मध्यप्रदेश विधान सभा


प्रश्‍नोत्तर-सूची
सितम्‍बर, 2022 सत्र


गुरूवार, दिनांक 15 सितम्‍बर, 2022

[ बुधवार, दिनांक 27 जुलाई, 2022 के प्रश्‍नोत्‍तर ]


भाग-1
तारांकित प्रश्‍नोत्तर



धार जिले में उद्योगों को आवंटित भूमि

[राजस्व]

1. ( *क्र. 398 ) डॉ. हिरालाल अलावा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                                         (क) धार जिले में म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 के अध्याय 18 में बताई गई दखल रहित भूमियों में से किस ग्राम की कितनी भूमि किस प्रकरण क्रमांक, आदेश, दिनांक से कलेक्टर या राजस्व विभाग के द्वारा उद्योगों को आवंटित किए जाने के संबंध में उद्योग विभाग को आवंटित की गई? आदेश की प्रति-सहित बताएं। (ख) उद्योग विभाग को प्राप्त भूमि भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 237 (1) में किस-किस प्रयोजन के लिए आरक्षित की गई? (ग) मनावर, गंधवानी एवं कुक्षी विधानसभा क्षेत्र में किन-किन शर्तों/नियमों के तहत किन-किन प्रयोजन/मद की जमीन किन-किन उद्योगों को किस दिनांक से लीज़ पर दी गई? प्रति-सहित बताएं। किन-किन उद्योगों की जमीनों की लीज़ समाप्‍त हो गई, किन उद्योगों ने लीज़ का नवीनीकरण कितने वर्षों के लिए किन प्रयोजन/मद के तहत कराया? प्रति सहित बताएं।  

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) धार  जिले में तहसील पीथमपुर के ग्राम गवला में 10.117 हेक्टेयर, तहसील धार के ग्राम जैतपुरा में 21.000 हेक्टेयर, ग्राम मगजपुरा में 6.487 हेक्टेयर, तहसील मनावर के ग्राम लुन्हेराबुजुर्ग में 20.000 हेक्टेयर, मोराड 0.858 हेक्टेयर, ग्राम मुहाली में 0.645 हेक्टेयर, ग्राम टोंकी में 63.50 हेक्टेयर, ग्राम टेमरनी में 3.726 हेक्टेयर, ग्राम गालपुरा में 14.569 हेक्टेयर, सोण्डुल में 0.729 हेक्टेयर, कस्थली में 0.261 हेक्टेयर, तहसील बदनावर के ग्राम खेरवास में 19.342 हेक्टेयर, भैसोला 632.501 हेक्टेयर, दोत्रया में 291.896 हेक्टेयर, ग्राम छायन में 52.278 हेक्टेयर, तिलगारा में 150.145 हेक्टेयर, भोईंदा में 12.404 हेक्टेयर, तहसील सरदारपुर के ग्राम हातोद में 65.785 हेक्टेयर, बोदला में 24.009 हेक्टेयर, ग्राम तारपुरा में 0.405 हेक्टेयर, ग्राम गवल्यावाडी में 31.317 हेक्टेयर, ग्राम कालीकिराय में 40.403 हेक्टेयर, ग्राम लोधीपुरा में 74.697 हेक्टेयर, ग्राम जैतापुर में 81.972 हेक्टेयर, पलास्या में 96.576 हेक्टेयर, ग्राम बलवारी में 79.154 हेक्टेयर, तारपुरा में 196.128 हेक्टेयर, कुण्डा में 38.543 हेक्टेयर, बासवी में 68.315 हेक्टेयर, लालबाग में 54.833 हेक्टेयर, तहसील गंधवानी के ग्राम करोंदिया में 8.975 हेक्टेयर, अतरसुमा में 1.500 हेक्टेयर, ग्राम घुरसल 7.108 हेक्टेयर इस प्रकार कुल 2170.178 हेक्टेयर भूमि उद्योग विभाग को आवंटित की गई। आदेश की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है।                                                                             (ख) म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 237 (1) के अंतर्गत पड़त कदम घोषित की जाकर उद्योग विभाग को आवंटित की गई। (ग) तहसील मनावर एवं कुक्षी की जानकारी निरंक है। तहसील गंधवानी में ग्राम करोंदिया, अतरसुमा, घुरसल की भूमि 18.503 हेक्टेयर कलेक्टर जिला धार के आदेश क्रमांक/39-43/नजूल/82 दिनांक 10 फरवरी, 1982 एवं आदेश क्रमांक 178/रीडर-1/1984, दिनांक 02.03.1984 के द्वारा उद्योग विभाग को अंतरित की गई। उक्त भूमि तत्पश्चात उद्योग विभाग के द्वारा मेसर्स महेन्द्र सीमेंट प्रा.लि. को आवंटन आदेश क्रमांक 8002, दिनांक 15.10.1984 क्षेत्रफल 3.762 हेक्टेयर भूमि स्थायी लीज़ पर 99 वर्षों के लिए आवंटित की गई थी। तत्पश्चात उद्योग विभाग के आदेश क्रमांक 1284-1288 धार दिनांक 12.09.2002 के द्वारा मेसर्स सतगुरू सीमेंट इकाई को लीज़ पर आवंटित की गई। आदेश की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है।  

प्रधानमंत्री उज्‍जवला योजना

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

2. ( *क्र. 547 ) श्री देवेन्‍द्र सिंह पटेल : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                                                (क) रायसेन जिले में प्रधानमंत्री उज्‍जवला योजना के अंतर्गत 25 जून, 2022 की स्थिति में कितनी महिलाओं को गैस कनेक्‍शन दिये गये? एजेंसीवार, विकासखण्‍डवार संख्‍या बतायें। (ख) 25 जून, 2022 की स्थिति में प्रधानमंत्री उज्‍जवला योजना के अंतर्गत गैस कनेक्‍शन हेतु किन-किन पात्र महिलाओं के आवेदन पत्र किस-किस गैस एजेंसी पर क्‍यों लंबित हैं तथा उनका कब तक निराकरण होगा?                                      (ग) 1 जनवरी, 2021 से प्रश्‍न दिनांक तक की अवधि में प्रधानमंत्री उज्‍जवला योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को गैस कनेक्‍शन देने हेतु विभाग के अधिकारियों द्वारा कब-कब क्‍या दिशा निर्देश दिये गये? (घ) प्रश्‍नांश (ग) में दिये गये दिशा-निर्देशों के पालन में रायसेन जिले में आज दिनांक तक क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई तथा पात्र महिलाओं को गैस कनेक्‍शन क्‍यों नहीं दिये जा रहे हैं तथा कब तक गैस कनेक्‍शन दिये जायेंगे?

खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) रायसेन जिले में प्रधानमंत्री उज्‍जवला योजना के अंतर्गत 25 जून, 2022 की स्थिति में ऑयल कंपनियों द्वारा कुल 156075 महिलाओं को गैस कनेक्‍शन दिये गये। विकासखण्‍डवार एजेंसीवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।                                   (ख) पोर्टल पर ऑनलाईन दर्ज लंबित पात्र आवेदन पत्रों की गैस एजेन्‍सीवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। ऑयल कंपनी के ऑनलाईन पोर्टल पर एस.वी. जारी करने की सुविधा उपलब्‍ध नहीं होने से पात्र परिवारों को गैस कनेक्‍शन जारी नहीं किये गये।                                                               (ग) प्रश्‍नांकित अवधि में प्रधानमंत्री उज्‍जवला योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को गैस कनेक्‍शन देने हेतु भारत सरकार के पत्र दिनांक 04 अगस्‍त, 2021 एवं म.प्र. शासन के पत्र क्रमांक 608/पी.एस.फूड/ उज्‍जवला/2021 दिनांक 16.08.2021, पत्र क्र. 635/पी.एस.खाद्य/उज्‍जवला/2021 दिनांक 25.08.2021, पत्र क्र. 706/उज्‍जवला/2021, दि. 15.09.2021, पत्र क्र. 756 पी.एस.खाद्य/उज्‍जवला/2021 दिनांक 28.09.2021, पत्र क्र. 9551/पी.एस.खाद्य/उज्‍जवला/2021, दिनांक 22.10.2021 के द्वारा विभागीय दिशा-निर्देश जारी किये गये। जो पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) शासन के दिशा-निर्देशों के पालन में कलेक्‍टर जिला रायसेन द्वारा समस्‍त क्षेत्रीय प्रबंधक एल.पी.जी., जिला नोडल अधिकारी उज्‍जवला, समस्‍त गैस एजेंसी संचालकों को शासन निर्देशानुसार कार्यवाही सुनिश्चित करते हुये पात्र महिलाओं को गैस कनेक्‍शन प्रदाय करने के निर्देश दिये जाकर गैस कनेक्‍शन प्रदाय कराये गये हैं। स्‍थानीय निकाय के निर्वाचन की आचार संहिता प्रभावशील होने के कारण उज्‍जवला योजना का ऑनलाईन पोर्टल बंद होने से शेष लंबित 792 गैस कनेक्‍शन नहीं दिये जा सके हैं, जो पोर्टल चालू होते ही प्रदाय किये जा सकेंगे।

पेंच व्‍यपवर्तन नहर निर्माण

[जल संसाधन]

3. ( *क्र. 643 ) श्री दिनेश राय मुनमुन : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिवनी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत विभाग द्वारा किन-किन क्षेत्रों में नहर निर्माण कार्य कराया गया है और किन-किन क्षेत्रों में नहर निर्माण कार्य किन-किन कारणों से नहीं कराया गया है?                                                           (ख) विभाग द्वारा कौन-कौन सी कार्य एजेन्‍सी से कितनी-कितनी राशि का कार्य कराया गया है? वर्ष 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक की जानकारी वर्षवार, कार्यवार देवें। (ग) पेंच नहर निर्माण कार्य का विभाग द्वारा कौन-कौन सी कार्य एजेन्‍सी को किस मद से कितनी-कितनी राशि का भुगतान किया गया है? (घ) पेंच नहर निर्माण कार्य कर रही वर्तमान एवं पूर्व की कार्य एजेन्‍सी कंपनियों की कितनी-कितनी सि‍क्‍योरिटी डिपॉजिट (अमानत राशि)/बैंक गांरटी आदि विभाग के पास जमा/शेष है? (ड.) सिवनी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नहर निर्माण कार्य अनुबंध के अनुसार कब तक पूर्ण किया जाना था? किन कारणों से नहर निर्माण कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हो पाया है? इसके लिये कौन-कौन जिम्‍मेदार/दोषी हैं और दोषियों के विरूद्व क्‍या कार्यवाही की गई? यदि कार्यवाही नहीं की गई तो क्‍यों?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) सिवनी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत बखारी शाखा नहर शत-प्रतिशत एवं सिवनी शाखा नहर लगभग 95 प्रतिशत पूर्ण होना प्रतिवेदित है। सिवनी शाखा नहर की वितरक शाखा डी-4 में हार्ड रॉक, वनभूमि एवं भू-अर्जन के कारण कुछ स्थानों में कार्य नहीं हो पाया था। वर्तमान में निर्माण कार्य प्रगतिरत होना प्रतिवेदित है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।                                                (ड.) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

सिविल अस्‍पताल हटा को आवंटित भूमि पर अतिक्रमण

[राजस्व]

4. ( *क्र. 184 ) श्री पुरुषोत्तम लाल तंतुवाय : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला दमोह में सिविल अस्‍पताल हटा हेतु कितनी भूमि आवंटित की गई थी? आवंटन आदेश की छायाप्रति व जमीन के खसरा, नक्‍शा सहित जानकारी उपलब्‍ध करावें। क्‍या सिविल अस्‍पताल हटा को आवंटित भूमि पर अस्‍पताल का कब्‍जा है? यदि हाँ, तो कितनी भूमि पर? नहीं तो किन के द्वारा शासकीय अस्‍पताल हटा की आवंटित भूमि पर अतिक्रमण किया गया है? नाम, पतावार कब्‍जा की भूमि सहित जानकारी उपलब्‍ध करायी जावे। (ख) सिविल अस्‍पताल हटा, को मुख्‍य चिकित्‍सा अधिकारी द्वारा भूमि पर किये गये अतिक्रमण को हटाये जाने हेतु कोई आवेदन दिया गया? यदि हाँ, तो सिविल अस्‍पताल हटा की भूमि को अतिक्रमण मुक्‍त कराये जाने की क्‍या कार्यवाही की गई एवं आज दिनांक तक अस्‍पताल को आवंटित भूमि को अतिक्रमण मुक्‍त क्‍यों नहीं कराया गया एवं अतिक्रमण मुक्‍त कब तक कराया जावेगा?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जिला दमोह के सिविल अस्पताल हटा हेतु ग्राम हटा खास पटवारी हल्का नंबर 32 में स्थित भूमि खसरा नंबर 22/4 रकबा 2.00 हे. एवं खसरा नंबर 26/2 रकबा 0.023 हे. कुल रकबा 2.023 हे. भूमि आवंटित की गई थी। आवंटन आदेश की प्रति व जमीन के खसरा, नक्‍शा की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। सिविल अस्पताल हटा को आवंटित की गयी भूमि में से रकबा 1.100 हे. पर अस्पताल का अधिपत्य व कब्जा है। शेष भूमि पर अतिक्रमणकर्ताओं की सूची कब्जा सहित पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) सिविल अस्पताल हटा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा सिविल अस्पताल की भूमि के सीमांकन हेतु पत्र तहसीलदार हटा को प्रेषित किया गया है। सिविल अस्पताल हटा की भूमि में अतिक्रामकों की मौके का चिन्हांकन कर अतिक्रामकों के विरुद्ध म.प्र.भू.रा. संहिता 1959 की धारा 248 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत अनावेदकगणों की सुनवाई उपरांत विधि अनुकूल अतिक्रामक भूमि से अनावेदकगणों की बेदखली की जाकर भूमि मुक्त कराई जावेगी।

अवैध उत्खनन/परिवहन/भण्डारण पर कार्यवाही

[खनिज साधन]

5. ( *क्र. 961 ) श्री विनय सक्सेना : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जबलपुर जिले अंतर्गत गत तीन वर्षों में अवैध उत्खनन/परिवहन/भण्डारण आदि के                                       कितने-कितने प्रकरण बनाये गये? किन-किन व्यक्तियों/फर्मों/कम्पनियों के विरुद्ध क्या-क्या कार्यवाही की गयी है? किस-किस पर कितना-कितना जुर्माना अधिरोपित किया गया है? सभी जुर्माने संबंधी नोटिस/आदेश की प्रति उपलब्‍ध करायें। (ख) क्या मार्च 2021 में बांगड़ इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के विरुद्ध बिना अनुमति के उत्खनन एवं भण्डारण के फलस्वरूप, 71 करोड़ रूपये जुर्माने का नोटिस जारी किया गया था? यदि हाँ, तो उक्त मामले से संबंधित जांच प्रतिवेदन, नोटिस, कंपनी द्वारा दिया गया उत्तर, जमा कराई गयी राशि आदि की जानकारी उपलब्‍ध करावें। (ग) विगत 10 वर्षों में विभाग के जबलपुर जिले कार्यालय में पदस्थ रहे अमले की सूची कार्यकालवार तथा उनके विरुद्ध प्राप्त शिकायतें व की गयी कार्यवाही का विवरण उपलब्‍ध करावें।

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) प्रश्‍नांश की जानकारी एकत्रित की जा रही है। (ख) जी हाँ। बांगड़ इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रायवेट लिमिटेड के विरूद्ध अवैध उत्‍खनन एवं भंडारण के फलस्‍वरूप, रूपये 71,87,82,750/- जुर्माना राशि जमा करने हेतु कारण बताओ नोटिस पत्र क्रमांक 1666, दिनांक 26.03.2021 से माननीय कलेक्‍टर न्‍यायालय द्वारा जारी किया गया था, जिसके विरूद्ध अनावेदक कंपनी द्वारा उत्‍तर दिनांक तक रूपये 6,97,00,700/- जमा किया जा चुका है, प्रकरण वर्तमान में माननीय न्‍यायालय कलेक्‍टर, जबलपुर के समक्ष विचाराधीन है। शेष प्रश्‍नांश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' में दर्शित है। (ग) प्रश्‍नांश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट  के प्रपत्र '' एवं '' में दर्शित है।

शासकीय भूमि को नि‍जी भूमि करने की जांच

[राजस्व]

6. ( *क्र. 999 ) श्री दिलीप सिंह गुर्जर : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                                               (क) माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय के पत्र क्र. 210/सी.एम.एस./सी.बी./2022, दिनांक 13.04.2022 को दिए गए निर्देश के तहत अवर सचिव, राजस्व विभाग द्वारा प्रश्‍नकर्ता को प्रेषित पत्र                                                          क्र. 598/564/2022/सात-3, दिनांक 26.04.2022 के तहत अवगत कराया कि कलेक्टर इंदौर को आवश्यक कार्यवाही हेतु आदेश जारी किए हैं? यदि हाँ, तो कलेक्टर इंदौर द्वारा क्या कार्यवाही की गई है? विवरण दें। (ख) क्या प्रश्‍नकर्ता द्वारा माननीय मुख्य सचिव को पत्र क्र. 4205/नागदा, दिनांक 16.03.2022 द्वारा इन्दौर शहर स्थित शासकीय भूमि सर्वे क्र. 143/645/2 की शासकीय कर्मचारियों द्वारा शासकीय भूमि को नि‍जी भूमि करने के संबंध में राजस्व अभिलेख वर्ष 1925-1926 के खसरा पांच साल की कॉपी उपलब्ध कराते हुए जांच की मांग की थी? यदि हाँ, तो जांच किस उच्च अधिकारी द्वारा की गई है? जांच अधिकारी का नाम देते हुए जांच प्रतिवेदन की कॉपी उपलब्ध कराएं।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। कलेक्‍टर इंदौर द्वारा की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी हाँ। अनुविभागीय अधिकारी राजस्‍व जूनी इन्‍दौर श्री अंशुल खरे से जॉच करवाई गई। जॉच प्रतिवेदन जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।

आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी को विक्रय

[राजस्व]

7. ( *क्र. 1131 ) श्री प्रताप ग्रेवाल : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                                                          (क) प्रश्‍नकर्ता के प्रश्‍न क्र. 1111, दिनांक 10 मार्च, 2022 के खण्ड (क) के संदर्भ में आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी को विक्रय करने की धारा 165 (6) में अनुमति देने की सामान्य शर्तें क्या हैं? उनकी सूची देवें तथा बतावें कि यह सामान्य शर्तें प्रदेश के सभी जिलों में समान हैं या भिन्न भिन्न हैं? (ख) क्या राज्य शासन ने धारा 165 (6) में अनुमति देने हेतु सामान्य शर्तों के संदर्भ में कोई आदेश, परिपत्र जारी किया है? यदि हाँ, तो उसकी प्रति देवें। यदि नहीं, तो बतावें कि सामान्य शर्तें क्या कलेक्टर के विवेक के अनुसार तय की जावेंगी? (ग) क्या मात्र पिछले 16 वर्षों में इन्दौर संभाग में 933.256 हेक्टेयर तथा उज्जैन संभाग में 1289.110 हेक्टेयर आदिवासी की जमीन गैर आदिवासी को विक्रय करने की अनुमति दी गई? (घ) प्रश्‍नांश (ग) से स्पष्ट है कि धारा 165 (6) में अनुमति देते वक्त तत्कालीन कलेक्टरों ने सुविधा का संतुलन आदिवासी के पक्ष में करने के स्थान पर गैर आदिवासी के पक्ष में किया तथा प्रश्‍नाधीन अवधि में इन्दौर, उज्जैन संभाग में लगभग 8 हजार आदिवासी भूमिहीन हो गये? क्या शासन इसकी उच्च स्तरीय जांच करायेगी? यदि नहीं, तो क्यों?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता की धारा 165 की उपधारा 6 के प्रावधान संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है। धारा 165 की उपधारा 6 के खण्‍ड (ड.) अनुसार आदिम जनजाति के किसी भूमि स्‍वामी अधिकार का अंतरण 165 (6) के खण्‍ड (एक) के अधीन अधिसूचित विनिर्दिष्‍ट क्षेत्रों से भिन्‍न क्षेत्रों में लागू है। (ख) उत्‍तरांश '' अनुसार। (ग) जी हाँ। विगत लगभग 16 वर्षों में इंदौर संभाग के जिलों में 873.725 हे. एवं उज्‍जैन संभाग के जिलों में 1196.883 हे. भूमि आदिवासी से गैर आदिवासी को विक्रय की अनुज्ञा दी गई है। (घ) विधिक अर्थान्‍वयन के कारण जवाब की आवश्‍यकता नहीं।

परिशिष्ट - "एक"

आरक्षित वन अधिसूचित भूमि

[वन]

8. ( *क्र. 127 ) श्री ब्रह्मा भलावी : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                                                              (क) मध्‍य भारत वन विधान 1950 की धारा 20 के तहत राजपत्र में दिनांक 21 अक्‍टूबर, 1954 को कितने जिलों के कितने वनमण्‍डलों के, कितने वन परिक्षेत्रों की कितने वर्ग मील भूमि को आरक्षित वन भूमि अधिसूचित किया गया? इन भूमियों से संबंधित धारा 4 की अधिसूचना राजपत्र में किस दिनांक को प्रकाशित की गई? यदि धारा 4 की अधिसूचना का प्रकाशन नहीं हो पाया हो तो कारण बतावें। (ख) 21 अक्‍टूबर, 1954 को प्रकाशित अधिसूचना में बड़वाह वनमण्‍डल के 09 वनग्रामों की कितनी-कितनी निजी भूमि, आबादी मद, निस्‍तार मद एवं जंगल मद की भूमि किस-किस वनखण्‍ड में शामिल कर आरक्षित वन अधिसूचित की गई? इनमें से किस ग्राम की कितनी निजी भूमि एवं कितनी आबादी मद की भूमि पर किसानों का कब्‍जा है तथा कितनी भूमि पर वन विभाग का कब्‍जा है? (ग) 09 ग्रामों की कितनी निजी भूमि को आरक्षित वन बनाने के लिए किस प्रकरण क्रमांक में किस आदेश दिनांक से अर्जित किया गया, किस किसान की कितनी भूमि का कितना मुआवजा निर्धारित कर कितनी राशि का किस दिनांक को भुगतान किया गया? (घ) निजी भूमि को अर्जित किए बिना ही आरक्षित वन अधिसूचित करने का अधिकार वन विभाग को किस-किस धारा में दिया जाकर धारा में क्‍या-क्‍या उल्‍लेख किया गया है?

वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) राजपत्र दिनांक 21.10.1954 में प्रकाशित अधिसूचना अनुसार वर्तमान में 13 जिलों के 15 वनमंडल अन्तर्गत 43 वन परिक्षेत्रों की 3893.64 वर्गमील भूमि को आरक्षित वनभूमि अधिसूचित किया गया, इन भूमियों में से भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 4 में अधिसूचित करने का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता। वर्ष 1954 में विभिन्न आरक्षित वनखण्‍डों को जोड़कर अविकल वनखण्ड बनाने के उद्देश्य से अनेक क्षेत्रों का समायोजन व पुनः आरक्षण मध्यभारत वन अधिनियम, 1950 की धारा 20 के अन्तर्गत मध्यभारत वन तथा आदिम जाति कल्याण विभाग की अधिसूचना क्रमांक 1623/X-F/114/(54) दिनांक 09.10.1954 द्वारा किया गया। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार(ग) 09 वनग्रामों में निजी भूमि प्रतिवेदन न होने से शेष प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता। (घ) उत्तरांश '''' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्‍न ही उपस्थित                                       नहीं होता।

सिंचाई हेतु पाइप लाईन

[जल संसाधन]

9. ( *क्र. 851 ) श्री सुरेश राजे : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                                         (क) जिला ग्वालियर अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 19 डबरा का ग्राम जिगनिया-बारकरी से बिलौआ तक कृषि क्षेत्र के खेतों में सिंचाई हेतु डाली जा रही पाइप लाईन का प्रोजेक्ट कुल कितनी राशि का है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार ग्राम जिगनिया-बारकरी से बिलौआ क्षेत्र में सिंचाई हेतु कितनी किलोमीटर पाइप लाईन कुल कितनी राशि व्यय कर बिछाई जानी है? इसमें से कितनी किलोमीटर पाइप लाईन बिछाई जा चुकी है? कुल कितनी राशि किस निर्माण एजेंसी को आज प्रश्‍न दिनांक तक भुगतान की गयी है? शेष कार्य कब तक पूर्ण किया जावेगा? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के अनुसार उक्त जिगनिया-बारकरी से बिलौआ सिंचाई परियोजना का कार्य पूर्ण होने पर किस-किस ग्राम में कितने-कितने हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की जा सकेगी? ग्रामवार एवं रकबा सहित बतावेंl

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) माँ रतनगढ़ बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना में दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई पद्धति अंतर्गत यूनिट-2 नहर के लिये राशि रू. 1377.19 करोड़ स्वीकृत होना प्रतिवेदित है। प्राप्‍त स्वीकृति में विधानसभा क्षेत्र क्र. 19 डबरा के ग्राम जिगनियां-बारकरी से बिलौआ तक खेतों में सिंचाई हेतु बिछाई जाने वाली पाइप लाईन का कार्य शामिल है।                                                            जिगनियां-बारकरी के लिए अलग से राशि स्‍वीकृत नहीं है। (ख) देवगढ़-बिलौआ नहर प्रणाली (जिगनियां-बारकरी) के अंतर्गत लगभग 400 किमी का पाइप लाईन नेटवर्क बिछाया जाना प्रस्तावित है। जिगनियां-बारकरी नहर का कार्य माँ रतनगढ़ बहुउद्देशीय परियोजना के यूनिट-2 नहर अंतर्गत दाबयुक्त सूक्ष्म सिंचाई पद्धति में सम्मिलित है। अलग से कोई राशि स्वीकृत नहीं है। संपूर्ण कार्य हेतु राशि रू. 831 करोड़ का अनुबंध निर्माण एजेंसी मेसर्स मंटेना वशिष्ठा माइक्रो जे.व्ही. के साथ संपादित किया गया है, इसमें आज दिनांक तक 5.5 कि.मी. पाइप लाईन बिछाई जा चुकी है। प्रश्‍न दिनांक तक निर्माण एजेंसी मेसर्स मंटेना वशिष्ठा माइक्रो जे.व्ही. को सामग्री प्रदाय करने, सर्वेक्षण एवं निर्माण कार्य हेतु कुल राशि रू. 423 करोड़ का भुगतान किया जाना प्रतिवेदित है। अनुबंधानुसार कार्य पूर्ण करने की अवधि जुलाई 2024 लक्षित है। (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।

परिशिष्ट - "दो"

तालाबों और नहरों का संरक्षण

[जल संसाधन]

10. ( *क्र. 977 ) श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र कसरावद में विभाग के निर्मित तालाबों में पानी के साथ ही मिट्टी जमा होने से जलभराव की क्षमता कम हुई है? अगर हाँ तो वर्षा काल के पूर्व मिट्टी निकालने की कोई योजना है? यदि हाँ, तो विवरण देवें। (ख) क्या इन तालाबों से किसानों को निःशुल्क मिट्टी निकालने की अनुमति दी जा सकती है? यदि हाँ, तो अनुमति‍ कौन प्रदान करेंगे, नहीं तो क्यों?                                         (ग) उक्त तालाबों की नहरों के सुधार या पक्की करने के कोई प्रस्ताव लंबित हैं? अगर हाँ तो कब तक स्वीकृति दी जाएगी, नहीं तो क्यों? (घ) विधानसभा क्षेत्र कसरावद में बने किन-किन तालाबों को इंदिरा सागर की नहरों से फीड करने के प्रस्ताव नर्मदा घाटी विकास को भेजे गये हैं? यदि हाँ, तो विवरण और प्रश्‍न दिनांक तक प्रस्तावों की अद्यतन स्थिति बतावें।

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) विधानसभा क्षेत्र कसरावद अंतर्गत जल संसाधन विभाग द्वारा निर्मित तालाबों में पानी के साथ ही मिट्टी जमा होने से उनकी जीवित जलभराव की क्षमता में कमी नहीं आना प्रतिवेदित है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।                                                         (ख) जी नहीं। तालाबों से मिट्टी निकालने हेतु प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग, भोपाल के पत्र दिनांक 01.07.2011 द्वारा तालाब से गाद (सिल्ट) निकालने से बांध में रिसाव की समस्या के दृष्टिगत, इसे पूर्णतः अव्यवहारिक माना है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र के तालाबों की नहरों के सुधार या पक्की करने के कोई प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित नहीं हैं। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) विधानसभा क्षेत्र कसरावद में बने किसी भी तालाब को इंदिरा सागर परियोजना की नहरों से फीड करने का कोई प्रस्ताव नर्मदा घाटी विकास विभाग को नहीं भेजा गया है, तथापि विधानसभा क्षेत्र कसरावद में निर्मित 14 तालाबों को नर्मदा घाटी विकास विभाग एवं जल संसाधन विभाग की आपसी सहमति अनुसार इंदिरा सागर की नहरों से आउटलेट व सीपेज के माध्यम से फीड किया जा रहा है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।

परिशिष्ट - "तीन"

खाद्यान्‍न भण्‍डारण

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

11. ( *क्र. 143 ) श्री रामपाल सिंह : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                                                                (क) 25 जून, 2022 की स्थिति में रायसेन जिले की किन-किन शासकीय उचित मूल्‍य की दुकानों में पी.ओ.एस. मशीन में कितना खाद्यान्‍न स्‍टॉक उपलब्‍ध है तथा दुकान पर भौतिक रूप से कितना खाद्यान्‍न का स्‍टॉक है? दोनों में अंतर का क्‍या कारण है? (ख) 25 जून, 2022 की स्थिति में रायसेन जिले की किन-किन शासकीय उचित मूल्य की दुकानों से मई एवं जून माह का राशन एवं केरोसिन तेल का वितरण नहीं किया है तथा क्‍यों? (ग) रायसेन जिले की शासकीय उचित मूल्य की दुकानों में उपभोक्‍ताओं के मान से खाद्यान्‍न का आवंटन क्‍यों नहीं किया जा रहा है तथा परिवहनकर्ता ठेकेदार द्वारा अनुबंध अनुसार निर्धारित तिथि तक खाद्यान्‍न दुकानों पर क्‍यों नहीं पहुंचाया जा रहा है? (घ) 1 जनवरी, 2022 से प्रश्‍न दिनांक तक खाद्यान्‍न आवंटन राशन का वितरण न होने के संबंध में मान. मंत्री जी तथा विभाग के अधिकारियों को प्रश्‍नकर्ता विधायक के पत्र कब-कब प्राप्‍त हुए तथा उन पर आज दिनांक तक क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई?

खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) उचित मूल्‍य दुकानों पर अनियमितता के कारण प्रकरण निर्मित होने एवं अन्‍य कारणों से उचित मूल्‍य दुकानों की पी.ओ.एस. मशीन एवं भौतिक स्‍टॉक में अन्‍तर प्रदर्शित हो रहा है, जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।                                        (ख) 25 जून, 2022 की स्थिति में रायसेन जिले की समस्‍त शासकीय उचित मूल्‍य दुकानों से माह मई एवं जून 2022 के राशन का वितरण किया गया है, किन्‍तु केरोसीन का वितरण नहीं किया गया है। चूंकि ऑयल कंपनी स्‍तर से केरोसीन मूल्‍य वृद्धि होने के कारण डिपो का प्रदाय दर 95.15 रू. प्रति लीटर एवं कर, भाड़ा, कमीशन आदि जोड़ने के पश्‍चात फुटकर बिक्री मूल्‍य 101 से 103 प्रति लीटर केरोसीन है। केरोसीन प्रदाय दर अधिक होने के कारण उपभोक्‍ताओं द्वारा केरोसीन क्रय नहीं किया जा रहा है न ही केरोसीन की उपभोक्‍ताओं द्वारा मांग की जा रही है। (ग) रायसेन जिले की शासकीय उचित मूल्‍य दुकानों को उपभोक्‍ताओं के मान से खाद्यान्‍न आवंटन दुकान में बची शेष स्‍टॉक की मात्रा को समायोजित करते हुये आगामी माह के लिये जारी किया जाता है। रायसेन जिले में परिवहनकर्ता ठेकेदार द्वारा अनुबंध अनुसार शासकीय उचित मूल्‍य दुकानों के डिलेवरी ऑर्डर जारी करने के 24 घण्‍टें के अंदर खाद्यान्‍न पहुंचाया जा रहा है। (घ) प्रश्‍नांश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।  

शिकायतों पर कार्यवाही

[राजस्व]

12. ( *क्र. 1015 ) श्री प्रियव्रत सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                                                  (क) राजगढ़ जिले की तहसील जीरापुर एवं खिलचीपुर अंतर्गत तहसीलदार, राजस्‍व निरीक्षक, पटवारी की अनियमितता संबंधी शिकायत माननीय मुख्‍यमंत्री, माननीय राजस्‍व मंत्री, मुख्‍य सचिव, आयुक्‍त (राजस्‍व), कलेक्‍टर, राजगढ़ को प्रश्‍नकर्ता द्वारा पत्राचार के माध्‍यम से विगत 4 वर्षों में कब व किन बिन्‍दुओं पर की गई? (ख) क्‍या इस संबंध में जांच गठित की गई है? यदि हाँ, तो उक्‍त शिकायतों पर कितने मामलों में असत्‍य शिकायतें पाई गई? असत्‍य मामले पाये जाने के क्‍या कारण हैं?                                                          (ग) कितनी शिकायतों पर मामले सत्‍य पाये गये हैं? जांच में दोषी पाये गये अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जा रही है?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अनुसार है। (ख) जांच में की गई कार्यवाही संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-के कॉलम-04 अनुसार है। (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट-अनुसार है।

परिशिष्ट - "चार"

डोकरीखेड़ा जलाशय की प्रशासकीय स्‍वीकृति

[जल संसाधन]

13. ( *क्र. 818 ) श्री ठाकुरदास नागवंशी : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र पिपरिया, जिला नर्मदापुरम के ग्राम डोकरीखेड़ा में डोकरीखेड़ा जलाशय के भराव हेतु नवीन डी.पी.आर. जिसकी लागत 33.69 लाख है, उक्‍त कार्य की घोषणा मान. मुख्‍यमंत्री जी के द्वारा (घोषणा क्रमांक बी-5376) कार्य को कराये जाने के निर्देश जारी किये गये थे?                                                                  (ख) यदि हाँ, तो क्‍या कार्यालय मुख्‍य अभियंता जल संसाधन विभाग नर्मदापुरम (म.प्र.) का पत्र क्रमांक 1672/कार्य/देनवा/डोकरीखेड़ा/मु.अ./ज.स.वि./2022, दिनांक 08.03.2022 एवं कार्यालय मुख्‍य अभियंता बोधी जल संसाधन विभाग भोपाल का पत्र क्रमांक 102/पी.ई.सी./586/पार्ट-2/द.ला./बोधी भोपाल, दिनांक 25.02.2022 प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग भोपाल को कार्य की प्रशासकीय स्‍वीकृति हेतु प्राक्‍कलन संलग्‍न कर प्रेषित किये जा चुके हैं? (ग) यदि हाँ, तो                                                        बार-बार पत्राचार करने के उपरांत भी कार्य की प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी न होने का क्‍या कारण है? (घ) कार्य की प्रशासकीय स्‍वीकृति कब तक जारी हो जावेगी, नहीं तो क्‍यों?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) जी हाँ, प्रस्‍ताव की लागत रू. 33.69 करोड़ होना प्रतिवेदित है। (ख) से (घ) जी हाँ। जी हाँ। प्रमुख अभियंता से शासन को प्राप्‍त प्रस्‍ताव में डोकरीखेडा जलाशय के लिए तवा बांध से जल उपलब्‍ध कराने के लिए जल की उपलब्‍धता एवं तकनीकी परीक्षण हेतु प्रस्‍ताव पुन: मुख्य अभियंता (बोधी) भोपाल को दिनांक 27.05.2022 को प्रेषित किया गया है। शासन स्‍तर पर प्रस्‍ताव प्राप्‍त होने के उपरांत प्रशासकीय स्‍वीकृति के संबंध में निर्णय लिया जाना संभव होगा। निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

तितली पार्क का रख-रखाव

[वन]

14. ( *क्र. 520 ) श्री उमंग सिंघार : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                                                                         (क) क्‍या धार जिले में पर्यटन नगरी माण्‍डव में तत्‍कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा 78.00 लाख रूपये लागत राशि का तितली पार्क स्‍वीकृत किया गया था? राशि स्‍वीकृति के पश्‍चात प्रथम किश्‍त 31,64,800/- राशि जारी की गई थी? विभाग द्वारा तितली पार्क हेतु 723 वर्गमीटर में तालाब किनारे फ्लेग स्‍टोन पेचिंग कार्य हेतु 234926/- राशि, 5650 वर्गमीटर में लैण्‍ड स्‍केपिंग कार्य हेतु                                           34183/- राशि, 885 वर्गमीटर में फेंसिंग कार्य हेतु 760301/- राशि, 500 वर्गमीटर में पार्किंग हेतु 597122/- राशि, पौधा रोपण हेतु 2750 पौधे लगाने हेतु 258464/- राशि तथा कंसल्‍टेंसी फीस की 3 प्रतिशत राशि 35068/- राशि को मिलाकर कुल राशि रू. 1920046/- खर्च की गई थी? (ख) प्रश्‍नांकित (‍क) अनुसार यदि हाँ, तो उक्‍त पार्क कार्य प्रगतिरत, अपूर्ण या पूर्ण हो गया है? यदि कार्य अपूर्ण है तो कब तक पूर्ण कर लिया जायेगा? (ग) क्‍या इतनी राशि खर्च करने के बाद उक्‍त पार्क मवेशियों के लिये चारागाह में तब्‍दील हो गया है, सारे पौधे नष्‍ट होकर मैदान में तब्‍दील हो गये हैं, इसका जिम्‍मेदार कौन है एवं जिम्‍मेदार पर कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक कार्यवाही की जायेगी एवं यदि नहीं, तो क्‍यों?

वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) तितली पार्क हेतु स्‍वीकृत राशि रूपये 78.67 लाख है। शेष जी हाँ। (ख) तितली पार्क का कार्य अपूर्ण है। भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण द्वारा आपत्ति लिये जाने के कारण समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ग) जी नहीं। क्षेत्र का फेंसिंग से घेराव किया गया है। स्‍थल निरीक्षण में रोपित 2750 पौधों के विरूद्ध 1307 पौधे जीवित पाये गये हैं। पौधरोपण में मौसमी पौधे होने एवं सिंचाई का प्रावधान नहीं होने से पौधे मृत हुए हैं, इसके लिए कोई जिम्‍मेदार नहीं है, अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

विवाह उपरांत सहायता राशि का प्रदाय

[श्रम]

15. ( *क्र. 11 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या भवन संनिर्माण के कार्डधारकों को विवाह उपरांत मिलने वाली सहायता राशि का प्रावधान समाप्‍त कर दिया गया है? (ख) यदि हाँ, तो सहायता राशि समाप्ति का प्रावधान किस दिनांक से लागू किया गया है? (ग) क्‍या प्रावधान समाप्ति के पूर्व पनागर एवं बरेला में हो चुके विवाह के प्रकरणों में विवाह सहायता राशि दी जावेगी? (घ) यदि हाँ, तो क्‍या शासन द्वारा हितग्राहियों के हित में अनुकूल दिशा निर्देश जारी किये जायेंगे?

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) जी नहीं। (ख) प्रश्‍नांश '' के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) प्रश्‍नांश '' के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

सौन चिरैया अभयारण्य में कृषि भूमि का क्रय विक्रय

[वन]

16. ( *क्र. 1075 ) श्री प्रागीलाल जाटव : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                                                           (क) जिला शिवपुरी अन्‍तर्गत सोन चिरैया अभयारण्य वर्ष 1983 में बनाया गया तब से प्रश्‍न दिनांक तक एक भी सोन चिरैया इस अभयारण्य में नहीं है और न ही कोई अन्‍य वन्‍य प्राणी है? यदि हाँ, तो सौन चिरैया अभयारण्य को क्‍यों बनाया गया? अभयारण्य बनाने का क्‍या उद्देश्‍य है? विगत पॉच वर्षों में अभ्‍यारण्‍य में कितनी राशि व्‍यय की गई? (ख) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के विधान सभा क्षेत्र करेरा के 32 ग्राम सोन चिरैया अभयारण्य के अंतर्गत आते हैं और उसमें किसानों की कृषि भूमि का क्रय विक्रय प्रतिबंधित है तथा विकास के कार्य, जैसे सड़क निर्माण उद्योगों की स्‍थापना, पेट्रोल पम्‍प की स्‍थापना आदि विकास कार्य नहीं हो पा रहे हैं, जिससे क्षेत्र पिछड़ता जा रहा है? यदि हाँ, तो सोन चिरैया अभयारण्य के अंतर्गत आने वाले 32 ग्रामों की कृषि भूमि का क्रय विक्रय चालू कर दिया जायेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) क्‍या सोन चिरैया अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत उत्‍खनन, पत्‍थर उत्‍खनन जैसे कार्य निरंतर जारी हैं? यदि हाँ, तो विकास कार्यों को क्‍यों रोका जा रहा है?

वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) शिवपुरी जिले के अंतर्गत सोन चिरैया अभयारण्‍य करैरा का गठन राज्‍य शासन की अधिसूचना दिनांक 21 मई, 1981 द्वारा किया गया था। अभयारण्‍य के गठन से वर्ष 1993 तक क्षेत्र में सोन चिरैया की उपस्थिति प्रतिवेदित की गई है। वर्ष 1993 के पश्‍चात यद्यपि सोन चिरैया दिखाई नहीं दी है, तथापि अभयारण्‍य क्षेत्र में अन्‍य प्रजाति के वन्‍य पशु-पक्षी मौजूद रहे हैं। सोन चिरैया अभयारण्‍य के गठन का उद्देश्‍य सोन चिरैया सहित अन्‍य वन्‍य                                                   पशु-पक्षियों का संरक्षण एवं संवर्धन रहा है। विगत पांच वित्‍तीय वर्षों में अभयारण्‍य में व्‍यय राशि निम्‍नानुसार रही है :-

क्र.

वर्ष

व्‍यय की गई राशि (रूपये में)

1

2017-18

3175585

2

2018-19

1880122

3

2019-20

1582018

4

2020-21

3119562

5

2021-22

3158500

 

(ख) सोन चिरैया अभयारण्‍य करैरा की सीमा में कुल 33 राजस्‍व ग्राम हैं। वन्‍यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 20 अनुसार नवीन अधिकारों का सृजन वर्जित है। कृषि भूमि का हस्‍तांतरण उत्‍तराधिकार द्वारा ही किया जा सकता है। अत: कृषि भूमि का क्रय-विक्रय वर्जित है। प्रश्‍नाधीन विकास कार्य नियमानुसार सक्षम स्‍तर से अनुमति प्राप्‍त कर कराये जा सकते हैं, अत: क्षेत्र पिछड़ने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। राष्‍ट्रीय वन्‍यप्राणी बोर्ड से करैरा अभयारण्‍य के डिनोटिफिकेशन की अनुशंसा प्राप्‍त हो चुकी है तथा डिनोटिफिकेशन की कार्यवाही प्रारम्‍भ कर दी गई है। कृषि भूमि का क्रय-विक्रय डिनोटिफिकेशन के बाद संभव है। (ग) करैरा अभयारण्‍य क्षेत्र के अंदर कोई रेत अथवा पत्‍थर की खदानें स्‍वीकृत नहीं है। करैरा अभयारण्‍य क्षेत्र में पदस्‍थ क्षेत्रीय कर्मचारियों द्वारा अवैध रेत एवं पत्‍थर उत्‍खनन को रोकने हेतु निरंतर वैधानिक कार्यवाही की जाती है। उत्‍तरांश '' अनुसार अभयारण्‍य क्षेत्र में विकास कार्यों पर किसी प्रकार की रोक नहीं है।

कोटवारों को मानदेय

[राजस्व]

17. ( *क्र. 108 ) श्री रामचन्‍द्र दांगी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                                                (क) प्रदेश में कितने कोटवार पदस्थ हैं? (ख) प्रदेश के कोटवारों को प्रति माह कितना वेतन तथा कौन कौन सी अन्य सुविधाएं दी जाती हैं? (ग) क्या सरकार मानती है कि वर्तमान में प्रदेश के कोटवारों को दिया जाने वाला वेतन उनके परिवार के भरण पोषण के लिए पर्याप्त है?                                                                     (घ) क्या सरकार प्रदेश के कोटवारों को नियमित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घोषित करने और उन्हें कलेक्टर रेट पर वेतन दिए जाने के लिए कार्यवाही करेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) मई 2022 की स्थिति में प्रदेश में 36650 कोटवार पदस्‍थ हैं। (ख) ग्राम कोटवार को मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता-1959 की धारा-231 अनुसार सेवा भूमि या पारिश्रमिक या दोनों का प्रावधान किया गया है। जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है। इसके अतिरिक्‍त कोटवारों को प्रति वर्ष वर्दी, जू‍ते, टॉर्च, बेल्‍ट एवं गरम कोट प्रदाय किये जाते हैं। (ग) कोटवारों को उनकी सेवाओं के लिए सेवा भूमि या पारिश्रमिक या दोनों मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता-1959 के प्रावधानों के अनुसार प्रदाय किए जाते हैं। (घ) ऐसा कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन                                    नहीं है।

परिशिष्ट - "पांच"

संबल योजना की राशि का प्रदाय

[श्रम]

18. ( *क्र. 304 ) श्री विजय रेवनाथ चौरे : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सरकार को जानकारी है कि वर्ष 2019-20, 2020-21 के संबल योजना के अंतर्गत मिलने वाले लाभ अभी तक हितग्राहियों को नहीं मिले हैं? (ख) यदि हाँ, तो क्या सरकार वर्ष                                       2019-20 के संबल योजना के अंतर्गत मिलने वाले हित लाभ संबंधित हितग्राहियों को देने के लिए कार्यवाही करेगी? (ग) यदि हाँ, तो कब तक संबल योजना की राशि दी जाएगी?

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) वर्ष 2019-20, 2020-21 के संबल योजना के पात्र स्‍वीकृत व डिजि‍टली साईन्‍ड प्रकरणों में बजट उपलब्धता अनुसार लाभ वितरण किया गया है। संबल योजना में अनुग्रह योजनांतर्गत आवेदन देने हेतु सामान्यतः 180 दिवस की समय-सीमा है, उक्त समय-सीमा को भी जिला कलेक्टर/अपीलीय अधिकारी द्वारा शिथिल किये जाने की व्यवस्था शासन द्वारा दी गई है। पदाभिहित अधिकारी द्वारा प्रकरण पात्र पाये जाने पर राशि भुगतान की स्थिति निर्मित होती है। इसी प्रकार अपात्र चिन्हित प्रकरणों में भी अपील की व्यवस्था शासन द्वारा की गई है। ऐसे में अपील निराकरण उपरान्त भी राशि प्रदाय किये जाने की स्थिति निर्मित होती है। हितलाभ वितरण एक सतत् प्रक्रिया है, जिसमें हितलाभ वितरण बजट उपलब्धता अनुसार किया जा रहा है। (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार हितलाभ वितरण एक सतत् प्रक्रिया है। सभी पात्र प्रकरणों में बजट उपलब्धता अनुसार राशि प्रदाय की जा रही है। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

स्टापडेम निर्माण

[जल संसाधन]

19. ( *क्र. 856 ) श्री सोहनलाल बाल्‍मीक : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र परासिया अन्तर्गत विभाग द्वारा सिंचाई योजना स्टापडेम एवं बैराज के कितने प्रस्ताव बनाये गये हैं तथा कितने स्टापडेम एवं बैराज का सर्वे एवं डी.पी.आर. बनाया गया है? (ख) विधान सभा क्षेत्र परासिया अन्तर्गत स्थित ग्राम पंचायत दमुआ के भीमसेन ढाना स्टापडेम का निर्माण कार्य प्रारंभ कराये जाने के संबंध में विभाग द्वारा अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है, उसका क्या कारण है, जबकि जिले से इसके प्रस्ताव भी विभाग को भेज दिये गये हैं? कारण सहित जानकारी उपलब्ध करायें। (ग) ग्राम पंचायत दमुआ के भीमसेन ढाना स्टापडेम का निर्माण कार्य विभाग द्वारा कब तक प्रारंभ करा दिया जायेगा?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।                                                           (ख) ग्राम पंचायत दमुआ के अंतर्गत भीमसेन ढाना स्टापडेम के कमाण्ड क्षेत्र को दमुआ जलाशय (घाटामाली नदी पर स्टोरेज टेंक) में समाहित करते हुए दमुआ जलाशय के सर्वेक्षण कार्य हेतु प्राक्कलन रू. 26.12 लाख तैयार कर प्रमुख अभियंता भोपाल के माध्‍यम से मुख्य अभियंता बोधी को परीक्षण हेतु प्रेषित किया गया। मुख्य अभियंता, बोधी के परीक्षणोपरांत अनुशीलन की कार्यवाही संभागीय कार्यालय स्‍तर पर प्रचलन में होना प्रतिवेदित है। (ग) प्रारंभिक कार्यवाही प्रचलन में होने से स्‍वीकृति दिए जाने की स्थिति नहीं है। स्वीकृति के लिए निश्चित समय-सीमा बताना संभव                              नहीं है।

परिशिष्ट - "छ:"

रेत खदानों के टेंडर

[खनिज साधन]

20. ( *क्र. 755 ) श्री प्रेमशंकर कुंजीलाल वर्मा : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नर्मदापुरम जिले में वर्ष 2021-22 में कुल कितनी रेत खदानों को चिन्हित कर रेत विक्रय हेतु टेंडर किया गया? (ख) टेंडर की कुल राशि क्या है? क्या ठेकेदार द्वारा संपूर्ण राशि जमा कर दी गई है? (ग) ठेकेदार के द्वारा रेत खदान संचालित करने की समय-सीमा क्या थी?                                              (घ) वर्ष 2018-19, 2019-20, 2020-21 , 2021-22 में नर्मदापुरम जिले में रेत खदानों से कितनी आय हुई है एवं वर्ष 2022 -23 की क्या योजना है?

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) प्रश्‍नाधीन जिले में वर्ष 2021-22 में कोई रेत खदान का चिन्‍हांकन न किया जाकर विक्रय हेतु टेण्‍डर नहीं किया गया है। (ख) प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) जिले में रेत खदानों से वर्षवार आय निम्‍नानुसार है :-

क्र.

वर्ष

आय (रूपयों में)

1.

2018-2019

27,83,29,077/-

2.

2019-2020

27,89,38,309/-

3.

2020-2021

65,50,00,000/-

4.

2021-2022

81,47,71,693/-

 

वर्ष 2020-21 में जिले की रेत खदानों का ठेका 261.99 करोड़ रूपयों में स्‍वीकृत किया गया था। ठेकेदार द्वारा माह अक्‍टूबर, नवम्‍बर एवं दिसम्‍बर 2021 की ठेका किश्‍त जमा न करने के कारण ठेका निरस्‍त किया गया, जिसके विरूद्ध ठेकेदार द्वारा माननीय उच्‍च न्‍यायालय, जबलपुर में याचिका दायर की गई, जिस पर न्‍यायालय का स्‍थगन है एवं याचिका विचाराधीन है। अत: वर्ष 2022-23 की कोई योजना वर्तमान में नहीं है।

कोरोना काल में मृत लोगों के परिजनों को आर्थिक सहायता

[राजस्व]

21. ( *क्र. 324 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                                                              (क) सागर नगर में कोरोना काल (कोविड-19) में मृत लोगों के परिजनों को आर्थिक सहायता दिये जाने के लिये राजस्‍व विभाग की कौन-कौन सी योजनायें हैं? किस योजना में कितनें लोगों के आर्थिक सहायता के प्रकरण शेष हैं? शेष होने का क्या कारण है तथा इन्हें कब तक सहायता प्रदान करा दी जायेगी? (ख) क्या यह सही है कि कोरोना काल (कोविड-19) में जो अविवाहित व्यक्ति मृत हो गये हैं एवं जिनके माता-पिता जीवित नहीं हैं, ऐसे प्रकरण में क्या उन सदस्यों को जिन पर उनके परिवार के देखभाल की जिम्मेदारी थी, उनको आर्थिक सहायता दी जायेगी एवं कब तक? ऐसे कितने प्रकरण हैं?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) कोरोना काल (कोविड-19) में मृत लोगों के परिजनों को आर्थिक सहायता दिये जाने के लिये राजस्‍व विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कोविड-19 (अनुग्रह राशि 50 हजार) हेतु निर्देश जारी किये गये हैं। कोविड-19 प्रभावित रोगियों एवं नागरिकों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे शासकीय कर्मियों हेतु सुरक्षा कवच के रूप में मुख्यमंत्री                                 कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना जारी की गई थी। मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना में 05 प्रकरणों में योजना के प्रावधानानुसार दस्‍तावेज पूर्ति की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। पूर्ति उपरांत पात्र होने पर सहायता दी जावेगी। (ख) सागर जिले में कोई प्रकरण लंबित नहीं है। अत: प्रश्‍न उदभूत नहीं होता।

 

 

कुंडालिया वृहद परियोजना

[जल संसाधन]

22. ( *क्र. 345 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजगढ़ जिले की कुंडालिया वृहद परियोजना से सारंगपुर विधानसभा के छूटे हुए क्षेत्र को सिंचाई से लाभान्वित किए जाने हेतु माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय को निवेदन किया गया था? यदि हाँ, तो विधानसभा क्षेत्र सारंगपुर के सिंचाई के लाभ से छूटे हुए क्षेत्र लाभान्वित किए जाने हेतु विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में यदि विभाग द्वारा कोई कार्यवाही की गई है, तो उसकी पुनरीक्षित प्रशासकीय स्‍वीकृ‍ति कब तक प्रदान की जावेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। वस्‍तुस्थिति यह है कि विधानसभा क्षेत्र सारंगपुर अंतर्गत सिंचाई लाभ से छूटे हुए क्षेत्र को परियोजना के सैच्‍य क्षेत्र में सम्मिलित किए जाने हेतु कुण्‍डालिया बांध में अतिरिक्‍त जल की मात्रा उपलब्‍ध न होने के कारण मैदानी कार्यालय द्वारा छूटे हुए क्षेत्र को सिंचित किए जाने हेतु मोहनपुरा बांध से सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु परियोजना रिपोर्ट तैयार कर उनके कार्यालयीन पत्र दिनांक 24.05.2022 द्वारा प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग, भोपाल को प्रेषित किया जाना प्रतिवेदित है। वर्तमान में प्रस्‍ताव का तकनीकी एवं वित्‍तीय मापदण्‍ड आदि का परीक्षण मुख्‍य अभियंता (बोधी), कार्यालय में प्रचलन में है। प्रस्‍ताव अंतिम होने पर स्‍वीकृति के संबंध में निर्णय लिया जाना संभव होगा। निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

अवैध अतिक्रमण ह‍टाया जाना

[राजस्व]

23. ( *क्र. 46 ) श्री सज्जन सिंह वर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                                      (क) प्रदेश में भू-माफिया अभियान के तहत प्रश्‍न दिनांक तक किस-किस जिले में भू-माफियाओं द्वारा शासकीय भूमि पर किये गये अतिक्रमण को हटाया गया एवं कितनी-कितनी भूमि को अतिक्रमण से मुक्‍त कराया गया है? (ख) क्‍या प्रदेश में अपराध करने वालों की सम्‍पत्ति को अवैध अतिक्रमण के नाम पर तत्‍काल बुल्‍डोजर चलाकर तोड़ा जा रहा है? यदि हाँ, तो क्‍या प्रदेश में बड़ी संख्‍या में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण किया गया है? यदि हाँ, तो यह अतिक्रमण क्‍यों नहीं हटाया जा रहा है? (ग) क्‍या देवास जिले के शासकीय विद्यालय के परिसरों पर अतिक्रमण कर कब्‍जे किये गये हैं? यदि हाँ, तो किन-किन विद्यालयों के परिसरों के अतिक्रमण अभी तक नहीं हटाये गये? कारण भी बताएं।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है।                                                                      (ख) जी नहीं। यह कहना सही नहीं है कि प्रदेश में बड़ी संख्‍या में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर निर्माण किया गया है। शासकीय भूमि के अतिक्रमण के मामले में म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता 1959 की धारा 248 एवं नगर पालिका अधिनियम की सम्‍यक धाराओं में प्रकरण दर्ज कर बेदखली आदेश पारित कर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की जाती है, जो एक सतत् प्रक्रिया है।                                                             (ग) जिला देवास की तहसील खातेगांव के ग्राम अकावल्‍या में 300 वर्गफीट भूमि पर किये गये अतिक्रमण हटाये जाने की कार्यवाही प्रचलित है।

परिशिष्ट - "सात"

मल्‍लारा तालाब सर्वेक्षण की जांच

[जल संसाधन]

24. ( *क्र. 1069 ) श्री प्रदीप पटेल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश शासन जल संसाधन विभाग मंत्रालय, वल्‍लभ भवन भोपाल पत्र क्रमांक एफ                                                     16-33/2016/पी-2/31, भोपाल 2018 श्री सी.एल. मरकाम एस.डी.ओ. जल संसाधन मुलताई द्वारा विकासखण्‍ड प्रभात पट्टन तहसील मुलताई, जिला बैतूल की मल्‍लारा तालाब योजना का त्रुटिपूर्ण सर्वेक्षण कार्य कर भू-अर्जन की मात्रा का त्रुटिपूर्ण प्रावधान करने हेतु अनुमति है? यदि हाँ, तो क्‍यों? नहीं तो उसकी प्रति दें। (ख) क्‍या तकनीकी एवं वित्‍तीय रूप से साक्ष्‍य पाये जाने पर योजना की साध्‍यता स्‍वीकृति मध्‍यप्रदेश शासन जल संसाधन विभाग, मंत्रालय भोपाल के आदेश क्रमांक                                                                     डी-1498/2012/ल.सि./1, भोपाल दिनांक 03.08.2012 द्वारा प्रदान की गई, जिसके अनुसार योजना की लागत रू. 161.46 लाख आकलित थी एवं इससे 100 हे. क्षेत्र में सिंचाई किया जाना प्रस्‍तावित था? यदि हाँ, तो प्रति दें। यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं? (ग) श्री सी.एल. मरकाम द्वारा योजना की प्रशासकीय स्‍वीकृति हेतु प्रस्‍ताव में कुल 11 हे. जिसमें निजी भूमि 04 हे. सिंचित एवं 07 हे. असिंचित भूमि सम्मिलित थी, के अधिग्रहण हेतु रू. 67.35 लाख की राशि प्रस्‍तावित थी, पर म.प्र. शासन जल संसाधन विभाग मंत्रालय के आदेश क्र. एफ 22/06/2013-14/ल.सि./31/भो., दिनांक 22.08.2013 द्वारा 228.15 लाख की प्रशासकीय स्‍वीकृति प्रदान की गई। योजना के निर्माण कार्य पूर्ण होने पर वास्‍तवित डूब प्रभावित क्षेत्र 17.932 हे. निजी सिंचित भूमि 08.630 हे. एवं असिंचित 08.102 हे. होना पाया गया, जो कि स्‍वीकृति में दर्शित डूब क्षेत्र 11.00 हे. ही है। यदि हाँ, तो प्रति दें। यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं? (घ) योजना की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्‍वीकृति म.प्र. शासन के                                          एफ-22/03/2016-17/ल.सि./31/679, दिनांक 05.04.2018 रू. 310.34 लाख की प्रदान की गई, जो बढ़ी हुई राशि है? यदि हाँ, तो कौन-कौन अधिकारी दोषी हैं? प्रकरण की क्‍या पुन: जांच की जावेगी? प्रश्‍नांश (क) से (घ) तक बिन्‍दुवार उत्‍तर दें कि शासन किस नाम/पदनाम को दोषी मानता है? दोषियों के विरूद्ध कब तक निलंबन की एवं विभागीय जांच की कार्यवाही करेगा।

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) श्री सी.एल. मरकाम एस.डी.ओ. जल संसाधन विभाग, मुलताई द्वारा विकासखण्‍ड प्रभातपट्टन, तहसील मुलताई जिला बैतूल की मल्‍लारा तालाब योजना के त्रुटिपूर्ण सर्वेक्षण के संबंध में तथ्‍यात्‍मक स्थिति यह है कि श्री मरकाम को मल्‍लारा जलाशय परियोजना का त्रुटिपूर्ण सर्वेक्षण कर भू-अर्जन की मात्रा का त्रुटिपूर्ण प्रावधान करने की अनुमति नहीं दी गई, अपितु श्री मरकाम को मल्‍लारा जलाशय परियोजना का त्रुटिपूर्ण सर्वेक्षण कर भू-अर्जन की मात्रा का त्रुटिपूर्ण आकलन करने के कारण शासन के आदेश क्रमांक-एफ 16-33/2018/ पी-2/31, दिनांक 01.12.2018 द्वारा आरोप पत्रादि जारी किए जाकर विभागीय जाँच संस्थित की गई। आरोप पत्र के परिप्रेक्ष्‍य में श्री मरकाम द्वारा प्रस्‍तुत बचाव उत्‍तर को मान्‍य कर शासनादेश                                                               क्रमांक-एफ 16-33/2018/पी-2/31, दिनांक 18.01.2019 द्वारा किसी कार्यवाही के बिना प्रकरण समाप्‍त किया गया। शासनादेश की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परि‍शिष्‍ट के प्रपत्र ''एक'' अनुसार है। (ख) जी हाँ। प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ''दो'' (पृ. 1 से 5) अनुसार है। (ग) जी हाँ। प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ''तीन'' (पृ. 1 से 5) एवं ''चार'' (पृ.1 से 2) अनुसार है। (घ) जी हाँ। परियोजना की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्‍वीकृति शासनादेश दिनांक 05.04.2018 द्वारा राशि रू. 310.34 लाख की प्रदान की गई। परियोजना की प्रशासकीय स्‍वीकृत राशि से पुनरीक्षित प्रशासकीय स्‍वीकृत राशि में वृद्धि होने का एक कारण भू-अर्जन की मात्रा तथा राशि में वृद्धि होना भी था। भू-अर्जन की मात्रा के त्रुटिपूर्ण आकलन/प्रावधान के लिए दोषी अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय जॉंच की जाकर शासनादेश दिनांक 18.01.2019 द्वारा प्रकरण समाप्‍त किया जा चुका है। अत: प्रकरण में पुन: जॉंच की आवश्‍यकता नहीं है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

वन ग्राम, मजरा एवं टोला में निर्माण कार्य की स्‍वीकृति‍

[वन]

25. ( *क्र. 682 ) श्रीमती लीना संजय जैन : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विदिशा जिला अन्‍तर्गत कुल क‍ितने वन ग्राम, मजरा, टोला हैं? विकास खण्‍डवार अलग-अलग नाम एवं जनसंख्‍या दर्शाकर सूची देवें। (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर में वर्णित सूची अनुसार इन वन ग्रामों, मजरों एवं टोलों में समुचित विकास नहीं हो पा रहा है? यदि नहीं, तो विभाग द्वारा इन ग्रामों का राजस्‍व ग्रामों की तरह विकास हो, ऐसी कार्य योजना बनाई जा रही है? नहीं तो क्‍यों? (ग) क्‍या इन ग्रामों मजरों एवं टोलों में शाला भवन, पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केन्‍द्र, उप स्‍वास्‍थ्य केन्‍द्र, सामुदायिक भवन, हैण्‍डपम्‍प, सड़क निर्माण जैसे अनेक विकास कार्यों हेतु जनहित में निर्माण की अनुमति पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को दी जावेगी? नहीं तो क्‍यों?

वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) विदिशा जिले के सामान्‍य वनमंडल के अंतर्गत कुल 05 वनग्राम हैं, जिनका विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) वनग्रामों के विकास के लिये पृथक से कोई कार्य-आयोजना नहीं है, परन्‍तु वनग्रामों के विकास कार्यों के लिए नोडल एजेन्‍सी द्वारा प्रस्‍ताव प्रेषित करने पर वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के अंतर्गत कार्यवाही की जाती है।                                                              (ग) इन वन ग्रामों मजरों एवं टोलों में शाला भवन, पंचायत भवन, आंगनवाड़ी केन्‍द्र, उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, सामुदायिक भवन, हैण्‍डपम्‍प, सड़क, निर्माण जैसे अनेक विकास कार्यों हेतु जनहित में निर्माण की अनुमति हेतु प्रस्‍ताव वन विभाग को प्राप्‍त होते हैं, तो वन विभाग द्वारा वन संरक्षण अधिनियम के तहत अनुमति जारी की जाती है। शेष प्रश्‍नांश का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - "आठ"

 

 



भाग-2

नियम 46 (2) के अंतर्गत अतारांकित प्रश्‍नोत्तर के रुप में परिवर्तित तारांकित प्रश्‍नोत्तर


बिना अनुमति वृक्षों की कटाई

[राजस्व]

1. ( क्र. 3 ) श्री राकेश पाल सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या म.प्र.शासन के द्वारा मध्यप्रदेश आदिम जनजातियों का संरक्षण (वृक्षों में हित) अधिनियम 1999 एवं नियम 2020 में आदिम जनजातियों को शोषण से बचाने की दृष्टि से उनके खेतों पर खड़े हुए वृक्षों में उनके हितों का संरक्षण करने से संबंधित विधि को समेकित तथा संशोधित करने हेतु शासन द्वारा कोई आदेश प्रसारित किया गया था? यदि हाँ, तो कब? नियम एवं आदेश की प्रति उपलब्ध कराये। (ख) क्या सिवनी जिले के विकासखंड कुरई के अन्तर्गत ग्राम ढुटेरा राजस्व निरीक्षक मण्डल सुकतरा तहसील कुरई के भूमि स्वामी भोजलाल पिता मिहिलाल वगैरह जाति गोंड भूमि स्वामी की भूमि खसरा नंबर 92/4, 127/4,140/3,150/4,167,169/3,174/2,185/2,309/4,476/5 में स्थित ईमारती सागवान एवं गैर इमारती वृक्षों की कटाई बिना अनुमति के की गई है? यदि हाँ, तो किस सक्षम अधिकारी की अनुमति से वृक्षों की कटाई करायी गई? क्या भूमिस्वामी के द्वारा वृक्ष काटने हेतु कोई आवेदन पत्र सीमांकन रिपोर्ट, फील्ड बुक, वृक्षों को काटने हेतु वृक्षों की सूची विधिवत पेश की गई थी? हाँ तो कब?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट  अनुसार है। (ख) जी नहीं। केवल भूमि स्‍वामी के खसरा नंबर 169/3 की सीमा तथा वन क्षेत्र में वन विकास निगम के द्वारा उपचार हेतु डाले गये कूप वर्ष 2019-20 की सीमा पर लगभग 10-12 वर्ष पूर्व, अज्ञात लोगों के द्वारा बिना सक्षम अनुमति के 01 लोखंडी, 01 मवई एवं 01 लेंड़ि‍या प्रजाति के 03 गैर इमारती वृक्षों को काटे जाने के पुराने डूंठ पाये गये हैं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - "नौ"

लकड़ी नीलामी की राशि का भुगतान

[वन]

2. ( क्र. 4 ) श्री राकेश पाल सिंह : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या तत्‍कालीन डी.ओ.एफ.श्री डी.के. वासनिक, दिनेश झारिया डिप्टी रेंजर, वनरक्षक देवेन्द्र ग्रामोत्तर की देख-रेख में बिना अनुमति के लगभग 18 एकड़ में स्थित ईमारती/गैर ईमारती वृक्षों को काटा जाकर दिनांक 09.02.2021 को 35 ट्रक 356.71 घनमीटर एवं दिनांक 12 मार्च को 12 ट्रक 121.862 घनमीटर लकड़ी माह अप्रैल में 35 ट्रक 333.455 घनमीटर लकड़ी इस तरह कुल सतकठा 567 घनमीटर एवं सागौन 242.490 घनमीटर कुल 811.388 घनमीटर लकड़ी का विदोहन कर बैहरई डिपों में परिवहन कराया गया था? यदि हाँ, तो किस अधिकारी की अनुमति से अवैध रूप से कटाई की गई थी? (ख) क्या भूमिस्वामी की भूमि में स्थित ईमारती/गैर इमारती वृक्षों को काटे जाने पर बरघाट परियोजना के तत्कालीन अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध शासन/विभाग कोई कार्यवाही करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? (ग) क्या बैहरई डिपों से लकड़ी की नीलामी करने के उपरांत भूमिस्वामियों को नीलामी से प्राप्त राशि को उनके खाते पर अंतरित की गई है? यदि हाँ, तो पृथक-पृथक दिनांक बतायें। यदि नहीं, तो क्यों?

वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) प्रश्‍नांकित क्षेत्र में बिना अनुमति के कोई पातन या परिवहन नहीं कराया गया है। भारत सरकार की अनुमति उपरान्त विभिन्न तिथियों में पातन और परिवहन मध्‍यप्रदेश वन विकास निगम द्वारा किया गया है। (ख) एवं (ग) प्रश्‍नांश के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

ठेकेदारों से पेनाल्‍टी की वसूली

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

3. ( क्र. 26 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि            (क) क्‍या म.प्र. स्‍टेट सिविल सप्‍लाई कार्पो. द्वारा रेक, लंबी दूरी परिवहन, द्वार प्रदाय योजना, डेमरेज, वारफेज एवं शासन द्वारा चलाई जा रही विभिन्‍न योजनाओं में विलंब से परिवहन करने वाले प्रदेश के ठेकेदारों को नोटिस जारी कर पेनाल्‍टी वसूली की कार्यवाही की गई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार प्रश्‍न दिनांक से गत 3 वर्षों में जारी किये गये नोटिस एवं पेनाल्‍टी राशि जो भी स्थिति हो की जानकारी ठेकेदारवार, जिलेवार देवें? (ग) प्रश्‍नांश (ख) अंतर्गत कितनी राशि वसूल की गई? विवरण दें। यदि वसूली नहीं की गई है तो कारण बतावें।

खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) एवं (ख)  जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट  अनुसार है(ग) प्रश्‍नांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में पेनाल्‍टी वसूली की कुल राशि रूपये 6,72,51,805/- की गई है।

शरणार्थियों को आवंटित भूमि की जानकारी

[राजस्व]

4. ( क्र. 39 ) श्री महेन्द्र हार्डिया : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वर्ष 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान बंगलादेशी शरणार्थियों को इंदौर में खजराना थाने के पीछे एवं कनाडिया रोड पर सरकारी भूमि आवंटित की गई थी? यदि हाँ, तो किन-किन हितग्राहियों को कितने-कितने स्क्वेयर फीट भूमि आवंटित की गई थी? सूची उपलब्ध करावें। (ख) कनाडिया रोड पर कतिपय भू-माफिया लोग शरणार्थियों से महंगे दामों पर भूमि/भवन खरीद रहे हैं? क्या उक्त सरकारी भूमि को हितग्राहियों को बेचने का अधिकार है? कनाडिया रोड पर अभी तक कितने प्लॉट/मकान की बिक्री की रजिस्ट्री हो गई है? (ग) कनाडिया रोड की रजिस्ट्री को कब निरस्त किया जावेगा? शरणार्थियों को खजराना थाने के पीछे एवं कनाडिया रोड पर आवंटित सरकारी भूमि को अन्य          भू-माफिया से बचाने हेतु बिक्री/रजिस्ट्री पर रोक कब लगाई जावेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। 175 हितग्राहियों को 13 बाय 66 वर्गफीट के 1-1 भूखण्ड/भवन आवंटित किये गये है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार  है। (ख) जी हाँ। 15 व्यक्तियों के क्रय-विक्रय की  जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है। (ग) जाँच उपरांत नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। भूखण्ड/भवन के क्रय-विक्रय पर रोक लगायें जाने हेतु जिला पंजीयक इंदौर को लिखा गया है।

राजस्व प्रकरणों का निराकरण

[राजस्व]

5. ( क्र. 61 ) श्री लखन घनघोरिया : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                (क) जबलपुर जिले में भूमि जायेदाद सम्बंधी नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा व अविवादित पंजीकृत कितने-कितने प्रकरणों का निराकरण किया गया? कितने प्रकरण लम्बित हैं? विशेष अभियान के तहत कितने प्रकरणों का निराकरण किया गया? कितने प्रकरणों का निर्धारित समयावधि में निराकरण नहीं किया गया? इस सम्बंध में शासन एवं जिला प्रशासन ने कब-कब क्या दिशा निर्देश जारी किये हैं? वर्ष 2019-20 से 2022-23 तक की तहसीलवार व माहवार जानकारी दें। (ख) न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) में पंजीकृत कितने प्रकरणों का निराकरण किया गया एवं कितने-कितने प्रकरण लम्बित है? माहवार पृथक-पृथक जानकारी दें। राजस्व प्रकरणों का निर्धारित समयावधि में निराकरण न करने, लापरवाही बरतने वाले दोषी किन-किन अधिकारियों पर जिला प्रशासन ने कब क्या कार्यवाही की हैं? (ग) लोकायुक्त पुलिस (संगठन) आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्‍यूरो (ई.ओ.डब्ल्यू.) ने कब-कब किन-किन कर्मचारियों अधिकारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा है एवं छापे में किस-किस के पास कितनी-कितनी नगद राशि व कितनी-कितनी चल-अचल सम्पति बरामद की हैं? शासन ने आरोपी किन-किन कर्मचारियों, अधिकारियों के विरूद्ध कब क्या कार्यवाही की है? सूची दें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जबलपुर जिले में भूमि जायेजाद संबंधी नामांतरण के सीमांकन, बंटवारा विवादित/अविवादित प्रकरणों का निराकरण की  जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "अ" अनुसार। अविवादित प्रकरणों का समय-सीमा में निराकरण किया गया है। वर्तमान में नामान्तरण के 3154, बंटवारा के 500, सीमांकन के 1030, प्रकरण लंबित है। विशेष अभियान (अभिलेख शुद्धिकरण पखवाड़ा के तहत 8198 प्रकरणों का निराकरण किया गया है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "ब" अनुसार। वर्ष 2019-20 से 2022-23 तक की तहसीलवार माहवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "अ"  अनुसार(ख) न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) में पंजीकृत/निराकृत/लंबित प्रकरणों की तहसीलवार  जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "अ" अनुसार। राजस्व प्रकरणों का समय पर निराकरण न करने, लापरवाही बरतने वाले दोषी अधिकारियों पर जिला प्रशासन द्वारा की गयी कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "स" अनुसार(ग) लोकायुक्त संगठन आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो दवारा रिश्वत लेते हुए पकड़े गये अधिकारियों, कर्मचारियों व पटवारियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "द" अनुसार। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

पहाड़ि‍यों के सौंदर्यीकरण की योजना

[वन]

6. ( क्र. 62 ) श्री लखन घनघोरिया : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वन मण्डल सामान्य जबलपुर ने पर्यटन की दृष्टि से ठाकुरताल की पहाड़ि‍यों को नैसर्गिक सौंदर्य प्रदान करने हेतु नगर वन योजना कब क्या बनाई है? इसका कुल रकबा कितना है एवं कितने क्षेत्रफल में कौन-कौन सा विकास एवं निर्माण कार्य कराना स्वीकृत/प्रस्तावित है? शासन ने कब कितनी राशि की प्रशासकीय एवं तकनीकी स्वीकृति दी है तथा कब कितनी राशि का बजट प्रावधान किया है? कब-कब कितनी-कितनी राशि आवंटित की है और कब से कितनी राशि आवंटित नहीं की है एवं क्यों? (ख) प्रश्‍नांकित योजना के तहत कितने क्षेत्रफल को नैसर्गिक स्वरूप में कब विकसित किया गया है एवं कितनी-कितनी राशि के कौन-कौन से विकास कार्य कब किस एजेन्सी से कराये है?            10 कि.मी. का पैदल ट्रैक व 3.5 कि.मी. के हिस्से में सफारी कार्य कब कितनी राशि में कराया गया है। पर्यटकों की सुविधा की दृष्टि से कौन-कौन सा कार्य कराया गया है? (ग) ठाकुरताल की पहाड़ियों के कितने क्षेत्रफल में अवैध कब्जा, अतिक्रमण व अवैध निर्माण है तथा कितने क्षेत्रफल को कब्जा मुक्त कराया गया हैं? प्रस्तावित कौन-कौन सा विकास कार्य कब से नहीं कराया गया एवं क्यों? वाचटावर व गेट का निर्माण कार्य कब से रूका पड़ा है एवं क्यों? शासन शेष कार्यों के लिये कब तक आवश्यक राशि का आवंटन कर निर्माण कार्य पूर्ण कराना सुनिश्चित करेगा?

वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) वनमंडल जबलपुर द्वारा पर्यटन की दृष्टि से ठाकुरताल की पहाड़ियों को नैसर्गिक सौंदर्य प्रदान करने हेतु नगर वन योजना अंतर्गत वर्ष 2016-17 में रकबा 149.95 हेक्टेयर का प्रस्ताव तैयार कर चैनलिंक फैसिंग/क्षेत्र सफाई, वृक्षारोपण/नेचुरल ट्रेल/वाचटॉवर/गेट निर्माण/सोलर लाईट सोलर पंप (सोलर सिस्टम), तालाब गहरीकरण, पोर्टबल टॉयलेट, पार्क बैचेंस, बंक हाउस आदि कार्य प्रस्तावित किया गया, जिसकी प्रशासकीय स्वीकृति राष्‍ट्रीय कैम्‍पा प्राधिकरण, नई दिल्‍ली के पत्र क्रमांक-13-28 (29) NVY/2015 CAMPA January, 2017 एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक के पत्र क्रमांक एफ-2/2016/10-3/445, दिनांक 20.07.2017 से दी गई। तकनीकी स्वीकृति मुख्‍य वन संरक्षक मध्यवन वृत जबलपुर के आदेश कं./व्यय/31, दिनांक 14.08.2017 से राशि रू. 2.00 करोड़ की दी गई। राशि आवंटन का विवरण निम्‍नानुसार है :-

वर्ष

आवंटित राशि रूपये में

योग

राज्‍यांश

केन्‍द्रांश

2017-18

1660000

8000000

9660000

2018-19

2016358

0

2016358

2019-20

0

7350000

7350000

योग

3676358

15350000

19026358

आगामी वर्षों में राशि ए.पी.ओ. में स्वीकृत न होने के कारण आवंटित नहीं की गई। नवीन नगर वन की स्‍थापना का प्रस्‍ताव भारत सरकार के पत्र क्रमांक-FNOE.I-3/2021B-1 (NAEB) दिनांक 18.11.2021 से 50 हेक्‍टेयर हेतु स्वीकृत किया गया है जिस हेतु राशि रूपये 95.75 लाख विमुक्त की गई है। प्रोजेक्ट पुनरीक्षित होने के कारण कार्य प्रारंभ नहीं किये गये है। (ख) उत्‍तरांश () में उल्‍लेखित अवधि में कार्य योग्‍य 100 हेक्‍टेयर क्षेत्र को वि‍कसित किया गया है। 10 कि.मी. का पैदल ट्रैक वर्ष 2019-20 में राशि 11.84 लाख से कराया गया है। 3.5 कि.मी. हिस्‍से की सफारी कार्य नहीं कराया गया है। प्रश्‍नांश की शेष जानकारी संलग्न  परिशिष्‍ट  में है। (ग) नगर वन उद्यान ठाकुरताल की पहाड़ि‍यों में कोई भी अतिक्रमण अवैध कब्‍जा या निर्माण विभाग के संज्ञान में नहीं है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। वाच टावर व गेट निर्माण कार्य वर्षान्‍त 31 मार्च, 2020 से शेष है। आगामी वर्षों के ए.पी.ओ. में राशि आवंटित न होने के कारण कार्य रूका है। अत: समय-सीमा दिया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - "दस"

कृषि धारकों को बैंकों द्वारा जारी किसान क्रेडिट कार्ड

[राजस्व]

7. ( क्र. 76 ) श्रीमती कल्पना वर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि              (क) जिला सतना विधान सभा क्षेत्र रैगांव में प्रश्‍न दिनांक तक कुल कितने कृषि भूमि धारक किसान हैं? (ख) उपरोक्‍त में से कितने किसानों के पास बैंकों द्वारा जारी किसान क्रेडिट कार्ड हैं तथा कितने किसान फसल बीमा से जुड़े हैं? (ग) क्‍या सरकार की जानकारी में है कि जिन किसानों के पास जारी किसान क्रेडिट कार्ड नहीं हैं, उन्‍हें निजी साहूकारों से कर्ज लेने के लिये मजबूर होना पड़ता है? (घ) यदि हाँ, तो क्‍या सरकार सभी किसानों को समय-सीमा में किसान क्रेडिट कार्ड के दायरे में लाने के लिये अधिकारियों को निर्देशित करेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) विधानसभा रैगांव अन्‍तर्गत कुल 96748 किसान कृषि भूमि धारक है। (ख) उपरोक्‍त में से बैकों द्वारा कुल 27268 किसानों के पास क्रेडिट कार्ड है तथा कुल 15415 किसान फसल बीमा से जुडे है। (ग) जी नहीं। जिले में ऐसा कोई मामला प्रकाश में नहीं है। (घ) उत्‍तरांश (ग) के प्रकाश में, प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

शासकीय लीज भूमि का मद परिवर्तन

[राजस्व]

8. ( क्र. 86 ) श्री ग्‍यारसी लाल रावत : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि            (क) सेंधवा नगरीय क्षेत्र में शिक्षा एवं अन्‍य व्‍यवसायिक उपयोग के लिये किन-किन व्‍यक्ति/संस्‍थाओं को पिछले 10 साल में कितनी शासकीय भूमि लीज पर दी गई हैं? (ख) क्‍या लीज की शर्तों के अनुसार भूमि का उपयोग किया जा रहा हैं? यदि नहीं, तो वर्तमान में उस भूमि का क्‍या उपयोग किया जा रहा हैं? (ग) क्‍या सेंधवा नगर में शासकीय लीज भूमि का मद परिवर्तन किया जाकर अन्‍य व्‍यवसाय जैसे:- होटल, कॉलोनी निर्माण इत्‍यादि कार्य किये जा रहे हैं, जिसमें शासन को करोड़ों रूपयों की राजस्‍व की हानि हो रही हैं? इसके लिये कौन अधिकारी जिम्‍मेदार हैं? (घ) क्‍या शासकीय लीज भूमि का मद परिवर्तन करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध निलंबन एवं विभागीय जांच की कार्यवाही तथा लीज धारकों की लीज निरस्‍त कर भूमि को शासकीय अधिपत्‍य में लिये जाने की कार्यवाही की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) सेंधवा नगरीय क्षेत्र में शिक्षा एवं अन्य व्यवसायिक उपयोग के लिये निजी व्यक्ति/संस्थाओं को पिछले 10 साल में शासकीय भूमि लीज पर नहीं दी गई है। (ख) से  (घ) उत्‍तरांश () के परिप्रेक्ष्‍य में शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

शासकीय भूमि का आवंटन

[राजस्व]

9. ( क्र. 87 ) श्री ग्‍यारसी लाल रावत : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि            (क) सेंधवा विधानसभा क्षेत्र में तहसील सेंधवा एवं तहसील वरला में स्थित नगरीय निकाय, नगर पंचायत व ग्राम पंचायतों में कहाँ-कहाँ कितनी शासकीय भूमि उपलब्‍ध हैं? पृथक-पृथक जानकारी उपलब्‍ध करायें। (ख) शासकीय भूमि को किसी संस्‍था या अन्‍य को आवंटित करने के क्‍या             दिशा-निर्देश हैं? नियमावली उपलब्‍ध करायें। (ग) सेंधवा नगरीय सीमा के अंतर्गत वर्ष 2016 से लेकर प्रश्‍न दिनांक तक कितनी शासकीय भूमि किसी संस्‍था या अन्‍य व्‍यक्ति को आवंटित की गई?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जानकारी  पुस्‍तकालय  में रखे                    परिशिष्ट-''एक''  अनुसार है। (ख) इस संबंध में म.प्र. नजूल भूमि निर्वतन निर्देश, 2020 का द्वितीय संस्करण राजस्‍व विभाग की वेबसाईट www.govtpressmp.nic.in पर उपलब्‍ध है जिसे डाउनलोड भी किया जा सकता है। जानकारी  पुस्‍तकालय  में रखे परिशिष्ट-''दो'' अनुसार है। (ग) सेंधवा नगरीय सीमा के अन्‍तर्गत वर्ष 2016 से लेकर प्रश्‍न दिनांक तक शासकीय भूमि निजी संस्था या अन्य व्यक्ति को आवंटित नहीं की गई।

राजस्‍व न्‍यायालय के आदेशों का पालन

[राजस्व]

10. ( क्र. 138 ) श्री ब्रह्मा भलावी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता 1959 में किस-किस धारा में राजस्‍व न्‍यायालय की क्‍या-क्‍या परिभाषा दी गई है? किस-किस राजस्‍व न्‍यायालय द्वारा दिए गए आदेशों या निर्णयों का पालन किए जाने की क्‍या-क्‍या समय-सीमा निर्धारित हैं। (ख) राजस्‍व न्‍यायालयों द्वारा दिए गए आदेश एवं निर्णय पर यदि किसी अन्‍य न्‍यायालय ने स्‍थगन आदेश जारी नहीं किया है तो ऐसे आदेश एवं निर्णय का पालन किए जाने की समयावधि क्‍या है और इसकी जिम्‍मेदारी किस पर हैं? पृथक-पृथक बतावें। (ग) मध्‍यप्रदेश शासन ने राजस्‍व न्‍यायालयों द्वारा दिए गए आदेशों या निर्णयों का निश्चित समयावधि में पालन सुनिश्चित किए जाने के संबंध में किस-किस दिनांक को पत्र, परिपत्र, आदेश, निर्देश जारी किए हैं? प्रति सहित बतावें। यदि नहीं, किए हैं तो कब तक किए जावेंगे?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता 1959 की धारा 31 में राजस्‍व न्‍यायालय की परिभाषा दी गई है जो इस प्रकार है:- मण्‍डल तथा राजस्‍व अधिकारियों की न्‍यायालयों की प्रास्थिति का प्रदान किया जाना- मण्‍डल या राजस्‍व अधिकारी जब कि वह राज्‍य सरकार तथा किसी व्‍यक्ति के बीच या किन्‍हीं कार्यवाहियों के पक्षकारों के बीच अवधारण के लिये उद्भूत होने वाले किसी प्रश्‍न की जांच करने या उसे विनिश्चित करने के लिये इस संहिता या तत्‍समय प्रवृत्‍त किसी अन्‍य अधिनियमित के अधीन शक्ति का प्रयोग कर रहा हो राजस्‍व न्‍यायालय होगा। (ख) एवं (ग) मध्‍यप्रदेश राजस्‍व संहिता के अध्‍याय चार की धारा 44 से 51 के अनुसार राजस्‍व अधिकारियों को संहिता में मूल आदेश अथवा अपील, पुनरीक्षण, पुनर्विलोकन शक्तियां प्राप्‍त है जिसके अंतर्गत सक्षम राजस्‍व अधिकारी द्वारा आदेश पारित किये जाते है। सक्षम राजस्‍व अधिकारी द्वारा जिस प्रावधान अंतर्गत आदेश पारित किये जा रहे है, उसमें वर्णित समयावधि अथवा आदेश में पीठासीन अधिकारी द्वारा आदेशित समयावधि में निर्देशित पदाधिकारी/कर्मचारी को आदेश का पालन किया जाना चाहिये।

बांध परियोजना के डूब क्षेत्र का व्‍यवस्‍थापन

[जल संसाधन]

11. ( क्र. 144 ) श्री रामपाल सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 25 जून 2022 की स्थिति में सागर जिले में स्‍वीकृत किन-किन बांध/सिंचाई परियोजना में रायसेन जिले की बेगमगंज तहसील के कौन-कौन से गांव पूर्णत: डूब रहे हैं तथा उनके व्‍यवस्‍थापन हेतु आज दिनांक तक क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) बेगमगंज तहसील के पूर्णत: डूब रहे ग्रामों के परिवारों को चिन्हित कर कब तक वैकल्पिक स्‍थान पर बसा दिया जायेगा? (ग) 25 जून 2022 की स्थिति में सागर जिले में स्‍वीकृत किन-किन बांध/सिंचाई परियोजना में रायसेन जिले की बेगमगंज तहसील के कौन-कौन से ग्रामों की भूमि डूब रही है तथा किन-किन ग्रामों के किसानों का मुआवजा राशि का भुगतान हो गया है तथा किन-किन ग्रामों के किसानों को मुआवजा राशि का भुगतान क्‍यों नहीं हुआ? (घ) क्‍या विभाग के अधिकारियों द्वारा रायसेन जिले की बेगमगंज तहसील के कुछ ग्रामों में निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है? यदि हाँ, तो क्‍यों तथा इसकी सूचना कलेक्‍टर रायसेन एवं रायसेन जिले के सांसद/विधायकों को क्‍यों नहीं दी गई?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) 25 जून 2022 की स्थिति में मडिया बांध में जल भराव होने पर रायसेन जिले के कोई भी ग्राम डूब में नहीं आ रहे हैं। वर्तमान में बांध निर्माणाधीन है। पूर्ण भराव की स्थिति में पूर्ण रूप से डूब में आने वाले ग्राम चांदामऊ की भूमि का मुआवजा हेतु     भू-अर्जन हेतु धारा-21 की कार्यवाही तथा ग्राम ककरुआ की धारा 19 की कार्यवाही पूर्ण की जा चुकी है। इन ग्रामों के मकानों एवं अन्‍य परिसंपत्तियों के अर्जन हेतु धारा-11 की कार्यवाही अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व), तहसील बेगमगंज में प्रक्रियाधीन है। डूब प्रभावित ग्रामों की आबादी के व्‍यवस्‍थापन हेतु तहसील बेगमगंज के गोपालपुर चुरक्कावीरपुर एवं उचेरा में स्थित शासकीय भूमि आवंटन की कार्यवाही कलेक्‍टर जिला रायसेन के स्‍तर पर प्रचलन में है। (ख) बेगमगंज तहसील के पूर्णत: डूब में आने वाले ग्रामों के परिवारों को चिन्हित कर भू-अर्जन एवं अन्य कार्यवाही पूर्ण होने पर वैकल्पिक स्थानों पर बसाया जाना संभव होगा। निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ग) सागर जिले में स्‍वीकृत बीना सिंचाई परियोजना अन्‍तर्गत मडिया बांध डूब क्षेत्र में आने वाले रायसेन जिले की बेगमगंज तहसील के ग्रामों की  सूची संलग्‍न  परिशिष्‍ट  अनुसार है। डूब में आ रहे 45 ग्रामों में से 10 ग्रामों का भू-अर्जन अवार्ड पारित किया जा चुका हैजिनके किसानों को मुआवजा राशि के भुगतान की कार्यवाही कलेक्‍टर रायसेन के स्‍तर पर प्रक्रियाधीन है। शेष ग्रामों के भू-अर्जन न होने के कारण मुआवजा राशि का भुगतान नहीं हुआ है। (घ) वस्‍तुस्थिति यह है कि मडिया बांध के डूब क्षेत्र में पूर्णत: डूब में आने वाले ग्राम क्रमश: ककरूआ, बरामदगढ़ी एवं चांदामऊ में प्रधानमंत्री/मुख्‍यमंत्री आवास स्‍वीकृत न किये जाने एवं स्‍वीकृत आवासों के निर्माण स्‍थगित रखे जाने हेतु कलेक्‍टरजिला रायसेन एवं अन्य अधिकारियों यथा मुख्‍य कार्यपालन अधिकारीजिला पंचायत रायसेनअनुविभागीय अधिकारी, (राजस्‍व) बेगमगंजजिला-रायसेनमुख्‍य कार्यपालन अधिकारीजनपद पंचायत बेगमगंजजिला रायसेन से पत्र दिनांक 20.09.2021 द्वारा अनुरोध किया गया था। कार्यवाही प्रचलन में होने के कारण अवगत कराने की स्थिति नहीं थी।

परिशिष्ट - "ग्यारह"

जारोली डेम की मरम्‍मत

[जल संसाधन]

12. ( क्र. 162 ) श्री बैजनाथ कुशवाह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि    (क) क्‍या विधानसभा क्षेत्र सबलगढ़ में रामपुर घाटी के नीचे क्‍वारी नदी पर जारोली घाट पर स्‍टाप डेम बनाया गया है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के प्रकाश में उक्‍त निर्मित स्‍टाप डेम में घटिया किस्‍म की सामग्री का उपयोग किया गया जिसके कारण उक्‍त डेम की वाल पहली ही वर्षा में ध्‍वस्‍त होकर बहाव में बह गई है? यदि हाँ, तो उक्‍त घटिया निर्माण के लिये कौन-कौन अधिकारी कर्मचारी एवं कार्य एजेंसी दोषी है एवं दोषी अधिकारी/कर्मचारियों एवं कार्य एजेंसी के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो कार्यवाही कब तक की जावेगी? (ग) क्‍या उक्‍त डेम की विगत एक वर्ष से ध्‍वस्‍त वाल का निर्माण कार्य अभी तक नहीं किया गया है? यदि हाँ, तो क्‍यों एवं इसके लिये उत्‍तरदायी अधिकारी/कर्मचारियों के विरूद्ध क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई है? यदि नहीं, तो कार्यवाही कब तक की जावेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) जी हाँ। (ख) स्टॉपडेम का निर्माण कार्य विभागीय स्पेसिफिकेशन एवं ड्राईंग अनुरूप कराया जाना प्रतिवेदित है। वर्ष 2021-22 में 28 जुलाई से 03 अगस्त के मध्य क्‍वांरी नदी के कैचमेन्ट में अतिवृष्टि के कारण बाढ़ का पानी रूपांकित फ्लड से 04.00 मीटर ऊपर तक जाने के कारण संरचना की बांयी ओर की की-वॉल क्षतिग्रस्त हुई जो कि प्राकृतिक आपदा का हिस्सा है। प्राकृतिक आपदा होने से क्षतिग्रस्त की-वॉल के लिए किसी अधिकारी/कर्मचारी एवं कार्य एजेन्सी को दोषी ठहराने तथा किसी के विरुद्ध कोई कार्यवाही किये जाने की स्थिति नहीं है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) डेम की की-वॉल की मरम्मत हेतु एजेन्सी निर्धारित होना प्रतिवेदित है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की आचार संहित लागू होने के कारण अनुबंध नहीं हुआ है। आचार संहिता हटने के पश्चात् अनुबंध संपादित कराकर कार्य कराया जाना संभव होगा। किसी अधिकारी/कर्मचारी पर कार्यवाही किए जाने की स्थिति नहीं है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

वि.स. सबलगढ़ के स्‍वीकृत बांधों के संबंध मे

[जल संसाधन]

13. ( क्र. 163 ) श्री बैजनाथ कुशवाह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍न क्रमांक 316 दिनांक 22.12.2021 को माननीय जल संसाधन मंत्री महोदय म.प्र. से प्रश्‍नकर्ता द्वारा पूछे गये विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 03 सबलगढ़ के रामपुर घाटी क्षेत्र के प्रस्तावित बांधों के संबंध के प्रश्‍न के जवाब में बताया गया था कि उक्‍त डेमों की साध्‍यता हो चुकी है चूंकि करोना काल होने के कारण बजट का अभाव है एवं शीघ्र ही स्‍वीकृति प्रदाय कर बजट स्‍वीकृत किया जायेगा? (ख) प्रश्‍नांश (क) यदि हाँ, तो प्रश्‍न दिनांक तक इस संदर्भ में क्‍या कार्यवाही की गई है? यदि नहीं, तो क्‍यों एवं कार्यवाही कब तक की जावेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) एवं (ख) तथ्यात्मक स्थिति यह है कि प्रश्‍न के जवाब में बताया गया था कि ''शीघ्र ही इन योजनाओं का सर्वेक्षण कार्य किया जाकर अग्रिम कार्यवाही की जाएगी''। तत्‍समय नवलपुरा तालाब की साध्‍यता स्‍वीकृति दिनांक 03.08.2018 को दी जाकर सर्वेक्षण कार्य पूर्ण होना तथा डी.पी.आर. बनाने की कार्यवाही प्रचलन में होने की जानकारी दी गई थी एवं शेष 04 परियोजनाओं की साध्‍यता स्‍वीकृति दिनांक 04.03.2020 को दिया गया, जिसमें सर्वेक्षण कार्य नहीं हुआ था। वर्तमान में शेष सभी 04 योजनाओं का सर्वेक्षण कार्य पूर्ण कर लिया जाना प्रतिवेदित है। डी.पी.आर. तैयार करने की कार्यवाही मैदानी कार्यालयों में प्रचलन में है। डी.पी.आर. प्राप्‍त होने पर स्‍वीकृति के संबंध में निर्णय लिया जाना संभव होगा। निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

पंचमनगर मध्यम सिंचाई परियोजना से किसानों को सिंचाई का लाभ

[जल संसाधन]

14. ( क्र. 188 ) श्री पुरुषोत्तम लाल तंतुवाय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला दमोह में पंचमनगर परियोजना कब कितनी राशि से स्‍वीकृत की गई थी? स्‍वीकृति का प्रशासकीय आदेश प्रदाय करें। साथ ही यह बतायें कि पंचमनगर परियोजना में दमोह जिले के कौन-कौन से गांव के किसानों को सिंचाई का लाभ प्राप्‍त हो सकेगा? (ख) विधानसभा क्षेत्र हटा के हटा व पटेरा विकासखण्‍ड के किसानों द्वारा ज्ञापन के माध्‍यम से मांग आयी है कि हटा व पटेरा विकासखण्‍ड को भी उक्‍त योजना में शामिल किया जावे जिसके प्रस्‍ताव शासन स्‍तर पर भेजे गये हैं? क्‍या हटा व पटेरा विकासखण्‍ड को इस योजना में जोड़े जाने की समुचित कार्यवाही की जावेगी जिससे कि किसानों को लाभ प्राप्‍त हो सके?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) पंचमनगर मध्यम सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 31.03.2012 को राशि रू.263.10 करोड़ एवं पंचमनगर सिंचाई काम्प्लेक्स की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 03.01.2017 को राशि रू. 674.90 करोड़ की प्रदान की गई थी। प्रशासकीय स्‍वीकृति एवं पुनरीक्षित प्रशासकीय स्‍वीकृति के आदेश की प्रति  पुस्‍तकालय  में रखे   परिशिष्ट-1 एवं 2 अनुसार है। परियोजना से दमोह जिले की पथरिया विकासखण्ड के अंतर्गत 11 ग्राम, बटियागढ़ विकासखण्ड के अंतर्गत 57 ग्रामों के किसानों को सिंचाई का लाभ प्राप्त होगा। ग्रामवार सूची  पुस्तकालय  में रखे परिशिष्ट  के प्रपत्र-'''' अनुसार है। (ख) विधानसभा क्षेत्र हटा के हटा व पटेरा विकासखण्ड के किसानों द्वारा उनके क्षेत्र को शामिल किए जाने हेतु ज्ञापन के माध्यम से मांग संबंधी जानकारी मैदानी कार्यालयों के संज्ञान में नहीं होना प्रतिवेदित है, अपितु मान. सदस्‍य का पत्र दिनांक 15.02.2021 मुख्‍यमंत्री कार्यालय के माध्‍यम से शासन को प्राप्‍त हुआ है। परियोजना के मूल प्रस्ताव में सम्मिलित ग्रामों की सिंचाई एवं पेयजल हेतु आवंटन के उपरांत शेष जल उपलब्ध नहीं होने के कारण अन्य ग्रामों को सम्मिलित किया जाना संभव नहीं है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

रेत नीति के नियम 4 अनुसार रायल्‍टी की वापसी

[खनिज साधन]

15. ( क्र. 193 ) सुश्री हिना लिखीराम कावरे : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विषयांकित रेत नीति के क्रमांक 04 में पंचायत द्वारा शासकीय योजनाओं जैसे स्‍वच्‍छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा ऐसे कार्य जो पंचायतों द्वारा किये जा रहे हैं में निकटतम स्‍वीकृत रेत खदान से लायी गई रेत की रायल्‍टी की राशि वापस करने के प्रावधान हैं? (ख) प्रश्‍न दिनांक तक प्रदेश की विभिन्‍न ग्राम पंचायतों से रेत नीति में दी गई छूट अनुसार कार्यां में इस्‍तेमाल की गयी रेत की रायल्‍टी की राशि लौटाने के कितने प्रस्‍ताव विभाग को प्राप्त हुये हैं? जिले अनुसार जानकारी उपलब्‍ध करायें। (ग) यदि प्रश्‍नांश (ख) में वर्णित कोई भी प्रस्‍ताव विभाग को प्राप्‍त नहीं हुआ है तो इसका अर्थ यह हुआ कि रेत नीति में शासन द्वारा पंचायतों को दी गयी इतनी बड़ी छूट की जानकारी विभाग पंचायतों तक नहीं पहुंचा सका। जानकारी न पहुंचाने के लिए दोषियों पर शासन क्‍या कार्यवाही करेगा तथा भविष्‍य में रेत नीति में छूट का लाभ पंचायतों को मिल सके, इसके लिए विभाग क्‍या कार्ययोजना बनाएगा?

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) जी नहीं। विभाग में प्रश्‍नानुसार रेत नीति लागू नहीं है। (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार रेत नीति में प्रावधान न होने के कारण प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

किसान सम्मान निधि का भुगतान

[राजस्व]

16. ( क्र. 230 ) श्री राजेश कुमार प्रजापति : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या किसानों को किसान सम्मान निधि का भुगतान किये जाने की कोई योजना संचालित है? यदि हाँ, तो कब से? योजना का नाम एवं भुगतान किये जाने वाले राशि बतायें। (ख) प्रश्‍न (क) अनुसार शासन की उक्त योजना का लाभ किसानों को प्राप्त हो रहा है? यदि हाँ, तो संख्‍यावार जानकारी उपलब्‍ध करायें। यदि नहीं, तो क्यों? ऐसे कितने किसान हैं जिन्हें लाभ नहीं प्राप्त हो रहा है? संख्‍यावार जानकारी उपलब्‍ध करायें। (ग) क्या उक्त योजना से वंचित किसानों को लाभान्वित किया जायेगा? यदि हाँ, तो समय-सीमा बतायें। यदि नहीं, तो कारण बतायें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। दिनांक 1.12.2018 से। योजना का नाम प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि योजना है एवं योजनांतर्गत एक वर्ष में प्रत्‍येक पात्र कृषक परिवार को रूपये 2000/- की तीन समान किश्‍तों में कुल राशि रूपये 6000/- का भुगतान किया जाता है। (ख) जी हाँ। दिनांक 10.07.2022 की स्थिति में 83,82,881 पात्र कृषक परिवारों को योजना का लाभ प्राप्‍त हो रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि योजना के नियत मापदण्‍ड अनुसार जिन पात्र कृषक परिवारों से सही जानकारी प्राप्‍त हुई है, उन्‍हें योजना का लाभ निरंतर प्राप्‍त हो रहा है। प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

शासकीय भूमि पर अवैध कब्‍जा

[राजस्व]

17. ( क्र. 237 ) श्री राजेश कुमार प्रजापति : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला छतरपुर की तहसील महाराजपुर में पदस्थ तहसीलदार के आदेश क्रमांक 864/री-2/2022 दिनांक 02-01-2022 द्वारा अतिक्रामक बालमुकुन्द पिता महादेव चौरसिया निवासी गढ़ी मलहरा की शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा करने की रिपोर्ट पुलिस थाना गढीमलहरा में दर्ज करायी गयी थी? यदि हाँ, तो तहसीलदार के आदेश की प्रति उपलब्ध करायें। (ख) क्या बालमुकुन्द चौरसिया की मृत्यु दिनांक 24-04-2018 को हो गयी थी? यदि हाँ, तो मृत व्यक्ति की रिपोर्ट शासन के नियम व निर्देशों के तहत की गयी थी? यदि हाँ, तो नियमों व निर्देशों की प्रति उपलब्ध करायें। यदि नहीं, तो क्या आदेश जारी करने वाले अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। तहसीलदार महाराजपुर के पत्र क्रमांक 864/री-2/2022 दिनांक 02/01/2022 की प्रति पुस्‍तकालय  में रखे परिशिष्‍ट  अनुसार है।              (ख) जी हाँ। अतिक्रामक की मृत्‍यु संबंधी तथ्‍य संज्ञान में न होने से संबंधित अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

शिकायतों पर कार्यवाही

[राजस्व]

18. ( क्र. 238 ) श्री राजेश कुमार प्रजापति : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला छतरपुर की तहसील महाराजपुर में पदस्थ तहसीलदार का मूल पद बतायें। क्या उक्त तहसीलदार को माननीय मंत्री जी (राजस्व) द्वारा अग्रेषित आवेदन कलेक्टर छतरपुर द्वारा कार्यवाही हेतु दिया गया था? यदि हाँ, तो क्या उक्त आवेदन पर तहसीलदार द्वारा कार्यवाही की गयी थी? यदि हाँ, तो कार्यवाही की प्रति उपलब्ध करायें। यदि नहीं, तो क्यों कारण बतायें। (ख) क्या उक्त तहसीलदार द्वारा न्यायालय अपर कलेक्टर छतरपुर के प्रकरण क्रमांक 0020 अपील/2022-23 आदेश दिनांक 25-05-22 का पालन किया गया है? यदि नहीं, तो क्यों कारण स्पष्ट करें। (ग) उक्त तहसीलदार वर्ष 2012 से प्रश्‍न दिनांक तक कहाँ-कहाँ पदस्थ रहे हैं एवं वर्ष 2012 से प्रश्‍न दिनांक तक इनके विरूद्ध कितनी शिकायतें प्राप्त हुई है? उल्लेख करें। (घ) क्या उक्त तहसीलदार की शिकायत दिनांक 20-06-2022 एवं 24-06-2022 को कलेक्टर छतरपुर को की गयी थी? यदि हाँ, तो क्या उक्त शिकायतों पर सक्षम अधिकारी द्वारा कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो समय-सीमा बतायें। यदि नहीं, तो क्यों कारण स्पष्ट करें। (ड.) क्या शासन के नियमानुसार सक्षम अधिकारी द्वारा निर्धारित समय-सीमा पर कार्यवाही न करने वाले अधिकारी के विरूद्ध विभाग कार्यवाही करने के आदेश जारी करेगा? यदि नहीं, तो क्यों?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जिला छतरपुर की तहसील महाराजपुर में प्रभारी तहसीलदार के रूप में श्री सुनील वर्मा पदस्‍थ है, इनका मूल पद नायब तहसीलदार है। श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत, माननीय मंत्री जी (राजस्‍व) द्वारा अग्रेषित आवेदन जांच हेतु अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) को कार्यालय के पत्र क्रमांक 11/शिका.2/2022 दिनांक 29.06.2022 से प्रेषित किया गया। जांच की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (ख) न्‍यायालय अपर कलेक्‍टर छतरपुर के प्रकरण क्रमांक 0020 अपील/2022-23 आदेश दिनांक 25.05.2022 के द्वारा अधीनस्‍थ न्‍यायालय का अभिलेख प्राप्‍त करने तक के लिए स्‍थगन आदेश जारी किया गया था। दिनांक 27.05.2022 को अधीनस्‍थ न्‍यायालय का अभिलेख प्राप्‍त हो गया है, जिससे स्‍थगन आदेश दिनांक 25.05.2022 शून्‍य हो गया है।              (ग) श्री सुनील वर्मा दिनांक 23.07.2012 से 28.01.2017 तक जिला गुना दिनांक 08.02.2017 से 10.07.2017 तक जिला विदिशा में दिनांक 01.08.2017 से 08.03.2019 तक जिला रीवा में। दिनांक 28.03.2019 से 05.07.2019 तक जिला रायसेन में। दिनांक 13.08.2019 से 17.07.2020 तक जिला होशंगाबाद में। दिनांक 30.07.2020 से वर्तमान तक जिला छतरपुर में। जिलें में पदस्‍थी दिनांक से प्रश्‍न दिनांक तक इनके विरूद्ध 03 शिकायतें प्राप्‍त हुई है। (घ) हाँ, तहसीलदार की शिकायत दिनांक 20.06.2022 एवं 24.06.2022 को कलेक्‍टर छतरपुर को की गयी थी। उक्‍त शिकायतों में आवेदक द्वारा पारित नामांतरण आदेश के प्रति असंतोष व्‍यक्‍त कर संबंधित अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही हेतु लेख किया गया है, जबकि वसीयतनामा के आधार पर नामांतरण आदेश पारित किया जा चुका है। अत: आवेदक अनुतोष प्राप्ति हेतु स्‍वतंत्र है। शिकायतों की जांच प्रक्रियाधीन है निष्‍कर्ष उपरांत नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। (ड.) आवेदक की शिकायत की जांच प्रक्रियाधीन है। जांच उपरांत ही आगामी कार्यवाही की जा सकेगी।

विधानसभा सिरमौर अंतर्गत उद्योगों की स्थापना

[राजस्व]

19. ( क्र. 252 ) श्री दिव्‍यराज सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                (क) क्या विकासखण्ड जवा के डभौरा में वीडियोकॉन एवं अन्य औद्योगिक समूहों के द्वारा शासन की औद्योगिक नीति के तहत किसानों की भूमि अधिग्रहीत की गई थी? यदि हाँ, तो कुल कितने रकबे का अधिग्रहण किया गया था? अधिग्रहीत की गई शासकीय एवं निजी भूमियों का खसरा क्रमांकवार विवरण उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुक्रम में कई वर्ष व्यतीत हो जाने के उपरांत भी अभी तक उक्त औद्योगिक समूहों के द्वारा किसी भी प्रकार का उद्योग स्थापित न कर पाने का क्या कारण है? क्या भविष्य में उक्त औद्यागिक समूहों के द्वारा उद्योग स्थापित कराये जावेंगे? यदि हाँ, तो विभाग के द्वारा क्या समय-सीमा निर्धारित की गई है? यदि नहीं, तो क्या अधिग्रहीत की गई भूमियों को कृषकों को वापस किया जावेगा? (ग) क्या विकासखण्ड सिरमौर अंतर्गत क्योंटी में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने संबंधी प्रस्ताव शासन स्तर पर स्वीकृत किया गया था? यदि हाँ, तो स्वीकृति उपरांत बिना प्रश्‍नकर्ता के संज्ञान में लाये उक्त संयंत्र को अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने का क्या कारण है? क्या स्वीकृत सौर ऊर्जा संयंत्र पुनः पूर्व प्रस्तावित स्थल क्योंटी में स्थापित कराया जावेगा? यदि नहीं, तो क्यों?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जी नहीं। शेष प्रश्‍नांश उद्भूत नहीं होता।               (ख) उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। शेष प्रश्‍नांश उद्भूत नहीं होता।

एक्वाडक्ट एवं स्‍टॉपडेम का घटिया निर्माण

[जल संसाधन]

20. ( क्र. 255 ) श्री दिव्‍यराज सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) त्योंथर उद्वहन सिंचाई योजना के तहत कुल कितने एक्वाडक्ट एवं स्‍टॉपडेम का निर्माण कराया गया है? ऐसे समस्त निर्मित एक्वाडक्ट की लागत कितनी थी? क्या निर्माण एजेंसी को पूर्ण भुगतान कर दिया गया है? यदि हाँ, तो क्यों? यदि नहीं, तो अब तक निर्मित एक्वाडक्ट निर्माण एजेंसी को कितना भुगतान किया जा चुका है? स्थलवार विवरण उपलब्ध करावें। (ख) विकासखण्ड जवा अंतर्गत कई एक्वाडक्ट ऐसे हैं जो निर्माण के उपरांत ही खराब हो गए हैं? क्या ऐसे स्थलों का भौतिक निरीक्षण कर टूटे हुए एक्वाडक्ट एवं स्‍टॉपडेम का मरम्मत कार्य कराया जावेगा? क्या    समय-सीमा के पूर्व खराब हो चुके एक्वाडक्ट एवं स्‍टॉपडेम की निर्माण एजेंसियों तथा कार्यपूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारी के विरुद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जावेगी? यदि नहीं, तो क्यों?      (ग) प्रश्‍नांश (ख) के अनुक्रम में खराब हो चुके अथवा टूटे हुए एक्वाडक्ट एवं स्‍टॉपडेम की स्थलवार सूची उपलब्ध करावें।

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) त्‍योंथर उद्वहन सिंचाई योजना के अंतर्गत एक्‍वाडक्‍ट एवं स्‍टॉपडेम निर्माण नहीं कराया जाना प्रतिवेदित होने से शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ख) एवं (ग) विकासखण्‍ड जवा अंतर्गत टमस नदी पर त्‍योंथर बहाव योजना में 6500 मी. की लम्‍बाई में साइफन एक्‍वाडक्‍ट का निर्माण कराया गया है, जिसमें ग्राम पटहट के समीप टमस नदी पर 450 मी. की लम्‍बाई में एक आर.सी.सी. एक्‍वाडक्‍ट का निर्माण किया गया है, जो सही स्थिति में होना प्रतिवेदित है। इस एक्‍वाडक्‍ट के अपस्‍ट्रीम एवं डाउनस्‍ट्रीम में क्रमश: 4200 मी. एवं 1850 मी. (कुल लम्‍बाई 6050 मी.) की Pre-stressed concrete (पी.एस.सी.) पाइप लाइन दो कतारों में बिछाई गई है। इस वर्ष रबी सिंचाई 2021-22 में नहर संचालन किया गया। इस दौरान साइफन एक्‍वाडक्‍ट की आर.छी. 4650 मी. से 6500 मी. के मध्‍य पी.एस.सी. पाइप लाइन के कई स्‍थानों पर रिसाव पाया गया है, जिसके सुधार हेतु निविदाकार को निर्देशित किया जाना प्रतिवेदित है। वर्तमान में निर्माण कार्य प्रगतिरत है एवं निविदाकार द्वारा सुधार कार्य किया जा रहा है। निविदाकार को कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है, अत: दण्‍डात्‍मक कार्यवाही करने की स्थिति नहीं है। स्‍टापडेम की वस्‍तुस्थिति उत्‍तरांश () अनुसार है।

सतधरु बांध निर्माण की अद्यतन स्थिति‍

[जल संसाधन]

21. ( क्र. 270 ) श्री अजय कुमार टंडन : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दमोह जिले में सतधरु नदी पर बनने वाले बाँध के निर्माण की अद्यतन स्थिति क्या है? (ख) इस बाँध का निर्माण कार्य कब आरम्भ किया गया तथा इसे कब तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था? (ग) बाँध निर्माण में कितना विलम्ब हो चुका है तथा इस विलम्ब का क्या कारण है? (घ) सतधरु नदी पर बनने वाले बाँध का निर्माण किस दिनांक तक पूरा हो जाएगा?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) दमोह जिले में सतधारू नदी पर बनने वाले बांध का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाना प्रतिवेदित है। (ख) एवं (ग) अनुबंध अनुसार बांध का निर्माण दिनांक 04.06.2018 से प्रारंभ किया गया था एवं इसे पूर्ण करने का लक्ष्य जून 2021 था। बांध के निर्माण कार्य में लगभग 06 माह का विलंब कोविड-19 के कारण होना प्रतिवेदित है।                (घ) दमोह जिले में सतधारू नदी पर बनने वाले बांध का निर्माण कार्य 12/2021 में पूर्ण कर लिया जाना प्रतिवेदित है।

सीतानगर बांध निर्माण की अद्यतन स्थिति

[जल संसाधन]

22. ( क्र. 271 ) श्री अजय कुमार टंडन : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दमोह जिले के ग्राम सीतानगर में सोनार नदी पर बनने वाले बाँध के निर्माण की अद्यतन स्थिति क्या है? (ख) इस बाँध का निर्माण कार्य कब आरम्भ किया गया तथा इसे कब तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था? (ग) बाँध निर्माण में कितना विलम्ब हो चुका है तथा इस विलम्ब का क्या कारण है? (घ) सोनार नदी पर बनने वाले इस बाँध का निर्माण किस दिनांक तक पूरा हो जाएगा?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) दमोह जिले के ग्राम सीतानगर में सुनार नदी पर बनने वाले बांध का निर्माण कार्य 75 प्रतिशत पूर्ण कर लिया जाना प्रतिवेदित है। (ख) अनुबंध अनुसार बांध का निर्माण कार्य दिनांक 12.09.2018 से प्रारंभ किया गया था एवं इसे पूर्ण करने का लक्ष्य सितंबर 2021 रखा गया था। (ग) बांध के निर्माण कार्य में लगभग 01 वर्ष 06 माह का विलंब होना प्रतिवेदित है, जिसका मुख्य कारण कोविड-19 संक्रमण एवं बांध निर्माण कार्य के लिए अर्जित भूमि का कृषकों द्वारा मुआवजा न लेने के कारण व्‍यवधान उत्‍पन्‍न किए जाना है।            (घ) सुनार नदी पर बनने वाले बांध निर्माण कार्य पूर्ण करने का पुनरीक्षित लक्ष्‍य जून-2023 रखा जाना प्रतिवेदित है।

नदियों के पट्टे वितरण

[राजस्व]

23. ( क्र. 308 ) श्री विजय रेवनाथ चौरे : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि  (क) क्या सौंसर विधानसभा क्षेत्र में ग्रीष्मकाल में नदियों में तरबूज और खरबूज की खेती करने वाले किसानों को खेती के लिए नदी में पट्टे आवंटित करने पर रोक लगा दी गई है? (ख) यदि हाँ, तो इसका क्या कारण है तथा क्या सरकार इन किसानों को खेती के लिए फिर से पट्टे आवंटित करेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जी नहीं। (ख) उत्‍तरांश () के अनुक्रम में प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है।

पास में उचित मूल्य की दुकान खोले जाना

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

24. ( क्र. 309 ) श्री विजय रेवनाथ चौरे : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि  (क) विधानसभा क्षेत्र सौंसर में ऐसे ग्राम हैं जहाँ उचित मूल्य की दुकान नहीं है तथा ग्रामवासियों को राशन लेने के लिए पांच किलोमीटर या उससे अधिक दूर जाना पड़ता है? (ख) क्या सरकार इन ग्रामों में उचित मूल्य की दूकान खोलने के लिए कार्यवाही करेगी?

खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) जी हाँ। ऐसे गांवों की सूची एवं दुकान से दूरी की  जानकारी संलग्न  परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जी हाँ। दुकान आवंटन की कार्यवाही प्रचलन में है।  05 दुकानविहीन ग्राम पंचायतों में आवेदन प्राप्‍त नहीं होने के कारण पुन: विज्ञप्ति जारी किया जाना है। मध्‍यप्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश, 2015 के प्रावधान अनुसार प्रत्‍येक पंचायत में एक उचित मूल्‍य दुकान खोलने का प्रावधान है। उक्‍त प्रावधान अनुसार उचित मूल्‍य दुकान खोलने की कार्यवाही वर्तमान में प्रचलित है। एक पंचायत में 800 से अधिक परिवार होने की स्थिति में अतिरिक्‍त दुकान खोलने का प्रावधान है।

परिशिष्ट - "बारह"

बुजुर्ग राशनकार्ड धारकों के बायोमेट्रिक मैच न होना

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

25. ( क्र. 311 ) श्री मुकेश रावत (पटेल) : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि  (क) अलीराजपुर जिले में प्रश्‍न दिनांक तक ऐसे कितने बुजुर्ग राशनकार्ड धारक हैं जिनके अंगूठे के निशान के बायोमेट्रिक मशीन से मैच न होने के कारण राशन नहीं मिल रहा है? ग्राम व जनपदवार राशन कार्ड धारकों की सूची देवें। (ख) क्या ऐसे मामलों में परिवार से बाहर के व्यक्ति को नामांकित करने का नियम है? (ग) यदि हाँ, तो क्या सरकार बुजुर्ग राशनकार्ड धारकों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए अंगूठे के निशान के बायोमेट्रिक मशीन से मैच न होने की स्थिति में ओटीपी, आई स्केनर या आधार कार्ड की कापी से राशन देने का प्रावधान करेगी?

खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) अलीराजपुर जिले में राष्‍ट्रीय खाद्य सुर‍क्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित पात्र हितग्राहियों में से बुजुर्ग हितग्राहियों के अंगूठे की रेखाएं           घिसने-सिकुड़ने से पीओएस मशीन पर बायोमेट्रिक सत्‍यापन विफल होने के कारण राशन प्राप्‍त करने से कोई हितग्राही वंचित नहीं है, जिन हितग्राहियों के बायोमेट्रिक सत्‍यापन विफल हुए हैं, उनको नॉमिनी अथवा आधार नम्‍बर से लिंक मोबाईल नम्‍बर पर ओटीपी के माध्‍यम से राशन का वितरण कराया जा रहा है। (ख) जी हाँ। बायोमेट्रिक सत्‍यापन सफल न होने वाले हितग्राहियों को नॉमिनी अथवा आधार नम्‍बर से लिंक मोबाईल नम्‍बर पर ओटीपी के माध्‍यम से राशन का वितरण कराया जा रहा है। (ग) राष्‍ट्रीय खाद्य सुर‍क्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित पात्र परिवारों में से परिवार के किसी भी सदस्‍य द्वारा पीओएस मशीन पर बायोमेट्रिक सत्‍यापन के आधार पर राशन प्राप्‍त किया जा सकता है। हितग्राही की एक अंगुली/अंगूठा की रेखाओं से बायोमेट्रिक सत्‍यापन सफल न होने पर एक से अधिक अंगुलियों (फ्यूजन फिंगर) के बायोमेट्रिक सत्‍यापन किया जाता है, साथ ही, बायोमेट्रिक सत्‍यापन न होने पर आधार नंबर से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी अथवा नॉमिनी के माध्‍यम से राशन सामग्री के वितरण की सुविधा उपलब्‍ध कराई गई है। हितग्राही द्वारा आधार पंजीयन केन्‍द्र पर अपने आधार नंबर को अपडेट कराने तथा मोबाइल नंबर लिंक कराने की सुविधा उपलब्‍ध है। किसी भी पात्र हितग्राही को बायोमेट्रिक सत्‍यापन सफल न होने के आधार पर राशन से वंचित नहीं किया जा रहा है।

राजस्व अभिलेखों में दर्ज भूमि

[राजस्व]

26. ( क्र. 314 ) श्री मुकेश रावत (पटेल) : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सतना जिले की हल्का सौनोरा चेक उतैरी की आराजी क्रमांक 91 वर्ष 1958-59 के राजस्व अभिलेख में किस-किस के नाम पर दर्ज थी? क्रमांक रकबा एवं नाम पृथक-पृथक बतावें, यह भूमि मई 2022 में किस-किस भू-स्वामी के नाम पर दर्ज है? रकबा सहित बतावें। (ख) आराजी क्रमांक 91 में वर्तमान में दर्ज किस-किस भूस्वामी का नाम किस आदेश दिनांक के द्वारा दर्ज किया गया, किस आधिपत्यधारी को किस आदेश दिनांक से भूस्वामी हक पर दर्ज किया, दोनों ही आदेशों की प्रति सहित बतावें। (ग) आराजी क्रमांक 91 पर वर्ष 1958-59 एवं वर्ष 2022 मई में किस-किस के नाम पर किस क्रमांक का कितना रकबा दर्ज है, उसमें से कितने रकबे पर उनका कब्जा है? सूची सहित बतावें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जानकारी संलग्न  परिशिष्‍ट अनुसार।                  (ख) उत्‍तरांश '''' के अनुसार वर्तमान के खसरे में दर्ज अनुसार लगभग 700 भूमिस्‍वामी है तथा विभिन्‍न आदेश दिनांकों के द्वारा दर्ज किये गये है। सभी अधिपत्‍यधारी को नामांतरण आदेश दिनांक से भूमिस्‍वामी हक में दर्ज किया गया है। आदेशों का विवरण वर्तमान खसरे के कैफियत के कालम में अंकित है। (ग) उत्‍तरांश '''' के अनुसार वर्ष 1958-59 की स्थिति में आराजी क्रमांक एवं नाम, रकबा सहित दर्ज है। खसरे में दर्ज भूमिस्‍वामी अपने-अपने रकबे पर काबिज है।

परिशिष्ट - "तेरह"

नामांतरण प्रकरणों का निराकरण

[राजस्व]

27. ( क्र. 325 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर विधान सभा क्षेत्रांतर्गत राजस्व विभाग में नामांतरण दर्ज कराये जाने हेतु विगत तीन वर्षों से प्रश्‍न दिनांक तक कितने आवेदन प्राप्त हुये। इनमें से कितनों का निराकरण हुआ तथा कितने लंबित है? लंबित रहने का क्या कारण है? (ख) नामांतरण प्रकरणों के निराकरण हेतु शासन द्वारा कोई  समय-सीमा निर्धारित है? यदि हाँ, तो समय-सीमा में निराकरण न हो पाने के लिये कौन जिम्मेदार है? क्या शासन ऐसे अधिकारियों पर कोई दण्डात्मक कार्यवाही करेगा तथा कब तक? (ग) क्या नामांतरण हो जाने के बाद भी समय-सीमा में राजस्व रिकार्ड में दर्ज नहीं हो पाते हैं? जिससे आवेदकों को प्रयोजन का लाभ नहीं मिल पाता? क्या शासन नामातंरण एवं राजस्व रिकार्ड में दर्ज कराये जाने हेतु कोई सरलीकरण कराये जाने पर विचार करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों?
राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) विधानसभा सागर अन्तर्गत तहसील सागर में विगत 03 वर्षों से प्रश्‍न दिनांक तक नामातंरण संबंधी कुल 10354 प्राप्त आवेदनों को पंजीबद्ध किया गया, जिसमें से कुल 9339 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है। शेष 1015 प्रकरण नियमानुसार समय-सीमा में प्रचलित है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) जी हाँ। नामांतरण की कार्यवाहियां विनिर्दिष्‍ट कालावधि के भीतर निराकृत नहीं की जाती है तो संहिता की धारा 110 (7) में समुचित प्रावधान है शेष प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है। (ग) राज्‍य सरकार द्वारा संहिता की           धारा 110 (4) में नामांतरण आदेश पारित होने के बाद भू-अभिलेख में प्रविष्टि तथा धारा 11 (5) में अद्यतन भू-अभिलेखों की प्रमाणित प्रति तीन दिन के भीतर पक्षकारों को नि:शुल्‍क प्रदाय करने के उपबंध किये गये हैं।

राजगढ़ जिलांतर्गत मंदिरों की जानकारी

[राजस्व]

28. ( क्र. 347 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                (क) राजगढ़ जिले में किन-किन सर्वे नंबरों की शासकीय भूमि पर किन-किन देवी देवताओं के मंदिर स्थित हैं एवं किन-किन सर्वे नंबरों की शासकीय भूमि पर धार्मिक ट्रस्‍ट एवं किन-किन सर्वे नंबर की निजी भूमि पर मंदिर स्थित हैं? (ख) राजगढ़ जिले में ऐसे कौन-कौन से मंदिर हैं जिनके खसरे के रिकार्ड में भगवान (मूर्ति) मालिक है और कौन-कौन से मंदिर ट्रस्‍ट के अधीनस्‍थ हैं?                  (ग) राजगढ़ जिले के किन-किन मंदिरों में कलेक्‍टर महोदय प्रबंधक के रूप में खसरे के राजस्‍व रिकार्ड में दर्ज है? (घ) क्‍या सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार कलेक्‍टर महोदय मंदिर प्रबंधक नहीं रह सकते व राजस्‍व रिकार्ड से कलेक्‍टर महोदय का नाम हटाए जाने का निर्देश है? यदि हाँ, तो अभी तक कौन-कौन से मंदिरों में नाम हटाए गए हैं? ग्रामवार, मंदिरवार जानकारी से अवगत करावें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जिले की शासकीय मंदिरों की सूची  पुस्‍तकालय  में रखे परिशिष्ट-अ अनुसार है। राजगढ़ जिले में स्थित शासकीय भूमि पर दो धार्मिक ट्रस्ट है।             1. माँ जालपा मंदिर तहसील राजगढ (फारेस्ट भूमि पर) 2. भैंसवा माता मंदिर तहसील सारंगपुर सर्वे नंबर 194 पर स्थित है। निजी भूमि पर स्थित मंदिर की सूची  पुस्‍तकालय  में रखे परिशिष्ट-ब अनुसार है। (ख) राजगढ़ जिले में स्थित शासकीय भूमि पर स्थित मंदिरों के खसरे के रिकार्ड में भगवान (मूर्ति) मालिक दर्ज नहीं है। दो मंदिर ट्रस्ट के अधीनस्थ है। 1. माँ जालपा मंदिर तहसील राजगढ 2. भैंसवा माता मंदिर तहसील सारंगपुर (ग) राजगढ़ जिले की शासकीय भूमि पर स्थित समस्त मंदिरों के व्यवस्थापक के रूप में कलेक्टर महोदय का नाम राजस्व रिकार्ड में दर्ज है।           (घ) जी नहीं।

किसानों की उपज का समर्थन मूल्‍य पर खरीदी

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

29. ( क्र. 351 ) डॉ. सतीश सिकरवार : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि              (क) ग्वालियर, चम्बल संभाग में कितने किसानों द्वारा वर्ष 2022 रबी फसल के समर्थन मूल्‍य (एम.एस.पी) हेतु पंजीयन कराये गये? जिलावार पंजीकृत किसानों की संख्या की जानकारी दी जावे। (ख) उक्त किसानों द्वारा गेहूँ, चना, सरसों, मूंग, अरहर के समर्थन मूल्यों पर किन-किन जिलों के अनाजवार संख्या की जानकारी दी जावे। (ग) उक्त संभाग के किस-किस जिले में कितनी शासन की मान्य संस्थाओं, सहकारी, समितियों पर जून 2022 तक कितनी खरीद की गई है? गेहूँ, चना, सरसों सहित अन्य फसलों की मात्रा सहित पूर्ण जानकारी दी जावे। (घ) क्या शासन द्वारा अनुमानित मात्रा में जून 2022 तक समर्थन मूल्य पर खरीद हो सकी है? अनुमान के अनुरूप खरीद नहीं होने के क्या कारण रहे? जिन कारणों से खरीद नहीं हो सकी है शासन उन कारणों के समाधान का किस प्रकार से प्रयास करेगा?

खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) ग्वालियर, चम्बल संभाग में वर्ष 2022 में रबी फसल के समर्थन मूल्‍य पर पंजीकृत किसानों की संख्‍या की जानकारी संलग्न  परिशिष्‍ट-अ अनुसार है।              (ख) ग्वालियर, चम्बल संभाग में समर्थन मूल्‍य पर गेहूँ एवं चने का उपार्जन किया गया है, जिसकी जिलावार जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट-ब अनुसार है। मूंग, अरहर एवं सरसों का उपार्जन निरंक है।          (ग) ग्वालियर, चम्बल संभाग में जून 2022 में शासन की मान्‍य संस्‍थाओं, सहकारी समितियों द्वारा उपार्जित स्‍कंध की फसलवार जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट-स अनुसार है। (घ) रबी विपणन वर्ष 2022-23 में खुले बाजार में गेहूँ के मूल्‍य समर्थन मूल्‍य से अधिक होने के कारण विगत वर्षों की तुलना में समर्थन मूल्‍य पर उपार्जन अपेक्षाकृत कम हुआ है। ग्‍वालियर एवं चंबल संभाग में ऐसे पंजीकृत किसान जो अपनी एफ.ए.क्‍यू. गुणवत्‍ता का गेहूँ विक्रय करने उपार्जन केन्‍द्र पर पहुंचे उन सभी किसानों उनकी उपज की समर्थन मूल्‍य पर खरीदी हेतु 04.04.2022 से 14.05.2022 तक अवधि निर्धारित की गई थी। इस अवधि में भी जो किसान अपनी उपज का विक्रय नहीं कर पाये उन्‍हें समुचित अवसर प्रदान करने के लिए उपार्जन अवधि में दिनांक 31.05.2022 तक वृद्धि की गयी। इस अवधि में समर्थन मूल्‍य पर चना का उपार्जन विगत वर्ष की तुलना में लगभग चार गुना अधिक किया गया।

परिशिष्ट - "चौदह"

गेहूँ एवं चना खरीदी का भुगतान

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

30. ( क्र. 364 ) इंजीनियर प्रदीप लारिया : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर जिला अंतर्गत गेहूँ एवं चना विक्रय हेतु कितने किसानों ने अपना पंजीयन कराया था तथा कितने किसानों ने अपना अनाज गेहूँ एवं चना उपार्जन केन्द्रों में विक्रय किया? (ख) क्या शासन द्वारा सागर जिला के किसानों को उनके अनाज खरीदी उपरांत गेहूँ एवं चना की राशि का भुगतान कर दिया गया है? यदि हाँ, तो जानकारी देवें। यदि सम्पूर्ण किसानों की राशि का भुगतान नहीं किया गया है तो क्यों? (ग) सागर जिला में कितने किसानों का गेहूँ एवं चना की राशि का भुगतान शेष रह गया है? किसानों की संख्या एवं राशि सहित जानकारी देवें। (घ) प्रश्‍नांश (ग) में शेष रहे किसानों की राशि के भुगतान का क्या कारण है? इसके लिए कौन उत्तरदायी है? विभाग किसानों की राशि का भुगतान कब तक करेगा?

खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) सागर जिले में रबी विपणन वर्ष 2022-23 में 83292 किसानों द्वारा गेहूँ की फसल विक्रय करने हेतु तथा 30386 किसानों द्वारा चने की फसल विक्रय करने हेतु     ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन कराया गया। पंजीकृत किसानों में से 21729 किसानों द्वारा गेहूँ की तथा 14532 किसानों द्वारा चने की फसल का विक्रय उपार्जन केन्‍द्रों पर किया गया। (ख) सागर जिले में गेहूँ एवं चना विक्रय करने वाले किसानों को किये गये भुगतान एवं भुगतान हेतु शेष किसानों की जानकारी संलग्न  परिशिष्‍ट अनुसार है। उपार्जित मात्रा के परिवहन में मार्गस्‍थ कमी, किसानों के पोर्टल पर दर्ज त्रुटिपूर्ण बैंक खातों में सुधार तथा आधार विहीन बैंक खाते के स्‍थान पर आधार से लिंक नवीन बैंक खाता लेने की कार्यवाही के चलते होने के फलस्‍वरूप कुछ किसानों का भुगतान शेष है। (ग) सागर जिले में गेहूँ एवं चना के भुगतान शेष रहे किसानों की संख्‍या एवं राशि की जानकारी संलग्न  परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) उपार्जित मात्रा के परिवहन में मार्गस्‍थ कमी, किसानों के पोर्टल पर दर्ज त्रुटिपूर्ण बैंक खातो में सुधार तथा आधार विहीन बैंक खाते के स्‍थान पर आधार से लिंक नवीन बैंक खाता लेने की कार्यवाही के चलते होने के फलस्‍वरूप कुछ किसानों का भुगतान शेष है। भुगतान की कार्यवाही निरंतर की जा रही है। तकनीकी कमियों का निराकरण करते हुए भुगतान किया जा रहा है। तकनीकी त्रुटियों के लिए कोई अधिकारी/कर्मचारी उत्‍तरदायी नहीं है।

परिशिष्ट - "पंद्रह"

समय पर परिवहन न करने वाले ठेकेदारों पर जुर्माना

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

31. ( क्र. 422 ) श्री प्रणय प्रभात पाण्डेय : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या म.प्र.स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन द्वारा समस्त प्रकार के परिवहन एल.आर.टी.रेक, द्वार प्रदाय एवं डेमरेज वारफेज विलंब से परिवहन कार्य करने वाले प्रदेश के समस्त जिलों के ठेकेदारों को वसूली हेतु कारण बताओ नोटिस जारी किए गये हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) अंतर्गत विलंब के कारण गत 3 वर्षों में अधिरोपित जुर्माना राशि की ठेकेदारवार, जिलेवार जानकारी देवें। (ग) क्या प्रश्‍नांश (ख) अंतर्गत ठेकेदारों द्वारा अधिरोपित राशि जमा की गई है? (घ) प्रश्‍नांश (ग) यदि हाँ, तो जमा की गई राशि का विवरण दें। यदि नहीं, जमा की गई तो कारण बतलावें।

खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट  अनुसार है। (ग) अधिरोपित पेनाल्‍टी राशि परिवहनकर्ताओं के देयक स्‍वीकृति के समय मध्‍यप्रदेश स्‍टेट सिविल सप्‍लाईज कार्पोरेशन के द्वारा काटी जाती है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट  एवं उत्‍तरांश ()  अनुसार है।

ग्रीष्मकालीन फसलों की गिरदावली

[राजस्व]

32. ( क्र. 452 ) श्री जालम सिंह पटैल : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि           (क) क्या प्रश्‍नकर्ता सदस्य द्वारा पत्र क्र. JSP/00981/BPL/22 दिनांक 06/06/22 को ग्रीष्मकालीन फसल गिरदावली के सबंध में पत्र दिया गया है? यदि हाँ, तो क्या कार्यवाही की गई? (ख) क्या नरसिंहपुर जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग, उड़द एवं अन्य फसलों की गिरदावली की गई है? यदि हाँ, तो कितने किसानों की एवं कितने किसान शेष रह गये हैं और शेष किसानों की कब तक की जावेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ, जिला कलेक्‍टर भू-अभिलेख के माध्‍यम से दिनांक 15/06/2022 को पत्र प्राप्‍त हुआ है। (ख) जी हाँ। नरसिंहपुर जिले में 147893 किसानों की ग्रीष्‍मकालीन मूंग, उड़द एवं अन्‍य फसलों की गिरदावरी की गई है, 2997 किसान गिरदावरी से शेष रह गए है, शेष किसानों की गिरदावरी करने हेतु कलेक्‍टर नरसिंहपुर को निर्देशित किया गया है।

लीजधारी से डेड रेन्‍ट की वसूली

[खनिज साधन]

33. ( क्र. 466 ) डॉ. अशोक मर्सकोले : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) किस-किस खनिज की खदान का कितना-कितना डेड रेन्‍ट निर्धारित किया गया हैं? डेड रेन्‍ट की वसूली किस कानून की किस धारा के तहत लीजधारी से किस दिनांक से की जा सकती है? इस संबंध में धारा में क्‍या-क्‍या उल्‍लेख किया गया है? (ख) लीजधारी को भू-प्रवेश की अनुमति दिए जाने का क्‍या प्रावधान हैं? लीजधारी को भू-प्रवेश की अनुमति दिए बिना ही डेड रेन्‍ट की वसूली किए जाने का अधिकार किस कानून की किस-किस धारा में किसे दिया जाकर धारा में क्‍या-क्‍या उल्‍लेख किया गया हैं? (ग) गत पांच वर्षों में मण्‍डला जिले के अन्‍तर्गत कितनी खदानों में भू-प्रवेश की अनुमति दिए बिना किस अवधि का कितना डेड रेन्‍ट जमा किए जाने की सूचना पत्र लीजधारी को दिया गया? कितना डेड रेन्‍ट भू-प्रवेश की अनुमति दिए बिना ही वसूल किया गया? (घ) लीजधारी को भू-प्रवेश की अनुमति दिए जाने का दायित्‍व किस-किस विभाग का हैं? भू-प्रवेश की अनुमति किन-किन कारणों से दिए जाने से इन्‍कार किया जा सकता है?

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) खनिजों के डेडरेन्‍ट की दरें खान एवं खनिज (विकास तथा विनियमन) अधिनियम, 1957 की तृतीय अनुसूची तथा मध्‍यप्रदेश गौण खनिज नियम, 1996 की अनुसूची-4 अनुसार निर्धारित है। जो अधिसूचित है। अधिनियम, 1957 की धारा   9-क के अधीन अधिसूचित दरों पर डेडरेंट देय होगा। राज्‍य शासन द्वारा जारी परिपत्र दिनांक              09 मई, 2022 अनुसार डेडरेंट अनुबंध निष्‍पादन की तिथि से देय होगा। (ख) लीजधारी को भू-प्रवेश की अनुमति मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता, 1959 की धारा 247 (5) के प्रावधानों के अंतर्गत प्रदान किया जाता है। शेष प्रश्‍न की जानकारी प्रश्‍नांश (क) अनुसार है। (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में दिये गये उत्‍तर अनुसार डेडरेंट लिया जाना एवं भू-प्रवेश दिया जाना पृथक-पृथक नियमों का विषय है। अत: प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता। (घ) मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता, 1959 के अंतर्गत यह विषय कलेक्‍टर (राजस्‍व) का विषय है। भू-प्रवेश की अनुमति भूमि के प्रकार पर निर्भर होती है। निजी भूमि-‍स्‍वामी की सहमति न होने पर भू-प्रवेश की अनुमति से इंकार किया जा सकता है।

वन भूमियों को वर्किंग प्‍लान में शामिल करना

[राजस्व]

34. ( क्र. 467 ) डॉ. अशोक मर्सकोले : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि             (क) क्‍या अविभाजित मण्‍डला (डिण्‍डोरी) एवं बैतूल जिले के राजस्‍व ग्रामों के निस्‍तार पत्रक, अधिकार अभिलेख, खसरा पंजी में दर्ज जमीनों को वन विभाग ने संरक्षित वन सर्वे में शामिल कर भा.व.अ. 1927 की धारा 29, धारा 4 एवं धारा 34 अ में अधिसूचित किया है? (ख) यदि हाँ, तो किस जिले के किस ग्राम की कितनी भूमि संरक्षित वन सर्वे में शामिल की गई? कितनी भूमि धारा 4 में अधिसूचित की गई? संरक्षित वन सर्वे में शामिल समस्‍त भूमि किस दिनांक को राजपत्र में धारा 34 अ के अनुसार डीनोटीफाईड की गई। (ग) सर्वे एवं वनखण्‍ड में शामिल भूमि किस-किस सार्वजनिक एवं निस्‍तारी प्रयोजन के लिए किस-किस जंगल मद और गैर जंगल मद में दर्ज जमीन है, इन जमीनों को सर्वें, वनखण्‍ड एवं वर्किंग प्‍लान में शामिल करने की अनुमति कलेक्‍टर या राजस्‍व विभाग ने किस दिनांक को प्रदान की? प्रति सहित बतावें। (घ) भू-राजस्‍व संहिता 1959 के अध्‍याय 18 में बताई गई दखल रहित जमीनों को धारा 29, धारा 4 एवं धारा 34 अ में अधिसूचित करने का अधिकार या छूट भू-राजस्‍व संहिता की किस-किस धारा में दिया गया हैं।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। (ख) मण्‍डला पश्चिम सामान्‍य वनमण्‍डल अंतर्गत उपलब्‍ध अभिलेख कंपलीशन रिपोर्ट अनुसार कुल 470 ग्रामों की सूची  पुस्तकालय  में रखे परिशिष्ट  अनुसार 105132.56 एकड़ अर्थात 42563.79 हे. भूमि संरक्षित वन सर्वे में शामि‍ल की गई है जिनमें से इस वनमण्‍डल के अंतर्गत 9 वनखण्‍ड बनाए जाकर 184.39 एकड़ अर्थात 74.65 हे. भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 4-एक में अधिसूचित की गई है। भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 34-अ के अंतर्गत 253 ग्राम निर्वनी कृत किए गए। राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना में ग्रामों के नामों के समक्ष खसरा नंबर रकबा का उल्‍लेख नहीं किया गया है। डिंडोरी-धारा 4 (1) के तहत जिले के कुल 254 ग्रामों की 11747.76 हेक्‍टेयर भूमि अधिसूचित की गई है तथा दिनांक 17 नवम्‍बर 1972 को धारा 34 (अ) के तहत ग्राम संख्‍या 489 रकबा निरंक राजपत्र में प्रकाशित किया गया है। बैतूल-मुख्‍य वन संरक्षक वन वृत्‍त बैतूल के प्रतिवेदन अनुसार वन वृत्त बैतूल अंतर्गत वनमंडलों में उपलब्ध अभिलेख सर्वे डिमारकेशन कम्प्लीशन रिपोर्ट अनुसार 680 ग्रामों के रकबा अनुसार 369409.76 एकड़ (149495.059 हे.) भूमि संरक्षित वन सर्वे में शामिल की गई। वन वृत्त बैतूल अंतर्गत 482 वनखंडों की 71909.247 हे. भूमि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 4 (1) में अधिसूचित की गई है। भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 34 (अ) के अंतर्गत प्रकाशित अधिसूचना क्र./4073-दस-2-72 दिनांक 10.07.1972 से वनमंडलों के अंतर्गत आने वाले 829 ग्राम निर्वनीकृत किये गये। राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना में ग्राम के नाम के समक्ष खसरा नंबर एवं रकबा का उल्लेख नहीं है। 31.12.1976 तक के अतिक्रमण व्यवस्थापन के तहत वर्ष 1990-91 में आंशिक भूमि धारा 34 (अ) के तहत निर्वनीकृत की गई है।      (ग) सर्वे एवं वन खण्‍ड में शामिल भूमि बडे झाड के जंगल छोटे झाड़ के जंगल, पहाड़, चट्टान मद में एवं अन्‍य सार्वजनिक प्रयोजन मद में दर्ज है। इन जमीनों को सर्वे वनखण्‍ड एवं वर्किंग प्‍लान में शामिल करने मण्‍डला जिले से अनुमति नहीं दी गई है। डिंडोरी-सर्वे एवं वन खण्‍ड में शामिल भूमि बड़े झाड़ का जंगल, छोटे झाड़ का जंगल एवं पहाड़ चट्टान मद की सार्वजनिक एवं निस्‍तारी प्रयोजन के लिये दर्ज है। बैतूल-सर्वे एवं वनखण्‍ड में शामिल भूमि बड़े झाड़ के जंगल, छोटे झाड़ के जंगल, पहाड़ चट्टान मद में एवं अन्‍य सार्वजनिक प्रयोजनों के लिये दर्ज है। बैतूल जिले में कोई अनुमति नहीं दी गई है। (घ) भू-राजस्‍व संहिता 1959 के अध्‍याय 18 में बताई गई दखल रहित जमीनों को धारा 29, धारा 4 एवं धारा 34अ में अधिसूचित करने संबंधी कोई प्रावधान म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता में नहीं है।

पंचायतों हेतु रेत संबंधी प्रावधान

[खनिज साधन]

35. ( क्र. 476 ) श्री आरिफ अक़ील : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मध्‍यप्रदेश राजपत्र में दिनांक 30 अगस्‍त 2019 को प्रकाशित रेत नियम 2019 की कंडिका 4 में ग्राम पंचायतों के निर्माण कार्यों हेतु रायल्‍टी जमा करवाई जाकर रेत की अनुमति से संबंधित प्रावधानों के अनुसार मध्‍यप्रदेश शासन विकास आयुक्‍त कार्यालय ने प्रश्‍नांकित दिनांक तक भी परिपत्र जारी नहीं किया? (ख) नियम 2019 में पंचायतों के लिए रेत से संबंधित क्‍या प्रावधान किए गए तथा उनका पालन किए जाने के संबंध में शासन ने किस दिनांक को प्रक्रिया निर्धारित कर परिपत्र जारी किया? प्रति सहित बतावें। (ग) यदि परिपत्र जारी नहीं किया हो तो उसका कारण बतावें। कब तक परिपत्र जारी किया जावेगा?

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) जानकारी एकत्रित की जा रही है।                   (ख) पंचायतों के लिए रेत संबंधी प्रावधान मध्‍यप्रदेश रेत (खनन, परिवहन, भंडारण तथा व्‍यापार) नियम, 2019 के नियम 4 के अंतर्गत अधिसूचित हैं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के उत्‍तर अनुसार प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

लघु सिंचाई परियोजनाओं की स्‍वीकृति

[जल संसाधन]

36. ( क्र. 484 ) श्री बापूसिंह तंवर : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता विधायक ने पत्र क्रमांक 58 दिनांक 21.4.2022 से प्रमुख सचिव महोदय, जल संसाधन को राजगढ़ विधानसभा अंतर्गत लघु सिंचाई परियोजनाओं को प्रशासकीय स्‍वीकृति प्रदान करने बाबत्। पत्र लिखा है? यदि हाँ, तो विधायक का पत्र प्राप्‍त होने के बाद से शासन/विभाग द्वारा किस-किस दिनांक को क्‍या-क्‍या पत्राचार किया गया? किये गये पत्राचार तथा प्राप्‍त हुए उत्‍तर की प्रति उपलब्‍ध कराते हुए जानकारी दें। (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार क्‍या शासन राजगढ़ की लंबित लघु सिंचाई परियोजनाओं की प्रशासकीय स्‍वीकृति प्रदान कर देगा? हाँ तो कब तक?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) माननीय सदस्‍य का प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित पत्र दिनांक 21.04.2022 जो कि प्रमुख सचिव, जल संसाधन विभाग को संबोधित है, प्रमुख अभियंता द्वारा मुख्‍य अभियंता, चंबल बेतवा कछार, भोपाल को प्रेषित किया जाना प्रेतिवेदित है। पत्र में उल्‍लेखित 11 चिन्हित परियोजनाओं की  जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट  के प्रपत्र-अ अनुसार है। किए गए पत्राचार की प्रति  पुस्तकालय  में रखे परिशिष्ट -1, 2, 3 एवं 4  अनुसार है। (ख) उत्‍तरांश '''' में दिए गए पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ  में दर्शित परियोजनाओं की प्रशासकीय स्‍वीकृति दिए जाने की स्थिति नहीं है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

गेहूँ खरीदी एवं भुगतान की जानकारी

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

37. ( क्र. 508 ) श्री कुणाल चौधरी : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                      (क) कालापीपल विधान सभा क्षेत्र में इस वर्ष किस-किस कृषक से किस दिनांक को कितनी मात्रा में गेहूँ कितनी राशि का शासन द्वारा तय एजेंसी द्वारा खरीदा गया तथा भुगतान किस दिनांक को किया गया तथा किस-किस कृषक का भुगतान उत्‍तर दिनांक तक शेष है? (ख) प्रश्‍नांश (क) की सूची में किस-किस कृषक से कितनी राशि सोसायटी आदि के बकाया ऋण की किस दिनांक को काटी गई तथा वह राशि सोसायटी इत्‍यादि को कृषक के ऋण पेटे किस दिनांक को दी गई तथा इसमें विलंब का कारण क्‍या है तथा नियमानुसार उसे कितने दिवस में सोसायटी को देना था?             (ग) क्‍या कई दिनों के अंतराल से ऋण पेटे काटी गई राशि सोसायटी देने से कृषक को शून्‍य प्रतिशत ब्‍याज का लाभ नहीं मिला तथा सोसायटी ने ऋण पर सात प्रतिशत से दस प्रतिशत की दर से ब्‍याज लगा दिया? यदि हाँ, तो बतावें कि ऐसे कृषकों की संख्‍या कितनी है? (घ) क्‍या विलंब से भुगतान पर कृषक पर लगाये गये ब्‍याज तथा पेनल्‍टी को निरस्‍त किया जायेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों? यदि हाँ, तो कब तक? (ड.) क्‍या विलंब से भुगतान पर लगाये गये ब्‍याज की राशि संबंधित एजेंसी जिसने विलंब किया उससे वसूली जायेगी? यदि नहीं, तो क्‍यों?

खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) से (ड.) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

अन्‍नपूर्णा एवं गरीब कल्‍याण योजनांतर्गत राशन का वितरण

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

38. ( क्र. 548 ) श्री देवेन्‍द्र सिंह पटेल : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि             (क) रायसेन जिले में मुख्‍यमंत्री अन्‍नपूर्णा योजना तथा प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण योजना के अंतर्गत कितनी तारीख से राशन वितरण होता है तथा शासकीय उचित मूल्‍य की दुकान माह में कितने दिन खुलती है? (ख) रायसेन जिले में 1 जनवरी, 2021 से प्रश्‍न दिनांक तक की स्थिति में किस-किस शासकीय उचित मूल्‍य की दुकान से हितग्राहियों को किस-किस माह का राशन नहीं दिया गया तथा क्‍यों? (ग) रायसेन जिले में परिवहनकर्ता ठेकेदार द्वारा शासकीय उचित मूल्‍य की दुकानों पर किस दिनांक तक राशन पहुँचाया जाता है? 1 जनवरी, 2022 से प्रश्‍न दिनांक तक की अवधि में किस-किस दिनांक में राशन पहुँचा? (घ) माननीय मंत्री जी तथा विभाग के अधिकारियों को विगत 2 वर्षों में प्रश्‍नांश (क), (ख) एवं (ग) के संबंध में रायसेन जिले के किन-किन विधायकों के पत्र कब-कब मिले तथा उनमें उल्‍लेखित किन-किन समस्‍याओं का निराकरण नहीं हुआ तथा क्‍यों? कब तक निराकरण होगा?
खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत मुख्‍यमंत्री अन्‍नपूर्णा योजना एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण अन्‍न योजनांतर्गत आवंटित खाद्यान्‍न पात्र हितग्राहियों को वितरण सुनिश्चित करने हेतु दोनों योजना की वितरण प्रारम्‍भ करने की अवधि पृथक-पृथक यथा माह की प्रथम तारीख से मुख्‍यमंत्री अन्‍नपूर्णा योजना एवं माह की 15 तारीख से प्रधानमंत्री गरीब कल्‍याण योजनांतर्गत खाद्यान्‍न का वितरण प्रारम्‍भ किया जाता है। उचित मूल्‍य दुकानें शासकीय अवकाश को छोड़कर प्रत्‍येक दिवस खोले जाने का प्रावधान है किन्‍तु, जिन विक्रेताओं द्वारा एक से अधिक दुकानों का संचालन किया जा रहा है, उन दुकानों को सप्‍ताह में तीन दिवस खोली जाती हैं। (ख) रायसेन जिले में दिनांक 01 जनवरी 2021 से प्रश्‍न दिनांक तक राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 अंतर्गत वैध पात्रता पर्चीधारी परिवारों में से उचित मूल्‍य दुकानों पर राशन सामग्री प्राप्‍त करने हेतु उपस्थित समस्‍त पात्र परिवारों को राशन का वितरण किया गया है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) रायसेन जिले में मध्‍यप्रदेश स्‍टेट सिविल सप्‍लाईज कार्पोरेशन द्वारा द्वार प्रदाय योजनांतर्गत नियुक्‍त परिवहनकर्ताओं द्वारा सामग्री प्रदाय करने हेतु उचित मूल्‍य दुकान के डिलीवरी आर्डर जारी करने के 24 घंटे के भीतर दुकान पर राशन सामग्री पहुँचाई जाती है। दिनांक 01 जनवरी 2022 से प्रश्‍न दिनांक तक की अवधि में परिवहनकर्ता द्वारा उचित मूल्‍य दुकानों पर प्रदाय सामग्री की अवधि की जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट-अ  अनुसार है। (घ) रायसेन जिले में माननीय विधायकों द्वारा प्रश्‍नांश (क), (ख) एवं (ग) के संबंध में प्रेषित पत्र एवं उनके संबंध में विगत दो वर्षों में की गई कार्यवाही की जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट-ब अनुसार है।

परिशिष्ट - "सोलह"

प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन एवं प्रबंधन

[राजस्व]

39. ( क्र. 618 ) श्री प्रवीण पाठक : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना के तहत कितने व्यक्तियों को कितनी क्षतिपूर्ति राशि दी गई? जिलेवार जानकारी दें। (ख) ग्वालियर जिले में उक्त योजना के तहत कितने व्यक्तियों को कितनी क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान किया गया? (ग) ग्वालियर जिले में कोविड-19 के तहत (उत्तर दिनांक तक) कितने व्यक्ति मृतक हुये उनमें से कितने परिवारों को आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत एवं वितरण की गई? (घ) क्या शासन द्वारा कोविड-19 के तहत बचाव आमजन की सुरक्षा व्यवस्था हेतु कोई स्थाई योजना बनाई है? यदि हां? तो क्या? यदि नहीं? तो कब तक कार्यवाही की जायेगी? (ड.) ग्वालियर जिले में शासकीय अस्पतालों में भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन दिये जाने हेतु कितने प्लांट स्थापित है? उनसे पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन उत्सर्जन हो रहा है या नहीं? यदि हाँ? तो क्या फिर भी बाहर से प्राइवेट सिलेंडरों के माध्यम से ऑक्सीजन क्रय की जा रही है? यदि हाँ? तो किस कारण? विस्तृत विवरण दें?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) प्रदेश में मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना के तहत कुल 61 शासकीयकर्मियों के वैध वारिसानों को 50.00 लाख रूपये के मान से आर्थिक सहायता राशि दी गई है। जिलेवार जानकारी संलग्न  परिशिष्‍ट  अनुसार है। (ख) जिला ग्वालियर में मुख्यमंत्री कोविड-19 योद्धा कल्याण योजना के तहत 02 शासकीयकर्मियों के वैध वारिसानों को 50.00 लाख रूपये के मान से आर्थिक सहायता राशि का भुगतान किया गया।              (ग) ग्‍वालियर जिले में कोविड- 19 से मृतकों की संख्या 738 दर्ज है। लोक स्‍वास्‍थ्‍य परिवार कल्‍याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी गाईड-लाईन दिनांक 03 सितम्‍बर 2021 में परिभाषित कोविड मृत्‍यु अनुसार 910 हितग्राहियों को 50,000/- के मान से अनुग्रह राशि का भुगतान किया गया है। (घ) जी नहीं। भारत सरकार द्वारा समय-समय पर प्राप्‍त दिशा-निर्देशों के पालन में समस्‍त जिला कलेक्‍टर एवं मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों को कोविड-19 के तहत बचाव एवं आमजन की सुरक्षा व्‍यवस्‍था हेतु दिशा निर्देश जारी किये जाकर निरंतर इलाज किया जा रहा है। अत: शेष प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता। (ड.) ग्वालियर जिले में शासकीय अस्पतालों में भर्ती मरीजों को ऑक्सीजन दिये जाने हेतु 09 ऑक्‍सीजन प्लांट स्‍थापित है। जी हॉ। जी नहीं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - "सत्रह"

लीज भूमियों की जांच

[राजस्व]

40. ( क्र. 629 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि            (क) क्या जावरा नगर चौपाटी स्थित एवं नगर के मध्य बने रेलवे फाटक के दोनों ओर देश की आजादी के पूर्व एवं आजादी के पश्चात जिनिंग फैक्ट्री, आईल मिल, रबर फैक्ट्री इत्यादि प्रकार के अन्य अनेक कार्य शासनाधिन भूमियों के अनुबंध कर लीज पर लेकर किए जाते थे? (ख) यदि हाँ, तो रेलवे फाटक के शहरी भाग की ओर जवाहर नगर की भूमि लीज पर होकर अनुबंधित कार्य होते रहे तथा रेलवे फाटक से लगे महावीर कॉम्प्लेक्स (सिटी पुलिस थाने के सामने ) की भूमि लीज पर होकर जीनिंग कार्य किए जाते रहे? (ग) यदि हाँ, तो इसी के साथ रेलवे फाटक से चौपाटी की ओर भूमियाँ भी लीज पर होकर तिलक नगर स्थित एवं उसके आसपास प्रीमियर ऑयल मिल सहित अन्य भूमियां भी लीज पर होकर उद्योग धंधे संचालित होते रहे? (घ) यदि हाँ, तो वर्ष 1980 से पूर्व के वर्षों में किस प्रकार के कूट रचित दस्तावेजों के माध्यम से भ्रामक जानकारी देकर भूमियों का नामांतरण होकर शासनाधीन भूमियां निज स्वामित्व की हो गई? क्या शासन विभाग संपूर्ण स्थिति की गंभीरता स्तरीय जांच कर कार्रवाई करेगा, तो कब तक? कार्यवाही किस सक्षम अधिकारी के माध्यम से होगी?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जी नहीं। (ख) से (घ) प्रश्‍नांश () के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

नवीन डैम बनाने के प्रस्‍ताव

[जल संसाधन]

41. ( क्र. 630 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शासन विभाग द्वारा जावरा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत वर्ष 2020-21 एवं वर्ष 2022-23 में जावरा तहसील एवं पिपलौदा तहसील अंतर्गत किन-किन स्थानों पर डैम के नवीन प्रस्ताव बनाकर कार्य योजना बनाई गई? (ख) वर्ष 2018- 19 से लेकर प्रश्‍न दिनांक तक शासन/विभाग द्वारा किन-किन स्थानों पर किस-किस प्रकार के कार्य को स्वीकृति दी जाकर निर्माण कार्य किए गए? कितने पूर्ण हुए, कितने अपूर्ण रहे? कितने अप्रारम्भ हैं? स्थानवार, स्वीकृत बजट राशि अनुसार किए गए व्यय सहित कार्यों की स्पष्ट जानकारी दें। (ग) पिपलौदा तहसील अंतर्गत हल्दूनी डैम, मचून डैम एवं विगत वर्षों में स्वीकृत की गई खोड़ाना तालाब कार्य योजना की पुनर्समीक्षा कर उसे पुनः कब तक स्वीकृति दी जाकर डार्क जोन एरिया घोषित पिपलौदा तहसील की समस्या का निवारण हो सकेगा? (घ) खोड़ाना तालाब कार्ययोजना शासन/विभाग द्वारा जिसका सर्वे करवाने का बजट स्वीकृत कर, सर्वे पूर्ण कर,साध्यता पाए जाने पर एवं क्षेत्रीय कृषकों की सहमति पर 8.19 करोड़ रु. की बजट राशि भी स्वीकृत की, किंतु कतिपय कारणों से उसे निरस्त किया गया तो क्या क्षेत्रीय भयावह जल संकट की कठिनाई को दृष्टिगत रख पुनः सर्वे एवं पुनः स्वीकृति कब तक दी जा सकेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) जावरा विधानसभा क्षेत्र अन्तर्गत वर्ष 2020-21 में पिपलौदा तहसील अन्तर्गत हल्दुनी बैराज की साध्यता स्‍वीकृति दिनांक 15.03.2022 को प्रदान की गई है। सर्वेक्षण उपरान्त योजना की डी.पी.आर. तैयार करने की कार्यवाही प्रचलन में है। (ख) प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित अवधि के दौरान विधानसभा क्षेत्र जावरा की पिपलौदा तहसील अर्न्तगत इन्द्रपुरी बैराज की प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 02.03.2019 को प्रदान की गई है। जानकारी संलग्न  परिशिष्ट  अनुसार है। (ग) पिपलौदा तहसील अन्तर्गत हल्दुनी बांध न होकर हल्दुनी बैराज है, जिसकी साध्‍यता स्‍वीकृति दिनांक 15.03.2022 को रू. 315 लाख की 180 हेक्‍टेयर सैंच्‍य क्षेत्र हेतु प्रदान की गई है। सर्वेक्षण उपरान्त योजना की डी.पी.आर. तैयार करने की कार्यवाही प्रचलन में है। मचुन तालाब क्रमांक-2 लागत रूपये 4539.55 लाख रूपांकित सिंचाई क्षमता 1120 हेक्टेयर की डी.पी.आर. प्रमुख अभियंता कार्यालय में परीक्षणाधीन है। वर्तमान में दोनों परियोजनाओं की प्रशासकीय स्वीकृति दिए जाने की स्थिति नहीं है। निमज्जित खोड़ाना तालाब की प्रशासकीय स्वीकृति वर्ष 2007 में प्रदान की गई थी जिसे वर्ष 2011 में शासन द्वारा मापदण्‍डों के अनुरूप नहीं होने से परियोजना की प्रशासकीय स्‍वीकृति निरस्त की गई। निमज्जित खोड़ाना तालाब के कार्य योजना की पुन: समीक्षा करने की स्थिति नहीं है। (घ) जी नहीं। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - "अठारह"

गलत तरीके से भूमि अधिग्रहित करने वालों पर कार्यवाही

[राजस्व]

42. ( क्र. 675 ) श्री के.पी. त्रिपाठी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रीवा जिले की वर्तमान में नगर पंचायत सेमरिया क्षेत्रांतर्गत खसरा क्र. 426 सन् 1956-1957 की खसरा खतौनी में किसका नाम दर्ज था? उक्‍त आराजी तब से अब तक किन-किन भू-धारकों के पास कितने रकवे से कब-कब किस प्रकार से हस्‍तान्‍तरित हुई एवं वर्तमान में कितने बटांकों के साथ किस अस्तित्‍व में है? विवरण सहित सत्‍यापित जानकारी देवें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के प्रकाश में उपरोक्‍त आराजी में वर्ष 1958-59 में किसका नाम दर्ज था? सत्‍यापित जानकारी देवें। (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के संदर्भ में क्‍या आम निस्‍तार/शासकीय पोखरी के अस्तित्‍व को कूटरचित दस्‍तावेजों के आधार पर अधिग्रहित करने वालों के विरूद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही कर उक्‍त जमीन को आम निस्‍तार के लिये पुन: बहाल किया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक? स्‍पष्‍ट करें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) रीवा जिले की वर्तमान में नगर पंचायत सेमरिया क्षेत्रान्तर्गत खसरा क्रमांक 426 सन् 1956-1957 की खसरा खतौनी में बाल्मीक प्रसाद सा. भटगवां का नाम दर्ज था। उक्त आराजी 1956-1957 से 1960-61 तक बाल्मीक प्रसाद के नाम दर्ज थी। वर्ष 1961 से 1996 तक का अभिलेख जिला अभिलेखागार में उपलब्ध नहीं है। वर्ष 1997-98 से           2002-03 के पंचायत खसरे में खसरा नं. 426 के तीन बटांक दर्ज है। 426/1 रकवा 1.05 एकड़ जगदीश प्रसाद पिता केशव प्रसाद ब्रा., 426/2 रकवा 2.09 एकड़ रामाश्रय पिता ठाकुरदीन ब्रा. एवं 426/3 रकवा 1.04 एकड़ ओमकार प्रसाद पिता केशव प्रसाद ब्रा. के नाम अभिलेख में दर्ज है। वर्ष 2007-08 से 2011-12 के पंचशाला खसरे में वर्ष 2010-11 में अन्य 426/3 में भूमिस्वामी उदित इन्फ्रा वर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड डायरेक्टर श्रीमती नीलम मिश्रा पत्नी अभय मिश्रा निवासी अर्जुन नगर रीवा तहसील हुजूर जिला रीवा दर्ज हुआ। उक्त अन्तरण रजिस्टर्ड विक्रय पत्र के आधार पर नामान्तरण हुआ है। वर्ष 2020-21 के कम्प्यूटरीकृत खसरे में आराजी नं. 426/1/1/1 रकवा 0.169 हे. श्रीमती नीलम मिश्रा पति अभय मिश्रा, 426/1/1/2 रकवा 0.024 हे. सन्तराम पिता जगदीश प्रसाद, 426/1/2 रकवा 0.220 हे. श्रीमती नीलम मिश्रा पति अभय मिश्रा, 426/1/3 रकवा 0.012 हे. संजीव कुमार गुप्ता पिता हुकुमचन्द्र गुप्ता 426/2 रकवा 0.846 हे. रामभगत, जितेन्द्र, सत्यम, बीरबल पिता रामभजन शुक्ला 426/3 रकवा 0,421 हे. उदित इन्फ्रा वर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड डायरेक्टर श्रीमती नीलम मिश्रा पत्नी अभय मिश्रा निवासी अर्जुन नगर रीवा के नाम भूमिस्वामी स्वत्व में दर्ज है। (ख) प्रश्‍नांश (क) के प्रकाश में उपरोक्त आराजी में वर्ष 1958-59 में बाल्मीक प्रसाद सा. भटगवां का नाम दर्ज था। (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के संदर्भ में वर्ष 1956-57 से 1960-61 तक आराजी क्रमांक 426 के पंचशाला खसरे में कालम नं. 1 एवं कालम नं. 22, 23 में पोखरी दर्ज था। उक्त आराजी के उपलब्ध किसी भी वर्ष के खसरे में आम निस्तार अथवा शासकीय पोखरी दर्ज नहीं है। वर्तमान में प्रश्‍नाधीन आराजी के कई बटांक नामान्तरण बंटवारा होने से दर्ज हो चुके है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में भूमिस्वामी की सहमति के बगैर भूमि को आम निस्तार के लिये बहाल किया जाना सम्भव नहीं है।

भूमिहीन गरीबों को पट्टा वितरण

[राजस्व]

43. ( क्र. 744 ) श्री देवेन्द्र वर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या राज्य सरकार भूमिहीन गरीबों को विगत 10 वर्षों से कब्जे के आधार पर आवास हेतु भूमि देने के लिये कृत संकल्पित है? (ख) यदि हाँ, तो खण्डवा जिले में राजस्व विभाग द्वारा कितने भूमिहीन गरीबों को आवास हेतु पट्टे का वितरण गत अभियान में किया गया? तहसीलवार स्वीकृत पट्टों की जानकारी दी जाए। (ग) क्या खण्डवा विधानसभा के कई ग्रामों में सैकड़ों आवासहीन गरीब भूमि के पट्टे से वंचित हैं जिसके कारण उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है?             (घ) यदि हाँ, तो क्या इन गरीबों को पट्टा वितरण हेतु नवीन सर्वें कराकर आबादी क्षेत्र से बाहर काबिज भूमि का आवास पट्टा वितरित किये जाने की कार्यवाही की जाएगी? यदि हाँ, तो कब तक?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) वर्तमान में कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन नहीं हैं।           (ख) खंडवा जिले में राजस्‍व विभाग द्वारा कुल 65,919 भूमिहीन गरीबों को आवास हेतु भू-खंड प्रमाण पत्रों का वितरण गत अभियान में किया गया। तहसीलवार स्वीकृत पट्टों की  जानकारी संलग्न  परिशिष्‍ट  अनुसार  है। (ग) जी, नहीं। जिले की समस्‍त विधानसभाओं में समय-समय पर पात्रतानुसार आवासहीन गरीबों को भूमि के पट्टे वितरित किये जाकर प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्राप्‍त हो रहा हैं। (घ) उत्‍तरांश (ग) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - "उन्नीस"

वन विभाग के कार्यों की जानकारी

[वन]

44. ( क्र. 747 ) श्री उमंग सिंघार : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या धार जिले की आदिवासी बाहुल्‍य क्षेत्र गंधवानी विधान सभा में विकास हेतु एवं आदिवासियों की मुलभूत सुविधाओं हेतु तत्‍कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा वन विभाग के विभिन्‍न कार्य स्‍वीकृत किये थे?             (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार यदि हाँ, तो कौन-कौन से मद से कितनी-कितनी राशि के कौन-कौन से कार्य स्‍वीकृत किये गये थे? ब्‍लाकवार, कार्यवार एवं राशिवार जानकारी उपलब्‍ध करावें। (ग) उक्‍त स्‍वीकृत कार्यों में से कितने कार्य पूर्ण, अपूर्ण एवं प्रगतिरत हैं? अपूर्ण कार्यों को कब तक पूर्ण कर लिया जायेगा? उक्‍त कार्यों की कितनी-कितनी राशि का भुगतान किया गया है? कितनी राशि भुगतान हेतु शेष हैं?

वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट पर है। (ग) जानकारी उत्‍तरांश ''''  के  पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट  में है। अपूर्ण कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने के प्रयास जारी हैं, समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

उचित मूल्‍य की दुकानों के वृद्धि की योजना

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

45. ( क्र. 758 ) श्री पी.सी. शर्मा : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भोपाल दक्षिण पश्चिम विधान सभा क्षेत्र में बी.पी.एल. राशनकार्ड धारियों की जनसंख्‍या के अनुपात में उचित मूल्‍य की दुकानों की संख्‍या में वृद्धि करने की योजना है? यदि हाँ, तो दुकानों में वृद्धि कब तक होगी और यदि नहीं, तो क्‍यों? (ख) भोपाल दक्षिण पश्चिम स्थित उचित मूल्‍य की दुकानों पर राशनकार्ड धारियों को पर्याप्‍त मात्रा, गुणवत्‍तापूर्ण खाद्य सामग्री दिये जाने का क्‍या प्रावधान है? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) उचित मूल्‍य की दुकानों में सामग्री प्रदाय किये जाने के लिये पूर्व व्‍यवस्‍था परिवार के मुखिया को ही परिवार का सम्‍पूर्ण खाद्य सामग्री प्रदाय करने की व्‍यवस्‍था को कब तक बहाल किया जायेगा और यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) उचित मूल्‍य की दुकानों पर राशन कार्डधारकों का मशीन पर नाम नहीं आने का क्‍या कारण है एवं ऐसे कार्डधारकों को खाद्य साम्रगी प्रदाय किये जाने की क्‍या व्‍यवस्‍था है?

खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) प्रश्‍नांकित विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत प्रचलित प्रावधान अनुसार एक अतिरिक्‍त नवीन उचित मूल्‍य दुकान खोली जा सकती है। तत्‍संबंध में जिले में कार्यवाही प्रचलित है। निश्चित समय बताया जाना संभव नहीं है। (ख) प्रश्‍नांकित विधानसभा क्षेत्र सहित भोपाल जिले में उचित मूल्‍य दुकानों से पात्र परिवारों को दी जाने वाली खाद्य सामग्री की मात्रा की  जानकारी संलग्न  परिशिष्‍ट अनुसार है। उपरोक्‍त सामग्री, पात्रतानुसार अच्‍छी औसत गुणवत्‍ता (एफ.ए.क्‍यू) सामग्री दिये जाने का प्रावधान है। शेष भाग का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 अंतर्गत पात्र परिवारों को समय पर उनकी हकदारी सुनिश्चित करने के लिए परिवार के किसी भी सदस्‍य को संपूर्ण परिवार की राशन सामग्री दी जाती है। प्रत्‍येक परिवार का मुखिया हर समय गांव में ही रहे, यह आवश्‍यक नहीं है। यदि मुखिया को ही राशन सामग्री प्राप्‍त करना है तो वह वन नेशन वन राशनकार्ड के अंतर्गत कहीं से भी राशन सामग्री प्राप्‍त कर सकता है। अत: वर्तमान व्‍यवस्‍था में किसी परिवर्तन का औचित्‍य नहीं है।             (घ) उचित मूल्‍य की दुकानों पर प्रत्‍येक पात्र परिवार जिनकी पात्रता पर्ची जारी हो चुकी है, के नाम एवं पात्रता पीओएस मशीन में प्रदर्शित होती है। मशीन में ऐसे परिवारों के नाम प्रदर्शित नहीं होते हैं जिनका चिन्‍हांकन अथवा चिन्‍हांकन उपरांत सत्‍यापन कर पात्रता पर्ची नहीं जारी की गई है।

परिशिष्ट - "बीस"

भू-अभिलेख अधीक्षक के रिक्‍त पदों की जानकारी

[राजस्व]

46. ( क्र. 759 ) श्री पी.सी. शर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                (क) दिनांक 01 जनवरी 2022 तक भू-अभिलेख अधीक्षक के कुल कितने पद रिक्‍त हैं? इनमें से कितने पद भू-अभिलेख विभाग के तथा कितने पद अन्‍य विभागों में प्रतिनियुक्ति के हैं? वर्गवार एस.सी., एस.टी., ओ.बी.सी. एवं अन्‍य के कितने पद रिक्‍त हैं? इनमें से कितने-कितने पद किस-किस वर्ष से रिक्‍त चले आ रहे हैं पदवार जानकारी देवें। (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित रिक्‍त पदों में से कितने पदों को वर्गवार पदोन्‍नति से भरा जाना है क्‍या पदोन्‍नति के रिक्‍त पदों की वर्गवार पूर्ति में कोई वैधानिक बाधा है? यदि‍ हाँ, तो क्‍या? यदि नहीं, तो इन्‍हें नहीं भरे जाने का क्‍या कारण है? क्‍या इसके लिए कोई दो‍षी हैं? यदि हाँ, तो संबंधित के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही कब तक की जावेगी एवं पदोन्‍नति के रिक्‍त पदों की पूर्ति कब तक कैसे किस प्रकार की जावेगी? (ग) क्‍या रिक्‍त पदों की व्‍यवस्‍था हेतु उच्‍च पद का प्रभार पुलिस विभाग की व्‍यवस्‍थानुसार दिया जाना विचाराधीन है? यदि हाँ, तो तदविषयक कार्यवाही कब तक, कैसे होगी एवं किस पद नाम को कितने वर्ष की सेवा तदविषयक पात्रता धारक माना जावेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) क्‍या पात्रता धारक सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख एवं एस.एल.आर. पदोन्‍न‍ति की प्रत्‍याशा में सेवानिवृत्‍त हो गये हैं? यदि हाँ, तो उनकी संख्‍या कितनी-कितनी है? क्‍या उनकी क्षति पूर्ति की कोई योजना है? यदि हाँ, तो क्‍या है और यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) दिनांक 01 जनवरी 2022 तक भू-अभिलेख अधीक्षक के कुल 137 पद रिक्‍त हैं। सभी पद भू-अभिलेख विभाग के है। अन्‍य विभागों में प्रतिनियुक्ति का पद नहीं है। वर्गवार 01.01.2022 तक रिक्‍त पदों की स्थिति:-

सामान्‍य

एस.सी.

एस.टी.

ओ.बी.सी.

कुल रिक्‍त पद

90

21

26

00

137

वर्गवार वर्षानुसार रिक्‍त पदों की स्थित :-

वर्ष

सामान्‍य

एस.सी.

एस.टी.

ओ.बी.सी.

वर्षानुसार कुल रिक्‍त पद

2016

84

17

22

00

123

2017

90

20

23

00

133

2018

90

21

23

00

134

2019

90

21

23

00

134

2020

90

21

23

00

134

2021

90

21

26

00

137

2022

90

21

26

00

137

(ख) सभी रिक्‍त पदों को वर्गवार पदोन्‍नति से भरा जाना है। जी हाँ। वर्तमान में वर्ष 2016 से पदोन्‍नति में आरक्षण संबंधी मामला माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय में विचाराधीन होने से पदोन्‍नति नहीं की जा सकी है। माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय से निर्णय होने पर पदोन्‍नति की जावेगी। (ग) जी नहीं। सीमित कार्य होने के कारण उच्‍च पद का प्रभार दिए जाने की आवश्‍यकता नहीं है। (घ) जी हाँ। सेवानिवृत्‍त हो गये है। जिनकी जानकारी निम्‍नानुसार है:-

सेवानिवृत्‍त एस.एल आर. की वर्षानुसार संख्‍या

 

सेवानिवृत्‍त ए.एस.एल.आर. की वर्षानुसार संख्‍या

वर्ष

संख्‍या

 

वर्ष

संख्‍या

2016

10

 

2016

09

2017

01

 

2017

06

2018

00

 

2018

00

2019

00

 

2019

00

2020

01

 

2020

01

2021

02

 

2021

11

2022

01

 

2022

07

कुल

15

 

कुल

34

पदोन्‍नति पर रोक होने के उपरांत भी सहायक अधीक्षक भू-अभिलेख एवं अधीक्षक भू-अभिलेख को नियमानुसार समय-समय पर समयमान-वेतनमान का लाभ दिया जा रहा है।

नहरों की माईनर डिस्ट्रीब्‍यूटरियों का उपयोग

[जल संसाधन]

47. ( क्र. 772 ) डॉ. सतीश सिकरवार : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्वालियर चम्बल के, श्‍योपुर, मुरैना, भिण्ड, दतिया, जिलों की नगर सीमा से लगी हुई नहरों की कितनी माईनर डिस्ट्रीब्‍यूटरियों का उपयोग सिंचाई हेतु कब से नहीं हो पा रहा है? उनके आस-पास रहवासी, बस्तियों के मकान, कॉलोनी बनाई जा चुकी है। चम्बल के ए.वी.सी, एम.बी.सी केनल एवं ग्वालियर दतिया की नहरों की माईनर डिस्ट्रीब्‍यूटरियों की जानकारी जून 2022 की स्थिति में दी जावे। (ख) चम्बल के जिला, तहसील, नगर परिषद के कितने नगरों के पास की माईनर डिस्ट्रीब्‍यूटरियों पर मकान बनाकर, माईनरो की खेती बाला सिंचाई का रकबा कितना कम कब से हो गया है रकवा की सर्वे नम्बर सहित पूर्ण जानकारी जून 2022 की स्थिति में दी जावे। (ग) क्या यह भी सही है मुरैना, भिण्ड, श्‍योपुर की माईनर डिस्ट्रीब्‍यूटरियों को या तो नष्‍ट  कर दिया है या उन पर जल संसाधन विभाग की अनुमति के बिना सड़कें बनाई जा चुकी है विभाग द्वारा नष्‍ट  माइनर डिस्ट्रीब्‍यूटरियों के बारे में अभी तक क्या कार्यवाही की गई है? तिथिवार  पूर्ण जानकारी दी जावे।  (घ) ग्वालियर चम्बल में कितना रकवा सिंचाई से कम हूआ है उसकी सर्वे नम्बर रकबा सहित पूर्ण जानकारी दी जावे। क्या नष्‍ट  की गई माइनर डिस्ट्रीब्‍यूटरियों पर उक्त अवधि में विभाग द्वारा मरम्मत राशि खर्च  की गई है यदि हाँ, तो पूर्ण जानकारी राशि सहित वर्ष 2018 से लेकर  जून 2022 की स्थिति में दी जावे।

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) यमुना कछार ग्वालियर अंतर्गत श्योपुर, मुरैना, ग्वालियर एवं भिण्ड जिलों में मुख्यतः चम्बल नहर प्रणाली एवं हरसी नहर प्रणाली के माध्यम से सिंचाई की जाती है। इन नहरों की माईनर, वितरिकाओं आदि का क्षेत्र सिंचाई हेतु उपयोग न होने बावत्  जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट  के प्रपत्र-'''' के कॉलम नं. 4 में दर्शित है।             (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट  के "प्रपत्र-अ" के कॉलम नं. 4 और 7 में दर्शित है।             (ग) जी नहीं। यमुना कछार के तहत जिला मुरैना, भिण्ड एवं श्योपुर अंतर्गत किसी भी नहर को नष्ट नहीं किया गया है एवं न ही उन पर सड़के बनाई गई है। ए.बी.सी. की 10 एल/33 आर वितरिका 6.00 कि.मी. से 12.00 कि.मी. तक का क्षेत्र रास्ते के रूप में बिना अनुमति के उपयोग हो रहा है। उक्त भूमि को विभाग द्वारा अनुपयोगी परिसम्पत्तियों के पोर्टल पर दिनांक 09.07.2021 एवं 13.07.2021 को पंजीयन करा दिया जाना प्रतिवेदित है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट  के प्रपत्र-'''' अनुसार है। इन जिलों में कम हुये रकवे के सर्वे नं. की  जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' में दर्शित है। कुछ नहरों के सर्वे नं. संकलित कराये जा रहे हैं। इन नहरों की मरम्मत/रख-रखाव कार्य पर वर्ष 2018 से जून 2022 तक की अवधि में कोई राशि व्‍यय नहीं की जाना प्रतिवेदित है।

बंटवारा प्रकरण में अनियमितता से स्टाम्‍प ड्यूटी की हानि

[राजस्व]

48. ( क्र. 773 ) डॉ. सतीश सिकरवार : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि              (क) क्या जिला, तहसील, मुरैना के ग्राम-जौरा खुर्द के सर्वे क्रमांक 6062 एवं 2069 का बंटवारा प्रकरण क्रमांक 46/2019/2020/अ-27 आदेश दिनांक 23.06.2020 में स्वीकृत किया गया है? आवेदक के हिस्से अनुसार सर्वे, रकबा सहित पूर्ण जानकारी दी जावे। (ख) उक्त बंटवारा असमान भाग से किया जाकर कुल कितने रकबा  को असमान रूप से हस्‍तान्तरित किया गया है? उक्त के बराबर में खातेदारों की वल्दियत भी बदल दी गई है, इस प्रकार इस प्रकरण में स्टाम्‍प ड्यूटी  की हानि होकर शासन के नियमों का उल्‍लंघन किया है? पूर्ण जानकारी तथ्यों सहित दी जावे। (ग) क्या उक्त प्रकरण की शिकायतें  कब-कब, किन- किन अधिकारियों, शासन के प्रतिनिधियों को की गई शिकायतकर्ताओं के नाम, अधिकारियों के नाम सहित जानकारी दी जावे? (घ) क्या शासन निर्धारित स्टाफ ड्यूटी  में असत्य प्रमाण जुटाकर की गई कार्यवाही की जांच कर जिम्मेदार कर्मचारी/अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करेगा? यदि हाँ, तो कब तक समय-सीमा बताई जावे?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँI तत्कालीन तहसीलदार तहसील मुरैना नगर द्वारा ग्राम जौराखुर्द के प्रकरण क्रमांक 46/2019-20/अ-27 में तत्कालीन पटवारी द्वारा फर्द बंटवारा के अनुसार जौराखुर्द के सर्वे क्रमांक 2062 एवं 2069 का बंटवारा आदेश दिनांक 23/06/2020 द्वारा स्वीकृत किया गया हैI उक्त बंटवारा न्यायालयीन प्रक्रिया अंतर्गत उभयपक्षों को सुनवाई का समुचित अवसर दिया गया हैI प्रकरण में अन्तर्निहित बंटवारा फर्द की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'अनुसार हैI प्रश्‍नांकित सर्वे क्रमांक 6062 का कोई बंटवारा नहीं किया गया हैI                   (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'''' अनुसार है। (ग) उक्‍त बंटवारा प्रकरण की शिकायत शिकायतकर्ता श्री उदयवीर सिंह सिकरवार तत्‍कालीन जिला उपाध्‍यक्ष भारतीय जनता पार्टी मुरैना द्वारा आयुक्‍त चम्‍बल संभाग मुरैना को की गई थी। आयुक्‍त चम्‍बल संभाग की नोटशीट की छायाप्रति  पुस्‍तकालय  में रखे परिशिष