मध्यप्रदेश विधान सभा


प्रश्नोत्तर-सूची
फरवरी-मार्च 2017 सत्र


शुक्रवार, दिनांक 24 मार्च 2017


भाग-1
तारांकित प्रश्नोत्तर

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टाउनशि‍पों/कॉलोनियों के लिये विद्युत अधोसंरचना का विकास

[ऊर्जा]

1. ( *क्र. 4302 ) श्री राजेश सोनकर : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इन्दौर शहर वृत्‍त के अन्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में (फरवरी-2017 तक) कितनी नई टाउनशि‍पों/कॉलोनियों के कॉलोनाईजरों को उनकी विकसित की जा रही टाउनशि‍पों/कॉलोनियों में विद्युत अधोसंरचना विकसित किये जाने हेतु स्‍वीकृति प्रदान की गई है? माह जनवरी-2017 की स्थिति में इन्‍दौर जिला अन्‍तर्गत शहर वृत्‍त इन्‍दौर में कितने घरेलू विद्युत मीटर खराब/बन्‍द हैं? (ख) इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अन्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में (फरवरी-2017 तक) कितनी नई टाउनशि‍पों/कॉलोनियों के कॉलोनाईजरों द्वारा कितनी राशि किस-किस मद में जमा कराई गई? शहर वृत्‍त इन्‍दौर के अन्‍तर्गत माह फरवरी-2017 की स्थिति में माह जनवरी में बदले जाने हेतु शेष मीटरों में से घरेलू उपभोक्‍ताओं के कितने खराब/बन्‍द विद्युत मीटर बदल दिये गये हैं और कितने बदले जाने हेतु शेष हैं? (ग) इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अन्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में (फरवरी-17 तक) कॉलोनाईजर द्वारा विद्युत अधोसंरचना एवं कॉलोनी विद्युतीकरण हेतु कितने प्राक्‍कलन स्‍वीकृत कराये गये हैं एवं उसमें से कितनी कॉलोनियों में कार्य पूर्ण होकर उक्‍त कॉलोनियों को विद्युत कंपनी को सौंप दिया गया है एवं कितनी कॉलोनियों को विद्युत कंपनी को सौंपा जाना/कनेक्‍शन दिया जाना शेष है? (घ) इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अन्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में (फरवरी-2017 तक) कॉलोनाईजर द्वारा विद्युत अधोसंरचना एवं कॉलोनी विद्युतीकरण हेतु कितने प्राक्‍कलन, कितने विद्युत भार के स्‍वीकृत कराये गये उसमें से कितनी कॉलोनियों में कार्य पूर्ण होकर कार्यपूर्णता की प्रमाणिकता विद्युत कंपनी के किस स्‍तर के अधिकारी ने निरीक्षण कर की क्‍या उक्‍त शेष कॉलोनियों के संबंध में नागरिकों द्वारा कोई विद्युत संबंधी शिकायत की गई? यदि हाँ, तो दोषी कॉलोनाईजर पर विद्युत कंपनी द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अंतर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 (फरवरी-2017 तक) में 17 नई टाउनशिपों/कॉलोनियों के लिये विद्युत अधोसंरचना विकसित किये जाने हेतु कॉलोनाइजरों को स्‍वीकृति प्रदान की गई है। माह जनवरी-2017 की स्थिति में शहर वृत्‍त इन्‍दौर के अंतर्गत बन्‍द एवं खराब घरेलू विद्युत मीटरों की संख्‍या 6217 थी। (ख) इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अंतर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 (फरवरी-2017 तक) में 17 नई टाउनशिपों/कॉलोनियों हेतु विद्युत अधोसंरचना विकसित किये जाने हेतु कॉलोनाईजरों द्वारा मदवार जमा की गई राशि की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अंतर्गत माह फरवरी-2017 में, माह जनवरी-2017 की स्थिति में बदले जाने हेतु शेष कुल 6217 बन्‍द एवं खराब घरेलू विद्युत मीटरों में से 2992 मीटर बदले गये एवं 3225 मीटर बदले जाने हेतु शेष हैं। (ग) इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अंतर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 (फरवरी-2017 तक) में 17 नई टाउनशिपों/कॉलोनियों हेतु विद्युत अधोसंरचना विकसित किये जाने के लिये 17 प्राक्‍कलन स्‍वीकृत किये गये हैं। उक्‍त में से 2 कॉलोनियों के कार्य पूर्ण होने के उपरांत उन्‍हें म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इन्‍दौर को सौंप दिया गया है। कतिपय कारणों से 15 कॉलोनियों के कार्य पूर्ण नहीं होने के कारण उन्‍हें पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को सौंपा जाना शेष है। (घ) इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अंतर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 (फरवरी-2017 तक) में 17 नई टाउनशिपों/कॉलोनियों हेतु विद्युत अधोसंरचना विकसित किये जाने के लिये कुल 29169 किलोवॉट विद्युत भार के 17 प्राक्‍कलन स्‍वीकृत किये गये। उक्‍त में से 2 कॉलोनियों के कार्य पूर्ण होने के उपरांत पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इन्‍दौर के संबंधित सहायक यंत्री ने उनका निरीक्षण कर कार्य पूर्ण होना प्रमाणित किया है। जी नहीं। कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है। अत: किसी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता।

परिशिष्ट - ''एक''

सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन

[नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा]

2. ( *क्र. 5545 ) श्री रामनिवास रावत : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में वर्तमान में सौर ऊर्जा से कितना विद्युत ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है वर्ष 2010 से प्रश्नांकित दिनांक तक किन-किन निजी कम्पनियों से कितनी कितनी क्षमता के सौर ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा उत्पादन परियोजनाओं के एम.ओ.यू. कब कब हस्ताक्षरित हुए? इनमें से कौन कौन सी परियोजना में कितना कितना विद्युत उत्पादन हो रहा है? किन-किन परियोजनाओं का निर्माण कार्य जारी है? किन परियोजनाओं का निर्माण किस कारण से अप्रारम्भ है? जिन परियोजनाओं का निर्माण कार्य जारी है, उनमें उत्पादन कब तक प्रारंभ हो जावेगा? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार जिन कंपनियों द्वारा एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किये हैं क्या उनको जमीन शासन द्वारा उपलब्ध कराई है? यदि हाँ, तो कितनी कितनी जमीन, कहाँ कहाँ, किस दर पर? (ग) प्रश्नांश (क) अनुसार जिन परियोजनाओं में विद्युत उत्पादन हो रहा है, उनमें विद्युत उत्पादन की दर प्रति यूनिट क्या है? उक्त विद्युत ऊर्जा उत्पादन इकाईयों द्वारा कितने मिलियन यूनिट विद्युत किस दर पर शासन को विक्रय की गई, निम्न विवरण सहित बतावें कम्पनी का नाम, स्थान, उत्पादन क्षमता (मेगावाट में), विक्रय की गई विद्युत (मिलियन यूनिट में), दर प्रति यूनिट, कुल राशि सहित वर्षवार जानकारी दें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) प्रदेश में वर्तमान में सौर ऊर्जा से 800 मेगावाट क्षमता का विद्युत उत्‍पादन हो रहा है। वर्ष 2010 से आज दिनांक तक 02 निजी कम्‍पनियों से एम.ओ.यू. हस्‍ताक्षरित किये गये हैं, जिनकी जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। दोनों परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। इन परियोजनाओं से विद्युत उत्‍पादन की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' में प्रस्‍तुत है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) जी हाँ। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) वांछित जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

परिशिष्ट - ''दो''

मातृत्‍व योजना का लाभ

[महिला एवं बाल विकास]

3. ( *क्र. 7053 ) सुश्री मीना सिंह : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) जनवरी, 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक विभाग द्वारा संचालित इंदिरा गांधी मातृत्‍व सहयोग योजना का लाभ अनूपपुर जिले में कितने हितग्राहियों को प्रदान किया जा चुका है। विधानसभा क्षेत्रवार हितग्राहियों की संख्‍या सहित जानकारी उपलब्‍ध करायें। (ख) क्‍या विभाग द्वारा इंदिरा गांधी मातृत्‍व सहयोग योजना का लाभ शासन द्वारा जारी नियमावली के आधार पर हितग्राहियों को समय-सीमा में प्रदान किया जा रहा है। अगर नहीं तो कारण बतायें। (ग) क्‍या विभाग द्वारा इंदिरा गांधी मातृत्‍व सहयोग योजना में हितग्राहियों को लाभान्वित करने पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रोत्‍साहन राशि देने का प्रावधान है। यदि हाँ, तो पुष्‍पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के द्वारा जिन हितग्राहियों को योजना के अंतर्गत लाभान्वित किया गया है क्‍या उन हितग्राहियों की प्रोत्‍साहन राशि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका को प्रदान की जा चुकी है? (घ) अगर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं स‍हायिकाओं को प्रोत्‍साहन राशि अभी तक प्रदान नहीं की गई है तो इसका कारण बतावें? साथ ही कब तक उन्‍हें प्रोत्‍साहन राशि प्रदान कर दी जायेगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) इन्दिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना अनूपपुर जिले में संचालित नहीं है। अतः हितग्राहियों की संख्या दिये जाने का प्रश्न ही नहीं है। (ख) जी हाँ। प्रदेश के 2 जिले सागर एवं छिंदवाड़ा में योजना का लाभ शासन द्वारा जारी नियमावली के आधार पर हितग्राहियों को समय-सीमा में प्रदान किया जा रहा हैI (ग) जी हाँ, विभाग द्वारा इन्दिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना में एक हितग्राही को संपूर्ण राशि मिलने के उपरांत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को 200/- रूपये एवं सहायिका को 100/- रूपये की प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है। अनूपपुर जिलें में इन्दिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना संचालित नहीं है। शेष का प्रश्न नहीं है। (घ) इन्दिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना अनूपपुर जिले में संचालित नहीं है। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

लोअर गोई, इंदिरा सागर परियोजना में कार्यरत श्रमिक

[नर्मदा घाटी विकास]

4. ( *क्र. 7102 ) श्री बाला बच्‍चन : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्र.क्र. 1381 दिनांक 23.02.2017 के (ख) उत्‍तर में वर्णित लोअर गोई परियोजना में निर्माणकर्ता कंपनी द्वारा कर्मचारियों/श्रमिकों के पी.एफ. कटौत्री का अंशदान करना माना है? अत: इन कर्मचारियों/श्रमिकों के नाम, पी.एफ. नंबर, इनका अंशदान, नियोक्‍ता अंशदान की जानकारी माहवार देवें विगत 3 वर्षों का कंपनी का सेलरी स्‍टेटमेंट भी देवें (ख) बड़वानी जिले में इंदिरा सागर परियोजना में कार्यरत श्रमिकों/कर्मचारियों के नाम, उनके पी.एफ. नंबर, इनका अंशदान, नियोक्‍ता अंशदान की जानकारी माहवार विगत 3 वर्षों की देवें? विगत 3 वर्ष का कंपनी का सेलरी स्‍टेटमेंट भी देवें?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है।

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के दायित्‍व

[नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा]

5. ( *क्र. 6564 ) श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा जनहित में क्‍या-क्‍या कार्य किये जाने के क्‍या प्रावधान हैं व कार्यों को मूर्त रूप देने हेतु विभाग द्वारा क्‍या मार्गदर्शिका अपनाई जाती है व उसके कार्यान्‍वयन हेतु क्‍या निर्देश/आदेश प्रचलन में हैं, की प्रति सहित जानकारी दी जाये। (ख) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में विगत तीन वर्ष में कितनी राशि जिला मुरैना को प्राप्‍त हुई व उक्‍त राशि से क्‍या-क्‍या कार्य किये गये। (ग) क्‍या प्रदाय राशि में से माननीय विधायकों को अपने विधानसभा क्षेत्रों में अनुशंसा सहित प्रस्‍ताव भेजने की पात्रता है व इस हेतु क्‍या नियम हैं? (घ) विधानसभा क्षेत्र-07 दिमनी जिला मुरैना में विगत तीन वर्ष में कितने कार्य जनहित में किये गये, विवरण दिया जावे? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा जनहित में किए जाने वाले कार्य एवं उन कार्यों के संबंध में आवश्‍यक प्रावधान की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। निर्देश-आदेश की प्रतियाँ पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) पृथक से कोई राशि जिलों को नहीं दी जाती है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। हितग्राही अंश एवं केन्‍द्र/राज्‍य शासन के अनुदान पर आधारित योजनाओं पर विगत तीन वर्षों में मुरैना जिले में किये गये कार्यों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जी हाँ। तथापि प्रस्‍तावित कार्यों हेतु हितग्राही अंश की आवश्‍यकता होगी व उक्‍त की उपलब्‍धता पर कार्य कराए जा सकेंगे। (घ) विधानसभा क्षेत्र दिमनी, जिला मुरैना में विगत 3 वर्षों में पेयजल हेतु निम्‍नानुसार सोलर पम्‍प की स्‍थापना का कार्य किया गया है :- 1. ग्राम-दलजीत का पुरा, 2. ग्राम-मलवसई, 3. शासकीय अनुसूचित जाति कन्‍या आश्रम नवाली, 4. शासकीय अनुसूचित जाति कन्‍या आश्रम दिमनी। इसके अतिरिक्‍त 224 नग एल.ई.डी. बल्‍ब का विक्रय किया गया है।

प्राचीन मंदिरों का पर्यटन के रूप में विकास

[पर्यटन]

6. ( *क्र. 6149 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या राज्‍यमंत्री, संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रदेश में शासन द्वारा प्राचीन मंदिरों एवं दर्शनीय स्‍थलों को पर्यटन के रूप में विकसित किये जाने का प्रावधान है? (ख) प्रश्नांश (क) यदि हाँ, तो कटनी जिले की विधानसभा क्षेत्र बहोरीबंद के अंतर्गत ग्राम बांधा में राधाकृष्‍ण मंदिर, ग्राम मुहास में हनुमान मंदिर, ग्राम बिलहरी में गयाकुण्‍ड स्‍थान एवं पुष्‍पावती नगरी, ग्राम तिगवां एवं बड़गांव में प्राचीन शिलालेख है, क्‍या इन्‍हें पर्यटन के रूप में विकसित किया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक और यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य के पत्र क्रमांक 1960, दिनांक 19.01.2017 पर क्‍या कार्यवाही की गई? तिथिवार, कार्यवाहीवार विवरण दें।

राज्‍यमंत्री, संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) जी नहीं। स्‍थल विशेष को पर्यटन के रूप में विकसित किये जाने का प्रावधान नहीं है। (ख) प्रश्‍नांश () के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) पत्र विभाग में प्राप्‍त नहीं हुआ है। अत: कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

नरसिंहपुर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत संचालित आगंनवाड़ी केन्‍द्र

[महिला एवं बाल विकास]

7. ( *क्र. 6966 ) श्री जालम सिंह पटेल : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नरसिंहपुर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत कौन-कौन से ग्रामों में आंगनवाड़ी केंन्द्र नहीं हैं? (ख) क्या ऐसे ग्रामों में आंगनवाड़ी केन्द्र प्रारंभ करने हेतु कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? (ग) कितने आंगनवाड़ी केन्द्रों के भवन हैं एवं कितने किराये के भवनों में संचालित हैं? (घ) क्या भवन विहिन आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए भवन की व्यवस्था की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) नरसिंहपुर विधानसभा क्षेत्र अन्तर्गत बाल विकास परियोजना नरसिंहपुर के 01 ग्राम तथा बाल विकास परियोजना करेली के 27 ग्रामों में आंगनवाड़ी केन्द्र नहीं है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) भारत सरकार द्वारा जनसंख्या के निर्धारित मापदण्डों की पूर्ति होने पर नवीन आंगनवाड़ी केन्द्र/मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र खोले जाने की स्वीकृति दी जाती है। नरसिहंपुर विधानसभा क्षेत्र के उक्त 28 ग्रामों में निर्धारित मापदण्ड अनुसार जनसंख्या न होने के कारण आंगनवाड़ी केन्द्र खोला जाना प्रस्तावित नहीं है। (ग) नरसिंहपुर विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत 70 आंगनवाड़ी केन्द्र विभागीय भवन में, 120 आंगनवाड़ी केन्द्र अन्य शासकीय विभाग भवन में तथा 64 आंगनवाड़ी केन्द्र किराये के भवन में संचालित हैं। (घ) भवन विहीन 184 आंगनवाड़ी केन्द्रों में से 16 आंगनवाड़ी केन्द्रों हेतु भवन निर्माण की स्वीकृति शासन से प्राप्त हो गई। आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण की स्वीकृति वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करती है, अतः समय-सीमा दिया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''तीन''

विद्युत का उत्‍पादन

[ऊर्जा]

8. ( *क्र. 7145 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा विगत 10 वर्षों में अशासकीय/निजी संस्‍थाओं (केप्टिव, गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्‍त्रोतों को छोड़कर) से कितने विद्युत क्रय अनुबंध (पी.पी.ए.) किये गये? वितरण सहित सूची उपलब्‍ध करायें (ख) ऐसे कितने प्‍लांट आज दिनांक तक संचालित हैं और उनसे वर्ष 2012-13 से दिसम्‍बर 2016 तक कितना विद्युत क्रय किया गया है एवं किस दर पर? विवरण सहित सूची उपलब्‍ध करायें (ग) म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड का प्रति वर्ष विद्युत उत्‍पादन तथा उन वर्षों में प्रति इकाई (यूनिट) औसत उत्‍पादन लागत कितनी है? विगत तीन वर्षों (2013-14, 2014-15 एवं 2015-16) की जानकारी दें

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा विगत 10 वर्षों में अशासकीय/निजी संस्‍थाओं (केप्टिव, गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्‍त्रोतों को छोड़कर) से विद्युत क्रय अनुबंध (पी.पी.ए.) की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) संचालित पॉवर प्‍लांट्स एवं वर्ष 2012-13 से दिसंबर 2016 तक विद्युत क्रय एवं दर संबंधी विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड का वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 का प्रति वर्ष विद्युत उत्‍पादन तथा इन वर्षों में प्रति इकाई (यूनिट) औसत उत्‍पादन लागत निम्‍नानुसार है :-

वर्ष

ताप विद्युत उत्‍पादन (मिलियन यूनिट में)

जल विद्युत उत्‍पादन (मिलियन यूनिट में)

प्रति इकाई औसत उत्‍पादन लागत (रू. प्रति यूनिट)

2013-14

16196.4

3673.4

3.32

2014-15

16909.3

2749.8

4.12

2015-16

18601.8

1962.3

4.25

 

श्‍योपुर जिले में फीडर सेपरेशन योजना अंतर्गत किये गये कार्य

[ऊर्जा]

9. ( *क्र. 6450 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) श्‍योपुर जिले में फीडर सेपरेशन योजना कब प्रारंभ हुई तब से वर्तमान तक कितने व कौन-कौन से ग्रामों को योजना में शामिल किया गया, में से कौन-कौन से ग्रामों में विद्युतीकरण कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण हुआ? किन-किन ग्रामों में नहीं हुआ तथा क्‍यों? कब तक पूर्ण कराये जावेंगे (ख) उक्‍त में से जिन ग्रामों में विद्युतीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है, उनमें घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया तथा अब भी कई ग्रामों में खम्‍भे नहीं गड़े, कहीं तार नहीं खिंचे, जहां दोनों कार्य हो गये वहाँ ट्रांसफार्मर नहीं लगे, जहां लगे वहां खराब पड़े हैं, इन्‍हें नहीं बदला जा रहा है, इसका कारण बतावें? (ग) क्‍या उक्‍त योजना के तहत जिले में 527 ग्रामों में विद्युतीकरण कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण होना था, वह नहीं हुआ? वर्तमान तक 166 ग्रामों में ही यह कार्य पूर्ण हो पाया नतीजन जिले के घरेलू एवं कृषि उपभोक्‍ताओं को समस्‍याओं का सामना करना पड़ रहा है एवं वे योजना के लाभ से व‍ंचित बने हुये हैं? (घ) क्‍या शासन पूर्ण हो चुके ग्रामों में विद्युतीकरण कार्यों की गुणवत्‍ता व कार्यों के अपूर्ण रहने के कारणों की जाँच करायेगा तथा शेष अविद्युतीकरण ग्रामों में विद्युतीकरण के कार्य एक निश्चित समय-सीमा में पूर्ण करवायेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) श्‍योपुर जिले में फीडर विभक्तिकरण योजना दिनांक 20.08.2011 से प्रारम्‍भ हुई थी, जिसमें फीडर विभक्तिकरण के कार्य हेतु 527 ग्राम सम्मिलित थे। उक्‍त कार्य टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु अवार्ड ठेकेदार एजेंसी मेसर्स ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर लिमिटेड को जारी किया गया था। उक्‍त ठेकेदार एजेन्‍सी द्वारा 134 ग्रामों के फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किया गया, किन्‍तु निर्धारित समयावधि में कार्य पूर्ण नहीं कर पाने के कारण उसका अवार्ड निरस्‍त कर दिया गया। शेष 393 ग्रामों के फीडर विभक्तिकरण के कार्यों के लिए पुन: निविदा प्रक्रिया उपरांत टर्न-की ठेकेदार एजेन्‍सी मेसर्स विकरान इंजीनियरिंग एण्‍ड एक्जिम प्रा.लि. को अवार्ड जारी किया गया है। वर्तमान तक उक्‍त ठेकेदार एजेन्‍सी द्वारा 102 ग्रामों के फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा 291 ग्रामों का कार्य शेष है। उक्‍तानुसार उक्‍त योजना में शामिल, पूर्ण एवं शेष ग्रामों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। उक्‍त शेष ग्रामों के फीडर विभक्तिकरण का कार्य निर्धारित समयावधि नवम्‍बर 2017 तक पूर्ण किया जाना प्रस्‍तावित है। (ख) फीडर विभक्तिकरण योजना में उपयोग की जाने वाली सामग्री की गुणवत्‍ता की जाँच एन.ए.बी.एल. प्रमाणित प्रयोगशाला में कराई जाती है। जाँच में सामग्री निर्धारित मानक स्‍तर के अनुरूप पाए जाने पर ही उपयोग में ली जाती है। उक्‍त योजना में जिन ग्रामों में फीडर विभक्तिकरण के कार्य पूर्ण किये गये हैं, उनमें निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही कार्य किये गये हैं तथा शेष कार्यों हेतु पुन: निविदा प्रक्रिया उपरांत चयनित ठेकेदार एजेन्‍सी को अवार्ड जारी किया गया है। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में 35 जले/खराब वितरण ट्रांसफार्मर शत-प्रतिशत राशि बकाया होने के कारण नहीं बदले जा सके हैं, जिन्‍हें नियमानुसार बकाया राशि जमा होने के उपरांत बदलने की कार्यवाही की जा सकेगी। (ग) प्रश्‍नाधीन फीडर विभक्तिकरण के कार्य (विद्युतीकरण के नहीं) 527 ग्रामों में किये जाने थे, जिनमें से वर्तमान तक 236 ग्रामों के फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा 291 ग्रामों के फीडर विभक्तिकरण का कार्य शेष है, जिसे पूर्ण किये जाने की निर्धारित समयावधि नवम्‍बर, 2017 है तथा प्रश्‍नाधीन सभी ग्रामों में विभक्‍त किये गये/मिश्रित फीडरों के माध्‍यम से कृषि एवं गैर-कृषि उपभोक्‍ताओं को निर्धारित समयावधि हेतु विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। (घ) फीडर विभक्तिकरण योजना में प्रश्‍नाधीन कार्यों की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने के लिये निरीक्षण हेतु थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेंसी को अनुबंधित किया गया है, जिनके साईट इंजीनियरों द्वारा कार्यों की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करते हुए निरीक्षण किया जाता है तथा निरीक्षण उपरांत कार्यों में कमी पाये जाने पर संबंधित ठेकेदार एजेंसी से आवश्‍यक सुधार कार्य कराए जाते हैं। थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेन्‍सी द्वारा इंगित त्रुटियों के निराकरण उपरांत ही ठेकेदार एजेन्‍सी के बिलों का भुगतान किया जाता है। अत: कार्यों की गुणवत्‍ता की जाँच कराने की आवश्‍यकता नहीं है। प्रश्‍नाधीन शेष कार्य निर्धारित समयावधि नवम्‍बर 2017 तक पूर्ण कराने के प्रयास किये जायेंगे।

लाड़ली लक्ष्मी योजना का क्रियान्‍वयन

[महिला एवं बाल विकास]

10. ( *क्र. 6920 ) श्री रामपाल सिंह : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्या शासन द्वारा बालिकाओं के प्रोत्साहन हेतु लाड़ली लक्ष्मी योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है? (ख) यदि प्रश्नांश (क) हाँ तो उक्त योजना के प्रारंभ दिनांक से प्रश्न दिनांक तक शहडोल जिले के प्रत्येक महिला एवं बाल विकास परियोजना अंतर्गत विभिन्न परियोजनाओं में योजना अंतर्गत कितने प्रकरण पंजीकृत किये गये?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''चार''

नवीन विद्युत ग्रि‍ड की स्‍थापना

[ऊर्जा]

11. ( *क्र. 2799 ) श्री अरूण भीमावद : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शाजापुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रूलकी एवं ग्राम मेवासा सहित आसपास के लगभग 20-25 ग्रामों में विद्युत निम्‍न दाब की गंभीर समस्‍या होने से सिंचाई कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या शासन किसानों की इस गंभीर समस्‍या पर विचार कर रहा है? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में यदि हाँ, तो क्‍या शासन उक्‍त स्‍थानों पर नवीन विद्युत ग्रिड स्‍थापित करने की स्‍वीकृति प्रदान करेगा? (घ) यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) शाजापुर विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत वर्तमान में ग्राम रूलकी एवं उसके आस-पास के ग्रामों को 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र बेरछा से निर्गमित 11 के.व्ही. चैसला कुल्मी कृषि फीडर से सिंचाई हेतु सुचारु रुप से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। तथापि रबी सीजन 2016-17 में 11 के.व्ही. चैसला कुल्मी फीडर पर अधिकतम भार 165 एम्पीयर एवं अंतिम बिन्दु पर वोल्टेज रेग्यूलेशन (व्ही.आर.) 20.04 प्रतिशत दर्ज हुआ है। 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र बेरछा से निर्गमित 11 के.व्ही. चैसला कुल्मी फीडर की कुल लम्बाई 14.45 कि.मी. है तथा इससे संबद्ध क्षेत्र में कम वोल्टेज की समस्या के निदान हेतु इस फीडर के विभक्तिकरण के लिये 4 कि.मी 11 के.व्ही. लाईन के निर्माण का कार्य दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अन्तर्गत स्‍वीकृत है। उक्त कार्य पूर्ण होने के पश्चात नवीन 11 के.व्ही. चैसला कुल्मी फीडर एवं पुराने 11 के.व्ही. चैसला कुल्मी फीडर पर भार क्रमशः 65 एम्पीयर एवं 100 एम्पीयर रहेगा एवं अंतिम सिरे पर वोल्टेज रेग्यूलेशन क्रमशः 6.0 एवं 7.0 प्रतिशत रहेगा। इस प्रकार प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में कम वोल्‍टेज की समस्‍या का निराकरण हो जायेगा। रबी सीजन 2016-17 में 11 के.व्ही. चैसला कुल्मी फीडर पर माह अक्टूबर-16 से फरवरी-17 तक औसतन 9 घंटे 39 मिनिट प्रतिदिन विद्युत प्रदाय किया गया है। ग्राम मेवासा एवं उसके आस-पास के ग्रामों को वर्तमान में 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र मझानिया से निर्गमित 11 के.व्ही. सुनेरा-मेवासा कृषि फीडर से सिंचाई हेतु सुचारू रूप से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। रबी सीजन 2016-17 में 11 के.व्ही. सुनेरा-मेवासा कृषि फीडर पर अधिकतम भार 165 एम्पीयर एवं अंतिम बिन्दु पर वोल्टेज रेग्यूलेशन (व्ही.आर.) 8.05 प्रतिशत दर्ज हुआ है, जो कि नियत सीमा में है। रबी सीजन 2016-17 में 11 के.व्ही. सुनेरा-मेवासा फीडर पर माह अक्टूबर-16 से फरवरी-17 तक औसतन 9 घंटे 27 मिनिट प्रतिदिन विद्युत प्रदाय किया गया है। (ख) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार ग्राम रूलकी एवं आस-पास के ग्रामों में रबी सीजन में कम वोल्‍टेज की समस्‍या के निराकरण हेतु 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र बेरछा से निर्गमित 11 के.व्‍ही. चैसला कुल्‍मी फीडर के विभक्तिकरण के लिये दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के अंतर्गत 4 कि.मी. 11 के.व्‍ही. लाईन के निर्माण का कार्य स्‍वीकृत किया गया है। (ग) एवं (घ) उत्तरांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में उक्त स्थानों पर वर्तमान में नवीन 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र स्थापित करने की तकनीकी रुप से आवश्यकता नहीं है।

घोषित वोल्‍टेज अनुसार विद्युत की सप्‍लाई

[ऊर्जा]

12. ( *क्र. 6960 ) श्री दिनेश राय (मुनमुन) : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सिवनी विधानसभा क्षेत्र के समस्‍त ग्रामों में म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता के अध्‍याय तीन के अंतर्गत घोषित वोल्‍टेज एवं विद्युत सप्‍लाई की जाती है? यदि हाँ, तो सिवनी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले सभी वितरण केन्‍द्रों में तीन वर्षों की औसत खपत की वर्षवार जानकारी दें? (ख) प्रश्नांश (क) में घोषित वोल्‍टेज यदि कम है, तो क्‍या विभाग उस क्षेत्र में नये उपकेन्‍द्र स्‍थापित करेगा? (ग) क्‍या उपभोक्‍ताओं को घोषित वोल्‍टेज एवं विद्युत सप्‍लाई देने के लिये विभाग बाध्‍य है, तभी बिल वसूल करने का हकदार है? यदि हाँ, तो कौन जिम्‍मेदार है? (घ) सिवनी जिले के विद्युत सप्‍लाई करने वाली विद्युत कंपनी की गत तीन वर्षों की सी..जी. द्वारा अंकेक्षण रिपोर्ट एवं प्रश्नांश (क), (ख), (ग) की कार्यवाही रिपोर्ट पटल पर रखें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, सिवनी विधानसभा क्षेत्र के सभी ग्रामों में म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता 2013 के अध्‍याय 3 के अन्‍तर्गत घोषित वोल्‍टेज पर विद्युत प्रदाय किया जाता है। सिवनी विधानसभा क्षेत्र के अन्‍तर्गत आने वाले सभी वितरण केन्‍द्रों में विगत 3 वित्‍तीय वर्षों में कुल विद्युत खपत की वर्षवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार सिवनी विधानसभा क्षेत्र के अन्‍तर्गत आने वाले सभी ग्रामों में म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता 2013 के अध्‍याय 3 के अन्‍तर्गत घोषित वोल्‍टेज पर विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। तथापि भविष्‍य में भार वृद्धि के दृष्टिगत दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजनांतर्गत पीपरडाही में एवं आई.पी.डी.एस. योजनांतर्गत अशोक नगर (सिवनी) में 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्रों के निर्माण का कार्य स्‍वीकृत किया गया है। (ग) उपभोक्‍ताओं को घोषित वोल्‍टेज पर विद्युत प्रदाय करने के लिये वितरण कंपनियाँ म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता 2013 में निहित प्रावधानों के अनुसार कटिबद्ध हैं एवं म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी दर आदेश के अनुसार ही बिल जारी कर विद्युत प्रदाय संहिता 2013 में निहित प्रावधानों के अनुसार वसूली की कार्यवाही की जाती है। इस प्रकार वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप ही प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में कार्यवाही की जा रही है, अत: किसी के जिम्‍मेदार होने का प्रश्‍न नहीं उठता। (घ) सिवनी जिले के अन्‍तर्गत मध्‍यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा विद्युत वितरण का कार्य किया जा रहा है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की वर्ष 2013-14 एवं 2014-15 के वार्षिक लेखों की प्रति सी.ए.जी की अंकेक्षण रिपोर्ट सहित विधानसभा के पटल पर क्रमश: दिनांक 24.03.2015 एवं दिनांक 27.07.2016 को रखी जा चुकी है तथा वर्ष 2015-16 के वार्षिक लेखों की प्रति सी.ए.जी. की अंकेक्षण रिपोर्ट सहित विधानसभा के पटल पर रखने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

परिशिष्ट - ''पाँच''

दतिया जिले में पोषण आहार का वितरण

[महिला एवं बाल विकास]

13. ( *क्र. 5015 ) श्री घनश्‍याम पिरोनियाँ : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्या दतिया जिले में स्थित आंगनवाड़ि‍यों में बच्चों को स्‍व-सहायता समूहों द्वारा पोषण आहार दिया जा रहा है? (ख) क्या शासन के नियमों के तहत आंगनवाड़ी केन्द्रों से बच्चों की उपस्थिति संख्या सुपरवाईजर से प्रमाणित होने के उपरांत ही संबंधित आपूर्तिकर्ता को भुगतान किया जाना चाहिये? क्या स्‍व-सहायता समूहों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का कोई सगा संबंधी नहीं होना चाहिये? (ग) क्या दतिया जिले के सेवढ़ा/भाण्डेर विधानसभा क्षेत्र के कई आंगनवाड़ि‍यों के स्‍व-सहायता समूहों को सुपरवाईज़र के उपस्थिति प्रमाणित कराये बिना दर्ज संख्या से अधिक बच्चों की राशि का भुगतान किया जा रहा है? (घ) भाण्डेर/सेवढ़ा विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक आंगनवाड़ी केन्द्रों के दिनांक 01 जनवरी 2014 से प्रश्न दिनांक तक भुगतान किये गये पोषण का विवरण आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तथा सुपरवाईजरों द्वारा दिये गये उपस्थिति पत्रकों का विवरण उपलब्‍ध कराएं। साथ ही आंगनवाड़ी केन्द्रों को पोषण आहार आपूर्तिकर्ता समूहों के नाम की सूची उपलब्ध करायें तथा यह भी प्रमाणित करें कि इन समूहों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कोई सगे संबंधी नहीं हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी हाँ। विभागीय निर्देशानुसार दतिया जिले में स्व-सहायता समूह के माध्यम से आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों को पोषण आहार दिया जा रहा है। (ख) राज्य शासन के निर्देशानुसार स्व-सहायता समूहों द्वारा प्रस्तुत जानकारी के आधार पर परियोजना अधिकारी द्वारा अभिप्रमाणित एवं संकलित कम्प्यूटरीकृत देयक के आधार पर भुगतान किया जाता है। जी नहीं। (ग) जी नहीं। दतिया जिले की सेवढ़ा एवं भाण्डेर परियोजना में आंगनवाड़ी केन्द्र में दर्ज एवं उपस्थिति के मान से ही भुगतान किया जाता है। दर्ज संख्या से अधिक उपस्थिति का भुगतान नहीं किया जा रहा है। (घ) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''1'' एवं ''2'' अनुसार है।

पाँच वर्षों से अधिक अवधि से पदस्‍थ अधिकारियों का अन्‍यत्र स्‍थानांतरण

[नर्मदा घाटी विकास]

14. ( *क्र. 5805 ) श्री तरूण भनोत : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में नर्मदा घाटी विकास विभाग में पदस्‍थ कितने कार्यपालन यंत्री, अधीक्षण यंत्री पिछले पाँच वर्षों से एक ही संभाग/मण्‍डल में पदस्‍थ हैं? जानकारी उनके नामवार, उनके संभाग में पदस्‍थी दिनांकवार बताई जावे (ख) क्‍या शासन की स्‍थानांतरण नीति के अन्‍तर्गत प्रथम श्रेणी के अधिकारियों को तीन वर्ष से अधिक एक ही स्‍थान पर नहीं रखने संबंधी शासन के निर्देश हैं? (ग) यदि वर्णित (ख) हाँ तो वर्णित (क) के अधिकारी जो विगत पाँच वर्षों से एक ही स्‍थान पर पदस्‍थ हैं, उन्‍हें कब तक हटाया जावेगा?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) एवं (ग) जी हाँ, स्‍थानांतरण नीति 2015 में उल्‍लेख है, परन्‍तु अनिवार्यता नहीं है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में कार्यपालन यंत्रियों/अधीक्षण यंत्रियों की सेवायें अन्‍य विभागों से प्रतिनियुक्ति पर ली जाती हैं। वर्तमान में प्राधिकरण में अभियंताओं की कमी है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

परिशिष्ट - ''छ:''

शासकीय महाविद्यालय धनेटा पोरसा में विद्युत व्‍यवस्‍था

[ऊर्जा]

15. ( *क्र. 3818 ) एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शा. महाविद्यालय धनेटा पोरसा जिला मुरैना, ग्राम धनेटा से कितनी दूरी पर स्थित है? (ख) क्‍या ग्राम धनेटा से कॉलेज तक विद्युत विभाग द्वारा बिजली के पोल नहीं डाले गये हैं, जिसके कारण आज दिन तक धनेटा पोरसा शा. महाविद्यालय विद्युत विहीन है? विद्युत व्‍यवस्‍था न होने से शास. कम्‍प्‍यूटर तथा अन्‍य आवश्‍यक उपकरण अनुपयोगी पड़े हुए हैं। (ग) क्‍या शासन छात्र-छात्राओं के हित को ध्‍यान में रखते हुए ग्राम धनेटा से शासकीय महाविद्यालय (दूरी लगभग 500 मीटर) तक पोल गाड़कर डी.पी. रखवाकर विद्युत व्‍यवस्‍था करायेगा? यदि हाँ, तो कब तक, नहीं तो क्‍यों नहीं?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) शासकीय महाविद्यालय धनेटा पोरसा, जिला मुरैना ग्राम धनेटा से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। (ख) शासकीय महाविद्यालय धनेटा के विद्युतीकरण हेतु अधोसंरचना विकसित करने का कार्य नियमानुसार '''' श्रेणी के विद्युत ठेकेदार से मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सुपरविज़न में महाविद्यालय प्रशासन द्वारा कराया जाना था, लेकिन महाविद्यालय प्रशासन द्वारा उक्‍त कार्य न करवाकर निम्‍न दाब लाईन से ही तात्‍कालिक समय में निम्‍न दाब कनेक्‍शन प्राप्‍त कर दिनांक 30.09.2005 से विद्युत का उपयोग किया जा रहा था। उक्‍त कनेक्‍शन की सर्विस लाईन जलने/खराब होने पर महाविद्यालय प्रशासन द्वारा सर्विस लाईन नहीं बदलवाने के कारण माह जून 2016 से विद्युत प्रदाय बंद है। उल्‍लेखनीय है कि महाविद्यालय के प्राचार्य के द्वारा दिनांक 14.08.2015 को लाईन विस्‍तार कार्य एवं 25 के.व्‍ही.ए. क्षमता का एक वितरण ट्रांसफार्मर स्‍थापित करने हेतु आवेदन दिया गया, जिस पर मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के संबंधित कार्यालय द्वारा दिनांक 06.01.2016 को राशि रू. 249719/- का प्राक्‍कलन स्‍वीकृत कर सुपरविज़न चार्ज एवं सर्विस टैक्‍स की राशि रू. 15,714/- का माँग पत्र जारी किया गया था, लेकिन आवेदक द्वारा उक्‍त राशि जमा नहीं करने के कारण प्रकरण में अग्रिम कार्यवाही नहीं की जा सकी। पुन: दिनांक 26.09.2016 को महाविद्यालय के प्राचार्य के द्वारा प्राक्‍कलन स्‍वीकृति हेतु आवेदन दिया गया, जिसके अनुसार उक्‍त कार्य नगरपालिका परिषद के द्वारा कराया जाना था, परन्‍तु प्राक्‍कलित राशि लगभग रू. 2.75 लाख होने के कारण नगरपालिका परिषद द्वारा उक्‍त कार्य करवाने में असमर्थता बतायी गई एवं उनके पास उक्‍त मद में मात्र रू. 2 लाख की राशि उपलब्‍ध होने के कारण पुन: पूर्व से स्‍थापित 100 के.व्‍ही.ए. क्षमता के ट्रांसफार्मर से निम्‍नदाब लाईन का लगभग 0.4 कि.मी. का विस्‍तार कार्य करने हेतु राशि रू. 1,94,496/- का प्राक्‍कलन स्‍वीकृत कर प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय धनेटा को कनिष्‍ठ यंत्री पोरसा के द्वारा सुपरविज़न चार्ज एवं अन्‍य प्रभार की राशि रू. 13,250/- का मांग पत्र दिनांक 04.03.2017 को जारी किया गया है। उक्‍त राशि आज दिनांक तक जमा नहीं कराई गई है। (ग) प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय धनेटा को कनिष्‍ठ यंत्री पोरसा के द्वारा सुपरविज़न चार्ज एवं अन्‍य प्रभार की राशि रू. 13,250/- का माँग पत्र दिनांक 04.03.2017 को जारी किया गया है। राशि जमा होने के उपरांत उक्‍त कार्य '''' श्रेणी के विद्युत ठेकेदार के माध्‍यम से महाविद्यालय/प्रशासन नगरपालिका परिषद के द्वारा मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सुपरविजन में करवाया जावेगा। अत: कार्य पूर्णता की समय-सीमा बताना संभव नहीं।

मुख्‍यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं का क्रियान्‍वयन

[सामान्य प्रशासन]

16. ( *क्र. 6744 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या दिनांक 31 जनवरी 2017 को ब्‍यावरा नगर में आयोजित एन.एच.ए.आई. के फोरलेन भूमिपूजन कार्यक्रम एवं जिला स्‍तरीय अंत्‍योदय मेले में माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा की गई घोषणाओं के संबंध में कलेक्‍टर जिला राजगढ़ द्वारा अपने पत्र क्रमांक/11427/एस.सी. 2/2017 राजगढ़ दिनांक 04.02.2017 से प्रमुख सचिव मुख्‍यमंत्री कार्यालय मध्‍यप्रदेश शासन, सामान्‍य प्रशासन विभाग भोपाल को आवश्‍यक कार्यवाही हेतु जानकारी प्रेषित की गई है? (ख) यदि हाँ, तो प्रश्‍न दिनांक तक उक्‍त घोषणाओं पर आवश्‍यक व त्‍वरित कार्यवाही हेतु किन-किन विभाग प्रमुखों को क्‍या दिशा-निर्देश दिये गये हैं? निर्देशों की प्रति सहित जानकारी उपलब्‍ध करावें (ग) क्‍या उपरोक्‍तानुसार माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा की गई घोषणाओं के परिपालन की कोई समय-सीमा निर्धारित की गई? यदि हाँ, तो क्‍या?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) घोषणाओं के क्रियान्‍वयन की कार्यवाही एक सतत् प्रक्रिया है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

मुरैना स्थित रिफाइनरियों से बाहर भेजा गया खाद्य तेल

[वाणिज्यिक कर]

17. ( *क्र. 5366 ) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुरैना वाणिज्‍यकर जाँच नाके से मुरैना की रिफाइनरियों में वर्ष 2015-16 में कितनी मात्रा में खाद्य तेलों को बाहर से मंगाया गया? (ख) क्‍या वाणिज्‍यकर जाँच चौकी मुरैना की क्रूड ऑयलों की प्रवि‍ष्ट‍ियों मार्गों पर स्थित अन्‍य प्रदेशों की जाँच चौकियों से भिन्‍न है? यदि हाँ, तो क्‍यों? यदि नहीं, तो क्‍या शासन इन प्रवि‍ष्ट‍ियों की सत्‍यता की जाँच हेतु कोई प्रावधान बनायेगा? (ग) उक्‍त समयावधि में मुरैना रिफाइनरियों से कितनी मात्रा में रिफाइण्‍ड खाद्य तेल की कितनी मात्रा बाहर भेजी गई।

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) मुरैना वाणिज्यिक कर, जाँच नाके से मुरैना की रिफाइनरियों में वर्ष 2015-16 में रू. 3905462145.00 का खाद्य तेल बाहर से बुलाया गया। जाँच चौकी पर किसी कमोडिटी का रिकॉर्ड मात्रात्‍मक आधार पर संधारित नहीं किया जाता है। (ख) वाणिज्यिक कर जाँच चौकी मुरैना की क्रूड ऑयलों की प्रविष्टियों मार्गों पर अन्‍य प्रदेशों की जाँच चौकियां अवस्थित नहीं होने से प्रविष्टियों की सत्‍यता की जाँच करने की स्थिति निर्मित नहीं होती है। (ग) उक्‍त समयावधि में मुरैना रिफाइनरियों से रू. 2024284034.00 का रिफाइंड खाद्य तेल बाहर भेजा गया है। किसी कमोडिटी का रिकार्ड मात्रात्‍मक आधार पर संधारित नहीं किया जाता है।

दतिया जिलांतर्गत अवैध शराब की बिक्री

[वाणिज्यिक कर]

18. ( *क्र. 5672 ) श्री प्रदीप अग्रवाल : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दतिया जिले में आबकारी विभाग द्वारा वर्ष 2015-16 एवं वर्ष 2016-17 में कितने व्‍यक्तियों को कितनी-कितनी अवैध शराब देशी/विदेशी विक्रय करने का प्रकरण बनाकर उसके खिलाफ क्‍या कार्यवाही की? जानकारी उपलब्‍ध करावें (ख) देशी/विदेशी मदिरा ठेकेदारों को शासन द्वारा किसी शासकीय प्रतिष्‍ठान से उपलब्‍ध कराई जाती है या किसी निजी प्रतिष्‍ठान अथवा ठेकेदार से यानि खुले बाजार से? (ग) क्‍या आबकारी विभाग ठेकेदारों के माध्‍यम से एक लायसेंस से 4-5 दुकानें नगर में तथा पुलिस के साथ समझौता कर थाने के अंतर्गत आने वाले समस्‍त ग्रामों में मदिरा का अवैध बिक्री का कारोबार करवा रहा है? यदि नहीं, तो संपूर्ण प्रकरण की जाँच प्रश्‍नकर्ता के समक्ष कराई जावेगी?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) आबकारी विभाग द्वारा जिला दतिया में वर्ष 2015-16 में कुल 640 प्रकरण एवं वर्ष 2016-17 में माह फरवरी 2017 अंत तक कुल 668 प्रकरण पंजीबद्ध किये गये। दर्ज प्रकरणों में जप्‍त की गई मदिरा की विकासखण्‍डवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है, दर्ज प्रकरणों में आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34 के अंतर्गत कार्यवाही की गई है। (ख) दतिया जिले में देशी मदिरा का प्रदाय शासकीय देशी मद्य भाण्‍डागार दतिया से एवं विदेशी मदिरा का प्रदाय शासकीय विदेशी मद्य भाण्‍डागार ग्‍वालियर से किया जाता है। (ग) आबकारी विभाग दतिया द्वारा जिले में विदेशी मदिरा के फुटकर विक्रय हेतु 15 एवं देशी मदिरा के फुटकर विक्रय हेतु 54 लायसेंस एवं 02 एफ.एल. 3 लायसेंस जारी किये गये हैं। लायसेंसशुदा दुकानों से ही मदिरा का विक्रय किया जाता है। इसके अतिरिक्‍त कहीं भी मदिरा विक्रय की अनुमति नहीं दी गई है, अवैध मदिरा विक्रय की सूचना प्राप्‍त होने पर आबकारी विभाग/पुलिस विभाग द्वारा प्रकरण पंजीबद्ध कर कार्यवाही की जाती है।

परिशिष्ट - ''सात''

ताप विद्युत गृह हेतु कोयले की खरीदी

[ऊर्जा]

19. ( *क्र. 7036 ) श्री जितू पटवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के प्रश्‍न क्रमांक 1377, दिनांक 23.02.2017 के संदर्भ में बतायें कि सिंगाजी, अमरकंटक व सतपुड़ा ताप विदयुत गृह हेतु पिछले 05 वर्षों में वॉश्ड कोल (धुला कोयला) हेतु कब कब टेंडर (निविदा) किये गये, किन-किन पेपरों में विज्ञप्ति‍ दी गई, की प्रति उपलब्‍ध कराते हुए बतायें कि उन टेंडरो में किन-किन कंपनियों ने हिस्‍सा लिया, कितनी कंपनियों को डिसक्‍वालिफाई किया गया, उसके क्‍या कारण थे व किस-किस कंपनियों ने क्‍या-क्‍या रेट उन टेंडरों में डाले? टेबल रूप में टेंडरवार व प्‍लांटवार जानकारी देवें (ख) मेसर्स स्‍पेक्‍ट्रम कोल एंड पॉवर को किये गये काउंटर ऑफर की समस्‍त प्रक्रिया व शर्तें उपलब्‍ध कराये बिना टेंडर के इस कंपनी को क्‍या कार्यादेश दिया गया? वहीं दूसरी कंपनियों से काउंटर ऑफर के लिये गये रेट की प्रति भी उपलब्‍ध करायें (ग) पिछले 2 वर्षों से आज दिनांक तक ए.सी.बी. इंडिया व स्‍पेक्‍ट्रम कोल एंड पॉवर के कितने धुला कोयला की जाँच की गई व कितने सेंपल उसमें अमानक पाये गये? अमानक पाये जाने पर कितना दंड शासन ने दोनों कंपनियों पर लगाया व हुये नुकसान की भरपाई सरकार ने कंपनियों से कैसे वसूल की? आदेशों की प्रति व कितनी-कितनी राशि वसूली गई की, राशि कंपनीवार बतायें (घ) बतायें कि‍ विगत 5 वर्षों में किन-किन कंपनियों को किन-किन नियम के अंतर्गत किन-किन शर्तों के साथ कितने कितने समय के लिए एक्‍सटेंशन दिया गया? एक्‍सटेंशन किन परिस्थितियों के कारण बार-बार दिया गया, की भी जानकारी देवें

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड द्वारा प्रथम बार श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह, खण्डवा में वॉश्ड कोयला (धुला हुआ) प्रदाय करने हेतु दिनांक 20-04-2015 को निविदा (टी.एस. 55) जारी की गई थी। निविदा हेतु विज्ञप्ति मध्य प्रदेश शासन की ई प्रोक्योरमेंट वेबसाइट के अतिरिक्त नवभारत टाईम्स नई दिल्ली, दैनिक भास्कर, रायपुर एवं नवभारत, बिलासपुर में भी प्रकाशित की गई। निविदा प्रकाशन हेतु जारी किये गये पत्र एवं निविदा विज्ञप्ति की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अ-1' अनुसार है। इस निविदा में निम्नलिखित कंपनियों ने टेंडर जमा किये- (1) मेसर्स ए.सी.बी. इंडिया लिमि., गुड़गाँव। (2) मेसर्स स्पेक्ट्रम कोल एंड पॉवर लिमि., नई दिल्ली। (3) मेसर्स एस.वी. पॉवर प्राइवेट लिमि., हैदराबाद। (4) मेसर्स मारूति क्लीन कोल एंड पॉवर लिमि., रायपुर। इस निविदा में भाग लेने वाली उक्‍त चार कंपनियों में से दो कंपनियाँ यथा मेसर्स एस.वी. पॉवर प्राइवेट लिमि., हैदराबाद तथा मेसर्स मारूति क्लीन कोल एंड पॉवर लिमि., रायपुर, को निविदा की निर्धारित अर्हताएं पूर्ण न करने पर डिसक्‍वालीफाई किया गया, जिसके प्रमुख कारण पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसतन 1.8 मिलियन टन प्रति वर्ष कोयले की धुलाई की मात्रा का कार्यानुभव, धनात्मक नेटवर्थ एवं रूपये 25 करोड़ औसत टर्न ओवर न होना था। मेसर्स ए.सी.बी. इंडिया लिमि., गुड़गाँव एवं मेसर्स स्पेक्ट्रम कोल एंड पॉवर लिमि., नई दिल्ली द्वारा टेंडर में डाली गयी दरें, टेबल रूप में पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब-1' अनुसार है। इसके उपरांत श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह एवं सतपुड़ा ताप विद्युत गृह हेतु धुले हुए कोयले के प्रदाय हेतु निविदा (टी.एस. 63) दिनांक 07-06-2016 को जारी की गई थी, जिसकी विज्ञप्ति भी मध्य प्रदेश शासन की ई प्रोक्योरमेंट वेबसाइट के अतिरिक्त टाईम्स ऑफ इंडिया, नई दिल्ली एवं देशबंधु, रायपुर में प्रकाशित की गई। निविदा विज्ञप्ति की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अ-2' अनुसार है। इस निविदा के विरूद्ध किसी भी फर्म द्वारा ऑफर नहीं दिया गयाअत: निविदा को निरस्त कर दिया गया। तदुपरांत दिनांक 09-09-2016 को श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह एवं सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी हेतु धुले हुये कोयले के प्रदाय हेतु निविदायें (टी.एस. 65 एवं टी.एस. 66) आमंत्रित की गई। वॉश्ड कोयला (धुला हुआ) प्रदाय करने हेतु इन दोनों निविदाओं की संयुक्त विज्ञप्ति मध्य प्रदेश शासन की ई प्रोक्योरमेंट वेबसाइट के अतिरिक्त स्टेटसमेन, नई दिल्ली एवं स्वदेश, रायपुर में प्रकाशित की गई। निविदा प्रकाशन हेतु जारी किये गये पत्र एवं निविदा विज्ञप्ति की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अ-3' अनुसार है। श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह, खण्डवा हेतु निम्नलिखित कंपनियों ने टेंडर जमा किये- (1) मेसर्स स्पेक्ट्रम कोल एंड पॉवर लिमि., नई दिल्ली। (2) मेसर्स हिन्द एनर्जी एवं कोल बेनेफिस्यिशन (इं.) लिमि., बिलासपुर। (3) मेसर्स ए.सी.बी. इंडिया लिमि., गुड़गाँव। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी हेतु निम्नलिखित कंपनियों ने टेंडर जमा किये- (1) मेसर्स स्पेक्ट्रम कोल एंड पॉवर लिमि., नई दिल्ली। (2) मेसर्स महावीर कोल वाश्‍रीज़ प्राइवेट लिमि., बिलासपुर। (3) मेसर्स ए.सी.बी. इंडिया लिमि., गुड़गाँव। दोनों निविदाओं में किसी भी कंपनी को डिसक्वालीफाई नहीं किया गया। उक्‍त सभी निविदाओं में विभिन्न कंपनियों द्वारा प्रस्‍तुत की गई दर टेबल रूप में टेण्डरवार एवं प्लांटवार पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब-2' एवं 'ब-3' अनुसार हैं। अमरकंटक ताप विद्युत गृह हेतु वॉश्ड कोल नहीं लिया गया है। (ख) निविदा दिनांक 20.04.2015 (टी.एस. 55) के विरूद्ध मेसर्स स्पेक्ट्रम कोल एंड पॉवर लिमि., नई दिल्ली (एल-2 बिडर) को निविदा की कंडिका क्रमांक-6.1 (छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है) में निर्धारित प्रक्रिया के तहत, मेसर्स ए.सी.बी. इंडिया लिमि., गुड़गाँव (एल-1 बिडर) द्वारा दी गयी कुल लेण्‍डेड दर पर काउंटर आफर के आधार पर कार्यादेश दिया गया। इस टेण्डर में किसी दूसरी कंपनी से काउंटर आफर के रेट नहीं लिये गये वरन एल-1 बिडर द्वारा उध्‍दत लेण्‍डेड दर पर टेंडर के प्रावधानों के अनुसार मेसर्स स्‍पेक्‍ट्रम को काउंटर आफर दिया गया। उक्‍त कंपनी (मेसर्स स्‍पेक्‍ट्रम) को निविदा में वर्णित प्रक्रियानुसार आदेश जारी किये गये। (ग) विगत दो वर्षों से प्रश्न दिनांक तक मेसर्स ए.सी.बी. इंडिया लिमि., गुड़गाँव एवं मेसर्स स्पेक्ट्रम कोल एंड पॉवर लिमि., नई दिल्ली द्वारा भेजे गये वॉश्ड कोल की प्रत्येक कोल रैक के कोयले की जाँच की गई है। जाँच के उपरांत निर्धारित मानकों के अनुसार मासिक औसत आधार पर कोयला प्राप्त न होने की स्थिति में कार्यादेश की शर्तों के अनुसार कंपनियों पर दण्‍ड अधिरोपित किया जाता है। यह दण्‍ड उनके बिल से काटा जाता है तथा अलग से आदेश प्रसारित नहीं किया जाता है। कोयले की गुणवत्ता की जाँच में माह मार्च 2016 की एक रैक का सेम्पल छोड़कर बाकी सभी सेम्पल मानक स्तर पर आदेश की कंडिकाओं के अनुरूप पाये गये हैंI माह मार्च 2016 में फर्म मेसर्स स्पेक्ट्रम कोल एंड पॉवर लिमि., नई दिल्ली के देयक से दंडस्वरूप रूपये 37054/- की राशि काटी गई है। उपरोक्त के अलावा समस्त ताप विद्युत गृहों में उक्त दोनों कंपनियों द्वारा प्रदाय किये गये कोयले की गुणवत्ता कार्यादेश में दर्शाये गये मानक स्तर की पाई जाने के कारण, कोई भी अतिरिक्त दण्डात्मक राशि मेसर्स ए.सी.बी. इंडिया लिमि., गुड़गाँव एवं मेसर्स स्पेक्ट्रम कोल एंड पॉवर लिमि., नई दिल्ली से नहीं वसूली गई है। (घ) विगत पाँच वर्षों में से वर्ष 2015-16 में ही म.प्र.पॉ.ज.कं.लि. द्वारा प्रथम बार वॉश्ड कोल प्रदाय हेतु कार्यादेश मेसर्स ए.सी.बी. इंडिया लिमि., गुड़गाँव एवं मेसर्स स्पेक्ट्रम कोल एंड पॉवर लिमि., नई दिल्ली को दिये गये। उक्त कार्यादेश को शर्त बिन्दु क्रमांक-5.1 (छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' पर उपलब्ध है) के अनुसार विद्युत गृह की आवश्यकता को देखते हुए सिर्फ एक बार 6 माह के लिये दिनांक 19-01-2017 तक बढ़ाया गया था।

लोक सेवा गारंटी अधिनियम अंतर्गत प्राप्‍त पत्रों पर कार्यवाही

[ऊर्जा]

20. ( *क्र. 289 ) श्री जतन उईके : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मध्‍यप्रदेश विद्युत मण्‍डल में लोकसेवा गारण्‍टी अधिनियम लागू है? (ख) यदि हाँ, तो छिन्‍दवाड़ा में पिछले 03 वर्षों में अधिनियम के अंतर्गत कितने आवेदन पत्र प्राप्‍त हुए हैं? (ग) प्राप्‍त आवेदनों में से कितने आवेदनों का निराकरण किया गया है और कितने लंबित हैं? यदि आवेदन पत्र लंबित हैं तो क्‍या कारण है, लंबित आवेदन पत्रों पर कब तक कार्यवाही की जावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, म.प्र. राज्‍य विद्युत मण्‍डल की तीनों उत्‍तरवर्ती विद्युत वितरण कंपनियों में ''म.प्र. लोकसेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010'' लागू है। (ख) ''म.प्र. लोकसेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2010'' के अंतर्गत, छिंदवाड़ा जिले में वर्ष 2014 में 3729 वर्ष 2015 में 2088 तथा वर्ष 2016 में 1955 आवेदन, विभिन्‍न सेवाओं हेतु प्राप्‍त हुए हैं। (ग) उत्‍तरांश (ख) में दर्शाए अनुसार विगत 3 वर्षों में प्राप्‍त सभी आवेदनों का निराकरण कर दिया गया है। अत: प्रश्‍न नहीं उठता।

 

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के विरूद्ध कार्यवाही

[महिला एवं बाल विकास]

21. ( *क्र. 6378 ) श्री केदारनाथ शुक्ल : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास सेवा-त्‍योंथर जिला रीवा के पत्र पृ.क्र/म.बा.वि./निरी./2016-17/1727 त्‍योंथर दिनांक 14.07.2016 द्वारा आंगनवाड़ी केन्‍द्र गडरगवां की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा केन्‍द्र का संचालन अपने घर में किये जाने पर आपत्ति करते हुये आदेशित किया गया कि पत्र प्राप्ति के दूसरे कार्य दिवस से प्राथमिक शाला गडरगवां में संचालित करना सुनिश्चित करें। (ख) क्‍या प्रश्नांश (क) में वर्णित पत्र आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गडरगवां को दिनांक 22.07.2016 को प्राप्‍त हो गया है? (ग) यदि हाँ, तो प्रश्नांश (क) में वर्णित पत्र के निर्देश/आदेश का पालन क्‍या आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा किया गया? (घ) यदि नहीं, तो शासनादेश के अनुरूप वरिष्‍ठ कार्यालय के निर्देश का पालन न करने के लिये आंगनवाड़ी कार्यकर्ता गडरगवां को अवचार का दोषी मानते हुये अनुशासनात्‍मक कार्यवाही करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। (ग) आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा पत्र क्र./मबावि/निरीक्षण/2016-17/1726 त्योंथर दिनांक 14/07/2016 का पालन करते हुये आंगनवाड़ी केन्द्र का संचालन प्राथमिक विद्यालय गडरगवां में संचालित किया गया था। केन्द्र संचालन हितग्राही समूह के अनुरूप न होने से शिकायत के अवलोकन में संयुक्त संचालक एकीकृत बाल विकास सेवा रीवा संभाग रीवा द्वारा निरीक्षण किया गया तथा पत्र क्र./संयु.संचा./स्था./एबाविसे/2016/777 दिनांक 03/10/2016 के निर्देशानुसार रामलखन यादव के मकान में निर्माणाधीन नवीन शासकीय केन्द्र के पास संचालित कराया गया था। वर्तमान में शासकीय आंगनवाड़ी भवन में आंगनवाड़ी केन्द्र गडरगवां का संचालन किया जा रहा है। (घ) प्रश्नांश (ग) के उत्तर अनुसार जानकारी होने से कोई दोषी नहीं है। अतः शेष कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

विद्युत मीटरों की स्‍थापना

[ऊर्जा]

22. ( *क्र. 6937 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या रतलाम जिला अंतर्गत शासन/विभाग एवं कम्पनी द्वारा विद्युत प्रदाय किये जाने हेतु स्थाई एवं अस्थाई कनेक्शन दिए गए हैं? (ख) यदि हाँ, तो बतायें कि जिला अंतर्गत वर्ष 2012-13 से लेकर प्रश्न दिनांक तक कितने स्थाई एवं अस्थाई कनेक्शन दिए गए? (ग) जानकारी दें कि क्या उपरोक्तानुसार दिए गए विद्युत आपूर्ति कनेक्शनों पर सभी स्थानों पर मीटर भी लगाए गए हैं? जिनकी रीडिंग समय-समय पर की जाती है? (घ) यदि हाँ, तो स्पष्ट करें कि विगत एक वर्ष में मीटरों की जाँच कब-कब की गयी, जहां पर मीटर नहीं हैं, वहां पर बिल किस प्रकार दिए जा रहे हैं? बिलों की राशि में भारी अंतर आ रहा है तो इस हेतु क्या किया जा रहा है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इन्‍दौर द्वारा रतलाम जिले के अंतर्गत स्‍थाई एवं अस्‍थाई विद्युत कनेक्‍शन दिये गये हैं। (ख) रतलाम जिले के अंतर्गत वर्ष 2012-13 से माह फरवरी-2017 तक कुल 87237 स्थाई एवं 89566 अस्थाई कनेक्शन दिये गये हैं। (ग) जी नहीं। स्थाई एवं अस्थाई कृषि प्रयोजन (सिंचाई) हेतु दिये गये विद्युत कनेक्शनों पर मीटर नहीं लगाये गये हैं। इसके अतिरिक्त अन्य प्रयोजनों हेतु प्रदाय किये गये स्थाई एवं अस्थाई विद्युत कनेक्शनों पर मीटर लगाये गये हैं, जिनकी रीडिंग प्रतिमाह ली जाती है। (घ) विद्युत उपभोक्ताओं के मीटरीकृत संयोजनों की प्रतिमाह मीटर वाचक द्वारा रीडिंग लेने के दौरान प्रथम दृष्टया भौतिक जाँच की जाती है। मीटर बन्द/खराब होने की स्थिति में मीटर रीडर द्वारा मीटर डायरी में संबंधित टीप अंकित की जाती है। इसके अतिरिक्त औचक निरीक्षण के दौरान संयोजनों की जाँच में भी विद्युत मीटर की जाँच की जाती है। इसके अतिरिक्त संबंधित उपभोक्ता द्वारा भी शिकायत करने पर विद्युत मीटर की जाँच की जाती है। मीटरों की जाँच करना एक सतत् प्रक्रिया है। अतः यह बताना संभव नहीं है कि मीटरों की जाँच कब-कब की गई। गैर-कृषि प्रयोजनों के उपभोक्ताओं के स्थाई संयोजनों पर मीटर नहीं होने की स्थिति में अथवा मीटर बंद/खराब/जला होने की स्थिति में म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता-2013 की कंडिका 8.35 के प्रावधानों के अनुसार विद्युत देयक जारी किये जाते हैं। स्थाई एवं अस्थाई कृषि प्रयोजनों के संयोजनों पर म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी टैरिफ आदेश के अनुसार निर्धारित खपत/फ्लेट रेट से बिलिंग की जाती है। कतिपय प्रकरणों में विद्युत बिलों की राशि के संबंध में शिकायत प्राप्त होने पर जाँच उपरांत उचित समाधानकारी कार्यवाही की जाती है।

इंदिरा सागर परियोजना अंतर्गत नहर निर्माण

[नर्मदा घाटी विकास]

23. ( *क्र. 3060 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यान सिंह सोलंकी : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इंदिरा सागर परियोजना के अंतर्गत बड़वाह विधान सभा क्षेत्र में प्रश्नकर्ता द्वारा नहर निर्माण के लिए ग्राम जूनापानी एव खंगवाडा के मध्य से ग्राम घोसली के अनुसूचित जाति एव जनजाति वर्ग के किसानों के सिंचाई के लिए वर्ष 2013 से वर्तमान तक मुख्य सचिव, कार्यालय प्रमुख, मुख्य अभियंता, सनावद को कितनी बार पत्र लिखे गए हैं उसकी तिथिवार जानकारी दी जावे। (ख) प्रश्नांश (क) के अनुसार प्राप्त पत्रों पर विभाग द्वारा प्रश्नकर्ता को कब कब उत्तर दिया गया? यदि प्रश्नकर्ता के पत्रों का उत्तर नहीं दिया तो उसके क्या कारण रहे हैं? जनप्रतिनिधियों के पत्रों के उत्तर दिए जाने के शासन के क्या नियम हैं? नियम की प्रति देवें। विभाग द्वारा उत्तर न दिए जाने पर शासन क्या कार्यवाही करेगा? समय-सीमा बतावें। (ग) प्रश्नकर्ता द्वारा प्रश्नांश (क) में जो निर्माण की स्वीकृति की कार्यवाही चाही है, उसकी अद्यतन जानकारी देवें। स्वीकृति‍ कब तक हो जावेगी, नहीं तो कारण बतावें.

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) उपाध्‍यक्ष, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण को संबोधित एवं मुख्‍य अभियंता, इंदिरा सागर परियोजना (नहरें) सनावद को पृष्‍ठांकित पत्र क्रमांक क्रमश: 173 दिनांक 07.04.2016 एवं 481 दिनांक 13.09.2016 प्राप्‍त हुए हैं। (ख) मुख्‍य अभियंता, इंदिरा सागर परियोजना (नहरें) सनावद के पत्र क्रमांक/कार्य/158069/भाग-8/2016/4715 दिनांक 14.10.2016 द्वारा। शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होते हैं। (ग) सनावद वितरण शाखा की माईनर क्रमांक एम-18 का ग्राम घोसली के पास शेष बचे हुये क्षेत्र के स्‍थल निरीक्षण में पाया गया कि नहर के जल स्‍तर से कमाण्‍ड का लेवल ऊँचा है। अत: विस्‍तारीकरण संभव नहीं है।

विधान सभा क्षेत्रों में भूमिपूजन/लोकार्पण के नियम

[सामान्य प्रशासन]

24. ( *क्र. 5061 ) श्री कमलेश्‍वर पटेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र में स्‍वीकृत कार्यों का भूमिपूजन (शिलान्‍यास) लोकार्पण करने का क्‍या नियम है? (ख) प्रश्नांश (क) के संबंध में क्‍या विभाग ने कोई दिशा निर्देश जारी किया है? यदि हाँ, तो जानकारी दें? सीधी एवं सिंगरौली जिले में यदि निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है तो क्‍या जिम्‍मेदार अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी? यदि नहीं, तो क्‍यों? यदि की जायेगी तो कब तक?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

विद्युत उपकेन्द्रों पर सिविल कार्यों में अनियमितताएं

[ऊर्जा]

25. ( *क्र. 5976 ) श्री सूबेदार सिंह रजौधा : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) एस.टी.सी. मुरैना द्वारा नये विद्युत उपकेन्द्रों पर सिविल कार्य जैसे कि नियंत्रण कक्ष, बोरबेल, बाउण्ड्री फेंसिंग कार्य, मुरम व मेटल फिलिंग आदि के कार्य ठेकेदार द्वारा कराये गए हैं? यदि हाँ, तो अप्रैल 2013 से प्रश्न दिनांक तक ठेकेदारों के नाम एवं उनके कार्यों से अवगत कराते हुए ई.पी.एफ. नं., सर्विस टेक्स नं. आदि से अवगत कराया जा सकेगा? (ख) प्रश्नांश (क) में वर्णित कार्यों के कार्यादेश प्राक्‍कलन तथा मात्रा देयकों एवं पास किए गए बिलों के विवरण उपलब्‍ध करावें। (ग) क्या उक्त कार्यों में संलग्न कुछ ठेकेदारों के परिजन या निकट संबंधी रिश्तेदार तत्‍कालीन कार्यवाही के समय एस.टी.सी. मुरैना में पदस्थ थे, जिनके द्वारा संबंधित ठेकेदार को फायदा पहुंचाया गया है, काम मानक अनुरूप नहीं हुआ है? (घ) क्या प्रश्नांश (क) में वर्णित समयावधि में एस.टी.सी. मुरैना एवं सर्किल ऑफिस में पदस्थ अधिकारियों से सांठ-गांठ करके टेण्डर प्रकिया को दूषित कर चहेते ठेकेदारों को टेण्डर देकर कार्य करवाये गये हैं? यदि हाँ, तो क्यों? यदि नहीं, तो टेण्डर प्रकिया की संपूर्ण कार्यवाही उपलब्ध करायें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के एस.टी.सी. संभाग, मुरैना द्वारा अप्रैल 2013 से प्रश्‍न दिनांक तक कराए गये सिविल कार्यों का ठेकेदारों के नाम, उनके द्वारा किये गये कार्य का विवरण तथा उनके ई.पी.एफ. नंबर एवं सर्विस टैक्‍स नंबर संबंधित प्रश्‍नाधीन चाही गई जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) उत्‍तरांश (क) में वर्णित कार्यों के कार्यादेश, प्राक्‍कलन, मात्रा देयकों एवं पास किये गये बिलों का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) प्रश्‍नाधीन कार्य जिन ठेकेदारों से कराए गए उनके परिजन या निकट संबंधी रिश्‍तेदारों की तत्समय एस.टी.सी. संभाग, मुरैना में पदस्‍थ होने की जानकारी प्रकाश में नहीं आई है। एस.टी.सी. संभाग, मुरैना द्वारा अप्रैल 2013 से प्रश्‍न दिनांक तक किये गये सिविल कार्यों हेतु निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुये निविदा सूचना का समाचार पत्रों में प्रकाशन किया जाकर न्‍यूनतम दर प्रस्‍तुत करने वाले निविदाकर्ता को ही कार्यादेश जारी किये गये हैं। प्रश्‍नाधीन पूर्ण किये गये कार्य मानक स्‍तर के हैं। (घ) जी नहीं। प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में टेण्‍डर प्रक्रिया की संपूर्ण कार्यवाही का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

 



भाग-2

नियम 46 (2) के अंतर्गत अतारांकित प्रश्नोत्तर के रुप में

परिवर्तित तारांकित प्रश्नोत्तर


ऊर्जा विभाग के स्‍वीकृत अपूर्ण कार्य

[ऊर्जा]

1. ( क्र. 202 ) श्री चम्पालाल देवड़ा : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) देवास जिले के संचालन संधारण संभाग बागली एवं कन्‍नौद में वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में फरवरी-2017 तक केन्‍द्र एवं राज्‍य सरकार द्वारा किन योजनाओं में कार्य स्‍वीकृत किये गये हैं? योजना स्‍वीकृति कार्य प्रारंभ करने एवं कार्य पूर्ण का दिनांक बतावें। (ख) देवास जिले के संचालन संधारण संभाग बागली एवं कन्‍नौद में वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में फरवरी-2017 तक केन्‍द्र एवं राज्‍य सरकार द्वारा जिन योजनाओं में कार्य स्‍वीकृत हुए हैं उनमें से कितने कार्य पूर्ण हो चुके है कितने कार्य अपूर्ण हैं यदि कार्य अपूर्ण है तो अपूर्ण होने के कारण बतावें? इन कार्यों को पूर्ण कराने हेतु विद्युत कंपनी ने क्‍या कार्यवाही की? (ग) देवास जिले के संचालन संधारण संभाग बागली एवं कन्‍नौद में वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में फरवरी-2017 तक केन्‍द्र एवं राज्‍य सरकार द्वारा जिन योजनाओं में कार्य स्‍वीकृत हुए हैं उन कार्यों का भौतिक सत्‍यापन किस स्‍तर के अधिकारी द्वारा किया गया है? अपूर्ण कार्य कब तक पूर्ण किये जाऐंगे समय-सीमा बतावें? (घ) क्‍या अपूर्ण एवं अप्रारंभ कार्यों के कारण कृषकों एवं आमजनों को विभाग की सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) देवास जिले के संचालन/संधारण संभाग बागली एवं कन्नौद में वर्ष 2015-16 में राज्य शासन द्वारा वित्त पोषित कृषक अनुदान योजना, एस.एस.टी.डी. योजना (विभागीय), एस.एस.टी.डी. योजना (निविदा के माध्यम से) एवं स्वयं का ट्रांसफार्मर योजना में कार्य स्वीकृत किये गये तथा केन्द्र सरकार द्वारा वित्त पोषित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना स्वीकृत की गई है। इन योजनाओं की स्वीकृति दिनांक, कार्य प्रारंभ करने की दिनांक एवं कार्य पूर्ण करने की दिनांक पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ-01, अ-02, अ-03 एवं अ-04 अनुसार है। वर्ष 2016-17 में फरवरी-2017 तक राज्य शासन द्वारा वित्त पोषित कृषक अनुदान योजना, एस.एस.टी.डी. योजना (विभागीय), एस.एस.टी.डी. योजना (निविदा के माध्यम से), स्वंय का ट्रांसफार्मर योजना एवं मुख्यमंत्री स्थाई कृषि पम्प कनेक्शन योजना में कार्य स्वीकृत किये गये है जिसकी जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब-01, ब-02, ब-03, ब-04 एवं ब-05 अनुसार है। (ख) देवास जिले के संचालन संधारण संभाग बागली एवं कन्नौद में वर्ष 2015-16 में एवं 2016-17 में फरवरी-2017 तक केन्द्र सरकार एवं राज्य शासन द्वारा वित्त पोषित जिन योजनाओं में कार्य स्वीकृत हुए है उनमें से पूर्ण कार्यों का विवरण उत्‍तरांश (क) में वर्णित पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ-01, अ-02, अ-03, अ-04 एवं ब-01, ब-02, ब-03 एवं ब-04 अनुसार तथा अपूर्ण कार्यों का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-स-01, स-02, स-03 एवं द-01, द-02, द-03, द-04, द-05 अनुसार है। कार्यों के अपूर्ण रहने का प्रमुख कारण पहुँच मार्ग की अनुपलब्‍धता, खेतों में फसल खड़ी होना इत्यादि है। ओ.व्हाय.टी. योजनान्तर्गत स्वीकृत कार्य संबंधित आवेदक द्वारा पूर्ण कराये जाते है, अतः इनकी पूर्णता, संबंधित आवेदक पर निर्भर करती है। एस.एस.टी.डी. योजना (निविदा आधारित) के अंतर्गत कार्यादेश अनुसार संबंधित कार्य दिनांक 03/11/2017 तक पूर्ण किये जाने है। अपूर्ण कार्यों को सम्पादित कराने हेतु वितरण कंपनी द्वारा विभागीय तौर पर समय-समय पर समीक्षा कर आवश्यक कदम उठाये जाते है एवं निविदा आधारित कार्यों के लिए संबंधित निविदाकार फर्म को कार्य शीघ्र सम्पादित करने हेतु निर्देशित किया जाता है। (ग) प्रश्‍नाधीन कार्यों का भौतिक सत्यापन संबंधित सहायक यंत्री/कार्यपालन यंत्री (एस.टी.सी.) द्वारा किया जाता है। पहुँच मार्ग की उपलब्धता के अनुसार अपूर्ण कार्य पूर्ण किये जाने के प्रयास किये जावेंगे, अत: निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है तथापि मुख्यमंत्री स्थाई कृषि पम्प कनेक्शन योजना के अंतर्गत लंबित कार्यों को आवेदक द्वारा राशि जमा करने के उपरांत निर्धारित समयावधि 270 दिवस में पूर्ण कर दिया जाएगा। (घ) जी नहीं। अपूर्ण एवं अप्रारंभ कार्यों के कारण कृषकों एवं आमजनों को विभाग की सुविधाओं से वंचित नहीं होना पड़ रहा है क्योंकि सम्पूर्ण क्षेत्र में उपलब्ध अधोसंरचना के माध्यम से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। कृषक अनुदान योजना/मुख्यमंत्री स्थाई कृषि पम्प कनेक्शन योजना के अंतर्गत आवेदन देने वाले कृषकगण सामान्यतः अस्थाई सिंचाई पम्प कनेक्शन लेकर अपनी सिंचाई संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति कर लेते है।

इंदिरा सागर परियोजना की मुख्य नहर निर्माण

[नर्मदा घाटी विकास]

2. ( क्र. 622 ) श्री विजय सिंह सोलंकी : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इंदिरा सागर परियोजना की मुख्य नहर आरडी 96 से 107 के बीच नहर निर्माण की निर्माण कंपनी के.डी.एस. को हुए कथित भुगतान और निर्माण कंपनी द्वारा नहर निर्माण के अधूरे कामों की शिकायत के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं की गई। यदि कोई कार्यवाही की गई तो इस संबंध में हुए वरिष्ठ कार्यालय व ठेकेदार के मध्य हुए पत्राचार की प्रति देवें। (ख) उक्त निर्माणकर्ता कंपनी पर खनिज रॉयल्टी बकाया होने के बावजूद हुए भुगतान एवं धरोहर राशि भी जारी करने का कारण बतायें। (ग) उक्त निर्माणकर्ता कंपनी के विरूद्ध शिकायत की जाँच किसके द्वारा कब-कब की गई? जाँचवार जाँच प्रतिवेदन के विवरण सहित सूची देवें। (घ) अधीक्षण यंत्री द्वारा उक्त निर्माणकर्ता कंपनी के कार्यों की जाँच में दोषी पाये गये अधिकारी/कर्मचारी पर क्या कार्यवाही की गई? विवरण देवें।

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) निर्माण एजेंसी को भुगतान में अनियमितता के कारण श्री यू.के.पटसारिया कार्यपालन यंत्री के विरूद्ध विभागीय जाँच संस्थित की गई है और सेवानिवृत्‍त कार्यपालन यंत्री श्री एन.के.तिवारी के विरूद्ध विभागीय जाँच संस्थित करने हेतु प्रकरण मंत्रि-परिषद् के आदेशार्थ है। एजेंसी को अधूरे निर्माण के भुगतान की स्थिति नहीं है। दोषी अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही के लिये निर्माण एजेंसी से पत्राचार नहीं किया जाता। (ख) अंतिम देयक से बकाया राशि की वसूली की गई है। शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता है। (ग) एवं (घ) निर्माणकर्ता कंपनी के कार्यों की कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

महिला उत्‍पीड़न रोकने हेतु राज्‍य स्‍तरीय समिति का गठन

[महिला एवं बाल विकास]

3. ( क्र. 1456 ) श्री प्रताप सिंह : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या कामकाजी महिलाओं के यौन उत्‍पीड़न रोकने के लिए माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के दिशा निर्देशों के अनुरूप राज्‍यस्‍तरीय समिति का गठन किया गया है? यदि हाँ, तो इस समिति का गठन कब किया गया है तथा इस समिति के सदस्‍य कौन-कौन हैं एवं समिति की बैठकें कब-कब आयोजित की गई? (ख) समिति के समक्ष अभी तक महिला यौन उत्‍पीड़न की कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं तथा प्राप्‍त शिकायतों में से कितनी शिकायतों का निराकरण किया गया है एवं कितने शिकायती प्रकरण किन-किन कारणों से निराकरण हेतु शेष हैं, उनका निराकरण कब तक किया जावेगा? (ग) विगत 5 वर्ष में मध्‍यप्रदेश मंत्रालय में महिला यौन उत्‍पीड़न को रोकने एवं उसके समाधार हेतु गठित समिति के पास अब तक कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं? उनमें से कितनों का निराकरण हुआ एवं कितनी शेष हैं?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी नहीं, शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ख) प्रश्‍नांश के परिप्रेक्ष्य में प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता है। (ग) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट पर है।

परिशिष्ट - ''एक''

परित्‍याग किये गये बच्‍चों की जानकारी तथा शासन से प्राप्‍त राशि

[महिला एवं बाल विकास]

4. ( क्र. 1743 ) श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या महिला बाल विकास विभाग द्वारा परित्‍याग बच्‍चों को राशि प्रदाय पालन पोषण योजना के तहत की जाती है? यदि हाँ, तो खरगापुर विधानसभा सहित टीकमगढ़ जिले में वर्ष 2013 से प्रश्‍न दिनांक तक कितने बच्‍चों को राशि प्रदाय की गई? नामवार एवं ग्रामवार संपूर्ण जानकारी दें तथा किन संस्‍थाओं के माध्‍यम से दी गई है। (ख) क्‍या खरगापुर विधानसभा में परित्‍यागता बच्‍चों का पूर्ण परीक्षण करा लिया गया है या शेष है? कुल कितने बच्‍चे परीक्षण के दौरान पाये गये है तथा उक्‍त सत्‍यापन किन-किन अधिकारियों द्वारा किया गया विकासखण्‍ड सहित दिनांक सहित एवं अधिकारी के नाम सहित संपूर्ण जानकारी उपलब्‍ध करायें। (ग) क्‍या कलेक्‍टर टीकमगढ़ द्वारा इस योजना के संबंध में परीक्षण कराया था और गंभीर अनियमितताएं पाई गई थी? यदि हाँ, तो प्रश्‍नकर्ता के समक्ष इस पूरे प्रकरण की गंभीरता पूर्वक जाँच करायेंगे और जाँच उपरांत दोषी पाये जाने वाले अधिकारी के विरूद्ध दंडात्‍मक कार्यवाही करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें? (घ) क्‍या खरगापुर विधान में शेष जो ऐसे परित्‍यागता वाले बच्‍चे हैं जिन्‍हें इस योजना से लाभ नहीं मिला है, उसका पुन: परीक्षण करा कर लाभ देगें? यदि हाँ, तो समयावधि बतायें? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) समेकित बाल संरक्षण योजना के तहत देख-रेख एवं संरक्षण के जरूरतमंद बालकों को पालन-पोषण देख-रेख कार्यक्रम के तहत लाभान्वित किया जाता है परित्यक्त बच्चे भी इस श्रेणी में आते हैं। टीकमगढ़ जिले में इस श्रेणी के बच्चों को पालन पोषण योजना के तहत राशि प्रदाय की जाती है। टीकमगढ़ जिले में वर्ष 2013 से 126 बच्चों को राशि प्रदाय की गई। किशोर न्याय (बालकों की देख-रेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 74 में विहित प्रावधान अनुसार बच्चों की पहचान प्रकट नहीं की जा सकती है। राशि सीधे बच्चे एवं पालक के संयुक्त खाते में जमा की गई है किसी संस्था के माध्यम से नहीं दी गई है। (ख) योजना के तहत परित्यक्त बच्चों का परीक्षण एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। खरगापुर विधानसभा क्षेत्र में परित्यागता बच्चों का परीक्षण समय-समय पर किया जाता है। खरगापुर विधानसभा क्षेत्र में पालन-पोषण देखरेख कार्यक्रम के तहत 16 आवेदन प्राप्त हुए थे। परीक्षण उपरांत कुल 6 लाभान्वित बच्चों में परित्यक्त (परित्यागता) बच्चों की संख्या 01 है। सत्यापन करने वाले कर्मचारियों की सूची संलग्न परिशिष्ट पर है। (ग) प्रश्न दिनांक तक योजना के तहत अनियमितता की कोई भी शिकायत प्राप्त नहीं हुए है अतः शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) नवीन दिशा निर्देशों के तहत पात्र बच्चों को कार्यक्रम का नियमानुसार लाभ दिया जायेगा। यह सतत् प्रक्रिया है।

परिशिष्ट - ''दो''

राजीवगांधी विद्युतीकरण योजना के तहत ग्रामों में बिजली पहुंचाई जाना

[ऊर्जा]

5. ( क्र. 1744 ) श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या खरगापुर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अन्‍तर्गत स्‍वीकृत ग्रामों में विद्युतीकरण किया जाना शेष हैं? यदि हाँ, तो शेष ग्रामों की जानकारी उपलब्‍ध करायें? यदि नहीं, तो इस आशय की जानकारी दें कि किन-किन ग्रामों में विद्युतीकरण कब किया गया? क्‍या जिन ग्रामों को विद्युतीकृत किया गया है क्‍या वर्तमान में विद्युत प्रदाय किया जा रहा है? (ख) प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित शेष ग्रामों में कहीं पर खंबे मात्र लगाकर छोड़ दिया, कहीं पर खंबे लगाकर केबिल डाल दी, बिजली सप्‍लाई नहीं की जा रही है और बिल देना प्रारंभ हो गया है? यदि हाँ, तो कारण बतायें कि ऐसा किस कारण से हो रहा हैं? ग्रामवार सूची उपलब्‍ध करायें? (ग) क्‍या शेष कार्य 06 माह में पूरा करा देंगे? यदि हाँ, तो समयावधि बतायें? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें तथा नगरीय क्षेत्रों के मोहल्लों में बिजली लगाये जाने का क्‍या नियम है, जैसे पलेरा बगारभाटा में बिजली नहीं है वहां पर किस तरह बिजली पहुंचाई जावेगी? संपूर्ण जानकारी नियम सहित बतायें एवं पलेरा के बगार भाटा में बिजली कब तक लगा देगें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी नहीं, खरगापुर विधान सभा क्षेत्रांतर्गत 12वीं पंचवर्षीय योजना में राजीव गाँधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत स्‍वीकृत ग्रामों के विद्युतीकरण/सघन विद्युतीकरण के कार्यों में से कोई भी कार्य किया जाना शेष नहीं है। उक्‍तानुसार किये गये ग्रामों के विद्युतीकरण/सघन विद्द्युतीकरण के कार्यों की दिनांकवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। जी हाँ, जिन ग्रामों में उक्‍तानुसार विद्युतीकरण का कार्य किया गया है, उन सभी ग्रामों में वर्तमान में विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। (ख) जी नहीं, प्रश्‍नाधीन क्षेत्र के योजनांतर्गत स्‍वीकृत सभी ग्रामों का विद्युतीकरण/सघन विद्युतीकरण कार्य करने के उपरान्‍त किये गये विद्युत प्रदाय के विरूद्ध नियमानुसार उपभोक्‍ताओं को बिल दिये जा रहे है। अत: प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) उत्‍तरांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न नहीं उठता। नगर पंचायत पलेरा का वार्ड क्र.3 बगारभाटा नगरीय क्षेत्र में होने के कारण ग्रामीण विद्युतीकरण की प्रश्‍नाधीन योजना में शामिल नहीं है। नगरीय क्षेत्र सहित सभी श्रेणी के उपभोक्‍ताओं हेतु म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा विद्युत प्रदाय के प्रयोजन से विद्युत लाईन प्रदाय करने अथवा उपयोग किये गये संयंत्र हेतु व्‍ययों तथा अन्‍य प्रभारों की वसूली हेतु अधिसूचित विनियम 2009 (आर.जी.-31 (1) वर्ष 2009) के प्रावधानों के अनुसार आवेदक द्वारा राशि जमा कराए जाने पर विद्युतीकरण का कार्य किये जाने का प्रावधान है। उक्‍त विनियमों के अनुसार आवश्‍यक राशि जमा कराए जाने पर प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में विद्युतीकरण का कार्य किया जा सकेगा, अत: इस हेतु निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''तीन''

अमानक स्‍तर के केबल के कारण ग्रामों में विद्युत सप्‍लाई बंद होना

[ऊर्जा]

6. ( क्र. 1807 ) श्री रजनीश सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र केवलारी अंतर्गत प्रश्‍न दिनांक तक कितने ग्रामों में कौन-कौन सी योजना में कितनी-कितनी राशि से अविद्युतीकृत ग्रामों के विद्युतीकरण कार्य पूर्ण हो चुके हैं? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार कितने ग्रामों में विद्युतीकरण कार्य होना शेष हैं? इनमें कब तक विद्युतीकरण कार्य पूर्ण कर लिया जावेगा? (ग) क्‍या विधानसभा क्षेत्रातंर्गत आने वाले ग्रामों जैसे-कोपीझोला, पीपरदौन, पंड्रापानी, चिरईडोंगरी, हिर्रीटोला में विद्युतीकरण कार्य में अमानक स्‍तर का तार (केबल) का उपयोग किया गया जिसके कारण विगत 6 महीनों से विद्युत सप्‍लाई बंद है एवं वर्षों बाद विद्युत आने के बाद भी यहां निवासरत आदिवासी ग्रामीण अंधेरे में जीवन यापन कर रहें? यदि हाँ, तो इसका जिम्‍मेवार कौन हैं? दोषी के विरूद्ध इस संबंध में विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) विधानसभा क्षेत्र केवलारी के अंतर्गत वर्ष 2014-15 से वर्ष 2016-17 में प्रश्‍न दिनांक तक की अवधि में, शेष अविद्युतीकृत 10 ग्रामों में से 8 ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना एवं 2 ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य आई.ए.पी.योजना के अंतर्गत पूर्ण किया जा चुका है, जिसका ग्रामवार, योजनावार, विद्युतीकरण, कार्य की लागत राशि एवं कार्य पूर्णता की दिनांक सहित विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार विधानसभा क्षेत्र केवलारी के सभी अविद्युतीकृत ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है, अत: प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) जी नहीं, विधानसभा क्षेत्र केवलारी के अंतर्गत ग्राम कोपीझोला, पीपरदौन, पंड्रापानी, चिरईडोंगरी एवं हिर्रीटोला के विद्युतीकरण कार्य में अमानक स्‍तर के केबल का उपयोग नहीं किया गया है अपितु एन.ए.बी.एल. प्रमाणित प्रयोगशाला में जाँच कराए जाने के उपरांत निर्धारित मापदण्‍डों के अनुरूप पाए जाने पर ही केबल सहित विद्युत सामग्री का उपयोग विद्युतीकरण के कार्यों में किया गया है। उक्‍त ग्रामों में विद्युत प्रदाय बंद होने की शिकायत दिनांक 26.01.2017 को प्राप्‍त हुई थी, जिसमें यह पाया गया कि 11 के.व्‍ही. लाईन का केबल ज्‍वाइंट खराब होने के कारण केबल का कुछ भाग जल गया था, जिसे दिनांक 19.02.2017 को ठीक कर दिया गया है। वर्तमान में उक्‍त ग्रामों का विद्युत प्रदाय चालू है। अत: उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में किसी अधिकारी के दोषी/जिम्‍मेदार होने अथवा किसी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता।

परिशिष्ट - ''चार''

महिला एवं बाल विकास में पदस्‍थ कर्मचारी

[महिला एवं बाल विकास]

7. ( क्र. 2111 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) प्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग में कुल कितने कर्मचारी हैं? संविदा सुपरवाइजर की संख्‍या कितनी है? (ख) विभाग में कितने कर्मचारियों के पद, कितने समय से किस कारण रिक्‍त हैं? क्‍या शासन आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति रिक्‍त पदों पर करने का प्रावधान कर रहा है? यदि हाँ, तो तत्‍संबंधी ब्‍यौरा क्‍या है? (ग) संविदा सुपरवाइजर्स कब तक स्‍थायी किये जाएंगे?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) विभाग में एकीकृत बाल विकास सेवा प्रभाग में 3442, महिला सशक्तिकरण प्रभाग में 578 एवं एकीकृत बाल विकास सेवा तथा महिला सशक्तिकरण प्रभाग के सम्मिलित कैडर में कुल 2436 कर्मचारी कार्यरत है। वर्तमान में कुल 552 संविदा सुपरवाइजर कार्यरत है। पदवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र   एवं अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र   एवं अनुसार है। पदोन्‍नति, त्‍यागपत्र, सेवानिवृत्ति से समय-समय पर पद रिक्‍त होते रहते है। वर्तमान स्थिति में माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा पदोन्‍नति के प्रकरणों में यथास्थिति का आदेश दिए जाने के कारण पदोन्‍नति न होने से भी पद रिक्‍त है। सीधी भर्ती के रिक्‍त पदों की पूर्ति हेतु प्रोफेशनल एग्‍जामिनेशन बोर्ड भोपाल के माध्‍यम से कार्यवाही की जा रही है। जी हाँ, पर्यवेक्षकों के रिक्‍त पदों के 50 प्रतिशत पदों पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से भर्ती किए जाने का प्रावधान है। इस हेतु प्रोफेशनल एग्‍जामिनेशन बोर्ड भोपाल के माध्‍यम से भर्ती की कार्यवाही प्रचलन में है। (ग) संविदा सुपरवाइजर्स को सीधे स्‍थाई किये जाने का कोई प्रावधान नहीं है। विभागीय भर्ती नियम अनुसार संविदा सुपरवाइजर्स को प्रोफेशनल एग्‍जामिनेशन बोर्ड भोपाल द्वारा आयोजित परीक्षा में सम्मिलित होकर चयनित होने पर ही नियमित किए जाने का प्रावधान है।

झाबुआ उत्‍सव

[संस्कृति]

8. ( क्र. 2130 ) श्री शान्तिलाल बिलवाल : क्या राज्‍यमंत्री, संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) झाबुआ जिले में दिनांक 20 दिसम्‍बर 2016 से 31 दिसम्‍बर 2016 तक झाबुआ उत्‍सव मनाये जाने हेतु शासन द्वारा कोई स्‍वीकृति दी गई थी? अगर नहीं दी गई तो झाबुआ उत्‍सव किसके आदेश से और किस एन.जी.ओ. के माध्‍यम से खेल मैदान पर लगाया गया? (ख) झाबुआ उत्‍सव जिस एन.जी.ओ. के माध्‍यम से लगाया गया उस एन.जी.ओ. द्वारा क्‍या खेल मैदान पर समतलीकरण करवाया गया? अगर नहीं तो खेल मैदान पर झाबुआ उत्‍सव मनाने से पूर्व शासन द्वारा खेल मैदान के संबंध में कोई शर्त या नियम नहीं बताये गये थे? (ग) खेल मैदान पर हुए नुकसान हेतु शासन खेल मैदान के संरक्षण एवं आगे ऐसे आयोजन हेतु प्रतिबंध लगायेगा? यदि हाँ, तो कब तक ताकि खेल मैदान खिलाड़ि‍यों हेतु सुरक्षित रह सकें?

राज्‍यमंत्री, संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) झाबुआ जिले में 20 दिसम्‍बर, 2016 से 31 दिसम्‍बर, 2016 तक झाबुआ उत्‍सव मनाये जाने हेतु शासन द्वारा कोई स्‍वीकृति नहीं दी गई. शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता. (ख) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता. (ग) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता.

विकासखण्ड जवा अंतर्गत अतरैला विद्युत सब स्टेशन का लंबित निर्माण

[ऊर्जा]

9. ( क्र. 2384 ) श्री दिव्‍यराज सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विकासखण्ड जवा की ग्राम पंचायत अतरैला में 220/132 के.वी. का विद्युत सब स्टेशन प्रस्तावित था जिसका भूमि पूजन सन् 2014 में किया गया था? यदि हाँ, तो क्या कारण है कि इतना लंबा समय व्यतीत हो जाने के पश्चात भी उक्त सब स्टेशन का निर्माण प्रारंभ नहीं हो सका? (ख) उक्त विद्युत सब स्टेशन के निर्माण पूर्णता की अवधि विभाग द्वारा क्या निर्धारित की गई है? समय-सीमा बतावें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) विकासखण्‍ड जवा की ग्राम पंचायत अतरैला में 220/132 के.व्‍ही. का नहीं तथापि 132/33 के.व्‍ही. का एक उपकेन्‍द्र जायका योजनान्‍तर्गत स्‍वीकृत है जिसका भूमि पूजन सन् 2014 में किया गया था। जायका (जापान) द्वारा ट्रांसमिशन कार्यों के लिए ऋण प्रदान किया जा रहा है, जिसमें इस उपकेन्‍द्र निर्माण के कार्य को भी शामिल किया गया है। जायका वित्‍त पोषित परियोजना के कार्यों का क्रियान्‍वयन जायका द्वारा निर्धारित मार्गदर्शिका के अनुसार किया जाना है। परियोजना हेतु जायका (जापान) से ऋण अनुबंध किया जाकर निविदा संबंधी कार्यवाही प्रक्रियाधीन है, जिसके उपरांत न्‍यूनतम निविदाकार टर्न-की ठेकेदार द्वारा निर्माण की कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी। (ख) उक्‍त उपकेन्‍द्र निर्माण की पूर्णता की अवधि कांट्रेक्‍ट अवार्ड जारी करने की तिथि से 24 माह होगी। उत्‍तरांश (क) के अनुसार निविदा संबंधी कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। योजना के अनुसार उपकेन्‍द्र का निर्माण वित्‍तीय वर्ष 2019-20 में पूर्ण होना प्रस्‍तावित है।

अवैध शराब की बिक्री

[वाणिज्यिक कर]

10. ( क्र. 2491 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या पनागर विधान सभा क्षेत्र में अवैध शराब ब्रिक्री के कारण असामाजिक तत्वों द्वारा आमजन के साथ गुण्डागर्दी एवं हत्या जैसी घटनायें हो रही हैं? (ख) अवैध शराब ब्रिक्री रोकने के लिये शासन ने गत एक वर्ष में कब-कब, कहाँ-कहाँ कार्यवाही की है एवं कितनी शराब जब्त की है? (ग) क्या प्रश्‍नांश (ख) अंतर्गत उन स्थानों पर पुन: शराब की बिक्री हो रही हैं?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) पनागर विधानसभा क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री के कारण असामाजिक तत्‍वों द्वारा गुण्‍डागर्दी एवं हत्‍याएं जैसी कोई घटना प्रकाश में नहीं आई है। (ख) पनागर विधानसभा क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री को रोकने हेतु आबकारी एवं पुलिस विभाग द्वारा विगत एक वर्ष में 577 प्रकरण कायम किए गए, जिसमें 2126.95 लीटर हाथ भट्टी मदिरा एवं 1386.70 लीटर देशी मदिरा एवं 1 बॉटल विदेशी मदिरा जप्‍त की गई। आबकारी विभाग द्वारा की गई कार्यवाही के दिनांक एवं स्‍थान की जानकारी विधानसभा पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के अंतर्गत कायम किए गए प्रकरणों के स्‍थानों पर पुन: शराब की बिक्री न हो इस हेतु निरंतर गश्‍त एवं उपलंभन कार्य किया जा रहा है एवं समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर कार्यवाही की जाती है।

लाड़ली लक्ष्मी योजना का क्रियान्वयन

[महिला एवं बाल विकास]

11. ( क्र. 2492 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) विधानसभा क्षेत्र पनागर में लाड़ली लक्ष्मी योजना के अंतर्गत वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनांक तक कितने हितग्राहियों ने आवेदन दिये? (ख) प्रश्नांश (क) के अंतर्गत कितने हितग्राहियों के आवेदन स्वीकृत किये गये? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के अंतर्गत कितने हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया? (घ) कितने हितग्राहियों को अभी तक लाभ नहीं मिला?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) विधानसभा क्षेत्र पनागर में लाड़ली लक्ष्‍मी योजना के अंतर्गत वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनांक तक 4498 हितग्राहियों ने आवेदन दिये। (ख) प्रश्नांश (क) के अंतर्गत 4498 हितग्राहियों के आवेदन स्‍वीकृत किये गये। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के अंतर्गत 4498 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। (घ) प्रश्‍नांश (ग) के तारतम्‍य में प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है।

पर्यटन विकास को प्रोत्साहित करना

[पर्यटन]

12. ( क्र. 2953 ) श्री मोती कश्यप : क्या राज्‍यमंत्री, संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ करौंदी जिला कटनी ने अपने पत्र दिनांक 12-12-2015 द्वारा किन्हीं विधायक को संसूचित करते हुये कलेक्ट‍र कटनी अ.वि.अ. व तहसीदार ढ़ीमरखेड़ा तथा सांसद शहडोल को संसूचित करते हुए केन्‍द्र (मध्‍य स्‍थान) को सुधारने व संवारने मरम्‍मत करने, रंगरोगन करने, उद्यान व वृक्षारोपण करने, रंगीन विदयुत व्‍यवस्‍था बनाने की अनुमति की मांगी की है और जो किन्हीं दिनांक को प्रदान कर दी गई है? (ख) क्या प्रश्नांश (क) ने किन्हीं को संसूचित करते हुये दिनांक 21-12-2015 को प्रश्नांश (क) के अधिकारियों को किन्हीं संचालित गतिविधियों का लेख करते हुये उक्‍त किन्‍हीं कार्य की अपेक्षा की है? (ग) क्या प्रश्नकर्त्ता ने किसी को प्रेषि‍त पत्र दिनांक 9-1-2016 में दर्शित पर्यटन विकास की किन्हीं योजनाओं के साथ संलग्न पत्रों सहित कलेक्टर कटनी एवं रीजनल मैनेजर पर्यटन जबलपुर को अपने पत्र दिनांक 24-1-2016 में लेख कर कोई अपेक्षा किये जाने पर उनके द्वारा कब क्या कार्यवाही की गई है? (घ) क्या विभाग प्रश्नांश (क), (ख), (ग) के द्वारा स्वयं के व्यय पर किये जाने को तत्पर संस्थान के साथ अद्वितीय पर्यटन विकास की योजना बनाकर क्रियान्वयन करायेगा?

राज्‍यमंत्री, संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। (ग) जी हाँ, म‍हर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ ग्राम करौंदी का पत्र दिनांक 15.12.2015 एवं माननीय विधायक महोदय द्वारा पत्र दिनांक 24.01.2016 लिखा गया है। पर्यटन नीति 2016 के अंतर्गत स्‍थानीय स्‍तर पर विकास हेतु संसाधन जुटाने, समन्‍वय एवं क्रियान्‍वयन करने के लिए जिला पर्यटन संवर्धन परिषद् के गठन का प्रावधान किया गया है। उक्‍त पत्रों पर जिला पर्यटन संवर्धन परिषद् में विचार किया गया है। (घ) उतरांश '''' अनुसार।

माइक्रोइरीगेशन योजना

[नर्मदा घाटी विकास]

13. ( क्र. 2954 ) श्री मोती कश्यप : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या मा. मुख्यमंत्री ने दिनांक 10.08.2016 को ढ़ीमरखेड़ा व सिलौड़ी तथा दिनांक 11.09.2016 को बड़वारा व खमहारा और दिनांक 15.10.16 को पानउमरिया की जनदर्शन यात्रा में किन्हीं ग्रामों के खेतों तक सिंचाई जल पहुंचाने की घोषणा के अनुरूप किसी अनुमानित राशि की कोई योजना बनवायी है? (ख) योजना का क्रियान्वयन कब तक प्रारंभ कर पूर्ण कर दिया जावेगा?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) ढ़ीमरखेड़ा सूक्ष्‍म सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्‍वीकृति दिनांक 01/02/2017 को राशि रूपये 256.16 करोड़ की सैच्‍य क्षेत्र 15,000 हेक्‍टेयर में सिंचाई सुविधा प्रदाय करने के लिये दी गई है। निविदा आमंत्रित की गई है। बड़वारा-स्‍लीमनाबाद सूक्ष्‍म सिंचाई परियोजना की डी.पी.आर. बनाने के निर्देश मैदानी अधिकारियों को दिए गए हैं। परियोजना का संभावित सैच्‍य क्षेत्र 35,000 हेक्‍टेयर होकर लागत लगभग रूपये 600.00 करोड़ अनुमानित है। (ख) उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है।

सलैयाकलां-धामोनी में विद्युत सब स्टेशन की स्‍वीकृति

[ऊर्जा]

14. ( क्र. 3213 ) श्री हरवंश राठौर : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बंडा विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत वर्ष 2016-17 में सलैयाकलां-धामोनी में पं. दीन दयाल ग्राम ज्योति योजना अंतर्गत विद्युत सब स्टेशन की स्वीकृति प्रदान की गई थी। स्वीकृति उपरांत वर्तमान में निविदा प्रक्रिया प्रारंभ हुई है या नहीं? (ख) यदि निविदा प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हुई है तो कब तक प्रारंभ होगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, बंडा विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत वर्ष 2016-17 नहीं अपितु वर्ष 2015-16 में सलैयाकलां-धामोनी में नवीन 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र की स्‍थापना का कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के अंतर्गत स्‍वीकृत किया गया है। जी हाँ वर्तमान में उक्‍त कार्य सहित योजना का समस्‍त कार्य टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु निविदा कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न नहीं उठता।

राष्ट्रीय राजमार्ग व राजकीय राज्यमार्ग पर शराब दुकानों का संचालन

[वाणिज्यिक कर]

15. ( क्र. 3723 ) श्री सुदर्शन गुप्‍ता (आर्य) : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग व राजकीय राज्यमार्ग पर अंग्रेजी व देशी शराब की दुकानें मार्ग से 500 मीटर की दूरी पर संचालित करवाने के निर्देश दिये गये हैं? यदि हाँ, तो इन्दौर संभाग में इन राज्य मार्गों पर संचालित अंग्रेजी व देशी शराब की दुकानों की सूची उपलब्ध करावें व वर्तमान में इन मार्गों से कितनी दूरी पर संचालित हो रही हैं? (ख) क्या प्रश्नांश (क) अनुसार संचालित शराब की दुकानें माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार मार्ग से 500 मीटर की दूरी पर संचालित नहीं हो रही हैं? यदि हाँ, तो इस हेतु जिला प्रशासन द्वारा क्या कार्यवाही की जा रही है?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। इन्‍दौर संभाग में इन राज्‍य मार्गों पर संचालित देशी एवं विदेशी शराब दुकानों एवं वर्तमान में इन मार्गों से उक्‍त दुकान की दूरी संबंधी जानकारी विधानसभा पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) उक्‍त मदिरा दुकानों को माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के निर्देशानुसार जिले के राज्‍य राजमार्ग से 500 मीटर के अधिक दूरी पर आपत्ति रहित स्‍थल पर दिनांक 01.04.2017 से स्‍थापित की जायेगी। इस हेतु आवश्‍यक कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

विद्युत विभाग द्वारा मेंटीनेंस कार्य

[ऊर्जा]

16. ( क्र. 3762 ) श्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या गुना जिले में विद्युत कार्यों के मेंटीनेंस हेतु शासन से आवंटन प्राप्‍त होता है? यदि हाँ, तो विगत 2 वर्षों में कितनी राशि का आवंटन मिला? (ख) क्‍या प्राप्‍त आवंटन से गुना जिले में मेंटीनेंस के कार्य कराये गये हैं? यदि हाँ, तो कहाँ-कहाँ तथा कौन-कौन से ग्रामों में। (ग) क्‍या विधान सभा क्षेत्र बमोरी में भी मेंटीनेंस के कार्य कराये गये हैं? यदि हाँ, तो कौन-कौन से ग्रामों में एवं कौन-कौन से कार्य, क्‍यों? इस मेंटीनेंस में पुराने तारों को भी बदला गया है? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी नहीं। अपितु गुना जिले में संचालन एवं संधारण वृत्‍त, गुना को म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा विद्युत अधोसंरचना के रख-रखाव कार्यों के लिये राशि उपलब्‍ध कराई जाती है। विगत दो वर्षों में मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विद्युत अधोसंरचना के रख-रखाव के कार्यों के लिए रू. 169.09 लाख की राशि गुना जिले के लिये आवंटित की गई है। (ख) जी हाँ। विगत 2 वर्षों में गुना जिले के अंतर्गत कराए गए रख-रखाव के कार्यों की स्‍थान/फीडरवार एवं ग्रामवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अ-1 एवं अ-2 अनुसार है। (ग) जी हाँ। विगत 2 वर्षों में विधानसभा क्षेत्र बमोरी के अंतर्गत कराए गए रख-रखाव के कार्यों की, कार्य के विवरण सहित ग्रामवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ब-1 एवं ब-2 अनुसार है। उक्‍त रख-रखाव के कार्यों के अंतर्गत आवश्‍यकतानुसार पुराने तार को बदलने का कार्य भी किया गया है। अत: प्रश्‍न नहीं उठता।

विद्युत सप्‍लाई एवं विद्युत लाईन का स्‍थानांतरण

[ऊर्जा]

17. ( क्र. 3918 ) श्री रामप्यारे कुलस्ते : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) निवास विधानसभा क्षेत्रांतर्गत ग्राम चकदेही, कापा समरहाटोला में विद्युत लाईन ग्राम मेहदवानी से जुड़ी हुई हैं ये ग्राम सुदूर जंगलों के बीच में है और मेहदवानी से दूरी अत्‍याधिक है इन ग्रामों में विद्युत लाईन हमेशा बंद रहती है बारिश के समय में तो तीन महीने पूरी तरह बंद रहती है। (ख) इन ग्रामों की विद्युत लाईन बंद रहने की समस्‍या विगत विधानसभा सत्र के दौरान ध्‍यानाकर्षण एवं शून्‍यकाल में आने के बाद भी अभी तक यहाँ पर विद्युत व्‍यवस्‍था सुचारू ढंग से सही संचालित नहीं है, क्‍या इन ग्रामों में विद्युत व्‍यवस्‍था व्‍यवस्थित कर सुचारू ढंग से प्रदाय करने हेतु दिशा निर्देश जारी करेंगे, इन ग्रामों को मेहदवानी से कब तक हटा दिया जावेगा. (ख) कौआडोंगरी, जारगी जारगा बिलगढ़ा औढ़ारी आदि ग्रामों की विद्युत लाईन सप्‍लाई को आडोंगरी से ही की जावेगा।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित ग्रामों को 33/11 के.व्‍ही. मेहदवानी उपकेन्‍द्र से निर्गमित 11 के.व्‍ही. मटियारी फीडर से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। प्रश्‍नाधीन ग्रामों को सामान्‍यत: सतत् रूप से विद्युत प्रदाय उपलब्‍ध कराया जाता है, किन्‍तु इन ग्रामों के सुदुर वन क्षेत्र में स्थित होने के कारण, विशेषकर वर्षाकाल में आंधी-तूफान आने से विद्युत लाईन फाल्‍ट होने की स्थिति में कतिपय अवसरों पर विद्युत प्रवाह अवरूद्ध होता है, जिसे पहुँच मार्ग सुगम होने पर शीघ्र ही सुधार कर विद्युत प्रदाय पुन: चालू कर दिया जाता है। (ख) प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित ग्रामों में विद्युत व्‍यवस्‍था सुचारू रूप से संचालित है, अत: इस हेतु पृथक से दिशा-निर्देश जारी करने की आवश्‍यकता नहीं है। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍नाधीन ग्रामों की वर्तमान विद्युत व्‍यवस्‍था 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र मेहदवानी से हटाकर अन्‍यत्र किये जाने का कोई भी प्रस्‍ताव वर्तमान में विचाराधीन नहीं है। (ग) वर्तमान में प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित ग्रामों को विद्युत प्रदाय 33/11 के.व्‍ही. लिंगापौडी उपकेन्‍द्र से निर्गमित कौआडोंगरी फीडर से किया जा रहा है, जो कि स्‍थानीय भौ‍गोलिक संरचना के अनुरूप उचित है।

अन्‍य राज्‍यों के प्रतियोगिता हेतु संख्‍या का निर्धारण

[सामान्य प्रशासन]

18. ( क्र. 4023 ) श्री देवेन्द्र वर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. सरकार के विभागों में नियुक्ति हेतु आयोजित होने वाली प्रतियोगी परिक्षाओं में अन्‍य राज्‍यों के प्रतियोगियों के लिए कोई बंधन अथवा नियुक्ति का कोई प्रतिशत निर्धारित किया गया है? यदि हाँ, तो कितने प्रतिशत? (ख) क्‍या अन्‍य राज्‍यों में वहां के बेरोजगारों के हित में होने वाली नियुक्तियों की प्रतियोगी परिक्षाओं में म.प्र. के बेरोजगारों के लिए कुल पदों में 05 प्रतिशत का प्रावधान है? (ग) क्‍या म.प्र. का पाठ्यक्रम अन्‍य प्रांतों की तुलना में सरल एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के अनुरूप नहीं है? इसमें गुणात्‍मक सुधार के क्‍या प्रयास किये जा रहे हैं? (घ) क्‍या प्रदेश में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं होने से अन्‍य राज्‍यों के प्रतियोगियों के नियुक्ति पा जाने के कारण म.प्र. में बेरोजगारी बढ़ रही है? यदि हाँ, तो क्‍या म.प्र. सरकार प्रदेश के युवा बेरोजगारों के हित में कोई निर्णय लेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। शेषांश प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) अन्य राज्यों से संबंधित। (ग) म.प्र. की प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम विभागों की आवश्यकता के अनुरूप निर्धारित किये जाते है तथा इसमें सतत् संशोधन किये जाने की निरंतर प्रक्रिया है। (घ) राज्य शासन की सेवाओं में सीधी भर्ती के पदों पर प्रदेश के उम्मीदवारों की अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष एवं मध्यप्रदेश के बाहर के आवेदकों के लिए आयु-सीमा 35 वर्ष रखी गई है। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

विदयुतीकरण कार्य में अनियमितता

[ऊर्जा]

19. ( क्र. 4228 ) श्री अनिल फिरोजिया : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्‍जैन परिक्षेत्र में ए.डी.बी.पी.पी.आर. 34 योजनान्‍तर्गत वर्ष 2011-12 से 2014-15 तक विदयुतीकरण के क्‍या-क्‍या कार्य कराये गये? (ख) क्‍या ठेकेदार/फर्म से कोई बैंक ग्‍यारंटी/एफ.डी.आर. जमा की गई थी? (ग) क्‍या अनुबंध में लाईनलास कम करने एवं मेन्‍टेनेंस की कोई शर्त निर्धारित थी? यदि हाँ, तो क्‍या? (घ) क्‍या कार्य पूर्ण उपरांत लाइनलॉस कम हुआ? यदि नहीं, तो उक्‍त ठेकेदार/फर्म को किस आधार पर भुगतान किया गया? (ड.) क्‍या अनुबंध शर्तों के अनुसार विदयुत सामग्री गुणवत्‍ता पूर्ण पाई गई? यदि नहीं, तो इसके लिये कौन दोषी है क्‍या उनके विरूद्ध कोई कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) उज्‍जैन जिले (उज्‍जैन परिक्षेत्र) में ए.डी.बी.पी.पी.आर. 34 योजनान्‍तर्गत वर्ष 2011-12 से 2014-15 तक जिले के 14 छोटे नगरों में 11 के.व्‍ही. लाईन, 25 के.व्‍ही.ए. एवं 63 के.व्‍ही.ए. क्षमता के वितरण ट्रांसफार्मरों की स्‍थापना, 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्रों पर मीटरिंग इक्‍युपमेंट्स की स्‍थापना, निम्‍नदाब से उच्‍चदाब में परिवर्तन एवं रि-कंडक्‍टरिंग के कार्य किये गये। (ख) निविदा अनुबंध की शर्तों एवं नियमों के अनुसार ठेकेदार एजेन्‍सी से कान्‍ट्रेक्‍ट परफार्मेंस गारंटी की कुल रू. 2,43,40,895 की राशि बैंक गारंटी के रूप में जमा कराई गई। (ग) जी हाँ, निविदा अनुबंध की शर्तों एवं नियमों में लाइन लॉस कम करने एवं मेन्‍टेनेन्‍स की शर्तें निर्धारित थी, जिसके अनुसार लाइन लॉस निर्धारित सीमा तक कम नहीं होने पर ठेकेदार एजेन्‍सी के बिलों से लिक्विडेटेड डैमेज के रूप में पेनाल्‍टी स्‍वरूप राशि काटे जाने का प्रावधान था। विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-'' अनुसार है। (घ) जी हाँ। कार्य पूर्ण होने के उपरांत जिन नगरों का लाइन लॉस कम हुआ है उसकी जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-'' अनुसार है। ठेकेदार एजेन्‍सी को अनुबंध की शर्तों के अनुसार भुगतान किया गया एवं जिन नगरों में निर्धारित सीमा तक लाइन लॉस कम नहीं हुआ, उनके विरूद्ध लिक्विडेटेड डैमेज के रूप में 1,16,91,664 रू. की राशि काटी गई। (ड.) जी हाँ, निविदा अनुबंध की शर्तों एवं नियमों अनुसार विद्युत निर्माण सामग्री निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई। विद्युत सामग्रियों की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने हेतु अनुबंध की शर्तों के अनुसार विद्युत सामग्रियों के नमूनों का एन.ए.बी.एल. प्रमाणित प्रयोगशाला में परीक्षण कराया गया तथा परीक्षण रिपोर्ट में सामग्री की गुणवत्‍ता निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए जाने पर ही उसका उपयोग किया गया। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में किसी के दोषी होने अथवा किसी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता।

ग्रामों में विद्युत आपूर्ति बंद होना

[ऊर्जा]

20. ( क्र. 4229 ) श्री अनिल फिरोजिया : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्‍जैन जिले की तराना तहसील में विगत दो वर्षों से कितने एवं कौन-कौन से ग्रामों की विद्युत प्रदाय बंद की गई है? उसका क्‍या कारण है? (ख) क्‍या तहसील के विभिन्‍न ग्रामों में विद्युत मीटर रीडिंग के आधार पर बिल जारी किये जा रहे है? यदि हाँ, तो प्रत्‍येक माह एवरेज बिल जारी करने का क्‍या कारण है? (ग) जिन ग्रामों में लम्‍बे समय से विद्युत प्रदाय बंद की गई है उन ग्रामों के उपभोक्‍ताओं को नियमित बिल जारी करने का क्‍या कारण है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) उज्जैन जिले की तराना तहसील में विगत दो वित्‍तीय वर्षों (2014-15 एवं 2015-16) में किसी भी ग्राम का विद्युत प्रदाय बन्‍द नहीं किया गया है अपितु उक्‍त क्षेत्र में 3 ग्रामों यथा सिद्धीपुर निपानिया, सादीखेड़ी एवं नाहर खेड़ी में स्थापित सभी 7 वितरण ट्रान्सफार्मर फेल हो गये थे तथा इनसे संबद्ध उपभोक्‍ताओं द्वारा विद्युत देयकों की राशि जमा नहीं करने के कारण शत्-प्रतिशत राशि बकाया होने से इन वितरण ट्रान्सफार्मरों को बदला नहीं जा सका है। उक्‍त तीनों ग्रामों में स्थापित कुल 7 वितरण ट्रांसफार्मरों की वितरण केन्द्रवार फेल होने की दिनांक सहित जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जी हाँ, उज्जैन जिले की तराना तहसील के समस्त ग्रामों में कृषि श्रेणी को छोड़कर समस्त श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं, जिनके मीटर चालू हैं, को वास्तविक मीटर रीडिंग के आधार पर ही विद्युत देयक जारी किये जा रहे है। केवल मीटर खराब/बन्द/दोषपूर्ण होने की स्थिति में ही उपभोक्ताओं को म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता-2013 की कंडिका 8.35 के प्रावधानों के अनुसार औसत खपत के आधार पर बिल दिये जाते है। (ग) ऐसे उपभोक्ता जिनका कनेक्शन विद्युत देयक की राशि का भुगतान नहीं करने के कारण अस्थाई रूप से विच्छेदित है, उन उपभोक्ताओं को शेष बकाया राशि एवं म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता-2013, में वर्णित निम्नदाब के उपभोक्ताओं को विद्युत प्रदाय हेतु मानक अनुबंध में उल्‍लेखित प्रावधानों के अनुसार देय न्यूनतम प्रभारों आदि का प्रतिमाह विद्युत देयक जारी किया जाता है।

परिशिष्ट - ''पाँच''

कोलारस विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत फीडर सेपरेशन के तहत फीडर चालू करना

[ऊर्जा]

21. ( क्र. 4243 ) श्री रामसिंह यादव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कोलारस विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत जनवरी 2017 की स्थिति में फीडर सेपरेशन के तहत फीडर सेपरेशन का कार्य किया गया है? यदि हाँ, तो किन-किन फीडरों का किन-किन ग्रामों में फीडर सेपरेशन का कार्य कब पूर्ण किया गया है इनमें से कौन-कौन से फीडर कब-कब चालू किए गए? (ख) क्‍या फीडर सेपरेशन के तहत जिन फीडरों का कार्य पूर्ण हो चुका है वह फीडर प्रश्‍न दिनांक की स्थिति में चालू नहीं है? यदि हाँ, तो कौन-कौन से फीडर क्‍यों चालू नहीं है? उक्‍त फीडर कब तक चालू किए जावेंगे? कार्य पूर्ण फीडर सेपरेशन से कौन-कौन सा कितना मटेरियल कब चोरी हो गया है? (ग) कोलारस विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत कौन-कौन से फीडर सेपरेशन का कार्य किया जाना प्रस्‍तावित/शेष है? उक्‍त फीडर सेपरेशन कार्य कब तक पूर्ण कर चालू कर दिए जावेंगे? (घ) क्‍या फीडर सेपरेशन के कार्य पूर्ण हेतु कोई अवधि निर्धारित की गई थी? यदि हाँ, तो वह अवधि क्‍या थी? निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण क्‍यों नहीं किए गए? निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण न करने के लिए किन-किन के विरूद्ध क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, की गई तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, कोलारस विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत जनवरी 2017 की स्थिति में फीडर वि‍भक्तिकरण योजना के अंतर्गत 29 फीडरों के विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किया गया है। फीडरवार एवं ग्रामवार फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किये जाने एवं विद्युत प्रदाय चालू किये जाने संबंधी प्रश्‍नाधीन चाही गई जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (ख) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में फीडर विभक्तिकरण योजना के तहत जिन फीडरों का कार्य पूर्ण हो चुका है, उन सभी फीडरों से कार्य पूर्ण होने की दिनांक से विद्युत प्रदाय चालू है। प्रश्‍नाधीन कार्यपूर्णता वाले 11 के.व्‍ही. रामगढ़ फीडर के चोरी गये मटेरियल की जानकारी निम्‍नानुसार है:-

क्र.

फीडर का नाम

सामग्री

मात्रा

चोरी की दिनांक

1.

11 के.व्‍ही. रामगढ़ फीडर

कंडक्‍टर

2.72 कि.मी.

01.10.2016

11 के.व्‍ही. व्‍ही. क्रॉस आर्म

02 नम्‍बर

11 के.व्‍ही. टॉप क्‍लेम्‍प

02 नम्‍बर

11 के.व्‍ही. पिन इंसुलेटर

09 नम्‍बर

वर्तमान में रामगढ़ फीडर से विद्युत प्रदाय चालू है। (ग) कोलारस विधान सभा क्षेत्रांतर्गत 11 के.व्‍ही. के 27 फीडरों के विभक्तिकरण का कार्य किया जाना शेष/प्रस्‍तावित है, जिसकी फीडरवार जानकारी संलग्‍न प्ररिशिष्‍ट के प्रपत्र- अनुसार है। उक्‍त शेष/प्रस्‍तावित कार्यों को जून 2017 तक पूर्ण किये जाने के प्रयास किये जा रहे है। (घ) जी हाँ, फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण करने हेतु प्रभावी तिथि 29.8.2011 से 18 माह की अवधि निर्धारित की गई थी। ठेकेदार एजेंसी मेसर्स एन.सी.सी. लिमिटेड, हैदराबाद द्वारा विभिन्‍न कारणों यथापर्याप्‍त श्रमिक एवं सामग्री उपलब्‍ध नहीं कराया जाना, राईट ऑफ वे की समस्‍या, आदि के कारणों से निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण नहीं हुए है। उक्‍त ठेकेदार एजेंसी द्वारा निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण नहीं किये जाने के कारण उसके द्वारा प्रस्‍तुत देयकों से लि‍क्विडेटेड डैमेज के रूप में पेनल्‍टीस्‍वरूप रू. 3.72 करोड़ की राशि काटी गई है।

परिशिष्ट - ''छ:''

शिशु गृह, बाल गृह एवं बालिका गृह में की गई व्‍यापक अनयिमितताओं की जाँच

[महिला एवं बाल विकास]

22. ( क्र. 4244 ) श्री रामसिंह यादव : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या शिवपुरी नगर में शिशु गृह, बाल गृह एवं बालिका गृह नवम्‍बर 2016 की स्थिति में संचालित थे? यदि हाँ, तो इसका संचालन किस संस्‍था द्वारा कब से कहाँ पर किया जा रहा था? शिशु बाल, बालिका गृह के संचालन के लिए लागू गाइडलाइन/नियम/निर्देश की प्रति संलग्‍न कर जानकारी दें? कि इनमें किन-किन नियमों को पालन संस्‍था द्वारा नहीं किया जा रहा था? (ख) क्‍या उक्‍त शिशु बाल, बालिका गृह के संचालन हेतु संचालक संस्‍था को आर्थिक सहायता/अनुदान दिया गया है? यदि हाँ, तो उक्‍त संस्‍था को नवम्‍बर 2016 तक कितना अनुदान वर्षवार दिया गया? यह अनुदान किस-किस उद्देश्‍य हेतु कितना-कितना व्‍यय किया गया? (ग) क्‍या शिशु गृह, बाल गृह एवं बालिका गृह एक ही भवन में संचालित थे और उसी भवन में वह संचालक के पिता और भाई निवास करते थे? यदि हाँ, तो क्‍या भवन किराया एक ही भवन भुगतान हुआ? अथवा अलग-अलग भवन का? इन भवनों का निरीक्षण/सत्‍यापन किस-किस अधिकारी द्वारा कब-कब किया गया? (घ) क्‍या शिवपुरी में संचालित शिशु, बाल एवं बालिका गृह को दिए गए अनुदान में व्‍यापक पैमाने पर अनियमितता की गई? दिए गए अनुदान का विभाग द्वारा लेखे एवं भुगतान का सत्‍यापन किस अधिकारी ने किया? क्‍या शासन संस्‍था द्वारा किए गए व्‍यापक अनियमितताओं की उच्‍चस्‍तरीय जाँच कराकर कार्यवाही करेगा?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी हाँ। शिवपुरी नगर में शिशुगृह एवं बालगृह वर्ष 2016 की स्थिति में शकुंतला परमार्थ समिति शिवपुरी द्वारा टी.वी. टावर के पास पटेल नगर शिवपुरी में दिनांक 26/09/2011 से एवं बालगृह का संचालन दिनांक 29/01/2013 से पटेल नगर शिवपुरी में किया जा रहा था। गाइड लाइन/नियम/निर्देश की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। संस्था द्वारा शिशुगृह, बालगृह सम्बन्धी गाइड लाइन का पालन किया जा रहा था। (ख) जी हाँ। संस्था को नवम्बर 2016 तक दिए गए अनुदान की वर्षवार गृहवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। अनुदान का व्यय निवासरत बालकों के देख-रेख एवं संरक्षण हेतु किया गया है। (ग) जी नहीं। शिशुगृह एवं बालगृह पृथक-पृथक किराये के भवन में संचालित थे। जी नहीं। बालगृह किराये के भवन में ऊपरी मंजिल पर संचालित था एवं संचालिका के पिता एवं भाई भवन में निचली मंजिल में संचालिका के साथ निवासरत थे। दोनों गृह के भवनों का निरिक्षण/सत्यापन सम्बन्धी जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (घ) जी नहीं। दिए गए अनुदान के संबंध में चार्टर्ड एकाउंटेंट से ऑडिट कराया गया है। ऑडिट रिपोर्ट में कोई अनियमितता प्रतिवेदित नहीं हुई है। अतः जाँच का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता है।

नर्मदा घाटी विकास परियोजनाएँ

[नर्मदा घाटी विकास]

23. ( क्र. 4423 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शासन द्वारा मध्‍यप्रदेश में नर्मदा घाटी विकास परियोजना के तहत योजनाओं का संचा‍लन किया जा रहा है? यदि हाँ, तो कुल कितनी परियोजनाओं का कार्य किया जा रहा है? (ख) क्‍या नर्मदा घाटी विकास के तहत परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं? यदि हाँ, तो परियोजनावार, लागतवार ब्‍यौरा पिछले 5 वर्षों का दें। (ग) क्‍या प्रश्नांश (क) अनुसार योजनाओं का कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हुआ है? यदि हाँ, तो कौन-कौन सी परियोजनाएं अपूर्ण हैं? उनके अपूर्ण रहने के क्‍या कारण हैं? क्‍या अपूर्ण परियोजनाओं की लागत में वृद्धि हुई है? यदि हाँ, तो परियोजनावार लागत वृद्धि का ब्‍यौरा पिछले 5 वर्षों का दें। (घ) क्‍या नर्मदा घाटी विकास की कुछ परियोजनाओं का कार्य पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया है? यदि हाँ, तो क्‍यों?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) जी हाँ, 19 परियोजनाओं का। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) अपूर्ण परियोजनाओं की जानकारी एवं लागत में वृद्धि की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। विभाग वृहद परियोजनाओं का निर्माण करता है। वृहद परियोजनाओं की स्‍वीकृति के पश्‍चात वन-भूमि के उपयोग की अनुमति, पर्यावरण स्‍वीकृतियाँ, भू-अर्जन एवं पुनर्वास की अनुमतियों में समय लगता है। निर्माण कार्य शुरू होने के पश्‍चात पूर्ण होने में पाँच से दस वर्ष का समय लगता है। परियोजनाओं के क्रियान्‍वयन के पूर्व एवं उसके दौरान न्‍यायालयीन स्‍थगन, जन विरोध, भू-अर्जन, भू-गर्भीय संरचना, निर्माण एजेन्‍सी की क्षमता एवं दक्षता तथा वित्‍तीय संसाधनों की उपलब्‍धता आदि कारणों से निर्माण में समय लगना स्‍वाभाविक है। (घ) जी नहीं।

जनसम्पर्क निधि से स्वीकृत राशि लेप्स होना

[सामान्य प्रशासन]

24. ( क्र. 4807 ) श्रीमती ममता मीना : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वर्ष 2015-16 में विधानसभा क्षेत्र चाचौड़ा अन्तर्गत विधायक द्वारा अनुशंसित अनुदान ग्रहीताओं को कलेक्टर जिला गुना द्वारा राशि स्वीकृत कर एजेन्सी सी.ई.ओ. जनपद पंचायत को चाचौड़ा को किस दिनांक को प्रशासकीय स्वीकृति आदेश उपलब्ध कराया गया? पुनर्वांटन आदेश किस दिनांक को जारी कर संबंधित सी.ई.ओ. चाचौड़ा को किस दिनांक को उपलब्ध कराया गया? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार स्वीकृति आदेश के अनुसार क्या अनुदान ग्रहीताओं को राशि का वितरण क्यों नहीं किया गया? सी.ई.ओ. चाचौड़ा द्वारा रूपये 125000.00 की मांग कब-कब की गई, उन मांग पत्रों पर क्या-क्या कार्यवाही हुई? कितने पत्र लंबित रखे गये? (ग) क्या मार्च 2016 में स्वीकृत अनुदान का वितरण संबंधितों को कब तक किया जावेगा? (घ) प्रश्नांश '' में वर्णित पुनर्वांटन आदेश विलंब से सी.ई.ओ. को उपलब्ध कराने वाले एवं सी.ई.ओ. मांग पत्रों पर कार्यवाही न करने वाले कर्मचारियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की जावेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत चाचौड़ा को प्रशासकीय स्‍वीकृति आदेश क्रमांक 882 दिनांक 17.03.2016 को जारी की गई थी तथा पुनर्वांटन आदेश दिनांक 18.03.2016 को जारी कर सी.ई.ओ. जनपद पंचायत चाचौड़ा को उपलब्‍ध कराया गया। (ख) दिनांक 25.03.2016 को वित्‍त विभाग द्वारा बिल प्रस्‍तुत करने की सुविधा समाप्‍त कर दिये जाने के कारण जनपद द्वारा उक्‍त राशि आहरण नहीं की जा सकी। मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत चाचौड़ा द्वारा राशि रू. 1.25 लाख की मांग दिनांक 15.09.2016 एवं पत्र दिनांक 04.01.2017 द्वारा की गई। वित्‍तीय वर्ष समाप्‍त होने के कारण भुगतान संभव नहीं था। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) मार्च 2016 में स्‍वीकृत अनुदान में से वर्ष 2016-17 में माननीय विधायक द्वारा भजन कीर्तन मंडली समिति चक हिंगोनी को 7500/- रूपये की अनुशंसा की है। जिनकी कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। अन्‍य हितग्राहियों की अनुशंसा नहीं की गई। (घ) उत्‍तरांश (क), (ख) एवं (ग) के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

प्रशिक्षित एवं अप्रशिक्षित कर्मचारी के वेतनमान में अंतर का आंकलन

[वित्त]

25. ( क्र. 4980 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रशिक्षित एवं अप्रशिक्षित कर्मचारी के वेतनमान में अंतर का आंकलन वित्त विभाग किस मापदंड के आधार पर करता है। किस-किस विभाग में प्रशिक्षित एवं अप्रशिक्षित कर्मचारी के वेतनमान में क्या अंतर है। (ख) म.प्र.वेतन पुनरीक्षित वेतन नियम 1990 में लेखापाल/गणक संवर्ग में लेखा प्रशिक्षित के लिए/लेखा अप्रशिक्षित के लिए क्या क्या वेतनमान स्वीकृत थे एवं वेतन पुनरीक्षित वेतन नियम 1998 में नियम 10 के अनुसार क्या विशेष वेतन स्वीकृत किया था। (ग) म.प्र.वेतन पुनरीक्षित वेतन नियम 2006 में लेखापाल (लेखा प्रशिक्षित के लिए/लेखा अप्रशिक्षित के लिए) के वेतनमान में किन किन कारणों से एकरूपता लाई गई है। (घ) वित्त विभाग एनी संवर्ग के प्रशिक्षित एवं अप्रशिक्षित कर्मचारी के अलग-अलग वेतनमान जारी करते आया है, उस स्थिति में लेखापाल संवर्ग में लेखा प्रशिक्षित के लिए/लेखा अप्रशिक्षित के लिए अलग-अलग वेतनमान न होने का क्या कारण है, बतावें। भोपाल जिले के किस-किस जिले में किस-किस विभाग में लेखा प्रशिक्षित लेखापाल कार्यरत है। संख्यात्मक जानकारी देवें।

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) शासकीय सेवकों के वेतनमानों का निर्धारण समय-समय पर राज्‍य शासन द्वारा गठित वेतन आयोग/समिति द्वारा किये गये आंकलनों के आधार पर होता है। म.प्र.पुनरीक्षित वेतनमान 2009 में प्रशिक्षित व अप्रशिक्षित संवर्ग वन रक्षक संवर्ग के वेतनमानों में अंतर है जो कि क्रमश: ग्रेड वेतन रूपये 1800 एवं रू. 1900 है। (ख) म.प्र.वेतन पुनरीक्षण नियम 1990 में लेखापाल/गणक संवर्ग के लिये लेखा प्रशिक्षित एवं अप्रशिक्षित के लिये क्रमश: 1320-2040 एवं 1200-2040 वेतनमान रहा है। वेतन पुनरीक्षण नियम, 1998 के नियम 10 के अनुसार पात्रता नहीं होने से लेखापाल संवर्ग को विशेष वेतन स्‍वीकृत नहीं किया गया था। (ग) म.प्र.वेतन पुनरीक्षण नियम 2009 प्रशिक्षित व अप्रशिक्षित लेखापाल के लिये वेतनमान में एकरूपता म.प्र.वेतन पुनरीक्षण नियम, 1998 के परिणामस्‍वरूप रहा है। (घ) उपर्युक्‍त '''' अनुसार। भोपाल जिले के अंतर्गत अन्‍य कोई जिला नहीं होने से प्रश्‍नांश की जानकारी नहीं दी जा सक रही है।

ऊर्जा विभाग द्वारा की गई खरीदी की जानकारी

[ऊर्जा]

26. ( क्र. 5039 ) श्री अजय सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिंहस्‍थ 2016 के दौरान विभाग द्वारा किस मद से कितनी राशि व्‍यय कर कितनी मात्रा (संख्‍या) में किस दर पर क्‍या-क्‍या सामग्री किस नाम/पते वाली फर्मों/संस्‍थाओं/अन्‍य से कब-कब खरीदी? (ख) प्रश्नांश (क) में वर्णित आयोजन में सामग्री खरीदी के लिये क्‍या-क्‍या प्रक्रियायें अपनाई गयी? किस-किस को, किस सामग्री हेतु कितनी-कितनी राशि का कब-कब, किस प्रकार से, किस दर से भुगतान किया गया? (ग) प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित आयोजन हेतु खरीदी के लिए कब-कब निविदायें निकाली गयी? उन्‍हें किन-किन नाम के अखबारों में किस-किस दिनांकों को प्रकाशित कराया गया? किस-किस सामग्रियों के लिये निविदायें प्रकाशित नहीं करायी गयी? उन्‍हें किस दर पर, कितनी मात्रा में खरीदा गया? भुगतान किस-किस को कब-‍कब, कितना-कितना किया गया? (घ) क्‍या खरीदी गयी सभी सामग्रियों का दरवार क्‍या ऑडिट कराया गया? कराये गये ऑडिट की एक रिपोर्ट दें? अगर नहीं कराया गया तो क्‍यों कारण दें? नियम बतायें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) सिंहस्थ-2016 के दौरान म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी एवं म.प्र. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा सिंहस्थ मद में क्रय की गई सामग्री की मात्रा, दर, सामग्री प्रदायकर्ता फर्मों/संस्थाओं के नाम/पते, सामग्री क्रय पर व्‍यय राशि (सामग्री का मूल्‍य) एवं क्रय दिनांक संबंधी विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'', '', '', '' एवं '' अनुसार है। (ख) उत्तरांश में उल्‍लेखित सिंहस्थ आयोजन हेतु निविदा प्रक्रिया का पालन करते हुए सामग्री क्रय की गई है। क्रय की गई सामग्री हेतु भुगतान प्राप्‍त करने वाली फर्मों एवं भुगतान की गई राशि संबंधी प्रश्‍नाधीन चाहा गया विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'', '', '', '' एवं '' अनुसार है। समस्त फर्मों/संस्थाओं को क्रय की गई सामग्री के विरुद्ध भुगतान इलेक्ट्रानिक अंतरण/चेक के माध्यम से किया गया है। (ग) उत्‍तरांश (क) में उल्‍लेखित सामग्री क्रय हेतु निविदा जारी करने की तिथि संबंधी विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-'', '', '', '' एवं '' अनुसार है। क्रय नियमों के अनुसार रू. पाँच लाख से अधिक के अनुमानित क्रय हेतु दो समाचार पत्रों में निविदा प्रकाशन आवश्‍यक है। तदनुसार समाचार पत्र प्रकाशन संबंधी विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-'' एवं '' अनुसार है। उक्‍त सीमा से कम राशि के क्रय आदेश हेतु निविदा का समाचार पत्रों में प्रकाशन नहीं किया गया तथा अन्‍य माध्‍यमों, यथा पोर्टल/एम.पी. आन-लाइन, नोटिस बोर्ड के माध्‍यम से निविदायें आमंत्रित की गई। संबंधित विवरण (फर्म का नाम/दर/मात्रा/भुगतान) पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-'', '', '', '' एवं '' अनुसार है। (घ) जी नहीं। खरीदी गई सामग्री का दर आधारित ऑडिट नहीं कराया जाता है। अतः ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत किये जाने का प्रश्न ही नहीं उठता। कंपनी के क्रयादेशों का ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक के कार्यालय द्वारा किया जाता है। उक्त ऑडिट नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कर्तव्य, शक्तियाँ, सेवा की शर्तें) अधिनियम-1971 के प्रावधानों के अंतर्गत सम्पादित किया जाता है।

संस्‍थाओं की प्रदेश के ऊपर बकाया कर्ज की जानकारी

[वित्त]

27. ( क्र. 5045 ) श्री अजय सिंह : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश शासन के द्वारा वित्‍तीय वर्ष 13-14, 14-15, 15-16 एवं 16 प्रश्‍नतिथि तक कितनी- कितनी राशि का, किस मद में उपयोग हेतु कर्ज, किन किन संस्‍थाओं से किस ब्‍याज दर पर किन शर्तों पर लिया? माहवार/वर्षवार/कर्जवार/संस्‍थावार/मदवार/राशिवार ब्‍याज दर बार/शर्तवार विवरण दें? (ख) मध्‍यप्रदेश सरकार के द्वारा प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित समयानुसार सामान्‍य बजट के अलावा कब-कब कितनी राशि का अनुपूरक बजट सदन में रखा वर्षवार/माहवार/राशिवार दें? (ग) प्रश्नांश (क) में वर्णित समयानुसार वित्‍तीय वर्षों में राज्‍य शासन का बजट घाटा कितनी कितनी राशि का था? (घ) प्रश्नांश (क) में वर्णित समयानुसार प्रदेश का ग्रास स्‍टेट डोमिस्टिक प्रोडक्‍ट (जी.एस.डी.पी.) कितना रहने का अनुमान लगाया जा रहा है?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) मध्य प्रदेश शासन द्वारा वित्त लेखे अनुसार वित्तीय वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में शुद्ध ऋण क्रमशः रूपये 5536.18 करोड़, रूपये 10996.99 करोड़ एवं रूपये 15124.94 करोड़ लिया गया। संबंधित वर्षों के वित्तीय लेखों में उधार तथा अन्य दायित्वों की विस्तृत जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में प्रश्नावधि तक के वित्त लेखे नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक से प्राप्त न होने के कारण कर्ज की जानकारी दिया जाना संभव नहीं है। महालेखाकार के द्वारा प्रेषित वित्त लेखा के भाग 2 में वर्षवार, संस्थावार, मदवार, राशिवार, ब्याज दरवार लिये गये कर्ज का विवरण, विधानसभा के पुस्तकालय में अवलोकनीय है। (ख) मध्य प्रदेश शासन द्वारा सामान्य बजट के अलावा निम्न अवधि में निम्न राशि का अनुपूरक बजट सदन में प्रस्तुत किया गया :-

तालिका
(राशि करोड़ में)

वित्तीय वर्ष

प्रथम अनुपूरक अनुमान

द्वतीय अनुपूरक अनुमान

तृतीय अनुपूरक अनुमान

चतुर्थ अनुपूरक अनुमान

 

 

राशि

तिथि

राशि

तिथि

राशि

तिथि

राशि

तिथि

2013-14

32,70,07,90,500

जुलाई 2013

70,71,73,21,600

 जनवरी 2014

7,45,93,58,300

मार्च 2014

-

-

2014-15

86,51,68,32,000

दिसम्बर 2014

108,52,01,90,000

मार्च 2015

-

-

-

-

2015-16

85,91,21,22,300

जुलाई 2015

84,07,65,04,840

नवम्बर 2015

58,89,71,13,000

दिसम्बर 15

16,27,70,06,400

मार्च 2016

2016-17

143,67,54,24,900

जुलाई 2016

94,30,91,00,387

दिसम्बर 2016

-

-

-

-


(
ग) वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में राज्य शासन का राजकोषीय घाटा क्रमशः रूपये 9881.29 करोड़, रूपये 11651.59 करोड़ एवं रूपये 14064.71 करोड़ था। (घ) वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में राज्य शासन का ग्रास स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट क्रमशः रूपये 450900 करोड़, रूपये 508006 करोड़ एवं रूपये 565053 करोड़ था। वर्ष 2016-17 में ग्रास स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट का बजट अनुमान रूपये 713676 करोड़ एवं पुनरीक्षित अनुमान रूपये 645602 करोड़ अनुमानित है।

वित्‍त विभाग द्वारा बजट आवंटन

[वित्त]

28. ( क्र. 5098 ) श्री महेन्‍द्र सिंह : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शासन द्वारा वित्‍तीय वर्ष 2013-14 वर्ष 2014-15 वर्ष 2015-16 एवं वर्ष 2016-17 में किन-किन विभागों को किस-किस योजना एवं कार्य के लिए कितना-कितना बजट आवंटन किया गया? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार आवंटित बजट का विभागवार खर्च का ब्‍यौरा दें? (ग) क्‍या आंवटित बजट का विभाग द्वारा पूर्ण खर्च नहीं किया गया है? यदि हाँ, तो क्‍या बजट का पूर्ण खर्च न करने से कोई योजना/कार्य प्रभावित हुआ है? यदि हाँ, तो ब्‍यौरा देवें? यदि बजट की आवश्‍यकता नहीं थी तो मांग का क्‍या औचित्‍य है बतावें? (घ) बजट खर्च नहीं होने से अधूरी रही योजनाओं एवं कार्यों के लिये जिम्‍मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो क्‍यों? यदि हाँ, तो ब्‍यौरा देवें?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) शासन द्वारा वित्‍तीय वर्ष 2013-14 वर्ष 2014-15 एवं वर्ष 2015-16 में विनियोग लेखा वर्ष 2013-14 वर्ष 2014-15 एवं वर्ष 2015-16 अनुसार बजट प्रावधान किया गया। संबंधित विनियोग लेखे की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। वर्ष 2016-17 में भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक द्वारा अभी विनियोग लेखा तैयार नहीं किया गया है। अत: जानकारी दी जानी संभव नहीं है। (ख) प्रश्‍नांश "क'' अनुसार संबंधित विनियोग लेखों में खर्च का ब्‍यौरा निहित है। (ग) विभागों द्वारा बजट आवंटन का उपयोग योजना के दिशा-निर्देशों एवं कार्य में व्‍यय अनुसार किया जाता है। बजट का पूर्ण खर्च न करने से योजना/कार्य के प्रभावित होने संबंधी प्रकरण वित्‍त विभाग द्वारा प्रत्‍यक्षत: के संज्ञान में नहीं आते है। संबंधित विभाग से बजट की आवश्‍यकता के आंकलन उपरांत ही बजट प्रावधान किये जाते है। (घ) भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक द्वारा अंकेक्षण किया जाता है। यदि किसी अंकेक्षण टीप में तत्‍संबंध में कोई तथ्‍य संज्ञान में आता है, तो निर्धारित प्रक्रियानुसार कार्रवाई की जाती है।

बिजली के तारों का मरम्‍मत एवं ट्रांसफार्मर स्‍थापित विषयक

[ऊर्जा]

29. ( क्र. 5142 ) डॉ. रामकिशोर दोगने : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या 34 (क्रमांक 483) दिनांक 6.12.2016 के उत्‍तर '' और '' में शासन द्वारा रीवा जिले के ग्राम सगरा वार्ड क्रमांक 16 में बिजली के तारों का मरम्‍मत एवं ट्रांसफार्मर पुन: स्‍थापित कर बिजली आपूर्ति बहाल किया जाने का जवाब दिया है जबकि आज दिनांक तक तारों की मरम्‍मत एवं ट्रांसफार्मर स्‍थापित नहीं किये गये है और बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की क्‍यों? (ख) प्रश्‍नांकित क्षेत्र में कब तक वास्‍तविक रूप से बिजली के तारों की मरम्‍मत एवं ट्रांसफार्मर स्‍थापित कर बिजली आपूर्ति बहाल की जाएगी यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, विधानसभा सत्र दिसम्‍बर, 2016 में अतारांकित प्रश्‍न क्रमांक 483 दिनांक 06.12.2016 के उत्‍तर में प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित जानकारी दी गई थी। वर्तमान में रीवा जिले के ग्राम सगरा वार्ड क्रमांक 16 में विद्युत लाईन पूर्णत: व्‍यवस्थित हैं तथा इनसे सुचारू रूप से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। उल्‍लेखनीय है कि उक्‍त ग्राम में दिनांक 19.11.2016 को स्‍थापित किया गया वितरण ट्रांसफार्मर दिनांक 28.02.2017 को फेल हो गया था जिसे दिनांक 03.03.2017 को बदलकर विद्युत प्रदाय बहाल कर दिया गया है। (ख) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार वर्तमान में प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में विद्युत प्रदाय सुचारू रूप से चालू है तथा उपभोक्‍ताओं द्वारा किसी भी प्रकार की विद्युत संबंधी शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है। अत: प्रश्‍न नहीं उठता।

किसानों के विरूद्ध बनाये गये प्रकरण

[ऊर्जा]

30. ( क्र. 5189 ) श्री गोवर्धन उपाध्‍याय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विदिशा जिले के विधान सभा क्षेत्र सिरोंज/लटेरी क्षेत्र में विद्युत विभाग द्वारा विगत 3 वर्षों में किसानों के विरूद्ध कितने प्रकरण किन-किन लोगों के विरूद्ध झगड़े के प्रकरण बनाये गये हैं? (ख) प्रश्‍नांश (ख) अनुसार दर्ज प्रकरणों में से कितने प्रकरणों पर किन-किन सक्षम अधिकारियों के द्वारा जाँच की जा रही है? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में म.प्र.मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा विगत तीन वर्षों में किसानों/उपभोक्‍ताओं द्वारा मारपीट करने, गाली गलोच करने, कंपनी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने एवं शासकीय कार्य में बाधा उत्‍पन्‍न करने आदि विभिन्‍न विवादों से संबंधित 7 प्रकरणों में पुलिस थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, जिसका आरोपी के नाम सहित विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) उत्‍तरांश (क) में उल्‍लेखित सभी प्रकरण पुलिस विवेचना/न्‍यायालयीन प्रक्रियाधीन है, अत: पृथक से जाँच कराया जाना आवश्‍यक नहीं है।

परिशिष्ट - ''सात''

आंनद मंत्रालय खोलने का उद्देश्‍य

[आनन्द]

31. ( क्र. 5285 ) श्री गोविन्‍द सिंह पटेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नवनिर्मित आंनद मंत्रालय खोलने का क्‍या उद्देश्‍य है इस विभाग द्वारा लोगों को आनंद की अनु‍भूति हो सरकार इस हेतु क्‍या-क्‍या प्रयास कर रही है? (ख) क्‍या सरकार इस हेतु जनता के सुझाव भी मांग रही है? (ग) इस विभाग द्वारा लोग भाई-चारे के साथ मिलकर अच्‍छे कार्य करें आंनद की अनु‍भूति करें? क्‍या इसके लिये प्रशिक्षण देने की कोई योजना प्रस्‍तावित है? यदि हाँ, तो योजना का विवरण देंवे। (घ) क्‍या इस योजना के अंतर्गत बुद्धिजीवियों, धर्माचार्यों, प्रबुद्धजनों के प्रबोधन कार्यक्रम कराकर लोगों को सद्भाव एवं आनंद हेतु प्रेरित किया जायेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) आनंद विभाग के उद्देश्य संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र-1 पर है। विभाग द्वारा इस संबंध में आनंद उत्सव, आनंदम, अल्पविराम एवं आनंद सभा कार्यक्रम निर्धारित किय गये है। आनंद उत्सव का आयोजन दिनांक 14 जनवरी, 2017 से 21 जनवरी, 2017 के मध्य में आयोजित किया गया। (ख) जी नहीं। (ग) जी हाँ। विभाग द्वारा अपनी वेबसाइट के माध्यम से इच्छुक व्यक्तियों का आनंदक एवं आनंदम सहयोगी के रूप में पंजीयन कराया जा रहा है। आनंद विभाग द्वारा चुने हुए आनंदम सहयोगियों हेतु ''अल्पविराम'' कार्यक्रम के प्रशिक्षण का प्रावधान किया गया है। ''अल्पविराम'' कार्यक्रम का विवरण संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र-2 पर है। (घ) वर्तमान में विभाग ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है।

परिशिष्ट - ''आठ''

स्‍थायी पंप कनेक्‍शन योजना

[ऊर्जा]

32. ( क्र. 5286 ) श्री गोविन्‍द सिंह पटेल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुख्‍यमंत्री स्‍थाई पंप कनेक्‍शन योजना के अंतर्गत किसानों को स्‍थाई पंप कनेक्‍शन देने हेतु विभाग की क्‍या योजना है योजना से शत्-प्रतिशत किसान लाभांवित हो सकें इस हेतु विभाग क्‍या प्रयास कर रहा है एवं कौन-कौन किसान इस योजना के पात्र हैं? (ख) क्‍या इस योजना में विगत दो वर्ष पूर्व अटूट बंधन योजना जिसमें एक हजार फुट की दूरी तक के किसान स्‍थायी पंप कनेक्‍शनधारी हो गये थे क्‍या उनको भी इस योजना में सम्मिलित कर लाभांवित किया जावेगा? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में यदि किसानों को इस योजना में शामिल नहीं किया जाता है तो क्‍या उनके खेतों में विद्युत लाइन एवं ट्रांसफार्मर लगाने की व्‍यवस्‍था होगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) एवं (ख) प्रदेश में कृषि को लाभ का धंधा बनाने की मंशा से कृ‍षकों को कम लागत पर स्‍थायी पंप कनेक्‍शन प्रदान करने के लिये दिनांक 6.9.16 से ''मुख्‍यमंत्री स्‍थायी कृषि पंप कनेक्‍शन योजना'' आरंभ की गई है। इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2016-17 में लघु एवं सीमांत कृषकों (दो हेक्‍टेयर से कम भूमि धारक) में से अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग एवं सामान्‍य वर्ग के कृषकों से क्रमश: रूपये 5 हजार एवं रूपये 7 हजार तथा दो हेक्‍टेयर से अधिक भूमि धारक कृषकों द्वारा रूपये 11 हजार प्रति हॉर्स पावर की दर से राशि जमा कराने पर स्‍थायी पंप कनेक्‍शन दिऐ जा रहे है। म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा पूर्व में जारी की गई ''अटूट बंधन योजना'' के स्‍थायी पंप कनेक्‍शनों, जिन्‍हें उक्‍त योजना में सम्मिलित नहीं किया गया है, को छोड़कर प्रदेश के सभी कृषक योजनांतर्गत अंशराशि जमा कर लाभान्वित हो सकते हैं। योजना का लाभ 3 हॉर्स पावर एवं 3 हार्स पॉवर से अधिक भार वाले पंप कनेक्‍शनों को दिया जावेगा। (ग) म.प्र.पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा दिनांक 01.02.14 को लागू की गई ''अटूट बंधन योजना'' में शामिल उपभोक्‍ताओं को स्थायी कृषि पंप उपभोक्‍ताओं के समान पूरे वर्ष बिजली तथा स्‍थायी पंप कनेक्‍शन के समान सब्सिडी प्रदान की जा रही है। उक्‍त लाभ के दृष्टिगत उक्‍त योजना में शामिल कृषकों से पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा संपादित अनुबंध की शर्त के अनुसार कृषक को अपने खर्चे से या राज्‍य शासन की कृषक अनुदान योजना के अंतर्गत अंश राशि जमा कर छ: माह के अंदर उनके खेतों में विद्युत लाईन एवं ट्रांसफार्मर लगाने संबंधित प्रस्‍तावित कार्य को स्‍वयं पूर्ण करवाना था। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में दिनांक 06.09.16 को आरंभ की गई ''मुख्‍यमंत्री स्‍थायी कृषि पंप कनेक्‍शन योजना'' में म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के द्वारा लागू की गई ''अटूट बंधन योजना'' के तहत प्रदान किये गये पंप कनेक्‍शनों को शामिल नहीं किया गया है। अत: ''अटूट बंधन योजना'' के अंतर्गत पंप कनेक्‍शन को अस्‍थाई से स्‍थाई किये जाने हेतु लगने वाली विद्युत लाईनों एवं ट्रांसफार्मरों की व्‍यवस्‍था कृषकों को अपने स्‍वयं के व्‍यय से करनी होगी।

घोषणाओं को पूर्ण होना

[सामान्य प्रशासन]

33. ( क्र. 5316 ) श्री जितू पटवारी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिंहस्‍थ महापर्व के अंतर्गत आयोजित वैचारिक महाकुंभ में मुख्‍यमंत्री जी ने क्‍या-क्‍या घोषणाएं ग्राम पंचायत निनौरा तहसील उज्‍जैन में दिनांक 05.12.2016 को की थी घोषणावार जानकारी देवें? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अंतर्गत की गई घोषणाओं में से आज दिनांक तक घोषित घोषणाओं में से कितनी पूर्ण हो चुकी हैं और कितनी बची हैं? (ग) क्‍या की गई घोषणाओं के संदर्भ में मुख्‍यमंत्री जी को ग्राम सरपंच निनौरा तहसील उज्‍जैन की तरफ से दिनांक 05.12.2016 को स्‍मरण पत्र भेजा गया था यदि हाँ, तो पत्र पर क्‍या कार्यवाही हुई? (घ) सम्‍पूर्ण घोषित घोषणा पर कोई कार्य नहीं होने की जिम्‍मेदारी किस अधिकारी की है और लापरवाही के लिए उन पर क्‍या कार्यवाही की जावेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) प्रश्‍नांकित दिनांक को कोई घोषणा नहीं की गई है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) एवं (घ) जी हाँ। पत्र में उल्‍लेख अनुसार कोई घोषणा नहीं की गयी है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

लाडली लक्ष्‍मी योजना की फीडिंग

[महिला एवं बाल विकास]

34. ( क्र. 5329 ) इन्जी. प्रदीप लारिया : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सागर जिले की परियोजनाओं में कितने ऑपरेटर योजना के तहत किन-किन परियोजनाओं में पदस्‍थ हैं एवं किन-किन परियोजनाओं में कार्यरत ऑपरेटर द्वारा ऑनलाईन फीडिंग का कार्य किस दिनांक से प्रारंभ किया गया हैं? (ख) विगत एक वर्ष में परियोजनाओं में कितने फार्म ऑनलाईन दर्ज किये गये परियोजनावार, माहवार, ऑनलाईन फीडिंग की गई तथा कितने फॉर्म आउटसोर्स के माध्‍यम से ऑनलाईन फीड कराये गये? कितने हितग्राहियों को लाडली लक्ष्‍मी योजना के प्रमाण पत्र वितरित किये गये? (ग) फार्म फीडिंग एवं प्रमाण पत्र हेतु शासन द्वारा कितना आवंटन प्राप्‍त हुआ? फीडिंग एवं प्रमाण पत्र हेतु कितनी राशि आउटसोर्स से फीडिंग हेतु भुगतान किया गया? (घ) यदि फार्म फीडिंग का कार्य आउट सोर्स एजेंसी से कराया जाता है तो उक्‍त अवधि में आपरेटर द्वारा क्‍या कार्य कराया गया?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) सागर जिले की परियोजनाओं में 11 ऑपरेटर पदस्थ है। परियोजनावार सूची संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-अ पर है। जिला अंतर्गत आने वाली समस्त 16 परियोजनाओं में कार्यरत ऑपरेटरों के मार्गदर्शन में ऑनलाईन डाटा फीडिंग आदि योजना संबंधी कार्य दिनांक 01/06/2015 से किये जा रहे है। (ख) विगत एक वर्ष में कुल 48592 फार्म ऑनलाईन दर्ज किये गये है। परियोजनाओं की परियोजनावार ऑनलाईन फीडिंग एवं हितग्राहियों को वितरित प्रमाणपत्रों की संख्यात्मक जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-ब पर है। (ग) फार्म फीडिंग एवं प्रमाणपत्र हेतु शासन द्वारा 1781730.00/- रुपये आवंटन प्राप्त हुआ। फार्म फीडिंग एवं प्रमाणपत्र हेतु रुपयें 1457760.00/- शासन के निर्देशानुसार भुगतान किये गये। (घ) ऑपरेटर द्वारा योजना प्रारंभ वर्ष से योजना संबंधी आवेदनों का एकत्रीकरण, लाडली लक्ष्मी योजना के आवेदन पत्रों में संलग्न दस्तावेजों का परीक्षण एवं अपने समक्ष में ही आवेदनों के दस्तावेजो की स्केनिंग, ऑनलाईन डाटा फीडिंग, प्रमाणपत्र जनरेट कराये जाकर प्रमाणपत्र को ए-4 साईज में कलर प्रिन्ट कर लेमिनेट या प्लास्टिक फोल्डर तैयार कराकर प्रदाय कराने संबंधी कार्य कराया जा रहा है। इसके अलावा हितग्राही को प्रमाणपत्र वितरण का कार्य एवं पुराने राष्ट्रीय बचत पत्रो का एकत्रीकरण/संधारण कर पोस्ट आफिस से निधि में राशि अंतरण करवाने का कार्य एवं अन्य कार्यालयीन दायित्वों का निर्वहन इनके द्वारा किया जा रहा है।

परिशिष्ट - ''नौ''

कुपोषण के संबंध में

[महिला एवं बाल विकास]

35. ( क्र. 5341 ) श्री नीलेश अवस्‍थी : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) जबलपुर जिले में वित्‍त वर्ष 2014-15 से प्रश्‍न दिनांक तक कब कब कहाँ कहाँ कुपोषित बच्‍चे पाये गये तथा इनके पोषण हेतु क्‍या-क्‍या कार्य किए गए तथा इनमें से कितने बच्‍चों की मृत्‍यु हुई वर्षवार सूची देवें? (ख) विधानसभा की बैठक दिनांक 6 दिसंबर 2016 को तरांकित प्रश्‍न संख्‍या 23 क्रमांक 700 के उत्‍तर में मुख्‍यमंत्री जी द्वारा कुपोषण पर श्‍वेत पत्र जारी करने की कार्यवाही प्रचलन में है बतलाया गया था इस संबंध में हुई प्रगति से अवगत करावे एवं कुपोषण के संबंध में माननीय उच्‍च न्‍यायालय द्वारा हाल ही में दिया गया निर्णय क्‍या है तथा आने वाले समय में कुपोषण से मृत्‍यु होने पर किये दंडित करने की बात कही गई है? (ग) प्रदेश में कुपोषण की दर देश के अन्‍य प्रदेशों से अधिक रहने के क्‍या कारण है तथा इसकी रोकथाम हेतु शासन स्‍तर पर क्‍या प्रयास कर कौन-कौन सी योजनायें चलाई जा रही है? प्रश्‍नांकित अवधि में कहाँ-कहाँ पर कुपोषण से मृत्‍यु होने पर किसके द्वारा कब जाँच कराई गई तथा इसमें किसे दोषी पाया गया तथा दोषियों पर कब क्‍या कार्यवाही की गई?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जबलपुर जिले में प्रश्नांकित अवधि में पाये गये 05 वर्ष तक के कम वजन एवं अतिकम वजन के बच्चों से संबंधित जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार हैं। कुपोषित बच्चों के पोषण हेतु किये गये कार्यों से संबंधित पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार हैं। जिले में कुपोषण से किसी भी बच्चे की मृत्यु प्रतिवेदित नहीं हुई हैं। (ख) कुपोषण पर श्वेत पत्र जारी करने की कार्यवाही प्रचलन में है। जी हाँ श्योपुर जिले के परिप्रेक्ष्य में माननीय उच्च न्यायालय खंडपीठ ग्वालियर द्वारा जारी अन्तरिम आदेश की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार हैं। (ग) शिशु एवं बाल आहार पूर्ति संबंधी व्यवहारों के प्रति प्रचलित कुरीतियों एवं भ्रांतियां, बच्चों को लंबी अवधि तक केवल स्तनपान कराना एवं 6 माह उपरांत शिशु को उपरी संपूरक आहार प्रारंभ न करना, महिला साक्षरता दर में कमी होने से बच्चों की स्वास्थ्य संबंधी देखभाल में अभाव, व्यक्तिगत स्वच्छता एवं वातावरण की स्वच्छता पर समुदाय का कम ध्यान, शौचालय के उपयोग के संबंध में अरूचि, बाल भोजन में विविधता का अभाव, स्थानीय स्तर पर उपलब्ध ऊर्जायुक्त भोज्य पदार्थों के संबंध में अनभिज्ञता, झोलाछाप डॉक्टर एवं स्थानीय ओझा द्वारा झाड़-फूंक पर अधिक विश्वास, परिवार नियोजन साधनों के संबंधों में अज्ञानता व कुल प्रजनन दर अधिक होना इत्यादि प्रदेश में कुपोषण अधिक रहने के संभावित कारण हैं। आंगनवाड़ी केन्द्रों में 5 वर्ष तक के बच्चों का वजन लिया जाकर उनके पोषण स्तर का निर्धारण किया जाता है। कुपोषण की रोकथाम हेतु आई.सी.डी.एस. एवं अटल बिहारी बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन का क्रियान्वयन किया जा रहा है। अतिकम वजन वाले बच्चों को थर्डमील का प्रदाय एवं चिन्हित ग्रामों में स्नेह शिविरों का आयोजन किया जाता है। अतिकम वजन वाले बच्चों में से चिन्हित बच्चों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित पोषण पुनर्वास केन्द्रों में संदर्भित किया जाता है। अतिकम वजन वाले बच्चों के पोषण की देखभाल जनसमुदाय, जनप्रतिनिधियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा जिम्मेदारी लिये जाने हेतु स्नेह सरोकार कार्यक्रम का क्रियान्वयन किया जा रहा है। विभाग द्वारा कुपोषित बच्चों की वर्तमान में संख्या का आंकलन करने हेतु विशेष वजन अभियान का आयोजन 01 नवम्बर 2016 से 28 फरवरी 2017 तक किया गया। इस अभियान में सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों पर पर्यवेक्षकों द्वारा बच्चों का वजन लेकर उनके पोषण स्तर का निर्धारण किया गया। इस अभियान में चिन्हित कम वज़न एवं अतिकम वज़न के बच्चों के पोषण स्तर में सतत् सुधार तथा फॉलोअप हेतु विशेष पोषण अभियान का प्रांरभ किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कुपोषण की रोकथाम हेतु किये जा रहे प्रयासों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार हैं। कुपोषण से मृत्यु न होने से जाँच एवं कार्यवाही का प्रश्न ही नहीं है।

वेतनमान के संबंध में

[ऊर्जा]

36. ( क्र. 5342 ) श्री नीलेश अवस्‍थी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्तमान समय में म.प्र.पा.जन.क.लि. में कार्यरत कर्मचारियों/अधिकारियों को क्रमश: प्रथम द्वितीय एवं तृतीय उच्‍च वेतनमान देने के क्‍या नियम एव