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जनसमस्याओं को हल करने में अधिक सक्षम होगी ई-विधान सभा: श्री तोमर

तकनीक में एक कदम और आगे मप्र विधान सभा, पेपरलेस होगा अगला सत्र

 

                                                                                                  भोपाल, 28 अक्टूबर, 2026

पहले जब विधायकों को प्रश्न लिख कर जमा करने होते थे तब विधान सभा के एक सत्र में औसत 700 प्रश्न तक आया करते थे। ऑनलाइन व्यवस्था होने के बाद एक सत्र में प्रश्नों की संख्या चार हजार तक पहुंच गई है। ये चार हजार प्रश्न हर सदस्य के क्षेत्र की आवाज हैं। जब इतनी बड़ी संख्या में समस्याएं सरकार तक पहुंचती है और सरकार इनका निराकरण करने के लिए व्यवस्थाओं को अधिक सक्षम बनाती है। ई विधान सभा होने के बाद विधान सभा के कार्य में कुशलता और पारदर्शिता आ सकेगी और इस तरह जनता की समस्याओं को व्यापक रूप से समाधान हो सकेगा। 

मध्यप्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इस आशय के विचार राष्ट्रीय ई-विधान एप्लीकेशन नेवा के अंतर्गत विधायकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घघाटन करते हुए व्यक्त किए। मध्यप्रदेश विधान सभा में आयोजित तीन दिनी प्रशिक्षण कार्यक्रम में लोक लेखा समिति के अध्यक्ष श्री भंवर सिंह शेखावत, प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष श्री अजय विश्नोई, विधान सभा के प्रमुख सचिव श्री अरविंद शर्मा, प्रशिक्षण के लिए आए श्री अमित जैन तथा विधायकगण व उनका स्टॉफ उपस्थित थे। लोक लेखा समिति के अध्यक्ष श्री भंवर सिंह शेखावत ने नेवा के उपयोग पर प्रकाश डाला तथा इसे बेहतर तथा व्यापक बनाने के लिए सुझाव दिए। प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष श्री अजय विश्नोई ने नेवा की विषयवस्तु तथा महत्व को विस्तार से बताया। विधान सभा के प्रमुख सचिव श्री अरविंद शर्मा ने स्वागत भाषण दिया।

अपने मुख्य उद्बोधन में विधान सभा अध्यक्ष श्री तोमर ने कहा कि लंबे समय से हम सब लोग डिजिटाइजेशन की प्रक्रिया पर काम कर रहे थे, प्रसन्नता है कि अब यह कार्य अंतिम चरण में है। हम सभी जानते हैं कि अगर हमें आगे बढ़ाना है तो युग के साथ प्रतिस्पर्धा करनी होगी। जब भी कोई नई तकनीक आती है तो एक पक्ष उस नई विधा का विरोध करता है और एक पक्ष उसे नई विधा को अस्त्र बनाकर प्रतिस्पर्धा में अन्य लोगों के साथ विजय प्राप्त करता है। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी दूरदृष्टि वाले नेता हैं। अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल के शुरुआती दौर में जब उन्होंने डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया का लक्ष्य रखा तो इन्हें नारा माना गया। वैसे नारे जैसे सामान्य तौर पर राजनीतिक क्षेत्र में लगाए जाते हैं। लेकिन आज देश डिजिटल क्रांति के जिस स्थान पर खड़ा हुआ है उसकी तारीफ पूरी दुनिया कर रही है। तकनीक का उपयोग करके समय भी बचाया जा सकता है और गुणवत्ता भी प्रदर्शित की जा सकती है। तकनीक का उपयोग कर हम पूरी पारदर्शिता के साथ अपने जीवन को खुला रख सकते हैं तथा जिन मतदाताओं ने हमको निर्वाचित करके इस सदन में पहुंचाया उन्हें के सामने अपने कार्यों को रख सकते हैं। डिजिटल इंडिया का ही परिणाम है कि चाहे किसान सम्मान निधि हो या लाडली बहन योजना, एक बटन दबा कर पैसा सीधा हितग्राही के खाते में पहुंचा दिया जाता है। बीच में कोई भी बिचौलिया नहीं होता है। जबकि पहले की सरकारों में यही असंतोष रहता था कि पात्र व्यक्तियों को पैसा नहीं मिला। तकनीक समय भी बचाता है और पारदर्शिता भी लाती है।

 

 

 

प्रधानमंत्री श्री मोदी की सलाह का पालन

 

विधान सभा अध्यक्ष श्री तोमर ने तकनीक के विस्तार पर अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब वे केंद्र सरकार में मंत्री बने तो प्रधानमंत्री मोदी जी को तकनीकी के प्रति बहुत सजग पाया। उनकी कोशिश रहती थी कि उनके साथ काम करने वाले अधिकारी, मंत्री व सांसद भी उतनी दक्षता से तकनीक का उपयोग करें। श्री तोमर ने कहा कि तब मेरे लिए भी तकनीक का उपयोग आसान नहीं था। मैं बहुत धीरे-धीरे सीख रहा था। एक दिन व्यक्तिगत चर्चा में मैंने प्रधानमंत्री मोदी जी से कहा कि तकनीक मेरी रुचि का विषय नहीं है। मुझे इसका ज्ञान भी नहीं है। तब प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि उन्हें भी सब कुछ नहीं आता है। ईश्वर ने हमको सरकार में पहुंचाया है और हमारे पास साधन हैं, अधिकारी हैं, प्रशिक्षित लोग हैं, हमको उनका उपयोग करके इस काम को आगे बढ़ना चाहिए। श्री तोमर ने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि पीएम श्री मोदी की सलाह पर काम को आगे बढ़ाया और उस कारण हमारे विभाग को प्रशंसा की मिली।

 

विधान सभा के पेपरलेस होने की प्रक्रिया के संबंध में श्री तोमर ने एक अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा कि जब डिजिटल भारत की बात चल रही थी तब प्रधानमंत्री श्री मोदी को लगता था कि लोकसभा, राज्यसभा व देश की सभी विधान सभाएं एक स्थान पर उपलब्ध होनी चाहिए। इसी मंशा के अनुरूप नेवा योजना बनाई गई। संसदीय कार्य मंत्री होने के कारण मैंने इसके क्रियान्वयन का जिम्मा संभाला और इसे लांच किया। मध्यप्रदेश में हाउस कमेटी में इस पर विचार-विमर्श किया। मुझे प्रसन्नता है कि सभी सदस्यों की सहभागिता के परिणाम स्वरूप आज यह परियोजना मूर्तरूप ले रही है। अब मध्यप्रदेश विधान सभा भी राष्ट्रीय ई विधान एप्लीकेशन में दिखाई देगी। 

 

पहले सत्र इन विधायकों का प्रशिक्षण

 

श्रीमती सरला विजेन्द्र रावत, श्री अम्बरीष शर्मा, श्री केशव देसाई, डॉ. सतीश सिकरवार, श्री मोहन सिंह राठौड़,श्री फूल सिंह बरैया, श्री रमेश प्रसाद खटिक, श्री कैलाश कुशवाहा, श्री प्रीतम लोधी, श्री महेन्द्र रामसिंह यादव , श्री ऋषि अग्रवाल, श्री पन्नालाल शाक्य, श्रीमती प्रियंका पेंची,जगन्नाथ सिंह रघुवंशी, श्री ब्रजेन्द्र सिंह यादव, एडवोकेट श्रीमती निर्मला सप्रे, इंजीनियर प्रदीप लारिया, श्री वीरेन्द्र सिंह लोधी, श्री नितेन्द्र ब्रिजेन्द्र सिंह राठौड़, श्री अनिल जैन, श्री जयन्त मलैया, श्री हरदीप सिंह डंग, इंजीनियर नरेन्द्र प्रजापति, श्री रामनिवास शाह, श्रीमती मनीषा सिंह, श्री शिवनारायण ज्ञानसिंह, श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल, श्री अभिलाष पाण्डेय, श्री अशोक ईश्वरदास रोहाणी, श्री संजय उईके, श्री विश्वनाथ सिंह "मुलायम भैया", श्रीमती कंचन मुकेश तन्वे, श्री भंवरसिंह शेखावत, श्री श्याम बरडे।

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