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सहकारिता का मंत्र 'मैं' नहीं, 'हम', अधिकारी नवाचार से बदलें व्यवस्था -नरेंद्र सिंह तोमर

अधिकारियों से जनहित को प्राथमिकता देने का आह्वान

 

                                                                                           भोपाल, 5 अगस्त, 2026

लोकतंत्र की असली ताकत सरकारों से अधिक उन अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यों में दिखाई देती है, जो योजनाओं और कानूनों को आम जनता तक पहुंचाते हैं। अधिकारियों की भूमिका केवल नियमों का पालन कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देना भी उनकी जिम्मेदारी है। यह बात कहते हुए मध्यप्रदेश विधान सभा अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने अधिकारियों से नवाचार और जनहित को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।

वे बुधवार को विधान सभा परिसर में सहकारिता, श्रम विभाग एवं उप पुलिस अधीक्षक सहित लगभग 60 प्रशिक्षु अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। ये अधिकारी आर.सी.वी.पी. नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी के आधारभूत प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत भ्रमण पर आये हुये हैं।

अधिकारियों से मुलाकात के उपरांत विधान सभा अध्यक्ष श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि सहकारिता केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि रोजगार, आत्मनिर्भरता और सामाजिक विकास का प्रभावी माध्यम है। इसका मूल मंत्र "मैं नहीं, हम" है। उन्होंने गुजरात के सफल सहकारिता मॉडल और महिला सहकारी समितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश को भी ऐसे सफल प्रयोगों से सीख लेकर सहकारिता आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना चाहिए।

अमूल का उदाहरण देते हुए विधान सभा अध्यक्ष श्री तोमर ने कहा कि गुणवत्ता, पारदर्शिता और सामूहिक प्रयासों के कारण यह देश का अग्रणी सहकारी ब्रांड बना है। इसी प्रकार मध्यप्रदेश में भी सहकारिता के माध्यम से नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

श्रम विभाग की भूमिका पर बोलते हुए श्री तोमर ने कहा कि अधिकारियों को श्रमिकों के हितों की रक्षा और उद्योगों के विकास के बीच संतुलन बनाकर काम करना होगा। उद्योग और श्रमिक एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग बढ़ेंगे तो रोजगार बढ़ेगा और रोजगार बढ़ेगा तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

अपने केंद्रीय श्रम मंत्री के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) व्यवस्था के माध्यम से वर्षों से लंबित लगभग 22 से 23 हजार करोड़ रुपये की कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) राशि श्रमिकों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई थी। उन्होंने अधिकारियों से श्रमिकों के शोषण को रोकने और कानूनों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए श्री तोमर ने कहा कि बदलते समय में अपराध के स्वरूप भी बदल रहे हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस का दायित्व केवल कानून लागू करना नहीं, बल्कि जनता के मन में सुरक्षा और विश्वास का वातावरण तैयार करना भी है। उन्होंने कहा कि पुलिस की पहचान भय नहीं, बल्कि भरोसे की प्रतीक होनी चाहिए।

विधान सभा अध्यक्ष श्री तोमर ने उपस्थित सभी प्रशिक्षु अधिकारियों  से कहा कि वे सही बात कहने का साहस रखें, व्यवस्था को मजबूत करें और जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी अधिकारी अपने दायित्वों का ईमानदारी और समर्पण के साथ निर्वहन करते हुए मध्यप्रदेश को विकास और सुशासन के नए आयामों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इस अवसर पर विधान सभा के प्रमुख सचिव श्री अरविंद शर्मा  भी उपस्थित रहे।

 

विस/जसं/26

                                                                                                   महावीर सिंह

                                                                                                 सूचना अधिकारी