मध्यप्रदेश विधान सभा
प्रश्नोत्तर-सूची
फरवरी-मार्च, 2026 सत्र
बुधवार, दिनांक 25 फरवरी, 2026
भाग-1
तारांकित
प्रश्नोत्तर
कॉलोनाइजर
रामदेव बाबा
बारको
डेवलपर्स के
संचालकों के
विरूद्ध
कार्यवाही
[गृह]
1. ( *क्र. 2392 ) श्री चन्द्रशेखर देशमुख : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या कलेक्टर बैतूल के निर्देश पर मुख्य नगरपालिका अधिकारी, मुलताई द्वारा कॉलोनाइजर रामदेव बाबा बारको डेवलपर्स के संचालकों के विरुद्ध रहवासियों से धोखाधड़ी करने एवं सरकारी भूमि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर विक्रय करने हेतु दिनांक 01.09.2024 को प्राथमिकी क्र. 636/2024 दर्ज कराई गई है? यदि हाँ, तो किस-किस थाना प्रभारी द्वारा किस-किस दिनांक को क्या क्या कार्यवाही की गई है? (ख) प्रश्नांश (क) में रामदेव बाबा बारको डेवलपर्स के संचालकों की आज दिनांक तक गिरफ्तारी कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत नहीं करने का क्या कारण है, इसके लिये कौन-कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं, उन पर क्या कार्यवाही की जावेगी? समय-सीमा बताई जावे। (ग) क्या मुलताई पुलिस जानबूझकर अपने अनैतिक हितों को साधने के लिये रामदेव बाबा बारको डेवलपर्स के संचालकों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं कर रही है? यदि नहीं, तो न्यायालय में चालान किस-किस के विरुद्ध कब तक प्रस्तुत किया जावेगा? (घ) आरोपियों की गिरफ्तारी के लिये मुलताई पुलिस द्वारा कब-कब, क्या-क्या प्रयास किये गये? कितनी बार पुलिस टीम भेजी गई? उक्त में की गई कार्यवाही का विवरण प्रपत्र सहित उपलब्ध करावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल) : (क) जी हाँ, मुख्य नगरपालिका अधिकारी, मुलताई द्वारा रामदेव बाबा बारको डेवलपर्स के संचालकों के विरुद्ध दिनांक 01.09.2024 को दर्ज करायी गई एफ.आई.आर. का क्रमांक 636/24 नहीं है, अपितु 639/24 है। प्रकरण के अनुसंधान में थाना प्रभारियों द्वारा की गई कार्यवाही का विवरण संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। (ख) प्रकरण के एफ.आई.आर. के नामजद आरोपीगण महाराष्ट्र राज्य के निवासी हैं, वर्तमान में फरार हैं। फरार आरोपियों के गिरफ्तारी के सघन प्रयास किये जा रहे हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के पश्चात आगामी विवेचना में एकत्रित साक्ष्य के आधार पर अंतिम प्रतिवेदन के संबंध में निर्णय लिया जावेगा। कोई अधिकारी जिम्मेदार नहीं है। घटना क्रम में कॉलोनाइजर रामदेव बाबा बारको डेवलपर्स ने माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ जबलपुर में दिनांक 18.10.2024 को प्रकरण क्रमाक W.P. 32848/24 दायर किया था। माननीय न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई में दिनांक 23.10.2024 को कलेक्टर बैतूल के आदेश दिनाक 29.08.2024 पर स्टे प्रदान किया है। वर्तमान में प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। (ग) जी नहीं। जानकारी प्रश्नांश "ख" के उत्तर में समाहित है। (घ) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है।
जिला खनिज फाउंडेशन से किये गये विकास कार्य
[खनिज साधन]
2. ( *क्र. 331 ) श्री घनश्याम चन्द्रवंशी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शाजापुर जिले में पिछले 3 वर्षों में जिला खनिज फाउंडेशन (D.M.F.) से कहाँ-कहाँ विकास कार्य किये गये? (ख) क्या कालापीपल विधानसभा में भी जिला खनिज फाउंडेशन (D.M.F.) खर्च किया गया? यदि हाँ, तो पिछले 3 वर्ष कि जानकारी उपलब्ध करावें? यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - मंत्री (श्री चेतन्य काश्यप) : (क) शाजापुर जिले में पिछले 3 वर्षों में जिला खनिज फाउंडेशन (D.M.F.) से किये गये विकास कार्यों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं, कालापीपल विधानसभा में भी जिला खनिज फाउंडेशन (D.M.F.) से कार्य स्वीकृत हेतु प्रस्ताव प्राप्त नहीं होने से कोई कार्य स्वीकृत नहीं किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
कैम्पा योजना के तहत वनों का सुधार
[वन]
3. ( *क्र. 669 ) श्री उमाकांत शर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सामान्य वनमण्डल विदिशा के अंतर्गत किन-किन वन परिक्षेत्रों में एक दिनांक 01 जनवरी, 2023 से प्रश्नांकित दिनांक तक कैम्पा योजना, बिगड़े वनों के सुधार, नवीनरोपण क्षेत्र विकसित करने हेतु एवं अन्य कौन-कौन सी योजनाएं पौधारोपण किया जा रहा है? योजनाओं की जानकारी परिक्षेत्र का नाम, बीट का नाम, योजना की लागत, स्वीकृति वर्ष, पौधारोपण का लक्ष्य एवं पौधरोपण की प्रशासकीय स्वीकृति आदेश की छायाप्रति उपलब्ध करावें एवं कौन-कौन से प्रस्तावित हैं? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में वन परिक्षेत्र सिरोंज वन परिक्षेत्र उत्तर लटेरी, वन परिक्षेत्र दक्षिण लटेरी में किन-किन बीटों के कक्षों में कितना-कितना पौधारोपण का लक्ष्य था एवं कितने-कितने पौधों का रोपण किया गया और वर्तमान में कितने पौधे जीवित हैं? पौधों की गणना कब-कब की गई, बतावें एवं किन-किन अधिकारियों द्वारा उक्त पौधारोपण का निरीक्षण किया गया? निरीक्षण में क्या कमियां पाईं गईं? निरीक्षण प्रतिवेदन एवं की गई कार्यवाही की छायाप्रति उपलब्ध करावें। यदि कार्यवाही नहीं की गई है, तो कब की जावेगी। (ग) प्रश्नांश 'ख' के संदर्भ में क्षेत्र तैयारी हेतु फेंसिंग कार्य गड्ढा खुदाई कार्य, निदाई कार्य, पौधारोपण कार्य हेतु किन-किन व्यक्तियों से सामग्री क्रय की गई एवं संस्थाओं एवं व्यक्तियों से पौधे क्रय किये गये एवं गड्ढा खोदने के लिये किन-किन मजदूरों के बैंक खातों में कितनी-कितनी राशि का भुगतान कब-कब किया गया है? जानकारी उपलब्ध करावें। भुगतान के नियम निर्देश एवं शासन द्वारा किन-किन कार्यों की कितनी-कितनी दर निर्धारित की गई है? आदेश की छायाप्रति उपलब्ध करावें। (घ) क्या वन विभाग के अधिकारियों द्वारा जिले के बाहर के व्यक्तियों से कार्य करवाया जाता है एवं स्थानीय व्यक्तियों के खातों में मजदूरी की राशि का भुगतान किया जाता है, तो इसकी जांच विभाग द्वारा कब-तक की जावेगी? समय-सीमा बतावें। यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री दिलीप अहिरवार) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1 एवं 2 अनुसार है। (ख) प्रश्नांश (क) से संबंधित पौधा रोपण, जीवित पौधों की जानकारी एवं गणना से संबंधित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 3 अनुसार है। उक्त पौधा रोपण कार्य का वन परिक्षेत्र अधिकारी, उप वन मण्डल अधिकारी एवं वन मण्डल अधिकारी द्वारा क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान समय-समय पर निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के दौरान कोई भी कमियां नहीं पाई गई हैं। माह अक्टूबर, 2025 की स्थिति में किये गये मूल्यांकन निरीक्षण प्रतिवेदन की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-3 अनुसार है। मूल्यांकन प्रतिवेदन अनुसार कोई भी वृक्षारोपण असफल नहीं है, अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्नांश के संदर्भ में क्षेत्र तैयारी हेतु फेंसिंग सामग्री क्रय की गई संस्थाओं का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-4 अनुसार है। गड्ढा खुदाई कार्य, निदाई कार्य, पौधा रोपण कार्य संस्थाओं से नहीं कराया गया है। पौधा रोपण हेतु पौधे वन विभाग की सामाजिक वानिकी वृत्तों की रोपणियों से प्राप्त किये गये हैं। गड्ढे खुदाई के लिये मजदूरों के बैंक खातों में भुगतान की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-5 अनुसार है। शासन द्वारा वानिकी कार्यों के जॉबदर की छायाप्रति संलग्न है। (घ) जी नहीं, सामान्य वन मण्डल विदिशा के अन्तर्गत वानिकी कार्य जिले के बाहर के व्यक्तियों से कार्य नहीं कराया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
प्रदेश के समस्त न्यायधीशों को सुरक्षा हेतु एक-एक गनमैन उपलब्ध कराया जाना
[विधि एवं विधायी कार्य]
4. ( *क्र. 2732 ) श्री हरिशंकर खटीक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) समस्त न्यायाधीशों को सुरक्षा प्रदाय हेतु शासन ने प्रश्न दिनांक तक क्या-क्या नियम बनाए हैं? कृपया ऐसे आदेशों/नियमों की छायाप्रतियां प्रदाय करें। (ख) प्रश्नांश (क) के आधार पर बताएं कि प्रदेश में ऐसे कौन-कौन से मुख्य न्यायाधिपति से लेकर व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 (मजिस्ट्रेट) हैं, जिनको वर्तमान में शासन द्वारा सुरक्षा हेतु गनमैन उपलब्ध हैं एवं किस-किस का नहीं? ऐसे समस्त न्यायाधीश के नाम, पद सहित समस्त जानकारी प्रदाय करें। (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के आधार पर बताएं कि समस्त न्यायाधीश महोदयों को उनकी सुरक्षा हेतु क्या विभाग द्वारा सभी को एक-एक गनमैन दिए जाने का प्रावधान विचाराधीन है? यदि हाँ, तो ऐसे आदेश विभाग कब तक जारी करेगा? निश्चित समय-सीमा सहित बताएं। (घ) प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) के आधार पर बताएं कि विभाग समस्त न्यायाधीशों की सुरक्षा हेतु एक कानून/विधेयक विधानसभा में लाये जाने पर विचार करेगा, जिससे प्रदेश के समस्त न्यायधीशों को उनकी सुरक्षा हेतु एक-एक गनमैन प्राप्त हो सके। समस्त न्यायधीशों को कब तक गनमैन प्राप्त हो जायेंगे? समय-सीमा बताएं।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री गौतम टेटवाल) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
जिला अनूपपुर से हवाई सेवा प्रारंभ की जाना
[विमानन]
5. ( *क्र. 1219 ) श्री बिसाहूलाल सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या माननीय मुख्यमंत्री जी के अनूपपुर प्रवास दिनांक 16.08.2024 के दौरान प्रश्नकर्ता के द्वारा जिला मुख्यालय अनूपपुर में हवाई अड्डा (एयरपोर्ट) बनाये जाने एवं हवाई सेवा की शुरुआत कराये जाने की माँग की गई थी? यदि हाँ, तो प्रश्न दिनांक तक जिला अनूपपुर में बनाये जाने वाले एयरपोर्ट एवं हवाई सेवा प्रारंभ किये जाने के संबंध में क्या कार्यवाही की गई है? जानकारी उपलब्ध करायें। (ख) प्रश्नांश "क" अनुसार प्रश्नकर्ता द्वारा पूर्व के तारांकित प्रश्न क्रमांक 1316 के उत्तर दिनांक 05 अगस्त, 2025 के संदर्भ में दिये गये उत्तर में अवगत कराया गया था कि उक्त कार्य आवश्यकता, उपयोगिता, व्यवहारिकता आदि का समय रूप से परीक्षण कराये जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है? यदि हाँ, तो प्रश्न दिनांक तक उक्त कार्यवाही कहाँ तक पहुँची? स्थल चयन किया जा चुका है? यदि हाँ, तो उक्त स्थल की जानकारी देवें। (ग) प्रश्नांश "क" एवं "ख" अनुसार यदि स्थल चयन की गई है, तो उस पर अभी तक क्या कार्यवाही की गई है? यह भी जानकारी देवें कि कब तक हवाई सेवा प्रारंभ की जायेगी? क्या जिला अनूपपुर को अठ्ठाईस जिलों में हवाई पट्टी बनाये जाने के प्रस्ताव में सम्मिलित किया गया? (घ) प्रश्नांश 'क' 'ख' एवं 'ग' अनुसार जानकारी उपलब्ध करावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्रीमती प्रतिमा बागरी) : (क) जी हाँ। कलेक्टर, जिला अनूपपुर एवं आयुक्त विमानन को परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही हेतु लिखा गया है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। (ख) जी हाँ। विभाग द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। जी हाँ, तहसील अनूपपुर, जिला अनूपपुर अन्तर्गत ग्राम कदमटोला कटनी गुमला चन्डिल मार्ग में भूमि का प्रारंभिक रूप से चयन किया गया है। (ग) जिला अनूपपुर में हवाई अड्डा (एयरपोर्ट) निर्माण हेतु प्राक्कलन तैयार किया गया है। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। जिला अनूपपुर को अठ्ठाईस जिलों में हवाई पट्टी बनाये जाने के प्रस्ताव में सम्मिलित किया गया है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। (घ) जानकारी उत्तरांश (क), (ख) एवं (ग) में समाहित है।
आदिवासियों को राजस्व व वन भूमि से जबरन हटाने की कार्यवाही
[वन]
6. ( *क्र. 5 ) श्री मुकेश मल्होत्रा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वन विभाग श्योपुर के अधिकारी/कर्मचारी आदिवासी और अन्य गरीब लोगों आवास झोपड़ियों को तोड़ रहे हैं, आग लगा रहे हैं? आदिवासियों पर झूठी एफ.आई.आर. दर्ज कर रहे हैं? (ख) क्या जिला श्योपुर की तहसील कराहल, वीरपुर एवं विजयपुर में आदिवासियों को राजस्व व वन भूमि से खदेड़ा जा रहा है? यदि हाँ, तो क्यों? (ग) क्या विजयपुर विधानसभा क्षेत्र की तहसील विजयपुर, वीरपुर कराहल क्षेत्र के ग्राम सुखदेला, रही का सहराना पन्नावारी, महुआमार (धनायचा) गुरजा, खूंटका, कुसमानी का सहराना, जार की तलैया, धोरेट, मसावनी पीपरवाला (पनवाडा) धोरेट का सहराना, रनसिंह का पुरा, झंकापुर उमरी कलाँ, चाँदपुरा, पनार, ऊंकाल, डावली खेरोना, श्यामपुरा, सारसिल्ली, धमानी सेसईपुरा सहित कई वन ग्रामों की वन भूमि व राजस्व भूमि से गरीब आदिवासियों को उजाड़ने का काम वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी कर रहे हैं? (घ) प्रश्नांश (क), (ख), (ग) यदि सही है तो क्या विभाग व सरकार श्योपुर जिले में वन भूमि व राजस्व भूमि वनों में काबिज निवासरत आदिवासियों को वन अधिकार अधिनियम के तहत भू-अधिकार पत्र प्रदान करेगी? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? कारण बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री दिलीप अहिरवार) : (क) सामान्य वनमंडल श्योपुर के वन अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा आदिवासी और अन्य गरीब लोगों के आवास एवं झोपड़ियों को तोड़कर आग नहीं लगाई गई है और न ही कोई झूठी एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है। (ख) वन अधिकार पत्र हेतु पात्र किसी भी आदिवासी को वन भूमि से बेदखल नहीं किया गया है। राजस्व भूमि पर काबिज आदिवासियों को भूमि से बेदखल करने का अधिकार वन अधिकारियों को नहीं है। (ग) सामान्य वनमंडल श्योपुर के अंतर्गत प्रश्नांकित ग्रामों की वन भूमि से गरीब आदिवासियों को उजाड़ने का कार्य वन विभाग द्वारा नहीं किया जा रहा है। (घ) अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत दिनांक 13.12.2005 को काबिज पात्र आदिवासियों को वन अधिकार पत्र हेतु आवेदन करने पर 3069 वन अधिकार पत्र जारी किये जा चुके हैं। आवेदन प्राप्ति पर परीक्षण और अधिकार-पत्र जारी करने की प्रक्रिया सतत् स्वरुप की है।
सहारा इण्डिया कंपनी के विरूद्ध पंजीबद्ध प्रकरणों/जनप्रतिनिधियों के पत्र पर कार्यवाही
[गृह]
7. ( *क्र. 2608 ) श्री जयवर्द्धन सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सहारा इण्डिया कंपनी के विरुद्ध प्रदेश में कितनी एफ.आई.आर. किन-किन धाराओं में, कितनी राशि की, कंपनी के समस्त सेक्टरों में किन-किन अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध कब-कब पंजीबद्ध हुई? प्रकरणवार F.I.R. की प्रति सहित पृथक-पृथक बतायें। (ख) उपरोक्त के परिप्रेक्ष्य में निवेशकों से प्राप्त राशि, परिपक्वता राशि एवं निवेशकों की संपूर्ण जानकारी के साथ गौशवारा बनाकर दें? (ग) विभाग द्वारा सहारा समूह द्वारा खरीदी गई संपत्तियों को अटैच किये जाने हेतु कोई कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, तो क्या एवं यदि नहीं, तो क्यों? (घ) प्रदेश के निवेशकों का डाटा कंपनी लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट में सहारा सेबी कोर्ट ऑफ कंटेंट केस नंबर 412/2012 सरकार की तरफ से निवेशकों के संबंध में केस लगाने प्रक्रिया की गई है या नहीं बतायें? (ड.) पत्र क्र./दि. 1724/29.1.2026 जो सी.एम./एस.सी.एस., जी.ए.डी./ए.सी.एस., होम/एस.पी. कलेक्टर राजगढ़ को ईमेल से दिनांक 29.1.2026 दोप. 02:01 बजे प्रेषित है एवं संदर्भ 1-2 अन्तर्गत सा.प्र.वि. के आदेश दिनांक 22.03.2011 के अनुक्रम में कृत कार्यवाही की जानकारी दें, नहीं तो सा.प्र.वि. के आदेश के बिन्दु 5 अन्तर्गत कार्यवाही कर, कृत कार्यवाही की जानकारी दें। (च) थाना प्रभारी जैतवारा, जिला सतना का पत्र क्र. थाना/जैतवारा/997/2025, दिनांक 05.11.2025 जो संचालक, एटमोस इन्टरप्राइजेज, अंबाला केन्ट, हरियाणा को प्रेषित है, जारी करने के निर्देश-नियम-आदेश की प्रति दें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल) : (क) से (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है। (ड.) प्रश्नांश से संबंधित पत्र पुलिस अधीक्षक राजगढ़ के ई-मेल पर प्राप्त होना नहीं पाया गया। (च) थाना जैतवारा के अपराध क्रमांक 44/25 धरा 420 भा.द.वि. के प्रकरण में संचालक, एटमोस इन्टरप्राइजेज, अंबाला केन्ट, हरियाणा से प्रकरण की विवेचना से संबंधित धारा 94 बी.एन.एस.एस. के तहत आवश्यक बिन्दुओं पर जानकारी मांगी गई थी।
महारानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण में किये गये घोटाले की जांच
[सामान्य प्रशासन]
8. ( *क्र. 1698 ) श्री जगन्नाथ सिंह रघुवंशी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त ग्वालियर को प्रश्नकर्ता के पत्र दिनांक 03.04.2025 के द्वारा जिला अशोकनगर में महारानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण में किये गये घोटाले की जांच करने हेतु समस्त दस्तावेज प्रस्तुत कर जांच कर दोषियों पर कार्यवाही करने हेतु अनुरोध किया था? उक्त पत्र पर आज दिनांक तक क्या-क्या कार्यवाही की गई है? संपूर्ण कार्यवाही की छायाप्रति उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्नांश (क) में स्कूलों में फर्जी प्रशिक्षण देने वाले व्यक्ति ब्रजेश धुरेंटे, आरती विश्वकर्मा, निकिल धुरेंटे तथा आनश खान से राशि की वसूली की गई है अथवा नहीं? यदि नहीं, की गई तो क्यों नहीं की गई? उक्त प्रकरण में दोषी तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केन्द्र, अशोकनगर पर प्राथमिकी दर्ज की गई है अथवा नहीं? यदि नहीं, तो क्यों नहीं की गई? विलंब का कारण स्पष्ट करें। (ग) क्या उक्त शिकायत को जिला स्तर पर लंबित कर मामला रफा-दफा किया जा रहा है, जिस कारण से जांच लंबित हुई है। जांच लंबित रखने वाले अधिकारी का नाम व पदनाम बतावें यदि जांच जान-बूझकर लंबित की गई है, तो क्या शासन उक्त अधिकारी पर दण्डात्मक कार्यवाही करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्रीमती कृष्णा गौर) : (क) प्रश्नांश ''क'' में उल्लेखित शिकायत दिनांक 03.04.2025 पर जाँच प्रकरण क्रमांक-100/ई/2005 पंजीबद्ध होकर जांचाधीन है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) एवं (ग) उत्तरांश ''क'' के प्रकाश में प्रकरण जांचाधीन होने के कारण शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
पत्रकार सुरक्षा कानून
[जनसंपर्क]
9. ( *क्र. 611 ) श्री विपीन जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता के अतारांकित प्रश्न क्रमांक 803, दिनांक 29.7.2025 द्वारा प्रेषित उत्तर में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने हेतु सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश अनुसार समिति का गठन किया गया है? उक्त समिति में कौन-कौन सदस्य हैं, उसका विवरण देवें। (ख) उक्त समिति की बैठक दिनांक 05.10.2023 के बाद आज दिनांक तक क्यों नहीं की गई है? उक्त दिनांक की बैठक की कार्यवाही का विवरण देवें। (ग) क्या शासन प्रशासन पत्रकारों की सुरक्षा व्यवस्था करने के लिये गंभीर नहीं है? यदि है तो 3 वर्ष बीत जाने के बावजूद भी आज दिनांक तक समिति की बैठक क्यों नहीं की गई है? (घ) मध्य प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून कब लागू कर दिया जायेगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
भिकनगांव–बिंजलवाड़ा लिफ्ट सिंचाई परियोजना
[नर्मदा घाटी विकास]
10. ( *क्र. 966 ) श्रीमती छाया गोविन्द मोरे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिकनगांव–बिंजलवाड़ा लिफ्ट सिंचाई परियोजना के अंतर्गत भिकनगांव एवं पंधाना विधानसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले 129 गाँवों की लगभग 50 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा प्रदान की जानी थी, किंतु वर्ष 2026 तक भी अधिकांश किसान नर्मदा जल से वंचित हैं? (ख) लागत में लगभग 69 करोड़ रुपये से अधिक की वृद्धि किन तकनीकी अथवा प्रशासनिक कारणों से हुई? क्या इस लागत वृद्धि की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराई गई? (ग) यदि नहीं, तो इसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी अथवा एजेंसी की है? क्या इस परियोजना का कार्य वर्ष 2021–2024 के बीच पूर्ण होना था, किंतु वर्ष 2026 तक भी पाइप-लाइन, पंप हाउस एवं वितरण प्रणाली का कार्य अधूरा है? क्या कई स्थानों पर कम गहराई में पाइप डाले गये कहीं बगैर पाइप डाले नालियाँ खोदकर बंद कर दी गई? इन निर्माण दोषों के कारण भिकनगांव एवं पंधाना विधानसभा क्षेत्र के किसानों को हजारों रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है, क्या दोषी एजेंसी पर कोई कार्यवाही की गई है? यदि नहीं, की गई तो कब तक की जायेगी। (घ) इस परियोजना में रोशनहार गांव भी शामिल था, उसमें कार्य अभी तक प्रारंभ क्यों नहीं हुआ?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी) : (क) पंधाना विधानसभा के कोई गांव परियोजना में शामिल नहीं हैं। वर्तमान में पम्प हाऊस क्रमांक-01, 03 एवं 05 से सिंचाई हेतु कृषकों को जल उपलब्ध कराया जा रहा है, पम्प हाऊस क्रमांक-02 एवं 04 के लिये विद्युत लाईन के तार खिंचने के कार्य में किसानों द्वारा बाधा उत्पन्न की जा रही है। कार्य होने के उपरांत वंचित कृषकों को जल उपलब्ध कराया जावेगा। (ख) मूल्य समायोजन एवं जी.एस.टी. की राशि को शामिल करने से हुई है। पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति वित्तीय एवं तकनीकी परीक्षण उपरांत प्रदान की गई। (ग) उत्तरांश (ख) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्नांश लागू नहीं। समयावधि दिनांक 19.10.2021 तक थी। परियोजना अंतर्गत पम्प हाऊसों का निर्माण कार्य पूर्ण है, पाईप लाईन वितरण प्रणाली बिछाने के कार्य प्रगतिरत है। जी नहीं। समय-सीमा में कार्य पूर्ण नहीं किये जाने के कारण ठेकेदार को दिनांक 30.01.2026 से एक वर्ष के लिये काली सूची में प्रतिस्थापित किया गया है। शेष प्रश्न लागू नहीं। (घ) जी नहीं। शेष प्रश्न लागू नहीं।
चौरई विधानसभा क्षेत्रांतर्गत अवैध उत्खनन की रोकथाम
[खनिज साधन]
11. ( *क्र. 2438 ) चौधरी सुजीत मेर सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या चौरई विधानसभा क्षेत्र में विगत 3 वर्षों में (2022-23, 2023-24, 2024-25) अवैध खनन मामलों में निरंतर वृद्धि हुई है? (ख) अवैध खनन रोकने हेतु चौरई क्षेत्र में कितने स्थायी एवं अस्थायी चेक पोस्ट संचालित हैं तथा उनकी प्रभावशीलता क्या है? (ग) क्या चौरई क्षेत्र में संचालित सभी खदानों के पास पर्यावरणीय स्वीकृति एवं माइन क्लोजर प्लान उपलब्ध है? पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रति उपलब्ध करावें। निरीक्षण की संख्या क्या है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - मंत्री (श्री चेतन्य काश्यप) : (क) प्रश्नांश अनुसार उल्लेखित अवधि में चौरई विधानसभा अंतर्गत प्रभावी कार्यवाही किये जाने से अवैध खनन के दर्ज मामलों में वृद्धि हुई है। (ख) प्रश्नांश अनुसार स्थायी चेक पोस्ट स्थापित नहीं किये गये हैं, अस्थायी चेक पोस्ट स्थापित किये गये हैं, जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। (ग) जी हाँ। पर्यावरणीय स्वीकृति की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। उपरोक्त कुल 06 खदानों का निरीक्षण किया गया है।
मानवाधिकार आयोग/विद्युत विनायक आयोग एवं महिला आयोग के अध्यक्ष के रिक्त पद
[सामान्य प्रशासन]
12. ( *क्र. 1443 ) श्री अजय अर्जुन सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या मध्यप्रदेश मानवाधिकार आयोग, मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग तथा मध्यप्रदेश महिला आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद लंबे समय से रिक्त/अधूरे हैं, जिसके कारण ये संवैधानिक/वैधानिक संस्थाएं पूर्ण क्षमता से कार्य नहीं कर पा रही हैं? (ख) उपर्युक्त प्रत्येक आयोग में अध्यक्ष तथा सदस्यों के कुल स्वीकृत पद कितने हैं, दिनांक 25.02.2026 तक कितने पद भरे हुए तथा कितने पद रिक्त हैं, रिक्त पदों के रिक्त होने की तिथि एवं अवधि (कितने माह/वर्ष से रिक्त) क्या है? (ग) इन आयोगों में लंबित प्रकरणों (शिकायतों/सुनवाइयों) की संख्या क्या है तथा रिक्त पदों के कारण इन प्रकरणों के निस्तारण में होने वाली औसत देरी कितनी बढ़ी है? कृपया आयोगवार वर्षवार विवरण दिया जाये।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्रीमती कृष्णा गौर) : (क) म.प्र. मानव अधिकार आयोग में अध्यक्ष का पद तथा सदस्य का एक पद रिक्त है। सदस्य के एक पद पर कार्यरत सदस्य को अपने पद के साथ-साथ अध्यक्ष के रूप में कार्य करने हेतु अधिकृत किया गया है। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग में अध्यक्ष का पद दिनांक 03.01.2025 से रिक्त है। ऊर्जा विभाग के पत्र क्रमांक 3407/2025/तेरह/04, भोपाल दिनांक 23 अप्रैल, 2025 द्वारा सदस्य (विधि) को अपने कर्तव्यों के साथ-साथ अस्थायी रूप से अध्यक्ष पद के दायित्वों के निर्वहन करने के लिये आदेशित किया गया एवं उनके द्वारा दिनांक 28.04.2025 से कार्यकारी अध्यक्ष पद के कार्यभार का निष्पादन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा पूर्ण क्षमता से कार्यों का निष्पादन किया जा रहा है। मध्य प्रदेश महिला आयोग में अध्यक्ष तथा सदस्यों के पद दिनांक 24 मार्च, 2020 से रिक्त हैं। (ख) म.प्र. मानव अधिकार आयोग में अध्यक्ष का 01 पद तथा सदस्य के 02 पद स्वीकृत हैं। सदस्य का 01 पद भरा है तथा अध्यक्ष का पद दिनांक 08.10.2022 (03 वर्ष 04 माह) एवं सदस्य का 01 पद दिनांक 10.05.2025 (09 माह) से रिक्त है। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग में अध्यक्ष तथा सदस्यों के कुल 03 पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में सदस्यों के दोनों (02) पद भरे हुए हैं एवं अध्यक्ष का एक (01) पद रिक्त है। अध्यक्ष का पद दिनांक 03.01.2025 (एक वर्ष एक माह) से रिक्त है। ऊर्जा विभाग के पत्र क्रमांक 3407/2025/तेरह/04, भोपाल दिनांक 23 अप्रैल, 2025 द्वारा सदस्य (विधि) को अपने कर्तव्यों के साथ-साथ अस्थायी रूप से अध्यक्ष पद के दायित्वों के निर्वहन करने के लिये आदेशित किया गया एवं उनके द्वारा दिनांक 28.04.2025 से कार्यकारी अध्यक्ष पद के कार्यभार का निष्पादन किया जा रहा है। मध्य प्रदेश महिला आयोग में एक पद अध्यक्ष एवं 5 पद सदस्यों के स्वीकृत हैं, वर्तमान में अध्यक्ष का (1 पद) सदस्य (5 पद) रिक्त हैं। अध्यक्ष/सदस्यों के पद दिनांक 24 मार्च, 2020 से रिक्त हैं, अवधि लगभग (पांच वर्ष ग्यारह माह) से रिक्त हैं। (ग) म.प्र. मानव अधिकार आयोग में पंजीबद्ध एवं निस्तारित प्रकरणों की वर्षवार जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र 'अ' अनुसार है। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग से संबंधित जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब' अनुसार है। मध्यप्रदेश महिला आयोग में दिनांक 31.01.2026 तक प्राप्त लंबित प्रकरणों की संख्या लगभग 30524 है, जिसमें से 50 प्रकरणों के जांच प्रतिवेदन प्राप्त हुए हैं, जांच प्रतिवेदन के आधार पर आयोग गठन उपरांत प्रकरणों का निराकरण तत्काल किया जा सकेगा।
पुलिसकर्मिर्यों को शहीद का दर्जा तथा आर्थिक सहायता राशि दी जाना
[गृह]
13. ( *क्र. 824 ) श्री श्रीकान्त चतुर्वेदी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या दिनांक 21 अक्टूबर, 2025 को पुलिस स्मृति दिवस परेड मध्यप्रदेश में प्रदेश के मुख्यमंत्री जी द्वारा द्वारा 01 सितम्बर, 2024 से 31 अगस्त, 2025 तक की अवधि में कर्तव्य के दौरान शहीद हुए म.प्र. पुलिस के अधिकारियों/कर्मचारियों की नामावली प्रकाशन के दौरान ग्यारह पुलिसकर्मियों को शहीद का दर्जा देने एवं एक करोड़ परिवार को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गयी थी? (ख) प्रश्नांश 'क' के संबंध में यदि हाँ, तो ऐसे शहीदों के परिजनों को आर्थिक सहायता क्या प्रदान कर ही गयी है? जानकारी दी जावे और किन-किन को किन-किन कारणों से नहीं की गयी है तथा कब तक आर्थिक सहायता प्रदान करा दी जावेगी? समयावधि बतायी जावे। (ग) प्रश्नांश 'क' एवं 'ख' के प्रकरण में क्या स्वर्गीय श्री अनुज सिंह, आरक्षक क्र. 31, जिला-सतना को प्रश्न दिनांक तथा प्रश्नकर्ता द्वारा अनेकों बार पत्राचार करने के बाद भी माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा के अनुसार आर्थिक सहायता एवं इंश्योरेंस की राशि उनके निकटतम परिजनों को नहीं दी गयी है? यदि हाँ, तो कब तक आर्थिक सहायता प्रदान करा दी जावेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल) : (क) जी नहीं। (ख) प्रश्नांश (क) के संबंध में घोषणा नहीं की गई है। दिवंगत पुलिस अधिकारी स्व. सहायक उप निरीक्षक, श्री रामचरण गौतम, 25वीं बटालियन, भोपाल को मध्यप्रदेश पुलिस वर्ग असाधारण परिवार निवृत्ति वेतन नियम 1965 के अंतर्गत असाधारण परिवार पेंशन/उपादान एवं विशेष अनुग्रह राशि रूपये 10.00 लाख की स्वीकृति दिनांक 01.04.2025 को प्रदान करते हुये शेष 90.00 लाख की स्वीकृति म.प्र. शासन, गृह विभाग के आदेश क्रमांक/1/1/1/0347/2025-B-4-02 (HOM), दिनांक 04.02.2026 के माध्यम से प्रदान की गई है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) दिवंगत श्री अनुज सिंह, आरक्षक क्रमांक 81 का प्रकरण मध्यप्रदेश पुलिस वर्ग की असाधारण परिवार निवृत्ति वेतन नियम 1965 की परिधि में नहीं आता है, नियम की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
रेत का अवैध उत्खनन बन्द किया जाना
[खनिज साधन]
14. ( *क्र. 357 ) श्री सोहनलाल बाल्मीक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) परासिया विधानसभा क्षेत्र में जितने भी स्थानों (जैसे पैजनवाड़ा नदी, खैरीचैतू नदी, पिंण्डरई नदी, बिजौरीफुल्ला नदी, जाटाछापर पेंच नदी, सिंदरईगुरैयाथर नदी, कन्हान नदी ढाला, पलटवाड़ा नदी, फुटारा नदी, लोहांगी नदी) में जो रेत की खदानें शासन द्वारा ठेकेदारों को आवंटित की गई है, ठेकेदारों के द्वारा चिन्हित की गई रेत खदानों की सीमा खसरे, नक्शे के अनुसार रेत का खनन कार्य न करते हुये खदान की बाहरी सीमा नदी के अन्य अलग-अलग स्थानों से रेत का अवैध उत्खनन कार्य कर टैक्टर ट्रॉली, डंपरों व अन्य वाहनों द्वारा बिना रॉयल्टी के अवैध परिवहन किया जा रहा है, जिसके कारण शासन को लाखों रूपयों का राजस्व का नुकसान हो रहा है, परन्तु फिर भी शासन/खनिज विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है, जिसका क्या कारण है? (ख) प्रश्नांश (क) के अनुसार विभिन्न रेत खदानों से चल रहे रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन कार्य को शासन/खनिज विभाग द्वारा कार्यवाही करते हुये कब तक बंद करा दिया जायेगा? (ग) पेंच नदी जाटाछापर से हो रहे रेत के अवैध उत्खनन एवं परिवहन कार्य को तत्काल बन्द कराये जाने के संबंध में प्रश्नकर्ता द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, परासिया एवं जिला कलेक्टर तथा जिला खनिज अधिकारी छिंदवाड़ा को पत्र क्र.वि.स./परासिया/127/2026/36, दिनांक 15.01.2026 को प्रेषित किये गये हैं, जिन पत्रों पर समस्या के निदान हेतु अभी तक क्या कार्यवाही की गई है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - मंत्री (श्री चेतन्य काश्यप) : (क) प्रश्नांश अनुसार उल्लेखित रेत खदानों में से परासिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ठेकेदार ग्रेवलिया इंटरप्राईजेस प्राईवेट लिमिटेड को पूर्व से चिन्हित रेत खदान खैरीचेतु, बिजौरीफुल्ला, जाटाछापर, सिंदरईगुरैयाथर, फुटेरा नदी आवंटित की गई है। उपरोक्त आवंटित चिन्हित रेत खदानों की सीमा से बाहर ठेकेदार द्वारा अवैध खनन किये जाने संबंधी कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं आया है। अपितु परासिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत अन्यत्र स्थानों पर विभिन्न उल्लघंनकर्ताओं के विरूद्ध 01 जनवरी, 2025 से 31 जनवरी, 2026 तक अवैध रेत से संबंधित 30 प्रकरण पंजीबद्ध कर राशि रूपये 8,69,153/- जमा कराई जाकर अवैध खनन को रोकने की कार्यवाही की गई है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) प्रश्नांश (क) के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी हाँ। माननीय विधायक महोदय का पत्र जिला कार्यालय को दिनांक 05.02.2026 को प्राप्त हुआ है। प्राप्त पत्र अनुसार अवैध उत्खनन/परिवहन/चेक पोस्ट लगाये जाने हेतु संबंधित तहसीलदार, सहायक खनि अधिकारी एवं एम.डी.ओ. को लेख किया गया है, जिससे माननीय विधायक जी को अवगत कराया गया है। कार्यवाही प्रचलन में है।
आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया
[सामान्य प्रशासन]
15. ( *क्र. 1104 ) श्री विवेक विक्की पटेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला बालाघाट में समस्त विभागों के अंतर्गत कुल कितने आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं व शासन और नियुक्तिकर्ता आउटसोर्स कंपनी द्वारा उन्हें क्या-क्या सुविधा दी जा रही है? कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी का नाम व पदनाम सहित विभागवार पृथक-पृथक जानकारी देवें। (ख) राज्य में आउटसोर्स के माध्यम से विभागों में कर्मचारी नियुक्त किये जाने के क्या नियम हैं? प्रत्येक पद हेतु वेतनमान व कटौती सहित संपूर्ण नियमावली देवें। (ग) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में समस्त विभागों में रखे गये आउटसोर्स कर्मचारी की जिला स्तर पर क्या चयन प्रक्रिया अपनाई गई है? विवरण प्रस्तुत करें। (घ) विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 112 के अंतर्गत विकासखंड वारासिवनी एवं खैरलांजी में कुल कितने आउटसोर्स कर्मचारी कार्यरत हैं? विभागवार पृथक-पृथक सूची उपलब्ध कराएं।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्रीमती कृष्णा गौर) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अ' अनुसार है। (ख) आवश्यकता अनुसार विभागों एवं विभाग अंतर्गत उपक्रमों द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं म.प्र. भण्डार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियम 2015 (यथा संशोधित-2022) में दिये गये प्रावधान अनुसार निजी सेवा प्रदाता कंपनी/कॉन्ट्रैक्टर फर्म के माध्यम से अनुबंध अनुसार ली जाती है। आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन भुगतान विभागों द्वारा नहीं किया जाता, उन्हे अनुबंधित सेवा प्रदाता कंपनी/कॉन्ट्रैक्टर फर्म द्वारा भुगतान किया जाता है। (ग) आउटसोर्स कर्मचारियों की जिला स्तर पर चयन प्रक्रिया नहीं होती है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब' अनुसार है।
अस्थाई कर्मियों के पदों को सांख्येतर घोषित किया जाना
[वित्त]
16. ( *क्र. 571 ) श्री महेश परमार : क्या उप मुख्यमंत्री, वित्त महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वित्त विभाग के परिपत्र क्रमांक 2232/R-512/2024/नियम/चार, दिनांक 22 दिसंबर, 2025 तथा मंत्रि-परिषद के आदेश (आइटम क्रमांक-14, दिनांक 16 दिसंबर, 2025) के माध्यम से अस्थायी, कार्यभारित, आकस्मिकता, स्थायीकर्मी सहित 7 श्रेणियों के कर्मचारियों को समाप्त कर उन्हें सांख्येतर घोषित किया गया है? यदि हाँ, तो उक्त दिशा-निर्देशों की पूर्ण प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराएं? (ख) इस निर्णय से प्रदेश में विभागवार एवं श्रेणीवार कुल कितने कर्मचारी प्रभावित होंगे? उनके लिये सरकार द्वारा प्रस्तावित संक्रमण (Transition) अथवा पुनर्वास योजना क्या है? (ग) वर्ष 2010 से 2025 तक उक्त 7 श्रेणियों में कुल कितनी नियुक्तियाँ की गईं तथा इनमें से कितने कर्मचारियों को नियमित/स्थायी किया गया? विवरण विभागवार उपलब्ध कराएं। (घ) वर्तमान में इन कर्मचारियों की सेवाएँ समाप्त होने अथवा सांख्येतर घोषित किये जाने से विभागीय कार्यों पर क्या प्रभाव पड़ेगा तथा शासन द्वारा कार्य संचालन हेतु वैकल्पिक व्यवस्था क्या की गई है? (ड.) इस निर्णय के कारण बेरोजगार होने वाले कर्मचारियों एवं उनके परिवारों के हित में क्या अनुकंपा नियुक्ति, पुनर्नियोजन अथवा पुनर्वास की कोई योजना है? यदि हाँ, तो वर्तमान में ऐसे कितने प्रकरण लंबित हैं? (च) इस नीति निर्णय से प्रदेश में कुल कितने कर्मचारी एवं कितने लाख युवा प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे तथा भविष्य में रोजगार सृजन हेतु शासन की क्या ठोस योजना है? (छ) यह नीति कब से और कब तक लागू की जायेगी तथा किन-किन विभागों के कौन-कौन से पदों/केडर को सांख्येतर श्रेणी में लिया जायेगा?
उप मुख्यमंत्री, वित्त ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी नहीं, वित्त विभाग के परिपत्र दिनांक 22.12.2025 द्वारा स्थायी एवं अस्थायी पदों का विभेदीकरण समाप्त किया गया है तथा कार्यभारित एवं आकस्मिक निधि के पद, स्थायीकर्मी, स्थायी वर्गीकृत कार्मिक सांख्येत्तर घोषित किये गये हैं। शेष का प्रश्न ही नहीं उठता। (ख) राज्य शासन के इस निर्णय से कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होगा। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) नियुक्ति की कार्यवाही एक सतत् प्रक्रिया है, संख्या की जानकारी दिया जाना संभव नहीं है। (घ) विभागीय कार्य पर कोई प्रभाव नहीं होगा। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ड.) उत्तरांश 'क', 'ख', 'ग' एवं 'घ' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (च) प्रश्नांश 'ग' एवं 'घ' अनुसार। (छ) उक्त नीति परिपत्र जारी होने के दिनांक से प्रभावशील है तथा प्रश्नांश 'क' अनुसार कार्यभारित एवं आकस्मिकता स्थापना के सभी पदों को सांख्येत्तर घोषित किया गया है।
ईको सीमेंट कंपनी द्वारा भूमियों का क्रय
[खनिज साधन]
17. ( *क्र. 723 ) श्री राजेश कुमार वर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला पन्ना के अनुभाग गुनौर अंतर्गत ईको सीमेंट कंपनी के लिये किन-किन ग्रामों में माइनिंग लीज स्वीकृत की गई है? ग्रामवार खसरा नम्बरवार जानकारी देवें। (ख) जिला पन्ना के अनुभाग गुनौर अंतर्गत ईको सीमेंट कंपनी के द्वारा लीज स्वीकृत ग्रामों में कितनी भूमि का क्रय किया गया है? जानकारी खसरावार वर्षवार देवें। क्रय की भूमि में कितनी भूमि मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 59 के अंतर्गत पुनर्निर्धारण शुदा है तथा कितनी भूमि मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 59 के अंतर्गत पुनर्निर्धारण शुदा नहीं है? ग्रामवार खसरावार जानकारी देवें। (ग) क्या ईको सीमेन्ट कंपनी के द्वारा क्रय करने के पूर्व सभी भूमियों का म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा-165 (4) के अनुक्रम में संहिता धारा 59 के अंतर्गत पुनर्निर्धारण कराया है? यदि हाँ, तो रजिस्ट्री दिनांक एवं डायवर्सन दिनांक की जानकारी देवें। यदि कंपनी द्वारा भूमि क्रय करने पूर्व डायवर्सन नहीं कराया गया है तो क्या शासन को मुद्रांक शुल्क की हानि हुई है? यदि हाँ, तो शासन को हुई इस राजस्व की हानि के लिये संबंधित कंपनी के जिम्मेदारों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की जावेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - मंत्री (श्री चेतन्य काश्यप) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ख) प्रश्नांश अनुसार क्रय की गयी भूमि की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। प्रश्नांश अनुसार पुनर्निर्धारण शुदा भूमि नहीं है। शेष भाग का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी नहीं। अनुविभागीय अधिकारी, गुनौर का पत्र पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-स अनुसार है। शेष भाग का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। मुद्रांक शुल्क की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-द अनुसार है।
भूमि को खनिज ब्लॉक में दिया जाना
[वन]
18. ( *क्र. 2414 ) श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र कुक्षी, जिला धार अंतर्गत वह कौन-कौन सी वन एवं अन्य भूमि है, जिस पर कई पीढ़ियों से अनुसूचित जनजाति/आदिवासी समुदाय निवास एवं कृषि कार्य करते आ रहे हैं, इसके बावजूद उसे निजी/औद्योगिक कंपनियों को आवंटित किया गया है? (ख) क्या उक्त भूमि पर निवासरत आदिवासियों के वन अधिकार अधिनियम, 2006 के अंतर्गत व्यक्तिगत एवं सामुदायिक अधिकारों का विधिवत सत्यापन निस्तारण एवं सहमति ली गई थी? यदि नहीं, तो कारण क्या है? (ग) क्या बिना ग्राम सभा की सहमति एवं अधिकारों के निस्तारण के उक्त वन एवं अन्य भूमि को कंपनियों को देना वन अधिकार अधिनियम, 2006 की धारा 4 (5) तथा P.E.S.A. अधिनियम, 1996 का उल्लंघन नहीं है? (घ) क्या पीढ़ियों से निवासरत आदिवासियों को बेदखल किये जाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं? यदि हाँ, तो उन पर क्या कार्यवाही की गई है? दोषी अधिकारियों/संस्थाओं के विरुद्ध क्या कार्रवाई प्रस्तावित है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री दिलीप अहिरवार) : (क) विधानसभा क्षेत्र कुक्षी, जिला धार अन्तर्गत 4467.303 हेक्टेयर वनभूमि पर अनुसूचित जनजाति/आदिवासी समुदाय के 4357 वन अधिकार पत्रधारकों को कृषि एवं आवास हेतु वन अधिकार पत्र वितरित किये गये हैं। प्रश्नांकित वनक्षेत्र में किसी भी योजना के तहत निजी एवं औद्योगिक उपयोग हेतु अनुमति जारी नहीं की गई है। (ख) उक्त प्रश्नाधीन भूमि पर दिये गये वन अधिकार पत्र संबंधित अधिनियम के प्रावधानुसार गठित त्रिस्तरीय समिति द्वारा जाँच, सत्यापन एवं अंतिम विनिश्चयन उपरांत जारी किये गये हैं। निजी एवं औद्योगिक उपयोग हेतु अनुमति जारी नहीं की गई है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) उत्तरांश 'क' एवं 'ख' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) जी नहीं। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
नियम विरूद्ध वाहनों की जब्ती एवं प्रकरणों का निराकरण
[वन]
19. ( *क्र. 2527 ) श्री हजारीलाल दांगी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजगढ़ जिला अन्तर्गत वन विभाग द्वारा कब-कब कितने वाहनों को प्रतिबंधित लकड़ी परिवहन करते हुए जब्त किया है? जब्त वाहनों के संबंध में कितने समय से कार्यवाही प्रचलित है, कितने प्रकरणों का निराकरण समय-सीमा में कर दिया है? कितने प्रकरण लंबित हैं? कारणों सहित पृथक-पृथक बतायें। (ख) समय-सीमा में निराकरण नहीं होने से कितने-कितने जब्त वाहन वन विभाग व डिपो में खड़े हैं? जब्त वाहनों के प्रकरणों के निराकरण की कितनी समय-सीमा निर्धारित है, नियम बतायें? क्या विभाग के अधिकारी/कर्मचारियों द्वारा अनावश्यक रूप से जब्त वाहनों को मुक्त नहीं किया जा रहा है? ऐसे प्रकरणों के निराकरण न होने में कौन-कौन अधिकारी/कर्मचारी दोषी हैं एवं दोषियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की जावेगी? (ग) क्या वन विभाग के अमले द्वारा प्रतिबंध मुक्त लकड़ी, सतकट लकड़ी तथा कार्यक्षेत्र से बाहर के परिवहनकर्ता वाहनों को भी जब्त किया है? यदि हाँ, तो कितने और कब-कब जानकारी पृथक-पृथक उपलब्ध करायें। जब्त वाहनों को कब तक मुक्त कर दिया जायेगा? समय-सीमा बतायें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री दिलीप अहिरवार) : (क) राजगढ़ जिला अंतर्गत प्रतिबंधित लकड़ी परिवहन करते हुए वर्ष 2025 में कुल 44 वाहन जब्त किये गये, जिनकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। उक्त जब्त वाहनों में से 25 प्रकरणों का निराकरण समय-सीमा में कर दिया है तथा वर्तमान में 19 प्रकरण विधिक कार्यवाही में हैं। (ख) जब्त वाहनों के निराकरण की समय-सीमा निर्धारण के संबंध में कोई नियम नहीं है, अपितु प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय से निर्देश जारी हैं कि जनहित में राजसात की प्रक्रिया अधिकतम 6 माह में पूर्ण की जावे। यदि किन्हीं कारणों से माह से अधिक समय लगना संभावित है तो विलम्ब के कारणों सहित समय-वृद्धि हेतु स्वीकृति अपीलीय अधिकारी से प्राप्त की जावे। जब्त 19 वाहन जिनका विधिक निराकरण नहीं हुआ है, में से 02 वाहन समय-सीमा से अधिक अवधि में रहने के कारण की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। इनके निराकरण न होने का भार वाहन मालिक में निहित होने के कारण कोई भी अधिकारी/कर्मचारी दोषी नहीं है, अतः कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। शेष प्रश्नांश वाहन मालिक के उपस्थित होने पर तथा अभिलेख प्रस्तुत करने पर निर्भर होने के कारण समय-सीमा बताना संभव नहीं है।
छतरपुर जिले की विभिन्न नदियों से अवैधानिक उत्खनन
[खनिज साधन]
20. ( *क्र. 1276 ) सुश्री रामश्री (बहिन रामसिया भारती) राजपूत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला छतरपुर में वर्ष 2023 से प्रश्न दिनांक तक कौन सी कंपनी के संचालनों को किन-किन नदियों से बालू निकलने का ठेका सरकार दवारा दिया गया? प्रश्न दिनांक तक सरकार को कितनी आय प्राप्त हुई? विवरण दें। (ख) प्रशासन के पास अवैध उत्खनन की कुल कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं, कितनों की जाँच कराई गई? जाँच अभिमत सहित विवरण उपलब्ध करावें। (ग) क्या अवैध उत्खनन के संबंध में वाहन पकड़े गये और उनको अधिकारियों द्वारा मोटी रकम लेकर छोड़ दिया गया, जिनके प्रकरण प्रकाश में आये? यदि हाँ, तो क्यों? (घ) क्या अवैध उत्खनन से नदियों की स्थिति ख़राब हुई है, जो चिंता का विषय है? प्रशासन द्वारा सरकार को वस्तुस्थिति से प्रतिवेदन प्रस्तुत किया? यदि हाँ, तो कब प्रतिवेदन की प्रति दें? यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - मंत्री (श्री चेतन्य काश्यप) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। (ख) अवैध उत्खनन की कुल 719 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। (ग) जी हाँ। अवैध उत्खनन के संबंध में वाहन पकड़े गये हैं। अपितु अधिकारियों द्वारा मोटी रकम लेकर छोड़ने संबंधी कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं आया। (घ) जी नहीं। प्रश्नांश अनुसार अवैध उत्खनन से नदियों की स्थिति ख़राब होने संबंधी कोई जानकारी प्रकाश में नहीं आई है। शेष भाग का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
अपराध की विवेचना में विलंब एवं दोषियों पर कार्यवाही
[गृह]
21. ( *क्र. 2459 ) श्री दिनेश गुर्जर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) थाना कोतवाली शहडोल में दर्ज अपराध क्रमांक 359/2010 (धारा 420, 467, 468, 471 भा.दं.सं.) जो कि शासकीय भूमि के फर्जी नामांतरण से संबंधित है, की विवेचना दर्ज होने के 14 वर्ष पश्चात भी अब तक पूर्ण क्यों नहीं हुई है? (ख) उक्त गंभीर आपराधिक प्रकरण की विवेचना में अत्यधिक विलंब के लिये उत्तरदायी तत्कालीन एवं वर्तमान पुलिस अधिकारियों/जांच अधिकारियों के विरुद्ध क्या विभागीय जांच संस्थित कर कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई है? यदि नहीं, तो क्यों? (ग) क्या प्रभावशाली भू-माफियाओं को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से जानबूझकर विवेचना को लंबित रखा गया है? शासन इस प्रकरण में न्यायालय में अभियोग पत्र (Charge-sheet) प्रस्तुत करने की क्या कोई निश्चित समय-सीमा तय करेगा? (घ) इस प्रकरण में अब तक कितने आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और कितने फरार हैं? फरार आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने हेतु पुलिस विभाग द्वारा क्या कदम उठाए गये हैं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल) : (क) प्रश्नांश में उल्लेखित अपराध तहसील सोहागपुर के तत्कालीन तहसीलदार के तत्कालीन रीडर की रिपोर्ट पर पंजीबद्ध किया गया था। अपराध पंजीयन के समय रिपोर्टकर्ता द्वारा मूल दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किये गये थे। दिनांक 06.11.2012 से 08.08.2024 के बीच विभिन्न दिनांकों में कुल 13 पत्र, राजस्व विभाग के दस्तावेजों में हेरफेर करने, राजस्व विभाग द्वारा की गई जांच, आरोपी सनत एवं मिथलेश के नाम फर्जी रूप से भूमि स्वामित्व में दर्ज करने के दस्तावेज, पटवारी की पदस्थापना आदेश एवं म.प्र. शासन मद में तत्समय दर्ज मूल अभिलेख उपलब्ध कराने के लिये पत्राचार किये गये थे। इसके अतिरिक्त उक्त दस्तावेज प्राप्त करने के लिये पुलिस अधीक्षक के द्वारा दिनांक 06.02.2024, 15.07.2024 एवं 27.08.2025 को जिला दण्डाधिकारी को पत्र भेजे गये हैं। मूल दस्तावेजों के अभाव में विवेचना पूर्ण नहीं हो पा रही है। (ख) प्रश्नांश (क) के उपरोक्त उत्तर के आलोक में किसी पुलिस अधिकारी/जांच अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही करने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं, किसी को लाभ पहुंचाने का प्रयास नहीं किया गया है। तहसीलदार द्वारा प्रथम सूचना पत्र में ही शिकायत की गई है कि भूमि शासकीय थी, जिसको पटवारी ने अभिलेख में परिवर्तित कर दिया है। (घ) प्रकरण में आरोपी पटवारी श्री सुशील कुमार मिश्रा की अग्रिम जमानत सक्षम न्यायालय द्वारा स्वीकृत की गई है। प्रकरण में विवेचना के दौरान आरोपियों की गिरफ्तारी के संदर्भ में उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर निर्णय लिया जायेगा।
कर अपवंचन किया जाना
[वाणिज्यिक कर]
22. ( *क्र. 2016 ) डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 01.04.2021 से प्रश्नतिथि के दौरान सतना जिले में स्थित इन्टू ट्रेडर्स स्टेशन रोड जी.एस.टी.आई.एन. 23 ए.जे.के.पी.एस. 1243 ए 1 जेड.पी./अनिल पान मसाला सब्जी मंडी पसंद नमकीन के सामने/गणपति ट्रेडर्स लालता चौक/आर.एस. रियल्टी सिंधी कैंप/मे. राजेश कुमार कैला सिंधी कैंप/सत्या बिल्डिकॉन प्रा.लि. सिंधी कैम्प/सेनानी पान मसाला कोतवाली चौक/बाबा पान मसाला गांधी चौक/जे.बी.डी. पान मसाला लालता चौक/मनोज पान मसाला गांधी चौक के द्वारा कितना-कितना एस.जी.एस.टी./सी.जी.एस.टी. प्राप्त किया, जमा किया? वर्षवार फर्मवार जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश (क) में वर्णित समयानुसार इन फर्मों के द्वारा निजी/शासकीय कितना-कितना जी.एस.टी. प्राप्त किया? उसे कब-कब विभाग में कितना-कितना जमा कराया? फर्मवार, वर्षवार उपलब्ध करायें। (ग) प्रश्नांश (क) में वर्णित फर्मों में से किन-किन फर्मों के द्वारा कर अपवंचन की जानकारी प्रश्नांश (क) में वर्णित समयानुसार प्राप्त हुई? शासन कब व क्या कार्यवाही किसके विरूद्ध करेगा? प्रकरणवार दें।
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित व्यवसाइयों द्वारा जमा की गई एस.जी.एस.टी. एवं सी.जी.एस.टी. की वर्षवार, फर्मवार जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) फर्मवार, वर्षवार जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित फर्मों के विरूद्ध कर अपवंचन से संबंधित कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
आपराधिक प्रकरण
[गृह]
23. ( *क्र. 889 ) श्री अभय मिश्रा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रश्नकर्ता के अतारांकित प्रश्न क्रमांक 440, उत्तर दिनांक 02 दिसम्बर, 2025 के उत्तरांश (क) में थाना सिविल लाईन में अपराध क्रमांक-312/2025 में धारा-296-115 (2), 118 (1), 119 (1) 351 (2) बी.एन.एस. के अपराध पंजीबद्ध किये जाने की जानकारी दी गई, लेकिन जाँच/विवेचना पूर्ण कर आरोपी श्री अभिषेक तिवारी की गिरफ्तारी नहीं की गई, क्यों जांच प्रतिवेदन देते हुये बतावें, विवेचना पूर्ण कर न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किये जाने बावत क्या निर्देश देंगे? जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार उल्लेखित प्रश्न के उत्तरांश (घ) में श्री अशोक तिवारी की उंगली को दांत से काटे जाने पर तैयार की गई एम.एल.सी. की क्वेरी एम.एल.सी. डॉक्टर से कराई गई, की जानकारी दी गई, क्वेरी बावत किस सक्षम अधिकारी द्वारा आदेश दिया गया? प्रति देते हुये बतावें, इसके पूर्व कितने प्रकरणों में एम.एल.सी. की क्वेरी बावत पत्र/अनुमत सक्षम अधिकारियों से प्राप्त कर क्वेरी एम.एल.सी. की कराई गई का विवरण देवें? इस प्रकरण में व्यक्तिगत रूचि पर क्वेरी कराई गई, जबकि डॉक्टर द्वारा रिपोर्ट पर कहीं नहीं लिखा गया कि उंगली दांत से नहीं काटी जा सकती। (ग) क्या प्रश्नांश (क) के अपराध पर संबंधित डॉक्टर श्री यादव एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, आरती सिंह के द्वारा मोबाईल फोन पर संपर्क कर एम.एल.सी. की जांच को प्रभावित किये जाने हेतु दबाव बनाया गया, जिसकी पुष्टि दोनों के कॉल डिटेल निकालकर की जा सकती है? जबकि मजरूब द्वारा दांत से उंगली काटने बावत रिपोर्ट दर्ज कराई एवं डॉक्टर द्वारा भी दांत से उंगली कट सकती है, का उल्लेख किया फिर क्वेरी की आवश्यकता पुलिस विभाग को क्यों पड़ी? स्पष्ट बतावें। (घ) प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) में उल्लेखित आधारों पर कार्यवाही बाबत क्या निर्देश देंगे, बतावें अगर नहीं तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल) : (क) जी हाँ, प्रकरण की विवेचना जारी है। प्रकरण की विवेचना में एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की गिरफ्तारी के संदर्भ में एवं प्रकरण के निराकरण के संदर्भ में निर्णय लिया जायेगा। (ख) घायल की एम.एल.सी. रिपोर्ट की क्वेरी किसी सक्षम अधिकारी द्वारा अनुमति नहीं दी गई है, बल्कि विवेचना की कड़ी में घायल अशोक तिवारी अंगुली काटे जाने की तैयार एम.एल.सी. रिपोर्ट में डॉक्टर द्वारा स्पष्ट अभिमत न देते हुए एक्स-रे रिपोर्ट, ऑर्थोपेडिक एवं सर्जरी विभाग से ओपीनियन (अभिमत) लिये जाने हेतु दी गई थी। उक्त सलाह पर घायल की एम.एल.सी. की क्वेरी कराई गई है। इस घटना के पूर्व थाना सिविल लाईन रीवा में किसी प्रकरण में क्वेरी की आवश्यकता नहीं पड़ी थी, अतः क्वेरी नहीं कराई गई है। यह कहना सही नहीं है कि व्यक्तिगत रुचि पर क्वेरी कराई गई है, डॉक्टर द्वारा यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि घायल की अंगुली दांत से ही काटी गई है। (ग) जी नहीं। यह कहना सही नहीं है कि एम.एल.सी. की जाँच को प्रभावित करने के लिये कोई दबाव बनाया गया है। एम.एल.सी. रिपोर्ट में डॉक्टर द्वारा घायल की अंगुली कटना लिखा गया है, किन्तु यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि घायल की अंगुली धारदार हथियार से कटी है अथवा दाँत द्वारा काटी गई है। अतः एम.एल.सी. की क्वेरी एम.एल.सी. डॉक्टर से करवाई गई है। (घ) प्रकरण की विवेचना जारी है। विवेचना में एकत्रित साक्ष्यों के आधार पर प्रकरण का विधि सम्मत निराकरण किया जायेगा।
वन विभाग द्वारा कराये गये निर्माण कार्य
[वन]
24. ( *क्र. 2474 ) श्री कैलाश कुशवाहा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग द्वारा विधानसभा क्षेत्र–24 पोहरी में जनवरी 2024 से वर्तमान तिथि तक कराये गये समस्त निर्माण एवं विकास कार्यों, जैसे-निर्माण कार्य, रेनोवेशन, सामग्री क्रय, वानिकी कार्य, वृक्षारोपण, वन सुधार, सड़क निर्माण/मरम्मत, कार्यालय भवन, चौकी निर्माण, नर्सरी विकास, जल संरचनाएं (तालाब, चेकडैम, स्टॉपडैम आदि), बाड़बंदी, फेंसिंग इत्यादि की कार्यवार एवं ग्रामवार विस्तृत जानकारी प्रदान की जाये। (ख) उपरोक्त प्रत्येक कार्य के संबंध में उसका उद्देश्य, वर्तमान भौतिक प्रगति/स्थिति, स्वीकृत राशि, अब तक व्यय राशि, कार्य प्रारंभ करने की तिथि, पूर्णता की निर्धारित/वास्तविक तिथि तथा संबंधित कार्य एजेंसी/ठेकेदार का नाम एवं पंजीयन विवरण क्या है? (ग) उपरोक्त कार्यों हेतु किस-किस मद (बजट शीर्ष) से राशि स्वीकृत की गई है तथा वह राशि वार्षिक योजना, राज्य योजना अथवा केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत है, इसका स्पष्ट विवरण उपलब्ध कराया जाये। (घ) क्या विभागीय नियमों के अनुसार उक्त कार्यों की जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित ग्राम पंचायतों को दिये जाने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो कब, किस माध्यम से तथा किन-किन जनप्रतिनिधियों/ग्राम पंचायतों को सूचना दी गई? उसका विवरण प्रस्तुत किया जाये। (ड.) क्या इन कार्यों का विभागीय निरीक्षण, गुणवत्ता परीक्षण एवं लेखा परीक्षण (ऑडिट) कराया गया है? यदि हाँ, तो संबंधित निरीक्षण/गुणवत्ता परीक्षण एवं ऑडिट रिपोर्ट की प्रमाणित प्रतियाँ उपलब्ध करावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री दिलीप अहिरवार) : (क) से (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (घ) जी नहीं। विभागीय नियमों के अनुसार उक्त कार्यों की जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं संबंधित ग्राम पंचायतों को दिये जाने का कोई प्रावधान नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ड.) कार्यों का विभागीय निरीक्षण, गुणवत्ता परीक्षण उपरान्त देयक पर प्रमाणीकरण अंकित किया गया है। उक्त निरीक्षण की पृथक से रिपोर्ट संधारित किये जाने का कोई प्रावधान नहीं है। कार्यवार लेखा परीक्षण (ऑडिट) कराने का प्रावधान नहीं है।
सागर जिलांतर्गत उद्योगों की स्थापना
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
25. ( *क्र. 929 ) श्री शैलेन्द्र कुमार जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्यप्रदेश शासन के माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्य आतिथ्य में विभागीय अधिकारियों द्वारा सागर में दिनांक 27 दिसम्बर, 2024 को रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया था। इसमें किन-किन कंपनियों द्वारा कितनी-कितनी की राशि के M.O.U. पर हस्ताक्षर किये गये थे? विस्तृत जानकारी उपलब्ध करायें। (ख) रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव अंतर्गत M.O.U. अनुसार किन-किन इकाइयों को भूमि आंवटित हो गई है तथा इनमें कितनी इकाइयों द्वारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है? अद्यतन स्थिति से अवगत करायें। (ग) रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव अंतर्गत किन-किन कंपनियों द्वारा M.O.U. हस्ताक्षर करने के बाद कोई भी कार्यवाही नहीं की? ऐसे उद्यमियों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध करायें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - मंत्री (श्री चेतन्य काश्यप) : (क) वर्ष 2012 के पश्चात विभाग द्वारा उद्योग स्थापना हेतु कोई एम.ओ.यू. नहीं किये जाते हैं, तथापि निवेशकों द्वारा निवेश आशय प्रस्ताव ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत किये जाते हैं। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग अंतर्गत आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव, सागर में ऑनलाईन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त निवेश प्रस्तावों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) एवं (ग) उत्तरांश 'क' के संदर्भ में जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।
भाग-2
नियम
46 (2) के
अंतर्गत
अतारांकित प्रश्नोत्तर
के रुप में
परिवर्तित
तारांकित प्रश्नोत्तर
अभयारण्य
से
आदिवासियों
का विस्थापन
[वन]
1. ( क्र. 8 ) श्री मुकेश मल्होत्रा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कलेक्टर सीधी, उमरिया, श्योपुर ने वर्ष 2020 से प्रश्नांकित दिनांक तक किस पार्क, अभयारण्य से किस ग्राम के कितने आदिवासियों एवं कितने गैर-आदिवासियों की कितनी निजी भूमि एवं कितनी वन भूमि से विस्थापन हेतु वन विभाग के विकल्प एक एवं विकल्प दो के अनुसार किस-किस कानून की किस-किस धारा के अनुसार आदेश पारित किये। (ख) जनवरी 2014 से लागू भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 एवं वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 24 एवं धारा 25 में दिए प्रावधानों के अनुसार विधिवत आदेश पारित नहीं किए जाने का क्या कारण है? (ग) जनवरी 2014 से लागू भूमि अर्जन कानून 2013 की किस धारा में कलेक्टर को वन विभाग के विकल्प एक एवं विकल्प दो के अनुसार कार्यवाही के क्या-क्या अधिकार दिए हैं? यदि कोई अधिकार नहीं है तो कलेक्टर उमरिया, सीधी एवं श्योपुर द्वारा जारी आदेश कब तक निरस्त कर भूमि अर्जन कानून 2013 के अनुसार अर्जन, तोषण, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन की कार्यवाही की जावेगी? समय-सीमा सहित बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) कलेक्टर, जिला सीधी, उमरिया, श्योपुर में वर्ष 2020 से प्रश्नांकित दिनांक तक मध्यप्रदेश शासन वन विभाग, मंत्रालय वल्लभ भवन भोपाल के पत्र क्रमांक/एफ-3-8/07/10-2/2129 दिनांक 30.10.2008 से ग्रामों के विस्थापन हेतु जारी दिशा निर्देशों के अनुसार राष्ट्रीय उद्यान एवं अभयारण्य से विस्थापित आदिवासियों एवं गैर-आदिवासियों की निजी एवं वन भूमि से विस्थापन किया गया है। जिलेवार जानकारी संलग्न परिशिष्ट में है। (ख) भूमि अर्जन पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकर एवं पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 एवं वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 24 एवं धारा 25 में भूमि में या उस पर अधिकार का अर्जन करने का प्रावधान है। ग्रामों का स्वैच्छिक विस्थापन का पृथक निर्देश व प्रक्रिया है। उक्त का परस्पर संबंध नहीं है। (ग) उत्तरांश (ख) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
वन ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित करना
[वन]
2. ( क्र. 9 ) श्री मुकेश मल्होत्रा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2018-2024 में तत्कालीन मुख्यमंत्री महोदय और वर्तमान मुख्यमंत्री महोदय जी द्वारा विजयपुर विधानसभा क्षेत्र के दौरा कार्यक्रम के दौरान कराहल वीरपुर विजयपुर में घोषणा की थी कि जिला श्योपुर के वन ग्रामों, ग्राम गोरस, पिपरानी कराई, बुडेरा, पातालगढ़, डाबली, अजनोई, झर्रेर, भेला भीमला, कलमी, ककरधा, पनार, खड़ी, खुटका, कोटका, डोकर का कस मानी का कुंड लुहारी कुरकुटा, खैरी दाती, बील डबरा, चक्ररामपुरा, पटोंदा, करियादेह, सौंधनी आदि ग्रामों को वन ग्रामों से राजस्व ग्राम घोषित किया जाएगा? (ख) क्या उक्त ग्रामों के अतिरिक्त लगभग 50 गांव आज भी वन ग्राम होने से सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं से वंचित है? (ग) क्या मध्यप्रदेश सरकार श्योपुर जिले में विभिन्न वन ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित करने का निर्णय लेगी यदि हाँ, तो कब तक समय-सीमा बताएं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा की गई घोषणा संलग्न परिशिष्ट-एक में है। प्रश्नांश में वर्णित 18 वनग्रामों को मध्यप्रदेश शासन, वन विभाग की अधिसूचना क्रमांक/3263-X-62 दिनांक 26.04.1962 से प्रबंधन हेतु राजस्व विभाग को हस्तांतरित किया गया है। शेष 07 ग्राम राजस्व ग्राम है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट-दो में है। (ख) जी नहीं। सरकार की समस्त जन कल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीण हितग्राही लाभांवित है। (ग) वर्तमान में जिला श्योपुर अंतर्गत वन विभाग के प्रबंधन में कोई वनग्राम नहीं है। अत: शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
नवीन शस्त्र लायसेंस बनाये जाने की प्रक्रिया
[गृह]
3. ( क्र. 333 ) श्री घनश्याम चन्द्रवंशी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रदेश भर में नवीन शस्त्र लायसेंस बनाए जाने की प्रक्रिया बंद है? यदि हाँ, तो कब प्रारंभ होगी? (ख) यदि नहीं, तो शाजापुर जिले में विगत 3 वर्षों में कितने नवीन शस्त्र लायसेंस बनाए गए? (ग) नवीन शस्त्र लायसेंस बनाने के लिए क्या रेडक्रॉस की राशि की रसीद बनवाना अनिवार्य है? यदि हाँ, तो अधिकतम कितनी राशि तय की गई?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) :(क) जी नहीं, शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) शाजापुर जिले में विगत 3 वर्षों में कुल 174 नवीन शस्त्र लायसेंस स्वीकृत किये गये है। (ग) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
ठाकुरताल नगर एवं वन उद्यान
[वन]
4. ( क्र. 373 ) श्री लखन घनघोरिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वन मण्डल सामान्य जबलपुर की ठाकुरताल नगर वन उद्यान हेतु शासन ने कब, कितनी राशि की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी हैं। इसकी मूल योजना क्या हैं। इसके लिये शासन ने कब कितनी राशि आवंटित की हैं? इसकी निर्माणाधीन अवधि में कुल लागत क्या हैं तथा इस पर कुल कितनी राशि व्यय हुई? वर्ष 2025-26 तक की जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश (क) में इसका निर्माण कार्य कब कितने क्षेत्रफल में कराया गया है एवं मूल योजना के तहत कौन-कौन से निर्माण कार्यों में कितनी-कितनी राशि व्यय हुई है? (ग) प्रश्नांकित ठाकुरताल नगर वन उद्यान का निर्माण कराने का मूल उद्देश्य क्या हैं? इसमें पर्यटकों के लिये एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण हेतु क्या-क्या सुविधाएं व प्रबंधन किये गये हैं? इसे अभी तक पर्यटकों व नगर वासियों के लिये प्रारंभ व न खोलने का क्या कारण हैं? इस हेतु प्रस्ताव कब से किस स्तर पर लम्बित है एवं क्यों? क्या इसका निर्माण कार्य वन मंत्रालय म.प्र. शासन की पूर्व अनुमति के बिना कराया गया है? यदि नहीं, तो इसे कब तक पर्यटकों के लिये खोल दिया जावेगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) वनमण्डल जबलपुर (सामान्य) की ठाकुरताल नगर वन उद्यान हेतु प्रदाय प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति तथा आवंटित एवं व्यय राशि का विवरण संलग्न परिशिष्ट-1 में है। (ख) नगर वन ठाकुरताल वर्ष 2017 से जुलाई 2021 तक क्षेत्रफल रकवा 150 हेक्टेयर में निर्माण कार्य कराया गया है। मूल योजना के तहत निर्माण कार्य एवं व्यय की जानकारी संलग्न परिशिष्ट-2 में है। (ग) योजना का मूल उद्देश्य नैसर्गिक सौंदर्यीकरण एवं पर्यावरण को संरक्षण तथा पर्यटन स्थल को बढ़ावा देना है। पर्यटकों के लिए वॉच टावर, परकुलेशन टैंक, नेचर ट्रेल एवं वन्य प्राणियों के संरक्षण हेतु पेयजल व्यवस्था, फेंसिंग कार्य, तालाब गहरीकरण आदि प्रबंधन किया गया है। उक्त क्षेत्र में जू सह रेस्क्यू सेंटर निर्माण का प्रस्ताव प्रक्रिया में होने से इसे अभी तक खोला नहीं गया है। नगर वन उद्यान के निर्माण हेतु सक्षम स्वीकृतियां प्राप्त है। जू सह रेस्क्यू सेंटर निर्माण पर अंतिम निर्णय के पश्चात ही खोला जाना संभव होगा। अत: समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
जबलपुर वन मंडल को राशि का आवंटन
[वन]
5. ( क्र. 374 ) श्री लखन घनघोरिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वनमंडल सामान्य एवं उत्पादन जिला जबलपुर को राज्य शासन एवं केन्द्रीय शासन की संचालित किन-किन योजना मद में कितनी-कितनी राशि आवंटित की गई एवं कितनी-कितनी राशि व्यय हुई? किन-किन योजना मद की कितनी-कितनी राशि का उपयोग नहीं किया गया एवं क्यों? बतलावें। वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक की पृथक-पृथक जानकारी दें। (ख) प्रश्नांकित किन-किन योजनांतर्गत बिगड़े वनों का सुधार, पौधा रोपण, वनीकरण व वन संरक्षण, निर्माण कार्यों पर कितनी-कितनी राशि व्यय हुई है? (ग) प्रश्नांश (क) में कैम्पा फंड की आवंटित कितनी-कितनी राशि का उपयोग नये पेड़ लगाने, प्रतिपूरक वनीकरण, चारागाह विकसित करने, वन और वन्य जीवों के आवासों का निर्माण, वन संरक्षण व विकास कार्य व तालाबों का निर्माण कार्य में किया गया है? (घ) प्रश्नांश (क) में कौन-कौन से विकास एवं निर्माण कार्य, कितने-कितने वन क्षेत्र में बिगड़े वनों का सुधार, पौधारोपण व संरक्षण कार्य कहां-कहां पर कितनी-कितनी राशि में कब कराया गया है? क्या शासन उक्त कार्यों में राशि का अपव्यय व भ्रष्टाचार करने की जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही करेगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) वनमण्डल सामान्य जबलपुर में प्रश्नाधीन अवधि में विभिन्न योजनाओं में कुल रूपये 41.30 करोड़ राशि आवंटित की गई तथा रूपये 33.25 करोड़ राशि व्यय की गई। प्रश्नांश की शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'अ' एवं 'ब' अनुसार है। जबलपुर जिले में उत्पादन वनमंडल नहीं है। (ख) एवं (ग) जानकारी उत्तरांश (क) के परिशिष्ट अनुसार है। (घ) जानकारी उत्तरांश (क) के परिशिष्ट अनुसार है। उक्त कार्यों हेतु राशि के अपव्यय एवं भ्रष्टाचार की कोई शिकायत संज्ञान में नहीं होने से शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
वन व्यवस्थापन अधिकारी की नियुक्ति
[वन]
6. ( क्र. 431 ) श्री ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विधानसभा अतारांकित प्रश्न क्रमांक 263 दिनांक 02.12.2025 में प्रश्नकर्ता द्वारा पन्ना जिला में वन व्यवस्थापन अधिकारी की नियुक्ति किये जाने के संबंध में पूछे गये प्रश्न के उत्तर में माननीय मंत्री जी द्वारा वन व्यवस्थापन अधिकारी की नियुक्ति का प्रस्ताव परीक्षण में है से अवगत कराया गया था? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार यदि हाँ, तो क्या उक्त प्रस्ताव का परीक्षण पूर्ण कर वन व्यवस्थापन अधिकारी नियुक्त करने की कार्यवाही की गई है? यदि हाँ तो कब? यदि नहीं, तो क्यों? कब तक वन व्यवस्थापन अधिकारी की नियुक्ति की जावेगी? बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। (ख) जी नहीं। शासन को प्राप्त प्रस्ताव उच्च स्तर पर चर्चा में है।
भूमि का निर्वनीकरण
[वन]
7. ( क्र. 432 ) श्री ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या पन्ना विधानसभा अंतर्गत ऐसे बंगाली विस्थापित परिवार जिनकों राजस्व विभाग द्वारा पट्टे जारी किये गये है मौके पर काबिज हैं परन्तु वन सीमा में होने के कारण राजस्व विभाग द्वारा उपरोक्त भूमि के निर्वनीकरण किये जाने की कार्यवाही हेतु पत्र क्रमांक/550/रीडर/2023 पन्ना दिनांक 24 जुलाई 2023 द्वारा लेख किया गया था? यदि हाँ, तो उक्त संबंध में निर्वनीकरण हेतु क्या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। प्रश्नाधीन भूमि भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा-4 (1) के तहत आरक्षित वन गठन के आशय से जारी की गई है, उक्त भूमि अधिनियम की धारा 5 से 19 की कार्यवाही के तहत अधिकारों के विनिश्चयन की अर्द्धन्यायिक प्रक्रिया में है तथा वन भूमि के निर्वनीकरण पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 13/11/2000 से स्थगन होने के कारण निर्वनीकरण करना संभव नहीं है।
घोड़ारोज पशु से छुटकारा पाने के उपाय
[वन]
8. ( क्र. 439 ) डॉ. चिंतामणि मालवीय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आलोट विधान सभा क्षेत्र में घोड़ारोज की संख्या अधिक हो गई है जिसके कारण कृषकों की फसलें चौपट हो रही है। (ख) सरकार समस्या निवारण के लिए क्या प्रयास कर रही है? (ग) घोड़ारोज की जनसंख्या नियंत्रण के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं? (घ) घोड़ारोज की समस्या से किसानों को कब तक राहत मिलेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) रतलाम वनमंडल के तहसील आलोट में घोड़ारोज की संख्या अधिक होने के कारण फसलों के क्षति होने संबंधी कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। (ख) घोड़ारोज द्वारा किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाये जाने पर सहायता राशि का भुगतान यथा संशोधित राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड छ: क्रमांक-4 के प्रावधानों के तहत किया जाता है। किसानों की फसलों को नुकसान करने वाली घोड़ारोज को आखेट करने की अनुमति जारी करने के लिए मध्यप्रदेश के समस्त अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अपने-अपने अधिकार क्षेत्र की सीमाओं के भीतर प्राधिकृत अधिकारी घोषित है। वर्ष 2016 में मंदसौर जिले के ऐरा ग्राम से 27 एवं NATRAX कैम्पस, पीथमपुर धार से 45 नीलगायों को वर्ष 2023-24 में प्रायोगिक तौर पर बोमा विधि से पकड़कर गांधी सागर अभयारण्य में छोड़ा गया है। शाजापुर जिले से प्रायोगिक तौर पर 67 नीलगाय को हेलीकॉप्टर से हांका लगाकर बोमा विधि से अन्यत्र स्थानांतरित किया गया है। (ग) किसानों की फसलों को नुकसान करने वाली घोड़ारोज को आखेट करने की अनुमति जारी करने के लिए मध्यप्रदेश के समस्त अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अपने-अपने अधिकार क्षेत्र की सीमाओं के भीतर प्राधिकृत अधिकारी घोषित है। (घ) वन्यप्राणी का विचरण एक नैसर्गिक प्रक्रिया है, अत: घोड़ारोज की समस्या से राहत मिलने की समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
विधायक निधि/स्वेच्छानुदान निधि के प्रबंधन हेतु साफ्टवेयर विकास की योजना
[विज्ञान और प्रौद्योगिकी]
9. ( क्र. 445 ) डॉ. चिंतामणि मालवीय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधायक निधि अथवा स्वेच्छानुदान की प्रक्रिया की शीघ्रता के लिए कोई सॉफ्टवेयर बनाने की योजना है। (ख) यदि हाँ, तो सॉफ्टवेयर कब तक तैयार हो जाएगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रशासनिक विभागों (स्वेच्छानुदान-सामान्य प्रशासन विभाग एवं योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग) से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्तमान में विधायक निधि अथवा स्वेच्छानुदान योजना के प्रबंधन हेतु किसी सॉफ्टवेयर के विकास की कोई योजना प्रस्तावित नहीं है। (ख) शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
प्रोटोकॉल के तहत प्राप्त सुविधायें
[सामान्य प्रशासन]
10. ( क्र. 509 ) कुँवर अभिजीत शाह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल, लिपिकीय सुविधाएं इन लिपिकों को प्राप्त होने वाले वेतन भत्ते, विधानसभा क्षेत्र में आवास/कार्यालय सुविधा, वाहन सुविधा, शासकीय कार्यक्रमों में आमंत्रित करने, विकास कार्यों के भूमिपूजन तथा लोकार्पण करने, पत्रों के जवाब प्रस्तुत करने एवं समस्त सुविधा एवं प्रोटोकॉल संबंधित वर्तमान में कौन-कौन से नियम प्रचलित हैं? इन समस्त नियमों की प्रति उपलब्ध करावें। क्या अगर कोई अधिकारी उल्लेखित नियमों एवं शिष्टाचार या विधायक प्रोटोकॉल का पालन नहीं करता या विधायकों द्वारा दिये गये पत्रों का उत्तर नहीं देता या जनता की मूलभूत समस्याओं के संबंध में दूरभाष के माध्यम से मौखिक समन्वयक बनाने हेतु संपर्क करने पर निर्वाचित जनप्रतिनिधि (विधानसभा) का दूरभाष नहीं उठाया जाता है तो उक्त अधिकारी पर क्या कार्यवाही करने के प्रावधान है? (ख) क्या शासकीय विकास एवं निर्माण कार्यों में भूमिपूजन तथा लोकार्पण करने एवं शिलालेख/पट्टिका पर अंकित किये जाने वाले नामों के संबंध में कोई नियम है? यदि हाँ, तो प्रति उपलब्ध करावें? यदि नहीं, तो क्या इस विषय पर नियम/कानून बनाना जरूरी नहीं है? स्पष्ट नियम बनाये जावे। (ग) शासन के राजपत्र अनुसार विधायक का प्रोटोकॉल जिला कलेक्टर से ऊपर होता है, इसके उपरांत भी जब नायब तहसीलदार को मुख्यालय पर आवास, वाहन, ड्राइवर, भृत्य आदि सुविधाएं मिलती है तो एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि/विधायक जिसका कार्य क्षेत्र, दायित्व अधिक है, उसको क्यों नहीं? क्या शासन की नजर में ये सुविधाएं मिलना चाहिए क्या शासन द्वारा इस पर विचार किया जा रहा है? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देश पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''अ'' अनुसार है। विधायकों को लिपिकीय सुविधाओं के संबंध में निर्देश पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''ब'' अनुसार है। शासकीय कार्यक्रमों में भूमि पूजन/लोकार्पण पत्रों के जवाब आदि देने के संबंध में निर्देश पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''स'' अनुसार है। (ख) उत्तरांश ''क'' अनुसार है। (ग) शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
प्रोटोकॉल का पालन
[सामान्य प्रशासन]
11. ( क्र. 515 ) कुँवर अभिजीत शाह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 01/01/2025 से प्रश्न दिनांक तक प्रश्नकर्ता द्वारा हरदा जिले के विभिन्न विभागों को प्रेषित किये गये पत्रों का जवाब, विभाग द्वारा किस-किस पत्रों के माध्यम से प्रेषित किया गया है। पत्रों की छायाप्रति उपलब्ध करावें? यदि पत्रों का जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया है, तो क्यों? (ख) क्या शासन द्वारा विधायक प्रोटोकॉल के संबंध में विभागीय अधिकारियों को समय-समय पर निर्देश जारी किये गये है? यदि हाँ, तो शासन द्वारा जारी समस्त नियमों/निर्देशों की प्रति उपलब्ध करावें। इन निर्देशों पर कलेक्टर जिला हरदा एवं अन्य विभाग प्रमुखों द्वारा क्या पत्र जारी किये गये है इनकी प्रतियाँ भी उपलब्ध करावें। (ग) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित पत्रों का जबाव प्रस्तुत न किये जाने पर संबंधित विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रोटोकॉल का उल्लंघन किये जाने पर जिलाधिकारी द्वारा क्या कार्यवाही की गई है? (घ) क्या शासन द्वारा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजनांतर्गत स्वीकृत कार्यों के लिये विभागों से टी.एस., खसरा नक्शा, अनापत्तियों/अनुमतियाँ एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज अभिप्राप्त किये जाने हेतु समय-सीमा निर्धारित किये जाने पर विचार किया जा रहा है? यदि हाँ, तो कब तक। यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) हरदा जिले के विभिन्न विभागों को प्रेषित किए गये पत्रों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट ''अ'' अनुसार है। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट ''ब'' अनुसार है। शेषांश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट ''स'' अनुसार है। (ग) उत्तरांश ''क'' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) जी नहीं। विभागीय नियमों के अनुसार कार्यवाही की जाती है।
जनसुनवाई कार्यक्रम का आयोजन
[सामान्य प्रशासन]
12. ( क्र. 516 ) कुँवर अभिजीत शाह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिले में प्रति सप्ताह जनसुनवाई आयोजित करने के शासन नियम क्या है एवं क्या इसमें निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किये जाने के प्रावधान है? किन-किन जिलों में किस नियम के आधार पर जनसुनवाई में जनप्रतिनिधि को आमंत्रित किया जा रहा है एवं किन-किन जिलों में जनप्रतिनिधि द्वारा स्वयं शासकीय विभागों की उपस्थिति में किस नियम के तहत जनसुनवाई आयोजित की जा रही है? शासन नियम निर्देशों की प्रति सहित जानकारी उपलब्ध करावें। (ख) हरदा में विगत 01 वर्ष में कुल कितनी जनसुनवाई जिला स्तर पर आयोजित की गई? इनमें प्राप्त, निराकृत, निरस्त एवं लंबित आवेदनों की वर्तमान स्थिति तथा निराकरण हेतु विभाग द्वारा तय समय-सीमा की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) जनपद पंचायत टिमरनी की बैठक दिनांक 13.10.2025 में जनसुनवाई आयोजन का प्रस्ताव पारित होने के बावजूद जनसुनवाई आयोजन क्यों नहीं किया गया? प्रस्ताव को किस नियम के तहत निरस्त किया गया? इस पर अमल क्यों नहीं किया गया? इस हेतु कौन जिम्मेदार है, उन पर क्या कार्यवाही कब तक की जा रही है? (घ) किस नियम के तहत जनप्रतिनिधियों द्वारा शासकीय विभागों के साथ जनसुनवाई आयोजित की जाती है? यदि ये नियमानुसार है तो पंचायत प्रस्ताव का पालन क्यों नहीं हुआ? यदि नहीं, तो जनप्रतिनिधि की जनसुनवाई पर रोक संबंधी कार्यवाही कब तक की जाएगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जिले में प्रति सप्ताह जनसुनवाई आयोजित करने के संबंध में जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'अ' अनुसार है। (ख) हरदा में विगत 01 वर्ष में कुल 50 जनसुनवाई आयोजित की गई है जिसमें प्राप्त आवेदनों की जानकारी निम्नानुसार है:- प्राप्त-4486, निराकरण-3581, निरस्त-00, लंबित-905 निराकरण की कार्यवाही प्रचलित है। (ग) जनपद पंचायत द्वारा साधारण सभा की बैठक में पारित निर्णय के अनुक्रम में कार्यालयीन पत्र क्रमांक 5280 दिनांक 17.10.2025 से समस्त खंड स्तरीय कार्यालय प्रमुखों को आयोजित जनसुनवाई प्रति बुधवार को जनसुनवाई में उपस्थित रहने हेतु सूचना जारी की गई है जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'ब' अनुसार है। उपरोक्त आयोजित जनसुनवाई के संदर्भ में विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचारों के संबंध में जिला स्तर पर होने वाली समय-सीमा की बैठक दिनांक 04.11.2025 में जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों से समक्ष में चर्चा अनुसार दिये गये निर्देशों के अनुरूप आमजन की समस्याओं के निराकरण हेतु शासन स्तर से पूर्व से ही प्रति मंगलवार जनसुनवाई सुनियोजित होने के प्रावधान रखे जाने के उपरांत पृथक से जनसुनवाई नहीं रखे जाने हेतु निर्देशित किया गया। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'ब' अनुसार है। (घ) उत्तरांश (क) एवं (ग) के क्रम में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
रायल्टी की राशि की वसूली
[खनिज साधन]
13. ( क्र. 699 ) श्री सुरेश राजे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) माननीय न्यायालय, कलेक्टर ग्वालियर का प्रकरण क्र./0004/अ-67/2022-23 में पारित आदेश दिनांक 22/08/22 अनुसार श्री सरदार सिंह गुर्जर पुत्र श्री प्रताप सिंह गुर्जर निवासी ग्राम रफादपुर तहसील डबरा जिला ग्वालियर द्वारा ग्राम रफादपुर खनिज का अवैध उत्खनन करने से रॉयल्टी रूपये 1,18,98,000-/ (एक करोड़ अठारह लाख अन्ठ्यान्वे हजार मात्र) एवं रॉयल्टी राशि का 30 गुना राशि रूपये 35,69,40,000-/ (पैंतीस करोड़ उनहत्तर लाख चालीस हजार मात्र) मध्यप्रदेश गौड़ खनिज नियम 1996 के नियम 53 के तहत अर्थदंड राशि अधिरोपित की गई है तथा आदेश जारी किये जाने की तारिख से 60 दिवस में व्यतीत होने के उपरान्त शासन पक्ष में वसूलने का दायित्व खनिज अधिकारी को दिए गए हैं। (ख) प्रश्नांश (क) के अनुसार पारित आदेशानुसार श्री सरदार सिंह गुर्जर पुत्र श्री प्रताप सिंह गुर्जर निवासी ग्राम रफादपुर तहसील डबरा से प्रश्न दिनांक तक कब-कब कितनी-कितनी राशि वसूली गई है तथा कितनी वसूली की जाना है? यदि वसूली नहीं की गई तो कब तक वसूली की जाएगी? जिसके लिए कौन अधिकारी उत्तरदायी है? कारण सहित विस्तृत ब्यौरा देवें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। प्रश्नाधीन आदेश द्वारा मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भण्डारण का निवारण) नियम 2022 के अधीन शास्ति राशि रूपये 35,69,40,000/- (पैंतीस करोड़ उनहत्तर लाख चालीस हजार मात्र) अधिरोपित की गई है तथा आदेश संसूचित किये जाने की तारीख से 60 दिन की अवधि व्यतीत हो जाने के उपरांत शासन पक्ष में राशि वसूलने का दायित्व खनिज अधिकारी का होना आदेशित किया गया है। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार राशि वसूल किये जाने हेतु कलेक्टर ग्वालियर द्वारा प्रश्नाधीन व्यक्ति के विरूद्ध दिनांक 14.12.2022 को मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 के अधीन राजस्व वसूली प्रमाण पत्र तहसीलदार डबरा को जारी किया गया है। तहसीलदार डबरा को कलेक्टर कार्यालय ग्वालियर के पत्र दिनांक 23.01.2026 से पुनः निर्देशित किया गया है। वर्तमान में कोई राशि वसूल नहीं की गई है। बकाया राजस्व की भांति राजस्व प्रक्रिया के अधीन राशि वसूल करने की कार्यवाही प्रचलित है। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
बिगड़ती कानून व्ययवस्था
[गृह]
14. ( क्र. 719 ) श्री साहब सिंह गुर्जर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रदेश में विगत 02 वर्षों में ड्रग्स, अवैध शराब, मानव तस्करी, जुआ-सट्टा, अवैध हथियारों का प्रयोग एवं महिलाओं तथा अबोध बालिकाओं के साथ दुराचार तथा अन्य जघन्य आपराधिक घटनाओं में वृद्धि हुई है? यदि हाँ, तो इन अपराधों में संलिप्त अपराधियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई? ऐसे प्रकरणों में पुलिस प्राथमिकी दर्ज होने के उपरान्त दोषी अपराधियों के विरूद्ध यदि माननीय न्यायालय में चालान पेश नहीं किये गये तो इसका कारण बतावें? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में ग्वालियर जिले के पुलिस थाना बेहट, उटीला, हस्तिनापुर एवं रायरू में ऐसी घटित आपराधिक घटनाओं की रोकथाम हेतु विभाग द्वारा अपने स्तर से क्या कार्यवाही की गई? वर्षवार, प्रकरणवार की गई कार्यवाही की जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत व्यापारियों, ट्रक एवं डम्पर तथा ट्रेक्टर-ट्रॉलियों से क्षेत्र की सड़क सीमाओं में प्रवेश के नाम पर चेक पोस्टों पर तैनात पुलिस कर्मियों द्वारा वाहन चालकों से अवैध वसूली संबंधी कितनी दर्ज शिकायतें विभाग को प्राप्त हुई हैं, ऐसी प्राप्त शिकायतों के आधार पर विभाग/स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा क्या कार्यवाही की गई? यदि कार्यवाही नहीं की गई तो कारण बतावें?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं, प्रदेश में विगत 02 वर्षों में ड्रग्स, अवैध शराब, मानव तस्करी, जुआ-सट्टा, अवैध हथियारों का प्रयोग एवं महिलाओं तथा अबोध बालिकाओं के साथ दुराचार के प्रकरणों में वृद्धि नहीं हुई है। केवल अन्य जघन्य आपराधिक घटनाओं में आंशिक वृद्धि हुई है, जिसमें संलिप्त अपराधियों के विरुद्ध कृत कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे गये परिशिष्ट- 'अ' अनुसार है। जिन प्रकरणों में पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज होने के उपरांत दोषी अपराधियों के विरुद्ध न्यायालय में चालान पेश नहीं किये गये है, ऐसे प्रकरणों में चालान प्रस्तुत न होने का कारण प्रकरण विवेचनाधीन होना अथवा विवेचना उपरांत समाप्ति का अंतिम प्रतिवेदन तैयार किया जाना है, इनका विवरण पुस्तकालय में रखे गये परिशिष्ट-अ में समाहित है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'ब' अनुसार है। (ग) विधानसभा क्षेत्रांतर्गत व्यापारियों, ट्रक एवं डम्पर तथा ट्रेक्टर-ट्रॉलियों से क्षेत्र की सड़क सीमाओं में प्रवेश के नाम पर चेक पोस्टों पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा वाहन चालकों से अवैध वसूली संबंधी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। अतः कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
विज्ञान केन्द्र की स्थापना
[विज्ञान और प्रौद्योगिकी]
15. ( क्र. 732 ) श्री सोहनलाल बाल्मीक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) परासिया विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत ग्राम खिरसाडोह में विज्ञान केन्द्र की स्थापना हेतु वर्ष 2019 में विभाग की टीम द्वारा स्थल का निरीक्षण कर कार्यवाही की जा चुकी है और ग्राम खिरसाडोह पॉलिटेक्निक कॉलेज के पास (कॉलेज की) लगभग 7.5 एकड़ शासकीय भूमि विज्ञान केन्द्र के लिए आवंटित की जा चुकी है परन्तु अत्यंत विलम्ब होने लगभग 7 वर्ष बीत जाने के बाद भी विज्ञान केन्द्र प्रारंभ किए जाने के संबंध में विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है जिसका क्या कारण है? कब तक विभिन्न कार्यवाही व औपचारिकताओं को पूर्ण करते हुए विज्ञान केन्द्र प्रारंभ किए जाने की स्वीकृति प्रदान कर दी जायेगी? (ख) प्रश्नांश ''क'' के अनुसार ग्राम खिरसाडोह में विज्ञान केन्द्र प्रारंभ किए जाने के संबंध में शासन/विभाग द्वारा अभी तक क्या-क्या कार्यवाही की गई है? मय दस्तावेजों की छायाप्रति सहित सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराये? (ग) विज्ञान केन्द्र खोले जाने के संबंध में शासन के क्या दिशा निर्देश व नियामावली है? छायाप्रति उपलब्ध करायें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) न्यायालय कलेक्टर, छिंदवाड़ा, राजस्व प्रकरण क्र./46/अ-19 (3)/2019-20 मौजा खिरसाडोह माल, ब.न.104 प.ह.न.49 तहसील परासिया जिला छिंदवाड़ा के पारित आदेश दिनांक 03 अक्टूबर 2019 के तहत 10.83 एकड़ शासकीय भूमि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद को विज्ञान केन्द्र की स्थापना के लिए आवंटित की गई। MAPCOST (मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद) द्वारा विज्ञान केन्द्र की स्थापना हेतु रूपये 15.20 करोड़ की परियोजना स्वीकृति हेतु भारत सरकार को भेजी गई है, जिसकी स्वीकृति अपेक्षित है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है।
नवीन जेल का निर्माण
[जेल]
16. ( क्र. 811 ) श्रीमती अर्चना चिटनीस : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शासन द्वारा वर्ष 2002 से 2025 तक मध्यप्रदेश में नवीन जेलों की स्थापना हेतु कर्मचारी आवास गृहों के लिए भूमि की चिन्हांकन कर स्वीकृति प्रदान की है? यदि हाँ, तो वर्षवार एवं जिलेवार स्वीकृत राशि तथा भूमि विवरण उपलब्ध कराया जाए। (ख) क्या वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में नवीन जिलों में जेल स्थापना हेतु बजट प्रावधान किया गया है? यदि हाँ, तो प्रावधानित राशि एवं अब तक चिन्हित भूमि (हेक्टेयर में) का विवरण दिया जाए। (ग) क्या नवीन जेल स्थापना हेतु कार्य एजेंसी के रूप में मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग (भवन) को नियुक्त किया गया है? यदि हाँ, तो क्या बजट प्रावधान से पूर्व संपूर्ण कार्ययोजना तैयार कर प्रस्तुत की गई थी? साथ ही जेल स्थापना हेतु भूमि चयन के निर्धारित मापदंड स्पष्ट किए जाएं। (घ) क्या बुरहानपुर जिले में नवीन जेल निर्माण हेतु बजट प्रावधान से पूर्व कार्य एजेंसी द्वारा कार्ययोजना प्रस्तुत की गई थी? यदि हाँ, तो कलेक्टर द्वारा चिन्हांकित बहादरपुर की खसरा 552,रकबा 06.16 हेक्टेयर भूमि पर स्वीकृति प्रदान की गई थी? क्या कार्ययोजना अनुसार 73.44 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति तथा 24.28 हेक्टेयर भूमि आवश्यकता सुनिश्िचत की गई थी? (ड.) यदि नहीं, तो बुरहानपुर के ग्राम भोलाना, हल्का-06, खसरा क्रमांक 94 (एस),41,95 में स्थित 06.00 हेक्टेयर भूमि पर नवीन जेल निर्माण की स्वीकृति न देने के कारण स्पष्ट किए जाएँ।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। निम्नानुसार
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क्र. |
वर्ष |
जिला |
जेल का नाम |
स्वीकृत राशि |
भूमि का विवरण |
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1 |
2004-05 |
सीहोर |
जिला जेल सीहोर |
6.73 करोड़ (मूल स्वीकृति) |
22 एकड़ ग्राम बिजौरी |
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2 |
2005-06 |
शिवपुरी |
जिला जेल शिवपुरी |
6.32 करोड़ (मूल स्वीकृति |
17.5 हेक्टेयर ग्राम बड़ौदी |
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3 |
2005-06 |
अनूपपुर |
जिला जेल अनूपपुर (100 बंदी) |
2.65 करोड़ (मूल स्वीकृति) |
15 एकड़ ग्राम दुलहरा |
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4 |
2006-07 |
भिण्ड |
जिला जेल भिण्ड |
8.98 करोड़ (मूल स्वीकृति) एवं दिनांक 10.07.2024 को 32.64 करोड़ पुनरीक्षित स्वीकृति |
25 एकड़ ग्राम रतनपुरा |
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5 |
2007-08 |
शहडोल |
सब जेल बुढ़ार |
1.77 करोड़ (मूल स्वीकृति) |
8 एकड़ ग्राम रूगटा |
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क्र. |
वर्ष |
जिला |
जेल का नाम |
स्वीकृत राशि |
भूमि का विवरण |
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6 |
2007-08 |
देवास |
सब जेल कन्नौद |
1.15 करोड़ (मूल स्वीकृति) |
5 एकड़ ग्राम अम्बाड़ा |
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7 |
2008-09 |
बुरहानपुर |
जिला जेल बुरहानपुर |
भारत सरकार की पर्सपेक्टिव प्लान योजना में कार्य स्वीकृत था, किन्तु कार्य अप्रारंभ रहने व योजना की समय-सीमा समाप्त होने के कारण दिनांक 06.01.2018 को विलोपित किया। दिनांक 12.08.2024 को 73.44 करोड़ स्वीकृत |
दिनांक 30.03.2007 बीज निगम प्रक्षेत्र बुरहानपुर की 10 हेक्टेयर, जिसे स्वास्थ्य विभाग को स्थानांतरित किया गया। अन्य कोई वैकल्पिक भूमि न होने से ग्राम बहादरपुरा की 6.16 हेक्टेयर भूमि दिनांक 13.02.2013 को आवंटित कराई गई। |
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8 |
2020-21 |
इंदौर |
केन्द्रीय जेल इंदौर |
प्रथम चरण में 60.00 करोड़ एवं दिनांक 11.07.2024 को 217.73 करोड़ |
51.66 एकड़ ग्राम पंचडेरिया |
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9 |
2021-22 |
छिंदवाड़ा |
जिला जेल छिंदवाड़ा |
127.08 करोड़ |
120 एकड़ ग्राम अर्जुनवाड़ी |
(ख) जी हाँ। नवीन जिला बुरहानपुर में दिनांक 12.08.2024 को 73.44 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई, इस कार्य हेतु वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में योजना शीर्ष-4059-6405 नई जेल निर्माण मद में क्रमश: राशि रूपये 73.10 करोड़ एवं 71.10 करोड़ का प्रावधान रखा गया। इस हेतु ग्राम बहादरपुर की भूमि 6.16 हेक्टेयर दिनांक 13.02.2013 आवंटित थी किन्तु कलेक्टर द्वारा दिनांक 01.01.2026 को ग्राम बहादरपुर की 6.16 हेक्टेयर भूमि का आवंटन निरस्त कर बिना जेल विभाग की सहमति लिए ग्राम भोलाना में 5.81 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है। (ग) जी हाँ। जी हाँ। जेल निर्माण में भूमि चयन करते समय क्षेत्रफल, भौगोलिक स्थिति के साथ-साथ, सुरक्षा, परिवहन-सुविधाएं, जलापूर्ति, सीवेज-निकासी, जलवायु की स्थिति, न्यायालय-अस्पताल-पुलिस लाईन से दूरी, कर्मचारियों के बच्चों की शैक्षणिक-आसान-सुविधा आदि को ध्यान में रखा जाता है। (घ) जी हाँ। जी हाँ। जी नहीं, उत्तर (ग) में उल्लेख किये अनुसार वर्ष 2013 में विभाग को आवंटित ग्राम बहादरपुर की भूमि 6.16 हेक्टेयर के अनुक्रम में 73.44 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई थी। (ड.) ग्राम भोलाना की भूमि का क्षेत्रफल कम होने, उसका आकार त्रिभुजाकर होने तथा शहर से लगभग 8 किलोमीटर दूर होने के कारण जेल निर्माण में कठिनाई है।
थाना जतारा के अंतर्गत एफ.आई.आर. दर्ज किया जाना
[गृह]
17. ( क्र. 817 ) श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या आवेदक बाबू लाल नि. देवराहा बारा दिनांक 08/11/2024 को थाना जतारा में एक लिखित आवेदन पत्र देकर रविन्द्र तनय जसरथ यादव के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने की गुहार लगाई थी उक्त आवेदन-पत्र पर क्या कार्यवाही की गई? (ख) क्या दिनांक 23/08/2023 को किशोरी अहिवार निवासी देवराहा ने भी थाना जतारा में आवेदन पत्र देकर मनीराम यादव एवं अखलेश पाल के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने की गुहार लगाई थी उक्त आवेदन पत्र पर क्या कार्यवाही की गई सम्पूर्ण जानकारी से अवगत करायें। (ग) क्या आम जनता को मारने पीटने धमकियां देना, जान से मारने की धमकियां देना आदिवासियों के घरों में आग लगाने जैसी घटनाओं पर कोई कार्यवाही नहीं होना यह नामांकित अपराधी रविन्द्र यादव, मनीराम यादव, अखलेश पाल, राहुल यादव, पवन यादव के द्वारा कई गरीब परिवारों की मारपीट करना, आम बात हो गई है और दिनांक 08/11/2024, 23/08/2023 एवं 16/06/2022 एवं 14/06/2022 के आवेदन पत्रों पर तत्कालीन थाना प्रभारी जतारा द्वारा कोई कार्यवाही नहीं करने से अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और लगातार अपराध कर रहे है क्या इन आवेदन पत्रों की जांच कराकर अपराधियों के विरूद्ध कार्यवाही करेंगे यदि हाँ, तो कब तक यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) पुलिस अधीक्षक टीकमगढ़ से प्राप्त प्रतिवेदन अनुसार आवेदक बाबूलाल निवासी देवराहा द्वारा दिनांक 08.11. 2024 को थाना जतारा में कोई आवेदन पत्र नहीं दिया गया। (ख) पुलिस अधीक्षक जिला टीकमगढ़ के प्राप्त प्रतिवेदन अनुसार आवेदक किशोरी अहिरवार, निवासी देवराहा द्वारा दिनांक 23.08.2023 को थाना जतारा जिला टीकमगढ़ में कोई भी आवेदन पत्र नहीं दिया गया। (ग) पुलिस अधीक्षक जिला टीकमगढ़ के प्रतिवेदन अनुसार दिनांक 8.11.2024, 23.08.2023, 16.06.2022 एवं 14.06.2022 को थाना जतारा के अभिलेख अनुसार कोई आवेदन पत्र देना नहीं पाया गया। आम जनता द्वारा किसी भी प्रकार के शिकायत आवेदन पत्र प्राप्त होने पर विधि अनुसार कार्यवाही की जाती है।
पुलिसकर्मियों की नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पदस्थापना
[गृह]
18. ( क्र. 843 ) श्री राजेन्द्र भारती : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या गृह विभाग द्वारा नक्सलाइट एरिया में पुलिसकर्मियों की सेवाकाल के दौरान उपनिरीक्षक एवं निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को अनिवार्य रूप से कार्य करने का नियम/आदेश है? यदि हाँ, तो दतिया में PHQ/गृह विभाग के अधिकारी प्रति उपलब्ध करायें। (ख) प्रश्न दिनांक तक ऐसे कितने निरीक्षक एवं उपनिरीक्षक है जो नक्सलाइट क्षेत्र में पदस्थ नहीं किये गये हैं? कृपया दतिया जिला सहित चम्बल जोन के उपनिरीक्षक एवं निरीक्षकों की सूची प्रदान करते हुये बताये कि छूटे हुये उपनिरीक्षक/निरीक्षकों को अभी तक उक्त क्षेत्र में पदस्थ क्यों नहीं किया गया? कृपया नामवार, पदनामवार, थानावार, जिलावार सूची प्रदान करें। (ग) क्या शासन/विभाग छूटे हुये इंस्पेक्टर/सब इंस्पेक्टर को नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पदस्थ करेगा? यदि नहीं, तो कारण सहित बताये और यदि हाँ, तो कब तक? जानकारी दें। (घ) क्या प्रश्नकर्ता के विधानसभा प्रश्न क्रमांक 2077 दिनांक 05 अगस्त 2025 की जानकारी संकलित कर ली गई है? यदि हाँ, तो कृपया संकलित जानकारी प्रदान करने का कष्ट करें। कृपया किस कारण से उक्त जानकारी अभी तक संकलित नहीं की जा सकी हैं? कारण सहित बतायें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "अ" अनुसार। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "ब" अनुसार। (ग) नक्सल प्रभावित जिलों के रिक्त पदों के अनुक्रम में वरिष्ठता सूची के क्रमानुसार उप निरीक्षकों/निरीक्षकों को नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पदस्थ किया जाता है, जो एक सतत प्रक्रिया है। निश्िचत समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (घ) उल्लेखित विधानसभा प्रश्न क्रमांक 2077 की जानकारी काफी वृहद एवं विस्तृत है जो म.प्र. पुलिस की समस्त इकाइयों एवं समस्त प्रतिनियुक्ति इकाइयों से संबंधित है, जिसका संकलन किया जा रहा है।
डेयरियों से जल एवं पर्यावरण प्रदूषित होना
[पर्यावरण]
19. ( क्र. 861 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जबलपुर जिले के अंतर्गत ग्राम कोसमघाट में डेयरी का मलमूत्र सड़क से होकर गौर नदी में जा रहा है? (ख) क्या मल मूत्र के उचित प्रबंधन न होने के कारण नदी का जल एवं पर्यावरण दूषित हो रहा है? (ग) यदि हाँ, तो क्या डेयरी हटाई जायेगी? (घ) यदि नहीं, तो क्या ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित कराया जायेगा ताकि ग्राम एवं नदी प्रदूषण मुक्त हो सके?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। (ग) जी नहीं। (घ) डेयरी इकाइयों को दूषित जल उपचार व्यवस्था करने के निर्देश जारी करने की प्रक्रिया प्रचलन में है।
वाटर कोर्स एवं फील्ड चैनल का निर्माण
[नर्मदा घाटी विकास]
20. ( क्र. 862 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्न क्र. 644 दिनांक 2 दिसम्बर 2025 के उत्तर में बताया गया है कि फील्ड चैनल निर्माण की दर रू. 835 प्रति मीटर को बढ़ाकर रू. 1249 प्रति मीटर की दर पुनरीक्षित किये जाने का प्रस्ताव वरिष्ठ संयुक्त आयुक्त जल संसाधन मंत्रालय भारत सरकार को प्रेषित किया गया है? (ख) यदि हाँ, तो कब तक वाटर कोर्स एवं फील्ड चैनल निर्माण कार्य किये जायेगे? (ग) क्या वाटर कोर्स एवं फील्ड चैनल के निर्माण न होने के कारण फसलों को पर्याप्त सिंचाई नहीं मिल रही है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। (ख) पुनरीक्षित दरों की स्वीकृति उपरांत। (ग) निर्मित रकबों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। शेष रकबों में पुनरीक्षित दरों की स्वीकृति उपरांत निर्माण कार्य कराया जाकर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराया जाना प्रतिवेदित है।
गौण-खनिज खदानों की जानकारी
[खनिज साधन]
21. ( क्र. 867 ) डॉ. रामकिशोर दोगने : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) हरदा जिले में वर्तमान में कुल कितनी रेत, गिट्टी, मुरम की खदानें संचालित हैं? प्रत्येक खदान का नाम, ग्राम/स्थान, खनिज का प्रकार, खुदाई हेतु स्वीकृत क्षेत्रफल/रकबा, शासकीय/अशासकीय भूमि व वैधता की अवधि क्या है? खदानवार जानकारी उपलब्ध करावें। (ख) हरदा जिले में वर्तमान में संचालित रेत, गिट्टी, मुरम की खदानें किस व्यक्ति/संस्था/ठेकेदार को आवांटित की गई है और कब? विगत 03 वर्षों में प्रत्येक खदान से खनन की स्वीकृत मात्रा तथा वास्तविक उत्खनन मात्रा कितनी रही है? (ग) हरदा जिले में संचालित खदानों से शासन को कितनी रॉयल्टी, पर्यावरण शुल्क एवं अन्य मदों में कितनी राशि प्राप्त हुई है व प्राप्त हुई राशि का उपयोग कहाँ किया गया है? (घ) क्या संचालित खदानों में पर्यावरणीय स्वीकृति, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति अथवा अन्य आवश्यक अनुमति के बिना खनन कार्य किया जा रहा है? यदि हाँ, तो उसका विवरण दें। (ड.) क्या विभाग द्वारा समय-समय पर अवैध खनन कार्य रोकने हेतु जाँच की जाती है? यदि हाँ, तो विगत 03 वर्षों में हरदा जिलान्तर्गत कितने अवैध खनन के प्रकरण दर्ज किए गए तथा दर्ज प्रकरण में संबंधितों पर क्या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो इसका कारण स्पष्ट करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रश्नांश अनुसार हरदा जिले में वर्तमान में खनिज रेत की कोई भी खदान संचालित नहीं है। खनिज गिट्टी (क्रेशर आधारित) की 13 तथा खनिज मुरम 04 खदानें संचालित है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-अ पर दर्शित है। (ख) हरदा जिले में वर्तमान में संचालित खदानों की प्रश्नांश अनुसार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ब पर दर्शित है। (ग) प्रश्नांश अनुसार हरदा जिले में संचालित खदानों से प्राप्त रायल्टी एवं ग्रामीण अवसंरचना कर की राशि राज्य की संचित निधि में जमा कराई गई है। डीएमएफ मद की राशि जिला खनिज प्रतिष्ठान हरदा में जमा कराई गई है, जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-स पर दर्शित है। जिला खनिज प्रतिष्ठान मद में प्राप्त राशि के उपयोग की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-द पर दर्शित है। पट्टेदार से पर्यावरण शुल्क के रूप में राशि वसूल किये जाने के कोई प्रावधान नहीं है। (घ) जी नहीं। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ड.) जी हाँ, विभाग द्वारा अवैध खनन कार्य रोकने हेतु समय-समय पर जांच की जाती है। विगत 03 वर्षों में हरदा जिले में अवैध खनन के दर्ज प्रकरण व की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ई पर दर्शित है।
नियम विरूद्ध पदस्थापना पर कार्यवाही
[सामान्य प्रशासन]
22. ( क्र. 890 ) श्री अभय मिश्रा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या 01 जनवरी 2026 के अद्यतन स्थिति में भा.प्र.से., भा.पु.से., भा.व.से. में अधिकारियों के पदोन्नति की कार्यवाही की गई तो कब-कब? पदोन्नत उपरांत इनको कहां-कहां पदस्थ किया गया अगर नहीं पदस्थ किया गया तो क्यों कब तक पदस्थ किया जाएगा बतावें यदि नहीं, तो क्यों? (ख) प्रश्नांश (क) के कितने ऐसे अधिकारी है जिन्हें स्टेट कैडर से अखिल भारतीय सेवा में पदोन्नत किया जा चुका है लेकिन किसी जिले में पदस्थ कर मैदानी सेवा के कार्य नहीं लिये गये का विवरण पदनाम सहित देवें। प्रश्नांश (क) अनुसार उल्लेखित अधिकारियों में कितने अधिकारियों को पिछले 15 वर्षों से जिलों में पदस्थ कर कार्य लिये जा रहे है इनमें से कितने ऐसे अधिकारी है जिनकी जिले में पदस्थापना अवधि तीन वर्ष से अधिक हो चुकी है लेकिन उनका स्थानांतरण नहीं किया गया स्थानांतरण बाबत् शासन के क्या निर्देश है प्रति देते हुये बतावें एवं इनके स्थानांतरण के निर्देश कब तक देंगे? बतावें। (ग) प्रश्नांश (क) अनुसार कितने ऐसे अधिकारी है जिनसे अतिरिक्त प्रभार के कार्य लिये जा रहे है जबकि प्रश्नांश (क) के अधिकारियों को पदोन्नत के बाद भी पदोन्नत किये गये पद पर पदस्थ कर कार्य नहीं लिया जा रहा क्यों? कारण सहित बतावें। पदोन्नत किये गये पद पर पदस्थ किये जाने बाबत् क्या निर्देश देंगे? बतावें। इनकी संख्या क्या है? जानकारी दें। (घ) प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) अनुसार उल्लेखित तथ्यों पर कार्यवाही बाबत् निर्देश देंगे? अगर नहीं तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
पन्ना जिले में खनिज विभाग की अनुमतियां
[खनिज साधन]
23. ( क्र. 1014 ) श्री राजेश कुमार वर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खनिज विभाग पन्ना द्वारा विगत 06 वर्ष में कितने खनिज क्रेसरों की अनुमति जारी की गई है? जारी अनुमति दिनांक, अवधि सहित प्रकरणवार, वर्षवार बताएं। क्या उक्त अनुमतियों में उल्लिखित शर्तों के संबंध में खनिज अधिकारी पन्ना द्वारा समय-समय पर मौका जांच की गई है? यदि हाँ, तो जांच प्रतिवेदन की सत्य प्रतिलिपि देवें। साथ ही अवगत कराये कि उन जांचों में क्या कार्यवाही हुई है? यदि कार्यवाही नहीं की गई है तो क्यों? इसके लिए कौन दोषी है? दोषियों पर क्या कार्यवाही की जावेगी। (ख) खनिज अधिकारी पन्ना द्वारा विगत 06 वर्ष में कितने अवैध परिवहन एवं भण्डारण, उत्खनन की शिकायतों एवं शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुक्रम में मौके पर जाकर कार्यवाही की गई है? जांच, पंचनामा एवं अंतिम आदेश की प्रति सहित जानकारी वर्षवार देवें। (ग) क्या पन्ना जिले के ग्राम सकरिया के पास, रेल लाइन निर्माण कार्य में भूमि का खनन किया गया है? यदि हाँ, तो क्या ठेकेदार द्वारा ग्राम बहेरा के पास उस खनन की चाल का भण्डारण किया गया है? यदि हाँ, तो क्या उक्त खनन, परिवहन एवं भण्डारण की अनुमति खनिज अधिकारी पन्ना द्वारा या उनके माध्यम से वरिष्ठ कार्यालयों द्वारा प्रदाय की गई है? यदि हाँ, तो क्या अनुमति अनुसार खनिज अधिकारी पन्ना ने मौके पर जांच की है? यदि हाँ, तो मौके का पंचनामा जांच रिपोर्ट, खनन परिवहन भण्डारण में शासन की रॉयल्टी जमा करने के आदेश एवं चालान की प्रति उपलब्ध करावे। यदि कार्यवाही नहीं की गई है, तो इसके लिये कौन दोषी है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) खनिज विभाग में क्रेशर की अनुमति जारी करने का खनिज नियमों में कोई प्रावधान नहीं है। शेष भाग का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) प्रश्नांश अनुसार विगत 06 वर्षों में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भण्डरण में प्राप्त शिकायतों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" पर दर्शित है तथा जाँच, पंचनामा एवं अंतिम आदेश की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"ब" पर दर्शित है। (ग) जी हाँ। निरीक्षण प्रतिवेदन अनुसार ठेकेदार द्वारा ग्राम बहेरा में किसी भी चाल का भण्डारण नहीं किया गया है। शेष भाग का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
पेट्रोल/डीजल पंप व्यवसायियों के टिन नं. प्राप्त करने हेतु समयावधि में वृद्धि
[वाणिज्यिक कर]
24. ( क्र. 1015 ) श्री राजेश कुमार वर्मा : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या मध्यप्रदेश राज्य शासन के यह नियम है कि पेट्रोल/डीजल पंप व्यवसायी टिन नं. प्राप्त करने के बाद व्यवसाय प्रारंभ करेंगे? यदि हाँ, तो कंपनी द्वारा मात्र जी.एस.टी. नं. प्राप्त करने वाले पेट्रोल/डीजल पंप व्यवसायियों को वर्ष 2020 से वर्ष दिसम्बर 2021 की अवधि में बिना टिन नं. के पेट्रोल/डीजल क्यों प्रदाय किया गया है? (ख) क्या मध्यप्रदेश वेट संशोधन अधिनियम 2020 की अधिसूचना क्रमांक 12 सन 2020 दिनांक 21 सितम्बर 2020 जिसमें 31 मार्च 2021 तक टिन नं. प्राप्त करने हेतु समयावधि में वृद्धि की गई थी? यदि हाँ, तो क्या इस कोरोना कॉल में जहां सभी प्रतिष्ठान बंद थे और व्यक्ति का जीवन बचाना सबसे बड़ी आवश्यकता थी, ऐसी दशा में यदि कोई पेट्रोल/डीजल पंप व्यवसायी उक्त अवधि में टिन नं. प्राप्त नहीं कर पाए है और 31 मार्च 2022 या उसके बाद टिन नं. प्राप्त किया है उन्हें दोहरे करा रोपण से बचाने के लिये उक्त समयावधि 31 मार्च 2021 में वृद्धि की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक बतावे। (ग) क्या पेट्रोल/डीजल पंप व्यवसायियों द्वारा वित्त विभाग मध्यप्रदेश शासन एवं माननीय वित्त मंत्री जी मध्यप्रदेश शासन के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत किये गये है? यदि हाँ, तो क्या इस संबंध में कोई कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, क्या कार्यवाही की गई है? यदि कार्यवाही नहीं की गई है तो क्यों?
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी नहीं। टिन (पंजीयन प्रमाण पत्र) प्राप्त करने के पश्चात ही व्यवसाय प्रारंभ किये जा सकने का कोई प्रावधान मध्यप्रदेश वेट अधिनियम, 2002 एवं तत्संबंधी वेट नियमों में नहीं है। मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रशासित मध्यप्रदेश वेट अधिनियम, 2002 एवं तत्संबंधी वेट नियमों के अंतर्गत पेट्रोल/डीजल पंप व्यवसायियों द्वारा आयात करने पर रू 5 लाख से अधिक एवं अन्य को रु. 10 लाख से अधिक सकल विक्रय होने पर टिन (पंजीयन प्रमाण पत्र) प्राप्त किया जाना अनिवार्य किया गया है। मात्र जीएसटी नम्बर प्राप्त पेट्रोल/डीजल पंप व्यवसायियों को वर्ष 2020 से वर्ष दिसम्बर 2021 की अवधि में बिना टिन (पंजीयन प्रमाण पत्र) पंजीयन प्राप्त किये गये पेट्रोल/डीजल पंप व्यवसायियों को पेट्रोल/डीजल प्रदाय किये जाने के संबंध में वेट अधिनियम, 2002 में कोई प्रतिबंध नहीं है। (ख) मध्यप्रदेश वेट (संशोधन) अधिनियम, 2020 की अधिसूचना क्रमांक 12 सन् 2020 दिनांक 21.09.2020 द्वारा पेट्रोल/डीजल पंप व्यवसायियों को टिन (पंजीयन प्रमाण पत्र) प्राप्त करने हेतु 31 मार्च 2021 तक की समयावधि में वृद्धि की गई थी। हाँ, व्यवसायियों की सुविधा हेतु पंजीयन प्रमाण पत्र (टिन) प्राप्त करने की समय-सीमा में विभाग द्वारा एक बार वृद्धि प्रदान की जा चुकी है। कोरोना काल में भी पेट्रोल/डीजल पंप व्यवसायियों द्वारा पेट्रोल/डीजल का व्यवसाय किया जाता रहा है, किन्तु उनके द्वारा टिन (पंजीयन प्रमाण पत्र) प्राप्त करने हेतु विभाग द्वारा प्रदत्त उक्त ऑनलाइन सुविधा का लाभ नहीं लिया गया है, की नियमानुसार अवधि समाप्त हो चुकी है। (ग) मध्यप्रदेश टैक्स लॉ बार एसोसिएशन एवं कमर्शियल टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन इन्दौर द्वारा संयुक्त रूप से मध्यप्रदेश शासन के समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया है। उक्त आवेदन मात्र 8 व्यवसायियों से संबंधित थे। जिसका विचारोपरांत निर्वतन किया गया है। एक बार समयावधि में वृद्धि उपरांत पुनः वृद्धि किया जाना कराधान अनुशासन की दृष्टि से उचित प्रतीत नहीं होने से कोई कार्यवाही नहीं की गई।
नर्मदा बांयी तट नहर का सुधार एवं जल-प्रदाय
[नर्मदा घाटी विकास]
25. ( क्र. 1155 ) श्री अजय विश्नोई : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जबलपुर जिले की बांयी तट नहरें क्षतिग्रस्त हो चुकी है और वर्तमान में उनमें उनकी क्षमता का आधे से भी कम जल प्रदाय किया जा रहा है? (ख) क्या विभाग के पास क्षतिग्रस्त नहरों के सुधार हेतु जिले से प्रस्ताव आये हुये हैं? (ग) विभाग जबलपुर जिले की बांयी तट नहरों के सुधार के लिये अपेक्षित राशि की स्वीकृति कब तक जारी कर देगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) जी हॉं। (ग) कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
नर्मदा की दांयी तट नहर से कटनी, सतना एवं रीवा जिले में जल-प्रदाय
[नर्मदा घाटी विकास]
26. ( क्र. 1156 ) श्री अजय विश्नोई : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नर्मदा की दांयी तट नहर से कटनी, सतना, रीवा जिले के खेतों तक जल प्रदाय कब तक प्रारंभ हो जायेगा? (ख) कटनी, सतना, रीवा जिले के खेतों तक पानी पहुंचाने दांयी तट तक नहर में कितने क्यूसेक पानी छोड़ना होगा? (ग) दांयी तट नहर से आज तक अधिकतम कितने क्यूसेक पानी छोड़ा गया है और वर्तमान स्थिति में दांयी तट नहर से अधिकतम कितना जल छोड़ा जा सकेगा? (घ) क्या शासन समय रहते दोनों तट नहर से रीवा तक पानी पहुंचाने के लिये आवश्यक क्यूसेक क्षमता के जल प्रवाह के लिये दांयी तट नहर का सुधार कर लेगा? यदि हाँ, तो कब तक?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) अक्टूबर 2027 तक प्रदाय किये जाने का लक्ष्य है। (ख) दांयी तट मुख्य नहर से डिजाईन डिस्चार्ज 8032 क्यूसेक में से आवश्यकता अनुसार। (ग) लगभग 1942.30 क्यूसेक तथा वर्तमान में निर्धारित क्षमता के अनुसार। (घ) जी हाँ। कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।
रेत खदानों की नीलामी
[खनिज साधन]
27. ( क्र. 1204 ) श्री विश्वामित्र पाठक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सीधी एवं सिंगरौली जिले में सोन घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में सोन नदी में नहाने एवं दैनिक उपयोग के लिये पानी की उपलब्धता एवं घरेलू उपयोग के लिये रेत कहां से उपलब्ध कराया जायेगा? (ख) क्या जनहित में सोन घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में जनता के उपयोग के लिये सोन नदी के पानी एवं रेत के उपयोग हेतु कोई व्यवस्था की जायेगी? (ग) क्या सोन घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में जहाँ घड़ियाल नहीं है वहां रेत खादानों की नीलामी पर विचार किया जायेगा? (घ) प्रश्नांश (ग) में यदि हाँ, तो कब तक समय-सीमा बतायें?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रश्नानुसार उल्लेखित गतिविधि अभयारण्य क्षेत्र में प्रतिबंधित है। (ख) एवं (ग) उत्तरांश (क) अनुसार प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) उत्तरांश (ग) अनुसार प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग को रेत उपलब्ध कराना
[खनिज साधन]
28. ( क्र. 1205 ) श्री विश्वामित्र पाठक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सीधी एवं सिंगरौली जिले में जिन ग्रामों में या ग्रामों के किनारे नदियों में रेत उपलब्ध है वहीं पर प्रधानमंत्री आवास निर्माण हेतु सस्ते दर पर रेत उपलब्ध कराया जायेगा? (ख) क्या इन जिलों में निवासरत बैगा, अ.जा., अ.ज.जा एवं गरीब परिवारों को आवास निर्माण हेतु रियायती दर पर रेत उपलब्ध कराने की कोई व्यवस्था है? (ग) प्रश्नांश (ख) में यदि हाँ, तो आवास निर्माण हेतु रेत कब तक उपलब्ध कराई जायेगी समय-सीमा बतायें?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं, अधिसूचित मध्यप्रदेश रेत (खनन, परिवहन, भण्डारण तथा व्यापार) नियम 2019 में प्रावधान है कि प्रधानमंत्री आवास निर्माण हेतु निकटतम स्वीकृत रेत खदान से रायल्टी का भुगतान करने के उपरांत ही रेत प्राप्त की जा सकती है। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) जी हाँ, अधिसूचित मध्यप्रदेश रेत (खनन, परिवहन, भण्डारण तथा व्यापार) नियम 2019 के नियम 4 (2) अनुसार "अनुसूचित जाति, जनजाति के मजदूर, सदस्यों, कारीगरों, ग्रामीण कृषकों द्वारा स्वयं के निवास के निर्माण, मरम्मत, कुँओं के निर्माण व कृषि कार्यों हेतु ग्राम सभा द्वारा, अपनी अधिकारिता के भीतर, इस प्रयोजन के लिए सीमांकित एवं चयनित किए गए क्षेत्र से एक वर्ष में अधिकतम 10 घनमीटर रेत का उपयोग कर सकते हैं। (ग) उत्तरांश (ख) अनुसार रेत प्राप्त कर सकते हैं। अत: समय-सीमा बताये जाने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
नवीन भवन निर्माण हेतु राशि स्वीकृति
[विधि एवं विधायी कार्य]
29. ( क्र. 1220 ) श्री बिसाहूलाल सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जिला मुख्यालय अनूपपुर में संचालित न्यायालय भवन शासकीय तुलसी महाविद्यालय के पुराने जर्जर एवं जीर्ण-शीर्ण भवन का मरम्मत कराकर संचालित किया जा रहा है जहाँ पर न्यायाधीशों, स्टाफ व अधिवक्ताओं एवं फरियादियों और गवाहों के साथ-साथ पेशी में लाये गये कैदियों के रखने में भारी परेशानी होने के कारण स्थानीय जनप्रतिनिधियों व अभिभावकों के द्वारा न्यायालय भवन का निर्माण कराये जाने की निरंतर मांग की जा रही है? जिसे स्वीकृत करने का क्या प्रावधान है? (ख) प्रश्नांश "क" अनुसार जिला अनूपपुर में तत्कालीन माननीय मुख्यमंत्री जी के एवं माननीय वर्तमान मुख्यमंत्री जी के प्रवास के दौरान जिला मुख्यालय अनूपपुर में जिला सत्र न्यायालय का नवीन भवन निर्माण कराये जाने की घोषणा की गई थी? यदि हाँ, तो किये गये घोषणा अनुसार अभी तक निर्माण हेतु राशि स्वीकृत की गई है? (ग) प्रश्नांश "ख" अनुसार जिला मुख्यालय अनूपपुर में अधिवक्ताओं और जनप्रतिनिधियों के द्वारा की गई मांग अनुसार भवन निर्माण की राशि स्वीकृत न होने के क्या कारण है? क्या उक्त भवन हेतु राशि स्वीकृत हो पायेगी? यदि हां, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? (घ) प्रश्नांश (क) (ख) एवं (ग) अनुसार उपरोक्त भवन के निर्माण हेतु राशि स्वीकृत की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। जी नहीं। (ग) विभागीय सूचकांक उपलब्ध नहीं होने के कारण। जी हाँ। निश्िचत समय-सीमा बतलाया जाना सम्भव नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) जी हाँ। निश्िचत समय-सीमा बतलाया जाना सम्भव नहीं है।
नवगठित जिलों में पुलिस विभाग की पदस्थापना
[गृह]
30. ( क्र. 1240 ) श्री श्रीकान्त चतुर्वेदी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नवगठित जिला मैहर सहित अन्य नवगठित जिलों में अभी तक जिला स्तरीय कार्यालय एवं पुलिस लाइन तथा अन्य शाखाओं के क्या पद स्वीकृत किये गये है? यदि हाँ, तो स्वीकृत पदों की जानकारी दी जावें? यदि नहीं, तो क्या राज्य सरकार में उक्त जिला स्तरीय पदों की स्वीकृति के प्रस्ताव विचाराधीन है, यदि हाँ, तो किस स्तर में लंबित है लंबित पदों को कब तक स्वीकृत किया जावेगा? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार नवगठित जिलों में पुलिस अधीक्षक कार्यालयों/पुलिस लाइन एवं आवासीय भवनों की स्वीकृति क्या प्रदान की गई है? यदि नहीं, तो कब तक स्वीकृति प्रदान की जावेगी तथा उक्त भवन कब तक निर्मित कराये जावेंगे। (ग) प्रश्नांश (क) प्रकाश में क्या नवगठित जिलों में यातायात/महिला थाना एवं अ.जा./अ.ज.जाति कल्याण थानों की स्थापना किये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। यदि हाँ, तो उक्त थानों की स्थापना कब तक कर दी जावेगी? समयावधि बतायी जावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) नवगठित जिला मैहर, पांढुर्णा एवं मऊगंज जिलो में जिला स्तरीय कार्यालय एवं पुलिस लाइन तथा अन्य शाखाओं के पदों की स्वीकृति हेतु कार्यवाही प्रकियाधीन है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) नवगठित जिला मैहर, पांढुर्णा एवं मऊगंज में पुलिस अधीक्षक कार्यालय एवं पुलिस लाइन की स्वीकृति दी जा चुकी है। जिला पांढुर्णा एवं मऊगंज में 60-60 आवासों के निर्माण की अनुमति म.प्र.पु.हा.कार्पो. को प्रदान की जा चुकी है एवं नवगठित जिला मैहर में 128, मऊगंज में 76 एवं पांढुर्णा में 36 आवासों के निर्माण की स्वीकृति की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ग) नवगठित जिलों में यातायात/महिला थाना एवं अजाक थाने की स्थापना किए जाने की स्वीकृति प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
वृक्षों की अवैध कटाई एवं वृक्षारोपण
[वन]
31. ( क्र. 1263 ) श्री कुँवर सिंह टेकाम : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सीधी एवं सिंगरौली जिले को अंतर्गत वन विकास निगम के द्वारा वृक्षारोपण कराये जाने के क्या प्रावधान है? सम्पूर्ण प्रावधान एवं नियम की प्रति उपलब्ध करायें। (ख) सीधी जिले के अंतर्गत वन विकास निगम सीधी के द्वारा बीट टिकरी अंतर्गत ग्राम शिकरा, बगदेवा एवं टिकरी कम्पार्टमेंट नं. पी-1373 में स्थित प्राकृतिक जंगल सरई, साल, तेंदू, महुआ आदि वृक्ष लगभग 10 हजार पेड़ों की अवैध कटाई 35 हेक्टेयर क्षेत्रफल में किया गया है? यदि हाँ, तो किस नियम एवं किनके आदेश से वृक्षों की कटाई की गई है? पूर्ण विवरण एवं आदेश की प्रति उपलब्ध करायें। (ग) सीधी एवं सिंगरौली जिले के अंतर्गत वन विकास निगम के द्वारा वर्ष 2021-22, 2022-23, 2023-2024, 2024-25 एवं 2025-26 के दौरान कितने वृक्षों की कटाई की गई थी? वृक्षारोपण के तहत किन-किन स्थानों में कितने वृक्षों का वृक्षारोपण किया गया है? पूर्ण विवरण, पी.एफ. नम्बर, बीट नम्बर, वृक्षों की संख्या, प्रजातिवार, वर्षवार जानकारी उपलब्ध करायें। (घ) प्रश्नांश (ग) के संदर्भ में वृक्षारोपण के तहत कितनी राशि का व्यय किया गया वर्षवार राशि सहित जानकारी उपलब्ध करायें। वृक्षारोपण में रोपित किये गये वृक्षों की संख्या के विरुद्ध कितने वृक्ष जीवित है? संख्या, वर्षवार, प्रजातिवार जानकारी उपलब्ध करायें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड अन्तर्गत रीवा-सीधी परियोजना मण्डल सीधी के द्वारा सीधी एवं सिंगरौली जिले में भारत सरकार द्वारा स्वीकृत रीवा कार्य आयोजना के अध्याय 02 वृक्षारोपण कार्यवृत्त में निहित प्रावधान अनुसार वृक्षारोपण का कार्य कराया जाता है। प्रावधान संलग्न परिशिष्ट- 1 अनुसार है। (ख) जी नहीं, कोई अवैध कटाई नहीं की गई है, शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड अन्तर्गत रीवा-सीधी परियोजना मण्डल सीधी में वर्ष 2021-22 से वर्ष 2025-26 तक कुल 13602 वृक्ष काटे गये तथा 22 कक्षों के कुल 842.000 हेक्टेयर क्षेत्र में सागौन एवं मिश्रित प्रजाति के कुल 2101500 पौधो का रोपण किया गया। शेष जानकारी संलग्न परिशिष्ट- 2 अनुसार है। (घ) मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड अन्तर्गत रीवा-सीधी परियोजना मण्डल सीधी में वर्ष 2021-22 से 2025-26 तक वृक्षारोपण पर कुल राशि रूपये 5,75,36,365/- का व्यय किया गया है। वर्ष 2021-22 से वर्ष 2025-26 तक कुल 2101500 पौधो का रोपण किया गया जिसमें से कि 90.53 प्रतिशत 1902538 पौधे जीवित है। शेष जानकारी संलग्न परिशिष्ट- 3 अनुसार है।
शासन के आदेशों का पालन
[सामान्य प्रशासन]
32. ( क्र. 1337 ) सुश्री रामश्री (बहिन रामसिया भारती) राजपूत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश क्र.F-11-41/2014/1/9 भोपाल दिनाँक 14/11/14 तथा पत्र क्र. F-11-38/96/1/एक भोपाल 4 नवम्बर 1996 के तहत छतरपुर जिले में प्रभारी अधिकारी जिला प्रशासन द्वारा नियुक्त किये? (ख) यदि हाँ, तो ऐसे कौन-कौन से विभाग है, जो अधिकारी वरिष्ठ है और वह आहरण वितरण DDO है तथा जिले के विभाग प्रमुख है सूची दें? (ग) क्या शिक्षा विभाग में जूनियर प्राचार्य लम्बे समय से DEO का कार्य कर रहे है और जूनियर प्राचार्य विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी जो सहायक संचालक का पद है जिसकी नस्ती नियम विरुद्ध बनाकर कलेक्टर छतरपुर को गुमराह कर नियमों के विपरीत कार्य कर रहे है यदि हाँ, तो क्यों? (घ) क्या छतरपुर जिले में कई सीनियर वरिष्ठ प्राचार्य एवं PSC से सिलेक्ट सहायक संचालक जो DEO कार्यालय में पदस्थ है उनको प्रभारी नियुक्ति प्रश्न दिनांक तक क्यों नहीं किया गया? क्या शासन आदेशों का पालन किया जावेगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) सामान्य प्रशासन विभाग का आदेश क्र.F-11-41/2014/1/9 भोपाल दिनाँक 14/11/14 तथा पत्र क्र. F-11-38/96/1/एक भोपाल 4 नवम्बर 1996 की प्रति संलग्न है। कार्यालय कलेक्टर छतरपुर म.प्र. का आदेश दिनांक 25/08/2025 द्वारा प्रभार सौंपा गया। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जिला छतरपुर स्कूल शिक्षा विभागान्तर्गत समस्त आहरण संवितरण अधिकार वरिष्ठ को ही सौंपे गये हैं। (ग) जिला छतरपुर स्कूल शिक्षा विभागान्तर्गत जिन विकासखण्डों में नियमित विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी (सहायक संचालक) पदस्थ नहीं हैं, उनका अतिरिक्त प्रभार विकासखण्ड अन्तर्गत वरिष्ठता सूची के आधार पर अतिरिक्त कार्य करने की सहमति के आधार पर सौंपा गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) उत्तरांश (क) से (ग) अनुसार कार्यवाही की गई।
जी.एस.टी. चोरी के प्रकरणों का निराकरण
[वाणिज्यिक कर]
33. ( क्र. 1444 ) श्री अजय अर्जुन सिंह : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इस वर्ष प्रदेश के अलग-अलग जिलों में प्रश्न दिनांक तक जी.एस.टी. चोरी के कितने मामले दर्ज हुए हैं? इनमें स्टील, सुपारी-गुटखा जैसे क्षेत्रों में दर्ज मामलों का विवरण क्या है? (ख) उपरोक्त में से बड़े (50 लाख+) चोरी वाले मामलों की संख्या, जिलावार राशि और फर्जी फर्मों/ऑपरेटरों का विवरण क्या है? टैक्स कलेक्शन में इस वर्ष लक्ष्य से कितनी कमी आई है? (ग) क्या जी.एस.टी. चोरी रोकने हेतु विशेष जांच/कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, तो कितनी राशि वसूल हुई? गिरफ्तारियां व मुकदमें दर्ज हुए?
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में प्रश्न दिनांक तक कुल 437 करदाताओं पर मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 67 के अंतर्गत इन्सपेक्शन, सर्च एवं सीज़र की कार्यवाही की गई। उक्त 437 करदाताओं की सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ए अनुसार है। जिसमें से आयरन स्टील, सुपारी-गुटखा जैसे क्षेत्रों से संबधित 127 करदाताओं पर कार्यवाही की गई। जिनमें राशि रूपये 4697.64 लाख जमा करायी गयी। सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-बी अनुसार है। (ख) उपरोक्त में से बडे़ (50 लाख+ से अधिक कर अपवंचन में संलिप्त) 140 प्रकरणों में जीएसटी अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाहियाँ की गई। जिलावार राशि की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट–'सी' अनुसार है। 21 फर्जी फर्म/ऑपरेटर्स का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट–'डी' अनुसार है। जीएसटी के तहत टैक्स कलेक्शन में इस वर्ष लक्ष्य से 0.75 प्रतिशत की कमी आई है, जिसका कारण जीएसटी 2.0 के तहत कर की दरों में कमी की जाना है। (ग) जी हाँ। विभाग द्वारा जी.एस.टी. चोरी रोकने के लिए निरंतर विशेष अभियान और प्रभावी जांच कार्यवाही हेतु 437 करदाताओं पर मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 67 के अंतर्गत इन्सपेक्शन, सर्च एवं सीज़र की कार्यवाही की जाकर राशि रु. 23449.00 लाख जमा करायी गयी, जिसकी सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ए अनुसार है। मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 68 के अंतर्गत चलित वाहनों की जांच कार्यवाही में कुल 2350 प्रकरणों में राशि रु. 2827.94 लाख जमा करायी गयी। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 में गिरफ्तारी के प्रकरण दर्ज नहीं हुए हैं।
खदान की सीमा से बाहर अवैध उत्खनन
[खनिज साधन]
34. ( क्र. 1460 ) श्री यादवेन्द्र सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वन परिक्षेत्र टीकमगढ़ के कारी कक्ष क्रमांक 48 रकबा 5.00 हेक्टेयर भूमि पर खनन हेतु वर्ष 1999 में सशर्त लीज स्वीकृत की गई थी बाद में सन् 2015-16 में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर 5 हेक्टेयर तक की खदान पर भी खनन हेतु पर्यावरण स्वीकृति लेना अनिवार्य किया था। खनन हेतु स्वीकृत लीज एरिया की सीमा बताने वाले मुनारों की जीपीएस रीडिंग क्या थी? (ख) क्या प्रश्नांश "क" में उल्लेखित खदान 5 हेक्टेयर तक की पर्यावरण स्वीकृति जिला पर्यावरण कमेटी द्वारा होने से उप जिला वनमंडल अधिकारी द्वारा अपने स्वीकृति आदेश क्रमांक 2016/558 टीकमगढ़ दिनांक 28.06.2016 के द्वारा किन-किन सीमा क्षेत्र के मुनारे भीतर खदान हेतु पर्यावरण अनुमति की अनुशंसा की थी? पर्यावरण अनुमति की प्रक्रिया में उप जिला वनमंडल अधिकारी, परिक्षेत्र अधिकारी, पंचनामा इत्यादि में सभी मुनारों की जी.पी.एस. रींडिग क्या थी? (ग) क्या प्रश्नांश "क" एवं ख" में दिये गये प्रतिवेदन में उल्लेखित कोर्डिनेट जी.पी.एस. रीडिंग पी-4 के मुनारे की रीडिंग भिन्न-भिन्न है? (घ) क्या रीडिंग भिन्न-भिन्न है यदि हाँ, तो खदान पर्यावरण स्वीकृति वर्ष 2016 से अवैध रूप से संचालित है यदि हाँ, तो दोषी अधिकारी एवं खनन करने वाली कंपनी के विरूद्ध कब तक कार्यवाही की जावेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। स्वीकृत क्षेत्र के अनुमोदित माईनिंग प्लान में दर्शित खदान के मुनारों के जीयो कोडिनेट्स की जानकारी संलग्न परिशिष्ट-"अ" पर दर्शित है। (ख) प्रश्नांश की जानकारी संलग्न परिशिष्ट-"ब" पर दर्शित है। (ग) जी हाँ। (घ) जी हाँ। जी नहीं। खनन कार्य कलेक्टर से अनुबंधित मानचित्र एवं अनुमोदित खनन योजना में दर्शित जीयो कोर्डिनेट के भीतर ही खनन कार्य किया जा रहा है। अतः अवैध उत्खनन किये जाने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
खदान की सीमा से बाहर वन विभाग में अवैध उत्खनन
[वन]
35. ( क्र. 1461 ) श्री यादवेन्द्र सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या अपर प्रधान वन संरक्षक (वन्य जीव) ने अपने पत्र क्र./ब.जी./प्रबंध/166/476847/8060 भोपाल दिनांक 10.09.2025 को कारी वन क्षेत्र क्र.48 म.प्र. स्टेट माईनिंग कॉर्पोरेशन लि. की खदान में खनन सीमा के बाहर अवैध खनन की शिकायत प्राप्त होने पर कार्यवाही हेतु वनमंडल अधिकारी को लेख किया था यदि हाँ, तो? (ख) वनमंडल टीकमगढ़ द्वारा प्रश्नांश (क) में वर्णित शिकायत पर अपनी नंबर रिपोर्ट 1156/2 दिनांक 16.10.2025 द्वारा भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 (1) ज में अतिक्रमण का पी.ओ.आर. काटा गया है। यदि हाँ, तो? (ग) क्या प्रश्नांश (क) में वर्णित आदेश एवं शिकायतकर्ता द्वारा अवैध उत्खनन के विरूद्ध कार्यवाही लेख की गई थी। यदि हाँ, तो? (घ) क्या भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 26 (1) छ में अवैध उत्खनन अंतर्गत पी.ओ.आर वनमंडल अधिकारी द्वारा काटा जाना था। यदि नहीं, तो? जिम्मेदार अधिकारियों के विरूद्ध कब तक कार्यवाही की जावेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। (ग) प्रश्नांश (क) में वर्णित आदेश से शिकायतकर्ता की शिकायत जांच हेतु लेख किया गया था। (घ) शिकायत जांच में पाया गया कि स्वीकृत खदान क्षेत्र से ओवर बर्डन निकाल कर वन भूमि पर रखा गया है, जो अतिक्रमण की श्रेणी में है, अतः भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 26 (1) (छ) के तहत वन अपराध प्रकरण पंजीबद्ध करने की आवश्यकता नहीं थी। अतः अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
लंबित विधायक निधि के देयकों का भुगतान
[योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी]
36. ( क्र. 1512 ) श्री सुरेश राजे : क्या उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्यप्रदेश के किस जिले में 01 जनवरी 2024 के पूर्व विधायक निधि के किन-किन पूर्व विधायक तथा वर्तमान की विधायक निधि के निर्माण कार्यों के लंबित देयकों को भुगतान हेतु कितनी-कितनी राशि प्रश्न दिनांक तक लंबित है? सम्पूर्ण जानकारी विधायक या पूर्व विधायक के नाम एवं विधानसभा क्षेत्रवार बतावे। (ख) पूर्व मंत्री श्री लाखन सिंह यादव द्वारा विधायक निधि से जो-जो निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग ग्वालियर द्वारा करवाए गए थे उनके सम्बन्ध में कब-कब माननीय पूर्व मंत्री द्वारा लंबित देयकों के भुगतान हेतु योजना मंडल ग्वालियर तथा भोपाल में वरिष्ठ अधिकारीयों तथा माननीय मंत्री महोदय को पत्र लिखे? पत्रों पर प्रश्न दिनांक तक क्या-क्या कार्यवाही की गई? सम्पूर्ण पत्रों सहित की गई कार्यवाही की जानकारी देवें (ग) प्रश्नकर्ता द्वारा 02 दिसंबर 2025 को अतारांकित प्रश्न (क्र.732) के दिनांक 02.12.2025 के उत्तर में माननीय पूर्व मंत्री के विधायक निधि के लंबित भुगतानों के सम्बन्ध में बताया गया था कि अनुपूरक बजट में शामिल किये जाने हेतु प्रस्ताव प्रेषित किया गया है? किन्तु नहीं हो सका? क्या आगामी बजट सत्र में शामिल कर बजट उपलब्ध करवा कर भुगतान किया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? कारण सहित बतावें।
उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना अंतर्गत निर्माण कार्य की भुगतान हेतु लंबित राशि की मांग वित्तीय वर्ष 2025-26 के तृतीय अनुपूरक अनुमान में की गई है। (ग) वर्ष 2025-26 के तृतीय अनुपूरक अनुमान प्रस्ताव में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना के निर्माण कार्य की भुगतान हेतु लंबित राशि की मांग की गई है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
जनसेवा मित्रों के सुरक्षित भविष्य के लिए सेवा बहाली
[लोक सेवा प्रबन्धन]
37. ( क्र. 1518 ) इंजीनियर हरिबाबू राय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. के लगभग 9300 शिक्षित युवाओं को जनसेवा मित्र के रूप में नियुक्त किया गया था। इन युवाओं ने कई महत्वपूर्ण योजनाओं को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए घर-घर जाकर अथक परिश्रम किया है किंतु पिछले दो वर्षों से इन युवाओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। इन 9300 युवाओं को पुनः सेवा में कब तक वापिस लिया जायेगा? (ख) युवाओं के साथ न्यायपूर्ण निर्णय करते हुए इनके मानदेय और स्थायित्व हेतु प्रावधान किया जायेगा। युवाओं के हित को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट तौर पर बताये जाने का कष्ट करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) 1. जनसेवा मित्र एक इंटर्नशिप कार्यक्रम था, जिसका उद्देश्य शिक्षित युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें भविष्य में रोजगार हेतु सक्षम बनाना था। यह कार्यक्रम किसी प्रकार का रोजगार अथवा नियमित सेवा नहीं था, बल्कि केवल प्रशिक्षण आधारित इंटर्नशिप थी। 2. कार्यक्रम की निर्धारित अवधि दिनांक 31/01/2024 को समाप्त होने के साथ ही यह इंटर्नशिप स्वतः समाप्त हो गई थी। अवधि समाप्ति के पश्चात पुनः कार्य, रोजगार अथवा सेवा में लिए जाने का कोई प्रावधान नहीं था। इसका स्पष्ट उल्लेख कार्यक्रम के विज्ञापन, नियम पुस्तिका तथा इंटर्नशिप आर्डर में दिया गया था। (ख) उत्तरांश “क” के संदर्भ में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
जिला न्यायालय के नवीन भवन का निर्माण
[विधि एवं विधायी कार्य]
38. ( क्र. 1555 ) डॉ. रामकिशोर दोगने : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या हरदा निवासी श्री अशरफ खान एवं उनकी पत्नी श्रीमती शगुफ्ता खान द्वारा अपनी वार्ड क्रमांक 32, हरदा स्थित लगभग 05 एकड़ भूमि, जिसका बाजार मूल्य लगभग 7.50 करोड़ है को हरदा जिला न्यायालय के नवीन भवन निर्माण हेतु शासन को दान में दी गई है, जिसकी दान स्वीकार करने, नामांतरण एवं अन्य औपचारिकताओं की कार्यवाही पूर्ण हो चुकी है? (ख) यदि हाँ, तो उक्त भूमि पर जिला न्यायालय के नवीन भवन निर्माण कराये जाने की प्रक्रिया शुरू क्यों नहीं की गई है? (ग) उक्त भूमि पर जिला न्यायालय के नवीन भवन निर्माण कार्य हेतु अब तक कौन-कौन से विभागीय/प्रशासनिक अनुमोदन प्राप्त हुए है? (घ) उक्त भूमि पर निर्माण कार्य हेतु तकनीकी, प्रशासनिक, वित्तिय स्वीकृति प्राप्त हुई है, क्या? यदि नहीं, तो कारण स्पष्ट करें। (ड.) उक्त भूमि पर नवीन जिला न्यायालय भवन निर्माण कार्य हेतु स्वीकृति प्रदान कर निर्माण कार्य कब से प्रारंभ किया जाएगा? समय-सीमा बताये।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (ड.) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
नर्मदा घाटी डूब प्रभावितों को आवंटित भूखण्डों की रजिस्ट्री
[नर्मदा घाटी विकास]
39. ( क्र. 1673 ) श्रीमती नीना विक्रम वर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रश्नकर्ता विधायक द्वारा विधानसभा सत्र जुलाई 2025 में प्रश्न क्रमांक 113 के माध्यम से धरमपुरी जिला धार में नर्मदा घाटी डूब प्रभावितों को आवंटित भूखण्डों की रजिस्ट्री के संबंध में पुछा गया था? (ख) यदि हाँ, तो क्या सत्रहवें मुख्यमंत्री जी के साथ डूब प्रभावितों के प्रतिनिधियों की सी.एम. हाउस में बैठक हुई थी तथा इस बैठक में आवंटी भूखण्डों की रजिस्ट्री निःशुल्क करवाने का आश्वासन दिया गया था? (ग) क्या दिनांक 14/12/2025 को माननीय उच्च न्यायालय इन्दौर द्वारा विस्थापितों को प्रदत्त भूखण्डों की रजिस्ट्री करवाने के आदेश दिये गये है तथा क्या उच्च न्यायालय द्वारा धार सहित आलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी जिले के कलेक्टर को भूखण्डों की रजिस्ट्री करवाये जाने हेतु समिति गठित कर इस हेतु अग्रिम कार्यवाही आगामी दो माह की समय-सीमा में करने के निर्देश दिये गये है? बताने का कष्ट करे। (घ) यदि हाँ, तो क्या जिलास्तरीय समितियों का गठन हो चुका है? यदि हाँ, तो गठित समितियों द्वारा उक्त तारतम्य में की गई कार्यवाही की प्रगति से अवगत करवाने का कष्ट करे तथा कब तक डूब प्रभावितों को रजिस्ट्री करवाना प्रारंभ किया जावेगा? जानकारी देने का कष्ट करें। (ड.) यदि नहीं, तो क्या कारण रहे है? इस संबंध में शासन की क्या नीति है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। (ग) जी हाँ। माननीय उच्च न्यायालय, इंदौर द्वारा दिनांक 14.12.2025 को नहीं वरन दिनांक 14.10.2025 को निर्देश दिये गये हैं। (घ) जी हाँ। पंजीयन हेतु कैंप प्रारंभ कर दिये गये हैं। शेष प्रश्नांश लागू नहीं। (ड.) उत्तरांश (घ) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न लागू नहीं।
आयरन माइंस की खनन अनुमति
[खनिज साधन]
40. ( क्र. 1722 ) श्री साहब सिंह गुर्जर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्वालियर के विकासखण्ड घाटीगांव की ग्राम पंचायत सांतऊ में संचालित आयरन माइंस की अनुमति विभाग द्वारा किस दिनांक को एवं कितनी खनन मात्रा की अनुमति दी गई है एवं खनन मात्रा प्रतिवर्ष का अनुबंध/आदेश कि प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध करावें। (ख) खनन प्रारंभ दिनांक से 20.01.2026 तक इनके द्वारा जमा की गई रॉयल्टी की जानकारी देवें। इस अवधि में जो खनन किया गया है उसकी मात्रा वर्षवार बतावें? क्या कारण है कि स्वीकृत मात्रा से अधिक खनन इनके द्वारा किया गया? खनिज अधिकारी की इस संबंध में जो निरीक्षण टीप लिखी गई उसकी प्रमाणित प्रतियां खनन प्रारंभ दिनांक से देवें। (ग) अधिक खनन करने पर कितनी दण्ड राशि निर्धारित है? इस प्रकरण में कितनी दण्ड राशि निर्धारित की गई एवं कितनी वसूल की गई, वसूली नहीं की तो कब की जावेगी? इनके द्वारा पर्यावरण अनुमति लेते समय जो नियम/शर्तें मान्य की गई उसके समस्त दस्तावेजों की छायाप्रति देवें व खनन क्षेत्र में जो पौधारोपण एवं अन्य कार्य आयरन माइंस द्वारा किये गये की जानकारी 20.01.2026 तक की स्थिति में देवें। (घ) नियमों विरूद्ध इन्हें संरक्षण देने वालों के नाम पदनाम देकर बतावें कि इनके विरूद्ध कब तक कार्यवाही की जावेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रश्नाधीन क्षेत्र पर स्वीकृत आयरन ओर खनिज के खनिपट्टा खनिज साधन विभाग के स्वीकृति एवं अनुबंध की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-अ पर दर्शित है। प्राप्त वैधानिक अनुमति अनुसार खनन योग्य वार्षिक मात्रा 1,13,299 मेट्रिक टन की अनुमति खनिपट्टा में प्राप्त है। (ख) प्रश्नानुसार कार्यालय में संधारित अभिलेख अनुसार जमा रायल्टी एवं खनन की मात्रा का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ब एवं स पर दर्शित है। पट्टेदार द्वारा अनुमत मात्रा से अधिक खनन नहीं किया गया है। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) खान एवं खनिज (विकास तथा विनियमन) अधिनियम 1957 की धारा 21 (5) के तहत अनुमत मात्रा से अधिक खनन पर बाजार मूल्य लिये जाने का प्रावधान है। प्रश्नाधीन पट्टेदार द्वारा अनुमत मात्रा से अधिक का खनन नहीं किया गया है। अतः प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। प्रश्नांश (क) में उल्लेखित खनिपट्टे के संबंध में प्राप्त पर्यावरण अनुमति की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-द पर दर्शित है। पट्टेदार द्वारा की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ई पर दर्शित है। (घ) प्रश्नाधीन खनिपट्टे का संचालन नियमानुसार किया जा रहा है। अतः पट्टेदार को नियम विरूद्ध संरक्षण दिये जाने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
धनई नदी क्षेत्र में अवैध/अनियंत्रित रेत का उत्खनन
[खनिज साधन]
41. ( क्र. 1750 ) श्री रजनीश हरवंश सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या धनई नदी के बागडोंगरी क्षेत्र में किसानों के खेतों में लगातार कटाव हो रहा है तथा रेत खनन के कारण ओवरलोड डम्परों के आवागमन से क्षेत्र की संपूर्ण सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं? यदि हाँ, तो आज दिनांक तक इसके निराकरण हेतु क्या-क्या कार्यवाही की गई है? (ख) क्या खुरसरा रेत खदान क्षेत्र में गोलीकांड जैसी गंभीर आपराधिक घटनाएँ सामने आई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भय एवं दहशत का माहौल बना हुआ है? यदि हाँ, तो दोषियों के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई है? (ग) क्या धनई नदी के बागडोंगरी क्षेत्र की रेत खदानों की स्वीकृति निरस्त (री-स्वीकृति समाप्त) करने पर विचार क्यों नहीं किया जा रहा है, जबकि इन खदानों के संचालन से जनसुरक्षा, किसान हित एवं सार्वजनिक संपत्ति को गंभीर क्षति हो रही है। (घ) क्या सरकार प्रभावित सड़कों के तत्काल पुनर्निर्माण, ओवरलोड वाहनों पर कठोर नियंत्रण तथा रेत खनन पर प्रभावी निगरानी हेतु कोई ठोस कार्ययोजना बनाएगी? यदि हाँ, तो उसका विवरण क्या है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। शेष भाग का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) जी नहीं। खुरसरा में कोई रेत खदान स्वीकृत नहीं है। अपितु खुरसरा में गोलीकाण्ड होने के संबंध में थाना प्रभारी उगली जिला सिवनी का पत्र दिनांक 05/02/2026 अनुसार दिनांक 19/11/2025 अनुसार आरोपियों के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचनाधीन है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट में दर्शित है। (ग) प्रश्नांश (क) में दिये उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) प्रश्नांश (क) में दिये उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रभावित सड़कों के तत्काल पुनर्निर्माण का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भण्डारण पर नियंत्रण हेतु एवं रेत खनन पर प्रभावी निगरानी हेतु टास्क फोर्स समिति का गठन किया गया है। जिसके तहत राजस्व विभाग, पुलिस विभाग, वन विभाग एवं खनिज विभाग द्वारा सतत् रूप से प्रभावी कार्यवाही की जा रही है।
सागर नगर स्थित मंगलगिरी पहाड़ी क्षेत्र का रख-रखाव
[वन]
42. ( क्र. 1787 ) श्री शैलेन्द्र कुमार जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सागर नगर स्थित मंगलगिरी पहाड़ी क्षेत्र में वन विभाग की भूमि को सिटी फॉरेस्ट-02 के रूप में विकसित किये जाने की स्वीकृति शासन द्वारा प्रदान की गई है? यदि हाँ, तो अब तक इस परियोजना हेतु कुल कितनी राशि स्वीकृत की गई है एवं स्वीकृत राशि से क्या-क्या कार्य कराये गये है? कृपया संपूर्ण कार्ययोजना से अवगत करायें। (ख) क्या बजट के अभाव में प्रस्तावित योजना अनुरूप कार्य पूर्ण नहीं हो पाए है? यदि हाँ, तो क्या शासन उक्त योजना को पूर्ण रूप से विकसित किये जाने हेतु आगामी समय में बजट स्वीकृत किये जाने पर विचार करेगा? (ग) इसके पूर्व में सागर में सिटी फॉरेस्ट-01 का विकास शासन द्वारा किया गया था, किन्तु उसके मेंटेनेंस हेतु नियमित बजट उपलब्ध न होने के कारण पेड़, पौधे एवं वनस्पति नष्ट हो गए। ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने हेतु क्या शासन सिटी फॉरेस्ट-02 के रख-रखाव (मेंटेनेंस) के लिये प्रतिवर्ष पृथक बजट प्रावधानित कर उपलब्ध कराये जाने पर विचार करेगा? यदि हाँ, तो कब तक और यदि नहीं, तो इसका क्या कारण हैं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। सिटी फारेस्ट-02 (मंगलगिरी) हेतु कुल 137.00 लाख स्वीकृति प्रदान की गई है एवं स्वीकृत राशि से कराये गये कार्यों का विवरण एवं संपूर्ण कार्य आयोजना पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। स्वीकृत योजना अनुसार ही कार्य कराये गये हैं। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। (ग) वनमंडल दक्षिण सागर के अंतर्गत वर्ष 2017-18 में स्वीकृत सिटी फारेस्ट -01 कक्ष क्रमांक आर एफ 735 में विकसित किया गया था, उक्त योजना रख-रखाव कार्य सहित पांच वर्ष हेतु स्वीकृत थी, जो कि वर्ष 2021-22 में समाप्त हो चुकी है। सिटी फारेस्ट- 01 में अधिकांश पेड़, पौधे एवं वनस्पति जीवित हैं। सिटी फारेस्ट-02 मंगलगिरी में स्वीकृत योजना वर्ष 2022-23 से वर्ष 2026-27 तक की है, जिसमें रख-रखाव कार्य शामिल है। स्वीकृत योजना अनुसार वर्ष 2022-23 से 2024-25 तक के कार्य पूर्ण किये जा चुके हैं। वर्ष 2025-26 के कार्य प्रारम्भ है। आगामी वर्ष 2026-27 में स्वीकृति अनुसार रख-रखाव कार्य करना सम्भव है, शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता हैं।
प्रदेश में औद्योगिक निवेश, इकाइयों की स्थापना एवं भूमि आवंटन
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
43. ( क्र. 1807 ) डॉ. विक्रांत भूरिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2020 से वर्ष 2025 तक की अवधि में प्रदेश में कुल कितना औद्योगिक निवेश (Capital Investment) प्राप्त हुआ है? उक्त अवधि में प्रदेश के किन-किन जिलों में नई विनिर्माण (Manufacturing) इकाइयां स्थापित की गई हैं? जिलेवार एवं उद्योग के प्रकार (जैसे- फार्मा, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण आदि) सहित सूची प्रदान करें। (ख) उक्त अवधि में उद्योगों की स्थापना हेतु किन-किन फर्मों/कंपनियों को किस जिले में, कितनी वन/राजस्व/औद्योगिक भूमि आवंटित की गई है? आवंटित भूमि का विवरण कंपनी के नाम, स्थान (ग्राम/तहसील), सर्वे/खसरा नंबर एवं कुल क्षेत्रफल (एकड़/वर्ग फुट में) सहित उपलब्ध कराएं। (ग) भूमि आवंटन हेतु सरकार द्वारा क्या दर (Rate per Sq. Ft.) निर्धारित की गई थी और किस कंपनी को किस रियायती दर या प्रीमियम पर भूमि दी गई? क्या आवंटन के समय "कलेक्टर गाइड-लाइन" की दरों का पालन किया गया है? यदि नहीं, तो रियायत देने के क्या कारण थे? (घ) क्या आवंटित भूमि पर संबंधित कंपनियों ने निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया है? ऐसी कितनी कंपनियां हैं जिन्होंने भूमि आवंटन के बावजूद अब तक विनिर्माण प्लांट (Manufacturing Plant) स्थापित नहीं किया है? उनके विरुद्ध विभाग द्वारा अब तक क्या कार्यवाही की गई है।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (घ) जानकारी संकलित की जा रही है।
सहजपुर (वि.खं. केसली) में पुलिस चौकी की स्थापना
[गृह]
44. ( क्र. 1849 ) श्री बृज बिहारी पटैरिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सागर जिले के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र देवरी के केसली थाना क्षेत्र में 145 ग्राम आते है, क्या ग्राम सहजपुर व आसपास के क्षेत्र में आपराधिक गतिविधियां/घटनाएं लगातार घटित होती रहती है। (ख) क्या उक्त घटनाओं को एवं जनता की सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए सहजपुर में पुलिस चौकी स्थापित करने का कोई प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है? (ग) यदि हाँ, तो सहजपुर में पुलिस चौकी कब तक स्थापित हो जायेगी? (घ) यदि नहीं, तो उक्त संबंध में शासन की क्या योजना/मंशा है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। सागर जिले के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र देवरी के केसली थाना क्षेत्र में 145 ग्राम आते है। सहजपुर व आसपास के क्षेत्र में घटित विगत 05 वर्षों के बी.एन.एन.एस. अपराध वर्ष 2021-43, 2022-54, 2023-12, 2021-43, 2024-79, 2025-76 है। (ख) जी नहीं। सहजपुर में पुलिस चौकी की स्थापना का प्रस्ताव शासन द्वारा निर्धारित मापदण्ड पूर्ण नहीं करने के कारण नस्तीबद्ध किया गया है। (ग) एवं (घ) उत्तरांश "ख" के परिप्रेक्ष्य में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
अधोसंरचना मद से कार्यों की स्वीकृति
[वन]
45. ( क्र. 1882 ) श्री नीरज सिंह ठाकुर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला जबलपुर अंतर्गत जनवरी 2024 से प्रश्नांश दिनाँक तक तेंदूपत्ता शुद्ध आय की 15/20 प्रतिशत राशि से कराये जाने वाले अधोसंरचना विकास मद से किन-किन जनप्रतिनिधियों द्वारा प्राप्त हुये? (ख) क्या प्रश्नकर्ता द्वारा पत्र क्रमांक 1535 दिनाँक 26/07/2024 एवं पत्र क्रमांक 1922 दिनाँक 07/03/2025 के माध्यम से अधोसंरचना मद से सामुदायिक भवन निर्माण हेतु विभाग को प्रस्ताव भेजे गये हैं? यदि हाँ, तो उक्त प्रस्तावों पर विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की गई है? कब तक कार्यों की स्वीकृति प्रदान कर दी जावेगी? समय-सीमा बतायें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जिला जबलपुर अंतर्गत जनवरी 2024 से प्रश्नांश दिनांक तक तेन्दूपत्ता शुद्ध आय की 15/20 प्रतिशत राशि से कराये जाने वाले अधोसंरचना विकास मद से माननीय विधायक श्री नीरज सिंह ठाकुर, बरगी, जबलपुर तथा श्री शिवप्रसाद मरकाम (जनपद सदस्य) जनपद पंचायत, जबलपुर से प्रस्ताव प्राप्त हुए। (ख) जी हाँ। प्रस्तावों पर कार्यवाही एवं स्वीकृति से संबंधित जानकारी संलग्न परिशिष्ट पर है।
नियमों को ताक पर रखकर उत्खनन किया जाना
[खनिज साधन]
46. ( क्र. 1904 ) श्रीमती ललिता यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला छतरपुर में किन-किन के द्वारा कहां-कहां माइनिंग (खनिज) उत्खनन किया जा रहा है। क्या उक्त उत्खनन शासन नियमानुसार विभाग की अनुशंसा के उपरांत उत्खनन की स्वीकृति सक्षम अधिकारी द्वारा दी गई थी? यदि हाँ, तो स्वीकृति आदेश की प्रति उपलब्ध कराई जाए। यदि नहीं, तो क्यों? (ख) उक्त स्वीकृत उत्खनन के संबंध उत्खनन करने वाले को शासन के कौन-कौन से नियमों का पालन करने के उपरांत उत्खनन का काम कर सकता है। क्या उक्त समस्त उत्खनन करने वालों द्वारा शासन के समस्त नियमों का पालन करने के उपरांत उत्खनन काम किया जा रहा है? यदि हाँ, तो सूची उपलब्ध कराई जाए। यदि नहीं, तो क्यों एवं कौन-कौन जवाबदेह है? (ग) शासन नियमानुसार आबादी एवं अन्य सार्वजनिक स्थल से कितनी दूरी के उपरांत माइनिंग उत्खनन की स्वीकृति दी जा सकती है। क्या उक्त नियमानुसार जिला छतरपुर में उत्खनन की स्वीकृति दी गई है? यदि हाँ, तो किस-किस स्वीकृत उत्खनन एवं आबादी की कितनी दूरी है सूची उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) स्वीकृत खनि रियायतों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" पर दर्शित है। जी हाँ खनि रियायतें नियमानुसार स्वीकृत की गई है। खनि रियायतों के स्वीकृत आदेश की प्रतियां पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"ब" पर दर्शित है। (ख) स्वीकृत उत्खनन के संबंध में अधिसूचित खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957, खनिज (परमाणु और हाईड्रोकार्बन ऊर्जा खनिजों से भिन्न) रियायत नियम, 2016 एवं मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 एवं पर्यावरण एवं प्रदूषण में विहित प्रावधानों का पालन किये जाने के उपरांत उत्खनन कार्य कर सकता है। नियमों के पालन कर उत्खनन किये जाने की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"स" पर दर्शित अनुसार है। खनि रियायत धारियों द्वारा नियमों का पालन नहीं किये जाने पर नियमानुसार कार्यवाही की गई है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"द" में दर्शित है। शेष भाग का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) प्रश्नांश अनुसार मध्यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 के नियम 5 (2) (ग) अनुसार 100 मीटर की दूरी छोड़ने के उपरांत उत्खनन की स्वीकृति प्रदान की जाती है। जी हाँ। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" में दर्शित है।
शासन को राजस्व हानि
[खनिज साधन]
47. ( क्र. 1905 ) श्रीमती ललिता यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला छतरपुर में वर्ष 2023 से प्रश्न दिनांक किस-किस उत्खनन के संबंध में कब-कब शिकायतें प्राप्त हुई है। शिकायत की प्रति उपलब्ध कराई जाए। क्या उक्त शिकायतों को सक्षम अधिकारी द्वारा गंभीरता से लेकर जांच कर कार्रवाई की गई है? यदि हाँ, नहीं तो क्यों? यदि हाँ, तो संपूर्ण दस्तावेजों की प्रति उपलब्ध कराई जाए। (ख) यदि हाँ, तो क्या उक्त जांच प्रतिवेदन के संबंध में न्यायालय कलेक्टर द्वारा जुर्माना लगाकर वसूली आदेश पारित किया गया है? यदि हाँ, तो कब-कब आदेश पारित की प्रति उपलब्ध कराई जाए। (ग) न्यायालय कलेक्टर के द्वारा जुर्माना वसूली आदेश पारित के संबंध में प्रथम/द्वितीय/तृतीय अपीलीय न्यायालय कौन-कौन हैं। उल्लेख करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रश्नांश अनुसार जिला छतरपुर में वर्ष 2023 से प्रश्न दिनांक तक प्राप्त शिकायतों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" पर दर्शित है। जी हाँ। सक्षम अधिकारी द्वारा गंभीरता से लेकर जाँच कर कार्यवाही की गई है। शेष प्रश्नांश अनुसार शिकायतों के सम्पूर्ण दस्तावेजों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"ब" पर दर्शित है। (ख) जी हाँ। प्रश्नांश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" पर दर्शित है। पारित आदेश की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"स" पर दर्शित है। (ग) प्रश्नांश अनुसार कलेक्टर न्यायालय के पारित आदेश के विरूद्ध अधिसूचित मध्यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन एवं भण्डारण का निवारण) नियम 2022 के नियम 27 के उपनियम (1) के अधीन संभागीय आयुक्त के समक्ष अपील/पुनरीक्षण प्रस्तुत करने के प्रावधान है एवं नियम 28 के उपनियम (1) में संभागीय आयुक्त के विरूद्ध राजस्व मंडल के समक्ष पुनरीक्षण दायर किये जाने के प्रावधान है।
बंदरों एवं जंगली सूअरों द्वारा क्षति
[वन]
48. ( क्र. 1938 ) श्री विवेक विक्की पटेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या मध्यप्रदेश के अनेक ग्रामीण एवं नगरी क्षेत्र में बंदरों से रहवासी आमजन एवं स्कूली बच्चों को अत्यधिक परेशानी होती है? यदि हाँ, तो वहां से बंदरों को हटाने या रोकने की कोई प्रक्रिया है? बंदरों के आतंक से जानलेवा तक दुर्घटनाएं होती हैं? क्या सरकार इनसे निजात दिलाने हेतु कोई प्रयास कर इस संबंध में कोई नियम बनाएगी? यदि नहीं, तो क्यों और यदि हाँ, तो कब तक? (ख) विधानसभा क्षेत्र 112 वारासिवनी- खैरलांजी के अनेक ग्रामों में कृषकों की रबी एवं खरीफ की फसलों को जंगली सूअरों एवं जानवरों द्वारा अत्यधिक नुकसान पहुंचाया जाता है? क्या इस संबंध में वन विभाग को शिकायतें प्राप्त होती है? यदि हाँ, तो उनके रोकथाम या निराकरण हेतु क्या नियम बनाकर कार्य योजना प्रस्तावित है? यदि नहीं, तो क्यों और हाँ तो जानकारी उपलब्ध करवाएं। (ग) क्या शासन स्तर पर जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नष्ट किए जाने से बचने हेतु सोलर फेंसिंग करने की कार्य योजना बनाई गई है? यदि नहीं, तो क्यों इस ओर प्रयास नहीं किया जा रहा है? यदि हाँ, तो कब तक क्षेत्र में इस कार्य को पूर्ण कर लिया जाएगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) बन्दरों का विचरण एक नैसर्गिक प्रक्रिया है। कुछ बंदरों की उपस्थिति वाले क्षेत्रों में बंदरों द्वारा आमजन को घायल करने तथा घरों से भोजन सामग्री उठाने की घटनाएं प्रकाश में आई है। वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के दायरे से लाल मुंह के बंदरों को बाहर रखा गया है, अतः इन्हें पकड़ने हेतु वन विभाग से अनुमति की आवश्यकता नहीं है। मध्यप्रदेश शासन, वन विभाग के पत्र क्रमांक/F-6/1/4/0043/2025-Sec-2-10 दिनांक 28.08.2025 द्वारा जिन जिलों में लाल मुंह के बंदर आमजन के जीवन को प्रभावित करते है वहाँ इन्हें पकड़ने हेतु स्थानीय निकाय/ग्राम पंचायत/नगर निगम/प्रशिक्षत संस्थाओं से आवश्यक कार्यवाही हेतु समस्त कलेक्टर समस्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी को निर्देश जारी किये गये है। लाल मुंह के बंदर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के दायरे से बाहर है, अतः नियम बनाने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) जी नहीं, शिकायतें वन विभाग को प्राप्त नहीं हुई है। यथासंशोधित राजस्व पुस्तक परिपत्र के खण्ड 6 क्रमांक 4 के प्रावधानों के तहत मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2010 सेवा क्रमांक 4.6 के अनुसार वन्यजीव द्वारा फसल हानि होने पर आर्थिक सहायता राशि का भुगतान राजस्व विभाग द्वारा किया जाता है। (ग) जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नष्ट किये जाने से बचाने हेतु संवेदनशील वन क्षेत्रों में फेंसिंग करने की कार्य योजना बनाई गई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में योजना क्रमांक 2899 एवं योजना क्रमांक 9854 में जंगली हाथियों का प्रबंधन के अंतर्गत फेंसिंग कार्य हेतु राशि रुपये 42.58 करोड़ का आवंटन किया गया है। संरक्षित क्षेत्रों में संवेदनशील स्थानों में फेंसिंग कार्य प्रारंभ है। प्रश्नांश की शेष जानकारी संलग्न परिशिष्ट में है।
नेहरू उद्यान का वन विभाग को हस्तांतरण
[वन]
49. ( क्र. 2012 ) श्री अरूण भीमावद : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शाजापुर जिला मुख्यालय पर नेहरू उद्यान क्षेत्र वन विभाग द्वारा संचालित है किया जा रहा है जो वर्तमान में अपेक्षित क्षेत्र हो गया है। (ख) शाजापुर नगर में आमजनों के लिए नगर में कोई बड़ा उद्यान नहीं होने के कारण अपने परिवार के साथ छुट्टियों में आनंदित होने का स्थल नहीं है (ग) क्या प्रश्नांश (क) एवं (ख) के अनुसार नेहरू उद्यान को नगर पालिका शाजापुर का हस्तांतरित कर दी जाती हैं? तो बड़ा उद्यान विकसित हो सकता है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) शाजापुर जिला मुख्यालय में शाजापुर नगर पालिका सीमा से 1 किमी की दूरी पर ग्राम गिरवर में 60.851 हेक्टेयर, ग्राम पतोली में 3.170 हेक्टेयर एवं ग्राम खेरखेडी में 31.690 हेक्टेयर इस प्रकार कुल 95.711 हेक्टेयर क्षेत्र में नेहरू उद्यान क्षेत्र वन विभाग द्वारा संचालित किया जा रहा है। नेहरू उद्यान को विकसित करने हेतु प्रोजेक्ट बनाने की कार्यवाही प्रक्रिया में है। (ख) शाजापुर नगर अंतर्गत नगर पालिका के छोटे उद्यान स्थित हैं। (ग) नेहरू उद्यान नगर पालिका क्षेत्र में नहीं है, अत: हस्तांतरित किये जाने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
बुंदेलखंड पैकेज में अनियमितता
[योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी]
50. ( क्र. 2021 ) श्री राजेन्द्र भारती : क्या उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या केन्द्र सरकार द्वारा म.प्र में बुंदेलखण्ड के विकास एवं जनसुविधाओं की दृष्टिगत रखते हुये बुंदेलखण्ड पैकेज दिया गया था? यदि हाँ, तो बुंदेलखण्ड पैकेज के अंतर्गत दतिया जिले को कितनी राशि प्राप्त हुई थी? शासन/प्रशासन द्वारा दतिया जिले में कौन-कौन सी योजनाओं में कितनी-कितनी राशि का आबंटन किया गया था? आवंटित राशि का विभागों द्वारा किस मद में कितनी-कितनी राशि व्यय की गई थी? कृपया मदवार योजनावार विभागवार व्यय राशि का विवरण देते हुए भौतिक सत्यापन की प्रति उपलब्ध करायें। (ख) क्या प्रश्नकर्ता द्वारा वि.स. प्रश्न क्रमांक 49 (क्र. 1648) दिनांक 01 अगस्त 2025 द्वारा दतिया जिले में बुंदेलखण्ड पैकेज में व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार एवं अनियमितता की शिकायत पर शासन द्वारा की गई कार्यवाही की जानकारी चाही गई थी? यदि हाँ, तो शासन द्वारा उक्त शिकायत में प्रश्न दिनांक तक क्या कार्यवाही की गई है? कृपया कार्यवाही के संबंध में जारी समस्त पत्रों एवं आदेशों की प्रतियां उपलब्ध कराये। (ग) क्या बुंदेलखण्ड पैकज में आदिवासी ग्रामों, मजरे, टोले के विकास हेतु राशि आवंटित की गई थी? यदि हाँ, तो व्यय की गई राशि का विस्तृत ब्यौरा प्रदान करते हुये बताये कि उक्त राशि से किन-किन स्थानों पर क्या-क्या कार्य कराये गये और उक्त कार्य किस-किस फर्म/एजेंसी से क्या-क्या कार्य कराये गये? कृपया अलग-अलग जानकारी प्रदाय करें।
उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) से (ग) जानकारी संकलित की जा रही है।
म.प्र. में आबकारी विभाग द्वारा अनियमितताएं
[वाणिज्यिक कर]
51. ( क्र. 2025 ) श्री राजेन्द्र भारती : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शासन द्वारा 2025-26, 2026-27 आबकारी नीति बनाई गई हैं? यदि हाँ, तो कृपया नीतियों की प्रतियां उपलब्ध करायें। क्या बनाई गई नीति के अनुसार शासन द्वारा पवित्र धार्मिक क्षेत्र को शराब ब्रिकी से मुक्त रखा गया हैं? यदि हाँ, तो आबकारी नीति से प्रभावित धार्मिक क्षेत्रों में कितना-कितना आबकारी राजस्व प्राप्त होता था? कृपया अलग-अलग धार्मिक क्षेत्रों से प्राप्त राजस्व की जानकारी उपलब्ध करायें। राजस्व के नुकसान की पूर्ति किस प्रकार की जा रही हैं? जानकारी प्रदान करें। (ख) क्या शासन/आबकारी विभाग द्वारा प्रदेश में धार्मिक नगरी घोषित नगरों में नगरीय सीमा से बाहर तथा राष्ट्रीय राजमार्गों एवं विद्यालय/धार्मिक स्थल से दूरी पर शराब दुकानें खोलने के निर्देश जारी किये गये हैं? यदि हाँ, तो उक्त दुकानें संचालन के नियम व निर्देशों की प्रतियां उपलब्ध कराते हुये बताये कि दतिया जिला धार्मिक नगर होते हुए भी नगर सीमा के भीतर एवं राष्ट्रीय राजमार्ग (झांसी-ग्वालियर) पर स्थापित शराब दुकानें क्या शासन के निर्देशों के अनुरूप ही संचालित हो रही है यदि नहीं, तो क्यों? कारण सहित बताते हुए अवगत करायें कि उक्त दुकानों को हटाने के संबंध में शासन/प्रशासन द्वारा क्या कार्यवाही की गई है और यदि नहीं, तो क्यों? कृपया कारण सहित बतायें। (ग) क्या म.प्र. में आबकारी विभाग में व्याप्त अनियमितताओं के संबंध में प्रश्नकर्ता द्वारा विधानसभा में प्रश्न क्रमांक 8 (क्र. 700) दिनांक 05 अगस्त 2025 द्वारा चाही गई प्रश्नांश (क) से (ग) तक की जानकारी संकलित कर ली गई हैं? यदि हाँ, तो कृपया जानकारी उपलब्ध करावें। यदि नहीं, तो क्यों? कारण सहित जानकारी प्रदान करें।
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) वर्ष 2025-26 शासन की आबकारी नीति की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-एक अनुसार है। वर्ष 2025-26 में शासन द्वारा घोषित 13 नगरीय एवं 06 ग्रामीण निकाय क्षेत्रों, की 06 जिलों में वर्ष 2024-25 में संचालित कुल 47 मदिरा दुकानों की 2024-25 के वार्षिक मूल्य की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-दो अनुसार है। वर्ष 2024-25 में धार्मिक क्षेत्रों में संचालित मदिरा दुकानों के वार्षिक मूल्य को संबंधित जिले की निकटवर्ती अन्य मदिरा दुकानों में समानुपातिक रूप से अंतरित किया जाकर, संबंधित जिले की शेष मदिरा दुकानों को आगामी वर्ष 2025-26 के लिये मदिरा दुकानों को निष्पादित किया गया है। वर्ष 2024-25 में धार्मिक क्षेत्रों में संचालित मदिरा दुकानों को आगामी वर्ष में बंद किये जाने से कितनी राजस्व की हानि हुई यहा बता पाना संभव नहीं है। (ख) मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 के अन्तर्गत निर्मित दुकानों के अवस्थापना संबंधी सामान्य प्रयोग के नियम-1 के प्रावधानानुसार मदिरा दुकानों की अवस्थापना आपत्ति रहित स्थान संचालित किये जाते हैं। छायाप्रति विधानसभा पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-तीन अनुसार है। वर्ष 2025-26 में शासन द्वारा घोषित पवित्र क्षेत्र दतिया नगर पालिका की सीमा में कोई भी मदिरा दुकान संचालित नहीं है, शेष प्रश्नांश की जानकारी निरंक है। (ग) जी हाँ। छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-चार अनुसार है।
मुख्यमंत्री जी की घोषणाओं पर कार्यवाही
[सामान्य प्रशासन]
52. ( क्र. 2085 ) श्री दिनेश राय मुनमुन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2020 से प्रश्न दिनांक तक माननीय मुख्यमंत्री जी के सिवनी भ्रमण के दौरान की गई घोषणाओं को पूर्ण करने के संबंध में क्या कार्यवाही की गई एवं किस स्तर पर लंबित है? कब तक कार्यवाही कर घोषणाओं को पूर्ण किया जावेगा? (ख) प्रश्नकर्ता द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी को प्रेषित किये गये पत्रों में से कितने पत्रों को ''ए'' व ''ए प्लस'' मॉनिट में किस दिनांक से दर्ज किया गया है? उक्त पत्रों पर क्या कार्यवाही की गई? वर्तमान में किस स्तर पर लंबित है? कब तक पत्रों का निराकरण किया जावेगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) दिनांक 01 जनवरी 2020 से प्रश्न दिनांक तक माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा सिवनी भ्रमण के दौरान की गई घोषणाओं की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट - ''अ'' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट - ''ब'' एवं ''स'' अनुसार है।
विधायक निधि का निर्माण कार्य
[योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी]
53. ( क्र. 2086 ) श्री दिनेश राय मुनमुन : क्या उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सिवनी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायतों व नगर पालिका में विधायक निधि के कार्य स्वीकृत हुये है? यदि हाँ, तो 01 अप्रैल 2013 से प्रश्न दिनांक तक कौन-कौन से कार्य स्वीकृत हुये है? (ख) क्या लंबी अवधि व्यतीत हो जाने के बाद भी कार्य अप्रांरभ/अपूर्ण है? यदि हां, तो इसका क्या कारण है, कार्यवार कारण सहित सूची उपलब्ध करावें। (ग) क्या निर्माण एजेन्सी को जनपद/नगरपालिका स्तर से कार्य पूर्ण करने हेतु एवं मूल्यांकन के उपरांत भी राशि समय से प्राप्त न होने के कारण कार्य अप्रारंभ एवं अपूर्ण है? (घ) प्रश्नांश ''ख'' एवं ''ग' का उत्तर यदि हाँ, में है तो इसके लिये कौन उत्तरदायी है? क्या उत्तरदायित्व का निर्धारण किया जावेगा, यदि नहीं, तो क्यों?
उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) सिवनी विधानसभा क्षेत्र में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना अंतर्गत कार्य स्वीकृत हुये हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी नहीं। (घ) उत्तरांश "ग" के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
तिलहन संघ के कर्मचारियों का अन्य विभागों में संविलियन
[वित्त]
54. ( क्र. 2141 ) श्री सुनील उईके : क्या उप मुख्यमंत्री, वित्त महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वित्त विभाग के आदेश क्रमांक 496/2031/2018/नियम/4 दिनांक 23.03.2019 को तत्कालीन प्रमुख सचिव वित्त द्वारा तिलहन संघ के कर्मचारियों को राज्य शासन अंतर्गत विभागों में प्रतिनियुक्ति होने पर पांचवा-छठवा वेतनमान निर्धारण के आदेश दिये गये हैं? (ख) क्या वाणिज्यिकर विभाग में तिलहन संघ से संविलियित को पांचवा वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया है? यदि हाँ, तो क्यों? (ग) क्या वित्त विभाग के आदेश क्रमांक 496/2031/2018/नियम/4 दिनांक 23.03.3019 का पालन इनके प्रकरणों के अंतर्गत निराकरण किया जावेगा? (घ) क्या शासन इस आदेश को लागू कराने हेतु संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देशित करेगा? यदि नहीं, तो क्यों? औचित्य बतायें?
उप मुख्यमंत्री, वित्त ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) मध्यप्रदेश शासन, वित्त विभाग का परिपत्र क्रमांक 496/2031/2018/नियम/चार, दिनांक 23.03.2019 में मध्यप्रदेश राज्य तिलहन संघ के कर्मचारियों की राज्य शासन के अंतर्गत शासकीय विभागों में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थापना होने पर वेतन निर्धारण विषयक है। परिपत्र में लेख अनुसार वेतन का निर्धारण मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र दिनांक 12 अगस्त 2013 की कंडिका 2.6 एवं परिपत्र दिनांक 23 अगस्त, 2016 में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया जाना है। (ख) वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा पत्र क्रमांक एफ-5/1/2/0018/2026 कक्ष-1/पांच, दिनांक 17.02.2026 के माध्यम से उपलब्ध करायी गयी जानकारी "वाणिज्यिक कर अंतर्गत संविलियत किये गये सेवायुक्तों का वेतन निर्धारण सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र दिनांक 23 अगस्त, 2016 के अनुसार किया जाकर छठवें वेतनमान का लाभ दिया गया है। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है"। (ग) मध्यप्रदेश शासन, वित्त विभाग का परिपत्र दिनांक 496/2031/2018/नियम/चार, भोपाल दिनांक 23.03.2019 में मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र दिनांक 12 अगस्त, 2013 की कंडिका 2.6 एवं परिपत्र दिनांक 23 अगस्त, 2016 में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार वेतन निर्धारण हेतु लेख है। (घ) राज्य शासन के दिशा-निर्देश सुस्पष्ट है। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
बैंकिंग ठगी एवं साईबर अपराध की जानकारी
[गृह]
55. ( क्र. 2184 ) इंजीनियर प्रदीप लारिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वर्ष-2024-25, 2025-26 से प्रश्न दिनांक तक ऑनलाइन बैंकिंग ठगी/धोखाधड़ी एवं साईबर अपराध के कितने प्रकरण विभिन्न जिलों में दर्ज किये गए हैं? जिलावार/वर्षवार जानकारी देवें तथा कितने प्रकरणों में विभाग द्वारा निराकरण किया गया? (ख) क्या साईबर अपराध एवं ऑनलाइन बैंकिंग ठगी में अन्वेषण एवं प्रकरण का निराकरण के लिए विभाग द्वारा अधिकारी/पुलिस बल/अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है? यदि हाँ, तो जानकारी देवें तथा प्रशिक्षण कार्य कहां संपादित किया जा रहा है। (ग) क्या सागर जिले में ऑनलाइन ठगी, साईबर अपराध के अन्वेषण/निराकरण एवं रोकने के लिए विभाग में कितने प्रशिक्षित अधिकारी, कर्मचारी पदस्थ है तथा आधुनिक संसाधन उपलब्ध है? (घ) क्या ऑनलाइन ठगी, साईबर अपराध रोकने में वर्ष 2025-26 में कमी आई है? यदि हाँ, तो जानकारी देवें तथा साईबर अपराध रोकने हेतु विभाग क्या-क्या कार्यवाही कर रहा है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'अ' अनुसार। (ख) जी हाँ। राज्य सायबर पुलिस मुख्यालय भोपाल अंतर्गत प्रशिक्षण शाखा द्वारा वर्ष 2025 में 2025 तक 338 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये गए है जिसमें कुल 33031 अधिकारी/पुलिस बल/अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया है। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश के समस्त पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों एवं राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों द्वारा समय-समय पर प्रशिक्षण कार्यकम आयोजित कर अधिकारी/पुलिस बल/अन्य कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'ब' अनुसार। सागर जिले ऑनलाइन ठगी, सायबर अपराध के अन्वेषण/निराकरण के लिए आधुनिक संसाधन उपलब्ध हैं। (घ) वर्ष 2024 में ऑनलाइन ठगी एवं अना सायबर एवं अन्य सायबर अपराध के 974 एवं वर्ष 2025 में 1106 अपराध दर्ज किये गये है। प्रदेश में सायबर अपराधों एवं ऑनलाइन ठगी की रोकथाम तथा त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही हेतु राज्य सायबर पुलिस मुख्यालय भोपाल अंतर्गत प्रशिक्षण शाखा द्वारा अब तक कुल 28157 सायबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर 21836078 नागरिकों (विद्यार्थियों, महिलाओं एवं बालिकाओं, वरिष्ठ नागरिकों एवं आमजन) को सायबर अपराधों के प्रति जागरूक किया गया है। अब तक कुल 338 सायबर ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित कर कुल 33031 पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों को प्रशिक्षण प्रदाय किया गया। सायबर जागरूकता के प्रचार-प्रसार हेतु आकाशवाणी (रेडियो), सोशल मीडिया (फेसबुक, ट्विटर हैंडल, व्हाट्सएप आदि) इत्यादि पर बैनर, पोस्टर, वीडियो के माध्यम से सार्वजनिक स्थानों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैण्ड, शॉपिंग मॉल आदि स्थानों पर जाकर लोगों को सायबर अपराध से बचने के तरीके से लगातार जागरूक किया जा रहा है।
यातायात सिग्नल का संचालन
[गृह]
56. ( क्र. 2185 ) इंजीनियर प्रदीप लारिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या नरयावली विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कितने यातायात सिग्नल विभिन्न चौराहों पर स्थित है? चौराहों के नाम सहित जानकारी देवें तथा इनका संचालन कब से प्रारंभ हुआ? किस कंपनी से अनुबंध हुआ? अनुबंध के नियम-शर्तों सहित जानकारी देवें। (ख) प्रश्नांश (क) में वर्णित यातायात सिग्नल किस-किस चौराहे पर कितने समय बंद रहे? जानकारी देवें तथा अधिक समय तक बंद रहने पर अनुबंध का उल्लंघन पर विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की गई? जानकारी देवें। (ग) यातायात सिग्नल के नियमों का पालन न करने पर विभाग द्वारा सिग्नल स्थापित होने से प्रश्न दिनांक तक कितने चालान/जुर्माना वसूले जाने की कार्यवाही की गई? जानकारी देवें तथा उक्त राशि को विभाग द्वारा किन-किन मदों में जमा की गई? जमा राशि का विवरण उपलब्ध करावें। (घ) प्रश्नांश (ख) एवं (ग) में यदि अनुबंध अनुसार कार्य संपादित नहीं किया है तो विभाग ने प्रश्न दिनांक तक कोई कार्यवाही की है? यदि हाँ, तो जानकारी देवें तथा यदि कार्यवाही नहीं की गई है तो विभाग क्या कार्यवाही करेगा? कब तक जानकारी देवें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) :(क) ITMS का संचालन नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा किया जा रहा है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार नरयावली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत मकरोनिया चौराहे, परेड मंदिर एवं कबूला पुल (तीन दिशाओं में से दो दिशाएँ जो नरयावली विधानसभा क्षेत्र में आती है) पर ट्रैफिक सिग्नल स्थापित है। जो टेक्नोसिस इंटीग्रेटेड सोल्यूशन प्रोजेक्ट के तहत दिनांक 16.11.2021 में स्थापित किया गया है। अनुबंध के नियम शर्तें संलग्न परिशिष्ट अनुसार। (ख) यातायात सिंग्नल दिनांक 16.11.2021 से संचालन प्रारंभ किया गया था। सर्विलांस, पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम तथा ANPR कैमरे दिनांक 16.11.2021 से निरंतर क्रियान्वित है। अनुबंध अनुसार सुधार कार्य एवं रख-रखाव किया जा रहा है। (ग) नरयावली विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत मकरोनिया चौराहे, परेड मंदिर एवं कबूला पुल पर ट्रैफिक सिग्नल पर नियमों का पालन न करने पर विभाग द्वारा सिंग्नल स्थापित होने से प्रश्न दिनांक तक 74,617 ई-चालान बने है, जिनकी राशि ₹2,49,89,300/- है, जिसकी भुगतान की गई कुल राशि एन.आई.सी. एवं एम.पी. ई-चालान साईट पे जमा की गई है, जिसका विवरण निम्नानुसार है- कुल पेड चालान 3.12.551 कुल राशि 1,17,82,750/- है, जो ऑनलाइन पोर्टल echallan.parivahan.gov.in एवं vcourts.gov.in के माध्यम से शासकीय मद में जमा की जाती है। (घ) ओपेक्स (OPEX) अवधि में विभाग द्वारा अनुबंध के अंतर्गत एजेंसी पर कुल राशि ₹8,10,377/- पेनल्टी राशि अधिरोपित की गई है।
प्रदेश के 9300 जनसेवा मित्रों की बहाली
[लोक सेवा प्रबन्धन]
57. ( क्र. 2236 ) श्रीमती सेना महेश पटेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में 9300 जनसेवा मित्रों को 01/02/2023 को रोजगार का आश्वासन देकर नियुक्त किया गया था, परंतु 16/01/2024 को उनकी सेवाएँ अचानक समाप्त कर दी गईं। क्या सरकार इस निर्णय से अवगत है यदि हाँ, तो सेवाओं की समाप्ति के कारण क्या थे? (ख) क्या सरकार मानती है कि इस निर्णय से 9300 परिवारों की आजीविका प्रभावित हुई है और जनसेवा मित्र पंचायत एवं ग्रामीण विकास योजनाओं, विशेषकर 'लाड़ली बहना' अन्य योजनाओं में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे थे? फिर भी सरकार ने नियुक्ति रद्द कर दी है? (ग) क्या सरकार बजट सत्र में जनसेवा मित्रों की पुनः बहाली अथवा वैकल्पिक रोजगार/स्थायी समाधान हेतु कोई ठोस प्रस्ताव लाएगी? यदि नहीं, तो इसके कारण क्या हैं क्या उनको न्याय मिलेगा और मिलेगा तो कब तक?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) 1. जन सेवा मित्र कार्यक्रम रोजगार या सेवा प्रदान करने का कार्यक्रम नहीं था। 2. इस प्रोग्राम के अंतर्गत लगभग 9300 इंटर्न्स को व्यवहारिक प्रशिक्षण, क्षमता विकास हेतु इंटर्नशिप प्रदान की गई थी। जिसे प्राप्त कर प्रदेश के युवाओं को रोजगार हेतु तैयार किया जाना था, जिसमें किसी भी प्रकार की नियुक्ति अथवा रोजगार का आश्वासन नहीं दिया गया था। 3. इंटर्नशिप प्रोग्राम निश्िचत अवधि के लिए था, जिसका उल्लेख कार्यक्रम के विज्ञापन, नियम पुस्तिका एवं इंटर्न को दिए गए ऑफर लेटर में भी स्पष्ट रूप से था। कार्यक्रम अवधि दि. 31/01/2024 को समाप्त होने पर इंटर्नशिप स्वतः समाप्त हो गयी थी। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) 1. जन सेवा मित्र कार्यक्रम आजीविका प्रदान करने का कार्यक्रम नहीं था, अपितु प्रदेश के युवाओं को शासकीय कार्य प्रणाली एवं योजनाओं से परिचित कराकर रोजगार एवं आजिविका हेतु प्रशिक्षित और सक्षम बनाना था। 2. शासन द्वारा चलाई जा रही समस्त योजनाओं का परिचय जन सेवा मित्रों को प्रशिक्षण के रूप में कराया गया था, लाड़ली बहना योजना भी इसी प्रशिक्षण का भाग थी। कार्यक्रम अवधि दि. 31/01/2024 को समाप्त होने पर इंटर्नशिप स्वतः समाप्त हो गयी थी। (ग) जन सेवा मित्र (इंटर्नशिप) कार्यक्रम शासन द्वारा निश्िचत अवधि के लिए संचालित किया गया था। जिसमें पुनः बहाली सम्बन्धी कोई प्रावधान नहीं था। कार्यक्रम अवधि दि. 31/01/2024 को समाप्त होने पर इंटर्नशिप स्वतः समाप्त हो गयी थी।
आरोपियों के फरार होने की जाँच
[गृह]
58. ( क्र. 2272 ) श्री महेन्द्र नागेश : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या थाना लखनादौन जिला सिवनी में अपराध क्रमांक 486/2025 दिनांक 04/10/2025 को पंजीबद्ध किया गया है यदि हाँ, तो क्या उक्त अपराध में उपयोग की जाने वाले हथियार, तलवार, राड, ट्रैक्टर एवं अन्य सामग्री जप्त कर ली गयी है विस्तृत जानकारी से अवगत कराये। (ख) क्या घटना एवं अन्य दिनों में गिरफ्तार आरोपी थाना लखनादौन से फरार हुए थे जानकारी से अवगत कराये। (ग) क्या थाना से फरार आरोपियों मामले की जांच करायी गई थी? अगर जांच करायी गयी थी तो दोषियों पर क्या – क्या कार्यवाही की गयी थी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ, अपराध क्रमांक 486/25 के आरोपी श्री नितेश यादव से दिनांक 28.01.2026 को घटना में प्रयुक्त तलवार, सिंचाई की नॉजल रॉड तथा एक ट्रैक्टर जप्त किया गया। अन्य आरोपी श्री भोपाल यादव से दिनांक 07.11.2025 को एक नॉजल रॉड जप्त की गई तथा आरोपी श्री कैलाश यादव से दिनांक 21.01.2026 को एक नॉजल रॉड जप्त की गई है। (ख) थाना लखनादौन जिला सिवनी के अपराध क्रमांक 485/25 में श्री नितेश यादव फरियादी है एवं उक्त प्रकरण में श्री नितेश यादव का एक्स-रे कराया जाना था। थाना लखनादौन के ही अपराध क्रमांक 486/25 में नितेश आरोपी था जो फरार हो गया था। इसके पश्चात आरोपी को दिनांक 15.01.2026 को गिरफ्तार कर लिया गया था। (ग) जी हाँ, पुलिस अधीक्षक जिला सिवनी के आदेशानुसार आरोपी श्री नितेश यादव के थाना लखनादौन से फरार होने के संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) लखनादौन से जांच करायी गई। जांच में प्रधान आरक्षक चालक श्री रज्जाक खान एवं आरक्षक श्री रामभरोस मर्सकोले की लापरवाही पाए जाने पर निलंबित किया जाकर, विभागीय जांच संपादित की जा रही है।
संवेदनशील भूमि से अतिक्रमण हटाया जाना
[वन]
59. ( क्र. 2333 ) श्री शिवनारायण सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या अनूपपुर जिला अंतर्गत नगर परिषद जैतहरी के वार्ड के 14-15 में स्थित नगर के जल प्रदाय योजना के बाउण्ड्रीवाल के ऊपर एवं उससे एवं उससे लगी भूमि जो वन भूमि खसरा क्र. 2077 में अवैधानिक रूप से लगभग 02 एकड़ भूमि में दो मंजिला भवन, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स एवं खुली भूमि में कब्जा कर जनजीवन की सुरक्षा से खिलवाड़ एवं कानून व्यवस्था को चुनौती दी गई है? यदि हाँ, तो कब्जाधारी का नाम, पिता का नाम संपूर्ण कब्जे के रकवा सहित जानकारी देवें? (ख) क्या आयुक्त राजस्व संभाग शहडोल में जल प्रदाय योजना के परिसर पर अतिक्रमण कर अवैध मंदिरा-मांस विक्रय की शिकायत पर वर्ष 2024 में जांच कराई गई? यदि हाँ, तो मांस-मदिरा आदि विक्रय की पुष्टि हुयी है? यदि हाँ, तो संपूर्ण जांच प्रतिवेदन उपलब्ध कराते हुए उत्तर दिनांक तक वन विभाग एवं राजस्व विभाग ने क्या कार्यवाही किया है? (ग) क्या जलप्रदाय जैसे अति संवेदनशील भूमि व बाउण्ड्रीवाल का उपयोग कर कभी भी कोई जहरीला पदार्थ या मांस-मंदिरा फिल्टर प्लांट में फेंककर नगर की जनता के जीवन से खिलवाड़ व उनकी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाई जा सकती है? यदि नहीं, तो इसकी गारंटी किसके द्वारा दिया जाएगा? (घ) क्या वन विभाग जिसमें नगरीय क्षेत्र में अति संवेदनशील परिसर में अतिक्रमण को प्रश्रय देने तथा न हटाने के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है? (ड.) क्या प्रश्नांश (क) प्रकरण में उच्च न्यायालय जबलपुर में जनहित याचिका विचाराधीन है? यदि हाँ, तो प्रकरण क्रमांक सहित जानकारी देते हुए बताएं कि सामान्य कामकाज व अतिक्रमण हटाने के लिए भी विभाग को उच्च न्यायालय के आदेश की प्रतिक्षा है? यदि हाँ, तो विभाग अपने कर्तव्य एवं दायित्व का निर्वहन करने में सक्षम नहीं है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। नगर के जल प्रदाय योजना के बाउन्ड्रीवॉल से लगी वन भूमि में दो मंजिला मकान, दुकान एवं बाड़ी है। उपरोक्त क्षेत्र बीट जैतहरी के कक्ष क्रमांक आर.एफ.304 अंतर्गत है। उक्त वनभूमि का अवैध अतिक्रमण का वन अपराध प्रकरण क्रमांक 1845/15 दिनांक 28.07.1977 चेपा पिता संभू भैना, निवासी-जैतहरी के नाम पंजीबद्ध है एवं अतिक्रमित क्षेत्र का रकबा 2 एकड़ है। वर्तमान में उक्त रकबे में रिसपतलाल उर्फ लाला भैना पिता गल्लू, निवासी-जैतहरी मकान बनाकर निवासरत है, जो चेपा भैना के पौत्र हैं। (ख) जी हाँ। जांच में मांस, मदिरा आदि विक्रय की पुष्टि नहीं हुई। अतः शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) जल प्रदाय संयंत्र के चारों ओर परिसर सात फीट ऊँची बाउण्ड्री एवं जाली से सुरक्षित है, अतः शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) अतिक्रमणकर्ता द्वारा वन भूमि पर वर्ष 1977 से अतिक्रमण किया गया है, जिसके विरूद्ध तत्समय ही वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया। आयुक्त शहडोल संभाग से प्राप्त जांच प्रतिवेदन अनुसार ''वन विभाग के कक्ष क्रमांक आर.एफ. 304 मुनारा क्रमांक 34 से लगी हुई भूमि है, जिसमें भू-प्रबंधन योजना शहडोल, म.प्र. के नाम से दिनांक 24.03.1987 में कोदू भैना के कब्जे विषयक उद्घोषणा जारी की गई थी, जो उद्घोषणा के समय वादग्रस्त भूमि पर गत तीन पीढ़ियों से काबिज होने के कारण अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के अंतर्गत पट्टा हेतु आवेदन किया गया था, किंतु नगर परिषद क्षेत्र में पट्टा के दावे पर विचार नहीं किया गया। अतः दावे पर विचारण के पूर्व 30 वर्ष से पुराने आबादी स्वरूप कब्जे को विधिसम्यक क्रम के विपरीत बेकब्जा नहीं किया जा सकता।'' अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के अध्याय 3 बिन्दु क्रमांक 5 में निहित प्रावधान ''जैसा अन्यथा उपबन्धित है उसके सिवाय, किसी वन में निवास करने वाले अनुसूचित जनजाति या अन्य परम्परागत वन निवासियों को कोई सदस्य उनके अधिभोगाधीन वन भूमि से तब तक बेदखल नहीं किया जायेगा या हटाया नहीं जायेगा जब तक कि मान्यता और सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती है।" अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ड.) प्रश्नाधीन दिनांक तक उक्त प्रकरण में उच्च न्यायालय जबलपुर में जनहित याचिका के संबंध में कोई भी नोटिस वनमंडल कार्यालय अनूपपुर में प्राप्त नहीं हुआ है, शेष उत्तरांश (घ) अनुसार।
लोकायुक्त में पंजीबद्ध प्रकरण पर कार्यवाही
[सामान्य प्रशासन]
60. ( क्र. 2334 ) श्री शिवनारायण सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अनूपपुर जिला अंतर्गत नगर परिषद् जैतहरी में तत्कालीन अध्यक्ष, सी.एम.ओ. एवं अन्य के विरूद्ध लोकायुक्त में पंजीबद्ध प्रकरण क्र. 0081/2021-22, क्र. 0082/2021-22, 0083/2021-22 की समस्त जांच प्रतिवेदन तथा उत्तर दिनांक तक जांच प्रतिवेदन अनुसार इतने अंतराल में क्या-क्या कार्यवाही की गई? (ख) लोकायुक्त में पंजीबद्ध प्रकरण क्र. 0081/2021-22 में पुनः निष्पक्ष जांच हेतु शिकायतकर्ता श्री कैलाश सिंह मरावी पूर्व जिला महामंत्री भाजपा, पूर्व अध्यक्ष कृषि उपज मण्डी तथा सभापति नगर परिषद् एवं श्री अनिल कुमार गुप्ता पूर्व जिला अध्यक्ष भाजपा ने लोकायुक्त, प्रमुख सचिव नगरीय प्रशासन तथा आयुक्त नगरीय प्रशासन भोपाल को प्रकरण क्र. 0081/2021-22 में दस्तावेजी साक्ष्य सहित पत्र पुनः जांच हेतु भेजा है? यदि हाँ, तो पत्र की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुए उत्तर दिनांक तक सम्पूर्ण जांच व नवीन तथ्यों पर कार्यवाही कब तक करेंगे? (ग) क्या लोकायुक्त प्रमाणित भ्रष्टाचार व लूट प्रकरण में आपराधिक प्रकरण दर्ज कराकर प्रकरण क्रं. 0081/2021-22 में पुनः जांच कराएगी? (घ) क्या लोकायुक्त कदाचरण के प्रमाणित प्रकरण में प्रश्नांश "क" के सभी प्रकरणों में अपराध पंजीबद्ध कराकर कार्यवाही सुनिश्चित कराएगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) अनूपपुर जिला अंतर्गत नगर परिषद् जैतहरी में तत्कालीन अध्यक्ष, सी.एम.ओ एवं अन्य के विरूद्ध लोकायुक्त संगठन में पंजीबद्ध प्रकरण कमांक-0081/2020-22 में 09 अप्रैल 2026 तथा प्रकरण क्रमांक-0082/2021-22 एवं प्रकरण क्रमांक-0083/2021-22 में 13 मार्च 2026 को अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग का माननीय लोकायुक्त महोदय के समक्ष साक्ष्य नियत है। (ख) श्री कैलाश सिंह मरावी द्वारा प्रस्तुत पत्र लोकायुक्त संगठन में दिनांक 28.05.2025 को प्राप्त हुआ है जिसे जांच प्रकरण कमांक-81/ई/21 में शामिल किया गया है। उत्तरांश-''क'' के परिप्रेक्ष्य में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। प्रकरण जांचाधीन होने के कारण समयावधि बताया जाना संभव नहीं है। (ग) एवं (घ) उत्तरांश ''क'' के परिप्रेक्ष्य में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
कान्हा टाइगर रिजर्व में एन.जी.ओ./संस्थाओं के कार्य
[वन]
61. ( क्र. 2360 ) श्री संजय उइके : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कान्हा टाइगर रिजर्व अंतर्गत वर्ष 2022-23 से प्रश्न दिनांक तक कौन-कौन से एन.जी.ओ./संस्थाएं कार्य कर रही हैं? इनके द्वारा किये गए या किये जा रहे कार्यों की जानकारी उपलब्ध कराएं। (ख) उक्त एन.जी.ओ./संस्थाओं द्वारा उक्त अवधि में कान्हा टाइगर रिजर्व को कितनी-कितनी राशि कब-कब प्रदाय की गई है? इस राशि से कान्हा टाइगर रिजर्व द्वारा कौन-कौन से कार्य करवाये गए हैं या खरीदी की गई है? कार्यों के नाम, व्यय राशि सहित जानकारी प्रदाय करें। खरीदी गई सामग्री व व्यय राशि की भी जानकारी प्रदाय करें। (ग) आई.सी.आई.सी.आई. फाउण्डेशन द्वारा उक्त अवधि में कितनी राशि दी गई एवं कौन-कौन से कार्य करवाये गए। विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएं। (घ) उक्त किये गए कार्यों/खरीदी का सत्यापन व मूल्यांकन किन-किन के द्वारा कब-कब किया गया? (ड.) उक्त प्राप्त राशि का ऑडिट कब-कब कराया गया? ऑडिट रिपोर्ट की जानकारी उपलब्ध कराएं।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) कान्हा टाइगर रिजर्व के अंतर्गत वर्ष 2022-23 से प्रश्न दिनांक तक कार्य कर रहे एन.जी.ओ./संस्था की जानकारी तथा किये जा रहे कार्यों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार है। अनुदान के रुप में प्राप्त राशि से सम्बंधित कार्य वन विभाग ने किया है, शेष कार्य संस्था द्वारा स्वयं कराया गया है तथा सामग्री क्रय कर कान्हा टाइगर रिजर्व को दान के रूप में दी गई है। (ख) कान्हा टाइगर रिजर्व के अंतर्गत वर्ष 2022-23 से प्रश्न दिनांक तक एन.जी.ओ./संस्था दवारा प्रदाय राशि, उससे कराए गए कार्य एवं व्यय की जानकारी उत्तरांश (क) के पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) आई.सी.आई.सी.आई. फाउण्डेशन द्वारा उक्त अवधि में स्वयं किये गये कार्यों की जानकारी उत्तरांश (क) के पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (घ) उक्त अवधि में किये गये कार्यों का मूल्यांकन/सत्यापन परिक्षेत्र अधिकारी/सहायक संचालक/उपसंचालक द्वारा कार्य के दौरान समय-समय पर किया गया है। (ड.) ऑडिट प्रतिवर्ष कराया गया है, शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है।
दैनिक वेतन भोगियों कर्मचारियों का विनियमितीकरण
[सामान्य प्रशासन]
62. ( क्र. 2371 ) श्री प्रताप ग्रेवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता के प्रश्न क्र. 2647 दिनांक 21.03.2025 का उत्तर दिलाया जाए एवं नगर पालिका, नगर निगम, नगर परिषद्, जनजाति कार्य विभाग और अन्य विभाग में स्थायी कर्मी दैनिक वेतन भोगी, अंशकालीन, अर्द्धकुशल, कुशल, उच्च कुशल कर्मचारियों को दस वर्ष या उससे अधिक हो जाने पर क्या उन्हें विनियमित किया जावेगा? विनियमितीकरण संबंधित परिपत्रों की प्रति उपलब्ध करावें। (ख) क्या तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री मध्यप्रदेश शासन ने A-15236/M/23 दिनांक 07.08.2023 को दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को 01 सितम्बर 2016 के बाद विनियमितीकरण के लिये तत्कालीन मुख्यमंत्री को अनुशंसा की थी? क्या राज्य सरकार उक्त अवधि के बाद के कर्मचारी को विनियमितीकरण में शामिल करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? नहीं तो क्यों? (ग) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित कर्मचारियों को 10 वर्ष से अधिक होने के उपरांत भी विनियमित या नियमित किये जाने के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा क्या शासन के समस्त विभागों के निर्देश जारी किये गये है? यदि हाँ, तो क्या विभागों में नियमितीकरण के प्रकरण लंबित हैं? धार जिले में कितने प्रकरण लंबित हैं एवं धार जिले में विभिन्न विभागों में उक्त कर्मचारी कब से कार्य कर रहे हैं? सूची विभागवार देवें। (घ) तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2023 में कितनी महापंचायतें रखी थीं, जिसमें क्या-क्या घोषणा की थी? जानकारी उपलब्ध करावें। कितनी घोषणा पूरी की गई?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का निराकरण
[सामान्य प्रशासन]
63. ( क्र. 2415 ) श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्यप्रदेश के नवगठित जिले मैहर एवं मऊगंज में सीधी भर्ती के पदों पर आरक्षण रोस्टर प्रकाशित न होने से अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों का निराकरण नहीं हो पा रहा है? (ख) यदि हाँ, तो कार्यालय कमिश्नर रीवा संभाग के द्वारा पत्र क्र. तीन/स्था./1/2024 रीवा माह अक्टूबर 2024 एवं कार्यालय कलेक्टर मैहर पत्र क्र. 43/स्था./2024 मैहर दिनाँक 3/10/24 द्वारा पत्र के माध्यम से सचिव जी.ए.डी. से नवगठित जिलों में नियुक्ति हेतु आरक्षण रोस्टर बनाए जाने हेतु मार्गदर्शन के लिए पत्र लिखा गया था? यदि हाँ, तो आज दिनांक तक कोई कार्यवाही क्यों नहीं हुई? यदि हुई तो क्या कार्यवाही हुई? (ग) क्या दोनों जिलों में आरक्षण रोस्टर प्रकाशित न होने से कई विभागों द्वारा अनुकंपा नियुक्तियां लंबित पड़ी हुई हैं? यदि हाँ, तो इसका जिम्मेदार कौन है? (घ) क्या अनुकंपा प्रकरण के निराकरण हेतु कई विभागों ने इन जिलों के कलेक्टर को पत्र लिखा गया था? उन पर नियुक्ति नहीं की गई और प्रकरण आज दिनाँक तक विचाराधीन है? क्या अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदक परेशान हो रहे हैं? इसका जिम्मेदार कौन है और कब तक निराकरण किया जाएगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) नवगठित जिलों के रोस्टर निर्धारण प्रस्ताव संबंधित जिलों से प्राप्त कर लिया गया है। प्रस्ताव के परीक्षण उपरान्त आगामी कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (ख) जी हाँ। मार्गदर्शन हेतु पत्र लिखा गया। उसी के अनुक्रम में विधिवत प्रस्ताव प्राप्त होने पर आगामी कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (ग) एवं (घ) उत्तरांश 'क' एवं 'ख' के क्रम में कार्यवाही प्रक्रियाधीन है, शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
जनसंपर्क द्वारा किए गए भुगतान
[जनसंपर्क]
64. ( क्र. 2421 ) श्री चैन सिंह वरकड़े : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जनसंपर्क अधिकारी भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड भोपाल को म.प्र. माध्यम द्वारा प्रेषित पत्र क्रमांक/मप्रमा/परियोजना/2024/1236 दिनांक 11/07/2024, इसी आधार पर पूर्व में मध्यप्रदेश माध्यम द्वारा 1 जनवरी 2018 से 31 दिसंबर 2020 तक भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड से जो पत्राचार किया गया एवं बी.सी.एल.एल. द्वारा माध्यम से जो पत्राचार किया गया, समस्त पत्रों एवं दस्तावेजों की छायाप्रति प्रदान करें। (ख) मध्यप्रदेश माध्यम द्वारा वर्ष 1 जनवरी 2016 से 31 दिसंबर 2020 तक भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड को जो राशि का भुगतान किया गया है, का माहवार, वर्षवार, किस मद में कितनी राशि का भुगतान किया, का गौशवारा बनाकर समस्त नोटशीट एवं दस्तावेज प्रदाय करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रश्नाधीन अवधि में मध्यप्रदेश माध्यम द्वारा भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड से कोई पत्राचार नहीं किया गया है। (ख) मध्यप्रदेश माध्यम द्वारा प्रश्नाधीन अवधि में कोई राशि का भुगतान नहीं किया गया है। अत: प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
स्थापित उद्योगों से प्रदूषण फैलने से उत्पन्न स्थिति
[पर्यावरण]
65. ( क्र. 2432 ) श्री राजन मण्डलोई : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इंदौर एवं धार जिले में पंजीकृत उद्योगों में से ऐसे कौन-कौन से उद्योग संचालित हैं जो के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बिना अनुमति एवं लायसेंस के वर्षों से संचालित है की सूची देवें। (ख) क्या इन उद्योगों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं एवं प्रदूषित केमिकल युक्त जल से जल एवं वायु प्रदूषित हो रहे हैं जिसका प्रभाव पानी पीने एवं सांस लेने से मानव जीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है? (ग) यदि हाँ, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय इंदौर द्वारा किन-किन उद्योगों को विगत दो माह में नोटिस जारी किये गये हैं एवं उन उद्योगों की बिजली काटे जाने हेतु पत्र लिखे गए है? सूची देवें। (घ) विगत पांच वर्षों में प्रदूषण फैलाने वाले किन-किन उद्योगों की शिकायतें क्षेत्रीय कार्यालय इंदौर एवं शासन को प्राप्त हुई है? उन शिकायतों में अब तक कार्यवाही नहीं किये जाने के कारण क्या है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''अ'' अनुसार है। (ख) जी नहीं। इंदौर एवं धार जिले की वायु गुणवत्ता संतोषजनक/मध्यम श्रेणी की पायी गई है। इंदौर एवं धार जिले के जल स्त्रोतों की जल गुणवत्ता ''ए'' एवं ''बी'' श्रेणी की पायी गई है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला इंदौर एवं धार से प्राप्त जानकारी अनुसार प्रदूषण से संबंधित सांस लेने की समस्या से प्रभावित हुए मरीज वर्तमान में उपचार हेतु नहीं आये हैं न ही धुएं एवं प्रदूषित केमिकल युक्त जल से संबंधित बीमारियों के प्रकरण दर्ज हुए हैं। (ग) उत्तरांश (ख) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''ब'' अनुसार है।
शेर के हमले से मृत व्यक्ति के मुआवजे का प्रदाय
[वन]
66. ( क्र. 2439 ) चौधरी सुजीत मेर सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या चौरई वन परिक्षेत्र के अंतर्गत ग्राम किसनपुर के किसान बलराम पिता फकीरा डेहरिया की मृत्यु शेर के हमले से हुई है? (ख) यदि हुई है तो उक्त प्रकरण में मृतक के परिजनों को नियमानुसार देय मुआवजा प्रश्न दिनांक तक क्यों नहीं दिया गया? (ग) वन्यजीव संरक्षण अधिनियम/राज्य शासन की नीति के अन्तर्गत मानव मृत्यु पर कितनी मुआवजा राशि निर्धारित है? (घ) मृतक परिवार को मुआवजा कब तक प्रदान कर दिया जावेगा? (ड.) क्या सरकार महाराष्ट्र राज्य के समान मानव मृत्यु पर मुआवजा राशि बढ़ाकर 25 लाख करने पर विचार कर रही है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) पूर्व छिंदवाड़ा वनमंडल अंतर्गत चौरई परिक्षेत्र के ग्राम किसनपुर में किसान बलराम डेहरिया की मृत्यु दिनांक 31.12.2025 को हुई। मृत्यु बाघ के हमले से नहीं अन्य वन्यजीव के हमले से हुई है। (ख) मृतक बलराम डेहरिया की मृत्यु उपरांत उनकी पत्नी रामशिला डेहरिया को दिनांक 23.01.2026 को नियमानुसार मुआवजा दिया गया। (ग) मध्यप्रदेश शासन, वन विभाग के आदेश क्रमांक 15-13/2007/10-2 दिनांक 10.12.2022 के तहत वन्यजीवों से जनहानि होने पर मृतक के परिजनों को राशि रूपये 8 लाख की क्षतिपूर्ति राशि भुगतान करने का प्रावधान है। (घ) उत्तरांश (ख) के अनुक्रम में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ड.) जी नहीं।
जी.एस.टी. राशि की वसूली
[खनिज साधन]
67. ( क्र. 2446 ) डॉ. हिरालाल अलावा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा तारांकित प्रश्न क्रमांक 2309 दिनांक 05/08/2025 के उत्तर अनुसार जबलपुर जिले के सिहोरा तहसील में मेसर्स आनंद माइनिंग कार्पोरेशन, मेसर्स निर्मला मिनरल्स एवं पैसिफिक एक्सपोर्ट के विरूद्ध श्री आशुतोष मनु दीक्षित द्वारा प्रस्तुत लिखित शिकायत दिनांक 31/01/2025 के संबंध में मध्यप्रदेश शासन द्वारा गठित जांच दल द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन दिनांक 06/06/2025 अनुसार राशि रूपए 4, 43, 04, 86890/- (चार अरब तैंतालीस करोड़ चार लाख छियासी हजार आठ सौ नब्बे रूपए) एवं तदानुसार जी.एस.टी. की वसूली किया जाना है? प्रश्न दिनांक तक भी उक्त राशि की वसूली नहीं किए जाने का विधिसम्मत कारण बतावें। प्रश्न दिनांक तक भी उक्त राशि की वसूली नहीं करने के लिए कौन-कौन दोषी/जिम्मेदार है? दोषियों पर कब तक क्या-क्या कार्यवाही की जाएगी? समय-सीमा सहित बतावें। (ख) प्रश्नांश (क) में वर्णित कंपनियों से उक्त राशि की वसूली कब तक कर ली जाएगी? समय-सीमा सहित बतावें। यदि समय-सीमा निर्धारित नहीं है तो विधिसम्मत कारण बतावें। (ग) श्री आशुतोष मनु दीक्षित द्वारा प्रश्नांश (क) की प्रस्तुत लिखित शिकायत दिनांक 31/01/2025 पर प्रश्न दिनांक तक की गई समस्त कार्यवाहियों की जानकारी प्रति सहित बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) उल्लेखित कंपनियों के विरूद्ध प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में प्रचलित है। अत: किसी के दोषी/जिम्मेदार के विरूद्ध कार्यवाही करने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) उत्तरांश (क) अनुसार प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में प्रचलन में है। न्यायालयीन प्रकरण होने से समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ग) उत्तरांश (क) के संदर्भ में जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट पर दर्शित है।
धार जिला अंतर्गत स्वीकृत कार्य
[नर्मदा घाटी विकास]
68. ( क्र. 2447 ) डॉ. हिरालाल अलावा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) धार जिला अंतर्गत दिनांक 01/04/2021 से प्रश्न दिनांक तक विभाग से किस-किस दिनांक को कितनी-कितनी राशि के कौन-कौन से कार्य स्वीकृत हुए? प्रति सहित बतावें। कार्यों की पूर्ण/अपूर्ण/ प्रगतिरत/अप्रारंभ की कारणवार वर्तमान भौतिक स्थिति प्रति सहित बतावें। जो मानक/मापदंड/नीति-नियम/आदेश जारी किए गए, उसकी प्रति देवें एवं उनमें किस दिनांक को किन कारणों से क्या-क्या संशोधन किए? तकनीकी स्वीकृति, प्रशासकीय स्वीकृति, मेजरमेंट बुक में इन्द्राज, एएस्टीमेट/डी.पी.आर. की छायाप्रति और निर्माण कार्य करने वाली निर्माण एजेंसी/ठेकेदार/संस्था/कंपनी का नाम-पता उपलब्ध करवाएं। (ख) प्रश्नांश (क) के किन-किन कार्यों के लिए किस एजेंसी/संस्था/ठेकेदार द्वारा कितने रूपए की बैंक गांरटी दी गयी? बैंक गारंटी की जांच/सत्यापन कर उसे स्वीकृत करने वाले अधिकारी के नाम-पदनाम और बैंक गारंटी की प्रति सहित बतावें। (ग) प्रश्नांश (क) के जिन-जिन कार्यों में दिए गए कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र, गुणवत्ता एवं उपयोगिता प्रमाण-पत्र की प्रति देवें। किस कंपनी के किस क्वालिटी एवं साइज की क्या सामग्री उपयोग की गई? प्रति सहित बतावें। भौतिक निरीक्षण किस-किस सक्षम अधिकारी द्वारा कब-कब किया गया? नाम-पदनाम सहित बतावें। (घ) ओंकारेश्वर परियोजना के तृतीय एवं चतुर्थ चरण में कितने किलोमीटर की नहरें बनाई गई हैं? इन नहरों पर कितने किलोमीटर की सड़क का निर्माण किया गया है तथा इसकी कुल लागत कितनी थी? विगत पांच वर्षों में किन-किन सड़कों की मरम्मत पर कितना व्यय हुआ? किन-किन सड़कों का मरम्मत कब से किन कारणों से नहीं किया गया है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''अ'', ''ब'', ''स'' एवं ''द'' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''इ'' अनुसार है। (ग) प्रश्न दिनांक तक कार्य पूर्ण नहीं हुए हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''ई'' अनुसार है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''उ'' अनुसार है।
राज्य में अमान्य/फर्जी जाति प्रमाण-पत्र धारकों की जानकारी
[सामान्य प्रशासन]
69. ( क्र. 2449 ) डॉ. हिरालाल अलावा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दस वर्षों में राज्य में अभ्यर्थियों को अमान्य/फर्जी जाति प्रमाण-पत्र से नौकरी हासिल करने से रोकने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग एवं अन्य विभागों द्वारा किस-किस दिनांक को क्या-क्या आदेश/पत्र-परिपत्र जारी किए? अमान्य/फर्जी जाति प्रमाण-पत्र से नौकरी करने वाले लोगों को चिह्नित करने के लिए किस-किस दिनांक को क्या-क्या आदेश/निर्देश/पत्र/परिपत्र जारी किए? वर्तमान में क्या-क्या नियम/प्रावधान/प्रक्रिया/कार्यवाही प्रचलित है प्रति सहित बतावें। (ख) राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग एवं अन्य विभागों द्वारा सक्षम अधिकारियों को अमान्य/फर्जी जाति प्रमाण-पत्र जारी करने से रोकने के लिए किस-किस दिनांक को क्या-क्या आदेश/पत्र-परिपत्र जारी किए गए? वर्तमान में क्या-क्या नियम/प्रावधान/प्रक्रिया/कार्यवाही प्रचलित है प्रति सहित बतावें। अमान्य/फर्जी जाति प्रमाण-पत्र जारी करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध किन-किन नियमों/आदेशों/ प्रक्रिया के तहत क्या-क्या कार्यवाही करने का प्रावधान है? प्रति सहित बतावें। (ग) सामान्य प्रशासन विभाग राज्य शासन छानबीन समिति द्वारा प्रदेश में कितने अमान्य/फर्जी जाति प्रमाण-पत्र धारित/चिन्हित व्यक्ति हैं? नाम-पदनाम की सूची सहित बतावें। (घ) घनश्याम धनगर इंदौर एवं अन्य जिलों में कब से कब तक एस.डी.एम. एवं अन्य किस-किस पद पर पदस्थ रहे और उनकी नियुक्ति दिनांक से प्रश्न दिनांक तक उनके द्वारा कहाँ-कहाँ किस-किस जाति के कितने जाति प्रमाण-पत्र जारी किए गए? सूची सहित बतावें। घनश्याम धनगर द्वारा जारी किए किन-किन जाति प्रमाण-पत्र में वर्ष 1950 की क्राइटेरिया का पालन नहीं किया गया, जाति प्रमाण-पत्र की प्रति सहित बतावें। (ड.) अक्षय मरकाम संयुक्त कलेक्टर झाबुआ, श्री राकेश कुमार मांगरे जेल अधीक्षक सेंट्रल जेल भोपाल, मोनिका सिंह एस.डी.ओ.पी. धामनोद पुलिस अधीक्षक कार्यालय धार की वर्ष 1950 की क्राइटेरिया अनुसार जाति प्रमाण-पत्र एवं मूल निवासी प्रमाण-पत्र की प्रतिलिपि उपलब्ध करावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के जाति प्रमाण पत्रों की जांच हेतु अनुसूचित जाति कल्याण विभाग, जनजातीय कार्य विभाग एवं पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की पृथक-पृथक छानबीन समिति के गठन संबंधी आदेश, फर्जी जाति प्रमाण-पत्र जारी करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही संबंधी परिपत्र एवं वर्तमान में प्रचलित परिपत्रों की प्रतियां पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार। (ग) अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के जाति प्रमाण-पत्र की जांच हेतु अनुसूचित जाति कल्याण विभाग, जनजातीय कार्य विभाग एवं पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की अध्यक्षता में पृथक-पृथक छानबीन समिति के गठन संबंधी आदेश जारी किये गये है। इस संबंध में जानकारी संबंधित विभागों से एकत्रित की जा रही है। (घ) एवं (ड.) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
अपराध क्रमांक 22/16 की जानकारी
[गृह]
70. ( क्र. 2456 ) श्री पंकज उपाध्याय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता के तारांकित प्रश्न क्रमांक 778 दिनांक 2 दिसंबर 2025 के उत्तर अनुसार थाना चिन्नौनी चंबल में दर्ज अपराध क्रमांक 22/16 में खात्मा रिपोर्ट क्रमांक 04/22 दिनांक 3.10.2022 जो माननीय जे.एम.एफ.सी. न्यायालय के एम.जे.सी.आर. क्रमांक 217/22 पर दर्ज है? उक्त रिपोर्ट की अनुमति पुलिस अधीक्षक मुरैना के द्वारा न दी जाकर एस.डी.ओ.पी. कैलारस द्वारा किस आदेश के तहत थाना प्रभारी चिन्नौनी चंबल को प्रदान की गई आदेश की विस्तार पूर्वक जानकारी प्रदान करें। (ख) क्या जे.एम.एफ.सी. न्यायालय जौरा जिला मुरैना ने एम.जे.सी.आर. में दर्ज प्रकरण क्रमांक 217/22 में खात्मा रिपोर्ट स्वीकार न कर न्यायालय ने कार्यवाही को जारी रखा है? प्रश्न दिनांक तक की जानकारी विस्तार पूर्वक उपलब्ध करायें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रकरण में खात्मा की अनुमति तत्कालीन पुलिस अधीक्षक जिला मुरैना के संज्ञान में लाकर अनुविभागीय अधिकारी कैलारस द्वारा थाना प्रभारी चिन्नौनी को दी गई है। पुलिस मुख्यालय के परिपत्र क्रमांक अअवि/क्राईम सेल/291/2008 दिनांक 22/05/2008 में उल्लेखित प्रावधान के अंतर्गत साधारण प्रकरणों में सी.एस.पी./एस.डी.ओ.पी. को खात्मा स्वीकृत करने के अधिकार प्राप्त है। (ख) जी हाँ। जे.एम.एफ.सी. न्यायालय जौरा, जिला मुरैना ने एम.जे.सी.आर. में दर्ज प्रकरण 217/22 में खात्मा रिपोर्ट स्वीकार नहीं की है एवं जे.एम.एफ.सी. न्यायालय द्वारा सुनवाई के प्रकरण में आवेदन पर तर्क हेतु दिनांक 12.03.26 नियत की गई है। प्रकरण वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।
विज्ञापनों पर व्यय की जानकारी
[जनसंपर्क]
71. ( क्र. 2457 ) श्री पंकज उपाध्याय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जनवरी 2024 से जनवरी 2026 तक किस-किस दैनिक समाचार पत्र, साप्ताहिक समाचार पत्र, टी.वी. चैनल, वेबसाइट, यू-ट्यूब चैनल, स्मारिका, पाक्षिक पत्रिका, मासिक पत्रिका, त्रैमासिक पत्रिका, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर इत्यादि विभिन्न प्रचार-प्रसार एजेंसी को विज्ञापन एवं प्रचार संबंधी कार्य के लिए विभिन्न मद में कुल कितनी-कितनी राशि का भुगतान किया गया? प्रत्येक एजेंसी का नाम, पता, कुल भुगतान राशि सहित पृथक-पृथक जानकारी प्रतिवर्ष अनुसार दें। (ख) जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रचार-प्रसार के लिए कौन-कौन मीडिया कंपनी की सेवाएं ली जा रही हैं? इन कंपनियों के नाम, पते बतावें। जनवरी 2023 से जनवरी 2026 तक किस मद में इन्हें कितना भुगतान किया गया? (ग) जनसंपर्क विभाग द्वारा जनवरी 2023 से जनवरी 2026 तक कौन-कौन सी पाक्षिक मासिक, त्रैमासिक पत्रिकाओं एवं स्मारिका को 50 हजार रुपए से अधिक की राशि के विज्ञापन आदेश दिए गए? उनके नाम, पते की जानकारी दें। (घ) जनसंपर्क विभाग द्वारा जिन त्रैमासिक, मासिक, पाक्षिक पत्रिकाओं को नियमित विज्ञापन सूची में शामिल किया गया है, उन पत्रिकाओं के नाम, संपादक, प्रकाशक के नाम, पते, प्रसार संख्या प्रश्नाधीन अवधि अनुसार बताएं।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जनसंपर्क विभाग द्वारा दैनिक समाचार-पत्र, साप्ताहिक समाचार-पत्र, टी.वी. चैनल, यू-ट्यूब चैनल, स्मारिका, पाक्षिक पत्रिका, मासिक पत्रिका, त्रैमासिक पत्रिका में प्रचार-प्रसार के लिये किसी भी एजेंसी से कार्य नहीं लिया जाता। म.प्र. माध्यम से सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के लिये प्रचार-प्रसार की व्यवस्था बनाई गई है। म.प्र. माध्यम द्वारा मीडिया एजेंसियों को इन्पेनल्ड किया गया है। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के माध्यम से विज्ञापना कार्यों पर कुल रूपए 1, 80, 00, 000/- का व्यय हुआ है। फर्म का नाम - मेसर्स क्रियान्स एडवरटाइजिंग लिमिटेड, एन.एस.आई.सी. कॉम्पलेक्स, ओखला इंडस्ट्रीयल स्टेट-तीन, नई दिल्ली - 110020। मेसर्स क्रियान्स एडवरटाइजिंग लिमिटेड, भोपाल एवं कॉनसेप्ट कम्युनिकेशन लिमिटेड मुम्बई से करवाये गये। इस अवधि में मेसर्स क्रियान्स एडवरटाइजिंग लिमिटेड, भोपाल को राशि रूपये 16, 19, 83, 782/- एवं मेसर्स कॉनसेप्ट कम्युनिकेशन लिमिटेड मुम्बई को राशि रूपये 4, 46, 87, 881/- का भुगतान किया गया है। (ख) जनंसपर्क विभाग द्वारा प्रचार-प्रसार के लिये किसी मीडिया कम्पनी की सेवाएं नहीं ली गई। (ग) जानकारी पुस्तकाल में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (घ) त्रैमासिक, मासिक, पाक्षिक पत्रिकाओं को नियमित विज्ञापन दिये जाने की कोई नियमित सूची संधारित नहीं की जाती।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निष्क्रियता
[पर्यावरण]
72. ( क्र. 2460 ) श्री दिनेश गुर्जर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या मुरैना जिले के बामोर और जड़ेरुआ औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित फैक्ट्रियों द्वारा उत्सर्जित धुएं और रासायनिक अपशिष्ट (Chemical Waste) के कारण क्षेत्र में वायु और जल प्रदूषण का स्तर मानक सीमा से कई गुना अधिक हो गया है? (ख) पिछले एक वर्ष में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Pollution Control Board) द्वारा इन क्षेत्रों की कितनी फैक्ट्रियों का औचक निरीक्षण किया गया और उनमें से कितनी फैक्ट्रियां प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करती पाई गईं? दोषी इकाइयों की सूची और उन पर की गई अर्थदंड या तालाबंदी की कार्यवाही का विवरण देवें। (ग) क्या शासन को यह जानकारी है कि इन औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले जहरीले पानी को बिना ट्रीटमेंट के खुले नालों और जमीन में बहाया जा रहा है, जिससे आसपास के गांवों का भू-जल (Ground Water) दूषित हो गया है और ग्रामीण कैंसर व त्वचा रोगों जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार हो रहे हैं? (घ) क्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पिछले एक वर्ष में क्षेत्र की वायु गुणवत्ता (AQI) और जल की शुद्धता की कोई वैज्ञानिक जांच कराई है? यदि हाँ, तो उसकी रिपोर्ट क्या है? यदि नहीं, तो क्या सरकार जन स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए इन क्षेत्रों की सघन जांच हेतु एक उच्च स्तरीय समिति गठित करेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। (ख) 61 फैक्ट्रियों का निरीक्षण किया गया, 17 में उल्लंघन पाया गया। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''अ'' अनुसार है। (ग) लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग खण्ड मुरैना से प्राप्त जानकारी अनुसार आस-पास के ग्रामों का भू-जल (शासकीय हैण्डपंप, पेयजल स्त्रोत ) सुरक्षित हैं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जिला मुरैना से प्राप्त जानकारी अनुसार प्रश्न में उल्लेखित बीमारियां न तो फैल रही हैं और न ही इन बीमारियों के गंभीर मरीज अस्पताल में उपचार कराने आ रहे है। (घ) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट - ''ब'' अनुसार है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
वन मंडल ग्वालियर के व्यय शाखा में हुई चोरी
[वन]
73. ( क्र. 2465 ) डॉ. सतीश सिकरवार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वन मण्डल ग्वालियर में व्यय शाखा में हुई चोरी की प्राथमिकी (एफ.आई.आर) दिनांक 27.10.2023 को राशि 500 रूपये की दर्ज कराई गई। यदि हाँ तो एफ.आई.आर की प्रति उपलब्ध कराई जावे। (ख) प्रश्नांश (क) के संबंध में विभाग स्तर से दिनांक 09.03.2023 एवं वन मण्डल ग्वालियर के आदेश 27.10.2023 से जांच समिति गठित की गई? यदि हाँ तो आदेश की प्रति उपलब्ध कराई जावे। (ग) प्रश्नांश (क) के संबंध में चोरी गये अभिलेख की राशि 500 बताई है, जबकि गठित समिति द्वारा चोरी गये अभिलेखों के प्रमाणकों की राशि 27, 82, 39, 967 रूपये बताई है। (घ) प्रश्नांश (ग) के संबंध में राशि 27, 82, 39, 967 रूपये के प्रमाणक (अभिलेख) चोरी होने के संबंध में दोषियों के विरूद्ध की गई अतिंम कार्यवाही की जानकारी, आदेश की प्रति सहित दी जावे। (ड.) प्रकरण में उक्त राशि की वसूली किन-किन शासकीय सेवकों से की गई? यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) वन मण्डल ग्वालियर में व्यय शाखा में हुई चोरी की एफ.आई.आर. दिनांक 27.10.2023 को दर्ज कराई गई है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार है। (ख) प्रश्नांश (क) के संबंध में विभाग स्तर से जांच समिति गठित नहीं की गई, वन मण्डल ग्वालियर के आदेश क्रमांक/स्टेनो/23/359 दिनांक 27.10.2023 से जांच समिति गठित की गई है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है। (ग) जी हाँ, एफ.आई.आर. में चोरी गये अभिलेख की रद्दी की कीमत राशि 500 रूपये बताई गई थी परन्तु जांच समिति के प्रतिवेदन में चोरी गये अभिलेखों के भुगतानशुदा प्रमाणकों में अंकित राशि 27, 82, 39, 967 रूपये पाई है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-3 अनुसार है। (ड.) गायब हुये प्रमाणक भुगतानशुदा एवं ऑडिटशुदा थे, जिससे किसी भी प्रकार वित्तीय हानि परिलक्षित नहीं होती है। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
वन विभाग में स्वीकृत कार्य
[वन]
74. ( क्र. 2469 ) श्री मोहन सिंह राठौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्वालियर जिले में वन विभाग द्वारा वर्ष 2024-25 से प्रश्न दिनांक तक विभिन्न योजनाओं में कौन-कौन से कार्य स्वीकृत हुए है? कार्यवार, वन परिक्षेत्रवार, राशिवार जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश ''क'' में स्वीकृत कार्य क्या विभागीय स्तर पर कराये जा रहे है? यदि हाँ तो कौन-कौन से एवं कितनी-कितनी लागत के? क्या कार्यों के एस्टीमेट, तकनीकी स्वीकृति, प्रशासकीय स्वीकृति सक्षम अधिकारी द्वारा दी गई है? यदि हाँ तो कार्यवार जानकारी दें। (ग) विभाग में किस-किस स्तर के अधिकारी को एस्टीमेट बनाने, तकनीकी स्वीकृति, प्रशासकीय स्वीकृति एवं वित्तीय स्वीकृति जारी के अधिकार है? कितनी-कितनी राशि के अधिकारी हैं? प्रदत्त अधिकारों की जानकारी दें। (घ) क्या भितरवार विधानसभा क्षेत्र में प्रश्नांश ''क'' अवधि में स्वीकृत कार्य स्थानीय लेबर, संसाधनों से न कराए जाकर अन्य प्रदेश एवं स्थानों की लेबर, संसाधनों से कराये जा रहे है? यदि हाँ तो क्यों? क्या यह नियमों के विरूद्ध नहीं है? यदि हाँ तो ऐसा करने वाले अधिकारियों पर कार्यवाही की जायेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार है। (ख) जी हाँ। विभागीय कार्यों के एस्टीमेट तकनीकी स्वीकृति, प्रशासकीय स्वीकृति सक्षम अधिकारी द्वारा दी गई है। शेष जानकारी उत्तरांश (क) के पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 में है। (ग) विभाग में एस्टीमेट (प्राक्कलन) बनाने और तकनीकी स्वीकृति, प्रशासकीय स्वीकृति एवं वित्तीय स्वीकृति पदानुक्रम के अनुसार मुख्य रूप से वन क्षेत्रपाल से शुरू होकर उप वन संरक्षक, वन मंडलाधिकारी, वन संरक्षक और उच्च अधिकारियों को मध्यप्रदेश शासन वित्त विभाग के ज्ञाप क्रमांक 1194 दिनांक 14/07/2022 से अधिकार प्रदत्त किये गये है। जिसमें संबंधित अधिकारियों को राशि के स्वीकृति का उल्लेख है। प्रदत्त अधिकारों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है। (घ) भितरवार विधानसभा क्षेत्र में प्रश्नांश (क) अवधि में स्वीकृत कार्य क्षेत्र में उपलब्धता अनुसार स्थानीय लेबर, संसाधनों से ही कराये गये है। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
वन परिक्षेत्रों में कार्यों की स्वीकृति
[वन]
75. ( क्र. 2470 ) श्री मोहन सिंह राठौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्वालियर जिले में वर्ष 2023-24 से प्रश्न दिनांक तक वन परिक्षेत्र में कौन-कौन से विभागों द्वारा कौन-कौन से विकास कार्य स्वीकृत किये गये है? वर्षवार, विभागवार, कार्यवार, वन परिक्षेत्रवार जानकारी दें। (ख) क्या प्रश्नांश (क) वर्णित अवधि में वन विभाग द्वारा बिना किसी वैध कारण के कार्यों पर रोक लगाई गई है? यदि हाँ तो कौन-कौन से एवं किस कारण से विभागवार, कार्यवार, वर्षवार, वन परिक्षेत्रवार जानकारी दें। (ग) क्या प्रश्नकर्ता के तारांकित प्रश्न क्रमांक 792 दिनांक 02.12.2025 के उत्तर में वन अधिनियम 1980 एवं अनुसूचित जनजाति एवं अन्य वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2006 के तहत सक्षम स्वीकृति प्राप्त करने की जानकारी दी है? (घ) प्रश्नांश (ग) का उत्तर यदि हाँ है तो प्रश्नांश (क) के संदर्भ में वन विभाग द्वारा प्रश्नांश (ग) उल्लेखित नियमों के तहत कार्यों की अनुमति देने के लिए ग्राम स्तरीय, ब्लॉक स्तरीय, जिला स्तरीय समितियों की बैठक कब-कब आयोजित कराई गई? बैठकवार जानकारी दें। यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट-1 एवं 2 अनुसार है। (ख) जी नहीं। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी हाँ। (घ) यथासंशोधित वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के तहत वन भूमि व्यपवर्तन की अनुमति भारत सरकार द्वारा दी जाती है। अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 की धारा 3 (2) के तहत विकास कार्यों की स्वीकृति हेतु वन मंडलाधिकारी सक्षम है। इसकी स्वीकृति हेतु प्रश्नाधीन समितियों के गठन का प्रावधान नहीं है, अत: शेष प्रश्नांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना का क्रियान्वयन
[सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम]
76. ( क्र. 2489 ) श्री अशोक ईश्वरदास रोहाणी : क्या सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जबलपुर जिले में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना अंतर्गत कितने युवा उद्यमियों को लोन प्रदान किया गया? संख्या एवं कुल राशि की जानकारी दें। (ख) इस योजना अंतर्गत जबलपुर जिले में जिन उद्यमियों को लोन प्रदान किया गया, उनमें से कितने उद्यमियों ने उद्योग प्रारंभ किया? जानकारी दें। (ग) इस योजना अंतर्गत जिन उद्यमियों ने उद्योग स्थापित नहीं किया है कब तक उद्योग प्रारंभ करेंगे? जानकारी दें।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ( श्री चेतन्य कुमार काश्यप ) : (क) जबलपुर जिले में वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रश्न दिनांक तक मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना अंतर्गत 416 युवा उद्यमियों को राशि रु. 3180.69 लाख का लोन उद्योग, सेवा एवं व्यवसाय की स्थापना हेतु प्रदान किया गया है। (ख) प्रश्नांश 'क' के सन्दर्भ में जिन उद्यमियों को लोन प्रदान किया गया था उनमें से 136 प्रकरण उद्योग स्थापना के लिए थे, जिनमें से 125 उद्यमियों द्वारा उद्योग प्रारंभ कर दिया गया है। (ग) प्रश्नांश 'ख' के सन्दर्भ में जिन 11 उद्यमियों द्वारा उद्योग स्थापित नहीं किया गया है, उनके द्वारा उद्योग स्थापना का कार्य प्रक्रियाधीन है।
डिजिटल स्कैम के प्रकरण
[गृह]
77. ( क्र. 2490 ) श्री अशोक ईश्वरदास रोहाणी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जबलपुर जिले में डिजिटल स्कैम में किस-किस थाने में रिपोर्ट दर्ज करायी गयी है? विस्तृत जानकारी दें। (ख) जबलपुर जिले में इस डिजिटल स्कैम से संबंधित कितने अपराधियों को कौन-कौन से थाने से पकड़ा गया है? जानकारी दें। (ग) जबलपुर जिले में इससे डिजिटल स्कैम से संबंधित कितने मामले अभी लंबित है, यह कब तक पूर्ण होंगे? जानकारी दें। (घ) इस डिजिटल स्कैम के निवारण की प्रक्रिया क्या है? विस्तृत जानकारी दें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जबलपुर जिले अंतर्गत थाना मदनमहल, अप.क्र. 439/2025 धारा 318 (4), 308 (2) बी.एन.एस. 66 डी.आई.टी. एक्ट, थाना ओमती, अप.क्र. 73/2025 धारा 318 (4), 319 (2) बी.एन.एस., अप.क्र. 600/2025 धारा 420 ताहि, थाना अपराध 500 प्रतिशत लाभ दिए जाने का लालच देकर ऑनलाइन रूपये जमा कराने के बाद रूपये वापस नहीं करने पर दिनांक 16.10.2025 को अर्चना सिंह की शिकायत पर धारा 318 (4) बी.एन.एस. एवं 66 (डी) आई.टी. एक्ट का अपराध क्र.05/2025 आरोपी अयुन्नी एवं कृतिका ठाकुर के विरूद्ध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। (ख) डिजिटल स्कैम से संबंधित थाना ओमती के 02 प्रकरणों में 03 आरोपियों को गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में पेश किया गया। थाना अपराध थाना क्षेत्र बीना जिला सागर, म.प्र. से 02 आरोपियों को गिरफ्तार कर लाया गया, जिन्हें जे.आर. पर माननीय न्यायालय में पेश किया गया। (ग) जबलपुर जिले में डिजिटल स्कैम से संबंधित थाना ओमती 01. थाना मदनमहल 01. एवं थाना अपराध 01 प्रकरण लंबित है। आरोपियों की तलाश पतासाजी की जा रही है, जिसकी विवेचना जारी है। (घ) प्राथमिक तौर पर धोखाधड़ी की राशि को संदिग्ध बैंक खातों में राशि होल्ड कर फरियादी को वापस दिलाये जाने के सार्थक प्रयास किये जा रहे हैं, आरोपियों की पतारसी हेतु अन्य राज्यों के पुलिस पोर्टल पर आरोपियों की जानकारी भरी जा रही है, संबंधित थानों के माध्यम से नोटिस प्रेषित किये गये हैं, आरोपियों की धरपकड़ हेतु लगातार टीमें गठित कर भेजी जाती है। साथ ही आमजन को डिजिटल स्कैम/सायबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से सायबर जागरूकता कार्यकमों का व्यापक रूप से आयोजन कराया जा रहा है।
महिलाओं के साथ अत्याचार
[गृह]
78. ( क्र. 2497 ) श्री फूलसिंह बरैया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2021 से 2025 तक बलात्कार, छेड़छाड़, लैंगिक अत्याचार के संबंध में विभाग द्वारा क्या-क्या जानकारी संग्रहीत की गई है और जानकारी किस-किस स्तर और विभागों के साथ साझा की जाती है? बलात्कार, छेड़छाड़, लैंगिक अत्याचार के संबंध में क्या-क्या जानकारी MIS में तैयार की गई है? वर्षवार जानकारी उपलब्ध करावें। (ख) वर्ष 2021 से 2025 तक बलात्कार, छेड़छाड़, लैंगिक अत्याचार से संबंधित कितनी शिकायतें हुईं? ऑनलाइन हुई व ऑफलाइन हुई? कितनी एफ.आई.आर. हुई? कितने मामले न्यायालयों तक गए? कितनों में दोषियों को सजा हुई? नाबालिगों के साथ वर्ष 2021 से 2025 तक बलात्कार, छेड़छाड़, लैंगिक अपराध के Posco से संबंधित कितनी शिकायतें मिलीं, कितनी एफ.आई.आर. दर्ज हुईं? कितने मामले न्यायालय तक गए व कितनों में सजा हुई? (ग) वर्ष 2021 से 2025 तक अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की माहिलाओं के साथ बलात्कार, छेड़छाड़, लैंगिक अत्याचार से संबंधित कितने मामले दर्ज हुए, न्यायालयों तक गए, कितनों में सजा हुई? अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति की नाबालिका के साथ वर्ष 2021 से 2025 तक बलात्कार, छेड़छाड़, लैंगिक अपराध के Posco से संबंधित कितने मामले न्यायालय तक गए व कितनों में सजा हुई? (घ) बलात्कार, छेड़छाड़, लैंगिक अपराध होने के मुख्य कारण क्या-क्या रहे? (शराब के नशे में अश्लील वीडियो एवं अन्य क्या-क्या कारण रहे?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
शासन की योजनाओं से वंचित किसान
[वन]
79. ( क्र. 2502 ) श्री अरविन्द पटैरिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या राजनगर विधानसभा अंतर्गत ग्राम पंचायत राजगढ़ के पूर्व में बसे गांव रैपुरा, चनारी, चौकन का वन विभाग द्वारा विस्थापन कर नवीन ग्राम नदिया बैहर एवं एकलव्य नगर स्थापित किये गये है? (ख) क्या वन विभाग विस्थापन नीति अनुसार नदिया बैहर व एकलव्य नगर के लोगों को कृषि भूमि एवं आवास पट्टा का वितरण वन विभाग द्वारा प्रारंभ किया गया है? (ग) उक्त प्रदान किये गये वन पट्टे आज तक राजस्व अभिलेख में क्यों दर्ज नहीं किये गये? (घ) क्या राजस्व रिकार्ड में दर्ज न होने के कारण इन किसानों को शासन की सम्मान निधि एवं के.सी.सी. इत्यादि योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, क्यों? कब तक उक्त समस्या का निराकरण कर दिया जावेगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। राज्य शासन वन विभाग की अधिसूचना दिनांक 18.01.2022 द्वारा बसाहट स्थल की वनभूमि निर्वनीकृत कर राजस्व भूमि में परिवर्तित कर दी गई है। राजस्व विभाग की अधिसूचना दिनांक 18 जुलाई 2022 द्वारा प्रश्नाधीन भूमि को राजस्व ग्राम घोषित किया जा चुका है। (ख) ग्राम रैपुरा-चनारी के 151 परिवारों को एवं मोटा चौकन के 14 परिवारों को 2 हेक्टेयर परिवारों के मान से भूमि आवंटित की गई है। पट्टा वितरण वन विभाग द्वारा नहीं किया गया है। (ग) विस्थापितों को प्रदान किये गये पट्टे, नवीन राजस्व ग्रामों नादिया बेहर एवं बेडरी (एकलव्य नगर) के नवीन भू-सर्वेक्षण एवं अधिकार अभिलेख निर्माण की कार्यवाही पूर्ण होने के उपरांत राजस्व अभिलेख में दर्ज किये जा सकेंगे। (घ) जी हाँ। प्रश्नाधीन ग्रामों के राजस्व अभिलेख निर्माण की कार्यवाही प्रक्रिया में है। नवीन भू-सर्वेक्षण उपरांत उक्त समस्या का निराकरण संभव है।
देवाधिदेव महादेव ट्रस्ट की जानकारी
[वाणिज्यिक कर]
80. ( क्र. 2504 ) श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या 2 दिसंबर 1982 को देवी शंकर खंडेलवाल/बृजेंद्र कुमार खंडेलवाल/केशव कुमार खंडेलवाल ने देवाधिदेव महादेव ट्रस्ट का व्यवस्था पत्र को तहादिक किया गया? यह व्यवस्था पत्र दिनांक 04.09.1982 को उप पंजीयक के यहां रजिस्टर्ड हुआ? एक प्रति उपलब्ध करायें। (ख) प्रश्नांश (क) में वर्णित उक्त ट्रस्ट की मौजा सतना खसरा क्रमांक 142, खसरा क्रमांक 143 व खसरा क्रमांक 232 मौजा बम्हनगवां रकवा 1.57 (हेक्टेयर/एकड़) की भूमि में से किस-किस क्रमांकों की भूमियों का हस्तांतरण/किस नियमों/मापदंडों से जिला पंजीयक कार्यालय से कब-कब/किसको-किसको/किस अधिकार पत्र के आधार पर कितनी-कितनी भूमि का किया गया? सूची दिनांकवार उपलब्ध करायें। (ग) जिला पंजीयक सतना बताएं कि प्रश्न तिथि तक उक्त भूमि की रजिस्ट्रियां कैसे/किसने/कब करवाकर भूमि पर कब्जा कैसे कर लिया? रजिस्ट्रियों की एक प्रति दें। कितनी भूमि प्रश्न तिथि तक किस आराजी क्रमांकों/कितने रकबे की शेष है? सूची दें।
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी हाँ, तसदीक किया गया है। यह व्यवस्था पत्र दिनांक 04.09.1982 को उप पंजीयक कार्यालय सतना में रजिस्टर्ड हुआ। दस्तावेज की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'अ' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'ब' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'ब' अनुसार है। प्रश्नांश की शेष जानकारी राजस्व विभाग से संबंधित है। राजस्व विभाग से प्राप्त जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'स' अनुसार है।
अवैध उत्खनन पर कार्यवाही
[खनिज साधन]
81. ( क्र. 2505 ) श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या आवेदक संगम लाल मिश्रा ग्राम बठिया खुर्द पोस्ट सगमनिया जिला सतना के द्वारा कार्यालय कलेक्टर सतना में दिनांक 19.9.2025 को 9 बिंदुओं का आवेदन/शिकायती पत्र में मेसर्स सतना सीमेंट वर्क्स/बिरला कार्पोरेशन के द्वारा खनिज साधन विभाग की सरपरस्ती में किये जा रहे अवैध उत्खनन पर कार्यवाही किए जाने दिया था? प्रश्न तिथि तक किस आदेश क्रमांकों एवं दिनांक से क्या पत्र/आदेश जारी किए गए? सभी की एक-एक प्रति उपलब्ध करायें। (ख) क्या दिनांक 09.08.2023 को प्रभारी खनिज अधिकारी को आवेदक संगम लाल मिश्रा ने जो आवेदन दिया जिसे आवक लिपिक ने जिला अध्यक्ष कार्यालय खनिज शाखा सतना मध्यप्रदेश ने दिनांक 09.08.2023 को रिसीव कर प्राप्ति दी है, पर प्रश्न तिथि तक खनिज अधिकारी सतना के द्वारा कब-कब क्या-क्या कार्यवाही की गई? अगर कार्रवाई नहीं की गई तो क्यों? कारण दें। नियमों की प्रति दें। (ग) क्या खनिज अधिकारी सतना के द्वारा आयुक्त रीवा संभाग/कलेक्टर कार्यालय के द्वारा जारी आदेशों का पालन करना अत्यावश्यक/अनिवार्य है? क्या प्रश्नांश (क), (ख) में उल्लेखित आदेशों का पालन किया गया? अगर हाँ तो जारी आदेशों की एक प्रति दें। (घ) खनिज अधिकारी सतना के पास रीवा का भी अतिरिक्त प्रभार है? क्या प्रदेश में खनिज अधिकारियों की कमी है? उक्त अधिकारी सतना में व रीवा में किस-किस वर्ष/माह में पदस्थापित रहे हैं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ, शिकायत की जांच हेतु खनिज निरीक्षक को पत्र क्रमांक 1497, दिनांक 22.09.2025, पत्र क्रमांक 1938, दिनांक 17.12.2025 एवं पत्र क्रमांक 36, दिनांक 09.01.2026, जारी किया गया तथा मेसर्स बिरला कार्पोरेशन को पत्र क्रमांक 42, दिनांक 09.01.2026 जारी किया गया है। जांच उपरांत खनिज निरीक्षक द्वारा दिनांक 19.01.2026 को प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर कार्यालीन ज्ञाप क्रमांक 100, दिनांक 23.01.2026 से माननीय न्यायालय, कलेक्टर, जिला सतना को प्रस्तुत पालन प्रतिवेदन अनुसार खनन पट्टेदार मेसर्स बिरला कार्पोरेशन के द्वारा बिना भू-प्रवेश के लगभग 561644.8 टन लाइम स्टोन के उत्खनन किया जाना पाया गया, जिसकी रायल्टी राशि रुपए 4, 49, 33, 184/- होती है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" में दर्शित है। (ख) जी हाँ, की गयी कार्यवाही की जानकारी प्रश्नांश (क) के उत्तर अनुसार दर्शित है। नियमानुसार कार्यवाही किए जाने से शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी हाँ, मेसर्स बिरला कार्पोरेशन द्वारा न्यायालय कलेक्टर सतना के आदेश दिनांक 16.06.2021 के विरुद्ध माननीय न्यायालय आयुक्त रीवा संभाग रीवा के समक्ष प्रस्तुत अपील न्यायालय आयुक्त रीवा संभाग रीवा के आदेश दिनांक 01.08.2022 से अमान्य होने के उपरांत माननीय न्यायालय म.प्र. राजस्व मण्डल ग्वालियर सर्किट कोर्ट रीवा के समक्ष दिनांक 16.08.2022 को अपील प्रस्तुत की गयी है, जो कि विचाराधीन है। न्यायालय कलेक्टर सतना के पारित आदेश दिनांक 16.06.2021 एवं आयुक्त रीवा संभाग रीवा पारित आदेश दिनांक 01.08.2022 की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"ब" में दर्शित है। (घ) जी नहीं, खनिज अधिकारी सतना के पास रीवा का अतिरिक्त प्रभार नहीं है। वर्तमान में प्रदेश में खनि अधिकारियों की कमी नहीं है। उक्त अधिकारी की जिला सतना/रीवा में पदस्थापना संबंधी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"स" में दर्शित है।
औद्योगिक इकाइयों की स्थापना
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
82. ( क्र. 2508 ) श्री मधु भगत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विकासखण्ड किरनापुर जिला बालाघाट ग्राम पंचायत बोडुन्दाकलॉ में लघु एवं वृद्य उद्योग या अन्य उपक्रमों हेतु भूमि का आवंटन किया गया था? कुल आवंटित भूमि सहित किस-किस फर्म/कम्पनी को किस कार्य हेतु की आवंटित की गई? विस्तृत ब्यौरा देवें। (ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित आवंटित भूमि पर कौन से उद्योग/फर्म/कम्पनी स्थापित की गई? वर्तमान में भौतिक स्थिति से अवगत करावें। (ग) क्या उक्त स्थानों में आगामी कार्यवाही हेतु प्रक्रिया में विभिन्न प्रकार के व्यवधानों के कारण अग्रिम कार्यवाही बंद कर दी गई है? यदि हाँ, तो बतायें कि कौन-कौन से कारणों से कार्यवाही बंद पड़ी है? (घ) क्या यह भी सही है कि रजेगांव हाइवे से लेकर औद्योगिक स्थल तक पक्की 2 लेन सड़क की अनुपलब्धता एवं विद्युत विभाग की असहमति के कारण कार्य अवरुद्ध है या अन्य कौन से कारण है? ब्यौरा देवें। अग्रिम कार्यवाही कब तक कर ली जावेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। विभाग अन्तर्गत ग्राम बोडुन्दाकलॉ, तहसील किरनापुर, जिला बालाघाट में वृहद श्रेणी की 5 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना हेतु कुल 76.880 हेक्टेयर अविकिसित भूमि का आवंटन किया गया है जिसका विवरण निम्नानुसार है:-
|
क्र. |
इकाई का नाम |
क्षेत्रफल (हेक्ट.में) |
गतिविधि/उत्पाद |
|
1. |
मेसर्स रमणीक पॉवर एण्ड एलायस प्रा.लि. |
12.140 |
सिलिको मैग्नीज |
|
2. |
मेसर्स वेनगंगा फेरो एलायस प्रा.लि. |
20.230 |
|
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3. |
मेसर्स ग्लोबल फेरो मेटल्स एण्ड केमिकल्स प्रा.लि. |
20.230 |
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|
4. |
मेसर्स दीपक फेरो एलायस लिमि. |
12.140 |
|
|
5 |
सेटर्न फेरो एलायस प्रा.लि. |
12.140 |
|
|
|
योग |
76.880 |
- |
(ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित आवंटित भूमि पर वर्तमान तक उद्योगों की स्थापना नहीं की गई है तथा वर्तमान में भूमि रिक्त है। (ग) एवं (घ) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित इकाइयों द्वारा आशय-पत्र में उल्लेखित शर्तों पर सहमति दी गई है जो निम्नानुसार है :- ''यदि एम.पी.आई.डी.सी. द्वारा कोई विकास कार्य किया जाता है तो विकास व्यय एवं भूमि अर्जन में व्यय की गई राशि तथा विकास कार्य हेतु उपयोग की जाने वाली अविकसित भूमि के मूल्य को प्रो-राटा बेसिस पर गणना की जाकर मांग पत्र अनुसार देय राशि का भुगतान इकाई द्वारा किया जाएगा''। उक्त सहमति के आलोक में पहुंच मार्ग, विद्युत आपूर्ति हेतु सब-स्टेशन निर्माण, इलेक्ट्रिक लाइन इत्यादि के विकास कार्य विभाग के अधीन एम.पी.आई.डी.सी. द्वारा किये जाने हेतु इकाइयों को समानुपातिक रूप से गणना करते हुए माँग-पत्र भी जारी किये गए है। इकाइयों द्वारा मांग पत्र से चाही गई राशि जमा नहीं की गई। इकाइयों द्वारा मांग पत्र अनुसार राशि का भुगतान नहीं किये जाने से अग्रिम कार्यवाही नहीं की जा सकी।
बड़े झाड़ की शासकीय भूमि की जानकारी
[वन]
83. ( क्र. 2511 ) श्री प्रेमशंकर कुंजीलाल वर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 136 सिवनी-मालवा में वन विभाग के आधिपत्य में बड़े झाड़ की शासकीय भूमि कितने हेक्टेयर है एवं कितने हेक्टेयर भूमि कहाँ-कहाँ है? (ख) उक्त बड़े झाड़ की भूमि पर कितने हेक्टेयर में अवैध कब्जा है एवं कितनी भूमि कब्जा मुक्त है? (ग) क्या बड़े झाड़ की भूमि में पौधे लगाने की विभाग की कोई योजना है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) वन विभाग के आधिपत्य की आरक्षित एवं संरक्षित भूमि में वृक्षारोपण सम्बंधित वन मंडल की कार्य आयोजना के प्रावधान अनुसार किया जाता है।
सिवनी-मालवा में औद्योगिक निवेश
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
84. ( क्र. 2512 ) श्री प्रेमशंकर कुंजीलाल वर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विगत दो वर्षों में विधानसभा क्षेत्र सिवनी-मालवा में कितने औद्योगिक निवेश किए गए? (ख) औद्योगिक निवेश से कितने लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ? (ग) आगामी वर्षों में विधानसभा क्षेत्र सिवनी-मालवा में और क्या-क्या औद्योगिक निवेश किए जाएंगे?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) विभाग के अधीन एम.पी.आई.डी.सी. द्वारा विधानसभा क्षेत्र सिवनी-मालवा के अंतर्गत विगत दो वर्षों में वृहद इकाई की स्थापना हेतु मेसर्स आई.ओ.सी. जी.पी.एस. रिन्यूएबल्स प्रा.लि. को ग्राम डोलरिया में भूमि आवंटित की गई है। (ख) उत्तरांश (क) में दर्शित इकाई के द्वारा प्रस्तावित निवेश से 200 व्यक्तियों को रोजगार के अवसर सृजित होना संभावित है। (ग) विभाग के अधीन एम.पी.आई.डी.सी. को वर्तमान में विधानसभा क्षेत्र सिवनी-मालवा में उक्त के अतिरिक्त कोई औद्योगिक निवेश प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुआ है।
राजगढ़ जिला जेल के नवीन भवन का निर्माण
[जेल]
85. ( क्र. 2515 ) श्री अमर सिंह यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या राजगढ़ जिला जेल का भवन काफी पुराना होने, बीच बाजार में होने से कैदियों के हिसाब से छोटा पड़ने से नवीन जिला जेल भवन के निर्माण की आवश्यकता है? (ख) यदि हाँ, तो क्या राजगढ़ जिला जेल के नवीन भवन हेतु शासन द्वारा शासकीय भूमि आवंटित की गई है? यदि हाँ, तो किस स्थान पर, कब और कितनी भूमि आवंटित की गई है? जानकारी दें। (ग) उक्त आवंटित भूमि पर नवीन जिला जेल भवन का निर्माण कब तक किया जावेगा? (घ) यदि जिला जेल के नवीन भवन हेतु भूमि आवंटित नहीं की गई है तो कब तक आवंटित की जावेगी? समय-सीमा बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। (ख) जी नहीं। प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) ग्राम मोतीपुरा खातीगांव में भूमि चिन्हित की गई है, जिसके आवंटन के संबंध में कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा निर्धारित की जाना संभव नहीं है।
नोटरी एवं शपथ आयुक्त की नियुक्ति
[विधि एवं विधायी कार्य]
86. ( क्र. 2518 ) श्री अमर सिंह यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शासन द्वारा न्यायालयों में नोटरी एवं शपथ आयुक्त नियुक्त किए जाने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो इसके क्या नियम निर्देश हैं? निर्देश की प्रति उपलब्ध करावें। (ख) वर्तमान में राजगढ़ जिले के न्यायालयों में नोटरी एवं शपथ आयुक्त के कितने-कितने पद किस-किस न्यायालय में स्वीकृत हैं? जानकारी दें। (ग) उक्त स्वीकृत पदों पर कौन-कौन नोटरी एवं शपथ आयुक्त कब से कार्यरत है? नाम, स्थान और दिनांक सहित बतावें। (घ) उपरोक्त स्वीकृत पदों में से प्रश्न दिनांक तक किस-किस न्यायालय में कौन-कौन से पद रिक्त हैं? उक्त रिक्त पदों की पूर्ति कब तक कर दी जावेगी? समय-सीमा बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) शपथ आयुक्त की नियुक्ति माननीय उच्च न्यायालय द्वारा की जाती है, समय-समय पर नोटरी के रिक्त पदों पर नियुक्ति की कार्यवाही नोटरी अधिनियम-1952 एवं नोटरी नियम-1956 अनुसार प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त अधिवक्ताओं के अनुशंसित पैनल पर राज्य शासन द्वारा पात्रता अनुसार की जाती है। नोटरी नियुक्ति संबंधी निर्देश की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''अ'' अनुसार है। (ख) जिला राजगढ़ एवं संबंधित तहसीलों में नोटरी के स्वीकृत पदों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''ब'' अनुसार है। (ग) वर्तमान में जिला राजगढ़ एवं संबंधित तहसीलों में कार्यरत नोटरी (मात्र राज्य शासन द्वारा नियुक्त) के नाम, स्थान और दिनांक सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''स'' अनुसार है। (घ) वर्तमान में जिला राजगढ़ में नोटरी के कुल 03 (मुख्यालय, राजगढ़-01 तथा तहसील खिलचीपुर में 01, तहसील नरसिंहपुर में 01) रिक्त पदों पर नियुक्ति होना शेष है, प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है। जिला राजगढ़ में नोटरी के रिक्त पदों पर नियुक्ति के संबंध में प्रस्ताव शासन स्तर पर विचाराधीन है। निश्चित समयावधि बताई जाना सम्भव नहीं है।
जन अभियान परिषद् द्वारा संचालित सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम
[योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी]
87. ( क्र. 2519 ) श्री उमाकांत शर्मा : क्या उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद् के माध्यम से विदिशा जिला के ग्रामीण एवं शहरी क्षत्रों में सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं? यदि हाँ, तो कौन-कौन से कार्यक्रम/योजनाएं संचालित किए जा रहे हैं? (ख) प्रश्नांश 'क' के संदर्भ में परिषद् के अंतर्गत वर्तमान में कितने नवांकुर संगठन पंजीकृत हैं तथा उन्हें किस प्रकार का आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है? विगत वित्तीय वर्षों में परिषद् को कितनी राशि आवंटित की गई तथा कितना-कितना व्यय किया गया? जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) प्रश्नांश 'क' एवं 'ख' के संदर्भ में क्या जन अभियान परिषद् पर्यावरण संरक्षण, जल संवर्धन एवं सामाजिक समरसता प्रशिक्षण हेतु क्षमता विकास कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं? यदि हाँ, तो उनसे कितने हितग्राही लाभान्वित हुए हैं? बतावें। (घ) विदिशा जिले में संचालित मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत 1 अप्रैल 2018 से प्रश्नांकित दिनांक तक कितने छात्र पंजीकृत हुए हैं एवं कितने छात्र परीक्षा में सम्मिलत हुए, कितने उत्तीर्ण हुए? कितने छात्र/छात्राओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया है? परामर्शदाताओं की चयन प्रक्रिया क्या है? वर्तमान में कार्यरत परामर्शदाताओं की सूची उपलब्ध करावें एवं इनको मानदेय कब-कब, कितना-कितना प्रदाय किया जाता है? क्या परामर्शदाता किसी अन्य संस्था में भी कार्यरत हैं? यदि हाँ, तो किन संस्थाओं में कार्यरत हैं? इन परामर्शदताओं के खिलाफ क्या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो कब-तक कार्यवाही की जावेगी? (ड.) 01 अप्रैल 2018 से विदिशा जिले में जिला विकासखण्ड एवं ग्राम स्तर की प्रस्फुटन समितियों द्वारा कौन-कौन से कार्यक्रम आयोजित किए गए? बतावें एवं इनमें कितनी-कितनी राशि व्यय की गई? (च) विदिशा जिले में युवाओं, महिलाओं एवं स्वैच्छिक संगठनों व नवांकुर संस्थाओं के चयन की क्या प्रक्रिया अपनाई गई है? चयनित नवांकुर संस्थाओं के समस्त दस्तावेजों की छायाप्रति उपलब्ध करावें।
उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी हाँ। 35 हितग्राही लाभान्वित हुए। (घ) से (च) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।
शासकीय अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध दर्ज प्रकरण
[सामान्य प्रशासन]
88. ( क्र. 2520 ) श्री उमाकांत शर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 01 अप्रैल 2018 से प्रश्नांकित दिनांक तक भोपाल संभाग में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ एवं लोकायुक्त संगठन द्वारा कुल कितने शासकीय अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध प्रकरण दर्ज किये गए एवं क्या-क्या कार्यवाही की गई? जिलेवार जानकारी देवें। (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में उक्त प्रकरणों में से कुल कितने मामलों में एफ.आई.आर. दर्ज की गई है, कितनों में गिरफ्तारी की गई है एवं कितने मामलों में न्यायलय में चालान प्रस्तुत किया गया है? कितने मामलों की लोक अभियोजन की स्वीकृति होना शेष है? जिलेवार, वर्षवार जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के संदर्भ में उक्त जांचों के आधार पर कितने अधिकारी/कर्मचारियों को निलंबित किया गया? कितनों के विरूद्ध विभागीय जांच प्रारंभ की गई तथा कितनों को सेवा से पृथक किया गया है? अधिकारी/कर्मचारियों के नाम सहित जानकारी देवें। (घ) प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) के संदर्भ में विदिशा जिले में कार्यरत कितने अधिकारी/कर्मचारियों के विरूद्ध प्रकरण दर्ज हुए एवं उन पर क्या-क्या कार्यवाही की गई? जांच प्रतिवेदन उपलब्ध करावें। यदि कार्यवाही नहीं की गई तो कब तक की जावेगी? समय-सीमा बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
विभाग द्वारा उप सचिव का अतिरिक्त प्रभार सौंपा जाना
[सामान्य प्रशासन]
89. ( क्र. 2523 ) श्री आतिफ आरिफ अकील : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विभाग के आदेश क्रमांक एफ-13722005/1-7/स्था-3 दिनांक 22 जून 2021 के अंतर्गत अन्य विभागों के पदेन उप सचिवों को उप सचिव, चिकित्सा शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने के आदेश जारी किए गए हैं? यदि हाँ, तो उन्हें चिकित्सा शिक्षा विभाग से क्या-क्या लाभ एवं सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं? (ख) उपरोक्तानुसार क्या चिकित्सा शिक्षा विभाग में उप सचिवों का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने हेतु चिकित्सा शिक्षा विभाग का कोई प्रस्ताव शासन को प्राप्त हुआ था? यदि यहां तो प्रस्ताव किस स्तर के अधिकारियों द्वारा भेजा गया? प्रस्ताव की प्रति उपलब्ध करावें। यदि नहीं, तो किन नियमयुक्त/विधियुक्त कारणों से प्रभार सौंपे गए हैं? (ग) प्रश्नांश "क'' एवं ''ख" के परिप्रेक्ष्य में क्या राज्य शासन द्वारा चिकित्सा शिक्षा विभाग का लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में मर्ज कर दिए जाने के कारण चिकित्सा शिक्षा विभाग में अतिरिक्त रूप से सौंपे गए उपसचिवों का प्रभाव उपरोक्त विभागों के मर्ज किए जाने के उपरांत उपरोक्त सचिवों के आदेश स्वत: निरस्त हो गए हैं अथवा कर दिए गए हैं? क्या शासन पदों के दुरुपयोग करने पर तत्काल रोक लगाते हुए उनकी सेवाएं मूल विभाग में वापस करेगा? यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार उक्त अधिकारी को पात्रतानुसार वर्ष 2021 से केवल वाहन की सुविधा प्रदान की गई थी। (ख) जी हाँ, कार्य की आवश्यकता को देखते हुए अपर मुख्य सचिव द्वारा प्रस्ताव भेजा गया, प्रति संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी नहीं, उत्तरांश ''क'' एवं ''ख'' के परिप्रेक्ष्य में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
अप्रासंगिक कानूनों का निरासन
[गृह]
90. ( क्र. 2526 ) श्री आतिफ आरिफ अकील : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में वर्तमान में प्रचलित कानूनों में से ऐसे कौन-कौन से कानून हैं जो कि, अब अप्रासंगिक हो गए हैं जैसे कि - मध्यप्रदेश डकैती व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम 1981, नक्सल समस्या से संबंधित कानून, मध्यप्रदेश ऋणियों का संरक्षण अधिनियम 1937 आदि का निरासन/समाप्त किया जाएगा? यदि नहीं, तो क्यों? यदि हाँ, तो कब तक? (ख) उपरोक्त प्रश्नांश के परिप्रेक्ष्य में राज्य सरकार यह दावा कर रही है कि प्रदेश में डाकू एवं नक्सल समस्या समाप्त हो गई है, उसके बावजूद भी पुलिस द्वारा मामूली घटनाओं में डकैती/नक्सली आदि के फर्जी मामले बनाए जा रहे हैं? इनकी रोकथाम के लिए जनहित में इन कानूनों का निरासन किया जाएगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट 'अ' अनुसार है। (ख) जानकारी परिशिष्ट 'ब' अनुसार है।
खनिज परिवहन में ई-टी.पी. व्यवस्था
[खनिज साधन]
91. ( क्र. 2532 ) श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या खनिज परिवहन हेतु लागू ई-टी.पी. पोर्टल में दूरी के आधार पर स्वतः समय-सीमा का निर्धारण होता है? अगर हाँ तो यह व्यवहारिक है? अगर नहीं तो विधिवत रॉयल्टी जमा करने वाले वाहन भी अवैध घोषित किए जा रहे हैं तथा भारी जुर्माना, वाहन जब्ती और प्रकरण दर्ज किए जा रहे हैं? विवरण। (ख) ई-टी.पी. की अत्यंत कम समय-सीमा के दबाव में तेज गति से परिवहन के कारण सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही है? अगर हाँ तो इसका निर्धारण कब तक किया जाएगा? (ग) क्या सरकार को जानकारी है कि ई-टी.पी. पोर्टल पर कई मामलों में रॉयल्टी गलत जिले में दर्शाई जा रही है तथा आर्थिक रूप से अव्यावहारिक मार्गों के लिए भी ट्रांजिट पास जनरेट हो रहे हैं, जो पोर्टल की गंभीर तकनीकी खामियों को दर्शाता है? (घ) क्या सरकार ई-टी.पी. पोर्टल में सुधार हेतु वाहन ब्रेकडाउन/दुर्घटना जैसी आपात परिस्थितियों की ऑनलाइन सूचना, यथार्थवादी व लचीली समय-सीमा, ऑटो ग्रेस पीरियड/ऑटो एक्सटेंशन सिस्टम लागू करने तथा तकनीकी त्रुटियों की जांच कर आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाही करने का विचार कर रही है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) जी नहीं। ऐसी कोई भी घटना प्रकाश में नहीं आयी है। (ग) जी नहीं। ऐसा कोई भी प्रकरण प्रकाश में नहीं आया है। (घ) वर्तमान में समय-समय पर प्राप्त सुझावों के आधार पर ई-खनिज पोर्टल का उन्नयन किया जा रहा है।
रजिस्टर्ड न्यूज़ चैनल की जानकारी
[जनसंपर्क]
92. ( क्र. 2539 ) डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नागदा खाचरोद तहसील के अंतर्गत एवं उज्जैन जिले में कितने रजिस्टर्ड न्यूज़ चैनल है जो सोशल मीडिया फेसबुक, यूट्यूब के माध्यम से चल रहे हैं? जानकारी उपलब्ध कराएं। (ख) नागदा खाचरोद और जिले भर में कितने समाचार चैनल यूट्यूब, फेसबुक आदि सोशल मीडिया के माध्यम से अनधिकृत रूप से चलाये जा रहे है, इनके खिलाफ अब तक क्या कार्यवाही की गई, क्या उनके द्वारा समय-समय पर प्रसारित अनर्गल समाचारों के संदर्भ में विगत वर्षों में विभाग द्वारा खंडन कर अब तक कोई स्पष्टीकरण जारी किया गया है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जनसंपर्क विभाग द्वारा सोशल मीडिया, फेसबुक, यूट्यूब के माध्यम से प्रसारित हो रहे चैनलों का पंजीयन नहीं किया जाता है। (ख) समाचार चैनल यूट्यूब, फेसबुक आदि सोशल मीडिया के विरूद्ध विभाग द्वारा कार्यवाही नहीं की जाती है। सोशल मीडिया, फेसबुक, यूट्यूब, डिजीटल मीडिया आदि पर शासन से संबंधित प्रसारित भ्रामक एवं त्रुटिपूर्ण सामचारों के संबंध में संबंधित विभाग से तथ्यात्मक जानकारी उपलब्ध होने पर विभाग द्वारा फैक्ट चेक जारी किया जाता है।
नागदा नगर में औद्योगिक विकास
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
93. ( क्र. 2540 ) डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) औद्योगिक क्षेत्र नागदा नगर में बिजली, पानी, सड़क, रेल आदि सभी मूलभूत आवश्यकताओं के साथ औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है तो क्या यहां औद्योगिक विकास की और भी प्रबल संभावना हो सकती हैं? (ख) शासन द्वारा वर्तमान में नए निवेश के लिए क्या कोई योजना बनाई जा रही है? शासकीय क्षेत्र के अलावा निजी क्षेत्र से नागदा में या नागदा के आसपास नए लघु या मध्यम उद्योग या बड़े उद्योग में निवेश के लिए क्या कोई प्रयास किए गए हैं? जानकारी देंl (ग) खाचरोद क्षेत्र में या इसके आसपास औद्योगिक क्षेत्र बनाए जाने हेतु लघु या मध्यम उद्योग की विकास की दृष्टि से किसी नए स्थल को भी विकसित किया जाने की योजना है? बताएं।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। (ख) उज्जैन जिला अंतर्गत नागदा सहित प्रदेश में औद्योगिकरण को बढ़ावा देने तथा निवेश को आकर्षित करने हेतु निरंतर प्रयास किए जा रहे है। उज्जैन जिले में रीजनल इण्डस्ट्री कॉन्क्लेव व रतलाम जिले में रीजनल इण्डस्ट्री स्क्लि एण्ड एम्प्लॉयमेंट कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया है। (ग) वर्तमान में तहसील खाचरोद में विभाग के स्वामित्व व आधिपत्य की शासकीय भूमि उपलब्ध नहीं है।
अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरण
[सामान्य प्रशासन]
94. ( क्र. 2543 ) श्री दिनेश जैन बोस : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्जैन जिले के समस्त विभागों में विभागवार कितने-कितने पद स्वीकृत हैं? उनके विरुद्ध कितने पदों पर नियुक्तियां की गई है तथा कितने-कितने रिक्त पद है? श्रेणीवार स्वीकृत पद, रिक्त पद की विभागवार जानकारी उपलब्ध कराएं। (ख) प्रश्नांश (क) के सन्दर्भ में 1 जनवरी 2020 से प्रश्न दिनांक तक कितने विभागों में कितनी-कितनी नियुक्तियां हुई है? विभागवार एवं वर्षवार जानकारी उपलब्ध कराएं। (ग) वर्ष 2020 से प्रश्न दिनांक तक उज्जैन जिला अंतर्गत विभागवार कितने कर्मचारियों के मृत्यु उपरांत अनुकंपा के कितने आवेदन/प्रकरण प्राप्त हुए हैं? कितने आवेदनों पर कार्यवाही करते हुए अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई है? नामवार, पदवार, विभागवार विवरण देवें। (घ) अनुकंपा नियुक्ति के कितने प्रकरण/आवेदन किस स्तर पर किस कारण से लंबित है? कब तक लंबित प्रकरणों पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाएगी? क्या अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों के विरुद्ध कोई पद रिक्त नहीं है? यदि नहीं, तो विभागवार, पदवार, श्रेणीवार रिक्त पदों का संपूर्ण विवरण देवें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
रसायनों के उत्पादन में जल उपयोग के आंकड़े
[पर्यावरण]
95. ( क्र. 2544 ) श्री दिनेश जैन बोस : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या नागदा स्थित लैंक्सेस उद्योग द्वारा लगभग 6.30 लाख मीट्रिक टन वार्षिक रसायनिक उत्पादन अनुमोदित है, जिसमें बेंजोइल क्लोराइड, बेंजोइल एल्कोहल, बेंजोइल एसीटेट, बेंजलडीहाइड, हाइड्रोक्लोरिक एसिड, थायोनाइल क्लोराइड, सल्फर डायक्लोराइड, सोडियम बेंजोएट, बेंजिल बेंजोएट, बेंजिल सैलिसिलेट एवं अन्य फाइन व फ्रेगरेंस केमिकल्स शामिल हैं? उक्त रसायनों के उत्पादन में प्रति टन औसतन कितने के.एल. पानी की आवश्यकता होती है तथा वर्ष 2024-25 में उद्योग द्वारा कुल कितने पानी का उपयोग किया गया? विस्तृत विवरण दें। (ख) क्या उपरोक्त अनुमोदित उत्पादन क्षमता के अनुसार उद्योग द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 3.7 करोड़ किलो लीटर (लगभग 10 करोड़ लीटर प्रतिदिन) पानी की आवश्यकता होती है? शासन द्वारा प्रमाणित वास्तविक जल आवश्यकता एवं उपयोग के आंकड़े का विवरण दिया जावे।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। पर्यावरणीय स्वीकृति 6.042 लाख मीट्रिक टन वार्षिक उत्पादन की है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''अ'' अनुसार है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कुल 3.7995 लाख मैट्रिक टन वार्षिक उत्पादन की सम्मति प्रदान की गई है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी सम्मति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''ब'' अनुसार है। पानी की आवश्यकता एवं उपयोग संबंधी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''स'' अनुसार है। (ख) जी नहीं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''अ'' की कण्डिका-6 एवं ''द'' अनुसार है।
शासकीय कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार
[जनसंपर्क]
96. ( क्र. 2547 ) श्री कमलेश्वर डोडियार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सैलाना विधानसभा क्षेत्र में जनसंपर्क विभाग द्वारा क्षेत्र में वर्ष 2020 से प्रश्न दिनांक तक शासन की योजनाओं, कार्यक्रमों एवं उपलब्धियों के प्रचार-प्रसार हेतु क्या-क्या गतिविधियां संचालित की गई हैं? कार्यक्रमवार एवं वर्षवार जानकारी उपलब्ध कराएं। उपरोक्त अवधि में जनसंपर्क विभाग द्वारा सैलाना विधानसभा क्षेत्र में समाचार पत्रों, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया, होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर, एल.ई.डी. वैन, प्रचार वाहन, विज्ञापन एवं अन्य माध्यमों पर कितनी राशि व्यय की गई है? माध्यमवार एवं वर्षवार जानकारी दें। सैलाना विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्य एवं ग्रामीण क्षेत्रों में शासन की योजनाओं की जानकारी पहुँचाने हेतु जनसंपर्क विभाग द्वारा कौन-कौन से विशेष अभियान चलाए गए हैं? यदि हाँ, तो उनकी विस्तृत जानकारी दें। यदि नहीं, तो कारण स्पष्ट करें। (ख) क्या कई ग्रामों में शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी आम जनता तक समय पर नहीं पहुँच पाई है? यदि हाँ, तो इसके लिए उत्तरदायी अधिकारी/कर्मचारी कौन हैं तथा उनके विरुद्ध प्रश्न दिनांक तक क्या कार्यवाही की गई है? वर्ष 2020 से प्रश्न दिनांक तक सैलाना विधानसभा क्षेत्र में जनसंपर्क विभाग अंतर्गत पदस्थ अधिकारियों/कर्मचारियों की पदस्थापना, रिक्त पदों एवं संविदा नियुक्तियों का पदवार विवरण क्या है? कृपया जानकारी बतावें। क्या सैलाना विधानसभा क्षेत्र में जनसंपर्क विभाग द्वारा सूचना प्रसार को अधिक प्रभावी बनाने हेतु कार्ययोजना प्रस्तावित है? यदि हाँ तो जानकारी बतावें। यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जनसंपर्क विभाग अंतर्गत संभागीय एवं जिला स्तर पर कार्यालय संचालित है। राज्य, संभाग और जिला स्तर से शासन की योजनाओं और उपलब्धियों का प्रचार-प्रसार किया जाता है। राज्य स्तर से प्रचार-प्रसार अंतर्गत वर्ष 2023 में शासन की योजनाओं का प्रचार-प्रसार ''प्रचार-रथ'' के माध्यम से किया गया था। इसमे एक प्रचार-रथ से विधानसभा क्षेत्र सैलाना में योजनाओं का प्रचार-प्रसार किया गया। इस पर राशि रूपये 4, 65, 703/- का व्यय हुआ। (ख) प्रचार-रथ से किये गये प्रचार-प्रसार में अधिकांश क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार की कार्यवाही की गई। विभागीय सेटअप के अनुसार सैलाना में न तो कार्यालय और न ही स्टाफ की स्वीकृति है। रतलाम जिला मुख्यालय से ही सैलाना विधानसभा क्षेत्र में विशेष कार्यक्रम होने पर प्रचार-प्रसार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम योजना का क्रियान्वयन
[सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम]
97. ( क्र. 2548 ) श्री कमलेश्वर डोडियार : क्या सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला रतलाम के सैलाना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में वर्ष 2020 से प्रश्न दिनांक तक कितने-कितने गरीब आदिवासी हितग्राहियों को विभाग की विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाभान्वित किया गया है? योजनावार, ग्रामवार एवं वर्षवार जानकारी बतावें। (ख) प्रश्नांश 'क' में उल्लेखित उपरोक्त क्षेत्र के गरीब आदिवासियों को लाभान्वित करने हेतु भविष्य में विभाग द्वारा कौन-कौन सी योजनाएं प्रस्तावित हैं? यदि हाँ, तो उनकी विस्तृत जानकारी एवं समय-सीमा बतावें। यदि भविष्य हेतु कोई योजना प्रस्तावित नहीं है, तो इसके क्या कारण हैं? क्या विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा योजनाओं का समुचित प्रचार-प्रसार नहीं किया गया? यदि योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रचार-प्रसार अथवा लाभ वितरण में किसी अधिकारी/कर्मचारी की लापरवाही अथवा दोष सिद्ध हुआ है, तो उनके विरुद्ध प्रश्न दिनांक तक क्या-क्या कार्यवाही की गई है? यदि नहीं, तो कारण सहित स्पष्ट बतावें।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ( श्री चेतन्य कुमार काश्यप ) : (क) विभाग द्वारा विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी संधारित नहीं की जाती है तथापि प्रश्न के सन्दर्भ में संकलित जानकारी अनुसार सैलाना विधानसभा क्षेत्र में केंद्र सरकार की स्वरोजगार/रोजगार सृजन हेतु संचालित प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) योजना अंतर्गत प्रश्नांश अवधि में 14 आदिवासी हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है, जिसकी ग्रामवार एवं वर्षवार जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र–अ अनुसार है। (ख) प्रदेश में आदिवासी वर्ग के युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए राज्य शासन के जनजातीय कार्य विभाग द्वारा भगवान बिरसा मुंडा स्वरोजगार योजना तथा टंट्या मामा आर्थिक कल्याण योजना संचालित है। विभागीय नीति एवं योजनाओं का समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रमों/सेमिनारों/शिविरों के माध्यम से प्रचार–प्रसार किया जाता है। विगत 01 वर्ष में रतलाम जिले में आयोजित किये गये प्रचार-प्रसार प्रोग्रामों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र–ब अनुसार है। उपरोक्त विधानसभा क्षेत्र के सम्बन्ध में विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रचार-प्रसार अथवा लाभ वितरण में लापरवाही के कारण कोई भी अधिकारी, कर्मचारी प्रश्नांश अवधि में दोष सिद्ध नहीं हुआ है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
मालवा क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर रोकथाम
[गृह]
98. ( क्र. 2551 ) डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या उज्जैन-इंदौर संभाग अंतर्गत नशीली वस्तुओं यथा एमडी, अफीम, डोडा चूरा, देशी, विदेशी, कच्ची शराब निर्माण किया जाना एवं अवैध हथियारों की खरीदी बिक्री इत्यादि प्रकार की अवैध गतिविधियां निरन्तर बढ़ती जा रही है? (ख) यदि हाँ, तो प्रश्नांश (क) में उल्लेखित दोनों संभागों के अंतर्गत होने वाली उक्ताशय की गतिविधियों की रोकथाम हेतु दोनों संभागों के सम्बंधित विभागों के सक्षम अधिकारियों की संयुक्त बैठक वर्ष 2020-21 से लेकर प्रश्न दिनांक तक किन-किन स्थानों पर कब-कब की गई? बैठक के बिंदुओं पर कितना क्रियान्वयन हुआ? (ग) प्रश्नांश (क) वर्णित दोनों संभागों के अनेक आवागमन के अन्य राज्यों की सीमाओं से लगे मुख्य संदिग्ध स्थानों हेतु क्या किसी कार्ययोजना पर कार्य किया जाता है तो किस प्रकार क्या किया गया? की गई कार्यवाही बताएं। (घ) दोनों संभागों के अंतर्गत अवैध गतिविधियों में लिप्त संदिग्धों के विरुद्ध वर्षवार क्या-क्या कार्यवाहियां की गई? वर्षवार कार्यवाही की जानकारी दें एवं कितने गंभीर अपराधों में लिप्त सभी प्रकार के अपराधियों के विरुद्ध जिला बदर की कार्यवाही हुई तो बताएं एवं किन-किन जिलों में जिला बदर की कार्यवाही किन-किन कारणों से लंबित है? अवगत करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "अ" अनुसार। (ग) संभागों के सीमावर्ती जिलों में अवैध गतिविधियों की रोकथाम हेतु संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में नियमित रूप से नाकों एवं चेक पोस्ट्स स्थापित कर के क्रॉस बॉर्डर गतिविधियों पर नजर रखी जाती है, साथ ही पड़ोसी राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर अपराधियों एवं तस्करी से संबंधित सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान कर प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाकर इन अपराधों में लिप्त अपराधियों के वारंटों का आदान-प्रदान करके पड़ोसी राज्य की पुलिस के सहयोग से समय-समय पर सूचनातंत्र के जरिये मादक पदार्थों की सूचनाएं प्राप्त होने पर, आवश्यक कार्यवाही की जाती है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "ब" अनुसार।
सी.एस.आर. मद से कराये गए कार्य
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
99. ( क्र. 2553 ) डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या रतलाम जिला अंतर्गत शासन/विभाग द्वारा जनकल्याणकारी कार्यों हेतु सी.एस.आर. मद के माध्यम से वर्ष 2020-21 से लेकर प्रश्न दिनांक तक अनेक उल्लेखनीय कार्य किये? (ख) यदि हाँ, तो जिला अंतर्गत क्षेत्रीय एवं आमजन की सुविधाओं कल्याण हेतु किन-किन स्थानों पर किस-किस वर्ष में किन-किन कार्यों पर कितना-कितना बजट स्वीकृत किया जाकर क्या-क्या कार्य किये गए? वर्षवार जानकारी दें। (ग) जिला अंतर्गत उक्ताशय के उक्त मद के माध्यम से कार्य किए जाने हेतु किस-किस प्रकार के किन-किन कार्यों के आवेदन/सुझाव प्राप्त होकर उन्हें स्वीकृतियां दी गई तो उनमें से कितने कार्य पूर्ण हो गए? कितने अपूर्ण हैं तो किन कारणों से? कितने कार्य अप्रारंभ है तो कब से एवं किन कारणों से? वर्षवार बताएं। (घ) उक्ताशय की मद से किये जाने वाले कार्यों की स्वीकृति हेतु जिले में किस समिति एवं किस नियम प्रक्रिया के माध्यम से स्वीकृतियां दी जाकर कार्यों की मॉनिटरिंग की जा रही है एवं नियमानुसार किन संस्थानों, फर्मों, उद्योगों, निवेशकों इत्यादि द्वारा योजना में सम्मिलित होकर सहयोग कार्य किया एवं अब तक कौन-कौन से ऐसे संस्थान हैं जिन्होंने कभी भी किसी कार्य में सहयोग नहीं किया? सम्पूर्ण जानकारी दें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से घ) भारत सरकार द्वारा अधिसूचित कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के अनुसार निर्धारित पात्र कंपनियों को कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सी.एस.आर.) के अंतर्गत अनुसूची-VII में उल्लेखित गतिविधियों पर व्यय किया जाना अनिवार्य है। सी.एस.आर. मद में व्यय की गई राशि का उपयोग संबंधित कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स एवं सी.एस.आर. समिति द्वारा कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135, अनुसूची-VII एवं कंपनी (CSR नीति) नियम, 2014 के प्रावधानों के अंतर्गत किया जाता है। भारत सरकार, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के General Circular No.14/2021 दिनांक 25.08.2021 के अनुसार सी.एस.आर. एक Board-Driven Process है, जिसकी योजना, अनुमोदन, क्रियान्वयन एवं निगरानी का दायित्व कंपनी के बोर्ड का होता है। सी.एस.आर. नियमों में यह अनिवार्य नहीं है कि जिस क्षेत्र से लाभ प्राप्त हुआ हो, उसी क्षेत्र में सी.एस.आर. राशि का व्यय किया जाए। सी.एस.आर. से संबंधित जनकल्याणकारी कार्य एवं राशि का व्यय संबंधित कंपनियों द्वारा ही किया जाता है। रतलाम जिले में निजी भूमि पर स्थापित औद्योगिक इकाई इप्का लेबोरेटरीज लिमिटेड द्वारा सी.एस.आर. मद में राशि का व्यय किया गया है। उक्त इकाई द्वारा वर्ष 2020-21 से प्रश्न दिनांक तक सी.एस.आर. मद में किये गये कार्यों का विवरण इकाई से प्राप्त जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। उक्त इकाई द्वारा जिला स्तर की समिति के माध्यम से सी.एस.आर. अंतर्गत कार्य नहीं कराया गया है। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
केन्द्र सरकार से विभागों को प्रदाय राशि
[वित्त]
100. ( क्र. 2562 ) श्री बाला बच्चन : क्या उप मुख्यमंत्री, वित्त महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश के विभागों के लिए केन्द्र सरकार ने कितनी राशि प्रदाय करना नियत किया था? विभागवार, राशि सहित जानकारी देवें। (ख) प्रश्न दिनांक तक उपरोक्तानुसार विभागों को प्राप्त राशि की जानकारी विभागवार, राशि सहित देवें। क्या कारण है कि वित्तीय वर्ष के 10 माह बाद भी केन्द्र से प्राप्त राशि का प्रतिशत बेहद कम है? (ग) इसके लिए किए समस्त पत्राचार की छायाप्रति देवें। (वर्ष 2025-26 के संदर्भ में) वर्ष 2024-25 के संदर्भ में भी बतावें कि प्रश्नांश (क) एवं (ख) अनुसार विभागों को मिलने वाली राशि की स्थिति क्या रही? विभागवार राशि सहित जानकारी देवें। (घ) वर्ष 2024-25 एवं 25-26 के दिसम्बर तक प्रदेश को जी.एस.टी. की कितनी राशि केन्द्र सरकार से प्राप्त हुई? माहवार जानकारी देवें।
उप मुख्यमंत्री, वित्त ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) केन्द्र शासन के बजट में राज्यवार बजट का प्रावधान नहीं होता है। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) एवं (ग) उत्तरांश "क" के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) वित्तीय वर्ष 2024-25 में राशि रूपये 29, 504.20 करोड़ प्राप्त हुयी है एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 के माह दिसम्बर, 2025 तक राशि रूपये 25, 541.67 करोड़ प्राप्त हुयी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं वित्तीय वर्ष 2025-26 के दिसम्बर, 2025 तक प्राप्त राशि का माहवार विवरण संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।
विस्थापितों परिवारों को पुनर्वास का लाभ
[नर्मदा घाटी विकास]
101. ( क्र. 2563 ) श्री बाला बच्चन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इंदिरा सागर और सरदार सरोवर बांध के विस्थापित कितने परिवारों को पुनर्वास नीति और नर्मदा ट्रिब्यूनल फैसले के अनुसार प्रश्न दिनांक की स्थिति में पुनर्वास होना लंबित है? क्या परिवारों को वैकल्पिक जमीन/अनुदान, मकान के लिए भूखण्ड, आजीविका के लिए अनुदान लंबित है? पृथक-पृथक सूची देकर बतावें। (ख) इस संबंध में म.प्र. को गुजरात सरकार से कितनी राशि प्राप्त हुई व कितनी शेष है? दिनांक 20-01-2026 की स्थिती में बतावें। इसमें पुनर्वास की राशि कितनी शेष है? प्रश्न दिनांक तक पुनर्वास पर म.प्र. शासन द्वारा कितनी राशि प्रदाय की गई है? (ग) सरदार सरोवर के विस्थापित 500 परिवार जो वर्ष 2019 से टीनशेड में रह रहे हैं, इन्हें पुनर्वास के लाभ व सुविधा कब तक प्रदान कर दी जाएगी? सरदार सरोवर विस्थापितों में से बड़े भूखंड के बदले नगद राशि लेने के बाद वर्ष 2017 के आदेश अनुसार छोटा भूखंड (30x60 का) कितने परिवारों को मिलना शेष है? सूची देवें। (ग) वर्ष 2023-24, 2024-25 व 2025-26 के बजट में सरदार सरोवर के विस्थापितों के पुनर्वास पर कितनी राशि व्यय की गई? वर्षवार, संख्या, राशि सहित जानकारी देवें। प्रश्नांश "क" एवं "ग" अनुसार विस्थापितों के पुनर्वास के लंबित प्रकरणों का निराकरण कब तक कर दिया जाएगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) इंदिरा सागर परियोजना का कोई प्रकरण लंबित नहीं है। सरदार सरोवर परियोजना के अंतर्गत पात्र विस्थापितों का पुनर्वास कर दिया गया है। सरदार सरोवर परियोजना के ऐसे विस्थापित जिनके प्रकरण माननीय विभिन्न न्यायालयों में प्रचलित हैं, से संबंधित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''अ'' अनुसार है। (ख) सरदार सरोवर परियोजना अंतर्गत मध्यप्रदेश शासन द्वारा राशि रू. 3865.25 करोड़ पुनर्वास पर व्यय की गई है, जिसमें गुजरात सरकार से राशि रू. 908.51 करोड़ प्राप्त हुई एवं राशि रू. 2917.74 करोड़ की मांग प्रेषित की गई है। उक्त राशि न्यायालयीन प्रकरणों एवं अन्य आधार पर परिवर्तित हो सकती है। इंदिरा सागर परियोजना अंतर्गत राशि रूपये 445.23 करोड़ पुनर्वास हेतु प्रदाय की गई है। (ग) पात्र विस्थापितों को लाभ दिये जा चुके हैं शेष विस्थापितों को छोटे भू-खण्ड (30X50) का आवंटन प्रक्रियारत है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''ब'' अनुसार है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''स'' अनुसार है। विभिन्न न्यायालयीन प्रकरणों के कारण समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
छत्तीसगढ़ सरकार को पेंशन राशि का प्रदाय
[वित्त]
102. ( क्र. 2573 ) श्री उमंग सिंघार : क्या उप मुख्यमंत्री, वित्त महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. एवं छत्तीसगढ़ राज्य के बंटवारे के समय छत्तीसगढ़ में रह गये और सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को उनकी पेंशन की कितनी राशि दी जानी है? (ख) क्या छत्तीसगढ़ सरकार ने म.प्र. को 10 हजार करोड़ की डिमांड भेजी है तो कब वित्त विभाग के संज्ञान में उक्त राशि की देनदारी की जानकारी कब आई? (ग) प्रश्नांश (ख) एवं (ग) के प्रकाश में इतनी अधिक राशि की देनदारी किन कारणों से उत्पन्न हुई? (घ) क्या उक्त प्रकरण का राज्य शासन स्तर पर परीक्षण हो रहा है तो इसके क्या निष्कर्ष आये?
उप मुख्यमंत्री, वित्त ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) म.प्र. पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 के संलग्न छठीं अनुसूची में उत्तरवर्ती राज्यों के बीच पेंशनरी दायित्वों का विभाजन जनसंख्या के अनुपात (म.प्र./छ.ग.राज्य के मध्य 48566:17615) में किया जाता है। (ख) जी हाँ, छत्तीसगढ़ शासन, वित्त विभाग के पत्र दिनांक 01.08.2025 के द्वारा 10133 करोड़ की डिमांड भेजी है। उक्त राशि की देनदारी की जानकारी दिनांक 01.08.2025 को आई। (ग) छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पेंशनरी दायित्वों के भुगतान लेखा पुनरीक्षण किये जाने के कारण उक्त देनदारी उत्पन्न हुयी। (घ) जी हाँ, वित्त विभाग के आदेश दिनांक 28.11.2025 के द्वारा दोनों राज्यों के अधिकारियों का संयुक्त कार्य दल गठित किया गया है। उक्त कार्य दल द्वारा अध्ययन किया जा रहा है।
वृक्ष कटाई की जानकारी
[वन]
103. ( क्र. 2574 ) श्री उमंग सिंघार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) धिरौली कोल ब्लॉक, जिला सिंगरौली के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में कुल कितने वृक्ष/पेड़ चिन्हित किए गए है? क्या विभाग के पास इस संबंध में कोई अधिकारिक गणना/आकलन उपलब्ध है तो अवधि सहित जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश 'क' के प्रकाश में धिरौली कोल ब्लॉक, जिला सिंगरौली में परियोजना हेतु कुल कितने वृक्षों की कटाई की अनुमति दी गई है तथा अब तक वास्तव में कितने वृक्ष काटे जा चुके है? (ग) धिरौली कोल ब्लॉक में वृक्ष कटाई के एवज में क्षतिपूरक वनीकरण के अंतर्गत कितने पौधे लगाने का प्रावधान किया गया है तथा अब तक कितने पौधे वास्तव में लगाए गए है? (घ) धिरौली कोल ब्लॉक में वृक्ष कटाई से स्थानीय पर्यावरण/जल स्तर/जैव विविधता पर पड़े प्रभाव के आकलन हेतु कोई अध्ययन/रिपोर्ट तैयार की गई है क्या? यदि हाँ, तो जानकारी दें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) धिरौली कोल ब्लॉक जिला सिंगरौली के अंतर्गत आने वाले वनक्षेत्र में 5, 70, 666 वृक्ष/पेड़ चिन्हित किये गये हैं। चिहिन्त वृक्षों की गणना का कार्य 17.02.2022 से 03.06.2022 की अवधि में पूर्ण किया गया एवं दिनांक 30.10.2023 को भारत सरकार के परिवेश पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज किये गये हैं। (ख) भारत सरकार एवं मध्यप्रदेश शासन, वन विभाग से स्वीकृत उक्त कोल ब्लॉक में प्रथम चरण में 345.32 हेक्टेयर वनभूमि में प्रभावित 1, 45, 274 वृक्षों के विदोहन की अनुमति दी गई है। प्रश्न दिनांक तक 345.32 हेक्टेयर वनभूमि के अंश रक़बा 72.32 हेक्टेयर वनभूमि में 33, 103 वृक्षों का विदोहन किया गया है। (ग) धिरौली कोल ब्लॉक में प्रभावित वृक्षों के एवज में 13, 97, 560 पौधे लगाने का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्य योजना में 527.723 हेक्टेयर भूमि को वैकल्पिक वृक्षारोपण हेतु प्रस्तावित किया गया है। अतः प्रश्नाधीन दिनांक तक रोपण नहीं किया गया है। (घ) धिरौली कोल ब्लॉक में वृक्ष कटाई से स्थानीय पर्यावरण/जल स्तर/जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रभाव के आकलन की रिपोर्ट पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।
पन्ना जिले में दिए गए सूचना पत्र
[खनिज साधन]
104. ( क्र. 2580 ) श्री चन्द्रशेखर देशमुख : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रश्न दिनांक से विगत दो वर्षों में पन्ना जिला खनिज कार्यालय द्वारा अवैध खनिज खनन से सम्बंधित व्यापक पैमाने पर कारण बताओ नोटिस सूचना पत्र जारी किये गए है या कलेक्टर से जारी करवाए गए हैं? (ख) यदि हाँ, तो गत दो वर्षों में किस-किस दिनांक को कितने-कितने अवैध खनन से सम्बंधित सूचना पत्र जारी किये जाकर, किस-किस ग्राम के किस-किस खसरा नंबर के कितने-कितने रकबे से कितना-कितना खनिज निकला जाना बताकर उस पर कितना-कितना अर्थदंड प्रस्तावित किया है? सूचना पत्र की प्रति सहित बतावें। (ग) प्रश्नांश (क) के अनुसार जारी सूचना पत्र में बताये गए अवैध खनिज खनन स्थल का निरीक्षण एवं पंचनामा खनिज विभाग के किस-किस अधिकारी/कर्मचारी ने किस-किस दिनांक को बनाया, किस अवैध खनिज खनन का पंचनामा बनाये बिना ही अवैध खनन का सूचना पत्र जारी किया? पृथक-पृथक बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। जिन क्षेत्रों में अवैध उत्खनन की सूचना या शिकायत प्राप्त हुई है, उन्हीं स्थलों की जांच नियमानुसार कलेक्टर पन्ना द्वारा कराई जाकर मौका पंचनामा तैयार कर अवैध उत्खननकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस सूचना पत्र जारी किये गये है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" एवं सूचना पत्र की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"ब" अनुसार है। (ग) प्रश्नांश (ख) में दी गई जानकारी अनुसार सभी जारी सूचना पत्रों में निरीक्षण एवं पंचनामा की कार्यवाही की गई है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" अनुसार है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना की लेप्स राशि पुन: बहाल की जाना
[योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी]
105. ( क्र. 2588 ) श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह : क्या उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या कार्यालय कलेक्टर (जिला योजना एवं सांख्यिकी) जिला भिण्ड के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना (8284) की वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 की 10 भिण्ड विधानसभा की राशि क्रमश: वर्ष 2023-24 राशि 11697966 व 2024-25 राशि 14708224 किस आधार पर लेप्स की गई है, जबकि उक्त राशि के अनुपात में संशाधित कार्य का प्रस्ताव नियत समय पर दिया गया था, उक्त संशोधित प्रस्ताव पर तत्कालीन कलेक्टर द्वारा विचार न किया जाकर राशि लेप्स का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया था जबकि उक्त अवधि के निर्माण कार्य प्रस्ताव प्रश्न दिनांक तक लंबित है। क्या उक्त निर्माण कार्यों के प्रस्ताव पर पुन: विचार कर लेप्स राशि को बहाल कर पुन: जारी किया जावेगा? यदि हाँ, तो समयावधि बताएं। (ख) क्या वर्ष 2023-24 व 2024-25 के निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना (8284) 10 भिण्ड विधानसभा क्षेत्र की कार्य संशोधित राशि प्रश्न दिनांक तक अप्राप्त होने के कारण कई महत्वपूर्ण विकास कार्य नहीं हो पा रहे है, उक्त लेप्स राशि को पुन: बहाल किया जाना सुनिश्चित करें ताकि उक्त कार्य को शीघ्र और समयावधि में पूर्ण कराया जा सके। यदि हाँ, तो समयावधि बताएं।
उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) भिण्ड विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना (8284) से स्वीकृत कार्यों के कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र वित्तीय वर्ष समाप्ति के पूर्व प्राप्त न होने से शेष राशि रूपये 1, 16, 97, 966/- का आहरण वित्तीय वर्ष 2023-24 में नहीं किया जा सका। माननीय विधायक विधानसभा क्षेत्र 10-भिण्ड ने पत्र दिनांक 11/07/2024 के द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में स्वीकृत 28 कार्यों के स्थल परिवर्तन हेतु अनुशंसा की थी किन्तु विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना मार्गदर्शिका वर्ष-2013 की कंडिका-3.3 अनुसार अनुमति न होने के कारण निज सहायक, माननीय विधायक विधानसभा क्षेत्र 10-भिण्ड को जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय, भिण्ड के पत्र दिनांक 24.07.2024 द्वारा अवगत कराया गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वीकृत कार्यों की राशि रूपये 1, 47, 08, 224/- निर्माण एजेन्सी को अंतरण हेतु जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय, भिण्ड द्वारा आदेश दिनांक 29.03.2025 जारी किये गये एवं दिनांक 29.03.2025 को ही देयक भुगतान हेतु कोषालय में प्रस्तुत किये गये, परन्तु IFMIS पोर्टल से राशि का आहरण नहीं हो सका। वित्तीय वर्ष 2025-26 के तृतीय अनुपूरक अनुमान में राशि आवंटन हेतु मांग की गई है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ख) जी नहीं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के तृतीय अनुपूरक अनुमान में राशि आवंटन हेतु मांग की गई है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
फूड पार्क की कार्य योजना
[सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम]
106. ( क्र. 2589 ) श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह : क्या सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या भिण्ड विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नुन्हारा में वर्ष 2024 से फूड पार्क स्थापना हेतु चयनित भू-खण्ड में निर्माण कार्य की मंजूरी हेतु प्रस्ताव विभाग को प्राप्त हुआ है? यदि हाँ, तो उसकी प्रशासकीय स्वीकृति कब होगी? समयावधि बताएं। (ख) प्रस्तावित फूड पार्क हेतु भू-खण्ड का चयन कर उसे विभाग को हस्तांतरित किया जाकर विभागीय अनुमति कार्य योजना तथा प्रशासकीय स्वीकृति कब तक प्रदान की जावेगी? समयावधि दें।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ( श्री चेतन्य कुमार काश्यप ) : (क) जी नहीं। मार्च 2025 में ग्राम नुन्हारा में भूमि आवंटन हुआ है। (ख) प्रश्नांश 'क' के उत्तर अनुसार अभी भूमि का आवंटन हुआ है, जिसका सर्वे डिमार्केशन कार्य शेष है।
पत्थर, फर्शी एवं पत्थर ब्लॉक लीजों की जानकारी
[खनिज साधन]
107. ( क्र. 2591 ) डॉ. प्रभुराम चौधरी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रायसेन जिला अंतर्गत पत्थर, फर्शी एवं पत्थर ब्लॉक उत्खनन हेतु कितनी लीज स्वीकृत है? जानकारी देवें। (ख) प्रश्नांश 'क' अनुसार पत्थर, फर्शी एवं पत्थर ब्लॉक उत्खनन लीज किस-किस फर्म/व्यक्तियों के नाम से कहाँ-कहाँ एवं कब से कब तक की अवधि हेतु संचालित है? पृथक-पृथक जानकारी देवें। (ग) उक्त पत्थर, फर्शी एवं पत्थर ब्लॉक उत्खनन लीजों से रायसेन जिले को कितनी-कितनी रॉयल्टी प्राप्त होती है? प्राप्त राशि से जिले में किस-किस कार्य हेतु कितनी-कितनी राशि का विकास कार्यों में उपयोग किया जाता है? ब्लॉकवार जानकारी देवें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रश्नांश अनुसार रायसेन जिला अंतर्गत खनिज पत्थर (क्रेशर आधारित) की 83, खनिज फर्शी पत्थर की 12 एवं खनिज फर्शी पत्थर (ब्लॉक) की 06 लीज स्वीकृत है, विस्तृत जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-अ पर दर्शित है। (ख) प्रश्नांश अनुसार रायसेन जिला अंतर्गत खनिज पत्थर (क्रेशर आधारित) की 69, खनिज फर्शी पत्थर की 10 एवं खनिज फर्शी पत्थर (ब्लॉक) की 06 लीज संचालित है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ब पर दर्शित है। (ग) उत्खनन लीज से स्वीकृत अवधि में प्राप्त कुल रॉयल्टी की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-अ पर दर्शित है। रॉयल्टी राशि संचित निधि में जमा होती है। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
पदोन्नत आदेश की शर्तों की अवहेलना
[वित्त]
108. ( क्र. 2593 ) श्री प्रदीप पटेल : क्या उप मुख्यमंत्री, वित्त महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला शिक्षा अधिकारी रीवा, लेखा अधिकारी वित्त पद पर सहायक कोष अधिकारी पुष्पा पुसाम को कार्य का आदेश कलेक्टर रीवा द्वारा जारी किया गया था तो क्या पुष्पा पुसाम, प्रभारी सहायक संचालक के पद पर वित्त विभाग आदेश/609/145774/2023/ई/चार दिनांक 03.04.2025 के द्वारा पदोन्नत करते हुए आदेश के शर्त क्र.-5 पर लेख किया गया है कि प्रभार में निचले पद म.प्र. अधीनस्थ लेखा अधिकारी के पद का कार्य नहीं करेंगे। क्या श्रीमती पुसाम, प्रभारी सहायक संचालक पदभार संयुक्त संचालक कोष एवं लेखा में ज्वाइन करने के पश्चात भी कलेक्टर रीवा के उक्त पूर्व पद के आदेश, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रीवा में कार्य कर रही है? पदोन्नत आदेश के शर्तों की अवहेलना की गई है? कर्मचारी के विरुद्ध क्या कार्यवाही की जायेगी? (ख) जिला शिक्षा अधिकारी रीवा के आदेश क्र./एसएसए (एसई)/2025/3232 रीवा दिनांक 10.09.2025 के द्वारा शासकीय हा.से.वि. पैपखरा, दुआरी, गुढ़, खैरा, बरहैया, खटखरी में बिना कार्य किये ही रु. 2838229/- का भुगतान प्रभारी सहायक संचालक वित्त पुष्पा पुसाम के अभिमत के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी रीवा द्वारा किया गया है? क्या पुसाम द्वारा अनधिकृत रूप से पदोन्नत पद ग्रहण करने के बाद ऐसी वित्तीय स्वीकृतियों हेतु अभिमत दिया गया है। क्या उक्त स्वीकृतियों के आधार पर भुगतान में हुई अनियमितताओं की जांच कराई जायेगी?
उप मुख्यमंत्री, वित्त ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी हाँ, कलेक्टर रीवा द्वारा इस संबंध में दिनांक 28.08.2023 को आदेश जारी किया गया था। जी नहीं, वित्त विभाग के आदेश दिनांक 20.04.2025 के अंतर्गत इसे पदोन्नति नहीं माना गया है। कलेक्टर रीवा ने उनके आदेश दिनांक 28.08.2023 के संदर्भ में आदेश दिनांक 23.01.2026 द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी के कार्यालय में बतौर वित्त अधिकारी कार्य करने की अनुमति में वृद्धि की गई है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) जी हाँ। जी नहीं। जी हाँ, जांच कराई गई है।
मदिरा दुकान के आवंटन की शिकायत
[वाणिज्यिक कर]
109. ( क्र. 2594 ) श्री प्रदीप पटेल : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या रीवा संभाग अंतर्गत फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर मदिरा दुकानों के आवंटन से संबंधित कोई शिकायत विभाग के संज्ञान में है? यदि हाँ, तो ऐसी शिकायतें कब-कब प्राप्त हुईं तथा वे वर्तमान में किस स्तर पर लंबित हैं? (ख) उपरोक्त के संबंध में यह भी स्पष्ट करें कि (1) क्या फर्जी बैंक गारंटी प्रकरण की जांच हेतु कोई जांच समिति/जांच दल गठित किया गया है? (2) यदि हाँ, तो जांच समिति का गठन कब किया गया तथा उसके द्वारा अब तक क्या जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है? (3) यदि जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया है, तो इसमें विलंब के कारण क्या हैं तथा इसके लिए उत्तरदायी अधिकारी/कर्मचारी कौन हैं? (ग) उपरोक्त तथ्यों के आलोक में यह भी बताएं कि जब मदिरा दुकानों के आवंटन हेतु केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों की बैंक गारंटी ही मान्य थी, तो फिर गैर-राष्ट्रीय कृत/अमान्य बैंक की बैंक गारंटी को किस आधार पर स्वीकार किया गया? क्या इस गंभीर वित्तीय अनियमितता में संलिप्त संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों एवं लाभार्थियों के विरुद्ध कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है? यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं तथा कब तक वैधानिक एवं दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी और अगर नहीं कि गई तो कारण, नियम से अवगत करावें।
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) कलेक्टर जिला रीवा के पत्र दिनांक 09.06.2023 से, जिले की कतिपय मदिरा दुकानों के लिये जमा प्रतिभूति राशि हेतु जिला सहकारी बैंक शाखा मोरवा, जिला सिंगरौली द्वारा जारी बैंक गांरटी, जो वर्ष 2023-24 हेतु मदिरा की फुटकर दुकानों के निष्पादन संबंधी राजपत्र क्रमांक-62 दिनांक 22.02.2023 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं होने का प्रतिवेदन प्राप्त हुआ। उक्तानुसार प्रकरण संज्ञान में आने पर, श्री अनिल जैन, तत्कालीन सहायक आबकारी आयुक्त, जिला रीवा के विरूद्ध कारण बताओ सूचना पत्र/आरोप पत्र जारी किया गया। सक्षम अधिकारी द्वारा प्रकरण में कोई राजस्व हानि न होने तथा अपेक्षित प्रतिभूति राशि की प्रावधानानुसार बैंक गारंटी जमा करा लिये जाने से, भविष्य में चेतावनी देते हुए प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया। (ख) प्रकरण में कोई जांच समिति/जांच दल का गठन नहीं किया गया है, प्रश्नांश (क) के उत्तर अनुसार संबंधित अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही की गई है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) वर्ष 2023-24 में ठेका संबंधी प्रावधानों के विपरीत बैंक गारंटी लिये जाने पर प्रश्नांश (क) के उत्तर अनुसार संबंधित अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही की गई है।
गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र की भूमि पर अतिक्रमण
[सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम]
110. ( क्र. 2600 ) श्री अम्बरीष शर्मा : क्या सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विभाग द्वारा भूखण्डों के आवंटन से पूर्व गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र के भूखण्डों का साइट प्लान जिसमें भूखण्डों का साइज व क्रमांक अंकित हो बनाकर ही भूखण्डों के आवंटन की प्रक्रिया संपन्न की थी? (ख) क्या MDP इंफ्रा 24/3 Sector D की ओर से इकाई को हस्तांतरित भूमि का आधिपत्य क्षेत्रफल कम होने से उनकी इकाई से लगी इकाइयों से भूमि को मुक्त कराकर आधिपत्य दिलाने सम्बन्धी आवेदन पर विभाग द्वारा किये गये संयुक्त निरीक्षण प्रतिवेदन में भूखंड 24/2 एवं 24/2-ए में यह कैसे लिखा है कि लीज डीड में माप अंकित नहीं है और अगर नहीं भी है तो अनुमोदित मानचित्र अनुसार संयुक्त निरीक्षण क्यों नहीं किया गया? पूर्ण जानकारी देते हुए अनुमोदित नक्शे की छायाप्रति उपलब्ध कराएं। (ग) क्या औद्योगिक क्षेत्र के इस नक्शे में कभी संशोधन किया गया व संशोधन अनुसार भूखण्डों की चतुर्सीमाओं में परिवर्तन किया गया? अगर हाँ तो प्रति उपलब्ध करायें। यदि नक्शे में संशोधन नहीं हुआ तो भूखण्ड क्रमांक 24/2 Sector D (HLBS), भूखण्ड क्रमांक 24/2 A Sector D (kuber), भूखण्ड क्रमांक 24/1 Sector D (shree ram) द्वारा भूखण्ड क्रमांक 24/3 Sector D (MDP इंफ्रा) को आवंटित भूमि पर किये गए अतिक्रमण को क्यों नहीं हटाया जाकर सामने की सड़क की चौड़ाई के आधार पर अतिक्रमण का क्यों समर्थन किया जा रहा है? कब तक अतिक्रमण हटाया जाकर आवंटिती को भूमि सौंप दी जाएगी? समय-सीमा बताई जाये।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ( श्री चेतन्य कुमार काश्यप ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है।
स्वीकृत अनुदान राशि की सभी किश्तों का भुगतान
[सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम]
111. ( क्र. 2601 ) श्री अम्बरीष शर्मा : क्या सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजगढ जिले के अंतर्गत पीलूखेडी विशेष औद्योगिक क्षेत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अंतर्गत गत तीन वर्षों में कितनी नयी औद्योगिक इकाइयां स्थापित की गयी? सूची उपलब्ध करायी जाये। (ख) ऐसी कितनी इकाइयां हैं जिन्हें गत दो वर्षों से अनुदान प्राप्त नहीं हो रहा है? पूर्व में स्वीकृत जिन औद्योगिक इकाइयों को स्वीकृत अनुदान की चौथी किश्त बकाया था उसका भुगतान भी लंबित होने से इकाइयों को बैंक ऋण में अधिक ब्याज देने से प्राप्त होने वाले अनुदान का लाभ वास्तविक रूप से प्राप्त नहीं हो रहा है? (ग) शासन एवं जिला उद्योग केन्द्र द्वारा स्वीकृत अनुदान की राशि की सभी लंबित किश्तों का भुगतान कब तक कर दिया जायेगा? समय-सीमा बतायी जाये।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ( श्री चेतन्य कुमार काश्यप ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) विभाग द्वारा समस्त पात्र इकाइयों को स्वीकृत अनुदान की किश्तों का वितरण निरंतर किया जाकर नवंबर, 2025 अंत तक की देय किश्तों का भुगतान किया जा चुका है। अत: दो वर्षों से अनुदान प्राप्त न होने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। औद्योगिक क्षेत्र पीलूखेड़ी में स्थापित एक इकाई शिखरजी मेटल को स्वीकृत अनुदान की चौथी किश्त 19.12.2025 को देय हुई है, जिसका भुगतान प्रक्रियाधीन है। (ग) किश्तों का भुगतान एक निरंतर प्रक्रिया है। स्वीकृत अनुदान की राशि की किश्तों की देयता उत्पन्न होने पर उनका भुगतान शीघ्रातिशीघ्र किया जाएगा।
भिण्ड जिले में फर्जी शस्त्र लायसेंस बनाया जाना
[गृह]
112. ( क्र. 2604 ) श्री हेमंत सत्यदेव कटारे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिण्ड जिले में कलेक्टर कार्यालय की आर्म्स शाखा की मिलीभगत से क्या हाल ही में बडे पैमाने पर अदृश्य सिंडीकेट द्वारा भ्रष्टाचार कर फर्जी शस्त्र लायसेंस जारी करने संबंधी घोटाला सामने आया है? (ख) यदि हाँ, तो देश की सुरक्षा से जुड़े इस फर्जी शस्त्र लायसेंस जैसे संवेदनशील मामले के प्रकाश में आने पर जिला प्रशासन/शासन द्वारा प्रारंभिक तौर पर क्या-क्या जांच व अन्य कार्यवाहियां की गई? क्या जांच में जम्मू कश्मीर सहित अन्य राज्यों के शस्त्र माफिया क्षेत्र के लोगों की संलिप्तता भी सामने आयी है? पूर्ण जानकारी दी जाये। (ग) कलेक्टर कार्यालय भिण्ड द्वारा दिनांक 01.01.2021 से प्रश्न दिनांक तक कितने शस्त्र लायसेंस जारी किये, उनकी सूची सहित पूर्ण जानकारी जिसमें शस्त्र लायसेंसधारी का नाम, पिता का नाम पता, थाना सहित शस्त्र लायसेंस हेतु किये गये आवेदन व उसके साथ संलग्न किये शपथ-पत्र, आधारकार्ड, पेनकार्ड की जानकारी सहित, चरित्र सत्यापन प्रतिवेदन आदि की छायाप्रति संलग्न उपलब्ध करायी जाये। (घ) क्या कलेक्टर भिण्ड द्वारा पत्र के माध्यम से चम्बल आयुक्त से प्रकरण की अन्य जिले के वरिष्ठ अधिकारी से जांच कराने हेतु लिखा है? यदि हाँ, तो प्रकरण की जांच किसके द्वारा की गयी व जाँच में कौन से तथ्य सामने आये? (ड.) क्या राज्य शासन इस गंभीर प्रकरण की निष्पक्ष व सूक्ष्म जांच एसआईटी गठित कर अथवा सीबीआई के माध्यम से करायेगा? यदि हाँ, तो बताएं।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (ड.) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने पर कार्यवाही
[सामान्य प्रशासन]
113. ( क्र. 2605 ) श्री हेमंत सत्यदेव कटारे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) श्री संतोष वर्मा के विरूद्ध हर्षिता अग्रवाल द्वारा पंजीबद्ध कराये अप.क्र. 851/2016 की एवं मान. न्यायाधीश श्री ब्रिजेन्द्र रावत द्वारा भी श्री वर्मा के विरूद्ध पंजीबद्ध कराये अप.क्र. 155/2021 के प्रथम सूचना रिपोर्ट की छायाप्रति सहित उक्त सूचनाओं से संबंधित प्रकरणों की वर्तमान स्थिति की पूर्ण जानकारी उपलब्ध करायी जाये। (ख) क्या श्री संतोष वर्मा के विरुद्ध पंजीबद्ध अप.क्र. 851/2016 से सम्बंधित मान. न्यायालय में प्रचलित प्रकरण में दिनांक 07. 11.2021 तक अंतिम निर्णय ही पारित नहीं हुआ था उससे पूर्व ही श्री वर्मा द्वारा अक्टूबर, 2020 में न्यायालय में प्रचलित इस प्रकरण के तैयार किये फर्जी निर्णय आदेश की प्रति अपनी सनिष्ठा प्रमाणित करने हेतु सामान्य प्रशासन विभाग को सौंपने के आधार पर ही शासन ने श्री वर्मा को आई.ए.एस. संवर्ग में पदोन्नति हेतु फिट दर्शाने से ही श्री वर्मा को आई.ए.एस. संवर्ग में पदोन्नत किया गया था? यदि हाँ, तो कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने के संबंध में श्री वर्मा के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कराकर कार्यवाही की गयी? यदि नहीं, तो क्यों? (ग) क्या हर्षिता अग्रवाल द्वारा दिनांक 28 अप्रैल 2021 को श्री वर्मा द्वारा प्रस्तुत किये कूटरचित न्यायालय आदेश के संबंध में शिकायत मुख्य सचिव को प्रेषित करने पर आई.जी. इन्दौर से जाँच कराने पर पाया कि श्री वर्मा के विरूद्ध न्यायालय में प्रचलित प्रकरण लंबित है उसमें कोई निर्णय नहीं हुआ? यदि हाँ, तो शासन ने शिकायत प्राप्त होने तथा जाँच प्रतिवेदन प्राप्त होने के बाद श्री संतोष वर्मा के विरूद्ध तत्काल 467, 468 एवं 471 का अपराध क्यों पंजीबद्ध नहीं कराया व अनुशासनिक कार्यवाहियां क्यों नहीं की? (घ) क्या केन्द्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल कार्यालय जबलपुर में स्वयं श्री संतोष वर्मा द्वारा यह स्वीकार किया है कि "मेरे द्वारा सामान्य प्रशासन विभाग में प्रस्तुत न्यायालय निर्णय यदि फर्जी था तो उसके लिये वह कैसे दोषी है" क्या यह स्वीकारोक्ति श्री वर्मा को कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने का अपराधी होना सिद्ध नहीं करता। (ड.) शासन को श्री वर्मा द्वारा अपनी सनिष्ठा संबंधी कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत की जानकारी शासन को प्रथमतः किस दिनांक को किस माध्यम से प्राप्त हुई? जानकारी प्राप्त होते ही शासन से क्रमशः क्या-क्या कार्यवाहियां की गयी? क्या श्री संतोष वर्मा को अवार्ड किये आय.ए.एस. को निरस्त करने हेतु केन्द्र सरकार को लिखा गया? यदि हाँ, तो केन्द्र सरकार को प्रेषित पत्र की छायाप्रति उपलब्ध कराते हुये बतायें कि केन्द्र सरकार में प्रकरण की वर्तमान स्थिति क्या है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) श्री संतोष वर्मा के विरूद्ध हर्षिता अग्रवाल द्वारा पंजीबद्ध कराये अप.क्र. 851/2016 की एवं मान. न्यायाधीश श्री ब्रिजेन्द्र रावत द्वारा श्री वर्मा के विरुद्ध पंजीबद्ध कराये अप.क्र. 155/2021 के प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट- 'अ' अनुसार है। श्री संतोष वर्मा के विरुद्ध थाना लसुड़िया जिला इंदौर में दर्ज अप. क. 851/2016 धारा 493, 494, 495, 323, 294, 506 भादवि में चार्जशीट का अंतिम प्रतिवेदन सक्षम न्यायालय में दिनांक 05-04-2019 को प्रस्तुत किया गया है। प्रकरण वर्तमान में जे.एम.एफ.सी. न्यायालय इंदौर में विचाराधीन होकर आगामी पेशी दिनांक 16.04.2026 नियत है। श्री संतोष वर्मा के विरुद्ध थाना एम.जी. रोड इंदौर में दर्ज अप क्र. 155/2021 धारा 420, 467, 471, 120बी भा.द.वि. में विवेचना उपरांत श्री संतोष वर्मा के विरुद्ध चार्जशीट क्र. 179/2021 दिनांक 07.09.2021 को सक्षम न्यायालय इंदौर में पेश किया गया है। जो एस.टी. नं. 662/2021 पर दर्ज होकर वर्तमान में 22वें अपर सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में विचाराधीन होकर आगामी पेशी दिनांक 04.03.2026 नियत है। प्रकरण में पूरक विवेचना जारी है। (ख) श्री वर्मा द्वारा विभाग में माननीय न्यायालय द्वारा पारित कथित आदेश दिनांक 06.10.2020 की प्रति प्रस्तुत की गई, जिसमें उनके दोषमुक्त (Acquitted) किए जाने का उल्लेख था। उक्त आदेश की प्रति अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, इंदौर जोन, इंदौर को भेजकर उपरोक्त आदेश के विरूद्ध सक्षम न्यायालय में अपील किये जाने के संबंध में जानकारी चाही गई। पुलिस महानिरीक्षक, जिला इंदौर द्वारा दिनांक 16.10.2020 को जिला लोक अभियोजन अधिकारी का अभिमत प्रेषित किया गया, जिसमें उक्त दोषमुक्ति आदेश सही प्रतीत होने तथा अपील योग्य आधार न होने का उल्लेख किया गया। उपर्युक्त आधार श्री वर्मा की संनिष्ठा प्रमाणित कर उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नति द्वारा नियुक्त किया गया। उक्त प्रकरण में एफ.आई.आर. दर्ज की जाकर प्रकरण जांचाधीन है। (ग) जी हाँ। पुलिस द्वारा प्रारम्भिक विवेचना में प्रकाश में आये तथ्यों के कारण श्री वर्मा को दिनांक 10.07.2021 को गिरफ्तार किया गया, तदोपरांत श्री वर्मा को दिनांक 13.07.2021 को अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के अंतर्गत निलंबित किया गया। प्रशासकीय अनुमोदन उपरांत दिनांक 11.08.2021 को श्री वर्मा के विरुद्ध अखित भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के अंतर्गत आरोप पत्र जारी किया जाकर, विभागीय जांच संस्थित की गयी। (घ) कूटरचित निर्णय के विषय में न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है। (ड.) हर्षिता अग्रवाल द्वारा दिनांक 28 अप्रैल 2021 को श्री वर्मा द्वारा प्रस्तुत किये कूटरचित न्यायालय आदेश के संबंध में शिकायत मुख्य सचिव को प्रेषित करने पर आई.जी. इन्दौर से जाँच कराने पर पुलिस द्वारा प्रारम्भिक विवेचना में प्रकाश में आये तथ्यों के कारण श्री वर्मा को दिनांक 10.07.2021 को गिरफ्तार किया, तदोपरांत श्री वर्मा को दिनांक 13.07.2021 को अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के अंतर्गत निलंबित किया गया। प्रशासकीय अनुमोदन उपरांत दिनांक 11.08.2021 को श्री वर्मा के विरुद्ध अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के अंतर्गत आरोप पत्र जारी किया जाकर, विभागीय जांच संस्थित की गयी। केन्द्र सरकार को प्रेषित पत्र की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट- 'ब' अनुसार है। प्रकरण प्रक्रियाधीन है।
शासकीय कार्या से पंजीयन शुल्क वसूली
[वाणिज्यिक कर]
114. ( क्र. 2609 ) श्री जयवर्द्धन सिंह : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या म.प्र. माल और सेवाकर अधिनियम 2017 की धारा 9 के तहत उस पर लगने वाले संपूर्ण राज्यकर से छूट देने हेतु आदेश जारी किये? कब क्या किस आधार पर? आदेश के पूर्व कितना कर लिया जाता है? पूर्व में एवं अद्यतन स्थिति में प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर माल की खपत, अनुमानित राशि, लाभ/हानि का तुलनात्मक गौशवारा में जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्य में म.प्र. राजपत्र दिनांक 18/9/25 में स.क्र. 7 शीर्ष 0201 में गौवंशीय पशुओं के मांस पर राज्यकर से पूर्ण छूट दी गई है? क्या राज्य सरकार का यह प्रस्ताव प्रदेश में गौवंशीय पशुओं के मास की बिक्री में वृद्धि के उद्देश्य से किया गया है? क्या इस छूट को सरकार वापस लेने पर विचार करेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? कारण सहित बतायें। (ग) क्या सभी ई-रजिस्ट्री क्र./दि. MP059702024A1789492/21-6-24, MP059702024A1783382/20-6-24, MP059702024A1759033/14-6-24 एवं MP059702024A1757611/14-6-24 को सब रजिस्ट्रार अजमल मारण ने संपादित कराई है? यदि हाँ, तो किस आधार पर कारण सहित बतायें। उक्त ई-रजिस्ट्री वन भवन से क्रमशः एमपीएसईडीसी-म.प्र. श्रम कल्याण मण्डल - म.प्र. भवन एवं सनिर्माण कर्मकार - म.प्र. स्टेट माइनिंग कार्पोरेशन लिमिटेड भोपाल से संपादित हुई में शासकीय कार्यालय से शासकीय कार्यालय में पंजीयन शुल्क स्टाम्प वेण्डर दिव्या नामदेव/ SP0105416042020101075 की मिलीभगत से क्यों एवं किस नियम पर की गई? विस्तृत जानकारी दें।
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) मध्यप्रदेश माल एवं सेवाकर अधिनियम, 2017 (क्र. 19 सन् 2017) की धारा 11 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कतिपय वस्तुओं पर कर की धारा 9 के तहत लगने वाले राज्य कर से छूट अधिसूचना क्रमांक FA 3-35-2017-1-V (25) दिनांक 18 सितम्बर, 2025 से दी गई है। इन वस्तुओं में गौवंशीय पशुओं का मांस, ताजा या ठंडा भी शामिल है। इस अधिसूचना के पूर्व वस्तुओं के कर पर छूट देने के संबंध में जो अधिसूचना लागू थी (FA3-35-2017-1-Five (63) दिनांक 30 जून, 2017) उस अधिसूचना में भी गौकुलीय प्राणी का मांस, ताजा और द्रुतशीतित को भी उक्त अधिसूचना में शामिल किया गया है। अतः 18-09-2025 के अधिसूचना से उक्त वस्तु पर कर से छूट की पुनरावृत्ति किया गया। अतः दिनांक 18-09-2025 को जारी अधिसूचना के पूर्व भी उक्त वस्तु पर कर की छूट दी गई थी। जी.एस.टी. के अंतर्गत पूरे देश में सामंजस्यपूर्ण संरचना और सुव्यवस्थित राष्ट्रीय बाजार के अवधारणा पर संविधान के अनुच्छेद 279 A के तहत माल एवं सेवाकर परिषद् का गठन किया गया है। माल एवं सेवाकर परिषद् में केन्द्र, समस्त राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेश के प्रतिनिधि होते है एवं परिषद् द्वारा ही जी.एस.टी. अधिनियम, नियमों एवं वस्तु तथा सेवाकर दरों के संबंध में अनुशंसा करती है, जिसे केन्द्र सरकार एवं समस्त राज्यों द्वारा समान रूप से लागू किया जाता है। कर दर का निर्धारण समस्त प्रकार की वस्तुओं एवं सेवा के प्रदाय पर, उसके बिक्री/प्रदाय की अनुमति हो या नहीं हो, अनिवार्य होता है। गौवंशीय पशुओं का मांस की खपत, अनुमानित राशि, लाभ-हानि के संबंध में जानकारी इस विभाग द्वारा न ही संधारित और न ही रखी जाती है। मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 के अंतर्गत धारा-4 अनुसार गौवंश के वध का प्रतिषेध, धारा-5 गौ-मांस रखने पर प्रतिषेध एवं धारा-6 वध के लिये गौवंश के परिवहन पर प्रतिषेध। अधिनियम की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) विभाग की अधिसूचना क्रमांक FA 3-35-2017-1-V (25) दिनांक 18 सितम्बर, 2025 के स.क्र. 7 शीर्ष 0201 से गौवंशीय पशुओं का मांस, ताजा या ठंडा पर कर की छूट प्रदान की गई है। जी.एस.टी. के अंतर्गत पूरे देश में सामंजस्यपूर्ण संरचना और सुव्यवस्थित राष्ट्रीय बाजार के अवधारणा पर संविधान के अनुच्छेद 279 A के तहत माल एवं सेवाकर परिषद् का गठन किया गया है। माल एवं सेवाकर परिषद् में केन्द्र, समस्त राज्य एवं केन्द्र शासित प्रदेश के प्रतिनिधि होते है एवं परिषद् द्वारा ही जी.एस.टी. अधिनियम, नियमों एवं वस्तु तथा सेवा के कर दरों के संबंध में अनुशंसा करती है, जिसे केन्द्र सरकार एवं समस्त राज्यों द्वारा समान रूप से लागू किया जाता है। अतः गौवंशीय मांस के कर दर में परिवर्तन जी.एस.टी. परिषद् की अनुशंसा पर किया जायेगा। मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 अंतर्गत, गौवंशीय वध का प्रतिषेध। अधिनियम की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) सभी ई-रजिस्ट्री क्र. दि. MP059702024A1789492/21.06.2024, MP059702024A1783382/20.06.2024, MP059702024A1759033/ 14.06.2024 एवं MP059702024A1757611/14.06.2024 पक्षकारों द्वारा पूरी स्टाम्प ड्यूटी लगाकर तथा निष्पादित कर सब रजिस्ट्रार अजमल मारण के समक्ष पंजीयन हेतु प्रस्तुत की गयी थी तथा पंजीयन अधिनियम 1908 के प्रावधानों के अनुरूप सब रजिस्ट्रार द्वारा उक्त चारों दस्तावेजों का पंजीयन किया गया। शेष प्रश्नांश के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
पर्यावरण कम्पलायंस की जांच
[पर्यावरण]
115. ( क्र. 2628 ) श्री गौरव सिंह पारधी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला-बालाघाट अन्तर्गत तहसील-कटंगी, तहसील-तिरोड़ी, तहसील-खैरलांजी के अन्तर्गत समस्त मैग्नीज/डोलोमाइट/रेत खदानों की प्रति 06 माह में जमा होने वाली पर्यावरण कम्पलायंस (अनुपालन) रिपोर्ट की विगत 05 वर्षों की छायाप्रति प्रदान करें। (ख) क्या उक्त कम्पलायंस (अनुपालन) की विभाग द्वारा सत्यता जानने के लिये कोई जांच की गई है। यदि हाँ, तो सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध करावें। यदि नहीं, की गई तो क्यों? जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारी के पदनाम सहित जानकारी उपलब्ध करावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों के अनुपालन प्रतिवेदन का भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वेबसाइट https:// environmentclearance.nic.in/online_state_EC_Complaince_Report.aspx पर अवलोकन किया जा सकता है। (ख) शर्तों का पालन कराने के लिये क्षेत्रीय कार्यालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार अधिकृत है।
जिलाबदर की कार्यवाही पर रोक
[गृह]
116. ( क्र. 2656 ) श्री बाबू जन्डेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रा.सु.का./जिलाबदर किये जाने हेतु अपराधी पर कितने पुलिस प्रकरण या सम्बंधित अपराधी पर किस प्रवृत्ति के प्रकरण होना आवश्यक है? नियम निर्देशों की प्रति उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार श्योपुर कलेक्टर न्यायालय में विचाराधीन प्रकरण क्र. 63/24 शासन विरूद्ध जसवन्त मीणा जिलाध्यक्ष किसान कांग्रेस श्योपुर निवासी सरजूपुरा के विरूद्ध व्यक्तिगत रूपसे कितने-कितने पुलिस प्रकरण कौन-कौन सी धाराओं में किस थाने में दर्ज होकर विचाराधीन हैं? FIR छायाप्रति एवं पुलिस अधीक्षक के कार्यालय श्योपुर द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन/जिलाबदर हेतु अनुशंसा के आधार की छायाप्रति उपलब्ध करावें। (ग) प्रश्नांश (ख) अनुसार श्री मीणापर ऐसे कितने संगीन एवं आदतन अपराधी प्रवृत्ति के प्रकरण व्यक्तिगत रूप से दर्ज है, जिनके कारण जिलाबदर किया जाना अत्यंत आवश्यक है तथा कितने प्रकरणों में सामूहिक रूप से पुलिस प्रकरण दर्ज है? उक्त सह आरोपियों पर भी जिलाबदर किये जाने की कार्यवाही का भी प्रकरण बनता है? अवगत करावें। उक्त पुलिस प्रकरणों में से ऐसे कितने प्रकरण हैं जो जनता के हित में धरना, आंदोलन, प्रदर्शन, चक्काजाम करने के दौरान सामूहिक रूप से दर्ज किये गये हैं? FIR की छायाप्रति उपलब्ध करावें तथा कितने प्रकरणों में प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की गई है? छायाप्रति उपलब्ध करावें। (घ) श्योपुर जिले में ऐसे कितने राजनैतिक पार्टियों के सदस्य एवं जनप्रतिनिधि, समाजसेवी व्यक्ति हैं जिनके ऊपर पांच से अधिक पुलिस प्रकरण दर्ज हुए हैं? उन सभी व्यक्तियों के पुलिस प्रकरण क्र. धारा एवं FIR की सूची उपलब्घ करावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "अ" अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "ब" अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट- 'स' पर है। प्रश्नांश में वर्णित सभी अपराधों में श्री जसवंत मीणा का नाम शामिल है। श्री जसवंत मीणा के विरूद्ध सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाना, जनता को उकसाकर धरना प्रदर्शन करना, मुख्य रास्तों पर चक्का जाम करना, आमजन को बंद एवं धरना के लिये विवश करना, शासन के आदेशों का उल्लंघन करना, जैसे विधि विरूद्ध कृत्य करने से अपराध दर्ज किये गये हैं, इसीलिये जिला निर्वासन की कार्यवाही की गई है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "द" अनुसार।
ऋण प्रकरणों को स्वीकृति
[सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम]
117. ( क्र. 2657 ) श्री बाबू जन्डेल : क्या सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग द्वारा श्योपुर जिले में वर्ष 2023 से प्रश्न दिनांक तक किन-किन योजनाओं में कितनी-कितनी राशि के प्रकरण स्वीकृत किये गये? वर्षवार जानकारी देवें? (ख) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्य में विभाग द्वारा स्वीकृत किये गये कितने प्रकरणों को बैंको द्वारा स्वीकृत किया जाकर कितने युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किये गये हैं? वर्षवार जानकारी देवें? (ग) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्य में विभाग द्वारा स्वीकृत प्रकरणों में से कितने प्रकरणो को बैंको द्वारा स्वीकृत नहीं किया गया और क्यों? प्रकरणवार सम्पूर्ण जानकारी सहित अवगत करावें? (घ) क्या राज्य शासन ऐसी नीति बनाने पर विचार करेगा, जिससे उद्योग विभाग द्वारा भारतीय रिर्जव बैंक के नियम निर्देशों के तहत तथा संबंधित स्थानीय बैंक शाखा पॉलिसी के अनुसार आवश्यक अभिलेखों की पूर्ति करते हुऐ स्वीकृत कर बैंको में भेजा जावें? जिससे उक्त सभी प्रकरणों में बैंको द्वारा ऋण जारी किया जा सके? शासन द्वारा उक्त नीति कब तक बनाई जावेगी? समय-सीमा बतावें? यदि नहीं, तो क्यो कारण बतावें?
सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ( श्री चेतन्य कुमार काश्यप ) : (क) विभाग द्वारा श्योपुर जिले में युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री उद्यम क्रान्ति योजना संचालित है। योजना अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 से प्रश्न दिनांक तक स्वीकृत प्रकरणों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-’अ’ अनुसार है। (ख) विभाग द्वारा योजना अंतर्गत प्रकरण स्वीकृत नहीं किये जाते हैं अपितु प्राप्त आवेदन बैंकों को प्रेषित किये जाते है जिसमें ऋण स्वीकृति एवं वितरण की अधिकारिता बैंकों की होती है। प्रश्नांश “क” के परिप्रेक्ष्य में वर्षवार स्वीकृत एवं रोजगार की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-’अ’ अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-’ब’ अनुसार है। (घ) जी नहीं। आवेदक के सभी आवश्यक अभिलेख बैंकों को उपलब्ध कराये जाते है परन्तु ऋण स्वीकृति (Credit decision) की अधिकारिता बैंकों की है जिसमें भारतीय रिज़र्व बैंक साख नियमों एवं बैंक पॉलिसी अनुसार ऋण स्वीकृति का निर्णय बैंक शाखाओं द्वारा लिया जाता है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
डामरीकृत हवाई पट्टियों की मरम्मत
[विमानन]
118. ( क्र. 2660 ) श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में ऐसी कितनी डामरीकृत हवाई पट्टियाँ हैं जिनकी मरम्मत (पुनः डामरीकरण) तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी नहीं हुई है? डामरीकृत हवाई पट्टियों की मरम्मत एवं देखरेख के लिए क्या विभाग द्वारा कोई समिति का गठन किया गया है? शासन की नीति/नियम के अनुसार हवाई पट्टी पर डामरीकरण के लिए क्या नीति है? नीति/नियम की प्रतिलिपि दें। (ख) प्रश्नांश (क) में संदर्भित हवाई पट्टियों में से कितनी हवाई पट्टियों की मरम्मत के प्रस्ताव विभाग के पास किन-किन कारणों से लंबित हैं? इन पर कब तक कार्यवाही की जाएगी? समय-सीमा बताएं। (ग) नीमच हवाई पट्टी के विस्तार हेतु क्या कोई प्रस्ताव विभागीय स्तर पर लंबित है? यदि हाँ, तो क्या विस्तार हेतु आवश्यक भूमि का विभागीय स्तर पर अधिग्रहण कर लिया गया है? भूमि की जानकारी दें। (घ) यदि प्रश्नांश (ग) का उत्तर 'हाँ' है, तो विस्तारीकरण में हो रही देरी के कारणों सहित जानकारी दें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रदेश स्थित 17 डामरीकृत हवाई पट्टियों में से खण्डवा, शिवपुरी, बिरवा, उमरिया एवं छिंदवाड़ा हवाई पट्टी पर तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी मरम्मत कार्य नहीं हुआ है। डामरीकरण हवाई पट्टियों की मरम्मत एवं देखरेख का कार्य सामान्यत: लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जाता है। रनवे का डामरीकरण के संबंध में शासन की कोई नीति/नियम नहीं हैं। अपितु संबंधित जिले के लोक निर्माण विभाग द्वारा आवश्यकतानुसार प्रस्तुत जानकारी/प्राक्कलन के आधार पर शासन स्तर से निर्णय लिया जाता है। (ख) रतलाम, खण्डवा, झाबुआ एवं शहडोल हवाई पट्टियों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। शहडोल एवं खण्डवा हवाई पट्टियों का चयन भारत सरकार की RCS-UDAN 5.2 योजना के अंतर्गत होने से लंबित हैं। रतलाम एवं झाबुआ हवाई पट्टी के रवने विस्तार का प्रस्ताव तैयार किया गया है। अत: समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ग) नीमच हवाई पट्टी का चयन भारत सरकार की RCS-UDAN 5.2 योजना के अंतर्गत हुआ है। विभाग द्वारा भारत सरकार, नागर विमानन मंत्रालय को इस संबंध में सैद्धांतिक सहमति दिनांक 21/02/2026 को प्रदान की गयी है। (घ) उत्तरांश 'ग' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
विवाह के नाम पर धोखाधड़ी प्रकरण
[गृह]
119. ( क्र. 2663 ) श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 1 जनवरी 2020 के बाद इंदौर और उज्जैन संभाग में समाचार पत्रों या अन्य माध्यमों से विवाह के नाम पर धोखाधड़ी से संबंधित कितने आवेदन किन-किन थानों में दर्ज हुए? (ख) प्रश्नांश (क) में संदर्भित कितने मामलों में कितने प्रकरणों का निराकरण हो गया है तथा कितने प्रकरण किन-किन कारणों से लंबित हैं? माननीय न्यायालय से निराकृत हुए प्रकरणों की संख्या भी बताएं। (ग) प्रश्नांश (क) और (ख) में संदर्भित जांच हेतु लंबित कितने मामलों में पुलिस द्वारा जांच पूर्ण कर चालान माननीय न्यायालय में प्रस्तुत कर दिए गए तथा ऐसे कितने रैकेट पकड़े गए जिन्होंने एक से अधिक व्यक्तियों के साथ विवाह के नाम पर धोखाधड़ी की? (घ) प्रश्नाधीन अवधि में प्राप्त एक ही मामले की शिकायत पुलिस कमिश्नर इंदौर और पुलिस अधीक्षक नीमच को प्राप्त हुई है? यदि हाँ, तो शिकायत के संदर्भ में सक्षम स्तर पर कोई जांच कराई गई? यदि हाँ, तो तत्संबंधी ब्यौरा दें और यदि नहीं, तो कारण बताएं।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'अ' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'ब' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'स' अनुसार है। (घ) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'द' अनुसार है।
शिकायती पत्रों की जानकारी
[गृह]
120. ( क्र. 2665 ) श्रीमती अनुभा मुंजारे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला बालाघाट के पुलिस थानों में 1 जनवरी 2023 से प्रश्न दिनांक तक कुल कितने गुमशुदा, हत्या, चोरी, दुर्घटना, बच्चा चोरी एवं किडनैपिंग के प्रकरण दर्ज हुए? सम्बन्धित प्रकरण का नाम, सम्बन्धित थाने का नाम, घटना स्थान एवं दिनांकवार जानकारी देवें। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार दर्ज प्रकरणों में से कितने प्रकरण पुलिस द्वारा सुलझाये गए एवं उन प्रकरणों में कितने दोषियों को पकड़ा गया व किस दोषी को कितनी सजा हुई? दोषियों के नाम सहित विस्तृत जानकारी उपलब्ध करायें। (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) अनुसार उक्त प्रकरणों का निराकरण आज दिनाँक तक नहीं होने के लिये दोषी अधिकारी,कर्मचारी कौन-कौन है नामवार, पदवार सम्पूर्ण जानकारी देवें एवं सम्बन्धित अधिकारी, कर्मचारी पर शासन द्वारा क्या-क्या कार्यवाही की गई? (घ) क्या गढ़वाल समाज भरवेली द्वारा दिनांक 21.7.2025 को पुलिस अधीक्षक बालाघाट को शिकायत पत्र दिया गया है? उक्त पत्र पर क्या कार्यवाही की गई और नहीं की गई तो क्यों? संपूर्ण अभिलेख सहित जानकारी प्रदान करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'अ' अनुसार है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'ब' अनुसार है।
रहवासी क्षेत्रों में संचालित शराब दुकानों एवं अहाते
[वाणिज्यिक कर]
121. ( क्र. 2666 ) श्रीमती अनुभा मुंजारे : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रश्नकर्ता के नगर पालिका क्षेत्र बालाघाट अंतर्गत वार्ड क्रमांक 02,06,12 एवं 24 में शराब दुकानें किस नियम से संचालित हैं? क्या यह पूर्णतः रहवासी क्षेत्रों में हैं? मध्यप्रदेश आबकारी नीति व शासन के दिशा निर्देशों की प्रति देवें? (ख) क्या इन शराब दुकानों के संचालकों द्वारा मध्यप्रदेश शासन के नियमों को ताक पर रखते हुए अवैध अहाते संचालित किए जा रहे हैं? इन अवैध गतिविधियों की कितनी शिकायतों व ज्ञापन दिये गये हैं? शिकायतों पर क्या कार्यवाही की गई? नहीं की गई तो क्यों? सम्पूर्ण विवरण दें? (ग) बालाघाट की उक्त दुकान संचालकों और अवैध अहातों के विरुद्ध आबकारी एवं पुलिस विभाग द्वारा कितने प्रकरण दर्ज है? कितने लायसेंस निरस्त अथवा निलंबित किए गए हैं, कितनी बार दुकानों को सील किया गया है? यदि नहीं, तो इसके लिए कौन अधिकारी उत्तरदायी है? कारण सहित सम्पूर्ण विवरण देवें। (घ) बालाघाट नगर के वार्ड क्र.-02 की शराब दुकान के संबंध में कार्यालय सहायक आबकारी आयुक्त बालाघाट के पत्र क्र. 4047 दिनाँक 11-12-2024 जारी किया गया हैं? पत्र के अनुसार स्थान परिवर्तन की कार्यवाही क्यों नहीं की गई? कारण सहित जानकारी दें। (ड.) क्या शासन आगामी शराब दुकानों की निविदा प्रक्रिया के पूर्व बालाघाट नगर के सभी रहवासी क्षेत्रों में संचालित शराब दुकानों का स्थान परिवर्तन आदेश जारी करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? नहीं तो क्यों?
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) वर्ष 2025-26 में बालाघाट नगर पालिका क्षेत्र की वार्ड क्रमांक 02, 06, 12 एवं 24 में शराब दुकानें क्रमशः (1) भटेरा चौकी, (2) मरारी मोहल्ला, (1) बूढ़ी एवं (4) मोती नगर संचालित हैं। वर्ष 2025-26 की शासन की आबकारी नीति तथा मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 के अन्तर्गत निर्मित दुकानों के अवस्थापना संबंधी सामान्य प्रयोग के नियम-1 के प्रावधानानुसार आपत्ति रहित स्थान पर संचालित हैं। शासन की आबकारी नीति तथा सामान्य प्रयोग के नियम की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-एक अनुसार है। (ख) प्रश्नांश (क) के उत्तर अनुसार मदिरा दुकानों में अवैध रूप से अहाता संचालित किये जाने की विभाग में 03 शिकायतें प्राप्त हुई। प्राप्त 03 शिकायतों की जांच करने पर, कोई अहाता संचालित होना नहीं पाया गया है। विस्तृत जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-दो अनुसार है। (ग) प्रश्नांश (क) अनुसार मदिरा दुकानों में अवैध रूप से अहाता संचालित किये जाने संबंधी आबकारी एवं पुलिस विभाग द्वारा कोई प्रकरण दर्ज नहीं किये गये हैं। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। (घ) सहायक आबकारी आयुक्त, जिला बालाघाट ने पत्र क्र. 4047 दिनाँक 11-12-2024 वार्ड क्रमांक 02 में संचालित मदिरा दुकान भटेरा चौकी के परिसर में ग्राहकों को शराब पिलाने की शिकायत की पुष्टि नहीं होने, संबंधी जानकारी प्रेषित की है। कलेक्टर, बालाघाट द्वारा पत्र क्रमांक 1636 दिनांक 23.05.2025 से वित्तीय वर्ष 2025-26 में, मदिरा दुकान भटेरा चौकी की अवस्थापना आपत्ति रहित स्थल पर होने एवं दुकान के परम्परागत श्रेणी की दुकान होने से एवं राजस्व हित में जिला निष्पादन समिति द्वारा दुकान का स्थान परिवर्तन नहीं किये जाने संबंधी सूचना माननीय विधायक महोदया को प्रेषित की गई है। पत्र की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-तीन अनुसार है। (ङ) उत्तरांश (घ) अनुसार है।
नीलगायों/घोड़ारोज से किसानों को नुकसान
[वन]
122. ( क्र. 2685 ) श्री सतीश मालवीय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्जैन जिले में नीलगाय/घोड़ारोज द्वारा किसानों की फसलों को लगातार हो रहे भारी नुकसान को रोकने एवं नीलगायों से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विभाग द्वारा जनवरी 2024 से प्रश्न दिनांक तक क्या-क्या कार्यवाहियाँ की गयी है? जानकारी देवें। (ख) जनवरी 2024 से प्रश्न दिनांक तक इस संबंध में विभाग को कुल कितनी शिकायतें प्राप्त हुई है? विभाग द्वारा उन शिकायतों के समाधान के लिए क्या-क्या कार्यवाहियाँ की गयी है? सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) उज्जैन जिले में नीलगायों द्वारा किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए किसानों को वर्ष 2024 से प्रश्न दिनांक तक कितना-कितना और कब-कब मुआवजा प्रदान किया गया? विधानसभावार और ग्रामवार किसानों की सूची मुआवजें की राशि सहित जानकारी उपलब्ध करावें। (घ) शाजापुर जिले में नीलगायों को पकड़ने के लिए जिस पद्धति (बोया पद्धति) का उपयोग किया जा रहा है, क्या वैसी कोई योजना अथवा पद्धति उज्जैन जिले के लिए भी विभाग द्वारा प्रस्तावित है? यदि हाँ, तो उसका क्रियान्वयन कब से शुरू किया जावेगा? (ड.) क्या विभाग द्बारा उज्जैन जिले के किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए नीलगायों/घोड़ारोज को अन्य स्थानों पर बसाने की कोई कार्ययोजना है? स्पष्ट करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) घोड़ारोज (नीलगाय) द्वारा किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाये जाने पर आर्थिक सहायता राशि का भुगतान यथा संशोधित राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड छ: क्रमांक-4 के प्रावधानों के तहत किया जाता है। किसानों की फसलों को नुकसान करने वाली घोड़ारोज को आखेट करने की अनुमति जारी करने के लिए मध्यप्रदेश के समस्त अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अपने-अपने अधिकार क्षेत्र की सीमाओं के भीतर प्राधिकृत अधिकारी घोषित है। घोड़ारोज (नीलगाय) से सड़क हादसों के रोकथाम के लिए आमजन को जागरूक करने हेतु सड़कों पर स्पीड ब्रेकर एवं सड़क किनारे वन्यजीवों की उपस्थिति के सूचक बोर्ड लगाये गये हैं। (ख) वनमंडल उज्जैन अंतर्गत जनवरी 2024 से प्रश्न दिनांक तक कुल 233 शिकायतें नीलगाय, हिरण एवं जंगली सुअर को पकड़कर अन्यत्र छोड़ने के संबंध में प्राप्त हुई चूंकि उक्त वन्य प्राणियों को पकड़कर अन्यत्र छोड़ने हेतु कोई योजना स्वीकृत नहीं होने के कारण 19 शिकायतों को बन्द किया गया तथा 214 शिकायतें मांग की श्रेणी में अंतरित की गई। फसल हानि से आर्थिक सहायता विषयक कोई भी शिकायत वनमण्डल उज्जैन को प्राप्त नहीं हुई है। (ग) उज्जैन जिले में वर्ष 2024 से प्रश्न दिनांक तक नीलगायों द्वारा किसानों की फसलों में पहुंचाये गये नुकसान के लिये स्वीकृत आर्थिक सहायता की जानकारी निरंक है। (घ) शाजापुर में नीलगाय पकड़ने की कार्यवाही प्रायोगिक तौर पर थी वर्तमान में उज्जैन जिले में बोमा विधि पद्धति के माध्यम से नीलगायों को पकड़ने की कोई योजना प्रस्तावित नहीं है। (ड.) उत्तरांश (घ) अनुसार।
उत्खनन हेतु जारी की गयी अनुमतियां
[खनिज साधन]
123. ( क्र. 2686 ) श्री सतीश मालवीय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्जैन जिले में (दक्षिण विधानसभा को छोड़कर) जनवरी 2024 से प्रश्न दिनांक तक किन-किन सड़कों के निर्माण/अन्य कार्य हेतु खनिज विभाग द्वारा उत्खनन हेतु अनुमतियां कहां-कहां और कितने उत्खनन के लिए जारी की गई है? जारी की गयी अनुमतियों के सर्वे न., रकबा, प्रयोजन (मुरम/मिट्टी/गिट्टी), नवीन स्टोन क्रेशर प्लांट नाम, पते सहित सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध करावें। (ख) जनवरी 2024 से प्रश्न दिनांक तक किन-किन सड़क निर्माण एजेंसियों पर अनुमति से अधिक मात्रा में अवैध उत्खनन के प्रकरण दर्ज किये गये एवं कितनी राशि का जुर्माना किन-किन एजेन्सी पर किया गया है एवं विभाग द्वारा जुर्माना वसूली के संबंध में क्या कार्यवाही की गई? सम्पूर्ण जानकारी जुर्माना आदेश सहित उपलब्ध करावें। (ग) वर्तमान में उज्जैन जिले में कितने प्रस्ताव कहां-कहां की सड़क निर्माण एजेन्सी द्वारा खनन हेतु अनुमतियां (मुरम, रेती, गिट्टी, मिट्टी) लम्बित या प्रक्रिया में हैं? ग्रामवार, स्थानवार सर्वेवार, रकबावार सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध करावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) उज्जैन जिले में (दक्षिण विधानसभा को छोड़कर) 01.01.2024 से दिनांक 01.02.2026 तक सड़कों/अन्य कार्य हेतु खनिज विभाग द्वारा जारी उत्खनन अनुमतियों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट-‘अ’ अनुसार है। (ख) प्रश्नांश अवधि में उज्जैन जिला अंतर्गत सड़क निर्माण एजेंसियों के विरुद्ध अनुमति से अधिक मात्रा में अवैध उत्खनन के कुल 03 प्रकरण दर्ज किये गये एवं राशि रुपये 78.07 करोड़ का जुर्माना प्रस्तावित किया गया है। वर्तमान में उक्त तीनों प्रकरण न्यायालय अपर कलेक्टर उज्जैन में प्रचलित है। प्रकरणवार जानकारी संलग्न परिशिष्ट-‘’ब’’ अनुसार है। (ग) वर्तमान में उज्जैन जिले में सड़क निर्माण एजेन्सी द्वारा खनन हेतु अनुमतियां कुल 03 प्रस्ताव लम्बित/प्रक्रिया में है। प्रकरणवार जानकारी संलग्न परिशिष्ट-‘स’ अनुसार है।
मा. उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों का अनुपालन
[विधि एवं विधायी कार्य]
124. ( क्र. 2688 ) श्री महेश परमार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या राज्य शासन के पास माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के अंतर्गत पारित परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण एवं अधिकार-पृच्छा संबंधी आदेशों का कोई केंद्रीकृत, विभागवार एवं अद्यतन संकलन (डिजिटल अथवा मैनुअल) उपलब्ध है? यदि हाँ,तो उसका विवरण एवं प्रतियाँ देवें, यदि नहीं,तो उत्तरदायी अधिकारी का नाम,पद एवं दायित्व स्पष्ट किया जाये। (ख) क्या विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा राज्य शासन के समस्त विभागों को माननीय उच्च न्यायालय एवं सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेशों के समयबद्ध, प्रभावी एवं एकरूप अनुपालन हेतु निर्देशात्मक परिपत्र/आदेश जारी किए गए हैं? यदि हाँ,तो उनके आदेश क्रमांक,तिथि एवं प्रतियाँ प्रस्तुत की जाये। (ग) क्या अनुच्छेद 226 के अंतर्गत पारित आदेशों के अनुपालन की निगरानी हेतु विधि विभाग में अब तक कोई पृथक नोडल शाखा गठित की गई है? यदि हाँ, तो आदेश की प्रति दें, यदि नहीं, तो कारण बताये। (घ) क्या सर्वोच्च न्यायालय एवं मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा अस्थायी रूप से भरे गए पदों पर पुनः अस्थायी/संविदा/तदर्थ नियुक्तियों पर प्रतिबंध के बावजूद विभिन्न विभागों में ऐसी नियुक्तियाँ की गई हैं? यदि हाँ, तो विभागवार विवरण देते हुए यह बताया जाए कि संबंधित दोषी निर्णयकर्ता अधिकारियों के विरुद्ध अवमानना अथवा अनुशासनात्मक कार्यवाही क्या की गई।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
पौधा रोपण एवं अन्य कार्यों की जानकारी
[वन]
125. ( क्र. 2692 ) श्रीमती रीती पाठक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सीधी जिले में वन विभाग अंतर्गत सामाजिक वानिकी को विगत 4 वर्षों में पौधा रोपण के लिए शासन द्वारा कितना बजट आवंटित किया गया एवं उपलब्ध कराई गई राशि से कहाँ-कहाँ और कितने पौधों का रोपण किया गया? जिलेभर में वर्षवार कितने पौधे कहाँ लगाये गए एवं कितने पौधे अभी अस्तित्व में हैं? (ख) सीधी जिले में विभाग द्वारा वन समितियों के माध्यम से क्या-क्या कार्य किये जा रहे हैं? विस्तृत ब्यौरा दें। (ग) सीधी जिले में कौन-कौन से वन उत्पादों का विभाग द्वारा संग्रह किया जाता है एवं इनके विक्रय या वितरण से कितनी राशि एकत्रित की जा रही है? (घ) सीधी जिले में कुल वन क्षेत्र कितना है एवं पिछले 5 वर्षों में विभिन्न विभागों द्वारा कितने विकास कार्यों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र की मांग की गई है? जिनमे से कितने अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किये गए हैं और कितने लंबित हैं? (ड.) सीधी जिले में कुल वन क्षेत्र की कितनी भूमि रिक्त है एवं इनमे वन लगाने की सरकार की क्या योजना है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) सीधी जिले में वन विभाग अंतर्गत सामाजिक वानिकी को विगत 4 वर्षों में पौधा रोपण हेतु कोई बजट आवंटन प्राप्त नहीं हुआ है। अत: शेष का प्रश्न उपरिस्थत नहीं होता। सीधी जिले में वर्षवार रोपित किये गये पौधों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) सीधी जिले में वन विभाग द्वारा वन समितियों के माध्यम से वन सुरक्षा/वृक्षारोपण सुरक्षा का कार्य किया जा रहा है। (ग) सीधी जिले में वन विभाग द्वारा वन उत्पादों का संग्रहण कार्य नहीं किया जाता है। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) सीधी जिले (सीधी वनमण्डल, संजय टाईगर रिजर्व सीधी एवं वन विकास निगम सीधी सहित) का कुल वन क्षेत्र 239139.310 हेक्टेयर है। विगत 5 वर्षों के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा विकास कार्यों के लिए कुल 124 अनापत्ति प्रमाण पत्र की मांग की गई जिसमें से 91 अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किये गये तथा 33 प्रमाण पत्र लंबित हैं। (ड.) सीधी जिले के वन मण्डल सीधी के अंतर्गत प्रचलित कार्य आयोजनानुसार पृथक से रिक्त क्षेत्र उल्लेखित नहीं है। वन मण्डल के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा अनुमोदित एवं प्रचलित कार्य आयोजना में प्रावधानित बिगड़े वनों का पुनर्स्थापन प्रबंधन वृत्त अंतर्गत रिक्त क्षेत्र में कार्य आयोजना के अनुसार पौधा रोपण का प्रावधान निहित है। वन विकास निगम सीधी में कुल 110.410 हेक्टेयर क्षेत्र रिक्त है जिसमें से कुल 65.320 हेक्टेयर क्षेत्र में वर्षा आधारित सागौन रोपण योजना अंतर्गत रोपण कार्य किया जा चुका है। शेष 45.090 हेक्टेयर क्षेत्र में आगामी वर्षों में वर्षा आधारित सागौन रोपण कार्य की योजना है।
पुलिस स्टाफ की स्थापना एवं मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति
[गृह]
126. ( क्र. 2693 ) श्रीमती रीती पाठक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सीधी जिले कुल कितने थाने/चौकियां भवन विहीन/दूसरे भवन में संचालित हैं इनके भवन निर्माण हेतु स्वीकृति कब तक प्रदान की जावेगी? (ख) सीधी जिले में पुलिस विभाग में अधिकारियों/कर्मचारियों के कुल कितने पद स्वीकृत हैं एवं कितने पद रिक्त हैं इन रिक्त पदों में अधिकारियों/कर्मचारियों की पदस्थापना कब तक कर दी जाएगी? (ग) सीधी जिले में पिछले दो वर्षों में कितने साइबर अपराध हुए हैं एवं इनमे से कितने अपराधों का निराकरण किया जा चुका है एवं कितने प्रकरण लंबित हैं? (घ) नये-नये तरीकों से किये जा रहे साइबर ठगी से निपटने के लिए सीधी जिले में प्रशिक्षित स्टाफ एवं आवश्यक आधुनिक उपकरण क्या उपलब्ध हैं यदि नहीं, तो कब तक उपलब्ध करा दिए जायेंगे? (ड.) महिलाओं एवं बच्चों के साथ हो रहे उत्पीड़न से बचाव के लिए जागरूकता के कौन-कौन से कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं? इन कार्यक्रमों की जिला स्तर, ब्लॉक स्तर, ग्राम पंचायत स्तर पर क्रार्यान्वयन की अद्यतन स्थिति क्या है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-‘अ‘ अनुसार। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-‘अ’ एवं ‘ब’ अनुसार। (ग) सीधी जिले में पिछले 02 वर्षों में कुल 33 सायबर अपराध पंजीबद्ध किये गये, जिनमें से 27 अपराधों का निराकरण किया जा चुका है, शेष 06 अपराध लंबित है। (घ) सायबर ठगी से निपटने के लिये समय-समय पर राज्य सायबर सेल द्वारा आयोजित प्रशिक्षणों में अधिकारियों/कर्मचारियों को भेजा जाकर प्रशिक्षित किया जा रहा है। सीडीआर एनालाईजर सॉफ्टवेयर के अतिरिक्त अन्य उपकरण उपलब्ध है। (ड.) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-‘अ’ एवं ‘स’ अनुसार।
केट द्वारा पुलिस कैडर रिव्यू एवं भा.पु.से. पदोन्नति
[गृह]
127. ( क्र. 2694 ) डॉ. अभिलाष पाण्डेय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) ने मध्य प्रदेश पुलिस कैडर रिव्यू को सरकार का अनिवार्य दायित्व बताते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार को 120 दिनों के भीतर इसे पूर्ण करने का आदेश दिया है? यदि हाँ, तो उक्त आदेश की प्रमाणित प्रति उपलब्ध करावे। (ख) प्रदेश में पिछला पुलिस कैडर रिव्यू किस वर्ष किया गया था? वर्तमान में राज्य पुलिस सेवा (SPS) के कितने अधिकारियों की IPS पदोन्नति लंबित है और इस विलंब के मुख्य कारण क्या हैं? (ग) CAT के आदेश के अनुपालन में राज्य सरकार द्वारा अब तक क्या ठोस कार्यवाही की गई है? क्या केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय को आवश्यक प्रस्ताव भेजा जा चुका है? यदि नहीं, तो इसमें हो रही देरी का आधार क्या है? (घ) क्या शासन यह सुनिश्चित करेगा कि निर्धारित 120 दिनों की समय-सीमा में रिव्यू प्रक्रिया पूर्ण हो? यदि इस अवधि में कार्य पूर्ण नहीं होता है, तो क्या इसके लिए संबंधित विभाग के उत्तरदायी अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) वर्ष 2022। चयन सूची वर्ष-2025 हेतु राज्य पुलिस सेवा से भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति से नियुक्ति के लिए रिक्तियों के निर्धारण हेतु भारत सरकार, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा निर्धारित कलेण्डर के अनुरूप कार्यवाही प्रचलन में है। (ग) केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जबलपुर द्वारा पारित निर्णय दिनांक 09.01.2026 के अनुपालन में भारत सरकार, गृह मंत्रालय, नई दिल्ली से निर्देश प्राप्त होने के उपरान्त प्रकरण में आगामी कार्यवाही की जा सकेगी। (घ) भारत सरकार से संबंधित है।
प्रदेश में आक्रामक विदेशी पौध प्रजातियों की रोकथाम
[वन]
128. ( क्र. 2695 ) डॉ. अभिलाष पाण्डेय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश के वन क्षेत्रों, कृषि वानिकी और निजी क्षेत्रों में वर्तमान में कौन-कौन सी आक्रामक प्रजातियां (Invasive Plants) सक्रिय रूप से विस्तारित हो रही हैं? क्या इन पौधों का उपयोग अभी भी शासनी व निजी वृक्षारोपण योजनाओं में किया जा रहा है? यदि हाँ, तो इसके क्या कारण हैं? (ख) क्या शासन को यह संज्ञान है कि ये आक्रामक प्रजातियां स्थानीय (Native) वनस्पतियों और जैव विविधता के लिए एक गंभीर संकट पैदा कर रही हैं? (ग) इन पौधों के कारण नष्ट हो रही जैव विविधता (Biodiversity) की भरपाई के लिए शासन के पास क्या कार्ययोजना है? क्या शासन भविष्य में पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने हेतु इन हानिकारक पौधों के रोपण को पूर्णतः प्रतिबंधित करने का विचार रखती है? (घ) इन आक्रामक प्रजातियों को हटाकर इनके स्थान पर स्थानीय प्रजातियों (जैसे- नीम, बरगद, महुआ, पीपल) को रोपने हेतु क्या कोई विशेष नीति या 'नेटिव प्लांटेशन ड्राइव' चलाई जा रही है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रदेश के वनक्षेत्रों, कृषि वानिकी और निजी क्षेत्रों में वर्तमान में आक्रामक वृक्ष प्रजातियां सक्रिय रूप से विस्तरित होने का कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं है। शासन की पौधा रोपण योजनाओं में स्थानीय वृक्ष प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाता है। अत: आक्रामक प्रजातियों के रोपण का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) उत्तरांश (क) अनुसार वन विभाग की रोपण योजनाओं में आक्रामक प्रजातियों को बढ़ावा नहीं दिया जाता है अत: जैव विविधता के लिए कोई गंभीर संकट पैदा होने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) उत्तरांश (क) एवं (ख) के अनुक्रम में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) विभागीय पौधारोपण में स्थानीय प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाता है। मध्य प्रदेश राज्य वन नीति की कण्डिका 3.4.4 में तथा 3.8.5 में प्रावधान किये गये हैं जो संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।
आउट सोर्स कंपनियों द्वारा कर्मचारियों की नियुक्ति
[सामान्य प्रशासन]
129. ( क्र. 2703 ) श्रीमती कंचन मुकेश तनवे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्य प्रदेश में शासकीय विभागों में आउटसोर्स कंपनी को किस आधार पर कर्मचारी नियुक्त करने की पात्रता और प्रक्रिया है और प्रदेश में कितनी कंपनियां द्वारा किन-किन विभागों में कर्मचारी उपलब्ध कराए जा रहे हैं? क्या आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति या हटाए जाने हेतु समिति गठित की गई है? (ख) शासकीय विभागों को किस आधार या मापदंड के अनुसार आउटसोर्स कर्मचारी उपलब्ध कराए जाते है, नियुक्ति के क्या नियम, प्रक्रिया है, खंडवा जिले में किस किस विभाग में, किस किस कंपनी द्वारा, किस किस पद पर आउटसोर्स कर्मचारी नियुक्त किए है, अनुबंध व नियुक्ति प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी प्रदान की जावे। (ग) जिला चिकित्सालय खंडवा व मेडिकल कॉलेज खंडवा में कार्यरत कंपनीज द्वारा विगत 3 वर्ष में कितने कर्मचारी, किस-किस पद पर नियुक्त किए, कितने हटाए गए और किन-किन कारणों से हटाए है, आदेशों की छायाप्रति व कर्मचारियों की सूची प्रदान करें। (घ) आउटसोर्स कर्मचारियों की वेतन भुगतान की नियमावली, प्रणाली व किन-किन मदों से भुगतान किया जाता है और अन्य से मद वेतन भुगतान के क्या नियम हैं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) आवश्यकता अनुसार विभागों एवं विभाग अंतर्गत उपक्रमों द्वारा आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाएं म.प्र. भण्डार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियम 2015 (यथा संशोधित-2022) में दिये गये प्रावधान अनुसार निजी सेवा प्रदाता कंपनी/कॉन्ट्रैक्टर फर्म के माध्यम से अनुबंध अनुसार ली जाती है। राज्य की कंपनियों द्वारा किन-किन विभागो में कर्मचारी उपलब्ध कराए जाने की जानकारी केन्द्रीयकृत रूप से संधारित नहीं की ती हैं, क्योंकि इनका प्रशासन संबंधित विभागों द्वारा किया जाता हैं। जी नहीं। (ख) उत्तरांश 'क' अनुसार। शेषांश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार। (घ) आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन भुगतान विभागों द्वारा नहीं किया जाता, उन्हें अनुबंधित सेवा प्रदाता कंपनी/कॉन्ट्रैक्टर फर्म द्वारा भुगतान किया जाता हैं। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
कर वसूली की अनियमितता
[वाणिज्यिक कर]
130. ( क्र. 2704 ) श्रीमती कंचन मुकेश तनवे : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में देशी, विदेशी, कंपोजिट शराब दुकानों के वितरण और संचालन के क्या नियम है,बिक्री हेतु क्या POS मशीन का उपयोग अनिवार्य है यदि हाँ, तो क्या खंडवा जिले की समस्त दुकानों पर मशीन क्रियाशील रूप में उपलब्ध है, क्या उन मशीनों के उपयोग व क्रियाशीलता जांचने हेतु विभाग द्वारा निरीक्षण किए गए है, यदि हाँ, तो खंडवा विधान सभा की प्रत्येक दुकान की एक एक निरीक्षण रिपोर्ट प्रदान करें। (ख) क्या विगत 01 वर्ष में खंडवा जिले की किस-किस दुकान से कितने-कितने की, कर के राजस्व की आय शासन को हुई है? (ग) क्या विगत 2 वर्ष में खंडवा जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री पर कार्यवाही की गई, ओर कितने-कितने का जुर्माना राजस्व के रूप में वसूला गया, और राज कोष में जमा किया गया? (घ) खंडवा जिले में किन-किन ग्रामों व क्षेत्रों में शराब बिक्री प्रतिबंधित है? (ड.) खंडवा विधानसभा अंतर्गत माताचौक शराब दुकान मेन रोड तथा पेट्रोल पंप के समीप तथा महादेवी रहवासी कॉलोनी के मुख्य द्वार के सामने होने से आए दिन विवाद व दुर्घटनाएं होती है, इस हेतु आमजन, ओर रहवासी लोगों की सुरक्षा हेतु शासन स्तर पर क्या उपाय या कार्यवाही की जाएगी अवगत कराए।
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के अन्तर्गत बनाये गये नियम एवं शासन की आबकारी नीति के अन्तर्गत मदिरा दुकानों का वितरण एवं संचालन किया जाता है। वर्ष 2025-26 की आबकारी नीति संबंधी मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) क्रमांक 47 दिनांक 14.02.2025 की कंण्डिका- 30 की उप कंण्डिका 30.1 अनुसार, मदिरा दुकानों से Point of Sale (POS) मशीनों के माध्यम से, मदिरा का विक्रय, इस संबंध में जारी निर्देशों के अनुसार किया जाना प्रावधानित है। उक्त प्रावधान का क्रियान्वयन ट्रैक एण्ड ट्रेस परियोजना को लागू किया जाकर किया जाना है, जिसकी स्वीकृति सक्षम स्तर से प्राप्त करने की प्रक्रिया प्रचलित है। तदनुसार स्वीकृति प्राप्त होने पर, मदिरा दुकानों से मदिरा का विक्रय POS मशीन के माध्यम से किया जायेगा। उक्त प्रावधान क्रियान्वित नहीं होने से शेष प्रश्नांश के भाग की जानकारी निरंक है। (ख) खण्डवा जिले में विगत वर्ष 2024-25 में संचालित 74 कम्पोजिट मदिरा दुकानों से प्राप्त राजस्व की जानकारी संलग्न परिशिष्ट-एक अनुसार है। (ग) खण्डवा जिले में वर्ष 2023-24 एवं वर्ष 2024-25 में जिले के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में शराब की अवैध बिक्री, आदि के पंजीबद्ध प्रकरणों एवं वसूल की गई जुर्माने की राशि की जानकारी संलग्न परिशिष्ट-दो अनुसार है। (घ) वर्ष 2025-26 हेतु शासन द्वारा घोषित आबकारी नीति अनुसार खण्डवा जिले के पवित्र क्षेत्र ओंकारेश्वर नगर पंचायत में 01.04.2025 से किसी भी प्रकार के तीर्थ क्षेत्र नगर परिषद ओंकारेश्वर में संचालित सभी मदिरा दुकानों को बंद कर, शराब बिक्री को प्रतिबंधित कर दिया गया है। (ड.) खण्डवा शहर के माताचौक क्षेत्र में स्थिति कम्पोजिट मदिरा दुकान जसवाड़ी रोड, मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 के अन्तर्गत निर्मित दुकानों के अवस्थापना संबंधी सामान्य प्रयोग के नियम-1 के प्रावधानानुसार आपत्तिरहित स्थान पर संचालित है। माताचौक स्थित उक्त शराब दुकान के कारण आये दिन विवाद एवं दुर्घटना संबंधी कोई शिकायत आबकारी विभाग को प्राप्त नहीं हुई है। उक्त के संबंध में पुलिस विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार थाना सिटी कोतवाली, खण्डवा द्वारा माताचौक क्षेत्र में आपसी वाद-विवाद के संबंध में 01 प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है।
ईको सेंसिटिव जोन के निर्माण में विसंगतियां
[वन]
131. ( क्र. 2715 ) श्री ठाकुर दास नागवंशी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या दिनांक 09 अगस्त 2017 को पर्यावरण, जल एवं जलवायु परिर्वतन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी गजट प्रकाशन अधिसूचना में ईको सेंसिटिव जोन की सीमाओं का विस्तार 100 मीटर होना उल्लेखित किया गया हैं, यदि हाँ, तो क्या इसके बावजूद भी वन विभाग के मानचित्र में ईको सेंसिटिव जोन की सीमाओं को 100 मीटर के स्थान पर 02 किमी दर्शाया जा रहा हैं यदि हाँ, तो ऐसा क्यों, इसका क्या कारण हैं बतायें? (ख) क्या सर्वोच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 17 नवम्बर 2025 में पर्यटन गतिविधियों को प्रतिबंधित गतिविधियों में नहीं रखा गया हैं, यदि हाँ, तो फिर जोनल मास्टर प्लॉन में इन गतिविधियों को प्रतिबंधित क्यों किया जा रहा हैं जानकारी दें। (ग) प्रश्नांश 'क' एवं 'ख' का उत्तर यदि हाँ, है तो वन विभाग द्वारा की जा रही इस दोहरी नीति के पीछे क्या कारण हैं? बतायें। इसके लिये कौन उत्तरदायी हैं। (घ) यदि ईको सेंसिटिव जोन की सीमाओं का निर्धारण 100 मीटर के स्थान पर 2 किमी किया जाता हैं तो इससे क्षेत्र के पर्यटन एवं रोजगार से जुझे हजारों श्रमिक व युवाओं की रोजी रोटी पर संकट उत्पन्न होगा इसके लिये कौन उत्तरदायी होगा, क्या उत्तरदायित्व का निर्धारण किया जावेगा बतायें?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, मंत्रालय भारत सरकार द्वारा दिनांक 09 अगस्त 2017 को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, होशंगाबाद (नर्मदापुरम्) की ईको सेंसिटिव जोन की अधिसूचना जारी की गई है। उक्त अधिसूचना के बिन्दु क्रमांक-1 पारिस्थितिक संवेदी जोन का विस्तार और उसकी सीमाएँ के अंतर्गत सतपुड़ा राष्ट्रीय उद्यान, पचमढ़ी वन्यजीव अभयारण्य और बोरी वन्यजीव अभयारण्य की सीमा की तरफ से अधिसूचित शहरी और आबादी क्षेत्र में 100 मीटर तक और सतपुड़ा बाघ आरक्षिती के कोर महत्वपूर्ण बाघ पर्यावास की अन्य तरफ से 02 किमी तक है। भारत सरकार द्वारा उक्त जारी अधिसूचना के अनुसार ही ईको सेंसिटिव जोन की सीमा को दर्शाया जा रहा है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं हो रहा है। (ख) जी नहीं। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 17 नवम्बर 2025 के बिन्दु क्र.-47.2.3 (ii) (iii) (iv) के अनुसार पर्यटन गतिविधियां संचालित है किंतु उक्त आदेश के बिन्दु क्र.-47.2.1 (viii) के अनुसार टाइगर रिजर्व क्षेत्र के ऊपर कम ऊंचाई वाले एयर क्राफ्ट/विमान (ड्रोन एवं गर्म हवा के गुब्बारे) को 1000 फीट से कम ऊंचाई पर उड़ाया जाना प्रतिबंधित है। जिसे जोनल मास्टर प्लान में पर्यटन गतिविधयों को प्रतिबंधित की श्रेणी में नहीं रखते हुए विनियमित (Regulated) की श्रेणी में रखा गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) उत्तरांश 'क' एवं 'ख' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) सतपुड़ा टाइगर रिजर्व, होशंगाबाद के ईको सेंसिटिव जोन की अधिसूचना में पर्यटन गतिविधियों को प्रतिबंधित श्रेणी में नहीं रखते हुए विनियमित श्रेणी में रखा गया है, रोजगार मूलक कार्य पर कोई रोक नहीं है। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं हो रहा है।
वृक्षरोपण में किये गए भुगतान राशि की वसूली
[वन]
132. ( क्र. 2726 ) श्री केशव देसाई : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कार्यालय क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक भोपाल के पत्र क्रमांक 2687, दिनांक 26.11.2025, 2688 26.11.2025 प.क्र. 1933 दि. 22.09.2025, प.क्र. 2019 दि. 09.10.2025 एवं 2195 दि. 22.10.2025 तथा मुख्यालय का पत्र क्रमांक 3773 दिनांक 16.09.2025 द्वारा विदिशा-रायसेन परियोजना मण्डल के वृक्षारोपण 2021 में किये गये भुगतान राशि की वसूली के संबंध में चाही गई जानकारी किस कारण से नहीं दी जा रही है? कारण बताओ एवं कब तक प्रदाय की जावेगी? समय-सीमा बतायें। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार उक्त पत्रों द्वारा चाही गई जानकारी की सत्यापित प्रति उपलब्ध कराई जावे।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रश्नाधीन जानकारी विदिशा-रायसेन परियोजना मंडल भोपाल के पत्र क्रमांक 5351, दिनांक 22.01.2026 एवं पत्र क्रमांक 5491, दिनांक 30.01.2026 के माध्यम से क्षेत्रीय महाप्रबंधक, भोपाल को प्रेषित कर दी गई है। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।
डाटा एंट्री आपरेटरों को समान कार्य समान वेतन दिया जाना
[वित्त]
133. ( क्र. 2733 ) श्री हरिशंकर खटीक : क्या उप मुख्यमंत्री, वित्त महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विभाग द्वारा ऐसे निर्देश हैं कि कर्मचारियों को समान कार्य के आधार पर समान वेतन दिया जावे? कृपया ऐसे समस्त आदेशों की छायाप्रतियां प्रदाय करें। (ख) प्रश्नांश (क) के आधार पर बताएं कि डाटा एंट्री ऑपरेटरों को कौन-कौन से विभागों में 2400/- ग्रेड पे का वेतन भुगतान किया जा रहा है और किस-किस विभाग में 1900/ग्रेड-पे का? कृपया स्पष्ट एवं सम्पूर्ण जानकारी दें। (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के आधार पर बताएं कि किस विभाग में इन्हें नियमित एवं किस विभाग में इन्हें संविदा के रूप में प्रश्न दिनांक तक रखा गया है? सम्पूर्ण जानकारी देते हुए यह भी बताएं कि वह कौन-कौन से विभाग है, जिन विभागों के ऐसे कर्मचारियों के वेतन पूर्व में अधिक एवं बाद में कम करके उन्हें वेतनमान दिया जा रहा है? स्पष्ट बताएं कि यह वेतन विसंगति कराने में कौन-कौन अधिकारी/कर्मचारी दोषी हैं? इन दोषियों के विरूद्ध प्रश्न दिनांक तक क्या-क्या कार्यवाही की गई है? सम्पूर्ण जानकारी दें। (घ) प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) के आधार पर बताएं कि वेतन विसंगति दूर करके समान कार्य एवं समान वेतन 2400/-ग्रेड-पे करते हुए संविदा पद का नाम समाप्त करते हुए नियमित मानकर सभी को समान वेतन देने हेतु विभाग कब तक आदेश जारी करेगा? निश्चित समय-सीमा सहित बताएं।
उप मुख्यमंत्री, वित्त ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी नहीं। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) पद विशिष्ट हेतु वेतनमान का निर्धारण संबंधित विभाग के सेवा भर्ती नियम एवं राज्य शासन के वेतन पुनरीक्षण नियम के आधार पर रहता है। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) डाटा एन्ट्री आपरेटर के पद, विशिष्ट विभाग के सेवा भर्ती नियमों एवं अनुसूचियों के आधार पर स्वीकृत होते है। जिन विभागों में पद नियमित श्रेणी के रूप में स्वीकृत है, वहां नियुक्ति भी तद्नुसार की जाती है एवं जिन विभागों में पद संविदा श्रेणी के रूप में स्वीकृत है, वहां नियुक्ति भी संविदा के अनुसार की जाती है। नियमित पद पर वेतनमान/संविदा पद पर पारिश्रमिक का भुगतान भी पद श्रेणी के अनुसार ही रहता है। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) राज्य शासन उपलब्ध वित्तीय संसाधनों एवं अन्य प्राथमिकताओं को दृष्टिगत रखते हुये, यथा समय पर उचित निर्णय करता है। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
सड़क निर्माण हेतु खनन अनुमति
[खनिज साधन]
134. ( क्र. 2891 ) श्री देवेन्द्र पटेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राष्ट्रीय राजमार्ग-146, सागर-भोपाल मार्ग के पुनर्निर्माण (फोरलेन) के कार्य हेतु किन-किन निर्माण एजेंसियों को किस-किस क्षेत्र में किस-किस खनिज (मटेरियल) के खनन हेतु अनुज्ञा दी गई है? विस्तृत विवरण दें व बतावें कि क्यों इन निर्माण एजेंसियों के द्वारा खनन अनुज्ञा क्षेत्र के बाहर अवैध उत्खनन किया जा रहा है? (ख) रायसेन-राहतगढ़ स्टेट हाइवे के नवनिर्माण और चौड़ीकरण कार्य में संलग्न निर्माण एजेंसियों को किन-किन स्थानों पर खनन अनुमतियां दी गई है? विस्तृत विवरण दें व बतावें कि अनुज्ञा क्षेत्र के बाहर अवैध उत्खनन हेतु कौन उत्तरदायी है? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) उल्लेखित अवैध उत्खनन के मामले में खनिज विभाग कार्यवाही क्यों नहीं कर पा रहा है? किन-किन अधिकारियों की मिलीभगत से उल्लेखित निर्माण एजेंसियां अवैध उत्खनन कर रही है? कब तक उत्तरदायी अधिकारियों व अवैध उत्खननकर्ताओं पर विभाग नियमानुसार कार्यवाही करेगा? नहीं तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रश्नांश अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग-146, सागर-भोपाल मार्ग के पुनर्निर्माण (फोरलेन) के कार्य हेतु प्रदान की गई खनन अनुज्ञा की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-‘अ’ अनुसार है। निर्माण एजेन्सियों द्वारा खनन अनुज्ञा क्षेत्र के बाहर उत्खनन पाए जाने पर नियमानुसार अवैध उत्खनन के प्रकरण दर्ज किए गए है। दर्ज प्रकरणों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-‘स’ अनुसार है। (ख) प्रश्नांश अनुसार रायसेन-राहतगढ़ स्टेट हाइवे के नवनिर्माण और चौड़ीकरण कार्य में संलग्न निर्माण एजेंसियों को दी गई खनन अनुमतियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-‘ब’ अनुसार है। प्रश्नांश अनुसार रायसेन-राहतगढ़ स्टेट हाईवे के नवनिर्माण और चौड़ीकरण कार्य में संलग्न निर्माण एजेंसियों के विरूद्ध अवैध उत्खनन का कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं आया है। (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) में उल्लेखित उत्तर के अनुरूप निर्माण एजेंसी के विरूद्ध अवैध उत्खनन के दर्ज प्रकरणों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-‘स‘ अनुसार है। नियमानुसार कार्यवाही किये जाने से शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन आवंटन
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
135. ( क्र. 2985 ) डॉ. हिरालाल अलावा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा दिनांक 01/01/2020 से प्रश्न दिनांक तक औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने के लिए किस-किस फर्मों को कितनी-कितनी जमीनें आवंटित की? जमीनों के मद और खसरा क्रमांक सहित फर्मों और उनके मालिकों के नाम, पते सहित बतावें। (ख) प्रश्नांश (क) के प्रत्येक फर्म का सालाना टर्नओवर क्या है? फर्मों और फर्मों के मालिकों की बैलेंस बुक की प्रति सहित बताएं? किस-किस फर्म को किन प्रयोजन के लिए जमीनें आवंटित की? जिस फर्म को जो जमीन आवंटित की, वे किन जिलों और तहसीलों में है? उनका खसरा, रकबा नंबर सहित बतावें। (ग) जमीन अथवा भूखंड प्राप्त कर चुकी फर्मों और उनके प्रमुखों ने प्रश्न दिनांक तक की स्थिति में क्या काम किए, उसका विवरण-सहित बतावें? उक्त अवधि में जमीन व भूखंड लेने वाले आवेदक, फर्में जो उक्त भूखंड अथवा जमीनों का उपयोग नहीं कर सके, उनका विवरण और उनमें से कितनों के खिलाफ क्या कार्यवाही की? (घ) दिनांक 01/01/2024 से प्रश्न दिनांक तक मध्य प्रदेश, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग से जुड़ी कितनी घोषणाएं की, उनमें से कितने का पालन हुआ, यदि नहीं, हुआ तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है, उनके खिलाफ क्या कार्यवाही की गई?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (घ) जानकारी संकलित की जा रही है।
नियमों का पालन न किया जाना
[सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम]
136. ( क्र. 3150 ) श्री गौरव सिंह पारधी : क्या सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. शासन सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा प्रदेश के कत्तिन, बुनकरों एवं कारीगरों को निरन्तर रोजगार दिये जाने के लिये म.प्र. शासन भण्डार क्रय एवं सेवा उपार्जन नियम 2015 (यथा संशोधित 2022) के नियम 25 के परिशिष्ट "अ" में पिछड़ा वर्ग एवं अल्प संख्यक कल्याण विभाग में वस्त्र क्रय के लिये प्रदेश के शासकीय उपक्रमों को आरक्षण प्रदान किया गया है। हां या नहीं? यदि नहीं, तो क्यों? (ख) पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग स्तरीय, राज्य स्तरीय, जिला स्तरीय शासकीय कार्यालय द्वारा इन क्रय नियमों का पालन करते हुए आरक्षित उपकमों से कितनी-कितनी राशि का किस-किस उपक्रम से वस्त्रों का क्रय विगत 3 वर्षों में किया गया है? देयक एवं राशि के भुगतान संबंधित विवरण की जानकारी एवं छायाप्रति सहित उपलब्ध कराये? (ग) पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग स्तरीय, राज्य स्तरीय, जिला स्तरीय शासकीय कार्यालयों द्वारा उक्त नियमों के विपरीत आरक्षित वस्त्रों का क्रय जैम पोर्टल अथवा अन्य माध्यमों से किया गया है? यदि हाँ, तो आरक्षित सामग्री के अन्य माध्यम से छूट के लिये क्या नियम है? नियमों की छायाप्रति सहित जानकारी उपलब्ध कराये?
सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ( श्री चेतन्य कुमार काश्यप ) : (क) जी हाँ। (ख) कार्यालय आयुक्त, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण म.प्र. अनुसार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-’अ’ अनुसार है। (ग) जी हाँ। नियमों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-’ब’ अनुसार है।
भाग-3
अतारांकित
प्रश्नोत्तर
चीतों को
खिलाए जा रहे
मांस के संबंध
में
[वन]
1. ( क्र. 18 ) श्री मुकेश मल्होत्रा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों को भोजन के लिए 1 वर्ष में कितनी राशि आवंटित की जा रही है और एक दिन में कितने बकरे खिलाए जा रहे है अभ्यारण में चीतों की संख्या कितनी हैं? (ख) क्या यह सही है कि राष्ट्रीय उद्यान कूनो में दिनांक 17 सितंबर 2022 से 1 वर्ष में बकरा क्रय करने के लिए 1 करोड़ 30 लाख रुपए प्रति वर्ष दिया जा रहा है? क्या चीता ग्वालियर, शिवपुरी, राजस्थान, मुरैना जिलों के ग्रामीणचलों में घूम रहे है और ग्रामीणों की बकरी-मवेशी का शिकार कर रहे है? (ग) क्या अभ्यारण के अंदर चीतों को भोजन नहीं दिया जा रहा है जिसके कारण एक चीते की घाटीगांव हाइवे रोड पर दिनांक 6 दिसंबर 2025 को एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई, चीतों की देखभाल कर रहे कूनो के कर्मचारी एवं विभागीय अधिकारी सो रहे हैं? (घ) प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) का उत्तर सही है तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध विभाग कार्यवाही करेगा और नहीं तो क्यों नहीं।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों के भोजन के लिए पृथक से कोई राशि आवंटित नहीं की जाती है। समय-समय पर चिकित्सकीय देखभाल एवं वन्यजीवों के प्रबंधन हेतु आवश्यकता के अनुरूप विभिन्न योजनाओं अंतर्गत उपलब्ध राशि से मीट क्रय का भुगतान किया जाता है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में बकरा मीट क्रय हेतु राशि रुपए 1,27,10,870/- व्यय की गई है। एक दिवस में कितने बकरे खिलाये जाते है का कोई मानक निर्धारित नहीं है आवश्यकता अनुसार मीट खिलाया जाता है। कूनो वन्यजीव वनमंडल अंतर्गत वर्तमान में 32 चीते मौजूद हैं। (ख) कूनो वन्यजीव वनमंडल अंतर्गत बकरा क्रय के लिए कोई राशि नहीं दी जा रही है। कूनो वन्यजीव वनमंडल अंतर्गत खुले जंगल में विचरण कर रहे चीते समय-समय पर वनमंडल की सीमा से बाहर चले जाते हैं तथा कभी-कभी ग्रामीणों की बकरी-मवेशी का शिकार कर लेते हैं। (ग) यह सही नहीं है। चीता निगरानी और ट्रैकिंग टीम प्रभावी ढंग से काम कर रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क दुर्घटना के कारण एक चीते की मृत्यु हुई है। (घ) उत्तरांश (क), (ख) एवं (ग) के अनुक्रम में किसी भी अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध कोई कार्यवाही करने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
हितग्राहियों को सब्सिडी का लाभ
[कुटीर एवं ग्रामोद्योग]
2. ( क्र. 37 ) श्री घनश्याम चन्द्रवंशी : क्या राज्य मंत्री, कुटीर एवं ग्रामोद्योग महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2021 से 2025 तक विभाग द्वारा शाजापुर जिले में कितने हितग्राहियों को लाभ दिया गया? (ख) विभाग द्वारा संचालित योजना से लाभान्वित हितग्राहियों के खाते में कितनी सब्सिडी दी गई? हितग्राही के नाम सहित ब्यौरा उपलब्ध करायें?
राज्य मंत्री, कुटीर एवं ग्रामोद्योग ( श्री दिलीप जायसवाल ) : (क) वर्ष 2021 से 2025 तक विभाग द्वारा कुल 309 हितग्राहियों (म.प्र. खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड-114 प्रशिक्षण एवं 116 प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना हितग्राही, रेशम संचालनालय- 03 रेशम केन्द्र 07 हितग्राही, म.प्र. माटीकला बोर्ड 72 हितग्राही) को लाभ दिया गया है। (ख) विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के अंतर्गत शाजापुर जिले में वर्ष 2021 से 2025 तक राशि रूपये 9,74,300/- छात्रवृत्ति एवं राशि रूपये 8,72,35,895/- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना अंतर्गत अनुदान दिया गया है। उक्त योजनाओं में लाभान्वित हितग्राहियों के नाम सहित ब्यौरा की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।
आरा मशीन एवं लकड़ी की टॉल का संचालन
[वन]
3. ( क्र.
160 ) डॉ.
राजेन्द्र
कुमार सिंह : क्या
मुख्यमंत्री
महोदय यह
बताने की कृपा
करेंगे कि (क)
सतना जिले
में ग्रामीण
क्षेत्रों
एवं शहरी क्षेत्रों
(नगर पालिक
निगम सीमा के
अंदर/नगर परिषद/
नगर पंचायत
क्षेत्रों
में) आरा
मशीनों/लकड़ी की
टॉल संचालित
करने के
क्या-क्या
नियम/अधिनियम/
मापदण्ड/मानदण्ड
नियमों के
अनुरूप
निर्धारित
हैं? सभी
नियमों/अधिनियमों
की एक-एक
प्रति उपलब्ध करायें।
(ख)
नगर पालिक
निगम सतना
क्षेत्रान्तर्गत
किस-किस वार्ड
क्रमांकों में
किस-किस नाम, पते
एवं
स्वामित्व
वाली आरा
मशीनों/लकड़ी
की टालें
कितने
वर्गफुट/वर्गमीटर
में कार्यरत हैं? सभी
लकड़ी की
टालों की वन
विभाग द्वारा
जारी अनुमति/एन.ओ.सी.
की एक-एक
प्रति (स्वच्छ
पढ़ी जा सकने
वाली लिपि
में) उपलब्ध
करायें। इन
सभी आरा
मशीनों, लकड़ी की
टालों के
द्वारा ली गई
फायर एन.ओ.सी.
जो वन विभाग
में जमा की गई
है की एक-एक
प्रति उपलब्ध
करायें। (ग) प्रश्नांश
(क) एवं (ख) में
उल्लेखित आरा
मशीनों/लकड़ी
की टालों के द्वारा
किस-किस
क्षमता वाली
चिराई की
मशीनें स्थापित
कब से कर रखी
हैं? उनके
द्वारा वन
विभाग से जो
अनुमति
प्राप्त की गई
है उसकी आरा
मशीनवार एक-एक
प्रति दें। (घ) प्रश्नांश
(क) एवं (ख) में
उल्लेखित आरा
मशीनों के
द्वारा वन
विभाग से 01.04.2022
से 31.12.2025
के दौरान
किन-किन
काष्ठगारों/अन्य
से किस प्रकार
की कितने
घनफुट लकड़ी
खरीदी/निविदा
में प्राप्त
की
माहवार/वर्षवार/लकड़ी
के
प्रकारवार/काष्ठगारवार/लकड़ी
की मात्रावार/आरा
मशीनवार/वार्ड
क्रमांकवार/ग्रामवार
जानकारी
उपलब्ध
करायें।
मुख्यमंत्री
( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रश्नाधीन
नियमों/अधिनियमों
की प्रति पुस्तकालय में
रखे परिशिष्ट-1
अनुसार
है। (ख)
वनमंडल
सतना अंतर्गत
नगर पालिक
निगम एवं नगर परिषद
में आरा
मशीन/लकड़ी की
टाल की
जानकारी एवं
सभी लकड़ी की
टालों के
कार्यरत होने
की जानकारी
पुस्तकालय
में रखे
परिशिष्ट-2
अनुसार है।
वन विभाग
द्वारा लकड़ी
की टालों हेतु
कोई अनुमति/ एन.ओ.सी.
जारी नहीं की
जाती है, अतः
अनुमति/एन.ओ.सी.
की प्रति देने
का प्रश्न
उपस्थित नहीं
होता। वनमंडल
सतना अंतर्गत
नगर पालिक
निगम एवं नगर
परिषद में आरा
मशीन/लकड़ी की
टाल के संचालन
हेतु किसी भी
वन नियम/वन अधिनियम
में फायर
एन.ओ.सी. वन
विभाग में जमा
करने बावत्
कोई प्रावधान
नहीं है, अतः फायर
एन.ओ.सी. की
प्रति देने का
प्रश्न
उपस्थित नहीं
होता। (ग)
जानकारी
पुस्तकालय
में रखे
परिशिष्ट-3
अनुसार है।
(घ)
जानकारी
पुस्तकालय
में रखे
परिशिष्ट-4
अनुसार
है।
कम्प्यूटर एवं वी.सी. सेटअप का क्रय
[विज्ञान और प्रौद्योगिकी]
4. ( क्र. 531 ) कुँवर अभिजीत शाह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश के समस्त विधायक कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेन्स का सेटअप लगाये जाने हेतु कितनी-कितनी राशि प्रति कार्यालय आवंटित की गई है? क्या संपूर्ण म.प्र. राज्य में इस कार्य हेतु एक ही एजेंसी से सामग्री क्रय की गई है? कुल कितने सेटअप लगाये जाने हेतु, कितनी राशि का टेण्डर किस-किस फर्म को भंडार क्रय नियम के किन प्रावधानों का उपयोग करते हुए किस प्रक्रिया के तहत जारी किया गया है? विधानसभा क्षेत्रवार, फर्म का नाम, फर्म के मालिक का नाम, सामग्रीवार जानकारी प्रदान की जावे। (ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित कार्य हेतु किस-किस निविदाकार द्वारा कितनी-कितनी राशि की बोली लगाई गई थी? इन समस्त निविदाकारों से प्राप्त कोटेशन एवं उनके आधार पर तैयार किये गये तुलनात्मक पत्रक की सत्यापित प्रति उपलब्ध कराई जावे? क्रय एवं परीक्षण समिति के गठन के आदेश की प्रति उपलब्ध कराई जावे? (ग) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित कार्य में विधायक कार्यालयों को आवंटित समस्त सामग्री जैसे कैमरा, माईक, टी.व्ही., कम्प्यूटर (ऑल इन वन), की बोर्ड, माउस, यू.पी.एस., बैटरी के क्या स्पेसिफिकेशन एवं क्या दर है? पृथक-पृथक बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रदेश के समस्त विधायक कार्यालय में वीडियों कॉन्फ्रेन्स सेटअप लगाये जाने हेतु आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय द्वारा उपलब्ध कराई गई कुल राशि रूपये 9,71,60,000/- आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय की सहमति उपरांत मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPSeDC) द्वारा उक्त राशि प्रदेश के समस्त जिलों की जिला ई-गवर्नेंस सोसायटी को हस्तांतरित की गई है, प्रति कार्यालय हेतु हस्तांतरित राशि की जिलावार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। जी नहीं, कुल 230 सेटअप लगाए जाने हेतु निविदाकार फर्म्स को दिए गए टेंडर एवं प्रश्नांश के शेष भाग की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) एवं (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।
टिमरनी विधान सभा क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार
[सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम]
5. ( क्र. 534 ) कुँवर अभिजीत शाह : क्या सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिले में एक भी अधिसूचित औद्योगिक क्लस्टर/MSME क्लस्टर/औद्योगिक क्षेत्र स्थापित नहीं होने के क्या कारण हैं? इस दिशा में शासन द्वारा क्या कोई प्रयास किया जा रहा है? यदि हाँ, तो विस्तृत रूप से जिले की भविष्य की औद्योगिक योजना की जानकारी बतावें। टिमरनी विधानसभा के ग्राम बिच्छापुर/बघवाड़ में क्या औद्योगिक क्षेत्र बनाये जाने के कोई प्रयास शासन द्वारा किये जा रहे है? यदि हाँ, तो वह किस स्तर पर लंबित है? (ख) विगत 03 वर्षों में हरदा जिले में औद्योगिक क्लस्टर, फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर, कोल्ड स्टोरेज अथवा एग्रो-बेस्ड इंडस्ट्री स्थापित करने हेतु सरकार द्वारा क्या कोई ठोस एवं समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की गई है? यदि हाँ, तो बतावें। अन्य जिलों की तुलना में हरदा जिले को औद्योगिक योजनाओं एवं निवेश प्रस्तावों में सम्मिलित न किए जाने के क्या कारण हैं? (ग) शासन द्वारा औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार अथवा औद्योगीकरण हेतु कितनी-कितनी राशि का बजट विगत 03 वर्षों में हरदा जिले को किस-किस कार्य हेतु उपलब्ध कराया गया है? प्राप्त बजट का उपयोग किस प्रकार विभाग द्वारा किया गया?
सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ( श्री चेतन्य कुमार काश्यप ) : (क) हरदा जिले में अधिसूचित औद्योगिक क्षेत्र (औद्योगिक क्षेत्र हरदा) 20.007 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित है। टिमरनी विधानसभा के ग्राम बिच्छापुर में 41.9 हेक्टेयर भूमि विभाग को हस्तांतरित है परंतु उक्त भूमि पर न्यायालयीन प्रकरण प्रचलित होने से कार्यवाही नहीं की गई। ग्राम बघवाड़ में औद्योगिक क्षेत्र हेतु वर्तमान में भूमि आवंटित नहीं है। (ख) विगत 03 वर्षों में हरदा जिले में कोई नवीन औद्योगिक क्षेत्र/क्लस्टर विकसित नहीं हुए हैं। हरदा में पूर्व से ही 50 एकड़ से अधिक रकबे पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित है तथा टिमरनी विधानसभा क्षेत्र में प्रश्नांश 'क' अनुसार भूमि आवंटित है। संपूर्ण प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्रों के विकास का निरंतर प्रयास किया गया है। (ग) विभाग द्वारा विगत 3 वर्षों में औद्योगिक क्षेत्र हरदा में अधोसंरचना विकास कार्यों हेतु निम्नानुसार राशि की स्वीकृतियां प्रदान की गई है, जिसका उपयोग औद्योगिक क्षेत्र के विकास हेतु किया गया है।
|
विवरण |
प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक |
प्रशासकीय स्वीकृति राशि (रु. लाख में) |
वित्तीय स्वीकृति राशि (रु. लाख में) |
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सीसी रोड, आरसीसी ड्रैन, एचपी कल्वर्ट आदि निर्माण |
02.03.2023 |
408.02 |
408.00 |
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एलटी लाइन शिफ्टिंग व हाईट एक्सटेन्शन कार्य |
19.06.2024 |
68.40 |
64.99 |
कर्मचारी बीमा सह-बचत योजना 2003 में बीमा राशि बढाना
[वित्त]
6. ( क्र. 742 ) श्री देवेन्द्र कुमार जैन : क्या उप मुख्यमंत्री, वित्त महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्यप्रदेश शासकीय कर्मचारी बीमा सह बचत योजना 2003 के अंतर्गत शासकीय अधिकारी/कर्मचारियों के दिवंगत होने की स्थिति में कितनी-कितनी बीमा राशि का भुगतान उक्त योजनांतर्गत किया जाता है तथा उक्त बीमा सह बचत योजना में अधिकारियों/कर्मचारियों में कितनी-कितनी अंशदान/प्रीमियम राशि प्रति कर्मचारी के मान से प्रतिमाह वेतन से कटौत्रा किया जाता है? जानकारी कर्मचारियों की श्रेणीवार अंशदान/प्रीमियम राशि सहित प्रदान करें। (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में क्या बीमा सह बचत योजना 2003 के अंतर्गत प्रदाय की जा रही बीमा राशि में 2003 के बाद से प्रश्न दिनांक तक कोई वृद्धि गई है? यदि हाँ, तो कब-कब व कितनी-कितनी की गई? यदि नहीं, तो क्या योजना के लागू होने के 22 वर्ष उपरांत भी उक्त योजना अंतर्गत प्रदाय की जाने वाली बीमा राशि में प्रश्न दिनांक की स्थिति में पर्याप्त है? क्या बीमा राशि में बढ़ोत्तरी किये जाने की आवश्यकता नहीं है? यदि आवश्यकता है तो क्या विभाग इस संबंध में विचार करेगा तथा कब तक बीमा राशि बढ़ायी जायेगी? यदि बीमा राशि बढ़ाने की आवश्यकता नहीं है, तो क्यों? इस संबंध में तथ्यात्मक सकारण उत्तर प्रदान करें?
उप मुख्यमंत्री, वित्त ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) विभाग के परिपत्र क्रमांक एफ 15/27/2002/ई/ चार,भोपाल, दिनांक 05.02.2003 अंतर्गत मध्यप्रदेश शासकीय कर्मचारी बीमा सह बचत योजना 2003 के अंतर्गत शासकीय अधिकारियों/कर्मचारियों के दिवंगत होने की स्थिति में प्रथम श्रेणी अधिकारियों को राशि रूपये 7,50,000/- द्वितीय श्रेणी अधिकारियों को राशि रूपये 5,00,000/- तृतीय श्रेणी कर्मचारियों को राशि रूपये 2,50,000/- एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को राशि रूपये 1,25,000/- का भुगतान दिवंगत होने की स्थिति में किया जाता है। मध्यप्रदेश शासकीय कर्मचारी बीमा सह बचत योजना 2003 के अंतर्गत शासकीय अधिकारियों/कर्मचारियों की अंशदान/प्रीमियम राशि प्रति कर्मचारी के मान से प्रतिमाह वेतन से प्रथम श्रेणी अधिकारियों हेतु राशि रूपये 600/- द्वितीय श्रेणी अधिकारियों हेतु राशि रूपये 400/-, तृतीय श्रेणी कर्मचारियों हेतु राशि रूपये 200/- एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों हेतु राशि रूपये 100/- का कटौत्रा किया जाता है। (ख) जी नहीं, विभाग में ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
घुरारा जागीर को यथावत थाना पृथ्वीपुर में जोड़े जाने के संबंध में
[गृह]
7. ( क्र. 747 ) श्री नितेन्द्र बृजेन्द्र सिंह राठौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कार्यालय कलेक्टर जिला निवाड़ी की जन सुनवाई में आवेदन क्रमांक 482343/62 दिनांक 21/01/2025 एवं माननीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री, भारत सरकार द्वारा पुलिस अधीक्षक जिला निवाड़ी को प्रेषित पत्र क्रमांक अ.शा.पत्र क्र.मं.सा.न्या.अ.आ.(टी.)/2025/757 दिनांक 19 जनवरी 2025 पर क्या कोई कार्यवाही की गई है? यदि हाँ तो अवगत कराये? यदि नहीं, तो क्यों? (ख) ग्रामीणों द्वारा घुरारा जागीर को यथावत थाना पृथ्वीपुर में जोड़े जाने हेतु प्रस्तुत आवेदन पत्रों पर क्या कार्यवाही की गई है? यदि नहीं, तो कब तक की जायेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। प्रस्तुत आवेदन पत्रों से संबंधित जानकारी प्राप्त की जाकर उक्त तारतम्य में जिला स्तर पर गठित समिति, ग्रामवासियों एवं जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर कार्यवाही की जा रही है। (ख) जानकारी उत्तरांश "क" अनुसार है।
वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण
[वन]
8. ( क्र. 755 ) श्री यादवेन्द्र सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या टीकमगढ़ एवं निवाड़ी जिले में अवैध वन कटाई एवं अवैध वन भूमि अतिक्रमण में प्रदेश में प्रथम एवं द्वितीय स्थान पर अव्वल है। ऐसा क्यों? यदि नहीं, तो जिलेवार, वर्षवार, विगत 5 वर्ष के प्रदेश में हुई वन कटाई एवं वन भूमि को अवैध अतिक्रमण के कितने प्रकरण बनाये गये है? (ख) क्या औरछा रेंज वीट गुलेदा वन मंडल टीकमगढ़ कक्ष क्र.-156,157,158, 159.160 पर लगभग 500 एकड़ पर रिजर्व सागौन का जंगल काट कर कुआं खोद कर बोरिंग कराकर पंप लगाकर खेती की जा रही है ऐसा क्यों, अतिक्रमणकारियों के नाम, पते सहित की गई कार्यवाही का विवरण दें? (ग) क्या कारी खास के जंगल में वीट कारी नं. 02 कक्ष क्र. आर.एफ.48 में 2.62 हेक्टयर पर दि म.प्र. माईनिंग कॉर्पोरेशन लि.टीकमगढ़ के विरूद्ध पी.ओ.आर. की कार्यवाही की गई, अपराधियों पर क्यों नहीं अपराधियों की भारी मशीनें आज भी अवैध उत्खनन में लगी है। ऐसा क्यों कब तक कार्यवाही की जावेगी? (घ) क्या दिगोड़ा सब रेंज में वनगाय, दरगाय, टोरिया, राजनगर, मिडोरा के जंगल कटवा कर खेती की जा रही है कब तक जांच कर फसलें जब्त की जावेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है। (ग) प्रश्नाधीन बीट के कक्ष क्रमांक-48 में 2.62 हेक्टेयर पर दि स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड टीकमगढ़ द्वारा अतिक्रमण कर खनिज का ओवरबर्डन डालने के कारण उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की गई। दि स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड टीकमगढ़ द्वारा शासन से स्वीकृत खदान क्षेत्र में ही उत्खनन कार्य करवाया जा रहा है, अत: कार्रवाई किये जाने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) प्रश्नाधीन क्षेत्र में अतिक्रमणकारियों के विरूद्ध भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 33 के तहत वन अपराध प्रकरण पंजीबद्ध कर प्रकरण माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किये गये हैं। न्यायालय के निर्णय उपरांत कार्यवाही संभव है।
पुलिस विभाग में रिक्त पदों की पूर्ति
[गृह]
9. ( क्र. 791 ) श्री विक्रम सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सतना जिले की रामपुर बाघेलान विधानसभा अंतर्गत कितने थाने एवं चौकियां है? (ख) क्या इन थानों में या पुलिस चौकियों में पर्याप्त बल उपलब्ध है? इन थानों एवं चौकियों में अपराधों की संख्या एवं प्रकार क्या है? (ग) क्या विधानसभा क्षेत्र में एक चौकी एवं एक थाना स्थापित किये जाने की मांग है? यदि हाँ तो स्वीकृत करने में कितना समय लगेगा? समय-सीमा बतावें?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) सतना जिले की रामपुर बाघेलान विधानसभा अंतर्गत 04 थाने एवं 05 चौकियां हैं। (ख) जी नहीं। इन थानों एवं चौकियों में वर्ष 2025 में घटित अपराधों की संख्या एवं प्रकार निम्नानुसार है- हत्या-16, हत्या का प्रयास-19, डकैती-निल, डकैती की तैयारी-01, लूट-06, चोरी-143, नकबजनी-67, अपहरण-182, बालात्कार-37, शीलभंग-14, दहेज हत्या-04, दहेज प्रताड़ना-06, आत्महत्या का दुष्प्रेरण-02, एक्सीडेंट-296, मारपीट/अन्य भा.दं.वि./बीएनएनएस-1607, आबकारी एक्ट-585, आर्म्स एक्ट-16, जुआ/सट्टा एक्ट-92, विस्फोटक एक्ट-04, एनडीपीएस एक्ट-33, बलवा-01, अन्य अधिनियम-08 कुल अपराध संख्या-3139 है। (ग) विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ एक थाना की मांग है, चौकी की मांग नहीं है। ग्राम सोनौरा में नवीन थाना स्थापित करने के प्रस्ताव पर कार्यवाही प्रचलन में है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
पुलिसकर्मियों के विरूद्ध दर्ज आपराधिक प्रकरणों की जानकारी
[गृह]
10. ( क्र. 852 ) श्री राजेन्द्र भारती : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता सदस्य के विधानसभा क्षेत्र दतिया अंतर्गत आने वाले समस्त थानों एवं रीवा जिले के सिरमौर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले समस्त थानों में वर्ष 2020 से प्रश्न दिनांक तक हत्या, बलात्कार, लूट, राहजनी, चोरी, मारपीट, अज्ञात हत्या, गुंडागर्दी, महिला उत्पीड़न एवं अन्य अपराधों के वर्षवार कितने-कितने संज्ञेय/असंज्ञेय अपराध पंजीबद्ध किए गए है? कृपया थानावार अपराधवार सूची दें। (ख) उक्त के थानों में वर्तमान में कितने ऐसे थाना प्रभारी हैं जिनके विरुद्ध आपराधिक प्रकरण आर्थिक अपराध लोकायुक्त एवं व्यक्तिगत परिवाद में अपराध पंजीबद्ध है? उक्त थाना प्रभारियों की थानावार नाम पदस्थापना अवधि अपराध क्रमांक धारा दर्ज कर थानावार, जिलावार जानकारी दें। (ग) उक्त के थानों में जिन थाना प्रभारी के विरुद्ध किसी भी प्रकार के आपराधिक प्रकरण दर्ज है या 3 वर्ष की पदस्थापना अवधि पूरी हो चुकी है, क्या उन्हें थाना प्रभार से मुक्त या स्थानांतरण कर देंगे? यदि हाँ, तो कब तक और किन-किन थाना प्रभारियों की सूची देते हुए, जी.पी.ओ. नियम की प्रति देते हुए जानकारी दें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) विधानसभा क्षेत्र दतिया एवं रीवा जिले के सिरमौर विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत के थानों में वर्तमान में पदस्थ किसी भी थाना प्रभारी के विरुद्ध कोई भी आपराधिक प्रकरण आर्थिक अपराध, लोकायुक्त एवं व्यक्तिगत परिवाद पंजीबद्ध नहीं है। (ग) विधानसभा क्षेत्र दतिया एवं रीवा जिले के सिरमौर विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत थाना में पदस्थ थाना प्रभारियों के विरूद्ध कोई आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध नहीं है तथा वर्तमान में कोई भी थाना प्रभारी 03 वर्ष या अधिक की अवधि से थाना प्रभारी पद पर पदस्थ नहीं है।
हरदा फटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट पिड़ितों को मुआवजा
[गृह]
11. ( क्र. 868 ) डॉ. रामकिशोर दोगने : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 06 फरवरी 2024 को हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में मृत हुए, कितने व्यक्तियों के परिजनों को प्रश्न दिनांक तक मुआवजा राशि दी जा चुकी है? प्रत्येक व्यक्ति को कितनी राशि दी गई? उनके नाम, पते सहित जानकारी देवें। (ख) प्रश्न दिनांक तक हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट पिड़ितों को कितनी-कितनी आर्थिक मदद दी गई है? प्रत्येक व्यक्ति के नाम, पते सहित जानकारी देवें। (ग) हरदा पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट के समय तत्कालीन हरदा कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक के विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई? वर्तमान में उसका स्टेटस क्या है? कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक पर की जा रही कार्यवाही से संबंधित समस्त दस्तावेजों की प्रति उपलब्ध करावे। यदि कार्यवाही नहीं की जा रही है तो कारण स्पष्ट करें। (घ) हरदा में हुए हादसे की तरह दूसरा हादसा न हो इसके लिए प्रशासन द्वारा क्या ठोस कदम उठाये गये? शासन द्वारा जारी किए गए आदेश-निर्देशों की प्रति उपलब्ध करावे। (ड.) म.प्र. के कितने जिलों में रहवासी क्षेत्र के अंदर से पटाखा फैक्ट्रियां व गैस गोदाम बाहर किए गए? प्रदेश के कौन-कौन से जिलों में शहर के अंदर संचालित पेट्रोल पंप, पटाखा व ज्वलनशील सामग्री तैयार करने वाली फैक्ट्रियां, घरेलू गैस गोदामों से जुड़ी शिकायतें प्राप्त हुई है व प्राप्त शिकायतों पर क्या कार्यवाही की गई?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट (अ) अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट (अ) एवं (ब) अनुसार। (ग) तत्कालीन कलेक्टर, हरदा को सामान्य प्रशासन विभाग के ज्ञाप दिनांक 30 दिसम्बर, 2024 अखिल भारतीय सेवाएं (अनुशासन तथा अपील) नियम, 1969 के नियम 8(4) के अंतर्गत आरोप पत्र जारी किया गया है। प्रकरण परीक्षणाधीन है। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक, जिला हरदा को गृह विभाग के आदेश दिनांक 07.02.2024 द्वारा स्थानांतरण सहायक पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस मुख्यालय, भोपाल किया गया है। वर्तमान में अनुशासनात्मक कार्यवाही का प्रकरण प्रचलन में है। (घ) मध्यप्रदेश शासन गृह विभाग भोपाल के पत्र क्रमांक 26/1368/2015/दो/सी-2 भोपाल दिनांक 06.02.2024 द्वारा जारी निर्देश अनुसार अनुविभागीय अधिकारी राजस्व एवं अनुविभागीय अधिकारी पुलिस के संयुक्त दल बनाकर जांच कराने के निर्देश प्राप्त होने पर नियमानुसार कार्यवाही की गई। शासन द्वारा जारी निर्देश दिनांक 04.04.2025 एवं दिनांक 06.02.2024 पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट (स) अनुसार। (ड.) जानकारी एकत्र की जा रही है।
सी.एस.आर. राशि का अनियमित व्यय तथा जांच एवं कार्यवाही
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
12. ( क्र. 895 ) श्री अभय मिश्रा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रीवा जिले में अल्ट्राटेक सीमेन्ट प्लान्ट, सोलर पॉवर प्लान्ट बदवार, जे.पी. सीमेन्ट प्लान्ट एवं अन्य के द्वारा सी.एस.आर. मद की राशि वर्ष 2020 से प्रश्नांश दिनांक तक व्यय की गई इनसे कौन-कौन से कार्य किन-किन स्थानों पर किन-किन की अनुशंसा पर कितनी-कितनी लागत से कराये गये का विवरण देवें। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार उल्लेखित प्लान्ट के द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत कौन-कौन से कार्य कब-कब किन-किन स्थानों पर कितनी-कितनी लागत से किनके अनुशंसा पर कराये गये का विवरण प्रश्नांश (क) की अवधि अनुसार देवें, कार्यों के कराये जाने बावत् शासन के क्या निर्देश है प्रति देते हुये बतावें। सी.एस.आर. मद से फैक्ट्री के ही अंदर गौशाला अस्पताल इत्यादि का निर्माण कराये गये। क्या ये कार्य सी.एस.आर. की परिधि में आएंगे? बतावें। यदि नहीं, तो इन पर कार्यवाही के क्या निर्देश देंगे? बतावें। (ग) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित प्लान्टों में स्थानीय कितने लोगों को रोजगार प्रदान किये गये एवं कितने बाहर के लोगों को कार्य पर रखा गया का विवरण देवें, स्थानीय लोगों को रोजगार न देने उनकी भूमियों को उनकी बिना सहमति अधिग्रहित करने के बाद भी उनके परिवार के सदस्यों को रोजगार न देने की जांच एवं कार्यवाही के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार बावत् क्या निर्देश देंगे बतावें इस संबंध में जारी शासन के निर्देश की प्रति भी देवें। (घ) प्रश्नांश (क) अनुसार प्राप्त सी.एस.आर. की राशि का उपयोग मनमानी तरीके से किया गया संबंधित क्षेत्रों को योजना से वंचित किया गया जबकि जिस क्षेत्र से राशि प्राप्त हुई तो उस क्षेत्र में सर्वाधिक कार्य किये जाने के निर्देश है. प्रश्नांश (ख) एवं (ग) अनुसार कराये गये कार्य सार्वजनिक व आम उपयोग के नहीं है स्थानीय लोगों को रोजगार न देकर शासन के निर्देशों की अवहेलना पर कार्यवाही के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार देने व सी.एस.आर. मद की राशि का अनियमित व्यय की जांच एवं कार्यवाही बावत् क्या निर्देश देंगे? बतावें। अगर नहीं तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) रीवा जिले में अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट, सोलर पॉवर प्लान्ट बदवार, जे.पी. रीवा सीमेंट प्लांट एवं अन्य के द्वारा सी.एस.आर. के मद में व्यय की गई राशि का विवरण, इकाइयों से प्राप्त जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'अ' अनुसार है। (ख) उत्तरांश (क) अनुसार उल्लेखित प्लांटों के द्वारा सी.एस.आर. मद में किये गये कार्यों का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'अ' में समाहित है। भारत सरकार द्वारा अधिसूचित कंपनी अधिनियम 2013 की अनुसूची VII (Schedule VII) के अनुसार पर्यावरणीय स्थिरता, पारिस्थितिक संतुलन, वनस्पति और जीव-जंतुओं की सुरक्षा, पशु कल्याण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से सम्बन्धित कार्य सी.एस.आर. मद में आता है। कंपनी अधिनियम 2013 के शेडयूल-7 में वार्णित गतिविधियों में ही कंपनियों द्वारा सी.एस.आर. व्यय किया जा सकता है। कम्पनी द्वारा परिचालन स्थान एवं संबंधित क्षेत्र में कार्पोरेट सामाजिक दायित्व की गतिविधि को प्राथमिकता दी जाना है, अपितु यह बंधनकारी नहीं है। सी.एस.आर. के संबंध में शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देश की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'ब' अनुसार है। (ग) उत्तरांश 'क' में उल्लेखित प्लांटो में प्रदत्त रोजगार की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'अ' में समाहित है। उत्तरांश 'क' में उल्लेखित प्लांट को स्थापित किये जाने हेतु भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही नहीं हुई है। उक्त प्लांट, आवंटित शासकीय भूमि अथवा इकाइयों द्वारा किसानों से सीधे क्रय की गई भूमि पर स्थापित हैं। (घ) सी.एस.आर. मद में व्यय की गई राशि का उपयोग कंपनी अधिनियम, 2013 एवं कंपनी (CSR नीति) नियम, 2014 के प्रावधानों के अनुसार किया गया है। स्थानीय लोगों को प्रदत्त रोजगार की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'अ' में समाहित है। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता हे।
समर्पण राशि को वापस नहीं किया जाना
[योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी]
13. ( क्र. 896 ) श्री अभय मिश्रा : क्या उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रदेश के जिलों में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में प्राप्त आवंटन राशियां समर्पण की गई का विवरण विधानसभावार देवें? यह भी बतावें कि इनकी मात्रा क्या थी? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार समर्पित राशि के पुनः आवंटन बावत् कब-कब कौन-कौन सी कार्यवाही जिला कलेक्टरों एवं योजना सांख्यिकी विभाग द्वारा की गई की प्रति देते हुये बतावें राशि समर्पण किये जाने के कारण निर्माण एजेंसियों को राशि का भुगतान नहीं किया गया, कार्य प्रभावित हुये, इसके लिये कौन-कौन उत्तरदायी है बतावें? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के तारतम्य में देयकों के लगने के ऑप्शन किस दिनांक व तिथि पर म.प्र. शासन भोपाल कोष एवं लेखा द्वारा बन्द किये गये की जानकारी देते हुये बतायें इनके बन्द होने के पूर्व देयकों को कोष एवं लेखा कार्यालय में प्रस्तुत कर भुगतान के कार्य की कार्यवाही क्यों नहीं की गई इसके लिये कौन-कौन उत्तरदायी है उन पर कार्यवाही के क्या निर्देश देंगे बतावें? (घ) प्रश्नांश (क) अनुसार समर्पित राशि के पूर्व कितने कार्यों हेतु प्रशासकीय स्वीकृति एवं वित्तीय स्वीकृति जारी की जा चुकी थी लेकिन निर्माण एजेंसियों को प्रथम किश्त का भुगतान नहीं किया गया तो क्यों उसके लिये कौन उत्तरदायी है उन पर क्या कार्यवाही के निर्देश देंगे बतावें एवं भुगतान कब तक करावेंगे एवं पुर्नआवंटन बावत् क्या निर्देश देंगे यह भी बतावें की प्रश्नांश (क), (ख), (ग) एवं (घ) अनुसार उल्लेखित तथ्यों पर कार्यवाही बावत् क्या निर्देश देंगे अगर नहीं तो क्यों?
उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिलों को आवंटित कोई भी राशि शासन को समर्पित नहीं की गई। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) उत्तरांश 'क' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) म.प्र.शासन, कोष एवं लेखा द्वारा वित्तीय समापन की प्रक्रिया सम्पन्न करने हेतु दिनांक 28/03/2025 से IFMIS पोर्टल में देयक प्रस्तुत करने की सुविधा पर रोक लगा दी गई थी। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) उत्तरांश 'क' के परिप्रेक्ष्य में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
फरियादी की मेडिकल जांच एवं जारी वारंट
[गृह]
14. ( क्र.
979 ) श्री
हेमंत
सत्यदेव
कटारे : क्या
मुख्यमंत्री
महोदय यह
बताने की कृपा
करेंगे कि (क)
ग्वालियर
जिले में
फरियादी
पुलिसकर्मी
द्वारा दिनांक 01.01.2024
से प्रश्न
दिनांक तक दर्ज
कराये
अपराधों में
कितने
फरियादी पुलिसकर्मी
का मेडिकल
(एम.एल.सी.) निजी
अस्पताल में
कराया गया।
निजी अस्पताल
में जांच
कराने का आधार
क्या था? ऐसे समस्त
प्रकरण की
पृथक-पृथक
जानकारी
जिसमें थाना, फरियादी
का नाम, अप.क्र., दिनांक
धारा का
उल्लेख हो
उपलब्ध करायी
जाये। (ख) क्या
उपरोक्त
प्रकरणों में
से जिन
अपराधों में
मेडीकल जांच
कराने वाले
अस्पताल का
संचालक अथवा
अन्य
चिकित्सक
व्यापम
महाघोटाले का
नामजद आरोपी
है? ऐसे
प्रकरण से
संबंधित
फरियादी
पुलिसकर्मी सहित
अस्पताल के
चिकित्सक/संचालक
के विरुद्ध
पंजीबद्ध
अपराधों की
जानकारी सहित
संपूर्ण
जानकारी दी
जाये। (ग) ग्वालियर
जिले में दिनांक
1.1.2024
से प्रश्न
दिनांक तक
मान.
न्यायालयों
द्वारा जारी
साक्षी
गिरफ्तारी
वारंट के पालन
में नियत
दिनांक के
पूर्व साक्षी
को गिरफ्तार
कर न्यायालय
में पेश किया
गया? जिलावार
जानकारी दी
जाये?
न्यायालय
आदेश पालन की
प्रक्रिया के
दौरान प्रदेश
में शासकीय
कार्य में
बाधा सहित
विभिन्न
धाराओं में
साक्षी एवं
उसके परिजनों
के विरुद्ध
अपराध दर्ज
किये गये? यदि
हाँ, तो
ऐसे प्रत्येक
अपराध की
जानकारी दी
जाये। (घ) ग्वालियर
जिले में विगत
एक वर्ष में
मान. न्यायालयों
द्वारा
किन-किन
पुलिसकर्मियों
के विरुद्ध
साक्षी एवं
आरोपी के
गिरफ्तारी
वारंट जारी
किये गये, किन-किन
जिलों में किन
पुलिसकर्मियों
को नियत
दिनांक के
पूर्व अथवा
नियत दिनांक
को साक्षी को
गिरफ्तार कर
न्यायालय में
पेश किया गया
तथा उत्तर दिनांक
तक किनके
विरुद्ध
गिरफ्तारी
वारंट लंबित
है? जानकारी
दी जाये।
मुख्यमंत्री
( डॉ. मोहन यादव ) : (क)
जानकारी
पुस्तकालय
में रखे
परिशिष्ट 'अ' अनुसार
है। (ख)
जानकारी
पुस्तकालय
में रखे
परिशिष्ट 'ब' अनुसार
है। (ग)
जानकारी
पुस्तकालय
में रखे
परिशिष्ट 'स' अनुसार
है। (घ)
जानकारी
पुस्तकालय
में रखे
परिशिष्ट 'द' अनुसार
है।
जाति प्रमाण पत्र बनाया जाना
[सामान्य प्रशासन]
15. ( क्र. 1090 ) श्री नरेन्द्र प्रजापति [इंजीनियर] : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 02 वर्षों से नवीन गठित जिला मऊगंज एवं मैहर में कुम्हार जाति को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र कब तक में मिलना शुरू होगा? (ख) जिला रीवा से विभक्त जिला मऊगंज एवं जिला सतना से विभक्त जिला मैहर में कुम्हार जाति को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र न बनने से विद्यार्थियों को प्रवेश में स्कॉलरशिप प्राप्त होने की समस्याओं का निदान कब तक होगा? समय-सीमा बतलायें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) मऊगंज एवं मैहर जिलों में कुम्हार जाति के अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी किए जाने के संबंध में कार्यवाही प्रचलन में है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
अपशिष्टों/धूल-कंकण से क्षेत्रीयजनों/वनों को हो रही क्षति
[पर्यावरण]
16. ( क्र. 1127 ) श्री निलेश पुसाराम उईके : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्या जिला-पांढुर्ना, छिंदवाड़ा व सिवनी में स्थित औद्योगिक संस्थानों, पावर प्लांट, स्टोन क्रेशर व अन्य से निकलने वाले अपशिष्टों/फ्लाय एस/धूल-कंकण/अन्य हानिकारक तत्वों व उनका परिवहन का शासन/विभाग/एन.जी.टी. के नियमानुसार न होने के कारण क्षेत्रीयजनों/वनों को हो रही परेशानी/क्षति/स्वास्थ्य की हानि के संबंध में मजदूर संगठन/स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा जिला प्रशासन/वन विभाग/शासन/विभाग को कोई पत्र प्राप्त हुए हैं? यदि हां तो वे क्या है और उन पर क्या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो क्यों और उन पर सम्बन्धितों की उपस्थिति में कब तक कार्यवाही की जावेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। सभी पत्रों पर कार्यवाही किये जाने से शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
औद्योगिक क्षेत्र पीलूखेड़ी में प्रदूषण
[पर्यावरण]
17. ( क्र. 1141 ) श्री मोहन शर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विधान सभा क्षेत्र नरसिंहगढ़ के अंतर्गत स्थित पीलूखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र से निकलने वाले प्रदूषित औद्योगिक अपशिष्ट जल के कारण आसपास के ग्रामों के कुएं, हैंडपंप, अन्य जल स्रोत दूषित हो गए हैं? (ख) यदि हाँ, तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा पिछले तीन वर्षों में कितने जल नमूनों की जांच कराई गई तथा उनमें से कितने मानक से अधिक प्रदूषित पाए गए? (ग) उक्त प्रदूषण के लिए जिम्मेदार औद्योगिक इकाइयों की पहचान कर अब तक कितनी इकाइयों पर जुर्माना, सीलिंग अथवा अन्य दण्डात्मक कार्रवाई की गई है? (घ) क्या पीलूखेड़ी औद्योगिक क्षेत्र में सभी उद्योगों द्वारा Effluent Treatment Plant (ETP) का समुचित संचालन किया जा रहा है? यदि नहीं, तो दोषी उद्योगों पर क्या कार्रवाई प्रस्तावित है? (ड.) प्रदूषित जल से प्रभावित आसपास के गाँवों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने हेतु सरकार द्वारा क्या तात्कालिक एवं स्थायी व्यवस्था की गई है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। (ख) एवं (ग) उत्तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) जी हाँ। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ड.) उत्तरांश (क), (ख), (ग) एवं (घ) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर की पदोन्नति
[सामान्य प्रशासन]
18. ( क्र. 1178 ) श्री राजकुमार कर्राहे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 19/02/2016 को आयोजित तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर की डी.पी.सी. में अनारक्षित वर्ग के विरूद्ध कितने अधिकारी किस नियम के अंतर्गत पदोन्नत हुये है? जिन अनुसूचित जाति के अधिकारियों को अनारक्षित वर्ग के विरूद्ध पदोन्नत किया गया है क्या रोस्टर के अनुसार आदर्श स्थिति आ गयी थी? (ख) अगर आदर्श स्थिति मानकर जितने अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है उतने अधिकारियों का समायोजन विभाग द्वारा संशोधित पदोन्नति नियम जुलाई 2002 के नियम 8 (3) के अनुसार किया जायेगा? (ग) रोस्टर के अनुसार जब आदर्श स्थिति मान ली गयी थी और अनूसूचित जाति के लिये कोई पद रिक्त नहीं था तो श्री रामबाबू सिण्डोस्कर के लिये अनुसूचित जाति वर्ग में नियुक्ति किस पद के विरूद्ध की गई है।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) म.प्र. राज्य सिविल सेवा (कार्यपालिक) वर्गीकरण, भर्ती तथा सेवा शर्ते नियम-1975 के नियम-14 के अन्तर्गत तहसीलदार/अधीक्षक, भू-अभिलेख के पद से उपजिलाध्यक्ष के पद पर पदोन्नति हेतु दिनांक 19/02/2016 को दिनांक 01/01/2014 एवं दिनांक 01/01/2015 की स्थिति में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित की गई थी। दिनांक 01/01/2014 की स्थिति में तहसीलदार/अधीक्षक, भू-अभिलेख के पद से उपजिलाध्यक्ष के पद पर पदोन्नति के संबध में आयोजित डीपीसी की बैठक में अनारक्षित वर्ग के 23 तथा दिनांक 01/01/2015 की स्थिति में आयोजित डीपीसी की बैठक में अनारक्षित वर्ग के 29 अधिकारियों के पदोन्नति आदेश दिनांक 22/03/2016 को जारी किये गये। अनुसूचित जाति वर्ग हेतु 15 रिक्तियों के विरुद्ध 03 अधिकारी श्री शिवलाल शाक्य (53), श्री अशोक कुमार कैथवास (104) एवं श्री सुरेश बराहदिया (114) के पदोन्नति आदेश जारी किए गए। 03 अधिकारी श्रीमती मीना पाल (9), श्री चरणलाल वर्मा (90) एवं श्री उत्तमचंद मेहरा (103) के नाम सीलबंद अनुशंसा में रखे गये। 9 अधिकारियों के नाम परिभ्रमण में रखे गये। इस प्रकार अनुसूचित जाति के 15 पदों को भरा मानते हुए अनारक्षित श्रेणी के अन्तर्गत पदोन्नत होने वाले अधिकारियों के नामों पर विचार किया गया। (ख) संशोधित पदोन्नति नियम जुलाई 2002 के अन्तर्गत नियम 8 (3) का उल्लेख होना नहीं पाया जाता है। (ग) विभाग द्वारा दिनांक 01.01.2015 की स्थिति में आयोजित विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक की अनुशंसा अनुसार अनारक्षित वर्ग की प्रतीक्षा सूची से 10 एवं अनुसूचित जाति संवर्ग की प्रतीक्षा सूची में प्रथम स्थान पर रखे गये श्री रामबाबू सिण्डोस्कर को रिक्त पद उपलब्ध होने पर पदोन्नति प्रदान की गई है।
राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति
[सामान्य प्रशासन]
19. ( क्र. 1179 ) श्री राजकुमार कर्राहे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राज्य प्रशासनिक सेवा के कैडर में डेपुटेशन हेतु कितने पद रखे गये हैं? क्या म.प्र. सिविल सेवा पदोन्न्ति नियम वर्ष 2002 के नियम 6 (3) में एक वर्ष से अधिक अवधि के प्रतिनियुक्ति से उपलब्ध पदों को पदोन्नति हेतु रिक्त/प्रत्याशित पदों में शामिल किये जाने का प्रावधान है तथा यह प्रावधान बंधनकारी है या वैकल्पिक? (ख) क्या सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा तहसीलदार, अधीक्षक भू अभिलेख से डिप्टी कलेक्टर पद हेतु आयोजित डी.पी.सी. दिनांक 19/02/2016 में एक वर्ष से अधिक के प्रतिनियुक्ति से उपलब्ध पदों की गणना में शामिल किया गया है? (ग) दिनांक 01.01.2015 से दिनांक 31.12.2015 के मध्य राज्य प्रशासनिक सेवा के कौन-कौन से अधिकारी किस-किस विभाग में कब से कब तक प्रतिनियुक्ति पर रहे हैं? सूची उपलब्ध करायें। केलेण्डर वर्ष 2015 में राज्य प्रशासनिक सेवा के कितने अधिकारी एक वर्ष से अधिक अवधि के लिये प्रतिनियुक्ति में है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) राज्य प्रशासनिक सेवा संवर्ग में प्रतिनियुक्ति रक्षित पदों की संख्या 55 है। जी हाँ, मध्यप्रदेश लोक सेवा (पदोन्नति) नियम, 2002 के नियम 6 (3) में 01 वर्ष से अधिक अवधि की प्रतिनियुक्ति से उद्भूत होने वाली रिक्तियों को भी रिक्तियों की गणना में शामिल किये जाने का प्रावधान है। (ख) बाहय सेवा/एक्स कैडर पदों पर प्रतिनियुक्तियों के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक सी/3-14/06/3/एक दिनांक 29/02/2008 के अनुसार राज्य प्रशासनिक सेवा संवर्ग के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के संबंध में कोई आदेश जारी नहीं किये गये हैं। अत: गणना में शामिल किये जाने का प्रश्न उद्भूत नहीं होता। (ग) उत्तरांश 'ख' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उद्भूत नहीं होता।
वन विभाग के द्वारा तालाबों का निर्माण
[वन]
20. ( क्र. 1186 ) श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या खरगापुर विधान सभा-47 में वन विभाग द्वारा वर्ष 2020 से प्रश्न दिनांक तक कितने तालाबों का निर्माण कराया गया तथा शासन द्वारा कितनी-कितनी राशि प्रत्येक तालाब निर्माण पर व्यय की गई स्वीकृत आदेश की प्रतियां उपलब्ध करायें। (ख) क्या उक्त तालाबों में वर्तमान समय में जंगली जानवरों को पीने का पानी उपलब्ध हो रहा है। यदि नहीं, तो क्यों? (ग) क्या शासन की भारी भरकम राशि का दुरुपयोग किया गया है और कई स्थानों पर तालाब निर्माणों में बहुत फर्जीवाड़ा किया गया है क्या समस्त तालाबों की जांच करायेंगे यदि हाँ, तो कब तक यदि नहीं, तो क्यों? (घ) क्या दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही कर राशि वसूली की कार्यवाही करेंगे यदि हाँ, तो कब तक यदि नहीं, तो क्यों कारण स्पष्ट करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) टीकमगढ़ वनमंडल के अन्तर्गत खरगापुर विधानसभा-47 में विभाग द्वारा वर्ष 2020 से प्रश्न दिनांक तक एक तालाब का निर्माण कराया गया तथा शासन द्वारा रूपये 14.25 लाख की राशि तालाब निर्माण पर व्यय की गई। तालाब निर्माण पर व्यय की गई स्वीकृत आदेश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी हाँ। तालाब में वर्तमान समय में जंगली जानवरों को पीने का पानी उपलब्ध हो रहा है। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) उत्तरांश (ग) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
प्रतियोगी परीक्षाओं का परीक्षा केन्द्र जिला-अनूपपुर में बनवाना
[सामान्य प्रशासन]
21. ( क्र. 1221 ) श्री बिसाहूलाल सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर में स्थित है और अनूपपुर जिले आसपास प्रतियोगी व प्रवेश परीक्षा केन्द्र नहीं होने से यहाँ के गरीब छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं में सम्मिलित होने हेतु जबलपुर भोपाल इन्दौर या अन्य दूर के जिलो में जाना पड़ता है। जिसके लिये अधोहस्ताक्षरी द्वारा अध्यक्ष/संचालक कर्मचारी चयन मंडल भोपाल को पत्र प्रेषित किया गया था यदि हाँ, तो क्या परीक्षा केन्द्र बनाया गया है? यदि हाँ, तो जिले में किन-किन विद्यालयों एवं महाविद्यालयों को परीक्षा केन्द्र चिन्हित किया गया है और कब तक परीक्षा केन्द्र बनाये जाने का प्रावधान है? (ख) प्रश्नांश "क" के अनुसार कर्मचारी चयन मंडल के द्वारा कौन-कौन सी प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं की परीक्षा केन्द्र बनाया जाना प्रस्तावित है और कब तक जिला अनूपपुर में कर्मचारी चयन परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं का केन्द्र बनाया जायेगा? (ग) प्रश्नांश "क" एवं "ख" अनुसार कर्मचारी चयन मण्डल द्वारा परीक्षा केन्द्र बनाया जाना है तो जिला मुख्यालय में किन-किन विद्यालय, महाविद्यालय को परीक्षा केन्द्र के रूप में चिन्हित गया है? (घ) प्रश्नांश "क" "ख" एवं "ग" अनुसार परीक्षा केन्द्र बनाये जाने हेतु कर्मचारी चयन मंडल द्वारा कार्यवाही की जा रही है तथा कब तक परीक्षा केन्द्र संचालित की जायेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) वर्तमान में अनूपपुर जिले में परीक्षा केन्द्र हेतु मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मण्डल के मानकों के अनुरूप आवश्यक तकनीकी आधारभूत ढांचा (IT Infrastructure) एवं सुरक्षा मापदण्डों के दृष्टिगत केन्द्र बनाने की कार्यवाही परीक्षणाधीन है। कार्यवाही आगामी 2 माह में पूर्ण कर ली जाएगी। (ख) से (घ) उत्तरांश 'क' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
हाथियों के आवागमन को रोकने की कार्यवाही
[वन]
22. ( क्र. 1231 ) श्री बिसाहूलाल सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जिला अनूपपुर मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित है? छत्तीसगढ़ की ओर से हाथियों का समूह हमेशा आते है, अनूपपुर का अधिकांश भू-भाग वन परिक्षेत्र से लगा हुआ है? हाथियों द्वारा फसलों को नष्ट करना, घरों को उजाड़ना, जान से मार डाला जाता है? यदि हाँ, तो अभी तक जिले में कितने घरों को नष्ट किया गया है? कितने कृषकों के फसलों को क्षति पहुँचाई गई है? कितने लोगों को जान से मार डाला गया है? उन्हें क्षतिपूर्ति किया गया है? सूचीबद्ध जानकारी उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्नांश 'क' अनुसार हाथियों के द्वारा कृषकों के फसलों, घरों व जनहानि होने पर क्षतिपूर्ति की राशि राजस्व विभाग के द्वारा कुछ अंश भाग ही प्रदान की जाती है। यदि हाँ, तो वन विभाग द्वारा क्यों नहीं? (ग) प्रश्नांश 'क' अनुसार कृषकों का हाथियों से कृषकों, गरीबो का वास्तविक क्षतिपूर्ति वन विभाग द्वारा दिलाया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक नहीं तो क्यों? (घ) प्रश्नांश 'क' 'ख' एवं 'ग' अनुसार क्या वन विभाग के क्षतिपूर्ति का वास्तविक मूल्यांकन कर भुगतान करने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो भुगतान क्यों नहीं की जाती है? यदि नहीं, है तो क्या वास्तविक क्षतिपूर्ति किया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। हाथियों का समूह छत्तीसगढ़ की ओर से निरंतर आते रहते हैं, अनूपपुर का अधिकांश भू-भाग वन परिक्षेत्र जैतहरी, कोतमा, बिजुरी लगा हुआ है। हाथियों द्वारा फसल एवं घर नष्ट किये जाने पर राजस्व विभाग द्वारा आर्थिक सहायता राशि दिलाये जाने की कार्यवाही की जाती है। मकान क्षति, फसल हानि एवं जनहानि की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) हाथियों के द्वारा कृषकों के फसलों एवं घरों का नुकसान होने पर राजस्व पुस्तक परिपत्र क्रमांक 6-4 में निर्धारित आर्थिक सहायता राशि राजस्व विभाग द्वारा पूर्ण रुप से दी जाती है एवं जनहानि होने पर निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि वन विभाग द्वारा दी जाती है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी नहीं। फसलों एवं घरों की क्षति होने पर उसके आंकलन हेतु विशेषज्ञता एवं आवश्यक दस्तावेज राजस्व विभाग में होने के कारण। (घ) जी नहीं। वन्यप्राणियों से होने वाली जनहानि पर मृतक के वैधानिक उत्तराधिकारी को निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि रुपये आठ लाख एवं व्यक्ति की मृत्यु यदि घायल किये जाने के पश्चात इलाज के दौरान हुई हो तो इलाज पर हुआ वास्तविक व्यय का भुगतान वन विभाग द्वारा किया जाता है। फसलों एवं घरों की क्षति होने पर आर्थिक सहायता राजस्व विभाग द्वारा दी जाती है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
समस्त थानों में पुलिस बल उपलब्धता
[गृह]
23. ( क्र. 1247 ) श्री श्रीकान्त चतुर्वेदी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नवगठित जिला मैहर सहित म.प्र. के समस्त थानों में जो बल उपलब्ध कराया गया है, वह किस मापदण्ड के आधार पर उपलब्ध कराया गया है तथा उक्त मापदण्ड का निर्धारण कब किया था? (ख) प्रश्नांश 'क' से संबंधित अनुसार क्या विगत 15-16 वर्षों में बढ़ती हुई जनसंख्या, बढ़ते हुए अपराधों एवं कानून व्यवस्या, धार्मिक आयोजनों मेला इत्यादि को दृष्टिगत रखते हुये, थानों में बल वृद्धि के नये मापदण्ड निर्धारित करने की शासन द्वारा कोई योजना बनाई गई है? यदि हाँ, तो राज्य शासन द्वारा कब तक नवीन मापदण्डों को निर्धारित किया जाकर म.प्र. के समस्त थानों में बल वृद्धि कर दी जावेगी? समयावधि बतायी जावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) नवगठित जिला मैहर सहित म.प्र. के समस्त थानों में बल का निर्धारण मध्यप्रदेश शासन, गृह विभाग के आदेश क्रमांक एफ-2 (क) 39/2010/बी-3/दो, दिनांक 25.11.2010 द्वारा निर्धारित किये मापदण्डों के आधार पर किया जाता है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) जी नहीं। बढ़ती जनसंख्या, अपराध एवं साम्प्रदायिक रूप से अति संवेदनशील थानों में बलवृद्धि के प्रावधान उपरोक्त आदेश में किये गये है। नये मापदण्ड निर्धारित करने की कोई योजना नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
वन विभाग द्वारा लगाए गए वृक्षों की जानकारी
[वन]
24. ( क्र. 1282 ) डॉ. रामकिशोर दोगने : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वन विभाग हरदा द्वारा विगत 03 वर्षों में हरदा जिला अंतर्गत कुल कितने व कौन-कौन से वृक्ष कितनी-कितनी लागत से लगाये गये है? (ख) वृक्षारोपण किस-किस स्थान/क्षेत्र (वन परिक्षेत्र/बीट/ग्राम/नगर) में किया गया? (ग) उक्तानुसार लगाए गए वृक्षों में से कितने वृक्ष जीवित व मृत हैं तथा जीवित वृक्षों की जीवितता प्रतिशत कितना है? (घ) उक्त अवधि में वृक्षारोपण पर कुल कितनी राशि व्यय की गई तथा यह राशि किस योजना/मद से व्यय हुई? (ड.) वृक्षारोपण एवं रख-रखाव कार्य हेतु कौन-कौन सी एजेंसी/संस्था (वन विभाग/ठेकेदार/ जनभागीदारी/एनजीओ) संलग्न रही?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (ड.) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।
बांस का उत्पादन एवं संवर्धन
[वन]
25. ( क्र. 1325 ) श्री नरेन्द्र प्रजापति [इंजीनियर] : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) एक जिला एक उत्पाद के तहत रीवा जिले में बांस को चयनित किया गया है, इसके उत्पादन में संवर्धन के लिये शासन स्तर से क्या योजना/नीति है? इसके निरीक्षण के लिये कौन सी संस्था कार्य कर रही है? (ख) बांस से बनने वाले उत्पाद के लिये बांस शिल्प विकास बोर्ड भोपाल की रीवा जिले में कितनी संस्था और कहाँ पर है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एक जिला एक उत्पाद के तहत रीवा जिले में बांस को चयनित किया गया है। बांस के उत्पादन में संवर्धन के लिए राष्ट्रीय बांस मिशन, भारत सरकार की केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं का क्रियान्वयन मध्यप्रदेश राज्य बांस मिशन द्वारा किया जाता है। कृषकों की निजी भूमि पर बांस पौध रोपण के लिए योजना अंतर्गत रुपए 150/- की सब्सिडी योजना के नियमों के अनुरुप 2 वर्षों में दी जाती है। इसके अतिरिक्त केपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी के अंतर्गत बांस उत्पादों से संबंधित उद्योगों की स्थापना के लिए बैंक ऋण/सब्सिडी देने की योजना भी है। पौध रोपण योजना में निरीक्षण का उत्तरदायित्व वनमंडल कार्यालय का है। केपिटल सब्सिडी स्कीम में इकाई स्थापित होने पर निरीक्षण का उत्तरदायित्व संबंधित बैंक एवं वनमंडल कार्यालय का है। (ख) बांस शिल्प विकास बोर्ड एक सलाहकार बोर्ड है। इसकी कोई भी शाखा नहीं है।
खनिज विभाग के राजस्व से स्टाप डेम का निर्माण
[खनिज साधन]
26. ( क्र.
1339 ) श्री
घनश्याम
चन्द्रवंशी : क्या
मुख्यमंत्री
महोदय यह
बताने की कृपा
करेंगे कि
(क) क्या खनिज
विभाग के
राजस्व से जल
संसाधन विभाग
के माध्यम से
छोटे स्टॉप
डैम का
निर्माण किया
जा सकता है? (ख) यदि
हाँ,
तो प्रदेश में
खनिज विभाग से
प्राप्त
राजस्व से
कितने स्टॉप
डैम का
निर्माण किया
गया है
जिलेवार ब्यौरा
देवें? (ग) इन
स्टॉप डैमों
की साध्यता
कितनी है?
मुख्यमंत्री
( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी
नहीं। (ख) एवं
(ग)
उत्तरांश
(क) के
परिप्रेक्ष्य
में प्रश्न
उपस्थित नहीं
होता।
शहरी आवासीय कॉलोनियों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाना
[पर्यावरण]
27. ( क्र. 1467 ) श्री यादवेन्द्र सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कॉलोनी निर्माण में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने के संबंध में क्या-क्या प्रावधान म.प्र. राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के द्वारा किये गए हैं, इन प्रावधानों के अनुसार बोर्ड के अधिकारियों को कब-कब निरीक्षण कर क्या-क्या कार्यवाही करना आवश्यक है? (ख) मध्यप्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के छिंदवाड़ा कार्यालय के द्वारा विगत पांच वर्ष में किस-किस कॉलोनी को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाने पर किस-किस दिनांक को सूचना पत्र जारी किए उनमें से किस-किस कॉलोनी ने प्लांट लगाया किस कॉलोनी ने प्रश्नांकित दिनांक तक प्लांट नहीं लगाया? (ग) छिंदवाड़ा कार्यालय के अंतर्गत कौन-कौन से जिले आते है उसमें बनाई गई किस-किस कॉलोनी का बोर्ड के किस अधिकारी ने किस दिनांक को निरीक्षण किया, किस कॉलोनी का प्रश्नांकित दिनांक तक भी बोर्ड के किसी अधिकारी ने निरीक्षण ही नहीं किया? (घ) सीवेज प्लांट लगाए बिना विकसित कॉलोनियों के विरूद्ध कब तक बोर्ड न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत कर देगा? समय-सीमा सहित बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) 2000 वर्गमीटर से अधिक बिल्टअप एरिया वाली बिल्डिंग परियोजनाओं तथा 1 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल वाली लैण्ड/एरिया डेव्हलपमेंट परियोजनाओं को मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 एवं वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अन्तर्गत स्थापना/संचालन सम्मति प्राप्त करने का प्रावधान है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा स्थापना एवं संचालन सम्मति जारी करने के पूर्व एवं आवश्यकतानुसार निरीक्षण किया जाता है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट - ''अ'' अनुसार है। (ग) मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय छिन्दवाड़ा अंतर्गत 03 जिले क्रमश: छिन्दवाड़ा, बैतूल व पांढुर्णा आते हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट - ''ब'' अनुसार है। बोर्ड द्वारा स्थापना एवं संचालन सम्मति जारी करने के पूर्व एवं आवश्यकतानुसार निरीक्षण किया जाता है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) चूंकि यह एक निरंतर प्रक्रिया है। अत: समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
कुटीर एवं ग्रामोद्योग इकाइयों का पंजीकरण
[कुटीर एवं ग्रामोद्योग]
28. ( क्र. 1566 ) श्री महेन्द्र नागेश : क्या राज्य मंत्री, कुटीर एवं ग्रामोद्योग महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) गोटेगांव विधानसभा क्षेत्र में कितनी कुटीर एवं ग्रामोद्योग इकाइयाँ पंजीकृत हैं तथा कितनी इकाइयाँ वर्तमान में संचालित हैं? (ख) विगत तीन वर्षों में इन इकाइयों को ऋण/ अनुदान/प्रशिक्षण के अंतर्गत क्या सहायता प्रदान की गई है? (ग) क्या विभाग द्वारा क्षेत्र में स्थानीय रोजगार बढ़ाने हेतु कोई विशेष योजना प्रस्तावित है?
राज्य मंत्री, कुटीर एवं ग्रामोद्योग ( श्री दिलीप जायसवाल ) : (क) गोटेगांव विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत 06 इकाइयां क्रमश: निम्न रेशम केन्द्र मुंगवानी, पांजरा, भदौरा, झोतेश्वर, टसर केन्द्र भदौरा, बहोरीपार संचालित है। (ख) विगत तीन वर्षों में उक्त इकाइयों को ऋण अनुदान सहायता प्रदान नहीं की गई है। रेशम संचालनालय द्वारा तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। (ग) विभाग द्वारा क्षेत्र में स्थानीय रोजगार बढ़ाने हेतु रेशम समृद्धि योजना संचालित है।
सांख्यिकीय आँकड़ों का संकलन एवं उपयोग
[योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी]
29. ( क्र. 1567 ) श्री महेन्द्र नागेश : क्या उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव के लिए विगत तीन वर्षों में सामाजिक-आर्थिक एवं जनसंख्या संबंधी सांख्यिकीय आँकड़े संकलित किए गए हैं? (ख) यदि हाँ, तो क्या इन आँकड़ों के आधार पर क्षेत्रीय विकास योजनाओं का निर्माण एवं बजट आवंटन किया गया है? (ग) यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं?
उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) उक्त जानकारी विधानसभा क्षेत्रवार संकलित नहीं की जाती है, बल्कि जिलेवार सांख्यिकी आंकड़े एकत्रित किए जाते हैं। अत: प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) एवं (ग) उत्तरांश 'क' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
माननीय विधायकों को प्रदाय कार्यालय एवं सुविधा
[विज्ञान और प्रौद्योगिकी]
30. ( क्र. 1570 ) श्री भंवर सिंह शेखावत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या एम.पी.एस.ई.डी.सी., ई-गवर्नेंस सोसायटी के माध्यम से प्रदेश के माननीय विधायकों को उनके कार्यालय सुधार तथा कार्यालय/निवास पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा उपलब्ध कराने हेतु प्रति विधायक ₹5,00,000 (पाँच लाख रुपये) की राशि प्रदाय किए जाने का प्रावधान किया गया था? (ख) यदि हाँ, तो प्रदेश में कुल कितने माननीय विधायकों को यह राशि स्वीकृत/प्रदाय की गई है? प्रत्येक विधायक को कार्यालय सुविधा हेतु कितनी राशि तथा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सामग्री/उपकरण हेतु कितनी राशि व्यय की गई है, कृपया पृथक-पृथक विवरण उपलब्ध करावें। (ग) क्या विधायक कार्यालयों में माननीय विधायक की पूर्व अनुमति के बिना वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कक्ष हेतु सामग्री/ उपकरण क्रय किए गए हैं? यदि हाँ, तो ऐसे क्रय आदेश किस अधिकारी/कर्मचारी द्वारा तथा किसके आदेश/अनुमोदन से जारी किए गए? (घ) माननीय विधायक की अनुमति के बिना सामग्री क्रय किए जाने का कारण क्या है? क्या उक्त प्रकरण में किसी प्रकार की अनियमितता पाई गई है? यदि हाँ, तो संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के विरुद्ध क्या-क्या कार्यवाही प्रस्तावित/की गई है? नहीं तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग द्वारा दी गई जानकारी अनुसार प्रदेश में 230 माननीय विधायकों के कार्यालय/निवास पर वीडियों कान्फ्रेंसिंग सुविधा हेतु प्रत्येक विधानसभा क्षेत्रवार राशि रूपये 05.00 लाख आवंटित की गई है। आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय द्वारा मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPSeDC) को समस्त 230 विधायक कार्यालय में वीडियों कान्फ्रेसिंग सेटअप के लिए कुल राशि रूपये 9,71,60,000/- आवंटित की गई है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय के पत्र क्रमांक 2654/2025/आसांस./17-पी.आई.डी./वर्चु.संवाद, दिनांक 10/06/2025 द्वारा प्राप्त सहमति अनुसार सामग्री के क्रय का कार्य समस्त जिलों में जिला कलेक्टर के निर्णय अनुसार सम्पादित किये जाने हेतु MPSeDC द्वारा जिला ई-गवर्नेन्स सोसायटी को सौंपा गया, प्रश्नांश का शेष भाग उपस्थित नहीं होता। (घ) क्रय की कार्यवाही नियमानुसार उत्तरांश (ग) अनुसार की गई है। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
जन सेवा मित्रों का विभागीय योजनाओं में कार्य करना
[लोक सेवा प्रबन्धन]
31. ( क्र.
1684 ) सुश्री
रामश्री (बहिन
रामसिया
भारती) राजपूत
: क्या
मुख्यमंत्री
महोदय यह
बताने की कृपा
करेंगे कि (क) प्रदेश
में जन सेवा
मित्रों
द्वारा लाड़ली
बहना योजना
जैसी
महत्वपूर्ण
योजना में
कार्य किया
जिनकी संख्या
लगभग 9300
है? (ख)
सरकार
द्वारा जन
सेवा मित्रों
को कितना मानदेव
भुगतान किया
गया? (ग)
क्या सरकार
जन सेवा
मित्रों को
पुनः सेवा में
लिए जाने तथा
अन्य योजनाओं
में कार्य
कराने की कोई
पहल की गई है? यदि
नहीं,
तो क्यों? (घ) जन
शिक्षा
मित्रों ने 2 वर्ष
तक कार्य किया
उनको सरकार द्वारा
पुनः कार्य पर
लिया जावेगा
समय-सीमा बताये?
मुख्यमंत्री
( डॉ. मोहन यादव ) : (क) 1. प्रोग्राम
के अंतर्गत
माह फरवरी
2023 में 4695 इन्टर्न
(जन सेवा
मित्र) को तथा
माह अगस्त
2023 में 4695 नवीन, कुल
लगभग 9300
इंटर्स को
इंटर्नशिप
प्रदान की
गयी। 2.
इंटर्नशिप
में शासकीय
कार्य
प्रणाली
समझने की समझ
विकसित करने
हेतु,
योजनाओं के
क्रियान्वयन
से अवगत कराया
गया था, जिसमें
लाड़ली बहना
योजना शामिल
थी। यह इंटर्नशिप
किसी रोजगार
से संबंधित
नहीं थी, बल्कि केवल
प्रशिक्षण
हेतु थी। (ख) चयनित
इंटर्स को रु. 8000/- प्रतिमाह
व विस्तारित
अवधि में रु. 10,000/- प्रति
माह दिया गया।
(ग)
यह
इंटर्नशिप
प्रोग्राम
इंटर्न को
प्रशिक्षण
प्रदान कर
रोजगार हेतु
सक्षम बनाना
था। इस कार्यक्रम
में
इंटर्नशिप
समाप्ति के
बाद सेवा का
प्रावधान
नहीं था, कार्यक्रम
समाप्त हो
चुका है। (घ) उत्तरांश
(क), (ख)
एवं (ग) के
संदर्भ में
शेष प्रश्न
उपस्थित नहीं
होता है।
परीक्षा में अभ्यर्थियों द्वारा परीक्षा केन्द्र का चयन
[सामान्य प्रशासन]
32. ( क्र. 1696 ) श्री जगन्नाथ सिंह रघुवंशी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा राज्य सेवा परीक्षा हेतु दिनांक 10 जनवरी से प्रारंभ ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में अभ्यर्थियों को परीक्षा केन्द्र चयन का विकल्प प्रदान नहीं किया जा रहा है? (ख) क्या शासन को यह ज्ञात है कि वर्तमान में अनेक अभ्यर्थी अपने मूल निवास स्थान से दूर अन्य शहरों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, जिससे उन्हें परीक्षा केन्द्र आवंटन के कारण गंभीर आवागमन एवं आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है? (ग) क्या अन्य राज्यों के वे अभ्यर्थी जो वर्तमान में मध्यप्रदेश में निवासरत हैं, उन्हें भी अपने वर्तमान निवास शहर के अनुसार परीक्षा केन्द्र चयन का विकल्प उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है? (घ) क्या शासन द्वारा मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग को निर्देश जारी कर राज्य सेवा परीक्षा आवेदन पत्र में अभ्यर्थियों को उनके वर्तमान निवास शहर के अनुसार परीक्षा केन्द्र चयन का विकल्प प्रदान किए जाने पर विचार किया जा रहा है? यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। (ख) अभ्यर्थी को सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से उसके गृह जिले को परीक्षा केन्द्र आवंटित किये जाने हेतु विज्ञापन में प्रावधान किया है। विगत वर्षों में यह परिलक्षित हुआ है कि कुल परीक्षार्थियों के लगभग 50 प्रतिशत अभ्यर्थी इन्दौर, भोपाल, ग्वालियर तथा जबलपुर जैसे बड़े शहरों को परीक्षा केन्द्र के रूप में चयन करते है। जिससे इन शहरों में दबाव बढ़ता है। परीक्षा आयोजन की व्यवस्था एवं गोपनीयता व सुरक्षा की दृष्टि से आयोग के मानकों के परीक्षा केन्द्रों की उपलब्धता में कठिनाई उत्पन्न होती है। अत: परीक्षाओं के सुरक्षित संचालन हेतु यह व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था से परीक्षा केन्द्रों में संख्या अनुसार उचित संतुलन होता है। गृह जिले में परीक्षा केन्द्र होने से अभ्यर्थियों को सुविधा होगी तथा परीक्षा संबंधी व्यवस्थाएं और अधिक सुदृढ़ होगी। (ग) जी हाँ। (घ) उत्तरांश ''ख'' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
प्रोटोकॉल का पालन करना
[सामान्य प्रशासन]
33. ( क्र. 1720 ) श्री सुरेश राजे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) माननीय विधायक को सार्वजानिक/शासकीय कार्यक्रमों तथा शासकीय कार्यों का भूमि पूजन, लोकार्पण, शिलालेख में नाम अंकित करने सम्बन्धी मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रोटोकॉल के नियम/आदेश की सत्यापित प्रति उपलब्ध करवाएं। (ख) वर्ष 2021-22 से 2025-26 में प्रश्न दिनांक तक विधानसभा क्षेत्र 19 डबरा में नगरीय निकाय/जल संसाधन विभाग/जनपद पंचायत/लोक निर्माण विभाग/ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना/मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के इन विभागों द्वारा (विधायक एवं सांसद निधि को छोड़कर) कौन-कौन से कार्य कितनी-कितनी राशि के स्वीकृत किये गए? विभागवार एवं वर्षवार बतावें तथा स्वीकृत निर्माण कार्यों में से किस-किस कार्य का भूमि पूजन/लोकार्पण किस-किस दिनांक को किया गया? जिसमें क्षेत्रीय विधायक को आमंत्रित कर शिलालेख पट्टिका में नाम अंकित किया गया? यदि नहीं, तो क्यों? कारण बतावें। (ग) प्रश्नांश (ख) के अनुसार क्या अधिकांश मध्यप्रदेश शासन के अधिकारियों द्वारा माननीय विधायकों के प्रोटोकॉल सम्बन्धी नियम/आदेश का पालन नहीं किया जा रहा? प्रोटोकाल का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) माननीय विधायकगण के प्रोटोकॉल संबंधी परिपत्र की प्रति संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जानकारी एकत्रित की जा रही है। (ग) जी नहीं। विभागीय नियमों के अनुसार कार्यवाही की जाती है।
सुरक्षा में तैनात अंगरक्षकों को जोखिम भत्ता
[गृह]
34. ( क्र.
1742 ) श्री
नरेन्द्र
प्रजापति
[इंजीनियर] : क्या
मुख्यमंत्री
महोदय यह
बताने की कृपा
करेंगे कि (क) राज्यपाल
महोदय एवं
मुख्यमंत्री
महोदय की सुरक्षा
में तैनात
अंगरक्षकों
को जोखिम भत्ता
कितना दिया जा
रहा है? किस नियम के
तहत, आदेश
की प्रति
उपलब्ध
करायें। (ख) राज्यपाल
महोदय एवं
मुख्यमंत्री
महोदय की सुरक्षा
के अतिरिक्त
अन्य मंत्री
जी, सांसद
जी एवं
विधायकगण की
सुरक्षा
कर्मियों को
भी जोखिम
भत्ता दिया
जायेगा? यदि हाँ, तो कब
तक? यदि
नहीं,
तो क्यों नहीं?
मुख्यमंत्री
( डॉ. मोहन यादव ) : (क) 1. म.प्र.
शासन के आदेश
क्रमांक एफ 2 (क) 29/10/बी-3/दो
भोपाल दिनांक 29 जून 2011
द्वारा
महामहिम
राज्यपाल महोदय
एवं माननीय
मुख्यमंत्री म.प्र.
महोदय की
सुरक्षा में
स्वीकृत पदों
के विरूद्ध
पदस्थ
सुरक्षा
कर्मियों को
केवल वेतन
(ग्रेड-पे
छोड़कर) का 30
प्रतिशत की दर
से विशेष वेतन
स्वीकृत किया
गया है। 2. म.प्र. शासन
के ज्ञाप
क्रमांक एफ 2 (क) 29/10/बी-3/दो
भोपाल दिनांक 25.02.2012
द्वारा जोखिम
भत्ता नामित
किये जाने की
सहमति प्रदान
की गई है। शेष जानकारी
पुस्कालय में
रखे परिशिष्ट "अ"
एवं "ब"
अनुसार। (ख) राज्यपाल
महोदय एवं
मुख्यमंत्री
महोदय की सुरक्षा
के अतिरिक्त
अन्य मंत्री
जी, सांसद
जी एवं
विधायकगण की
सुरक्षा
कर्मियों को
जोखिम भत्ता
दिये जाने से
सम्बन्धित
कोई प्रस्ताव
विचाराधीन
नहीं है।
कोरोना कर्मवीर योद्धा पदक एवं जोखिम भत्ता प्रदान करना
[गृह]
35. ( क्र. 1774 ) श्री सोहनलाल बाल्मीक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मान.मंत्रियों एवं विधायकों की सुरक्षा में पदस्थ आरक्षकों (PSO) द्वारा कोरोना काल में सुरक्षा ड्यूटी सम्पादित की है, फिर भी सुरक्षाकर्मी (गनमैनों) को कोरोना कर्मवीर योद्धा पदक से उन्हें वंचित रखकर, पदक प्रदान नहीं किया गया, जिसका क्या कारण है? जबकि मुख्यमंत्री सुरक्षा राज्यपाल सुरक्षा एवं वल्लभ भवन सुरक्षा में तैनात (PSO) गनमैनों को कोरोना कर्मवीर योद्धा, पदक प्रदान किया जा चुका है विभाग द्वारा कब तक कार्यवाही करते हुये कोरोना काल में सुरक्षा ड्यूटी करने वाले मान.मंत्रियों एवं विधायकों की सुरक्षा में पदस्थ आरक्षकों (PSO) गनमैनों को, कोरोना कर्मवीर योद्धा पदक प्रदान कर दिया जायेगा? (ख) मुख्यमंत्री सुरक्षा एवं राज्यपाल सुरक्षा में पदस्थ आरक्षकों (PSO) को 30% जोखिम भत्ता किस आधार पर एवं किस समय अवधि से प्रदान किया जा रहा है? जबकि मान.मंत्रियों एवं विधायकों की सुरक्षा में पदस्थ आरक्षकों को भी जोखिम भत्ता प्रदान किया जाना चाहिये परन्तु उन्हें जोखिम भत्ता प्रदान नहीं किया जा रहा है जिसका क्या कारण है? क्या विधायकों एवं मंत्रियों की सुरक्षा ड्यूटी में तैनात आरक्षकों (PSO) को जान का जोखिम नहीं होता है? अगर होता है तो मान.मंत्रियों एवं विधायकों की सुरक्षा में पदस्थ आरक्षकों (PSO) को भी जोखिम भत्ता प्रदान किया जाना चाहिये क्योंकि सभी सुरक्षाकर्मी एक समान नौकरी करते हैं? विभाग द्वारा कब तक कार्यवाही करते हुये मान.मंत्रियों एवं विधायकों की सुरक्षा में पदस्थ आरक्षकों (PSO) को जोखिम भत्ता प्रदान किया जायेगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) कोविड-19 महामारी के दौरान संभावित संक्रमण स्थानों पर कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों को कर्मवीर योद्धा पदक से सम्मानित करने हेतु उनकी इकाइयों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर शासन के अनुमोदन उपरांत दिनांक 12.08.2021 को कर्मवीर योद्धा पदक के आदेश जारी किये गये। जिन अधिकारियों/कर्मचारियों के प्रस्ताव समय-सीमा में प्राप्त नहीं हुये उनका नाम कर्मवीर योद्धा पदक हेतु सम्मिलित नहीं किया गया है। वर्तमान में कर्मवीर योद्धा पदक प्रदाय किये जाने के संबंध में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। (ख) म.प्र. शासन, गृह विभाग के आदेश क्रमांक/एफ 2 (क) 29/10/बी-3/दो भोपाल, दिनांक 29 जून, 2011 द्वारा महामहिम राज्यपाल महोदय एवं माननीय मुख्यमंत्री जी, म.प्र. महोदय की सुरक्षा में स्वीकृत पदों के विरुद्ध पदस्थ सुरक्षा कर्मियों को केवल वेतन (ग्रेड-पे छोड़कर) का 30 प्रतिशत की दर से विशेष वेतन स्वीकृत किया गया है, जानकारी संलग्न परिशिष्ट-अ अनुसार। म.प्र.शासन के ज्ञापन क्रमांक एफ 2 (क) 29/10/बी-3/दो, भोपाल, दिनांक 25.02.2012 द्वारा जोखिम भत्ता नामित किये जाने की सहमति प्रदान की गई है, जानकारी संलग्न परिशिष्ट-ब अनुसार। महामहिम राज्यपाल महोदय एवं माननीय मुख्यमंत्रीजी महोदय की सुरक्षा के अतिरिक्त माननीय मंत्रियों एवं विधायकों की सुरक्षा में पदस्थ आरक्षकों (PSO) को जोखिम भत्ता दिये जाने के संबंध में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
पानी प्रदूषित होने से रोकना एवं आयरन रिमूवल प्लांट की स्थापना
[पर्यावरण]
36. ( क्र. 1775 ) श्री सोहनलाल बाल्मीक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) परासिया पेन्च क्षेत्र में स्थित कुछ कोयला खदानें बन्द हो चुकी है, किन्तु कुछ स्थानों पर स्थित वे.को.लि.प्रबंधन के बोरो न्यूटन क्षेत्र, जाटाछापर, चांदादेव टेकड़ी, 3 बोर एवं रेलवे पुल के पास स्थित बोरो से एसीडिक-वाटर व आयरन युक्त पानी बहुत अधिक मात्रा में बह रहा है और वह पानी पेच नदी में जाकर मिल रहा है, जिसके कारण सम्पूर्ण पेच नदी का पानी प्रदूषित हो गया है, जिसका सीधा प्रभाव आमजनों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, जिसकी जांच कराकर तत्काल कार्यवाही किया जाना, पेच नदी के पानी को प्रदूषित होने से रोका जाना आवश्यक है, विभाग द्वारा उपरोक्त संबंध में कब तक जांच कराकर कार्यवाही की जायेगी? (ख) पेच नदी के पानी को प्रदूषित होने की रोकथाम के संबंध में महाप्रबंधक वेकोलि पेन्च-क्षेत्र परासिया द्वारा आयरन रिमूवल-प्लांट की स्थापना के लिए कहा गया था, परन्तु अभी तक प्लांट की स्थापना नहीं की गई है, क्या कारण है? कब तक प्लांट की स्थापना करा दी जायेगी? प्रश्नकर्ता द्वारा महाप्रबंधक वेकोलि पेन्च क्षेत्र को पत्र क्र.वि.स./परासिया/127/2025/704 दिनांक 08.12.2025 को प्रेषित किया गया था, पत्र पर क्या कार्यवाही हुई है? (ग) पेच नदी के पानी को प्रदूषित होने की रोकथाम के संबंध में प्रश्नकर्ता द्वारा पर्यावरण विभाग सचिव महोदय भोपाल को पत्र क्र. 625, दिनांक 06.11.2025 एवं प्रदूषण जिला अधिकारी छिंदवाड़ा को पत्र क्र. 651, दिनांक 23.10.2024 को पत्र प्रेषित किए जा चुके है जिन पत्रों पर उल्लेखित समस्या के निदान हेतु अभी तक ना तो कोई जांच हुई है, ना ही कार्यवाही की गई है, क्या कारण है? कब तक जांच कराकर कार्यवाही की जायेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बोरवेल के जल के नमूनों की जांच कराये जाने पर आयरन की मात्रा पीने के पानी के मानक अनुसार निर्धारित सीमा में पाई गई है, छिन्दवाड़ा जिले में पेच नदी की जल गुणवत्ता ''ए'' एवं ''बी'' श्रेणी की पाई जाती है। खण्ड चिकित्सा अधिकारी परासिया से प्राप्त जानकारी अनुसार परासिया में दूषित पानी से बीमार कोई भी मरीज अस्पताल में नहीं आया है और कोई भी मरीज दूषित पानी के सेवन से ग्रसित नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) राशि रूपये 166.10 लाख का डी.पी.आर. तैयार किया जाकर दिनांक 06/01/2026 को शासकीय जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज को प्रेषित किया गया है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ग) क्षेत्रीय कार्यालय, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, छिन्दवाड़ा के पत्र दिनांक 27/11/2025 के माध्यम से एक्शन टेकन रिपोर्ट माननीय सदस्य को प्रेषित की जा चुकी है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
जनप्रतिनिधियों की समस्याओं की जानकारी
[गृह]
37. ( क्र. 1836 ) श्रीमती प्रियंका पैंची : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या किसी जनप्रतिनिधि को क्षेत्र के लोगों की समस्या के निराकरण हेतु सक्षम अधिकारी को अवगत कराते हुए उस संदर्भ में जानकारी लेने का अधिकार होता है? यदि हाँ, तो अधिकारी द्वारा अपने कर्तव्यों का निर्वहन ठीक से नहीं किया जा रहा हो, तो क्या संबंधित अधिकारी पर कार्यवाही का कोई प्रावधान है? यदि हाँ, तो क्या? यदि नहीं, तो क्यों नहीं कारण स्पष्ट करे। (ख) जिला गुना के पुलिस अधीक्षक द्वारा प्रश्नकर्ता द्वारा बताए गए कार्यों एवं समस्याओं के निराकरण हेतु दूरभाष माध्यम से संपर्क किया जाता है तो इनके द्वारा हमेशा अनदेखी का रवैया अपनाया जाता है? क्या यह सही है? यदि नहीं, तो क्या इन पर किसी प्रकार की कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो क्या? यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ, माननीय जनप्रतिनिधि को क्षेत्र के लोगों की समस्या के निराकरण हेतु सक्षम अधिकारी को अवगत कराते हुए उस संदर्भ में जानकारी लेने का अधिकार है। किसी भी माननीय जन प्रतिनिधि द्वारा लोगों की समस्याओं के निराकरण हेतु जानकारी मांगे जाने पर प्रदाय की जाती है। (ख) माननीय विधायक विधानसभा क्षेत्र चांचौड़ा द्वारा पुलिस से संबंधित बताये गये कार्यों एवं समस्याओं के निराकरण के संबंध में पत्राचार या दूरभाष पर जब भी चर्चा की जाती है, उनका विधि एवं नियमानुसार निराकरण किया जाकर तत्परतापूर्वक उन्हें अवगत कराया जाता है एवं जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद व समन्वय हेतु सदैव शिष्टाचार का पालन किया जाता है। उपरोक्त संदर्भित पत्र में दिये गये निर्देशानुसार माननीय विधायक विधानसभा क्षेत्र चांचौड़ा द्वारा पुलिस अधीक्षक गुना को प्रेषित पत्रों के संबंध में की गई कार्यवाही की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।
विधायक के पत्रों पर कार्यवाही
[सामान्य प्रशासन]
38. ( क्र. 1839 ) श्रीमती प्रियंका पैंची : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश क्र. एफ 19-76/2007/1/4 दिनांक 19/07/2019 एवं सा.प्र.वि. के आदेश क्रमांक एफ 19-76/2007/1/4 भोपाल दिनांक 22.3.2011 के पालन में पिछले 2 वर्षों में प्रश्नकर्ता द्वारा कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यालय गुना को प्राप्त पत्रों में से, दोनों कार्यालयों द्वारा क्रमशः कितने पत्रों के लिए पावती दी गई है तथा प्रत्यक्षण रजिस्टर संधारित करते हुए निर्धारित अवधि में कार्यवाही कर उत्तर दिया गया? (ख) क्या कलेक्टर या पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में कोई ऐसा मामला आया है जहाँ अधीनस्थ जिलाधिकारियों/खंड स्तरीय अधिकारियों ने विधायक के पत्राचार के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों का पालन नहीं किया है यदि हाँ, तो संबंधित अधिकारी का नाम बताएं। (ग) प्रश्नांश (ख) में सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों का उल्लंघन के दोषी पाए गए अधिकारियों/कर्मचारियों पर दोनों कार्यालयों द्वारा क्या और कौन सी कार्यवाही की गई है? कार्यालयवार, पद सहित विवरण दें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) गुना जिले के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कार्यालय को प्राप्त पत्रों के संबंध में अपेक्षित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट ''अ'' एवं ''ब'' अनुसार है। (ख) जी नहीं। (ग) उत्तरांश ''क'' एवं ''ख'' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
देवरी नाहरमऊ (नन्ही देवरी) में पुलिस चौकी की स्थापना/स्वीकृति
[गृह]
39. ( क्र. 1853 ) श्री बृज बिहारी पटैरिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर जिले के अंतर्गत प्रश्नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र देवरी के केसली विकासखण्ड की ग्राम पंचायत देवरी नाहरमऊ (नन्ही देवरी) का आसपास का क्षेत्र जो वर्तमान में टड़ा पुलिस चौकी के अंतर्गत आता है। उक्त क्षेत्र की पुलिस थाना गौरझामर, पुलिस थाना केसली व पुलिस चौकी टड़ा से दूरी लगभग 18 कि.मी. है। दूरी अधिक होने व विधानसभा क्षेत्र की सीमा की बाह्य सीमा पर स्थित होने से इस क्षेत्र में आपराधिक घटनाएं लगातार घटित होती रहती है। यहां पुलिस चौकी की स्थापना अति आवश्यक है। (ख) क्या देवरी नाहरमऊ (नन्ही देनरी) में पुलिस चौकी की स्थापना की स्वीकृति का कोई प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है? (ग) यदि हाँ, तो वहां पुलिस चौकी कब तक स्थापित कर दी जायेगी? यदि नहीं, तो इस संबंध में शासन की क्या योजना/मंशा है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) क्षेत्र में घटित अपराधों पर नियमानुसार कार्यवाही की जाती है। (ख) जी नहीं। देवरी नाहरमउ (नन्हीं देवरी) में पुलिस चौकी की स्थापना का प्रस्ताव शासन द्वारा निर्धारित मापदण्ड पूर्ण नहीं करने के कारण नस्तीबद्ध किया गया है। (ग) उत्तरांश "ख" के परिप्रेक्ष्य में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
प्रदेश में निवेश प्रस्ताव कम होना
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
40. ( क्र. 1861 ) श्री अजय अर्जुन सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वर्ष 2025-26 के पहले नौ माह में देशभर में प्राप्त लगभग 26.6 लाख करोड़ रुपये के कुल निवेश प्रस्तावों में से मध्य प्रदेश हिस्सेदारी केवल लगभग 3.2 प्रतिशत रही है, जबकि आंध्र प्रदेश अकेले लगभग 25 प्रतिशत से अधिक निवेश प्रस्ताव आकर्षित करने में सफल रहा है? (ख) वर्ष 2024-25 तथा 2025-26 (पहले नौ माह तक) की अवधि में प्रदेश में प्राप्त कुल निवेश प्रस्तावों (मंजूर/प्रस्तावित) की राशि कितनी है तथा इनमें से वास्तविक धरातल पर लागू/कार्यरत निवेश की राशि कितनी-कितनी है? (ग) ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (जीआईएस) 2023 में राज्य सरकार द्वारा लगभग 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त होने के दावें किए गए थे, बतायें कि इन दावों में से अब तक कितने प्रस्तावों के लिए एमओयू क्रियान्वित एवं परियोजनाएं शुरू हो चूंकी हैं तथा उन परियोजनाओं में वर्तमान तक कितना वास्तविक निवेश (करोड़ रुपये में) हुआ है? (घ) क्या सरकार के संज्ञान में यह तथ्य है कि आईटी/ डाटा सेंटर, विनिर्माण एवं सेवा क्षेत्र के बड़े प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु आदि राज्यों में अधिक जा रहे हैं जबकि मध्य प्रदेश में अपेक्षाकृत कम आ रहे हैं, यदि हाँ, तो इसके प्रमुख कारण क्या माने गए हैं प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए राज्य सरकार द्वारा मौजूदा औद्योगिक नीति एवं प्रोत्साहन पैकेज में क्या-क्या संशोधन/सुधार प्रस्तावित हैं? (ड.) निवेश प्रस्तावों के वास्तविक क्रियान्वयन की निगरानी हेतु कौन-सा तंत्र स्थापित किया गया है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) विभाग द्वारा देश भर में प्राप्त निवेश प्रस्तावों की जानकारी संधारित नहीं की जाती है। (ख) वर्ष 2024-25 तथा 2025-26 (पहले नौ माह तक) की अवधि में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग अंतर्गत कुल राशि रू.12.98 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए तथा इनमें से राशि रू. 4.73 लाख करोड़ के उद्योग धरातल पर आने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। (ग) जी नहीं। अपितु ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट (जीआईएस) 2025 में 30 लाख करोड़ रूपये से अधिक के निवेश आशय प्रस्ताव प्राप्त हुये जिसमें से 8.63 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव धरातल पर आने की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। (घ) उल्लेखनीय है कि उद्योग संवर्धन नीति 2025 को पूर्व से प्रचलित उद्योग संवर्धन नीति 2014 (यथा संशोधित) को प्रतिस्थापित कर लागू किया गया है। उद्योग संवर्धन नीति 2025 को निवेशकों के बीच अधिक आकर्षक बनाये जाने के उद्देश्य से पूर्व नीति में उपलब्ध प्रोत्साहनों में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ प्रथम-बार अन्य प्रकार के प्रोत्साहनों का प्रावधान भी किया गया है। प्रथम बार विनिर्माण इकाइयों हेतु प्रावधानित सहायताओं में से निवेश प्रोत्साहन सहायता अंतर्गत एफडीआई गणक, एपीआई/बल्क ड्रग निर्माण वाली फार्मा इकाइयां, मेडीकल डिवाईसेस इकाइयां, इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण इकाइयां, हाई वैल्यू एडेड विनिर्माण इकाइयां हेतु निवेश प्रोत्साहन सहायता अंतर्गत अतिरिक्त सहायता गणक (1.30) है। साथ ही प्रदेश में शोध एवं विकास पारिस्थितिक तंत्र की स्थापना को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से स्वतंत्र शोध एवं विकास इकाइयों को स्थापना पर हुए व्यय की 25% प्रतिपूर्ति का भी प्रावधान रखा गया है। उपरोक्त के अतिरिक्त उद्योग संवर्धन नीति 2014 (यथा संशोधित) अंतर्गत उपलब्ध मूल निवेश प्रोत्साहन सहायता, हरित औद्योगिकीकरण सहायता, अधोसंरचना विकास सहायता आदि में भी बढ़ोत्तरी की गई है। (ड.) निवेश प्रस्तावों के वास्तविक क्रियान्वयन के फॉलोअप हेतु विभाग के अधीन एमपी इण्डस्ट्रीयल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड अंतर्गत 'निवेश प्रोत्साहन सेल' स्थापित की गई है।
थानों में दर्ज प्रकरणों की जानकारी
[गृह]
41. ( क्र. 1863 ) श्री फूलसिंह बरैया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्वालियर चंबल संभाग के थानों में SC/ST ACT के कितने प्रकरण गत तीन वर्ष 2022 से प्रश्न दिनांक तक पंजीबद्ध किये गये? किन-किन प्रकरणों में FIR की गई और कितने प्रकरणों में चालान लगाये गये? थानावार सूची प्रदान करें। (ख) कितने प्रकरणों में पुलिस द्वारा राहत राशि के प्रकरण तैयार कर संबंधित विभाग को भेजे गये और कितने प्रकरण में राहत राशि प्रदान की गई? यदि राहत राशि प्रदान नहीं की गई तो कृपया उसका कारण बतायें। (ग) ग्वालियर चंबल संभाग में कितने प्रकरणों में विवेचक अधिकारी द्वारा समय-सीमा में चालान न्यायालय में पेश किये गये हैं और कितने प्रकरण में समय-सीमा पश्चात चालान न्यायालय में पेश किये गये? क्या समय-सीमा के बाद पेश चालानों में क्या विवेचकों के विरूद्ध कोई कार्यवाही की गई? यदि हाँ, तो क्या? कार्यवाही की प्रतियां उपलब्ध करायें। यदि नहीं, तो क्यों नही?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'अ' एवं 'ब' अनुसार है। (ख) पुलिस द्वारा वर्ष 2022 से प्रश्न दिनांक तक पंजीबद्ध प्रकरणों में से 8597 प्रकरण राहत राशि के तैयार कर समिति को भेजे गये, जिनमें से 7679 प्रकरणों में राहत राशि प्रदान की गई हैं एवं शेष प्रकरण समिति के पास राहत राशि स्वीकृति हेतु प्रक्रियाधीन है। (ग) ग्वालियर चम्बल संभाग में वर्ष 2022 से प्रश्न दिनांक तक अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के अन्तर्गत पंजीबद्ध प्रकरणों में से 7523 चालान समय-सीमा में न्यायालय प्रस्तुत किये गये है एवं 905 चालान समय-सीमा पश्चात न्यायालय में प्रस्तुत किये गये है। समय-सीमा के बाद पेश चालानों में विवेचकों के विरुद्ध विधिक कार्यवाही नहीं की गई हैं। क्योंकि समय-सीमा पश्चात चालान प्रस्तुत करने हेतु अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 की धारा 4 (ड.) का पालन करते हुये, विवेचकों द्वारा चालान न्यायालय में प्रस्तुत किये जाते है।
सूचना के अधिकार अंतर्गत जानकारी
[गृह]
42. ( क्र. 1864 ) श्री फूलसिंह बरैया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जिला-छतरपुर थाना सिटी कोतवाली छतरपुर में दर्ज अपराध पंजीबद्ध/क्रमांक/266/23 में उल्लेखित आरोपी को 18/03/2023 सुबह करीब 11:00 बजे गिरफ्तार कर 19/03/2023 को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था? (ख) क्या उक्त गिरफ्तार आरोपी द्वारा दिनांक 18/03/2023 दोपहर करीब 12:30 बजे आत्महत्या का प्रयास करने के संबंध में दिनांक 19/03/2023 को सुबह करीब 10:00 बजे आवेदन प्राप्त हुआ था? (ग) प्रश्नांश "क" एवं "ख" के अनुसार यदि हाँ, तो क्या थाना सिटी कोतवाली में अपराध पंजीबद्ध/क्रमांक/277/2023 आरोपी को गिरफ्तार दिनांक 18/03/2023 पुलिस अभिरक्षा दिनांक 19/03/2023 को अपराध पंजीबद्ध कर कपड़ों की जब्ती की गई थी? (घ) यदि नहीं, तो क्या दिनांक 18/03/2023 को संभवतः थाना प्रभारी से आरोपी सह-आरोपी के परिजन/ दोस्तों/अन्य व्यक्तियों से भ्रष्टाचार की डील के अनुसार थाना प्रभारी को कुछ रिश्वत के रुपए मिल जाने के कारण वादा के अनुसार दिनांक 20/03/2023 तक थाना प्रभारी द्वारा अपराध पंजीबद्ध नहीं किया गया था? (ड.) क्या PMOPG/E/2025/0187779 एवं PMOPG/E/2025/0188023 ऑनलाइन एवं पुलिस अधीक्षक जिला-छतरपुर दिनांक 02/12/2025 को शिकायत दर्ज पर सक्षम अधिकारी द्वारा गंभीरता से लेकर निष्पक्ष जांच की गई है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं, आरोपी श्री सुरेन्द्र सिंह तोमर को अपराध क्रमांक-266/23 धारा 294, 323, 506 भादवि, 3 (1) (द), 3 (1) (थ), 3 (2) (va) अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम में दिनांक 18.04.2023 के समय 14:30 बजे गिरफ्तार कर दिनांक 19/04/2023 को सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया। (ख) जी नहीं। (ग) जी नहीं, अपराध क्रमांक 277/23 में आरोपी श्री सुरेन्द्र सिंह तोमर से दिनांक 22/06/2023 को एक काले रंग का अधोवस्त्र तथा एक शर्ट जब्त की गयी थी। आरोपी को अपराध क्रमांक 277/23 में धारा 41 (1) दंड प्रक्रिया संहिता का नोटिस दिया गया। (घ) जी नहीं, थाना पर दिनांक 21.04.2023 को आवेदक श्री मनोज पचौरी द्वारा टाईपशुदा आवेदन पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिस पर आपराध क्रमांक 277/23 धारा 309, 109 भादवि का पंजीबद्ध किया गया। (ड.) PMOPG/E/2025/0187779 एवं PMOPG/E/2025/0188023 ऑनलाइन शिकायत कार्यालयीन रिकार्ड अनुसार इकाई में आना नहीं पायी गयी है तथा थाना कोतवाली जिला छतरपुर के अपराध क्रमांक 266/23 तथा अपराध क्रमांक 277/23 के सबंध में आवेदक श्री मनोज कुमार की पब्लिक ग्रीवास अन्तर्गत प्राप्त हुई। इस शिकायत आवेदन पत्र की जांच नगर पुलिस अधीक्षक छतरपुर से करायी गयी तथा जांच उपरांत इसे नस्तीबद्ध किया गया है।
विकास कार्यों की जानकारी
[नर्मदा घाटी विकास]
43. ( क्र. 1883 ) श्री नीरज सिंह ठाकुर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बरगी विधानसभा क्षेत्रांतर्गत जनवरी 2024 से प्रश्नांश दिनांक तक नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा कौन-कौन से कार्य स्वीकृत किये गये है? कार्यों की स्थिति क्या है? वर्तमान में कौन-कौन से कार्य प्रगति पर हैं? (ख) बरगी विधानसभा क्षेत्र हेतु आगामी वर्षों में कराये जाने हेतु कौन-कौन से कार्य प्रस्तावित हैं? सूची उपलब्ध करावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''अ'', ''ब'' एवं ''स'' अनुसार है।
सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा स्थापित इकाइयां
[सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम]
44. ( क्र. 1884 ) श्री नीरज सिंह ठाकुर : क्या सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला जबलपुर में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग की कितनी इकाइयां हैं? इन इकाइयों के तहत कितने लोगों को जनवरी 2024 से प्रश्न दिनांक तक रोजगार दिया गया? सूची उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार संचालित इकाइयों की सूची पते सहित उपलब्ध करावें। (ग) जिला जबलपुर अंतर्गत बरगी विधानसभा में सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा लघु उद्योगों हेतु कौन-कौन से स्थान/भूमि चिन्हित की गई है तथा वहाँ पर कौन-कौन से उद्योग स्थापित किये जाने की योजना है? (घ) सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का लाभ लेने हेतु वर्ष 2024 से प्रश्न दिनांक तक जिला जबलपुर में कितने लोगों द्वारा आवेदन किये गये तथा कितने लोगों के प्रकरण बैंक से स्वीकृत किये गये? कितने प्रकरण अमान्य/अस्वीकृत किये? कारण सहित जानकारी उपलब्ध करावें।
सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ( श्री चेतन्य कुमार काश्यप ) : (क) विभाग द्वारा उद्योग स्थापित नहीं किए जाते हैं अपितु उद्योगों को प्रचलित विभागीय नीति/नियम में प्रावधानित सुविधाओं का लाभ पात्रतानुसार प्रदान किया जाता है। भारत सरकार के उद्यम पोर्टल अनुसार जनवरी 2024 से प्रश्न दिनांक तक जिला जबलपुर में स्थापित 940 विनिर्माण इकाइयों में 3825 रोजगार प्रदाय किये गये हैं, जिसकी सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) उत्तरांश (क) अनुसार है। (ग) जिला जबलपुर अंतर्गत बरगी विधानसभा में ग्राम झांसी में तहसील शहपुरा की 90.96 हेक्टेयर भूमि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया जिला प्रशासन स्तर पर प्रक्रियाधीन है। (घ) सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग द्वारा संचालित योजना मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना का लाभ लेने हेतु 2024 से प्रश्न दिनांक तक जबलपुर में 2037 लोगों द्वारा आवेदन किये गये तथा 847 लोगों के प्रकरण बैंक से स्वीकृत किये गये एवं 407 प्रकरण अमान्य/अस्वीकृत किये गये। आवेदक पात्र न होने, कम सिविल स्कोर एवं प्रोजेक्ट अनुपयुक्त होने के कारण अमान्य/अस्वीकृत किये गये।
विकास कार्यों की जानकारी
[वन]
45. ( क्र.
1885 ) श्री
नीरज सिंह
ठाकुर : क्या
मुख्यमंत्री
महोदय यह
बताने की कृपा
करेंगे कि
(क) बरगी
विधानसभा क्षेत्रांतर्गत
जनवरी 2024 से प्रश्नांश
दिनांक तक वन
विभाग द्वारा
कौन-कौन से कार्य
स्वीकृत किये
गये है? कार्यों की
स्थिति क्या
है? वर्तमान
में कौन-कौन
से कार्य
प्रगति पर हैं? (ख) बरगी
विधानसभा
क्षेत्र हेतु
आगामी वर्षों
में कराये
जाने हेतु
कौन-कौन से
कार्य प्रस्तावित
हैं?
मुख्यमंत्री
( डॉ. मोहन यादव ) : (क)
जानकारी
संलग्न परिशिष्ट-अ
अनुसार
है। (ख)
जानकारी
संलग्न परिशिष्ट-ब
अनुसार
है।
5 अगस्त, 2025 में
मुद्रित प्रश्न
क्र. 1167 में
दिये गये उत्तर
अनुसार
कार्यवाही
[गृह]
46. ( क्र. 1986 ) श्री आरिफ मसूद : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या 5 अगस्त, 2025 में मुद्रित प्रश्न क्र. 1167 के प्रश्नांश (क) का उत्तर जी हाँ में देते हुये प्रश्नांश (ख) का उत्तर श्रीमती रक्षा परते अभियोजन अधिकारी के सेवाकाल के दौरान ही सेवापुस्तिका में नामांकन प्रपत्र प्रमाणित नहीं होने के कारण वैध उत्तराधिकारी की प्रमाणिकता संतोषप्रद नहीं होने से सक्षम न्यायालय द्वारा जारी उत्तराधिकारी प्रमाण प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया गया था। इसी कारण श्रीमती रक्षा परते की सेवानिवृत्ति उपरांत देय स्वत्वों के भुगतान की कार्यवाही विभागीय नियमों के अनुरूप न होने से प्रकरण लंबित रहा है। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता एवं प्रश्नांश (ग) के अनुक्रम में प्रश्न उपस्थित नहीं होता दर्शाया गया है? (ख) यदि हाँ, तो संबंधित कर्मचारी के सेवाकाल में रहते हुये सेवानिवृत्ति के लगभग 6 वर्षों तक जीवित रहते उसके स्वत्वों के लाभ का भुगतान उसे कर दिया जाता तो उसके निधन उपरांत उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र की आवश्यकता ही क्यों पड़ती? समय रहते संबंधित के जीवित रहते उसे स्वत्वों के भुगतान नहीं किये जाने वाले दोषी कौन है? (ग) क्या शासन/विभाग संबंधित कर्मचारी के समय रहते/जीवित रहते उसके स्वत्वों का भुगतान नहीं करने वालों के साथ-साथ शासन द्वारा समय-समय पर जारी दिशा निर्देशों के अन्तर्गत संबंधित कर्मचारी के नॉमिनेशन फार्म को पूर्ण नहीं करने वाले दोषियों पर भी अनुशासनात्मक कार्यवाही करेगा? यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। (ख) श्रीमती रक्षा परते जिला लोक अभियोजन अधिकारी जिला बैतूल के सेवाकाल के दौरान व सेवानिवृत्ति के लगभग 06 वर्षों तक जीवित रहते हुए नियमानुसार नामांकन संबंधी कार्यवाही लंबित रही है। श्रीमती परते कार्यालय प्रमुख (सक्षम प्राधिकारी) की हैसियत से पदस्थ होने के उपरांत भी उपरोक्त कार्यवाही नहीं की गई है। ऐसी स्थिति में शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
बरगी डेम जलाशय की परियोजना की जानकारी
[नर्मदा घाटी विकास]
47. ( क्र. 1990 ) श्री योगेन्द्र सिंह (बाबा) : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रानी अवंतीबाई लोधी सागर परियोजना बरगी डेम जलाशय से वर्तमान में जबलपुर, मण्डला, सिवनी जिलों में पेयजल सिंचाई हेतु कितनी परियोजनाएं संचालित हैं? सिवनी जिले के घंसौर ब्लॉक में माईका उद्वहन सिंचाई योजना स्वीकृति हेतु लम्बित है, लम्बित परियोजना कब तक स्वीकृत होगी, परियोजना में कितने क्यूबिक एमसीएम पानी की आवश्यकता होगी? (ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित जिलों में माईक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना कब तक स्वीकृत की जाएगी तथा उसके लिए कितनी राशि की बजट का प्रावधान किया गया है? (ग) बरगी डेम में सिवनी जिले के लिए कितने जल क्षमता का सिंचाई एवं पेयजल हेतु आवंटित किया गया है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट-''अ'' एवं ''ब'' अनुसार है। घंसौर माईक्रो सिंचाई परियोजना के साध्यता का परीक्षण किया जा रहा है। शेष प्रश्न लागू नहीं। (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्ट-''अ'' के सरल क्रमांक-3 अनुसार है।
कोरोना पदक से सम्मानितों की जानकारी
[गृह]
48. ( क्र. 2019 ) डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या कोरोना बीमारी की लहर एक एवं दो के समय इस कठिन परिस्थितियों में डटकर कार्य करने वाले गृह (पुलिस) विभाग के कर्मचारियों/अधिकारियों को कोरोना पदक से सम्मानित किया गया? (ख) कोरोना पदक से सम्मानित किन-किन कर्मचारियों/अधिकारियों को उनके द्वारा क्या-क्या कार्य करने पर किस मापदण्ड/मानदण्डों के आधार पर प्रदान किये गये? (ग) कोरोना पदक से सम्मानित सभी कर्मचारियों/अधिकारियों की सूची उपलब्ध कराते हुय बताये कि उक्त सभी कर्मचारियों की ड्यूटी उस समय किस सक्षम कार्यालय में थी जिसमें पदस्थ रहते हुये उन्हें पदक से सम्मानित किया गया? (घ) गृह (पुलिस) विभाग के बहुत बड़ी संख्या में ऐसे भी अधिकारी/कर्मचारी हैं जिन्होंने उस कठिन समय में ड्यूटी की लेकिन उन्हें उचित सम्मान/पदक नहीं मिला? शासन ऐसे कर्मचारियों को चिन्हित कर उन्हें सम्मान व पदक से पुरुष्कृत करेगा जिससे उनका मनोबल बढ़े?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) कोविड-19 की लहर एक में ड्यूटी करने वाले पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों को शासन के अनुमोदन उपरांत उनकी इकाइयों से प्राप्त अनुशंसाओं के आधार पर कर्मवीर योद्धा पदक से सम्मानित किया गया है। लहर दो हेतु कर्मवीर योद्धा पदक प्रदाय नहीं किये गये है। (ख) कोविड-19 महामारी के दौरान ड्यूटी करने वाले मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारियों/कर्मचारियों को निम्नानुसार मापदण्ड के आधार पर कोरोना कर्मवीर योद्धा पदक से सम्मानित किया गया है- ''जिन पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा संभावित संक्रमण स्थानों पर दिनांक 24.03.2020 से दिनांक 30.06.2020 तक की अवधि में कम से कम एक माह तक अपनी सेवायें दी है" इकाइयों से प्राप्त अनुशंसाओं के आधार पर कर्मवीर योद्धा पदक के आदेश दिनांक 12.08.2021 को जारी किये गये है, आदेश की छायाप्रति पृष्ठ क्रमांक 01 से 1603 तक पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जानकारी उत्तरांश (ख) में समाहित है। (घ) कोविड-19 महामारी की प्रथम लहर के दौरान संभावित संक्रमण स्थानों पर कार्य करने वाले पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों को कर्मवीर योद्धा पदक से सम्मानित करने हेतु उनकी इकाइयों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर शासन के अनुमोदन उपरांत दिनांक 12.08.2021 को कर्मवीर योद्धा पदक के आदेश जारी किये गये है। जिन अधिकारियों/कर्मचारियों के प्रस्ताव समय-सीमा में प्राप्त नहीं हुये उनका नाम कर्मवीर योद्धा पदक हेतु सम्मिलित नहीं किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
सतना जिले में भूमि की रजिस्ट्री
[वाणिज्यिक कर]
49. ( क्र. 2020 ) डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पंजीकरण संख्या एम पी 348622024ए 1344147 पंजीकरण की तिथि 17.03.2024 एवं ई पंजीकरण संख्या एम पी 348622024 ए 1344155 पंजीकरण की तिथि 17.03.2024 में क्या एक ही चौहद्दी नक्शा पर रजिस्ट्री हुई है? अगर नहीं तो दोनों रजिस्ट्रियों की एक-एक प्रति संलग्न दस्तावेजों एवं चौहद्दी नक्शों जो कि रजिस्ट्री के दस्तावेज के समय लगा है की एक-एक प्रति दें? (ख) क्या सतना जिले के मझगवां में सड़क के किनारे की भूमि की रजिस्ट्री के समय सड़क ही गायब कर स्टाम्प ड्यूटी की चोरी की गई है? अगर नहीं तो क्या आशीष शर्मा ग्राम पोस्ट मझगवां तह. मझगवां के द्वारा आवक लिपिक कलेक्टर कार्यालय सतना में 05.01.2026 को एवं रजिस्ट्रार कार्यालय सतना में 05.01.2026 को शिकायत देकर रिसीव ली? (ग) तहसील मझगवां जिला सतना के परेवा हल्का नंबर 44 की आराजी क्र. 20/1, 22/1, 23/1/1 की भूमि की रजिस्ट्री में 22 लाख रुपयों से ज्यादा की स्टाम्प ड्यूटी को खुर्द-बुर्द (कम जमा किया) करने पर प्रश्नतिथि तक कार्यालय कलेक्टर सतना एवं जिला पंजीयक सतना के द्वारा की गई जांच में किस आदेश क्रमांकों एवं दिनांकों से कब व क्या कार्यवाही की गई के सभी पत्रों/आदेशों की एक प्रति दें? (घ) शासन कब तक जिला पंजीयक एवं उप पंजीयक अनीता रैदास को कब तक निलंबित कर विभागीय जांच संस्थित करेगा?
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी हाँ। (ख) जी नहीं, दोनों दस्तावेजों में विक्रय कृषि भूमि राजमार्ग बाईपास पर होना उल्लेखित है। दस्तावेज के आधार पर प्रचलित गाईड-लाइन वर्ष 2023-2024 प्रावधान अनुसार स्टाम्प एवं पंजीयन शुल्क चुकाया गया है। आशीष शर्मा की शिकायत के आधार पर भारतीय मुद्रांक अधिनियम,1899 की धारा 48 (ख) के तहत कलेक्टर ऑफ स्टाम्प सतना के न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 47/बी.103/2025-26 एवं क्रमांक 48/बी.103/2025-26 दर्ज कर लिया गया है। (ग) पत्र व्यवहार की प्रतियां पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। शिकायत के आधार पर न्यायालय कलेक्टर ऑफ स्टाम्प सतना द्वारा भारतीय मुद्रांक अधिनियम,1899 की धारा 48 (ख) के तहत प्रकरण क्रमांक 47/बी.103/2025-26 एवं क्रमांक 48/बी.103/2025-26 दर्ज कर लिया गया है। (घ) जिला पंजीयक एवं उप पंजीयक द्वारा रजिस्ट्रीकरण अधिनियम 1908 एवं भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 में उल्लेखित प्रावधानों के अंतर्गत कार्यवाही सम्पादित की गई है। उप पंजीयक द्वारा पंजीबद्ध किये गये विलेख में पंजीयन उपरांत कमी अपवंचन दृष्टिगत होने पर नियमानुसार भारतीय स्टाम्प अधिनियम की धारा 48 (ख) में प्रकरण दर्ज कर वैधानिक कार्यवाही किये जाने के प्रावधान वर्णित है। जिला पंजीयक द्वारा स्वप्रेरणा से शिकायत का संज्ञान लेते हुए प्रकरण दर्ज कर लिया गया है। विधिसम्मत कार्यवाही प्रचलित होने से वर्तमान में निलंबन या विभागीय जांच का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों का स्थानांतरण
[गृह]
50. ( क्र. 2029 ) श्री राजेन्द्र भारती : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या पुलिस मुख्यालय म.प्र. द्वारा पत्र क्रमांक पुमु/3/कार्मिक/1520/2025 दिनांक 10.06.2025 एवं पत्र क्रमांक पुमु/3/कार्मिक/7/1545/2025 दिनांक 13.06.2025 जारी किये गये थे? यदि हाँ, तो उक्त पत्रों के क्रम में सभी जिलों से जानकारी संकलित कर ली गई है? यदि हाँ, तो कृपया दतिया जिले को जानकारी सहित जिले से प्राप्त प्रतिवेदन की प्रति उपलब्ध कराये। कुल सेवाकाल की अवधि 3 वर्ष से अधिक होने के बाद भी दतिया जिले में कौन-कौन से अधिकारी/कर्मचारी पदस्थ है कारण बताये एवं सूची प्रदान करें। (ख) दतिया जिले में किन-किन थाना प्रभारियों को उनकी पदस्थ अवधि अधिक होने एवं शिकायत के आधार पर हटाया जायेगा? यदि नहीं, तो क्यों? कारण सहित बताये कि कौन-कौन से पदस्थ थाना प्रभारियों के विरूद्ध जांच प्रचलित है तथा न्यायालयों एवं विभागों में थाना प्रभारियों द्वारा असत्य जानकारियां दी गई है? क्या ऐसे थाना प्रभारियों के विरूद्ध विभाग द्वारा अनुशासनहीनता के अंतर्गत दण्डात्मक कार्यवाही की जायेगी? यदि हाँ, तो कितने थाना प्रभारियों के विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की गई है? यदि नहीं, तो क्यों? कारण सहित बतायें। (ग) क्या प्रदेश के गृह विभाग अथवा पुलिस मुख्यालय द्वारा पुलिस के प्रधान आरक्षक से उप पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारियों की गृह जिले एवं निकट रिश्तेदारी में पदस्थापना न करने संबंधी नियम/निर्देश है? यदि हाँ, तो नियम/निर्देशों की प्रतियां उपलब्ध करायें? यदि नहीं, तो बतायें कि पुलिस की निष्पक्षता हेतु उक्त आदेश/निर्देश जारी किये जायेंगे? यदि हाँ, तो कब तक?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। दतिया जिले की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-अ अनुसार है। दतिया जिले में 03 वर्ष से अधिक अवधि से पदस्थ अधिकारियों/कर्मचारियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ब अनुसार। मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, वल्लभ भवन के पत्र क्रमांक एफ 6-1/2024/एक/9, भोपाल, दिनांक 29.04.2025 द्वारा जारी स्थानांतरण नीति 2025 के अनुसार स्थानांतरण संबंधित कार्यवाही संपादित की जाती है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-स अनुसार। (ख) जिला दलिया में कोई भी थाना प्रभारी लंबी अवधि से पदस्थ नहीं है। थाना प्रभारी के विरुद्ध शिकायतों में उल्लेखित तथ्यों की प्रकृति, गंभीरता, लगाये गये आरोपों की प्रमाणिकता को दृष्टिगत रखते हुये स्थानांतरण हेतु प्रशासकीय निर्णय लिया जाता है। जिला दतिया में किसी भी थाना प्रभारी के विरुद्ध विभागीय जांच प्रचलित नहीं है। वर्तमान में जिला दतिया में पदस्थ थाना प्रभारियों के विरुद्ध ऐसा कोई प्रकरण संज्ञान में नहीं आया है। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है। (ग) मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, वल्लभ भवन के पत्र क्रमांक एफ 6-1/2024/एक/9, भोपाल, दिनांक 29.04.2025 द्वारा जारी स्थानांतरण नीति 2025 की कंडिका-29 में "किन्हीं भी कार्यपालिक कर्मचारियों/अधिकारियों को उनके गृह जिले में स्थानांतरण के द्वारा अथवा पदोन्नति की स्थिति में सामान्यतः पदस्थ न किया जाए, किंतु अविवाहित, विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता महिलाओं के प्रकरणों में उनके गृह जिले में स्थानांतरण किया जा सकेगा।" के निर्देश दिये गये है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-द अनुसार। अतः शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है।
सड़क की स्वीकृति दिये जाने की कार्यवाही
[वन]
51. ( क्र. 2043 ) श्री फूलसिंह बरैया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जिला दतिया विकासखण्ड दतिया के अंतर्गत पीएम जनमन योजना के अंतर्गत स्वीकृत सड़कों 1 भगौर रोड से अगोरा (आदेशपुरा) 2 बड़ौनी खुर्द रोड से रामसागर स्वीकृत हुई है जिनके एलाइन्मेंट में वन भूमि आ रही है? (ख) क्या वन भूमि की स्वीकृति हेतु संबंधित विभाग द्वारा प्रपत्र-क्र, प्रस्ताव एवं सभी दस्तावेज़ जमा कराए गए हैं? यदि हाँ, तो वन भूमि में सड़क बनाने हेतु स्वीकृति/ NOC प्रदान क्यों नहीं की गई है? (ग) क्या यह भी सत्य है कि 1 हेक्टेयर तक की वन भूमि में सड़क निर्माण हेतु स्वीकृति डी.एफ.ओ. अधिकारी द्वारा प्रदान की जाती है? यदि हाँ, तो अभी तक स्वीकृति क्यों प्रदान नहीं की गई है तथा कब तक स्वीकृति प्रदान की जाएगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। (ख) एवं (ग) जी हाँ। प्रश्नांश 'क' में उल्लेखित मार्गों की स्वीकृति वन मण्डल अधिकारी, दतिया द्वारा पत्र दिनांक 27.01.2026 एवं 04.02.2026 से औपचारिक स्वीकृति जारी की गई।
वर्षों तक पदस्थ रहे अधिकारियों की पुन: पदस्थापना
[वाणिज्यिक कर]
52. ( क्र.
2052 ) श्री
कमल मर्सकोले
: क्या
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक
कर महोदय यह
बताने की कृपा
करेंगे कि (क) क्या
प्रदेश के
जिला सिवनी
में पदस्थ
एडीईओ श्री
प्रणय
श्रीवास्तव
के जिले में
ही पूर्व पदस्थापना
कार्यकाल के
समय उनके आवास
से शा. शस्त्र
चोरी संबंधी
प्रकरण विभाग में
दर्ज किया गया
था? यदि
हाँ,
तो क्या उक्त
संबंध में
जिले के जन
प्रतिनिधियों
एवं संगठनों
द्वारा तत्संबंध
में
कार्यवाही हेतु
पत्र शासन को
प्राप्त हुए
थे? यदि
हाँ,
तो वे
क्या है और उन
पर संबंधित अधिकारी
पर आज दिनांक
तक क्या कार्यवाही
की गई?
यदि नहीं, तो
क्यों और कब
तक की जावेगी? (ख) क्या
प्रश्नांश
(क) में
वर्णित
अधिकारी के
प्रकरण में
विभाग के वरिष्ठ
अधिकारियों
द्वारा जानबूझकर
शिथिलता बरती
जा रही है? यदि
नहीं,
तो क्या जांच
प्रक्रिया की
निष्पक्षता
हेतु पुनः
उक्त शस्त्र
चोरी प्रकरण
की जांच प्रदेश
के गृह विभाग
के वरिष्ठ
प्र. अधिकारी
के मार्गदर्शन
में कराई
जावेगी? यदि हाँ, तो कब
तक? (ग)
क्या जिला
सिवनी में
वर्तमान में
पदस्थ एडीईओ श्री
प्रणय
श्रीवास्तव
की शिथिल
कार्यप्रणाली, मदिरा
ठेकेदार के
साथ सांठगांठ, सिवनी
जिले में पुनः
बार-बार पदस्थ
होने एवं जिले
के
जनजातीय/नगरीय
क्षेत्रों
में वृहद मात्रा
में विदेशी
मदिरा का अवैध
विक्रय/परिवहन
के कारण
इन्हें
अन्यत्र जिला/मुख्यालय
संलग्न करने
हेतु कोई पत्र
जनप्रतिनिधियों/
संगठनों
द्वारा शासन
को प्राप्त
हुआ है? यदि हाँ, तो उस
पर क्या
कार्यवाही की
गई? यदि
नहीं,
तो कब तक की
जावेगी? क्या जिले
में 09
वर्षों से
पदस्थ
उपनिरीक्षकों
को अन्यत्र जिला
पदस्थ किया
जावेगा? (घ) क्या
सिवनी जिले के
नगरीय एवं
जनजातीय
क्षेत्रों में
स्थित मदिरा
दुकानों के
परिसर में
खुलेआम मदिरा
का सेवन, शा. मार्गों में
मदिरा दुकान
के साइन बोर्ड, मदिरा
दुकानों में
मदिरा के
अतिरिक्त
अन्य सामग्री
का विक्रय, मदिरा
विज्ञापन
संबंधी एवं
अन्य
अनियमितताएं
जो कि मदिरा
दुकानों में
लगे
सी.सी.टी.व्ही.
कैमरे में भी
दर्ज भी है, संबंधी पत्र
जनप्रतिनिधियों/मजदूर
संघों द्वारा
शासन/विभाग को
प्राप्त हुए
है? यदि
हाँ,
तो उसकी
सूक्ष्म जांच
अन्य विभाग के
वरिष्ठ अधिकारियों
के
मार्गदर्शन
में संबंधित
शिकायतकर्ता
के कराई गई? यदि
नहीं, तो
क्यों और कब
तक कराई
जावेगी?
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक
कर ( श्री
जगदीश देवड़ा
) : (क)
कलेक्टर एवं
जिला दण्डाधिकारी
सिवनी के पत्र
क्रमांक-680
दिनांक 17.06.2015 से
प्राप्त
प्रतिवेदन
अनुसार श्री
प्रणय
श्रीवास्तव
द्वारा जिला
सिवनी में
उनके रहवासी
मकान से 02 शस्त्र
चोरी संबंधी
प्रथम सूचना
रिपार्ट थाना
कोतवाली
सिवनी में
दिनांक 15.03.2015 को दर्ज
करायी गयी।
पुलिस की जांच
टीम द्वारा
प्रकरण की
विवेचना के
दौरान चोरी
हुए शस्त्रों
में से एक शस्त्र
बरामद कर लिया
गया, जिसे
जिला आबकारी
कार्यालय
सिवनी में
दिनांक 27.07.2015 को जमा
करा दिया गया, साथ
ही एक अन्य
शस्त्र
पुलिस
विवेचना में
प्राप्त नहीं
हो पाने से
उक्त शस्त्र
की कीमत के
समतुल्य
राशि चालान
क्रमांक 84
दिनांक 27.05.2016 से
शासकीय मद में
जमा कराये
गये। उक्त
प्रकरण के
संबंध में
श्री राकेश
पाल सिंह, पूर्व
विधायक
विधानसभा
केवलारी
द्वारा पत्र
क्रमांक 1002
दिनांक 26.02.2020 कलेक्टर
जिला सिवनी को
प्रस्तुत कर
अनुशासनात्मक
कार्यवाही का
लेख किया गया, जिसके
आधार पर कलेक्टर
जिला सिवनी के
अर्द्धशासकीय
पत्र क्रमांक 528
दिनांक 12.03.2020 के
अनुक्रम में
श्री प्रणय
श्रीवास्तव, सहायक
जिला आबकारी
अधिकारी
द्वारा की गई
प्रथम दृष्टयता
लापरवाही
परिलक्षित
होने पर तत्काल
सूचना नहीं
देने एवं
आवंटित
शासकीय शस्त्र
की सुरक्षा
में लापरवाही
की आधार पर
आबकारी आयुक्त
कार्यालय के
आदेश दिनांक 20.05.2021
से विभागीय
जांच संस्थित
की गयी। उक्त
प्रकरण में
विभागीय जांच
उपरांत
प्राप्त
निष्कर्षों
एवं तथ्यों
के आधार पर
आबकारी आयुक्त
कार्यालय के
आदेश दिनांक 21.01.2022
से विभागीय
जांच प्रकरण
समाप्त किया
गया है। (ख) उत्तरांश
(क) अनुसार
संबंधित
अधिकारी के
विरूद्ध
विभागीय जांच के
जांच
प्रतिवेदन
अनुसार
प्रकरण में
श्री प्रणय
श्रीवास्तव, सहायक
जिला आबकारी
अधिकारी पर
लगाये गये आरोपों
की पुष्टि
नहीं होने से
विभागीय जांच
प्रकरण समाप्त
किया गया है।
इसके साथ ही
पुलिस विभाग
द्वारा भी
प्रकरण की
विवेचना में
ऐसा कोई ऐसा
कोई तथ्य/साक्ष्य
परिलक्षित
नहीं हुआ है, जिसके
लिये पृथक से
जांच किये
जाने की आवश्यकता
हो। (ग) जी हाँ, श्री
प्रणय
श्रीवास्तव
सहायक जिला
आबकारी
अधिकारी, जिला
सिवनी को अन्यत्र
पदस्थ किये
जाने हेतु
श्री अजब सिंह
डेहरिया, मंडल
भाजपा
कार्यकर्ता, ग्राम
मडई, तहसील
लखनादोन जिला
सिवनी का
आवेदन दिनांक 21.02.2025
प्राप्त
हुआ। श्री
प्रणय
श्रीवास्तव
सहायक जिला
आबकारी
अधिकारी को
जिला सिवनी में
पदस्थ हुये
अल्प अवधि
होने से स्थानांतरण
नीति के
प्रावधान
अनुसार अन्यत्र
स्थानांतरण
नहीं किये
जाने का
प्रशासकीय
निर्णय लिया
गया है। माननीय
विधायक श्री
कमल मर्सकोले, विधानसभा
बरघाट, जिला सिवनी
का पत्र
दिनांक 26.10.2025 प्राप्त
हुआ है, जिसके
संबंध में
विभागीय पत्र
दिनांक 24.12.2025 द्वारा
आबकारी आयुक्त
से टीप चाही
गई है। जिले
में 09
वर्षों से
पदस्थ
आबकारी
उपनिरीक्षकों
को अन्यत्र
पदस्थ करने
के संबंध में
उल्लेखनीय
है कि विभाग
द्वारा स्थानांतरण
नीति में
वर्णित
प्रावधानों
एवं प्रशासनिक
व्यवस्था
को दृष्टिगत
रखते हुए स्थानांतरण
किया जाता है।
(घ) जी हाँ।
जनप्रतिनिधियों/मजदूर
संघों के पत्र
प्राप्त हुए, जिनकी
जांच विभागीय
अधिकारियों
से करायी जाकर
संबंधित
शिकायतकर्ताओं
को अवगत कराया
गया। मदिरा
दुकानों से
मदिरा के
अतिरिक्त
अन्य
सामग्रियों
का विक्रय
होना नहीं
पाया गया है।
दुकानों के
आस-पास मदिरा
का सेवन कराने
वालों के
विरूद्ध मध्यप्रदेश
आबकारी
अधिनियम 1915 की
धारा 36
(ए) के
अंतर्गत 147 न्यायालयीन
प्रकरण कायम
किये गये है
तथा मध्यप्रदेश
आबकारी
अधिनियम 1915 की
सामान्य
अनुज्ञप्ति
शर्तों के
अनुसार
कार्यवाही करते
हुए वित्तीय
वर्ष 2025-26
में दिनांक 01
अप्रैल 2026 से दिनांक 12.02.2026
तक कुल 1742 विभागीय
प्रकरण कायम
किये गये है।
विभागीय अधिकारियों
से जांच
उपरांत
नियमानुसार
कार्यवाही किये
जाने से अन्य
विभाग के
वरिष्ठ
अधिकारियों
से जांच कराये
जाने की आवश्यकता
प्रतीत नहीं
होती।
कम्प्यूटर ऑपरेटर (जॉब दर)/श्रमिकों के ई.पी.एफ. जमा किया जाना
[वन]
53. ( क्र. 2053 ) श्री कमल मर्सकोले : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रदेश के सिवनी जिले में स्थित वन वृत्त कार्यालय सिवनी में अंतर्गत कार्यालयों/परिक्षेत्रों में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर (जॉब दर)/श्रमिकों के वेतन से व शासन द्वारा ई.पी.एफ. की राशि जमा की जा रही है? यदि नहीं, तो कब तक की जावेगी? क्या वन वृत्त सिवनी के अंतर्गत समस्त कार्यालयों में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर (जॉब दर) को माह जून-जुलाई 2025 तक मिलने वाला मासिक वेतन, वर्तमान में अर्थात जुलाई 2025 के उपरांत भी उसी प्रकार दिया जावेगा? (ख) क्या प्रदेश के वन वृत्त/ वन विकास निगम सिवनी एवं जबलपुर के अंतर्गत उप वनमंडल कार्यालयों, वन परिक्षेत्र कार्यालयों में वर्तमान में कार्यालय प्रमुखों के रिक्त पद के विरूद्ध सभी पदों की पद पूर्ति की गई है? यदि नहीं, तो क्यों और कब तक उन रिक्त पदों के विरूद्ध पद पूर्ति कर दी जावेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) सिवनी जिले में स्थिति वनवृत्त कार्यालय सिवनी स्थित अधीनस्थ कार्यालयों/परिक्षेत्रों में घंटे के आधार पर जाब दर अनुसार कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटर्स के पारिश्रमिक से ई.पी.एफ. की राशि नहीं जमा की जा रही है। मध्य प्रदेश राजपत्र दिनांक 30.05.2013 में जारी अधिसूचना की कंडिका 8 के अनुसार पी.एफ.आर.डी.ए. द्वारा विनियमित राष्ट्रीय पेंशन स्कीम के तहत दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों की निर्धारित राशि उनके स्थाई खाते में जमा की जा रही है। प्रश्नांश के शेष भाग के सम्बंध में ई.पी.एफ. संगठन से मार्गदर्शन लेकर विधि अनुरुप कार्यवाही की जाना सम्भव होगी। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। समय-सीमा बताना संभव नहीं है।
वन विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी
[वन]
54. ( क्र. 2096 ) श्री चन्दरसिंह सिसौदिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) गरोठ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत विभाग द्वारा कौन-कौन सी योजना का संचालन किया जा रहा है? पिछले 3 वर्षों में विभाग द्वारा क्या कार्य करवाए गए, किस एजेंसी के माध्यम से? सूची उपलब्ध करावे। (ख) किन-किन कार्यों के प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं? लेकिन प्रश्न दिनांक तक लंबित हैं? सूची उपलब्ध करावे। (ग) वन्य जीव से कोई जनहानी हुई हैं? यदि हाँ, तो पीड़ित परिवार को सहायता राशि दी गई है? यदि हाँ, तो बताएं? यदि नहीं, तो क्या शासन पीड़ित परिवार को सहायता राशि प्रदान करेगा? यदि हाँ, तो कब तक। (घ) मुख्य मार्ग से हिंगलाजगढ़ आने जाने वाले स्थानीय रहवासियों से बैरियर लगाकर राशि वसूली जा रही है? यदि हाँ तो क्या शासन स्थानीय निवासियों को छूट प्रदान करेगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) वनमण्डल मंदसौर के गरोठ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार है। (ख) वनमण्डल मंदसौर अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 की स्थिति में ऐसे कोई भी प्रस्ताव लंबित नहीं है। (ग) जी हाँ। वन्यजीव से जनहानि होने पर पीड़ित परिवार को क्षतिपूर्ति मुआवजा राशि प्रदान की गई है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है। (घ) जी नहीं। शेष प्रश्न उत्पन्न नहीं होता।
अंबुजा सीमेंट उद्योग को स्थापित करना
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
55. ( क्र. 2097 ) श्री चन्दरसिंह सिसौदिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) गरोठ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत अंबुजा सीमेंट को उद्योग स्थापित करने हेतु कुल कितनी शासकीय भूमि प्रदाय की है? किन-किन शर्तों के अधीन दी गई है? प्रति उपलब्ध करावे। (ख) कंपनी द्वारा उद्योग स्थापित नहीं करने पर प्रदाय की गई शासकीय भूमि पुनः शासकीय अधीन घोषित कर दी गई है? यदि हाँ, तो उक्त सर्वे आदेश की प्रति उपलब्ध करावे। यदि नहीं, तो विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की गई है? (ग) क्षेत्र के किसानों की भूमि उद्योग स्थापित करने के लिए ली गई। संबंधित कंपनी के द्वारा उद्योग स्थापित नहीं करने पर विभाग द्वारा क्या कार्रवाई की जा रही है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) गरोठ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत मेसर्स अंबुजा सीमेंट को उद्योग स्थापित करने हेतु कुल 24.554 हेक्टेयर शासकीय भूमि आवंटित की गई है। दिनांक 25.02.2012 को निष्पादित पट्टाविलेख में निहित शर्तों के तहत इकाई को भूमि आवंटित की गई है। निष्पादित पट्टाविलेख की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। इकाई द्वारा निर्धारित समयावधि में उद्योग स्थापित ना करने तथा निष्पादित पट्टाविलेख की कण्डिकाओं के उल्लंघन के फलस्वरूप आदेश दिनांक 09.11.2016 से इकाई के पक्ष में निष्पादित पट्टाविलेख एवं आवंटन आदेश निरस्त किया गया। उक्त आदेश के विरूद्ध इकाई द्वारा प्रमुख सचिव वाणिज्य, उद्योग और रोजगार विभाग के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई जो अपीलीय अधिकारी के आदेश दिनांक 24.03.2017 से निराकृत हुई जिससे पूर्व में जारी निरस्तीकरण आदेश दिनांक 09.02.2016 को अपास्त किया गया। (ग) इकाई को उद्योग स्थापित करने हेतु किसानों की भूमि का अर्जन नहीं किया गया है। इकाई को समय-समय पर नियमानुसार दिनांक 27.07.2017, 25.10.2017 एवं 23.10.2023 को उद्योग स्थापना हेतु सूचना पत्र प्रसारित किये गये है।
लोकतंत्र सेनानी की सम्मान निधि
[सामान्य प्रशासन]
56. ( क्र. 2151 ) श्री अजय विश्नोई : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या मध्यप्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा जारी पत्र क्रमांक 452/2017/1/13 दिनांक 03.07.2017 के द्वारा मीसा बंदियों के दिवंगत होने पर उनकी पत्नि/पति को सम्मान निधि स्वीकृत करने का अधिकार जिला कलेक्टर को दे दिया गया है? (ख) क्या म.प्र. के सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा जारी पत्र क्रमांक 831463/2022/1/13 भोपाल दिनांक 27.09.2022 के द्वारा जिला कलेक्टर को निर्देशित किया गया है कि मीसी बंदी के जीवित रहते हुये उनकी पत्नि/ पति का नाम पी.पी.ओ. में अंकित कर लिया जाये ताकि, उनके दिवंगत होने पर, पत्नि/पति को सम्मान निधि मिलने में विलम्ब नहीं हो? (ग) यदि हाँ, तो प्रश्नांश (क) एवं (ख) में वर्णित सामान्य प्रशासन विभाग के उक्त आदेशों का पालन किस-किस जिले में कर लिया गया है और किस-किस जिले में नहीं किया गया है? (घ) जिन जिलों में इसका पालन नहीं हुआ है उनमें इसका पालन कब तक सुनिश्चित कर लिया जावेगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। प्रश्न में उल्लेखित पत्र जारी किया गया है। (ख) जी हाँ। प्रश्न में उल्लेखित निर्देश जारी किए गए हैं। (ग) उक्त दोनों आदेशों का प्रदेश के समस्त जिलों में पालन किया जा रहा है। (घ) प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
केन्द्रीय जेल सागर के नवीन भवन का निर्माण
[जेल]
57. ( क्र. 2186 ) इंजीनियर प्रदीप लारिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या केन्द्रीय जेल सागर में कितने कैदियों को रखने की स्वीकृत क्षमता है? प्रश्न दिनांक तक कितने कैदी/बंदी वर्तमान में है? (ख) क्या केन्द्रीय जेल की क्षमता से अधिक कैदियों/बंदियों की संख्या को दृष्टिगत रखते हुए जेल विभाग द्वारा नये भवन की योजना विभाग द्वारा बनाई गई है? यदि हाँ, तो केन्द्रीय जेल निर्माण हेतु प्रश्न दिनांक तक इस विषय में क्या-क्या कार्यवाही की गई है? (ग) क्या केन्द्रीय जेल सागर को शासकीय भूमि का आवंटन ग्राम चितौरा विकासखण्ड सागर में हुआ है? यदि हाँ, तो उक्त ग्राम पंचायत की कितनी भूमि आरक्षित की गई है? केन्द्रीय जेल के निर्माण की क्या समयावधि रहेगी? (घ) क्या भूमि आरक्षित करते समय ग्राम पंचायत/गांव में निस्तार हेतु/नवीन शासकीय भवन हेतु/गौशाला हेतु ग्राम पंचायत में भूमि रकबा उपलब्ध है तथा उक्त ग्राम पंचायत में विस्थापित योजना के तहत पंचायत में विकास कार्य को सम्मिलित किया गया है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) केन्द्रीय जेल सागर में 974 कैदियों को रखने की क्षमता है, दिनांक 03.02.2026 को 1650 कैदी परिरुद्ध है। (ख) जी हाँ, पुनर्घनत्वीकरण योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल द्वारा बनाई गई है। नई जेल निर्माण का डी.पी.आर. तैयार किया जाकर दिनांक 25.08.2025 को साधिकार समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया था, जिसमें आगामी 25 वर्षों के मान से क्षमता निर्धारित कर संशोधित डी.पी.आर. प्रस्तुत के निर्देश हुए। डी.पी.आर. संशोधन किया जाकर साधिकार समिति की आगामी बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। (ग) जी हाँ। ग्राम चितौरा विकासखण्ड के अंतर्गत पटवारी हल्का नं. 56 तहसील सागर स्थित भूमि खसरा नं. 441 कुल रकबा 57.88 हेक्टेयर में से 10 हेक्टेयर एवं 448/1 कुल रकबा 82 हेक्टेयर में से 70 हेक्टेयर कुल 80 हेक्टेयर जेल विभाग को हस्तांतरित की गई है। मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मण्डल द्वारा संशोधित डी.पी.आर. साधिकार समिति से अनुमोदन उपरांत निविदा की कार्यवाही की जाना प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा निर्धारित की जाना संभव नहीं है। (घ) चरनोई के लिए 02 प्रतिशत भूमि आरक्षित की गई है।
हवाई पट्टी का उन्नयन एवं घरेलू विमान सेवा की जानकारी
[विमानन]
58. ( क्र. 2187 ) इंजीनियर प्रदीप लारिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या ढाना हवाई पट्टी का उन्नयन कर घरेलू विमानन सेवा प्रारंभ करने का कोई प्रस्ताव/ प्राक्कलन शासन/विभाग द्वारा तैयार किया गया है? (ख) ढाना हवाई पट्टी उन्नयन के लिए विभाग द्वारा वर्ष 2024-25, 2025-26 से प्रश्न दिनांक तक कितनी राशि उन्नयन निर्माण कार्यां के लिए प्रदान की गई? (ग) क्या उन्नयन कार्यों के उपरांत ढाना हवाई पट्टी, घरेलू विमान सेवा प्रारंभ करने के मानक स्तर पर/मापदण्ड का पालन करती है? यदि हाँ, तो जानकारी देवें। (घ) प्रश्नांश (ग) में वर्णित मापदण्ड को ढाना हवाई पट्टी पूर्ण करती है/क्षमता रखती है तो घरेलू विमान सेवा कब तक प्रारंभ की जावेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं अपितु ढाना हवाई पट्टी के विकास/विस्तार हेतु फिजीबिलिटी सर्वे किया जा रहा है। (ख) ढाना हवाई पट्टी पर रनवे की रिकार्पेटिंग एवं बाउण्ड्रीवॉल के निर्माण हेतु दिनांक 12/06/2024 को राशि रूपये 717.73 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई, जिस पर वर्ष 2024-25 में राशि रूपये 653.94 लाख व्यय किया गया है तथा वर्ष 2025-26 में कोई व्यय नहीं किया गया है। (ग) एवं (घ) उत्तरांश ''क'' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
अवशेष राशि का उपयोग
[योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी]
59. ( क्र. 2217 ) श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 1 अप्रैल 2014 से नीमच विधानसभा में प्रश्नकर्ता विधायक के विधायक निधि, खनिज निधि एवं विधायकों की अनुशंसा से किए जाने वाले अन्य कार्यों में कितनी अवशेष निधि शेष रही? वर्षवार जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश (क) संदर्भित अवशेष निधि के संबंध में विभाग द्वारा क्या निर्देश जारी किए गए हैं? निर्देशों की प्रतिलिपि दें। क्या अवशेष निधि विधानसभा के प्रत्येक कार्यकाल में शासन स्तर पर चालान के रूप में जमा कराना आवश्यक है? यदि हाँ, तो उक्त तिथि से कब-कब अवशेष निधि की राशि को चालान के रूप में जमा किया गया? जमा की प्रतिलिपि दें। (ग) प्रश्नांश (क) और (ख) संदर्भित 1 जनवरी 2024 के पश्चात प्रश्नकर्ता विधायक के कितने कार्यों की अवशेष निधि वर्तमान में उपलब्ध है? कुल राशि सहित जानकारी दें।
उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। जी हाँ। उक्त तिथि से आज दिनांक तक क्रियान्वयन एजेंसी द्वारा अवशेष निधि की राशि चालान के रूप में जमा नहीं की गई है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।
आधार केन्द्रों की वर्तमान स्थिति एवं सुविधाएं
[विज्ञान और प्रौद्योगिकी]
60. ( क्र. 2221 ) श्री निलेश पुसाराम उईके : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छिंदवाड़ा/पांढुर्णा जिले में वर्तमान में कुल कितने आधार केन्द्र (शासकीय एवं निजी) संचालित हैं? कृपया विकासखंडवार केन्द्रों की सूची उपलब्ध कराएं। (ख) क्या शासन को यह जानकारी है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधार केन्द्रों की कमी है? यदि हाँ, तो क्या शासन नए आधार केन्द्र खोलने पर विचार कर रहा है? (ग) विगत दो वर्षों में छिंदवाड़ा/पांढुर्णा जिले में कितने आधार केन्द्रों के विरुद्ध अनियमितताओं या अधिक शुल्क वसूली की शिकायतें प्राप्त हुई हैं? उन पर विभाग द्वारा अब तक क्या ठोस कार्यवाही की गई है? (घ) क्या जिला प्रशासन द्वारा इन केन्द्रों के नियमित निरीक्षण हेतु कोई रोस्टर तैयार किया गया है? यदि हाँ, तो पिछले 6 माह में कितने केन्द्रों का निरीक्षण किया गया और उनमें क्या कमियां पाई गईं? (ड.) क्या शासन प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर या उचित मूल्य की दुकानों (राशन दुकान) पर 'आधार किट' उपलब्ध कराकर स्थायी आधार केन्द्र स्थापित करने की कोई योजना बना रहा है? यदि हाँ, तो कब तक?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) आधार केन्द्रों की स्थापना एवं संचालन भारत सरकार/भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा किया जाता हैं। अत: जानकारी भारत सरकार के कार्य क्षेत्र की होने के कारण विभाग की जानकारी निरंक है। (ख) से (ड.) उत्तरांश ''क“ अनुसार है।
क्रेशर मशीन एवं खनन लीज की जानकारी
[खनिज साधन]
61. ( क्र. 2232 ) श्री मोहन शर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजगढ़ जिले की तहसील नरसिंहगढ़ में कितनी क्रेशर मशीनें संचालित हैं? फर्म का नाम, संचालक का नाम, स्थान, स्वीकृत खनन लीज का विवरण एवं स्वीकृत क्षमता बताएं। (ख) क्या विभाग को जानकारी है कि संचालित क्रेशर मशीन संचालकों द्वारा स्वीकृत खनन लीज से अधिक खनन किया जा रहा है? यदि हाँ, तो वर्ष जनवरी 2020 से प्रश्न दिनांक तक कितनी क्रेशर मशीनों की जांच कराई गई, जिनमें लीज से अधिक खनन पाया गया है उन पर क्या कार्यवाही की गई हैं? यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) राजगढ़ जिले की तहसील नरसिंहगढ़ में कुल 15 क्रेशर मशीनें संचालित हैं। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं, संचालित क्रेशर मशीन संचालकों द्वारा स्वीकृत खनन लीज से अधिक खनन नहीं किया जा रहा है। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
पांचवा वेतन आयोग का लाभ दिया जाना
[सामान्य प्रशासन]
62. ( क्र. 2235 ) श्रीमती सेना महेश पटेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्य प्रदेश राज्य तिलहन संघ से प्रतिनियुक्ति पर सामान्य प्रशासन विभाग में वर्ष 2000 से 2004 तक कितने कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ रहे हैं? (ख) क्या प्रश्नांश (क) के प्रकाश में कितने कर्मचारी निज सहायक के पद पर पदस्थ रहे हैं? नामवार जानकारी दें। (ग) कितने ऐसे कर्मचारी है जिन्हें उक्त अवधि में, वेतनमान का लाभ दिया जा चुका है? क्या यह भी सही है कि वर्ष 2004 के बाद तिलहन संघ से प्रतिनियुक्ति पर रहे कुछ सेवायुक्तों को विभाग द्वारा पांचवा वेतनमान का लाभ दे दिया गया है? यदि हाँ, तो 2000 से 2004 तक पदस्थ रहे कर्मचारियों को किन कारणों से यह लाभ नहीं दिया गया? कारण स्पष्ट करें। (घ) क्या दिनांक 19.05.2016 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में तिलहन संघ से शासन में पदस्थ सेवायुक्तों को न्यायालयीन आदेशों के पालन में पांचवा वेतनमान सक्षम स्तर से स्वीकृत करने का निर्णय लिया गया था? यदि हाँ, तो उक्त निर्णय का पालन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा अब तक क्यों नहीं किया जा रहा है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) मध्यप्रदेश राज्य तिलहन संघ से प्रतिनियुक्ति पर सामान्य प्रशासन विभाग में वर्ष 2000 से वर्ष 2004 तक पदस्थ रहे कर्मचारियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'अ' अनुसार है। (ख) श्री बेन्नी पी.एम., निज सहायक के पद पर पदस्थ रहे हैं। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'अ' अनुसार है। श्री बेन्नी पी.एम. को पांचवे वेतनमान का लाभ माननीय न्यायालय में याचिका लंबित होने से नहीं दिया गया है। (घ) जी हाँ। तिलहन संघ से प्रतिनियुक्ति पर पदस्थकर्मियों के संबंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में दिनांक 19/05/2016 को बैठक आयोजित की गई थी। मध्यप्रदेश शासन सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश दिनांक 24/06/2020 के दृष्टिगत वेतन निर्धारण किया गया है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'ब' अनुसार है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
काली बावड़ी और चिप्राटा में पुलिस चौकी स्वीकृत करना
[गृह]
63. ( क्र. 2240 ) डॉ. हिरालाल अलावा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) धार जिले के मनावर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत काली बावड़ी और कुक्षी विधानसभा अंतर्गत चिप्राटा में पुलिस चौकी स्वीकृत किए जाने बावत् प्रश्नकर्ता ने माननीय मुख्यमंत्री जी, माननीय गृह मंत्री जी, गृह विभाग एवं पुलिस अधीक्षक धार को कब-कब पत्र लिखा? उक्त पत्र में प्रश्नकर्ता ने किन-किन विषयों के तहत पुलिस चौकी स्वीकृत किए जाने की मांग की है? उक्त पत्र पर प्रश्न दिनांक तक क्या-क्या कार्यवाही की गई? समस्त कार्यवाही का ब्यौरा देवें। यदि कार्यवाही नहीं की गई तो विधि सम्मत कारण बताएं। (ख) काली बावड़ी और चिप्राटा में पुलिस चौकी स्वीकृत किए जाने बावत् क्या प्रक्रिया आगे बढ़ी है? कब तक पुलिस चौकी स्वीकृत की जाएगी? समय-सीमा सहित बताएं। (ग) काली बावड़ी और चिप्राटा में और उसके आसपास के क्षेत्रों में विगत तीन वर्षों में चोरी, लूट एवं अन्य अपराधों की कौन-कौन सी कितनी घटनाएं संज्ञान में आई हैं? उक्त घटनाओं के संबंध में किस पुलिस चौकी/पुलिस स्टेशन द्वारा क्या कार्यवाही की गई? उक्त घटनाएं संबंधित पुलिस स्टेशन के अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा कितनी कम अथवा कितनी अधिक हैं? प्रति सहित बताएं। (घ) क्या माननीय मंत्री महोदय काली बावड़ी और चिप्राटा में पुलिस चौकी स्वीकृत किए जाने बावत् आदेश जारी करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रश्नकर्ता द्वारा विधानसभा याचिका क्रमांक 625 द्वारा काली बावड़ी, लन्हेरा बुजुर्ग तथा चिप्राटा में पुलिस चौकी की मांग की थी। काली बावड़ी में चौकी का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय स्तर पर शासन को प्रेषित किये जाने वाले बल वृद्धि के एकजाई प्रस्ताव में शामिल किया गया है। लुन्हेरा बुजुर्ग को काली बावड़ी के प्रस्ताव में शामिल किया गया इस कारण पृथक से लुन्हेरा बुजुर्ग में चौकी का प्रस्ताव नहीं भेजा गया। चिप्राटा की कुल जनसंख्या लगभग 1500 है। थाना कुक्षी से सतत पेट्रोलिंग, सुगम्यता एवं कानून व्यवस्था की स्थिति सामान्य होने से चिप्राटा में पुलिस चौकी की स्थापना की आवश्यकता नहीं है। (ख) जी हाँ। काली बावड़ी में चौकी का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय स्तर पर शासन को प्रेषित किये जाने वाले बलवृद्धि के एकजाई प्रस्ताव में शामिल किया गया है। शीघ्र ही शासन को एकजाई प्रस्ताव प्रेषित किया जावेगा। समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है। चिप्राटा में पुलिस चौकी की स्थापना की आवश्यकता नहीं है। (ग) काली बावड़ी में विगत तीन वर्षों में चोरी के 25 अपराध, लूट के 0 अपराध एवं अन्य शीर्ष के 290 अपराध पंजीबद्ध हुए है, जिन पर थाना धरमपुरी द्वारा समय-समय पर विवेचना कर माननीय न्यायालय में चालान पेश किए गए। चिप्राटा में चोरी एवं लूट से संबंधित कोई भी अपराध पंजीबद्ध नहीं हुआ है, अन्य शीर्ष में मात्र 09 अपराध पंजीबद्ध हुए है जिन पर थाना कुक्षी द्वारा समय-समय पर विवेचना कर माननीय न्यायालय में चालान पेश किए गए। ग्राम काली बावड़ी क्षेत्रान्तर्गत घटित घटनाएं संबंधित पुलिस स्टेशन धरमपुरी के अन्य क्षेत्रों की 31% है। ग्राम चिप्राटा क्षेत्रान्तर्गत घटित घटनाएं संबंधित पुलिस स्टेशन कुक्षी के अन्य क्षेत्रों की 0.7% है। (घ) काली बावड़ी में पुलिस चौकी का प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है। चिप्राटा में पुलिस चौकी की आवश्यकता नहीं है।
लिपिक संवर्ग के समयमान वेतनमान की विसंगति
[वित्त]
64. ( क्र. 2277 ) श्री अनिल जैन कालूहेड़ा : क्या उप मुख्यमंत्री, वित्त महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या मैदानी लिपिक संवर्ग एवं मंत्रालयीन लिपिक संवर्ग के भर्ती नियम एवं शैक्षणिक योग्यताएं समान है? (ख) यदि प्रश्नांश (क) का उत्तर हाँ है तो, मंत्रालयीन लिपिक एवं मैदानी लिपिक के समयमान वेतनमान में भिन्नता क्यों है? (ग) मैदानी लिपिक संवर्ग के समयमान वेतनमान की विसंगति को दूर करने हेतु क्या कोई प्रक्रिया प्रचलन में है? यदि है तो अवगत करावेंl
उप मुख्यमंत्री, वित्त ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी हाँ। (ख) शासन के नीतिगत निर्णय अनुसार मंत्रालयीन लिपिक संवर्ग के समयमान वेतनमान के आदेश जारी किये गये है। (ग) वर्तमान में कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
जिला एवं विशेष सशस्त्र बल कर्मचारियों की पदोन्नति
[गृह]
65. ( क्र. 2278 ) श्री नरेन्द्र प्रजापति [इंजीनियर] : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला पुलिस बल एवं विशेष सशस्त्र बल की चयन प्रकिया, प्रशिक्षण एक समान ही है, क्या पदोन्नति प्रक्रिया भी एक जैसी है? यदि हाँ, तो जिला पुलिस बल की पदोन्नति 10 वर्षों में एवं विशेष सशस्त्र में पदोन्नति 25 वर्षों में भी पदोन्नति नहीं होती है? क्यों? जिला पुलिस बल एवं विशेष सशस्त्र बल में पदोन्नति में भेदभाव क्यों? विशेष सशस्त्र बल की भी जिला पुलिस बल की तरह पदोन्नति की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक? (ख) मध्यप्रदेश पुलिस को कौन-कौन से भत्ते मिल रहे हैं? किस दर से और आखिरी बार उन भत्तों का नवीनीकरण कब हुआ था? क्या उन भत्तों की दरें आज की महंगाई के अनुसार प्रासंगिक हैं? इन भत्तों के नवीनीकरण के लिये शासन की क्या कार्ययोजना है? (ग) माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा वि.स.बल कम्पनियों को रेंज स्तर पर पदस्थ करने की घोषणा की गयी थी, तो आज तक कितनी वाहिनी की कम्पनियों को रेंज स्तर पर पदस्थ किया गया? जिन वाहिनियों की कम्पनियों को आज तक रेंज स्तर पर पदस्थ नहीं किया गया है, उनको कब तक पदस्थ किया जावेगा समय-सीमा बतावें, यदि नहीं, तो क्यों नहीं कारण बतायें?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जिला पुलिस बल एवं विशेष सशस्त्र बल की पदोन्नति प्रक्रिया एक समान है एवं विशेष सशस्त्र बल में समय-समय पर पद रिक्त होने पर वरिष्ठताक्रमानुसार पदोन्नति की कार्यवाही की जाती है, पदोन्नति संबंधी नियम की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-अ अनुसार है। जिला पुलिस बल एवं विशेष सशस्त्र में पदोन्नति प्रक्रिया में कोई भेदभाव नहीं है। विशेष सशस्त्र बल में रिक्त पदों के अनुरूप समय-समय पर नियमित रूप से पदोन्नति संबंधी कार्यवाही संपादित होती है। वर्तमान में पदोन्नति संबंधी प्रकरण माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय उपरांत तदानुसार पदोन्नति प्रक्रिया में अग्रिम कार्यवाही की जा सकेगी। समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है। (ख) पुलिस विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों को प्रति माह मिलने वाले भत्तों के संबंध में जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ब अनुसार है। मंहगाई के अनुसार भत्ते का नवीनीकरण एक निरंतर प्रक्रिया के तहत किया जाता है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) विसबल कंपनियों को रेंज स्तर पर वाहिनियों के नजदीक पदस्थ करने के संबंध में विसबल मुख्यालय स्तर पर कानून-व्यवस्था को दृष्टिगत रखते हुए एवं तत्कालीन परिस्थितियों में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार समय-समय पर किया जाता है। उपरोक्त तारतम्य में विसबल मुख्यालय के पत्र दिनांक 15.03.2023 अनुसार विसबल कंपनियों के रोटेशन/ बदली हेतु कमेटी बनाई गई, जिसमें कमेटी के अध्यक्ष सेनानी, 7 वीं वाहिनी विसबल भोपाल एवं सदस्य समनि विसबल, मुख्यालय व सेनानी, 25ची वाहिनी विसबल, भोपाल द्वारा कंपनियों की परस्पर दूरी/रेज/जिले/पदस्थापना समय आदि की गणना कर बहुत हद तक कंपनियों का रोटेशन समय-समय पर किया जा रहा है. आदेश की प्रतियां पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-स अनुसार है। प्रतिदिन व्ही.व्ही.आई.पी., व्ही.आई.पी. स्तर के अधिकारियों एवं व्यक्तियों के आगमन एवं उनकी विभिन्न सुरक्षा श्रेणियों में सुरक्षा हेतु तथा असमय उत्पन्न होने वाली कानून व्यवस्था सुरक्षा ड्यूटियों व त्यौहार/स्थानीय त्यौहार संबंधी ड्यूटियों आदि में बल की अत्यधिक आवश्यकता के कारण जिले के पुलिस अधीक्षक तथा रेंज जोन के पुलिस महानिरीक्षक द्वारा कंपनी रोटेशन न किये जाने संबंधी अनुरोध किये जाने से व वर्ष 2023 में तेलंगाना, राजस्थान, मध्यप्रदेश, मिजोरम व छत्तीसगढ, वर्ष 2024 में झारखण्ड, हरियाणा, महाराष्ट्र, जम्मू-कश्मीर, उड़ीसा, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, आंध्रप्रदेश एवं वर्ष 2025 में बिहार य दिल्ली में विधानसभा चुनाव में तथा वर्ष 2023 में संपूर्ण भारत में लोकसभा चुनाव होने से विसबल कंपनियों के बल का लगातार मूवमेंट होने के कारण विसबल कंपनियों के रोटेशन हेतु गठित कमेटी द्वारा शेष अन्य कंपनियों की बदली/स्थानांतरण किया जाना संभव नहीं हो सका। विसबल कंपनियों के उपलब्ध होने पर उन्हें रेंज/जोन में पदस्थ किया जाता है। यह एक सतत् प्रक्रिया है।
सूचना के अधिकार के तहत जानकारी नहीं देना
[गृह]
66. ( क्र. 2306 ) श्री केशव देसाई : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिण्ड जिले की तहसील लहार के थाना आलमपुर में श्री निखिल प्रताप शिकायतकर्ता की शिकायत पर अपराध क्र. 09/23 पंजीबद्ध किया गया था? (ख) क्या उक्त पंजीबद्ध अपराध के संबंध में शिकायतकर्ता आवेदक निखिल प्रताप निवासी ग्राम अंधियारी न. 2 द्वारा दिनांक 01.03.2024 को सूचना के अधिकार अधिनियम-2005 के तहत लोक सूचना अधिकारी थाना आलमपुर से जानकारी मांगी गई थी, जानकारी न दिए जाने पर प्रथम अपील पुलिस अधीक्षक भिण्ड एवं द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग भोपाल को किए जाने के बाद भी जानकारी नहीं दिए जाने के क्या कारण हैं? जानकारी कब तक दी जाएगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) थाना आलमपुर में शिकायतकर्ता श्री निखिल प्रताप की शिकायत पर अपराध क्रमांक 09/23 पंजीबद्ध किया गया था। बल्कि सत्य यह है कि आवेदक निखिल प्रताप द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) लहार को दिये गये आवेदन पत्र एवं थाना आलमपुर जिला भिण्ड के रोजनामचा सान्हा कमाक 11 दिनांक 11.05.2023 की जांच पर से मृतिका कुमारी साक्षी पुत्री स्व. रामकुमार यादव निवासी ग्राम ससीगढ़ के संबंध में मर्ग क0 09/23 धारा 174 द.प्र.सं. का पंजीबद्ध किया गया था। मर्ग सूचना की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे गये परिशिष्ट अनुसार है। (ख) उक्त संबंध में अपराध पंजीबद्ध नहीं है। मात्र मर्ग पंजीबद्ध हुआ था। आवेदक निखिल प्रताप निवासी ग्राम अंधियारी नं0 02 के द्वारा सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के तहत दिनाक 01-03-2024 को लोक सूचना अधिकारी/थाना प्रभारी आलमपुर से जानकारी मागना, जानकारी न दिये जाने पर प्रथम अपील पुलिस अधीक्षक भिण्ड एवं द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग को किये जाने का उल्लेख किया है। इस संबंध में थाना प्रभारी आलमपुर से जानकारी प्राप्त की गयी जिसके अनुसार आवेदक निखिल प्रताप सिंह का सूचना अधिकार अधिनियम 2005 के अन्तर्गत आवेदन पत्र दिनांक 01.03.2024 थाना 5 आलमपुर पर प्राप्त नहीं होना उल्लेखित किया गया है। जिला पुलिस कार्यालय की संबंधित शाखा के अभिलेख अनुसार प्रथम अपीलीय अधिकारी। पुलिस अधीक्षक भिण्ड को आवेदक के आवेदन पत्र दिनांक 01-03-2024 के विरुद्ध आवेदक की प्रथम अपील प्राप्त नहीं हुई है और न ही राज्य सूचना आयोग की ओर से इस कार्यालय में द्वितीय अपील प्राप्त हुई।
गैर जिम्मेदार अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही
[वित्त]
67. ( क्र. 2315 ) श्री प्रदीप पटेल : क्या उप मुख्यमंत्री, वित्त महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आयुक्त कोष एवं लेखा भोपाल द्वारा आदेश क्रमांक 48 दिनांक 15.10.2025 के द्वारा श्री दीपक पटेल सहायक ग्रेड-3 की पदोन्नति भृत्य पद पर की गई है? उक्त विभागीय जांच के निष्कर्ष क्या है? क्या विभागीय जांच म.प्र. सिविल सेवा वर्गीकरण नियम के प्रावधानों के अनुसार प्रति परीक्षण गवाहों से कराने का अवसर दिया है? प्रति परीक्षण की पंजी, प्रश्नोत्तर जो नियमानुसार तैयार की है, नहीं तो इस हेतु दोषी जांचकर्ता/प्रस्तुतकर्ता अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जायेगी? (ख) उक्त सेवक के विरुद्ध आरोप-1 में वर्णित श्रीमती हसीना खान की शिकायत, श्रीमती खान द्वारा किया ही नहीं गया है, निष्कर्ष प्राप्त हुआ है? तो कूटरचना करने वाले, बिना परीक्षण के ही शास्ति अनुशंसा करने वाले गैर जिम्मेदार अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी? (ग) उक्त के विरुद्ध-2 में वर्णित आरोप क्या है? विभागीय जाँच में आरोपों से पृथक सूचनाओं एवं गवाहों के द्वारा प्रस्तुत षड्यंत्रयुक्त आधार पर आरोप-पत्र से पृथक आरोपों को बिना प्रति परीक्षण के सिद्ध है? नहीं तो प्रति परीक्षण उपलब्ध करावें। यदि हाँ, तो जिम्मेदार कौन है? (घ) सेवक पर वित्तीय अनियमितता का आरोप था? यदि नहीं, तो अनुकंपा नियुक्त सेवक के विरुद्ध युक्तियुक्त बचाव का अवसर दिये बिना दीर्घ शास्ति से दण्डित किये बिना ठोस आधार के एवं बिना प्रति परीक्षण कराये ही दिया जाना क्या उचित है?
उप मुख्यमंत्री, वित्त ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी हाँ, श्री दीपक पटेल सहायक ग्रेड-3 की पदानवति भृत्य के पद पर की गई है। विभागीय जांच में जांचकर्ता अधिकारी (जिला कोषालय उमरिया) द्वारा प्रेषित जांच प्रतिवेदन दिनांक 23.07.2025 द्वारा श्री दीपक पटेल के विरूद्ध अधिरोपित आरोप क्रमांक (1) प्रमाणित नहीं पाया गया एवं आरोप क्रमांक (2) प्रमाणित पाया गया था। विभागीय जांच म.प्र. सिविल सेवा वर्गीकरण नियम के प्रावधानों के तहत दिनांक 03.07.2025 से 18.07.2025 के मध्य की अवधि में अभियोजन साक्ष्य एवं अपचारी कर्मचारी की उपस्थिति में परीक्षण तथा प्रति परीक्षण किया गया तथा संबंधित अपचारी कर्मचारी के गवाह भी उपस्थित रहे अभियोजन साक्षी एवं अपचारी कर्मचारी द्वारा नोटशीट में हस्ताक्षर किये गये हैं। (ख) विभागीय जांच प्रतिवेदन में आरोप क्रमांक (1) असिद्व पाया गया परन्तु आरोप क्रमांक (2) सिद्व पाया गया है। संयुक्त संचालक उद्यान रीवा के पत्र क्रमांक 50 दिनांक 16.01.2025 द्वारा जिला कोषालय रीवा को लिखित रूप से श्रीमती हसीना खान की शिकायत संलग्न कर प्रेषित की गई इस पत्र में संयुक्त संचालक उद्यान रीवा द्वारा अवगत कराया गया की श्रीमती हसीना खान सहायक ग्रेड-2 (सेवानिवृत्त) से श्री दीपक पटेल द्वारा जीपीएफ आहरण के लिये राशि रूपये 8 हजार की मांग की गई। इसी आधार पर विभागीय जांच में श्री दीपक पटेल के विरूद्ध आरोप क्रमांक-1 अधिरोपित किया गया। संयुक्त संचालक उद्यान रीवा के पत्र क्रमांक 886 दिनांक 10.07.2025 में पुन: यह पुष्टि की गई कि श्रीमती हसीना खान के संबंध में लिखा पत्र संयुक्त संचालक उद्यान रीवा द्वारा ही प्रेषित किया गया। किंतु इसी पत्र में यह भी उल्लेखित किया गया कि श्रीमती हसीना खान द्वारा कोई शिकायत नहीं की गई। चूँकि संयुक्त संचालक, उद्यान रीवा द्वारा जिला कोषालय रीवा को दिनांक 16.01.2025 को पत्र प्रेषित किया गया था एवं इसी आधार पर दिनांक 01.04.2025 को श्री दीपक पटेल के विरूद्ध विभागीय जांच संस्थित की गई जिसमें आरोप क्रमांक-1 अधिरोपित किया गया। अत: कूटरचना करने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) प्रश्नांश स्पष्ट नहीं है। उक्त के विरूद्ध 2 में वर्णित आरोप का आशय स्पष्ट नहीं है। अत: उत्तर दिया जाना संभव नहीं है। (घ) जी हाँ, आरोप क्रमांक-1 यह था कि सुश्री हसीना खान द्वारा कोषालय अधिकारी जिला रीवा को दिनांक 21.07.2024 को शिकायत प्रेषित की गई। प्रेषित शिकायत में सुश्री हसीना खान के जी.पी.एफ. प्राधिकार पत्र के बिल को पास कराने के लिए श्री दीपक पटेल द्वारा अनुचित मांग करने का लेख किया गया है। विभागीय जांच में आरोप क्रमांक-1 प्रमाणित नहीं पाया गया। किंतु श्री दीपक पटेल के विरूद्ध आरोप क्रमांक-2 अनुसार वरिष्ठ जिला कोषालय अधिकारी रीवा के पत्र क्रमांक/कोषा./2025/25, दिनांक 06.01.2025 संभागीय संयुक्त संचालक, कोष एवं लेखा, रीवा के पत्र क्रमांक 437 दिनांक 14.01.2025 एवं 2025 संभागीय संयुक्त संचालक, कोष एवं लेखा, रीवा की टीप दिनांक 15.01.2025 द्वारा प्राप्त शिकायत के अनुसार कोषालय अधिकारी रीवा द्वारा श्री दीपक पटेल के कार्य विभाजन में परिवर्तन के उपरांत इनके द्वारा विभिन्न माध्यमों से विभाग की छवि धूमित करने का प्रयास किया। इससे स्पष्ट है कि श्री दीपक पटेल द्वारा अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन नहीं किया गया। विभागीय जांच में श्री दीपक पटेल के विरूद्ध अधिरोपित आरोप क्रमांक-2 प्रमाणित पाया गया। म.प्र. शासन, सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय के परिपत्र दिनांक 29 जुलाई 1994 के परिपालन में श्री दीपक पटेल को विभागीय जांच में जांच प्रतिवेदन का प्रकटन भी कराया गया एवं बचाव उत्तर प्रस्तुत करने का समुचित अवसर प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त श्री दीपक पटेल के द्वारा म.प्र. शासन, वित्त विभाग, मंत्रालय में अभ्यावेदन दिनांक 11.11.2025 प्रस्तुत किया गया। म.प्र. शासन, वित्त विभाग, मंत्रालय द्वारा आदेश क्रमांक एफ 1/1/20/0011/2025/ई/चार, दिनांक 05.01.2026 द्वारा अपीलार्थी श्री दीपक पटेल द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन पर उपलब्ध समस्त अभिलेखों, विभागीय जांच प्रतिवेदन, संलग्न कार्यालयीन नोटशीट्स, पत्राचार, संबंधित अधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रतिवेदन तथा अपीलार्थी द्वारा प्रस्तुत आपत्तियों का सम्यक एवं विस्तृत परीक्षण करने के उपरांत यह निष्कर्ष निकाला गया की अपीलार्थी श्री दीपक पटेल द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन में ऐसा कोई नवीन अथवा ठोस आधार नहीं है, जिसके आधार पर पदावनति आदेश दिनांक 15.10.2025 में परिवर्तन किया जाना आवश्यक हो, के अनुक्रम में म.प्र. शासन, वित्त विभाग, मंत्रालय द्वारा श्री पटेल का अभ्यावेदन दिनांक 11.11.2025 को अमान्य किया गया।
जालसाजी, धोखाधड़ी व खयानत अपराधों में कार्यवाही
[गृह]
68. ( क्र. 2341 ) श्री शिवनारायण सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अनूपपुर जिला अंतर्गत थाना जैतहरी में जनवरी 2020 से 31 जनवरी, 2026 तक जालसाजी, धोखाधडी एवं खयानत के आरोप में कितने प्रकरण पंजीबद्ध है? प्रत्येक प्रकरण का क्रमांक, धाराए, अपराध पंजीबद्ध दिनांक, शिकायतकर्ता का नाम, पद तथा अपराधियों के नाम, पिता का नाम, पता साहित पूर्ण जानकारी देवें। (ख) प्रश्नांश (क) प्रकरण में प्रत्येक अपराध में किन-किन दिनांक को न्यायालय में चालान पेश किया गया। प्रकरण क्रमांक, आरोपी का नाम तथा न्यायालय का नाम सहित स्पष्ट जानकारी देवें। (ग) क्या शासकीय विभागों में धोखाधडी, जालसाजी तथा खयानत के विरूद्ध पंजीबद्ध अपराधों में कितने प्रकरण में उत्तर दिनांक तक न्यायालय में चालान पेश नहीं किया गया है? (घ) जैतहरी थाना में पदस्थ प्रभारी का नाम, पद, सेवा में पदस्थापना से 31 जनवरी, 2026 में इनके विरूद्ध प्राप्त शिकायत व प्रत्येक पदस्थापना की जानकारी देते हुए कार्यवाही से अवगत कराएं? (ड.) क्या प्रश्नांश (क) इतने गंभीर प्रकरणों में न्यायालय में चालान प्रस्तुत न करना पुलिस की लापरवाही व मिलीभगत तथा कदाचरण हैं? पुलिस महानिदेशक भोपाल सम्पूर्ण प्रकरणों में लापरवाही व कदाचरण पर कार्यवाही सुनिश्चित कर कानून के राज का अहसास कराएंगे? यदि हाँ, तो कब तक?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'अ' अनुसार है। (ग) शासकीय विभागों से संबंधित 4 प्रकरण विवेचना में लंबित होने से अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किये गये है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'ब' अनुसार है। (ड.) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'अ' में उल्लेखित लंबित अपराधों में अभियोग पत्र प्रस्तुत नहीं करना पुलिस की लापरवाही, मिलीभगत एवं कदाचरण नहीं है। लंबित अपराध अनुसंधान में है। लंबित अपराधों में संकलित साक्ष्यों के आधार पर अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया जायेगा।
आयरन माइंस की पर्यावरण अनुमति
[पर्यावरण]
69. ( क्र. 2354 ) श्री साहब सिंह गुर्जर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला ग्वालियर के विकासखण्ड घाटीगॉव की ग्राम पंचायत सांतऊ में संचालित आयरन माइंस की समस्त पर्यावरण अनुमतियों की छायाप्रति देंवे। (ख) इन पर्यावरण अनुमतियों के अन्तर्गत किये गये पौधा रोपण की भौतिक सत्यापन की छायाप्रति देंवे। खनन प्रारंभ होने के दिनांक से पर्यावरण विभाग के अधिकारियों द्वारा कब-कब निरीक्षण किया गया? निरीक्षण टीप की छायाप्रति देंवे। (ग) पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करने पर कब तक आयरन माइंस की अनुमति निरस्त कर दी जावेगी? यदि नहीं, तो कारण बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''अ'' अनुसार है। (ख) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार के क्षेत्रीय कार्यालय से प्राप्त जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''ब'' अनुसार है। (ग) एजेन्सी द्वारा पर्यावरणीय स्वीकृति का पालन नहीं करने पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (सिया) द्वारा यथोचित कार्यवाही की जा सकती है।
कम्पनियों द्वारा युवाओं को रोजगार
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
70. ( क्र. 2358 ) श्री संजय उइके : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में देश एवं विदेश की कम्पनियों को मध्यप्रदेश में उद्योग लगाने निवेश आकर्षित करने के लिए निवेश सम्मेलन (इंवेस्ट समिट) किये गये है? (ख) यदि हाँ, तो वित्तीय वर्ष 2013 से प्रश्न दिनांक तक कहां-कहां, कब-कब निवेश आकर्षित करने निवेश सम्मेलन (इंवेस्ट समिट) किये गये? किस-किस उद्योग घरानों से कितने-कितने के MOU हस्ताक्षर किये गये? (ग) निवेश सम्मेलन में MOU हस्ताक्षर करने वाले कौन-कौन से उद्योग घरानों ने कहां-कहां, किस-किस सेक्टर में कार्य प्रारंभ किया गया? कितने-कितने युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। (ख) वित्तीय वर्ष 2013 से प्रश्न दिनांक तक निवेश आकर्षित करने हेतु किये गये निवेश सम्मेलन (इन्वेस्टर्स समिट) की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। वर्ष 2012 के पश्चात विभाग द्वारा उद्योग स्थापना हेतु कोई एम.ओ.यू. नहीं किए जाते है। (ग) निवेश सम्मेलन में निवेश हेतु एमओयू नहीं किये जाते है। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
खनन परियोजनाओं हेतु पर्यावरण स्वीकृति
[पर्यावरण]
71. ( क्र. 2359 ) श्री संजय उइके : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विभाग द्वारा खनन परियोजनाओं हेतु पर्यावरण स्वीकृति के पूर्व जन सुनवाई की जाती है? (ख) यदि हाँ, तो वित्तीय वर्ष 2022-23 से प्रश्न दिनांक तक जिला बालाघाट एवं सिंगरौली में किन-किन खनन परियोजनाओं के लिए कब-कब जन सुनवाई किया गया? (ग) वर्ष 2022-23 से प्रश्न दिनांक तक जिला बालाघाट एवं सिंगरौली में जिन खनन परियोजना की स्वीकृति दी गई हैं, उन परियोजनाओं का नाम स्वीकृति का क्रमांक एवं दिनांक सहित जानकारी उपलब्ध कराएं।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''अ'' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''ब'' अनुसार है।
थानों में पुलिस बल बढ़ाये जाने के संबंध में
[गृह]
72. ( क्र. 2363 ) श्री प्रदीप अग्रवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दतिया जिले के विकासखंड सेंवढ़ा के अंतर्गत कुल कितने पुलिस थाने आते हैं? यह थाने कौन-कौन से एवं कहां-कहां के सब डिवीजन (SDOP) से कंट्रोल होते हैं? थानों के नाम, कंट्रोलकर्ता सब डिवीजन सहित SDOP के नाम की सूची सहित जानकारी दी जाए। (ख) क्या उक्त समस्त थानों का कंट्रोल एक ही सब डिवीजन सेंवढ़ा के एसडीओपी के पास होना चाहिए किंतु देखने में आ रहा है कि सेंवढ़ा विकासखंड के पुलिस थाने दतिया जिले के समस्त एसडीओपी के अंतर्गत लग रहे हैं? फलस्वरुप आमजन के कार्यों में समस्या एवं विलंब होता है, जिससे समस्या हो रही है। (ग) क्या सेंवढ़ा विकासखंड के पुलिस थानों में बल का अभाव होने के कारण लगातार गस्त आदि के कार्य प्रभावित हो रहे हैं जिससे क्षेत्र में अपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं? (घ) क्या विकासखंड सेंवढ़ा के सभी थानों को एक ही सब डिवीजन सेंवढ़ा एसडीओपी के अंतर्गत लाये जाने एवं बढ़ती अपराधिक घटनाओं के रोकथाम के लिए यहां के थानों में पर्याप्त बल उपलब्ध कराने हेतु आदेश प्रसारित करने की कृपा करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक कार्यवाही होगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) प्रशासनिक व्यवस्था के फलस्वरूप कुछ क्षेत्र थाना गोराघाट, थाना धीरपुरा एवं थाना गोंदान में होने से संबंधित थानों का नियंत्रण थाना अनुसार संबंधित अनुविभागीय अधिकारी पुलिस के अधिकार क्षेत्र में है। पुलिस व्यवस्था के फलस्वरूप आमजन के कार्यों में किसी प्रकार का विलम्ब या समस्या उत्पन्न नहीं हो रही है। आमजन की समस्याओं के निराकरण हेतु प्रभावी वैधानिक कार्यवाही की जाती है। जिला मजिस्ट्रेट जिला दतिया के द्वारा वि.क.2/आरडीएम/9-5/24/01/दिनांक-02.01.2024 के माध्यम से पुलिस थानों और चौकियों की सीमाओं के पुर्ननिर्धारण हेतु विज्ञप्ति जारी की गई है। (ग) जिला दतिया में उपलब्ध बल में से क्षेत्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप उपलब्ध बल के अनुपात अनुसार सेंवढा अनुभाग के थानों में बल आवंटित किया गया है। जिससे आपराधिक घटनाओं को रोकने के संबंध में लगातार गस्त एवं कानून व्यवस्था ड्यूटियाँ ली जा रही है तथा आपराधिक घटना होने पर तत्काल विधिवत् कानूनी कार्यवाही की जाती है। (घ) विकासखण्ड सेंवढा के सभी थानों को एक ही सब डिवीजन सेंवढा एसडीओपी के अंतर्गत लाये जाने संबंधी निर्णय प्रशासनिक स्तर पर लिया जाता है। थाना क्षेत्रान्तर्गत होने वाली घटनाओं की रोकथाम हेतु क्षेत्रीय दृष्टिकोण अनुरूप कानून व्यवस्था हेतु बल उपलब्ध कराया जाकर वैधानिक कार्यवाही की जाती है।
विधायक के पत्रों का जवाब नहीं दिया जाना
[सामान्य प्रशासन]
73. ( क्र. 2364 ) श्रीमती अनुभा मुंजारे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शासन के द्वारा ऐसा कोई नियम है, जिसमें विधायकों/जनप्रतिनिधि जो जनता के द्वारा चुने जाते है उन्हें अपने अनुसार पी.ए. (निज सहायक) की सेवा लेने का अधिकार है? क्या प्रश्नकर्ता विधायक द्वारा महिला बाल विकास विभाग भोपाल से पत्राचार किया गया है? आज दिनांक तक पत्रों पर क्या कार्यवाही की गई है? (ख) यदि विभाग के द्वारा किसी विधायक के साथ कोई व्यक्ति पी.ए. (निज सहायक) के रूप में अटैच करती है तो क्या विधायक के अनुमति के बिना उसे वापस बुला सकती है? यदि हाँ, तो क्यों? यदि निज सहायक जो प्रशासनिक और व्यक्तिगत कार्य में सहायक होते है जिसमें शेड्यूलिंग, यात्रा समन्वय और संचार प्रबंध जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल रहते है ऐसे व्यक्ति को बिना सहमति/अनुमति के विभाग वापस बुलाती है तो क्या इससे विधायक की गरिमा खंडित नहीं होती? क्या विशेषाधिकार हनन नहीं होता? ऐसी स्थिति के लिये जवाबदार कौन है? (ग) क्या महिला बाल विकास विभाग भोपाल द्वारा वर्तमान में ऐसे किसी प्रकरण में एक तरफा आदेश जारी किया है जिससे विधायक के विशेषाधिकार का हनन हुआ हो? क्या विभाग आदेश को निरस्त करेगी? नहीं तो क्यों? दस्तावेज सहित सम्पूर्ण जानकारी प्रदाय करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हॉं। जी हॉं। संचालनालय महिला एवं बाल विकास के पत्र दिनांक 04.02.2026 द्वारा कलेक्टर बालाघाट को माननीय विधायक को निज सहायक की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु लिखा गया है। (ख) शासन परिपत्र क्रमांक एफ ए-10-15/94/एक (1), दिनांक 19 मई 1995 में कोई निर्देश नहीं है। विभाग में कर्मचारियों की कमी को दृष्टिगत रखते हुए अटैच कर्मचारी को वापस बुलाया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) उत्तरांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
श्रमिकों को भुगतान में अनियमितता
[वन]
74. ( क्र. 2368 ) श्री राजेश कुमार शुक्ला : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता के अतारांकित प्रश्न क्रमांक 448 दिनांक 02/12/2025 के उत्तर में प्राप्त परिशिष्ट के अनुसार श्रमिक मूरत सिंह, इमरत यादव, प्रेमलाल यादव, चंद्रभान, मनमोदी यादव, रामसखी, पप्पू यादव, बबलू यादव ने किन-किन दिनांकों को किन-किन स्थानों पर कार्य किया, जानकारी प्रदाय करें। (ख) उक्त की मजदूरी नकद या खाते में दी गई? सभी के नाम एवं भुगतान दिनांक, राशि सहित जानकारी प्रदाय करें। (ग) प्रश्नांश (क) के अनुक्रम में प्राप्त परिशिष्ट के अनुसार ऐसे कितने मजदूर है, जिन्होंने एक ही दिनांक में अलग-अलग स्थानों में कार्य किया उनके नाम, दिनांक, कार्य स्थल की जानकारी प्रदाय करे, यह कैसे संभव है। (घ) विभाग द्वारा एक दिन की मजदूरी कितनी तय है? एक माह तक लगातार कार्य करने पर, कितनी मजदूरी बनती है? क्या उक्त परिशिष्ट में ऐसे भी मजदूर है जिन्हें एक माह में उक्त राशि से ज्यादा का भुगतान किया गया? हाँ, तो नाम एवं कारण क्या है? (ड.) प्रश्नांश (क) के अनुक्रम में प्राप्त परिशिष्ट में, ऐसे कितने लोग है, जिन्होंने विभाग द्वारा दिखाई गई तिथियों में एवं पंचायत द्वारा भी उसी तिथि में कार्य करना दिखाया गया। उनके नाम, दिनांक, आदि की जानकारी प्रदाय करे।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) मजदूरों को कोषालय के माध्यम से ई पेमेंट से उनके खाते में मजदूरी का भुगतान किया गया है। शेष जानकारी उत्तरांश (क) के जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) प्रश्नांश (क) के अनुक्रम में ऐसे कोई भी श्रमिक नहीं है, जिन्होंने एक ही दिनांक में अलग-अलग स्थानों में कार्य किया है। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) विभाग में वानिकी गतिविधियों एवं निर्माण कार्य के लिये मजदूरी की दरें कार्य की प्रकृति के आधार पर भिन्न होती है। वानिकी कार्य की प्रकृति अनुसार स्वीकृत जॉबदर में मानव दिवस का निर्धारण किया गया है, जिसके अनुसार मजदूरों को मजदूरी का भुगतान किया जाता है। जी नहीं। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ड.) विभाग द्वारा उन्हीं मजदूरों की जानकारी दी गई है, जो विभागीय कार्यों में संलग्न थे। पंचायत द्वारा पंचायत में किये गये कार्यों से संबंधित कोई अभिलेख वन विभाग में संधारित नहीं होता है। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
लोकायुक्त की पुलिस में पंजीबद्ध प्रकरण
[सामान्य प्रशासन]
75. ( क्र. 2369 ) श्री प्रताप ग्रेवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता के प्रश्न 783 दिनांक 29.7.2025 के उत्तरांश (ग) में बताएं कि पूर्व विधायक पारस सकलेचा की शिकायत पर अपराधिक प्रकरण दर्ज हुआ कि नहीं। नहीं तो कारण क्या है? क्या दिनांक 12.8.2025 को साक्ष्य की कार्यवाही हुई थी? समस्त दस्तावेज की प्रतियां देवें। सकलेचा के पत्र क्रमांक 305/2130सी/2025 दिनांक 30.7.2025 पर क्या निर्णय लिया गया? (ख) वर्ष 2024 में दर्ज 237 अपराधी प्रकरणों की शिकायत किस दिनांक को मिली, जांच प्रकरण तथा अपराधिक प्रकरण किस किस दिनांक को दर्ज हुआ? वर्ष 2024 में विभिन्न माननीय विशेष न्यायालय में पेश 176 चालान में, अपराधिक तथा जांच प्रकरण किस दिनांक को दर्ज हुआ था तथा शिकायत किस दिनांक को प्राप्त हुई थी? (ग) लोकायुक्त की पुलिस में पंजीबद्ध प्रकरणों में विभिन्न माननीय विशेष न्यायालयों द्वारा जन. 22 से जन. 2026 तक कुल कितने प्रकरण में आरोपी को दंडित तथा कितने में बरी किया गया? (घ) लोकायुक्त में 2018 से 2025 तक प्रत्येक वर्ष की अंतिम दिनांक को कितनी शिकायतें, कितने जांच तथा अपराधी प्रकरण थे? विशेष न्यायालय में कितने प्रकरण लंबित थे। 31 जन. 2026 को कितनी शिकायत, कितने जांच प्रकरण, कितने अपराधी प्रकरण दर्ज है तथा विभिन्न विशेष न्यायालयों में कितने प्रकरण लंबित है? (ड.) लोकायुक्त में वर्ष 2018 से जन. 2026 तक पद के दुरुपयोग के संबंध में कितनी शिकायतें प्राप्त हुई? कितनी शिकायतों को निराकृत किया गया? कितनी शिकायत जांच के लिए पंजीकृत की गई तथा कितनी शिकायतों पर आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किए गए?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। विशेष पुलिस स्थापना म.प्र. में प्रश्नकर्ता के प्रश्न 783 दिनांक 29/07/2025 के उत्तरांश (ग) के संदर्भ में कोई अपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं है। प्रकरण जांचाधीन होकर दिनांक 12/08/2025 एवं इसके पश्चात दिनांक 05/02/2026 तक जानकारी चाही गई है। जानकारी अप्राप्त है। पत्र क्रमांक 305/2130/सी/2025 दिनांक 30/07/2025 (शिकायत क्रमांक 225/सी/25-26) पर जांच प्रकरण क्रमांक 298/ई/25 दिनांक 19/09/2025 पंजीबद्ध होकर जांचाधीन है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार है। (ख) विशेष पुलिस स्थापना म.प्र. में वर्ष 2024 में 237 अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है। वर्ष 2024 में विभिन्न माननीय न्यायालय में 176 आपराधिक प्रकरणों में चालान पेश किए गये हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-3 अनुसार है। (ग) विशेष पुलिस स्थापना म.प्र. में पंजीबद्ध प्रकरणों में विभिन्न माननीय विशेष न्यायालयों द्वारा जनवरी, 2022 से जनवरी, 2026 तक कुल 462 प्रकरणों में आरोपी को दण्डित तथा 257 प्रकरणों में बरी किया गया। (घ) लोकायुक्त संगठन की शिकायत एवं जांच शाखा से संबंधित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-4 अनुसार है। विशेष पुलिस स्थापना म.प्र. में 2018 से 2025 तक प्रत्येक वर्ष की अंतिम दिनांक को विवेचना में लंबित आपराधिक प्रकरणों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-4 के कॉलम-3 अनुसार है। माननीय विशेष न्यायालयों में कुल 1106 प्रकरण लंबित थे। 31 जनवरी, 2026 को कुल 969 आपराधिक प्रकरण विवेचनाधीन हैं तथा विभिन्न माननीय विशेष न्यायालयों में 1123 प्रकरण लंबित हैं। (ड.) लोकायुक्त संगठन की शिकायत एवं जांच शाखा से संबंधित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-4 अनुसार है। विशेष पुलिस स्थापना म.प्र. में वर्ष 2018 से जनवरी, 2026 तक पद के दुरूपयोग के संबंध में कुल 236 आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किये गये।
विकासखंड स्तर के किसी संविदाकर्मी की सेवा समाप्त करने
[सामान्य प्रशासन]
76. ( क्र. 2370 ) श्री प्रताप ग्रेवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या कलेक्टर या संभागायुक्त द्वारा जिला स्तर या विकासखंड स्तर के किसी संविदाकर्मी की सेवा समाप्त की जाती है तो क्या स्वयं के सेवा समाप्ति आदेश के विरुद्ध कलेक्टर या संभागायुक्त सेवा बहाली की अपील सुनवाई कर सकते है? यदि नहीं, तो अपील सुनने आर्बिट्रेट का अधिकार किसे है? (ख) यदि राज्य कार्यालय भोपाल के अलग-अलग योजनाओं, कार्यक्रमों, संगठनों, परिषद के सीईओ, एमडी, संचालक, आयुक्त द्वारा सीधे किसी जिला स्तर या विकासखण्ड के संविदाकर्मी की सेवा समाप्त करते है तो क्या ये अधिकारी स्वयं अपने द्वारा जारी सेवा समाप्ति आदेश के विरुद्ध सेवा बहाली अपील सुनने व आर्बिट्रेट का अधिकार है? यदि नहीं, तो राज्य स्तर के अधिकारी द्वारा सीधे जिले के संविदाकर्मी की गई सेवा समाप्त की अपील सुनने आर्बिट्रेट का अधिकार किस वरिष्ट पद के अधिकारी को है व क्या जिला स्तर पर पदस्थ संविदाकर्मी की राज्य स्तर से की गई सेवा समाप्ति आदेश के विरुद्ध संभाग आयुक्त को सेवा बहाली अपील आर्बिट्रेट का अधिकार है? (ग) क्या संभाग आयुक्त का पद राज्य की योजनाओं, कार्यक्रमों, परियोजनाओं, मिशन, कार्यक्रमों के सीईओ, एमडी, संचालक के पद से वरिष्ठ है या कनिस्ठ? क्या संभाग आयुक्त इन अधिकारियों के आदेशों में बदलाव या निरस्त कर सकते हैं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। संविदा नीति 2023 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। (ख) जी नहीं। संविदा नीति 2023 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। जी नहीं। (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
बेरोजगार छात्रों की मांगों का निराकरण
[सामान्य प्रशासन]
77. ( क्र. 2386 ) श्री हेमंत सत्यदेव कटारे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नेशनल एज्यूकेशन यूथ यूनियन (NEYU) के नेतृत्व में हजारों छात्र वर्तमान में इंदौर में अपनी शैक्षणिक एवं भर्ती संबंधी मांगों को लेकर आन्दोलनरत है। क्या दिसम्बर, 2024 में इसी NEYU बेनर तले हुये व्यापक छात्र आन्दोलन के समय मान. मुख्यमंत्री जी द्वारा छात्र प्रतिनिधि मंडल के सदस्यों को मुख्यमंत्री निवास आमंत्रित कर समक्ष में मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था? यदि हाँ, तो छात्र नेताओं की किन-किन समस्या/मांगों को मान्य करने हेतु शासन की सहमति बनी थी? पूर्ण जानकारी दी जाय। (ख) आन्दोलनरत छात्रों की मुख्य मांगों में राज्य शासन के अधीन आयोजित होने वाली विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार करने से संबंधित हैं जिनमें भर्ती राज्य सेवा परीक्षा, अभियांत्रिकी सेवा, अभियोजन अधि.परीक्षा. सहा. प्राध्यापक परीक्षा में न्यूनतम पदों का सुनिश्चित करने सहित अन्य आयोजित चयन परीक्षाओं में प्रक्रियात्मक सुधार करने आदि की मांग की गयी है। छात्रों की किन-किन समस्या/मांगों के निराकरण हेतु शासन द्वारा आज तक क्या कार्यवाही की गयी? (ग) वर्तमान में प्रदेश के युवाओं को राज्य की सभी चयन परीक्षाओं हेतु अलग-अलग चयन परीक्षा में सम्मिलित होने हेतु पृथक-पृथक परीक्षा आवेदन शुल्क जमा करना होता है, जिससे आर्थिक स्थिति से कमजोर युवा आर्थिक समस्या होने के कारण सभी परीक्षाओं में सम्मिलित नहीं हो पाते हैं ऐसी स्थिति में श्री मितेन्द्र दर्शन सिंह, युवा एवं वरिष्ठ समाजसेवी की ओर से शासन को प्रस्तुत किया सुझाव जिसमें राज्य राजस्थान आदि व अन्य राज्यों की भांति प्रदेश के युवाओं से पूरे वर्ष के लिये एक बार शुल्क लेकर सभी परीक्षाओं में सम्मिलित करने के किये प्रावधान अनुसार क्या शासन बेरोजगार युवाओं के हित में प्रदेश में लोक सेवा आयोग/कर्मचारी चयन मण्डल के माध्यम से आयोजित होने वाली सभी परीक्षाओं के लिये पूरे वर्ष हेतु एक बार फीस लेने की योजना पर विचार कर रहा है? (घ) यदि हाँ, तो शासन कब तक बेरोजगार छात्रहित के इस प्रस्ताव को मान्य कर प्रदेश में लागू करेगा? समय-सीमा बतायी जाये।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं, अपितु दिसंबर 2024 में अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि मंडल द्वारा दिए गए ज्ञापन के संबंध में जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) राज्य शासन स्तर पर परीक्षा प्रक्रिया में परिवर्तन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। राज्य शासन के लिए किसी व्यक्ति विशेष के सुझाव को मान्य किया जाना बंधनकारी नहीं है। (घ) उत्तरांश (ग) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
वन संरक्षण एवं संधारण
[वन]
78. ( क्र. 2400 ) श्री आशीष गोविंद शर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) देवास जिले के अंतर्गत वर्तमान में वन विकास निगम के पास कितना वन क्षेत्र मौजूद है? क्षेत्रफल बताइयें। सामान्य वन मण्डल के पास कुल कितना वन क्षेत्र उपलब्ध है? कुल रकबा बतायें। वर्ष 2020 से 2025 के बीच में वन क्षेत्र के कुल रकबे में से कमी या बढ़ोतरी दर्ज की गई है। (ख) वर्तमान में वनों के संरक्षण के लिये खातेगांव विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत कितने वन क्षेत्र में सुरक्षा जाली लगाई गई है? कुल क्षेत्रफल व्यय राशि, स्थान बतायें। विधानसभा क्षेत्र में वनों के संरक्षण एवं संधारण पर कुल कितनी राशि विकास कार्यों के लिये किस-किस मदों से प्रदाय की गई? (ग) जंगलों के आस-पास नाली बनाने, मुनारा स्थापित करने सड़क बनाने, कुटूर बनाने के लिये वर्ष 2025-26 में कितनी राशि मशीन चलाने पर व्यय की गई राशि एवं कार्य का विवरण प्रदान करें? कार्य का भुगतान किस व्यक्ति और फर्म को किया गया? (घ) खातेगांव विधान सभा क्षेत्र में वनों की सुरक्षा एवं अधिकारियों के लिये किन-किन वाहनों का उपयोग सामान्य वन मण्डल में किया जा रहा है? वाहनों की संख्या एवं अधिकारी का पद नाम बतायें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) देवास जिले के अंतर्गत वर्तमान में वन विकास निगम खण्डवा अंतर्गत परियोजना परिक्षेत्र कन्नौद अंतर्गत कुल क्षेत्र 10083.220 हेक्टेयर प्रभार में है। सामान्य वन मण्डल देवास के आधिपत्य में कुल अधिसूचित वन क्षेत्र 197635.38 हेक्टेयर उपलब्ध है। वर्ष 2020 से 2025 के बीच वनक्षेत्र के कुल रकबे में 169.635 हेक्टेयर की बढोत्तरी दर्ज की गई है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है। (घ) खातेगांव विधानसभा अंतर्गत वनों की सुरक्षा एवं अधिकारियों के लिए वाहन की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-3 अनुसार है।
सुरक्षा व्यवस्था हेतु पर्याप्त पुलिस बल
[गृह]
79. ( क्र. 2401 ) श्री आशीष गोविंद शर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्यप्रदेश में आबादी के लिहाज से पूरे प्रदेश में कितने पुलिस थाने और चौकियां कार्यरत हैं? जिलेवार संख्या बतायें एवं इन थानों और चौकियों में कितने पद स्वीकृत हैं? कितने कार्यरत हैं? जिलेवार स्वीकृति पद और कार्यरत संख्या बतायें। (ख) पुलिस बल की संख्या में प्रति हजार किस मान से बल की संख्या होनी चाहिये? बल की संख्या में वृद्धि का क्या प्रावधान है? क्या बल की कमी के कारण अनुसंधान और कानून व्यवस्था के कार्य प्रभावित हो रहे हैं एवं पुलिस कर्मियों पर कार्य का दबाव है? (ग) देवास जिले के कन्नौद, खातेगाँव, नेमावर, हरण गॉंव थाने और जियागांव चौकी पर कितना बल स्वीकृत है एवं कितने कार्यरत है? थानेवार संख्या बतायें। क्या इन थानों पर सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती संख्या के मान से पर्याप्त पुलिस वाहन उपलब्ध नहीं है? (घ) तीर्थ क्षेत्र नेमावर में प्रतिमाह आयोजित होने वाले स्थान पर्व एवं अन्य त्यौहार हेतु एक बटालियन की स्थापना का कोई प्रावधान विचाराधीन है? यदि हाँ, तो बतायें क्या यह सरकार बल की आपूर्ति हेतु शीघ्र इंतजाम करेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) मध्यप्रदेश में जिला बल के 984 पुलिस थाने एवं 559 पुलिस चौकियॉ कार्यरत है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-अ अनुसार है। थानों/चौकियों में कार्यरत बल की जिलेवार जानकारी संकलित की जा रही है। (ख) प्रति हजार के मान से पुलिस बल की संख्या का मानक निर्धारित नहीं है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ब अनुसार है। जी नहीं। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-स अनुसार है। इन थानों पर सड़क दुर्घटनाओं पर कार्यवाही करने हेतु पर्याप्त पुलिस वाहन उपलब्ध है। (घ) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
प्रदेश में जेल सुरक्षा मानक
[जेल]
80. ( क्र. 2402 ) श्री आशीष गोविंद शर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्यप्रदेश में जेलों की संख्या कितनी है? इन जेलों में महिला जेल की संख्या बतायें इन जेलों में कैदियों की संख्या कितनी है? महिला जेलों की संख्या एवं कैदियों की संख्या जिलेवार बतायें। (ख) क्या जेलों में स्वीकृत क्षमता से अधिक कैदी रखे गये हैं, यदि हाँ, तो किस जेल में तय क्षमता से कितने अधिक कैदी अधिक है? कैदियों की संख्या बतायें। (ग) प्रत्येक जेल में विचाराधीन कैदियों की संख्या कितनी है? क्या सुरक्षा मानकों के लिहाज से यह संख्या ज्यादा है? (घ) प्रदेश में किन-किन जिलों में हाइटेक जेल का निर्माण किया गया है? इसके निर्माण की मानकता क्या है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) दिनांक 31.01.2026 की स्थिति में, मध्यप्रदेश में कुल 133 (08 खुली जेल सहित) जेलें कार्यरत् है। मध्यप्रदेश में पृथक से महिला जेल स्वीकृत नहीं है, किन्तु प्रत्येक जेल में पृथक से महिला वार्ड है। मध्यप्रदेश की जेलों में दिनांक 31.01.2026 की स्थिति में कुल 42119 बंदी परिरूद्ध है। जेलों की संख्या, परिरूद्ध बंदियों की संख्या संबंधी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" अनुसार है। (ख) जी हाँ। प्रदेश की जेलों में बंदी क्षमता से 35.76% अधिक बंदी परिरूद्ध है। जिन जेलों पर क्षमता से अधिक बंदी परिरूद्ध है उनकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"ब" अनुसार है। (ग) प्रदेश की जेलों में 22261 (52.85%) विचाराधीन बंदी परिरूद्ध है। जेलवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"स" अनुसार है। जी हाँ। (घ) हाइटेक (उच्च तकनीक) जेल की पृथक से कोई मानकता तय नहीं है, प्रदेश में सर्वाधिक तकनीक का उपयोग भोपाल जिले की केन्द्रीय जेल भोपाल में किया जा रहा है। प्रदेश में पृथक से कोई हाइटेक जेल नहीं है।
पर्यावरण एवं जल प्रदूषण रोकना
[पर्यावरण]
81. ( क्र. 2407 ) श्री आशीष गोविंद शर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्यप्रदेश में किन-किन उद्योगों की स्थापना या संचालन के लिये पर्यावरण विभाग की अनापत्ति प्रमाण-पत्र की आवश्यकता है, म.प्र. किन शहरों में वायु की गुणवत्ता निर्धारित मानके से खराब स्थिति में है एवं नर्मदा और क्षिप्रा नदी में कितने उद्योगों का अपशिष्ट मिल रहा है? (ख) क्या वर्तमान में नर्मदा और क्षिप्रा का जल अत्यधिक प्रदूषित हो रहा है जिससे जलचर जीवों और नदियों के पारिस्थित की तंत्र पर खराब असर हो रहा है? (ग) वर्ष 2025-26 में कितने नवीन उद्योगों को नर्मदा और क्षिप्रा की सहायक नदियों या किनारों पर परमिशन दी गई, संख्या बतायें?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। मध्यप्रदेश के शहरों की वायु गुणवत्ता खराब श्रेणी की नहीं है। नर्मदा एवं क्षिप्रा नदी में किसी भी उद्योग का अपशिष्ट मिलने की शिकायत वर्तमान में नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्नाधीन अवधि में नर्मदा और क्षिप्रा नदी के किनारे किसी भी उद्योग को अनुमति नहीं दी गई है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
प्राथमिकता वाले शहरों में परीक्षा केन्द्र की व्यवस्था किया जाना
[सामान्य प्रशासन]
82. ( क्र. 2417 ) श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या म.प्र. पुलिस, MP SI और आबकारी कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में ESB द्वारा अभ्यर्थियों की प्रथम प्राथमिकता वाले 4 शहरों को छोड़कर परीक्षा केंद्र 800-900 किमी दूर निर्धारित किए गए? क्या यह निर्णय प्रशासनिक सुविधा के लिए लिया गया था या फिर अभ्यर्थियों के समय, संसाधन और स्वास्थ्य की परवाह नहीं किए बगैर उन्हें परेशान करने के लिए किया गया। (ख) क्या इस तरह दूर परीक्षा केंद्र देने से अभ्यर्थियों पर यातायात, आवास और आर्थिक बोझ बढ़ा, जबकि पहली प्राथमिकता वाले शहरों में परीक्षा देने की व्यवस्था संभव थी? क्या प्राथमिकता के अनुरूप केंद्र देने का निर्देश पालन नहीं किया गया? (ग) क्या सरकार यह स्वीकार करती है कि इस निर्णय से लाखों योग्य युवाओं का मानसिक और शैक्षणिक संतुलन प्रभावित हुआ और उनके प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा? क्या ESB के परीक्षा केंद्र निर्धारण में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित किया गया है? (घ) क्या सरकार सदन को स्पष्ट कर सकती है कि भविष्य में प्राथमिकता और दूरी के अनुसार अभ्यर्थियों के परीक्षा केंद्र निर्धारित करने हेतु क्या ठोस, समयबद्ध और जवाबदेह उपाय किए जाएंगे, ताकि प्रशासनिक सुविधा के नाम पर युवाओं का भविष्य प्रभावित न हो?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। अभ्यर्थियों की संख्या, उपलब्ध सीटों की संख्या एवं परीक्षा की शुचिता एवं सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए केन्द्र निर्धारित किए जाते हैं। परीक्षा केन्द्रों का निर्धारण मण्डल की मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करते हुए नियमानुसार किया गया है। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है। (ख) एवं (ग) उत्तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) कर्मचारी चयन मण्डल द्वारा समस्त प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं के लिए परीक्षा केन्द्र का निर्धारण संबंधित जिले में उपलब्ध संसाधनों और अभ्यर्थियों की संख्या के आधार पर किया जाता है। मण्डल की मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार आधारभूत संरचना एवं तकनीकी रूप से सक्षम केन्द्र उपलब्ध होने की स्थिति में परीक्षाएं आयोजित करना प्रस्तावित किया जा सकता है।
नारंगी वन भूमि के आंकड़ों का पुनराकलन
[वन]
83. ( क्र. 2422 ) श्री चैन सिंह वरकड़े : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रश्न क्रमांक 1080 दिनांक 11/12/2014 में "उक्त त्रुटि प्रकाश में आने पर नारंगी वनभूमि के आकड़ों से छोटे झाड़, बड़े झाड़ के जंगल एवं निर्वनीकृत वन भूमि के आंकड़ों को अलग करने की कार्यवाही की जा रही है" की जानकारी दिए जाने के बाद भी जबलपुर वन वृत एवं बैतूल वनवृत द्वारा प्रश्नांकित दिनांक तक भी कोई कार्यवाही नहीं की गई। (ख) नारंगी भूमि इकाई मंडला, जबलपुर एवं बैतूल ने कितने राजस्व ग्रामों में से कितने राजस्व ग्रामों की कितनी बड़े झाड़, छोटे झाड़ के जंगल मद में दर्ज जमीन एवं कितने ग्रामों की डीनोटीफाईड समस्त भूमि में से कितनी भूमि नारंगी भूमि सर्वे, नारंगी वनखण्ड में शामिल की यह भूमि कलेक्टर ने किस प्रकरण क्रमांक आदेश दिनांक से वन विभाग को आवंटित हुई, आदेश की प्रति सहित बतावे। (ग) बड़े झाड़, छोटे झाड़ के जंगल मद की जमीन एवं निर्वनीकृत भूमि को आकड़ों से अलग किए जाने के संबंध में राज्य मंत्रालय वन विभाग भोपाल वन मुख्यालय भोपाल एवं वनवृत जबलपुर, बैतूल द्वारा प्रश्नांकित दिनांक तक भी पत्र जारी नहीं करने का क्या कारण है।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। नारंगी इकाई द्वारा सर्वेक्षण कर जो वनखंड बनाए गये हैं उनमें छोटे-बड़े झाड़ के जंगल एवं निर्वनीकृत शासकीय भूमि जिन्हें वन के रूप में प्रबंधन किया जाना है, उनके आंकड़े सीमांकन प्रतिवेदन में पृथक-पृथक प्रतिवेदित किए गए हैं। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार है। नारंगी भूमि सर्वेक्षण का कार्य राज्य शासन के निर्देश अनुसार किया गया है, निर्देश की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है, निर्देश की कंडिका 4.1 एवम 4.2 अनुसार अभिलेख वन विभाग को प्राप्त हुए है। (ग) उत्तरांश (ख) के पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 में जारी निर्देश अनुसार राजस्व विभाग के प्रभार की प्रश्नाधीन शासकीय भूमि जिन्हें वन के रुप में प्रबंधित किया जाना है, को सर्वे में शामिल करने के कारण पृथक से निर्देश जारी करने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
वन मुख्यालय के निर्देश
[वन]
84. ( क्र. 2423 ) श्री चैन सिंह वरकड़े : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या राज्य के 925 प्रतिवेदित वन ग्रामों में से जबलपुर वनवृत एवं बैतूल वनवृत के अंतर्गत आने वाले वनग्रामों के 1980-81 में बनाए गए पटवारी मानचित्र, खसरा पंजी, निस्तार पत्रक, अतिक्रमण पंजी की प्रति वन मुख्यालय के पत्र क्रमांक 1173 दिनांक 4 सितम्बर, 2024 के अनुसार संबंधित ग्रामसभा/ग्राम पंचायत को उपलब्ध नहीं करवाई गई? (ख) पत्र दिनांक 4 सितम्बर, 2024 में क्या-क्या निर्देश दिए इस निर्देश के अनुसार किस वन मंडल ने किस वनग्राम के पटवारी मानचित्र, खसरा पंजी, निस्तार पत्रक, अतिक्रमण पंजी की प्रति किस ग्राम पंचायत के किस सरपंच, सचिव या रोजगार सहायक या अन्य किस कर्मचारी को किस दिनांक को उपलब्ध करवाई पावती की प्रति सहित बतावें? (ग) पटवारी मानचित में दर्ज ग्राम की चतुर्थ सीमा का सत्यापन किए जाने एवं खसरा पंजी में दर्ज पट्टाधारी एवं अतिक्रमणकारी के कब्जे का सत्यापन कर सीमांकन किए जाने के संबंध में राज्य मंत्रालय से जारी एस.ओ.पी. दिनांक 16.04.2025 की किस कंडिका में क्या निर्देश दिए यदि कोई निर्देश नहीं दिए हो तो कारण बतावें?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-एक एवं दो अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-तीन अनुसार है। पावती प्राप्त करने के कोई निर्देश नहीं है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-चार अनुसार है। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
मुख्यमंत्री जनसेवा मित्र योजना का क्रियान्वयन
[लोक सेवा प्रबन्धन]
85. ( क्र. 2424 ) श्री चैन सिंह वरकड़े : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रदेश में मुख्यमंत्री जनसेवा मित्र योजना के अंतर्गत लगभग 9300 युवाओं की नियुक्ति की गई थी? यदि हाँ, तो उनकी वर्तमान स्थिति क्या है? (ख) क्या सरकार के पास इन अनुभवी युवाओं की सेवा अवधि बढ़ाने या इन्हें अन्य विभागों में प्राथमिकता के आधार पर समायोजित करने की कोई योजना है? (ग) क्या सरकार बजट सत्र 2026 में इन जनसेवा मित्रों के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु किसी विशेष वित्तीय प्रावधान या नीतिगत निर्णय पर विचार कर रही है? (घ) यदि नहीं, तो शिक्षित युवाओं के साथ हो रहे इस अन्याय का कारण क्या है और उनकी बहाली कब तक सुनिश्चित की जाएगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) 1. जनसेवा मित्र प्रोग्राम के अंतर्गत माह फरवरी 2023 में 4695 इन्टर्न (जन सेवा मित्र) को तथा माह अगस्त 2023 में 4695 नवीन, कुल लगभग 9300 इंटर्स को इंटर्नशिप प्रदान की गयी। 2. प्रोग्राम के अंतर्गत चयनित इंटर्न को निश्चित अबधि (फरवरी 2023 से जनवरी 2024 तक) हेतु इंटर्नशिप प्रदान की गई थी। योजना की अवधि समाप्त होने पर उनकी इंटर्नशिप स्वतः समाप्त हो गयी है। (ख) इंटर्नशिप अवधि की समाप्ति के पश्चात पुनः इंटर्नशिप में लिए जाने अथवा सेवा-विस्तार का कोई प्रावधान नहीं था, जिसका उल्लेख इंटर्नशिप के विज्ञापन, नियम पुस्तिका एवं इंटर्न को दिए गए ऑफर लेटर में स्पष्ट था। (ग) एवं (घ) कार्यक्रम शर्तों के अनुसार इंटर्नशिप की समाप्ति के पश्चात पुनः बहाली, सेवा विस्तार अथवा वैकल्पिक/स्थायी रोजगार का कोई प्रावधान नहीं था, जिसका उल्लेख कार्यक्रम सम्बन्धी विज्ञापन, नियम पुस्तिका एवं इंटर्न को दिए गए ऑफर लेटर में स्पष्ट रूप से था। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं जनजातीय वर्ग पर अत्याचार किया जाना
[गृह]
86. ( क्र. 2433 ) श्री राजन मण्डलोई : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में एन.सी.आर.बी. के अनुसार वर्ष 2023, 2024, 2025 एवं 2026 में प्रश्न दिनांक तक इन वर्गों पर अत्याचार के कितने-कितने मामले पंजीबद्ध किये गये है? (ख) राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो की वर्ष 2020, 2021, 2022, 2023, 2024 एवं 2025 की रिपोर्ट के अनुसार इन वर्गों पर अत्याचार के मामलो में मध्यप्रदेश का देश में कौन सा वर्षवार स्थान रहा है। कृपया पृथक-पृथक जानकारी देवें। (ग) उपरोक्त प्रश्नांश के परिप्रेक्ष्य में इन वर्गों की महिलाओं/बालिकाओं से छेड़छाड़ करने बलात्कार करने एवं सामूहिक बलात्कार करने के मामलों में मध्यप्रदेश का देश में कौन सा वर्षवार स्थान रहा है? कृपया पृथक-पृथक जानकारी देवें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एन.सी.आर.बी. नई दिल्ली के द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में अनुसूचित जाति के विरूद्ध 8232 अपराध एवं अनुसूचित जनजाति के विरुद्ध 2858 अपराध पंजीबद्ध हुए है। वर्ष 2024, 2025 एवं 2026 के पंजीबद्ध आपराधिक आकड़े एन.सी.आर.बी. द्वारा प्रकाशित नहीं किए गये है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एन.सी.आर.बी. नई दिल्ली) के द्वारा देश में प्रदेश के अपराधों में स्थानो (Ranking) की जानकारी पृथक से प्रकाशित नहीं की जाती है। (ग) राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो (एन.सी.आर.बी. नई दिल्ली) के द्वारा देश में प्रदेश के अपराधों में स्थानो (Ranking) की जानकारी पृथक से प्रकाशित नहीं की जाती है।
प्रदेश के सभी थानों में सी.सी.टी.वी कैमरे लगाये जाना
[गृह]
87. ( क्र. 2434 ) श्री राजन मण्डलोई : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या माननीय उच्चतम न्यायालय ने परमवीर सिंह सैनी विरूद्ध बलजीत सिंह के संबंध में वर्ष 2020 में सभी पुलिस थानों में सी.सी.टी.वी. कैमरे (नाईट विजन और आडियो रिकार्डिंग के साथ) अनिवार्य रूप से लगाये जाने जिसमे कैमरे पूरे थाने को कवर करे एवं फुटेज कम-कम से 18 महीने तक रखे जाने के संबंध में दिशा-निर्देश राज्यों को दिये थे? (ख) यदि हाँ, तो उक्त दिशा-निर्देश के पालन में मध्यप्रदेश के सभी थानों में उक्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। यदि नहीं, तो उक्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के संबंध में क्या-क्या कार्यवाही की जा रही है और कब तक सभी थानों में उक्त व्यवस्था कर दी जायेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। (ख) माननीय सर्वोच्च न्यायालय के पालन में प्रदेश के थाना/चौकियों में सीसीटीव्ही सिस्टम की स्थापना हेतु पुलिस दूरसंचार मुख्यालय भोपाल द्वारा कार्यादेश दिनांक 24/11/2021 को फर्म टी.सी.आई.एल. नई दिल्ली को जारी किया गया। 18 माह की अनिवार्य रिकार्डिंग के साथ प्रदेश के 1659 थाना चौकियों में 5 वर्षीय कम्प्रहेंसिव एएमसी के साथ सीसीटीव्ही सिस्टम स्थापित किये गये हैं। उक्त सिस्टम को दिनांक 01/02/2023 से गो-लाइव कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त कार्यादेश जारी होने के पश्चात स्वीकृत अथवा उन्नयित प्रदेश के 49 थाना/चौकियों (02 नवीन थाने 11 उन्नयित थाने एवं 36 पुलिस चौकियों) में सीसीटीव्ही सिस्टम की स्थापना हेतु निविदा प्रक्रिया प्रचलन में है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
निरीक्षक एवं उप निरीक्षकों के स्थानांतरण नियम
[गृह]
88. ( क्र. 2441 ) चौधरी सुजीत मेर सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पुलिस विभाग में निरीक्षकों एवं उप निरीक्षकों के स्थानांतरण के क्या नियम हैं? कॉपी प्रदान करें। (ख) निरीक्षक एवं उप निरीक्षक एक जिले में अधिकतम कितने वर्ष तक पदस्थ रह सकते हैं? (ग) क्या एक जिले में 10 वर्ष होने के बाद भी कई अधिकारियों का स्थानांतरण नहीं कर स्थानांतरण नीति का उल्लंघन किया जा रहा है? यदि हाँ, तो स्थानांतरण नीति का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की जाएगी? (घ) जिलों में उप निरीक्षक और ऊपर रैंक के कितने अधिकारी ऐसे हैं जो संपूर्ण कार्यकाल में 10 वर्ष से पदस्थ हैं और उन्हें हटाया नहीं जा रहा है? सूची प्रदान करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) म.प्र. शासन, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण नीति वर्ष 2025 जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" अनुसार। (ख) स्थानांतरण नीति की कण्डिका-17 "जिलों में पदस्थ प्रथम श्रेणी एवं द्वितीय श्रेणी के कार्यपालक अधिकारियों के एक ही स्थान पर तीन वर्ष की पदस्थापना पूर्ण कर लेने पर जिले से अन्यत्र प्राथमिकता पर स्थानांतरण किया जाता है। तृतीय श्रेणी कार्यपालिक अधिकारियों एवं कर्मचारियों का भी एक ही स्थान पर सामान्यतः 3 वर्ष या उससे अधिक पदस्थापना की अवधि पूर्ण कर लेने के कारण स्थानांतरण के प्रावधान है। (ग) स्थानांतरण नीति की कण्डिका-18 "प्रशासनिक आधार पर किये जाने वाले स्थानांतरणों में उन शासकीय सेवकों को पहले स्थानांतरित किये जाने के प्रावधान है, जिनके द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त नहीं किया गया हो। इसका आशय यह है कि जिन आधारों पर स्थानांतरण किया जा सकता है उनमें एक आधार यह भी है। यह अनिवार्य नहीं है कि 3 वर्ष पूर्ण होने पर स्थानांतरण किया ही जायें" का उल्लेख है। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है। (घ) जिलो में 10 वर्ष से अधिक अवधि से पदस्थ उप निरीक्षक एवं ऊपर के रैंक के अधिकारियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"ब" अनुसार।
जमतरा गेट से प्रवेश शुरू किया जाना
[वन]
89. ( क्र. 2442 ) चौधरी सुजीत मेर सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विभाग ने चौरई विधान सभा क्षेत्र में पेंच नेशनल पार्क में प्रवेश जमतरा गेट से मुख्य प्रवेश शुरू करने की कोई योजना बनाई है? यदि हाँ, तो कब तक शुरू होगा? (ख) जमतरा गेट से प्रवेश शुरू करने के लिए आवश्यक सड़क और आधारभूत संरचना तैयार है या नहीं? (ग) क्या जमतरा गेट से प्रवेश पर जंगल में अंदर पेंच नदी पर पुल निर्माण की योजना विभाग की है या नहीं? (घ) यदि है तो यह कब शुरू हो जावेगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। वर्तमान में जमतरा गेट से पर्यटन शुरू है। (ख) जी हाँ। छिन्दवाड़ा जिले से आने वाले पर्यटकों हेतु जमतरा में पर्यटन गेट, सड़क एवं आधार भूत संरचना पूर्व से तैयार है। (ग) जमतरा गेट से प्रवेश पर जंगल के अंदर पेंच नदी पर आवागमन हेतु ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक-2 छिन्दवाड़ा को बाक्स कलवर्ट/रपटा/पुलिया निर्माण हेतु प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) मध्यप्रदेश के पत्र क्रमांक/वन्यजीव/व.त.अ.-1/GEN-672/533 दिनांक 17.01.2025 से अनुमति जारी की जा चुकी है जिसकी सूचना एवं अनुमति उप संचालक के पत्र क्रमांक/मा.चि./347 सिवनी दिनांक 22.01.2025 के द्वारा जारी की जा चुकी है। (घ) निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्रमांक-2 छिन्दवाड़ा द्वारा किया जाना है। वर्तमान में कार्य शुरू नहीं हुआ है।
पुलिस अधीक्षक जिला कटनी द्वारा दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही
[गृह]
90. ( क्र. 2444 ) डॉ. हिरालाल अलावा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या पुलिस अधीक्षक जिला कटनी ने दिनांक 14/09/2025 को पत्रकारवार्ता में मीडिया को बताया कि थाना कटनी के बहुचर्चित लूट मामले में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी राहुल सिंह उर्फ बिहारी को पकड़ने में थाना कटनी पुलिस को सफलता मिली है और पुलिस अधीक्षक ने मीडिया को यह भी बताया कि पकड़े गए अभियुक्त राहुल सिंह से पूछताछ के दौरान कटनी के कई लोगों द्वारा उसे आर्थिक रूप से सहायता एवं संरक्षण देने वालों की जानकारी मिली है जिसकी सूक्ष्मता से जांच की जा रही है? (ख) राहुल सिंह उर्फ बिहारी के मेमोरेंडम बयान के आधार पर कोतवाली पुलिस कटनी ने किस-किस व्यक्ति को कितने-कितने इस आशय का नोटिस जारी कर विस्तृत लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया, जिनसे फरारी के दौरान अभियुक्त राहुल सिंह नियमित संपर्क में था? राहुल सिंह के बयान पर जिस-जिस को कोतवाली पुलिस कटनी ने नोटिस जारी किया उन व्यक्तियों के विरूद्ध प्रश्न दिनांक तक क्या कार्यवाही की गई? नोटिस जारी करने के बाद यदि संबंधितों के विरूद्ध प्रश्न दिनांक तक कार्यवाही नहीं की गई तो विधिसम्मत कारण बतावें। कब तक क्या-क्या कार्यवाही की जाएगी? समय-सीमा सहित बतावें। (ग) राहुल सिंह को संरक्षण देने वालों को कोतवाली पुलिस कटनी द्वारा नोटिस जारी करने के बाद प्रश्न दिनांक तक कार्यवाही नहीं करने के लिए कौन-कौन दोषी हैं? दोषियों के विरूद्ध कब तक क्या कार्यवाही की जाएगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) थाना कोतवाली कटनी के अपराध क्रमांक 518/25 धारा 232, 296, 351 (3), 309 (4), 61 (2), 3 (5) बीएनएस के मामले में फरार आरोपी श्री राहुल सिंह उर्फ बिहारी को दिनांक 14.09.2025 को गिरफ्तार किया गया था। आरोपी की गिरफ्तारी के पश्चात अन्य आरोपियों के संबंध में अनुसंधान किया गया है। (ख) विवेचना के दौरान श्री शुभम सिंह पिता मोतीलाल सिंह उम्र 30 वर्ष निवासी थाना माधव नगर जिला कटनी एवं श्री अरमान द्विवेदी पिता अरूण कुमार द्विवेदी उम्र 28 वर्ष निवासी थाना कुठला जिला कटनी को सहअभियुक्त बनाया गया है। गिरफ्तार आरोपियों के विरूद्ध अभियोग पत्र तैयार कर माननीय न्यायालय पेश किया जा चुका है। फरार आरोपी श्री अरमान द्विवेदी के विरूद्ध धारा 193 (9) बीएनएसएस के अधीन विवेचना में है। (ग) उपरोक्तानुसार विधिसम्मत कार्यवाही की गई है।
सहारा जमीन घोटाले के संबंध में
[सामान्य प्रशासन]
91. ( क्र. 2445 ) डॉ. हिरालाल अलावा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राज्य आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ भोपाल मध्यप्रदेश द्वारा आशुतोष मनु दीक्षित की शिकायत-दिनांक 20/01/2025 पर सहारा जमीन घोटाले में P.S. EOW Bhopal में दिनांक 25/07/2025 को FIR No. 0116 आईपीसी धारा 420, 120बी सिमातों राय सीसीएम प्रमुख सहारा समूह, जेबी राय डिप्टी मैनेजिंग वर्कर एवं ओ.पी. श्रीवास्तव डिप्टी मैनेजिंग वर्कर सहारा प्राईम सिटी लिमिटेड एवं अन्य अज्ञात के विरूद्ध दर्ज की है परंतु आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा भोपाल, जबलपुर, कटनी जिले की सहारा जमीन घोटाले के मास्टर-माइंड एवं लाभार्थी क्रेता कंपनी मेसर्स सिनाप रियल एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड एवं मेसर्स नायसा देवबिल्ड प्राईवेट लिमिटेड, इनके डायरेक्टर्स एवं शेयर होल्डर्स के विरूद्ध प्रश्न-दिनांक तक कार्यवाही क्यों नहीं की, कार्यवाही नहीं करने के लिए कौन-कौन दोषी है? दोषियों के विरूद्ध कब तक क्या-क्या कार्यवाही होगी? क्रेता कंपनियों एवं इसके डायरेक्टर्स एवं शेयर होल्डर्स के विरूद्ध कब तक कार्यवाही की जाएगी? (ख) प्रश्नांश (क) की एफआईआर में नामजद आरोपी ओ.पी. श्रीवास्तव डिप्टी मैनेजिंग वर्कर सहारा प्राईम सिटी लिमिटेड को प्रवर्तन निदेशालय कोलकाता ने दिनांक 20/11/2025 को गिरफ्तार किया, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ भोपाल द्वारा उक्त नामजद आरोपी ओ.पी. श्रीवास्तव को प्रश्न-दिनांक तक हिरासत में लेकर भोपाल, जबलपुर, कटनी जिले के सहारा जमीन घोटाले के संबंध में पूछताछ क्यों नहीं की गई, कब तक गिरफ्तार किया जाएगा? प्रश्न-दिनांक तक उक्त आरोपी को गिरफ्तार नहीं करने के लिए कौन-कौन दोषी हैं? दोषियों के विरूद्ध कब तक क्या कार्यवाही होगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) अपराध क्रमांक-116/2025 विवेचनाधीन है। विवेचना में प्राप्त तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर अग्रिम विधिसम्मत कार्यवाही का प्रावधान है। (ख) आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के नामजद आरोपी श्री ओ.पी. श्रीवास्तव के विरूद्ध विवेचना में प्राप्त तथ्यों व साक्ष्यों के आधार पर अग्रिम विधिसम्मत कार्यवाही का प्रावधान है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
जनसेवा मित्रों की बहाली
[लोक सेवा प्रबन्धन]
92. ( क्र. 2451 ) श्री विपीन जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या 9300 जनसेवा मित्रों की नियुक्ति 01 फरवरी 2023 को की गई थी? इनसे क्या कार्य लिया जाता था? (ख) इनकी सेवा बिना सूचना के समाप्त कर दी गई है इन जनसेवा मित्रों की बहाली कब होगी उसके लिए सरकार की क्या कार्ययोजना है? (ग) पूर्व मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान द्वारा जनसेवा मित्रों के लिए की गई 04 अगस्त 2023 को घोषणा के अनुसार जन सेवा मित्रों की सेवा क्यों नहीं ली जा रही है? (घ) इन शिक्षित युवाओं की बहाली कर इन्हें सेवा में कब लिया जाएगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) 1. जनसेवा मित्र प्रोग्राम के अंतर्गत माह फरवरी 2023, में 4695 इन्टर्न (जन सेवा मित्र) तथा माह अगस्त 2023 में 4695 नवीन इन्टर्न (जन सेवा मित्र) को इंटर्नशिप हेतु चयनित किया गया था। 2. यह इंटर्नशिप कार्यक्रम प्रदेश के युवाओं को शासकीय कार्य प्रणाली से परिचित कराना, शासन की विभिन्न योजनाओं से परिचय कराने के पश्चात रोजगार हेतु सक्षम बनाना था। (ख) 1. उक्त कार्यक्रम एक प्रशिक्षण कार्यक्रम था जो कि निश्चित अवधि के लिये संचालित किया गया था एवं अवधि समाप्त होने पर उक्त कार्यक्रम समाप्त हो चुका है। 2. अवधि का उल्लेख इंटर्नशिप के विज्ञापन, नियम पुस्तिका एवं इंटर्न को दिए गए ऑफर लेटर में भी स्पष्ट था। योजना समाप्ति पश्चात् किसी भी प्रकार सेवा, रोजगार दिए जाने का प्रावधान नहीं था। (ग) माननीय पूर्व मुख्यमंत्री जी की घोषणा क्रमांक C-1966 दिनांक 04/08/2023 के अनुसार, मूल्यांकन उपरांत पात्र पाए गए चयनित जन सेवा मित्रों (फरवरी 2023) की इंटर्नशिप अवधि आगामी 6 माह (दि. 04/08/23 से दि. 31/01/24) के लिए बढ़ाया गया। कार्यक्रम में घोषणा अनुरूप कार्यवाही की गई थी। (घ) उत्तरांश (क), (ख) एवं (ग) के संदर्भ में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
औद्योगिक निवेश एवं रोजगार
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
93. ( क्र. 2454 ) श्री विपीन जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग अंतर्गत मंदसौर जिले में विगत 10 वर्षों में कितना निवेश आया है और कौन-कौन से उद्योग स्थापित हुए हैं? (ख) प्रश्नांश (क) अंतर्गत कितने लोगों को किस-किस प्रकार का रोजगार प्राप्त हुआ है? उसकी सूची देवें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के अधीन एम.पी. इण्डस्ट्रीयल डेव्हलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड क्षेत्रांतर्गत जिला मंदसौर में विगत 10 वर्षों में स्थापित उद्योग तथा निवेश से संबंधित जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) उत्तरांश (क) के संदर्भ में रोजगार से संबंधित जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।
वरिष्ठता निर्धारण में विसंगति
[सामान्य प्रशासन]
94. ( क्र. 2455 ) श्री पंकज उपाध्याय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. सिविल सेवा नियम 1961 नियम 12 (1) क अनुसार सीधे भर्ती वाले अभ्यर्थी की वरिष्ठता योग्यताक्रम अनुसार निर्धारित होना है, इस नियम की व्याख्या विभागों में अलग-अलग ढंग से होने के कारण MPPSC की अनुपूरक सूची से चयनित किसी अभ्यर्थी को लाभ मिल रहा है तो किसी के साथ अन्याय हो रहा है। सा.प्र.वि. की भांति अन्य विभागों में भी अनुपूरक सूची से चयनित अभ्यार्थियों की वरिष्ठता निर्धारण हेतु शासन के उक्त नियम की स्पष्टता एवं पालन के संबंध में सा.प्र.वि. द्वारा अब तक कौन से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं? यदि नहीं, तो कब तक जारी कर दिए जाएंगे? (ख) सा.प्र.वि. द्वारा 1998 के बाद अनुपूरक सूची से नियुक्त उपजिलाध्यक्षों की वरिष्ठताएं किन नियमो के तहत MPPSC की उनकी मेरिट अनुसार स्वीकृत गई है? (ग) MPPSC द्वारा अनुशंसा में किस नियम के तहत टीप अंकित की जाती है कि ''अनुपूरक सूची में अनुशंसित उम्मीदवार की वरिष्ठता संबंधित संवर्ग के मुख्य सूची के अंतिम चयनित उम्मीदवार के नीचे ही निर्धारित होगी''। इस टीप की अस्पष्टता के कारण हीं विभागों द्वारा विरोधाभासी वरिष्ठताएं निर्धारित की गई हैं, MPPSC सा.प्र.वि. के अंतर्गत निकाय है MPPSC की उक्त टीप का क्या आशय है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की अनुपूरक सूची से चयनित अभ्यर्थी की वरिष्ठता योग्यता क्रम का निर्धारण म.प्र. सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्ते) नियम, 1961 के नियम 12 (1) क अनुसार किया जाता है, जो स्पष्ट है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) म.प्र. सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्ते) नियम, 1961 के नियम 12 के अनुसार कार्यवाही की गई है। (ग) म.प्र. सिविल सेवा (सेवा की सामान्य शर्ते) नियम, 1961 के नियम 12 (1) क में लेख ''आयोग से परामर्श करने के पश्चात् नियुक्तियां की जाती हों, उस क्रम के अनुसार आयोग द्वारा नियुक्ति हेतु उनकी सिफारिश की गई हो,'' अनुसार अंकित की गई है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
माननीय मुख्यमंत्री जी की दावोस यात्रा की जानकारी
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
95. ( क्र. 2458 ) श्री पंकज उपाध्याय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 22 जनवरी, 2026 को वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस (मालदीव) में माननीय मुख्यमंत्री के साथ प्रतिनिधि मंडल में गए लोगों के नाम और पद बताएं। इस यात्रा का इवेंट मैनेजमेंट किस संस्था द्वारा किया गया था और उसे कितना भुगतान किया गया? (ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित यात्रा में सारे विभाग को मिलाकर, कुल कितना खर्च हुआ और वह किस विभाग द्वारा किस आयोजना मद से किया गया या किया जायगा? सारे प्रमुख खर्चों की उसके शीर्ष अनुसार जानकारी दें। (ग) मध्यप्रदेश में किस-किस क्षेत्र में निवेश के लिए दावोस में किन कंपनियों, निवेशकों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए? कंपनी का नाम, पता, निवेश की राशि तथा संभावित रोजगार सहित जानकारी दें। (घ) दावोस में जिन निवेशकों से MoU साईन हुए उनके साथ पिछले दो वर्ष में पहले भी अनुबंध किस-किस क्षेत्र में कितनी राशि के निवेश के लिए हुए थे तथा उन्हें किस दिनांक को कितनी जमीन किस शहर में आमंत्रित की गई? (ड.) 2024 से जनवरी 2026 तक निवेश के लिए देश विदेश में कौन-कौन से आयोजन, किस-किस दिनांक को हुए? सब मिलाकर कुल कितना निवेश किस-किस क्षेत्र में होगा तथा कितने रोजगार जनरेट होंगे? उनमें से कितनी राशि के कितने उद्योग प्रारंभ हो चुके हैं या प्रक्रियारत है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम, दावोस-2026 में माननीय मुख्यमंत्री के साथ शामिल प्रतिनिधि मंडल की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'1' अनुसार है। इस यात्रा का इवेंट मैनेजमेंट, मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम मर्यादित भोपाल द्वारा कराया गया। उद्योग संवर्धन एवं आंतरिक संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी), भारत सरकार के प्रस्ताव के अनुक्रम में इण्डिया पवेलियन में मध्यप्रदेश पवेलियन की स्थापना डीपीआईआईटी द्वारा नियुक्त ईवेंट मेनेजमेंट एजेन्सी के माध्यम से कराया गया है। उक्त यात्रा में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग अंतर्गत हुये खर्च हेतु संबंधित संस्था से देयक अपेक्षित है। देयक प्राप्त होने पर आयोजना मद 5531- डेस्टिनेशन म.प्र. इन्वेस्टमेंट ड्राइव से भुगतान संबंधी कार्यवाही की जाएगी। (ग) विभाग द्वारा निवेश संबंधी एमओयू हस्ताक्षरित नहीं किये जाते है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की वार्षिक बैठक-2026 में मध्यप्रदेश शासन की भागीदारी के दौरान निवेशकों एवं राजनियकों से मध्यप्रदेश में निवेश आमंत्रित करने के दृष्टिगत बैठकें/चर्चा की गई। (घ) उत्तरांश (ग) के संदर्भ में जानकारी निरंक है। (ड.) औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग अन्तर्गत 2024 से जनवरी 2026 तक निवेश के लिए देश विदेश में कौन-कौन से आयोजन, किस-किस दिनांक को हुए का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'2' अनुसार है। 2024 से जनवरी 2026 तक औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन अन्तर्गत हुए आयोजन में कुल रु. 32.66 लाख करोड़ का निवेश विभिन्न क्षेत्रो यथा टेक्सटाइल, खाद्य, नवीकरणीय उर्जा, ऑटोमोबाईल, प्लास्टिक, ईजीनियरिंग तथा अन्य क्षेत्रो में प्रस्तावित है। इसमे कुल 22,88,528 व्यक्तियों को रोजगार प्रस्तावित है। इनमें से राशि रु. 4,91,488 करोड़ के 724 उद्योग प्रांरभ हो चुके हैं या प्रक्रियारत है।
विधायक निधि के देयकों का भुगतान
[योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी]
96. ( क्र. 2461 ) श्री दिनेश गुर्जर : क्या उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्यप्रदेश के किस-किस जिले में 1 जनवरी, 2024 के पूर्व के विधायक निधि के किन-किन पूर्व विधायकों तथा वर्तमान विधायकों की विधायक निधि के निर्माण कार्यों के लंबित देयकों को भुगतान हेतु कितनी-कितनी राशि प्रश्न दिनांक की स्थिति में लंबित है? सम्पूर्ण जानकारी विधायक या पूर्व विधायक के नाम तथा विधानसभा क्षेत्र क्र. एवं नाम सहित बतावें। (ख) ग्वालियर जिले में पूर्व मंत्री श्री लाखनसिंह यादव द्वारा विधायक निधि से जो-जो निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग ग्वालियर द्वारा कराये गये थे, माननीय पूर्वमंत्री श्री लाखनसिंह यादव द्वारा कब-कब इन लंबित देयकों के भुगतान हेतु योजना मण्डल ग्वालियर तथा योजना मण्डल विभाग भोपाल में वरिष्ठ अधिकारियों तथा माननीय मंत्री महोदय को पत्र लिखे गये थे, लिखे गये पत्रों पर पत्र दिनांक से प्रश्न दिनांक तक क्या-क्या कार्यवाही की गई है? सम्पूर्ण पत्रों सहित की गई कार्यवाही की जानकारी दें।
उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना अंतर्गत निर्माण कार्य की भुगतान हेतु लंबित राशि की मांग वित्तीय वर्ष 2025-26 के तृतीय अनुपूरक अनुमान में की गई है।
महिलाओं एवं बालिकाओं की गुमशुदगी की घटनाएं
[गृह]
97. ( क्र. 2462 ) श्री दिनेश गुर्जर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पिछले दो वर्षों में महिलाओं और बच्चियों की गुमशुदगी की घटनाओं में निरंतर वृद्धि का मुख्य कारण क्या है? (ख) गत दो वर्षों में प्रदेश से प्रतिदिन गायब हो रही औसतन दर्जनों महिलाओं और बच्चियों में से कितनी प्रतिशत की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सकी है? (ग) गुमशुदगी के मामलों में एफआईआर दर्ज करने की दर इतनी निम्न (मात्र 3% के आसपास) क्यों है? क्या गृह विभाग ने पुलिस थानों को अपराध के आंकड़े कम दिखाने के लिए एफआईआर दर्ज न करने के मौखिक निर्देश दिए हैं? (घ) क्या 'ऑपरेशन मुस्कान' जैसे अभियानों के बावजूद प्रदेश 'महिला सुरक्षा' के मामले में देश के सबसे असुरक्षित राज्यों की सूची में क्यों बना हुआ है? क्या सरकार इस गंभीर मुद्दे पर एक 'स्पेशल टास्क फोर्स' (STF) गठित कर समयबद्ध जांच की घोषणा करेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) गुमशुदगी की घटनाओं में निरंतर वृद्धि का मुख्य कारण सोशल मीडिया प्रभाव, प्रेम प्रसंग, अशिक्षा, आर्थिक कमजोरी, रोजगार तलाश आदि हैं। (ख) प्रदेश में गत 02 वर्षों (2024-2025) में कुल 80,876 गुम महिलाओं में से 56,782 (70.20%) महिलाएँ सुरक्षित दस्तयाब की गई हैं तथा कुल 24,819 गुम बालिकाओं में से 23,495 (94.67%) बालिकाएँ सुरक्षित दस्तयाब की गई हैं। (ग) महिलाओं की दस्तयाबी के बाद जांच उपरांत एफ.आई.आर. दर्ज की जाती है। वर्तमान में अपराध दर्ज दर लगभग 0.75% है। बालिकाओं की गुमशुदगी के मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रिट याचिका क्र. 75/12 (बचपन बचाओ आंदोलन विरुद्ध भारत सरकार) में बच्चों की गुमशुदगी के मामलों में तत्काल एफ.आई.आर. दर्ज करने के निर्देश दिये गये है। बालिकाओं की गुमशुदगी में अपराध दर्ज दर 100% है। ऐसे कोई आदेश नहीं दिये गये हैं। (घ) जी नहीं, प्रदेश महिला सुरक्षा के मामले में देश के सबसे असुरक्षित राज्यों की सूची में बना हुआ है। गुम नाबालिग बालिकाओं की तलाश हेतु वर्षभर के लिये अनवरत अभियान प्रदेश स्तर पर संचालित किया जा रहा है, जिसकी समीक्षा महिला सुरक्षा शाखा द्वारा मुख्यालय स्तर पर लगातार की जा रही है। लगातार प्रयासों के कारण ही विगत 05 वर्षों में लंबित अदमपता बालिकाओं की संख्या में 1000 की कमी आयी है, 3627 लंबित अदमपता बालिकाओं की संख्या घटकर अब 2627 रह गई है। अतः स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने की आवश्यकता नहीं है।
आर्म्स डीलर्स लायसेंस नवीनीकरण किया जाना
[गृह]
98. ( क्र. 2463 ) डॉ. सतीश सिकरवार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आर्म्स डीलर्स लायसेंस नवीनीकरण किये जाने के संबंध में प्रदेश स्तर से जारी निर्देश/परिपत्र/ आदेश की प्रति उपलब्ध कराई जावें। (ख) आर्म्स डीलर लायसेंस नवीनीकरण किये जाने के संबंध में क्या समय-सीमा नियत है। आदेश की प्रति उपलब्ध कराई जावें। (ग) ग्वालियर-चम्बल संभाग में जिलेवार संचालित आर्म्स डीलरों के नाम/पते सहित जानकारी दी जावें। (घ) वर्ष 2024 एवं 2025 में नवीनीकरण हेतु किन-किन आर्म्स डीलरों द्वारा आवेदन प्रस्तुत किये गये? इनमें से कितनी दुकानों का नवीनीकरण किस दिनांक को किया गया? आर्म्स डीलर्सवार जानकारी दी जावें। (ड.) वर्तमान में कितने आर्म्स दुकानों के नवीनीकरण आवेदन किस दिनांक से लंबित है? नाम एवं कारण सहित जानकारी दी जावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'अ' अनुसार है। (ग) से (ड.) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'ब' अनुसार है।
शस्त्र लायसेंस जारी किया जाना
[गृह]
99. ( क्र. 2464 ) डॉ. सतीश सिकरवार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में शस्त्र लायसेंस जारी करने के संबंध में क्या नियम/निर्देश शासन स्तर से जारी किये गये है? आदेश की प्रति/परिपत्र उपलब्ध कराये जावे। (ख) प्रदेश में 1 जनवरी, 2024 से 31 दिसंबर, 2025 तक कितने लायसेंस जारी हुये है? जिलेवार एवं शस्त्र के प्रकार सहित संख्यात्मक जानकारी दी जावे। (ग) ग्वालियर/चंबल संभाग/जिले में उक्त अवधि में किस-किस वर्ष के आवेदन वर्तमान में लंबित है? वर्षवार संख्यात्मक जानकारी दी जावे। (घ) जिला ग्वालियर एवं जिला मुरैना में शासन के आदेश का हवाला देते हुये आवेदन जमा नहीं किये जा रहे है? इस संबंध में शासन द्वारा रोक लगाई गई है, यदि हां, तो आदेश की प्रति उपलब्ध कराई जावे। (ड.) क्या शासन द्वारा शस्त्र लायसेंस आवेदनों का निराकरण करने हेतु समय-सीमा नियम की गई है? यदि हां, तो शासन के आदेश की प्रति उपलब्ध कराई जावे।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (ड.) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
रिक्त पदों की जानकारी
[सामान्य प्रशासन]
100. ( क्र. 2466 ) डॉ. सतीश सिकरवार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला ग्वालियर में संभागीय स्तर/जिला स्तर के कार्यालयों में कितने पद किस-किस संवर्ग के स्वीकृत है? सवंर्गवार/कार्यालयवार जानकारी दी जावे। (ख) प्रश्नांश (क) के संबंध में उक्त स्वीकृत पदों में से कितने पद किस वर्ष से रिक्त है? संवर्गवार/कार्यालयवार जानकारी दी जावे। (ग) प्रश्नांश (ख) में उल्लेखित रिक्त पदों को भरने के लिये क्या कार्यवाही की गई? के संबंध में जानकारी अभिलेख सहित दी जावे। (घ) प्रश्नांश (ग) के संबंध में यदि रिक्त पदों को भरने की कार्यवाही प्रचलित नहीं है, तो क्या कारण रहे?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) रिक्त पदों को भरने के लिए कर्मचारी चयन मंडल एवं लोक सेवा आयोग के माध्यम से निरंतर कार्यवाही की जाती है। (घ) उत्तरांश (ग) के प्रकाश में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
मीना एवं मांझी समाज के संबंध में
[सामान्य प्रशासन]
101. ( क्र. 2467 ) श्री मोहन सिंह राठौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रदेश सरकार द्वारा अपने आदेश दिनांक 18 जनवरी, 2002, 20 नवम्बर, 2014 एवं 02 सितम्बर, 2016 तथा समय-समय पर जारी आदेशों के द्वारा कीर, मीना, पारथी एवं मांझी समाज के कर्मचारियों के विरूद्ध कार्यवाही नहीं करने के/अनावश्यक परेशान नहीं करने के निर्देश जारी किये गये है? यदि हां, तो निर्देशों की प्रति उपलब्ध करायें। (ख) प्रश्नांश (क) यदि हां में उत्तर है तो ग्वालियर एवं चंबल संभाग में इन जातियों के कर्मचारियों के विरूद्ध जाति के संबंध में पुलिस कार्यवाही क्यों की जा रही है, की जा रही कार्यवाही को कब तक रोका जायेगा? समय-सीमा बताएं। यदि नहीं, तो क्यों? (ग) क्या शासन प्रश्नांश (क) में उल्लेखित जातियों के हित संरक्षण में प्रश्नांश (क) में उल्लेखित आदेशों के तारतम्य में पुनः नवीन आदेश जारी करेगा? यदि हां, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ ! निर्देशों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार। (ख) ग्वालियर व चंबल संभाग में इन कर्मचारियों के विरूद्ध पुलिस कार्यवाही नहीं की गई शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) उपरोक्त उत्तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
जेल प्रहरियों की शिकायत एवं कार्यवाही
[जेल]
102. ( क्र. 2468 ) श्री मोहन सिंह राठौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्वालियर संभाग में कितनी केन्द्रीय जेल/जिला जेल/उपजेल है? नामवार एवं स्थानवार जानकारी दें। जेलों में प्रहरियों के कितने पद स्वीकृत है, कितने भरे है एवं कितने रिक्त है? जेलवार संख्यात्मक जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित जेलों में पदस्थ प्रहरियों के विरूद्ध 1 जनवरी, 2025 से प्रश्न दिनांक तक कितनी शिकायतें प्राप्त हुई है? जेलवार, प्रहरियोंवार जानकारी दें। (ग) क्या गुना जिले की जेलों में पदस्थ प्रहरियों के विरूद्ध प्रश्नांश (ख) अवधि में प्राप्त शिकायतों पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है? क्यों? कार्यवाही कब तक की जायेगी? समय-सीमा बताएं।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) ग्वालियर संभाग में 01 केन्द्रीय जेल, 04 जिला जेल एवं 07 सब जेल कुल 12 जेलें हैं। इन जेलों के नाम, स्थान एवं उनमें प्रहरियों के स्वीकृत, भरे एवं रिक्त पदों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-अ अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ब अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ब के सरल क्रमांक 05 अनुसार जिला जेल गुना के एक प्रहरी के विरुद्ध शिकायत प्राप्त हुई जिस पर नियमानुसार कार्यवाही की गई। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
व्यवहार न्यायालय खोले जाना
[विधि एवं विधायी कार्य]
103. ( क्र. 2471 ) श्री कैलाश कुशवाहा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शिवपुरी जिले की नरवर तहसील में प्रश्न दिनांक तक व्यवहार न्यायालय की स्थापना क्यों नहीं की गई है, जबकि जिले की अन्य तहसीलों में व्यवहार न्यायालय नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं? नरवर तहसील के अंतर्गत थाना सीहोर, पुलिस चौकी मगरोनी एवं पुलिस चौकी सुनाटी सहित कुल 61 ग्राम पंचायतें एवं 128 ग्राम आते हैं, जिनके समस्त सिविल एवं फौजदारी प्रकरण वर्तमान में करैरा व्यवहार न्यायालय में प्रचलित हैं। करैरा एवं नरवर के मध्य लगभग 35 कि.मी. की दूरी होने के कारण आम नागरिकों, अधिकारियों एवं गवाहों को बार-बार आवागमन में अत्यधिक समय एवं आर्थिक व्यय करना पड़ रहा है, इस तथ्य पर शासन का क्या विचार है? इसकी समय-सीमा एवं वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए। (ख) क्या नरवर तहसील में व्यवहार न्यायालय की स्थापना होने से आम नागरिकों को समय एवं अनावश्यक आर्थिक व्यय से राहत मिलेगी तथा उन्हें कम खर्च में सुलभ एवं शीघ्र न्याय उपलब्ध हो सकेगा? यदि हाँ, तो शासन द्वारा इस दिशा में क्या कदम उठाए गए हैं? (ग) क्या पूर्व में तहसील नरवर में व्यवहार न्यायालय की कार्यवाही प्रारंभ करने संबंधी प्रस्ताव/कार्यवाही विभाग द्वारा की गई थी, परंतु प्रश्न दिनांक तक स्थापना नहीं की गई? साथ ही, क्या शासन की मंशानुसार प्रत्येक तहसील में व्यवहार न्यायालय की स्थापना किए जाने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो उसका विवरण प्रस्तुत किया जाए।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्त
[पर्यावरण]
104. ( क्र. 2472 ) श्री कैलाश कुशवाहा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शिवपुरी जिले में वित्तीय वर्ष 2021-22 से प्रश्न दिनांक तक विभिन्न परियोजनाओं/योजनाओं के अंतर्गत पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने हेतु प्राप्त समस्त आवेदनों की परियोजनावार सूची उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, उक्त अवधि में जिन परियोजनाओं/योजनाओं को पर्यावरणीय स्वीकृति प्रदान की गई है, उनकी स्वीकृति आदेशों की छायाप्रति दी जावे। (ख) प्रश्नांश (क) के अनुसार प्रदत्त पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों का निर्माण एजेंसियों द्वारा पालन न किए जाने संबंधी शिकायतें विभिन्न माध्यमों (जनप्रतिनिधि, जनसुनवाई, लिखित आवेदन, ऑनलाइन पोर्टल आदि) से प्राप्त हुई हैं? यदि हाँ, तो प्राप्त शिकायतों की संख्या, शिकायतों का स्वरूप तथा उन पर की गई जांच एवं कार्यवाही का विस्तृत विवरण प्रदान किया जाए। (ग) विभिन्न परियोजनाओं/योजनाओं में प्रदत्त पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों में उल्लिखित सामाजिक-सामुदायिक दायित्वों से संबंधित कार्यों पर होने वाला व्यय कौन करता है, संबंधित राशि का लेखा-जोखा किस विभाग/एजेंसी द्वारा रखा जाता है तथा यह राशि किस मद/योजना से व्यय की जाती है, साथ ही इन शर्तों के पालन की मॉनिटरिंग एवं पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी किस अधिकारी/प्राधिकरण की है? स्पष्ट किया जाए। (घ) यदि निर्माण एजेंसी द्वारा पर्यावरणीय स्वीकृति की शर्तों का पालन नहीं किया जाता है, तो संबंधित नियमों/ अधिनियमों के अंतर्गत निर्माण एजेंसी पर क्या-क्या दण्डात्मक कार्यवाही किए जाने का प्रावधान है? साथ ही, ऐसी शिकायतों की संख्या एवं अब तक की गई कार्यवाही का विस्तृत विवरण प्रदान किया जाए।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''अ'' एवं ''ब'' अनुसार है। (ख) राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण में ई-मेल के माध्यम से श्री दीपक जैन से शिवपुरी जिला करेरा, नरवर अनुभाग अंतर्गत ग्राम कल्याणपुर में रेत खदान हेतु अधिरोपित शर्तों का उल्लंघन कर सिंध नदी से रेत के अवैध उत्खनन की शिकायत दिनांक 01/06/2024 को प्राप्त हुई थी, जिसे राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण के पत्र क्रमांक 1171 दिनांक 04/06/2024 के माध्यम से कार्यवाही हेतु कलेक्टर, जिला शिवपुरी तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य खनिज निगम को प्रेषित की जा चुकी है। (ग) परियोजना प्रस्तावक द्वारा। शर्तों का पालन कराने एवं पर्यवेक्षण हेतु भारत सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का क्षेत्रीय कार्यालय अधिकृत है। (घ) भारत सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा यथोचित कार्यवाही की जा सकती है। क्षेत्रीय कार्यालय, भारत सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से प्राप्त जानकारी अनुसार शिवपुरी जिले से संबंधित परियोजनाओं के संबंध में प्रश्नाधीन अवधि के दौरान कोई भी शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
निवाड़ी में संचालित शराब दुकाने
[वाणिज्यिक कर]
105. ( क्र. 2479 ) श्री अनिल जैन : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) निवाड़ी जिले में देशी-विदेशी कम्पोजिट कितनी शराब दुकानें कहाँ-कहाँ संचालित हैं? नामवार, फर्मवार जानकारी देवें। (ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित शराब दुकानों की दूरी मंदिर, धार्मिक स्थल, विद्यालय, महाविद्यालय से निश्चित दूरी तय की गई है? यदि हाँ, तो नियम के प्रति देवें। (ग) क्या यह सही है कि निवाड़ी नगर की मुख्य बस्ती में शराब दुकान संचालित है यदि हाँ, तो इसको हटाने के लिए स्थानीय निवासियों के द्वारा कब-कब जिले के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन दिये है यदि हाँ, तो अभी तक क्या कार्यवाही की गई?
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जिला निवाड़ी में 42 कम्पोजिट मदिरा दुकानें संचालित हैं। निवाड़ी जिले में संचालित दुकानों का स्थल एवं कम्पोजिट मदिरा दुकान के लायसेंसी/फर्म की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-एक अनुसार है। (ख) मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) क्रमांक 111 दिनांक 31.03.2023 को प्रकाशित अधिसूचना क्रमांक एफ 3/3/4/0009/ 2023-Sec-2-05- (CT) (15) दिनांक 31.03.2023 से निश्चित दूरी तय की गई है। उक्त नियम की छायाप्रति जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-दो अनुसार है। (ग) जी हां। निवाड़ी नगर की मुख्य बस्ती में (कम्पोजिट मदिरा दुकान निवाड़ी न. 01 संचालित है जिसको हटाने के लिए स्थानीय निवासियों द्वारा समय-समय पर ज्ञापन प्रस्तुत किये गये हैं। उक्त संबंध में कलेक्टर, निवाड़ी द्वारा आदेश क्रमांक 249 दिनांक 26.04.2025 से दुकान को अन्यत्र अपनी स्वीकृत अवस्थिति में 07 दिवस में नियमानुसार स्थानांतरित करने हेतु आदेश पारित किया गया था जिसके संबंध में लायसेंसी द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में रिट याचिका क्रमांक 16143/2025 प्रस्तुत की गई जिस पर माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अगली सुनवाई तक उक्त आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई है। प्रकरण अभी माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
जिला कार्यालय स्वीकृत किया जाना
[वाणिज्यिक कर]
106. ( क्र. 2480 ) श्री अनिल जैन : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जिला निवाड़ी के गठन के 07 वर्ष व्यतीत होने के पश्चात् भी वाणिज्यिक कर विभाग का जिला कार्यालय स्वीकृत नहीं हुआ है? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में यदि वाणिज्यिक कर विभाग का जिला कार्यालय स्वीकृत नहीं हुआ है तो कार्यालय प्रारंभ किये जाने हेतु क्या कार्यवाही की गई है? कब तक निवाड़ी जिले में वाणिज्यिक कर विभाग का जिला कार्यालय प्रारंभ कर दिया जावेगा? समय-सीमा सहित बतावें।
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी हाँ। वर्तमान में निवाड़ी जिले में वाणिज्यिक कर विभाग का वृत्त कार्यालय स्वीकृत नहीं हुआ है। (ख) निवाड़ी जिला वर्तमान में टीकमगढ वृत्त के अंतर्गत है। निवाड़ी जिले में वर्तमान में पंजीयत व्यवसायियों की कुल संख्या 2180 है, जिसमें से राज्य क्षेत्राधिकार के व्यवसाई 1186 हैं, किन्तु अधिकांश व्यवसायियों द्वारा विवरण पत्र निरंक प्रस्तुत किये जाते हैं। इनसे प्राप्त राजस्व रू. 10.5 करोड़ है। जिले में कोई वृहद स्तर का उद्योग भी स्थापित नहीं है। अत: वर्तमान में निवाड़ी जिले में वाणिज्यिक कर विभाग का वृत्त कार्यालय प्रारंभ किये जाने हेतु कोई कार्यवाही प्रचलन में नहीं हैं।
थाना खजुराहो में रिपोर्ट क्र. 0306 पर कार्यवाही
[गृह]
107. ( क्र. 2503 ) श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर जिले के थाना खजुराहो में प्राथमिक सूचना रिपोर्ट क्रमांक 0306 दि. 19.12. 2025 में किस-किस नाम के व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है? FIR की एक प्रति देते हुए बताएं कि प्रश्न तिथि तक किस-किस आरोपी की गिरफ्तारी हो चुकी है? (ख) क्या होटल स्टाफ के द्वारा दिए गए खाने को रामस्वरूप कुशवाहा/बिहारी पटेल/गिरजा रजक/रोशनी रजक/गोलू अग्निहोत्री/रवि कोंडर/दयाराम कुशवाहा/गोविंददास/राजकुमारी/हार्दिक ने भी खाया? सभी को उल्टी दस्त की शिकायत हुई? (ग) प्रश्नांश (क) में वर्णित जिन-जिनके नाम उल्लेखित हैं? बयानों की एक प्रति जो की घटना के बाद पुलिस ने लिए हैं, उपलब्ध करायें? क्या 0306 दिनांक 19.12.2025 में इन सभी नामों का उल्लेख FIR में है? (घ) राज्य शासन/जिला प्रशासन/पुलिस प्रशासन/द्वारा उक्त घटना के बाद बीमार हुए प्रश्नांश (ख) में वर्णित लोगों व अन्य लोगों व मृत प्राणी कुशवाहा के परिजनों को कितनी-कितनी सहायता राशि शासन से एवं होटल मैनेजमेंट से दिलवाई गई? प्रकरणवार जानकारी/ नामवार/राशिवार दें? अगर नहीं दिलवाई गई तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) छतरपुर जिले के थाना खजुराहो में प्राथमिक सूचना रिपोर्ट क्रमांक 0306 दिनांक 09.12.2025 की विवेचना में क्रमशः 1 श्री आशीष तिवारी प्रभारी स्टोर मैनेजर होटल गौतम रिसोर्ट खजुराहो तथा 2-श्री दयाराम रैकवार प्रभारी गार्डन स्टोर रूम होटल गौतम रिसोर्ट खजुराहो को आरोपी बनाया गया है। सात वर्ष से कम अवधि से दण्डनीय अपराध होने के कारण गिरफ्तारी नहीं की गई है। आरोपी स्व. दयाराम रैकवार की दिनाक 23-12-2025 को मृत्यु हो चुकी है। प्रथम सूचना पत्र की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'अ' अनुसार है। (ख) जी हाँ। (ग) प्रश्नांश (क) में किसी भी व्यक्ति के नाम का उल्लेख नहीं है। प्रथम सूचना पत्र 0306 का उल्लेख किया गया है। प्रथम सूचना पत्र 0306 में आरोपी होटल गौतम रिसोर्ट मैनेजमेन्ट खजुराहो का उल्लेख है। अनुसंधान में संकलित साक्ष्य के आधार पर प्रश्नांश (क) के प्रारूप उत्तर (क) में अंकित व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। प्रथम सूचना पत्र क्रमांक 0306 में प्रश्नांश (ख) में उल्लेखित सभी पीड़ितों का उल्लेख है। चूंकि अपराध विवेचना में है अतः कथनों की प्रतिलिपि देने से विवेचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना संभव है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'ब' अनुसार है।
सतना हवाई अड्डा के उद्घाटन एवं उड़ानों के संबंध में
[विमानन]
108. ( क्र. 2506 ) श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सतना हवाई अड्डा का उद्घाटन वर्ष 2025 में कब (किस तिथि को) और किन-किन जनप्रतिनिधियों द्वारा किया गया? उद्घाटन तिथि से प्रश्नतिथि तक कितनी उड़ाने कहां-कहां के लिए गई और कितने यात्रियों ने सफर किया? सूची उपलब्ध कराएं। (ख) अभी तक प्लेन/उड़ानो का संचालित न हो पाने का क्या कारण है? क्या प्लेन/उड़ानों के लिए संपूर्ण तैयारी नहीं थी या कोई तकनीकी कारण था? क्या इसमें दोषियों की जिम्मेदारी तय करते हुए सरकार सख्त से सख्त कार्यवाही करेगी? यदि हाँ, तो कब तक में? यदि नहीं, तो क्यों? (ग) सतना हवाई अड्डा से कहां-कहां के लिए और कब से उड़ानों/प्लेन, का सुचारू रूप से संचालन शुरू किया जाएगा? समयावधि बताएं। यदि संचालित नहीं होगा तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) सतना हवाई अड्डे का उद्घाटन दिनांक 31/05/2025 को हुआ था। उद्घाटन के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट पर है। उद्घाटन तिथि से प्रश्न तिथि तक भोपाल, रीवा, इन्दौर, दिल्ली, खजुराहो, सिंगरौली, गया और झारसुगुड़ा की 41 उड़ानों में कुल 137 आगमन/प्रस्थान यात्रियों द्वारा सफर किया गया। विभाग द्वारा यात्रियों का अभिलेख संधारित नहीं किया जाता है। (ख) हवाई अड्डे से हवाई उड़ानों का निर्णय भारत सरकार/भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आता है। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) उत्तरांश (ख) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
भूमि लीज आवंटन के दिशा-निर्देश
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
109. ( क्र. 2507 ) श्री मधु भगत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विगत 3 वर्षों में सम्पूर्ण म.प्र. में उद्योग या बड़े उद्योग या अन्य उपक्रम हेतु किन-किन व्यक्तियों/फर्म को भूमि लीज पर कब से उपलब्ध करायी गई है? जानकारी उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित भूमि लीज प्राप्त व्यक्तियों/फर्म/अन्य प्रक्रम की वर्तमान में भौतिक स्थिति यथा बंद/चालू क्या स्थिति हैं? बतायें। बंद होने की स्थिति में यह बताये की वर्तमान में भूमि किस उपयोग में लाई जा रही है? भूमि लीज आवंटन के दिशा/निर्देश/नियम का उल्लंघन क्यों किया जा रहा है? (ग) क्या यह सही है कि निश्चित अवधि के पश्चात स्वत: लीज निरस्त होने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो बताये कि जिस उपयोग हेतु भूमि लीज प्रदान की गई तो भूमि का अन्य तरह से उपयोग क्यों हो रहा? क्या दोषियों पर कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक यदि नहीं, तो क्यों? (घ) प्रश्नांश (क) एवं (ख) में उल्लेखित लीज भूमियों का अन्यत्र उपयोग पर लीज निरस्त कर अन्य व्यक्तियों/ फर्म अन्य प्रक्रमों हेतु लीज प्रदाय की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) विभाग के अधीन एमपीआईडीसी अंतर्गत विगत 03 वर्ष में उद्योग या बड़े उद्योग या अन्य उपक्रम हेतु व्यक्तियों/फर्म को लीज पर उपलब्ध/आवंटित भूमि का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) उत्तरांश (क) में उल्लेखित भूमि लीज प्राप्त व्यक्तियों/फर्म/अन्य प्रक्रम की वर्तमान में भौतिक स्थिति यथा बंद/चालू की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। प्रचलित मध्यप्रदेश राज्य औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम 2019 अंतर्गत सूक्ष्म, लघु, मध्यम एवं वृहद उद्योगों की श्रेणीवार 02 वर्ष से 04 तक की समयावधि उद्योग स्थापनार्थ प्रदान की जाती है। इकाई के लीजडीड में उल्लेखित कंडिकाओं का उल्लंघन करने पर नियमानुसार नोटिस जारी करने एवं निरस्तीकरण की कार्यवाही की जाती है। (ग) जी नहीं। अत: शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) प्रश्नांश (क) एवं (ख) में उल्लेखित औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग अंतर्गत इकाइयों को औद्योगिक प्रयोजन के अन्यत्र उपयोग पर अथवा उत्पादनरत न होने की स्थिति में म.प्र. राज्य औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम 2019 (यथा संशोधित 2025) के अनुसार विभाग द्वारा नियमानुसार निरस्तीकरण की कार्यवाही की जाती है। इकाई को लीज निरस्त उपरांत अपील करने का भी विकल्प उपलब्ध रहता है। तदपश्चात आधिपत्य प्राप्त कर भूखंड को पोर्टल के माध्यम से आवंटन हेतु उपलब्ध कराया जाता है।
पॉल्यूशन बोर्ड में नियमों का उल्लंघन
[खनिज साधन]
110. ( क्र. 2509 ) श्री मधु भगत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला सिवनी के ग्राम पंचायत डुंगरिया (कंडीपार) विकासखण्ड सिवनी में कितनी क्रेशर प्लांट संचालित हैं? क्रेशर मालिक के नाम सहित, शासन से अनुमति से संबंधित समस्त दस्तावेज की सत्यप्रति उपलब्ध करावें? (ख) विभागीय अधिकारी द्वारा विगत तीन वर्षों में उक्त क्रेशर कम्पनियों का कब-कब निरीक्षण किया गया? तिथिवार निरीक्षणकर्ता के नाम सहित निरीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध करावें। CSR की राशि की पृथक से जानकारी देवें। (ग) क्या उक्त कम्पनियों में अनुमति से अधिक उत्खनन किया गया है? यदि हां/नही तो विगत 4 वर्षों के उत्खनन की जानकारी देवें? क्या कम्पनी एरिया के आसपास पेड़-पौधे एवं बाउण्ड्रीवॉल मौजूद हैं? जानकारी देवें। (घ) क्या पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के नियमों का उल्लंघन किया गया? सीटीई तथा सीटीओ के नियमों का सर्कुलर उपलब्ध करावें। आम जनता, मवेशी आदि की अनचाही दुर्घटना से बचाव के क्या इतंजाम किये गये हैं? बतायें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" पर है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"ब" पर है। CSR भारत सरकार के कम्पनी अधिनियम 2013 की विषयवस्तु है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी नहीं। क्रेशर प्लांट में खनिज का उत्खनन नहीं किया जाता है। शेष भाग का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। स्वीकृत उत्खनिपट्टा क्षेत्र एवं आसपास पेड़-पौधे तथा सुरक्षा हेतु बाउण्ड्रीवॉल/तार फेंसिंग की गई है। (घ) स्वीकृत उत्खनिपट्टा में क्रेशर हेतु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्राप्त होने उपरांत ही संचालन कार्य किया जाता है। सीटीई तथा सीटीओ भारत सरकार के जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 अधिसूचित हैं। आम जनता, मवेशी आदि की अनचाही दुर्घटना से बचाव के लिए स्वीकृत क्षेत्र में सुरक्षा हेतु बाउन्ड्रीवाल/तार फेंसिग की गई है।
पर्यावरण संरक्षण के उपाय
[पर्यावरण]
111. ( क्र. 2513 ) श्री प्रेमशंकर कुंजीलाल वर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या राज्य की नदियों में औद्योगिक अपशिष्ट गिराया जा रहा है? यदि हाँ, तो संबंधित इकाइयों पर क्या कार्यवाही की गई है? (ख) अपशिष्ट एवं गंदी नालियों का पानी नदियों में न बहाए जाए इसके लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं? (ग) राज्य में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत विगत 3 वर्ष में कितने प्रकरण दर्ज किए गए हैं और उनमें से कितनों का निराकरण हुआ है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में शिकायत/सूचना मिलने पर निरीक्षण किया जाता है तथा प्रदूषण पाये जाने पर विधि अनुसार कार्यवाही की जाती है। (ख) उद्योगों द्वारा दूषित जल उपचार संयंत्र की स्थापना कर शून्य निस्त्राव की स्थिति बनाये रखने की मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा अधिरोपित शर्त का पालन कराया जाता है। प्रमुख अभियंता, नगरीय प्रशासन एवं विकास म.प्र. से प्राप्त जानकारी अनुसार 149 एस.टी.पी. क्रियाशील हैं। (ग) प्रश्नाधीन अवधि में कुल 07 प्रकरण दर्ज किये गये हैं, इनमें से कोई निराकृत नहीं हुआ है।
जल एवं वायु प्रदूषण की रोकथाम
[पर्यावरण]
112. ( क्र. 2514 ) श्री प्रेमशंकर कुंजीलाल वर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राज्य में पिछले 5 वर्षों में वायु प्रदूषण के स्तर में कितनी वृद्धि अथवा कमी हुई है? (ख) इसके नियंत्रण हेतु क्या-क्या कदम उठाए गए हैं एवं क्या दुष्परिणाम सामने आए हैं? (ग) राज्य में जल प्रदूषण की रोकथाम हेतु कितने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्वीकृत निर्माणाधीन एवं क्रियाशील है? प्रत्येक पर होने वाला व्यय कितना है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा वायु प्रदूषणकारी उद्योगों/संस्थानों/खदानों को वायु प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों की स्थापना एवं सुचारू रूप से संचालन हेतु सशर्त सम्मति जारी की जाती है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रमुख अभियंता, नगरीय प्रशासन एवं विकास म.प्र. से प्राप्त जानकारी अनुसार प्रदेश के नगरीय निकायों में 360 एस.टी.पी. स्वीकृत/निर्माणाधीन हैं। इनमें से 149 एस.टी.पी. निर्मित/ क्रियाशील हैं। प्रत्येक एस.टी.पी. में लगभग रूपये 1.00 करोड़ प्रति एम.एल.डी. की लागत होती है।
राजगढ़ जिले में वन विभाग द्वारा विकास कार्य
[वन]
113. ( क्र. 2516 ) श्री अमर सिंह यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वन विभाग द्वारा जिले में विकास कार्यों हेतु प्रति वर्ष बजट आवंटित किया जाता है? (ख) यदि हाँ, तो वन विभाग द्वारा राजगढ़ जिले में वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में कितना-कितना बजट आवंटित किया है? वर्षवार बतावें। (ग) उक्त प्राप्त बजट से विभाग द्वारा कितनी-कितनी राशि के क्या-क्या कार्य कराए गए? वर्षवार बतावें। (घ) उक्त कार्य कराये जाने हेतु क्या कोई टेंडर जारी किए गए थे? उसकी क्या शर्ते थी? उनमें किन-किन के द्वारा टेंडर डाले गए? उनमें किसके टेंडर स्वीकृत हुए? बतावें। कौन-कौन से कार्य किस-किस के द्वारा कितनी-कितनी राशि के कराए गए हैं? बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। विभाग द्वारा जिलों में विकास कार्यों और वानिकी गतिविधियों के लिए प्रति वर्ष बजट आवंटित करता है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार है। (ग) जानकारी उत्तरांश (ख) के पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट में है। (घ) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है।
राजगढ़ विधानसभा अंतर्गत उद्योगों की स्थापना
[सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम]
114. ( क्र. 2517 ) श्री अमर सिंह यादव : क्या सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या राजगढ़ जिले की विधानसभा राजगढ़ अंतर्गत विभाग द्वारा उद्योग खोले जाने हेतु शासकीय भूमि आरक्षित की गई है? यदि हाँ, तो किस-किस स्थान पर कितनी-कितनी शासकीय भूमि आरक्षित की गई है? जानकारी दें। (ख) उक्त आरक्षित भूमि पर क्या कोई उद्योग लगाया जाना प्रस्तावित है? यदि हाँ, तो कहां पर स्थान, यदि नहीं, तो विभाग द्वारा कोई उद्योग खुलवाया जाएगा? बतावें। (ग) विभाग द्वारा उद्योग लगाए जाने हेतु क्या सहायता की जाती है? जानकारी दें।
सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ( श्री चेतन्य कुमार काश्यप ) : (क) जी नहीं। (ख) उत्तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) उद्योग स्थापित करने हेतु विभाग द्वारा एम.एस.एम.ई. प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री उद्यम क्रॉति योजना तथा म.प्र. स्टार्टअप पॉलिसी, के तहत पात्रतानुसार सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
पुलिस कर्मियों हेतु आवासों का निर्माण
[गृह]
115. ( क्र. 2521 ) श्री उमाकांत शर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भोपाल संभाग अंतर्गत थाना, भवन पुलिस कार्यालय एवं पुलिस कर्मियों हेतु आवास निर्माण का कार्य किस एजेन्सी/निगम के माध्यम से कराया जाता है? 01 अप्रैल, 2018 से प्रश्नांकित दिनांक तक मध्यप्रदेश में किन-किन स्थानों पर निर्माण कार्यों के स्वीकृति हुई प्रशासकीय आदेश की छायाप्रति उपलब्ध करावें? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में मध्यप्रदेश पुलिस आवास एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड में कौन अधिकारी कर्मचारी पदस्थ है? कर्मचारी/अधिकारियों की जानकारी देवें एवं इसमें अनुसंलग्न एवं प्रतिनियुक्ति के नियम निर्देश है? (ग) प्रश्नांश (क), (ख) के संदर्भ में उक्त एजेन्सियों द्वारा भोपाल संभाग में कौन-कौन से थाना भवन एवं पुलिस आवास निर्माण कार्यालय निर्माण किये गए है? कितने पूर्ण हुए, कितने अपूर्ण है, कितने अप्रारंभ है? उक्त निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने हेतु कौन-कौन से अधिकारियों द्वारा कार्यों का निरीक्षण किया गया कार्यों में क्या कमियां पाई गई कार्य एजेन्सियों पर क्या-क्या कार्यवाही की गई? (घ) विदिशा जिले के अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय लटेरी पुलिस आवासीय परिसर लटेरी एवं थाना आनंदपुर एवं थाना मुगलसराय की भवन निर्माण की क्या कार्ययोजना है? उक्त भवनों का निर्माण कब तक कर दिया जावेगा? समय-सीमा बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) भोपाल संभाग अंतर्गत थाना भवन पुलिस कार्यालय एवं पुलिस कर्मियों हेतु आवास निर्माण का कार्य सामान्यतः म.प्र. पुलिस आवास एवं अधोसंरचना विकास निगम द्वारा किया जाता है। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-अ अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ब अनुसार है। अनुसंलग्न एवं प्रतिनियुक्ति के पृथक से नियम निर्देश नहीं है। (ग) 01 अप्रैल, 2018 के पश्चात स्वीकृत कुल 09 थाना भवनों में से 02 थाना भवनों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है एवं 07 का निर्माण अप्रारम्भ है तथा 01 अप्रैल 2018 के पश्चात स्वीकृत कुल 05 कार्यालय भवनों में से 02 कार्यालय भवनों का निर्माण पूर्ण हो चुका है एवं 03 कार्यालय भवनों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-स अनुसार है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने हेतु मैदानी अमला परियोजना यंत्री, सहायक यंत्री, उपयंत्री द्वारा कार्यों का निरीक्षण किया गया है। 01-04-2018 के पश्चात् भोपाल संभाग में आवासों के निर्माण की कोई नई प्रशासकीय स्वीकृति नहीं है परन्तु एक 01-04-2018 पूर्व की प्रशासकीय स्वीकृति के परिपेक्ष में पुलिस मुख्यालय से अनुमोदित भोपाल संभाग में आवास गृहों के निर्माण की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-द अनुसार है। (घ) अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय लटेरी, थाना आनंदपुर एवं थाना मुगलसराय स्वयं के भवन में संचालित है जो वर्तमान में कण्डम/ जर्जर नहीं है। अतः इनके भवन निर्माण की कोई कार्य योजना नहीं है। लटेरी पुलिस आवासीय परिसर हेतु कोई कार्ययोजना नहीं है।
जेल अधिकारी-कर्मचारियों के विरूद्ध कार्यवाही
[जेल]
116. ( क्र. 2522 ) श्री उमाकांत शर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 01 अप्रैल, 2020 से प्रश्नांकित दिनांक तक प्रदेश में कुल कितने केन्द्रीय, जिला, उपजेल संचालित है तथा प्रत्येक जेल की स्वीकृति क्षमता के विरूद्ध वर्तमान में कितने बंदी निरूद्ध है? क्या जेलों में क्षमता से अधिक बंदी रखे गए है? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ मध्यप्रदेश के जेलों में बंदियों की मृत्यु, आत्महत्या, फरारी आपसी हिंसा अथवा अन्य गंभीर घटनाओं के कितने प्रकरण सामने आए है? इन मामलों में दोषी पाए गए जेल अधिकारी/कर्मचारियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई बातवें? (ग) प्रश्नांश (क), (ख) के संदर्भ में विदिशा जिले की जेलों में बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही भोजन, चिकित्सा, स्वच्छता, पेयजल हेतु कितनी-कितनी राशि व्यय की गई है? 01 अप्रैल, 2022 से प्रश्नांकित दिनांक तक जानकारी उपलब्ध करावें एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं की वर्तमान स्थिति क्या है तथा इन व्यवस्थाओं में सुधार हेतु क्या ठोस कदम उठाए गए है? बतावें। (घ) मध्यप्रदेश के जेलों में बंदियों के सुधार हेतु पुनर्वास हेतु जेल विभाग द्वारा कौशल विकास, शिक्षा, प्रशिक्षण एवं रोजगारोन्मुखी कार्यक्रमों की क्या स्थिति है एवं इन योजनाओं से लाभान्वित बंदियों की संख्या कितनी है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) 01 अप्रैल, 2020 से प्रश्नांकित दिनांक तक प्रदेश में 11 केन्द्रीय, 41 जिला, 73 उप जेलें एवं 08 खुली जेलें संचालित है। जिसमें बंदी आवास क्षमता एवं इसके विरूद्ध परिरूद्ध बंदियों की संख्या की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-''A'' अनुसार है। जी हाँ, जेलों में क्षमता से अधिक बंदी रखे गये हैं। (ख) 01 अप्रैल, 2020 से प्रश्नांकित दिनांक तक मध्यप्रदेश के जेलों में बंदी मृत्यु के 715, आत्महत्या के 36, बंदी फरारी के 54 तथा आपसी हिंसा एवं अन्य गंभीर घटनाओं के 21 प्रकरण है। इन प्रकरणों में दोषी अधिकारियों/ कर्मचारियों के विरूद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-''B'' अनुसार है। (ग) विदिशा जिले की जेलों में बंदियों को उपलब्ध कराई जा रही भोजन, चिकित्सा एवं स्वच्छता मद में दिनांक 01 अप्रैल, 2022 से प्रश्नांकित दिनांक तक व्यय राशि की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-''C'' अनुसार है। मध्यप्रदेश जेल नियमावली 1968 में दिए गए सुरक्षा निर्देशों का पालन किया जा रहा है। प्रदेश की 15 जेलों की बाउण्ड्रीवॉल पर इलेक्ट्रिक वायर फेन्सिंग लगाई गई है, अन्य जेलों पर भी इलेक्ट्रिक वायर फेन्सिंग लगाये जाने का कार्य प्रक्रियाधीन है, समय-समय पर जेलों का सुरक्षा ऑडिट कराया जाता है, प्राप्त सुझाव अनुसार कार्रवाई की जा रही है, सभी जेलों को सी.सी.टी.व्ही. नेटवर्क से जोड़ा गया है सुरक्षा संबंधी अमले की पूर्ति हेतु भर्ती की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। (घ) मध्यप्रदेश की जेलों में बंदियो के सुधार हेतु प्रदेश की 13 सर्किल एवं 11 जिला जेलों में विभिन्न उद्योग संचालित है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-''D'' अनुसार है। जिनमें बंदियों को व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, इन उद्योगों में वर्ष 2025 में 2828 बंदियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त बंदियों के औद्योगिक प्रशिक्षण हेतु 03 जेलों में आई.टी.आई. संचालित है। वर्ष 2025 में 96 बंदियों को आई.टी.आई. में प्रशिक्षण प्रदान किया गया। साथ ही वर्ष 2025 में विभिन्न कक्षाओं में 1007 बंदी, हिन्दी राष्ट्रभाषा परीक्षा में 550 बंदी परीक्षा में शामिल हुए तथा 6646 दंडित एवं विचाराधीन बंदियों को साक्षर बनाया गया।
किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ
[वित्त]
117. ( क्र. 2524 ) श्री आतिफ आरिफ अकील : क्या उप मुख्यमंत्री, वित्त महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश को वित्तीय वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार से कितनी राशि मिलना थी? प्रश्न दिनांक तक कितनी राशि प्राप्त हुई, शेष राशि किन-किन कारणों से नहीं मिल पाई है? केंद्र से राज्य के हिस्से की संपूर्ण राशि किन-किन विभागों को प्रश्न दिनांक तक किन-किन कारणों से प्राप्त नहीं हुई है? (ख) क्या पिछले वित्तीय वर्ष में केंद्र सरकार से प्राप्त राशि का उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं करने के कारण, केंद्र से विभाग की कल्याणकारी योजनाओं के लिए राशि नहीं मिल रही है? यदि हाँ, तो इसके लिए कौन-कौन उत्तरदायी है? क्या उनके विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी? (ग) उपरोक्त प्रश्नांश के परिप्रेक्ष्य में क्या यह सही है कि वित्तीय वर्ष में कृषि विकास योजना, राष्ट्रीय कृषि योजना के लिए प्रश्न दिनांक तक कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है, जिससे किसानों से जुड़ी योजनाएं प्रभावित हो रही है और प्रदेश के किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है? यदि हाँ, तो क्यों?
उप मुख्यमंत्री, वित्त ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) केन्द्र शासन के बजट में राज्यवार बजट का प्रावधान नहीं होता है। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) जी नहीं। केन्द्र सरकार से प्राप्त राशि के लिये उपयोगिता प्रमाण-पत्र निर्धारित समय-सीमा में प्रस्तुत किये जाते है। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। (ग) उत्तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
किसानों से जुड़ी समस्याओं का निराकरण
[गृह]
118. ( क्र. 2525 ) श्री आतिफ आरिफ अकील : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पुलिस मुख्यालय में उपलब्ध जानकारी के अनुसार 1 जनवरी, 2024 से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में राजधानी भोपाल सहित प्रदेश में कहाँ-कहाँ पर किसानों की किन-किन समस्याओं को लेकर किसान संगठनों आदि के द्वारा कब-कब धरना प्रदर्शन/आंदोलन किए गए हैं? इन आंदोलनों के दौरान पुलिस से झड़प होने पर कितने किसानों की मृत्यु हुई एवं कितने किसान घायल हुए, कितने किसानों को आंदोलन करने पर उनके विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज किए गए उनकी संख्या बतावें? किसान आंदोलन की जिलेवार/दिनांकवार जानकारी देवें। (ख) क्या उक्त आंदोलन के दौरान जिन किसानों के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं, शासन जनहित में उन प्रकरणों में खात्मा लगाएगा? यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) शासन द्वारा गुणदोष के आधार पर कार्यवाही की जाती है।
सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण
[नर्मदा घाटी विकास]
119. ( क्र. 2533 ) श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खरगोन जिले की बिस्टान उद्वहन, खरगोन उद्वहन पीपरी उद्वहन, बलकवाड़ा उद्वहन, चोण्डी जामन्या, अम्बा रोड़िया सिंचाई परियोजना और बिंजलवाड़ा सिंचाई योजना का कार्य पूर्ण हो चुका है या प्रगतिरत है? योजनावार विवरण दें। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार परियोजनाओं की निर्माण एजेन्सियों को अनुबंध अनुसार पूर्ण करने की क्या समयावधि थी? कार्य समयावधि में पूर्ण कर लिया गया है, अगर हाँ तो विवरण दें? नहीं तो कारण बताएं। (ग) इंदिरा सागर परियोजना की मुख्य और माईनर नहरों के दोनों किनारों पर सड़क निर्माण का कोई प्रावधान किया गया है? यदि हाँ, तो यह मार्ग कितने किलोमीटर के हैं? विवरण दें। (घ) क्या मुख्य नहरों के बने मार्ग, निरीक्षण कुटियॉ जीर्णशीर्ण और नहरें झाड़ियों के साथ ही मलबे से भरी-पडी है? अगर हाँ तो क्यों कारण? नहीं तो कब और इस पर कितनी राशि व्यय की गई? विवरण देवें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी हाँ। मुख्य नहर पर सड़क निर्माण का प्रावधान है, माईनर नहर पर नहीं। इंदिरा सागर परियोजना की मुख्य नहर पर 241.74 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया है। (घ) लगभग 15 वर्ष पूर्व परियोजना के निर्माण कार्य पूर्ण होने से कतिपय स्थानों पर क्षतिग्रस्त होना प्रतिवेदित है। शेष प्रश्नांश लागू नहीं।
प्रदेश में उद्योगपतियों को दिए गए ऋण
[वित्त]
120. ( क्र. 2534 ) श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव : क्या उप मुख्यमंत्री, वित्त महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विगत 05 वर्षों में प्रदेश में राष्ट्रीयकृत बैंकों, निजी व सहकारी बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थाओं द्वारा कितने उद्योगपतियों/उद्यमियों को उद्यम/व्यवसाय ऋण उपलब्ध कराए गए? इनकी कुल संख्या और राशि का जिलावार और बैंकवार वार्षिक तथा समेकित विवरण दें? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार उक्त अवधि में इनमें से कितने उद्यमियों/उद्योगपतियों को ऋण स्वीकृत किए गए? कितने ऋण जारी किए गए? कितनी राशि ऋण के रूप में वास्तव में वितरित की गई? कुल कितनी राशि वसूली की गई और कितनी राशि बकाया है? (ग) किस जिले में कितने उद्योगपतियों/उद्यमियों को ऋण मिला? किस प्रकार के उद्यम/उद्योग को ऋण प्रदान किया गया? किस बैंक/वित्तीय संस्थान ने वह ऋण प्रदान किया?
उप मुख्यमंत्री, वित्त ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) भारत के संविधान के अनुच्छेद 246 के सातवी अनुसूची की सूची क्रमांक एक के अनुक्रमांक 45 अनुसार "बैंकिंग" संघ सूची का विषय है तथा राज्यों की समवर्ती सूची का नहीं है। राष्ट्रीयकृत/व्यावसायिक/क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक राज्य शासन के नियंत्रणाधीन न होकर केन्द्र सरकार/भारतीय रिजर्व बैंक के नियंत्रणाधीन कार्यरत होती है। राज्य सरकार का ऐसी बैंकों पर कोई संवैधानिक या विधिक नियंत्रण नहीं होता है। (ख) एवं (ग) उत्तरांश (क) के प्रकाश में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
प्रदेश में हुए इंडस्ट्रियल समिट और गोल्बल इंवेस्टर मीट
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
121. ( क्र. 2536 ) डॉ. विक्रांत भूरिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में वर्ष 2020 से 2025 तक संभाग स्तर पर हुई इंडस्ट्रियल समिट में किस संभाग में किस संस्था से एमओयू किए गए? सूची दें। विस्तृत जानकारी प्रदान करें। (ख) भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में किन कंपनी से एमओयू हुए? किस निवेशक ने कितनी राशि निवेश का अनुबंध किया और कितने लोगों को रोजगार देने का एमओयू किया? (ग) वर्ष 2020 से 2025 तक हुए इंडस्ट्रियल समिट और ग्लोबल इंवेस्टर मीट में कितना खर्चा हुआ प्रति वर्ष की जानकारी प्रदान करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) उल्लेखित अवधि में विभाग द्वारा उद्योग स्थापना हेतु कोई एम.ओ.यू. नहीं किए गये है। अत: जानकारी 'निरंक' है। (ख) उत्तरांश (क) के आलोक में एमओयू एवं निवेश का अनुबंध नहीं होने से जानकारी 'निरंक' है। (ग) वर्ष 2020 से 2025 तक हुए इंडस्ट्रियल समिट और ग्लोबल इंवेस्टर मीट में प्रतिवर्ष हुए व्यय का विवरण निम्नानुसार है:-
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क्रमांक |
वर्ष |
व्यय राशि (रू. लाख में) |
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1 |
2020 |
समिट आयोजित नहीं होने से व्यय निरंक। |
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2 |
2021 |
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3 |
2022 |
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4 |
2023 |
1565.22 |
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5 |
2024 |
7753.00 |
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6 |
2025 |
10867.09 (प्रावधिक) |
मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मण्डल के ऑन-लाईन परीक्षा केंद्र
[सामान्य प्रशासन]
122. ( क्र. 2538 ) डॉ. विक्रांत भूरिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राज्य में ऑनलाइन/प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरते समय अभ्यर्थियों से परीक्षा केंद्रों का विकल्प लिया जाता है, कई मामलों में अभ्यर्थियों को उनके चुने गए विकल्पों के बजाय दूरस्थ जिलों में परीक्षा केंद्र क्यों आवंटित किए जाते हैं? (ख) प्रदेश में कितने जिलों में नवीन परीक्षा केंद्र खोलने की विभाग की क्या कार्य योजना है, कितने आदिवासी बहुल जिलों में इस प्रकार के केंद्र खोले जाने वाले है? जिससे की भविष्य में परीक्षाएं केवल अभ्यर्थी द्वारा चयनित विकल्पों में ही देना सुनिश्चित हो। (ग) अकार्यपालिका पदों में एस.टी. सीटों का वितरण क्या वास्तव में आनुपातिक है, विस्तृत जानकारी प्रदान करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) अभ्यर्थियों की संख्या, उपलब्ध सीटों की संख्या एवं परीक्षा की शुचिता एवं सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए केन्द्र निर्धारित किए जाते हैं। (ख) मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मण्डल के मानकों के अनुरूप आवश्यक तकनीकी, आधारभूत सुविधा एवं संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर शैक्षणिक संस्थानों को परीक्षा केन्द्र के रूप में निर्धारित किया जा सकता है। (ग) विभागों द्वारा प्रदाय श्रेणी/संवर्गवार आरक्षण तालिकाओं के आधार पर भर्ती परीक्षाओं का आयोजन किए जाने से प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
संचालित गतिविधियों की जानकारी
[आनंद]
123. ( क्र. 2542 ) डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नागदा-खाचरौद नगर पालिका एवं जनपद पंचायत क्षेत्र आनंद विभाग के अंतर्गत किन गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है? यदि गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है तो उसका नाम और उस शासकीय संस्था का नाम बतावें? (ख) आनंद विभाग के मार्गदर्शन में निजी संस्थागत स्तर पर भी यदि कोई गतिविधि संचालित होती है, तो उस संस्था का नाम व संचालित करने वाली गतिविधि का नाम बताएं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जनपद पंचायत खाचरौद में दिनांक 14.01.2026 से 24.01.2026 तक जनपद पंचायत खाचरौद की 130 ग्राम पंचायतों के 56 ग्राम पंचायत क्लस्टर मुख्यालय पर प्रचलित परंपरागत खेलकूद का आयोजन किया गया। नागदा नगरपालिका क्षेत्र में दिनांक 14.01.2026 को स्थानीय डे-केयर सेंटर वार्ड क्रमांक 14 में आनंद उत्सव अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं से रंगोली निर्माण एवं नगरपालिका खाचरौद द्वारा दिनांक 19.01.2026 को स्वामी विवेकानंद वाटिका वार्ड क्रमांक 03 में आनंद उत्सव अंतर्गत निकाय कर्मचारी एवं स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा चेयर रेस दौड़ नंबर गेम आदि खेल गतिविधियों का आयोजन किया गया है। (ख) नागरिकों को आनंदित करने वाली गतिविधि, सेवा परोपकार का प्रसार करने में विभिन्न स्थानीय संस्था, आनंदक, आनंद क्लब आदि सेवाभाव से स्वत: स्फूर्त (स्वेच्छा से) सहयोग करते है। इन कार्यों के लिए किसी भी निजी संस्थान को कोई अनुदान नहीं दिया जाता है।
उद्योगों के लिये संचालित योजनाएं
[कुटीर एवं ग्रामोद्योग]
124. ( क्र. 2545 ) श्री दिनेश जैन बोस : क्या राज्य मंत्री, कुटीर एवं ग्रामोद्योग महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कुटीर एवं ग्रामोद्योग अंतर्गत शासन द्वारा कौन-कौन सी योजनाएं संचालित है? योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराएं। (ख) उज्जैन जिले अंतर्गत कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा कब-कब मेला/प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है? कब-कब हस्तशिल्पियों तथा ग्रामोद्योगों, बुनकरों को प्रशिक्षण, उन्नत उपकरण, आवश्यक मशीनें प्रदाय की गई है? सूचीवार विवरण देवें। (ग) विगत पांच वर्षों में विधानसभा क्षेत्र महिदपुर में कितने हितग्राहियों को विभिन्न व्यवसाय के कार्य हेतु कितना ऋण किस प्रकार के व्यवसाय के संचालन हेतु प्रदाय किया गया है? नामवार, व्यवसायवार, ऋणवार विवरण देवें।
राज्य मंत्री, कुटीर एवं ग्रामोद्योग ( श्री दिलीप जायसवाल ) : (क) कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा प्रदेश में संचालित योजनाओं की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-अ अनुसार है। (ख) उज्जैन जिले अंतर्गत विभाग द्वारा नगर पालिक निगम उज्जैन एवं हाथकरघा संचालनालय द्वारा वर्ष 2024 से प्रतिवर्ष उज्जैनी विक्रम व्यापार मेला आयोजित किया जाता है। वर्ष 2025 में म.प्र. खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा 01 मेला/प्रदर्शनी आयोजित की गई है। हस्तशिल्पियों तथा बुनकरों को दिये गये प्रशिक्षण, उन्नत उपकरण, आवश्यक मशीनों के विवरण की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ब अनुसार है। (ग) विगत पांच वर्षों में विधानसभा क्षेत्र महिदपुर में हितग्राहियों को व्यवसाय संचालन हेतु ऋण प्रदान करने की जानकारी निरंक है।
लैक्सेस उद्योग के जल आवंटन एवं जल उपयोग की जांच
[नर्मदा घाटी विकास]
125. ( क्र. 2546 ) श्री दिनेश जैन बोस : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नर्मदा-क्षिप्रा परियोजना को उज्जैन से नागदा तक विस्तारित करने हेतु कौन-कौन से उद्योगों व जनप्रतिनिधियों ने स्वीकृति की मांग की थी? नाम सहित विवरण दें। (ख) क्या योजना को पूर्ण हुए 5 वर्ष हो चुके हैं? नागदा स्थित लैक्सेस उद्योग द्वारा नर्मदा-क्षिप्रा परियोजना से 1.85 एमसीएम पानी का वार्षिक आवंटन दिनांक 9 मार्च 21 को किया गया था, परन्तु उद्योग द्वारा 5 वर्ष बाद भी अनुबंध क्यों नहीं किया गया है? कब करेंगे? (ग) क्या लैक्सेस उद्योग संचालन हेतु पानी व वाष्प ग्रेसिम उद्योग से लेता है, परन्तु घरेलू अपशिष्ट पानी से उद्योग के संचालन को दर्शाता है, जबकि उनके उद्योग के उत्पादन से स्पष्ट है कि उनके यहां पानी की खपत कितनी, क्या शासन इसकी जांच करेगा? (घ) क्या वर्ष 1995 से 2026 तक विधानसभा क्षेत्र क्र. 173 वर्तमान 212 के विधायक के प्रश्न के उत्तर में ग्वालियर केमिकल वर्तमान में लैक्सेस उद्योग द्वारा अपने उद्योग के संचालन को ग्रेसिम से पानी लेना बताया था? यदि हाँ, तो विवरण दें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) बिरला ग्राम नागदा एम्लायर्स एसोसिएशन समिति बिरला ग्राम नागदा जिला उज्जैन। (ख) जी नहीं। मेसर्स लैक्सेस द्वारा पुनरीक्षित मात्रा 0.365 एम.सी.एम. की स्वीकृति का आवेदन पुन: प्रस्तुत किया, तदनुसार दिनांक 26.06.2024 को 0.365 एम.सी.एम. जल उपयोग हेतु स्वीकृति प्रदान की गई। वर्तमान में मेसर्स लैक्सेस द्वारा अनुबंध नहीं किया गया है। शेष प्रश्नांश लागू नहीं। (ग) ग्रेसिम उद्योग से प्राप्त जानकारी अनुसार ग्रेसिम उद्योग लैक्सेस उद्योग को अपने उद्योग संचालन के लिए पानी नहीं देता है तथापि लैक्सेस उद्योग यदा कदा आवश्यकतानुरूप ग्रेसिम उद्योग से भाप (स्टीम) लेता है। शेष प्रश्नांश लागू नहीं। (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
अधिकारियों/कर्मचारियों की पदस्थी
[सामान्य प्रशासन]
126. ( क्र. 2549 ) श्री कमलेश्वर डोडियार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला रतलाम के सैलाना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत वर्ष 2020 से प्रश्न दिनांक तक कितने प्रशासनिक आदेश, परिपत्र, निर्देश एवं शासन निर्णय जारी किए गए हैं? विषयवार एवं वर्षवार जानकारी उपलब्ध करावें। उपरोक्त अवधि में सैलाना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पदस्थ शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के स्थानांतरण, पदस्थापना, पदोन्नति एवं निलंबन से संबंधित कितने आदेश जारी किए गए हैं? श्रेणीवार एवं वर्षवार जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित वर्ष 2020 से प्रश्न दिनांक तक सैलाना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कितने शासकीय पद स्वीकृत हैं, कितने पदों पर पदस्थापना है तथा कितने पद रिक्त हैं? विभागवार जानकारी बताएं। (ग) क्या पदों की कमी के कारण सैलाना विधानसभा क्षेत्र में शासन की योजनाओं एवं सेवाओं के क्रियान्वयन में विलंब हो रहा है? यदि हाँ, तो इसके निराकरण हेतु सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की गई है? उपरोक्त अवधि में सैलाना विधानसभा क्षेत्र से संबंधित प्रशासनिक लापरवाही, कदाचार अथवा अनियमितता के कितने प्रकरण सामने आए हैं? उन प्रकरणों में दोषी पाए गए अधिकारी/कर्मचारियों के विरुद्ध प्रश्न दिनांक तक क्या कार्यवाही की गई है? जानकारी दें। यह भी बतावें की भविष्य में सैलाना विधानसभा क्षेत्र में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी एवं जनोन्मुखी बनाने हेतु सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा क्या कार्य-योजना प्रस्तावित है? जानकारी दे?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
कुटीर एवं ग्रामोद्योग योजना का क्रियान्वयन
[कुटीर एवं ग्रामोद्योग]
127. ( क्र. 2550 ) श्री कमलेश्वर डोडियार : क्या राज्य मंत्री, कुटीर एवं ग्रामोद्योग महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्रामोद्योग विभाग में संचालित योजनाओं के क्रियान्वयन संबंधी शासन आदेश की सत्यापित प्रति उपलब्ध करावें तथा वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक रतलाम जिले में स्वरोजगार हेतु योजनावार प्राप्त लक्ष्य-पूर्ति की विकासखंडवार संख्या बतावें। (ख) प्रश्नांश (क) के अनुसार ग्रामोद्योग विभाग रतलाम द्वारा वर्ष 2019-20 से 2025-26 में प्रश्न दिनांक तक किस हितग्राही को किस बैंक से कुल कितनी राशि किस दिनांक को स्वीकृत की गयी? इन्हें किस दिनांक को कितनी अनुदान राशि विभाग द्वारा जारी की गयी? सम्पूर्ण जानकारी वर्षवार, हितग्राहीवार बतावें। हितग्राही का नाम/पता/पिता पति का नाम/जाति/विकासखंड/ग्राम पंचायत/उद्योग-दुकान/बैंक का विवरण/स्वीकृत कुल राशि/अनुदान राशि/दुकान का भौतिक सत्यापन अधिकारी/कर्मचारी का नाम एवं दिनांक बतावें।
राज्य मंत्री, कुटीर एवं ग्रामोद्योग ( श्री दिलीप जायसवाल ) : (क) कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग द्वारा प्रदेश में संचालित योजनाओं की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-अ अनुसार है। वर्ष 2019-20 से 2025-26 तक रतलाम जिले में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना एवं मुख्यमंत्री आर्थिक कल्याण योजना में कुल 246 हितग्राहियों के लक्ष्य के विरूद्ध 212 हितग्राहियों को सहायता कर पूर्ति की गई है। वर्षवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ब अनुसार है। विकासखण्डवार लक्ष्य निर्धारित नहीं किये जाते है। (ख) उत्तरांश (क) अनुसार वर्ष 2019-20 से 2025-26 में प्रश्न दिनांक तक हितग्राहियों को स्वीकृत राशि, दिनांक, जारी अनुदान राशि की वर्षवार, हितग्राहीवार सम्पूर्ण जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-स अनुसार है।
औद्योगिक निवेश क्षेत्र के कार्य
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
128. ( क्र. 2552 ) डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या रतलाम जिला अंतर्गत शासन/विभाग द्वारा औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन हेतु वर्ष 2021-22 से लेकर प्रश्न दिनांक तक केंद्र/राज्य प्रवर्तित योजनाओं के माध्यम से अनेक कार्यों का क्रियान्वयन किया जा रहा है? (ख) यदि हाँ, तो जिला अंतर्गत किन-किन कार्यों की किस-किस प्रकार की प्राथमिकताएं/भूमियां/सुविधाएं दी जाकर किन-किन स्थानों पर क्या-क्या कार्य किये? वर्षवार, स्थानवार जानकारी दें। (ग) औद्योगिक निवेश हेतु उपरोक्त वर्षों में किन-किन कार्यों हेतु किस- किस स्थान से कितने-कितने प्रस्ताव/आवेदन प्राप्त होकर शासन/विभाग द्वारा उन पर क्या-क्या कार्यवाहियां की गई? वर्षवार जानकारी दें। (घ) निवेशकों द्वारा प्राप्त प्रस्तावों एवं आवेदनों पर कितने कार्य किन-किन स्थानों पर किन-किन कारणों से अब तक अप्रारम्भ है तो इस हेतु क्या किया जा रहा है? साथ ही औद्योगिक निवेश क्षेत्रों में समस्त स्थानों पर सड़क, नाली, विद्युतीकरण, जल व्यवस्था एवं अधोसंरचना से संबंधित सुविधाओं के कार्य क्या सभी स्थानों पर पूर्ण कर लिए गए या अपूर्ण है तो कब तक पूर्ण कर लिए जाएंगे एवं समस्त सुविधाएं कब तक दी जा सकेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। (ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित अवधि में किये गये कार्यों की वर्षवार एवं स्थानवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'1' अनुसार है। (ग) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित अवधि में रतलाम जिले में विभाग के आधीन एमपीआईडीसी के क्षेत्रांतर्गत औद्योगिक क्षेत्रों में औद्योगिक भूमि आवंटन की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'2' अनुसार है। (घ) निवेशकों से प्राप्त प्रस्तावों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'2'मे समाहित है। औद्योगिक क्षेत्रो में अधोसंरचना विकास कार्यों की स्थिति निम्नानुसार है:- 1. नमकीन एवं एलाइड फूड क्लस्टर, ग्राम करमदी, जिला रतलाम में समस्त अधोसंरचना सुविधाएँ जैसे सड़क, नाली/ड्रेनेज, विद्युत आपूर्ति, जल आपूर्ति एवं अन्य सहायक अधोसंरचना कार्य पूर्ण रूप से निष्पादित किए जा चुके हैं तथा क्षेत्र में उद्योगों को सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध हैं। 2. औद्योगिक पार्क रतलाम में सड़क, नाली/ड्रेनेज, जल आपूर्ति, विद्युतीकरण एवं अन्य अधोसंरचना से संबंधित सभी कार्य पूर्ण हो चुके हैं। 3. औ.क्षे. जावरा में सी.सी. रोड़, स्ट्रॉर्म वॉटर ड्रेन सीवर लाईन, यूटिलिटी लाईन, इंटरनल वॉटर डिस्ट्रीब्यूशन, सम्पवेल, ओवरहेड टेंक, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लॉंट, ओवरहेड टेंक का निर्माण कार्य सम्पादित किये गये एवं विद्युतीकरण कार्य, अप्रोच रोड निर्माण कार्य प्रगति पर है। जल संसाधन विभाग से जल आवंटन नहीं होने के कारण जल प्रदाय व्यवस्था का कार्य अपूर्ण है जल आपूर्ति हेतु वैकल्पिक व्यवस्था की संभावना तलाश की जा रही है। 4. मेगा इंडस्ट्रियल पार्क, रतलाम में सड़क, नाली/ड्रेनेज, विद्युत, जल आपूर्ति एवं अन्य अधोसंरचना से संबंधित कार्यों की पूर्णता, अनुबंध अनुसार समय-सीमा जून 2027 तक निर्धारित है।
उत्कृष्ट पुरस्कृत कर्मियों को सुविधाएं
[गृह]
129. ( क्र. 2554 ) डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग द्वारा भारतीय पुलिस सेवा एवं राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों, कर्मचारियों की कर्तव्य परायणता एवं उत्कृष्ट कार्य किए जाने पर कौन-कौन से पुरस्कार, मेडल, प्रोत्साहन इत्यादि दिए जाते हैं? जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश (क) उल्लेखित विभागीय अधिकारियों को पुरस्कार, मेडल, प्रमाण-पत्र इत्यादि के अतिरिक्त अन्य किस-किस प्रकार की सुविधा यथा स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा, आवास, टैक्स छूट, यात्री सुविधा या अन्य और किसी प्रकार की क्या-क्या सुविधा दी जाती है? जानकारी दें। (ग) कर्तव्य स्थल पर कार्यरत संबंधित अधिकारी, कर्मचारी घायल स्थिति में उपचार, गंभीर बीमारियों एवं बड़े ऑपरेशनों के व्यय में सहायता, स्थाई विकलांग होने की स्थिति एवं मृत्यु (शहीद) होने की स्थिति में परिवार के आश्रितों एवं शहीद के सम्मान हेतु क्या-क्या किया जाता है? (घ) मध्य प्रदेश में वर्ष 2023-24 से लेकर प्रश्न दिनांक तक उपरोक्त उल्लेखित प्रश्नांश (क), (ख) व (ग) अंतर्गत नीति निर्धारण कार्यों हेतु क्या-क्या उल्लेखनीय कार्य किये गए? जानकारी दें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "अ" अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "ब" अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "स" अनुसार है। (घ) उत्तरांश (क), (ख) व (ग) अंतर्गत समस्त उल्लेखनीय कार्य है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
व्यावसायिक भूमि को कृषि भूमि दर्शाकर रजिस्ट्री
[वाणिज्यिक कर]
130. ( क्र. 2556 ) श्रीमती निर्मला सप्रे [एडवोकेट] : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या बीना तहसील अंतर्गत अमित राय पिता महेश राय निवासी शिवाजी वार्ड बीना द्वारा खसरा क्र. 408/1 की व्यावसायिक भूमि को कृषि भूमि दर्शाकर गलत तथ्यों के आधार पर रजिस्ट्री कराई गई, जिस पर कलेक्टर ऑफ स्टाम्प सागर द्वारा प्रकरण क्र.27/व-103/धारा-38 (2)/2019-20 में दिनांक 20/03/2020 को लगभग ₹4.50 करोड़ की स्टाम्प ड्यूटी, पंजीयन शुल्क एवं शास्ति अधिरोपित की गई? कितनी राशि वसूल की गई है? क्या सम्पूर्ण वसूली की जा चुकी है? (ख) यदि नहीं, तो आदेश के बाद भी आज दिनांक तक प्रभावी वसूली न हो पाने के लिये कौन अधिकारी उत्तरदायी हैं? (ग) क्या संबंधित पक्षकार द्वारा 25% अनिवार्य राशि जमा कर कोई वैध अपील प्रस्तुत की गई है? क्या यह मामला माननीय उच्च न्यायालय में लंबित है? यदि हाँ, तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है? (घ) क्या आरआरसी जारी कर संपत्ति कुर्की, बैंक खाते सीज एवं नामांतरण/पुनः पंजीयन पर रोक लगाई गई है? (ड.) संबंधित द्वारा लगभग ₹1.38 करोड़ की बाजार मूल्य वाली भूमि क्रय हेतु प्रयुक्त धनराशि का स्रोत क्या है? क्या वैध आय स्रोत उपलब्ध हैं? यदि हाँ, तो विवरण दें। अब तक एजेंसियों से इसकी जांच क्यों नहीं कराई गई? (च) क्या गलत तथ्यों के आधार पर की गई रजिस्ट्री को निरस्त किया गया है? यदि नहीं, तो क्यों?
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी हाँ, पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों/तथ्यों के आधार पर रजिस्ट्री की गई है। तत्कालीन उप पंजीयक द्वारा कमी शुल्क की वसूली हेतु तत्कालीन कलेक्टर ऑफ स्टाम्प को भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 38 (2) के तहत प्रकरण संदर्भित किया गया था। कलेक्टर ऑफ स्टाम्प सागर द्वारा प्रकरण क्रमांक 27/बी-103/धारा-40/2019-20 में प्रकरण दर्ज कर, दिनांक 20.03.2020 को शेष कमी मुद्रांक शुल्क 3,49,86,315/- रूपये, पंजीयन शुल्क 29,46,216/- रूपये एवं शास्ति 69,97,264/- रूपये, इस प्रकार कुल राशि 4,49,29,795/- रूपये अधिरोपित कर आदेश पारित किया गया। वसूली की कार्यवाही प्रचलित है। (ख) वसूली की कार्यवाही प्रचलित है। अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) संबंधित पक्षकार द्वारा 25 प्रतिशत अनिवार्य राशि जमा नहीं की गई है। आयुक्त सागर संभाग सागर को अपील प्रस्तुत की गई थी। इसी प्रकरण के संबंध में पक्षकार श्री प्रदीप राय बीना द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका क्रमांक (MP-Misc Petition) 631/2021 दायर की गई है। माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा याचिका में पारित अंतरिम आदेश दिनांक 19.02.2021 के अनुसार न्यायालय आयुक्त सागर, संभाग सागर के अपील प्रकरण क्रमांक 0027/अपील/2020-21 में आयुक्त सागर, संभाग सागर को अंतिम आदेश पारित नहीं किये जाने के निर्देश दिये गये हैं। जी हां, यह मामला माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में लंबित है। प्रकरण की वर्तमान स्थिति अनुसार, प्रकरण लंबित है। (घ) जी हां, प्रश्नाधीन प्रकरण में प्रकरण क्रमांक 12/अ-76/2020-21 में दर्ज कर आर.आर.सी. जारी की जा चुकी है, मांग पत्र जारी किया जा चुका है। अतिरिक्त तहसीलदार एवं वरिष्ठ जिला पंजीयक के न्यायालय में वसूली की कार्यवाही प्रचलित है। वर्तमान में प्रश्नाधीन प्रकरण में संपत्ति कुर्की, बैंक खाते सीज एवं नामांतरण/पुन: पंजीयन पर रोक संबंधी कार्यवाही नहीं की गई है। (ड.) भूमि क्रय हेतु प्रयुक्त धनराशि का स्त्रोत ज्ञात करना विभाग के क्षेत्राधिकार में नहीं है। शेष प्रश्नांश की जानकारी विभाग से संबंधित नहीं। (च) जी नहीं। जहां तक गलत तथ्यों के आधार पर रजिस्ट्री निरस्त किये जाने का प्रश्न है, यह विभाग के क्षेत्राधिकार में नहीं है।
जे.के. सीमेंट कम्पनी दुर्घटनाओं में व्यक्तियों की मृत्यु
[गृह]
131. ( क्र. 2557 ) श्री राजेश कुमार वर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पन्ना जिले की अमानगंज तहसील अंतर्गत जे.के. सीमेंट कंपनी के अंदर वर्ष 2022 से प्रश्न दिनांक तक कितने व्यक्तियों की मृत्यु किस-किस घटना में हुई? घटना का दिनांक, मृतक के पता सहित जानकारी देवें। मृतकों को कितनी-कितनी आर्थिक सहायता दी गई? (ख) जे.के. सीमेंट कंपनी पुरैना अमानगंज से सीमेंट ढोने वाले ट्रालों से कितने लोगों की मृत्यु वर्ष 2022 से प्रश्न दिनांक तक हुई? क्या कंपनी द्वारा सीमेंट के परिवहन के साथ-साथ क्लिंकर (Clinker) का परिवहन पुरैना, अमानगंज से बाहर, ट्रालों से किया जा रहा है, जिससे अमानगंज-पन्ना-छतरपुर मार्ग में भारी वाहनों की संख्या बढ़ने से सड़क की व्यस्तता बढ़ जाती है तथा मंडला घाटी (जिला पन्ना) में आए दिन जाम की स्थिति रहती है, यातायात बाधित होता है? क्या उक्त मंडला घाटी में यातायात बाधित होने के कारण आम जन एवं मरीजों को अस्पताल तक पहुँचने के लिये घंटों खडा रहना पड़ता है? (ग) क्या जे.के. सीमेंट कंपनी द्वारा क्लिंकर (Clinker) का परिवहन पुरैना, अमानगंज से बाहर किया जा रहा है? यदि हाँ, तो क्या यह नियमानुसार है? यदि नहीं, तो क्या जे.के. सीमेंट के ट्रालों को नेशनल हाइवे में लगे कैमरों के वीडियो फुटेज में देखा गया है और ऐसी स्थिति नहीं पाई गई है? स्पष्ट करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जे.के. सीमेंट कंपनी पुरैना अमानगंज से सीमेंट ढोने वाले ट्रालों से 05 लोगों की मृत्यु वर्ष 2022 से प्रश्न दिनांक तक हुई है। जिले से नेशनल हाईवे 39 झांसी, छतरपुर, पन्ना से होता हुआ सतना, रीवा सीधी की ओर जाता है तथा राज्यमार्ग 49 अजयगढ़ अमानगंज, सिमरिया, दमोह की ओर जाता है जिन पर सभी प्रकार के वाहनों के द्वारा माल का परिवहन किया जाता है। मंडला घाटी का रोड अत्यधिक सकरा होने, घाट की दीवारे क्षतिग्रस्त होने एवं रोड के साइड सोल्डर का भराव कार्य न होने से वाहन चालको द्वारा ब्रेक डाउन करने एवं वाहन खराब होने के कारण घाट में जाम की स्थिति निर्मित होती है तथा घाट में जाम लगने की सूचना प्राप्त होते ही थाना मंडला पुलिस व यातायात पुलिस बल के द्वारा मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाया जाता है। जिससे आम जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े तथा मंडला घाट में जाम की स्थिति निर्मित न हो सके इसके लिए थाना मंडला पुलिस व यातायात पुलिस बल के साथ लगातार रोड पेट्रोलिंग की जाती है। (ग) शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
पत्थर खदान एवं क्रेशर के संचालन हेतु अनुमतियां
[खनिज साधन]
132. ( क्र. 2558 ) श्री राजेश कुमार शुक्ला : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विधानसभा क्षेत्र बिजावर अंतर्गत ग्राम परवा तहसील सटई में खसरा नंबर 1288 में वर्ष 2009 में पत्थर खदान की लीज स्वीकृत की गई थी? यदि हाँ, तो किसे, कितने वर्षों के लिए, किन शर्तों पर दी गई? (ख) क्या इसे पुनः लीज पर दिया गया? हाँ तो किसे? किन शर्तों पर, किसे? कितने वर्षों के लिए? (ग) इस पत्थर खदान से कितने मीटर पर रहवासी मकान, शमशान, तालाब, सड़क आदि है। क्या उक्त दूरी तय मानक के अनुसार सुरक्षित दूरी पर है? नहीं तो लीज क्यों स्वीकृत की गई? सुरक्षा मानकों की पुनः जांच उपरांत क्या लीज स्वीकृति पर पुनः विचार किया जाएगा? (घ) ग्राम परवा में लगा पी पी मिनरल का क्रेशर सुरक्षा एवं पर्यावरणीय मापदंडों को पूरा करता है? क्रेशर संचालन हेतु क्या मापदंड है। (ड.) उक्त क्रेशर जिस भूमि पर लगा है क्या वह भूमि पट्टे की थी? हाँ तो किसके नाम पट्टा था? क्या पट्टे की भूमि का विक्रय सभी आवश्यक अनुमतियों के बाद किया गया? (च) पत्थर खदान और क्रेशर लगाने हेतु ली गई सभी अनुमतियों एनओसी आदि की प्रतियां प्रदाय करे।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। (ख) प्रश्नांश (क) में दिये उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) उत्तरांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) ग्राम पारवा में पी पी मिनरल के नाम से कोई क्रेशर स्वीकृत नहीं है। शेष भाग का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ड.) उत्तरांश (घ) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (च) उत्तरांश (क), (ख), (ग), (घ) एवं (ड.) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
ग्राम शिवराजपुरा को थाना देहात टीकमगढ़ में जोड़ा जाना
[गृह]
133. ( क्र. 2559 ) श्री नितेन्द्र बृजेन्द्र सिंह राठौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता द्वारा भेजे गये पुलिस अधीक्षक जिला टीकमगढ़ (म.प्र.) को पत्र क्रमांक 100/वि.स.पृथ्वी./2024, दिनांक 28/08/2024 पर प्रश्न दिनांक तक क्या कार्यवाही की गई? कार्यवाही कहाँ लंबित है और क्यों? सम्पूर्ण स्थिति से अवगत करायें। (ख) ग्राम शिवराजपुरा को थाना मोहनगढ़ से थाना देहात टीकमगढ़ में पुनः शामिल किये जाने हेतु कोई कार्यवाही की गई है? यदि हाँ तो अवगत करायें। यदि नहीं, तो कब तक की जायेगी? जानकारी दें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) प्रश्नकर्ता के संदर्भित पत्र पर थाना प्रभारी मोहनगढ़/अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) जतारा द्वारा जांच की गई। जांच उपरांत प्रतिवेदन अग्रिम कार्यवाही हेतु कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति को प्रेषित किया गया। वर्तमान में कार्यवाही कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति के विचारण में है। (ख) जी हाँ। जानकारी उत्तरांश "क" में समाहित।
सागर जिला अंतर्गत सिल्वर कलस्टर की स्थापना
[सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम]
134. ( क्र. 2560 ) श्री शैलेन्द्र कुमार जैन : क्या सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या 27 दिसम्बर, 2024 को सागर में आयोजित रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव के दौरान माननीय मुख्यमंत्री महोदय द्वारा सागर जिला अंतर्गत सिल्वर कलस्टर की स्थापना किये जाने हेतु कोई घोषणा की गई थी? यदि हाँ, तो वर्तमान में क्या कार्यवाही प्रचलन में है। (ख) क्या सिल्वर कलस्टर की स्थापना हेतु शासन द्वारा प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है? यदि हाँ, तो इसकी स्थापना हेतु किस स्थान पर एवं कितनी भूमि चिन्हित की गई है? क्या उक्त भूमि का आवंटन पूर्ण हो चुका है? यदि नहीं, तो यह प्रक्रिया कब तक पूर्ण कर ली जायेगी? (ग) यदि सिल्वर कलस्टर की स्थापना हेतु प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है, तो इस परियोजना हेतु कुल कितनी राशि स्वीकृत की गई है एवं इसमें कौन-कौन से घटक सम्मिलित किये गये है? प्रश्न दिनांक तक इस संबंध में क्या कार्यवाही प्रचलन में है? विस्तृत विवरण सहित जानकारी उपलब्ध करायें।
सूक्ष्म,लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ( श्री चेतन्य कुमार काश्यप ) : (क) जी नहीं। (ख) एवं (ग) उत्तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
जी.एस.टी. कर प्रकरण
[वाणिज्यिक कर]
135. ( क्र. 2564 ) श्री बाला बच्चन : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बड़वानी, उज्जैन जिले में दिनांक 01.04.23 से 20.01.26 तक जी.एस.टी. कर में कितने प्रकरण दर्ज किए गए? इन प्रकरणों की प्रश्न दिनांक की स्थिति में निराकरण/लंबित की जानकारी विधानसभावार, जिलावार देवें। (ख) इन प्रकरणों में नोटिस में दी गई राशि व वसूल की गई राशि की जानकारी भी प्रकरणवार, नाम, पता, जी.एस.टी. नंबर सहित विधानसभावार, जिलावार देवें। (ग) जिन प्रकरणों में नोटिस व वसूली की राशि में 5 हजार रूपये से अधिक का अंतर है उनके विषय में प्रकरणवार बतावें कि ऐसा किस नियम के तहत किया गया? इस नियम की छायाप्रति भी देंवे।
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ए एवं A-1 अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट–ए, A-1 एवं B अनुसार है।
निर्धारित दर से अधिक दर पर शराब का विक्रय
[वाणिज्यिक कर]
136. ( क्र. 2565 ) श्री बाला बच्चन : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश में कई जिलों में शराब दुकानों से निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब का विक्रय होना पाया गया है? यदि हाँ, तो किन-किन जिलों में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर शराब बेचने के कितने प्रकरण कायम किये गये है विस्तृत जानकारी जिलावार देवें। (ख) आबकारी आयुक्त के निर्देश क्रमांक 89, दिनांक 13/05/2025 के द्वारा प्रदेश भर में चलाए विशेष अभियान अंतर्गत अब तक क्या कार्रवाई की गई? निर्धारित दर से अधिक दर पर विक्रय होने पर कितने अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की गई? यदि नहीं, की गई तो क्यों नहीं की गई? दोषी अधिकारियों के विरूद्ध कब तक कार्यवाही की जावेगी? (ग) ओवररेटिंग से संबंधित कितनी शिकायतें किन-किन जिलों में किस-किस माध्यम से प्राप्त हुई है? क्या कोई शिकायत सही पाई गई? सी. एम. हेल्पलाइन में प्राप्त अधिकांश शिकायतों को कोर्स क्लोजर क्यों किया जा रहा है? इसके लिए दोषी कौन है? जिलावार जानकारी देवें। (घ) जबलपुर जिले में कलेक्टर के आदेश से पटवारियों ने शराब दुकानों पर अधिक मूल्य से शराब बेचने के कई मामले कायम किए हैं क्या शासन को पटवारियों की कार्यवाही पर भरोसा नहीं है क्या आबकारी आयुक्त के द्वारा विभाग के किसी भी अधिकारी के विरूद्ध कोई कार्यवाही की जावेगी?
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) इस वितीय वर्ष में प्रदेश के जिलों में शराब दुकानों से निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब का विक्रय संबंधी शिकायत एवं शिकायत पर की गयी कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-एक अनुसार है। (ख) आबकारी आयुक्त के पत्र क्रमांक 89, दिनाक 13/05/2025 के द्वारा प्रदेश में चलाए विशेष अभियान अन्तर्गत प्रश्न दिनांक तक निर्धारित दर से अधिक दर पर विक्रय होने पर संबंधित लायसेंसियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की गयी है। कृत कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-दो अनुसार है। उपरोक्तानुसार कार्यवाही किये जाने से किसी भी अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) प्रदेश में ओवररेटिंग से संबंधित शिकायते एवं सी.एम. हेल्पलाइन में प्राप्त अधिकांश शिकायतों को कोर्स क्लोजर संबंधी जिलेवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-तीन अनुसार है। उपरोक्तानुसार कार्यवाही किये जाने से किसी भी अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) जबलपुर जिले में कलेक्टर, जबलपुर के आदेशानुसार अधिक मूल्य पर शराब बेचने के 20 प्रकरण पंजीबद्ध किये गये हैं। विभाग के किसी अधिकारी द्वारा अनियमिताएं किया जाना पाये जाने पर आबकारी आयुक्त द्वारा नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।
विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के लोगों की नियुक्ति
[सामान्य प्रशासन]
137. ( क्र. 2569 ) श्री फुन्देलाल सिंह मार्को : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शासन के विभिन्न विभागों में रिक्त सीधी भर्ती के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर विशेष पिछड़ी जनजाति (बैगा, भारिया एवं सहारिया) की नियुक्ति के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के क्या नियम/निर्देश हैं। नियमों की प्रति उपलब्ध करावें। (ख) शहडोल संभाग अंतर्गत जिलों में विभिन्न विभागों में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कितने पद स्वीकृत हैं एवं कितने पद रिक्त हैं? दिनांक 1 अप्रैल, 2023 से प्रश्न दिनांक तक की जिलेवार संख्यात्मक जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) रिक्त पदों पर प्रश्नांश (क) एवं (ख) के संदर्भ में दिये गये निर्देशों के पालन में विशेष पिछड़ी जनजाति के, नियुक्ति हेतु कितने उम्मीदवारों के आवेदन प्राप्त हुये, कितने उम्मीदवारों को नियुक्ति दी गई? यदि नहीं, तो कारण बतायें। (घ) क्या विशेष पिछड़ी जनजाति के उम्मीदवारों की नियुक्ति हेतु शासन द्वारा समय-समय पर निर्देश जारी होने के बाद भी विशेष पिछड़ी जाति के उम्मीदवारों को नियुक्ति नहीं दी जाना शासन के नियमों का उल्लंघन नहीं है।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट- ''एक'' अनुसार। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट - ''दो'' अनुसार। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट - ''तीन'' अनुसार। (घ) उत्तरांश (ग) के प्रकाश में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
विभागीय जांच की समय-सीमा एवं कार्यवाही
[सामान्य प्रशासन]
138. ( क्र. 2570 ) श्री फुन्देलाल सिंह मार्को : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शासकीय सेवक की विभागीय जांच संस्थित होने के उपरांत विभागीय जांच पूर्ण करने एवं प्रकरण में कार्यवाही हेतु समय-सीमा निर्धारित है। यदि हाँ, तो कितनी, नियम की प्रति उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्नांश (क) में निर्धारित समय-सीमा में विभागीय जांच पूर्ण नहीं करने वाले प्रस्तुतकर्ता एवं विभागीय जांच अधिकारी/निर्णयकर्ता अधिकारी के विरूद्ध कोई कार्यवाही की जाती है। यदि हाँ, तो क्या-क्या, किस-किस नियम के तहत, नियम की प्रति उपलब्ध करावें। (ग) विभागीय जांच पूर्ण कर सक्षम अधिकारी को प्रस्तुत करने के बाद सक्षम अधिकारी को निर्णय पारित करने हेतु भी समय-सीमा निर्धारित है? यदि हाँ, तो कितनी। (घ) विगत चार वर्ष में मध्यप्रदेश गृह निर्माण अधोसंरचना मंडल द्वारा कितनी विभागीय जांच संस्थित की गई थी। उन पर विभागीय जांच समय-सीमा में पूर्ण कर अभी तक सक्षम अधिकारी द्वारा निर्णय क्यों नहीं लिया गया है। क्या सक्षम अधिकारी के विरूद्ध शासन प्रश्नांश (क) एवं (ख) में दिये गये प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही करेगा।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम-1966 के अंतर्गत सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा विभागीय जांच की कार्यवाही के संबंध में निर्धारित समय-सीमा हेतु जारी परिपत्र क्र 204/1840713/2022/3/1, दिनांक 20.02.2024 की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'अ' अनुसार है। (ख) जी हाँ। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी परिपत्र क्र सी-5-2/87/3/1, दिनांक 16.04.1987 की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'ब' अनुसार है। (ग) जी हाँ। मुख्य शास्ति हेतु 3 सप्ताह एवं लघु शास्ति हेतु 2 सप्ताह। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'स' अनुसार है। लंबित विभागीय जांच प्रकरण म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 नियम 14 अंतर्गत जांच अधिकारी के स्तर पर होने से सक्षम अधिकारी पर कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
म.प्र. के शा. कर्मचारियों के निलंबन संबंधी नियम
[सामान्य प्रशासन]
139. ( क्र. 2571 ) श्री फुन्देलाल सिंह मार्को : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के अंतर्गत संभागीय आयुक्त/कलेक्टर को किस श्रेणी के शासकीय सेवकों को किन आधार पर निलंबन करने के अधिकार हैं? नियम की प्रति उपलब्ध करावें। (ख) जनवरी, 2023 से प्रश्न दिनांक तक शहडोल संभाग अंतर्गत जिलों में किन-किन शासकीय सेवकों को किन आधार पर निलंबित किया गया, नाम, पदनाम, पदस्थापना स्थल सहित जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) निलंबित शासकीय सेवक को निलंबन अवधि के दौरान जीवन निर्वाह भत्ता दिये जाने और निलंबन अवधि में विभाग द्वारा निर्धारित मुख्यालय से, किस कार्यालय द्वारा कहां-कहां पर पदस्थ किये जाने का प्रावधान है। नियम की प्रति उपलब्ध करावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के अंतर्गत सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्र. सी-6-6-2002-3-एक, दिनांक 30.08.2002 द्वारा जारी एकजाई परिपत्र, पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट- 'अ' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट- 'ब' अनुसार है। (ग) उत्तरांश (क) अनुसार।
समयमान वेतनमान की स्वीकृति
[वित्त]
140. ( क्र. 2572 ) श्री फुन्देलाल सिंह मार्को : क्या उप मुख्यमंत्री, वित्त महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या म.प्र. शासन के सामान्य प्रशासन विभाग अंतर्गत कार्यरत अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों को समयमान वेतनमान दिये जाने के निर्देश हैं? यदि हाँ, तो कितने वर्ष की सेवा के उपरांत समयमान दिये जाने का प्रावधान है? नियम की प्रति उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में शासन के निर्देश के पालन न करते हुये जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्धारित सेवा अवधि पूर्ण होने के बाद भी समयमान, वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया है? क्या यह शासन के निर्देशों के उल्लंघन की श्रेणी में माना जायेगा? (ग) दिनांक 1 जनवरी, 2023 से प्रश्न दिनांक तक कितने अधिकारी और कर्मचारियों को समयमान का लाभ समयावधि पूर्ण होने के उपरांत भी नहीं दिया गया है, संख्यात्मक जानकारी उपलब्ध कराते हुये बतायें कि कब तक समयमान दें दिया जायेगा?
उप मुख्यमंत्री, वित्त ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी हाँ। नियम की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार। (ख) सामान्य प्रशासन विभाग अंतर्गत तृतीय श्रेणी शासकीय सेवकों को निर्धारित सेवा अवधि पूर्ण होने पर समयमान वेतनमान का लाभ देने हेतु कार्यवाही प्रचलित है। प्रक्रियागत कारणों से अधिक समय लगने पर कर्मचारी की पात्रता तिथि से ही वेतनमान स्वीकृत किया जाता है। (ग) प्रश्नाधीन अवधि में कुल 52 शासकीय सेवकों को समयमान वेतनमान प्रदान करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा बताना संभव नहीं है।
वैज्ञानिक अनुसंधान की जानकारी
[विज्ञान और प्रौद्योगिकी]
141. ( क्र. 2575 ) श्री उमंग सिंघार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रदेश में वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न योजनाएँ संचालित की जा रही हैं? यदि हाँ, तो वे कौन-कौन सी योजनाएं है? अद्यतन स्थिति की जानकारी दें? (ख) वर्ष 2020 से 2025 तक इस विभाग के माध्यम से कितने शोध प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए? इन पर कितना प्रावधान किया गया एवं कितनी राशि व्यय की गई? (ग) प्रश्नांश (ख) के आलोक में उक्त शोध प्रोजेक्ट द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं से प्रदेश के औद्योगिक, कृषि अथवा सामाजिक क्षेत्रों में क्या ठोस लाभ प्राप्त हुए? स्पष्ट करें? (घ) क्या विभाग के पास परियोजनाओं के परिणामों के मूल्यांकन हेतु कोई स्वतंत्र एजेंसी उपलब्ध है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने हेतु शोध परियोजनाएं, सेमीनार, सिस्पोजिया, वर्कशॉप, शोध पत्रों के वाचन हेतु अंतर्राष्ट्रीय यात्रा अनुदान, युवा वैज्ञानिक प्रशिक्षण एवं अध्येन वृत्ति, परम्परागत ज्ञान का वैज्ञानिक सत्यापन तथा ग्रामीण प्रौद्योगिकी के अंतर्गत योजनाएं क्रियान्वित की जा रही है उक्त योजनाएं भारत एवं राज्य सरकार के कृषि मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय के सहयोग से क्रियान्वित की जा रही है। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) विज्ञान एवं तकनीकी आधारित शोध परियोजनाओं के परिणामों में जन सामान्य को व्यावहारिक रूप से लाभान्वित करने में समय लगता है जिसके कारण 2020-2025 के बीच किए गए शोध के प्रभाव का सही आंकलन किये जाने में कठिनाई है। यद्यपि विभिन्न शोध परियोजनाओं के माध्यम से मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद् द्वारा महत्वपूर्ण कार्य व्यावहारिक रूप से संपादित किये जा रहे हैं :- (1) प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत किसानों को फसल बीमा राशि हेतु एआई एवं रिमोट सेन्सिंग आधारित मॉडल के माध्यम से कार्य क्रियान्वित किया जा रहा है। (2) रिमोट सेन्सिंग एवं जीआईएस आधारित मास्टर प्लान योजना के अंतर्गत नगरों के सामाजिक, आर्थिक एवं अधोसंरचनात्मक विकास के लिए विकास योजनाएं तैयार की जा रही है। (3) एफसीडीओ एवं मिनिस्ट्री ऑफ रूरल डेव्हलपमेंट, गवर्नमेंट ऑफ इंडिया, भारत सरकार के सहयोग से मनरेगा के अंतर्गत वेब बेस्ड़ क्लाईमेट रिजिलेशन टूल के माध्यम से विभिन्न कार्य किये जा रहे है। (4) मध्यप्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों के समुचित उपयोग एवं नियोजन हेतु जिला आधारित डिजिटल एटलस का कार्य किया जा रहा है। (5) प्रदेश की समस्त नदियों एवं जल संरचनाओं की डिजिटल मेपिंग का कार्य विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत किया जा रहा है। (6) नल जल योजना के अंतर्गत राज्य परामर्श संगठन के रूप में रिमोट सेन्सिंग एवं जीआईएस आधारित कार्य किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा वन एवं पर्यावरण, खनिज संसाधन, परमाणु उर्जा एवं आदिवासी क्षेत्रों में 23 से अधिक विकासीय योजना के अंतर्गत विभिन्न शोध एवं तकनीकी परियोजनाओं के माध्यम से कार्य किये गये है। (घ) जी नहीं।
शासकीय सेवाओं में रिक्त पदों की पूर्ति
[सामान्य प्रशासन]
142. ( क्र. 2576 ) श्री उमंग सिंघार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जनजातीय कार्य, अनुसूचित जाति कल्याण एवं सामान्य प्रशासन विभाग में कार्यरत प्रथम श्रेणी (Class-l), द्वितीय श्रेणी (Class-ll) एवं अधिकारियों की कुल स्वीकृत एवं भरी हुई पदों की संख्या कितनी है? (ख) प्रश्नांश (क) के प्रकाश में तीनों श्रेणियों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) वर्ग के कर्मचारियों की संख्या एवं प्रतिशत की जानकारी दें? (ग) क्या यह सत्य है कि प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी में इन वर्गों का प्रतिनिधित्व आरक्षण अनुपात (15%, 18%, 14%) से काफी कम है? यदि हाँ, तो क्या नियमानुकूल है? यदि नहीं, तो इस दिशा में क्या ठोस कदम उठाए जा रहे है? (घ) विगत पांच वर्षों में इन वर्गों के लिए पदोन्नति एवं सीधी भर्ती से कितनी नियुक्तियां की गई और क्या शासन इन रिक्तियों को शीघ्र भरने हेतु विशेष अभियान चलाने पर विचार कर रहा है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
खनिज संसाधनों से प्राप्त राजस्व की राशि के व्यय संबंधी नियमावली
[खनिज साधन]
143. ( क्र. 2581 ) श्री चन्द्रशेखर देशमुख : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बैतूल जिले में विगत तीन वित्तीय वर्षों में कोयला, रेत एवं अन्य खनिजों से कुल कितनी राशि रॉयल्टी/DMF के रूप में प्राप्त हुई है? वर्षवार विवरण क्या है? (ख) उक्त राशि के व्यय हेतु शासन द्वारा कौन-कौन सी नियमावली/नीतियां लागू है? (ग) क्या जिला खनिज प्रतिष्ठान की राशि के व्यय में प्राथमिक एवं द्वितीयक कार्यों (पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क आदि का निर्धारण किया गया है? यदि हाँ, तो बैतूल जिले में मदवार कितना व्यय किया गया है? जानकारी उपलब्ध करावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-अ अनुसार है। (ख) रॉयल्टी के रूप में प्राप्त राशि राज्य की संचित निधि में जमा की जाती है। DMF के रूप में प्राप्त राशि के उपयोग के संबंध में अधिसूचित, म.प्र. जिला खनिज प्रतिष्ठान नियम, 2016 लागू है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-ब अनुसार है।
विभाग द्वारा राशि का भुगतान
[वाणिज्यिक कर]
144. ( क्र. 2585 ) श्री केशव देसाई : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा विधानसभा प्रश्न क्र. 2139, उत्तर दिनांक 16.07.2024 में यह जानकारी दी गई है कि श्री बेन्नी पी.एम. पूर्व वाणिज्यिक कर निरीक्षक को सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दिनांक 18.05.2024 को रू. 5500 का भुगतान किया गया है? (ख) यदि हाँ, तो उक्त भुगतान का विस्तृत विवरण (आदेश क्र., भुगतान का माध्यम, बैंक खाता क्र.) की जानकारी दें। (ग) क्या उक्त जानकारी असत्य है तो सही तथ्य क्या है? बतावें। (घ) किन कारणों से किन अधिकारी/कर्मचारी द्वारा जानकारी दी गई, क्या उनके विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब? यदि नहीं, तो क्यों?
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) जी नहीं। (ख) उत्तरांश (क) के संदर्भ में प्रश्नांश उद्भूत नहीं होता है। (ग) वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा रु. 5500/- का भुगतान शासकीय अधिवक्ता, श्री आयुष देव बाजपेयी को किया गया है, जिसकी रसीद संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (घ) उत्तरांश (क) के संदर्भ में प्रश्नांश उद्भूत नहीं होता है।
पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध शिकायतों पर कार्यवाही
[गृह]
145. ( क्र. 2599 ) श्री प्रदीप पटेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2020 से 12/2025 के मध्य मऊगंज/रीवा जिलों में किन-किन थानों एवं पुलिस चौकियों में पदस्थ किन-किन पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों/थाना प्रभारियों के विरुद्ध गंभीर आरोप अथवा शिकायतें प्राप्त हुई? उक्त शिकायतों पर क्या-क्या कार्यवाही की गई? की गई जांचों के जांच प्रतिवेदन का विवरण क्या है? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में यह भी बतावें कि वर्ष 2020 से 12/2025 के मध्य मऊगंज एवं रीवा जिलों में आमजनता द्वारा फर्जी मुकदमे दर्ज किए अथवा झूठे प्रकरणों में फंसाने की कितनी शिकायतें प्राप्त हुई? उक्त शिकायतें किस थाना/चौकी के विरुद्ध थी? किन-किन शिकायतों पर जांच कराई गई? यदि जांच कराई गई, जांच प्रतिवेदन का निष्कर्ष क्या रहा? प्रतिवेदन के आधार पर वैधानिक/विभागीय कार्यवाही की गई? (ग) वर्ष 2020 से 12/2025 के मध्य मऊगंज एवं रीवा जिलों में पदस्थ समस्त पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा वार्षिक आय विवरण वर्षवार प्रस्तुत किया गया या नहीं? यदि हाँ, तो वर्षवार विवरण क्या है? यदि किसी अधिकारी/कर्मचारी द्वारा आय विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया, तो उसके विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई? क्या नियुक्ति के समय समस्त पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा आय एवं संपत्ति का विवरण प्रस्तुत किया गया था? यदि हाँ, तो उसका संक्षिप्त विवरण क्या है और यदि नहीं, तो जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जिला मऊगंज में वर्ष 2020 से 12/2025 तक थानों एवं पुलिस चौकियों में पदस्थ पुलिस अधिकारिर्या/कर्मचारियों थाना प्रभारियों के विरुद्ध कुल 31 शिकायतें प्राप्त हुई, जिनमें से 29 शिकायतों पर कार्यवाही की जा चुकी है। 02 शिकायत जांच प्रक्रियाधीन/लंबित है। जिला रीवा में वर्ष 2020 से 12/2025 तक थानों एवं पुलिस चौकियों में पदस्थ पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों थाना प्रभारियों के विरुद्ध कुल 47 शिकायतों पर कार्यवाही की जा चुकी है। शेष विवरण/जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "अ" अनुसार है। (ख) जिला मऊगंज में वर्ष 2020 से 12/2025 तक आमजनता द्वारा दर्ज फर्जी मुकदमें अथवा झूठे प्रकरणों में फंसाने की कुल 31 शिकायतें प्राप्त हुई, जिनमें से 29 शिकायतों पर कार्यवाही की जा चुकी है। शेष 02 शिकायत जांच प्रक्रियाधीन/लंबित है। जिला रीवा में वर्ष 2020 से 12/2025 तक आमजनता द्वारा दर्ज फर्जी मुकदमे अथवा झूठे प्रकरणों में फंसाने की कुल 08 शिकायतें प्राप्त हुई। जिनमें से 08 शिकायों पर कार्यवाही की जा चुकी है। शेष विवरण/जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "ब" अनुसार है। (ग) जिला मऊगंज में वर्ष 2020 से 12/2025 तक कुल 10 राजपत्रित अधिकारी पदस्थ रहें। जिनमें से 02 अधिकारियों द्वारा संपति विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया एवं 01 राजपत्रित अधिकारी दिनांक 20.04.2024 को सेवानिवृत्त हो चुके है। जिला रीवा में वर्ष 2020 से 12/2025 तक कुल 43 राजपत्रित अधिकारी पदस्थ रहें। जिनमें से 14 राजपत्रित अधिकारियों द्वारा संपत्ति विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया एवं 08 राजपत्रित अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके है। जिन राजपत्रित अधिकारियों द्वारा संपत्ति विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया उनके स्पष्टीकरण प्राप्त किये जा रहे है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "स" अनुसार है।
यातायात व्यवस्था का सुचारू रूप से संचालन
[गृह]
146. ( क्र. 2602 ) श्री अम्बरीष शर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या भोपाल शहर में यातायात नियंत्रण हेतु मेट्रोलिटन सिटी के मान से निर्धारित मानदण्डों का पालन नहीं किया जा रहा है। भोपाल शहर में बढ़ते ट्राफिक एवं आमजनों को आवागमन में कई स्थानों पर घंटों-घंटों जाम की स्थिति बनती है जिसमें बावडि़या पुल, दानापानी चौराहा, साऊथ एवेन्यू नहर की पुलिया, रोहित नगर चौराहा, ओरा मॉल तिराहा, ग्यारह सौ हनुमान मंदिर के पहले का चौराहा, गुलमोहर चौराहा ऐसे प्रमुख स्थान हैं जहाँ यातायात नियंत्रण के लिये ऑटोमेटिक ट्राफिक सिग्नल (लाल, पीली एवं हरी लाईट) नहीं लगाये गये जाने से यातायात जाम होता है। अतः इन स्थानों पर ट्राफिक सिग्नल क्यों नहीं लगाये गये तथा कब तक लगाये जावेंगे? समय-सीमा बतायी जायें। (ख) शहर के अन्दर ऐसे सभी स्थान जहाँ आवागमन बाधित होता है में ऑटोमेटिक्ली ट्राफिक सिग्नल लगाकर उन्हें सुचारू रूप से संचालित कराने के लिये कब तक कार्यवाही की जावेगी? जानकारी दी जायें। (ग) शहर में अन्य स्थानों पर लगे ट्राफिक सिग्नल अक्सर बंद रहने सुगमतापूर्ण यातायात बाधित होता है? उचित प्रकार से ट्राफिक सिग्नल संचालन एवं संधारण नहीं होने से जिम्मेदार एजेन्सी व दोषी अधिकारियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की गयी? पूर्ण जानकारी दी जाये।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) भोपाल शहर में बढ़ते ट्राफिक को दृष्टिगत रखते हुये आवश्यकता के अनुसार यातायात के प्रवाह, घनत्व के अनुपात में सिग्नल लगाये जाने की कार्यवाही स्मार्ट सिटी, यातायात पुलिस द्वारा सड़क सुरक्षा समिति की अनुशंसा उपरांत करवायी जाती है। वर्तमान में बावड़िया चौराहा, रोहित नगर चौराहा (गुलमोहर), कैरियर कॉलेज तिराहा, साक्षी होटल तिराहा पर यातायात सिग्नल लगाये जाने हेतु कार्य आदेश जारी हो गये, कई स्थान ऐसे है जहां पर सड़क निर्माण, मेट्रो निर्माण कार्य के कारण सिग्नल प्रतिस्थापित किये गये है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के उपरांत स्मार्ट सिटी द्वारा सिग्नल पुनः स्थापित कर दिये जायेंगे। इन स्थानों पर यातायात के संचालन के लिये यातायात का बल, थाने का बल एवं निर्माण एजेंसी के कर्मचारियों के माध्यम से यातायात का संचालन करवाया जा रहा है। यातायात पुलिस को जाम की सूचना प्राप्त होने पर 13 एसटीएस (स्पेशल ट्राफिक स्क्वार्ड) के माध्यम से जाम अथवा यातायात दबाव को हटाया जाता है। (ख) जिन स्थानों पर यातायात ट्राफिक का घनत्व अधिक है और जहां पर उसका समाधान ट्राफिक सिग्नल लगाकर किया जा सकता है उनका परीक्षण किया जाकर बजटीय संसाधन उपलब्ध होने पर, वहां पर ऑटोमेटिक ट्राफिक सिग्नल लगाये जाते हैं जो कि एक सतत् प्रक्रिया है अतः समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं हैं। शहर में स्थापित एवं संधारित ट्राफिक सिग्नलों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) ट्राफिक सिग्नल बंद होने पर उन्हे शीघ्र ठीक कराकर यातायात व्यवस्था को सुचारू रखना निरंतर रूप से सुनिश्चित किया जाता हैं। अतःशेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है।
भोपाल शहर के संरक्षित वनक्षेत्र पर अतिक्रमण
[वन]
147. ( क्र. 2603 ) श्री अम्बरीष शर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भोपाल नगर में शाहपुरा पहाड़ी पर शहरी वन क्षेत्र आरक्षित होकर उसका रख-रखाव पर्यावरण वानिकी वन मण्डल भोपाल द्वारा किया जाता है। क्या शाहपुरा ग्राम के पास जिले विभाग द्वारा मयूर वन घोषित किया है में कतिपय व्यक्तियों द्वारा लगभग 50 हजार वर्गफिट से ज्यादा जंगल काटकर सामुदायिक भवन, मैरिज गार्डन का निर्माण किया जाकर आर्थिक लाभ लिया जा रहा है? यदि हाँ, तो इसके लिये कौन दोषी है? (ख) क्या प्रश्नांश (क) वर्णित उक्त पक्के अतिक्रमण को रोकने की कई शिकायतें किये जाने के उपरान्त भी विभागीय अधिकारियों के सहयोग से करोडों रूपये मूल्य की भूमि पर हरे-भरे पेड़ कटवाकर अतिक्रमण कराया गया और जंगल समाप्त कर भ्रष्टाचार किया गया है? यदि हाँ, तो पूर्ण जानकारी दी जाय। (ग) क्या प्रश्नांश (क) वर्णित यह भी सही है कि उक्त शहरी वन के बाहरी और रोड की तरफ होटल/दुकानों के नाम से पेड़ काटे जाकर अतिक्रमण किया गया है? यदि हाँ, तो उसे हटाने हेतु विभाग को क्या-क्या कार्यवाही कब-कब की गयी? पूरी जानकारी दी जाये। (घ) क्या शाहपुरा पहाड़ी का एकमात्र शहरी वन पर्यावरण की दृष्टि से संधारित व सुरक्षित था परंतु विभाग की लापरवाही से निरंतर वन क्षेत्र में अतिक्रमण कर जंगल समाप्त किया जा रहा है? क्या विभाग द्वारा इसे बचाने के लिये एवं दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) भोपाल नगर में शाहपुरा पहाड़ी स्थित शहरी नगरवन का रख-रखाव पर्यावरण वानिकी वनमंडल भोपाल द्वारा किया जा रहा है। परंतु यह शहरी नगरवन आरक्षित वन के रूप में अधिसूचित नहीं है। शाहपुरा ग्राम के पास विभाग द्वारा मयूर वन घोषित नहीं किया गया है अपितु शाहपुरा नगर वन में राष्ट्रीय पक्षी मोर प्राकृतिक रूप से पाये जाने के कारण स्थानीय तौर पर मोरवन के नाम से पहचाना जाता हैं। प्रश्नांश के शेष बिन्दुओं की जांच के लिए वन संरक्षक, क्षेत्रीय वन वृत्त, भोपाल की अध्यक्षता में त्रि-सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने पर गुण-दोष के आधार पर यथोचित कार्यवाही सम्भव है। (ख) एवं (ग) उत्तरांश (क) अनुसार जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने पर गुण-दोष के आधार पर यथोचित कार्यवाही सम्भव है। (घ) शाहपुरा पहाड़ी पर स्थित शहरी नगरवन के अतिरिक्त अन्य 11 शहरी नगरवन भी पर्यावरणीय दृष्टि से पर्यावरण वानिकी वनमंडल द्वारा संधारित व सुरक्षित किये जा रहे हैं। शेष बिन्दुओं के संबंध में उत्तरांश (ख) अनुसार।
हवाई यात्राओं की जानकारी
[विमानन]
148. ( क्र. 2607 ) श्री हेमंत सत्यदेव कटारे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पिछले पाँच वर्षों में मुख्यमंत्री जी द्वारा कितनी हवाई यात्राएं शासकीय अथवा निजी कार्य से की गई? यात्राओं में कितनी-कितनी राशि व्यय हुई? वर्षवार शासकीय व निजी यात्राओं की पृथक-पृथक जानकारी दी जाये। (ख) मुख्यमंत्री जी द्वारा की गई हवाई यात्राओं में कितनी यात्राएं शासकीय वायुयान/हेलीकॉप्टर से तथा कितनी यात्राएं निजी कंपनी का वायुयान किराये पर लेकर की गई? आलोच्य अवधि में शासकीय वायुयान/हेलीकॉप्टर निजी कंपनी से किराये पर लेकर की गई यात्राओं की पृथक-पृथक वर्षवार जानकारी उपलब्ध करायी जाये। (ग) मुख्यमंत्री जी की यात्राओं हेतु निजी कंपनी का वायुयान किराये पर लेने के क्या नियम हैं? आलोच्य अवधि में किन-किन निजी कंपनी का वायुयान किस दर पर किराये पर लिया गया व आलोच्य अवधि में मुख्यमंत्री की यात्राओं हेतु वर्षवार किस निजी कंपनी को किराये के रूप में कितनी राशि का भुगतान किया गया? वर्षवार जानकारी दी जाये। (घ) क्या शासन स्तर पर नया वायुयान/हेलीकॉप्टर क्रय करने का प्रस्ताव विचाराधीन है? यदि हाँ, तो किस मॉडल व कंपनी का कितनी राशि में क्रय किये जाने की योजना है? विस्तृत जानकारी दी जाये।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
एमपीपीएससी द्वारा परीक्षाओं का आयोजन
[सामान्य प्रशासन]
149. ( क्र. 2610 ) श्री जयवर्द्धन सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जनवरी 2019 से प्रश्न दिनांक तक एमपीपीएससी द्वारा कितनी परीक्षाओं का आयोजन, कितने पदों पर, कब किया गया, परीक्षाओं के परिणाम कब जारी किये, कितने पदों पर भर्ती प्रक्रियापूर्ण एवं कितने पदों पर किन कारणों से होल्ड की है? वर्षवार, परीक्षावार, पदसंख्या, पदनाम सहित गोशवारा बनाकर पृथक-पृथक आदेश, नियम-निर्देश एवं एकल नस्ती सहित बताये। (ख) मुख्यमंत्री पीएससी कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों को कब और कितनी शिकायतें इस संबंध में प्राप्त हुई है? उन पर कब और क्या कार्यवाही की गई? शिकायतवार पृथक-पृथक बताये? (ग) उपरोक्त अवधि में पीएससी में भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार हेतु विभाग द्वारा कब और क्या कार्यवाही की गई? प्रस्तुत एजेंडे की प्रति, मीटिंग के मिनिट्स और उसके पालनार्थ जारी आदेशों की प्रति दें। (घ) उपरोक्त अवधि में पीएससी कार्यालय में कितने कार्यरत बोर्ड मेम्बर अधिकारी कर्मचारी कार्यरत है? नाम, पदनाम, वेतनमान, मोबाईल नं., कब से एक ही स्थान पर पदस्थ, कितने प्रतिनियुक्ति पर किस कार्यालय से कब से पदस्थ है, संपत्ति की जानकारी सहित आदेशों निर्देश नियम की प्रति सहित संपूर्ण जानकारी का गोशवारा बनाकर वर्षवार बताये? (ड.) 87:13 क्या है? विभाग द्वारा माननीय न्यायालय एवं वरिष्ठ कार्यालयों से कब और क्या पत्र व्यवहार किया? कब तक इन पदों पर भर्ती पूर्ण की जायेगी निश्चित समयावधि बतायें?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट ''अ'' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट ''ब'' अनुसार है। परीक्षा परिणाम न्यायालयीन प्रकरण के कारण होल्ड होने के कारण कार्यवाही स्थगित है। (ग) उत्तरांश ''ख'' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट ''स'' अनुसार है। (ड.) अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण के संदर्भ में माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर द्वारा पारित अंतरिम आदेश के प्रकाश में आयोग द्वारा संचालित विभिन्न परीक्षाओं के परिणाम घोषित करने में कठिनाई के दृष्टिगत राज्य सेवा एवं अन्य भर्ती परीक्षा का परिणाम दो भागों में, एक 87 प्रतिशत पदों पर मुख्य तथा दूसरा 13 प्रतिशत पदों पर प्रावधिक परीक्षा परिणाम घोषित करने से संबंधित है। प्रकरण माननीय न्यायालय में विचाराधीन होने से, माननीय न्यायालय एवं वरिष्ठ कार्यालयों से पत्र व्यवहार किये जाने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। समयावधि बताया जाना संभव नहीं है।
शिकायतों पर कार्यवाही नहीं की जाना
[खनिज साधन]
150. ( क्र. 2611 ) श्री जयवर्द्धन सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रश्नकर्ता का पत्र क्र. 945 दिनांक 19/12/25 जो सीएस/एसीएसजीएसएडी/ पीएसमाईनिग/ कलेक्टर भोपाल को प्राप्त हुआ है? सा.प्र.वि. के आदेश क्रमांक एफ 19-76/2007/1/4 दिनांक 22/3/2011 के उल्लंघन होने पर आदेश के बिन्दु पांच अनुसार संबंधितों का निलंबन करते हुये कब तक जानकारी एकल नस्ती आदेशों की प्रति के साथ उपलब्ध कराई जायेगी। (ख) क्या दिनांक 22/1/26 को संभागायुक्त (राजस्व) कलेक्टर-एम.ओ. भोपाल को कार्या. खनिज अधिकारी द्वारा राजस्व की चोरी के संबंध में शिकायत प्राप्त हुई है? शिकायत की प्रति एवं प्रश्न दिनांक कृत कार्यवाही से अवगत कराये? यदि कार्यवाही नहीं की गई तो कारण सहित बताये क्यों? (ग) क्या दिनांक 29/1/26 को दोप. 2.56 बजे ई-मेल से जबलपुर जिले में सरकारी जमीनों पर खनन पट्टों की संदिग्ध नीलामी, माफिया संरक्षण, नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने के संबंध में ईमेल पर शिकायत प्राप्त हुई है? शिकायत की प्रति एवं शिकायत पर कृत कार्यवाही एकल नस्ती सहित दें। (घ) मार्च 2020 से प्रश्न दिनांक तक कलेक्टर-एमओ कटनी को अवैध खनन/परिवहन सहित अन्य कितनी शिकायतें प्राप्त हुई? शिकायतों की प्रति एवं कृत कार्यवाही का गोशवारा बनाकर एकल नस्ती सहित दें। (ड.) 20 मार्च 2020 से प्रश्न दिनांक तक विभाग द्वारा सीएसआरफण्ड एवं सत्कार व्यय अन्तर्गत कब कितनी कहां पर राशि व्यय की संपूर्ण जानकारी का गोशवारा बनाकर वर्षवार पृथक-पृथक बतायें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। संबंधितों के विरूद्ध नियमानुसार कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है। (ख) जी हाँ। प्रश्नानुसार शिकायत की प्रति एवं कृत कार्यवाही संबंधी अभिलेख पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'अ' अनुसार है। (ग) जी हाँ। प्रश्नानुसार शिकायत की प्रति एवं कृत कार्यवाही संबंधी अभिलेख पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'ब' अनुसार है। (घ) प्रश्नानुसार उक्त अवधि में जिला कार्यालय कटनी को अवैध खनन/परिवहन से संबंधित कुल 493 शिकायतें प्राप्त हुई है जिसका विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'स' अनुसार है। (ड.) प्रश्नांश अनुसार सी.एस.आर. फंड भारत सरकार द्वारा प्रचालित कंपनी अधिनियम 2013 का विषय है, जिसकी जानकारी विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती। विभागीय लेखा शीर्ष में आतिथ्य पर व्यय के नाम से लेखा शीर्ष, वर्ष 2024-25 से आंवटित है। उक्त शीर्ष में आवंटित राशि का उपयोग विभागीय बैठकों में ही किया जाता है। आवंटित बजट एवं व्यय की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-'द' अनुसार है।
विवादित भूमि का निपटारा
[वन]
151. ( क्र. 2624 ) श्री शरद जुगलाल कोल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शहडोल जिला अन्तर्गत विधानसभा क्षेत्र ब्यौहारी अन्तर्गत ग्राम आमानार, बनचाचर, कनाड़ी मसीरा, कल्हारी, जमोड़ी, उमरगढ, छिउलाकछार इत्यादि ग्रामों में राजस्व एवं वन विभाग की भूमि को लेकर विवाद की स्थिति विद्यमान है। (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में क्या उक्त ग्रामों में वनाधिकार अधिनियम 2006 के अन्तर्गत पूर्व में वनाधिकार बन्दोबस्ती के पट्टे वितरित किये जा चुके है तथा संबंधित भूमि पर आबादी/बसाहट वर्षों से निवासरत है। यदि हाँ, तो उक्त विवाद के कारणों का विवरण क्या है तथा अब तक इस संबंध में राजस्व एवं वन विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की गई है? जानकारी दें। (ग) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में क्या शासन द्वारा उक्त विवाद के निराकरण हेतु कोई समय-सीमा निर्धारित की गई है? यदि हां, तो कब तक विवाद का अंतिम निपटारा किया जायेगा? यदि नहीं, तो इसके क्या कारण है तथा प्रभावित ग्रामीणों को राहत देने हेतु शासन तथा प्रशासन द्वारा क्या कदम उठाया जा रहा है जानकारी देवें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) शहडोल जिला अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र ब्यौहारी के ग्राम मसीरा, वनचाचर, कल्हाडी, जमोडी एवं उमरगढ़ में वन राजस्व सीमा विवाद है। (ख) अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत बंदोबस्ती पट्टे दिये जाने का कोई प्रावधान नहीं है। उक्त अधिनियम के अन्तर्गत प्रदाय किये जाने वाले वन अधिकार पत्र एवं वन राजस्व सीमा विवाद में परस्पर कोई संबंध नहीं है। प्रश्नांकित ग्राम में मान्य किये गये वन अधिकार पत्र की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-‘’एक’’ अनुसार है एवं प्रश्नांकित ग्राम में की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-‘’दो’’ अनुसार है। (ग) वन राजस्व सीमा विवाद का निराकरण जिला कलेक्टर एवं वनमंडलाधिकारी द्वारा राजस्व एवं वनभूमियों को राजस्व अभिलेखों में इंद्राज कर राजस्व के नक्शों में सीमा लाईन डालकर इन नक्शों पर संयुक्त रूप से हस्ताक्षर कर एक प्रति कलेक्टर कार्यालय एवं एक प्रति वनमंडल कार्यालय में रखने के निर्देश हैं। शहडोल जिले के कुल 681 ग्रामों में से 557 ग्राम वन सीमा में लगे है, जिनमें वन राजस्व सीमा लाईन का निर्धारण किया गया है। शेष 124 ग्रामों में राजस्व अभिलेखों में सीमा लाईन डालने का कार्य प्रक्रिया में है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-तीन अनुसार है। वन एवं राजस्व सीमा विवाद के निराकरण हेतु जिला कलेक्टर शहडोल एवं संबंधित क्षेत्रीय अधिकारी को निर्देश दिये गये हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-चार अनुसार है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
विभागीय पदस्थापना की जानकारी
[सामान्य प्रशासन]
152. ( क्र. 2630 ) श्री गौरव सिंह पारधी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या किसी विभाग के प्रमुख/जिला प्रमुख के प्रभारी की पदस्थापना की अधिकतम समय-सीमा निर्धारित की गई है अगर हाँ तो कितने वर्ष है? जानकारी उपलब्ध करावें। (ख) क्या किसी विभाग के प्रमुख या जिले के प्रभारी को गृह विभाग में पदस्थ किया जा सकता है? यदि हाँ, तो किन-किन विभागों में पदस्थापित किया जा सकता है? संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
वन सुरक्षा समिति के लाभांश एवं अवैध कटाई
[वन]
153. ( क्र. 2640 ) श्रीमती गंगा सज्जन सिंह उईके : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र 132—घोड़ाडोंगरी अंतर्गत तीनों विकासखण्डों यथा शाहपुर, घोड़ाडोंगरी एवं चिचोली में पिछले दो वर्षों में वन सुरक्षा समिति की लाभांश की राशि का उपयोग किन—किन कार्यों में किया गया है। विवरण वर्षवार, विकासखण्डवार पृथक—पृथक प्रदान करें। (ख) विधानसभा क्षेत्र 132—घोड़ाडोंगरी के विकासखण्ड शाहपुर, घोड़ाडोंगरी एवं चिचोली में विगत दो वर्षों में वृक्षारोपण कार्य पर खर्च की गई राशि का विवरण वर्षवार, विकासखण्डवार पृथक—पृथक प्रदान करें। विगत दो वर्षों में रोपे गये पौधों की स्थिति (जीवित/अजीवित/अन्य) का संख्यात्मक विवरण प्रदान करें। (ग) विधानसभा क्षेत्र 132—घोड़ाडोंगरी के विकासखण्ड शाहपुर, घोड़ाडोंगरी एवं चिचोली में वनभूमि पर काबिज जनजातीय परिवारों की संख्या, कितनी है जिन्हें शासन द्वारा नियमानुसार पट्टे वितरित किए जाने हैं? (घ) विधानसभा क्षेत्र 132—घोड़ाडोंगरी के विकासखण्ड शाहपुर, घोड़ाडोंगरी एवं चिचोली में विगत दो वर्षों में अवैध कटाई के कितने प्रकरण दर्ज किए गए हैं। वनमाफियाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किए जाने हेतु कार्यवाही का क्या प्रावधान है? क्या इसका प्रभावी क्रियान्वयन विगत दो वर्षों में प्रश्नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत किया गया है? क्या इन अवैध गतिविधियों में वनसेवकों की संलिप्तता पाई गई हैं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) विधानसभा क्षेत्र 132-घोड़ाडोंगरी अंतर्गत विकासखण्ड शाहपुर, घोड़ाडोंगरी एवं चिचोली में पिछले दो वर्षों में वन सुरक्षा समिति की लाभांश की राशि से कराये गये कार्यों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट-1 अनुसार है। (ख) विधानसभा क्षेत्र 132-घोड़ाडोंगरी के विकासखण्ड शाहपुर, घोड़ाडोंगरी एवं चिचोली में विगत दो वर्षों में वृक्षारोपण कार्य पर खर्च की गई राशि, रोपे गये पौधों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट-2 अनुसार है। (ग) वनभूमि पर काबिज जनजाति परिवारों को वन विभाग द्वारा वनभूमि पर पट्टा प्रदाय करने की कोई योजना प्रभावशील नहीं है, अतः संख्यात्मक जानकारी का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन हेतु नोडल जनजाति कार्य विभाग है। अधिनियम अंतर्गत गठित त्रि-स्तरीय समिति में वनभूमि पर वन अधिकार के प्रस्तुत दावों का परीक्षण उपरांत मान्य किये गये पात्र काबिज वन निवासियों को वन अधिकार पत्र दिये जाने का प्रावधान है। (घ) विधानसभा क्षेत्र 132-घोड़ाडोंगरी के विकासखण्ड शाहपुर, घोड़ाडोंगरी एवं चिचोली में विगत दो वर्षों में अवैध कटाई के दर्ज प्रकरणों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट-3 अनुसार है। प्रचलित अधिनियम/नियम/निर्देशों के अंतर्गत वनमाफियाओं पर कार्यवाही कर माननीय न्यायालय में अपराधियों को प्रस्तुत किया जाता है। वन अपराध प्रकरण संज्ञान में आने पर वन अपराधियों के विरुद्ध विधि अनुसार कार्यवाही सुनिश्चित की गई है। इन अवैध गतिविधियों में वनसेवकों की संलिप्तता नहीं पाई गई है।
वन विभाग द्वारा संचालित योजनाएं
[वन]
154. ( क्र. 2648 ) श्री भैरो सिंह बापू : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वन विभाग द्वारा कौन-कौन सी योजना संचालित की जा रही है जानकारी देवें? (ख) जिला आगर-मालवा में वर्ष 2024 से प्रश्न दिनांक तक कितने किसानों को स्वयं की भूमि पर व खेत की मेड़ पर पेड़ लगाये जाने हेतु कितने किसानों को आंशिक राशि दी गई जानकारी देवें? (ग) जिला आगर मालवा में कितनी वन समितियां है जानकारी देवें एवं वन समितियों का गठन कब कब किया गया व वन समिति के क्या कार्य है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-1 अनुसार है। (ख) जिला आगर मालवा में वर्ष 2024 से प्रश्न दिनांक तक 40 किसानों को स्वयं की भूमि पर व खेत की मेड़ पर बांस पौधे लगाये जाने हेतु राष्ट्रीय बांस मिशन की गाईड लाईन्स में निर्धारित पात्रता अनुसार अनुदान की आंशिक राशि प्रदाय की गई है। (ग) जिला आगर मालवा में कुल 24 ग्राम वन समितियां गठित है। ग्राम वन समितियों का पुनर्गठन वर्ष 2022 में किया गया है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-2 अनुसार है। राज्य शासन के संकल्प दिनांक 22 अक्टूबर, 2001 पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-3 अनुसार है, जिसके बिन्दु क्रमांक 11.2 अनुसार संयुक्त वन प्रबंधन समितियां कार्य करती है।
अवैध शराब विक्रय परिवहन
[वाणिज्यिक कर]
155. ( क्र. 2658 ) श्री बाबू जन्डेल : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2020 से प्रश्न दिनांक तक विधानसभा क्षेत्र श्योपुर में अवैध शराब विक्रय, परिवहन तथा अवैध बिक्री के कितने प्रकरण तथा सूचनाएं प्राप्त हुई? तिथिवार ब्यौरा देवें। (ख) श्योपुर विधानसभा में वैध देशी एवं विदेशी मदिरा की दुकान ग्रामों एवं शहरों में कहाँ-कहाँ संचालित है? लाइसेंस धारक का नाम पता सहित सूची उपलब्ध कराएं। (ग) क्या नगर पालिका क्षेत्र हेतु आवंटित देशी एवं विदेशी मदिरा की दुकान ग्रामीण क्षेत्र हसनपुरा हवेली ग्राम पंचायत जैदा में अवैध रूप से संचालित है? यदि हाँ, तो उक्त दुकान कब तक हटा दी जावेगी? यदि नहीं, तो क्यों कारण बतावें? (घ) विभाग में कौन-कौन से अधिकारी/कर्मचारी कब-कब से पदस्थ है? जानकारी उपलब्ध करावें? क्या लम्बे समय से एक ही स्थान पद पदस्थ ASI श्री संजीव ध्रुवे के संरक्षण में अवैध मदिरा विक्रय हो रहा है? यदि हाँ, तो ऐसे भ्रष्ट ASI श्री संजीव ध्रुवे को श्योपुर से कब तक हटा दिया जावेगा? समय-सीमा बतावें। यदि नहीं, तो क्यों कारण बतावें?
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) वर्ष 2020 से प्रश्न दिनांक तक विधानसभा क्षेत्र श्योपुर में अवैध शराब विक्रय परिवहन तथा अवैध बिक्री की प्राप्त शिकायत सूचनाओं/उपलम्भन के दौरान पंजीबद्ध किये गये प्रकरणों की जानकारी तिथिवार ब्यौरा पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-एक अनुसार है। (ख) श्योपुर विधानसभा के ग्रामों एवं शहरों में 22 कम्पोजिट मदिरा दुकानें संचालित है। कम्पोजिट मदिरा दुकान का नाम, स्थान, लाइसेंस धारक का नाम एवं पते की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-दो अनुसार है। (ग) जी नहीं। नगर पालिका क्षेत्र हेतु श्योपुर सिटी दुकान जिला समिति द्वारा अनुमोदित व्यवस्था वर्ष 2025-26 के परिशिष्ट Location of shop (दुकानों की अवस्थिति) अनुसार श्योपुर नगरीय क्षेत्र के अन्तर्गत पूर्व घोषित परिसीमा नगरीय क्षेत्र अन्तर्गत बंजारा डेम शहरी सीमा तक अन्तर्गत स्थापित है। (घ) श्योपुर जिले में वर्तमान में पदस्थ अधिकारी/कर्मचारियों की पदस्थापना संबंधी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-तीन अनुसार है। श्री संजीव कुमार धुर्वे आब.उप नि. के संरक्षण में अवैध मदिरा विक्रय का कोई तथ्य/प्रकरण प्रकाश में नहीं आया है। श्री संजीव धुर्वे आब.उपनि. द्वारा अवैध मदिरा पर अंकुश लगाने हेतु प्राप्त शिकायत सूचनाओं के क्रम में अवैध मदिरा विक्रय के संदिग्ध स्थानों पर प्रभावी उपलम्भन कार्य किया गया, जिसके फलस्वरूप मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के अंतर्गत कुल 244 न्यायालयीन प्रकरण पंजीबद्ध किये गये। शासन की स्थानांतरण नीति के अनुसार स्थानांतरण किये जाते हैं।
ड्रिंक एंड ड्राइव प्रकरण
[गृह]
156. ( क्र. 2661 ) श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्जैन संभागों के विभिन्न शहरों में 1 जनवरी, 2024 के पश्चात् ड्रिंक एंड ड्राइव सहित अन्य चेकिंग के लिए पुलिस द्वारा कितने स्थानों/पॉइंट पर किस-किस श्रेणी के कितने प्रकरण दर्ज किए गए? जिलेवार जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश (क) संदर्भित प्रकरणों से कितनी राशि वसूली गई? कितने चार पहिया/दो पहिया वाहन जब्त किए गए एवं कितने किन कारणों से छोड़े गए? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) संदर्भित उक्त अवधि में कितने फरार आरोपी, गुंडे या अन्य आपराधिक व्यक्ति और आपराधिक गतिविधियों में तलाश किए जा रहे वाहन पकड़े गए? जिलेवार जानकारी दें। (घ) ड्रिंक एंड ड्राइव करने के संबंध में लागू नियम एवं कानून की प्रतियां देते हुए बताएं कि किस नाम के व्यक्ति ने शराब दुकानों के बाहर बैठकर शराब पीने के संबंध में कार्यवाही करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किए। दोषी पाए जाने पर दुकान लाइसेंसधारी व उक्त दोषी व्यक्ति के खिलाफ क्या कार्यवाही की गई?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'अ' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'ब' अनुसार है। (ग) निरंक (घ) ड्रिंक एण्ड ड्राइव के संबंध में मोटर यान अधिनियम 1988 एवं मोटर यान (संशोधन) अधिनियम 2019 की प्रतियां पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट 'स' अनुसार है। शराब दुकानों के बाहर बैठकर शराब पीने वालों के संबंध में जिला उज्जैन, देवास, शाजापुर, रतलाम, नीमच व आगरमालवा से जानकारी निरंक है। जिला मंदसौर में शराब दुकान के बाहर बैठकर शराब पीने वाले 01 व्यक्ति द्वारा शराब दुकान लाइसेंसधारी के विरुद्ध दिनांक 05-04-2025 को एक शिकायत की गई थी एवं शराब की दुकान के बाहर शराब पीने की शिकायत प्राप्त होने पर पुलिस द्वारा उन्हें रंगे हाथों वाहनों सहित गिरफ्तार किया जाकर उनके एवं जब्त वाहनों के संबंध में मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्यवाही की जाकर न्यायालय में पेश किया जाता है।
प्रदेश में आत्महत्या के प्रकरण
[गृह]
157. ( क्र. 2662 ) श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 1 जनवरी, 2022 के बाद प्रदेश में आत्महत्या के कितने प्रकरण सामने आए हैं? आत्महत्या के कारणों सहित जिलेवार संख्यात्मक जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश (क) में संदर्भित अवधि में आत्महत्या के लिए उकसाने या मजबूर करने की कितनी शिकायतें किसके विरुद्ध कहाँ-कहाँ दर्ज कराई गईं? कितनी शिकायतों को किन कारणों से निस्तारित किया गया तथा कितनी शिकायतों पर जाँच जारी है? (ग) प्रश्नांश (क) और (ख) में संदर्भित आत्महत्या के लिए उकसाने या मजबूर करने वालों में कितने शासकीय कर्मचारी/अधिकारी हैं? उनके नाम, पद और वर्तमान पदस्थापना सहित जानकारी दें तथा बताएँ कि यदि उनके खिलाफ कोई कार्यवाही की गई है तो जाँच प्रतिवेदन, दर्ज एफ.आई.आर. एवं चालान का विवरण दें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "अ" (पेनड्राईव) अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "ब" (पेनड्राईव) अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट "स" (पेनड्राईव) अनुसार है।
शक्कर मिल फैक्ट्री को बंद किया जाना
[पर्यावरण]
158. ( क्र. 2673 ) श्री प्रदीप अग्रवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दतिया की तहसील इंदरगढ़ के ग्राम भदौना में शक्करमिल/खांडसारीमिल की स्थापना कब, किसके द्वारा हुई, शासन के किस-किस विभाग से अनुमतियां ली गई, इसमें कितने कर्मचारी हैं, प्रोजेक्ट रिपोर्ट शासन से ली गई समस्त अनुमतियों की छायाप्रति सहित कर्मचारियों के नाम/पद उनके मूल निवास स्थान की जानकारी दी जाये। (ख) उक्त संस्था का निरीक्षण शासन के किस-किस विभाग द्वारा किस-किस दिनांक को किए गए, निरीक्षणकर्ता अधिकारी का नाम पद सहित उनके द्वारा दी गई रिपोर्ट की छायाप्रति के साथ जानकारी देवें। (ग) क्या उक्त कारखाने से रासायनिक धुंआ निकलने एवं रासायनिक वेस्ट से आस-पास के लोगों को गंभीर बीमारियां हो रही है जिससे लोगों के जीवन में संकट आ गया है, लोग मर रहे हैं जो चिंता का विषय है, यदि नहीं, तो क्या एक जांच दल गठित कर जांच कराई जावेंगी। (घ) क्या इस फैक्ट्री में क्षेत्र के बेरोजगार युवकों को अवसर न देते हुए बाहर के लोगों को रोजगार दिया गया है क्या विभाग बीमारी फैलाने वाली एवं हमारे क्षेत्र के युवाओं की उपेक्षा करने वाली फैक्ट्री को बंद करने हेतु आदेश जारी करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? जानकारी दी जावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) पर्यावरण विभाग के अधीन प्रश्नाधीन उद्योग को मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 तथा वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के प्रावधानों के अंतर्गत स्थापना एवं स्थापना विस्तार सम्मति प्रदान की गई है। शेषांश के संबंध में पर्यावरण विभाग से संबंधित जानकारी ''निरंक'' है। (ख) मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''अ'' अनुसार है। (ग) जी नहीं। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला दतिया से प्राप्त जानकारी अनुसार कारखाने के आस-पास के क्षेत्र में कोई विशेष बीमारी की सूचना नहीं है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला दतिया के आदेश क्रमांक 1482 दिनांक 04/02/2026 द्वारा चिकित्सकीय दल का गठन किया जा चुका है। (घ) उद्योग से प्राप्त जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''ब'' अनुसार है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
प्रकरण क्रमांक 0686 में कार्यवाही
[गृह]
159. ( क्र. 2683 ) श्री देवेन्द्र कुमार जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या थाना कोतवाली शिवपुरी द्वारा कार्यालय उप-पंजीयक शिवपुरी के पत्र क्रमांक 196/उ.पं./2025 शिवपुरी दिनांक 03.11.2025 के क्रम में ग्राम नोहरीखुर्द तहसील शिवपुरी में एक विक्रय से वर्जित भूमि की फर्जी अनुमति के आधार पर रजिस्ट्री से संबंधित प्रकरण में क्रमांक 0686 दिनांक 03.11.2025 के द्वारा पुलिस प्राथमिकी दर्ज की गई थी? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में उक्त दर्ज प्रकरण में पुलिस द्वारा प्रश्न दिनांक तक क्या-क्या कार्यवाही की गई है? प्रकरण में गिरफ्तारियाँ की गई अथवा नहीं? यदि नहीं, तो कब तक की जावेंगी? जानकारी दें?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ, उप पंजीयक शिवपुरी की रिपोर्ट पर दिनांक 03.11.25 को थाना कोतवाली शिवपुरी में अपराध क्रमांक 686/25 अन्तर्गत धारा 318 (4), 338, 336 (3), 340 (1) बीएनएस का पंजीबद्ध किया गया। (ख) प्रकरण में साक्षियों के कथन लिये गये। प्रकरण के मूल आरोपी श्री प्रेमशंकर ताबडे को दिनांक 23.11.2025 को गिरफ्तार कर न्यायालय प्रस्तुत किया गया है, जो जिला जेल शिवपुरी में निरुद्ध है। प्रकरण में एक अन्य आरोपी श्री प्रबल शर्मा घटना के बाद से फरार हैं, जिसकी तलाश की जा रही हैं।
पुलिस चौकियों का उन्नयन कर नवीन थाना बनाया जाना
[गृह]
160. ( क्र. 2684 ) श्री देवेन्द्र कुमार जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला शिवपुरी के पुलिस थाना भौंती, थाना पिछोर, थाना मायापुर, थाना खनियांधाना एवं पुलिस चौकी खोड़ के अंतर्गत शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र के कुल कितने-कितने व कौन-कौन से ग्राम आते हैं? थाना व चौकीवार पृथक-पृथक जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में क्या शिवपुरी विधानसभा के खोड़ क्षेत्र के आस पास की लगभग 39 ग्राम पंचायतों के विभिन्न ग्राम अलग-अलग थाना क्षेत्रों में शामिल होने के चलते भौगोलिक एवं कार्य सुविधा की दृष्टि से बेहतर कानून व्यवस्था बनाये रखने में पुलिस प्रशासन को एवं शिकायतें लेकर थानों तक पहुंचने वाले आम लोगों को परेशानियां होती हैं? (ग) प्रश्नांश ''क'' एवं ''ख'' के संदर्भ में क्या पुलिस चौकी खोड़ का उन्नयन कर खोड़ को नवीन थाना बनाये जाने से विभिन्न थाना क्षेत्रों में शामिल विभिन्न ग्रामों में से अधिकांश एक ही थाना क्षेत्र में शामिल होंगे जो कि पुलिस तथा आमजन को कार्य सुविधा, बेहतर कानून व्यवस्था एवं भौगोलिक सुविधाओं की दृष्टि से बेहतर होगा? (घ) क्या वर्तमान में पुलिस चौकी खोड़ को नवीन थाना बनाये जाने के संबंध में कोई कार्यवाही प्रचलन में है? यदि है तो किस स्तर पर है? मय दस्तावेज सम्पूर्ण जानकारी दें। अगर नहीं तो क्या विभाग इस संबंध में विचार करेगा व कब तक?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जिला शिवपुरी के पुलिस थाना भौंती, थाना पिछोर, थाना मायापुर, थाना खनियाधाना एवं पुलिस चौकी खोड़ के अंतर्गत शिवपुरी विधानसभा क्षेत्र के ग्रामों की थाना व चौकीवार सूची संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। (ग) जिला स्तर पर थाना एवं चौकियों के क्षेत्र के पुर्ननिर्धारण एवं उन्नयन से संबंधित समिति की दिनांक 06.01.2024 को बैठक आयोजित की गई थी। उक्त बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों से थाना/चौकियों के सीमा क्षेत्र निर्धारण एवं उन्नयन के संबंध में सुझाव मांगा गया तो खोड़ चौकी का थाने में उन्नयन से संबंधित कोई सुझाव/प्रस्ताव जिला स्तरीय समिति के समक्ष नहीं रखा गया था। (घ) जी नहीं। चौकी खोड़ निरीक्षक स्तर का थाना भौंती के अंतर्गत आती है साथ ही इसके नजदीक निरीक्षक स्तर का थाना मायापुर भी है। अतः चौकी खोड़ को थाने में उन्न्यन किये जाने की आवश्यकता प्रतीत नहीं होती है।
पदोन्नतियों में नियमों का उल्लंघन
[सामान्य प्रशासन]
161. ( क्र. 2687 ) श्री महेश परमार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या मध्यप्रदेश शासन के विभिन्न विभागों में पदस्थ लिपिकीय/अशासकीय कर्मचारियों की पदोन्नति हेतु पृथक-पृथक सेवा नियम लागू हैं? यदि हाँ,तो क्या वर्ष 2008 से अब तक उज्जैन संभाग में विभिन्न विभागों में पदस्थ स्टेनो-टाइपिस्ट कर्मचारियों को सहायक श्रेणी-02 के पद पर पदोन्नत किया गया है? यदि हाँ, तो नाम,पद,विभागवार विवरण एवं आदेश की प्रमाणित प्रतियां देवें। (ख) क्या प्रश्नांश (क) में वर्णित पदोन्नतियों में मध्यप्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994, आरक्षण रोस्टर नियमों, वरिष्ठता सूची एवं पात्रता मापदण्डों का पूर्णतः पालन किया गया है? सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त की गई थी? यदि हाँ, तो विभागवार जानकारी और यदि नहीं, तो कारण बताये। (ग) क्या पदोन्नत कर्मचारियों के जाति प्रमाण-पत्रों की वैधता की जांच,मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति/जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण-पत्र सत्यापन नियम तथा उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप सक्षम जांच समिति/अधिकारी द्वारा कराई गई? यदि हाँ, तो जानकारी देवें और यदि नहीं, तो इसके लिए उत्तरदायी अधिकारी कौन है? (घ) क्या उज्जैन संभाग में वर्ष 2008 में की गई स्टेनो-टाइपिस्ट की पदोन्नतियाँ—लिपिकीय संवर्ग के पदोन्नति नियमों के अंतर्गत की गई या राजपत्रित अधिकारियों के पदोन्नति नियमों के अंतर्गत? यदि गलत नियम लागू किए गए, तो उसके औचित्य का स्पष्टीकरण दिया जाए। (ड.) क्या शासन द्वारा वर्ष 2008 से अब तक विभिन्न विभागों में नियम विरुद्ध की गई पदोन्नतियों की समीक्षा/जांच कराई गई है? यदि हाँ,तो दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की गई? यदि नहीं,तो इसके कारण बताए जाये।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) उत्तरांश (क) के प्रकाश में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) पदोन्नति कर्मचारियों के जाति प्रमाण-पत्रों की वैधता की जांच के संबंध में कोई दिशा-निर्देश नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) उत्तरांश (क) के प्रकाश में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ड.) जी नहीं। विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा पर शासकीय सेवक की पदोन्नति की जाती है।
लोकायुक्त संगठन एवं EOW द्वारा एफ.आई.आर. के सार्वजनिक प्रकरण
[सामान्य प्रशासन]
162. ( क्र. 2689 ) श्री महेश परमार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) द्वारा पंजीबद्ध एफ.आई.आर.को उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जाने हेतु किस शासन आदेश/निर्देश/परिपत्र के अंतर्गत अधिकार प्राप्त है? संबंधित आदेश का क्रमांक, तिथि एवं वर्तमान वैधानिक स्थिति बताई जाए तथा प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाये। (ख) क्या माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रिट याचिका क्रमांक 68/2016 में पारित आदेश लोकायुक्त संगठन, मध्यप्रदेश की विशेष पुलिस स्थापना पर भी समान रूप से लागू होता है? यदि हाँ, तो लोकायुक्त संगठन द्वारा उक्त आदेश का पूर्ण अनुपालन न किए जाने के कारण तथा इसके लिए उत्तरदायी अधिकारी का नाम,पद एवं संबंधित निर्णय अभिलेख प्रस्तुत किए जाये। (ग) लोकायुक्त संगठन एवं EOW द्वारा वर्ष 2014 से प्रश्न दिनांक तक कुल कितने प्रकरणों की जाँच की गई है,जिनमें से कितने प्रकरणों में विभिन्न स्तर के प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आरोपित रहे हैं? ऐसे कितने प्रकरण सार्वजनिक पोर्टल पर प्रदर्शित नहीं किए गए हैं। प्रकरणवार स्थिति एवं अभियोजन स्वीकृति संबंधी अभिलेख उपलब्ध कराये जाये। (घ) क्या राज्य सूचना आयुक्त, मध्यप्रदेश द्वारा दिनांक 24 सितम्बर 2019 को पारित आदेश से लोकायुक्त संगठन को सूचना का अधिकार अधिनियम की परिधि से मुक्त रखने संबंधी अधिसूचना को अमान्य घोषित किया गया है? यदि हाँ, तो अनुपालन स्थिति स्पष्ट की जाए। (ड.) क्या लोकायुक्त संगठन एवं EOW के लिए सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा कोई पृथक कार्यालयीन मैनुअल अथवा प्रक्रिया नियमावली जारी की गई है? यदि हाँ, तो उसका विवरण प्रस्तुत किया जाए, यदि नहीं,तो कारण बताये जाये।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रिट पिटीशन (क्रिमि.) क्रमांक 68/2016 में पारित आदेश दिनांक 07/09/2026 के पालन में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ द्वारा दिनांक 04/04/2018 को प्रथम सूचना रिपोर्ट अपलोड किए जाने के संबंध में आदेश जारी किया गया है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-''अ'' अनुसार है। (ख) जी हाँ। विशेष पुलिस स्थापना म.प्र. द्वारा उक्त आदेश का पूर्ण अनुपालन किया जा रहा है। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) विशेष पुलिस स्थापना म.प्र. के द्वारा वर्ष 2014 से प्रश्न दिनांक तक पंजीबद्ध 3940 प्रकरणों में से कुल 2978 प्रकरणों की विवेचना पूर्ण की गई है, जिनमें से 47 प्रकरणों में विभिन्न स्तर के प्रशासनिक सेवा के अधिकारी आरोपित रहे हैं। गोपनीयता एवं विवेचना प्रभावित होने की दृष्टि से अभिलेख उपलब्ध कराया जाना संभव नहीं है एवं आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में वर्ष 2014 से प्रश्न दिनांक तक कुल 887 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इन प्रकरणों में विभिन्न स्तर के प्रशासनिक अधिकारी आरोपी रहे हैं जिनकी प्रकरणवार स्थिति व अभियोजन स्वीकृति संबंधी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट ''ब'' अनुसार है। वर्ष 2014 से वर्ष 2016 तक सार्वजनिक पोर्टल पर कुल 154 प्रकरण प्रदर्शित नहीं किए गए हैं एवं वर्ष 2017 से प्रकरण सार्वजनिक पोर्टल पर प्रदर्शित किए गए हैं। अभियोजन स्वीकृति संबंधी अभिलेख उपलब्ध कराए जाने के संबंध में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 192 के अनुसार प्रकरण की केस डायरी एवं दस्तावेज केवल सक्षम न्यायालय में ही प्रस्तुत किए जाते हैं। (घ) जी नहीं। राज्य सूचना आयुक्त म.प्र. द्वारा दिनांक 24 सितम्बर, 2019 को पारित आदेश से विशेष पुलिस स्थापना म.प्र. को सूचना का अधिकार अधिनियम की परिधि से मुक्त रखने संबंधी अधिसूचना को अमान्य घोषित नहीं किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ड.) जी नहीं। लोकायुक्त संगठन एवं आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में अनुसचिवीय बलों की पदस्थापना गृह विभाग से की जाती है।
पुलिस सहायता केंद्र का चौकी में उन्नयन
[गृह]
163. ( क्र. 2690 ) श्री चन्दरसिंह सिसौदिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या गरोठ विधानसभा क्षेत्र के बोलिया पुलिस सहायता केंद्र को चौकी में उन्नयन करने हेतु कोई प्रस्ताव विभाग को प्राप्त हुआ है? यदि हाँ, तो विभाग इसका उन्नयन कब तक करेगा? (ख) खड़ावदा ग्राम पंचायत गरोठ पुलिस थाना से 20 किलोमीटर दूर है। इसके नजदीक 20 से 25 ग्राम पंचायत और लगी है। खड़ावदा क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस चौकी या सहायता केंद्र खुला जाना आवश्यक है? यदि हाँ, तो क्या विभाग कोई कार्यवाही करेगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। बोलिया पुलिस सहायता केन्द्र को चौकी में उन्नयन का प्रस्ताव प्राप्त हुआ था, जो चौकी हेतु निर्धारित मापदण्डों को पूर्ण नहीं करने से अमान्य किया गया। (ख) खड़ावदा क्षेत्र में पुलिस चौकी या सहायता केन्द्र खोलने के संबंध में परीक्षण उपरांत नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी।
मादक पदार्थों की तस्करी
[गृह]
164. ( क्र. 2691 ) श्री चन्दरसिंह सिसौदिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) गरोठ विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2022 से अब तक किन-किन थाना क्षेत्र में डोडा चूरा एवं एमडी पाउडर के कितने प्रकरण पंजीकृत हुए थानावार ब्यौरा क्या हैं? (ख) डोडा चूरा एवं एमडी की कितनी-कितनी मात्रा उपरोक्त अवधि में पकड़ी गई? थानावार विवरण दें। (ग) मादक पदार्थों की तस्करी की सर्वाधिक घटनाएं किस क्षेत्र में हो रही है? इन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट "अ" अनुसार। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट "ब" अनुसार। (ग) गरोठ थाना क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी के सर्वाधिक अपराध पंजीबध्द हुये हैं, पुलिस द्वारा मादक पदार्थ तस्करों के विरुद्ध मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर वाहन चैकिंग के माध्यम से लगातार प्रभावी कार्यवाही की जा रही है, जिसमें पुलिस को निरंतर सफलता प्राप्त हो रही है।
आदिवासियों की जमीन का हस्तांतरण
[वन]
165. ( क्र. 2702 ) श्री प्रताप ग्रेवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इंदौर जिले की देपालपुर तहसील के ग्राम कालीबिल्लीद के आदिवासियों को शासन द्वारा कई वर्षों पूर्व सर्वे/खसरा क्र. 278 पर वनभूमि आवंटित कर विस्थापित किए गए थे। यदि हाँ, तो कितने आदिवासियों के नाम पट्टे का रकबा की जानकारी बताये एवं क्या उपरोक्त वनभूमि को 26 नवंबर 1990 को सरकार ने म.प्र.राजपत्र में अधिसूचना जारी कर उक्तभूमि को राजस्व विभाग में अंतरित की गई है। कृपया इस संबंध में की गई कार्यवाही एवं राजपत्र की प्रति उपलब्ध करावें। (ख) कार्यालय कलेक्टर नजूल जिला-इंदौर केपत्र क्रं.888/प्र.अ.न./2025 इंदौर,दिनांक23.01.2025 को सर्वे क्र.278 की भूमि किसी को हस्तांतरण की गई, हस्तांतरण पत्र एवं समस्त नोटशीट की प्रति उपलब्ध करावें एवं खसरा नं.278 की यह जमीन दिनांक 23.01.2026 को शक्ति पम्प कम्पनी (इंडिया) लिमिटेड को 99 साल की लीज पर हस्तांतरित की गई है इसकी कार्यवाही एवं आदेश की प्रति उपलब्ध करावें। (ग) प्रश्नांश (ख) के अनुसार उक्त भूमि पर कितने किसान कब से काबिज है उक्त किसानों को या इन किसानों को भूमि से बेदखलकर एवं खड़ी फसल पर जेसीबी चलाकर खेतों में गड्डे खोदकर नुकसान किया गया। यदि हाँ, तो क्यों समस्त विवरण देवें। (घ) पेसा एक्ट के तहत आदिवासियों को जमीन से बेदखल करने के लिए ग्राम सभा की सहमति ली गई? यदि हाँ, तो प्रति देवें। यदि नहीं, तो बगैर अनुमति के कैसे जमीन हस्तांतरित कर दी गई एवं आदिवासियों को भू-राजस्व संहिता के अन्तर्गत कब्जा हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए और समाचार पत्रों में इसकी विज्ञप्ति जारी कर आमजनता या आदिवासियों को सूचित किया गया है। यदि हाँ, तो समस्त जानकारी देवें नहीं तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) वनमण्डल इंदौर के अंतर्गत देपालपुर तहसील के ग्राम कालीबिल्लोद के संबंध में म.प्र. राजपत्र दिनांक 26.11.1990 में वन विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ-5-49-10-3 (6) दिनांक 24.11.1990 से संरक्षित वनखण्ड कालीबिल्लोद के अतिक्रमण केन्द्र कालीबिल्लोद अ, ब, स, द, क से कुल 24.332 हे. वनभूमि निर्वनीकृत की गई है, जिसमे वर्ष 1976 के पूर्व के वनभूमि के अतिक्रामको के व्यवस्थापन की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-एक अनुसार है एवं राजपत्र की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-दो अनुसार है। (ख) कलेक्टर (नजूल) जिला इन्दौर के पत्र क्रमांक/888/प्र.अ.न./2025 इन्दौर दिनांक 23/01/2025 को सर्वे नम्बर 278 रकबा 44.304 हेक्टेयर शासकीय भूमि औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग (म.प्र. शासन को औद्योगिक प्रयोजन हेतु हस्तान्तरित की गई। उक्त सर्वे नम्बर 28 रकबा 44.304 हेक्टेयर में से 8.3807 हेक्टेयर भूमि को औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के पत्र क्रमांक MPIDC/ROINDORE/P-7/20205/324 दिनांक 07/01/2026 द्वारा मेसर्स शक्ति पम्प कम्पनी (इण्डिया) लिमिटेड को आवंटित की गई। आदेशों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-तीन अनुसार है। (ग) कार्यालय औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग का पत्र क्रमांक 13985 -86 दिनांक 30/10/2025 के अनुक्रम में नायब तहसीलदार टप्पा बेटमा के द्वारा निवेश क्षेत्र विकास एवं प्रबंधन योजना अन्तर्गत स्थित ग्राम कालीबिल्लोद स्थित भूमि सर्वे क्रमांक 278 रकबा 44.304 हेक्टेयर की भूमि कार्यालय कलेक्टर जिला इन्दौर के प्रकरण क्रमांक 51/अ-20 (3)/2022-23 तथा प्रकरण क्रमांक 141/अ-20 (3)/2023- 24 में पारित आदेश क्रमांक/888/प्र.अ.न./2025 दिनांक 23/01/2025 के माध्यम से मध्यप्रदेश शासन ओद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को हस्तांतरित की गई। आवेदित भूमि का राजस्व अभिलेखो में ग्राम कालीबिल्लौद स्थित भूमि सर्वे क्रमांक 278 रकबा 44.304 हेक्टेयर भूमि का नामांतरण मध्यप्रदेश शासन औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के नाम पर किये जाने तथा भूमि का आधिपत्य दिलाये जाने की कार्यवाही तदनुसार की गई। (घ) प्रश्नाधीन भूमि पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा) अंतर्गत अधिसूचित ब्लॉक में नहीं होने से पेसा एक्ट लागू नहीं है। अत: शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
वन विभाग द्वारा विकास कार्य
[वन]
166. ( क्र. 2705 ) श्री संतोष वरकड़े : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिहोरा विधानसभा अंतर्गत वन विभाग द्वारा परिक्षेत्र में कितने तालाब बनाये जा चुके है कृपया विस्तृत जानकारी देवें। (ख) सिहोरा विधानसभा अंतर्गत वन विभाग द्वारा परिक्षेत्र में कितने सी.सी. रोड बनाये जा चुके है विस्तृत जानकारी देवें। (ग) सिहोरा विधानसभा अंतर्गत वन विभाग द्वारा परिक्षेत्र में कितने सामुदायिक भवन बनाये जा चुके है विस्तृत जानकारी देवें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट-1 अनुसार है। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट-2 अनुसार है। (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्ट-3 अनुसार है।
तेंदूपत्ता हितग्राहियों को बीमा की राशि का भुगतान
[वन]
167. ( क्र. 2706 ) श्री संतोष वरकड़े : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वन विभाग द्वारा सिहोरा विधान सभा अंतर्गत कितने तेंदूपत्ता हितग्राहियों को मृत्यु उपरांत बीमा की राशि प्रदान की जा चुकी है विस्तृत जानकारी देवें (ख) वन विभाग द्वारा सिहोरा विधानसभा अंतर्गत तेंदूपत्ता के वर्तमान में कितने हितग्राहियों की मृत्यु के उपरांत आवेदन लंबित है कृपया विस्तृत जानकारी देवें। (ग) वन विभाग द्वारा तेंदूपत्ता बीमा योजना के लंबित आवेदन कब तक स्वीकृत होंगे एवं इस योजना का लाभ कब तक मिलेगा समय-सीमा बताये।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) राज्य शासन की संबल योजना प्रचलित होने से मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित, भोपाल द्वारा तेन्दूपत्ता हितग्राहियों से संबंधित बीमा योजना वर्तमान में प्रचलित नहीं है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) एवं (ग) उत्तरांश (क) के अनुक्रम में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
अनुकंपा नियुक्ति के जिला स्तर पर लंबित प्रकरण
[सामान्य प्रशासन]
168. ( क्र. 2719 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मंदसौर जिले के विभिन्न विभागों में सहायक ग्रेड-03 तथा अन्य तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कितने रिक्त पद है तथा इन विभागों में कितने पदों पर अनुकम्पा नियुक्ति के प्रकरण लंबित है? विभागवार स्थानवार जानकारी देवें? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार क्या मध्य प्रदेश शासन के नियमानुसार संबधित विभाग में पद रिक्त नहीं होने पर विभाग द्वारा नियुक्ति हेतु प्रकरण संबंधित जिला कलेक्टर को प्रेषित किया जाना होता है यदि हाँ, तो मंदसौर जिले के लंबित प्रकरणों की विभागवार सूची देवें? (ग) प्रश्नांश (ख) अनुसार उक्त अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों को विभागों द्वारा क्यों लंबित रखा गया है तथा विभाग में पद रिक्त नहीं होने पर यह संबंधित जिला कलेक्टर को अन्य विभागों में रिक्त पद पर नियुक्ति हेतु क्यों प्रेषित नहीं किये जा रहे है, ताकि पद पूर्ति कर विभिन्न विभागों द्वारा संचालित शासन की सेवाओं का जनता को लाभ मिल सके?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) मन्दसौर जिले के विभिन्न विभागों में रिक्त पदों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट - 'अ' अनुसार एवं जिले अंतर्गत विभागों में लंबित अनुकम्पा नियुक्ति के प्रकरण की जानकारी संलग्न परिशिष्ट – 'ब' अनुसार है। (ख) जी हाँ। जानकारी संलग्न परिशिष्ट - 'स' अनुसार है। (ग) अनुकम्पा नियुक्ति के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र दिनांक 29.9.2014 की कंडिका 7 ''अनुकम्पा नियुक्ति की प्रक्रिया'' अनुसार कार्यवाही की जाती है।
दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का विनियमितीकरण
[योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी]
169. ( क्र. 2727 ) श्री भैरो सिंह बापू : क्या उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद में कितने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को किस नियम अंतर्गत विनियमित किया गया कर्मचारी के नाम नियुक्ति दिनांक सहित जानकारी देवें? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार ऐसे कितने कर्मचारी है जिनकी सेवाएं 10 वर्ष पूर्ण नहीं हुई उन्हें भी विनियमित किया गया जानकारी देवें?
उप मुख्यमंत्री, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद् में 76 दैनिक वेतन भोगियों को मध्यप्रदेश शासन, सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र क्रमांक एफ 5-1/2013/1/3 भोपाल, दिनांक 07.10.2016 के तहत "स्थाई कर्मी" घोषित किया गया है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।
हीरे की उपलब्धता संबंधित भ्रामक जानकारी
[खनिज साधन]
170. ( क्र. 2734 ) श्री हरिशंकर खटीक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या तारांकित प्रश्न क्र. 2856 दिनांक 05.08.2025 के उत्तर में बताया गया था कि जिला टीकमगढ़ में हीरा संभावित क्षेत्रों में हीरा खनिज की खोज हेतु सर्वे/पूर्वेक्षण कार्य संबंधी प्रश्न के उत्तर में बताया गया था कि जिले में हीरा खनिज की उपलब्धता पाई गई थी? (ख) प्रश्नांश (क) के आधार पर बताएं कि क्या दिनांक 02.12.2025 को म.प्र. शासन के श्री चेतन्य कुमार कश्यप, मंत्री जी अधिकृत खनिज ने विधानसभा में संशोधित उत्तर दिया था कि जिला टीकमगढ़ के सर्वे/पूर्वेक्षण रिपोर्ट के आधार पर हीरा खनिज की उपलब्धता नहीं पाई गई है, इसलिए टीकमगढ़ जिले में पुनः सर्वे/पूर्वेक्षण कार्य कराए जाने की योजना नहीं है? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के आधार पर सर्वे/पूर्वेक्षण कार्य जो टीकमगढ़ जिले में भारत सरकार की कंपनियों मेसर्स नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कार्पोरेशन द्वारा वर्ष 2018-19 से 2021-22 तक एवं मिनरल एक्सप्लोइटेशन कंसल्टेंसी लिमिटेड द्वारा 2022-23 से 2023-24 तक किया गया था? इन्होंने जो अलग-अलग, अपनी-अपनी रिपोर्ट विभाग को दी है, ऐसी उन रिपोर्टों की छायाप्रतियां प्रदाय करें। विभाग द्वारा पूर्व में हीरा की उपलब्धता जिले में है और अब नहीं? इसका दोषी कौन-कौन है? स्पष्ट बताएं। प्रश्न दिनांक तक क्या-क्या कार्यवाही की गई है? (घ) प्रश्नांश (क) के आधार पर बताएं कि इन एजेंसियों द्वारा कहां-कहां जिले में किस तहसील की किस ग्राम पंचायत की किस खसरा नंबर के कितने-कितने रकबे में यह सर्वे कहां-कहां किया गया है? सम्पूर्ण जानकारी देते हुए यह भी बताएं कि यह एजेंसियां क्या अभी भी जिले में कार्य कर रही हैं? इन पर निगरानी एवं जांच करने हेतु कौन-कौन अधिकारी एवं कर्मचारी उपरोक्त समयावधि में कब-कब गए हैं? नाम, पद एवं पता सहित जानकारी प्रदाय करें। क्या इन एजेंसियों को क्षेत्र से भगाया जावेगा तो कब तक? निश्चित समय-सीमा सहित जानकारी प्रदाय करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। प्रश्न क्रमांक 2856 के उत्तर को पोर्टल में दर्ज करते समय टंकण त्रुटि होने से विधानसभा में संशोधित उत्तर दिया गया था। (ग) प्रश्नांश अनुसार मेसर्स नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कार्पोरेशन एवं मिनरल्स एक्सप्लोरेशन एण्ड कंसल्टेंसी लिमिटेड की रिपोर्ट की प्रति क्रमश: पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-"अ" एवं "ब" अनुसार है। प्रस्तुत रिपोर्ट अनुसार जिला टीकमगढ़ में हीरा खनिज की उपलब्धता नहीं पाई गई है। शेष भाग का उत्तर प्रश्नांश (ख) में दिये गये उत्तर अनुसार है। (घ) प्रश्नांश अनुसार इन एजेंसियों द्वारा तहसील/ग्राम-पंचायत एवं खसरावार सर्वे कार्य नहीं किया जाता है, अपितु जिला-टीकमगढ़ के वृहद क्षेत्रों पर टोपोशीट नक्शे पर सर्वे कार्य किये गये है। उक्त एजेंसियां भारत सरकार के शासकीय उपक्रम होने से इनकी निगरानी विभाग द्वारा नहीं की जाती है। इन एजेंसियों द्वारा कार्य पूर्ण किया जा चुका है। शेष भाग का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
उप पंजीयक की शिकायतों के आधार पर हटाया जाना
[वाणिज्यिक कर]
171. ( क्र.
2735 ) श्री
हरिशंकर खटीक
: क्या
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक
कर महोदय यह
बताने की कृपा
करेंगे कि (क) क्या टीकमगढ़
जिले के जतारा
उप-पंजीयक को
शिकायतों के
आधार पर हटाए
जाने हेतु
प्रश्नकर्ता
द्वारा
विधानसभा में
तारांकित
प्रश्न क्र. 98 (क्र. 892) दिनांक
02.12.2025
किया गया था, जिसके
उत्तर (क) में
स्वीकार किया
था -'जी, हाँ? (ख) प्रश्नांश
(क) के आधार पर
बताया गया था
कि कुछ सर्विस
प्रोवाइडरों
द्वारा उप-पंजीयक
शबाना पखीम को
हटाने हेतु
हड़ताल की गई
थी? क्या
प्रश्न
दिनांक तक
इसके विरूद्ध
सर्विस
प्रोवाइडर एवं
जनता में आज
भी जबरदस्त
रोष व्याप्त
है? (ग)
प्रश्नांश
(क) एवं (ख) के आधार
पर निश्चित
समय-सीमा सहित
बताएं कि
उपरोक्त
उप-पंजीयक
द्वारा
किसानों
सर्विस
प्रोवाइडरों
के साथ अभी
अभद्र व्यवहार
भी किया जा
रहा है? क्या
इन्हें वहां
से हटाकर
विभागीय जांच
करवाई जावेगी
तो कब तक? निश्चित
समय-सीमा सहित
बताए।
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक
कर ( श्री
जगदीश देवड़ा
) : (क)
जी हाँ। (ख) जी
हाँ। प्रश्नाधीन
अवधि में
उप-पंजीयक
जतारा के
विरूद्ध सर्विस
प्रोवाइडर
एवं जनता में
रोष व्याप्त
होने संबधी
कोई शिकायत
प्राप्त
नहीं हुई है। (ग) उत्तरांश
(क) एवं (ख) के
परिप्रेक्ष्य
में प्रश्न
उपस्थित नहीं
होता है।
तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर की डी.पी.सी.
[सामान्य प्रशासन]
172. ( क्र. 2848 ) श्री आरिफ मसूद : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्य प्रदेश पदोन्नति नियम 2002 के अंतर्गत नियम 6 (4) के तहत जब दिनांक 19/02/2016 को तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर पद की डी.पी.सी. आयोजित की गई थी तब उसमें वर्ष 2014 एवं 2015 के रिक्त पदों की डी.पी.सी. आयोजित की गई लेकिन वर्ष 2016 के पदों की डी.पी.सी. आयोजित क्यों नहीं की गई? (ख) क्या दिनांक 19/02/2016 को आयोजित डी.पी.सी. में चालू वर्ष (2016) की डी.पी.सी. नहीं करना पदोन्नति नियम 2002 की कंडिका 6 (4) एवं सा.प्र.वि. द्वारा जारी परिपत्र क्र. 3-2/2013/1/3 दिनांक 03 जुलाई 2014, क्र. सी 3-2/2013/3/एक, दिनांक 24/04/2013, क्र. सी 3-2/2013/1/3 दिनांक 02/02/2013 एवं परिपत्र क्र. सी-3-7/2002/1/3 दिनांक 03/11/2009 का उल्लंघन नहीं है? यदि है तो इसके लिये जिम्मेदार कौन है? उनके नाम बताये जावें। (ग) क्या उक्त नियम एवं समय-समय पर जारी परिपत्रों के अनुसार प्रतिवर्ष पदोन्नति ना करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही के निर्देश है? यदि हाँ, तो अधिकरियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो कब तक की जायेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) म.प्र. लोक सेवा पदोन्नति नियम, 2002 के अंतर्गत विभाग द्वारा वर्ष 2014 एवं 2015 की विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक दिनांक 19.02.2016 को आयोजित की गयी, तत्पश्चात् पदोन्नति के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा डब्ल्यू.पी. 1942/2011 में दिनांक 30.04.2016 को पारित निर्णय एवं माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा एस.एल.पी. क्र.13954/2016 दिनांक 12.05.2016 में पारित आदेश के अनुक्रम में वर्ष 2016 की पदोन्नति की कार्यवाही बाधित है। (ख) एवं (ग) उत्तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न ही उद्भूत नहीं होता।
रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया जाना
[विधि एवं विधायी कार्य]
173. ( क्र. 2849 ) श्री आरिफ मसूद : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विधानसभा निर्वाचन हेतु रिटर्निंग ऑफिसर के पद पर सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट से अनिम्न श्रेणी के अधिकारी नियुक्त नहीं किये जा सकते है? (ख) यदि हाँ, तो वर्ष 2023 के म.प्र. विधानसभा निर्वाचन में कितनी विधानसभाओं में प्रभारी डिप्टी कलेक्टर जिनका मूलपद तहसीलदार है, के द्वारा रिटर्निंग आफिसर के रूप में कार्य किया गया था? इन विधानसभा क्षेत्रों तथा अधिकारियों के नाम बताये जायें। (ग) क्या मूल पद तहसीलदार का पद धारित करने वाले इन अधिकारियों के द्वारा रिटर्निंग अधिकारी के कर्तव्यों का निर्वहन किया जाना विधिसंगत है? यदि नहीं, तो इन मूल पद तहसीलदार द्वारा रिटर्निंग आफिसर के रूप में कराये गये निर्वाचन कार्यों को शून्य किया जावेगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
अनुसूचित जनजाति क्षेत्र अंतर्गत मूलभूत सुविधाएं
[गृह]
174. ( क्र. 2923 ) श्री नरेन्द्र प्रजापति [इंजीनियर] : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा मनगवां 73 अंतर्गत आने वाले थाना मनगवां, गढ़, नईगढ़ी में अनुसूचित जाति से संबंधित अपराध के वर्ष 2024-2025 से अब तक कितने प्रकरण लंबित हैं? लंबित प्रकरण कब तक में निराकृत किये जायेगें? विवरण सहित जानकारी दी जाये। (ख) विधानसभा मनगवां 73 अंतर्गत आने वाले समस्त शासकीय विभागों में अनुसूचित जाति के वर्तमान में रिक्त पद (सीधी भर्ती एवं बैकलॉग) की विवरण सहित जानकारी दी जाये एवं इन रिक्त पदों पर भरने हेतु सरकारी विज्ञापन कब तक में प्रकाशित कर पूर्णरूपेण भर्ती प्रक्रिया सम्पन्न की जायेगी? (ग) विधानसभा मनगवां 73 अंतर्गत अनुसूचित जाति वर्ग बाहुल्य की बस्तियों में वर्तमान में नाली निर्माण, सड़क निर्माण, पेयजल की क्या व्यवस्था है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
एम.डी. ड्रग के खिलाफ कार्यवाही
[गृह]
175. ( क्र. 2984 ) डॉ. हिरालाल अलावा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 01/01/2023 से प्रश्न दिनांक तक प्रदेश के किन-किन जिलों में किस-किस के यहां कितनी-कितनी एमडी ड्रग पकड़ी गई? उसकी मात्रा व कीमत सहित बतावें। जिन जिलों में एमडी ड्रग के खिलाफ जो-जो कार्यवाही की, उनमें जिस-जिस आरोपियों को पकड़ा, उसकी समस्त जानकारी नाम, पता सहित बतावें। (ख) प्रश्नांश (क) के आरोपी किस दल, संस्था, विभाग से जुड़े हैं? इनमें से प्रत्येक पर पूर्व से कितने अपराध दर्ज हैं? प्रश्न दिनांक तक उक्त कार्यवाही में पकड़े गए आरोपियों में से किन-किन के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है? किस-किस का चालान लंबित है? किस-किस व कितने आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, नाम,पता सहित बतावें। (ग) प्रश्नांश (क) के आरोपियों पर क्या किसी अन्य राज्यों में भी कार्यवाही हुई है, प्रति सहित बतावें? जिन जिलों में एमडी ड्रग के खिलाफ कार्यवाही की, उसे कितने लोगों को बेचा गया? जिन लोगों को बेचा गया, उनके नाम, पते क्या है? यदि पुलिस एमडी ड्रग खरीदने वालों तक नहीं पहुंची तो इसकी वजह क्या थी? जिन जिलों में एमडी ड्रग पकड़ी गई, वह किससे खरीदी गई थी? बेचने वालों के नाम-पते क्या है? यदि पुलिस बेचने वालों तक नहीं पहुंची तो क्यों, इसके क्या कारण थे? जिन जिलों में एमडी ड्रग के खिलाफ कार्यवाही की, उनमें से कितने आरोपियों की सीडीआर निकालकर उसे जांच में लिया गया? यदि नहीं, लिया गया तो कारण बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
अपराधिक प्रकरणों की स्थिति
[गृह]
176. ( क्र. 3048 ) श्री नरेन्द्र प्रजापति [इंजीनियर] : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा मनगवां 73 अंतर्गत आने वाले थाना मनगवां, गढ़, नईगढ़ी में जनजाति से संबंधित अपराध के वर्ष 2024-2025 से अब तक कितने प्रकरण लंबित हैं? लंबित प्रकरण कब तक में निराकृत किये जायेगें? विवरण सहित जानकारी दी जाये। (ख) विधानसभा मनगवां 73 अंतर्गत आने वाले समस्त शासकीय विभागों में जनजाति के रिक्त पद (सीधी भर्ती एवं बैकलॉग) की विवरण सहित जानकारी दी जाये एवं इन रिक्त पदों पर भरने की समय-सीमा कब तक है? (ग) विधानसभा मनगवां 73 अंतर्गत अनुसचित जनजाति वर्ग बाहुल्य की बस्तियों में नाली निर्माण, सड़क निर्माण, पेयजल की क्या व्यवस्था है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।
औद्योगिक क्षेत्र नागझिरी, उज्जैन से केमिकल प्रदूषण
[पर्यावरण]
177. ( क्र. 3182 ) श्री महेश परमार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या दिनांक 08 जुलाई 2023 को रात के समय नागझिरी औद्योगिक क्षेत्र स्थित ओमकार केमिकल इकाई से केमिकल युक्त, बदबूदार एवं अम्लीय अपशिष्ट जल के नाले में प्रवाह किया गया, जिससे आस-पास के 50 से अधिक परिवारों के स्वास्थ्य, पेयजल स्रोत एवं जीवन स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा? (ख) क्या स्थानीय रहवासियों द्वारा उक्त प्रदूषण के संबंध में पूर्व में जिला प्रशासन एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को शिकायतें दी गईं? जांच एडीएम स्तर पर सौंपी गई, किंतु प्रश्न दिनांक तक प्रभावी कार्यवाही अथवा राहत नहीं मिली? यदि हाँ, तो इसके कारण एवं उत्तरदायी अधिकारियों के नाम बताएं। (ग) क्या केमिकल प्रदूषण से प्रभावित परिवारों में कमजोर, गरीब एवं श्रमिक वर्ग शामिल है? जिनके संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन, स्वास्थ्य एवं स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार प्रभावित हुए हैं? (घ) क्या विभाग ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर सामाजिक क्षति, दिव्यांगता, स्वास्थ्य हानि एवं पुनर्वास का आंकलन करेगा? यदि नहीं, तो विभागीय दायित्व के तहत यह कार्य क्यों नहीं किया गया? स्पष्ट करें। (ड.) क्या नागझिरी क्षेत्र के प्रभावित नागरिकों को न्याय, स्वास्थ्य सुरक्षा एवं सामाजिक संरक्षण कब तक सुनिश्चित किया जाएगा? समय-सीमा बताएं। (च) श्रमिकों का दिव्यांग पंजीयन (H.I.) दिनांक 03.11.2023 को हो चुका है, इसके बावजूद न तो क्षतिपूर्ति का भुगतान किया गया और न ही वैकल्पिक आजीविका सुनिश्चित की गई? क्यों, स्पष्ट करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) एवं (ख) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) से (च) उत्तरांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
परीक्षा केंद्रों की जानकारी
[सामान्य प्रशासन]
178. ( क्र. 3363 ) श्री पंकज उपाध्याय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विगत 3 वर्षों में कर्मचारी चयन मंडल द्वारा कौन-कौन सी भर्ती परीक्षा एवं प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई तथा मध्यप्रदेश के किन-किन जिलों में कितने परीक्षा केन्द्र बनाए गए? परीक्षावार जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार परीक्षाओं में कुल कितने आवेदन प्राप्त हुए तथा जिला मुरैना, ग्वालियर, भिंड, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर एवं दतिया के कुल कितने-कितने आवेदक थे तथा उपरोक्त जिलों के आवेदक तथा कुल आवेदकों की संख्या बतावें? (ग) प्रश्नांश (क) अनुसार परीक्षा केंद्रों की कुल क्षमता क्या-क्या है? जिले एवं परीक्षा केन्द्र अनुसार जानकारी उपलब्ध कराएं? (घ) आवेदकों को परीक्षा केन्द्र आवंटित किए जाने हेतु क्या प्रक्रिया एवं प्रावधान है? प्रश्नांश (ख) में उल्लेखित ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों के कितने आवेदकों को ग्वालियर से बाहर के परीक्षा केन्द्र आवंटित किए गए? (ड.) क्या मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन आयोग द्वारा चंबल ग्वालियर संभाग के छात्रों को दुर्भावनापूर्ण तरीके से गृह जिले से सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा केन्द्र आवंटित किए जाते हैं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) से (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट (पेनड्राइव) अनुसार है। (घ) अभ्यर्थियों की संख्या, उपलब्ध सीटों की संख्या एवं परीक्षा की शुचिता एवं सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए केन्द्र निर्धारित किए जाते हैं। परीक्षा केन्द्रों का निर्धारण मण्डल की मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करते हुए स्वचालित सॉफ्टवेयर के माध्यम से मानवीय हस्ताक्षेप किए बिना, प्राथमिकता एवं रेंडमाईजेशन प्रक्रिया अनुसार परीक्षा शहर एवं केन्द्रों का आवंटन किया जाता है। उत्तरांश ‘’ख’’ में ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों के आवेदकों की संख्या की जानकारी समाहित है। इनमें से उत्तरांश ‘’ग’’ की जानकारी में उल्लेखित ग्वालियर शहर के परीक्षा केन्द्रों की क्षमता अनुसार, उत्तरांश ‘’ख’’ में उल्लेखित जिलों के आवेदकों को परीक्षा शहर ग्वालियर में आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त शेष बचे आवेदकों को ग्वालियर के अतिरिक्त उनकी प्राथमिकता अनुसार रैंडमली कम्प्यूटरीकृत प्रक्रिया अनुसार परीक्षा केन्द्र आवंटित किए गए हैं। (ड.) उत्तरांश '’घ'’ के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
जंगली जानवरों से हुए फसलों को नुकसान
[वन]
179. ( क्र. 3418 ) श्री चन्दरसिंह सिसौदिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) गरोठ विधानसभा क्षेत्र में जंगली सुअर, घोड़ारोज़ से किसानों की फसलों को हो रहे नुकसान से बचाव के लिए क्या क्या प्रयास किए जा रहे हैं (ख) गरोठ विधानसभा अंतर्गत कितने किसान उक्त जानवरों के प्रकोप से प्रभावित है? फसलों कों उक्त जानवरों से किस-किस फसल को अधिक नुकसान हुआ है?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) : (क) जंगली सुअर,घोड़ारोज द्वारा किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने पर निर्धारित आर्थिक सहायता राशि का भुगतान यथा संशोधित राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड छ: क्रमांक-4 के प्रावधानों के तहत किया जाता है, जो मध्यप्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2010 सेवा क्रमांक 4.6 के अनुसार यह सेवा राजस्व विभाग को सौंपी गई है। किसानों की फसलों को नुकसान करने वाली घोड़ारोज, जंगली सुअर के आखेट की अनुमति जारी करने के लिए मध्यप्रदेश के समस्त अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अपने-अपने अधिकार क्षेत्र की सीमाओं के भीतर प्राधिकृत अधिकारी घोषित है। कृषकों द्वारा अपने स्तर पर तार फेंसिंग लगाकर फसल नुकसान के बचाव किये जाते हैं। (ख) गरोठ विधानसभा अंतर्गत वन्यजीवों के प्रकोप से प्रभावित किसानों की संख्या निरंक है।