मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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षोडश विधान सभा                                                                  नवम् सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2026 सत्र

 

शुक्रवार, दिनांक 27 फरवरी, 2026

 

(8 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1947)

 

 

[खण्ड- 9 ]                                                                                 [अंक- 10 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

सोमवार, दिनांक 27 फरवरी, 2026

 

(8 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1947)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.01 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-  अध्‍यक्ष महोदय, आज सदन की उपस्थित देखकर ऐसा लग रहा है कि होली का माहौल चालू हो गया है.

11.02 बजे     

बधाई उल्‍लेख

श्री बृजबिहारी पटैरिया, सदस्‍य को जन्‍मदिन की शुभकामनायें

          अध्‍यक्ष महोदय-  आज माननीय सदस्‍य श्री बृजबिहारी पटैरिया का जन्‍मदिन है, सदन की ओर से, उन्‍हें जन्‍मदिन की हार्दिक शुभकामनायें.

(मेजों की थपथपाहट)

 

 

11.03 बजे

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

विकास कार्य प्रारंभ किया जाना

[नगरीय विकास एवं आवास]

1. ( *क्र. 3033 ) श्रीमती रीती पाठक : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सीधी विधानसभा क्षेत्र में पुराने बस स्टैंड को गिराकर नया शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए 7 करोड़ की राशि राज्य सरकार द्वारा लगभग 2 वर्ष पूर्व स्वीकृत की गई थी, किन्तु आज दिनाँक तक सीधी नगरपालिका द्वारा न तो निविदा प्रक्रिया की गई है, न ही कार्य प्रारंभ हो सका है? इसका कारण क्या है एवं यह कार्य कब तक प्रारंभ कर दिया जायेगा? (ख) इस सदन के माध्यम से पूर्व में भी नगरपालिका क्षेत्र अंतर्गत अवैध कॉलोनियों एवं अवैध प्लॉटिंग के संबंध में की गई कार्यवाही की जानकारी मांगी गई थी? सीधी नगरपालिका क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों में बिना रेरा रजिस्ट्रेशन के कितनी अवैध कॉलोनियां बनाई गईं हैं एवं इस संबंध में नगरपालिका सीधी द्वारा क्या कदम उठाये गये हैं? (ग) सीधी नगरपालिका क्षेत्र के लिए सीवर लाइन निर्माण परियोजना की मांग लगातार की जा रही है, इस सीवर लाइन निर्माण परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति कब तक जारी कर दी जायेगी?

        नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) जी हाँ। जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। (ख) सीधी नगरपालिका में 05 अवैध कॉलोनियां चिन्हांकित हैं। कार्यवाही की जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। (ग) सीवर लाइन परियोजना स्वीकृत नहीं है। शासन स्तर पर कोई प्रस्ताव इस संबंध में विचाराधीन नहीं है।

परिशिष्ट - "एक"

 

          श्रीमती रीती पाठक-  अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद. मेरा प्रश्‍न क्रमांक 3033 है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर सदन के पटल पर प्रस्‍तुत है.

          श्रीमती रीती पाठक-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, आपके माध्‍यम से मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि यह विषय सीधी जिले की, सीधी विधान सभा का है. जहां पर नगर पालिका का यह विषय विगत 2 वर्षों से लंबित है. मेरी विधान सभा में पुराने बस स्‍टैण्‍ड को गिराकर, नया शॉपिंग कॉम्‍प्‍लेक्‍स बनाने के लिए रुपये 7 करोड़ की राशि, मेरे द्वारा मुख्‍यमंत्री जी से आग्रह करने पर, राज्‍य सरकार द्वारा, लगभग 2 वर्ष पूर्व स्‍वीकृत की गई थी, किंतु आज दिनांक तक सीधी नगर पालिका द्वारा, न तो इसमें निविदा की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है, और न ही कोई कार्य इसमें हुआ है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं, केवल इतना पूछना चाहती हूं कि इसका कारण क्‍या है ? और यह कार्य कब तक प्रारंभ कर दिया जायेगा, क्‍योंकि इस विषय के संबंध में मैंने लगातार संपर्क बनाकर, इसमें प्रश्‍न उठाती रही हूं और पूछने की कोशिश भी की है तो इसमें कभी कोई कारण, कभी कोई ओर कारण दिया जाता है, इसलिए मुझे यह प्रश्‍न आज यहां लेकर आना पड़ा.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  अध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा सीधी है लेकिन वहां की विधायक तेज-तर्रार हैं. (हंसी)

          अध्‍यक्ष महोदय-  सीधी का रास्‍ता भी टेढ़ा-मेढ़ा है, पहले कहा जाता था कि सीधी जाना है तो टेढ़े-मेढ़े रास्‍ते से जाना पड़ेगा. (हंसी)

          श्रीमती रीती पाठक-  अध्‍यक्ष महोदय, अब तो वह रास्‍ता भी सीधा हो गया है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  अध्‍यक्ष महोदय, आपकी सरकार आने के बाद अच्‍छे-अच्‍छे सीधे हो गए हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो विषय उठाया है, बिल्‍कुल सही है. जैसे ही यह प्रश्‍न आया, वैसे ही मैंने एक वरिष्‍ठ अधिकारी को जिम्‍मेदारी सौंपी कि क्‍या कारण है ? क्‍योंकि उनके पास पैसा है, उनका भवन है और उसके बाद क्‍यों काम नहीं हुआ, उन्‍होंने कुछ बहानेबाजी की थी, परंतु हमने उस बहानेबाजी को माना नहीं. हम यह मानते हैं कि इसमें हमारे विभाग की नगर पालिका की गलती है और हमने सुनिश्चित किया है कि जो लोग जिम्‍मेदार हैं, उनको कारण बताओ नोटिस दीजिये. और इसलिए तत्‍कालीन सीएमओ को कारण बताओ नोटिस दिया है, हरिशंकर मिश्रा ई.ई. हैं उनको कारण बताओ नोटिस दिया है, उपयंत्री हैं पीके तिवारी उनको भी कारण बताओ नोटिस दिया है. अध्‍यक्ष महोदय, जो आर्किटेक्‍ट थे, कंसलटेंट थे जिन्‍होंने जिम्‍मेदारी ली थी कि उन्‍हें समय पर हमें बनाकर देना था उनको उन्‍हें भी हमने ब्‍लैक लिस्‍ट किया है और यह सुनिश्चित करेंगे कि यह कार्य जल्‍दी हो. पहले इसकी लागत 7 करोड़ रुपए थी. अब यह लगभग 12 करोड़ रुपए की लागत में बनने वाला है. परंतु वह इतनी अच्‍छी लोकेशन है कि यह बनने के बाद 12 करोड़ रुपए भी एकत्रित हो जाएंगे और नगर पालिका की आय भी बढ़ जाएगी.

          श्रीमती रीती पाठक-- माननीय मंत्री महोदय, सबसे पहले तो आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद करती हूं क्‍योंकि मैंने आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी के माध्‍यम से इसमें 7 करोड़ रुपए की राशि तो स्‍वीकृत करवाई थी, लेकिन आपने इस राशि को 12 करोड़ रुपए की राशि कर दी तो मुझे लगता है कि अब जो इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर बनकर तैयार होगा वह बहुत ही अच्‍छा और बहुत ही विशाल होगा जो मुझे लगता है कि हमारे सीधी विधान सभा के लिए एक आदर्श के रूप में उस छोटे से विधान सभा क्षेत्र में स्‍थापित होगा. जिस तरह की आपकी कार्यशैली है, मुझे पूरा विश्‍वास था कि इसमें तुरंत एक्‍शन होगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से दूसरा प्रश्‍न भी रखना चाहती हूं कि यहां इस सदन में पूर्व में भी मैंने इस विषय को रखा हुआ था और अपने जिला प्रशासन में भी कई बार मैंने लिखकर दिया था कि इस विषय पर कार्यवाही हो. विषय है कि सीधी नगर पालिका क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों में बिना रेरा रजिस्‍ट्रेशन के कितनी अवैध कॉलोनियां बनाई गई हैं, क्‍योंकि मैं वहां की विधायक हूं, स्‍थानीय रूप से बहुत अच्‍छे से जानती हूं, लेकिन चीजें यहां पर ठीक क्‍यों नहीं हो पा रही हैं? व्‍यवस्थित नहीं हो पा रही हैं? इसलिए मुझे आपको माध्‍यम से सदन में इस पर प्रश्‍न करना पड़ा और इस संबंध में नगर पालिका सीधी द्वारा क्‍या कदम उठाये गये हैं. क्‍योंकि मैं लगातार पूछती रही हूं और इसी के साथ एक छोटा सा दूसरा प्रश्‍न जोड़ती हूं कि सीधी नगर पालिका क्षेत्र के लिए सीवर लाइन निर्माण परियोजना की मांग मैंने लगातार, बार-बार की है, क्‍योंकि हम कितना भी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर खड़ा कर दें, बना दें पर जब तक जमीनी तह ठीक नहीं है तब तक चीजें बहुत अच्‍छा रिजल्‍ट नहीं देती है. माननीय मंत्री जी यह बताने की कृपा करें कि इस सीवर लाइन निर्माण परियोजना की प्रशासकीय स्‍वीकृति कब तक होगी?  

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस नगर पालिका की जो जनसंख्‍या है वह एक लाख से कम है और इसलिए वहां पर सीवर लाइन की कोई योजना तो नहीं है परंतु अभी हम इनके आसपास जितने भी नाले हैं, उन नालों की टेपिंग का काम कर देंगे. अगर कोई गंदगी की कोई शिकायत हो तो, आप बता दीजिए. मैं उसको भी ठीक करा दूंगा. परंतु आगे आने वाले समय में एक लाख से कम आबादी वाले शहर की कोई योजना होगी तो उस योजना में हम सीधी को सम्मिलित कर लेंगे. आपके दो प्रश्‍न थे. एक आपने अवैध कॉलोनी को बारे में भी पूछा है. अवैध कॉलोनी में हमने कार्यवाही करने के निर्देश कलेक्‍टर को दिये हैं परंतु मैं इस सदन को अवगत कराना चाहता हूं कि अवैध कॉलोनी काटने वाले लोगों के खिलाफ हम एक कड़ा कानून ला रहे हैं. तीन माह के अंदर ही हम वह कानून बनाकर हम सदन में भी लाएंगे और अवैध कॉलोनी से निश्चित रूप से ऑर्गेनाईजेशन में बहुत परेशानी आ रही है और इसीलिए शहरों के अंदर अवैध कॉलोनी नहीं बने, नहीं बसे उसके लिए हम कड़ा कानून ला रहे हैं और अभी दो तीन माह के अंदर ही लाएंगे. निश्चित रूप से अवैध कॉलोनी को रोकने के लिए सरकार एक कड़ा कदम उठायेगी.

          श्रीमती रीती पाठक-- माननीय मंत्री महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          डॉ. सीतासरन शर्मा  -- अध्यक्ष महोदय, जो पहले से अवैध कॉलोनियां हैं उनमें निर्माण कार्य नहीं कर पा रहे हैं. इसके लिए विधायक निधि या सांसद निधि भी देते हैं तो आपके विभाग से अनुमति नहीं मिलती है. इसका भी निराकरण हो जाए. स्पष्ट निर्देश हो जाएं कि जो कॉलोनियां बन चुकी हैं उनमें मूलभूत सुविधाएं मिल जाएं, नागरिक अपने ही हैं, वोटर हैं, रहते हैं और टैक्स देते हैं. आपसे अनुरोध है कि इस विषय में स्पष्ट निर्देश दे दें. ताकि जो पूर्व में अवैध कॉलोनियां हैं उनमें निर्माण कार्यों में नगरीय प्रशासन विभाग अनुमति दे.

          श्रीमती रीती पाठक -- अध्यक्ष महोदय, मुझे लगता है उनको वैधानिक रुप से परमिट करना चाहिए जिससे किसी की रहवासिता पर प्रश्न चिह्न न हो.

          अध्यक्ष महोदय -- दोनों काम एक साथ नहीं होंगे. (हंसी)

          कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है कि अभी अवैध कॉलोनियों में निर्माण की अनुमति नहीं है और मैं यह नहीं मानता हूँ कि वहां निर्माण नहीं हो रहे हैं. हमारी बिना अनुमति के भी बहुत सारे निर्माण हो रहे हैं. अवैध कॉलोनी को वैध करने की प्रक्रिया पर हम काम कर रहे हैं जो वैध हो सकती हैं उनको वैध भी करेंगे. जो वैध नहीं हो सकती हैं उनके बारे में भी हम विचार करेंगे.

 

राजघाट पेयजल परियोजनांतर्गत पेयजल आपूर्ति एवं जल शुद्धीकरण

[नगरीय विकास एवं आवास]

2. ( *क्र. 1640 ) श्री शैलेन्द्र कुमार जैन : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर की राजघाट पेयजल योजनांतर्गत पेयजल आपूर्ति हेतु टाटा कंपनी द्वारा D.P.R. तैयार की गई थी, इसमें कितने कि.मी. की नई पाइप-लाइन बिछाई जानी थी तथा कितने कि.मी. की नई पाइप-लाइन बिछाई जा चुकी है एवं कितनी शेष है? प्रोजेक्ट में कितने कि.मी. की पुरानी पाइप-लाइन का उपयोग किया जा रहा है? (ख) उपयोग की जा रही पुरानी    पाइप-लाइन लीकेज एवं जर्जर अवस्था में हैं, जिस कारण घरों तक दूषित पेयजल पहुँच रहा है, इससे इन्दौर जैसी दुःखद घटना घटित होने की संभावनायें बनी हुई हैं? क्या शासन द्वारा इन पुरानी पाइप लाइनों को बदला जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? (ग) इन्दौर में दूषित पेयजल से हुई घटना के पश्चात प्रदेश के निकायों द्वारा जल शुद्धीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है? सागर में पेयजल आपूर्ति में नगर निगम द्वारा जल शुद्धीकरण हेतु क्या-क्या व्यवस्थायें की जा रही है? क्या जल शुद्धीकरण हेतु अधिकृत केमिस्ट की नियुक्ति की गई है? (घ) नगर निगम सागर में पेयजल योजनांतर्गत टाटा कंपनी द्वारा कार्य किया गया है, किन्तु शहर के कई क्षेत्रों में अभी भी पानी सप्लाई का प्रेशर कम है, जिस कारण अनेक वार्डों में निर्धारित मात्रा में पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है? क्या शासन द्वारा इस समस्या के समाधान हेतु कोई कार्ययोजना बनाई गई है?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) जी नहीं, सागर की राजघाट पेयजल योजना अंतर्गत पेयजल आपूर्ति हेतु डी.पी.आर. नगर पालिक निगम सागर द्वारा कंसल्टेंट के माध्यम से तैयार करायी गई थी। विस्तृत कार्य योजना में विभिन्न व्यास की 260.00 कि.मी. पाइप-लाइन बिछायी जानी थी तथा निविदा स्वीकृति उपरांत संविदाकार मेसर्स टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के सर्वे अनुसार आकलित कुल 264.284 कि.मी. (सी.डब्लू.आर. व डिस्ट्रीब्‍यूशन) पाइप-लाइन बिछाई जानी थी, परन्तु समय एवं मांग अनुसार कुल 395.615 कि.मी. नवीन पाइप-लाइन बिछायी जा चुकी है तथा पैकेज-6B के अंतर्गत सागर नगर निगम क्षेत्रान्तर्गत  पाइप-लाइन बिछाने का कार्य शेष नहीं है। प्रोजेक्ट में 46.961 कि.मी. पुरानी पाइप-लाइन का उपयोग जलप्रदाय के लिये किया जा रहा है। (ख) योजना अंतर्गत जलप्रदाय में उपयोग की जा रही अधिकांश पुरानी लाइनें जर्जर अवस्था में नहीं हैं व घरों में दूषित पेयजल न पहुंचे इस हेतु लीकेजों को चिन्हित किया जाकर निरंतर मरम्मत का कार्य कराया जा रहा है। नगर पालिक निगम सागर के क्षेत्र अंतर्गत इन्दौर जैसी घटना घटित होने की संभावना नगण्य है। जलप्रदाय में उपयोग की जाने वाली भगवानगंज क्षेत्र की पुरानी पाइप-लाइन को बदलने का कार्य प्रगति पर है, अतिशीघ्र ही जलप्रदाय प्रारंभ कर दिया जावेगा। (ग) सागर में पेयजल आपूर्ति हेतु नगर निगम सागर द्वारा राजघाट परियोजना की प्रयोगशाला में पेयजल परीक्षण की व्यवस्था है, जिसमें निर्धारित प्रक्रिया एवं मानकों अनुसार जलप्रदाय के पूर्व प्रतिदिन पेयजल का परीक्षण किया जा रहा है। पेयजल आपूर्ति में विभिन्न स्थानों को चिन्हांकित कर जलप्रदाय के दौरान जल की समुचित फिजिकल/केमिकल/बेक्टोरियोलॉजिकल जांच भी की जा रही है। जी हाँ, अनुबंध अनुसार संविदाकार द्वारा परियोजना में केमिस्ट की नियुक्ति की गई है। (घ) नगर निगम सागर में पेयजल योजना का संचालन एवं संधारण का कार्य संविदाकार मेसर्स टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। शहर के जलप्रदाय योजनांतर्गत क्षेत्रों में मानक प्रेशर से निर्धारित मात्रा में पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। नगर पालिक निगम में कम प्रेशर से जलापूर्ति की शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल निराकरण किया जाता है। सभी वार्डों में निर्धारित मात्रा में पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है।  जी नहीं।

 

          श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद. मेरा प्रश्न क्रमांक 1640 है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.

          श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जो विषय है यह मेरी विधान सभा क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था को लेकर है. इसमें जो 24/7 पेयजल प्रदाय करने की डीपीआर बनाई गई थी. इसमें 260 किलोमीटर लंबाई की पाइप लाइन विभिन्न डाया की डालनी थी. जब टाटा कंसल्टेंसी आई और टाटा ने इस काम को टेक-अप किया तो उनके सर्वे के हिसाब से 265 किलोमीटर का उन्होंने सर्वे किया और जब फायनली पाइप लाइन डाली गई तब वह पाइप लाइन 395 किलोमीटर लंबाई की डाली गई. फिर भी 46 किलोमीटर पुरानी पाइप लाइन का इस्तेमाल किया गया है. जिसके चलते रोजाना कहीं-न-कहीं शहर के किसी न किसी हिस्से में लीकेज की प्राब्लम, मरम्मत की प्राब्लम चल रही हैं. मेरे प्रश्न के ख के उत्तर में बताया गया है कि भगवानगंज में बड़ी पाइप लाइन डालने का कार्य चालू है क्योंकि वो पाइप लाइन बिलकुल जर्जर हो गई थी. कभी खुदा-ना-खास्ता यदि वो पानी लोगों के पीने में आ जाए तो बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती है. इन तमाम कठिनाइयों से बचने के लिए मैं आपके माध्मय से माननीय मंत्री महोदय से...

          अध्यक्ष महोदय -- इन तमाम कठिनाइयों से बचने के लिए प्रश्न करना जरुरी है. (हंसी)

          श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री महोदय यह जो 46 किलोमीटर शेष पानी की लाइन है और यदि कुछ और शेष निकलती है उसको बदलने के आदेश देने की मेरी आपसे प्रार्थना है. कृपया इस संबंध में आदेश प्रदान करें.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आप समझ गए होंगे कि माननीय विधायक कितने प्रभावशाली हैं. योजना बनी थी 260 किलोमीटर पाइप लाइन की, यह इनका प्रश्न कह रहा है, मैं नहीं कह रहा हूँ. 395 किलोमीटर पाइप लाइन इन्होंने डलवा ली है. 260 किलोमीटर पाइप लाइन का प्रस्ताव था इन्होंने अपने प्रभाव से 395 किलोमीटर डलवा ली उसके बाद 46 किलोमीटर की और बात कर रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, ये क्या बच्चे की जान लेंगे (हंसी).

          श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जान न चली जाए इसलिए यह आपसे निवेदन है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, योजना भी बड़ी है. लगभग 35-40 करोड़ रुपए की है. अगर माननीय सदस्य को ऐसा लगता है कि यह पाइप लाइन डालना बहुत ही ज्यादा जरुरी है तो 50 प्रतिशत मेरा विभाग दे देगा और 50 प्रतिशत का भार इनकी नगर निगम उठा ले तो पाइप लाइन डल जाएगी.

          श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सागर नगर पालिक निगम कि आर्थिक वित्तीय स्थिति ऐसी नहीं है मंत्री जी जानते हैं. लोगों को पेनालाइज क्यों होना पड़े. मेरा आपसे निवेदन है.

          अध्यक्ष महोदय -- जब डिमांड पर चर्चा हो रही थी तो उन्होंने आह्वान किया था कि सभी संस्थाएं आत्म-निर्भर बनें.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, यह कहकर पीछे हट जाना यह तो ठीक नहीं है. इनको नगर निगम को सशक्‍त करना चाहिए, मजबूत करना चाहिए. 260 किलोमीटर की पाईपलाइन थी और इन्‍होंने अपने प्रभाव से 395 किलोमीटर डलवा ली और अब फिर अपने प्रभाव से 46 किलोमीटर फोकट में डलवाना चाहते हैं अपना कुछ खर्च नहीं करना चाहते हैं. वहां सांसद निधि है, विधायक निधि है और थोड़ा सा नगर निगम भी मिलाए. मैं तो कह रहा हूं कि 50 प्रतिशत मैं देने को तैयार हूं. 40 करोड़ की होगी तो 20 करोड़ मैं दे दूंगा, 45 करोड़ की होगी तो 22.50 करोड़ मैं दे दूंगा, 50 करोड़ की होगी तो 25 करोड़ मैं दे दूंगा. 25 करोड़ तो इनकी नगर निगम मिला ले.

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है शैलेन्‍द्र जी, अब धन्‍यवाद दे दीजिए.

श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन -- अध्‍यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद लेकिन वह परियोजना पूर्ण नहीं हो पाएगी. इसी से संबंधित एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है. जब यह पानी की लाईन डाली गई तो लगभग पूरा शहर खोद दिया गया और आप भी सागर शहर से वाकिफ हैं अधिकांश सड़कें 10 फिट की, 12 फिट की हैं और वहां पर जब पानी की लाईन के लिए खुदाई हुई तो उनका जो री-स्‍टोरेशन है वह ठीक ढंग से नहीं हो पाया तो वस्‍तुस्थिति यह है कि सड़क हमने री-स्‍टोर भी की है और अंततोगत्‍वा नई सड़क बनानी पड़ी. मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन करूंगा कि इस संबंध में माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय ने भी संज्ञान लिया है, उन्‍होंने भी पब्लिकली घोषणा की थी कि टाटा कंपनी से वह राशि वसूल की जाकर सागर में लगभग 25 करोड़ रुपये की सड़कों का निर्माण किया जाएगा. मंत्री महोदय से निवेदन है कि मेरी इस याचिका पर ध्‍यान दें.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, पहली बात तो इस प्रश्‍न से यह उद्भूत नहीं होता परंतु प्रभावशाली और वजनदार विधायक हैं इसलिए मैं जवाब दे देता हूं. जब भी माननीय मुख्‍यमंत्री जी कोई घोषणा करते हैं तो हमारे विभाग के पास उसकी जानकारी आती है. हमारे पास कोई जानकारी नहीं आई है. मैं पता कर लूंगा यदि मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा होगी तो हम निश्चित रूप से मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा पर काम करेंगे.

श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन -- अध्‍यक्ष महोदय, एक लास्‍ट पॉइंट था.

अध्‍यक्ष महोदय -- बस-बस तीन हो गए. प्रदीप जी को भी बोलना है क्‍योंकि आपकी विधान सभा में जो पानी होगा वह प्रदीप जी की विधान सभा के लोग भी पीते हैं.

श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन -- अध्‍यक्ष महोदय, दो हुए हैं. हमारी उनकी विधान सभा का एक जैसा है.

इंजी. प्रदीप लारिया -- अध्‍यक्ष महोदय, छोटे भाई और बड़े भाई जैसा है.

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन -- अध्‍यक्ष महोदय, जो पानी की लाईन डली है वह सीवर लाईन के समानांतर डली है तो उन दोनों के बीच में कभी मिलाप होता रहता है जिससे यह समस्‍या पैदा होती है. क्‍या क्रमबद्ध तरीके से भविष्‍य में ऐसी व्‍यवस्‍था करेंगे कि पानी की लाईन और सीवर की लाईन दोनों का मिलाप न होने पाए. वह सैपरेट-सैपरेट डाली जाएं यह मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन है और मंत्री महोदय को आपके माध्‍यम से बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्रदीप लारिया जी, एक प्रश्‍न करेंगे.

          इंजी. प्रदीप लारिया -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका धन्‍यवाद करता हूं क्‍योंकि यह बहुत महत्‍वपूर्ण जॉइंट स्‍कीम सागर नगर निगम और मकरोनिया नगर पालिका की है. इसमें मैं केवल माननीय मंत्री जी के ध्‍यान में लाना चाहता हूं मेरे एक ही प्रश्‍न में मैं दो तीन चीजों की बात कर लेता हूं. तो मकरोनिया में 123 किलोमीटर की पाईपलाइन प्रस्‍तावित थी उसके विरुद्ध 193 किलोमीटर डल गई है. लगभग 70 किलोमीटर पाईपलाइन ज्‍यादा डली है. मेरा आग्रह था चूंकि छोटे और बड़े भाई का मामला है लेकिन जब पानी का संकट गर्मी के समय आता है तो मकरोनिया छोटे भाई से उसकी कटौती कर ली जाती है. मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि जब हम इसके पार्टनर हैं, जॉइंट स्‍कीम है तो जो मकरोनिया की पानी की आवश्‍यकता है लगभग 13 एमएलडी, एक तो 24x7 की बात हुई थी अल्‍टरनेट पानी की व्‍यवस्‍था हो रही है, उसमें भी 8 से 9 एमएलडी पानी मिल रहा है तो मेरा यह कहना है कि हमें 13 एमएलडी पानी मिले. जब स्‍कीम बनी थी तो मेरा यह कहना था कि       रॉ-वाटर से लेकर सप्‍लाई वाटर तक यह नगर निगम को वाटर सप्‍लाई खर्च करने में मुझे लगता है कि 8-9 रुपये पर 1,000 लीटर आ रहा है. लेकिन वह मकरोनिया नगर पालिका से  15 रूपये , एक हजार लीटर वसूल कर रहे हैं. तो मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि यह विसंगति क्यों है.  जब ज्वाईंट पार्टनर हैं तो जो पैसा का खर्च आ रहा है वही मकरोनिया से वसूला जाये और दूसरा इसमें 30 किलोमीटर पाइप लाईन और आवश्यकता है मकरोनिया को और मैं केवल इतना माननीय मंत्री जी के ध्यान मे लाना चाहता हूं यह एमपीयूडीसी ने इसमें बहुत गड़बड़ी की . इन्होंने पाइप लाइन कई अवैध कालोनियों में डाल दी और कई ऐसी जगह लाइन डाल दी जिसकी फिजिकल इन्क्वायरी होना चाहिये. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि इसकी जांच के लिये एक टीम यहां से भेजकर के गंभीरता से इसकी जांच हो जाये क्योंकि इसमें एक भी वाल्व नहीं है, 5 वार्ड में पानी नहीं पहुंच रहा है. तो कुल मिलाकर के यह विसंगति है, इसकी जांच कर लेगे तो ठीक रहेगा.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, बड़े मियां और छोटे मियां की बात है. और बड़े मियां कौन हैं, छोटे मियां कौन हैं मुझे पता नहीं है.

          अध्यक्ष महोदय-टॉस कर लेंगे.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, एक भाई दूसरे भाई पर आरोप लगा रहा है कि यह मुझसे ज्यादा पैसा ले रहे हैं, अध्यक्ष जी अब आप बताईये कि इसमें मेरी क्या भूमिका है. हालांकि यह प्रश्न इससे उद्भुत तो नहीं होता पर यदि भाई हमारे कह रहे हैं कि पूरी इसकी जांच करा लें तो मैं किसी अधिकारी को आपके साथ में भेज दूंगा, बैठकर के बात कर लेंगे कोई अगर इसमे सरकार की तरफ से सहयोग की आवश्यकता होगी तो हम अवश्य करेंगे.

          इंजीनियर प्रदीप लारिया-- अध्यक्ष जी मेरा एक निवेदन है. केवल इन्क्वायरी कर लें.

          अध्यक्ष महोदय- प्लीज लारिया जी, मर्यादा का पालन करना चाहिये हम सब लोगों को भाई.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह पेयजल हेतु नगर पालिका की योजनायें जो स्वीकृत हुई थीं, वैसी ही स्थिति जावद में नगर पंचायतों की हैं, तीन साल में कम से कम 6 बार समय का भोपाल से एक्सटेंशन दे दिया जाता है और तीन साल से वह दूसरी योजना में भी कवर नहीं हो रहे है, शहर की पांचों नगर पंचायतें, एक वॉटर ट्रीटमेंट प्लान्ट भी नहीं चल रहा है. अध्यक्ष महोदय, चूंकि यह सीधे उस प्रश्न से उद्भुत तो नहीं हो रहा है लेकिन चूंकि मंत्री जी बहुत चीजों को संज्ञान में लेकर के निर्देश दे देते हैं, इसलिये मैंने बीच में उनसे आग्रह किया कि जावद विधानसभा की चारों नगर पंचायतों में जो पेयजल की योजना टाटा के पास में है एक और किसी कंपनी के पास में है सबमें स्थिति वैसी ही है कृपया निराकरण करें और नीमच जिले के जावद विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सिंगोली का वॉटर ट्रीटमेंट प्लान्ट 6 साल से लग गया है, पेमेंट हो गया है, चालू एक दिन भी नहीं हुआ, मेरा इतना ही आपसे आग्रह है.

          अध्यक्ष महोदय- माननीय सदस्य ने खुद स्वीकार किया है कि सप्लीमेंट्री उद्भुत नहीं हो रहा है ,लेकिन यह सब सदस्य आपकी दरियादिली के कायल हैं.तो उसको कारण सप्लीमेंट्री आ रहे हैं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत-- असली बड़े मियां तो आप हो कैलाश जी. यह समस्या सागर की और सारे जिलों के अंदर आ रही है. वॉटर लाइन और ड्रेनेज की लाइन साथ साथ चल रही है. इस समस्या मैं आपको दोष दिया जाये यह भी ठीक हीं है. मेरे ख्याल से इसमे आप अगर यह दिखवा लें कि एक जैसी समस्या इंदौर से लेकर के सागर और जावद की  क्यों  हैं, क्यों इंजीनियर को यह पता नहीं है कि वॉटर की ओर ड्रेनेज की लाइन साथ साथ न चले. या तो यह अधिकांश इंजीनियर जिनकी पोस्टिंग हुई है, यह व्यापम से निकले हुये हैं, इनको पता ही नहीं है. क्योंकि सभी जगह इंदौर हो या सागर हो सभी जगह यह समस्या है.

          अध्यक्ष जी यह जिस टाइप के इंजीनियर की आपने पोस्टिंग की है या तो यह क्वालीफाइड नहीं हैं या इनको टेक्निकल ज्ञान नहीं है. पूरे ही प्रदेश में एक जैसी समस्या कैसे हो सकती है. अब बार बार मंत्री जी को सुनना पड़ता है, सरकार को सुनना पड़ता है और यह इंजीनियर अपनी तनख्वाह भी ले रहे हैं , बिना पढ़े लिखे पता नहीं कहां से डिग्री ले आये, कौन से कालेज से डिग्री ले ली और आज भर्ती हो गये. तो इनकी जांच कराई जाये.

          अध्यक्ष महोदय- मंत्री जी, आपके इंजीनियरों की कोई ट्रेनिंग कैंप करें, उसमें पूर्व उप महापौर जी का भी जरूर मार्गदर्शन लें.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-- जी अध्यक्ष जी. मैं एक सत्र इनका भी रखूंगा. हमारे विभाग के सारे इंजीनियर्स की एक वर्कशाप करूंगा जिसमें बौद्धिक के लिये मैं इनको बुलाऊंगा. (हंसी) माननीय अध्यक्ष महोदय, ओमप्रकाश जी ने जो बात कही है, मैं किसी इंजीनियर को भेजकर के दिखवा लूंगा कि विलंब होने का क्या कारण है, हालांकि अध्यक्ष जी आपने ही कहा कि यह इस प्रश्न से उद्भुत नहीं होता है, पर ठीक है यदि समस्या है तो उसका निराकरण होना चाहिये और निराकरण करना हमारी जवाबदारी है, तो यह प्रश्न उद्भुत हुआ है तो हम इसका निराकरण करेंगे.

बिछुआ नगर में हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता

[नगरीय विकास एवं आवास]

3. ( *क्र. 3037 ) चौधरी सुजीत मेर सिंह : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बिछुआ नगर परिषद में वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में किन विकास हेतु किन-किन योजनाओं में कितनी-कितनी राशि शासन से प्राप्त हुई? (ख) बिछुआ नगर परिषद में उपरोक्त वर्षों में सड़क एवं नाली निर्माण की जानकारी वार्डवाइस देवें? (ग) क्या बिछुआ नगर परिषद क्षेत्र में नई बनी सड़क/नाली कुछ ही महीनों में टूट-फूट गई? वार्डवाइस जानकारी देवें।                                    (घ) इन सड़‌कों एवं नालियों का वॉरंटी/डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि क्या है? D.L.P. के दौरान मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी है? (ड.) क्या सड़‌कें/नाली टूट-फूट गई हैं, तो उनका मरम्मत कार्य                  समय-सीमा में कराया जायेगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) वर्तमान में नहीं है। (घ) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। D.L.P. के दौरान मरम्‍मत की जिम्‍मेदारी संबंधित संविदाकार की है। (ड.) वर्तमान में जी नहीं। डिफेक्‍ट लाइबिलिटी पीरियड में मरम्‍मत कार्य संबंधित संविदाकार से कराया जाता है।

            चौधरी सुजीत मेर सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 3037 है.

            श्री कैलाश विजयवर्गीय- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रख दिया है.

            चौधरी सुजीत मेर सिंहअध्यक्ष महोदय, मैंने प्रश्न में यह पूछा था कि बिछुआ नगर  परिषद्  के   कितने वार्डों  की जो अभी   विगत् दो वर्षों में    सड़कें बनी हैं, वह अभी टूट-फूट  गई है.  उत्तर मिला है कि कोई भी ऐसी वर्तमान में  स्थिति नहीं है.  मैं मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि  मैं खुद वहां से निकलता हूं, बहुत वार्डों की सड़कें   टूट फूट गई हैं, मरम्मत   की आवश्यकता है.  एक  छोटा सा उदाहरण भी बताना चाहता हूं कि  वार्ड क्र. 5  शिव मंदिर से पुलिस थाना होते हुए  वार्ड क्र.14  सुरेश  कटारे के मकान  तक  पीडब्ल्यूडी मार्ग,  यह 41 लाख का  मार्ग बना हुआ है.  यह मार्ग एक साल भी नहीं चला और  इसमें सीमेंट की परतें अलग  निकल गई हैं, गिट्ठी  दिखने लगी है.  दूसरा  एक और बहुत जरुरी मार्ग है बीटी  रोड कार्य  शिवमंदिर से खमारपानी तिराहे तक.  यह 20 लाख का मार्ग है,  बना हुआ है.  इसके आगे  मैं मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि  एक  कालेज  भी है इसी रोड  के आगे खमारपानी रोड पर  तिराहे के आगे.  हमारा सांदीपनी  विद्यालय  भी है. तो छात्राओं ने इसमें हड़ताल  की  कि उन्हें आने  जाने के लिये   इस मार्ग से बहुत परेशानी होती है.  मेन रोड है, इसमें  20 लाख का कार्य हुआ  और  6   महीने भी नहीं चला  और  फिर से अब उसमें गड्ढे भी  हो गये और  बिटुमिन  भी अब उसमें नहीं दिख रहा है.  तो  मेरा मंत्री जी से यही कहना है कि  इसकी जांच करा लें.  वास्तव में यदि ये सड़कें टूट फूट  गई हैं,  तो क्या आप  इनकी मरम्मत करा सकते  है,  मेरा मंत्री जी से  यही कहना है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय अध्यक्ष महोदय,  जैसे ही विधायक महोदय का प्रश्न आया था,  वैसे  ही  मैंने एक इंजीनियरों की टीम  वहां पर  भेज दी  थी  और  उनसे मैंने  कहा था कि वीडियो  बनाकर  और फोटो लेकर आयें.  मेरे पास सारी सड़कों के  फोटो है,  अच्छी सड़कों के  भी  और जो सड़कें उखड़ी  हुई हैं, उनकी भी.  (फोटो दिखाते हुए.) वैसे  सड़कों  का निर्माण काफी अच्छा हुआ है, पर कुछ जगह निश्चित रुप से   खराब हुई हैं,  उसकी मेरे पास फोटो ग्राफ्स हैं.  मैं सदस्य जी को विश्वास दिलाता  हूं कि  जहां  जहां सड़कें खराब हुई हैं,  वहां वहां हम बिलकुल सड़कें अच्छी कर देंगे और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्यवाही  भी करेंगे.  वहां माननीय विधायक  जी का  एक यह भी आग्रह था कि   सीमेंट की सड़कें नहीं बनायें.  ऐसा वहां के  हमें अधिकारियों ने आकर बताया,   क्योंकि सड़कें  ऊंची बन जाती हैं  और  वह घरों में पानी भरता है, यह आपका आग्रह था उसमें.  तो  अधिकारियों की टीम मैंने भेजी थी,  तो  उन्होंने बताया मुझे.  हम अब  जो सड़कें बना रहे हैं,   उसमें  हम एफडीआर सिस्टम से बनायेंगे कि  Full Depth Reclamation  के माध्यम से उसमें  पहले जो बनी हुई सड़क है,  उसको उखाड़ते हैं और उसी मटेरियल को फिर  रीयूज करते  हैं कुछ अच्छा मिलाकर, जिससे  सड़क की ऊंचाई  बढ़े नहीं.  उसी लेवल पर रहे, जिससे  घरों के  अंदर पानी नहीं जाये.  हम  उस दिशा में भी काम करेंगे.  उसके काम  करने के निर्देश हमने दे दिये हैं.

          चौधरी सुजीत मेर सिंहअध्यक्ष महोदय, मैं इसके लिये मंत्री जी को धन्यवाद भी देता हूं, पर मैं एक चीज और कर रहा था कि  यह मरम्मत जितनी जल्दी हो जाती,  क्योंकि  बहुत सारे छात्र, छात्राओं को  वहां  से निकलना पड़ता है,  बारिश में  बहुत दिक्कत होती है, तो कितने  समय में  हमको यह रिजल्ट मिल जायेंगे.  जल्दी से जल्दी मिल जायें, तो यह  मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय अध्यक्ष महोदय, मैंने  अभी निर्देश  जारी किये   हैं,  जल्दी से जल्दी हो जायेगा.

          चौधरी सुजीत मेर सिंहअध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

          श्री सुरेश राजेअध्यक्ष महोदय,  मैं  मंत्री जी से निवेदन करुंगा कि  मेरी  विधान सभा प्रॉपर  नगर पालिका के अंतर्गत जो पाइप लाइन डाली गई थी,   वह मैंने शुरु में  निवेदन भी किया था, उसका ध्यानाकर्षण भी लगाया था कि वह  इतनी घटिया  उसकी   बनी, जिसके कारण  आये दिन  वह पाइप  लाइन  ऐसा कोई, मुझे  नहीं  लगता कोई महीना जाता हो,  जो पाइन  लाइन  कहीं न कहीं से  फूटती न हो.  उसकी एक बार ठीक से जांच  भी करा लें, क्योंकि भविष्य में  जब भी रोड डलवाओगे, अभी तो  कोई रोड डबरा में है नहीं.  एक भी वार्ड में रोड है नहीं.  सारे  के सारे शहर  ही रोड विहीन   हैं एक तरह से,  वह अलग बात है कि  आपकी कृपा से  शहरों के आस पास के  रोड हमारे बन गये थे,  लेकिन  शहर में कोई रोड नहीं है.   उसका कारण यह है कि  वह पाइप लाइन इतनी घटिया स्तर की  डली है कि  कोई महीना गुजरता  ही नहीं और कहीं न कहीं से  बीच शहर  में फूट जाती है  और जब वह फूटती है, तो  मैं मंत्री जी से आग्रह करुंगा कि  कम से कम उसे बनाने में  एक से डेढ़ महीने लगता है  दुरुस्त करने में तो इस ओर ध्यान देंगे. यही  निवेदन करना था, धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदयसुरेश  जी, आप विनम्रतापूर्वक   मंत्री जी से मिलकर आग्रह  करें,  आपकी समस्या थोड़ी पेचीदगी  है और प्रश्न से संबंध उसका नहीं है. लेकिन व्यक्तिगत रुप से मिलकर मंत्री जी से चर्चा करें.

            अध्‍यक्ष महोदय- श्री अशोक ईवरदास रोहाणी जी नही हैं. श्री संतोष वरकड़े जी, उनकी तरफ से प्रश्‍न करेंगे.

          श्री अशोक ईश्‍वरदास रोहाणी (अधिकृत, श्री संतोष वरकड़े) प्रश्‍न क्रमांक-2494.- (अनुपस्थित)

मिश्रित फीडरों का विद्युतीकरण

[ऊर्जा]

5. ( *क्र. 519 ) कुँवर अभिजीत शाह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                    (क) प्रश्‍नकर्ता के अतारांकित प्रश्‍न क्रमांक 140 में प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र के 44 बसाहटों के 319 अविद्युतीकरण घरों एवं 7 सार्वजनिक शासकीय संस्थाओं में विद्युतीकरण की कार्ययोजना तैयार किये जाने का लेख किया गया है, इसकी वर्तमान स्थिति क्या है? यह कार्य किस स्तर पर लंबित है? स्वीकृत 13 बसाहटों में विद्युतीकरण के कार्य की वर्तमान स्थिति क्या है? (ख) प्रश्‍नकर्ता के अतारांकित प्रश्‍न क्रमांक 140 में प्रस्तुत जबाव अनुसार घरेलू एवं कृषि फीडर विभक्तिकरण के कार्य हेतु दिनांक 14.11.2025 को निविदा जारी किये जाने का लेख किया गया है, उक्त कार्य किस योजना में स्वीकृत किये गये हैं, प्राक्कलन क्या है तथा इनकी वर्तमान स्थिति क्या है? प्राक्कलन सहित जानकारी उपलब्ध करावें। विधानसभा के कुल 06 मिश्रित फीडरों एवं घरेलू फीडरों से कृषि हेतु विद्युत उपलब्ध कराये जा रहे फीडरों की विगत 06 माह की एम.आर.आई. रिपोर्ट उपलब्ध करावें? (ग) प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत वर्तमान में कितने घरेलू फीडर, कितने कृषि फीडर एवं कितने मिश्रित फीडर संचालित हैं, इनके नाम सहित जानकारी प्रदान की जावे? इनमें से किन-किन फीडरों के सेपरेशन का कार्य किया जा रहा है? ऊर्जा विभाग के आकलन के अनुसार विधानसभा क्षेत्र की जनसंख्या एवं कृषि रकबे के आधार पर किस-किस क्षेत्र के लिये कितने-कितने घरेलू एवं कृषि फीडर स्थापित होना चाहिये, जो कि वर्तमान में कितने हैं? पृथक-पृथक जानकारी देवें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ) : (क) अतारांकित प्रश्‍न क्रमांक 140 के उत्‍तर में उल्‍लेखित विद्युतीकरण कार्यों हेतु प्रशासकीय स्‍वीकृति अप्राप्‍त है। अत: शेष प्रश्‍नांश नहीं उठता है। तथापि भविष्‍य में केन्‍द्र एवं राज्‍य शासन की विद्युतीकरण की योजना प्रचलन में आने पर योजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पात्र बसाहटों/घरों के विद्युतीकरण का कार्य वित्‍तीय उपलब्‍धता अनुसार कराया जायेगा। उक्‍त के अतिरिक्‍त प्रश्‍नाधीन क्षेत्रान्‍तर्गत धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA-JUGA) योजनांतर्गत स्वीकृत 13 बसाहटों में से 7 बसाहटों के विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है एवं शेष कार्य प्रगतिरत है। (ख) जी हाँ। उक्त कार्य आर.डी.एस.एस. योजना में स्वीकृत हैं। प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित फीडर विभक्तिकरण कार्य हेतु म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा दिनांक 31.12.2025 को मेसर्स रैनी पॉवर, भोपाल को कार्यादेश जारी किया गया है। उक्‍त निवेदित फर्म द्वारा संयुक्त सर्वे पश्‍चात टॉस्क आई.डी. अनुसार प्राक्कलन तैयार कर स्वीकृत किये जावेंगे। अत: शेष प्रश्‍नांश नहीं उठता है। विधानसभा क्षेत्र टिमरनी अंतर्गत 05 मिश्रित 11 के.व्‍ही. फीडरों से कृषि कार्य हेतु विद्युत उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अतिरिक्त हरदा विधानसभा क्षेत्र के 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्रों से निर्गमित 03 मिश्रित 11 के.व्‍ही. फीडरों से जुड़े टिमरनी विधानसभा क्षेत्र के 34 ग्रामों को कृषि कार्य हेतु विद्युत प्रदाय की जा रही है। उक्‍त 3 मिश्रित फीडरों के विभक्तिकरण कार्य भी उपरोक्त कार्यादेश में सम्मिलित हैं। प्रश्‍नाधीन विधानसभा क्षेत्र के 05 मिश्रित फीडरों की विगत 6 माह की अवधि हेतु एम.आर.आई. रिपोर्ट की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। उल्‍लेखनीय है कि विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कृषि कार्य हेतु किसी भी घरेलू फीडर से विद्युत आपूर्ति नहीं की जाती है। (ग) प्रश्‍नाधीन विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत वर्तमान में 11 के.व्‍ही. के 30 घरेलू फीडर, 11 के.व्‍ही. के 60 कृषि फीडर एवं 05 मिश्रित 11 के.व्‍ही. फीडर संचालित हैं, जिनकी प्रश्‍नाधीन चाही गयी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के क्रमश: प्रपत्र '', 'ब-1' एवं 'ब-2' अनुसार है। उक्‍त में से फीडर सेपरेशन के कार्य वाले मिश्रित फीडरों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब-2' अनुसार है। इसके अतिरिक्त हरदा विधानसभा क्षेत्र के 03 मिश्रित फीडरों से जुडे टिमरनी विधानसभा क्षेत्र के 34 ग्रामों को कृषि हेतु विद्युत उपलब्ध कराई जा रही है। उल्‍लेखनीय है कि क्षेत्र की जनसंख्या एवं कृषि रकबे के आधार पर फीडरों की स्थापना नहीं की जाती है, यद्यपि क्षेत्र में विद्युत उपभोक्‍ताओं के विद्युत भार के अनुसार विद्युत अधोसंरचना का निर्माण एवं विस्तार किया जाता है। वर्तमान में प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में 11 के.व्ही. के कुल 95 फीडर स्थापित हैं। उल्‍लेखनीय है कि स्‍थापित विद्युत अधोसंरचना अतिभारित पाये जाने की स्थिति में समय-समय पर नियमानुसार प्रणाली सुदृढ़ीकरण योजना अथवा सामान्‍य विकास योजना के तहत तकनीकी साध्‍यता अनुसार स्‍थापित विद्युत अधोसंरचना के विस्‍तार संबंधी कार्य के प्रस्‍ताव पर सक्षम स्‍वीकृति उपरांत विद्युत अधोसंरचना निर्माण एवं विस्‍तार की कार्यवाही की जाती है, जो कि एक सतत् प्रक्रिया है।

          कुंवर अभिजीत शाह- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक- 519.

          श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर है.

          कुंवर अभिजीत शाह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को बताना चाहूंगा कि मेरी विधान सभा आदिवासी विधान सभा है. मेरी विधान सभा में 94 गांव आज मिक्‍स फीडर के नाम से बिजली सप्‍लाई दी जा रही है और वहां पर सिंगल फेज़ जो लाईन होती है वह 22 घण्‍टे मिलती है और थ्री फेज़ लाईन जो होती है, मैं एक उदाहरण देना चाहूंगा कि एमआरआई रीडिंग होती है, सरकार दावा करती है कि हम 10 घण्‍टा हम खेत में बिजली दे रहे हैं और 24 घण्‍टा गांव में बिजली दे रह हैं. लेकिन यह एमआरआई हर पीटीआर में लगी होती है, यह रिपोर्ट बताती है कि कहां किस गांव में कितनी बिजली प्राप्‍त हुई और कितनी दी गई. यह रिपोर्ट बता रही है, आपके सामना आंकड़ा रख रहा हूं, यह दिनांक 1.1.26 की रिपोर्ट है, उस दिन मात्र 5 घण्‍टा 15 मिनट बिजली दी गयी. यदि मैं महीने का निकालूंगा तो 8 घण्‍टा थ्री फेज़ लाईन मिली. अगर हम सिंगल फेज़ की बात करें तो वहां पर मात्र 22 घण्‍टा बिजली मिल पायी है. सरकार के दावे हैं कि हम हर गांव में 24 घण्‍टा बिजली दे रहे हैं वह असत्‍य हैं. पहली बात तो 94 गांव मेरी विधान सभा में ऐसे हैं, जहां पर 24 घण्‍टा थ्री फेज़ लाईन ही नहीं मिलती है क्‍योंकि आप भी वहां पर जो कृषि फीडर और जो घरेलू फीडर होते हैं उसका सेपरेशन ही नहीं हुआ है. जब मैंने पहली बार प्रश्‍न क्रमांक-380 के माध्‍यम से विधान सभा में एक साल पहले प्रश्‍न लगाया था, उस समय तो कोई मान ही नहीं रहा था कि ऐसे फीडर भी हैं, उस समय यही कहा जा रहा था कि जितने भी मध्‍यप्रदेश में फीडर हैं उनमें सभी मैं फीडर लग चुके हैं. लेकिन मैंने ढूंढकर निकाला, मेरी विधान सभा में 94 गांव हैं. उसमें 8 ऐसे फीडर हैं जो मिक्‍स फीडर के तौर पर चल रहे हैं, इसका घाटा यह होता है हम तो मिक्‍स फीडर को हम चलाते हैं तो जो आपको खेत में लाईन देनी होती है तो आप थ्री फेल़ बिजली दे देते हो, लेकिन उसी मिक्‍स फीडर से जब गांव में लाईन देनी होती है तो दो फेज़ काट दिये जाते हैं. अब एक फेज़ से एक फीडर से कम से कम 12 गांव को बिजली दी जाती है. तो जो बल्‍ब होता है तो वह भी नहीं जल पाता है. तो 94 गांव के जो आदिवासी गांव हैं, वह लोग बहुत परेशान हैं तो इसके लिये जब मैंने प्रश्‍न क्रमांक -140 यह मैंने दिनांक 4.11.25 को तो आपके द्वारा जवाब दिया गया थी कि इसके लिये टेण्‍डर लगा दिये गये हैं. मैंने उस टेण्‍डर की कापी मांगी थी जो अभी तक मुझे विभाग द्वारा नहीं दी गयी है. इसके बाद मैंने जब प्रश्‍न लगाया 519 तो बताया गया कि रेनी पॉवर को ही टेण्‍डर दे दिया गया है. लेकिन मैंने फिर कहा है कि मुझे टेण्‍डर की कॉपी तो उपलब्‍ध कराइये.

          अध्‍यक्ष महोदय- यह ध्‍यानाकर्षण पर चर्चा नहीं हो रही है. यह प्रश्‍नकाल है, आप पूरक प्रश्‍न करो कि आप मंत्री जी से क्‍या चाहते हो.

          कुंवर अभिजीत शाह- मेरा मंत्री जी प्रश्‍न यह है कि पहला जो आपने कहा है कि रेनी पॉवर को टेण्‍डर मुहैया करा दिया गया है. उसकी प्रति मुझे दी जाये और तब तक उन 94 गांवों को थ्री फेज़  बिजली मिल पायेगी कि या नहीं ? क्‍योंकि इसकी एक निश्चित तारीख तय होना चाहिये. मैंने पिछली बार भी आपको 60 बसाहटों की सूची दी थी. जिसके तहत जो राज्‍य शासन द्वारा ही 14 मई , 2010 को एक संकल्‍प पारित किया गया था, विज़न 2013 कि हम हर बसाहट में, हर गांव में 24 घण्‍टा लाईट देंगे. वह अभी तक पूरा नहीं हुआ है. मेरी विधान सभा में 60 बसाहटें हैं, उनमें बिजली कब तक पहुंच जायेगी.

          श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को यह बताना चाहता हूं कि इनके यहां पर 5 मिश्रीत फीडर हैं, तीन दूसरी विधान सभा से हैं. इस प्रकार से कुल 8 मिश्रत फीडर हैं. उनके लिये ट्रिपल आईडीएसएस के तहत,उन फीडर सेपरेशन का काम स्‍वीकृत हो गया है, कार्यादेश जारी हो गया है और कार्यादेश की कॉपी मैं सम्‍माननीय सदस्‍य को उपलब्‍ध करा दूंगा और उसमें जो गारण्‍टी की राशि होती है वह भी जमा कर दी है. हम शीघ्र कार्य चालू करा देंगे और जो कार्यादेश में जो समय दिया है उस कार्यादेश में कार्य पूरा करा देंगे.

कुंवर अभिजीत शाह- एक तो इसमें कोई तारीख नहीं दी गयी है तो कृपया मंत्री महोदय तारीख बता दें. दूसरा मैं आपको एक उदाहरण देना चाहूंगा और आपको धन्‍यवाद भी देना चाहूंगा इस सदन के माध्‍यम से क्‍योंकि मैंने आपसे सब-स्‍टेशन की भी मांग की थी, उसको आपने पूरा भी किया है. इसमें मेरा भीमपुरा सब-स्‍टेशन था और भी तीन कुछ सब-स्‍टेशन थे. लेकिन भीमपुरा सब-स्‍टेशन डेढ़ साल पहले स्‍वीकृत किया गया. उसके तार खींच दिये गये. अध्‍यक्ष महोदय, यह मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहूंगा कि यहां पर हुआ यह कि तारों को काट दिया गया,  वन विभाग द्वारा. डेढ़ साल बाद भी वन विभाग द्वारा प्रपत्र '' और '' में अनुमति ही नहीं दी गयी. अब वह लगभग 2-4 करोड़ रूपये का काम था तो अब उसका खर्चा अब कौन वहन करेगा. उसको बिजली विभाग करेगा या वन विभाग करेगा. मेरा सिर्फ इतना ही कहना है कि क्‍योंकि मध्‍यप्रदेश शासन की राशि है. इससे सरकार की राशि व्यर्थ नहीं होगी. मुझे सिर्फ एक तारीख बता दी जाय कि इस तारीख तक कर दिया जाय. एक चीज मैं कहना चाहूंगा  क्योंकि इससे पहले मिक्स फीडर मेरी विधान सभा में चल रहे हैं यह मान ही नहीं रहे थे. जब मेरे द्वारा यह प्रश्न उठाया गया. मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि आपने उसको माना और आपने रैनी पावर को टेण्डर दे भी दिया है लेकिन सिर्फ इतना है कि जब भी हम प्रश्न उठाते हैं तो उसका एक एक्नालेजमेंट भी हमको मिलना चाहिए क्योंकि हमको कुछ लिखित में नहीं आता है कि कार्यवाही कहां तक पहुंच गई है. इसके लिए हमको अगले सत्र का इंतजार करना पड़ता है कि दोबार सत्र आएगा तब हम पूछेंगे. जब हम क्षेत्र में जाते हैं तो अगर मैंने जो विधान सभा में मांग की है, उसका एक्नालेजमेंट मुझे मिल जाय तो कम से कम क्षेत्र की जनता को बता पाऊंगा कि यह काम मैं स्वीकृत कराकर लेकर आया हूं. नहीं तो क्षेत्र में बात ऐसी होती है कि ठीक है, विधायक कोई भी हो सकता है, विधान सभा प्रश्न लगाने से कार्य नहीं होते हैं तो मैं पूछना चाहता हूं कि विधान सभा में प्रश्न लगाने से कार्य होते हैं कि नहीं होते हैं ? हमारा इसका कोई संवैधानिक दायित्व बनता है कि नहीं? इसलिए एक्नालेजमेंट हम लोगों को मिलना चाहिेए.

श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर - अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से माननीय सदस्य को बताना चाहता हूं कि हमारी सरकार  हर क्षेत्र में, ऊर्जा के क्षेत्र में काम करा रही है. आपने प्रश्न उठाया है, आप पवित्र लोकतंत्र के मंदिर में सदस्य चुनकर आए हैं. हमारी सरकार की स्पष्ट मंशा है कि  हर क्षेत्र को बिजली मिले. आपके 8 कृषि फीडरों को ही हमने स्वीकृति दी है.  कार्यादेश दिनांक 31.12.2025 को जारी हो चुका है, उसके 18 माह के अंतर्गत काम हो जाएगा. दूसरा, आपने कहा है कि जो वन विभाग वाली बात कही है, इस प्रकरण को मैं दिखा लूंगा और अधिकारी मिलकर आपको बता देंगे.

कुंवर अभिजीत शाह - धन्यवाद.

संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - अध्यक्ष महोदय, पहली बार के विधायक हैं और मैं हमेशा देखता हूं बहुत अच्छा अध्ययन करके प्रश्न पूछते हैं, बढ़िया,  आपको बधाई.

अध्यक्ष महोदय - खानदानी हैं.

(मेजों की थपथपाहट)..

अध्यक्ष महोदय - श्री बृज बिहारी पटैरिया जी.

श्री बृज बिहारी पटैरिया - (अनुपस्थित)

श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष महोदय, श्री बृज बिहारी पटैरिया जी, कार्यकर्ताओं के बीज में बर्थ डे मना रहे हैं और उन्होंने सबको भोजन पर बुलाया है.

 

 

 

ग्रामीण क्षेत्र में विद्युतीकरण कार्य

[ऊर्जा]

7. ( *क्र. 1727 ) श्री साहब सिंह गुर्जर : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                          (क) विधानसभा 14 ग्‍वालियर ग्रामीण क्षेत्रान्‍तर्गत क्या समस्त‍ ग्रामों, बसाहटों में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण कार्य हो गया है? यदि हाँ, तो ग्रामवार, बसाहटवार जानकारी उपलब्ध करावें? यदि नहीं, तो विद्युतीकरण कब तक किया जावेगा? समय-सीमा बतावें। (ख) प्रदेश में कृषि फीडरों, कमर्शियल फीडरों एवं डोमेस्टिक फी‍डरों पर दिन-‍रात में कितने-कितने घण्टें विद्युत आपूर्ति का प्रावधान है? क्या प्रावधान अनुसार नियमित विद्युत आपूर्ति की जा रही है? यदि नहीं, तो कारण बतावें तथा विधानसभा 14 ग्वालियर ग्रामीण अन्‍तर्गत किन-किन फीडरों पर नियमित आपूर्ति की जा रही है? ग्रामवार विस्तृत जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) विधानसभा क्षेत्र 14 ग्वालियर ग्रामीण में समाधान योजनान्तर्गत किन-किन कृषकों एवं घरेलू उपभोक्ताओं को विद्युत बकाया राशि पर छूट का लाभ प्रदाय किया गया है? ग्रामवार, कृषकवार/उपभोक्तावार जानकारी उपलब्ध करावें। समाधान योजना में विद्युत देयक जमा करने के उपरान्त भी ट्रांसफार्मर समय-सीमा में क्यों नहीं उपलब्ध कराये जा रहें हैं? समाधान योजनान्तार्गत विधानसभा क्षेत्र 14 ग्‍वालियर ग्रामीण में कहां-कहां ट्रांसफार्मर रखवाये गये हैं? ग्रामवार जानकारी उपलब्ध करावें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ) : (क) जी हाँ, विधानसभा क्षेत्र क्रमांक-14 ग्‍वालियर-ग्रामीण अंतर्गत समस्‍त राजस्‍व ग्राम एवं इनके संसूचित मजरे/टोले पूर्ववर्ती ग्रामीण विद्युतीकरण योजनाओं के अंतर्गत विद्युतीकृत हैं, जिनकी जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। उल्‍लेखनीय है कि नये घरों का बनना एक सतत् प्रक्रिया है, जिनके विद्युतीकरण का कार्य            समय-समय पर उपलब्‍ध विद्युतीकरण की योजनाओं के अंतर्गत किया जाता है। वर्तमान स्थिति में प्रश्‍नाधीन क्षेत्रांतर्गत 28 अतिरिक्‍त नवीन बसाहटें विकसित पाई गयी हैं, जो विद्युतीकरण हेतु शेष हैं। वर्तमान में विद्युतीकरण हेतु संचालित भारत सरकार की धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्‍कर्ष योजना के दिशा-निर्देशों/मापदण्‍डों के अनुरूप उक्‍त बसाहटें पात्र नहीं होने के कारण योजना अंतर्गत स्‍वीकृत नहीं किये जा सके हैं। तथापि केन्‍द्र/राज्‍य शासन की विद्युतीकरण योजना की उपलब्‍धता अनुसार भविष्‍य में प्रश्‍नाधीन शेष नवनिर्मित विद्युत विहीन मजरों/टोलों/बसाहटों के विद्युतीकरण हेतु आवश्‍यक कार्यवाही किया जाना संभव हो सकेगा। (ख) वर्तमान में प्रदेश में राज्‍य शासन के नियमानुसार कृषि प्रयोजन हेतु 11 के.व्‍ही. कृषि फीडरों के माध्‍यम से प्रतिदिन औसतन 10 घंटे एवं गैर कृषि उपभोक्ताओं को 11 के.व्‍ही. गैर कृषि फीडरों के माध्‍यम से 24 घंटे विद्युत आपूर्ति किये जाने का प्रावधान है। किसानों को कृषि कार्य हेतु विद्युत उपलब्‍धता, ग्रिड स्थिरता एवं अन्‍य तकनीकी आधारों पर वर्तमान में प्रचलित नियमानुसार कृषि उपभोक्‍ताओं का दिन में औसत 6 घण्‍टे एवं रात्रि में औसत 4 घंटे विद्युत आपूर्ति का निर्धारण किया गया है। जी हाँ। उल्‍लेखनीय है कि विद्युत लाइनों/अधोसंरचना के रख-रखाव हेतु पूर्व निर्धारित शट-डाउन लेने तथा तकनीकी कारणों/प्राकृतिक आपदा से आये आकस्मिक व्‍यवधानों जैसी अपरिहार्य स्थिति के कारण कतिपय अवसरों पर विद्युत प्रदाय बाधित होता है, जिसमें आवश्‍यक रख-रखाव/सुधार कार्य कर विद्युत प्रदाय शीघ्र ही सुचारू कर दिया जाता है। प्रश्‍नाधीन विधानसभा क्षेत्रांतर्गत विद्यमान 11 के.व्‍ही. के 71 कृषि फीडरों एवं 11 के.व्‍ही. के 67 गैर कृषि फीडरों के माध्‍यम से उक्‍तानुसार विद्युत प्रदाय किया जा रहा है, जिसकी प्रश्‍नाधीन चाही गई फीडरवार/ग्रामवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' एवं '' अनुसार है। (ग) प्रश्‍नाधीन क्षेत्रांतर्गत वर्तमान में संचालित समाधान योजना अंतर्गत प्रश्‍न दिनांक तक की स्थिति में 1395 कृषि उपभोक्‍ताओं को राशि रूपये 4,06,66,982/- एवं 1721 घरेलू उपभोक्‍ताओं को राशि रूपये 1,30,58,038/- का लाभ प्रदान किया गया है, जिसकी प्रश्‍नाधीन चाही गई ग्रामवार, कृ‍षकवार/उपभोक्‍तावार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। प्रश्‍नाधीन विधानसभा क्षेत्रांतर्गत समाधान योजना में विद्युत देयक जमा करने के उपरांत अपात्र रहे जले/खराब वितरण ट्रांसफार्मरों की समीक्षा उपरांत नियमानुसार कोई भी जला/खराब वितरण ट्रांसफार्मर बदलने हेतु पात्र नहीं पाया गया है। समाधान योजनांतर्गत वितरण ट्रांसफार्मर रखवाये जाने का प्रावधान नहीं है, अत: शेष प्रश्‍न नहीं उठता।

श्री साहब सिंह गुर्जर - अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 1727 है.

श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर - अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रख दिया गया है.

अध्यक्ष महोदय - साहब सिंह जी पूरक प्रश्न करें.

श्री साहब सिंह गुर्जर - अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी के उत्तर में बताया गया है कि शत-प्रतिशत ग्रामों में बसाहटों में विद्युतीकरण हो चुका है, जो असत्य जानकारी है. मैं उदाहरण बताता हूं कि वार्ड क्रमांक 61 मोहनपुर की कंजर पहाड़ी जो 35 वर्ष पुरानी है इसमें 60-70 घर की बसाहट है इसमें आज तक विद्युतीकरण नहीं हुआ है एवं ग्राम पंचायत महिदपुर का नया गांव जिसमें करीब 75 बसाहटें 80 वर्षों से हैं. इसमें 25 के.व्ही. ट्रांसफार्मर 700 मीटर की दूरी  पर लगाए हैं, यहां आज तक केबल एवं खम्भे नहीं हैं. इसे 25 केव्ही के स्थान पर 100 केव्ही किया जावे. यह ट्रांसफार्मर कब तक लगवा दिये जाएंगे, मंत्री जी सदन में आश्वस्त करें एवं समय-सीमा बतावें.

श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर - अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से सम्माननीय सदस्य को बताना चाहूंगा कि जो ग्रामीण क्षेत्र में 213 राजस्व ग्राम और इनके 222 मजरे-टोले हैं, उनमें विद्युतीकरण पूरा किया जा चुका है. परन्तु यह एक सतत् प्रक्रिया है. 28 अतिरिक्त नवीन बसाहटें हैं जो अविद्युतीकृत हैं उन बसाहटों के लिए हमारी सरकार ने कार्ययोजना बनाकर भारत सरकार को भेजी है जैसे ही  स्वीकृति आ जाएगी. हम उन क्षेत्रों को भी विद्युतीकृत करा देंगे. दूसरा, आपने जो कहा है कि 60 साल पुरानी बस्तियां हैं  उनको मैं यहां से आपको आश्वस्त कर रहा हूं कि  मैं अपनी टीम को निर्देश दूंगा वह जाकर वहां निरीक्षण करेंगी. अगर कोई कारण से छूटी भी होंगी तो उनके लिए हम कार्य योजना बनाकर भी काम करेंगे.

श्री साहब सिंह गुर्जर - धन्यवाद मंत्री जी. अध्यक्ष महोदय, प्रश्न क का दूसरा पार्ट, इसमें मंत्री जी ने बताया है कि जो 28 नवीन बसाहटों में विद्युतीकरण नहीं हुआ है, कृपया मंत्री जी यह बतावें कि इन 28 बसाहटों में  कब तक किस योजना के तहत विद्युतीकरण किया जावेगा, समय सीमा बताएं?

श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर - अध्यक्ष महोदय, मैंने आपके माध्यम से माननीय सदस्य को बता दिया है कि हमारी नई बसाहटों के लिए एक कार्ययोजना बनाकर भारत सरकार  को भेजी गई है और जैसे ही वित्तीय संसाधन की उपलब्धता हो जाएगी, शीघ्र उस काम को कराया जाएगा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न क्रमांक 8, श्री राजन मण्‍डलोई जी.

          श्री साहब सिंह गुर्जर -- (XXX)

          अध्‍यक्ष महोदय -- साहब सिंह गुर्जर जी, दो प्रश्‍न समाप्‍त हो गए. कृपया तीसरा पढ़कर मत बताइए. माननीय राजन मण्‍डलोई जी का आएगा.

सीवरेज प्रोजेक्ट में अनियमितता की जांच

[नगरीय विकास एवं आवास]

8. ( *क्र. 1657 ) श्री राजन मण्‍डलोई : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा खुदाई के पूर्व रोड कटिंग में कँक्रीट कटर मशीन के उपयोग करने के निर्देश दिये गये हैं? अगर हाँ, तो निर्देशों की छायाप्रतियां देवें। (ख) क्या बड़वानी शहर में पोकलेन/जे.सी.बी. रॉकब्रेकर मशीन से सी.सी. रोड की खुदाई कराई जा रही है? यदि हाँ, तो निरीक्षणकर्ता अधिकारी कौन-कौन हैं एवं इनके द्वारा किये गये निरीक्षण प्रतिवेदनों की छायाप्रतियां देवें। (ग) क्या बड़वानी शहर के सीवरेज प्रोजेक्ट के निविदा दस्तावेज में सीवर मैनहोल के निर्माण इंडियन स्टैण्डर्ड-4111 अनुसार मैनहोल चैम्बर में दोनों तरफ प्लास्टर किया जाना चाहिये? यदि हाँ, तो निर्देशों की छायाप्रतियां देवें? (घ) क्‍या प्रश्‍नांश (ग) वर्णित अधिकांश मैनहोल चैम्बर में दोनों तरफ प्लास्टर नहीं किया जा रहा है? यदि हाँ, तो कार्य के निरीक्षणकर्ता अधिकारी द्वारा किये गये निरीक्षण प्रतिवेदनों की छायाप्रतियां देवें। (ड.) क्या बड़वानी शहर में चल रहे सीवरेज प्रोजेक्ट हेतु अस्थाई तथा स्थाई रोड रेस्टोरेशन के लिए म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कंपनी के क्या निर्देश हैं? निर्देशों की छायाप्रतियां देवें। बड़वानी शहर में ठेकेदार द्वारा निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है? कार्य के निरीक्षणकर्ता अधिकारी द्वारा किये गये निरीक्षण प्रतिवेदनों की छायाप्रतियां देवें एवं अनुबंध एवं निर्देशों का पालन नहीं करने वाले संबंधित ठेकेदार के विरूद्ध कार्यवाही करते हुये संपूर्ण कराये गये कार्य एवं चल रहे कार्य की उच्च स्तरीय जांच कराई जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) जी हाँ, निर्देशों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जी हाँ, कँक्रीट रोड पेवमेंट कटिंग के पश्चात स्थल की आवश्यकतानुसार पोकलेन/जे.सी.बी. रॉक ब्रेकर द्वारा खुदाई की जा रही है। प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सलाहकार जी.आई. टेक एवं पी.आई.यू. के यंत्रियों द्वारा नियमित निरीक्षण किया जाता है। यह नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, अतः निरीक्षण उपरांत समय-समय पर दिये गये निर्देश की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जी हाँ, अनुबंध की जानकारी पुस्‍तकालय में परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) जी नहीं, सामान्यतः मैनहोल चैम्बर के दोनों ओर प्लास्टर किया जा रहा है, तथापि नियमित निरीक्षण के दौरान यदि मैनहोल के दोनों ओर प्लास्टर किया जाना नहीं पाया जाता है, तो तत्काल संविदाकार को निर्देशित कर सुधार कर दिया जाता है। निरीक्षण प्रतिवेदन की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है (ड.) संविदाकार द्वारा रोड रेस्टोरेशन अनुबंध अनुसार एवं खोदी गई सड़क की स्थल पर स्थिति अनुसार किया जाना है। पृथक से जारी निर्देश की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। जी नहीं, निरीक्षण के दौरान दिये निर्देश की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। सीमेंट कँक्रीट रोड रेस्टोरेशन कार्य की गुणवत्ता की जांच कोरकटर लेकर पृथक से कराई जाती है, जिसके आधार पर ही कार्यवाही की जाती है। अतः जाँच की आवश्यकता नहीं है।

          श्री राजन मण्‍डलोई -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक- 8 (1657) है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर रख दिया है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- राजन जी, सप्‍लीमेंट्री क्‍वेश्‍चन करिए.

          श्री राजन मण्‍डलोई -- अध्‍यक्ष महोदय, वैसे तो हमारे माननीय मंत्री जी इंदौर मालवा की शान हैं और बहुत संवेदनशील हैं, लेकिन मेरे बड़वानी शहर के अंदर सीवरेज लाईन डालने का काम चल रहा है, जिसमें मैंने माननीय मंत्री जी से प्रश्‍न पूछा था, उस प्रश्‍न के जवाब में आया है कि क्रांकीट कटर मशीन के पश्‍चात ही आवश्‍कतानुसार पोकलेन और जेसीबी से रॉकब्रेकर मशीन से खुदाई की जा रही है. जबकि वास्‍तविकता यह है कि पेवमेंट कटिंग कहीं से कहीं तक नहीं कराई गई. जो सीसी रोड थी, उसकी पूरी खुदाई जेसीबी और पोकलेन मशीन से कराई जा रही है और सीमेंट-क्रांकीट की जो रोड है,वह खराब हो चुकी है. साथ ही माननीय मंत्री जी ने जवाब में यह भी बताया है कि सीसी रोड बनाए जाने में आवागमन अवरूद्ध नहीं हो रहा है, जबकि शहर में चारों तरफ पूरा आवागमन बाधित हो रहा है. पूरे रास्‍ते खोद दिये गये हैं और न ही उसके पीछे कोई रिस्‍टोरेशन का कार्य किया जा रहा है. जबकि रिस्‍टोरेशन का कार्य नियमानुसार 24 घंटे में टेम्‍परेरी होना चाहिए और बाद में परमानेंट किया चाहिए, लेकिन वह भी नहीं हो रहा है. उसमें भी जो काम हो रहा है, वहां पर भी बहुत ही घटिया क्‍वॉलिटी का काम हो रहा है. साथ ही जो मेनहोल है, मेनहोल के चेम्‍बरों में इनर साइड और आउटर साइड में भी उनका पक्‍का प्‍लास्‍टर नहीं किया जा रहा है, जिसके कारण सीवरेज का पानी लीकेज होगा और जब कभी कोई दिक्‍कत आएगी.....

          अध्‍यक्ष महोदय -- राजन जी, आप प्रश्‍न तो कीजिए.

          श्री राजन मण्‍डलोई -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यही है कि जो जवाब आए हैं उसमें पोकलेन और जेसीबी मशीनों से सीधे ब्रेकिंग की जा रही है, पेवमेंट मशीन से कटिंग नहीं की जा रही है. इसमें मेरा यह कहना है कि माननीय मंत्री जी भविष्‍य में इसकी जांच कराएं. क्‍योंकि हमारे शहर में इंदौर के भागीरथपुरा जैसी स्‍थिति उत्‍पन्‍न न हो, क्‍योंकि जो मेनहोल बना रहे हैं उनमें इनर और आडटर साइड में भी रिपेयरिंग का काम नहीं किया जा रहा है. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि जो कार्य हो रहे हैं, उसके लिए आप एक टीम भेजकर उसकी जांच करवा लें.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसे ही माननीय विधायक महोदय जी का प्रश्‍न आया था, मैंने वहां टीम भेज दी थी. वह टीम उन कार्यों का निरीक्षण करके आयी है और टीम ने मुझे रिपोर्ट भी दी है. माननीय विधायक जी के पास कुछ विषय में सत्‍य जानकारी है और शायद कुछ विषय में जानकारी सत्‍य नहीं है. वहां पर ड्रेनेज लाईन डल रही है और बड़ा काम हो रहा है. यह बात सही है कि क्रांकीट की रोड है और उसकी खुदाई करने में कई जगहों पर कटिंग का उपयोग हुआ है और कई जगहों पर सीधे खुदाई की गई, जिससे सड़क की स्‍थिति काफी खराब हुई है. हम उसको रिस्‍टोर करेंगे, हम यह आपसे वादा करते हैं.

          दूसरा आपने कहा है कि वहां पर जो चेंबर बन रहे हैं उन चेम्‍बरों की संख्‍या 6 हजार है. 4 हजार चेंबर बन चुके हैं. 4 हजार में से सिर्फ 20 ही ऐसे मेनहोल निकले हैं जहां पर दोनों जगह प्‍लॉस्‍टर नहीं हुआ है, बाकी सब जगह प्‍लॉस्‍टर हुआ है. यह फिजिकल रिपोर्ट मेरे पास है, जिसके फोटोग्राफ्स मेरे पास में हैं. यदि आप चाहें, तो आप देख सकते हैं. मैंने पहले ही यहां से टीम भेजकर पूरी रिपोर्ट मंगा ली है. वहां रिस्‍टोरेशन भी अच्‍छा होगा, मैं इसकी गारंटी देता हॅूं. क्‍वॉलिटी वर्क होगा, इसकी भी गारंटी ले रहा हॅूं और जहां पर सड़कें छोटी हैं, वहां वास्‍तव में ट्रैफिक की तकलीफ है, तो अभी हम कलेक्‍टर से बात करके, वहां पर वैकल्‍पिक मार्ग से लोग निकल सकें, क्‍योंकि छोटी रोड है वहां पर काम चलेगा, तो रोड बंद होगी ही और इसलिए वैकल्‍पिक मार्ग के लिए वहां पर एसपी के साथ मिलकर नगरपालिका के लोग बात करेंगे, ताकि वहां से लोग निकल सकें, इसलिए हम उसका विकल्‍प जरूर देंगे. क्‍योंकि काम होगा, तो ट्रैफिक में बाधा तो आएगी ही. क्‍योंकि बहुत चौड़ी सड़कें नहीं हैं कि एक साइड आपने काम करा लिया और एक साइड से ट्रैफिक निकल जाए. छोटी सड़कें हैं और उसकी चौड़ाई भी कम है तो इसलिए वहां पर काम करने में थोड़ी-सी असहजता हो रही है, लेकिन हम सुनिश्‍चित करेंगे कि नागरिकों को तकलीफ भी न हो और काम क्‍वॉलिटी का हो.

          अध्‍यक्ष महोदय -- कोई दूसरा प्रश्‍न हो, तो आप करिए.

          श्री राजन मण्‍डलोई -- अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न यही है कि जो काम हो रहा है, यह बाद में इतना बड़ा काम होना नहीं है. जो चेंबर बन रहे हैं, यदि वह गुणवत्‍तापूर्ण बनेंगे, तो भविष्‍य में चेंबर्स से लीकेज नहीं होंगा. नहीं तो भविष्‍य में नगरपालिकाओं की यह स्‍थिति नहीं है कि वह इतने सारे चेंबरों को बाद में रिपेयर कर पाएगी. चेम्बरों की बाद में रिपेयर कर पाएगी इससे सीपेज होगा इससे भविष्य में कोई हानि हो, पानी में मिल जाये ऐसी कोई घटना न हो, क्योंकि आये दिन इसकी शिकायत होती रहती है. साथ में मंत्री जी यह बता रहे हैं मैं मंत्री जी की बात से सहमत हूं, फिर भी आप वहां पर जायें आपने जरूर टीम भेजी होगी. लेकिन वहां के वार्ड पार्षद हो, या नगर-पालिका अध्यक्ष हो, या वहां के निवासी हो, किसी से भी पूछिये काम जो रिपोर्ट आई है उस हिसाब से नहीं हुआ है. एक भी स्थान पर कटर मशीन का उपयोग हुआ ही नहीं है. साथ में रजिस्ट्रेशन के काम तो बहुत ही खराब हैं. वहां ट्रेफिक भी इतना हो रहा है कि तो पहले एक गली पूरी कर लें उसके बाद अगला ले लें. जिधर जाएगी गाड़ी फिर आपको पल्टाकर वापस आना पड़ेगा.

          अध्यक्ष महोदयमंडलोई जी आप मंत्री जी को बता दें कोई प्रश्न बचा है.

          श्री राजन मंडलोईजी अध्यक्ष महोदय. श्री कैलाश कुशवाह जी

शिवपुरी जिले में खराब विद्युत व्यवस्था

[ऊर्जा]

9. ( *क्र. 3050 ) श्री कैलाश कुशवाहा : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                         (क) शिवपुरी एवं पोहरी विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्द्र कहां-कहां पर कितनी-कितनी क्षमता के हैं, कितने M.V.A. के कितने पावर ट्रान्सफार्मर लगे हुए हैं? उपकेन्द्रों से कितने 11 के.व्‍ही. फीडर कितनी-कितनी लम्बाई के निकले हुए हैं? वितरण केन्द्रवार एवं विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी दें, की कितने पावर ट्रान्सफार्मर ओवरलोडेड हैं? (ख) शिवपुरी में 33/11 के.व्‍ही. के विद्युत उपकेन्द्र भेड़फार्म में कितने पावर ट्रान्सफार्मर कितनी क्षमता के कब से स्थापित हैं? इस उपकेन्द्र से कौन-कौन से 11 के.व्‍ही. लाइन फीडर निकले हैं, इनकी अन्तिम छोर तक फीडरवार लम्बाई कितनी है? उपकेन्द्र से निकले सिटी फीडर की 11 के.व्‍ही. लाइन कब बिछाई गई थी? इसमें कितने पोल लोहे के और कितने सीमेन्ट के हैं, कितने टेढ़े एवं कितने टूटे हैं? जानकारी दें।   (ग) भेड़फार्म सिटी फीडर की 11 के.व्‍ही. लाइन कितने मकानों के ऊपर से कितनी उंचाई से निकली हैं? क्या रहवासियों को 11 के.व्‍ही. लाइन से जान-माल का खतरा है? यदि हाँ, तो उक्त लाइन सड़क किनारे कब तक शिफ्ट करके रहवासियों को जान-माल के खतरे से मुक्ति दिलाई जायेगी?   (घ) विधानसभा क्षेत्र-24 पोहरी के अन्तर्गत पोहरी एवं बैराड़ में कितने मकानों के ऊपर से कौन सी विद्युत लाइनें निकली हैं, उक्त लाइनों को मकानों के ऊपर से कब तक शिफ्ट किया जायेगा, जिससे जन-धन हानि होने की संभावना से बचाया जा सके?

ऊर्जा मंत्री ( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ) : (क) प्रश्‍नाधीन विधानसभा क्षेत्रों के अन्‍तर्गत स्‍थापित 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्रों एवं इन पर स्‍थापित पावर ट्रांसफार्मर की प्रश्‍नाधीन चाही गयी स्‍थानवार एवं क्षमतावार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। उक्‍त 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्रों से निर्गमित 11 के.व्‍ही. फीडरों का प्रश्‍नाधीन चाहा गया वितरण केन्‍द्रवार एवं विधानसभा क्षेत्रवार विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। उक्‍त स्‍थापित पावर ट्रांसफार्मरों में से अतिभारित पॉवर ट्रांसफार्मरों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) शिवपुरी में वर्तमान में भेड़फार्म नाम से कोई भी 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र स्‍थापित नहीं है। अत: प्रश्‍न नहीं उठता है। तथापि विद्यमान 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र खेरू होटल से निर्गमित 11 के.व्‍ही. सिटी फीडर (भेडफार्म फीडर) की लाइन लगभग 50 वर्ष पूर्व बिछाई गई थी, जिसमें 80 लोहे के पोल एवं 85 सीमेंट के पोल विद्यमान हैं एवं इनमें से कोई भी पोल टेड़े अथवा टूटी हुई अवस्‍था में नहीं है। (ग) 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र खेरू होटल से निर्गमित 11 के.व्‍ही. सिटी फीडर (भेडफार्म फीडर) का निर्माण लगभग 50 वर्ष पूर्व निर्धारित मानकों के आधार पर जमीन से सुरक्षित दूरी रखते हुये किया गया था। तदोपरान्‍त उक्‍त लाइन के नीचे कालान्‍तर में समय-समय पर रहवासियों द्वारा नियम विरूद्ध मकानों का निर्माण कराया गया। लाइन के नीचे बिना अनुमति निर्माण कराये जाने से मानक दूरी कम हुई है तथा मकानों की ऊंचाई अलग-अलग होने के कारण सटीक ऊंचाई का आकलन किया जाना संभव नहीं है। केन्‍द्रीय विद्युत प्राधिकरण, विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विद्युत आपूर्ति और सुरक्षा से संबंधित उपाय के लिये विनियम दिनांक 08.06.2023 को अधिसूचित किये गये हैं, जिनके अनुसार विद्युत अधोसंरचना में फेरबदल/शिफ्टिंग की आवश्‍यकता होने की स्थिति में फेरबदल/शिफ्टिंग की आपूर्तिकर्ता द्वारा आंकी गई लागत की राशि आवेदक/अन्‍य संबंधित संस्‍थाओं द्वारा जमा करने पर अथवा आवेदक द्वारा विद्युत अधोसंरचना विस्‍थापित करने हेतु स्‍वीकृत प्राक्‍कलन की 5 प्रतिशत राशि सुपरविजन चार्ज के रूप में वितरण कंपनी में जमा करते हुए स्‍वयं '' श्रेणी के ठेकेदार से, विद्युत अधोसंरचना के विस्‍थापन हेतु कार्यवाही की जा सकती है। (घ) पोहरी विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत वर्तमान में 11 के.व्‍ही. पोहरी सिटी फीडर की लाइन लगभग 82 मकानों के ऊपर से,11 के.व्‍ही. चकराना पंप फीडर की लाइन, 33 के.व्‍ही. गोवर्धन लाइन, 11 के.व्‍ही. झलवासा पंप लाइन, 11 के.व्‍ही. बूडदा पंप लाइन एवं 11 के.व्‍ही. ऐंचवाड़ा पंप फीडर की लाइन लगभग 99 मकानों के ऊपर से गुजरी हुई है। उपरोक्‍त लाइनों के शिफ्टिंग की कार्यवाही उत्‍तरांश (ग) में उल्‍लेखित प्रावधानों के अनुरूप की जा सकती है, जिस हेतु वर्तमान में निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

          श्री कैलाश कुशवाहअध्यक्ष महोदय मेरा प्रश्न क्र.3050 है.

          श्री प्रद्युम्नसिंह तोमरअध्यक्ष महोदय,उत्तर पटल पर रख दिया है.

          श्री कैलाश कुशवाहअध्यक्ष महोदय माननीय मंत्री जी ने बताया है कि सिटी फीडर की लाईन लगभग 50 वर्ष पूर्व में बिछाई गई थी जिसमें 80 लोहे के एवं 85 सीमेंट के खंबे लगे हुए थे. यह लाईन उस समय 500 कनेक्शनों के लिये बछाई गई थी. लाईन पर खींचे गये तार 50 वर्ष पुराने हैं इस समय ढाई हजार कनेक्शन जिससे लाईन बार बार बंद हो रही है. लाईन के पुराने तार कब तक बदले जायेंगे? पूरे शिवपुरी जिले में काफी कम कनेक्शन के हिसाब से लाईनें बिछाईं गई थीं, लेकिन आज जनसंख्या बढ़ने के कारण पुरानी लाईनों पर लोड है बार बार तारें टूट जाती हैं जिससे जनहानि का नुकसान होने की संभावना है.

          श्री प्रद्युम्नसिंह तोमर अध्यक्ष महोदय माननीय सदस्य को मैं बताना चाहूंगा कि जो 50 साल पुरानी लाईनें हैं उनका समय समय पर मेंटेनेंस होता है आगे भी मेंटनेंस होगा, यह सतत प्रक्रिया है होगा. अगर तारों की क्षमता कम होगी तो उसकी मांग के अनुरूप तार बदले भी जायेंगे उसको मैं दिखवा भी लूंगा अगर उसमें आवश्यकता होगी तो तार भी बदले जायेंगे.

          श्री कैलाश कुशवाहअध्यक्ष महोदय बैराड़, पोहरी, बेसरावद ऐसे कई गांव हैं जहां से काफी शिकायतें आ रही हैं. इसके अलावा मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि किसानों को काफी समय पहले कुछ ट्यूबवेल बंद हो गये. किसान विभाग में आवेदन भी लगा देता है कि ट्यूबवेल  बंद है, लेकिन कहीं न कहीं उनको आज बड़े बड़े बिल लाकर लूटने की तैयारी की जाती है. लोक अदालत के नाम पर परिवारों को चक्कर लगवाते हैं फिर समझौता हो जाता है. इसमें मेरा यह कहना है कि किसानों के पूर्व में ट्यूबवेल बंद हो गये हैं उनके बिल जीरो करके उनका हमेशा के लिये कनेक्शन काटा जाये जिससे किसान को अपनी जमीन न बेचनी पड़े.

          श्री प्रद्युम्नसिंह तोमर अध्यक्ष महोदय यह प्रश्न सम्मानीय सदस्य का नहीं है. परन्तु मैं कहना चाहता हूं कि अभी हमने समाधान योजना विभाग के द्वारा लाई है आप उस योजना का लाभ लें. अगर ऐसा कोई पम्प आप कोई बताएंगे जो लंबे समय से सूखे हुए हैं तो उसकी जांच करवा ली जायेगी तथा उसका निराकरण किया जायेगा.

          श्री कैलाश कुशवाहअध्यक्ष महोदय जिन ट्रांसफार्मरों पर ज्यादा लोड है उनका सर्वे करवाकर ट्रांसफार्मरों का लोड बढ़ाया जाये जिससे किसानों को कोई दिक्कत न हो.

         

          अध्यक्ष महोदय, अध्यक्ष महोदयश्री अनुरूद्ध (माधव) मारू जी

 

गौशालाओं के संबंध में

[पशुपालन एवं डेयरी]

10. ( *क्र. 1813 ) श्री अनिरुध्द (माधव) मारू : क्या राज्‍य मंत्री, पशुपालन एवं डेयरी महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्य प्रदेश में कितनी गौशालाएं संचालित हो रही हैं? जिलावार जानकारी उपलब्ध कराई जावे। (ख) विगत 5 वर्षों में मध्यप्रदेश में कितनी गौशालाओं को शासकीय अनुदान प्रदान किया गया है? जिलावार जानकारी उपलब्ध कराई जावे। (ग) प्रत्येक गौशाला में कितने गोवंश हैं और उनकी गणना किसके द्वारा की जाती है एवं अनुदान हेतु गोवंश की संख्या किस अधिकारी के द्वारा प्रमाणित की जाती है, जिसके आधार पर अनुदान दिया जाता है?                                 (घ) अनुदान प्राप्त गौशालाओं आदि में ट्रैकिंग किस प्रकार की जा रही है? क्या ट्रैकिंग कोई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण के माध्यम से की जा रही है या मैनुअल तरीके से की जा रही है?

राज्‍य मंत्री, पशुपालन एवं डेयरी ( श्री लखन पटैल ) : (क) प्रदेश में 3040 गौशालाएं संचालित हैं, जिनमें से पंजीकरण के प्रावधानों के अनुसार 3127 गौशालाएं मध्‍यप्रदेश गौसंवर्धन बोर्ड अंतर्गत पंजीकृत हैं। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) गौशालाओं में गौवंश संख्‍या की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। गौशालाओं में उपलब्‍ध गौवंश संख्‍या की गणना प्रतिदिन के आधार पर संबंधित गौशाला के संचालक द्वारा M.P. Gaushala App में दर्ज की जाती है। उक्‍त गौवंश संख्‍या का सत्‍यापन प्रत्‍येक माह में संबंधित क्षेत्र के पशु चिकित्‍सा सहायक शल्‍यज्ञ/पशु चिकित्‍सा विस्‍तार अधिकारी द्वारा किया जाता है। सत्‍यापित गणना का अनुमोदन जिला उप संचालक द्वारा जिला गौपालन एवं पशुधन संवर्धन समिति के अध्‍यक्ष, जो कि संबंधित जिले के कलेक्‍टर होते हैं, से कराया जाकर App में दर्ज की जाती है। उक्‍त अनुमोदित गौवंश संख्‍या के आधार पर बोर्ड द्वारा D.B.T. Portal के माध्‍यम से गौशालाओं के बैंक खातों में अनुदान राशि मासिक आधार पर अंतरित की जाती है। (घ) अनुदान प्राप्‍त गौशालाओं में उपलब्‍ध गौवंश की ट्रैकिंग मेनुअल तरीके से प्रति गौवंश की गणना करके की जाती है.

          श्री अनुरूद्ध (माधव) मारूअध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 1813

          श्री लखन पटेलअध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.

          श्री अनुरूद्ध (माधव) मारूअध्यक्ष महोदय, प्रदेश में गौसेवा को लेकर, दूध उत्पादन को लेकर एक वृहद स्तर पर काम चल रहा है. निश्चित रूप से मध्यप्रदेश में इसका परिणाम अच्छा होगा. मैं मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि मेरी फ्रक्वेशन की प्रक्रिया क्या है ? उसको कौन सम्पन्न करता है ? पशुओं की ट्रेकिंग के लिये कोई अलग से डिवाईस वगैरह है जिससे आप कंफर्म कर सकते हैं कि या पशुओं की ट्रेकिंग कर सकते हों इसके लिये कोई व्यवस्था हो तो बतायें ?

                                                                                       


 

          श्री लखन पटेल-- अध्‍यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्‍य ने पूछा है कि गौवंश की गणना किस तरीके से करते हैं, तो मैं बताना चाहता हूं कि हमारी इस गणना की प्रक्रिया त्रिस्‍तरीय होती है, हमारे यहां विभाग ने एक गौ पालन एप तैयार किया है, इस एप में गौ शाला के संचालक प्रति दिन उस पर संख्‍या अपलोड करते हैं और महीने के अंत तक कर देते हैं, उसके बाद 7 से 14 तारीख में उस एरिये का डॉक्‍टर उसको वेरिफाई करता है और उस वेरिफिकेशन के बाद उप संचालक जितनी उनने उपस्थिति दी है, उसके दस प्रतिशत का वेरिफिकेशन करके वह कलेक्‍टर के माध्‍यम से फिर हमारे यहां आता है, तो उसका डी.बी.टी. के माध्‍यम से भुगतान किया जाता है.           अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको बताना चाहता हूं कि हमने एक पत्र केंद्र सरकार को लिखा था, जिसमें कि अभी आप देखते हैं कि गौ माता का जो टैग है, वह पीले कलर का है, तो निराश्रित गौवंश के लिये हमने कहा था कि दूसरे रंग का टैग दिया जाये, तो वहां से अनुमति मिल गई है और जो अब निराश्रित गौवंश और पालतू गौवंश का अलग-अलग कलर का टैग होगा, जिससे हम एक तरीके से चिन्हि्त कर सकेंगे कि वह कौन सी गाय है निराश्रित हैं या यह है.

          अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने दूसरी बात कही कि कोई ट्रेकिंग का सिस्‍टम है क्‍या, तो अभी तो कोई ट्रेकिंग का सिस्‍टम ऐसा नहीं है, अभी तो मेन्‍युअली उसको देखते हैं, परंतु यह बात जरूर है कि हमने अभी उस पर एक चिप जी.पी.एस की तैयार करवाई है, जिससे कि हम गौशालाओं में जितनी गाय हैं या जो भी गौवंश है, उसमें स्‍थापित कर देंगे और वह ऑटोमेटिकली रोज के रोज उसकी अटेंडेंस होगी, जिसका अभी डेमोंस्‍ट्रेशन होना शेष है, टेंडर प्रक्रिया हो गई है, डेमोंस्‍ट्रेशन जैसे ही हो जायेगा और सक्‍सेस होगा, तो हम उसको लागू कर देंगे, जिससे आने वाले समय में सौ प्रतिशत जितनी भी होगी, वह रोज की रोज उन गौ माताओं की अटेंडेंस होगी.

          श्री अनिरूद्ध माधव मारू -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि स्‍वावलंबी गौशालाओं के संबंध में और साथ में जो

अशासकीय गौशालाएं ट्रस्‍टों द्वारा संचालित होती हैं, उन सभी को उन्‍नत करने के लिये कोई योजना और साथ में जिन गौशालाओं के अभी तक विद्युत कनेक्‍शन नहीं हुए हैं, उनके विद्युत कनेक्‍शन कब तक हो जायेंगे? उसके लिये कोई कार्य योजना बनी हो तो जानकारी दें.

          श्री लखन पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सदस्‍य को बताना चाहता हूं कि आप संभाग का जानना चाह रहे हैं या पूरे प्रदेश का जानना चाह रहे हैं.

          श्री अनिरूद्ध माधव मारू -- आप उज्‍जैन संभाग का ही बता दें.

          श्री लखन पटेल -- उज्‍जैन संभाग में अभी तक कुल 604 गौशालाएं पंजीकृत हैं, जिसमें से 591 जारी हैं, आपके जिले नीमच में 45 पंजीकृत हैं, जिसमें से 44 संचालित हैं, आपने स्‍वावलंबी गौशाला का पूछा है, तो आपके उज्‍जैन संभाग में कुल 7 जिले हैं और 7 जिलों में सातों जगह स्‍वावलंबी गौशालाओं के लिये चिन्हित हो गई हैं, जिसमें से चार जगह आपके मंदसौर, रतलाम, शाजापुर और देवास चार जिलों में भूमि आवंटित हो गई है और आगर मालवा, उज्‍जैन और नीमच यहां पर चिन्ह्ति हो गई है, तो इनकी प्रक्रिया बहुत जल्‍दी हम पूरी कर लेंगे और जहां तक विद्युत कनेक्‍शन का सवाल आपने किया है, तो वह पंचायत विभाग द्वारा किया जाता है, चूंकि यह गौशालाएं जो बनाई गईं थीं, यह पंचायत विभाग द्वारा की गई थी, तो जहां पर नहीं हैं, अगर ऐसे आप अवगत करा देंगे तो पंचायत विभाग से बात करके और उसको पूरा कराने का काम हम करेंगे. वैसे आप अगर कोई जमीन की बात कहें तो जमीन भी मैं बता सकता हूं कि कितनी जमीन आपके यहां आवंटित हुई है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप उनसे पूछिये नहीं, आप अपना बतायें.

          श्री अनिरूद्ध माधव मारू -- जितनी प्रायवेट गौशालाएं ट्रस्‍टों द्वारा संचालित हो रही हैं, अनुदान प्राप्‍त नहीं करती हैं, उनको उन्‍नत करने के लिये भी क्‍या कोई योजना विभाग द्वारा बनाई गई है, ताकि उन जमीनों का बड़ा उपयोग किया जा सके, क्‍योंकि ट्रस्‍टों के पास जमीने बहुत बड़ी-बड़ी हैं, लेकिन अपेक्षित गौवंश वहां नहीं हैं, क्‍योंकि उनके पास सुविधाएं नहीं है, तो उनको भी अपग्रेड करने के लिये भी आपने कोई योजनाएं बनाई हैं  ?

          श्री लखन पटेल -- ट्रस्‍ट के लिये तो नहीं है, लेकिन अगर ट्रस्‍ट संचालित करेगा तो हम जो सरकार 40 रूपये देती है, वह निश्चित रूप से आपके जितने भी गौवंश होंगे, उनको भी देने का काम करेंगे.

          श्री अनिरूद्ध माधव मारू -- माननीय मंत्री जी, धन्‍यवाद.                                                

                                                                                               

                                                                            


 

            सड़कों एवं निर्माणाधीन पुलों के निर्माण में अनियमितता

[लोक निर्माण]

11. ( *क्र. 2975 ) श्री मधु भगत : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वित्तीय वर्ष 2023-24 से प्रश्‍न दिनांक तक बालाघाट जिले में कुल कितनी सड़कों एवं पुलों (Bridges) के निर्माण की स्वीकृति दी गई है? इनमें से कितने कार्य पूर्ण हो चुके हैं और कितने निर्माणाधीन हैं? कार्यवार नाम, एजेंसी का नाम एवं स्वीकृत राशि का विवरण देवें। (ख) क्या विभाग को यह शिकायतें प्राप्त हुई हैं कि निर्माणाधीन पुलों का निर्माण अनुमोदित ड्रॉइंग और डिजाइन (Approved Drawing & Design) के अनुसार नहीं किया जा रहा है? क्या पुलों के निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्री (कँक्रीट ग्रेड, सरिया आदि) की गुणवत्ता की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी (Third Party Inspection) से कराई गई है? यदि हाँ, तो रिपोर्ट का विवरण दें? (ग) जिले में सड़कों के पैच वर्क और संधारण में हो रही घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग पर विभाग की क्या निगरानी प्रक्रिया है? क्या गुणवत्ताविहीन कार्यों के कारण पहली बारिश में ही पैच वर्क उखड़ रहे हैं? (घ) क्या सरकार बालाघाट जिले में निर्माणाधीन पुलों के स्ट्रक्चरल ऑडिट (Structural Audit) और सड़कों की गुणवत्ता की जांच हेतु मुख्यालय स्तर से एक विशेष तकनीकी जांच दल गठित करेगी? यदि पुल/सड़कें ड्रॉइंग के विपरीत या घटिया पाई जाती है, तो संबंधित एस.डी.. (S.D.O.), इंजीनियर और ठेकेदार पर क्या दंडात्मक कार्यवाही की जावेगी?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री राकेश सिंह ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' एवं 'अ-1' अनुसार है। (ख) जी नहीं, गुणवत्ता की जाँच पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' के स्तंभ 8 अनुसार है, रिपोर्ट पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1 से 7 अनुसार है। (ग) सड़कों के पेंच वर्क एवं संधारण कार्य में उपयोग होने वाली सामग्री की प्रयोगशाला में जांच उपरांत टेस्ट रिजल्ट मानक अनुसार प्राप्त होने पर ही सामग्री का उपयोग किया जाता है। जी नहीं। (घ) जी नहीं। कार्य के मानकों के अनुसार किया जाता है। अतः शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

 

          श्री मधु भगत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक  2975 है.

          श्री राकेश सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर सभा पटल पर रख दिया गया है.

          श्री मधु भगत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी का जवाब संतोषजनक आया है. मैंने बालाघाट जिले में परसवाड़ा के अंदर कितनी सड़कें निर्माणाधीन हैं, आगे और कितनी मुझे प्राप्‍त होंगी, उसकी जानकारी उन्‍होंने मुझे दे दी है जिसमें स्‍वीकृति के तौर पर प्रश्‍न के बाद बजट में वह सड़कें जुड़ गई हैं, लेकिन जो अस्‍वीकृत सड़कें हैं, मैं चाहूंगा माननीय मंत्री जी से सीता डोंगरी से मदनपुर बोदा मार्ग 2 किलोमीटर, एनएच सड़क से हिरमूटोला तक कटेगांव पहुंच मार्ग पुल निर्माण कार्य 5 किलोमीटर, मानपुर से कतौली पहुंच मार्ग लंबाई 6 किलोमीटर, मुरझर से राघोटोला प्रतापपुर सड़क मार्ग 5 किलोमीटर, बुढि़यागांव से अलीपुर मार्ग 3 किलोमीटर, ग्राम सोनखार से कोटा पहुंच मार्ग 6 किलोमीटर, जरैरा से उमरधौनी सड़क मार्ग 7 किलोमीटर यह सड़कें और जोड़ दी जायें तो बड़ी मेहरबानी होगी और जो सड़कें आपने दी हैं, खोखर डूरा से पिंडरई, देवरी सुनेतरा इसके लिये हम आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देते हैं. इन सड़कों को कब तक जोड़ने की प्रक्रिया होगी यह बता दें.

          श्री राकेश सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य की चिंता अपने विधान सभा क्षेत्र में विकास को लेकर है, जो स्‍वाभाविक है. लेकिन हम सभी एक प्रक्रिया से बंधे हुये हैं, जब भी इस तरह की कोई मांग आती है तो सबसे पहले उसका परीक्षण होता है क्‍योंकि सड़कों के स्‍तर पर भी अलग-अलग ग्रामीण विकास विभाग से लेकर और अन्‍य सड़कें भी होती हैं. परीक्षण के उपरांत ही यह तय किया जाता है कि वह विभाग सड़क को बना सकता है या नहीं और फिर उसमें उपलब्‍धता धनराशि की प्राथमिकता यह सारे विषय साथ में जुड़े होते हैं, लेकिन उन्‍होंने मांग की है, विभाग उसका परीक्षण जरूर करेगा.

          श्री मधु भगत--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं धन्‍यवाद देता हूं मंत्री महोदय को, लेकिन यह प्रस्‍ताव बालाघाट जिले से भेज दिये गये थे जो मेरी वर्ष 2023, 2024, 2025 लगातार की मांग हैं, इनमें से जो स्‍वीकृत हुये वह जानकारी से भी मैंने आपको अवगत कराया है मंत्री महोदय, लेकिन यहां से जानकारी पूरी तरह से बालाघाट जिले को या बालाघाट जिले से भोपाल कार्यालय में कहीं न कहीं अवरोध है अन्‍यथा इन रोडों को इतना लंबा समय नहीं लगता, दो, ढाई साल बीत चुके हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके आदेश से मैं मंत्री महोदय से एक प्रश्‍न और करना चाहता हूं, चूंकि यह प्रश्‍न मेरा इसके पूर्व में इसी सत्र में जब आपका प्रश्‍न था उस समय मैं अतारांकित हो गया था, वह सड़क है परसवाड़ा से बैहर मार्ग 31 किलोमीटर जो लगातार इस सदन के अंदर मैं उसकी जानकारी आपको देता रहा हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय--  मधु भाई, आप ऐसा सप्‍लीमेंट्री करो कि उत्‍तर भी आ जाये, एक मिनट बचा है. समय का ध्‍यान रखो.

          श्री मधु भगत--  जी अध्‍यक्ष जी, माननीय मंत्री जी, मुझे बस आश्‍वासन कर दें कि वह मार्ग तत्‍काल प्रभाव से परसवाड़ा से बैहर का मार्ग हम तत्‍काल ले लेंगे और जो मार्ग छूटे हुये हैं, पुल, पुलिया उनको आप परसबाड़ा के जितने भी हैं, उनको आप सम्मिलित करेंगे.

          श्री राकेश सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने बैहर, परसवाड़ा, लामटा मार्ग के बारे में अभी प्रश्‍न किया है. यह लगभग 51 किलोमीटर की सड़क है और यह एडीव्‍ही-6 योजना के अंतर्गत काफी पहले निर्मित हुई थी, उस समय इसमें से लगभग 20 किलोमीटर का निर्माण हुआ था और शेष 31 किलोमीटर चूंकि ठीक स्थिति में थी इसलिये उसका निर्माण नहीं हुआ था, लेकिन कुल मिलाकर समय भी कम है और उत्‍तर विस्‍तृत है, लेकिन मैं माननीय सदस्‍य को आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि इस सड़क को विभाग ने अपनी प्रा‍थमिकता में लिया है और उसके लिये लगभग 26 करोड़ रूपये की राशि की स्‍वीकृति की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है.

          श्री मधु भगत-- बहुत-बहुत धन्‍यवाद, मंत्री महोदय.

 

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)


 

12.00 बजे                         नियम 267-क के अधीन विषय

            अध्यक्ष महोदय -

 

                                                          सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.

          अब मैं सूचना देने वाले सदस्यों के नाम पुकारूंगा:-

         

 

 

           

                                                          शून्यकाल में मौखिक उल्लेख  

          श्री सोहनलाल बाल्मीक - अध्यक्ष महोदय,महत्वपूर्ण है हमारे विधायक जण्डेल जी पर प्रकरण बनाया गया है. यदि कोई आंदोलन करे या कोई विरोध प्रदर्शन करे तो विधायकों के ऊपर  यदि प्रकरण बन जाये. बाबू जण्डेल पर 2 केस बन गये ऐसे अन्य विधायकों के ऊपर भी लगातार केस बन रहे हैं. हम लोगों के ऊपर मंशा ठीक नहीं है कि हम लोग अपनी बात रखें. रोड पर खड़े हों. तो प्रकरण बन जाएं.

          (..व्यवधान..)

          श्री सचिन यादव - अध्यक्ष महोदय,

          (..व्यवधान..)

          श्री पंकज उपाध्याय - मध्यप्रदेश की विधान सभा का विधायक ही सुरक्षित नहीं रहेगा विधायकों के ऊपर झूठे प्रकरण बनेंगे.

          अध्यक्ष महोदय - एक मिनट पंकज जी. सोहन जी(बाबू जण्डेल के अपने आसन से आगे आने पर) बाबू भाई आप अपनी सीट पर जाओ. पंकज जी बाबू जण्डेल जी कल मुझे मिले थे. उनकी पंकज जी  की शून्यकाल की सूचना में यही विषय है और यह विषय उठ गया है और यह विषय कार्यवाही के लिये विभाग को भेजा जा रहा है. (.व्यवधान..) विधान सभा में  हम उल्लेख कर सकते हैं विधान सभा में विषय को उठा सकते हैं. नियम प्रक्रिया के अंतर्गत ही सदन चल रहा है. शून्यकाल की सूचना के माध्यम से यह विषय आ गया है. अब यह नीचे जायेगा. आप कोई और नियम के  अंतर्गत देते तो मैं उस पर भी विचार करता. शून्यकाल में बात आई है तो शून्यकाल की सूचना पढ़ी गई. मैंने उसको अनुमति दी है.

 

                                           पत्रों का पटल पर रखा जाना

          (1)(क)मध्‍यप्रदेश वेअरहाउसिंग एण्‍ड लॉजिस्‍टिक्‍स कार्पोरेशन अधिनियम, 1962 (क्रमांक 58 सन् 1962) की धारा 31 की उपधारा (11) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश वेअरहाउसिंग एण्‍ड लॉजिस्टिक्‍स कार्पोरेशन का इक्‍कसीवां वार्षिक प्रतिवेदन एवं हिसाब-पत्रक वित्‍तीय वर्ष 2023-2024

(ख) राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 (क्रमांक 20 सन् 2013) की धारा 16 की उपधारा (6) (च) एवं मध्‍यप्रदेश खाद्य सुरक्षा नियम, 2017 के नियम 15 के उपनियम (5) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश राज्‍य खाद्य आयोग, भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2025-2026

 

          (..व्यवधान..)

अध्यक्ष महोदय - शून्यकाल में बात आई है तो शून्यकाल की सूचना पढ़ी गई. मैंने उसको अनुमति दी. आज सदन में बहुत काम है. आज काफी ध्यानाकर्षण लिये हैं.

          श्री महेश परमार - अध्यक्ष महोदय,मध्यप्रदेश में दिव्यांग अनाथ बच्चों के आश्रम युगपुरुष इन्दौर और दोहाधा उज्जैन में. 25-30 मौतें हुईं.

          अध्यक्ष महोदय - कृपया बैठें.(..व्यवधान..) आपकी बात से मैं असहमति व्यक्त नहीं कर रहा हूं. मुझे दोनों सदस्यों ने मिलकर कहा था वह शून्यकाल की सूचना में आज उठाया गया है मैंने उसकी अनुमति दी है. विषय के प्रति सदन का ध्यान आकर्षित हुआ है.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक - जांच कराकर प्रकरण वापस करवा दें सरकार के माध्यम से.

          अध्यक्ष महोदय - अरे भाई नीचे जाने तो दो. मैं आश्वासन नहीं दे सकता. शून्यकाल में सीधे तो जवाब आता नहीं है. सरकार जवाब दे सकती है. श्री चेतन्य काश्यप जी.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक -   हम सदन से बर्हिगमन करते हैं.

 

 

 

 

 

12.04 बजे                                         बहिर्गमन

          (श्री सोहनलाल बाल्मीक के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के श्री बाबू जण्डेल,श्री पंकज उपाध्याय,श्री महेश परमार सहित कई सदस्यों ने केस वापस कराने की मांग पर सदन से बर्हिगमन किया.

                                      पत्रों का पटल पर रखा जाना(क्रमश:)

(2)कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार डी.एम.आई.सी.पीथमपुर जल प्रबंधन लिमिटेड का 9वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

 

(3) मध्‍यप्रदेश विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 1973 (क्रमांक 22 सन् 1973) की धारा 47 की अपेक्षानुसार अवधेश प्रताप सिंह विश्‍वविद्यालय, रीवा का 57वां वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025


 

12.05 बजे                       नियम 138 (1) के अधीन ध्‍यान आकर्षण

 

                                           ध्‍यानाकर्षण से संबंधित अध्‍यक्षीय घोषणा           

              मेरा सभी सदस्‍यों से अनुरोध है कि ध्‍यानाकर्षण सूचना आपकी ली गई है. सूचना पढ़ें और उत्‍तर भी आए. लेकिन पूरक प्रश्‍न बहुत सीमा में करें क्‍योंकि 6 ध्‍यानाकर्षण पूरे करने हैं और आगे बजट की प्रक्रिया भी चलना है. आज अशासकीय संकल्‍पों का दिन है, तो अशासकीय संकल्‍प भी चर्चा में रहेंगे. इसलिए एक-एक प्रश्‍न करें तो बहुत अच्‍छा है. श्री प्रदीप लारिया जी, अपनी सूचना पढ़ें.

 

 

(1)     नरयावली विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत निर्माणाधीन कड़न सिंचाई परियोजना की 

         प्रशासकीय स्‍वीकृति शासन स्‍तर से लंबित होने से परियोजना कार्य अपूर्ण रहना.

 

            इंजीनियर प्रदीप लारिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूँ आपको कि इस बहुत के महत्‍व के विषय पर मेरी ध्‍यानाकर्षण सूचना को स्‍वीकृति प्रदान की है.

            माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

            राज्‍य मंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण (श्रीमती कृष्‍णा गौर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

          अध्‍यक्ष महोदय - प्रदीप जी, संक्षिप्‍त में एक प्रश्‍न करें.

          इंजी. प्रदीप लारिया -  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहूँगा, चूंकि नरयावली विधान सभा का जो सागर ब्‍लॉक है, वह मध्‍यप्रदेश का सबसे ड्राय ब्‍लॉकों में है, एकमात्र मध्‍यम सिंचाई परियोजना कड़ान सिंचाई परियोजना है और वर्ष 2017 में इसकी स्‍वीकृति हो गई थी, इसको 9 वर्ष हो गए हैं. मेरा निवेदन है कि इसमें कोई प्रोजेक्‍ट की कॉस्‍ट नहीं बढ़ी है, केवल जो गाइड बण्‍ड का प्रोविजन किया गया था, मुझे लगता है कि अपस्‍ट्रीम में पानी भरने के कारण लोगों के लिये यह खतरा है कि आने वाले समय में जब पानी भरेगा, तो उनके गांवों तक पानी जायेगा, उससे न केवल खेती खराब होगी, बल्कि जनहानि की भी संभावना है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं ज्‍यादा लम्‍बी बात नहीं करना चाहता हूँ, क्‍योंकि विभाग भी इसके लिये सकारात्‍मक है, विभाग की भी यह इच्‍छा है कि यह योजना पूर्ण हो क्‍योंकि इसमें 400 करोड़ रुपये लगने के बाद भी जो 12,383 हेक्‍टेयर जमीन सिंचित होनी चाहिए थी, केवल 1200 हेक्‍टेयर जमीन सिंचित हो पा रही है. हमारे यहां बुन्‍देलखण्‍ड में एक कहावत है कि 'नौ दिन चले अढ़ाई कोस'. मेरा निवेदन केवल इतना ही है कि साधिकार समिति की 4 बैठक हो गई हैं और बिना इसके पुनरीक्षित शासकीय प्रशासकीय स्‍वीकृति के बिना यह काम पूरा नहीं हो सकता है. मेरा निवेदन है कि क्‍योंकि इसकी फिर एक बार दिनांक 31 मार्च को, जो इसमें केवल मुआवजा की राशि बढ़ रही है, दिनांक 31 मार्च को फिर जमीन की कीमत बढ़ जायेगी और मुआवजा फिर बढ़ जायेगा. मेरा निवेदन केवल इतना ही है कि 4 साधिकार की बैठक हो गई हैं, दिनांक 31 मार्च के पहले साधिकार समिति से क्‍या इसकी स्‍वीकृति प्रदान कर दी जायेगी ?

          श्रीमती कृष्‍णा गौर - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी और माननीय जल संसाधन मंत्री जी के संज्ञान में यह पूरा विषय है और विभाग क्षेत्र की जनता एवं किसानों के हित के लिए प्रतिबद्ध है तथा विभाग इसे बहुत गंभीरता से भी ले रहा है. परियोजना का पूर्ण लाभ कृषकों को उपलब्‍ध कराये जाने के साथ ही प्रभावित ग्रामों की पूर्ण सुरक्षा हेतु विभाग दृढ़-संकल्पित है. परियोजना के डूब क्षेत्र से प्रभावित ग्राम पथरिया हाट की सुरक्षा एवं विस्‍थापन की स्थिति में होने वाली कठिनाइयों एवं उससे पड़ने वाले वित्‍तीय भार को दृष्टिगत रखते हुए प्रस्‍ताव में बार-बार पुनरीक्षण की स्थिति हुई. कड़ान मध्‍यम सिंचाई परियोजना के प्राक्‍कलन को पुनरीक्षण किया जाकर साधिकार समिति की आगामी बैठक में निराकरण हेतु प्रस्‍तुत किया जाना प्रस्‍तावित है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को इस बात का विश्‍वास दिलाती हूँ कि इस पुनरीक्षित प्रस्‍ताव को साधिकार समिति की आगामी बैठक में शीघ्रातिशीघ्र प्रस्‍तुत करके इस कार्य को पूर्ण कराने हेतु आवश्‍यक निर्णय लिये जायेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय - ठीक है. (प्रदीप जी के अपने आसन पर खड़े होकर बोलने पर) बस प्रदीप जी, प्‍लीज, प्‍लीज.

          इंजी. प्रदीप लारिया -  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, .......

          अध्‍यक्ष महोदय -  प्‍लीज, प्‍लीज. मैंने पूर्व में ही यह आग्रह किया था कि आज 6 ध्‍यानाकर्षण हैं, इसलिए एक-एक प्रश्‍न करें. मंत्री जी ने भी विस्‍तृत उत्‍तर दिया है, आपने भी विस्‍तार से अपनी बात कही है. यादवेन्‍द्र सिंह जी.

          इंजी. प्रदीप लारिया -  मैं मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय - धन्‍यवाद मत दो, लेकिन बैठ जाओ. (हंसी) प्‍लीज, प्‍लीज, प्‍लीज. यादवेन्‍द्र सिंह जी.

          इंजी. प्रदीप लारिया -  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या 31 मार्च के पहले इसको स्‍वीकृति प्रदान कर दी जायेगी ? 

          अध्‍यक्ष महोदय - यादवेन्‍द्र सिंह जी, आप अपनी ध्‍यान आकर्षण की सूचना पढ़ें.

 

 

12.14 बजे                         

(2)  टीकमगढ़ जिले में बिगड़ती कानून व्‍यवस्‍था से उत्‍पन्‍न स्थिति .

                   श्री यादवेन्‍द्र सिंह (टीकमगढ़) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 


 

          राज्‍यमंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण (स्‍वतंत्र प्रभार) (श्रीमती कृष्‍णा गौर)-                       अध्‍यक्ष महोदय,

                                                

          अध्‍यक्ष महोदय-- यादवेन्‍द्र सिंह जी प्रश्‍न बड़ा कर लें, लेकिन एक ही करें.

          श्री यादवेन्‍द सिंह‍-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, टीकमगढ़ नगर में अभी चार दिन पहले पूर्व मुख्‍यमंत्री उमा भारती हैं उनकी बहू ने शिकायत की है कि हमारे घर पर नकाबपोश आए और धमकी देकर चले गये. उसके पहले एक पत्रकार के साथ मारपीट हुई और पत्रकार की पत्‍नी के साथ मारपीट हुई. एक वकील के घर में उनकी फोरव्‍हीलर गाड़ी रखी हुई थी उसमें आग लगा दी और उनके घर के ऊपर पथराव हुआ. इसे कानून व्‍यवस्‍था की बहुत अच्‍छी स्थिति तो नहीं कह सकते हैं? यह हाल है शहर का इसके अलावा जितने थाना प्रभारी हैं जहां पर टीआई रैंक के अधिकारी पदस्‍थ होना चाहिए वहां पर इंस्‍पेक्‍टर रैंक के अधिकारी पदस्‍थ हैं, एसआई रैंक के आदमी पदस्‍थ हैं तो जिन टीआई लोगों को आप लाइन अटेच किये हुए हो उनको आप थाने क्‍यों नहीं देते? वरिष्‍ठों को आप लाइन अटेच करे हो, उनसे दूसरे काम ले रहे हो और थानेदारों से आप थाने चलवा रही हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तीसरी बात यह है कि जैसे ही दो बजते हैं, दो बजे के बाद सारे थानों की पुलिस वसूली करने के लिए, वाहनों की चैकिंग करने के लिए रोड पर आ जाती है. जब हमने उनसे बात की कि आप रोज के रोज रोड पर चैकिंग करने के लिए खड़े हो जाते हैं. अभी शादियों का सीजन है, छोटे-छोटे बच्‍चे, महिलाएं, मोटरसायकिल खड़ी करके एक तरफ खड़े हो जाते हैं. मैंने उनसे निवेदन किया तो वह सुप्रीम कोर्ट का हवाला देते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं इसलिए हमें तो चालान करना है. इस तरीके से वहां के थाना प्रभारी कानून व्‍यवस्‍था की तरफ ध्‍यान नहीं दे रहे हैं और वह केवल वसूली के काम में लगे हुए हैं. (XX) तो कानून व्‍यवस्‍था की स्थिति को अच्‍छा तो नहीं कहेंगे?

          अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह रूपेश जैन एक पत्रकार हैं. उसके घर पर दो घंटे तक तांडव होता रहा है. उसका पूरा घर गोबर से पोत दिया, उसके घर में घुस गये, उसकी औरतों के साथ मारपीट की और पुलिस वाले शहर के अंदर खड़े-खड़े देखते रह गये. मैं समझता हूं कि यह कानून व्‍यवस्‍था की सबसे विकराल स्थिति है. अगर इसके ऊपर माननीय मंत्री जी ने ध्‍यान नहीं दिया तो मैं नहीं समझता कि मेरी स्‍वयं की 181 लगी हुई है मुख्‍यमंत्री जी के पास मेरे नाम से. उसको 1 हजार दिन से ऊपर हो गये. यह मुख्‍यमंत्री जी का विभाग है और 1 हजार दिन में अभी तक किसी के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं हुई. किसी की उसमें गिरफ्तारी नहीं हुई. किसी के ऊपर कार्यवाही नहीं हुई. मैं समझता हूं कि हमारी 181 का यह आलम है तो फिर समझ लो कि आम आदमी का तो भगवान ही मालिक है. उनके साथ क्‍या होता होगा यह तो आप स्‍वयं सोच सकते हैं. हमारा निवेदन यह है कि आप वहां पर वरिष्‍ठ अधिकारियों को भेजकर जांच कराएं. जिन थानों में थाना प्रभारी, टीआई रैंक के अधिकारी नहीं हैं वहां पर टीआई रैंक के अधिकारी भेजें. अगर वहां कमी है तो दूसरे लोगों को वहां पर पदस्‍थ करें और तीसरी बात यह है कि ऐसे निकम्‍मे अधिकारियों को वहां से तत्‍काल हटायें. उनके हटाये बिना वहां पर कार्यवाही नहीं हो सकती है.

            श्रीमती कृष्णा गौर -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने ध्यान आकर्षित कराया है कि थानों में पदस्थ पुलिस के अधिकारी पुलिस चेकिंग के नाम पर बैरिकेट्स लगाकर वसूली करते हैं. मैं बताना चाहूंगी कि आमजन द्वारा यातायात नियमों का पालन सुनिश्चत हो इस हेतु लगातार हेलमेट और सीट बेल्ट के संबंध में नियमित रुप से चेकिंग करवाई जाती है. माननीय सदस्य ने इस दिशा में हमारा ध्यान आकर्षित किया है कि शाम के समय में थाने खाली रहते हैं और सारा पुलिस का अमला सड़कों पर होता है तो निश्चित रुप से हम इस दिशा में प्रयास करेंगे कि जो समय चेकिंग के लिए निर्धारित किया गया है उसी समय पर चेकिंग करें.

          श्री भंवर सिंह शेखावत -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आदरणीया महोदय को बताना चाहता हूँ कि यादवेन्द्र सिंह जी ने बहुत ही मोजूँ सवाल उठाया है. ढाई-तीन बजे के बाद टीकमगढ़ नहीं सभी थाने खाली हो जाते हैं और (xx) यह क्या चल रहा है, लूट मची है जरा इस पर ध्यान दीजिए. जनता लुट रही है भाई.

          अध्यक्ष महोदय -- माननीया मंत्री जी उसका जवाब दे रही हैं.

          श्रीमती कृष्णा गौर -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने कहा कि माननीय सदस्य द्वारा हमारे संज्ञान में जो लाया गया है, निश्चित रुप से आने वाले समय में उस पर कार्यवाही भी होगी और कोशिश भी यही होगी कि  निश्चित समय पर ही सड़कों पर चेकिंग करें और शेष समय थानों में उनकी उपस्थिति रहे. साथ ही माननीय सदस्य ने एक और प्रश्न किया है कि जितने भी थाने हैं उनमें थाना प्रभारी, एस आई को नियुक्त किया गया है और जिनको वहां पर होना चाहिए वे नहीं हैं. मैं बताना चाहूंगी कि जिले में 14 थाने हैं, 1 महिला थाना है, 1 अजाक थाना है और एक 1 ट्रेफिक थाना है. इस तरह कुल 17 थाने हैं. जिनमें 13 थाने निरीक्षक स्तर के हैं तथा 4 थाने उप निरीक्षक स्तर के हैं. 4 निरीक्षक स्तर के थानों में उप निरीक्षक पदस्थ हैं क्योंकि पुलिस लाइन में 4 निरीक्षक पदस्थ हैं परन्तु उनमें से 3 निरीक्षकों की विभागीय जांच चल रही है. एक निरीक्षक को कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर पुलिस लाइन अटैच किया गया है. वहां पर जैसे ही व्यवस्था होगी हम थाना प्रभारी की नियुक्ति करेंगे. आपने कहा है कि उमा जी के परिवार के ऊपर किसी नकाबपोश ने आरोप लगाया है. उमा जी के परिवार से जो शिकायत प्राप्त हुई है उसकी भी जांच की जा रही है. जिसने भी इस प्रकार का कृत्य किया है उसके ऊपर कड़ी से कड़ी कार्यवाही होगी. जिस पत्रकार के बारे में आपने कहा है उस पत्रकार के प्रकरण में अपराध पंजीबद्ध हो चुका है उस पर विवेचना जारी है. मैंने पूर्व में भी यह बताया है. हमारी पूरी कोशिश होगी कि टीकमगढ़ जिले की कानून व्यवस्था पूरी तरह से सुचारु रुप से रहे.

          अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी के अपराध के मामले में जोरो टॉलरेंस के निर्देश हैं इसका पूरा पालन हम लगातार टीकमगढ़ जिले में कर रहे हैं. मैं माननीय सदस्य को आपके माध्यम से विश्वास दिलाती हूँ कि जो भी उनकी समस्याएं हैं और उन्होंने ध्यानाकर्षण के माध्यम से इस सदन का ध्यान आकर्षित कराया है. हम आपको इस बात से भविष्य के लिए आश्वस्त करते हैं कि टीकमगढ़ जिले की कानून व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कोई कोताही नहीं बरती जाएगी और चाक-चौबंद व्यवस्था रहेगी.

          श्री नितेन्द्र बृजेन्द्र सिंह राठौर -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा...

          अध्यक्ष महोदय --  नितेन्द्र सिंह राठौर जी मैं आपका नाम सम्मिलित कर रहा हूँ क्योंकि आप टीकमगढ़ जिले के विधायक हैं लेकिन मैंने बताया कि एक-एक प्रश्न ही करना है. क्योंकि 6 सदस्य हैं.

          श्री नितेन्द्र बृजेन्द्र सिंह राठौर -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह मेरी विधान सभा से संबंधित है.

          अध्यक्ष महोदय --  मैं आपकी बात से सहमत हूँ लेकिन व्यवस्था का पालन हमें करना चाहिए. श्री राजेन्द्र पाण्डेय जी अपना प्रश्न करें.

          श्री अजय अर्जुन सिंह (चुरहट) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदया ने बड़े विस्तार से सूची पढ़ दी है और कह दिया कि सब सामान्य है कोई दिक्कत नहीं हैं. माननीय विधायक जी ने कहा कि 14 दिन में 7 हत्याएं हुईं, उन्होंने सूचीबद्ध बता दिया कि किस-किस की हत्या हुई है. मुख्यमंत्री जी के जीरो टॉलरेंस की भी बात आ गई. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं 41 साल से विधायक हूँ. वर्ष 1985 में विधायक बना था. मुझे एक चीज समझ में नहीं आती है कि ध्यानाकर्षण करने वाला व्यक्ति आखिरी में कहता है कि रोष व्याप्त है, उत्तर में आता है कि सब कुछ ठीक-ठाक है.

अध्‍यक्ष महोदय --  कार्यवाही प्रचलित है.

          श्री अजय अर्जुन सिंह -- कार्यवाही प्रचलित है. माननीय मंत्री महोदया जब खुद बता रही हैं कि इतनी घटनाएं हो चुकी हैं, पूर्व मुख्‍यमंत्री महोदया के घर पर जब हालत यह है उसके बाद आप कहें कि टीकमगढ़ में सब कुछ ठीक-ठाक है. थोड़ा इस पर ध्‍यान दीजिए. किसी वरिष्‍ठ अधिकारी को यहां से भेजकर टीकमगढ़ जिले की पुलिस व्‍यवस्‍था के लिए थोड़ा सुचारू रूप से यदि संवेदनशील सरकार है, जीरो टॉलरेंस वाली सरकार है, हजार दिन में इनके ऊपर 181 की कोई कार्यवाही नहीं हुई यदि जीरो टॉलरेंस है तो जब विधायक के साथ यह हो सकता है तो और साधारण व्‍यक्ति के साथ क्‍या होगा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी ने वैसे बहुत विस्‍तार से और संवेदनशीलता से उत्‍तर दिया है और मैं समझता हूं कि जो सदस्‍यों की भावना है मंत्री जी उसको दिखवा लेंगी.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह --  अध्‍यक्ष महोदय

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्‍लीज प्‍लीज. मैंने राजेन्‍द्र पाण्‍डेय जी को अनुमति दी है. उतना ही चलेगा.

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,


श्री राकेश सिंह (लोक निर्माण मंत्री) --  अध्‍यक्ष महोदय,

श्री राकेश सिंह --  अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने बरगढ़ फंटा से भैसान फंटा तक की सड़क के बारे में अपने क्षेत्र की चिंता जाहिर की है. यह बात बिल्‍कुल सच है कि इस सड़क में काफी समय लगा है क्‍योंकि यह वर्ष 2018 में 18 किलो मीटर लंबाई की टू लेन रोड स्‍वीकृत हुई थी जिसकी लागत लगभग 40 करोड़ है. जब किसी सड़क के निर्माण कार्य को स्‍वीकृति मिलती है और निश्चित समयावधि में ठेकेदार के कारण वह पूर्ण न हो पाए तो विभाग उस पर कार्यवाही करता है लेकिन माननीय सदस्‍य भी इससे अवगत हैं कि इस सड़क में लगभग पूरी लंबाई में भूअर्जन की कार्यवाही होनी थी और इसमें लगभग 205 भूस्‍वामी यानि किसान हैं. लंबे समय तक चूंकि यह प्रक्रिया तो राजस्‍व विभाग के अधीन होती है उन्‍होंने भी अपने स्‍तर पर प्रयास किया लेकिन जब इतनी संख्‍या में किसान हों तो स्‍वाभाविक है कि कठिनाई जाती है और उसमें जो विलंब हुआ उसके कारण अनुबंध की शर्तों के अनुसार जो पहले ठेकेदार थे उन्‍होंने लिखित में दिया कि वह अब इस काम को नहीं करना चाहते और वह इस काम से हट गए. उसके बाद दोबारा निविदा हुई और दोबारा निविदा में भी यह वर्ष 2023 में स्‍वीकृत हो गई और फरवरी, 2025 में यह पूरी होनी थी अब जो 205 भूस्‍वामी थे उनमें से 173 किसानों के भूअर्जन की कार्यवाही लगभग पूर्णता पर आ चुकी है लेकिन 32 किसान आज भी बाकी हैं जिनकी प्रक्रिया अब तेज गति से चल रही है और इस 18 किलोमीटर में से लगभग एक किलोमीटर प्रधानमंत्री सड़क योजना के अंतर्गत पूर्ण हो चुका है. जो शेष लगभग 17 किलोमीटर है उसमें से 14.72 किलोमीटर में डामरीकरण का कार्य और पुल-पुलिया भी बन चुके हैं और जो शेष बचता है लगभग दो-सवा दो किलोमीटर इसमें भूअर्जन की कार्यवाही तेजी से चल रही है और जो विस्‍तारित कार्य योजना स्‍वीकृत हो गई है उसके अनुसार अब जून, 2026 तक यह कार्य निश्चित रूप से पूर्ण हो जाएगा.

          अध्यक्ष महोदय, अभी जब विभाग का बजट प्रस्तुत हुआ था तो सर्वाधिक धन्यवाद माननीय मंत्री जी कार्य के लिये मिले थे. अध्यक्ष महोदय, मेरा आग्रह है आपके माध्यम से चूंकि यहां पर राजस्व मंत्री जी भी उपस्थित हैं.  यह राजस्व विभाग के कारण भी लंबित हुआ है तो क्यों न उज्जैन संभाग के कमिश्नर और रतलाम जिले के कलेक्टर को निर्देशित किया जाये कि यह भी शासकीय कार्य है ,यह जो अवार्ड 32 शेष हैं और 72 रजिस्ट्री शेष हैं वह शीघ्र पूर्ण की जाये तभी जाकर के यह पूर्ण हो सकेगा. अध्यक्ष महोदय, मेरा आग्रह और प्रश्न है कि इसमें पुल पुलिया जो बनाई गई हैं वह छोटी हैं , एक रोड ओवर ब्रिज (ROB) की वेधशाला मे अत्यंत आवश्यकता है तो क्या इस मार्ग की संपूर्णता के लिये , संपूर्ण उपयोग के लिये माननीय मंत्री जी वहां पर रोड ओवर ब्रिज (ROB) की स्वीकृति देंगे  और इसी के साथ जो समयावधि बताई गई है यह कार्य इसी समयावधि 15.6.2026 तक क्या पूर्ण कर लिया जायेगा. यही मेरा प्रश्न है.

          श्री राकेश सिंह -- माननीय अध्यक्ष जी, यह संपूर्ण जानकारियां बुलाने के बाद जब यह तय हो गया कि लगभग 32 किसान ही बाकी हैं और उनमें भी बहुत तेजी के साथ मे कार्य चल रहा है तो उसके आधार पर यह जो समयावधि दी गई है. अभी जिस रोड ओवर ब्रिज (ROB)  की माननीय सदस्य ने बात की है, जहां पर यह सड़क समाप्त हो रही है, उसके पश्चात वह रोड ओवर ब्रिज (ROB) प्रारंभ होता है चूंकि इस कार्य योजना का वह हिस्सा नहीं है लेकिन माननीय सदस्य की वह चिंता है तो निश्चित रूप से उसका परीक्षण करायेंगे क्योकि किसी भी कार्य को करने के पहले उसका परीक्षण आवश्यक होता है और परीक्षण के उपरांत फिर इसके बारे में कुछ कहा जा सकेगा, वहां बाकायदा परीक्षण के लिये लोग जायेंगे और उसके पश्चात जो जानकारी हमें मिलेगी वह माननीय सदस्य को भी अवगत करायेंगे.

          डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, एक तो परीक्षण के लिये यहां से भोपाल से एक टीम भेज दें तो सड़क का भी परीक्षण हो जायेगा, जांच भी हो जायेगी और इसी के साथ में रोड ओवर ब्रिज (ROB)  का परीक्षण भी हो जायेगा.

          अध्यक्ष महोदय- मंत्री जी ने कह दिया है कि अधिकारी जायेंगे.

          डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय-- यह दोनों कार्य हो जायें, बहुत बहुत धन्यवाद.

(4)    प्रदेश में धान बिक्री हेतु सर्वर न चलने से कृषकों का स्लाट बुक न होने से उत्पन्न स्थिति.

 

        अध्यक्ष महोदय-- श्री फुन्देलाल मार्को जी ध्यानाकर्षण की सूचना पढ़ें.

          श्री फुन्देलाल सिंह मार्कों(पुष्पराजगढ)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आज माननीय सदस्य श्री ओमकार सिंह मरकाम जी विशेष कारणों से भोपाल से बाहर हैं आपके निर्देशानुसार

 

          खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री (श्री गोविन्द सिंह राजपूत)अध्यक्ष महोदय़,

           

            अध्यक्ष महोदयफुन्देलाल जी, सामान्यतः   ध्यानाकर्षण सूचना  देने वाले  सदस्य ही  उसे प्रस्तुत करते हैं,  लेकिन  विषय किसानों से   संबंधित था, उसकी गंभीरता को  दृष्टिगत रखते हुए मैं  आपको अनुमति दे रहा हूं.   यह आगे उदाहरण नहीं बनेगा. एक. दूसरा, फुन्देलाल जी,  आप एक प्रश्न करके अपनी बात को पूरा करें.

          श्री फुन्देलाल सिंह मार्कोअध्यक्ष महोदय,जी.  मंत्री जी बताने का कष्ट करें कि वैसे  भी इस बार हम किसान वर्ष  मना रहे हैं और इस बार बम्पर पैदावार भी म.प्र.. में हुआ  और नियत तिथि के पूर्व  स्लॉट  और सर्वर बंद  हो जाने के  कारण कोई डिंडोरी जिला ही नहीं,  पूरे प्रदेश में  इलैक्ट्रानिक  मीडिया  और  दैनिक पेपरों के माध्यम से कई चीजें प्रकाशित होती  रहीं कि   किसानों में आक्रोश है.   मैं मंत्री जी से  जानना चाहूंगा कि  9  से 13 तक सर्वर डाउन होने का कारण क्या है और  इसके जिम्मेदार कौन हैं,  क्या  डिंडोरी जिले में जिन   किसानों ने  अपना स्लॉट बुक नहीं  कर पाये  सर्वर डाउन होने के कारण,  क्या  उन किसानों के धान खरीदे जायेंगे और कब तक, यह मैं आपसे जनान चाहता हूं .

          श्री  गोविन्द  सिंह राजपूत अध्यक्ष महोदय, डिंडोरी  जिले में पिछले वर्ष 24 हजार 78  किसानों   ने पंजीयन कराया था. 22634 किसानों  ने स्लॉट  बुकिंग कराई थी. 22 हजार 18 किसानों से  77700 मेट्रिक  धान राज्य सरकार ने   खरीदी भी है.  अकेले  आपके  डिंडोरी  जिले की बात कर रहा हूं, जबकि इस वर्ष धान की खरीदी के लिये लगभग 25740  किसानों ने पंजीयन  कराया है. जिनमें से 32 हजार 659 किसानों ने स्‍लॉट बुक कराया था. इन किसानों में से 23 हजार 232 किसानों में 675 मैट्रिक टन धान राज्‍य सरकार ने खरीदी है. जहां तक आपने प्रश्‍न पूछा है, अध्‍यक्ष महोदय, मैं उनका उत्‍तर एक ही साथ दे देता हूं. भारत सरकार द्वारा इस वर्ष जो लक्ष्‍य था, लक्ष्‍य से अधिक धान की खरीदी राज्‍य सरकार ने की है और पूरे प्रदेश में की है. हमारा जो लक्ष्‍य था उससे अधिक खरीदी हमने की है.

          आपके डिंडौरी जिले में पिछले साल की तुलना में 6 प्रतिशत धान की खरीदी अधिक की जा चुकी है. अब धान की खरीदी का समय बीत चुका है. हमने पर्याप्‍त धान की खरीदी कर ली है. इसलिये पोर्टल खोला जाना संभव नहीं है.

 

 

 

 

 

 

 

 

12.46 बजे

5.         देवास जिले के खातेगांव तहसील अंतर्गत वन परिक्षेत्र में कृषकों के विरूद्ध                   वन धारणाधिकार का कार्य समय पर ना होना.

          श्री आशीष गोविंद शर्मा( खातेगांव)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

                                                                                                                       

श्री आशीष गोविन्द शर्मा - अध्यक्ष महोदय, इसका तथ्य यह है कि जंगलों में कूप की कटाई की जाती है उन पर हैमर लगाया जाता है, मार्का लगाया जाता है . यह बात आम किसान और आम व्यक्ति भी जानता है कि हैमर और मार्का लगी लकड़ी  सिर्फ डिपो से ही क्रय की जा सकती है. जंगलों में जो कूप की कटाई होती है , उसका काम जमदूर करते हैं और वहां से डिपो की दूरी लगभग 50 से 100 कि.मी. होती है, इसलिए कई बार उन लकड़ियों को स्थानीय स्थान पर रख दिया जाता है, जिस नर्मदा प्रसाद सेनी के ऊपर आरोप लगाया है वह वन समिति का अध्यक्ष है, उसके पहले आज तक पूर्व में किसी भी प्रकार का न कोई उस पर आपराधिक प्रकरण दर्ज है, न वन अपराध में किसी प्रकार उसकी संलिप्तता रही है. जिन 3 कर्मचारियों को इसमें आरोपी बनाया गया है , वन समिति अध्यक्ष को बनाया गया है, उनकी जो तत्कालीन जो एसडीओ फारेस्ट और रेंज आफिसर फारेस्ट हैं, उन कर्मचारियों ने उनके कार्य एवं व्यवहार की शिकायत विभाग के अधिकारियों को की थी इसके कारण जो उप वनमंडलाधिकारी है, वह उन कर्मचारियों के प्रति और वन समिति के अध्यक्ष के प्रति द्वेष रखता था, जिस जगह से लकड़ी काटी गई है, वह दूसरी वन समिति का क्षेत्र है और कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसा होता है कि शासकीय लकड़ी विश्वास के कारण वन समिति के अध्यक्ष के यहां रख दी गई. लकड़ियां बाहर से भी दिखाई दे सकती हैं और बाहर से दिखाई और गांव के लोगों के सामने रखी गई. दिनांक 8 तारीख को जिस दिन लकड़ियां रखी गईं, उस दिन उप वनमंडलाधिकारी और रेंज आफिसर दोनों की लोकेशन आप निकालेंगे तो उसी गांव में पाई जाएगी. काल डिटेल से भी इस बात की पुष्टि होगी कि उनके द्वारा कहने पर ही वन समिति के अध्यक्ष ने मात्र 30 नग लकड़ी अपने घर पर रखना स्वीकार किया. उनके द्वारा कहा गया कि जैसे ही वाहन की व्यवस्था हो जाएगी, वैसे ही लकड़ियों को परिवहन करके डिपो पर भिजवा देंगे. अभी होली का समय सामने आ रहा है और जंगलों में आग लग रही है इसलिए सुरक्षा की दृष्टि से  इन लकड़ियों को आपके घर रख लेने दिया जाय.

अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यही है कि जो उप वनमंडलाधिकारी हैं उनको पहले इस प्रकरण की जांच करके पीओआर करनी थी , लेकिन साजिशपूर्वक इन चारों लोगों को इस प्रकरण में फंसाने का काम किया है जो उप वनमंडलाधिकारी दिनेश वास्कले हैं, उनके खिलाफ वर्ष 2022 में रालामंडल में भी उनके विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों द्वारा शिकायत की गई जिसमें जांच हुई और उनको वहां से हटाया गया. यहां पर भी इनके कार्य एवं बर्ताव को लेकर कई तरह की शिकायतें प्रचलित हैं. अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यह है कि जिस कूप की कटाई बताई गई है, उस कूप का निरीक्षण कटाई से पूर्व और कटाई के पश्चात् क्या उप वनमंडलाधिकारी एवं रेंज आफिसर के द्वारा किया गया, क्या लॉग बुक भरी गई? क्या उनके द्वारा दिनांक 8.2.2026 को उस वन समिति के अध्यक्ष के घर जब लकड़ी रखाई गई, तब उस समय रेंज आफिसर वहां स्वयं मौजूद थे, इस कारण ही ग्रामीणों के सामने वह लकड़ी वहां रखवाई जा सकी.

श्री दिलीप अहिरवार - अध्यक्ष महोदय, यह अकेले देवास जिले में नहीं, संपूर्ण मध्यप्रदेश में हमारे वन विभाग के द्वारा यह प्रक्रिया और नियम है कि कोई भी कूप जो कटते हैं प्रत्येक जिले के अंदर कूप कटते हैं तो वह कूप जो मेच्योर हो जाते  हैं, जो पेड़ मर जाते हैं जो सूख जाते हैं वह कूप जो हमारे वहां के अधिकारी हैं जो कूप प्रभारी हैं  और सारे जो हमारे वन रक्षक हैं, वनपाल हैं वह कूप सीधे जाकर डिपो पहुंचाते हैं.

अध्यक्ष महोदय, कूप कटने के बाद किसी घर पर नहीं रखवाए जाते हैं यह नियम में नहीं है. यह कूप जो पकड़े गये हैं, जो लकड़ी पकड़ी गई है जो हमारा वहां का समिति का अध्यक्ष है जिसकी भूमिका ही महत्वपूर्ण होती है, भले ही वह प्राइवेट समिति के अध्यक्ष हैं मगर सारे हमारे विभाग के काम में, व्यवस्था में कटाई को रोकने में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है और उसके घर पर पकड़े गये, वह कूप और उसके स्वयं के ट्रेक्टर पर पकड़े गये कूप और उस ट्रेक्टर पर पकड़ने के बाद, उन्होंने एक अन्य अधिकारी जिसका नाम लिया है दिवाकर यादव वन रक्षक, उसको भी हमने निलंबित किया है और उसके साथ जिनकी भूमिका है, जो पूरे कूप को वन रक्षक को देखते हैं एक अजय कुमार श्रीवास्तव जो हमारे विभाग का ही कर्मचारी है वनपाल और कार्यवाहक वनपाल है परिक्षेत्र सहायक वह भी हमारे वन विभाग का है क्योंकि उनकी भी भूमिका थी, उनकी जवाबदारी भी थी तो दो अधिकारियों को संलिप्त करते हुए और एक अधिकारी और, 4 लोगों पर हमने वन अपराध दर्ज किया है, इसमें कोई वह नहीं है.  रेंजर की भूमिका यह है कि एसजीओ जो हमारा एक सक्षम अधिकारी होता है, उसके पास जानकारी आती है कि हमारे कूप कहीं न कहीं एक सूचना के माध्यम से उन्हें मिले तो उन्होंने रेंजर को निर्देश किया और रेंजर ने जाकर नंगे हाथों उनके घर पर जाकर पकड़ा है तो निश्चित रूप से मुझे ऐसा लगता है कि मध्यप्रदेश हमारा वन विभाग जिस प्रकार से काम करता है, मैं साधुवाद देता हूं. अगर वन विभाग के कर्मचारी इसमें संलिप्त पाये गये.

कि वन विभाग के कर्मचारी उसमें संलग्‍न पाए गए, तो उन पर भी कार्रवाई की है, तो मुझे लगता है कि जो कार्रवाई हुई है, वह बहुत सही हुई है और उसके बाद भी हमने उसकी जांच के लिए एक टीम भी बनाई. उसमें उज्‍जैन जिले का एक अधिकारी, देवास जिले का एक अधिकार रहेगा, तो ऐसे हमने तीन जगहों के अधिकारियों की एक टीम बनाई है, ताकि निष्‍पक्ष जांच हो सके. किसी के साथ गलत न हो. मुझे लगता है कि जो कार्रवाई हुई है, वह सही हुई है.

          श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष जी, उपवनमंडलाधिकारी को क्‍या वहां से हटाकर जांच करवाएंगे ? केवल इतना बता दीजिए.

          अध्‍यक्ष महोदय --, प्‍लीज, आशीष गोविन्‍द जी. श्री अमर सिंह यादव जी.

12.56 बजे      

(4)    प्रदेश में राजस्‍व अधिकारियों द्वारा भूमिहीन एवं गरीबों के लिये पट्टे एवं धारणाधिकार का कार्य समय पर न होने से उत्‍पन्‍न स्‍थिति.

 

        श्री अमर सिंह यादव (राजगढ़) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

         

                  

राजस्‍व मंत्री, (श्री करण सिंह वर्मा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

          श्री अमर सिंह यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नगरीय निकायों एवं राजस्‍व विभाग के अंतर्गत आदेश क्रमांक 4209, दिनांक 17/11/2025 द्वारा जारी दिशा-निर्देश एवं समय सारणी अनुसार समय पर कार्य नहीं हो पा रहा है, पट्टा वितरण में विलंब हो रहा है. सभी निकायों में अंतिम सूची प्रकाशित नहीं हुई है. राजस्‍व अधिकारी, कर्मचारियों द्वारा कार्य में रूचि न लेने से और पट्टा वितरण, पट्टाधृति अधिकार, नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, स्‍थायी पट्टे और काले पट्टों की कार्यवाही, व्‍यवस्‍था न होने से प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 का लाभ नहीं मिल रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप प्रश्‍न तो करिए. आप पूरक प्रश्न करें.

            श्री अमर सिंह यादवअध्यक्ष महोदय,  आवास योजना जो गरीबों को देना है शहरी क्षेत्र में उनको ढाई लाख रूपये का लाभ मिलना है. मेरा उसमें आग्रह है कि इसमें कलेक्टर जी की समिति बनी है उनकी बैठक 17 तारीख को हुई 18 तारीख कलेक्टर जी की तरफ से सभी जिलों में आदेश जारी किया है. परन्तु ढाई लाख आवेदन जो गरीबों ने किये हैं, पोर्टल पर अभी पेंडिंग है. उनका निराकरण हो जाये तो उन लोग को देश के प्रधानमंत्री जी का अंतिम व्यक्ति का जो विकास की बात की है कि उनको ढाई लाख रूपये मकाने बनाने का जो लाभ मिलेगा. एक गरीब की यही इच्छा होती है कि हमारा मकान बने और वह लंबे समय से एक स्थान पर बैठे हुए हैं. उन्होंने आवेदन भी किया है, सिर्फ उनका निराकरण तत्काल हो जाये ऐसा मैं मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं.

          श्री करन सिंह वर्माअध्यक्ष महोदय, संयुक्त विभागीय निर्देश 17.11.2025 को जारी किये हैं. आवेदन प्राप्त कर दावे आपत्ति सुनवाई का निर्णय पारित करना एक कानूनी प्रक्रिया है. इसमें न्यूनतम समय लगता है प्रक्रिया को तेज करने हेतु उसके निर्देश प्रसारित कर दिये गये हैं. माननीय अध्यक्ष महोदय, यह कार्यवाही धीमी है इसलिये इस परियोजना की कार्यवाही पूर्ण नहीं हो सकी है, यह बात सही है कि हम जिला कलेक्टरों को निर्देश देंगे कि कार्यवाही जल्दी से जल्दी पूर्ण कर लें.

          श्री अमर सिंह यादवधन्यवाद अध्यक्ष महोदय, 

 

  1.02 बजे                               (1)    ध्यानाकर्षण संबंधी घोषणा.

 

1.03  बजे                             याचिकाओं की प्रस्तुति  

          आज की कार्यसूची में उल्लिखित याचिकाएं क्रमांक 1 से 76 तक प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.

 

1.04   बजे                                अध्यक्षीय घोषणा

 

          आज भोजनावकाश नहीं होगा. मेरा सभी माननीय सदस्यों से आग्रह है कि सदन की लॉबी में भोजन उपलब्ध है. अपनी सुविधा से सदस्यगण भोजन ग्रहण कर सकते हैं.

 

1.05                                                                   शासकीय विधि विषयक कार्य

मध्यप्रदेश श्रम कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक, 2026 (क्रमांक 3 सन् 2026)

            श्री ओमप्रकाश सखलेचाअध्यक्ष महोदय, नीमच मंदसौर का यह विषय है. नीमच मंदसौर पहले एक ही जिला था. मैं मध्यप्रदेश श्रम कल्याण निधि संशोधन विधेयक के पक्ष में बात करना चाहता हूं. माननीय श्रम मंत्री जी द्वारा लाया गया यह बिल 2026 हितैषी विधेयक है. यह मूलतः 1983 में गठित स्लेट पेंसिल कल्याण बोर्ड जो कि अभी काफी हद तक अप्रभावी हो गया है. कारखाने में कर्मचारी बहुत कम रह गये हैं. आज उस स्लेट पेंसिल बोर्ड के काम का अस्तित्व भी धीरे धीरे कम होता जा रहा है. इन सबको ध्यान में रखते हुए वहां के जितने भी अभी इन सबको ध्‍यान में रखते हुए, वहां के जितने भी अभी 700 मजदूर काम कर रहे हैं, उन सबका व्‍यय और उन सबके भविष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए, इस बोर्ड को श्रम कल्‍याण मण्‍डल में विलय करने के इस प्रस्‍ताव का मैं समर्थन करता हूं क्‍योंकि स्‍लेट पेंसिल की इस यूनिट के कारण वहां काफी संख्‍या में सिलिकोसिस के पीडि़त मरीज भी हो जाते है, जो काम करते हैं, वह काफी इस चीज के कारण परेशानी में भी आते हैं. इस कारखाने को मर्ज करने के कारण काफी संशोधनों के माध्‍यम से कर्मचारियों को बहुत फायदा भी होगा, उनका इस बिल में अलग से अस्तित्‍व भी बरकरार रखा गया है , ताकि उनके हितों को अलग से संरक्षित भी करेंगे, इसके साथ ही इसमें स्‍लेट पेंसिल उद्योग के प्रतिनिधि भी उसके बोर्ड में रहेंगे, जिससे वह अपनी बात  प्रभावी तरीके से रख सकते हैं और श्रमिकों को इस बोर्ड के मर्ज होने के कारण, उनके परिवारों के शिक्षा, खेल,बीमा अन्‍य सभी पुराने लंबित मामलें भी तुरंत पूरे होंगे, इस चीज को ध्‍यान में रखते हुए मैं सिर्फ यही आग्रह करूंगा कि हम श्रम हितैषी इस विधेयक  का पूरा समर्थन करते हैं और यह श्रमिकों के हितों की रक्षा करता हैं यहां पर मैं एक लाइन और कहना चाहूंगा कि हम किसी भी वर्ग विशेष की बजाय केवल श्रमिक कैटेगिरी को मानते हुए, उन सबके भले के लिये इस बिल का समर्थन करते हुए, इसको प्रभावशाली व्‍यय से तुरंत स्‍वीकृत करने के लिये और इस बिल को लाने के लिये मैं माननीय मंत्री जी का बहुत-बहुत अभिनंदन एवं धन्‍यवाद करना चाहूंगा.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक(परासिया) -- अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश श्रम कल्‍याण निधि(संशोधन) विधेयक, 2026 पर मैं अपनी बात आपके समक्ष रखना चाहता हूं. मध्‍यप्रदेश श्रम कल्‍याण निधि(संशोधन) विधेयक, 2026 मूल अधिनियम की धारा 4 के निधि शब्‍द के स्‍थान पर निधि स्‍लेट पेंसिल निधि स्‍थापित कर दिया गया है. स्‍लेट पेंसिल कामगार जो हैं, यह खास तौर पर मंदसौर जिले का विशेष काम रहा है और अब धीरे धीरे यह कामगार समाप्ति की ओर जा रहे हैं, परंतु प्रश्‍न इस बात का है कि माननीय जी ने जो संशोधन विधेयक यहां प्रस्‍तुत किया है, उसमें यह जरूर कहूंगा कि जो कामगार हैं, मान लीजिये आज 700 कामगारों का रजिस्‍ट्रेशन है, या 700 कामगार बचे हैं, पर इसके पूर्व में भी जितने सालों, वर्षों तक जिन्‍होंने काम किया है या जिन्‍होंने अपना योगदान इस उद्योग को चलाने के लिये दिया है, आज उनकी संख्‍या की जानकारी विभाग को नहीं है कि कहां कितने लोग हैं? वह किस स्थिति में है, क्‍या वह बीमार की हालत में है, उनका परिवार किस तरीके से चल रहा है ? जो परिस्थितियां उनके परिवार की है, उसमें भी कल्‍याण बोर्ड को इस बात का ध्‍यान रखना चाहिए कि उनका किस तरीके से उत्‍थान किया जाये. हालांकि इस अधिनियम के अंदर उन सभी चीजों का उल्‍लेख है, उनके परिवार का भी उल्‍लेख है, मगर मैं आपसे कहना चाहता हूं कि राज्‍य सरकार अधिसूचना द्वारा संपूर्ण राज्‍य के लिये श्रम कल्‍याण मण्‍डल का गठन, इस प्रयोजन से करेगी कि निधि एवं स्‍लेट पेंसिल निधि प्रशासन करे और ऐसे अन्‍य कार्यों का संपादन करे, जो इस अधिनियम के अधीन मण्‍डल में सौंपे जाये.

          अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यह है कि स्‍लेट पेंसिल निधि कुल कितनी राशि है? माननीय जब अपने भाषण में बोलेंगे, तो इसकी भी जानकारी देने का कष्‍ट करेंगे, जो श्रम कल्‍याण बोर्ड को संचालित की जायेगी, ताकि उसको पता चले कि उसमें कितनी राशि का उल्‍लेख किया गया है और साथ ही साथ में इस बात का भी उल्‍लेख करेंगे कि विधेयक खण्‍ड 4, धारा 9 के पश्‍चात् धारा 9 के अंत: स्‍थापित की जा रही है, इसमें शब्‍द प्रत्‍येक अधिष्‍ठा मण्‍डल को ऐसी दर से अभिदाय करेगा, जैसे कि राज्‍य सरकार अधिसूचना समय-समय पर नियत करे, आपने अधिष्‍ठा शब्‍द को पारिभाषित नहीं किया है, कृपया उसको अपने भाषण में स्‍पष्‍ट करने कि कृपा करेंगे. अध्‍यक्ष महोदय, विधेयक खण्‍ड 5 की धारा 11 में, 11 '''' का अंत स्‍थापना किया गया है, उसकी उपधारा (2) में आपने बताया है कि स्‍लेट पेंसिल निधि का उपयोग ऐसे कर्मकार जिसकी मृत्‍यु सिलिकोसिस के कारण हो गई है, या हो सकती है, कुटुम्‍ब के सदस्‍यों की सहायता का अनुदान दिया जायेगा. मेरा यह कहना है माननीय अध्‍यक्ष जी कि सिलिकोसिस बीमारी के अलावा अन्‍य कोई बीमारी से अगर मृत्‍यु होती है तो क्‍या उसका कुटुंब सहायता अनुदान दे सकेगी, इसका प्रावधान इसमें नहीं किया गया है. मेरा माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि इसका प्रावधान जरूर आवश्‍यक रूप से रखेंगे. माननीय अध्‍यक्ष जी, श्रम राजपत्र जब जारी होता है तो उसमें बहुत सारे विभागों को, कामगारों को अलग-अलग केटेगरी में बांटा जाता है, मगर हम लागों ने इस बात का उस राजपत्र में पहले भी उल्‍लेख नहीं हुआ है, अभी भी नहीं हो पाता है कि इन लोगों का जो वेतन निर्धारित है, बाकी लोगों का तो जो वेतन निर्धारित होता है श्रमिकों का मगर ऐसे उद्योगों के लिये अलग से उसमें वेतन और भत्‍ते उसके कल्‍याणकारी योजना का भी उल्‍लेख इसके अंदर में होना चाहिये ताकि जो गंभीर बीमारी से पीडि़त होते हैं उनका पूरा परिवार प्रभावित होता है तो इन सबके लिये भी कहीं न कहीं उन सब जगह होने की व्‍यवस्‍था होना चाहिये, यही माननीय मंत्री जी से मैं आग्रह करना चाहूंगा और बाकी बातों का उल्‍लेख इस विधेयक में किया गया है. मैं यही मंत्री जी से कहूंगा कि जो कमियां इसके अंदर में रह गई हैं या जो आप उसमें जोड़ना चाहते हैं तो उसमें जरूर जोड़ें. मेरा अंत में एक सवाल यह है कि जितने भी कामगार अभी तक इन लोगों ने अपना योगदान इस उद्योग में दिया है, इन कामगारों के परिवारों की दशा क्‍या है, उन कामगारों की क्‍या स्थिति है, मान लीजिये 20 साल काम करने, 25 साल काम करने के बाद में आज वह किस परिस्थिति में है तो उस कल्‍याण बोर्ड के हिसाब से भी उन लोगों की हम मदद करें, उनका परिवार चलाने की कुछ ऐसी व्‍यवस्‍था बनायें ताकि वह गरीबी से उठकर अपना जीवन यापन कर सकें, यही मेरा निवेदन है. धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय-- इसमें विवेक जी का भी नाम है, लेकिन विवेक जी नहीं हैं. माननीय मंत्री जी. अच्‍छा बैठे हैं, चलिये बोलिये.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल-- यह तो विपीन जैन है.

          अध्‍यक्ष महोदय--  इसमें विवेक विक्‍की पटेल का नाम दिया है. चलो विपीन जी अब आप खड़े हो गये हो तो एक मिनट में अपनी बात समाप्‍त करो. विवेक की पूर्ति हो जायेगी.

          श्री विपीन जैन (मंदसौर)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍लेट पेंसिल कर्मकार मंडल का गठन 1983 में किया गया था. मंदसौर जिले में सर्वाधिक स्‍लेट पेंसिल के कारखाने हैं और पूरे भारत में स्‍लेट पेंसिल मंदसौर से जाती थी. मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि इस मंडल के बंद करने से आपका जो कहना है कि 700 मजदूर वहां पर है, लेकिन मेरा यह कहना है कि 700 से ज्‍यादा हजारों मजदूर अभी भी उन कारखानों में काम करते हैं और हजारों लोगों को उससे रोजगार मिलता है क्‍या इस मंडल के बंद होने से जो मजदूरों के हित प्रभावित नहीं होंगे एवं यह जो कारखाने भी संचालित हैं इनके संचालन में इनका कोई प्रभाव तो नहीं पड़ेगा मैं आपसे यही पूछना चाहता हूं बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्रम मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका, माननीय ओमप्रकाश सखलेचा जी, बाल्‍मीक जी और विपीन जी सभी का आभार व्‍यक्‍त करता हूं. यह मंडल पेंसिल बोर्ड समाप्‍त करके उसका मर्जर कर रहे हैं, उसको पूरी तरह से खत्‍म नहीं कर रहे हैं. कुछ चीजें हैं जो सदन के माध्‍यम से मैं लाना चाहता हूं. मध्‍यप्रदेश स्‍लेट पेंसिल कर्मकार कल्‍याण निधि अधिनियम वर्ष 1982 में काननू के तौर पर इस सदन ने पास किया था और इसी वर्ष में हमारा जो श्रमिक कल्‍याण बोर्ड है वह भी वर्ष 1982 में ही अधिसूचित हुआ था. वर्ष 1983 में इसका बोर्ड बना और उसके बाद वर्ष 1985 में पहली बार स्‍लेट पेंसिल बोर्ड के कर्मकारों की गिनती शुरू हुई जो साढ़े 6 हजार थी और उस समय 200 कारखाने थे. ठीक उसके बाद में वर्ष 1995 से यह संख्‍या तेजी के साथ घटने लगी, 10 वर्षों में यह फर्क पड़ा है और उसके बाद वर्ष 2011 में उसका विस्‍तृत सर्वे हुआ जिसमें वह संख्‍या घटकर कुल 1182 बची थी. वर्ष 2023 में जो संख्‍या है वह 773 है और 35 कारखाने हैं और इसलिये यह जो क्रम है यह बड़ा साफ बताता है कि बोर्ड की स्थिति क्‍या है. इसमें कर्मचारियों के लिये जो पैसा आता है वह उन्‍हीं से आता है जो नियोजक हैं तो जो फ्लो है वह लगभग 1 करोड़ 3 लाख रूपये का है और अभी तक जो हमारे पास राशि है वह 6 करोड़ रूपये बोर्ड में है और जो दूसरी बात आपने अधिष्‍ठाता की पूछी है वास्‍तव में वह नियोजक की जगह पर जो रखा गया है तो जो बिल का आयेगा तो पहले ही कॉलम में हमने उसको स्पष्ट किया है कि सरकार अब इन बातों को सीधे देखेगी बोर्ड के माध्यम से जहां तक सवाल आपने बीमारी की बात कही तो सिलिकोसिस बीमारी से सर्वाधिक पीड़ित हैं उनके उपचार के लिये 2 हजार रुपये महिने की पेंशन सहायता पीड़ित व्यक्ति को दी जाती है उसमें परिवार के सदस्य भी शामिल हैं वह परिभाषा उसमें बहुत विस्तृत दी गई है अगर कोई सिलिकोसिस से मृत्यु होती है तो उसको भी 5 हजार अन्तेष्टि के लिये और 15 हजार बाकी दिये जाते हैं अगर कार्य स्थल पर उसकी मृत्यु होती है तब भी उसको मुआवजा है. आप जो बात कह रहे थे कि वैसे कोई मृत्यु होती है तो उसको मुआवजा मिलता है कि नहीं. अभी 2020 से लेकर वर्तमान सत्र तक 90 लोगों की मृत्यु हुई है उसका बेकअप वर्षवार भी मेरे पास है और 90 के 90 लोगों को उसका मुआवजा मिल भी गया है. विधवा सहायता इस आंकड़े से भी हम अंदाज लगा सकते हैं कि कुल 700 के आसपास लोग बचे हुए हैं लेकिन जो विधवा पेंशन दे रहे हैं वह है 251. इतनी बड़ी तादात में विघवाओं की संख्या है. अब इसमें बाकी छात्रवृत्ति से लेकर स्वास्थ्य को लेकर सारी योजनाओं का प्रावधान इसमें है जो बात आपने कही है तो पहले ही इसमें जो संशोधन है क्रमांक 1 पर इस अधिनियम का संक्षिप्त नाम श्रम कल्याण संशोधन विधेयक,2026 होगा दूसरा जो संशोधन है उसमें पैरा 1 के खण्ड 4 में स्पष्ट है कि नियोजक के पश्चात्  शब्द अधिष्ठाता अंत:स्थापित किया जिसका आपने प्रश्न किया. अब इस मामले में सरकार सीधे देखेगी. आप यह क्लाज पढ़ेंगे तो उसमें बड़ा स्पष्ट है. दूसरा जो आपने मजदूरों के बारे में बात की है उसमें अगर आप 10(घ) को देखेंगे तो उसके लिये स्लेट,पेंसिल कर्मकार से अभिप्रेत  है ऐसा कोई व्यक्ति जो किसी स्लेट पेंसिल कारखाने में कुशल अर्द्धकुशल,शारीरिक, लिपिकीय, पर्यवेक्षक या तकनीकी कार्य करने के लिये भाड़े या पारिश्रमिक पर नियोजित किया गया है उसको भी इसमें शामिल किया गया है. इसकी एक विस्तारिक परिभाषा इसमें दी गई है. तीसरा चूंकि पैसे का प्रावधान जरूरी था तो धारा 4 में जहां हमारे मूल अधिनियम में निधि का उल्लेख था उसमें निधि और स्लेट पेंसिल निधि उसमें स्पष्ट कर दिया गया है ताकि उनके हितों के लिये जो सामाजिक सुरक्षा पेंशन हो उनके लिये यह निधि सुनिश्चित हो जाए. कोई भ्रम नहीं होना चाहिये तो 11-क के भीतर एक लंबी सूची है. किसी की मृत्यु सिलिकोसिस के कारण हो गई है उसके कुटुम्ब के सदस्यों को सहायता और अनुदान तो जो बात आपने कही थी विस्तार से इसमें है.सिलोकोसिस ग्रस्त कर्मचारी का चिकित्सकीय उपचार. कर्मकार या उसके आश्रितों की सामुदायिक आवश्यक्ताएं,कर्मकार के कुटुम्ब के लिये शैक्षणिक सुविधाएं. स्लेट पेंसिल कारखाने के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा औषधालयों की स्थापना में जो खर्च लगेगा जो हमारे श्रमिक अस्पताल होंगे हम उसका उपयोग करेंगे तो मुझे लगता है कि खेलकूद से लेकर अंतिम मजदूर तक उसके लिये जो सामाजिक सुरक्षा की गारंटी ली जाती है  उन सबका प्रावधान इसमें किया गया है क्योंकि मैं यह मानता हूं कि मजदूरों के मामले में कभी भी एक छोटे से बिन्दु कि वह किसके दरवाजे पर जायेगा अपनी डिमांड करने के लिये तो बोर्ड इसके लिये पूरी तरह से जवाबदेह है. मर्जर भी इसलिये किया है. हम एक विकल्प यह भी हो सकता था कि हम बोर्ड को खत्म करते और उनको एक मुश्त मुआवजा दे देते लेकिन उससे उनके परिजनों की या उनकी जो माली हालत खराब है जो कुछ कर ही नहीं सकते. उनको पैसा अगर एक बार दे भी दोगे तो उनके सामाजिक सुरक्षा की गारंटी नहीं होती इसलिये  हमने उसका मर्जर किया है उसको खत्म भर करके मुआवजा दे देते, चाहते तो हमारे पास विकल्प था हम कर सकते थे लेकिन तय किया है कि आखिरी व्यक्ति तक  उसके परिजनों के हितरक्षण का काम पूरा हो इस कारण से हम यह मर्जर का बिल लेकर आये हैं और अंत में जो उद्देश्य और कारण मैंने इसमें लिखे हैं मैंने उसमें स्पष्ट तौर पर पूरी बात कही कि अगर आप पूरी बात को इस उद्देश्य को पढ़ेंगे तो मैंने खुदने प ढ़ने के बाद यह बात यहां पर रखी है कि किसी भी कीमत पर यह सच है कि वह बहुत बुरी हालत में हैं. जब किसी को सिलिकोसिस होता है तो उसके परिवार की जो परिस्थित होती है मुझे लगता है आप और हम उसको व्यक्त नहीं कर सकते. इसलिये इस कष्ट के प्रति मानवीय तौर पर भी हम सबकी जवाबदेही है और अभी तो मृत्यु में जो मिलती है क्षतिपूर्ति उससे ज्यादा  2 लाख तो हम संबल और बाकी चीजों में दे सकते हैं तो मुझे लगता है कि जो बेनिफिट्स उनको मिलते थे.उनसे बेहतर बेनेफिट्स उनके परिजन को मिलेंगे. ऐसा मैं विश्‍वास करता हूँ और मैं सदन से आपके माध्‍यम से यही प्रार्थना करता हूँ कि यह मजदूरों के हित में लिया गया काम है. उद्योग में इस बीमारी का तो चोली-दामन का साथ है. यह सच्‍चाई है. जबकि उनकी सारी सुरक्षा के लिए मास्‍क देते हैं, बाकी चीजें भी देते हैं. इसलिए सिलिकोसिस जिनको है, वह संख्‍या भी आज की तारीख में 137 है. वर्तमान में 137 मरीज हैं. यही बात कहते हुए कि इस विधेयक को समर्थन मिले और विधेयक पास किया जाए, इस विनती के साथ अपनी बात को समाप्‍त करता हूँ.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यह है कि ऐसे कितने लोग हैं, जिनके मान लीजिए कि बोर्ड के अंदर रजिस्‍ट्रेशन नहीं हो पाया है या उनकी खोज नहीं कर पाए क्‍योंकि बहुत सारे लोगों ने 20 साल काम किया, 25 साल काम किया. अब 25 साल के बाद काम करने के बाद हो सकता है कि उनको सिलिकोसिस पुन: हो गई होगी या पहले से रही होगी. उनकी कितनी संख्‍या होगी, क्‍या बोर्ड इसकी जांच करेगा ? दूसरा प्रश्‍न यह है कि जो आपने मृत्‍यु के बाद मुआवजे की बात की है, 15,000 रुपये, यह बात ठीक है कि संबल में इसको जोड़ लेंगे तो अच्‍छी राशि बन जाएगी. मगर इसके कारण मृत्‍यु होना तो उसमें क्‍या मुआवजे की राशि को बढ़ाने की आवश्‍यकता नहीं है ? मैं यह पूछना चाहता हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, कुछ कहना चाहेंगे. 

            श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, नहीं, मुझे लगता है कि जो नियोजक होते हैं, उनकी मदद से जो धनराशि आती है, उसके आधार पर इसका उपयोग होता रहा है. वहां नियोजक ही घटते गए तो फिर राशि, इसलिए मैंने आपको आंकड़ा बताया. दूसरी जो बात आपने कही है कि मजदूर शेष न रह जाएं. इसलिए मैंने जान-बूझकर वे वर्ष पढ़ दिए थे कि पहला सर्वे वर्ष 1985 में हुआ था और अंतिम सर्वे वर्ष 2023 में हुआ है. इसलिए कोई उससे वंचित नहीं है. लगातार बोर्ड इस बात पर जोर देता रहा है और बाकी लोग भी इसकी चिंता करते रहे हैं. इसलिए यह दुविधा होनी नहीं चाहिए क्‍योंकि वर्ष 1985 से लेकर अब तक 4 बार सर्वे हुआ है और चारों सर्वे के आंकड़े मैंने सदन के सामने रखे हैं.

         

         

                                                                                               


 

1.25 बजे                                    समितियों का निर्वाचन.

6. लोक लेखा, प्राक्‍कलन, सरकारी उपक्रमों संबंधी तथा स्‍थानीय निकाय एवं पंचायतीराज लेखा समितियों के सदस्‍यों के निर्वाचन की घोषणा

अध्‍यक्ष महोदय -- जैसे कि पूर्व में सूचना दी गई थी, समितियों का निर्वाचन संपन्‍न हो                                   गया है.

 

(मेजों की थपथपाहट)

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय (जावरा) - धन्‍यवाद, माननीय अध्‍यक्ष महोदय. आपने विश्‍वास किया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

 

 

 

1.27 बजे

7. वर्ष 2026-2027 की अनुदानों की मांगों पर मतदान .....(क्रमश:)

                   (1)     मांग संख्‍या - 26                  संस्‍कृति

                             मांग संख्‍या - 37                  पर्यटन

                             मांग संख्‍या - 51                  धार्मिक न्‍यास और धर्मस्‍व

 

 

 

 

                   उपस्थित सदस्‍यों के कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुए.

                   अब मांगों और कटौती प्रस्‍तावों पर एक साथ चर्चा होगी.


 

01.30 बजे

{सभापति महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय) पीठासीन हुए.}

          श्री आशीष गोविंद शर्मा (खातेगांव)-  माननीय सभापति महोदय, मैं, मांग संख्‍या 26, 37 और 51 के समर्थन में अपनी बात रख रहा हूं. धर्म, संस्‍कृति, पर्यटन तीनों एक-दूसरे पर कहीं न कहीं इनकी निर्भरता है. जहां धर्म होता है, वहां धर्म आधारित संस्‍कृति का निर्माण होता और जहां धर्म और संस्‍कृति को देखना हो, वहां पर्यटन की संभावनायें हमें स्‍वत: दिखाई देने लग‍ती है. मैं मानता हूं कि हमारा भारत देश, वह देश है जहां भगवान स्‍वयं अवतरित हुए, अपनी लीलायें कीं और युगों के पश्‍चात् भी उनकी लीलायें आज हमारी मातृभूमि में धरोहर के रूप में मौजूद है.

          सभापति महोदय, 15 अगस्‍त, 1947 को जब देश आज़ाद हुआ, तब उसमें कहा गया कि राज्‍य का कोई धर्म नहीं होगा. इस देश पर अनेक आक्रमण हुए, यहां की संस्‍कृति को नष्‍ट किया गया, धार्मिक अभिलेखों, प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन उसके बाद भी हमारी जो सांस्‍कृतिक विरासत है, वह आज हमें जगह-जगह पर दिखाई देती है. जहां पर इनके बारे में सवाल उठाया जाता है, वहां अभिलेख, पुरात्‍तव महत्‍व की मूर्तियां, शिलालेख इन बातों की पुष्टि करते हैं कि इस मंदिर, इमारत का निर्माण कब हुआ था. हम कह सकते हैं कि हमारे देश में, प्रदेश में सांस्‍कृतिक उत्‍थान को देखने के लिए धार्मिक पर्यटन, वन्‍य पर्यटन आदि की असीम संभावनायें हैं. हमारे प्रदेश में भाजपा की सरकार है जो कि इस प्रदेश में धार्मिक स्‍थानों के लिए, धार्मिक महत्‍व के स्‍थानों के विकास के लिए निरंतर काम कर रही है. धर्म, संस्‍कृति और पर्यटन तीनों के प्रति प्रदेश सरकार, हमारे मुख्‍यमंत्री जी एवं विभाग के मंत्री धर्मेन्‍द्र लोधी जी की रूचि यह दर्शाती है कि प्रदेश इन तीनों क्षेत्रों में, न सिर्फ आगे बढ़ रहा है बल्कि जन आकांक्षाओं की पूर्ति भी कर रहा है. शास्‍त्रों में कहा गया है कि-

 

"धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः ।

तस्माद् धर्मं न त्यजामि मा नो धर्मो हतोऽवधीत् ॥"

          अर्थात् जो धर्म का नाश करता है, वह नष्‍ट हो जाता है और धर्म की रक्षा करने वाला, रक्षित रहता है, इसलिए कभी धर्म का त्‍याग नहीं करना चाहिए. धर्म को बहुत ही संकुचित अर्थों में आजकल मनुष्‍य और राजनीति स्‍वीकार कर रही है लेकिन इसका विस्‍तृत अर्थ यह है कि हमें जो काम, जिम्‍मेदारी दी गई है, हम उसका पालन ईमानदारी से करें, यही वास्‍तविक धर्म है. सूर्य का धर्म प्रकाश देना है, जल का धर्म है तृप्ति देना, प्‍यास बुझाना और इसलिए हम सभी को अपने धर्म का पालन करना चाहिए जो कि मानवता का धर्म है. लेकिन आज के राजनैतिक दौर में धर्म को बहुत संकुचित कर दिया गया है, भगवान को भी समाजों में बांट दिया गया है. जबकि महापुरूष, ईश्‍वर के अवतार, इन सभी ने इस मानवता की पीड़ा को दूर करने के लिए और अधर्म की समाप्ति के लिए समय-समय पर अवतार लिये. आज मैं कह सकता हूं कि हमारे प्रदेश की जिन कारणों से पहचान है, हमारे यहां मां नर्मदा अमरकंटक से कल-कल करती हुई बहती है और रत्‍ना सागर में मिलकर, भारत के बहुत बड़े भू-भाग को संचित करती है. मां नर्मदा का उद्गम स्‍थल हमारे यहां हैं, जिसमें लगभग 5 लाख से अधिक पदयात्री नर्मदा जी की परिक्रमा करते हैं. बड़े-बड़े संत-महात्‍मा जो पर्यावरण के संरक्षण का संदेश दे रहे हैं और किस तरह नदियों की परिक्रमा जो अनादि काल में जगत गुरू शंकराचार्य से लेकर, उससे भी युगों पहले से मां नर्मदा की परिक्रमा का विधान है, उस नर्मदा परिक्रमा पथ को, यात्रियों के लिए सुगम बनाने के लिए, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, संस्‍कृति, पर्यटन, धार्मिक न्‍यास एवं धर्मस्‍व विभाग, इनके माध्‍यम से यात्री निवास बनाये जा रहे हैं, सदाव्रत की व्‍यवस्‍था कई निजी संस्‍थायें करती हैं, लेकिन नर्मदा परिक्रमा पथ जो कि लगभग 850 किलोमीटर है, पूरा निर्मित हो, जिसका आश्‍वासन लोक निर्माण मंत्री जी द्वारा दिया गया है. चूंकि मध्‍यप्रदेश में पूरे देश और विदेशों से भी, आप जर्मनी के कुछ परिक्रमावासियों से मिलेंगे, जो वहां से नर्मदा जी की परिक्रमा करने के लिए इस पथ पर चल रहे हैं जो यह बताता है कि उनकी सनातन के प्रति, हमारी पवित्र नदियों के प्रति, कितनी आस्‍था है. उस नर्मदा परिक्रमा पथ का विकास हमारी सरकार कर रही है, इसके लिए मैं मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं. रामवन पथ गमन पथ पर पूर्व में कई बार चर्चा हो चुकी है. रामवन गमन पथ का डिजाइन भी लगभग फायनल है और सरकार उस पर शीघ्र काम करने जा रही है. राम अयोध्‍या से निकले चित्रकूट में निवास करते हुए उन्‍होने लंका तक जाकर अन्‍याय और धर्म के प्रति रावण का नाश करके सीताजी को मुक्‍त किया. वास्‍तव में यह महापुरूषों का, भगवान का, ईश्‍वर का, जो जीवन है वह आने वाले पीढि़यों को प्रेरणा दे. वैसे तो घर-घर में रामचरित्र मानस पढ़ा ही जाता है और विभिन्‍न कहानियों और सीरियलों के माध्‍यम से हम उनके चरित्र को समझते हैं, देखते हैं, लेकिन रामवन गमन पथ बनने से आने वाले समय में जिस तरह से हमारे देश से कई सारे लोग पर्यटन के लिए धार्मिक पर्यटन के लिए श्रीलंका जाते हैं जहां पर लंका के कुछ अवशेष होने का दावा किया जाता है, लेकिन लोग वहां पर राम सेतु को देखने जाते हैं तो कहीं न कहीं मध्‍यप्रदेश में भी भगवान राम माता जानकी, हनुमान जी से, लक्ष्‍मण जी से जुड़ी हुई जो स्‍मृतियां हैं उनको विकसित किये जाने से उन स्‍थानों का विकास किये जाने से धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में मध्‍यप्रदेश को अपार संभावनाएं मिलेंगी. मुख्‍यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना जो कि मध्‍यप्रदेश सरकार द्वारा, पूर्व मुख्‍यमंत्री द्वारा चलाई गई. वर्तमान सरकार भी तीर्थ दर्शन योजना के लिए बेहद आशान्वित हैं और वास्‍तव में हमारे भारतीय संस्‍कृति में विदेशों में हम कभी तीर्थ का कोई ऐसा बड़ा मेला या आयोजन देखते या सुनते नहीं पाए जाते हैं, लेकिन हमारे भारतवर्ष में चार धामों की यात्रा और अन्‍य सारे तीर्थयात्रियों के अपने इष्‍ट की तीर्थ यात्रा करने का बहुत विधान है और इसलिए मध्‍यप्रदेश सरकार लगातार जो तीर्थ दर्शन यात्राएं करा रही है. वर्ष 2026 में 24 ट्रेनें संचालित कर लगभग 20 हजार वरिष्‍ठों को तीर्थ दर्शन योजना का लाभ मध्‍यप्रदेश की सरकार ने दिया इसके लिए मैं विभाग को अपनी ओर से धन्‍यावाद देता हूं. शासन संधारित मंदिर, उनके पास जमीनें भी होती हैं, पुराने समय में विभिन्‍न राजा महाराजाओं के द्वारा इन मंदिरों को पुजारियों को सौंपा गया. उनकी पूजा पुजारियों का परिवार करता है. उनकी चिंता होना स्‍वाभाविक है, क्‍योंकि मैं भी उसी वर्ग से आता हूं लेकिन मेरा ऐसा मानना है कि जो भूमियां पुजारियों को, उस मंदिर के उस देव स्‍थान के जिसका मालिक उस मंदिर की मूर्ति है, जो दी गई है उनमें शासन का हस्‍तक्षेप बंद होना चाहिए. उस भूमि से पुजारियों का परिवार चलता है, उस मंदिर की व्‍यवस्‍थाएं चलती हैं. इसलिए इस पर शासन को ध्‍यान देना चाहिए. मैं धन्‍यवाद देता हूं मुख्‍यमंत्री जी को जिन्‍होंने शासन संधारित मंदिर के पुजारियों के लिए लगभग 21 करोड़ 95 लाख रुपए की राशि का भुगतान किया है. साथ ही साथ उज्‍जैन में हमारे धर्मस्‍व विभाग का मुख्‍यालय है इसलिए आने वाले समय में सिंहस्‍थ महाकुंभ हमारे उज्‍जैन में होना है जो कि सनातन का एक बहुत बड़ा आयोजन है. करोड़ों की संख्‍या में एक समय में स्‍नान के लिए लोग सनातन मतावलंबी वहां पर एकत्रित होने हैं. न सिर्फ सनातन को मानने वाले बल्कि दुनिया भर के कई देशों से लोग साधु संतो को देखने के लिए, उनकी जीवनचर्या को देखने के लिए, स्‍नान के म‍हत्‍व को समझते हुए वहां पर आते हैं. सभी का अभिनन्‍दन हमें मध्‍यप्रदेश की धरती पर करना है.

          माननीय मुख्‍यमंत्री जी की स्‍वयं चिंता है क्‍योंकि वह उसी नगरी से आते हैं, बाबा महाकाल का वैभव, मां हरसिद्धि जहां पर विराजित हैं वहां पर सिंहस्‍थ के सफल आयोजन के लिए सरकार चिंता कर रही है. इसके लिए मैं धन्‍यवाद देता हूं. हमारे मध्‍यप्रदेश में कई जगहों पर छोटे-छोटे मेले लगते हैं. किसी संत महात्‍मा के नाम से ऐसे सभी मेलों को मध्‍यप्रदेश की सरकार ने न सिर्फ मेला प्राधिकरण के अंतर्गत चिह्नित किया है बल्कि इनके अंदर सांस्‍कृतिक कार्यक्रमों के लिए भी सरकार सहायता करती है, कार्यक्रम देती है. मैं उसके लिए मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं. हम चूंकि नर्मदा के किनारे की विधान सभा क्षेत्र से आते हैं और नर्मदा जयंती के दिन बहुत सारे कार्यक्रम नर्मदा के तटों पर मध्‍यप्रदेश की सरकार अमरकंटक से लेकर मध्‍यप्रदेश के हिस्‍से में प्रदान करती है, जिसके कारण नर्मदा जी के जो भक्‍त हैं उनको उन भजनों को सुनकर, उन कार्यक्रमों को देखरक बहुत आनंद मिलता है. मैं मंत्री जी को और माननीय मुख्‍यमंत्री जी को इसलिए भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं. इस बार जन्‍माष्‍टमी के और महाशिवरात्री के पर्व पर भी कई प्रमुख भगवान महादेव के स्‍थानों पर और कई सारे कृष्‍ण मंदिरों पर संस्‍कृति विभाग के द्वारा कार्यक्रम दिये गये. जिससे इसका भक्‍तों ने बहुत आनंद लिया. वास्‍तव में सरकार जो भी काम करती है उसके पीछे उद्येश्‍य एक ही होता है मनुष्‍य मात्र की संतुष्टि, अगर हमारे कार्यक्रमों से, हमारी योजनाओं से व्‍यक्ति को आनंद मिलता है, उसको प्रसन्‍नता होती है तो ऐसे कार्यक्रमों का दायरा और बढ़ाना चाहिए. क्‍योंकि आजकल हर व्‍यक्ति चिंतित है, उसको अवसाद ग्रहण कर लेता है निराश उसमें कभी आ जाती है लेकिन इस तरह के कार्यक्रम जब बहुरंगी संस्‍कृति के दर्शन लोक गायकों के द्वारा गायन जब हमें सुनाई देता है, कवियों की ओजस्‍वी वाणी जब हम सुनते हैं, कविताएं सुनते हैं तब मन प्रफुल्लित होता है. इसलिए सांस्‍कृतिक आयोजन जो इस संस्‍कृति से किसी तादात में स्‍थापित करते हैं ऐसे कार्यक्रमों के लिए ज्‍यादा से ज्‍यादा बजट देना चाहिए.

          श्री उमाकांत शर्मा-- माननीय सभापति महोदय, कल तक मेरा चर्चा में नाम था और आज मेरा नाम काट दिया गया है. मेरे साथ बार-बार अन्‍याय हो रहा है. 

सभापति महोदय -- आपका नाम है उमाकांत जी, आप इंतजार करिये.

          श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा -- सभापति महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी को मैं इसलिए भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि कृष्‍ण पाथेय और गीता भवन, गीता सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, माननीय प्रधान मंत्री जी कहीं भी जाते हैं तो वह श्रीमद् भागवत गीता वहां के राष्‍ट्राध्‍यक्ष को भेंट करते हैं. जीवन को सही राह पर ले जाने के लिए और हम भक्ति के जिस मार्ग का अनुसरण कर रहे हैं वह मार्ग अंत में उस नारायण के चरणों में पहुंचता है इसका संदेश है गीता. ईश्‍वर एक है और उस तक पहुंचने के मार्ग असंख्‍य हो सकते हैं लेकिन कोई मार्ग किसी मार्ग का विरोधी नहीं है. आप जिस भाव से भगवान को भजते हैं उस भाव तक आप पहुंचते हैं. क्‍या लेकर आये हो क्‍या लेकर जाओगे, तो जीवन में विपत्तियां आने पर, जीवन में दुखद क्षण आने पर श्रीमद्भागवत गीता मनुष्‍य को मार्ग दिखाती है. गीता भवन का निर्माण हर विधान सभा क्षेत्र में सरकार करने जा रही है. हमारी जो विश्‍व में पहचान है वह हमारे ज्ञान के कारण ही थी. एक समय में हमारे विश्‍वविद्यालय में पूरी दुनिया भर के समस्‍त विषय पढ़ाये जाते थे और पढ़ने के लिये विद्यार्थी आते थे तो ज्ञान से जिस भारत की पहचान दुनिया में है उस ज्ञान को दिखाने का काम संस्‍कृति और पर्यटन मंत्रालय के माध्‍यम से सरकार कर रही है. मैं माननीय मंत्री जी को पुन: इस बात के लिए धन्‍यवाद देना चाहता हूं.

सभापति महोदय, हमारे मध्‍यप्रदेश में चाहे दतिया का मां पीताम्‍बरा जी का धाम हो, चाहे ओरछा में भगवान रामाजा का परिसर हो, भगवान रामराजा जहां विराजित हों और इसके साथ-साथ हमारी धार्मिक नगरी चित्रकूट में कामतागिरी की परिक्रमा करने के लिए बड़ी संख्‍या में भक्‍तजन पहुंचते हैं और उन सबके विकास के लिए मध्‍यप्रदेश की सरकार काम कर रही है. साथ ही साथ उज्‍जैन में भगवान महाकाल महालोक आप सब लोग देखते ही हैं. सांदीपनि आश्रम का विकास, सलकनपुर जो कि हमारी माताजी का प्राचीन धाम है उसको सलकनपुर लोक के रूप में बनाने का काम, श्री हनुमान लोक पांढुर्णा और श्रीराम वनवासी लोक चित्रकूट इस तरह के जो स्‍थान हैं वहां का विकास मध्‍यप्रदेश की सरकार कर रही है. निश्चित ही भारत के अलावा मध्‍यप्रदेश से भी कई जो क्षेत्रफल में छोटे देश हैं वहां पर लाखों, करोड़ों की संख्‍या में प्रतिवर्ष पर्यटक पहुंचते हैं देखने के लिए, वहां की व्‍यवस्‍थाओं के कारण वहां पहुंचते हैं, तो मध्‍यप्रदेश में असीम संभावनाएं हैं.

सभापति महोदय, हमारे पास समृद्ध वन क्षेत्र है. धार्मिक पर्यटन के लिए आने वाले बहुत सारे स्‍थान हमारे यहां दो-दो ज्‍योतिर्लिंग ओंकारेश्‍वर महादेव, महाकालेश्‍वर महादेव और कई सारे देवी स्‍थान, भगवान शिव के स्‍थान हैं और इन सबका दर्शन करने के लिए बड़ी संख्‍या में भारत भर से, दुनिया भर से श्रद्धालु आते हैं. इसलिए इन सबका विकास करना हमारी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए. पर्यटन वह क्षेत्र है जिसमें हम बहुत सारा राजस्‍व अर्जित कर सकते हैं और निश्चित ही मध्‍यप्रदेश के पर्यटन विभाग ने बहुत बड़ी आय कई सारे स्‍थानों से की है. आज मध्‍यप्रदेश में चूंकि माननीय मुख्‍यमंत्री जी की स्‍वयं रुचि वन्‍यजीवों के संरक्षण में वनों के प्रति और पर्यटन के केन्‍द्रों का विकास करने में है. मुझे याद है कि हनुवंतिया जो कि एक डैम के निर्माण के कारण एक वाटर बॉडी बनी है, जहां पर सरकार ने कैबिनेट भी की और वहां पर बड़ी संख्‍या में पर्यटक पहुंचने लगे तब लगा कि हम वाटर टूरिज्‍म में भी अपना एक अच्‍छा अर्निंग कर सकते हैं और साहसिक खेलों से जुड़े हुए चाहे पैराग्‍लाइडिंग हो, चाहे अन्‍य इवेंट्स हों, हमारे भोपाल की झील में भी नौकायन की प्रतियोगिता होती है. अब कश्‍मीर की डल लेक जैसा वातावरण वहां पर निर्मित करने का प्रयास किया गया है. आदमी चाहता है कि उसको उसके घर के पास ही कुछ अच्‍छा स्‍थान मिल जाएं जहां वह अपने परिवार और बच्‍चों के साथ जा सके. हमारे देवास जिले में भी खिवनी अभ्‍यारण्‍य है. मध्‍यप्रदेश में कूनो कई सारे अभ्‍यारण्‍य हैं जहां पर वन्‍य पर्यटन सरकार ने शुरू किया है. वहां पर निर्माण कार्य किए गए हैं और वहां के लोकल जो ट्राइब्‍स हैं, वहां के जो लोकल युवा हैं, जो थोड़ा बहुत पढ़े लिखे हैं, ग्रेज्‍युएट हैं, उन सबको किस तरह हम बाहर से आने वाले पर्यटकों के साथ प्रस्‍तुत हों, किस तरह से उनको गाइड करें, किस तरह से यहां का खान पान होमस्‍टे उनको कराएं, इसके लिए भी सरकार बड़ी संख्‍या में स्‍थानीय निवासियों को प्रशिक्षित कर रही है. हर व्‍यक्ति जो बड़े-बड़े शहरों से ईंट और सीमेंट की बड़ी-बड़ी दीवारों से निकलकर आता है, लिफ्ट से आता है, पक्‍की पक्‍की इमारतों में जो रहकर ऊब जाता है उसकी इच्‍छा होती है कि जंगल में कोई बांस की बनी झोपड़ी हो, गोबर से लिपा हुआ आंगन हो, चूल्‍हे की बनी हुई रोटी हो और धार, अलीराजपुर के मक्‍के के आटे के पानिये और चटनी हो खरण पर पिसी हुई, जब उसे यह सब मिलता है तो उसके मन को बहुत अच्‍छा लगता है. नदी का किनारा, पक्षियों का कलरव जब व्‍यक्ति सुनता है तो उसका स्‍ट्रेस दूर होता है और यह काम करके हम निश्चित ही मध्‍यप्रदेश में पर्यटकों की असीम संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं. वेलनेस सेंटर हमारी मध्‍यप्रदेश की सरकार खोलने जा रही है. अभी तक पंचकर्म के लिए लोग केरला तरफ देखते थे लेकिन वही पद्धति वही ज्ञान मध्यप्रदेश के कई स्थानों पर, मध्यप्रदेश की सरकार प्रारंभ कर रही है. निजी भागीदारी भी हम उसमे जुटा रहे हैं. इससे निश्चित ही फायदा होगा. मध्यप्रदेश चूंकि भारत का हृदय स्थल है सभी ट्रेनें यहां से होकर के जाती हैं, वायुमार्ग भी हमारे पास में मौजूद हैं इसलिये मध्यप्रदेश में पर्यटकों के आने की संभावना बड़ी संख्या में रहती हैं.

          माननीय सभापति महोदय, मैं इस पर कुछ सुझाव आपके माध्यम से देना चाहता हूं. सभापति महोदय, मध्यप्रदेश पर्यटन के मानचित्र में पूरी दुनियां में मध्यप्रदेश में पर्यटन की संभावनाओं को दिखाने के लिये विभाग ने कई सारे देशों में भी अपनी प्रदर्शनी लगाई है, पर्यटन के क्षेत्र मे, पर्यटकों को आकर्षित करने के लिये कई सारे कार्यक्रम मध्य प्रदेश की सरकार चला रही है. मध्यप्रदेश में जो बोलियां हैं, जो लोक नृत्य हैं उन सबको संरक्षित करने के लिये संस्कृति विभाग काम कर रहा है. कई बार हम देखते हैं हमारे गांव में, हमारे शहरों में जो बूढ़ी अम्मा हैं शादियों के गीत गाती हैं जो, कई सारे पारम्परिक भजन इत्यादि रहते हैं वह उनकी मृत्यु के साथ ही रिकार्ड समाप्त हो जाता है. चाहे हमारी संजा माता (सांझी माता) हो, गणगौर माता हो, इनके गीतों का लेखन, इन संस्कृतियों को सहेजने का काम इन चित्रों को इन आकृतियों को सहेजने का काम, संरक्षित करने का काम संस्कृति विभाग कर रहा है. क्योंकि व्यक्ति के चले जाने के साथ ही उसका ज्ञान चला जाता है इसलिये जब यह लिपिबद्ध हो जायेंगी, चाहे गीत हों, चाहे भजन हो, लोकोक्तियां हों, जब इन्हे संग्रहित करके एक डाटा के रूप में स्थापित कर दिया जायेगा तो आने वाली पीढ़ियां भी इनको समझ सकेगी, इनका गायन कर सकेगी, इनका वादन कर सकेगी इनको बोल सकेगी, और यही काम है संस्कृति को सहेजने का , जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक स्वत: जाती है उन्हें यदि लिपिबद्ध कर दिया जाये, डाटा मे शामिल कर दिया जाये तो निश्चित ही हम आने वाली पीढियों को एक अच्छा उपहार दे सकते हैं.

          माननीय सभापति महोदय,धर्मस्व हो, संस्कृति हो, यह हमारी पहचान है और मै ऐसा मानता हूं कि मध्यप्रदेश की सरकार और माननीय मुख्यमंत्री जी विशेष रूप से चिंता करके काम कर रहे हैं. अभी भी जो प्राचीन बड़े बड़े स्थान हैं जैसे हमारे हरदा जिले में भगवान रिद्धनाथ महादेव मंदिर  एक प्राचीन मंदिर है, नेमावर में भगवान सिद्धनाथ (सिद्धेश्वर महादेव) मंदिर मध्य प्रदेश के देवास जिले में नेमावर में नर्मदा नदी के उत्तरी तट पर स्थित एक प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिर है यह एक प्राचीन मंदिर है, मां नर्मदा का नाभि स्थल उसको कहा जाता है जिसकी प्रमाणिक गणना करके उसे मध्य क्षेत्र में न जाने कब स्थापित किया गया , ऐसी मान्यता है कि दुनियां के इतिहास में, भारत के इतिहास में, युगों के इतिहास में सतयुग स्वर्ण युगत्रेता ,द्वापर और कलयुग किसी भी युग में जो नदी नष्ट नहीं हुई, जिसने अपना मार्ग परिवर्तित नहीं किया वह है केवल नर्मदा नदी इसलिये दुनियां में जितनी प्राचीन सभ्यताओं की खोज हो रही है उसका कहीं से अगर उद्गम मिल सकता है तो वह नर्मदा घाटी की सभ्यता में मिल सकता है.

          माननीय सभापति महोदय, हमारी सबसे प्राचीन सभ्यता है, सबसे प्राचीन विरासत है, वहां पर मां नर्मदा के पास भगवान सिद्धनाथ, पर हर अमावस्या में लाखों लोग आते हैं, और अब परमपूज्य आचार्य विद्यासागर जी महाराज के द्वारा वहां पर त्रिकाल चौबीसी के भव्य मंदिर का निर्माण किया गया जहां पर जैन संत तो रहते ही हैं लेकिन बड़ी संख्या में दिगम्वर जैन धर्मावलंबी भी वहां पर आते है इसलिये वहां पर सिद्धनाथ लोक का निर्माण और कुछ यात्रियों के लिये सुविधायें जुटाने का काम भी सरकार को करना चाहिये.

          माननीय सभापति महोदय, मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होने नर्मदा जी की पंचकोशी यात्रा भारत में जो कि 5 दिवसीय यात्रा रहती है जो लोग पूरी परिक्रमा नहीं कर सकते वह नर्मदा जी की पांच दिन की पंचकोशी यात्रा करते हैं उसके लिये 3 लाख रूपये का बजट हमारी जनपद पंचायत को प्रदान किया जिसके कारण वहां पर यात्रियों की सुविधा के लिये हम कुछ व्यवस्थापन कर सकें. आने वाले समय में देवास जिले में चूंकि यहां पर मेरे साथी विधायक मुरली भंवरा जी यहां पर बैठे हैं जटाशंकर तीर्थ जिसकी महिमा है, सीतावन जहां पर माता सीता जी के वनगमन के समय के कई अवशेष मौजूद हैं , कांवडिया पहाड़ , मुंबई के मरीना और जुहू बीच जैसी कुछ पत्थरों की श्रृंखलायें आज भी मौजूद है , और जहां पर डेम बनने के बाद में चूंकि जल रूक जाता है लेकिन आज भी वहां पर निकाले जाने वाले शिवलिंग के पत्थरों का आकार एक अद्भुत आकार होता है इन सबको सरकार लोगों को दिखाये, जयंती माता  एक क्षेत्र है जंगल का, खंडवा और देवास जिले की वाउन्ड्री पर पड़ता है , जहां पर 12 महीने जल  प्राकृतिक झरने के रूप में बहता रहता है इन सब स्थानों का विकास होना चाहिये. और उन गुफाओं की खोज भी कराना चाहिये, जामवंत जी जो कि चिरंजीव हैं, पूरे भारत में अश्वत्थामा (द्रोणाचार्य पुत्र) और जामवंत के कई जगहों पर हमें चिह्न मिलते हैं. क्योंकि वह निरंतर घूमते रहते हैं. हमारे क्षेत्र में भी जामवंत की गुफा करके एक स्थान है जिसके बारे में कहा जाता है कि उस 25 किलोमीटर लंबी गुफा से संत महात्मा जामवंत जी प्रतिदिन नर्मदा जी के स्नान के लिेये जाते थे तो ऐसी गुफाओं की खोज भी संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय को कराना चाहिये.

          सभापति महोदय, आपको पता होगा विदेशों में हम डिस्कवरी चैनल पर कई सारे कार्यक्रम देखते हैं जहां कई सारे खोजकर्ता जाकर के उनके विडीयो बनाते हैं, फिल्में बनाते हैं जिससे लाखों करोड़ों लोग देखते हैं तो हमारे पास भी इस तरह की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासतें मौजूद हैं , आवश्यकता इस बात की है कि अच्छा अनुसंधान हो ताकि आने वाली पीढियों तक हमारा ज्ञान हमारा धर्म, हमारी परम्परायें पहुंच सकें. इसीलिये धर्म और संस्कृति विभाग की स्थापना मेरे ख्याल से पुराने लोगों द्वारा की गई होगी, क्योंकि धर्म ही इस देश के प्राण हैं, धर्म से हम जुड़े रहेंगे तो धर्म हमें जोड़े रखेगा.

          सभापति महोदय, आपने बोलने का समय दिया उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.                                                                         

          श्री नितेन्द्र बृजेन्द्र सिंह  राठौर (पृथ्वीपुर) सभापति महोदय,  मैं मांग संख्या 26,37 एवं 51  के अनुदान मांगों  के कटौती प्रस्ताव  पर  अपनी चर्चा रख रहा हूं.पर्यटन ऐसा विभाग है,  जिससे सांस्कृतिक आदान प्रदान, रोजगार के अवसर, ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण  आदि में मदद मिलती है और साथ ही   इससे इतिहास को समझने   का मौका मिलता है.  यह  उद्योग  प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष   रुप से  बड़े पैमाने पर रोजगार  पैदा करता है.  अगर हम होटल के बारे में  बात करें, तो  होटलों में तमाम कर्मचारी  इसमें काम करते हैं. गाइड्स बनते हैं.  ट्रेवल एजेंसीज काम करती हैं.  सोविनियर शॉप्स  होती हैं,  इन सबको  काम करने का अवसर मिलता है और तमाम लोगों को अपनी दुकानदारी  करने का  इससे संबंधित  लोगों को  अवसर मिलता है.  इसमें  पर्यटन में सबसे महत्वपूर्ण सेक्टर  अगर हम कहें, तो हॉस्पिटैलिटी सेक्टर है,   जिसमें सबको सिखाया जाता है कि   Treat a guest like God. अतिथि देवो भव और  अतिथि देवो भव के  माध्यम  से  जो लोग भी घूमने आते हैं, जो एक दूसरे से मिलते हैं,  सबसे महत्वपूर्ण होता है कि  किस तरह से हम उनका  ख्याल रखें, किस तरह से  उनकी मेहमान नवाजी  करें और इसके  माध्यम से न केवल आर्थिक  सम्पन्नता, बल्कि संबंधों  की भी सम्पन्नता   हमें मिलती है.   आज जरुरत है पर्यटन को बढ़ावा  देने की. जिसके लिये  महत्वपूर्ण है कि  हमारा  बुनियादी ढांचा  जैसे सड़क,स्वच्छता, सुरक्षा सुनिश्चित करने की. स्थानीय संस्कृति व  ग्रामीण  पर्यटन पर ध्यान केंद्रित  करना आवश्यक है.  विदेशी पर्यटकों को लाने के लिये जो दूतावास है,  उनमें खास लोगों को आमंत्रित  करना आवश्यक है.  देश विदेश में  बड़े बड़े ट्रेवल एजेंट्स होते है.   जैसे डब्ल्यूडीएम लंदन है, आईटीबी बर्लिन,  फिटूर  मैड्रिड है, साटे डिल्ली है, जीआईटीबी जयपुर है,  एटीएम  दुबई है  और  ये सबमें म.प्र.  पर्यटन हिस्सा लेता है.  लेकिन  मेरा मानना है कि इसमें होटल व्यवसायियों को, ट्रेवल एजेंट्स को और  उनके साथ साथ तमाम जो फूड ब्लॉगर जो खाने का प्रमोशन   भी करते  हैं अलग अलग जगह पर और  जो आज कल    डेटिस्टनेशन वेडिंग एक बहुत बड़ा बिजनेस प्लेटफार्म  पर्यटन के लिये बन गया है. तो इसमें जो वेडिंग प्लानर्स हैं,  उनको  भी आमंत्रित करना चाहिये और उनको  प्रोत्साहित  करना चाहिये कि इस प्लेटफार्म  पर वे पार्टिसिपेट करें  और  उसको बढ़ाने का मौका दें.  जो विदेशी टूर, ट्रेवल   एजेंट्स  हैं,  उनको आमंत्रित करके  अलग अलग सर्किट में  घुमाना चाहिये,  जिससे कि म.प्र. के सारे  भागों को  अच्छे से समझ सकें  और नई  आरडिनरियां बना सकें.  हमारा म.प्र. जिसमें बहुत कुछ  घूमने  के लिये है.  अगर हम हेरिटेज सर्किट  की बात  करें, तो हमारे पास खजुराहो जैसी  महत्वपूर्ण जगह, ओरछा, चंदेरी,  दतिया, ग्वालियर,सांची, भोपाल,महेश्वर, मांडू एवं जबलपुर है.  अगर हम वाइल्ड लाइफ की बात करें,  तो  हमारे  पास पेंच,बांधवगढ़,कान्हा,पन्ना,कूनो,मढ़ई है  और तमाम और भी जगह  यहां पर हैं, जहां पर वाइल्ड लाइफ एक बहुत बड़ा  सेक्टर है.  अगर हम धार्मिक जगह की   बात करें, तो  चित्रकूट का कामतानाथ मंदिर,  महाकालेश्वर, उज्जैन, ओंकारेश्वर,  दतिया का पीताम्बरा पीठ,  ओरछा का राम राजा मंदिर,  मैहर  का माता  का मंदिर और तमाम  ऐसी जगह हैं, जहां और प्रमोशन  की  आवश्यकता है.  अगर सरकार ठान ले  पर्यटन ऐसा उद्योग है, जिसके माध्यम से  बेरोजगारी की समस्या लगभग  60 से  70 प्रतिशत  तक हम समाप्त कर सकते हैं.  इस बजट पर दो पंक्तियां मैं  आपके सामने रखना चाहूंगा  और एक आदमी की बात है, क्योंकि हर आदमी घूमना चाहता है,  अपने परिवार को घुमाना चाहता है.  हसरतें बहुत हैं कि  बादलों के पार जायें,  मगर जेब के  सिक्के कहते हैं कि घर   वापस आयें.  सरकार हर वर्ष पर्यटन वृद्धि के दावे  करती है, लेकिन प्रश्न यह है कि पिछले   वित्तीय वर्ष में पर्यटन विभाग   को जितनी राशि  आवंटित हुई,  उसका कितना प्रतिशत  खर्च हुआ.  कितने  नये  होटल्स, होम  स्टे पंजीकृत हुए. पर्यटन से प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष रोजगार से कितनी वृद्धि हुई. यदि बजट बढ़ रहा है और रोजगार के आंकड़े स्थित है तो यह चिंता का विषय है. क्‍या पर्यटन बजट का बड़ा हिस्‍सा, केवल प्रचार-प्रसार और इवेंट मैनेजमेंट में खर्च हो रहा है. क्‍या कारण है कि पर्यटन विभाग अपना पूरा बजट उपयोग नहीं कर पा रहा है. आप बजट भाषण में तो आप राशि बढ़ा देते हो. लेकिन उसका पूरा उपयोग नहीं होता है.

          सभापति महोदय, पर्यटक किसी भी राज्‍य में आते हैं तो वह देखते हैं कि वहां पर कानून व्‍यवस्‍था कैसी है.मध्‍यप्रदेश की कानून व्‍यवस्‍था जब तक सुचारू नहीं होगी, अच्‍छी नहीं होगी, तब तक पर्यटक और ज्‍यादा नहीं बढ़ सकते है. पिछले बजट में हम सबने देखा कि रामवनपथ गमन पथ यात्रा के लिये 30 करोड़ रूपये और श्रीकृष्‍ण पथयात्रा के लिये 10 करोड़ रूपये का प्रावधान था. लेकिन आज रामवनपथ गमन श्रीकृष्‍ण पथ का क्‍या हुआ. यह सरकार को स्‍पष्‍ट करना चाहिेये.

          सभापति महोदय,पर्यटन, संस्‍कृति और धार्मिक न्‍यास के लिये लगभग1610 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है. जो पिछले वर्ष से 133 करोड़ से अधिक है, लेकिन प्रश्‍न यह है कि वृद्धि वा‍स्‍तविक विकास में कितनी दिखाई दे रही है. सरकार के अनुसार वर्ष 2024 में लगभग 13 करोड़ पर्यटक देश में आये, जिनमें से लगभग 10 करोड़ से अधिक पर्यटक धार्मिक स्‍थलों पर गये. यह एक बड़ा अवसर है लेकिन मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि पर्यटन से प्रत्‍यक्ष और अप्रत्‍यक्ष कितने रोजगार सृजित हुए क्‍या इन पर्यटकों से स्‍थानीय अर्थव्‍यवस्‍था में वास्‍तविक आय वृद्धि हुई,, पर्यटन बजट का कितना हिस्‍सा, आधारभूत संरचना, सड़क, शौचालय, सुरक्षा और गाइड प्रशिक्षण पर खर्च हुआ और कितना प्रचार प्रसार पर. यदि 13 करोड़ पर्यटक आये और ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी बनी हुई है तो मॉडल पर पुन:विचार जरूरी है.

          माननीय सभापति महोदय, सिंहस्‍थ आ रहा है और हम सब स्‍वागत करते हैं. सिंहस्‍थ वर्ष 2028 के 2005 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है जो इन विभागों के वार्षिक बजट से भी अधिक है. यह आयोजन महत्‍वपूर्ण है, क्‍या यह खर्च स्‍थायी एवं संरचना में निवेश है या स्‍थायी आयोजन प्रबंधन में. आयोजन के बाद  परिसम्‍पत्तियों  का उपयोग कैसे होगा. संस्‍कृति विभाग में 507 करोड़ रूपये स्‍मारकों के लिये है, लेकिन लोक कलाकारों की पेंशन और मानदेयों का क्‍या हुआ. सरकार कहती है कि मध्‍यप्रदेश पर्यटन का हृदय है. लेकिन यह सच है कि पर्यटन का दिल तो धड़क रहा है, पर जमीन पर विकास की नब्‍ज़ कमजोर है.

          सभापति महोदय, मध्‍यप्रदेश में लोक कलाकारों की संख्‍या हजारों में है, कितने कलाकारों को नियमित मानदेय मिल रहा है, कितने सांस्‍कृतिक संस्‍थान वित्‍तीय संकट में हैं. बुंदेली, बघेली, मालवी और निमाड़ी भाषाओं के संरक्षण के लिये कोई स्‍थायी अमादमी या शोध संस्‍थान को पर्याप्‍त बजट मिला है या यदि संस्‍कृति बजट का बड़ा हिस्‍सा केवल बड़े शहरों के कार्यक्रमों में खर्च हो रहा है तो ग्रामीण कलाकार उपेक्षित रहेंगे.

          सभापति महोदय, आवंटित बजट बनाम वास्‍तविक खर्च का प्रतिशत और रोजगार सृजन के ठोस आंकड़े, धार्मिक न्‍यास के आय-व्यय की सार्वजनिक पारदर्शिता, बिना इन तथ्‍यों के यह बजट केवल घोषणाओं का दस्‍तावेज रहेगा, विकास का नहीं.

          सभापति महोदय, प्रदेश के विभिन्‍न लोकगीत कलाकरों को सरकार की ओर से बढ़ावा और प्रोत्‍साहन मिलना चाहिये और आर्थिक सहयोग भी मिलना चाहिये. अनेकों विश्‍व धरोहर जैसे सांची, भीमबेटका आदि. आज भी सुविधाओं के लिये तरस रहे हैं. सरकार विज्ञापनों में अद्भूत है लेकिन व्‍यवस्‍था में अधूरी है. स्‍मारक बन रहे हैं, पर कलाकार बिखर रहे हैं, यही इस बजट की सच्‍चाई है. यह बजट विकास का दस्‍तावेज कम और आयोजन और प्रचार का पोस्‍टर ज्‍यादा है. अगर 13 करोड़ पर्यटक आ रहे हैं. अगर मंदिरों में करोड़ों की आय हो रही है. अगर बजट में हजारों करोड़ के प्रावधान हैं तो फिर प्रदेश का युवा बेरोजगार क्‍यों है, ग्रामीण कलाकार उपेक्षित क्‍यों हैं. यह चिंता का विषय है.

          माननीय सभापति महोदय, मैं बुंदेलखंड से आता हूं और बुंदेलखंड की एतिहासिक व धार्मिक नगरी ओरछा जहां रामराजा स्‍वयं विराजमान हैं. वहां से जोड़कर मड़ोर की सिद्ध पहाड़ी पर मंदिर, गढ़कुड़ार का किला , वीरसागर का बिहारी जू मंदिर, तारामाई का मंदिर सिनोनिया, अछरू माता का मंदिर, बंधा का जैन मंदिर, मढ़ा गीर मंदिर, मोहनगढ़ का किला व चतु‍भुर्जच, मुड़खेरा का सूर्य मंदिर, गोट का देवराई मंदिर, कुंडश्‍वर का शिव मंदिर आदि को जोड़कर पर्यटन का सर्किट बनाये जाने की मांग पिछली बार मैंने सदन में भी रखी थी और माननीय मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखकर भी यह सूचना दी थी. इस बजट में कहीं भी इसका उल्‍लेख नहीं है. यदि इसे जोड़कर सर्किट बनाया जायेगा. तो निश्चित ही निवाड़ी एवं टिकमगढ़ जिले का समग्र विकास होगा. जो यहां बेरोजगारी के कारण स्‍थानीय लोगों को पलायन करके शहरों में जाना पड़ता है. उनको इसका फायदा भी मिलेगा. सभापति महोदय, हमारे यहां बहुत ही खूबसूरत चंदेलकालीन तालाब है खास तौर पर जिला निवाड़ी में वीरसागर तालाब और जिला टीकमगढ़ में नदनवारा तालाब, ये दोनों ही तालाब बहुत सुंदर हैं और जल क्रीड़ा के लिए उपयुक्त भी है. मैं माननीय मंत्री जी से भी चाहूंगा कि मैंने पत्र के माध्यम से भी उनको सूचित किया है. इस पर निश्चित रूप से सरकार ध्यान दे. साथ ही ओरछा के समीप राधापुर बागन लाड़पुरा गांव है जहां कई होम स्टे संचालित हैं  और लाड़पुरा में तो बहुत पहले से फूलों की खेती भी होती है. मैं चाहता हूं कि सरकार इन्हें भी प्रोत्साहित करे और आगे भी इन लोगों को मार्गदर्शन दे.

सभापति महोदय, साथ ही वर्ष 2020 में जब कमलनाथ जी मुख्यमंत्री थे,  तब ओरछा में 'नमस्ते ओरछा' कार्यक्रम का आयोजन हुआ था जिससे ओरछा का नाम पूरे विश्व में प्रसिद्ध हुआ था. कई बड़े संगीतकार, क्लासिकल और वेस्टर्न उस कार्यक्रम में परफार्म किये थे. निश्चित ही मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से और माननीय मंत्री जी से चाहूंगा कि इस तरह के कार्यक्रम ओरछा में आगे भी कराए जाएं, जिससे न केवल ओरछा बल्कि पूरे क्षेत्र का समग्र विकास हो और लोगों को रोजगार भी मिल सके.

          सभापति महोदय, एक सुझाव और भी है और यह बहुत गंभीर विषय है. मैं माननीय मंत्री जी को भी मैं अवगत कराना चाहता हूं कि इस ऐतिहासिक इमारतें पुराने धार्मिक मंदिरों में जीर्णोद्धार उनके पुरातात्विक स्वरूप के साथ जो छेड़छाड़ की जा रही है, उदाहरण के तौर पर रामराजा मंदिर की कई बार यह बात आती है कि पुराने जो मंदिर है उनके प्लास्टर को उखाड़ा जा रहा है, कहीं न कहीं जो हमारा पुरातात्विक महत्व है उसको नहीं मिटना चाहिए. इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए और संबंधित अधिकारियों को इस बात के लिए कहना भी चाहिए कि उसके साथ कोई छेड़छाड़ नहीं हो.

          सभापति महोदय, साथ ही मैं कहना चाहता हूं कि  ओरछा जो बुन्देलखण्ड का द्वार है और स्वयं रामराजा वहां पर विराजमान हैं, अगर पर्यटक दिल्ली आगरा से होते हुए आते हैं तो ओरछा से आगे खजुराहो की तरफ जाते हैं. सवाई माधोपुर उदयपुर कोटा से आते हैं तो भी यहीं से होकर जाते हैं. मेरा कहना है कि तमाम जगह राजस्थान का उदयपुर, कोटा, सवाई माधोपुर, जयपुर इसको जोड़कर अलग पर्यटन के सर्किट यहां पर बनाये जाएंगे तो निश्चित ही पूरे बुन्देलखण्ड को इसका फायदा होगा और आगे बघेलखण्ड तक वह रोड जाती है. सभी जगहों को इसका फायदा मिलेगा. साथ ही सरकार से अंत में एक मांग है कि पर्यटन विभाग की जो नीति बनाई जाती है, मेरा माननीय मंत्री जी से भी आग्रह है कि इसकी जब नीति बनाई जाती है तो हर क्षेत्र चाहे मध्यप्रदेश का कोई भी क्षेत्र हो, वहां पर चाहे होटल व्यवसाई हों, या वहां के ट्रेवल एजेंट्स हों, जो इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं , उनके भी सुझाव लिये जाने चाहिए, जिससे जो नीति बनाई जाय तो उसमें हम बेहतर तरीके से हर सेक्टर में हर क्षेत्र में काम कर सकें. साथ ही साथ श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने वर्ष 2023 में एक घोषणा भी की थी कि ओरछा में रामराजा की नगरी से जोड़कर जो तारामाई का मंदिर है सिनौनिया में वहां तक के लिए रोप-वे की घोषणा की गई थी, उस पर भी पुनर्विचार किया जाय और रोप-वे वहां पर चालू की जाय, जिससे वहां पर जो पर्यटक आते हैं उन सबको फायदा मिले. सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, आपका बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्री अरविन्द पटैरिया (राजनगर) - सभापति महोदय, मैं 26, 37 एवं 51 पर आपने बोलने का अवसर दिया है उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद. मैं सबसे पहले तो मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी और वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा जी और पर्यटन मंत्री श्री धर्मेन्द्र लोधी जी का धन्यवाद देना चाहूंगा कि इस वित्तीय वर्ष में जिस प्रकार से पर्यटन को लेकर जो वित्त की व्यवस्था की गई है वह लगभग 565 करोड़ 67 लाख 25 हजार रुपये की राशि  जो अब तक की सबसे बड़ी राशि है.

          सभापति महोदय, मध्यप्रदेश देश के मध्य का राज्य है मध्यप्रदेश राज्य में  अन्य राज्यों से बेहतर कनेक्टिविटी है. प्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं . किसी भी राज्य के पर्यटन विकास के लिए रोड कनेक्टिविटी और सुरक्षा एवं सुगम्य वातावरण चाहिए जिसकी दृष्टि से मध्यप्रदेश अपने सभी मापदंडों को पूरा करता है. जहां एक तरफ मालवा में महाकाल, ओंकारेश्वर भगवान विराजमान होकर जगत कल्याण कर रहे हैं वहीं मध्य भारत में झीलों की नगरी भोपाल इटावली, सोमावली, भोजपुर, झांसी की रानी का ग्वालियर का जो किला, दतिया, पीताम्बरा पीठ है, जो मध्यप्रदेश में है. जो मध्‍यप्रदेश में है महाकौशल में पेंच, कान्‍हा टाइगर रिजर्व है. बघेलखण्‍ड में संजय गांधी नेशनल पार्क एवं चित्रकूट, बांधवगढ़ जैसे पार्क हैं. मैं बुन्‍देलखण्‍ड क्षेत्र से आता हूं, वहां नौरादेही, पन्‍ना नेशनल पार्क और खजुराहो के विश्‍व प्रसिद्ध मंदिर, जटाशंकर धाम और बागेश्‍वर धाम भी बुन्‍देलखण्‍ड में है. खजुराहो के जो मंदिर हैं वह चंदेल कालीन मंदिर हैं और वह पर्यटकों के लिए बहुत ही आकर्षण का केन्‍द्र बने हुए हैं.

          सभापति महोदय, हमारी सरकार ने पर्यटन विभाग, धर्मस्‍व विभाग और संस्‍कृति विभाग के क्षेत्र में कई नवाचार किए हैं. पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार की स्‍वदेश दर्शन योजना 2 के अंतर्गत ग्‍वालियर के फूलबाग क्षेत्र में चित्रकूट के घाटों के विकास के माध्‍यम से आध्‍यात्‍म हेतु तथा पीताम्‍बरा पीठ मंदिर दर्शन के विकास के लिए करोड़ों रूपए स्‍वीकृत किए गए हैं. तथा यह तीनों कार्य प्रगति पर हैं.

          सभापति महोदय, हमारी सरकार ने रोप-वे प्रोजेक्‍ट के माध्‍यम ओंकारेश्‍वर, भोजपुर, सलकनपुर, रायसेन किला, जामापाव, भेड़ाघाट के चौंसठ योगिनी मंदिर आदि को जोड़ा है. प्रदेश के विभिन्‍न स्‍थलों पर धार्मिक एवं सांस्‍कृतिक पर्यटन की दृष्‍टि से जो लोक हमारी सरकार द्वारा बनाए गए हैं, इसमें रामराजा लोक, चित्रकूट, सलकनपुर पशुपतिनाथ लोक मंदसौर में जामवंत, हनुमान लोक, परशुराम लोक, जामापाव, पीताम्‍बरा लोक, राजेश्‍वर नाथ लोक, जागेश्‍वरनाथ लोक, जागेश्‍वरी लोक, चंदेरी में नर्मदा लोक, अमरकंटक जैसे धार्मिक लोक आकार ले रहे हैं एवं दूसरी ओर रानी दुर्गावती स्‍मारक, रानी अवंती बाई स्‍मारक, संत रविदास लोक जोकि सागर में एक हजार करोड़ रूपए की लागत बनाया जा रहा है. अटल स्‍मारक, ग्‍वालियर, देवी अहिल्‍या बाई लोक पर्यटन विभाग की नई ऊंचाइयां छू रहे हैं.

          माननीय सभापति महोदय, ग्रामीण पर्यटन को देखते हुए 28 ग्रामों में हमारी सरकार ने 400 होम स्‍टे बनाए हैं. हमारी सरकार का 1 हजार होम स्‍टे बनाने का लक्ष्‍य है.

          सभापति महोदय, मैं आपको बताना चाहता हूं कि हमारी सरकार के द्वारा पीएम श्री हेली पर्यटन सेवा का शुभारंभ वर्ष 2024 में किया गया था. जिसमें वर्तमान में भोपाल, खजुराहो, रीवा, सिंगरौली एवं सतना के लिए नियमित उड़ानें संचालित की जा रही हैं. पीएम हेली पर्यटन सेवा के माध्‍यम से भी पर्यटन स्‍थलों, धार्मिक एवं राष्‍ट्रीय उद्यानों के मध्‍य हवाई सेवा को सुगम बनाने के लिए इस सेवा को 3 सर्किट में बांटा गया है. पहला इंदौर, उज्‍जैन, अशोकनगर है. दूसरा  भोपाल, मढ़ई, पचमढ़ी है और तीसरा जबलपुर, बांधवगढ़, कान्‍हा चित्रकूट, मैहर, अमरकंटक है.

          सभापति महोदय, हमारे प्रदेश में स्‍काय डाइविंग का आयोजन किया जा रहा है. साढ़े तीन सौ लोगों ने स्‍काय डाइविंग का अनुभव किया है. खजुराहो में भी हर वर्ष डांस फेस्‍टिवल होता है, इस वर्ष भी 92वां डांस फेस्‍टिवल खुजराहो में हुआ है. उसी समय खजुराहो में स्‍काय डाइविंग का भी हमारे क्षेत्रीय लोगों ने लुत्‍फ उठाया है. मानसून मैराथन के माध्‍यम से भी खजुराहो में डांस फेस्‍टिवल जो अभी 25 से 26 तारीख तक चल रहा था, उसमें भी खुजराहो में 22 तारीख को मैराथन किया गया था.

          सभापति महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि जल पर्यटन गतिविधियों के माध्‍यम से भी खजुराहो, जोकि बुन्‍देलखण्‍ड के पर्यटन की दृष्‍टि से महत्‍वपूर्ण स्‍थान रखता है,  तो जल पर्यटन गतिविधियों के माध्‍यम से भी कई ऐसे नवाचार किये जा रहे हैं. अभी तक ऐसा मानना रहता था कि मध्यप्रदेश केवल बाघों के लिये आश्रय स्थल बना हुआ था, मैं माननीय मुख्यमंत्री तथा माननीय पर्यटन मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि अब इस प्रदेश में नेशनल पार्कों में चीतों की जिस प्रकार से संख्या में बढ़ोतरी हो रही है तो कहीं कहीं बाघ और चीते मध्यप्रदेश के वातावरण के अनुकूल हैं. मैं यह भी कहना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश के खजुराहों से मैं आता हूं मुझे भगवान मतंगेश्वर ने मुझे क्षेत्र की सेवा करने का मौका दिया है. भगवान मतंगेश्वर और बाघेश्वर धाम दो प्रसिद्ध स्थान हैं जिनका नाम देश में ही नहीं विदेशों में भी है. मैं मंत्री जी से कहना चाहूंगा हमारी विधान सभा को पवित्र क्षेत्र घोषित किया गया है, इसके लिये मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं. जहां पर देवी जी का स्थान है. मध्यप्रदेश में खजुराहो आध्यात्मक और पर्यटन का केन्द्र है. यह चंदेलकालीन मंदिरों के लिये जाना जाता है. इन मंदिरों के अलावा कंधारिया महादेव जी का मंदिर, लक्ष्मण मंदिर, विश्वनाथ जी का मंदिर, चित्रकूट मंदिर, चौसठ योगिनी मंदिर, बडाव मंदिर, देवी जगदंबा मंदिर, खजुराहो के तालाब और झीलों का नगर भी कहा जाता है. खजुराहो की सुंदरता, स्वच्छता और पर्यावरण की दृष्टि से भी अपनी अलग पहचान बनाये हुए है. खजुराहो के आसपास विभिन्न जल स्रोतों कुटनी डेम और हमारा रनुवा डेम है. माननीय प्रधानमंत्री जी को भी धन्यवाद देना चाहूंगा कि हमारी केन बेतवा लिंक परियोजना के कारण जिस प्रकार से बुंदेखखण्ड को सूखाग्रस्त कहा जाता था आज बुंदेलखंड विकसित बुंदेलखंड होगा हमारी पर्यटन की दृष्टि से हमारे जो बांध मेरे विधान सभा क्षेत्र में आते हैं उस परियोजना के पूर्ण होने के कारण जब उनका भराव क्षेत्र बढ़ेगा और पानी बढ़ेगा तो इसके लिये पर्यटन को हमारी सरकार के किये हुए कामों से जो लाभ मिलेगा. मेरी क्षेत्र की जो मांगे हैं खजुराहो पर्यटन की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है. इस सरकार के द्वारा चाहे रेल, प्लेन अथवा रोड़ की कनेक्टिविटी हो हमारी सरकार ने बहुत बड़े काम किये हैं. भगवान मतंगेश्वर मंदिर है वहां पर रोपवे का भी निर्माण किया जाये, रानीफाल पर रोपवे बनाया जाये, क्योंकि जटाशंकर धाम को बुंदेलखंड में केदारनाथ जी कहा जाता है. वहां पर रोपवे की घोषणा की गई है. वहां का काम चालू करवाएं ताकि वहां का विकास हो सके. बाघेश्वर धाम को देश में ही नहीं विदेशों में भी पहचाना जाता है. इतने प्रसिद्ध स्थानों पर मुझे सेवा का अवसर मिला है. बाघेश्वर धाम का भी विकास किया जाये, मां बंबरबेनी का जीर्णोद्धार भी किया जाये. भगवान मतंगेश्वर की बारात भी निकलती है उसमें लाखों लोग शामिल होते हैं उसको मंत्री जी संस्कृति विभाग से जोड़ दें तो अच्छा रहेगा. खजुराहो में गाईड की संख्या बहुत कम है. जिन भी नौजवान साथियों को भाषाओं का ज्ञान सीखना पड़ता है. उनको दिल्ली व अन्य जगहों पर जाना पड़ता है. वहां पर ऐसी व्यवस्था की जाये कि वहां पर गाईडों को अन्य भाषाओं के ज्ञान के लिये शिक्षण केन्द्र खोला जाये तो लाभ होगा. धन्यवाद.

 

           02.15 बजे                        अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

          सभापति महोदय -- आज ध्‍यानाकर्षण की सूचना क्रमांक-2 में सदस्‍य श्री भंवर सिंह शेखावत जी द्वारा मुख्‍यमंत्री जी के संबंध में टिप्‍पणी की गई थी, उसे विलोपित किया जाये.

 

          02.16 बजे          

                      वर्ष 2026-2027 की अनुदानों की मांगों पद मतदान....... (क्रमश)

          श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर(खरगापुर) -- सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या-26 संस्‍कृति, मांग संख्‍या-37 पर्यटन, मांग संख्‍या-51 धार्मिक न्‍यास और धर्मस्‍व विभाग के संबंध में मैं अपनी बात रखते हुए कहना चाहती हूं कि खरगापुर विधानसभा के नगर बल्‍देवगढ़ में प्राचीन किला है, एक किला ग्राम पचेर में है. उक्‍त प्राचीन धरोहर को सुरक्षित रखे जाने के लिये और उक्‍त दोनों किलों की इमारतों में जहां -जहां टूट फूट हिस्‍से हैं, उनके निर्माण  कराये जाने हेतु राशि की व्‍यवस्‍था कराई जावे, क्‍योंकि प्राचीन इमारतें हम सबको कुछ न कुछ अतीत के बारे में जानकारी देती है.

          सभापति महोदय, इन दोनों किलों का अच्‍छा निर्माण कराये जाने पर सौन्‍दर्यीकरण कराये जाने हेतु पर्यटन विभाग से अनुरोध करती हूं कि इन दोनों किलों को शासन की ओर से होटल के रूप में भी बदल सकते हैं, तथा बल्‍देवगढ़ किले के पास से लगा हुआ ग्‍वालसागर तालाब है, जिस पर बोट क्‍लब बनाकर एक पर्यटन स्‍थल बनाया जा सकता है. पचेर के किले के पास एक धसान नदी भी निकली है, वहां पर भी एक सुंदर से सुंदर स्‍थान बनाया जा सकता है, जब दोनों स्‍थानों को पर्यटक स्‍थल बनायेंगे, तो शासन को राजस्‍व आय प्राप्‍त होने के साथ-साथ हमारी प्राचीन धरोहर सु‍रक्षित हो जायेगी.

          सभापति महोदय, मैं दूसरी बात कम से कम समय में रखना चाहती हूं. खरगापुर विधानसभा क्षेत्र में काफी प्राचीन मंदिर हैं, जिसमें विंध्‍यवासिनी मंदिर, दुर्गानगर बल्‍देवगढ़, कालका माता मंदिर देरी, दूबदेई मंदिर दूबदेई, हिंगलाज माता मंदिर घूरा, हरतला मंदिर पलेरा, बड़ी देवी मंदिर पलेरा, चर्तुभुज मंदिर देरी, कुटी सरकार पचेर, बाजना सरकार पिपरा विलारी, हनुमान जी मंदिर कोटरा, हनुमान जी मंदिर कुड़याला, प्राचीन शिव मंदिर नारायणपुर, हनुमान जी मंदिर खुड़न बड़ाघाट, जोगन माता मंदिर छिदारी, बंदान के हनुमान जी मंदिर भटगोरा, अंजनी माता मंदिर सुजानपुरा, सूर्य मंदिर गोरा, हनुमान जी मंदिर भिलौनी, हनुमान जी मंदिर बन्‍ने, शंकर जी मंदिर देवरदा, खंदा के हनुमान जी मंदिर एरोरा, हनुमान जी मंदिर हरपुरा, चौराहे के हनुमान जी मंदिर खरगापुरा, हनुमान जी मंदिर गनेशपुरा, हनुमान जी मंदिर अलोपा, चांदी वेर के हनुमान जी मंदिर पथरगुंवा, सिद्धबाबा मंदिर मि‍ड़ावली, बिहारी जू मंदिर सरकार, झाड़ी वाले बाबा का मंदिर आलमपुरा, पुराने जिनागढ़ के हनुमान जी मंदिर, राम जानकी मंदिर सुजानपुरा आदि मंदिरों के निर्माण हेतु कुछ न कुछ राशि की व्‍यवस्‍था कराई जाये और धार्मिक धर्मस्‍व विभाग से मैं इसलिए बार-बार राशि की मांग करती हूं कि आम जनता की सुविधाओं हेतु सरकार बजट में राशि का प्रावधान करती है, मगर सरकार भगवान के लिये मंदिरों के सौन्‍दर्यीकरण एवं विकास के लिये बजट का प्रावधान कम करती है, इसलिए इन मंदिरों को जोड़ते हुए राशि की व्‍यवस्‍था कराई जाये क्‍योंकि विधायक निधि से मंदिरों को राशि दिये जाने का प्रावधान नहीं होने से बार बार माननीय मंत्री जी से अनुरोध करती हूं कि मेरे विधानसभा क्षेत्र के मंदिरों के लिये राशि की व्‍यवस्‍था जरूर करा दें. सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, उसके लिये बहुत बहुत धन्‍यवाद.   

          डॉ अभिलाष पाण्‍डेय (जबलपुर उत्‍तर)--  मानीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 26, 37 और 51 के विषय में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. सबसे पहले तो मैं मध्‍यप्रदेश सरकार को इसके लिये बधाई देता हूं, जिस तरह से देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्‍द्र मोदी जी जो इस बात को कहते हैं कि विकास भी और विरासत भी यह दोनों काम मध्‍यप्रदेश की सरकार कर रही है. विकास के नाम पर लगातार मध्‍यप्रदेश की सरकार अपने आप को इस देश में एक अलग स्‍थान पर पूरे भारत के सामने स्‍थापित कर रही है जिसमे 4 लाख 38 हजार करोड़ रूपये से ज्‍यादा का बजट यह मध्‍यप्रदेश के सर्वांगीण विकास की परिकल्‍पना को साकार करता है. एक ओर हम विकास करते हैं और दूसरी ओर हम विरासत के संरक्षण की भी बात करते हैं. मध्‍यप्रदेश की बहुत समृद्ध विरासत है और इस विरासत को लेकर के जिस तरह से मध्‍यप्रदेश के जननायक मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी और मध्‍यप्रदेश के हमारे पर्यटन के मंत्री आदरणीय धर्मेन्‍द्र लोधी जी काम कर रहे हैं मैं अपनी ओर से आपको बहुत-बहुत शुभकामनायें और बधाई देता हूं. मध्‍यप्रदेश में जिस तरह से लगातार हर क्षेत्र के विकास की परिकल्‍पना को आप साकार कर रहे हैं, चाहे ग्‍वालियर के अंदर शनिश्‍चरा का मंदिर हो जो अपने आप में एक ऐसा आध्‍यात्मिक केन्‍द्र है जिसमें विश्‍व प्रसिद्ध हमारा शनिश्‍चरा का मंदिर है उसके भी निर्माण की परिकल्‍पना आप साकार कर रहे हैं माननीय मंत्री महोदय. आपने विभिन्‍न जाति वर्ग समाज के अलग-अलग लोगों की जिनकी अपनी-अपनी मान्‍यतायें हैं, मैं आपको धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि आपने मध्‍यप्रदेश के अंदर मध्‍यप्रदेश में जो परशुराम भगवान की जन्‍मस्‍थली है जानापाव जहां से कई नदियां निकलती हैं, वह जानापाव अपने आप में आध्‍यात्मिक चेतना, हमारी आस्‍था, श्रद्धा और सांस्‍कृतिक विरासत का प्रतीक है, उस स्‍थान के अंदर भी जानापाव लोक के निर्माण की परिकल्‍पना को साकार कर रहे हैं. मैं मध्‍यप्रदेश सरकार को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनायें देता हूं. महाकाल लोक भी हम बना रहे हैं, हम राजा राम का ओरछा का लोक भी बना रहे हैं, हम वही लोग हैं जो सड़क, पानी, बिजली और अन्‍य प्रकार पुल, पुलिया और ब्रिज बनाते हैं, लेकिन महाकाल लोक भी हम बनाते हैं, ओंकारेश्‍वर लोक भी हम बनाते हैं, राजाराम लोक भी हम बनाते हैं, देवी लोक भी हम बनाते हैं, पशुपति नाथ का मंदसौर में लोक भी हम बनाते हैं, जामसांवली जहां हनुमान जी का स्‍थल है वह भी हम बनाते हैं, इसके साथ साथ रानी दुर्गावती, रानी दुर्गावती सिर्फ एक रानी नहीं थीं, रानी दुर्गावती के बारे में जब आप विचार करेंगे तो तत्‍कालीन समय की एक वॉटर मेनेजमेंट की सबसे बड़ी रानी के रूप से रानी दुर्गावती जानी जाती है. मैं धन्‍यवाद  देना चाहता हूं कि जबलपुर संस्‍कारधानी के नाम पर देश के प्रधानमंत्री आकर 100 करोड़ से ज्‍यादा की लागत का रानी दुर्गावती जी का भव्‍य स्‍मारक संस्‍कारधानी में बनाया जायेगा. वह श्रद्धांजलि होगी रानी दुर्गावती जी को और वह श्रद्धांजलि होगी राजा शंकरशाह और रघुनाथ शाह को जिन्‍होंने भारत के लिये, अपने देशा के लिये, अपनी अस्मिता के लिये, उसकी रक्षा के लिये अपने प्राणों की आहूति दी, उन्‍हें श्रद्धांजलि देने का काम मध्‍यप्रदेश की सरकार कर रही है. इसी के साथ-साथ संत रविदास, लोग संत रविदास जी को जाति, पंत के नाम पर बांटते होंगे, लेकिन मैं आज धन्‍यवाद देना चाहता हूं संत रविदास जी के नाम पर जो 100 करोड़ रूपये की लागत का सागर के अंदर भव्‍य मंदिर बनाया जा रहा है, संत रविदास कहते थे कि- ''ऐसा चाहूं राज मैं मिले सभी को अन्‍न, हिल मिलकर सब खुश रहें रविदास रहें प्रसन्‍न''. यह रविदास जी की मान्‍यता थी इसीलिये संत रविदास जी के नाम पर इस प्रकार के वहां पर एक तीर्थ स्‍‍थल बनाना यह धन्‍यवाद की पात्र है मध्‍यप्रदेश की सरकार, हमारी विरासत, हम पुरातन संस्‍कृति को मानते हैं. आज मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं इस फ्लोर के माध्‍यम से अंबेडकर जी, यहां हमने अंबेडकर जी का चित्र लगाया है माननीय सभापति महोदय, अंबेडकर जी के लिये भी जो अंबेडकर जी के पंच तीर्थ हैं चाहे उनकी जन्‍मस्‍थली महू हो, उनकी दीक्षा स्‍थली नागपुर हो, उनकी शिक्षा स्‍थली लंदन हो, उन्‍होंने अंतिम जहां सांस ली वह दिल्‍ली हो, उनकी चैत्र भूमि मुम्‍बई हो इन सारी विरासतों को संरक्षित और संवर्धित करने का काम किसी ने किया है तो वह भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है. इसके साथ-साथ मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं माननीय मंत्री जी आपने टूरिज्‍म के नाम पर रीजनल टूरिज्‍म कॉनक्‍लेव में भी आपने पार्टिसिपेट किया है. आपके साथ साथ मोदी सरकार को भी मैं इस बात के लिये धन्‍यवाद देता हूं. वर्ष 2013 के पहले माननीय सभापति महोदय, इस देश के अंदर जो कला और संस्‍कृति की विरासतें थीं वह मात्र 13 लौटकर आईं, लेकिन वर्ष 2013 के बाद से लेकर वर्ष 2026 में 462 ऐसी आदरणीय मोदी जी की अगुवाई में वह कलाकृतियां भारत के अंदर लौटकर आईं, यह कलाकृतिक विरासत और हमारे सांस्‍कृतिक राष्‍ट्रवाद का प्रतीक हैं, जो काम भारतीय जनता पार्टी की सरकारें करती हैं. आज अभी अरविंद जी कह रहे थे वायु सेना हेलीकाप्‍टर के माध्‍यम से यह सारी चीजें तो हो रही हैं, लेकिन इसके साथ-साथ मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं माननीय सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि जिन्होंने राम हमारे मन और आत्मा में बसा हुआ राम अरे हम गौरवशाली हैं अपने आप में गौरव इस बात को महसूस करते हैं लोग हम पर आरोप लगाते थे कि राम लला हम आएंगे मंदिर वहीं बनाएंगे पर डेट नहीं बताएंगे लेकिन भव्य डेट भी बताई गई और सुन्दर राम मन्दिरका निर्माण भी हुआ और मैं जानता हूं सदन में बैठा हुआ हर व्यक्ति गर्व करता होगा कि भगवान श्रीराम का 500 वर्ष के बाद मन्दिर बनाया गया. ऐसे श्रीराम के बारे में जो कहा जाता है कि अयोध्या धाम धर्म की धुरी,रघुकुल तिलक सत्य की सूरी,वन गमन हित पिता आज्ञा मानी त्याग दया मर्यादा खानी ऐसे प्रभु श्रीराम उनके लिये राम वन गमन पथ का कांसेप्ट लेकर मध्यप्रदेश की सरकार आई है. इसी तरह कृष्ण पाथेय की बात कर रहे थे. नेता प्रतिपक्ष जी के क्षेत्र का वह स्थान है अजमेरा,जानापाव, वहां पर है जहां परशुराम जी ने उन्हें सुदर्शन चक्र प्रदान किया था. श्रीकृष्ण की जहां शिक्षा भूमि है. वह सांदीपनी आश्रम के लिये,इस तरह से राम पथ गमन के साथ-साथ कृष्ण पाथेय, कृष्णम् वन्दे जगत्गुरू की कल्पना को साकार करने वाली मध्यप्रदेश की सरकार है.मैं समझता हूं कि समय की मर्यादा है. मध्यप्रदेश की सरकार ने शहीदों के लिये,शहीदों के बारे में जिस प्रकार से कहा जाता है और शहीदों के लिये मध्यप्रदेश की सरकार ने जो काम किया है पंडित चंद्रेशेखर आजाद,रामप्रसाद बिस्मिल,अशफाउल्ला खां,भगत सिंह,राजगुरू,टांट्या भील, तात्या टोपे इनके बारे में कौन विचार करेगा आने वाली पीढ़ी को कौन दिशा देने वाला है. इसलिये इन पीढ़ियों के बारे में भी विचार करने की आवश्यक्ता है.ऐसे शहीदों के  बारे में आपने सोचा. मुझे ध्यान है जब मैं युवा मोर्चे का प्रदेश अध्यक्ष हुआ करता था तब जिस तरह से जो आजाद नगर बनाने का काम भांवरा के अंदर अलिराजपुर के सुदूर जिले में मध्यप्रदेश सरकार ने काम किया था मैं धन्यवाद देना चाहता हूं क्योंकि पीढ़ियों को बताने की आवश्यक्ता है. यदि शहीदों का सम्मान नहीं किया गया तो मैं कहना चाहता हूं कि पूजे नहीं गये तो फिर यह पंथ कौन अपनाएगा तोपों के मुंह से कौन अपनी छातियां अड़ाएगा, पूजे नहीं गये शहीद तो यह बीज कहां से आयेगा. धरती को अपनी मां कहकर यह माटी माथे से कौन लगायेगा. इसीलिये शहीदों के नाम पर भी काम आपने किया है. जिस पंडित चंद्रशेखर आजाद ने यह कहा था कि दुश्मनों की गोलियों का सामना करूंगा. आजाद ही जिया हूं आजाद ही मरूंगा. इलाहाबाद के अंदर वह पार्क है तो कांग्रेस के कालखण्ड में उसे स्टीफन गार्डन कहा जाता है लेकिन जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार आती है तो उसे आजाद पार्क का नाम दिया जाता है यह काम मध्यप्रदेश और देश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार कर रही है. मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि जबलपुर संस्कारधानी से मैं आता हूं. भोपाल हमारी राजधानी है. इन्दौर आर्थिक राजधानी है लेकिन जबलपुर संस्कारधानी और धर्मधानी है. जिस प्रकार से आपने पर्यटन,संस्कृति के नाम पर रोजगार की अपार संभावनाएं प्रदेश में बढ़ाई हैं. आज मध्यप्रदेश सुरक्षा और कनेक्टिविटी के नाम पर सेंट्रल में होने के कारण उसका लाभ है. हम हमेशा यह बात करते हैं कि धर्मो रक्षति रक्षत: जो धर्म की रक्षाकरेगा धर्म उसकी रक्षा करेगा. मां नर्मदा के तट से आता हूं अमरकंटक से लेकर खम्बात की खाड़ी में मां नर्मदा जाकर मिलती है मध्यप्रदेश के 16 जिले 779 गांव आते हैं. मध्यप्रदेश की सरकार ने 100 प्रतिशत ओडीएफ कर दिया है तो मां नर्मदा के तट पर बहुत सारे ऐसे नदी और नाले गंदा पानी नर्मदा में समाहित हो रहे हैं तो उन नालों को भी रोकना चाहिये एक्सपर्ट यह कहते हैं कि नर्मदा अपने उद्गम स्थल से लेकर आज तक के समय में नर्मदा का 44 परसेंट जल कम हो गया है.यह भविष्य के लिये दुविधा है. जिस तरह से मध्यप्रदेश में पुजारी और पंडितों के लिये मानदेय की घोषणा पहले हो चुकी है. मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि बहुत कम राशि में वे काम करते हैं, इसलिए पुजारी और पण्‍डितों के लिए मानदेय की व्‍यवस्‍था हो. माननीय मंत्री जी, मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि जबलपुर के अंदर, क्‍योंकि जबलपुर अपने आपमें एक ऐतिहासिक शहर है, मैं चाहता हूँ कि जबलपुर के अंदर दो दिन का जबलपुर महोत्‍सव हमारी उत्‍तर मध्‍य विधान सभा में हनुमानताल एक बड़ा स्‍थल है, जहां पर हमारे जैन संप्रदाय का भी बड़ा मंदिर है, बड़ी खेरमाई भी है, आदिनाथ भगवान भी विराजमान हैं. मैं चाहता हूँ कि उस स्‍थान पर हमारा एक ''जबलपुर महोत्‍सव'' का आयोजन हो.

          सभापति महोदय, इसी तरह से जबाली ऋषि की तपोस्‍थली जबलपुर है. मैं चाहता हूँ कि जबलपुर का नामकरण जबाली ऋषि के नाम पर होना चाहिए. इसलिए जबाली ऋषि के नाम पर नामकरण हो. इसके साथ-साथ मैं माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूँ. माननीय सभापति महोदय, आपके प्रति इस बात के लिए भी आभार व्‍यक्‍त करता हूँ कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया. मेरी ओर से बहुत-बहुत शुभकामनाएं. धन्‍यवाद, प्रणाम, नमस्‍कार, जय श्रीराम.

          सभापति महोदय -- बहुत-बहुत धन्‍यवाद डॉ. अभिलाष पाण्‍डेय जी. अभी विपिन जैन जी ने हाथ खड़ा किया था. आपका नाम है नहीं, आप बिना भूमिका के एक मिनट में अपनी बात रख दीजिएगा.

          श्री विपिन जैन (मंदसौर) -- माननीय सभापति महोदय, धन्‍यवाद. मंदसौर के अंदर विश्‍वविख्‍यात भगवान पशुपतिनाथ जी का मंदिर है. जैसा कि अभी कुछ दिन पूर्व ही मुख्‍यमंत्री जी वहां पर पधारे थे और उन्‍होंने पशुपतिनाथ लोक का लोकार्पण किया था. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करता हूँ, आग्रह करता हूँ कि पशुपतिनाथ लोक के दूसरे चरण की राशि इस बजट में 50 करोड़ रुपये दी जाए ताकि विश्‍वविख्‍यात पशुपतिनाथ लोक मंदसौर में बन सके एवं एक धार्मिक कॉरिडोर बने और आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ें. मुझे आपसे उम्‍मीद है और मेरा पुन: आग्रह है कि इस बजट में भगवान पशुपतिनाथ लोक के दूसरे चरण की राशि आप स्‍वीकृत करेंगे ताकि वहां काम शुरू हो सके. बहुत-बहुत धन्‍यवाद. सभापति महोदय, आपका भी बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री रामनिवास शाह (सिंगरौली) -- माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 26, 37 और 51 संस्‍कृति, पर्यटन और धार्मिक न्‍यास और धर्मस्‍व विभाग की मांगों पर चर्चा करने के लिए इसके समर्थन में खड़ा हुआ हूँ.

          माननीय सभापति महोदय, आपने समय दिया, इसके लिए आपका धन्‍यवाद. देश के माननीय यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी एवं प्रदेश के मुख्‍यमंत्री माननीय डॉक्‍टर मोहन यादव जी एवं संस्‍कृति और पर्यटन मंत्री माननीय धर्मेन्‍द्र लोधी जी ने जो यह प्रस्‍ताव लाया है. यह इस बजट में बहुत ही अच्‍छा है. हम भी चाहते हैं कि कुछ क्षेत्र के विकास के काम हों. दूरांचल क्षेत्र सिंगरौली, जो उत्‍तरप्रदेश और छत्‍तीसगढ़ के बॉर्डर पर बसा हुआ है. जहां पर रिहंद डैम और गोविन्‍द बल्‍लभ पंत सागर प्रसिद्ध हैं. इस डैम के अलग-बगल में ऊर्जा का उत्‍पादन होता है. लेकिन सांस्‍कृतिक दृष्‍टिकोण से भी उत्‍तर प्रदेश के बॉर्डर पर ज्‍वालामुखी माता जी का बहुत ही प्रसिद्ध पीठ मंदिर है. ऐसे ही हमारे सिंगरौली में मो माढ़ा गुफा है, जिसको हम पहले से जानते हैं कि बालम राजा का आना-जाना वहां पर होता था और वहां पर गणेश जी का मंदिर है. गुफाएं हैं. वहां पर विवाह माढ़ा के नाम से भी गुफाएं हैं. ऐसे ही एक लिलावर पहाड़ी है, जहां पर बताते हैं कि बालम राजा का उसमें भवन रहा है, किला रहा है, ऐसी तमाम वहां पर कंद्राएं हैं, गुफाएं हैं, उनका जीर्णोद्धार किया जाए तो पर्यटन की दृष्‍टि से बहुत ही अच्‍छा होगा. इनका पुर्ननिर्माण करने से बहुत अच्‍छा हो जाएगा. गोविन्‍द वल्‍लभ पंत जो पिपरी, रैनिकोट, उत्‍तरप्रदेश सिंगरौली के नाम से स्‍थापित है, उसका पानी, हमारे वैढ़न, जो जिला सिंगरौली का मुख्‍यालय है, उसके नजदीक 2 किलोमीटर की दूरी पर ही काफी मात्रा में अधिग्रहण करके भूमि पर जमाव रहता है. हम चाहते हैं कि बोट क्‍लब का गठन करके वहां पर बोट क्‍लब एवं एक बड़ा पार्क स्‍थापित किया जाए, जिससे पर्यटन के दृष्‍टिकोण से यह बहुत अच्‍छा हो जाएगा. ऐसा बताया जाता है कि पहले भी सिंगरौली श्रृंगी ऋषि की तपोभूमि है और रेणुका नदी पर श्रृंगी ऋषि जी ने तपस्‍या की थी. इस नाते भी हम चाहते हैं कि सिंगरौली का पर्यटन की दृष्‍टि से विकास किया जाए. ऐसे भी पीएमश्री जो हवाई यात्रा माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने चलाई है, मैं मुख्‍यमंत्री जी और पूरी सरकार को धन्‍यवाद देना चाहूँगा कि उसके माध्‍यम से हम सबका आना-जाना हो रहा है, लेकिन जो बहुत जरूरी चीजें हैं, जैसे चतुर्भुज मंदिर है, हमको लगता है कि पूरे विन्‍ध्‍य के क्षेत्र में एक ही मन्दिर है, जहां पर श्री लक्ष्‍मी प्रसाद द्विवेदी जी पुजारी हैं, इनको वर्ष 2008 के पहले मानदेय मिलता था, आज नया जिला सिंगरौली वर्ष 2008 में बनने के बाद भी मानदेय प्राप्‍त नहीं हो रहा है. अगर सीधी जिले से इस तरह की व्‍यवस्‍थाएं रही हैं, जब से हम अलग हुए हैं, तब से ही मानदेय नहीं मिल रहा है, तो यह भी कार्य पूरा हो जाये, जिससे उनको मानदेय प्राप्‍त हो सके. इसी तरह से हनुमान मन्दिर ट्रस्‍ट, बैढ़न जो बना हुआ है, यह शहर के बीचों बीच है, हम चाहते हैं कि जय स्‍तंभ का जीर्णोद्धार करके इसका अच्‍छा निर्माण कराया जाना अति आवश्‍यक है, इसी प्रकार से, हम चाहते हैं कि लीलावर पहाड़ पर जहां बालम राजा का आवास हुआ करता था, उसके अन्‍दर वह कभी कहा करते थे कि यदि हम पत्र लिख देते थे, तो पुराने जमाने में उनको बरतनी मिला करती थी, लेकिन अब वह समय नहीं है. लेकिन अगर हम सांस्‍कृतिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण से इसकी खोज करते हैं, तो बहुत ही अच्‍छा होगा. इतना कहते हुए माड़ा की जो गुफाएं प्रसिद्ध हैं, वहां पर हम दीपावली के समय में, धरतेरस के समय में मेला लगा करता है, इसी तरह से हनुमान मन्दिर औढ़ी पर भी मेला लगता है, जो मध्‍यप्रदेश में हैं, उसके सौन्‍दर्यीकरण और उसके जीर्णोद्धार करने के लिए आपसे आग्रह करते हैं, इसको जोड़ते हुए, मैं अपने मंत्री महोदय माननीय श्री धर्मेन्‍द्र भाव सिंह लोधी जी एवं मुख्‍यमंत्री जी को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए मांग संख्‍या 36, 37 एवं 51 का समर्थन करता हूँ, माननीय सभापति महोदय, आपने बोलने का समय दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद.  

            सभापति महोदय - बहुत-बहुत धन्‍यवाद, रामनिवास जी.

          श्रीमती मनीषा सिंह (जयसिंह नगर) - माननीय सभापति महोदय जी, हमारे क्षेत्र शहडोल मुख्‍यालय पर एक विराट मन्दिर है और चूंकि वह बहुत ऐतिहासिक मन्दिर है, वहां पर मेला भी लगता आया है. लेकिन जो विराट मन्दिर है, वह तिरछा हो गया है, उसे संरक्षित करने की मांग, मैं माननीय मंत्री महोदय जी से करना चाहूँगी और जिससे हम लोगों की जो आस्‍था है, वह वहां बनी रहे. धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय - धन्‍यवाद. (श्री पंकज उपाध्‍याय जी के आसन पर खड़े होने पर) पंकज जी, आपका नाम है, एक मिनट. आपके पीछे वाले ने हाथ खड़ा किया था. आपका नाम नहीं है, आप अपनी पूरी बात दक्षता के साथ एक मिनट में रख दीजियेगा. 

          श्री साहब सिंह गुर्जर [ग्‍वालियर (ग्रामीण)] - धन्‍यवाद, माननीय सभापति महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में तानसेन नगरी, जो संगीत सम्राट, विश्‍वविख्‍यात तानसेन जी की समाधि स्‍थल.. 

          सभापति महोदय - (श्री उमाकांत शर्मा जी के खड़े होकर बन्‍द माईक से बोलते रहने पर) उमाकांत जी आपका भी नाम है. उमाकांत जी, एक मिनट. आप बैठ जाइये.

          श्री साहब सिंह गुर्जर - माननीय सभापति महोदय, मेरे विधान सभा में गिरगांव महादेव मन्दिर स्थित है, जो लोगों की आस्‍था का प्रतीक है. आम जनता उन्‍हें न्‍यायाधीश मानती है, यह कहावत है. मन्दिर में आकर कोई उनके सामने आकर असत्‍य कसम नहीं खा सकता है, जो भी असत्‍य कसम खाता है, उसके साथ अप्रिय घटना घटती है, इस मन्दिर का सौन्‍दर्यीकरण कर विकास कार्य कराया जाये. ऐसे ही मेरी विधान सभा क्षेत्र में प्रसिद्ध शीतला माता का मन्दिर है, जहां हजारों श्रद्धालु आते हैं, उस स्‍थल का विकास किया जाये और पुलिस चौकी बनवाई जाये. दतिया और ग्‍वालियर के बीच रतनगढ़ माता का मन्दिर में हजारों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन मन्दिर का ट्रस्‍ट भी हैं, तथा आय का स्‍त्रोत नहीं होने से मन्दिर का समुचित विकास नहीं हो पा रहा है. तो मेरा निवेदन है कि इस मन्दिर के विकास हेतु राशि दी जाये. बहुत-बहुत धन्‍यवाद, सभापति महोदय.

          सभापति महोदय - साहब सिंह जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. श्री दिलीप सिंह परिहार जी. दिलीप जी, एक मिनट. श्री सोहनलाल बाल्‍मीक जी.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक (परासिया) - माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से धार्मिक न्‍यास और धर्मस्‍व के मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि बहुत सारे मन्दिर ऐसे हैं, जिनको प्रशासक चला रहे हैं. तहसीलदार उसके रिसीवर हैं. मैंने बीच में निवेदन किया था कि एक नया विधेयक लाया जाये, क्‍योंकि मैंने जब उनसे बात की थी, तो उन्‍होंने कहा था कि जो पुराने मन्दिर हैं, उन्‍हीं का संरक्षण सरकार की तरफ से होगा, बाकि का संरक्षण नहीं होगा. मगर ऐसे बहुत सारे मन्दिर हैं कि जो विधेयक लाकर उसमें नये मन्दिर को जोड़ना आवश्‍यक है, तो मेरा निवेदन है कि आने वाले समय में नया विधेयक लाकर दूसरे मन्दिरों को उसमें जोड़ा जाये.       

          सभापति महोदय-  डॉ. साहब, आप संक्षेप में कह दें या दिलीप सिंह जी के बाद कह दें.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह (अमरपाटन)-  नहीं, आप उदार हैं, जैसे बकरा हलाल करने के पहले, उसका मालिक केसर-मेवे खिलाता है. मैं जानता हूं मुखबंध होने वाला है.

          सभापति महोदय-  आप वरिष्‍ठ हैं, मुझसे अधिक बार सदन में क्षेत्र का नेतृत्‍व किया है.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंहसभापति महोदय, मैं, विषय पर आ जाता हूं. मेरी विधान सभा में ग्राम देवराजनगर है, वहां एक भव्‍य मंदिर बन रहा है, राजाधिराज मंदिर. आपको आश्‍चर्य होगा कि उसे सरकार बनवा रही है, सरकारी ट्रस्‍ट के माध्‍यम से, पूर्ववर्ती सरकारों ने यह निर्णय लिया था, वह मंदिर पुराने मंदिर जो बाणसागर बांध में डूबे थे, उसकी मुआवज़ा राशि रुपये 30-40 लाख, उस समय वर्ष 1977-80 के बीच थी, वह राशि बढ़कर रुपये 6-7 करोड़ हो गई थी. सरकार ने ट्रस्‍ट बनाया, कलेक्‍टर अध्‍यक्ष है, एस.डी.एम. सचिव है, कमेटी के और भी सदस्‍य हैं. मंदिर बनना वर्ष 2004 में शुरू हुआ लेकिन महंत जो पहले के थे, प्रभु ऐसे लोग लालची तो हैं ही, उन्‍होंने क्‍लेम किया कि हमको दिया जाये, हम बनायेंगे, वे लोअर कोर्ट से हार गए. मंदिर का काम शुरू हो गया, नागर शैली का मंदिर हैं. सोमपुरा जो गुजरात वाले हैं, जिन्‍होंने अभी प्रभु श्रीराम का भी मंदिर बनाया, उन्‍हीं के परिवार ने उन्‍होंने मंदिर का कार्य शुरू किया, आधे से अधिक मंदिर बन गया लेकिन माननीय उच्‍च न्‍यायालय से महंत जी को स्‍टे मिल गया.

          सभापति महोदय, हमें इसी बात की तकलीफ है कि हमारा जिला प्रशासन, कलेक्‍टर, एस.डी.एम. स्‍टे खारिज करवाने के लिए पैरवी ही नहीं करते हैं, स्‍टे खारिज हो जायेगा. वहां की जनता को बड़ी उम्‍मीद है, आकांक्षा है कि वह मंदिर पूरा हो. शायद यह सोमनाथ (गुजरात) के बाद दूसरा मंदिर होगा जो सरकार बनवा रही है, बड़ा विशेष प्रोजेक्‍ट है इसलिए मैं चाहता हूं कि मंत्री जी आप पहल करवायें और वह स्‍टे खारिज़ हो, पैरवी ठीक से करनी होगी, आप यहां से अधिकारियों को नियुक्‍त करें, महाधिवक्‍ता से बात करें, धन्‍यवाद.

          श्री दिलीप सिंह परिहार (नीमच)-  सभापति महोदय, मैं, मांग संख्‍या 26, 37 और 51 के पक्ष में अपने विचार रखना चाहता हूं. मैं केवल अपने क्षेत्र की बात रखकर अपनी बात समाप्‍त करूंगा. आज हम बड़े प्रसन्‍न हैं क्‍योंकि मुख्‍यमंत्री जी पर्यटन और संस्‍कृति को बढ़ाने के लिए लगातार समय-समय पर सहयोग करते हैं और उसे बढ़ाने का काम किया है और साथ ही मंत्री धर्मेन्‍द्र लोधी जी को धन्‍यवाद दूंगा और इनके समर्थन में खड़े होकर कहूंगा कि प्रदेश की भौगोलिक स्थिति में, विभिन्‍न प्रकार के पर्यटक आर्कषणों, प्रसिद्ध धार्मिक स्‍थल, प्राचीन किले, प्राकृतिक सौंदर्य के साथ जलाशय, राष्‍ट्रीय अभ्‍यारण, वन्‍य प्राणियों के प्राकृतिक आवास प्रसिद्ध हैं. अब प्रदेश चीतों के रूप में भी पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है. हमारे गांधी सागर में अभी माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने चीते छोड़ने का काम किया था. आज विकास से विरासत की ओर प्रदेश बढ़ रहा है. मां नर्मदा का परिक्रमा पथ बन रहा है. सनातन संस्‍कृति लगातार बढ़ती जा रही है.

          सभापति महोदय, मैं, कहूंगा कि जहां उज्‍जैन में सिंहस्‍थ पर्व आने वाला है, वहां महाकाल लोक में भगवान महाकाल की नगरी में महाकाल लोक जब सजा था तो वहां देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी, पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज जी एवं वर्तमान मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी ने सिंहस्‍थ के लिए महाकाल लोक की दशा और दिशा बदली है. पर्यटक बहुत बड़ी संख्‍या में उज्‍जैन में आ रहे हैं.  जहां भगवान कृष्‍ण और सुदामा ने साथ में शिक्षा प्राप्‍त की थी, उस महाकाल लोक का हम आनंद ले रहे हैं और उनकी कृपा प्रदेश में सभी के ऊपर है इसलिए हमारा प्रदेश जो देश का ह्दय स्‍थल है, वह विकास की गति को आगे बढ़ाने का काम कर रहा है.

          सभापति महोदय, अभी मंदसौर में मुख्‍यमंत्री जी, सांसद, विधायक सभी आये थे, हम सभी वहां थे और वहां भगवान पशुपतिनाथ लोक के प्रथम चरण का उन्‍होंने शुभारंभ किया तो मंदसौर-नीमच जिले में हर्ष की लहर थी. वहां के विधायक जी ने अभी बताया है और हम भी यह चाहते हैं द्वितीय चरण का काम भी वहां प्रारंभ हो.

          सभापति महोदय, मां भादवा माता का वहां स्‍थान है, पूर्व में उसके लिए रुपये 10 करोड़, मां भादवा माता लोक के लिए पर्यटन के विभाग के माध्‍यम से, सरकार ने दिये थे, वहां विकास भी हुआ है, मगर वहां मां का स्‍थान है और वहां कई लोग दूर-दूर से आते हैं, जिन्‍हें लकवा मार जाता है

वह यदि वहां के जल से नहाते हैं वहां का जल ग्रहण करते हैं, नौ दिन तक मां के दरबार में पूजा में रहते हैं तो जो लोग कंधे पर बैठकर आते है मां की कृपा से वह पैदल जाते हैं. भादवा माता लोक का भी 10 करोड़ रुपए का काम हो गया है.

          सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मुख्‍यमंत्री जी और मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि मां भादवा माता लोक का 17 करोड़ रुपए का प्रस्‍ताव नीमच के जिलाधीश महोदय ने, कमिश्‍नर साहब ने भोपाल भेजा है. मैं मान्‍यवर मुख्‍यमंत्री मोहन यादव जी और पर्यटन मंत्री, धर्मेन्‍द्र लोधी जी से निवेदन करूंगा कि मां भादवा माता लोक के लिए आप पैसा जारी करने का काम करें जिससे कि जो लोग वहां अपेक्षा कर रहे हैं उस अपेक्षा पर हमारी सरकार खरी उतरे. वैसे भी पूर्व की सरकारों में सनातन संस्‍कृति और धर्म के लिए कोई काम नहीं किये हैं, लेकिन आज सब दूर चाहे महांकाल लोक हो, पशुपतिनाथ का लोक हो या मा भादवा माता का लोक हो हमारे मुख्‍यमंत्री जी लगातार उस संबंध में काम कर रहे हैं. मेरा आपसे यही निवेदन है. सुखदेव जी की तपोस्‍थली जहां सुखदेव जी भगवान ने जावद के पास में सुखानंद जी का स्‍थान है जहां सुखदेव जी ने तपस्‍या की थी. उस पर्यटन स्‍थान को भी बढ़ाने के लिए कुछ राशि के प्रस्‍ताव भेजे हैं तो वो भी पास हो जाएं. साथ ही राजा राम तो इस देश के प्राण हैं और राम राजा के लोक के लिए अभी पूर्व में बताया मैं खुद भी शुरू से विश्‍व हिन्‍दू परिषद् बजरंग दल में काम करता था. राम का महत्‍व है और राम नाम की अद्भुत महिमा है जिससे ''पानी पर पत्‍थर तैरे, झुका समंदर सेतु बनाया केसरिया रण में फिरे तो रम पथ गमन भी आज बन रहा है तो इसके लिए भी मैं मान्‍यवर मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद दूंगा. कृष्‍ण पथ गमन के लिए भी पैसा इस फंड में डाला है तो भगवान कृष्‍ण पथ गमन भी बनेगा. महापुरुषों के लिए भी संत रविदास हो, रानी दुर्गावती हो. सागर में 100 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. उसके लिए भी मैं धन्‍यवाद दूंगा. मुझे यही है कि ज्‍यादा कुछ बोलने की आवश्‍कता नहीं है.

          सभापति महोदय-- माननीय मंत्री जी को तो एक बार भादवा माता दर्शन के लिए आमंत्रित कर लें.

          श्री दिलीप सिंह परिहार--मैं तो सभी को आंमत्रित करता हूं. आप सभी को,  यहां सदन में बैठे हुए बंधुओं से कि मां भादवा माता ममतामयी मां हैं, करूणामयी मां हैं, दयामयी मां हैं और उनका आर्शीवाद सभी पर रहता है. जो लोग कंधे पर बैठकर आते हैं मां की कृपा से ठीक घर जाते हैं. मैं धर्मेन्‍द्र जी से भी निवेदन करूंगा कि वह भी पधारें मां का आर्शीवाद लें और हमारे यहां जो 17 करोड़ का जो प्रस्‍ताव भेजा है उसके मंजूर करें. मां भादवा माता लोक में कुछ लोग भ्रांतियां फैला रहे हैं कि पैसा दान दाता लगाएंगें. हमें किसी दान दाता का पैसा नहीं चाहिए. हमारे वहां जो दान पात्र है उसमें जो 5 करोड़ रुपया एकत्रित हुआ है हम उसी से मंदिर बनाएंगे क्‍योंकि मंदिर एक ऐसी चीज है जहां लोगों की श्रद्धा जुड़ी रहती है. जो गलत काम करते हैं दारू वाले और ऐसे लोगों का पैसा हम वहां नहीं लगाना चाहते हैं जो हमारी माताएं बहने हैं देवद्रव्‍य का पैसा उस पेटी में डालती हैं उससे हम भव्‍य मंदिर बनाना चाहते हैं, क्‍योंकि मां सबकी हैं. और उस पैसे से ही मंदिर बने, मेरा यह भी आग्राह है. उस समय हमने इस मीटिंग में भी यह बात कही थी जिलाधीश महोदय के सम्‍मुख भी कि हमें किसी दान दाता का पैसा नहीं चाहिए. कोई गरीब अगर दान पेटी में पैसा डालता है तो हम उसको स्‍वीकार करेंगे. भू-माफिया या किसी भी अन्‍य व्‍यक्ति के पैसे की हमें आवश्‍यकता नहीं है. इतना ही कहकर, समय की कमी को देखते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं. धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय--आपकी शुद्धता और धर्म आचरण के लिए धन्‍यवाद.

          श्री पंकज उपाध्‍याय (जौरा)-- माननीय सभापति महोदय, मैं सबसे पहले सदन को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि धर्म के कई अच्‍छे काम हो रहे हैं. हम भी धार्मिक लोग हैं, लेकिन राम के नाम पर आप जो राजनीति कर रहे हैं उसके लिए भी आपको ध्‍यान रखने की आवश्‍यकता है. मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि हमारे यहां शनिचरा का बहुत ही प्राचीन स्‍थान है. उसका बहुत अच्‍छा निर्माण कार्य चल रहा है. साथ में चौंसठ योगिनी मंदिर, सैंकड़ों प्राचीन शिव मंदिर हैं. बड़ावली में ककरमठ का एक बहुत सुंदर मंदिर है. चंबल वन अभ्‍यारण्‍य है. इन सब पर काम करने की आवश्‍यकता है. अभी बीच में पर्यटन विभाग ने डकैत पर्यटन चालू कर दिया था मैं उसका घोर विरोध करता हूं. इससे हमारे चम्‍बल क्षेत्र की छवि बहुत खराब हो रही है इसको बंद किया जाए. हमारे यहां पर्यटन के बहुत सारे अन्‍य स्‍थान हैं. जैसे हमारे यहां शहीद रामप्रसाद बिस्मिल हुए. कई लोगों को पता ही नहीं है कि हमारे मुरैना जिले के ग्राम भरवाही जहां मेरा भी जन्‍म स्‍थान है वहीं उनका जन्‍म हुआ था. वहां पर एक बड़ा स्‍मारक बनाने की आवश्‍यकता है. साथ ही मेरे क्षेत्र में बहुत समृद्ध विरासत है. एक लिखीछाछ नाम का स्‍थान है वहां पर 10 हजार साल पुराने भित्ति चित्र हैं उनकी ओर सरकार का आज तक ध्‍यान नहीं गया है मैं चाहता हूं कि उस पर आप कार्यवाही कराएं. इसके साथ एक अलोपीबाबा का बहुत प्राचीन मंदिर है. दो स्‍वयंभू शिवलिंग हैं वहां पर एक रोपवे की बहुत आवश्‍यकता है. जोरावर सिंह जी थे उनके नाम से हमारे यहां जौरा नाम पड़ा. वहां पर एक बहुत प्राचीन शिव मंदिर है जिससे रावत समाज का विशेष लगाव है वह प्राचीन स्‍थान है लेकिन बहुत जीर्ण शीर्ण अवस्‍था में आ चुका है तो उसको भी सुधारने की आवश्‍यकता है. ऐसे ही निरार माता, ईश्‍वर महादेव बहुत सुंदर स्‍थान है जहां पर अपने आप बारह महीने देव पुराणों में भी उसका उल्‍लेख आया है, अपने आप पानी झड़ रहा है तो बहुत सुंदर जगह है लेकिन वहां आज तक पहुंचने की व्‍यवस्‍था नहीं है, सड़क की व्‍यवस्‍था नहीं है, लाईट नहीं है, पानी नहीं है, ऐसे ही हमारे बहरारा का प्राचीन मंदिर है जहां पर हमारी लाखों लोगों की आस्‍था का केन्‍द्र है वहां पर कार्य करने की बहुत आवश्‍यकता है. ऐसे ही हमारे यहां पटिया वाले बाबा का स्‍थान है जहां पर लगातार कई वर्षों से रामधुन की जा रही है और वहां पर इतना विश्‍वविख्‍यात भण्‍डारा होता है कि लगभग 12-14 लाख लोग भण्‍डारा में आते हैं लेकिन कोई व्‍यवस्‍था नहीं होती है. ऐसे ही एक सती मैया सरसैनी और उदयपुरा का मंदिर है. सती मैया सरसैनी में हमारे दलखू बाबा की एक मूर्ति स्‍थापित हो रही है वहां पर भी सरकार को काम करने की आवश्‍यकता है. ऐसे ही छिनवरा हनुमानजी का मंदिर है पचोखरा में दो शिवलिंग महादेव का मंदिर है. बरइकोट बहुत प्राचीन स्‍थान है. जो मैं पूरे नाम बता रहा हूं जो हमारा पहाड़गढ़ का एरिया है, पहाड़गढ़ एक रियासत हुआ करती थी वहां पर भी एक सुंदर किला बना हुआ है उसके रखरखाव की भी आवश्‍यकता है. साथ ही वहां पर बहुत सारे प्राचीन स्‍थान हैं तो आवश्‍यकता है कि मुरैना की जो विरासत, धरोहर है आप उसको भी संरक्षित करें.

सभापति महोदय, हमारे यहां एक पगारा डैम है उसमें स्‍पोर्ट्स के लिए बहुत सारा काम हो सकता है. एक बहुत सुंदर डैम बना हुआ है. बैक वाटर कई किलोमीटर पर फैला हुआ है तो वहां पर भी स्‍पोर्ट्स हो जाए तो पर्यटन को बहुत बढ़ावा मिलेगा. साथ ही मेरी मांग है कि अभी अभिलाष पाण्‍डेय जी ने बोला कि पुजारी और पंडितों के लिए मानदेय की व्‍यवस्‍था करनी चाहिए मैं इसका समर्थन करता हूं. साथ ही मैं चाहता हूं कि हमारे बहरारा मंदिर और जितने भी मैंने नाम लिए हैं आप उनके लिए कोई व्‍यवस्‍था करें. धन्‍यवाद आपने मुझे बोलने का समय दिया.

          श्री उमाकांत शर्मा (सिरोंज) -- सभापति महोदय, (मेजों की थपथपाहट) पता नहीं व्‍यंग्‍य में ताली बज रही हों. इस वर्ष 2026-27 के बजट में संस्‍कृति विभाग को 1,365 करोड़ का प्रावधान लगभग 47.4 प्रतिशत की जो वृद्धि की गई है उसके लिए मैं प्रदेश के धर्म और संस्‍कृति के पुरोधा माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय का और संस्‍कृति विभाग की चमक को बढ़ाने वाले संस्‍कृति मंत्री महोदय का हृदय से धन्‍यवाद देता हूं. धार्मिक न्‍यास और धर्मस्‍व विभाग भी इसी से जुड़े हुए है और मैं निवेदन करना चाहता हूं कि धर्मस्‍व और धार्मिक न्‍यास का मध्‍यप्रदेश के धार्मिक स्‍थल और धार्मिक भावनाओं को देखते हुए, विराट स्‍वरूप को देखते हुए उसका बजट बढ़ाने की आवश्‍यकता है. साथ ही मैं धन्‍यवाद देता हूं कि मध्‍यप्रदेश में भारतीय ज्ञान परम्‍परा, सनातन ज्ञान परम्‍परा का लोकव्‍यापीकरण, ज्ञान परम्‍परा केन्द्रित पुस्‍तकों, शोध पत्रिका, विक्रम सार, यूट्यूब चैनल, भारत विक्रम, विक्रम उत्‍सव, व्‍याख्‍यान माला, वैचारिक संगोष्ठि, प्रदर्शनी क्‍या अभी इनकी जानकारी आई.

मैं,  माननीय मंत्री जी को हृदय से धन्यवाद देता हूं. मुख्यमंत्री जी को और विभाग के अधिकारियों द्वारा जो नवाचार करके आपने भारत की संस्कृति और व्यवस्था को बनाये रखा है. उसके लिये हृदय से धन्यवाद.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक-- सभापति महोदय, हमारे पक्ष के लोगों को भी समय देना चाहिये.

          सभापति महोदय- सभी को बराबर समय दे रहे है. उमाकांत जी आप तो बोलें, आप तो विद्वान हैं, आप गागर में सागर कर देंगे. कृपया बोलें.

          श्री उमाकांत शर्मा -- माननीय सभापति महोदय, संस्कृति और धर्म की जहां पर चर्चा होती है, आप लोगों को जलन सी होती है. विक्रमादित्य वैदिक घड़ी, जो फरवरी 2024 में उज्जैन में स्थापित की गई थीपारंपरिक भारतीय कालगणना (30 मुहूर्त) और सूर्योदय-आधारित समय प्रणाली पर आधारित दुनिया की पहली घड़ी है क्यों कांग्रेस के राज्य में नहीं आई, भारतीय कालगणना सर्वाधिक विश्वसनीय पद्धति का पुनर्स्थापन विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के माध्यम से हुआ है तो माननीय हमारे मंत्री धर्मेन्द्र जो धर्म के लोधी जी के माध्यम से और मोहन जी के माध्यम से हुआ है उसके लिये मैं संस्कृति विभाग द्वारा दिये गये बजट की और प्रयोग की भूरि भूरि प्रशंसा करता हूं.

          माननीय सभापति महोदय, सर्वाधिक प्राचीन संसार की उज्जैन के पास डोंगला में स्थित वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला प्राचीन भारतीय कालगणना, में स्थापित होकर के उसका पुनर्स्थापन भारतीय कालगणना का विश्व में किया जा रहा है , उसके लिये भी मैं अपनी और से धन्यवाद और बधाई देता हूं.

          माननीय सभापति महोदय, वनवासी चरित्र,निषादराज, भक्तिमाता सबरी,

शबरी की भक्ति निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक मानी जाती है श्री हनुमान और गौण समुदाय के आख्यान रामायण जनजातीय की बात होती है, अनूसूचित जाति की बात होती है, रविदास जी का मंदिर ,जनजातीय समाज के स्थानों की सुरक्षा और मैं तो यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि पिछड़े वर्ग और सामान्य वर्ग के देवी देवता लोक देवता वन विभाग में राजस्व विभाग में स्थापित हैं उन पर से कई बार लड़ाई होती है लोग मना कर देते हैं. उनको भी चिह्नित करके पटवारी हल्कावाईज सूची बनाकर के उनका संरक्षण नहीं तो कम से कम सूचीकरण तो हो जाये जिससे कि आगामी समस्यायें न हो.

          सभापति महोदय, यूनेस्को ने 31 अक्टूबर 2023 (विश्व शहर दिवस) को ग्वालियर को अपने 'क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क' (UCCN) में 'सिटी ऑफ म्यूजिक' (संगीत शहर) के रूप में शामिल किया है ग्लायिर को इस सूची में म्यूजिक गतिविधियों में सम्मलित किया गया है. इसका ताली बजाकर स्वागत करें. मैं छाती ठोककर के माननीय मुख्यमंत्री जी को बधाई देता हूं और संस्कृति मंत्री और विभाग को, भोपाल को UNESCO के क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क (UCCN) में 'सिटी ऑफ लिटरेचर' (साहित्य नगरी) के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है, जिसका उद्देश्य शहर की समृद्ध साहित्यिक विरासत और सांस्कृतिक विविधता को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाना है यह स्वीकृत होगा तो भोपाल सांस्कृतिक गतिविधियों का केन्द्र बनेगा इसके लिये भी मैं आपको बधाई देता हूं.

          माननीय सभापति महोदय, वीर भारत न्यास संग्राहलय उज्जैन का कार्य, सिटी म्यूजियम भोपाल राजधानी भोपाल को प्रदेश का पहला सिटी म्यूजियम मिलने जा रहा है  ग्वालियर महाराज बाड़ा पर देश का पहला आधुनिक जियो साइंस म्यूजियम शुरू किया गया है ,अटल म्यूजियम ग्वालियर, ग्वालियर के महाराज बाड़ा स्थित गोरखी स्कूल में अत्याधुनिक 'अटल संग्रहालय' स्थापित किया गया है, जहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की 1935-38 के दौरान की स्कूली शिक्षा और उनके जीवन से जुड़ी यादों को डिजिटल रूप में संजोया गया है  संत रविदास संग्राहलय जियोलाजिकल मध्य प्रदेश के सागर जिले के बड़तूमा में ₹100 करोड़ से अधिक की लागत से एक भव्य संत रविदास मंदिर और म्यूजियम (इंटरप्रिटेशन सेंटर) का निर्माण किया जा रहा है

          सभापति महोदय, जितने लोगों ने भाषण दिया है उसमें से ज्यादातर चले गये हैं. जियोलाजिकल म्यूजियम जबलपुर , देवी अहिल्याबाई के जन्म पर आधारित म्यूजियम, महेश्वर 100 करोड़ , रानी दुर्गावती संग्राहलय जबलपुर को 100 करोड का प्रावधान किया गया है, उसके लिये हृदय से धन्यवाद देता हूं, सरकार की भूमि भूमि प्रशंसा करता हूं.

          सभापति महोदय, ग्वालियर में आयोजित 100वें अंतर्राष्ट्रीय तानसेन समारोह (दिसंबर 2024) में 546 भारतीय शास्त्रीय वादकों ने 9 विभिन्न वाद्ययंत्रों के साथ राग मल्हार, मियां की तोड़ी और दरबारी कान्हड़ा पर 9 मिनट की ऐतिहासिक प्रस्तुति दी  जिससे एक नया गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड मध्यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की संस्कृति विभाग की सरकार ने बनाया है उसके लिये हार्दिक बधाई देता हूं, अभिनंदन करता हूं.

          सभापति महोदय- अपने क्षेत्र के बारे मे भी कुछ बोलना चाहें तो बोल लें.

          श्री कैलाश कुशवाह-- क्या इस सरकार के पहले मध्यप्रदेश में कभी भी मंदिर नहीं दिखे थे. इस देश में और प्रदेश में जो आप बोल रहे हैं.

          श्री उमाकांत शर्मा-- सभापति महोदय, मेरा नंबर तो आखिरी मे आया है अंतिम संस्कार है यह मेरा.

          सभापति महोदय-उमाकांत जी आसंदी की और थोड़ा संक्षिप्त में कर दें.

          सभापति महोदय-- क्षेत्र की कुछ बात रख दें.

          श्री उमाकांत शर्मा -- क्षेत्र के लिये नहीं चाह रहा हूं. तीन बिंदू पर अपने विचार और रखना चाहता हूं. मैं संस्कृति, धर्म जीवन की बात करना चाहता हूं. मैं यह पूछना चाहता हूं कि कांग्रेस के लोग बड़े विद्वान हैं अंग्रेजो के ज्ञान से भरपूर हैं,500 साल पहले कई कल्चर, ..

          श्री दिनेश गुर्जर -- सभापति जी, कांग्रेस ने देश की लड़ाई लड़ी थी. और उसमें भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने अंग्रेजों की मुखबरी करने का काम किया था.

          सभापति महोदय- शर्मा जी आसंदी की और देखकर के बोलें. दिनेश जी कृपया बैठे.

श्री उमाकांत शर्मा -- आप संस्कृति कल्चर, संस्कृति  के नाम से   वेदों में,  पुराणों में कहीं भी अगर उल्लेख बता दें, तो नहीं मिलेगा.  यह ट्रेडिशन, कस्टम, विलाइजेशन, हेरिटेज,  लाइफ स्टाइल, सोसाइटी  यह अंग्रेजों ने संस्कृति  के नाम  से   इन   चीजों पर और  इसमें धर्म नहीं रखा. जीवन शैली को नहीं रखा.  इसलिये संस्कृति शब्द पर भी  पुनर्विचार कर  इसके लिये कोई  सुयोग्य शब्द लाया जाये,   विचार, विमर्श किया जाये.  मैं  यह नहीं कह रहा हूं कि बदला जाये.

          सभापति महोदयअब संक्षिप्त कर समाप्त करें.

          श्री उमाकांत शर्मा--    इसके अलावा एक शब्द और चल रहा  है.धार्मिक पर्यटन. धार्मिक पर्यटन नहीं होता,  नहीं होता.  यह तीर्थाटन होता है. यह  धर्म की यात्रा  होती है. यह  तीर्थ यात्रा होती है.  इसलिये जहां भी  ऐसी जगह सरकारी  कामों  में धार्मिक पर्यटन   शब्द प्रयोग किया जाता है,  उसमें परिवर्तन लाने के लिये  विचार किये जाये,  ऐसा मेरा सुझाव है.   इसके साथ ही एक बात और कहना चाहता हूं कि  आजकल ..

          सभापति महोदय--  उमाकांत जी, एक ही बात  में   समाप्त कर देना.  थोड़ा समय का ध्यान रखते हुए.

          श्री उमाकांत शर्मामैं तो समाप्त ही हो  गया था.  साहब आपने जीवन दे दिया.  आप जीवन दाता हैं.  आजकल एक नई संस्कृति चली है.  नया बोल चला है गौकाष्ठ. गौ माता की लकड़ी. कौन सी अच्छी बात है. हमारे लिये सर्वतीर्थमयी, सर्वदेवमयी  गौ माता हैं  और उसमें आप देखेंगे भास्कर के पेज पर  अखबारों में  उससे हमारी भावना को  कि  गौकाष्ठ से होली जलाई जायेगी.  यह गौकाष्ठ नहीं है.  वह गोबर काष्ठ है. इसलिये सदन के माध्यम से  मुख्यमंत्री जी, म.प्र. सरकार से आग्रह करता हूं कि गौ काष्ठ  शब्द पर प्रतिबंध लगाया जाये और गोबर काष्ठ, गौमय   काष्ठ इसका   व्यवहार में लाया जाये.  रही  मेरे विकास की क्षेत्र की बातें, लेकिन  मैं दो बातें  आपसे कहना चाहता हूं कि  मैंने अभी कहा था कि  संस्कृति की परिभाषा क्या है. आशीष गोविन्द जी,  अभिलाष जी. वेदों में, पुराणों में, शास्त्रों में  कहीं  भी संस्कृति, कल्चर हो, तो  मुझे ज्ञान प्रदान करें, ताकि  मैं अपने विषय को सुधार  लूं. मैं भ्रमित हूं.   एक श्लोक मुझे  कहीं से  मिल  गया.  संस्कृतिः  संस्कारसम्भूता शीलाचारसमन्विता. लोककल्याणकारिणी सा   संस्कृतिरीति कथ्यते. जो संस्कारों से उत्पन्न हो,  उत्तम  शील और  आचरण से युक्त हो तथा  लोककल्याण करने वाली हो,  वही संस्कृति है.  . भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिस्तथा. भारत में दोनों की प्रतिष्ठा है. भारत दोनों के द्वारा जाना जाता है.  संस्कृत और संस्कृति. मैं  चाहता हूं कि संस्कृति  के माध्यम  से म.प्र.की सुसंस्कृत   संस्कृति सब दूर पहुंचे.  अभी भाई साहब ने बोला था कि  होटल.  आपको खजुराहो  के ही होटल की याद  आती हैं क्या. निकट है.  होटल हमारे लिये विशेष  नहीं है.  मैं  यह निवेदन करना चाहता हूं कि तीर्थ यात्रा  का भाव बना रहे.  यह ओंकारेश्वर,यह महाकाल, यह चिच्रकूट. अयोध्या, मथुरा, माया, काशी, कांची, अवन्तिकापुरी, द्वारवती ज्ञेया: सप्तैता मोक्ष  दायिका. यह कुंभ किसी राजा महाराजा ने पैदा किये. सिंहस्‍थ आ रहा है. हमारे ग्रह नक्षत्रों के कारण, वह भव्‍य रूप से सम्‍पन्‍न हो. इसके लिये संस्‍कृति मंत्री जी ने किया है, नगरीय मंत्री जी ने किया है, मुख्‍य मंत्री ने किया है उनको बधाई देते हुए. आगामी सिंहस्‍थ भारतीय जनता पार्टी की सरकार बहुत अच्‍छे ढंग से करेगी और 12 साल बाद, पुन: सिंहस्‍थ इसी भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्‍व में प्रधान मंत्री भारतीय जनता पार्टी के होंगे. मुख्‍यमंत्री भारतीय जनता पार्टी को हम और आगे ले जायेंगे. धन्‍यवाद.

          श्री दिनेश गुर्जर (मुरैना) - माननीय सभापति महोदय, मुझे मांग संख्‍या 37 पर बोलने का अवसर मिला. मैं अपनी बात रखना चाहता हूं कि मितावली, पढावली, शनिचरा मंदिर पर्यटक स्‍थल हैं, यहां पर पर्याप्‍त सफाई की कोई व्‍यवस्‍था नहीं है, पार्किंग की कोई व्‍यवस्‍था नहीं है. जहां साफ-सफाई और लाइटिंग की व्‍यवस्‍था होना चाहिये और गाइड की व्‍यवस्‍था होना चाहिये कि जो महाभारतकालीन यह मितावली और बटेश्‍वर मंदिर है. वहां जो पर्यटक आयेंगे और उसका इतिहास जानेंगे तो निश्चित रूप तौर पर उसका और ज्‍यादा प्रचार प्रसार होगा और मुरैना में पर्यटक अधिक आयेंगे. वहां पर सुरक्षा की व्‍यवस्था होना चाहिये. वहां फोटो पाइंट वहां होने चाहिेये. जिससे पर्यटकों को आरामदायक अनुभव हो, जिससे वहां की अर्थव्‍यवस्‍था भी बढ़ेगी.

 

3.02 बजे               { सभपति महोदया( श्रीमती अर्चना चिटनीस) पीठासीन हुईं.}

        हमारे यहां जो करह आश्रम पटियावाले बा‍बा के नाम से प्रसिद्ध है. वहां पर हजारों लोग प्रतिदिन जाते हैं और लाखों लोग विषेश दिनों में वहां पर जाते हैं. जिसको मध्‍यप्रदेश का दूसरा चित्रकूट धाम के नाम से पटियावाले बाबा को. वहां पर सुरक्षा की दृष्टि से वहां पर पुलिस चौकी की स्‍थापना हो और वहां पर पार्किंग की व्‍यवस्‍था की जाये, जिससे की वहां जो भक्‍तगण आते हैं उनको सुविधा हो सके.

          सभापति महोदया, चंबल और ग्‍वालियर संभाग का एक बहुत बड़ा पटियावाले बाबा का मंदिर है. मुरैना जिले के अंदर महाभारतकालीन कई मंदिर है, जैसे ककनमठ मंदिन है, कर्णखार मंदिर है, हरसिद्धि माता मंदिर है, वसैया माता मंदिर है, पढावली में बटेश्‍वर मंदिर, मितावली में चौसठ योनिनी मंदिर हैं और मितावली का चौसठ योगिनी मंदिर है, वह भारत की जो संसद बनी है वह मितावली मंदिर के ही आधार पर बनायी गयी हैं. ऐसी धरोहर हमारे मुरैना में है. मितावली में पर्यटन विभाग ने एक होटल बनाया था, वह किसी ने नहीं लिया, वह संचालित नहीं है. मैं पर्यटन मंत्री से कहना चाहता हूं कि उसका फिर से मितावली में जो जगह आपने रेस्‍टोरेंट बनायी है, वह किसी को दें. जिससे की वहां जो पर्यटक आते हैं उनकी व्‍यवस्‍था हो सके.

          सभापति महोदया- वार्ड नंबर-45 में आसन नदी पर छोंदा में हमारे द्वारा कई बार मांग की गयी है कि हमारे मुरैना शहर के लिये किसी भी नौजवानों के लिये, माताओं, बुजुर्गों और बहनों के लिये मनोरंजन करने का वहां पर कोई पर्यटन स्‍थल नहीं है. जहां अपने परिवार के साथ घूमने जा सकें. पूर्व में भी मांग की थी और माननीय मुख्‍यमंत्री जब मुरैना गये थे तो घोषणा करके आये थे कि हम आसन नदी, छोंदा पर बोट क्‍लब और पार्क बनायेंगे. परंतु दुर्भाग्‍य की बात है कि आज तक उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है. मेरी मांग है कि मुरैना को पर्यटक स्‍थल घोषित करके आसर नदी पर बोट क्‍लब और पार्क बनाया जाये जिससे लोगों को भी वहां मनोरंजन का एक साधन मिल सके. यह हैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से आग्रह करता हूं क्‍योंकि वह मंदिर मैंने जो आपको बताये वह हमारी धरोवर है. निश्चित तौर पर आप वहां निर्माण कार्य करायेंगे, सुरक्षा की दृष्टि से निर्माण कार्य करेंगे, पर्यटन को बढ़ावा मिले उसके लिये वहां पर ज्‍यादा ध्‍यान दिया जाये. धन्‍यवाद.

          श्री महेश परमार- माननीय सभापति महोदया, उज्‍जैन महाकाल मंदिर में शयन आरती औरसंध्‍या आरती में दर्शन में रूपये 250 शुल्‍क लिया जाता है. इससे उज्‍जैन वासियों और पूरे देशभर से आने वाले बाबा महाकाल के भक्‍तों की नाराजगी है. इस शुल्‍क को समाप्‍त किया जाये. जिससे बाबा महाकाल के भक्‍तों को निशुल्‍क दर्शन हो सकें. यह मेरी मांग है. आपने बोलने का समय दिया उसके लिये धन्‍यवाद.

            श्री हरिशंकर खटीक (जतारा) - सभापति महोदया, मैं मांग संख्या 26 संस्कृति, मांग संख्या 37 पर्यटन एवं मांग संख्या 51 धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग, इनके समर्थन में मैं खड़ा हुआ हूं. सभापति महोदया, सबसे पहले तो डॉ. मोहन यादव जी की सरकार को और हमारे साथी भाई सम्माननीय श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी जी को जो संस्कृति पर्यटन और धर्मस्व विभाग के मंत्री हैं हम उनको बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहते हैं. हमारे बुन्देलखण्ड में राम राजा सरकार का मंदिर है. वहां पर भव्य और दिव्य राम राजा लोक बनाने का काम जारी है. इसके लिए हम सबसे पहले बहुत बहुत बधाई और धन्यवाद देते हैं. इसके साथ साथ माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहते हैं कि हमारे टीकमगढ़ जिले में कुण्डेश्वर धाम एक ऐतिहासिक और भव्य मंदिर है और उसको पर्यटन केन्द्र घोषित किया जाय यह हमारा अनुरोध है. इसके साथ साथ हमारे टीकमगढ़ जिले में मोर पहाड़ी एक गांव है जो हमारे विधान सभा क्षेत्र में आता है.

          सभापति महोदया, वहां पर महाराज छत्रसाल का जन्म हुआ था. एक मोर की पहाडिया है, उस मोर की पहाड़िया पर जब मुगलों से महाराज छत्रसाल के पिता चंपतराय बुन्देला साहब, मुगलों से युद्ध लड़ रहे थे और उनकी पत्नी सारंधा मां जो सारंधा कहलाती थीं, उस समय वह गर्भवती थी. जब युद्ध हो रहा था और उनके पति ने उनको एक हाथ से उठाया तो जो बच्चा गर्भ में था, वह बच्चा गर्भ से वहीं पर गिर गया, उस मोर की पहाड़ियों पर गिरा, वहां पर स्वयं साक्षात् शेषनाग जी प्रकट हुए एक छत्र के रूप में उस बच्चे की सुरक्षा की और उस गांव के लोगों ने जब देखा तो उस बच्चे का नाम छत्रसाल पड़ा, शेषनाग भगवान ने उनकी रक्षा की, उनका नाम छत्रसाल रखा गया.

          सभापति महोदया, टीकमगढ़ जिले के हमारे विधान सभा क्षेत्र में मोर पहाड़िया जतारा विधान सभा क्षेत्र में आता है और उनका जन्म 4 मई 1649 को हुआ था लेकिन उनका जो जन्मोत्सव का कार्यक्रम है. उनकी जो राजधानी थी वह धुबेला नौगांव थी, वहां पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता है. लगातार 1 दिन हो, 2 दिन हो, 3 दिन हो कोई दिक्कत की बात नहीं है क्योंकि उनकी राजधानी थी और महाराज छत्रसाल के नाम से छतरपुर भी बसा लेकिन जहां उनका जन्म हुआ, वहां पर कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं होते हैं तो हमारी विनती है, प्रार्थना है माननीय मंत्री जी से लगातार हम बरसों से मांग कर रहे हैं क्योंकि वहां के लोग भी बोलते हैं महाराजा छत्रसाल का यहां पर जन्म हुआ और उनके पिता जो चंपतराय साहब थे वह वहां महोबा के जागीरदार भी थे, वह भी हमारे पूरे विधान सभा क्षेत्र में आता है तो सभापति महोदया, हमारा अनुरोध है कि वहां पर 4, 5 एवं 6 यानी 3 दिन का कार्यक्रम मोर पहाड़िया महोत्सव  के नाम से उनकी जन्म स्थली पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाय, यह हमारी विनती और प्रार्थना है.

          सभापति महोदया, एक और हमारा अनुरोध है हमारे टीकमगढ़ जिले में हमारे विधान सभा क्षेत्र में मतदान केन्द्र क्रमांक एक कहलाता है छिपरी के नाम से जो मातृ धाम छिपरी है, वहां पर भगवान शिव की प्रतिमा परम पूज्य रावतपुरा सरकार महाराज जी ने बहुत भव्य वहां पर बनवाई है जहां पर सैंकड़ों हजारों लोग प्रतिदिन दर्शन के लिए जाते हैं वहां पर आशीर्वाद भी लेते हैं तो हमारी विनती और प्रार्थना है कि यह जो मातृ धाम छिपरी है, वहां पर माननीय मुख्यमंत्री महोदय जी, उनके जन्मोत्सव कार्यक्रम में गये थे, दिनांक 5 जुलाई 2024 को और उन्होंने घोषणा की थी कि उसका नाम मातृ धाम छिपरी रखा जाएगा. इसके साथ साथ वहां पर पर्यटन केन्द्र बनाया जाएगा. घोषणा है विभाग में भी है और यहां आई भी है तो घोषणा पर अमल कराने का हमारे मंत्री महोदय जी कष्ट करें. तीसरा हमारा अनुरोध है कि टीकमगढ़ जिले में चंदेली तालाब है और पूरे टीकमगढ़ जिले में बरसों पुराने बने हुए मंदिर हैं और छतरपुर जिले में भी हैं उन सबको संयुक्त रूप से एक विभाग के माध्यम से एक सर्वे कराया जाय जहां जहां प्राकृतिक ऐतिहासिक धरोहर हैं  जो हमारी विरासत के रूप में जानी जाती हैं.

          सभापति महोदया, हमारा अनुरोध है कि जो विरासत हैं उनको संजोने का काम किया जाय, उनकी मरम्मत कराने का भी काम किया जाय और उनको एक धार्मिक स्थल के रूप में एक पर्यटन स्थल के रूप में घोषित किया जाय. आखिरी में एक अनुरोध आपसे है कि हमारे जो पुजारी हैं उनको मानदेय बहुत कम मिल रहा है. लगातार बजट बढ़ा है इसके लिए हम माननीय मुख्यमंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहते हैं और माननीय मंत्री जी को भी धन्यवाद देना चाहते हैं. अभी सब वक्ताओं ने अपनी बात रखी है, उनको भी धन्यवाद देना चाहते हैं. मंदिर के पुजारी जो भगवान की सेवा करते हैं और समय से भगवान का दरबार खोलते हैं, उनके ऊपर भी सब लोगों की आस्‍था रहती है. माननीय मंत्री से मेरी विनम्र प्रार्थना है कि पूरे प्रदेश के मंदिरों के जो पुजारी हैं, उनका मानदेय बढ़ाने का कष्‍ट करें. जो बात हमने आप सब लोगों के बीच रखी है, चाहे वह मोरपाड़िया महोत्‍सव की बात हो, चाहे हमारे मातृधाम छिपरी की बात हो, इसे पर्यटन केन्‍द्र भी घोषित किए जाए और जहां हमने जो-जो बातें आपके बीच रखी हैं, उन पर कार्यवाही की जाए. माननीय सभापति महोदया, आपने बोलने का अवसर दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री मोहन सिंह राठौर (भितरवार) -- माननीय सभापति महोदया, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में संस्‍कृति, पर्यटन, धार्मिक न्‍यास और धर्मस्‍व राज्‍यमंत्री, माननीय श्री धर्मेन्‍द्र भावसिंह लोधी जी को धन्‍यवाद देता हूं कि रानीघाटी मंदिर के लिए रामजानकी मंदिर, नियोना रामजानकी मंदिर और बरई रामजानकी मंदिर इन तीनों मंदिरों के लिए 1 करोड़ राशि रूपए 30 लाख स्‍वीकृत किए हैं. वहां जीर्णोद्धार का कार्य चल रहा है उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद. इसके साथ ही मैं एक विनम्र आग्रह करना चाहता हॅूं कि मेरे क्षेत्र में एक हनुमान मंदिर है जो अपने आप में पुरातत्‍व की दृष्‍टि से भी खास है और धार्मिक आस्‍था का केन्‍द्र है, वहां 1 करोड़ 8 लाख रूपए का प्रस्‍ताव लंबित है, कृपया उसे स्‍वीकृत करने की कृपा करें. इसके साथ धूमेश्‍वर धाम और सबरी माता मंदिर है मेरे भितरवार विधानसभा क्षेत्र में यह दो बडे़ मंदिर हैं. चूंकि वहां पर्यटन की भी दृष्‍टि से और धार्मिक आस्‍था की भी दृष्‍टि से जल प्रपात भी है. यहां 12 महीने पानी गिरता है लेकिन सुरक्षा की व्‍यवस्‍था न होने की वजह से हर वर्ष कोई न कोई घटना होती रहती है.

          सभापति महोदया -- आपकी बात आ गई है. आप आउट ऑफ टर्न बोल रहे हैं.

          श्री मोहन सिंह राठौर -- सभापति महोदया, सुल्‍तानगढ़ जल प्रपात को भी इस बजट में शामिल करें. इसके साथ ही रानी पद्मावति का पलाया ग्राम है. पुरातत्‍व की दृष्‍टि से आज भी वहां तमाम सारे लोग जाते हैं तो उन्‍हें वहां पुरातत्‍व की तमाम चीजें देखने को मिलती हैं, कृपया इसे भी बजट में शामिल करने की कृपा करें. धन्‍यवाद.

          सभापति महोदया -- धन्‍यवाद. श्री शरद जुगलाल कोल जी.

          श्री विजय रेवनाथ चौरे -- माननीय सभापति महोदया जी, मैं केवल आधा मिनट लूंगा. मेरे विधानसभा क्षेत्र में हुनमान जी का मंदिर है. वह भव्‍य और दिव्‍य मंदिर है, जो निद्रा अवस्‍था में लेटी हुई प्रतिमा है. मैं आपसे अनुरोध करना चाह रहा हॅूं.

          सभापति महोदया -- नहीं,. आप पहले माननीय शरद जी को अपनी बात पूरी करने दीजिए.

          श्री शरद जुगलाल कोल (ब्‍योहारी) -- माननीय सभापति महोदया, मैं पर्यटन, धार्मिक न्‍यास और धर्मस्‍व विभाग के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हॅूं. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय को धन्‍यवाद ज्ञापित करता हॅूं कि आपने मुझे पर्यटन के क्षेत्र में, धर्मस्‍व के क्षेत्र में बोलने का अवसर दिया. मैं माननीय मंत्री श्री धर्मेन्‍द्र भाव सिंह लोधी जी का भी धन्‍यवाद ज्ञापित करता हॅूं. पर्यटन के क्षेत्र में निरंतर मध्‍यप्रदेश ने अनेक ऐसे आयाम स्‍थापित किए हैं, जिनकी बदौलत पूरे देश के अंदर मध्‍यप्रदेश...

          सभापति महोदय -- मेरा माननीय सदस्‍य से आग्रह है कि आपका कुछ विषय विशेष हो, तो उस पर आकर अपनी बात पूरी करें.

          श्री शरद जुगलाल कोल -- जी, माननीय सभापति महोदया. मध्‍यप्रदेश ने देश के अदंर एक विशेष पहचान स्‍थापित किया है. उस क्रम में मैं माननीय मंत्री महोदय को धन्‍यवाद ज्ञापित करता हॅूं कि शहडोल जिले के ब्‍योहारी में स्‍थित सरसी आयलैंड बनाकर प्रदेश के अंदर एक नई पहचान जिले को दी है. पर्यटन के क्षेत्र में सड़क, रेल, हवाई सुविधा संपर्क बनाकर नेचुरल कनेक्‍टिविटी को सुव्‍यवस्‍थित करते हुए पर्यटन के क्षेत्र में जो प्रयास किए हैं, उसके लिए मैं धन्‍यवाद ज्ञापित करता हॅूं. मैं मेरे क्षेत्र के जो महत्‍वपूर्ण बिन्‍दु हैं, उस पर मैं अपनी बात रखते हुए अपने भाषण को समाप्‍त करूंगा. हमारे यहां माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय ने रामवन पथ गमन के नोटिफाइड क्षेत्र में, शहडोल जिले का जो गंदिया नामक स्‍थान है, उस जगह पर 8 फरवरी को माता शबरी की जन्‍म-जयंती मनाकर हमारे क्षेत्र को जो सौगात दी है, उस क्षेत्र को जो पहचान दी है, उसके लिए भी मैं माननीय मंत्री महोदय से कहना चाहता हॅूं कि वे उस क्षेत्र को पर्यटन के साथ-साथ धार्मिक आस्‍था के केन्‍द्र के रूप में स्‍थापित करें. साथ ही यहां पर बाणसागर में नगर परिषद् निर्मित जो हमारा बाणसागर डेम है. उसको मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश और बिहार राज्यों को जो पानी देता है उसका वास्तविक रूप से बाण सागर का जो डेम है वह महान लेखक एवं कवि बाण भट्ट जी की जिनका सातवीं शताब्दी में उल्लेख किया जाता है. ऐसे उन महान कवि के नाम से बाणसागर डेम की स्थापना की गई थी. मैं चाहता हूं कि धार्मिक क्षेत्र में, पर्यटन क्षेत्र में बाण भट्ट जी का स्टेचु लगाकर वहीं पर उनकी जीवनी से संबंधित एक पार्क निर्मित किया जाये वहीं से वॉटर रिवेंचर को कनेक्ट करते हुए आयरलेंड से जोड़कर पर्यटन के क्षेत्र में एक अवसर मिलेगा. इसी के साथ साथ हमारे शहडोल जिले में बहुत सारी लखवरिया जी की गुफाएं हैं जो पाण्डवों के जमाने की बता रहे हैं. चीरसागर है हमारे विधायकों ने भी विषय रखे हैं. हमारे शहडोल के मुख्यालय में विराट मंदिर है हमारे शहडोल एवं विन्ध्य क्षेत्र की प्राचीन धरोहर है ऐसी जगहों को चिन्हांकित करके पुनरीक्षित कर सर्वे कराकर पर्यटन के क्षेत्र में जोड़ने का काम करेंगे तो हमारे क्षेत्र को एक नई पहचान मिलेगी. धन्यवाद.

          श्री विवेक विक्की पटेल(वारासिवनी)सभापति महोदया, मेरे विधान सभा क्षेत्र में रामपयाली में भगवान राम जी का ऐतिहासिक मंदिर है जहां पर माननीय मंत्री जी आये थे. कहा जाता है कि वहां पर राम जी स्वयं आये थे. मैं चाहता हूं कि वहां रामलोक बनाया जाये जिससे पर्यटन की गतिविधियां बढ़ेंगी. साथ ही नदी किनारे स्थित है वहां पर 108 फीट की रामजी की मूर्ति लगाई जाये. साथ ही रमरमा का विस्तार किया जाये. धन्यवाद.

          श्री विजय रेवनाथ चौरे(सौंसर) सभापति महोदया मेरे क्षेत्र में हनुमान जी का बड़ा मंदिर है. काफी लोग वहां पर दर्शन करने के लिये आते हैं उसको अभी हनुमान लोक के नाम से जाना जाता है. जहां पर पूर्व मुख्यमंत्री जी ने वहां पर 300 करोड़ रूपये की घोषणा की थी. आपसे अनुरोध है कि प्रदेश की सरकार से एक रूपया भी नहीं आया है. वहां पर डीएमएफ के फंड से 30 करोड़ रूपये जरूर मिले हैं. बड़ा दिव्य एवं भव्य मंदिर है. हनुमान जी वहां पर निद्रावस्था विराजमान है. आपसे अनुरोध है कि माननीय मंत्री जी उसमें राशि प्रदान करें तो बड़ी कृपा होगी.

          3.23 बजे  {अध्यक्ष महोदय {श्री नरेन्द्र सिंह तोमर} पीठासीन हुए.

श्री धर्मेन्द्र भावसिंह लोधी राज्यमंत्री संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्याय एवं धर्मस्वअध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से जो चर्चा हुई है सदन के जिन माननीय सदस्यगण ने इस चर्चा में भाग लिया है उनको इस मंच के माध्यम से धन्यवाद देता हूं आप लोगों द्वारा जो सकारात्मक सुझाव दिये हैं उस पर विभाग गंभीरतापूर्वक विचार करेगा. चर्चा में भाग लेने वाले सदस्यगण सर्वश्री आशीष शर्मा जी, जितेन्द्र राठौर जी, माननीय अरविन्द पटेरिया जी, माननीय अभिलाष पाण्डेय जी, श्रीमती चन्दा गौर जी, माननीय विपिन जैन जी, माननीय रामनिवास शाह जी, श्रीमती मनीषा सिंह जी, श्री साहब सिंह जी, माननीय राजेन्द्र कुमार सिंह जी, माननीय दिलीप सिंह परिहार जी, श्री पंकज उपाध्याय जी, माननीय उमाकांत शर्मा जी, माननीय दिनेश गुर्जर जी, माननीय हरिशंकर खटीक जी, माननीय शरद कोल जी, माननीय मोहन राठौर जी, सहित और भी माननीय सदस्यगण ने इस चर्चा में भाग लिया है और उनके बहुमूल्य सुझाव भी प्राप्त हुए हैं. निश्चित रूप से आप सबके बहुमूल्य सुझावों पर संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग की ओर से गंभीरतापूर्वक विचार भी किया जायेगा और आपने जो डिमांड की हैं, आपकी उस डिमांड का क्‍या हुआ? उसके बारे में अवगत कराने का काम भी हम करेंगे. संस्‍कृति विभाग द्वारा साहित्‍य, शास्‍त्रीय संगीत, नाटक एवं लोक कलाओं के संरक्षण तथा प्रदेश की विविधतापूर्ण सांस्‍कृतिक भाषाई और क्षेत्रीय संस्‍कृति को संरक्षित और संवर्धित करने का काम किया जा रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मुझे यह बताते हुए प्रसन्‍नता है कि इस वर्ष हमने 101 वां तानसेन समारोह एवं 52 वां अंतर्राष्‍ट्रीय नृत्‍य समारोह जैसे बड़े आयोजन बड़े ही दिव्‍य और भव्‍य रूप में संपन्‍न किये हैं. (मेजों की थपथपाहट) विगत वर्ष संस्‍कृति विभाग के माध्‍यम से संपूर्ण देश में लोकमाता अहिल्‍याबाई होल्‍कर का 300 वां जन्‍म शताब्‍दी वर्ष एवं वीरांगना रानी दुर्गावती जी का 500 वां जन्‍म शताब्‍दी वर्ष मनाया गया है. मध्‍यप्रदेश के संस्‍कृति विभाग द्वारा संपूर्ण मध्‍यप्रदेश में इस उपलक्ष्‍य में दिव्‍य और भव्‍य सांस्‍कृतिक आयोजन किये गये हैं. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में हमने रामवन गमन पथ एवं कृष्‍णपाथेय योजना का निर्माण किया है, जिससे जनमानस को भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्‍ण के जीवन  चरित्र को समझने और उनके अनुरूप अपना व्यक्तित्व  निर्माण करने का मार्ग प्रशस्‍त हो सकेगा, इसके साथ ही हमारे द्वारा विक्रमादित्‍य शोध पीठ एवं वीर भारत न्‍यास की भी स्‍थापना की गई है, जिसके माध्‍यम से प्रदेश की वीर गाथाओं को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में हम कर रहे हैं. मुझे सदन को यह बताते हुए प्रसन्‍नता है कि शोर्य न्‍याय और पराक्रम के प्रतीक राजा विक्रमादित्‍य के जीवन चरित्र पर आधारित  विक्रमोत्‍सव एवं महानाट्य का भव्‍य आयोजन प्रदेश एवं प्रदेश के बाहर भी भव्‍यता के साथ किया गया है, यह आयोजन इस साल भी संपूर्ण गौरव के साथ मनाया जा रहा है. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, सांस्‍कृतिक एकता के लिये ओंकारेश्‍वर में एकात्‍म धाम का निर्माण किया जा रहा है, जहां आदि शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा स्‍थापित की जा चुकी है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में एकात्‍म धाम परियोजना के अंतर्गत आचार्य शंकर संग्रहालय एवं अद्वेत लोक के निर्माण हेतु 2 हजार 424 करोड़ से अधिक की राशि की प्रशासकीय स्‍वीकृति प्रदान की गई है. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, देश के स्‍वतंत्रता संग्राम के दस्‍तावेजीकरण और स्‍वतंत्रता के संघर्ष के आदर्शो एवं प्रेरक विचारों को समाज में पहुंचाने के लिये स्‍वाधीनता संग्राम में जनजातीय चेतना को रेखाकिंत करने के लिये स्‍वाराज संस्‍थान संचालनालय द्वारा स्‍वाधीनता संग्राम के अमर सेनानियों महानायकों एवं क्रांतिकारियों पर पूरे प्रदेश में कार्यक्रमों का आयोजन कर देशभक्ति की भावना को जाग्रत करने का काम भी किया गया है और कहा भी गया है कि

          ''तुमने दिया देश को जीवन, देश तुम्‍हें क्‍या देगा,

        अपनी आग तेज रखने को नाम तुम्‍हारा लेगा''

           इस भाव धारा को लेकर संस्‍कृति विभाग ने निरंतर अपने अमर शहीदों को याद करने का भी काम किया है और अमर शहीदों की जीवनी को प्रकाशित करने का काम भी संस्‍कृति विभाग के द्वारा किया गया है. हमारे द्वारा स्‍वाराज संस्‍थान के माध्‍यम से प्रदेश के सभी जिलों के राष्‍ट्रीय स्‍वाधीनता संग्राम से संबंधित महापुरूषों और उनके द्वारा किये गये कार्यों को समाहित करते हुए साहित्‍य का प्रकाशन किया गया है, जो कि पूरे देश में अपनी तरह का अनूठा कार्य है.

        अध्‍यक्ष महोदय, हमारा प्रदेश पुरातात्विक दृष्टि से अत्‍यंत समृद्ध प्रदेश है, हमारे पुरातात्‍वित स्‍थलों एवं संग्रहालयों के संरक्षण और संवर्धन के लिये निरंतर काम किया जा रहा है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे यह बताते हुये प्रसन्‍नता है कि खजुराहो, सांची, भीमबैठका के अतिरिक्‍त 15 सांस्‍कृतिक और पुरातात्विक स्‍थलों को यूनेस्‍को की अस्‍थाई विश्‍व धरोहर की सूची में सम्मिलित किया गया है. यह निश्चित ही हम सबके लिये गौरव का विषय है. मुझे विश्‍वास है कि शीघ्र ही इन स्‍थलों को स्‍थाई सूची में शामिल कर लिया जायेगा और अभी राम राजा लोक सरकार ओरछा को स्‍थाई सूची में शामिल करने का प्रस्‍ताव भी भेजा गया है जो जल्‍दी ही पूरे होने की संभावना है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, संस्‍कृति विभाग द्वारा प्रदेश के अभावग्रस्‍त कलाकारों एवं साहित्‍यकारों को मासिक पेंशन प्रदान किये जाने की योजना संचालि‍त की जा रही है. इसके अलावा सांस्‍कृतिक परंपराओं से जुड़ी हुई अशासकीय संस्‍थाओं को भी विभाग द्वारा आर्थिक अनुदान प्रदान किया जा रहा है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश का संस्‍कृति विभाग देश का एकमात्र ऐसा सांस्‍कृतिक विभाग है जिसके पास भाषाई अकादमियां हैं. प्रदेश में हिन्‍दी, उर्दू, मराठी, भोजपुरी, पंजाबी और प्रदेश के स्‍थानीय भाषाओं के साहित्‍य को संपोषित करने के लिये भाषाई अकादमियों की स्‍थापना की गई है. इन अकादमियों के माध्‍यम से हम लगातार विभिन्‍न भाषाओं के साहित्‍य को संपोषित करने का काम कर रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश की संस्‍कृति को संरक्षित और संवर्धित करने के लिये हमारे द्वारा ऐसे अनेकानेक कार्य किये जा रहे हैं जिसका समय सीमा होने के कारण, समय की कमी होने के कारण उल्‍लेख करना अभी संभव नहीं है. जहां तक पर्यटन विभाग की बात करें तो पर्यटन विभाग भी निरंतर यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में पर्यटन की दृष्टि से मध्‍यप्रदेश क्रमांक-1 का प्रदेश बने इस उद्देश्‍य को लेकर हम निरंतर काम कर रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे आपके माध्‍यम से सदन को बताते हुये प्रसन्‍नता है कि हमारा मध्‍यप्रदेश पर्यटन और तीर्थाटन की दृष्टि से अत्‍यंत समृद्ध प्रदेश है. यहां पर्यटन स्‍थलों में हमें श्रद्धा, ज्ञान और वैभव तीनों देखने को मिलते हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने, निवेश को आकर्षित करने तथा संभावनाओं को यथार्थ में बदलने के लिये माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में लगातार अभूतपूर्व कार्य किये जा रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पर्यटन की दृष्टि से हमारा प्रदेश एक समृद्ध प्रदेश है. हमारे प्रदेश में सांस्‍कृतिक, पुरातात्विक, प्राकृतिक एवं वन्‍य जीवन की दृष्टि से समृद्ध स्‍थल विद्यमान हैं. हमारी सरकार इन स्‍थलों को वैश्विक दृष्टि से विकसित करने का लगातार काम कर रही है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सदन को बताना चाहता हूं कि हमारे द्वारा हाल ही में नई पर्यटन नीति और नई फिल्‍म पर्यटन नीति 2025 को भी लागू करने का काम हमने किया है इसके माध्‍यम से पर्यटन तथा फिल्‍म पर्यटन के क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिये अनेक पारदर्शी प्रावधान हमारे द्वारा किये गये हैं. सिंगल विंडो सिस्‍टम के साथ-साथ संबंधित सेवाओं को लोक सेवा गांरटी अधिनियम के अंतर्गत लाने का काम पर्यटन विभाग के द्वारा, हमारी सरकार के द्वारा किया गया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश में पर्यटन एवं धार्मिक स्‍थलों को वायुसेवा से जोड़ने के लिये पीएम श्री पर्यटन वायुसेवा एवं पीएम श्री पर्यटन हेली सेवा का शुभारंभ हमारी सरकार ने किया है जो अपने आप में देश में ऐसा नवाचार है जो देश के किसी अन्‍य राज्‍य में देखने को नहीं मिलता है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धार्मिक और सांस्‍कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये हमारे द्वारा 17 धार्मिक और सांस्कृतिक लोकों का निर्माण किया जा रहा है जिसके लिये समुचित बजट का प्रावधान बजट में किया गया है. प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये होम स्टे के माध्यम से देश विदेश के पर्यटकों को हमारी संस्कृति से परिचित कराने का कार्य हम कर रहे हैं. मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रदेश में 400 से अधिक होम स्टे का निर्माण प्रारंभ किया गया है. हमारा लक्ष्य एक हजार से अधिक होम स्टे निर्मित करने का है. जिस पर सरकार निरंतर काम कर रही है. महिलाओं हेतु सुरक्षित पर्यटन की दृष्टि से प्रदेश में भय मुक्त वातावरण निर्माण के लिये हमारे द्वारा महिलाओं हेतु सुरक्षित पर्यटन स्थल योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है इसके अंतर्गत 45 हजार से अधिक युवतियों और महिलाओं को प्रशिक्षण देने का काम हमने किया है. मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश के बढ़ते हुए प्रयासों को देखते हुए हमें बेस्ट सस्टेनेबल स्टेट टूरिज्म का अवार्ड भी प्राप्त हुआ है. प्रदेश में पर्यटन की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये हमारे द्वारा लगातार स्काई डाईविंग,स्कूबा डाईविंग,बाईकिंग,राक क्लाइंबिंग,मेराथन,टेंट सिंटी,जल पर्यटन,जल महोत्सव आदि एडवेंचर गतिविधियों को आयोजित कर नवाचार करने का काम पर्यटन विभाग द्वारा किया जा रहा है. प्रदेश की राजधानी भोपाल में पर्यटकों को आकर्षित करने के लिये नवाचार करते हुए पर्यटन विभाग द्वारा भोपाल के बड़े तालाब में शिकारा संचालन का काम हमने शुरू किया है निश्चय ही यह पर्यटकों के लिये एक नया अनुभव प्रदान करने वाली गतिविधि है. मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि चंदेरी स्थित प्राणपुर ग्राम में देश की प्रथम क्राफ्ट टूरिज्म विलेज का निर्माण किया गया है और इस ग्राम को देश में प्रथम पुरस्कार भी मिला है. मध्यप्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिये हमारे दूरदर्शी मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्व में रीवा और ग्वालियर में रीजनल टूरिज्म कान्क्लेव का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 6 हजार 500 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं इसके साथ ही भोपाल में मध्यप्रदेश में ट्रेवल मार्ट का आयोजन किया गया जिसमें देश भर के स्टेक होल्डर्स तथा 28 देशों के प्रतिनिधियों ने अपनी सहभागिता की. इस ट्रेवल मार्ट में 3565 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. मैं यहां यह भी उल्लेख करना चाहता हूं कि पर्यटकों की सुविधा हेतु पर्यटन विकास निगम द्वारा संपूर्ण प्रदेश में हास्पिलेटली सुविधाओं का विस्तार करने का काम हम कर रहे हैं. माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मुझे सदन को यह बताते हुए प्रसन्नता है कि विगत वर्ष मध्यप्रदेश में 14 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन हुआ है और मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में इस संख्या में और अधिक विस्तार होगा. हमारा मध्यप्रदेश बेस्ट टूरिज्म फ्रेंडली स्टेट के रूप में स्थापित हुआ है. मध्यप्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में हमारी सरकार के द्वारा किये जा रहे नवाचारों के कारण प्रदेश को पर्यटन के क्षेत्र में 18 से अधिक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं. डाक्टर मोहन यादव जी के नेतृत्व में हमारी सरकार मध्यप्रदेश को पर्यटन की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के लिये लगातार कार्य कर रही है इसके लिये समुचित बजट का प्रावधान किया गया है. माननीय अध्यक्ष महोदय, अगर हम धर्मस्व विभाग की बात करें तो धर्मस्व विभाग के माध्यम से धर्म संस्कृति और समाज के मूल स्तम्भों को संरक्षित करने का काम हम कर रहे हैं. धर्म केवल एक नैतिक आचार संहिता नहीं है बल्‍कि व्‍यक्‍ति के जीवन को संतुलित, सकारात्‍मक और सुखी बनाने का मार्ग भी है. धर्म मनुष्‍य को आत्‍मिक उन्‍नति और नैतिक प्रगति के मार्ग पर ले जाने वाला बड़ा कारक है. इसी उद्देश्‍य को दृष्‍टिगत रखते हुए मध्‍यप्रदेश में लोकप्रिय मुख्‍यमंत्री डॉक्‍टर मोहन यादव की सरकार प्रदेश में धर्म और संस्‍कृति के उन्‍नयन और संपोषण के लिए लगातार प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है.

          अध्‍यक्ष महोदय, धार्मिक न्‍यास और धर्मस्‍व विभाग निरंतर अपने उद्देश्‍यों को पूर्ण करने में सफल रहा है. मुझे सदन को यह बताते हुए प्रसन्‍नता है कि धार्मिक दृष्‍टि से मध्‍यप्रदेश अत्‍यन्‍त समृद्ध प्रदेश है. हमारे प्रदेश में दो ज्‍योतिर्लिंग, चार देवी शक्‍ति पीठ और कई ऐसे धार्मिक स्‍थल हैं, जहां से निकलने वाला धार्मिक प्रकाशपुंज संपूर्ण मानव जाति के लिए सकारात्‍मक ऊर्जा प्रदान करने का काम करता है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सदन को बताना चाहता हूँ कि मध्‍यप्रदेश में 22 हजार से अधिक शासन संधारित मंदिर हैं. इन मंदिरों के संरक्षण, संधारण और जीर्णोद्धार के लिए हमारी सरकार निरंतर काम कर रही है. वर्ष 2025-26 में सरकार द्वारा 21 करोड़ 86 लाख रुपये की राशि से 127 शासन संधारित मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया गया है. इसके साथ ही, धार्मिक स्‍थलों के पास धर्मशालाओं के निर्माण हेतु 53 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके साथ ही शासन संधारित मंदिरों के पुजारियों के समुचित उत्‍थान के लिए नियमित रूप से प्रति माह मानदेय प्रदान करने का काम हमारी सरकार कर रही है. यह मानदेय सिंगल क्‍लिक के माध्‍यम से प्रदान करने का प्रावधान हमारी सरकार के द्वारा किया गया है. वित्‍तीय वर्ष 2025-26 में राशि 21 करोड़ 96 लाख रुपये का मानदेय पुजारियों को प्रदान करने का काम हमारी सरकार ने किया है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश के वरिष्‍ठ नागरिकों को भारत के विभिन्‍न तीर्थ स्‍थानों की यात्रा का लाभ प्रदान करने के लिए मुख्‍यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना का सफल क्रियान्‍वयन हमारी सरकार के द्वारा किया जा रहा है. वर्ष 2025-26 में हमारी सरकार द्वारा लगभग 42 करोड़ रुपये के व्‍यय से मुख्‍यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत 24 ट्रेनें संचालित कर 19,200 वरिष्‍ठ नागरिकों को प्रयागराज, अयोध्‍या, काशी और कामाख्‍या जैसे तीर्थ स्‍थानों की यात्राएं कराई गई हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धार्मिक और सांस्‍कृतिक मेले हमारी संस्‍कृति के दर्पण होते हैं. हमारे द्वारा प्रदेश के धार्मिक मेलों को संवर्द्धित और संपोषित करने के उद्देश्‍य से मध्‍यप्रदेश तीर्थस्‍थान और मेला प्राधिकरण के माध्‍यम से सहयोग प्रदान किया जाता है. प्राधिकरण में प्रदेश के 111 प्रमुख तीर्थ एवं प्रदेश के कुल 1,629 मेले पंजीकृत हैं. विभाग द्वारा वित्‍तीय वर्ष 2025-26 में धार्मिक मेलों एवं तीर्थों के प्रबंधन हेतु 2 करोड़ 80 लाख 75 हजार रुपये का अनुदान जारी किया गया है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धार्मिक स्‍थानों के संवर्द्धन और उन्‍नयन एवं धर्म और दर्शन के माध्‍यम से प्रदेश में धार्मिक उन्‍नति और जागृति के लिए डॉक्‍टर मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में हम लगातार लोककल्‍याणकारी कार्य कर रहे हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं सदन से आग्रह करता हूँ कि संस्‍कृति विभाग से संबंधित वित्‍तीय वर्ष 2026-2027 के अंतर्गत मांग संख्‍या 26 के अंतर्गत उपरोक्‍तानुसार कुल राशि एक हजार तीन सौ पैंसठ करोड़ बाईस लाख पचहत्‍तर रुपये का अनुदान पारित करने का कष्‍ट करें. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बड़ी विनम्रतापूर्वक सदन से आग्रह करता हूँ कि पर्यटन विभाग से संबंधित वित्‍तीय वर्ष 2026-27 के अन्‍तर्गत मांग संख्‍या 37 के अंतर्गत उपरोक्‍तानुसार कुल राशि 565 करोड़ 67 लाख 25 हजार रुपये का अनुदान पारित करने का कष्‍ट करें. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बड़ी विनम्रतापूर्वक सदन से आग्रह करता हूँ कि धार्मिक न्‍यास और धर्मस्‍व विभाग से संबंधित वित्‍तीय वर्ष 2026-27 के लिये मांग संख्‍या 51 के अंतर्गत कुल राशि 126 करोड़ 54 लाख 31 हजार रुपये का अनुदान पारित करने का कष्‍ट करें. बहुत-बहुत धन्‍यवाद. (मेजों की थपथपाहट)

 

(मेजों की थपथपाहट)

 

3.48 बजे

मुखबंध प्रस्‍ताव

          अध्‍यक्ष महोदय - वर्ष 2026-2027 के आय-व्‍ययक पर सामान्‍य चर्चा के साथ कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्‍ताव पर दोनों पक्षों के अधिकांश माननीय सदस्‍यों द्वारा विस्‍तार से चर्चा की गई है. कार्यमंत्रणा समिति में सहमति अनुसार अभी तक शासन के मुख्‍य विभागों की अनुदान मांगों पर सतत् रूप से भोजनावकाश स्‍थगित करने के साथ सायं देर तक बैठकर विस्‍तृत चर्चा सदन में हुई है. निर्धारित समय सीमा में अनुदान मांगें स्‍वीकृत होना आवश्‍यक है और कार्य दिवस कम हैं.

          अत: वर्णित स्थिति में वर्ष 2026-2027 के आय-व्‍ययक में सम्मिलित अनुदानों की मांगों पर अब मुखबन्‍ध (गिलोटिन) होगा. इस संबंध में मतदान हेतु शेष विभागों की अनुदान मांगें माननीय उप मुख्‍यमंत्री (वित्‍त) जी एक साथ प्रस्‍तुत करेंगे तथा उन पर एक साथ मत लिया जाएगा. माननीय जगदीश देवड़ा जी.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक मिनट लूँगा. अध्‍यक्ष महोदय, जल संसाधन विभाग पर मेरे बहुत महत्‍वपूर्ण सुझाव थे, अगर आपकी अनुमति हो, चूँकि अब आगे इस विभाग पर चर्चा नहीं होगी, तो मैं पटल पर रख देता हूँ. अगर आपकी अनुमति हो.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - अध्‍यक्ष महोदय, आप लिखित में मांग लीजिये.

          अध्‍यक्ष महोदय - डॉ. राजेन्‍द्र कुमार जी, मुझे लगता है कि वह पूरा हो गया है और कार्यमंत्रणा समिति के अनुसार ही सारी कार्यवाही चल रही है.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, मैं पटल पर रख देता हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय - क्‍या यह ले करना है ?

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह - जी हां. मैं आगे कुछ नहीं कहूँगा. मैं संसदीय कार्य मंत्री जी से कहूँगा कि ले करा दें. 

          अध्‍यक्ष महोदय - बिल्‍कुल. डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह जी का भाषण ले करा दें. 

           

 

 

                   उप मुख्‍यमंत्री, वित्‍त (श्री जगदीश देवड़ा)-  अध्यक्ष महोदय, मैं, राज्यपाल महोदय की सिफारिश के अनुसार प्रस्ताव करता हूँ कि 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने वाले वर्ष में राज्य की संचित निधि में से प्रस्तावित व्यय के निमित्त राज्यपाल महोदय को

अनुदान संख्या

-

006

वित्‍त के लिए पैंतीस हजार तीन सौ बाईस करोड़, उन्‍नीस लाख, पचास हजार रुपये;

 

अनुदान संख्या

-

007

वाणिज्यिक कर के लिए चार हजार एक सौ उनासी करोड़, सतावन लाख, सत्रह  हजार रुपये

 

अनुदान संख्या

-

008

भू-राजस्‍व, जिला प्रशासन तथा आपदा राहत पर व्‍यय के लिए तेरह हजार आठ सौ बहत्‍तर करोड़, तैतीस लाख, चौवन हजार रुपये;

 

अनुदान संख्या

-

009

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा के लिए चार सौ उनसठ करोड़, छियालीस लाख, छब्‍बीस हजार रुपये;

 

अनुदान संख्या

-

012

ऊर्जा के लिए चौदह हजार चार सौ पन्‍द्रह करोड़, पचहत्‍तर लाख, सैतीस हजार रुपये;

 

अनुदान संख्या

-

013

किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास के लिए इक्‍तीस हजार सात सौ अठावन करोड़, बारह लाख, इक्‍कानवे हजार रुपये;

 

अनुदान संख्या

-

014

पशुपालन एवं डेयरी के लिए दो हजार तीन सौ चौसठ करोड़, सैतीस लाख, पन्‍द्रह हजार रुपये;

 

अनुदान संख्या

-

015

घुमन्‍तु और अर्धघुमन्‍तु जनजाति के लिए पचपन करोड़, इक्‍कीस लाख, सतावन हजार रुपये;

 

 

अनुदान संख्या

-

016

मछुआ कल्‍याण तथा मत्‍स्‍य विकास के लिए चार सौ बारह करोड़, चौहत्‍तर लाख, तैतीस हजार रुपये;

 

अनुदान संख्‍या

-

017

सहकारिता के लिए एक हजार छ: सौ उनासी करोड़, अठाइस लाख, उनहत्‍तर हजार रुपये;

 

अनुदान संख्या

-

020

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी के लिए छ: हजार चार सौ तिरसठ करोड़, बयासी लाख, बयालीस हजार रुपये;

 

अनुदान संख्या

-

023

जल संसाधन के लिए सात हजार दो सौ सत्‍तर करोड़, चौसठ लाख, चौदह हजार रुपये;

 

 

 

 

 

अनुदान संख्या

-

031

योजना, आर्थिक और सांख्यिकी के लिए नौ सौ सतासी करोड़, पांच लाख, अड़तालीस हजार रुपये;

 

अनुदान संख्या

-

034

सामाजिक न्‍याय एवं नि:शक्‍तजन कल्‍याण के लिए चार हजार पांच सौ सत्‍तर करोड़, इकतालीस लाख, तिरानवे हजार रुपये;

 

अनुदान संख्या

-

035

सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम के लिए दो हजार एक सौ चवालीस करोड़, छियालीस लाख, इक्‍कानवे हजार रुपये;

 

 

 

 

अनुदान संख्या

-

039

खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण के लिए एक हजार आठ सौ बासठ करोड़, पचपन लाख, पन्‍द्रह हजार रुपये;  

 

अनुदान संख्या

-

043

खेल और युवा कल्‍याण के लिए सात सौ पन्‍द्रह करोड़, चार लाख, चवालीस हजार रुपये;

 

 

अनुदान संख्या

-

050

उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्‍करण के लिए सात सौ बहत्‍तर करोड़, पैंतालीस लाख, तिरेपन हजार रुपये;

 

 

 

 

 

अनुदान संख्या

-

053

अल्‍प संख्‍यक कल्‍याण के लिए एक सौ छप्‍पन  करोड़, उनतालीस लाख, पैंतालीस हजार रुपये;

 

अनुदान संख्‍या

-

054

पिछड़ा वर्ग कल्‍याण के लिए एक हजार छ: सौ छत्‍तीस करोड़, अठावन लाख, तिरासी हजार रुपये;

 

अनुदान संख्या

-

055

महिला एवं बाल विकास के लिए बत्‍तीस हजार सात सौ तीस करोड़, पैंतालीस हजार रुपये;

 

अनुदान संख्या

-

056

कुटीर एवं ग्रामोद्योग के लिए एक सौ पैतालीस करोड़, पचास हजार रुपये;

 

         

तक की राशि दी जाय.

 

अध्यक्ष महोदय :-       प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

 

प्रश्न यह है कि 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने वाले वर्ष में राज्य की संचित निधि में से प्रस्तावित व्यय के निमित्त उप मुख्‍यमंत्री (वित्‍त) द्वारा प्रस्‍तुत अनुदान मांगों  6, 7, 8, 9, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 20, 23, 31, 34, 35, 39, 43, 50, 53, 54, 55 एवं 56 के लिए राज्‍यपाल महोदय को  प्रस्‍तावित राशि दी जाये-

 

मांगों का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

 

3.53 बजे

शासकीय वित्‍त विषयक कार्य

 

मध्यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-2) विधेयक, 2026

 

          उप मुख्‍यमंत्री, वित्‍त (श्री जगदीश देवड़ा)-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-2) विधेयक, 2026 का पुर:स्‍थापन करता हूं.          

          अध्‍यक्ष महोदय-  प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ. कोई माननीय सदस्‍य कुछ कहना चाहते हैं ? किसी को कुछ बोलना तो नहीं है ? मंत्री जी जारी रखें.

 


 

3.56 बजे                             अशासकीय संकल्‍प

 

        अध्‍यक्ष महोदय--मुझे लगता है कि अशासकीय संकल्‍प लगभग एक नेचर के ही हैं और उत्‍तर भी एक ही विभाग को देना है तो जो प्रस्‍तुत करने वाले महानुभाव हैं वह एक साथ संकल्‍प प्रस्‍तुत कर देंगे. मंत्री जी का जवाब एक साथ आ जाएगा.

 

 

(1) कालापीपल रेलवे स्‍टेशन को अमृत भारत योजना अंतर्गत जोड़कर रेलवे स्‍टेशन का विकास एवं सौंदर्यीकरण करते हुए प्‍लेटफार्म की ऊंचाई बढ़ाई जाना

 

          श्री धनश्‍याम चन्‍द्रवंशी (कालापीपल)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं संकल्‍प प्रस्‍तुत करता हूं कि मेरा अशासकीय संकल्‍प क्रमांक-14 इस प्रकार है. कालापीपल रेलवे स्‍टेशन पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल का उज्‍जैन भोपाल खंड पर स्थित है. प्रमुख रेलवे स्‍टेशन है. यहां पर प्रतिदिन 11 जोडे यात्री ट्रेनों का आवागमन होता है. जिसमें लगभग हजारों की संख्‍या में यात्रीगण यात्रा करते हैं. यह रेलवे स्‍टेशन मेरी विधान सभा का प्रमुख रेलवे स्‍टेशन है. यहां से आसपास के लगभग 200 गांव के ग्रामीण जन यात्रा करते हैं. यहां की रेलवे स्‍टेशन बिल्डिंग, प्रतीक्षालय अत्‍याधिक पुरानी है एवं वर्तमान में यात्रियों के आवागमन के मान से छोटी भी है. कालापीपल रेलवे स्‍टेशन के प्‍लेटफार्म नंबर एक व दो वर्तमान ट्रेनों के एलएसएच कोच के मान से अत्‍यधिक नीचे है जिससे महिलाओं एवं बुजुर्गों को ट्रेन से चढ़ने उतरने में परेशानी होती है. यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्‍व में भारतीय रेल के मूलभूत ढ़ांचे से आमूलचूल परिवर्तन एवं विकास हो रहा है. इस कड़ी में रेलवे स्‍टेशनों का अमृत भारत योजना के तहत सौन्‍दर्यीकरण तथा निर्माण किया जा रहा है. मैं सदन के सभी माननीय सदस्‍यों से अनुरोध करता हूं कि कालापीपल रेलवे स्‍टेशन को अमृत भारत योजना में जोड़ते हुए दोनों प्‍लेटफार्म की ऊंचाई बढ़ाने हेतु संकल्‍प पारित करने का कष्‍ट करें.

          अध्‍यक्ष महोदय-- धनश्‍याम जी आपने भाषण तो दे दिया, लेकिन जो मूल प्रस्‍ताव था वह आप पूरा पढ़ दो.

          श्री धनश्‍याम चन्‍द्रवंशी-- यह सदन केन्‍द्र शासन से अनुरोध करता है कि ''कालापीपल रेलवे स्‍टेशन को अमृत भारत योजना अंतर्गत जोड़कर रेलवे स्‍टेशन का विकास एवं सौंदर्यीकरण करते हुए प्‍लेटफार्म की ऊंचाई बढ़ाई जाये''.

          अध्‍यक्ष महोदय-- प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ

          (2) इंजीनियर प्रदीप लारिया (अनुपस्थित)

 

 

 

 

 

(3) ग्‍वालियर-भिण्‍ड-इटावा नेशनल हाईवे क्रमांक 719 को सिक्‍स-लेन एवं हाईवे पर स्थित चंबल नदी के क्षतिग्रस्‍त पुल का मरम्‍मत कार्य पूर्ण कराकर आवागमन प्रारंभ किया जाना

 

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे-- सदन का यह मत है कि'' ग्‍वालियर-भिण्‍ड-इटावा नेशनल हाईवे क्रमांक 719 को सिक्‍स-लेन एवं हाईवे पर स्थित चंबल नदी के क्षतिग्रस्‍त पुल का मरम्‍मत कार्य पूर्ण कराकर आवागमन प्रारंभ किया जाये''.

          अध्‍यक्ष महोदय-- संकल्‍प पत्र प्रस्‍तुत हुआ.

 

3.59 बजे                                     स्‍वागत उल्‍लेख

          अध्‍यक्ष महोदय--हिमाचल प्रदेश की विधान सभा की नगरीय निकाय समिति के सभापति एवं सदस्‍य सभी अध्‍यक्षीय दीर्घा में विराजमान हैं. सदन की ओर से उनका स्‍वागत है. (मेजों की थपथपाहट)..

 

3.59 बजे                             अशासकीय संकल्‍प (क्रमश:)

          श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे (अटेर) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सर्वप्रथम मैं आपको अपने दिल की गहराई से धन्यवाद देना चाहूंगा कि यह एक ऐसा जनहित का विषय है जिस पर आपने मुझे चर्चा का अवसर दिया. चूंकि विषय केन्द्र सरकार से जुड़ा हुआ है. नेशनल हाई-वे है इसमें निश्चित ही राज्य सरकार की सीमाएं बंधी हुई हैं. अधिकार क्षेत्र बंधे हुए हैं. परन्तु अशासकीय संकल्प के माध्यम से यदि इस विषय को सदन में उठाया जाए तो मुझे लगता है कि केन्द्र सरकार इस पर गंभीरता से विचार करेगी. यह कांग्रेस और बीजेपी से जुड़ा हुआ विषय नहीं है. चूंकि आपका क्षेत्र भी उससे निकट है और आप खुद इस समस्या से भलीभांति परिचित हैं. इस हाई-वे को वर्तमान में कोई खूनी हाई-वे कह रहा है, कोई मौत का हाई-वे कह रहा है. ऐसा कोई दिन नहीं जाता है ऐसी कोई सुबह नहीं होती है जब अखबार खोला जाए, मुझे तो आज भी याद है क्योंकि होली आने वाली है, आपको याद होगा पिछली होली पर मैंने इस बात को अपने वक्तव्य में कहा भी था कि एक दुर्घटना में एक ही परिवार के सात लोगों की मृत्यु हो गई थी. उनके यहां होली पर मातम पसरा हुआ था. चूंकि होली आने वाली है. प्रत्येक दिन ऐसा होता है. वहां के लोगों के द्वारा इसको मौत के हाई-वे का नाम दे दिया गया है. वहां के अन्य जनप्रतिनिधि चाहे मेहगांव से मंत्री जी राकेश शुक्ला जी हों, चाहे गोहद से विधायक केशव देसाई जी, चाहे भिण्ड से नरेन्द्र सिंह कुशवाह जी विधायक हों या अम्बरीश शर्मा जी लहार से हों. सभी लोगों ने इस विषय को निरन्तर उठाया है. यहां कांग्रेस और बीजेपी का विषय ही नहीं है. यहां विषय बहुत ऊपर जा चुका है. मैंने पहली बार अपने राजनैतिक जीवनकाल में देखा है कि जो जिले के सभी संत हैं.  चाहे उसमें गंगरऊआ सरकार हों, तेजपुरा महाराज हों, जितने भी संत हैं. करीब हजारों की संख्या में संतों ने भूख हड़ताल की थी जो दो दिन तक चली थी. फिर मैं खुद जिला अस्पताल गया. मैंने संतों के पैर छुए. दो घंटे बड़ी मुश्किल से आग्रह करके उनको नारियल पानी पिलाकर यह कहा कि यह आपका कार्य नहीं है. इसकी लड़ाई लड़ने के लिए आपने हमें जनप्रतिनिधि बनाकर चुना है. हमारा दायित्व है हम इसकी लड़ाई लड़ेंगे भूख हड़ताल मत कीजिए. संत बड़ी मुश्किल से माने थे. पुन: उन्होंने दूसरी बार हड़ताल की क्योंकि शासन ने असत्य आश्वासन दिया था और कहा था कि हम इसका एक महीने में कार्य प्रारंभ कर देंगे. एक महीने के दो महीने बीत गए. एक गिट्टी का भी काम प्रारंभ नहीं हुआ. इसके बाद जो भूतपूर्व सैनिक हैं इन लोगों ने एक यात्रा चलाई. इस हाई-वे को लेकर के समाजसेवियों के साथ मिलकर दिल्ली तक पदयात्रा की गई. क्यों भिण्ड के, ग्वालियर के या इस हाई-वे पर जो भी लोग चल रहे हैं, उन्हें मौत के घाट उतारा जा रहा है. क्यों उनको सिर्फ मुआवजे तक सीमित किया जा रहा है. इन मौतों को रोकने के लिए हमारा सदन चिंतित है या नहीं है. मेरी चिंता यह है. मेरे क्षेत्र की जनता भी इस बात को जानती है कि यह हमारे अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है. लेकिन यह तो हमारे अधिकार क्षेत्र में है कि हम इस काम की अनुशंसा करके सर्वसहमति से चाहे सत्तापक्ष हो या विपक्ष हो हम सब मिलकर के इस हाई-वे के कार्य के लिए केन्द्र सरकार को चेताएं और उससे हाथ जोड़कर आग्रह करें कि अतिशीघ्र इस कार्य को प्रारंभ किया जाए. अध्यक्ष महोदय, मैं आपको एक उदाहरण देना चाहूंगा. अभी हाल ही में अमित शाह जी ग्वालियर आए थे. स्वर्गीय पंडित अटल बिहारी वाजपेई जी का जन्म दिन था. एक रात पहले जो उनके निवास की रोड थी जो कि क्षतिग्रस्त थी एक रात पहले डामर की पूरी रोड बन गई. माननीय अध्यक्ष महोदय, यह कौन सा गुप्त विभाग है मैं आपके माध्यम से मंत्री जी और सदस्यों से पूछना चाहूंगा. यूं तो सामान्य प्रशासन विभाग के नियम बताए जाते हैं कि 2 लाख रुपए से ऊपर का कोई भी कार्य होगा तो टेंडर निकाला जाएगा. 2 लाख रुपए के लिए कोई फाइल चलेगी तो महीनों-सालों अटकी रहेगी. परन्तु यहां पर 2 करोड़ रुपए से ज्यादा का कार्य एक रात में हो जाता है. यह कौन सा गुप्त विभाग है जो मध्यप्रदेश में सक्रिय है. मैं तो कहता हूँ अगर यह है तो क्यों न इस गुप्त विभाग को ही आदेशित करके इन मौतों को बचाया जाए, भिण्ड के लोगों को क्यों मारने पर आमादा हैं.

          अध्यक्ष महोदय -- आपकी सड़क इसमें नहीं आएगी. वो कैलाश विजयवर्गीय जी का विभाग है.

          श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे -- वो कोई गुप्त विभाग है. उसके मंत्री भी गुप्त हैं.

          अध्यक्ष महोदय -- आपकी सड़क के मंत्री दूसरे हैं.

          श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे -- अध्यक्ष महोदय, दिन में भले न बने रात में बन जाए, लेकिन सड़क बन जाए. मेरा आपसे आग्रह है. मालनपुर का टोल है, एक तरफ तो इस हाई-वे पर मौतें हो रही हैं. यह एक पहलू है इसका दूसरा पहलू माननीय मंत्री महोदय यह है कि मालनपुर में जो टोल है. इस टोल से निरन्तर वसूली की जा रही है. टोल से वसूली का अधिकार भी होता है, टोल बने ही इसके लिए हैं. परन्तु चिंताजनक बात यह है कि इस टोल की जो समयावधि थी वो समाप्त हो चुकी है. अब समयावधि समाप्त होने के बाद सरकार को चिंता होनी चाहिए थी, भिण्ड के लोगों की लेकिन सरकार इस टोल के मालिक के साथ खड़ी हो गई. टोल का मालिक एक एक्सटेंशन का लेटर लिखकर देता है एमपीआरडीसी को और उसमें क्लाज 26 का उल्लेख करता है कि हमारे कंसेशन एग्रीमेंट में..

          डॉ. सीतासरन शर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह संकल्प का विषय नहीं है. यह भाषण देने लगे हैं.

          अध्यक्ष महोदय -- यह संकल्प-पत्र की विषय-वस्तु नहीं है.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले ही बताया था कि यह सरकार का विषय नहीं है शायद आपने उस बात को सुना नहीं. मैं पुन: दोहरा देता हूं कि यह केन्‍द्र सरकार का विषय है राज्‍य सरकार का विषय नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय --  संकल्‍प का विषय नहीं है उन्‍होंने यह कहा है.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- अध्‍यक्ष महोदय, यह संकल्‍प का विषय है और यदि लोगों की मौत की बात आएगी तो मुझे लगता है कि विषय बदलने को भी यह सदन को मजबूर किया जाएगा. यहां लोगों के मौत की बात है. मेरा हाथ जोड़कर आपसे निवेदन है. मैं इसमें कोई भी राजनैतिक बात नहीं कह रहा हूं मैं इसमें सिर्फ इतना आग्रह कर रहा हूं कि यह टोल एक तरफ लोगों की मौत हो रही है दूसरी तरफ मालनपुर में टोल वसूला जा रहा है. जब उसकी समयावधि समाप्‍त हो गई थी क्‍योंकि उसको एक्‍सटेंशन दिया गया. 2 साल, 9 महीने, 18 दिन का एक्‍सटेंशन कोविड के आधार पर दिया. इतना तो कोविड भी नहीं चला. कोविड में अधिकतम 2 से 3 महीने की दिक्‍कत हुई और जब कोविड हुआ तो क्‍या लोगों को नुकसान नहीं हुआ क्‍या सिर्फ टोल मालिक को ही नुकसान हुआ. सरकार टोल मालिक के साथ जाकर खड़ी हो गई. मैं आग्रह करता हूं कि यह जो टोल है इसके लिए जो भी नियम होगा ठीक है पंडित जी, आपने नियम बताया तो इसका भी नियम बता दें कैसे बंद होगा. मैं आपसे हाथ जोड़कर विनती कर लेता हूं लेकिन हमारे लोगों की जान लेकर टोल की वसूली तो नहीं की जाएगी. हो सकता है मुझे नियम नहीं पता आप नियम के सर्वज्ञाता हैं, आप नियम बता दें उस नियम से बंद करवाने चलें लेकिन यह तो नहीं होगा कि एक तरफ लोग मरेंगे और दूसरी तरफ उनसे टोल भी वसूला जाएगा.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, जब आप वह विषय लाएंगे तो नियम बता देंगे. आज उसका अवसर नहीं है.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- अध्‍यक्ष महोदय, काफी हंसी की बात थी मुझे तो नहीं महसूस हुई परंतु सम्‍माननीय सदस्‍यों को हुई. ठीक है. मैं अंतिम बात यह कहना चाहूंगा कि इसी के साथ एक विषय और जुड़ा हुआ है कि फूंफ से इटावा के लिए एक मात्र पुल है यूपी से जो कनेक्‍टेड है इसी से हमारे लोग जा सकते हैं तो यह जो पुल है हमेशा क्षतिग्रस्‍त बना रहता है इसकी भी मरम्‍मत की जानी चाहिए. साथ ही साथ मेरी सिर्फ इतनी सी मांग है कि सिक्‍सलेन के लिए हाईवे को अपग्रेड किया जाए. यदि तत्‍काल अपग्रेड नहीं हो सकता, उसका प्रोसीजर यदि लंबा है तो इसके चौड़ीकरण का कार्य जिसके लिए अनेकों मीटिंग हो चुकी हैं, कलेक्‍टर, मंत्री सबको बुलाकर 100 मीटिंग हो चुकी हैं उसमें चाय नाश्‍ता इतना बढि़या था पता नहीं उसके कितने खर्चे हो गए होंगे, तो यह मीटिंग बंद करके कम से कम चौड़ीकरण का कार्य शुरू कर दिया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय, तीसरी बात यह जो टोल वसूला जा रहा है यह एक्‍सटेंशन दिया है. सरकार तय करे कि वह टोल मालिक के साथ खड़ी है या उनके साथ खड़ी है जिन लोगों की वहां पर मौतें हो रही हैं. आखिरी बात यह कहूंगा एक और टोल इसी हाईवे पर पड़ता है बरहई से. टोल का नियम यह है कि 15 से 20 किलोमीटर की सीमा पर जो गांव हैं और जो ग्रामवासी हैं उनको एक पास बनाकर दिया जाता है जिससे कि उनसे रोज टोल वसूली नहीं की जाए तो जो निकट के गांव हैं उनसे भी अवैध वसूली की जा रही है उसको समाप्‍त किया जाए. अंत में सिर्फ यह कहूंगा कि यह विषय जनहित का विषय है और कैसे मौत पर राजनीति बंद की जाए और इन मौतों को रोका जाए सर्वसहमति से मेरा आग्रह है सत्‍ता पक्ष से, विपक्ष तो है ही हम सब लोग मिलकर इसको पारित तो करें ही साथ ही साथ केन्‍द्र सरकार से आग्रह करें कि अतिशीघ्र 30-40 दिन के अंदर इसका कार्य प्रारंभ किया जाए. आपने मुझे इस महत्‍वपूर्ण विषय पर बोलने का समय दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, दोनों को एक साथ ही आप करेंगे.

श्री राकेश सिंह (लोक निर्माण मंत्री) -- अध्‍यक्ष महोदय, पहले तो अनुमति चाहूंगा कि मुझे विषय वस्‍तु पर उत्‍तर देना है या भाषण पर.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, आप जो उचित समझते हैं वह बात करिये.

अध्‍यक्ष महोदय --  सोहन जी, बैठ जाइये मंत्री जी दे देंगे.

श्री राकेश सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक सुझाव के रूप में भी इस समूचे सदन में यह कहना चाहूंगा कि जब कभी हम अशासकीय संकल्‍प जैसे विषय सदन में रखते हैं तो स्‍वाभाविक है कि उन्‍हें हम सरकार को साथ में सहमत करते हैं कि इन्‍हें केन्‍द्र शासन को भेजा जाए. अगर वह विषय पर केन्द्रित हो तो वह विषयवस्‍तु, विषय का हिस्‍सा होगा. यदि वह काफी विषय के इर्द गिर्द चला जाएगा तो उस मूल विषय के अलावा बाकी कुछ भी वहां नहीं जाएगा जहां इसको पहुंचना है. मेरा केवल इतना ही आग्रह है कि हम विषय पर केन्द्रित रहकर बात करते हैं तो इसे ठीक तरीके से भेजा जा सकता है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप तो विषय पर केन्द्रित रहें. जहां पहुंचना है वहां पहुंचाएं.

            श्री राकेश सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं पूरी तौर पर अनुमति लेकर‍ विषय पर ही केन्द्रित रहूंगा. माननीय घनश्‍याम चन्‍द्रवंशी जी के द्वारा कालापीपल रेलवे स्‍टेशन को अमृत भारत योजना के अंतर्गत जोड़कर उसके सौंदर्यीकरण और प्‍लेटफार्म की ऊंचाई की बात की गई है. सिद्धांतत: सरकार की इस पर सहमति है लेकिन जैसा होता है कि इस पर निर्णय राज्‍य सरकार नहीं कर सकती तो हमें केन्द्र सरकार को उसको भेजना होगा और यह इसी रूप में केन्द्र को भेजने के लिये सरकार की सहमति है.

          माननीय अध्यक्ष जी, माननीय हेमंत जी ने जो अपना विषय रखा है उसमें भी उनका जो मुख्य विषय है वह ग्वालियर-भिण्ड-इटावा नेशनल हाईवे कर्मांक 719 को सिक्स लेन में परिवर्तित करने का है. इसके गुण दोष पर जाये बिना सीधे तौर पर सरकार इसमें सहमति प्रदान करती है कि इस विषय को भी हम केन्द्र सरकार को भेजेंगे, सरकार की इसमें सहमति है.

          श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे-- समय सीमा आ जाये.

          अध्यक्ष महोदय- हेमंत जी, बैठें ऐसा नहीं होता.

          प्रश्न यह है कि यह सदन केन्द्र शासन से अनुरोध करता है कि "कालापीपल रेल्वे स्टेशन को अमृत भारत योजना अंतर्गत जोड़कर रेल्वे स्टेशन का विकास एवं सौन्दर्यीकरण करते हुये प्लेटफार्म की ऊंचाई बढ़ाई जाये".

          दूसरा संकल्प है श्री हेमंत कटारे जी का कि सदन का यह मत है कि "ग्वालियर-भिण्ड-इटावा नेशनल हाईवे क्रमांक 719 को सिक्स लेन एवं हाईवे पर स्थित चंबल नदी के क्षतिग्रस्त पुल का मरम्मत कार्य पूर्ण कराकर आवागमन प्रारंभ किया जाये."  मैं समझता हूं कि दोनों पक्ष इससे सहमत हैं . इसलिये दोनों संकल्प सर्वसम्मति से स्वीकृत किये जाते हैं.

                                                                   संकल्प सर्वसम्मति से स्वीकृत.

 

 

4.11 बजे                            सत्र का समापन

 

 

 

 

 

कर्मियों के  साथ साथ मैं संसदीय कार्य मंत्री,  श्री कैलाश विजयवर्गीय  जी का भी हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि  उनके अपने दीर्घगामी  अनुभव  और संसदीय योग्यता  से सदन के  सुचारु संचालन  में  सहयोग प्राप्त हुआ है. मैं  सभी के प्रति  हृदय से आभार प्रकट करता हूं.

          मैं अपनी ओर से तथा पूरे सदन की ओर से  प्रदेशवासियों को होली,रंचपंचमी,गुड़ी गड़वा,चैती चांद, ईद-उल-फितर, राम नवमी तथा महावीर जयंती  की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं तथा उनकी  एवं प्रदेश की  समृद्धि और  खुशहाली की मंगल कामना  करता हूं.

            उप मुख्यमंत्री,वित्त (श्री जगदीश देवड़ा)अध्यक्ष महोदय,  म.प्र.  विधान की  सोलहवीं विधान सभा  के नवम् सत्र के समापन  अवसर पर  मैं इस गरिमामय  सदन को  संबोधित करते हुए  कहना चाहता हूं कि यह सत्र  अत्यन्त सार्थक, परिणामकारी एवं  जन भावनाओं के अनुरुप रहा है.   आपके मार्गदर्शन, आपके नेतृत्व.....

          श्री सोहनलाल  बाल्मीकअध्यक्ष महोदय,  सारे विषयों पर, जिनमें चर्चा  होनी थीं,   पूरी मांगों पर चर्चा नहीं हुई.  हम उस समय आपके बीच में नहीं बोल पाये थे.  मगर इस  तरीके  की परम्परा चलेगी, तो कैसे काम चलेगा.  इसमें सारी चर्चा होनी थी.  हम लोग तैयारी कर रहे थे, बात-चीत कर रहे थे.  यह चर्चा  तो  होनी थी. अध्यक्ष महोदय, आपके  बीच में हम लोग व्यवधान  नहीं डालना चाह  रहे थे.   

          अध्यक्ष महोदयसोहन जी, कृपया बैठ जायें.

..(व्यवधान)..

            श्री जगदीश देवड़ा--  अध्यक्ष महोदय, आपके नेतृत्व में सदन संचालन  में यह सदन  अपनी सर्वश्रेष्ठता के  स्तर पर पहुंचा है. सत्र का प्रारम्भ माननीय राज्यपाल  महोदय के अभिभाषण से हुआ.  इसमें प्रदेश सरकार की नीतियों,उपलब्धियों तथा आगामी  वर्ष की  विकास परख  प्राथमिकताओं  की रुपरेखा प्रस्तुत की गई.

..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदयइस अवसर पर यह नहीं होना चाहिये. यह गलत बात है

..(व्यवधान)..

श्री  जगदीश देवड़ाअध्यक्ष महोदय, अभिभाषण पर सदन के माननीय सदस्यों   ने गंभीरता  एवं व्यापक दृष्टिकोण के साथ चर्चा में भाग लिया  तथा महत्वपूर्ण सुझाव  दिये, जो शासन के लिये  मार्गदर्शक सिद्ध होंगे.

..(व्यवधान)..

श्री सोहनलाल बाल्मीक – (xxx)

श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे—(xxx)

श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव (xxx)

अध्यक्ष महोदययह नहीं लिखा जायेगा. देवड़ा जी, जो बोल रहे हैं, वही कार्यवाही का अंग   बनेगा.

..(व्यवधान)..

श्री जगदीश देवड़ाअध्यक्ष महोदय, सत्र के दौरान प्रश्नों, ध्यानाकर्षणों, शून्यकाल एवं विभिन्न चर्चाओं  के माध्यम  से   जन हित से जुड़े  अनेक विषय  प्रभावी रुप से उठाये गये. गौ संरक्षण, गौ शालाओं की  व्यवस्था, आवारा  श्वानों की समस्या, स्वास्थ्यशिक्षा, कृषि, पेयजल,   अधोसंरचना एवं  नगरीय  सेवाओं  जैसे मुद्दों पर सकारात्मक एवं रचनात्मक  चर्चा हुई.  सरकार ने सभी विषयों  पर  गंभीरता से विचार करते हुए  आवश्यक कार्यवाही  के प्रति अपनी  प्रतिबद्धता  व्यक्त की है. सदन द्वारा वर्ष 2026-27 के आय-व्‍ययक का पारित किया जाना तथा वर्ष 2025-26 की तृतीय अनुपूरक मांगों को स्‍वीकृति प्रदान किया जाना, प्रदेश के विकास और किसान कल्‍याण विभागों को सशक्तिकरण तथा समाज के अंतिम व्‍यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में महत्‍वपूर्ण कदम है. मैं पक्ष एवं प्रतिपक्ष क सभी माननीय सदस्‍यों का आभार व्‍यक्‍त करता हूं. जिन्‍होंने सक्रिय सहभागिता एवं रचनात्‍मक विचारों से इस सत्र को सफल बनाया. मतभेद लोकतंत्र का स्‍वाभाविक अंग है. परंतु प्रदेश हित हमारी सर्वोच्‍च प्राथमिकता है. मैं माननीय संसदीय कार्य मंत्री, माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी का आभार व्‍यक्त करता हूं, जिनके नेतृत्‍व में सदन में शांति से विस्‍तृत चर्चा सम्‍पन्‍न हुई. इस सत्र के सुचारू संचालन हेतु मैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय नेता प्रतिपक्ष, सभी माननीय मंत्रीगण, सभापति तालिका के सदस्‍यगण, समस्‍त माननीय सदस्‍य, प्रिंट एवं इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के प्रतिनिधिगण, विधान सभा के प्रमुख सचिव, विधान सचिवालय एवं शासन के अधिकारी/कर्मचारी और सुरक्षा कर्मियों के प्रति हृदय से आभार व्‍यक्‍त करता हूं. अंत मैं इस अवसर पर प्रदेश के समस्‍त प्रदेशवासियों को होली, रंगपंचमी, गुड़ी पड़वा, चांद ईद उल फितर, राम नवमी तथा महावीर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं. ईश्‍वर से प्रार्थना है कि यह पावन पर्व प्रदेश में सदभाव, समरस्‍ता, सुख समृद्धि और प्रगति का संदेश लेकर आये. इन्‍हीं शब्‍दों के साथ में इस सत्र के सफल समापन के लिये आप सभी का धन्‍यवाद करता हूं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

4.21 बजे

 

बहिर्गमन

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍य श्री हेमंत सत्‍यदेव कटारे, श्री सोहनलाल बाल्‍मीक एवं अन्‍य सदस्‍यों द्वारा विभागों की मांगों पर अपनी बात न रख पाने के कारण सदन से बहिर्गमन

          श्री हेमंत सत्‍यदेव कटारे- सरकार प्रतिपक्ष की बातों को नहीं सुनना चाहती है. इसलिये हम सदन से बहिर्गमन करने है.

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍य श्री हेमंत सत्‍यदेव कटारे, श्री सोहनलाल बाल्‍मीक एवं अन्‍य सदस्‍यों द्वारा विभागों की मांगों पर अपनी बात न रख पाने के कारण सदन से बहिर्गमन किया गया.)

          श्री आरिफ मसूद- इसमें रमजान को भी जोड़ लिया जाये.

          अध्‍यक्ष महोदय- मैंने बोला है. रमजान भी जोड़ा गया है.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले तो आपको धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि आपके कुशल नेतृत्‍व में, आपके अनुभव के कारण विधान सभा ने एक नई ऊंचाई प्राप्‍त की है. इसलिये चाहता हूं कि पूरा सदन माननीय अध्‍यक्ष जी का अभिनन्‍दन करे.( मेजों की थपथपाहट) अध्‍यक्ष महोदय यह हमारे लिये बहुत प्रसन्‍नता की बात है कि हमारा मध्‍यप्रदेश उन प्रदेशों में है, जिनकी विधान सभाओं की अपनी गरिमा है और हमारी विधान सभा की परम्‍परा हमेशा बहुत उच्‍चकोटि की रही है. जिसकी चर्चा सारे देश में की जाती है. हमारे यहां, पूर्व में जो बड़े-बड़े मंत्री रहे हैं, जिनका मैं हमेशा जिक्र करता हूं. वह चाहे इधर बैठने वाले हों या उधर बैठने वाले हों. सबने हमेशा अपनी-अपनी विचारधारा के अनुसार काम किया है, पर विधान सभा की गरिमा को ठेस लगे ऐसा कोई काम नहीं किया. अध्‍यक्ष महोदय हम उस परम्‍परा को निभाने का काम कर रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, यह पहले 320 माननीय सदस्‍यों की विधान सभा थी. मेरा सौभाग्‍य था कि मैं उसमें भी सदस्‍य था. आज 230 माननीय विधायकों की विधान सभा है. मुझे यहां पर भी रहने का सौभाग्‍य प्राप्‍त हुआ है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि हमने आपस में एक दूसरे के खिलाफ सड़क पर कितनी भी लड़ाई लड़ी, सदन में भी हमने एक दूसरे के खिलाफ वार्तालाप किया हो, बहस की हो. पर जब हम बाहर निकलते हैं तो एक दूसरे के प्रति जो सं‍बंध है, जो मित्रता है, इस पर मुझे गर्व है कि मैं मध्‍य प्रदेश की विधान सभा का सदस्‍य हूं. मैं सारे प्रदेश में दौरा करता हूं और मैंने देखा है कि इस दल के लोग, उस दल वालों के साथ बात भी नहीं करते हैं. अगर बात भी करते है तो आगे-पीछे देखते हैं कि कोई देख तो नहीं रहा है. वह मैंने देखा है, इतनी कटुता. पर यहां इतनी सहृदयता है. (श्री यादवेन्‍द्र सिंह जी द्वारा बैठे-बैठे कुछ कहने पर) जग्‍गू भाई के यहां पर जरूर एक बार हमने गोली चलते हुए देखी थी. (हंसी) आपने बोला इसलिये मैंने बोला. आप चुपचाप बैठे रहते तो मैं कुछ बोलता ही नहीं. हमने वहां जरूर देखा था.

          अध्‍यक्ष महोदय, हमारे यहां राजनीतिक सौहाद्रता की एक बहुत लम्‍बी श्रंखला चली आ रही है. हम सब उसी मार्ग पर चल रहे हैं. इस बात को मैं फिर दोहराऊंगा कि आपका कुशल नेतृत्‍व, कुशल अनुभव इस विधान सभा को और ऊंचाई देता जा रहा है. मैं माननीय सदस्‍यों से कहूंगा, जैसा आपने अपने भाषण में कहा कि लगभग 7000 से ज्‍यादा तारांकित और अतारांकित प्रश्‍न यहां पर पूछे गये हैं. एक प्रश्न को पूछने में दूर-सुदूर बैठा हुआ चपरासी से लेकर वहां का छोटे से लेकर बड़ा कर्मचारी तक और यहां के प्रमुख सचिव तक सब सक्रिय हो जाते हैं. आपका एक प्रश्न आता है और उस प्रश्न से पूरी सरकार की श्रृंखला नीचे से ऊपर तक हिल जाती है, मतलब आपके एक प्रश्न का कितना महत्व है. आप खुद सोचिए, विचार कीजिए और इसलिए हम सब अपने महत्व को समझें और मुझे लगता है कि आप सब लोग अपने महत्व को समझकर आपने जो सदन की गरिमा है उसको बनाने की, हमेशा कोशिश की है, इसलिए हमारे विपक्ष के साथियों को भी मैं  बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं . वे सब कर्मचारी, सुदूर में बैठे हुए चपरासी से लेकर सारी अधिकारी, मध्यप्रदेश सरकार के मुख्य सचिव से लेकर सभी प्रमुख सचिव तक, मध्यप्रदेश की विधान सभा के माननीय प्रमुख सचिव से लेकर सभी हमारे अधिकारी व कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी ये सब बधाई के पात्र हैं क्योंकि जब विधान सभा चलती है तो इन सबकी भूमिका बहुत अच्छी रहती है और मैं एक बात यह कहूंगा, मैं शुरू से इस बात को महसूस करता हूं कि जितना अच्छा आपका सचिवालय है, यदि उतना अच्छा सरकार का भी सचिवालय हो जाय तो पता नहीं यह प्रदेश किस ऊंचाई तक पहुंच जाय. (मेजों की थपथपाहट).. यह मैं इस बात को स्वीकार करता हूं कि विधान सभा का सचिवालय बहुत अच्छे तरीके से काम करता है.

          अध्यक्ष महोदय, मैं एक बार फिर से हमारे सभी साथियों को जिन्होंने बहुत ही सहजता से, सजगता से इस विधान सभा में न सिर्फ चर्चा की है. कई बार हास-परिहास कई नरम-गरम, कई बार उत्तेजना ये सारे क्षण आते हैं और यह आना भी चाहिए. इसी से विधान सभा लाइव रहती है. यदि एक जना कोई बोलेगा और दूसरा सोएगा तो फिर चलती नहीं है, इसलिए बहुत जरूरी है कि सदन में कौतूहल हो, सदन में उत्साह हो, सदन के अंदर कुछ गरम हो, सदन के अंदर कुछ नरम हो, सदन के अंदर कुछ उत्तेजना हो, यह बहुत ज्यादा जरूरी है सदन को लाइव रखने के लिए और मैं समझता हूं कि इसमें हमारी जो विधान सभा है वह आपके नेतृत्व में बहुत कुशलता से काम कर रही है.

          अध्यक्ष महोदय, मैं आपको फिर एक बार धन्यवाद दूंगा. विधान सभा के सभी सदस्यों को धन्यवाद दूंगा. नेता प्रतिपक्ष और उनकी पूरी टीम उनको बधाई दूंगा. हमारे पत्रकार बंधु, जो सजगता से सुबह से लेकर शाम तक यहां बैठकर हमारे द्वारा जो विधान सभा में विषय उठाए जाते हैं उनको बहुत सजगता के साथ जनता तक पहुंचाते हैं उन सब पत्रकार बंधुओं को भी धन्यवाद दूंगा और एक बार फिर से मध्यप्रदेश की जनता को होली, रंगपंचमी, गुड़ीपड़वा. चेतीचंड, ईद उल फितर, रामनवमी, महावीर जयंती और जितने भी त्योहार हैं उन सबकी बहुत बहुत बधाई देता हूं. एक बार फिर से आप सबका अभिनंदन और शुभकामनाएं. (मेजों की थपथपाहट)..इस मंच के माध्यम से कहना चाहता हूं कि हमारे यहां रंगपंचमी बहुत अच्छी मनती है. देश में ऐसी रंगपंचमी कहीं नहीं मनती है अध्यक्ष महोदय, आप सहित सब माननीय सदस्यों को मैं रंगपंचमी पर इन्दौर आमंत्रित करता हूं.

          डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह (अमरपाटन) - अध्यक्ष महोदय, बजट सत्र का आज अंतिम दिन है. हालांकि 5 और 6 तारीख के 2 दिन और निर्धारित थे, लेकिन आगे चूंकि होली, रंगपंचमी सारे त्योहार हैं तो कार्यमंत्रणा समिति से संभवतः चर्चा करके वह दिन कम हुए. लेकिन मैं आपसे आग्रह करना चाहूंगा जब भी अगला सत्र हो, आप योजना बनाए तो आपके माध्यम से सरकार से कहना चाहूंगा कि उस सत्र में ये दो दिन और जोड़ दें, उसकी भरपाई हो जाएगी और हमारे माननीय सदस्य जिनको कुछ कष्ट हुआ है, उसमें मरहम लगेगा. इस 10 दिन के सत्र में मुझे ऐसा आभास हुआ कि हमारे मध्यप्रदेश विधान सभा की जो गौरवमयी परम्परा रही है, वह दबे पांव धीरे-धीरे वापस आ रही है. श्री कैलाश जी ने कहा यहां गरमा-गरमी भी हुई, उत्तेजना के क्षण आए, हास-परिहास हुआ. यही तो विधानसभा है, यही संसद है और नीचे स्‍तर पर जैसे ग्राम पंचायत, ग्राम सभा सभी जगह यह होना चाहिए और अगर बिल्‍कुल शांति बनी रहेगी, तो फिर शांति तो श्‍मशान में होती है, कब्रिस्‍तान में होती है. यहां सार्थक बातें होनी चाहिए. हास-परिहास भी होना चाहिए. (मेजों की थपथपाहट) किसी के दिल को बिना ठेस पहुंचाए व्‍यंग्‍य भी होना चाहिए. यह सारी चीजें हैं, वह यहां पर होना चाहिए. मैंने देखा है पहले ऐसी चीजें होती थीं. इस सत्र में जैसा कि मैंने कहा कि शुरूआत हो गई है. उत्‍तेजना के एकाध-दो क्षण ऐसे आए, लेकिन जहां समस्‍या है, वहां समाधान भी है. उनका आपके कुशल नेतृत्‍व में समाधान खोजा गया. हम लोग भाग्‍यशाली हैं कि आप जैसा कद का व्‍यक्‍ति हमारा मुखिया है, मध्‍यप्रदेश विधानसभा का अध्‍यक्ष है. (मेजों की थपथपाहट) वैसे यह बहुत ऊंची कुर्सी है. यह बहुत बड़ा पद है. लेकिन कभी-कभी उस कुर्सी में बैठने वाला व्‍यक्‍ति बौना होता है. ऐसे क्षण होते हैं. ऐसा समयकाल मैंने देखा, लेकिन कोई ऐसा भी व्‍यक्‍ति होता है, जो कुर्सी पर बैठकर कुर्सी के महत्‍व को और बढ़ा दे. (मेजो की थपथपाहट) और उनमें से आप एक हैं. ऐसा मैं ही नहीं, बल्‍कि मैं समझता हॅूं कि इस तरफ के लोग भी (पक्ष) और हमारे साथी (विपक्ष) भी इस बात को मानते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को भी धन्‍यवाद दूंगा कि उन्‍होंने महत्‍वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रखी. चर्चा में कुछ भाग लिया लेकिन अगर वे और उपस्‍थित होते, तो हम लोगों को और आनंद आता. अब उस पद की कुछ मजबूरियां भी होती हैं, ऐसा मैं मानकर चलता हॅूं. मैं उनको धन्‍यवाद देता हूं. हमारे माननीय उपमुख्‍यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा जी, श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी, हमारे संसदीय कार्य मंत्री माननीय श्री कैलाश विजयवर्गीय जी, वे कल सदन में नहीं थे, तो यहां पर कार्यवाही कुछ नीरस थी. वे कल इंदौर चले गये थे. मंत्रिपरिषद् के माननीय सदस्‍यगण को, सत्‍ता पक्ष के माननीय विधायकगण को, प्रतिपक्ष के माननीय विधायकगण को, हमारे मुख्‍य सचेतक माननीय सोहनलाल बाल्‍मीक जी, जो हम लोगों को हमेशा दिशा देते रहते हैं, वह भी धन्‍यवाद के पात्र हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं विधानसभा सचिवालय के प्रमुख सचिव जी को भी धन्‍यवाद देता हॅूं. उनके जितने सहयोगी-साथी हैं, सचिवालय के जितने कर्मचारी, अधिकारी हैं, उनको भी मैं धन्‍यवाद देता हॅूं. मैं जानता हॅूं कि सतह के नीचे बहुत हलचल होती है और जब सत्र आता है तो रात-दिन बैठकर इन लोगों को काम करना पड़ता है. रात 12-12 बजे तक यह लोग बैठते हैं और जैसा कि माननीय कैलाश जी ने कहा हजारों-हजारों प्रश्‍न आते हैं, ध्‍यानाकर्षण आते हैं और नियमों के तहत सूचनाएं आती हैं, तो यह कैसे तैयारी करते हैं. बड़ा कठिन कार्य है लेकिन मैं उनको धन्‍यवाद दूंगा कि उन्‍होंने मेहनत करके सब कार्य संपादित किया.

          अध्‍यक्ष महोदय, यह बात जरूर कहूंगा और सरकार से अपेक्षा करूंगा कि जो हमारे प्रश्‍न लगते हैं, मैं कई सत्रों से देख रहा हॅूं कि कुछ प्रश्‍नों में यह लिखकर आता है कि जानकारी एकत्रित की जा रही है. यह परम्‍परा न रहे, सदन के माध्‍यम से ऐसा प्रयास किया जाए और दूसरा जिस तरह से सदन गंभीरता से लेता है, तो हमारी जो डेमोक्रेसी है, हमारे जो अधिकारी हैं, वे विधायकों और जनप्रतिनिधियों के पत्रों का जवाब दें. यह लोकतंत्र में सर्वोच्‍च संस्‍था है. यह व्‍यक्‍ति के प्रति सम्‍मान नहीं होता, बल्‍कि यह संस्‍था के प्रति सम्‍मान होता है, तो इसका सम्‍मान होना चाहिए. मैं मुख्‍य सचिव से लेकर, कलेक्‍टर से लेकर नीचे ग्राम स्‍तर तक राज्‍य शासन के जितने भी कर्मचारी, अधिकारी हैं, पटवारी स्‍तर तक के कर्मचारी, अधिकारी हैं, उन सबको धन्‍यवाद देता हॅूं.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया के कर्मियों को, जो निरंतर कवरेज करते हैं और हम लोग यहां जो चर्चा करते हैं. अगर उनका सहयोग और भागीदारी न हो तो प्रदेश की जनता को कैसे मालूम पड़ेगा कि क्या हो रहा है ? उनके हित में उनकी खुशहाली के लिये क्या निर्णय विधान सभा ले रही है, जो हमारा काम है यहां पर. वह भी धन्यवाद के पात्र हैं. जितने भी सुरक्षाकर्मी हैं हमारी विधान सभा के भी हैं और बाहर से भी पुलिसकर्मी बुलाये जाते हैं उनको भी बहुत मेहनत करनी पड़ती है, वह भी धन्यवाद के पात्र हैं. आने वाले जो त्यौहार हैं होली आयेगी, रंग पंचमी आयेगी माननीय कैलाश जी ने आमंत्रित तो किया है सबको लेकिन मीनू नहीं बताया है. मीनू भी बता देते कि क्या रहेगा ? होली है, रमजान है, आदि कई त्यौहार आने वाले हैं उन त्यौहारों के उपलक्ष्य में सबको बहुत बहुत बधाई देता हूं. दल की ओर से मुझे बोलने का अवसर मिला बहुत बहुत धन्यवाद.

 

4.36 बजे       

विधान सभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिये स्थगित की जानाः प्रस्ताव

 

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)अध्यक्ष महोदय, विधान सभा के वर्तमान सत्र के लिये निर्धारित समस्त वित्तीय एवं अन्य शासकीय कार्य पूर्ण हो चुके हैं. अतः मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम 12 (ख) के द्वितीय परन्तुक के अंतर्गत मैं प्रस्ताव करता हूं कि सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिये स्थगित की जाये.

          अध्यक्ष महोदयप्रस्ताव प्रस्तुत हुआ. प्रश्न यह है कि सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिये स्थगित की जाये.

 

                                                                                                            प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

 

 

 

 

4.37 बजे                          राष्ट्रगान जन-गण-मन का समूहगान

 

          अध्यक्ष महोदयअब राष्ट्रगान होगा.

 

          (सदन के माननीय सदस्यों द्वारा राष्ट्रगान जन-गण-मन का समूहगान किया गया)

 

 

4.38 बजे   

सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिये स्थगित किया जानाः घोषणा

 

          अध्यक्ष महोदयविधान सभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिये स्थगित.

          अपराह्न 4.38 बजे विधान सभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिये स्थगित की गई.

 

भोपालः                                                                       अरविन्द शर्मा,

दिनांक  27 फरवरी, 2026                                                    प्रमुख सचिव,

                                                                            मध्यप्रदेश विधान सभा