मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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षोडश विधान सभा                                                                                         नवम् सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2026 सत्र

 

गुरुवार, दिनांक 26 फरवरी, 2026

 

(7 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1947)

 

 

[ खण्ड-9 ]                                                                                                      [अंक- 9 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरुवार, दिनांक 26 फरवरी, 2026

 

(7 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1947)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11. 02 बजे समवेत् हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

11.02 बजे                          तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

स्टॉप डैम/तालाब का निर्माण

[जल संसाधन]

1. ( *क्र. 1940 ) श्री विवेक विक्की पटेल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र 112, वारासिवनी-खैरलांजी के अंतर्गत जल संसाधन विभाग अंतर्गत कितने स्टॉप डैम/तालाब निर्माण एवं जलाशय जीर्णोद्धार की स्वीकृति शासन स्तर पर विचाराधीन है? ऐसे कितने स्टॉप डैम/तालाब की साध्यता स्वीकृत है? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार जिन परियोजनाओं की साध्यता स्वीकृत हो चुकी है? उनकी प्रशासकीय स्वीकृति कब तक कर दी जावेगी? (ग) विकासखंड वारासिवनी अंतर्गत ग्राम रमरमा एवं ग्राम सिर्रा की सीमा पर बने चांपा जलाशय से 20-25 ग्रामों की कृषि भूमि की सिंचाई होती है? उक्त जलाशय का जीर्णोद्धार अति आवश्यक है? क्या इस हेतु कोई कार्ययोजना शासन स्तर पर प्रस्तावित है?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) 03 योजनाओं के सुधार/मरम्‍मत कार्य प्रस्‍ताव परीक्षणाधीन होना प्रतिवेदित है। शेष प्रश्‍नांश लागू नहीं। (ख) उत्‍तरांश '' के परिप्रेक्ष्‍य में शेष प्रश्‍न लागू नहीं। (ग) जी नहीं, अपितु 03 ग्रामों की कृषि भूमि में सिंचाई होती है। जलाशय की वर्तमान भौतिक स्थिति संतोषजनक होने के कारण जीर्णोद्धार की स्थिति नहीं है।

श्री विवेक विक्‍की पटेल  -- अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न क्रमांक 1940 है.

          श्री तुलसीराम सिलावट -- अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर प्रस्‍तुत है.

          श्री विवेक विक्‍की पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पूछा था कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में कितने स्‍टॉप डैम, कितने जलाशय, कितने तालाब विचाराधीन हैं, उसका जवाब आया है कि 3 हैं. मुझे इस बात की खुशी है कि माननीय मंत्री जी ने तीनों स्‍वीकृत कर दिए हैं. चूंकि सरकार इस साल कृषि कल्‍याण वर्ष मना रही है, जब तक किसान के खेत में पानी नहीं पहुंचेगा तब तक किसान का कल्‍याण नहीं होगा. इसके अलावा मेरे क्षेत्र में 3 स्‍टॉप डैम प्रस्‍तावित हैं जो मैंने मांग की है. एक गुनई से कुटिया, एक बकोरी से पिनकेपार और एक सांवरी से घोटी साथ ही आपके माध्‍यम से एक और निवेदन है और मैं चाहता हूं कि हमारे क्षेत्र में नहरों की लाइनिंग हो जाए.

          श्री तुलसीराम सिलावट -- अध्‍यक्ष महोदय, भारतीय जनता पार्टी की सरकार पक्ष, विपक्ष नहीं देखती है. सम्‍माननीय विक्‍की पटेल जी की जानकारी में मैं देना चाहूंगा कि सुधार एवं मरम्‍मत के कार्य हेतु ब‍ैकरा क्रमांक 1 जलाशय राशि 22 लाख, 62 हजार रुपये स्‍वीकृत की गई. चिखला क्रमांक 2 जलाशय राशि 9 लाख, 52 हजार की गई है. लालपुर तालाब राशि 11 लाख, 68 हजार रुपये स्‍वीकृत की गई है. जिस प्रकार से माननीय सदस्‍य ने पूछा है नवीन स्‍टॉप डैम, अभी उनके कोई भी तालाब की साध्‍यता हेतु विचाराधीन नहीं है.

          श्री विवेक विक्‍की पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद आपने जो मेरे क्षेत्र के 3 जलाशय स्‍वीकृत किए हैं. साथ ही मेरा आपसे निवेदन है चूंकि मैंने पहले भी कहा था कि माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं पहली बार का विधायक हूं और चूंकि हमारा क्षेत्र कृषि प्रधान क्षेत्र है और वहां पर धान की खेती होती है और धान में पानी बहुत लगता है, इसलिये यह जरूरी है कि मैंने अपने क्षेत्र की जो तीन अन्य मांग आपको बताई है मैं चाहता हूं कि गुनई से चुटिया, सांवरी से गोटी और बकोरी से पिंडकेपार इसके अलावा नहरों की लाईनिंग आप करवा देंगे तो मैं आपका आभारी रहूंगा. मंत्री जी यह तीनों मांगे मैं आपको लिखकर के भी दे दूंगा. समय की मांग है कि पानी का स्टोर बना रहे.

          अध्यक्ष महोदय- बैठिये तो.

          श्री तुलसीराम सिलावट-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जैसा कहा कि मैं कहना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री सम्मानीय मोहन यादव जी ने इस वर्ष को कृषि कल्याण वर्ष घोषित किया है.इनके संज्ञान के लिये बताना चाहता हूं कि आपकी विधानसभा में लगभग 2 बड़ी योजनायें एवं 29 लघु सिंचाई योजनायें कुल 31 परियोजना से लगभग 29 हजार हेक्टेयर में हम सिंचाई कर रहे हैं. इसके बाद भी माननीय सदस्य जो मांग रखी है मैं उसका परीक्षण करवाकर पूरी कोशिश करूंगा कि यह काम हो जाये.

          श्री मधु भाऊ भगत- माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत बहुत धन्यवाद आपने मुझे अवसर दिया. माननीय मंत्री जी मैं भी बालाघाट से आता हूं मेरी परसवाड़ा विधानसभा है . वहां पर विगत दो वर्षो से लंबित पड़ी हमारी दो योजनाओं की टेंडर की प्रक्रिया रूकी हुई पड़ी है, एक माइक्रो इरीगेशन बंगला पाठ जो परसवाड़ा मुख्यालय में जो 8 हजार एकड क्षेत्र में सिंचित के लिये रेडी पड़ी हुई है उसका आप टेंडर लगवायें, दूसरी परसवाड़ा क्षेत्र में बाईं तट पर बांध टूटने  से हमारा किसान इस पर निर्भर है रजेगांव तक 100 किलोमीटर की लाईन है उसका सीमेन्टीकरण करवायें, यह दो काम हैं अगर मंत्री जी इसके ऊपर टेंडर प्रक्रिया पूरी करवा दें तो बहुत मेहरबानी होगी.

          श्री तुलसीराम सिलावट- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो माननीय सदस्य ने कहा है सरकार इसको गंभीरता से लेगी और कोशिश करेगी कि परीक्षण करने के बाद अतिशीघ्र किया जाये.

          अध्यक्ष महोदय- सोहन लाल जी एक चीज का ध्यान रखें कि प्रश्न चल रहा है. प्रश्न के अंतर्गत अगर पूरक प्रश्न पूछेंगे तो ठीक है मतलब ऐसा नहीं है कि जल संसाधन चल रहा है तो अपन कोई भी चीज पूछें, ऐसा नहीं होना चाहिये.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जल संसाधन से ही संबंधित है. मेरे विधानसभा के बारे में जब मेरा प्रश्न लगा था तो उसमें दो तीन बाते थी जिसके कारण वह स्वीकृत नहीं हो पा रहे थे. मेरा मंत्री जी से आपके माध्यम से निवेदन है कि मंत्री जी समय दें तो मैं मिल लूंगा. तो करा देंगे . यह जो साढे तीन लाख रूपये प्रति हेक्टेयर जो जल संसाधन विभाग का एक मापदंड है प्राक्कलन बनाने का इसको अब बढ़ाना चाहिये क्योंकि बहुत पहले का यह प्राक्कलन है अब मंहगाई बढ़ गई है, कई चीज के रेट बढ़ गये हैं और कई योजनायें इससे प्रभावित हो जाती हैं जिसके कारण योजनायें निरस्त हो जाती हैं तो मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह निवेदन है कि इस राशि को बढ़ाया जाये ताकि योजनायें विफल न हो और उनको स्वीकृति प्रदान हो. जब स्कीम बनती है तब साढे तीन लाख रूपये प्रति हेक्टेयर पर जो कास्ट आती है उसको नहीं बढ़ाते हैं तो बहुत सारी योजनायें विफल हो जाती हैं जिसके चलते काम रूकते हैं, तो मंत्री जी से निवेदन है कि इस पर विचार करके यह राशि को बढ़ाने का काम करेंगे.

          श्री तुलसीराम सिलावट-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार इस पर गंभीरता से विचार करेगी.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक-- अध्यक्ष जी मैंने मंत्री जी से समय मांगा था, समय तो बता दें.

          श्री सुरेश राजे-- मुझे भी एक मिनिट का समय दे दिया जाये.

          श्री नारायण सिंह पट्टा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंडला जिले के विकासखंड घुघरी के अंदर एक छिपरी नाला है जिसकी साध्यता हो गई है, किसान की समस्या को ध्यान में रखते हुये उसका प्राक्कलन स्वीकृत हो गया है अब सिर्फ टेंडर लगना है . मंत्री जी अगर आदेश कर देंगे तो बहुत जल्दी उसकी प्रक्रिया हो जायेगी. अध्यक्ष महोदय, आपको बहुत धन्यवाद.

          श्री तुलसीराम सिलावट-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सम्माननीय सदस्य ने गंभीर प्रश्न उठाया है . मैं उस पर विचार करके अधिकारियों को निर्देशित करूंगा कि जल्दी किया जाये.

          श्री सुरेश राजे- अध्यक्ष जी आधा सेकेंड में अपनी बात कह दूंगा.

          अध्यक्ष महोदय- अब नहीं श्रीमान उमंग सिंघार.

          श्री सुरेश राजे -- अध्यक्ष महोदय , मेरा निवेदन यह था कि..

          अध्यक्ष महोदय- सुरेश राजे जी, प्लीज. मैंने नेता प्रतिपक्ष का नाम पुकार लिया है तो उसके बाद मर्यादा का पालन करना चाहिये.

 

धिरौली कोयला ब्‍लॉक में अनि‍यमितता

[राजस्व]

2. ( *क्र. 2873 ) श्री उमंग सिंघार : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                   (क) जिला सिंगरौली के अंतर्गत धिरौली कोयला परियोजना के लिये कुल 2672 हेक्टेयर भूमि के अधिग्रहण हेतु मध्यप्रदेश सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के अंतर्गत कितनी भूमि के लिये अधिसूचना जारी की गई थी? साथ ही सोशल इम्पेक्ट असेसमेंट रिपोर्ट कब तैयार की गई? (ख) प्रश्‍नांश (क) के प्रकाश में कितनी भूमि का अधिग्रहण निजी तथा सरकारी भूमि का किया गया? इसके नोटिफिकेशन कब-कब जारी किये गये? इस आधार पर कितनी मुआवजा राशि दी गई है? (ग) क्या सरकारी भूमि का मुआवजा प्राप्त हो गया है, तो कितना एवं कब? (घ) क्या धिरौली कोयला प्रक्षेत्र संविधान की छठवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है या नहीं? यदि नहीं, तो किस आधार पर अधिग्रहण की कार्यवाही की गई?

        राजस्व मंत्री ( श्री करण सिंह वर्मा ) :-

 (ग) शासकीय भूमियों का भू-भाटक, प्रीमियम राशि जमा कराया जाता है एवं उस प‍र स्थित परिसम्‍पत्तियों का मुआवजा दिया जाता है। उत्‍तरांश '' के उत्‍तर अनुसार कार्यवाही प्रचलन में है। (घ) जी नहीं। भूमि के अधिग्रहण की कार्यवाही भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्‍यवस्‍थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के प्रावधानों के तहत की गई है।

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्यक्ष महोदय मेरा प्रश्न क्रमांक 2873 है.

          श्री करण सिंह वर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, महत्वपूर्ण सवाल इस सरकार के लिये है. अध्यक्ष महोदय, सरकार जनहित में कार्य करना चाहती है , आदिवासियों के हित में काम करना चाहती है या नहीं यह इस सवाल के जवाब से मैं समझना चाहूंगा .

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न बदल दिया गया, उत्तर बदल दिया गया. कल सरकार को लगा कि 500 करोड़ देना है और आज संशोधित उत्तर के माध्यम से 368 करोड़ हो गया. लगभग 150 करोड़ रूपये की राशि रातभर के अंदर कैसे बदल दी गई. क्या सरकार को यह ज्ञात नहीं था कि कितने पैसे देना है. मेरे प्रश्न के जवाब में आपने कहा है. मैं  मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि कितने गांव  थे  विस्थापन के और कितने गांव का आपने  विस्थापन किया.

          श्री करण सिंह वर्माअध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.

          अध्यक्ष महोदयनहीं, उन्होंने पूरक प्रश्न कर लिया है.   वह यह कह रहे हैं कि  कितने गांव  थे और कितने गांव का विस्थापन  किया है.

          श्री करण सिंह वर्माअध्यक्ष महोदय, निजी भूमि   554.01 हेक्टेयर है.   शासकीय  गैर  वन भूमि  681.80 हेक्टेयर है.   वन  भूमि संरक्षित  वन   1335.35 हेक्टेयर है.  राजस्व वन भूमि  100.84  हेक्टेयर है और राजस्व  भूमि में कोई माइनिंग नहीं हुई है.

          श्री उमंग सिंघार अध्यक्ष महोदय, मेरा सवाल था कि  कितने गांव थे,  कितनों का विस्थापन हो गया और कितनों का नहीं हुआ.  वह मैं गांव के नाम पूछ रहा हूं.

          श्री करण सिंह वर्माअध्यक्ष महोदय, मैं नेता प्रतिपक्ष को बताना चाहूंगा कि  धारा 11 के तहत 208.12  हेक्टेयर  भूमि संबंधी अधिसूचना  दिनांक 15.2.2022 को जारी की गई.   अध्यक्ष महोदय, यह 8 गांव  हैं.   8 गांव में से 5 गांव  की जमीन  का अधिग्रहण किया गया है और लगभग  प्लाट के बदले   निर्धारित हमने जमीन   25 लाख रुपये  (प्रतिपक्ष के सदस्यों की  तरफ से  गांव के नाम बताने की आवाज आने पर)  बता रहा हूं न कि  5 गांव की जमीन अधिग्रहित  की गई है.

          अध्यक्ष महोदयउमंग जी, यह संशोधित उत्तर  आपके पास है.

          श्री उमंग सिंघार अध्यक्ष महोदय, हां.  सरकार ने यह जो सिंगौरली का  जो धिरौली ब्लाक  है, उसमें  8 गांव आते हैं.  आमदंड,अमराईखोह,बासीबेड़दा,बेलवार, सिरसावा, झालारी,धिरौली  और फाटापानी. तो पांच गांव  में आपने किया है.  तो मतलब सरकार यह मानती है कि  हमने  3 गांव में अभी  नहीं किया.

          श्री करण सिंह वर्माअध्यक्ष महोदय, अभी 5 ही गांव की जमीन का अधिग्रहण किया है,  बाकी जमीन का अधिग्रहण नहीं किया है.

          श्री उमंग सिंघार अध्यक्ष महोदय, अब सवाल यह उठता है कि  जब  3 गांव  का अधिग्रहण  नहीं हुआ, तो फिर  अडानी   की कम्पनी को कोल ब्लॉक  कैसे दे दिया.  क्या सरकार बगैर अधिग्रहण   की पूरी कार्यवाही किये बगैर  पूरे गांव की जमीन क्या  दे सकती है, यह बता दें.

          श्री करण सिंह वर्माअध्यक्ष महोदय, प्रश्न के उत्तर में  ही स्पष्ट है कि  जैसे जैसे  हम और  भी सारा मामला हमने   पूरे  विस्थापित  लोगों का बना लिया है और 3 अरब  68 करोड़ रुपये   उन  लोगों के लिये अवार्ड की राशि है,  हम विस्थापितों  को  बसायेंगे.  उनके लिये जमीन  भी हमने अलाट कर दी है.  3 करोड़ कम्पनी देगी और  माननीय नेता प्रतिपक्ष जी पूछ रहे हैं, तो एक आदिवासी को  कम से कम 50 लाख के आस पास पैसा मिलेगा.  उनकी सारी चीजों का हमने  ध्यान रखा है.  विस्थापितों का ध्यान रखा है.  इनकी आवश्यकता नहीं थी नेता प्रतिपक्ष जी,  इसलिये अभी उनको अधिग्रहण  नहीं किया है.

          श्री उमंग सिंघार अध्यक्ष महोदय, शायद मंत्री जी को  पता  नहीं  है कि वहां पर क्या स्थिति है. उन तीनों  गांव  के लोगों को भी बाहर निकाला जा रहा है.  एक और सवाल  है,   जो आपने नीति का कहा कि  आपने 50 लाख रुपये  आदिवासियों को  देने की बात  की है.   आपकी जानकारी के लिये  बताना चाहता हूं कि  दो-ढाई लाख से  ज्यादा  वहां किसी आदिवासी परिवार को  नहीं दिये जा रहे हैं.  एक चीज आपकी परिवहन नीति और पुनर्वास नीति में यह था 60 हजार रूपये प्रति व्‍यक्ति परिवहन के दिये जायेंगे, 90 हजार रूपये 300 दिवस के दिये जायेंगे. हमारे हिसाब से ऐसे 12998 परिवार हो रहे हैं, जैसा मैंने वहां के कलेक्‍टर से डेटा लिया था.

          अध्‍यक्ष महोदय, 368 करोड़ रूपये के लगभग की राशि, यदि इसको 12000 परिवारों में डिवाइड करें तो दो लाख रूपये होती है तो 50 लाख रूपये आदिवासियों को कैसे मिल गये. इसको आप स्‍पष्‍ट करें.

          दूसरा, जिन गांवों में अधिग्रहण हो गया तो उन गांव के लोगों को नहीं मिला तो क्‍या आप पूरी सूची आप पटल पर रखेंगे कि किसको मिला, किसको नहीं मिला. तीसरा, यह महत्‍वपूर्ण बात है कि क्‍या बाहर के लोगों को विस्‍थापन नीति के अन्‍दर फायदा मिल रहा है, स्‍थानीय लोगों को फायदा नहीं मिलेगा, यह बतायें. क्‍या आपने बाहर के लोगों को दिया, यह बता दो.

          श्री करण सिंह वर्मा- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले भी बताया है कि 203.882 हेक्‍टेयर निजी भूमि है उसमें हमने दो गुना मुआवजा किसानों को दिया है. जिनके मकान बने हैं तो हमने मकान का भी अधिक पैसा दिया है और जो बाहर से आये हुए ऐसे लोग हैं, जो अतिक्रमणकारी हैं उनको इसमें पैसा नहीं दिया गया है. 1552 लोगों को हमने आवंटित कर दिया है.

          श्री उमंग सिंघार- 1500 आप खुद मान रहे हो. परंतु वहां पर 12000 परिवार हैं, तो फिर आपने कैसे (XX) को खदान चलाने की अनुमति दे दी. यह सीधा-सीधा सवाल बनता है कि कैसे अनुमति मिल गयी. सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह है कि मैंने पूछा है कि क्‍या यह जो विस्‍थापित हो रहे हैं, जिनको मुआवजा दिया गया है या देने वाले हैं, उनकी सूची उपलब्‍ध करायेंगे, इसके बारे में भी बतायें और सूची के अंदर बाहर के लोग हैं. नाम तो मैं बता दूंगा लेकिन माननीय मंत्री जी वह नाम बतायें.

          श्री करण सिंह वर्मा- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कुल 126 विस्‍थापित परिवारों को जटाठोला में प्‍लाट आवंटित किया गया है. 40 विस्‍थापितों को रोजगार दिया जा चुका है और 10 को डायून ट्रेनिंग हेतु रायपुर भेजा गया है. शेष रोजगार हेतु कार्यवाही विचाराधीन है. प्रभावित परिवारों में केवल 1552 लोग थोड़े से सर्वे के बाहर गये हैं. सूची कलेक्‍टर कार्यालय में उपलब्‍ध है.

          श्री उमंग सिंघार- माननीय मंत्री जी, आप उपलब्‍ध करायेंगे ?

          श्री करण सिंह वर्मा- हां. पटल पर रख दूंगा.

          श्री उमंग सिंघार-अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने कहा कि इसमें बाहर के लोग नहीं हैं. इन्‍हीं की सूची में जितेन्‍द्र भदौरिया, सरइ थाने में पिछले दो साल से थाना प्रभारी हैं, इसकी पत्‍नी है प्रियंका सिंह, जिसके खाते में 15 लाख 94 हजार 989 रूपये हैं, यह सूची के क्रमांक का 66 वां नंबर है, यह सूची है, क्‍यों दिया जा रहा है, ताकि वहां पर (XX) को संरक्षण दे इसलिये वहां पर इस जितेन्‍द्र भदौरिया, टीआई की पत्‍नी को दिया गया है, रिश्‍वत. मैं जवाबदारी के साथ कह रहा हूं, यह मेरे पास सूची है. दीपेन्‍द्र सिंह कुशवाह, यातायात प्रभारी हैं, जो (XX) के ट्रकों को आने-जाने में मदद करते हैं, उसकी पत्‍नी का 67 नंबर पर नाम है स्‍वाति सिंह, इनको 14 लाख 83 हजार 442 रूपये हैं,उसके खाते में है. यह कहां के रहने वाले हैं, यह भिण्‍ड के रहने वाले हैं. क्‍या यह आदिवासी हैं. क्‍या वहां के स्‍थानीय निवासी हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वहां पर बाहर के लोगों ने आकर घर बनाये और उनको मुआवजा मिल गया. वहां के आदिवासी, वहां के स्‍थानीय लोगों को मुआवजा नहीं मिला. आपने कहा कि ऐसे कई लोग हैं, जिनके उस खाते में अभी भी पैसे नहीं पहुंचे हैं. उनके नाम भी आपको बताना चाह रहा हूं और बेचारों को बाहर निकाला जा रहा है. उनको कहा जा रहा है कि आप अपना घर खुद अपने हाथों से तोड़ लो. फिर हम आपको देंगे. यह सरकार की नीति है. अमरइखोह के कमलेश कुमार शाह, राम कुमार शाह, सुनीला देवी, राम कुमार शाह, राजेश कुमार, अनिल कुमार, धीरेन्‍द्र शाह, रमेश, बृजेन्‍द्र, छोटेलाल, बाबूलाल खैरवा, बृजमोहन, बाबूलाल, संजय, प्रदीप शाह, सुनील ऐसे ही बेलवाड़ गांव के हैं मुकेश कुमार शाह, मिथिला, विनोद, अमित इतने सारे लोग हैं. कितने सारे लोग हैं जिनको आज भी मुआवजा नहीं मिला, उनको वहां से निकाला जा रहा है और बाहर के लोगों को आप मुआवजा दे रहे हैं. प्रभावित लोग कहां हैं और आपके पास इतना पैसा कहां है? आपके 350 करोड़ रुपये के हिसाब से सिर्फ  2 से 3 लाख रुपये होता है. मंत्री कह रहे हैं, सरकार कह रही है कि 50 लाख रुपये हम हर परिवार को दे रहे हैं, असत्य कथन, क्या इतना फायदा हम उस कंपनी (XX) को पहुंचाना चाहते हैं? अध्यक्ष महोदय, इस पर स्पष्ट होना चाहिए, इस पर सरकार की तरफ से इस पर जांच कमेटी होना चाहिए, विधान सभा की कमेटी बनना चाहिए, इस पर निष्पक्ष जांच होना चाहिए, यह मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं. क्या इस पर सरकार जांच कराएगी?

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) - अध्यक्ष महोदय, दो बार माननीय नेता प्रतिपक्ष ने उन्हीं बातों का, नाम को रिपीट किया है. पटल पर सूची रखने में सरकार कोई आपत्ति नहीं है. यह जांच का विषय हो सकता है कि कोई नान आदिवासी है उसकी भूमि या भवन वहां था या नहीं, इस आधार पर तो बात हो सकती है, लेकिन अगर बाकी लोगों को अगर नहीं मिला है तो मैं मानता हूं कि उस पर जरूर जांच की जाएगी, उसमें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सरकार की नीति पर सवाल उठाना मुझे लगता है कि ठीक नहीं है और इसलिए आपने जो नाम लिये हैं वह तो पटल पर आ गये, आपने सूची में नाम रखे हैं. आप भी अपनी सूची रख दीजिए, विभाग उस बात की जानकारी लेकर बिल्कुल सदन में रखेगा, यह हम सरकार की तरफ से कहना चाहते हैं.

श्री उमंग सिंघार - अध्यक्ष महोदय, क्या इस पर विधान सभा की कमेटी जांच करेगी, मैं यह समझता हूं कि यह उस क्षेत्र के आदिवासियों का वहां के लोगों का नुकसान हो रहा है, उनको मुआवजा नहीं मिल रहा है, मंत्री जी कह रहे हैं कि वहां पर 50 लाख रुपये दिये, वहां पर 2 लाख रुपये ही नहीं मिल रहे हैं.

श्री प्रहलाद सिंह पटेल - अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि सरकार का काम है कि जो आपने पक्ष रखा है उसकी जांच करा लें. विधान सभा कमेटी बनेगी, नहीं बनेगी, यह चेयर को करना है. जो बात आप ध्यान में लाए हैं. वह पटल पर आई है. आपने जो दो बातें कहीं हैं, हम पटल पर सूची रखेंगे और जो सूची आपने बताई है, उसकी बराबर जांच कराकर हम उसको सदन में रखेंगे.

श्री उमंग सिंघार - अध्यक्ष महोदय, मैंने इसीलिए अनुरोध किया है, मैं अनुरोध तो कर सकता हूं?

अध्यक्ष महोदय - माननीय श्री करण सिंह जी कुछ कह रहे हैं.

श्री करण सिंह वर्मा - अध्यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष जी ने जो पूछा है उसका उत्तर मैं दे रहा हूं. भू राजस्व में उक्त परियोजना हेतु निजी भूमि अधिग्रहण की गई उसमें 1552 किसान प्रभावित हुए हैं. भू अर्जन में 368 करोड़ 11 लाख 12 हजार 118 रुपये की राशि का अवार्ड हुआ है. इसमें से राशि रुपये 144 करोड़ 68 लाख रुपये का वितरण किया जा चुका है. शेष राशि 223 करोड़ 82 लाख रुपये के वितरण की कार्यवाही चल रही है. जब तक कार्यवाही चल रही है, इनको 12 परसेंट ब्याज के रूप में भी हम देते हैं. आपने जो विस्थापित परिवारों का पूछा है. 159 हेक्टेयर जमीन कंपनी को आवंटित की गई है. आपने कहा कि 2 लाख रुपये मिल रहे हैं. प्लाट के बदले निर्धारित राशि 2 लाख 50 हजार रुपये हम दे रहे हैं, मकान के बदले निर्धारित राशि 6 लाख रुपये, नौकरी के बदले एकमुश्त निर्धारित राशि 6 लाख रुपये, पुनर्वास अनुमान राशि 75 हजार रुपये, मकान निर्माण हेतु 3 लाख रुपये का भुगतान, 111 विस्थापितों को किया जा चुका है और आपने कहा है कि अमुक व्यक्ति का नाम है या कोई भी हो सकता है उनका मकान जैसा हमारे पटेल साहब ने कहा है उसकी जांच करा लेंगे.

श्री उमंग सिंघार - अध्यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि महत्वपूर्ण सवाल है, पूरे आदिवासियों का सवाल है, आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि  क्या सरकार विधान सभा की कमेटी बनाकर अध्यक्ष जी, जांच कराएंगे, मैं यह चाहता हूं और अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, फिर आपने कैसे खदान चालू कर दी? इस पर मंत्री जी ने कुछ बोला ही नहीं. जवाब ही नहीं दिया. जब 8 गांवों का अधिग्रहण नहीं हुआ, 5 गांवों का अधिग्रहण किया है और राशि पहुंची नहीं है, लोगों के खाते में राशि नहीं गई और आपने खदान चालू करवा दी? क्या सरकार इस पर कार्यवाही करेगी?

श्री प्रहलाद सिंह पटेल - अध्यक्ष महोदय, मैं कोयला राज्यमंत्री रहा हूं. माइनिंग में जब हम अधिग्रहण करते हैं जिस हिस्से का अधिग्रहण करते हैं वहीं माइनिंग होती है, जहां पर अधिग्रहण नहीं हुआ है, अगर वहां पर माइनिंग हो रही है तब वह इल्-लीगल होता है. आपने कहा कि 8 गांव, 8 गांव में से 5 गांव का अधिग्रहण हो गया.

(व्यवधान)..

श्री उमंग सिंघार - अध्यक्ष महोदय, मैं बताना चाहता हूं कि जिन गांवों के अंदर माइनिंग हो रही है, वहीं पर पैसे नहीं मिले हैं.

श्री प्रहलाद सिंह पटेल - अध्यक्ष महोदय, इस पर जांच हो सकती है.

श्री उमंग सिंघार - अध्यक्ष महोदय, आदिवासी दर दर की ठोकर खा रहे हैं, कलेक्टर के अंदर उनसे 1-1 लाख रुपये मांगे जा रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय - एक मिनट माननीय नेता प्रतिपक्ष जी, मैं समझता हूं कि नेता प्रतिपक्ष ने कुछ विषय उठाए हैं, मंत्री जी ने जवाब भी दिया है. किसी भी प्रकार का भूमि अधिग्रहण जब सरकार करती है तो उसके निश्‍चित मानदण्‍ड हैं और उन मानदण्‍डों को पूरा करना ही होता है. पात्र व्‍यक्‍ति को उसका मुआवजा मिले, यह सरकार की निश्‍चित रूप से जिम्‍मेदारी है. जैसा कि माननीय मंत्री जी ने कहा कि 8 गांवों की भूमि अधिग्रहित की जानी थी, जिसमें से 5 की भूमि अधिग्रहित की है शेष में अभी आवश्‍यकता नहीं थी. अब विषय इतना है कि कुल मिलाकर के जो भूमि अधिग्रहित नहीं हुई, उस पर भी क्‍या माइनिंग हो रही है, इतना ही विषय है और दूसरा जो पात्र व्‍यक्‍ति है उनको मुआवजा मिलने में विलंब हो रहा है, तो उसके क्‍या कारण हैं और उनको शीघ्र मुआवजा मिल जाए. अगर हमारी सरकार की मुआवजा नीति में किसी भी प्रकार का पालन नहीं हो रहा है या कहीं उल्‍लंघन हो रहा है, या गलत हितग्राही को मुआवजा दिया गया है तो निश्‍चित रूप से मंत्री जी ने कहा है कि वे जांच करा लेंगे और नेता प्रतिपक्ष जी को अवगत करा देंगे.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खदान का काम रोकना चाहिए. यह 12 हजार आदिवासी परिवारों की बात है. इसका काम रूकना चाहिए. बगैर विस्‍थापन के, बगैर मुआवजा के, खदान कैसे चालू हो गई. 50 लाख रूपए मिले हैं ऐसा माननीय मंत्री जी कह रहे हैं. खदान का काम रूकना चाहिए. अवैध रूप से यह पूरी खदान चल रही है. सिंगरौली की खदान अवैध रूप से चल रही है. अध्‍यक्ष महोदय, इसमें सरकार को आपकी तरफ से निर्देश होना चाहिए ....(व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्‍लीज, आप सभी बैठिए. माननीय नेता प्रतिपक्ष जी से अनुरोध है कि मैंने व्‍यवस्‍था दे दी है. आपने जांच की मांग की थी, माननीय मंत्री जी ने जांच की बात मान ली है और मुझे लगता है कि यह विषय यहां समाप्‍त होना चाहिए और मैंने पर्याप्‍त समय इस प्रश्‍न पर चर्चा के लिए दिया है. अब कार्यवाही आगे बढ़ गई है. प्रश्‍न संख्‍या 3.....कृपया, डॉ.सीतासरन शर्मा जी को अपना प्रश्‍न करने दें. ..(व्‍यवधान)..

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खदान का काम रूकना चाहिए, जब तक विस्‍थापितों को मुआवजा न मिल जाए. जब तक पूरे आदिवासियों को पैसे न मिल जाएं. सरकार 50 लाख रूपए की बात कर रही है, 50 लाख रूपए मिल नहीं रहे हैं. सरकार 2 लाख रूपए से ज्‍यादा नहीं दे पा रही है.....(व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- मेरा माननीय नेता प्रतिपक्ष जी से अनुरोध है कि इस विषय पर चर्चा के लिए पर्याप्‍त समय दिया गया है. आप के दो प्रश्‍नों के उत्‍तर आगे प्रस्‍तुत किए गए हैं......(व्‍यवधान)...

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खदान का काम रूकना चाहिए...(व्‍यवधान)...

          श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार के दबाव में....(व्‍यवधान)...

(प्रतिपक्ष के सदस्‍यगण द्वारा नारेबाजी की जाती रही.)

....(व्‍यवधान)....

          अध्‍यक्ष महोदय -- मैंने जांच के लिये कहा है कि पात्र हितग्राही को उसका मुआवजा मिले.....(व्‍यवधान)....

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या वहां पर खदान चलती रहेगी. लोगों को मुआवजा नहीं मिल रहा है. सरकार विस्‍थापन नहीं कर पा रही है. सरकार हिस्‍सा नहीं दे पा रही है...(व्‍यवधान)..उस कंपनी से पैसा नहीं ले पा रही है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खदान का काम रूकना चाहिए. सरकार को आश्‍वासन देना चाहिए कि वहां पर तत्‍काल खदान का काम रूके....(व्‍यवधान)...

           अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया, प्रश्‍न काल को आगे बढ़ने दें. प्‍लीज. आप सभी अपने स्‍थान पर बैठ जाएं....(व्‍यवधान)..

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसके लिए कमेटी बना दीजिए. ज्‍वाइंट पॉर्लियामेंट्री कमेटी बना दीजिए, हम संतुष्‍ट हैं. सदन (XX) के हिसाब से नहीं चलेगा....(व्‍यवधान)...

          श्री उमंग सिंघार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधानसभा की ज्‍वाइंट कमेटी बना दीजिए. सरकार तो कुछ करेगी नहीं....(व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- मैं नेता प्रतिपक्ष जी से अनुरोध करना चाहता हॅूं कि कृपया, आप सब बैठ जाइए...(व्‍यवधान)...हम सब की जनहित की भावना रही है. आगे के प्रश्‍न भी जनहित के हैं....(व्‍यवधान)...

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह भी जनहित का मामला है. यह भी सिंगरौली क्षेत्र का जनहित का मामला है. आदिवासियों का मामला है...(व्‍यवधान)...अगर यह खदान 2 महीने के लिए बंद हो जाएगी और उनको पैसा मिल जाएगा, तो उसके बाद चालू करें. इतना प्रेम क्‍यों है आपको (XX) सरकार को.....(व्‍यवधान)...

.....(व्‍यवधान)...

 

 

 

 

 

11.29 बजे                               गर्भगृह में प्रवेश

(श्री उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्‍व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा प्रश्‍न संख्‍या 2 पर शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर गर्भगृह में प्रवेश एवं नारेबाजी की गई.)

 

------(व्‍यवधान)-------

 

        अध्‍यक्ष महोदय -- देखिए, अभी प्रश्‍नों की सूची में 2 ही प्रश्‍न हुए हैं. 23 प्रश्‍न चर्चा के लिए हैं और उन सबमें जनकल्‍याण के विषय हैं. आगे के प्रश्‍नों पर चर्चा होगी. कृपया, इसलिए मेरा नेता प्रतिपक्ष और सभी सदस्‍यों से अनुरोध है कि सभी अपने स्‍थान पर जाएं....(व्‍यवधान)....

            (इंडियन नेशनल कांग्रेस के अनेक सदस्यगण द्वारा गर्भगृह में लगातार नारेबाजी की जाती रही)

(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदयमेरा सभी सदस्यों से अनुरोध है कि वह अपनी अपनी सीटों पर जायें. (व्यवधान) मेरा नेता प्रतिपक्ष से अनुरोध है कि इस प्रश्न पर चर्चा पर्याप्त हुई है. मैंने इसमें चर्चा के लिये पर्याप्त समय दिया है. (व्यवधान) मंत्री जी ने इसमें उत्तर भी दिया है. मुझे लगता है कि इसमें कोई विषय बचा नहीं है. (व्यवधान)

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें असत्य जवाब दे रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदयजांच कराने के लिये कह दिया है.

          श्री उमंग सिंघारजब तक आदिवासियों को मुआवजा नहीं मिल जाता है तब तक कैसे खदान चालू कर दी. (व्यवधान)

          श्री करणसिंह वर्माअध्यक्ष महोदय, जहां पर अधिग्रहण नहीं हुआ है वहां पर कोई खदान नहीं चल रही है ? (व्यवधान)

          श्री उमंग सिंघारअध्यक्ष महोदय, जहां पर अधिग्रहण हुआ है वहां पर आदिवासी भाइयों को पैसे नहीं मिले हैं. आपने खुद ने कहा है कि इसमें 50 लाख रूपये मिलना चाहिये. (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदयमंत्री जी कह रहे हैं कि वहां पर माईनिंग नहीं हो रही है. (व्यवधान)

          श्री उमंग सिंघारवहां पर माईनिंग हो रही है. (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदयसदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिये स्थगित की जाती है.

                    (11.31 बजे सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिये स्थगित की गई)

                                                                                               

11.45 बजे                             विधान सभा पुनः समवेत हुई.     

                            {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए}

अध्‍यक्ष महोदय सभी सदस्‍यों से अनुरोध है, कृपया अपने स्‍थान पर जाए. प्रश्‍नकाल को आगे बढ़ने दें.

श्री भंवर सिंह शेखावत अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवदेन है कि सभी सदस्‍य आपकी आज्ञा का पालन करने को तैयार है. ये बड़ा गंभीर मामला है. आपके आदेश के बाहर तो कोई भी नहीं है, आप कहेंगे तो हम बैठ भी जाएंगे, उठ भी जाएंगे. मेरा निवेदन इतना है कि गंभीर मामला है, प्रदेश की पूरी आदिवासी जनता को प्रभावित करने वाला मामला है. माननीय सदस्‍य ने जो मुद्दा उठाया है, इसमें माननीय करण सिंह जी जो हमारे आदरणीय मंत्री है, उनका कहना है कि खदानें चल नहीं रही है और पूरा प्रदेश कह रहा है कि खदानें चल रही है, बात इतनी सी है. मैं आपसे एक निवेदन करता हूं कि इसमें सभी लोगों की सहमति है, आदरणीय प्रहलाद जी सीनियर है और केन्‍द्र में खदान के मंत्री भी रहे हैं, सभी के चहेते भी है और इन पर सभी भरोसा भी करते हैं. आपके नेतृत्‍व में दोनों पार्टी की (जेपीसी) ज्‍वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी जिसको कहते हैं, वह बना दीजिए, कुछ इधर के वरिष्‍ठ सदस्‍य और कुछ वहां के सदस्‍य रहे, प्रहलाद जी उसका नेतृत्‍व करें और वहां देखकर आ जाए, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. मेरा निवेदन है कि इस मामले को क्‍यों उलझाया जा रहा है, ये प्रदेश की जनता से संबंधित मामला है.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री प्रहलाद सिंह पटेल) अध्‍यक्ष जी, मेरा सदन से, नेता प्रतिपक्ष से, निवेदन है कि हमारी प्रभारी मंत्री को एक बार सुन लेना चाहिए, मुझे लगता है कि ये भ्रम क्‍यों फैल रहा है. सरकार तो इस बात के लिए तैयार है, लेकिन मुझे लगता है कि इसमें एक बार प्रभारी मंत्री की बात सुन लेना चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय सभी अपने अपने स्‍थान पर बैठ जाए. (..व्‍यवधान)

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री (श्रीमती संपतिया उइके) अध्‍यक्ष जी, मैं वहां की प्रभारी मंत्री हूं, एक सेवक हूं. अभी कुछ दिन पहले मैं वहां गई थी, जब हमारे विपक्ष के नेता गए थे, उसके बाद भी गई और अभी कुछ दिन पहले भी गई थी वहां पर, बात सही है कि 33 हजार के लगभग पेड़ कटे हैं, ऑन रिकार्ड मैं बता रही हूं तो जितने हमारे 8 गांव को लिए है, जिमसें से पांच गांव को अधिकृत किया गया है उसमें अभी पेड़ अधिग्रहण करके पेड़ की कटाई हुई है. साथ में अभी कोयला नहीं निकाला जा रहा है. जब तक हमारे जनजाति समाज के भाई-बहन और जो भी वहां पर है, उन लोगों को जब तक सही मुआवजा न मिले और जो ऐसे प्रायवेट लोग है, कुछ लोगों को मुआवजा देना भी शुरू हो चुका है और जो शेष हैं उसको, हमने प्रशासन को निर्देश देकर आए हैं कि जो भी लोग इसमें है, उन सभी को मुआवजा मिल जाए, उसके बाद ही कोयला निकाला जाए. ये बात भी सही है कि वहां पर पेड़ कटने के बाद मिट्टी अलग की जा रही है, अभी कोयला नहीं निकाला जा रहा है, ये रिकार्ड में मैं बता रही हूं. ये बात सही है. (..व्‍यवधान)

नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) अध्‍यक्ष महोदय, हम सब विपक्ष के विधायक गए थे वहां, अंदर नहीं घुसने दिया, उन गांव के लोगों से मिलने नहीं दिया. सिंगरौली के आदिवासी विस्‍थापित लोगों से मिलने नहीं दिया. (..व्‍यवधान) पूरी छावनी बना दी. वहां पर 4 हजार पुलिस वाले थे.

अध्‍यक्ष महोदय नेता प्रतिपक्ष से अनुरोध है कि आपके प्रश्‍न के माध्‍यम से जो भावना सदन के समक्ष आनी चाहिए थी, वह भावना आ गई है. सरकार ने अपना उत्‍तर स्‍पष्‍ट रूप से दिया है. साथ ही जो बात आपने जांच की मांग की थी, जांच की बात भी मंत्री जी ने स्‍वीकार किया है और साथ ही साथ सारे लोग जो हितग्राही हैं, जो उनको मुआवजा मिलना है, वह मुआवजा दिया जाना सरकार सुनिश्चित करेगी. अब इस विषय को आगे बढ़ाने की आवश्‍यकता मैं नहीं समझता हूं. इसमें मेरा अनुरोध है कि अभी 23 प्रश्‍न चर्चा में है, मेरा अनुरोध है कि सदन की कार्यवाही आगे बढ़ने दी जाए. (..व्‍यवधान)

श्री प्रहलाद सिंह पटेल अध्‍यक्ष जी, जितना स्‍पष्‍ट निर्देश आपने आसंदी से दिया है. नेता प्रतिपक्ष की किसी भी बात का आपने आसंदी से निर्देश दिया है, उसके बाद सरकार आसंदी के निर्देश को और जो माननीय नेता प्रतिपक्ष ने बात कही है, हमारे मंत्री जी ने उसकी जांच की बात भी की है और आपने एक एक बिन्‍दु स्‍पष्‍ट करके सदन के सामने रखा है, सरकार उस बात के लिए तैयार है.

श्री भंवर सिंह शेखावत आदरणीय प्रहलाद जी, आदरणीय मंत्री महोदया ने भी साफ साफ कहा है कि पेड़ भी उखाड़े जा रहे हैं और मिट्टी भी अलग की जा रही है और वहां माइंस का ही तो काम हो रहा है और हो क्‍या रहा है और इसी की जांच की तो बात हम कर रहे हैं. प्रहलाद जी के नेतृत्‍व में आप तीन-तीन, चार-चार सदस्‍यों की कमेटी बना दीजिए, ये प्रदेश की जनता के साथ बहुत बड़ा धोखा होगा और हम टाल रहे हैं ये विषय बहुत गंभीर है. आपने स्‍वीकार किया है. जब जनता (..व्‍यवधान)

श्रीमती संपतिया उइके अध्‍यक्ष जी, मैं खुद भी आदिवासी हूं और आदिवासी के साथ अन्‍याय नहीं होने देंगे, ये मैं विश्‍वास दिलाना चाहती हूं(..व्‍यवधान)

          श्री भंवर सिंह शेखावत आपने स्‍वीकार किया है. (..व्‍यवधान) जब जनता में अन्‍याय हो रहा है, हम अन्‍याय पर न्‍याय की बात कर रहे हैं. आप कह रहे हैं कि वहां पर मिट्टी खुद रही है, उसके बाद भी आप उसको इंकार कर रहे हो. (..व्‍यवधान)

                                      (भारी व्‍यवधान..)

           श्री भंवर सिंह शेखावत -- यह गंभीर विषय है, अध्‍यक्ष महोदय, आप ज्‍वाइंट कमेटी बना दीजिये, जांच ही तो होना है, जांच करने से सरकार पीछे क्‍यों हटना चाहती है, क्‍या आपको माननीय प्रहलाद जी पर भरोसा नहीं है? माननीय प्रहलाद जी जो कहेंगे, हम उनका निर्णय मानने को तैयार है. (भारी व्‍यवधान..)

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री प्रहलाद सिंह पटेल) -- जांच के लिये हम तैयार है, सरकार जांच से नहीं भाग रही है, यह आप गलत बोल रहे हैं. हमने जांच की बात तो कही है. आप रिकार्ड उठाकर देखिये, हमने छ: बार कहा है कि हम जांच करने के लिये तैयार हैं. (भारी व्‍यवधान..)

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, सरकार ने माना कि पेड़ कट रहे हैं, तो खदान जब चालू होगी, तो उसके पहले ओवर बर्डन हटेगा, पेड़ कटेंगे (व्‍यवधान.) लकडि़या छत्‍तीसगढ़ जा रही है, फॉरेस्‍ट डिपार्टमेंट में जमा नहीं हो रही है, ईमारती बेशकीमती लकडि़यां वहां से छत्‍तीसगढ़ जा रही है, तो पेड़ कटेंगे, ओवर बर्डन हर्डन हटेगा फिर खदान चालू होगी, तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वहां के लोगों को हटाया जा रहा है, तो यही तो माईनिंग है. (व्‍यवधान.)

          अध्‍यक्ष महोदय -- सामान्‍यत: हम सभी इस बात को भली भांति जानते हैं कि जब किसी खेत पर माइनिंग होती है, तो उससे पहले पेड़ कटते हैं.(व्‍यवधान.)

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, हमारा इसमें आपसे यह अनुरोध है कि एक ज्‍वाइंट पार्लियामेंट कमेटी बना दें. आप जे.पी.सी. कमेटी बना दें, श्री प्रहलाद पटेल जी कोयला मंत्री रहे हैं, इनके नेतृत्‍व में जेपीसी बना दें, इनके सदस्‍य भी उसमें आ जायें. आप कहते हैं कि पैसे ही नहीं है, 350 करोड़ और आप वहां पर पचास लाख रूपये देने की बात हर आदिवासी, हर परिवार को देने की बात कर रहे हो. .(व्‍यवधान.)

 

 

          अध्‍यक्ष महोदय --  मैं समझता हूं कि प्रश्‍नकाल को आगे बढे़ अभी थोड़ा सा ही समय हुआ है, अभी दो तीन प्रश्‍न ही हुए हैं. डॉ.सीतासरन शर्मा जी आप बोलें. श्री उमंग सिंघार जी प्‍लीज आप बैठ जायें. .(व्‍यवधान.)

          श्री भंवर सिंह शेखावत -- अध्‍यक्ष महोदय. .(व्‍यवधान.)

          श्री उमंग सिंघार --लेकिन अध्‍यक्ष महोदय, पैसा ही नहीं है. कंपनी ने, अडानी ने पैसे ही नहीं दिये हैं तो फिर कहां से आप पैसा दोगे?पचास लाख रूपये के हिसाब से छ: हजार करोड़ रूपये बनते हैं और 350 करोड़ रूपये दिये गये, क्‍या यह शर्म की बात नहीं है? अध्‍यक्ष महोदय, इसमें ज्‍वाइंट पार्लियामेंट कमेटी बननी चाहिए, मैं आपसे कहता हूं कि जेपीसी बनना चाहिए. आप विधानसभा की एक कमेटी बना दें.

          अध्‍यक्ष महोदय-- आप प्‍लीज बैठ जाईये, प्‍लीज आप बैठ जाईये. .(व्‍यवधान.)

          डॉ. सीतासरन शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, 268 में से 196 प्रकरणों का निराकरण कर दिया गया है. (व्‍यवधान)

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर नारेबाजी करते रहे.)

          अध्‍यक्ष महोदय -- सदन की कार्यवाही 12.00 बजे तक के लिये स्‍थगित की जाती है. .(व्‍यवधान.)

             (11:51 बजे विधानसभा की कार्यवाही 12.00 बजे तक के लिये स्‍थगित की गई)

                                                 

                                               

12.05 बजे                             विधान सभा पुन: समवेत हुई.

                               अध्‍यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुये.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार ने जो आंकड़े दिये हैं वह जमीनी हकीकत से कोसों दूर हैं और मैं तो जितने विद्वान मंत्री बैठे हैं जैसा आपने कहा कि खदान चालू नहीं हुई तो क्‍या मिट्टी हटाना, पेड़ काटना क्‍या खदान की परिभाषा में नहीं आता, यह बता दें कोई मंत्री जी. खनन के इसमें नहीं आता...

          अध्‍यक्ष महोदय--  अब प्रश्‍नकाल तो समाप्‍त हो गया है. प्‍लीज अब कार्यवाही आगे बढ़ गई है. मेरा सभी सदस्‍यों से अनुरोध है ध्‍यानाकर्षण की सूचनायें हैं, बजट है उन सब चीजों को कवर करके आगे बढ़ना है ..(व्‍यवधान)..

          श्री उमंग सिंघार--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन सवाल यह क्‍या ..(व्‍यवधान).. लेकिन आंकड़े गलत बताये जा रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय क्‍या जेपीसी होगी, आपसे अनुरोध है कि इस पर कमेटी बने ..(व्‍यवधान).. इसमें क्‍या परेशानी है सत्‍तापक्ष को. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आदिवासियों के लिये काम नहीं करना चाहते हैं. ..(व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय--  देखिये प्रश्‍न पर काफी चर्चा हुई है, आपने भी अनेक पूरक प्रश्‍न किये हैं. सरकार ने उसका जवाब दिया है, आपकी आशंका थी तो आशंका पर उन्‍होंने जांच करवाने का कहा है. मुझे लगता है इसके बाद इस विषय में कुछ बचता नहीं है इसलिये अब ध्‍यानाकर्षण भी हैं. ध्‍यानाकर्षण भी जनहित से जुड़े हुये हैं ..(व्‍यवधान).. आगे और भी कार्यवाही होना है. मेरा अनुरोध है कि कृपया सहयोग करें कार्यवाही को आगे बढ़ाने में. ..(व्‍यवधान)..

          श्री भंवर सिंह शेखावत-- माननीय अध्‍यक्ष जी, हम तो सहयोग करना चाहते हैं, लेकिन सरकार सहयोग कहां कर रही है. ..(व्‍यवधान).. इस बात में भी अगर ज्‍वाइंट पार्लियामेंट कमेटी नहीं बनेगी तो किसमें बनेगी. एक आदमी के लिये पूरा प्रदेश लुटाया जा रहा है (XX) के नाम पर. ..(व्‍यवधान)..

          श्री उमंग सिंघार--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या आदिवासियों को न्‍याय नहीं मिलेगा. ..(व्‍यवधान)..  (XX). ..(व्‍यवधान)..  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक व्‍यापारी (XX) को लेकर सरकार इतनी परेशान क्‍यों हो रही है. क्‍या सिंगरौली के आदिवासियों को न्‍याय नहीं मिलेगा. ..(व्‍यवधान)..  उनको पैसा नहीं मिल रहा, उनका विस्‍थापन सही नहीं हो रहा. ..(व्‍यवधान)..  (XX) इतना क्‍यों है. ..(व्‍यवधान)..  यह प्रदेश के आदिवासियों की बात है. तत्‍काल इस पर कमेटी बनना चाहिये अध्‍यक्ष महोदय यह अनुरोध है. इस पर हम बहिर्गमन करते हैं.

 

 

 

 

12.07 बजे                                    बहिर्गमन

धिरौली कोयला ब्‍लॉक में अनियमितता संबंधी प्रश्‍न पर नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार के नेतृत्‍व में इंडियन कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर सदन से बहिर्गमन.

 

          श्री उमंग सिंघार--  हमारी बात नहीं सुनी जा रही. हम सदन से बहिर्गमन करते हैं.

          (धिरौली कोयला ब्‍लॉक में अनियमितता संबंधी प्रश्‍न पर नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार के नेतृत्‍व में इंडियन कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया.)

 

12.08 बजे                     नियम 267-क के अधीन विषय

          अध्‍यक्ष महोदय--  नियम 267-क के अधीन लंबित सूचनाओं में से 15 सूचनाएं नियम 267-क(2) को शिथिल कर आज सदन में लिये जाने की अनुज्ञा मैंने प्रदान की है यह सूचनाएं संबंधित सदस्‍यों द्वारा पढ़ी जावेंगी. इन सभी सूचनाओं को उत्‍तर के लिये संबंधित विभागों को भेजा जायेगा.

          मैं समझता हूं सदन इससे सहमत है.

                                                          (सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.)

          अब मैं सूचना देने वाले सदस्‍यों के नाम पुकारूंगा.

          1.       श्री दिनेश राय मुनमुन                      अनुपस्थित

          2.       श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को                   अनुपस्थित

          3.       श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर             अनुपस्थित

          4.       श्री साहब सिंह गुर्जर                        अनुपस्थित

          5.       श्री यादवेन्‍द्र सिंह                            अनुपस्थित

          6.       श्री महेश परमार                            अनुपस्थित

          7.       श्री देवेन्‍द्र पटेल                               अनुपस्थित

 

        8.     ग्राम परसवाड़ा में बस स्‍टेण्‍ड के लिये आरक्षित भूमि  पर  काबिज                       दुकानदारों को प्राथमिकता के आधार पर दुकान आवंटित न किया जाना.       

          श्री मधु भाऊ भगत (परसवाड़ा)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय मेरी शून्‍यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है-

           

          9.       श्री भैरो सिंह बापू                 अनुपस्थित

          10.     डॉ.चिंतामणि मालवीय           अनुपस्थित

          11.     डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह            अनुपस्थित

          12.     श्री राजन मण्डलोई               अनुपस्थित

          13.     श्री उमाकांत शर्मा                 अनुपस्थित

      

 

 

 

 

 

  14.      आष्टा स्थित सेल मैन्यूफैक्चरिंग प्रा.लि. कंपनी के बंद हो जाने से उत्पन्न स्थिति

          श्री गोपाल सिंह "इंजीनियर"(आष्टा) - अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है:

          15.       डॉ.सीतासरन शर्मा                       अनुपस्थित     

 

                            

                                पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश प्‍लास्टिक सिटी डेवलपमेन्‍ट कॉरपोरेशन, ग्‍वालियर लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा वर्ष 2024-2025

        श्री प्रहलाद सिंह पटेल,पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री - अध्यक्ष महोदय, मैं,

कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश प्‍लास्टिक सिटी डेवलपमेन्‍ट कॉरपोरेशन, ग्‍वालियर लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा वर्ष 2024-2025 पटल पर रखता हूं.

 

 

(2) महर्षि पाणिनी संस्‍कृत एवं वैदिक विश्‍वविद्यालय, उज्‍जैन का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025

          श्री इन्दर सिंह परमार,उच्च शिक्षा मंत्री - अध्यक्ष महोदय, मैं, महर्षि पाणिनी संस्‍कृत एवं वैदिक विश्‍वविद्यालय, उज्‍जैन का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025 पटल पर रखता हूं.

 

 

12.15 बजे                         नियम 138 (1) के अधीन ध्‍यान आकर्षण

(1) रीवा जिले के अनुसूचित जाति एवं जनजाति विभाग द्वारा विद्युतीकरण कार्यों में अनियमितता के दोषियों से वसूली एवं आपराधिक प्रकरण दर्ज न किए

जाने से उत्‍पन्‍न स्‍थिति

 

          श्री अभय मिश्रा (सेमरिया) -- अध्‍यक्ष महोदय,

                

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) -- माननीय अध्‍यक्ष जी, हमारे सहयोगी मंत्री माननीय नागर सिंह चौहान जी की तरफ से मैं आपके सामने उत्‍तर प्रस्‍तुत कर रहा हूँ. माननीय सदस्‍य ने दिनांक 01.12.2025 को इसी सदन में मतलब जनजातीय कार्य विभाग में भी यही मामला उठाया था. अब इस बार वही विषय उसी धारा के क्रमांक 24 के अनुसार जनजातीय कार्य विभाग की बजाय अनुसूचित जाति कल्‍याण विभाग की तरफ से वही मामला उठाया है. यह बात मैं आपके और सदन के ध्‍यान में लाना चाहता हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा जो माननीय सदस्‍य का कहना है, उसमें, मेरे पास में दोनों कागज यहां पर मौजूद हैं. दिनांक 24.03.2022, उस समय जब ये प्रपत्र निकला तो इस पर एजेंसी का नाम विभागीय रखा गया. लेकिन दिनांक 07.03.2023 को बाकायदा संशोधित करते हुए, उसका सर्कुलर मेरे हाथ में है, संशोधित करके एजेंसी को विभाग की जगह पर पंचायत कर दिया गया. इसलिए यह कहना कि यह कूटरचित है. दोनों पत्र वर्ष 2022 और 2023 के हैं और संशोधन बाकायदा विभाग ने जारी किया है. तब फिर यह कहना कि दो एजेंसियों से काम कराया गया है. भुगतान हो गया है. यह बिल्‍कुल पूरी तरह से असत्‍य है और शायद जानकारी का अभाव है और इसलिए मैं माननीय विधायक जी से कहूँगा कि ये दोनों पत्र भी मैं उन्‍हें देने के लिए तैयार हूँ. आदेश की इन प्रतियों को उनको देखना चाहिए तो यह जो उनके मन में भ्रम है, वह दूर हो जाएगा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- अभय जी, कोई पूरक प्रश्‍न.

          श्री अभय मिश्रा -- अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं दो पूरक प्रश्‍न करूंगा. पहला तो यह है कि जो आप आदेश की बात कर रहे हैं, हमारा एक और प्रश्‍न भी लगा था. शायद आपके ध्‍यान से, उत्‍तर बनाने वालों के ध्‍यान से उतर गया है. एक अतारांकित प्रश्‍न था, 441..

          अध्‍यक्ष महोदय -- अभय जी, ऐसा है कि इसमें कोई आपको जानकारी चाहिए हो तो पूरक प्रश्‍न कर लें. सामान्‍य तौर पर जो विषय पहले सदन में आ चुका है, उस पर बहुत चर्चा होती नहीं है. ऐसे विषयों के लिए प्रश्‍न एवं संदर्भ समिति बनी हुई है. आपको प्रश्‍न एवं संदर्भ समिति का उपयोग करना चाहिए लेकिन पूरक प्रश्‍न आप कर लें.

          श्री अभय मिश्रा -- अध्‍यक्ष महोदय, इसमें जो यह उत्‍तर है, कलेक्‍टर महोदय का, अतारांकित प्रश्‍न का, इसमें इन्‍होंने दोषी माना है. एक लिपिक को पूरी तरह से दोषी माना है और उसको इन्‍होंने निलंबित भी किया. जो अधिकारी था, उस समय का जो भी अधिकारी था, उसको कारण बताओ नोटिस जारी किया. 45 दिन के अंदर आरोप-पत्र दिया जाना था, आरोप-पत्र नहीं दिया गया और वह बहाल हो गया. वे अधिकारी मऊगंज चले गए, उसको ले जाकर अपने पास पोस्‍टिंग करा लिए. एक चीज तो उसको सरंक्षण देने वाली बात यह हो गई. दूसरा, आप जो यह कह रहे हैं, आपने बताया ना कि इसमें एजेंसी बदली गई है, ये दोनों कागज भी मेरे पास हैं. ये चुनाव के दौरान का मामला है. आप उसकी तारीख देखिए. उस समय अपना विधान सभा का चुनाव चल रहा था. यह मामला ठीक चुनाव के पहले और चुनाव के बाद का है. इसमें पहले इन्‍होंने एक जगह से निकाला, फिर इसी को एजेंसी बदल के दोनों जगह और मौके पर कार्य नहीं कराए गए. मेरा पहला प्रश्‍न यह है कि क्‍या इसकी मौके पर जांच करा ली जाएगी और जो बाबू बहाल हुआ है, आरोप-पत्र नहीं देने वाले अधिकारी का और वह जो अधिकारी है, उसके विरुद्ध क्‍या कार्यवाही की जाएगी. यह मेरा पहला प्रश्‍न है, फिर मैं दूसरा प्रश्‍न करता हूँ.

           श्री प्रहलाद सिंह पटेल - अध्‍यक्ष जी, इन कागजों के आधार पर उस क्‍लर्क की कोई त्रुटि नहीं दिखती है, लेकिन जो दूसरी बात माननीय सदस्‍य ने कही है, यदि काम नहीं हुआ है, उसकी जांच कराना है, तो मैं आपके माध्‍यम से सदस्‍य को कहना चाहता हूँ कि हम उसकी जांच कराने के लिए तैयार हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -  क्‍या आपका कोई दूसरा अनुपूरक प्रश्‍न है ?

          श्री अभय मिश्रा - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हां. मेरा दूसरा अनुपूरक प्रश्‍न है, जो आपने हमारे विधान सभा प्रश्‍न क्र. 441, दिनांक 4.12.2025 में उत्‍तर दिया था, यह हमारे पास है. मैं इसके आधार पर बात कर रहा हूँ, यह डाटा यहीं से निकाला है. अनुसूचित जनजाति बस्‍ती क्रमांक 5 6  हरदुआ, सीसी रोड राशि 5 लाख रुपये, यह सूची क्रमांक 3 में उल्‍लेखित है, वर्ष 2022-23 में, फिर यही चीज वार्ड क्रमांक 5 6 हरदुआ सड़क क्रमांक दिनांक 3/8/13 में उल्‍लेखित है. इसी तरह बुदसेड़ के घर तक यह 11 में भी है, 2 में भी है, 7 में भी है, 12 में भी है. आप फिर आ जाइये, ग्राम पंचायत बिहरिया में यह भी 5 लाख रुपये का काम सूची सड़क क्रमांक 2 में भी है, 7 में भी है, 12 में भी है, तीनों का. मेरे कहने का आशय यह है कि माननीय मंत्री जी इसमें जांच कराने में कोई दिक्‍कत नहीं होनी चाहिए. मेरा आरोप यह है कि यह लोग एक ही कार्य को कई जगह दिखाकर के इसकी राशि आहरण कर लेते हैं. सब वहीं लोकल स्‍टाफ की मिलीभगत चलती है, आप भी इतने अनुभवी हैं, इस सबको आप अच्‍छी तरीके से जानते हैं. आप रीवा के प्रभारी मंत्री भी हैं. आपके सामने इस तरह का विषय बार-बार आता है, आप उस चीज को जानते हैं. सबसे बड़ी बात यह है, आप उस चीज को जानते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय - अभय जी, प्रश्‍न आ गया है.

          श्री अभय मिश्रा - अध्‍यक्ष महोदय, मेरी एक अंतिम बात है कि हम विधायकों की अगर विधायक निधि सरेंडर होती है, हम उपयोग नहीं कर पाये, हमारी निधि सरेंडर हो गई. हम कितनी बार आपके पास प्रश्‍न भी लगा चुके हैं, आप लोगों से व्‍यक्तिगत भी मिले हैं कि हमारी राशि को अगले वित्‍तीय वर्ष में जोड़ दिया जाये. हमारी तो नहीं जुड़ पा रही है, इनकी एक वित्‍तीय वर्ष की राशि दूसरे वित्‍तीय वर्ष में कैसे चली गई ? वह कैसे सरेंडर नहीं हुई. जो माननीय मंत्री महोदय अभी कह रहे थे, उसका उत्‍तर दें.

          अध्‍यक्ष महोदय - अभय जी, आप बैठिये. मेरा आग्रह इतना है कि प्रश्‍न में तो पूरक प्रश्‍न होते हैं. पूरक प्रश्‍न में, यदि पूरक होगा, तो चर्चा कभी समाप्‍त नहीं होगी. माननीय श्री प्रहलाद सिंह पटेल जी.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं उस जिले का प्रभारी मंत्री भी हूँ. मैंने जांच की बात पहले कही है, हम जांच कराने के लिए तैयार हैं. हमें कोई दिक्‍कत नहीं है.

          अध्‍यक्ष महोदय - (अभय मिश्रा जी के खड़े होकर बन्‍द माईक से बोलने पर) अभय जी, काम हो गया. प्‍लीज, आप बैठें. श्रीकान्‍त चतुर्वेदी जी, आप अपनी ध्‍यानाआकर्षण की सूचना पढे़ं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.22 बजे                           ध्‍यान आकर्षण सूचना

(2) प्रदेश में शाला भवनों के रख-रखाव में बरती जा रही

उदासीनता से उत्‍पन्‍न स्थिति

          सर्वश्री श्रीकान्‍त चतुर्वेदी (मैहर) [लखन घनघोरिया]  - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

         

 

 

 

 

 

 

 

          स्‍कूल शिक्षा मंत्री (श्री उदय प्रताप सिंह) -  माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

    

 

 

 


हमने कलेक्‍टर स्‍तर पर रुपये 19 करोड़ और सीधे BEO, प्राचार्य आदि से जो प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए वहां रुपये 69 करोड़ भेजने का काम किया है. वर्तमान में जिस तरह से मांग आ रही है, उन मांगों की पूर्ति करने का काम विभाग द्वारा किया जा रहा है. सा‍थ ही जैसा माननीय सदस्‍य ने कहा कि जो विसंगति उनके क्षेत्र की उजागर हुई है, उसमें संबंधित के विरूद्ध एफ.आई.आर. आदि दर्ज करने का और वसूली की प्रक्रिया भी प्रक्रियाधीन है.

          अध्‍यक्ष महोदयश्रीकान्‍त जी, पूरक प्रश्‍न करें.

          श्री श्रीकान्‍त चतुर्वेदी-  अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश की सरकार, मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी की सरकार में बहुत ही व्‍यवस्थित ढंग से काम चल रहा है लेकिन अधिकारी सही ढंग से जानकारी नहीं दे रहे हैं. मेरे जिले की बात बताना चाहूंगा, मैहर जिले के राम नगर ब्‍लॉक में, 22 लोगों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज हुई, यह दर्शाता है कि ऊपर से बहुत बड़े तरीके से अनियमितता हुई है और यह लाखों नैनिहालों के भविष्‍य का सवाल है. हमारी सरकार यहां से रख-रखाव के लिए, पुताई के लिए, बाउण्‍ड्री-वॉल के लिए, शौचालय और विद्यालय भवन की मरम्‍मत के लिए पैसा देती है लेकिन वहां के संचालक, संयुक्‍त संचालक अपने निजी ठेकेदारों के द्वारा मैहर के राम नगर में कार्य करवाया जा रहा है,  विदिशा और भोपाल के ठेकेदार वहां जाकर कार्य कर रहे हैं, इससे स्‍पष्‍ट है कि इसमें बहुत लंबा घोटाला हुआ है. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि ऐसे भ्रष्‍ट अधिकारियों को सदन में निलंबित (Suspended) करने की घोषणा करें.

          श्री उदय प्रताप सिंहअध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैंने पूर्व में आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को बताया कि मैहर जिले में इस तरह की विसंगति पाये जाने पर, कलेक्‍टर द्वारा जांच करवाई गई और 17 कर्मचारी-अधिकारी, जिसमें देवराज नगर के व्‍याख्‍याता से लेकर विनोद कुमार पटेल जो सांदीपनि स्‍कूल में भृत्‍य है, तक 17 लोगों पर एफ.आई.आर. की कार्रवाई हुई है और जिन ठेकेदारों के द्वारा काम नहीं किया गया है और फर्जी बिल लगाकर भुगतान हुए हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी, आर.आर.सी. जारी होगी और जो वैधानिक रूप से, नियम संगत हैं, उन पर सख्‍त से सख्‍त कार्रवाई करेंगे, किसी किस्‍म की कार्रवाई में कोई कोताही नहीं बरती जायेगी, आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को अवगत करवाना चाहता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदयदूसरा पूरक प्रश्‍न करें.

          श्री श्रीकान्‍त चतुर्वेदी-  अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मंत्री जी ने स्‍वीकार किया है, यही तो मैं बोल रहा हूं, जब एक ब्‍लॉक में ऐसा हुआ है तो मध्‍यप्रदेश के सारे ब्‍लॉकों में यह माफिया भोपाल से संचालित कर रहा है और एक ब्‍लॉक में जब रुपये 4 करोड़ का घोटाला हुआ है तो पूरे प्रदेश में उसी स्थिति में किस स्‍तर का घोटाला हुआ होगा ? इसलिए इसकी जांच करवाई जाये और यह जांच तभी संभव है, जब इन अधिकारियों को पहले निलंबित किया जाये.

          श्री उदय प्रताप सिंहअध्‍यक्ष महोदय, मैंने पूर्व में भी आग्रह किया कि प्रथमदृष्‍टया जहां दोषी पाए गए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई हुई, एफ.आई.आर. की गई है और चूंकि यह विषय बहुत गंभीर है, इस तरह की शिकायत मिलना, इससे मैं स्‍वयं भी काफी विचलित हुआ हूं, शिक्षा विभाग में इस तरह की अनियमितता की, कहीं कोई गुंजाईश नहीं है और माननीय मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में जीरो-टॉलरेंस की जो नीति है, उसका हम 100 फीसदी पालन करते हैं. मैं, बहुत जिम्‍मेदारी के साथ आपके माध्‍यम से सदस्‍य को कहना चाहता हूं, इसमें यथासंभव उच्‍च स्‍तर पर हम जांच करवायेंगे और जो कार्रवाई होगी, उसे अवश्‍य करेंगे.

          श्री लखन घनघोरिया (जबलपुर पूर्व)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वैसे हमारे प्रश्‍न का संदर्भ भी बदल गया और स्‍वरूप भी बदल गया. मैंने अपने ध्‍यानाकर्षण की सूचना इसी 20 तारीख को दी थी और फ्लाईओवर ब्रिज गिरने वाली 23 तारीख को दी थी. मेरा निवेदन वह था, लेकिन आपने इस संदर्भ में, इसी में समाहित कर लिया तो इस पर बात कर ले रहे हैं, लेकिन फ्लाईओवर ब्रिज भी ज्‍यादा आवश्‍यक था. 400 करोड़ रुपए का फ्लाईओवर ब्रिज, तीन साल के अंदर गिर जाना? हमारा विषय वह था, लेकिन यदि इसमें ज्‍वाइन कर दिया तो उसी में चर्चा कर लें. लेकिन मैं उसमें आपसे यह आग्रह जरूर करना चाहता हूं कि आप इस संदर्भ में कोई व्‍यवस्‍था जरूर दें कि इस ध्‍यानाकर्षण को भी ग्राह्य किया जाए. यह बहुत ही महत्‍वपूर्ण विषय है.

          अध्‍यक्ष महोदय- लखन जी, अभी तो आप इस पर प्रश्‍न कर लें.

          श्री लखन घनघोरिया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने अपने कथन में इस बात को स्‍वीकार किया है कि प्रथम चरण में लोक शिक्षण संस्‍थान के माध्‍यम से शिक्षा विभाग की जो आवंटन की राशि जाती है वह प्रथम चरण में कलेक्‍टर के माध्‍यम से जाती है. वहां तक तो ठीक है, लेकिन जो राशि द्वितीय चरण में जाती है उसी में तो दो नंबर का खेल है. उसमें आपने 69 करोड़ रुपए बताया है. जो कलेक्‍टर आवंटित कर रहा है उसमें कितना है?

          दूसरा जैसा माननीय सदस्‍य श्रीकांत जी ने कहा यह रामनगर की घटना है. जब यह पत्रिका समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ था तब उजागर हुई. कलेक्‍टर ने जांच करवाई, उसमें दोष भी सिद्ध हुआ. एफआईआर दर्ज हुई. मंत्री जी ने इसमें बताया. लेकिन सवाल इस बात का उठता है कि लोक शिक्षण संचालनालय के कुछ बिंदु ऐसे हैं कि एक ही जगह पर बैठे व्‍यक्ति वर्षों से जमे हैं. उनहोंने यहां भोपाल में बैठकर पूरा एक काकस बना लिया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, बिना टेंडर के और बिना कोई जानकारी के वह वहां से प्रस्‍ताव मंगाते हैं और मंगाते किससे हैं डायरेक्‍टर, डिप्‍टी डायरेक्‍टर और ज्‍वाइन डायरेक्‍टर से मंगाते हैं. जैसा श्रीकांत जी बता रहे थे. रामनगर की तो पकड़ गई, लेकिन यह समस्‍या पूरे प्रदेश की समस्‍या है. कई बार वहां यह तक हुआ है कि बिल आदेश जारी होने के पहले ट्रेजरी में चला गया. यह बड़ी विचित्र विसंगति है. यह भ्रष्‍टाचार कोई छोटा भ्रष्‍टाचार नहीं है. यह भ्रष्‍टाचार पूरे प्रदेश का है. यदि आप प्रदेशभर में जो भी लोक शिक्षण संचालनालय के कार्य हुए हैं. मरम्‍मत से लेकर भवन निर्माण तक तीन साल का रिकॉर्ड मंगवा लें. तीन साल के रिकॉर्ड की जांच करवा लें तो आपको दूध का दूध पानी का पानी क्लियर हो जाएगा कि कितने काम बगैर भौतिक सत्‍यापन के हुए नहीं और बिल पेमेंट हो गया. आप तीन साल की जांच करा लें. जांच करवाने के पहले एक निवेदन है कि कोई नीति तो ऐसी बनाएं कि बंदर बांट न हो. कलेक्‍टर के माध्‍यम से जाते हैं तो पारदर्शिता तो होती है, लेकिन जो डायरेक्‍ट जाते हैं, यहीं तो उनका परसेंटेज तय रहता है और यहीं के ठेकेदार तय रहते हैं. वहां के ठेकेदार नहीं हैं. पैसा बगैर कार्य हुए यहीं वापस आ जाता है और जैसे पुल गिरा है वैसे यदि स्‍कूल के भवन गिरें तो कितनी बड़ी त्रासदी होगी? कितने बच्‍चों की जांच के साथ खिलवाड़ होगा?

          अध्‍यक्ष महोदय-- लखन जी आप मंत्री जी से प्रश्‍न तो कर लें.

          श्री लखन घनघोरिया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से आग्रह है कि ऐसी परिस्थितियों में जब आपका नियम विसंगतिपूर्ण है तो या तो इसे कलेक्‍टर के माध्‍यम से करें और यदि आप डायरेक्‍ट कर रहे हैं, डायरेक्‍ट जिनने किया, अनियमितताएं तो हैं यह आप स्‍वीकार कर रहे हैं तो क्‍या इसकी जांच कराएंगे? और जांच करवाने के पहले तीन साल का जो रिकॉर्ड है उसकी जांच करवाएंगे? और जांच कराने के पहले डायरेक्टर, डिप्टी डायरेक्टर और ज्वाइन डायरेक्टर को वहां से अलग करके जांच कराएं तो शायद जांच की कोई सार्थकता होगी. सही स्थिति सामने आएगी. क्या आप इनको अलग करके जांच कराएंगे.

          श्री उदय प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा मैंने पूर्व में भी कहा है माननीय श्रीकांत जी के प्रश्न के उत्तर में कि हमारी सरकार 100 फीसदी पारदर्शिता में विश्वास रखती है. जहां अनियमितता उजागर हुई, निर्धारित समयावधि में जांच कराकर एफआईआर कराने का हमने काम किया है. मैहर से हमें एक चीज समझ में आई कि दूसरे जिलों में भी इस जांच को बढ़ाने की आवश्यकता है. हमने सचिव महोदय से आग्रह किया है कि इसकी मध्यप्रदेश स्तर पर जांच कराएं. हम जांच कराएंगे भी, किसी भी विसंगति को हमारा विभाग कतई स्वीकार नहीं करेगा. मेरा आग्रह है कि जहां पर जांच हो गई. एफआईआर दर्ज कराई है, विधिवत उन पर प्रकरण चलेगा, आपराधिक प्रकरण चलेगा और दूसरी जगहों पर हम जांच कराएंगे. जांच रिपोर्ट आने पर जो दोषी होगा उस पर हम कार्यवाही भी करेंगे.

          श्री लखन घनघोरिया -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी यह आग्रह कर रहे हैं कि जांच कराएंगे. आप तो आदेश करो, आग्रह करने की क्या जरुरत है. यह सदन आदेश करने के लिए है सरकार आग्रह करने के लिए नहीं है. क्या सरकार आग्रह करेगी. प्रथम दृष्टया आपने मान लिया कि यह गड़बड़ी हुई है. जब गड़बड़ी हुई है तो फिर ऐसे दोषी अधिकारियों को आप हटाकर जांच क्यों नहीं करा रहे हैं. जांच के बाद फिर हटाएंगे. मैहर, रीवा संभाग के तमाम जिलों में आपने दायरे को बढ़ाया है. तब आपको सारी चीजें स्पष्ट हुईं हैं, परिलक्षित हो चुकी हैं. जब हो चुकी हैं तो उनको हटाकर आप जांच करवा लीजिए. पूरे प्रदेश की तीन साल की जांच करवा लीजिए.

          श्री उदय प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा मैंने पूर्व में भी कहा है माननीय दोनों सदस्य श्रीकांत जी और लखन घनघोरिया जी, मैं आपकी बात से असहमत नहीं हूँ.

          श्री लखन घनघोरिया -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी सहमत हो जाएं, तर्क सही है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ विपक्ष के विधायक बोल रहे हैं. सत्तापक्ष के भी बोल रहे हैं.

          श्री उदय प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैहर क्षेत्र का मामला था इसकी हमने तुरंत जांच करवाई संबंधित के खिलाफ एफआईआर करवाई. डेमोक्रेसी में जब तक जांच नहीं कराएंगे, जांच का परिणाम नहीं आएगा. दोष सिद्ध होने पर ही तो कानूनी कार्यवाही करेंगे.

          श्री लखन घनघोरिया -- आपने कहा कि हम जांच का आग्रह करेंगे. पहली चीज, दूसरी चीज आपने एफआईआर की है, जांच के बाद ही तो एफआईआर की गई होगी. अधिकारियों पर एफआईआर तो जांच के बाद हुई है.

          अध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी ने यह कहा है कि कुछ विषय सामने आए उनकी जांच करके एफआईआर की गई बाकी के जो विषय हैं उनकी जांच कराएंगे.

          श्री लखन घनघोरिया -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जब एक जिले का सामने आ गया तो प्रदेश स्तर की जाँच माननीय मंत्री जी के अधिकार क्षेत्र में है.

          श्री उदय प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, हम बिलकुल जांच कराएंगे. विनम्रता से रखा विषय कमजोरी नहीं होता है, यह हमारी भाषा शैली है, इसको हम तीखी आवाज में भी बोल सकते हैं,  लेकिन हम विनम्रता से कह रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी, मेरा सिर्फ इतना आग्रह है कि श्रीकांत जी ने भी विषय रखा है और लखन जी ने भी रखा है. आपने भी विषय की गंभीरता को समझा और उसे स्वीकार भी किया. आपने जांच कराने की भी बात कही है. मुझे लगता है कि आप तय करें कि क्या कोई व्यक्ति बीच में ऐसा है जो जांच को प्रभावित कर सकता है, अगर वो कर सकता है तो उसको हटाकर जांच करा लें, क्या दिक्कत है.

          श्री उदय प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने पूर्व में भी कहा है. श्रीकांत जी ने बहुत विस्तार से विषय को रखा है. शिकायत के बाद वे स्वयं मुझसे मिले भी थे. हम लोगों ने विभाग में इसकी समीक्षा भी की है. यह निहायत चिंता का विषय है इसके लिए हम राज्य स्तर पर जा रहे हैं. आसंदी ने जो निर्देश दिया है आपके निर्देश का अक्षरश: पालन होगा और उच्च स्तर पर जो संबंधित अधिकारी हैं उनको हम वहां से जांच होने तक अलग करके ही जांच कराएंगे. दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ कार्यवाही भी करेंगे.

                                                                                     

 

12.40 बजे                             प्रतिवेदनों की प्रस्‍तुति एवं स्‍वीकृति

 

(1) गैर-सरकारी सदस्‍यों के विधेयकों तथा संकल्‍पों संबंधी

समिति का अष्‍टम प्रतिवेदन

          श्री शिवनारायण सिंह लल्‍लू भैया -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं गैर-सरकारी सदस्‍यों के विधेयकों तथा संकल्‍पों संबंधी समिति का अष्‍टम प्रतिवेदन प्रस्‍तुत करता हूं.

          प्रतिवेदन इस प्रकार है:- समिति ने शुक्रवार, दिनांक 27 फरवरी, 2026 को चर्चा के लिये आने वाले गैर-सरकारी सदस्‍यों के कार्य पर विचार किया तथा निम्‍न- लिखित समय अशासकीय संकल्‍पों पर चर्चा के लिये निर्धारित करने की सिफरिश की है:-

अशासकीय संकल्‍प      शुक्रवार, दिनांक 27 फरवरी, 2026           निर्धारित समय

1. (क्रमांक-14)                     श्री घनश्‍याम चन्‍द्रवंशी                   30 मिनिट

2. (क्रमांक-15)                     इंजी. प्रदीप लारिया                       30 मिनिट

3. (क्रमांक-23)                     श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे                 30 मिनिट

 

          श्री शिवनारायण सिंह लल्‍लू भैया -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि सदन गैर-सरकारी सदस्‍यों के विधेयकों तथा संकल्‍पों संबंधी समिति के अष्‍टम प्रतिवेदन से सहमत है.

 

 

          अध्‍यक्ष महोदय --                                              प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ.

          प्रश्‍न यह है कि सदन गैर-सरकारी सदस्‍यों के विधेयकों तथा संकल्‍पों संबंधी समिति के अष्‍टम प्रतिवेदन से सहमत है.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

 

12.42 बजे    (2) लोक लेखा समिति का अठासीवां से एक सौ सत्‍ताईसवां प्रतिवेदन

          श्री भंवरसिंह शेखावत -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं लोक लेखा समिति का अठासीवां से एक सौ सत्‍ताईसवां प्रतिवेदन प्रस्‍तुत करता हूं. सोलहवीं विधान सभा के गठन के बाद आपके आदेश से मुझे इस लोक लेखा समिति का सभापति बनने का अवसर आपने दिया. इस समिति ने लगातार परिश्रम करके वर्ष 2004 से लंबित सारे प्रकरणों से वर्ष 2016-17, 2017-18 तक जितने पेंडिंग थे, आपके आदेशानुसार इस कमेटी ने उनका प्रतिवेदन बनाकर आपके समक्ष प्रस्‍तुत करने का परिश्रम किया है. मेरे साथ में इस समिति में विशेष आमंत्रित रूप से आदरणीय अजय विश्‍नोई जी जो प्राक्‍कलन समिति के यशस्‍वी सभापति हैं, वह भी इस कमेटी के अंदर मेरे सहयोगी रहते हैं और बड़े सीनियर लोगों में सबसे आदरणीय जयंत मलैया जी हमारी कमेटी को हमेशा मार्गदर्शन देते रहते हैं. आदरणीय संजय पाठक जी, श्रीमती नीना विक्रम वर्मा जी, आदरणीय श्रीमती रीती पाठक जी, आदरणीय राजेन्‍द्र पाण्‍डेय जी, आदरणीय अभय मिश्रा जी, आदरणीय हेमन्‍त कटारे जी, आदरणीय हरिशंकर खटीक जी के साथ इस कमेटी ने लगातार बैठकें और परिश्रम करते हुए इन 127 प्रतिवेदनों का निर्णय करके विधान सभा के समक्ष प्रस्‍तुत करने का उपक्रम किया है. जब हमने काम करना शुरू किया था तब वर्ष 2004 से ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर इस कमेटी के अंदर ऑडिट रिपोर्ट आने के बाद ही इस कमेटी का काम शुरू होता है और प्रत्‍येक विभाग की ऑडिट रिपोर्ट भी कम से कम डेढ़-डेढ़ सौ, दो-दो सौ पन्‍नों की होती है जिसका अध्‍ययन करके बहुत बारीकी से उसके ऊपर यह समिति अपना निर्णय लेकर आपके समक्ष प्रस्‍तुत करती है. हमने इसमें एक्‍शन कमेटी भी बनाई थी जिसके अंदर आदरणीय राजेन्‍द्र पाण्‍डेय जी उसके अध्‍यक्ष थे. इन्‍होंने भी काफी परिश्रम करके इस कमेटी में इतने प्रतिवेदनों को लाने का उपक्रम किया है. मैं यहां उल्‍लेख करना चाहता हूं कि लंबित कार्यों के निराकरण में आपके सचिवालय के लोक लेखा समिति के पदस्‍थ अधिकारी, कर्मचारी और समस्‍त महालेखाकार कार्यालय के अमले ने भी काफी मेहनत और परिश्रम किया है और ईमानदारी से कार्य किया है. इस कारण आज हम इस स्थिति में यहां पहुंचे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय, मैं पुन: आपको, प्राक्‍कलन समिति के सभापति जी, सदस्‍यगण और हमारी लोक लेखा सिमि‍ति की पूरी टीम को साधुवाद देता हूं जिसमें हमारे आदरणीय अजय विश्‍नोई जी ने मार्गदर्शन किया है और मैं पूरी कमेटी के सभी सदस्‍यों का धन्‍यवाद अदा करते हुए अपनी बात समाप्‍त करता हूं. धन्‍यवाद.

            मंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास(श्री प्रहलाद सिंह पटेल)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं चाहता हूं कि यह सदन मेजें थपथपाकर समिति के इस कार्य के लिये समिति का अभिनंदन करे. मध्यप्रदेश के विधानसभा के इतिहास में अभी तक का सबसे बड़ी संख्या है जिसमें 45 पुरानी समिति के और 82 प्रतिवेदन वर्तमान समिति के मिलाकर 127 और इतना बड़ा बेकलाग पूरा किया है. मैं माननीय सभापति सहित सभी समिति के सदस्यों का, मैं तो अभिनंदन करता ही हूं सरकार की तरफ से सदन भी पूरे समिति के इस काम की सराहना करता है.

(सदन में मेजें थपथपाहट)

          अध्यक्ष महोदय- श्री भंवर सिंह जी और उनकी पूरी टीम ने लोक लेखा समिति ने जो काम किया है और जो बेकलाग को निराकृत किया है. मैं उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं. सदन की ओर से उनका हृदयपूर्वक स्वागत है. मुझे आशा है कि आगे भी यह समिति और तेजी के साथ काम करेगी और सारे बेकलाग को निराकृत करेगी.

          डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह निश्चित रूप से आपका कुशल नेतृत्व है, आपका मार्गदर्शन है और आपके द्वारा बनाई गई यह समिति का कार्य जैसा विवरण में आया है, मैं उसको दोहराना नहीं चाहता लेकिन अनुभव और विद्वता दोनों भंवर सिंह जी में कूट कूट कर भरी है . और इसी के साथ साथ में सचिवालय के समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों की चिंता और गंभीरता का विषय भी रखना चाहूंगा कि उन्होंने इतनी चिंता की, इतनी चिंता की कि बेगलाग पूरा 2004 का था जैसा कि माननीय मंत्री जी ने भी इसका उल्लेख किया है और लगभग इतनी कार्यवाही लंबित थी, 2004 की उसे आप 2015-16 तक लाये, न केवल लाये, जो विगत समिति ने मैं उस पर कोई आश्चर्य नहीं कर रहा हूं मात्र 45 प्रतिवेदन प्रस्तुत किये थे और आज 82 प्रतिवेदन यहां सदन में प्रस्तुत होना अत्यंत महत्वपूर्ण है. इस समिति ने एक उप समिति भी बनाई थी उसके लिये धन्यवाद देना चाहता हू. बड़ा विचार विमर्श हुआ था कि उप समिति बनाई जा सकती है या नहीं बनाई जा सकती है, लेकिन अंतत: उप समिति बनाई और उसमें श्रीमती रीति पाठक जी और अभय मिश्रा जी भी साथ में हमारे सदस्य थे उन्होंने भी इसके लिये बहुत परिश्रम किया , समस्त सदस्यों ने किया, अधिकारियों और कर्मचारियों ने किया . मैं आपके माध्यम से उनके प्रति कृतज्ञता और धन्यवाद ज्ञापित करता हूं. महालेखाकार ने हमें बहुत अच्छा और उचित मार्गदर्शन किया इससे यह समिति को और दिशा मिल सकी. आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद.

12.46 बजे

प्राक्कलन समिति का नवम् एवं दशम् प्रतिवेदन

 

        अध्यक्ष महोदय-- श्री भंवर सिंह शेखावत जी प्राक्कलन समिति का प्रतिवेदन भी प्रस्तुत करेंगे.

          श्री भंवर सिंह शेखावत -- आदरणीय अध्यक्ष महोदय, प्राक्कलन समिति के औजस्वी सभापति और समिति के सदस्यगण. श्रीमान जी इस समिति के सभापति श्री अजय विश्नोई जी आपने पारिवारिक कार्य से अनुपस्थित हैं और इस कारण आपके आदेश से मैं ,प्राक्कलन समिति के नवम् एवं दशम् प्रतिवेदन को भी प्रस्तुत करता हूं.

12.47 बजे

याचिकाओॆ की प्रस्तुति

        अध्यक्ष महोदय-  आज की कार्यसूची के पद क्रमांक 1 से 70 तक की याचिकायें प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.

 

 

 

 

12.48 बजे                                           शासकीय विधि विषयक कार्य

                                   मध्यप्रदेश श्रम कल्याण निधि(संशोधन) विधेयक, 2026

        श्रम मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश श्रम कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्थापन की अनुमति चाहता हूं.

          अध्यक्ष महोदय --प्रश्न यह है कि, मध्यप्रदेश श्रम कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्थापन की अनुमति दी जाये.

अनुमति प्रदान की गई.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मध्यप्रदेश श्रम कल्याण निधि (संशोधन) विधेयक, 2026 का पुर:स्थापन करता हूं.

 

12.49 बजे

नियम 169 के तहत सदन को सूचना

        अध्यक्ष महोदय--मैंने श्री केशव देसाई, सदस्य द्वारा सीएचएस एप्पल हास्पीटल गीता कालोनी, हास्पीटल रोड ग्वालियर के श्री अंकित यादव एवं श्री अमित यादव के विरूद्ध दी गई विशेषाधिकार भंग सूचना को विशेषाधिकार समिति को जांच एवं अनुसंधान एवं प्रतिवेदन हेतु सौंप दिया है.

12.49 बजे

वर्ष  2026-2027 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमश:)

मांग संख्या 19  लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा

 

          मंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा (श्री राजेन्द्र शुक्ल )-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं राज्यपाल महोदय की सिफारिश के अनुसार प्रस्ताव करता हूं कि 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने वाले वर्ष में राज्य की संचित निधि में से प्रस्तावित व्यय के निमित्त राज्यपाल महोदय को -

          अनुदान संख्या 019               लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के लिये                                                                   बाईस हजार तीन सौ बासठ करोड़, सात लाख ,                                                             दस हजार रूपये तक की राशि दी जाये.

 

          अध्यक्ष महोदय-- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

 

          अब इस मांग पर कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत होंगे. कटौती प्रस्तावों की सूची पृथकत: वितरित की जा चुकी है. प्रस्तावक सदस्य का नाम पुकारे जाने पर जो माननीय सदस्य हाथ उठाकर कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाने हेतु सहमति देंगे, उनके ही कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुये माने जायेंगे

 

            मांग संख्या- 019                  लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा

 

क्रमांक 01       श्री सचिन सुभाष यादव

क्रमांक 02       श्री नारायण सिंह पट्टा

क्रमांक 04       श्री फूलसिंह बरैया

क्रमांक 05       श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाह

क्रमांक 06       श्री यादवेन्द्र सिंह

क्रमांक 07       श्री अभय मिश्रा

क्रमांक 10       श्रीमती चन्दा सुरेन्द्र सिंह गौर

क्रमांक 12       श्री राजन मण्डलोई.

 

          उपस्थित सदस्यों के कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुये. अब मांग और कटौती प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

12.50 बजे                              अध्यक्षीय घोषणा

भोजनावकाश नहीं होने विषयक

अध्यक्ष महोदय -- आज भोजनावकाश नहीं होगा.  भोजन  लॉबी में उपलब्ध है,  सदसयगण अपनी सुविधानुसार ग्रहण कर सकते हैं.  पूरा  दिन काम काज  करना है आज. श्रीमती अर्चना चिटनीस जी. 

 

12.51 बजे               वर्ष 2026-27  की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमशः)

          श्रीमती अर्चना चिटनीस (बुरहानपुर) --  अध्यक्ष महोदय,  जिस देश  के प्रधानमंत्री देश  का गौरव, दुनिया के हर  क्षेत्र में बढ़ाने  के लिये कमिटेड  प्रधानमंत्री की प्राथमिकता  हर भारतीय का स्वास्थ्य हो. देश का स्वास्थ्य हो और प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन  यादव  जी  का  मिशन प्रधानमंत्री  जी के  विजन को  म.प्र. में साकार करना हो..

          अध्यक्ष महोदय--   एक मिनट अर्चना जी.  मेरा  सभी सदस्यों से अनुरोध है  पक्ष  और प्रतिपक्ष दोनों के, जो हमारे पहले वक्ता हैं,  वह 15-15 मिनट लें.  बाकी जो शेष वक्ता हैं,  वह  5 मिनट की सीमा के भीतर  अपने  जो भी विषय हैं,  उनको प्रस्तुत करेंगे. तो  मुझे लगता है कि आज की कार्यवाही  को  ठीक समय  तक पूर्ण करने  में मदद मिलेगी.

          श्रीमती  अर्चना चिटनीस--  अध्यक्ष महोदय,  मैं यही  कहना चाह रही थी कि  देश  के हृदय प्रदेश,  म.प्र.  के  स्वास्थ्य और चिकित्सा विभाग पर चर्चा करने का अवसर  मिलना, मैं  अनने  लिये भी बहुत महत्वपूर्ण मानती हूं,  और  इस

12.53 बजे                 {सभापति महोदय (डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय) पीठासीन हुए.}

 जिम्मेदारी को संभाल  रहे म.प्र.  के उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल जी  को  मैं इस बात की बधाई देते  हुए अपनी  बात प्रारम्भ करुंगी कि  इतने चुनौतीपूर्ण विभाग को  जिस प्रकार मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में  वह संभाल रहे हैं और उन्हें  वित्तीय वर्ष 2026-27  हेतु म.प्र.  के  स्वास्थ्य  एवं चिकित्सा विभाग हेतु  22362.57 करोड़ का  कुल बजट प्रावधान  उनके  विभाग के लिये किया गया है.  जो गत वर्ष से  129 करोड़ रुपये अधिक है. इसके लिये   स्वास्थ्य विभाग को  बहुत सारी बधाई और मुख्यमंत्री जी  एवं वित्त  मंत्री जी को   इसके  लिये विशेषकर के बहुत  मैं धन्यवाद देना चाहती हूं. स्वास्थ्य को लेकर  दुनिया में  और इस विकसित दुनिया में बहुत सारे विचार बहुत तेज गति से बदले हैं और यहां तक कि  यह माना गया है कि जीडीपी से भी अधिक ह्यूमन हेल्थ  इंडेक्स है. सभापति महोदय, Health and Human Development is an interdisciplinary field focused on improving, measuring and sustaining the well being capabilities and longevity of people. It emphasizes that health measured by life expectancy physical, mental and social well being is the central to expanding human freedom, choices and economic growth.   और इसके आधार पर  स्वास्थ्य शिक्षा  और लोगों के जीवन स्तर को   अन्य किसी भी  वैभव  से  अधिक महत्व   दिया जाने का  एक एप्रोच हम  बढ़ते हुए इस दुनिया में  देख रहे हैं.  यह जो विभाग है, इस विभाग की  विशालता  और विराटता का अंदाजा, वैसे हम सबको है. लेकिन इस विभाग पर चर्चा करने का जब अवसर मिला और विभाग को मैंने डीप इनसाइड देखने की कोशिश करी तो इसका और एहसास हुआ कि प्रदेश के अंतर्गत हमारे पास 55 जिला चिकित्‍सालय हैं, 158 सिविल अस्‍पताल हैं, 348 सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं, 1442 प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं, जिनमें कुल मिलाकर 47 हजार 366 बिस्‍तर उपलब्‍ध हैं, 10 हजार 258 उप-स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं, कुल 4 शहरी सामुदायिक उप-स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं, 141 शहरी प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, 394 मुख्‍यमंत्री संजीवनी क्‍लीनिक इस विभाग में क्रियाशील हैं. अर्थात कितना डीप इनसाइड शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में यह विभाग अपनी स्‍वास्‍थ्‍य की सेवायें जन-जन तक पहुंचा रहा है.

          माननीय सभापति महोदय, अगर नटशेल में ही बात की जाये और प्रमुख उपलब्धियों पर ही चर्चा करके विषय को आगे बढ़ाया जाये तो मैं दो तुलना करना चाहती हूं वर्ष 2003 और 2026 में और 2003 और 2026 मात्र पर्याप्‍त नहीं है, तुलना करने के लिये. हम इसको केवल अपना अचीवमेंट नहीं मान सकते. डॉ. मोहन यादव जी की सरकार और राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी की उपलब्धि बतानी है तो 2023 और 2026 में भी तुलना करना पड़ेगी.

          माननीय सभापति महोदय, आज डॉक्‍टरों के अभाव को लेकर हम सब कन्‍सर्न हैं. लगातार डॉक्‍टर्स की नियुक्तियों के बाद भी जितने पद हैं और जितनी नियुक्ति हो रही है उसमें गैप है. इसको एड्रेस करने के लिये सरकार ने लगातार चिकित्‍सा महाविद्यालयों पर इस कदर ध्‍यान दिया है, इसको अण्‍डर लाईन करना मैं बहुत अत्‍यावश्‍यक समझती हूं. वर्ष 2003 में एमबीबीएस के शासकीय कॉलेजों के पद 660 थे, वर्ष 2023 में 2275 और 660 से 2275 पर आप रूके नहीं. विगत दो साल में 2275 से बढ़कर 2850 हमारी एमबीबीएस की सीटें हुई हैं. इसके लिये चिकित्‍सा शिक्षा विभाग प्रशंसा का पात्र है, अभिनंदन का पात्र है और निजी महाविद्यालय की अगर हम बात करें तो मात्र 100 सीटें निजी महाविद्यालयों में हुआ करती थी, जो वर्ष 2023 तक बढ़कर 2400 हुई और आज जब हम चर्चा कर रहे हैं, तब 2700 सीटें हमारे प्रायवेट चिकित्‍सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस की उपलब्‍ध हैं और शासकीय कॉलेजों में तो पीजी का एक बहुत बड़ा एक स्‍टीव डवलपमेंट दिखता है. जहां वर्ष में 2003 में 140 सीटें थीं, 2023 में 1262 सीटें थीं, आज हमारे शासकीय महाविद्यालयों में 1468 सीटें पोस्‍ट ग्रेजुएशन की करके, एक प्रकार से टिप ऑफ द आइसबर्ग तक एक प्रकार से पहुंचे. इसी प्रकार बीडीएस, एनडीएस सभी हमारे क्षेत्रों में डॉक्‍टर्स की उपलब्‍धता निरंतर बढे. इस दृष्टि से विभाग और सम्‍पूर्ण शासन लगातार काम कर रहा है. जहां हमारे 39 जिला अस्‍पताल थे, वहां वर्ष 2003 तक बढ़कर 52 हुए और आज मध्‍यप्रदेश में 55 जिला अस्‍पताल संचालित किये जा रहे हैं.          माननीय सभापति महोदय, एक उपलब्‍धि जो कि उल्‍लेखनीय है, वर्ष 2003 में हमारी शिशु मृत्‍युदर 85 थी, जो कम होकर वर्ष 2023 में 85 से कम होकर 43  हुई और आज दो साल में 43 से कम होकर 37 हुई जो अपने आप में एक मानवीय दृष्टि से बड़ी मार्मिक उपलब्धि हमारे लिये है. बच्‍चा जन्‍म लेते ही मर जाता था . 85 से हम 43 पर पहुंचे और अब 37 पर पहुंचे. इसी प्रकार मातृ मृत्यु दर  क्योंकि शिशु मृत्यु दर से और नाजूक विषय है, जब एक मां संसार से जाती है तो आगे की दुनिया को बढ़ाने की संभावनाएं भी कम से कम तो होती जाती हैं. मातृ मृत्यु दर, बहुत दुख के साथ कहना पड़ता है वर्ष 2003 में 498 थी, वर्ष 2023 में कम होकर 173 हुई और वर्ष 2026 में जो आपने उपलब्धि हासिल की है, वह निश्चित तौर पर उल्लेखनीय है, वह 173 से भी कम होकर आज 142 पर हमने एमएमआर को लेकर और प्रगति हासिल की है.

            सभापति महोदय, संस्थागत प्रसव जो 29.7 प्रतिशत था, वह वर्ष 2023 में 81.85 और अब तो मंत्री जी के सामने बात करने में ऐसा नहीं है कि मैं मेरे क्षेत्र की मांगों पर कुछ बोलने वाली हूं, इसलिए यह सब बातें करना आवश्यक है. परन्तु यह फेक्ट है, यह एनएफएचएस 5 के ये आंकड़े हैं कि 81.85 से मात्र 2 साल में हम 90 प्रतिशत तक पहुंचे हैं जो एक लम्बी दूरी आपने मात्र 2 साल में तय की है.

सभापति महोदय, उपलब्धियां बहुत हैं, समय सीमित है परन्तु कुछ तो बहुत मानवीय विषय इस सरकार ने जो हाथ में लिये हैं उनको जरूर आज इस सदन में मैं अपने तरफ से कहना चाहूंगी. प्रदेश में देहदान करने वाले 60 मृतकों को भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने डॉ. मोहन यादव जी की सरकार ने, हमारे बहुत संवेदनशील स्वास्थ्य मंत्री जी के नेतृत्व में जो किया है, वह सच में वंदनीय है. 60 देहदान करने वालों को गार्ड आफ आर्नर प्रदान इस सरकार द्वारा किया गया है, मतलब जो अच्छा काम करे, जो संवेदनशीलता से अपना मृत देह भी  दुनिया के मानवता के कल्याण  में दे जाय उसको गार्ड आफ आर्नर देने का निर्णय करना, उसको एग्जीक्यूट करना निश्चित तौर पर उल्लेखनीय है. (मेजों की थपथपाहट)..

सभापति महोदय, इसके साथ ही प्रदेश में 148 शव वाहनों की सेवा प्रारंभ की गई है. पूर्व की संचालित योजनाओं के साथ साथ बहुत सी नयी योजनाओं का क्रियान्वयन भी हुआ है . सीएम केयर के अंतर्गत कैंसर के उपचार पर ध्यान दिया गया है, इसके लिए करीब 300 करोड़ का इस बजट में प्रावीजन किया गया है और कैंसर की बात करने के साथ साथ जो सीएम के लिए जो प्रस्तावित सेंटर आफ एक्सीलेंस की स्थापना का उल्लेख इस बजट में है, उसके साथ साथ सभापति महोदय, मैं एक बात को विशेष तौर पर इंगित करना चाहती हूं.

          सभापति महोदय, यह जो हमारा विभाग है, यह विभाग आइसोलेशन में काम करे, यह ऐसा विभाग नहीं है. मैंने स्वास्थ्य की दुनिया में मानी जाने वाली डेफिनेशन का उल्लेख करते हुए इंटरडिसिप्लीनरी वर्ड का प्रयोग किया था. मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से कुछ अनुरोध करना चाहती हूं कि इंटरडिसिप्लीनरी फील्ड पर फोकस रखते हुए आप अपनी मंशा को बेहतर तरीके से नीचे तक उतारने के लिए महिला बाल विकास और स्वास्थ्य विभाग का परस्पर समन्वय बहुत आवश्यक है. आज बहुत बड़ी चुनौती जो आज हमारे सामने है, हमने एमएमआर और आईएमएमआर में तो उपलब्धि हासिल की, लेकिन एनिमिया हमारे सामने एक बहुत बड़ी चुनौती है और महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा मंत्री जी भी यहां पर उपस्थित हैं. इन सबके साथ में कॉर्डिनेशन स्‍थापित किये बिना हम एनीमिया को एड्रेस नहीं कर सकते. अब हर दृष्‍टि से हमारी आर्थिक प्रगति हो रही है. हम उन बहनों को लाड़ली बहनों तक का हम लाभ दे रहे हैं. उनके हाथ में दो पैसे हमेशा रहें, इसकी चिंता कर रहे हैं. ऐसी परिस्‍थिति में हमारा एनीमिया बढ़ा है और 54.7 परसेंट महिलाओं में और बच्‍चों में 73 प्रतिशत है. उसमें भी लड़कियों और लड़कों में जो गैप है वह फीमेल्‍स में 57.4 और मेल्‍स में 32.8 परसेंट है. इसमें मेरा एक सुझाव माननीय मंत्री जी के लिए है कि फोलिक एसिड के तौर पर हम आयरन विभाग में देते हैं. रिसर्चेस का मानना है कि मात्र आयरन इंटेक से आयरन का एब्‍जॉर्ब्‍शन नहीं होता. वह हम खाते हैं और बिना एब्‍जॉर्ब्‍शन के वह हमारे शरीर से बाहर निकल जाता है. रिसर्चेस बताती हैं और अब सरकार भी इसको मान्‍य करती है. स्‍वास्‍थ्‍य को लेकर जितनी भी अन्‍तर्राष्‍ट्रीय संस्‍थाएं हैं, वे सब इसको मान्‍य करती हैं कि आयरन के साथ-साथ विटामिन-सी का इंटेक बहुत आवश्‍यक है. एनीमिया का मूल कारण विटामिन-सी की डेफिशिएंसी है इसलिए सरकार अब भारत सरकार से इस बात के लिए आग्रह करें और महिला बाल विकास मंत्री जी यहां बैठीं हैं, वह भी आपके साथ में आप दोनों जाकर अगर इस पर प्रयास करेंगे, तो मध्‍यप्रदेश से एनीमिया को एड्रेस करने के लिए फोलिक एसिड के बजाय फेरेस एस्‍कॉर्बिट टेबलेट मध्‍यप्रदेश को मिले, जिसमें विटामिन-सी का मॉलिक्‍यूल उसके अंदर इनबिल्‍ट है, ताकि जो इसका सेवन करे, उसको एसिमिलेशन हो सके और हम एनीमिया जैसी चीज को पाइंटआउट कर सकें. हम उसको पूरा कर सकें. मात्र दवाइयों से बात नहीं बनेगी.

          सभापति महोदय, लाइफ साइकल एप्रोच की बहुत आवश्‍यकता है और फलदार वृक्ष ग्रामीण क्षेत्र में बहुत तेज गति से कम हुए हैं. जब प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि "एक पेड़ मां के नाम" तो वे सेहत की बात कर रहे होते हैं. हम आंवला, कबीट, सुरजना, कैरी, टमाटर, नींबू, इमली, जामुन जैसी चीजें हमारे यहां हैा. अंबाड़ी के फूल खाए जाते हैं और यह लोकल में उपलब्‍ध चीजें हैं. उनका सेवन खटाई के सेवन के बिना हम एनीमिया को मीटआउट नहीं कर पाएंगे और इसलिए मेरा पुन: आग्रह है कि फोलिक एसिड आयरन के साथ विटामिन-सी के इंटेक पर हम सभी विभाग मिलकर एक लाइफ स्‍टाइल एप्रोच के साथ ही इस विषय को हम एड्रेस कर पाएंगे.

          सभापति महोदय, मैंने माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी से इस बात के लिए आग्रह किया और मुझे प्रसन्‍नता है कि उन्‍होंने मेरे आग्रह को समझते हुए इस बात का एक्‍जीक्‍यूशन भी किया, आदेश भी निकाला, पर एक्‍जीक्‍यूशन में कहीं हम ही कमजोर पड़ जाते हैं. अगर सरकारी डॉक्‍टर बाहर जाकर इलाज कर सकता है, तो बाहर प्रैक्‍टिस करने वाला डॉक्‍टर सरकारी अस्‍पताल में आकर इलाज करे, हम उसको भी आयुष्‍मान की तरफ से कुछ न कुछ रेम्‍यूनेरेशन दे दें. ताकि जो हमारे सरकारी अस्‍पतालों में डॉक्‍टर्स का अभाव है, वह बाहर का जो डॉक्‍टर प्राइवेट प्रैक्‍टिस में है उसके लिए भी हमें ओपनिंग कोई न कोई तरीके से रखना चाहिए. जिससे डॉक्‍टर्स के अभाव को हम प्राइवेट डॉक्‍टर्स का पार्टिपिटेशन करते हुए करें. लेकिन जब आप यह लागू करेंगे, तो निश्‍चित तौर पर इसकी विजिलेंस और मॉनिटरिंग बहुत आवश्‍यक होगी. ताकि इस व्‍यवस्‍था का दुरूपयोग कोई भी न कर पाए और बिना जनप्रतिनिधियों के इन्‍वॉल्‍वमेंट के कोई एक मंत्री हर सीएचसी और पीएचसी पर पहुंचकर व्‍यवस्‍थाओं को सुधार लेगा, ऐसा संभव नहीं दिखता है.

          सभापति महोदय, एक बड़ा काम माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी ने अपने विभाग में किया. उन्‍होंने टेली मेडिसिन का काम किया. उसको भी बिना बडे़ एक्‍सपेंडिचर के मेडिकल कॉलेजेस से जोड़ते हुए आपने टेली मेडिसिन का प्रावधान किया और उसमें 1 करोड़ से अधिक की कॉस्‍ट लगी. मेडिकल कॉलेज के एक्‍सपर्ट से फोन पर बात करके स्‍थानीय तौर पर छोटी जगहों पर हमने मरीजों को उनके कष्‍ट का निवारण करने के लिए अपनी बात को चरितार्थ करने का एक अपने आप में बड़ा उदाहरण है. एक बड़ा अभाव है जो हमारे जैसे लोगों में भी और जन-सामान्‍य में भी है. अचानक कोई कष्ट आ जाये, तो हम कहां जायें, किस अस्पताल में जायें ? किस अस्पताल में कौन सी बीमारी के लिये आयुष्मान का सर्टीफिकेशन और किस बीमारी के लिये नहीं है. मेरा मंत्री जी से एक आग्रह है कि रेडक्रास समितियों के साथ मिलकर मेडिकल गाईडेंस का एक प्रोवीजन जिला स्तर पर अवश्य करें. चिकित्सा शिक्षा विभाग और आयुष विभाग का कहीं न कहीं कॉर्डीनेशन होने से प्रधानमंत्री जी का आयुष के प्रति उनकी जो श्रद्धा है जो इस देश की प्रतिष्ठा है उसके अनुरूप मेरे अपने जिले में हम बहुत अच्छा एक आयुर्वेदिक कॉलेज चलाते हैं उसकी आईपीडी हमारे सरकारी अस्पताल में हो जाये तो हमें एक अतिरिक्त सर्विस मिलेगी और दोनों विधाओं में एक संबंध बन जायेगा. कई बार जहां पर एलोपैथी खत्म होती है वहां से आयुर्वेद कई बार बहुत सी बीमारियों को एड्रेस करने की स्थिति में आ जाता है. मैं अपनी बात को पूरा करते हुए केवल अपने क्षेत्र के लिये और देखा जाये तो प्रदेश की दृष्टि से भी एक बात के लिये आपसे आग्रह करूंगी कि हम एफल्यूएंट ट्रीटमेंट के लिये निजी चिकित्सालयों को आग्रह करती हूं. हमारे हर जिला चिकित्सालय में ईटीपी की स्थापना हो इसका प्रावधान माननीय मंत्री जी करें. उसके साथ हम चाहें तो कुछ प्रायवेट अस्पताल एवं निजी अस्पताल उसके साथ जुड़ सकते हैं. एक एफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट हम प्रत्येक जिला अस्पताल में उसको प्रारंभ किया तो उसकी सुविधा होगी. ऐसा नहीं है कि आप इस दिशा में काम नहीं कर रहे हैं. वर्तमान में आप धार, खंडवा में झाबुआ इन्दौर में एफ्ल्यूएंट ट्रीटमेंट प्लांट आप इसका अन्य जिलों में भी इसका फैलाव करें तथा इसको मेरे जिले में भी इसको सुनिश्चित करें. ताकि हम संक्रमण के बढ़ते नुकसान से अपने आप को बचा सकें. सभापति महोदय, आपने हमें एमडी मेडिसिन हमें बहुत सालों बाद हमें मिला मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देती हूं. एनीस्थीसिया चार साल से नहीं था आपने दिया उसके लिये आपको धन्यवाद देती हूं. मानसिक रोग वाला डॉक्टर हमारे बुरहानपुर में होगा हमें इसकी कल्पना ही नहीं थी, आपने हमें दिया. मैं आपको धन्यवाद देती हूं. आपने एमबीबीएस के कई डॉक्टर्स दिये, नर्सिंग स्टॉफ दिया, इसके लिये भी धन्यवाद देती हूं. साथ ही रेडियोलॉजी, गायनेकोलॉजिस्ट भी दिये हैं. ईएनटी के डॉक्टर्स भी हमें मिले इसके लिये आपसे आग्रह करती हूं. हमारा अस्पताल आज 200 बेड का है उसको आप 300 बेड का करें. शाहपुर के मेरे सीएफसी को सिविल अस्पताल का दर्जा देने के लिये जो भी प्रक्रिया करनी है वह करके पूरा करें. सभापति महोदय गंभीर विषय है आयुष्मान की प्रधानमंत्री जी बहुत ही महत्वाकांक्षी योजना है. मैं किसी अस्पताल का नाम नहीं लूंगी एक निजी अस्पताल की शिकायत होती है, शिकायत पर जांच संस्थित होती है, जांच पूरी नहीं होती और जो शिकायत के बाद आयुष्मान का उनका जो लिंकेज निलंबित हुआ था उसकी जांच किये बिना उसको पुनः चालू कर दिया जाता है. माननीय मंत्री जी इन सब चीजों को अपने ध्यान में रखें. चाहे वह किसी भी विभाग में रहे हों हर विभाग में इन्होंने अच्छा ही काम करके दिखाया है. आयुष्मान का क्रियान्वयन हमारे प्रदेश में इस कदर हो रहा है कि एक प्रकार से हम 94 प्रतिशत लोगों को आयुष्मान कार्ड बनाकर के दे चुके हैं उसका एज्यूकेशन अच्छे से और दुरूपयोग करने वालों पर बंदिश लगे. स्वास्थ्य विभाग के साथ साथ मेरा यह निश्चित मानना है कि महिला बाल विकास एवं स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा एवं कृषि क्योंकि प्रेस्टीसाईज का उपयोग बुरी तरह हमें केंसर के साथ फोर्टिलिटि कम कर रहा है, मानसिक रोग कर रहा है. पार्किनसन डिसीज कर रहा है. एग्रीकल्चार विभाग के साथ मिलकर जैसे सिगरेट के डिब्बे पर लिखा होता है इसके सेवन से नुकसान है तो किस प्रेस्टीसाईज के सेवन से क्या नुकसान है यह भी खाने वाले को अवगत हो. यह कृषिमंत्री जी के साथ साथ स्वास्थ्य मंत्री भी इसकी चिंता करें. अब तो बोर्ड ऑफ ओर्गेनाईजेशन भी इसको स्वीकार करती है. माननीय प्रधानमंत्री जी केवल स्वास्थ्य की बात करते हैं तो वह सिर्फ आयुष्मान की बात नहीं करते वह इसके साथ साथ प्राकृतिक खेती की भी बात करते हैं हम सबको इसी एप्रोच के साथ इस दिशा में आगे बढ़ना होगा. धन्यवाद.

          सभापति महोदय श्री भंवर सिंह शेखावत जी.         

श्री भंवर सिंह शेखावत (बदनावर) आदरणीय सभापति जी, बहुत बहुत धन्‍यवाद. बहुत महत्‍वपूर्ण विषय पर आपने बोलने का अवसर दिया है. वैसे तो इस विभाग के जो प्रमुख हैं. बहुत सौम्‍य है, सभ्‍य है और बड़े दयालू हैं. मैं आज उनकी इस बजट में तारीफ करना चाहता था, लेकिन जो वास्‍तविक स्थिति इस विभाग की है जो उनको दिया गया है, इसमें उनका तो कोई कसूर है नहीं, लेकिन विभाग का जो कार्यकलाप है और जिस प्रकार से विभाग काम कर रहा है और जिस प्रकार से जनता तक ये बात पहुंची है, उसका उल्‍लेख करना यहां बहुत जरूरी है. पिछली बार जब बजट आया था. अभी बहन अर्चना जी अपना वक्‍तव्‍य दे रही थीं, बहुत अच्‍छी वक्‍ता है, मैं कॉलेज के समय से उनको जानता हूं, बोलने और अपनी बातों को प्रभावी ढंग से रखती हैं. उन्‍होंने 20-25 मिनट लिए भाषण देने में, पूरे भाषण में वे कोशिश करके भी इस विभाग की बहुत अच्‍छाईयों को भी नहीं बता पाईं. वे चाहती थीं कि आपके समर्थन में बोले, बोलना भी चाहिए, लेकिन समर्थन में क्‍या बोले, इस विभाग का जो आउटपुट है, जो जनता तक पिक्‍चर बन रही है, जिसको सुधारने का प्रयास आप लगातार कर रहे हैं. इस विकट विभाग को प्रयास करके आप सुधारने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन आज फील्‍ड में जो व्‍यवस्‍था है, वह बड़ी विपरीत है, उसकी चर्चा करना बहुत जरूरी है. पिछले साल भी हमने बजट पास किया, पिछले साल का भाषण मैं देख रहा था, जो पिछले साल व्‍यवस्‍थाएं, परिस्थितियां थीं, आज भी कमोवेश वही परिस्थितियां हमारे समक्ष है, समस्‍या के रूप में, जिसका समाधान ढूंढा तो गया लेकिन पूरा नहीं किया जा रहा है. बातें तो बार बार आती है, क्‍या कमियां हैं, अस्‍तपालों के अंदर, क्‍या स्थितियां है, वास्‍तविक रूप से जितने विधायक हैं, उनकी जो प्रायमरी डिस्‍पेंसरीज है, जो प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द हैं, उनकी क्‍या स्थितियां हैं आखिर हम क्‍यों इस व्‍यवस्‍था को सुधारने में सक्षम नहीं हो पा रहे हैं. हमारे बजट का आकार बढ़ता है, करोड़ों, अरबों का बजट. बजट का आकार बढ़ाने से कोई खूबसूरती तो नहीं आती. हम जब तक आम आदमी को, जो गरीब है, मध्‍यम वर्ग का है, क्‍योंकि उच्‍च वर्ग के व्‍यक्ति को आर्थिक रूप से कोई कठिनाई नहीं होती, वह कितना भी बड़ा इलाज करवा सकता है, लेकिन हमारी आबादी का जो 80-85 प्रतिशत हिस्‍सा है, वह कहीं न कहीं सरकार की तरफ देखता है कि वह अस्‍पताल चला जाए, तो उसको इलाज मिल जाए. अस्‍पताल जाए तो उसकी पूछ परख हो जाए, जेब पर कम से कम भार पड़े, ये उसकी इच्‍छा रहती है. लेकिन आज हम अमृत काल और पता नहीं, क्‍या क्‍या काल, हम मना रहे हैं, ये काल मनाने में तो सामने वाली पार्टी बहुत मजबूत है, लेकिन आज जो वास्‍तविकताएं हम देख रहे हैं, वह मन को पीड़ा देने वाली है माननीय राजेन्‍द्र जी और मन दुखी होता है कि हम इतने साल बाद भी आम आदमी को सस्‍ता, सुलभ इलाज ही मुहैया नहीं करवा पा रहे हैं, कारण क्‍या है. ये व्‍यवस्‍था कहां अटकी हुई हैं. हम सड़कों और बिल्डिंगों में बहुत अच्‍छा काम करते हैं, लेकिन अस्‍पतालों के मामलों में हम इतने पीछे क्‍यों है. सखलेचा जी आप कुछ कहना चाहते हैं. (सखलेचा जी के कुछ कहने पर)

श्री ओमप्रकाश सखलेचा आयुष्‍मान भी ठीक है.

सभापति महोदय सखलेचा जी, आपका भी नाम है, उन्‍हें बोलने दीजिए.

            श्री भंवर सिंह शेखावत आप आयुष्‍मान का करिश्‍मा देखोगे, तो कलेजा फट जाएगा. आयुष्‍मान के नाम से क्‍या खेल हो रहा है. आयुष्‍मान का कितने लोगों को लाभ मिल रहा है. सखलेचा जी, जिस सदन में आप बैठकर के चर्चा कर रहे हो, इसी सदन में आपके पिता जी भी यही कहते थे, जो मैं कह रहा हूं. हम व्‍यवस्‍था को सुधारने की कोशिश जरूर कर रहे हैं, लेकिन हम वहां पहुंच नहीं पा रहे हैं. अब एक ही बात बता देते हैं जितने अस्‍पताल है. उसके अंदर आज की तारीख में हम एम.बी.बी.एस. सीटें बढ़ाने की बात करते हैं कि हमने एम.बी.बी.एस. सीटें इतनी कर दी हैं. आप हमारे जितने डॉक्‍टर्स बन रहे हैं, पिछले दस साल का ऑडिट तो कराईये, मध्‍यप्रदेश में पिछले दस साल के अंदर जितने डॉक्‍टर्स बने हैं, उन डॉक्‍टरों में से कितने डॉक्‍टर मध्‍यप्रदेश में सेवा दे रहे हैं या इस देश में सेवा दे रहे हैं, जब हम विदेशों में जाते हैं, आप यूरोप में जाओ, आप लंदन में जाओ, आप अमेरिका में जाओ, वहां के सारे अस्‍पताल हिंदुस्‍तान के डॉक्‍टरों के भरोसे चल रहे हैं, हमारे डॉक्‍टरों ने वहां पर कीर्तिमान स्‍थापित किये हैं, वहां की सारी स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍थाओं का जिम्‍मा, हिंदुस्‍तान के जो पढ़े हुए डॉक्‍टर्स हैं, यहां से जो एम.बी.बी.एस. करके जाते हैं, वह अमेरिका और यूरोप की व्‍यवस्‍थाएं संभालते हैं, क्‍या हमने कभी इस बात के बारे में सोचा है? आप आदरणीय नरेन्‍द्र मोदी जी की बड़ी तारीफ करते हैं और करना भी चाहिए, राष्‍ट्रीय स्‍तर पर आपको अभी कोई पांच साल, दस साल, पंद्रह साल सत्‍ता में आये हुए हो गये हैं. मेरा यह कहना है कि आप तो दस साल का ऑडिट करिये कि मध्‍यप्रदेश के कितने डॉक्‍टर एम.बी.बी.एस.  बनें और उन एम.बी.बी.एस.  डॉक्‍टर्स में कितने हमारे मध्‍यप्रदेश के अस्‍पतालों में सेवा दे रहे हैं, इसका कारण क्‍या है, क्‍यों डॉक्‍टर्स हमारे पास रूकना नहीं चाहते हैं, क्‍यों डॉक्‍टर बनने के बाद हमारे अस्‍पतालों को डॉक्‍टर नहीं मिल रहे हैं, क्‍यों गांव का आदमी, किसान आदिवासी जब भी अस्‍पताल जाता है तो उसको डॉक्‍टर नहीं मिलता है? उनको सिर्फ आश्‍वासन मिलता है, उनको रेफर कर दिया जाता है. आप बड़े अस्‍पताल में जाओ, बाहर के अस्‍पताल में जाओ,इंदौर में जाओ, रतलाम में जाओ आदरणीय राजेन्‍द्र जी मैं आपके प्रयासों को किसी नकारात्‍मक स्थिति में नहीं लाना चाहता हूं. आप प्रयास कर रहे हैं, मैं जानता हूं. मैं आपको व्‍यक्तिगत रूप से जानता हूं कि आप ईमानदारी से इस विभाग को ठीक करने में और इस प्रदेश की व्‍यवस्‍था को सुधारने में लगे हैं, लेकिन कहीं न कहीं जो अमला बरसों से इसके अंदर एक माफिया के रूप में बैठा हुआ है, उस पर जरा विचार करिये, बहुत गड़बड़ मामला है. अब आप बताईये कि अस्‍पताल के भवन तो आपने बनाये हैं, मेडीकल कॉलेज आपने बनाये हैं, बहुत अच्‍छी बात है. अभी हमारे साथी यह कह सकते हैं कि पहले इतने मेडीकल कॉलेज थे, आज इतने मेडीकल कॉलेज बन रहे हैं, मेडीकल कॉलेज में बन क्‍या रहा है? मेडीकल कॉलेज के भवन बन रहे हैं. आदरणीय राजेन्‍द्र जी भवन बनने से अस्‍पताल नहीं बना करते हैं, अस्‍पताल बनने के लिये जो आवश्‍यक चीजे हैं, वह जब तक भवनों में नहीं पहुंचेंगी, तब तक वह भवन बने हुए खड़े रहेंगे और जीर्णशीर्ण हो जायेंगे.

          सभापति महोदय, हमारे पास जितने डॉक्‍टर्स आज की तारीख में हैं, वह अपर्याप्‍त हैं, वह पर्याप्‍त नहीं है और डॉक्‍टर ही नहीं, पिछले बारह साल का जरा आप हिसाब निकालिये कि आपकी ही सरकार है, आप ही के मंत्री हैं, पैरामेडीकल स्‍टॉफ का क्‍या हाल है, नर्सेस का क्‍या हाल है? इतना बड़ा नर्सिंग घोटाला हो गया, क्‍या जांच में निकला? विपक्ष का  जो धर्म है, वह तो हम निभाते हैं, यहां चिल्‍लाने का, गला फाड़ने का, जनता की बात को रखने का, जनता की समस्‍या को रखने का वह हम करते हैं, लेकिन उसके बाद रिजेल्‍ट क्‍या है, नर्सिंग घोटाले का आज रिजेल्‍ट क्‍या निकला है? आज भी आधे से ज्‍यादा नर्सिंग कॉलेज और अंडर सबज्‍यूडिस मामलें पड़े हुए हैं, न्‍यायालय के बीच में पड़े हुए हैं, आधे चल रहे हैं, आधे नहीं चल रहे हैं, नर्सेस बन रही है, नहीं बन रही है, नर्सिंग का क्‍या हो रहा है? बिना नर्सिंग स्‍टॉफ के, बिना पेरामेडीकल स्‍टॉफ के आप कितना ही बड़ा डॉक्‍टर और एक्‍सपर्ट रख दीजिये, बिना नीचे के स्‍टॉफ के कोई अस्‍पताल चलता नहीं है, उसकी कोई उपयोगिता नहीं है, तो मेहरबानी करके मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूं कि आप प्रयास तो करें. लेकिन हम 5-7 साल का ऑडिट भी हमारे सामने रखे तो सही कि हमारे डॉक्‍टर्स जा कहां रहे हैं? हम डॉक्‍टर्स को तनख्‍वाह नहीं दे पा रहे हैं, जिस तनख्‍वाह को हम देना चाहते हैं, उस तनख्‍वाह में डॉक्‍टर काम नहीं करना चाहते हैं, क्‍या हम उनकी तनख्‍वाहों के बारे में नहीं सोच सकते हैं? हमारा अरोबों रूपये का बजट बनता है और बेमतलब के कामों में उसे खर्च करते हैं, फ्री बीजिंग करते हैं. फोकट का लाड़ली बहना, अरे दे दो लाड़ली बहनाओं को जितना पैसा देना है, लेकिन अस्‍पताल में अगर डॉक्‍टर नहीं है, नर्स नहीं है, तो लाड़ली बहना का क्‍या मतलब है, अगर मरीज को इलाज नहीं मिल रहा है तो लाड़ली बहना का ओर किसी और फ्री बीजिंग का क्‍या मतलब है? खूब फ्री में लुटाइये, कर्ज करते रहे "ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्" , कर्जे का बजट है, हम लगातार कर्जा ले रहे हैं, लेकिन कर्जा लग तो जाये अपनी सही जगह पर, अगर कर्जा लगाकर भी हम आम आदमी को इलाज दे पायें, तो बहुत खुशी की बात है और कर्ज करने में कोई बुराई नहीं मानता हूं. लेकिन उस कर्ज की राशि का सही उपयोग हो और सही दिशा के अंदर उपयोग हो, इसको तो आपको सुनिश्चित पड़ेगा. अब कई जगह तो आप मशीन खरीदने में ही मास्‍टर हैं. बड़ी-बड़ी मशीन जर्मनी की, यहां की, डॉक्‍टरों की, स्‍केनिंग की, सीटी स्‍केन की, एमआरआई की खरीदी हुई हैं, डायलिसिस की मशीनें खरीदी हुर्ह हैं, लेकिन आदरणीय राजेन्‍द्र जी, इन मशीनों को चलाने वाले आपरेटर हमारे पास नहीं हैं. मशीनें खड़ी-खड़ी जंग खा रही हैं इंदौर के एमवाय अस्‍पताल में जाकर देखिये, 6-6 करोड़ रूपये की मशीन आई हुई हैं और 6 साल से जो मशीन 6-6 करोड़ की खरीदी गईं, 6 साल से वह मशीन जंग खा गईं, लेकिन उसको चलाने वाला कोई व्‍यक्ति नहीं है, आपरेटर नहीं है, स्‍टाफ नहीं है. अंदाज तो लगाईये मेरे बदनावर में डायलिसिस मशीन है, अब डायलिसिस मशीन तो आ गई जब हम रोगी कल्‍याण समिति की बैठक में हरेक विधायक जाते हैं, चर्चा करते होंगे आप लोग अपने-अपने प्राथमिक स्‍वास्‍थ केन्‍द्र के बारे में, अपने अपने डॉक्‍टर्स के बारे में यही आती है बात कि साहब स्‍टॉफ नहीं है, स्‍टॉफ भर्ती करने का हमको पॉवर नहीं है, हम बाहर से आउटसोर्स से कोई व्‍यक्ति रख लेते हैं, उसको तनख्‍वाह देने के पैसे नहीं है. आप इस व्‍यवस्‍था की तरफ देखिये तो सही कि आखिर हम मात कहां खा रहे हैं. इतने अच्‍छे सुशिक्षित मंत्री के होते हुये भी अगर स्‍टाफ के अंदर नीचे तक सुविधा न जाये यह विचारणीय मामला है, बहुत गंभीर है. कल मैं सुन रहा था आदरणीय राकेश सिंह जी का विभाग चल रहा था और सारे विधायक उनकी तारीफ कर रहे थे, बधाई दे रहे थे. मैं चाहता हूं आपको भी ऐसी ही बधाई दी जाये, आप भी उस केटेगरी के अंदर आते हैं, मैं मानता हूं आपको, लेकिन मुझे तकलीफ है यह कहने में आज मैं मेरी विधान सभा की बात बताता हूं दो भवन बनकर तैयार हैं प्राथमिक स्‍वास्‍थ केन्‍द्र  के, भवन बन गये, अब न वहां चपरासी है, न सफाई करने वाला है, न ताला खोलने वाला है, क्‍या गजब है भाई, कितना पैसा आप बर्बाद कर रहे हैं भवन बनाने में, आपने इतने मेडिकल कॉलेजों की बिल्डिंगें बना दीं, लेकिन पुराने मेडिकल कॉलेजों के हाल क्‍या हैं. मध्‍यप्रदेश का एमबायएस देखिये, आपने तो देखा है, अभी 6 महीने पहले की घटना है, चूहों ने मरीजों को कतर लिया, बच्‍चों की मौत हो गई. चूहों के खाने से मरीज मर जाये और इंदौर सरीखे प्रतिष्ठित अस्‍पताल में कैलाश विजयवर्गीय जी यहां हैं नहीं, बड़ी-बड़ी डींगे हांकते हैं, वहां के प्रभारी मंत्री भी हैं. मैंने उनसे निवेदन किया कि यार तुम प्रभारी मंत्री हो, बड़े प्रभावी मंत्री हो और इंदौर का जिला अस्‍पताल का भवन आदरणीय राजेन्‍द्र जी मैं तो 6 साल बोला, लेकिन मुझे वहां से फोन आया रात में मेरी विधान सभा से कि क्‍या बात कर रहे हो शेखावत जी यह भवन तो 13 साल से नहीं बन रहा है. इंदौर जैसी जगह में जिला अस्‍पताल का भवन दो-दो मंत्री हैं, आदरणीय तुलसी सिलावट जी भी हैं और कैलाश विजयवर्गीय जी भी हैं. 13 साल से जिला अस्‍पताल का भवन अधूरा पड़ा हैं इंदौर के अंदर, अंदाज लगाईये आसपास के 50 100 गांव के लोग मेरे ख्‍याल से इंदौर में इलाज कराने आते होंगे. क्‍या स्थिति है. अब इन सब बातों को बार-बार कहने से...

          लोक स्‍वास्‍थ एवं परिवार कल्‍याण मंत्री (श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल)-- माननीय सभापति महोदय, आपकी शंकाओं का तो, कई शंकाओं का जवाब दिया जा सकता था, लेकिन जो जिला अस्‍पताल की बात आप कह रहे हैं, अप्रैल में उसका भव्‍य लोकार्पण होगा. आपको आमंत्रित किया जायेगा.

          श्री भंवर सिंह शेखावत-- हम भी रहेंगे बड़ी खुशी होगी. आप लोकार्पण करने कल आयें, हम आपका स्‍वागत फूलों से करेंगे महाराज. 13 साल के बाद आपके नेतृत्‍व में बन जायेगा तो मुझे खुशी होगी. मैं स्‍वयं आपके स्‍वागत के लिये वहां रहूंगा. लेकिन अब एम्‍बूलेंस भी अब विधायक जो हैं कई बार अपने कोटे से हम लोग एम्‍बूलेंस अस्‍पताल को डोनेट करते हैं और मैं समझता हूं हरेक विधायक ने दी होगी. अर्चना जी आपने दी की नहीं दी (श्रीमती अर्चना चिटनीस जी की ओर देखते हुये) सभी विधायक अपनी राशि में से एक एम्‍बूलेंस अस्‍पताल को भेंट करते हैं, लेकिन आदरणीय राजेन्‍द्र जी अब उस एम्‍बूलेंस को चलाने के लिये ड्राइवर नहीं हैं. अस्‍पताल में खड़ी है एम्‍बलेंस, लेकिन उसको चलाने के लिये ड्राइवर नहीं है और अगर ड्राइवर मिल जाये और किसी मरीज को कहीं और दूर इंदौर या रतलाम ले जाना पड़े तो डीजल डालने के लिये पैसे नहीं है. मेरा निवेदन है आदरणीय राजेन्‍द्र जी आप भी बहुत लर्निड हैं. मैं वर्षों से देख रहा हूं आपको कि आप बड़ी मेहनत करके इस विभाग को ठीक भी करना चाहते हैं, लेकिन यह जो बारीक-बारीक बातें हैं इन पर थोड़ा ध्‍यान दे दीजियेगा तो मैं समझता हूं कि काफी चीजें बन जायेंगी.

          सभापति महोदय--  माननीय शेखावत जी, थोड़ा सा बारीक करके संक्षिप्‍त कर दें.

          श्री भंवर सिंह शेखावत -  मैं 5-7 मिनट और लूंगा. मेरी तो कोई पीड़ा नहीं है. आपकी ही पीड़ा बोल रहा हूं कुछ बातें हैं बहुत लर्नेड हमारे मंत्री हैं इनकी नालेज में ला दूं इनकी नालेज में आ जायेगा तो कुछ जनता का रास्ता निकल जायेगा. मैं यह चाहता था जैसा मैंने कहा कि हमारे डाक्टर्स हमारे यहां नौकरी क्यों नहीं कर रहे हमारे अस्पतालों में क्यों नहीं आना चाहते. हम जो उनको सेलरी देते हैं उनके जो रहने की व्यवस्था करते हैं वह शायद नहीं कर पा रहे हैं गांव के अंदर वह डाक्टर क्यों जायेगा. हम एमबीबीएस की डिग्री  6 साल में देते हैं.  2 साल फील्ड में काम करना होता है शायद उसके बाद डिग्री दी जाती है अर्चना जी. 2 साल तो प्रेक्टिस करता है ना वह अगर एक नियम आप एमबीबीएस की डिग्री में जोड़ दें मेरा सुझाव है और मैंने विदेशों में देखा है कि जब एमबीबीएस की रिटन का कोर्स पूरा हो जाये.

          श्री राजेन्द्र शुक्ल - एमबीबीएस के बाद इंटर्नशिप होती है फिर 2 साल का बाण्ड होता है. आप बाण्ड कह रहे थे ग्रामीण क्षेत्रों में.

          श्री भंवर सिंह शेखावत - मेरा यह निवेदन है कि उसको एमबीबीएस की डिग्री तभी देना चाहिये जब वह दो साल ग्रामीण आदिवासी क्षेत्रों में काम कर ले. दो साल उसको वहां काम करना पड़ेगा तभी एमबीबीएस की डिग्री पूरी होगी नहीं तो डिग्री शहरों से लेकर आदमी स्पेन,जर्मनी,अमेरिका चला जायेगा तनख्वाह वहां मिलती है.  वे लोग तनख्वाह ज्यादा देते हैं और इसलिये देते हैं क्योंकि उनके यहां पढ़ने वाले लोग मिलते नहीं हैं. अमेरिका और इंग्लैण्ड  के अंदर डाक्टरी कोई पढ़ता नहीं है वहां के लोग नहीं पढ़ते हैं. यहां के डाक्टरों को ज्यादा सेलरी देकर वह काम कराते हैं और हम इतना पैसा खर्च करकर डाक्टर बनाते हैं राजेन्द्र जी और हमारा बनाया हुआ डाक्टर एमबीबीएस की डिग्री लेकर वहां जाकर काम करता है वहां काफी तनख्वाह मिलती है काफी. इन सब बातों पर भी जरा आप विचार कर लीजियेगा. आयुष्मान,मेरा भाई बोल रहा था आयुष्मान. बहुत अच्छी योजना है मैं समझता हूं कि प्रधानमंत्री ने बहुत सोच समझकर इस योजना का प्रतिपादन किया है गरीबों को लाभ मिले हम बड़े गर्व के सथ कहते हैं कि 5 लाख की फ्री कौन सी 5 लाख की फ्री सेवा हो रही है अस्पतालों मे जाकर कभी देखा है. कभी आपने इसका आडिट किया है इसका भी 5-10 साल का आडिट कराईये. अस्पताल में जब मरीज जाता है आदरणीय राजेन्द्र जी तो अस्पताल वाले कहते हैं कि अभी तुम पैसे जमा कर दो जब सरकार से पैसा आयेगा तो रिएंबर्स करके आपके खाते में पहुंचा देंगे. यह आयुष्मान का सही चरित्र है. लोगों से पैसे जमा करा लिये जाते हैं. पैसा जमा कराने के बाद अगर आपने यहां से पैसा रिएंबर्स कर दिया तो वह मिल जाता है बाकी अस्पताल भी सब नहीं है उसके अंदर आपने यहां कुछ प्रायवेट अस्पतालों से कांट्रेक्ट कर लिया. इन्दौर के अंदर एम.वाय. अस्पताल के अंदर तो शायद ईलाज नहीं होगा लेकिन भण्डारी अस्पताल में हो जायेगा. इंडेक्स में हो जायेगा. आयुष्मान कार्ड सब जगह कहां चल रहे हैं. आयुष्मान कार्य लेकर मरीज भागता फिरता है और जब अस्पताल में जाता है तो कहते हैं कि पहले आप पैसे जमा करा दीजिये आपका ईलाज कर देते हैं लेकिन जब पैसे सरकार से आयेंगे यह पैसे जाते कहां हैं किसके पास जा रहे हैं कौन समृद्ध हो रहा है. आयुष्मान कार्ड हरएक आदमी के लिये क्यों नहीं है. हर एक अस्पताल में क्यों नहीं है. जब हम 5 लाख की सहायता करना चाहते हैं हमारे एक नागरिक को तो वह चाहे एम.वाय. में जाये या भण्डारी अस्पताल में जाये. प्रायवेट में जाये या सरकारी अस्पताल में जाये. 5 लाख का उसको ईलाज मिलना चाहिये. बड़ी पीठ थपथपाते हैं कि आयुष्मान आयुष्मान,आदरणीय ओमप्रकाश जी आयुष्मान के खेल कितने हो  रहे हैं आप तो इन्दौर जाते हैं कोविड के अंदर आयुष्मान का क्या हुआ कौन-कौन से अस्पताल ने अरबों,खरबों कमा लिये. 5-10 साल के अपने दीवाले पूरे कर लिये आम आदमी को नहीं मिला आप इस पर भी विचार कीजिये राजेन्द्र जी. मैं अपनी बात 2 बातें कहकर समाप्त करता हूं. बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. इस प्रदेश के अंदर सिरप बिक रहा है कोरेक्स जिसकी चर्चा हुई. आपके ही विभाग के हैं लेकिन 25-26 बच्चे मर गये. हमारे यहां जब बहस चल रही थी कि लोग कहने लगे कि 25-26 बच्चे मर गये हैं मंत्री जी का इस्तीफा मांगो. मंत्री जी का उससे क्या लेना देना है. ये जो सिरप बिक रहा है, ये जो बाहर में दवाएं अवैध रूप से बिक रही हैं, यह तो प्रशासन और शासन के तंत्र का काम है. लेकिन हम आप पर थोंप देते हैं कि साहब, 25 बच्‍चे मर गए, इसके लिए राजेन्‍द्र जी जवाबदार हैं. अब मंत्री बेचारा बातें तो सुन लेगा और क्‍या करेगा. लेकिन हमारी व्‍यवस्‍था कितनी चरमरा रही है. हमारा नीचे का तंत्र क्‍या कर रहा है. ये सिरप बाजार में कैसे बिक रही हैं. ये अवैध दवाएं कैसे बिक रही हैं. आप अस्‍पतालों में दवाएं भेजते हैं. अस्‍पतालों से दवाएं बाहर आ जाती हैं. 4 करोड़ रुपये की दवाएं एमवाय हॉस्‍पिटल के बाहर फेंकी गई. आपके द्वारा भेजी गई थीं. जब उन दवाओं को इकट्ठा किया गया तो वे सब दवाएं करेंट में चलने वाली थीं. आज काम में आने वाली दवाएं थीं. वहां से लोग उठाकर गाड़ियों में भरकर बाहर उपयोग करते हैं. कहीं न कहीं आपके तंत्र में गड़बड़ी है. आपकी व्‍यवस्‍था में गड़बड़ी है. आदरणीय राजेन्‍द्र जी, आप इस व्‍यवस्‍था को सुधारिए. बाकी सब बातें तो आलोचना करने के लिए बहुत मिल जाएंगी.

          सभापति महोदय -- बस, अब समाप्‍त करें.

          श्री भंवर सिंह शेखावत -- सभापति महोदय, लेकिन प्रदेश की स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था वाकई चरमरा गई हैं. मैं आपको धन्‍यवाद देना चाहता हूँ. आपकी पीठ थपथपाना चाहता हूँ. लेकिन मजबूर हूँ. जनता की बात को अनदेखा मैं कर नहीं सकता और इस प्‍लैटफॉर्म पर खड़े होकर के मैं आपकी तारीफ करूं, सरकार की तारीफ करना चाहता हूँ कि आप प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इस अमले को सुधारिए. इस व्‍यवस्‍था को सुधारिए. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय -- बहुत-बहुत धन्‍यवाद शेखावत जी. श्री राजेन्‍द्र मेश्राम जी और मेरा सभी माननीय से अब अनुरोध है कि माननीय अध्‍यक्ष जी के निर्देश पर अब जो भी सदस्‍य बोलेंगे, 5-5 मिनट में अपनी बात पूरी करें.  

          श्री राजेन्‍द्र मेश्राम (देवसर) -- बहुत-बहुत धन्‍यवाद सभापति महोदय. माननीय सभापति जी, मैं मांग संख्‍या 19 लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा के पक्ष में अपने विचार रख रहा हूँ.

          माननीय सभापति महोदय, मानव का सर्वश्रेष्‍ठ धन उसका निरोग एवं स्‍वस्‍थ शरीर है. मैं आपके माध्‍यम से देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री श्रीमान नरेन्‍द्र भाई मोदी को धन्‍यवाद ज्ञापित करना चाहता हूँ. उन्‍होंने देश में चिकित्‍सा के हित में अनेक जनकल्‍याणकारी योजनाएं चलाकर अद्वितीय कार्य किया है. प्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉक्‍टर मोहन यादव जी ने उनकी योजनाओं को शत्-प्रतिशत अपने प्रदेश में जमीन पर उतारने का अद्वितीय कार्य किया है. जो प्रदेश के उपमुख्‍यमंत्री हैं, जिनके पास इस लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा विभाग का दायित्‍व है, ऐसे सरल, सहज और संवेदनशील व्‍यक्‍ति श्रीमान राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी को भी धन्‍यवाद देता हूँ कि जो-जो विभाग आपके पास पूर्व में भी रहे, जब ऊर्जा विभाग में थे तो पूरे प्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा ने एक नया रिकार्ड स्‍थापित किया.

          सभापति महोदय, जैसा मेरे वरिष्‍ठ कह रहे थे कि आप बहुत ही विद्वान हैं, बहुत ही संवेदनशील हैं और यह सच है, आप गंभीर हैं. आप विजनरी परसन हैं. आपको जिस रूप में प्रदेश मिला. वर्ष 2003 में प्रदेश की क्‍या स्‍थिति थी. जिस रूप में प्रदेश मिला था, तब बीमारू राज्‍य के नाम से जाना जाता था. आज लेकिन मध्‍यप्रदेश विकसित राज्‍य की श्रेणी में खड़ा है. इसलिए भी मैं दिल से हमारे मंत्री जी श्रीमान राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूँ कि आपकी दूरदर्शी सोच की वजह से मध्‍यप्रदेश में चिकित्‍सा जगत में चहुंमुखी विकास हो रहा है. उसके कई कारण हैं, जो मैं आपको बताना चाहता हूँ.

          माननीय सभापति महोदय, भारत के यशस्‍वी प्रधानमंत्री श्रीमान नरेन्‍द्र मोदी जी का मैं धन्‍यवाद ज्ञापित करता हूँ जिनकी संवेदनशील सोच की वजह से पीएम जनमन अभियान के अंतर्गत मिशन मोड में उल्‍लेखनीय कार्य प्रारंभ किए गए. इसमें विशेष रूप से पिछड़ी जनजाति, पीवीटीजी हेतु 7.23 लाख, 97.38 प्रतिशत आयुष्‍मान कार्ड बनाए गए हैं. सभापति महोदय, 97.38 प्रतिशत का मतलब समझिए. रिकार्ड है. पहले भी सरकारें हुआ करती थीं. आलोचना सिर्फ आलोचना के लिए नहीं होनी चाहिए. समालोचना होनी चाहिए. बहुत विद्वान लोग हैं. लेकिन हम सिर्फ विरोध करने के लिए खड़े होते हैं, सच को स्‍वीकार करना चाहिए और हमारे मंत्री जी ने विकास किया है, तो कहना चाहिए कि विकास किया है. उदारता होनी चाहिए, कृपणता नहीं होनी चाहिए. यह लोगों ने देखा है वह बीमारू राज्‍य और आज का विकसित राज्‍य. सिंगरौली दूरांचल में कब किसी ने मेडिकल कॉलेज की कल्‍पना की थी. उस सरकार में जिला नहीं बना पाये.

          सभापति महोदय, आज जो दूरांचल का सिंगरौली  वहां पर मेडिकल कॉलेज है. इस पर हृदय की गहराइयों से सदन को तालियां बजानी चाहिए, सदन को अपने मुख्‍यमंत्री जी का सम्‍मान करना चाहिए, अपने लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा मंत्री एवं उप मुख्‍यमंत्री जी का सम्‍मान करना चाहिए. (मेजों की थपथपाहट) क्‍या उसका लाभ विपक्ष के मित्र नहीं लेते हैं ? आयुष्‍मान कार्ड  के बिना हमारे आदिवासी भाई, हमारे जनजाति लोग जिनके पास पैसा नहीं होता था, पैसे के अभाव में उनकी मृत्‍यु दर बढ़ गई थी, क्‍या आयुष्‍मान पर 5 लाख रुपये कम होते हैं ? प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्‍याय महाअभियान, पीएम-जनमन अभियान अंतर्गत लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा विभाग द्वारा पीवीटीजीएस ग्रामों के पांच किलोमीटर के दायरे में जहां पर चिकित्‍सा सुविधा उपलब्‍ध नहीं है, ऐसी अद्वितीय योजना माननीय प्रधानमंत्री जी लाये हैं कि जो एमएमयू- मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्‍यम से, हम वहां सुविधा पहुँचाते हैं और जिसमें हमारे उस मेडिकल यूनिट में एक चिकित्‍सक, एक स्‍टाफ नर्स, एक एएनएम, एक एमपीडब्‍ल्‍यू, एक फिजियोथैरेपिस्‍ट, एक लैब टेक्निशियन और एक वाहन चालक होता है और दवाइयां होती हैं. पूर्व की सरकारों ने कब ऐसा काम किया था ? आप उन लोगों से पूछिये, जिन्‍होंने कभी चिकित्‍सा सुविधा प्राप्‍त नहीं की थी, आज उसका लाभ मिल रहा है, तो वे दिल से दुआएं देते हैं.

          सभापति महोदय -  राजेन्‍द्र जी, अब आप अपने क्षेत्र की कोई बात हो, तो रख दें. थोड़ा सा संक्षिप्‍त करते हुए अपने क्षेत्र की बात भी रख दें.

          श्री राजेन्‍द्र मेश्राम - सभापति महोदय, क्षेत्र की बातें तो आ ही जायेंगी. लेकिन मैं चाहता हूँ कि जो चहुँमुखी चिकित्‍सा क्षेत्र में जो हमारे माननीय उपमुख्‍यमंत्री जी ने अपने विजनरी होने का प्रमाण दिया है, इसकी चर्चा भी होनी चाहिए. आप इसलिए मुझे थोड़ा समय दे दीजिये. आपका संरक्षण मुझे मिलना चाहिए.

          सभापति महोदय -  नहीं, सभी के लिए यह व्‍यवस्‍था है. 5-5 मिनट में अपनी बात दोनों पक्ष के सदस्‍य रखें.

          श्री राजेन्‍द्र मेश्राम - माननीय सभापति महोदय, धरती आबा जनजातीय ग्राम  उत्‍कर्ष अभियान के अंतर्गत प्रदेश के 63 लाख, 91.12 प्रतिशत आयुष्‍मान कार्ड बनाये गये हैं. यह इतनी पवित्र योजना है, यह किसकी सोच है ? यह भारतीय जनता पार्टी के विद्वान मंत्री, भारतीय जनता पार्टी के विद्वान प्रधानमंत्री, भारतीय जनता पार्टी के विद्वान मुख्‍यमंत्री जी की सोच है, जिन्‍होंने ग्राउण्‍ड लेबल तक उस योजना को पहुँचा दिया है. ''स्‍वस्‍थ नारी सशक्‍त परिवार'', इस पवित्र योजना के तहत प्रदेश के 51 जिलों में उच्‍च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव हेतु कुल 228 बर्थ वेटिंग रूम क्रियाशील है, साथ ही साथ गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव हेतु उनकी शंका का समाधान हेतु सुमन सखी चैटबॉट उपलब्‍ध कराया गया है. इसीलिये भी माननीय मुख्‍यमंत्री जी और माननीय उपमुख्‍यमंत्री जी को, मैं जिनके पास लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा विभाग है, को हृदय की गहराइयों से धन्‍यवाद देना चाहता हूँ.

          माननीय सभापति महोदय, देश और प्रदेश की ऐसी पहली योजना है, जो देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री, प्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री और विभाग के मंत्री, जो उपमुख्‍यमंत्री सम्‍माननीय श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी को धन्‍यवाद करता हूँ कि होप के माध्‍यम से, होम बेस्‍ट केयर प्रोग्राम फॉर एल्‍डरली (होप) योजना के तहत 6 शहरी क्षेत्रों में 1 हजार 214 अशक्‍त वृद्धजनों को घर पर स्‍वास्‍थ्‍य और सेवाएं प्रदान की जाती हैं, जो वृद्धजन अशक्‍त हैं, जो शहर में अस्‍पताल तक नहीं जा पाते हैं. पहली बार यह देश में और मध्‍यप्रदेश में योजना लाई गई है. होप के माध्‍यम से हमने उन अशक्‍तजनों को घर में इलाज दिया है. मैं एक बार सदन से चाहूँगा कि हमारे विद्वान मंत्री और विद्वान मुख्‍यमंत्री जी के लिए, देश के प्रधानमंत्री जी के लिए जोरदार सम्‍मान के साथ तालियां बजाकर उनका सम्‍मान करें. (मेजों की थपथपाहट)

            सभापति महोदय, मृत्‍यु पहले भी हुआ करती थी, आज भी हो रही है, आने वाले कल में भी होगी लेकिन कभी उन गरीबों का अस्‍पताल में कोई व्‍यक्ति मर जाये, तो कभी शव उनके घर नहीं पहुंचाये जाते थे, उनकी संवेदनशीलता को मैं प्रणाम करता हूं, उनकी दूरदृष्टि और सोच की वजह से हम शव वाहन परिवहन करने की योजना लेकर आये, जो भी कोई अस्‍पताल में मृत होता है, तो उसके शव को सम्‍मान के साथ घर पर परिवहन किया जाता है, यह अद्वितीय योजना है. प्रदेश में हर जगह विकास है, आपको देखना नहीं है, यह अलग विषय है, आपने सदैव आलोचना करना सीखा है.  

          श्री पंकज उपाध्‍याय-  शव वाहन नहीं चल रहे हैं. मेरे क्षेत्र में 3 बच्चियां मर गईं, शव वाहन के लिए 1 घंटा इंतजार करते रहे, ये असत्‍य बोल रहे हैं.  

          सभापति महोदय-  पंकज जी व्‍यवधान न करें. मेश्राम जी आप समाप्‍त करें.

(...व्‍यवधान...)

          श्री राजेन्‍द्र मेश्रामसभापति महोदय, ये हमेशा अनुशासनहीनता करते हैं, इनके स्‍वभाव का हिस्‍सा हो गया है. सच स्‍वीकार नहीं कर सकते हैं. इनके स्‍वभाव का हिस्‍सा हो गया है, अनुशासनहीनता करना. सभापति महोदय, पहले इनको बता दीजिये कि आप बैठ जायें.

          सभापति महोदय-  राजेन्‍द्र जी, आप परस्‍पर चर्चा न करें और शीघ्र समाप्‍त करें.

          श्री राजेन्‍द्र मेश्रामसभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से ही कह रहा हूं.   

(...व्‍यवधान...)

          श्री दिलीप सिंह परिहार-  सभापति महोदय, ये सही बात बोल रहे हैं, शव वाहन सभी जगहों पर चल रहे हैं, माननीय सदस्‍य अच्‍छा बोल रहे हैं.   

          सभापति महोदय-  पंकज जी आप बैठ जायें. समय की मर्यादा है, आपके समय कोई ऐसा करे तो, यह ठीक नहीं है.

(...व्‍यवधान...)

          श्री राजेन्‍द्र मेश्रामसभापति महोदय, इनके स्‍वभाव का हिस्‍सा हो गया है, अपने स्‍वभाव का परिचय सदन को दे रहे हैं. दूसरों का समय नुकसान करना, इनके स्‍वभाव का हिस्‍सा है. मैं कहना चाहता हूं कि अभी सिंगरौली में इतना बेहतरीन मेडिकल कॉलेज है और मेडिकल कॉलेज ही नहीं, जैसा लोग कह रहे थे कि डॉक्‍टर ही नहीं है. अभी इतने सारे हमारे मानव संसाधनों की, विशेषज्ञों की पूरे प्रदेश में नियुक्तियां हुई हैं और हमारे मेडिकल कॉलेज में भी हुई है. मैं माननीय उपमुख्‍यमंत्री जी से एक निवेदन करना चाहता हूं कि आपने जब मुख्‍यमंत्री जी सरई में, मेरी विधान सभा में आये थे, जो 100 बेड की घोषणा की थी, आप बड़ी तत्‍परता के साथ उसमें कार्य कर रहे हैं परंतु मैं चाहता हूं कि उसमें थोड़ी और गति आ जाती और वहां 100 बेड का अस्‍पताल जल्‍दी शुरू हो जाता क्‍योंकि उधर के क्षेत्र में इसकी अति आवश्‍यकता है.

          सभापति महोदय, दूसरी घोषणा माड़ा को CHC (Community Health Centre) बनाने की और वह भी क्रियाशील है, उसमें भी त्‍वरित कार्रवाई हो जाती, ऐसा मेरा विनम्र निवेदन स्‍वीकार करें. बिंदुल और गन्‍नई में दो PHC (Primary Health Centre) में डॉक्‍टर नहीं हैं, आपने अभी जो नई नियुक्तियां की हैं, मेरे विचार से आपके यहां से निर्देश भी जारी हुए होंगे, पोस्टिंग भी होने वाली होगी, मैं, चाहता हूं कि पोस्टिंग भी अविलंब हो जाए. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, धन्‍यवाद.

          सभापति महोदयश्री सुनील उईके के स्‍थान पर श्री ओमकार सिंह मरकाम

भी अपनी बात रखेंगे.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस-  सभापति महोदय, मैं, सदन को बताना चाहती हूं कि आयुष्‍मान योजना पर इतनी बात हुई. विगत वर्ष इसके अंतर्गत रुपये 3 हजार 8 सौ 11 करोड़ के क्‍लेम की राशि 34 लाख मरीजों के लिए दी गई है.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम (डिण्‍डौरी)-  सभापति महोदय, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग इंसान के लिए आवश्‍यक है. मेरी मंशा मंत्री जी के विषय में कोई निंदा करने की नहीं है, मेरी मंशा है कि लोगों का इलाज अच्‍छा हो, लोगों को स्‍वास्‍थ्‍य लाभ मिले, यह हमारा मानव धर्म कहता है और इंसानियत के नाते, मैं, इसमें जो कमी पाता हूं वह कह रहा हूं. हमारे अस्‍पतालों में महत्‍वपूर्ण इकाई है वहां की दवाई. दवाई खरीदने के लिए आप MADHYA PRADESH PUBLIC HEALTH SERVICE CORPORATION LIMITED (MPPHSCL)  बना कर रखे हैं. सभापति महोदय, उसमें नियम है कि सीएमएचओ और सिविल सर्जन को जब दवाई लेना होगा तो दवाई लेने के लिए पीओ काटेंगे, परचेसिंग ऑर्डर आएगा. सीओ जो आपके यहां बैठे हैं, उनके पास आएगा. 45 दिन में आपको दवाई देना है. आप दवाई 45 दिन में देंगे. वह जिला चिकित्‍सालय में पहुंचेगी. जिला चिकित्‍सालय में उसकी टेस्टिंग रिपोर्ट आएगी, जब टेस्टिंग रिपोर्ट आएगी तब जाकर आपके भुगतान की प्रक्रिया पूर्ण होगी. उसमें उसकी शुद्धता का ध्‍यान रखना है. अगर आप उसकी शुद्धता का ध्‍यान रखते तो छिंदवाड़ा में हमारी बच्चियां जो आज हमारे बीच में नहीं हैं उनकी मौत नहीं होती. अगर उसे आपने गंभीरता से देखा होता तो यहां जो सीओ बैठे हैं.

          उप मुख्‍यमंत्री (श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल)-- माननीय सभापति महोदय, जो माननीय ओमकार जी कह रहे हैं वह सरकारी दवाईयां जो सप्‍लाई होती हैं उसमें इस प्रक्रिया का पालन होता है. छिंदवाड़ा में जो घटना हुई है उसमें सरकारी दवाई की सप्‍लाई नहीं थी इसलिए वह इस प्रकार की जांच प्रक्रिया से नहीं गुजरा है.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम-- सभापति महोदय, आपके पास ड्रग इंस्‍पेक्‍टर हैं, आप जिम्‍मेदार हैं. मध्‍यप्रदेश में कोई ऐसा कानून नहीं है कि वह सरकार की अवहेलना करके दवाई बेच सके. माननीय मंत्री जी आप हमें न समझाएं. हम भी पढ़े-लिखे हैं, जानते हैं. आपके अधिकारी जितना पढ़े हैं उतना हम भी पढ़े हैं. आईएएस के एग्‍जाम में बैठे नहीं हैं  इसका मतलब आप हमें गुमराह नहीं कर सकते हैं.

          सभापति महोदय, ड्रग इंस्‍पेक्‍टर आपके पास, इन्‍वेस्टिगेशन आपके पास, लायसेंस देने का कुछ अधिकार आपके पास, कुछ केन्‍द्र के पास. आप गुमराह कर रहे हैं, यह सब समझ रहे हैं.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल-- आपने हेल्‍थ कॉर्पोरेशन का नाम लिया इसलिये हमने ऐसा बोला.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम-- आप उप मुख्‍यमंत्री जी हैं, आपके पास स्‍वास्‍थ्‍य विभाग है, मुझे पता है. भारत देश के अंदर कोई ऐसी प्राईवेट कंपनी नहीं है जो ओवरटेक कर सके. अंबेडकर जी के संविधान में इतनी ताकत है, पर आप अगर कमजोर हैं तो निजी लोग इस तरह से आगे आएंगे.

          सभापति महोदय, मेरी दूसरी बात यह है कि हम बाजार से दवाई लेते हैं हमको हर दवाई में 20 से 30 प्रतिशत की छूट दी जाती है. अगर 1 हजार की दवाई है तो 700 रुपए हमसे लेंगे 800 रुपए लेंगे. आप पूरी की पूरी उसी कीमत में ले रहे हैं. इसका मतलब 20 से 30 प्रतिशत का भ्रष्‍टाचार दवाई खरीदने में होता है. उसकी एवज में आपकी दवाई असर नहीं करती है. निजी अस्‍पतालों में जाकर लोग इलाज कराते हैं. माननीय मंत्री जी, मैं चाहता हूं कि इंसानियत के नाते आप इस बात को संज्ञान में लें कि जब मार्केट में 20 से 30 प्रतिशत में उसी दवाई की दर कम मिलती है तो आप उसी दर पर उठाइये. आपका पैसा बचेगा, उसमें आप अच्‍छी दवाई लीजिए. अभी आयुष्‍मान योजना की बात हुई. हम भी चाहते हैं आयुष्‍मान योजना के माध्‍यम से लोगों के इलाज हों. आयुष्‍मान में आपने थोड़ा ध्‍यान दिया है?

          सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि किसी भी बीमारी का जब तक टेस्‍ट नहीं होगा तो उसके ट्रीटमेंट का प्‍लान नहीं होता है. आपके आयुष्‍मान में टेस्‍ट का कोई प्रावधान नहीं है. बीमारी के इलाज का प्रावधान है. लाखों रुपए मरीज के टेस्‍ट में लग जाते हैं यह आपको ध्‍यान में रखना पड़ेगा. यह टेस्‍ट में जो पैसा लगता है वह पैसा मरीज से लिया जाता है और इसके बाद बीमारी का इलाज प्रारंभ किया जाता है. अभी तो हाल यह है कि रिक्‍शा चालकों को भी भर्ती कर दिया गया है. उसके नाम पर पेमेंट हो रहा है परंतु जो जरूरतमंद है उसके टेस्‍ट के लिए आपने प्रावधान नहीं रखा है. मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि कौन डॉक्‍टर है जो बिना टेस्‍ट रिपोर्ट के ट्रीटमेंट प्‍लान करे. मैं आपसे भी कहूंगा कि अगर हम भी कभी जाते हैं तो पहले आप चेक करेंगे, इंवेस्टिगेशन करेंगे, उसके बाद आप ट्रीटमेंट प्‍लान करेंगे. इसमें पूरा उस गरीब आदमी का पैसा लग रहा है और वह टेस्‍ट रिपोर्ट बनवाने में परेशान हो रहा है. आप इसमें सुधार नहीं करेंगे तो आपके आयुष्‍मान के औचित्‍य पर सीधा प्रश्‍न लगता है. आपका नियम है जहां 20 डिलेवरी से ऊपर होगा वहां चार स्‍टॉफ नर्स हैं आपने कितने उपस्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में डिलेवरी प्‍वाइंट में चार स्‍टॉफ नर्स रखी हैं. दस डिलेवरी होंगी वहां तीन नर्स रखने का नियम है आप नहीं दे पा रहे हैं.

          सभापति महोदय, कटनी में मेडिकल कॉलेज का 23 तारीख को उद्घाटन होने वाला था. संजय कपूर को 4 मेडिकल कॉलेज उसको मिले हैं. उसे मेडिकल का लाभ देने के लिए आपने ऐसी कंडीशन लगाई कि उसी को मिले. जब आप उद्घाटन कराने गए तो 22 जनवरी को, राजस्थान में तो आपकी ही सरकार है आप भजनलाल जी से बात कर लिए होते कि साहब न भेजो आज, 22 तारीख को क्यों पुलिस आई. किसको गिरफ्तार करने आई किसको, सुनील कपूर को, और कटनी का आपका मेडिकल कॉलेज का भूमि पूजन निरस्त हो गया. आपने उसको देखा नहीं कि वो किस मामले में फर्जी है. उन पर मामला है या नहीं है यह देखना चाहिए. फर्जी डिग्री देने का राजस्थान में मामला है और आपने उसे मध्यप्रदेश में 4-4 मेडिकल कॉलेज दे दिए. धार, बैतूल, कटनी और पन्ना दे दिया. आप कुछ तो सुधार करें, सुधार नहीं हो पा रहा है.

          सभापति महोदय, मैं आपसे अनुरोध करना चाहूँगा कि माननीय मंत्री जी की बड़ी-बड़ी बातें हैं. मंत्री जी डिण्डौरी में भी आए थे. हमने उम्मीद की थी कि आप हमारे यहां सुधार करके जाएंगे. डिण्डौरी एक ऐसी जगह है जहां पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी भी गए थे. वर्तमान मुख्यमंत्री तो हमारे पालक मंत्री थे. पालक मंत्री होने के नाते वे तो हर स्थिति को जानते हैं. आप भी गए थे. पर डिण्डौरी जिले में स्वास्थ्य विभाग में आपने संज्ञान नहीं लिया है. 20 जननी एक्सप्रेस हैं. बीएलएफ डिण्डौरी में 8 हैं और एएलएफ 3 हैं. डिण्डौरी से मेडिकल की दूरी 150 किलोमीटर है और यह अंडर कंस्ट्रक्शन रोड है. 5 से 6 घंटे लगते हैं मेडिकल पहुंचने में, मेरे यहां की आबादी 8 लाख है, 140 किलोमीटर क्षेत्र में मेरी विधान सभा है.

          सभापति महोदय -- मरकाम जी थोड़ा सहयोग करें, समाप्त करें.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- सभापति महोदय, थोड़ा सा आप शांत हो जाएं, आप ही तो समय ले लेते हैं.

          सभापति महोदय -- सदन बहुत शांति से चल रहा है, शांति से सुन रहा है, आप शांति से बात रख दें. माननीय मंत्री जी वैसे ही बहुत शांत हैं.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- सभापति महोदय, मैं बीएलएफ और एएलएफ पर बात कर रहा हूँ. डिण्डौरी की भौगोलिक दृष्टि को ध्यान में रखते हुए आप एडवांस लाइफ सपोर्ट वाहन, हमारे यहां 5-7-10 एक्सीडेंट रोज हो रहे हैं. उनको भेजते हैं तो रिटर्न नहीं आ पाती हैं. आप हमें एएलएफ दे देंगे साथ में हमें करंजिया का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, बजाग का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, गाड़ासरई का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, चारा का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, गौरा कनारी का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र. जिला चिकित्सालय में अगर आप थोड़ा सा सुधार कर देंगे तो हम आपका भी सम्मान करेंगे.

          सभापति महोदय, माननीय उप मुख्यमंत्री जी ने कुछ योजनाओं को बंद करने का निर्णय लिया है. 5674 निर्धन वर्ग के लिए निशुल्क विक्रमादित्य शिक्षा योजना, आप इसे क्यों बंद कर रहे हैं. आपके बजट में है. आप शिक्षा क्यों नहीं दे पा रहे हैं. धरती आबा में जीरो बजट रखा है. प्रधानमंत्री जी कह रहे हैं कि हम दे रहे हैं पर पंडित जी कह रहे हैं कि हम नहीं ले रहे हैं. पंडित जी थोड़ी कृपा करें. आपका जो एयर एम्बूलेंस का प्रोसेस है. एयर एम्बूलेंस को परमिट करने के लिए सीएमएचओ और कलेक्टर की प्रोसेस से गुजरना पड़ता है. अभी हमने एक व्यक्ति को एयर एम्बूलेंस से शिफ्ट कराया था उसको हमें यहां लाने में 28 घंटे लग गए थे. प्रोसेस करने में और लाने में, पहुंचाने में. डिण्डौरी से यहां लाने में 8 घंटा लगेगा, तो आप एयर एम्‍बुलेंस की जगह हमको एएलएफ दे दें. एएलएफ आप 20  दे सकते हैं. हम लाइफ सपोर्ट वाहन के साथ उनको भेजेंगे. अगर क्रिटिकल सिचुएशन होती है तो वहां पर कोई लाईफ सपोर्ट सिस्‍टम एयर में उपलब्‍ध कराना बड़ा कठिन होता है, तो उसको हम यहां कर पाएंगे. मेरा सिर्फ इतना अनुरोध है कि मानवता के नाते नहीं तो आप लोग सरकार में हैं और जब कनक कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय. वा खाए बौराय जग, या पाए बौराय. ऐसा न हो कि आप अहंकार का चश्‍मा पहने रहें. इस समय भाजपा वालों में अहंकार का चश्‍मा ऐसे लगा है, परंतु मैं कहना चाहूंगा कि हम अपना कर्तव्‍य कर रहे हैं. अगर कांच में पारा लगाओ आइना बन जाता है और किसी को आइना दिखाओ तो पारा चढ़ जाता है. मेरा कहना है कि आप पारा मत चढ़ाना. सभापति महोदय, यही मेरा आपके माध्‍यम से अनुरोध है और जो संजय कपूर जिसने इतनी गड़बड़ी की है उसके विषय में आप जांच करा लें और नहीं कराएंगे तो आप पर ही आरोप लगेगा. हम तो सलाह दे दिये मानो तो वाह-वाह और न मानो तो आप आरोप झेलते रहें. सभापति महोदय, आपने बोलने का समय दिया मैं बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूं.

          श्री हरिशंकर खटीक (जतारा) -- सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 19 लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. मैं माननीय उप मुख्‍यमंत्री माननीय राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी का बहुत-बहुत धन्‍यवाद करना चाहता हूं. अगर हम बात करें मेडिकल कॉलेज के संबंध में तो वर्ष 2003 के पहले पूरे मध्‍यप्रदेश की धरती पर मात्र 5 मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे जिसमें भोपाल, इन्‍दौर, जबलपुर रीवा और ग्‍वालियर थे. इसके बाद हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जब काम किया तो लगातार मेडिकल कॉलेज बढ़ते गए. आज हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि मध्‍यप्रदेश की धरती पर 19 शासकीय मेडिकल कॉलेज काम कर रहे हैं. इसके साथ-साथ पीपीपी मोड पर 12 मेडिकल कॉलेज स्‍वीकृत किए गए हैं जिसमें 4 की निविदाएं भी प्राप्‍त हो गई हैं. इससे सिद्ध होता है कि हमारे उप मुख्‍यमंत्री श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी लगातार स्‍वास्‍थ्‍य और चिकित्‍सा शिक्षा के क्षेत्र में प्रयास कर रहे हैं. अभी आयुष्‍मान भारत के कार्डों से संबंधित बात आ रही थी तो लगातार सरकार का प्रयास आयुष्‍मान भारत के कार्ड बनाने का भी रहा है. इसमें अगर उपलब्धियों से संब‍ंधित बात करें तो अभी तक की स्थिति में 4 करोड़, 43 लाख यानि 94 परसेंट आयुष्‍मान भारत कार्ड मध्‍यप्रदेश की धरती पर बनाए जा चुके हैं और उनसे लोगों का लगातार इलाज हो रहा है. 2 वर्ष में प्रदेश में 84 लाख पात्र हितग्राहियों के आयुष्‍मान भारत कार्ड बनाए गए हैं. आयुष्‍मान द्वितीय, मध्‍यप्रदेश योजना अंतर्गत प्रदेश में 70 वर्ष एवं 70 से ऊपर के जो हमारे वरिष्‍ठ नागरिक हैं उनके 14 लाख, 85 हजार यानि 42.73 परसेंट आयुष्‍मान कार्ड मध्‍यप्रदेश में बुजुर्ग लोगों के बन चुके हैं. इसके साथ-साथ अगर हम बात करें उन गरीब वर्गों की चाहे वह बैगा हो, भारिया हो, चाहे सहरिया हो, उनके लिए हमारे कार्ड अगर मध्‍यप्रदेश मे बने हैं तो 7 लाख, 23 हजार यानि 97.38 परसेंट उन गरीब वर्ग के लोगों के आयुष्‍मान भारत योजना के कार्ड बनाए जा चुके हैं जो इलाज के लिए भटकते थे, जो हॉस्टिपटल नहीं पहुंच पाते थे लेकिन हमारे प्रधान मंत्री माननीय श्री नरेन्‍द्र मोदी जी को हम धन्‍यवाद देना चाहते हैं, माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी को जिन्‍होंने यह कार्ड बनवाने का काम किया और गरीब वर्ग के व्‍यक्तियों को 5 लाख रुपये तक का इलाज नि:शुल्‍क देने का काम हमारी सरकार कर रही है.

          सभापति महोदय, इसके साथ-साथ धरती आबा जनजातीय उत्‍कर्ष अभियान के अंतर्गत 63 लाख 91.12 परसेंट लोगों के आयुष्‍मान भारत योजना के कार्ड बनाए गए हैं. कुल 151 निजी अस्‍पतालों और 517 सरकारी अस्‍पतालों को इस योजना में सम्मिलित किया गया है जहां उनका इलाज होगा. इलाज पर अगर हम बात करें तो इलाज पर अभी जो राशि व्‍यय हुई है वह वर्ष 2025-26 में केन्‍द्रांश सहित कुल राशि 765.96 करोड़ का प्रावधान किया गया था इसमें बजट राशि में से 465 करोड़, 46 लाख रुपये का इलाज किया गया है यानि 4 अरब, 65 करोड़ इलाज में मध्‍यप्रदेश की सरकार ने खर्च किया है. नि:शुल्‍क उपचार हेतु कई और महत्‍वपूर्ण जो हमारी सरकार ने काम किया है.

          माननीय सभापति महोदय, जैसे कैंसर की बीमारी है तो कैंसर की बीमारी से संबंधित एक वर्ष में 3 लाख 26 हजार 59 रोगियों का उपचार किया जिसके लिये 858 करोड़ की राशि व्यय की गई. अगर कार्टिलेज की बात करें तो 96922 रोगी को इसका उपचार किया गया 737 करोड़ की राशि व्यय की गई. डायलिसिस सेवा की बात की जाये तो 7 लाख 85 हजार 331 रोगियों को उपचार उपलब्ध कराया गया जिसमें 162 करोड़ रूपये की राशि व्यय की गई है. ऑर्गन ट्रांसप्लांट (अंग प्रत्यारोपण) की बात करें तो 254 रोगियों का इसमें उपचार किया गया तथा 6 करोड़ की राशि का इसमें व्यय किया गया है.

          सभापति महोदय,  यह हमारी सरकार है जो गरीबों के लिये काम कर रही है. और सबसे ज्यादा गरीब व्यक्तियों को लाभ आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से मिल रहा है. अभी भाई ओमकार सिंह जी बोल रहे थे कि कुछ नहीं हो रहा है, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि अपनी आत्मा से पूछें कि गरीब वर्ग के उत्थान के लिये भारतीय जनता पार्टी कितना काम कर रही है.

          माननीय सभापति महोदय, जो पात्र विशेषज्ञों के पद रिक्त हैं उनको भरने का काम भी हमारी सरकार निरंतर कर रही है. अभी सदन में बात आई थी कि मेडिकल कालेजों में सिविल अस्पताल में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में जो पद रिक्त हैं उनके भरने की कार्यवाही नहीं हो रही है. माननीय सभापति महोदय, मैं सदन को बताना चाहूंगा कि इस संबंध में हमारी सरकार के द्वारा लगातार प्रयास किया जा रहा है. लगातार विज्ञापन निकाले जा रहे हैं, उसके माध्यम से हमारी सरकार इन रिक्त पदों को भरने की कार्यवाही भी कर रही है.

          माननीय सभापति महोदय, मैं सदन को बताना चाहता हूं कि निश्चेतना विशेषज्ञ (एनेस्थेसियोलॉजिस्ट) के 228 पदों के विरूद्ध 75 चयनित लोगों की सूची 26.8.2025 को जारी की गई है, यह पद भर दिये गये हैं, 75 लोगों को नियुक्त दे दी गई है. इसके बाद शिशु रोग विशेषज्ञों के 208 पदो के विरूद्ध 106 शिशु रोग विशेषज्ञों की चयन सूची 30.9.2025 के माध्यम से यह पद भी भर दिये गये हैं लेकिन कई ऐसे महत्वपूर्ण पद अभी हैं जो रिक्त हैं , फिर भी सरकार का लगातार प्रयास चल रहा है. हमारे उप मुख्यमंत्री जी और माननीय मुख्यमंत्री जी लगातार इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं, सरकार इस पर गंभीरता से चिंता भी कर रही है. अब ऊल्टे चश्मे से हमारे माननीय सदस्य श्री ओमकार सिंह जी देख रहे थे वह बता भी नहीं पा रहे थे, अगर चश्मे की बात करें तो हमारे पास जानकारी है कि कुल 4 लाख 3 हजार 401 मोतियाबिंद की शल्यक्रिया निश्चेतना विशेषज्ञ के माध्यम से  (Anesthetist) मोतियाबिंद की शल्य क्रिया (Cataract Surgery) की गई है. जिसमें 48 हजार 616 स्कूली बच्चों को एवं 1 लाख 3 हजार 944 बुजुर्गों को चश्मे भी हमारी सरकार ने निशुल्क देने का काम किया है. यह सरकार का प्रयास है.

          सभापति महोदय- हरिशंकर जी समय की मर्यादा है. कुछ बातें अपने क्षेत्र की भी रखे लें.

          श्री हरिशंकर खटीक- ठीक है सभापति महोदय, मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा. सभापति महोदय, मैं टीकमगढ़ जिले की बात करना चाहता हूं. हमारे टीकमगढ़ जिले के बड़े भाई सम्माननीय यादवेन्द्र सिंह जी, टीकमगढ़ विधानसभा से विधायक हैं उनको सरकार को धन्यवाद देना चाहिये कि टीकमगढ़ जिले में मेडिकल कालेज हमारी सरकार ने स्वीकृत किया है बहुत बहुत धन्यवाद उनको देना चाहिये ठीक है पहले सरकारी मेडिकल कालेज स्वीकृत हुआ था किन्हीं कारणों से वह कालेज पीपीपी मोड पर चला गया है. सभापति महोदय, हमारा अनुरोध है कि पीपीपी मोड पर लगातार इसके टेंडर बुलाये जा रहे हैं, और टेंडर बुलाने के बाद भी नहीं आ रहे हैं, तो माननीय उप मुख्यमंत्री जी से और माननीय मुख्यमंत्री जी से हमारी विनम्र प्रार्थना है कि टीकमगढ़ का जो मेडिकल कालेज है वह पीपीपी मोड से पुन: सरकारी मेडिकल कालेज में किया जाये यह विनम्र हमारी उप मुख्यमंत्री जी से प्रार्थना है.

          माननीय सभापति महोदय, एक बात के लिये मैं और भी माननीय मुख्यमंत्री जी को और उप मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि टीकमगढ़ जिले को जिला चिकित्सालय , अरे वर्षों हो गये थे यह मांग करते हुये  कि 500 बिस्तरों का वहां का अस्पताल किया जाये, लेकिन हम धन्यवाद देना चाहते हैं और यहां पर इस समय टीकमगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक भी बैठे हैं, उनसे भी हमारा अनुरोध है कि वह भी सरकार को धन्यवाद दें कि 300 बिस्तरों का जो अस्पताल था वह 500 बिस्तरों का अस्पताल हमारे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी की सरकार ने और माननीय उप मुख्यमंत्री जी ने कर दिया है इसके लिये आपको धन्यवाद देना चाहिये.

          माननीय सभापति महोदय, एक और अनुरोध मैं करना चाहता हूं कि हमारे टीकमगढ़ जिले में जतारा और पलेरा दो विकासखड हैं एक जतारा में सिविल अस्पताल हमारे उप मुख्यमंत्री जी ने दिया है, इसके लिये बहुत धन्यवाद देते हैं लेकिन पलेरा जो कि टीकमगढ़ से 65 किलोमीटर की दूरी पर है वहां के लिये हमारा अनुरोध है कि आगे जब कभी भी सिविल अस्पताल आपके खुलें तो उसमे पलेरा के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को भी सिविल अस्पताल में उन्नयन करने का कष्ट करेंगें. माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया इसके लिये आपको बहुत बहुत धन्यवाद.

          सभापति महोदय- बहुत धन्यवाद हरिशंकर जी. मेरा सभी माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि हरिशंकर जी ने जैसे समय की मर्यादा का पालन किया है, अन्य सारे सदस्य भी थोडा समय सीमा का पालन करें.

          श्री भैरो सिंह बापू -    ( अनुपस्थित  )

          सभापति महोदय -- राठौर साहब एक मिनिट में अपनी बात रख दें, लंबा भाषण कृपया न दें. समय की सीमा है.

          श्री मोहन सिंह राठौर(भितरवार) -- माननीय सभापति महोदय, मैं माननीय मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी, उप मुख्यमंत्री जी को सिर्फ इस बात का धन्यवाद देना चाहता हूं कि मेरी भितरवार विधानसभा क्षेत्र में 17 उप स्वास्थ्य केन्द के भवन स्वीकृत किये हैं जिसमें से अधिकांश के भवन पूर्ण हो चुके हैं, कुछ पूर्ण होने में शेष हैं इसके लिये माननीय मुख्यमंत्री जी को और माननीय उप मुख्यमंत्री जी को बधाई देता हू. पूरे प्रदेश क जनता के बेहतर स्वास्थ्य सेवायें देने के लिये अग्रणी प्रयास कर रहे हैं, यह सभी जगहों पर देखा जा सकता है.

            सभापति महोदय श्री मोहन सिंह राठौर,   आप भाषण न दें. एक मिनट में अपनी बात रख दें.

          श्री मोहन सिंह राठौर (भितरवार)सभापति महोदय,  माननीय मुख्यमंत्री, डॉ.  मोहन यादव जी एवं  उप मुख्यमंत्री, राजेन्द्र शुक्ल जी  को मैं सिर्फ इस बात का धन्यवाद देना चाहता हूं कि  मेरी  भितरवार विधान सभा क्षेत्र में 17  उप स्वास्थ्य केंद्रों  के  भवन  स्वीकृत किये हैं, जिनमें से  अधिकांश   भवन पूर्ण हो चुके हैं और  कुछ पूर्ण होने  में शेष हैं, उसके लिये  मैं  उप मुख्यमंत्री जी को बहुत बहुत बधाई देता हूं.  पूरे  प्रदेश की जनता के बेहतर स्वास्थ्य   सेवायें देने के लिये  अग्रणी प्रयास कर रहे हैं. जो  सभी जगहों पर देखा जा सकता है.  मैं  धन्यवाद देते हुए अपने भितरवार विधान सभा  क्षेत्र के संबंध में  मांग रखना चाहता हूं कि मोहना एवं  भितरवार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को सिविल हास्पिटल में  उन्नयन  करना,  घाटीगांव  उप स्वास्थ्य केंद्र को   सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र  तथा  मोहना  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र  में   महिला चिकित्सक  की एक  अत्यन्त आवश्यकता है,  उसकी पदस्थापना तथा  मोहना  और भितरवार   स्वास्थ्य केंद्रों  को  बाउंड्रीवाल की अत्यन्त  आवश्यकता है, इसको   भी इसमें सम्मिलित करने की कृपा करें.   सभापति महोदय, आपका बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल(मुड़वारा) सभापति महोदय,  आपका बहुत  बहुत धन्यवाद. मैं मुख्यमंत्री जी को और आदरणीय  हमारे  स्वास्थ्य मंत्री, श्री राजेन्द्र शुक्ल जी को  बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूंगा. कटनी में पीपीपी   मेडिकल कालेज के लिये.  अभी  हमारे साथी विधायक कुछ बातें  कर रहे थे,  अगर किसी को टेंडर मिला है,  तो  प्रक्रिया के तहत मिला है.  किसी  को बुलाकर नहीं दे दिया गया है.  पीपीपी मेडिकल कालेज में मेरी पूर्व में भी   मंत्री जी से चर्चा हुई थी,  जो शासकीय चिकित्सालय  में  सुविधाएं हैं, वह अनवरत  जारी रहेंगी.  चिकित्सा का स्तर ऊंचा होगा.  चिकित्सक हमें मिलेंगे,  विशेषज्ञ मिलेंगे.  यह  सब फायदे हमारे यहां मिलेंगे.  एक अच्छी हमारी चिकित्सा  सुविधा हमारे जिले  में  बढ़ेगी और जहां तक सरकारी  मेडिकल कालेज की बात है,  तो  यह कहीं से भी तर्क संगत  नहीं, क्योंकि कटनी में  इस  बात को उठाया गया.   यह कहीं से भी तर्क संगत नहीं है कि अगर हमें पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कालेज   मिल रहा है, तो हम यह कह कर लौटा दें कि  हमको शासकीय मेडिकल कालेज चाहिये. हम पीपीपी मेडिकल कालेज  के माध्यम से कटनी के निवासियों को अपने   मंत्री जी के माध्यम से  मुझे लगता है कि अपने  बाद  में जो उनका भाषण होगा,  उसमें वे इस बात को  स्पष्ट   भी करेंगे कि पीपीपी में  कितने  फायदे होंगे  और जो शासकीय हमारा चिकित्सालय है,  उसमें  कितनी सुविधायें अनवरत  जारी रहेंगी.  तो इसलिये हम सब उसका इंतजार कर रहे हैं.  अगर किसी ने कोई गलती की है,  तो उसके लिये कानूनी कार्यवाही और जांच होगी और उसमें निर्णय होंगे.

2.13 बजे             {सभापति महोदया (श्रीमती अर्चना चिटनीस) पीठासीन हुई.}

        सभापति महोदया, लेकिन जो टेंडर डाक्यूमेंट  के  आधार पर जो एग्रीमेंट है,   उनकी शर्तों का पालन  सरकार  हमेशा सुनिश्चित करती है  और लगातार  टेंडर होने के बाद   सबके लिये  खुला मंच  था, जिसको आना चाहे,   वह टेंडर में आ सकता  था, जो आया, जिसने उचित भरा, उसको  मिला है  और मैं उम्मीद करता हूं कि  जल्दी से जल्दी हमारे यहां उसका काम चालू होगा. रही बात  सरकारी मेडिकल कालेज की, तो अगर  जबलपुर, भोपाल, इन्दौर वगैरह  में  दो दो, तीन तीन मेडिकल कालेज  हो सकते  हैं, तो मैं मांग करुंगा कि  भविष्य में सरकारी मेडिकल  कालेज हो,  तो हमारे कटनी को एक और सरकारी मेडिकल कालेज   मिले और कटनी में कुछ चिकित्सकों की कमी है,  तो  मैं मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि  वहां  पर चिकित्सकों की कमी को पूरा किया जाये, बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्री दिनेश जैन (बोस) (महिदपुर)--  सभापति महोदया,    मध्यप्रदेश की बात है,  स्वास्थ्य पर बात चल रही है.  मेरी महिदपुर तहसील उज्जैन  जिले के  नागदा  में जो ग्रासिम  इंडस्ट्रीज, केमिकल इंडस्ट्रीज  और  लैंक्सेस इंडस्ट्रीज हैं.  मेरे क्षेत्र  के आस पास अगर पानी का परीक्षण कराया जाये,   तो  वह पानी बहुत ही जहरीला है.  उसमें काफी क्लोराइड परसेंटेज है  और आस  पास के क्षेत्र के लोग काफी बीमार हो रहे हैं.   मैं सोचता हूं कि कहीं भागीरथपुरा  जैसा कांड   उज्जैन जिले की  महिदपुर   तहसील में और नागदा   के ग्रासिम  से  जो  कचरा  हजार्डस    वेस्ट  का सॉल्युशन आ रहा है, हजार्डस वेस्ट  और  जो केमिकल वेस्ट  जो बहते पानी  में छोड़ दिया जाता है और अंडर ग्राउंड  जो  बोरिंग में डाल   दिया जाता है.  उसके कारण आस पास के क्षेत्र के लोगों का स्वास्थ्य काफी खराब हो रहा है.   आप वहां पर स्वास्थ्य शिविर लगाकर  देख लें.  आने वाले कल में  भागीरथपुरा  जैसी स्थिति  उज्जैन जिले के नागदा  और  महिदपुर में नहीं हो,  यह मुख्यमंत्री जी का भी क्षेत्र है. उज्‍जैन जिले के नागदा हौ महिदपुर में न हो. यह मुख्‍यमंत्री जी का भी क्षेत्र है. इसमें पॉल्‍यूशन कंट्रोल विभाग को भी ध्‍यान देना चाहिये. स्‍वास्‍थ्‍य की जो बिगड़ती हुई समस्‍या महिदपुर तहसील में दिख रही है. आप देखेंगे कि‍ बहुत सारे लोग पैरालिसिस और अटैक की बीमारी से लोग कर रहे हैं. अटैक 45 तक के बच्‍चों को आ रहा है. नागदा में एवरेज आयु 60-65 साल रह गयी है. पॉल्‍यूशन हवा में भी जमीन के अंदर भी 1500 फीट के ट्यूबवेल लगाकर के वह जो केमिकल पानी का वेस्‍ट है वह पानी के अंदर डाल रह हैं. मेरा अनुरोध है कि स्‍वास्‍थ्‍य पर चर्चा चल रही है तो आप इस पर ध्‍यान दें.

          श्री कैलाश कुशवाह (पोहरी)- माननीय सभापति महोदया, आपने बोलने का अवसर दिया उसके लिये धन्‍यवाद. स्‍वास्‍थ्‍य बड़ा गंभीर विषय है, चिंता की बात है. शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य हमारे दोनों महत्‍वपूर्ण जीवन के एक धन हैं. अगर इसमें एक्‍ट्रा बजट भी लगे तो इसमें लगा देना चाहिये. हमारे शिवपुरी जिले में मेडिकल कॉलेज तो है, लेकिन चिंता का विषय यह है कि वहां हार्ट का डॉक्‍टर नहीं है. वह शिवपुरी जिले का यह मुख्‍य अस्‍पताल भी है. दो-दो अस्‍पताल होने के बाद भी यह बहुत बड़ा चिंता का विषय है. आज के दौर में एक गंभीर बीमारी, जब से कोरोना हुआ, उसके बाद से हर 7 में से एक व्‍यक्ति को हार्टअटैक आ रहा है. अभी हमारे यहां शिवपुरी में बारात चढ़ रही थी तो दुल्‍हे को घोड़े पर बैठे-बैठे अटैक आ गया. उसे अस्‍पताल ले जाने का मौका भी नहीं मिला और उसकी जान चली गयी.

          हमारे शिवपुरी में मेरे मित्र राकेश सिंह जी जो मुझसे छोटे थे और एक वकील साहब मित्‍तल जी का 17 साल का बेटा, एक हमारी एक बहन जो 17 साल की थी, शिवपुरी जिले के कई ऐसे नाम हैं, जिनकी हार्टअटैक से मौत हो गयी. करीब 125 युवा जो तीस साल से कम उम्र के थे वह हार्टअटैक से खत्‍म हो गये. जिनको डॉक्‍टर के यहां जाने का मिला तो मेडिकल अस्‍पताल में कोई सुविधा नहीं थी. अगर हम इलाज सही नहीं कर पा रहे हैं तो इस प्रदेश और देश का क्‍या होगा ?

          सभापति महोदया, मैं हमारे उप-मुख्‍यमंत्री जी से मांग करता हूं कि शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में एक हृदय का डॉक्‍टर उपलब्‍ध करायें, जिससे हमारे युवाओं की जान बच सके और यह अटैक किस कारण से आ रहे हैं, आप इस मुद्दे पर अभी तक पहुंचे या नहीं. अमेरिका और ब्रिटेन में इसकी जांच चल रही है उन्‍होंने इस वैक्‍सीन पर रोक लगा दी. कहीं न कहीं कोरोना के बाद और वैक्‍सीन लगने के बाद पूरे प्रदेश और देश में, कई हमारे लाखों युवा हमको छोड़कर चले गये हैं. युवा पर ही हमारे देश का भविष्‍य है और युवा ही इस दुनिया से चला जायेगा तो फिर देश की रक्षा कौन करेगा. मैं माननीय मंत्री जी से मांग करता हूं कि शीघ्र ही शिवपुरी जिले में जो हार्टअटैक आ रहे हैं. इसलिये आप वहां पर एक स्‍पेशलिस्‍ट डॉक्‍टर की व्‍यवस्‍था करें. इसके अलावा हमारे पोहरी और बैराड़ में स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र है, लेकिन वहां महिला डॉक्‍टर नहीं है. वहां नर्स ही डिलेवरी करा रही हैं. डिलेवरी के समय हमारी कई महिलाओं और बच्‍चों की मौत हो गयी है. वहां डॉक्‍टर की कोई व्‍यवस्‍था ही नहीं है. कई जगह तो नर्स या जो पोस्‍टमार्टम करता है, वही टांके लगाने लगता है. स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की पूरे जिले में बहुत ही खराब व्‍यवस्‍था है. वहां पूरे जिले में डॉक्‍टरों की बहुत कमी है. आरोग्‍य अस्‍पताल और छोटे-छोटे अस्‍पताल पंचायतों में बने हैं. हमारा झिरी सेक्‍टर है, हमारा चर्च सेक्‍टर है वहां पर डॉक्‍टरों की व्‍यवस्‍था नहीं है तो मैं मांग करता हूं कि वहां आप विशेषज्ञ डॉक्‍टरों की पदस्‍थापना करें. विशेषकर महिला डॉक्‍टर जिससे हमें आने वाले समय में हमारी मां और बच्‍चे की जान सुरक्षित रहे. हमारी डॉयल 108 नंबर की गाड़ी चल रही है और उसका सीधी अटैचमेंट भोपाल से है. मैं मांग करता हूं कि यदि मरीज बीमार होता है या हमारी मां जिसका डिलेवरी का समय होता है तो वह समय पर नहीं पहुंचती है. या उसके डिलेवरी रास्ते में हो जाती है या वहीं हो जाती है या कोई एक्सीडेंटल केस होता है वह कहीं न कहीं वहीं दम तोड़ देता है. उसको जिले से या ब्लाक से अटैच किया जाय जिससे 108 की गाड़ी समय पर पहुंच सके. अब यह मुझे मालूम नहीं है कि ड्रायवर गुमराह करता है कि जो आपने नम्बर दिया है, वह गुमराह करता है यह एक चिंताजनक बात है. इस पर माननीय मंत्री जी आप इस पर गौर करो और यह पूरे प्रदेश की चिंता का विषय है कि हमारी एम्बूलेंस समय पर नहीं पहुंच पाती. ऐसी कई शिकायतें आती हैं. मैं माननीय मंत्री जी से विशेष बात रखना चाह रहा हूं कि कभी कभी हमारे स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में मेडिकल कालेजों में कभी कभी हड़ताल हो जाती है, इसका कारण क्या है?  क्या उनकी समय पर तनख्वाह नहीं मिलना या कम डॉक्टर होना या उन पर लोड ज्यादा होना तो मैं अभी हमारे शिवपुरी मेडिकल कालेज में 500 आउटसोर्स कर्मचारी हैं उनको दीपावली के समय तनख्वाह 5-6 महीने से नहीं मिली तो मुझे पहुंचना पड़ा.

          सभापति महोदया, मेरा यह आग्रह है कि ऐसा मौका न आए जिससे मरीजों पर असर हो, हमारा मरीज परेशान न हो, उनको समय पर तनख्वाह मिल जाय, अगर वह धनवान होते तो वह आउटसोर्स में नौकरी ही क्यों करते, और उनको जितनी तनख्वाह ऊपर से आती है, उतनी भी नहीं मिल रही है उसमें भी दो दो चार चार हजार का कटौत्रा हो रहा है. ऐसी  भी रिपोर्ट आई है कि एक एक, दो दो लाख रुपये लेकर रख रहे हैं, बीच में शिकायतें आई हैं तो इसमें भी माननीय मंत्री जी विशेष ध्यान दें. हमारे जीवन में अगर हम स्वस्थ रहेंगे निरोगी रहेंगे तभी हम आगे काम करेंगे, विकास करेंगे और हमारे जिले शिवपुरी का, मध्यप्रदेश और देश का युवा जब जिंदा रहेगा, हम स्वस्थ रहेंगे. तभी हमारा देश तरक्की करेगा. मैं स्वास्थ्य को लेकर घूमने गया तो एक मुझे गोलियों का ढेर मिला, वह लगभग एक ट्रक गोलियां होंगी.  अब वह गोलियां कहां से आईं? यह एक चिंता का विषय है कि वह गोलियां  कचरे के ढेर में पड़ी थीं.  यह हमारे अस्पतालों से पहुंच रहीं हैं कि जो उनके एक्सपायरी डेट होती है वह हैं, ऐसे कई चिंताओं के विषय हैं  कि इन गोलियों पर मरीजों को विश्वास नहीं रहा. हमारे छिंदवाड़ा जिले में लगभग 24 बच्चों की जान गई. कई गोलियां ऐसी आ रही हैं जिनका असर नहीं हो रहा. हमारे दवाइयों के मेटर में देखा जाय कई दवाइयां ऐसी हैं जो कि एमआर उनको मेडिकल दुकानों तक 10 रुपये में पहुंचाता है जबकि उसमें 130 रुपये की एमआरपी आ जाती है. मतलब 10-10 गुना रेट होते हैं.

          सभापति महोदया - अपने अपने विषय को समाप्त करें. आपको 7 मिनट हो चुके हैं.

          श्री कैलाश कुशवाह - सभापति महोदया, जब एक कुत्ते पर दो दो घंटे हमारे सदन में बात हो सकती है. हम इंसानों की जान के लिए क्या बात नहीं कर सकते हैं? आप ही बताएं.

          सभापति महोदया - आप बात रखें, समय सीमा में बात पूरी करें.

          श्री कैलाश कुशवाह - सभापति महोदया, मैं बात ही रख रहा हूं, आपके संरक्षण में हम  वह बात रख रहे हैं जो रिपीट न हो. हमारी दवाओं का असर कम हो रहा है और दवाएं ही जहर बन रही हैं यह एक चिंता का विषय है. रैबीज का मामला आया है, वहां बड़वानी में 5 लोगों की मौत हुई. रैबीज इंजेक्शन लगने के बाद भी असर रहता है कुत्ते का, वह भी एक चिंता का विषय है, मेरा विषय यह है कि कुल मिलाकर दवाई असली है कि नकली है और उन पर कार्यवही की जाय. वह है मेन मुद्दा कि नकली दवाइयों से व्यापार चल रहा है और उसके अलावा हर व्यक्ति जिस परिवार जिले में, देश में, प्रदेश में अगर कोई मरीज परिवार में नहीं होगा तो उसके घर में भगवान स्वरूप बैठा है. एक भी ऐसा परिवार नहीं है, जो कहीं न कहीं परिवार का कोई सदस्य स्वास्थ्य से बीमार न हो. यह गहन चिंता का विषय है कि आर्थिक स्थिति हर व्यक्ति की मजबूत नहीं होती है. सभी लोग परेशान हैं. हमें नकली दवाई मिल जाय, नकली इंजेक्शन मिल जाय और परिवार का सदस्य छोड़कर चला जाय, यह एक चिंता का विषय है कि जहां भी कोई भी एजेंसी हो, अगर मालूम चलता है तो उस पर तुरन्त कार्यवाही होना चाहिए न कि गुमराह करके उसे छोड़ देना चाहिए. मैं यही आग्रह करता हूं कि नकली दवाई या नकली फैक्‍ट्री में आप विशेष ध्‍यान दें. हमारे स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों पर और बडे़-बडे़ हॉस्‍पिटल्‍स में डॉक्‍टर तो हैं अब डॉक्‍टर ही यह कहने लगें कि आप घर पर ही इलाज कराने आ जाइए, तो अब लोग क्‍या करेंगे. हमारे नरवर के एल.डी.शर्मा जी डॉक्‍टर हैं वे मरीजों से कहते हैं कि आप मेरे घर पर आ जाइए , मैं घर पर सहीं इलाज करूंगा. शिवपुरी जिले में ऐसे कई डॉक्‍टर हैं. पूरे प्रदेश में यही हाल है कि सरकारी हॉस्‍पिटल के सरकारी डॉक्‍टर मरीजों से कहते हैं कि आप घर पर इलाज कराने आइए. इसके लिए गरीब व्‍यक्‍ति क्‍या जमीन बेचेगा. वह क्‍या बेचकर इलाज कराएगा. अभी लाखों रूपए में इलाज हो रहे हैं. कई परिवारों की यही स्‍थिति है. आयुष्‍मान कार्ड हम जैसे पैसे वालों के बने हैं लेकिन गरीबों के कार्ड नहीं बने हैं, जबकि गरीबों के लिए यह सुविधा दी गई है.

          सभापति महोदया, मेरा यही आग्रह है कि यह बहुत चिंता का विषय है. स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा इसमें हर तरह की बीमारी पर ध्‍यान दिया जाना चाहिए और जहां-जहां स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में, चाहे वह पोहरी हो, बेराड़ हो या शिवपुरी जिला हो, जिसमें जो कि एक गंभीर बीमारी है जो कहीं न कहीं कोरोना के समय में वेक्‍सीन लगी है, वह भी नकली आयी है. उसके कारण जो बीमारी हमारे देश में, पूरे प्रदेश में और जिलों में फैली है, उसमें यह चिंता का विषय है कि हमारे युवा हमें छोड़कर जा रहे हैं. उस बात पर गौर किया जाए. उस पर विशेष ध्‍यान दिया जाए, जिससे हमारे युवा बच सकें. हमारा परिवार बच सके. किसी परिवार का कोई सदस्‍य यदि छोड़कर जाता है तो वह परिवार ही जानता है कि उस पर क्‍या बीतती होगी. इतना कहकर मैं अपनी बात समाप्‍त करता हूं, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          डॉ.राजेन्‍द्र पाण्‍डेय (जावरा) -- माननीय सभापति महोदया, मैं मांग संख्‍या 19 के समर्थन पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हॅूं. निश्‍चित रूप से एक महत्‍वपूर्ण और अत्‍यंत आवश्‍यक प्रत्‍येक जन-जन का यह कार्य है. स्‍वास्‍थ्‍य पर ही सब कुछ निर्भर होता है. मैं धन्‍यवाद के साथ में प्रशंसा करना चाहता हॅूं कि माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में और अत्‍यंत विनम्र, सरल, धीर-गंभीर माननीय मंत्री श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी के नेतृत्‍व में, जो स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में निरंतर बढ़ोत्‍तरी हुई है और स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में जो कमियां थीं,  कठिनाइयां थीं, समस्‍याएं थीं, उनका किस तरह से निराकरण किया जा सके, वह तेजी के साथ में प्रारम्‍भ होना शुरू हुआ है. पहले ग्रामीण क्षेत्रों में स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं नहीं हुआ करती थीं. अब उप-स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों के माध्‍यम से, प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों के माध्‍यम, सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों के माध्‍यम से मैं केवल दूरस्‍थ ग्रामीण क्षेत्रों तक और अगर शहरों में भी कहीं सिविल हॉस्‍पिटल है या जिला चिकित्‍सालय भी है लेकिन उसके बावजूद संजीवनी के माध्‍यम से उन दूर-दराज की बस्‍तियों में भी उस मरीज को, अस्‍वस्‍थ को कैसे स्‍वस्‍थ किया जा सके, यह सब तेजी के साथ में होना प्रारम्‍भ हुआ. अब अगर आंकलन करें, तो स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के लिए स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों की जो निचले स्‍तर से लेकर उच्‍च स्‍थान तक लगभग 12 हजार से अधिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं उसमें छोटे-बडे़ सभी केन्‍द्र आ जाते हैं. 12 हजार स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों में पहले जैसा कि आप-हम सभी भलीभांति जानते हैं, मैं कोई आरोप लगाना नहीं चाहता लेकिन पहले न कोई लैब हुआ करती थी, आज आधुनिक लैब छोटे से छोटा स्‍थान मेरे स्‍वयं का विधानसभा क्षेत्र जावरा सिविल हॉस्‍पिटल है, मैं उसके लिए माननीय मंत्री जी का धन्‍यवाद ज्ञापित करना चाहता हॅूं कि 2 करोड़ रूपए की लैब वहां पर प्रदान की गई और वह 2 करोड़ रूपए की जो मशीन है उसमें लगभग 134 या 150 जांचें होती हैं. पहले हमारे यहां से इंदौर या दाहोद, बड़ौदा या अहमदाबाद जांच भेजी जाती थी और जांच की रिपोर्ट आने के बाद में उपचार प्रारंभ होता था. मैंने इसलिए यह बात व्‍यक्‍त की कि माननीय सदस्‍य ने इस बात को उठाया था कि जांच की जानी चाहिए. जांच हो रही है, जांच निशुल्‍क हो रही है और अगर आयुष्‍मान कार्डधारक भी है, तो वह वहां जाकर जांच कराकर उसका उपचार होना प्रारंभ हो जाता है तो इस तरह की इन सारी आवश्‍यकताओं की पूर्ति की जाना प्रारंभ  हुआ. पहले एमआरआई मशीन के बारे में विचार ही नहीं आता था. अब तो एमआरआई मशीनें प्रदान की जाने लगीं. मेरे छोटे से स्थान पर डॉयलिसिस की 6 मशीनें काम कर रही हैं. डायलिसिस मशीनें वहां पर लग जाने के कारण जो दूरदराज के स्थान थे वह लगभग केन्द्र पर आना प्रारंभ हुए, यह निःशुल्क भी चलती है. निःशुल्क व्यवस्था वहां पर होने की वजह से उन गरीब किडनी रोगियों को जो आसरा हुआ है आप हम सब उनकी परेशानियों के बारे में आप सब भलि-भांति जानते हैं. इन आधुनिक मशीनों का जब लगाया जाना प्रारंभ हुआ तो मैं स्वयं अस्पताल जाकर देखा पहले तो सरकारी अस्पताल में जाना ही नहीं है. लेकिन आज उस तहसील मुख्यालय पर अगर सिर्फ मैं अपने विधान सभा क्षेत्र की बात करूं तो लगभग औसतन प्रतिदिन एक हजार ओपोडी हो रही है. एक हजार ओपीडी उप स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, सिविल अस्पताल उन केन्द्रों पर ही एक ही विधान सभा क्षेत्र में, क्योंकि उन्हें नजदीक तथा अच्छा इलाज प्राप्त हो रहा है. पहले अगर तुलनात्मक बात करें तो मैं उसे दोहराना नहीं चाहता, लेकिन सिर्फ भारतीय जनता पार्टी की सरकार की बात करें तो 2003 और इस 2026 में भी अंतर स्पष्ट दिखाई देता है. पहले मेडिकल कॉलेजों की क्या स्थिति थी ? पहले नर्सिंग कॉलेज तो हुआ ही नहीं करते थे अब तो नर्सिंग कॉलेज तो तेजी के साथ बनना प्रारंभ हुए हैं उसमें नर्सेस निकलना भी प्रारंभ हो गई हैं. रतलाम मेडिकल कॉलेज में भी माननीय मंत्री जी ने नर्सिंग कॉलेज के निर्माण की अनुमति दी है, वह निर्माणाधीन है, इसके लिये माननीय मंत्री जी को हृदय से धन्यवाद देता हूं. ग्रामीण क्षेत्रों में और अधिक सुविधाएं मिल सकें इसके लिये मैंने शासन से तथा माननीय मुख्यमंत्री जी, माननीय मंत्री जी से अनुरोध किया था. मैं पुनः बार बार धन्यवाद देना चाहता हूं. मेरे जावरा विधान सभा क्षेत्र के तहसील मुख्यालय जावरा में प्रारंभ से सिविल अस्पताल था यह 1957-58 की बात है, लेकिन जब दूसरी मांग की गई तो पिपलोदा तहसील में भी लगभग साढ़े 11 करोड़ रूपये का सिविल अस्पताल की मंजूरी दी, वह निर्माणाधीन है. आज ग्रामीण क्षेत्र में सिविल अस्पताल पहुंचने से आज ग्रामीणजन को आश्चर्य हुआ कि मेरे यहां पर भी सिविल अस्पताल बन सकता है ? उन बनती हुई भव्य बिल्डिंग उसके संसाधनों को देखकर के वहां का आमजन पूरी तरह से संतुष्ट है. मैं निवेदन करना चाहता हूं कि निश्चित रूप से पहले विगत् वर्षों में कमियां रही होंगी उन कमियों की यादश्त आज भी बनी हुई है. अब सरकारी अस्पताल में कोई जाकर के तो देखे वहां जाये तो सही, पहुंचे तो सही मैं तो सबको आमंत्रण देना चाहता हूं कि मेरे यहां पर जो पुराना सिविल अस्पताल था उस सिविल अस्पताल में मैंने जनभागीदारी के माध्यम से एक ऑक्सीजन प्लांट लगभग एक करोड़ रूपये की राशि आमजन ने प्रदान की विगत् समय माननीय पूर्व मुख्यमंत्री जी ने इससे खुश होकर के एक और ऑक्सीजन प्लांट वहां पर दिया है. अब तो सिविल अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगने लगे हैं. कोरोनाकाल में इसकी कठिनाईयां सबने देखी हैं. हम लोग ऑक्सीजन के लिये भटकते रहे. अच्छे अच्छे प्रभावशाली लोगों को समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल पाई थी. आज स्वास्थ्य सेवाओं में ऑक्सीजन प्लांट लगाकर के सीधे बेड पर ऑक्सीजन मिलना प्रारंभ हुआ है इससे कितने लोगों को जीवनदान मिल रहा होगा. निश्चित रूप से यह प्रशंसनीय है. स्वास्थ्य सेवाओं में सुदृढ़ता के लिये माननीय मंत्री जी ने जो उल्लेखनीय कार्य किये हैं, वह प्रशंसनीय हैं. मैं निवेदन करना चाहूंगा कि हमारे यहां पर फोर लेन, सिक्स लेन और एट लेन बन जाने के कारण रोड़ पर काफी एक्सीडेंट होते हैं. मैं प्रारंभ से निवेदन कर रहा हूं कि जावरा सिविल अस्पताल में वहां पर ट्रामा सेंटर एक ब्लड बैंक की हमें अगर स्वीकृति मिल जाये तो आम जन को और सुविधा होगी. इसी के साथ साथ जावरा सिविल अस्पताल में वह लगभग 1957-58 में बनना प्रारंभ हुआ था 1962 में पूर्ण हुआ. पूर्व मुख्यमंत्री डॉ.कैलाशनाथ काटजू ने इसकी आधारशिला रखी थी जब वह बना तो माननीय लक्ष्मीकांत जी पाण्डेय मेरे पिता जनसंघ के उम्मीदवार थे वह 1962 में हार गये थे. 1962 में ही इसका लोकार्पण हुआ था. मैं चाहता हूं कि इसकी हमने बार बार मरम्मत कराई है. हमने बहुत अच्छी स्थिति में उसको लाने की कोशिश की है, लेकिन वहां पर सिविल अस्पताल के नवीन भवन के निर्माण की अनुमति हमें मिल जाये फिर मैं धन्यवाद देना चाहता हूं कि विगत् वर्षों में माननीय मंत्री जी ने हमें महिला एवं बाल चिकित्सालय की अनुमति दी थी बह बनकर के वहां पर उपयोग में आ रहा है. लेकिन जिस स्थान पर पूर्व में महिला चिकित्सालय हुआ करता था अब वह पूरी तरह से रिक्त हो गया है. तो वहां पर स्‍टाफ क्‍वार्टर या अन्‍य कार्य की अनुमति दी जाए, वहां पर स्‍टाफ क्‍वार्टर की निश्चित ही अत्‍यधिक आवश्‍यकता है. इन सारे कार्यों के साथ साथ,  मेरे यहां पर सिविल अस्‍पताल में बाउंड्री बॉल की अत्‍यंत आवश्‍यकता है. क्‍योंकि वहां पर अतिक्रमण वगैरह होना प्रारंभ हुआ है. इन सारे कार्यों को यदि कर दिया जाता है तो उन स्‍वास्‍थ्‍य गतिविधियों में हमारे क्षेत्र को और सुविधा प्राप्‍त होगी. मध्‍यप्रदेश में जिस गंभीरता और गहराई के साथ में माननीय मंत्री जी द्वारा किए जा रहे हैं वह निश्चित रूप से प्रशंसनीय है, कुछ कमियां हो सकती है, उसके सुझाव आए हैं, उन सुझाव को अमल करते हुए उन कमियों को आगामी समय में दूर किया जा सकेगा, लेकिन वर्तमान में जो किया जा रहा है और विगत वर्षों में जो किया गया था, उसकी तुलना की जाए तो जितनी प्रशंस की जाए उतनी कम है. आपने बोलने का समय दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह (अमरपाटन) - आदरणीय सभापति महोदया, मैं मांग संख्‍या 19, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा की बजट मांगों पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हुं. मैं अपने इस भाषण में कुछ महत्‍वपूर्ण सुझाव देना चाहता हूं. अगर मंत्री जी आश्‍वस्‍त करें तो, वे गंभीरता से इन पर विचार करेंगे और समाधान तक पहुंचने का प्रयास करेंगे, तो मैं इसका समर्थन भी कर सकता हूं.

          सभापति महोदया आप बिल्‍कुल शंका न करें, मंत्री जी स्‍वभाव से ही गंभीर है.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह वैसे भी बड़े संजीदा इंसान है, मिलनसार है, सभी का ध्‍यान रखते हैं, अपने क्षेत्र के साथ साथ आस पड़ोस का भी रखते हैं, हम इनके पड़ोसी हैं, इनसे कोई गिला शिकवा नहीं है.  

सभापति महोदया मंत्री जी गंभीर है.

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह मैं तो कई विषयों पर बोलना चाहता था. कई मुद्दों पर बोलना चाहता था. स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के संबंध में जो डिलीवरी है, सिविल हॉस्पिटल से, जिला अस्‍पतालों से, हमारी पीएससी है, सब हेल्‍थ सेंटर्स हैं, लेकिन दूसरा मेडिकल कॉलेज जो पीपीपी मोड पर  बनाया जाना प्रस्‍तावित है, इन सभी के संबंध में बोलना चाहता था, लेकिन भंवर सिंह जी ने हमारे और साथियों ने बड़ी सकारात्‍मक आलोचना और स्‍पष्‍ट बातें की हैं, तो उस विषय पर अब बोलना नहीं चाहूंगा, जो हमारे क्षेत्र की मांगें और समस्‍याएं हैं, यदि आप अनुमति देंगी और मंत्री जी इजाजत देंगे तो मैं उनको लिखकर दे दूंगा और पटल पर  भी रख दूंगा. अगर मंत्री जी तैयार हो तो, इसमें हमारा समय बच जाएगा. मैं बड़ी भूमिका नहीं बाधूंगा, बहुत लोग शिकायत करते हैं, मेरे ही दल के लोग करते हैं कि आप बहुत बोलते हो और बगावत हो रही है, कुछ नेतृत्‍व भी करते हैं, (..हंसी) खैर वह अलग बात है. मेरा अधिकार है इसलिए मैं चुनकर आया हूं. अगर मैं अपने क्षेत्र की बात यहां नहीं रख सकता, अपने विचारों को प्रकट नहीं कर सकता तो मेरा यहां बैठने का कोई औचित्‍य नहीं है.

          एक महत्‍वपूर्ण सुझाव, जों मैंने कहा. मैंने विधान सभा सचिवालय में एक प्रस्‍ताव दिया हुआ है और उसकी सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई है, हमने पूरी करके दी है, यहां से पूरी होनी है और शायद वह सरकार के पास विचार  या राय के लिए भेजा गया  है. यह एक निजी सदस्‍य का विधेयक, बहुत सालों बाद इस मध्‍यप्रदेश की विधान सभा में दो या तीन ही ऐसे अवसर आए हैं, जब किसी सदस्‍य ने निजी विधेयक प्रस्‍तुत किया है. किसी विधायक की यह प्राथमिक जिम्‍मेदारी है, प्राथमिक दायित्‍व और कर्तव्‍य है, कानून बनाने का. दूसरा है बजट, उसकी समीक्षा करना, कहां अपव्‍यय हो रहा है, कहां सही है, ये सारी चीजों को देखना ही मुख्‍य कार्य होते हैं, लेकिन विधायकी कहलाता है, विधायिका, विधेयक, विधायक ये सब पर्यायवाची है और अर्चना जी(सभापति महोदया) आप तो बहुत विद्वान है, आपके सामने तो बहुत ज्‍यादा इस पर नहीं बोलूंगा. हमारे शास्‍त्रों में और लोक उक्‍तियों में ये बड़ा प्रचलित है कि सबसे बड़ा सुख कौन सा है, लोग कहते हैं कि सबसे बड़ा सुख निरोगी काया है और दूसरा सुख है घर में हो माया, तो अब जब माया होगी, तब तो निरोगी काया होगी और तीसरे औैर चौथे सुख के बारे में उल्‍लेख नहीं करूंगा, वह बड़े विवादास्‍पद हैं. हां समझने वाले समझ गये हैं, जो न समझे वह अनाड़ी है. यदि मनुष्‍य के जीवन में जैसा मैंने कहा कि आवश्‍यकता है, तो वह है स्‍वस्‍थ शरीर की और स्‍वस्‍थ शरीर में ही स्‍वस्‍थ मन भी रहता है और हमारे वेदों में जो चार वेद हैं, उसमें जो यजुर्वेद है, वह चिकित्‍सा के लिये समर्पित है. हमारे बहुत से ऐसे शास्‍त्र संहिताएं हैं, चरक संहिता, सुश्रुत संहिता ऐसी बहुत सारी संहिताएं हैं. यानि तब से हमारे मनीषी, हमारे ऋषि मुनि, इस पर चिंता करते आये हैं. हमारे गरीब की सेवा और स्‍वास्‍थ्‍य की दिशा में बहुत बड़ी सेवा होती है और किसी भी इंसान की एक गरीब और बेसहारा व्‍यक्ति की कातर आंखों को देखकर उसमें दर्द न पैदा हो, चिंता न पैदा हो, तो मैं समझता हूं वह इंसान, इंसान नहीं है, वह मनुष्‍य की श्रेणी में नहीं आता है.

          सभापति महोदया, प्रजातांत्रिक राज्‍य बहुत सारे हैं, जो कल्‍याणकारी राज्‍य हैं, हम भी कल्‍याणकारी राज्‍य होने का दावा करते हैं और हमारा संविधान भी वेलफेयर स्‍टेट की अवधारणा बना है. वेलफेयर स्‍टेट की बुनियाद है और उसमें कहीं कहीं उल्‍लेख भी है, स्‍वास्‍थ्‍य के बारे में उल्‍लेख है, शिक्षा के बारे में उल्‍लेख है और पेयजल और पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी उससे जुड़ी हैं, लेकिन उसके बाद क्‍योंकि हमारा संविधान भी कहता है, मेरा जो विधेयक है, वह सार्वभौम नि:शुल्‍क स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा यानि की आज हमारे आयुष्‍मान का कवरेज पांच लाख रूपये तक का है, लेकिन जो लाभार्थी हैं, जो लोग कवर्ड हैं, वह 60 से 65 फीसदी हैं, 30 से 35 फीसदी अभी भी अनकवर्ड हैं, उनको इसकी जरूरत है और बहुत सारे ऐसे देश हैं, जैसे स्‍वीडन है, फिनलैंड हैं, जर्मनी है, इंग्‍लैंड है, यहां पर नि:शुल्‍क स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं हैं और कहीं कहीं थोड़ा सा शुल्‍क भी लगता है. जापान क्‍यूबा और कैनेडा यह तो पूरी तरह से मुफ्त चिकित्‍सा सुविधाएं देते हैं, आस्‍ट्रेलिया और न्‍यूजीलैंड में भी यही व्‍यवस्‍था लागू है और मैं समझता हूं कि इस पर हमको भी विचार करने की जरूरत है.

          सभापति महोदया, हमारी अर्थव्‍यवस्‍था भी बहुत बड़ी होती चली जायेगी और बढ़ती ही जायेगी, ऐसी जरूरतों के लिये हमको धन का आवंटन करना चाहिए, उसमें कोताही नहीं बरतनी चाहिए. हमारे जो आयुष्‍मान कार्ड हैं, उसमें पांच लाख रूपये तक का कवरेज है, लेकिन यह सभी बीमारियों के लिये अपर्याप्‍त है. अगर कोई गंभीर बीमारी हो जाती है, तो उसमें राशि कम पड़ती है, उसमें जो जटिलताएं हैं, उन के संबंध में हमारे श्री शेखावत जी ने उल्‍लेख किया है, मैं उन पर नहीं जाना चाहता हूं. लेकिन इसमें कौन कवर्ड है, इसमें जो गरीबी रेखा के नीचे हैं, कर्मकार मण्‍डल वाले हैं, संबल योजनाओं में नाम जिनका जुड़ा है और अब इसमें सीनियर सिटीजन को भी जोड़ा गया है, यानि 70 वर्ष से जो ऊपर हैं,उनके लिये कार्ड बन रहे हैं, वे भी इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं. इसी से हमें प्रेरणा मिली है कि अगर सीनियर सिटीजन को नि:शुल्‍क मिल सकता है, बिना भेद भाव के मिल सकता है, उसमें न आय का कोई मापदंड है, न जाति, न वर्ग, न कोई सा धार्मिक, कोई भेदभाव नहीं है सबको, जितने है सबको, मुझे इससे प्रेरणा मिली है कि अब सभी परिवारों को और उनके सदस्‍यों को सुविधा दी जाये मेरे इस विधेयक में उल्‍लेख भी है और इसमें जितने हैं, मैंने उन सभी को शामिल करने का प्रस्‍ताव दिया है, उसमें सब शामिल हो सकते हैं, जैसे जो श्रमिक वर्ग आयुष्‍मान में शामिल नहीं है, किसान हैं, व्‍यापारी हैं, कर्मचारी हैं, चाहे निजी क्षेत्र के हों, या शासकीय हों, अर्धशासकीय हों, आउटसोर्स वाले हों. विधायक हों, पूर्व विधायक हों, सांसद हों, पूर्व सांसद हों सिर्फ उनको बाहर रखा जाना चाहिये जिनके पास हेल्‍थ कवरेज है, स्‍वास्‍थ बीमा होता है उनके पास. हमारे आईएएस और आईपीएस जो ऑल इंडिया सर्विसेस के हैं वह सारे कवर्ड हैं. सेवाकाल में उनको, उनकी पत्‍नी को और आश्रित बच्‍चों को मुफ्त सुविधा मिलती है. रिटायर्ड होने के बाद भी उनको मिलती है, अगर खुदानाखास्‍ता उनकी मृत्‍यु हो जाती है तो उनकी पत्‍नी को और आश्रित बच्‍चों को भी मिलती रहती है तो अगर हम आईएएस, आईपीएस को उस श्रेणी के लोगों को दे सकते हैं तो आम लोगों को भी क्‍यों यह फर्क करें और केन्‍द्र सरकार तो कहती है सब बराबर हैं, सबका विकास, सबका साथ, सबका विश्‍वास तो हम को इस पर विचार करने की जरूरत है. पंजाब सरकार ने भी पिछले म‍हीने यह बिल प्रस्‍तुत किया है, वहां पास भी हो गया है, उसका जो प्रारूप है उन्‍होंने सबको कबरेज किया है, यूनिवर्सल कवरेज जिसे कहते हैं और उसमें उन्‍होंने 10 लाख तक का कवरेज दिया है और लगभग 3 हजार करोड़ पंजाब में सरकार को इस पर खर्च करने पड़ेंगे. मध्‍यप्रदेश का आकार देखते हुये और आबादी हमारी उनसे बहुत ज्‍यादा है. मैंने अनुमान लगाया कि लगभग 8 से 9 हजार करोड़ रूपया प्रतिवर्ष इस पर खर्च आयेगा. मैं चाहूंगा सरकार इस पर गंभीरता से विचार करे, यह न माने कि मेरा विधायक है मेरी पार्टी की तरफ से, यह आपका विधेयक है, यह जनता का विधेयक है. पूरा श्रेय आप लो, हमें श्रेय नहीं चाहिये हम तो सिर्फ इस विषय को लाना चाहते थे. आम आदमी की पीड़ा जो लोग चर्चा करते हैं. भेदभाव इसमें तो न हो कम से कम इस पर विचार करना बहुत जरूरी है. प्रत्‍येक परिवार को मैंने प्रस्‍तावित किया है 15 लाख तक का कवरेज परिवार को प्रतिवर्ष और यदि गंभीर बीमारी हो जाती है, आपको लीवर का ट्रांसप्‍लांट कराना है, किडनी का तो यह इतने में नहीं होते हैं तो 25 लाख तक का कवरेज इसमें दिया जाना चाहिये.

          सभापति महोदया, हम अपनी लाड़ली बहनों को इस वर्ष के बजट में भी हमने 23 हजार करोड़ रूपये आवंटित किये हैं. हम कर्ज ले रहे हैं वहां भी जाता है कर्ज का पैसा इसके लिये यदि आप कर्ज लेंगे तो मैं कभी आपके कर्ज का विरोध नहीं करूंगा, यदि इस काम के लिये आप कर्ज लेते हो भले कितना भी हो जाये इसके लिये कर्ज लीजिये, पूरा करिये. लाड़ली बहनों को राशि दिये जाने का मैं विरोधी नहीं हूं, मैं तो समर्थक हूं. हमारी पार्टी का भी जो वचन पत्र था, मैं उसका अध्‍यक्ष था, हमने उसमें शामिल किया था नारी सम्‍मान और 1200 रूपये, 1500 रूपये हमने भी देने की बात कही थी, फर्क इतना था कि आप सरकार में थे, आप देने लगे और हमारा तो लोगों ने वादा ही माना.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल--  माननीय, वैसे जो कर्ज लिया जाता है उस राज्‍य को बेहतर माना जाता है जो केपिटल एक्‍सपेंडिचर में उस कर्ज का उपयोग करता है, अदरवाइज तो वह लोन बढ़ता चला जायेगा और कर्ज में डूब जायेगा तो इसलिये यह केपिटल एक्‍सपेंडिचर ही है.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह--  जी, मुझे यह ज्ञात है राजेन्‍द्र जी, केपिटल एक्‍सपेंडिचर ही स्‍वस्‍थ बजट, स्‍वस्‍थ वित्‍तीय प्रबंधन की निशानी है, इक्‍वल जितना अलाटमेंट है उसका कितना केपीटल में करते हैं और कितना रेवेन्‍यू में करते हैं, यानि वेतन भत्‍तों एवं फालतू के जो खर्च होते हैं उनमें भी करते हैं तो मैं कहना चाह रहा था इसे आप शामिल करें. हमारा विरोध नहीं जैसा मैंने कहा मैं स्‍वागत करता हूं लाड़ली बहना का भी उन्‍होंने आपकी सरकार बनाई है, वह तो प्रायोरिटी ही हैं, अगर वह सरकार न बनाती तो फर्क उल्‍टा हो जाता, वह तो सारे सर्वे कह रहे थे, वह तो अचानक...

          सभापति महोदया--  कल भी आपने इसी विषय पर इंगित किया था.

          श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत-- यह उनकी पीड़ा है.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह-- तो पीड़ा तो हमेशा निकलती रहती है माननीय वह कहां से बायपास कर दें, या कोई सर्जरी हो तो बताईये, बायपास करा लेते हैं.

          सभापति महोदया-- इस विषय को कन्‍क्‍लूड करें.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह-- मैं समाप्‍त ही कर रहा हूं, मैं ज्‍यादा बोलने वाला नहीं हूं. मेरा तो यह महत्‍वपूर्ण विषय है, मैं जानता हूं यह विधेयक जल्‍दी नहीं आयेगा.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल--  आपने अभी कहा न कि निरोगी काया तब ही होगी जब घर में होगी माया तो सवा करोड़ बहनें जिनको हर महीने 1500 रूपये मिलता  है उससे उनके स्‍वस्‍थ रहने के लिये उनके परिवार के लिये बहुत बड़ा सहारा मिल जाता है.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह-- मैं सहमत हूं कुछ हद तक राजेन्‍द्र जी, यह बताईये उसको अगर 10 लाख खर्च करना पड़ जाये तो यह 1500 रूपये तो आने जाने का किराया ही लग जायेगा सिर्फ किराये में काम आयेगा. वह तो एक सांत्‍वना है एक राजनीति का, वोट का फंडा है, वह छोड़ दीजिये. लेकिन कुछ तो राहत होती है. मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से और आप से आज सदस्य ही नहीं हैं हमारे पक्ष के भी कम हैं आपके पक्ष के भी कम हैं मंत्री जी तो कुछ आ गये हम तो गिन रहे थे साढ़े तीन तक तो काफी लोग हो गये हैं तो बोलने का भी आनंद नहीं है और कमी क्यों है मैं यह सोच रहा था अगर बुरा न माने तो एक चीज कह दूं. आज बिल्ली गई है तीरथ करने तो सारे चूहे इधर-उधर घूम रहे हैं. बुरा तो नहीं लगा.

          सभापति महोदय - मुझे लगता है हम आगे बढ़ें.

          डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह - जैसा मैंने कहा कि मेरे इस विधेयक पर आप गंभीरता से विचार करें इस मेरे विधेयक पर और यहां भी रिकार्ड बने कम से कम कि किसी निजी सदस्य के और कोई भी दे सकता है आप सब निजी सदस्य हैं आप सरकारी सदस्य नहीं हैं जितने उधर बैठे हैं. सब निजी सदस्य हैं और हम सब आपकी तरफ से पेश कर रहे हैं और कोई माननीय सदस्य सोचता है कि गलत है ऐसा नहीं होना चाहिये तो मौका मिले भाषण देने का जरूर विरोध करिये मैं उसका स्वागत हूं अगर सकारात्मक आलोचना है सुधार की तो वह भी मैं करूंगा. आज कमी है वैसे भी बोलने का आनंद नहीं है और जो मैंने आग्रह किया था मैं क्षेत्र की बातें नहीं कह रहा हूं बहुत सी चीजें वह जानते भी हैं मैं लिखित में दे दूंगा. आपने मुझे समय दिया इस आशा और विश्वास के साथ कि जो मैंने एक गंभीर मुद्दा उठाया है उस पर सरकार भी उतनी ही गंभीरता से विचार करेगी यह जनकल्याण का विषय है गरीबों से जुड़ा हुआ  विषय है बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री विपिन जैन(मंदसौर) -माननीय सभापति महोदय, मेरे मंदसौर के अंदर जिला चिकित्सालय में एक एसडीपी मशीन की मांग है  और वहां आए दिन मरीजों को दिक्कत आती है और 50-100 कि.मी. दूर जाना पड़ता है इसके अलावा एक सोनोग्राफी मशीन वहां पर है  लेकिन रेडियोलाजिस्ट की कमी है तो मेरा माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि रेडियोलाजिस्ट की नियुक्ति की जाये और एसडीपी मशीन प्रोवाईड कराई जाए. मैं मंदसौर जिले के दलौदा का निवासी हूं और दलौदा के अंदर  2015 में  एक 10 बेड का अस्पताल का निर्माण हुआ था जब मैं सरपंच था और अब विधायक बन गया लेकिन वह अस्पताल आज तक चालू नहीं हुआ.

          श्री सचिन बिरला - माननीय सभापति महोदया, राजेन्द्र सिंह जी विधान सभा के सदस्यों को चूहा बोल रहे थे मेरा कहना है इसे विलोपित किया जाये इसको हटाया जाये और यह उनके स्वभाव को ठीक नहीं जमता.इस तरह की भाषा का उपयोग करके वह सदन को क्या दिखाना चाहते हैं.कुछ समझ नहीं आ रहा.

          सभापति महोदया - नहीं. हम सब शेर हैं कहां बिल्ली चूहे के चक्कर में पड़ रहे हैं.

          श्री विपिन जैन - सभापति महोदया एक मिनट

          सभापति महोदया - नहीं आपकी बात आ गई है कृपया बैठिये. अभिलाष पाण्डेय जी.

          डॉ.अभिलाष पाण्डेय(जबलपुर उत्तर) - माननीय सभापति महोदय, सबसे पहले तो आपको धन्यवाद देता हूं कि इतने गंभीर और महत्वपूर्ण और गंभीर विषय पर अपनी बा तकहने का मौका दिया. मांग संख्या 19 के समर्थन में मैं अपनी बात कह रहा हूं. मैं अभी सुन रहा था पूर्व सदस्यों ने अपनी-अपनी बात कही और इस बात के लिये माननीय उपमुख्यमंत्री,स्वास्थ्य को  धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने इस बात को चरितार्थ करने करने का काम किया है कि जो परंपराएं,मान्यताएं और हमारी पुरातन संस्कृति जिस बात को कहती है कि "सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत्।"आपने इस बात को चरितार्थ करके मध्यप्रदेश में दिखाया और 2025-26 और 2026-27 में जिस बजट का प्रावधान किया गया उसमें 22362 करोड़ 7 लाख 10 हजार रुपये का जो आपने प्रावधान किया है. मुझे लगता है कि मध्‍यप्रदेश में राज्‍य के स्‍वास्‍थ्‍य की दृष्‍टि से यह बहुत महत्‍वपूर्ण बजट है. इसमें सबकी चिंता की गई है. अभी बहुत सारी बातें आईं कि कितने चिकित्‍सालय हैं. सिविल अस्‍पताल हैं. 1,442 प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं. अलग-अलग जिलों में अलग-अलग स्‍थानों पर सिविल अस्‍पताल चल रहे हैं. जिला अस्‍पताल चल रहे हैं. 158 सिविल अस्‍पताल हैं. लेकिन इसके साथ-साथ मध्‍यप्रदेश के अंदर आयुष्‍मान कार्ड को लेकर लोग बार-बार बात करते हैं. मैं विपक्ष को यह बताना चाहता हूँ कि आयुष्‍मान कार्ड के माध्‍यम से किस प्रकार से मध्‍यप्रदेश और देश की सरकार काम कर रही है. हमने महाभारत में हमेशा सुना है कि जब भीष्‍म पितामह को कोई प्रणाम करता था तो वे कहते थे कि आयुष्‍मान भव. हमारे बुजुर्गों को भी जब हम प्रणाम करते हैं तो वे कहते हैं आयुष्‍मान भव. ये आयुष्‍मान भव सिर्फ कहना नहीं है. ये आयुष्‍मान भव इस बात का प्रगटिकरण भी करता है कि मध्‍यप्रदेश के अंदर कितनी अच्‍छी स्‍थिति है. मैं विपक्ष को यह बताना चाहता हूँ कि एक बार इस आंकड़े को पढ़ने की आवश्‍यकता है. आरोप-प्रत्‍यारोप तो हम कर सकते हैं. लेकिन मैं आपसे यह निवेदन करता हूँ कि वर्ष 2003 में जो आपका बजट 23 हजार करोड़ रुपये था, इस वर्ष हमने उसका आधा 11,939 करोड़ रुपये सिर्फ और सिर्फ आयुष्‍मान कार्डधारकों के लिए इलाज के लिए खर्चा मध्‍यप्रदेश के अंदर हुआ है.

          सभापति महोदया, मेरे अपने जबलपुर शहर की मैं बात करता हूँ. जिस जबलपुर शहर से मैं आता हूँ, वहां 375 करोड़ रुपये सिर्फ आयुष्‍मान कार्डधारकों के लिए इलाज के लिए जबलपुर के अंदर खर्चा होता है. इसके साथ-साथ 70 प्‍लस के लोगों के लिए आयुष्‍मान कार्ड की भी परिकल्‍पना को साकार किया जा रहा है. अभी माननीय सदस्‍य कह रहे थे, 6 प्रकार के सुख होते हैं. पहला सुख निरोगी काया, दूसरा सुख घर में हो माया, तीसरे और चौथे सुख को विलोपित करते हैं तो पांचवा सुख घर में पाठा, छठा सुख घर में हो साठा. अरे, घर में 60 वर्ष का व्‍यक्‍ति होगा, उसके इलाज की चिंता कौन करने वाला है. अरे, जहां जाकर बीमा कंपनियां भी इंश्‍योरेंस करना बंद कर देती हैं, वहां पर भी यदि कोई खड़ा हुआ दिखाई देता है तो मैं गर्व के साथ कहता हूँ कि वह भारत की सरकार और देश के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्‍द्र मोदी जी खड़े हुए दिखाई देते हैं. यह काम हमने करके दिखाया है.

          माननीय सभापति महोदया, आयुष्‍मान कार्ड के बारे में मैं एक बात और सच्‍ची घटना का उल्‍लेख आपसे इस सदन के माध्‍यम से करना चाहता हूँ. मैं चुनाव लड़ रहा था. मुझे मात्र 15 या 16 दिन का समय मिला. चुनाव प्रचार के दौरान मैं एक घर के सामने से निकल रहा था तो एक व्‍यक्‍ति बैठा हुआ था. उसके चेहरे पर सूजन थी. हाथ पैर में सूजन थी. उसने मुझे आवाज दिया. मैं उसे पहचानता नहीं था. उसने मुझे बुलाया कि अभिलाष इधर आओ. मैं गया. उसने मुझसे कहा कि अभिलाष दो मिनट अंदर चलना है. मुझे लगा कि शायद अपने परिवार से मिलवाएंगे और वे अपनी कोई बात कहेंगे. माननीय सभापति महोदया, वे जब मुझे अंदर लेकर गए तो सीधे ले जाकर उन्‍होंने अपने मंदिर के सामने मुझे खड़ा कर दिया. मुझे लगा कि वे शायद को भगवान को प्रणाम कराएंगे और मुझसे कहेंगे कि प्रणाम करो, ईश्‍वर से आशीर्वाद लो और तुम विजयश्री की तरफ आगे बढ़ो. मैंने देखा कि मंदिर में अंदर हनुमान जी थे, शंकर भगवान जी थे, लक्ष्‍मी माता का चित्र लगा हुआ था. लेकिन उसी मंदिर के बगल में एक चित्र और लगा था. जब मैंने उस चित्र को देखा तो मन द्रवित हो गया, भावुक हो गया. अपने प्रति संवेदना और उनके प्रति विश्‍वास और बढ़ गया. जब मैंने देखा कि मंदिर के बगल से किसी और की फोटो नहीं, हमारे देश के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्‍द्र मोदी की फोटो लगी है. (मेजों की थपथपाहट). उन्‍होंने इस बात को कहा कि अभिलाष, मेरा पूरा परिवार मेरा साथ छोड़कर चला गया. सारे लोगों ने जब से मेरी डायलिसिस की स्‍थिति बनी, पूरा परिवार ने साथ छोड़ दिया. इस विपरीत परिस्‍थिति में भी कोई मेरे साथ खड़ा है तो आयुष्‍मान कार्ड और देश का प्रधानमंत्री मेरे साथ खड़ा है. ये आयुष्‍मान कार्ड का काम है.

          सभापति महोदया, इसके साथ-साथ आज के समय में मध्‍यप्रदेश और देश के अंदर चिकित्‍सा पर्यटन की भी स्‍थिति बढ़ी है. मैं गर्व के साथ कहता हूँ कि इस देश के एतिहासिक विकास की विकास गाथा जो लिखने वाली इस देश की सरकार है. मध्‍यप्रदेश के डॉक्‍टर मोहन यादव जी की जो सरकार है, आदरणीय हमारे राजेन्‍द्र शुक्‍ला जी के कुशल मार्गदर्शन में चिकित्‍सा शिक्षा के साथ-साथ चिकित्‍सा व्‍यवस्‍थाओं को जो बढ़ावा मिल रहा है, आज मध्‍यप्रदेश और देश विश्‍व के पटल पर 10वें नंबर है, जिस तरह से स्‍वास्‍थ्‍य पर्यटन की दृष्‍टि से मध्‍यप्रदेश ऐसे विकास की ओर अग्रसर होने वाला हमारा राज्‍य बना हुआ है. अन्‍य चिकित्‍सा महाविद्यालय भी खुले. चिकित्‍सा महाविद्यालयों की संख्‍याएं भी आई हैं. प्रायवेट तरह से किस प्रकार पीपीपी मॉडल पर, प्रायवेट पार्टनरशिप पर जिस तरह से काम चल रहा है और आगे जिस तरह की बात, हमारे अभी आदरणीय डॉ. राजेन्‍द्र जी भाई साहब कह रहे थे. मैं कहना चाहता हूँ कि आपने बिल्‍कुल सही बात कही है कि भारत की ऐतिहासिक परम्‍पराएं और चिरपुरातन संस्‍कृति इस बात का प्रकटीकरण है कि भारत के अन्‍दर आचार्य चरक हुए, जिनको ''फादर ऑफ मेडिसिन'' कहा जाता था एवं आचार्य सुश्रुत हुए, जिन्‍हें ''फादर ऑफ सर्जरी'' कहा जाता था. उस समय किसी प्रकार की सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन उसके बाद भी हमारे भारत की पुरातन परम्‍परा थी और जिस प्रकार से आयुर्वेद ने भारत, भारत के लोगों का और भारत के स्‍वाभिमान को विश्‍व पटल पर बढ़ाने का काम किया है. मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूँ हमारे माननीय मंत्री जी को, माननीय मुख्‍यमंत्री जी को, ऑल इण्डिया इंस्ट्टियूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्‍स) को आयुर्वेद के नाम से उज्‍जैन के अन्‍दर लाकर मध्‍यप्रदेश की धरती में एक बड़ा काम करने का काम सरकार ने किया है, इसके लिए भी मैं आपको धन्‍यवाद देना चाहता हूँ.

          माननीय सभापति महोदया, इसके साथ-साथ, मैं आदरणीय आपके प्रति एवं केन्‍द्र सरकार के प्रति आभार व्‍यक्‍त करता हूँ. हम सब सड़क हादसे की बात करते हैं, आज के दिन, मैं आपको इस बात के लिए भी धन्‍यवाद देता हूँ कि सड़क हादसों में यदि कोई व्‍यक्ति आहत होगा, तो उसका डेढ़ लाख रुपये तक का इलाज प्रधानमंत्री जी के माध्‍यम से कराया जायेगा. मैं हमेशा एक बात कहता हूँ कि सरकार संवेदनशील सरकार होनी चाहिए, भावनाओं से भरी हुए सरकार होनी चाहिए. वह भावनाएं और संवेदनशीलता सरकार पर दिखाई देती हैं.

          माननीय सभापति महोदया, मैं इस बात के लिए भी धन्‍यवाद देना चाहता हूँ कि जिस तरह से सरकार काम कर रही है, तो मेरी छोटी-छोटी दो-तीन डिमांड हैं. मैं निवेदन करता चाहता हूँ कि मैं एक विषय सदन के पटल पर लाया था, जिसमें मैंने उस समय यह बात कही थी कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों पर, मोबाइल की लत और आने वाले समय की समस्‍याएं, जिस प्रकार से डोपामाइन नाम का जिस तरह से हार्मोंस रिलीज होता है, उसमें उत्‍साह की स्थिति बनती है, मेटा का युग है, बार-बार वही रील आती है, रील से उत्‍साह बनता है और बच्‍चे देखते हैं. एडवाइजरी जारी होती है, फरीदाबाद का सीएमएचओ कहता है और इन सारी बातों के साथ एक मायोपिया नाम की बीमारी होती है, जिसकी ऑल इण्डिया इंस्ट्टियूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्‍स)  एक रिपोर्ट तैयार करती है, वर्ष 2001 में 7 प्रतिशत, वर्ष 2010 में 11.9 प्रतिशत एवं वर्ष 2025 में 14.9 प्रतिशत ऐसे बच्‍चे हैं, जिनको चश्‍मे लगने की उम्र 18 -20 वर्ष से घटकर 10 वर्ष से 12 वर्ष हो गई है. मैं माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करता हूँ. मैंने एक डॉक्‍टर से जब यह बातें कही कि ऐसा क्‍यों है कि बच्‍चे इतना ज्‍यादा मोबाइल देखते हैं ? तो उन्‍होंने मुझसे कहा कि अभिलाष यह तो महाभारतकाल का युग है. महाभारतकाल की समस्‍या है. सुभद्रा को अर्जुन जब कहानी सुनाते हैं, तब गर्भ में अभिमन्‍यु आधी बात सीखता है, उसी प्रकार से गर्भवती माताएं जितना ज्‍यादा मोबाइल चलाती हैं, आने वाली पीढ़ी उतना ही मोबाइल का उपयोग करती हैं. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करता हूँ कि हम अपने डॉक्‍टर्स के लिए यह एडवाइजरी जारी करें कि जिस तरह से हम डॉक्‍टर्स चौथे- पांचवे महीनों से यह लिखते हैं कि क्‍या-क्‍या काम नहीं करना है ? उसमें मध्‍यप्रदेश की सरकार अनिवार्यता दे कि डॉक्‍टर्स यह लिखें कि बच्‍चों की मां, जो प्रैग्‍नेंट हैं, गर्भवती हैं, वह मोबाइल चलाना कम करेंगी, तो आने वाली पीढ़ी को मोबाइल जैसी समस्‍याओं से बचाया जा सकता है. मैं इसके साथ-साथ एक निवेदन और करता हूँ कि जिस तरह से हमारा मनमोहन नगर अस्‍पताल है, जो उत्‍तर मध्‍य विधान सभा के अंतर्गत आता है, मैं माननीय मंत्री जी आपको धन्‍यवाद देना चाहता हूँ कि आपने वहां ऑपरेशन थियेटर, सोनोग्राफी, और एक्‍सरे मशीन दी है.

          माननीय सभापति महोदया, चूंकि आप एक नारी शक्ति का प्रतीक हैं. मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मनमोहन नगर अस्‍पताल हमारा एक ऐसा अस्‍पताल है, जिसमें मैं दावे के साथ कहता हूँ कि आप किसी प्रायवेट अस्‍पताल का मध्‍यप्रदेश में रिकॉर्ड निकालकर देख लीजिये. हमने वहां माननीय मंत्री जी के सहयोग से प्रयास किया है, 459 डिलीवरी वहां पर होती हैं. लेकिन प्रयास करके माननीय मंत्री जी से यह आग्रह भी किया था कि उस हॉस्पिटल को हम नॉर्मल डिलीवरी का सेन्‍टर बना रहे हैं, जिसमें एक वर्ष में 459 डिलीवरी नॉर्मल होती है, मैं दावे के साथ कहता हूँ कि इतना बड़ा रिकॉर्ड किसी और अस्‍पताल में नहीं हो सकता है क्‍योंकि मैं जानता हूँ कि जिस प्रकार की पी‍ड़ाएं होती हैं, और जिस तरह से  मनमोहन नगर अस्‍पताल का उन्‍नयन चल रहा है. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि इस हॉस्पिटल को सिविल अस्‍पताल बनाया जाये. इस तरह एक बड़ा हॉस्पिटल हमारे यहां विकसित हो सकता है. जिस तरह विक्‍टोरिया हॉस्पिटल है, जिसके अंदर 245 बेड का हॉस्पिटल बन रहा है, जिसके लिए मैं आपके प्रति आभार व्‍यक्‍त करता हूं. मनमोहन नगर हॉस्पिटल को भी उसी तरह से विकसित करने की आवश्‍यकता है. इसके साथ-साथ इस बात के लिए मैं धन्‍यवाद दूंगा कि जबलपुर का हॉस्पिटल, क्‍योंकि मुझे विश्‍वास है कि जबलपुर संभाग न केवल जबलपुर है बल्कि उसके साथ रीवा, शहडोल भी हैं, इन सारे संभागों के लोग भी बड़ी संख्‍या में, यदि किसी बड़े हॉस्पिटल की ओर देखते हैं, तो वह जबलपुर हॉस्पिटल है. आपने जो रुपये 8 सौ करोड़ से जबलपुर के मेडिकल हॉस्पिटल के अंदर उन्‍नयन का कार्य किया है, मैं, उसके लिए आपके प्रति आभार व्‍यक्‍त करता हूं कि जिस तरह से आप उसका जीर्णोद्धार कर रहे हैं, आपने नए तरीके से सुपर स्‍पेशलिटी हॉस्पिटल बनाया है, आदरणीय जे.पी.नड्डा जी के कुशल मार्गदर्शन में, कैंसर इंस्‍टीट्यूट जबलपुर में बनाया जा रहा है, उसके लिए भी जे.पी.नड्डा जी ने बहुत मदद की है लेकिन हमारे मंत्री जी, राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी एक दूरदर्शी नेता हैं, जो इस विज़न के साथ काम कर रहे हैं कि हमें भवनों का जीर्णोद्धार तो करना है लेकिन क्‍वालिटी ऑफ एजुकेशन के साथ-साथ, सुविधाओं का भी उन्‍नयन कैसे हो सकता है, आपके माध्‍यम से वह भी हो रहा है, इसके लिए आपका आभार.

          सभापति महोदया, मैं, अपनी पूरी बात केवल एक विषय को रखते हुए समाप्‍त करूंगा. मैंने हमेशा एक बात सीखी है, मेरा पिताजी भी मुझसे कहते हैं, मेरे माता-पिता दोनों ही शिक्षक हैं, वे कहते हैं और मेरा ध्‍येय वाक्‍य है कि-

"Every Successful person gives result and every unsuccessful person gives reasons."

          सभापति महोदया, जो सफल होगा वह यहां बैठकर परिणाम देगा और जो असफल होगा, वह हमेशा केवल कारण ही बताता रहेगा. मुझे इस बात को सदन में कहते हुए प्रसन्‍नता है कि Successful rate और Successful person यदि कोई है तो मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव और हमारे स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री, राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी हैं. मैं अपनी ओर से उन्‍हें बहुत-बहत बधाई एवं शुभकामनायें देता हूं, धन्‍यवाद.

(मेजों की थपथपाहट)

          श्री विवेक विक्‍की पटेल (वारासिवनी)-  सभापति महोदया, मंत्री जी के सहयोग से मेरे विधान सभा क्षेत्र में सिविल अस्‍पताल में, 100 बिस्‍तर के अस्‍पताल का काम चालू है. साथ ही खैरलांजी तहसील में 50 बिस्‍तर का सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र बनना था, उसकी प्रशासकीय स्‍वीकृति हो चुकी है लेकिन उसका काम अभी तक चालू नहीं हुआ है. मैं मंत्री जी से आग्रह करूंगा की यथाशीघ्र उसका काम प्रारंभ करवायें. साथ ही चूंकि मैं बालाघाट जिले से आता हूं, हमारा जिला पिछड़ा हुआ है. 3 वर्ष पूर्व तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह जी ने वहां भूमिपूजन किया था लेकिन अभी तक वहां मेडिकल कॉलेज का काम प्रारंभ नहीं हुआ है. आपका कहना था कि यह कॉलेज PPP मोड से बनेगा, मुझे लगता नहीं है कि वहां PPP मोड के लिए कोई सामने आयेगा, मेरा निवेदन है कि वहां सरकार अपनी ओर से मेडिकल कॉलेज बनाये, जिससे वहां के लोगों को वर्तमान में किसी भी चिकित्‍सा संबंधी कार्य के लिए नागपुर जाना पड़ता है, उन्‍हें नागपुर न जाना पड़े और बालाघाट स्‍तर पर ही उन्‍हें स्‍वास्‍थ्‍य सुविधायें मिले, धन्‍यवाद.

          श्री गौरव सिंह पारधी (कटंगी)-  सभापति महोदया, आज मैं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की मांग संख्‍या 19 के समर्थन में बोल रहा हूं. भगवान गौतम बुद्ध ने कहा था कि स्‍वास्‍थ्‍य सबसे बड़ा उपहार होता है और निश्चित ही हमारा स्‍वास्‍थ्‍य विभाग, मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में और हमारे बहुत ही ऊर्जावान, Dynamic उपमुख्‍यमंत्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी के नेतृत्‍व में नई ऊंचाइयां छू रहा है. मैं आपको बताना चाहूंगा कि हमारा प्रदेश, हमारे कुल बजट का 6.2 प्रतिशत स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में खर्च करता है और यह प्रसन्‍नता का विषय है कि यह हमारे देश के औसत को भी छूता है क्‍योंकि देश का औसत भी इतना ही है.

          सभापति महोदया, पिछले 3 वर्षों में ही हमने स्‍वास्‍थ्‍य विभाग का बजट दुगुना किया है वर्ष 2023 में जो बजट रुपये 13 हजार 3 सौ 48 करोड़ था, वह आज वर्ष 2026 में रुपये 22 हजार 2 सौ 33 करोड़ हो गया. मैं सदन को बताना चाहूंगा कि मध्‍यप्रदेश में अगर हम देश के सूचकांकों की चर्चा करें तो डॉक्‍टर टू पेशेंट का अनुपात जो कि एक जमाने में 1 डॉक्‍टर के अनुपात में 4500 होता था, वह अब 1 डॉक्‍टर  के अनुपात में 1500 हो गया है, जो कि मध्‍यप्रदेश की प्रगति का सूचक है. मैं इस पूरे स्‍वास्‍थ्‍य विभाग को 4 हिस्‍सों में बांटना चाहूंगा. इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर और फेसेलिटीज़. जिसमें हमारे एसएचसी, पीएचसी, सीएचसी आते हैं. जिनकी चर्चा पहले हो चुकी है. मैं इसी में एक छोटा सा निवेदन करना चाहूंगा कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में लगभग तीन लाख की आबादी के बाच में एक सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र है. उसका सिविल अस्‍पताल के रूप में उन्‍नयन होना चाहिए. ऐसा मेरा माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी से निवेदन है.

          सभापति महोदया, इस इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर फेसेलिटी के बारे में बताना चाहूंगा कि इस बार औषधालय और अस्‍पतालों के बजट में 170 प्रतिशत की बढ़ोत्‍तरी की गई है. 527 करोड़ रुपए पर यह पहुंचा है इसलिए निश्चित ही माननीय मुख्‍यमंत्री जी, वित्‍त मंत्री जी और उप मुख्‍यमंत्री जी बहुत ही बधाई के पात्र हैं. जो उपकरण होते हैं जिनका रखरखाव होता है, जैसे एक्‍सरे मशीन, सोनोग्राफी, ब्‍लड कलेक्‍शन सेंटर और मेरे विधान सभा क्षेत्र के सामुदायिक केन्‍द्र में माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी के द्वारा एक सोनोग्राफी मशीन दी गई थी जिसके लिए मैं पुन: अपनी तरफ से आभार व्‍यक्‍त करता हूं.

          सभापति महोदया, मुझे बताने की जरूरत नहीं है कि इस प्रदेश में किस प्रकार से शासकीय, स्‍वशासी और निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्‍या में उन्‍नति हुई है. हमारे विपक्ष के सभी साथीगणों को नंबर रट गया है कि 19 शासकीय और स्‍वशासी संस्‍थाएं हैं और 14 प्राईवेट मेडिकल कॉलेज इस प्रदेश में कार्यरत हैं, लेकिन निश्चित तौर पर बालाघाट जिले के मेडिकल कॉलेज की हम सभी को प्रतीक्षा है और हमें पूर्ण विश्‍वास है कि जल्‍द ही वह वहां पर खोला जाएगा. दूसरा आयाम आता है. ह्यूमन रिर्सोस एण्‍ड स्‍टाफिंग का. इसमें मैं आपको दो चीजें बताना चाहूंगा. कि हमारे उप मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में प्रदेश ने लगभग 30 हजार पदों को सृजन करके आउटसोर्सिंग या अन्‍य माध्‍यमों से भरने का निर्णय लिया है. उसके लिए आप बधाई के पात्र हैं. साथ ही साथ एक जो इंटीग्रेटिव एप्रोच हम मध्‍यप्रदेश में देख रहे हैं कि मेडिकल कॉलेज के साथ नर्सिंग कॉलेज भी हो तो इसके लिए भी निश्चित ही स्‍वास्‍थ्‍य विभाग बधाई का हकदार है. स्किल और ट्रेनिंग की चर्चा नहीं होगी तो यह विषय पूर्ण नहीं होगा. मैं बधाई देना चाहूंगा कि आपने परिचारकाओं के प्रशिक्षण के लिए बजट प्रावधान डबल कर दिया है, क्‍योंकि निश्चित तौर पर अगर हमारे कर्मी जो हैं वह वेल्‍ड ट्रैंड नहीं हैं तो स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं बहुत अच्‍छे से प्रदान नहीं की जाएंगी. पिछले कुछ वर्षों में आपने विशेषज्ञ डॉक्‍टरों को रखा. जिनकी संख्‍या 1500 के आसपास हो रही है‍. निश्चित ही मैं समझता हूं कि यह एक अच्‍छा कदम है. तीसरा विषय होता है. सर्विस डिलेवरी एण्‍ड क्‍वालिटी ऑफ केयर इसमें मैं बताना चाहूंगा कि मध्‍यप्रदेश में चाहे वह प्रिवेंटिव हो, क्‍यूरेटिव हो, रिवेल्‍यूवेटिव हो या पेलिटेटिव हो इसमें निश्चित ही हमने नये आयाम पाये हैं. सबसे पहले प्रिवेंटिव के तौर पर बताना चाहूंगा कि हमने वैक्‍सीनेशन में नये आयाम गढ़े हैं. हम लगभग 95 प्रतिशत से ज्‍यादा पूर्ण टीकाकरण की तरफ बढ़ गये हैं. मुझे यह बताने की जरूरत नहीं है कि वर्ष 2003-04 में यह 40 प्रतिशत से भी कम था. पुन: कुछ लोगों को तकलीफ होगी, लेकिन थोड़ी बहुत तकलीफ बीच-बीच में देते रहना चाहिए.

          सभापति महोदया, गर्भवती महिलाओं को स्‍ट्रक्‍चर्ड-वे में फोकस करने के लिए जो हमारी अनमोल 2.0 योजना है वह अपने आप में एक कीर्तिमान है. साथ ही साथ मैं बधाई देना चाहूंगा कि वय वंदना योजना जिसमें हमारे 70 वर्ष से अधिक के लोगों को आयुष्‍मान कार्ड बनने थे उसमें भी मध्‍यप्रदेश देश में अग्रणी प्रदेश है. उसके लिए निश्चित ही स्‍वास्‍थ्‍य विभाग हमारे माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में बधाई का हकदार है.

          सभापति महोदया, निरामय योजना जिसमें निर्माण श्रमिकों को सहयोग किया जाता है वह भी अपने आपमें अलग है. बालाघाट से आते हुए मैं बताना चाहूंगा कि हमारे यहां पर आदिवासी क्षेत्र में सिकल सेल की बीमारी एक बड़े रूप में रहती है, लेकिन मध्‍यप्रदेश हमारे राज्‍यपाल जी के मार्गदर्शन में, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी के नेतृत्‍व में नये आयाम, कीर्तिमान स्‍थापित कर रहा है. Pneumococcal Vaccine  है जो कि आने वाले समय में सिकल सेल की बीमारी आगे न बढ़े उसके लिए इसका बडे़ स्‍तर पर प्रयोग किया जा रहा है, वैक्‍सीनेशन किया जा रहा है तो निश्चित ही स्‍वास्‍थ्‍य विभाग इसके लिए बधाई का हकदार है. हमारे जो ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल है उसमें मैं एक बात जरूर बताना चाहूंगा कि कैंसर के लिए लगभग हर जिला अस्‍पताल में जो डे-केयर सेंटर खोले गये हैं. उसके लिए निश्चित ही यह प्रदेश अपने आप देश में एक भूमिका निभाता है. एक बात और इंदौर मेडिकल कॉलेज ने जो  Chimeric Antigen Receptor-T Cell Therapy थेरेपी शुरू की है यह एक बहुत ही इनोवेटिव
टेक्‍नोलॉजी से शासकीय स्‍तर पर जो सुविधा प्रदान कर रहे हैं ऐसे मरीजों को
जिनको यह बीमारी हो जाती है यह वाकई में अपने आप में एक कीर्तिमान है. जो मध्यप्रदेश में ही संभव हो सकता था. इस प्रदेश की लगभग सभी डाइग्नोस्टिक लेब NABL accredited हैं.  आज 134 प्रकार के ब्लड टेस्ट होते हैं जबकि वर्ष 2002 में सिर्फ 45 प्रकार के होते थे. हमने 365 डायलेसिस मशीनें स्वास्थ्य विभाग के द्वारा विभिन्न अस्पतालों में उपलब्ध कराई हैं. हम अस्पतालों में सिर्फ सुविधाएं नहीं देते हैं वहां पर भर्ती मरीजों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और सफाई का भी ध्यान रखते हैं. इसके लिए बजट में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है. क्लीनलीनेस से ही हेल्थ पॉसिबल है इस दिशा में भी प्रदेश काम कर रहा है. आखिरी  पैरामीटर है, Performance metrics and accountability. MMR, IMR, TFR. IMR  में 86 से 37 पर आ गए हैं, पिछले 20 सालों में, यह हमारे मातृ शिशु संजीवनी मिशन की उपलब्धि दिखाता है. साथ ही टीबी, लेप्रोसी, मलेरिया जैसी बीमारियों पर काबू पाने का प्रयास किया गया है. यह भी इस प्रदेश को अच्छा सूचकांक देता है. मध्यप्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र निवेश प्रोत्साहन नीति 2025 लाई गई. भले इसकी चर्चा नहीं हो रही है यह अपने आप में एक उल्लेखनीय कदम है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, निवेश प्रोत्साहन विभाग, सम्माननीय मुख्यमंत्री जी बधाई के पात्र हैं. मध्यप्रदेश को मेडिकल ट्रीटमेंट टेक्नालॉजी का हब बनाने की दिशा में एक प्रयास है. इसके लिए मैं पुन: हमारे उप-मुख्यमंत्री जी को बधाई देते हुए आखिरी निवेदन करूंगा कि कटंगी को सिविल अस्पताल की सौगात प्राप्त हो यही निवेदन है. बहुत बहुत धन्यवाद. भारत माता की जय वन्दे मातरम्.

          श्रीमती प्रियंका पैंची (चाचौड़ा) -- माननीय सभापति महोदया, आज मैं लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा की मांग संख्या 19 जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर अपनी बात रखने के लिए खड़ी हुई हूँ.

          माननीय सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से इस सदन का ध्यान प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में पिछले वर्षों में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की ओर आकर्षित करना चाहती हूँ. यह कहना गलत नहीं होगा कि हमारी सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है. इसके परिणाम प्रदेश के हर जिले में दिखाई दे रहे हैं. प्रदेश के जनसामान्य को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराए जाने एवं प्रदेश में चिकित्सा के क्षेत्र में मानव संसाधन विकसित किए जाने हेतु वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य शासन द्वारा 5806 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. चिकित्सा शिक्षा हेतु राज्य शासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 की तुलना में 22.45 प्रतिशत की वृद्धि बजट में की गई है. आज मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य ढांचा लगातार मजबूत हो रहा है. कैंसर जैसे गंभीर रोगों के उपचार के लिए प्रदेश में 52 डे-केयर सेंटर संचालित किए जा रहे हैं. जहां पर आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं. आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के लिए पूरे प्रदेश में 108 एम्बूलेंस और जननी एम्बूलेंस का व्यापक नेटवर्क कार्य कर रहा है. मोबाइल मेडिकल यूनिट्स भी दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा रही हैं. मुझे बताते हुए बड़ा ही गर्व हो रहा है कि इंदौर के शासकीय महात्मा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय में अत्याधुनिक उपचार सुविधाएं जैसे कार्टिसेल थैरेपी, बेरायाट्रिक सर्जरी और लेजर सर्जरी जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं. यह प्रदेश की चिकित्सा क्षमता में एक बड़ा कदम है. पिछले कुछ वर्षों में चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. प्रदेश में शासकीय महाविद्यालयों की संख्या 14 से बढ़कर 19 हो गई है. वहीं निजी चिकित्सा महाविद्यालय भी 12 से बढ़कर 14 हो गए हैं. इसके अतिरिक्त केन्द्र सरकार द्वारा इंदौर में ESIC चिकित्सा महाविद्यालय का संचालन भी प्रारंभ किया गया है. चिकित्‍सा महाविद्यालय का संचालन भी प्रारंभ किया गया है जिससे चिकित्‍सा शिक्षा को और मजबूती मिली है. सरकार द्वारा आम जन की संवेदनाओं को ध्‍यान में रखते हुए जुलाई, 2025 से शव परिवहन सेवा प्रारंभ की गई है. इस सेवा के माध्‍यम से अब तक 6,300 से अधिक दिवंगत व्‍यक्तियों के पार्थिव शरीर को सम्‍मान पूर्वक उनके गंतव्‍य तक पहुंचाया या है. यह केवल एक योजना नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा एक महत्‍वपूर्ण प्रयास है. इसी प्रकार मई, 2025 में पीएम श्री एयर एम्‍बुलेंस सेवा प्रारंभ की गई है जिसके माध्‍यम से गंभीर मरीजों को त्‍वरित उपचार के लिए एयरलिफ्ट किया जा रहा है. योजना के प्रारंभ से अबतक 128 लोगों को इस सुविधा का लाभ मिला है जो यह दर्शाता है कि सरकार आपातकालीन स्‍वास्‍थ सेवाओं को कितना महत्‍व दे रही है. किडनी रोगियों के उपचार के लिये भी महत्‍वपूर्ण कदम उठाए गए हैं. प्रदेश में 9 नई डायलिसिस यूनिट्स प्रारंभ की गई हैं और वर्ष 2025-26 में हजारों मरीजों के लाखों डायलिसिस सत्र किए जा चुके हैं. यह सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है जिसमें गंभीर रोगों से जूझ रहे लोगों को राहत पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है.

          सभापति महोदय, जन सामान्‍य को सस्‍ती और सुलभ दवाइयां उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से प्रदेश के सभी जिला चिकित्‍सालयों में जन औषधि केन्‍द्र सथापित किए गए हैं. इसके अतिरिक्‍त कई नये विशेषज्ञ संवर्गों में भी चयन प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है. इएनटी विशेषज्ञ, स्‍त्री रोग, मे‍डिसिन, अस्थि रोग, पैथोलॉजी, क्षय रोग और नेत्र रोग विशेषज्ञों के लिए चयन सूची जारी की जा चुकी है तथा उनकी पदस्‍थापना की प्रक्रिया भी जारी है. इससे आने वाले समय में प्रदेश के अस्‍पतालों में विशेषज्ञ डॉक्‍टरों की उपलब्‍धता और बेहतर होगी. नर्सिंग स्‍टाफ की भर्ती पर भी विशेष ध्‍यान दिया गया है. वर्ष 2024-25 में विभिन्‍न स्‍वास्‍थ संस्‍थाओं में 868 पदों पर नर्सिंग स्‍टाफ की भर्ती की गई है जिससे मरीजों की देखभाल व्‍यवस्‍था को मजबूती मिली है. राष्‍ट्रीय बाल स्‍वास्‍थ्‍य कार्यक्रम के अंतर्गत हजारों बच्‍चों को नि:शुल्‍क सर्जरी उपलब्‍ध कराई जाती है. जिसमें जन्‍मजात हृदय रोग से पीडि़त बच्‍चे शामिल हैं उनकी अनेकों सर्जरी नि:शुल्‍क  हुई हैं. उनको नया जीवन मिला है. यह हमारे लिए बहुत ही गर्व की बात है. मैं आपके माध्‍यम से इस सदन के समक्ष प्रदेश में लागू आयुष्‍मान भारत योजना की महत्‍वपूर्ण उपलब्धियों को प्रस्‍तुत करना चाहती हूं.

          सभापति महोदया -- माननीय सदस्‍य से मेरा यह निवेदन है कि जो बात आ गई है उसकी पुनरावृत्ति न हो, आपका कोई व्‍यक्तिगत विषय अपने क्षेत्र को लेकर हो तो उसको आप लेंगी तो अच्‍छा रहेगा.

          श्रीमती प्रियंका पैंची -- सभापति महोदया, मैं माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देती हूं कि हमारे यहां बीनागंज हॉस्पिटल में फीमेल डॉक्‍टर नहीं थी माननीय मंत्री जी ने मेरे रिक्‍वेस्‍ट करने पर वहां फीमेल डॉक्‍टर की उपलब्‍धता कराई है. साथ ही मैंने माननीय मंत्री जी से बीनागंज स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र को सिविल हॉस्पिटल की स्‍वीकृति प्रदान करने की मांग की है तो जल्‍दी ही यह सिविल अस्‍पताल की अनुमति मिल जाए. साथ में आयुष्‍मान भारत योजना ने यह साबित कर दिया है कि जब सरकार संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ काम करती है तो स्‍वास्‍थ सेवाएं वास्‍तव में गरीब और जरूरतमंद लोगों तक पहुंच सकती हैं. इसी के साथ इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए मैं प्रदेश सरकार तथा सभी स्‍वास्‍थ कर्मियों को धन्‍यवाद देती हूं. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री सुरेश राजे (डबरा) -- सभापति महोदया, मेरा आपके माध्‍यम से अनुरोध है कि मैं लगातार सुन रहा हूं कि स्‍वास्‍थ के क्षेत्र में बहुत काम हुआ है मेरा आपके माध्‍यम से अनुरोध है कि वर्ष 2020 में सिविल हॉस्पिटल डबरा की 100 बिस्‍तरों की बिल्डिंग बनना शुरू हुई है तो जब मैं यहां आपके सामने बोल रहा हूं पता नहीं कछुए की चाल से भी धीमी गति से माननीय मंत्री जी वह कार्य चल रहा है तो कृपा करके वह समय पर बन जाएगी इतना अनुरोध मुझे आपसे करना था. धन्‍यवाद.

          श्री कैलाश कुशवाह (पोहरी)-- माननीय सभापति महोदय, मुद्दे की बात कहना चाहता हूं. मेरा माननीय उप मुख्यमंत्री जी से विशेष आग्रह है कि जो मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की लैब होती हैं जिनमें जांच होती है, अल्ट्रासाउंड (या सोनोग्राफी) होता है, एक्स-रे (X-ray)  होता है, उनका खर्चा गोलियों जैसा है 10 रूपये के खर्चे पर 100 रूपये, मतलब मंत्री जी इस पर आप ध्यान दें कि गरीब आदमी जब एक्स-रे कराता है , अल्ट्रासाउंड कराता है या कोई जांच कराता है. तो उसमें जो खर्चा आता है ,थोडा बहुत तो चल जाता है लेकिन सुनने में ऐसा आता है कि 50 प्रतिशत तो जो डॉक्टर पर्चा बनाते हैं उनका ही कमीशन जाता है, इस पर कृपया ध्यान दें.

          सभापति महोदय- मंत्री जी देखेंगे, विजय रेवनाथ चौरे जी.

          श्री विजय रैवनाथ चौरे(सौंसर) -- माननीय सभापति महोदय, धन्यवाद. मोहन सरकार का यह तीसरा बजट है दो और बजट वह भविष्य में पेश करेंगे. माननीय सभापति महोदय, सन 2024-25 में विभाग का बजट था 3 लाख 65 हजार करोड का, 2025-26 का बजट था 4 लाख 21 हजार करो़ड़ का, इसमें 15 प्रतिशत की वृद्धि थी. लेकिन अभी जो बजट प्रस्तुत हुआ है, तो  4 लाख 21 हजार के बाद इस बार 4 लाख 38 हजार का बजट प्रस्तुत हुआ है. केवल 4 प्रतिशत की बढौती.

          माननीय सभापति महोदय, कभी भी जब बजट बढ़ता है,जैसे पिछली बार आपने 15 प्रतिशत बजट बढ़ाया था अगर आप इसको 16 प्रतिशत भी कर देते तो हमको लगता कि यह बजट बातों के बताशे वाला बजट नहीं है. और सफाचट भी नहीं है.

          माननीय सभापति महोदय, मैं कहना चाह रहा हूं कि आज सरकार के पास में पैसा नहीं है, बजट हेतु राशि नहीं है इसलिये यह सब परिस्थितियां बन रही है इसलिये आपने सिर्फ 4 प्रतिशत बजट किया है.

          माननीय सभापति महोदय, स्वास्थ्य के बारे में कहना चाहता हूं कि लगभग 22 हजार 300 करोड़ का बजट स्वास्थ्य विभाग के लिये हमारे स्वास्थ्य मंत्री जी ने घोषित किया है. माननीय सभापति महोदय, मैं उनसे पूछना चाहता हूं जब इतना बड़ा बजट आपने आवंटित किया है तो यह पैसा जा कहां रहा है. आज मंत्री जी यह बतायें कि अभी हमारे बहुत सारे साथियों ने मेडिकल कालेज की गिनती करा दी 2003 में इतने थे, 2026 में इतने हैं, मैं पूछना चाहता हूं कि मेडिकल कालेज की गितनी करा देने से क्या पूरी स्वास्थ्य की सुविधायें और इलाज हो जाता है.

          माननीय सभापति महोदय, 4 साल पहले छिंदवाड़ा का मेडिकल कालेज बनकर के तैयार हुआ और परासिया में 25 बच्चों ने कफ़ सिरप पीने से उनकी मौत हो गई, तो उनका इलाज उस छिंदवाड़ा के मेडिकल कालेज में नहीं हुआ, उनको नागपुर ले जाना पड़ा और वहां उनकी मौतें हुई और वहां उनका इलाज हुआ, प्रायवेट अस्पतालों में उनका इलाज हुआ. सभापति जी यहां पर  मेडिकल कालेज की बड़ी बड़ी बातें कर रहे हैं, सुविधायें नहीं दे रहे है आप. आदरणीय कैलाश विजयवर्गीय जी उस दिन कह रहे थे कि हमने सारे प्रायवेट अस्पतालों में इंदौर के मरीजों को भर्ती किया. इंदौर इतना बड़ा महानगर है जहां बड़े बड़े अस्पताल, मेडिकल कालेज, वहां पर सरकारी अस्पताल में आपके पास में क्या मरीजों के इलाज के लिये जगह नहीं थी, क्या वहां पर इलाज के लिये व्यवस्था नहीं बन पाई. जिस कारण मरीजों को आपको प्रायवेट अस्पतालों में ले जाना पडा.

          माननीय मंत्री जी आप खूप अपनी पीठ थपथपा लो, आप कहते हैं कि हमने इतने अस्पताल बनाये, इतने मेडिकल कालेज बनाये. मंत्री जी मैं कहना चाहता हूं कि आपके अस्पताल केवल भ्रष्टाचार के लिये बनते हैं. गांव गांव में जब 50-60 लाख की जो बिल्डिंगें बन रही हैं वह केवल भ्रष्टाचार की भेंट चढ रही है. और मैं मेरे विधानसभा क्षेत्र की बात मंत्री जी को बता दूं  कि कई गांव ऐसे हैं जिनके वीडियो में दिखा सकता हू कि  अस्पताल बन गये, बिल्डिंग बन गई, खंडहर हो गये हैं, लेकिन आज स्थिति यह है कि उनके खिड़की दरवाजे चोरी जा रहे हैं और उस अस्पताल में डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ नहीं है.आप पीठ  थपथपाते हो अपनी सरकार की.

          माननीय सभापति महोदय, मैं एक चीज और सरकार से कहना चाहता हूं कि आपने सारे आउट सोर्स के रूप में कर्मचारियो को रखा है, ड्रायवर की पोस्ट अस्पताल में बंद कर दी है, ड्रेसर की पोस्ट बंद कर दी, दाई की पोस्ट बन्द कर दी तो सारे अस्पतालों की यह हालत है. जब आपके पास में डॉक्टर नहीं है, पैरा मेडिकल स्टाफ नहीं है, इक्विपमेंट नहीं. मेरे यहां पर एक्स-रे मशीन को आये हुये 10 साल हो गये हैं एक्स-रे मशीन को चलाने वाला आपरेटर नहीं है, वह मशीन जंग खा रही है, यह परिस्थितियां मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य व्यवस्था की है. माननीय उप मुख्यमंत्री जी यह आपकी बीमार अर्थव्यवस्था के गाल पर तमाचा है.

          माननीय सभापति महोदय, आज मेरा एक प्रश्न लगा था पर वह किसी कारण से नहीं आ सका. आयुष्मान योजना की बड़ी बड़ी बात कर रहे थे, इलाज कराने के पहले क्योंकि आयुष्मान में केवल इलाज होता है, इलाज कराने के पहले जमाने भर की जांच डॉक्टर बताते हैं, कैंसर अगर है तो  उसके लिये 1 लाख रूपये की जांच बता देता है, मरीज को वह अपनी जेब से भरना पड़ता है, आयुष्मान  का इलाज तो बाद में शुरु  होता है. उसके बाद आयुष्मान  योजना के अंतर्गत  मैंने  एक प्रश्न लगया था कि  5 लाख रुपये तक  आप  आयुष्मान की सीमा देते हैं. कैंसर  और हृदय रोग जैसी गंभीर  बीमारियों में  8-10 लाख तक खर्च  हो जाता है  और जिसके  कारण आयुष्मान  योजना  के अंतर्गत  जब वह इलाज कराता है, तो उसको  बीच में बीमारी में अपना  इलाज रोक देना पड़ता है.  मैंने प्रश्न लगाया था मंत्र जी  कि राजस्थान, गुजरात और  दिल्ली में, वहां पर भी डबल इंजन की भाजपा  की सरकार है,  वहां की सरकार ने आयुष्मान  की  सीमा 5 लाख  से बढ़ाकर 10 लाख की है  और म.प्र. में भी  जब डबल इंजन  की बीजेपी की सरकार  है. मैं पूछना चाहता हूं कि क्या  आप  भी यहां 5 लाख से बढ़ाकर  10  लाख रुपये करेंगे.  इसका आप जवाब जरुर अपने भाषण  में दीजिये. एक और चीज मैं कहना चाहता हूं कि  मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान  में आप सौतेला व्यवहार कर रहे हैं मुख्यमंत्री जी कांग्रेस  के  विधायकों, नेताओं के साथ. मैं एक चीज यह बताना चाह रहा हूं कि  मैंने  इस पंचवर्षीय  में,  पिछले शिवराज सिंह जी के समय में  मैंने चिट्ठी दी थी, तो 10-12  तो मेरे हो गये थे मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान  पर गरीबों के इलाज.   इस पंचवर्षीय  में  स्वास्थ्य मंत्री जी सुनिये.  मैंने  22 चिट्ठियां दी हैं मुख्यमंत्री जी को गरीबों के इलाज  के लिये. एक भी चिट्ठी उन्होंने  मुख्यमंत्री राहत कोष से  गरीबों के इलाज के लिये   कांग्रेस के विधायकों का काम नहीं किया. यह सौतेला व्यवहार  और मैं पूछना चाहता हूं कि  मुख्यमंत्री जी और मंत्री जी जब  आप शपथ लेते हैं, तो कहते हैं कि  द्वेष, पक्षपात,  भय, निडरता के साथ  में  बिना द्वेष के काम करुंगा. यह  आपकी शपथ के शब्द है.  यह  आपकी शपथ असत्य   है या सही है. तो  आप सौतेला व्यवहार कर रहे हैं.  एक और चीज मैं कहना चाहता हूं कि उप मुख्यमंत्री जी ने    कहा अपने भाषण  में कि  हम मुख्यमंत्री स्वेच्छा  अनुदान से अलग से  इलाज कराते हैं,  आयुष्मान में  अगर  कवर नहीं होता है तो.  मुझे बताइये   कि कैंसर और हार्ट अटैक  के कितने सारे मरीजों का इलाज  आपने करा दिया  क्या आयुष्मान  योजना के अलावा मुख्यमंत्री स्वेच्छा अनुदान से.  यह बताने का कष्ट करें आप,  जब   अपन भाषण में बात करें. केवल बातों  के बताशे हैं और आज मैं यही कहना चाहता हूं कि  आज हमारे पूरे प्रदेश में बदहाल  स्थिति है. डॉक्टर्स की बहुत बुरी स्थिति है.   मेरे यहां पर सौ बिस्तर का अस्पताल संचालित है, जिसमें 42 डॉक्टर के पद हैं.  केवल 12 डाक्टर पोस्टेड हैं.  आपके  म.प्र. की स्वास्थ्य व्यवस्था  यह  चरमरा रही है और आप  कह रहे हैं और खूब पीठ थपथपा  रहे हैं.  आयुष्मान कार्ड की बड़ी लम्बी चौड़ी  बातें हो रही हैं. आयुष्मान कार्ड का जो इलाज होता है,  उसमें भारी घोटाला हुआ है. इतना बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है कि  कई लोग  इलाज के  नाम पर  भर्ती हो जाते हैं और डॉक्टर   बिल निकाल लेते हैं. 3  लाख का इलाज करते हैं, डॉकटर कहते हैं कि  5 लाख का इलाज आपका हो गया चलो  हो गई छुट्टी.  मेरा  विधान सभा क्षेत्र नागपुर से लगा हुआ है  और सारे मरीजों को नागपुर जाना पड़ता है. एक  अस्पताल केवल  स्योरटेक  नागपुर का,  उसमें केवल आयुष्मान कार्ड  चलता है.  वहां के सारे अस्पताल में  जैसे ही आयुष्मान कार्ड लेकर जाता है मरीज  फेंक  दिया जाता है. यह दुर्दशा है,  यह हम आपके आयुष्मान कार्ड  की बात कर रहे हैं.  कहीं चल नहीं रहा है  आयुष्मान  कार्ड  महाराष्ट्र के अस्पतालों में.  इस पर मंत्री जी आप कुछ जवाब देंगे.   सभापति महोदया, मुझे बहुत सारी बातें बोलने की थीं,  मैं समय  की सीमा का ध्यान रख रहा हूं,  पर निवेदन यह कर रहा हूं कि  म.प्र. की स्वास्थ्य व्यवस्था को  और अधिक सुदृढ़   बनाने  की जरुरत है और अच्छा काम करने  की जरुरत है,  आपने मुझे बोलने का मौका दिया,  बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा (जावद) सभापति महोदया, धन्यवाद.  मैं मांग  संश्या 19  के पक्ष में और  मांग  की जरुरत के बारे में  चर्चा करने के लिये  खड़ा हुआ हूं.  मैं काफी  देर से कई वक्ताओं  के  वक्तव्य सुन रहा था. चर्चाएं हुईं.  किसी  ने बोला  मेडिकल कालेज ज्यादा हुए,  किसी ने बोला कि क्यों हुए.  किसी ने बोला कि स्टाफ नहीं हैं,   कहीं न कहीं  हमें यह समझना पड़ेगा कि जब  5 मेडिकल कालेज थे,  कितने डॉक्टर म.प्र.  में  बनते थे.  कितने गांव हैं. कैसे हम डॉक्टरों को कहां से  लाकर पोस्टिंग करेंगे. यह कोई फार्मूला तो ऐसा है नहीं  कि  जहां हम तुरंत  कर लें.   वास्तव  में  एक विजन के साथ  म.प्र. की भाजपा की सरकार  जो काम कर रही है कि जब तक  मूलभूत हम डॉक्टर और  नर्सिंग स्टाफ पूरा तैयार  नहीं करेंगे. तब तक सुविधाएं उस स्‍तर की कैसे पहंचेगी. मैं इस बात की बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूं. मैं एक आंकलन के लिये देख रहा था कि मरी विधान सभा में वर्ष 2003 में मात्र दो डॉक्‍टर होते थे, लेकिन आज चालीस डॉक्‍टर हैं. क्‍या यह बधाई का काम नहीं है. कहीं न कहीं सुविधा बढ़ेगी कैसे तो हमें गंभीरता से समझना पड़ेगा, हमें यह भी समझना पड़ेगा, मैं अभी देख रहा था कि एक शीर्ष है- 2366, जहां के प्रस्‍ताव में संख्‍या भी बढ़ी और जो डिलेवरीज़ वह अस्‍पताल में जैसे-जैसे बढ़ रही है तो जच्‍चा-बच्‍चा मृत्‍यु दर कम हो रही है, क्‍या यह बड़ा अचीवमेंट नहीं है. जीवन में प्रीवेंटिव के बारे में भी तेजी से काम हो रहा है. Preventive Health is the Best thing in stead of treatment we should look for preventive health system as well as. हमने देखा और मैंने एक एम्‍सपेरीमेंट किया था और उस एक्‍सपेरीमेंट में मैंने 1 लाख 50 हजारे मेरी विधान सभा के लोगों का प्रीवेंटिव हैल्‍थ चैकअप करवाया. It cost me only 200 rupees per person. सरकारी अस्‍पताल की टीम में ही मैंने एडिशनल टीम लगाकर इक्‍वीपमेंट और कुछ फण्‍ड देकर यह काम करवाया. जिसमें तकरीबन ब्‍लड के सभ टेस्‍ट हार्ट, लीवर, किडनी का असेसमेंट और उसका रिजल्‍ट सिर्फ इतना सा आया कि एक गांव में जहां हर तीसरे महीने हार्ट अटैक से एक नौजवान की मृत्‍यु हो रही थी, उसमें चार साल में एक भी हार्ट अटैक नहीं आया और यह सरकारी अस्‍पताल का सर्टिफाइड डाटा है. मैं उस विषय पर बहुत गंभीरता से चर्चा कर रहा हूं कि कमियां निकालने के लिये हर व्‍यक्ति तैयार बैठा है तो क्‍या केवल हम किसी दूसरे के भरोसे और केवल एक ऊंगली जब दूसरी तरफ दिखाते हैं तो तीन ऊंगली अपनी तरफ आती है. हम लोग अपने सिस्‍टम को उतनी ही गंभीरता से करेक्‍शन करने का स्‍थानीय स्‍तर पर भी प्रयास कर सकते हैं क्‍या. मैं बहुत से विषय जिसमें बात करना चाह रहा था कि आज भारत के हेल्‍थ सिस्‍टम को सबसे बड़ा टूरिज्‍म का सेकेंड अर्निंग पाईंट बनाना है. मेरा ख्‍याय है 18-20 देशों के लोग बहुत तेजी से हमारे यहां इलाज के लिये भारत में आकर इलाज ले रहे हैं. हमारे मध्‍यप्रदेश में भी इस विषय पर धीरे-धीरे शुरूआत हो रही है. लेकिन मैं इस विषय पर चाहूंगा कि मध्‍यप्रदेश की जो नई सपोर्ट सिस्‍टम की पॉलिसी बनायी है, जिसके बारे में हमारे पूर्व वक्‍ता बता रहे थे. मैं पूरी पॉलिसी पढ़ना नहीं चाह रहा हूं. केवल मध्‍यप्रदेश में सरकारी सुपर स्‍पेशियलिटी या प्रायवेट अस्‍पताल बनाने पर भी ग्रांट देकर, उसको सपोर्ट करके बढ़ा रहे हैं. ताकि वह केवल हेल्‍थ सुविधाएं ही न दे, साथ ही मध्‍यप्रदेश के कॉमन आदमी की इंकम भी कैसे बढ़े. मैं यहां पर इस बात की तारीफ भी करना चाहूंगा कि कहीं न कहीं हम जितने भी काम पर हेल्‍थ को लेकर फोकस कर रहे हैं. बीमारियों का स्‍वरूप बदल रहा है. टेस्‍ट डे बाय डे बढ़ते जा रहे हैं. वरना एक जमाना वह भी था कि आदमी नब्‍ज़ देखकर इलाज कर देता था. लेकिन आप उसकी संतुष्टि नहीं है. हमें इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पर तेजी से बढ़ना था, उस पर भी बहुत तेजी से हमारे हेल्‍थ डिपार्टमेंट में तरक्‍की हो रही है. बजट की बात कर रहे हैं कि तीन प्रतिशत, पांच प्रतिशत की. हम नेशनल स्‍टैंडर्ड ऑफ ग्रोथ के बराबर चल रहे हैं. लेकिन हमें उसमें और तरक्‍की करने की जरूरत है. मैं सिर्फ दो बातें कहना चाहूंगा कि बहुत तेजी से, बहुत अच्‍छे बेसिक स्‍टेप बाय स्‍टेप हमारी ग्रोथ हो रही है. चाहे मेडिकल कॉलेज के माध्‍यम से डॉक्‍टर्स हों, चाहे नर्सिंग कॉलेजेस् के माध्‍यम से सेकेण्‍डरी लाइन के स्‍टॉफ की तैयारी हो और धीरे-धीरे यह एस्‍टेबलिश हो रहा है. लेकिन हमें प्रिवेंटिव के ऊपर थोड़ा सा फोकस करना पड़ेगा. मैं यहां पर सिर्फ इतना ही सजेशन देना चाहूं‍गा कि जिस तेजी से, मुझे पूरा विश्‍वास है कि हमारे उप- मुख्‍यमंत्री जी बहुत तेजी से एआई का उपयोग करते हुए हेल्‍थ में कई नये इनोवेशन के बारे में भी अनाउसमेंट भी करेंगे. हम उद्देश्‍य एक ही है कि सब लोगों ने कहा कि स्‍वस्‍थ्‍य शरीर, स्‍वस्‍थ्‍य मन का स्‍थान होता है और उस स्वस्थ मन के स्थान के लिए कई जरूरतें हैं वह पूरी होगी, लेकिन मैं यहां पर अपनी थोड़ी सी उस क्षेत्र की जो रिक्वायरमेंट हैं उसके बारे में चर्चा करना चाहूंगा. मैं चाहूंगा कि माननीय जो भी नोट कर रहे हैं जावद सिविल अस्पताल को 100 बेडेड अस्पताल में कनवर्ट करना क्योंकि वह विधान सभा का ब्लाक स्तर का प्लेस हैं वहां पर अभी केवल 30 बेड का अस्पताल है, हमारे दो और अस्पताल जिनकी अपग्रेडेशन की जरूरत है, सिक्स बेड के हमारे प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र रतनगढ़ और सरवानिया महाराज हैं इसको 30-30 बेड का अस्पताल में कनवर्ट करना अनिवार्य है. साथ ही में चाहूंगा कि सिंगौली का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को सिविल अस्पताल में अपग्रेड किया जाय. सरवानिया महाराज और नया गांव में 6 बेड के ही अस्पताल हैं, इसको भी चूंकि नयागांव बिल्कुल बार्डर पर है, राजस्थान की सीमा पर है. हमारा हाईवे का वह स्थान है वहां पर 30 बेड का और मेडिकल कालेज जो हमने नीमच में खोला है, वीरेन्द्र कुमार सखलेचा मेडिकल कालेज, उससे मुश्किल से 8 कि.मी. है तो रूरल बेल्ट में  मेडिकल कालेज कुछ रूरल गांव को एडाप्ट करता है तो उसमें नया गांव बहुत अच्छा पाइंट है. वहां पर अगर उसको भी 30 बेड का बना दें.

सभापति महोदया, साथ ही डायलिसिस की बीमारियां बहुत तेजी से बढ़ रही हैं, जावद और सिंगौली में 2-2 डायलिसिस की मशीनों की जरूरत है, दो-दो दोनों जगहों पर, कुछ हमारी जरूरत माड्युलर ओटी की भी है, जावद और सिंगौली इन दोनों जगहों पर माड्युलर ओटी क्योंकि नया अपग्रेडेशन अस्पताल आज से आप स्वीकृत करेंगे  उसको बनने में 2 से ढाई साल बनकर कंप्लीट होने में लगता है तो तब तक हमारी डायलिसिस की दो-दो मशीनें और माड्युलर ओटी  दो-दो यह अनिवार्य रूप से स्वीकृत करें. यह कुछ हमने हमारी जरूरतें बताई है जो जावद के बहुत मूलभूत जरूरतों में है, इसके लिए मैंने पहली बार कई बार चिट्ठियां लिखी हैं. हम चाहते हैं कि धीरे धीरे मेडिकल सर्विसेस और बेहतर हो और उसका प्रयास है कि एआई का उपयोग करते हुए मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे उप मुख्यमंत्री पूरी शक्ति से इस पर काम करेंगे. सभापति महोदया, आपने बोलने का समय दिया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आभार.

          श्री प्रेमशंकर कुंजीलाल वर्मा (सिवनीमालवा) - सभापति महोदया, आपने जो मुझे बोलने का समय दिया, उसके लिए बहुत धन्यवाद. मैं मांग संख्या 19 लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के समर्थन में अपनी बात करना चाहता हूं. आज हमारा मध्यप्रदेश माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में बहुत तेजी से विकास की ओर आगे बढ़ रहा है उसमें स्वास्थ्य विभाग भी बहुत तेजी से अपने क्षेत्र में स्वास्थ्य के लिए काम कर रहा है. हमारे उप मुख्यमंत्री स्वास्थ्य माननीय श्री राजेन्द्र शुक्ल जी को मैं इस बात के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने एक मध्यप्रदेश के लिए बहुत ही महत्वाकांक्षी  स्वास्थ्य बजट प्रस्तुत किया है जो 23533 करोड़ रुपये का है जो पिछले वर्ष के बजट से 8 प्रतिशत ज्यादा राशि का प्रावधान किया है. सभापति महोदया, मैं ज्यादा विस्तार में नहीं चाहता हूं. पहले तो हम भारतीय जनता पार्टी की सरकार और भारतीय जनता पार्टी के सरकार की बजट की तुलना कांग्रेस से तो कर ही नहीं सकते हैं कहीं वह ठहर ही नहीं सकते हैं. वर्ष 2003-04 में कांग्रेस सरकार का स्वास्थ्य का बजट 37 करोड़ 50 लाख रुपये का था और आज हमारा 23747 करोड़ रुपये का स्वास्थ्य का बजट है, 633 गुना अधिक है, इसकी हम तुलना ही नहीं कर सकते हैं. अब आप सोच सकते हैं कि जब इतनी कम राशि रखी जाती थी, तो स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में यह क्‍या काम करेंगे, क्‍या नया कॉलेज बनाएंगे.

          श्री महेश परमार -- अभी क्‍या करना है पहले आप यह बताइए. अभी क्‍या करना है, वह बताइए कि नंबर वन पर आ जाए. 20 साल हो गए.

          सभापति महोदया -- वर्मा जी, आप अपनी बात करेंगे. कृपया, आप कोई इंट्रप्‍शन न करें.

          श्री प्रेमशंकर कुंजीलाल वर्मा -- सभापति महोदय, इतने कम बजट में ये क्‍या करेंगे और इसलिए वर्ष 2003 से अभी तक 5 मेडिकल कॉलेज पूरे प्रदेश में थे. 2 निजी मेडिकल कॉलेज थे और आज हम देखें तो 19 शासकीय मेडिकल कॉलेज हैं और 14 निजी मेडिकल कॉलेज हैं. जब प्रदेश में इतने ज्‍यादा मेडिकल कॉलेज काम करेंगे तो निश्‍चित रूप से हमको ज्‍यादा संख्‍या में डॉक्‍टर मिलेंगे. गांव-गांव में जो हमारे प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं, सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं, सिविल अस्‍पताल है उसमें हम डॉक्‍टरों की पूर्ति कर सकेंगे. यह भारतीय जनता पार्टी के उपमुख्‍यमंत्री माननीय राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी का बजट है जो मध्‍यप्रदेश को स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का काम कर रहा है. डिजिटल स्‍वास्‍थ्‍य पहल वाले प्रदेश में मध्‍यप्रदेश अग्रणी है. आज मध्‍यप्रदेश में 55 जिला चिकित्‍सालय हैं. हमारे कांग्रेसी मित्र चाहते हैं कि कुछ बात हो. उनको भी मैं समझा देना चाहता हॅूं.

          सभापति महोदया -- कृपया, बातों की पुनरावृत्‍ति न हो.

          श्री अभिजीत शाह अंकित बाबा -- माननीय, आपकी विधानसभा मेरे बाजू में ही है. आप पहले आपकी विधानसभा देख लें. उसकी हालत ऐसी है कि शरीर तो है पर आत्‍मा नहीं है. बिल्‍डिंग बनी हुई है लेकिन डॉक्‍टर का स्‍टॉफ नहीं है. यह सच्‍चाई है. आप आएंगे उस पर ?

          श्री प्रेमशंकर कुंजीलाल वर्मा -- माननीय सभापति महोदय, 1442 स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं. 10 हजार 256 उपस्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं. 48 हजार टोटल बिस्‍तर हैं. मैं मेरे विधानसभा क्षेत्र की बात बताना चाहता हॅूं कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में 2 वर्ष के अंदर 5 प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, 26 उपस्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, 1 सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हुए हैं. भीमराव अंबेडकर सिविल अस्‍पताल सिवनी-मालवा में भी यह 2 वर्ष के अंदर हुए हैं. यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार ही कर सकती है. यह भारतीय जनता पार्टी के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री ही कर सकते हैं. यह कांग्रेस की सरकार के बस की बात नहीं है.

          माननीय सभापति महोदया, ऐसे ही अब गिनाने की बात कहें, तो अभी मैहर, मऊगंज, पांढुर्ना में नये जिला चिकित्‍सालय बन रहे हैं. विगत 2 वर्षों में नये 5 नये शासकीय मेडिकल कॉलेज प्रारम्‍भ किए गए हैं. उनमें 2275 सीट बढ़ाकर एमबीबीएस की सीट 2275 से 2850 सीट कर दिया गया है.

          श्री नीलेश पुसाराम उइके -- सभापति महोदया, आपने पांढुर्ना का नाम लिया है, पांढुर्ना में बन ही नहीं रहे हैं. असत्‍य बोल रहे हैं.

          सभापति महोदय -- यह उचित नहीं है.

          श्री प्रेमशंकर कुंजीलाल वर्मा -- सभापति महोदया, ऐसे ही एमएस, एमडी की सीटें 1262 से बढ़ाकर1468 कर दी हैं ताकि हमारे अस्‍पतालों को डॉक्‍टर मिल सके. यह हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार, हमारे माननीय उपमुख्‍यमंत्री, स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी मध्‍यप्रदेश के लिए चिकित्‍सा सेवा क्षेत्र में काम कर रहे हैं. निजी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेज धार, बैतूल, पन्‍ना में हो चुके हैं. 9 मेडिकल कॉलेज प्रक्रियाधीन हैं. भिण्‍ड, गुना, अशोकनगर, मुरैना, बालाघाट, टीकमगढ़, सीधी, शाजापुर जिले और जहां तक अभी भर्ती की बात आयी थी, मैं आपको बता दूं कि कभी भी कांग्रेस की सरकार में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की ओर ध्‍यान ही नहीं दिया गया है.

          सभापति महोदया, हमारे माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी के द्वारा चिकित्‍सा के क्षेत्र में 38 से 50 चिकित्‍सकों के पद भर भर्ती की. नर्सिंग अधिकारियों के 1256 पदों पर भर्ती की गई है और एनेस्‍थिसिया के 75 पद, रेडियोलॉजी के 7, सर्जरी के 62 पद हैं, लैब टेक्‍नीशियन के 297, एएनएम के 2061 पद हैं.

          सभापति महोदया -- कृपया, आपका समय पूरा हुआ. डॉ.योगेश पंडाग्रे जी.

          श्री प्रेमशंकर कुंजीलाल वर्मा -- सभापति महोदया, मैं केवल एक मिनट का समय लूंगा. मैं अपने क्षेत्र की बात करना चाहता हॅूं. मैं माननीय उपमुख्‍यमंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हॅूं कि मेरे विधानसभा क्षेत्र सिवनी-मालवा में केसला में, सुकतवा में सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र है, आज वहां पर 62 पंचायत के लोग इलाज के लिए आते हैं. मेरा निवेदन है कि वहां पर सिविल अस्‍पताल की स्‍थापना की जाए. दूसरा शिवपुरी क्षेत्र है वहां प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र है उसका उन्‍नयन करके वहां पर सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र बनाया जाए और आदिवासी अंचल का शाहपुरा क्षेत्र है वहां पर प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र देने की कृपा करें. बस इन्‍हीं शब्‍दों के साथ मैं इस स्‍वास्‍थ्‍य बजट का समर्थन करता हॅूं धन्‍यवाद.

          सभापति महोदया -- बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

            डॉ.योगेश पंडाग्रे (आमला)अध्यक्ष महोदय, मैं पूरी बात बताऊंगा, लगभग 19 हजार सत्र प्रतिमाह संपादित करने का काम कर रही है. आज हर जिले में जन औषधि केन्‍द्र हैं, ताकि हमारे मरीजों को सस्‍ती दवाईयां उपलब्‍ध हो सके. एक वक्‍त ऐसा था कि इस प्रदेश की स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं तो वेंटीलेटर पर थी, लेकिन अस्‍पतालों में वेंटीलेटर नहीं हुआ करते थे. आज हर जिले में वेंटीलेंटर जैसी अत्‍याधुनिक जीवर रक्षक प्रणाली मौजूद हैं. आज हम लोग और ऊपर जाते हुए सुपर स्‍पेशियालिटी के भी ट्रीटमेंट हर मेडिकल कॉलेज में उपलब्‍ध करवा रहे हैं. आज मेडिकल कॉलेज में कैथलैब उपलब्‍ध है, जहां हृदय की धमनियों का सटीक आंकलन कर उपचार सुलभ किया है, हार्ट के मरीज को महंगे इलाज से मुक्ति दिलाने का काम इस सरकार के द्वारा किया गया है. साथ ही कैंसर के मरीजों के लिए थैरेपी ताकि सटीकता से रेडियोथेरेपी उनको मिल सके, सात करोड़ की मशीन भोपाल, इंदौर और रीवा के लिए स्‍वीकृत किया. डयूल एनर्जी लीनर एक्‍सलीटर (Dual Energy LINAC) जो मशीन जिसकी लागत लगभग 50 करोड़ रुपए है, रेडियोथेरेपी को और सटीकता से देने के लिए इसकी स्‍वीकृति इंदौर, जबलपुर, गुना, रीवा और भोपाल में दी जा चुकी है. जो विश्‍वस्‍तरीय सुविधा है, जैसे आर्गन ट्रांसप्‍लांटेशन आज हमारे लिए गर्व की बात है कि इंदौर में सिकलसेल मरीजों के लगभग 100 बोनमेरो ट्रांसप्‍लांट करने का काम इस सरकार के माध्‍यम से किया गया है. भोपाल हमीदिया अस्‍पताल में किडनी ट्रांसप्‍लांटेशन, साथ ही एम्‍स भोपाल में हृदय प्रत्‍यारोपण की भी हमने खबरें सुनी है. हमारा विश्‍वास है कि इस प्रदेश को हम मेडिकल हब के रूप में विकसितस करेंगे हमारा वह सपना  साकार होते दिखता है. भोपाल में जो किडनी ट्रांसप्‍लांट होता है वह आयुष्‍मान योजना के माध्‍यम से होता है, इस योजना से जब हम सामग्री को क्रय करते हैं तो उसमें शायद दो दिन लग जाते हैं और कई बार जिन मृत  से आर्गन लिया जाता है, उसमें दो या तीन घंटे का समय लगता है ,चूंकि प्रक्रिया इतनी जल्‍दी नहीं हो पाती है कि मेरा आपसे निवेदन है कि चार पांच किट जो किडनी ट्रांसप्‍लटेशन के लिए पहले से यदि अस्‍पताल में हो तो मुझे लगता है कि हमीदिया में हम बेहतर तरह से किडनी ट्रांसप्‍लांट कर सकेंगे.

          अध्‍यक्ष जी आज डाक्‍टरों की संख्‍या जिस पर हमारे मित्र बात कर रहे थे, तुलनात्‍मक रूप से कम दिखती है, लेकिन हम लोगों ने स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में जो विस्‍तार किया है जो नए अस्‍पताल खोले हैं, दूर दूर तक स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं का विस्‍तार हुआ उसके कारण भी है और मुझे लगता है कि विपक्ष को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए.

          श्री अभिजीत शाह (अंकित बाबा) विस्‍तार ऐसा हुआ है कि आप देखेंगे कि इंदौर में एक नवजात बच्‍चे का(...व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय अभिजीत जी, आपस में बात मत करो, आप जब बात रख रहे थे आप अपनी पूरी बात रख दो, जब आपको बोलना हो तो मुझे बताओ, तो मैं बोलूंगा, आप उनकी बात क्‍यों काट रहे हो. वे उनकी बात रख रहे हैं. एक दूसरे को जवाब मत दीजिए.

          डॉ. योगेश पण्‍डाग्रे अध्‍यक्ष जी, जो स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं में विस्‍तार हुआ, उसी के अनुपात में डाक्‍टरों की आवश्‍यकता बढ़ी, लेकिन विपक्ष को अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए. मेडिकल कॉलेज ऐसी चीज नहीं है कि आज उसकी बात की और कल उसे खोल दिया जाए. स्‍वीकृति मिलने, बिल्डिंग बनाने में, डॉक्‍टर्स को निकलने में कम से कम 10 से 12 साल का समय लगता है.

          अध्‍यक्ष महोदय योगेश जी कन्‍क्‍लूड करें.

          डॉ. योगेश पण्‍डाग्रे अध्‍यक्ष जी, बस पांच मिनट. अध्‍यक्ष जी आज इस सत्र में पहली बार बोलने का मौका मिला है और मेरे फील्‍ड से संबंधित चीजें है.

          अध्‍यक्ष महोदय ठीक है, एक दो मिनट में पूरा करें.

          डॉ. योगेश पण्‍डाग्रे अध्‍यक्ष जी, विपक्ष वाले 5 मेडिकल कॉलेज का क्‍लैम करते हैं, लेकिन दो तो अंग्रेज खोलकर गए थे, तीन इन लोगों ने खोले थे. लेकिन आज  एमडी के 75 पद, Paediatricians  के 106, ईएनटी के 17, आई स्‍पेशलिस्‍ट के 45, आर्थोपेडिक सर्जन के 24, इतने पदों की स्‍वीकृति दी है, गायनोकोलॉजिस्‍ट के 101 पद पैथोलॉजिस्‍ट के 8 पद, इनमें भर्ती की गई है, सरकार के द्वारा और 3850 पदों पर भी डाक्‍टर की भर्ती प्रक्रिया अभी प्रारंभ है. 868 स्‍टाफ नर्स की नियुक्तियां, 72 रेडियोग्राफर, लैब टेक्निशियन 297, जो बात कर रहे थे कि सपोर्टिंग स्‍टाफ नहीं है, ये सारी भर्तियां करने  का काम हमारी सरकार कर रही है और अब हम लोग चूंकि एमबीबीएस और एमडी की सीटों के बारे में बात कर चुके हैं.  हम लोग एक कदम और आगे बढ़कर सुपर स्‍पेशलिटी के कोर्स को भी यहां पर स्‍वीकृति देकर 93 सुपर स्‍पेशियालिस्‍ट के कोर्सेस को भी चालू करने का काम इस सरकार के द्वारा किया गया है, जो सपोर्टिंग स्‍टाफ के लिए जीएनएम और बीएससी नर्सिंग के कालेज 2003 में जीरो थे, एक भी इनका बीएससी नर्सिंग का कालेज नहीं था. आज 24 बी.एस.सी. नर्सिंग के कॉलेज खोले जा रहे हैं, 5 हजार 806 करोड़ रूपये की व्‍यवस्‍था मानव संसाधन के लिये की गई है और एक ओर जो हम लोगों के लिये उपलब्धि रही है, वर्ष 2003 में मलेरिया के लगभग इस प्रदेश में 95 हजार हमने केसेस देखे थे, आज बेहतर स्‍वच्‍छता और मिशन मोड में किये गये कार्यों की मदद से मलेरिया की संख्‍या में लगभग 98 प्रतिशत का रिडक्‍शन है. केवल दो हजार मरीज इस बार देखे गये, सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर अनुवांशिक बीमारी जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता है कि इसको भी समूल नष्‍ट किया जा सकता है, हमारे प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी के नेतृत्‍व में और हमारे महामहिम राज्‍यपाल मंगूभाई पटेल जी के मार्गदर्शन में जेनेटिक कार्ड तैयार किये जा रहे हैं, यह एक बड़ी शानदार चीज है. अध्‍यक्ष महोदय, लगभग 1 करोड़ 13 लाख लोगों को जेनेटिक कार्ड वितरित करने का काम इस सरकार के द्वारा मेरे बैतूल जैसी छोटी सी जगह पर किया गया है, वहां 8 लाख 55 हजार 102 लोगों का स्‍क्रीनिंग हुआ है और साढ़े सात लाख लोगों को जेनेटिक कार्ड दिया गया है. यह जेनेटिक कार्ड कुंडली मिलान की तरह है, इस जेनेटिक कार्ड को योग्‍य युवक युवती एक दूसरे को देकर यह देख सकते हैं कि उनमें आगे आने वाली पीढ़ी में इस बीमारी की क्‍या संभावना होगी, इस प्रकार से वह समझ सकते हैं कि कौन आपस में शादी कर सकते हैं और कौन नहीं कर सकते हैं. आगे आने वाली पीढ़ी में क्‍या संभावना है, यह जानकर हम लोग इस बीमारी को समूल नष्‍ट करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं, यह भी एक बड़ा महत्‍वपूर्ण उपलब्धि है.

          अध्‍यक्ष महोदय,  टीवी मरीजों के लिये सीबीनेट जैसी बेहतर निदान तकनीक है, जिसमें ड्रग रजिस्‍ट्रेशन के बारे में भी हम लोग जान सकते हैं और समय पर टीवी की पहचान और समय पर उपचार, जिससे रोगियों की मृत्‍यु दर को हम 3 प्रतिशत से कम रखने में सफल हुए हैं, साथ ही आसपास के पड़ोसियों को और रोगियों के परिवार को भी हम लोग स्‍क्रीनिंग करके लगातार अब इसके फैलने की गति पर भी  लगाम लगा रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, कुत्‍तों पर भी काफी बात हुई. सभी बात कर रहे थे कि एक घंटा कुत्‍तों पर डिस्‍कशन किया गया, लेकिन मुझे लगता है कि वह मानव जीवन से संबंधित बात थी, क्‍योंकि रेबीज जो बीमारी है, जिसमें सौ प्रतिशत मृत्‍यु दर है, जिसमें जो डॉग बाइट्स के केसेस थे, उसमें साढ़े पांच लाख एंटी रेबीज वैकसीन लगाने का काम इस सरकार के द्वारा किया गया है, इसमें एक ओर ध्‍यान दिलाना चाहूंगा कि कुछ  बात आई थी कि जिन लोगों को एंटी रेबीज वेकसीन लगा,उसके बाद भी उनकी मृत्‍यु हुई, तो इसमें यह है कि केटेगिरी थ्री के जो बाईट होते हैं या जो सिर के आसपास के बाईट हों, उसमें एंटी रेबीज इम्‍यूनोग्‍लोबीन भी देना चाहिए ताकि मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके, चूंकि मंहगी दवाई है, इसलिए कई बार लोग अफोर्ड नहीं कर पाते हैं, तो मुझे लगता है कि यह भी अस्‍पतालों में उपलब्‍ध हों.

          अध्‍यक्ष महोदय, आखिरी बात कहकर अपनी बात खत्‍म करना चाहूंगा कि एक नई चुनौती scrub typhus जिसमें मैंने पिछली बार भी ध्‍यानाकर्षित किया था. एक नई चुनौती के रूप में यह बीमारी आ रही है, जो अगस्‍त से लेकर अक्‍टूबर तक के बैतूल छिंदवाड़ा और आसपास के जिलों में होती है, हरदा में भी होती है, जिस तरह से हमने मिशन मोड में काम करके मलेरिया बीमारी को नियंत्रित किया है, उसी तरह से scrub typhus के विरूद्ध भी व्‍यापक सर्वेक्षण, हॉट स्‍पॉट की पहचान, जनजागृति अभियान, प्राथमिक स्‍तर पर जांच और सुविधाओं का विस्‍तार किया जाना आवश्‍यक है, ताकि इस बीमारी को हम लोग रोक सकें, क्‍योंकि लेट होने पर इसमें मरीज की किडनी, लंग्‍स और लीवर बुरी तरह से डेमेज होते हैं और इस बीमारी को अभी तक आयुष्‍मान भारत योजना के अंतर्गत शामिल नहीं किया गया है, मैं चाहता हूं कि उसे शामिल किया जाये ताकि इससे पीडि़त मरीजों को नि:शुल्‍क उपचार मिल सके.

          अध्‍यक्ष महोदय, बैतूल में रेडियोलॉजिस्‍ट और एनेस्‍थीसिया के डॉक्‍टरों की कमी है, तो वह अगर हो जाये तो अच्‍छा होगा. हर अस्‍पताल में चूंकि मरीज और अस्‍पताल के बीच में बिल को लेकर विवाद की स्थिति होती है, तो हर अस्‍पताल में होटलों की तरह मेन्‍यू कार्ड में जैसे दरों का डिस्‍पले होता है, वैसे ही हर अस्‍पताल में भी यह डिस्‍पले हो ताकि यह होने वाला विवाद भी कम से कम रहे.

          अध्‍यक्ष महोदय, अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि मध्‍यप्रदेश की स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था में आये यह परिवर्तन केवल आंकड़ों की वृद्धि नहीं है, बल्कि यह जन जन के जीवन में विश्‍वास, सुरक्षा और स्‍वस्‍थ्‍य भविष्‍य की गारंटी है, आपने मुझे बोलने का मौका दिया उसके लिये आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद. (मेजों की थपथपाहट)

           डॉ. हिरालाल अलावा (मनावर) -- अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे मांग संख्‍या -19 लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा पर बोलने का अवसर दिया उसके लिये आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद. चूंकि मैं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग से ही संबंध रखता हूं. मैं भी डॉक्‍टर हूं और जनरल मेडीसन से डॉक्‍टर हूं.(डॉ.योगेश पंडाग्रे, सदस्‍य की ओर देखकर) हम दोनों डॉक्‍टर हैं और मैं देहली एम्‍स में वर्ष 2016 तक प्रोफेसर रहा हूं, पांच साल मैंने एम्‍स में सेवाएं दी हैं और मेरा डिपार्टमेंट रूमेटोलॉजी डिपार्टमेंट रहा है. मैं शुरूआत खुद से कर रहा हूं क्‍योंकि मैं रूमेटोलॉजी के बारे में आपके माध्‍यम से प्रदेश की जनता को और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी को बताना चाहता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय--  आप कहीं से भी शुरू करो, समय का ध्‍यान रखो.

          डॉ. हिरालाल अलावा-- जी अध्‍यक्ष महोदय, रूमेटोलॉजी डिपार्टमेंट में सारी ऑटोइम्‍यून डिजीज आती है जिसमें रूमेटाइड आर्थराइटिस एसएलई गाउट और वैस्‍कुलाइटिस जिसके मध्‍यप्रदेश में और देश में बहुत कम सुपर स्‍पेशलिस्‍ट डॉक्‍टर होते हैं और हमारे मध्‍यप्रदेश में भले ही 19 मेडिकल कॉलेज हमने खोले हैं, लेकिन अभी रूमेटोलॉजी डिपार्टमेंट नहीं है जिसके कारण एक तो रूमेटोलॉजी के बारे में अबेयरनेस नहीं है और आम जनता जिसको इलाज मिलना चाहिये उनको इलाज नहीं मिल पा रहा है क्‍योंकि प्राइवेट में 2 हजार, ढाई हजार फीस है तो मेरी आपके माध्‍यम से माननीय स्‍वास्‍थ मंत्री जी से मांग है कि मध्‍यप्रदेश में कम से कम रूमेटोलॉजी डिपार्टमेंट मेडिकल कॉलेज लेबल पर शुरू होना चाहिये और इसमें पीजी के कोर्सेस भी शुरू करवाने चाहिये ताकि प्रदेश की जनता को आटोइम्‍यून डिसीज के स्‍पेशलिस्‍ट डॉक्‍टर मिलें. हमारे सभी सत्‍तापक्ष के साथियों ने स्‍वास्‍थ सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में बेहतर सुझाव दिये, पॉजिटिव सुझाव दिये, लेकिन हम बीच में वर्ष 2003 में जाते हैं और कांग्रेस पर दोष मढ़ते हैं. मेरा आपके माध्‍यम से सुझाव है कि हम विकसित भारत बनने की दिशा में बढ़ रहे हैं. वर्ष 2047 में विकसित देश बनना चाहते हैं तो हम लोग विश्‍व गुरू की बात कर रहे हैं तो हमारा मुकाबला चीन और अमेरिका जैसे देशों से होना चाहिये जहां पर जीडीपी का 15 प्रतिशत स्‍वास्‍थ सेवाओं पर खर्च होता है और जापान और जर्मनी जो दूसरी और तीसरी अर्थव्‍यवस्‍था है वह 11 से 12 प्रतिशत स्‍वास्‍थ सेवाओं पर खर्च कर रही है, हम लोग मात्र 2 प्रतिशत देश की जीडीपी का खर्च कर रहे हैं. आने वाले बजट में स्‍वास्‍थ सेवाओं पर बजट जीडीपी के हिसाब से वृद्धि होना चाहिये. हमारे साथी डॉ. साहब, मित्र बोल रहे थे कि वेंटीलेटर हमने बढ़ाये हैं, लेकिन आपके माध्‍यम से मैं यह कहना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश की स्‍वास्‍थ सेवायें वास्‍तव में अगर हकीकत में देखा जाये तो वेंटीलेटर पर हैं, जो वेंटीलेटर पर मरीजों को होना चाहिये लेकिन स्‍वास्‍थ सेवायें इसके एग्‍जाम्‍पल देना चाहता हूं हमारे एमवाय जो महात्‍मा गांधी मेडिकल कॉलेज का एक बड़ा अस्‍पताल है, मध्‍यप्रदेश की बड़ी जनसंख्‍या को कवर करता है वहां पर नवजात शिशुओं को एनआईसीयू में चूहों ने कुतर लिया, उसके हाथ खा गये, उंगलियां खा गये तो यह स्‍वास्‍थ सेवाओं की पोल खोल रहा है. दूसरा सबसे बड़ा जो स्‍वास्‍थ सेवाओं के मामले में फाल्‍ट देखने को मिला है कि छिंदवाड़ा में कफ सीरप से 24 बच्‍चों की मृत्‍यु हुई हमने एक डॉक्‍टर के ऊपर कार्यवाही की है लेकिन डॉक्‍टर के ऊपर कार्यवाही करने की बजाय हमको ड्रग कंट्रोलर जो कौन सी दवाई मध्‍यप्रदेश में मेडिकल स्‍टोर्स पर जायेगी उनके ऊपर भी कार्यवाही करनी चाहिये, ताकि सबक मिले कि नकली दवाईयां मध्‍यप्रदेश के मेडिकल स्‍टोर्स में नहीं बिकनी चाहिये. तीसरा एग्‍जाम्‍पल जो स्‍वास्‍थ सेवाओं में सबसे बड़ी लापरवाही मध्‍यप्रदेश के सतना जिले के  बिरला अस्‍पताल में जहां पर थैलेसीमिया के जो पीडि़त बच्‍चे थे, उन्‍हें संक्रमित ब्‍लड चढ़ा दिया गया है तो यह कहीं न कहीं स्‍वास्‍थ सेवाओं के मामले में हम लोगों की पोल खुलती नजर आ रही है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक और जो महत्‍वपूर्ण सुझाव जो मैं माननीय स्‍वास्‍थ मंत्री जी को दे रहा हूं स्‍वास्‍थ सेवायें बेहतर बनाने के लिये जो मध्‍यप्रदेश में स्‍वीकृत पद हैं, जो स्‍पेशलिस्‍ट डॉक्‍टरों के पद हैं 5443 पद हैं उसमें से मात्र आज दिनांक तक 1362 पद भरे हुये हैं मतलब 75 प्रतिशत पद स्‍पेशलिस्‍ट डॉक्‍टरों के खाली पड़े हुये हैं तो हम प्रदेश की जनता को बेहतर स्‍वास्‍थ सुविधायें कैसे प्रदान करेंगे. मेडिकल ऑफिसर के 6513 पदों में से मात्र 3824 पद खाली थे, 41 प्रतिशत पद खाली हैं तो यह पद भरने की दिशा में हमको काम करना चाहिये. हमारे कई सदस्‍यों ने कहा है कि हम मातृ मृत्‍यु दर में और शिशु मृत्‍यु दर में हम बेहतर सुधार कर रहे हैं. आज भी मध्‍यप्रदेश में 1 लाख जो महिलाओं की डिलेवरी होती है उसमें 142 महिलाओं की मृत्‍यु हो जाती है इसको हम बेहतर नहीं कर सकते हैं अगर अमेरिका और चाइना से तुलना करेंगे तो 10 से 15 है तो हमारी तुलना विकसित देशों से होना चाहिये, हमारी तुलना विश्‍वगुरू बनने की दिशा में अगर हम जा रहे हैं तो वहां तुलना होना चाहिये तो यह मातृ मृत्‍यु दर का हमारे लिये शर्मनाक आंकड़ा है और शिशु मृत्‍यु दर की बात अगर हम करें तो 1 हजार बच्‍चों पर अभी भी 37 से 40 बच्‍चे हैं तो एक गंभीर आंकड़ा है जिसे हमें सुधारने की जरूरत है. अभी हमारे साथियों ने कहा है कि हम कुपोषण के मामले में एनएफएचएस का आंकड़ा कहता है पूरे देश का आंकड़ा मैं बताना चाहता हूं एनएफएचएस 5 के अनुसार नाटापन और दुबलापन नाटेपन का मामला 35 प्रतिशत है और दुबलेपन के मामले में ओवर आल बच्‍चे 32 प्रतिशत हैं और मध्‍यप्रदेश का शिवपुरी जैसा जिला आज भी 52 प्रतिशत नाटेपन के मामले में है तो कुपोषण के मामले में हमको बहुत काम करने की जरूरत है. यूएनओ का खाद्य एवं कृषि संगठन कहता है कि 75 प्रतिशत देश की जनता को अभी भी पोषण युक्त भोजन नहीं मिल पा रहा है. मेरे विधान सभा क्षेत्र की कुछ मांगें हैं. मेरे विधान सभा क्षेत्र में सिविल अस्पताल बड़े लंबे संघर्ष के बाद स्वीकृत कराया है.हमने लंबे समय से मांग की साढ़े चार लाख की आबादी है तो 100 सीटर होनी चाहिये तो वहां सिर्फ 50 बिस्तरीय मिला है तो उसको 100 बिस्तरों के उन्नयन में लिया जाये और वहां पर स्पेशलिस्ट डाक्टरों के पद और डाक्टरों के लिये आवासीय परिसर केम्पस के अंदर होना चाहिये और एक और महत्वपूर्ण मांग है सिविल अस्पताल का 9 करोड़ 51 लाख का निर्माण हुआ है वहां ठेकेदार ने सेकंड फ्लोर के लिये लिफ्ट की जगह छोड़ी है लेकिन लिफ्ट नहीं दी है जब एक्सीडेंटल केस,इमरसेंजी,मेटरनल केस आयेंगे तो उनको फर्स्ट फ्लोर पर शिफ्ट करने में दिक्कत होगी तो वहां लिफ्ट लगना चाहिये और क्वलिटी में कंप्रोमाईज किया है तो ठेकेदार पर भी कार्यवाही होनी चाहिये. यह मेरी मांग है. एक और मांग है कि मेडिकल कालेजों में आज की तारीख में मेडिकल कालेजों की संख्या तो बढ़ा रहे हैं लेकिन आज भी जो पुराने मेडिकल कालेज हैं वहां 30 प्रतिशत असिस्टेंट प्रोफेसर,एसोसियेट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पद खाली हैं और जो नये मेडिकल कालेज खुल रहे हैं वहां 90प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं तो आज मैं खुद मेडिकल स्टूडेंट रहा हूं मुझे खबर आती है कई जगह से कि हमारे प्रेक्टिकल नहीं हो रहे हैं. बेड साईट टीचिंग नहीं हो रही है तो कम से कम क्वालिटी आफ एजुकेशन के लिये अगर हम काम कर रहे हैं तो फेकल्टीज को जो भर्ती होनी चाहिये  और शतप्रतिशत शिक्षा देने के लिये हमको काम करना चाहिये नहीं तो फिर मुन्ना भाई एमबीबीएस वाले डाक्टर निकलेंगे पता चला कि पेट में कैंची छोड़ रहे हैं पेट में तमाम तरह की चीजें छोड़ रहे हैं. हमको स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने की दिशा में काम करना चाहिये. मेडिकल कालेज के जो प्रोफेसर हैं सरकार ने घोषणा की थी कि जो उनके लिये नान प्रेक्टिस अलाउंस दिया जायेगा तो आज दिनांक तक उनको नान प्रेक्टिस अलाउंस नहीं दिया जारहा है यह गंभीर विषय है उपमुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि डाक्टर्स के लिये नान प्रेक्टिस अलाउंस की घोषणा की जाये. एक और महत्वपूर्ण सुझाव है स्वास्थ्य सेवाएं शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की बहुत डिफरेंट है. शहरी क्षेत्रों में फिर भी मेडिकल कालेज हैं जिला अस्पताल अच्छे हैं लेकिन ग्रामीण इलाकों में अभी भी स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में स्पेशलिस्ट डाक्टर्स नहीं हैं वहां  पर मेडिकल आफीसर्स नहीं हैं तो कहीं न कहीं वहां दिक्कतें आती हैं दूसरा जो हमारे यू.जी. के बाद इंटर्नशिप के बाद जो ग्रामीण पोस्टिंग होती है कई बार डाक्टर नहीं जा रहे हैं क्योंकि डाक्टर्स प्रोटेक्शन एक्ट 2001 जो लागू हुआ था आज तक उसको इंप्लीमेंट नहीं किया गया इस कारण कोई भी डाक्टरों के साथ मारपीट करता है और डर का माहौल पैदा किया जा रहा है हम अगर वास्तव में ग्रामीण इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देना चाहते हैं तो हमको डाक्टरों के लिये उनकी प्रोटेक्शन के लिये जो एक्ट बना उसको इंप्लीमेंट करना चाहिये यह मेरा सुझाव है. आपने स्वास्थ्य सेवाओं पर बोलने का मौका दिया.बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री भगवानदास सबनानी(भोपाल दक्षिण-पश्चिम) - माननीय अध्यक्ष महोदय,मैं मांग संख्या 19 लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा पर बोलना चाहता हूं. पहला सुख निरोगी काया इस मंत्र के साथ कि मध्यप्रदेश का प्रत्येक नागरिक स्वस्थ हो इसके नाते हमारी मध्यप्रदेश की सरकार माननीय डॉ.मोहन यादव जी और उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल जी के नेतृत्व में स्वास्थ्य सुविधा बेहतर हो यह प्रयास लगातार किया जा रहा है. माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के आशीर्वाद से मध्यप्रदेश में तमाम योजनाओं के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं जहां एक तरफ आयुष्मान को लेकर आज कहा जा सकता है कि मध्यप्रदेश में 1075 चिकित्सालय संबद्ध हैं जिसमें से 578 निजी और 497 शासकीय चिकित्सालय सम्मिलित हैं.साथ ही मध्यप्रदेश ने एक कीर्तिमान स्थापित करते हुए 94 परसेंट आयुष्मान कार्ड बनाये हैं. जिससे एक परिवार को सुरक्षा की गांरटी मिली है. जहां एक तरफ 5 लाख रुपये प्रतिवर्ष की चिकित्‍सा सुविधा जो कि 70 प्‍लस वाले नागरिकों के लिए भी हैं. यह बात सही है कि ऐसा भी मध्‍यप्रदेश के कई अंचलों में है, जहां लोगों को अपने स्‍वास्‍थ्‍य के लिए, स्‍वास्‍थ्‍य की रक्षा करने के लिए, अपने जीवन की रक्षा के लिए अपने घर-जेवर भी गिरवी रखना पड़ता था या बेचना पड़ता था. लेकिन माननीय प्रधानमंत्री जी की दूरगामी सोच के चलते और मध्‍यप्रदेश में डॉक्‍टर मोहन यादव जी के प्रयासों से मध्‍यप्रदेश में लगातार स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं बढ़ रही हैं. इसके लिए माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी को बहुत-बहुत बधाई.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कैंसर जैसा खतरनाक रोग. कैंसर के नाम से एक भय होता है. कैंसर अगर किसी व्‍यक्‍ति को डाइग्‍नोज़ हो जाए तो उस व्‍यक्‍ति को लगता है कि डेथ वारंट तैयार हो गया है. लेकिन मध्‍यप्रदेश की संवेदनशील सरकार ने उसको भी भरोसा दिया है कि आपके कैंसर के लक्षण आने के बाद आप जांच कराइये. लगातार मध्‍यप्रदेश में 52 डे केयर सेंटर क्रियाशील हैं, जिनमें से 42 में कैंसर रोधी दवाएं उपलब्‍ध हैं. मैं माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी को बहुत बधाई देता हूँ कि इस बार के बजट में 5,806.66 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 22.45 प्रतिशत अधिक है. यह इस बात का द्योतक है कि मध्‍यप्रदेश की सरकार स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहती. हम स्‍वास्‍थ्‍य को अग्रणी रखना चाहते हैं. अगर नागरिक स्‍वस्‍थ होगा तो सारी सुविधाएं, सारे कार्य तेजी से होंगे और मध्‍यप्रदेश अन्‍य राज्‍यों की तुलना में विकसित राज्‍य बनने की दौड़ में और आगे निकलेगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश में चिकित्‍सा क्षेत्र में जनसामान्‍य को उपचार और चिकित्‍सा महाविद्यालय और संबद्ध चिकित्‍सालय की अधोसरंचना के विस्‍तार के लिए भी पिछले वर्ष की तुलना में 31.83 प्रतिशत की वृद्धि की गई है. यह इस बात का प्रमाण है कि लगातार हम स्‍वास्‍थ्‍य की सेवाओं में कैसे बढ़ोतरी करते जा रहे हैं और 2,357.67 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. मैंने जैसा बताया कि कैंसर के मरीजों के लिए भी, उनको ध्‍यान में रखते हुए सेंटर ऑफ एक्‍सीलेंस की स्‍थापना नवीन योजना 1,629 सीएम केयर प्रस्‍तावित किए जाकर वित्‍तीय वर्ष 2026-2027 में 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. 300 करोड़ रुपये केवल कैंसर के मरीजों के लिए, उनके स्‍वास्‍थ्‍य को ध्‍यान में रखते हुए रखे गए हैं. उनके स्‍वास्‍थ्‍य की बेहतरी के लिए प्रयास लगातार हो रहा है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश में जहां शव वाहन की कमी लगती थी, 148 शव वाहन की सेवाएं प्रारंभ की गई हैं, जो नि:शुल्‍क सेवा के रूप में हैं. प्रदेश में उपचारित रोगियों को उच्‍चस्‍तरीय दैनंदिनी जांच सुविधा उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से वर्ष 2025 में चिकित्‍सालय भोपाल और ग्‍वालियर में एमआरआई मशीन लगाई गई है. सरकारी अस्‍पतालों में एमआरआई मशीन की सुविधाएं नहीं उपलब्‍ध हुआ करती थी. जब बाहर इलाज कराने के लिए, जांच कराने के लिए, एमआरआई कराने के लिए जाते थे तो हजारों रुपये एक जांच के लिए लगते थे. उसके लिए माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी आपके प्रयासों की बहुत प्रशंसा करता हूँ कि आपने इतनी तत्‍परता के साथ इस दिशा में अपना काम आगे बढ़ाया है. जैसा कहा गया है कि आज 19 चिकित्‍सा महाविद्यालय हैं, उनमें लगातार सेवाओं में वृद्धि करने का काम हो रहा है. मैं देखता हूँ कि भोपाल के जिला अस्‍पताल, जयप्रकाश अस्‍पताल में भी बेहतर सुविधा हो रही हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक उदाहरण बताऊँगा कि 32 साल का एक नवजवान मेरे घर आया कि मेरे पास पैसे की दिक्‍कत है. आयुष्‍मान कार्ड कहीं अस्‍पताल में नहीं चल रहा है. उसके हिप रिप्‍लेसमेंट का काम होना था. हिप रिप्‍लेसमेंट के काम के लिए मैंने जयप्रकाश अस्‍पताल के सीएमएचओ से बात की कि इस मरीज की मदद करना है. वहां से आप कुछ कर दीजिए. कुछ मैं विधायक निधि से या निजी तौर से मदद करूंगा. थोड़े दिन बाद सीएमएचओ का फोन आया कि वह मरीज आपसे मिलना चाहता है. आप आकर उससे मिल लीजिए. वह मरीज गुलदस्‍ता हाथ में लिए हुए था कि मेरा इलाज हो गया. मेरे दोनों हिप रिप्‍लेसमेंट का काम हो गया. मैंने डॉक्‍टर से पूछा कि इस पर खर्चा कितना आया. उन्‍होंने कहा कि इसके ऊपर जीरो खर्चा आया. हमने रोगी कल्‍याण से सारी राशि दी है और आपको भी एक रुपया देने की जरूरत नहीं है. मैं माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी आपको बहुत बधाई देता हूँ. 32 साल का एक नवजवान केवल आपके स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं के कारण क्‍योंकि आपने दूरगामी सोच के साथ ये सुविधाएं उपलब्‍ध कराई हैं. वह गरीब स्‍वस्‍थ होकर के भोपाल में अब आम जीवन व्‍यतीत कर रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय, भोपाल के साथ-साथ रीवा में कॉर्डियोलॉजी विभाग को आपने आगे बढ़ाया है. कॉर्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के आने से जो कॉर्डियो के इलाज के लिए लोग दिल्‍ली जाते थे, मुंबई जाते थे. अब और बेहतर सुविधाएं भोपाल में हो रही हैं, मध्‍यप्रदेश में हो रही हैं. प्रदेश में चिकित्‍सा महाविद्यालयों के नाते सीटी स्‍कैन मशीन की अस्‍पतालों में बात होती है कि सीटी स्‍कैन मशीन नहीं हैं, यह लिखकर दे दिया जाता था और बाहर मनमानी कीमतें वसूल की जाती थी. आज आपने 9 करोड़ रुपये की प्रत्‍येक मशीन भोपाल, इन्‍दौर, जबलपुर, रीवा और सागर में सीटी स्‍कैन मशीनें दी हैं. एमआरआई की मशीनें जिसकी प्रत्‍येक की कीमत 14 करोड़ रुपये यह आपने देने का काम किया है, माननीय मंत्री जी, वास्‍तव में आप बधाई के पात्र हैं. रेडियोथेरेपी के मामले में भी भोपाल, इन्‍दौर, रीवा और सागर में आपने 7 करोड़ रुपये प्रति मशीन के दिये हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश में देहदान करने वाले ऐसे 60 मृतकों के लिए, मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को बहुत बधाई देता हूँ कि जहां पहले नेत्रदान की बात होती थी और इन्‍दौर में, मैं देखता हूँ कि एक सामाजिक संस्‍था उसमें स्किन का दान हो, तो लोगों ने अपनी स्‍वेच्‍छा से, अपने जीते-जी अपने शरीर का देहदान करने का निर्णय लिया है, उसके कारण उन्‍हें 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया जाता है. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को बहुत बधाई देता हूँ, वह यह प्रेरणा देता है कि उसकी मृत्‍यु हो जाने के बाद यह शरीर तो जलकर राख हो जायेगा, लेकिन यह अगर किसी के काम आ सकता है तो उससे हमारे मेडिकल कॉलेज के स्‍टूडेंट, उस पर रिसर्च कर सकते हैं. मैं बहुत बधाई देता हूँ कि चिकित्‍सा महाविद्यालयों में सीनियर रेजिडेंट के 354 पद स्‍वीकृत किए हैं, जिससे निश्चित रूप से चिकित्‍सा के क्षेत्र में बढ़ोतरी हो सकेगी, प्रगति हो सकेगी.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जुलाई, 2025 से आपने शव परिवहन सेवा प्रारंभ की है, 6,308 शवों का परिवहन यह बात दर्शाता है कि हम कितनी संवेदनशीलता के साथ लोगों के साथ जुड़ाव रखते हुए काम कर रहे हैं. मई, 2024 में पीएम एयर एंबुलेंस सेवा जो प्रारंभ की गई, वह इतनी कारगर है कि मरीज को यह भरोसा है कि उसे अगर कहीं दिक्‍कत है, उसके परिवार में अगर किसी को दिक्‍कत आयेगी तो मध्‍यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव जी की सरकार परिवार के साथ खड़ी है और उसे जिस अस्‍पताल में जाना होगा, दिल्‍ली जाना होगा, बॉम्‍बे जाना होगा, तो वहां जाकर उसका इलाज हो सकता है. इसके लिए मैं आपको बहुत बधाई देता हूँ.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आयुष्‍मान वय वन्‍दना योजना के आधार पर 70 प्‍लस के नागरिकों के लिए, जो आपने 14.85 लाख आयुष्‍मान कार्ड बनाए हैं, उसके लिए भी मैं बधाई देता हूँ. राज्‍य के 51 जिलों में उच्‍च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं के लिए उनके सुरक्षित प्रसव के लिए 228 बर्थ वेटिंग रूम क्रियाशील है. मैं जेपी अस्‍पताल में गया था, मुझे सूचना मिली कि मेरी विधान सभा क्षेत्र के पंचशील नगर में भी आपने यह सुविधा दी है, तो मैं आपको बहुत बधाई देता हूँ कि ऐसी महिलाओं को जहां कठिनाई होती है, वहां आपने बर्थ वेटिंग रूम उपलब्‍ध कराए हैं. इसके कारण लोगों को एक भरोसा है कि सरकार इनके साथ खड़ी है, कभी भी कोई जरूरत होगी तो सरकार उनकी मदद के लिए आगे खड़ी रहेगी. प्रदेश में खाद्य और औषधियों के नमूनों की त्‍वरित और समय सीमा में जांच करने हेतु, जो आपने औषधि परीक्षण प्रयोगशाला शुरू की है, इससे भी मध्‍यप्रदेशवासियों को लाभ मिलेगा. मैं माननीय उपमुख्‍यमंत्री जी से निवेदन करना चाहूँगा कि जेपी अस्‍पताल में नवीन पांच मंजिला नया भवन तैयार हुआ है, उसमें जहां तीन मंजिल पर सर्जिकल और अर्थोपेडिक डिपार्टमेंट की स्‍थापना हो रही है, इसके साथ ही जो ऊपर 2 मंजिलें हैं, उसके लिए अभी उपयोग तय नहीं हुआ है. पहले सिद्धान्‍ता रेडक्रास से एमओयू साईन हुआ था, उसको बाद में समाप्‍त कर दिया गया. वहां पर अब मेरा आग्रह है कि या तो कार्डियो डिपार्टमेंट हम लेकर आएं, चूंकि इसकी आवश्‍यकता जिला अस्‍पताल में है, नहीं तो आप कैंसर अस्‍पताल के लिए भी चूंकि कैंसर के मरीजों की भी संख्‍या लगातार बढ़ती जा रही है. कैंसर यूनिट आने से भी भोपाल और उसके आसपास के लोगों को उससे बहुत बड़ा लाभ मिलेगा. फिजियोथैरेपी एक पूर्ण काम है और इसमें बड़ी राशि भी खर्च होने वाली नहीं है, अगर इसके लिये भी पूरा विभाग यहां पर शुरू हो जायेगा. जेपी अस्‍पताल में इसकी रेडियोलॉजिस्‍ट की भी आवश्‍यकता है, यह लगातार वहां से डिमांड आती है कि बाकि अस्‍पतालों के पास है, बाकि शहरों में भी है, तो हमारे शहर भोपाल में भी रेडियोलॉजिस्‍ट विशेषकर जिला अस्‍पताल जेपी अस्‍पताल में हो, इतना आग्रह करते हुए और मैं आपको बहुत-बहुत बधाई देते हुए, माननीय अध्‍यक्ष जी ने संकेत दिया है,  मैं अपनी बात पूरी कर चुका हूँ. मेरा एक आग्रह है कि रोगी कल्‍याण समिति की बैठक होनी चाहिए, वह भी एक समय सीमा में जिले की बैठकें निरन्‍तर होती रहेंगी तो वहां रोगी कल्‍याण के साथ-साथ और भी कुछ विषय आएंगे, तो उनको भी हम दूर कर सकेंगे. बहुत-बहुत धन्‍यवाद, बहुत-बहुत बधाई.     

          अध्‍यक्ष महोदय-  नेता प्रतिपक्ष जी.      

          श्री कमलेश्‍वर डोडियार-  अध्‍यक्ष महोदय, मेरा बाकी है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  आपने पहले क्‍यों नहीं दिया, आपको पहले ही अपना नाम देना चाहिए. कमलेश्‍वर जी संक्षेप में अपनी बात कहें.

          श्री कमलेश्‍वर डोडियार (सैलाना)-  अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश की स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं पर कई साथियों ने सदन में जोरदार बातें रखी हैं लेकिन प्रदेश में भिन्‍न-भिन्‍न स्‍थानों पर, स्‍वास्‍थ्‍य की जो हालात है, उसे विपक्ष के साथियों ने अच्‍छा से रखा है. मेरा क्षेत्र रतलाम जिले का, सैलाना क्षेत्र क्रमांक 221 है. वहां रावटी, बाजना और सरवन में प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र बने हुए हैं, प्रत्‍येक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र पर 1 लाख से अधिक लोग उपचार एवं स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के लिए निर्भर हैं. मैं, पिछले 2 वर्षों से आग्रह कर रहा हूं, सदन में बोल रहा हूं, प्रश्‍न भी कर रहा हूं और विधान सभा सैलाना के लोग भी लगातार ज्ञापन मुख्‍यमंत्री जी एवं मंत्री जी के नाम पर दे रहे हैं लेकिन अभी तक उस प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र को अपग्रेड करके, सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र में परिवर्तित करने जैसी कार्रवाई शुरू नहीं की गई है.

          अध्‍यक्ष महोदय, सैलाना में जितने भी उप स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र संचालित हैं, उन पर एक भी चिकित्‍सक उपलब्‍ध नहीं होता है और जो बॉन्‍डेड होते हैं, वे भी आते नहीं हैं, उन्‍हें कहीं और अटैच कर दिया जा रहा है. मेरे पूरे विधान सभा क्षेत्र में एक भी महिला चिकित्‍सक नहीं है. मेरा आग्रह है कि सैलाना में 2 विकासखण्‍ड हैं, सैलाना और बाजना, कम से कम दोनों विकासखण्‍ड मुख्‍यालयों पर 1-1 महिला चिकित्‍सक नियुक्‍त कर दिया जाये. सैलाना में स्थित उप स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र, प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र और सैलाना मुख्‍यालय में स्थित सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र पर स्‍वास्‍थ्‍य सेवायें जानबूझकर सुचारू रूप से संचालित नहीं की जा रही हैं, जिसके परिणामस्‍वरूप मरीज मजबूर होकर झोलाझाप बंगालियों के पास जाते हैं और वे मोटी फीस लेकर गलत तरीके से, अनुचित तरीके से उपचार करते हैं और इस इलाज से लोगों की मौत हो जाती है.       अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए आपके माध्‍यम से मंत्री जी से आग्रह है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र के सरवन, रावटी और बाजना के प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों को अपग्रेड कर सामुदायिक अस्‍पताल बनाया जाए और उप स्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों पर कम से कम 1-1 चिकित्‍सक की नियुक्ति की जाये और सैलाना विधान सभा क्षेत्र में, सैलाना व बाजना विकासखण्‍ड में केवल 1-1 महिला चिकित्‍सक की नियुक्ति की जाये, ऐसा आग्रह है. अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मंत्री जी से ऐसा अनुरोध है, कम से कम 1 प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र को सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र बनाया जाये, इतना तो किया ही जाये, ऐसा अनुरोध है, धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय-  मंत्री जी, वे कम से कम मांग रहे हैं.  

         

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-  अध्‍यक्ष महोदय, मांग संख्‍या 19 पर आपने बोलने का समय दिया, इसके लिए धन्‍यवाद. मुख्‍यमंत्री जी चैट-जीपीटी के भाषण में कई बड़े-बड़े दावे करते रहते हैं, मेडिसिटी की बात की, आयुष्‍मान की बात की, एअर एम्‍बुलेंस की बात की, सवा करोड़ सिकलसेल स्‍क्रीनिंग की बात की, 12 हजार 6 सौ 55 आरोग्‍य मंदिरों की बात की, 4 सौ 48 क्लिनिकों की बात की, मेडिकल कॉलेज में वृद्धि की बात की, सरकार बार-बार कहती है और यह बात बजट में आती हैं कि पूंजीगत व्‍यय पर हम खर्च कर रहे हैं, भवन बना रहे हैं, सड़कें बना रहे हैं, विकास कार्य कर रहे हैं लेकिन स्‍वास्‍थ्‍य के मामले में, आप अस्‍पताल के भवन बना रहे हैं, प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र, उप स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र बना रहे हैं लेकिन उस भवन कोई नहीं है, न डॉक्‍टर बैठ रहा है, गांवों में यही स्थिति है, ये भवन किसके लिए बन रहे हैं, क्‍या भूतों के लिए बन रहे हैं ?    

          श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल-  भूत होते हैं क्‍या ?

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-  मतलब समझ जाया करो कि सरकार किस तरह से अपव्‍यय कर रही है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  कृपया, बीच में कोई व्‍यवधान न करें.

          श्री उमंग सिंघार--अध्‍यक्ष महोदय सीएजी की रिपोर्ट वर्ष 2024 में उसका प्रमाण है 6 हजार 467 डॉक्‍टरों की कमी. अस्‍पतालों में चूहे दौड़ रहे हैं, नवजात बच्‍चों को खा रहे हैं और पेस्‍ट कंट्रोल पर करोड़ो रुपए खर्च किया जा रहा है. अगर करोड़ों रुपए पेस्‍ट कंट्रोल पर खर्च किया जा रहा है तो मैं नहीं समझता कि एमवाय अस्‍पताल में यह स्थिति बनती. जहरीले सिरप की जो बात हुई, कई बार मामला उठा, लेकिन लगता है सरकार उससे भी नहीं जाग पा रही है. एयर एम्‍बुलेंस की बात होती है कि हमने प्रदेश के अंदर 100, 150 लोगों को एयर एम्‍बुलेंस से लिफ्ट किया.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सामान्‍य एम्‍बुलेंस 108 तो समय पर पहुंच नहीं पाती है. सड़कों पर कई लोगों की मृत्‍यु हो जाती है. मैंने पिछले बार भी उदाहरण दिया था, हमारे सदस्‍यों ने बताया था कि कई जगह एम्‍बुलेंस में शराब जा रही है, लेकिन उसके अंदर मरीज नहीं है. एम्‍बुलेंस 108 शराब के लिए बनी है कि मरीजों के लिए बनी है.    मैं समझता हूं कि सरकार के लिए उप‍लब्धियां गिनाना अच्‍छी बात है, लेकिन उपलब्धियां जब होती हैं, जब सुविधाएं हों, सेवाएं हों और वह आम व्‍यक्ति के लिए मिले तो आप उपलब्धियों गिनाएं तो हम आपका स्‍वागत करेंगे. सरकार बार-बार वर्ष 2047 का सपना दिखाती है. मैं आपके माध्‍यम से स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी से, उप मुख्‍यमंत्री जी से जानना चाहूंगा कि वर्ष 2047 या वर्ष 2026 में उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, सामुदायिक केन्‍द्रों के अंदर डॉक्‍टरों की भर्ती होगी? यह बताएं? मुझे नहीं लगता है कि सरकार के पास इसका जवाब होगा, क्‍योंकि जितनी भर्तियां हो रही हैं वह आरक्षण में उलझ रही हैं, कहीं पैसा नहीं है तो पोस्टिंग विचाराधीन हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार ने Telemedicine की बात की. जब सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र, प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में जब डॉक्‍टर नहीं हैं, सुविधाएं नहीं हैं तो Telemedicine एक परिकल्‍पना है. कौन से गांव में Telemedicine की गाड़ी जा रही है? कौन सी विधान सभा में जा रही है? यहां सदस्‍यों से भी आप पूछ लें. घर बैठे डॉक्‍टर किसको ऑनलाईन देख रहा है. अभी तक तो यह बात हमारे सामने आई नहीं. अगर है तो सरकार ने प्रचार क्‍यों नहीं किया? सरकार एयर एम्‍बुलेंस का प्रचार कर रही है, लेकिन घर बैठे इलाज हो रहा है, डॉक्‍टर प्रिस्‍क्रिपशन लिख रहे हैं उसकी बात नहीं हो रही है, इस‍का मतलब यह है कि यह नहीं हो रहा है, क्‍योंकि प्रचार में सरकार हमेशा आगे रहती है. अगर आप घर-घर इलाज करा रहे हो तो प्रदेश की सरकार को जनता को बताना पड़ेगा. आपका बजट कई करोड़ रुपए का था. 22 हजार करोड़ रुपए के आसपास का था. लेकिन ड्रग के लिए, औषधी के लिए, नियंत्रण के लिए वर्ष 2025-26 में बजट 18 करोड़ 37 लाख रुपए था. वर्ष 2026-27 में 15 करोड़ 99 लाख रुपए हो गया. सीधे सवा दो करोड़ रुपए कम कर दिये. क्‍यों जांच व्‍यवस्‍था को कमजोर किया जा रहा है? क्‍या सरकार छिंदवाड़ा के कफ सिरप से नहीं सीख पाई कि आज हमें यहां पर जांच के लिए दवाओं की आवश्‍यकता है. उसमें तो आपने बजट कम कर दिया. अभी भी सरकार 26 मासूमों की मौत के बाद भी  नहीं चेती. ड्रग सेफ्टी का खर्च यदि देखें तो प्रतिव्‍यक्ति 1 रुपए 81 पैसे करीब आता है. सरकार की नजरों में दवा की सुरक्षा प्राथमिकता नहीं है. इससे यह स्‍पष्‍ट है. यह इससे स्पष्ट है. भोपाल, इंदौर और जबलपुर में लेब स्थापित हैं. पूरे प्रदेश में 79 ड्रग इंस्पेक्टर हैं. एक महीने में 40 निरीक्षण करना होते हैं, 5 से 10 सेम्पल लेना होते हैं. आपके पास इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है इस कारण प्रदेश में अवैध दवाओं का व्यापार हो रहा है. इन अवैध और जहरीली दवाओं के कारण मौतें हो रही हैं. क्या सरकार इस पर अभी भी नहीं चेतना चाहती है. आपने केन्द्र सरकार को 211 करोड़ रुपए का सुदृढ़िकरण का प्रस्ताव भेजा था. राशि आई है या नहीं आई है, पता नहीं है. लोक स्वास्थ्य विभाग का 22362 करोड़ रुपए का बजट है. इसमें से 47 प्रतिशत अस्पतालों के लिए खर्च किया जा रहा है. प्रदेश में 10 हजार के लगभग अस्पताल हैं. उसमें से पीएचसी के लिए सिर्फ 9 प्रतिशत खर्च हो रहा है. सीधे-सीधे ग्रामीण जनता के साथ विभाग भेदभाव कर रहा है. आपने बड़े अस्पतालों और मुख्यालयों के लिए राशि आवंटित कर दी लेकिन पीएचसी के लिए आप राशि नहीं दे पाए हैं. सरकार गरीब के इलाज की बात करती है. एयर एम्बूलेंस में ले जाने की बात करती है, लेकिन उसके लिए पैसा ही नहीं रखती है. अभी हाई कोर्ट ने एक विषय पर संज्ञान लिया था जिसे मैं सरकार के संज्ञान में लाना चाहता हूँ. क्रमांक 6382 है. आज भागदौड़ भरी जिंदगी हो गई है. मानसिक उपेक्षाएं हो रही हैं इसी कारण युवा आत्महत्या कर रहे हैं. दिनांक 18 फरवरी, 2026 को विधान सभा में प्रस्तुत आंकड़े में, प्रश्न क्रमांक 764 में बताया गया कि 13 दिसम्बर, 2023 से लेकर 20 जनवरी 2026 तक 32385 मामले आत्म हत्या के दर्ज किए गए हैं. अर्थात् 42 आत्म हत्याएं प्रतिदिन हो रही हैं. यह आत्म हत्याएं क्यों हो रही हैं इसके पीछे एक कारण है. उदाहरण देना चाहता हूँ. एक बहिन ने अपनी ही बहिन की हत्या कर दी थी, कारण ईर्ष्या था. यह घटना नरसिंहपुर जिले की है, यह वर्ष 2023 की घटना है. माननीय हाई कोर्ट ने मानसिक स्वास्थ्य के मामले को लेकर यह माना कि हमारे यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी है. राज्य सरकार को 90 दिन के अन्दर इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए कहा गया था. सरकार ने क्या किया कुछ स्पष्ट नहीं है. क्या हम प्रदेश के युवाओं को आत्महत्या से बचाने के लिए उनकी काउंसलिंग नहीं कर सकते हैं. प्रदेश के कौन से अस्पताल में काउंसलिंग के लोग हैं. कहां पर साइकोलॉजिस्ट हैं. हर व्यक्ति भागदौड़ भरी जिंदगी में मानसिक दबाव में रहता है, परेशानियां होती हैं. सरकार को इस पर संवेदना के साथ ध्यान देना चाहिए. जब जब हाईकोर्ट संज्ञान लेती है तब सरकार जागती है. यह मध्यप्रदेश सरकार की परम्परा बन गई है. यह सरकार सोती रहती है. भागीरथपुरा में जब फटकार मिली तब जाकर ज्यूडीशरी इंक्वायरी हो रही है. सीएजी की वर्ष 2022 की रिपोर्ट में आया है कि एनएचएफ का फण्ड 3111 करोड़ रुपए था जिसका सरकार उपयोग ही नहीं कर पाई. यह बड़ी लज्जा की बात है. एक तरफ आप लोन लेना चाहते हो और जो फण्ड है उसे खर्च नहीं कर पा रहे हो. सीएजी की रिपोर्ट में कई बातें आईं. दबाव पर दिए गए डेढ़ करोड़ के ठेके, सवा करोड़ से ज्‍यादा कीमत की दवाएं खत्‍म हो गईं, अनाधिकृत ब्‍लड बैंक संचालन, जिसमें सतना का उदाहरण है. एचआईवी का आपको पता है. पूरे प्रदेश को पता है. सरकार सिर्फ आंकड़े गिनाना चाहती है कि हमारी बिल्डिंग इतनी हो गईं, हमारे स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र इतने हो गए. 10,256 आप बता रहे हैं. जिला अस्‍पताल, उप स्‍वास्‍थ केन्‍द्र प्रति 3,000 व्‍यक्तियों पर एक ग्रामीण जनसंख्‍या पर, प्राथमिक स्‍वास्‍थ केन्‍द्र 20,000 की ग्रामीण जनसंख्‍या पर एक, सामुदायिक स्‍वास्‍थ केन्‍द्र 80,000 जनसंख्‍या पर एक. अगर सरकार को सिर्फ बिल्डिंग्‍स ही बनानी है, अगर जनता के स्‍वास्‍थ का ध्‍यान नहीं रखना, अगर वहां पर आप ह्यूमन रिसोर्स, अगर नौकरियां नहीं देना चाहते तो यह स्‍वास्‍थ विभाग कैसे चलेगा. कई जगह यही स्थिति है. मैं विशेष रूप से आपका इस ओर ध्‍यान दिलाना चाहता हूं कि मोदी सरकार बार-बार औषधि केन्‍द्र की बात करती है. अभी 25,000 पूरे देश में होने वाले हैं मुख्‍यमंत्री जी ने भी कई बार प्रेस में बोला कि हम औषधि केन्‍द्र ला रहे हैं. पूरे देश का 2 लाख करोड़ के आसपास फार्मास्‍युटिकल का बिजनेस है. बड़ी-बड़ी कंपनियां हैं. सन फार्मा, सिफला, डॉ.रेड्डी, टोरेंट, ल्‍युपिन, जायडू, मेनकाइंड ऐसी तमाम कंपनियां हैं और एक तरफ मोदी सरकार, भाजपा सरकार कहती है कि हम गरीब को कम कीमत में इलाज उपलब्‍ध कराएंगे, कम कीमत में हम उनको दवा उपलब्‍ध कराएंगे लेकिन सच्‍चाई दूसरी है कि रजिस्‍टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स के संबंध में 02 अगस्‍त, 2023 को एक रूलिंग जारी की गई कि हर डॉक्‍टर को जेनेरिक के नाम पर मूल ड्रग के नाम से दवाई लिखनी पड़ेगी. यह अनिवार्य किया गया लेकिन फिर 23 अगस्‍त को उस नोटिफिकेशन को वापस ले लिया. एक तरफ मोदी जी कहते हैं कि हम औषधि केन्‍द्र खोलेंगे तो क्‍या नरेन्‍द्र मोदी जी इतने कमजोर हो गए कि जो आम व्‍यक्तियों, गरीबों को दवाइयां उपलब्‍ध नहीं करा पा रहे हैं. क्‍या बड़ी ब्राण्‍ड की दवा कंपनियों के सामने घुटने टेक दिए.

अध्‍यक्ष महोदय, एक दवा आती है सामान्‍य तौर पर वायरल फीवर सबको होता है जिसको हम बुखार की दवा कहते हैं आजकल डोलो के नाम से 650 एमजी की आती है, वह बाजार में 5 से 8 रुपये की दवा बिकती है क्‍योंकि वह ब्राण्‍ड के नाम से बिक रही है लेकिन उसका ड्रग है पैरासिटामॉल. अगर वह पैरासिटामॉल के नाम से बिके तो मैं दावे से कह सकता हूं कि 50 पैसे से 1 रुपये से ज्‍यादा की दवा नहीं है. क्‍या इससे आम व्‍यक्ति को लाभ नहीं होगा. हम सक्षम लोग यहां पर बैठे हैं. हमें सुविधाएं मिलती हैं. हम हमारा इलाज करा सकते हैं लेकिन गरीब व्‍यक्ति इलाज कैसे कराएगा जो मजदूरी कर रहा है. क्‍या हम उसको 50 पैसे की दवा नहीं दिलवा सकते हैं. (मेजों की थपथपाहट) यह कैसी डबल इंजन की सरकार है. कैसा सिस्‍टम है. ग्‍लूकोज की बॉटल के एक छोटे से अस्‍पताल के अंदर ग्रामीण क्षेत्र में 150-200-300 रुपये ले लेते हैं. हम उसको जेनेरिक दवा के नाम से करें तो क्‍या वह 25 रुपये, 50 रुपेय बॉटल नहीं आ सकती. उस गरीब को हम लाभ नहीं पहुंचा सकते. कोई एक्‍सीडेंट हो जाता है तो सर्जिकल की पट्टी लगती है. वह आती है 25-50 रुपये की. अगर वह बगैर ब्राण्‍ड के बिकने लग जाए तो 5 रुपये, 10 रुपये में वह पट्टी उसको मिलने लगेगी, लेकिन नहीं. आप किसको फायदा पहुंचा रहे हैं. आप बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचाना चाहते हैं. एक तरफ आपकी सरकारी एजेंसी दवाई सप्‍लाई कर रही है. किसके पास जा रहा है करप्‍शन का पैसा. अगर सरकार की नीयत साफ है तो मैं कहता हूं कि मोदी जी की, आपकी भारतीय जनता पार्टी की सरकार स्‍कीम की बात करती है तो क्यों नहीं आप आज से ही लागू करें कि हमारे प्रदेश में जेनेरिक दवाएं, के नाम पर यह बिके, सरकार क्यों इस पर फैसला नहीं लेती है, सरकार इसकी समीक्षा क्यों नहीं करना चाहती है. इसलिये नहीं करना चाहती है कि करोड़ों रूपये भारतीय जनता पार्टी को (XX) के नाम से पैसा मिल रहा है. अगर सेवा करना है तो दिल से करो नहीं तो मत करो. यह सरकार से मैं कहना चाहता हूं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, आउट सोर्स को लेकर के 100 करोड़ के टेंडर हो रहे हैं, कई जिलों में टेंडर प्रक्रिया चालू है, कई कंपनियां इसमे शामिल हैं, इंदौर की भी एक दो कंपनी हैं. अध्यक्ष महोदय, आउट सोर्स को लेकर के सरकार के जो नियम हैं जो गाइड लाईन है वह चेंज कर दी गई, एक कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिये. अध्यक्ष महोदय, आप क्यो आउट सोर्स करना चाहते हैं, क्या आपको नौकरी करने वाले योग्य लोग नहीं मिल रहे हैं, क्या मध्यप्रदेश के अंदर आपको काम करने वाले लोग नहीं मिल रहे हैं. क्यों आप ओउट सोर्स के माध्यम से काम ठेकेदार को देना चाहते हैं जो 50 हजार रूपये उस गरीब आदमी से ले रहा है जो सफाई कर्मी है. मैं समझता हूं कि इस पर भी सरकार को संज्ञान लेना चाहिये.

          अध्यक्ष महोदय, जब इंदौर मे भागीरथपुरा में घटना घटी थी तब मैं इंदौर के एमवाय अस्पताल मे गया था. वहां पर कार्यरत आउट सोर्स के कर्मचारियों को दो दो माह से वेतन नहीं दिया गया है. कोई दिल्ली की कंपनी है वह वेतन नहीं दे रही है. गरीब लोग हैं, मेरे सामने उस परिवार की महिलायें, बहनें रो रही हैं, घर में खर्च के लिये पैसे नहीं है, हम 10 हजार रूपये की नौकरी कर रहे हैं, हमको 8 घंटे के बजाए 12 घंटे की नौकरी कराई जा रही है और समय पर वेतन भी नहीं दिया जा रहा है. तीन माह बिना वेतन के हम कैसे रहें, हमारे घर का चूल्हा कैसे जलेगा. और जो आवाज उठाता है उसको निकाल देते हैं. यह हाल इंदौर का है. माननीय मंत्री जी इस मामले में संज्ञान लें कि हम माह उनको वेतन तो कम से कम मिले क्योंकि एमवाय बड़ा अस्पताल है, इंदौर संभाग और पूरे प्रदेश के मरीज वहां पर इलाज कराने के लिये आते हैं, तो वहां ऐसी अव्यवस्थायें नहीं होना चाहिये, मंत्री जी इस पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिये. और इन गरीब लोगों पर जो बार बार 12 घंटे काम करने का दवाब बनाया जाता है, तो यदि आपको 12 घंटे काम करवाना है तो 12 घंटे के पैसे दिलवायें, 8 घंटे के नाम से 12 घंटे काम करवाते हैं , और  यह समस्या केवल इंदौर की नही है पूरे मध्यप्रदेश की है, इस पर मंत्री जी को गंभीरता से चिंतन करना चाहिये ,पॉलिसी पर नजर रखना चाहिये.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री बीमारी सहायता योजना के बारे में कहना चाहता हूं कि प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार विधायक निधि के आवंटन को लेकर के तो भेद भाव कर रही है , क्षेत्र में पैसा देने में भेद भाव कर रही है. दुख की बात है कि मुख्यमंत्री बीमारी सहायता योजना में भी भेदभाव हो रहा है. अध्यक्ष महोदय, क्षेत्र में यदि कोई गरीब आदमी बीमार हो जाता है इलाज के लिये उसके पास में पैसे नहीं हैं तो हम मुख्यमंत्री जी को चिट्ठी लिखते हैं, इसकी सहायता करे, अब उसमें भी भेद भाव हो रहा है, वह गरीब है बीमारी से संघर्ष कर रहा है, उसके पास में पैसा नहीं है हम लोगों के सामने हाथ फैला रहा है कि  बीमारी में उसकी मदद कर दो, उसके साथ भी भेदभाव, यह तो उचित नहीं है..

          श्री आरिफ मसूद -- माननीय अध्यक्ष महोदय, कम से कम 200 पत्र मुख्यमंत्री जी को मैंने लिखे हैं एक पर भी सहायता नहीं मिली है..व्यवधान...

          श्री महेश परमार -- अध्यक्ष जी, ऐसा भेदभाव तो कभी किसी सरकार ने नहीं किया है, जो इस समय यह सरकार कर रही है.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक-- हमारे प्रस्ताव पर सरकार विचार नहीं करती है. गरीब मरीजों के साथ में ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिये. ..व्यवधान...

          श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव--अध्यक्ष महोदय, इस प्रकार की राजनीति करना उचित नहीं है, इसमें भेदभाव नहीं होना चाहिये.

          अध्यक्ष महोदय- कृपया बैठें, नेता प्रतिपक्ष जी बोल रहे हैं, उनको अपनी बात रखने दीजिये.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक- दुख की बात है प्रदेश के मुख्यमंत्री के यहां मरीजों के साथ में भी असमानता का व्यवहार हो रहा है. इस पर आपकी व्यवस्था आनी चाहिये.

          अध्यक्ष महोदय- सोहनलाल जी कृपया बैठें .उमंग जी को अपनी बात रखने दें.

          श्री भंवर सिंह शेखावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इस गंभीर विषय पर माननीय नेता प्रतिपक्ष ने सदन के संज्ञान में कोई बात लाई है. यह तो ऐसा पैसा है जो जनता का पैसा है और जनता में बंट रहा है, आप बांट रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन करना चाहता हूं माननीय मंत्री जी और आदरणीय मुख्यमंत्री जी से कि पिछले दो साल जब से मुख्यमंत्री जी ने  अपना  कार्यकाल संभाला है कि मुझे ध्यान नहीं आता है कि   शिवराज जी के टाइम  में  कोई  ऐसा पक्षपात होता होगा. लेकिन  दो साल के अन्दर कितने   आवेदन विपक्षी   विधायकों के आये हैं  और कितने सत्ता पक्ष के विधायकों के आवेदन आये  हैं.  कितने कितने आवेदन आये हैं,  मेहरबानी करके पब्लिक कर दिये जायें  कि बीजेपी के विधयाकों ने  लोगों की सहायता के लिये कितने आवेदन दिये,  उनमें कितनों में कितना पैसा  आपने  वितरित किया है.

          अध्यक्ष महोदयभंवर सिंह जी, बात आ गई.

          श्री भंवर सिंह शेखावत अध्यक्ष महोदय, बात कहां  आ गई,  हो नहीं रहा है ना.  बात तो आ गई,  आपने  आशीर्वाद दिया है, तो   बात आ गई.  दो साल  का  आंकड़ा  जनता के बीच  में आये तो सही कि भाजपा  के द्वारा  दिये गये आवेदनों पर कितना पैसा जारी हुआ  और  कितना  पैसा कांग्रेस   के सदस्यों  के आवेदन पर दिया गया है.  बीमारी  में पक्षपात करते हो आप लोग.  इससे बड़ा घोर पाप क्या होगा.  इससे बड़ा कोई पाप हो नहीं सकता कि जनता के द्वारा  दिये  हुए टैक्स  के पैसे को  आप बांट  रहे हो और  कांग्रेस   वाले के यहां पर कोई बीमार पड़ जाये, तो  नहीं दोगे और  बीजेपी  वालों को धड़ाधड़ दिये जा रहे हो.  बीजेपी के आवेदन पर डेढ़-डेढ़  दो दो लाख.  इसमें आपने कांग्रेस बीजेपी बना दिया.  मैं  आपसे  पूछना चाहता हूं कि कांग्रेस के  लोगों  के  आवेदन पर आपने कितने पैसे दिये और  बीजेपी  के लोगों के  आवेदन पर आपने कितने पैसे दिये.

          अध्यक्ष महोदयभंवर सिंह जी, कृपया बैठिये. उमंग जी, पूरी बात कर लें.

          श्री भंवर सिंह शेखावतबैठ जाता हूं साहब.

          अध्यक्ष महोदय(श्री आरिफ मसूद,सदस्य  के   खड़े होने पर) नेता प्रतिपक्ष जी बोल रहे हैं.  आपकी ही वे बात बोल रहे हैं.

          श्री उमंग सिंघारअध्यक्ष महोदय,  मैं समझता हूं कि आप सर्वोपरि  हैं विधान  सभा में और आपको  इस पर  कोई व्यवस्था देना चाहिये कि  इस प्रकार  कोई अपने जीवन मृत्यु के लिये संघर्ष  कर रहा है.  क्या हम उसके लिये  मदद नहीं करें  और पैसा जनता का है.  हम तो सिर्फ चिट्ठी लिख रहे हैं.  लेकिन  यह भी सच है कि  मुख्यमंत्री जी  की आर्थिक  सहायता  का इस सदन  को  भी मालूम होना चाहिये कि पैसा  कहां कहां जा रहा है, कौन से अस्पतालों में जा रहा है.  किस के जेब में जा रहा है. क्या  मरीजों के जेब में जा रहा है कि  और किसी के जेब में जा रहा है,  यह  भी स्पष्ट  होना चाहिये. मैं आपसे चाहूंगा.  लेकिन मैं समझता हूं कि..

          अध्यक्ष महोदय यह तो पेज लास्ट वाला था ना.  कोई और है.  नहीं, आपने कहा कि एक और.  इसलिये मुझे ध्यान आया.

          श्री उमंग सिंघारअध्यक्ष महोदय,   निश्चित तौर से  आप प्रयास करें.  जनहित  में हम   आपके साथ सकारात्मकता के साथ  तैयार है चर्चा  करने के लिये, लेकिन निष्कर्ष आना  चाहिये, क्योंकि मैं देखता हूं कि  एक तरफ हम करोड़ों  रुपये खर्च करते हैं विधान  सभा में कार्यवाही के अंदर और चर्चाओं के नाम पर सिर्फ  और सिर्फ योजनाएं  गिनाई जाती हैं. क्या लाभ हुआ, वह आंकड़े  आना चाहिये. अगर विपक्ष का विधायक, यहां अकेला नहीं है, 3 लाख उसके क्षेत्र की जनता की आवाज  के रुप में   आया है और उसकी आवाज को बंद  कराया जाता है हर विधान सभा में.  अब 3 लाख तो लोग आयेंगे नहीं,  जनप्रतिनिधि है. तो क्या 3 लाख की तरफ से  अगर  वह  विधायक अपनी बात कर रहा है, तो वह उनकी बात कर रहा है.  मैं समझता हूं कि सरकार को इस बात  को गंभीरता से लेना चाहिये और अंत  में मैं मंत्री जी   को कई बार कह चुका हूं कि  मेरी  विधान सभा गंधवानी के अंदर  आपके  सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र  गंधवानी,बाघ,टांडा में   एक भी वहां पर  स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं है.  पूरी विधान सभा में  अगर  50 प्रतिशत आबादी  यदि महिलाओं की है,   तो   अगर वहां पर स्त्री रोग विशेषज्ञ  नहीं होगी, तो   कहां जायेगी (XX) बहन.  मैं समझता हूं कि  मंत्री  जी इस बारे में विशेष रुप से सोचेंगे, क्योंकि हर कोई ग्रामीण क्षेत्र में जाना नहीं चाहता.  लेकिन यह तो मैं मुख्यालय,ब्लाक स्तर की बात कर रहा हूं.   कई बार आपके संज्ञान में भी लाया हूं.  ऐसे  ही कई पद खाली पड़े हैं. 74  में से सिर्फ 26 पद  खाली पड़े हैं.  शल्य चिकित्सक भी नहीं  हैं तीनों जगह.  यह  तो मैंने  सामुदायिक केंद्र की  स्थिति बताई है, अगर नीचे जायेंगे,  तो  उप स्वास्थ्य, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में , तो  वहां तो बिलकुल खाली है. कुत्ते घूमते हैं वहां पर,  उप स्वास्थ्य, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में. डॉक्टर भी नहीं है, न नर्स है,  कोई नहीं है. डॉक्‍टर भी नहीं है, ना ही नर्स है कोई भी नहीं है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार बिल्डिंग बनाने के बजाय, भूतों के बजाय डॉक्‍टर रखें, नर्स रखें, स्‍टॉफ रखें और लागों की सेवा हो तो हम उनका स्‍वागत करेंगे. अगर आपको सिर्फ बिल्डिंगें बनानी है और उसके नाम से लोन लेना हो तो हम लोग विरोध करेंगे. क्‍योंकि यह जनता का पैसा है. यह आपका अपना पैसा नहीं है. यही मैं कहना चाहता हूं. स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री बड़े गंभीर मंत्री हैं, बोलते कम हैं और मुस्‍कुराते ज्‍यादा हैं. उप-मुख्‍यमंत्री जी, अब मैं समझता हूं कि इन सब बातों को लेकर जो हमारे सदस्‍यों ने भी उठायी है. इन बातों को लेकर काम करेंगे, नहीं तो हम भाषण सुन लेंगे और चले जायेंगे. लेकिन प्रदेश की जनता को स्‍वास्‍थ्‍य लाभ मिलेगा. इस पर मैं समझता हूं कि माननीय मंत्री जी विश्‍वास दिलायेंगे. धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय- मंत्री जी, बिल्‍कुल फ्रेश दिख रहे हैं. वैसे सदस्‍यों को बोलते समय यह ध्‍यान रखना चाहिये कि जवाब देते समय तक मंत्री जी थके नहीं. यह हमारी भी जिम्‍मेवारी है.

          उप-मुख्‍यमंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा (श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछले साढ़े चार घण्‍टे से लगातार स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में बहुत ही सार्थक चर्चा हो रही है.

          नेता प्रतिपक्ष, माननीय उमंग सिंघार जी के सहित माननीया अर्चना चिटनीस जी, माननीय भंवर सिंह शेखावत जी, मा.राजेन्‍द्र मेश्राम जी, ओंकार सिंह मरकाम जी, मा. हरिशंकर खटीक जी, मा. मोहन सिंह राठौर जी, मा. संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल जी, मा. दिनेश जैन 'बोस' जी, मा. कैलाश कुशवाह जी, डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय जी, डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह जी, श्री विपिन जैन जी, डॉ. अभिलाष पाण्‍डे जी, विवेक विक्‍की पटेल जी, मा. गौरव पारधी जी, श्रीमती प्रियंया पैंची जी, श्री सुरेश राजे जी, श्री विजय रेवनाथ चौरे जी, ओमप्रकाश सखलेचा जी, प्रेमशंकर वर्मा जी, डॉ. योगेश पंडाग्रे जी, डॉ. हिरालाल अलावा जी, श्री भगवान दास सबनानी जी, श्री कमलेश्‍वर डोडियार जी ने अपने समर्थन में भी और कटौती प्रस्‍ताव में भी अपने-अपने विचार यहां पर प्रस्‍तुत किये हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय- माननीय शेखावत जी ने विपक्ष की ओर से चर्चा की शुरूआत की और उन्‍होंने वही सवाल उठाया, जिसका समापन नेता प्रतिपक्ष, उमंग सिंघार जी ने कहा कि डॉक्‍टर की कमी है और डॉक्‍टर नहीं हैं. लेकिन मुझे खुशी होती कि यदि आप उस समय उसके साथ ही साथ डॉक्‍टर कैसे होंगे, उसके लिये जो प्रयास हो रहे हैं, उसकी प्रशंसा भी करते.

                      माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि हमें डॉक्‍टर की उपलब्‍धता भी चाहिये तो हमें एमबीबीएस की सीटें बढ़ानी पडेंगी, पीजी की सीटें बढ़ानी पड़ेंगी. तभी तो हमें मेडिकल आफिसर्स और विशेषज्ञ मिलेंगे और किस तरीके से एमबीबीएस और पीजी की सीटें बढ़ी हैं, यदि आप इधर देखेंगे तो पिछले दो सालों में मात्र करीब एक हजार एमबीबीएस की सीटें बढ़ी हैं, (मेजों की थपथपाहट) ना ही सिर्फ मेडिकल कॉलेज बना उसमें नीट की परीक्षा के बाद, काउंसिलिंग के बाद उसमें एडमिशन भी हो गये और वहां पर फैकल्‍टी मेंबर्स कि जहां कमी हैं. वहां पर भी फैकल्‍टी मेंबर्स का भी लगातार रिक्रूटमेंट हो रहा है. कल ही हमारे विभाग ने आर्डर निकाला है कि 58 असिस्‍टेंट प्रोफेसर्स, प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर्स की पदस्‍थापना हुई है. पिछले दो वर्षों में यदि हम वर्ष 2003 से बतायेंगे तो बतायेंगे कि आप बीस साल पहले पहुंच गये. इसलिये वर्ष 2003 से नहीं बतायेंगे, वर्ष 2003 से बतायेंगे तो बहुत तकलीफ होगी. लेकिन दो साल में 2000 जो पीजी की सीटें थी वह 2800 हो गयी हैं. मतलब करीब 900 सीटें बढ़ी हैं. (मेजों की थपथपाहट) यह तो मेडिकल कॉलेज के स्‍टूडेंट्स की बात कर रहे हैं कि जो पीजी की सीटें बढ़ी और जितने मेडिकल कॉलेज हैं उसमें आपको मालूम है कि एनएमसी नार्म्‍स के हिसाब से हमको परमीशन मिलती है और जो असिसटेंट प्रोफेसर्स की आवश्‍यकता होती है उसी के बाद ही मिलती है. और लक्ष्य है प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का कि हमें आने वाले 2-3 वर्षों में पूरे देश में 75000 एमबीबीएस की सीटें पूरे देश में बढ़ानी हैं. (मेजों की थपथपाहट).. मध्यप्रदेश में कोई ऐसा लोकसभा क्षेत्र नहीं बचेगा जहां पर मेडिकल कालेज नहीं होगा. पीपीपी मोड में  मेडिकल कालेज का काम शुरू हो गया है. 19 मेडिकल कालेज बनकर तैयार हो गये हैं और आने वाले दिनों में 12 मेडिकल कालेज को और भी पीपीपी मोड में इनवेस्टर्स को आमंत्रित किया है, उसके टेण्डर जल्दी खुलने वाले हैं. इस प्रकार से मुझे याद है जब मैं ऊर्जा मंत्री था तो उस समय बिजली की कटौती एक बहुत बड़ा इश्यु था. जैसे आज हेल्थ सेक्टर में डॉक्टर की कमी एक इश्यु है. यही विधान सभा में ही ऊर्जा मंत्री के नाते मैंने कहा था कि 24 घंटे बिजली देंगे तो आप सारे विपक्ष में जो लोग थे वह खड़े हो गये, क्या बात कर रहे हैं, 24 घंटे बिजली असंभव है क्योंकि वर्ष 2003 के पहले आपकी सरकार रही, 10 वर्ष ऊर्जा के क्षेत्र में जो आपने काम किया था, आपको पूरा कांफिडेंस था अपने ऊपर और इसलिए आप कह रहे थे कि 24 घंटे बिजली आप कभी नहीं दे पाएंगे तो मैंने कहा था कि आपने सिस्टम को इतना बिगाड़ दिया, इतना कांफिडेंस? यदि हम 24 घंटा बिजली देने की बात कर रहे हैं तो वह पूरी नहीं हो पाएगी,  लेकिन उसके लिए जहां पर चाह होती है, वहां राह को निकलना पड़ता है. आज मध्यप्रदेश में यह कोई कहने का साहस नहीं कर सकता है  कि मध्यप्रदेश में बिजली कटौती होती है. बिजली का फाल्ट हो जाय वह अलग मेटर है.

         श्री दिनेश गुर्जर - मेंटीनेंस के नाम पर बिजली काट देते हैं.

         श्री राजेन्द्र शुक्ल - वह अलग मेटर है, मेंटीनेंस तो करना पड़ेगा.

         श्री उमाकांत शर्मा - आदरणीय दिग्विजय सिंह जी के समय की कटौती शुरू करवा दें क्या?

         अध्यक्ष महोदय - उमाकांत जी बैठो.

         श्री राजेन्द्र शुक्ल - यदि आप बोलोगे तो उमाकांत जी बोलेंगे
और यदि उमाकांत जी बोलेंगे तो जो विषय आपने उठाया है, उसके समाधान तक यह भाषण नहीं हो पाएगा.

         अध्यक्ष महोदय - दिनेश जी टेक्नीकल विषय पर मत बोला करो. हम लोग चम्बल वाले हैं तकनीक से क्या लेना-देना.

         श्री राजेन्द्र शुक्ल - अध्यक्ष महोदय, हर सेक्टर में हमें जनप्रतिनिधियों को बहुत जागरूकता के साथ अपनी भूमिका निर्वहन करने की जरूरत है. प्रायमरी हेल्थ केयर, सेकण्ड्री हेल्थ केयर, टर्सरी हेल्थ केयर ये तीन हिस्सों में पूरा हेल्थ का डिपार्टमेंट बंटा हुआ है. प्राइमरी हेल्थ केयर में सब हेल्थ सेंटर आता है पीएचसी आता है, हमारी मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक आती है, जिसको प्रधानमंत्री जी ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर का नाम दिया है. इस आयुष्मान आरोग्य मंदिर में कितने कार्यक्रम चल रहे हैं इसको समझना कम से कम हम जनप्रतिनिधियों को बहुत जरूरी है. क्या यह किसी को मालूम है कि निरोगी काया अभियान जब चला तो कितना काम हमारे देश में हुआ? स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान चला उसमें हमारे प्रदेश के अंदर क्या काम हुआ. कई पैरामीटर्स में मध्यप्रदेश को हिन्दुस्तान में नम्बर एक अवार्ड मिला है, क्योंकि आपने उस स्क्रीनिंग का क्योंकि इलाज तो बाद में होगा, जब हम बीमार पड़ जाएंगे तो इलाज होगा, लेकिन हम बीमार न पड़े इसके लिए समय पर हमारी सारी स्क्रीनिंग हो और सिर्फ सक्षम लोगों की स्क्रीनिंग नहीं, आम आदमी की स्क्रीनिंग हो सके. अभी नेता प्रतिपक्ष कह रहे थे कि गरीबों को दवाई महंगी मिल रही है. गरीबों को महंगी दवाई का सवाल ही नहीं उठता, गरीबों को तो निःशुल्क दवाई मिल रही है. (मजों की थपथपाहट) निःशुल्क जांच, निःशुल्क दवाई.

         श्री उमंग सिंघार - मंत्री जी, एक बार प्रदेश में गांव में दौरा कर आएं तो पता चल जाएगा कि वहां पर किस प्रकार की स्थिति है, आपके सिर्फ सरकारी अस्पताल के अलावा कहां मिल रही है, आम व्यक्ति को जब डॉक्टर प्रिस्क्रिपशन लिखता है तो उसको मेडिकल की दुकान पर जाना पड़ता है. कई हजारों रुपये देना पड़ते हैं.

         श्री राजेन्द्र शुक्ल - इसलिए मेरा यह कहना है कि जो गरीब लोग हैं जिनके लिए निःशुल्क स्क्रीनिंग का अभियान चलता है, उस स्क्रीनिंग के अभियान में हम सबको भी ज्यादा सक्रिय होकर उसमें एक जन जागरण का अभियान क्योंकि हमारे देश में अभी स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता उतनी नहीं आई है जितनी होना चाहिए क्योंकि कभी भी इस प्रकार के अभियान नहीं चले, लेकिन मोदी जी के नेतृत्व में स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो स्क्रीनिंग के अभियान चल रहे हैं. हम राइट टू हेल्थ जानते हैं, राइट टू एजुकेशन जानते हैं लेकिन राइट टू स्क्रीनिंग, देश का कोई भी व्यक्ति ऐसा न बचे, जिसकी बीपी की जांच न हो जाय, जिसकी डायबिटीज की जांच न हो जाय, जिसके फैटी लीवर की जांच न हो जाय. जिसकी ओरल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर की जांच न हो जाय और यदि समय रहते इसकी जांच हो जाएगी, यह बीमारी पकड़ में आ जाएगी तो फिर उसको ठीक करना बहुत कठिन नहीं है. यह बीमारी पकड़ में आ जाएगी, तो फिर उसको ठीक करना बहुत कठिन नहीं है. लेकिन जब इसका अभियान चलता है, तो उस समय हैल्‍थ वर्कर के साथ कन्‍धे से कन्‍धा मिलाकर हम अपना कितना योगदान देते हैं, वह हमारे लिए अपॉर्च्‍यूनिटी है क्‍योंकि वास्‍तव में जितने लोगों ने यहां पर सवाल उठाया है, पक्ष के लोगों ने जो काम हुआ है , सकी बात की और विपक्ष के लोगों ने सकारात्‍मक विपक्ष की भूमिका निभाते हुए, जो कमी है उसको हाइलाइट किया है. आपने भी कहा कि प्रयास किया जा रहा है लेकिन डॉक्‍टर्स कहां से आएंगे, तो मैंने यही कहा कि जब डिमांड और सप्‍लाई में अंतर होता है तो फिर स्‍वाभाविक है कि कमी रहती है. लेकिन यदि सप्‍लाई बढे़गी, जैसा कि माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी ने जो घोषणा की है कि हम 75 हजार एमबीबीएस की सीटें बढ़ाएंगे, तो यह सोच-समझकर किया है. ऐसे ही यह घोषणा नहीं हुई. मेडिकल कॉलेज ऐसे ही नहीं खोले जा रहे हैं और जब मेडिकल कॉलेज किसी ग्रामीण क्षेत्रों में जैसे श्‍योपुर, सिंगरौली में मेडिकल कॉलेज खुलता है तो पूरा का पूरा टर्शियरी केयर की फेसिलिटी वहां पर पहुंच जाती है. सारे विशेषज्ञ वहां पहुंच जाते हैं. यदि फैकल्‍टी मेंबर्स, टीचिंग हॉस्‍पिटल उनका खुद का है, तो वहां पर सारे मेडिकल कॉलेज में टर्शियरी की सुविधाएं शुरू होती हैं. यदि कोई जिला अस्‍पताल उससे अटैच है, तो जिला अस्‍पतालों में डॉक्‍टरों की कमी अपने आप ही दूर हो जाती है, जिस कमी को दूर करने की बात हम लोग कर रहे हैं, तो इसलिए एक बहुत बड़ा अभियान मध्‍यप्रदेश में शुरू हुआ है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो स्‍क्रीनिंग हुई है क्‍योंकि आधी जनसंख्‍या तो महिलाओं की है और उनमें हीमोग्‍लोबिन की बहुत बड़ी समस्‍या है. क्‍योंकि महिलाएं काम करती रहती हैं और वास्‍तव में तो जो किशोरी बालिकाएं हैं, उनकी समय से ही हीमोग्‍लोबिन की जांच होना शुरू हो जाना चाहिए. यह जो अभियान और कार्यक्रम चल रहे हैं, जिसमें किशोरी बालिकाएं हैं, गर्भवती माताएं हैं इसमें अन्‍य महिलाओं की हीमोग्‍लोबिन जांच होती है. इसमें आप देखेंगे, तो लगभग 50 लाख से 1 करोड़ जनसंख्‍या को कवर किया गया है, जिसमें यह जांचें की गई है और उन जांचों का यह असर हुआ है कि चाहे वह आयरन सुक्रोज हो या ब्‍लड ट्रांसफ्यूजन हो, जैसा कि माननीय अर्चना चिटनीस जी ने कहा एनीमिया को लेकर जो बात उठायी है उन्‍होंने जो फेरम एस्‍कॉर्बेट टेबलेट की बात कही है, मुझे यह बताते हुए प्रसन्‍नता है कि एनएचएम के पीआईपी में इस बार जो एनीमिया की दवाई देने में इस दवाई को इन्‍क्‍लूड कर लिया गया है और आने वाले दिनों में वह विटामिन-सी और उस प्रकार की दवाई की जो आवश्‍यकता है, वह उपलब्‍ध होने में कहीं किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं आएगी.(मेजों की थपथपाहट)

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि अभी सभी लोगों ने इस उपलब्‍धि को बताया है, यह उपलब्‍धि कोई छोटी उपलब्‍धि नहीं है. शिशु मृत्‍युदर 43 से 37 प्रतिशत हुई है और जो मातृ मृत्‍युदर है, वह 173 से घटकर 142 हुई है. लेकिन अभी भी हम नेशनल एवरेज से ऊपर हैं और यह जो सफलता हमको मिली है, इसका कारण यह है कि आशा वर्कर्स, एएनएम ने घर-घर जाकर गर्भवती माताओं का पंजीयन किया. पंजीयन के बाद उनका "एंटी-वाइटल" चेकअप समय से हुआ. तीन बार "एंटी-वाइटल" चेकअप होता है और उस चेकअप में यह समझ में आ जाता है कि कोई हाई रिस्‍क प्रेग्‍नेंट लेडी तो नहीं है. यदि उच्‍च जोखिम वाली कोई महिला है तो उसको घर भेजने के बजाय किसी न किसी हैल्‍थ सेंटर में पहुंचाने की आवश्‍यकता होती है. यह हमारी सरकार की योजना है कि जो प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्‍व योजना है, अब हम लोगों को यह भी मालूम होना चाहिए कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्‍व योजना क्‍या है. इसमें जो हाई रिस्‍क प्रेग्‍नेंट वुमन है, उनको हर महीने की 9 और 25 तारीख को कम्‍युनिटी हैल्‍थ सेंटर जो हमारे यहां 348 हैं, सिविल हॉस्‍पिटल में भले ही वहां पर कोई स्‍त्री रोग विशेषज्ञ हो या न हो, पीडियाट्रिशन हो या न हो, लेकिन वहां पर विदाउट फेल, जिले से कोई न कोई स्‍त्री रोग विशेषज्ञ जाती है. आशा वर्कर्स उन सारी महिलाओं को लाती है, उनका चेकअप होता है और यदि उनको आयरन की कमी है, तो आयरन की दवा दी जाती है. ब्‍लड ट्रांसफ्यूजन करना है, तो वह किया जाता है और यदि ऐसा लगता है कि वे अभी भी खतरे में हैं. तो उसको जिला अस्पताल में रिफर किया जाता है. जिला अस्पताल अथवा मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में ले जाकर के उनके जीवन को बचाने का काम किया जाता है. लेकिन यह बात भी देखने में आयी है कि एनटीनेटल चेकअप जैसे हम उनको मदर चाईल्ड कार्ड देते हैं उस घर के लोग ही उतने संवेदनशील नहीं हैं, जिस घर की वह महिला है. उनको एनटीनेटल चेकअप कौन से दिन कराना है जितना उनके परिवार अथवा गांव के लोगों को भी जागरूक होने की आवश्यकता है उसमें हमें और काम करने की आवश्यकता है. क्योंकि हमको इसको नेशनल एवरेज में ले जाना है मातृ मृत्यु दर को 42 से 80 ले जाना है तो हमें हेल्थ वर्कर्स को भी बराबरी के साथ काम करना पड़ेगा. वहां के जो जनप्रतिनिधि हैं उनको भी जागरूक रहना पड़ेगा तथा उनके परिवार के लोगों को भी संवेदनशील रहना पड़ेगा. ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी करने वाली माताएं बहने खेतों में काम करने वाली अंतिम समय में मैंने कहा कि एमएमआर सबसे ज्यादा डेथ कहां हो रही है तो आपको आश्चर्य होगा मेडिकल कॉलेज जहां पर टर्सरी केयर है, वहां पर डेथ रेट ज्यादा है. मैंने जब उनसे पूछा कि यहां पर डेथ रेट क्यों ज्यादा है ? तो उन्होंने बताया कि हमारे यहां बिल्कुल लास्ट स्टेज में महिलाएं आती हैं जब उनका हीमोग्लोबिन तीन अथवा चार हो जाता है. बचने की बहुत संभावनाएं होती हैं, इतना लेट करते हैं समय रहते पहुंचाने में जो देरी होती है. हालांकि उसमें बहुत कमी लायी है इसलिये मातृ मृत्यु दर एवं शिशु मृत्यु दर में इतनी गिरावट आयी है. हम सफलता की ओर आगे बढ़ रहे हैं. हमारा लक्ष्य है कि आदर्श पैरामीटर हेल्थ के जितने भी हमको प्राप्त करने हैं. हमारे यहां मध्यप्रदेश में प्रायमरी सेंटर है इसमें हमारा सबसे बड़ा योगदान है. सर्विस सेन्टर में आपने कहा कि डॉक्टर नहीं हैं. सर्विस सेन्टर में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर रहते हैं. उसमें सीनियर नर्सिंग ऑफिसर या बीएमएस के डॉक्टर होते हैं उसमें डॉक्टरों के पद नहीं हैं लेकिन एएनएम अथवा बाकी जो स्टॉफ है. आशा वर्कर के साथ समन्वय करके पांच हजार की जनसंख्या में घर घर जाकर वह जो प्रायमरी चेकअप या प्रायमरी कंसलटेशन है. वहीं पर टेली मिक्सिंग की भी सुविधा दी गई है. टेलीमिक्सिंग में मैं आपकी बात को मानता हूं कि इसमें और प्रचार करने की आवश्यकता है. माननीय नेता प्रतिपक्ष जी ने यह बात बहुत अच्छी कही है कि टेलीमिक्सिंग जहां पर विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है. वहां पर कोई ओपीडी में आता है उसको किसी प्रकार की बीमारी टेली मेडिसिन से उसका कंसलटेशन जिला अस्पताल के विशेषज्ञ से या मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ से किया जा सकता है तो इसका प्रचार होना चाहिये. आपके सुझाव को स्वीकार करते हुए उसका और प्रचार किया जा सकता है टेलीमिक्सिंग को और कितना स्पंदन किया जा सकता है और कितना डॉक्टरों को सेंसेटाईज किया जा सकता है जो जिला अस्पताल में बैठे हैं. लगभग 27 लाख पिछले वर्ष टेली कंसलटेशन टेलीमिक्सिंग की सुविधा कराने में हमने सफलता प्राप्त की है. जिस दिन लोगों में इसकी आदत पड़ जायेगी कि हमें सर्विस सेंटर में जाना है वहां पर डॉक्टर से टेलीमिक्सिंग के माध्यम से हमें अपना इलाज कराने में हमें कोई परेशानी नहीं है. यह वही देश है जहां पर यूपीआई से हमारे देश के गरीब तथा ठेले में सब्जी बेचने वाले, रिक्शा चलाने वाले कभी यूपीआई का उपयोग करेंगे, यह हम लोगों ने सोचा ही नहीं था. आज दुनिया में जब हमारी तारीफ होती है कि यूपीआई में सबसे ज्यादा यूज करने वाले यूजर्स हिन्दुस्तान में हैं. इससे लगता है कि हमारे देश के लोगों का दिमाग सबसे तेज है, लेकिन उनको दिशा की आवश्यकता है, जिस दिन टेली मिक्सिंग का उपयोग हमारे ग्रामीण सुदूर सर्विस सेंटर पीएसी में लोगों की आदत में आ जायेगा क्योंकि कभी संतोष नहीं होता है कि जब डॉक्टर नाड़ी पकड़कर के नहीं देखेगा, तब तक हमारी बीमारी दूर नहीं होगी. यह मानसिकता सुधारने में हम सफल होंगे तो टेलीमिक्सिंग उसी प्रकार से क्रांतिकारी टूल हमारे लिये होगा. लोगों को समय रहते सही कंसलेटेंट दे सकेगा और सही समय पर जहां पर उनको जाना है. सही समय पर वहां जा सकेंगे. बीमार अति बीमार गंभीर स्थिति में जब केस कोई रिफर होता है तो डेथ रेट बढ़ती है, फिर समस्या आती है. इसलिये प्रायमरी हेल्थ सेंटर प्रायमरी केयर में जो प्रवेन्टिवी है, क्योंकि एक ओर हमें प्रवेनशियन में काम करना है. दूसरी ओर हमको क्यूरेटिव में काम करना है ? आज किसी ने कभी सोचा था हमारे मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल होगा वहां पर किडनी ट्रांसप्लांट भी होने लगेगा. वहां पर बोनमेरो ट्रांसप्‍लांट, एंजीयोप्‍लास्‍टी, एंजीयोग्राफी भी होगी, बायपास सर्जरी, वाल्‍व रिप्‍लेसमेंट, रीवा जैसे इलाके में. रीवा में पिछले वर्ष 29-30 बायपास सर्जरी हुई है. दस लोगों की किडनी ट्रांसप्‍लांट हुआ है, एंजीयोप्‍लास्‍टी तो हजारों लोगों की हुई है. ये सुविधा की सफलता से अब मुख्‍यमंत्री जी ने यह निर्णय लिया है कि सीएम केयर योजना लांच करेंगे. इसमें हार्ट, कैंसर और आर्गन ट्रांसप्‍लांट, ये तीनों का, या तो हम शासन से कैपेक्‍स करेंगे, शासन से पदों की स्‍वीकृति करेंगे या पीपीपी मोड पर हम लोगों को आमंत्रित करके जितने भी मेडिकल कॉलेज है, सभी में बायपास सर्जरी, किडनी ट्रांसप्‍लांट, आर्गन ट्रांसप्‍लांट और आर्गन ट्रांसप्‍लांट में मध्‍यप्रदेश का नाम कहीं नहीं था. मुझे याद है कि रीवा के हमारे एक साथी के आर्गन ट्रांसप्‍लांट के लिए हमने तमिलनाडु के मंत्री से बात करके और उनके लीवर ट्रांसप्‍लांट के लिए उनकी सिफारिश की थी, जिनका एक महीने बाद नंबर लगा था, फिर उनको लीवर मिला और आज वे स्‍वस्‍थ होकर रीवा में घूम रहे हैं. तब से मुझे लगा कि हमारे प्रदेश में आर्गन ट्रांसप्‍लांट क्‍यों नहीं आगे बढ़ सकता. सारे लोग तमिलनाडु क्‍यों जा रहे हैं. मैंने देखा कि वहां पर आर्गन डोनर्स को बहुत प्रोत्‍साहित किया जाता है. अध्‍यक्ष जी, मैंने इस बारे में मुख्‍यमंत्री जी से चर्चा की, मैंने उनसे कहा कि यदि कोई ब्रेन डेड व्‍यक्ति है और उसके परिवार के लोग सहमत हो जाए, तो उसकी किडनी, हार्ट, लीवर को ट्रांसप्‍लांट करके हम बहुत लोगों की जिन्‍दगी बचा सकते हैं तो क्‍यों नहीं, हम उनको गार्ड ऑफ ऑनर्स (Guard of Honour) देकर उनको प्रोत्‍साहित करें. कम से कम लोग इस बात के लिए सहमत हो जाते हैं. कल हमारे परिजन जो अब बच नहीं सकता है, उसका Guard of Honour होगा और उनके परिजन जिन्‍होंने, सहमति दी उनको 15 अगस्‍त और 26 जनवरी के राष्‍ट्रीय पर्वों में बुलाकर उन्‍हें प्रशस्ति पत्र देंगे, उनका सम्‍मान करेंगे, फोटो खिंचेगी तो जब यह योजना लागू हुई अंगदान और देहदान वाली भी. देहदान तो पढ़ाई के उद्देश्‍य से उस बॉडी का उपयोग होता है, लेकिन अंगदान से लोगों का जीवन बचता है. मुझे बताते हुए प्रसन्‍नता है कि इस योजना को लांच करने के बाद लगभग 1700 लोगों ने आर्गन डोनेशन करने में अपनी सहमति जताई(..मेजों की थपथपाहट) इंदौर में तो एअर एंबुलेंस और आर्गन डोनरेशन की हमारी जो पालिसी है, उसकी एक हम लोगों ने इतनी आदर्श पिक्‍चर हमने देखी है कि जबलपुर में एक ब्रेन डेड व्‍यक्ति के लीवर और हार्ट की सहमति देने के बाद एअर एंबुलेंस के प्‍लेन से चौइथराम अस्‍पताल इंदौर का वहां पर हार्ट ले गए और एम्‍स भोपाल में लीवर लेकर आए और वह जो पूरी फिल्‍म दिखाई गई, तो ऐसा लग रहा था कि ये हकीकत नहीं फिल्‍म देख रहे हैं, जिसमें एंबुलेस के आर्गन को क्‍योंकि एक समय सीमा के अंदर रिट्रीव करने के बाद उसको ट्रांसप्‍लांट नहीं करते है तो वह आर्गन काम नहीं आता है. हैलीकाप्‍टर की पंखा भी चल रहा था, प्‍लेन भी खड़ा था, एंबुलेंस  से हार्ट लीवर उसमें रखा गया और ये पूरा वीडिया जो था वह मध्‍यप्रदेश में आर्गन रिट्रीव करना, आर्गन ट्रांसप्‍लांट करना एअर एंबुलेंस का सदुपयोग ये सारी चीजों को मिलाकर ये जो सफलता की कहानी थी उसने हमारे हौंसले को बढ़ाया है और आज आर्गन डोनेशन और आर्गन ट्रांसप्‍लांट  के मामले में मध्‍यप्रेदश तेजी से आगे आया है. इसलिए सीएम केयर योजना में भी मेडिकल कालेजों में हार्ट, कैंसर और ट्रामा और आर्गन ट्रांसप्‍लांट इसके लिए जो योजना आएगी, वह बहुत ही लाभदायक साबित होगी. इस प्रकार के कई निर्णय लिए गए हैं, जो आने वाले दिनों में लोगों को मदद करेगी और जेरियाट्रिक्‍स में भी जो वयोवद्धि हैं, 70 साल से ऊपर हैं उनके लिए योजना की जानकारी हम सभी को रहेगी तो योजना का क्रियान्‍वयन सिर्फ अधिकारियों की निगरानी में नहीं, बल्कि हम सभी की जानकारी में भी रहे, वृद्धजन स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल कार्यक्रम अंतर्गत वृद्धजनों हेतु 10 बिस्‍तरीय जेरियाट्रिक्‍स वार्ड माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सभी जिला अस्‍पतालों में सुरक्षित किये गये हैं  और होप (HOPE - Home Based Program for Elderly) योजना के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में अशक्‍त वृद्धजनों को घर पर स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं, नर्सिंग केयर प्रदान करने की योजना हमारी शुरू हुई है.

          अध्‍यक्ष महोदय, आयुष्‍मान वय वंदना योजना अंतर्गत आप सबको मालूम ही है कि 70 साल के ऊपर के जो हमारे बुजुर्ग हैं, क्‍योंकि आयुष्‍मान योजना ने वास्‍तव में स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में बहुत बड़ी क्रांति लाने का काम किया है, यह हमें स्‍वीकार करना पड़ेगा और हम लोगों ने इस बात को न तो मार्क किया था न किसी ने कल्‍पना की थी कि हमारे देश में ऐसी कोई हेल्‍थ सिक्‍योरिटी की कोई स्‍कीम आ सकती है, जो हमारे देश के 80 करोड़ लोगों को पांच लाख रूपये का मुफ्त में इलाज करने की सुविधा दे सकती है. प्रधानमंत्री जी की इस योजना ने वास्‍तव में हेल्‍थ सेक्‍टर को बहुत मजबूती प्रदान की है और प्रायवेट सेक्‍टर के अस्‍पताल भी बहुत तेजी से आये हैं और हमारे मध्‍यप्रदेश में ही 1800 अस्‍पताल इसमें इंपैनेल्‍ड हैं और जब से यह योजना लांच हुई है, आज तक मध्‍यप्रदेश में अकेले 13 हजार करोड़ रूपये का भुगतान अस्‍पतालों को गरीबों के इलाज के लिये हुआ है. अब इतने बडे़ सिस्‍टम में बातें हो सकती हैं, कोई शिकायतें आ सकती हैं, उसके लिये थर्ड पार्टी इंस्‍पेक्‍शन के सारे प्रोवीजंस हैं. भारत सरकार की कोई योजना होती है, उसमें मानिटरिंग बड़ी फुलप्रूफ और बड़ी क्‍लोज मानिटरिंग के अंतर्गत वह योजना चलती है, उसके बाद भी यदि कोई रिश्‍क लेता है और कोई बड़े गलत तरीके से कोई बिल सबमिट करता है या पास करता है, तो वह अपने रिश्‍क पर करता है और आज नहीं तो कल, कल नहीं तो परसों वह पकड़ में भी आ जाता है, लेकिन इस बात को हमें मानना ही पड़ेगा कि स्‍वास्‍थ्‍य की अधोसंरचना को मजबूत करने में आयुष्‍मान भारत योजना ने बहुत महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है. जब भी मैं किसी सरकारी अस्‍पताल में जाता हूं, जैसे रीवा में जब भी किडनी ट्रांसप्‍लांट या एंजियोप्‍लास्‍टी या बॉयपास सर्जरी या न्‍यूरो का गंभीर इलाज होता है, तो मैं जरूर एक बार देखने जाता हूं और मैं पूछता हूं कि यह दो हजार लोगों की एंजियोप्‍लास्‍टी हुई है, तो इसमें आयुष्‍मान वाले कितने है, तो मुझे बताते हुए संतोष है कि दो हजार यदि एंजियोप्‍लास्‍टी की रिपोर्ट डॉक्‍टर करते हैं, तो उसमें 1800 लोग आयुष्‍मान कार्ड धारियों की रिपोर्ट करते हैं ( मेजों की थपथपाहट)  तो कौन कहता है कि गरीबों का इलाज नहीं हो रहा है.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, जो आयुष्‍मान कार्ड है, जैसे  मध्‍यप्रदेश में मेरा छिंदवाड़ा जिला है, हम लोग नागपुर महाराष्‍ट्र यदि आयुष्‍मान के लिये रेफर करते हैं, तो वहां के अस्‍पताल उसे एक्‍सेप्‍ट नहीं करते हैं, तो ऐसी कोई व्‍यवस्‍था हो कि जो पैनल में है, तो वह उसको एक्‍सेप्‍ट करे और इलाज करवाये, वह वापस कर देते हैं, एक बार जब मरीज चला जाता है, तो वह उसको भर्ती करके फिर उससे पैसा लेने लगते हैं.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय बाल्‍मीक जी ने जो बात कही है इस पर हम लोग बात करेंगे कि इसका क्‍या रास्‍ता निकल सकता है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मुझे लगता है कि उसमें यह प्रावधान तो है कि दूसरी जगह अगर पेशेंट जायेगा तो उसको ट्रीटमेंट मिलेगा, कुछ न कुछ प्रॉब्‍लम हुई होगी, आप इनसे एक बार बात कर लेना.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, अदर स्‍टेट में दिक्‍कत जा रही है.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- उस पर्टिकुलर अस्‍पताल या उस राज्‍य में दिक्‍कत आ रही होगी.

          श्रीमती अर्चना चिटनिस -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी महाराष्‍ट्र में कुछ न कुछ समस्‍या है, उसमें आप और माननीय मुख्‍यमंत्री जी ही कुछ समाधान कर सकेंगे. 

          श्री योगेश पंडाग्रे -- अध्‍यक्ष महोदय, वहां पर आशा अस्‍पताल भी और श्‍योरटेक अस्‍पताल भी यह ले रहे हैं, तो हम लोग यहां पर एक लिस्‍ट बनाकर दे दें क्‍योंकि कुछ अस्‍पताल की इच्‍छा होती है लेने की और कुछ की नहीं होती है, तो हम उन अस्‍पतालों के नाम दे दें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है, बात आ गई है. जहां तकलीफ आ रही होगी, वह बात सोहनलाल जी ने कही है और यह माननीय मंत्री जी के ध्‍यान में आ गया है.

           श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- यह विभाग बहुत सेवा का विभाग है, जब मुझे माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने स्‍वास्‍थ्‍य विभाग संभालने का मौका दिया था, तो मुझे लगा कि यह जीवन को सार्थक करने वाला काम है, पीडि़त मानवता की सेवा है और जीवन को सफल करने वाला काम है (मेजों की थपथपाहट) और इसमें वह सारे काम, जो सारे प्रयास किये जा सकते हैं, वह होने चाहिए ओर इसके लिये सबसे बड़ी चुनौती जो आप सभी ने कहा है कि डॉक्‍टर्स और पैरामेडिकल स्‍टॉफ की कमी हमें हमेशा इस बात को सोचने के लिये मजबूर करती है कि इतना बड़ा इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर बन रहा है, सब हेल्‍थ सेंटर बन रहे हैं जो सवा करोड़ रूपये में बन रहे हैं, प्रायमरी हेल्‍थ सेंटर बन रहे हैं जो ढाई से तीन करोड़ में बनते हैं, कम्‍यूनिटी हेल्‍थ सेंटर 18 से 20 करोड़ में बनते हैं, जिला अस्‍पताल, मेडीकल कॉलेज, तो इसमें मैंने कहा कि जो गेप एनालिसिस होना चाहिए कि कितने पद हैं, कितने खाली हैं और आइ‍डली कितने पद होने चाहिए भारत सरकार के वर्ष 2012 के आई.पी.एच.एस. नॉर्म्‍स जो हैं, उस नॉर्म्‍स के हिसाब से कितने पद की रिक्‍वायरमेंट हैं. और उन पदों की मंजूरी कराने में भी हमने सफलता प्राप्‍त की है. चाहे वह विशेषज्ञ हों, चाहे वह मेडिकल ऑफीसर हों, चाहे वह नर्सिंग स्‍टॉफ हो, चाहे वह एएनएम हो, चाहे वह फार्मासिस्‍ट हों, चाहे वह लेब टेक्निशियन हों और उसमें जो गेप है वह सारे गेप की भरती की प्रक्रिया भी हमने शुरू कर दी है. कर्मचारी चयन मंडल में वह सारे प्रस्‍ताव चले गये हैं और पीएससी में विशेषज्ञों और  उनके प्रस्‍ताव चले गये हैं, लेकिन यह बात सही है कि यदि हजार पद मंजूर होते हैं तो ढाई सौ पद ही सीधी भरती के पद होते हैं, 750  पद पदोन्‍नति वाले पद होते हैं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत--  आदरणीय मंत्री जी आप स्‍मार्ट तो हैं ही, लेकिन आज लगा कि चतुर भी बहुत तगड़े हैं. क्‍या पतली गली से आपने रास्‍ता निकाला है. मैं प्रमुख दो बातें जानना चाहता हूं आपने बहुत अच्‍छा भाषण दिया, आपने बहुत सी बातों में समाधान की तरफ ले जाने का इशारा भी किया, लेकिन समस्‍या की जो मूल जड़ थी उसकी तरफ तो कोई इशारा आपका हुआ ही नहीं. मैंने आपसे निवेदन किया कि आप अपने कार्यकाल के दो साल में इतने बता दीजिये कि पहले हमारे पास इतने डॉक्‍टर थे, इन दो सालों में हमने इतने डॉक्‍टर उपलब्‍ध कराये. एएनएम और जितना भी आपका पैरामेडिकल स्‍टॉफ है कितने की आपने उपलब्धि कराकर, कितने की आपने भरती की, इतना तो बता दीजिये और क्‍यों हमारे डॉक्‍टर बनने के बाद में मध्‍यप्रदेश में नौकरी करना नहीं चाहते, लोग बाहर जाकर विदेशों में नौकरी कर रहे हैं, मध्‍यप्रदेश में नौकरी करते ही नहीं हैं. हम चाहे जितनी सीटें बढ़ा दें, इस समस्‍या के समाधान का कहां आपने उत्‍तर दिया.

          अध्‍यक्ष महोदय--  अभी मंत्री जी का भाषण पूरा नहीं हुआ भंवर सिंह जी. अभी आगे और समाधान होने वाला है. आप आराम से बैठिये.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल-- मैं उसी पर आ रहा था तो आपने बीच में ही टोक दिया. 4 हजार लोगों की भरती पिछले एक वर्ष में हम लोगों ने की है, लेकिन जो विशेषज्ञ हैं जो सबसे ज्‍यादा जरूरी है स्‍त्री रोग विशेषज्ञ हो गया, एनेस्‍थीसिया हो गया और हमारे बाल शिशु विशेषज्ञ, इनकी सबसे ज्‍यादा जरूरत पड़ती है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि हम किसी कम्‍युनिटी हेल्‍थ सेंटर को फर्स्‍ट रेफरल यूनिट बनाना चाहते हैं. वास्‍तव में आदर्श स्थिति तो यह है कि जो 348 कम्‍युनिटी हेल्‍थ सेंटर हैं वहां जितने पद हैं वह भर जायें, सारे विशेषज्ञ आ जायें और वहां पर 90 प्रतिशत लोगों का इलाज हो जाये और 10 प्रतिशत लोग ही रेफर होकर जिला अस्‍पतालों में जायें क्‍योंकि जिला अस्‍पतालों में जाने से हमारी समस्‍या और बढ़ती है क्‍योंकि वहां पर ओवर क्राउडेड हो जाता है, भीड़ बढ़ जाती है. वहां पर एक तरह से कम्‍युनिटी हेल्‍थ सेंटर से रेफरल केस जाने चाहिये और जिला अस्‍पताल से रेफरल केस जाने चा‍हिये मेडिकल कॉलेज में तो यह कम्‍युनिटी हेल्‍थ सेंटर में जो मैं बता रहा था कि इसके लिये जो विशेषज्ञ चाहिये, जिसके हमने 4 हजार पद मंजूर कराये, लेकिन सीधी भरती के मात्र 1300 पद थे, 1300 पद में जो सिलेक्‍शन हुआ वह 500 लोगों का हुआ और 500 लोगों में शायद 300 लोग ही ज्‍वाइन कर रहे हैं. आवश्‍यकता है जो आपने बताया कि 4 हजार की और मिल रहे हैं हमको 300 लोग, इसका मतलब क्‍या है. इसका मतलब यह है कि जो विशेषज्ञ हैं उनकी उपलब्‍धता कम है, उनकी उपलब्‍धता हमको बढ़ानी पड़ेगी. उपलब्‍धता कैसे बढ़ेगी कि मेडिकल कॉलेज में पीजी की सीटों को हमको बढ़ाना पड़ेगा तो मैंने आपको बताया कि पीजी की सीटें पिछले 2 सालों में हमने 1 हजार बढ़ाई हैं और एमबीबीएस की सीटें हमने 1 हजार बढ़ाई हैं इन दो सालों में और अभी यह ऐसा दौर है जैसे मैंने ऊर्जा विभाग का आपको बताया कि एक समय ऐसा था कि पूरे देश में बिजली का संकट था, बिजली का कलंक था, लेकिन एक दौर ऐसा आया कि बिजली सरप्‍लस हो गई और सभी राज्‍य बाजार ढूंढते हैं कि इतनी बिजली है कि बाकी दूसरे राज्‍य में हम बिजली बेचने का काम करें तो हेल्‍थ सेक्‍टर में भी जो कार्यक्रम बनाये गये हैं, एक दिन ऐसा आयेगा, ज्‍यादा दिन नहीं हैं जब यह सारे मेडिकल कॉलेज शुरू हो जायेंगे तो फिर डिमांड और सप्‍लाई का जो गेप है वह कम होगा, जितनी डिमांड है, उतनी ही सप्‍लाई होगी तो हमें विशेषज्ञ भी मिलेंगे, हमें डाक्‍टर भी मिलेंगे और हमारे पद सारे मंजूर हैं ही हम अपनी ओर से और भी कोशिश कर रहे हैं कि जब तक हमको यह विशेषज्ञ नहीं मिलते हम संविदा में कर सकते हैं, हम सीधी भरती की संख्‍या को कैसे और बढ़ा सकते हैं, हम प्रमोशन का कैसे कोई रास्‍ता निकाल सकते हैं. प्रमोशन का रास्‍ता तो निकाला गया था, लेकिन मामला सब-जुडिशियल है इसलिये मैं कुछ बोलना नहीं चाहता हूं और नहीं तो अभी हमनें 1300 विशेषज्ञों का विज्ञापन निकाला था नहीं तो हम 4 हजार विशेषज्ञों का विज्ञापन निकालते और प्रमोशन करके हम सारे पदों को भर सकते थे. यह कठिनाईयां भी हमको समझनी हैं और आप यह भरोसा कर सकते हैं कि यह प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी के प्रयोरिटी सेक्‍टर में हेल्‍थ सेक्‍टर है, क्‍योंकि अब देश आर्थिक रूप से इतना सक्षम हो चुका है माननीय अध्‍यक्ष महोदय कि अब इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर हम चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गये हैं. यदि इंफ्रास्ट्रक्चर का काम नहीं हुआ होता तो हमारे खजाने में इतना पैसा नहीं आ पाता और इसलिये जब भी कोई देश सक्षम हो जाता है तो हेल्थ एजुकेशन और एम्प्लायमेंट में ही काम होता है तो अब ऐसा दौर है हमारे देश के अंदर जब हेल्थ एजुकेशन और एम्पालयमेंट में काम हो रहे हैं. हमारे मुख्यमंत्री जी लगातार इंवेस्टर समिट करके रोजगार के अवसर बढ़े इसके लिये काम कर रहे हैं यह प्रायोरिटी सेक्टर है जितनी राशि की हमको आवश्यक्ता होती है हमें अपने बजट में से लेने में परेशानी नहीं होती. केन्द्र से भी एनएचएम के माध्यम से सेंट्रल स्पांसर्ड स्कीम के अंतर्गत 6-6 मेडिकल कालेज हमको मिले. अगले वर्ष आप देखियेगा बुधनी,छतरपुर और दमोह मेडिकल कालेज भी हम शुरू कर रहे हैं उसके आगे हम उज्जैन मण्डला और

 

 

5.31 बजे                             अध्यक्षीय घोषणा

                सदन के समय में वृद्धि  एवं चाय की व्यवस्था लॉबी में होने विषयक

          अध्यक्ष महोदय - आज की कार्य सूची के पद 6 के उप पद(3) में अंकित मांग संख्या पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाय. मैं समझता सदन इससे सहमत है.

                                                          सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.

          अध्यक्ष महोदय - सभी सदस्यों के लिये एक शुभ सूचना. चाय की व्यवस्था लॉबी में है. आराम से चाय ग्रहण कर सकते हैं.

          डॉ.हिरालाल अलावा - जो फेकल्टी की कमी है. मंत्री जी आपकी मंशा बहुत अच्छी है. सरकार अच्छा काम कर रही है. आपको धन्यवाद सीटें बढ़ाना है. मेडिकल कालेज खुल रहे हैं लेकिन जो फेकल्टी की कमी का ईशू है जो पुराने मेडिकल कालेज हैं वहां 30 परसेंट और नये में 90 परसेंट प्रोफेसर के पद खाली हैं. आप एनवायरमेंट क्रियेट कीजिये एक सबसे बड़ा उनका ईशू आ रहा है सेलरी वाला दूसरा उनकी सिक्युरिटी वाला सुपर स्पेशलिस्ट करने के बाद हम डेढ़ दो लाख दे रहे हैं वही प्रायवेट में 5 लाख वह कमा रहा है. सिक्युरिटी का एक ईशू है डाक्टर प्रोटेक्शन डाक्टरों की समस्या है कि हमको कोई भी अटेंडेंट मारकर चला जाता है तो यह एन्वायरमेंट आपको देना पड़ेगा. दो साल से उनको एनपीए नहीं मिल रहा है तो यह समस्या है.

          अध्यक्ष महोदय - पहले बात आ चुकी है आप डाक्टर हो मंत्री जी इंजीनियर हैं.

          डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह - मंत्री जी, एक अमरपाटन में भी एक मेडिकल कालेज की घोषणा कर दीजिये.

          श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाह"डब्बू"" - सतना के मेडिकल कालेज की सड़क तो बनवा दीजिये कम से कम लोग आना-जाना तो कर लें दूसरा आरक्षण के कारण भर्तियां रुकी हुई हैं उस आरक्षण को बहाल करावा दीजिये जो होल्ड है 13 परसेंट तो शायद इससे भी समाधान हो.

          श्री राजेन्द्र शुक्ल - इसमें विद्वान वकील काम कर रहे हैं जो भी निर्णय आता है न्यायालय में. जितने भी माननीय सदस्यों ने सुझाव दिये हैं सारे नोट हुए हैं क्योंकि सबका जवाब देना संभव नहीं है लेकिन हमारे अधिकारियों ने भी नोटकिया है और हमने भी नोट किया है. ज्यादातर जो बातें आई हैं उन्नयन की,सत्ता पक्ष के जो विधायक हैं सभी ने विभाग की उपलब्धियों को बढ़-चढ़कर बताया है लेकिन मैं समझता था कि लास्ट में उनके विधान सभा के हेल्थ सेंटर के उन्नयन का मुद्दा जरूर आयेगा तो वह सभी नोट हुए हैं. इसकी फिजिबिलिटी स्टडी..

          श्री सोहनलाल बाल्मीक - अध्यक्ष महोदय,

          अध्यक्ष महोदय - कृपया बैठें. इस तरह आप बीच में इंट्रप्ट करते रहे तो मंत्री जी का भाषण खत्म ही नहीं हो पाएगा.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक -अभी एक घटना घटी है 26 मासूम बच्चों की मृत्यु हुई है. अमानक दवाई यहां सप्लाई हुई है तो हमारे यहां लेबोरेटरी बढ़ाना चाहिये मेडिसिन टेस्ट की वह हैं नहीं कम हैं जिसके कारण दवाईयां टेस्ट नहीं हो पा रहीं चाहे वह प्रायवेट सेक्टर की हो चाहे गवर्नमेंट सेक्टर की हो यदि लैब बढ़ेंगी टेस्ट होगा तो दवाएं मार्केट में अमानक दवाईयां नहीं आ पाएंगी.

          श्री राजेन्द्र शुक्ल - उप स्वास्थ्य केन्द्र का उन्नयन होकर प्राथमिक होना,प्राथमिक को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बनाना,सिविल हास्पिटल बनाना सभी ने लगभग यह मांग की है. हमने गंभीरता के साथ उसका साध्यता परीक्षण कराया है और बेड आक्यूपेंसी रेश्यो,बीओआर और ओपीडी के आधार पर सक्षम जो हमारी समिति है वह सारे प्रस्तावों को ले जाती है और एक बड़ी संख्या में हम प्रस्ताव ले भी जा रहे हैं लेकिन उसमें जो मापदण्ड  हैं वह जब पूरे होते हैं तभी जाकर समिति से क्‍लियर होकर फिर कैबिनेट में जाता है. लेकिन उन्‍नयन करने के बाद, उन्‍नयन हम क्‍यों चाहते हैं, क्‍योंकि हमें बड़ा भवन का पैसा भी मिल जाएगा और पद ज्‍यादा मंजूर हो जाएंगे. ज्‍यादा पद होंगे तो ज्‍यादा डॉक्‍टर आएंगे. ज्‍यादा डॉक्‍टर और पैरामेडिकल स्‍टॉफ हमको मिल जाएगा. क्‍योंकि सीएचसी में यदि 41 लोगों के स्‍टॉफ का प्रोविजन है तो वहीं पीएचसी में 11 से 15 लोगों के स्‍टॉफ का प्रोविजन है. जब उन्‍नयन होता है तो उतने मैनपॉवर हमको मिल जाते हैं. लेकिन मैनपॉवर की उपलब्‍धता, जहां पर हमने उन्‍नयन कर दिया, वहां भी आप सवाल कर रहे हैं कि उन्‍नयन तो कर दिया, भवन बना दिया. डॉक्‍टर कहां हैं. तो डॉक्‍टर कैसे उपलब्‍ध हों, इसके लिए हम सबको गंभीरता के साथ विचार करना है और हमें विषय को समझना भी है कि डॉक्‍टर के न मिल पाने का जो यह फेज चल रहा है, यह फेज खत्‍म होगा और ऐसा फेज आएगा, जब डॉक्‍टर सरप्‍लस में रहेंगे. उनकी सैलेरी पर विचार करने की आवश्‍यकता है.

          अध्‍यक्ष महोदय, वास्‍तव में बहुत अच्‍छे सुझाव आए हैं. आपने जान-बूझकर शायद ये चार घंटे लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा विभाग को समय दिया है. जिससे कि सबकी बात आ जाए. आप सभी सदस्‍यगण जमीन से जुड़े हुए हैं, जनप्रतिनिधि हैं, लंबे समय से काम कर रहे हैं और सभी को यह मालूम है कि समस्‍या है तो उसका समाधान क्‍या हो सकता है. यदि समस्‍या का समाधान जिसके पास नहीं है, वह खुद ही एक समस्‍या है. (हंसी). हमारी सरकार के पास सारी समस्‍याओं का लेखा-जोखा है. जो कुछ कमी थी, वह आज आपने दे दी है और उसका सॉल्‍यूशन हमारे पास है. रोडमैप हमारा बना हुआ है.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी, पैरामैडिकल के छात्र हमेशा धरना प्रदर्शन करते रहते हैं. उनका समाधान नहीं मिलता है तो मैं आपके पास भेज दूंगा तो आप समाधान कर देना. नहीं तो फिर आपने जो बोला, वह ठीक है.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- शायद आप फार्मासिस्‍ट की बात कर रहे हैं. पैरामैडिकल की समस्‍या का समाधान भी कर दिया है. फार्मासिस्‍ट की समस्‍या का भी समाधान उनके पंजीयन को लेकर जो माड्यूल बनाया है, उसका भी समाधान हो गया है. नर्सिंग वाला आपने बता ही दिया है कि नर्सिंग में हाई कोर्ट और सीबीआई के बाद जितने नर्सिंग कालेजेस को मान्‍यता दी जा सकती थी, दे दिया है. वहां पर एडमिशन होकर और नर्सिंग के बच्‍चों की पढ़ाई प्रभावित न हो. इसके लिए जो जरूरी है, उन सारी चीजों की हम लोगों ने चिंता करके रास्‍ता निकालने का प्रयास किया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, काफी समय हो गया है. मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि ...

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने एक गंभीर विषय यहां पर उठाया था और मुझे उम्‍मीद थी कि कम से कम मंत्री जी अपने जवाब में यह कहेंगे कि उस पर हम विचार करेंगे. इतनी कोताही तो नहीं बरतनी चाहिए. सार्वभौमिक स्‍वास्‍थ्‍य, ये जो विधेयक मैंने सदन में प्रस्‍तुत किया हुआ है, यह आपके पास गया हुआ है. उस पर विचार कर लें.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय राजेन्‍द्र सिंह जी चाहते हैं कि आयुष्‍मान में शामिल हो जाएं.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- उसको आयुष्‍मान में शामिल कर दीजिए तो खर्चे में कमी आ जाएगी. उसको और आयुष्‍मान को आप जोड़ दीजिए.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- अब वह तो आपका विधेयक है, उस पर गुण-दोष के आधार पर विचार करेंगे.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- जी हां, कम से कम विचार करने का आश्‍वासन तो दे दीजिए. आपने जिक्र ही नहीं किया. मैंने आज कुछ और बोला ही नहीं. वही-वही मैं बोला.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- गुण-दोष के आधार पर विचार करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- वैसे मंत्री जी ने कहा कि बहुत ही उत्‍तम सुझाव आए हैं और उन सबको गंभीरता से लेंगे तो उसमें वह शामिल होगा ही ना.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- नहीं, नहीं, अध्‍यक्ष जी. ऐसी बात नहीं है. अध्‍यक्ष जी, अब इतना नादान तो मैं नहीं हूँ, जितना आप समझ रहे हैं. (हंसी)..

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- आपके दोनों सुझाव जो हैं, उन पर बहुत विचार करना पड़ेगा. एक तो आपने अमरपाटन में मेडिकल कॉलेज मांगा है. अभी पॉलिसी है कि हर लोकसभा में एक मेडिकल कॉलेज होगा. हर विधान सभा में नहीं होगा.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- यह तो चलते-चलते मांग लिया, मैंने जो पहले बोला था, वह मैन है.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- और जो दूसरा है वह मैंने आपको बताया था कि पूंजीगत खर्च के लिए, आपने कहा कि लोन लेकर इसको कर दें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप तो ऐसे ही बता दें, जरा पंच देकर. जैसे बिजली के मामले में दौर आया तो अब हेल्‍थ के मामले में भी दौर आएगा.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- अध्‍यक्ष महोदय, दौर आएगा. मेरे विभाग की अनुदान की मांगों के लिए मैं सदन के सभी सदस्‍यों से यह अनुरोध करता हूँ कि उसका समर्थन करें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मैं, पहले कटौती प्रस्‍तावों पर मत लूंगा.

          प्रश्‍न यह है कि मांग संख्‍या - 19 पर प्रस्‍तुत कटौती प्रस्‍ताव स्‍वीकृत किये जाएं.

                                                                                  कटौती प्रस्‍ताव अस्‍वीकृत हुए.

                   अब, मैं, मांग पर मत लूंगा.

 

 

                     

          अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न यह है कि 31 मार्च, 2027 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में राज्‍य की संचित निधि में से प्रस्‍तावित व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को - 

                     अनुदान संख्‍या   -  19              लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा के                                                                        लिए बाईस हजार तीन सौ बासठ करोड़,

                                                                 सात लाख, दस हजार रुपये

 

                                                तक की राशि दी जाय.

 

मांग का प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ. (मेजों की थपथपाहट)

 

 

5.41 बजे

अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

कार्यसूची के पद 6 अनुदान की मांगों पर मतदान के उपपद (2) व (3) की

मांग संख्‍याओं  को एक साथ चर्चा में लिये जाने विषयक्

          अध्‍यक्ष महोदय - आज मैंने कार्यसूची के पद 6 अनुदान की मांगों पर मतदान के उपपद (2) व (3) में उल्‍लेखित मांग संख्‍याओं को एक साथ चर्चा के लिए लिये जाने का निर्णय लिया है. मेरे द्वारा पुकारे जाने पर उक्‍त मांगों से संबंधित माननीय मंत्रीगण अपने-अपने प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करेंगे तथा सभा के माननीय सदस्‍य प्रस्‍तुत प्रस्‍तावों पर संयुक्‍त रूप से चर्चा करेंगे. मैं समझता हूँ कि सदन इससे सहमत है.

(सदन द्वारा सहमति व्‍यक्‍त की गई.)

 

 

 

5.42 बजे

                   (2)     मांग संख्‍या  - 27                 स्‍कूल शिक्षा

                             मांग संख्‍या  - 36                 परिवहन        

                   (3)     मांग संख्‍या  - 44                 उच्‍च शिक्षा

                             मांग संख्‍या  - 38                 आयुष

                             मांग संख्‍या  - 47       तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार

         

उच्‍च शिक्षा, आयुष एवं तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री (श्री इन्‍दर सिंह परमार) -

         

 

 

 

 

स्‍कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री (श्री उदय प्रताप सिंह) -

         

अध्‍यक्ष महोदय - अब इन मांगों पर कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत होंगे. कटौती प्रस्‍तावों की सूची पृथकत: वितरित की जा चुकी है. प्रस्‍तावक सदस्‍य का नाम पुकारे जाने पर जो माननीय सदस्‍य हाथ उठाकर कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किये जाने हेतु सहमति देंगे, उनके कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुए माने जायेंगे.

                   मांग संख्‍या  - 044                                   उच्‍च शिक्षा

                                                                                क्रमांक

          डॉ. हिरालाल अलावा                                                02

          श्री राजन मण्‍डलोई                                                  07                  

          श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव                                        08

          श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाह                                        09

 

 

 

                मांग संख्‍या  - 047                               तकनीकी शिक्षा कौशल

                                                                       विकास एवं रोजगार

                                                                                क्रमांक

          श्री विवेक (विक्‍की) पटेल                                           02

          डॉ. हिरालाल अलावा                                                04                  

          श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाह                                        06

 

                   मांग संख्‍या  - 027                                   स्‍कूल शिक्षा

                                                                                 क्रमांक

          श्री फूलसिंह बरैया                                                    01

          श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर                                       07                  

          डॉ. हिरालाल अलावा                                                08

          सुश्री रामश्री राजपूत (बहिन रामसिया भारती)                 11

          श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाह                                        17

          श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर                                       19        

          श्री उमंग सिंघार                                                      20

          श्री राजन मण्‍डलोई                                                  21

 

                    मांग संख्‍या  - 036                                  परिवहन

                                                                                 क्रमांक

          श्री राजन मण्‍डलोई                                                  01

          श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर                                       07

         

उपस्थित सदस्‍यों के कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुए.

          अब मांगों और कटौती प्रस्‍तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

                               

          अध्‍यक्ष महोदय-  मेरा एक अनुरोध पक्ष एवं विपक्ष दोनों के सदस्‍यों से है, उमंग जी प्रतिपक्ष के 16 सदस्‍यों के नाम चर्चा हेतु हैं और सत्‍तापक्ष के 21 सदस्‍यों के नाम हैं. मेरा आग्रह है कि इस संख्‍या को थोड़ा कम करें, कल भी चर्चा होगी. आज दोनों विभागों पर चर्चा होना है और मंत्रियों के जवाब भी आने हैं, इसलिए इस विषय में दोनों पक्ष चिंता करेंगे, तो ठीक रहेगा.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस (बुरहानपुर)-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मांग संख्‍या 27 स्‍कूल शिक्षा और 36 परिवहन के पक्ष में अपनी बात रखने के लिए उपस्थि‍त हुई हूं, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए धन्‍यवाद. हम सभी चाहे जन प्रतिनिधि के तौर पर, चाहे अधिकारी के तौर पर, पत्रकार मित्र साथी जो यहां उपस्थित हैं, हम सभी आज जो यहां उपस्थित हैं, अपने उन शिक्षकों के कारण, जिन्‍होंने हमें शिक्षित बनाया और इस योग्‍य बनाया कि हम अपने-अपने कर्त्‍तव्‍यों की पूर्ति कर सकें. मेरा मानना है कि शिक्षक वह है जो शिष्‍य के सामने का आकाश बड़ा कर दे, उसका फ़लक बढ़ा दे, इस देश में वह शिक्षक आज भी जिंदा है, वह इस देश के संस्‍कार में है, वह विद्यार्थी आज भी यहीं है, उसकी प्रतिष्‍ठा कुंठित नहीं हुई है. उसके प्रकाश का प्रमाण दूर-दूर तक मिलता है. माता जैसे 9 माह गर्भ में बच्‍चे को धारण करती है, वैसे गुरू अपने भीतर शिष्‍य को धारण करता है, उसे तब तक पढ़ाता और उसके पास जितना ज्ञान का रक्‍त है, उससे शिष्‍य को पोषित करता है और फिर उसे समाज को देता है, शिष्‍य को नया जन्‍म देकर, वह आशा करता है कि वह भी इसी प्रकार अपने रक्‍त से दूसरों का पोषण करेगा और अक्षर ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाता रहेगा.

05.47 बजे

{ सभापति महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय) पीठासीन हुए.}

 

          सभापति महोदय, अपने-अपने गुरूजनों के प्रति श्रद्धाभाव रखते हुए हम सब अपने जीवन को सार्थक करने के लिए अपने-अपने कर्त्‍तव्‍यों की पूर्ति कर रहे हैं.    अभी-अभी हमारे स्‍कूल शिक्षा मंत्री, राव उदय प्रताप जी ने बताया कि उन्‍हें रुपये 36 हजार 6 सौ 96 करोड़ के बजट की स्‍वीकृति इस वर्ष हुई है और गत वर्ष मैं जितना स्‍मरण करती हूं रुपये 31 हजार 7 सौ करोड़ के लगभग की स्‍वीकृति हुई थी. 7-8 प्रतिशत की यह अभिवृद्धि है और निश्चित तौर पर यह स्‍वागतयोग्‍य है.

            सभापति महोदय, अभी-अभी जब स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी बात कर रहे थे, वही बात यहां भी लागू होती है, हम सभी जन प्रतिनिधि, शासन की योजनाओं को, शासन द्वारा दी जा रही सुविधाओं को, अपने-अपने क्षेत्र में भली-भांति क्रियान्वित करने के लिए अपना योगदान दें. एक सकारात्‍मक सहयोगात्‍मक रवैये से काम करें तो निश्चित तौर पर हर योजना और उसका प्रत्‍येक पैसा धरातल तक पहुंचकर लोगों की सेवा में, जनसेवा में काम आयेगा.

          सभापति महोदय, मैं, मंत्री जी को इस बात की बधाई देती हूं कि आपने 1 अप्रैल, 2025 को राज्‍य में शाला प्रवेश उत्‍सव का कार्यक्रम रखा, उससे पूर्व मार्च में आपने सारी व्‍यवस्‍थाओं को चाक-चौबंद कर दिया और अच्‍छी बात यह है कि कक्षा 1 का कुल नामांकन पिछले वर्ष की तुलना में लभगभ 19.6 प्रतिशत अधिक रहा. इसके लिए आप बधाई के पात्र हैं, आपका विभाग बधाई का पात्र है. (मेजों की थपथपाहट)

          सभापति महोदय यह कुल नामांकन था, शासकीय और निजी विद्यालयों का. और शासकीय विद्यालयों में यह वृद्धि 32.4 प्रतिशत की दर्ज हुई जो अपने आपमें बहुत विशेष बात है. मैं भी स्‍कूल शिक्षा मंत्री रही हूं यह करना साधारण नहीं है. इसी प्रकार कक्षा नौवीं और बारहवीं में जो वृद्धि हुई वह भी उल्‍लेखनीय है. कक्षा नौवीं से बारहवीं में 4.25 प्रतिशत की वृद्धि हुई जो पिछले वर्षों में सर्वाधिक है. मंत्री जी और उनकी टीम इस बात में बधाई की पात्र है कि Dropout Rate  में उल्‍लेखनीय गिरावट ध्‍यान में आती है. वर्ष 2022-23 से वर्ष 2024-25 के बीच Dropout Rate 6.8 प्रतिशत से घटकर शून्‍य पर आ गया है. मतलब There is no Dropout Rate in class first. उच्‍च और प्राथमिक स्‍तर पर यह 10.6 प्रतिशत से घटकर 6.3 प्रतिशत पर आया है. इसी प्रकार secondary Dropout की दर 21.4 प्रतिशत से घटकर 16.8 प्रतिशत की रह गई है. माननीय मंत्री जी यह बात करते हुए निश्चित तौर पर सरकार के सालों का सतत् प्रयास का परिणाम इसमे दिखता है.

          सभापति महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी जब बात कर रहे थे. तब मैंने कहा था कि जितनी खराब स्थिति में स्‍वास्‍थ्‍य हमें मिला था, जैसा हमें ऊर्जा की स्थिति में जर्जर प्रदेश मिला था, स्‍कूल शिक्षा की स्थिति उससे कहीं बेहतर नहीं थी. जीरो बजट स्‍कूल संचालित थे. स्‍कूल था, लेकिन उसके नाम पर कोई बजट नहीं था, कोई टीचर नहीं था, कोई बिल्डिंग नहीं थी और आगे की भी कोई संभावना नहीं थी.

          सभापति महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि इतनी अच्‍छी दर संख्‍या है, आपने रिजल्‍ट में भी बड़ा सुधार किया है. हम सभी जनप्रतिनिधियों के ध्‍यान में आता होगा कि आज से दो, तीन साल पहले तक हम जाते थे तो विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में बच्‍चे गणवेश में, टोलियों में अपनी शालाओं में जाते हुए दिखते थे. गणवेश पहने हुए बच्‍चे हमें गावं में दिखते थे. कई बार तो स्‍कूल टाइम के बाद भी जब बच्‍चे खेलते रहते थे तो तब भी वह गणवेश में ही खेलते रहते थे. आपने जो भी विचार किया होगा, मुख्‍यमंत्री जी ने जो निर्णय किया होगा, मेरा आपसे आग्रहपूर्वक निवेदन है. मैंने माननीय मुख्‍यमंत्री जी की इस बात को, उनके कार्यक्रमों में कही गई बात को, एक से अधिक बार सुना भी है. मेरा आपसे आग्रह है कि यह जो राशि हम सीधे बच्‍चों के खातों में डाल रहे हैं उससे गणवेश नहीं लिये जा रहे हैं और हम धीरे-धीरे अपने विद्यालयों को गणवेश विहीन स्थिति में पाते जा रहे हैं. आप चाहे ग्‍लोबल टेंडर निकालें, व्‍यवस्‍था को कैसे पारदर्शी करें, गुणवत्‍ता को किस प्रकार आप मेंटेन करें किसी प्रकार का आप कोई मेनीपुलेशन या कोई खुर्द-वुर्द कोई राशि न हो इसको सुनिश्चित करें. व्‍यवस्‍था आप चाक चौबंद करें पर बच्‍चे स्‍कूलों में गणवेश पहनकर जाएं. उन्‍हें गणवेश मिले इसे सुनिश्चित करने का कष्‍ट आप माननीय मुख्‍यमंत्री जी के मार्गदर्शन में अवश्‍य करेंगे ऐसी मैं आपसे अपेक्षा करती हूं.

          माननीय सभापति महोदय,  मैं माननीय मंत्री जी को इस बात की भी बधाई दूंगी कि पेयजल की सुविधा की उपलब्‍धता 96.99 प्रतिशत से बढ़कर 99.52 प्रतिशत मतलब अब 0.48 प्रतिशत की कमी है. मैं समझती हूं आप 100 प्रतिशत तक इसको अचीव करने की स्थिति में होंगे. पेयजल की उपलब्‍धता विद्यालय में होना एक बहुत मानवीय और मार्मिक विषय है जिसको आपने पूरा किया है. एक प्रकार से हमारे प्रधानमंत्री जी हर घर नल और हर नल में जल की बात करते हैं. आपने हर स्कूल में नल और नल में जल को साकार करके दिखा दिया है. पुस्तकालयों की स्थिति भी 91.19 प्रतिशत से बढ़कर 99.94 प्रतिशत तक पहुंची है. यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है. बिजली की उपलब्धता जो कि 50 प्रतिशत के लगभग थी वह बढ़कर 92.81 प्रतिशत तक पहुंच गई है. इसी प्रकार रैंक आपने 98.60 स्कूलों तक पहुंचा दी है. पीएमश्री विद्यालयों में, 799 विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के घटकों को आप पहुंचा रहे हैं. बोर्ड की परीक्षा के परिणाम के बारे में मैंने पूर्व में भी कहा है. कक्षा दसवीं का परीक्षा परिणाम 87.52 प्रतिशत और बारहवीं का परिणाम 82.53 प्रतिशत रहा है जो कि 31 प्रतिशत और 19 प्रतिशत से क्रमश: बढ़ा है. पाठ्य पुस्तकों का वितरण समय पर हो सका उसके लिए आपने एसओपी का निर्धारण किया.

          माननीय सभापति जी को बताते हुए मुझे प्रसन्नता है कि यह जो लेपटॉप वाली योजना है. जब इसकी शुरुआत हुई तो किसी बजट से शुरुआत नहीं हुई थी. एक साल बारहवीं कक्षा का रिजल्ट 34 प्रतिशत रहा, मुझे कुछ ही महीने हुए थे शिक्षा मंत्री बने हुए. मुझे लगा कि कुछ करना होगा. माध्यमिक शिक्षा मंडल के पास बच्चों की फीस की राशि एकत्रित थी.  एक छोटा समय ऐसा था जब स्कूल शिक्षा विभाग की पीएस थीं वे हीं माध्यमिक शिक्षा मंडल की अध्यक्ष भी थीं. हमने मिलकर निर्णय किया कि बच्चों का पैसा है, बच्चों के काम आए. वित्त विभाग ने तो बाद में यह बजट लाइन प्रारंभ की थी. हमने माध्यमिक शिक्षा मंडल के पैसे से लेपटॉप की योजना बनाकर उसका वितरण प्रारंभ किया था. (मेजों की थपथपाहट) उसके प्रोत्साहन से हम देखते हैं कि स्कूल शिक्षा में हमें परिणाम में बेहतरी दिखती है. वे सामान्य परिवारों के बच्चे जिनके माता-पिता उन्हें लेपटॉप नहीं दिला सकते थे उन मेरिटोरियस बच्चों को लेपटॉप भी प्राप्त होता है.

          माननीय सभापति जी, 7890 विद्यार्थियों को स्कूटी से लाभांवित किया गया. साइकिल को लेकर भी मेरा मानना है कि मंत्री जी कोई न कोई ऐसी तरकीब लगाएं जिससे सच में बच्चों के पास राशि नहीं साइकिल हो. साइकिल पर पैडल मारता और हवा से बात करता हुआ बच्चा जब स्कूल जाता है उससे उसका कॉन्फीडेंस बढ़ता है. चाहे वो पहले साइकिल ले ले, उसके बाद आप पेमेंट करें पर कोई ऐसा तरीका बना दें ताकि सचमुच में बच्चों को साइकिल उपलब्ध हो सके.

          सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी आपके विभाग के कुल 24-25 एप हैं. शिक्षक एप, एम शिक्षा एप, शिक्षा मित्र एप, एमपी पोषण एप, पुस्तक वितरण एप, चाइल्ड ट्रेकिंग एप, एनआईएल एप, कर्मयोगी एप, एमपी टास्क एप, विमर्श एप बहुत सारे एप्स हैं. यह विषय शिक्षकों से ही मेरे पास आया है. इन एप्स में ओवरलेपिंग भी है. एक ही एक विषय बार-बार डालने में शिक्षकों का समय भी जाता है. शिक्षा और प्रशासनिक दृष्टि से क्वालिटी टाइम उसमें खराब होता है. आप कृपया इन एप्स को री-व्यू करके इनको एक या दो एप बनाकर सीमित करेंगे तो समय की बहुत बचत होगी.

          सभापति महोदय, मेरा आपके माध्यम से विधान सभा अध्यक्ष जी, माननीय मुख्यमंत्री जी और शिक्षा मंत्री जी से एक आग्रह है. धर्मपाल जी बहुत विद्वान व्यक्ति हुए हैं. वैसे वे गांधी जी से बहुत प्रभावित थे. उन्होंने गजेटियर से अध्ययन करके ही अंग्रेजों के आने के पूर्व की शिक्षा व्यवस्था का अध्ययन किया था और The Beautiful Tree पुस्तक छापी. उसमें यह पता लगा कि जब अंग्रेज भारत आए तब भारत में शिक्षा 95-96 प्रतिशत थी. भेदभाव नहीं था. हर वर्ग का बच्‍चा विद्यालय जाता था और कैसे उन्‍होंने हमारी शिक्षा व्‍यवस्‍था को ध्‍वस्‍त किया. मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि मध्‍यप्रदेश की विधान सभा के हर सदस्‍य को धर्मपाल जी की पुस्‍तक The Beautiful Tree आप अपनी ओर से दें. उस पर विधान सभा अध्‍यक्ष जी अपनी ओर से चर्चा रखें ताकि अनर्गल प्रलाप करने वाले, निराधार बात करने वाले, तथ्‍यहीन बात करने वाले, इस देश की मिट्टी से जुड़ाव को कमजोर करने वाली मानसिकता में वह स्‍पष्‍टता आए कि यह देश जिसका नाम भारत है कभी अंधकार में नहीं था कभी अशिक्षित नहीं था. यह और बात है कि आक्रान्‍ताओं के कारण कुछ काला समय हमने देखा और उबरकर आज फिर हम विश्‍व में अपना माथा गौरव से ऊपर उठाते हुए आगे बढ़ता हुआ देश हैं. मेरा माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि टेक्‍नोलॉजी का उपयोग होना चाहिए. Artificial Intelligence का उपयोग होना चाहिए. For any case science is a good servant but a bad master. ह्यूमन टच नहीं खत्‍म हो सकता. हमारे चेहरे के आगे आज भी शिक्षकों का चेहरा, उनकी बात, उनका प्रेम, उनकी फटकार हमें अब भी अपने जीवन में बहुत कुछ याद दिलाती है. जो मैंने आपसे निवेदन किया था कि शिक्षा देश के प्रति अनुराग पैदा करने वाली होनी चाहिए. कुछ साल पहले तक हम 7 जुलाई को सारे प्रदेश में अमर छलांग नाम से एक कार्यक्रम करते थे. तैराकी की प्रतियोगिता करते थे. हर जिले में तैराकी में जो बच्‍चा पहला या दूसरा आया, सारे प्रदेश के हर जिले के दो विद्यार्थियों को अण्‍डमान निकोबार एक बार पानी के जहाज मार्ग से फिर एक बार हवाई जहाज से सरकारी स्‍कूल के बच्‍चों को ले जाते थे ताकि बच्‍चे उस तीर्थ को देख सकें जहां इस देश को आजादी दिलाने के लिए लोग तिल-तिल कर जिए और मरे हैं. शिक्षा अगर देश प्रेम को अंदर डालने वाली नहीं होगी, इस मिट्टी से पागलों की तरह प्रेम करना नहीं सिखाएगी, तो ऐसी शिक्षा बहुत काम की भी हो सकती है और कभी-कभी समस्‍याओं को भी खड़ा कर सकती है.

          सभापति महोदय, कुछ दिन पूर्व मेरे जिले में कार्यक्रम हुआ बड़ी संख्‍या में लोग इकट्ठे हुए. सारी नकारात्‍मक बातें, तथ्‍यहीन बातें, हम सब जनप्रतिनिधि वहां उपस्थित थे कान तरस गए कि एक बार तो कोई भारत माता की जय बोल दे, कोई तो कह दे. भारत माता की जय न कहे तो जय हिन्‍द ही कह दे, किसी तरीके से इस देश के प्रति अपना रिश्‍ता बनाते हुए सबके बीच में बात हो. शिक्षा का काम इस दृष्टि से भी आप वह अमर छलांग जो वीर सावरकर जी के स्‍मरण में कॉम्पिटीशन होता था अगर आप उसका संचालन करेंगे तो 70 मील तक वह जहाज से कूदकर तैरते हुए गए और फ्रांस की जमीन पर पहुंचे वह ऐसी घटनाएं भी पता लगेंगी और स्‍पोर्ट्स के लिए भी उसमें अवसर मिलेगा.

          सभापति महोदय -- अर्चना जी, अब समाप्‍त करें काफी समय हो गया है.

          श्री अर्चना चिटनीस -- सभापति महोदय, मैं अपनी बात को पूरा करते हुए माननीय उच्‍च शिक्षा मंत्री जी, माननीय स्‍कूल शिक्षा मंत्री जी इन दोनों से आग्रह करूंगी कि बिल्डिंग बनाने वाले इंजीनियर को तो हम 4-5 साल पढ़ाते हैं, वह बिल्डिंग टूट भी गई तो फिर बन जाएगी लेकिन इंसान बनाने वाले माता-पिता को हम अपने बच्‍चों को एक अच्‍छे माता-पिता बनने की कोई न कोई औपचारिक, अनौपचारिक किसी न किसी प्रकार की ट्रेनिंग यूनिवर्सिटीज में चाहे चेयर स्‍थापित करें, चाहे गर्भ संस्‍कार का हम उन्‍हें कुछ रास्‍ता दिखाएं कि माता-पिता होना कितनी बड़ी कृपा है ईश्‍वर की और उस कृपा को पूरा करने के लिए हमारा अपना रोल क्‍या है. हमें हमारे माता-पिता ने दुनिया में लाकर अपना काम पूरा किया. एक कुशल माता-पिता किस प्रकार हों इसका संस्‍कार और शिक्षा भी शिक्षा का पार्ट एण्‍ड पार्सल हो. इसी बात के लिए आग्रह करते हुए आपने मुझे बोलने का अवसर दिया और मेरे अपने क्षेत्र के लिए जो विषय है वह मैं माननीय मंत्री जी से बात करके उनसे अलग से निवेदन कर लूंगी. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

            चौधरी सुजीत मेर सिंह(चौरई) -- माननीय सभापति महोदय,धन्यवाद. मै उच्च शिक्षा विभाग की मांग संख्या 044 के कटौती प्रस्ताव के समर्थन में और बजट के विरोध में अपनी बात रखना चाह रहा हूं.

          माननीय सभापति महोदय, मैं सदन का ध्यान मध्यप्रदेश के प्रस्तुत उच्च शिक्षा विभाग के बजट की ओर आकर्षित करना चाहता हूं. उच्च शिक्षा किसी भी राज्य के विकास का आधार होती है इसलिये इसके बजट का सही उपयोग महत्वपूर्ण होता है. उच्च शिक्षा विभाग का बजट, राज्य की नई पीढ़ी के भविष्य को मजबूत बनाने के लिये जो बजट है वह पर्याप्त और सक्षम होना चाहिये. पर्याप्त होना चाहिये और व्यवहारिक होना चाहिये. पर दुर्भाग्य की बात है कि इस बजट में कई गंभीर कमियां हमें दिखाई देती हैं जिन पर मैं सरकार की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं.

          माननीय सभापति महोदय, वर्ष 2026-27 में उच्च शिक्षा के लिये 4 हजार 246 करोड़ का बजट का प्रस्ताव रखा गया है जो कि कुल राज्य के बजट का 0.96 प्रतिशत है. वर्ष 2025-26 के प्राथमिक बजट में 4 हजार 344 करोड़ का बजट रखा गया था जो लगभग प्राथमिक बजट का 1 प्रतिशत था, यानि बजट और हिस्सेदारी दोनों में बहुत गिरावट दर्ज हुई है. एक प्रतिशत से घटाकर के 0.96 प्रतिशत बजट यह लगभग 100 करोड़ रूपये की कमी इस बजट में पिछले वर्ष की तुलना में की गई है. तो क्या इतनी कमी में हम यह मान सकते हैं कि हमारे प्रदेश के युवाओं के भविष्य के लिये क्या मजबूत होगी, हम सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहते हैं.

          माननीय सभापति महोदय, यह बजट स्पष्ट करता है कि उच्च शिक्षा अब हमारी सरकार की प्राथमिकता से बाहर होता जा रहा है, हमारी सरकार का ध्यान हमारे प्रदेश के युवाओं के प्रति बिल्कुल भी नहीं है. 2026 के साईबर डाटॉ के अनुसार पिछले वर्ष जो बजट उच्च शिक्षा विभाग का था लगभग 40 प्रतिशत राशि का उसमें उपयोग ही नहीं किया गया, तो यह दर्शाता है कि समस्या संसाधनों की नहीं है, बल्कि सरकार की उपयोग की इच्छा शक्ति की है कि 40 प्रतिशत बजट का उपयोग भी यह सरकार नहीं कर पाई.

          माननीय सभापति महोदय, पिछले दिसम्बर के सत्र में मेरा प्रश्न लगा था, प्रश्न क्रमांक 128 था उसमें उच्च शिक्षा विभाग की तरफ से यह जवाब दिया कि हमारे राज्य के 19 में से 15 कालेजों में 70 प्रतिशत से अधिक पद अभी भी खाली पड़े हुये हैं. कुछ तो ऐसे कालेज हैं जिसमें 100 प्रतिशत पद की रिक्तता है केवल गेस्ट फैकल्टी (अतिथि शिक्षक)  से काम चलाये जा रहे हैं, जब बजट घट रहा है, हमारे पास में खर्च अधूरा है, हम खर्चा पूरा कर नहीं पा रहे हैं. और स्टाफ भी हमारे पास में नहीं हो तो क्या इसका परिणाम यह नहीं होगा कि कहीं हम हमारे प्रदेश के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सकते है क्या, या हम उन्हें आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर सकते हैं क्या.

          माननीय सभापति महोदय, उच्च शिक्षा हमारे युवाओ की आकांक्षाओं का स्तंभ है, यदि इसमें बजट अधिक होगा तो निश्चित रूप से यह राज्य के भविष्य के लिये अच्छा होगा. यदि इसी प्रकार से बजट में हम कमी करते रहे तो निश्चित रूप से इसका दुष्परिणाम हमारे आगे आने वाली पीढियों को भुगतना पड़ेगा.

          माननीय सभापति महोदय, जैसा कि मैंने पहले ही कहा है कि प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों में,कालेजों में हजारों पद रिक्त पड़े हुये हैं. इस बजट में नई नियुक्तियों, गेस्ट फैकल्टी (अतिथि शिक्षक)  की निर्भरता को कैसे हम कम कर सकें या हम स्थायी नियुक्तियों पर पर्याप्त धन राशि के लिये यदि अलग से कोई निधि संचित करते हैं तो निश्चित रूप से यह एक अच्छी बात होगी ताकि गेस्ट फैकल्टी की निर्भरता हमारी कम हो सके.

          सभापति महोदय, विद्यार्थियों का अनुपात लगातार बढ़ता जा रहा है संख्या बढ़ती जा रही है और उस अनुपात में हमारा बजट बहुत अपूर्ण है. इसके साथ ही मैं एक उदाहरण देना चाहूंगा . मेरे चौरई विधानसभा क्षेत्र में नया कालेज खोल दिया गया पर न वहां कोई स्थाई है ही नहीं गेस्ट फैकल्टी से पूरा काम चल रहा है. लैब नहीं है, लायब्रेरी नहीं है, फर्नीचर की कमी है,  दूसरे कालेजों से फर्नीचर लेकर के एग्जाम कराये जाते हैं. पीने के पानी की वहां पर कोई व्यवस्था नहीं है. इधर उधर की ग्राम पंचायत से पानी के टेंकर लाकर के उतने सारे विद्यार्थियों को पानी पिलाया जा रहा है.

          माननीय सभापति महोदय, नये कालेज तो हम खोल रहे हैं, पर हम छात्र छात्राओं को कोई सुविधा प्रदान नहीं कर पा रहे हैं. और सरकार कहती है कि हम उच्च शिक्षा में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं.

          माननीय सभापति महोदय, इसके साथ ही मैं हमारे क्षेत्र की विशेष समस्याये हैं जो मैं आपके सामने रखना चाहता हूं जब हमारे मुख्यमंत्री जी पिछले सत्र में उच्च शिक्षा मंत्री थे तो मेरे क्षेत्र में दौरे पर गये हुये थे. मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के चांद में एक सरकारी कॉलेज में गये हुये थे. मेरे विधानसभा क्षेत्र में छिंदवाड़ा जिले की चौरई में तीन कालेज हैं, चौरई, चांद, और बिछुआ तीनों कालेजों के लिये मांग आई, पर माननीय मुख्य मंत्री जी ने सभी के लिये घोषणा कर दी. आज तक वह घोषणायें पूरी नहीं हुई हैं, हमारे उच्च शिक्षा मंत्री जी प्रमोशन पाकर के मुख्यमंत्री हो गये , पर हमारी जो समस्याये हैं वह आज भी यथावत हैं. आउट आफ टर्न उनका प्रमोशन हो गया मैं उच्च शिक्षा मंत्री जी के लिये भी यही शुभकामनाएं देता हूं कि  आप  भी इसी प्रकार से  इसी सरकार में आउट ऑफ   टर्न  होकर के  मुख्यमंत्री हो जायें , पर हमारी मांग आप  जरुर पूरी कर दें.  मेरी उच्च शिक्षा मंत्री जी से गुजारिश है, हमारे  क्षेत्र की समस्या यह है कि  छिंदवाड़ा यूनिवर्सिटी की घोषणा  बहुत पहले हो गई,  काम भी शुरु हो गया.  2-3 कमरों में यूनिवर्सिटी  चल रही है. आज  तक बिल्डिंग नहीं बनी हुई है.  बहुत बड़ी यूनिवर्सिटी है, पर  बिल्डिंग का वहां पर अभाव है.  साथ में  चौरई कालेज की मैंने बात की,  फर्नीचर का  अभाव है.  लैब नहीं है वहां पर.   पेयजल  की स्थिति  बहुत गंभीर है. टैंकर से पानी दिया जा रहा है.  इस पर  आप विशेष ध्यान दें.  चांद भी हमारा एक  बड़ा अच्छा कालेज है, वहां से  साइंस फैकल्टी और पीजी की कक्षायें यदि शुरु हो जाती हैं,  कोई रोजगारन्मुखी  वहां  पर और भी पाठ्यक्रम   लागू हो जाते हैं, तो यह  क्षेत्र के लिये बहुत अच्छा होगा.  एक बिछुआ  हमारा  ट्राइबल क्षेत्र है,  पर  बहुत अच्छा कालेज वहां संचालित  हो रहा है.  बहुत छात्र, छात्राएं वहां पर अध्ययनरत् हैं और  चूंकि ट्राइबल बेल्ट  है  वह पूरा,  बहुत अच्छी गतिविधियां वहां  पर होती हैं, एक ऑडिटोरियम वहां  पर हो जाये, तो निश्चित रुप से  वहां  बिछुआ कालेज के लिये  बहुत अच्छी बात होगी.  मैं  यही बात करके आपने    बोलने के लिये समय दिया बहुत बहुत धन्यवाद.

          सभापति महोदयथोड़ा समय की मर्यादा सभी सदस्य रखें, सभी माननीय सदस्यों से अनुरोध है, पक्ष और विपक्ष से.

          श्री हरिशंकर खटीक  (जतारा)सभापति महोदय, मैं  मांग संख्या 27,36,44,38,47 के समर्थन में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं.  शिक्षा  आज के जीवन में  पहले पूर्वजों  की तो बात अलग है,  लेकिन  आज के  युग में  शिक्षा  बहुत अनिवार्य है. शिक्षा के बिना  आदमी का जीना  भी बेकार है. अगर जो शिक्षित नहीं है,  समझ लो उसका जीना बेकार है.  हम म.प्र. के यशस्वी मुख्यमंत्री, डॉ. मोहन यादव जी को  और स्कूल शिक्षा, परिवहन मंत्री, राव  उदय प्रताप सिंह  जी को तथा  उच्च शिक्षा  मंत्री, श्री  इन्दर सिंह परमार जी को  सबको बहुत बहुत बधाई  और   उनके प्रति आभार व्यक्त करते हैं कि  बहुत अच्छा बजट  विभाग में  आपने  प्रावधान किया  और लगातार  दो वर्षों  में आपने  शिक्षा के क्षेत्र में   गुणात्मक  सुधार किया है.  हमारी सम्मानीय पूर्व मंत्री जी,  श्रीमती  अर्चना चिटनीस जी ने  बहुत अच्छा वक्तव्य  हम  सब लोगों के बीच में दिया. तो उस पर तो हम नहीं जाना चाहते,  लेकिन  हम तो यही बताना चाहते  हैं कि   शिक्षा के क्षेत्र में  जो नया सत्र चालू  होता है,  वह  1 अप्रैल से चालू होता है,  उसका जो लगातार प्रयास   शिक्षा विभाग के   शिक्षकों के माध्यम से  किया जाता है  और जो उनके पालक हैं,  बच्चों के माता पिता  हैं,  उनको जो समझाने का प्रयास  किया  जाता है कि  बच्चों   को प्रवेश हर हालत में  दिलवाना है. तो  बच्चों के जब शत प्रतिशत  प्रवेश होंगे,  तो  बच्चे शत प्रतिशत पढ़ेंगे.  यह सबसे बड़ा एक न्यू फाउण्डेशन  यहीं से तैयार होता है  शिक्षा विभाग के माध्यम से.  तो  शिक्षा  विभाग को हम बहुत बहुत धन्यवाद देते हैं. दूसरा शिक्षा का अधिकार उसके  माध्यम  से कोई भी बच्चा  शिक्षा के  प्रवेश से वंचित न हो.  अगर उसके पास दस्तावेज नहीं  है, तो    किसी भी प्रकार से  उसका एडमिशन  न रुके,  इसके लिये भी सरकार ने चिंता की है.  इसके  लिये हम मंत्री जी को बहुत बहुत  धन्यवाद देते हैं.  बाकी इसमें ड्राप आउट में भी बहुत कमी आई है.  जो  बच्चे  5वीं तक पढ़ने के बाद   बैठ जाते थे,  लेकिन अब वह लगातार छठवीं  में एडमिशन लेकर के पढ़ रहे हैं.   आठवीं के बाद नौवीं  में  एडमिशन लेकर के पढ़ रहे हैं.  ग्यारहवीं के बाद  वह  आगे और कालेज की भी   पढ़ाई बच्चे कर रहे हैं.  तो  शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक  सुधार  हुआ है.  इसका मुख्या कारण  यह  है कि पहले जब हम स्कूल में जाते थे,  तो स्कूल में बैठने की व्यवस्था  नहीं  थी, पर्याप्त स्कूल के भवन नहीं थे.  पीने के पानी की समस्या स्कूल  में रहती थी.  बच्चों के लिये पुस्तकालय  भी नहीं थे. स्कूलों में बिजली की व्यवस्था  भी नहीं थी  और दिव्यागों  की सुगमता को ध्यान में   रखते  हुए  रैम्प वगैरह नहीं बने थे. लेकिन आज यह व्यवस्था स्कूल  विभाग ने  बहुत अच्छी करने का काम  किया है. इसका एक मुख्य कारण है कि  पेयजल सुविधा जो स्कूलों में मात्र 96.99 प्रतिशत थी,  उसको बढ़कर के  अब 99.52  प्रतिशत हो गई है.  इसके साथ साथ पुस्तकालय जो 91.19  प्रतिशत थे, वह बढ़कर के  99.94 प्रतिशत हो गये हैं.  इसके साथ ही अगर बिजली की बात करें, तो  स्कूलों में मात्र 50.34 प्रतिशत  स्कूलों में बिजली थी. लेकिन अब बढ़कर के 92.81 प्रतिशत हो गयी है. दिव्‍यांगजनों के लिये अगर रेंप की बात करें पहले 78.52 प्रतिशत था, वह अब बढ़कर के 98.6 प्रतिशत हो गयी है.

          माननीय सभापति महोदय, यह इस सरकार का प्रयास है और लगातार सरकार प्रयास कर रही है और सरकार के उसी प्रयास से विद्यालयों को अगर आज हम देखें तो  विद्यालयों में अतिरिक्‍त कक्ष भी बन रहे हैं. बिल्डिंगें बहुत अच्‍छी बन रही है और बिल्डिंग अच्‍छी बनने के साथ-साथ हमारे देश के प्रधान मंत्री जी की जो सोच है कि हर व्‍यक्ति, हर बच्‍चा शिक्षित हो और हमारे मुख्‍यमंत्री जी की भी सोच है. उसके लिये भी हमारे पीएम श्री योजना के माध्‍यम से पूरे मध्‍यप्रदेश में 799 विद्यालयों में राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के माध्‍यम से विद्यालयों में लेब, कम्‍प्‍यूटर और सीबीएससी स्‍तर की पढ़ाई के लिये सरकार ने चिंता की है. इसमें केन्‍द्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालयों में जैसी पढ़ाई होती है, वैसी पढ़ाई का काम इसमें किया जा रहा है. एक और योजना के माध्‍यम से अगर हम आपको बतायें कि सरकार का प्रयास हो रहा है वर्ष 2024 से. एक परख राष्‍ट्रीय सर्वेक्षण नीति है. उसके अंतर्गत जो प्रतिभाशाली बच्‍चे हैं उनका परीक्षण कराया जाता है, उनका कम्‍प्‍यूटर होता है. हम माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहते हैं कि राष्‍ट्रीय सर्वेक्षण में कक्षा-तीन में मध्‍यप्रदेश के छात्रों का प्रदर्शन देश में आठवें स्‍थान पर रहा है. यह एक एतिहासिक काम हमारी सरकार ने किया है. इसमें बच्‍चे के समग्र विकास के लिये ज्ञान का प्रदर्शन किया जाता है, मूल्‍यांकन समीक्षा और विश्‍लेषण भी किया जाता है. राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के तहत एनसीईआरटी के वर्ष 2023 में स्‍थापित एक साथ मूल्‍यांकन के लिये मानक निर्धारिण करने का काम किया जाता है

          सभापति महोदय, बोर्ड परीक्षा का परिणाम, हमारी सम्‍माननीय पूर्व मंत्री जी ने आपके बीच में बता दिया है. इसके साथ-साथ अगर हम आपसे बात करें तो जो बच्‍चे हैं, पहले बच्‍चों को लेपटॉप नहीं मिलते थे. जो प्रतिभाशाली बच्‍चे हैं उनका मनोबल भी बढ़ना चाहिये. हमारे जो प्रतिभाशाली बच्‍चे हैं उनको हम आगे कैसे बढ़ा सकें, उनको और आगे कैसे ले जायें, इसके लिये सरकार ने चिंता की और जो प्रतिभाशाली बच्‍चे हैं उनको एक सम्‍मान के तौर पर हमारी सरकार ने एक लेपटॉप देने का काम किया है.

          सभापति महोदय- हरिशंकर जी, अब क्षेत्र की प्रमुख बात हो तो वह आप रख दें. अभी बहुत सारे सदस्‍यों को बोलना है. सभी सहयोग करें,  आप अपने क्षेत्र की कोई उल्‍लेखनीय बात हो तो रख दें.

          श्री हरिशंकर खटीक- सभापति महोदय, हमारी सरकार ने बच्‍चों को लेपटॉप और स्‍कूटी प्रदान की है, उससे भी बच्‍चों का आगे पढ़ने में मनोबल बढ़ा है. अगर हम सीएम राईज़ स्‍कूल की बात करें, जो आज सांदिपनी स्‍कूल हैं वह पूरे मध्‍यप्रदेश में बन रहे हैं. हम उसके लिये धन्‍यवाद देना चाहते हैं स्‍कूल शिक्षा मंत्री जी को और हमारी सरकार को. जो सांदिपनी स्‍कूल बन रहे हैं तो ऐसा लगता है कि महल खड़े हों. हमारे यहां जतारा विधान सभा क्षेत्र में जो सीएम राईज़ स्‍कूल बना तो उसको देखने-देखने के लिये लोग गांव-गांव से जाते हैं कि हां यह स्‍कूल बना है. वास्‍तव में बहुत अच्छा स्‍कूल बना है और उसकी जो ड्राइंग, डिजाईन है वह महल के समान हैं. अब बच्‍चे जब महल में जाकर पढ़ेंगे तो उनका मनोबल और ज्‍यादा बढ़ेगा. टीचर भी प्रशिक्षित होकर के सांदिपनी स्‍कूल में पहुंच रहे हैं. इस बार से सांदिपनी स्‍कूल में प्रवेश होगा तो हम माननीय मंत्री जी से अनुरोध करेंगे कि लोकापर्ण करने के लिये हमारे माननीय मंत्री जी स्‍वयं आयें. यह हमारा विनम्र अनुरोध है. दूसरा एक यह कि हमारे यहां जो एक लिधोरा स्‍कूल है, वह किले में वर्षों से संचालित हा रहा है. माननीय मंत्री जी से हमने अनुरोध किया था कि लिधोराखास और बम्‍होरीकला के दो स्‍कूल सांदिपनी स्‍कूल किये जाये यह हमारा अनुदोध है. बाकि परिवहन की बात भी बहुत करना थी. मैंने जो बात कही है वह बजट में ले ली जाये. धन्‍यवाद

          सभापति महोदय- आप मंत्री जी को लिखित में दे दीजियेगा. मेरा सभी सदस्‍यों से निवेदन है कि कृपया सहयोगात्‍मक रहें. कम शब्‍दों में सम्‍पूर्ण बात रखें. गागर में सागर करें. श्री राजन मण्‍डलोई जी.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस- माननीय सभापति महोदय, मैं सिर्फ एक बात कहना चाहती हूं कि - '' अन्‍न ग्रहण करने से पहले, विचार मन में करना है, किस हेतु से शरीर का, रक्षण पोषण करना है.

           है परमेश्‍वर एक प्रार्थना

          नित्‍य तुम्‍हारे चरणों में,

          लग जाये तन-मन-धन मेरा,

           मातृ भूमि की सेवा में.''

          धन्‍यवाद

          श्री राजन मण्‍डलोई (बड़वानी)- माननीय सभा‍पति महोदय, मैं मांग संख्‍या- 27 और मांग संख्‍या-36 के कटौती प्रस्‍ताव के समर्थन में बोलना चाहता हूं.

          माननीय सभापति महोदय, जो शिक्षा के अधिनियम-9 के अनुसार प्राथमिक स्‍तर पर पहली से पांचवीं तक छात्र, शिक्षक अनुपात 30 होना चाहिये. 30 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिये और माध्‍यमिक स्‍तर पर 35 पर एक शिक्षक होना चाहिये और हायर सेकेण्‍डरी में 30 छात्रों पर एक शिक्षक और सामाजिक आर्थिक रूप से वंचित क्षेत्रों में 25 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए. उपमुख्यमंत्री जी ने बजट भाषण के बिन्दु 54 में यह कहा था कि स्कूली शिक्षा में 15000 शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रियाधीन है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 62000 से अधिक स्कूलों में 3 लाख के मुकाबले मात्र 2 लाख से भी कम शिक्षक हैं. जबकि विधान सभा में दिनांक 19 फरवरी, 2026 के प्रश्न क्रमांक 2699 के उत्तर में भी बताया गया है कि 115678 पद रिक्त हैं, इतने पद रिक्त होने पर मात्र 15000 शिक्षकों की नियुक्ति करने की बात किया जाना एक हास्यास्पद है. कैसे उम्मीद करें कि बच्चों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल जाएगी? सीएजी की रिपोर्ट में भी यह तथ्य सामने आया कि 1895 स्कूल में एक भी शिक्षक नहीं है. 80000 से अधिक स्कूलों में अतिथि शिक्षक शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं और माननीय महोदय अतिथि शिक्षकों के भरोसे स्कूल चल रहा है और अतिथि शिक्षकों का जो मानदेय है, वह भी उनको समय पर नहीं मिल रहा है. साथ में उपलब्ध शिक्षकों में 22 प्रतिशत से अधिक शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के बजाय दूसरे सरकारी काम करने में लगे हैं जैसे चुनाव में, बीएलओ बने हुए हैं, एसआईआर के काम में और अन्य शासकीय कार्य में, और साथ में शिक्षकों को मिड डे मील बनाने में भी लगे रहना पड़ता है और दूसरे कागजी खानपूर्ति में भी उनका समय व्यतीत हो जाता है तो हम कैसे उम्मीद करें नौनिहालों को, प्राथमिक और मिडिल के बच्चों को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे सकते हैं. जब इतने अधिक संख्या में प्रदेश में शिक्षकों की भारी कमी है. अब बात करें स्कूलों की. स्कूलों की क्या स्थिति है? स्कूल जीर्णशीर्ण अवस्था में हैं. स्कूलों की छतों में पानी टपक रहा है. एक प्रश्न क्रमांक 2699 में यह भी जानकारी दी है कि  5735 विद्यालय जीर्णशीर्ण हैं. 2000 से अधिक विद्यालयों में छात्राओं के लिए शौचालय ही नहीं हैं.

          सभापति महोदय - अपने क्षेत्रीय प्रमुख प्राथमिकताओं के बिन्दुओं को ले लें ताकि रिकॉर्ड में आ जाएगा.

          श्री राजन मण्डलोई - सभापति महोदय, मेरा कहना है कि स्कूलों में जब बिजली पानी की व्यवस्था नहीं है, टायलेट की व्यवस्था नहीं है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है कि कन्याओं के लिए प्रत्येक स्कूल में टायलेट और सैनिटरी पेड होना अनिवार्य है. मेरे क्षेत्र की बात करूं तो मैं बड़वानी विधान सभा से आता हूं जहां मेरा पार्टी विकास खण्ड जो पूरी तरह से ट्राइबल है, वहां पर आन रिकार्ड 13 स्कूलें झोपड़ों में संचालित हो रही हैं, तबेलों में संचालित हो रही हैं . स्कूल भवन नहीं हैं और जो स्कूलें हैं अधिकांश स्कूल जर्जर हैं और बरसात के दिनों में छत टपकती है और बरसात के दिनों में अघोषित स्कूलों की छुट्टी हो जाती है क्योंकि ऐसी स्थिति में शिक्षक बच्चों को कैसे पढ़ाएं? स्कूल प्रबंधन समिति का गठन हुआ. शाला प्रबंधन समिति के माध्यम से रंगाई पुताई होना चाहिए, लेकिन जो रंगाई पुताई के मेंटीनेंस का पैसा आता है वह कहां चला जाता है, स्कूल में मरम्मत में वह लगता ही नहीं है. इस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता है.

          सभापति महोदय, अब ड्राप आउट रेट की बात करें तो अन्य जगहों की बात करें तो रिकार्ड बहुत लम्बा है. लेकिन मैं बड़वानी जिले की बात करूं. मेरे बड़वानी जिले में भी 21000 छात्रों ने स्कूल छोड़ दिया है और वह 5वें नम्बर पर है. यह गंभीर बात है कि 12वीं तक आते आते बच्चे मात्र 20 प्रतिशत रह जाते हैं 80 प्रतिशत छात्र ड्राप आउट हो जाते हैं. एक लेटर का हवाला मैं जरूर देना चाहूंगा कि संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा संचालक अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान भोपाल को दिनांक 4.9.2025 को एक स्मरण पत्र भेजा गया कि कक्षा पहली से बारहवीं तक नामांकन में आ रही गिरावट के संबंध में रिसर्च स्टडी करने का अनुरोध किया. इस संबंध में आपको प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आवश्यक निर्देश की जानकारी दी जा चुकी है परन्तु आज दिनांक तक कोई भी कार्य योजना प्रस्तुत नहीं की गई है. यह एक महत्वपूर्ण कार्य है और प्राथमिकता के आधार पर किया जाना है. नामांकन में आ रही गिरावट को लेकर सरकार द्वारा कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर रहे हैं. अभी तक उसकी बैठक भी नहीं हुई है. इस पर स्टडी नहीं की गई है रिसर्च नहीं किया जा रहा है. शिक्षा के अधिकार के अंतर्गत जो अधिनियम की बात करते हैं इसमें 6 से 14 वर्ष के बच्चों को अनिवार्य और निःशुल्क शिक्षा की बात है, प्राइवेट स्कूलों में भी कुछ बच्चों के लिए 25 परसेंट आरक्षित करने का है लेकिन प्राइवेट स्कूलों में यदि बच्चे जाते हैं तो उनकी स्कूल ड्रेस, उनकी जो नियत पुस्तकें हैं नियत स्थान से ड्रेस खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है. स्कूल बस के लिए भी बाध्य किया जाता है, ऐसी स्थिति में बच्चे वहां पढ़ नहीं पाते हैं और खास कर हम आदिवासी क्षेत्र की बात करें तो जो हमारे बड़वानी जिले का अंचल क्षेत्र है, वहां पर्याप्‍त स्‍कूल नहीं हैं. आवागमन के साधन नहीं हैं और जंगली-जानवरों का भी डर बना रहता है. हमारे क्षेत्र में स्‍कूलों की भारी कमी है. जैसा कि मैंने बताया कि 13 स्‍कूल हैं जो झोपड़ी में संचालित होते हैं, तो वहां अतिरिक्‍त स्‍कूल खुलने चाहिए. मैं मानता हॅूं कि सांदीपनि स्‍कूल के माध्‍यम से 1 किलीमीटर के दायरे में प्राथमिक, माध्‍यमिक स्‍कूल लाकर यदि वहां अच्‍छी सुविधा दी जाएगी, तो बहुत अच्‍छा रहेगा. लेकिन जो पहाड़ी क्षेत्र हैं जहां आने-जाने के साधन नहीं हैं. वहां गरीब-अनपढ़ व्‍यक्‍ति रहते हैं, वे मजदूरी के लिए बाहर पलायन कर जाते हैं. उनके बच्‍चों की शिक्षा-दीक्षा के लिए यह जरूरी है और हमारे पहाड़ी क्षेत्र में अच्‍छी और गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा देना चाहते हैं, तो आदिवासी क्षेत्र के अंदर आश्रम शालाएं और छात्रावास अधिक से अधिक खोले जाएं. तब ही छात्र वहां पढ़ पाएंगे, क्‍योंकि उनके परिजन अनपढ़-निरक्षर हैं. वे बच्‍चों को पढ़ाने में भी सक्षम नहीं हैं और न ही स्‍कूल भेजने के लिए तैयार हैं. इस स्‍थिति में जब तक उनको आश्रम शालाओं की सुविधा और छात्रावास की सुविधा देंगे, तो आदिवासी बच्‍चों में शिक्षा की दर बढे़गी.

          सभापति महोदय -- आप अपनी बात 1 मिनट में पूरी करें. भूमिका न बनाएं. मैंने आपसे कहा है कि क्षेत्र की मुख्‍य बात 1, 2, 3 कर दें. इतनी भूमिका में न जाएं. समय बचाएं.

          श्री राजन मण्‍डलोई -- सभापति महोदय, मैं स्‍कूल के संबंध में भी मांग करना चाहता हॅूं कि हमारे बड़वानी जिला मुख्‍यालय पर 2 हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल बरसों पुराने हैं. 1 गर्ल्‍स हायर सेकेण्‍डरी है. हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल नंबर 1 को उत्‍कृष्‍ट शाला में तब्‍दील कर दिया गया है और नंबर 2 बची है और गर्ल्‍स हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल भी एक ही है, तो उन स्‍कूलों में बच्‍चों का अतिरिक्‍त भार है. स्‍कूल नहीं होने से बच्‍चों का वहां एडमीशन नहीं हो पाता है. स्‍कूलों में अत्‍यधिक लोड भी है. हम इसके लिए प्राचार्य से बार-बार बात करते हैं तो वे कहते हैं कि हमारे पास पर्याप्‍त सीट ही नहीं है, बैठने के लिए स्‍थान ही नहीं है तो हम बच्‍चों को कैसे एडमीशन दें. जिससे मजबूरी में लोगों को प्राइवेट स्‍कूलों में जाना पड़ता है. मेरा यह निवेदन है कि बड़वानी जिले के अंदर एक बॉयस हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल और एक गर्ल्‍स हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल की अनुमति दी जानी चाहिए.

          सभापति महोदय, साथ में मिडिल स्‍कूल का उन्‍नयन करके हाईस्‍कूल बना दिया है. लेकिन वहां मिडिल स्‍कूल की बिल्‍डिंग इतनी छोटी है कि हाईस्‍कूल के जितने बच्‍चे हैं, वे पढ़ नहीं पाते हैं. वहां 2-2 शिफ्ट में बच्‍चों को पढ़ाया जा रहा है. कई बच्‍चों को पढ़ाने की बजाय गेम्‍स में लगा देते हैं, तो ऐसी स्‍थितियां हैं. मेरा निवेदन है कि उन शालाओं का उन्‍नयन भी करना चाहिए. हमारे गंदावल, सिलावद, मिनीमाता आदि क्षेत्रों में भी ऐसी ही स्‍थिति है, जहां स्‍कूलों की बहुत दरकार है. मांग है और इस क्षेत्र में काम करने की जरूरत है. साथ ही यह पूरा ट्राइबल क्षेत्र है पूरा आदिवासी बाहुल इलाका है. मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करता हॅूं कि दोनों विभाग मिलकर वहां अधिक से अधिक छात्रावास और आश्रम शालाएं प्रारम्‍भ करें और हर क्षेत्र में जो नाम बताएं हैं, उन सभी गांवों के अंदर छात्रावास और आश्रम शालाओं की सुविधा होगी, तब ही बच्‍चे आगे पढ़ पाएंगे.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, परिवहन विभाग के बारे में भी एक-दो बातें बोलकर अपनी बात समाप्‍त करूंगा. परिवहन विभाग एक बहुत बड़ा विभाग है. इसमें बडे़-बडे़ घोटाले सामने आते हैं. मैं यहां वाहन पंजीयन की बात नहीं कर रहा हॅूं मैं सीधे बात कर रहा हॅूं कि बड़वानी आरटीओ कार्यालय में विवेक मलतारे नाम का एक व्‍यक्‍ति है. उसके घर लोकायुक्‍त का छापा पड़ा. उसके घर के अंदर सरकारी फाईलें मिलीं. उसके बाद उस पर आरटीओ में भी कार्यवाही हुई है. लेकिन बड़वानी के लोगों को मालूम नहीं था कि विवेक मलतारे बाहरी व्‍यक्‍ति है. लोग तो यही समझते थे कि यह कोई क्‍लर्क होगा. यह किस प्रकार का भ्रष्‍टाचार है. बड़वानी जिले के अंदर जो बालसमुंद बेरियर, जिसे 1 जुलाई 2024 से समाप्‍त कर दिया गया है लेकिन वह आज भी अवैधानिक रूप से चल रही है. आरटीओ के कर्मचारी, अधिकारी को छोड़िए, उसकी बाहरी गुंडों को लेकर साथ में जाकर ट्रकों से अवैध वसूली बदस्‍तूर जारी है.

          सभापति महोदय -- धन्‍यवाद. आपकी पूरी बात आ गई. श्री ठाकुरदास नागवंशी जी.

          श्री राजन मण्‍डलोई -- सभापति महोदय, मैं एक और बात कहना चाहता हॅूं. एक अंतिम प्रश्‍न है. एक प्रश्‍न आया था.

          सभापति महोदय -- आप भूमिका बहुत बना रहे हैं. मैंने आपको 2, 3 मिनट दे दिए.

          श्री राजन मण्‍डलोई -- सभापति महोदय, आरटीओ आरक्षक श्री सौरभ शर्मा, की संपत्‍ति भोपाल से दुबई तक फैली है. जिसके पास से लगभग 30 करोड़ की संपत्‍ति सरकार ने जब्‍त की है. उसके पास गोल्‍ड मिला है. मैं पूछना चाहता हॅूं कि सौरभ शर्मा के विरूद्ध कौन-कौन सी एजेंसी जांच कर रही है क्‍योंकि अभी तक सदन को नहीं बताया गया है कि उसको सरंक्षण देने वाले राजनेता कौन हैं. उसको बचाने वाले अधिकारी और नियुक्‍ति देने वाले अधिकारियों का अभी तक खुलासा नहीं हुआ है. इस बात का भी खुलासा होना चाहिए. बहुत सारी बातें हैं और इस विभाग में भारी भ्रष्‍टाचार है.....

          सभापति महोदय -- मण्‍डलोई जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. बाकी आप माननीय मंत्री जी को लिखित में दे  दीजिएगा. श्री ठाकुरदास नागवंशी जी.

            श्री ठाकुरदास नागवंशी(पिपरिया)सभापति महोदय, मांग संख्या 27 एवं 36 पर बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. इस आधुनिक युग में, आधुनिक शिक्षा संस्कारमय, प्रवेशमय विद्यार्थी को टीका लगाकर के स्वागत किया गया. संस्कारमय शिक्षा के लिये राज्य में1 अप्रैल 2025 को प्रवेश उत्सव कार्यक्रम 20 से 25 आयोजित किये गये. इसके पूर्व माह मार्च में सभी विद्यालयों में व्यवस्थित एवं अभियान आधारित प्रवेश की प्रक्रिया प्रारंभ की गई. हमने इसके पहले भी देखा हमारी दीदी और लोगों ने बोला है प्रवेश में कहीं न कहीं कागजों के कारण दिक्कत आती थी उसे सरलता से कर कर कोई दस्तावेज के अभाव में किसी भी विद्यार्थी को प्रवेश से वंचित न किया जाये. इसके लिये माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं. निश्चित प्रतिभाएं एवं मेघावी छात्राओं के लिये जो सरकार चिंता कर रही है वह शिक्षा के विषय में वह गंभीर है. क्योंकि प्रतिभाएं समाज का गौरव नहीं होती हैं, अपितु देश का गौरव होती हैं. ऐसी प्रतिभाओं को और मेघावी छात्राओं को हमारी सरकार के द्वारा चाहे लेपटॉप हो, जैसा कि हमारी दीदी ने भी बताया कि स्कूटी 7890 विद्यार्थियों को प्रदान की गई. 94300 लेपटॉप बच्चियों को दिये गये हैं. मैं इसके लिये माननीय मंत्री जी इसलिये भी धन्यवाद देना चाहता हूं कि संदीपनी स्कूल के विषय में चर्चा आई. आप यकीन नहीं करेंगे जब दो परिवार अपने बच्चों को स्कूल जाते हुए देखते थे एक परिवार अपने आप को गर्व महसूस करता था, एक परिवार ठगा हुआ महसूस करता था. जब प्रायवेट स्कूलों में अच्छे स्तर के पैसे वालों के बच्चे स्कूल जाते थे तथा बच्चों को टाई बेल्ट लगाकर के जब स्कूल जाते थे तो उनको लगता था कि मेरा बच्चा एक प्रायवेट स्कूल में पढ़ने के लिये जा रहा है. उस समय जो दूसरा परिवार उन बच्चों को देखता था तो अपने बच्चों को उंगली पकड़कर कहीं उनके जूते फटे हुआ करते थे तो कहीं ड्रेस व मौजे फटे हुआ करते थे. जब परिवार उस बच्चे की ओर देखता था तो ठगा सा महसूस करता था. उसको लगता था उसकी मां और उसके पिता का यह सपना था कि मैं भी कभी अपने बच्चों को इस स्कूल में पहुंचा पाऊंगा. इस तरह की शिक्षा अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पाऊंगा अथवा नहीं दे पाऊंगा. आज उस मां बाप का सपना अगर किसी ने पूरा किया है तो माननीय मुख्यमंत्री मोहन यादव और राव उदय प्रताप सिंह जी ने तथा हमारे उच्च शिक्षा मंत्री इंदरकुमार परमार जी ने किया है. उन बच्चों को बसें घर पर लेने के लिये आ रही हैं, उनको स्कूल से घर वापस छोड़ने भी जा रही है. शिक्षा, मनोरंजन, कलाकृत्ति सब चीजें वहां पर सिखाई जा रही हैं. तो ऐसी सरकार जिन्होंने सपना दिखाया ही नहीं सपना पूरा करने का काम अगर किसी ने किया है तो हमारी सरकार ने किया है. इसके अलावा मैं परिवहन पर बोलना चाहता हूं. आज ड्राईविंग लायसेंस जो हमारे बन रहे हैं उनमें कहीं न कहीं दिक्कतें आ रही हैं इसमें मैं माननीय मंत्री जी का ध्यानाकर्षित करना चाहता हूं. ड्रायविंग लायसेंस में रजिस्ट्रेशन कोड नहीं होने के कारण अन्य राज्यों में ड्रायविंग लायसेंस एवं रजिस्ट्रेशन कार्ड की मांग की जाती है. पहले बड़ी सुलभता से ड्रायविंग लायसेंस बन जाते थे, अब कहीं न कहीं फीस जमा होने के बाद भी कार्ड उपलब्‍ध नहीं है, इसलिए लायसेंस नहीं मिल पाते, जो टू व्‍हीलर होते हैं, उनको ट्राफिक में कहीं भी रोक लिया जाता है. कार्ड अच्‍छे नहीं होते हैं. कार्ड अभी उपलब्‍ध भी नहीं है, इन्‍हें जल्‍दी से जल्‍दी राशि जमा करके उनके कार्ड बनवा दिए जाए, ताकि उनका चालान न बने. एक सिस्‍टम और था ऑनलाइन, इसमें दिक्‍कत यह जाती है कि हम ग्रामीण क्षेत्र के लोग हैं, वहां ऑनलाइन नहीं हो पाते. दूसरी बात फोन के माध्‍यम से एंड्राइड फोन उनके पास होते हैं, वे उसमें कापी कर लेते हैं और दिखा देते हैं, तो सभी के पास एंड्राइड फोन भी नहीं है. ये सुविधा भी मैं मंत्री जी से चाहूंगा कि इसकी व्‍यवस्‍था करें ताकि लोगों के चालान न बन पाए. दूसरा निवेदन है कि मध्‍यप्रदेश शासन द्वारा व्‍यवसायिक वाहनों के फिटनेस जो एसटीएस के माध्‍यम से कराये जाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें से कई ऐसे जिले हैं, जहां एसटीएस है ही नहीं. मेरा निवेदन है कि जो पुरानी परम्‍परा चली आ रही है जहां यह व्‍यवस्‍था नहीं है, जो सुचारू रूप से चालू नहीं है, वहां पहले जो व्‍यवस्‍था चल रही थी, वैसा ही करने का काम करें, आरटीओ को ये अधिकार पुन: दे दिए जाएं ताकि वे बसों को फिटनेस दे सकें.  अब इसमें विसंगतियां यह है कि या तो हमें जिला जाने के लिए 100 से 250 किलोमीटर जाना पड़ता है, लेकिन वहां सिस्‍टम ही नहीं है फिटनेस का, तो हम यह चाहते हैं कि आरटीओ आफिस के माध्‍यम से ही ये फिटनेस सेंटर जो जिले में हैं उनको ही वहां करवा दिए जाए, ताकि व्‍यवसायिक लोगों को अव्‍यवस्‍था न हो इससे जाने का समय भी बचेगा, अभी हम जिले में जाते हैं तो फिटनेस करवाने में दो तीन दिन लागते हैं. यदि 100 से 150 किलोमीटर जाएंगे तो हमारा डीजल भी लगेगा, ये समय बचे ऐसा मेरा मंत्री राव उदयप्रताप जी से निवेदन है.

          सभापति जी, बस एक मिनट दीजिए. हमारे यहां तीन सांदीपनि स्‍कूल दिए हैं, इसके लिए मैं मध्‍यप्रदेश सरकार को और मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं. मैं ग्रामीण क्षेत्र से आता हूं, गांवों में जितने अच्‍छे स्‍कूल होंगे, उतनी अच्‍छी शिक्षा होगी.अगर देश शिक्षित होगा तो देश का विकास होगा और आत्‍मनिर्भर बनेगा, शिक्षा से ही बनेगा. मैं यह चाहता हूं कि एक सांदीपनि स्‍कूल हमारा ब्‍लाक सांडिया में खोल दिया जाए, इसकी आप घोषणा कर दें. माल्‍हनवाड़ा भी हमारा बड़ा  सेंटर है, आपकी विधान सभा और मेरी विधान सभा से लगा हुआ है, इस पर भी कृपा दृष्टि करें. पीपरपानी में भी एक वनखेड़ी ब्‍लाक में खोलने का कष्‍ट करें और एक हमारी नगर पालिका पिपरिया में दसवीं तक स्‍कूल है हाई स्‍कूल नगर पालिका इसको 12 वीं तक कर  दें ताकि हमारा लोड कम हो. इन्‍हीं शब्‍दों के साथ मैं पुन: इसका समर्थन करता हूं बहुत बहुत धन्‍यवाद.

          श्री बाबू जण्‍डेल (श्‍योपुर) अनुपस्थित.          

            श्री साहब सिंह गुर्जर(ग्‍वालियर ग्रामीण) -- सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या- 27 स्‍कूल शिक्षा पर बोलना चाहता हूं.

          "विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्।

 

        पात्रत्वाद् धनमाप्नोति, धनाद् धर्मं ततः सुखम्॥"

 

          सभापति महोदय,विद्या से विनम्रता आती है और विनम्रता से योग्‍यता मिलती है और योग्‍यता से धन और धन से धर्म और अंतत: सुख प्राप्‍त होता है. हर मर्ज की दवा शिक्षा है. इसलिए शिक्षा व्‍यवस्‍था को गंभीरता से लेने की जरूरत है.

           आदरणीय सभापति महोदय, प्रदेश में शासकीय स्‍कूलों की स्थिति अत्‍यंत दयनीय है, लगभग छ: हजार स्‍कूल जीर्णशीर्ण अवस्‍था में हैं, करीब दो हजार स्‍कूलों में शौलाचय नहीं है तथा दो हजार प्रायमरी स्‍कूलों में बालिका शौचालय नहीं है, यह जानकारी शिक्षा मंत्री महोदय द्वारा विधानसभा में लगाये गये एक प्रश्‍न के उत्‍तर में दी गई है. स्‍कूलों में शौचालय, बाउंड्री वाल, पेयजल बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं है, इस कारण से छात्राएं असुरक्षित हैं.

          सभापति महोदय, मेरे विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत दैली के विद्यालय की छत गिरने से छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई थी, तथा ग्राम पंचायत दउका के भौगीपुरा विद्यालय की छत का प्‍लास्‍टर गिरने से बड़ा हादसा होते-होते टला तथा वार्ड क्रं-62 के चक्रामपुर प्राथमिक विद्यालय की छत की पटिया गिर गई, जिससे गंभीर दुर्घटना होते होते बची है. सभापति महोदय, अभी हाल में कटनी जिले के बिजराबरगढ़ में जर्जर स्‍कूल की बाउंड्री गिरने से पांचवी कक्षा के एक छात्र की मृत्‍यु हो गई. प्रदेश में वर्ष 2020-21 से वर्ष 2024-25 के बीच पांच सालों में दस हजार से ज्‍यादा स्‍कूल बंद हुए हैं. सभापति महोदय, यही नहीं पिछले साल की तुलना में इस वर्ष सरकारी स्‍कूलों में 3 लाख 44 हजार से कम विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया है. वर्ष 2003 में 8 हजार 720 पदों के लिये भर्ती निकली थी, लेकिन अंतिम चयन सिर्फ 2 हजार 901 पर ही किया गया है, हजारों पद आज भी खाली हैं, इसके बावजूद योग्‍य उम्‍मीदवारों को वेटिंग में डाल दिया जाता है.

          सभापति महोदय -- साहब सिंह जी अपने क्षेत्र की बात रख दें, तो वह आ जायेगी. आप प्राथमिकता से क्षेत्र की बात रखें.

          श्री साहब सिंह गुर्जर -- सभापति महोदय, योग्‍य शिक्षक ही नियुक्ति के लिये वर्षों इंतजार करेंगे तो पढ़ाई कैसे सुधरेगी? यह गंभीर प्रश्‍न है. कहीं गुरूजी के पद खाली हैं, ''कहीं छत टपकती रातों में बच्‍चे भविष्‍य ढूंढ रहे हैं कोरी किताबों में'' सभापति महोदय, नामांकन के आंकड़े बताते हैं कि स्‍कूल चले हम अभियान ग्‍वालियर जिले में पूरी तरह से फैल हो चुका है. ग्‍वालियर जिले में 34 हजार ड्राप बॉक्‍स और 6 हजार शाला त्‍यागी बच्‍चों की जानकारी स्‍कूल शिक्षा विभाग के अनुसार है,जबकि यह स्थिति प्रदेश स्‍तर पर और गंभीर है.

          सभापति महोदय, सरकारी स्‍कूलों के भवनों की स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है, आज भी कई स्‍कूलों में भवन नहीं होते हैं, बच्‍चे खुले में पढ़ रहे हैं, भवन पेयजल, बिजली टॉयलेट जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है. सरकारी स्‍कूलों में मध्‍याह्न भोजन  वितरण की स्थिति भी दयनीय है, छात्रों को भोजन हेतु बर्तन तक उपलब्‍ध नहीं है, हद तो तब इस बात की है कि बच्‍चों को कॉपी के पन्‍ने पर भोजन परसो जा रहा है, यह स्थिति सरकारी स्‍कूलों की दुर्दशा को प्रदर्शित करती है. विद्यालयों में भी अभिभावकों के साथ लूट हो रही है और निजी स्‍कूलों के द्वारा विशेष दुकान से किताबें गणवेश आदि सामग्री खरीदने का दबाव बनाया जाता है, यह भी एक गंभीर विषय है.

          सभापति महोदय -- क्षेत्र की कोई विशेष बात हो तो प्राथमिकता से रख दें.

          श्री साहब सिंह गुर्जर -- मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि स्‍कूल शिक्षा के लिये बजट पर्याप्‍त नहीं है तो शिक्षा के लिये बजट बढ़ाया जाये, यदि है तो स्‍कूल में मूलभूत सुविधा क्‍यों नहीं है, यह कब सुनिश्चित होगी. मेरी विधानसभा ग्राम धनेली में हाई स्‍कूल खोला जाये ताकि वहां के बच्‍चों को अध्‍ययन के लिये दूर नहीं जाना पडे़. ग्राम बेहट में सांदीपनि हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल खोला जाये तथा बालक एवं बालिकाओं के लिये पृथक पृथक हाई स्‍कूल खोले जावें. ग्राम निरावली में हाई स्‍कूल का हायर सेकेण्‍डरी में उन्‍नयन किया जाये एवं निरावली हाई स्‍कूल की बिल्डिंग निर्माण की स्‍वीकृति शीघ्र जारी की जाये. बढ़ते बजट के बावजूद घटते स्‍कूल और कम होते बच्‍चे और गिरता शिक्षा का स्‍तर, अत्‍यंत ही चिंताजनक है. गांव का वह बच्‍चा जो टूटी छत के नीचे बैठकर जो सपने देखता है उसे भी उतना ही अधिकार है जितना बड़े स्‍कूल में पढ़ने वाले बच्‍चे को है. हम चाहते हैं कि हमारे क्षेत्र के स्‍कूल भी सुविधा, शिक्षक और सम्‍मान के साथ आगे बढ़ें. मंत्री जी आपका साथ मिल जाये तो हर बच्‍चे का अधूरा सपना मुकम्‍मल हो जाये. सभापति जी, धन्‍यवाद.

          श्री बाबू जण्‍डेल (श्‍योपुर)-- माननीय सभापति महोदय, मेरी विधान सभा श्‍योपुर में वर्ष 2021 में आई भीषण बाढ़ से सेकड़ों शासकीय प्राथमिक, माध्‍यमिक एवं हाई स्‍कूल, हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल भवन क्षतिग्रस्‍त एवं धराशायी हो गये हैं. मेरे द्वारा विधान सभा प्रश्‍न क्रमांक 1006 दिनांक 30.07.25 के द्वारा भी उक्‍त भवनों की मरम्‍मत एवं पुल निर्माण की बात लगातार उठाता रहा हूं फिर भी आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं हुई. शासन एवं विभाग द्वारा 29 शाला भवन मरम्‍मत योग्‍य हैं एवं 3 हायर सेकेण्‍डरी भवन नवीन निर्माण करया जाना स्‍वीकार किया गया है, जिसके लिये राशि भी मंजूर होना बताया है. अभी भी कई विद्यालय भवन नहीं है, उदाहरण स्‍वरूप में जैसे हाईस्‍कूल राडे़प मेरे क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत राड़ेप है उसमें 7 हजार की आबादी है और उसी में भ्रष्‍टाचार हैं जो स्‍कूल के लिये हायर सेकेण्‍डरी के लिये पैसा आया है वह भ्रष्‍टाचार की चपेट में है और पांडोला ग्राम लूंड में अभी हाल में एक स्‍कूल की छत टूटी हुई है वह तो भगवान की कृपा है कि बच्‍चे नहीं आये स्‍कूल में जिसके पहले वह छत गिर गई थी. ऐसे हमारे कनापुर में भी एक छत गिरी है, एक बालक की मौत हुई है और हमारे रूंड में भी ऐसे ही छत गिरी है एवं श्रीजी की गांवड़ी भवन ध्‍वस्‍त हो गया है एवं कई धराशायी होने की कगार पर है. इन सभी भवनों की तत्‍काल मरम्‍मत एवं नवीन निर्माण कराया जाये. यही स्थिति पूरे प्रदेश की है. हमारे क्षेत्र में जो 25 लाख रूपये मरम्‍मत के लिये आये थे वह मुन्‍ना गर्ग जिला शिक्षा अधिकारी है और अतिथि शिक्षक ने काफी भ्रष्‍टाचार किया और जो 25 लाख मरम्‍मत में आये हैं वह भी अभी जांच में चल रहा है और इसमें अभी कोई कार्यवाही नहीं हुई है. संयुक्‍त संचालक मधु शर्मा भी हैं, जैन साहब हैं बड़े अधिकारी हैं इन्‍हें दूर रखा जा रहा है, जो भ्रष्‍ट मुन्‍ना गर्ग है जिसने अतिथियों में काफी घपला किया था और जो 25 लाख का जो मरम्‍मत का बजट आया था वह पैसे पूरे खा चुका है अगर यह पैसे मरम्‍मत में लग जाते तो श्रीजी की गांवड़ी का स्‍कूल नहीं गिरता और कनापुर में एक माली समाज का 10-12 साल का एक बालक था उसकी मौत हुई थी तो मैं कहना चाह रहा हूं.

          सभापति महोदय--  जण्‍डेल जी अब समाप्‍त करें.

          श्री बाबू जण्‍डेल-- माननीय शिक्षा का मामला है, वर्ष 2020-21 में मैंने विधान सभा में यह मामला उठाया था, अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई, कोई आश्‍वासन नहीं है. मैं कह रहा हूं श्‍योपुर में चीता के लिये वह पैसा खर्च हुआ है और एक साल का 1 करोड़ 32 लाख का मीट आता है चीतों के लिये, जब मीट के लिये 1 करोड़ 32 लाख आ जाते हैं और बच्‍चों के लिये मरम्‍मत के लिये आप 25 हजार रूपये देते हो, वह भी पूरा गर्ग साहब खा जाता है. आप जांच कराईये जब इस शिक्षा में जो मंदिर होता है और हमारा भविष्य हमारे बच्चे हमारी रीढ़ की हड्डी होते हैं और हमारे राष्ट्र की धरोहर बच्चे होते हैं उनके साथ ऐसा खिलवाड़ हो रहा है और चीता के लिये करोड़ों रुपये का मीट का दिया हुआ है. एक बात कहना चाहता हूं कि हमारे श्योपुर में किसानी हेतु खेती के संसाधन पहुंचाने हेतु 167 करोड़ की जो चंबल सूक्ष्म परियोजना है वह बगैर गुणवत्ता की है वह 2018 में स्वीकृत हुई थी. कमलनाथ जी की सरकार में अभी तक 167 करोड़ भ्रष्टाचार की कगार पर है जब मैंने प्रश्न लगाया था 15.2.24 में तो इसमें जानकारी मिली है कि 2200 हेक्टेयर में पानी सिंचाई हो चुकी है पर 22 हेक्टेयर में भी नहीं हुई है 22 बीघा में भी नहीं हुई है. एक लाईन बोलना चाहता हूं कि साहब सिंह गुर्जर जी ने जो शेर सुनाया जब जब मैं भ्रष्टाचार के खिलाफ बोलता हूं तो मेरे पर एक महिने में तीन एफआईआर की जाती है. मंजिल लाख कठिन आए, गुजर जाऊंगा,हौसला हारकर भी बैठूंगा तो मर जाऊंगा.चल रहे थे जो मेरे साथ कहां हैं वह लोग जो कहते थे कि रास्ते में बिखर जाऊंगा.

          श्री विपिन जैन(मंदसौर) - माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि मेरे मंदसौर विधान सभा में तीन साल पहले दो सांदीपनी विद्यालय स्वीकृत हुए थे एक हुआ था नगरीय और एक हुआ था मंदसौर. दोनों में न तो अभी तक जमीन चिन्हित हुई न बिल्डिंग बनी तो जल्द से जल्द जमीन चिन्हित करके बिल्डिंग बनाने की कृपा करें एवं मेरे विधान सभा में दो हायर सेकेंड्री स्कूल का उन्नयन करना है उसके लिये एक निम्बोद और एक खजूरिया तो इन दोनों का उन्नयन करके हायर सेकेंड्री स्कूल बनाएंगे. धन्यवाद.

          श्री मोहन सिंह राठौर(भितरवार) - माननीय सभापति महोदय, तीसरे इस वर्ष के इस बजट पर पहली बार मुझे बोलने का मौका दिया है इसके लिये मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं और साथ ही माननीय मुख्यमंत्री जी और माननीय शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह जी को दो लाईनें समर्पित करते हुए अपनी बात कहना चाहता हूं. हम तो दरिया हैं हमें अपना हुनर मालुम है जिस तरफ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जायेगा.माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में माननीय उदय प्रताप सिंह जी हमारे स्कूल शिक्षा मंत्री,हमारे उच्च शिक्षा मंत्री सभी लोग शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का काम कर रहे हैं.शिक्षा समाज का दर्पण है. शिक्षा समाज ही वर्तमान में प्रगति के पथ पर बढ़ रहा है यह हमारी शिक्षा का ही योगदान और परिणाम है कि हमारे युवा आगे बढ़ रहे हैं तथा अपने गांव,अपने जिले,अपने प्रदेश भारत देश का नाम रोशन कर रहे हैं. वर्तमान में भारतीय युवक,युवतियां चाहे समुद्र हो,धरती हो,आसमान हो,चाहे अंतरिक्ष चाहे खेल के मैदान सभी जगहों

अपनी योग्‍यता का परचम लहरा रहे हैं.

          सभापति महोदय -- राठौर जी, मेरा आग्रह है कि आप अपने क्षेत्र की बात रख दें. भूमिका ज्‍यादा हो जाती है. अपने क्षेत्र के काम की बात रख दें.

          श्री मोहन सिंह राठौर -- 10 मिनट तो आपने दिए हैं, उसमें मैं सब समाहित कर लूंगा.

          सभापति महोदय -- 10 मिनट नहीं, 10 मिनट किसी को भी नहीं दिए हैं. 5 मिनट के भीतर-भीतर अपनी बात रखनी है.

          श्री मोहन सिंह राठौर -- अंतरिक्ष, सभी जगहों पर अपनी योग्‍यता का परचम लहरा रहे हैं.

          सभापति महोदय -- क्षेत्र की बात रख दें आप.

          श्री मोहन सिंह राठौर -- मैं कर लूंगा साहब, आप चिंता न करें. कम समय में मैं अपनी बात खत्‍म कर दूंगा. यह हमारी शिक्षा नीति और शिक्षा व्‍यवस्‍था का परिणाम है. हमारे यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी, शिक्षा के प्रति समर्पित माननीय शिक्षा मंत्री जी के अथक प्रयासों से शिक्षा को घर-घर तक पहुँचाया गया है. हमारे बच्‍चे-बच्‍चियों को प्रभोत्‍सव के माध्‍यम से घर-घर से निकालकर स्‍कूलों तक पहुँचाना, इसके लिए विशेष कार्यक्रम लगातार चलाए जा रहे हैं.

          सभापति महोदय, हमारी सरकार द्वारा शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए पीएमश्री योजना के अंतर्गत 799 विद्यालय राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के सभी प्रमुख घटकों का क्रियान्‍वयन सुनिश्‍चित किया जा रहा है. इसी प्रकार वर्ष 2024 में आयोजित 'परख' के माध्‍यम से मध्‍यप्रदेश के छात्रों ने पूरे राष्‍ट्र में आठवां स्‍थान प्राप्‍त किया है. यह हमारे लिए गौरव की बात है. शिक्षा प्रोत्‍साहन के लिए, मनोबल की वृद्धि के लिए वर्ष 2025-26 में जो लैपटॉप वितरित किए गए, 7,890 विद्यार्थियों को स्‍कूटी दी गई. इसी का परिणाम है कि लगातार सरकारी स्‍कूलों में भी प्राइवेट स्‍कूलों से बच्‍चे निकल-निकल कर अध्‍ययन करने के लिए पहुँच रहे हैं. गांव से स्‍कूल तक जाने के लिए छात्र-छात्राओं को 4 लाख 85 हजार जो साइकिलें दी गई हैं, मैंने अपने क्षेत्र के 42 विद्यालयों में, हाई स्‍कूल और हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूलों में जाकर इन वितरणों में भाग लिया है और उसी के माध्‍यम से मैंने वहां बच्‍चों के चेहरों पर जो उत्‍साह देखा है, वहां शिक्षक-पालक संघ और बच्‍चों के बीच में जो डिबेट कराई है. उससे जो कमियां निकल कर बाहर आई हैं. उन कमियों के लिए अपनी विधायक निधि से मैंने 50 से 60 लाख रुपये खर्च करके उन कमियों को पूरा करने का प्रयास किया है.

          माननीय सभापति महोदय, इसके साथ ही मैं जब इस माध्‍यम से गया तो मैंने तमाम शिक्षकों से पूछा था कि क्‍या वार्षिकोत्‍सव हमारे स्‍कूलों में होते हैं. शिक्षकों ने कहा कि कई वर्षों से, लगभग 20 से 25 वर्षों के पहले से हमने कभी अपने स्‍कूलों में वार्षिकोत्‍सव नहीं किए हैं. हम जब पढ़ते थे, तब वार्षिकोत्‍सव होते थे. माननीय उदय प्रताप सिंह जी, जो हमारे शिक्षा मंत्री जी हैं, राव साहब से जब हमने बात की तो मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि मेरे भीतरवार विधान सभा क्षेत्र के 42 स्‍कूलों के प्रत्‍येक स्‍कूल में वार्षिकोत्‍सव के माध्‍यम से हमने बच्‍चों की प्रतिभा को आगे लाने का प्रयास किया है. यही प्रयास मध्‍यप्रदेश में जहां भी यह कार्यक्रम बंद हो, वहां भी शुरू करने का प्रयास किया जाना चाहिए. इस सबसे हम बच्‍चों की प्रतिभाओं को आगे निकालते हैं, बच्‍चों को सर्वांगीण विकास की ओर हम ले जाते हैं. उससे बहुत बड़ी मदद हमको मिली है. यह हमारे शिक्षा मंत्री जी कृपा से सब कुछ हुआ है.

 

06.59 बजे           {सभापति महोदया (श्रीमती अर्चना चिटनीस) पीठासीन हुईं.}

 

          माननीय सभापति महोदया, डिजिटल शिक्षा के लिए 24 प्रतिशत, मिडिल 84 प्रतिशत, हाई स्‍कूल, हायर सेकेण्‍डरी कक्षा स्‍मार्ट क्‍लास स्‍वीकृत संचालित तथा आईसीटी 85 प्रतिशत हाई स्‍कूल हायर सेकेण्‍डरी में संचालित हैं. यह भी हमारे लिए गौरव की बात है. विद्यालयों में शिक्षकों की उपस्‍थिति के लिए, जो तमाम शिक्षकों की अनुपस्‍थितियां होती थीं, आज विद्यालयों में हमारा शिक्षक एप जो बनाया गया है. इसके लिए शिक्षक, अतिथि शिक्षक की वीटी द्वारा उपस्‍थिति दर्ज की जाती है. उनकी शत्-प्रतिशत उपस्‍थिति से जो हमारे परीक्षा परिणाम आ रहे हैं, उन परीक्षा परिणामों में हमारे बच्‍चे जिस तरह से टॉप कर रहे हैं. आगे आने वाले समय में चाहे वह स्‍कूटी हो, चाहे लैपटॉप हो, इनकी और भी आवश्‍यकता हमें पड़ेगी. हमारे शासकीय स्‍कूलों की पढ़ाई का स्‍तर धीरे-धीरे बहुत आगे बढ़ रहा है.

          सभापति महोदया, हमारी जनजाति के दूरस्‍थ शिक्षा क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए जनमन योजना में 50 सीटर बालक-बालिका छात्रावास भवन हेतु बसाहटों में भवन निर्माण का प्रस्‍ताव, जो भारत सरकार को गया था, इसमें दो करोड़ तीस लाख रुपये प्रति छात्रावास के हिसाब से 106 छात्रावासों की जो स्‍वीकृति प्राप्‍त हुई है, उससे भी हमारे क्षेत्र में जनजाति और 'धरती आबा' के अंतर्गत ऐसे 100 सीट बालक-बालिकाओं के छात्रावास भवनों का निर्माण आदिवासी बसाहटों में होगा, उससे हमारे यहां के अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को बहुत मदद मिलेगी. इसी प्रकार 4 करोड़ रुपये प्रति छात्रावास की दर से 104 छात्रावासों की स्‍वीकृति प्राप्‍त हुई है, इसका भी निर्माण शीघ्र किया जायेगा, यह माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व और हमारे शिक्षा मंत्री की दूरदर्शिता का परिणाम है. इससे हमारे शिक्षा का स्‍तर लगातार बढ़ रहा है, हमारे क्षेत्र में विद्यार्थियों को शिक्षण एवं पठन-पाठनी सामग्री उपलब्‍ध हो, इस हेतु विभाग द्वारा 5 केन्‍द्रीय पुस्‍तकालय, 36 जिलों में जिला पुस्‍तकालय संचालित किये जा रहे हैं, बच्‍चों की तमाम सारी क्विच प्रतियोगिताएं हैं, उनमें भी उन्‍हें भाग लेते हुए आगे बढ़ने का अवसर मिलता है. मेरा आपके माध्‍यम से विभाग के माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि विद्यार्थियों की छिपी हुई प्रतिभा को उभारने के लिये, मैं पुन: आग्रह कर रहा हूँ कि पूरे मध्‍यप्रदेश में इस व्‍यवस्‍था को लागू करने के लिए आवश्‍यक दिशा-निर्देश जारी करने की कृपा करें.

          माननीय सभापति महोदया, मेरे विधान सभा क्षेत्र की कुछ मांगे हैं. मैं उन मांगों के प्रति माननीय मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूँ. ग्राम घाटीगांव एवं ग्राम चीनोर, ग्राम पाटल एवं ग्राम बरई में सांदीपनि विद्यालयों की स्‍थापना अत्‍यन्‍त आवश्‍यक है, क्‍योंकि यह पूरा क्षेत्र सहरिया और आदिवासी समाज की सारी जनसंख्‍या यहां पर निवास करती है, इसलिए यहां पर सांदीपनि विद्यालय खोला जाना आवश्‍यक है. ग्राम स्‍याउ में हाईस्‍कूल को हायर सेकेण्‍ड्री में उन्‍नयन करने की आवश्‍यकता है, माध्‍यमिक शाला खेड़ाटांका को हाईस्‍कूल में उन्‍नयन करने की आवश्‍यकता है, प्राथमिक विद्यालय बेरनी एवं प्राथमिक विद्यालय रायपुरखुर्द को माध्‍यमिक शाला में उन्‍नयन करने की तत्‍काल आवश्‍यकता है, माध्‍यमिक शाला बड़कीसराय एवं माध्‍यमिक शाला तोड़ा को हाईस्‍कूल में उन्‍नयन करने की आवश्‍यकता है, इसी प्रकार मेरे क्षेत्र भितरवार विधान सभा में हाईस्‍कूल खैरवाया, बनवार, कछौआ, डोंगरपुर, सिमरियाटांका, गड़ाजर और मस्‍तूरा को हायर सेकेण्‍ड्री में उन्‍नयन करने की आवश्‍यकता है क्‍योंकि मेरा भितरवार विधान सभा क्षेत्र 150 किलोमीटर स्‍क्‍वायर में निवास करता है, बहुत बड़ा का क्षेत्र है, वहां तमाम सारी आवश्‍यकताओं को देखते हुए इसे बजट में शामिल किया जाये.

          सभापति महोदया - अब अपनी बात जल्‍दी पूरी करने की कोशिश करें.

          श्री मोहन सिंह राठौर - माननीय सभापति महोदया, आदरणीय मैं परिवहन विभाग की भी कुछ बातों को रखना चाहता हूँ. परिवहन विभाग की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एवं आम जनता को सुविधा देने के लिए आवश्‍यक रूप से परेशानी न हो, इस उद्देश्‍य से हमारी सरकार ने मोटरयानों के रजिस्‍ट्रेशन, परमिट एवं ड्रायविंग लाइसेंस से संबंधित सभी सेवाओं को एनआईसी द्वारा विकसित वाहन तथा सारथी पोर्टल के माध्‍यम से प्रदाय किया जा रहा है. इससे भ्रष्‍टाचार से क्षेत्र में मुक्ति मिली है और तमाम सारी योजनाओं से लोग लाभान्वित हो रहे हैं. मोटरयान अधिनियम की धारा 1988 की धारा 87 के तहत जारी किये जाने वाले अस्‍थाई परमिटों को ऑनलाइन पोर्टल से जोड़कर ''ऑटो एप्रूवल'' सेवा के माध्‍यम से जारी किया जाना प्रारंभ किया है, जिससे अनावश्‍यक परेशानी और असुविधा न हो तथा समय की बचत हो. यह सब माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में माननीय मंत्री जी, श्री उदय प्रताप सिंह जी द्वारा किया जा रहा है. इसके लिए मैं उनको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूँ.

          सभापति महोदया - माननीय सदस्‍य, आप अपनी बात जल्‍दी समाप्‍त करें. आपको पर्याप्‍त समय हो गया है.

          श्री मोहन सिंह राठौर - सभापति महोदया, मैं बस थोड़ी सी बात और रखना चाहता हूँ. यह बहुत बड़ी समस्‍या थी, इस समस्‍या के समाधान के लिए भी सुविधा केन्‍द्रों के माध्‍यम से इसको प्रारंभ किया गया है, इसके लिये भी, मैं बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूँ.           

          डॉ. रामकिशोर दोगने (हरदा)-  सभापति महोदया, मैं, मांग संख्‍या 27, 36, 44, 38 और 47 के संबंध में अपना पक्ष रख रहा हूं. हम जानते हैं कि शिक्षा रूपी चाबी हर ताले में लगती है. शिक्षा से ही विकास दिखता है, किसी देश को विकसित, विकासशील देश तभी कहा जाता है, जब वहां शिक्षा अच्‍छी हो, शिक्षा में ध्‍यान देने की बात है. मेरा आग्रह है कि हमारे शिक्षकों की जो भर्तियां होती हैं, एक स्‍थाई शिक्षक होता है, अतिथि शिक्ष होता है, संविदा शिक्षक होता है, ये सभी श्रेणियां हटाकर केवल एक शिक्षक श्रेणी बनाई जाये, जो अच्‍छी शिक्षा दे सके, पढ़ा सके और मेहनत कर सके. उन्‍हें अलग-अलग श्रेणी में बांटने से वे मेहनत नहीं करते, हर आदमी सोचता है कि वह आगे निकल गया, उसे ज्‍यादा वेतन मिलता है, वह काम करेगा, मैं काम नहीं करूंगा. ये परिस्थितियां समाप्‍त कर, शिक्षा में स्‍थाई पद देकर, समान वेतन दिया जायेगा, तो अच्‍छा रहेगा.

          सभापति महोदया, इसके साथ ही मेरा आग्रह है कि हमारा बजट रुपये 4 लाख 38 हजार करोड़ का है, 17 प्रतिशत बजट शिक्षा का है, जिसमें रुपये 75 हजार करोड़ करीब बजट आ रहा है. हमारे शासकीय स्‍कूल चल रहे हैं लेकिन बहुत से स्‍थानों पर शौचालय नहीं है, पीने का पानी नहीं है और भी व्‍यवस्‍थायें नहीं हैं, ये व्‍यवस्‍थायें करेंगे तो अच्‍छा रहेगा.

          सभापति महोदया, इसके साथ ही प्राइवेट स्‍कूल भी प्रदेश में बहुत हैं, प्रदेश में 32 हजार प्राइवेट स्‍कूल हैं, जिसमें करीब 1 करोड़ बच्‍चे पढ़ते हैं. उनको भी सुविधायें दी जानी चाहिए. उद्योगों को सुविधा दी जाती है, सब्सिडी दी जाती है, उसी प्रकार स्‍कूलों के लिए भी सरकार को कुछ करना चाहिए. मेरा आग्रह है कि RTE की फीस के रूप में उन्‍हें रुपये 5-6 हजार दिए जाते हैं जबकि दूसरे प्रदेशों में स्‍कूल की फीस के बराबर राशि दी जाती है, इसलिए हमारे यहां भी कम से कम सम्‍मानजनक फीस स्‍कूलों को दी जाये. जिससे स्‍कूल उन बच्‍चों को सही ढंग से पढ़ा सकें. RTE के अंतर्गत काफी बच्‍चे पढ़ते हैं, रुपये 5-6 हजार में कुछ नहीं होता है. इसे कम से कम रुपये 25 हजार किया जाये, जिससे स्‍कूल वाला भी काम करेगा. हमारे प्रदेश के सरकारी स्‍कूलों में प्रति बच्‍चे के हिसाब से रुपये 42 हजार से अधिक का खर्च होता है, प्राइवेट स्‍कूल वाले को रुपये 25 हजार भी मिलेगा तो वह तसल्‍ली से पढ़ायेगा.

          सभापति महोदया, मेरा आग्रह है कि सांदीपनि स्‍कूल खुल रहे हैं, हरदा शहर में जो स्‍कूल खुलना है, उसमें वहां के गर्ल्‍स स्‍कूल को परिवर्तित किया जा रहा था चूंकि वहां केवल एक गर्ल्‍स स्‍कूल है इसलिए उसे सांदीपनि स्‍कूल में परिवर्तित न किया जाये और हरदा के महात्‍मा गांधी हायर सेकण्‍डरी स्‍कूल को सांदीपनि स्‍कूल में परिवर्तित कर दिया जाये तो बड़ी कृपा होगी. हमारे यहां हांडिया तहसील, मगरदा क्षेत्र जो आदिवासी क्षेत्र से लगा है, मोरगड़ी, चारवा क्षेत्र, मसनगांव में भी सांदीपनि स्‍कूल खोले जायें. इस तरह से 4-5 और सांदीपनि स्‍कूल खुलेंगे तो क्षेत्र का विकास होगा और सभी को शिक्षा मिलेगी. स्‍कूल शिक्षा के संबंध में कहने को तो बहुत सी बातें थीं, मैं मंत्री जी से मिलकर बात कर लूंगा.

          सभापति महोदया, मेरा निवेदन है उच्‍च शिक्षा के संबंध में है कि हमारे हरदा में हरदा डिग्री कॉलेज हैं, जहां 4-5 हजार बच्‍चे हैं और जगह केवल 30-40 हजार स्क्वायर फीट है, उसमें भवन है. उसके लिए नई जगह पर भवन बनाने के लिए, स्‍थान आवंटित किया जाये और वहां नया भवन बनायेंगे तो अच्‍छा रहेगा. मंत्री जी से निवेदन है कि वहां हमारा पॉलिटेक्निक कॉलेज है, मंत्री जी ने उसे स्‍वयं देखा है कि वहां सीमेंट गिर रहा है, कोई दुर्घटना हो, उससे पहले उस भवन को बदला जाये और पॉलिटेक्निक कॉलेज को इंजीनियरिंग कॉलेज में परिवर्तित किया जाये, क्‍योंकि वह बहुत पुराना कॉलेज है.

          सभापति महोदया, कृषि महाविद्यालय के विषय में कहूंगा कि हरदा कृषि प्रधान जिला है, इसे मिनी पंजाब भी कहा जाता है. कृषि महाविद्यालय की वहां कई बार घोषणा हुई है, तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री जी ने कई बार घोषणा की, परंतु वहां कॉलेज नहीं खुला, वहां कृषि महाविद्यालय खोला जाये क्‍योंकि वहां कृषि विभाग के पास 90 एकड़  जमीन भी है, इससे बच्‍चों को सुविधा होगी, क्षेत्र में नए प्रयोग होंगे और अच्‍छी फसल के लिए काम भी होगा.

          सभापति महोदया, हरदा जिला ही एक छूटा हुआ जिला है, आप सभी जिलों में मेडिकल कॉलेज की बात कर रहे हैं. हमारे यहां 250 बेड का अस्‍पताल बन गया है, उसमें मेडिकल कॉलेज खोला जाए, जिससे वहां के लोगों को फायदा मिलेगा.

          सभापति महोदया, मेरी ये मांगें पूरी हो जायेंगी, तो मेरे जिले का विकास हो जायेगा और लोगों को अच्‍छी शिक्षा मिलेगी. हमारे उच्‍च शिक्षा जी को धन्‍यवाद कि उन्‍होंने हमारे यहां विधि महाविद्यालय चालू करवाया, भवन बन रहा है और वहां 2 सांदीपनि स्‍कूल बनकर तैयार हो गए हैं, टिमरनी विधान सभा का सांदीपनि स्‍कूल भी तैयार है, जल्‍दी उसका उद्घाटन करें, ऐसा स्‍कूल शिक्षा मंत्री जी से आग्रह है. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, धन्‍यवाद, जय हिन्‍द, जय भारत.

          श्री विवेक विक्‍की पटेल (अनुपस्थित)

          श्री श्रीकांत चतुर्वेदी      (अनुपस्थित)

          श्री महेश परमार (तराना)-- माननीय सभापति महोदया, मैं आपके माध्‍यम से माननीय परिवहन मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि उज्‍जैन आरटीओ में अरुणाचल प्रदेश और अन्‍य प्रदेशों की हजारों गाडि़यों का पंजीयन कर रहे हैं. एनओसी (नो ऑब्‍जेक्‍शन प्रमाणपत्र) उसकी जांच करवाएं और वह कई वर्षों से वहां जमें हुए हैं. यह एक बड़ा भ्रष्‍टाचार है और जो गाडि़यां उन प्रदेशों में नहीं चल सकती हैं वह उन गाडि़यों का पंजीयन हमारे क्षेत्र में कर रहे हैं. इससे हमारे मध्‍यप्रदेश में प्रदूषण हो रहा है और बाकी सारी चीजें आपके सामने हैं. मेरा निवेदन है कि इसकी जांच करवाकर, इसका निराकरण करवाएं.

          श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर (पृथ्‍वीपुरा)-- माननीय सभापति महोदया, मैं मांग संख्‍या 44 और 27 की अनुदान मांगों के कटौती प्रस्‍तावों पर अपनी बात रख रहा हूं. सबसे पहले तो आपका धन्‍यवाद कि मुझे इस सत्र में पहली बार बोलने का अवसर मिला है. मैं बड़े दु:ख के साथ इस सदन में कहना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश के उच्‍च शिक्षा विभाग का यह बजट युवाओं के साथ सीधा अन्‍याय है. सरकार आंकड़ों की बजीगरी कर सकती है, लेकिन हकीकत यह है कि यह बजट विकास का नहीं व्‍यवस्‍था चलाने भर का बजट है. महंगाई लगातार बढ़ रही है. कॉलेज के खर्च बढ़ रहे हैं, लेकिन उच्‍च शिक्षा के बजट में जो वृद्धि दिखाई दे रही है वो केवल कागजी़ है. वास्‍‍तविक रूप से यह बजट ठहराव का बजट है. प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में हजारों पद रिक्‍त पड़े हुए हैं. असिस्‍टेंट प्रोफेसर नहीं हैं, प्रयोगशाला सहायक नहीं हैं, लाइब्रेरियन नहीं हैं और सरकार कहती है कि शिक्षा की गुणवत्‍ता बढ़ रही है. क्‍या अतिथि विद्वानों के भरोसे प्रदेश का भविष्‍य बनाया जाएगा? क्‍या युवाओं का भविष्‍य संविदा पर चलेगा. विश्‍वविद्यालयों और महाविद्यालयों की इमारतें जर्जर हैं. एससी, एसटी, ओबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति समय पर नहीं मिल रही है. गरीब छात्र फीस जमा करने के लिए दर-दर भटकता है क्‍या यही युवा सशक्तिकरण है. नई यूनिवर्सिटीज़ की घोषणाएं कर देना तो आसान है, लेकिन उनके लिए पर्याप्‍त फंड कहां है. पहले जो संस्‍थान हैं उन्‍हें तो मजबूत कीजिए. रिसर्च के नाम पर राज्‍य विश्‍वविद्यालयों को नाम के लिए राशि दी जा रही है. राष्‍ट्रीय स्‍तर पर प्रतिस्‍पर्धा की बात करते हैं, लेकिन संसाधन देने में सरकार पीछे हट जाती है और सबसे गंभीर सवाल है कि डिग्री देने वाली व्‍यवस्‍था तो बना दी लेकिन रोजगार देने वाली व्‍यवस्‍था कहां हैं. उच्‍च शिक्षा का उद्येश्‍य केवल प्रमाण पत्र देना नहीं बल्कि युवाओं को आत्‍मनिर्भर बनाना है. इस बजट में इंडस्‍ट्री लिंक शिक्षा, स्किल स्‍टार्टअप, प्‍लेसमेंट इन सभी पर ठोस रणनीति नजर नहीं आती है. यह बजट युवाओं की आकांक्षाओं के साथ न्‍याय नहीं करता और ज्ञान की दिशा में आगे भी नहीं ले जाता. यह बजट केवल घोषणाओं का दस्‍तवेज बनकर रह गया है. मैं सरकार से मांग करता हूं कि रिक्‍त पदों पर तुरंत नियमित भर्ती हो, ग्रामीण कॉलेजों के लिए विशेष इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पैकेज दिया जाए. छात्रवृत्ति समयबद्ध और पारदर्शी प्रणाली हो. सरकार के लिए शायद उच्‍च शिक्षा प्राथमिकता नहीं बल्कि औपचारिकता बनकर रह गई है. प्रचार में करोड़ों रुपए खर्च हो सकते हैं, लेकिन प्रोफेसर्स की भर्ती के लिए खजाना खाली हो जाता है. सरकार कहती है कि वह ज्ञान की अर्थव्‍यवस्‍था बना रही है, लेकिन सच्‍चाई यह है कि हमारे विश्‍वविद्यालय संस्‍थानों के अभाव में संघर्ष कर रहे हैं.

          सभापति महोदया, घोषणाओं से रैंकिंग नहीं सुधरती है, निवेश से सुधरती है.  अगर यही नीति रही तो मध्‍यप्रदेश के युवा डिग्री लेकर बेरोजगारी की लाईन में खड़े रहेंगे और सरकार उपलब्धियों की प्रेस कांफ्रेन्‍स करती रहेगी. यह बजट युवाओं के सपनों को पंख देने का नहीं बल्कि इंतजार कराने का बजट है. डिग्री देने से भविष्‍य नहीं बनता है, गुणवत्‍ता और रोजगार देने से भविष्‍य बनता है और इस बजट में दोनों की ही कमी साफ दिखाई देती है. सरकार यदि सच में युवाओं के साथ है तो आंकड़ों की ढाल छोड़कर भर्ती बजट और बुनियादी सुधार पर निर्णय लें. मैं निवाड़ी जिले से आता हूँ. निवाड़ी जैसा नवगठित जिला उच्च शिक्षा व शिक्षा में आज भी संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है. शासकीय महाविद्यालयों में स्थायी प्राध्यापक नहीं हैं. छात्र-छात्राओं को विषय तो मिल जाते हैं लेकिन विषय विशेषज्ञ नहीं मिलते हैं. कई विभाग अतिथि विद्वानों के भरोसे चल रहे हैं. प्रयोगशालाओं में आधुनिक उपकरणों की कमी है. लायब्रेरी में नई पाठ्य पुस्तकों का अभाव है. ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण यहां के छात्रों के पास निजी कॉलेज का विकल्प भी नहीं होता है. वे पूरी तरह से सरकारी व्यवस्था पर निर्भर हैं. मैं सरकार से पूछना चाहता हूँ क्या निवाड़ी जिले के युवाओं के सपने छोटे हैं. क्या उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार नहीं है. यदि उच्च शिक्षा व शिक्षा का बजट वास्तव में युवाओं के लिए होता तो निवाड़ी जैसे जिले के कॉलेजों को विशेष पैकेज दिया जाता. लेकिन आज भी वहां पर बुनियादी ढांचे और स्थायी भर्ती की प्रतीक्षा है.

          सभापति महोदया, मैं, अंत में शिक्षा मंत्री जी से अपने विधान सभा क्षेत्र के लिए मांग करना चाहता हूं. मैंने एक सूची आपको भेजी भी है. मेरा विनम्र निवेदन है कि जिन स्कूलों की हालत जर्जर है, कई जगह शौचालय नहीं है, फर्नीचर बहुत खराब है. जल्दी से जल्दी इनकी स्वीकृति कर दें जिससे हमारे क्षेत्र के छात्र-छात्राओं के साथ भी न्याय हो. इसी के साथ मैंने सांदिपनी स्कूल के लिए भी आपसे मांग की है. मैं चाहूंगा कि पृथ्वीपुर विधान सभा क्षेत्र के जीरोन, मोहनगढ़, दिगौड़ा मैं अगर आप सांदिपनी स्कूल देते हैं तो हमारे क्षेत्र के जो नौजवान हैं उनका भविष्य भी उज्जवल होगा उनको बेहतर शिक्षा मिल सकेगी. यह आपसे कामना है. उच्च शिक्षा मंत्री जी से भी चाहूंगा कि हमारे यहां पृथ्वीपुर विधान सभा में मोहनगढ़ महाविद्यालय है इसमें खेल का मैदान और कुछ बेहतर व्यवस्थाएं हो सकें. पृथ्वीपुर महाविद्यालय में यदि एक ऑडिटोरियम उपलब्ध करा सकें तो आपकी बड़ी कृपा होगी. सभापति महोदया, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री सुरेन्द्र सिंह गहरवार (चित्रकूट) -- माननीय सभापति महोदया, मैं मांग संख्या 27 स्कूल शिक्षा और मांग संख्या 44 उच्च शिक्षा के पक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं.

          माननीय सभापति महोदया, जो भी बच्चा किसी ऊंचाई तक पहुंचता है उससे जब भी उसकी सफलता के बारे में पूछा जाता है तो वह उसमें अपनी मां और गुरुओं का बहुत बड़ा योगदान बताता है. हर बच्चे का पहला स्कूल उसकी माँ होती है. जितनी होशियार, जितनी समझदार, विवेकशील माँ होगी आने वाली पीढ़ी उतनी ही होशियार होगी. मेरे दिमाग में कभी-कभी आता है कि देश की आजादी के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरु केम्ब्रिज और ऑक्फोर्ड के पढ़े थे, वे विद्वान थे. उन्होंने बालिका शिक्षा के बारे में क्यों नहीं सोचा. यदि उस समय बालिका शिक्षा अनिवार्य की गई होती तो आज अनावश्यक आबादी न बढ़ती और आने वाली पीढ़ियां...

          श्री महेश परमार -- सभापति महोदया, यह बिना मतलब की बात कर रहे हैं. ये जवाहरलाल नेहरु की बात कर रहे हैं.

          सभापति महोदया -- यह आप मुझ पर छोड़ दीजिए न, मुझ पर भरोसा रखें. सुरेन्द्र जी आप बजट पर बात करें.

          श्री सुरेन्द्र सिंह गहरवार -- सभापति महोदया, यदि बालिका शिक्षा को अनिवार्य किया जाता तो आने वाली पीढ़ी पढ़ी लिखी होती. बच्चे के जीवन को तराशने में माँ की बहुत बड़ी भूमिका होती है.

 

          गुरु कुम्हार शिष कुंभ है, गढ़ि गढ़ि काढ़ै खोट.

        अंतर हाथ सहार दै, बाहर बाहै चोट.

 

          सभापति महोदया, माँ की भूमिका कितनी बड़ी होती है. कुम्हार के चक्के में रखी मिट्टी से निर्मित होने वाले बर्तन का अंदाज कुम्हार लगा सकता है इसलिए कि रचनाकार कुम्हार है.  हर बच्चे की माँ रचनाकार है इसलिए जितनी होशियार, समझदार माँ होगी आने वाली पीढ़ियां उतनी ही होशियार होंगी. अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने कहा था कि मैं जो कुछ भी हूँ, जो कुछ भी बनने की आशा करता हूँ अपनी माँ का ऋणी हूँ. इसलिए माँ की भूमिका का कोई तोड़ नहीं है. दूसरा हिस्सा है गुरुओं का है जो भी बच्चा जब 5 साल का होकर स्कूल जाने लायक होता है तो उसमें गुरुओं की भूमिका बड़ी महत्वपूर्ण होती है. जितना स्‍कूल के संबंध में, शिक्षा के संबंध में बच्‍चा गुरु के ऊपर विश्‍वास करता है उतना माता-पिता के ऊपर भी नहीं करता. गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागे पांव, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय. गुरु की महत्‍ता को तो भगवान ने भी सराहा है. यह तन बिष की बेलरी गुरु अमृत की खान, शीश दिहे जो गुरु मिले तो भी सस्‍ता ज्ञान. यह गुरुओं का देश हमेशा से रहा है. दुनिया में गुरु ही पूजा गया है. मैं माननीय शिक्षा मंत्री जी को बहुत-बहुत बधाई और धन्‍यवाद दूंगा कि उन्‍होंने बच्‍चों को पढ़ने के लिए तमाम तरह की सुविधाएं, चाहे साईकिल हो, चाहे स्‍कूल, चाहे किताब हों, चाहे ड्रेस हो, मध्‍याह्न भोजन हो, चाहे सांदीपनि विद्यालय हों, मुझे भी एक सांदीपनि विद्यालय और दिया है इसके लिए उनको बहुत-बहुत बधाई. मैं गुरु का एक उदाहरण बताता हूं.

          सभापति महोदया -- बजट पर चर्चा करके अपने क्षेत्र का कोई विषय हो तो उस पर आप बात कर लें ऐसा मेरा आपसे आग्रह है.

          श्री सुरेन्‍द्र सिंह गहरवार -- सभापति महोदया, मेरा माननीय शिक्षा मंत्री जी से अनुरोध है कि चित्रकूट की सीमा 160 किलोमीटर लंबी पूर्व से पश्चिम तक है और 65 किलोमीटर चौड़ाई पर बसा है. 75 प्रतिशत हिस्‍सा जंगली है. एक सांदीपनि विद्यालय मंत्री जी ने दिया इसके लिए उनको बहुत-बहुत धन्‍यवाद बधाई. एक की मांग और है. पहले उनके दिमाग में यह बात कई बार डाली गई थी शायद उसका ख्‍याल किए होंगे. एक बरौंधा में भी कर दें. यह विद्यालय 50 किलोमीटर की दूरी पर होंगे. बिरसिंहपुर आपने दिया है. बिरसिंहपुर से 40-45 किलोमीटर दूर मझगवां में पहले से था और इतनी ही करीब 50-55 किलोमीटर दूरी बरौंधा की है. बरौंधा से नीचे भी 30-40 किलोमीटर पीछे तक आबादी है. यदि एक विद्यालय और दे दें तो बड़ी कृपा होगी. विद्यालय के संबंध में मेरे कुछ सुझाव हैं. पिछले साल हमको शिक्षक देर से मिले थे. इस साल उन्‍होंने जुलाई में शिक्षक दिया. निश्चित रूप से इससे पढ़ाई में बढ़ोत्‍तरी हुई है और इस साल मेरा प्रयास है शिक्षा के क्षेत्र में वहां 48 हायर सेकेंड्री, हाई स्‍कूल मेरे विधान सभा में हैं. उन 48 हायर सेकेंड्री, हाई स्‍कूलों में प्रत्‍येक विद्यालय में मैं गया. वहां दो-दो घण्‍टे रहा और बच्‍चों को बहुत सारे उदाहरण देकर समझाईश भी दी और 29 बच्‍चे 10 वीं की बोर्ड परीक्षा में 90 परसेंट से ऊपर लाये, जो जंगली, पहाड़ी और संघर्षरत् क्षेत्र में हैं और 90 परसेंट से ऊपर 9 बच्‍चे रिजल्‍ट लाये. 10 वीं के ऐसे 39 बच्‍चों को विधायक स्‍वेच्‍छा निधि से मैंने 10-10 हजार रुपये दिया. जो 12 वीं के बच्‍चे हैं उनको भी मैंने 15-15 हजार रुपये दिया ताकि इन जंगली क्षेत्र के बच्‍चों को आगे पढ़ाई के लिए प्रोत्‍साहन मिले. और बच्‍चे भी आगे आ जाएं इसलिए 80 से 90 प्रतिशत जो बच्‍चे रिजल्‍ट लाए हैं उनको मैंने 2-2 हजार रुपये दिया. थोड़ा सा उनका मनोबल बढ़े, थोड़ा उत्‍साह उनके मन में आए. हो सकता है अगले साल वह ज्‍यादा अंक लेकर आएंगे. उनको भी 10 हजार, 15 हजार रुपये दूंगा. उन बच्‍चों को मैंने कहा भी कि पढ़ाई के लिए माननीय मंत्री जी बहुत उदार हैं कभी कोताही नहीं करते और शिक्षा के प्रति काफी गंभीर हैं वह और मदद करके इस क्षेत्र में शिक्षा को और आगे बढ़ाएंगे.

          सभापति महोदया, मेरा लक्ष्‍य इस साल चित्रकूट विधान सभा के लिए था कि यदि मेरी विधान सभा के 4 बच्‍चे आईआईटी और ट्रिपलआईटी में शासकीय विद्यालय के आ सकते हैं तो इस साल 40 क्‍यों नहीं और पिछले साल का यदि रिजल्‍ट 40 परसेंट था तो इस साल उसको बढ़ाकर 70 परसेंट अर्थात् 30 परसेंट बढ़ाना है. मैं उन तमाम शिक्षकों को भी धन्‍यवाद देता हूं, बच्‍चों को, उनके अभिभावकों को भी कि वह पूरा प्रयास करके मुझे लगता है कि 30 परसेंट रिजल्‍ट भी बढ़ाएंगे. एक दर्जन से ज्‍यादा बच्‍चे इस साल फिर आईआईटी ट्रिपल आईटी के लिए पात्र होंगे. विद्यालय के लिए कुछ मेरे सुझाव हैं.

          सभापति महोदया -- अब आपको अपनी बात पूरी करनी पड़ेगी. आपका समय काफी हो चुका है. कन्‍क्‍लूड करें.

          श्री सुरेन्‍द्र सिंह गहरवार -- सभापति महोदया, बच्‍चे विचार संपन्‍न हों इसके लिए वैचारिक पढ़ाई पर भी थोड़ा सा ध्‍यान देने की जरूरत है. रूसी उपन्‍यासकार मैक्सिम गोर्की ने कहा था कि हम आसमान में पक्षियों की तरह उड़ सकते हैं. विज्ञान हमें आसमान में पक्षियों की तरह उड़ना सिखा सकता है विज्ञान हमें पानी में मछलियों की तरह तैरना सिखा सकता है पर विज्ञान हमें इंसान के रूप में जन्म लेकर इंसान जैसा बनना और इंसान जैसा रहना नहीं सिखा सकता है. सभापति महोदया, मैं विज्ञान का समर्थक हूं लेकिन आज जितनी बच्चे की पढ़ाई के लिये शिक्षा जरूरी है उससे ज्यादा कहीं संस्कार जरूरी हैं. और इसलिये हम रोजी रोटी के साथ साथ बच्चों को संस्कारित करें. बहुत सारे महान साहित्यकार हैं, लेखक हैं ..

          सभापति महोदया- आप कृपया अपनी बात समाप्त करे यह मेरा आपसे आग्रह है.

          श्री सुरेन्द्र सिंह गहरवार- एक मिनिट का समय दे दें. सभापति महोदय, मैं कह रहा था कि ऐसे महापुरूष जिनके शब्दों में इतनी जान थी कि उनके शब्दों से देश की आजादी में बहुत बड़ा उनका सहयोग मिला , उनको भी पढ़ाया जाये, बहुत अच्छे लेखक हैं उनको पढ़ाया जाये, वैज्ञानिकों को पढ़ाया जाये, नामचीन जो बड़े वकील हैं जिनकी प्रतिष्ठा कानून के क्षेत्र में देश में बढ़ी है उनको भी पढ़ाया जाये, बच्चे समझदार हों और आज के समय में मैं पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिह जी चौहान, वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी और देश के यशस्वी प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी को मैं बहुत बहुत धन्यवाद और बधाई दूंगा. कि बच्चियों के संबंध में खासकर के बच्चों के संबंध में जितनी भी योजनायें चल रही थीं उन सारी योजनाओं को और आगे बढ़ाने का काम उन्होंने किया क्योंकि एक कहावत है कि "पूत सपूत तो का धन संचय पूत कपूत तो का धन संचय" यदि सपूत है बच्चा , बच्चा पढ़ लिखकर के आगे निकल गया तो कमा लेगा और यदि बच्चा कपूत है तो भी बिगाड़ देगा इसलिये सपूत बनाने के लिये हमारी सरकार ने भरतीय जनता पार्टी की सरकार ने माननीय मुख्यमंत्री जी ने माननीय प्रधान मंत्री जी ने और माननीय शिक्षा मंत्री जी ने जो प्रयास किया है वह काफी सराहनीय हैं. हमारी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिये जितनी तपस्या कर रही है , आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है इसलिये निश्चित रूप से मैं उनको धन्यवाद देता हूं, और आपने मुझे बोलने का समय दिया , बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्री दिनेश गुर्जर (मुरैना) -- माननीय सभापति महोदय, मै माननीय मत्री जी को मुरैना जिले के स्कूलों के बारे मे कुछ विशेष बातें हैं, उनमें क्या क्या कमियां हैं उनसे इस सदन को अवगत कराना चाहता हूं.

          माननीय सभापति महोदय, हमारे क्षेत्र के शाला भवन बहुत खराब स्थिति में हैं, विद्यालयों में कई जगहों पर शौचालय, पीने के पानी, बिजली की व्यवस्था पर्याप्त नहीं होने से छात्र छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

          सभापति महोदया- एक मिनिट दिनेश जी. मैं आपसे और सभी माननीय सदस्यों से यह आग्रह कर रही हूं कि तीन तीन मिनट में अपनी बातें पूरी करने का कष्ट करे क्योंकि अभी मंत्रियों के विषय भी सामने आ जायें.

          श्री दिनेश गुर्जर- सभापति महोदय, आपने सीनियर लोगों को 1-1 घंटे बोलने का अवसर दिया और जूनियर लोग जो सीखना चाहते हैं उनको तीन मिनिट, क्या हम सीखेंगे और क्या हम बतायेंगे.

          सभापति महोदय- 1 घंटा कोई भी नहीं बोला मैंने तो ओपनिंग की थी मैं भी इतना नहीं बोली थी.

          श्री दिनेश गुर्जर -- सभापति महोदया हमारा आपसे आग्रह है कि हम लोगों पर आपका विशेष संरक्षण होना चाहिये.

          सभापति महोदया- समय सीमा में आप अपनी बात पूरी करें.

          श्री दिनेश गुर्जर --माननीय सभापति महोदया, मैं कह रहा था कि स्कूल में पर्याप्त सुविधा न होने के कारण छात्र छात्राओं को परेशानी होती है. शासकीय विद्यालय भवन, मुरैना जिले में कई जगह जर्जर हालत में हैं, कभी भी कोई गंभीर घटना हो सकती है. मेरी विधानसभा में भवन जर्जर हालत में तो है ही कक्षाओं के लिये कमरो की भी कमी है, चूंकि छात्र छात्राओं की संख्या अधिक है उसके अनुपात में कमरे कम हैं , इसलिये अतिरिक्त कक्षों का निर्माण सुनिश्चित किया जाये. छात्र छात्राओॆ के लिये छात्रवृत्ति कई जगह पर नहीं मिल पा रही है, सायकिल और यूनिफार्म समय पर न मिलने से छात्र छात्राओं को कठिनाई हो रही है, स्मार्ट क्लास, कमप्यूटर लैब, इंटरनेट और आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) उपकरण  होने के बाद भी नियमित रूप से उनका उपयोग नहीं हो रहा है.  खेल मैदान और खेल सामग्री की बहुत कमी है. स्थानीय स्तर पर शिक्षकों की भर्ती की जावे. वर्तमान में अतिथि शिक्षकों के ऊपर अधिक निर्भार है हमारा शिक्षा विभाग, यह निर्भरता कम की जावे. रेग्यूलर शिक्षकों की भर्ती की जावे.

          सभापति महोदया अगर सरकार गरीब किसान के बच्चों को अच्छी शिक्षा देना चाहती है तो यह सब सुख सुविधाये छात्र छात्राओं को मिलना चाहिये. मुरैना जिले के कई स्कूल में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी है . सरकार दावा करती है कि हमारी सरकार ने शिक्षा का स्तर सुधारा है तो फिर यह सब समस्यायें मेरे जिले में भी है और मैं समझता हूं कि मध्यप्रदेश के अन्य जगहों पर भी हैं.

          सभापति महोदया मेरी विधानसभा में कई जगह पर विद्यालय न होने  से वहां के छात्र छात्राओं के भविष्य बर्बाद हो रहे हैं. कारण बताये जाते है कि 1 किलोमीटर की दूरी पर शासकीय विद्यालय का भवन है इसलिये हम वहां पर विद्यालय नहीं दे सकते हैं. मैं माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि क्या गरीब किसान की बेटियों को पढ़ने का अधिकार नहीं है. अगर दूरी पर विद्यालय  हैं, तो   कुछ बसों की व्यवस्था की जाये, जिससे कि  उन बेटियों को  सुरक्षित  जाकर  और शिक्षा ग्रहण कर सकें.  यह मैं  शिक्षा मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं.  मैंने  पूर्व में कई बार मंत्री जी को  यह  अवगत कराया है कि मुरैना विधान सभा   क्षेत्र में  कई एडेड शालाएं  बंद होने के कारण  हमारे  छात्रा,छात्राएं शिक्षा ग्रहण  नहीं कर पा रहे हैं. मुरैना  नगर निगम के  वार्ड क्रमांक 45 में  अनुसूचित जाति का बहुत बड़ा  क्षेत्र है, वहां विद्यालय नहीं है सविता का पुरा.  मैं चाहता हूं कि  वहां  नया शासकीय विद्यालय  खोला जाये.  ग्राम पंचायत बरेड़ा, घुरैया का पुरा, वहां भी एक शासकीय  विद्यालय खोला जाये.  ग्राम पंचायत खिरावली, छर्रा  का पुरा में शासकीय  विद्यालय खोला जाये.  ग्राम पंचायत  बमरोली  बिसेठा  में  शासकीय विद्यालय खोला जाये.  ग्राम  पंचायत  गिरगौनी, ग्राम  गिरगौनी    में  शासकीय विद्यालय खोला जाये.  ग्राम पंचायत  धनेला,  सिहोरी का पुरा  में  शासकीय विद्याललय   भवन बहुत  जर्जर हालत में है. कभी भी  गंभीर घटना हो सकती है.  नवीन  विद्यालय भवन  वहां  बनाया जाये.  मेरे द्वारा दो वर्ष से यह मांग की जा रही है.  मैं शिक्षा मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि  मुरैना  क्षेत्र के  छात्र,छात्राओं  को  शिक्षा की बहुत आवश्यकता  है और  आपको वहां के लोगों को  बहुत  संरक्षण देना चाहिये.  ऐसी  व्यवस्था अगर आप  कर सकते हैं,   क्योंकि मैंने पूर्व में प्रश्न लगाया , तो मुझे जवाब आया था कि  यह डेढ़  किलोमीटर  दूरी  पर विद्यालय होने की वजह से हम  विद्यालय नहीं खोल सकते.  तो  क्या गरीब किसान का बेटा  प्रति दिन  डेढ़ किलोमीटर पैदल जायेगा और पैदल आयेगा, तो यह संभव नहीं है कि  वह गरीब का बेटा पढ़कर  और अपने  परिवार का पालन पोषण  कर सके. मेरी आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि  जो  मैंने आपको  अभी जो जानकारी दी है क्षेत्र में विद्यालय भवन और   विद्यालय खोलने की, तो  इस बजट में  मेरे यह सब जोड़ा जाये.  मैं सभापति जी को धन्यवाद देता हूं कि  मुझे बोलने का अवसर दिया, धन्यवाद.  एक बात  और कहना चाहता हूं कि  जो  विधायक निधि में   धार्मिक स्थानों पर हम लोगों को  काम करने के लिये वह नहीं है,  जबकि वह सार्वजनिक  रुप होता है. कोई मंदिर है,  अगर कोई  धार्मिक स्थान है,  तो  विधायक को यह अधिकार होना चाहिये कि वह अपनी विधायक निधि से  वहां  कोई काम करा सके. डब्ल्यूबीएम सड़क, अब 3-3 किलोमीटर  तक कई पंचायतों में..

          सभापति महोदयाइसका शिक्षा विभाग से क्या संदर्भ है.

          श्री दिनेश गुर्जरमजरे टोले में सड़कें नहीं हैं,  क्योंकि मैं बोल नहीं पाया था,  वह बताना चाह रहा हूं.   मजरे टोलों में डब्ल्यूबीएम  सड़क  का भी  विधायकों को अधिकार  दिया जाये, जिससे कि डब्ल्यूबीएम  सड़क बनाकर किसानों को सुविधा सड़क की दे सकें.

          श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा (सतना) सभापति महोदया, बहुत बहुत  धन्यवाद. मैं  मांग 27  पर बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. तमाम बातें हुई हैं शिक्षा को लेकर, लेकिन  कुछ शिक्षा की नीतियों में सुधार की जरुरत है,  उसके लिये मैं  मंत्री जी से यह आग्रह करता हूं कि  जो  सबसे बड़ा विषय है इन्फ्रास्ट्रक्चर,  वह तो आपके पास है ही शिकायतें.  मैं भी  बताऊंगा, लेकिन जो  नीतियों का विषय है,  वह है   अंग्रेजी शिक्षा का. आज हर  अभिभावक  अपने  बच्चे  को अंग्रेजी शिक्षा  देना  चाहता है. लेकिन शासन  की जो व्यवस्था है,  उसमें  9वी.10वीं,11वी,12वीं  में शायद है, एक्सीलेंस स्कूलों में  और संदीपनी  में भी शुरु हुआ है.  लेकिन  बाकी कोई भी स्कूलों में   अंग्रेजी शिक्षा की कोई व्यवस्था  नहीं है. तो कृपा करके अगला सत्र जो शुरु हो,  तो हम  इसको  ध्यान में रखें कि हर पंचायत स्तर पर   और  फिर दूसरा अगला विषय  आता है शहरी इलाके में. शहरी इलाके में जहां घनत्व ज्यादा है,  उन  शहरी इलाकों में  सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाएं  एकदम जीरो हैं.  बहुत जगह ऐसी हैं, जहां पर   आने जाने का रास्ता भी नहीं है.   बहुत जगह ऐसी हैं,   जहां  कक्ष तो बने हैं, लेकिन कक्ष के न आगे, न  पीछे  कोई स्थान नहीं है, जहां बच्चे  खेल सकें या बैठ सकें,  जिसके कारण  माता पिता अपने बच्चों को   असुरक्षित महसूस करते हैं और  मजबूरी  में भेजना पड़ता  है उन्हें प्रायवेट स्कूलों में और बड़ी महंगी, मोटी मोटी  फीसें देनी पड़  रही हैं. तो मैं  मंत्री  जी से अनुरोध करुंगा कि यह  दो  ऐसे विषय हैं,  जिस पर हमें गंभीरता से सोचना चाहिये, ताकि शहरी क्षेत्र में और भी अंग्रेजी  स्कूलें   खुल सकें  और जो आज के आधुनिक  दौर की शिक्षा है,  वह उन्हें मिल जाये.  दूसरा विषय यह है कि स्‍कूलों में चपरासी नहीं है. कई बार स्थिति यह आती है कि बच्‍चों से ही टीचर उम्‍मीद करने लगते हैं कि व्‍ययवस्‍था में कुछ छोटे-मोटे काम होते हैं, वह कहना मुझे ठीक नहीं लगता है. कई बच्चों से ही उम्‍मीद करने लगते हैं और कई बार बच्‍चे करते हैं और जब उसका वीडियो के सामने आता है और आम जनमानस के सामने आता है तो बड़ी किरकिरी होती है. सरकार की इतनी बड़ी व्‍यवस्‍था और इतनी बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था और सरकारी स्‍कूलों में चपरासी नहीं है. तो कम से कम यह नियम बनाया जाये कि स्‍कूलों में एक चपरासी जरूर हो और स्‍कूलों में सामान्‍य ज्ञान और खेल, सामान्‍य ज्ञान और खेल के प्रति जो सरकार को व्‍यवस्‍था देनी चाहिये प्राथमिक रूप से, वह व्‍यवस्‍था शून्‍य के बरा‍बर है.

 

7.38 बजे     { माननीय अध्‍यक्ष महोदय( श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए. }

       

        अध्‍यक्ष महोदय, हो सकता है कि कुछ रिकार्ड में हो. लेकिन जब हम फिजिकल रूप से स्‍कूल में जाते हैं और देखते हैं तो वहां पर कई बार कोई भी व्‍यवस्‍था नहीं है. साथ ही हमारे इलाके मझगवां में जो आपका सांदिपनी स्‍कूल है, वहां पर परिवहन के लिये बस की व्‍यवस्‍था की गयी थी उसका भुगतान न होने के कारण कई महीने बच्‍चों ने स्‍कूल आने-जाने में सफर किया है. 

          आदरणीय अभी गहरवार जी बोल रहे थे तो उन्‍होंने इस बात का जिक्र नहीं किया कि बसों का भुगतान न होने के कारण बच्‍चों को 15-20 मिलोमीटर सफर करना पड़ा है. यह भी एक बहुत महत्‍वपूर्ण विषय है. चूंकि समय का अभाव है इसलिये ज्‍यादा समय नहीं लूंगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, मेरे सतना विधान सभा क्षेत्र के कुछ स्‍कूल हैं, जिनका मैं चाहता हूं कि उनका उन्‍नयन हो. उनमें से गलहटा एक हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल है, उसमें अतिरिक्‍त कक्ष की भी आवश्‍यकता है और उन्‍नयन की भी आवश्‍यकता है. इसी तरह हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल कुंआ है, उसमें भी कक्ष की आवश्‍यकता है. साथ ही साथ माद में शासकीय हाई स्‍कूल है, जहां पर अतिरिक्‍त कक्ष की भी आवश्‍यकता है और उन्‍नयन की भी आवश्‍यकता है. शासकीय हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल खमरिया-तिमरयान वहां पर भी अतिरिक्‍त कक्ष की आवश्‍यकता है. रामस्‍थान हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल जहां पर कक्ष की और उन्‍नयन की आवश्‍यकता है. सुहास शासकीय हाई स्‍कूल, यहां पर स्‍कूल के उन्‍नयन की भी आवश्‍यकता है और यहां पर एक विषय और है कि स्कूल की जमीन कम होने के कारण गांव वालों ने एक एकड़ जमीन अपनी दान में दी. चूंकि उनके परिजन सेना में थे तो वह चाहते थे कि उस स्‍कूल का नाम उनके नाम पर हो. उन्‍होंने उसकी कार्यवाही भी की है. इसलिये कृपया संज्ञान में ले लें.

          अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह नगर निगम क्षेत्र में कृपालपुर में वार्ड क्र. 16 में स्‍कूल के कक्ष के निर्माण की आवश्‍यकता है और उन्‍नयन की भी आवश्‍यकता है. साथ ही वार्ड नंबर-14, 37 और वार्ड नंबर-43-44 के मध्‍य एक गर्ल्‍स हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल की आवश्‍यकता है. मैं माननीय मंत्री जी से उसके लिये अनुरोध करना चाहता हूं. एक विषय और अभी जब हमारे एक विधायक साथी बोल रहे थे कि शिक्षा की जरूरतें और शिक्षा की शुरूआत की जब बात हो रही थी तो मैं उस संबंध में सदन का ध्‍यान आकर्षित कराना चाहता हूं कि यह वही भारत है, जहां पर शिक्षा आम आदमी की पहुंच से बहुत दूर थी. उसके धन्‍यवाद करना चाहता हूं इस सदन में कि माता सावित्री बाई फूले, महात्‍मा ज्‍योति बा राव फूले, फातिमां शेख जिन्‍होंने शिक्षा के दरवाजे आम लोगों के लिये खोले. यह बात भी सदन के लोगों को जानना चाहिये. जब भी कोई बात आती है तो हम हर बार कांग्रेस के ऊपर आरोप लगाते हैं. देश आजाद कब हुआ, अभी किसी ने कहा कि तब बजट इतना था और हमने इतना कर दिया. जब देश आजाद हुआ तो हमें क्‍या मिला था ? आप बीमारू राज्‍य की बात कर रहे हो. अरे, हम तो गुलाम देश से आजाद भारत बनाये हैं, यह वहीं कांग्रेस है. मेरा आपसे सिर्फ अनुरोध है कि सदन में कोई भी सदस्‍य बात करे तो मर्यादित ढंग से करे. भाजपा और कांग्रेस को देख कर बात ना करे. आज वर्तमान की जो परिस्थितियां हैं, उसमें क्‍या सुधार कर सकते हैं, क्‍या व्‍यवस्‍था दे सकते हैं. हमारे पास आज जो संसाधन हैं तो क्‍या वह 50 या100 साल पहले थे. उन संसाधनों को जुटाते-जुटाते आज देश यहां तक पहुंचा है तो मेरा अध्‍यक्ष महोदय से और सदन से अनुरोध है कि इन सब चीजों से लोगों को जरूर अवगत कराया जाये. मैं अपनी बात यही पर खत्‍म करता हूं. धन्‍यवाद.                                                                     

श्री कमलेश्वर डोडियार (सैलाना) - अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र सैलाना में रावटी क्षेत्र एक बड़ी आबादी वाला इलाका है जहां केवल एक हायर सेकण्ड्री स्कूल है और उसको सांदीपनि स्कूल के रूप में उसको विशिष्ट संस्थान बना दिया गया है, जिससे आसपास के सैंकड़ों विद्यार्थी आगे की पढ़ाई करने के लिए प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं, इसलिए मेरा आग्रह है कि  रावटी अंचल में जो हाईस्कूल हैं यहां पर इनका उन्नयन करके हायर सेकण्ड्री स्कूल किया जावे और बाजना में सांदीपनि स्कूल स्वीकृत नहीं हुआ है, मेरा स्कूल शिक्षा मंत्री से मेरा निवेदन रहेगा कि बाजना में सांदीपनि स्कूल स्वीकृत किया जाय. बाजना विकासखण्ड के लिए पहले कन्या शिक्षा के लिए एक संस्थान स्वीकृत हुआ था. उसको भी रतलाम जिला मुख्यालय में बना दिया है और अभी बाजना का स्वीकृत ही नहीं हुआ है. मेरा आग्रह है कि बाजना में सांदीपनि स्कूल स्वीकृत किया जाय.

अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में ज्यादातर स्कूल में प्राथमिक विद्यालय के भवन नहीं हैं. जो है वह जर्जर हैं खराब हालत में हैं इसलिए बहुत ज्यादा खराब हालत वाले स्कूल का परीक्षण किया जाय और नये भवन स्वीकृत किये जायं. मेरे क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्र वाले विद्यालयों में शौचालय नहीं है. यहां तक कि छात्राओं के लिए भी शौचालय नहीं हैं. अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में नर्सिंग शिक्षा प्रदान करने वाले कुछ निजी संस्थान हैं. माही कालेज, कालेज आफ सैलाना, महाराजा इंद्रजीत कालेज, आधार नर्सिंग कालेज इन कालेजों में पिछले 3 वर्षों से परीक्षा नहीं हुई है और 3 वर्षों से एसटी, एससी के जो स्टूडेट्स होते हैं उनको छात्रवृत्ति भी नहीं मिली है.

अध्यक्ष महोदय, सभी विद्यार्थियों को डरा-धमकाकर उनसे ब्लैक मेलिंग कर फीस सारे प्राइवेट नर्सिंग कालेज बच्चों से वसूल कर ले रहे हैं. मेरा आपसे आग्रह है इस प्रकार से जो शिक्षा के नाम पर खासकर नर्सिंग कालेजेस में इस प्रकार का अपराध करने वाले खुले में घूम रहे हैं, इनके खिलाफ मुकदमा दर्ज होना चाहिए और छात्र छात्राएं न तो वहां उसी प्राइवेट कालेज में नर्सिंग की पढ़ाई पूरी कर पा रहे हैं और न ही किसी दूसरे नर्सिंग कालेज में एडमिशन के लिए वहां से उनको डाक्यूमेंट दिये जा रहे हैं. मतलब छात्र का जीवन पूरा अटका हुआ है, इसलिए मेरा निवेदन है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र के सारे नर्सिंग कालेजेस की जांच हो और विद्यार्थियों के साथ न्याय हो.

अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में रावटी में एक कालेज संचालित है. एक प्राथमिक स्कूल है और उसके दो कमरे हैं वह पूरी तरीके से जर्जर है और टूटा हुआ है, उसमें कालेज संचालित है. मेरा आपके माध्यम से आग्रह है कि रावटी में सरकारी कालेज के लिए भवन स्वीकृत किया जाय और रावटी कालेज के अंदर में केवल साइंस के पाठ्यक्रम संचालित हैं. जबकि आदिवासी इलाका है ज्यादातर बच्चे स्टूडेट्स हैं आर्ट्स सब्जेक्ट पढ़ने को प्राथमिकता देते हैं. इसलिए रावटी कालेज के अंदर में आर्ट्स के पाठ्यक्रम, कला संकाय के पाठ्यक्रम संचालित किये जाएं, जैसे कि बीए और बाजना के अंदर में केवल आर्ट्स है वहां साइंस पाठ्यक्रम शुरू किया जाय, यह मेरी मांग है और सैलाना विधान सभा क्षेत्र में खेतीबाड़ी में अग्रणी रहता है रतलाम जिले का जहां मक्का कपास, बालम ककड़ी इस प्रकार की कुछ फसलें हैं जो विख्यात हैं यहां बच्चे कृषि संकाय की पढ़ाई करने को प्राथमिकता देते हैं, उनको बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई करने के लिए जिले से बाहर काफी दूर जाना पड़ता है, इसलिए मेरा आग्रह है कि रतलाम जिले मेरे विधान सभा क्षेत्र सैलाना में कृषि की पढ़ाई करने के लिए कृषि का एक कालेज खोला जाय. अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

 

श्री सुरेश राजे (डबरा) - अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 27, 36 पर अपनी बात रखने के लिए खड़ा हुआ हूं. अध्यक्ष महोदय, मैं सीधे सीधे समय के अभाव को देखते हुए आपको कुछ कहें इससे पहले ही मैं कोशिश करूंगा कि समय के अंदर अपनी बात रख लूं.

अध्यक्ष महोदय - आप सीधे ही आ जाओ.

श्री सुरेश राजे - अध्यक्ष महोदय, मेरा सबसे पहले प्रमुख जो निवेदन है, जो मेरी मांग है. वह डबरा में कन्या महाविद्यालय है. आपको ज्ञात है कि कितनी जरूरी मांग है. माननीय मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि कन्या महाविद्यालय डबरा में अति आवश्यक है. क्‍योंकि वहां से दूरी लगभग 100 किलोमीटर के आसपास है, जिस कारण हमारी बेटियां शिक्षा अधूरी छोड़ने के लिए मजबूर हो जाती हैं. मेरा आपसे निवेदन है कि हमारे बिलउवा नगर पंचायत, पिछोर नगर पंचायत में हमारा जो हाई स्‍कूल है, उसको हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल करें, क्‍योंकि बच्‍चियों को बहुत दूरी पड़ती है. चीमत में एक हाई स्‍कूल कन्‍याओं के लिए खोलना अति आवश्‍यक है. दूसरा बात यह है कि नोन नदी सिमरिया में हाई स्‍कूल के लिए  बहुत पहले से प्रस्‍तावित मांग थी, लेकिन पता नहीं किन कारणों से यह नहीं बन पाया.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान परिवहन विभाग की ओर भी आकृष्‍ट करना चाहूंगा कि एक तो हमारा परिवहन विभाग जो रोड टैक्‍स लेता है, तो फिर टोल टैक्‍स क्‍यों ले रहा है, यह समझ से परे है. दूसरा टोल के ठेके की पूरी वसूली होने के बाद कई टोल ऐसे चल रहे हैं जो लगातार वसूली करते जा रहे हैं, इस ओर भी विभाग को ध्‍यान देना होगा. मैं यह कहना चाहता हॅूं कि हर टोल बेरियर पर एक डिस्‍पले होना चाहिए कि यह टोल कब तक वसूला जाएगा. इसकी समयसीमा तो होना चाहिए और आरटीओ बेरियर खतम होने के बाद नये बेरियर खुल गए हैं. हम जब आते हैं तो पहले तो पता चलता था कि एक आरटीओ बेरियर है लेकिन हर 10-20 किलोमीटर की दूरी पर एक गाड़ी खड़ी होती है, उसमें चार लोग खडे़ होते हैं. उसमें अधिकारी है, नहीं है, कोई नेमप्‍लेट नहीं है, बस सीधा उन्‍होंने हाथ दिया और नया काम शुरू हो गया है, तो विभाग को इस ओर भी बिल्‍कुल निश्‍चित रूप से ध्‍यान देना चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत गंभीर विषय है, जिसको मैं आपके माध्‍यम से उठाना चाहता हॅूं कि शहर के अंदर भी हेलमेट बहुत जरूरी है. ठीक है, सुरक्षा की दृष्‍टि से हेलमेट होना चाहिए. लेकिन शहर के अंदर जब 10 किलोमीटर की रफ्तार से बाइक या स्‍कूटी चलती है और एक ही शहर में लोगों को 3-3, 4-4 जगहों पर हेलमेट के नाम पर रोका जाता है और चेकिंग के नाम पर लोगों को परेशान किया जाता है. शहर में कम से कम इस हेलमेट से छुटकारा दिलाएं. यह बहुत समस्‍या है. होता यह है कि कोई भी जनप्रतिनिधि हो, जैसे हम डबरा के विधायक हैं और कोई व्‍यक्‍ति ग्‍वालियर से फोन करता है कि विधायक जी, हमारे पास हेलमेट नहीं था, हमें उसकी वजह से रोक लिया गया है. अब उनके नियम में है, तो ठीक है लेकिन शहर के अंदर तो कम से कम हेलमेट से छूट दिलाई जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हॅूं कि भारी वाहन, चाहे वह गिट्टी भरकर चलें, चाहे बालू भरकर चलें, जो भी चीज भरकर चलें लेकिन वह ओवर लोडिंग इनको दिखाई नहीं देता है लेकिन वह दो पहिया वाहन जरूर दिख जाता है और एक जगह नहीं, बल्‍कि चार-चार जगहों पर चेकिंग के नाम पर लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

          अध्‍यक्ष महोदय, टोल टैक्‍स पर जो बेरियर गिरता है, कई बार यह देखने में आया है कि उनके कम्‍प्‍यूटर खराब होने के कारण जो भी दिक्‍कत आती है, उससे वहां लंबी-लंबी लाइनें लग जाती हैं. इसलिए इसमें भी विभाग को विशेष रूप से ध्‍यान देना होगा. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए आपको दिल से धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय -- सुश्री रामसिया जी. अब आप सभी एक-एक मिनट में अपनी बात पूरी करेंगे.

          सुश्री रामश्री राजपूत (बहिन रामसिया भारती) (मलहरा)  -- धन्‍यवाद माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया. मैं मांग संख्‍या 44 पर मैं बोलने के लिए खड़ी हुई हॅूं. बड़ा मलहरा विधानसभा क्षेत्र के स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय के निर्माण और विकास के मुद्दे पर मैं अपनी बात रखना चाहती हॅूं. हमारा क्षेत्र मध्‍यप्रदेश का एक गौरवान्‍वित हिस्‍सा है, जहां ग्रामीण युवा शिक्षा के बल पर देश को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहते हैं लेकिन सच्‍चाई यह है कि उच्‍च शिक्षा की कमी हमारे युवाओं के सपनों को पूरा करने में बाधक बन रही है. बड़ा मलहरा क्षेत्र में स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय की आवश्‍यकता है. क्‍योंकि यहां सैकड़ों छात्र स्‍नातक करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए बाहर जाते हैं. यह न केवल आर्थिक बोझ को बढ़ाते हैं, बल्‍कि अगर देखा जाए, तो यह लड़कियां की सुरक्षा और शिक्षा को भी प्रभावित करता है. हमारे क्षेत्र में 18 से 25 वर्ष की आयु के 40 प्रतिशत से अधिक युवा उच्‍च शिक्षा से वंचित हैं. स्नातकोत्तर महाविद्यालय खुलने से न केवल डिग्री प्राप्त होगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. वर्तमान में बड़ा मलहरा में स्नातक स्तर पर उपलब्ध विषयों के बारे में आपका ध्यानाकर्षित करना चाहूंगी. बड़ा मलहरा के कॉलेज में केवल कामर्स विषय है. पीसीएम और एग्रीकल्चर की संकाय की स्वीकृति दी जावे माननीय मंत्री जी तो कृपा होगी. इसी प्रकार के बकसुआ कॉलेज में केवल पीसीएम विषय पर पढ़ाई हो रही है. बकसुआ कॉलेज में एग्रीकल्चर, कामर्स, संस्कृत, जिओग्राफी की संकाय स्वीकृति प्रदान की जाये तो आपकी बड़ी कृपा होगी. अध्यक्ष महोदय, मैं उच्च शिक्षा मंत्री जी के लिये मैं यह कहना चाहूंगी कि हमारी बड़ा मलहरा की जनता की ओर से भी कहना चाहूंगी कि चाह आनो से पैसों में आती रही, चाह पैसों से रूपया बनाती रही, चाह क्या क्या न करती, कराती रही. मुझे तो विकास की चाह चाहिये और अगर आप भी वह चाहें तो फिर हम लोगों को क्या चाहिये ? धन्यवाद.

          श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल((मुड़वारा)अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 27 एवं 44 के पक्ष में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. मैं जिले के प्रभारी मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि उन्होंने भवनों के लिये फंड दिया है. मैं चाहूंगा कि उनकी ओर से एक निर्देश हो जाये कि जितने भी भवन जर्जर हैं, अथवा कमरों की संख्या कम है उसको बनाकर के राशि का सदुपयोग करें. माननीय उच्च शिक्षा मंत्री जी की काफी योजनाओं के बारे में प्रकाश डाला जा चुका है. मैं मांग रखना चाहता हूं कि जबलपुर हाईकोर्ट बहुत नजदीक है हमारे काफी अधिवक्ता वहां पर प्रेक्टिस करते हैं, लेकिन दुर्भाग्य है कि कटनी में एक भी विधि महाविद्यालय नहीं है. मेरी एक विधि महाविद्यालय की मांग है उसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र की दो बड़ी पंचायतें जिनमें लगभग सात आठ किलोमीटर से बच्चे आते हैं. कनवाड़ा एवं निवाड़ में दोनों में एक एक महाविद्यालय की मेरी मांग है. मैं आग्रह करता हूं कि उसको पूर्ण करने का आग्रह है. महाविद्यालय में जनभागीदारी में शासकीय कन्या विद्यालय में काफी काम हुआ है, वहां अतिरिक्त कक्ष की आवश्यकता है. आपने नया कॉलेज दिया इसके लिये आपका तथा माननीय मुख्यमंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूं. लेकिन कॉलेज में कुछ कक्षों की आवश्यकता है जिला प्रशासन से बात करके 15 एकड़ भूमि भी आवंटित कराई जा रही है. तो उसमें एक खेल मैदान की आवश्यकता है. आपने तिकक कॉलेज में कम्प्यूटर कक्ष के लिये 3 करोड़ रूपये और पॉलिटेक्नि कॉलेज के लिये 5 करोड़ रूपये माईनिंग विंग के लिये दिये हैं उसके लिये आभार व्यक्त करता हूं. धन्यवाद.

          श्री विवेक विक्की पटेल(वारासिवनी)अध्यक्ष महोदय, मांग संख्या 47 तकनीकी शिक्षा और कौशल पर बोलना चाहता हूं. सरकार ने वर्ष 2026-27 में तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के लिये मात्र 2925 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है. यह कुल बजट का लगभग 0.67 परसेंट है, जो कि बहुत कम है. पिछले बजट से मात्र 154 करोड़ रूपये की वृद्धि है. प्रदेश में युवा आबादी बड़ी ताकत है. हमारा प्रदेश युवा प्रदेश है. प्रदेश के 20 से 29 साल 1 करोड़ 53 लाख 82 हजार है इसमें शिक्षित बेरोजगारों की संख्या सर्वाधिक है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के बेरोजगार युवा जिन्होंने डेंटिंग पेंटिंग करके आकांक्षी युवा कहा जाता है उनकी तादाद 25 लाख से ज्यादा है. लेकिन रोजगार और कौशल विभाग के कुल बजट का सिर्फ 0.67 देना बताता है कि सरकार रोजगार संकट को प्राथमिक मुद्दा नहीं मान रही है. इसकी ट्रेनिंग आईटीआई अपग्रेड, पिलेसमेंट और इंडस्ट्रीज लिंक के लिये यह राशि जरूरत के मुताबिक बहुत छोटी है. इनका उद्देश्य रोजगार देना है. इनका बजट सीमित रहेगा तो संसाधन की गुणवत्ता और रोजगार से जुड़ाव कमजोर रहेगा. सरकार 2027 की बात करती है, तब तक ये युवा बूढ़े हो जायेंगे. रोजगार की उपलब्धता तथा कौशल विकास को मजबूत करना था ताकि युवा सिर्फ मजदूरी नहीं समाज में रोजगार पा सकें तथा समाज में जी सकें. रही बात मेरे क्षेत्र की, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि विवेकानंद जी ने कहा था कि :

संघर्षों के साय में इतिहास हमारा पलता है,

जिस ओर जवानी चलती है, उस ओर जमाना चलता है.

मंत्री जी, हमारे क्षेत्र में रोजगार मेले लगाए जाएं, अभी तक मेरे क्षेत्र में शासकीय आईटीआई नहीं है, दो साल पहले घोषण हुई, मैं खुद आईटीआई  के अधिकारी से मिला, 5 एकड़ का स्‍थान चयन किया राजस्‍व विभाग ने, पर अभी तक कुछ नहीं हुआ. बड़े दुख की बात है कि अभी तक बीस साल से आपकी सरकार है मेरा निवेदन है कि आईटीआई तुरंत खोली जाए.

          श्री मधु भगत (परसवाड़ा)  - अध्‍यक्ष जी, आपके माध्‍यम से स्‍कूल शिक्षा विभाग के मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि मरम्‍मत योग्‍य जितने भी भवन है, उनकी मरम्‍मत की जाए. विद्यालय में शिक्षकों, उच्‍च शिक्षकों और माध्‍यमिक शिक्षकों की कमी बनी हुई हैं, उन्‍हें पूरी की जाए. परसवाड़ा विधान सभा 110 में प्राथमिक शिक्षकों की संख्‍या अधिक एवं अतिशेष है. सांदीपनि स्‍कूल जो बहुत महत्‍वपूर्ण योजना के अंतर्गत परसवाड़ा में बने हैं, जो एक बड़े स्‍वरूप में बिल्डिंग बनी है, वह ऐतिहासिक है, वहां पर बच्‍चों की संख्‍या 1200 है, लेकिन वहां पर 2400 बच्‍चे पढ़ सकते हैं. वहां की फैकल्‍टी बढ़ाई जाए, एग्रीकल्‍चर या अन्‍य शिक्षा के जो पाठ्यक्रम हैं उनको बढ़ाया जाए, हर स्‍कूलों में शुद्ध जल की व्‍यवस्‍था एवं बाउंड्रीवाल की परसवाड़ा के सभी स्‍कूलों में व्‍यवस्‍था की जाए. दूरस्‍थ अंचल में हमारा ग्राम पंचायत चरेगांव बसता है, वहां लगभग एक छोटा संदीपनि स्‍कूल से आदिवासी बाहुल्‍य में एक व्‍यवस्‍था बनाई जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय सांदीपनि तो, सांदीपनि है, इसमें छोटा और बड़ा क्‍या होता है.

          श्री मधु भगत अध्‍यक्ष जी, मैंने इसलिए बोला कि इतना बड़ा स्‍कूल बना है, जिसमें बच्‍चे कम है. हम चाहते हैं कि ये बजट आधा हो जाए और मिनी सांदीपनि स्‍कूल के नाम से अन्‍य पंचायतों में ये एक नवाचार किया जाए. दूसरा घुनाड़ी पंचायत में 11 वीं के हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल का उन्‍नयन किया जाए. परिवहन में सिर्फ इतना कहना है कि इंदौर से भोपाल जो इस वक्‍त प्रायवेट, टूरिस्‍ट बसें चलती हैं उनमें अनाब-सनाब पैसा लिया जाता है, जिससे बच्‍चों को पढ़ने में तकलीफ होती है. आप उनके लिए एक टेरिफ तय कर दीजिए, ताकि शिक्षा के लिए जो बच्‍चे बाहर जाते हैं, उनको सुविधा मिल जाए. तकनीकी शिक्षा में चांगोटोला के अंदर मैंने कई बार मंत्री जी को पत्र लिखा, इसमें एक नवीन आईटीआई अतिआवश्‍यक है, लामटा के अंदर कालेज भवन बना है, लेकिन सड़क नहीं है, वह भवन साढ़े छह करोड़ का बना हुआ है. एक हट्टा के अंदर कालेज भवन का निर्माण किया जाए. आपने बोलने का समय दिया, इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद.

          श्री अमर सिंह यादव(राजगढ़) अध्‍यक्ष जी बहुत बहुत धन्‍यवाद, मैं एक मिनट में अपनी मांग रखता हूं. उच्‍च शिक्षा मंत्री जी से निवेदन है कि मेरे गृहनगर खुजनेर में डिग्री कालेज की घोषणा हो चुकी है, परन्‍तु अभी बजट में नहीं आया है. मुख्‍यमंत्री जी ने कहा है कि इस साल से ही वहां पर कक्षा प्रारंभ की जाएगी, तो मंत्री जी से आग्रह है कि उसको इस साल से प्रारंभ किया जाए. अध्‍यक्ष जी बहुत बहुत धन्‍यवाद.

             श्री केदार चिड़ाभाई डाबर (भगवानपुरा) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं सीधे मांग कर रहा हूं कि मेरे विधानसभा क्षेत्र भगवानपुरा में प्राथमिक विद्यालय के 19 भवन विहीन हैं, जिसमें मिडिल स्‍कूल भी हैं, जिनका नाम मैं बता रहा हूं. जामन्‍या पानी, आम्‍बा, कोलंबिया, बाड़यापुरा(सेगांव), धवलियावाडी, किराडिया फालिया(देवली) देवाड़ा) मोमदिया, खापरजामली, मालखेडा, खड़किया घाट, चांदपुरा, डोगलियापानी, डूडवा फालिया(सेजला), झंजाडफालिया, बसाली और माध्‍यमिक और प्राथमिक दोनों ही जगह स्‍कूल और भवन नहीं है. जूनाबिलवा, गढ़ी, कोगरगांव, पिपलझोपा और जूनापानी यह भवन विहीन है, यहां नवीन भवन बनाये जायें.

          अध्‍यक्ष महोदय, उच्‍च शिक्षा विभाग के संबंध में कहना चाहता हूं कि मेरी विधानसभा भगवानपुरा में जो महाविद्यालय तीन साल पहले खुला है, वहां 22 प्राध्‍यापक के पद जो स्‍वीकृत हैं, उसमें 16 पद खाली हैं और 8 पद क्‍लर्क के हैं, जो लेखापाल है, ग्रंथपाल हैं, लिपिक हैं, उनके खाली हैं, उनको शीघ्र भरा जाये ताकि बच्‍चों को वहां शिक्षा अच्‍छी मिले और एक ओर मेरा निवेदन है कि मेरा ब्‍लॉक मुख्‍यालय सेगांव है, जहां कई दिनों से महाविद्यालय की मांग की जा रही है, जिसकी सारी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, आने वाले सत्र में उसको स्‍वीकृत कर खोला जाये. अध्‍यक्ष महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय शिक्षा मंत्री जी से मेरा कहना है कि अलीराजपुर झाबुआ क्षेत्र में प्रतियोगी ऑनलाईन जो परीक्षाएं होती हैं, उनका वहां पर केंद्र नहीं है, उन सबको इंदौर आना पड़ता है. मैं समझता हूं कि जो दूरस्‍थ आदिवासी क्षेत्र गुजरात से लगा हुआ है, उस पर सरकार विचार करेगी और दूसरा आपने दसवी और बारहवीं के स्‍कूल उन्‍नयन की बात की है, तो मैं समझता हूं कि विधायक निधि तो आपकी सरकार और आपके मुख्‍यमंत्री बढ़ा नहीं रहे हैं, लेकिन हर विधानसभा क्षेत्र में दसवी, बारहवी के सबके उन्‍नयन हो जायें तो मैं समझूंगा की ठीक रहेगा (मेजों की थपथपाहट) दूसरी एक महत्‍वपूर्ण बात परिवहन मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि श्री नितिन गडकरी केंद्रीय मंत्री जी का जब पत्र मध्‍यप्रदेश सरकार को आया था और चेक पोस्‍ट को बंद करने की बात हुई थी, कागज पर चेक पोस्‍ट बंद हो गये हैं, लेकिन अभी भी अवैध वसूली हो रही है. मैं इसमें कहना चाहता हूं कि सरकार इस पर विशेष ध्‍यान दे, क्‍योंकि कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं और नकाब पहनकर और बगैर किसी परिवहन के कर्मचारी के, सादी ड्रेस के अंदर वसूली हो रही है, यह कौन लोग हैं ? क्‍या परिवहन विभाग के लोग हैं, क्‍या परिवहन विभाग ने किसी को ठेका दे दिया है?  मैं समझता हूं कि   आपके केंद्रीय मंत्री जी ने इस पर कहा है, तो यह इस प्रकार से नहीं होना चाहिए और इस पर सरकार को तत्‍काल संज्ञान लेना चाहिए. मैं इतना ही कहना चाहता हूं. अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

          उच्‍च शिक्षा,आयुष, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री      (श्री इंदर सिंह परमार) -- अध्‍यक्ष महोदय, चर्चा में हमारे सभी माननीय सदस्‍यों ने भाग लिया है, उसमें किसी ने सभी विषयों को साथ में जोड़कर भाग लिया है, किसी ने एक एक विषय को लेकर भाग लिया है. श्रीमती अर्चना चिटनिस जी, आदरणीय सुजीत चौधरी जी, आदरणीय श्री हरिशंकर खटीक जी, श्री राजेन्‍द्र मण्‍डलोई जी, श्री ठाकुरदास नागवंशी जी, श्री साहब सिंह जी, श्री बाबू जण्‍डेल जी, श्री विपिन जैन साहब, सम्‍माननीय मोहन सिंह जी, श्री रामकिशोर दोगने जी, श्री नितेन्‍द्र सिंह जी, श्री सुरेन्‍द्र सिंह अहिरवार जी, श्री दिनेश गुर्जर जी, श्री सिद्धार्थ कुशवाहा जी, श्री कमलेश्‍वर जी, श्री सुरेश राजे जी, सुश्री राम सिया जी, आदरणीय संदीप जायसवाल जी, श्री विवेक विक्‍की पटेल जी, श्री मधु भगत जी, श्री अमरसिंह यादव जी, श्री केदार भाई डाबर जी, सम्‍माननीय श्री उमंग सिंघार जी मैं सभी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूं, आपने अच्‍छे सुझाव के साथ जो मांगे रखी हैं, हम बहुत सहानुभूतिपूर्वक सरकार के संसाधनों की उपलब्‍धता के आधार पर उन कामों को करने की पूरी कोशिश करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले आयुष विभाग के बारे में बोलना चाहता हूं. देश की आजादी के बाद से वर्ष 2023 तक मध्‍यप्रदेश में सात आयुर्वेदिक, एक यूनानी और एक होम्‍योपैथिक कॉलेज था, देश के प्रधानमंत्री श्रीमान् नरेन्‍द्र मोदी जी ने इस प्रकार से आयुर्वेदिक को बढ़ावा देने का जो संकल्‍प लिया है, उसमें पूरे देश के साथ मध्‍यप्रदेश को भी अग्रणी राज्‍य में लाकर उन्‍होंने लाकर खड़ा किया है. और उस क्रम में वर्ष 2024-25 में हमने 7 आयुर्वेदिक महाविद्यालय स्‍वीकृत किये हैं. वर्ष 2025-26 में हमको 2 की फिर भारत सरकार से स्‍वीकृति मिली है और एक मध्‍यप्रदेश सरकार ने अपने बजट से ऐसे हम अब 8 आयुर्वेदिक महाविद्यालय और खोलने जा रहे हैं. आने वाले समय में यानी वर्ष 2026-27 में हम एक होम्‍योपैथिक, दो आयुर्वेदिक कॉलेज खोलने की ओर आगे बढ़ सकते हैं. मैं समझता हूं कि बड़ी संख्‍या में हमारे यहां आयुर्वेदिक क्षेत्र में काम करने का अवसर मिलेगा. हमारे यहां यूनानी कॉलेज चलता है. यूनानी कॉलेज में अभी तक हिन्‍दी में पढ़ाई नहीं होती थी जिसमें हमने निर्णय किया, जिस पर काम चल रहा है हम हिन्‍दी में यूनानी में भी पढ़ाई प्रारंभ करेंगे और उसका लाभ यह होगा कि जो हमारे अनुसूचित जाति, जनजाति के जो बच्‍चे हैं, जो सामान्‍यत: हिन्‍दी भाषी होते हैं या अपनी मातृभाषा में अपने क्षेत्र की भाषा में बोलते हैं और उसी में वहां पढ़ाई होती है, ऊदू जैसे विषय में इसलिये वहां बच्‍चे नहीं जानते हैं तो इस कारण विद्यार्थी भी नहीं आते और जब भरती होती है तो सारे के सारे पद खाली रह जाते हैं तो मैं समझता हूं कि आरक्षित वर्ग के बच्‍चों को वहां बहुत अच्‍छे ढंग से रोजगार भी मिलेगा और पढ़ने की सुविधा भी होगी, क्‍योंकि जिन समाज का इलाज करने जाते हैं वह तो लगभग हिन्‍दी भाषी है इसलिये उसको हम आगे करने जा रहे हैं, क्‍योंकि रिसर्च को लेकर राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति में भी बहुत बात हुई है और इसलिये वर्ष 2020 के बाद में जो शिक्षा नीति पर जो चर्चा चल रही थी उसमें व्‍यापक रूप से जो विचार किया गया है तो हम अपने आयुर्वेद के सारे विषयों को रिसर्च से जोड़ने जा रहे हैं और इसलिये हमने पतंजलि संस्‍थान से भी एमओयू किया है हमारे खुशीलाल महाविद्यालय ने और रिसर्च व्‍यवस्‍था पर आगे बढ़ रहे हैं. मुख्‍य रूप से मध्‍यप्रदेश के संदर्भ में हम देखेंगे तो हमने दो बड़े काम किये एक तो बालाघाट में एक रिसर्च सेंटर बनने जा रहा है और दूसरा मंडला जहां पर परंपरागत रूप से जो हमारे वैद्य हैं जो सामान्‍यत: भारतीय परंपरा को पीड़ी दर पीड़ी एक पीड़ी से दूसरी पीड़ी तक पहुंचाते हैं और ध्‍यान में आया है कि कई तो हमारे आयुर्वेद ग्रंथों तक में भी ऐसे वनस्‍पति का जिनके औषधि के रूप में, जड़ी बूटी के रूप में उपयोग करते हैं उनका उल्‍लेख नहीं मिलता है, उनका भी उपयोग करते हुये उनके ज्ञान को संजोने के लिये महामहिम राज्‍यपाल महोदय की अध्‍यक्षता में हमने एक दिवसीय पूरे उस जिले के सारे वैद्यों को बुलाकर के उनके साथ संवाद किया था और उसके बाद में हर उस वैद्य जी का एक वीडियो बनाकर के उनका जो ज्ञान है, उनका डाक्‍यूमेंटेशन करने का हमारा महाविद्यालय करने जा रहा है. मैं समझता हूं आने वाले समय में आयुर्वेद अपने देश की उन मूलभूत समस्‍याओं जिनमें स्‍वास्‍थ महत्‍वपूर्ण है उसमें सस्‍ता इलाज कैसे हो सकता है इस प्रकार का बड़ा प्रयोजन करने में हमारा आयुष विभाग सफल होगा. हमने लगातार अभी जिस प्रकार चर्चा हो रही थी, हेल्‍थ में भी चर्चा हो रही थी तो हमने संख्‍या बढ़ाना एक तो सीटों की संख्‍या बढ़ाने का भी निर्णय किया है सभी महाविद्यालयों में 100 सीट रहने वाली हैं साथ में पीजी की कक्षायें भी उनमें प्रारंभ करें ताकि हमारे एक्‍सपर्ट उनसे मिल सकें, रिसर्च कर सकें, इस प्रकार से आयुर्वेद को एक नये मोड़ में ले जाने के संकल्‍प के साथ आगे बढ़ रहे हैं. आने वाले समय में मध्‍यप्रदेश को भारत सरकार के बजट में 3 जो हमारे अय्याके खोलने का उन्‍होंने निर्णय किया है. मुझे विश्‍वास है कि मुख्‍यमंत्री जी उसके लिये प्रयास कर रहे हैं कि मध्‍यप्रदेश को एक अय्या का सेंटर मिल जायेगा. लगातार आयुष को लेकर के माननीय मुख्‍यमंत्री जी भी चिंता करते हैं और हमारे विभाग के अधिकारी से लेकर सब लोग मिलकर के पूरा का पूरा जो किया जा रहा है बहुत अच्‍छी स्थिति में हम आगे बढ़ने जा रहे हैं. एक फार्मेसी को लेकर के हमने सभी महाविद्यालयों में जो हमारे आयुर्वेद महाविद्यालय हैं उन सबमें फार्मेसी निर्माण करने का निर्णय लिया है क्‍योंकि अभी तक हमारे पास केवल ग्‍वालियर में फार्मेसी है, लेकिन बाकी महाविद्यालय में इसे खोलने का निर्णय किया है. हमने ग्‍वालियर, रीवा, जबलपुर, बुरहानपुर में बालक बालिका छात्रावास का भी उन्‍नय हम करने जा रहे हैं, उसके लिये राशि की पर्याप्‍त उपलब्‍धता की है. हमारे बुरहानपुर, भोपाल आयुर्वेदिक और होम्‍योपैथिक महाविद्यालय में 100 सीटर नवीन छात्रावासों के निर्माण के लिये राशि स्‍वीकृत की है और सिंहस्‍थ मद से ढाई सौ सीट का नवीन बालक, बालिका छात्रावास उज्‍जैन के आयुर्वेदिक कॉलेज में भी स्‍वीकृत किया गया है.एक प्रकार से शोध और शिक्षा के एकेडमिक विषय को लेकर पूरा का पूरा बजट का जो उपयोग करने जा रहे हैं उससे आने वाले समय में नये संदर्भों के साथ हम आगे बढ़ सकेंगे. हमने एक-डेढ़ साल में जो पदों की पूर्ति की है 590 आयुष चिकित्सा अधिकारी की नियुक्ति की है. 69 व्याख्याताओं की नियुक्ति की है. कुल 81 पेरामेडिक एवं स्टाफ की नियुक्ति की है इस प्रकार 740 नियुक्तियां हम इस साल कर चुके हैं इस के बाद में हम अभी 12 वेलनेस सेंटर हम पर्यटन विभाग के माध्यम से एमओयू के माध्यम से करने जा रहे हैं जिसमें खजुराहो,उज्जैन,पचमढ़ी,चित्रकूट,ओरछा,चंदेरी,दतिया,अलिराजपुर,सिंगरौली,ओंकारेश्वर और आगर यह स्वीकृत हुए हैं मैं समझता हूं कि विदेश पर्यटक भी हमारे यहां आते हैं वह इसका लाभ ले सकेंगे साथ ही आगामी वर्ष 26-27 में राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत हम कान्हा,बांधवगढ़,बागेश्वर धाम छतरपुर एवं सांची में वेलनेस सेंटर का प्रस्ताव भारत सरकार को भेज रहे हैं. एक प्रकार से वेलनेस सेंटर ज्यादा से ज्यादा संख्या बढ़ाना,आरोग्य केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा से ज्यादा बढ़ाना ताकि एलोपैथी के साथ-साथ आयुष के भी सेंटर वहां उपयोगी हो सकें और जैसा मध्यप्रदेश में जनसंख्या का अनुपात है  उस हिसाब से आयुष विभाग एक बड़ी भूमिका में आ सकेगा. इस प्रकार से आगे की कार्य योजना बनाई है. दूसरा तकनीकी शिक्षा को लेकर मध्यप्रदेश में नये नवाचार जो हम करने जा रहे हैं. हमारे जो कालेज परंपरागत रूप से जिन विषयों में चलते थे अब हम उनको इंडस्ट्री के साथ संवाद करके और साथ में उस क्षेत्र की क्या किस चीज की आवश्यक्ता है क्या विषय संचालित करना चाहिये या इंडस्ट्री या कंपनियों का योगदान,हमारे साथ सहभागिता किस रूप में हो सकती है इसलिये उनके एक्सीलेंस सेंटर भी हमारे पोलिटेक्निक और इंजीनियरिंग कालेज में स्थापित करने का काम चल रहा है हमने सामान्यत: सीमेंट प्रोद्योगिकी,खनिज प्रोद्योगिकी,ऐसे विषय को कुछ पोलिटेक्निक कालेज में प्रारंभ किया है आगे जाकर उनका विस्तार किया जायेगा और हर क्षेत्र के जो उद्योग हैं उस  क्षेत्र की आवश्यक्ता के अनुसार पूरे सिलेबस में हम लगातार परिवर्तन कर रहे हैं. एक बड़ा बदलाव हमारे इंजीनियरिंग कालेज में जो बच्चे पढ़ते हैं उनके मन में भाव रहता है कि अच्छे संस्थानों से वह पढ़ना चाहते हैं तो  भारत सरकार के दो संस्थानों के साथ हमने एमओयू किया है एक तो भोपाल मेनिट के साथ में और एक आईआईटी इन्दौर के साथ में जिसमें हम सारे इंजीनियरिंग कालेज के अंतिम सेमिस्टर के 50-50 बच्चों का चयन करते हैं और उनको एक सेमिस्टर में पढ़ने का अवसर मिलता है बाद में उनकी जो क्रेडिट है वह ट्रांसफर करने का काम हम करेंगे.  यह बहुत बड़ा नवाचार मध्यप्रदेश में करने जा रहे हैं.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक - मध्यप्रदेश के बच्चों का एडमीशन का या अन्य चीजों का कितना परसेंट होगा.मध्यप्रदेश के लोगों का क्या कोटा होगा.

          अध्यक्ष महोदय - मंत्री जी, वह कह रहे हैं मध्यप्रदेश का क्या कोटा होगा तकनीकी शिक्षा के छात्रों के लिये.

          श्री उमंग सिंघार - अध्यक्ष महोदय, इसमें सामान्यत: यह होता है कि फैक्ट्रियों में अधिकतर अन्य राज्यों के लोग आ जाते हैं. यहां के युवाओं को नौकरी नहीं मिल पाती सरकार को इस पर विचार करना चाहिये कि बाहर के साथ यहां के युवाओं का कोटा रहे जो आपके टेक्निकल एजुकेशन में कौशल ले रहे हैं वह बेचारे बेरोजगार हो जाते हैं  उनके लिये भी एक कोटा होना चाहिये. है तो एक बार सरकार को बताना भी चाहिये.

          श्री इन्दर सिंह परमार - सामान्यत: हमारे इंजीनियरिंग कालेज है जो मध्यप्रदेश सरकार द्वारा संचालित होते हैं या आटोनोमस हैं उनके जो एडमीशन हैं वह एडमीशन जेईई के माध्यम से हम लेते हैं लेकिन क्योंकि उसमें सभी महाविद्यालय में हमारे छात्र आते नहीं हैं इसीलिये  आसपास के बारहवीं के विद्यार्थी मेरिट के अधार पर उन विद्यार्थियों का एडमीशन करते हैं तो मैं समझता हूं अपने मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों का बड़ी संख्या में चयन होता रहता है और इस बार मैं बता देना चाहता हूं कि पिछले वर्ष की तुलना में  इस वर्ष हमने 25-26 में 27 प्रतिशत की एडमीशन में वृद्धि हुई है. पोलिटेक्निक में 21 प्रतिशत से ज्यादा प्रवेश में वृद्धि हुई है. एक प्रकार से लगातार तकनीकी शिक्षा में मध्यप्रदेश में जो पद पोलिटेक्निक के पद खाली रहते थे. लगभग-लगभग सभी पदों पर आज की स्‍थिति में हमारे विद्यार्थी एडमिशन ले पा रहे हैं. पिछले साल से लगातार, जैसे नौगांव हमारा ऐसा इंजीनियर कॉलेज हैं, जहां 6 बच्‍चे, 8 बच्‍चे होते थे. लेकिन पिछले साल जो हमारे एडमिशन हुए, बड़ी संख्‍या में छात्र आए. प्रोफेसरों और फेकल्‍टीज ने जा-जा कर नीचे के जो हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल हैं, उनमें जाकर छात्रों से संपर्क किया और उसका फायदा हमें मिला और भी ज्‍यादा एडमिशन कैसे हों, इसका प्रयास किया जा रहा है. एक प्रकार से टेक्‍निकल क्षेत्र में मध्‍यप्रदेश में बहुत ज्‍यादा कुछ काम करने को नहीं दिखता था, लेकिन हमारे अधिकारियों ने जो प्रयास किया है, उसमें नए संदर्भ के साथ में हम बड़े बदलाव की ओर आगे बढ़ते जा रहे हैं. यही मैं कहना चाहता हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा विषय उच्‍च शिक्षा विभाग के बारे में मैं बताना चाहता हूँ कि किसी ने कहा था कि मध्‍यप्रदेश में इस साल का बजट कम है. मैं कहना चाहता हूँ कि उच्‍च शिक्षा का विभाग बजट 713 करोड़ रुपये से अधिक का है. पिछले साल की तुलना में अधिक है. इसलिए सरकार ने पर्याप्‍त बजट की व्‍यवस्‍था की है. इसमें किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है. हमने जो हमारे तीन विश्‍वविद्यालय इस बार खोले हैं, उनके लिए भी बजट का प्रावधान किया है. उनके भवन निर्माण कराने के लिए, उनके डीपीआर बनाने के लिए प्रावधान किया है. क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्‍वविद्यालय, खरगोन, क्रांतिवीर तात्‍या टोपे विश्‍वविद्यालय, गुना और रानी अवन्‍तीबाई लोधी विश्‍वविद्यालय, सागर, इन तीनों विश्‍वविद्यालयों के लिए प्रावधान किया गया है. हमने संस्‍कृत को बढ़ावा देने के लिए जिस प्रकार से महर्षि पाणिनि विश्‍वविद्यालय है, उसमें भी पिछले साल की तुलना में बजट बढ़ाने का प्रावधान किया है. अटल बिहारी वाजपेई हिन्‍दी विश्‍वविद्यालय में भी हमने पिछले साल की तुलना में अधिक बजट का प्रावधान किया है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शिक्षा के क्षेत्र में जो हमेशा अनिश्‍चितता का माहौल रहता था. हमने प्रवेश से लेकर परीक्षा परिणाम तक यानि शैक्षणिक कैलेण्‍डर का कड़ाई से पालन करने का निर्णय किया. साथ में बच्‍चों का ऑनलाइन प्रवेश हो जाए, इसका भी हमने पूरा प्रयास किया है. इसलिए लगातार कई बार जनवरी तक, फरवरी तक एडमिशन की प्रक्रिया चलती थी. पिछले वर्ष हमने विचार तो किया था कि 30 अगस्‍त तक प्रक्रिया पूरी कर दें लेकिन सीट खाली रह गई थी, इसलिए थोड़ा सा समय बढ़ाया था. लेकिन इस साल हम 14 अगस्‍त तक एडमिशन की प्रक्रिया पूरी कर लेंगे. इसके बाद पढ़ाई प्रारंभ हो जाए. समय पर परीक्षा हो जाए. समय पर उनका वेल्‍युएशन हो करके उनका रिजल्‍ट भी समय पर आ जाए. इसलिए एक बड़ा नवाचार मध्‍यप्रदेश के हमारे सभी विश्‍वविद्यालय करने जा रहे हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डिजिटल वेल्‍युएशन की ओर मध्‍यप्रदेश बढ़ने वाला है. हमारे कई विश्‍वविद्यालयों ने उस पर कार्य प्रारंभ कर दिया है. हमारी जो आगामी परीक्षा होने वाली है, डिजिटल वेल्‍युएशन के आधार पर उनका परिणाम समय पर आ जाएगा. एक बड़ा प्रयोग हम मध्‍यप्रदेश में करने जा रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, डिजिलॉकर पर भी मध्‍यप्रदेश में बहुत काम हुआ है और इसलिए जिस प्रकार से अपार आईडी से सभी छात्रों को जोड़ा जा रहा है. उसके कारण उनकी डिग्री, अंकसूची सब सुगमता के साथ एक साथ मिल जाएगी. हमारे मध्‍यप्रदेश में अभी 14 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने एबीसी यानि अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट में अपना पंजीयन कराया है. इसमें क्रेडिट हस्‍तानंतरण और ऑनलाइन सुविधाओं का लाभ उन सब बच्‍चों को मिल सकेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, उपस्‍थिति को लेकर भी समस्‍या थी. हमारे कैम्‍पस बड़े खाली-खाली दिखते हैं. कॉलेजों में बहुत कम उपस्‍थिति होती है. शिक्षक की भी उपस्‍थिति कम होती है यानि प्राध्‍यापकों, असिस्‍टेंट प्राध्‍यापकों और प्रिंसिपल की भी उपस्‍थिति हम सार्थक एप के माध्‍यम से ले रहे हैं. अगले सत्र से विद्यार्थियों की भी उपस्‍थिति हम सार्थक एप से सुनिश्‍चित करने जा रहे हैं. साथ में उनकी उपस्‍थिति को हम क्रेडिट से जोड़ेंगे ताकि जिस छात्र की ज्‍यादा से ज्‍यादा उपस्‍थिति होगी, उसको कुछ क्रेडिट देकर के उसको अलग से प्रोत्‍साहन देने का भी हम प्रयास करेंगे. इससे हमारे कॉलेज के कैम्‍पस खाली नहीं होंगे. क्‍लास में शत्-प्रतिशत उपस्‍थिति की ओर हम आगे बढ़ने जा रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैंने परीक्षा परिणामों के बारे में जैसा अभी कहा कि परिणाम सही समय पर आना चाहिए, काफी विश्‍वविद्यालयों ने प्रयास किया है. परिणाम समय पर आने लगे हैं, लेकिन जब डिजिटल वेल्‍युएशन होगा तो मैं समझता हूँ कि अच्‍छा परिणाम हम समय पर दे सकेंगे. जिससे हमारी दूसरे जो विषय के एक्‍जाम रहते हैं, उसमें भी विद्यार्थी समय से बैठ सकेंगे. अभी भर्तियों को लेकर मध्‍यप्रदेश में काफी चर्चा होती रहती है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं बता देना चाहता हूँ कि अभी हमने वर्ष 2022 में जो विज्ञापन जारी किया था, 2,053 पदों के लिये, जिसमें सहायक प्राध्‍यापक के 1,669, ग्रंथपाल के 255, क्रीड़ा अधिकारी के 129 में से एक हजार से अधिक पदों पर हमारी भर्तियां हो गई हैं, नियुक्तियां हो गई हैं, बाकि का  काम चल रहा है. उसके बाद हमारा विज्ञापन वर्ष 2024 में जारी हुआ है, उसमें 2,197 पदों में, 1,930 सहायक प्राध्‍यापक के पद हैं, ग्रंथपाल के 80 पद हैं, क्रीड़ा अधिकारी के 187 पद हैं, जिनकी प्रक्रिया चल रही है, उनकी परीक्षा हो चुकी है, उसी प्रकार से वर्ष 2025 में भी 1,237 सहायक प्राध्‍यापकों हेतु विज्ञापन जारी हो चुका है, चयन की प्रक्रिया आगे चलती रहेगी, इस प्रकार से कुल मिलाकर जब हम बात करते हैं, तो 5,487 पदों पर हमारी भर्ती का काम पूरा हो जायेगा. एक प्रकार से हम बहुत बड़ी संख्‍या में भर्ती का काम कर लेंगे, लेकिन इसके साथ मैं एक बात और बता देना चाहता हूँ, फिर भी पद खाली रहेंगे. इसलिए हमारे यहां जो कार्यरत् अतिथि विद्वान हैं, वे लगभग 4,017 हैं. हमने हरियाणा राज्‍य की पॉलिसी को यहां पर बुलाया है, उसको देख रहे हैं, उस पर कमेटी बनाई है और जो मध्‍यप्रदेश के संदर्भ में ठीक होगा, हमारी कमेटी जो सिफारिश करेगी, तो जो अतिथि विद्वान है, जिसके बारे में समय-समय पर कई बार बात उठती है, हम उनकी भी समस्‍या का  समाधान कर सकेंगे यानि उसमें से कुछ पद हमारे साथ हो जायेंगे, तो बहुत कम पद मध्‍यप्रदेश में खाली रहेंगे और हम निरन्‍तर भर्ती की प्रक्रिया जारी रखने वाले हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम जानते हैं कि हमारे यहां सामान्‍यत: जो चर्चा होती है, वह उच्‍च शिक्षा विभाग की ज्‍यादा चर्चा होती है. विश्‍वविद्यालयों के कारण, विश्‍वविद्यालयों में उनका स्‍वरूप ऑटोनोमस है, हमारे कुलगुरु उसकी चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं, उसके अध्‍यक्ष होते हैं. जो कमेटी एक्‍सपर्ट की बनती है, वह कमेटी भी महामहिम राज्‍यपाल महोदय के अनुमोदन से बनती है, अभी भारत सरकार और मध्‍यप्रदेश सरकार ने भी, क्‍योंकि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में हमको प्रोफेसरों की आवश्‍यकता है, तो चार-पांच महीने में भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करने को सभी विश्‍वविद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि चार-पांच महीने में भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ करें, ताकि यह जो रिक्तियां दिखती हैं या हम अतिथि विद्वानों पर निर्भर रहते हैं, वह समाप्‍त हो जाये और विश्‍वविद्यालयों में पदपूर्ति का काम हम तेज गति के साथ करने जा रहे हैं. हमारे यहां शिक्षा की गुणवत्‍ता को लेकर मध्‍यप्रदेश के हमारे विश्‍वविद्यालयों ने नैक रेटिंग में सहभागिता सुनिश्चित की है और इसलिए उसमें बड़ी बात यह है कि 63 महाविद्यालय और 7 विश्‍वविद्यालय ने उस ग्रेडिंग में भाग लिया और ग्रेडिंग प्राप्‍त की है. 3 संस्‍थाओं को ए प्‍लस, जिसमें दो चित्रकूट और जीवाजी विश्‍वविद्यालय और एक कॉलेज इन्‍दौर होल्‍कर कॉलेज है. ऐसे यह ए डबल प्‍लस में आए हैं- तीन संस्‍थाओं को ए प्‍लस, इसमें तीन कॉलेज हैं- एक बैतूल, एक कन्‍या उज्‍जैन है और एक उत्‍कृष्‍टता संस्‍थान, भोपाल का है. 16 संस्‍थाओं को ए , जिसमें तीन यूनिवर्सिटी हैं और 13 कॉलेज हैं, 16 संस्‍थानों को बी प्‍लस ग्रेड, एक यूनिवर्सिटी है और 13 कॉलेज है, इस प्रकार से इसके लिये हमने पर्याप्‍त तैयारी की है और आने वाले समय में ज्‍यादा से ज्‍यादा इस प्रकार की गुणवत्‍ता की ग्रेडिंग होती है, उसमें हमारे लोग ज्‍यादा से ज्‍यादा कर सकेंगे. एक राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में जो बातचीत चलती है, उसमें भारतीय ज्ञान परम्‍परा को शामिल किया गया है और भारतीय ज्ञान परम्‍परा एक प्रकार से भारत के केवल आध्‍यात्मिक और धार्मिक ही नहीं, विज्ञान में भारत के लोगों का क्‍या योगदान रहा है ? अलग-अलग विषय में भारत का बड़ा योगदान है, जब सारे लोग इस पर रिसर्च कर रहे हैं, तो सबके सामने आ रहा है और इसलिए हमने राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति में मध्‍यप्रदेश अग्रणी राज्‍य बना उसी प्रकार से भारतीय ज्ञान परंपरा को भी हमने अग्रणी राज्‍य में शामिल कर लिया है. इस वर्ष 2026-27 का सिलेबस बन रहा है, उसमें प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को, प्रथम यूनिट में ही भारतीय ज्ञान परंपरा को पढ़ने के लिए मिलेगा. गणित, भौतिकी और अन्‍य सभी विषयों में पढ़ने को मिलेगा, इस प्रकार एक बड़ा बदलाव, जिससे हमारे विद्यार्थियों को भारत के दर्शन को पहचाने का अवसर मिलेगा. जिस शिक्षा के दर्शन के आधार पर भारत कभी विश्‍व गुरू कहलाता था, इसका उल्‍लेख करने का अवसर मिलेगा. मैं बताना चाहता हूं कि हमारे देश की परंपरा में गणित को लेकर सामान्‍यत: पाइथागोरस प्रमेय का उल्‍लेख किया जाता है लेकिन पाइथागोरस गणितज्ञ, ईसा से 500 वर्ष पूर्व हुए थे लेकिन उसके भी पूर्व लगभग 300 वर्ष और पूर्व अर्थात् ईसा के 850 वर्ष पूर्व, "बौधायन गणितज्ञ" ने अपने सूत्रों में, उसी प्रकार के प्रमेय को, सरल तरीके से हल करने का काम किया है. इसलिए भारत के ज्ञान-दर्शन को हम इस बार प्रथम यूनिट में शामिल करने जा रहे हैं. अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह से कहा जाता है कि बिजली के विषय में, वैज्ञानिक खोज के लिए भारत के ऋषि-मुनियों ने कोई काम नहीं किया है, लेकिन मैं, एक उदाहरण देना चाहता हूं कि सप्‍तऋषियों में से एक, अगस्‍त ऋषि द्वारा रचित "अगस्‍तसंहिता" में विद्युत सेल निर्माण की विधि बताई गई और बहुत सरल, स्‍पष्‍ट शब्‍दों में इसका उल्‍लेख है. अभी तक भारत के विद्यार्थियों को जो पढ़ाया जाता था कि विद्युत सेल के लिए काम करने वाले डेनियल वोल्‍टाज़ हुए हैं लेकिन भारत के इस ऋषि द्वारा अपनी रिसर्च के आधार पर, बिजली बनाने की विधि अगस्‍तसंहिता में बताई गई है, ऐसे विषयों को हम जोड़ने जा रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, इसी प्रकार आयुर्वेद का उल्‍लेख करना चाहता हूं कि आयुर्वेद में सर्जरी के जनक "आचार्य सुश्रुत" को माना जाता है, इसे एलोपैथी भी मानती है और हमारा आयुर्वेद भी मानता है. ऐसे विषय-वस्‍तु राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति में हर विषय में जोड़ने को मिल रही हैं. राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति में हमने बी.एस.सी. के एक विद्यार्थी को बी.कॉम. या बी.ए. का विषय लेने की छूट दी है. मल्‍टी-डिसिप्लिनरी पर हमने काम प्रारंभ किया है. इसके संदर्भ में कहना चाहता हूं कि पूरे प्रदेश के सभी महाविद्यालय जिसमें छात्र संख्‍या पर्याप्‍त है, उसे हम चरणबद्ध तरीके से, सबसे पहले जिला केंद्र के, फिर जिले के बड़े सेंटरों को और फिर नीचे के, जगह-जगह से जहां संकाय खोलने की मांग आ रही है, उसमें इस नीति के साथ, एक साथ हम चरणबद्ध तरीके से काम करने जा रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं, सभी माननीय सदस्‍यों को कहना चाहता हूं कि हम अच्‍छे कैंपस बनाकर, उसमें बहुविषय सभी संकायों को खोलेंगे ताकि आने वाले समय में किसी विद्यार्थी को इधर-उधर नहीं जाना पड़े, उसी कॉलेज में यदि उसे विषय बदलना पड़े तो उसको वहां विषय मिल जाये और वह पढ़ सके, इस प्रकार की व्‍यवस्‍था राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति में बनाई गई है. हम एक मल्‍टीपल इंट्री एण्‍ड एक्जिट बना रहे हैं. एक विद्यार्थी कॉलेज में आता है और यदि प्रथम वर्ष के बाद वह पढ़ाई नहीं करना चाहता है तो अभी तक उसे कोई प्रमाण पत्र नहीं मिलता है लेकिन अब वह यदि पढ़ाई छोड़कर जायेगा तो उसे प्रमाण-पत्र मिलेगा. यदि दूसरे वर्ष के बाद पढ़ाई छोड़ता है तो उसे डिप्‍लोमा मिलेगा और तीसरे वर्ष के बाद उसे वर्तमान की तरह डिग्री मिलती रहेगी और चौंथे वर्ष को भी हमने स्‍नातक (UG) में जोड़ा है ताकि उसमें रिसर्च भी विद्यार्थी करना चाहे तो कर सके. जहां पर चौंथे वर्ष में रिसर्च होगा, वहां स्‍नातकोत्‍तर (PG) एक वर्ष का होगा और जहां 3 वर्ष का UG होगा, वहां 2 वर्ष का PG पाठ्यक्रम वर्तमान की तरह चालू रहेगा, इस प्रकार की व्‍यवस्‍था हमने प्रदेश में राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के संदर्भ में, आगे के लिए करने का निर्णय लिया है, यह बहुत बड़ा निर्णय है. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, हमने दो चीजें और की हैं जो सामाजिक दृष्टि से और भाषा को लेकर बहुत व्‍यापक रूप से पूरे मध्‍यप्रदेश में नहीं अपितु पूरे देश में जिसका प्रभाव पड़ने वाला है. अध्‍यक्ष महोदय, एक तो हमने हमारे देवी अहिल्‍याबाई विश्‍वविद्यालय में जनजाति अध्‍ययन एवं शोध केन्‍द्र की स्‍थापना की है और केवल उसमें जनजाति समाज के, आदिवासी समाज के विद्यार्थी नहीं होते हैं. आज की स्थिति में वहां सभी वर्ग के विद्यार्थी इस जनजाति केन्‍द्र में अध्‍ययन कर रहे हैं और मैं समझता हूं कि उसका रिस्‍पॉन्‍स बहुत अच्‍छा आ रहा है इसीलिए हमने आगे उन केन्‍द्रों की संख्‍या बढ़ाने का निर्णय लिया है. रानी दुर्गावती विश्‍वविद्यालय जबलपुर में और शहडोल के दोनों विश्‍वविद्यालयों में भी हम इस प्रकार के केन्‍द्र स्‍थापित करने जा रहे हैं. भाषा को लेकर भी हम नया प्रयोग करने जा रहे हैं. जो हमारी 22 भारतीय भाषाएं हैं, उन 22 भारतीय भाषाओं में से 13 भाषाओं को हमने अलग-अलग हमारे विश्‍वविद्यालयों को देने का काम किया है. विश्‍वविद्यालयों ने चयन किया है. आने वाले समय में हम उसको क्रेडिट से जोड़कर किसी विश्‍वविद्यालय में तमिल होगा, किसी में कन्‍नड़, किसी में मलयालम, किसी में तेलगु, किसी में मराठी, किसी में गुजराती, किसी में पंजाबी, किसी में मणिपुरी, किसी में सिंधी, किसी में उडि़या, किसी में बांग्‍ला, ऐसी 13 भाषाओं का चयन हमारे विश्‍वविद्यालयों ने किया है. आने वाले समय में मध्‍यप्रदेश देश का वह हिन्‍दी राज्‍य होगा जो भाषा जोड़ने का काम करेगा, तोड़ने का काम नहीं करेगा. पूरे देश को एकात्‍म का नया संदेश देने वाला केन्‍द्र मध्‍य प्रदेश बनने वाला है. हमारे देश के प्रधानमंत्री श्रीमान नरेन्‍द्र मोदी जी के संकल्‍प को भी हम मध्‍यप्रदेश में तेज गति के साथ आगे बढ़ाने वाला प्रदेश बनने जा रहे हैं. हमने पिछले साल मार्च के महीने में माननीय राज्‍यपाल जी की पहल पर मिशन कर्मयोगी पर एक सेमिनार किया था और सेमिनार के बाद में लगातार जो हमारे एक्‍सपर्ट थे, जो कमेटी बनी थी उन लोगों के साथ हमारी वर्चुअल मीटिंग होती थी. अभी दिनांक 18, फरवरी को फिर से उनके साथ हमारी मीटिंग हुई है. देश के जाने माने लोग उस कमेटी में हैं जो देश में भी काम करते हैं और मध्‍यप्रदेश पहला राज्‍य होगा जिसमें मिशन कर्मयोगी पर हमने इतना व्‍यापक काम किया है. जिसमें प्रोफेसर डॉक्‍टर राधाकृष्‍णन, चेयरमेन बोर्ड ऑफ गर्वनेंस आईआईटी कानपुर, प्रोफेसर अनिल सहस्‍त्रबुद्धे चेयरमेन National Assessment and Accreditation Council (NAAC) Bengaluru., प्रोफेसर संतीश्री धुलिपुड़ी पंडि़त, कुलपति जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय, प्रोफेसर डॉ. आर बालसुब्रमण्‍यम, सदस्‍य एचआर केपेसिटी बिल्डि़ंग कमीशन, मिशन कर्मयोगी भारत सरकार, प्रोफेसर भरत भास्‍कर निर्देशक आईआईएम अहमदाबाद, प्रोफेसर दीपक कुमार श्रीवास्‍तव उपाध्‍यक्ष यूजीसी भारत सरकार, डॉ. विक्रांत सिंह तोमर वेश्विक शिक्षाविद Global, convener United Consciousness, प्रोफेसर गोविन्‍दन घनराजन, निर्देशक Indian Institute of Science (IISc) Bengaluru..  ऐसे जाने माने लोग हमारे इस कमेटी के सदस्‍य हैं. आगे जाकर के जो हमने इस पर अभी तक काम किया है हमारे विश्‍वविद्यालयों में और हमारे पूरे एकेडमिक वातावरण में मानव संसाधन ओर इंफ्रा के साथ-साथ इसमें क्‍या-क्‍या एकेडमिक बदलाव होने चाहिए उन सभी पर विस्‍तार से चर्चा की है और हम लगभग एक साल आगे एक नये स्‍वरूप में मिशन कर्मयोगी के काम को आगे बढ़ा सकेंगे लेकिन इसमें सबसे ज्‍यादा एक बात महत्‍वपूर्ण है.

          श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)-- अध्‍यक्ष महोदय, चार बजे की चाय आठ बजे तक तो दम मार सकती है, लेकिन आठ बजे के बाद की एनर्जी के लिए इन दोनों पर पेनल्‍टी लगाई जाए जिनको सुनने के लिए हम यहां बैठे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय-- शिक्षा विभाग ऐसा नहीं है जो आपको डिनर दे सके. (हंसी)

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे--माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक यदि आपकी अनुमति हो तो एक छोटा सा सुझाव दे सकता हूं. एक कोर्स और संचालित हो रहा है. आपने नये कोर्सों की बात की. शायद आपकी जानकारी में होगा क्‍योंकि आप वैसे भी बडे़ विद्वान मंत्री हैं और मैं समझता हूं कि आपके नॉलेज में आने के बाद यह चल रहा है. इलेक्‍ट्रो होम्‍योपैथी. अटल बिहारी हिन्‍दी विश्‍वविद्यालय में चल रहा है और यह कोर्स कहीं पर भी मान्‍यता प्राप्‍त नहीं है. एक फर्जी कोर्स है. छात्र इसमें पढ़ रहे हैं और उनका भविष्‍य अंधकार में जा रहा है. मैं अपनी बात को पूरा कर दूं. मेरा प्रश्‍न ही नहीं आएगा तो उत्‍तर कैसे आएगा. छोटी सी जिज्ञासा और है.

            श्री इन्दर सिंह परमार-- आप क्या पूछना चाहते हैं मुझे मालूम है. मैं सदन में जवाब दे चुका हूँ.

          श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे -- लगता है बागेश्वर बाबा के दर्शन की जरुरत नहीं है आप तो सभी समझते हैं.

          अध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी इशारे में समझ गए.

          श्री इन्दर सिंह परमार-- बाकी सदस्यों के विषय हैं मैं उसके साथ इसका भी उल्लेख करुंगा.

          अध्यक्ष महोदय, जो मिशन कर्मयोगी का है. इसमें महत्वपूर्ण बात बता देना चाहता हूँ. हमारे यहां एकाउंटेबिलिटी किसी एक सिस्टम में नहीं है. कोई एक पीरियड भी लेता है कोई दो पीरियड भी लेता है. कोई पीरियड लेता ही नहीं है, कोई कॉलेज जाता है, कोई कॉलेज जाता ही नहीं है. मैं उच्च शिक्षा विभाग के संदर्भ में बात कह रहा हूँ. हम उनकी जवाबदेही आने वाले समय में तय करने जा रहे हैं. हम परफार्मेंस इंडेक्स बनाने की ओर आगे बढ़ेंगे. जब किसी का प्रमोशन होता है या उच्च पद पर जाता है तो सभी जगह पर उस परफार्मेंस के आधार पर हम काम करेंगे. एकेडमिक सुधार की दृष्टि से यह बहुत महत्वपूर्ण कदम मध्यप्रदेश में होने वाला है. मैं कहना चाहता हूँ कि बड़े बदलाव के साथ मध्यप्रदेश में काम चल रहा है.

          अध्यक्ष महोदय, आदरणीय कटारे जी ने जिस बात का उल्लेख किया. बीच में विधान सभा में इस  बारे में प्रश्न था. अटल बिहारी वाजपेई हिन्दी विश्वविद्यालय में इलेक्ट्रो होम्योपैथी जो विषय था. वह कहीं से मान्यता प्राप्त नहीं है. हमने उस विश्वविद्यालय को सरकार की ओर से, विभाग की ओर से बंद करने का निर्देश दे दिया है. किसी कन्फ्यूजन के कारण उस विश्वविद्यालय ने यह विषय प्रारंभ कर लिया था लेकिन हमने उसको निर्देशित कर दिया है. आगे उसमें किसी प्रकार के एडमीशन नहीं करेंगे यह हमारी तरफ से आदेश चला गया है.

          अध्यक्ष महोदय, सुजीत जी ने शासकीय महाविद्यालय, चौरई के बारे में जो बताया था. मैं बता देना चाहता हूँ कि आपके यहां दो करोड़ रुपए की बाउंड्रीवॉल के लिए राशि स्वीकृत की गई है. प्राध्यापकों की भर्ती की बात मैं कह चुका हूँ. छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय के बारे में भी हमारे भाई ने बात कही थी. मैं बताना चाहता हूँ कि छिंदवाड़ा विश्वविद्यालय में भी हम राशि देने का काम कर रहे हैं. जितने नए विश्वविद्यालय खुले हैं उनकी जितनी डीपीआर बनी है उसी मान से हम उसको भी बजट देने का काम कर रहे हैं. अभी हमने वहां पर कुछ निर्माण का काम प्रारंभ कर दिया है. बाकी महाविद्यालयों के साथ साथ वहां की भी बिल्डिंग तैयार होकर वो बन सकेगा.

          अध्यक्ष महोदय, आदरणीय कमलेश्वर डोडियार जी ने सैलाना के बारे में बात कही है. रावड़ी में कम छात्र संख्या है. वहां की समस्या उन्होंने बताई है कि वहां पर साइंस विषय है, उनकी बात सही है और हम भी यह बात मानते हैं कि जहां पर आदिवासी समाज निवास करता है वहां पर हमको पहले आर्ट्स जैसे विषय प्रारंभ करना चाहिए था. लेकिन पहले वहां पर साइंस खुल चुका है. निश्चित रुप से हम वहां पर आर्ट्स की कक्षाएं प्रारंभ करने का काम करेंगे ताकि वहां पर ज्यादा बच्चे एडमीशन ले सकें. उस महाविद्यालय की जो दूसरी कमियां हैं उनकी हम पूर्ति करके उस महाविद्यालय को हम किसी भी हालत में बंद नहीं होने देंगे. उसको चलाने का काम हम करेंगे. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्यक्ष महोदय, सम्माननीय सुरेश राजे जी ने भी डबरा के लिए बात कही थी. नई शिक्षा नीति में बेटे बेटियों का अलग-अलग स्कूल और कॉलेज नहीं होगा. स्कूल के बारे में अभी स्कूल शिक्षा मंत्री जी कहेंगे.  जो कॉलेज हैं उसमें आप जितनी सुविधाएं चाहते हैं वो सब हम देने के लिए तैयार हैं. अब भविष्य में बेटे-बेटियों के कॉलेज अलग-अलग खोलने की नीति नहीं रखेंगे. अब हम बहुत आगे बढ़ चुके हैं उस दृष्टि से एक बड़ा निर्णय हमने किया है. पुराने जो कन्या महाविद्यालय चल रहे हैं उनको हम जारी रखेंगे. लेकिन नए कॉलेज हम लड़कियों के लिए अलग नहीं खोलेंगे. जो कॉलेज हैं वहां पर सुविधाओं की पूर्ति करने का काम हम करेंगे जो कमी हो आप मुझे बताइए. आपने सुझाव दिया उसके लिए धन्यवाद.

          अंत में, मैं कहना चाहता हूँ मध्यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति है. जिसमें भारत केन्द्रित शिक्षा का उल्लेख है, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का उल्लेख है, ज्ञान आधारित शिक्षा का उल्लेख है उसके लिए हम सतत् प्रयत्न करते रहेंगे. वर्ष 2047 के विकसित भारत का जो संकल्प है यानि विश्व गुरु भारत बनने का. मैं समझता हूँ कि  National Education Policy 2020 के द्वारा जो व्यापक बदलाव भारत के समाज को खड़ा करते हुए, भारत के दर्शन को साथ में जोड़ते हुए, अपने पैरों पर अपने पुरुषार्थ के बल पर देश की ताकत के बल पर खड़ा करने का संकल्प है. मैं समझता हूँ शिक्षा जगत के माध्यम से हम उस लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे. अंत में, मैं यही बात कहना चाहता हूँ --

        यह उथल पुथल उत्ताल लहर पथ से न डिगाने पाएगी। 
पतवार चलाते जाएंगे, मंजिल आएगी आएगी। 

 

          भारत माता की जय. (मेजों की थपथपाहट).

                                                                            

          डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान -- अध्‍यक्ष महोदय, आप एक मिनट का समय दे दें. बस एक मिनट में अपने क्षेत्र की बात करूंगा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, मंत्रिगण का जब जवाब होता है तो ऐसा नहीं होता है. चर्चा दोबारा से खुल जाएगी डॉक्‍टर साहब. आप समझदार हैं मिलकर बता देना.

मंत्री, स्‍कूल शिक्षा एवं परिवहन (श्री उदय प्रताप सिंह) -- अध्‍यक्ष महोदय, सदस्‍यों की भावना और समय को ध्‍यान में रखते हुए मैं कोशिश करूंगा कि बहुत संक्षिप्‍त में करूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- समय का विशेष ध्‍यान रखना है. भंवरसिंह जी ने बता दिया है कि चाय जो थी वह अब पूरी तरह घुल चुकी है.

श्री उदय प्रताप सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, सदस्‍यों की भावना है पूरे सदस्‍य हाथ जोड़ रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बोलिये, आपका विभाग बड़ा विभाग है.

श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, शेखावत जी की बात का आपने ध्‍यान नहीं दिया चाय तो आपने पिलाई थी, वह 8 बजे के बाद के आइटम की व्‍यवस्‍था का पूछ रहे हैं...(हंसी)..

अध्‍यक्ष महोदय -- मैंने इसीलिए कहा शिक्षा विभाग में इसकी कोई गुंजाइश है नहीं..(हंसी)..

श्री महेश परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, यह 8 बजे के बाद की जिम्‍मेदारी हमारे भैया संदीप जायसवाल जी को दे दीजिए.

श्री उदय प्रताप सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, जब मुख्‍य बजट पर चर्चा होगी तो उसको थोड़ा सा लंबा खिचवा देंगे. मांग संख्‍या 27 और 36 पर बहुत व्‍यापक रूप से माननीय सदस्‍यों ने चर्चा की. इस चर्चा की शुरुआत श्रीमती अर्चना चिटनीस जी ने की है और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जी ने भी बीच में उसमें इंटरवीन किया. संदीप जायसवाल जी, ठाकुरदास नागवंशी जी, सुरेन्‍द्र सिंह गहरवार जी, मोहन सिंह राठौर जी, हरिशंकर खटीक जी, सुरेश राजे जी, राजन मण्‍डलोई जी, साहब सिंह गुर्जर जी, बाबू जण्‍डेल जी, दिनेश गुर्जर जी, नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर जी, महेश परमार जी, विपीन जैन जी, सिद्धार्थ कुशवाहा जी, दोगने जी, कमलेश्‍वर डोडियार जी, सुश्री रामसिया जी, मधु भगत जी और केदार डाबर जी, माननीय सदस्‍यों का मैं हृदय से आभार व्‍यक्‍त करता हूं, क्‍योंकि यह सदन चर्चा के माध्‍यम से और मुझे लगता है कि आपके सुझाव के आधार पर ही नीतियां बनती हैं और आगे बढ़ती हैं. मैं बहुत लंबी बात नहीं करूंगा. माननीय उच्‍च शिक्षा मंत्री जी ने जिस विभाग की नींव पिछले 5 वर्षों में शिक्षा मंत्री के तौर पर रखी थी हम लोगों ने उसको आगे बढ़ाने का प्रयास किया है. स्‍वतंत्र भारत के महामानव पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय जी ने एक बार कहा था कि जब किसी राष्‍ट्र के विकास की चर्चा की जाती है तो उसमें शिक्षा का स्‍थान सर्वोपरि होता है, विश्‍व के किसी भी राष्‍ट्र का विकास शिक्षा के बिना असंभव है. स्‍वाभाविक रूप से मध्‍यप्रदेश में माननीय मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में हमारी सरकार ने भी उन्‍नत और प्रगतिशील समाज की रचना हो इस दिशा में शिक्षा के अंदर एक बेहतर निवेश करने की कोशिश की है.

अध्‍यक्ष महोदय, 36,730 करोड़ का बजट शिक्षा विभाग के लिए दिया गया है. मुझे लगता है कि पिछले वर्ष की तुलना में इसको बढ़ाने का काम माननीय वित्‍त मंत्री जी ने किया है. मैं प्रदेश के मुखिया मुख्‍यमंत्री जी और माननीय वित्‍त मंत्री देवड़ा जी का हृदय से आभार व्‍यक्‍त करता हूं कि वह बच्‍चे जो हमारे राष्‍ट्र के भविष्‍य के निर्माता हैं उन बच्‍चों की बेहतर शिक्षा, बेहतर प्रबंधन के लिए बजट में बढ़ोत्‍तरी की गई है और पर्याप्‍त बजट शिक्षा विभाग को दिया गया है जो आगे आने वाले समय में वैश्विक रूप से शक्तिशाली भारत का निर्माण हो और नई शिक्षा नीति 2020 की स्‍थापना प्रमुखता के साथ हो उसमें उसकी महत्‍वपूर्ण भूमिका रहने वाली है. हमारा विभाग मूल रूप से बच्‍चों की शिक्षा, बच्‍चों के ज्ञानार्जन, उनको बेहतर इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, आज के युग के हिसाब से उनको संसाधन जिसमें वह वैश्विक स्‍तर पर कम्‍पलीट कर सकें और ऐसी आचरण आधारित शिक्षा जिसमें वह एक सुसंस्‍कृत समाज को आगे बढ़ाने का काम करें, हमारे भारत की जो सभ्‍यता है, हमारी जो गौरवशाली सभ्‍यता है उसको आगे बढ़ाने में हमारा वह बालक कामयाब हो सके. जनजातीय क्षेत्र में हमारे विभाग ने बहुत काम किया है और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्‍कर्ष अभियान के तहत ऐसे गांवों को चिह्नित करके जिनके 5 किलोमीटर की दूरी पर कोई स्कूल नहीं है उन बसाहटों को चिह्नित किया गया , और हमने 50 विकासखण्डों में 100-100 सीटर बालक एवं बालिका 104 छात्रावासों के निर्माण का काम हमारे विभाग ने किया है और इसके लिये 4 करोड़ रूपये की व्यवस्था की है और जो इसके लिये भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार के 60 और 40 केन्द्रांश और राज्यांश के साथ इस योजना को हम लोग आगे बढ़ा रहे हैं और 10 हजार से अधिक विद्यार्थी हमारे छात्र छात्रायें जो इसमे लाभ लेंगे. हमने इसमें 208 करोड रूपये से ज्यादा का प्रावधान इसमें किया है.

          माननीय अध्यक्ष जी, प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन) (PM-JANMAN )जो है यह माननीय प्रधान मंत्री जी का बड़ा एक फोकस प्रोग्राम है और माननीय प्रधान मंत्री जी का एक लक्ष्य है कि हमारे जो पीएमजनमन योजना के अंतर्गत विशेष आरक्षित जनजातीय समूह हैं, हमारे
पीवीटीजी
 (PVTG - Particularly Vulnerable Tribal Groups)
जो 'विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह' है उन के विकास हेतु इस योजना का प्रारंभ किया गया था , जैसे बैगा, भारिया, सहारिया जनजातियों के लिये इस प्रदेश में काम करते है और वही मापदंड इसमें भी, इस योजना में भी होते हैं कि 5 किलोमीटर की दूरी पर स्कूल नहीं हैं उन बसाहटों में 50-50 सीटर बालक बालिकाओं के छात्रावास बनाये जाते हैं, 106 छात्रावासों की व्यवस्था हमारे राज्य में इस बार हुई है और लगभग 203 करोड़ रूपये 60 और 40 के राज्यांश और केन्द्रांश के माध्यम से इस पर कर रहे हैं और साढे पांच हजार के आसपास विद्यार्थी जो हैं छात्र छात्रायें इसमें लाभान्वित होंगे.

          माननीय अध्यक्ष महोदय,  देश के प्रधान मंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी ने PM-SHRI योजना इस देश में लागू की थी और भारत सरकार का जो हमारा शिक्षा विभाग है वह लगातार ऐसे स्कूलो को फंडिंग करता है और उनको बेहतर शिक्षण संस्थान के रूप में बढ़ाने के लिये अपनी तरफ से उनका एक विशेष सहयोग रहता है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे सेन्ट्रल स्कूल हैं, नवोदय हैं उस तर्ज पर राज्यों के स्कूल की मदद के लिये भारत की सरकार आगे आई, हम उनका हृदय से आभार व्यक्त करते हैं, और प्रत्येक विकासखंड में हमारे प्रदेश के अंदर सांदीपनि के अलावा प्रत्येक विकासखंड में दो शासकीय विद्यालयों के पीएमश्री विद्यालय के रूप में विकसित किया जावेगा. प्रधान मंत्री जी की महत्वाकांक्षी योजना को प्रदेश में लगभग 799 पीएमश्री विद्यालय हमारे स्वीकृत किये गये हैं और वर्ष 2026-27 में इन पर 530 करोड़ रूपये के बजट का हम लोगों ने प्रावधान किया है. इस योजना के अंतर्गत शिशु वाटिका का विकास, राष्ट्रीय आविष्कार अभियान (RAA,) विद्यालयों की व्यवसायिक शिक्षा, खेलने की सुविधा ,लायब्रेरी , लैब इत्यादि की व्यवस्था की जाती है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सामान्य स्कूल से हटकर होते हैं, बच्चों के पास में एक अवसर होता है कि पीएमश्री में पढ़ने के लिये अगर वह जा रहे हैं तो प्रायवेट इंस्टीट्यूशन (Institution) के साथ उनके मुकाबले में हमारा स्कूल उसमें बच्चों का एक आकर्षण बढ़ा है और बच्चों की संख्या भी बढ़ी है. इन विद्यालयों को ग्रीन स्कूल की तर्ज पर भी हम विकसित कर रहे हैं. छात्र छात्राओं को डिजिटल लायब्रेरी, आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) लैब, स्मार्ट क्लेसस, काफी इस तरह की सुविधायें हम उनको उपलब्ध कराने का काम कर रहे हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, इन विद्यालयों की शिक्षा ऐसी होगी  एक ऐसे विद्यार्थी यह तैयार करेगे जो जीवन के सभी पहलुओं में सीखने की कुशाग्रता-इच्छा रखते हो, ताकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की जो हमारी परिकल्पना है  उसके अनुसार एक उचित समावेशी और अलग अलग विचारधाराओं, मूल्यों वाले समाज में संलग्न उत्पादक और योगदान देने वाले नागरिक बना सकें.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, पिछली सरकार ने मध्यप्रदेश में सीएम राइज की एक महत्वकांक्षी योजना चालू की  थी, मैं धन्यवाद देना चाहता हूं हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी को कि महर्षि सांदीपनि ऋषि के नाम से उस योजना को आगे बढ़ाने का काम किया. सांदीपनि विद्यालय के रूप में वह योजना आगे बढ़ रही है. 275 विद्यालय सांदीपनि विद्यालय के रूप में संचालित हैं . 271 विद्यालयों के लिये हम 10 हजार 447 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई हैं. 91 भवनों का निर्माण पूरा हो गया है और हमारी कोशिश जून 2026 तक 179 स्कूल भवन का निर्माण पूरा करने का हमारा लक्ष्य है. पूर्ण स्कूल भवनों में उच्च गुणवत्तापूर्ण हमारे क्लास रूप फर्नीचर , डायनिंग हाल, हमारा शादी के आउटडोर प्ले इक्यूपमेंट्स इस तरह की गतिविधियों के लिये हम उनको सामग्री प्रदाय कर रहे हैं. और जैसे  जैसे यह स्कूल भवन पूरे होते जायेंगे , इनको हम लोग उस हिसाब से फर्नीचर आदि की व्यवस्था उपलब्ध कराते जायेंगे और एक बेहतर केंपस मध्यप्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से हम प्रदान करने जा रहे हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, सांदीपनि स्कूल में जो प्रायवेट इन्सट्यूशन के सामने हमारी बड़ी चुनौति होती थी कि बच्चो को अगर उनके ऊपर छोड़ा जाये कि बेटा कहां पढ़ने जाओगे तो वह किसी प्रायवेट संस्थान का नाम लेता था अब प्रदेश में बदलाव आया है और बच्चों की च्वाईस हमारे मॉडल स्कूल, एक्सीलेंस, सांदीपनि, पीएमश्री हमारे यह विद्यालय बने हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय आज में बड़े गर्व के साथ में यह बात कह सकता हूं कि हमारी सरकार कि योजना जो है इसकी तरफ पालक भी आकर्षित हुये हैं और हमारे विद्यार्थी भी आकर्षित हुये हैं. क्योंकि हम लोग वहां पर  जो प्रायवेट इंस्टीट्यूशंस   चीजें देती हैं, वह हम लोग भी देने का काम कर रहे हैं.  इंटरेक्टिव पैनल्स हैं,  स्मार्ट टीवीज हैं, कम्प्यूटर लैब्स हैं और  सबसे महत्वपूर्ण है कि  विद्यार्थियों के लिये निशुल्क परिवहन व्यवस्था भी हम   इन  स्कूल्स में करने जा रहे हैं.   अभी पिछले  माह   हमारी कैबिनेट ने  मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता  में   म.प्र. में  200 नये सांदीपनी स्कूल्स स्थापित हों,  इस बात की स्वीकृति दी है वह, प्रक्रियाधीन है,   जल्दी वह हम सांदीपनी स्कूल्स  प्रदेश में स्थापित  करेंगे.  सबसे  महत्वपूर्ण जो हमारे   जिन विधान सभाओं में   सांदीपनी स्थापित नहीं हुए थे,  जो  पिछली हमारी सरकार के दौरान  जो  विधान सभाएं छूट गई थीं,  हमने प्राथमिकता पर पहले उन विधान सभाओं को शामिल  किया है. म.प्र.  में सौ फीसदी विधान सभाओं में   कम से कम से एक   एक सांदीपनी होगा,   एक से अधिक होगा,  इस बात की विभाग ने  चिंता  की है.  स्मार्ट क्लासेस और कम्प्यूटर लैब्स   की लगातार स्थापना  कर रहे हैं.  अभी तक  4400 स्मार्ट क्लास,  200 कस्तूरबा गांधी  बालिका छात्रावास  एवं स्मार्ट क्लास स्थापित  किये गये हैं.  3400 हायर सेकेण्डरी  और हाय स्कूल्स में   आईसीटी  लैब्स स्थापित किये गये हैं. लगभग 5273  आईसीटी लैब्स स्थापित  करने का काम किया है.  यह बातें  माननीय सदस्यों को इसलिये बता रहा हूं  कि  इस बात का पता होना चाहिये और मैं आग्रह करना चाहता हूं कि म.प्र. में लगातार  नई शिक्षा नीति  और  प्रधानमंत्री जी का  जो लक्ष्य है कि  2047 में   भारत दुनिया के सशक्त  राष्ट्रों के सामने  खड़ा हो सके.  वह स्थान पर तब  जा सकेगा,  जब हम   आज की वर्तमान पीढ़ी  जो  प्रायमरी, मिडिल स्कूल में   बच्चा पढ़ रहा है,  वह 2047 में   सशक्त भारत का एक   महत्वपूर्ण  अंग बनेगा.  उनके लिये  जो बेहतर से बेहतर  हम दे सकते हैं,  वह करने का काम हमारी सरकार ने किया है.  समग्र शिक्षा अभियान के तहत  भी लगातार हम लोग प्रयास  कर रहे हैं कि बच्चों को बेहतर से बेहतर   व्यवस्था दें.   वित्त मंत्री जी ने भी   इसमें एक बेहतर बजट का  प्रावधान किया  है, लगभग  5649 करोड़ रुपये  का प्रावधान है और  भारत सरकर भी लगातार  समग्र शिक्षा के क्षेत्र  में  हमारी  मदद  करने का काम करती है.  हमने 3367  विद्यालयों में  व्यावसायिक शिक्षा के  तहत विद्यार्थियों  को  17 ट्रेड्स में   जॉबरोल  आधारित शिक्षा  प्रदान की जा रही है.  योजना के अंतर्गत लगभग  5 लाख 98 हजार  से  अधिक विद्यार्थियों को   इसमें प्रशिक्षण दिया जा रहा है.  भविष्य में हमारी कोशिश है,  हम लोगों ने विभाग में चर्चा की है, हमारे  एक्सपर्ट्स  बात कर रहे हैं,  अधिकारी इस पर चिंतन कर रहे हैं  कि हम कुछ विदेशी भाषाओं का  अध्ययन भी बच्चों को करायें.   दुनिया के कई  ऐसे देश हैं,  उनका एक उम्र का   इस पड़ाव में वह देश हैं कि   जहां  उनको  नौजवान  बच्चों  की छोटे  मोटे कामों   के लिये आवश्यकता पड़ती है और थोड़ा  सा भी भाषायी ज्ञान अगर   उस देश के बारे में  हमारे बच्चे को होगा, तो  उन्हें बहुत आसानी से  जैसे जापान,जर्मनी, सिंगापुर  है,  इन देशों में बुजुर्गों  की संख्या अधिक है, नौजवानों के लिये रोजगार के अवसर  बहुत हैं. तो अगर  उन  भाषाओं का प्रायमरी   लेवल का   भी अध्ययन   उनको होगा, तो वहां जाकर उनको   स्थानीय स्तर के   काम  मिल सकते हैं, इस पर  भी हमारा विभाग  काम कर रहा है.  अटल टिंकरिंग लैब  भारत सरकार की एक पहल है,  जिसमें अटल इनोवेशन मिशन,  एआईएम के तहत  इसे प्रारंभ किया गया था.   मुख्य   उद्देश्य विद्यार्थियों, वैज्ञानिक सोच, समस्याओं के समाधान की क्षमता, प्रौद्योगिकी  में  रुचि को बढ़ावा देने और उनमें नवाचार  और रचनात्मकता को   प्रोत्साहित करना है.   बच्चों के अंदर जो उनकी   स्किल  होती है.  कई बार वह कल्पनाशील   बच्चे होते हैं, वह  कुछ बेहतर करना चाहते हैं,    नया करना चाहते हैं,  ऐसे बच्चों के  लिये  यह अटल टिंकरिंग लैब     उनके लिये कहना चाहिये कि   एक  बड़ा पुरस्कार  की  तरह है.  थ्रीडी प्रिंटिंग,  रोबोट टेक, इन्टरनेट ऑफ  थिंग्स, आईओटी और  माइक्रो प्रोसेसर   आधारित उपकरणों का उपयोग  करते हुए विभिन्न  मॉड्यूल   हमारे  बच्चे  ये तैयार कर रहे हैं.   उनको  हम प्रशिक्षण  देने का काम कर रहे हैं.  पीएमश्री के अंतर्गत   473  विद्यालयों में  अटल टिंकरिंग लैब      स्वीकृत   हुई हैं,  जिनको  स्थापित करने का काम  किया  गया है.  इस प्रदेश में हमारे  वह बच्चे  जो  विशेष एघ्जाम के तहत   10वीं क्लास में हम उनको एक  सुपर हण्ड्रेड योजना   पिछली सरकार के समय   चालू हुई थी और सुपर  हण्ड्रेड  योजना के माध्यम से  बच्चों को बहुत लाभ हुआ है और बच्चे  10वीं के बाद में  एक परीक्षा के माध्यम से हम उनको   चयन करते हैं,  वह बच्चे चुनकर  आते हैं.  तो 10वीं एवं 12वीं  में  उनको  हम शासकीय  जो हमारा  सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय भोपाल में है और  शासकीय  मल्हार आश्रम  इन्दौर और  इन स्कूल्स  में   उनको  अध्ययन के पश्चात्  व्यावसायिक पाठ्यक्रमों इंजीनियरिंग, मेडिकल और क्लेट आदि में जाने के लिये  उनको  एक अवसर रहता है. मुझे बताते हुए  खुशी है कि 2025 -26 में  सुपर हण्ड्रेड योजना  में जो बच्चे चयनित  हुए थे, लगभग अभी तक इसमें  597   बच्चों को  इसका लाभ  दिया जा रहा है 2025-26  योजना के  अंतर्गत.  वर्ष  2025 में जेईई मेन्स में 55,  जेईई  एडवांस  में 9  और नीट में  80 विद्यार्थी  इसके माध्यम से सफल हुए हैं.और यह पूर्णत: निशुल्‍क रहता है और इसमें हमारे जो मास्‍टर्स ट्रेनर हैं और जो अच्‍छे टीचर्स रहते हैं वह उनको पढ़ाने का काम करते हैं. इस योजना को हम लोग बढ़ाने का काम कर रह हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, आगामी समय में हमारी कोशिश है कि एक आपका, वैसे तो आपको पूरा मध्‍यप्रदेश है. हर जिला आपके लिये महत्‍वपूर्ण है लेकिन ग्‍वालियर और जबलपुर में सुपर -100 योजना शुरू हो, इसके लिये विभाग तैयारी कर रहा है. हमारी कोशिश होगी कि आगामी समय में उन बच्‍चों के लिये, जिस तरह से भोपाल और इंदौर में बच्‍चों को पढ़ा रहे हैं. इसी तरह ग्‍वालियर और जबलपुर में भी बच्‍चों को स्‍थानीय स्‍तर पर काउंसिलिंग के माध्‍यम उनको स्‍कूल चुनकर वहां पढ़ने की एक व्‍यवस्था हो.

          माननीय अध्‍यक्ष जी, प्रायवेट इंस्‍टीट्यूशन्स और शासकीय क्षेत्र में पढ़ने वाले विद्यार्थियों, दोनों के बीच में बड़ी चुनौती है. हमारे कई सदस्‍यों ने कहा कि बच्‍चे यूनिफार्म नहीं पहन पाते और कई बार स्‍कूल दूर रहता है तो जा नहीं पाते हैं. सायकिल आदि का इंतजाम नहीं होता. एक इंफियरिटी काम्‍प्‍लैक्‍स जैसी चीज बच्‍चों के अंदर आती है. उन सबसे उबारने का सरकार ने अच्‍छे प्रोग्राम प्रदेश में चला रखे हैं. निशुल्‍क सायकिल वितरण योजना भी उसका एक प्रमुख पार्ट है. यह योजना वर्ष 2004-05 से यह योजना चालू की थी. छटवीं और नौवीं क्‍लास में अध्‍ययनरत बच्‍चों को जो गांव से दूर से पढ़ने आते हैं, उनको इस योजना में सायकल प्रदान की जाती है. मैं समझता हूं कि सारे हमारे जो विधायकगण है, इनके पास सायकल वितरण योजना के समय पर एक अवसर होता है कि गांव-गांव जाकर साय‍कल वितरण के कार्यक्रमों में शामिल होना, बच्‍चों से और पालकों से रूबरू होना और बच्‍चों के साथ एक इंटरक्‍शन का अवसर उनको मिलता है, बच्‍चों को उनको जानने का और बच्‍चों के परिवेश को जानने का एक बड़ा महत्‍वपूर्ण अवसर होता है. इस तरह से यह हम छात्रावासों में भी बांटने का काम करते हैं, जब तक बेटी छात्रावास में रहेगी तो वह सायकल का इस्‍तेमाल करेग और वह जब छात्रावास छोड़कर जायेगी तो वहां सायकल छात्रावास में जमा कर देगी. वर्ष 2025-26 में 4 लाख 90 हजार पात्र छात्र/छात्राओं को हमने सायकिल वितरित की थी. वर्ष 2026-27 में हमने 210 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है और यह संख्‍या मुझे लगता है कि 5 लाख के ऊपर जायेगी. जिन बच्‍चों को मुफ्त में सायकल देकर सरकार उनको पढ़ने के लिये प्रेरित करने का काम करेगी.

          अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह से ई-स्‍कूटी योजना और आईसीएस एक प्रदाय करते हैं, हम लोग. जो टापर्स बच्‍चे हैं उन बच्‍चों को हम स्‍कूटी देने का काम करते हैं. वर्ष 2022-23 में यह योजना संचालित हुई थी और इसको स्‍कूल शिक्षा विभाग औ जनजा‍तीय विभाग जो हायर सेकेण्‍डरी में 12वीं के बच्‍चे टॉप आते हैं, चाहे वह किसी भी संकाय के हों. हमारे स्‍कूल से जो बच्‍चे पास आउट होते हैं उनके लिये नियमित छात्रों को टॉप करने वालों बच्चों को हम ये स्‍कूटी देते हैं. इसमें पैट्रोल से चलने वाली स्‍कूटी 90 हजार है, वह एक्‍स शोरूम प्राइज, इंश्‍योरेंस और ऐसेसिरीज़ तैयार करके उन बच्‍चों को स्‍कूटी देते हैं और कोई बच्‍चा कहता है कि स्‍कूटी नहीं, ई-स्‍कूटी देना है तो हम उसको आज के एनवायरमेंट को ध्‍यान में रखते हुए, ई-स्‍कूटी का प्रावीज़न भी उसमें किया है और 1 लाख 20 हजार रूपये की राशि अगर बच्‍चा ई-स्‍कूटी लेना चाहता है तो उसको भी रजिस्‍ट्रेशन आदि की सुविधा के साथ में, वह भी उपलब्‍ध कराने का हम काम कर रहे हैं. इस योजना में वर्ष 2025-26 में 7 हजार 865 पात्र विद्यार्थी हमारे लाभांवित हुए थे और वर्ष 2;26-27 में भी लगभग 100 करोड़ रूपये का इसमें प्रावीज़न हमारे विभाग में माननीय वित्‍त मंत्री जी ने हमको प्रदाय किया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, अभी शिक्षा के अधिकार के तहत हमारे किसी सदस्‍य ने बात करी थी, शायद दोगने जी ने इस बात का उल्‍लेख किया था कि प्रायवेट इंस्‍टीट्यूशनंस में पढ़ते हैं, 25 प्रतिशत बच्‍चे जो आरटीई के तहत उनको प्रायवेट इंस्‍टीट्यूशनंस में पढ़ाने के लिये भारत सरकार उनकी फीस आदि देने का काम करती है, परंतु उसकी मात्रा कम है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से बताना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश के अंदर उस आरटीई की फीस के कारण प्रायवेट स्‍कूल खुल रहे हैं. बहुत से बेरोजगार बच्‍चे सोसायटी का रजिस्‍ट्रेशन कराते हैं, स्‍कूल खोल लेते हैं केवल इस उम्‍मीद में कि बच्‍चे फ्री में पढ़ने आयेंगे, आरटीई का पैसा मिलेगा और हमारे स्‍कूल चलेंगे. हम लोगों ने पहली बार मध्‍यप्रदेश में ऐसा किया कि आटीई का पैसा सिंगल क्लिक से उन स्‍कूलों में माननीय मंख्‍यमंत्री जी को हम लोग हरदा जिले में वहां गये थे और खिरकिया में एक सिंगल क्लिक से विगत वर्ष का आरटीई का पैसा ट्रांसफर करने का काम किया है. हम लोग कोशिश कर रहे हैं कि आटीई के पैसे के विलंब के कारण वह छोटे-छोटे से प्रायवेट इंस्‍टीट्यूशनंस को दिक्‍कत आती है औ हमारी कोशिश है कि उसको आगे आने वाले समय में हर वर्ष का उसी वर्ष में आरटीई का पैसा मिल जाये. इस बात के लिये सरकार चिंता कर रही है. माननीय मंख्‍यमंत्री जी के मार्गदर्शन में हम वह काम कर पायेंगे, ऐसी हमें उम्‍मीद है और पिछले वर्ष हमने 490 करोड़ रूपये का आटीई में प्रावीज़न किया था औरइस बार 546 करोड़ रूपये की राशि उन गरीब बच्‍चों के लिये आरटीई के पैसे, मतलब हमारी फीस के माध्‍यम से प्रायवेट इंस्‍टीट्यूशन को हम ट्रांसफर करेंगे,  लगभग साढ़े पांच सौ करोड़ रुपये की राशि उन बच्चों की फीस के रूप में हमारी सरकार देने जा रही है. जो हमारे रिजल्ट के बारे में बातचीत हुई कि किस तरह से मेहनत कर रहे हैं, स्वाभाविक रूप से यह पूरा काम इसका पूरा श्रेय अगर कहीं जाता है तो हमारे शिक्षकों को जाता है, हमारे प्राचार्यों को जाता है. मध्यप्रदेश के हमारे शिक्षकों ने हमारे प्राचार्यों ने उन अतिथि शिक्षिकों ने, हम जानते हैं कि अतिथि शिक्षक संघर्ष कर रहे हैं  लेकिन आप भी सरकार में रहे हैं, सरकार की अपनी सीमाएं, बाध्यताएं हैं. एक साथ चीजें पूरी नहीं हो सकती हैं. आरक्षण के अपने इश्यु हैं. माननीय न्यायालय की अपनी बाध्यताएं हैं. इसके बाद भी हमारा प्रयास है कि हम बेहतर से बेहतर इस प्रदेश में शिक्षण व्यवस्था को आगे बढ़ाएं और वर्ष 2024-25 में 10वीं का परीक्षा परिणाम 87.52 था और 12वीं का 82.53 था, जो वर्ष 2023-24 की तुलना में 31.52 परसेंट और 19.53 परसेंट रहा, यह बड़ा परिवर्तन है. 20-22 परसेंट रिजल्ट पूरे प्रदेश में लगातार बढ़ जाय और यह किसी मैनेजमेंट के तहत नहीं हुआ, यह पूरी तरह से टीचर्स, प्रिंसिपल्स और पैरेंट्स की अवेयरनेस के कारण हुआ है. पालक भी जब जागरूक रहता है स्कूल के साथ जुड़ता है. मुझे लगता है कि बच्चा परिणाम लेकर आता है और जो शिक्षा विभाग हमारा है.

अध्यक्ष जी, हम लोग टीचर्स की भर्ती में लगातार काम कर रहे हैं. वर्ष 2024-25 में लगभग 3200 माध्यमिक शिक्षकों को भर्ती करने का काम किया गया था. वर्ष 2026-27 में हमारी कोशिश है कि 15000 से अधिक शिक्षकों की भर्ती की जाय, जिससे कि उसमें भी हम लोग 50 परसेंट आरक्षण हमारे जो अतिथि शिक्षक हैं उनको देने का काम करेंगे, जिससे शिक्षकों की पूर्ति हम कर सकें और हमने लगभग 5500 अतिथि शिक्षकों का युक्तियुक्तरण भी किया है, जिससे एक सिंगल टीचर्स स्कूल हैं या जहां पर बच्चे कम हैं और टीचर्स ज्यादा हैं, उनको युक्तियुक्तकरण के माध्यम से उनको भी व्यवस्थित करने का काम कियाहै.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) - अध्यक्ष महोदय, 5000 अतिथि शिक्षक की बात कर रहे हैं मंत्री जी, 70000 अतिथि शिक्षक हैं तो क्या 5000 का आंकड़ा छोटा नहीं है? मैं समझता हूं कि जो 70000 शिक्षक हैं उन पर भी आप विचार करें. आपकी सरकार विचार करे. अगर आप सिर्फ ऊंट के मुहं में जीरे वाली बात करेंगे, बाकी क्या 65000 का क्या होगा?

          श्री उदय प्रताप सिंह - मैं माननीय नेता प्रतिपक्ष जी को माननीय अध्यक्ष महोदय के माध्यम से बताना चाहता हूं कि आप भी सरकार में  रहे हैं. भर्ती एक ऐसी व्यवस्था है जो केवल आपके हाथ में नहीं होती. इसमें हम भर्ती करने जाते हैं कोर्ट केस होते हैं, 8000 से ज्यादा मामले शिक्षा विभाग के माननीय न्यायालयों में लंबित हैं  परिस्थिति ऐसी है कि हम चाहते हैं कि भर्ती हो जाय. बहुत सी भर्तियां हो चुकी हैं हम अपाइंटमेंट लेटर उनको नहीं दे पा रहे हैं. कुछ ऐसे हैं जो वैरिफिकेशन की स्टेज पर रुके हुए हैं. अकेले हमारे हाथ में नहीं होता है, विभाग के हाथ में नहीं होता है. सारी चीजों को सामने रखकर हमको चलना पड़ता है. एक चीज में हम लोगों ने बहुत मेहनत की है.

          अध्यक्ष महोदय - उमंग जी तो खुद सरकार में रहे हैं तो परेशानियों  को समझते हैं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत - अध्यक्ष महोदय, मैं आदरणीय मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि अभी माननीय नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 65000-70000 की संख्या सबको नौकरी देना तो संभव नहीं है,यह बात तो हम भी समझ सकते हैं, लेकिन 3-3 महीने तक अतिथि शिक्षकों को तनख्वाह न मिले कम से कम इसकी चिंता तो आप कर लें. 3-3, 4-4 महीने तक अतिथि शिक्षक बेचारे अपनी तनख्वाह के लिए इंतजार करते रहते हैं उनके परिवार चलाने में कई बार कठिनाइयां पैदा होती हैं मैं समझता हूं कि इसको मानवीयता पर लेना चाहिए.

          श्री उदय प्रताप सिंह - अध्यक्ष जी, हम लोगों ने बच्चों की पुस्तकों के मामले में हमारे विभाग ने बहुत मेहनत की है और जो हमारे आरटीई के तहत बच्चों को फ्री में पुस्तकें उपलब्ध कराते हैं, उनकी प्रिंटिंग उनकी क्वालिटी पेपर क्वालिटी सब पर काम किया है और पहले जुलाई अगस्त सितम्बर तक बच्चों को मुफ्त में मिलने वाली किताबें मिलती थीं अब हम हर हाल में अप्रैल के पहले, सेशन चालू होने के पहले वह पुस्तकें उनको उपलब्ध कराने का काम करते हैं. इस पर विभाग ने बहुत मेहनत की है. पूरी एक टीम लगातार इस पर काम करती है और आगामी समय में जैसा पूर्व के कुछ हमारे माननीय सदस्यों ने एक विषय उठाया था, एक अशासकीय विद्यालयों में किताबों की उनकी पुस्तकों की कीमत पर चिंता जाहिर की थी.  स्वाभाविक रूप से हमने यह व्यवस्था की है कि अशासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी बहुत न्यूनतम दर पर जैसे 12वीं का सिलेबस है लगभग 450-500 रुपये का आता है, इस बार हम लोग कोशिश कर रहे हैं जिला स्तर पर तो पिछली बार प्रयास किया था इस बार जिला स्तर पर तो हम बुक फेयर लगाएंगे. हमारा प्रयास होगा कि हम उससे नीचे भी जाएं. विकासखण्‍ड स्‍तर पर बुक फेयर लगाएं और बच्‍चों  के पास एक व्‍यवस्‍था उपलब्‍ध हो कि वे प्राइवेट इंस्‍टीट्यूशन में पढ़ रहे हैं लेकिन शासकीय तौर पर उपलब्‍ध किताबें, जिसमें पहली क्‍लॉस का सिलेबस डेढ़ सौ रूपए में पूरा मिलेगा. 12वीं का सिलेबस लगभग साढे़ चार सौ रूपए पूरा मिलेगा. शासकीय दर पर बना हुआ सिलेबस, जो हम शासकीय स्‍कूलों में दे रहे हैं. लगभग वह प्राइवेट इंस्‍टीट्यूशंस के बच्‍चों को भी उपलब्‍ध कराएं, इस पर भी विभाग ने बहुत मेहनत की है.

          अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से कहना चाहता हॅूं चूंकि यह डिजिटल वर्ल्‍ड है और सारी चीजें कम्‍प्‍यूटर, सॉफ्टवेयर के माध्‍यम से हो रही हैं, तो हम लोगों ने भी उत्‍तरपुस्‍तिकाओं का मूल्‍यांकन डिजिटल पद्धित से कम्‍प्‍यूटर पर कराया जाकर 1 माह से भी कम समय में परीक्षाफल घोषित करने का काम पिछले साल किया था और इस साल भी हम वही करेंगे. परीक्षा के एक महीने के अंदर हम बच्‍चों को रिजल्‍ट देंगे, जिससे वे आगे आने वाले समय के लिए अपनी योजना तैयार कर सकें और समय पर जहां उन्‍हें अगला एडमीशन लेना है, वहां बच्‍चे जा सकें.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि आज के युग में ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एक बहुत बड़ी चुनौती है और इसके बिना काम भी नहीं चल सकता. राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति में बिन्‍दु क्रमांक-23.13 में एक कृत्रिम बुद्धिमत्‍ता आधारित प्रौद्योगिकी के लिए मध्‍यप्रदेश राज्‍य मुक्‍त स्‍कूल शिक्षा बोर्ड और माइक्रोसॉफ्ट के साथ हमने अभी एमओयू किया है. उसके माध्‍यम से बच्‍चों के लिए एक प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार कराते हैं, उसके लिए प्रशिक्षण की व्‍यवस्‍था भी हम कर रहे हैं. हमारा जो राज्‍य मुक्‍त स्‍कूल शिक्षा बोर्ड है, वह ऐसे 53 चयनित शासकीय विद्यालयों में वर्ष 2022 से पारित प्रोजेक्‍ट के रूप में ऑर्टिफिशियल इंटेलीजेंस का पाठ्यक्रम प्रारम्‍भ किया गया था. जिसमें 8वीं से 12वीं तक के बच्‍चों को इसमें पढ़ाया जाएगा और आगे आने वाले समय में इसको हम थोड़ा और स्‍ट्रेंग्‍थन करेंगे. क्‍योंकि यही एक चीज ऐसी है, जो चुनौती भी है और बच्‍चों के लिए लाभकारी भी है. इसके लिए भी बच्‍चों को मानसिक रूप से तैयार करने के लिए विभाग व्‍यवस्‍था कर रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय, महर्षि पंतजलि संस्‍कृत संस्‍थान इस प्रदेश में काम कर रहे हैं. लगभग 261 संस्‍कृत विद्यालयों में कक्षा 1 से कक्षा 12 तक लगभग 28 हजार विद्यार्थी संस्‍कृत का स्‍वमेव अध्‍ययन कर रहे हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से बताना चाहता हॅूं कि हमारी नई राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के हिसाब से जो हमारा अरूण उदय कक्षाओं का है उस पर भी हम लोग आगे बढ़ने वाले हैं और नई शिक्षा नीति के तहत उनका क्रियान्‍वयन उस आधार पर हो, इस पर भी विभाग काम कर रहा है. महर्षि पंतजलि संस्‍कृत संस्‍थान के माध्‍यम से अभी हम लोगों ने दो जगहों पर प्रयोग किया है. राजगढ़ और नरसिंहपुर में किया है. हम ऐसे संस्‍थान बना रहे हैं जहां आयुर्वेद, योग, वैदिक और इस तरह की शिक्षा एक ही संस्‍थान के अंदर उसका अध्‍ययन हम करा सकें, उस पर यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो लगभग हर जिले में इस तरह के संस्‍थान खोलने का काम आगामी समय में विभाग करेगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍कूलों में फर्नीचर आदि की बात चली थी. बच्‍चों को जहां 5-7 घंटे बैठना पड़ता है. उनको अच्‍छी क्‍वॉलिटी वाला फर्नीचर उपलब्‍ध हो, इसलिए मैं माननीय सदस्‍यों से आग्रह करूंगा कि सांदीपनि स्‍कूल्‍स में तो फर्नीचर बहुत अच्‍छे हैं जो दूसरे स्‍कूल्‍स हैं जो हॉयर सेकेण्‍डरी लेवल के हैं या अन्‍य स्‍कूलों में एक बार आप जरूर जाइएगा, उन फर्नीचर्स को देखिएगा कि किसी भी प्राइवेट इंस्‍टीट्यूशंस से बेहतर फर्नीचर हमारे शिक्षा विभाग ने हमारे स्‍कूल्‍स के अंदर उपलब्‍ध कराए हैं. (मेजों की थपथपाहट) बच्‍चों को हमने बहुत आरामदायक फर्नीचर दिये हैं. और विभाग द्वारा प्रदेश के लगभग 4 हजार हाई और हॉयर सेकेण्‍डरी स्‍कूल्‍स में 2 लाख ड्यूअल डेस्‍क और चेयर सेट हमने उपलब्‍ध कराए हैं और इसके लिए अभी वर्ष 2026-27 में लगभग राशि रूपए 200 करोड़ का इसमें प्रोवीजन भी किया गया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, हमारे माननीय सदस्‍यों ने शौचालयों की बात की थी. मैं बहुत विनम्रतापूर्वक आग्रह करना चाहता हॅूं कि हम लोगों ने बालिका विद्यालयों में लगभग साढे़ तीन हजार और पहली से आठवीं कक्षा, 9वीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यालयों में लगभग साढे़ तीन हजार शौचालय स्‍वीकृत किए हैं, जिनमें इन्‍हें रूपए 100 करोड़ की राशि उपलब्‍ध करायी जाएगी. विभाग का लक्ष्‍य है कि मई-जून तक हम कम से कम बालिका शौचालय चालू हालत में हों, स्‍कूल के अंदर बिजली की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था हो, इसके लिए इंतजाम किया है और सेशन चालू होने के पहले यह चीजें वहां दुरस्‍त हो जाएं, इस बात के लिए हम प्रयासरत हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नामांकन दर बड़ी चिंता है. स्‍वाभाविक रूप से धीरे-धीरे घटती हुई आबादी प्राइवेट इंस्‍टीट्यूशंस की तरफ बढ़ता हुआ पालकों का रूझान और मुझे इस बात को कहने में कोई संकोच नहीं है कि लोगों की जो परचेसिंग पावर बढ़ी है, लोगों की जो आय बढ़ी है, जब व्‍यक्‍ति के पास पैसा आता है तो वह बेहतर खोजने की कोशिश करता है और मन में यह आता है कि जब पैसा है तो हम पढ़ा सकते हैं. अब सरकारी छोड़ो, इसमें चले जाते हैं तो उसको मद्देनजर रखते हुए हम लोग अपने शासकीय स्‍कूल बेहतर कर रहे हैं. पीएम श्री, मॉडल, एक्सीलेंस, सांदीपनि उसका पालकों का धीरे धीरे रूझान इस तरफ बढ़ रहा है तो हमारी नामांकन दर भी पिछले दिनों बढ़ी है. अध्यक्ष महोदय हमने प्रवेश उत्सव मनाया, हमारे विधायक, सांसद, अधिकारी, यहां तक कि निचले स्तर पर हमारे सब डिवीजन में जो अधिकारी काम करते हैं वह स्कूलों में जाते थे प्रवेश उत्सवों में बाजे गाजे के साथ बच्चों को स्कूल में एडमिशन के लिये आग्रह करते थे. हमने सभी माननीय विधायकों से भी आग्रह किया था उन सबका मिला-जुला परिणाम यह हुआ कि पिछले साल हमारे शासकीय विद्यालयों में लगभग 32 परसेंट हमारी नामांकन दर बढ़ी है. प्रायवेट इंस्टीट्यूशन में उसके मुकाबले कम बढ़ी है. शासकीय विद्यालय में 2025-26 से कक्षा 9 वीं से कक्षा 12 वीं तक के नामांकन में भी लगभग 4 परसेंट की वृद्धि हुई है. हमने कक्षा 5 और 8 की बोर्ड पेटर्न परीक्षा के परिणाम भी समयपूर्व मार्च में घोषित कर दिये थे. विगत् तीन वर्षों में सभी कक्षाओं में ड्राप आऊट में भी कमी आयी है. पहले ड्राप आऊट काफी आगे होता था 2024-25 में प्राथमिक स्तर पर ड्राप आऊट 6.8 प्रतिशत था वह घटकर लगभग जीरो प्रतिशत हो गया है, यह एक बड़ी उपलब्धि हमारे विभाग की है. दूसरा हमने समग्र आईडी के माध्यम से ट्रेकिंग पोर्टल हमारे विभाग ने विकसित किया है. हम लोग 90 परसेंट बच्चों को जो 6 से 14 वर्ष के हैं. उनको ट्रेक करके उनका रिकार्ड हमने संधारित किया है, उनको स्कूलों में भी भेजने का काम किया है. जो बच्चे दूसरे जिलों में भी चले जाते थे अपने परिवार के साथ काम करने चले जाते थे उन बच्चों को ट्रेक किया है, यह चुनौतीपूर्ण कार्य था उनको भी हमारे विभाग ने बेहतर तरीके से स्कूल में भेजने का काम किया है. छात्रवृत्ति योजना भी संचालित हो रही है इसमें 352 करोड़ रूपये की राशि विद्यार्थियों के खाते में डीबीटी के माध्यम से हम लोग देने का काम करते हैं. हमारे विभाग ने बहुत मेहनत करके पिछले दिनों में बड़ी अपेक्षा थी जैसा माननीय उच्च शिक्षा मंत्री जी ने बताया है कि उपस्थिति को डिजीटली करने जा रहे हैं. आपने जो लेक्चर प्रोफेसर के किये हैं. हमारे यहां पर भी उपस्थिति का प्रोवीजन हम लोगों ने किया, इसमें बहुत सार्थक परिणाम आये है. लगभग 98 प्रतिशत अतिथि शिक्षक और 88 परसेंट के आसपास हमारे नियमित टीचर जो हैं यह उपस्थिति से जुड़े हैं जहां पर मोबाईल से टावर नहीं मिलते हैं वहां की समस्याओं को छोड़ दिया जाये या कुछ लोग उसका पालन नहीं कर रहे हैं उनको छोड़ दिया जाये. तो इस समस्या से हमको निजात मिली है. ई.उपस्थिति साफ्यवेयर के ऊपर शिक्षकों ने उस पर काफी सहभागिता सुनिश्चित की है. हमारा जो उपस्थिति का पोर्टल है इसमें अकेली उपस्थिति नहीं ले रहे हैं. हम लोग उनको विभिन्न प्रकार से काम ले रहे हैं अगर उनको छुट्टी लेना है उसका आवेदन लगाना है. एप के माध्यम से सक्षम अधिकारी उसके आवेदन को स्वीकृत करता है. कोई शिकायत अगर टीचर को दर्ज कराना है तो उसका उपयोग करता है. कक्षोन्नति एवं विद्यार्थी की सहमति उपरांत उच्च कक्षा एवं अन्य शासकीय विद्यालयों में प्रवेश आदि को भी इस पोर्टल के माध्यम से किया है.

          श्री सोहनलाल बाल्मिकअध्यक्ष महोदय, टीचरों को जैसे दूसरे कामों के लिये उपयोग कर रहे हैं, कम से कम वह तो रूकवाएं. अभी एक्जाम के पहले एसआईआर में लोगों को लगा दिया जिससे बच्चे पढ़ नहीं पाये पूरे टीचर एसआईआर में लगे रहे. यह काम पढ़ाई के अलावा अतिरिक्त दे रहे हैं कहीं न कहीं स्कूलों को प्रभावित कर रहे हैं इसको रोका जाये.

          श्री उदय प्रताप सिंहअध्यक्ष महोदय, हम लोगों की यह सभी की चिंता है माननीय मुख्यमंत्री जी भी लगातार हमारी बैठकों में जब रिव्यू करते हैं तो इस बात की चिंता वह भी करते हैं कि भवनविहीन शालाएं हैं, जर्जर हैं, इनको किस तरह से आगे बढ़ाया जाये. प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में निर्माण कार्यों की हम लोगों ने स्वीकृति दी है. नवीन अभी देने का काम किया है. लगभग हर विधान सभा क्षेत्र में, अतिरिक्‍त कक्ष, बाउंड़ीबाल या भवन की व्‍यवस्‍था यहां पर की गई है. आगामी समय में उन्‍नयन एक चुनौती है लगभग हर विधायक का, जब भी मिलने आते हैं, तो उन्‍नयन हो इस बात पर जरूर उनकी बातचीत होती है. सांदीपनि स्‍कूल जब बने थे, तो उस समय केबिनेट ने प्रॉविजन किया  था कि हम सांदीपनि स्‍कूल बनाएंगे, उस समय के सीएम राइज अब उन्‍नयन नहीं करेंगे, लेकिन हम लोग वह भी अब केबिनेट में जा रहे हैं, चूंकि सांदीपनि उस गति से नहीं बन पाएंगे. हमें बजट की उतनी आजादी नहीं देता कि इतनी जल्‍दी हम बना सके. इसलिए हम उन्‍नयन का काम करने जा रहे हैं और इस साल 175 स्‍कूल आगे आने वाले समय में लगभग 550 स्‍कूल, जिसमें हायर सेकेण्‍डरी और हाई स्‍कूल को करेंगे. लोक सेवा आयोग के माध्‍यम से हम लोगों ने बीईओ आदि की नियुक्ति की है, एडीपीसी की नियुक्ति की है. मध्‍यप्रदेश में खेलों के आयोजन पहले से बेहतर हुए हैं. बच्‍चों को जैसा कहा कि खेलों में उनको जोड़ना है इस पर अलग अलग जिलों में जो विभिन्‍न प्रकार के खेल हैं, उनको हमने कराने का काम किया है. शिक्षकों की कमी के बारे में बड़ा महत्‍वपूर्ण विषय है. हमारे लगभग 3 लाख 10 हजार पद  है, जिन पर 2 लाख 30 हजार 124 नियमित शिक्षक काम कर रहे हैं और 70 हजार के आसपास अतिथि शिक्षक काम कर रहे हैं, तो इस पर हमारी लगभग संख्‍या हम पूरी करते हैं और लगातार  भर्ती के माध्‍यम से हमारी कोशिश होगी कि अतिथि शिक्षकों की संख्‍या घटे और रेगुलर शिक्षकों की संख्‍या बच्‍चों के अनुपात में पूरी हो इस बात के लिए प्रयासरत है. निजी विद्यालय की संख्‍या भी प्रदेश में लगभग 29 हजार है, उनमें भी पढ़ने वाले बच्‍चों की संख्‍या 50 लाख के आसपास है, स्‍वाभाविक रूप से सरकार हमारे मुख्‍यमंत्री और हम सभी लोग चिन्‍ता करते हैं चूंकि वे  निजी हैं इसलिए उनको फ्री छोड़ दिया जाए, ऐसा नहीं है, लगातार उनको भी ट्रेक करते हैं, उनकी गतिविधियों को, उनके सेलेबस को, बच्‍चों के साथ किस तरह से उनका व्‍यवहार है, लगातार हमारा विभाग उनकी भी मॉनिटरिंग करता है, इस पर हम काम कर रहे हैं.

          अध्‍यक्ष जी, मैंने पहले भी बताया कि जो सुविधा हमको उपलब्‍ध करवाना है कभी हमें किताबें जुलाई अगस्‍त में मिलती थी. अब हम 1 अप्रैल में देने लगे हैं. साइकिल वितरण हम अप्रैल में करेंगे और हर चीज समय पर  बच्‍चों को उपलब्‍ध हो जिससे बच्‍चे के अंदर, पालकों के अंदर, शासकीय स्‍कूलों के प्रति आकर्षण बढ़े, इस बात के लिए हम लोग लगातार प्रयासरत है. अभी हमारे सतना के विधायक जी ने कहा कि अंग्रेजी माध्‍यम हो तो उसमें भी हमारे जो मॉडल स्‍कूल हैं, एक्‍सीलेंस हैं, सां‍दीपनि है, दूसरे और स्‍कूल पीएम श्री है, उनमें तो अंग्रेजी पढ़ाते ही है. साथ ही पांच हजार से अधिक स्‍कूलों में, हमने विगत वर्षों में केजी 1, केजी 2 जो अरुणोदय के नाम से आगे जाना जाएगा. हमने उन स्‍कूलों में अंग्रेजी का अध्‍ययन कराना चालू किया है और जब देश के शिक्षा मंत्री धर्मेन्‍द्र प्रधान जी आए थे, उनसे भी हमने आग्रह किया था कि इसमें हमें छूट मिलना चाहिए, क्‍योंकि हमारी जो दर्ज संख्‍या बच्‍चों की घटती है, कोई भी पालक बच्‍चे को तीन साल के बाद घर में नहीं रखना चाहता और हम 6 साल से पहले हम लेना नहीं चाहते, तो बीच का जो समय है वह प्रायवेट इंस्‍टीटयूशन के लिए एक खाद पानी का काम करता है. यदि  हमारे यहां भी केजी 1-2 में लेना चालू कर देंगे तो स्‍वभाविक रूप से ये संख्‍या हमारी बढ़ेगी, जिस पर भी हम गंभीरता से काम कर  रहे हैं.

          अध्‍यक्ष जी, एक चीज और है, कई जगहों से स्‍कूलों के नामकरण के प्रस्‍ताव आते हैं, तो हम लोगों एक सुझाव भेज रहा है कि जहां पर हमारे देश के लिए, जो सैनिक शहीद होता है अगर आपके गांव का रहने वाला है, गांव प्रस्‍तावित करता है, जिले की बॉडी प्रस्‍तावित करती है, तो उस अमर शहीद के नाम पर उस गांव का विद्यालय हम लोग जरूर करेंगे, इस बात के लिए भी हमारा विभाग काम करेगा. (..मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष जी, मैं आपके माध्‍यम से सदन का हृदय से आभार व्‍यक्‍त करता हूं. समय बहुत हो गया इसके बाद भी बहुत गंभीरता पूर्वक ध्‍यान से शिक्षा विभाग की अनुदान की मांगों पर गंभीरता पूर्वक चिंतन किया. बहुत सदस्‍यों ने इसमें भाग भी लिया आपके सहयोग के लिए मैं धन्‍यवाद ज्ञापित करता हूं.  साथ ही इस देश के प्रधान मंत्री माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी को जिन्‍होंने मैकाले की शिक्षा पद्धति को आखिरी रूप से वाय वाय करने का काम किया और नई शिक्षा नीति वर्ष 2028 तक हमारा प्रयास है कि जमीनी स्‍तर पर हम इसको नीचे उतार सकें, जिस दिन इस देश में नई शिक्षा नीति लागू हो जाएगी, उस दिन स्‍थानीय भाषाओं को, स्‍थानीय स्‍तर पर हमारा जो एक इन्‍वाल्‍वमेंट है, एजुकेशन के अंदर स्‍थानीय परिस्थितियों का बेहतर होगा. पूरे देश में समान शिक्षा की व्‍यवस्‍था होगी, मैं प्रधानमंत्री जी का हृदय से आभार व्‍यक्‍त करते हुए, मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में हमारे वित्‍तमंत्री आदरणीय देवड़ा जी ने जो अनुदान संख्‍या 27 के माध्‍यम से 36 हजार 696 करोड़ 97 लाख 37 हजार रूपये और परिवहन के लिये 229 करोड़ रूपये की राशि...

          अध्‍यक्ष महोदय -- ( श्री उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष द्वारा अपने आसन से कहने पर) उन्‍होंने मांग संख्‍या बोली है.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग संघार) -- चेक पोस्‍ट पर भी मांग ही रहती है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री गौतम जी को भी बोलना है, माननीय मंत्री जी आप समाप्‍त करें.

            श्री उदयप्रताप सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, पांच मिनट में खत्‍म हो जायेगा. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको धन्‍यवाद देता हूं. साथ ही परिवहन विभाग में जो लगभग 230 करोड़ के बजट का प्रोवीजन किया गया है, उसको भी हम करने का काम करेंगे और जो चेक पोस्‍ट आदि की आपने बात की थी, आपकी सरकार जाने के बाद यह अचानक से एक विसंगति इस प्रदेश में दिखी माननीय गडकरी जी ने एक पत्र लिखा, आपकी जानकारी के लिये बता दूं कि इस सरकार के बनने के बाद गडकरी जी का कोई पत्र नहीं आया, गडकरी जी का पत्र पूर्व के वर्षों में आया है. हम लोगों ने पूरी ताकत से इस प्रदेश में जो एक सिस्‍टम, जिसके बारे में आप हम सब जानते हैं, जिसके कारण सामाजिक विकृति पैदा हुई थी, तकलीफ आई थी, उसको खत्‍म करने का काम किया था और आज जो चलित हमारे चेक प्‍वाइंट हैं, उनको हम इसलिए बंद नहीं कर सकते हैं कि वही हमारा एक सिस्‍टम ऐसा है, जो कि चाहे जी.एस.टी. हो, ओवर लोडिंग हो, गाड़ी बड़ी करने का हो या किसी भी तरह की अनैतिक गतिविधि को अगर नियंत्रित करने का अगर कोई मैकेनिज्‍म है, तो केवल वही हमारे पास है, पुलिस के पास है, आर.टी.ओ के पास है, उसे हम बंद नहीं कर सकते हैं. हां, विसंगतियां हर जगह हो सकती है, हम उस पर काम कर रहे हैं, हमारा विभाग के लगभग 18 प्रतिशत कर्मचारी या तो सस्‍पेंड या उनको लाईन हाजिर कर रखा है, इससे ज्‍यादा सख्‍ती और विभाग नहीं कर सकता है, यह आपके माध्‍यम से सदन को बताते हुए मैं आग्रह करता हूं.

          श्री उमंग सिंघार -- सोने की ईंटे निकल रही है, परिवहन डिपार्टमेंट से सख्‍ती तो करना पड़ेगी.

            श्री उदयप्रताप सिंह -- मैं आपसे कह रहा हूं कि इससे ज्‍यादा सख्‍ती नहीं कर सकते हैं, विभाग को चलाना भी है.

          श्री महेश परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, उज्‍जैन आर.टी.ओ. का भी है, वह हजारों गाडि़यों का पंजीयन कर रहा है, आपसे विशेष प्रार्थना है. 

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी आप पूरा करें.

            श्री उदयप्रताप सिंह -- जो विषय यहां पर आया है, भले ही आपने तीस सैकेंड का अपना उद्बोधन दिया था, तब भी मैंने आपको कोड किया था कि जो विषय यहां पर आयें हैं, वह संज्ञान में लिये जायेंगे, आवश्‍यकता होगी तो उन पर निर्णय किया जायेगा, सख्‍त निर्णय की आवश्‍यकता होगी, तो वह भी किये जायेंगे (मेजों की थपथपाहट) क्‍योंकि हमको हमारे मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी की जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करना है. मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से सभी सदस्‍यों से आग्रह करूंगा कि हमारे विभाग की दोनों अनुदान की मांगें स्‍कूल शिक्षा की 27 और परिवहन की 36 इनको सर्वानुमति से मान्‍य करने की कृपा करेंगे. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिये मैं आपका हृदय से आभार व्‍यक्‍त करता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री गौतम जी आप कौशल विकास मंत्री हो, कुशलता से पांच मिनट में समाप्‍त करके आप पूरी कुशलता का परिचय दो.

          राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार (श्री गौतम टेटवाल) -- अध्‍यक्ष महोदय, समय भी अधिक हो गया है और शेखावत भाई साहब ने कह दिया है कि अब सहन नहीं हो रही है, इसलिए कम समय में मैं अपनी बात पूरी करूंगा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी, मांग पारित कराने के लिये वोट भी चाहिए, ये ही उठकर चले जायेंगे, तो वोट कौन देगा.(हंसी)

          श्री गौतम टेटवाल -- अध्‍यक्ष महोदय, कौशल विकास एवं रोजगार के क्षेत्र में प्रदेश ने उल्‍लेखनीय उपलब्‍धियां प्राप्‍त की हैं, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार के विभाग के अंतर्गत कौशल विकास संचालनालय मध्‍यप्रदेश द्वारा प्रदेश  के युवाओं को आई.टी.आई. के माध्‍यम रोजगारोन्‍मुख और उद्योगोन्‍मुख कौशल प्रशिक्षण उपलब्‍ध कराने के लिये शतत् प्रयास कर रहा है. संचालनालय का उद्देश्‍य केवल प्रशिक्षण प्रदान करना ही नहीं बल्कि उद्योगों को बदलती आवश्‍यकता के अनुरूप दक्ष, प्रतिस्‍पर्धी और आत्‍मनिर्भर कुशल मानव संसाधन तैयार करना भी है. जब बच्‍चे का एडमीशन महाविद्यालय में नहीं हो पाता है, पॉलीटेकनिक में, इंजीनियरिंग कॉलेज में नहीं होता है, तब वह सोचते है कि मेरे बेटे का आई.टी.आई. में एडमीशन हो जाये, उसके बाद वह कमायेगा खायेगा और उस विद्यार्थी को हम प्रशिक्षण देकर समाज में प्रतिस्‍पर्धा के लिये तैयार करने का काम आई.टी.आई करता है. वर्तमान में प्रदेश में 55 जिलों में 313 विकासखण्‍डों में से 262 विकासखण्‍डों में कुल 290 शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्‍थायें संचालित हैं, जिनके माध्‍यम से विभिन्‍न तकनीकी और व्‍यावसायिक ट्रेडस में गुणवत्‍तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, इसमें युवाओं को रोजगार एवं स्‍वरोजगार के अवसर प्रदान किये जा रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सत्र 2025 में प्रदेश की शासकीय आईटीआई में कुल 49402 प्रवेश हुये जो कि 94.55 प्रतिशत है. यह अब तक का सर्वाधिक प्रवेश हुआ है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले हमारे यहां 84 प्रतिशत, 75 प्रतिशत प्रवेश हुआ करते थे पर इस बार वर्ष 2025-26 में 94.55 प्रतिशत प्रवेश हुआ है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस सत्र में 3424 सीटों की वृद्धि की गई है जिसमें अधिक से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण के अवसर मिल रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश में युवाओं के भविष्‍य की आवश्‍यकता के अनुरूप जो युवा चाहता है उस क्षेत्र की और भविष्‍य की आवश्‍यकता के अनुरूप तैयार करना न्‍यूज एस कोर्स, सोलर, टेक्‍नीशियन, मेकेनिक, इलेक्‍ट्रॉनिक, व्‍हीकल, ड्रोन व्‍हीकल, ड्रोन टेक्‍नीशियन आदि आईटीआई के माध्‍यम से ट्रेड संचालित किये जा रहे है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2025 में हमने जो बच्‍चे आठवीं की योग्‍यता पर आधारित ट्रेस की संख्‍या 5 से बढ़ाकर 10 की गई है जिससे अधिक संख्‍या में विद्यार्थियों को प्रवेश के अवसर मिल सकें. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2025 में आईटीआई के नियमित पाठ्यक्रम में दिव्‍यांगजनों के प्रवेश में भी वृद्धि हुई है. इस सत्र में 490 दिव्‍यांगजन, जो दिव्‍यांगजन जो कुछ कर नहीं सकते, समाज से अलग हो जाते हैं उनको भी प्रवेश करने की आवश्‍यकता है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में संयुक्‍त राष्‍ट्र की संस्‍था यूएन के साथ हुये अनुबंध के अंतर्गत प्रदेश में 12 आदिवासी बाहुल्‍य जिलों में आईटीआई एवं पॉलीटेक्निक महाविद्यालय अध्‍ययनरत 2127 बहनों को साइंस टेक्‍नोलॉजी, इंजीनियरिंग एवं मैथ्‍स तथा सॉफ्ट स्किल का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है जिससे हमारी बहनों को सशक्तिकरण मिले, जिसमें 220 बहनों को सफलतापूर्वक प्‍लेसमेंट किया गया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय जो महिला सशक्तिकरण और कौशल के विकास की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण उपलब्धि है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, व्‍यावसायिक प्रशिक्षण का सुदृढ़ीकरण एवं विस्‍तार के अंतर्गत कुल 864 करोड़ का प्रावधान किया गया है. इसके माध्‍यम से आईटीआई में नियमित पाठ्यक्रम संचालित किये जायेंगे एवं इस योजना के मद से शासकीय आईटीआई में प्रशिक्षण की गुणवत्‍ता सुधार हेतु औजार उपकरण मशीनरी अधोसंरचना विकसित की जा रही है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अनुसूचित जनजाति के युवाओं को 4 शासकीय आईटीआई धार महिला आईटीआई बैतूल चकल्‍दी एवं खेड़ी में प्रशिक्षण संचालित हैं जहां निशुल्‍क आवास, भोजन एवं 1 हजार रूपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जा रही है इसके लिये वित्‍तीय वर्ष 2026-27 में 10 करोड़ का प्रावधान किया गया है. इस प्रकार अनुसूचित जाति के युवाओं हेतु शासकीय आईटीआई सीहोर एवं मुरैना में संचालित है जहां निशुल्‍क आवास एवं भोजन 1 हजार रूपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है. इसके लिये 6.64 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है. युवाओं को औद्योगिक प्रतिष्‍ठान में व्‍यावहारिक अनुभव प्रदान करने के उद्देश्‍य से मध्‍यप्रदेश की महत्‍वकांक्षी मुख्‍यमंत्री सीखो कमाओ योजना संचालित की जा रही है. इस योजना के अंतर्गत युवाओं को विभिन्‍न औद्योगिक प्रतिष्‍ठानों में ऑन द जॉब ट्रेनिंग की सुविधा प्रदान की जा रही है जिसमें जिन्‍हें वास्‍तविक कार्य स्‍थल का अनुभव प्राप्‍त हो सके. योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को 8 हजार से 10 हजार रूपये प्रतिमाह का स्‍टायफंड भी प्रदान किया जाता है. वर्तमान में इस योजना के तहत 28332 अभ्‍यार्थी प्रशिक्षण से लाभांवित हैं.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूर्व में मैंने बात उठाई थी, ग्रुप में चर्चा हो रही थी कि अब टेटवाल जी का है, तकनीकी शिक्षा का, आईटीआई का. आप इतने हॉस्‍टल खोल रहे हैं नये आप आईटीआई ट्रेनिंग दे रहे हैं, उनको स्‍टायफंड दे रहे हैं, अच्‍छी बात है, लेकिन क्‍या प्रदेश के युवाओं को चाहे आप एससी के हों, एसटी के हों, ओबीसी के हों, जनरल हों उनको रोजगार की गारंटी क्‍या है सरकार की. मैं यही चाहता हूं कि पॉलिसी उद्योग विभाग के साथ यह तकनीकी डिपार्टमेंट क्‍या इस पर विचार करेंगा कि प्रदेश के 80 परसेंट लोगों को तकनीकी डिपार्टमेंट इस पर विचार करेगा कि प्रदेश के 80 परसेंट  लोगों को तो नौकरी मिले. जितनी कंपनियां खुल रही हैं सब बाहर के लोग यहां आकर नौकरी कर रहे हैं लेकिन यहां के युवाओं का क्या होगा. मैं समझता हूं कि बाहर के लोगों को भी मिले लेकिन हमारे यहां का 80 प्रतिशत का कोटा होना चाहिये. क्यों नहीं सरकार इस पर विचार करती है.

          श्री गौतम टेटवाल -  माननीय अध्यक्ष महोदय,वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस हेतु 100 करोड़ का प्रावधान किया गया है जिससे अधिक से अधिक युवाओं को व्यवसायिक प्रशिक्षण एवं रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें. एशियाई डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क की स्थापना तथा 10 संभागीय आई.टी.आई. जबलपुर,इन्दौर,उज्जैन,सागर,भोपाल,नर्मदापुरम,रीवा,शहडोल,ग्वालियर तथा भिण्ड का उन्नयन किया गया है इसके लिये वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट के प्रावधान के अंतर्गत कुल 110 करोड़ का प्रावधान किया गया है. मुझे गर्व के साथ संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क भोपाल भारत का पहला मल्टी स्किल्ड पार्क है जिसकी स्थापना मध्यप्रदेश शासन द्वारा उद्योगोन्मुखी

          श्री सोहनलाल बाल्मीक -  कौशल विकास में आप सब कुछ कर रहे हैं रोजगार गारंटी की भी तो बात करो.

          श्री गौतम टेटवाल - बालमीक जी रोजगार पर भी आ रहा हूं.युवाओं को रोजगारोन्मुखी एवं अंतर्ऱाष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से की गई है. सिंगापुर की प्रतिष्ठित संस्था इंस्टीट्यूट आफ टेक्निकल एजुकेशन सर्विस आईटीईएस से तकनीकी सहयोग से विकसित यह संस्थान वैश्विक गुणवत्ता के पाठ्यक्रम एवं अधोसंरचना से सुसज्जित है. वर्ष 2019 से प्रारंभ इस संस्था में वुर्तमान में 9 उन्नत कोर्स संचालित हैं. अब तक 1035 से अधिक प्रशिक्षु इस संस्थात से प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं और वर्तमान में लगभग 1 हजार से अधिक विद्यार्थी प्रशिक्षण ले रहे हैं.

          श्री उमंग सिंघार - पूरे प्रदेश में  22 लाख आकांक्षी बेरोजगार हैं. 11 लाख करोड़ मुख्यमंत्री जी निवेश ला रहे हैं तो आपके पास क्या कंपनियां नहीं हैं क्या.

          अध्यक्ष महोदय - अलग-अलग योजनाओं में बता रहे हैं.

          श्री गौतम टेटवाल -  मैं ग्लोबल स्किल पार्क में जो प्रशिक्षण हुआ उसकी बात कर रहा हूं.

          श्री उमंग सिंघार - ट्रेनिंग के बाद नौकरी कहां मिलेगी यह तो बताओ. कितने जाब मिलेंगे. कितने की गारंटी सरकार दे रही है युवाओं को.

          अध्यक्ष महोदय - अभी उन्होंने 3-4 बातें कीं उनके स्टायफंड की बात की उसमें हजारों लोग प्रशिक्षण दे रहे हैं अभी जो कह रहे हैं वह ग्लोबल स्किल पार्क में कितने लोग ले रहे हैं अब स्किल्ड तो हो जाने दो. रोजगार तो उसके बाद मिलेगा.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक -  यह बता दें कि कितने लोगों को रोजगार मिली है जो स्किल्ड हो गये हैं.

          श्री गौतम टेटवाल - संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क में रिलायंस इंडस्ट्री,एसआरएफ लि. एवं टायटाय ग्रुप जैसे उद्योग के कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है. साथ ही 16 विद्यार्थियों को सिंगापुर के

          श्री महेश परमार -  आप उज्जैन जिले के प्रभारी मंत्री हैं वहां कितने लोगों को प्लेसमेंट किया.

          (..व्यवधान..) 

          अध्यक्ष महोदय -  मेरा कहना यह है कि हम लोगों ने ढाई तीन घंटे चर्चा की है. सुनना तो चाहिये.

          श्री गौतम टेटवाल - ए.आई.टेक्नालाजी ए.आई. डिजिटल मार्केटिंग और उद्यमिता जैसे उभरते क्षेत्रों में उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है.विश्व स्तरीय सुविधाओं,औद्योगिक सहयोग और आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से यह संस्थान युवाओं को राष्ट्रीय एवं वैश्विक अवसरों के लिये तैयार कर रहा है. लोकमाता अहिल्याबाई प्रशिक्षण कार्यक्रम में 31 करोड़ का प्रावधान किया गया है. भारत सरकार की महत्वाकांक्षी कौशल विकास योजना अंतर्गत युवाओं को अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण एवं प्रमाणपत्र प्रदान किया जारहा है. वित्तीय वर्ष 26-27 में इस योजना हेतु 94 करोड़ का प्रावधान किया गया है जिससे प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं को रोजगारोन्मुख लघु उद्योग शिक्षा प्राप्त हो सके. युवा संगम, युवाओं को स्‍वरोजगार एवं एप्रेंटिशिप के अवसर एक ही स्‍थान पर उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से मध्‍यप्रदेश शासन द्वारा युवा संगम का कार्यक्रम आयोजन प्रदेश के सभी जिलों में किया जा रहा है. माह नवंबर 2024 से प्रतिमाह प्रत्‍येक जिले में निर्धारित दिवस में युवा संगम का आयोजन किया जाता रहा है. यह सतत प्रयास स्‍वरोजगार, रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर के समन्‍वय से मध्‍यप्रदेश सरकार के प्रयासों को एक ...(व्‍यवधान)...

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम जानना चाहते हैं कि रोजगार कितनों को मिला. ...(व्‍यवधान)...

          श्री गौतम टेटवाल  -- अध्‍यक्ष महोदय, रोजगार संचालन और कौशल विकास संचालन का सम्‍मानित किया जा रहा है. ...(व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- गौतम जी, पूरा करें.

          श्री गौतम टेटवाल  -- बस अध्‍यक्ष महोदय, 5 मिनट.

          अध्‍यक्ष महोदय -- 5 मिनट का तो कुल था. ...(व्‍यवधान)...

          श्री गौतम टेटवाल  -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिले के कलेक्‍टर के मार्गदर्शन में हमने व्‍यक्‍तिगत लाभार्थी योजनाओं में... ...(व्‍यवधान)...

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- टेटवाल  जी, यह बता दें, प्रमाण-पत्र कितने दे दिए. आपका विभाग है. ...(व्‍यवधान)...

          श्री गौतम टेटवाल  -- वहीं पर आ रहा हूँ. ...(व्‍यवधान)...

          श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल -- अध्‍यक्ष महोदय, अब जो देरी हो रही है, उसके लिए नेता प्रतिपक्ष जी जिम्‍मेदार हैं. ...(व्‍यवधान)...

          श्री गौतम टेटवाल  -- अध्‍यक्ष महोदय, युवा संगम के माध्‍यम से कुल 2,35,842 आवेदक लाभान्‍वित हुए. (मेजों की थपथपाहट). ...(व्‍यवधान)...

          श्री उमंग सिंघार -- नौकरियां कितनों को लगी. रोजगार कितनों को मिला. यह बताएं. ...(व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- गौतम जी, पूरा करें. ...(व्‍यवधान)...

          श्री महेश परमार -- माननीय अध्‍यक्ष जी, रोजगार कितनों को मिला. माननीय अध्‍यक्ष जी, गौतम टेटवाल जी का भाषण पढ़ा हुआ माना जाएगा. ...(व्‍यवधान)...

          श्री गौतम टेटवाल  -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 90 हजार लोगों को रोजगार मिला है. यह पहला प्रदेश है जहां युवाओं को सशक्‍त और आत्‍मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्‍वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- सब लोग रोजगार के बारे में पूछ रहे हैं तो रोजगार का आंकड़ा यदि आपके पास हो तो स्‍पष्‍टता से बता दो.

          श्री गौतम टेटवाल  -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने बताया, 90 हजार लोगों को रोजगार प्राप्‍त हुआ है. प्रदेश की उपलब्‍धियां, प्रदेश में शासकीय महिला आईटीआई, बैतूल की प्रशिक्षार्थी सुश्री त्रिशा तावड़े द्वारा राष्‍ट्रीय स्‍तर पर आईटीआई परीक्षा में व्‍यवसाय इलेक्‍ट्रिशियन से सेंट्रल जोन में सबसे अधिक अंक प्राप्‍त कर माननीय प्रधानमंत्री जी से सम्‍मान प्राप्‍त किया है. एक हमारी बिटिया त्रिशा तावड़े ने.. ...(व्‍यवधान)...

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसको नौकरी दी क्‍या. जिसको प्रधानमंत्री जी ने सम्‍मानित किया, उसको नौकरी मिली क्‍या. अध्‍यक्ष जी, यह बात आप बताएं कि माननीय प्रधानमंत्री जी जिसको सम्‍मानित कर रहे हैं और जिसने प्रदेश के नाम को गौरवान्‍वित किया है. क्‍या सरकार ने उसको नौकरी दी.

          श्री गौतम टेटवाल  -- निश्‍चित रूप से हमारी सरकार ने नौकरी दी है. उसके कौशल को और विकास के लिए..

          अध्‍यक्ष महोदय -- एक मिनट, गौतम जी. सामान्‍य तौर पर उन्‍होंने बताया कि 90 हजार लोगों को रोजगार मिला है. सामान्‍य तौर पर जब आईटीआई हो, ग्‍लोबल स्‍किल पार्क हो, अन्‍य कौशल विकास की जो योजनाएं हैं, उनमें जो ट्रेनिंग होती है तो स्‍वाभाविक रूप से उसमें प्रयत्‍न यह होता है कि व्‍यक्‍ति स्‍किल्‍ड होने के बाद अपना रोजगार स्‍थापित करे. स्‍वयं भी आजीविका कमाए और 10 को भी रोजगार दे. ये बड़ा व्‍यापक विषय है.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय अध्‍यक्ष जी, किस विभाग में किस-किस को नौकरी मिली, यह पोर्टल में जारी करा दें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मैं समझता हूँ कि चर्चा पूर्ण हुई.

(मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय--  विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार दिनांक 27 फरवरी, 2026 को प्रात: 11.00 बजे तक के लिये स्‍थगित की जाती है.

            रात्रि 09.42 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार, दिनांक 27 फरवरी, 2026 ( 8 फाल्‍गुन, शक संवत् 1947 ) के पूर्वाह्न 11.00 बजे तक के लिये स्‍थगित की गई.

 

भोपाल                                                                                   अरविन्‍द शर्मा,

दिनांक: 26 फरवरी, 2026                                                            प्रमुख सचिव,

                                                                                        मध्‍यप्रदेश विधान सभा.