
मध्यप्रदेश विधान सभा
की
कार्यवाही
(अधिकृत विवरण)
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षोडश विधान सभा नवम् सत्र
फरवरी-मार्च, 2026 सत्र
बुधवार , दिनांक 25 फरवरी, 2026
(6 फाल्गुन, शक संवत् 1947)
[खण्ड- 9] [अंक- 8]
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मध्यप्रदेश विधान सभा
बुधवार, दिनांक 25 फरवरी, 2026
(6 फाल्गुन, शक संवत् 1947)
विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत् हुई.
{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}
11.02 बजे निधन का उल्लेख
1. श्री मुकुल रॉय, भूतपूर्व केन्द्रीय मंत्री तथा
2. श्री तेजीलाल सरयाम, भूतपूर्व राज्यमंत्री, मध्यप्रदेश शासन

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं बंगाल का प्रभारी था, तब श्री मुकुल रॉय जी टीएमसी के बहुत बड़े नेता थे, महामंत्री थे. मैं बार-बार जब देहली जाता था, तो कई बार मेरी उनसे फ्लाइट में मुलाकात हुई और एक बार मैंने उनसे ऐसे ही कह दिया कि आप तो यहां महामंत्री से कभी ऊपर नहीं जा सकते, आप हमारे यहां आएंगे, तो हो सकता है कि आप सीएम बन जाएं.
अध्यक्ष महोदय, इस तरह हमारी मित्रता बढ़ती गई, बढ़ती गई. वे उस समय टीएमसी में ही थे और फिर एक बार जब मैंने उनसे कहा कि आप तो हमारे यहां आ जाइए, हमारी पार्टी ज्वॉइन कर लीजिए और फिर वे हमारे साथ आ गए थे. उन्होंने 3-4 साल पार्टी में बहुत अच्छा काम किया और बंगाल के अंदर हमें पहली सफलता मिली थी हमें 18 सीटें आयी थीं उसमें मुकुल रॉय जी ने बड़ी महती भूमिका अदा की थी. विधान सभा के चुनाव आये वह विधान सभा के चुनाव लड़े और जीते पर जीतने के बाद जिस तरीके से वहां की सरकार ने उनके बेटे के कॉलेज बंद कर दिये उनके कॉलेज थे, सील कर दिये उनको इतना परेशान कर दिया कि वह रात को आये कहा कि मैं टीएनसी ज्वाइन कर रहा हूं. मेरे लिये कोई चारा नहीं है. मेरी पूरी फेमिली डिस्टर्ब हो गई है. मैंने कहा कि बिल्कुल कर लीजिये, कोई बात नहीं. अध्यक्ष महोदय, उन्होंने टीएनसी ज्वाइन की पता नहीं उनको क्या सेडबेक लगा जो बीमार हुए वह ठीक ही नहीं हुए. मुझे बड़ा दुःख है कि बंगाल का एक बहुत अच्छा कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता जिन्होंने बहुत काम किया बंगाल में, बंगाल की धरती को उन्होंने पैरों से नापा था. पहले वह कांग्रेस में थे, जब टीएनसी बनी तब टीएनसी में गये, फिर हमारे साथ में आये. पुनः मजबूरी में टीएनसी में चले गये. जब मेरे घर से जा रहे थे जहां पर मैं फ्लेट में रहता था उनकी आंख में आंसू आ गये थे मैंने उनको गले लगाया मैं उनको लिफ्ट तक छोड़कर भी आया तथा उनको गाड़ी में बिठाकर के आया, उनकी आंखों में आंसू थे अध्यक्ष महोदय. यह मेरी अंतिम मुलाकात थी उसके बाद मेरी मुलाकात ही नहीं हुई उनसे जब परसों उनके निधन का समाचार सुना तो बहुत दुःखी हुआ, मेरे लिये यह व्यक्तिगत क्षति थी, क्योंकि मैंने एक दो बार फोन से बात करने की कोशिश की भी बीच में की. तो उनका बहुत सारा मल्की आर्गन्स फेल्युअर था लगभग वह एक साल से बेड पर थे. उनका जाना बंगाल के एक बड़े नेता का जाना है. अपनी ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. तेजीलाल सरयाम जी के साथ हमें काम करने का मौका मिला. प्रहलाद भाई और हम जब युवा मोर्चा में साथ में काम करते थे तो हमें छत्तीसगढ़ एवं मध्यप्रदेश तब एक ही था. आप भी उस समय हम बदल बदल कर संभाग जाया करते थे. सरयाम जी के साथ काफी हमारा राजनीतिक संबंध रहा है उनके मार्गदर्शन में हमने काम किया है. वह बहुत ही जमीन के नेता थे सबसे बड़ी बात तो यह है. मुझे उनके जाने से एक अच्छा छत्तीसगढ़ का कार्यकर्ता हमने खोया है. निश्चित रूप से उनके जाने से बड़ी क्षति राजनीति के क्षेत्र में हुई है. दोनों ही महाने नेताओं के चरणों में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)—अध्यक्ष महोदय, दिवंगत मुकुल रॉय जी, दिवंगत श्री तेजीलाल सरयाम जी दोनों के प्रति मेरे दिल की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं.
श्री सोहनलाल बाल्मीक—माननीय अध्यक्ष जी, तेजीलाल सरयाम जी मेरी ही विधान सभा के ग्राम पंचायत नीमकुईं के निवासी हैं. 1992 में वह प्रथम बार विधायक बने. तेजीलाल सरयाम जी एक साधारण परिवार से उन्होंने अपना राजनीतिक जीवन प्रारंभ किया उसमें माननीय कमलनाथ जी ने उन्हें पूरा सहयोग प्रदान किया. वह ऐसे व्यक्ति थे कि जो हमेशा निचले तबके से और अपने साधारण रूप से अपना जीवन-यापन करते रहे हैं. मैंने उनको बहुत करीब से जाना है उनके परिवार से तथा उनसे मेरे व्यक्तिगत संबंध थे. हमेशा उन्होंने मुझे राजनीति में आगे बढ़ाने के लिये सहयोग प्रदान किया. क्योंकि मेरे ही विधान सभा परासिया से थे. वह हमेशा आदिवासी समाज हो, या अन्य समाज हो, वह सबके चहेते थे, उनका जो व्यवहार था, उनका जो संबंध था हर किसी व्यक्ति से था. कभी भी राजनीति में उन्होंने न ही भारतीय जनता पार्टी को विपक्ष में समझा, ना ही कांग्रेस को समझा जो उनके पास में जाते थे हमेशा उनकी मदद करते थे. मंत्रिकाल में भी उन्होंने क्षेत्र के लिये जो भी बन सका उन्होंने काम किया. निश्चित रूप से वह एक भोले-भाले व्यक्ति थे, साधारण व्यक्ति थे. उनके जीवन को जब मैंने समझा और देखा हमेशा उन्होंने एक साधारण व्यक्ति की तरह अपना जीवन बताया है. अंत तक भी उन्होंने अधिक बीमार होने के कारण धीरे धीरे वह अनकॉसिस हुए उनके आंखों से देखना भी बंद हुआ, सुनाई देना कम हुआ. मगर जब भी हम मिलते थे तो थोड़ा बहुत इशारा करके बातचीत करते थे. आज वह हमारे बीच में नहीं है मुझे बेहद दुःख हो रहा है हमेशा से उन्होंने मुझे राजनीतिक संरक्षण दिया है. मैं ईश्वर से कामना करता हूं कि ईश्वर उनको अपने चरणों में स्थान दें उनके परिवार में जो दुःख की घड़ी है उन्हें शक्ति प्रदान करें. मैं इन्हीं सब बातें कहकर अपने श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं.
श्री सुनील उइके (अनुपस्थित)

(11.10 बजे सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिये स्थगित)
11:17 बजे विधान सभा पुन: समवेत हुई
{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द सिंह तोमर) पीठासीन हुए}
अध्यक्ष महोदय - प्रश्न क्रमाक 1, श्री चन्द्रशेखर देशमुख जी.
कॉलोनाइजर रामदेव बाबा बारको डेवलपर्स के संचालकों के विरूद्ध कार्यवाही
[गृह]
1. ( *क्र. 2392 ) श्री चन्द्रशेखर देशमुख : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या कलेक्टर बैतूल के निर्देश पर मुख्य नगरपालिका अधिकारी, मुलताई द्वारा कॉलोनाइजर रामदेव बाबा बारको डेवलपर्स के संचालकों के विरुद्ध रहवासियों से धोखाधड़ी करने एवं सरकारी भूमि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर विक्रय करने हेतु दिनांक 01.09.2024 को प्राथमिकी क्र. 636/2024 दर्ज कराई गई है? यदि हाँ, तो किस-किस थाना प्रभारी द्वारा किस-किस दिनांक को क्या क्या कार्यवाही की गई है? (ख) प्रश्नांश (क) में रामदेव बाबा बारको डेवलपर्स के संचालकों की आज दिनांक तक गिरफ्तारी कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत नहीं करने का क्या कारण है, इसके लिये कौन-कौन अधिकारी जिम्मेदार हैं, उन पर क्या कार्यवाही की जावेगी? समय-सीमा बताई जावे। (ग) क्या मुलताई पुलिस जानबूझकर अपने अनैतिक हितों को साधने के लिये रामदेव बाबा बारको डेवलपर्स के संचालकों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं कर रही है? यदि नहीं, तो न्यायालय में चालान किस-किस के विरुद्ध कब तक प्रस्तुत किया जावेगा? (घ) आरोपियों की गिरफ्तारी के लिये मुलताई पुलिस द्वारा कब-कब, क्या-क्या प्रयास किये गये? कितनी बार पुलिस टीम भेजी गई? उक्त में की गई कार्यवाही का विवरण प्रपत्र सहित उपलब्ध करावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल) : (क) जी हाँ, मुख्य नगरपालिका अधिकारी, मुलताई द्वारा रामदेव बाबा बारको डेवलपर्स के संचालकों के विरुद्ध दिनांक 01.09.2024 को दर्ज करायी गई एफ.आई.आर. का क्रमांक 636/24 नहीं है, अपितु 639/24 है। प्रकरण के अनुसंधान में थाना प्रभारियों द्वारा की गई कार्यवाही का विवरण संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। (ख) प्रकरण के एफ.आई.आर. के नामजद आरोपीगण महाराष्ट्र राज्य के निवासी हैं, वर्तमान में फरार हैं। फरार आरोपियों के गिरफ्तारी के सघन प्रयास किये जा रहे हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के पश्चात आगामी विवेचना में एकत्रित साक्ष्य के आधार पर अंतिम प्रतिवेदन के संबंध में निर्णय लिया जावेगा। कोई अधिकारी जिम्मेदार नहीं है। घटना क्रम में कॉलोनाइजर रामदेव बाबा बारको डेवलपर्स ने माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ जबलपुर में दिनांक 18.10.2024 को प्रकरण क्रमाक W.P. 32848/24 दायर किया था। माननीय न्यायालय ने प्रकरण की सुनवाई में दिनांक 23.10.2024 को कलेक्टर बैतूल के आदेश दिनाक 29.08.2024 पर स्टे प्रदान किया है। वर्तमान में प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। (ग) जी नहीं। जानकारी प्रश्नांश "ख" के उत्तर में समाहित है। (घ) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है।
श्री चन्द्रशेखर देशमुख – अध्यक्ष जी, मेरा प्रश्न क्रमांक 2392 है.
अध्यक्ष महोदय – माननीय मंत्री.
श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल – अध्यक्ष जी, उत्तर पटल पर रखा है.
अध्यक्ष महोदय – चन्द्रशेखर जी, पूरक प्रश्न करें.
श्री चन्द्रशेखर देशमुख – माननीय अध्यक्ष जी, माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि रामदेव बाबा डेवलपर्स, के संचालक के विरूद्ध एफआईआर होने के बाद पुलिस द्वारा क्या कार्यवाही की गई?
श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल – माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने निश्चित रूप से जनहित का एक अच्छा प्रश्न खड़ा किया है. आपके माध्यम से बताना चाहूंगा कि उन्हीं की शिकायत के आधार पर कलेक्टर बैतूल] ने एक जांच दल बनाया था. जांच दल में जांच कमेटी में, अपर कलेक्टर बैतूल, कार्यपालन यंत्री पीएचई बैतूल, कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग, परियोजना अधिकारी शहरी विकास प्राधिकरण, सहायक संचालक नगर एवं ग्राम निवेश बैतूल, इनको सम्मिलित करके एक कमेटी बनाई गई थी, तत्पश्चात इस समिति ने प्रथम दृष्टया यह पाया था कि ये दोषी है, इसमें कुछ गड़बडि़यां हैं. इसके आधार पर कलेक्टर ने उस प्रतिवेदन के आधार पर एफआईआर करने का आदेश दिया था और पुलिस ने एफआईआर उस केस में दर्ज कर ली थी, परन्तु डेवलपर्स कोर्ट में चले गए और कोर्ट में जाने के बाद उनको कलेक्टर के आदेश पर स्थगन आदेश मिल गया है. चूंकि कलेक्टर के आदेश पर स्थगन आदेश है, परन्तु एफआईआर पर नहीं है. ऐसा मानकर पुलिस अभी भी उसकी विवेचना कर रही है, लेकिन न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है, इसलिए पुलिस सावधानी पूर्वक फिर भी विवेचना लगातार कर रही है.
श्री चन्द्रशेखर देशमुख – अध्यक्ष जी, मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि दिनांक 23.10.24 को कलेक्टर, बैतूल ने कौन से आदेश दिए, जिसके विरूद्ध एफआईआर हुई.
श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल – माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने पूर्व में भी बताया कि शिकायत के आधार पर कलेक्टर ने एक जांच कमेटी बनाई थी, सात सदस्यीय, जिसमें मैंने अधिकारियों के नाम पहले बताए थे, उन्होंने जो जांच प्रतिवेदन दिया था, उसके आधार पर कलेक्टर ने एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था और एफआईआर दर्ज भी हो गई है, विवेचना भी जारी है. माननीय विधायक जी की जो चिन्ता है, जनता के प्रति, कोई छल कपट न हो, सरकारी संपत्ति में किसी तरह का अतिक्रमण न हो, निश्चित रूप से उसके लिए हमारे कलेक्टर भी लगातर प्रयास कर रहे हैं तथा हमारा पुलिस विभाग इसके लिए विवेचना जारी रखे हुए हैं.
जिला खनिज फाउंडेशन से किये गये विकास कार्य
[खनिज साधन]
2. ( *क्र. 331 ) श्री घनश्याम चन्द्रवंशी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शाजापुर जिले में पिछले 3 वर्षों में जिला खनिज फाउंडेशन (D.M.F.) से कहाँ-कहाँ विकास कार्य किये गये? (ख) क्या कालापीपल विधानसभा में भी जिला खनिज फाउंडेशन (D.M.F.) खर्च किया गया? यदि हाँ, तो पिछले 3 वर्ष कि जानकारी उपलब्ध करावें? यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - मंत्री (श्री चेतन्य काश्यप) : (क) शाजापुर जिले में पिछले 3 वर्षों में जिला खनिज फाउंडेशन (D.M.F.) से किये गये विकास कार्यों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं, कालापीपल विधानसभा में भी जिला खनिज फाउंडेशन (D.M.F.) से कार्य स्वीकृत हेतु प्रस्ताव प्राप्त नहीं होने से कोई कार्य स्वीकृत नहीं किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
श्री घनश्याम चन्द्रवंशी -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक-331 है.
श्री चेतन्य काश्यप -- अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रख दिया गया है.
श्री घनश्याम चन्द्रवंशी -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न डी.एम.एफ. को लेकर था कि जिले की जो डी.एम.एफ. की राशि है, मैंने वह पिछले तीन वर्ष की मांग की थी कि तीन वर्ष की राशि मेरे जिले में कहां-कहां पर खर्च की है? तो इसमें सिर्फ एक वर्ष 2023 की जानकारी मुझे मिली है. माननीय मंत्री जी से मेरा अनुरोध है कि वर्ष 2023 में लगभग 8 करोड़ की राशि जिले में खर्च हुई है, उसमें मेरी विधानसभा छूटी थी, इस संबंध में मैंने प्रश्न भी किया था कि मेरी विधानसभा क्यों छूटी है, तो उसमें उत्तर आया था कि आपके द्वारा कोई मांग नहीं की गई है, लेकिन मैंने वर्ष 2025 में माननीय प्रभारी मंत्री जी को पत्र दिया था, उसमें जो मांग की थी, मेरे पास उस पत्र की कॉपी भी है, मेरी विधानसभा में लगातार डी.एम.एफ. की राशि जो है, वह पिछले तीन चार-बार से नहीं आई है, तो ऐसा कोई नियम भी नहीं है, लेकिन मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि कालापीपल विधानसभा की जनता ने मुझे चुना है, तो मुझे उनको जवाब देना पड़ता है, इसलिए जब कोई डम्पर या जे.सी.बी. राजसात होती है या फिर माइनिंग का जो फंड है, वह यहां से भी कलेक्ट किया जाता है, तो बराबर हिस्सा कम से कम हमारी विधानसभा को भी मिले, माननीय मंत्री जी से मेरा प्रश्न है कि जो मैंने आवेदन दिये हैं, उन आवेदनों के आधार पर जो विकास कार्य मैंने लिखकर दिये हैं, क्या वह आप मेरी विधानसभा में पूर्ण करायेंगे?
श्री चेतन्य काश्यप -- अध्यक्ष महोदय, डी.एम.एफ. फंड की राशि शाजापुर जिले में दिनांक-13/09/2023 को एक बैठक हुई थी, उसमें 46 लाख रूपये जिला स्तर पर खर्च हुए हैं और 6 करोड़ रूपये जो राज्य की राशि से जाते हैं, वह विभिन्न क्षेत्रों में खर्च हुए हैं, सदस्य महोदय का बराबर जो प्रश्न था कि उनके कालापीपल क्षेत्र में कोई कार्य नहीं हुआ है, परंतु यह जो प्रस्ताव आपके गये हैं, चूंकि डी.एम.एफ. का सीधा नियंत्रण हमारे पास नहीं होता है, परंतु डी.एम.एफ. के जिला कलेक्टर अध्यक्ष हैं और सारे के सारे विधानसभा के सदस्य, सांसद और जिला पंचायत के अध्यक्ष यह सब उसके मेंबर होते हैं, यह निश्चित है कि पिछले दो सालों से जिले की कोई बैठक नहीं हुई है और सदस्य की जो चिंता है कि उनके जो कार्य हैं, उनके बारे में कोई चिंतन नहीं हुआ है, तो मेरा उनसे भी आग्रह है और हम भी यहां कलेक्टर को निर्देशित करेंगे कि अगले माह के अंदर एक या दो माह में वह उसकी बैठक कर लें और उस बैठक में आप अपना प्रस्ताव रख दें और उसकी जो प्राथमिकताएं हैं, उसके अनुसार आपके कार्यों को जो कि जिला स्तर पर 93 लाख रूपये अभी वहां एकत्र हैं, तो यह निर्देश हम यहां से कलेक्टर को देंगे, उसमें यदि संभावित होगा तो आपके कार्यों को स्वीकृत किया जायेगा.
श्री घनश्याम चन्द्रवंशी -- अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मेरा यही आग्रह था कि आप निर्देशित कर दें अधिकारियों और कलेक्टरों को कम से कम जनप्रतिनिधियों को बैठक में बुलाकर और डी.एम.एफ. की राशि के बारे में चर्चा हो जाये कि कहां इसको खर्च किया जाये, तो आपने इसको स्वीकार किया है, आपको बहुत-बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय -- वह तो मंत्री जी ने कह ही दिया है कि निर्देशित करेंगे.
श्री तेजबहादुर सिंह चौहान -- अध्यक्ष महोदय, मैं इसी से संबंधित माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि उज्जैन जिले को भी ले लें, खाचरौद, नागदा या अन्य विधानसभाओं में भी डी.एम.एफ. की राशि का उपयोग नहीं हुआ है.
अध्यक्ष महोदय -- मुझे लगता है कि सभी जगह के लिये एक बार निर्देश रिपीट हो जायें कि कमेटी की बैठक बुलाकर सारे जनप्रतिनिधियों के साथ तय कर लें.
श्री चेतन्य काश्यप -- अध्यक्ष महोदय, समस्त जिलों के लिये निर्देशित कर देंगे.
अध्यक्ष महोदय -- (श्री सोहनलाल बाल्मीक, सदस्य द्वारा अपने आसन से कहने पर) वह मैंने मंत्री जी को बता दिया है कि सभी कलेक्टरों को निर्देश रिपीट कर दें कि जनप्रतिनिधियों के साथ बैठक करके राशि का वितरण करें, यह मैंने मंत्री जी को बता दिया है.
श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- अध्यक्ष महोदय, यह बहुत गंभीर विषय है...
कैम्पा योजना के तहत वनों का सुधार
[वन]
3. ( *क्र. 669 ) श्री उमाकांत शर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सामान्य वनमण्डल विदिशा के अंतर्गत किन-किन वन परिक्षेत्रों में एक दिनांक 01 जनवरी, 2023 से प्रश्नांकित दिनांक तक कैम्पा योजना, बिगड़े वनों के सुधार, नवीनरोपण क्षेत्र विकसित करने हेतु एवं अन्य कौन-कौन सी योजनाएं पौधारोपण किया जा रहा है? योजनाओं की जानकारी परिक्षेत्र का नाम, बीट का नाम, योजना की लागत, स्वीकृति वर्ष, पौधारोपण का लक्ष्य एवं पौधरोपण की प्रशासकीय स्वीकृति आदेश की छायाप्रति उपलब्ध करावें एवं कौन-कौन से प्रस्तावित हैं? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में वन परिक्षेत्र सिरोंज वन परिक्षेत्र उत्तर लटेरी, वन परिक्षेत्र दक्षिण लटेरी में किन-किन बीटों के कक्षों में कितना-कितना पौधारोपण का लक्ष्य था एवं कितने-कितने पौधों का रोपण किया गया और वर्तमान में कितने पौधे जीवित हैं? पौधों की गणना कब-कब की गई, बतावें एवं किन-किन अधिकारियों द्वारा उक्त पौधारोपण का निरीक्षण किया गया? निरीक्षण में क्या कमियां पाईं गईं? निरीक्षण प्रतिवेदन एवं की गई कार्यवाही की छायाप्रति उपलब्ध करावें। यदि कार्यवाही नहीं की गई है, तो कब की जावेगी। (ग) प्रश्नांश 'ख' के संदर्भ में क्षेत्र तैयारी हेतु फेंसिंग कार्य गड्ढा खुदाई कार्य, निदाई कार्य, पौधारोपण कार्य हेतु किन-किन व्यक्तियों से सामग्री क्रय की गई एवं संस्थाओं एवं व्यक्तियों से पौधे क्रय किये गये एवं गड्ढा खोदने के लिये किन-किन मजदूरों के बैंक खातों में कितनी-कितनी राशि का भुगतान कब-कब किया गया है? जानकारी उपलब्ध करावें। भुगतान के नियम निर्देश एवं शासन द्वारा किन-किन कार्यों की कितनी-कितनी दर निर्धारित की गई है? आदेश की छायाप्रति उपलब्ध करावें। (घ) क्या वन विभाग के अधिकारियों द्वारा जिले के बाहर के व्यक्तियों से कार्य करवाया जाता है एवं स्थानीय व्यक्तियों के खातों में मजदूरी की राशि का भुगतान किया जाता है, तो इसकी जांच विभाग द्वारा कब-तक की जावेगी? समय-सीमा बतावें। यदि नहीं, तो क्यों?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री दिलीप अहिरवार) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1 एवं 2 अनुसार है। (ख) प्रश्नांश (क) से संबंधित पौधा रोपण, जीवित पौधों की जानकारी एवं गणना से संबंधित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 3 अनुसार है। उक्त पौधा रोपण कार्य का वन परिक्षेत्र अधिकारी, उप वन मण्डल अधिकारी एवं वन मण्डल अधिकारी द्वारा क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान समय-समय पर निरीक्षण किया गया है। निरीक्षण के दौरान कोई भी कमियां नहीं पाई गई हैं। माह अक्टूबर, 2025 की स्थिति में किये गये मूल्यांकन निरीक्षण प्रतिवेदन की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-3 अनुसार है। मूल्यांकन प्रतिवेदन अनुसार कोई भी वृक्षारोपण असफल नहीं है, अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्नांश के संदर्भ में क्षेत्र तैयारी हेतु फेंसिंग सामग्री क्रय की गई संस्थाओं का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-4 अनुसार है। गड्ढा खुदाई कार्य, निदाई कार्य, पौधा रोपण कार्य संस्थाओं से नहीं कराया गया है। पौधा रोपण हेतु पौधे वन विभाग की सामाजिक वानिकी वृत्तों की रोपणियों से प्राप्त किये गये हैं। गड्ढे खुदाई के लिये मजदूरों के बैंक खातों में भुगतान की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-5 अनुसार है। शासन द्वारा वानिकी कार्यों के जॉबदर की छायाप्रति संलग्न है। (घ) जी नहीं, सामान्य वन मण्डल विदिशा के अन्तर्गत वानिकी कार्य जिले के बाहर के व्यक्तियों से कार्य नहीं कराया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
श्री उमाकांत शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद, मेरा प्रश्न क्रमांक-669 है.
श्री दिलीप सिंह अहिरवार -- अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रख दिया है.
श्री उमाकांत शर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि मैंने जो प्रश्न किया था कि पौधारोपण हेतु किन किन मजदूरों के खातों में कितनी कितनी राशि का भुगतान हुआ है? मेरे प्रश्न के उत्तर में मजदूर का नाम, राशि, भुगतान दिनांक तो बताई गई है, लेकिन पता एवं बैंक खाता क्रमांक नहीं बताया गया है जिससे स्पष्ट नहीं हो रहा है कि किस व्यक्ति के खाते में राशि हस्तांतरित हुई. माननीय मंत्री जी, आप यह पता और बैंक खाता कब बताने की कृपा करेंगे, साथ ही मेरे प्रश्न के उत्तर में बताया गया है कि वृक्षारोपण के लिये जिले के बाहर के मजदूरों से कार्य नहीं करया गया. मैंने तो मौके पर बाहर के मजदूरों को कार्य करते हुये देखा है. सूरनताल कम्पार्टमेंट में, सिरोंज विकास खंड में हाल ही में बाहर के मजदूरों से गड्डे खुदाई का कार्य कराया गया है. क्या इसकी माननीय मंत्री महोदय प्रदेश के स्तर की टीम से जांच करायेंगे और मेरी उपस्थिति में करायेंगे.
श्री दिलीप अहिरवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से, हमारे बहुत ही वरिष्ठ सदस्य हैं, बड़ा ही सम्मान मैं उनका करता हूं और जो उन्होंने प्रश्न किया है सारी जानकारी मैंने उनको उपलब्ध भी करा दी है, मगर निश्चित रूप से सदस्य ने जो प्रश्न किया है कि जो एकाउंट नंबर तो कोई एक मर्यादा होती है किसी का एकाउंट नंबर देना थोड़ी सदन के माध्यम से भी मैं आग्रह करूंगा और यदि व्यक्तिगत माननीय सदस्य को यदि कोई दिक्कत हो तो उसका भी विवरण मैं आपके माध्यम से दे दूंगा. दूसरा इन्होंने प्रश्न किया है कि बाहर से जो हमारे लेबर हैं उनसे काम कराने की बात है, हमारी प्रायोरिटी यह रहती है जो हम गड्डा खुदाते हैं या पेड़ लगवाते हैं या निंदाई वगैरह जो भी करवाते हैं पहली प्रायोरिटी हमारे क्षेत्र के मजदूर ही करते हैं, कभी ऐसी स्थिति आ जाती है कि जब क्षेत्र में मजदूर नहीं मिलते तो अगल, बगल के ही मजदूर लेने का हम काम करते हैं, ऐसा कोई नियम नहीं है. जब हमको मजदूर नहीं मिलेंगे तो हम उस स्थिति में हम बाहर के मजदूर लेते हैं और अगर आपको लगता है कि कोई समस्या है तो निश्चित रूप से हम उसे हल करेंगे.
श्री उमाकांत शर्मा-- आप मेरी उपस्थिति में इसमें जो अनियमिततायें हुई हैं, कमियां हैं, उसकी जांच करा देंगे. कब तक करा देंगे, आश्वासन देने की कृपा करें.
श्री दिलीप अहिरवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपको बता दूं कि कोई अनियमितता की तो बात ही नहीं है. आपके यहां पर जितने हम लोगों ने पौधे लगाये, सारी पारदर्शिता के साथ है, नियम के साथ हम काम करते हैं. वर्ष 2023 में हमने 6 लाख पौधे आपके यहां लगाये, वर्ष 2024 में 3 लाख पौधे लगाये, वर्ष 2025 में 5 लाख पौधे लगाये और निश्चित रूप से जिस प्रकार से हम पौधे लगाते हैं, हमारी एक टीम रहती है कि हर 6-6 महीने में एक साल में 2 बार हम उनका परीक्षण करवाते हैं और उसके बाद भी मूल्यांकन कराने के लिये हम बाहर की संस्थाओं से टेंडर के माध्यम से मूल्यांकन कराने का काम करते हैं, तो मुझे नहीं लगता कि कोई अनियमितता की बात है, उसमें तो पारदर्शिता की बात है, एक-एक चीज है, एक एक विवरण हमने आपको दिया है कि हम कैसे मजदूरी कराते हैं, कैसे गड्डे खुदवाते हैं, कैसे उसकी निंदाई के लिये हम मजदूर लगाते हैं, फिर पौधे कैसे लगाते हैं तो मुझे तो नहीं लगता कि इस प्रकार की कोई चीज उसमें है. एक-एक चीज पारदर्शिता के माध्यम से आपको बताई गई है.
श्री उमाकांत शर्मा-- मैं निवेदन करना चाहता हूं कि लटेरी और सिरोंज वन विभाग में कैसी पारदर्शिता है, पिछले 1 अगस्त को भी आपने मुझे उत्तर दिया था सर्वे नं. 358, 359, 360, 361 में वन माफिया वन भूमि पर कब्जे करके खेती कर रहे हैं, वह अतिक्रमण आज तक नहीं हटा है और वह भूमि वन विकास निगम ने वर्ष 2023 में सामान्य वन विभाग को हस्तांतरित कर दी है. माननीय मंत्री महोदय, माननीय अध्यक्ष महोदय के माध्यम से आपसे पूछना चाहता हूं, मैंने आपको आवेदन दिया है एक वन रक्षक दीन नारायण जोशी एवं अतिक्रमणकर्ता के बीच चर्चा का आडियो वायरल हो रहा है, जिसकी शिकायत मैंने श्रीमान मंत्री महोदय को भी की है. उक्त वन रक्षक एवं डिप्टी रेंजर पर कब तक कार्यवाही कर उसे वहां से हटाकर प्रदेश स्तर की टीम से जांच कराने की कृपा करेंगे.
अध्यक्ष महोदय-- उमाकांत जी, अब प्रश्न आ गया है, पूरक प्रश्न मत करना. आपका तीसरा हो गया.
श्री दिलीप अहिरवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, चूंकि हमारे सदस्य हैं, बड़ा सम्मान करता हूं. इस प्रश्न के बाहर का भी इन्होंने प्रश्न पूछ लिया है, फिर भी....
श्री उमाकांत शर्मा-- वन विभाग का प्रश्न है, उसी के वृक्षारोपण का प्रश्न है, सन् 1920 से लगातार आज तक कार्यवाही ढंग से नहीं हुई.
अध्यक्ष महोदय-- उमाकांत जी बैठिये आप.
श्री दिलीप अहिरवार - मैं आपके ही हित की बात कर रहा हूं मैं आपके ही सम्मान की ही बात कर रहा हूं मैंने कहा ना कि मैं सम्मान कर रहा हूं मैं जवाब भी दे रहा हूं. इन्होंने पिछली बार जो प्रश्न उठाया था और अभी दो-तीन दिन पहले एक पत्र दिया है और मैंने अधिकारियों को निर्देश भी कर दिया है मैं माननीय सदस्य को आश्वस्त करना चाहता हूं कि जो वन रक्षक हैं उससे आपको दिक्कत है उसको भी हम अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से हटा भी देंगे.
श्री उमाकांत शर्मा - मेरे को दिक्कत नहीं है.वन कटवा रहा है रिश्वत ले रहा है पेन ड्राईव में उसका आडियो है मैं सदन के पटल पर पेश करता हूं. सरकार की बदनामी हो रही है हमारे मुख्यमंत्री जी प्रधानमंत्री जी पर्यावरण अच्छा चाहते हैं जंगल अच्छा चाहते हैं वहां चूना लगाया जा रहा है.
अध्यक्ष महोदय - उमाकांत जी प्लीज.श्री हरिशंकर खटीक
श्री अजय सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय माननीय शर्मा जी ने बहुत गंभीर बात उठाई है. पर्यावरण से जुड़ा हुआ है. माननीय मंत्री महोदय गोल मोल जवाब दे रहे हैं. वन अवैध कटाई,इसी में दूसरी चीज जोड़ना चाहता हूं परसों उमरिया जिले में शेर के मारने की वजह से कुछ लोगों को जेल में रखा गया. 60 दिन में एफआईआर दर्ज होनी चाहिये नहीं हो पाई तो वह लोग छूट गये. अपने प्रांत का शेर मारने की वजह से ऐसे लोग छूट जाएं और वन मंत्री महोदय इनका उल्टा सीधा दे रहे हों यह घोर आपत्ति है. पर्यावरण में खिलवाड़ नहीं होना चाहिये.
श्री कैलाश विजयवर्गीय - शेर कहां का विदिशा का प्रश्न है.
श्री अजय सिंह - शेर तो पूरे प्रदेश का है जंगल में रहता है.शेर तो हमारे यहां ही रहेगा आपके यहां नहीं रहेगा
अध्यक्ष महोदय - उमाकांत जी ने जो प्रश्न किया मंत्री जी ने उसका समाधानकारक उत्तर दिया है इसके अतिरिक्त भी आपके मन में कोई शंका है तो लिखकर मंत्री जी को दे दो और आपको पर्याप्त पूरक प्रश्न करने का अवसर दिया गया है.
श्री उमाकांत शर्मा - इसकी जांच करा देंगे क्या.
प्रदेश के समस्त न्यायधीशों को सुरक्षा हेतु एक-एक गनमैन उपलब्ध कराया जाना
[विधि एवं विधायी कार्य]
4. ( *क्र. 2732 ) श्री हरिशंकर खटीक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) समस्त न्यायाधीशों को सुरक्षा प्रदाय हेतु शासन ने प्रश्न दिनांक तक क्या-क्या नियम बनाए हैं? कृपया ऐसे आदेशों/नियमों की छायाप्रतियां प्रदाय करें। (ख) प्रश्नांश (क) के आधार पर बताएं कि प्रदेश में ऐसे कौन-कौन से मुख्य न्यायाधिपति से लेकर व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 (मजिस्ट्रेट) हैं, जिनको वर्तमान में शासन द्वारा सुरक्षा हेतु गनमैन उपलब्ध हैं एवं किस-किस का नहीं? ऐसे समस्त न्यायाधीश के नाम, पद सहित समस्त जानकारी प्रदाय करें। (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के आधार पर बताएं कि समस्त न्यायाधीश महोदयों को उनकी सुरक्षा हेतु क्या विभाग द्वारा सभी को एक-एक गनमैन दिए जाने का प्रावधान विचाराधीन है? यदि हाँ, तो ऐसे आदेश विभाग कब तक जारी करेगा? निश्चित समय-सीमा सहित बताएं। (घ) प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) के आधार पर बताएं कि विभाग समस्त न्यायाधीशों की सुरक्षा हेतु एक कानून/विधेयक विधानसभा में लाये जाने पर विचार करेगा, जिससे प्रदेश के समस्त न्यायधीशों को उनकी सुरक्षा हेतु एक-एक गनमैन प्राप्त हो सके। समस्त न्यायधीशों को कब तक गनमैन प्राप्त हो जायेंगे? समय-सीमा बताएं।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री, तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार (श्री गौतम टेटवाल):-

श्री हरिशंकर खटीक - मेरा प्रश्न क्रमांक 2732
श्री गौतम टेटवाल - अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा गया है.
श्री हरिशंकर खटीक - माननीय अध्यक्ष महोदय, चाहे वह कार्यपालिका हो चाहे विधायिका हो चाहे न्यायपालिका हो सबका अपनी अपनी जगह महत्व और सब अपनी अपनी जगह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं. चाहे मजिस्ट्रेट हों,चाहे एडजे हों,चाहे जिला न्यायाधीश हों, चाहे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हों सभी की सुरक्षा से संबंधित हमारा मामला है. मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि राज्य सुरक्षा समिति कब तक ऐसा निर्णय लेगी कि प्रदेश के प्रत्येक मजिस्ट्रेट,न्यायाधीशों को निजी सुरक्षा में कम से कम एक-एक गनमैन पीएसओ प्रदान किये जाएंगे.
श्री गौतम टेटवाल - अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश राजपत्र असाधारण दिनांक 24जून,2003 के प्रावधानों के तहत वर्तमान में माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के माननीय मुख्य न्यायाधिपति महोदय तथा माननीय न्यायाधीशों एवं माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ इन्दौर एवं ग्वालियर के माननीय न्यायाधीशों को उनकी निजी सुरक्षा में गनमेन प्रदान किये गये हैं. राजपत्र में उल्लिखित न्यायाधीशों को सुरक्षा प्रदान की गई है अन्य को नहीं फिर भी हमारे वरिष्ठ सदस्य माननीय खटीक जी हमारे बड़े भाई हैं इसके अतिरिक्त वास्तविक खतरे को दृष्टिगत रखते हुए आवश्यक्ता पड़ने पर पुलिस अधीक्षक के प्रतिवेदन पर राज्य सुरक्षा समिति द्वारा सुरक्षा उपलब्ध कराई जाती है.
अध्यक्ष महोदय - श्री हरिशंकर खटीक जी,वैसे मुझे लगता है कि समुचित उत्तर है.
श्री हरिशंकर खटीक - अध्यक्ष महोदय, जो न्यायालय में मजिस्ट्रे,एडीजे होते हैं वह अपनी सुरक्षा से संबंधित कहीं लिख नहीं पाते. यह सबके लिये पूरा,न्यायाधीश न्यायाधीश होता है चाहे वह उच्च न्यायालय का न्यायाधीश हो चाहे लोअर कोर्ट का न्यायाधीश हो,एडीजे हो, एक समानता के रूप में कम से कम सुरक्षा व्यवस्था के रूप में एक अंगरक्षक एक पीएसओ के रूप में उनकी सुरक्षा के लिये पदस्थापना हो जायेगी तो न्यायपालिका भी बहुत अच्छे से काम कर रही है और अच्छे से काम करेगी. मंत्री महोदय से मेरा निवेदन है कि ऐसे आदेश कब तक राज्य सुरक्षा समिति को दिये जायेंगे. ऐसे आदेश कब तक जारी होंगे.
अध्यक्ष महोदय -- हरिशंकर जी बैठिए, माननीय मंत्री जी ने कहा है कि पुलिस अधीक्षक अगर अपनी रिपोर्ट देंगे तो उस पर सुरक्षा समिति बैठ करके विचार करके निर्णय करती है.
श्री गौतम टेंटवाल -- जी माननीय अध्यक्ष महोदय.
अध्यक्ष महोदय -- अगर ऐसी कहीं कोई दिक्कत वाली बात होगी और पुलिस अधीक्षक के ध्यान में आएगी तो वह अपनी रिपोर्ट भेजेंगे तो वे विचार करेंगे, कह तो दिया उन्होंने. श्री बिसाहूलाल सिंह जी.
श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उच्च न्यायालय से भी 17 फरवरी को ऐसा आदेश जारी हुआ है...
अध्यक्ष महोदय -- हरिशंकर जी, प्लीज, प्लीज..
श्री हरिशंकर खटीक -- अध्यक्ष महोदय, उच्च न्यायालय ने भी इसके लिए चिंता व्यक्त की है. इसका भी जवाब दिलवाने का कष्ट करें.
जिला अनूपपुर से हवाई सेवा प्रारंभ की जाना
[विमानन]
5. ( *क्र. 1219 ) श्री बिसाहूलाल सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या माननीय मुख्यमंत्री जी के अनूपपुर प्रवास दिनांक 16.08.2024 के दौरान प्रश्नकर्ता के द्वारा जिला मुख्यालय अनूपपुर में हवाई अड्डा (एयरपोर्ट) बनाये जाने एवं हवाई सेवा की शुरुआत कराये जाने की माँग की गई थी? यदि हाँ, तो प्रश्न दिनांक तक जिला अनूपपुर में बनाये जाने वाले एयरपोर्ट एवं हवाई सेवा प्रारंभ किये जाने के संबंध में क्या कार्यवाही की गई है? जानकारी उपलब्ध करायें। (ख) प्रश्नांश "क" अनुसार प्रश्नकर्ता द्वारा पूर्व के तारांकित प्रश्न क्रमांक 1316 के उत्तर दिनांक 05 अगस्त, 2025 के संदर्भ में दिये गये उत्तर में अवगत कराया गया था कि उक्त कार्य आवश्यकता, उपयोगिता, व्यवहारिकता आदि का समय रूप से परीक्षण कराये जाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है? यदि हाँ, तो प्रश्न दिनांक तक उक्त कार्यवाही कहाँ तक पहुँची? स्थल चयन किया जा चुका है? यदि हाँ, तो उक्त स्थल की जानकारी देवें। (ग) प्रश्नांश "क" एवं "ख" अनुसार यदि स्थल चयन की गई है, तो उस पर अभी तक क्या कार्यवाही की गई है? यह भी जानकारी देवें कि कब तक हवाई सेवा प्रारंभ की जायेगी? क्या जिला अनूपपुर को अठ्ठाईस जिलों में हवाई पट्टी बनाये जाने के प्रस्ताव में सम्मिलित किया गया? (घ) प्रश्नांश 'क' 'ख' एवं 'ग' अनुसार जानकारी उपलब्ध करावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्रीमती प्रतिमा बागरी) : (क) जी हाँ। कलेक्टर, जिला अनूपपुर एवं आयुक्त विमानन को परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही हेतु लिखा गया है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। (ख) जी हाँ। विभाग द्वारा फिजिबिलिटी सर्वे की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। जी हाँ, तहसील अनूपपुर, जिला अनूपपुर अन्तर्गत ग्राम कदमटोला कटनी गुमला चन्डिल मार्ग में भूमि का प्रारंभिक रूप से चयन किया गया है। (ग) जिला अनूपपुर में हवाई अड्डा (एयरपोर्ट) निर्माण हेतु प्राक्कलन तैयार किया गया है। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। जिला अनूपपुर को अठ्ठाईस जिलों में हवाई पट्टी बनाये जाने के प्रस्ताव में सम्मिलित किया गया है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। (घ) जानकारी उत्तरांश (क), (ख) एवं (ग) में समाहित है।
श्री बिसाहूलाल सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 1219 है.
श्रीमती प्रतिमा बागरी -- अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.
अध्यक्ष महोदय -- बिसाहूलाल जी, पूरक प्रश्न करें.
श्री बिसाहूलाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूँ कि दिनांक 16.08.2024 को माननीय मुख्यमंत्री जी ने अनूपपुर में हवाई-अड्डा बनाने की घोषणा की थी. अभी तक उस संबंध में क्या कार्यवाही हुई, इसकी जानकारी मुझे दें.
श्रीमती प्रतिमा बागरी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं माननीय सदस्य को बताना चाहूँगी कि माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा वायु सेवा को मध्यप्रदेश में तीव्रता मिली है. जैसा कि माननीय सदस्य का प्रश्न है, आयुक्त, विमानन संचालन द्वारा परीक्षण कर इसके लिए आवश्यक कार्यवाही की जा चुकी है. उसके लिए जगह का चिह्नांकन भी किया जा चुका है. जगह के चिह्नांकन के बाद अब फिजिबिलिटी सर्वे वहां पर प्रारंभ है और जैसे ही फिजिबिलिटी सर्वे हो जाएगा तो आगे की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.
अध्यक्ष महोदय -- माननीय सदस्य.
श्री बिसाहूलाल सिंह -- इसको कब तक शुरू करवाएंगे ?
श्रीमती प्रतिमा बागरी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने बताया है कि फिजिबिलिटी सर्वे हो जाएगा, जिसमें एयर ट्रांसपोर्टेशन और उसकी कितनी कैपेसिटी वहां पर जनसंख्या के आधार पर है, जब वह सर्वे पूरा हो जाएगा तो उसके बाद यह प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात् हवाई सेवा शुरू हो जाएगी. इसकी कोई समय-सीमा अभी निर्धारित नहीं है, लेकिन सर्वे के बाद जल्द से जल्द इस कार्य को पूरा किया जाएगा.
अध्यक्ष महोदय -- बिसाहूलाल सिंह जी.
श्री बिसाहूलाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, ठीक है.
आदिवासियों को राजस्व व वन भूमि से जबरन हटाने की कार्यवाही
[वन]
6. ( *क्र. 5 ) श्री मुकेश मल्होत्रा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वन विभाग श्योपुर के अधिकारी/कर्मचारी आदिवासी और अन्य गरीब लोगों आवास झोपड़ियों को तोड़ रहे हैं, आग लगा रहे हैं? आदिवासियों पर झूठी एफ.आई.आर. दर्ज कर रहे हैं? (ख) क्या जिला श्योपुर की तहसील कराहल, वीरपुर एवं विजयपुर में आदिवासियों को राजस्व व वन भूमि से खदेड़ा जा रहा है? यदि हाँ, तो क्यों? (ग) क्या विजयपुर विधानसभा क्षेत्र की तहसील विजयपुर, वीरपुर कराहल क्षेत्र के ग्राम सुखदेला, रही का सहराना पन्नावारी, महुआमार (धनायचा) गुरजा, खूंटका, कुसमानी का सहराना, जार की तलैया, धोरेट, मसावनी पीपरवाला (पनवाडा) धोरेट का सहराना, रनसिंह का पुरा, झंकापुर उमरी कलाँ, चाँदपुरा, पनार, ऊंकाल, डावली खेरोना, श्यामपुरा, सारसिल्ली, धमानी सेसईपुरा सहित कई वन ग्रामों की वन भूमि व राजस्व भूमि से गरीब आदिवासियों को उजाड़ने का काम वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी कर रहे हैं? (घ) प्रश्नांश (क), (ख), (ग) यदि सही है तो क्या विभाग व सरकार श्योपुर जिले में वन भूमि व राजस्व भूमि वनों में काबिज निवासरत आदिवासियों को वन अधिकार अधिनियम के तहत भू-अधिकार पत्र प्रदान करेगी? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? कारण बतावें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री दिलीप अहिरवार) : (क) सामान्य वनमंडल श्योपुर के वन अधिकारी एवं कर्मचारियों द्वारा आदिवासी और अन्य गरीब लोगों के आवास एवं झोपड़ियों को तोड़कर आग नहीं लगाई गई है और न ही कोई झूठी एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है। (ख) वन अधिकार पत्र हेतु पात्र किसी भी आदिवासी को वन भूमि से बेदखल नहीं किया गया है। राजस्व भूमि पर काबिज आदिवासियों को भूमि से बेदखल करने का अधिकार वन अधिकारियों को नहीं है। (ग) सामान्य वनमंडल श्योपुर के अंतर्गत प्रश्नांकित ग्रामों की वन भूमि से गरीब आदिवासियों को उजाड़ने का कार्य वन विभाग द्वारा नहीं किया जा रहा है। (घ) अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत दिनांक 13.12.2005 को काबिज पात्र आदिवासियों को वन अधिकार पत्र हेतु आवेदन करने पर 3069 वन अधिकार पत्र जारी किये जा चुके हैं। आवेदन प्राप्ति पर परीक्षण और अधिकार-पत्र जारी करने की प्रक्रिया सतत् स्वरुप की है।
श्री मुकेश मल्होत्रा -- माननीय अध्यक्ष महोदय जी , मेरा प्रश्न क्रमांक 5 है.
श्री दिलीप अहिरवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा गया है.
अध्यक्ष महोदय -- मुकेश जी, पूरक प्रश्न करें.
श्री मुकेश मल्होत्रा -- माननीय अध्यक्ष महोदय जी, मेरे प्रश्न के उत्तर में विभाग द्वारा जो जानकारी दी गई है, वह असत्य जानकारी है. माननीय अध्यक्ष महोदय, सामान्य वन मण्डल, श्योपुर द्वारा दिनांक 14.06.2025 को खाड़ी रेंज स्टॉफ ने ग्राम जार की तलैया में आदिवासी बस्ती में घुसकर महिलाओं के साथ गलत नियत से छेड़छाड़ की और पुरुषों के साथ मार-पीट कर उनकी झोंपड़ियों में आग लगाकर चार आदिवासियों पर रघुनाथपुर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करा दी. इसी तरह दिनांक 06.01.2026 को बड़ोदा रेंज स्टॉफ ने ग्राम मसावनी के आदिवासियों की झोंपड़ी नष्ट कर आदिवासियों के साथ मार-पीट की और 13 आदिवासियों पर आपदा पुलिस थाने में असत्य एफआईआर दर्ज करा दी. माननीय अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2025 में कराहल रेंज में स्टॉफ ने ग्राम मुकाल में आदिवासियों के साथ मार-पीट की और उनकी झोंपड़ियों में आग लगाई एवं 5 आदिवासियों को तीतर-बटेर का असत्य केस बनाकर जेल भेज दिया था. माननीय अध्यक्ष महोदय, सामान्य वन मण्डल, श्योपुर के अधिकारी-कर्मचारी ऐसे कई असत्य प्रकरण दर्ज कर चुके हैं और लगातार आए दिन आदिवासियों को वन भूमि व राजस्व भूमि से बेदखल कर असत्य एफआईआर दर्ज कर परेशान कर रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी.
श्री दिलीप अहिरवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमें वन की भी चिंता होती है और वन में रहने वाली हमारे उन आदिवासी भाइयों की भी चिंता हम करते हैं. यह हमारी निरंतर प्रक्रिया है कि वन विभाग के अधिकारियों के द्वारा जो लोग वन भूमि में कब्जा किए हैं, वे किसी भी समाज और और किसी भी वर्ग के हों. मैं किसी समाज और वर्ग की बात नहीं करूँगा, तो नियम के अनुसार प्रकरणों में बेदखली की कार्यवाही प्रचलित रहती है और निश्चित रूप से जब अधिनियम 1927 की धारा 80 (अ) के तहत बेदखली के नोटिस भी हम देते हैं, बेदखली के आदेश जारी करते हैं और उसके माध्यम से हम अतिक्रमण हटाते हैं. हमारे वन विभाग के कर्मचारियों ने इसी प्रकार से प्रक्रिया का पालन करते हुए वह अतिक्रमण हटाने के लिए वहां पर पहुँचे तो वहां पर हमारे कई अधिकारियों के साथ मारपीट हुई. हमारे लगभग 3 वन रक्षक, 1 वनपाल घायल हुए थे तथा शासकीय वाहन भी क्षतिग्रस्त हुआ था. ऐसी सारी घटनाएं होने के बाद फिर हमारे अधिकारियों के द्वारा पुलिस विभाग के एसपी को आवेदन दिया गया और पुलिस विभाग ने उसकी जांच करके एफआईआर दर्ज की है, उनकी जांच के आधार पर, यह एफआईआर दर्ज हुई है. यह कहना असत्य है कि हमने किसी पर भी फर्जी तरीके से एफआईआर दर्ज की है और न ही हम करते हैं.
श्री मुकेश मल्होत्रा - माननीय अध्यक्ष महोदय, आदिवासी समाज सदियों से वहां निवास करता है, जबसे वर्ष 1927 के पूर्व से वन अधिकार कानून नहीं बना था. इसके बाद भी उन पर असत्य मुकदमे दर्ज किये जा रहे हैं. जिले के विभिन्न वन ग्रामों और राजस्व ग्रामों में सदियों से काबिज आदिवासियों को वन विभाग के कर्मचारी खेती नहीं करने दे रहे हैं. आदिवासियों के पास भूमि अधिकार पट्टे व वनाधिकार पट्टे होने के बाद भी खेती करने और उन्हें बसने से रोका जा रहा है. यह आदिवासियों के साथ अन्याय हो रहा है. अध्यक्ष जी, आप ही श्योपुर के आदिवासियों के संरक्षक हैं, क्योंकि आपने उनकी कई बार समस्या सुनी है और लोगों को न्याय दिलवाया है. आपसे हमेशा उनकी उम्मीद रहती है कि आप श्योपुर का विशेष ध्यान रखेंगे. मैं आपके माध्यम से, माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करता हूँ कि श्योपुर के वन अधिकारी को निर्देश जारी करें कि वह वन भूमि व राजस्व ग्रामों में सदियों से काबिज आदिवासियों को बेदखल कर परेशान नहीं करें और उन पर दर्ज सभी असत्य मुकदमों को विलोपित करने का कष्ट करें.
श्री दिलीप अहिरवार - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सदस्य की भावना की कद्र करता हूँ, सम्मान भी करता हूँ और जिस प्रकार से उन्होंने कहा कि वन अधिकार के पत्र जिनके पास हैं और उन आदिवासी भाइयों को अगर वन विभाग के कर्मचारी हटा रहे हैं, तो मैं उनको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि आप मुझे उनका नाम भर बता दीजिये, अगर ऐसे कोई कर्मचारी, जिनके पास वन अधिकार पत्र हैं और उसके बाद भी उनपर कर रहे हैं, तो हम उन पर कार्यवाही करने का काम करेंगे, मैं यह सदन के माध्यम से, आपसे कहना चाहता हूँ.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सदन के माध्यम से आपसे आग्रह कहना चाहता हूँ कि हम निरन्तर यह काम कर रहे हैं, यह प्रक्रिया है और वहां हम वन अधिकार पत्र भी दे रहे हैं, सर्वे भी चल रहा है. 3 हजार से ज्यादा हमने वन अधिकार पत्र दिए भी हैं और भी आवेदन आए हैं, तो निश्चित रूप से सदस्य से आपके माध्यम से मैं कहना चाहूँगा कि व्यक्तिगत भी अगर आपने जो सवाल उठाये हैं, मुझे आप बता देना और ऐसे विधायक भी मेरे पास आते हैं, जो व्यक्तिगत वन विभाग की समस्या को लेकर आते हैं, मैं व्यक्तिगत भी उनकी मदद करता हूँ और ऐसे काम करने के लिए हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी का भी निर्देश है कि किसी भी प्रकार से कोई हमारा आदिवासी या अन्य भाई परेशान न हो, तो मैं सदस्य को आश्वस्त करना चाहता हूँ. आप मिलकर मुझे बताइये, मैं कार्यवाही करूँगा.
अध्यक्ष महोदय - (श्री मुकेश मल्होत्रा के खड़े होकर बन्द माईक पर बोलने पर) प्लीज, प्लीज, आप बैठ जाएं. अब कार्यवाही आगे बढ़ गई है. श्री जयवर्द्धन सिंह जी.
सहारा इण्डिया कंपनी के विरूद्ध पंजीबद्ध प्रकरणों/जनप्रतिनिधियों के पत्र पर कार्यवाही
[गृह]
7. ( *क्र. 2608 ) श्री जयवर्द्धन सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सहारा इण्डिया कंपनी के विरुद्ध प्रदेश में कितनी एफ.आई.आर. किन-किन धाराओं में, कितनी राशि की, कंपनी के समस्त सेक्टरों में किन-किन अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध कब-कब पंजीबद्ध हुई? प्रकरणवार F.I.R. की प्रति सहित पृथक-पृथक बतायें। (ख) उपरोक्त के परिप्रेक्ष्य में निवेशकों से प्राप्त राशि, परिपक्वता राशि एवं निवेशकों की संपूर्ण जानकारी के साथ गौशवारा बनाकर दें? (ग) विभाग द्वारा सहारा समूह द्वारा खरीदी गई संपत्तियों को अटैच किये जाने हेतु कोई कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, तो क्या एवं यदि नहीं, तो क्यों? (घ) प्रदेश के निवेशकों का डाटा कंपनी लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट में सहारा सेबी कोर्ट ऑफ कंटेंट केस नंबर 412/2012 सरकार की तरफ से निवेशकों के संबंध में केस लगाने प्रक्रिया की गई है या नहीं बतायें? (ड.) पत्र क्र./दि. 1724/29.1.2026 जो सी.एम./एस.सी.एस., जी.ए.डी./ए.सी.एस., होम/एस.पी. कलेक्टर राजगढ़ को ईमेल से दिनांक 29.1.2026 दोप. 02:01 बजे प्रेषित है एवं संदर्भ 1-2 अन्तर्गत सा.प्र.वि. के आदेश दिनांक 22.03.2011 के अनुक्रम में कृत कार्यवाही की जानकारी दें, नहीं तो सा.प्र.वि. के आदेश के बिन्दु 5 अन्तर्गत कार्यवाही कर, कृत कार्यवाही की जानकारी दें। (च) थाना प्रभारी जैतवारा, जिला सतना का पत्र क्र. थाना/जैतवारा/997/2025, दिनांक 05.11.2025 जो संचालक, एटमोस इन्टरप्राइजेज, अंबाला केन्ट, हरियाणा को प्रेषित है, जारी करने के निर्देश-नियम-आदेश की प्रति दें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल) : (क) से (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (घ) प्रकरण में कार्यवाही भारत सरकार द्वारा की जा रही है। (ड.) प्रश्नांश से संबंधित पत्र पुलिस अधीक्षक राजगढ़ के ई-मेल पर प्राप्त होना नहीं पाया गया। (च) थाना जैतवारा के अपराध क्रमांक 44/25 धरा 420 भा.द.वि. के प्रकरण में संचालक, एटमोस इन्टरप्राइजेज, अंबाला केन्ट, हरियाणा से प्रकरण की विवेचना से संबंधित धारा 94 बी.एन.एस.एस. के तहत आवश्यक बिन्दुओं पर जानकारी मांगी गई थी।
श्री जयवर्द्धन सिंह - मेरा तारांकित प्रश्न क्रमांक 2608 है.
श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा हुआ है.
अध्यक्ष महोदय - माननीय सदस्य, आप पूरक प्रश्न करें.
श्री जयवर्द्धन सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न बहुत ही गंभीर विषय को लेकर है. सहारा चिटफंड घोटाले के माध्यम से, हमारे मध्यप्रदेश के लाखों छोटे निवेशक चाहे वे किसान हों, चाहे वे छोटे व्यापारी हों, चाहे वे घर की महिला हों, उनके द्वारा बचत के पैसे इस विश्वास के साथ सहारा समूह को दिये गये थे कि 3 वर्ष में वही पैसा दोगुना हो जायेगा. मैंने इस प्रश्न में माननीय मुख्यमंत्री जी को, क्योंकि वह स्वयं गृह मंत्री भी है, उनसे पूछा था कि अब तक मध्यप्रदेश में सहारा समूह के खिलाफ कितनी एफआईआर दर्ज हुई हैं ? लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि जिस विभाग के मंत्री मुख्यमंत्री जी हैं, वहां मुझे अपूर्ण जानकारी दी गई है, तो मेरा पहला प्रश्न माननीय राज्य मंत्री जी से यह है कि अब तक मध्यप्रदेश में वर्ष 2020 से लेकर आज तक, सहारा समूह के ख्लिाफ कितनी एफआईआर दर्ज हुई हैं ? कृपया बताएं.
श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे माननीय सदस्य जी ने जो प्रश्न किया है. वह निश्चित रूप से गंभीर विषय है और चिन्ता का विषय भी है, क्योंकि छोटे निवेशकों का पैसा उस संस्था में लगा था. परंतु जो प्रश्न माननीय सदस्य ने किया था, चूंकि उसमें दिनांक का कोई उल्लेख नहीं था कि कहां से देना है, चूंकि वह ओपन-एंडेड (Open-ended) था, तो आपके आदेश से ही इसकी तारीख़ 01.01.2024 तय की गई थी, उस दिनांक के बाद 4 F.I.R. हुई हैं, उनका विस्तार से उल्लेख कर दिया गया है.
श्री जयवर्द्धन सिंह- अध्यक्ष महोदय, जैसा मैंने कहा कि इतना गंभीर विषय है और बड़े अफसोस की बात है कि गृह मंत्रालय पूरी जानकारी प्रस्तुत नहीं कर पा रहा है लेकिन विभाग के पास जानकारी हो न हो, मेरे पास पूरी जानकारी है, पिछले 6 वर्षों में 123 F.I.R. पूरे मध्यप्रदेश में सहारा समूह को लेकर हुई हैं, जिसकी मेरे पास सूची है. अफसोस की बात है कि मेरे प्रश्न को बदला गया और मात्र भोपाल की 4 F.I.R. का उल्लेख किया गया. कोई बात नहीं, जैसा मैंने कहा कि कुला-मिलकार 123 F.I.R. हुई, जो अभी-भी लंबित हैं.
अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि अब तक मध्यप्रदेश में, सहारा समूह में, निवेशकों का जो पैसा है, वह कुल राशि कितनी है, क्योंकि मैंने मेरे प्रश्न के खण्ड (ख) और (ग) में यह पूछा था कि अब तक मध्यप्रदेश के निवेशकों की कुल कितनी राशि का गबन हुआ है, कृपया मंत्री जी बतायें.
श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल- अध्यक्ष महोदय, हमारे सदस्य की चिंता बिल्कुल उचित है, हमारे प्रदेश के छोटे निवेशकों की वे चिंता कर रहे हैं, इसलिए वे बधाई के पात्र हैं, पंरतु उन्होंने हम पर जो आरोप लगाया है तो मैं कहना चाहूंगा कि हमने उनका प्रश्न नहीं बदला है, मैंने पहले भी बड़ी विनम्रता के साथ इसका उल्लेख किया कि विधान सभा सचिवालय से ही प्रश्न परिवर्तित हुआ था, ओपन-एंडेड था इसलिए उनको कोई दिनांक तय करनी थी, उन्होंने 01.01.2024 तय कर दी, हमने उसके बाद की हुई F.I.R. उपलब्ध करवा दी लेकिन माननीय सदस्य जब से, जिस दिनांक से, कहेंगे तब की जानकारी हम उन्हें उपलब्ध करवा देंगे, जब उनके पास जानकारी उपलब्ध ही है तो अच्छी बात है. मेरा निवेदन है कि चूंकि जितनी F.I.R. हैं, इसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा एक रिट पिटीशन दायर हुई थी 23621/2023, इसके माध्यम से जितनी भी F.I.R. हैं, वे सभी जो मुख्य F.I.R. 859/2020, पुलिस स्टेशन कोतवाली, जिला मुरैना, इससे संबंधित कर दी गई हैं. ये जो 4 F.I.R. हमने आपको उपलब्ध करवाई हैं और आपने जिन 123 F.I.R. का उल्लेख किया है, वे सभी F.I.R. कोतवाली, जिला मुरैना थाने में पहुंच गई हैं और संयुक्त होकर उनकी विवेचना जारी है.
अध्यक्ष महोदय, जैसा कि आपने एक प्रश्न और किया था कि मध्यप्रदेश के कुल कितने निवेशक हैं, उनकी कुल संख्या, कुल प्राप्त आवेदन 9 लाख 6 हजार 661 हैं और मुझे यह बताते हुए संतोष है कि इसमें से लगभग 7.5 लाख निवेशकों के आवेदनों का निराकरण, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार हो गया है. इसमें कुल राशि रुपये 6 हजार 6 सौ 89 करोड़ निवेशकों की थी. जिसमें माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने CRCS, सहारा रिफण्ड पोर्टल बनाया है, उसके माध्यम से रुपये 3 सौ 55 करोड़ की राशि छोटे निवेशकों में वितरित की जा चुकी है.
श्री जयवर्द्धन सिंह- अध्यक्ष महोदय, जैसा मैंने कहा और जैसा मंत्री जी ने स्वीकारा है कि कुल-मिलाकर मध्यप्रदेश के रुपये 6.5 हजार करोड़ की राशि का गबन हुआ है और मात्र रुपये 3 सौ करोड़ के आस-पास की रिकवरी हुई है, जो कि केवल 5 प्रतिशत है मेरा इसमें मंत्री जी से आखिरी प्रश्न यह है कि लगभग अभी-भी रुपये 6 हजार 3 सौ करोड़ की राशि छोटे निवेशकों को अप्राप्त है. इसके साथ-साथ जो जानकारी मैंने प्रश्न के माध्यम से मांगी थी कि कुल-मिलाकर कितनी जमीनें सहारा कंपनी की मध्यप्रदेश में हैं. क्या सरकार पुन: उनको अपने पास लेकर उसकी नीलामी के लिए कुछ योजना बना रही है. निवेशकों का जो पैसा अभी भी अटका पड़ा है वह अकेले मध्यप्रदेश में 6 हजार 300 करोड़ रुपए का है. क्या उसकी रिकवरी के लिए सरकार के पास कोई योजना है?
श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल-- अध्यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने आपको पूर्व में भी बताया है माननीय सर्वोच्च न्यायालय में रिट पिटीशन के आधार पर यह जो पोर्टल बनाया गया है और सेवी भी इसमें लगी हुई है. जो स्टॉक एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया है जो कि इस तरह के निवेशकों की चिंता करती है. वह स्वयं भी सर्वोच्च न्यायालय में गया है और सर्वोच्च न्यायालय के तत्वावधान में यह सारी रिफंड की कार्यवाही चल रही है. उसकी अनेक संपत्तियां सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर भी अटेच की गई हैं. निश्चित रूप से यह अब मध्यप्रदेश पुलिस की सीमा से बाहर का विषय है और सर्वोच्च्ा न्यायालय स्वयं इसकी समीक्षा भी कर रहा है और उसके तत्वावधान में यह रिफंड की कार्यवाही चल रही है.
श्री जयवर्द्धन सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा एक ही प्रश्न था कि कम से कम सरकार के पास यह जानकारी तो हो कि कुल सारा समूह की मध्यप्रदेश में कितनी संपत्तियां हैं, कितनी अभी तक कुर्क हो चुकी हैं. कितनी संपत्तियों को लेकर नीलामी का प्लान बना है. उसमें कुछ ऐसे आरोप भी हैं कि कुछ बड़े-बड़े नेताओं ने भी जमीनें खरीदी हैं, लेकिन कुल मिलाकर कुल कितनी संपत्तियां सहारा समूह की मध्यप्रदेश में हैं यह भी जानकारी मंत्री जी सदन को बताएं. यह गंभीर मुद्दा है. जब 6 हजार 300 करोड़ रुपए मध्यप्रदेश के आमजन के गायब हो चुके हैं तो क्या सरकार इस पर गंभीर नहीं है? यह बात मंत्री जी हमें बताएं.
अध्यक्ष महोदय-- मुद्दा गंभीर है इसीलिए मैंने आपको दो अतिरिक्त सप्लीमेंट्री प्रश्न करने की अनुमति दी है.
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह विषय सबज्यूडिशरी से है. उनकी जितनी भी प्रॉपर्टी हैं वह ऑनलाइन हैं और इसलिए एकदम सीधा यह कह देना कि किसी नेता के पास है. ऐसा नहीं है. पूरी की पूरी जितनी प्रॉपर्टी हैं पूरा ऑनलाइन है और पूरा कि पूरा सुप्रीमकोर्ट के अधीनस्त है. नीलाम भी हो रही है तो उनके अधीनस्त हो रही है, इसलिए इसमें गृह मंत्रालय की बहुत ज्यादा भूमिका नहीं है. मैं माननीय सदस्य से निवेदन करूंगा कि आपका प्रश्न अच्छा है और मध्यप्रदेश के जो निवेशक हैं उनको बचाने के लिए आपने बड़ा अच्छा प्रश्न पूछा है, पर इसमें शासन की कुछ मजबूरियां हैं क्योंकि जो भी निर्णय हो रहे हैं वह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से हो रहे हैं.
महारानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण में किये गये घोटाले की जांच
[सामान्य प्रशासन]
8. ( *क्र. 1698 ) श्री जगन्नाथ सिंह रघुवंशी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पुलिस अधीक्षक, लोकायुक्त ग्वालियर को प्रश्नकर्ता के पत्र दिनांक 03.04.2025 के द्वारा जिला अशोकनगर में महारानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण में किये गये घोटाले की जांच करने हेतु समस्त दस्तावेज प्रस्तुत कर जांच कर दोषियों पर कार्यवाही करने हेतु अनुरोध किया था? उक्त पत्र पर आज दिनांक तक क्या-क्या कार्यवाही की गई है? संपूर्ण कार्यवाही की छायाप्रति उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्नांश (क) में स्कूलों में फर्जी प्रशिक्षण देने वाले व्यक्ति ब्रजेश धुरेंटे, आरती विश्वकर्मा, निकिल धुरेंटे तथा आनश खान से राशि की वसूली की गई है अथवा नहीं? यदि नहीं, की गई तो क्यों नहीं की गई? उक्त प्रकरण में दोषी तत्कालीन जिला परियोजना समन्वयक, जिला शिक्षा केन्द्र, अशोकनगर पर प्राथमिकी दर्ज की गई है अथवा नहीं? यदि नहीं, तो क्यों नहीं की गई? विलंब का कारण स्पष्ट करें। (ग) क्या उक्त शिकायत को जिला स्तर पर लंबित कर मामला रफा-दफा किया जा रहा है, जिस कारण से जांच लंबित हुई है। जांच लंबित रखने वाले अधिकारी का नाम व पदनाम बतावें यदि जांच जान-बूझकर लंबित की गई है, तो क्या शासन उक्त अधिकारी पर दण्डात्मक कार्यवाही करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्रीमती कृष्णा गौर) : (क) प्रश्नांश ''क'' में उल्लेखित शिकायत दिनांक 03.04.2025 पर जाँच प्रकरण क्रमांक-100/ई/2005 पंजीबद्ध होकर जांचाधीन है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) एवं (ग) उत्तरांश ''क'' के प्रकाश में प्रकरण जांचाधीन होने के कारण शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
श्री जगन्नाथ सिंह रघुवंशी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न क्रमांक 1698 है.
श्रीमती कृष्णा गौर-- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर सदन के पटल पर है.
श्री जगन्नाथ सिंह रघुवंशी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री महोदया से निवेदन है कि क्या वह मेरे द्वारा पूछे गये प्रश्न में जांच कराना सुनिश्चित करेंगी?
श्रीमती कृष्णा गौर--माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न पूछने वाले सदस्य, हमारे सदन के बहुत ही वरिष्ठतम सदस्य हैं और उनकी मांग बिलकुल वाजिब मांग है. वर्ष 2023-24 में अशोक नगर जिले में महारानी लक्ष्मी बाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया गया जो हमारी शासकीय माध्यमिक शालाओं की बालिकाओं के लिए था. माननीय सदस्य के संज्ञान में जब यह बात आई कि जो प्रशिक्षण हुआ वह फर्जी हुआ और राशि का भुगतान भी हो गया तब उन्होंने संज्ञान लेते हुए तत्काल लोकायुक्त में शिकायत दर्ज करवाई. दिनांक 3 अप्रैल, 2025 को जांच प्रकरण क्रमांक 100/ई/2005 पंजीबद्ध हुआ है. लोकायुक्त द्वारा प्रकरण की जांच की जा रही है.
अध्यक्ष महोदय-- जगन्नाथ सिंह जी कुछ और पूछना चाहते हैं.
श्री जगन्नाथ सिंह रघुवंशी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री महोदया से केवल इतना चाहता हूं कि जो जांच में दोषी पाए जाएं उन पर सख्त कार्यवाही हो.
अध्यक्ष महोदय-- ठीक है.
श्रीमती कृष्णा गौर--माननीय अध्यक्ष महोदय, लोकायुक्त अपने आप में बहुत ही गरिमापूर्ण और वैधानिक संस्था है. मैं माननीय सदस्य को पूरा विश्वास दिलाती हूं कि जांच में जो भी दोषी होगा. निश्चित रूप से उस पर वैधानिक कार्यवाही होगी. माननीय स्कूल शिक्षा मंत्री जी भी यहां उपस्थित हैं और निश्चित रूप से वह स्वयं भी इस पर संज्ञान लेंगे.
पत्रकार सुरक्षा कानून
[जनसंपर्क]
9. ( *क्र. 611 ) श्री विपीन जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता के अतारांकित प्रश्न क्रमांक 803, दिनांक 29.7.2025 द्वारा प्रेषित उत्तर में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने हेतु सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश अनुसार समिति का गठन किया गया है? उक्त समिति में कौन-कौन सदस्य हैं, उसका विवरण देवें। (ख) उक्त समिति की बैठक दिनांक 05.10.2023 के बाद आज दिनांक तक क्यों नहीं की गई है? उक्त दिनांक की बैठक की कार्यवाही का विवरण देवें। (ग) क्या शासन प्रशासन पत्रकारों की सुरक्षा व्यवस्था करने के लिये गंभीर नहीं है? यदि है तो 3 वर्ष बीत जाने के बावजूद भी आज दिनांक तक समिति की बैठक क्यों नहीं की गई है? (घ) मध्य प्रदेश में पत्रकार सुरक्षा कानून कब लागू कर दिया जायेगा?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी) :-

श्री विपीन जैन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 611 है.
श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.
श्री विपीन जैन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर है. पत्रकार लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ होता है. अपनी जान की परवाह किए बिना जनता की आवाज उठाता है व निष्पक्ष रिपोर्टिंग करता है. आए दिन हम खबरों में देखते हैं कि पत्रकारों के ऊपर हमले होते हैं. इन्हें जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं. कई पत्रकारों की हत्या भी हो गई है. आज के दौर में पत्रकारिता करना कठिन काम है. पत्रकार अपनी जान की परवाह किए बिना खबरों को कवरेज करता है. पक्ष और विपक्ष की कमजोरियों को बताकर समाज और जनता के बीच में संतुलन भी करता है. माननीय मंत्री जी ने बताया है कि वर्ष 2023 में पत्रकार सुरक्षा कानून के संबंध में एक मीटिंग हुई थी. इस कानून को बनाने के लिए अन्य राज्यों में लागू कानूनों के अध्ययन एवं इस क्षेत्र के विशेषज्ञों से सुझाव प्राप्त होने के पश्चात् प्रारुप तैयार करेंगे. मैं पूछना चाहता हूँ कि यह पत्रकार सुरक्षा कानून कब तक लागू हो जाएगा. वर्ष 2023 में हुई मीटिंग के बाद अभी तक इस पर क्या निर्णय हुआ है, यह बताने की कृपा करें.
श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को बताना चाहता हूँ कि जैसा कि हम सब जानते हैं कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ है. भारत के संविधान में भी स्वतंत्रता के अधिकार के अन्तर्गत प्रेस को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रदान की गई है. इसके साथ ही भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में भी सुरक्षात्मक प्रबंध किए गए हैं. लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में हमारी सरकार पत्रकारों की समुचित सुरक्षा और सम्मान के लिए प्रतिबद्ध है. जैसा कि बताया जा चुका है कि पत्रकार सुरक्षा कानून बनाए जाने के लिए अन्य राज्यों के कानूनों का अध्ययन किया जा रहा है और विषय विशेषज्ञों से सुझाव भी प्राप्त किए जा रहे हैं. इन सब के अध्ययन और परीक्षण के उपरांत सरकार इस संबंध में निर्णय लेगी. जहां तक पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान की बात है. हमारी सरकार निरंतर पत्रकारों के हित में कल्याणकारी योजनाएं भी चलाने का काम कर रही है. पत्रकारों एवं उनके परिवार के सदस्यों को सामान्य बीमारियों में उपचार के लिए 40 हजार रुपए तथा गंभीर बीमारियों में उपचार के लिए एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता हमारी सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जाती है. मान्यता प्राप्त श्रमजीवी पत्रकारों की मृत्यु होने पर आश्रित परिवार को 4 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रावधान है. 65 वर्ष से अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ पत्रकारों को 4 लाख रुपए का निशुल्क स्वास्थ्य बीमा तथा 10 लाख रुपए का दुर्घटना बीमा भी हमारी सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है. 60 वर्ष और उससे अधिक उम्र के पत्रकारों को 20 हजार रुपए की सम्मान निधि प्रतिमाह प्रदान करने का काम हमारी सरकार कर रही है. सम्मान निधि प्राप्त करने वाले पत्रकारों की मृत्यु की स्थिति में आश्रित पति/ पत्नी को 8 लाख रुपए की सहायता देने का भी प्रावधान है. मैं माननीय सदस्य को बताना चाहता हूँ कि अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को 30 लाख रुपए के आवास ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान 5 वर्ष तक प्रदान करने का प्रावधान है. कुल मिलाकर हमारी सरकार निरंतर पत्रकारों के हित में काम भी कर रही है और पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध है.
श्री विपीन जैन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ पत्रकार सुरक्षा कानून कब तक बना देंगे.
श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने बताया है कि हमारी सरकार निरंतर पत्रकारों के हित में काम भी कर रही है और पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान के लिए पूर्णत: प्रतिबद्ध है. पत्रकार सुरक्षा कानून के संबंध में प्रशासनिक...
अध्यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी शेष उत्तर से माननीय सदस्य को आप अवगत करवा दीजिएगा. प्रश्नकाल समाप्त हो गया है.
श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी -- जी माननीय अध्यक्ष महोदय.
(प्रश्नकाल समाप्त)
12.00 बजे शून्यकाल
अध्यक्ष महोदय -- अब शून्यकाल की सूचनाएं ली जाएंगी.
(1) श्री राजेन्द्र भारती जी
(2) श्री राजेन्द्र पाण्डे जी
(3) श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव जी
(4) श्री आशीष गोविंद शर्मा जी
(5) श्रीमती अनुभा मुंजारे जी
(6) श्री दिनेश गुर्जर
(7) श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल
(8) श्री मुकेश टण्डन
(9) डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान
(10) श्री शैलेन्द्र कुमार जैन
की सूचनाएं पढ़ी हुई मानी जाएंगी.
12.01 बजे शून्यकाल में मौखिक उल्लेख
महिला आयोग एवं अन्य आयोगों का गठन किया जाना
श्री अजय अर्जुन सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मेरा एक बहुत गम्भीर प्रश्न लगा हुआ था वह आया नहीं. यह सरकार महिलाओं के लिये बहुत लंबी-चौड़ी बातें करती है लेकिन 5 साल से महिला आयोग का गठन नहीं हुआ, मानव अधिकार का गठन नहीं हुआ, किसी भी आयोग का गठन नहीं हुआ क्या यह सरकार अपने आपको संवेदनशील कहती है. महिला आयोग में ही गठन हो जाए. कब तक गठन होगा यह बता दें.
12.02 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना
(1) मध्यप्रदेश स्टेट माइनिंग कार्पोरेशन लिमिटेड, भोपाल का 60 वां
वार्षिक प्रतिवेदन वित्तीय वर्ष 2022-2023

(2) सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय, उज्जैन का 68 वां
वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025

12.03 बजे ध्यानाकर्षण
श्री
अजय अर्जुन
सिंह -- अध्यक्ष
महोदय,
राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार)पशुपालन एवं डेयरी(श्री लखन पटेल)-- माननीय अध्यक्ष महोदय इस ध्यानाकर्षण पर विभागीय टीप इस प्रकार है -



श्री अजय अर्जुन सिंह—अध्यक्ष महोदय, कल आदरणीय मुख्यमंत्री जी ने किसानों के हित के लिये विभिन्न योजनाओं का केबिनेट मीटिंग के माध्यम से यहां पर हम लोगों को सूचित किया. म.प्र. का किसान खेती करे कि रात भर जाग कर तकवारी करे. उसके लिये भी कोई योजना मुख्यमंत्री जी किसान भाइयों के लिये बनायेंगे. मंत्री जी के उत्तर में कोई दिक्कत नहीं है. सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा है. हमारी योजनाएं बन गईं, इतने सार पशु भर बचे हैं. दिल पर हाथ रख करके बता दें कि पथरिया से यदि रात को 11.00 बजे इनको भोपाल आना हो, तो इनका ड्राइवर कहेगा कि मंत्री जी सुबह चलिये, रास्ते में गाय बहुत रहेंगी, ठीक से गाड़ी नहीं चला पाऊंगा. पूरे प्रदेश की हालत यह है. यह सिर्फ एक जिले की बात नहीं है, पूरे प्रदेश में आज रात भर किसान टार्च लिये अपनी खेती और फसल को बचाने में लगा रहता है. यह समस्या म.प्र. की इस तरह से क्यों हो गई. कितनी गौशालाएं अभी भी बंद पड़ी हुई हैं. इन्होंने गिनती बताई कि 3040 गौशालाएं संचालित हैं. कितनी गौशालाएं संचालित नहीं हैं, जो बनी हुई हैं. उसके भी आंकड़े बता दें. यह कहना कि स्वावलम्बी योजना के तहत 130 एकड़ हम जमीन देंगे. पूरे प्रदेश में एक भी स्वावलम्बी योजना गौशाला की बन पाई है. किसी ने टेंडर नहीं किया. थोड़ा दूसरी सोच से इसमें काम करें. मेरा सुझाव यह है कि मंत्री जी इसको गंभीरता से लें. किसान अपनी फसल बचा सकें, उनको तकवारी न करनी पड़े, उसके लिये भी आपसे प्रार्थना है कि इस तरह की योजना बनायें और एक चीज है कि वह हाईवे में व्यवस्था कर दी गई है. सिर्फ एक अंचल में, नर्मदापुरक के अंचल में सड़कों के लिये एक कोई स्ट्रे-केटल व्हीकल के लिये प्रावधान बनाया गया है. वहां पर सफलता हुई. यदि यही योजना पूरे नेसनल हाईवे में, स्टेट हाईवे में हो जाये कि स्ट्रे केटल उठाने का प्रावधान है. हर 50 किलोमीटर पर बता रहे हैं, खुद ही उत्तर दे रहे हैं कि 50 किलोमीटर में ऐसा प्रावधान है, लेकिन प्रावधान का कहीं पालन नहीं हो रहा है. दोनों चीज का मंत्री जी उत्तर दें.
श्री लखन पटेल-- अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्य ने पूछा है कि कितनी गौशालाएं इनकम्प्लीट हैं. तो मैं बताना चाहता हूं कि जो आपके समय में गौशालाएं बनाई गई थीं, उनको लगभग...
श्री अजय अर्जुन सिंह—अध्यक्ष महोदय, मेरे कौन से समय भाई. हमारा कौन सा समय भाई.
श्री लखन पटेल-- अध्यक्ष महोदय, आपके 15 महीने के कार्यकाल में.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे—मंत्री जी,आपका दिमाग वहीं पर है कि हमने क्या किया. मंत्री जी, आपआगे की बात तो करिये.
श्री लखन पटेल-- अध्यक्ष महोदय, बात पूरी सुन तो लीजिये मेरी. मेरी पूरी बात ही नहीं सुनी और रिएक्शन दे दिया. मैं आपकी तारीफ ही तो कर रहा हूं कि आपने बनाई थी, आप क्यों नाराज हो रहे हैं.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे—आप समस्या का निराकरण कर दें.
श्री लखन पटेल-- अध्यक्ष महोदय, मैं बिलकुल निराकरण कर दूंगा. आप विश्वास रखिये, डॉ. मोहन यादव जी की सरकार दो साल के भीतर..
श्री अजय अर्जुन सिंह—मंत्री जी, आप एक चीज भूल गये. डॉ. मोहन यादव की सरकार और केंद्र में नरेन्द्र मोदी जी की सरकार. दोनों नाम एक साथ लिया करो.
श्री लखन पटेल-- अध्यक्ष महोदय, जी. आपने कहा, उसके लिये धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय—मंत्री जी को जवाब देने दीजिये. कृपया शांति बनाये रखिये.
श्री लखन पटेल-- अध्यक्ष महोदय, तो आपने जो कहा, उसमें 116 गौशालाएं मात्र अभी अपूर्ण हैं और जैसा वरिष्ठ सदस्य जी ने कहा है. जैसा कि वरिष्ठ माननीय सदस्य ने कहा कि गौ-शालाओं के एक भी टेण्डर नहीं आये हैं. मैं आपको बताना चाहता हूं कि 25 जिलों में 29 स्थान हमने चयनित कर लिये जो पशुपालन विभाग को राजस्व विभाग से जमीन ट्रांसर्फर हो गयी है. जिसकी टेण्डर प्रक्रिया हुई, जिसमें 7 जगह, मैं, आपको नाम पढ़कर बता देता हूं कि जिसमें जबलपुर में 461 एकड़ भूमि, रायसेन में 320 एकड़ भूमि, दमोह में 520 एकड़ भूमि, सागर में 411 एकड़ भूमि, अशोक नगर में 293 एकड़ भूमि, खरगौन में 133 एकड़ भूमि और रीवा में 135 एकड़ भूमि, इन सात जगहों के टेण्डर हो चुके हैं. जिसका एग्रीमेंट 10 दिन के भीतर करके और मैं आपसे और सभी सदस्यों से निवेदन करना चाहता हूं कि जिस दिन इसका भूमिपूजन हो तो आप सब लोग शामिल हों. क्योंकि यह देश की यह पहली योजना है, जिसके अंतर्गत यहां निराश्रित गौवंश को रखा जायेगा. मैं आपको बताना चाहता हूं कि यह जो गौवंश है, इसमें हमने कहा है कि मिनीमम 5000 हजार गौवंश 130 एकड़ में रखा जायेगा, इससे कहीं ज्यादा रखा जायेगा और कई गौ-शालाएं ऐसी हैं, जहां पर 20000, 25000 और 30000 गौवंश एक जगह रखा जायेगा और अकेला इसको स्वावलंबी बनाने के लिये हमारे मुख्यमंत्री जी का और हमारी केबिनेट ने जो प्रस्ताव पारित किया है. वह देश का पहला मॉडल है. मैं इसमें आपको बताना चाहता हूं आस्ट्रेलिया और दुबई से आकर लोगों ने टेण्डर डाला है और उनका यह भी कहना है कि हम बाकि और भी गौ-शालाएं लेंगे. हम अभी 22 गौ-शालाओं के टेण्डर जारी कर रहे हैं. मुझे लगता है कि एक महीने के भीतर वह भी टेण्डर आ जायेंगे.
अध्यक्ष महोदय, मैं सभी सदस्यों को अवगत कराना चाहता हूं कि आप विश्वास रखिये, दो साल के भीतर, जैसा कि आपने अपने आंकड़ों में कहा है कि 10 लाख गौवंश बाहर हैं. अभी हमारी 4 लाख 80 हजार हमारी गौ-शालाओं में गौवंश रहेगा. मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं, चूंकि इसको बनाने में अभी समय लगेगा और यह दो साल के भीतर बनकर कम्प्लीट होंगी तो एक भी गौवंश आपको सड़क नहीं दिखेगा. यह आप विश्वास रखिये (मेजों की थपथपाहट)
अध्यक्ष महोदय, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि अभी हमने जो 7 गौ-शालाएं के टेण्डर किये हैं. हमारी ऐसी कोशिश होगी कि जून के पहले यह आधे से अधिक कल्प्लीट हो जायें. तथा जो नेशनल हाइवे हैं या जो मैन हाइवे हैं, उन पर जो गौवंश होगा, उनको हम विस्थापित करके गौ-शालाओं में पहुंचाने का काम करेंगे.
श्री अजय अर्जुन सिंह- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर सुनने के बाद सब कुछ ठीक-ठाक है. कोई गौवंश सड़क पर कहीं नहीं है. कहीं और जाने की जरूरत नहीं है. आप अपनी राजधानी भोपाल शहर की सड़कों पर ही, कृष्णा गौर जी मुस्करा रहीं हैं उनके बगल में बैठकर के. उन्हीं के क्षेत्र में कितने आवारा पशु ऐसे घूम रहे हैं, जिनका कोई गौशाला में जाने का सवाल ही नहीं है.
अध्यक्ष महोदय, मैं जब उम्र में छोटा था तो गांव में एक चीज होती थी, कांजी हाउस. हमारे यहां कांजी हाउस कहते थे कांजी हाउस, पता नहीं यहां पर क्या कहते थे. आज यदि पंचायतों को ही यह प्रावधान दे दिया जाये, कुछ ऐसी व्यवस्था कर दी जाये कि अपनी पंचायत में यदि कोई इस तरह से आवारा पशु घूम रहे हैं तो उनकी व्यवस्था पंचायत करने लगे तो जब तक यह स्वावलंबी योजना चालू होगी, तब तक कम से कम व्यवस्था हो जायेगी. लेकिन अभी क्या दिक्कत है कि यदि कोई सरपंच अपने क्षेत्र में तीन-चार लोगों को मिलाकर के इस तरह से व्यवस्था करते हैं तो लोग पुलिस केस कर देते हैं, हमारे यहां खुद हुआ है. यहां पर पंचायत मंत्री भी बैठे हैं और मुख्यमंत्री जी भी बैठे हैं, इस तरह से व्यवस्था हो जाये. यह हमारी भर दिक्कत नहीं है. यह पूरे प्रदेश के किसानों की समस्या है, गाड़ी चलाने वालों की समस्या है, सड़कों की हालत खराब है. इसलिये कुछ ठीक-ठाक व्यवस्था हो जाये.
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) - अध्यक्ष महोदय, इस समस्या से सभी का संवेदनात्मक लगाव है और सरकार की जिम्मेदारी का ही परिणाम है कि गौवंश जिस प्रकार से राज्य में कटता था, यह सर्वविदित है और शर्मनाक रहा है और इसलिए मुझे लगता है कि जब हम इस पर चर्चा करे तो आरोप-प्रत्यारोप की बजाय हम वास्तव में देखे, जब आपने कहा था, मैंने भी अपने उत्तर में कहा था कि गौशालाओं के 7 के टेण्डर हुए हैं तब भी आपने कहा कि कोई टेण्डर नहीं हुए. उन्होंने नाम पढ़कर बता दिये. यह सच है लेकिन संख्या का जो आंकड़ा आता है वह किसी ने कभी शासकीय तौर पर या अशासकीय तौर पर किसी एनजीओ ने कभी पंजीबद्ध नहीं किया, लेकिन यह सच है कि जहां पर सड़कों पर गौवंश है, उसका रास्ता निकलना चाहिए, जो कांजी हाउस की व्यवस्था है वह आज भी विद्यमान है लेकिन समस्या यह है कि जिसकी खुद की गाय है, वह खुद छोड़ रहा है तो वह कांजी हाउस लेने क्यों जाएगा? इस कारण से वह पंचायत में रहती है उसके बाद में वहां से कोई वापस नहीं ले जाता. अपने को दोनों पक्षों को देखना होगा और उसके आधार पर सरकार ने एक विस्तारित योजना बनाई है जिसमें सरकारी जितनी गौशालाएं थीं, अध्यक्ष महोदय, मैंने अपने जवाब में भी कहा था कि जो 1200-1300 गौशालाएं बनी थी, न तो वहां पर बिजली थी, न सड़क थी, न पानी था. साइट सिलेक्शन हुआ नहीं, उसके बाद भी सरकार ने नीति बनाई और बकायदा मुख्यमंत्री जी की उपस्थित में बैठकर यह फैसला हुआ कि जो व्यक्ति लेने को चाहे तो हम व्यक्ति को देने को तैयार है, समूह लेना चाहे तो समूह को देने को तैयार हैं, कोई सोसाइटी हो तो हम उसको भी देने के लिए तैयार है. इतना व्यापक सोचने के बाद भी लगभग 400 गौशालाएं अभी भी खाली पड़ी हुई हैं. कुछ स्टार्ट अप ने 3 लोगों ने भोपाल के बाजू में लिया है, आईआईटियन हैं तो मुझे लगता है कि कोशिश वही है और इसमें हम सबको मिलकर काम करना पड़ेगा कि सामाजिक तौर पर जो हमारी गैर-जिम्मेदारी है, उसको भी कहीं झांककर देखेंगे तो मुझे लगा कि ठीक होगा, सरकार का रास्ता बिल्कुल सही है, जिस रास्ते पर हम जा रहे हैं उस रास्ते में हम 2 साल के भीतर सफल होंगे ऐसा हमारा भी विश्वास है.
श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव - अध्यक्ष महोदय, मैं बड़ी गंभीरता और विनम्रता से एक सुझाव सरकार के सामने रखना चाहता हूं. जो गौमाता निराश्रित घूम रही हैं, जिनका कोई आश्रय नहीं हैं और लगातार सरकार प्रयास कर रही है. गौ अभ्यारण्य बनाने का काम भी सरकार कर रही है, परन्तु अगर जैसा माननीय मंत्री जी ने कहा कि जो गौ अभ्यारण्यों की व्यवस्था सरकार कर रही है , उसमें लगभग 2 साल का समय लगेगा और इस दिशा में जो 2 साल की अवधि है, इस 2 साल में जो गौमाताएं निराश्रित घूम रही हैं, जिसके कारण आए-दिन जैसा कि माननीय श्री राहूल जी ने भी अपने ध्यानाकर्षण की सूचना में पढ़ा, जो 2 साल का पीरियड है, इस 2 साल में हम क्या व्यवस्था करेंगे जो निराश्रित गौमाताएं हैं, वह गौमाताएं कहां पर जाएंगी?
अध्यक्ष महोदय, मेरा छोटा सा सुझाव है चूंकि भारतीय जनता पार्टी प्रदेश और देश की सबसे बड़ी पार्टी है तो एक-एक गौमाता भारतीय जनता पार्टी के मित्रों के यहां पर भिजवा दें तो उनको इस प्रकार से गौमाता को आश्रय भी मिल जाएगा और गौमाता की सेवा करने का पुण्य भी मिल जाएगा.
(व्यवधान)..
अध्यक्ष महोदय - डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय जी. (कई माननीय सदस्यों के एक साथ खड़े होने पर) इसको विषयांतर मत करें. सुझाव आ जाने दें.
डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय (जावरा) - अध्यक्ष महोदय, बहुत बहुत धन्यवाद. निश्चित रूप से डॉ. मोहन यादव जी ने बहुत गंभीरता के साथ में संवेदनशील होकर गौमाता के लिए आपने सराहनीय निर्णय लिये हैं.
अध्यक्ष महोदय - राजेन्द्र जी एक मिनट में सुझाव पूरा करें.
डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय - थोड़ा-सा विवरण देकर एक मिनट में सुझाव देना चाहता हूं. अध्यक्ष महोदय, लगातार तेजी से विकास के कार्यों के कारण, लगातार बनती हुई सड़कों के कारण आखिरकार जीव-जंतु जायं तो कहां जायं, यह गौमाता के साथ-साथ एक विषय और रखना चाहता हूं कि यह जो रौजडा है, नीलगाय है, या घोड़ारोज है, इसके कारण न केवल फसलें नष्ट हो रही हैं तो मैं यह कहना चाहता हूं कि जब शेर और चीतों के लिए बड़े बड़े वन अभ्यारण्य क्षेत्र घोषित किये गये हैं तो जिस तरह से जीव-जंतु वंचित रह गये हैं आखिरकार वे कहां रहें उनके लिए ऐसे कोई संभागीय स्तर पर बड़े स्थानों को गौ अभ्यारण्य के रूप में विकसित किया जाय और अभी श्वान पर भी विषय हुआ था. अध्यक्ष महोदय, मैं क्षमा चाहूंगा. अभी श्वान पर भी काफी लम्बी चर्चा हुई थी. अभी परसों ही शाजापुर में नन्हीं बच्ची के उसने गाल नोंच लिये, वह मरते मरते बची है तो आखिर जो विकास कार्य हो रहे हैं बड़ी बड़ी सड़कें बन रही हैं तो जीव-जंतु कहां जाय तो शासन को गंभीरता के साथ में संभागीय मुख्यालयों पर बड़े गौ अभ्यारण्य या ऐसे वन क्षेत्र घोषित करके उस कार्य योजना पर विचार करना चाहिए. अध्यक्ष महोदय, बहुत बहुत धन्यवाद, आपने मुझे बोलने का समय दिया.
अध्यक्ष महोदय -- श्री कैलाश कुशवाह जी.
श्री कैलाश कुशवाह (पोहरी) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद. मैं कहना चाहता हॅूं कि सड़कों पर जो एक्सीडेंट होते हैं, उसमें हमारी गौमाता भी मरती है और हमारी जनहानि भी होती है. यह मध्यप्रदेश के लिए एक गंभीर विषय है. मैं यही आग्रह करता हॅूं कि जिस तरह अन्य प्रदेशों में फोरलेन, सिक्सलेन और जो सिंगल रोड हैं, उनमें कहीं न कहीं सुरक्षा की दृष्टि से जाली लगाई गई है लेकिन मध्यप्रदेश में कहीं भी जालियां नहीं लगीं हैं.
अध्यक्ष महोदय-- कुशवाह जी, आप प्रश्न कीजिए. कोई भी एक प्रश्न कीजिए.
श्री कैलाश कुशवाह -- जी माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं वही कह रहा हॅूं कि एक्सीडेंट होने से जनहानि हो रही है, तो उसकी सुरक्षा के लिए जाली लगाई जानी चाहिए. चाहे वह सिंगल रोड ही क्यों न हो. क्योंकि जब कभी कोई जानवर अचानक से सड़क पर आ जाता है, तो वह गाड़ी से टकरा जाता है जिससे जनहानि तो होती है और जानवर भी मरता है. जैसा कि हमारे माननीय राहुल भैया जी ने बताया कि पूरे प्रदेश में यही हाल है. चाहे वह ग्वालियर संभाग हो, चाहे वह चंबल संभाग हो, चाहे वह हमारा मालवा हो.
अध्यक्ष महोदय -- कुशवाह जी, आपका प्रश्न क्या है ? आप माननीय मंत्री जी से क्या पूछना चाहते हैं. आप बैठ जाइए, मंत्री जी से बुलवाते हैं, क्योंकि वह उनसे जुड़ा हुआ विषय है. माननीय मंत्री जी.
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी आपसे बड़ी विनम्र प्रार्थना है कि हम इतने असंवेदनशील तरीके से इसको न देखें. अगर हमें वास्तव में गौमाता की चिंता है और इस समस्या से हमें समाधान चाहिए, तो मैं थोड़ी कोशिश करता हॅूं कि हम चुनौतियों को देखें. मेरे जैसा व्यक्ति भी एक साल इस हालत में आ गया था कि व्यक्तिगत तौर पर हम 27-28 लाख रूपए के कर्ज में थे. आपको लगता जरूर होगा कि जिन्हें आपने गौशाला दे दी है, वह ऐसे ही चला लेंगे. जिस दिन भूसे की कमी आयी थी, तो गेहूं से महंगा भूसा था. लेकिन आप गौमाता को अपनी आंखों के सामने मरने नहीं दे सकते. इसमें सरकार ने दो बडे़ काम किए. भूसे की मशीनें उनको उपलब्ध करायीं, लेकिन उसके बाद भी मेरे जैसा व्यक्ति तीसरे साल में यानि पिछले साल सफल हो पाया कि हम धान के पिराया को इकट्ठा करके कैसे उसको भूसे के विकल्प के रूप में वहां पर रखें. पिछली गौशाला दमोह में ही माननीय मंत्री जी के जिले में उनकी विधानसभा में ही है और पौने तीन सौ एकड़ में गो-अभ्यारण्य है. आज की तारीख में 27 सौ से ज्यादा गोवंश वहां पर हैं और मुझे लगता है कि हमें जिम्मेदारी लेनी होगी. केवह हम यह कहकर नहीं टाल सकते. यह सच है कि उसके प्रति जो संवेदनशीलता रखेगा, वही सेवा कर पाएगा. सेवा, गौसेवा केवल पैसे भर से नहीं होती और इसलिए कम से कम इन चुनौतियों को हम सबको स्वीकार करना पडे़गा कि जहां पर गौ-अभ्यारण्य हैं, गौशालाएं हैं वहां पर एक बार जाकर जरूर देखिए. केवल पैसा भर मिल जाने से गौसेवा नहीं हो सकती, उसके लिए मेन पॉवर चाहिए, अच्छे लोग चाहिए और समय पर खाद्यान्न चाहिए. मैंने कहा कि मैं इतनी बड़ी-बड़ी बातें नहीं कर रहा हॅूं. मैंने जिस दिन गौ-अभ्यारण्य शुरू किया था, उस दिन मैंने कहा था कि मैं कोई बड़ी-बड़ी बातें नहीं कर रहा. सड़क से उठाकर वहां रखूंगा. गाय मर जाएगी, तो समाधि दे दूंगा. मैं कोशिश करूंगा कि उनका जितना इलाज हो सके, वह करूं. ज्यादा बड़-बोलापन इसके लिए अच्छा नहीं होगा. हम सबको तय करना पडे़गा कि वास्तव में हम किस रास्ते में गए हैं. (मेजों की थपथपाहट) लेकिन सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती है चाहे वह धान के बंडल बनाने की चुनौती हो, भूसा बनाने की चुनौती हो और इसलिए मुझे लगता है कि इन बातों को हमें गंभीरता से लेना चाहिए. अगर कहीं कमी दिखती है, तो मैंने खुद इस सदन में स्वीकार किया है कि जिन गौशालाओं में पानी नहीं है, वहां गौसेवा कैसे हो सकती है. बिजली नहीं हो, तो चलेगा लेकिन सड़क और पानी तो चाहिए, भूसा तो चाहिए. अगर हमने साइड सेलेक्शन गलत किया है, तो उसके लिए कोई न कोई तो जिम्मेदार है. मैं भी गिनती बता सकता हॅूं लेकिन मुझे लगता है कि इस बहस में नहीं पड़ना चाहिए. लेकिन यह सच है कि अगर इसकी चुनौती है, राष्ट्रीय राजमार्ग के पास कोई सरकारी जमीन है, सरकार उस पर भी जांच पड़ताल कर रही है कि वहां पर भी हम कैसे रखें. लेकिन रखने के बाद में उनकी सेवा करने के सिस्टम पर भी तो विचार करना होगा. किसी सरपंच के यहां अगर गौशाला चल रही है, तो एक बार जरा आपके विधानसभा क्षेत्र में जाकर देखिए और उससे कठिनाइयां पूछिए, तो पता चल जाएगा कि हम उसमें मददगार हैं या नहीं.
अध्यक्ष महोदय -- श्री उमंग सिंघार जी.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)—अध्यक्ष महोदय, इस बारे में हमने चर्चा के लिये भी सूचना दे रखी है. मैं समझता हूं कि सरकार को इस पर विस्तृत चर्चा कराना चाहिये. अब सरकार क्यों नहीं कराना चाहती है, यह अलग बात है. लेकिन मेरे एक दो इस विषय पर सुझाव हैं. हम गौशाला खोलना चाहते हैं, पशुपालक तब उनको छोड़ता है जब गाय दूध नहीं देती है. क्या हम 40 रूपये उस पशुपालक को नहीं दे सकते हैं? आप संभाले आपकी जवाबदारी है. आजकल तो जमाना एआई का है, जीपीएस सिस्टम हैं, सब चीजें हैं. आप उसकी लाइव लोकेशन देखो आप जब इतनी हाई टेक्नॉलॉजी की बात करते हैं, आपके पास शिपरी है आपने कहा कि हम मॉनिटरिंग कर रहे हैं, खेत की तालाब की, सड़कों की, कहीं आप नगरीय प्रशासन में कर रहे हैं तो क्या हम इसके लिये लाइव नहीं कर सकते हैं ? बच्चों की आज लाइव लोकेशन ट्रेकिंग होती है उस आधार पर उनको पैसे दो. पशुपालक को अगर पैसे मिलेंगे उसको खिलाने के लिये कौन गौमाता को छोड़ना चाहेगा. मैं समझता हूं कि इस पर सरकार को विचार करना चाहिये. आप चाहें तो उसको पायलट प्रोजेक्ट कर सकते हैं. एक अथवा दो गांव में. इतने करोड़ रूपये आप गौशालाओं में आप खर्च कर रहे हैं. आप सीधे सीधे पैसा उन पशुपालकों को दें मेरा इसमें यही सुझाव है. एक चीज माननीय मंत्री जी की तरफ से नहीं आयी कि गौशालाएं खुल रही हैं, लेकिन गाय की मृत्यु के बाद क्या होगा ? उसको कैसे दफनाया जायेगा उसका क्या होगा ? इस बारे में भी व्यवस्था होना चाहिये, स्पष्ट होना चाहिये. कागज पर बोलने से अलग बात होती है, क्योंकि सच्चाई यह है कि गौमांस भी बिक रहा है, यह कैसे रूके ? मैं समझता हूं कि इस पर भी सरकार की चर्चा अलग से होनी चाहिये, इन दोनों बातों पर होना चाहिये. मैं चाहूंगा कि मंत्री जी बतायें ?
श्री कैलाश विजयवर्गीय—अध्यक्ष महोदय, अजय जी को धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने बहुत ही गंभीर विषय पर ध्यानाकर्षण लगाया. सरकार भी इस मामले में उतनी ही गंभीर है. मैं सदन को अवगत कराना चाहूंगा कि पहले गौशाला को 20 रूपये मिलते थे. हमारी सरकार ने गौशाला को 40 रूपये देकर उसको बचाने का काम किया. मैंने गौशालाओं के सफल प्रयोग मैंने देखे हैं, क्योंकि मेरी भी एक छोटी सी गौशाला है जहां पर साढ़े तीन सौ चार सौ पशुधन हैं उसमें चार पांच ही गायें ही दूध देती हैं बाकी सब ऐसी ही गायें हैं. यह बात सही है कि गौशालाएं चलाने में बड़ी ही तकलीफ है. लेकिन फिर भी हम वास्तव में पशुप्रेम करते हैं तो हमें अपना दायित्व भी निभाना चाहिये. राजेन्द्र शुक्ला जी ने 10 हजार पशुधन हैं अजय जी आप एक बार जरूर देखियेगा. इन्होंने बड़ा ही साहसिक काम किया है. 10 हजार पशुधन की इन्हौने गौशाला बनायी है.
श्री अभय मिश्रा—अध्यक्ष महोदय, फसलें बर्बाद हो रही हैं, इससे अधिक कुछ नहीं कहूंगा.
श्री कैलाश विजयवर्गीय—अध्यक्ष महोदय, हमेशा नकारात्मक बात करने से काम नहीं होगा. इस प्रदेश में बहुत ही सकारात्मक काम हो रहे हैं. यह लखन पटेल जी ने जो विषय बताया है, यह सीएनजी प्लांट लगाना, बाकी चीजें, जैसे सोलर प्लांट लगाना, इसकी ब्रीडिंग का काम, ये सारी चीजें करने के लिए दो साल का समय दिया गया है. लेकिन गौ-शालाएं, जैसे मैंने पूर्व में निवेदन किया कि हम कोशिश करेंगे कि आधे से अधिक गौ-वंश बरसात के पहले उन गौ-शालाओं में व्यवस्थित हो जाए, ताकि जितने कार्पोरेट्स जो आए हैं, उनसे हम यही कह रहे है कि सबसे पहले आप शेड बनाकर और भूसा रखने का काम शुरू कर दीजिए, बाकी काम आप बाद में कर लें. मुझे लगता है आज बहुत अच्छे से सभी लोगों ने सुझाव भी दिए हैं. जिस तरह से माननीय प्रहलाद पटेल जी ने, माननीय संसदीय कार्यमंत्री जी ने कहा और सदस्यों के भी जो प्रश्न आए हैं, निश्चित रूप से सरकार उस पर विचार कर रही है और माननीय नेता प्रतिपक्ष जी ने जो कहा है, उस विषय पर हम लोग बात करके, इसमें कुछ न कुछ निर्णय लेंगे.
उप मुख्यमंत्री(श्री राजेन्द्र शुक्ल) – माननीय अध्यक्ष जी, गौ संरक्षण और संवर्द्धन के लिए जिस प्रकार से पूरे सदस्यों ने इस विषय पर चिन्ता व्यक्त की है. यह वास्तव में उस समय कठिन काम था, जब मात्र पांच रुपए प्रति-कैटल प्रतिदिन मिलता था और फिर बीस रुपए पर-कैटल प्रतिदिन हुआ, लेकिन अब चालीस रुपए पर-कैटल, पर-डे जो मिल रहा है, उसमें आप सारे लोग अपनी अपनी विधान सभा में पांच पांच हजार बेसहारा गौवंशों को रखने की व्यवस्था बना सकते हैं, क्योंकि जैसे अभी कैलाश जी ने कहा कि एक हजार गौवंश हमारे यहां, रीवा में लक्ष्मण बाग में है. 9-10 हजार के बीच में पसामन मामा में है, हिनौतिया गौ-धाम में 25 हजार गौवशों को रखने की व्यवस्था कर रहे हैं, लेकिन अभी लखन पटेल जी ने उसी एरिया में जो 300 एकड़ है, 150 एकड़ प्रायवेट सेक्टर को दिय है, इसलिए हमको आधा ही डेवलप करना पड़ेगा. 40 रुपए में 35 रुपए है, चारा, भूसा पोषण आहार के लिए और 5 रुपए गौ-सेवकों के लिए है. इसका मतलब है कि बहुत आसानी से ये व्यवस्था बन सकती है. सुझाव देना अच्छी बात है, लेकिन सुझाव पर काम करने के लिए सभी को कमर कसकर मैदान में भी आने की आवश्यकता है, इसका दूसरा फायदा प्राकृतिक खेती का है. अभी पिछले दिनों केन्द्रीय गृहमंत्री जी को वहां पर हमने आमंत्रित किया था, वहां पर पूरी व्यवस्था उन्होंने देखी, जो मास्टर ट्रेनर थे, उनसे बात की नेचुरल फार्म में, क्योंकि कैमिकल फर्टीलाइजर से हमारी जमीनों की हेल्थ खराब हो रही है और उससे पैदा होने वाले गेहूं, अनाज और सब्जियों से जो लोग उसका उपभोग कर रहे हैं, उनकी हैल्थ खराब हो रही है. अभी हम लोग जब स्वास्थ्य विभाग में स्क्रीनिंग करवाते हैं तो डायबिटीज, बीपी, फैटी लिवर जैसी बीमारियां पहली इतनी नहीं होती थी, जितनी अब सामने आ रही है. इसका कारण यह है कि हमारी जमीन कैमीकल फर्टीलाइर से लगातर विषयुक्त हो गई है, और विषयुक्त आहार हम ले रहे हैं. गोबर और गोमूत्र, दूध देना भले ही गाय बंद कर दें, लेकिन गोबर और गोमूत्र से धरती को वह पोषण मिलता है, जिससे जमीन की हेल्थ ठीक होती है, इसलिए इससे बेहतर काम दूसरा नहीं हो सकता है. यदि हम आने वाली पीढ़ी को हेल्थी बनाना चाहते है तो, इसके लिए जो विषय उठा है, जिसमें सभी लोगों ने जिस प्रकार की चिंता की है, चिन्ता करना भी जरूरी है और उस दिशा पर कदम बढ़ाने की भी जरूरत है.
अध्यक्ष महोदय – श्री हेमन्त कटारे जी.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे – अध्यक्ष जी, मेरी चिन्ता यह है कि जब आवारा कुत्तों पर चर्चा होती तो 47 मिनट यह सदन दे सकता है. जब हमारी मां समान गौ-माता का विषय है, हमारे किसानों का विषय है तो इस सदन को क्यों जल्दी है. मैं तो कहता हूं कि इसमें पूरा दिन चर्चा क्यों नहीं हो सकती.
अध्यक्ष महोदय – आप सुझाव तो दो.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे – आप तो एक समय तय कर दीजिएगा. मैं अपना सुझाव इसमें देना चाहूंगा. कोई आरोप प्रत्यारोप नहीं क्योंकि प्रहलाद पटेल जी ने जो बातें कही और मैंने सबकी बात सुनी और वास्तविकता में, भिण्ड जिले के किसानों के लिए, आज की तारीख में सबसे बड़ा यदि कोई विषय या समस्या है तो वह यही है कि निराश्रित पशुओं के द्वारा, या फिर आवारा पशुओं के द्वारा, या गौमाता के द्वारा जो फसलें नष्ट हो रही है निरंतर, किसान खून के आंसू रो रहा है. आपके मुरैना, मेरे भिण्ड और पूरे प्रदेश में यही स्थिति है. बात यह आती है कि किसान इससे बचने के लिए क्या करता है, अपने खेत की बाऊंड्रीज सुरक्षित करता है, उसमें तार लगाता है और तार फेंसिंग में वह करंट छोड़ देता है, करंट छोड़ने के बाद इसमें गौ हत्या हो रही है, जाने या अनजाने में. दूसरी चीज, कई बार कोई बच्चा या कोई बड़ा भी उस तार की चपेट में आ जाता है, ऐसे कई प्रकरण आपके भी संज्ञान में होंगे और उसमें कई लोगों की अनचाहे जान चली गई, ऐसी घटनाएं घटित हुई हैं. और यह भिण्ड जिले की सबसे बड़ी समस्या है, मैं तो इसमें आपसे हाथ जोड़कर विनम्र प्रार्थना करता हूं कि ऐसी व्यवस्था इसमें दी जानी चाहिए कि किसान जब आपकी इस व्यवस्था को सुने, तो वह जीवन पर्यंत इस बात को याद करें. दूसरी बात जो माननीय मंत्री जी ने कही थी कि दुबई और ऑस्ट्रेलिया की कंपनीज यहां आकर गौ-सेवा करेगी तो नहीं अध्यक्ष महोदय मुझे शंका है कि दुबई और आस्ट्रेलिया की जो कंपनीज आयेंगी, वह गौमांस की दृष्टि से आयेगी, गौ सेवा जो भारतीय कर सकता है, वह दुबई और आस्ट्रेलिया का व्यक्ति यहां आकर नहीं कर सकता है, वह आयेंगे और गौमास बेचेंगे. मैं आपको फिर बोल रहा हूं और मैं आरोप नहीं लगा रहा हूं और जो भोपाल में हो रहा है, मैं आरोप नहीं लगा रहा हूं लेकिन आप इस बात पर चिंता करना कि क्या आस्ट्रेलिया का वह अग्रेंज यहां आकर गौ-सेवा करेगा? नहीं करेगा, कतई भी नहीं करेगा.
अध्यक्ष्ा महोदय, दूसरी चीज जो हमारे नेताप्रतिपक्ष जी ने सुझाव दिया है, श्री उमंग सिंघार जी ने कहा है, यह बहुत बढि़या सुझाव है यदि आपको नहीं समझ आया हो तो मुझसे समझ लीजियेगा, मैं और भईया आपको बैठकर विस्तार से समझायेंगे. अध्यक्ष महोदय, जी.पी.एस. ट्रेकिंग, अगर हर आवारा पशु गौ-माता के ऊपर जी.पी.एस. ट्रेकर लगा दिया जाये, तो थोड़ा सा खर्चा जरूर हो सकता है, लेकिन इतनी व्यवस्थित और इतने अच्छे से इस समस्या का निपटारा किया जा सकता है कि आने वाले समय में शायद इस समस्या का निदान हो जाये, तो मेरी हाथ जोड़कर यही प्रार्थना है कि इस विषय पर हमारे श्री प्रहलाद पटेल जो हमारे भिण्ड जिले के प्रभारी मंत्री भी हैं, उन्होंने बड़ी गंभीरता से बात कही है यदि उन तक मेरी बात पहुंचेगी या मैं उनसे अकेले में बात करूंगा कि वास्तविकता में इस समस्या से निदान करना है और आदरणीय मुख्यमंत्री जी को आपने अंत में बोलने का समय दिया था, लेकिन वह चले गये हैं. किसानों का, गौ का विषय है सिर्फ कैबिनेट में बात नहीं होगी, माननीय मुख्यमंत्री जी, को उपस्थित होकर व्यवस्था देना चाहिए और इसके लिये चर्चा का समय दिया जाना चाहिए. आपने बोलने का समय दिया है, उसके लिये आपका बहुत बहुत धन्यवाद.
संसदीय कार्यमंत्री( श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्यक्ष महोदय, मेरी एक आपत्ति है. माननीय सदस्य अब वरिष्ठ हो गये हैं, इन्होंने कहा कि कुत्तों के लिये आप समय दे देते हैं, गाय के लिये समय नहीं देते हैं. साधारणतया ध्यानाकर्षण में यह परंपरा रही है कि अगर कोई सदस्य ध्यानाकर्षण लगाता है, तो वह सदस्य दो प्रश्न पूछ सकता है. अध्यक्ष महोदय, आपने उस परंपरा को तोड़कर कितने सारे लोगों को मौका दिया है, उसके बाद यह एप्रिसिएट नहीं कर रहे हैं और उस पर भी आपको कठघरे में खड़ा कर रहे हैं, इस प्रकार आसंदी को कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं है और मुझे इस बात का बहुत अफसोस है, क्योंकि ध्यानाकर्षण में साधारणतया परंपरा यही रही है और आप आसंदी को इस प्रकार से कठघरे में खड़ा करेंगे.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- हम इतने समय से देख रहे हैं कि संसदीय कार्यमंत्री जी आप ऐसी कोई बात बोलते हैं, जिससे सदन भटक जाता है. आप सदन को भटकाने वाली बात करते हैं. आसंदी का कहां अपमान हुआ है, क्या बोल दिया है, बोला क्या है?
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- आसंदी को कठघरे में खड़ा करने का अधिकार किसी को भी नहीं है.
नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) -- अध्यक्ष महोदय, मेरा दल, मेरे विधायक पूरा आपका सम्मान करते हैं, यह बार-बार विषय को भटकाने का काम यहां पर चलता है (मेजों की थपथपाहट) मैं समझता हूं कि गौवंश को लेकर गौ की बात हो रही है, तो उसी पर होना चाहिए, हम आपका सदैव सम्मान करते हैं, मैं समझता हूं कि संसदीय कार्यमंत्री स्वयं इस प्रकार से आप ही पर आरोप लगा रहे हैं, हम तो आरोप लगा ही नहीं रहे है. आसंदी को पता है, यह बोल रहे हैं, हम तो बोल ही नहीं रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय -- (अनेक माननीय सदस्यों द्वारा अपने आसन से कहने पर) अब विषय कृपया समाप्त हो गया है. मैं समझता हूं कि श्री अजय सिंह जी का जो ध्यानाकर्षण था, वह निश्चित रूप से गंभीर प्रकृति का था. सब जगह इस प्रकार की समस्याओं का सामना सभी को करना पड़ता है. विशेष रूप से किसानों को और रास्ते में जब अवरोध पैदा होता है, तो भी समस्या उत्पन्न होती है, समस्या की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए ही मैंने अनेक लोगों को अवसर दिया है (मेजों की थपथपाहट) उन्होंने अपने सुझाव भी दिये और समस्या भी बताई और जो लोग गौ-सेवा की दृष्टि से प्रयोग कर रहे हैं, उन्होंने अपने अनुभव इस समय पटल पर रखे हैं. माननीय मंत्री जी ने भी सरकार की जो योजनाएं हैं, उनका उत्तर दिया है. मैं समझता हूं कि गौ-सेवा का विषय है, गौ संवर्धन का जो विषय है, यह विषय किसी एक पक्ष का नहीं हो सकता है, क्योंकि आज अगर गौ सड़क पर है, तो उसके लिये क्या गौ दोषी है? इस पर भी विचार होना चाहिए. यह समस्या मानव जनित है, मतलब समस्या का जनक कौन है, इस पर भी विचार होना चाहिए और इसलिए समस्या की तह तक हमें जाना चाहिए, सरकार लगातार इस दृष्टि से प्रयत्न कर रही है. मुझे भी ध्यान है वर्ष 2004 से सरकारी गौ शालाओं का मैं भी किसी न किसी रूप में साक्षी रहा हूं और अभी भी सरकार ने बताया, मंत्री जी ने बताया कि वह प्रोफेशनल गौ-शालाएं प्रारंभ कर रहे हैं, क्या है कि यह इतना व्यापक विषय है कि यह दो तरीके से चल सकता है एक तो गौशाला प्रोफेशनल बन जाये, मतलब गौशाला से आय होने लगे और दूसरा गायों का संरक्षण होता रहे या फिर सेवा उसमें इतनी ज्यादा हो कि सेवा के माध्यम से श्रृद्धा के माध्यम से गौशाला की आय हो और उसमें गौ का संवर्धन हो, तो मुझे लगता है कि सेवा की दृष्टि से भी अनेक प्रकल्प चल रहे हैं. पिछले दिनों मुझे ध्यान है कई वर्ष पहले जब शिवराज जी मुख्यमंत्री थे तो देश का पहला गौ अभ्यारण्य शाजापुर में बनाया था, लगभग ढाई सौ, 300 हेक्टेयर में और यहां भी हुआ, उसके बाद बहुत से प्रकल्प शुरू हुये हैं, लेकिन यह सही है कि निश्चित रूप से अभी भी इस मामले में काम करना काफी शेष है और मुझे लगता है कि सरकार को भी और सरकार के साथ हम सब लोगों को समन्वय बनाकर इस समस्या की तह तक भी पहुंचना चाहिये और इसके निराकरण की दृष्टि से गंभीरतम प्रयास करना चाहिये. आप सबने अच्छे सुझाव दिये, इसके लिये मैं आप सबको धन्यवाद देता हूं. डॉ. अभिलाष पाण्डेय जी, अपना ध्यानाकर्षण पढ़ें.
श्री लखन पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो बात कही है कि आस्ट्रेलिया, और वह गौमांस के लिये आये होंगे, मैं उनको बताना चाहता हूं...
अध्यक्ष महोदय-- लखन जी, मैंने स्पष्ट कर दिया है कि प्रोफेशनल होना चाहिये.
श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष जी, इस पर सरकार चर्चा क्यों नहीं कराना चाह रही, हम तो दिन भर चर्चा कराने को तैयार हैं. कई मुद्दे हैं, गौमाता की हत्या हो रही है, उसके बारे में सरकार नहीं सोच रही है. गौमास कटकर बाहर जा रहा है, उसके बारे में सरकार बात नहीं कर रही है.
अध्यक्ष महोदय-- गौशाला को प्रोफेशनल बनाना यह अत्यंत आवश्यक है, इसके लिये प्रयोग किया जाना चाहिये. आपने जो प्रयोग किया है वह ठीक दिशा में आप आगे बढ़ रहे हैं. अगर कोई समस्या आयेगी तो उससे भी सरकार कढ़ाई से निपटेगी, ऐसा हम कह सकते हैं.
12.47 बजे
(2) प्रदेश में बढ़ती हुई आगजनी की घटनाओं पर अंकुश लगाने हेतु फायर सेफ्टी कानून एवं नियमित ऑडिट की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं किया जाना.
डॉ. अभिलाष पाण्डेय (जबलपुर उत्तर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

डॉ.अभिलाष पाण्डेय - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो जवाब दिया है निश्चित तौर पर मुझे जो जवाब प्राप्त हुआ है मैं मंत्री जी का ध्यान एक विषय पर आकृष्ट करना चाहता हूं कि अभी निरंतर आगजनी की घटनाएं बढ़ रही हैं जब आगजनी होती है तब आग सिर्फ घर और प्रतिष्ठानों को नहीं जलाती है वह विश्वास सपने और इंसानियत को भी राख कर देती है. मेरे अपने खुद के उत्तर-मध्य विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत ऐसे व्यापारिक केंद्र संभाग का सबसे बड़ है उसमें फुहारा,विजय नगर,सुपर मार्केट,नरघैया,लाडगंज,सराफा,गंजीपुरा,कछियाना,मुकादमगंज और निवाड़गंज ऐसी जगह हैं जहां फायर ब्रिगेड तो छोड़िये कार तक जाना संभव नहीं है मुझे लगता है कि कई ऐसे सदस्य होंगे. मैं मंत्री जी से यह आग्रह करता हूं कि जिस तरह से फायर सेफ्टी कानून की बात की जाती है और आजकल आधुनिक तरीके से फायर सेफ्टी कानून की व्यवस्थाएं पूरे विश्व में अलग-अलग जगह हैं जैसे फायर रेटा डेंट सामग्री,पेंसिल फायर प्रोटेक्शन,स्मोक मेनेजमेंट क्लीन ऐजेंट सिस्टम जिस तरह से हमारे क्षेत्र में अभी जितनी आगजनी की घटनाएं हुई हैं उन आगजनी की घटनाओं में जो मुआवजा मिलता है वह इतना कम होता है जिसमें लोगों को करोड़ों का नुकसान होता है लेकिन हजारों,लाखों में, माननीय मुख्यमंत्री जी की सहृदयता है और माननीय मंत्री जी के माध्यम से भी वह चीजें मिलती हैं लेकिन आपके जवाब में जो बात कही गई है कि भविष्य में हम फायर सेफ्टी एक्ट कानून हम लेकर आयेंगे. फायर सेफ्टी कानून अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग समय बना है लेटेस्ट अवधि पर बना है हमारे मध्यप्रदेश के अंदर कब तक फायर सेफ्टी एक्ट और अनिवार्यता से फायर आडिट जो बिल्डिंग,स्कूल,या नये मकानों,प्रतिष्ठानों के अंदर हो जायेगा मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करता हूं कि कुछ समय-सीमा निर्धारित करिये कि हम फायर सेफ्टी एक्ट लाकर मध्यप्रदेश में नये कानून का प्रावधान करेंगे.
श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष महोदय, अभी तीन महिने पहले ही विभाग की संबंधित बैठक ली थी और हमने देखा कि नगर निगम जो 74 वें संविधान संशोधन में नगर पालिका और नगर निगम को यह अधिकार दिये हैं और तकनीकी रूप से यह सक्षम नहीं हैं इसीलिये होम अफेयर मिनिस्ट्री के द्वारा जो माडल फायर एक्ट आया है उसके माध्यम से ही उसके मार्गदर्शन में ही मध्यप्रदेश का भी फायर एक्ट बना रहे हैं और अभी वह प्रक्रियाधीन है और मुझे लगता है कि दो-तीन महिने में एक्ट बनकर हम जन सुविधा के लिये और इसकी जवाबदारी सुनिश्चित करने के लिये क्योंकि यह बहुत जरूरी है यह बात सही है कि जो 74वें अमेंडमेंड के अंदर नगर पालिका और नगर निगम को अधिकार दिये हैं. वे तकनीकी रूप से उतने सक्षम नहीं हैं. अभिलाष जी ने बड़ा अच्छा विषय उठाया है, जिसके कारण लोगों का नुकसान जरूर होता है. पर हम इसके लिए बहुत अच्छा कानून बनाएंगे. बाकी राज्यों के कानून का भी हम अध्ययन कर रहे हैं और केन्द्र सरकार के मॉडल फायर एक्ट का भी हम अध्ययन कर रहे हैं. एक अच्छा एक्ट बने, इसके ऊपर हमारे विभाग की टीम लगी हुई है. मुझे लगता है कि तीन महीने के अंदर यह एक्ट आ जाना चाहिए.
अध्यक्ष महोदय -- अभिलाष जी, एक प्रश्न और करें. सिर्फ प्रश्न ही करना है.
डॉ. अभिलाष पाण्डेय -- जी हां. माननीय अध्यक्ष जी, यह बहुत महत्वपूर्ण विषय है और आपके सरंक्षण की आवश्यकता भी है. मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देता हूँ. जिस तरह से यह बात कही जाती है कि जो मध्यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की डॉ. मोहन यादव की सरकार है, कहीं न कहीं जनता के प्रति जिस तरह के आप जो निर्णय करते हैं, माननीय मंत्री जी उसके लिए भी मैं आपका आभार व्यक्त करता हूँ कि तीन महीने के अंदर जनता को लाभ होगा.
माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मेरा एक निवेदन माननीय मंत्री से और है कि इस समय मध्यप्रदेश के अंदर लगातार विकास हो रहा है. मध्यप्रदेश के जो नगरीय क्षेत्र हैं, उनमें लगातार कालोनियों का विकास हो रहा है. जैसे मेरे खुद के क्षेत्र में विजयनगर, माढ़ोताल ऐसी अलग-अलग जगह विकास की बातें हो रही हैं. लेकिन मैं आपसे कहना चाहता हूँ, जब तक कानून आता है, उससे पहले एक निवेदन करना चाहूँगा कि अभी भी हमारा जो फायर स्टेशन है, वह कहीं न कहीं शहर के सेन्टर में है. एक स्थान से शहर के दूसरे कोने तक पहुँचने में लगभग आधे घण्टे का भी समय लगता है. कहीं 15 मिनट का समय लगता है और कहीं 20 मिनट का भी समय लगता है. मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से यह आग्रह करना चाहता हूँ कि जहां पर भी इस प्रकार की स्थिति बनती है, क्या नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग उन क्षेत्रों के परिसीमन के हिसाब से कुछ ऐसा सिस्टम बनाएगा कि शहर के उन दूरस्थ क्षेत्रों के अंदर भी कहीं न कहीं फायर स्टेशन आ जाए, जिसके कारण वहां पर पहुँचने में देरी होती है ?
अध्यक्ष महोदय -- अभिलाष जी, आपका प्रश्न आ गया.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, बड़ा अच्छा प्रश्न पूछा है. हम पिछली बार जब इस संबंध में चर्चा करने के लिए बैठे थे, तो हमने इस पर प्लानिंग की है कि कहीं पर भी आग लगे, जैसे ही फोन आए, उसके बाद पांच से सात मिनट और अधिकतम दस मिनट में हमारी गाड़ी पहुँच जाना चाहिए. इतनी दूर हमें फायर स्टेशन बनाना चाहिए. किसी शहर में दो फायर स्टेशन लगेंगे. किसी शहर में तीन लगेंगे. किसी शहर में पांच लगेंगे. इसकी सबकी प्लानिंग चल रही है. अभी हम जो फायर एक्ट बना रहे हैं, तो वहां पर कंस्ट्रक्शन भी करना पड़ेगा कि जहां पर फायर स्टेशन बना रहे हैं, वहां पर पार्किंग की जगह हो, जमीन की जरूरत पड़ेगी तो हमें कलेक्टर से जमीन लेनी पड़ेगी. मैं एकदम यह कह दूँ कि यह काम तीन महीने में हो जाएगा, यह नहीं हो सकता है. तीन महीने में एक्ट बन जाएगा, पर एक्ट बनने के बाद इसके इन्फ्रास्ट्रक्चर बनने में लगभग एक साल हमको लगेगा क्योंकि हमें जमीन लेकर वहां पर इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना पड़ेगा. हम एक्ट तो तीन महीने में बना देंगे और हमारी सोच में यह बात बिल्कुल है कि कहीं पर भी आग लगे, तीन से दस मिनट के अंदर गाड़ी पहुँच जाना चाहिए. हमें इतने फायर स्टेशन बनाने पड़ेंगे. उसके लिए कहां, कितने फायर स्टेशन की आवश्यकता है, उसकी हम नगर पालिका और नगर निगमों से, सबसे जानकारी ले रहे हैं और एक अच्छा तथा सर्वश्रेष्ठ फायर सिस्टम हमारे प्रदेश के अंदर हो, इसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय -- नियम 169 के अंतर्गत सदन को सूचना.

12.58 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति
अध्यक्ष महोदय -- आज की कार्यसूची में क्रमांक (1) से लेकर (85) तक उल्लिखित याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जाएंगी.
12.59 बजे वक्तव्य
(1) श्रीमती कृष्णा गौर, राज्यमंत्री, स्वतंत्र प्रभार, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण का दिनांक 2 दिसम्बर, 2025 को पूछे गये परिवर्तित अतारांकित प्रश्न संख्या 96 (क्रमांक 862) के उत्तर में संशोधन करने के संबंध में वक्तव्य
अध्यक्ष महोदय -- श्रीमती कृष्णा गौर, राज्यमंत्री, स्वतंत्र प्रभार, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण (अधिकृत-सामान्य प्रशासन विभाग) दिनांक 2 दिसम्बर, 2025 को पूछे गये परिवर्तित अतारांकित प्रश्न संख्या 96 (क्रमांक 862) के उत्तर में संशोधन करने के संबंध में वक्तव्य देंगी.
राज्य मंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण (श्रीमती कृष्णा गौर) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, दिनांक 02.12.2025 की प्रश्नोत्तर सूची में पृष्ठ क्रमांक 83 में मुद्रित परिवर्तित अतारांकित प्रश्न संख्या 96 (क्रमांक 862) में, मैं निम्नानुसार संशोधन करना चाहती हूँ :-
प्रश्नोत्तर सूची में मुद्रित उत्तर के भाग (क) जी हां. जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट क्र. 01 अनुसार है.
के स्थान पर कृपया निम्नानुसार संशोधित उत्तर पढ़ा जाए :-
(क) जी हां. जानकारी पुस्तकालय में रखे संशोधित परिशिष्ट क्र. 01 अनुसार है.
(2) दिनांक 1 अगस्त, 2025 को पूछे गये परिवर्तित अतारांकित प्रश्न संख्या 122
(क्रमांक 1996) के उत्तर में संशोधन करने के संबंध में श्री दिलीप अहिरवार,
राज्यमंत्री वन, पर्यावरण का वक्तव्य.
अध्यक्ष महोदय - अब, श्री दिलीप अहिरवार, राज्य मंत्री, वन, पर्यावरण विभाग दिनांक 01 अगस्त, 2025 को पूछे गये परि. अतारांकित प्रश्न संख्या 122 (क्रमांक 1996) के उत्तर में संशोधन करने के संबंध में वक्तव्य देंगे.

1.01 बजे
अध्यक्षीय व्यवस्था
भोजन अवकाश नहीं होने एवं माननीय सदस्यों हेतु भोजन की व्यवस्था सदन की लॉबी में किए जाने विषयक
अध्यक्ष महोदय - आज भोजन अवकाश नहीं होगा. भोजन की व्यवस्था में लॉबी में उपलब्ध है. सदस्य अपनी सुविधानुसार ग्रहण कर सकते हैं. अब अनुदान की मांगों के बारे में प्रस्ताव आयेगा.
1.02 बजे
वर्ष 2026-2027 की अनुदानों की मांगों पर मतदान .....(क्रमश:)
(1) मांग संख्या - 24 लोक निर्माण कार्य
श्री राकेश सिंह - धन्यवाद, अध्यक्ष महोदय. मैं, राज्यपाल महोदय की सिफारिश के अनुसार प्रस्ताव करता हूँ कि 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने वाले वर्ष में राज्य की संचित निधि में से प्रस्तावित व्यय के निमित्त राज्यपाल महोदय को --
अनुदान संख्या - 024 लोक निर्माण कार्य के लिए बारह हजार दो सौ इक्यावन करोड़, चौवन लाख, तेरह हजार रुपये
तक की राशि दी जाय.
अध्यक्ष महोदय :- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.
अध्यक्ष महोदय - अब इन मांग पर कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत होंगे. कटौती प्रस्तावों की सूची पृथकत: वितरित की जा चुकी है. प्रस्तावक सदस्य का नाम पुकारे जाने पर जो माननीय सदस्य हाथ उठाकर कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाने हेतु सहमति देंगे, उनके ही कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए माने जायेंगे.
मांग संख्या - 024 लोक निर्माण कार्य
क्रमांक
श्री राजन मण्डलोई 01
श्री उमंग सिंघार 02
श्री यादवेन्द्र सिंह 03
सुश्री राम श्री राजपूत (बहन रामसिया भारती) 06
श्री पंकज उपाध्याय 07
श्री नारायण सिंह पट्टा 08
श्री ऋषि अग्रवाल 11
श्री कैलाश कुशवाह 12
डॉ. हिरालाल अलावा 14
श्री अभय मिश्रा 15
श्री विवेक (विक्की) पटेल 17
श्रीमती झूमा डॉ. ध्यानसिंह सोलंकी 18
श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर 20
श्री नारायण सिंह पट्टा 22
श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव 26
श्री लखन घनघोरिया 27
उपस्थित सदस्यों के कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए.
अब मांग और कटौती प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा होगी.
श्री रामेश्वर शर्मा (हुजूर) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 24 के समर्थन में यहां पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ. माननीय अध्यक्ष महोदय, आप और हम सब यह जानते हैं कि एक विकसित राष्ट्र या विकसित राज्य की कल्पना बिना अधोसंरचना के बिना संभव नहीं है और आज हम यह कह सकते हैं कि भारत सरकार आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व एवं मध्यप्रदेश सरकार डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में निरन्तर विकास की अधोसंरचना पर ध्यान दे रही है. जब हम एक विकसित राष्ट्र तथा किसी विकसित राज्य की कल्पना करते हैं, तो हमारे मानस पटल पर सबसे पहले अधोसंरचना की तस्वीर उभरकर सामने आती है, उसमें आज हमारा मध्यप्रदेश अग्रणी प्रदेश है. चाहे एक्सप्रेसवे हो, हाईस्पीड कॉरिडोर हो, चाहे एलिवेटेड मार्ग हों, चाहे सुदृढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग हों, इन सबको सुव्यवस्थित करने के लिए हमारी सरकार लगातार काम कर रही है. केवल निर्माण पर नहीं बल्कि आर्थिक समृद्धि पर भी हमारी सरकार ने, लोक निर्माण विभाग ने, इस दिशा में काम किया है. मैं, मंत्री राकेश सिंह जी को धन्यवाद दूंगा कि जो हमारे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री जी की कल्पना है, वर्ष 2047 की, उसे ध्यान में रखते हुए, मध्यप्रदेश ने भी कई विकसित योजनाओं की दृष्टि पर काम करना शुरू किया है. हमारी सरकार ने प्रदेश के समग्र विकास के लिए जो वादे किए हैं, उन्हें पूरा करने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं, हमारी सरकार के संकल्प-पत्र में, प्रदेश में 6 विकास-पथ बनाने का संकल्प लिया था.
01.06 बजे
{ सभापति महोदय (श्री लखन घनघोरिया) पीठासीन हुए.}
सभापति महोदय, इन सभी प्रगति पथों पर निर्माण की कार्रवाई प्रांरभ हो चुकी है. विकास के ये पथ न केवल प्रदेश के सुदूर क्षेत्रों को आपस में जोड़ेंगे बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी प्रदेश को विकास की गति प्रदान करेंगे. हमारे संकल्प-पत्र में हम सभी ने सड़कों की निर्माण एजेंसियों के सहयोग से 1 लाख किलोमीटर सड़कें, 500 फ्लाईओवर एवं रेल ओवरब्रिज बनाने का जो संकल्प लिया है, इन सभी की कार्य योजना तैयार है और निर्माण कार्य जारी है. हमारे संकल्प-पत्र में हमने भोपाल-इंदौर जबलपुर-ग्वालियर-उज्जैन शहरों में रिंग-रोड बनाने का संकल्प लिया है, आपको जानकार खुशी होगी, इन सभी रिंग रोड के निर्माण कार्य की प्रक्रिया जारी है.
(मेजों की थपथपाहट)
सभापति महोदय, इन रिंग-रोडों के निर्माण के माध्यम से, शहरों में यातायात का दबाव कम होगा और भारी वाहन शहर में प्रवेश नहीं करेंगे, जिससे शहरी यातायात सुगम होगा, दुर्घटनाओं में कमी होगी. हमारे संकल्प-पत्र में हमने संकल्प लिया है कि प्रदेश के सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को अपग्रेड करेंगे. प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई 9 हजार 3 सौ 15 किलोमीटर है, जिसमें लगभग 4 हजार 7 सौ 40 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों को फोरलेन बनाया जा चुका है, यह प्रदेश के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि का विषय है. (मेजों की थपथपाहट)
सभापति महोदय, शेष 4 हजार 5 सौ 75 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों में से 3 हजार 50 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों को फोरलेन में अपग्रेड करने की योजना विभाग ने, मंत्री जी और उनकी पूरी टीम ने तैयार की है, इसके लिए मंत्री जी को ह्दय से धन्यवाद देता हूं. इनमें अनेक निर्माण कार्य जारी हो चुके हैं. मुझे गर्व है कि संकल्प-पत्र में किए गए वादों को धरातल पर देखने के लिए प्रदेश की जनता ने हमें 5 वर्ष का समय दिया था, उससे पहले मध्यप्रदेश की सरकार ने, मंत्री जी, मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में इस काम को प्रारंभ कर दिया गया है. प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारी डबल इंजन की सरकार, स्पष्ट रूप से विकास कार्यों को तेज गति देकर, विकसित मध्यप्रदेश को दुनिया के नक्शे पर चमकाने की दृष्टि से प्रयत्न कर रही है. विभाग की वृह्द अधोसंरचना परियोजना में प्रमुख एक्सप्रेस-वे एवं विकास पथ कुल लागत रुपये 1 लाख 25 करोड़ से अधिक है, ये परियोजनायें जिनकी लागत के कार्य अभी तक प्रदेश में सोचे नहीं जा सकते थे, वे चालू हैं.
सभापति महोदय, अटल पथ, हम जब चंबल की बात करते हैं, चंबल में विकास की बात होती है तो चंबल के बीहड़ों की चर्चा हो जाती है लेकिन जब ये अटल पथ बनकर वहां तैयार होगा, तो वहां की रेतीली धरती पर भी विकास की नई फसलें लहलहायेंगी, वहां भी विकास की गाथायें दोहरायी जायेंगी, वहां भी औद्योगिक क्षेत्र का कॉरिडोर बनेगा, चंबल की तस्वीर उभरकर देश के नक्शे पर आयेगी.
(मेजों की थपथपाहट)
सभापति महोदय, इसमें रुपये 12 हजार 2 सौ 27 करोड़ की लागत है. जिससे 299 किलोमीटर सड़क बनेगी. नर्मदा मां की हम सभी जय-जयकार करते हैं, नर्मदा मां प्रदेश की जीवनधारा है. परंतु इसके समानांतर भी हमारी सरकार ने एक नर्मदा पथ का विकास करने का अध्याय लिखने का कार्य शुरू किया है, बड़ी महत्वाकांक्षी योजना है, रुपये 5 हजार 2 सौ 99 करोड़ खर्च होगा, 876 किलामीटर लंबा एक कॉरिडोर होगा और इसके बनने से नर्मदा मैया के दर्शन होंगे लेकिन यातायात सुगम होगा, साथ ही वहां के सभी गांव-शहरों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा.
सभापति महोदय, विंध्य की बात होती है लेकिन मैं मुख्यमंत्री जी और मंत्री जी को बधाई देता हूं कि विंध्य क्षेत्र के विकास के लिए सीधी से भोपाल को जोड़ने के लिए एक नई इबारत रचने वाला एक्सप्रेस-वे लागत रुपये 3 हजार 8 सौ 9 करोड़, जोरदार ताली बजायें ज़रा विंध्य के लिए. (मेजों की थपथपाहट)
इसकी जो लंबाई है वह 666 किलोमीटर है. मालवा में भी इंदौर, उज्जैन औद्योगिक गलियारे के रूप में विकसित किया जा रहा है. इसमें 7 हजार 972 करोड़ रुपए खर्च किये जा रहे हैं और इसकी लंबाई 450 किलोमीटर है. मध्य भारत जहां हम बैठे हैं. यहां पर राजधानी भोपाल से उत्तर में जो ग्वालियर है, दक्षिण में जो बैतूल है. ग्वालियर से बैतूल को सीधा जोड़ने के लिए एक केन्द्रीय मार्ग तैयार हो रहा है जिसकी लागत 3 हजार 819 करोड़ रुपए है और लंबाई 746 किलोमीटर है.
सभापति महोदय, इंदौर, भोपाल ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे, दो महानगरों के बीच में अभी तक हम जाते थे. मैं पुरानी सरकार के समय का उल्लेख करना नहीं करना चाहूंगा. उस समय में हम इंदौर जाते थे तो इंदौर जाने में पांच घंटे लगते थे. आज की तारीख में लगभग सवा दो, ढाई घंटे लगते हैं, लेकिन माननीय मंत्री राकेश सिंह जी जो योजना लेकर आए हैं इससे मात्र डेढ़ घंटा ही लगेगा. इंदौर से भोपाल की दूरी भी कम होगी और विकास को भी नई गति मिलेगी.
सभापति महोदय, जबलपुर के राकेश सिंह जी भी हैं और आप भी हैं. जबलपुर को भी माननीय राकेश सिंह जी ने नहीं छोड़ा है. महाकौशल और मालवा को एक साथ एक सूत्र में पिरोना वाला एक मेगा प्रोजेक्ट तैयार किया है. जो 7 हजार 650 करोड़ रुपए का है और इसकी लंबाई 2555 किलोमीटर है. यह विकास है. ग्वालियर, नागपुर ग्रीन फील्ड कॉरिडोर यह भी है. उत्तर से दक्षिण भारत को जोड़ने वाला रणनीतिक महामार्ग है. इसमें 40 हजार करोड़ रुपए का खर्च है और लंबाई है 569 किलोमीटर है. भोपाल, मंदसौर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे.
श्री अभय मिश्रा-- सभापति महोदय, जो स्टेट बजट में छपा है उस पर चर्चा करें. इसकी बातें तो वहां केन्द्रीय बजट में, दिल्ली में हो गईं हैं. उसको यहां क्यों कर रहे हैं.
लाक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह)-- यह इंफ्रास्ट्रक्चर टोटल सड़क, पुल, पुलियों पर होने वाली चर्चा है. उसमें वह सब भी शामिल होगा. जब डबल इंजन की सरकार की बात होती है तो सारे विषय इसमें आएंगे.
श्री रामेश्वर शर्मा-- अभय जी, राकेश जी ने आपको भी ध्यान में रखा है. यह सभी मार्ग निकलेंगे तो 10 से 12 किलोमीटर लेफ्ट, राईट से ही निकलेंगे और 10, 12 किलोमीटर में हवा सभी दूर जाएगी. विकास आपके द्वार तक भी जाएगा. यह डॉ. मोहन यादव की सरकार है. यह सभी 230 माननीय सदस्यों को एक नजर से देखती है, क्योंकि हमने सम्पूर्ण मध्य प्रदेश के विकास की बात की है.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- रामेश्वर जी आप बार-बार बधाई, धन्यवाद दे रहे हैं राकेश जी को, डॉ. मोहन यादव जी को. आपके दल में कई सीनियर लोग हैं और कभी भी मुख्यमंत्री बन सकते हैं तो आपको अगर मंत्री बनना है तो सबको धन्यवाद दिया करो. यह मेरा सुझाव है, क्योंकि आप हमारे मित्र हो.
श्री राकेश सिंह-- सभापति महोदय, हमारे यहां हर विभाग मुख्यमंत्री जी के अधीन माना जाता है और इसलिए जब विभाग की प्रशंसा और तारीफ होती है तो प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री जी और पूरी सरकार की तारीफ होती है.
श्री नारायण सिंह पट्टा-- सभापति महोदय, रामेश्वर जी का कहना है कि हमारी सरकार पूरे 230 सदस्यों को बराबर देख रही है. इसी बजट में मेरे विधान सभा क्षेत्र में एक भी सड़क को माननीय मंत्री जी ने शामिल नहीं किया है.
सभापति महोदय-- नारायण पट्टा जी, आपका नाम है. अपने नंबर पर बोल लीजिएगा.
श्री रामेश्वर शर्मा-- सभापति महोदय, ग्वालियर नागपुर ग्रीन फील्ड कॉरिडोर उत्तर भारत से दक्षिण भारत से जोड़ने वाला है जिसके बारे में मैं आपको बता चुका हूं. सागर-सतना ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे बुंदेलखंड को विकास की नई दिशा देने वाला एक्सप्रेस-वे है. 11 हजार करोड़ रुपए इसकी लागत है दूरी 222 किलोमीटर है. ग्वालियर एलीवेटेड कॉरिडोर जो शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम और सुव्यवस्थित बनाने वाला कॉरिडोर है इसकी लागत 1064 करोड़ रुपए है. रेलवे ओव्हरब्रिज परियोजना. रेलवे फाटक पर आप और हम घंटों खड़े रहते थे. मैं एक उदाहरण देना चाहता हूँ. मेरा यहां संत हिरदाराम नगर है जिसको बैरागढ़ बोलते हैं. वहां पर एक रेलवे फाटक है उस रेलवे फाटक की दूसरी ओर श्मशान घाट है. जब फाटक बंद होता था तो 5-7-10 मिनट तक शव यात्रा भी रुकी रहती थी. वहां पर भी रेलवे फाटक के ऊपर फ्लाई ओवर बनकर तैयार है. मैं भारत सरकार को, माननीय प्रधानमंत्री जी को, माननीय रेल मंत्री जी को, माननीय मुख्यमंत्री जी को, माननीय राकेश जी को बधाई देता हूँ. 111 फ्लाई ओवर 3903 करोड़ रुपए की लागत से बनाना तय किया है, मैं सरकार को बहुत बहुत हृदय से धन्यवाद देता हूँ, चाहो तो आप भी दो, न चाहो तो मत दो.
डॉ. योगेश पण्डाग्रे (आमला) -- माननीय सभापति महोदय, यह लोग भी सोशल मीडिया पर खूब धन्यवाद दे रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जी ने धन्यवाद दिया है. ओमकार जी यहां पर बैठे हैं 310 करोड़ रुपए की सड़क उनके क्षेत्र को मिली है उन्होंने भी धन्यवाद दिया है. फुन्देलाल मार्को जी को भी 3 सड़कें मिली हैं उन्होंने भी धन्यवाद दिया है. डॉ. हिरालाल अलावा जी को 5 सड़कें मिली हैं उन्होंने भी धन्यवाद दिया है. बाला बच्चन जी को भी 10-12 सड़कें मिली हैं उन्होंने भी धन्यवाद दिया है. फुन्देलाल मार्को जी मुझे बोल रहे थे कि मैं तो धन्यवाद दे नहीं सकता हूँ, 3-4 रोड उनको मिली हैं, तो कहने लगे आप ही मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद दे देना. यह वह सरकार है जिसने हरेक व्यक्ति का ध्यान रखते हुए. सर्वस्पर्शी विकास की अवधारणा के साथ कार्य करने का काम किया है, धन्यवाद.
श्री फुन्देलाल सिंह मार्को (पुष्पराजगढ़) --माननीय सभापति महोदय, लोक निर्माण मंत्री बड़े सरल हृदय के हैं. जैसा कि आपने बोला कि वे 230 विधायकों का ध्यान रखते हैं. वे जब अमरकंटक प्रवास पर गए थे और मां नर्मदा की पवित्र धरा पर माननीय मंत्री जी ने कहा था कि यह काम मैं कर दूंगा वो काम आपने किया. इसलिए मैं हृदय से आपको धन्यवाद देता हूँ.
श्री सोहनलाल बाल्मीक (परासिया) -- माननीय सभापति महोदय, प्रभारी मंत्री राकेश सिंह जी मेरे छिंदवाड़ा जिले के हैं. मैंने कई बार निवेदन किया था कि मेरे क्षेत्र की रोड दे दें मुझे एक भी रोड नहीं मिली है.
डॉ. योगेश पण्डाग्रे -- छिंदवाड़ा जिले में भी करीब 300 करोड़ रुपए के काम दिए हैं.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- माननीय सभापति महोदय, मैं मेरे विधान सभा क्षेत्र की बात कर रहा हूँ.
डॉ. योगेश पण्डाग्रे -- ठीक है कई बार मिलता है, कई बार नहीं मिलता है. जब कांग्रेस की सरकार थी तब विपक्ष के एक भी विधायक को रोड नहीं दी गई थी, लेकिन यह सरकार है जितने विपक्ष के नाम मैंने गिनाए उनको सड़कें दी हैं.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- माननीय सभापति महोदय, इनको थोड़ा बैठाइए.
श्री राकेश सिंह -- सभापति महोदय, हम बिना किसी भेदभाव के विकास की बात करते हैं और आज भी जब मैं अपने विभाग की चर्चा करूंगा तो पूरे रिफार्म्स पर करुंगा. जहां तक यह बात है तो मेरे पास पूरे आंकड़े हैं कि हमने अपने कांग्रेस के मित्रों और भाइयों के क्षेत्रों में भी बगैर किसी भेदभाव के विकास की धारा को वहां तक पहुंचाया है. हो सकता है किसी एक विधान सभा क्षेत्र में अभी न मिला हो, लेकिन पिछली बार में मिला होगा, उसके पहले मिला होगा. इसी दो वर्ष में मिला होगा. अगर कहीं कोई कमी होगी प्राथमिकता के आधार पर कुछ छूट रहा होगा तो अभी समय खत्म नहीं हुआ है. पूरा 5 साल का समय बाकी है. सप्लीमेंट्री भी हैं.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- माननीय सभापति महोदय, मैं मानता हूं कि अभी समय नहीं गया है. सप्लीमेंट्री में मेरे क्षेत्र की रोड को शामिल कर लीजिएगा.
श्री रामेश्वर शर्मा -- माननीय राकेश जी आपके जिले के प्रभारी मंत्री हैं उनसे मिलते रहिएगा.
डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय (जावरा) -- माननीय सभापति महोदय, जब सदन में इतने सारे धन्यवाद आ रहे हैं तो मैं भी धन्यवाद देने के लिए खड़ा हुआ हूँ.
श्री महेश परमार -- माननीय सभापति महोदय, रामेश्वर शर्मा जी का भाषण पढ़ा हुआ माना जाए क्योंकि सदस्य उन्हें बोलने ही नहीं दे रहे हैं.
डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय -- मैं संभाग की बात कर रहा हूँ. आप सभी जानते हैं कि पहले उज्जैन से जावरा जाने के लिए लगभग साढ़े पांच घंटे का समय लगता था. विगत वर्षों में वहां पर एक सड़क स्वीकृत हुई थी उसके कारण दो से ढाई घंटे लगने लगे थे. मैं माननीय मंत्री जी का धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ कि एक सड़क उन्होंने उज्जैन से उन्हेल-नागदा और जावरा की स्वीकृत की है यह सड़क बनने के बाद में सिर्फ एक घंटे में पहुंचा जा सकेगा, इतनी दूरी कम हो जाएगी. इसी के साथ-साथ आपने मेरे निर्वाचन क्षेत्र जावरा में माहौता से लेकर माताजी बड़वाली तक जिला मुख्यालय पहुंच मार्ग की स्वीकृति दी है उसके लिए हृदय से आपका धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ.
श्री रामेश्वर शर्मा -- सभापति महोदय, मैं तो बोल ही नहीं पा रहा हूं. पक्ष, विपक्ष के इतने लोग धन्यवाद दे रहे हैं. यही तो हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शी सोच है. यही तो डॉ. मोहन यादव जी की सोच है. वर्ष 2028 में महाकाल कुम्भ आएगा लेकिन हमारी सरकार ने जिस दिन शपथ ली थी उसी दिन से कुम्भ पर काम करना शुरू कर दिया था. आज केवल वहां हमारा मेला नहीं है बल्कि आध्यात्मिकता का महाकुम्भ है. उस महाकुम्भ की व्यापक तैयारी हमारी सरकार ने आध्यात्मिक चेतना को ध्यान में रखते हुए, सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखते हुए जो तैयारियां शुरू की हैं मैं मध्यप्रदेश की जनता की ओर से डॉ. मोहन यादव जी और प्रधानमंत्री जी को हृदय से धन्यवाद देता हूं कि हमारी सरकार ने वहां पर व्यापक तैयारियां शुरू की हैं. आज लगातार उज्जैन क्षेत्र में व्यापक काम चल रहे है. प्रदेश के तमाम सिक्स लेन और हाईवे के कई मार्ग ऐसे हैं जो हमने यातायात की दृष्टि से उज्जैन जाने वाले महाकाल के दर्शन को कुम्भ में जाने वाले लोगों को उन मार्गों से सुगमता से जोड़ने का काम किया है. उज्जैन-जावरा एक्सप्रेस जिसके बारे में मुझे लगता है कि अभी श्री राजेन्द्र जी ने यह बात कह दी है कि 5,017 करोड़ रुपये का यह मार्ग है. जरा जोरदार ताली बजाइये. भैया महेश जी, इन्दौर-उज्जैन फोरलेन मार्ग, सिक्सलेन मार्ग 1692 करोड़ रुपये से उन्नयन किये जा रहे हैं. जय श्रीराम, जय महाकाल जरा बोलते रहिये. यह लगातार जो क्षेत्र में विकास हो रहा है यह विकास इस दृष्टि से नहीं हो रहा है कि वहां भाजपा का आदमी रह रहा है, यह इस दृष्टि से हो रहा है कि मध्यप्रदेश की 8 करोड़, 50 लाख आबादी को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार ने प्लान किया है. हमारी सरकार विकास कर रही है.
सभापति महोदय -- रामेश्वर जी, जल्दी समाप्त करें.
श्री रामेश्वर शर्मा -- सभापति महोदय, अभी तो शुरू किया है और यह 2-2 मिनट अन्य सदस्यों ने लिए हैं वह भी तो मुझे दीजिए. माननीय राकेश जी ने काम ही इतने दिए हैं.
सभापति महोदय -- ज्यादातर तो आपके दल के लोग बोल गए हैं आपके समर्थन में. जल्दी समाप्त करें.
श्री रामेश्वर शर्मा -- सभापति महोदय, आप उधर भी तो देखिये टोंकने से चूक ही नहीं रहे जब राजेन्द्र सिंह जी की कहानी शुरू होती है. नवीन इन्दौर-उज्जैन ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे लगभग 2,935 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित किया जा रहा है. आधुनिक मानकों वाला यह मार्ग है जो यातायात समय में उल्लेखनीय कमी लाएगा. सिंहस्थ के दौरान भीड़ प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. इस परियोजना से सिंहस्थ के समय भारी वाहनों के डायवर्सन और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी यह मार्ग बहुत महत्वपूर्ण है. इस मार्ग में उज्जैन-इन्दौर मालवा क्षेत्र में स्थाई रूप से हाई स्पीड, सुरक्षित और विश्वस्तरीय क्वालिटी प्रदान की जा रही है. राष्ट्रीय राजमार्ग के ऐतिहासिक निवेश के लिए एनएच के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का जो एमओयू मध्यप्रदेश सरकार ने भारत सरकार से किया है मैं उसके लिए माननीय मंत्री जी को हृदय से बधाई देता हूं. मैं राष्ट्रीय राजमार्ग क्षेत्र में जो प्रदेश के ऐतिहासिक निवेश किये जा रहे हैं उनके बारे में थोड़ी बताना चाहता हूं. इसके अंतर्गत् 998 किलोमीटर लंबाई के 55 राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण कार्य कराया जा रहा है जिसकी कुल लागत 14,918 करोड़ रुपये है. यह मार्ग प्रदेश की आर्थिक गतिविधि और औद्योगिक विकास में अहम भूमिका निभाएंगे. नागरिकों की सुविधा को भी सशक्त बनाने में सहायक होंगे. एनएचए के साथ जो 1 लाख करोड़ रुपये का एमओयू साइन किया है वह मात्र कागजों पर नहीं बल्कि उसमें 26 हजार करोड़ के विकास कार्यों की स्वीकृति परियोजना में दे दी गई है.
सभापति महोदय -- रामेश्वर जी, समय का ध्यान रखें.
श्री रामेश्वर शर्मा -- सभापति महोदय, थोड़ा सा और है. 2-3 हमारी भी तो परेशानी बताएंगे. उसमें आपकी भी होंगी. आगरा-ग्वालियर खण्ड में ग्रीन फील्ड सिक्सलेन परियोजना में 88 किलोमीटर मार्ग है जिसकी लागत 4,613 करोड़ रुपये है. बैतूल-खण्डवा, खरगोन-जमुलिया खण्ड 233 किलो मीटर का है जिसकी लागत 4,992 करोड़ रुपये है. रीवा-सीधी खण्ड एनएच 93 फोरलेन परियोजना की कुल लंबाई 60 किलोमीटर है इसमें लागत 1,500 करोड़ रुपये है. सलकनपुर-नसरूल्लागंज बायपास तक फोरलेन परियोजना की कुल लंबाई 43 कलोमीटर है उसकी लागत 1425 करोड़ रूपये है. ग्वालियर शहर पश्चिम फोरलेन बायपास की कुल लंबाई 29 किलोमीटर है लागत इसकी 1226 करोड़ रूपये है.
सभापति महोदय- अब आपकी कुछ समस्या है तो वह बता दें.
श्री रामेश्वर शर्मा-- माननीय सभापति महोदय, थोड़ी सी और बता दूं. मैं उसी पर आ रहा हूं. सागर बायपास फोरलेन परियोजना कुल लंबाई 20 किलोमीटर है इसकी लागत 785 करोड़ रूपये है, भोपाल के अयोध्या में जिसका काम शुरू हो गया है, 16 किलोमीटर है इसकी लागत 1050 करोड़ रूपये हैं, उज्जैन-झालावाड़ जो नेश्नल हाइवे 55 है( 552जी) फोरलेन है इस परियोजना की लंबाई 124 किलोमीटर है इसकी अनुमानित लागत 2232 करोड़ रूपये हैं.
सभापति महोदय इंदौर रिंग रोड पश्चिम पूर्व बायपास परियोजना की कुल लंबाई 141 किलोमीटर है अनुमानित लागत 6500 करोड़ रूपये है. जबलपुर दमोह एनएच 34 परियोजना कुल लंबाई 100 किलोमीटर है अनुमानित लागत 2000 करोड़ रूपये है,
सभापति महोदय, सुनिश्चित शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होता है जिसमें हमारे संकल्प पंत्र में भोपाल, इंदौर , जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन शहरों में रिंगरोड के निर्माण का संकल्प लिया था . मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि सभी शहरों में रिंग रोड के निर्माण कार्य प्रारंभ किये जा चुके हैं . इन रिंग रोडों से निर्माण शहर के भीतर यातायात का दवाब कम होगा और बाहरी वाहनों को बाहर से जाने की अनुमति होगी और शहर की यातायात सुगम होगी, और दुर्घटनायें भी कम होंगे.
सभापति महोदय -- रामेश्वर शर्मा जी आपको 20 मिनट हो गये कृपया संक्षेप में अपने क्षेत्र की बात करते हुये समाप्त करें.
श्री रामेश्वर शर्मा --राकेश जी इतना काम क्यों करते हैं कि 5 दिन बताने में लग जायें. अब यह तो मंत्री जी ने काम ही इतने किये हैं .
सभापति महोदय- आप समाप्त करें, शेष बातें आप राकेश सिंह जी को बता देना.
श्री रामेश्वर शर्मा-- सभापति महोदय,आपके माध्यम से जो बात जाती है उसकी अलग बात है.
सभापति महोदय, राष्ट्रीय राजमार्गों के फोरलेन के उन्नयन के बारे में पहले ही बता चुका हूं फिर भी इनकी लंबाई बता देता हूं कि 9315 किलोमीटर है इसकी लागत 4740 किलोमीटर पर फोरलेन उन्नयन का काम किया जा चुका है. शेष मार्गों की प्रगति रिपोर्ट तैयार है. रेल ओवर ब्रिज और फ्लाय ओवर ब्रिज के बारे में बता चुका हूं कि 111 जो माननीय मंत्री जी ने घोषणा की है उनके काम चल रहे हैं जगह जगह पर रेल के फाटक अब खतम हो जायेंगे और वहां पर आरओबी का निर्माण हो जायेगा. यह जो हमारी भारत सरकार की मंशा है यह बहुत महत्वपूर्ण है और अति महत्वाकांक्षी है.
सभापति महोदय- रामेश्वर जी कृपया समाप्त करें. श्री महेश परमार जी
श्री रामेश्वर शर्मा-- माननीय दो तीन मुद्दे हैं, उनको भी मैं ध्यान में लाना चाहता हूं. वैसे तो बात बहुत लंबी है परंतु मैं एक अनुरोध माननीय मंत्री जी से करूंगा कि वैसे उन्होंने उस पर काम शुरू किया है . जब सड़क की डीपीआर बनाई जाये तो उसमें जितने भी काम हैं उनके लिये एक एजेसी शामिल की जाये अगर उसमें पुल बनना है तो सेतु निगम को देने के बजाए एक ही एजेंसी से कार्य कराया जाये, साथ ही उसमें ट्राफिक सिंग्नल की आवश्यकता है उसे अलग से नहीं किया जाये बल्कि जो रोड बना रहा है उसी से ट्राफिक सिग्नल लगवाये जाये, और अगर लाइट के खंबे शिफ्ट होना है या स्ट्रीट लाइट लगना है तो वह भी उसी एजेंसी के कराया जाये जिससे जो आपका 8 साल तक का जो गारंटी का फार्मूला है वह फार्मूला जमीन पर उतारा जावे. और रोड की सुगमता से जांच एक अधिकारी एक एजेंसी पर निर्भर होगी तो काम की क्वालिटी और गुणवत्ता पर भी हम समय समय पर बारीकी से अध्ययन कर सकते हैं.
माननीय सभापति महोदय, मेट्रो के बारे में हालांकि हमारे नगरीय प्रशासन मंत्री जी ने कह दिया है परंतु भोपाल में माननीय मंत्री जी से प्रार्थना करेंगे कि भोपाल में जो मेट्रो डले उसमें रोडों की चौड़ाई चूंकि हमारे पास में पहले से ही कम है अब वहां पर नये रोड चौडे नहीं हो सकते हैं, इसलिये यहां पर डवल ड्रेकर बनाई जाये, मेट्रो भी चले, आदमी भी चले, नीचे भी सड़क रहे, ऊपर भी सड़क का इस्तेमाल किया जाये क्योंकि मेट्रो इस पर ध्यान नहीं देती है. हाल ही मैं उदाहरण दूं कि बैरागढ़ में हमने डबल डेकर का प्लान किया था पर उसमें कुछ न कुछ मेट्रो आनाकानी कर रही है एक बार उस पर विचार करने की जरूरत है.
सभापति महोदय-- रामेश्वर शर्मा जी, कृपया समाप्त करें. काफी समय हो गया है, महेश परमार जी अपनी बात प्रारंभ करें.
श्री रामेश्वर शर्मा –एक मैं और मांग करना चाहता हूं कोलार सिक्स लेन और बैरागढ़ में हम जो एलिवेटेड कॉरिडोर बना रहे हैं. लेकिन कोलार सिक्स लेन के साथ साथ मंत्री जी आपसे प्रार्थना है कि भगवान दास सबनानी जी चले गये, वह भी जोड़ेंगे इसमें, क्योंकि 10 लाख से ऊपर की आबादी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर कोलार में हो गई है. वहां पर आप सबके सहयोग, आशीर्वाद से हमारी सरकार के सहयोग से सिक्स लेन बनकर तैयार है. नागरिकों ने भरपूर वहां पर हमें सहयोग किया है, लेकिन हम चाहते हैं कि यह सिक्स लेन अभी कोलार तिराहे पर आकर रुक गया है, इसको हम रेल्वे जो है प्लेट फार्म नम्बर 6 पर ले जाना चाहते हैं. इससे वहां के नागरिकों को रेल्वे स्टेशन और एयर पोर्ट जाने के लिये आसानी होगी और भविष्य में आप इसमें फ्लाई ओवर भी आपको देना है. मंत्री जी, यहां पर अगर हो सके तो एलिवेटेड कॉरिडोर का फ्लाई ओवर लाइये. ट्रेन, बसें भी चलें, मेट्रो भी चले, जिससे मां बिजासन मैया के दर्शन के लिये लोग जाना चाहते हैं, तो वहां जा सकें और अगर मां नर्मदा मैया के दर्शन के लिये जाना चाहें, तो वह वहां जा सकें. इसलिये केवल मैं यह प्रार्थना करुंगा कि हमारी सरकार ने प्रदेश के अधोसंरचना के लिये डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में, राकेश सिंह जी के नेतृत्व में जो कार्य योजना तैयार करके जमीन पर उतारने का काम किया है, मैं सदन की ओर से मुख्यमंत्री जी क, प्रधानमंत्री जी का, राकेश जी का हृदय से धन्यवाद करता हूं और उम्मीद करता हूं कि प्रदेश में विकास का यह कार्य और तेज चलता रहेगा. विकसित म.प्र., उन्नत म.प्र. देश के नक्शे में हमारा प्रदेश धड़केगा और दुनिया को बतायेंगे कि यह प्रदेश विकसित प्रदेश है.
श्री महेश परमार (तराना)—सभापति महोदय, मैं मांग संख्या 24 लोक निर्माण विभाग के विरोध में अपनी बात रखना चाहता हूं. हमारे वरिष्ठ सदस्य, आदरणीय रामेश्वर शर्मा जी ने काफी धन्यवाद दिये हैं, मैं भी कुछ धन्यवाद दे दूं और उम्मीद करुंगा कि उस तरफ बैठे हमारे जितने भी मंत्री जी, विधायकण मेरी बातों की सराहना करें. अभी हमारे साथी कह रहे थे कि हमने यह दिया, वह दिया. तो यह जितनी भी सड़कों का निर्माण हो, ब्रिज बनाना हो, फ्लाई ओवर हो, मेट्रो का काम हो, क्या आप अपनी घर की सम्पत्ति बेचकर यह अपने निजी खर्चों से बनवा रहे हैं. यह तो जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा है. आप धन्यवाद दो जनता को. आप जनता से टोल टैक्स बसूल रहे हो. टैक्स वसूल रहे हो, उसी राशि से यह आप सड़कें निर्माण करवा रहे हो. तो धन्यवाद म.प्र. की जनता को देना चाहिये. धन्यवाद उन हजारों,लाखों जो टोल टैक्स दे रहे हैं बिना मतलब के, उन हमारे परिवार के लोगों को देना चाहिये न कि अपने आपको. पीडब्ल्यूडी और बहुत ही विद्वान और वरिष्ठ दिल्ली में सांसद रहे हैं और सभापति जी आपके ही शहर से हैं मंत्री जी. मैं मंत्री जी, सरकार का ध्यान पीडब्ल्यूडी की तरफ दिलाना चाहता हूं. म.प्र. के पीडब्ल्यूडी विभाग की आज पहिचान एक सबसे भ्रष्ट तंत्र के रुप में म.प्र. के पीडब्ल्यूडी और पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की पहिचान है, इस सरकार की पहिजान है. मैं धन्यवाद देता हूं मंत्री जी को और इन काबिल भोपाल और म.प्र. के इस विभाग के अधिकारियों को. 90 डिग्री का पुल भोपाल में रामेश्वर जी बेंचे थपथपाओ. 90 डिग्री का पुल लज्जा आनी चाहिये और मंत्री जी बहुत काबिल हैं, बहुत विद्वान हैं. यह पीडब्ल्यूडी ने बनाया कि किसी और विभाग ने बनाया. इस विभाग का 90 डिग्री एंगल का पुल पूरे देश एवं विश्व में चर्चा का विषय बना हुआ है. डिजाइन स्वीकृति, सुरक्षा में चूक, मानक, यह पुल किस मानक से बना है, कौन से इंजीनियरों ने बनाया है. उस समय मंत्री जी थे कि नहीं थे. उस समय आपकी सरकार थी कि नहीं थी. इसके लिये भी आप थोड़ा धन्यवाद दो अपने अधिकारियों को. इसके बावजूद उस 90 डिग्री के पुल को स्वीकृति दे दी गई. यह आवठां अजूबा है. मैं तो धन्यवाद देता हूं मंत्री जी.
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) - सभापति महोदय, मैं नहीं चाहता कि माननीय विद्धान विधायक गलत साबित हों. 90 डिग्री का पुल या सड़क बनना कोई नाकाबिलियत की निशानी नहीं है. देश में, दुनिया में अनेकों 90 डिग्री के पुल और सड़कें हैं और जो विकसित शहर और विकसित देश हैं, वहां पर भी हैं. इसलिये मैं नहीं चाहता कि आपके वक्तव्य में आप गलत साबित हों. 90 डिग्री का पुल होना बुरी बात नहीं है. बशर्ते कि इनमें बारी सारी सावधानियत बनती गयी हों. जब मैं अपना वक्तव्य दूंगा तो यह भी बता दूंगा कि दुनिया और देश में कहां-कहां 90 डिग्री के पुल बने हुए हैं.
1.36 बजे { माननीय सभापति महोदय (डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय) पीठासीन हुए.}
श्री महेश परमार- माननीय सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी बहुत विद्धान हैं, वरिष्ठ हैं. माननीय मंत्री जी ने ठीक कहा. जब आप अपनी बातें रखें तो उस समय मेरी बातों का जवाब दे दें. वह वरिष्ठ हैं, मेरी नासमझ के कारण कहीं कोई गलत बात बोल दी हो तो.
माननीय मंत्री जी, आपके माध्यम से पूछना चाहता हूं कि उन अधिकारियों को फिर आपने प्रोत्साहन क्यों नहीं किया. आपने क्यों उनको निलंबित किया. इस बात का भी आप मुझे जवाब देना. अगर यह निर्माण किया गया तो उसको पर्यटन की सूची में जोड़ा जाये और पूरे देश में दिखाया जाये कि मध्यप्रदेश में आपके लोक निर्माण विभाग के इतने काबिल अधिकारी हैं. बतायें कि आपने उनको क्यों निलंबित किया, यह मैं आपसे विनम्रतापूर्वक पूछना चाहता हूं. माननीय मंत्री जी, यह कौन अधिकारी हैं उनके नाम भी चस्पा करें, बतायें और परीक्षण करें. आप सब चीजों को विस्तृत रूप से बतायें.
सभापति महोदय, अब मुझे और आपके माध्यम से सुरक्षा मिलेगी. आप मेरे संभाग से हैं.
सभापति महोदय- संभाग की बातें काफी आ गयी हैं. आप अपने क्षेत्र की बात करें.
श्री महेश परमार- सभापति महोदय, माननीय रामेश्वर शर्मा जी जितना समय बोले , उससे मुझे पांच मिनट कम बोलने को दें.
सभापति महोदय- आप अपने क्षेत्र की बातें रख दें.
श्री महेश परमार- माननीय रामेश्वर भैया सुनो. लोक निर्माण विभाग का एक और कारनामा. मेट्रो ट्रेन वह कमलनाथ जी की देन है, आपने खूब वाह-वाही करी. मेट्रो ट्रेन में आप इंदौर शहर में पार्किंग बनाना ही भूल गये. आपके इतने विद्धान और काबिल अधिकारी हैं.
श्री रामेश्वर शर्मा- महेश जी, आपने मेरा नाम लिया है. मैं कमल नाथ जी की तारीफ करना चाहता हूं, वह बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं. सभापति महोदय, हम भारत सरकार से आग्रह करके हम लालघाटी चौराहे का ब्रिज हम 33 करोड़ रूपये का, सेंक्शन करा कर लाये और कमल नाथ जी ने केवल एक मस्जिद के कारण हमारे फ्लाई ओव्हर का काम रोक दिया. आपका देखने का तरीका क्या है. (व्यवधान)
सभापति महोदय- श्री रामेश्वर जी, आप बैठिये. महेश जी आप शांति से बोलिये. आपका समय पूरा हो रहा है इसलिये अपने क्षेत्र की बात रख दें.
श्री महेश परमार- माननीय सभापति महोदय, यह सरकार, इनके (XX) और आईना साफ कर रहे हैं, यह नहीं दिखायेंगे तो फिर किसको दिखायेंगे. जब (XX) और यह आईना साफ कर रहे हैं. यह तो दिखाना जरूरी है . आधे घण्टे तक हमने इनकी रामायण और महाभारत सुनी. (व्यवधान)
श्री रामेश्वर शर्मा- आप सुनो, यह रामायण तो खैर नहीं है.
सभापति महोदय- रामेश्वर जी, बार-बार बोलना सही नहीं है.
श्री रामेश्वर शर्मा- यह इसलिये उग्र और नाराज हैं कि कल राहुल गांधी जी सभा में इनको ... (व्यवधान)
श्री महेश परमार- आप राहुल गांधी जी की बात मत करो. हम महाकाल के भक्त हैं. आप मेरे साथ बोला जय-जय श्रीराम, जय महाकाल बोलो, क्षिप्रा मैय्या की जय बोलो, आप उसको शुद्ध करो.
सभापति महोदय- महेश जी, आप आसंदी की ओर देखकर बोलें. परस्पर आपस में चर्चा ना करें.
श्री महेश परमार- माननीय सभापति महोदय, मेट्रो बहुत महत्वकांक्षी योजना है. माननीय मंत्री जी यह भी बतायेंगे कि इनके अधिकारियों ने कितना अच्छा काम किया कि पार्किंग बनाना ही भूल गये. क्या एआई से गाड़ी पार्किंग करेंगे. माननीय मुझे बोलने दीजिये, मेरी बात आने दीजिये.
सभापति महोदय- मंत्री जी, कुछ बोल रहे हैं.
श्री महेश परमार- आप अपने वक्तव्य में बात करें. मुझे बीच-बीच में क्यों टोक रहे हैं.
श्री राकेश सिंह- माननीय सभापति महोदय, हमारे पास मेट्रो का काम नहीं है. मेट्रो का काम लोक निर्माण विभाग के पास नहीं है. वह काम अर्बन डव्हल्पमेंट विभाग के पास है.
श्री महेश परमार- अर्बन डव्हल्पमेंट विभाग के पास नहीं है तो जब रामेश्वर भैया मेट्रो का गुणगान कर रहे थे तो आपको इनको बोलना था कि यह कार्य लोक निर्माण विभाग के पास नहीं है. आपको उस समय बता देना था.
माननीय सभापति महोदय, जो आपने कहा. मैं वही तो बता रहा हूं. आप इनका कारनामा देखिये कि मेट्रो स्टेशन क्या एआई से जायेंगे. क्या एआई से गाड़ी पार्क करेंगे. यह माननीय मंत्री जवाब दें. हद हो गई माननीय. जो आपके विभाग के विद्वान अधिकारी माननीय मंत्री जी, आपके नाक के नीचे आप सोचिए कि कितना बड़ा घटनाक्रम है. मुझे तो समझ से परे हैं. इसमें सुधार करें. इसमें नये नये नवाचार, नवाचार के नाम पर जोखिम.
सभापति महोदय - आप मेरे आग्रह की ओर भी ध्यान दें. आपका समय पूर्ण हो रहा है. अपने क्षेत्र की बात आप रख दें.
श्री महेश परमार - सभापति महोदय, मैंने अभी तो शुरुआत की है.
श्री आशीष गोविन्द शर्मा - आधा समय तो महेश भैया ने इस बात में निकाल दिया कि मेट्रो इसमें है कि नहीं है.
श्री महेश परमार - सभापति महोदय, माननीय मुख्यमंत्री और माननीय मंत्री जी में प्रतिस्पर्धा चल रही है कि पहले मुख्यमंत्री जी के जिले का पुल गिरे कि पहले आपके जिले का पुल गिरे. यह आप देखो. अभी 2 दिन पहले इतना बड़ा कारनामा हुआ. इसके लिए भी आप ताली बजाइए. तुलसी भैया ताली बजाइए. सभापति महोदय, लज्जा आती है और कहते हैं कि निर्माणाधीन, 4-4 सौ करोड़ रुपया, माननीय मंत्री जी कहते हैं कि रोड है तो गड्ढे हैं, क्या दूसरे दिन ही बनने के बाद गड्ढे हो जाएंगे. आप विद्वान हैं वरिष्ठ हैं रोड हैं तो गड्ढे हैं तो 2-2 सौ करोड़ रुपये, 3-3 सौ करोड़ रुपये की सड़कें हैं और इनकी बहन, हमारी मंत्री प्रतिमा बागरी जी फुटबाल खेलती हैं इनकी सड़कों से, एक मिनट में निकल जाती है, इसके लिए भी आप थोड़ी मेज थपथपा दीजिए. मंत्री जी खुद कहते हैं रोड है तो गड्ढे हैं. माननीय आप बहुत विद्वान हैं, आपसे ऐसी उम्मीद नहीं है. यह कहीं न कहीं हमारे मध्यप्रदेश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठता है कि इतने वरिष्ठ मंत्री ऐसा कैसे कह सकते हैं. जनता का पैसा है, आप उनसे टैक्स वसूल कर रहे हैं, टोल टैक्स ले रहे हैं.
सभापति महोदय, गुणवत्ता के मामले में मैंने आपको बताया. हमारे यहां संभागीय बैठक हुई थी, भगवान मंगलनाथ जी का हमारे यहां पर मंदिर है. पिछले 3 साल से उसका शिखर ही नहीं बन पाया है. इनके विभाग के द्वारा गयाकोटा का मंदिर मैंने संभागीय बैठक में आदरणीय श्री राजौरा जी वहां आए थे, उनको बताया था, इस बैठक को भी लगभग एक वर्ष हो गया है. सभापति महोदय, आप भी उस बैठक में पधारे थे. आप स्थिति देख सकते हैं कि भगवान मंगलनाथ जी का शिखर ही नहीं बना पाए, यह लोक निर्माण विभाग है रामेश्वर भैया.
सभापति महोदय, यह राजनीति का विषय नहीं है, यह जवाबदेही और न्याय का विषय है. यह किसकी जिम्मेदारी है. हम इनके दुश्मन नहीं हैं, हम यह बताना चाहते हैं कि इस चीज में सुधार हो. आपका विभाग गलती पर गलती किये जा रहा है, उसके बाद भी आप उस पर पर्दा डाल रहे हैं. यह समझ से परे है. सभापति महोदय, यह जो मुहं पर कालिख पोती है. सभापति महोदय, एमपीआरडीसी, पीडब्ल्यूडी, पीआईयू, रोडों का निर्माण और विकास नहीं हुआ है, सभापति महोदय, यहां पर चीफ इंजीनियर थे. नाम अगर आप अनुमति दें, (XX). सभापति महोदय, सड़कों का विकास नहीं हुआ है, इनके जिले के ईई को देख लो, इनके संभाग के अधिकारी को देख लो, इनके प्रदेश के अधिकारी को देख लो, पिछले 15-20 साल पहले इनकी संपत्ति कहां थी, उस संपत्ति की जांच करा लो तो आपको दिखेगा कि वाकई विकास किसका हुआ है? बेनामी संपत्ति, आय से 200-300-400 गुना ज्यादा भ्रष्टाचार, यह लोक निर्माण विभाग के इनके जिले के, इनके संभाग के, इनके प्रदेश के अधिकारी कर रहे हैं और उसके बाद भी, एक बार मेरे लिये भी मेजें थपथपा दो, (XX) के यहां मिला कि नहीं मिला आय से अधिक संपत्ति का मामला, यह आप मुझे बता दो. इन पर क्या दंडात्मक कार्यवाही की?
सभापति महोदय - अब आप समाप्त करें.
श्री महेश परमार - माननीय मंत्री जी बैठे हैं उस क्षेत्र के उन्होंने कहा कि अगली बार बनाऊंगा, 100 से ज्यादा मौतें हो गईं और सभापति महोदय, हद तो जब हो गई कि नकाबपोश सांची जाकर टोल टैक्स पर जाकर गोली चलाता है और यह तो हमने फिल्मों में देखा और यह कहता है कि रोज लोग मर रहे हैं, सड़क बना दो, इसके लिए भी आप लोग ताली बजाओ. सभापति महोदय, हद हो गई. ग्वालियर, भिंड रोड वहां जाकर साधु संतों ने धरना दिया, वहां भूख हड़ताल की, मैं मालनपुर टोल टैक्स की बात कर रहा हूं वहां गोली चला रहे हैं, यह हमने फिल्मों में देखा है. नायक यह करता है, जब कोई सुनता नहीं है. इस बात का भी माननीय मंत्री जी जवाब दें. जो एक नायक फिल्म आई थी, उसमें आपकी सरकार का आंख खोलने का काम किया है. सभापति महोदय, सोचिए वह व्यक्ति कितना त्रस्त होगा, उसको गोली चलानी पड़ रही है इसलिए कि आप सड़क बनाइए, लोग रोज मर रहे हैं आपकी इस लोक निर्माण विभाग की सड़क पर. यह एमपीआरडीसी की बात करूं. 12 टोल एमपीआरडीसी के, एक इनके अधिकारी हैं वर्णवाल जी, 12 टोल इनकी पत्नी के नाम पर खाते हैं, 9 करोड़ के टोल पर उनको 5 लाख रुपये में टोल मिल रहा है और संख्या से ज्यादा 6-6 गुना, 8-8- गुना, यह स्व-सहायता समूह को मिलना चाहिए. और संख्या तो 6-6, 8-8 गुना है. यह स्वसहायता समूह को मिलना चाहिए. यह इनके विभाग के कर्मचारी, अधिकारी कर रहे हैं. इसमें 9 करोड़ का टेण्डर हुआ. यह स्थिति है. यह मोबाइल यूनिट की बात करते हैं. मोबाइल यूनिट से क्या लाभ हुआ. इनके विभाग ने स्वीकार किया कि 253 पुल-सड़कें जर्जर हैं, जिससे कभी भी बसें गिर सकती हैं, ट्रक गिर सकते हैं, हादसे हो सकते हैं और यह बात खुद विभाग स्वीकार कर रहा है. कृपया, माननीय मंत्री जी इस ओर भी ध्यान दें.
सभापति महोदय -- परमार जी, अब आप समाप्त करें, काफी सदस्य हैं थोड़ा आप सहयोग करें. आप अपनी बात 2 मिनट में पूरा करें.
श्री महेश परमार -- जी माननीय सभापति महोदय, मैं भूखीमाता ब्रिज के बारे में बताना चाहता हूं. उसमें अधिकारी कह रहे हैं कि ब्रिज पूरा हो गया, जबकि वहां कोई काम नहीं हुआ. भूखीमाता ब्रिज का काम पूरा होना चाहिए. नरसिंहघाटपुरा में अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उसमें काम हुआ है. उसमें सिर्फ मिट्टी डली है और अधूरा काम पड़ा है. लालपुर ब्रिज को 3 साल हो गए, उसकी अवधि समाप्त हो गई, वह आज भी अधूरा है. एमआर 4, सावंराखेड़ी पुल है. आपने कहा कि जावरा से उज्जैन, क्या उन्हेल, क्या नागदा क्या वहां से निकलेगा. अगर लोगों को सिंहस्थ के लिए इसकी सौगात देना है, तो नागदा से उज्जैन तक फोरलेन बनाइए. आपने बाहर-बाहर सड़कें निकाल दीं. आप किसानों की जमीनें हड़प रहे हैं. इसका कोई लाभ नहीं मिलने वाला. जो सड़क परम्परागत हैं वहां फोरलेन बनाइए. नागदा, उन्हेल से उज्जैन जावरा भी जोड़िए, जिससे सैकड़ों-हजारों गांव जुडे़ंगे. जंगल में मोर नाचा, किसने देखा. इससे उलट तो आपने किसानों की जमीनें हड़प लीं.
सभापति महोदय, मेरी विधानसभा तराना में कांकरिया गांव है. तराना व बिछुआ को जोड़ने वाले ब्रिज में आए दिन बारिश के समय पुल-पुलिया में पानी आ जाता है. आपने कहां कि मैं सबको समान दृष्टि से देखता हॅूं. तो माननीय मंत्री जी ब्रिज बनाने की कृपा करें.
सभापति महोदय, हमारे सागरी आनंदखेड़ी से डिमरोला मेरी पंचायत का गांव है. कृपया, इसको जोड़ने का काम करें. सागरी से बघेरा रोड, हाजीखेड़ी से बघेरा, नाताखेड़ी से बघेरा, नाताखेड़ी से बीजपड़ी, कायदा विद्युत मंडल से बड़ा बाजार, मक्सी रोड से जोड़ने का काम करें. झुमकी उमरिया को जोड़ने का काम करें. हमारे तेजलाखेड़ी से झुमकी को जोड़ने का काम करें. जवासियाकुमार से बेलरी, मोरधाधाकड़ से आलरी और मेरी विधानसभा में सिंहस्थ को दृष्टिगत रखते हुए 2 एनएचएआई उज्जैन झालावाड़ आगरा बांबे रोड तो हमारे निनावद में हमें तराना में माकरोन में, कायथा में....
सभापति महोदय -- बहुत-बहुत धन्यवाद परमार जी.
श्री महेश परमार -- माननीय सभापति महोदय, मेरे क्षेत्र की बात तो आ जाए....(व्यवधान)..
सभापति महोदय -- आप, माननीय मंत्री जी को लिखित में दी दीजिएगा. श्री दिलीप सिंह परिहार जी....(व्यवधान)....
श्री महेश परमार -- माननीय सभापति महोदय जी, मेरी आखिरी बात है.
सभापति महोदय -- परमार जी, आप बैठ जाइए. मैंने आपको पर्याप्त अवसर दिया है, कृपया क्षमा करें. प्लीज, आप बैठ जाइए. ....(व्यवधान)....
श्री महेश परमार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, इंदौर उज्जैन के किसान दुखी और परेशान हैं. पीडब्ल्यूडी के द्वारा उनकी जमीनें हड़पी जा रही हैं. किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हैं... ....(व्यवधान)....
सभापति महोदय -- परमार जी, कृपया, आप बैठ जाइए. ....(व्यवधान)....
श्री महेश परमार -- माननीय सभापति महोदय, मेरी बात सुन लीजिए. आपने माननीय रामेश्वर शर्मा जी को 40 मिनट और जब मैं सच्चाई बता रहा हॅूं और जब इनके (XX) कर रहे है....(व्यवधान)...
सभापति महोदय -- परमार जी, बैठ जाइए आप...(व्यवधान)..
श्री महेश परमार -- सभापति महोदय, मुझे 2-3 मिनट बोलने दीजिए. पीडब्ल्यूडी विभाग भ्रष्टाचार ....(व्यवधान)...
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे -- माननीय सभापति महोदय, वे अपने क्षेत्र के बारे में बोल रहे हैं, कृपया, उन्हें अपनी बात रखने दीजिए...(व्यवधान)..
सभापति महोदय -- नहीं, नहीं. परमार जी, बैठ जाइए. मैंने उनको 3-4 बार अवसर दे दिया है. यह कोई तरीका नहीं है., कृपया, बैठिए आप...(व्यवधान)..
श्री दिलीप सिंह परिहार (नीमच) -- माननीय सभापति महोदय, देश का पश्चिम क्षेत्र मालवा और इंदौर जो व्यापारिक राजधानी है, उज्जैन आध्यात्मिक केंद्र है खंडवा, बुरहानपुर औद्योगिक कृषि क्षेत्रों में से युक्त होकर आर्थिक शक्ति प्रतीत हुआ है.
सभापति महोदय -- दिलीप जी, एक मिनट रूक जाइए. माननीय मंत्री जी कुछ कहना चाह रहें हैं.
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह)—सभापति महोदय, महेश परमार जी बहुत आक्रोशित थे अभी शायद अपने मित्रों को बताना नहीं चाहते थे कि उनके विधान सभा क्षेत्र में 2024‑25 से लेकर अभी तक 185 करोड़ रूपये के काम लोक निर्माण विभाग द्वारा स्वीकृत किये गये हैं.
श्री महेश परमार—सभापति महोदय, 2024-25 तथा 2025-26 टेण्डर हो जायेंगे तो महाकाल जी का प्रसाद भी करूंगा.
श्री दिलीप सिंह परिहार—सभापति महोदय, मैं मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा आप लोक कल्याण के काम कर रहे हैं. बिना भेदभाव के सड़कें देने का काम कर रहे हैं, इस बात को कांग्रेस को स्वीकार करना चाहिये. मुझे याद है कि जब 2003 में नीमच से जीतकर के आया यह जिला साढ़े चार से पांच सौ किलोमीटर के एरिये में उस समय खड्डे में सड़क थी और सड़क में खड्डा था उसमें कुछ नजर नहीं आता था. 18 घंटे में नीमच से भोपाल आया था आज मैं 6 घंटे में नीमच से भोपाल आता हूं. यह लोक निर्माण मंत्री जी की देन है. आज हम देख रहे हैं कि जिस प्रकार से शरीर में नसों में रक्त दौड़ता है इससे हमारा शरीर स्वस्थ रहता है. स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है. इसीलिये आज मध्यप्रदेश में स्वस्थ सड़कें बनी हैं. चाहे सिक्स लाईन हों जो संभाग केन्द्र को जोड़ रही है, चाहे फोर लाईन हैं, जो जिला केन्द्र को जोड़ रही है, जो टू लाईन हो, जो तहसील केन्द्र को जोड़ने का काम कर रही हैं. वहीं आज गांव गांव में सड़कों का निर्माण हुआ है. इसी वजह से उद्योग के क्षेत्र में, कृषि के क्षेत्र में और व्यापार के क्षेत्र में आमूल-चूल परिवर्तन आया है. आज जो किसान जिस मालवा में अन्न पैदा करता है. उस अन्न को मंडी में ले जाने के लिये अच्छी सड़कें बनी हैं. आज आप देख रहे हैं कि दिल्ली, मुम्बई कॉरिडोर की बात भी मैं करूंगा. जो 6-6 घंटे में मुम्बई-दिल्ली में पहुंचाने का काम करेगा. मालवा में यह कहावत है माननीय सभापति जी के पूल्य पिताजी को हम मालवा के गांधी कहा करते थे. मानव माटी घन गंभीर पग पग रोटी डग डग नीर की कहावत मालवा में चरितार्थ हुई है. उस वजह से अन्न का भंडार भरा है. वह अन्न मंडी में सड़कों के माध्यम से जाता है किसान की जो कच्ची फसलें होती हैं वह भी 5-5, 8-8 घंटे में मंडियों में पहुंच जाती हैं वह अच्छे भावों में बिकता है तो कहीं कहीं मध्यप्रदेश सम्पन्नता की ओर जा रहा है. निश्चित ही आज लोक निर्माण विभाग के माध्यम से जो वृहद स्तर पर सड़क, पुल, एलीवेशन, कॉरिडोर एवं भवन निर्माण हुआ है. भवन के संबंध में मैं यह कहना चाहूंगा कि दो वर्ष में 2 हजार 240 करोड़ की लागत से मध्यप्रदेश में 136 विद्यालयों एवं सीएम राईज स्कूल के भवन बने हैं. जहां हमारे बेटा बेटी शिक्षा प्राप्त करते हैं. शांतिपनी कॉलेज के माध्यम से शिक्षा कृष्ण एवं सुदामा ने उज्जैन की महानगरी में जहां शिक्षा प्राप्त की. ऐसी शांतिपनी कॉलेज तहसील तहसील में माननीय शिक्षा मंत्री जी दे रहे हैं तथा वहां लोक निर्माण मंत्री वहां पर सड़कें बनाने का काम कर रहे हैं तो बच्चों को शिक्षा में भी इन सड़कों का बहुत बड़ा योगदान है. आज हम देख रहे हैं कि 177 स्वास्थ्य परियोजनाओं का निर्माण लोक निर्माण मंत्री जी के माध्यम से हुआ है. जहां शरीर स्वस्थ रहता है तभी तो सब काम चलते हैं. उन परियोजनाओं का निर्माण आज हम कह सकते हैं कि नीमच, मंदसौर और छतरपुर और सिवनी में चार नये मेडिकल कॉलेज लोक निर्माण के माध्यम से बने हैं. आप जानते हैं कि रतलाम का कॉलेज डॉ.लक्ष्मीनारायण पाण्डेय जी के नाम से हमने रखा है, मंदसौर का कॉलेज माननीय सुंदरलाल जी पटवा जी के नाम से रखा है, नीमच का कॉलेज माननीय वीरेन्द्र कुमार सखलेचा जी के नाम से रखा है. वहां पर बच्चे मेडिकल की पढ़ाई प्राप्त कर रहे हैं. वहां से शिक्षा प्राप्त करके वह गांव में जाकर उच्च शिक्षा दे पाएंगे. गांव में तभी जा पाएंगे जब सड़कें होंगी. आज गांव गांव में सड़कों का जाल मंत्री जी ने फैलाया है. हम सब जानते हैं कि आज जिस हिसाब से सड़कें बनी हैं, उसी हिसाब से मध्यप्रदेश सर्वांगीण विकास कर रहा है. तीन नये न्यायालय भवन हम देखते हैं कि न्याय मिलने के लिये पहले न्यायालय की बिल्डिंगे नहीं होती थीं. लोक निर्माण के माध्यम से आज न्यायालय भवन भी बने हैं. चाहे न्यायालय भवन ग्वालियर का हो, चाहे नीमच का हो, चाहे रीवा का हो, आज अनेक जगह न्यायालय की बिल्डिंग लोक निर्माण के माध्यम से सर्वसुविधायुक्त बनी हैं. जहां पर आम गरीब को न्याय मिल रहा है. मैं यह भी कहना चाहता हूं कि सांवेर रोड़ पर 60 करोड़ की लागत से केन्द्रीय जेल का निर्माण भी लोक निर्माण मंत्री के माध्यम से हुआ है. जबलपुर में धर्म शास्त्र राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के भवनों वह लोक कल्याण के भव्य कार्य पूर्ण किये गये हैं. निश्चित ही सड़क अधोसरंचना के सतत विस्तार में, समृद्धि में निरंतर द्वार खुलते हैं, सड़कों के माध्यम से ही सभी विकास के द्वार खुलते हैं. वित्तीय बजट वर्ष 2026-27 में सड़क पुल निर्माण सुधारने हेतु 12 हजार 690 करोड़ का प्रावधान मंत्री जी ने किया है. वहीं क्षतिग्रस्त पुल-पुलियाओं के निर्माण में 900 करोड़ रुपए का निर्धारण इस बजट में किया गया है. मुख्यमंत्री जी का मजरा टोला जो सड़क योजनाएं, गांव में जो गरीब रहता है उसको सारी सुविधाएं नहीं मिल पाती है तो उसको बारिश में आने जाने में बहुत तकलीफ होती थी. उन छोटे छोटे गांव में पंडित अटल बिहारी वाजपेयी जी के माध्यम से प्रधानमंत्री सड़कें पहुंचाने का काम किया है, जो गांव कहीं न कहीं वंचित रह गए थे, उनमें मजरा टोला के माध्यम से सड़कों का निर्माण होगा. काग्रेंस के समय गांव खाली हो रहे थे, प्रधानमंत्री जी ने सड़कें बनाई मुख्यमंत्री जी और पीडब्ल्यूडी ने सड़कें बनाई, तो आज गांव का भी सर्वांगीण विकास हो रहा है. पूज्य महात्मा गांधी जी ने कहा था कि गांव का विकास होगा, तो देश का विकास होगा. वहीं काम हमारे देश के प्रधानमंत्री और हमारे मुख्यमंत्री जी कर रहे हैं, गांव-गांव में सड़कों का जाल फैला रहे हैं, तो गांव आत्मनिर्भर बन रहे हैं.
निश्चित ही जो काम हुए हैं 20 हजार 900 किलोमीटर के सड़क निर्माण की अनुमति मिली है. मैं इसके लिए भी धन्यवाद देता हूं. गांव के मुख्य मार्ग को जोड़ने के लिए व्यापार, रोजगार को गति देते हैं. यदि कोई भी मुख्य मार्ग जुड़ता है तो वहां व्यापार भी अच्छा चलता है और हर काम को गति मिलती है. यदि सड़कें अच्छी होती है तो उद्योग और उद्योगपति भी आते हैं.
सभापति महोदय – दिलीप जी अपने क्षेत्र की कोई महत्वपूर्ण बात हो तो रख दें, पर्याप्त समय हो गया है. अन्य सदस्यों का भी ध्यान रखना है.
श्री दिलीप सिंह परिहार – सभापति जी, स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए मैं मान्यवर मंत्री जी को बहुत धन्यवाद देता हूं. लोक निर्माण से, लोक कल्याण के सारे काम, आज मध्यप्रदेश की धरती पर हो रहे हैं. विगत दो वर्ष में सड़क पुल पुलियाओं के निर्माण में प्रगति आई है, इसमें सात सेतु कार्य पूर्ण हुए हैं. मेरे यहां भी ओवर ब्रिज मिला है, उसका काम भी पूर्णता की और है, जबकि वर्तमान में 125 कार्य निर्माणाधीन और स्वीकृति पर और ये परियोजनाएं हमारे क्षेत्र में यातायात सुगमता और व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देगी, वृहद पुल आरओ जैसे सभी कार्य इस गति से चल रहे हैं. मैं मेरे क्षेत्र की मांग करना चाहता हूं. सीमा क्षेत्र में हम मजबूत है, हमारी सीमाएं राजस्थान से मिलती है. मालवा और मेवाड़ एक जगह आ जाएगा तो हम सिंहस्थ के समय में भी जो काम अभी मंत्री जी के माध्यम से होने वाले हैं, जो सिंहस्थ लगने वाला है वर्ष 2028 में, वहां ब्रिज बन रहे हैं, सिक्स लाइन जुड़ रही है, इंदौर से आने के लिए मेट्रो बन रही है, ये सब काम लगातार हो रहे हैं. कनेक्टिविटी निवेश के लिए आकर्षित किया है. मेरे यहां भी एक झांझरवाड़ा में उद्योग क्षेत्र लगा है तो राजस्थान से लोग आ रहे हैं कह रहे है आपके यहां बिजली, पानी, सड़क मिल रही है तो हम क्यों नहीं आएंगे. ये सभी सुविधाएं मुख्यमंत्री और पीडब्ल्यूडी मंत्री जी की वजह से हुई है. मैं अपने क्षेत्र की मंत्री जी से मांग करना चाहता हूं कि आपने बहुत कुछ दिया है. नीमच जो अंतिम छोर में है, वहां आपने डुमलावदा से भाटखेड़ा की 132 करोड़ रुपए की सड़क दी है, जो नीमच की दशा और दिशा दोनों बदल रही है, उसमें कुछ पैसा ज्यादा है तो उसको वही खर्च करवा दें. क्योंकि वहां न्यायालय, जिला पंचायत, कलेक्टर और मंडी आती है, वहां एक्सीडेंट न हो इसलिए साइड में एक सड़क और निकल जाएगी तो उसका फायदा होगा. दूसरा, हमारे यहां एक भादवा माता का स्थान है, किसी को भी लकवा मारता है जो लोग कंधे पर बैठकर जाते हैं, मां की कृपा से पैदल घर जाते हैं, वहां जाने वाला जो स्थान है जो मनासा जैतपुरा चौराहे पर एक ओवरब्रिज बना दें, मैंने वहां कई एक्सीडेंट होते हुए देखे हैं, निर्दोष लोग अपनी जान खोते हैं, मां अपने बेटे का घर पर इंतजार करती है. मेरा निवेदन है कि जैतपुरा चौराहे पर एक ओवरब्रिज बना दें. मुख्यमंत्री जी को भी मैंने इस बारे में लिखकर दिया है, वे बहुत संवेदनशील है. नीमच जिला स्थान है, वहां कहीं न कहीं सर्किट हाउस तहसील, जीनद भी मैंने एक प्रस्ताव भेजा है
तो वहां एक विश्राम गृह बना दें, जिससे कि आने वाले लोगों को सुविधा हो, छोटी-छोटी सड़के हैं, जो मेरे क्षेत्र में हैं, जो रह गई हैं, वह छोटी-छोटी सड़कें हैं, वह सड़कें राजस्थान को जोड़ती हैं, कोई दूधराज के गांव को जोड़ती है. एक दारू गांव है, दारू मतलब पीने वाली नहीं है, दारू एक गांव का नाम है, बिसलवास कलां स्टेशन जो लोग आते हैं, दारू से स्टेशन आने वालों की एक दो ढाई किलोमीटर की सड़क है, मैं आपसे निवेदन करूंगा कि एक राबडि़या से हरनाउदा की एक डेढ़ किलोमीटर की सड़क है, कनावटी से लेवड़ा की सड़क, ग्वालतालाब से पिराना की सड़क है, जो हमारे मण्डल अध्यक्ष जी हैं, उन्हीं का वह गांव है, तो इसको भी आप जोड़ने का कृपा करे. कनावटी से हमारी नई मंडी मान्यवर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने नीमच में दी है, जो 300 करोड़ रूपये के लगभग की मंडी है, उस मंडी में जाने के लिये एक सड़क पुरानी मंडी से नई मंडी में जोड़ना है, वह दो ढाई किलोमीटर की है, उसका भी मैंने आपको प्रस्ताव दे रखा है, तो उसको भी जोड़ने की कृपा करें, निश्चित ही आने वाले समय में आज वहां मेडीकल कॉलेज दिया है, आपने नर्सिंग कॉलेज दिया है, अब 400 बेड का जब अस्पताल मान्यवर मुख्यमंत्री जी की घोषणा में है, वह देंगे तो वह भी पी.डब्ल्यू.डी. के मंत्री जी बनायेंगे और लोग अहमदाबाद और इंदौर जाने से कहीं न कहीं वंचित रहेंगे. मैं पुन: आपको बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं.
सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी ने स्वास्थ्य शिक्षा, न्याय, सुरक्षा के संबंध में अदभुत काम किया है. न्याय, सुरक्षा के क्षेत्र महत्वूपूर्ण हैं, नीमच के भवन जो बने हैं, वह बहुत ही अच्छे बने हैं, सड़के जो बनी हैं, बहुत अच्छी बनी हैं. आपने एक जैसनपुरा का हमारा बायपास पास कर दिया है, केवल भूमि का अधिग्रहण उसमें चल रहा है, जिलाधीश महोदया उसमें लगे हुए हैं, तो उसका भी काम हो जायेगा. मल्हारगढ़ जो जीरन है, श्री जगदीश देवड़ा जी के पास में मेरा क्षेत्र आता है, तो देवड़ा जी भी थोड़ी खजाने की चाबी नीमच में भी खोलेंगे तो अच्छा रहेगा और आपसे भी निवेदन है कि मल्हारगढ़ से जीरन और जीरन से जहां हैलीपेड बना है, उस सड़क को भी मंजूर करने का काम करें. मान्यवर सभापति महोदय, मैं आपको धन्यवाद दूंगा. मान्यवर पीडब्ल्यूडी मंत्री जी का दिल की गहराइयों से धन्यवाद दूंगा, मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि आज मध्यप्रदेश जिस हिसाब से विकास के क्षेत्र में बढ़ रहा है, अधोसरंचनाओं में, सड़कों में वह एक अभूतपूर्व है क्योंकि गड्ढे में सड़क देखी थी, सड़क में गड्ढा देखा था, आज प्लेन सड़कें मध्यप्रदेश की धरती पर देख रहे हैं, मध्यप्रदेश कहीं न कहीं उन्नत मध्यप्रदेश बन रहा है, समृद्ध मध्यप्रदेश बन रहा है, देश का हृदय स्थल मध्यप्रदेश है और सड़कों के मामले में आज सारी दुनिया में मध्यप्रदेश की तारीफ हो रही है, इसके लिये बहुत-बहुत बधाई. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.
श्री निलेश पुसाराम उईके(पांढुरना) -- अध्यक्ष महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. आपने बहुत महत्वपूर्ण विभाग पर बोलने का मुझे मौका दिया है. पत्राचार के माध्यम से मैंने माननीय मंत्री जी से पांढुरना से अमरावती मार्ग पर वर्धा नदी तक रोड के लिये मांग किया था, माननीय मंत्री जी ने उसको इस बजट में शामिल किया है, मैं मंत्री जी का बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं. (मेजों की थपथपाहट) साथ ही मेरे क्षेत्र की बहुत सारी मांगें हैं, मैं उनको पटल पर रखते हुए माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि मेरा पूरा क्षेत्र आदिवासी ट्रायबल क्षेत्र है. बारिश के दिनों में कुछ गांव मेरे विधानसभा क्षेत्र के ऐसे हैं, जहां आवागमन पूरा बंद हो जाता है, वहां पुल की बहुत आवश्यकता है. धगडि़या से उमरडोह के बीच बेल नदी में, बिजागोरा से भवारी के बीच, कन्हान नदी में नारायण घाट से पलासपानी के बीच, रायबासा से बुचनखापा, सिराठा मार्ग से टेमनी में पुल नहीं होने के कारण बारिश के दिनों में छात्र, छात्राओं के स्कूल आने जाने में दो तीन महीने काफी दिक्कत होती है, माननीय मंत्री जी ने से मेरा निवेदन है कि इन पुलियों को स्वीकृत करने की कृपा करें. साथ ही बहुत सारी रोडें मेरे क्षेत्र की हैं,उनको भी स्वीकृति प्रदान करने की कृपा करें.चिमनघापा से भैंसाडोंगरी, उत्तमडेरा से डोलनघापा, छाबड़ी से धनोरा, लेन्डोरी से रैय्यतवाड़ी ढाना, नोरछापर से छिन्दबोड, डोडिया से डोडिया ढाना, बाकुल से जायदेही, प्रधानघोघरी से निंबूखेड़ा, भैरवपुर से पौनार, खैरवाडा से खैरवाड़ा कॉलोनी, बडगोना से बीजागोरा, यह बहुत महत्वपूर्ण रोड हैं, माननीय सभापति महोदय, इनको स्वीकृत करने की कृपा करें, साथ ही बैतूल नागपुर हाईवे हमारे पांढुरना से रोड गुजरता है, यहां मोहि घाट में आये दिन दुर्घटनाएं होती हैं. नेशनल हाईवे होने के कारण ट्रेफिक ज्यादा है, हर दिन दुर्घटनाएं होती हैं, आज तक हजारों लोगों ने यहां अपनी जान गवा दी है. माननीय सभापति महोदय, आपके माध्यम से मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि उसका कोई स्थाई समाधान निकाला जाये, ताकि दुर्घटनाएं न हो, मेरे क्षेत्र की एक दो समस्याएं और मैं बताना चाहता हूं हमारे आदिवासी क्षेत्र पाटई मैं महाविद्यालय की मांग कई दिनों से की जा रही है, नानदंवाड़ी में एकलव्य स्कूल की मांग की जा रही है, मैनीघापा में कन्या क्षेत्र की मांग की जा रही है, इन मांगों को माननीय सभापति महोदय, आप स्वीकृत करने की कृपा करें. पांढुरना अभी नया जिला बना है, यहा विश्राम गृह की बहुत आवश्यकता है, उसको भी स्वीकृत करने की कृपा करें, आपने बोलने का मौका दिया, आपका बहुत-बहुत, धन्यवाद.
सभापति महोदय-- थोड़ा निलेश जी का अनुसरण करें, ऐसा मेरा सभी माननीय सदस्यों से अनुरोध है. कम समय में उन्होंने महत्वपूर्ण बातों को रखा है. कृपया सभी सदस्यों से आग्रह है, वे भी ध्यान दें.
श्री आशीष गोविन्द शर्मा-- सभापति महोदय, अभी भी कांग्रेस के कई सदस्य सदन से अनुपस्थित हैं, उन्हें भी सड़कें मिलने के लिये धन्यवाद देना चाहिये.
श्री गोविन्द सिंह राजपूत-- सभापति महोदय, विधायक जी ने सरकार के काम की जो तारीफ की है, यह विपक्ष को सीखना चाहिये.
श्री गौरव सिंह पारधी (कटंगी)-- सभापति महोदय, आज मेरा सौभाग्य है कि मैं लोक निर्माण कार्य विभाग की मांग संख्या 24 का समर्थन करते हुये बोल रहा हूं. यह ऐसा विभाग जो माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में और एक बहुत ही प्रभावी मंत्रीगण हमारे आदरणीय राकेश सिंह जी के मार्गदर्शन में काम कर रहा है और साथ ही साथ इस विभाग की मैं देख रहा हूं विभागीय टीम भी बहुत ही उच्चदर्शिता से काम कर रही है. मैं आज इस सदन में लोक निर्माण विभाग की केपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क के तहत ही बात करना चाहूंगा क्योंकि इतने ब्रॉड-वे में यह विभाग काम कर रहा है कि निश्चित तौर पर अगर बोलना चाहेंगे तो 5 दिन का समय भी कम पड़ जायेगा. आज मध्यप्रदेश में अधोसंरचना विकास की एक अभूतपूर्व गति बनी हुई है. प्रदेश में एक्सप्रेस-वे, एलीवेटेड कॉरीडोर, स्मार्ट सिटी परियोजनाओं जैसे अभूतपूर्व कार्य किये जा रहे हैं, लेकिन सभापति महोदय कार्य कितना ही अभूतपूर्व क्यों न हो जब तक, मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं तो हम लोग कहते हैं कि हार्डवेयर कितना ही अच्छा हो जाये, जब तक सॉफ्टवेयर अच्छा नहीं होता तक तब हार्डवेयर अच्छा काम नहीं कर पायेगा. उसी प्रकार से लोक निर्माण विभाग में चाहे कितनी ही अच्छी योजनायें आ जायें, कितनी ही राशि दे दें, जब तक उसमें कार्य करने वाले हमारे अभियंता दक्ष नहीं होंगे तब तक वह कार्य गुणवत्तापूर्वक पूर्ण नहीं हो पायेगा. मैं बधाई देना चाहूंगा हमारे माननीय मंत्री जी को कि इन्होंने इस बात को समझा और इस दिशा में अपना पूरा फोकस किया. सभापति महोदय यह केपेसिटी फ्रेमवर्क बिल्डिंग क्यों जरूरी है, क्योंकि डीपीआर को समझना है, नई टेक्नोलॉजी को समझना है, बिल्डिंग इंफार्मेशन मॉडलिंग करनी है आजकल ईपीसी जैसी नई-नई चीजें आ गई हैं, गुणवत्ता नियंत्रण करना है, एनवायरमेंटल एस्पेक्ट को समझना है. इस प्रकार वित्तीय जो अनुशासन होता है उसको भी समझना है. जब हम कार्य करते हैं तो राइट ऑफ इश्यू आते हैं तो डिस्प्ले रेजोल्यूशन करना है तो निश्चित तौर पर माननीय मंत्री जी ने इस बात को समझा और अपने विभाग के अभियंताओं के लिये एक नया फ्रेमवर्क आगे बढ़ाया उसके लिये मैं माननीय मंत्री जी को और पूरे विभाग को माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में बहुत सारी बधाई देता हूं. मैं आपको बताना चाहूंगा कि विभाग में कार्यरत 970 अभियंताओं का विस्तृत ट्रेनिंग नीड असेस्मेंट किया गया यह बहुत ही साइंटिफिक तरीका है, निश्चित तौर पर मैं समझता हूं कि अपने आप में भारत में एक उदाहरण बनेगा मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग कि आपने अपने अभियंताओं के लिये इस चीज को सामने लाया. इसको समझना ही बड़ी चीज थी माननीय सभापति महोदय, मैं पुन: बधाई देना चाहूंगा कि आपने इस चीज को समझा और इसकी आपने तैयारी की. आने वाले समय में इस अध्ययन में यह पाया गया कि आधुनिक निर्माण तकनीकी डिजीटल टूल्स अनुबंध प्रबंधन गुणवत्ता आश्वासन और परिसम्पत्ति प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में उन्नत प्रशिक्षण की आवश्यकता थी. इस आवश्यकता को निकाला गया और उसके बाद एक फ्रेमवर्क जो असेस्मेंट करके सामने लाया गया जिसको हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी ने 10 जनवरी 2026 को सामने लाया.
माननीय सभापति महोदय, मैं इस विभाग की कार्यसंस्कृति को नई दिशा देने वाली इस बात के बारे में बाताना चाहूंगा कि इसके बाद जो लगातार ट्रेनिंग का सेशन चालू हुआ है, लगभग 26 ट्रेनिंग सेशन हो चुके हैं. इन ट्रेनिंग सेशन के क्या लाभ हो रहे हैं. तकनीकी क्षमता बढ़ रही है, डिजीटल दक्षता बढ़ रही है, परियोजनाओं की गुणवत्ता में सुधार आ रहा है, कॉस्ट कंट्रोल हो रहा है, टाइम कंट्रोल हो रहा है ट्रांसपेरेंसी बढ़ रही है, अकाउंटेबिलिटी बढ़ रही है और माननीय सभापति महोदय जो सबसे बड़ी बात होने वाली है, इनोबेशन बढ़ रहा है. लोकल टेक्निक को समझते हुये हमारे अभियंता इनोबेट कर रहे हैं, ऑन द स्पॉट इनोबेट कर रहे हैं लोकल चीजों के हिसाब से वहां पर दिशा निर्देश दे रहे हैं और इसके साथ ही आने वाले दिनों में हम देखेंगे कंसिस्टेंसी इफीसेंसी और एथिक्स में भी सुधार होगा मैं फिर से कहूंगा कि यह ऐसी चीज है, ऐसे परिदृश्य को माननीय मंत्री जी ने और पूरे विभाग ने पकड़ा है जो अक्सर सबके पन्नों के नीचे छिप जाता है, इन्होंने सबके सामने लाया. माननीय सभापति महोदय, ट्रेनिंग मेट्रिक्स सामने लाया गया. और एक क्वाटरली प्रशिक्षण योजना बनाई गई बहुत ही सिस्टेमेटिक वे में काम हो रहा है एनुवल ट्रेनिंग कैलेण्डर सामने आया जो इस क्षेत्र में कार्य करने वाली हमारी राष्ट्रीय संस्थाएं हैं. सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट,इंडियन एकेडमी आफ हाईवे इंजीनियर्स और इनके साथ एमओयू किया गया और उसके आधार पर रोड मैप तैयार किया गया है. जैसा कि मैंने आपको बताया कि 2025-26 में भी इसका ठोस क्रियान्वयन शुरू हो चुका है लेकिन जो फ्यूचर ओरियेंटेड और इस प्रदेश के लिये आने वाले समय में सबसे बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाला है वह है विभाग का यह निर्णय कि एक इंजीनियर ट्रेनिंग एण्ड रिसर्च इंस्टीट्यूट भोपाल में स्थापित किया जायेगा. मैं चाहता हूं कि पूरा सदन मेजें थपथपाकर इसके लिये बधाई दे क्योंकि यह संस्था सिर्फ लोक निर्माण विभाग की नहीं वहां हर निर्माण कार्य़ के जितने हमारे विभाग हैं उनके अभियंताओं उनके इंजीनियर्स की ट्रेनिंग दी जायेगी और आने वाले समय में यह रिसर्च एण्ड डेवलपमेंट एक बड़े विंग के रूप में उभरेगा. मैं पुन: माननीय मंत्री जी को बहुत सारी बधाईयां बहुत सारी शुभकामना देता हूं. विभाग ने अनेक नवीन नवाचार किये हैं नवीन आधुनिक निर्माण पद्धतियां शुरू की हैं जिसमें मैं 2-4 नाम और लेना चाहूंगा जिसमें व्हाइट टापिंग निश्चित तौर पर ट्री ट्रांसप्लांटेशन और वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए सस्टेनेबल कंस्ट्रक्शन और ग्रीन बिल्डिंग का जो कांसेप्ट लाया है मेरी विधान सभा में भी हम लोग प्रयासरत् हैं कि हमारे यहां कुछ ग्रीन बिल्डिंग जरूर आएं. हम चाह रहे हैं कि हमारे यहां जो हास्पिटल का निर्माण हो रहा है वह भी ग्रीन बिल्डिंग के रूप में उभरे साथ ही साथ जैसा कि मैंने आपको बताया कि प्रदेश हैम जैसे नवीन तकनीकों का इस्तेमाल करने वाला है तो निश्चित ही ऐसे परिदृश्य में यह जो नई ट्रेनिंग की पद्धति केपेसिटी बिल्डिंग का फ्रेम वर्क सामने आया है यह अपने आप में उदाहरण के रूप में सामने आयेगा मैं इसके लिये अपनी तरफ से बधाई देता हूं और साथ ही साथ विभाग की एक बात के लिये आभार करना चाहूंगा विभाग की एक बात के लिये विभाग ने एक रोड नेटवर्क मास्टर प्लान तैयार किया है यह मास्टर प्लान,लगातार हमारे विपक्षी साथी मास्टर प्लान मास्टर प्लान चिल्लाते रहते हैं अरे बधाईयां दीजिये हमारे लोक निर्माण विभाग को कि आपने रोड का मास्टर प्लान तैयार किया है ऐसा मास्टर प्लान तैयार किया है जो आने वाले समय में प्रदेश में कब कहां कैसे प्रायोरिटी के हिसाब से रोडों की जरूरत है उसको पूरा करने वाले मास्टर प्लान को सामने लाया है. हमारे विभाग ने ड्रेन वाटर हार्वेस्टिंग जीरो फेटेलिटी कंट्रोल की दिशा में भी कार्य किया है ताकि हाईवे में जो एक्सीडेंट होते हैं यह कम से कम हो जाएं और सेफ्टी के लिये डेटा ड्रिवन हाईपर इंटनवेंशन जैसी नई टेक्नालाजियों का आपने उसमें अध्ययन किया है. अनेक प्रकार की बेस्ट प्रेक्टिसिस का अध्ययन करके मानक निविदा दस्तावेज तैयार किये गये हैं मैं अपनी तरफ से एक छोटा सा सुझाव देना चाहूंगा यह जो नवीन मानक निविदा दस्तावेज हैं बहुत अच्छे हैं इनमें सुधार हुआ है लेकिन एक जियो टैगिंग जैसे कान्सेप्ट इसमें डालेंगे तो उससे और सुधार की संभावनाएं होंगी. पुन: मैं अपनी तरफ से,पूरे प्रदेश की तरफ से पूरे विभाग का आभार करता हूं धन्यवाद करता हूं कि आपने लोक पथ जैसे एप को लाकर एकदम डाउन स्ट्रीम तक आखिरी छोर तक के व्यक्ति तक माननीय हमारे दीनदयाल जी की भावना को सामने लाते हुए आखिरी छोर के व्यक्ति को अधिकार दे दिया कि अगर कहीं सड़क खराब है तो वह एप में डालेगा और सड़क सुधार सामने आयेगा.मुझे विभाग के द्वारा बहुत कुछ दिया गया उसके लिये मैं माननीय मंत्री जी,माननीय मुख्यमंत्री जी और विभाग के सभी अधिकारियों को धन्यवाद करता हूं आने वाले समय में कटंगी को एक बायपास की सुविधा आपके द्वारा प्रदान हो यही कहते हुए दो शब्दों में मैं अपनी बात को समाप्त करूंगा. मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनकी कोशिश कभी रुकती नहीं, सड़कें उन्हीं को भाती हैं जिनकी रूह कभी थकती नहीं जिनकी रूह कभी थकती नहीं.
श्री नारायण सिंह पट्टा (बिछिया) -- माननीय सभापति महोदय, आज इस सदन में मध्यप्रदेश विधान सभा के माध्यम से मध्यप्रदेश सरकार के वर्ष 2026-27 के बजट में लोक निर्माण विभाग पर अपनी बात रखना चाहता हूँ.
सभापति महोदय, लोक निर्माण विभाग विभिन्न क्षेत्रों में काम करता है. जिनमें प्रमुख रूप से सड़क, पुल-पुलिया, जो अंतिम छोर के व्यक्ति को जोड़ने का कार्य करते हैं, शामिल है. लेकिन सरकार द्वारा अभी भी बहुत से ऐसे जो अंतिम छोर में रहने वाले हमारे लोग हैं, जो ग्रामीण क्षेत्र के गांव हैं, वे गांव अधूरे हैं. सरकार ने आंकड़ों का जाल बुनकर विकास का सपना तो दिखाया है...
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) -- सभापति महोदय, अभी-अभी गौरव जी ने विषय रखा, रिफॉर्म्स की जिस दिशा में हम जा रहे हैं, उसमें कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रैमवर्क पर जिस सरलता से बहुत कठिन विषय को उन्होंने रखा है, मैं इसके लिए उनको बधाई देना चाहूँगा और चाहूँगा कि लोग मेजें थपथपाएं, चाहे यहां के सदस्य हों या वहां के सदस्य हों, जो भी युवा साथी तैयारी के साथ में सदन में अपनी बात रखते हैं, उनकी प्रशंसा की ही जानी चाहिए. (मेजों की थपथपाहट).
सभापति महोदय -- निश्चित रूप से गौरव जी पहली बार के विधायक हैं, और जब-जब विभिन्न विभागों में चर्चा में उन्होंने भाग लिया है, उनका प्रस्तुतिकरण बहुत अच्छा है और सदन की गरिमा और समय की मर्यादा भी रखते हैं.
श्री नारायण सिंह पट्टा -- सभापति महोदय, जैसा कि मैंने कहा, मंत्री जी दूरदर्शिता वाले हैं, दयालू भी हैं, सबका ध्यान रखते हैं. लेकिन कभी-कभी हो सकता है कि उनके ऊपर ऐसा कोई दबाव आ जाता होगा कि कुछ अछूते, अनसुने रह जाते होंगे. मैं कभी तुलना नहीं किया, न कभी मैं बुराई करता, फिर भी.
सभापति महोदय, सरकार ने आंकड़ों का जाल बुनकर के विकास का सपना तो दिखाया है, लेकिन जमीन पर सच्चाई क्या है. प्रदेश की सड़कों की हालत किसी से छिपी नहीं है. बरसात आती है, सड़कें गड्ढों में बदल जाती हैं और गड्ढे सड़कों में बदल जाते हैं. क्या यही सरकार का इन्फ्रास्ट्रक्चर और मॉडल है ?
सभापति महोदय, बजट में हजारों करोड़ की घोषणाएं की गईं, लेकिन क्या पिछली घोषणाओं का हिसाब दिया गया ? कितने पुल अधूरे हैं, कितनी सड़कें समय-सीमा से बाहर हैं ? कितने ठेकेदारों पर कार्यवाही हुई ? प्रदेश की जनता यह पूछ रही है. जबलपुर-भोपाल हाईवे, जो पुराना एनएच-12 है, अभी पिछले 3-4 दिन पहले की ही बात है. वह ओव्हर ब्रिज बने तीन साल ही हुआ था, वह पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है. क्या पुल गुणवत्ताविहीन था, किसकी जवाबदेही थी, मंत्री जी ने उस पर क्या कार्यवाही की. आज आवागमन बाधित हो चुका है. लोग बहुत परेशान हैं. इस पर भी मंत्री जी से हमारा अनुरोध है कि जब वे अपना जवाब दें तो इस पर भी बोलें. ऐसे अनेक उदाहरण हैं क्योंकि हर साल मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं. फिर भी सड़कें एक सीजन नहीं टिकतीं क्योंकि गुणवत्ताविहीन निर्माण पर अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होती.
सभापति महोदय, सरकार कहती है कि सड़क से समृद्धि आएगी, लेकिन जब सड़क ही सुरक्षित नहीं तो समृद्धि कैसे आएगी. ग्रामीण क्षेत्रों में हालत और भी बद्तर है. गांवों को जोड़ने की बात की गई, लेकिन हकीकत यह है कि कई ग्रामीण सड़कें आज भी नहीं बनी हैं. महोदय, लोक निर्माण विभाग सिर्फ सिमेंट और डामर का विभाग नहीं है. यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. जब सड़क खराब होती है तो किसान की फसल बाजार तक नहीं पहुँच पाती. व्यापारी का माल समय पर नहीं पहुँचता. एम्बुलेंस देर से पहुँचती है और कई बार किसी की जान चली जाती है.
सभापति महोदय, हम विकास के विरोधी नहीं हैं. लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ हैं. हम बजट के खिलाफ नहीं हैं लेकिन बिना जवाबदेही वाले बजट के खिलाफ हैं. आज प्रदेश की जनता कह रही है कि घोषणाएं नहीं, गारंटी चाहिए, गड्डे नहीं, मजबूत सड़क चाहिए.
सभापति महोदय, जैसे मैंने कहा है कि आज भी मेरे विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत कान्हा नेशनल पार्क आता है. दुनिया भर से लोग वहां पर आते हैं और जब वह पार्क में घूमने जाते हैं, तो उसके पहले गांव देखने आते हैं, वे वहां की सड़कों को देखते हैं, तो उससे उन्हें हमारे प्रदेश की हालत का पता चलता है. मैं मंत्री महोदय से कहना चाहता हूँ कि हमारे कान्हा से छपरी, सोंतिया, पटपरा से मानेगांव और खटियागेट से लसरेटोला तक जहां बैगा जनजाति के लोग निवास करते हैं, ग्राम झापुल बिछिया से मनोहरपुर के बीच में जो कच्चा मार्ग है, वह आज भी जुड़ नहीं पा रहा है. बान्दरवाड़ी से मगरवाड़ा तटमा वन ग्रामों में पक्के मार्ग की बात तो की जाती है, मंत्री जी ने स्वीकृत करने की कोशिश तो की थी, लेकिन फॉरेस्ट विभाग के द्वारा एनओसी नहीं मिल पाती है.
सभापति महोदय, इसी प्रकार मेरा जहां निवास है. मैंने पत्र भी माननीय मंत्री जी को लिखा है. घुघरी उपमंडी मुख्य मार्ग से तहसील मुख्यालय तक लगभग एक-डेढ़ किलोमीटर की दूरी है, मैंने निवेदन भी किया है, मुझे मंत्री जी से भरोसा है, विश्वास है. वैस ही दानीटोला से बिछिया, जो मेरी विधान सभा का मुख्यालय है, वहां कोर्ट भी है, वहां लोगों का आवागमन बहुत ज्यादा रहता है, मंत्री जी, यह 16 किलोमीटर की दूरी है, जिसका प्राक्कलन आपके विभाग में बनकर तैयार है. हमारे क्षेत्र के लोगों और जिले के लोगों को उम्मीद थी कि इस बार हमारे मुख्य बजट में इस रोड की स्वीकृति मिलेगी, क्योंकि उस रोड में भारी वाहन चलते हैं, एकल रोड है, वहां पर अनेक दुर्घटनाएं होती ही रहती हैं. उसमें मैं यह निवेदन करना चाहता हूँ कि किसी भी प्रकार से चूंकि इस एकल मार्ग को अगर आप स्वीकृति दे देंगे, तो हम दुर्घटनाओं से बच जाएंगे. दूसरा, मैंने आपसे निवेदन किया था, पत्र भी दिया है.
सभापति महोदय, हमारे जिले की मंत्री महोदया, संपतिया जी अभी नई हैं. वह अभी सदन में नहीं हैं. बमनीटिकरवारा जो उनका गृह ग्राम पड़ता है, वहां से हृदयनगर, पदमी रामनगर, रामनगर घुघरी, घुघरी सलवाह, बमरी, अमरपुरपुर, समनापुर, गाड़ासरई राष्ट्रीय राजमार्ग से यह प्रारंभ होती है और राष्ट्रीय राजमार्ग में यह समाप्त होती है. इसको स्टेट हाइवे घोषित कर दें ताकि जो प्रकाश की व्यवस्था है और हमारे स्टेट हाइवे में जो दिशानिर्देशक सूचकांक बने हुए होते हैं, क्योंकि यह नर्मदा परिक्रमा का भी मार्ग है. अगर यह मार्ग बन जायेगा, साफ-सफाई हो जायेगी, इसका चौड़ीकरण हो जायेगा, तो हम लोगों को ज्यादा भटकना नहीं पड़ेगा. मैं निश्चित रूप से कहना चाहता हूँ कि जो ग्रामीण क्षेत्रों के अछूते रोड हैं, इसके अलावा और भी जो रोड हैं, जिसमें मुख्य रूप से जनसुविधा की दृष्टि से उनको जोड़ने का काम करें. जैसे विकासखण्ड गुगरी के अंतर्गत देवहारा सरई टोला से उसरी घुंदी जो अमरपुर जिला डिण्डौरी को जोड़ने का काम करती है, देलनदेह से बुलन्दा जिला डिण्डौरी को जोड़ने का काम करती है, कुसमी भानपुर से मसूर गुगरी जिला डिण्डौरी को जोड़ने का काम करती है. घुघरी मण्डला मुख्य मार्ग छतरपुर टोपीटोला से घुघराटोला मलवाथर विकासखंड घुघरी विधान सभा निवास जिला मण्डला को जोड़ने का काम करती है. इसी प्रकार मैं मंत्री जी का ध्यान आकर्षण कराना चाहता हूँ. एनएच 30 जबलपुर मण्डला, जो नेशनल हाइवे है, इस हाइवे में आपने भी शायद देखा है. क्योंकि अनेक बार मंत्री जी का वहां से आना-जाना रहता है. मोती नाला में रेस्ट हाऊस है, वह लोक निर्माण विभाग की भूमि है, वह पूरी तरह से जीर्णशीर्ण हो चुकी है, उसकी मरम्मत या नवीन निर्माण हो जाये. जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर पर अंजनिया हाइवे के पास बसा हुआ है, वहां भी मुख्य मार्ग पर लोक निर्माण विभाग की काफी भूमि है, वर्षों पूर्व बना भवन अब जीर्णशीर्ण हो चुका है, चिंता इस बात की है कि उस भूमि पर लोग अतिक्रमण कर रहे हैं.
सभापति महोदय, माननीय गडकरी जी मण्डला आये थे तो उन्होंने जनता के समक्ष खेद प्रकट किया था. अभी जबलपुर में गडकरी जी का बहुत बड़ा इवेंट मंत्री जी के माध्यम हुआ था, उन्होंने वहां बहुत सी सौगातें दी थीं, जिसमें उन्होंने जबलपुर- बलेरा-मण्डला से चिल्पी नेशनल हाईवे, जिसमें बहुत गड्ढे हैं, जर्जर स्थिति में है, उन्होंने इसकी घोषणा की है. मंत्री जी जब अपना वक्तव्य देंगे तो उसकी यथास्थिति क्या है, इससे भी अवगत करवायें. निश्चित रूप से हमें आपसे बहुत उम्मीदें हैं, सभापति जी आपका इशारा हो चुका है, मैं समझ गया, चूंकि हमें मंत्री जी से आशायें हैं और मुझे ही नहीं, हमारे पूरे जिले, प्रदेश को है कि वास्तव में जनहित के लिए, आज जिन मार्गों की जरूरत है, आप उन पर विचार करेंगे और उनकी स्वीकृति देने का कष्ट करेंगे, आपने बोलने का अवसर दिया, धन्यवाद.
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह)- सभापति महोदय, माननीय सदस्य ने कुछ विषय उठाये हैं, मैं, चाहूंगा कि जब मेरा उत्तर होगा, तब आप और हमारे कांग्रेस के साथीगण यहां रहेंगे तो रिफॉर्मस् पर बहुत सी बातें होंगी. एक तो नारायण जी बताना भूल गए कि उनकी अपनी विधान सभा क्षेत्र में रुपये 162 करोड़ के कार्य स्वीकृत हुए हैं, तो उन्हें एक बार हमारे मुख्यमंत्री जी को, सरकार को धन्यवाद दे देना चाहिए.
सभापति महोदय- नारायण जी, आप भी धन्यवाद दे दीजिये.
श्री राकेश सिंह- सभापति महोदय, इसके साथ उन्होंने जिस सड़क की बात की है, वह हमारे ध्यान में है. वास्तव में हमें जबलपुर से मण्डला होते हुए चिल्पी तक ही नहीं, रायपुर तक की कनेक्टिविटी मिले क्योंकि लखनादौन से रायपुर की कनेक्टिविटी पहले भी जब मैं दिल्ली में था, तब उस समय स्वीकृत हुई थी लेकिन मुझे लगा कि मण्डला हमारा ट्राइबल क्षेत्र है, छूटना नहीं चाहिए और इस दृष्टि से आग्रह करके इसे भी स्वीकृत करवाया है. यह सड़क भी जब बनेगी और रायपुर तक होगी तो निश्चित रूप से उस पूरे ट्राइबल क्षेत्र को इसका बहुत अधिक लाभ मिलने वाला है.
श्री नारायण सिंह पट्टा- सभापति महोदय, मंत्री जी ने मेरे नाम का उल्लेख किया है.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे- सभापति महोदय एक मिनट. शायद हमारे सदन के वरिष्ठ सदस्य, आदरणीय मंत्री राकेश सिंह जी को इस व्यवस्था के बारे में नहीं पता है कि वे अंत में अपने भाषण में सभी सदस्यों को उत्तर दे सकते हैं. सभी को बीच-बीच में उत्तर देने के स्थान पर, वे अति उत्साहित हैं जो काम वहां हुए हैं लेकिन काम केवल टेण्डरों तक ही सीमित हैं और भ्रष्टाचार तक सीमित हैं, यह भी मैं बताना चाहूंगा और वे अंत में अपना उत्तर प्रस्तुत कर दें.
(...व्यवधान...)
श्री रामेश्वर शर्मा- सभापति महोदय, मंत्री जी सदस्य को बता रहे हैं और सदस्य इस पर खुशी ज़ाहिर कर रहे हैं, तो इनको क्या तकलीफ है ?
(...व्यवधान...)
डॉ. सीतासरन शर्मा- ये यहां बैठकर सभी को ज्ञान देते हैं.
सभापति महोदय- कृपया सभी बैठ जायें.
(...व्यवधान...)
श्री राकेश सिंह- भईया, अब आप उपनेता प्रतिपक्ष नहीं हैं, मेरी बात सुनकर जायें. (श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे जी के सदन से बाहर जाने पर)
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे- जी, मंत्री जी ने कहा है तो सुनना ही पड़ेगा.
श्री राकेश सिंह- सभापति महोदय, सदन के विषय में, मैं, यह जानता हूं. आप कितनी बार के विधायक हैं, मुझे नहीं मालूम लेकिन मैं पार्लियामेंट में 8 वर्ष तक चीफ व्हिप रहा हूं. संवैधानिक व्यवस्थाओं को भी जानता हूं और संसदीय व्यवस्थाओं को भी जानता हूं. यह आवश्यक नहीं है कि मैं सभी का उत्तर दूं लेकिन हमारे माननीय सदस्य यहां से उत्साहित होकर जायें, इस दृष्टि से अंत में सारी बातों का जवाब दिया जाना संभव नहीं होगा इसलिए कांग्रेस के मित्रों को भी मैं बता रहा हूं कि उनके लिए क्या उपयोगी और वे अपने क्षेत्र में इसकी चर्चा कर सकते हैं.
दूसरी बात कटारे जी, जो आप टिप्पणियां करते हैं, ये हल्की होती हैं, सदन के भीतर टिप्पणियां सारगर्भित भी हो सकती हैं, हास-परिहास भी होता है लेकिन वह भी उसी संवेदना के साथ होना चाहिए कि सदन में हम कौन-सी बात कह रहे हैं, उसका क्या असर होगा, हल्की टिप्पणियों का जवाब हल्केपन से दिया जा सकता है, पर वह मेरी तासीर नहीं है लेकिन मेरा कहना केवल इतना है कि कोई भी बात कहें तो सारगर्भित कहें, आप आरोप जरूर लगायें लेकिन आरोप भी सारगर्भित हों और साथ में उसी स्तर के साथ हों, जिस स्तर का यह सदन हम मानते और महसूस करते हैं. (मेजों की थपथपाहट)
श्री नारायण सिंह पट्टा-- सभापति महोदय, मैंने अपनी बात पूरी नहीं की. (व्यवधान)...
सभापति महोदय--मेरा सभी सदस्यों से निवेदन है. चर्चा को जारी रहने दें. निरंतरता बनी रहने दें. सभी लोग बैठ जाइये. नारायण जी आपकी सारी बात आ गई है. (व्यवधान)...
श्री नारायण सिंह पट्टा-- सभापति महोदय, सभी लोगों ने कहा है अब मेरी बात आ गई है तो मैं धन्यवाद तो दे दूं. (व्यवधान)...
सभापति महोदय--परस्पर चर्चा न करें. इससे सदन का समय बर्बाद हो रहा है. नारायण जी, हेमन्त जी आप बैठ जाइए. (व्यवधान)...
श्री गोविन्द सिंह राजपूत--कटारे जी, सुनो. छोटे भाई. दो साल आप उपनेता का पद संभाल नहीं पाए. इस्तीफा दे दिया. कुछ दिन और रहते. (व्यवधान)...
सभापति महोदय-- आशीष जी आप आपकी बात प्रारंभ करें. हेमन्त जी प्लीज बैठ जाइए. काफी समय हो गया है आप बैठें. (व्यवधान)....
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे--(XXX)
सभापति महोदय-- परस्पर चर्चा में समय जा रहा है. आशीष जी अपनी बात करें. यह जो बीच में हेमन्त कटारे जी व्यक्त कर रहे हैं. यह नहीं लिखा जाए. यह रिकार्ड में नहीं लिया जाएगा. अब कुछ भी रिकार्ड में नहीं लिया जाएगा. आशीष जी आप अपनी बात प्रारंभ करें (व्यवधान)
श्री आशीष गोविन्द शर्मा-- माननीय अध्यक्ष महोदय,
श्री सोहनलाल बाल्मीक-- (XXX) (व्यवधान)....
श्री नारायण सिंह पट्टा--(XXX) (व्यवधान)....
सभापति महोदय-- अनावश्यक परस्पर चर्चा में समय जा रहा है. सभी के नाम हैं. आप सभी बैठ जाइए. सोहन जी आप अनुभवी हैं. प्लीज बैठ जाइए. आशीष जी आप अपना भाषण प्रारंभ करें. पट्टा जी आप बैठ जाइये. अब कुछ भी रिकार्ड में नहीं आ रहा है. (व्यवधान)....
श्री हेमन्त कटारे-- (XXX)
श्री नारायण सिंह पट्टा-- (XXX) (व्यवधान)....
सभापति महोदय-- आप बैठ जाइये. रिकार्ड में कुछ भी नहीं आ रहा है. यहां चर्चा हो रही है. चर्चा में सभी भाग ले रहे हैं यह तर्क-वितर्क का समय नहीं है. (व्यवधान)....
श्री नारायण सिंह पट्टा--(XXX)
सभापति महोदय-- माननीय मंत्री जी, जब बोलने के लिए खड़े हों उस समय आप धन्यवाद दे दीजिएगा. बैठें. (व्यवधान)....
श्री नारायण सिंह पट्टा--माननीय सभापति महोदय, उन्होंने यहां पर जिक्र किया है. मैं मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं. जो बात सही है, तो सही है. मुझे विश्वास और भरोसा है कि मैंने सदन में जो जिक्र किया है उन रोडों को भी स्वीकृति मिलनी चाहिए. अगर यह स्वीकृति देंगे तो मैं निश्चित रूप से उनके वक्तव्य पर धन्यवाद दूंगा.
सभापति महोदय-- धन्यवाद नारायण जी. आशीष जी आप अपना भाषण प्रारंभ करें.
श्री आशीष गोविन्द शर्मा (खातेगांव)-- सभापति महोदय, यातायात के साधनों के साथ-साथ उन साधनों का उपयोग जिन सड़कों पर किया जाता है, जिन मार्गों पर किया जाता है उनके भी दुरुस्त होने की बहुत आवश्यकता होती है. आज के दौर में सड़क यातायात पिछले दस वर्षों की तुलना में लगभग 4 गुना बढ़ा है. सरकार की आर्थिक नीतियों के फलस्वरूप आज मध्यमवर्गीय व्यक्ति भी एक कार अफोर्ड कर पा रहा है और अब तो इलेक्ट्रिक वाहन भी बड़ी संख्या में समाज में उपलब्ध हैं. जिस कारण से आने वाले समय में प्रदूषण मुक्त, ईधन मुक्त एक यातायात की सुगम व्यवस्था देखने के लिए चलेंगे. मैं आज आपके माध्यम से मध्यप्रदेश सरकार में माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी हमारे लोक निर्माण विभाग के अत्यंत वरिष्ठ मंत्री जिन्होंने केन्द्र में भी एक सांसद के रूप में लोकसभा क्षेत्र के साथ-साथ मध्यप्रदेश के विकास की चिंता की है ऐसे आदरणीय राकेश सिंह जी, जिन्होंने लोक निर्माण विभाग संभालने के बाद कई सारे नवाचार किये हैं. चूंकि पूर्व वक्ता बहुत सारी चीजें रख चुके हैं. माननीय मंत्री जी भी बोलेंगे. रिपिटेशन नहीं हो इसके लिए मैं कहना चाहता हूं कि आपके माध्यम से मध्यप्रदेश के हाइवे पर, सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं के लिए जो टोल फ्री नम्बर 1099, 108 और 100 यह जो हमारे तीन टोल फ्री नम्बर हैं इनके माध्यम से हाईवेज़ के आसपास एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई है. जगह-जगह पर इन नम्बरों को डिसप्ले भी कराया गया है. दुर्घटना होने की स्थिति में इन गाडि़यों के माध्यम से मरीजों की लोकेशन को ट्रेक करते हुए
2.35 बजे {सभापति महोदया (श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकी) पीठासीन हुईं}
श्री आशीष गोविन्द शर्मा -- दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की चिंता करते हुए निकटस्थ अस्पताल में उपचार की व्यवस्था सरकार ने की है. एक, रोड असेट मैनेजमेंट सिस्टम है. जिसमें पुलों और सड़कों का वैज्ञानिक विधि से सर्वेक्षण कर समस्त जानकारियां नक्शे पर प्रदर्शित की जाती हैं. कई बार विभिन्न विभागों के द्वारा विभिन्न निर्माण कार्य किए जाते हैं. कई बार उनके निर्माण कार्यों की लोकेशन में उनके स्थान के चयन में विरोधाभाष हो जाता है. इसलिए मध्यप्रदेश में होने वाले समस्त निर्माण कार्यों की जानकारी एक सिस्टम के माध्यम से विभाग के पोर्टल पर अपलोड की गई है. इन सब जानकारियों के एकजुट होने के पश्चात् नवीन निर्माण की योजनाएं लोक निर्माण विभाग के द्वारा बनाई जा रही हैं. इससे सड़क, पुल, पुलिया और इमारतों के निर्माण में न सिर्फ आसानी होगी बल्कि भविष्य को ध्यान में रखकर जगह की उपलब्धता के आधार पर योजनाएं बनाई जा सकेंगी. पीएम गतिशक्ति पोर्टल जो कि केन्द्र सरकार का है. यह एक अत्यावश्यक पोर्टल है. एक जीआईएस आधारित सिस्टम है. जिसका उपयोग करके वर्तमान में सभी निर्माण एजेंसियां अपने वर्तमान में चल रहे निर्माण कार्यों और भविष्य के निर्माण कार्यों को एक ही नक्शे पर दर्ज कराती हैं. इस पोर्टल में अपना निर्माण कार्य और भविष्य की योजनाएं दर्ज होने के पश्चात् साथ ही साथ मध्यप्रदेश के जंगलों, पहाड़ों, नदियों, शहरों, गांवों का इस पोर्टल में विवरण होता है. इससे आगामी समय में चाहे फोरलेन या सिक्सलेन सड़क बनाना हो, पुल, पुलिया, बिल्डिंग बनाना हो. उनके निर्माण में और नक्शे बनाने में विभाग को सुविधा होती है. भास्कराचार्य संस्थान के माध्यम से लगभग 77268 किलोमीटर सड़कों को इस पोर्टल पर मेप किया जा चुका है. यह नवाचार माननीय मंत्री जी के समय में हुआ है. लोकपथ मोबाइल एप. आजकल हम अपनी यात्रा के लिए प्रदेश के अन्दर या बाहर भी गूगल मेप पर निर्भर हो गए हैं. बड़े महानगरों में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते समय ड्रायवर उसी मेप का उपयोग करता है. मध्यप्रदेश में लोकपथ मोबाइल एप के माध्यम से आम जनता क्षतिग्रस्त सड़कों की रिपोर्टिंग कर चार दिनों में सड़कों की मरम्मत करवा सकती है. यह नवाचार माननीय मंत्री जी ने किया है. चूंकि सड़कें खराब होती हैं, गढ्डे हो जाते हैं बाहरी वाहनों का भी दबाव रहता है. जब आम नागरिक को उस सड़क पर चलने में असुविधा महसूस होती है तो वह इस लोकपथ एप के माध्यम से शिकायत दर्ज करवा सकता है. इसमें जो रिस्पॉन्स टाइम है वह बहुत कम है. सरकार का प्रयास रहता है कि कम से कम समय में उस सड़क को रिपेयर कर दिया जाए. आप हम लोग कई बार इंदौर-भोपाल की सड़क पर यात्रा करते ही हैं. आप देखते होंगे कि छोटे-छोटे गड्ढे भी कम्पनी के लोग रिपेयर करते हुए पाए जाते हैं. इसमें पिछले एक वर्ष में लगभग 11 हजार से ज्यादा शिकायतें आईं. जिसमें से 95 प्रतिशत शिकायतों का निराकरण किया गया. खासकर बारिश के मौसम में डामर की सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं. उस समय इस लोकपथ एप के माध्यम से रिपेयरिंग का काम विभाग करता है. आज के समय में लोकपथ 2.0 के माध्यम से, वैसे यह इस विभाग का विषय नहीं है, लेकिन मध्यप्रदेश के पुलिस विभाग ने भी कई स्थानों पर ब्लैक स्पॉट के विषय में पुरानी दुर्घटनाओं का हवाला देते हुए साइन बोर्ड लगाए हैं. लेकिन लोकपथ 2.0 के माध्यम से आज उस रोड पर ब्लैक स्पॉट की जानकारी, टोल की संख्या, टोल की राशि, आपातकालीन सुविधा (SOS) एवं रियल टाइम निर्माण उस रोड पर चल रहा है उसकी जानकारी भी मिलती है. विभागीय जीआईएस पोर्टल में बजट मॉडयूल तैयार किया गया है. सड़कों के नाम में कई बार भ्रम हो जाता है एक जनप्रतिनिधि बजट में उसी सड़क को देता है और कोई दूसरा जनप्रतिनिधि भी उसी सड़क को अन्य नाम से दे देता है तो इससे विभाग में कई बार कन्फ्यूजन होता है. मेरे विधान सभा क्षेत्र की भी एक सड़क दो योजनाओं में स्वीकृत हो गई थी. इस स्थिति को दूर करने के लिए एक सड़क एक ही बार स्वीकृत हो इसलिए बजट मॉडयूल तैयार किया गया है. इसके माध्यम से अब सड़कों को चिह्नित करके पता लगाया जाता है कि यह सड़क अन्य किसी योजना में पहले कभी स्वीकृत तो नहीं हुई है. अन्य किसी योजना में तो नहीं बननी है. नई तकनीकों का प्रयोग मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग कर रहा है, जिसके बारे में गौरव जी ने बताया है. माइक्रो सरफेसिंग ग्लास ग्रिड एवं जियो ग्रिड तकनीक से सड़क निर्माण अल्ट्राहाइड परफॉर्मेंस, फाइबर री-इन्फोर्स कान्क्रीट, ग्लास फाइबर री- इन्फोर्स पॉलीमर, कई बार समाचार पत्रों में खबर छपती है कि दूसरी तरह के सरिये लगाये जा रहे हैं. पहले लोहे के सरियों का उपयोग विभाग करता था लेकिन अब नई धातु का उपयोग किया जा रहा है जिसमें जंग नहीं लगता और महीनों तक यह सीमेंट कान्क्रीट निर्माण चलता है. प्लास्टिक इस समय की एक सबसे बड़ी समस्या है और उस प्लास्टिक का भी सड़क बनाने में उपयोग करने का काम लोक निर्माण विभाग कर रहा है. अब वेस्ट प्लास्टिक से सड़क बनाई जा रही है और यह निर्माण अच्छी गुणवत्ता का हो यह सबसे बड़ी चिंता होती है. सड़क बनती है एक बार पैसा लगता है, बिल्डिंग बनती है पचासों वर्षों तक वह सेवा देने लायक रहनी चाहिए, इसलिए अब विभाग ने चलित प्रयोग शालाएं प्रारम्भ की हैं और अब डामर मध्यप्रदेश के लोक निर्माण विभाग द्वारा भारतीय कंपनियों इंडियन ऑयल, हिन्दुतान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम से ही लिया जा रहा है जो कि अच्छी क्वॉलिटी का है और इस कारण से जो डामर की शिकायतें बीच में आती थीं वह भी अब आना कम होंगी. एक सम्भाग के अधिकारियों से दूसरे संभाग के निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण कराना. औचक निरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके माध्यम से हम गड़बडी को बिना सामने वाले को पता लगे पकड़ सकते हैं उसका औचक रूप से निरीक्षण करके, यह काम भी हमारा लोक निर्माण विभाग कर रहा है. साथ ही साथ जो सड़कें निर्मित की जा रही हैं इसके आसपास कई बार मुरुम या भरती भरने के लिए जो मटेरियल उठाया जाता है वहां पर एक बड़ा सा गड्ढा हो जाता है उसको तालाब के रूप में बनाने का काम लोक कल्याण सरोवर के रूप में विभाग कर रहा है. मध्यप्रदेश में हाईवेज के आसपास लगभग 506 लोक कल्याण सरोवर बन चुके हैं.
सभापति महोदया, पिछली बार अशासकीय संकल्प के माध्यम से मैंने विधान सभा में इसे लगाया था तो आप सबने पारित किया था कि सड़कों के आसपास वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाए. सरकार ने इसको न सिर्फ संज्ञान में लिया बल्कि अब नई बनने वाली सड़कों में हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जा रहा है. पर्यावरण के लिए हम सबकी चिंता है इसलिए अब विभाग पेड़ों को काटने की बजाय बड़े पेड़ों को अन्य जगह शिफ्ट करने का काम कर रहा है और मध्यप्रदेश में लगभग 2 लाख के आसपास पौधारोपण सड़कों के किनारे किया गया है. साथ ही साथ मैं एक बात की ओर माननीय का ध्यान अवश्य आकर्षित करना चाहता हूं.
सभापति महोदया -- आशीष जी, अब समाप्त करें.
श्री आशीष गोविन्द शर्मा -- सभापति महोदया, बस एक-दो मिनट और लूंगा मेरे क्षेत्र की कुछ बात मैं रख दूं. हमारे यहां नर्मदा परिक्रमा पथ के लिए आपने सड़कें प्रदान की हैं. प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में पदयात्री नर्मदा जी की परिक्रमा करने के लिए जाते हैं. मध्यप्रदेश की सरकार लगभग साढ़े आठ सौ करोड़ की लागत से उस पथ को बना रही है लेकिन जितनी भी सड़कें अभी बची हुई हैं आप उनको देने की कृपा करेंगे.
सभापति महोदया, सिंहस्थ एक बहुत महत्वपूर्ण हमारा आने वाले समय में आस्था का महाकुम्भ उज्जैन में लगने वाला है तो उज्जैन से लेकर नेमावर तक नर्मदा के किनारे ओंकारेश्वर को कव्हर करते हुए आप यात्री प्रतीक्षालयों और यात्री निवासों की व्यवस्था कराने का अगर काम करेंगे तो बड़ी कृपा होगी. सांकल घाट जो कि हाट पीपल्या तहसील का एक गांव है वहां तक आपने पीडब्ल्यूडी से एक सड़क दी है अगर वह पानीगांव तक आ जाएगी तो दो तहसीलों को जोड़ने के लिए एक अच्छी सड़क हमको प्राप्त होगी. साथ ही साथ जितने रेस्ट हाऊस हमारे विधान सभा क्षेत्रों में पूरे प्रदेश भर में हैं उनके रिनोवेशन के लिए भी आप कुछ राशि स्वीकृत करेंगे तो अच्छा होगा. मेरे विधान सभा क्षेत्र में ग्राम राजोर में नर्मदा नदी का एक पुल बनने से लगभग 50 गांवों के लोगों को खण्डवा, हरसूद, हरदा की दूरी कम हो जाएगी इसलिए उसका भी आप आने वाले समय में सर्वे कराकर स्वीकृति देने की कृपा करेंगे ऐसी आपसे आशा है.
सभापति महोदया, माननीय मंत्री जी को मैं धन्यवाद देता हूं कि आज से सदियों और युगों पहले भी जब लंका पर माता सीता की खोज के लिए राम जी की सेना का उस पार जाना आवश्यक था तब इंजीनियरिंग के कौशल से नल, नील जैसे हजारों, लाखों वानरों ने मात्र 5 दिन में समुद्र पर सेतु बनाने का काम किया था. भगवान राम तो सामर्थ्यवान थे. वह पूरी सेना को बगैर रोड के और सेतु के लंका ले जा सकते थे. वहीं से रावण का वध कर सकते थे लेकिन उस समय भी वानरों के कौशल ने समुद्र के पार जाने के लिए, दूरियों को पाटने लिए पुल का निर्माण किया. आज भी यह पुल और सड़कें न सिर्फ हमें भौतिक रूप से एकदूसरे से जोड़ती हैं बल्कि यह हमारी प्रगति की भी सहायक हैं. हमारी प्रगति में इनका बहुत बड़ा हिस्सा है और मुझे इस बात का गर्व है कि जिस मध्यप्रदेश की पहचान कभी गढ्ढे वाली सड़कों के रूप में थी, जहां मरीज इलाज के अभाव में रास्ते में सफर करते करते हास्पीटल में पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते थे. आज वहां पर द्रुत गति के वाहन चल रहे हैं, 140 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने योग्य वाहनों की हमारी सड़के हैं. और इन सड़कों पर हमारा पूरा सदन, सांसद, विधायक और जनप्रतिनिधि सभी चलते हैं ,इसलिये जो अच्छा काम हुआ हो उसकी तारीफ करना ही चाहिये.
माननीय सभापति महोद, यह विकास के पथ हैं और यह विकास के पथ ही मध्यप्रदेश को और भारत को एक विकसित राष्ट्र और एक विकसित राज्य के रूप में आने वाले समय में पहचान दिलायेंगे. माननीय सभापति महोदय, आपने लोक निर्माण विभाग की मांग पर मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया इसके लिये आपको बहुत बहुत धन्यवाद.
श्री भगवानदास सबनानी -- माननीय सभापति महोदय, मेरे आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि सड़क सुरक्षा समिति जिसमे प्रावधान है उसमें विधायकों को भी बुलाया जाये, ऐसा सुनिश्चित हो जाये.
मंत्री, लोक निर्माण विभाग(श्री राकेश सिंह) -- सभापति महोदय, जिला स्तरीय जो सड़क सुरक्षा समिति होती है उसमें माननीय विधायकों को आमंत्रित किया जाता है.
डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह(अमरपाटन) -- माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे लोक निर्माण विभाग की मांग पर बोलने का मौका दिया है . मैं आपको बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं.
माननीय सभापति महोदय, मांग संख्या 24 के विरोध में बोलने के लिये मैं खड़ा हूं और इसलिये कि यह समावेशी नहीं है. जैसा कि मंत्री जी दावा करते हैं कि पूरे प्रदेश में बिना भेदभाव के सबको सड़कें दी गईं, तमाम योजनायें दी गईं और सभापति महोदय मैं इसमें कुछ सुझाव भी दूंगा. अगर उनका समावेश आप कर सकें तो बेहतर होगा. मुझे मालूम है कि इस बजट में आप नहीं करेंगे लेकिन सप्लीमेन्टरी बजट आगे जब आयेगा, आगे के बजट आयेंगे शायद तब तक मंत्री जी पसीज जाये या विचार करें, ऐसी मैं आशा रखता हूं.
माननीय सभापति महोदय, यह विभाग केवल सड़क-पुल नहीं बनाता है, यह तय करता है कि राज्य की अर्थ व्यवस्था किस रफ्तार से चलेगी या रूकी रहेगी. नागरिक शाम को अपने घर में सुरक्षित पहुंचेंगे या कोई दुर्घटना के शिकार होंगे. मेरा ईशारा है (Road Safety) जीवन रक्षक की तरफ. सरकार और सत्ता पक्ष के माननीय विधायक बार बार 2003 में दिग्विजय सिंह जी की सरकार का हवाला देते हैं. दिग्विजय सिंह जी..क्या कहें अंग्रेजी में बीटिंग बॉय कहते हैं. क्या है. और दिल्ली में जवाहर लाल जी नेहरू यहां पर दिग्विजय सिंह जी. अरे 2003-2004 की परिस्थितियों को समझिये, मैं स्वीकार करता हूं. बहुत सारी रोडें खराब थीं लेकिन इनका जो आरोप है वह अर्द्धसत्य है, पूरा सही नहीं है, मैं ऐसा मानता हूं.
माननीय सभापति महोदय, आज बहुत सारे साधन उपलब्ध हैं, बहुत से नये तरीके फार्मेट उपलब्ध हैं जिनके माध्यम से हमारी रोडें बनतीं हैं, फाईनेंस आते हैं, पहले राज्य का बजट ही बहुत कम होता था. मैं समझता हूं कि अगर दिग्विजय सिंह जी के समय का पूछना चाहते हैं तो लगभग 23 हजार करोड़ का था लेकिन अगर आप दिग्विजय सिंह जी का पूछना चाहते हैं तो मैं थोड़ा और आगे और पीछे का बता दूं. माननीय पटवा जी के जमाने में लगभग 10 हजार करोड़ का बजट था उसके बाद शिवराज जी आये तो वर्ष 2007-08, और 2008-09 का बजट 40 हजार करोड़ का था. आज आपका बजट माननीय डॉ.मोहन यादव जी की सरकार का बजट 4 लाख 38 हजार करोड़ है. लेकिन क्या इसी आकार के कारण, क्या यह कोई पेमाना है नापने के लिये, कि कौन सी सरकारें अच्छी थीं, कौन ज्यादा योग्य, कौन ज्यादा बुद्धीमान मुख्यमंत्री थे, सरकारें थीं, अगर यही पेमाना है तो आप लोग फिर स्वयं पटवा जी के ऊपर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं, शिवराज जी के ऊपर प्रश्नचिह्न लगा रहे है उनका क्यों था इतना कम 40 हजार करोड़ के आसपास. सभापति महोदय, वर्तमान में जो परिस्थितियां देश में बन रही हैं आर्थिक उदारीकरण के कारण अर्थ व्यवस्था का जो आकार बढ़ रहा है, नई टेक्नानालॉजी आ रही है. नई टेक्नालाजी आ रही है, संसाधन बढ़ रहे हैं. उदारीकरण के पूर्व तो आप विदेश से कुछ नहीं ला सकते थे. आज तमाम राशियां,धनराशियां आ रही हैं. वर्ल्ड बैंक हैं, एडीबी है, तमारी सारी इंस्टीट्यूशेंस हैं, जो फायनेंस करती हैं और यह कांसेप्ट जो है, टोल रोड्स का, पीपीपी, बीओटी और एनयुटी मॉडल जो एक नया विकसित हुआ है, ऐसी अवधारणाएं शुरुआती स्तर पर तब थीं, लेकिन आज उनका स्वररुप पूरी तरह से विस्तृत है, जिससे आपको रोड बनाने में लाभ, सहायता मिल रही है. यह भी सत्य है कि 2003 में यह सिस्टम प्लेस में आ गया था, शुरुआती दौर था. दिग्विजय सिंह जी के समय एडीबी से पहला फेज जब शुरु हुआ, तो बहुत सारी रोड्स पहले फेज में बनी थीं, तब से शुरुआत हुई अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं के द्वारा वित्त पोषण राज्य सरकारों को. पहले राज्य सरकार को बाहर से कोई पैसा नहीं मिलता था. तब यह इसकी शुरुआत हुई और वह जो सड़कें बनीं, बहुत सारी बनीं. हमारे यहां रीवा से शहडोल जो राज्य मार्ग है, अब राष्ट्रीय राजमार्ग हो गया है. वह इसी योजना से बना था. सतना से मैहर और आगे बरई. वह कटनी तक जाना था, बाद में बाबूलाल गौर जी आये थे. उसका उद्घाटन करने के लिये आये था. मैं भी उस कार्यक्रम में था. तो वह सब उनके जमाने में यह शुरुआत हो गई थी. अब प्रश्न यह नहीं है कि पहले क्या था और आज क्या है. कहते हो आप कि रात थी, अरे रात तो गई. कहते हो सुबह आई है, तब रोशनी है. रोशनी का हिसाब आप दोगे कि हम देंगे, कौन देगा. जनता ने आपको वहां भेजा. उनकी सुविधाओं में विस्तार करने के लिये हर तरह की, उसका हिसाब तो आप ही को देना पड़ेगा. इतनी बड़ी धनराशि, इतना बड़ा भारी भरकम ताम झाम आपकी रोड्स चल कितना रही हैं. यह बताइये. सबसे बड़ा प्रश्न यह है. इस बात का प्रश्न नहीं है कि लम्बाई कितनी बनी है, उसकी गुणवत्ता क्या है. मैं राकेश जी से कहना चाहूंगा कि अभी 3 दिन पहले ही आपके राष्ट्रीय राजमार्ग का जो फ्लाई ओवर है, कितने साल पहले बना था. 4-5 साल पहले. ध्वस्त हो गया, तमाम डायवर्ट होकर ट्रेफिक पाटन की तरफ से जा रहा है. जिसे 40-50 साल चलना चाहिये था, तो यह तो हाल है आपके निर्माण का और आपकी पहली, दूसरी बारिश में तमाम रोड्स धंस जाती हैं. गड्ढा सड़क से ज्यादा टिकाऊ है, यह प्राकृतिक आपदा नहीं, यह मानव निर्मित विफलता है. भोपाल जबलपुर की मैंने नेशनल हाईवे 45 की बात कह दी. ग्वालियर में पिछले वर्ष की बात है. आप ही के द्वारा बनाये गये रोड में वहां तो गड्ढे होते थे हम लोगों के शासन के समय. वहां तो बड़े भारी मैनहोल हो गये हैं. वह गाड़ी आधी घुस गई थी, अगर आपको याद हो, यह बड़ी खबर आई थी चारों तरफ आधी गाड़ी, वह परिवार बमुश्किल से सुरक्षित बचा था. यह तो हाल आपके समय का है. आप ही के जबलपुर में एक निर्माणाधीन पुल था, वह भी ध्वस्त हो गया था, धंस, गिर गया था, दो लोग मरे थे. यह तो आपके संज्ञान में होगा ही. सतना का मामला आपके विभाग से संबंधित नहीं है. रोड तो है. वह प्रहलाद सिंह जी के विभाग से संबंधित है. आप ही के एक केबिनेट के मंत्री फुटबाल जैसे वह रोड पर मारती हैं , तो डामर सब उछलकर इधर उधर हो जाता है. यह है असली कहानी और यह कोई हम नहीं गये थे करने के लिये, आप ही की विभाग की, आपकी साथी हैं. वह गई थीं. जैसा मैंने कहा कि आप किलोमीटर गिन रहे हो, फोटो, शिलान्यास गिन रहे हो. लेकिन गिनती सड़क की उम्र और गुणवत्ता से होनी चाहिये. सबसे महत्वपूर्ण है जवाबदेही. ठेकेदार बदल जाता है, इंजीनियर ट्रांसफर हो जाता है, लेकिन नुकसान जनता उठाती है. आपका डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड आपका कागज पर है, जमीन पर नहीं है. सड़कें बार-बार बनती हैं और बार-बार टूटती हैं. यह केवल आवश्यकता है या सार्वजनिक धन की यह बर्बादी है. इस पर आपको विचार करना पड़ेगा. कितनी सड़कों पर ठेकेदारों से रिकवरी की गयी, कितने इंजीनियरों के विरूद्ध आपने कार्यवाही की, आपने व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की या नहीं ?
अब दखिये, मैं तारीफ तो नहीं करूंगा, जहां करना होगी तो अवश्य करूंगा. मैं आपको आईना दिखा रहा हूं, यह मेरा काम है. अब जनता ने मुझे यहां भेजा है और लाड़ली बहनों ने आपको वहां भेज दिया है. अगर वह ना होती तो हम लोग उधर होते और आप इधर होते, यह बात सही है. कितनी परियोजनाओं का स्वतंत्र थर्ड पार्टी ऑडिट कराया है. आप इस पर जरूर ध्यान दें, अभी तक तो शून्य है. दोष मौसम का नहीं, प्रबंधन और आपकी नीयत का है, सवाल यह उठता है.
सभापति महोदया- मैं लोक निर्माण विभाग के बारे में ज्यादा नहीं बोलूंगा. बहुत से लोगों ने अपनी बात रख दी है. मैं. इस विभाग की मांगों पर अपना कुछ सुझाव और विचार रखना चाहता हूं. पहला तो यह है कि इंडिपेंड पॉलिटी ऑडिट अनिवार्य कर दीजिये. इससे पता लगेगा कि आप कहां खड़े हो, क्या हो रहा है. डिफेक्ट लायबिलिटी आने पर भुगतान नहीं, ब्लैक लिस्टिंग हो. आप भुगतान भर ही ना रोकिये, ब्लैक लिस्टिंग भी करिये. सड़कों पर आप मेंटेनेंस को अनिवार्य बनाइये. मैंने एक दिन सीएजी रिपोर्ट देखी, यह टोल बेसियर्स की मैं बात कर रहा हूं. टोल बेरियर्स की कार्यप्रणाली बहुत अच्छी नहीं रही. समय-समय पर तमाम कहानियां उसकी आती रही हैं. सीएजी की रिपोर्ट में यह आया है कि टोल बेरियर्स ऐसे हैं, जहां पूरी वसूली कर ली गयी है, जो उस पर धनराशि खर्च हुई थी. वह वापस आ गयी है लेकिन शायद नियम नहीं है, ऐसा मेरे संज्ञान में है. वह टोल वसूली अभी भी हो रही है.
सभापति महोदया, आज यह समस्या नहीं है कि हम सड़कें नहीं बना रहे हैं, सड़कें आप बना रहे हो. समस्या यह है कि हम अस्थायी सड़कें बना रहे हैं, जो जल्दी खराब हो रही हैं. यह सब स्थायी भ्रष्टाचार है, उसमें बेईमानी भी है. हमारे महेश जी ने किसी बड़े अधिकारी का उदाहरण दिया, अब मैं नाम नहीं लूंगा. सड़क अगर बार-बार टूटे तो समझिये कि कहीं ना कहीं इमानदारी पहले ही टूट चुकी है. जैसा कि मैंने कहा कि मैं और भी विभागों पर बोलूंगा.
सभापति महोदया, यदि अनुमति हो और राकेश सिंह जी इधर गौर फरमायें थोड़ा सा संजिदा होकर.
सभापति महोदया- आप थोड़ा सा संक्षिप्त करें. आपको बोलते हुए 10 मिनट से अधिक हो गया है. आप सिर्फ क्षेत्र के सुझाव दे दीजिये.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह- मेरे यहां एक, मैंने लिखकर भी आपको दिया है कि अहिरगांव नेशनल हाईवे से अहिरगांव की तरफ एक रोड निकलती है और वह जाकर जिन्ना में दूसरे नेशनल हाईवे पर मिल जाती है. यह रोड लगभग 15 किलोमीटर की होगी, प्रधान मंत्री सड़क योजना से बनी थी. इसके आसपास 30-35 गांव हैं. हजारों की संख्या में लोग वहां ट्रेवल करते हैं. वहां पर घनत्व बहुत ज्यादा है और रोड पर दबाव काफी ज्यादा है तो रोड खराब हो जाती है. अगर आप अपने कार्पोरेशन से या विभाग से इसे बनवायें तो बहुत अच्छा होगा. दूसरी बात मैं कहना चाह रहा था वह मार्कंडेय घाट की पुरानी बात है. मैं उसको पुन: दोहरा देता हूं. आपको भ्रम है कि वह बाणसागर से पुल जायेगा, बाणसागर से नहीं जायेगा. बाणसागर में जो उसका स्त्रोत है सोन नदी है और इधर से छोटी महानदी कटनी की तरफ से आती है. यह ब्रिज छोटी महानदी के ऊपर है, जहां मार्कंडेय घाट है वहां छोटी महानदी है. उसके बाद में जानता हूं कि वहां पर बैक वॉटर आ जाता है तो आपको वहां बंडिंग करनी पड़ेगी. ऐसा नहीं है कि 500 करोड़ रूपये खर्च होंगे. आपके 500 करोड़ रूपये खर्च नहीं होने वाले हैं, कम होंगे. इसका आप फिर से थोड़ा सा सर्वे करवा लीजिये तो बड़ी मेहरबानी होगी. तीसरी बात मैं यह कहना चाह रहा था कि एक मुद्दा बार-बार आता है, मैंने ध्यानाकर्षण लगाया, मैंने शून्यकाल में भी यह मामला दिया और आपके यहां से जो जवाब आया. वह बड़ा हैरान करने वाला है. मुझे समझ में नहीं आता कि आजकल अधिकारियों की क्या मानसिकता हो गयी है. यह मैं बताता हूं, पूर्व में मेरे द्वारा लगाया गया 5 दिसम्बर, 2025 के प्रश्न क्रमांक-114, इसमें आपने जवाब भी दिया था और मैंने वहां पर दुर्घटना होने की बात कही थी और मार्ग पहाड़ी पर बहुत कम चौड़ी होने की बात कही थी. आपका उत्तर तो यह था कि यह कहना गलत है कि मार्ग सक्रिय होने के कारण दुर्घटना एक्सीडेंट होते हैं. यह आपका जवाब है ध्यानाकर्षण में भी वैसा ही जवाब आया, लेकिन वास्तविकता क्या है, मेरा निर्वाचन क्षेत्र है, दो ब्लाक हैं, बीच का वह रास्ता है, दोनों ब्लाकों को जोड़ता है, मैं अक्सर उस रोड से जाता हूं, वहां पर अगर दो ट्रक आ जाएं तो 5-7 कि.मी. की रफ्तार से ही चलते हैं वरना कोई न कोई आपस में एक्सीडेंट हो जाता है. ट्रक निकलता है और कार आती है, कार वाला वहां पर भयभीत रहता है कि कहीं एक्सीडेंट न हो जाय. वहीं के नीचे के गांव गिलहरी के सरपंच नरोत्तम शर्मा वह अक्सर टहलने जाया करते थे. एक दिन उनको वहां पर किसी ट्रक ने कुचल दिया. आप कहते हैं कि वहां पर एक्सीडेंट नहीं हुए. थाने में जाकर दरयाफ्त कर लीजिए, अगर आपके अधिकारी जानकारी नहीं लेते हैं तो थाने से जानकारी बुलवा लीजिए. आए दिन वहां एक्सीडेंट होते हैं परन्तु इस तरह का जवाब?
देखिए, इसमें आपको जांच करानी पड़ेगी. अगर मैं गलत हूं. मैं कोई दावे नहीं करता हूं. मैं कोई कसम खाने का आदी नहीं हूं. मैंने कभी कसम खाई नहीं. लेकिन मैं कहता हूं कि अगर मैं गलत हूं तो आप जो सजा कहेंगे मैं भुगतने को तैयार हूं. क्षमा तो मांग ही लूंगा. लेकिन अगर यह गलत उत्तर आपके पास में आ रहा है, विधान सभा को गुमराह किया जा रहा है, यह बहुत बड़ा अपराध है, यह छोटा अपराध नहीं है. अगर यही इस तरह से संसदीय व्यवस्था चले और आप तो चीफ व्हिप रहे हो लोकसभा के तो आपको तो और संजीदा और गंभीर ऐसे मामलों में होना चाहिए. आप कार्यवाही करें, आप दिखवा लें और चलें, बड़ी कृपा होगी अगर आप हमारे क्षेत्र में आ जायं, हमारे साथ चलें, मैं भी धन्य हो जाऊंगा कि लोक निर्माण मंत्री जी हमारे और आगे आगे क्या होगा, देखेंगे, जमाना देखेगा. हमारे साथ हैं, उनको क्षेत्र में लाए हैं तो उसमें आप थोड़ा-सा गंभीर हो जाइए. वह बहुत जरूरी है.
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) - आपने आमंत्रित किया है, धन्यवाद. वैसे भी आपकी विधान सभा क्षेत्र में 221 करोड़ रुपये के कार्य विभाग ने दिये हैं तो निश्चित रूप से भूमि पूजन लोकार्पण के लिए हम आपके क्षेत्र में जरूर आएंगे और जहां हमारे माननीय डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह जी बहुत गंभीर और विद्वान विधायक हैं, वरिष्ठ हैं तो आपने ध्यान आकृष्ट किया है, निश्चित रूप से हम उसका भी परीक्षण करेंगे कि अगर वहां पर एक्सीडेंट होते हैं तो उसका रास्ता क्या है उस पर भी विचार करेंगे. वैसे तो यह आसंदी का विषय है. मुझे लगता है कि जब उन्होंने शुरुआत की है तो उन्होंने मांग संख्या 19 पर बात रखी है, यह मांग संख्या 24 है. यह बहुत बड़ा विषय नहीं है उसको दुरुस्त कर दिया जाय.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह - उसको दुरुस्त करा दिया जाय.
सभापति महोदया - यह मांग संख्या 24 लोक निर्माण विभाग है.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह - यह जो आपने आंकड़ा दिया है, आपने बोल तो दिया है और कार्यवाही में भी आ गया है लेकिन मुझे सूची तो दे दीजिए. मैं तो खोजता रह गया कि कहां काम है, दो रोड हैं लेकिन उनकी बहुत पुराने समय से मांग है और वह भी सीमेंट फैक्ट्री को जोड़ती हैं, वह रोड उनकी खदानों को जोड़ती हैं जो आपने मंजूर की, बाकी कोई रोड मंजूर नहीं हैं. यह भी आपके पास में गलत जानकारी है तो आप कम से कम यह देखें. मार्कण्डेय घाट वाली बात हो गई. चौथी चीज है, हमारे विन्ध्य के इलाके में यह अंचल है, यह बहुत पिछड़ा हुआ है और मार्गों का बड़ा अभाव है. खासकर राजमार्ग, राष्ट्रीय राजमार्ग क्योंकि राजमार्ग हमारे यहां पहले दो-दो थे, परन्तु बाण सागर बांध के कारण वह बंद कर दिये गये हैं तो क्षेत्र की जनता का हमारा हक बनता है कि कोई न कोई बड़ी सड़क मिलनी चाहिए. मैं आपसे गुजारिश करूंगा राकेश सिंह जी, आप गडकरी जी से बात करें, केन्द्र से संपर्क करें और राष्ट्रीय राजमार्ग एनएचएआई से एक मार्ग निकलना चाहिए और मुफीद होगा, बहुत उपयोगी होगा, जबलपुर कटनी आता ही है. वह सड़क कटनी से केमोर, केमोर से रामनगर, रामनगर से सीधी चली जाएगी. सीधी के पहले ही चुरहट के पास राजमार्ग से मिल जाती है और यह सीधे सिंगरौली तक, उत्तरप्रदेश तक चली जाएगी. यह राष्ट्रीय राजमार्ग बन जाती है तो उस इलाके का जो विकास का पैमाना है वह बढ़ेगा और विकास की रोशनी और ज्यादा तीव्रता से फैलेगी. रामनगर और अमरपाटन दोनों हमारे सबडिवीजन हैं, दो दो कमरे के रेस्ट हाउस हैं.
श्री राकेश सिंह - अमरपाटन से मार्कण्डेय मार्ग की आपने बात की है?
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह - नहीं, वह तो अलग विषय है. यह एनएचएआई का विषय है, जैसा मैंने आपसे कहा है.
श्री राकेश सिंह - वैसे यह भी आपका स्वीकृत है अमरपाटन से मार्कण्डेय मार्ग और यह लगभग 157 करोड़ रुपये का है. यह 35 कि.मी. लम्बा है.
सभापति महोदया - अब तो आपका रोड भी आ गया है.
श्री राकेश सिंह - यह सारा आपको रिकॉर्ड पर अभी उपलब्ध हो जाएगा.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह - यह जरूर दे दीजिए.
श्री राकेश सिंह - आप एक बार बजट देख लेते तो अच्छा होता.
डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह -- सभापति महोदय, बजट मैंने देखा है. अब मुझे मालूम नहीं है. बहरहाल, हमारे यहां 2-2 कमरे के रेस्टहाउस हैं. दोनों सब-डिवीजन हैं लेकिन वह नाकाफी हैं और अमरपाटन में तो बाहर के बहुत से लोग भी देवी दर्शन के लिए आते हैं. उससे मैहर लगा हुआ है. मेरा निवेदन है कि आप कम से कम एक नया रेस्टहाउस हमें दे दीजिए और मैं आपके माध्यम से गुजारिश करूंगा कि आपने इस पर जो बजट दिया है, कृपया, इस पर पुनर्विचार करें. मैंने कुछ सुझाव दिये हैं और भी कुछ सुझाव हमारे साथियों की तरफ से आए हैं, उन सुझावों को अगर आप शामिल करें, तो बड़ी कृपा होगी. धन्यवाद. जय हिन्द.
सभापति महोदया -- आपको बहुत-बहुत धन्यवाद. लोक निर्माण विभाग के लिए निर्धारित समय 1 घंटा 30 मिनट का है. अभी तक 2 घंटे का समय हो गया है, तो अभी जितने भी माननीय सदस्य आगे अपनी बात रखेंगे, तो आप समयसीमा का ध्यान जरूर ध्यान रखें, ताकि सभी की बात आ जाए. सभी माननीयों को 2 से 5 मिनट में अपनी बात पूरी करना है. अगले जितने भी माननीय सदस्य अपनी बात रखेंगे, कृपया समयसीमा का ध्यान रखें.
श्री विक्रम सिंह जी - (अनुपस्थित)
श्री नीरज सिंह ठाकुर (बरगी) -- माननीय सभापति महोदया, सड़क जहां पहुंचे, वहां समृद्धि आए. पुल जहां बने, वहां अवसर मुस्काए. इसी अवधारणा पर लोक निर्माण विभाग काम कर रहा है, उससे निवेश और रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं. मैं मांग संख्या 24 का समर्थन करता हॅूं और खासतौर से, चूंकि आपने समय कम दिया है, तो लोक निर्माण विभाग जिस चीज पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रहा है उस ओर मैं सदन का ध्यान आकृष्ट करता हॅूं. गुणवत्ता नियंत्रण हम सब जानते हैं कि किसी भी निर्माण कार्य का अत्यंत महत्वपूर्ण अंग होता है और जब हम सड़क, पुल या भवन बनाते हैं, तो हम अपने आगे आने वाली पीढ़ी के लिए दीर्घकाल तक उपयोग में आने वाली सार्वजनिक और स्थायी संपत्ति का निर्माण करते हैं और यदि यही निर्माण निर्धारित तकनीकी मानकों, स्वीकृत डिजाइन और गुणवत्तायुक्त सामग्री का नहीं होगा, तो उस संरचना की आयु कम होगी. दुर्घटना की संभावनाएं रहेंगी और भविष्य में भारी मरम्मत व्यय करना पड़ सकता है इसलिए क्वॉलिटी कंट्रोल की जो एक प्रक्रिया है, उस प्रक्रिया को पूर्ण करना आवश्यक है. जिसमें मटेरियल टेस्टिंग, साइट निरीक्षण, लेबोरेट्री टेस्टिंग, टेक्निकल ऑडिट वगैरह है. कुछ की-परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स भी हैं. कुछ ऐसी प्रमुख पहल है जो पीडब्ल्यूडी विभाग ने विगत 2 वर्षों में लागू की हैं. उसमें से मोबाइल लैब की व्यवस्था लगभग आवश्यक परीक्षण उपकरण और डिजिटल रिपोर्टिंग सिस्टम से युक्त 15 मोबाइल वैन प्रयोगशालाएं तैयार हैं, जो फील्ड पर ही जाकर सॉइल एग्रीगेट बिटुमिन क्रांकीट और कॉम्पेक्शन जैसे परीक्षण तत्काल कर सकेंगी और इस व्यवस्था से ही जो सड़क की गुणवत्ता है, उसमें जीरो टॉलरेंस पॉलिसी को साकार भी किया जा सकेगा.
सभापति महोदया, एक अभिनव पहल की गई है कि क्वॉलिटी कंट्रोल विंग भी बनाई गई है और इस विंग के माध्यम से निर्माण की प्रत्येक अवस्था जैसे कि डिजाइन का एप्रुअल है, सामग्री का चयन है, कार्य का निष्पादन और फिनिशिंग है, इसकी निगरानी रखी जायेगी और सीधे प्रमुख सचिव क्वॉलिटी कंट्रोल के अधीन काम करेगी. वह सीधे मंत्रालय को रिपोर्ट करेगी. इसमें संभागीय और क्षेत्रीय स्तर पर क्वॉलिटी कंट्रोल इंजीनियर्स को नियुक्त किया जाएगा. यह एक सतत् निरीक्षण और निगरानी प्रणाली की व्यवस्था है और किसी भी सड़क की गुणवत्ता या मजबूती टिकाऊपन, आयु उस सड़क निर्माण में प्रयुक्त डामर से होती है और डामर की सप्लाई और उपयोग की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण के लिए विभाग ने सड़क निर्माण में प्रयोग होने वाले डामर को अब केवल सरकारी रिफाइनरी जैसे इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन एचपीसीएल, बीपीसीएल से लेने का निर्णय लिया है. यह कदम हमारे विभाग की गुणवत्ता सर्वोपरि नीति की दिशा में बड़ा सुधार है. मैं चाहूंगा कि हम इस सोच के लिए हमारे माननीय मंत्री श्री राकेश सिंह जी का मेज थपथपाकर के स्वागत करें. (मेजों की थपथपाहट) साथ ही जिस तरह की व्यवस्था पेट्रोल पंप में टैंक लॉरी से डीजल या पेट्रोल भेजते वक्त की जाती थी. वो व्यवस्था को विभाग ने अपनाया है. जीपीएस आधारित ई लॉकिंग सिस्टम को लागू किया जा रहा है. टेंकर जब रिफायनरी से निकलेगा उसको वहां डिजीटली लॉक किया जायेगा. निर्माण स्थल पर ही ठेकेदार विभाग के इंजीनियर के द्वारा ओटीपी डालकर उसको खोला जायेगा. पूरे परिवहन मार्ग में उसकी जीपीएस से ट्रेकिंग की जायेगी. तो यह एडलट्रेशन की शिकायत आती थी उस शिकायत से भी हमें इसमें निजात मिलेगा. एक विभाग ने शिड्यूल ऑफ रेट्स में भी स्पष्ट प्रावधान किये हैं जो मानक निविदा दस्तावेज है उसमें भी स्पष्ट शर्तों को जोड़ा है. कोई भी ठेकेदार तभी निविदा में भाग ले सकता है. जब नई प्रणाली के अंतर्गत आपूर्ति और परिवहन की व्यवस्था रखता होगा. निजी प्रयोगशालाओं की भी इनपेलनमेंट की बात विभाग में हुई है. इसमें लगभग 18 एनएबीएल मान्यता प्राप्त निजी प्रयोगशालाओं का इनपेलनमेंट हुआ है जिससे जो अतिरिक्त क्षमता प्रयोगशालाओं की बढ़ी है उससे प्रयोगशालाओं में जो विलंब की संभावनाएं रहती थीं वह कम होगी. एक निजी और विभागीय प्रयोगशालाओं के साथ मिलकर मल्टीलेयर गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली विकसित की गई है. जो मिनिस्ट्री ऑफ रोड़ ट्रांसपोर्ट हाईवेज इंडियन रोड़ कांग्रेस मानकों के अनुरूप परीक्षण क्रास वेरीफिकेशन और क्वालिटी इंश्योरेंस को और मजबूत बनायेगा. श्रेष्ठ प्रणालियों को भी विभाग अपना रहा है और उसके लिये गुजरात, तेलंगाना, महाराष्ट्र जैसे अग्रणी राज्यों में अध्ययन दल गया था. उन राज्यों में जो सड़क निर्माण और मेंटेनेंस, क्वालिटी कंट्रोल की श्रेष्ठ प्रक्रियाएं कार्य प्रणाली हैं. उनका अध्ययन कर विभाग को तकनीकी रूप से और परिणामन्मुखी बनाया जा रहा है. माननीय मंत्री जी के नेतृत्व में 14 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल गुजरात में दिसम्बर 2024 में अध्ययन यात्रा पर गये थे. वहां पर क्वालिटी कंट्रोल, नीति निर्माण और परियोजना प्रबंधन की उत्कृष्ठ प्रक्रियाओं का सीधे अवलोकन किया. तेलांगाना महाराष्ट्र एनएचईआई दिल्ली की जो बेस्ट प्रेक्टिस है उनका भी अध्ययन करके हम सीख रहे हैं कि कैसे सड़क को गुणवत्ता के साथ अंतर्राष्ट्रीय मानक के अनुरूप बनाया जा सके. हम उत्कृष्ट हमारे इंजीनियर्स और संविदाकारों को भी पुरूस्कृत कर रहे हैं उसके लिये भी हम विभिन्न पुरूस्कार वितरण की योजनाएं प्रारंभ की हैं. 15 सितम्बर को अभियंता दिवस 2025 को माननीय मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी ने इस पुरूस्कार वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ किया था. मोक्ष कुंडम विश्वेश्वरीय पुरूस्कार उन अभियंताओं को दिया जायेगा जो उत्कृष्ट तकनीकी, कौशल, नवाचार, परियोजना प्रबंधन और विभाग की कार्य संस्कृति में जिन्होंने अच्छा कार्य किया है. विश्वकर्मा पुरूस्कार उन ठेकेदारों को दिया जायेगा जिन्होंने समयबद्ध गुणवत्तापूर्ण और प्रभावी लागत से काम किया है. पर्यावरण संरक्षक हितैषी पुरूस्कार, रानी दुर्गावती हितैषी पुरूस्कार के अंतर्गत—
सभापति महोदया—पीएमश्री विद्यालय की छात्राएं आज विधान सभा की कार्यवाही देखने के लिये आयी हैं मैं आपको सबको बता देना चाहती हूं कि छात्राएं कार्यवाही देखें और अपना भविष्य उज्वल करें इधर अपनी रूचि भी जाहिर करें कि वह भी भविष्य में कुछ नेतृत्व करें.
श्री नीरज सिंह ठाकुर—सभापति महोदया यह ऐसी अभिनव पहल है जिसे सदन के हर सदस्य को जानना आवश्यक है इसलिये मैं बता रहा हूं. विषय पर ही हूं. रानी दुर्गावती पर्यावरण हितैषी पुरूस्कार के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में जो अच्छा कार्य कर रहे हैं जिनका योगदान हैं, उन्हें पुरूस्कृत किया जा रहा है. विक्रमादित्य पुरूस्कार 15 किलोमीटर से यदि बड़ी परियोजना है यह समयबद्ध एवं गुणवत्ता तरीके से पूर्ण हुई है उसके लिये भी हम अपने इंजीनियर्स को पुरूस्कृत कर रहे हैं. ओचक निरीक्षण व्यवस्था भी विभाग के द्वारा किया जा रहा है इसमें सरप्राईज निरीक्षण की व्यवस्था पूर्ण रूप से साफ्टवेयर आधारित और रेंडम चयन पर आधारित होती है. किसी भी तरह की इसमें सूचना की लीक की संभावना नहीं रहती है. गुणवत्ता सुधार के लिये प्रत्येक माह की 5 एवं 20 तारीख को यह ओचक निरीक्षण की व्यवस्था दी गई है. हमारे विभाग की प्रयोगशालाएं जो लगभग 14 हैं उनका भी उन्नयन किया गया है. उनके उन्नयन के साथ ही हमें मॉडल क्वालिटी टेस्टिंग हब मिलेंगे. उन प्रयोगशालाओं में Bitumin analyzer, laser grading machine, universal testing device, digital compressure testing machine आदि सामग्री परीक्षण की सुविधाएं होंगी. उसके माध्यम से सड़क की प्रत्येक परत चाहे, वह सबग्रेड हो, बेस सबबेस हो, बेसकोर्स हो, या बिटुमिन परत हो, सबका परीक्षण वैज्ञानिक मापदंड के आधार पर कर सकेंगे. हमारे जिले की बात करुंगा. माननीय मंत्री जी द्वारा जबलपुर जिले को 175 करोड़ रुपए से ज्यादा की सड़कें दी हैं और लगभग 300 किलोमीटर की सड़कें हाइब्रिड एन्यूटि मॉडल से पूर्ण होगी, उसके लिए मैं मंत्री जी को बहुत बधाई देता हूं. बजट में मेरी और पाटन विधान सभा को जोड़ने के लिए एक बरगी नगर भेड़ाघाट उरना-सकरा रोड जो हाइब्रिड एन्यूटि मॉडल माडल पर ही बनेगी, जो 73 किलोमीटर लंबी है. यदि में जिले में देखूं तो 175 करोड़ रुपए की जो सड़कें बनी है, उसमें मध्य और सिहोरा के विधायक जी की ओर से भी बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं. मैं विभाग की कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियों की ओर भी ध्यान दिलाना चाहूंगा. अभी मैंने आपसे कैपिटल पूंजीगत निवेश की बात नहीं की. पीडब्ल्यूडी विभाग जो पूंजीगत निवेश कर रहा है, लगभग 10 हजार 177 करोड़ रुपए, हम पूंजीगत निवेश करेंगे और ये विगत 5 वर्षों में लगभग 78 प्रतिशत पर पहुंच गया है और उसके लिए जो कैपेक्स अनुपात में बढ़ोतरी हुई है, जिससे हमारे विकास के कार्यों को गति मिलेगी. मध्यप्रदेश जो कैपेक्स रेश्यो अनुपात में राष्ट्रीय औसत से बेहतर कार्य कर रहा है. गुजरात और उत्तरप्रदेश जहां सबसे ज्यादा अधोसंरचना पर ध्यान दिया जा रहा है. आज हम उन राज्यों की श्रेणी में खड़े हैं. यह भी कहना चाहता हूं कि हाई कैपेक्स के साथ, क्वालिटी कंट्रोल बीआईएम, जीआईएस मॉनिटरिंग और कैपेसिटी बिल्डिंग पर भी विभाग ध्यान दे रहा है, बगैर क्वालिटी कंट्रोल और बगैर कैपेसिटी बिल्डिंग आदि के ये जोखिम भरा भी हो सकता है. अंत में कुछ पंक्तियों के साथ अपना उद्बोधन समाप्त करता हूं:-
गुणवत्ता ही पहचान बने, यही विभाग का मान हो..
लोक निर्माण का हर प्रयास, लोक कल्याण के साथ प्रदेश की शान हो, प्रदेश की शान हो. धन्यवाद..
सभापति महोदया – श्री अभय मिश्रा जी. कृपया समय सीमा का ध्यान रखें.
श्री अभय मिश्रा(सेमरिया) – माननीय सभापति महोदय, सभी का समय हम ही मेंटेंन करेंगे. जो सबका न्यूनतम समय अभी तक का रहा हो, उससे थोड़ा कम हमको दे दीजिएगा.
सभापति महोदया, मांग संख्या 24 पर मैं न्यूट्रल होकर अपनी बात रख रहा हूं, न पक्ष, न विपक्ष. हमारे लोक निर्माण विभाग के माननीय मंत्री महोदय जो हैं. मैं जो समझता हूं, वे संजीदा है, संवेदनशील है, एक्टिव है, अच्छे, भले नहीं हो, उससे क्या होगा. जो अच्छे मंत्री है, उनमें मैं चेतन्य कश्यप जी और इनको मानता हूं, कुछ लोग बहुत संजीदा और एक्टिव है. मैं इन सभी से चाहता हूं कि ये शब्दों का जलपान अब बंद होना चाहिए. जब काम अच्छा है तो यथार्थ में हम थोड़ा जीने का प्रयास करें. एक तो हम जो केन्द्र के और राज्य के बजट की एक साथ सब्जी बनाकर, करोड़ों करोड़ घुमाते हैं और आदमी भौचक्का रह जाता है, वहां भी पीठ थपथपाते हैं, दिल्ली की अलग ताली और यहां की अलग ताली, तो फिर ये दोबार क्यों ताली कि जब हम यहां की बात करें, तो सिर्फ यहीं की बात करें. एक बात और दिमाग में रहती है कि हम जो याचिकाएं लगाते हैं, जो हम कटौती प्रस्ताव लाते हैं, जो हम शून्यकाल लाते हैं, जो हम यहां अपना मुंह चलाएंगे कि हमें ये दिया जाए, कि ये दिया जाए, क्या इन पर कभी कोई कार्यवाही होती है भी. मुझे तो नहीं लगता, ये केवल हमें अपने संतोष के लिए भले लगता हो, इसके बावजूद भी हम लगातार बात करते हैं कि हमें ये मिल जाए, पर इस पर विचार हो, तब तो इसका मतलब है, सबसे पहले तो प्रदेश में प्लानिंग की बात आई है, पारधी जी ने बोला कि एक अच्छी प्लानिंग पर काम हो रहा है, अगर ऐसा होता है तो यह हमारे लिये बड़ा सुखद होगा, पर अभी भी हमने काम करना शुरू नहीं किया है, रोडों का जो सिलेक्शन है, महाराष्ट्र है, छत्तीसगढ़ है, हमारा प्रदेश तो 22-22 साल से रहा है, उसको हम तुलना करे तो अभी हमारी स्पीड कम है.
सभापति महोदय, केंद्र सरकार ने नो डॉउट पूरे भारत देश में रोड़ों के मामलें में अच्छा काम किया है और उसी पर हम भी शामिल होकर के, उन्हीं कामों पर अपनी पीठ जरूर थपथपा ले लेते हैं, पर जो हमारा राज्य का बजट है, जैसे जो यह हमारा मूल बजट है, जिसमें अभी 13 हजार करोड़ है, इसमें से जो मूल निर्माण कार्य के लिये दस हजार करोड़ रूपये है, हमारा तीन हजार करोड़ योजनेत्तर वेतन और बाकी चीजों के लिये है, उसमें हमारी यूटिलिटी शिफ्टिंग भी शामिल है, उसमें हमारा मुआवजा भी शामिल है. हमें दस हजार करोड़ रूपये के मूल रूप से काम करने हैं, जब हम एम.डी.आर. रोड घोषित करते हैं, स्टेट हाइवे घोषित करते हैं, तो उसकी कोई संरचना नहीं होती है, हमें खुद नहीं मालूम है कि यह कैसे घोषित हो जाता है, अचानक से आ जाता है और हम जान जाते हैं कि एम.डी.आर. हो गई, स्टेट हाईवे हो गया है, इसका कोई ऐसा एक फार्मेट नहीं है कि हमें यह पता हो कि पहले हम इन इंटर स्टेट कनेक्विटी को लेंगे, फिर स्टेट हाईवे को लेंगे, फिर हम मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड लेंगे, फिर हम आंतरिक रोड लेंगे, फिर कोई इमरजेंसी ऐसे काम हैं, जो जरूरी है, वह लेंगे.
सभापति महोदय, अभी पिछले दो वर्षों के बीच में हमें कुछ उम्मीद लगी, अभी हमने आपसे कहा कि माननीय मंत्री जी संजीदा हैं, संवेदनशील है और उनसे भारी उम्मीदें हैं, पर अभी इस दिशा में काम होना चाहिए. अभी जो रोडों के आवंटन हुए हैं, हम माननीय मंत्री महोदय से चाहते हैं कि इनको विधानसभा वार अलग अलग बांट लेंगे तो अपने आप एक पिक्चर क्लीयर हो जायेगी कि हम मध्यप्रदेश का विकास कर रहे हैं या हम किसी क्षेत्र विशेष का विकास कर रहे हैं या हम कुछ ताकतवर लोगों को ही ऑब्लाइज कर रहे हैं या समतामूलक विकास हो रहा है, चाहे वह दल के अंदर हो, चाहे दल के बाहर हो. अभी होता यह है कि हम बगल में जिला तो डाल देते हैं, लेकिन विधानसभा नहीं डालते हैं, हमें विधानसभा डालना चाहिए. सभापति महोदय, अभी जो हमने बताया है कि 13 हजार करोड़ में से 10 हजार करोड़ रूपये इसके अलावा एक बहुत बड़ा बजट है. पहले क्या होता था कि शुरू में जब पैसा नहीं होता था, इतना ज्यादा मुद्रा का प्रसार भी नहीं था, जैसा माननीय राजेन्द्र कुमार सिंह साहब बता रहे थे 40 हजार करोड़ रूपये का बजट था, अब 4 लाख करोड़ रूपये ऊपर है, उस समय यह मॉडल बी.ओ.टी. का आया, बाण्ड कम बी.ओ.टी. आया, फिर इसके बाद अलग-अलग करते करते फिर ओ.एम.टी, एन.यू.टी, तमाम करते करते हेम प्रोजेक्ट चल रहा है, हेम प्रोजेक्ट में अपना क्या लगना है, सरकार का कुछ नहीं लग रहा है, 60 प्रतिशत कांट्रेक्टर का पैसा है, 40 प्रतिशत ए.डी.बी. का लोन है, या एन.डी.बी. का लोन हम ले रहे हैं, कहीं हम ए.डी.बी. का लोन ले रहे हैं, फिर हम किश्तों में पैसा दे रहे हैं, यह जो दस हजार करोड़ रूपये का बजट है, इसमें वह किश्त शामिल है. मतलब हमने लाखों लाख करोड़ रूपये के, लाखों तो नहीं कहेंगे पर पचासों हजार करोड़ रूपये के काम इस तरह के करा लिये हैं कि जो हम पिछले दस साल, पंद्रह साल तक हम उनकी किश्ते दे रहे हैं और आने वाले भी दस साल, बीस साल जो सरकार रहेगी, वह किश्ते देती जायेगी और हमारा काम होता जायेगा, जो मध्यप्रदेश सरकार का काम दिख रहा है, उसमें वह ज्यादातर वही काम है, लेकिन पता नहीं क्या है, अब उसमें कमी आ गई है, शायद हमें ए.डी.बी. ने लोन देना बंद कर दिया है, या एन.डी.बी. ने लोन देना बंद कर दिया है. हमारा मध्यप्रदेश सड़क विकास प्राधिकरण जैसा काबिल विभाग जिसमें नो डॉउट क्वॉलिटी और इन सब मामले में अच्छा काम किया है, आज उसके पास काम नहीं है. अब वही छोटे-छोटे मार्ग या कह लीजिए की विभाग को चलाने वाला काम है. हेम मॉडल हमारा सफल भी रहा है, हम यह चाहते हैं कि यह मॉडल और बढ़ता रहे. लोक पथ एप हमारा सफल है, लेकिन मैं माननीय मंत्री जी के ध्यान में एक बात लाना चाह रहा हूं कि यह औचक निरीक्षक वाला मामला है, यह सफल नहीं है. आप खुद सोचिए कि आप एक ही प्रदेश के, एक ही विभाग के एक जिला की जांच करा रहे है, एक ही विभाग के, एक अधिकारी के काम के विरूद्ध आप दूसरे अधिकारी को भेज रहे हैं, कल वही अधिकारी इसकी जांच करेगा. एक चीफ इंजीनियर, दूसरे चीफ इंजीनियर के खिलाफ रिपोर्ट देगा, कल वह दूसरा चीफ इंजीनियर भी जब उसका मौका आयेगा, तो इसके खिलाफ रिपोर्ट नहीं देगा, कोई एक दूसरे से क्यों बुराई लेगा? कोई एक दूसरे के खिलाफ क्यों लिखेगा? जो चीज संभव नहीं है, लेकिन हम उसको कर रहे हैं, बल्कि इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है, यह सफल नहीं हो पा रहा है, ई.पी.सी. मॉडल सफल नहीं है. अपने प्रदेश में इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कांट्रेक्ट जो है, यह सफल नहीं हो पाया है. इसके पहले शुरू में क्या होता था, सीएसआर रेट टेंडर होते थे, फिर इसके बाद आईटम रेट टेंडर हुये, फिर ईपीसी रेट टेंडर हो गया. केन्द्र की सरकार जो ईपीसी में काम करती है, इस मॉडल में पूरे देश में काम हो रहा है. वहां आप देखेंगे एड टियर एड बियर काम हो रहा है अगर आपने निविदा डाल दी है तो वह आपको अलग से नहीं दे रहे हैं वह यह कह रहे हैं कि आपने देखकर, सुनकर टेंडर डाला है, इंजीनियरिंग आपकी है हमारे नार्म्स को फॉलो करिये, इसके बाद कंसल्टेंट काम करेगा. हमारे यहां भी यह व्यवस्था है, लेकिन कंसल्टेंट के ऊपर अधिकारी हमारे डाल देते हैं कि बीच में हमने एक कंसल्टेंट रखा है कि इसकी जिम्मेदारी बनेगी. कंसल्टेंट की एक छोटी सी बैंक गारंटी होती है. कंसल्टेट के कम से कम दसों नाम से रजिस्ट्रेशन होते हैं, ले देकर न अधिकारी का कुछ होता है, न कंसल्टेंट का कुछ होता है. सबसे बड़ी बात यह है कि आज 40-40 परसेंट बिलो अगर टेंडर जा रहे हैं तो यह जो पैसा सेव हो रहा है, वह पैसा कहां है. कहीं पैसा नहीं बच रहा है.
श्री दिलीप सिंह परिहार -- औचक निरीक्षण केवल ठेकेदार नहीं चाहते हैं, बाकी औचक निरीक्षण होना चाहिये, यह अच्छी परंपरा है.
श्री अभय मिश्रा-- ठीक है न, मैंने अपने विचार रखे, जरूरी नहीं है कि मैं सही हूं. मैंने अपने विचार रखे जो मुझे लगते हैं, मैं कहां कह रहा हूं कि मैं सफल हूं या मेरी बात आप मान ही जाओगे.
श्री सोहनलाल बाल्मीक-- मंत्री जी, जो आपने सिखाया था वह उन्होंने बोल दिया.
श्री राकेश सिंह-- हमने तो आपको भी सिखाया था, लेकिन आपने नहीं बोला.
श्री अभय मिश्रा-- उस समय जब टेंडर होता था, उस समय जितना काम होता था उतना भुगतान होता था, आज क्या हो गया ईपीसी में हमने अपनी, हम अपने क्षेत्र में आ रहे हैं, हमारे रीवा में रीवा वायपास की रोड बन रही है माननीय मंत्री जी थोड़ा हमारी बात को ध्यान से सुनियेगा. कश्मीर से कन्याकुमारी वाली रोड है जो पुराना एनएच-7 है आप चले जाइये पूरे देश में इस छोर से उस छोर को जाने वाली रोड बीच में ऐसा लगता है जैसे कोई पीएमजीएसबाई की रोड घुस गई, अभी अभी वह रोड बन रही है, पहले सिंगल लेन थी, आज वह डबल लेन बन रही है. पहला रोड होगा जिसमें बीच में डिबाइडर नहीं है. 400 करोड़ का टेंडर मान लीजिये 20 परसेंट बिलो है, 100 करोड़ का सीओएस है, चलिये 100 करोड़ के इधर उधर के फालतु के आईटम ठीक हैं, मैं चिल्ला रहा हूं, मैं कह रहा हूं कि मेरी सेमरिया को जो नीचे रोड जा रही है वहां से पूरी माइनिंग आ रही है, इसी में उसको चौड़ा कर दीजिये. कल आप उसको नहीं खोदोगे तो जब बाद में आप उसी को तोड़ोगे और आप दोबारा बनाओगे इस तरह से जो-जो कमियां हैं अभी ठीक कर लीजिये आप जो कर रहे हो उसमें उसको भी शामिल कर लीजिये, लेकिन नहीं अपने इंट्रेस्ट की चीजें हो जाती हैं. माननीय मंत्री जी से मैंने निवेदन किया था कि हालांकि हम ज्यादा उम्मीद नहीं करते फिर हम वही करते हैं कि कोई ड्राइवर पकड़ लेते हैं, कोई पीए पकड़ लेते हैं कोई इधर उधर से कोई तोहफा से काम हो जाये बाकि तो बहुत से लोग कोशिश करते हैं कि सेमरिया में कोई विकास काम नहीं होना चाहिये पर तब भी माननीय मंत्री जी ने हमें पिछली बार हमारी सेमरिया के लिये रोड दी थी, मैं उनका ऋणी हूं और जो कृतज्ञता ज्ञापित मैंने किया था आज भी कर रहा हूं. एक वर्ष हो गये हैं, लेकिन अभी भी उसका टेंडर प्रोसेस में नहीं आया, कहां अटका है. माननीय मंत्री जी से मैंने कहा भी था पर उम्मीद करता हूं अभी तो 2 साल 3 साल हैं वह काम हो जायेंगे. मैं माननीय मंत्री महोदय से हमारे सेमरिया में एक बायपास बना हुआ है वह एक छोर से घुसता है और वीरसिंहपुर तक चला जाता है, लेकिन अगर मुश्किल से 4 किलोमीटर और बन जाता तो सतना वाली रोड में अगर मिल जाता तो शहर के अंदर से जो भारी वाहन निकलते हैं, जाम लगता है, एक्सीडेंट होते हैं उसके लिये ज्यादा नहीं मात्र 10 करोड़ की जरूरत थी पर मैंने तो इतनी ही बिनती की, हाथ जोड़े, निवेदन किया पर अब क्या कहें, यह बेरहम जमाना, कभी -कभी ऐसा लगता है कि एक गाना है न कि- आप आप जो कहते हैं, आप आप जो करते हैं, सर पर सावन ढोते हैं, और अंतिम लाइन उसकी है कोई तरस रहा उजियारे को, कोई सूरज बांधे सोते हैं. मेरा माननीय मंत्री जी से यह अनुरोध था एक हमारा जरूरी काम इतना कर दें बाकी सरकार ने जो काम किया है. पहले वर्ष 2008 में भी जब मैं विधायक था उस समय भी मैंने अपने क्षेत्र को देखा, आज भी देखा. इन 15-20 वर्षों में बहुत कुछ बदल गया और सरकार आपकी ही रही काम हुआ है इसे हम डिनाय नहीं कर रहे हैं. आज हमारा सेमरिया ही जहां पहले कैसा था आज कैसा है उस चीज को हम बदल रहे हैं, माने हम उस चीज को स्वीकार करते हैं. हमारा मूल रूप से एक यह काम करवा दीजिये और जो हमारा बनकुईयां रोड जहां से कि पूरी की पूरी माइनिंग,मिनरल पूरा वहीं से आता है उसको आप पैसे मत लीजिये हमने कहा था कि उसको एनयूटी टोल में लगा दीजिये. हैंड प्रोजेक्ट्स में लगा दीजिये सरकार का पैसा भी नहीं लगेगा उतना आप करा दीजिये एक आपने घोषणा की थी पिछली बार भी आया था सुनेवरा वाली रोड इस बार के बजट में वह पढ़ने को नहीं मिली तो उस पर ध्यान दें तब भी मैं कहता हूं कि माननीय मंत्री संजीदा व्यक्ति हैं संवेदनशील हैं इतना एक्टिव रहते हैं हम लोग जब बात करते हैं उठ-उठ कर एक-एक चीज का जवाब देते हैं नहीं तो हमने बहुत देखा कि कोई ध्यान भी नहीं देता उसके लिये हम कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं और यह उम्मीदरखते हैं कि मध्यप्रदेश में और जो हमारी कमियां हैं एक और रोड साईट एम्युनिटी, जैसे केंद्र की सरकार है जो उसकी महंगी जमीनें हैं वह रोडों को उन्न्त करने के लिये और वेबसाईट एम्युनिटी वाली एक स्कीम लाई है ऐसे ही मध्यप्रदेश में भी होना चाहिये. नये-नये नवाचार करते हुए हम अच्छी दिशा में बढ़ें हम सब मिलकर काम करें और सबको समरूपता के साथ थोड़ा थोड़ा न्याय मिले इन्हीं बात के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं. धन्यवाद.
सभापति महोदया - सभी माननीयों से निवेदन है कि समय-सीमा में अपनी बात रखें.
श्री फुन्देलाल सिंह मार्को - हम देख रहे थे कि मिश्र जी की बात को उपमुख्यमंत्री जी सबसे ज्यादा ध्यान से सुने हैं.
श्री अभय मिश्रा - सबसे सगे वाले भाई हैं.साहब हमारे सबसे बड़े हितैषी हैं और सेमरिया के विकास के लिये बहुत चिंता करते हैं.
श्री सोहनलाल बाल्मीक - सभापति जी, हमको तो यह समझ में नहीं आ रहा कि नाम हमारीतरफ से गया कि उनकी तरफ से गया.
श्री आरिफ मसूद - मैं तो पिछली बार का भी कहूंगा. मंत्री जी आपने दिया हमने तो धन्यवाद करा था. भोपाल के भी आज तक काम नहीं हुए. टेण्डर ही अभी तक नहीं हुए. बजट में स्वीकृत करा हमने धन्यवाद भी दिया लेकिन कार्य तो करा दीजिये.
श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल(मुड़वारा) - सभापति महोदया, मैं मांग संख्या 24 लोक निर्माण विभाग के समर्थन में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. मैं प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी तथा लोक निर्माण विभाग के मंत्री आदरणीय राकेश सिंह जी को धन्यवाद देना चाहूंगा जिन्होंने इस बजट के माध्यम से न केवल सड़कों का जाल बिछाना बल्कि सुरक्षित यात्रा सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करने के लिये इस बजट को प्रस्तुत किया है. राज्य सरकार जेनेवा कन्वेंशन के अनुरूप सड़क दुर्घटनाओं में दस प्रतिशत मृत्यु दर कम करने के लिये प्रतिबद्ध है. राज्य सरकार द्वारा 2073 करोड़ की लागत से 5 प्रमुख शहरों में एलीवेटेड कारीडोर और 3917 करोड़ की लागत से 105 ओवरब्रिजों का निर्माण कार्य प्रगति पर है. सबसे मुख्य बात इस बजट में सरकार की जो प्राथमिकता है बच्चों को लेकर स्कूलों के लिये इसके तहत सेव लाईफ फाउंडेशन और आईआईटी मद्रास के सहयोग से प्रत्येक जिले में एक माडल के रूप में सुरक्षित स्कूल जोन विकसित किये जा रहे हैं और स्कूल के आसपास सुरक्षित पैदल मार्ग और ट्रेफिक प्रबंधन को प्राथमिकता दी जा रही है इसके लिये मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा जो इस संबंध में बजट में विशेष प्रयास किये जा रहे हैं.बजट का एक बड़ा हिस्सा गोल्डन आवर को प्रभावी बनाने में निवेश किया गया है. टोल फ्री हेल्पलाईन 1099 के माध्यम से राज्य सरकार ने अब तक 3283 से अधिक जानें बचाई हैं और राज्य सरकार का प्रयास है कि ट्रामा सेंटर
3.34 बजे अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.
और एंबुलेंस की मेपिंग के माध्यम से कैश लेस और समयबद्ध उपचार हर पीड़ित तक पहुंचे. राज्य सरकार एक लाख से अधिक स्थानों पर आईटीएमएस स्थापित कर रही है. 481 ब्लेक स्पाटों को चिह्नित करते हुए उनके तकनीकी सुधार हेतु वित्तीय स्वीकृति भी जारी की गई है. इसके लिये मैं मंत्री महोदय को धन्यवाद देना चाहूंगा. सड़कों पर निराश्रित गौवंश की सुरक्षा के लिये 1200 से अधिक गौशालाओं की जियो मेपिंग की गई है और कैटल लिफ्टर वाहनों की तैनाती की गई है जिससे मार्ग भी सुरक्षित हो रहे हैं. चूंकि सभी विधायक साथियों ने बात कही है. लेकिन इस बजट में लोक निर्माण विभाग के माध्यम से जो कुछ हम लोगों ने देखा है, सड़कों के माध्यम से, जैसे हमारे एक साथी विधायक कह रहे थे कि लक्ष्य तक पहुँचने के लिए सड़क सिर्फ सड़क नहीं है. लेकिन हमारे जीवन में विकास हो या हमारा सुरक्षित जीवन हो, हर तरह से सड़क जुड़ी हुई है. इसको ध्यान में रखते हुए, चाहे गौवंश के माध्यम से हो, चाहे स्कूली बच्चों के लिए हो, चाहे आपकी सुदूर यात्राएं हों, इन सबको ध्यान में रखते हुए बजट में हर तरह के प्रावधान किए गए हैं.
अध्यक्ष महोदय, हमारे कटनी जिले से हमारे मंत्री जी का पुराना नाता है. वे हमारे सांसद भी रहे हैं और आज भी कटनी से उनका लगाव बना हुआ है. हम सब लगातार उनसे जुड़े हुए हैं. कटनी न सिर्फ खनिज, उद्योग और व्यापार की दृष्टि से बल्कि रेलवे की दृष्टि से भी एक बहुत महत्वपूर्ण जंक्शन है. यही कारण है कि कटनी में अप और डाऊन दोनों दिशाओं में ग्रेड सेपरेटर 15 से 17-17 किलोमीटर के लगभग 1500 से 2000 करोड़ की लागत से पूर्णता की ओर हैं. ऐसे कटनी जिले में मैं माननीय मंत्री महोदय को धन्यवाद देना चाहूँगा कि चारों विधान सभाओं को जोड़ने वाली 160 करोड़ रुपये की एक सड़क का जो उन्होंने इस बजट में प्रावधान किया है, उसके लिए मैं उनको धन्यवाद देता हूँ. इसके अलावा महानदी में 93 करोड़ रुपये का पुल और लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से 20 अन्य सड़कों का भी इस बजट में प्रावधान किया गया है. उसके लिए मैं उनका आभारी हूँ. कटनी-उमरिया मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग से भी जोड़ने का जो प्रावधान किया गया है, उसके लिए भी मैं उनका आभार व्यक्त करता हूँ. अध्यक्ष महोदय, सबसे महत्वपूर्ण, कटनी को अभी पिछले वर्षों में लगातार चाहे हम इसे रीवा के माध्यम से फोरलेन से जोड़ रहे हों, चाहे जबलपुर से जोड़ रहे हों और अब उमरिया के लिए भी प्रस्तावित किया गया है, और हमारे कटनी जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जो हमको मिली है, कटनी-दमोह मार्ग को एमपीआरडीसी के माध्यम से फोरलेन बनाने के लिए जो 4400 करोड़ का प्रावधान किया गया है, उसके लिए मैं उनका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूँ. यह हमारे कटनी के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि होगी. कटनी चारों ओर से जुड़ेगा.
अध्यक्ष महोदय, इससे पूर्व भी, चाहे लमतरा फाटक हो, चाहे मझगवां फाटक हो, चाहे जोला ओव्हरपास हो, चाहे मिशन चौक हो, चाहे फोनलेन बाइपास जो सैकड़ों करोड़ की लागत से बन रहा है, वहां पर दो ओव्हर ब्रिज हों, चाहे आयुध निर्माणी में निर्माणाधीन ओव्हर ब्रिज हो, 400 करोड़ रुपये के ऊपर के ओव्हर ब्रिज आपके माध्यम से हम लोगों को मिले. कई जगह पर लगभग 60 करोड़ रुपये की लागत से, चाहे कटनी नदी का पुल हो, गाटरघाट का पुल हो, गंगरी कलां से गंगरी खुर्द हो, जरवाई, धपई हो, आदर्श कॉलोनी, ऐसे अनेक पुल भी आपके माध्यम से हमें प्राप्त हुए. 500 करोड़ रुपये से अधिक की सड़कें, झिंझरी, देवगांव हो, चाहे कैलवारा मोहास हो, कटनी, विजयराघोगढ़ हो, कटनी उमरिया हो और कटनी का मुख्य मार्ग हो, इत्यादि अनेक सड़कें आपके माध्यम से हमें मिली हैं. इसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूँ.
अध्यक्ष महोदय, इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में 200 करोड़ रुपये से अधिक की सड़कें जो कटनी को मिलीं, उसके लिए भी मैं आपका आभार व्यक्त करता हूँ. कुछ मांगें मैं अपनी विधान सभा को लेकर आपके समक्ष रखना चाहता हूँ.
अध्यक्ष महोदय -- संदीप भाई, अब समाप्त करना पड़ेगा.
श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल -- अध्यक्ष महोदय, बस ये चार लाइनें हैं.
अध्यक्ष महोदय -- जल्दी करें.
श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल -- अध्यक्ष महोदय, मंगलनगर से झर्रा टिकुरिया और गायत्री नगर से सिविल लाइन के दो ब्रिज बजट में पहले स्वीकृत हुए थे. मैं माननीय मंत्री महोदय से आग्रह करूंगा, इन दोनों अलग-अलग ओव्हर ब्रिज के लिए जल्द से जल्द स्वीकृति मिले. इंडस्ट्रियल एरिया को जोड़ने वाली एक सड़क बजट में आई थी, उसका जल्द से जल्द क्रियान्वयन हो जाए. नई बस्ती से कटनी नदी के पार जाने वाले पुल और सड़क का भी एक प्रस्ताव लंबित है. मैं माननीय मंत्री महोदय को धन्यवाद देना चाहूँगा कि शासकीय कन्या महाविद्यालय जो नया खुला, उस तक पहुँच मार्ग बन गया, लेकिन उसके चौड़ीकरण के लिए एक अतिरिक्त राशि की मैं मांग करना चाहूँगा. इन सब प्रावधानों के लिए और साथ में प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिए सभी क्षेत्रों को जोड़ते हुए जो बजट में प्रस्तावित किए गए हैं, उन सबके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री आदरणीय डॉक्टर मोहन यादव जी और आदरणीय राकेश सिंह जी के साथ-साथ हमारे पूर्व प्रभारी मंत्री और हमारे वित्त मंत्री आदरणीय देवड़ा जी और हमारे प्रभारी मंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूँ. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ. धन्यवाद.
3.40 बजे अध्यक्षीय व्यवस्था
समय सीमा में अपनी बात रखने विषयक
अध्यक्ष महोदय - बहुत धन्यवाद. अब सभी माननीय सदस्य अपनी-अपनी बातें 5 मिनट में पूरी करेंगे, क्योंकि डेढ़ घण्टा चर्चा के लिए तय था, ढाई घण्टे से अधिक चर्चा हो चुकी है. मैं पक्ष और विपक्ष के दोनों नेताओं से यह आग्रह करना चाहता हूँ किे वे अपने-अपने सदस्यों को सीमित करें या व्यवस्था बनाएं. जो लोग एक डिमांड पर एक बार बोल चुके हैं, वह दूसरी डिमांड पर न बोलें, दूसरे को उसमें अवसर दें. संख्या सीमित नहीं रहेगी और समय सीमित नहीं रहेगा, तो व्यवस्था को बनाये रखने में दिक्कत होगी. अगर मान लो हम नियंत्रित नहीं कर पाते हैं, तो मैं आखिरी में तीन-चार नाम स्वयं से काट दूँगा और मंत्री जी का जवाब करा दूँगा. यह सब लोग ध्यान रखें.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) - माननीय अध्यक्ष जी, आपने ध्यान नहीं दिया. अभय मिश्रा जी, अभी कह रहे थे कि सौभाग्य से मैं पहले बोल लिया. (हंसी)
अध्यक्ष महोदय - नहीं. दरअसल ढाई घण्टा हो गया है. डेढ़ घण्टे में मंत्री जी का जवाब भी शामिल था. ढाई घण्टा चर्चा हो चुकी है, हमको एक सीमा तो बांधनी ही पड़ेगी, सदन आप ही लोगों का है, आप ही लोगों को विचार व्यक्त करना है, आप ही लोगों को समाधान तक पहुँचना है, आप ही लोगों को संचालन करना है, मैं तो आपके प्रतिनिधि के नाते निमित्त हूँ (विपक्ष के किसी माननीय सदस्य ने अपने आसन पर बैठे-बैठे बंद माईक से 6 बजे कहा.) श्री देवेन्द्र सखवार जी, आप लोग एक-एक मिनट में पूरा करें, तो मैं आपकी बात मान लूँगा.
श्री देवेन्द्र रामनारायण सखवार (अम्बाह) - धन्यवाद, अध्यक्ष जी. माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार द्वारा कहा जाता है कि सबका साथ और सबका विकास. लेकिन यह कितना सत्य है, यह मैं आपको बताना चाहता हूँ. प्रत्येक विधान सभा में करोड़ों रुपये के विकास कार्य करने की बात हर समय कही जाती है, परन्तु यह बात सही नहीं है. जैसे इस बजट से पूर्व मेरे द्वारा माननीय मुख्यमंत्री महोदय, माननीय लोक निर्माण मंत्री महोदय तथा माननीय उपमुख्यमंत्री (वित्त) महोदय को बार-बार अपनी विधान सभा में 2 वर्ष से अपनी सड़कों के लिए निर्माण कार्य को स्वीकृत कर इस बजट में शामिल करने का निवेदन किया गया था, परन्तु इस बजट में एक भी सड़क को शामिल नहीं किया गया है. सरकार ने बजट में मेरी विधान सभा अम्बाह के साथ पक्षपात किया है. फिर यह बजट जनता का हितैषी कैसे हो गया? मैं सरकार से फिर से निवेदन कर मांग करता हूँ कि मेरी विधान सभा अम्बाह की कुछ मांगें हैं, जिन्हें बजट में जोड़ा जाये. ग्राम अजेहरा से पंडित के पुरा तक सड़क निर्माण, ग्राम कचमना से पालकीपुरा तक सड़क निर्माण, ग्राम बड़ौली मेनरोड से कुंवरपुरा हवेली तक सड़क निर्माण, ग्राम पाली से परदुपुरा तक सड़क निर्माण, पिनाक रोड से सोनपालकीपुरा तक सड़क निर्माण, ग्राम बड़पुरा से लेटेवाले हनुमान जी मंदिर के बिजलीघर तक सड़क निर्माण, ग्राम महुआ से चक्रधारी मंदिर केलापुरा तक सड़क निर्माण, ग्राम जानकीपुरा से बड़पुरा तक सड़क निर्माण. मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूँ कि मेरी इन मांगों को जोड़ा जाये.
माननीय अध्यक्ष महोदय, इस बजट में मेरी विधान सभा के बेरोजगार युवाओं के रोजगार के लिये कोई योजना नहीं बनाई गई. मेरी विधान सभा अम्बाह का युवा रोजगार के लिये पलायन कर रहा है. उनके पलायन को रोकने के लिये उद्योग लगाने की योजना को बजट में शामिल किया जाये. मैं एक बात और कहना चाहता हूँ कि सड़कों पर घूम रहा गौवंश बहुत ही खतरनाक होता जा रहा है, जिससे आये दिन एक्सीडेंट हो रहे हैं, जिनकी वजह से कई लोगों की जानें भी चली गई हैं और हमारे किसान इस गौवंश के कारण अधिक परेशान हैं, क्योंकि वे रात-रात भर जागकर अपने खेतों की रखवाली करते हैं. इनकी रोकथाम के लिये सरकार को इस बजट में किसी ठोस योजना को शामिल नहीं किया गया है. अन्त में, मैं इतना ही कहना चाहूँगा कि बजट जनहितैषी न होकर, सिर्फ घोषणाओं का पिटारा है और कर्ज लेकर मध्यप्रदेश की जनता को कर्ज में डुबाए जा रहा है. मैं एक बात और कहना चाहूँगा कि सरकार जो हमारे साथ पक्षपात का व्यवहार कर रही है, वह गलत है. सरकार पक्षपात न करके, सबका साथ, सबका विकास का जो नारा दे रही है, उस पर बिना भेदभाव के कायम रहे, तो ही मध्यप्रदेश का विकास संभव है. माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय - बहुत धन्यवाद, देवेन्द्र सखवार जी. सभी लोगों को देवेन्द्र जी का अनुसरण करना चाहिए. यह मेरे विधायक हैं, इसलिए उन्होंने मेरी पूरी बात मानी है. मैं इनके विधान सभा क्षेत्र का रहने वाला हूँ. श्री महेन्द्र नागेश जी, आप पांच मिनट में पूरा करना. आप पहले अपनी सारी डिमांड रख दो.
श्री महेन्द्र नागेश (गोटेगांव)- अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, धन्यवाद. मैं, मांग संख्या 24 पर, इस सदन के माध्यम से प्रदेश के विकास की आधारशिला लोक निर्माण विभाग के कार्यों एवं योजनाओं पर अपना पक्ष प्रस्तुत करना चाहता हूं. लोक निर्माण विभाग केवल सड़कों का निर्माण करने वाला विभाग नहीं अपितु यह प्रदेश की आर्थिक, सामाजिक एवं प्रशासनिक संरचना को सुदृढ़ करने वाला तंत्र है. मध्यप्रदेश जैसे विशाल, भौगोलिक राज्य में सुरक्षित, उच्च गुणवत्ता वाली सड़क, विकास का मूलाधार है. प्रदेश में व्यापक सड़क नेटवर्क विस्तार कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के राजमार्गों, प्रमुख जिला मार्गों एवं ग्रामीण संपर्क सड़कों का उन्नयन एवं चौड़ीकरण किया जा रहा है. आधुनिक मानकों के अनुरूप एक्सप्रेस-वे, प्रगति-पथ जैसी महत्वाकांक्षी योजनायें प्रदेश को तीव्र एवं सुरक्षित यातायात प्रदान कर रही हैं. इसके अतिरिक्त पुल-पुलियों का निर्माण एवं संरचनात्मक निर्माण के माध्यम से आवागमन को बाधारहित बनाया जा रहा है. यह केवल सड़क निर्माण नहीं, अपितु व्यापार, कृषि, उद्योग एवं निवेश को गति देने की ठोस पहल है. तकनीकी पारदर्शिता की दिशा में विभाग द्वारा लोक-पथ 2.0 मोबाईल एप के माध्यम से नागरिकों को शिकायत एवं निगरानी की सुविधा प्रदान की गई है. लोक निर्माण विभाग शासकीय भवनों, चिकित्सालयों, शैक्षणिक संस्थाओं एवं प्रशासनिक परिसरों के निर्माण एवं संधारण के माध्यम से प्रदेश की संस्थागत व्यवस्था को मजबूत कर रहा है. मैं विश्वास के साथ कहना चाहता हूं कि माननीय राकेश सिंह जी के नेतृत्व में यह विभाग केवल सड़कें नहीं बना रहा बल्कि विकसित, सशक्त, आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में ठोस आधार निर्मित कर रहा है.
अध्यक्ष महोदय, भाजपा की यह सरकार, आदरणीय मोदी जी के नेतृत्व में, लोक निर्माण विभाग के केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी को मैंने बहुत सुना है और स्वयं उनके कार्यक्रम देखें हैं. पैसे की कोई कमी नहीं है, जितना पैसा मांगते हैं, उससे भी ज्यादा केंद्रीय मंत्री जी देते हैं. प्रदेश के मुखिया डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्व में, हमारे मंत्री जी, ऐसे मंत्री जी हैं, जिन्होंने मेरी विधान सभा में मेरी मांग अनुसार पिछले बजट में बहुत सड़कें दी थीं, जिनके कार्य पूर्ण हो चुके हैं. इस बार भी उन्होंने कुछ सड़कें दी हैं, जिसके काम अभी होंगे, मंत्री जी ने मुझे मार्च में समय दिया है कि वे गोटेगांव विधान सभा में आकर उनका भूमिपूजन और उद्घाटन करेंगे. मुझे आशा है कि आने वाले समय में भी मंत्री जी मेरी मांग का ध्यान रखते हुए और अधिक कार्य देंगे. गोटेगांव विधान सभा क्षेत्र जो कि शहपुरा-झांसी घाट-गोटेगांव-दादामहाराज फोरलेन का सर्वे लगभग हो चुका है, कृपया उसे स्वीकृत करवाने की कृपा करें. दूसरा एक आदिवासी क्षेत्र में परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर है, जो सिवनी बंधा रोहिया मुंगवानी मार्ग को जोड़कर NH में मिल जायेगा. तीसरी हमारी एक बहुत बड़ी मांग है, गोटेगांव बायपास फेस-2, जिसका DPR तैयार हो गया है, वह भी लगभग बजट में आ गया है, उसकी भी शीघ्र स्वीकृति देंगे, ऐसी कृपा करेंगे. मैं पुन: लोक निर्माण विभाग के मंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूं, धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय- बहुत धन्यवाद.
श्री विवेक विक्की पटेल (वारासिवनी)- अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 24 पर चर्चा करना चाहता हूं. मैं पहली बार का विधायक हूं, हमारे क्षेत्र की जनता को मुझसे और मुझे सरकार से बहुत उम्मीदें हैं. इस बार वित्त मंत्री जी ने बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर पर विशेष फोकस किया है. क्षेत्र के विकास में सड़कों का मजबूत होना नितांत आवश्यक है, जिस पर चलकर जनमानस अपने जीवन के क्रियाकलापों से विकास में योगदान देती है. मेरी विधान सभा के बीच में, एक सड़क है, 27 किलोमीटर की जो वारासिवनी-कोसते-मेंढ़की-डोमरमाली-रेंगाटोला-बेनिज तक जाती है. वह मात्र 3.5 मीटर चौड़ी है, जिसमें बहुत अधिक ट्रैफिक रहता है और दुर्घटनायें होती हैं.
अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री से कहना चाहता हूं कि इस रोड का चौड़ीकरण शीघ्र कराया जाए जिससे कि आम जनता को राहत मिल सके. इसके अलावा कुछ छोटी सड़कें हैं जिसमें आरम्भा साकड़ी, बैनी, आकूडोस से मोहगांव कोसीडोरा से मुडझड़, सरंडी से सांगी, खापा से झालीवाड़ा, कासपुर से आलिझरी, कायदी से इकोड़ी, देवगांव से गर्रा, मेहदोली से गर्रा, खुर्सीपार से खैरी, खुर्सीपार से नैवगांव, बुनई से अतरी, बरबतपुर से सिलोटपार, टुईयाबस से बदहमपुर इसके अलावा एक ब्रिज है जिससे बच्चे तीन महीने स्कूल जा पाते हैं. करड़ गांव से भानपुर यह बहुत आवश्यक है. साथ ही मेरी विधान सभा में दो तहसील मुख्यालय हैं. वारासिवनी और खैरलांजी. खैरलांजी मुख्यालय में मैं चाहूंगा कि लोक निर्माण विभाग का एक रेस्टहाउस बनाया जाए. आपने बोलने का अवसर दिया बहुत-बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय-- अरूण भीमावद जी समय का ध्यान रखें.
श्री अरूण भीमावद (शाजापुर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अनुदान मांग संख्या 24 पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया इसके लिए मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा. लोक निर्माण से लोक कल्याण इस मंत्र के साथ हमारे लोक निर्माण मंत्री निश्चित रूप से डॉ.मोहन यादव जी के मार्गदर्शन में काम कर रहे हैं. उसका उदाहरण इस बात से दिखाई देता है कि चाहे हम पुल की बात करें, चाहे हम आरओबी की बात करें, चाहे एलिवेटेड कॉरिडोर की बात करें, भवन की बात करें, सड़क निर्माण की बात करें. आज वह धरातल पर निश्चित रूप से दिखाई देती है. मैं आपके माध्यम से इस गरिमामय सदन को पश्चिमी क्षेत्र इंदौर, उज्जैन में हो रहे व्यापक एवं ऐतिहासिक सड़क अधोसंरचना के कार्यों से अवगत कराना चाहूंगा.
अध्यक्ष महोदय, विगत दो वर्षों में सड़क, पुल निर्माण निश्चित रूप से इन क्षेत्रों में सात बड़े सेतु बनाने का काम हुआ है. 125 कार्य निर्माणाधीन है जिसकी लागत 2 हजार 545 करोड़ रुपए है. यह परियोजनाएं हमारे इंदौर, उज्जैन क्षेत्र में यातायात को सुगम एवं सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगी. जैसे इंदौर शहर एबी रोड पर एलआईजी चौराहे से नवलखा चौराहे तक 350 करोड़ रुपए से ब्रिज बन रहा है. धार जिले में मनावर मार्ग पर, मां नर्मदा नदी पर 750 मीटर में 77 करोड़ रुपए की लागत से पुल बनाया जा रहा है. उज्जैन शहर में चामुंडा माता चौराहे से हरिगंज आरओबी 616 मीटर का 51 करोड़ रुपए की लागत से आरओबी बनाया जा रहा है. अगर मैं भवन की बात करूं तो मंदसौर, नीमच, इंदौर यह चिकित्सा महाविद्यालय मेडिकल कॉलेज हैं जहां पर 302 करोड़ रुपए 287 करोड़ रुपए, 526 करोड़ रुपए का कार्य आज की तारीख में चल रहा है.
अध्यक्ष महोदय, शिक्षा के क्षेत्र मे भवन के रूप में 64 सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण का कार्य इन दोनों विद्यालयों में चल रहा है. मैं न्याय की बात करूं तो इंदौर, सागर रोड़ पर 411 करोड़ रुपयों की लागत से जिला जेल का निर्माण कार्य प्रगति पर है. सड़कों का जाल जिनकी गिनती मैं करूंगा तो मुझे 45 मिनट लग जाएंगे. उज्जैन से जावरा रोड, उज्जैन से झालावाड़ रोड, इदौर-उज्जैन सिक्सलेन, इंदौर-गरोठ मार्ग, बुरहानपुर, खंडवा, छ:गांव, माखनगांव रोड, खलघाट मनावर रोड, इंदौर देपालपुर रोड, उज्जैन-मक्सी फोरलेन रोड. इसके साथ ही मैं माननीय मंत्री जी को इस बात के लिए धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने शाजापुर विधान सभा क्षेत्र में जो विकास की गांगा लोक निर्माण विभाग के माध्यम से बहाई है उसमें मक्सी-उज्जैन फोरलेन रोड 230 करोड़ रुपए, शाजापुर-मक्सी फोरलेन रोड 130 करोड़ रुपए, शाजापुर बायपास 180 करोड़ रुपए, सिरौलिया, कपालिया, सिहोदा, सजौद मार्ग 30 करोड़ रुपए, कडौदिया, कालवा, धुपाड़ा, बिजाना मार्ग 30 करोड़ रुपए, मक्सी बेचा टू लेन मार्ग 110 करोड़ रुपए, मोहन बड़ौदिया रिंग रोड 25 करोड़ रुपए यह दर्शाता है कि हमने कुछ कामों का तो भूमि पूजन भी किया है और अभी जो बजट आया है उसमें भी शाजापुर विधान सभा क्षेत्र को बहुत राशि दी गई है. मैं शाजापुर विधान सभा क्षेत्र की ओर से उनका हार्दिक अभिनंदन, हार्दिक स्वागत करता हूं. नीयत और नियति माननीय मंत्री जी के नेचर में दिखाई देती है. जब मंत्री जी शाजापुर आए थे तो उन्होंने हमसे वादा किया था कि मैं आज 130 करोड़ रुपए की लागत की फोरलेन सड़क का भूमिपूजन कर रहा हूं और आने वाले समय में बजट में शाजापुर विधान सभा कहीं-न-कहीं दिखाई देगी. बजट में उन्होंने 410 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं. मैं उनका हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ और धन्यवाद देता हूँ. लेकिन उस समय 10 छोटी-छोटी सड़कें रह गईं थीं यह सड़कें आप 3 साल में पूरी कर देना. सामने तराना विधान सभा क्षेत्र के विधायक भी बैठे होंगे. वे बात कर रहे थे. मैं महेश परमार जी को बताना चाहूंगा कि मेरी और उनकी विधान सभा 30 किलोमीटर तक साथ-साथ चलती है. जितने काम मेरी विधान सभा क्षेत्र में हुए हैं उसका 25 प्रतिशत हिस्सा उनके विधान सभा क्षेत्र में भी आता है. माननीय मंत्री जी वहां पर भी विकास की गंगा बहा रहे हैं. वे आरोप लगा रहे थे कि उनके क्षेत्र में कोई काम नहीं हुआ है. मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि एक तरफ तराना है तो दूसरी तरफ सुसनेर विधान सभा क्षेत्र है. माननीय भंवर सिंह शेखावत जी बैठे हैं उनका क्षेत्र भी लगता है. जब रिंग रोड बन रहा है तो एक तरफ सुसनेर विधान सभा का बन रहा है दूसरी तरफ शाजापुर विधान सभा का बन रहा है. बिना भेदभाव के काम करने वाले हमारे लोक निर्माण मंत्री जी का हम जोरदार तालियों के साथ स्वागत करें. (मेजों की थपथपाहट)
अध्यक्ष महोदय, मैं डॉ. मोहन यादव जी को धन्यवाद दूंगा. वे जब मक्सी शहर में आए थे वहां पर उन्होंने जो भी घोषणाएं की थीं मैं सदन में ताकत के साथ कह रहा हूं आज वे सभी बजट में शामिल हो गई हैं. अध्यक्ष महोदय, आपने बोलने का समय दिया उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्री मधु भगत (परसवाड़ा) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे तीन विधान सभा क्षेत्रों के बारे में बात रखना है क्योंकि दो विधायक अनुपस्थित हैं.
अध्यक्ष महोदय -- सीधे विषय पर आ जाएं. मेरे पास जो नाम हैं उनमें से सभी विधायक उपस्थित हैं.
श्री मधु भगत -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लोक निर्माण विभाग के बजट में 13 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. मैं माननीय मंत्री राकेश सिंह जी से कहना चाहता हूँ कि बालाघाट के लिए आपने काफी सौगातें दी हैं. बालाघाट जिले में विशेष तौर पर कटंगी और लांजी का बहुत ध्यान रखा गया है, लेकिन परसवाड़ा, बैहर, बालाघाट और वारासिवनी में हम लोगों के पक्षपात किया गया है. हमारे क्षेत्र में काम तो मिला है लेकिन बहुत सीमित दायरे में मिला है. मुख्यमंत्री महोदय जब बालाघाट जिले में आते हैं तो वे कहते हैं कि किसी प्रकार का पक्षपात किसी भी विधान सभा क्षेत्र के साथ नहीं करेंगे लेकिन मंत्री महोदय को भी उनकी भावनाओं की कद्र करना चाहिए. बिना पक्षपात के सारी सड़कों का विस्तारीकरण जिले को खूबसूरत बनाने के लिए करना चाहिए. मेरी विधान सभा परसवाड़ा में कुछ पुल आरईएस ने बनाए हैं जो बरसात में जर्जर हो गए हैं. उसमें प्रमुख पुल अतरी और मोतेगांव पंचायत में है यह पूरी तरह से जर्जर हो गया है. इसके कारण बच्चों का स्कूल आना-जाना पूरी तरह से खत्म हो गया है. इससे 13 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ रहा है इसको आप देख लीजिएगा. यदि यह पुल लोक निर्माण में जुड़ सकता है तो उसको बालाघाट जिले में जुड़वा दें. इसी प्रकार घुनाड़ी से मूरझर राघवटोला के मध्य निर्माण का कार्य अतिआवश्यक है. यह सिवनी और बालाघाट जिले को जोड़ता है. इससे दूरी कम से कम 40 किलोमीटर घट जाती है. इसको अपने बजट में आने वाले समय में जोड़ लें तो बड़ी मेहरबानी होगी. गुडरू-कुकड़ा मोहगांव पुल निर्माण कार्य इसको भी अगर आप बजट में जोड़ते हैं तो सुविधा होगी सहजना झांगुल के मध्य पुल निर्माण कार्य, मौगांव से सीताडोंगरी के मध्य पुल निर्माण कार्य, खामी से वरुड़गोटा के मध्य निर्माण कार्य, कुम्हारी से लामता अंतरी मार्ग पुल निर्माण यह मैंने अपनी विधान सभा को जो गांवों की दूरी 15-15, 30-30 किलोमीटर फेरा पड़ती है अगर पीएमजीएसवाई से कोई पुल होता है लेकिन पीडब्ल्यूडी भी इस पर जिम्मेदारी निर्वहन करे तो यह निर्माण कार्य अगर छोटे-छोटे पुल जुड़ जाते हैं तो निश्चित तौर पर एक पूरी विधान सभा अपने आप में मजबूत होती है. एक महत्वपूर्ण चर्चा मैं रखना चाहूंगा कि लगातार मैं पिछले दो वर्षों से इस बात को रख रहा हूं और संज्ञान में लाना चाहता हूं कि आपकी 543 एनएच जो बालाघाट से नैनपुर मार्ग है,जिसके ऊपर मेरे विधान सभा क्वश्चन में मुझे संतोष जनक जवाब नहीं आया है लेकिन मैं चाहूंगा कि एक बार बालाघाट नैनपुर मार्ग 543 आप देख लें. उसके अंदर कार्यवाही कहां पर रुकी है, किस वजह से रुक रही है, क्योंकि यह रोड वर्ष 2014 का सेंग्शन है और वर्ष 2014 से आज 2026 हो रहा है लेकिन उस हाईवे में किसी प्रकार का कोई भी कार्य नहीं हो रहा है और उससे मंत्री महोदय, कलेक्टर महोदय, गरीब, मजदूर, किसान सबका आना जाना है. इस मार्ग को आप अपनी डायरी में नोट कर लें. इसके ऊपर संज्ञान ले लें. दूसरी महत्वपूर्ण बात जो मेरे विधान सभा क्वशचन में थी कि परसवाड़ा से बैहर 31 किलोमीटर का जो चेंज स्कोप में रखा हुआ है और लास्ट टाइम मैंने इसको क्वशचन में उठाया था तब आपने मुझसे कहा था कि यह चेंज स्कोप में बहुत जल्दी ले लिया जाएगा उसका भी प्रावधान करें. अगर आपके किसी अनुबंध में वह कहीं चली गई है तो उसको निकालकर उस रोड का अगर आप मजबूतीकरण या सुधार कार्य में भी ले लें तो वह चलने लायक बन जाए क्योंकि वह कान्हा नेशनल पार्क को जोड़ती है.
अध्यक्ष महोदय, बालाघाट जिले से मैं थोड़ा सा एक वक्तव्य रखना चाहता हूं कि बालाघाट जिले में गायखुरी गोंगलई निवरगांव मार्ग 11 करोड़ की एवं खैरीगोदा मार्ग की ग्रामीणों द्वारा लंबे समय से मांग की जा रही थी डेढ़ करोड़ की एवं सेलवा से जाम 2.25 करोड़ कुल राशि 14 करोड़ यह बालाघाट जिले के लिए आपने सेंग्शन की है इसके लिए वहां से आपको धन्यवाद भी दिया जा रहा है.
अध्यक्ष महोदय -- मधु भाई, अब समाप्त करें. आपका टाइम पूरा हो गया.
श्री मधु भगत -- अध्यक्ष महोदय, यह बालाघाट जिले का धन्यवाद था अब परसवाड़ा का बचा है. धन्यवाद ही धन्यवाद बचा है. दूसरा एक महत्वपूर्ण विषय है माननीय मंत्री महोदय कि अभी नया पुल आरओबी सरेखा से बालाघाट कोसमी को जोड़ता है, चूंकि यह वक्तव्य मैं इसलिए प्रस्तुत कर रहा हूं कि अभी उस निर्माण कार्य का उद्घाटन हुए 2-3 महीने नहीं हुए हैं और उस सीमेंटीकरण आरओबी के ऊपर अब नया डामरीकरण करके उसको लेबलिंग किया जा रहा है, तो कहां और किस प्रकार का भ्रष्टाचार हुआ और उसकी लंबाई कितनी कम हुई इसको आप संज्ञान में ले लें. कारण क्या था, क्या इसमें राजनीति थी. क्या इसमें भ्रष्टाचार था या किस प्रकार का घटिया काम हुआ है. यह संज्ञान में ले लें क्योंकि यह सरकार के लिए एक प्रकार से अनुचित है.
अध्यक्ष महोदय -- प्लीज मधु भाई, समाप्त करें.
श्री मधु भगत -- अध्यक्ष महोदय, एक लाईन और है. मैं आपको एक धन्यवाद और दे रहा हूं. हमारे राजकुमार कर्राहे जी लांजी और मेरे परसवाड़ा विधान सभा के बीच में आपने एक फोरलेन हमको दिया है जो रजेगांव से लांजी 41 किलोमीटर का है उसके लिए मैं और राजकुमार कर्राहे जी दोनों विधायक हमारे विधायक और आपके विधायक धन्यवाद दे रहे हैं.
श्री राजकुमार कर्राहे -- अध्यक्ष महोदय, मधु भैया, एक मिनट. माननीय मंत्री जी ने जो आमगांव और लांजी होते हुए किरनापुर रजेगांव फोरलेन सड़क है वह आपकी विधान सभा को मेरी विधान सभा से जोड़ती है उसके लिए धन्यवाद देता हूं.
अध्यक्ष महोदय -- अभी दोनों लोग मिलकर दे रहे थे अब अलग-अलग धन्यवाद देने लगे.
श्री राजकुमार कर्राहे -- अध्यक्ष महोदय, नहीं वह भी दोनों की तरफ से है.
श्री मधु भगत -- अध्यक्ष महोदय, एक धन्यवाद मैं आपको और दे रहा हूं कि आपने घिसर्री पुल के ऊपर परसवाड़ा से घिसर्री कटंगी तक का जो हमको एक पुल दिया है 11 करोड़ का उसके लिए भी मैं आपको धन्यवाद देता हूं और पूरक बजट का भी एक धन्यवाद आपको दे रहा हूं जो आपने साढ़े सात करोड़ का एक पुल हमको पांडेवाड़ा से डोंगरबोड़ी के लिए दिया उसके लिए भी देता हूं. मैं सिर्फ इसलिए आपको धन्यवाद दे रहा हूं कि आपने छोटे-छोटे कार्य किए हैं लेकिन मैं अगर कुछ मांग रख रहा हूं तो इसके ऊपर आप ध्यान केन्द्रित करेंगे कि मेरी अगर कोई मांग आए जिसमें आपको फाईल बुलाने में अगर 10 महीने लगने लगें.
अध्यक्ष महोदय -- मधु भाई, प्लीज आप बड़े समझदार विधायक हैं. प्लीज समझ का परिचय हर चीज में देना चाहिए.
श्री मधु भाऊ भगत -- और पूरक बजट का भी आपको धन्यवाद दे रहा हूं जो आपने साढ़े 7 करोड़ की एक पुल आपने पांडरवाड़ा और डोगरगोड़ी के लिये दिया है उसके लिये भी आपको धन्यवाद दे रहा हूं. मैं सिर्फ आपको धन्यवाद इसलिये दे रहा हूं कि आपने छोटे छोटे कार्य किये हैं, मैं अगर कुछ मांग आपसे कर रहा हूं तो इस पर आप अपना ध्यान केन्द्रित करेंगे कि मेरी अगर कोई भावनायें हैं..
अध्यक्ष महोदय- मधु भाई प्लीज आप बड़े समझदार विधायक हैं..समझ का परिचय हर चीज में देना चाहिये. प्रहलाद लोधी जी 5 मिनिट में अपनी बात कहेंगे.
श्री मधु भाऊ भगत-- अध्यक्ष जी, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया उसके लिये आपको बहुत बहुत धन्यवाद.
श्री प्रहलाद लोधी(पवई)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे लोक निर्माण विभाग की मांग पर अपनी बात रखने का अवसर प्रदान किया उसके लिये आपको बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय--5 मिनट में अपनी बात को रखेंगे.
श्री प्रहलाद लोधी -- अध्यक्ष महोदय, मैं ओर भी जल्दी बोलने की कोशिश करूंगा. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि लोक निर्माण से लोक कल्याण के ध्यये के पग के साथ पूर्व क्षेत्र सागर, रीवा, एवं जबलपुर संभाग में लोक निर्माण विभाग द्वारा विगत 2 वर्षों में किये गये अभूतपूर्व विकासकार्य की उपलब्धियों पर चर्चा करने के लिये खड़ा हुआ हूं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे देश की भौगोलिक स्थिति जो विंध्य के पहाड़ों और बुंदेलखंड संसाधनों से समृद्ध है, उसे प्रगति की मुख्यधारा से जोड़ने के लिये सरकार ने बुनियादी ढांचे का एक सशक्त जाल बिछाया है. वृहद पुल, एलिवेटेड कॉरिडोर (Elevated Corridor) से सुगम यातायात के नये युग का प्रारंभ हुआ है.
अध्यक्ष महोदय, विगत दो वर्षो में 22 सेतु, के कार्य लगभग रूपये 1273 करोड़ के पूर्ण किये गये हैं. जबकि 219 से अधिक के कार्य़ रूपये 4899 करोड़ के अभी प्रगति पर हैं. जिसमें से एक पुल मेरे विधानसभा में ही है, मेरे विधानसभा में इस 8 से 9 पुल हैं जिसमे से केन नदी पर 4-5 पुल हैं, एक बेरवा नदी पर, एक पटना नदी पर तो मैं इसके लिये मैं मंत्री जी का धन्यवाद करता हूं , आभार व्यक्त करता हूं. उनका स्नेह और प्यार मुझे पहले भी मिलता था आज भी मिल रहा है, पहले जब आप सांसद थे, प्रदेशाध्यक्ष थे तब भी आपका स्नेह मुझे मिलता था. आज भी मिल रहा है. मेरे विधानसभा क्षेत्र में जो 134 करोड़ रूपये की रोड दी है उसके लिये भी मैं बहुत धन्यवाद देता हूं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में माननीय मंत्री जी के नेतृत्व में लगातार हमारी सरकार प्रगति की ओर बढ़ रही है. अभी जैसे हम लोग जबलपुर जाते हैं जो वहां का एलिवेटेड कॉरिडोर जो कि 6 किलोमीटर का है,9 किलोमीटर का है वह रूपये 1100 करोड़ का बनाया है, जबलपुर शहर का चारों तरफ से ट्राफिक रहता है चाहें हम दमोह से चले जायें, चाहे पाटन से चले जायें तो जबलपुर में उससे ट्राफिक होता था, उसके बनने से ट्राफिक की समस्या और जो दुर्घटनायें होती थीं इससे निजात मिली है, यह बहुत बड़ी उपलब्धि है. मैं इसके लिये भी माननीय मुख्यमंत्री जी का और माननीय मंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, इसी प्रकार से रीवा में सिरमौर चौराहे पर ट्राफिक की बड़ी समस्या थी वहां पर भी एक रीवा में यातायात सुगम बनाने के लिए सिरमौर चौराहा से अस्पताल चौराहा तक एक प्रमुख एलिवेटेड मार्ग (फ्लाईओवर) का निर्माण प्रस्तावित है. 163 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनने वाले इस 2.3 किमी लंबे फ्लाईओवर में बोहर नदी पर केबल ब्रिज भी शामिल होगा, जो शहर के यातायात को जाममुक्त करने में मददगार होगा. एक एलिवेटेड मार्ग जो कि 39.82 करोड़ का है इससे व्यापारियों और सभी को इसका लाभ मिलता है ऐसी स्थिति में मैं माननीय मंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूं. अध्यक्ष महोदय आभार केवल रोड के लिये व्यक्त नहीं कर रहा हूं, हमारे मंत्री जी और मुख्यमंत्री जी ने लगातार कई भवनों को चाहे वह स्कूल के भवन हों, चाहे स्वास्थ्य के भवन हों, कई प्रकार से, विकास की गति चारों तरफ से हो रही है. जो हमारे कांग्रेस पक्ष के विधायक कह रहे हैं, मैं तो कहता हूं कि आप बजट उठाकर के देख लें ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां पर हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी ने, हमारे माननीय मंत्री जी ने रोड या भवन कुछ न कुछ अवश्य दिया है. विपक्ष का तो काम ही रहता ही है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश में डबल इंजन की सरकार में हमारे देश के प्रधान मंत्री आदरणीय मोदी जी के नेतृत्व में मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में रोड बन रहे हैं, इसके पहले भी मैं तो कहता हूं कि ऐसे ऐसे रोड बनें हैं , एक रोड पर तो फ्लाइट भी उतार दी गई थी. हेलीकाफ्टर भी रोडों पर उतार दिये जाते हैं, इतने बेहतरीन रोड हमारी सरकार ने बनाये हैं. इतनी मजबूती से रोड बन रहे हैं. अभी आगरा के पास में राजनाथ जी के सामने ही रोड पर हेलीकाफ्टर उतारे गये थे. तो इतनी अच्छी और मजबूती के साथ में काम हो रहे हैं. वह तो विरोधियों का काम है विरोध करना इसलिये किसी भी बात पर विरोध करते हैं.
अध्यक्ष महोदय- प्रहलाद जी अब आप धन्यवाद तो दे दो.
श्री प्रहलाद लोधी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपको भी धन्यवाद दे रहा हूं, माननीय मुख्यमंत्री जी को भी धन्यवाद दे रहा हूं और माननीय लोक निर्माण मंत्री जी को भी धन्यवाद दे रहा हूं. लेकिन एक निवेदन और कर रहा हूं.
अध्यक्ष महोदय- प्रहलाद जी लेकिन, किंतु परंतु मत लगाओ. सीधे धन्यवाद दो.
श्री प्रहलाद लोधी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आप मेरी स्थिति को देख लें मुझे जो सीट दी गई है, सीधे तरफ कांग्रेस के सदस्य बैठते हैं उल्टी तरफ बीजेपी के विधायक बैठते हैं यह बीजेपी वाले समझते हैं कि कांग्रेस के विधायक बैठे हैं और कांग्रेस के विधायक समझते हैं कि बीजेपी के विधायक बैठे हैं,(हंसी) तो इस पर भी थोड़ा सा आपका ध्यान दिलाना चाहूंगा, मैं तो बीच में लटका हूं. (हंसी)
अध्यक्ष महोदय- प्रहलाद जी पूरा करो.
श्री प्रहलाद लोधी-- बिल्कुल अध्यक्ष महोदय, एक मिनिट में पूरा करूंगा. पवई से पिपरिया दोन मार्ग - कल्दा और मैहर मार्ग को अगर जोड़ा जाए तो माननीय कल्दा हमारा ट्रायवल क्षेत्र है, वहां पर जो जीवन रेखा बनेगी वहां से रीवा भी जोड़ देगी, उससे यहां वह छतरपुर,झांसी भी जोड़ देगी. इसी प्रकार से एक हनुमान भाटा की सड़क स्वीकृत थी. तो उसको भी पूर्ण करवाया जाये. एक निवेदन और करता हूं कि हमारे मोहन्द्रा से रेपुरा, बहोरीबंद, बाकल सिहोरा के रोड का चौड़ीकरण कर दिया जाये. तो जबलपुर से सीधे इससे बहुत बड़ी सुविधा बनेगी. अध्यक्ष महोदय, आपका, मंत्री जी का एवं मुख्यमंत्री जी का बहुत बहुत धन्यवाद.
श्री प्रणय प्रभात पांडे (बहोरीबंद) – अध्यक्ष महोदय, मैं मांग शंख्या 24 के समर्थन एवं कटौती प्रस्ताव के विरोध में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. सर्व प्रथम तो मैं मुख्यमंत्री जी, हमारे लोक निर्माण मंत्री जी, राकेश सिंह जी का पूरे जिले की ओर से और बहोरीबंद विधान सभा एवं प्रदेश की ओर से धन्यवाद करना चाहता हूं कि समस्त बहोरीबंद विधान सभा एक समय ऐसा हुआ करता था, जब रोड न होने के पीछे जाना जाता था और आज मुख्यमंत्री जी और हमारे मंत्री जी, चूंकि वे हमारे सांसद भी रहे हैं. इनके विशेष प्रयास से और मुझे लगता है कि इतना प्रयास मुझे लगता है कि महाकौशलल में सबसे ज्यादा अगर रोडों का काम और जाल बिछाने का काम कहीं हुआ है, वह बहोरीबंद विधान सभा में हुआ है. अब तो मुझे कई बार कहते हुए इतनी प्रसन्नता होती है, यह मैं नहीं कहता, मेरे क्षेत्र की जनता कहती है कि अगर कोई ग्राम पंचायत है, तो ग्राम पंचायत के अंदर भी पीडब्ल्यूडी का सड़क लगभग 9 किलोमीटर जो ग्राम पंचायतों के अंदर भी पीडब्ल्यूडी के जैसे बाकल,बड़गांव,रीठी, स्लीमनाबाद के अन्दर जाने के लिये, तमाम बड़े पीडब्ल्यूडी के निर्माण चाहे वह स्कूल के काम हों, चाहे हास्पिटल हों, चाहे दो दो महाविद्यालय और एक बहुत बड़ा आईटीआई बनकर तैयार हो रहा है. इसके लिये मैं मंत्री जी एवं मुख्यमंत्री जी का बारम्बार धन्यवाद करता हूं और सबसे बड़ा धन्यवाद चूंकि मुझे सड़क भी सबसे ज्यादा मिली हैं, इस बजट में भी और पिछले बजट में भी. आज एक बहुत अच्छी पारदर्शिता के साथ मंत्री जी ने योजनाएं बनाई हैं, विजन बनाया है, मुझे लगता है कि इससे अच्छा विजन कोई हो नहीं सकता कि भ्रष्टाचार मुक्त रोड कैसे बनें, मजबूत रोड कैसे बनें और अगर रोड बना है तो एप्प के माध्यम से जो लोक पथ एप्प है, उसका मैं खुद भी गवाह हूं. मैं सदन में कहता हूं कि मैंने एक रोड में गड्ढा देखा और मैं उसको उस एप्प से फोटो अपलोड कर दिया, 4 दिन बाद वह गड्ढा बनकर तैयार हो गया. ऐसी भी योजनाओं के माध्यम से यानि हम जो कहते हैं, वह करते हैं. वह दिखता भी है. हमारे मंत्री जी ने तमाम ऐसे काम जो वह रोड के टेंडर को लेकर हों, ऐसे जो टेंडर के काम जो हुआ करते थे. कोई भी, कैसे भी ठेकेदार उसको भर कर चला जाता था. आज यह व्यवस्था इतनी लगाम कस दी गई कि मेरे यहां एक गलत ठेकेदार रहा होगा. मैं नहीं जानता, पर उसने इसीलिये उस रोड को नहीं लिया, मैं धन्यवाद देता हूं मंत्री जी को इसलिये भी कि ऐसे लोगों से भी बचाये कि अच्छी रोड लेकर कि अच्छा ठेकेदार बनायेगा, तो वह दूर तक रोड बनकर जायेगा. जैसे डामर के लिये भी बहुत अच्छी व्यवस्था है. आज चाहे वह इंडियन ऑयल से लें या तमाम शासकीय एजेंसी से डामर की खरीदी होगी. इसमें भी भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं होगी. अगर रोड कहीं खराब होता था, तो सीधे शीधे डामर उखड़ने से खराब होता था. कहीं न कहीं धांधली होती थी. पर उस धांधली को भी सुधार करके मंत्री जी ने उसके लिये बहुत अच्छा प्रयास किया है. उसके लिये बहुत बहुत साधुवाद, धन्यवाद. धन्यवाद तो मैं कितना भी दूं, उतना भी कम है. पर एक बहुत बड़ा रोड जो कटनी से दमोह, अभी दमोह से सागर फोर लेन रोड स्वीकृत हुआ था, जो उसका सबसे ज्यादा पार्ट जो प्रस्तावित है, कटनी से दमोह फोर लेन रोड जायेगा, जो मेरी विधान सभा से होकर 60 ककिलोमीटर से जाने वाला है, उसके लिये मैं बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं. चूंकि इससे हमारे मजदूरों को, युवाओं को सबको रोजगार भी मिलेगा और स्कूल एवं कालेज में पढ़ने वाले बच्चों को आने जाने के लिये साधन उपलब्ध होंगे. आसानी से आने जाने का रास्ता मिलेगा. उसके लिये मैं बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं. एक छोटा सा फिगर है, जिसके लिये मैं मंत्री जी को धन्यवाद, देना चाहता हूं. मेरे पास 24 सड़कें जो दो साल में मुझे मिली हैं, जिनकी दूरी लगभग 152 किलोमीटर और लागत लगभग उसकी 180 करोड़ रुपये है. अभी तीन-चार रोड और हैं. दो-तीन आरओबी हैं. चाहे वह रेल्वे के तीन आरओबी भी बने हैं और अभी दो प्रास्तावित हैं. इस सबके लिये मैं धन्यवाद देता हूं. धन्यवाद इसलिये भी देता हूं कि जाम के लिये भी अगर कोई विधान सभा जाना जाता था, तो देवरी फाटक,सलैया फाटक, जहां आये दिन जाम रहता था. चाहे दमोह कटनी रोड हो, चाहे स्लीमनाबाद शहडोल रोड हो. दो दो तीन घण्टे का जाम लगता था, आज उस जाम से मुक्ति मिली है. इसके लिये भी मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद प्रेषित करता हूं. 3 रोड अभी इस बजट में मिली हैं, क्योंकि मैं उस रोड का मंत्री जी को इसलिये धन्यवाद करना चाहता हूं कि वह जनजाति गांव को जोड़ता है.और जनजातीय गांव को ही नहीं जोड़ता, वह ऐसे विकास को और ऐसी बस्तियों को और ऐसे लोगों को जोड़ता है, जिनके लिये हम कहते हैं कि हमारा जो अंतिम पंक्ति में व्यक्ति बैठा है, उसका विकास होना चाहिये. हमारे यहां केवलारी-निपनिया, पथरावी-पिपरिया से केवलारी-निपनिया जाने वाला गांव, वहां पर कुल ढाई सौ लोगों की आबादी है. माननीय मंत्री जी ने 9 करोड़ रूपये की लागत से वहां एक रोड स्वीकृत किया और दूसरा इस बजट में किया. लगभग 20 करोड़ रूपये की लागत से इस गांव के लिये ऐसी लिंक खोल दी कि हमको रीढी से हमारा मुख्यालय बहोरीबंद और रीढी जाने के लिये 75 मिलोमीटर की दूरी लगती थी. अब जब वह रोड बनकर तैयार हो जायेगा, तो 35 किलोमीटर में वह हमारा जनजातीय भाई, हमारा साथी चाहे वह मुख्यालय आ जाये, अस्पताल आ कॉलेज चला जायेगा. इसके लिये मैं मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं. चूंकि दो रोड जो अतिआवश्यक है. वहां भी लोगों को घूमकर के जाना पड़ता है. वैसे रोड के लिये मुझे कहना नहीं पड़ता है. मैं दिल से मंत्री जी को धन्यवाद करता हूं. मुझे अधिकार भी नहीं बनता की मैं रोड मांगू, चूंकि मुझे इतना मिला है कि अगर एक रोड मांगी तो 5-5 सड़क मिली है.
अध्यक्ष महोदय- इस साल और मत मांगों. अगले साल भी बजट आयेगा.
श्री प्रभात प्रणय पांडे- अध्यक्ष महोदय, अगली बार के लिये ही मांग रहा हूं कि अगली बार मिल जाये. एक बाकल से पिपरिया को जोड़ने वाली सड़क है और एक तिवरी से बिछुआ होकर लखनवारा-खरेनी होते हुए एक रोड है. अगर यह रोड और मिल जायेगा तो इस पूरे क्षेत्र के विकास के लिये पूरी एक मुख्य लाइन तैयार हो जायेगी.
अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया और माननीय मंत्री ने और इस सरकार ने मुझे इस मंच से बोलने के लिये, मेरे क्षेत्र की ओर से इतने काम आपने दिये हैं. अगर मैं बोलूंगा तो अभी भी मेरे पास बोलने के लिये बहुत कुछ है. आपको बहुत-बहुत धन्यवाद, माननीय मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद, माननीय मंत्री जी का धन्यवाद.
श्री सोहनलाल बाल्मीक (परासिया)- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री मेरे छिंदवाड़ा जिले के प्रभारी मंत्री हैं.
मैं उनके सामने अपने क्षेत्र की कुछ मांग रखना चाहता हूं. एक तो यह मांग है कि छिंदवाड़ा से परासिया तक का फोरलेन का यदि आप परीक्षण करा लें और उसे बनवा दें. क्योंकि यह बहुत आवश्यक है. वहां पर हर सप्ताह कोई न कोई दुर्घटना घटती है. जिससे कई लोगों की जान गयी है. यह बहुत आवश्यक है और दूसरा चांदामेटा से एक ग्राम गाजेंडू तक का उन्नयन करना है. यह रोड 5 किलोमीटर तक का है. इसका मैंने एस्टीमेट भी पहुंचवाया है, वह लगभग 9 करोड़ रूपये का है. यदि आप यह कर देंगे तो चांदामेटा नगर पंचायत को इसका काफी सहारा मिलेगा, इससे व्यापार बढ़ेगा और लोगों को सुविधा प्राप्त होगी.
दूसरा नवीगांव से दिगवानी का मार्ग, जो आपने मुझे पिछली बार दिया था. इसमें अलायमेंट चेंज करने का था, उसका प्रस्ताव भी आया है. सिर्फ 500 मीटर अलायमेंट चेंज करना है. इसमें कोई अतिरिक्त राशि नहीं लगेगी तो इसलिये मेरा आपसे निवेदन है कि इसको स्वीकृति प्रदान करवा दें.
दूसरा एक सतनूर टोल नाका है जो एमपीआरडीसी का है. वह कई वर्षों से चल रहा है. उसकी जो लागत थी और जो ठेकेदार का प्राफिट था, वह सब निकल गया है उसके बाद भी वर्ष 2031 तक चलाने की उसकी योजना है तो मेरा आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन है कि यदि उसकी राशि पूरी निकल चुकी है और उसका लाभ प्राप्त हो चुका है तो उस टोल को बंद कराने की कृपा करेंगे.
एक और यह है कि ग्राम पुरा से ग्राम पुराढाना तक रोड की स्वीकृति पिछली बार आपने दी थी. मगर इसमें जो एस्टीमेट बना था तो उसमें 40 लाख रूपये की कास्ट कम आ गयी थी तो इसलिये मेरा आपसे आग्रह है कि वह विभाग ने भेज दिया है. यदि आप उसको करवा देंगे तो बहुत उचित काम हो जायेगा. यह मेरा आपसे निवेदन था.
अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे एक बात यह भी कहना चाहूंगा कि हम सभी विधायक याचिका, शून्यकाल भी लगाते हैं. मगर याचिका की, शून्यकाल की और जो मांगों में चर्चा का. इसका कोई अस्तित्व है या नहीं कि यह सिर्फ रिकार्ड में आता है. आप देखिये हम याचिका कई वर्षों से लगा रहे हैं. मगर याचिका के हिसाब से कोई काम नहीं मिलता. दूसरा हम यहां पर शून्यकाल भी पढ़ते हैं. मगर शून्यकाल का कोई परिणाम नहीं आ पाता है. आज मांगों में कई वर्षों से चर्चा चल रही है. अपनी बात और सुझाव विधायक लोग देते हैं, तो क्या विधायकों के अच्छे सुझाव माने जाते हैं क्या उन मांगों को जो हम रखते हैं या अपनी बात रखते हैं तो क्या अनुरूप काम विधान सभा के अंदर में होता है. क्या विभाग आगे चलकर इस पर कोई कार्यवाही करता है. इसके अस्तित्व को बनाना पड़ेगा क्योंकि ध्यानाकर्षण का अस्तित्व है. तारांकित प्रश्काल का अस्तित्व है. मगर बाकि चीजों का अस्तित्व कहां है.
माननीय अध्यक्ष जी, यह बड़ा गंभीर विषय है और आप व्यवस्था बनायेंगे तो इन सभी में क्योंकि हम याचिका, शून्यकाल लगाते हैं तो उसमें कुछ उम्मीदें रहती हैं. मगर उसका कुछ रिजल्ट नहीं आ पा रहा है, कुछ जानकारी नहीं मिल पाती है तो मेरा आपसे निवेदन है कि इस ओर ध्यान देंगे तथा आने वाली विधान सभा में इस पर कुछ न कुछ व्यवस्था बनाने का कष्ट करेंगे. धन्यवाद.
श्रीमती झूमा डॉ. ध्यानसिंह सोलंकी (भीकनगांव) - अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी का धन्यवाद करूंगा कि पिछले बजट में दामखेड़ा से भीकनगांव रोड जो चल रहा है उसके लिए धन्यवाद, परन्तु उसके बीच की जो पुलिया है, जगदन नदी की पुलिया है वह भी स्वीकृत है, लेकिन वह अभी तक शुरू नहीं हुई है तो उसको जरूर शुरू करवा दें, उसी के पास का गांव चेनपुर के पास में मारूगढ़ है, उसकी भी पुलिया है, ये दोनों हो जाएंगे तो निश्चित ही उस रोड की शोभा बढ़ जाएगी. दोनों तहसीलों को जोड़ने वाला यह रोड है, इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करूंगी, यह जरूर आप इसको संज्ञान में लें और शामिल करें. धन्यवाद.
श्री विश्वनाथ सिंह 'मुलाम भैया'(तेंदूखेड़ा) - अध्यक्ष महोदय, मैं आपका बहुत आभारी हूं, आपका बहुत बहुत धन्यवाद. सत्ता पक्ष के सभी साथियों का अभिनंदन, विपक्ष के सभी साथियों का अभिनंदन. वास्तव में अभी हमारे बहुत वरिष्ठ नेता आदरणीय डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह जी ने बात रखी थी कि बजट पहले कम होता था, अब ज्यादा है, इसलिए काम दिख रहे हैं, यह बात नहीं है. बात यह है कि नेता की नीयत हो, नेता ठीक हो, नेता में कार्य करने की क्षमता हो, तब काम दिखता है. (मेजों की थपथपाहट)..मैं मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को और हमारे लोक निर्माण मंत्री आदरणीय श्री राकेश सिंह जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि पिछले बजट में मुझे उन गांवों को रोड दीं जो आजादी के 70 साल के बाद भी नहीं जुड़े थे. टेकापास से धोखेड़ा, इमलिया से पिपरिया, एक नर्मदा मैया का रोड दिया , जहां 50-60 गांव के लोग नर्मदा जी में स्नान करने जाते हैं. जिस तरह से हमारे लोक निर्माण मंत्री दिखते हैं, देखें जरा सब लोग नजर उठाकर एक बार, उस तरह हमारी रोडें दिख रही हैं. (हंसी)..यह काम करने की नीयत है. इस बजट में अभी मुझे माननीय मंत्री जी ने रोड दी हैं. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि मेरी विधान सभा पूरी ग्रामीण है. एक भी शहर नहीं है. कुछ रोड दी हैं उनमें थोड़ा सा संशोधन कराऊंगा. करली से गाडरवारा, तेदूंखेड़ा से गाडरवारा जहां डम्फर चलते हैं 15 दिन में 10-15 मौतें होती हैं उन सड़कों का चौड़ीकरण किया जाय. जिस मां का बेटा मरता है, उस मां की तकलीफ देखी नहीं जाती. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करता हूं एमपीआरडीसी का यह रोड है. माननीय मंत्री जी इसका चौड़ीकरण करवा दें. यदि इसको टू लेन न कराएं तो कम से कम लोगों को निकलने के लिए रास्ता होगा. मेरी विधान सभा का टिटरी ब्लाक जहां चौहान का किला है, राजा प्रेमनारायण, दुर्गावती रानी का स्मारक है, उस पूरे क्षेत्र में सड़कों की कमी है. माननीय मंत्री जी मैं बार बार लिखकर देता हूं अगले बजट में उनको जोड़ने की कृपा करेंगे. मुझे उम्मीद है.
अध्यक्ष महोदय, मेरा पूरा ग्रामीण क्षेत्र है. सबसे पहले तो वास्तव में फिर एक बार कहना चाहता हूं कि पाथेय स्मरणीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को धन्यवाद दें कि प्रधानमंत्री बनने के बाद हमारे कई गांव प्रधानमंत्री सड़क से जुड़ गये. (मेजों की थपथपाहट).. यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं की नीयत और काम करने का तरीका है. इस मध्यप्रदेश में सबसे पहले मुख्यमंत्री श्री बाबूलाल गौर हुए थे, जब उन्होंने बुलडोजर चलवाया तो भोपाल की तस्वीर और तकदीर बदल दी थी. श्री पटवा जी वर्ष 1992 में आए थे, अभी डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह जी बात कर रहे थे. बजट बहुत कम होता था, मेरे स्वर्गीय चाचा जी श्री सुजान सिंह पटेल उस वक्त मंत्री हुआ करते थे और हमारी विधान सभा सड़कें नहीं थीं. आदरणीय श्री उदय प्रताप सिंह जी बैठे हैं, मैंने सबसे पहले उस वक्त चाचा जी के मार्गदर्शन में नारगी से कल्याणपुर और तेंदूखेड़ा से भामा जैसे रोड बनवाए थे. बजट की कहीं कमी नहीं दिखती थी. श्री पटवा जी ने क्या योजनाएं चलाई थीं, वसुंधरा, जीवनधारा. यह भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के काम करने की क्षमता है. चाहे पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान हों, चाहे वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हों. 2 साल में मैं फिर भी कहूंगा मैं धन्यवाद देता हूं मुख्यमंत्री जी को कि 350 करोड़ रुपये से ऊपर काम कराएं, उसके लिए मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद. जय हिन्द, जय भारत.
(मेजों की थपथपाहट)..
श्री कमल मर्सकोले (बरघाट) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 24 के समर्थन में और कटौती प्रस्ताव के विरोध में अपनी बात रखने के लिए खड़ा हुआ हॅूं. लोक निर्माण विभाग किसी भी राज्य की आधारभूत संरचना का मूल स्तंभ है. पुल-पुलिया, सड़क, भवन, अस्पताल, विद्यालय और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों का निर्माण और रख-रखाव विभाग की जिम्मेदारी है. प्रदेश के समग्र विकास में, औद्योगिक प्रगति में और ग्रामीण-शहरी संतुलन में विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है. मध्यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जिस गति से आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ और मजबूत करने की दिशा में काम किया है, आज उसी का परिणाम है कि संपूर्ण प्रदेश में अच्छी सड़कें, बेहतर सड़कें केवल आवागमन को सुगम नहीं बनाती, बल्कि यह व्यापार, पर्यटन, निवेश को भी प्रोत्साहित करती हैं. वास्तव में किसी भी देश या राज्य के विकास का मापदण्ड वहां की सड़कें होती हैं और मध्यप्रदेश में हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में, आदरणीय मुख्यमंत्री जी और हमारे मंत्री जी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में सड़कों के नेटवर्क मजबूत करने का काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है.
अध्यक्ष महोदय, बरघाट विधानसभा की जनता-जनार्दन की तरफ से उनकी भावनाओं को मैं आपके समक्ष रखना चाहता हॅूं. सिवनी से बालाघाट मार्ग जिसकी लंबाई 90 किलोमीटर है, उस मार्ग की चौड़ाई साढे़ 5 मीटर है. इस मार्ग पर भारी आवागमन रहता है और भारी यातायात भी रहता है. उस मार्ग पर ट्रैफिक बहुत है. वाहनों को क्रॉसिंग करने में काफी दिक्कतें होती हैं, जिससे प्रतिदिन लगभग 5 से 7 दुर्घटनाएं होती हैं और अभी तक दर्जनों मौतें भी इस मार्ग पर हो चुकी हैं. विगत 5 अगस्त 2024 को हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी बरघाट अर्द्ध प्रवास पर आए थे. उन्होंने सिवनी-बालाघाट मार्ग के फोरलेन सड़क निर्माण के लिए घोषणा की थी. घोषणा के परिपालन में द्वितीय अनुपूरक बजट में सिवनी-बालाघाट फोरलेन निर्माण के लिए राशि रूपए 15 करोड़ 86 लाख का प्रावधान किया और डीपीआर बनकर के तैयार भी हुआ है. इसके लिए वन विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र भी जारी हो चुका है. सारी औपचारिकताएं लगभग पूर्ण हो चुकी हैं. इसे वित्त विभाग और कैबिनेट में जाना है. आपके माध्यम से मेरा माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि सिवनी-बालाघाट फोरलेन मार्ग की टेण्डर प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर और उस मार्ग का काम शीघ्र प्रारम्भ कराने का मैं अनुरोध करता हॅूं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करता हॅूं कि मेरी विधानसभा के ग्राम गुरेना से बिछुआ मार्ग पर एक गदर नदी नाला है. जो दो विधानसभाओं को जोड़ने का काम करता है. एक तरफ केवलारी विधानसभा है और दूसरी तरफ बरघाट विधानसभा है. इस गदर नदी पर यदि पुलिया का निर्माण हो जाता है, तो निश्चित रूप से 20-25 गांवों के लोगों को आवागमन की दृष्टि से उसका लाभ मिलेगा और इसके लिए मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी अनुरोध करता हॅूं कि इसकी पुलिया की स्वीकृति प्रदान करने का कष्ट करें.
मैं अनुरोध करता हूं कि मेरी विधान सभा क्षेत्र के सजनवारा से पिपरिया हिर्री मार्ग पर निर्मित पुलिया टूट गया है. जिससे 20 से 25 गांव का आवागमन रूक गया है. इस मार्ग पर पुलिया का निर्माण हो जाये तो बड़ी कृपा होगी. मेरे विधान सभा क्षेत्र में 4 रेस्ट हाऊस हैं जो जर्जर अवस्था में हैं बरघाट, हर्री, खुरई और खवासा यदि इसके लिये धनराशि उपलब्ध करवाकर के नवीन विश्राम गृह की माननीय जी से अनुरोध करता हूं उसके साथ साथ मेरी विधान सभा क्षेत्र में नये गांव से चिरचिरा मार्ग निर्माण, जोरावारी से चिरचिरा मार्ग निर्माण, बम्होडी, साल्है, चीचबंद, डुंगरिया मार्ग निर्माण, बोरी से खुर्सीपास, पाथरफोड़ी, करकोटी, मुण्डरई, भोमा मार्ग निर्माण, विजयपानी से बारहद्वारी मार्ग निर्माण, ग्राम पखारा से पखाराटोला से श्यामसिंह उइके के घर तक मेहरापिपरिया ग्राम की ओर सड़क निर्माण, साल्हे (कोसमी) से अमीनगंज टोला होते हुए खर्रापाठ तक मार्ग निर्माण, आष्टा से अरी मार्ग, पिपरिया, सजनवाड़ा होते हुए नहर के किनारे मार्ग निर्माण, गोपालगंज, चक्कीखमरिया फुलारा मार्ग निर्माण 26 किलोमीटर है, कुरई बिछुआ, सर्रारीठ पाटन जिलापुर, जामरापानी धनोली, पिटेसुर कुडवा, सिंगापौनार, मार्ग निर्माण 32 किलोमीटर, बकोरीटोला से लाबासर्रा कटंगी मार्ग निर्माण मैं मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि यदि इन मार्गों की स्वीकृति प्रदान हो जाती है तो निश्चित रूप से आवागमन में आम जनता को इसकी सुविधा का लाभ मिलेगा. आपने बोलने का अवसर दिया इसके लिये धन्यवाद.
स्वागत उल्लेख
श्री सुधीर गुप्ता, सांसद, मंदसौर का स्वागत उल्लेख
स्कूल शिक्षा मंत्री (श्री उदय प्रताप सिंह)—अध्यक्ष महोदय, अध्यक्षीय दीर्घा में हमारे मंदसौर के सांसद सुधीर गुप्ता जी बैठे हैं.
अध्यक्ष महोदय—सदन की ओर से श्री सुधीर गुप्ता जी का बहुत बहुत स्वागत है.
श्रीमती सेना महेश पटेल—अध्यक्ष महोदय, हमारी विधान सभा में मुझे 6 रोड़ प्राप्त हुए हैं उसके लिये मंत्री जा का धन्यवाद. मंत्री जी से निवेदन भी करती हूं कि--
श्री भंवरसिंह शेखावत—माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं पहली बार देख रहा हूं कि माननीय मंत्री जी का दोनों पक्षों के लोग स्वागत ही स्वागत कर रहे हैं. मैंने बजट भाषण इतने लोगों के सुने हैं, लेकिन जितनी बधाईयां आदरणीय राकेश जी को मिल रही हैं और दोनों दलों की तरफ से मिल रही हैं. मैं समझता हूं कि बाकी मंत्रियों को इनका अनुसरण करना चाहिये. वह निर्वघन रूप से सबको साथ लेकर के काम करने का वह काम कर रहे हैं. बाकी मंत्री जी भी इनकी तरह से सीखेंगे तो अच्छा लगेगा.
डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय—अध्यक्ष महोदय, सबका साथ, सबका विकास, मैं तो अध्यक्ष महोदय, जी से कहना चाहता हूं कि सुबह का लंच तो आपकी तरफ से हो गया इतने धन्यवाद और बधाईयां आ गई हैं कि डिनर माननीय मंत्री जी तरफ से होना चाहिये.
अध्यक्ष महोदय—मैं काफी देर से सोच रहा था कि भंवर सिंह जी की कोई टिप्पणी क्यों नहीं आ रही है ?
श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल—अध्यक्ष महोदय, जैसा दोनों पक्षों की ओर से लोग तारीफ कर रहे हैं तो फिर इसको सर्वसम्मति से पास किया जाये.
अध्यक्ष महोदय—कैलाश जी का काम मनोज जी ने संभाल लिया है.
अध्यक्ष महोदय – सेना जी, कृपया समय का ध्यान रखें.
श्रीमती सेना महेश पटेल(जोबट) – धन्यवाद अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद प्रेषित करना चाहती हूं. हमारी विधान सभा जोबट में 6 रोड प्राप्त हुए हैं, लगभग 26 करोड़ की है. मंत्री जी से निवेदन है कि तीन वर्ष पहले मंजूरी मिली थी और माननीय नितिन गड़करी जी को भी धन्यवाद करना चाहती हूं. मध्यप्रदेश और गुजरात जो दो राज्यों को जोड़ने का जो एनएच का बड़ा रोड है, जिसका भूमिपूजन ऑनलाइन प्रक्रिया से किया गया था, जो आज दिनांक तक चालू नहीं हुआ. क्या कारण रहा, ये मुझे नहीं पता है, मंत्री जी से जवाब चाहेंगे. लेकिन ये जो रोड आमवा से सेजावाड़ा तक का एनएच का रोड है, जल्दी से जल्दी ये चालू हो जाए, तो जिस प्रकार से वहां दुर्घटना कई बार हुई और कई लोगों को मृत्यु हुई है आवागमन से, ये रोड चालू होने से, वहां की जनता की राहत मिलेगी.
अध्यक्ष जी, मेरी बहुत छोटी छोटी मांगें हैं, जिस प्रकार से सेजावाड़ा से आमवा तक का रोड जल्दी चालू हो जाए. इसी प्रकार से सुखाआम्बा फालिया से मैन रोड तक ग्राम कालूवाट, उबलड हिरापुर से व्याहा होली फालिया होकर पटेल फलिया तक, खारी मैन रोड से सिन्धी मैन रोड तक, मैन रोड करेली मउडी से ग्राम छोटी खटटाल तक ग्राम पंचायत खामडका से केवडी तक काटीवाड़ा ब्लाक, ग्राम वडी जुवारी से उबगारी तक रोड निर्माण बलोदमूंग उदयगढ़, झीरण रोड से वड़ी मिरीयावाट वडी फालिया तक सड़क निर्माण और कनवाड़ा सेवारिया सीमा से लेकर जमेरी, वलेडी सीमा तक. माननीय अध्यक्ष महोदय, इस प्रकार से ग्राम पंचायत गुड़ा गिट्टी मशीन के वहां से प्रारंभ होकर कनाशिया फालिया, वास्कल फलिया, भारी सेमल फालिया, रायणी फालिया, बान्डी सेमल फालिया, गुडा वल्ली, जोबट फाटक तक इस को स्वीकृति मिल जाए, ऐसा निवेदन है. उम्दा भानपुर से नदी फालिया होते हुए पंचायत तक और उम्दा भूरिया कुआ से कुंडालिया फालिया तक सड़क निर्माण हेतु स्वीकृति प्रदान करें, माननीय मंत्री जी यही मेरा निवेदन है. अध्या जी आपने बोलने का समय दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय – श्री कमलेश्वर डोडियार.
श्री कमलेश्वर डोडियार (सैलाना) – धन्यवाद अध्यक्ष जी, बजट प्रस्तुत हुआ उसमें पीडब्ल्यूडी विभाग में रतलाम जिले में अलग अलग बहुत सारा बजट स्वीकृत किया, सड़कें बनाने के लिए, लेकिन मेरे विधान सभा क्षेत्र में ऐसा लगा कि मेरी विधान सभा के लोगों के साथ सरकार ने सौतेला व्यवहार किया है. पूरे विधान सभा में केवल एक ही सड़क स्वीकृत की है, वह भी केवल एक करोड़ रुपए की है. मेरा आग्रह है कि मेरी विधान सभा क्षेत्र के लिए मैं लगातार पिछले दो साल से मांग कर रहा हूं कि चन्द्रगढ़ में माही नदी पर और राजापुरा माताजी गांव में करन नदी पर पुल बनाने की सख्त जरूरत हैं, क्योंकि यहां बड़ी सड़क है और कई गांवों के लोग आने जाने में इस सड़क का उपयोग करते हैं, इन दोनों नदियों पर पुल नहीं है तो इस वजह से बहुत समस्या होती है. मरकुल गांव में जाम्बड नदी पर पुलिया निर्माण की सख्त आवश्यकता है. यहां तकरीबन 20 गांवों के लोग रोज संघर्ष करते हैं, नदी होने की वजह से स्कूल जाने वाले बच्चे भी संघर्ष करते हैं, कई बार दुर्घटनाएं भी होती हैं, जंगली जानवर भी होते हैं. मरकुल गांव में जाम्बड नदी पर पुलिया स्वीकृत किया जाए और गांव नाहरपुरा में जाम्बड नदी पर पुलिया पहले से बनी थी, लेकिन यह पुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई है, नदी हमेशा चालू रहती है. इसके पहले डैम बना हुआ है, जब डैम से पानी निकलता है तो यहां हमेशा पानी रहता है. पहले भी मैंने इस बारे में माननीय मंत्री महोदय को पत्र लिखे हैं, प्रस्ताव भी दिए हैं. मेरा अनुरोध है कि मेरी विधान सभा क्षेत्र में यह स्वीकृति दी जाए. धन्यवाद.
श्री फूल सिंह बरैया(भाण्डेर) -- अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 24 के संबंध में कटौती प्रस्ताव के पक्ष में बोलने के लिये खड़ा हुआ है. एक बहुत बड़ी समस्या है, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान इस ओर आकर्षित कराना चाहता हूं, ग्वालियर से इटावा इसमें 125 किलोमीटर का रोड है और इसमें 25 किलोमीटर उत्तरप्रदेश का आयेगा और 100 किलोमीटर के लगभग का मध्यप्रदेश का आयेगा, यह टू वे रोड है और लगभग बीस हजार से ज्यादा उसमें भारी ट्रेफिक है, वहां इतने ज्यादा एक्सीडेंट होते हैं कि एन.डी.टी.वी. एम.पी., छत्तीसगढ़ ने एक सर्वे कराया था, उस सर्वे में दो मौत रोज की होती हैं, एक्सीडेंट में 4,5,6,7 लोग एक साथ खत्म होते हैं. औसतन उन्होंने दो बताये थे, इस रोड की काफी समय से मांग चल रही है, इसको फोर लेन किया जाये, इसके लिये मांग करते-करते इतना समय निकल गया है कि अब उसकी मांग सिक्स लेन की हो गई है और पूरा एरिया उत्तरप्रदेश से लगा हुआ है, वहां जनसंख्या का घनत्व सबसे ज्यादा है. लोग अब इतने डर गये हैं कि कभी बारात लेकर अगर जाते हैं, तो वहां पर रोड की पूजा करते है, इस रोड का नाम लोगों ने खूनी रोड रख दिया है, लोग इसे हत्यारी रोड कहने लगे हैं, इतनी भयावह स्थिति है कि अगर यह रोड नहीं बनाई गई, तो न जाने कितने चिराग बुझेंगे, न जाने कितनी बहनों के भाई चले जायेंगे, कितने बच्चे अनाथ हो जायेंगे, उनके मां बाप चले जायेंगे, ऐसा उस रोड पर आये दिन होता है. माननीय मंत्री महोदय इसके ऊपर थोड़ा सा गंभीरता से विचार करें और बजट का प्रावधान जो कुछ भी हो इसको विशेष रूप से लेकर इस रोड के बारे में आप थोड़ा विचार करें और आपके जो क्षेत्र हैं, ग्वालियर से मालनपुर, गोहद चौराहा, मेहगांव और फिर भिंड, खूब, बरई और इटावा इसमें रोज जाम लगे रहते हैं क्योंकि उत्तरप्रदेश का जनसंख्या का जो घनत्व है, वैसा ही यहां पर है, इतना ज्यादा जाम लगा रहता है कि जो व्यक्ति चार घण्टे में निकलना चाहता है, उसको वहां पर पूरी-पूरी रात लग जाती है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, इसके साथ में कहूंगा कि धन्यवाद तो हम सभी को देंगे, यह काम आप कर देंगे तो आपको मैं समझता हूं कि इस काम के लिये पुण्य मिलेगा, क्योंकि यह इतना पुण्य का कार्य है कि इससे बड़ा पुण्य का कार्य कोई नहीं हो सकता है, इसके साथ में भाण्डेर विधानसभा के संबंध में चार लाइन और पढ़कर बता रहा हूं, हालांकि उसका आप सर्वे भी चाहें तो करा सकते हैं, भाण्डेर विधानसभा एक ऐसी विधानसभा है, जो संयोगवश पिछड़ गई हैं, कोई जानबूझकर हो सकता है कि नहीं पिछाड़ी गई हो, पर वह संयोगवश पिछड़ गई है. इस विधानसभा में पुलिया, पुल, नदी, नाले बिल्कुल जैसे के तैसे हैं, पुल नहीं है, कभी रपटे बने थे, उस समय जब कभी बजट कम हुआ करता होगा, तो रपटे भी अब खत्म हो गये हैं.
श्री प्रीतम लोधी -- पहली बार बरैया जी ने अच्छी बात करी होगी.
अध्यक्ष महोदय -- आज वह सिर्फ अच्छी बात ही करेंगे, लेकिन आप शांत रहो. (हंसी)
श्री फूलसिंह बरैया -- अध्यक्ष महोदय, मैं चार रोड माननीय मंत्री जी के संज्ञान में लाना चाहता हूं. पहली रोड है दुरसड़ा से चरबरा, मैथानापाली, सोड़ा, गोदन भलका रोड का निर्माण का प्रावधान जोड़ा जाये. दूसरा रोड है भाण्डेर से सरसई तक चौड़ीकरण निर्माण का प्रावधान जोड़ा जाये, तीसरी रोड है सालौन ए से दलपतपुर से सैतौल से सलैतरा होते हुए पक्के मार्ग तक जोड़ा जाये. चौथा रोड है ग्राम घिसलनी से उनाव तक पक्का रोड निर्माण इसका जोड़ा जाये. अध्यक्ष महोदय, यह मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं. मेरे क्षेत्र का विकास के मामले में आप सर्वे भी करा लें, तो निश्चित रूप से आपको धन्यवाद देने की सूची में मुझे भी शामिल कर लें और भिंड का काम कराने के लिये जो खूनी रोड है, उस खूनी रोड का नाम मिटा दीजिये, अध्यक्ष महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.
लोक निर्माण मंत्री(श्री राकेश सिंह)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, वैसे यह भूल गये कि 165 करोड़ रूपये के काम इनकी विधानसभा में भी स्वीकृत हुए हैं (मेजों की थपथपाहट)
श्री रामेश्वर शर्मा -- बरैया जी अब तो आप धन्यवाद दे दो.
श्री फूल सिंह बरैया -- आप एक बार मुझे सूची तो दिलावा दें, तो मैं भी देख तो लूं कि कहां-कहां स्वीकृत हुए हैं. अध्यक्ष महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय-- फूल सिंह बरैया जी की जो सड़कें हैं, उनसे मेरी भी सहानुभूति है. ..(हंसी)..
डॉ. प्रभुराम चौधरी (सांची)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मांग संख्या 24 लोक निर्माण विभाग की मांगों के समर्थन में और कटौती प्रस्ताव के विरोध में बोलने के लिये मैं खड़ा हुआ हूं. माननीय अध्यक्ष महोदय, लोक निर्माण विभाग द्वारा जो मध्यप्रदेश के विकास में, मध्यप्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने और जहां वर्ष 2047 तक देश को आत्मनिर्भर और पूरा विकसित भारत बनाना है तो मध्यप्रदेश को विकसित बनाने के लिये मोहन यादव जी के नेतृत्व में आदरणीय राकेश सिंह जी के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग जहां सड़कों का निर्माण कर रह है वहीं नये-नये और भी नवाचार इस विभाग के द्वारा प्रदेश में आदरणीय राकेश सिंह जी ने किये हैं. जहां सड़कों की गुणवत्ता के लिये लोक पथ एप बनाया है कि अगर कहीं सड़क खराब है फोटो खींचकर उस एप पर डाल दो तो वह जल्दी ही उस रोड का रिपेयर हो जायेगा. दूसरा रोडों के साथ साथ वृक्षारोपण का काम भी लोक निर्माण विभाग ने हाथ में लिया, अनेक जगहों पर वृक्ष भी लगाये गये. माननीय अध्यक्ष महोदय, वृक्षारोपण के साथ-साथ जहां सड़क बन रही है वहां पर सरोवर का निर्माण भी किया जा रहा है तो लोक निर्माण में अनेक नवाचार हुये. माननीय मंत्री जी गुजरात और तेलंगाना के दौरे पर गये वहां से और मध्यप्रदेश में सड़कों की गुणवत्ता कैसे ठीक की जा सकती है वह काम प्रदेश में किया जा रहा है. जहां प्रदेश में अनेक कॉरीडोर, अनेक फ्लाई ओवर, हाइवे, नेशनल हाइवे का निर्माण किया जा रहा है. माननीय अध्यक्ष महोदय, समय की सीमा है इसलिये मैं अपने विधान सभा क्षेत्र की जो कुछ मांगें हैं, कुछ काम हैं उनका भी आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी के सामने रखना चाहता हूं.
अध्यक्ष महोदय-- बस उन्हीं पर आ जाओ आप, वह जरूरी हैं.
डॉ. प्रभुराम चौधरी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद तो दोनों तरफ से माननीय मंत्री जी को मिला है और मैं भी उनको बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं. मेरे विधान सभा क्षेत्र में भी अनेक सड़कों की स्वीकृति उन्होंने सप्लीमेंट्री बजट में दी थी. अभी भी 2-3 सड़कें मेरी बजट में ली गई हैं उसके लिये मैं आपके माध्यम से उनको बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं. अनेक सड़कें जो अभी निर्माणाधीन हैं, कईयों की गुणवत्ता बहुत अच्छी है जैसे गढ़ी से अहमदपुर मेरे विधान सभा क्षेत्र की जो सड़क है बहुत अच्छा उसका निर्माण हुआ है, गुणवत्तापूर्ण हुआ है, लेकिन दूसरी उसी के साथ में रतनपुर से चिकलोद जो दो विधान सभा क्षेत्र को जोड़ती है, आधी सड़क बन चुकी है पेमद तक, लेकिन आधी अभी अधूरी पड़ी है तो नागरिकों में काफी चिंता का विषय है, तो मैं मंत्री जी से कहूंगा कि उसे भी शीघ्र पूरी करवा दें.
माननीय अध्यक्ष महोदय, दूसरा एक विदिशा और रायसेन जिले को जोड़ने वाली हैदरगढ़ से सुल्तानगंज सड़क का निर्माण चल रह है. पिछले सत्र में उसके लिये ध्यानाकर्षण भी आया था, उस सड़क के बीच में मेरा स्वयं का गांव भी वहां पर पड़ता है हैदरगढ़ से बेगमगंज के बीच में, लेकिन पिछले दो साल से उस गांव की सड़क भी अधूरी है और अभी तो माननीय अध्यक्ष महोदय गोविंद सिंह जी के क्षेत्र में एक बड़ा डेम राहतगढ़ में बना है उधर हमारे जिले के 42 गांव प्रभावित हुये हैं और उसमें अभी पिछले 6 महीने तो आवागमन बंद रहा पुल का निर्माण नहीं हो पाया तो उसको शीघ्र करवा दें जिससे कि वहां आवागमन का काम शुरू किया जा सके. माननीय अध्यक्ष महोदय, अनेक सड़कें माननीय मंत्री जी ने हमको दी हैं, छोटी-छोटी सड़कें उनको ग्रामीण अंचल में जोड़ने के लिये, मैं उनको धन्यवाद तो दे ही रहा हूं, लेकिन मैंने पिछले दो बार से लगातार रायसेन, माननीय अध्यक्ष महोदय रायसेन में एक कहावत है कि ऊपर किला और नीचे जिला, रायसेन को कुछ नहीं मिला, लेकिन माननीय मंत्री जी के नेतृत्व में और मोहन यादव जी के नेतृत्व में और आदरणीय शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री थे तब बदल रहा है विकास तो मैं कहना चाहता हूं कि रायसेन के चारों तरफ एक तरफ नेशनल हाईवे कानपुर के लिये जा रहा है भोपाल रायसेन विदिशा सागर होते हुए.
श्री ओमकार सिंह मरकाम - अध्यक्ष महोदय, हमारे साथी हम आपके साथ हैं कुछ तो दया करो ले गये जबर्दस्ती में.
श्री तुलसीराम सिलावट,जल संसाधन मंत्री - ओमकार सिंह जी आपकी पीड़ा मुझे समझ में आ रही है आप डा.साहब की चिंता छोड़ दो हम उन्हीं के साथ हैं.
श्री ओमकार सिंह मरकाम - आप इतना बिगड़ गये हमें उम्मीद नहीं थी.
अध्यक्ष महोदय - वह इसीलिये गुस्से में हैं कि आपने उनसे चर्चा क्यों नहीं की.
श्री तुलसीराम सिलावट - इधर आने को आतुर थे.
डॉ.प्रभुराम चौधरी - मरकाम जी चिंता मत करो रायसेन का विकास तो शुरू हो गया आप भी आ जाओ तो आपके यहां भी शुरू हो जायेगा. अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं माननीय मंत्री जी से कि मैंने रायसेन के बायपास के लिये गोपालपुर से खरगावली और रतनपुर के लिये आपको आग्रह भी किया था और लिखा अभी था मुख्यमंत्री जी को तो वह नहीं हो पाया तो आने वाला जो भी सप्लीमेंट्री है उसमें जोड़ लें. हमारे यहां भवनों का निर्माण भी विभाग के द्वारा एक बिल्डिंग डेवलपमेंट कार्पोरेशन बनाया है उसके माध्यम से कुछ अस्पताल,स्कूलों का निर्माण किया जा रहा है मेरे विधान सभा क्षेत्र में अनेक जगह मैंने विजिट भी किया. जैसे सांची में सांदीपनी स्कूल बन रहा है बहुत अच्छा गुणवत्तापूर्ण काम हो रहा है. जिला अस्पताल में क्रिटिकल केयर यूनिट बन रहा है वह भी अच्छा काम हो रहा है लेकिन गैरतगंज और रायसेन में सांदीपनी स्कूल है उसमें कुछ कमियां पाईं थीं मैंने पी.एस. को भी कार्पोरेशन को लेटर लिखे थे कि इसमें सुधार किया जाये मैं मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं क्योंकि बनते समय हम सुधार कर लेंगे तो काफी समय तक गुणवत्तापूर्ण वह भवन बनकर तैयार हो जायेंगे. गैरतगंज में जब मैं स्वास्थ्य मंत्री था पिछले कार्यकाल में तो हमने एक वहां पर सिविल अस्पताल मंजूर किया था लेकिन चार साल हो गये अभी तक भवन राशि आवंटित की गई लेकिन पीआईयू के माध्यम से बन रहा है तो उसका जल्दी करें क्योंकि शहर में जनता के लिये अस्पताल जल्दी चालू हो पाएगा. आपने सप्लीमेंट्री बजट में सांची जैसा जो हमारा प्लेस है सभी जानते हैं वहां पहले सर्किट हाऊस था उसे पर्यटन निगम को दे दिया आपने उसको सप्लीमेंट्री में शामिल किया तो उसका टेंडर जल्दी लग जाएं.एसएपसी वगैरह हो जाये तो वह काम हो जायेगा. छोटी-छोटी सड़कें और दीं हमने. गढ़ी से मावलखोह पहुंच मार्ग 1 कि.मी. है.यह प्रसिद्ध स्थान है.इसे शामिल किया जाये. मूरलकला से निहालपुर चांदना यह रोड भी मैंने आपको दी है अभी तक बजट हो गया है लेकिन मैं सप्लीमेंट्री के लिये आपसे निवेदन कर रहा हूं और जो सिमरिया से हैदरगढ़ का जो रोड है यह काफी जर्जर हो गया है उसको रिपेयर की श्रेणी में है उसका प्रस्ताव विभाग के द्वारा आया हुआ है. करमोदी से बरनी मानपुर,गढ़ी से जुझारपुर और चांदपुर से वनखेड़ी यह सड़कें आपके विभाग को भी हमने भेजी हैं मंत्री जी आपको भी लिखा है तो आने वाले बजट में इनको शामिल करेंगे. अभी रामेश्वर जी और कई लोगों ने विभाग के बारे में जो प्रदेश में चल रहा है बताया है. मेट्रो की बात भी यहां पर चल रही थी मैं माननीय राकेश जी से कहूंगा कि यहां पर दिक्कत आ रही है पैसेंजर कम मिल रहे हैं अगर सांची,रायसेन तक मेट्रो को ले जायेंगे तो सांची से जो टूरिस्ट राजधानी भोपाल आते हैं और रायसेन के किले में रोपवे के निर्माण के लिये हमारी मोहन यादव जी की सरकार करने वाली है तो सांची से आवागमन में काफी सुविधा होगी. अध्यक्ष जी मैं आपको बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं और मंत्री जी को भी धन्यवाद देना चाहूंगा कि आपको जो पहले काम दिये हैं और आगे भी आपको तो दोनों ओर से धन्यवाद की बाढ़ आई हुई है. आपकी सर्वसम्मति से सारी मांगें पूरी हो जाये लेकिन आप रायसेन की मांगों का विशेष रूप से ध्यान रखेंगे. आपने समय दिया धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी..(मेजों की थपथपाहट).
श्री ओमकार सिंह मरकाम -- माननीय अध्यक्ष जी, हमें बहुत प्रसन्नता है कि हमारी संस्कारधानी जबलपुर के हमारे लाडले सपूत हमारे मंत्री जी को सब तरफ से धन्यवाद मिला है. हम जबलपुर संस्कारधानी की तरफ से आपको धन्यवाद देते हैं और उम्मीद करते हैं कि सभी के विश्वास में आप खरे उतरें और ऐसा काम करके दिखाएं कि नंबर एक में हमारी संस्कारधानी भी आ जाए. यह हम लोग चाहते हैं. कोई इंदौर चाहता है, कोई ग्वालियर चाहता है तो हमारी संस्कारधानी जबलपुर का भी हमारा अधिकार बनता है. महाकौशल है. बहुत बढ़िया भैया, आपको बहुत-बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय -- ठीक है. बहुत धन्यवाद. प्लीज, प्लीज, प्लीज..
श्री भगवानदास सबनानी -- अध्यक्ष महोदय, केवल एक निवेदन करना चाहता हूँ.
अध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी खड़े हो गए हैं. आप व्यक्तिगत रूप से निवेदन कर लेना. विषय खुल जाएगा. प्लीज, प्लीज, प्लीज. डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय जी ने कहा है कि इतने धन्यवाद के बाद डिनर होना चाहिए तो उसकी घोषणा मत करना, आपके मन में हो तो हमें बताना. ..(हंसी)..
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) -- धन्यवाद अध्यक्ष महोदय. मैं यह दुस्साहस नहीं कर सकता, ये सर्वाधिकार आपके पास सुरक्षित हैं.
अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं आपके प्रति आभार प्रकट करना चाहता हूँ और धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आपके अपने संसदीय ज्ञान, आपके अपने अनुभव और सभी को समावेश करने की जो प्रवृत्ति है, उसके कारण यह सदन बहुत व्यवस्थित तरीके से चल रहा है. हृदय की गहराइयों से आपके प्रति आभार और आपका धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय, आज विस्तार से लोक निर्माण विभाग की अनुदानों की मांग संख्या 24 पर 26 सदस्यों ने भाग लिया है. इनमें माननीय श्री रामेश्वर शर्मा जी, श्री महेश परमार जी, श्री दिलीप सिंह परिहार जी, श्री निलेश पुसाराम उइके जी, श्री गौरव पारधी जी, श्री नारायण सिंह पट्टा जी, श्री आशीष गोविन्द शर्मा जी, डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह जी, श्री नीरज सिंह ठाकुर जी, श्री अभय मिश्रा जी, श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल जी, श्री देवेन्द्र सखवार जी, श्री महेन्द्र नागेश जी, श्री विवेक विक्की पटेल जी, श्री अरूण भीमावद जी, श्री मधु भगत जी, श्री प्रहलाद लोधी जी, श्री प्रणय प्रभात पाण्डेय जी, श्री सोहनलाल बाल्मीक जी, श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकी जी, श्री विश्वनाथ सिंह जी, श्री कमल मर्सकोले जी, श्रीमती सेना महेश पटेल जी, श्री कमलेश्वर डोडियार जी, श्री फूल सिंह बरैया जी और डॉ. प्रभूराम चौधरी जी हैं. मैं इन सभी के प्रति धन्यवाद प्रकट करता हूँ. सभी के प्रति आभार प्रकट करता हूँ. पक्ष में हों या विपक्ष में, सभी ने अपनी-अपनी बातें रखी हैं. मैं उस राजनीतिक कम्पलशन को भी समझता हूँ कि विपक्ष में हों और हमारी यह जिम्मेदारी भी होती है अपने क्षेत्र के लोगों के प्रति हमारी जवाबदेही और अपनी पार्टी के प्रति भी हमारी अपनी जवाबदेही होती है. उसके कारण कुछ मर्यादाएं और सीमाएं होती हैं. लेकिन हृदय की गहराइयों से आप सभी का धन्यवाद क्योंकि आप सबके मन में एक ही बात है और वह यह है कि हमारा अपना मध्यप्रदेश विकास के रास्ते में कैसे आगे बढें. इन्फ्रास्ट्रक्चर कैसे हम ज्यादा बेहतर कर सकें और इसी दृष्टि से सारे सुझावों को मैं सकारात्मक रूप में ही लेता हूँ.
माननीय अध्यक्ष जी, आज हम गर्व से कह सकते हैं कि मध्यप्रदेश उस निर्णायक दौर से गुजर रहा है जहां केवल हमें आज की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं करनी है, बल्कि आने वाले 20-25 वर्षों में मध्यप्रदेश कैसा होगा, इन्फ्रास्ट्रक्चर की दृष्टि से, उसकी नींव भी हमें आज ही रखनी होगी.
अध्यक्ष महोदय, देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी के प्रति हम सभी आभार प्रकट करते हैं क्योंकि देश को एक विजन उन्होंने दिया है. विशेष रूप से इन्फ्रास्ट्रक्चर को उन्होंने आने वाले कल की नींव माना है. उस दिशा में पूरे देश को प्रेरित किया है कि हम सकारात्मक सोच के साथ में आगे बढ़ें. मैं विशेष रूप से मध्यप्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के प्रति भी आभार प्रकट करना चाहूँगा कि इन दो वर्षों में इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में जो हम थोड़ा बहुत भी कर पाये हैं, वह बगैर उनके मार्गदर्शन, नेतृत्व और सहयोग के बिना संभव नहीं था और इसीलिये हृदय की गहराइयों से, मैं उनके प्रति भी आभार प्रकट करता हूँ. इसमें बहुत सी बातें आई हैं. मैं कोई भी राजनीतिक चर्चा आज यहां पर नहीं करूँगा. कुछ विषय राजनीतिक आए हैं.
अध्यक्ष महोदय, 90 डिग्री के ब्रिज की बात भी आई है, एक तो कई बार परसेप्शन बनता है. यह मध्यप्रदेश हम सबका है, कहीं पर भी इसका मान-सम्मान कम न हो, मैं यह मानता हूँ कि उधर के लोग हों या इधर के लोग हों, किसी को भी यह ठीक नहीं लगेगा. पहली बात तो हम इस बात को समझ लें कि वह ब्रिज 90 डिग्री का नहीं है, वह 119 डिग्री का ब्रिज है. (मेजों की थपथपाहट) एक तो परसेप्शन बन गया है और उस परसेप्शन पर सभी चल पड़े. लेकिन 90 डिग्री के ब्रिज के बारे में भी, मैंने आपको बताया है कि देश और दुनिया में, बड़े विकसित देशों में और देश के विकसित राज्यों में भी 90 डिग्री के ब्रिज भी हैं और 90 डिग्री की सड़कें भी हैं, क्योंकि जब कोई शहर नया बसाना हो, तो उसके चौराहों और ब्रिजेस की कल्पना तो आप कर सकते हैं. लेकिन किसी बसे-बसाए शहर में जब विकास की कल्पना होती है, तो चौराहे और ब्रिज जो बनते हैं, लेकिन जो उपलब्ध जगह है, उसी पर बनाने होते हैं, उसके कारण से 90 डिग्री भी बनता है. हमारे यहां पर ऐशबाग के ब्रिज को लेकर जो कार्यवाहियां हुई हैं, 119 डिग्री का जो ब्रिज है, वह उसकी डिग्री के कारण नहीं, लेकिन उसमें जो स्लोप दिया जाना चाहिए था, जो कर्व दिये जाने चाहिए थे, वह नहीं दिए गए हैं, इसके कारण से वह कार्यवाहियां हुई हैं, तो कुछ विषयों पर हम सभी एकमत रहें कि वास्तविकता क्या है ?
अध्यक्ष महोदय, मैं यह भी मानता हूँ कि जब हम व्यवस्थाओं में परिवर्तन के सुधार की बात करते हैं, तो ईमानदारी से हमको इस बात को भी स्वीकार करना चाहिए कि क्या समस्या है ? तो मैं स्वीकार करता हूँ कि समस्या है. आज से नहीं है, यह इधर और उधर की बात भी नहीं है. लेकिन काम करते-करते कार्य पद्धति विकसित हो जाती है, चाहे वह कोई भी विभाग क्यों न हो ? और जब आप उसमें परिवर्तन की बात करते हैं, तो विभाग का, विभाग के अधिकारियों का, कर्मचारियों का, इंजीनियर्स का सबका अपना एक माइंडसेट बना होता है. और वहां से निकालकर उस सुधार की तरफ ले जाना, इसमें थोड़ा समय लगता ही है और मुझे बेहद खुशी है कि डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में हम उस सुधार की तरफ बढ़ रहे हैं, तो हम एक टीम के रूप में काम कर रहे हैं. मैं अपने मंत्रिमंडल के सभी माननीय मंत्रीगण के प्रति भी आभार प्रकट करता हूँ कि हमें इन सबका सहयोग मिल रहा है. यहां पर बैठे जो माननीय विधायक हैं, जो उधर बैठे माननीय विधायक हैं. व्यक्तिगत चर्चा में सबने इसको सपोर्ट किया है कि यह सारे सुधार होने ही चाहिए. वह सुधार, जिन्हें हम सभी रिफॉर्म कहते हैं, लेकिन थोड़ा समय इसमें लगेगा. लेकिन एक बात का मैं भरोसा दिला सकता हूँ कि रिफॉर्म्स के बाद में चीजें बदली हुई होंगी और मैंने यह कहा कि हम एक टीम के रूप में काम कर रहे हैं, तो हमारे विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, इंजीनियर्स सब आज इस मानसिकता में हैं कि हमें सुधार की तरफ आगे बढ़ना है. लोक निर्माण विभाग का जब मैंने दायित्व संभाला था तो एक टैगलाइन ध्येय वाक्य तय किया था, ''लोक निर्माण से लोक कल्याण'. प्रारंभिक रूप से थोड़ी असहजता विभाग के लोगों में इसको लेकर थी, लेकिन इस बात की जब उनको स्पष्टता हुई कि इसका मतलब है कि जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना, कि जो कार्य हमें मिल रहे हैं, खासतौर से लोक निर्माण विभाग, वह विभाग जो निर्माण कार्यों के मामले में हम कह सकते हैं कि बहुत सारे विभागों का पैरेंटल विभाग हैं. अपनी गुणवत्ता को स्थापित करना, साबित करना और इसीलिये आज मुझे लगता है कि जो दृष्टिकोण विभाग का बना है, उसमें लगभग सभी की सहमति है. कुछ विधायकों ने बहुत अच्छे सुझाव दिये हैं. उसमें से एक सुझाव था कि मध्यप्रदेश में सड़कों का क्लासिफिकेशन बहुत स्पष्टता के साथ नहीं है. मैं, इसे स्वीकार करता हूं. प्रदेश में लोक निर्माण विभाग के पास अभी 5 श्रेणियों की सड़कें हैं. जिनमें राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य राजमार्ग, मुख्य जिला मार्ग, अन्य जिलामार्ग (ODR) और विलेज रोड हैं. ये पांचों तरह की श्रेणियां हैं, सैद्धांतिक रूप से तो यह वर्गीकरण हो गया लेकिन व्यवहार में यह पाया गया है कि इनके मापदण्डों में स्पष्टता नहीं है और इसलिए कहीं-कहीं जिसे हम विलेज रोड कहते हैं वे 7 मीटर चौड़े हैं और कहीं-कहीं मुख्य जिलामार्ग हैं वे मात्र 3.75 मीटर यानि सिंगललेन के रोड हैं लेकिन मुख्य जिलामार्ग हैं और कहीं-कहीं मुख्य जिलामार्ग फोरलेन भी हैं. कहीं स्टेट हाईवे इंटरमीडिएट लेन यानि 5.5 चौड़े भी हैं. इसलिए जब सड़क की श्रेणी में ही स्पष्टता नहीं होगी है तो जब हम भविष्य के विकास की संभावना बनाते हैं या देखते हैं तो उसमें भी स्पष्टता नहीं होगी, इसलिए हमने तय किया कि इसमें युक्तिकरण की आवश्यकता है और उस दिशा में हम आगे बढ़े और युक्तिकरण का मतलब केवल किसी सड़क की चौड़ाई घटाना या बढ़ाना नहीं है, बल्कि उस सड़क पर यातायात कितना है, आने वाले समय में उसकी आवश्यकता किस तरह की होगी, इस पर विचार करते हुए, उसकी श्रेणी तय करना, ये तय किया और इसलिए इसे हमने अपने काम के आधार के रूप में लिया है और इसमें भी युक्तिकरण के बाद, ये सारा जो बनने के बाद हमारे सामने आयेगा, वह भी हम आप सभी के सामने रखेंगे.
अध्यक्ष महोदय, हमें स्वीकार करना चाहिए कि मध्यप्रदेश अकेला नहीं, देश के अनेक राज्यों में सड़कों की वास्तविक लंबाइयां नहीं होती हैं. लगातार बीतते हुए कालखण्ड में एक अंदाज से सड़कें बताई जाती हैं. मध्यप्रदेश में भी इसे लेकर स्पष्टता नहीं थी, इसलिए हमने तय किया कि हमें अपनी सारी सड़कों की लंबाई-चौड़ाई स्पष्ट होनी चाहिए, उसका पूरा डेटा हमारे पास होना चाहिए और उसके लिए आवश्यक था कि डेटा आधारित कोई प्लेटफॉर्म हमारे पास हो लेकिन प्लेटफॉर्म आधुनिक तकनीक से ले भी लें तो डेटा कहां से लायेंगे ? इसके लिए हमने तय किया और भास्कराचार्य संस्थान, अहमदाबाद का सहयोग लिया, उनका बहुत स्थानों पर हमने सहयोग लिया है. मैं स्वयं वहां गया था और उसके बाद हमने तय किया कि हम हर सड़क की चौड़ाई, उसके पेमेंट का प्रकार, उसके शोल्डर की कंडीशन, इन सभी मापदण्डों पर सारी सड़कों का हम सर्वे करेंगे, इसलिए हमने पहले 3 दिवसीय और बाद में 7 दिवसीय विशेष सड़क सर्वेक्षण अभियान चलाया और मुझे गर्व है कि हमारे सारे इंजीनियरों ने कड़ी मेहनत की और वे सभी सड़कों पर उतरे और मोबाइल-एप के माध्यम से हमने सारी सड़कों का सर्वेक्षण किया, थोड़ा-सा कार्य अभी बाकी है लेकिन जो हमारे पास आज डेटा आया है, उस एप के माध्यम से 71 हजार 2 सौ 10 किलोमीटर से अधिक लंबाई की सड़कें, 2 हजार 9 सौ 75 भवन और 1 हजार 4 सौ 26 पुलों का सर्वेक्षण हम कर चुके हैं और इसके साथ में अभी तक हमारे सामने एक परेशानी होती थी, आप सभी के सामने भी कठिनाई आती है कि PMGSY की सड़क कहां से शुरू होकर, कहां तक समाप्त हो रही है और कहां से PWD की सड़क शुरू हो रही है, स्थानीय निकाय की सड़क कहां से शुरू हो रही है. ये विभाजन करने में हमारे इंजीनियरों को भी कठिनाई होती थी लेकिन आज हम कह सकते हैं कि हमारे पास अपनी प्रत्येक संपत्ति का डिजिटल और प्रामाणिक डेटा है, इसलिए अब हम आने वाले समय में जो निर्णय लेंगे, वह अनुमान से नहीं बल्कि प्रमाण से लेने जा रहे हैं. जब हमारे पास प्रामाणिक GIS बेस डेटा आ गया है तो हम आगे की प्लानिंग कर सकते हैं.
अध्यक्ष महोदय, रोड नेटवर्क मास्टर प्लान को लेकर बात आई थी, बहुत बार आरोप लगते हैं कि यहां काम ज्यादा हुआ, वहां कम हुआ, क्षेत्र के आधार पर हुआ, व्यक्ति के आधार पर हुआ लेकिन पूरे प्रदेश के समग्र विकास के बिना, प्रदेश के हर हिस्से के विकास के बिना सम्पूर्ण विकास की कल्पना नहीं हो सकती हम इसको मानकर चलते हैं और इसीलिए आवश्यकता यह थी कि हमारा रोड नेटवर्क मास्टर प्लान भी बने, लेकिन वह भी साइंटिफिक हो और उस दृष्टि से हमने वहां पर भी भास्कराचार्य इंस्टीट्यूट का सहयोग लिया. उनसे आग्रह किया और उन्होंने हमारे लिए इसको एक विशेष मास्टर प्लान मॉड्यूल बनाया. आज हमें यह कहते हुए खुशी है कि इस मास्टर प्लान मॉड्यूल पर एनालिसिस करने पर हम पता लगा सकते हैं कि 50 हजार से अधिक की आबादी वाले शहरों के लिए हमें लगभग कितने किलोमीटर के बायपास की आवश्यकता है. माइनिंग के क्षेत्र हों, इंडस्ट्रियल क्षेत्र हों पर्यटन आधारित क्षेत्र हों इनमें कहां-कहां हमे सड़कों को बनाने की आवश्यकता है. जिला मुख्यालय से कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए कितने किलोमीटर की सड़कों को अपग्रेड करना होगा, इसके माध्यम से हम वह भी ले सकते हैं और इस मॉड्यूल पर जो एआई आधारित एनालिसिस टूल है उसमें हम प्रश्नों के माध्यम से भी भविष्य का खाका उत्तर के रूप में खींच सकते हैं कि अगर हमने उसमें यह पूछा कि ऐसे कौन से दो पर्यटन क्षेत्र हैं जिनमें बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता है तो वह टूल हमें वह जानकारी भी उपलब्ध करा देता है. ऐसे दो कौन से इंडस्ट्रियल कॉरिडोर हैं जहां रोड कनेक्टिविटी बेहतर तरीके से नहीं है. उनकी हमें आवश्यकता होगी तो यह टूल हमें वह भी जो डेटा है उसके आधार पर उत्तर देता है. अभी दो हफ्ते पहले ही दिनांक 12 फरवरी, 2026 को माननीय मुख्यमंत्री जी के हाथों से इस मास्टर प्लान की शुरुआत कर दी है और मुझे यह कहते हुए खुशी है कि आने वाले समय में यह केवल एक योजना नहीं बल्कि प्रदेश के सड़क विकास की दिशा तय करने वाला मॉड्यूल होगा. इतना ही नहीं अब हम तो एरियल डिस्टेंस पर भी बात कर रहे हैं. किन्हीं दो क्षेत्रों की जो दूरी है आमतौर पर वह दूरी और एरियल डिस्टेंस में बहुत फर्क होता है. हर जगह हम एरियल डिस्टेंस पर नहीं जा सकते, लेकिन कई जगहों पर हम जा सकते हैं तो हमने उसको ही प्लानिंग करने के लिए पीएम गति शक्ति पोर्टल पर नये-नये एलाइनमेंट हम कैसे खोज सकते हैं उसकी भी तैयारी की है. अभी प्रारंभिक रूप से ऐसे बहुत से एलाइनमेंट मिलेंगे लेकिन 6 ऐसे नये एलाइनमेंट हमने चिह्नित किये हैं. केवल जानकारी के लिए आपको बता सकते हैं कि शाजापुर से भोपाल की वर्तमान दूरी 155 किलोमीटर है नया एलाइनमेंट एरियल डिस्टेंस के आधार पर हम जाएंगे प्रधानमंत्री गतिशक्ति के पोर्टल को लेकर तो केवल 111 किलोमीटर की दूरी होगी. अंजड़ से मनावर यह 50 किलोमीटर है, लेकिन नये एलाइनमेंट पर जाएंगे तो हम यह 24 किलोमीटर में पहुंच सकते हैं. नसरुल्लागंज से सिवनी मालवा यह 63 किलोमीटर है हम केवल 40 किलोमीटर में पहुंच सकते हैं. आरोन से मुंगावली और बनरा पथरिया, बरेली से सोहागपुर ऐसे बहुत सारे एलाइनमेंट हैं जिनमें हम इसका लाभ आने वाले समय में ले सकते हैं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, प्लानिंग का एक ओर महत्वपूर्ण पार्ट होता है वह है बजटिंग कई बार एक ही सड़क अलग-अलग जनप्रतिनिधियों के माध्मय से मांग के रूप में आती है और फिर वह बजट में शामिल हो जाती है. कई बार एक से अधिक सड़कें एक ही बजट में शामिल हो जाती हैं. कई बार वह सड़कें भी शामिल हो जाती हैं जो पिछले बजट में थीं, लेकिन इस बार भी वह बजट में जुड़ गईं क्योंकि हमारे पास कोई ऐसा टूल नहीं था जिसके आधार पर इसकी हम प्लानिंग कर सकें तो यहां भी हमने भास्कराचार्य संस्थान का सहयोग लिया, उनसे मांग की और उन्होंने हमको एक पीएम गतिशक्ति प्लेटफार्म पर जीआईएस बेस्ट एक बजट मॉड्यूल भी हमको विकसित करके दे दिया है. अब इसके माध्यम से आने वाले समय में जनप्रतिनिधियों की मांग भी हमारे पास सीधे डिजिटल नक्शें पर आएगी और पिछले तीन सालों का जो बजट है वह भी सम्मिलित करके उनको भी उसी डिजिटल नक्शे पर मैप कर रहे हैं. अब होगा यह कि आने वाले समय में किसी भी सड़क को हम उस नक्शे पर डालेंगे तो हमको यह पता चल जाएगा कि यह रोड या इसका कोई भाग पहले बजट में सम्मिलित हुआ था या नहीं हुआ था. जो डुप्लीकेशन होता है उसकी संभावनाएं समाप्त हो जाएंगी और बजट केवल मांग आधारित भर नहीं होगा बल्कि हमारी प्राथमिकता आवश्यकता और संतुलन के साथ साइंटिफिक और जीआईएस बेस्ड भी होगा. एक और महत्वपूर्ण बात आती है इस पर बहुत बार चर्चा होती है अभी कई माननीय सदस्यों ने भी बात की है कोई परियोजना प्रारंभ होती है उसके समय का जो निर्धारण होता है उसकी परम्परागत पद्धति यही है कि हमारे अधिकारी, इंजीनियर्स, उसकी लागत, कार्य के आधार पर उसकी समय सीमा का निर्धारण कर देते हैं. कई बार यह समय-सीमा व्यावहारिक होती है कई बार अव्यावहारिक होती है. जब अव्यावहारिक होती है तो कई बार यह होता है कि उसमें समय वृद्धि की मांग आती है यह माना जाता है कि इसमें बहुत अधिक समय लग रहा है, समय तो इतना निर्धारित था. इसलिए हम वैज्ञानिक पद्धति से निर्माण कार्य में लगने वाले समय का निर्धारण करने जा रहे हैं. पीएम गति शक्ति पोर्टल में यहां भी एक विशेष मॉडयूल तैयार हो रहा है. मुझे यह कहते हुए खुशी है कि यह मॉडयूल शीघ्र तैयार हो जाएगा और देश में किसी भी राज्य में तैयार होने वाला यह पहला मॉडयूल होगा जो मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग के द्वारा उपयोग में लिया जाएगा.
अध्यक्ष महोदय, बजटिंग के बाद बारी आती है एग्जीक्यूशन और एग्जीक्यूशन से भी महत्वपूर्ण होता है समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ उसको पूरा करना. जब बात गुणवत्ता की होती है तो बहुत बार उसको लेकर आलोचनाएं भी होती हैं. गुणवत्ता के चार स्तम्भ हम मान सकते हैं. एक है, मॉनिटरिंग. एक है वर्कमेनशिप. एक है उसमें लगने वाली जो सामग्री है उसकी गुणवत्ता और उसके साथ-साथ जो हमारे इंजीनियर्स हैं उनका तकनीकी कौशल. हमने इन चारों पर साइंटिफिक तरीके से अध्ययन किया उसके बाद हमने नवाचार किए हैं. उनके बारे में कुछ चर्चाएं आ चुकी हैं. संक्षेप में मैं उनके बारे में भी बताऊंगा. उसमें से पहला है लोकपथ एप. जब हम जनता को गुणवत्ता के साथ जोड़ देते हैं तो कार्य के प्रति कार्य करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी, दायित्व भी बढ़ जाते हैं और पारदर्शिता भी बढ़ जाती है. जब लोकपथ एप हम ला रहे थे तो मुझे कई लोगों ने कहा कि आप अपने लिए यह एक मुसीबत खड़ी कर रहे हैं. लेकिन मुझे लगा कि यह मुसीबत तात्कालिक रुप से दिख रही है. आने वाले समय में बहुत सारी मुसीबतों को हल करने का एक महत्वपूर्ण टूल होगा यह लोकपथ एप. उस समय हमने 7 दिन की समय-सीमा का निर्धारण किया था. उसके बाद अब हम लोकपथ 2.0 भी लेकर आ गए हैं. इसमें समय-सीमा घटाकर 4 दिन कर दी है. मेरा सभी माननीय सदस्यों से आग्रह है चाहे वे पक्ष में हों या विपक्ष में हों इस लोकपथ 2.0 को आप सभी अपने-अपने मोबाइल पर डाउनलोड करिए. यह आपका अपना एप है. यह किसी पार्टी का नहीं है. यह सरकार का है. चूंकि यहां व्यवस्था संभव नहीं है अन्यथा मैं तो टीवी पर अभी आपको उसका क्यू-आर कोड दिखाकर कहता कि इसको डाउनलोड कर लिया जाए. इसको हम डाउनलोड करेंगे तो हम सब भी उस जिम्मेदारी का हिस्सा बनेंगे और काम करने वालों का दायित्व बढ़ेगा. इसमें 4 दिन के साथ और भी कई चीजों को जोड़ दिया गया है. माननीय मुख्यमंत्री जी के द्वारा 10 जनवरी को हमने इसका लोकार्पण कर दिया है. यह अब केवल शिकायत दर्ज करने का टूल नहीं है बल्कि एक स्मार्ट ट्रेवल पार्टनर बन गया है. आपको मध्यप्रदेश में किसी भी एक शहर से दूसरे शहर, एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना हो तो आप इस एप को डाउनलोड करके रखें. उसमें डेस्टीनेशन डाल दीजिए. उसमें रुट प्लानर की सुविधा है. उदाहरण के लिए आपको भोपाल से झाबुआ जाना है तो यह कम से कम दो और ज्यादा से ज्यादा तीन वैकल्पिक मार्ग आपको दिखाएगा. किस मार्ग पर कितने टोल नाके हैं. आपके पास कौन सी गाड़ी है उसके आधार पर कितनी राशि उसमें लगने वाली है. कहां-कहां अवरोध हैं. रास्ते में कौन से दर्शनीय स्थल पड़ने वाले हैं. कौन से होटल, रेस्टोरेंट हैं. कहां थाने हैं. इसके साथ साइट एमेनिटीज की जानकारी भी देगा. बहुत बार मन में आएगा कि गूगल में भी तो इससे मिलती जुलती जानकारी आती है. लेकिन यह उससे अलग इस मायने में है कि अगर कहीं कोई ब्लेक स्पॉट है तो उसके 500 मीटर पहले यह आपको आपके मोबाइल पर एक अलर्ट भेजेगा कि सावधान हो जाइए की आधा किलोमीटर आगे ब्लेक स्पॉट आने वाला है, ड्रायविंग संभलकर करिए. (मेजों की थपथपाहट) इसलिए यह उससे हटकर है. मेरा आग्रह है कि हम सभी को इसे महत्वपूर्ण मानते हुए अपने-अपने मोबाइल पर डाउनलोड करना चाहिए. अभी औचक निरीक्षण की भी बात आई थी. देखिये इस तरह के कार्य कोई नहीं करना चाहता क्योंकि जब आप इस तरह के कार्य शुरू करते हैं तो अनरेस्ट होता है. विभाग के भीतर और उन काम करने वाले लोगों में, ठेकेदारों में भी क्योंकि आप सीधे तौर पर गुणवत्ता को आधार बना रहे हैं. औचक निरीक्षण में सारे चीफ इंजीनियर 20 तारीख और 5 तारीख को महीने में दो बार सड़कों पर होते हैं. एक सॉफ्टवेयर एप के माध्यम से 3 तारीख को हमारे चीफ इंजीनियर को पता चलता है कि उसको कहां जाना है. हो सकता है कि रीवा वाले चीफ इंजीनियर को इन्दौर जाना पड़े, हो सकता है कि इन्दौर वाले चीफ इंजीनियर को झाबुआ जाना पड़े. जब वह निकल जाता है तो दूसरा सॉफ्टवेयर उसके पास मैसेज भेजता है कि वहां जाकर आपको कौन से 5 कामों का निरीक्षण करना है. यह किसी को भी नहीं पता होता है. यह सॉफ्टवेयर निकालता है. यह मुझे भी नहीं पता होता है. उसके बाद तीसरा सॉफ्टवेयर जानकारी देता है कि जिस काम के निरीक्षण के लिए आप जा रहे हैं वहां से अगर सैंपल लेना है तो वह सैंपल किस स्थान से लेना है, क्योंकि बहुत बार यह भी आरोप लग सकते हैं कि सैंपल जहां से लिया वह तय करके वहां से लिया गया जहां की क्वालिटी अच्छी है लेकिन सॉफ्टवेयर को तो यह नहीं पता, वह तो स्थान तय कर देता है कि आपको यहां से सैंपल लेना है. फिर जब वह सैंपल मिल गया तो हम यह व्यवस्था बना रहे हैं कि वह सैंपल क्यूआर कोड के माध्यम से लैब में भेजा जाएगा.
श्री उमंग सिंघार -- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी सॉफ्टवेयर बड़ा अच्छा बता रहे हैं और आपने कहा है कि सॉफ्टवेयर से ही वहां पर पता चल जाएगा कि सैंपल कहां से लेना है इसका मतलब यह है कि रोड में गड्ढे कहां हैं क्या यह भी मालूम पड़ जाएगा यह भी बता दीजिए ?
श्री राकेश सिंह -- अध्यक्ष महोदय, गड्ढों पर भी मैं अभी आता हूं. क्यूआर कोड के माध्यम से वह जब लैब में जाएंगे तो न वहां लैब में टेक्नीशियन को यह पता होगा कि किस सड़क का यह सैंपल है, न ही संबंधित ठेकेदार को यह पता होगा कि उसका सैंपल किस लैब में गया है और न ही इंजीनियर को यह पता होगा कि यह कहां पर गया है. जो बात आपने की है दरअसल गड्ढों को लेकर यह लोकपथ एप है और अभी कोई ऐसा स्केनर नहीं आया है कि हम यह कह सकें कि गड्ढों की जानकारी स्केन करके हमारे पास में आ जाएगी लेकिन लोकपथ एप हमने जरूर किया है. यह हम इसलिए कर पा रहे हैं जो हम क्यूआर कोड की बात कर रहे हैं.
श्री उमंग सिंघार -- अध्यक्ष महोदय, आपको सुझाव देना चाहता हूं कि सैटेलाइट सर्विस ले लीजिए आपको गड्ढे भी पता चल जाएंगे कितने इंच, कितने सेंटीमीटर वह भी मिल जाएंगे. यह भी एक बार आप विचार कीजिए.
अध्यक्ष महोदय -- आप बैठिये तो वह करेंगे.
श्री राकेश सिंह -- अध्यक्ष महोदय, जरूर. आधा अमला इसी में हमको लगाना पड़ेगा लेकिन फिर भी सुझाव आपका बहुत अच्छा है. कुल मिलाकर यह औचक निरीक्षण जो होता है उसमें बात आई कि अभी तक कार्यवाही कितनी हुई तो पिछले 13 महीनों में 875 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण हुआ है. 4 अभियंता सस्पेंड हुए, 105 इंजीनियर्स को कारण बताओ नोटिस दिये गये, 25 ठेकेदार ब्लैक लिस्टेड हुए हैं, 1 कंसल्टेंट ब्लैक लिस्टेड हुआ है, 329 निर्माण कार्यों में सुधार किया गया है. यह करते हुए कि हमने इतने लोगों के खिलाफ कार्यवाही की है यह अच्छा लगता है ऐसा नहीं है, क्योंकि आपको अपने विभाग के उन लोगों के खिलाफ कार्यवाही करनी होती है जिनके साथ आप एक टीम वर्क के रूप में काम कर रहे हैं और इसलिये हमने यहां पर दण्ड और पुरस्कार दोनों ही तय किये हैं कि जो अच्छा काम करेंगे उनको पुरस्कार दिया जाएगा और मुझे यह कहते हुए खुशी है कि देश के दूसरे राज्य जिन्हें हम विकसित राज्य मानते हैं इस औचक निरीक्षण की जानकारियां मध्यप्रदेश से लेकर अपने राज्यों में उसको लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं. हम प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम 2.0 भी लेकर आये हैं ताकि गुणवत्ता, जवाबदेही और पारदर्शिता केवल निर्माण स्थलों पर ही न हो बल्कि कार्यालय में भी हो और माननीय मुख्यमंत्री जी ने अभी 12 फरवरी को इसकी भी शुरुआत की है. 1,500 से अधिक इंजीनियर उस समय वहां मौके पर थे जब हमने इसकी शुरुआत की है तो इसमें भवन में अभी बीडीसी में है, अब पीआइयू में भी इसको लागू करने जा रहे हैं तो इसमें इसकी प्लानिंग, स्वीकृति, प्रगति, भुगतान, मानीटरिंग, सब कुछ आन लाइन होने वाला है, यानि अगर किसी को समयवृद्धि भी चाहिये है तो कहीं पर भी किसी अधिकारी को यह दिख जायेगा कि उसने समयवृद्धि की मांग की है. और समय वृद्धि का कारण क्या है , किसी का भुगतान नहीं हुआ है तो अनावश्यक उसके भुगतान में विलंब नहीं किया जा सकेगा. तो यह भी एक तरह की पारदर्शिता है. इसके साथ साथ बहुत बार एक विषय टेंडर को लेकर के आता था, अभी भी आते हैं. बहुत बार कम दरें आती हैं .अभी भी बात आई कि 30 प्रतिशत 40 प्रतिशत ब्लो टेंडर आते हैं, आप किसी को रोक नहीं सकते कि आप इतना कम रेट मत डालिये लेकिन कम रेट डालने का मतलब यही होता है कि गुणवत्ता से समझौता, और यह न करना पड़े तो उसके लिये हमने निविदा की शर्तों में भी बहुत सारे सुधार किये हैं. अब यह तय किया है कि जो अव्यवहारिक रेट डालकर के टेंडर ले रहे हैं, उनको दो गुना अतिरिक्त परफार्मेंस गारंटी देना होगी. एक गुना नहीं दो गुना लेकिन वह भी बैंक गारंटी के रूप में नहीं , बल्कि एफडीआर के माध्यम से, क्योंकि जब उनका उतना पैसा डिपाजिट होगा तो स्वाभाविक है कि वह गुणवत्ता से समझौता नहीं करेंगे. साथ में हमने न्यूनतम मशीनरी भी तय कर दी है और इसके अतिरिक्त हम सभी निर्माण विभागों के लिये एक नया मानक निविदा दस्तावेज भी तैयार कर रहे हैं इसके लिये अंतरविभागीय एक समिति का गठन हो चुका है. और उसके आधार पर यह भी हम जल्दी ही तय करने वाले हैं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, इसके अलावा बात आती है कि सड़कों में समय सीमा जब तक ठेकेदार की रहती है तो उसको ही मेंटनेंस करना है जब वह समय सीमा निकल जाती है तब तक या तो मजबूतीकरण न हो तब तक या नये सिरे से निर्माण न हो तब तक वह सड़कें उनके हाल पर छूट जाती हैं. तो अब हम इसके लिये दो तरह की व्यवस्थाओं पर आ रहे हैं जिसमें है कि शॉर्ट टर्म मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट और उसके साथ साथ परफॉर्मेंस बेस्ड मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट . यह दोनों ही अब हम देने वाले हैं. यानि अब हर सड़क किसी न किसी रूप में ठेकेदार के पास में होगी, जब उसकी परफार्मेंस गारंटी का समय समाप्त हो जायेगा तो उसके बाद इस आधार पर सड़कों की जिम्मेदारी होगी ताकि, हमारी कोशिश है कि सारी सड़कें गढ्ढा मुक्त रहें उनमें रोड मार्किंग रहे , सोल्डर ठीक हों, वहां पानी इक्टठा न हो और यात्रा की सुरक्षा रहे और इसके आधार पर उस ठेकेदार को सड़क की जिम्मेदारी उठानी होगी और अगर ऐसा नहीं किया तो उसके खिलाफ कार्यवाही और जुर्माना दोनों का प्रावधान किया है. हमने लेब के उन्नयन की भी बात कही है. इसके सारे परिणाम अभी अभी किया है कल से ही आना शुरू हो जायेंगे, मैं ऐसा नहीं मानता हूं. निश्चित रूप से इसमें थोड़ा समय लगेगा, क्योंकि मैंने कहा है कि यह केवल व्यवस्था में बदलाव नहीं है यह मानसिकता में भी बदलाव है.
अध्यक्ष महोदय, हमने बहुत सारी प्रयोगशालाओं का उन्नयन किया है मोबाइल लैब भी चालू कर रहे हैं. अभी तक होता यह था कि मोबाइल लैब होती नहीं थी कई बार छोटी मोटी टेस्टिंग जो रोड पर ही होना है या उस स्थान पर ही होना है वह नहीं हो पाती थी. एक बहुत बड़ा विषय है वह है बिटुमेन का. जब मैंने पहली बार अपने इंजीनियर को अलग अलग राज्यों में भेजा था तो हमारे एक चीफ इंजीनियर के नेतृत्व में तेलंगाना जो टीम गई थी उसने वहां से मुझे फोन करके कहा कि सर जिस सड़क पर हम खड़े हैं यह सड़क 6 साल पहले वनी है लेकिन लगता है कि अभी अभी बनी है, तो मैंने कहा कि मुझे क्या बता रहे हो यही देखने के लिये तुमको मैंने वहां पर भेजा है. लौटकर के आकर के उन्होंने मुझसे कहा कि वह 6 साल पहले बनी हुई नहीं थी वह तो 7 साल पहले की बनी हुई थी तो उसका एक बहुत बड़ा कारण है. बिटुमेन की क्वालिटी. हमारे यहां अभी तक बिटुमेन को लेकर के कोई मापदंड नहीं थे, बहुत सारे विरोध हुये, लोग कोर्ट में भी चले गये. लेकिन हमने उसको विशेष शर्तों में डाल दिया बहुत सारे लोगों की नाराजगी लेकर कि अब केवल और केवल गवर्मेंट रिफाइनरियां यानि हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड और भारत पेट्रोलियम, इस रिफायनरी का बिटुमेन ही लिया जायेगा. उसके बिल्स की भी अब हम जांच करने जा रहे हैं और आने वाले समय में हमारी कौशिश है कि इस पर भी हम डिजिटल लॉक पर जायें, अभी उसकी शुरूवात हो रही है , आने वाले समय में उसमें सफलता मिलने की संभावना हमारे हाथ में है कि जब वह वहां से रिफायनरी से बिटुमेन टेंकर से निकलेगा , तो वह डिजिटल लॉक होगा, वह लॉक तभी खुलेगा जब वह क्षेत्र विशेष में जहां के लिये वह टेंकर गया है उसके 20 से 5-0 मीटर की पेराफेरी में वह लाक खुलेगा लेकिन वह भी तब जब वहां से एक ओटीपी आयेगा और ओटीपी भी वहां के इंजीनियर के पास में आयेगा, और जब वह उसको डालेगा तब वह लाक खुलेगा और इसके आधार पर उस बिटुमेन की गुणवत्ता भी हम सुनिश्चित कर सकेंगे. लेकिन मैंने कहा है कि इसमें भी थोड़ा समय लगेगा. अब हमने तय किया है कि बिटुमिन नहीं बल्कि जो इमल्शन है, जो एडहेसिव है, वह भी गवर्नमेंट रिफाइनरी से लिया जाये. पिछले दो सालों में हमने बहुत सारे जो बेस्ट प्रैक्टिसेस हैं दूसरे राज्यों के, उनका भी अध्ययन किया. अभी भी कर रहे हैं, आने वाले समय में भी करेंगे. लेकिन हम उसको उसी रुप में नहीं स्वीकार करते. उसमें हमारे राज्य के लिये क्या बेहतर हो सकता है, हम उसका अध्ययन करके उसके आधार पर हम नवाचारों की कापी नहीं करते, बल्कि नवाचार म.प्र. में गढ़ते हैं और उसके आधार पर अपने राज्य में उसको हम लागू करते हैं. अभी अभी मैं आईआईटी चैन्नई भी गया था और वहां पर हमने थ्रीडी प्रिंटिंग तकनीक भी देखी है, जहां भवन निर्माण उसके माध्यम से होता है और इस तकनीक में भवन की ड्राइंग एक विशेष कम्प्यूटर साफ्टवेयर में लोड कर दी जाती है और उसके बाद जो रोबोटिक आर्म होती है.
5.31 बजे अध्यक्षीय घोषणा
सदन के समय में वृद्धि विषयक
अध्यक्ष महोदय—एक मिनट मंत्री जी. कार्य सूची में जो कार्यवाही है, वह पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाये, मैं समझता हूं कि सदन इससे सहमत है.
(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.)
श्री सोहनलाल बाल्मीक-- अध्यक्ष महोदय, और भी कुछ काम रहते हैं. साढ़े 6 बजे तक कर लीजिये.
अध्यक्ष महोदय—सदस्यों के लिये चाय की व्यवस्था है, अपनी सुविधा से ग्रहण कर सकते हैं.
5.32 बजे वर्ष 2026-2027 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमशः)
श्री राकेश सिंह -- अध्यक्ष महोदय, वह जो रोबोटिक आर्म होती है, वह लेयर बाय लेयर वह मटेरियल को एप्लाई करता है और उसके बाद वह भवन तैयार हो जाता है और जिसको बनाने में एक साल लगना है, वह कुछ महीनों में बनकर तैयार हो जाता है और कई बार बहुत आवश्यक है, तो वह हफ्तों में भी बन सकता है. कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क की बात भी हुई है. मुझे यह कहते हुए खुशी है कि कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क बनाने वाला लोक निर्माण विभाग देश का पहला राज्य है, जहां हमने कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क बनाया है, क्योंकि हम कितनी भी सुविधाएं उपलब्ध करा दें, कितनी भी तकनीक ले आयें. लेकिन अगर हमारे अभियंता, इंजीनियर उसके लिये दक्ष नहीं हैं, तो परिणाम वह हमको नहीं दे पायेंगे. इसीलिये कैपेसिटी बिल्डिंग फ्रेमवर्क भी लेकर आये हैं और उसके आधार पर ट्रेनिंग नीड असेसमेंट भी हमने कराया और उसके आधार पर यह फ्रेम वर्क तैयार किया. इसके साथ अभी मुख्यमंत्री जी के हाथों इसकी भी शुरुआत की थी और चार जो प्रतिष्ठित राष्ट्रीय संस्थान हैं, उनसे चर्चा करके प्रशिक्षण की एक कार्य योजना तैयार की है. उसमें हमारे चार संस्थान हैं सेंट्रल रोड रिसर्न इंस्टीट्यूट, इंडियन एकेडमी ऑफ हाईवे इंजीनियर्स, आईआईटी बॉम्बे, इंजीनियर स्टाफ कालेज ऑफ इंडिया. इन सबसे हमने एमओयू साइन किया है और ट्रेनिंग का अपना एक मॉड्यूल भी तैयार किया है. यह ट्रेनिंग मॉड्यूल को हमने कैलेण्डर में डाल दिया है और त्रैमासिक एक थीम तय की है, उस थीम के आधार पर हम ट्रेनिंग देने वाले हैं. पहली त्रैमासिक थीम होगी, जिसमें तकनीक, प्रबंधन और कांट्रेक्ट मैनेजमेंट से संबंधित विषय पर प्रशिक्षण दिया जायेगा. उसके बाद में द्वितीय में आरओबी, फ्लाई ओवर इन पर देंगे. तृतीय में सड़क पेमेंट एसेट मैनेजमेंट, सड़क सुरक्षा और चौथे में हमारा फोकस होगा यह कांट्रेक्ट मैनेजमेंट प्रोक्योरमेंट और पहले में मैंने गलत बता दिया, पहले में जो होगा यह हाई राइज बिल्डिंग डिजाइन निर्माण और प्रबंधन पर होगा. इस तरह से हमने पूरे साल भर का कैलेण्डर भी अपना तैयार किया है. अभी तक म.प्र. में हमारा अपना कोई ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट था ही नहीं. इंजीनियर्स को समय के साथ साथ दक्ष होना पड़ता है. हमारे साथ में टकराव भी है. टकराव इस बात का है कि एक तकनीक लगातार बदल रही है. नई नई तकनीकें आ रही हैं और वह तकनीकें अलग तरह से रोड निर्माण, भवन निर्माण इनमें भी आ रही है. साफ्टवेयर आधारित भी आ रही हैं. लेकिन हमारे इंजीनयर्स की जो पढ़ाई है, वह अगर उसके अनुकूल नहीं हैं, तो मैं निर्माण कार्यों के साथ में समझौता नहीं कर सकता और इसीलिये हम जो ट्रेनिंग कम रिसर्च सेंटर बना रहे हैं. ट्रेनिंग के साथ साथ रिसर्च सेंटर भी होगा. हम बाहर की रिसर्च को नहीं मानेंगे. आने वाले समय में हमारी कोशिश होगी कि देश के दूसरे राज्य अपने इंजीनियर्स को ट्रेनिंग के लिये म.प्र. में भेजें, उस स्तर के मास्टर ट्रेनर हम यहां पर लेकर आने वाले हैं. मुझे खुशी है कि पिछले 70 सालों में यह नहीं था. लेकिन मुख्यमंत्री जी से मैंने एक बार आग्रह किया और तत्काल उन्होंने इसकी घोषणा कर दी. जल्दी ही हम इसका काम भी प्रारम्भ करने जा रहे हैं. इसके लिये जगह भी निर्धारित हो गयी है. जब हम यह सारे विकास के कार्य करते हैं तो बहुत बार विकास के कार्यों का पर्यावरण के साथ तालमेल नहीं होता है इसलिये विकास को पर्यावरण का बहुत बार दुश्मन भी माना जाता है. अगर पर्यावरण से अनुकूलता या तालमेल नहीं है और इसीलिये हमने पर्यावरण के अनुकूल और दीर्घकालीन निर्माण कार्यों की कल्पना की है और इसीलिये हम लोक कल्याण सरोवर का निर्माण कर रहे हैं. आमतौर पर ठेकेदार मिट्टी कहीं से भी निकालते हैं और वह अलग-अलग जगह से निकालते हैं. कई बार वह किसी खेत से निकाल लेते हैं. लेकिन अब यह तय किया है कि अब ठेकेदार जहां से भी मिट्टी निकालेंगे उन्हें उस स्थान का, वह स्थान भी तय होगा और बाकायदा कलेक्टर से परमीशन होगी और उस स्थान पर एक सरोवर का निर्माण करना पड़ेगा और वह सरोवर जियोटैग फोटो के साथ में वह हमारे पास में भेज रहे हैं उसमें उसका आकार-प्रकार उसकी गहराई और वहां पर एक बोर्ड लगेगा कि लोक कल्याण सरोवर. 506 लोक कल्याण सरोवर बनाने का इस बार का हमारा लक्ष्य था, पूरे प्रदेश में. इस महीने के अंत तक हमारे हमारा वह 506 का लक्ष्य लगभग पहले ही पूरा हो चुका था, उसमें कुछ कमियां थीं वह हम पूरी करने जा रहे हैं. आने वाले समय में जब एक बार यह प्रैक्टिस में आ जायेगा तो हम सभी माननीय सदस्य यहां पर जो बैठे हैं, हम यह समझ सकते हैं कि कितनी बड़ी संख्या में पूरे प्रदेश में तालाबों का निर्माण होगा. जो निश्चित रूप से भूजल को भी ठीक करेंगे और पर्यावरण को भी अनुकूल बनायेंगे. इसके लिये भी हमने पीएम गति शक्ति प्लेटफार्म पर एक माड्यूल तैयार किया है जो सरोवर कहां पर बनाया जाये, जहां पर पानी ठहरने वाला है, वह वो भी हमको बतायेगा, उसके आधार पर इसका निर्माण होगा. अब हम ग्राउंड वाटर रिचार्च बोर भी, यानि सड़क के साथ-साथ हमारी कोशिश है कि ग्राउंड वॉटर रिचार्ज भी हम सड़क के साथ-साथ बनायें. हमारी योजना तो थी कि हम हर किलोमीटर पर इसको बनायें. लेकिन प्रारंभिग रूप से यह व्यावहारिक माना जाये, इसके लिये हमने कुछ चयन किया है और 840 किलोमीटर सड़कों पर लगभग एक हजार रिचार्ज बोर, हम यह बनायेंगे. यह ठेकेदार के काम के स्कोप में ही यह शामिल होगा. इस पर लगभग 35 हजार रूपये का खर्च आयेगा. एक किलोमीटर सड़क लगभग 1 करोड़ रूपये में अनुमानित बनती है. उसमें 35 हजार रूपये का रिचार्ज बोर अगर हमने बना दिया तो बारीश के समय आकर बहने वाला पानी, वह सीधा उसके माध्यम से जमीन के भीतर जायेगा, जो निश्चित रूप से हमारे भू-जल के स्तर को बेहतर करेगा. ऐसे ही प्रदेश में हमने पुलों पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के बारे में विचार किया है कि सारे पुल करोड़ों लीटर पानी इसके माध्यम से एक-एक पुल से बहकर व्यर्थ निकल जाता है. वह भी जमीन के भीतर जायें इस पर भी हम काम करने जा रहे हैं. ट्री-शिफ्टिंग को लेकर गंभीरता पूर्वक हम आगे बढ़ रहे हैं. अभी सारे इंजीनियर्स को लेकर इसमें एक ट्रेनिंग भी की है. अब ग्रीन बिल्डिंग, यह हमारे आने वाले समय की मांग है और इसीलिये पिछले दिनों एक बैठक में माननीय मंख्यमंत्री जी से इसके लिये आग्रह किया था. हमने कहा था कि 20-25 करोड़ से ऊपर की सारी बिल्डिंग ग्रीन बिल्डिंग बनायी जायें तो उन्होंने कहा कि 20-25 करोड़ से ऊपर की क्यों. अब जो भी विल्डिंग बने वह सारी की सारी ग्रीन बिल्डिंग बने तो उस दिशा में मध्यप्रदेश आगे बढ़ रहा है.
अध्यक्ष महोदय, नवाचारों की दृष्टि से जब हम बात करते हैं तो मुझे कहते हुए बहुत खुशी है कि अगर यह सारे नवाचार यह सारे माड्यूल, यह सारे साफ्टवेयर, यह टूल अभी तक जैसे यह बनते आये थे अगर हम वैसे बनाते तो उनके टेण्डर की प्रक्रिया होती. पहले हम टेण्डर निकालते, फिर लेने वाला टेण्डर लेता. फिर डेढ़ साल, दो साल उसको डेव्हल्प करने का समय लेता और फिर उसक बाद में वह बनकर मिलता और शायद इन सारे के सारे टूल्स पर साफ्टवेयर पर शायद 200-300 या 400 करोड़ रूपये का भी खर्च आता. परंतु हमने इस पर एक रूपया भी खर्च नहीं किया है. सब कुछ भास्कराचार्य इंसीट्यूट से हमने इसको तैयार कराया है. आज जब हम निकार्ण की बात करते हैं, इंफ्रास्टकचर की बात करते हैं तो मध्यप्रदेश भारत के उन पांच राज्यों में है, जहां सबसे बड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग का नेटवर्क है और हमारे पास लोग निर्माण के अंतर्गत 77 हजार किलोमीटर की सड़कें भी हैं. जिसके बारे में अभी मैंने जानकारी दी ही है. पिछले दो सालों में हमने 19 हजार 572 करोड़ की लागत से 11 हजार 632 किलोमीटर सड़कों का निर्माण और मजबूतीकरण भी किया है. 956 किलोमीटर की लागत से 5 हजार 741 किलोमीटर की सड़कों का नवीनीकरण किया है. 3756 करोड़ रूपये से 190 एलीवेटेड कारीडोर भी बनाये हैं और बाकि बहुत से काम है. जिनके बारे में मैं, विस्तार से नहीं जा रहा हूं. अध्यक्ष महोदय, अभी जब प्रारंभ हुआ है आज के विषय का तो कौन-कौन से हमारे विकास के पथ हैं इनके बारे में श्री रामेश्वर जी ने विस्तार से चर्चा की है, इसलिए मैं उनको भी नहीं दोहराऊंगा. इसके साथ साथ रिंग रोड भी 5 प्रमुख स्थानों पर तय किये हैं लेकिन आने वाले समय में इसको भी लेकर एक मापदंड हम बनाने जा रहे हैं. साथ में हमने अपने संकल्प पत्र में यह भी तय किया था कि हमारे जितने भी राष्ट्रीय राजमार्ग हैं, इन सभी को हम फोर लेन अपग्रेड करेंगे, उसकी तरफ हम बढ़ रहे हैं. एनएचएआई के साथ जो 1 लाख करोड़ रुपये का एमओयू हमने माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में किया था, वह एमओयू केवल कागजों पर नहीं है. मुझे यह कहते हुए खुशी है कि 28 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को अभी तक स्वीकृति भी मिल चुकी है और वह सारी की सारी परियोजनाएं कोई 4 हजार करोड़ रुपये की है, कोई 8 हजार करोड़ रुपये की है, कोई 6 हजार करोड़ रुपये की है, कोई 15 हजार करोड़ रुपये की है, वह सारी हमको कागजों पर नहीं व्यावहारिक रूप से दिखने वाली हैं.
अध्यक्ष महोदय, अभी अभी जनवरी में माननीय श्री नितिन गडकरी जी जब मध्यप्रदेश में आए थे. मैं उनके प्रति भी आभार प्रकट करना चाहता हूं. माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी का इनफ्रास्ट्रक्चर से संबंधित जो विज़न है, उसको कार्य रूप में वैसे के वैसे ही कोई अगर स्थापित कर रहे हैं वह है देश के भूतल परिवहन मंत्री माननीय श्री नितिन गडकरी जी. (मेजों की थपथपाहट)..जिनका अपना एक अलग विज़न है, जब वह आए थे तो हमने उनसे यह मांग की थी और उन्होंने कई इनफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की घोषणा भी की. उसमें 13500 करोड़ रुपये की लागत का सागर कोटा ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे भी है. 18000 करोड़ रुपये लागत की ग्वालियर भोपाल नागपुर कारिडोर भी है. 2500 करोड़ रुपये का उज्जैन झालावाड़ फोर लेन भी है, 5000 करोड़ रुपये की लागत से इंदौर सिक्स लेन पूर्वी बायपास भी है और इन सबके कारण हमें यह कहते हुए खुशी है कि मध्यप्रदेश आने वाले समय में राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नेटवर्क का एक केन्द्र बनकर उभरने वाला है.
अध्यक्ष महोदय, जब हम विस्तार से इन सारे कामों की बात करते हैं देश में किसी भी राज्य के पास अपने संसाधन इतने नहीं होते कि वह अपनी मनोवांछित इनफ्रास्ट्रक्चर को डेवलप, अपने संसाधनों से कर लें. केन्द्र में भी 1 लाख करोड़ रुपये का लगभग बजट है, लेकिन 10 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के काम चल रहे हैं, तब जाकर यह विकास के काम दिखते हैं और इसलिए मध्यप्रदेश में भी हम इनका अध्ययन कर रहे हैं, 'हेम' (HAM - Hybrid Annuity Model) माडल की बात अभी हुई थी, हेम मॉडल पर हम जा रहे हैं, जिसमें 40 परसेंट और 60 परसेंट, 40 परसेंट राज्य सरकार के द्वारा और 60 परसेंट निजी डेवलपर के द्वारा निवेश किया जाता है और इसका फायदा सबसे बड़ा यह है कि 15 साल तक उस सड़क का बेहतर मेंटिनेंस उसी कांट्रेक्टर को करना होगा, जो उसका काम लेगा तो उस दृष्टि से हमें बहुत अच्छी गुणवत्ता की सड़कें मिलेंगी. अभी तक यह काम केवल एमपीआरडीसी के माध्यम से हो रहा था, अभी हमने कई चीजों को तय किया है, अभी एमपीआरडीसी, पीडब्ल्यूडी, बीडीसी, पीआईयू ये अलग-अलग नहीं हैं. अब लगभग एक टीम के रूप में सभी काम कर रहे हैं. साथ में यह तय किया है कि सभी के लिए अलग-अलग कोई स्पेसिफिकेशन्स नहीं होंगे, क्वालिटी भी सबके लिए एक समान होगी, समय-सीमा का निर्धारण भी उसी के अनुसार होगा और उसी के आधार पर हमारे इंजीनियर्स की क्षमताओं का निर्धारण भी हम एक साथ करेंगे. ट्रेनिंग भी एक जैसी होगी ताकि एक ही प्रदेश के भीतर हमारे इंजीनियर वहां पर अलग क्षमता के साथ काम करें, यहां पर अलग क्षमता के साथ करें. ऐसा नहीं होना चाहिए तो उस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं. कई सारी सड़कें हैं जो 'हेम' के माध्यम से एमपीआरडीसी के द्वारा बनाई जाने वाली हैं उसका विस्तार से मैं उल्लेख नहीं कर रहा हूं.
अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश देश का पहला वह राज्य है चूंकि हम टाइगर स्टेट कहलाते हैं. सर्वाधिक टाइगर हमारे पास में हैं. पर्यटन की असीम संभावनाएं हमारे पास में हैं और यह देश का पहला राज्य है, जहां हमारी मांग पर माननीय मुख्यमंत्री जी के आग्रह पर देश के भू-तल परिवहन मंत्री माननीय श्री नितिन गडकरी जी ने टाइगर कॉरिडोर की घोषणा कर दी है और यह लगभग 8000 करोड़ रुपये की लागत से बनने जा रहा है, जिसमें प्रदेश के 4 ऐसे जो हमारे नेशनल पार्क हैं, उनको जोड़ते हुए पर्यटन आधारित यह टाइगर कॉरिडोर बनने वाला है. सिंहस्थ के बारे में भी कुछ बातें आई हैं, उसमें मध्यप्रदेश में 13274 करोड़ रुपये की लागत से हम सिंहस्थ के कार्य कर रहे हैं और उसका इस बार उद्देश्य केवल अस्थाई निर्माण कार्य करना नहीं है, बल्कि ज्यादातर निर्माण कार्य ऐसे हों, जो पूरे क्षेत्र को दीर्घकालीन इनफ्रास्ट्रक्चर की सौगात दें. उस दृष्टि से हम उस पर काम करने जा रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, आज मैंने विस्तार से इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास से जुड़ी हुई जितनी भी जानकारियां प्रस्तुत की हैं, वह किसी क्षेत्र विशेष तक नहीं है, वह किसी योजना का हिस्सा नहीं है बल्कि वह हमारे समग्र दृष्टिकोण का परिणाम है और जिसके कारण से हम यह कह सकते हैं कि आने वाले समय में इंफ्रास्ट्रक्चर की दृष्टि से मध्यप्रदेश देश के उन राज्यों में गिना जाएगा, जहां पर इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर है और इंफ्रास्ट्रक्चर के आधार पर किसी राज्य को अगर विकसित राज्य माना जा सकता है, तो मध्यप्रदेश को भी उस दृष्टि से विकसित राज्य के रूप में देखा जाएगा. (मेजों की थपथपाहट)
माननीय अध्यक्ष महोदय, अंत में मैं आपका भी और यहां पर उपस्थित सभी हमारे विपक्ष के साथियों का, हमारे यहां के साथियों का और पूरे मंत्रिमंडल का, हमारे मुख्यमंत्री जी का इन सबका आभार प्रकट करना चाहता हॅूं कि इन सारे परिवर्तनों के लिए यह कोई एक अकेला व्यक्ति अपने स्तर पर नहीं कर सकता. अगर हमने इसकी शुरूआत की है, तो हमें टीम के रूप में विभाग का सहयोग मिला. विभाग के अधिकारियों, इंजीनियर्स का सहयोग मिला. उसके पहले माननीय मुख्यमंत्री जी का मार्गदर्शन मिला, उनकी सहमति मिली और उसके पहले पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ के साथियों ने इसमें सहयोग दिया, तो हम यह कह सकते हैं कि आने वाले समय में लोक निर्माण विभाग जिस दिशा में कार्य की दृष्टि से, जिस कार्य संस्कृति की तरफ आगे बढ़ रहा है, निश्चित रूप से उसमें हम सभी उसकी सराहना करेंगे. बहुत सारे विषय अभी थे लेकिन वह राजनैतिक मान लिये जाएंगे, लेकिन उन पर मैं कोई चर्चा नहीं करना चाहता. मैंने अपनी पूरी चर्चा को रिफॉर्म पर केन्द्रित रखा है और इसको आपने ध्यान से सुना, इसके लिए हृदय की गहराईयों से आप सबका आभार. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद. (मेजों की थपथपाहट)
श्री गोविन्द सिंह राजपूत -- माननीय अभय मिश्रा जी, अब पीडब्ल्यूडी विभाग भी हाइटेक होने वाला है. अब आप हाइटेक कॉन्ट्रेक्टर बनना.
श्री अभय मिश्रा -- (XXX)
अध्यक्ष महोदय -- अभय जी जो कह रहे हैं यह विधानसभा की कार्यवाही का हिस्सा नहीं बनेगा. मैंने भगवान दास जी को भी रोका था. प्लीज, आपको भी रोक रहा हॅूं.
माननीय मंत्री जी ने जवाब बहुत अच्छा दिया (मेजों की थपथपाहट) और मुझे भी यह कल्पना नहीं थी कि लोक निर्माण विभाग की दशा सुधारने के लिए इतने नवाचार हो रहे हैं. निश्चित रूप से समय के साथ-साथ हमको परिवर्तन करते रहना चाहिए और इस दिशा में आप कोशिश कर रहे हैं. हमारी सबकी शुभकामनाएं आपके साथ हैं. आप, सबको साथ लेकर आगे बढ़ते रहें. (मेजों की थपथपाहट)


5.48 बजे अध्यक्षीय घोषणा
कार्यसूची के पद 7 अनुदानों की मांगों पर मतदान के उप पद (2) एवं (3) में उल्लिखित
मांग संख्याओं को एक साथ चर्चा हेतु लिये जाने संबंधी.

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.)



मैं समझता हूं कि दोनों तरफ से दस दस अथवा ग्यारह नाम आये हैं मैं दोनों पक्षों से अनुरोध करूंगा मांग संख्या को आज ही हमें पारित करना है. इसलिये थोड़ी कटौती करेंगे तो ठीक रहेगा, क्योंकि कल भी 2-3 विषयों पर चर्चा होगी. सब लोग बोल सकते हैं इस मामले में पक्ष तथा विपक्ष के नेता ध्यान देंगे. जो प्रारंभ करने वाले सदस्य हैं वह 10 मिनट तक अपनी बात सीमित रखेंगे और उसके बाद जो बोलेंगे वह 5 मिनट में अपनी बात पूरी करेंगे इसका थोड़ा ध्यान रखेंगे. श्री शरद जुगललाल कोल अपनी बात रखें.
श्री शरद जुगलाल कोल (ब्यौहारी)—अध्यक्ष महोदय, मैं धन्यवाद ज्ञापित करता हूं कि आपने मुख्य बजट जनजातिय वर्ग पर बोलने का मौका दिया है. पक्ष के सभी हमारे माननीय नेताओं का और विपक्ष के सभी नेताओं का भी धन्यवाद ज्ञापित करता हूं कि जिस तरह से पिछले विषय पर शांति बनाकर के सदन को चलने दिया है, उस तरह से मैं भी अपेक्षा करूंगा, क्योंकि मैं पहली बार का विधायक हूं तथा पहली बार मुझे बोलने का अवसर मिला है. मांग संख्या 33 के समर्थन में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. मैं ऐसे विषय पर आज आपके बीच ऐसा विषय रखना चाहता हूं जो जनजातीय वर्ग निरंतर प्रगति के बीच अपने आप को संजोकर रखने वाला अपने नेचर के साथ जीवन-यापन करने वाला ऐसा समाज जिसके कल्याण के लिये निरंतर वह सदियों से जंगल पहाड़ व नदियों के बीच में अपना जीवन स्थापित किया है. अपनी पहचान, अपनी सादगी इस बात का उसका परिचायक है, वह जनजातीय वर्ग के लोग हैं. उन लोगों के कल्याण के लिये जिस तरह से बदलते हुए समय में हमारे समाज के लोगों को मूलभूत सुविधाओं को देने का काम हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है. इस बात के लिये धन्यवाद ज्ञापित करता हूं. और उसके समर्थन में मैं खड़ा हुआ हूं. कुछ आंकड़े सदन के समक्ष रखना चाहता हूं जिसमें हमारे प्रधानमंत्री न्याय महाअभियान के तहत पीएम जनमन की जो योजना उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिए आजादी के बाद प्रथम बार प्रधानमंत्री जी द्वारा जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान पीएम जनमन का शुभारंभ दिनांक 15.11.2023 को इसकी शुरूआत की थी. इसमें प्रदेश के तीन पीवीटीजी, बैगा, भारिया सहरिया, की 6 हजार 600 पीवीटीजी बसाहटों के 3 लाख 41 हजार 51 परिवार के 13 लाख 17 हजार 626 पीवीटीजी संख्या को लाभान्वित किया जाकर ऐसी हमारी सरकार ने व्यवस्था बनाई है, जिसमें सर्वाधिक संख्या 8 लाख 60 हजार 335 सहरिया जनसंख्या है, जो योजना से विशेष रूप से लाभान्वित सरकार द्वारा किया जा चुका है. अभियान में मध्यप्रदेश के 24 जिले, अनूपपुर, अशोकनगर, बालाघाट, छिन्दवाड़ा, दतिया डिण्डौरी, गुना, ग्वालियर, कटनी, मंडला, मुरैना, नरसिंहपुर, मैहर, शहडोल, श्योपुर, शिवपुरी, सीधी, विदिशा, भिण्ड, जबलपुर, रायसेन, उमरिया, सिंगरौली, सिवनी के बैगा भारिया सहरिया के विशेष पिछड़ी जनजाति हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा रहा है. पीएम जनमन अभियान के अंतर्गत 9 मंत्रालय की 11 अंधोसंरचनात्मक एवं सात हितग्राही मूलक योजनाओं का सेचुरेशन करते हुए पीवीटीजी जनजाति को लाभान्वित करते हुए उनके सर्वांगीण विकास का प्रयास किया जा रहा है. इसी क्रम में हमारे धरती आभा जनजाति उत्कर्ष अभियान का शुभारंत हमारे प्रधानमंत्री जी ने जनजाति वर्ग के जो लोग निवास कर रहे हैं ऐसे लोगों के व्यवस्था भारत सरकार के जनजाति कार्य मंत्रालय द्वारा जनजाति ग्रामों में शत प्रतिशत सेचुरेशन के लिए इस अभियान का प्रारंभ किया है. इसमें प्रदेश के 51 जिले के 267 विकासखंड के 11377 ग्रामों के निवासरत 18 लाख 58 हजार 795 जनजाति परिवार को 93 हजार 23 जनजाति वर्ग की जनसंख्या को योजना से लाभान्वित किए जाने का लक्ष्य रखा है. अभियान की अवधि पांच वर्ष 2024-25 से लेकर वर्ष 2028-29 है. भारत सरकार द्वारा इस अभियान में बहुत से संवेदनशीलता के साथ अनुसूचित जनजाति वर्ग के जीवन को सुधारने और उनके समग्र विकास के लिए संचालित किया जा रहा है. ताकि प्रत्येक बसाहटों का संपूर्ण अधोसंरचना का कार्य पूर्ण हो सके. वित्तीय वर्ष 2025-26 में यही योजना अंतर्गत राशि 200 करोड़ का प्रावधान रखा गया है. भारत सरकार द्वारा इस बजट में प्रावधान के विरूद्ध 67.99 करोड़ की राशि प्राप्त हुई है जिसमें फरवरी 2026 से 60.15 लाख का व्यय किया गया है. वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना अंतर्गत राशि 250 करोड़ का प्रावधान प्रस्तावित है. अध्यक्ष महोदय मैं सदन के माध्यम से अवगत कराना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश के अंदर समाज के अंदर रहने वाले पिछड़ी जनजाति को सर्वांगीण विकास में चाहे वह शिक्षा या आर्थिक स्थिति को सुधार करने का विषय हो और जंगल में निवास करने वाले लोगों को उनकी मूलभूत सुविधाओं को चाहे उनकी सड़क नाली पानी या आवास की व्यवस्था कराने की बात हो हमारी भाजपा की सरकार ने जो अपेक्षित बस्तियां थीं उनको भी बसाहट में व्यवस्था करते हुए उनको भी मुख्य धारा में लाने का प्रयास हमारी सरकार ने किया है.
5:59 बजे {सभापति महोदय (डॉ. राजेन्द्र कुमार पाण्डेय) पीठासीन हुए.}
एक विषय और आपके समक्ष रखना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान विशेष पिछड़ी जनजाति समुदाय के सर्वागीण विकास के लिये आजादी के बाद प्रथम बार माननीय प्रधानमंत्री जी के द्वारा प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान, पी.एम.जनमन का शुभारंभ दिनांक-15/11/2023 से किया जाकर इस अभियान में लगभग पूरे प्रदेश के अंदर, हमारे समाज के अंदर बहुत सी ऐसी जनजातियां हैं, जिनकी काउटिंग शायद हमारे पूर्ववर्ती सरकारों ने अगर की होती, तो आज भी उनको मुख्य धारा में आकर समाज के बीच बराबर का जीने का अधिकार होता है और हम निरंतर उनके विकास के क्रम में यह कड़ी जोड़ने का काम करते.
सभापति महोदय, मैं इस सदन के माध्यम से एक महत्वपूर्ण विषय पर अपने क्षेत्र में घट रही घटनाओं के आधार पर अपनी बात इस सदन के माध्यम से जन मानस तक ले जाना चाह रहा हूं. मैं एक बात बताना चाह रहा हूं कि प्रदेश के अंदर हमारी बहुत सारी जनजातियां निवासरत हैं और बहुत सी ऐसी संस्थाएं हैं, वह चाहे रेवेन्यू रिकार्ड में हो, चाहे हमारे स्कूल शिक्षा विभाग के बहुत सारे डाइस कोड हों और चाहे हमारी बहुत सी ऐसी बसाहटों के क्षेत्र हों, जहां पर हम उनको जाति सूचक नाम से नामकरण कर संबोधित करते हैं, जिससे आज हमने एक तरह से एट्रोसिटी कानून भी बनाया है, दूसरी तरफ हमने जाति सूचक नाम को लीगलॉइज राईट्स देकर उस क्षेत्र को हमने दुविधा में पैदा किया है, जिससे हमारे क्षेत्र की बहुत सारी ऐसी जनजातियां हैं, जिन जातियों को बहु वचन करके अगर हम संबोधित करते हैं, तो निश्चित रूप से वह अपमानित महसूस करते हैं. सभापति महोदय, मैं इस सदन के माध्यम से बताना चाहता हूं कि बहुत सारे ऐसे रिकार्डो में संशोधन करने की आवश्यकता है, जब हमारी सरकार ने एक तरफ हबीबगंज का नाम हटाकर रानी कमलापति करके हमारे जनाजातीय समुदाय का मान सम्मान बढ़ाने का काम किया है (मेजों की थपथपाहट) उसी तरह से हमारे यहां ब्यौहारी में 9 जून को कोल महा सम्मेलन के उस कार्यक्रम में हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री महोदय, ने हमारी आदिवासी कन्या परिसर का नाम बदलकर उसको शबरी कन्या आश्रम करते हुए हमारे जनजातीय देवी, हमारी आराध्य देवी के नाम से उसको करके, जो हमारे जनजातीय वर्ग के सम्मान को बढ़ाने का काम किया है, इसके लिये हम धन्यवाद ज्ञापित करते हैं. हम भारतीय जनता पार्टी और हमारे नेता का भी धन्यवाद ज्ञापित करते हैं.
सभापति महोदय, इसी तरह से इस सदन के माध्यम से मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि अगर वास्तव में हमारे समाज के अंदर समान भाव से हमारी सरकार ने निरंतर काम किया है, तो इसको भी जोड़ा जाए, यह सरकार को मेरा सुझाव है कि जो हमारी बस्तियों का नाम, रेवेन्यू रिकार्ड में नाम और स्कूलों के डाइस कोड में जो जाति सूचक नाम हैं, उन नामों को हटाकर उस जाति के जो महापुरूष हैं, उनके नाम से अगर नामकरण करेंगे, तो निश्चित तौर पर उसको सम्मान मिलेगा और आने वाले समाज में जो जाति के अंदर जहर घोलने का काम करते हैं, उनको भी रोकने का यह काम होगा. इस वक्तव्य के माध्यम से मैं आप सभी के समक्ष यह चाहता हूं कि यह निश्चित तौर पर प्रदेश की सरकार समस्त जिले के कलेक्टरों को निेर्देशित करे और ऐसे नोटिफाइड एरियों के जो प्रस्ताव आयें, उनको मंगाकर इसको संशोधन करेंगे तो समाज के बीच समरता का भाव पैदा होगा, ऐसा आप सभी से अनुरोध करता हूं.
सभापति महोदय, इसी क्रम में हमारे क्षेत्र के बहुत सारे ऐसे पिछड़े जनजातीय क्षेत्र के बहुत सारे लोग जो जंगल के अंदर निवास करते हैं, वहां बिजली विभाग के बहुत सारे ऐसे नोटिफाइड एरिये हैं, जहां पर फॉरेस्ट की दिक्कतों के कारण उनका विद्युतीकरण नहीं हो पाया है, इसलिए हम बस्ती विकास के माध्यम से माननीय मंत्री जी से चाहेंगे कि विकास के क्रम में आपने अनेकों सौगात हमारे क्षेत्र को दिये हैं, इसको भी बस्ती विकास के क्षेत्र में हमारे यहां नोटिफाइड बहुत सारे ऐसे क्षेत्र हैं, जैसे चरकवाह, बनासी, रिड़वाह, टिहकी, घोरसा, बरकच्छ, बराछ, तेंदुआठ, नग्ननोड़ी, पिपरी, बांसा,वनचाचा, आमानार, कोठिगढ़ आदि गांव ऐसे हैं, जो विद्युत विहीन क्षेत्र हैं, निश्चित तौर पर हमारे वनवासी क्षेत्र के अंदर निवास करने वाला वह आदिवासी उसको भी आज वर्तमान के समय में प्रकाश की आवश्यकता है. जो हमारी सरकार ने निरंतर विकास के कई आयाम स्थापित किये हैं निश्चित तौर पर यह काम अगर होंगे तो हमारे क्षेत्र के जनजातीय परिवार के उन लोगों को भी सम्बल हमारी सरकार से उपलब्धियों के रूप में सौगात मिलेगी, ऐसा मेरा पूरा विश्वास है. लास्ट में अपने एक बात और मैं कहते हुये अपनी बातों को खत्म करूंगा कि पेसा कानून जो निरंतर हमारी सरकार ने दिया है इसको प्रभावी रूप से अगर इसका संचालन होगा प्रभावशील इसको हम बनायेंगे तो निश्चित तौर पर हमारे जो पहले से निर्धारित जनजातीय क्षेत्र हैं उनके लोगों को अधिकार मिलेगा और वहां के जो जनजातीय परिवार के समूह के लोग हैं उनको भी अपने हाथों से अपनी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का मौका मिलेगा. वहां पर पेसा कानून जो हमारी सरकार ने यहां पर लागू करके जो वहां पर कर्मचारी नियुक्त किये हैं पेसा मोबलाइजरों को भी निश्चित तौर पर उनको भी संबल मिलेगा, हमारे बहुत से काम पेसा मोबलाइजरों के द्वारा होते हैं, उनके नियमित रूप से मानदेय करते हुये सरकार उनको और सशक्त बनायेगी ऐसा मेरा सरकार से अनुरोध है और जनजातीय क्षेत्र के हमारे बहुत सारे ऐसे प्रकरण हैं जो न्यायालय में विचाराधीन हैं, सरकार हमारी अनेकों स्तर पर जनजातीय वर्ग के लोगों की मदद करती है, लेकिन वह आर्थिक स्थिति के कारण बहुत से ऐसे मामलों में अपनी पैरवी करने में सक्षम नहीं होते इसलिये सरकार से मेरा अनुरोध है कि ऐसे निर्धन परिवार जो आदिवासी व्यक्ति हैं उनकी पैरवी करने के लिये सरकार की तरफ से एक अधिवक्ता नियुक्त करके उनके प्रकरणों का निराकरण करना चाहिये, ऐसा मैं सरकार से अनुरोध करते हुये जनजातीय वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिये जो हमारी सरकार ने जो बजट पेश किया है मैं पूर्णत: उसके समर्थन में हूं और माननीय मंत्री जनजातीय कार्य विभाग का मैं धन्यवाद ज्ञापित करता हूं कि उन्होंने मुझे बोलने का अवसर दिया और यह पहली दफा मुझे बोलने का अवसर मिला, इसके लिये भी मैं सदन के दोनों पक्षों के नेताओं का और माननीय सभापति महोदय का इस मंच के माध्यम से मैं धन्यवाद ज्ञापित करता हूं और यह मेरा कॉन्फिडेंस आज हमारे दोनों पक्ष के नेताओं ने बढ़ाया है शांति बनाकर, यह मेरे लिये बड़े गौरव का विषय है, ऐसी अपनी बातें कहते हुये आपको बहुत-बहुत धन्यवाद.
सभापति महोदय-- बहुत धन्यवाद शरद जी. आप बहुत अच्छा बोले हैं, पहली बार बोले हैं, सदन पूरी गंभीरता के साथ में सुन रहा था और किसी भी व्यक्ति ने एक ने भी आपके बोलने में व्यवधान नहीं किया, आपको बहुत-बहुत बधाई.
श्री शरद जुगलाल कौल-- सभापति महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.
सभापति महोदय-- आपने समय पर पूरा भी कर दिया, ऐसा ही सभी माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि समय पर अपनी बात पूरी कर लें. समय का ध्यान रखते हुये.
श्री फुन्देलाल सिंह मार्को (पुष्पराजगढ़)-- त्वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे. मां नर्मदा को प्रणाम करते हुये सदन को मैं जय जवाहर करता हूं. माननीय सभापति महोदय जी, मांग संख्या 33 जनजातीय कार्य विभाग, मांग संख्या 42 भोपाल गैस त्रासदी, मांग संख्या 45 लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन से संबंधित मांगों पर मैं अपने विचार रखने का प्रयास करूंगा और सबसे पहले मैं माननीय अध्यक्ष महोदय को बधाई देना चाहता हूं, धन्यवाद देना चाहता हूं. माननीय सभापति महोदय, मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि आज हम मांग संख्या 33 जनजातीय कार्य विभाग पर चर्चा कर रहे हैं . वर्ष 2018-19, 2019-20, 2020-21, 2021-22, 2022-23, 2023-24, 2024-25 और 2025-26 इन वर्षों में जनजातीय कार्य विभाग पर चर्चा हुई ही नहीं. माननीय सभापति महोदय, मांगों पर चर्चा नहीं होती थी, लेकिन हमें गर्व इस बात का है कि माननीय अध्यक्ष महोदय जी की व्यवस्था से उन तमाम विषयों पर और विभाग की मांगों पर चर्चा माननीय सदस्य अपनी बातों को रखेंगे. ताकि अपने क्षेत्रों के विकास से संबंधित और हो रही गड़बड़ियों के बारे में सदन में रखने का मौका मिलता है और इसलिये सभी माननीय सदस्य अपने क्षेत्र के प्रत्यक्षदर्शी होते हैं और इसी आशा अनुरूप सदन में बातों को रखने का प्रयास भी करते हैं. माननीय मंत्री जी विराजमान हैं. 15 हजार करोड़ से अधिक की राशि का आपने व्यवस्था की है. 2003-04 से मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है. 2003-04 से 26-27 का वर्ष हम यह जानना चाहते हैं और प्रदेश यह जानना चाहता है कि इन वर्षों में इस प्रदेश में कितने आई.ए.एस. आदिवासी समाज के बने. कितने आई.पी.एस. बने. कितने आई.एफ.एस. बने और कितने सामान्य प्रशासन विभाग में प्रथम,द्वितीय श्रेणी के अधिकारी बनें इसकी जानकारी हम चाहेंगे कि मंत्री जी आप जब वक्तव्य देंगे तो इसको बताने की कृपा करेंगे. बहुत सारे प्रश्नों के उत्तर में आता है कि सरकार के पास गणना नहीं है आंकड़ा नहीं है कि आदिवासी समाज के लोग इन पदों पर कितने प्रदेश में काम कर रहे हैं. यह जवाब नहीं मिल पाता है. यह दुख का विषय है हमारे लिये जहां 22 प्रतिशत इस प्रदेश की जनसंख्या और वहां यह पता नहीं कि आदिवासी समाज के कितने अधिकारी,कितने आईएएस,आईपीएस,आईएफएस,राजपत्रित अधिकारी कितने हैं. प्रश्नों के उत्तर में संकलन की बात कही जाती है और यह चिंता का विषय होता है. इस प्रदेश में अभी सर्वे हुआ और कुपोषण का बहुत सारी बातें हम लोग करते हैं कि हम जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास सरकार कर रही है. एक प्रश्न के उत्तर में जो आंकड़ा आया कि अतिकुपोषित बच्चों की संख्या जिलावार जहां सर्वाधिक है बड़वानी 1513,धार,2411 बच्चे अतिकुपोषित,छिंदवाड़ा 1860,बैतूल 889,रीवा 1433,सतना 1136,सिंगरौली 765 और अन्य जो हमारे 52 जिले हैं इनकी अतिकुपोषित संख्या 29830 बच्चे मध्यप्रदेश में अतिकुपोषित हैं. आप बताईये कैसे इनकी रक्षा कर रहे हैं कैसे इनको पोषण आहार मिलेगा. आज सरकार को सोचना पड़ेगा और यह बच्चे वह आदिवासी बच्चे हैं जो जंगल में पहाड़ में बसाहटों में निवास करते हैं उनके यह छोटे-छोटे बच्चे हैं जो अतिकुपोषित हैं. सरकार अपनी पीठ थपथपाए लेकिन यह सदन में दिया हुआ आंकड़ा है मेरा नहीं है विधान सभा का आंकड़ा है. कुपोषित बच्चों की संख्या इस प्रदेश में 1 लाख 6422 है. इस प्रदेश में कुपोषित बच्चों की संख्या लाखों में है. ये आंकड़े विधान सभा के हैं, मेरे नहीं हैं. अब आप बताइये, माननीय मंत्री जी भी हमारे आदिवासी समाज के हैं. अति वरिष्ठ हैं और अति संवेदनशील हैं और आपके विभाग में लाखों लाख बच्चे कुपोषित हैं. हम क्या कर रहे हैं. हम इन आदिवासी समाज के लोगों को क्या देना चाहते हैं. क्या हम इनके साथ मात्र वोट की राजनीति कर रहे हैं. मात्र वोट के लिए इनको लुभावना भाषण और राशन देने का प्रयास करते हैं. क्या आप इन्हें केवल वोट बैंक मानते हैं. क्या आप चाहते हैं कि आदिवासियों के छोटे-छोटे बच्चों के हाथ-पैर न चलें. आप उन्हें खड़े कर दें तो उनकी एक-एक हड्डी गिन सकते हैं. यह स्थिति हमारे प्रदेश के आदिवासियों की है.
सभापति महोदय, हम चाहते हैं कि इनके लिए आपकी योजना बने. आपकी जो कार्यरत एजेंसियां हैं, उनसे आप पूछिए कि ये आंकड़े कैसे आ गए. लाखों-करोड़ों रुपये हम खर्च कर रहे हैं, लेकिन कल भी वही स्थिति थी और आज भी वही स्थिति है. इसके बारे में हमको और आपको चिंता करने की आवश्यकता है.
माननीय सभापति महोदय, अभी सरकार का एक आदेश जारी हुआ, जनजातीय कार्य विभाग का आदेश जारी हुआ. संकल्प पत्र, 2023 का अवलोकन करेंगे. पूजा स्थलों का विस्तार एवं नवीनीकरण के संबंध में यह आदेश है. मैं आज यह जानना चाहता हूँ माननीय मंत्री जी कि जब आप अपना वक्तव्य दें तो यह बताएं कि किन-किन जिलों में, 89 विकासखण्डों में से किन-किन विकासखण्डों में आदिवासी क्षेत्रों के किन क्षेत्रों में, किन गांवों में, किन बसाहटों में उनकी मान्यता के देवी-देवताओं के पूजा स्थलों का आपने सौंदर्यीकरण किया. क्या आदेश जारी कर देने से उन देवी-देवताओं के पूजा स्थलों का सौंदर्यीकरण हो जाएगा. आपने प्रोफार्मा बनाकर भेज दिया. वहां चला गया और उसके बाद आपके पास पैसा ही नहीं है. आपने तो पूरा पैसा डायवर्ट कर दिया है. आदिवासी सब-प्लान की राशि कहां जा रही है. पिछले तीन साल में 125 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए. सबसे ज्यादा आपने दे दिया, विद्युतिकरण में, आपने दे दिया जल संसाधन में, आपने दूसरे विभागों को दे दिया तो हमारे जनजातीय कार्य विभाग ने क्या किया.
माननीय सभापति महोदय, 'धरती आबा योजना', बताने में बहुत अच्छी लगती है, लेकिन क्या वह क्रियान्वित हो रही है ? आपने इस योजना से कितने लोगों को लाभान्वित किया ? अच्छे, अच्छे आदेश जारी कर देने से आदिवासियों का विकास नहीं होगा, जब तक कि धरातल पर ये सब नहीं उतरेंगे, जब तक कि तह तक और गांव तक ये योजनाएं नहीं पहुँचेंगी, तब तक विकास नहीं होगा. वैसे भी आदिवासी समाज के बारे में आप जानते हैं, जब हमारे मंत्री लोग भी गांवों में जाते हैं तो सबसे पीछे आदिवासी खड़ा रहता है. वह जानता है कि उसके गांव में पीने का पानी नहीं है. सड़क नहीं है. वह मूलभूत सुविधाओं से भी कोसों दूर है. इसके बाद भी पीछे लाइन लगाया रहता है. वह हिम्मत नहीं करता कि इस देश का, इस प्रदेश का मैं भी व्यक्ति हूँ, मैं भी निवासी हूँ. मेरी भी गणना हो रही है. जब साढ़े आठ करोड़ जनसंख्या की गिनती होगी तो मेरी भी गणना होगी. वह व्यक्ति मुंह बंद करके खड़ा रहता है.
सभापति महोदय -- फुंदेलाल मार्को जी, थोड़ा संक्षिप्त करने का प्रयास करें.
श्री फुंदेलाल सिंह मार्को -- आप कह दें तो मैं बिल्कुल नहीं बोलूंगा.
सभापति महोदय -- नहीं, आप बहुत अच्छा बोल रहे हैं.
श्री फुंदेलाल सिंह मार्को -- सभापति महोदय, मैं तो माननीय अध्यक्ष जी को धन्यवाद दिया हूँ कि इस मांग संख्या पर हम चर्चा कर रहे हैं. आठ साल बाद इस मांग संख्या पर हम चर्चा कर रहे हैं. इसके बाद भी आप कह दें तो मैं बैठ जाऊंगा.
सभापति महोदय -- नहीं, मैं बैठने के लिए नहीं कह रहा हूँ.
श्री फुंदेलाल सिंह मार्को -- सभापति महोदय, सत्य को तो स्वीकार करना पड़ेगा.
सभापति महोदय - फुन्देलाल सिंह मार्को जी, थोड़ा संक्षेप में कर दीजिये. सभी को बोलना है.
श्री फुन्देलाल सिंह मार्को - माननीय सभापति महोदय, हम यह जानते हैं कि आपने पेसा एक्ट लागू किया, यह अच्छी बात है. पेसा अधिनियम आदिवासियों का संरक्षण करता है, लेकिन विकास के नाम पर आदिवासियों का विस्थापन नहीं होना चाहिए, जब तक उनके ग्राम पंचायत की सहमति, सर्वसम्मति न हो जाये, उनको विस्थापित न किया जाये, उनको बेघर न किया जाये, उनकी जमीनें इस तरह से कौड़ी के भाव में न ली जायें, चूंकि वह कोई व्यापारी नहीं है. जन्म से आदिवासी समाज सनातनी है, वह जल, जंगल और जमीन को पकड़ा रह गया, उसको अपना आराध्य माना, जंगल के पेड़-पौधों को उसने अपने गौत्र से जोड़ा और उसको अपने हृदय में लगा लिया. अगर यदि कोई रक्षक है, तो वह आदिवासी समाज ही है, उसने जंगल की रक्षा की है, उसने पर्यावरण की रक्षा की है.
माननीय सभापति महोदय, मैं दावे के साथ कहता हूँ कि आप गांवों में जाकर देखिये कि किस आदिवासी के पास सागौन है, साल है, हल्दू है, बीज है, इमारती लकड़ी है. उनके पास बैठने के लिए पीढ़ा भी नहीं है, मचिया भी नहीं है, वह सब कहां चले गए ? आदिवासियों ने काटा है. नहीं, आदिवासियों ने हमेशा रक्षा की, अपने गौत्र से उसको जोड़ लिया, अपने सीने से लगा लिया और उसकी रक्षा करने का प्रयास किया है. आज जब जंगल कटते हैं, तो आदिवासी को दर्द होता है, इसलिए क्योंकि वह हमेशा प्रकृति से जुड़ा रहा है. वह जंगल में हमेशा रहा है, वहां के फल-फूल, वनोपज से उसने अपना जीवन निर्वाह किया, इसलिए उसने कभी प्रकृति का दोहन करने का प्रयास नहीं किया. सभापति महोदय, मैं चाहता हूँ कि आदिवासी समाज की जब भी कोई कार्य योजना सरकार की ओर से बने, तो यह प्रयास किया जाये कि पेसा अधिनियम का पूरा पालन किया जाये. उनको बेघर मत कीजिये. उनकी जमीनों को मत लीजिये. यदि आपने उनके आशियाने लूट लिये, तो वही आदिवासी नगरों एवं महानगरों जाकर किसी कूड़े-कचरे के पास झोपड़ी बनाकर मजदूरी करके रहने लगेंगे. सभापति महोदय, मैं जानता हूँ कि आपने मुझे बोलने का समय दिया है.
सभापति महोदय - फुन्देलाल जी, नाम काफी अधिक हैं. समय आपके सामने है. यह सभी के लिए हैं. कृपया संक्षिप्त करें.
श्री फुन्देलाल सिंह मार्को - माननीय सभापति महोदय, हमारी जो एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना संचालित है, जो वहां के पूरे आदिवासी समाज की मूलभूत सुविधाएं करेगा. उसको क्या चाहिए ? वह वहां गांव में जाकर सर्वे करते थे, देखते थे ओर उसके बाद योजनाएं बनती थीं. आज भी पत्र जारी होते हैं. आप एकीकृत आदिवासी विकास के माध्यम से प्रस्ताव भेजिये. मेरे पुष्पराजगढ़ से 5 हजार करोड़ रुपये का आ गया और एक भी सेंक्शन नहीं हुआ. पैसा दोबारा मिला ही नहीं, वह एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना कहां चली गई ? उसका मात्र बोर्ड लगा है, उसमें हम तनख्वाह दे रहे हैं, लेकिन उसका काम कुछ भी नहीं है. चाहे वह सिंगरौली के पेड़ कटाई का हृदय विदारक मामला हो. जहां आदिवासी समाज के लोग निवास करते हैं. दुर्लभ जड़ी-बूटियों से जहां इस देश के लोगों को स्वस्थ बनाने का काम करते थे, उनको एक तरीके से काटकर फेंक दिया गया. मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूँ कि पिछली सरकार ने एक निर्णय लिया था कि प्रदेश में पिछड़ी जनजाति सहरिया, भारिया और बैगा समाज के लोग जिन बसाहटों में, गांवों में, मजरों-टोलों में निवास करते हैं, वहां सरकार नि:शुल्क बिजली देगी. उनमें भिण्ड, अनूपपुर, अशोक नगर, बालाघाट, छिन्दवाड़ा, दतिया डिण्डौरी, गुना, ग्वालियर, कटनी, मंडला, मुरैना, नरसिंहपुर, मैहर, शहडोल, श्योपुर, शिवपुरी, सीधी, विदिशा, भिण्ड, जबलपुर, रायसेन, उमरिया, सिंगरौली, सिवनी, विदिशा इन जिलों में बसाहटों में नि:शुल्क बिजली लगाने की बात सरकार ने की थी लेकिन आज तक इन बसाहटों में आजादी के इतने वर्षों के बाद भी दुर्भाग्य है कि मुझे बिजली आपने नहीं दी, मेरा बेटा आज भी चिमनी में पढ़ रहा है, आज भी दीये में पढ़ रहा है, आज भी वह लालटेन खोज रहा है, आपने वहां मिट्टी तेल बंद कर दिया. आप बतायें वह कैसे पढ़ेगा, यह हम उस सरकार की बात कर रहे हैं जो सरकार ने तय किया, हमने कुछ नहीं कहा है.
सभापति महोदय, नाम परिवर्तन करने का बड़ा शौक है. एक कहावत है कि कौए के ऊपर चूना लगा दें और उसे कबूतर कहें लेकिन जब पानी पड़ा उस पर, फिर कौआ का कौआ दिखने लगा, आप नाम बदल देंगे तो क्या वह कौआ चूना लगा देने से कबूतर बन जायेगा ? वह कौआ ही रहेगा. लेकिन दु:ख इस बात का है कि जिन विद्यालयों के नाम आपने परिवर्तित किए, उसके साथ आप वहां सुंदर शैक्षणिक व्यवस्था करें. आपके पास शिक्षक नहीं हैं, आज शिक्षाकर्मियों से आपका काम चल रहा है, 60 लाख शिक्षाकर्मी हैं, उनको आप नियमित क्यों नहीं कर रहे हैं, रिक्त पदों के विरूद्ध आप करें, यदि वे पढ़ाने का काम कर रहे हैं तो उनको नियमित कर देना चाहिए, ऐसा मेरा आपसे निवेदन है.
सभापति महोदय- मार्को जी, आपको पर्याप्त समय हो गया है, थोड़ा संक्षिप्त कर दें, नाम काफी हैं इसलिए मेरा आग्रह है.
श्री फुन्देलाल सिंह मार्को- सभापति महोदय, आपके आदेश का पालन करता हूं. आज 12 हजार प्राथमिक विद्यालयों में भवन नहीं हैं, इससे भी ज्यादा हैं लेकिन आपके आंकड़ों के आधार पर बता रहा हूं कि 6 हजार से ज्यादा विद्यालय बंद हो गए हैं. जब मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और माननीय दिग्विजय सिंह जी मुख्यमंत्री थे, तब राजीव गांधी शिक्षा मिशन चला और उसके तहत प्रत्येक मजरा-टोला में, जहां भी 40 बच्चे मिले, वहीं विद्यालय संचालित हो गया और वहीं के बेटा-बेटी, जो पढ़े-लिखे बच्चे थे, उनको वहीं शिक्षक के रूप में भर्ती किया गया. उस समय बड़ी हंसी उड़ाई गई इस बात की कि रुपये 500 में गुरूजी बना दिये, यही आप सब कह रहे थे, आज वह रुपये 500 पाने वाला हमारा गुरूजी, रुपये 50-70 हजार पा रहा है, ये दूरदर्शिता थी कांग्रेस की.
सभापति महोदय- अब बहुत समय हो गया, आप भी थोड़ा धैर्य रखें, संयम रखें. बिल्कुल एक मिनट में अपनी बात समाप्त करें.
श्री फुन्देलाल सिंह मार्को- सभापति महोदय, आप जब मुस्कुराकर बोल देते हैं तो लगता है अभी बैठ जाऊं कि और बोलूं ?
सभापति महोदय- मैं तो चाहता हूं कि सभी मुस्कुराकर ही बात करें और आप भी मुस्कुराकर, धन्यवाद देकर बैठ जायें तो बहुत अच्छा रहेगा जिससे मैं अगले वक्ता को बुला सकूं.
श्री फुन्देलाल सिंह मार्को- सभापति महोदय, थोड़ा समय और दे दीजिये.
सभापति महोदय- नहीं-नहीं, बहुत समय हो गया है.
फुन्देलाल सिंह मार्को-- मध्यप्रदेश सरकार वर्तमान में आदिवासियों को टुकड़े-टुकड़े में बांटना चाह रही है. जाति के आधार पर, वर्ग के आधार पर, हमारे महापुरुषों के आधार पर. वह इस आदिवासी समाज को एक नहीं होने दे रहा है. हम चाहते हैं कि इस सदन के माध्यम से आदिवासियों के अस्तित्व को बचाये रखने के लिए आदिवासी का कोड जारी होना चाहिए ताकि सभी जाति के ''एक तीर एक कमान आदिवासी एक समान'' वहां अंतर कहां हैं. सारे लोग मिलकर भाईचारे के साथ पहले भी रहते थे, आज भी रह रहे हैं इसीलिए मैं आपको निवेदन करना चाहता हूं. एक और सर्वे बता देता हूं. अनादिकर्मी सर्वे अभी हुआ. उसमें लगभग 41 जिलों के 13 हजार गांवों का सर्वे हुआ. उस 13 हजार गांवों में 2 लाख 50 हजार आदिवासी समाज के लोग झुग्गी, झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर हो रहे हैं. यह मैं सरकार का सर्वे बता रहा हूं. 50 हजार ऐसे लोग हैं जो खुले में शौंच करने के लिए मजबूर हैं. मैं चाहता हूं कि...
सभापति महोदय-- फुन्देलाल जी बहुत-बहुत धन्यवाद. आपकी बात आ गई है. आपको बहुत समय मिल गया. आप अच्छा बोले, बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्री फुन्देलाल सिंह मार्को-- सभापति महोदय, धन्यवाद तो दिया ही नहीं.
सभापति महोदय-- बहुत-बहुत धन्यवाद. आ गया, सभी के सुनने में आ गया.
श्री फुन्देलाल सिंह मार्को-- सभापति महोदय, आपने बोलने का समय दिया इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्री रजनीश हरवंश सिंह--सभापति महोदय, फुन्देलाल मार्को जी ने बहुत अच्छी बात कही और बहुत ही विस्तृत जनजाति विभाग के ऊपर वह बोल रहे हैं और जो आपकी मुस्कुराहट है न केवल उनके मानस पटल पर यह अंकित है बल्कि हम सभी सदस्यों के ऊपर भी अंकित है. जब भी आप आसंदी पर बैठते हैं तो हम लोगों को पूरा भरोसा रहता है. मैं दो लाइन बोलना चाहूंगा कि:-
''हाल क्या है दिलों का न पूछो सभापति महोदय जी,
आपका मुस्कुराना गजब ढ़ा गया''
श्री फुन्देलाल सिंह मार्को-- सभापति महोदय, मैं अपने क्षेत्र की बात तो कर लूं. मैं अपने क्षेत्र की बात ही नहीं कर पाया. आप व्यवस्था दे दें.
सभापति महोदय-- आपकी बात हो गई है फुन्देलाल जी.
श्री संतोष वरकड़े (सिहोरा)-- माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया इसके लिए मैं आपका दिल से आभारी हूं. साथ ही संसदीय कार्यमंत्री, जनजातीय कार्य मंत्री जी का भी आभारी हूं. मैं वर्ष 2026-27 के अनुदानों की मांगों पर भाग संख्या 33 जनजातीय कार्य के पक्ष में बोलने के लिए उपस्थित हुआ हूं. भारत देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी के द्वारा संकल्पित विकसित भारत संकल्पना को साकारकर्ता मध्यप्रदेश की सरकार जिसके यशस्वी, संवेदनशील मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में प्रस्तुत यह वर्ष 2026-27 का संतुलित अद्भुत बजट जिसमें गरीबों की कल्याण की नीति, युवाओं की उन्नति, अन्नदाता का सम्मान और हमारी नारी शक्ति, मातृ शक्ति के प्रत्येक कदम में आत्मविश्वास की झलक और उद्योगों के विस्तार एवं उनसे जुड़े अद्योसंरचना के विस्तारण संबंधी यह बीज मंत्र लेकर आया स्वर्णिम मध्यप्रदेश को साकार करता यह बजट, माननीय सभापति महोदय, जब हम बजट की बात करते हैं तो प्रदेश के समग्र और सर्वांगीण विकास की कार्य योजना इस बजट में रहती है. जब हम सर्वांगीण क्षेत्र की बात करते हैं तो जनजातियों का भी इसमें विचार आता है. उनके लिए भी राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बजट में अपनी सहभागिता देती है. भारतीय जनता पार्टी जिसका ध्येय वाक्य है अन्त्योदय. मैं इस सदन को यह अवगत कराना चाहूंगा कि पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय स्वर्गवासी अटल बिहारी बाजपेई जी की सरकार में वर्ष 1999 में सिर्फ और सिर्फ जनजातियों के कल्याण के लिए आदिम जाति कल्याण मंत्रालय का गठन किया गया था. पूर्ववर्ती सरकारों ने भी किसी न किसी प्रकार की योजनाएं बनाईं थीं लेकिन वे योजनाएं सिर्फ कागजों तक सिमट गईं. जनजातियों के सर्वांगीण विकास, उनकी सामाजिक और आर्थिक उन्नति के लिए एक अलग से विभाग का बनाया जाना यह सिद्ध करता है कि और भी अधिक प्रयास किए जाने चाहिए. इसी क्रम में भारत के प्रधानमंत्री श्रीमान मोदी जी ने जिनकी संकल्पना से आदि कर्मयोगी अभियान का चलना और पीएम जनमन जैसी महत्वाकांक्षी और कल्याणकारी योजनाओं का आना यह सिद्ध करता है कि अन्त्योदय के लिए यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार सदैव प्रतिबद्ध है, बचनबद्ध है और रहेगी.
सभापति महोदय, जब हम बजट की बात करते हैं तो तनिक मैं यह भी अवगत कराना चाहूंगा कि वर्ष 2025-26 में 47 हजार 295 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया था. वहीं वर्ष 2026-27 में 47 हजार 429 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान रखा गया है. पिछले वर्ष की तुलना में इसमें 134 करोड़ रुपए की वृद्धि की गई. यह वृद्धि मात्र वृद्धि नहीं है यह हमारी सरकार की मंशा है कि जनजातियों को किसी प्रकार की कमी न हो. मैं बजट की तुलनात्मक दृष्टि की भी चर्चा करना चाहूंगा. हम बीते हुए समय की बात करें तो वर्ष 2003 में जनजातियों के लिए मात्र 613 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित हुआ करता था. वही बजट आज वर्ष 2026-27 में बढ़कर 15 हजार 15 करोड़ का प्रस्तावित किया गया है. यदि इसे हम प्रतिशत की तुलना में देखें तो यह वृद्धि 2361 प्रतिशत की वृद्धि है. यह कोई साधारण वृद्धि नहीं है. जब हम जनजातियों की बात करते हैं तो मैं वीर महापुरुषों की भी इस सदन में चर्चा करना चाहूंगा कि कैसे हमारे जनजातीय नायकों के साथ भेदभाव किया गया था. इतिहास के पन्नों से उनके नाम तक अलग कर दिए गए थे. मैं मध्यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार और हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा. जिनके मार्गदर्शन पर जनजातियों का गौरव लौटाया गया. 15 नवम्बर को भगवान बिरसा मुण्डा जयंती को गौरव दिवस के रुप में सम्पूर्ण राष्ट्र में मनाया जाता है. महान वीर पुरुषों की जब हम चर्चा करते हैं तो मेरा भी क्षेत्र ऐसे महान गोंडवाना शासक की धरा से आता है जहां हम सम्मानपूर्वक राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह जी को भी याद करते हैं. महारानी वीर वीरांगना गोंडवाना की शान, रानी दुर्गावती जी के चरणों में भी नमन करते हैं. हमारी सरकार ने राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह का संग्रहालय लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत से बनाया है और वहां पर जो आज की पीढ़ी है वह पीढ़ी उस संग्रहालय में आकर अपने पूर्वजनों की वीरगाथाओं के चित्रण का दर्शन करती है और अपनी विरासत पर गर्व करती है.
सभापति महोदय -- अब अपने क्षेत्र के बारे में जो कहना चाहते हैं वह रख दें संतोष जी, समय पूरा हो रहा है. समय का ध्यान रखें.
श्री संतोष वरकड़े -- सभापति महोदय, पूरा मध्यप्रदेश मेरा क्षेत्र है. मैं पहली बार बोल रहा हूं. आपसे आरक्षण और संरक्षण की अपेक्षा करता हूं.
सभापति महोदय -- स्वागत है आपका बहुत अच्छा बोल रहे हैं लेकिन थोड़ा संक्षेप में कर लें.
श्री संतोष वरकड़े -- सभापति महोदय, निश्चित रूप से भारतीय जनता पार्टी की यशस्वी सरकार और हमारे संवेदनशील मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में जो हमारी विशेष जनजातियां हैं और अति पिछड़ी हैं, जैसे बैगा, भारिया, सहरिया इनके सर्वान्मुखी विकास के लिए, शत् प्रतिशत पुनर्वास के लिए सरकार ने समय-समय पर ऐसी योजनाएं बनाई हैं जिनमें मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि इनके उत्थान के लिए बैगा विकास प्राधिकरण, भारिया विकास प्राधिकरण, सहरिया विकास प्राधिकरण के माध्यम से निश्चित रूप से उनके जनजीवन में बदलाव आया है. एक और जो मानवीय संवेदनाओं पर आधारित एक ऐसी योजना जिसकी नितान्त आवश्यकता थी वर्तमान में वह संचालित है आहार अनुदान योजना, जिसमें मैंने अभी पूर्व में उल्लिखित तीन जनजातियों के विषय में बताया. इनमें हमारी जो मातृ शक्तियां हैं, जो महिला हमारी उन परिवारों की मुखिया होती हैं उनके प्रोत्साहन के लिए हमारे राज्य की संवेदनशील सरकार 1,500 रुपये प्रतिमाह देती है. निश्चित रूप से यह राशि अधिक नहीं होगी मैं मानता हूं लेकिन इतनी पर्याप्त है कि वह अपने बच्चों को स्वस्थ गुणवत्तापूर्ण पोषक आहार दे सकें ताकि कुपोषण में कमी आए. यह एक प्रयास है. यह योजना लगभग 8 जिलों में संचालित है. मैं जिलों के नाम पर नहीं जाउंगा. मैं सरकार के भाव को उल्लिखित कर रहा हूं.
सभापति महोदय, मैं यह बताना चाहूंगा कि इसी प्रकार ऐसे जनजातीय ग्रामों के विकास की भी योजना बनती है जिसे हम बस्ती विकास योजना के माध्यम से उन दूरस्थ ग्रामीण अंचलों में बसे गांवों में हम कहीं बिजली की व्यवस्था करते हैं, कहीं सीसी रोड बनाने की व्यवस्था करते हैं, ऐसे मजरे-टोलों में सुगमता के लिए यह सारे प्रयास किए जाते हैं, इस हेतु भी वर्ष 2026 में 60 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान प्रस्तावित है.
सभापति महोदय -- अब समाप्त करें संतोष जी, आपकी काफी सारी बातें आ गई हैं. समय का ध्यान तो सबको रखना जरूरी है. मेरा दोनों पक्षों के माननीय सदस्यों से अनुरोध है.
श्री संतोष बरकड़े--माननीय सभापति महोदय, मेरे अपने क्षेत्र में भी अब चूंकि प्रदेश में 89 आदिवासी विकासखंड जो हैं उसमें पेसा एक्ट लागू है. मेरा माननीय मंत्री जी से यह विशेष आग्रह है कि मेरी विधानसभा क्षेत्र सिहोरा है और वहां पर कुण्डेश्वर जनपद है जिसमें 85 प्रतिशत जनसंख्या आदिवासियो की है. मैं चाहता हूं कि 89 विकासखंड को बढ़ाकर के 90 विकासखंड आदिवासियों के हो जायें और मेरे कुण्डेश्वर को भी उसमें शामिल कर लिया जाये. आशा है कि मंत्री जी मेरी बातों पर गंभीरता से विचार करेंगे, माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया उसके लिये धन्यवाद, जय हिंद, जय बड़ादेव.
सभापति महोदय- आपको भी धन्यवाद.
श्री मोहन सिंह ठाकुर-- सभापति महोदय मैं भी ग्वालियर जिले के सहरिया समाज की भावनाओं से अवगत कराना चाहता हूं कृपया अनुमति प्रदान करें.
सभापति महोदय- इंतजार करें, यह अपना नाम दे दें.
डॉ.हिरालाल अलावा(मनावर) -- माननीय सभापति महोदय, बहुत बहुत धन्यवाद, आपने मुझे मांग संख्या 33 पर बोलने का अवसर प्रदान किया. माननीय सभापति महोदय, जनजातीय कार्य विभाग में जैसा कि अभी बताया गया कि 47 हजार करोड़ रूपये का बजट है. सबसे पहले तो मैं आपके माध्यम से प्रदेश के पश्चिमी आदिवासी बाहुल्य जिले धार, झाबुआ, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, में जो कल से भगोरिया पर्व शुरू हुआ है ,मैं ढेर सारी बधाईयां और शुभकामनायें देता हूं पूरे प्रदेशवासियों को और भगोरिया पर्व के बारे में भगोरिया हाट के बारे मे आपके माध्यम से मैं सदन को बताना चाहता हूं कि यह पर्व आदिवासियों की संस्कृति उनकी परम्पराओं, उनके रीति रिवाजों और उनकी एकता को प्रदर्शित करने वाला पर्व है.
माननीय सभापति महोदय, पिछले कई वर्षों से भगोरिया के बारे में भ्रम फैलाया गया था कि यह प्रणय पर्व है लेकिन मैं आपके माध्यम से सदन को बताना चाहता हूं कि यह एक आदिवासियों का सांस्कृतिक एकता महापर्व है इसमें हमारे आदिवासी समाज का एक बड़ा हिस्सा भाग लेता है और अपनी संस्कृति का प्रदर्शन करता है. आज सरकार आदिवासियों की संस्कृति को बचाने के लिये करोड़ों रूपया खर्चा कर रही है लेकिन असल में आदिवासियों की सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिये सरकार कोई प्रयास नहीं कर रही है.
माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हू कि सरकार अगर वास्तव में आदिवासी हितैषी है तो उनकी संस्कृति को बचाने के साथ साथ उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा और सुरक्षा करे ताकि मध्यप्रदेश का 2 करोड़ आदिवासी अपने आपको सुरक्षित और संरक्षित महसूस करे.
आज मध्यप्रदेश में आदिवासी समाज विकास के अंतिम पायदान पर खड़ा है.फर्जी जाति प्रमाण पत्र एक गंभीर समस्या है, हजारों की संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर लोग लाभ ले रहे हैं. आज 10 हजार से ज्यादा फर्जी जाति प्रमाण पत्र के ऊपर जांच चल रही है, लेकिन समय पर जांच नहीं होती है, और जांच होती भी हो और दोषी पाये भी जाते हैं तो हाईकोर्ट से स्टे मिल जाता है. अगर सरकार वास्तव में आदिवासी हितैषी है तो सरकार को अपने स्तर पर समय सीमा निर्धारित करनी चाहिये कि जिस फर्जी प्रमाण पत्र की जांच हो रही है उसके ऊपर कार्यवाही हो.
सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से एक उदाहरण सदन में पेश करना चाहता हूं. सभापति महोदय 2015 की राज्य सेवा की परीक्षा में झाबुआ में जो वर्तमान में डिप्टी कलेक्टर है अक्षय सिंह मरकाम पहले 2013 से पहले वे गुप्ता थे, फिर मरकाम बने, 2017 में दुबारा चयन हुये डिप्टी कलेक्टर बने, हमने उनकी जाति प्रमाण पत्र की मांग करी, तो जब उनके पिताजी के रिकार्ड में मिला कि 1981 में उज्जैन के महिदपुर से उनका प्रमाण पत्र बना और पिताजी का जाति प्रमाण पत्र इस आधार पर बना कि वहां के स्थानीय विधायक श्री आनंदीलाल छजलानी के आधार पर बनाया गया है, क्या यह जाति प्रमाण पत्र बनाने का कोई मापदंड है. अगर आदिवासी जाति प्रमाण पत्र बने तो उसके लिये 1950 का रिकार्ड माना जाता है, जबकि वास्तव में हमारे श्योपुर जिले में हजारों की संख्या में है भील भिलाला जो धार, झाबुआ, बड़वानी से विस्थापित होकर के आये हैं लेकिन आज भी उनके जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पाये हैं.तो यह आदिवासी जाति प्रमाण पत्र एक गंभीर मुद्दा है, जिसको सरकार को गंभीरता से लेकर ऐसे दोषियों के ऊपर जल्दी से जल्दी कार्यवाही करनी चाहिये. दूसरा, एक महत्वपूर्ण मुद्दा है आज आदिवासी इलाकों में.आदिवासियों की जमीन छीनी जा रही है. जमीन दो तरीके से छीनी जा रही है. एक तो आदिवासी लड़कियों को बहला फुसला कर उनसे शादी कर ली जाती है या फिर दलालों के माध्यम से उनके गरीब मां बाप को 2-3 लाख रुपये दे दिये जाते हैं और जब उस लड़की की अन्य जाति में शादी हो जाती है, तो उस लड़की को पंच,सरपंच,जनपद,जिला पंचायत,विधायक एवं सांसद का चुनाव लड़ाया जा रहा है और जो आदिवासियों को राजनीतिक रुप से संविधान ने आरक्षण दिया है, उसका चीर हरण किया जा रहा है. इस पर सरकार गंभीरता से विचार करे और ऐसी आदिवासी लड़कियां जो अन्य समाज में चली गईं, उनको किसी भी प्रकार का चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाना चाहिये. दूसरा, आदिवासियों की जमीन छीनने के लिये आदिवासियों को बंधुआ मजदूर बना लिया जाता है. मैं आपको एक उदाहरण बतना चाहता हूं कि म.प्र. के कटनी जिले में चार आदिवासी नथु कौल, प्रहलाद कौल, राकेश सिंह गौंड और रघुराज सिंह गौंड. इनमें तीन जो ऊपर के हैं नथु,प्रहलाद और राकेश सिंह ये बीपीएल कार्ड धारी हैं. इनके नाम पर 1143 एकड़ जमीन म.प्र. के अलग अलग जिलों में खरीदी गई और आदिवासियों की जमीन पर कब्जा किया गया. यह सिर्फ एक उदाहरण के तौर पर आपको बताना चाह रहा हूं, हजारों की संख्या में आदिवासियों के नाम पर जमीन खरीदी जा रही है और आदिवासियों से जमीन छीनी जा रही है. क्या म.प्र. की संवेदनशील सरकार जो कहती है कि आदिवासी हितैषी है, इस तरह से आदिवासियों की जमीन छीनने के रास्ते तैयार करेगी. यह आदिवासियों के साथ धोखा है. दो तीन गंभीर मुद्दे हैं. एक मनावर एक आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है. हमने लम्बे समय से सरकार से मांग की कि हमको बायपास की स्वीकृति दे दी जाये, क्योंकि मनावर में अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट, गंधवानी में सीमेंट प्लांट, अभी कुक्षी में भी सीमेंट प्लांट लगाया जा रहा है और यह आदिवासियों की जमीन छीनकर लगाया जा रहा है. पेसा कानून के बगैर अनुमति के लगाया जा रहा है. ग्राम सभाओं की बगैर अनुमति के लगाया जा रहा है और जो आदिवासी संघर्ष कर रहा है, विरोध करता है, उनके ऊपर एफआईआर कर दी जा रही है. आदिवासियों के लिये नियम और सीमेंट फैक्ट्रियों के लिये कोई नियम नहीं, कोई संविधान नहीं. यह कौन सा न्याय है आदिवासियों के साथ. आज हमने एक बायपास की मांग की, घंटों जाम रहता है, तो नियम आड़े आ गये. हमने मेडिकल कालेज की मांग की तो नियम आड़े आ गये. लेकिन जब कम्पनियां आ रही हैं और आदिवासियों की जमीन छीन जा रही है, तो इनके लिये कोई नियम नहीं है. एक गंभीर मुद्दा है आदिवासी इलाकों में बेरोजगारी. सरकार की दो महत्वपूर्ण योजनाएं हैं और इन योजनाओं का एक ही उद्देश्य है कि युवाओं को रोजगार देना, आत्मनिर्भर बनाना. सरकार की मंशा बहुत अच्छी है और योजनाएं भी बहुत अच्छी है, लेकिन जब ये बेरोजगार युवा लोन लेने के लिये जाते हैं बैंकों में, तो बैंक उनसे बैंक ट्रांजेक्शन, गारंटी मांगता है. जब एक बेरोजगार आदिवासी युवा बैंक ट्रांजेक्शन,गारंटी कहां से लाकर देगा. सरकार कहती है कि एक तरफ मैं गारेंटर हूं. लेकिन सरकार की असल में यह बात कहने की है. अगर वास्तव में इन बेरोजगार युवाओं को लाभ देना है, तो सरकार को नियम बनाना पड़ेगा और साथ मैं आपको एक बात यह भी कहना चाहता हूं कि असल में इन योजनाओं का अगर कोई लाभ उठा रहा है, तो या तो विधायक, सांसद के लड़के उठा रहे हैं या बड़े अधिकारियों के लड़के उठा रहे हैं. जिस अन्त्योदय की बात कर रहे हैं, जिस अंतिम पंक्ति में खड़े वर्ग को लाभ देने की बात कर रहे हैं, उनको कोई लाभ नहीं मिल रहा है इन रोजगार योजनाओं का. हमारे मनावर विधान सभा क्षेत्र में नर्मदा नदी के तट पर हमारे घाटों के निर्माण की हमने लम्बे समय से मांग की थी, सेमल्दा घाट,बड़दा घाट, उर्दना घाट के सौंदर्यीकरण के साथ साथ में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये बहुत महत्वपूर्ण हो सकते हैं. लेकिन अभी तक मनावर विधान सभा क्षेत्र में घाटों के निर्माण को लेकर सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया. मेरी मांग है कि मेरे क्षेत्र में इन घाटों का निर्माण होना चाहिये. दूसरी, एक और मेरी मांग है कि हमारा खलघाट से मनावर,मनावर से कुक्षी और कुक्षी से अलीराजपुर रोड. ये स्टेट हाईवे 38 है और सबसे ज्यादा एक्सीडेंट होने वाला यह जोन बन चुका है. आपके माध्यम से सरकार से मेरी मांग है कि कम से कम इसको फोरलेन की स्वीकृति दे दी जाये.
माननीय सभापति महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र की कुछ रोड हैं, यह आपके माध्यम से नोटिफाईड हो जायें. मेरी मांग है कि आप चाहे बस्ती विकास से दो या कोई से भी विकास से दो. इनको नोटिफाईड किया जाये.
सभापति महोदय- डॉक्टर साहब, अगर आपकी क्षेत्रीय मांग हैं तो यहां पर पटल पर रख दें, वह आपके भाषण में जुड़ जायेगा और उतना समय भी बच जायेगा.
डॉ. हिरालाल अलावा- सभापति महोदय, ग्राम पंचायत आमसी में बेडीपुरा से सिंगाजी मेला लटामली, मडावदा हाई स्कूल से खेरियाखोदरी तक, बडियाकाकड से भमवालत तक, धनोरा से कलालदा, पांजिरिया फाटक से महादेवखोदरा, अवल्दा से भैंसलायी, बालीपुर से गुराडि़या रोड, धुलसर से सोल्यापुरा, टाना घाटा से भसलाय और चिपराटा से टेकी. सभापति यह जो मांगे हैं यह लंबे समय से हमारे आदिवासी भाईयों और सभी वर्गों के लिये महत्वपूर्ण होगी.
सभापति महोदय, आखरी में मेरी दो मांगे हैं लोक सेवा आयोग में पिछले चार-पांच सालों से पदों की संख्या को लेकर लंबे समय से छात्र आंदोलन कर रहे हैं. सिर्फ 400-500 हजार के अंदर पद निकल रहे हैं. जबकि परीक्षा देने वाले विद्यार्थी एक लाख से डेढ़ लाख हैं. मेरा आपके माध्यम से अनुरोध है कि प्रदेश में आकांक्षी पोर्टल पर 6 लाख 97 हजार युवा हैं तो यदि इन पदों की संख्या है तो कहीं न कहीं इन वर्गों को लाभ मिलेगा. दूसरा वर्ग-1 के पदों को भी बढ़ाया जाये. यह भी महत्वपूर्ण मांग है. मनावर विधान सभा क्षेत्र से धार जो जिला का कार्यालय है वह 80 मिलोमीटर के लगभग पड़ता है. मेरी लंबे समय से मांग रही है कि मनावर को जिला बना दिया जाये. ताकि हमारे आदिवासियों को वहां 80-90 किलोमीटर दूर तक न जाना पड़े और उनको स्थानीय स्तर पर ही राजस्व के उनके सारे काम हो जायें. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया आपका बहुत धन्यवाद. जय जुहार, जय आदिवासी जिंदाबाद.
सभापति महोदय- माननीय सदस्य आपका नाम नहीं है, एक मिनट में अपनी पूरी कर दीजियेगा.
श्री मोहन सिंह राठौर (भितरवार)- सभापति महोदय, मैं सबसे पहले मुख्यमंत्री जी को और मंत्री जी को इस बात के लिये धन्यवाद देता हूं कि ग्वालियर जिले की भितरवार विधान सभा में सबरीमाता जो बहुत बड़ा आस्था का केन्द्र था, उसके लिये जमीन उपलब्ध करायी है. उसके लिये मैं बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं.
सभापति महोदय- इसके साथ ही यह जानकारी भी देना चाहता हूं कि ग्वालियर जिले की सहरिया समाज की जितनी संख्या है उसका 80 प्रतिशत केवल मेरी भितरवास विधान सभा में निवास करता है. लेकिन वहां घाटीगांव एक बहुत बड़ा क्षेत्र है. वहां पर आईटीआई भी है, तमाम हायर सेकेण्डरी और सारे स्कूल हैं. लेकिन वहां एक सौ सीटर का आदिवासी सहरिया समाज के लिये, बालक-बालिकाओं के लिये एक छात्रावास की अत्यंत आवश्यकता है यदि आप उसे सम्मिलित करेंगे तो उससे बहुत बड़ा हमारे क्षेत्र में लाभ होगा. इसके साथ ही आदिवासी समाज के बहुत सारे युवा ऐसे हैं, जो अग्निवीर और पुलिस और सारी चीजों की तैयारी कर रहे हैं, उनकी तैयारियों के लिये और खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिये, एक स्टेडियम की अत्यंत आवश्यकता है. मैं यह भी निवेदन करूंगा कि यदि आप इसको भी सम्मिलित करेंगे तो बहुत बड़ी कृपा भितरवार विधान सभा क्षेत्र के लिये होगी. सहरिया समाज की हमारे यहां 103 बस्तियां हैं और प्रत्येक बस्ती को किसी न किसी नाम से जाना जाता है. जैसे आदिवासी बस्ती घाटीगांव, आदिवासी बस्ती महरामपुरा उसका अपना नाम नहीं है तो उसकी वजह से जो भी योजना आदिवासी और सहरिया समाज के लिये यहां से भारतीय जनता पार्टी की सरकार देती है. उस योजना का लाभ कुछ लोग उठाते हैं और आदिवासी और सहरिया समाज तक उसका लाभ नहीं पहुंचने देते.
मैं समझता हूं कि वह जिनको भी आराध्य मानते हैं या अपने समाज के किसी बड़े पुरखा या पिता तुल्य किसी आदमी को मानते हैं तो उसके नाम पर भी उन बस्तियों के नाम रखे जाने की एक पहल होना चाहिये, ताकि उनका हक उन तक पहुंच सके. दूसरा यह कि 2011 की जनसंख्या है, उस जनसंख्या के आधार पर इनको लाभ दिया जाता है. लेकिन तमाम सारे रोजगारों की वजह से, तमाम सारे अन्याय, अत्याचार या अन्य प्रकार से किसी भी कारण से वे जो माइग्रेट हो गये हैं जिन्होंने अपने पुराने गांव छोड़ दिये हैं उनको अगर शासकीय तमाम सारी योजनाओं का लाभ देना है तो वे कहीं न कहीं वंचित हो जाते हैं तो अब जो वर्तमान की स्थिति है उस आधार पर उनकी गणना हो, और गणना के हिसाब से उनको शासकीय योजनाओं का लाभ मिले क्योंकि माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में, माननीय मंत्री कुंवर विजय शाह साहब के नेतृत्व में सहरिया समाज और आदिवासी समाज को इतनी योजनाओं का लाभ दिया जाना है, वे उससे वंचित न रहें, यही मेरा आपसे निवेदन है. सभापति महोदय, आपने बोलने का अवसर दिया, बेशक मेरा नाम नहीं था, मैं पहली दफे अपनी बात रख रहा हूं. धन्यवाद, जय हिन्द.
श्री भगवानदास सबनानी (भोपाल दक्षिण-पश्चिम) - धन्यवाद, सभापति महोदय, मैं मांग संख्या 33, 42 एवं 45, भोपाल गैस त्रासदी राहत तथा पुनर्वास विभाग इसके समर्थन में अपनी बात कहने के लिए खड़ा हुआ हूं. वस्तुतः 41 साल पहले भोपाल में जो घटना हुई, वह एक बड़ा नरसंहार था. मैं शब्द नरसंहार इसलिए कहता हूं कि जिस घटना की जानकारी पहले से हो कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. एक योग्य पत्रकार ने, विख्यात पत्रकार ने पहले से ही सरकार को सचेत किया था कि यह घटना घटने जाएगी और जब घटना घटेगी तो उसके दुष्परिणाम क्या होंगे, बाद इसके उस समय की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उसकी अनदेखी की और 41 साल पहले 2 और 3 दिसम्बर की दरम्यानी रात्रि को जो घटना हुई, वह गैस रिसन हुआ. मैं भी उसमें विक्टिम हूं, न केवल मैं विक्टिम हूं, मेरे पूज्य पिताजी, मेरे बड़े भाई साहब, मेरी माता जी, हम सब लोग भी वहां से जब रात में गैस कोई छूटी है, कोई सिलेण्डर से गैस निकली है, कोई घटना हुई है, पास में शादियां हो रही हैं, कुछ मिर्ची डाल दी क्या है, ऐसा मानकर और घर से निकले तो ऐसे बेतहाशा लोग, बदहवास लोग दौड़ते हुए जा रहे थे, भाग रहे थे और दुर्भाग्य से वह घटना के बाद जो उस समय की तत्कालीन सरकार ने एक हवाई निरीक्षण कर दिया कि भोपाल के 56 वार्डों में से केवल 36 वार्ड अफेक्टेड हुए हैं और 36 वार्ड के नागरिकों के लिए भी जिस तरह की व्यवस्थाएं होनी चाहिए थी वह नहीं हुई.
सभापति महोदय, मेरे पूजनीय पिताजी मेरे बड़े भाई साहब दोनों उस गैस अफेक्टेड होने के कारण बाद में लंग्स की बीमारी के कारण दुनिया से चले गये. आज जब मैं यह बात यहां कहने के लिए खड़ा हुआ हूं. मुझे मालूम है जब किसी दूसरे विषय पर बात हो रही थी तो त्रासदी की बात होती है, लेकिन एक सुनियोजित तरीके से और सरकार की अनदेखी के कारण हजारों लोग काल-कवलित हो जायं और सरकार उसकी जिम्मेदारी न ले वरन् जो अपराधी है वह अपराधी भोपाल में आकर सरकार के संरक्षण में उसको सकुशल वापस भेज दिया गया, इसके बाद वह अमरीका से वापस नहीं लौटा और दुनिया के किसी देश में इतने बड़े अपराध में कोई मुकदमें नहीं चल रहे हैं. भारत में ही जितने प्रयास चल रहे हैं और बाकी जो प्रयास सामाजिक संस्थाएं करती रहीं, आज मुझे यह में गर्व है कि मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव जी की सरकार ने आदरणीय मंत्री विजय शाह जी के नेतृत्व में वह जहां कचरा था जिसको कहा गया कि यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री का रासायनिक अवशिष्ट इसको नष्ट करने के लिए भी एक लंबी लड़ाई लड़ी कि इसको यहां से समाप्त किया जाय और इसके लिए भारत सरकार के वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्री की अध्यक्षता में कमेटी की 19 जून 2023 को बैठक हुई और उसमें जो निर्णय लिया गया, माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के निर्देशों के अनुसार यह 3 जुलाई, 2025 को 87.74 एकड़ इस जमीन पर 337 मीट्रिक टन अवशिष्ट पदार्थ के विनिष्टीकरण का काम आरंभ हुआ और उसको पूरे तरीके से अब समाप्त कर दिया गया है और मुझे सदन को यह बताने में भी प्रसन्नता है कि इसके बाद माननीय मुख्यमंत्री जी स्वयं 17 जनवरी को उस स्थान पर गये और उस स्थान को कैसे संयोजित किया जा सकता है, कैसे संरक्षित किया जा सकता है और इसका सदुपयोग मध्यप्रदेश की हमारी सरकार कैसे करेगी, इसके भी निर्देश माननीय डॉ.मोहन यादव जी ने दिये. आज मध्यप्रदेश की डॉ.मोहन यादव जी की सरकार, आदरणीय मंत्री डॉ.कुंवर विजय शाह जी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की राजधानी के गैस पीड़ितों के लिए 175 करोड़ रूपए का प्रावधान इस बजट में किया गया है, जिसका मैं हृदय से अभिनन्दन करता हूँ, स्वागत करता है.
सभापति महोदय, एक बडे़ बजट के साथ हम गैस विक्टिम और उनके परिवारों के लिए क्या सुविधाएं कर सकते हैं, इसके लिए सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ, पूरी गंभीरता के साथ काम कर रही है. गैस पीड़ितों एवं उनके बच्चों के उपचार के लिए गैस प्रभावित क्षेत्रों में कुल 33 चिकित्सकीय संस्थाएं, जिसमें 24 राज्य शासन की, एवं 3 भारत सरकार की संस्थाएं संचालित की जा रही हैं, जिसके माध्यम से गैस पीड़ितों एवं उनके बच्चों को नि:शुल्क जांच एवं उपचार का लाभ उनको मिल रहा है.
सभापति महोदय, इसके अतिरिक्त गैस पीड़ित एवं उनके बच्चों की जांच एवं उनके उपचार हेतु मध्यप्रदेश निरामयम आयुष्मान योजना के अंतर्गत भोपाल में पंजीकृत चिकित्सालयों की सुविधा उपलब्ध करायी गई है. उक्त उपचार का व्यय राशि रूपए 5 लाख गैस पीड़ित परिवार को नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही है. यह सरकार की संवेदनशीलता बताती है. इसके साथ ही गैस पीड़ित एवं उनके बच्चों को बेहतर से बेहतर उपचार मिल सके, इसका प्रयास हमारी सरकार ने किया है. गैस पीड़ितों के उपचार में शत-प्रतिशत् व्यय राज्य शासन द्वारा वहन किया जाना, मेरी सरकार द्वारा अन्य स्त्रोतों से भी उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिसमें राज्य शासन के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से व्यय की प्रतिपूर्ति की जाती है.
सभापति महोदय, गैस पीड़ित एवं उनके बच्चों के लिए कैंसर, किडनी एंव लीवर ट्रांसप्लांट जैसी गंभीर बीमारियों के उपचार की नीति तैयार की गई है. जिसके अंतर्गत गैस पीड़ितों के उपचार की प्रतिपूर्ति राज्य सरकार द्वारा की जायेगी.
सभापति महोदय, ऐसे गंभीर विषय पर हमारी सरकार जिस संवेदनशीलता के साथ आगे बढ़ रही है वह एक-एक पीड़ित को न केवल पीड़ित को, बल्कि उसके परिवार की भी हमारी सरकार चिंता करती है.
सभापति महोदय, भारत सरकार के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में जहां 70 प्लस आयु के आयुष्मान कार्ड बनाए जा रहे हैं, वहीं भोपाल के इन प्रभावितों के लिए परिवार के परिवार की कैसे हम चिंता कर सकते हैं, इसका ध्यान रखते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी ने यह व्यवस्था की है. भोपाल गैस पीड़ित मरीज एवं उनके बच्चों को कैंसर उपचार हेतु गैस राहत विभाग द्वारा अनुबंधित 3 निजी चिकित्सालय एवं एम्स भोपाल के साथ अनुबंध किया जाकर उनको नि:शुल्क कैंसर उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है. कैंसर जैसा रोग जिसके डॉयग्नोस होने के बाद से लेकर के उस व्यक्ति को लगता है कि वह कितने दिन का मरीज है, उसकी अवस्था कैसी है, यदि वह गैस पीड़ित परिवार का सदस्य है तो उसको लेकर के सरकार ने कैंसर के प्रारम्भिक लक्षणों के आते ही उसके ईलाज की चिंता भी मध्यप्रदेश की हमारी सरकार कर रही है.
सभापति महोदय, विभाग द्वारा इस वर्ष 2026 में कुल 7 विशेष प्रकरणों में 5 किडनी ट्रांसप्लांट और 2 लीवर ट्रांसप्लांट कराए गए हैं जिसमें एक बड़ी धनराशि का खर्चा इसमें होता है. किडनी ट्रांसप्लांट, लीवर ट्रांसप्लांट और इसके बाद उसका सर्वाइवल इतना मुश्किल होता है लेकिन सरकार ने पूरी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए ऐसे लोगों की मदद करने का काम किया.
सभापति महोदय, गैस पीड़ित हमारी जो कल्याणी बहनें हैं, 4334 बहनों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अतिरिक्त सरकार के द्वारा दी जाने वाली राशि है, उससे अलग हटकर के 1 हजार रूपए प्रति कल्याणी बहनों को दिया जा रहा है.
सभापति महोदय, विभाग के अंतर्गत संचालित समस्त चिकित्सालयों में अत्याधुनिक इमरजेंसी यूनिट, जो 24X7 गैस पीड़ितों एवं उनके बच्चों के उपचार हेतु संचालित है. पूरे सप्ताह भर के लिए एवं गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों के उपचार के लिए लाने एवं ले जाने के लिए 2 नवीन एम्बूलेंस क्रय की गई हैं. गैस राहत विभाग द्वारा गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों के किडनी रोग, सीकेडी, गंभीर उपचारों के लिये कमला नेहरू गैस चिकित्सालय में डायलिसिस यूनिट की स्थापना की गई है जिसके अंतर्गत 13 डायलिसिस मशीनों को स्थापित कर निःशुल्क उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय जो कि गैस राहत के अंतर्गत आता है. भोपाल में गैस पीड़ित मरीजों के उपचार हेतु सोनोग्राफी एवं ईकोकार्डियोग्राफी सुविधा प्रारंभ की गई है. गैस पीड़ित मरीजों एवं उनके बच्चों के उपचार हेतु वर्ष 2025 में विटामिन डी, विटामिन बी 1-2, थायराईड की जांच एवं शुगर के मरीजों के लिये एचबीए 1 सी की जांच हेतु मशीनें विभिन्न चिकित्सालयों में उपलब्ध कराई गई है. गैस राहत विभाग के अंतर्गत संचालित बाग उमराव डिसपेंसरी एवं पॉली क्लीनिक इब्राहिमगंज पुनर्निर्माण कराया गया है. गैस राहत चिकित्सालयों में भर्ती मरीजों के लिये पौष्टिक भोजन की व्यवस्था प्रारंभ कर दी गई है. जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय में आजीविका मिशन के द्वारा केन्टीन की सुविधा प्रारंभ की गई है जिसमें न्यूनतम मूल्य पर भोजन एवं स्वल्पाहार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. एक जिम्मेदारी के साथ यह सरकार गैस पीड़ितों के साथ जो पूर्व में अन्याय हुआ था अब उसको हम कैसे ठीक कर सकते हैं तो हम उनके बेहतर इलाज तथा उनकी शिक्षा के लिये जो कदम उठाये जा सकते हैं, इसके लिये डॉ.मोहन यादव जी की सरकार माननीय विजय शाह जी के नेतृत्व में लगातार अग्रसर है. मैं आज के इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री जी का तथा माननीय मंत्री जी का हृदय से अभिनन्दन करता हूं. धन्यवाद.
सभापति महोदय—मेरा दोनों पक्षों के माननीय सदस्यों से निवेदन है कि पांच पांच मिनट में अपनी बात को समाप्त करें, क्योंकि लगभग विषयों को दोहराया जा रहा है. श्री केदार चिड़ाभाई डाबर.
श्री केदार चिड़ाभाई डाबर(भगवानपुरा)—सभापति महोदय, मैं मांग संख्या 33 तथा 49 पर बोलने का अवसर दिया है. मैं कहना चाहता हूं कि जनजातीय कार्य विभाग इसका नाम बदलकर जनजातीय विकास विभाग किया जाये. मैं कहना चाहूंगा आदिवासी एवं जनजातीय कार्य विभाग में इतने मद का अनुमोदन हम करने जा रहे हैं. लेकिन आदिवासी क्षेत्र में सबसे पहले शिक्षा तथा छात्रवृत्ति को आदिवासी विभाग देखता है, लेकिन इतने सालों में हमारी आदिवासी ग्रामीण क्षेत्र की जो स्कूल हैं, वह जर्जर हैं. मेरे विधान सभा क्षेत्र की 19 स्कूल ऐसे हैं जहां पर बच्चे कहीं झाड़ के नीचे बैठ रहे हैं या कहीं किसी के घर में बैठ रहे हैं. जहां पर भवनविहीन हैं. छात्रवास जो 40-50 साल पहले बने थे उनकी स्थिति वैसी की वैसी है, उनका जीर्णोद्धार नहीं हुआ, उनके नवीन भवन नहीं बने. इसलिये आदिवासी बच्चों को वहां पर रहने की सुविधा तथा स्कूल में जाने की भी सुविधा नहीं मिल पा रही है, स्कूल में बैठने की सुविधा नहीं मिल पा रही है. शांदीपनी और सीएम राईज स्कूल जो खोले हैं, बहुत अच्छी बात है. लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में चार स्कूलें खुली हैं. तीन साल हो गये हैं वहां पर बच्चों को परिवहन के लिये सरकार ने कहा था बच्चों को लायेंगे तथा उनको घर पर छोड़ेंगे आज भी परिवहन का अनुबंध नहीं हुआ है. वह बच्चे पिता के साथ आ रहे हैं या अभिभावकगण स्कूल छोड़ रहे हैं. क्योंकि 15-20 किलोमीटर क्षेत्र के बच्चे वहां पर नहीं पहुंच पा रहे हैं. साथ ही मैं कहना चाहूंगा कि आदिवासियों के लिये आदिवासी मद में पहले एक बत्ती कनेक्शन आप मंजूर कर रहे हैं, लेकिन पहले सिंचाई के लिये 3 फेस मीटर की लाईन दी जाती थी जो जनजाति बस्ती विकास के अंतर्गत है, वह कई सालों से बंद है. किसानों और आदिवासी भाईयों को आगे बढ़ाने के लिये जब हम आदिवासी मद में उनका पैसा अनुमोदन कर रहे है, उनके विकास की बात कर रहे हैं, तो जो हमारा आदिवासी समाज है, अधिकतम किसानी पर जिन्दा है, पहाड़ी क्षेत्रों में रहता है तो उनको सिंचाई के साधन कम है, उनको कुएं, ट्यूबवेल से सिंचाई के लिए थ्री फेस लाइन नहीं दी जा रही है, उसको इसके लिए अधिक से अधिक पैसा दिया जाए. साथ ही पेयजल की बात करें, जल निगम, जल जीवन मिशन के माध्यम से घरों तक पानी देने की कार्यवाही की जा रही है, लेकिन हमारा क्षेत्र मजरे, टोले, फालियों में है, मेरे क्षेत्र में अभी इस योजना को पूरा होने में लगभग दो साल लग जाएंगे, लेकिन वह पानी भी फलियों में नहीं पहुंचेगा, मुख्य ग्राम में पहुंचेगा. ऐसी जगह में शुद्ध पेयजल आदिवासियों को देने के लिए, वहां पर हैंण्डपम्प की अतिरिक्त व्यवस्था की जाए और आदिवासी क्षेत्रों में आदिवासी विभाग से भी पैसा दिया जाए.
मेरे क्षेत्र की मुख्य मांग है, ग्राम केली, तलकपुरा, ब्लाक मुख्यालय सेगांव कन्या हायर सेकेण्ड्री, बहादरपुरा हायर सेकेण्ड्री, भग्यापुर हायर सेकेण्ड्री के स्कूल भवन जो हाईस्कूल पहले थी उसी में चल रहे हैं. उनके नवीन हायर सेकेण्ड्री स्कूल भवन दिए जाए और सेगांव और भगवानपुरा जो हमारा ब्लाक मुख्यालय है वहां 100-100 छात्र छात्राओं के लिए नवीन छात्रावास खोला जाए. केली, भगवानपुर, तलकपुरा डालकी, भग्यापुरा, बिस्टान, गोलवाडी में जो पुराने वर्षों पुराने छात्रावास है वहां छात्रावासों के नवीन भवन दिए जाए. ग्राम गढी, श्रीखण्डी जो माध्यमिक विद्यालय वर्षों पुराने है उनका उन्नयन कर हाईस्कूल खोले जाएं. साथ ही मैं कहना चाहूंगा कि अनुसूचित जाति विभाग में मेरे सेगांव ब्लाक मुख्यालय पर छात्रावास संचालित है, लेकिन उसका भवन नहीं है वह कहीं और बच्चे रहकर पढ़रहे हैं इसलिए अनुसूचित जाति मद से भी छात्रावास भवन स्वीकृत किया जाए. धरती आभा, किसान कल्याण वर्ष मनाया जाए. किसानों के हित में जब सरकार काम कर रही है, मेरे क्षेत्र की कुछ बातें कहना चाहता हूं कि नर्मदा घाटी विकास विभाग में नागलवाड़ी परियोजना संचालित है और उसमें जो पानी दिया गया उन गांवों में अधूरा दिया गया है. तीरी, कोलखेडा, सतावड़, सीतापुरी, चिजगढ, आछलवाड़ी, कवढियाझिटा, केली, लाव्हारिया पानी, देवली, मालपुरा, छितीनपानी, सांगवी नवाड़, छिपीपुरा, सिनखेड़ी, सिलोटिया, डालकी, खोलगांव नवाड, गाटलाखेड़ी, भवरापुरा, मुकातीपुरा, बाडयापुरा के जो गांव अधूरे छूट गए हैं, इनको सर्वे में शामिल करके इस परियोजना का पानी देने का कष्ट करें. सेंधवा परियोजना संचालित है जिसमें अभी सेंधवा मे पानी जाना जिसमें वहां से मेरा गांव लगा हुआ है, मेरी विधान सभा लगी हुई है. वहां आमल्यापानी, थुल्यापानी, लिपनी, जलालाबाद, आमसरी डोगलिया, पानी देवनलिया, भुलवानिया, कार्बरी, चौखण्ड, कान्यापानी, गुजरबाड़ी, बिल्बा को इस परियोजना में जोड़ा जाए. सभापति महोदय, मुझे बोलने का अवसर दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.
सभापति महोदय – श्री सुरेन्द्र सिंह बघेल जी.
श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल(कुक्षी) – माननीय सभापति महोदय, सरकार भाजपा की हो या कांग्रेस की हो, प्रयास और लक्ष्य एक ही रहता है कि क्षेत्र का विकास हो, सामाजिक विकास हो, पर जो बजट आया है. इसमें आंकड़े तो है विकास होगा या नहीं होगा, ये प्रश्नचिन्ह मेरे मन में और मेरे विधान सभा के लोगों में और प्रदेश की जनता और इस समुदाय के लोगों में भी है. जिस तरह से केन्द्र सरकार आदिवासी समाज के बारे में बात कर रही है, प्रदेश स्तर पर भी प्रदेश की भाजपा सरकार आदिवासियों के उत्थान के लिये बात कर रही है, समाज के विकास के लिये बात कर रही है और अगर हम धरातल पर देखें तो इस तरह की कोई बात देखने में नहीं आ रही है, हो क्या रहा है कि जो कानून आदिवासियों के हित के लिये बने हैं, उन कानूनों का परिपालन नहीं हो रहा है, इसका ताजा उदाहरण मैं आपका बताना चाहूंगा मेरी कुक्षी विधानसभा के जो गांव हैं, तलावड़ी, खेड़ली, बावनबेड़ी, भीमपुरा और कुछ गांव अलीराजपुर के हैं, यहां पर सी सीमेंट के नाम से जमीन आवंटित कर दी जाती है, न ग्राम सभा की अनुमति ली जाती है और वह अनुसूचित क्षेत्र है, पेसा एक्ट जहां पर लागू होता है, उसको भी नजरअंदाज करके जमीन आवंटित कर दी जाती है, क्या यह उचित है? क्या आदिवासियों को बसाने की बात जो सरकार कर रही है, वह आदिवासियों की हटाने की बात भी दूसरी तरफ कर रही है? लोगों ने विद्रोह किया, जब फैक्ट्री वाले वहां पर काम करने गये थे, लोगों ने उसका विद्रोह किया, लोगों ने उनको खदेड़ा और अगर इस तरह से मेरी विधानसभा में हो रहा है, तो मैं यह आपको बताना चाहता हूं कि प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी अगर आदिवासी समाज के लोगों के साथ में ऐसा होगा और उनकी जमीन उनकी बिना सहमति से ली जायेगी, तो उसका विद्रोह करेंगे, एक चर्चा होना चाहिए, उनको कांफिडेंस में लेना चाहिए, उनकी बातों को सुनना चाहिए, न की जबरदस्ती होना चाहिए और यही की यही मेरी विधानसभा में लोनी पंचायत है, लोनी पंचायत के चोरबावड़ी में किसी विभाग को आबादी की जमीन आवंटित की जाती है, लोग वहां पर रह रहे हैं और एकाएक अमला चला जाता है कि यह जमीन तो इस डिपार्टमेंट को दे दी और वही स्थिति वहां पर भी बनती है, लोग विरोध करते हैं और वहां पर लगभग सौ प्रतिशत लोग जनजातीय समुदाय के हैं, तो क्या इस तरह से विकास मध्यप्रदेश में होगा ? क्या इस तरह से आदिवासियों को यह भाजपा सरकार प्रताडि़त करेगी और न केवल जमीन के मामले में मध्यप्रदेश में करीबन डेढ़ लाख बैकलॉग पद अभी भी खाली हैं, जिसकी प्रक्रिया हमारे श्री कमलनाथ जी जब मुख्यमंत्री थे और मैं मंत्री था, तब हमारा प्रतिनिधि मण्डल कमलनाथ जी से मिला और उन्होंने प्रक्रिया चालू करी कि बैकलॉग के पद मध्यप्रदेश में भरे जायें, परंतु आज भी स्थिति वही की वही है, लोग बेरोजगार घूम रहे हैं, परीक्षा देते हैं, बड़ी-बड़ी फीस देते हैं और उनकी नौकरी नहीं लग पा रही है क्योंकि सरकार नौकरी निकाल ही नहीं रही है, बैकलॉग पद भरने की प्रक्रिया यह सरकार कर ही नहीं रही है.
सभापति महोदय, पदोन्नति में आरक्षण के बारे आपको मैं बताना चाहता हूं कि कितने वरिष्ठ अधिकारी जिन्होंने प्रदेश को लंबा समय दिया है, वह आज रिटायर होने चले हैं. अभी यह मामला कोर्ट में चल रहा है, पर प्रदेश की सरकार कोर्ट में अपना पक्ष तो मजबूती से रखे ताकि उसका लाभ उन लोगों को मिले, नहीं तो एक पीढ़ी तो रिटायरमेंट हो चुकी है, एक होने वाली है और आने वाली पीढि़यों को उसका लाभ मिलेगा, नहीं मिलेगा इसका भी कोई भरोसा हमको नहीं दिखता है.
सभापति महोदय, इसी तरह से मेरी विधानसभा कुक्षी में दही एक आदिवासी सौ प्रतिशत बाहुल्य क्षेत्र है और विगत वर्षों से वहां पर कॉलेज की मांग आ रही है और लगभग प्रक्रिया भी पूरी हुई है, श्रेय भी जिसको लेना था लिया, हमको उसमें भी कोई नाराजगी नहीं है, पर माननीय मंत्री जी से मैं कहना चाहूंगा कि आप भी अगर इसमें देखेंगे, दही में आप भी आये हैं, आपने भी देखा है कि कितनी दूर बच्चे जा रहे हैं, कोई अलीराजपुर जा रहा है, कोई बड़वानी जा रहा है, कोई इंदौर जा रहा है, कहां से लायेंगे पैसा, हम लोगों के पास मैं पैसा कहां है? या तो मजदूरी करें, या खेतीबाड़ी करें और वह पैसा अपने बच्चों के लिये खर्च करें कि अपने बच्चों की शादी के लिये खर्च करें, तो मेरा आप दोनों मंत्रियों से अनुरोध है कि आप भी इस बात को माननीय मुख्यमंत्री जी तक पहुंचा दीजियेगा कि दही में एक कॉलेज तो हो जाये, जिससे शिक्षा का स्तर अगर वहां पर बढ़ेगा, तो बच्चों को आर्थिक बोझ से जो गुजरना पड़ता है, वह नहीं गुजरना पडे़गा. आपने देखा होगा भोपाल में बड़े-बडे़ शहरों में बड़ी-बड़ी धर्मशालायें, बड़ी-बड़ी होटलें हैं पर आदिवासी समाज की न भोपाल में, न इंदौर में, न कोई बड़े स्थानों पर जहां पर बच्चे कॉम्पिटेटिव एग्जाम के लिये परीक्षा देने जाते हैं, कोई रूकने की व्यवस्था नहीं. एक तो बड़ी फीस भरो, होटलों में रूको, खाने की परेशानी, तो मैं आपसे कहना चाहूंगा माननीय मंत्री जी आपको भी एक निर्णय लेना चाहिये कि बड़ी जमीन आप सरकार से लें, आप ही की सरकार है, बड़ा भवन बने, बच्चे, बच्ची वहां रहने आयें तो उनको फ्री में वहां रूकने मिले, भोजन मिले यह व्यवस्था मैं समझता हूं कि यदि आप करेंगे तो बच्चों को लाभ होगा. मैंने बैकलॉग पद की बात की दूसरी तरफ से आपकी भारतीय जनता पार्टी की सरकार नियुक्तियां कर रही है मोबिलाइजरों की, अरे भई कैसे आपने कर दी, क्या उनका इंटरव्यू हुआ था ? क्या उसकी परीक्षा हुई थी ? अगर आप ऐसे ही बैकडोर से लोगों की एंट्री करते चलेंगे तो हजारों हजार बच्चे जो इतनी बड़ी-बड़ी फीस भरकर इंटरव्यू देने जा रहे हैं उनको कब अवसर मिलेगा, इस पर रोक लगनी चाहिये. अगर इस तरह से होगा तो भविष्य अंधकार में चला जायेगा उन बच्चों का, उनकी उम्र चली जायेगी, उनको अवसर नहीं मिलेगा. आदिवासी विकास मद का पैसा जो आप देते हैं, जो अनुसूचित क्षेत्र हैं, ब्लॉक हैं, विधायक लोगों को मिलता है पर वह पर्याप्त नहीं है और पर्याप्त होने के साथ-साथ आपने उसमें इतने मापदंड लगा दिये हैं कि आप इसमें दे सकते हैं, इसमें नहीं तो कहीं न कहीं आपको एक आदिवासी समाज का प्रतिनिधि मंडल जिसमें आदिवासी मंत्री भी हों, आदिवासी विधायक भी हों उनके साथ आप बैठिये, जिसमें पक्ष के लोग भी हों विपक्ष के लोग भी हों हम मिल बैठकर एक ऐसी रूपरेखा बनाकर माननीय मुख्यमंत्री जी को अवगत करायें कि इस तरह से अगर इस मद में यह काम भी होगा तो उस एरिये की बेहतरी के लिये होगा और यह एक मांग है जो जनता की मांग है, जनप्रतिनिधि की मांग है उस अनुसार काम अच्छे से आगे बढ़ पायेगा.
माननीय मंत्री जी, आपसे विनम्र अनुरोध है और एक विश्वास, एक भरोसा आपके प्रति है क्योंकि आपका लंबा समय एक क्षेत्र के प्रतिनिधित्व करते हुये रहा. विधायक में भी आपको देखा, मंत्री के रूप में भी आपको देखा और बहुत सारी चीजें आपसे सीखी भी हैं और आपको कार्य करते हुये देखा भी है तो मैं समझता हूं कि जब आप अपने भाषण में चीजों को बोलें तो न केवल समाज को, क्षेत्रीय विकास को उसमें प्राथमिकता दें सामाजिक स्तर पर भी हम समाज को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं, समाज को कैसे मुख्य धारा से जोड़ सकते हैं, समाज को हम और आगे कैसे ले जा सकते हैं इस पर आप जरूर बोलेंगे. मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं सभापति महोदय कि आपने मुझे बोलने का समय दिया और मंत्री जी आपने सुना इसके लिये बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्री फूल सिंह बरैया- (अनुपस्थित)
श्री कमल मर्सकोले (बरघाट)--माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्या 33 के समर्थन में और कटौती प्रस्ताव के विरोध में अपनी बात रखने के लिये खड़ा हुआ हूं. माननीय सभापति महोदय, मध्यप्रदेश में आदिवासियों की आबादी कुल जनसंख्या का 23 प्रतिशत से ज्यादा है. आदिवासियों की 95 प्रतिशत आबादी गांव में रहती है. मध्यप्रदेश देश का ऐसा राज्य हैं जहां पर हर पांचवां व्यक्ति आदिवासी है. माननीय सभापति महोदय, आदिवासी वर्ग की अधिकांश आबादी गांव में रहती है और आदिवासियों की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक, सांस्कृतिक स्थिति कैसे सुदृढ़ हो, कैसे मजबूत हो और इसके लिये हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार और हमारे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी निरंतर प्रयास कर रहे हैं. मोदी जी के नेतृत्व में डाक्टर मोहन यादव जी की सरकार आदिवासियों के सामाजिक,आर्थिक,शैक्षणिक विकास और उत्थान के लिये प्रतिबद्ध है. आदिवासियों के सामाजिक,सांस्कृतिक भाषा,परंपराएं,रीति रिवाज और उनकी कला और विद्या का संरक्षण और संवर्धन करने की दिशा में मोहन यादव जी की सरकार ने उल्लेखनीय काम किया है. देश की आजादी में भारत माता की रक्षा में,मातृभूमि की रक्षा में आदिवासी समाज का शानदार योगदान रहा है और देश की आजादी में आदिवासी समाज के अनगिनत लोगों ने अपनी शहादत दी है अपने प्राणों की आहूति दी है और मैं इस बात को कहना चाहता हूं कि देश की आजादी के इतने सालों में इन महापुरुषों की चिंता किसी ने की है शहीदों की चिंता की है तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने की है उनके जन्म स्थान हों या शहादत स्थल हों उनकी प्रतिमा लगाकर भव्य स्मारक बनाने का काम भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है.उन महापुरुषों के सम्मान में चाहे रानी दुर्गावती सम्मान हो चाहे शंकर शाह सम्मान हो,ठक्कर बाबा सम्मान हो,जनननायक टंट्या भील सम्मान हो चाहे हमारे विष्णु कुमार जनजातीय सेवा सम्मान से सम्मानित करने का काम भारतीय जनता पार्टी सरकार ने किया है. मध्यप्रदेश में 43 जनजाति निवास करती हैं इनमें से सहरिया,बैगा,भारिया यह जनजाति सामाजिक आर्थिक और शेक्षणिक रूप से अत्यंत पिछड़ी जनजातियां हैं और इसलिये भाजपा सरकार ने इन तीनों जनजातियों को विशेष जनजाति समूह में शामिल करके उनके समग्र उत्थान और विकास के लिये सहरिया जनजाति विकास प्राधिकरण,बैगा जनजाति विकास प्राधिकरण,भारिया जनजाति विकास प्राधिकरण का गठन कर उनके विकास उत्थान के लिये निरंतर मध्यप्रदेश में काम कर रही है. भारतीय जनता पार्टी की सरकार आदिवासियों के समग्र विकास और उत्थान के लिये बजट में आदिवासियों की जनसंख्या के अनुपात में बजट का प्रावधान किया है. हमारे आदिवासी छात्र छात्राएं पैसे के अभाव में गरीबी के कारण धन के अभाव में उच्च
7.33 बजे सभापति महोदया(श्रीमती अर्चना चिटनीस) पीठासीन हुई
शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते इसीलिये भारतीय जनता पार्टी सरकार ने आदिवासी वर्ग के विद्यार्थिर्यों की उच्च शिक्षा के लिये चाहे एमबीबीएस हो चाहे इंजीनियरिंग की पढ़ाई हो चाहे बीएससी नर्सिंग हो बी.एड. हो आदि पाठ्यक्रमों में अध्ययन करने वालों के लिये लगने वाली जो फीस है उसकी भी व्यवस्था करने का काम हमारी सरकार ने किया है और जो विद्यार्थी विदेश में शिक्षा ग्रहण करना चाहते हैं ऐसे विद्यार्थियों के लिये मोहन यादव जीज की सरकार ने प्रत्येक वर्ष 50 विद्यार्थियों को विदेश भेजना सुनिश्चित किया है. आदिवासियों के हित और कल्याण के लिये सरकार निरंतर योजनाएं चला रही है. चाहे खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और पुरस्कार योजना हो,आवास सहायता योजना हो,शंकर शाह और दुर्गावती पुरस्कार योजना हो चाहे अनुसूचित वर्ग की बालिकाओं हेतु निशुल्क साईकल प्रदान योजना हो कन्या साक्षरता प्रोत्साहन योजना हो. सैनिक स्कूल में भी शुल्क की प्रतिपूर्ति प्रतिभा योजना आकांक्षा योजना,जनजातीय वर्ग के विद्यार्थियों को दिल्ली में उच्च शिक्षा के लिये और सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना, अखिल भारतीय सेवाओं के लिए सिविल सेवा एवं परीक्षा हेतु कोचिंग योजना है. कक्षा 10वीं एवं 12वीं और महाविद्यालयीन छात्रों हेतु छात्रवृत्ति योजना है. विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने हेतु छात्रवृत्ति योजना और बोर्ड परीक्षाओं में भी शुल्क की प्रतिपूर्ति जैसी अनेक योजनाएं बना करके आदिवासियों के हित और कल्याण के लिए सरकार निरंतर काम कर रही है.
माननीय सभापति महोदया, वन अधिकार अधिनियम का क्रियान्वयन मध्यप्रदेश में वर्ष 2008 से किया जा रहा है. वन अधिकार अधिनियम के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश अग्रिम राज्यों की श्रेणी में है. मध्यप्रदेश में 26,707 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र, 28,670 निस्तार के सामुदायिक वन अधिकार पत्र, 33 विशेष पिछड़ी जनजातीय समूह के पर्यावास अधिकार एवं 51 सामुदायिक वन संसाधन के सरंक्षण और संवर्द्धन के अधिकारों को मान्यता दी गई है.
माननीय सभापति महोदया, वन अधिकारों के दावों के लिए 3 स्तरों पर वन अधिकार समिति गठित की गई है. ग्राम पंचायत स्तर पर, उप खण्ड स्तर पर और जिला स्तर पर समिति का गठन किया गया है. इन समितियों द्वारा ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दावों का भी निराकरण किया जा रहा है. वन अधिकार पत्र धारकों के जीवन में सुधार हो, उनकी कृषि भूमि को उन्नत कैसे बनाया जाए, इसके लिए सरकार ने निरंतर काम किया है. अभी तक 67,134 लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिला है. 53,830 लोगों को सिंचाई हेतु कपिल धारा योजना के अंतर्गत कूप निर्माण की सुविधा दी गई है. 59,220 लोगों को भूमि सुधार, मेढ़ बंधान चाहे भूमि समतलीकरण योजना का लाभ दिया गया है. 23,622 लोगों को सिंचाई हेतु डीजल पंप, विद्युत पंप और पाइप लाइन का वितरण किया गया है. इसके अलावा 1,90,563 लोगों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिला है. साथ ही 99,676 लोगों को किसान क्रेडिट कार्ड योजना का लाभ दिया गया है.
माननीय सभापति महोदया, जनजातीय वर्ग के उत्थान और उनके कल्याण के लिए भाजपा की सरकार संकल्पबद्ध है. आज आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान अपने विधान सभा क्षेत्र की कुछ मांगों की ओर दिलाना चाहता हूँ. जनभावनाओं को रखना चाहता हूँ.
सभापति महोदया, मेरे विधान सभा क्षेत्र बरघाट में दो विकासखण्ड हैं, बरघाट और कुरई. कुरई विकासखण्ड आदिवासी बाहुल्य तहसील है. इस तहसील में पाटन हाई स्कूल और कोहका हाई स्कूल है. सभापति महोदया, इन दोनों हाई स्कूलों का उन्नयन हायर सेकेण्डरी स्कूलों में किए जाने का मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से अनुरोध करता हूँ. एक और मेरा अनुरोध है कि कुरई आदिवासी बाहुल्य तहसील है और मेरी अपनी विधान सभा में शिक्षा का बहुत अच्छा स्तर है. इस स्तर को देखते हुए मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध करता हूँ कि कुरई में मॉडल आवासीय विद्यालय यदि खुल जाएगा तो हमारे आदिवासी छात्र-छात्राओं को अच्छी शिक्षा की सुविधा मिल सकेगी.
माननीय सभापति महोदया, मेरी विधान सभा के आदिवासी बाहुल्य तहसील कुरई में चक्की खमरिया में नवीन बालक छात्रावास यदि खुल जाए तो बड़ी कृपा होगी. इसी प्रकार आदिवासी बाहुल्य तहसील कुरई में ग्राम बादलपार और पीपरवानी में नवीन कन्या छात्रावास यदि खुल जाएगा तो हमारे छात्र-छात्राओं को अच्छी शिक्षा की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी. माननीय सभापति महोदया, कुरई तहसील की खमरिया हाईस्कूल, दरासी कला हाईस्कूल और पीपरवानी हाईस्कूल भवनविहीन है, इसलिए भवन निर्माण हेतु राशि स्वीकृत करने को, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध करता हूँ, उसके साथ-साथ खवासा हायर सेकेण्ड्री स्कूल और शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय कुरई, यह जर्जर अवस्था में हैं. यदि इसके लिए भी भवन निर्माण की स्वीकृति मिल जाये, इसके लिए मैं आपसे अनुरोध करता हूँ. आज मुझे आपने बोलने का अवसर प्रदान किया है, इसके लिए मैं आपको हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ. जय हिन्द, जय भारत.
सभापति महोदया - माननीय फूलसिंह बरैया जी.
श्री फूलसिंह बरैया (भाण्डेर) - माननीय सभापति महोदया, मैं अनुसूचित जाति कल्याण की मांग संख्या 49 के कटौती प्रस्ताव के समर्थन में खड़ा हुआ हूँ.
माननीय सभापति महोदया, जो अभी वर्ष 2026-27 का बजट आया है, इस बजट में अनुसूचित जाति के लिए 2,591 करोड़ रुपये रखा गया है, जो कुल बजट का 0.59 पर्सेन्टेज है. बजट का जो संविधान के अनुसार डिस्ट्रिब्यूशन होना चाहिए, वह 68,318 करोड़ रुपये होता है. 68,318 करोड़ रुपये में से 2,591 करोड़ रुपये दिया गया है. यहीं से पता चलता है कि इन वर्गों के पक्ष में सरकार कितनी संवेदनशील है ? सभापति महोदया, (XX), बजट देंगे नहीं, सम्पन्नता बढ़ेगी नहीं.
सभापति महोदया - यह जो आरक्षण से संबंधित की गई है, इसे विलोपित किया जाये. आप बजट की परिधि में बात करें. यह मेरा आपसे आग्रह है.
श्री फूलसिंह बरैया - माननीय सभापति महोदया, मैं बजट की परिधि में ही बोल रहा हूँ. बजट का संवैधानिक डिस्ट्रिब्यूशन नहीं है और मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि जब तक इन वर्गों के पास संपत्ति नहीं पहुंचेगी, धन नहीं पहुँचेगा, यह समाज की मुख्यधारा में नहीं आएंगे, तब तक आरक्षण चलता रहेगा. मैं आरक्षण का कन्सेप्ट बता रहा हूँ. मैं यहां पर आरक्षण का प्रचार नहीं कर रहा हूँ. सभापति महोदया, आरक्षण का कन्सेप्ट है, जहां से आरक्षण लिया गया था. ठीक जैसे बीमार व्यक्ति को.
सभापति महोदया - आरक्षण का तो संविधान भी पक्ष में है, पूरा सदन पक्ष में है. माननीय सदस्य मैं जो आग्रह करना चाह रही हूँ, लेकिन कोई उसका विरोध करता नहीं है, इसलिए आप कृपया ऐसी टिप्पणी न करें.
श्री फूलसिंह बरैया - माननीय सभापति महोदया, मुझे बोलने दीजिये. बीमार व्यक्ति को जितने दिन तक दवा की जरूरत है, जब तक उसकी बीमारी दूर नहीं हो जाती, वह दवा बन्द नहीं होगी. वैसे ही आरक्षण मुख्य धारा से इन वर्गों को बराबरी में ला दिया जायेगा, उस दिन अपने आप खत्म हो जायेगा. 10 वर्ष, अनन्त वर्ष इसका कोई निश्चित नहीं है, वह तो किसी नेता ने कह दिया कि मैं 10 वर्ष में बराबर कर दूँगा, किसी ने कह दिया कि मैं 10 वर्ष में नहीं कर पाया, तो 10 वर्ष और बढ़ा दूँगा, किसी ने कह दिया कि लम्बे समय तक चलाऊँगा. मेरे कहने का मतलब है कि 68,318 करोड़ रुपये में से 2,591 करोड़ रुपये बजट देंगे, तो इनकी दशा कहां से सुधरेगी ? मैं कोई उस चीज का प्रचार नहीं कर रहा हूँ. लेकिन मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि आर्थिक हालात इन वर्गों के इतने खराब हो गए हैं कि इन वर्गों की स्थिति यह हैं कि पिछले वर्ष 0.60 प्रतिशत बजट दिया था, इस बार 0.59 प्रतिशत है अर्थात. 0.1 प्रतिशत कम कर दिया गया, यह मेरे कहने का तात्पर्य है. मध्यप्रदेश में 1 करोड़ 13 लाख संख्या इनकी है, यह बड़ा समाज है और इस वर्ग की प्राथमिकता उतनी ही छोटी है. जबकि इसकी प्राथमिकतायें बड़ी होनी चाहिए और प्रतिव्यक्ति रुपये 22 सौ, प्रतिवर्ष आता है, इसका मतलब है न कुछ. इसके साथ-साथ यही नहीं है, मैं, संविधान का इसलिए जिक्र कर रहा था, संविधान में डॉ. बाबा साहब अंबेडकर ने 25 नवंबर, 1949 को कहा था कि मैंने आज संविधान फाइनल करके दिया है, कल यह संविधान सभा के हाथ में जायेगा, संविधान सभा इसे 26 जनवरी, 1950 को लागू करेगी. मुझे शंका है, किस बात की शंका है कि इसका क्या होगा, कानून कितना भी अच्छा हो, जिन हाथों में जायेगा कानून वैसा हो जाता है. कानून अच्छा है, हाथ खराब हैं, तो कानून भी खराब हो जायेगा. संविधान खराब भी हो, हाथ अच्छे हों तो संविधान भी अच्छा साबित होगा लेकिन आजादी के आज 78 वर्ष बाद भी हम संपत्ति के नाम पर अनुसूचित जाति के पास 2 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति के पास 1 प्रतिशत, यही हम गिनते चले आ रहे हैं. मेरे कहने का तात्पर्य है कि बजट में सुधार लाना चाहिए, दूसरी ओर सामाजिक हैसियत क्या है, सामाजिक हैसियत में हम कौन से गीत गा रहे हैं कि अत्याचार में पिछले 2 वर्षों में वृद्धि हुई है.
सभापति महोदया, केवल यही बात नहीं है, जानवरों की तरह भरकर ले जाते हैं. 2 वर्ष का रिकॉर्ड है, 1 लाख 98 हजार 4 सौ 14 महिलायें लापता हैं और उसमें 38 हजार नाबालिग हैं, यही नहीं पिछले 5 वर्षों में 48 हजार 6 सौ 84 मामले दर्ज हुए हैं. ये रिकॉर्ड है, छोटा-मोटा रिकॉर्ड नहीं है, इस रिकॉर्ड के हिसाब से देखें तो कहीं से लगता नहीं है कि इन वर्गों का भला कैसा होगा ? अत्याचार समाप्त करने में पैसे की ज्यादा जरूरत नहीं है, अत्याचार बिना पैसे के भी समाप्त किया जा सकता है लेकिन मन होना चाहिए. हमारे तमाम साथी कहते हैं कि यही हमारी नीति है, यही हमारी नियति है. इसके लिए मैं कह रहा हूं नीति-नियति अपनायें, हम साथ देने के लिए तैयार हैं.
सभापति महोदया, मैं, कहना चाहूंगा कि इन वर्गों की सामाजिक स्थिति इतनी खराब है, इसको अच्छा करने के लिए एक योजना लाई गई थी. डॉ.अंबेडकर स्वरोजगार योजना, जिसमें पहले हमें लोन मिलता था, 30 प्रतिशत तक की सब्सिडी थी, वह सब्सिडी समाप्त कर दी गई, अब 7 प्रतिशत ब्याज की छूट है. हम बात करते हैं तो अधिकारी हमें समझा देते हैं कि इसमें ज्यादा फायदा है, उसमें फायदा नहीं था. ऐसे ही अनुसूचित जनजाति के लिए यही कर दिया गया है, कोई लोन नहीं ले रहा है.
सभापति महोदया- आप 9 मिनट से अधिक बोल चुके हैं, अब अपनी बात जल्दी पूरी करें.
श्री फूलसिंह बरैया- सभापति महोदया, मैं एक और योजना का जिक्र कर रहा हूं. ज्यादा योजनाओं का जिक्र इसलिए नहीं कर रहा हूं क्योंकि सभी योजनायें बंद पड़ी हैं. एक योजना है अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति का आदमी मारा जाता है तो उसे रुपये 8 लाख 25 हजार, सहायता के तौर पर दिये जाते हैं, सरकार देती है. FIR के दिन रुपये 4 लाख 25 हजार देते हैं और चालान के दिन रुपये 4 लाख देते हैं. अपना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति का विभाग, यह भी पढ़ा-लिखा विभाग है और इसके अलावा मैं आपको बताना चाहता हूं कि आप किसी भी अधिकारी को पूछिये. तीन माह के भीतर. पहले 6 माह का था अब संशोधन कर दिया. 10 हजार रुपए पेंशन देंगे पीडि़ता को, पीड़ित को. पीडि़ता, पीडि़त को नौकरी, पढ़े लिखे नहीं है तो रोजगार, रोजगार के नाम पर कोई धंधा करने लायक नहीं है तो 6 बीघा जमीन मतलब ढ़ाई एकड़ जमीन और यदि उसका घर टूटा हुआ है तो घर बनाकर दें और घर नहीं बना है तो घर खरीदकर दें. पीडि़त बच्चों को स्नातक स्तर की पूरी शिक्षा, बालिग होने तक उनका भरण पोषण, बच्चों को सरकार द्वारा आवासीय स्कूल, बर्तन, चावल, गेंहू, दाल, दलहन तीन महीने के लिए. बच्ची नाबालिग है तो उसकी शादी. आप अगर अपने विभाग से पूछें. कलेक्टर, एसपी और डीओ तीन की समिति होती है अभी तीनों को पूछें. क्या आप यह योजना चला रहे हैं. कुछ तो छूटते ही बोलते हैं कि हां किसकी बात कर रहे हैं हरिजन एक्ट की. 78 साल की आजादी हो गई, अभी भी वो हरिजन बोलते हैं.
सभापति महोदया, यह क्राइम है, यह असंवैधानिक शब्द है. क्या इसके लिए अधिकारियों के ऊपर कार्यवाही होगी. मध्यप्रदेश में इसको आप पूरी तरह से देखिये योजनाएं कहीं भी प्रयोग में नहीं हैं. मैं आपके माध्यम से मंत्री जी को कहना चाहता हूं कि अधिकारियों को पूछिये कि इस योजना के बारे में हमें बताइये कि किन-किन जिलों में यह योजना लागू हुई है और कहां-कहां नहीं हुई है. मैं यह बात कहकर अपनी बात को विराम देता हूं. धन्यवाद.
श्रीमती कंचन मुकेश तनवे (खण्डवा) -- माननीय सभापति महोदया जी को जय रामजी की, सदन में उपस्थित सभी मंत्रीगण, सभी विधायकगण, सभी अधिकारीगण आप सभी को जय रामजी की. मैं जनजातीय कार्य विभाग की मांग संख्या 33 का समर्थन करती हूं और आपका धन्यवाद करती हूं कि आपने मुझे मुख्य बजट पर बोलने का अवसर दिया.
सभापति महोदया, मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदेश के दूरस्थ अंचल में निवासरत् अनुसूचित जनजाति वर्ग के बालक, बालिकाओं को घर से बाहर शिक्षा हेतु आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने हेतु विभिन्न जूनियर एवं सीनियर महाविद्यालयीन स्तर के छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है. जनजातीय कार्य विभाग द्वारा सभी श्रेणी के 2 हजार 671 छात्रावास आश्रमों में लगभग 1 लाख 50 हजार जनजातीय बालक, बालिकाओं को नि:शुल्क आवास, भोजन, शैक्षणिक सुविधा, विद्युत, पेयजल, बिस्तर सामग्री एवं फर्नीचर की सुविधा प्रदान की जा रही है. इसमें निवास करने वाले बालकों को प्रतिमाह 1650 रुपए एवं बालिकाओं को 1700 रुपए छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है. विभाग द्वारा संचालित आश्रम छात्रावासों में 1 लाख 49 हजार 324 जनजातीय विद्यार्थियों को निवास हेतु व्यवस्था एवं इसमें 56 हजार 877 बालिकाओं के लिए निवास की व्यवस्था है. वर्ष 2026-27 के लिए आश्रम छात्रावास योजना संचालन हेतु 1 हजार 24 करोड़ रुपए का प्रावधान रखा गया है.
सभापति महोदया, छात्रावास योजना में 971 बालक छात्रावास हैं, बालिका छात्रावास 1700 कुल 2 हजार 71 छात्रावास हैं. उत्कृष्ट छात्रावास में नौवीं से बारहवीं के विद्यार्थियों को 200 रुपए पोषण आहार तथा 2 हजार स्टेशनरी हेतु पृथक में दिये जा रहे हैं. हमारी सरकार अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति के संभव कल्याण के लिए प्रयासरत है. छात्रावासों में बालक, बालिकाओं को सर्वसुविधा युक्त पौष्टिक भोजन एवं कोचिंग की व्यवस्था के लिए हमारी सरकार दृढ़ संकल्पित है. प्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जाति, जनजाति बाहुल्य बस्तियों में विकास योजना के तहत वर्षों से लगातार विकास कार्य किया जा रहा है. जिसमें गुणवत्तापूर्ण मूलभूत सुविधाएं मिल रही हैं. कुल मिलाकर मध्यप्रदेश सरकार का यह बजट अनुसूचित जाति, जनजाति के कल्याण के लिए उपयोगी सिद्ध होगा. मैं इस बजट का समर्थन करती हूँ.
सभापति महोदया, मैं माननीय मंत्री महोदय का ध्यान किसानों के खेत में विद्युतीकरण के कार्य की ओर भी आकर्षित करना चाहूंगी. कृपया इस दिशा में भी विचार करें. आवास सहायता योजना, हमारी सरकार जनजाति विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही है. माननीय मुख्यमंत्री जी का ध्यान जनजाति वर्ग के शिक्षा उत्थान पर विशेष रुप से है. महाविद्यालयीन विद्यार्थियों की पढ़ाई में किसी तरह की रुकावट न हो इस हेतु हमारी सरकार द्वारा आवास सहायता योजना वर्ष 2013-14 से शुरु की गई है. महाविद्यालयीन विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हेतु गृह नगर से बाहर छात्रावास उपलब्ध न होने की स्थिति में आवास किराए पर लेने की व्यवस्था की गई है एवं किराए की राशि का भुगतान सरकार के द्वारा किया जा रहा है. शासन द्वारा चलाई जा रही योजना से जनजातीय वर्ग के आर्थिक रुप से कमजोर विद्याथियों की उच्च शिक्षा हेतु शहरों में रहने की उत्तम व्यवस्था प्राप्त हो जाती है. शहरों में उनके निवास की समस्या हल हो चुकी है. जिससे जनजातीय वर्ग के विद्यार्थी उच्च शिक्षा प्राप्त कर पा रहे हैं. साथ ही विद्याथियों की ड्राप-आउट दर में उल्लेखनीय कमी आई है. इस वर्ष 1 लाख 5 हजार से अधिक विद्याथियों को लगभग रुपए 162 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है. वर्ष 2026-27 हेतु योजना अन्तर्गत राशि 198 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया है. संभाग मुख्यालय पर 2000 रुपए शेष सभी जिला मुख्यालय पर 1250 रुपए तथा विकासखण्ड मुख्यालय पर 1000 रुपए दे रहे हैं. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हूँ कि इस राशि को बढ़ाने पर भी विचार किया जाए.
सभापति महोदया जी, अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का लाभ इस वर्ग को प्राप्त हो रहा है. माता-पिता के मजदूरी करने के कारण जो बच्चे आगे की पढ़ाई नहीं कर पाते थे. उनके रहने, खाने, कोचिंग और कॉलेज की फीस मध्यप्रदेश सरकार प्रदान कर रही है. इसी तारतम्य में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी नरेन्द्र मोदी जी एवं हमारे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी और जनजातीय कार्य मंत्री माननीय कुंवर विजय शाह जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूँ कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चों के लिए, बच्चों के भविष्य को देखते हुए उन्हें आगे बढ़ाने का जो काम कर रहे हैं. हमारी सरकार का मूलमंत्र है सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास इसी के साथ हम सबको काम करना है और आगे बढ़ना है. जनजातीय कार्य मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद देती हूँ कि उन्होंने मुझे सदन में बोलने का अवसर दिया. बाबा साहेब भीमराव आम्बेडकर जी, शहीद टंट्या मामा, भगवान बिरसा मुण्डा जी अमर रहें, अमर रहें, जय हिंद जय भारत.
श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकी (भीकनगांव) -- माननीय सभापति महोदया, आदिवासी अंचल में भगोरिया पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है इसकी शुरुआत हो गई है. मैं इस पर्व की सदन के सभी माननीय सदस्यों को ढेर सारी बधाई देती हूँ. यह पर्व आदिवासी समाज के लिए बहुत बड़ा पर्व होता है. हम हमारी बात रखने के लिए यहां पर उपस्थित हैं.
सभापति महोदया, मैं मांग संख्या 33 जनजातीय कार्य विभाग से ही अपनी बात रखना चाहूंगी. जनजातीय कार्य विभाग ऐसा लगता नहीं है कि यह कोई विभाग है. यह जनजातीय कार्य विभाग की बजाय आदिवासी विभाग होगा तो ज्यादा बेहतर होगा. इससे लगता है कि इस प्रदेश की सबसे बाहुल्य समाज का विभाग है. जनजातीय कार्य तो ऐसा लगता है जैसे कोई काम का विभाग है. इसके नाम को बदला जाना चाहिए. वर्ष 2026-27 में विभाग का कुल बजट वर्ष 2026-27 में विभाग का कुल बजट 15 हजार करोड़ रखा गया है जो कुल बजट का 3.43 प्रतिशत है. पिछले वर्ष 2025-26 में 14,830 करोड़ था जिसमें पिछले वर्ष के बजट से अंतर कम है, किन्तु हम सबने सुना कि हमारे माननीय वित्तमंत्री जी ने पूरी ताकत के साथ कहा कि पिछले साल के मुकाबले इस साल का बजट हमारा कई गुना अधिक है. अधिक है तो फिर हमारे इस आदिवासी विभाग को कम बजट क्यों दिया गया यह एक बहुत बड़ी बात है.
8.01 बजे {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}
अध्यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश की 21.1 प्रतिशत इतनी बड़ी आबादी का यह विभाग है तो अनुपात के बराबर बजट की हिस्सेदारी भी उतनी ही होनी चाहिए. यह पूरा समाज आज भी निम्न स्थिति में गुजर रहा है जिससे उनके अधिकारों, आजीविका की नीतिगत उपेक्षा पूरी तरह से दर्शाता है. शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, बुनियादी सुविधाओं में अभी भी यह बहुत पीछे है. समान अवसर देने के लिए निवेश भी उतने ही होने चाहिए. यदि इस समाज को आगे बढ़ाना है तो बजट भी उतना ही देना होगा तभी यह विकास की ओर अग्रसर होंगे. जनजातीय जिलों में आज भी कुपोषण, शिशु मृत्यु दर, सिकल सेल जैसी महामारी मौजूद हैं. मैं तो यहां तक कहती हूं कि महाराष्ट्र राज्य में सिकल सेल के अलग से अस्पताल बनाए गए हैं. जहां पूरी तरह से इस बीमारी से ग्रस्त परिवारों को पूरी सुविधाएं दी जाती हैं. सुविधाएं हमारे यहां भी दी जा रही हैं लेकिन जो सबके लिए सामान्य अस्पताल हैं वहीं पर दे रहे हैं, तो हमारे यहां भी सिकल सेल के लिए अलग से अस्पताल हों जिससे उनका इलाज ज्यादा बेहतर तरीके से कर पाएंगे.
अध्यक्ष महोदय, इसी को आगे बढ़ाते हुए कह रही हूं कि स्वास्थ्यगत ढांचे को मजबूत करने के लिए विशेष पैकेज की भी आवश्यकता है तभी जाकर यह कुछ कर पाएंगे. वित्त मंत्री जी ने पूरे भाषण में बड़े शानदार तरीके से आदिवासी समाज के कल्याण के लिए खूब बोला है किन्तु यह बजट में शुरुआत से ही दिखता है कि कहने और करने में कितना फर्क है. अनुसूचित जनजाति बस्ती विकास की जो हर वर्ष राशि आती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के काम हों और इसकी स्वीकृति प्रभारी मंत्री जी की अध्यक्षता में विधायकों के साथ बैठक में निर्णय होता है. यह प्रावधान है, किन्तु होता यह है कि राजनैतिक द्वेषता के कारण ठेकेदारों से प्रस्ताव लिए जाते हैं और उन्हीं को मंजूरी दी जाती है और विधायकों के जो जनहित के प्रस्ताव होते हैं उनको शामिल नहीं किया जाता है. पिछली बार मेरी विधान सभा के सारे कामों को निरस्त किया गया और अभी भी वही स्थिति है. इसमें घोर आपत्ति है.
अध्यक्ष महोदय, अनुसूचित जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में आदिवासियों की भूमि को गैर आदिवासी समाज द्वारा भ्रम फैलाकर खरीदे जाने का चलन आदिवासी जिलों में हो रहा है. यह बहुत हो रहा है. अन्य समाज के द्वारा उनके यहां काम करने वाले नौकरों के नाम से यह जमीनें हड़प ली जाती हैं और करोड़ों मूल्य में फिर वापस कालोनियां डेव्हलप करके बेची जाती हैं. यह देखना चाहिए, यह जांच का विषय है कि वास्तव में वह गरीब व्यक्ति की इतनी क्षमता है कि वह करोड़ों की जमीन खरीद सके. इस ओर भी ध्यान देने की आवश्यकता है. आदिवासी सब प्लान की राशि अन्य विभागों को दे दी जाती है. यह जितना बजट दिया गया उसके अलावा सब प्लान की जितनी राशि है उसमें कई गुना अन्य विभाग ले लेते हैं और नाम आता है कि यह जनजातीय कार्य विभाग को दिया गया. ऐसा सौतेला व्यवहार क्यों ? यदि उनके नाम का है तो उन्हीं को दिया जाए ताकि वह बेहतर ढंग से काम कर सकें. फॉरेस्ट के पट्टे चूंकि इसमें हमारे आदिवासी विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है. आज भी सर्वे के आधार पर कई हमारे आदिवासियों के पट्टे शेष हैं. इनका पूरी तरह से सर्वे कराते भी हैं पर जो भी आवेदन आता है वह निरस्त कर दिया जाता है. हमारे खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, धार, झाबुआ इन जिलों में और प्रदेश के अन्य जिलों में भी बहुत लोग इससे प्रभावित हो रहे हैं और लाखों पट्टे निरस्त कर दिये गये हैं. मेरी विधानसभा की बात करूं तो 8 हजार के करीब पट्टे निरस्त हुये हैं, उनको पट्टे दिये जायें, यह बात मैं पहले भी कह चुकी हूं. माननीय मुख्यमंत्री जी ने भी स्पष्ट रूप से विधानसभा के सभ वर्ष 2025 में कहा था कि जितनी जमीनें बची हैं उनका सर्वे होगा और सर्वे के आधार पर पुन: पट्टे दिये जायेंगे किंतु आज तक इस विषय पर कोई भी कार्यवाही सरकार के द्वारा नहीं की जा रही है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं ज्यादा समय नहीं लेते हुये अपने क्षेत्र की बात करना चाहूंगी. बहुत ताकत के साथ में सभी ने कहा कि गौरव दिवस मनाया जाता है और क्रांतिवीर का बहुत सम्मान होता है, उनके नाम से योजनायें बन रही हैं, किंतु मैं आपसे कहना चाह रही हूं कि खरगौन जिले मे क्रांतिसूर्य ट्ट्या मामा की मूर्ति की स्थापना की गई, आदिवासी समाज बहुत खुश हुआ कि हां हमारा सम्मान बढ़ाया गया, क्योंकि यह मैं आपको बता देना चाहती हूं कि आदिवासी समाज प्रकृति पूजक है, हमारे जितने भी पूर्वज हैं वह उनके देवता तुल्य हैं और वही भावना वह मन में रखते हैं ,किंतु वही मूर्ति माननीय मुख्यमंत्री जी के कहने से लगी, उन्होंने आदेश किया , कलेक्टर ने फिर उसको संज्ञान में लेकर के पक्के पत्थर या कांसे की मूर्ति स्थापित की जाये इसके आदेश दिये और इसकी बाकायदा पीआईसी में मंजूरी भी मिली किंतु जब मूर्ति लगाने की बारी आई तो वहां पर दिखावा किया गया बाकायदा बड़ी क्रेन लाई गई कि हां यह बड़े पत्थर की मूर्ति है और मूर्ति वहां पर फायवर की लगा दी गई.
माननीय अध्यक्ष महोदय, इस बात की हमारे समाज में घोर आपत्ति है कि हमारे समाज की भावनाओं कितना आहत किया है, इसलिये अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी आपके माध्यम से यह निवेदन करना चाहती हूं कि जिन्होंने यह मूर्ति बदली है इनके ऊपर में कार्यवाही निश्चित रूप से इस सरकार को करनी चाहिये. ऐसे अधिकारी, सब इंजीनियर, नगर पालिका के अध्यक्ष जिनके हस्ताक्षर से यह सारा काम हुआ है, उनके ऊपर कार्यवाही होने की आवश्यकता है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे समाज के लोग शिक्षित तो हैं किंतु रोजगार के अभाव में उन्हें कहीं भी नौकरियां नहीं मिल रही हैं, बैकलॉग के 2 लाख से अधिक पद पूरे मध्यप्रदेश में खाली हैं. उनको तत्काल भरे जाना चाहिये ताकि उनको रोजगार मिले और ईधर और ऊधर जो भटकाव आ रहा है वह भटकाव कम हो.
माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे आदिवासी क्षेत्रों में चूंकि मनरेगा हम लोग पहले कहते थे अब उसका नाम बदल दिया गया है विकसित भारत-जी राम जी" योजना के नाम से अब संचालित है, उसका सीधा फायदा आदिवासी वर्ग को, आदिवास पंचायत को होता था, उस योजना के कारण आदिवासियों का पलायन रूका हुआ था, किंतु यह योजना ठप्प होने से पंचायतें प्रभावित हुई हैं, आदिवासी समाज प्रभावित है, आदिवासियों का पलायन हो रहा है और पलायन के बाद के जो दुष्परिणाम हैं, वह है महिलाओं की गुमशुदगी, बालिकाओं की गुमशुदगी, यह अपराध भी अब उसके साथ में सामने आ रहे हैं. तो इन सब पर रोक लगना चाहिये, ऐसा योजनाये जो लंबे रूप से जीवन को चलाने वाली योजना एक तरह से थी जिसकी वजह से अपराध भी रुक रहे थे, इस योजना में बजट आना चाहिये और ग्राम पंचायतों के विकास के लिये इस योजना की अच्छी भूमिका है. ऐसा मेरा मानना है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, चूंकि यह विभाग बहुत बड़ा है और इस विभाग के माननीय मंत्री कद्दावर मंत्री हैं, बड़ी ताकत से काम भी करते हैं और जब बोलते हैं तो पूरा देश भी हिल जाता है इनके कहने से , अध्यक्ष जी मैंने सही बोला न.
अध्यक्ष महोदय- आप इतनी प्रशंसा मंत्री जी की मत करो नहीं तो फिर आज कुछ बोल कर हिला देंगे तो फिर दिक्कत हो जायेगी. (हंसी)
श्रीमती झूमा डॉ.ध्यान सिंह सोलंकी-- अध्यक्ष महोदय, आदिवासियों के वर्ग के हित में बोल कर के आज हिला दें , इसीलिये मैंने यह बात बोली है (हंसी) इसीलिये मैंने बोला है कि जब मंत्री जी बोलते हैं तो देश हिल जाता है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहती हूं जितनी बातें मैंने कही है यह सब सही हैं, मुझे सिर्फ भाषण देना नहीं आता है. मैं जो सही बात होती है उतना ही कहती हूं.
अध्यक्ष महोदय, सांदीपनि स्कूल जो पहले सीएम राइज स्कूल के नाम से शुरू हुई, अच्छा कांसेप्ट है .10 से 15 गांव के बच्चे इसमें पढ़ते हैं. किंतु इन स्कूलों में बच्चों के लाने और ले जाने के लिये बस का आदेश अभी तक पूरी तरह से नहीं मिला है. चूंकि यह बात केदार भाई डाबर जी भी कह चुके हैं, इसका आप लोग करे और बालिकाओॆ का भी इस निर्णय से पढ़ाई में रूझान बढ़ा है. वह स्कूल में ज्यादा दर्ज हो रही हैं. और अब यह 50% और 60% का नहीं, सीधा 70% और 30% का रेश्यो हो गया है. सीधा 70 और 30 का रेशो हो गया है. 70 प्रतिशत बालिकाएं आ रही हैं, 30 प्रतिशत बालकों का बल्कि घट क्यों रहा है, इस पर भी अभी से विचार करना पड़ेगा. 50 प्रतिशत तो होना चाहिये. 70 और 30 प्रतिशत का रेशो आ रहा है. तो इन बालिकाओं को और बढ़ावा मिले और पढ़ाई के प्रति रुझान बढ़े, इसलिये छात्रावासों की आवश्यकता और बढ़ाना पड़ेगी. मेरे भीकनगांव और छिरनिया दोनों तहसीलों में जो हैं, वह टीनशेड के छात्रावास जो सालों पुरानी बिल्डिंग हैं, जिनकी बार बार रिपेयर होकर फिर से बच्चों को वहीं पर रखा जा रहा है. इनके नवीन भवन बनाये जायें दोनों तहसीलों पर बालक और बालिकाओं के. एकलव्य स्कूल वह बहुत अच्छे से संचालित हो रहा है, उसमें भी 500 बच्चे हैं, ढाई सौ बालिकाएं और ढाई सौ लड़के. किन्तु वहां पर भी अतिथि शिक्षक है, रेगुलर भी है, किन्तु उनकी तनख्वाह प्रति माह नहीं मिल रही है. वह बार बार कह रहे हैं कि हमारा चयन होकर हम आ तो गये हैं, वह ऑल इंडिया से आये हुए हैं. कोई यूपी, राजस्थान एवं कोई दिल्ली से आया है, किन्तु उनका वेतन नियमित हर महीने, दूसरे महीने भी मिल जाये तो भी वह तैयार हैं. पर 4 से 5 महीने में आ रहा है, तो उनका इस बात का जरुर ध्यान रखा जाये. हायर सेकेण्ड्री स्कूल मेरे यहां 3 अंजनगांव,भीकनगांव का उत्कृष्ट विद्यालय और गोराड़िया का हायर सेकेण्ड्री भवन नहीं चाहिये. इसकी बाउण्ड्रीवाल चाहिये मुझे. बाउण्ड्रीवाल के अभाव में ये पूरे भवन बच्चे भी असुरक्षित हैं. वहां कई घटनाएं घटी हैं, जिसका मैं जिक्र नहीं करना चाहती हूं. छात्रवासों में बार बार शिकायतें आ रही है कि भोजन अच्छा नहीं मिल रहा है. उनकी सुरक्षा नहीं की जा रही है. वजह है उसकी, चूंकि मैं उनके बीच हमेशा रहती हूं और वजह यह है कि 200 बच्चों को एक ही वार्डन, सहायक वार्डन संभाल रही है. तो इस नियम में आप परिवर्तन कीजिये. 50 बच्चों पर एक वार्डन होना चाहिये, ताकि वह इतनों का खाना पीना से लगा करके उनका पढ़ाई लिखाई सारी व्यवस्थाएं अच्छी से देख सकें और कभी भी शिकायत करने के लिये रोड पर बच्चे बार बार आ रहे हैं. तहसीलों से जिलों पर जाने के लिये रोड पर निकल रहे हैं और मेन रीजन छोटा सा है, बहुत भारी बात नहीं है. हम लोग कर सकते हैं कि 50 या 100 बच्चों पर वार्डनों की नियुक्ति बढ़ाई जाये, तो बिलकुल वह सही हो जायेंगे. बहुत सारे 130 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें शिक्षक स्थाई नहीं हैं. मैं आपसे अनुरोध कर रही हूं कि यहां पर अतिथियों के भरोसे यह स्कूल चल रहे हैं, इनमें स्थाई शिक्षक दिये जायें. शासन के द्वारा नियुक्ति भी हुई, किन्तु जिले पर जाकर उनको एक अधिकार दिया गया कि आपको स्थान अपनी मर्जी से भरना है. तो वह क्यों जायेगा दूरस्थ स्थलों पर. हम लोगों ने 3 से 4 दिन रोका कि नहीं पहले यह सीटें भरेंगी, उसके बाद आपको शहर के आस पास की जगह दी जायेगी. तो बाकायदा वह कोर्ट में पहुंच गये. इसलिये आप एक नियम ऐसा बना दें कि पहले नियुक्तियां यहां से हों, तो सीधे यह ट्राइबल क्षेत्रों के स्कूलों की पद पूर्ति हो. उसके बाद ही शहर दिये जायेंगे और भवन विहीन स्कूल जो काफी जर्जर स्थिति में हैं ट्राइबल विभाग के. मैं आपसे अनुरोध कर रही हूं कि यदि मैं अभी पढ़ूंगी, तो 2-3 मिनट और लगेंगे. मैं नहीं चाहती कि मेरे बाकी साथियों का समय भी मैं पूरा ले लूं. तो वह मैं आपको सूची उपलब्ध कराऊंगी. जो बिलकुल नहीं है, या तो पेड़ के नीचे लग रहे हैं, किराये के मकानों में लग रहे हैं या फिर टूटने की स्थिति में हैं. तो ऐसे भवन आपको देना होंगे, ताकि बच्चे अच्छे से पढ़ सकें और अपने भविष्य को उज्जवल बना सकें. अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे समय दिया, इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद. जय हिन्द.
अध्यक्ष महोदय-- बहुत धन्यवाद सबको. काफी अच्छी चर्चा हुई. मंत्री जी.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)—अध्यक्ष महोदय, पंकज उपाध्याय जी अपने क्षेत्र की कुछ बात कहना चाहता हैं, मैं समझता हूं कि एक मिनट उनको मिल जाये.
श्री पंकज उपाध्याय (जौरा)-- अध्यक्ष महोदय, मेरा नाम था, अब किसने नाम काट दिया, क्यों काट दिया, यह मुझे जानकारी मिल जाती,तो यह मेरी जानकारी के लिये ठीक रहता.
अध्यक्ष महोदय -- दरअसल बात यह हुई थी कि दोनों पक्षों से 5-5 लोग बोलेंगे, उसके बाद सब लोगों से बात करके चेंज किया है, कल स्वास्थ्य परिवार कल्याण पर बोल लेना आप.
श्री पंकज उपाध्याय -- अध्यक्ष महोदय, यह मेरे क्षेत्र का बड़ा गंभीर मामला है और जन भावनाओं से जुड़ा हुआ है. मैं दो दिन से तैयारी कर रहा हूं.
अध्यक्ष महोदय—मुझे लग रहा है कि अब सवा आठ बज रहे हैं. अब 5 मिनट से ऊपर नहीं होगा. आप 5 मिनट में समाप्त करें. 8.15 हो रहे हैं. 8.20 पर खतम करना. फिर आशीष जी भी बोलेंगे.
श्री पंकज उपाध्याय- अध्यक्ष जी, बड़ा जनभावना का मुद्दा ऐसा है कि बजट की बहुत चर्चा हुई, लेकिन एक बड़ा वर्ग इससे अछूता रह जाता है. जिसको अपने अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं. मैं यहां रजक-धोबी समाज की यहां बात करना चाहता हूं कि अनुसूचित जाति में आने के लिये इसमें कई बार प्रस्ताव पहुंचाये गये, कई बार कार्यवाही की गयी. कई अशासकीय संकल्प लेकर आये जो आपने दिल्ली पहुंचा दिये. परंतु आज तक वर्ष 2018 में इसका प्रयास किया गया. भारत सरकार के कानून मंत्रालय में 20 सितम्बर, 1976 को दो वर्गों में बांट दिया गया. भोपाल, सीहोर और रायसेन. इनको वहां पर अनुसूचित जाति का आरक्षण दे रहे हैं. लेकिन पूरे प्रदेश में इसको हम अनुसूचित जाति में नहीं लेना चाहते हैं. इसके कारण से यह रजक-धोबी समाज अपने आप को बहुत ठगा हुआ महसूस कर रहा है और लगातार इस लड़ाई को सड़कों पर आकर लड़ता है. मैं 10 साल से लगातार देख रहा हूं कि अखिल भारतीय धोबी महासंघ और संत गोड़से बाबा रजक समिति, इसके दो कार्यक्रमों में आप भी गये थे. हमारे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज जी घोषणा करके आये. लेकिन इसमें आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है. 10 प्रदेश ऐसे हैं जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और दिल्ली. इनमें उनको पूर्ण आरक्षण मिल रहा है. हमारे प्रदेश में केवल तीन जिलों को मिल रहा है. मेरा अध्यक्ष जी आपसे निवेदन है कि इसमें काम करने की बहुत आवश्यकता है. इनको आरक्षित किये जाने की बहुत आवश्यकता है. दूसरा यह कि ऐसा ही एक सेम मामला और है कि संविधान की जब 1949 में तो कश्यप, रायकवार, बाथम, मांझी, केवट, मलाह, भोई, ढीमर और निषाद आदि यह सभी लोग सभी अनुसूचित जनजाति में लिये गये थे. लेकिन इस मामले में हमारे मुख्मंत्री जी ने एक प्रश्न उठाया था, उन्होंने प्रश्न लगाया था 26 जुलाई, 2019 में कि इन लोगों को अभी भी इनकी जाति के सर्टिफिकेट नहीं मिल रह हैं. आप देखिये कि इतने बड़े समाज को, इतने बड़े वर्ग को अगर हम उसके अधिकारों से वंचित रखते हैं तो कहीं ना कहीं यह सदन इसके लिये जवाबदार है. मेरा आपसे अनुरोध है कि इसमें गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है. क्योंकि यह दोनों समाज, समाज में बहत बड़ा स्थान रखते हैं, बहुत बड़ी संख्या आती है. इनकी हमने कई बार जनगणना करवा ली. हर प्रदेश में इनकोख् इनके अधिकार मिल रहे हैं,आरक्षण मिल रहा है कहीं जनजाति में मिल रहा है तो कई जगह अनुसूचित जाति में चल रहा है. लेकिन यह दोनों समाज अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय, इसमें मेरा आपसे अनुरोध है कि आप इसमें आदेश जारी करें, ताकि इन दोनों समाजों को उनके अधिकार मिल सके. ऐेसे ही अध्यक्ष जी अनुसूचित जाति बस्ती विकास योजना है, उसकी कई मीटिंग होती है, हमसे प्रस्ताव मंगाये जाते हैं. दो साल में करीबन चालीस प्रस्ताव मंगा दिये और 70 प्रस्ताव इस साल जिले में आये. मैंने इस संबंध में प्रश्न लगाया था तो उसका मुझे उत्तर मिला. लेकिन मेरे एक भी प्रस्ताव को नहीं लिया गया है. जो प्रस्ताव तो यह अधिकारी अपनी मनमानी करते हैं और अपनी मनमानी के हिसाब से इसको बंदरबांट करके काम कर लेते हैं. इसको देखने की बहुत आवश्यकता है. छात्रावासों की स्थिति बहुत दयनीय हो चुकी है. इस वर्ग का लगातार शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है. रोजगार के लिये कोई दूसरी व्यवस्था नहीं की गयी, विशेषकर अनुसूचित जाति और जनजाति के लिये. इतनी आर्थिक रूप से असमानता इस वर्ग में देखी गयी है और किसी वर्ग में इतनी देखी नहीं गयी है.
अध्यक्ष जी, जो पट्टे दिये गये हैं, उन पट्टों पर आज भी हमारी पूरे जिले में बाहुबलियों का कब्जा है. उनको उनका अधिकार नहीं दिया जा रहा है. इस पर आपको विशेष रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है. मेरे क्षेत्र के रामलालपुरा में स्कूल नहीं है, दो वर्षों से तो मैं मांग कर रहा हूं. यहां पर हर बार मांग करता हूं. आश्वासन कई बार मिले लेकिन कुछ हुआ नहीं है. ऐसे ही कल्याणपुरा, टेमपुरा, टेथ का पुरा, आंतरी, नरसिंह का पुरा,जमनीपुरा,बाबूपुरा, हरिवनपुरा यहां पर कहीं श्मशानघाट नहीं हैं, कहीं स्कूल नहीं है और कहीं पहुंचने के सड़क ही नहीं है. ऐसे ही अध्यक्ष जी जो मैं मलाह समाज की बात कर रहा हूं, आप कई बार घोषणा करके आया हूं. लेकिन उनका काम करने की आवश्यकता है. जैसे छउआपुरा, बैंतपुरा, आमलापुरा, झबुआपुरा,होरावरा और भीलगढ़ यहां पर आज तक हम यहां पहुंचने का रास्ता नहीं बना पाये हैं, आजादी के सत्तर साल बाद भी और बजट इतना बड़ा बताते हैं और मैं समझता हूं कि 70 प्रतिशत तो अपनी पीठ थपथपाने में निकल गया. यह बहुत महत्वपूर्ण बाते हैं. बहादुरपुरा में भी रोड की व्यवस्था नहीं है और अध्यक्ष जी धोंधाखोडा, खईयापुरा, मानपुर में तो..
अध्यक्ष महोदय- आपका समय हो गया. बैठ जाइये.
श्री पंकज उपाध्याय- अध्यक्ष जी एक मिनट लूंगा, मेरा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है, वहां पीने की पानी तक की व्यवस्था नहीं है, स्कूल शिक्षा विभाग की बात रह गई, लेकिन वहां पीने के पानी की व्यवस्था कराना हमारा नैतिक दायित्व बनता है, आपने मुझे समय दिया और अध्यक्ष जी, जो मेरा नाम बार-बार काटा जा रहा है इसके बारे में थोड़ी आप जांच करा लें.
अध्यक्ष महोदय - नहीं, नहीं, नाम किसी ने ऐसे ही नहीं काटा है, बात हुई थी, दल के लोगों ने बातचीत करके ही बात की थी. श्री आशीष शर्मा जी.
श्री पंकज उपाध्याय - अध्यक्ष महोदय, विशेष यह है कि कोई सभापति आ जाता है, आपको देखकर थोड़ा सा हम दबाव में भी आ जाते हैं.
अध्यक्ष महोदय - पंकज जी, आप अपने को करेक्ट कर लो, मैं कोई घोषणा करके नहीं आया हूं, मैं वही घोषणा करता हूं जिसमें बीजारोपण हो जाता है तभी बोलता हूं, इससे पहले कभी बोलता ही नहीं हूं.
श्री आशीष गोविन्द शर्मा (खातेगांव) - अध्यक्ष महोदय, हमारा मध्यप्रदेश देश का हृदय प्रदेश है और हमें इस बात का गौरव होना चाहिए कि विविधता भरे हुए इस प्रदेश में अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सामान्य विभिन्न जातियां जो कि सनातन को मानती हैं. वह सब निवास करती हैं. जंगल के पास, जंगल के समीप पहाडियों पर, नदियों के किनारे रहने वाला अनादिकाल से हमारा आदिवासी समाज जो कि प्रकृति के बहुत नजदीक है उसकी चिंता निश्चित तौर पर भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने की है. अभी माननीय मंत्री जी का इस पर वक्तव्य आना है. लेकिन मैं समस्त जनप्रतिनिधियों के बीच इस बात को महसूस करता हूं कि आजादी के इतने वर्षों बाद जो समाज उपेक्षित रहा, उसके उत्थान के लिए हमारी सरकार ने निःसंदेह काम किया है. एक जमाने में जो हमारा अनुसूचित जनजाति का परिवार जो खेतों पर मजदूरी करता था, उसके बेटा बेटी भी उसके साथ खेतों पर ही मजदूरी करते थे. वह स्कूल तक नहीं जा पाते थे और कई बार निरक्षरता की स्थिति में उनका जीवन भी बदहाली की कगार पर होता था, लेकिन आज समस्त जनप्रतिनिधि इस बात को स्वीकार करेंगे कि आज आप किसी भी अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति के गांव में चले जाइए. आपको ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और बड़ी बड़ी डिग्री लिये हुए अच्छे पदों को सुशोभित करने वाले युवा और युवती मिल जाएंगे.
अध्यक्ष महोदय, यह इस बात का प्रमाण है कि एक लम्बी शैक्षणिक व्यवस्था के माध्यम से हमने इन समाजों को ऊंचा उठाने का काम किया है, चाहे हमने होस्टल खोले हों, चाहे एकलव्य विद्यालय खोले हों, चाहे इनकी फीस का संदाय हमने किया हो, चाहे इन्हें गणवेश की व्यवस्थी दी हो, पाठ्यपुस्तकें दी हों, चाहे शहरों में रहने वाले, कालेज की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को 1000, 1500, 2000 रुपये मकान का किराया दिया हो, जो विदेश में पीएचडी करने जाना चाहते हैं या उच्च अध्ययन के लिए जाना चाहते हैं चाहे ऐसे बच्चों को विदेश की धरती तक भेजा हो, मेरे विधान सभा क्षेत्र का भी एक आदिवासी बच्चा मध्यप्रदेश सरकार की फीस के माध्यम से विदेश में उसने अध्ययन किया और जिस यूनिवर्सिटी में अध्ययन किया, वहीं पर उसको जॉब मिल गई, यह हमारे लिए गौरव का क्षण है. जिनके बच्चों के माता-पिता कभी 50 रुपये, 100 रुपये फीस की व्यवस्था नहीं कर पाते थे. आज वह डॉक्टर हैं, आज वह बड़े बड़े यूनिवर्सिटी में पढ़ा रहे हैं. आज वह एसडीएम हैं, तहसीलदार हैं, पटवारी हैं, तब लगता है कि संविधान पर आधारित व्यवस्था हमारे मध्यप्रदेश में साकार होने जा रही है. मैं केवल दो योजनाओं की बात करूंगा जिसे हमारे प्रधानमंत्री जी ने खास करके अनुसूचित जनजाति के विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह के लिए लेकर आए हैं पीएम जनमन योजना, जिसके माध्यम से चूंकि मेरे विधान सभा क्षेत्र में हमारे देवास जिले में भी बहुत बड़ी संख्या में जनजाति वर्ग निवास करता है और उनकी उन्नति के लिए बहुत सारी योजनाओं का लाभ सरकार के माध्यम से उनको हम दिलाने जा रहे हैं . धरती, आबा, जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना जिसके अंतर्गत उन मजरे टोलों का पक्की सड़क से जोड़ने का काम सरकार कर रही है. वहां 24 घंटे विद्युतीकरण करने का काम कर रही है जहां पर बिजली की व्यवस्था नहीं हुई, पेयजल की व्यवस्था भी सरकार करने जा रही है और मैं ऐसा मानता हूं कि चूंकि हमारा जनजाति समाज जो फालियों में रहता है, छोटी छोटी बस्तियां बनाकर रहता है जिनका कई बार राजस्व रिकार्ड में नाम भी नहीं आ पाता है. अब वहां पर पक्की सड़कें पहुंच रही है. बिजली की लाइन पहुंच रही है तो निश्चित ही एक नया सवेरा हमें जनजाति क्षेत्र में देखने के लिए मिलेगा.
अध्यक्ष महोदय, प्रत्येक जिले में एकलव्य विद्यालय खोले गये हैं. हमारे देवास जिले में भी बागली, खातेगांव इन क्षेत्रों के बीच में एकलव्य विद्यालय खोले जायं. साथ ही साथ मैं अपने विधान सभा क्षेत्र के लिए कहने को तो बहुत सारे विषय थे, बहुत सारी बातें थीं, लेकिन ग्राम जीयागांव में जो कि हमारे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र का एक हायर सेकण्ड्री स्कूल है. यहां पर पोस्ट मेट्रिक बालक छात्रावास और पानीगांव जहां पर आदिवासी जनसंख्या बड़ी संख्या में रहती हैं, यहां बच्चियां हायर सेकण्ड्री की पढ़ाई करने के लिए 15-15, 10-10 कि.मी. दूर से कई बार आकर मकान किराए से लेकर रहती हैं, वहां पर एक पोस्ट मेट्रिक बालिका छात्रावास मिलना चाहिए. मेरे विधान सभा क्षेत्र में पत्थरों के सिल-बट्टे बनाने वाले बहुत सारे परिवार निवास करते हैं, जिन्हें टाकिया कहा जाता है जो मूल रूप से आदिवासी लोग ही हैं लेकिन हमारे विधान सभा क्षेत्र में उन्हें अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा है बाकी देवास जिले में अन्य जगहों पर उनके रिश्तेदारों को जनजाति का प्रमाण पत्र दिया जाता है, इसलिए मेरी यह मांग है कि जनजाति कार्य विभाग इस विषय में भी देखे और अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं. भगोरिया पर्व हमारे विधान सभा क्षेत्र में बागली में बड़े पैमाने पर इस समय प्रारंभ हो गया है. सभी आदिवासी जनजाति भाइयों को भगोरिया पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं. अध्यक्ष महोदय, आपने बोलने का समय दिया उसके लिए धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय -- माननीय हरिशंकर खटीक जी, कल आप हैल्थ की, एजुकेशन की डिमांड पर बोलिएगा. प्लीज, आप कल बोलिएगा. (श्री हरिशंकर खटीक, सदस्य के अपने आसन से खडे़ होकर बोलने पर)
श्री हरिशंकर खटीक -- जी माननीय अध्यक्ष महोदय.
भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास मंत्री (डॉ.कुंवर विजय शाह) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, एसटी, एससी के सभी माननीय विधायकगणों ने बहुत ही गंभीरता से इन विभागों पर अपनी चर्चा का शुभारंभ किया, अपने सुझाव दिये और अनुभव के आधार पर कई सदस्यों ने बडे़ गंभीर सुझाव भी दिये. क्योंकि बुद्धि का ठेका सिर्फ हमने नहीं लिया है कि हम मंत्री बन गए, तो सारी बुद्धि हममे आ गई. ऐसा कुछ नहीं है. इसलिए तमाम हमारे सदस्यों को मैं धन्यवाद देना चाहता हॅूं. हमारे श्री शरद कोल जी जो पहली बार बोल रहे थे, लेकिन ऐसा लग नहीं रहा था कि वे पहली बार बोल रहे हैं. हमारे श्री संतोष वरकडे़ जी, जो पहली बार बोल रहे थे. यह हमने जानबूझकर के पहली बार सदस्यों को शुभारंभ कराया है. जनरली शुभारंभ बहुत सीनियर लोगों से होता है लेकिन हमने कोशिश की कि जो पहली बार चुनकर आए युवा जनप्रतिनिधि हैं, वे अपनी विचारधारा को यहां अच्छे से प्रकट करें. माननीय श्री फुन्देलाल सिंह मार्कों जी मां नर्मदा जी के उद्गम स्थल से आते हैं, वे बहुत सीनियर सदस्य हैं, उन्होंने बहुत अच्छे सुझाव दिये हैं. मैं अभी आगे उस पर चर्चा करूंगा. डॉ.हिरालाल अलावा जी दिल्ली में रहें हैं, वे डॉक्टर हैं और दूसरी बार जनप्रतिनिधि बने हैं. पार्टी अलग हो सकती है लेकिन जिस भाव से उन्होंने इस समाज की प्रगति के लिए अपनी बात रखी, मैं उनका स्वागत करता हॅूं. श्री मोहन राठौर जी ऐसी जगह रहते हैं, जहां सहरिया जाति के बहुत से लोग रहते हैं. उनकी बातों पर भी मैं आऊंगा. मैं उनको भी धन्यवाद देना चाहता हूँ. श्री भगवानदास सबनानी जी ने जिस विभाग के बारे में बात रखी है, मैं शुरूआत उसी विभाग से करूंगा. उन्होंने कहा कि जो काम 40 साल से नहीं हुआ, उस काम को सरकार ने बहुत अच्छा किया. श्री केदार चिड़ा भाई डाबर जी ने भी बहुत अच्छे सुझाव दिये. श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल जी, श्री हरि भैया जी ने भी बहुत अच्छे सुझाव दिये. बहन जी के साथ, मंत्री रहे, माननीय अर्जुन सिंह जी के साथ मंत्री रहे, माननीय दिग्विजय सिंह जी के साथ मंत्री रहे. अभी श्री हनी जी ने लगातार कई अच्छे सुझाव दिये हैं. सीनियर हमारे विधायक मंत्री रहे हैं. श्री कमल मर्सकोले जी, श्री फूलसिंह बरैया जी श्रीमती कंचन तनवे जी, हमारी बहन श्रीमती झूमा सोलंकी जी, जिन्हें मैं बरसों से जानता हॅूं, श्री पंकज उपाध्याय जी, श्री आशीष गोविन्द शर्मा जी और पिछली बार नेता प्रतिपक्ष जी ने बहुत अच्छा सुझाव दिया था कि वास्तव में आदिवासियों का भला करना है, तो पट्टों में सैटेलाइट इमेजरी को प्रूफ मानें. माननीय नेता प्रतिपक्ष जी आपके सुझाव को हमारे माननीय मुख्यमंत्री ने न केवल माना, बल्कि उसके लिए राशि रूपए 14 करोड़ मंजूर भी कर दिए हैं (मेजों की थपथपाहट) और 3 महीने में सेटेलाइट इमेजरी को प्रूफ के साथ हम प्रस्तुत करेंगे और जो आदिवासी बंधु पट्टों से वंचित रह गये हैं, उन आदिवासी बंधुओं के लिए बहुत बड़ा काम इस सरकार ने किया है.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इसमें सुझाव की एक लाइन और जोड़ना चाहता हॅूं कि जिन आदिवासियों की जमीनें कानून के हिसाब से वर्ष 2006-07 के पहले की हैं, जब सैटेलाइट इमेजरी आएगी, तो उनको आप पहुंचाएं, ताकि उन्हें यह न लगे कि हमारे साथ भेदभाव हुआ है. आप इस पर थोड़ा विशेष ध्यान रखेंगे.
डॉ.कुंवर विजय शाह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष जी के जो सुझाव हैं, मैं उन्हें सदन से आश्वस्त करना चाहता हूं कि 13 दिसम्बर 2005 की जो सैटेलाइट इमेजरी है और जिसने भी आपत्ति लगायी है कि मेरा पट्टा नहीं मिला, हम उसको फ्री में सैटेलाइट इमेजरी उपलब्ध कराएंगे, ताकि वह प्रूफ के साथ प्रस्तुत कर सके. मैं वर्ष 1984 की शुरूआत की बात कर रहा हूं. 2-3 दिसम्बर की भयावह रात, जहां भोपाल शहर में लोग सो रहे थे, उन्हें मालूम ही नहीं था कि हम सुबह उठेंगे या नहीं उठेंगे. जहरीली गैस लीकेज हुई, उससे 6 लाख लोग प्रभावित हुए और 3 हजार से ज्यादा हमारे बहन-भाई काल कलवित हो गए.जिनके सपने खत्म हो गये, जिनकी दुनिया उजड़ गई, कई स्थायी विकलांग हो गये. दुनिया की सबसे भीषण त्रासदी झेलने वाला प्रदेश है वह भोपाल शहर है. बड़े दुःख के साथ हम लोगों ने इसको झेला है. आरोपी और अपराधी आये 4 तारीख को आते हैं 5 तारीख को सरकारी हवाई जहाज से भाग जाते हैं अब कौन सी सरकार थी उनको किसने भगाया इसमें मैं नहीं जाना चाहता. लेकिन मुझे बड़ा दुःख होता है कि इतनी भीषण त्रासदी का अपराधी 4 तारीख को आता है और 5 तारीख को भागे और अपने तरीके से भागे. सरकार का हवाई जहाज लेकर के भाग गया, यह तो विचारणीय प्रश्न है माननीय नेता प्रतिपक्ष जी यह ऐसे कैसे हो सकता है ? इतना बड़ा अपराधी खैर उस बात को छोड़ो. उसके बाद 40 साल हो गये वह जो जहरीला कचरा जो वहां पर पड़ा था, लोग तिल तिल कर मर रहे थे, लोगों को डर के मारे नींद नहीं आती थी कि कचरे का क्या हुआ ? अब हमारे बच्चों का क्या होगा ? 40 सालों तक कई सरकारें आयीं और कई सरकारें चली गईं, पर हमारी डॉ.मोहन यादव जी के आने के बाद यह दायित्व मुझे दिया. विभाग में काम चेलेंज का है. मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को जो यहां पर हैं नहीं लेकिन उनके चेलेंज को हमने स्वीकार किया. माननीय नेता प्रतिपक्ष जी हम दिल्ली से पैसा लाये. सुप्रीम कोर्ट तथा हाईकोर्ट में लड़ाई लड़ी और वह सारा का सारा जहरीला कचरा सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के मार्गदर्शन में पीथमपुर में ले जाकर के समाप्त कर दिया गया और लोगों को राहत दी गई. आज की तारीख में भोपाल शहर की 88 एकड़ जमीन जिसको आने वाले समय में जनता के हित में आप लोगों से भी सुझाव लेंगे. माननीय मुख्यमंत्री जी भी दौरा करके आये हैं. 88 एकड़ जमीन मध्यप्रदेश के बच्चों के भविष्य में कैसे ला सकते हैं, हम काम करने वाले हैं. इस विषय को मैं ज्यादा नहीं बढ़ाना चाहता केवल हमारे सबनानी जी ने कहा था कि पहले हमारे जो गैस पीड़ित भाई बहन थे उनको हमारे अस्पतालों में इलाज होता था. 5 लाख रूपये आयुष्मान कार्ड का लाभ है जो प्रधानमंत्री जी ने दिया है, उसका लाभ गैस पीड़ितों को नहीं मिलता था. मेरे मंत्री बनने के बाद सबसे पहले उन गैस पीड़ित परिवारों को वह हमारे अस्पतालों में इलाज नहीं कराना चाहते हैं, वह एम्स तथा पीपुल्स में जाना चाहते हैं तथा दूसरी प्रायवेट अस्पतालों में जाना चाहते हैं उनको 5 लाख तक का इलाज आयुष्मान कार्ड से उसके बाद भी कुछ पैसा लगे तो हम हैं ना, हम देंगे. एक भी गैस पीड़ित का आयुष्मान कार्ड से ज्यादा का पैसा खर्च हो जाता है माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी तो उसके लिये मोहन सरकार है और हम दे रहे हैं. किसी भी गैस पीड़ित की आंखों में हमने आंसू नहीं आने दिये हैं, ऐतिहासिक काम हमने किया है. हमारे अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी थी चूंकि जितना पैसा माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी देते हैं उससे कम हमारे गैस वाले देते थे. हमारे यहां पर डॉक्टरों की कमी थी इसलिये हमने अभी एक साल पहले उनके वेतन बढ़ा दिये. वेतन बढ़ाने के बाद करीबन 80 लाख का कर्ज लिया. जो हमारे पास में आ गये जिनका एक लाख वेतन था उनका दो लाख कर दिया, जिनकी एक लाख थी उनकी 1 लाख 99 कर दिया. यह कनिष्ट व वरिष्ठ परामर्शीय समिति के माध्यम से किया गया. ज्यादा तो मैं नहीं जानता हूं. जिनका वेतन 53 हजार था उसका वेतन 1 लाख 25 हजार कर दिया. उद्देश्य क्या था कि हमारा गैस-पीड़ित परिवार का व्यक्ति इलाज से वंचित न रहे, हमारी भावना अच्छी थी डॉक्टर जो कम पैसे में नहीं आते थे, डॉक्टर आने लगे. इसके साथ इस विषय को और आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं. आने वाले समय में सभी जनप्रतियों से और नेताओं से पूछकर इस 88 एकड़ जमीन को मध्यप्रदेश शासन और जनता के हित में आगे ले जायेंगे. मैं इस ऐतिहासिक काम के लिये माननीय मुख्यमंत्री जी को पुनः धन्यवाद देता हूं. मैं तो चाहता हूं कि इस बात के लिये पूरा सदन उनको धन्यवाद दें. जो काम 40 साल से नहीं हुआ, वह काम करके दिखाया इससे ज्यादा इस विषय पर कुछ नहीं कहना. माननीय अध्यक्ष जी दूसरा विषय है हमारा जनजातीय कल्याण में भी हमारी सरकारों ने बड़ी गंभीरता से इसको लिया है. मेरा यह मानना है कि जो हमारे आदिवासी विधायक हैं, जिन्होंने इस चर्चा में भाग लिया. बहुत मुश्किल से एक विधायक चुनकर आता है जनजाति क्षेत्रों से, चाहे वह किसी पक्ष का हो. लेकिन मैं आश्वस्त करता हूं कि बिना भेद भाव के कम से कम 10-10 करोड़ रुपए के काम तो मैं दूंगा, जिन्होंने यहां भाग लिया, जो आदिवासी है, चाहे उनके छात्रावास हो या कुछ भी निर्माण कार्य दें.
डॉ सीतासरन शर्मा – जो यहां सुनने के लिए बैठे रहे, उनको भी कुछ दीजिए.
डॉ. कुंवर विजय शाह – उनके बारे में बाद में आएंगे सर, बोला वही है, जिसके मन में दुख था, तकलीफ थी, इसलिए पहले उनको मिलना चाहिए.
श्री भंवर सिंह शेखावत – जो इतनी देर से आपका भाषण सुनने के लिए लोग बैठे हैं, हम लोग क्या पागल है, इनको दस दस करोड़ रुपए, हमको पांच पांच करोड़ तो दो भाई,(…हंसी) भाषण सुनने के लिए हम साढ़े आठ बजे तक बैठे हैं, बदनावर जिस विधान सभा से मैं आता हूं, वहां 60 प्रतिशत आदिवासी हैं, उनके लिए भी कुछ करो.
डॉ. कुंवर विजय शाह – अध्यक्ष जी, भंवर सिंह जी हमारे नेता रहे हैं, जब मैं कॉलेज में पढ़ता था, तो इनके भाषण सुनने जाया करता था.
अध्यक्ष महोदय – उस्ताद है.
डॉ. कुंवर विजय शाह – उस्ताद को मैं सलाम करता हूं और उस्ताद का कहा तो पट्ठा मना कर ही नहीं सकता. इसलिए उनका कहना जो उनका क्षेत्र भी आदिवासी बहुल्य है, वे जो कहेंगे, निश्चित हम करेंगे. मैंने पहले ही कहा कि मुझे 35 साल हो गए, इस सदन का सदस्य होते हुए लगातार, राजनीतिक रूप से कभी भेदभाव करके या चेहरा देखकर जैसे हमारी बहन ने लगाई थी कि हमारे काम नहीं होते, उस विषय पर आउंगा अभी. केवल मैं तो यह कहना चाहता हूं कि फुन्देलाल जी ने जो दुख व्यक्त किया. आपने कहा कि हम सब पागल है, अध्यक्ष जी, जो पागल होता है, वह इस विधान सभा का सदस्य नहीं होता है. (...हंसी) तो मैं माननीय शेखावत जी को आश्वस्त कर देता हूं कि आप पागल नहीं है और कोई भी सदस्य यहां पागन नहीं है. अगर पागल होता तो अध्यक्ष जी इस कम्पाउंड में उसे घुसने नहीं देंगे वह विधायक नहीं रहता. (..हंसी)
अध्यक्ष महोदय – लेकिन जो लोग पूरे टाइम बैठते हैं, उनकी कद्र तो होनी चाहिए, भंवर सिंह जी भी उसी में से हैं.
डॉ. कुंवर विजय शाह – अध्यक्ष जी, आपका निर्देश सिर-माथे पर, यह डॉ. मोहन जी की सरकार है. इन्होंने जो भी, माननीय सदस्यों ने, जो नहीं भी बोल पाए, समय की अपनी मर्यादा है, उन्होंने जो सुझाव दिए, मैं पूरी कोशिश करुंगा कि एक भी विधायक जिन्होंने चिट्टी भी दी वह निराश न हो. हमारा दायित्व है, हमारा धर्म है, वे जो मांग रहे हैं खुद के लिए नहीं मांग रहे हैं, वे समाज, प्रदेश और क्षेत्र के लिए मांग रहे हैं, इसलिए ज्यादा से ज्यादा हम आपको देंगे, एक भी आदमी यहां से निराश होकर नहीं जाएगा. (...मेजों की थपथपाहट)
नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) - भाषण ऐसा लग रहा है कि जैसे एक नंबर की तैयार है(..हंसी)
डॉ. कुंवर विजय शाह – भैया, यहीं रहने दो, अभी तो लोग यहां भी पीछे पड़े हैं(..हंसी) आदरणीय बुआ जी के साथ, जो मेरी प्रभारी मंत्री भी थीं और वर्षों उनसे सीखने को मिला, आपने भी उनसे ही गुरुदीक्षा पाई होगी. किसी दिन बुआ जी पर चर्चा अलग से कर लेंगे. उनका बहुत सारा प्रभाव आप पर देखने को मिला, इसलिए आप अच्छा बोलते भी हैं और आवाज तो बहुत गजब की है, अमिताभ बच्चन के बाद यदि किसी की आवाज है तो, वह आपका ही गला है. (..हंसी)
श्री उमंग सिंघार – मैं बजट नहीं दे सकता, बजट तो आप ही दोगे, आप मेरी तारीफ करोगे, तो फिर भी बजट आप ही देंगे.
अध्यक्ष महोदय – विजय जी, विषय पर ही रहे. (..हंसी)
डॉ. कुंवर विजय शाह – अध्यक्ष जी, हमारी सरकार ने कभी कल्पना की कन्या शिक्षा परिसर की, जहां हमारी बहनें पढ़ती हैं, उनको बार बार घर न जाने पड़े, सुरक्षा हो, इसलिए कन्या शिक्षा परिसर की कल्पना हमने वर्ष 2004 में की जब हमारी सरकार बनी, उस समय वर्ष 2004 में दो कन्या शिक्षा परिसर थे और आज हम 88 ब्लॉकों में 40-40 करोड़ से कन्या शिक्षा परिसर खोल रहे हैं.
डॉ.सीतासरन शर्मा -- माननीय मंत्री जी, आपसे यह निवेदन है कि हमारे कन्या शिक्षा परिसर को ऑडिटोरियम दे दीजिये, इटारसी में कन्या शिक्षा परिसर है, वहां पर बच्चियों के ऑडिटोरियम की मांग है, कृपा कर दे दीजिये.
डॉ. कुंवर विजय शाह -- शर्मा जी ऑडिटोरियम के लिये दो करोड़ रूपये दे देंगे. अब बीच में कोई नहीं बोले भईया कुछ नहीं मिलेगा.(हंसी) ..अब जो बीच में बोलेगा उसको कुछ नहीं मिलेगा, शर्मा जी हमारे पुराने विधानसभा अध्यक्ष रहे हैं.(हंसी)..
अध्यक्ष महोदय, सरकार ने कल्पना की कि हमारे आदिवासी बच्चियों को छठवीं, से बारहवीं तक सुरक्षित आवास मिले, अच्छा खाना मिले और इसकी कल्पना की और वर्ष 2004 से जब हमने इसकी शुरूआत की और आज मुझे यह बतलाते हुए गर्व है कि हम 57 कन्या शिक्षा परिसर बना चुके हैं और बाकी जो रह गये हैं, वह आने वाले साल में बन जायेंगे, एक कन्या शिक्षा परिसर में 480 बहनें रहती हैं, उनका रहना खाना, सब उनका वहां रहता ही है, इसके अलावा उनको 3 हजार रूपये साल का अलग से मिलता है, ताकि वह अपने ब्लेजर या दूसरे कोट वगैरह ले सकें और कन्या शिक्षा परिसर को अभी हमारे श्री शरद जुगलाल कोल जी कह रहे थे कि आदिवासी कन्या शिक्षा, एस.सी. फलाना, फलाना हमारे मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर हमने निर्देश जारी कर दिये हैं कि माता शबरी अब उनके बारे में डिटेल में मैं नहीं जाऊंगा क्योंकि समय कम है, जितने कन्या शिक्षा परिसर हैं, उन सबके नाम माता सबरी कन्या शिक्षा परिसर होंगे (मेजों की थपथपाहट) आज के बाद से कोई भी उनको एस.सी.एस.टी. छात्रावास के नाम से नहीं बोलेगा. मैं आज ही आदेश जारी कर रहा हूं. हमारे जितने आदिवासी छात्रावास बालकों के हैं, वह शंकर शाह, कुंवर रघुनाथ शाह, जिनको अग्रेंजो ने तोप के मुंह में बांधकर जिनके चिथड़े उड़ा दिये, वह बाप बेटे जिन्होंने आजादी के लिये अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया, उनके नाम पर होंगे ताकि उनके इतिहास को आने वाली पीढ़ी याद रखे और जितने आदिवासी छात्रावास होंगे, लगभग 1800-2000 उन सबके नाम शंकर शाह, रघुनाथ शाह आदिवासी छात्रावास के नाम से होंगे (मेजों की थपथपाहट) और जितने हमारी बहनों के छात्रावास होंगे, उनके नाम रानी मां दुर्गावती के नाम से होंगे, उनके बारे में बतलाने की जरूरत नहीं है, उनका नाम ही काफी है. रानी मां दुर्गावती के नाम पर जितने भी छात्रावास होंगे, उन सबके नाम की आज मैं घोषणा करता हूं कि मध्यप्रदेश में जितने आदिवासी छात्रावास होंगे, वह अब रानी मां दुर्गावती कहलायेंगे. हम उनको सम्मान देना चाहते हैं, यह हमारे पूर्वज हैं, जिन्होंने चाहे मुगलकाल हो, चाहे अग्रेंजों से देश की आजादी में भाग लिया हो, हम उनको याद करना चाहते हैं, हम उनको सम्मान देना चाहते हैं.
अध्यक्ष महोदय, उसी तरह से आदर्श आवासीय विद्यालय जो बच्चों के हैं, वह केवल अभी तक प्रदेश में 8 हैं, जहां 250 बच्चे पढ़ते हैं. हमारे सभी माननीय सदस्य अधिकांश एस.टी. वर्ग से भी हैं, अब यह 8 के हम 88 कर रहे हैं, एक का चालीस करोड़ कर रहे हैं. अभी 8 हैं आने वाले तीन साल में यह 88 के 88 बालक छात्रावास हर आदिवासी ब्लॉक में बन जायेंगे, जहां आपके हमारे बेटे पढ़ेंगे, इसके लिये भी हमने एक हजार करोड़ रूपये रखा है, बाकी आवश्यकता पड़ेगी, तो तीन साल में यह पूरे हो जायेंगे. मैं सदन में यह कहना चाहता हूं कि कोई भी माननीय सदस्य वंचित नहीं रहेगा कि मैं तो दूसरी पार्टी से हूं, मैं तो कांग्रेस पार्टी से हूं, मैं फलानी पार्टी से हूं, तो डॉ. मोहन जी ने नहीं दिया है, क्योंकि आप किसी भी पार्टी से आये हों, आप जनप्रतिनिधि हो और बेटा-बेटी हमारे समाज के हैं, यह हमारा दायित्व है, हमारा धर्म है और हम इसको पूरा कर रहे हैं, यह ऐतिहासिक काम आपके नेतृत्व में इस विधानसभा में हो रहा है (मेजों की थपथपाहट)
अध्यक्ष महोदय, छात्रावासों के संचालन में बहुत शिकायतें आती थीं, गद्दा खराब है, तकिया खराब है, भ्रष्टाचार हो गया, हमने एक समिति बनाई और एक साल उसका परीक्षण किया. हमने कुछ अधिकारी बहनों और भाईयों को इस काम में लगाया और कहा कि जाओ छात्रावासों में जाकर देखों कि तकलीफ क्या है? और पूरे प्रदेश के छात्रावासों में जब समिति गई और उन्होंने कहा कि साहब देखो कि जो खरीदी करते हैं, वह गड़बड़ करते हैं और कई बार तो बिल लगा देते हैं, फिर हम जांच करते हैं, लेकिन हमने तय कर दिया है कि यह जो गद्दा, तकिया, पलंग यह हमारे जो कन्या शिक्षा परिसर हैं और आवासीय इसमें छोड़कर के कितने छात्रावास हैं, वहां पर हम सब बच्चों के खाते में 6 हजार रूपये, 7 सात हजार रूपये देंगे और कोई भी हमारा अधिकारी इनकी खरीदी नहीं करेगा (मेजों की थपथपाहट) बच्चे का एडमिशन हुआ अध्यक्ष जी, डीबीडी के माध्यम से प्रधानमंत्री जी ने कहा पूरा पैसा उसके खाते में जायेगा ताकि अपना वह अच्छा तकिया, गद्दा ले सके और आरोप प्रत्यारोप से मध्यप्रदेश की सरकार बचे और बच्चे अच्छा काम करें. इसके लिये हमने आदेश ही जारी नहीं किये हैं माननीय अध्यक्ष जी पैसा भी डाल दिया है. डाल दिया न भाई (अधिकारी दीर्घा की ओर देखते हुये) डाल दिया है और फिर देखा गया जैसा बहन ने बताया था कि बाउंड्रीवाल नहीं है, जितने कन्या बहनों के छात्रावास हैं बहन जी, सालभर के अंदर जितना पैसा लगे एक भी नहीं छोड़ेंगे और कुछ रह गया तो दो साल के अंदर हम कम्पलीट कर देंगे, बिना बाउंड्रीवाल के एक भी छात्रावास बहनों का नहीं रहेगा और केवल इतना ही नहीं कई बार बाहरी लोग आ जाते हैं मुझे कहना नहीं चाहिये, बोलते हैं हम इनके भाई हैं, इनकी बहन हैं, इनके रिश्तेदार हैं बच्चों को छुट्टी कराकर ले जाते हैं. बच्चे कब जाते हैं शुक्रवार, शनिवार को और सोमवार को आते हैं. अब कोई जायेगा तो हमारी टीम ने एक साल का परीक्षण किया है, उन्होंने कहा कि सीसीटीवी कैमरे लगाओ, कोई बाहरी व्यक्ति नहीं आये, बच्चे सुरक्षित रहें और कौन किसके साथ हमारी बहन गई, भैया गया, कब गया, कब आया हमारे भोपाल में दर्ज हो जायेगा वहां भी दर्ज हो जायेगा तो सीसीटीवी कैमरे, फेस स्केनर, फिल्टर पानी और ऐसी अनेक चीजें हैं. माननीय अध्यक्ष जी, बिजली का बिल 100 करोड़ से ऊपर आता है हमारा, कैसे कम करें, अब सारे छात्रावासों में हम सौर ऊर्जा लगा रहे हैं. 100 करोड़ का बिल हमारा 40-50 करोड़ का हो जायेगा तो 50 करोड़ तो बचेंगे, यह हमने निर्णय ले लिया है ऐसे अनेक निर्णय, बच्चों को कम पड़ता था पैसा, जब मैं खाद्य मंत्री था तो मैंने 15 किलो अनाज 1 रूपये किलो में देना शुरू किया, वह आज भी जारी है. शिष्यावृत्ति के अलावा अगर वह एससी एसटी का बच्चा है, छात्रावास में रहता है तो 10 किलो गेहूं और 5 किलो चावल केवल 15 रूपये में एक रूपया किलो पूरे हिन्दुस्तान में कोई नहीं देता, लेकिन हमारी मोहन यादव जी की सरकार देर ही है. अच्छा आहार मिले, हिंदुस्तान में कहीं नहीं है, मैंने पता किया था. हम कोई एहसान नहीं कर रहे, हम केवल हमारा धर्म और हमारा फर्ज निभा रहे हैं. माननीय नेता प्रतिपक्ष जी आपका सहयोग मिलेगा तो आगे भी निभा देंगे. (हंसी) इसी तरह हमारे जो सांदीपनी विद्यालय हैं सीएम राइज स्कूल, सीएम राइज में अभी हमारे कई माननीय सदस्यों ने कहा कि विद्यालय खुल गये, परिवहन के लिये व्यवस्था, बसे नहीं हैं. आप चिंता मत करो, इस बार हमने कुछ पैसा रखा है और जहां-जहां सांदीपनि विद्यालय हैं, सीएम राइज हैं उसमें बच्चों को लाने के लिये बस की सुविधा आने वाले वित्तीय वर्ष से चालू कर दी जायेगी. जिन सदस्यों ने यहां भाग लिया है उनके यहां पहले की जायेगी.
अध्यक्ष महोदय-- कितना समय और लेंगे मंत्री जी, नागर सिंह जी को भी बोलना है.
डॉ. कुंवर विजय शाह-- अध्यक्ष जी, बस 10 मिनट. माननीय अध्यक्ष जी, हम लोग बड़े दिल से काम करते हैं जो हमारे जिले हैं जिले में कॉलेज खोल दिये खासकर हमारी बहनें कॉलेज में कम आती थीं एक तो बस नहीं मिलती थी और बस फुल भर जाती थी तो धक्का मुक्की होती थी तो बहनें हमारी कॉलेज नहीं पहुंच पाती थीं. माननीय अध्यक्ष जी, हमने एक प्रयोग किया. हमने सीएसआर से 4-5 बसे कॉलेज को दे दीं तो जहां हरसूद के कॉलेज में 20-25 परसेंट हमारी बहनें आती थीं तो मेरी 5 बस दान करने से मैंने कहा बेटा करोड़, डेढ़ करोड़ की बस हमसे ले जाओ, डीजल डाल लो और ड्राइवर को रख लो, आज 70-80 प्रतिशत बहनें हमारी कॉलेज आने लगीं और उस बजट को हमने माननीय मुख्यमंत्री जी को दिखाया है और आने वाले समय में कॉलेज खोलने से कुछ नहीं होगा, क्योंकि एक कॉलेज खोलते हैं पढ़ाने वाला जो लेक्चरर होता है उसकी 2 लाख, ढाई लाख तनख्वाह होती है उसमें कम से कम 10 लोग रखना पड़ते हैं, उससे अच्छा है हम 10 बसें दे दें जिससे हमारे ब्लॉक के आदिवासी भाई बहन कुक्षी में, डही में आकर के पढ़ लेंगे. अभी आप बता रहे थे कि डही से कुछी दूर पड़ता है, हम बस दे देंगे, वह योजना हमारी माननीय मुख्यमंत्री जी को है, सबको है. जितने हमारे 88 ब्लॉक हैं, जहां-जहां कॉलेज हैं, वहां के आसपास के भाईयों, बहनों को हम बस से लायेंगे, बस से छोड़ेंगे तो हमारा शिष्यावृत्ति का पैसा भी बढ़ेगा, बच्चे शाम को घर पहुंच जायेंगे, सुरक्षित रहेंगे और ऐसी इनोवेटिव योजना आदिवासी बच्चों के हित में लेकर आ रहे हैं इसके अलावा हमारे जितने जिला मुख्यालय हैं भाई लोग तो पढ़ लेते हैं लेकिन बहनों के लिये 100-100 सीटर छात्रावास एक भी ट्रायवल जिला ऐसा नहीं बचेगा बिना भेदभाव के आने वाले तीन साल में हर जिले में केवल आदिवासी जिलों में नहीं क्योंकि सीहोर में भी विदिशा में भी आदिवासी हैं. हर जिले में जहां आदिवासी पढ़ना चाहता है हमारी बहनों के लिये 100-100 सीटर छात्रावास तीन साल में 7-7 करोड़ के सब जगह बनाये जायेंगे. आवास सहायता योजना जहां हमारे डेढ़ लाख बच्चे यह भी मैंने बनाई थी. ब्लाक में एक हजार,जिले में बारह सौ पचास,संभाग में दो हजार. जब से मैं हट गया 10-12 साल हो गये पैसा नहीं बढ़ा महंगाई बढ़ गई मुख्यमंत्री जी से निवेदन करेंगे और कैसे इस आवास योजना को और अच्छा बनाएं क्योंकि बच्चा जब किराये के मकान में जाता है आप बहन,भाई सबको मालुम है तो मकान मालिक बोलता है कि तुम तो एससी,एसटी के हो तुम्हारी क्या गारंटी तुम्हारा पैसा आखिरी में आता है तुम तो एडवांस दो तो आदिवासी आवास लेता ही नहीं पढ़ाई छोड़कर घर बैठ जाता है यह अनुभव आया है. हम नयी योजना इसके लिये लेकर आ रहे हैं अभी आप सब लोगों से मिल जुलकर ताकि उसको बेइज्जत न होना पड़े और सम्मानपूर्वक हम एमओयू कर रहे हैं कि जो दस बच्चे बच्चियों को रखने की गारंटी रखेगा उसको हम साल भर पैसा देंगे. विभाग एमओयू करेगा. हमारे एससी,एसटी बच्चों को वह मान सम्मान के साथ रखे इसके लिये हम नयी योजना लेकर आ रहे हैं. अभी यहा बताया गया कि कितने आदिवासी बच्चे आईएएस,आईपीएस बने कितने पीएससी में सलेक्शन हुए. देश की आजादी के बाद 1956 में मध्यप्रदेश के निर्माण के बाद माननीय नेता प्रतिपक्ष जी मुझे बोलना प ड़ता है कि बहुत सी सरकारें आईं. किसी ने यह नहीं सोचा कि हमारे आदिवासी बेटा,बेटी इन्दौर,भोपाल,शहडोल,उज्जैन,जबलपुर वहां रहकर बड़ी-बड़ी दृष्टि,सृष्टि जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियां सिखाती हैं उनके साथ में रहना,खाना फ्री और उनको अच्छी ट्रेनिंग देकर हम आईएएस बने,डिप्टी कलेक्टर बनाएं कहते हुए मुझे बहुत हर्ष है. मैं अपने हाथों से अपनी पीठ थपथपा रहा हूं क्योंकि अपने हाथों से वही अपनी पीठ थपथपाता है जिसके हाथ बड़े होते हैं. 16-16 करोड़ रुपये माननीय मुख्यमंत्री जी ने मुझे दिया है और आने वाले दो महिने के अंदर इन्दौर,भोपाल,उज्जैन,शहडोल,जबलपुर में दो-दो सौ बेटा,बेटी आईएएस और दूसरी ट्रेनिंग शुरू कर देंगे जहां रहना फ्री खाना फ्री और एक बच्चे पर लगभग दो-ढाई लाख एक बच्चे पर खर्च होगा. दो-दो साल के लिये हर जिले से 10 बेटा,10 बेटी लायेंगे और उनके साथ उनकी पढ़ाई की शुरुआत करेंगे. हममें से ही कोई बच्चा यहां आकर बैटेगा. यहां मतलब आईएएस ही बैटते हैं.
श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत अच्छी बात कह रहे हैं होस्टल खोलने के लिये आदिवासियों और दलितों के लिये होस्टल ही खुल रहे हैं. पदोन्नति के अंदर प्रमोशन पिछले पांच साल से बंद हैं. पदोन्नति कब होगी यह बता दें. नये बच्चे कब बनेंगे जो अभी अधिकारी रिटायर हो जायेंगे क्या उनको पदोन्नति का अधिकार नहीं है. उनकी तो बात नहीं हो रही. एक और कहता हूं आईटीडीपी, इंटीग्रेटेड ट्रायवल प्रोजेक्ट उसमें केंद्र सरकार ने कितना पैसा दिया क्या बढ़ाकर दिया यह भी पूरे प्रदेश को आप बता दें.
डॉ.कुंवर विजय शाह - माननीय नेता प्रतिपक्ष जी आपको बीच में डिस्टर्ब करके बोलने का अधिकार है.इसीलिये मैं आपको रोकूंगा नहीं लेकिन नीतिगत विषय जो माननीय मुख्यमंत्री जी को निर्णय करना है आपकी मैं मुख्यमंत्री जी के साथ बैठक करा दूंगा.
श्री उमंग सिंघार - आप विभाग के मंत्री हैं और आप आदिवासी हैं और दलित डिपार्टमेंट को लेकर बैटे हैं. दलित और आदिवासियों के लिये आपको बोलनी चाहिये.
डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय - माननीय अध्यक्ष महोदय, निश्चित रूप से आपका नेतृत्व जब से इस सदन को मिला है और आज का दिन तो इतना प्रसन्नतादायक रहा कि निश्चित रूप से हम सभी सदस्य प्रसन्न हैं. पीडब्लूडी का आपने बजट पारित कराया. चहुं दिशाओं से धन्यवाद आया. पूरे सदन ने लगभग लोगों ने धन्यवाद दिया लेकिन आज की जो खूबसूरती रही इस बजट की. एससी,एसटी का बजट आ रहा है. तो दोनों पक्षों की ओर से. उधर विपक्ष की ओर से पंकज उपाध्याय जी, ब्राह्मण हैं. मैं जातिगत बात नहीं कर रहा हूँ. इधर से पक्ष की ओर से श्री आशीष गोविन्द शर्मा जी. वे भी ब्राह्मण हैं. दोनों ब्राह्मण हैं. संयोग है कि क्षत्रीय ही सभी समाज का संरक्षण करता आया है, आप क्षत्रीय के रूप में आसंदी पर बैठकर हमारा संरक्षण कर रहे हैं. (हंसी). माननीय अध्यक्ष महोदय, इससे बड़ी सामाजिक समरसता मध्यप्रदेश विधान सभा की और क्या होगी. सामाजिक समरसता का आपके नेतृत्व में इस बजट के माध्यम से समस्त वर्गों ने, न केवल मध्यप्रदेश को, पूरे देश को संदेश दिया है. मैं आपका हृदय से धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ. माननीय मंत्री जी का धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ.
अध्यक्ष महोदय -- विजय जी को भाषण पूरा कर लेने दें.
डॉ. कुंवर विजय शाह -- माननीय अध्यक्ष जी, आपके सानिध्य में और मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में अभी जैसा कि नेता प्रतिपक्ष जी ने बताया, सभी माननीय सदस्य और नेता प्रतिपक्ष जी, हम केवल परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण सेंटर नहीं खोल रहे हैं. जब मैं गांवों में जाता हूँ तो देखता हूँ कि हमारी सरकार कैसे काम करती है. एक गांव में मैं गया, एक बड़े व्यापारी की बिटिया थी. मैंने पूछा कि बेटा, तुम अब कहां जाओगी. बोली कि अंकल जी, मैं तो इंदौर जा रही हूँ नीट, क्लैट, जेईई की तैयारी करने के लिए. मैंने पूछा कि बेटा, कितना पैसा लगेगा. बोली कि दो लाख रुपये लगते हैं. दो लाख रुपये, मैंने कहा, बात तो खत्म हो गई वह जा रही है तैयारी करने के लिए, लेकिन अध्यक्ष जी, मेरे मन में आया कि क्या कोई गरीब का बेटा-बेटी नीट, जेईई और क्लैट की तैयारी करने के लिए दो लाख रुपये साल में दे सकता है. केवल इस बात को सोचकर हमने निर्णय कर लिया कि इंदौर और भोपाल में 600 बेटा-बेटी को हमने रखा है तथा क्लैट, नीट और जेईई की तैयारी हम करवा रहे हैं. दो-दो लाख रुपये खर्च कर रहे हैं. यह सरकार की नीति और नियत है. मोहन सरकार को आप धन्यवाद दे सकते हैं. आने वाले समय में इसको खण्डवा में और खोलेंगे, जबलपुर में और खोलेंगे और जहां भी आवश्यकता लगेगी और खोलेंगे. कोई भी बेटा-बेटी को नीट, जेईई और क्लैट की तैयारी के लिए किसी ने सोचा नहीं होगा. अध्यक्ष जी, दो लाख और ढाई लाख रुपये हम खर्च करेंगे. सपनों को साकार करने वाली मोहन जी के ड्रीम प्रोजेक्ट को साकार करने वाली योजना लाए हैं. अभी हमने इसको नाम नहीं दिया है. हो सकता है कि मोहन जी का ड्रीम प्रोजेक्ट इस योजना को नाम दे दें. आने वाले समय में ऐसी कई योजनाएं हम चलाने वाले हैं.
अध्यक्ष जी, प्रधानमंत्री जनमन योजना, पीवीटीजी योजना, पिछड़ी जनजाति, सहरिया, बैगा और भारिया, देश की आजादी के बाद किसी ने नहीं सोचा. जब प्रधानमंत्री जी ने लागू किया तो हमें भी मन में शंका हुई कि इससे तो वोट मिलेंगे नहीं, ये क्यों कर रहे हैं, लेकिन अध्यक्ष जी, प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री हैं. क्या सोच है. सेटेलाइट से ज्यादा देखते हैं. उन्होंने देखा कि अगर पीवीटीजी को हमने मकान नहीं दिया तो आने वाले समय में, क्योंकि आजादी के 70 साल में तो नहीं मिला, और भी नहीं मिलेंगे और इसलिए उन्होंने कहा कि नहीं, 8 हजार करोड़ रुपये विजय भाई, हम मध्यप्रदेश को दे रहे हैं, जितने पीवीटीजी हैं, एक लाख छियासी हजार लोगों को दो-दो लाख रुपये के मकान दे दिए. आधे मंजूर हो गए. आधे बन गए और आधे और बन जाएंगे. मध्यप्रदेश का जब आने वाला स्थापना दिवस होगा तो नेता प्रतिपक्ष को भी हम बुलाएंगे. ये एक लाख छियासी हजार लोगों को, जिनको दो-दो लाख रुपये के मकान मिले हैं, प्रधानमंत्री जी के साथ आप आइये. हम प्रधानमंत्री जी का स्वागत करेंगे. पूरे हिन्दुस्तान में पीवीटीजी का इतना बड़ा काम नहीं हुआ है. अध्यक्ष जी, इससे वोट नहीं मिलेंगे, इससे सरकारें नहीं बनेंगी. लेकिन क्या सोच है, उनके लिए पैसा जो सबसे नीचे हैं, सबसे पीछे हैं. उनको आगे लाना है. जो दीनदयाल जी का सपना है, उस सपने को साकार करने वाले प्रधानमंत्री जी श्री नरेन्द्र मोदी जी के लिए आप चाहें तो तालियां बजा सकते हैं. मैं रोकूंगा नहीं. न बजाएं तो आपकी इच्छा. पर उन्होंने ऐसा किया है. अध्यक्ष महोदय, मैं एक भी असत्य बात नहीं बोल रहा हूँ.
अध्यक्ष महोदय -- अब आगे तो बढ़ें, 10 मिनट हो गए हैं.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- जापान से बुलेट ट्रेन लेट आएगी, लेकिन लगता है कि इनके भाषण की बुलेट ट्रेन जल्दी आ गई है.
डॉ. कुंवर विजय शाह -- माननीय नेता प्रतिपक्ष जी, बस दो प्वॉइन्ट और हैं. अध्यक्ष महोदय, आदिवासियों के देव स्थान कई जगह फॉरेस्ट के अंदर होते थे. वन विभाग वाले जाने नहीं देते थे, मैं भी रहा हूँ वन विभाग में, आप भी वन विभाग में रहे हैं, वन विभाग वाले पूजा करने के लिए नहीं जाने देते थे. वे कहते थे, यहां नहीं करना. हमारी पूरा, हमारी आस्था, हमारे विश्वास का वह केन्द्र, आदिवासी जनजाति का वह हमारा बड़ा देव का मंदिर, बडे़ देव की पूजा, अब हमने तय कर लिया है कि पहली बार आदिवासी देव स्थान और आदिवासी मान्यता है, उन देव स्थानों की.
रिपेयरिंग और पूजा को कोई फॉरेस्ट वाला भी मना नहीं कर पायेगा. इधर हो, तो देख लेना और समझ लेना, वहां रिपेयरिंग करेंगे और अध्यक्ष जी, हमने वहां 5 करोड़ रुपये की राशि पहली बार रखी है. अगर आवश्यकता पड़ी, आदिवासी के देवस्थान पूरे मध्यप्रदेश में ठीक करने के लिए तो यह सरकार 500 करोड़ रुपये भी रखेगी. (मेजों की थपथपाहट) यह हमने पहली शुरुआत की है, हम धन्यवाद दे सकते हैं. आप नहीं देना चाहो, तो यह अलग बात है. लेकिन हमने यह व्यवस्था की है.
माननीय अध्यक्ष जी, (एक पुस्तक को हाथ में पकड़कर दिखाते हुए) आप सब लोगों ने यह पुस्तक देखी होगी. 'शासकीय प्रतिवेदन' इसमें एक आदिवासी बालिका है, जो आदिवासी गौंड वेशभूषा में खड़ी हुई है. यह कौन लड़की है ? इसका क्या नाम है ? यह सरकार कैसे काम करती है ? मैं जबलपुर एक हॉस्टल में गया था, तो वहां हमारी बहनों ने कहा कि मंत्री जी, आप इतना काम कर रहे हैं, तो हमको तो मालूम ही नहीं पड़ता है. मेरा नाम शालिनी है. आप कुछ ऐसा नहीं कर सकते कि हमारे मोबाइल में सब कुछ आ जाये. मुझे यह बात चुभ गई. हमने शालिनी ऐप लांच कर दिया. 10 हजार लोगों ने गूगल से डाउनलोड कर दिया. ट्रायबल डिपार्टमेंट की सारी योजनाएं इस शालिनी ऐप में हैं (मेजों की थपथपाहट) और मुख्यमंत्री जी ने इसका उद्धाटन कर दिया. इसमें शालिनी बेटी का हमने फोटो छापा है, हम ऐसा काम करते हैं और एक साथ दस लाख लोग शालिनी ऐप देख सकते हैं. सारी ट्रायबल डिपार्टमेंट की योजनाएं, मैं यह फोटो दिखा रहा हूँ, (शासकीय प्रतिवेदन की किताब के पन्ने पलटते हुए) यह आदिवासी गरीब परिवार के बच्चे हैं, जिन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि हम 40 से 50 हजार डॉलर प्रतिवर्ष खर्च करके विदेश में पढ़ेंगे. इनके माता-पिता ने भी कभी नहीं सोचा, इनके सपनों को साकार अगर किसी ने किया है, तो हमारे डॉ. मोहन यादव जी ने किया है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने फोटो सहित इसलिए छापा है कि कोई यह न बोले कि नाम क्या है ? पता क्या है ? कहां कर रहे हैं ? क्या पढ़ रहे हो ? तो मैंने श्रीमान् जी आपके सबके बस्ते में डाल दिया है और इस सपने को हम और आगे साकार करें और बच्चे जाएं. पहले 10 बच्चे जाते थे, डॉ. मोहन जी ने बोला कि विजय शाह जी 50 बच्चे कर दो, कोई कमी नहीं है. अगर आदिवासी बच्चा दुनिया में कहीं पर भी पढ़ना चाहता है तो 40 हजार डॉलर और 10 हजार डॉलर दूसरे, इस प्रकार हम 50 हजार डॉलर प्रतिवर्ष खर्च करते हैं. अगर हमारे जमाने में यह योजना होती, तो हम भी विदेश जाकर पढ़ लेते. (हंसी) हम क्यों नहीं पढ़ पाये कि उस समय सरकार ने ऐसी योजना नहीं बनाई थी, तो आज ऐसी अनेकों चीजें हैं, हम क्या-क्या बताएं ?
अध्यक्ष महोदय, आज एक चीज और बताई हमारे अलावा जी ने कि लोन लेने जाता है तो बड़ी बेइज्जती महसूस होती है, तो लोन नहीं मिलता है. हम वित्त निगम चला रहे हैं, हम फलां-फलां चला रहे हैं, आपको भी अनुभव है. हम सब बैठकर सारे आदिवासी विधायक मुख्यमंत्री जी के साथ बैठते हैं कि हम कैसे आदिवासियों को अपने पैरों पर खड़ा करें ? यह जो लोन की बेइज्जती होती है, उसके लिए क्या करें ? छोटी-छोटी नौकरियों में कैसे लगाएं ? अभी आरोप लगा रहे थे कि हमारे हनी भैया कि 6 हजार पद भर लिये हैं, वह सब भाजपा के हैं. यह भाजपा के नहीं है, किसी ने अगर गलत भरा हो तो इसको फिर से निकालकर फिर से परीक्षण करके यह पैसा जनता के हित में है, अगर थोड़ा भी आरोप होगा तो 6 हजार के 6 हजार हम बाहर करके और बिना केवल आदिवासी विचारधारा के रखेंगे, किसी पार्टी की विचारधारा के नहीं रखेंगे, यह मैं आपको आश्वस्त करता हूँ.
माननीय अध्यक्ष जी, ऐसी अनेकों चीजें हमने की हैं. सामूहिक रेडियो, रेडियो उनकी भाषा में सहरिया, बैगा, भील है. आदिवासी रेडियो उनकी भाषा में है, एफएम बैण्ड इन 50 किलोमीटर कभी आपने कल्पना की है. अभी 8 जगह हमने 75-80 लाख रुपये एक में दिए हैं और आदिवासी रेडियो उनकी भाषा में और आगे आप सब लोग पसन्द करेंगे, तो 88 ब्लॉक में आदिवासी रेडियो उनकी भाषा में, ताकि वहां ज्यादा से ज्यादा योजनाएं जाएं. कई लोग मेरी विधान सभा में हिन्दी नहीं जानते हैं, वह कोरकू जानते हैं, तो हम उनको रेडियो स्टेशन पर बैठाते हैं और जैसे लाड़ली बहना योजना या जननी एक्सप्रेस है, तो वह हमारी दो बहनें हिन्दी में बात करते हैं, और वह हिन्दी में बात करके कोरकू भाषा में कन्वर्ट करते हैं और हम रेडियो से प्रसारण करते हैं, तो घर में काम करने वाली हमारी बहनें वह सरकार की योजनाएं को सुनती हैं, लाभ लेती हैं. अगर आप आगे सब पसन्द करोगे तो 88 ब्लॉक में मैं दावा कर रहा हूँ कि 3 वर्ष में यह एफएम बैण्ड 50 किलोमीटर का मेट्रिएड ब्लॉक खोल देगा. (मेजों की थपथपाहट) कोई तकलीफ नहीं है. हमारे काम करने का तरीका अलग है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैपसेट के माध्यम से, रोजगार प्रशिक्षण के माध्यम से आने वाले समय में हम कैसे अभी एक डंपर ड्रायवर है, एक पोकलोन ड्राइवर है. उसका वेतन रुपये 25-30 हजार होता है. लेकिन हमारा एक भी आदिवासी ऐसा ड्राइवर नहीं है चूंकि उसे किसी ने पोकलेन, जेसीबी चलाना सिखाया नहीं, जिससे वह अपने पैरों पर खड़ा हो जाये, 8वीं पास कोई आदिवासी है, उसे 3-4 माह की ट्रेनिंग देकर, रुपये 25-30 हजार वेतन मिलेगा, ऐसा पहला ट्रेनिंग सेंटर हम खण्डवा में खोल रहे हैं और बाकी अन्य आदिवासी जिलों में भी खोलेंगे, धार में भी खोलेंगे. बड़ी कंपनियों से जो मोटर बनाती हैं, उनके साथ हम टाइअप कर रहे हैं कि हमारे आदिवासी भाई-बहन जो 8वीं पास हैं, वे अपने पैरों पर खड़े होकर कम से कम रुपये 20 हजार महीना कैसे मिले, इसके लिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं. बाकी बहुत से और विषय हैं.
श्री उमंग सिंघार- दिल्ली से आदिवासियों के लिए कितना पैसा मिला, वह भी बतायें.
डॉ. कुँवर विजय शाह- उमंग भाई, उसकी बात हम बैठकर कर लेंगे. मैं, नेता प्रतिपक्ष और साथी विधायकों को आश्वस्त करना चाहूंगा कि आप चाहे आदिवासी न हों, जैसा शर्मा जी ने कहा लेकिन आदिवासी आपके क्षेत्र में हैं. हमारे प्रदेश में कहीं भी रहने वाले आदिवासी भाई-बहन, जो आदिवासी ब्लॉक में नहीं हैं, और वहां रहते हैं तो उनकी शिक्षा, दीक्षा, प्रशिक्षण और ट्रेनिंग में कोई कमी यह सरकार नहीं छोड़ेगी. आप जो सुझाव देंगे, पूरी ईमानदारी के साथ बिना भेदभाव के हम उसे पूरा करेंगे. अध्यक्ष महोदय आपके माध्यम से इस सदन से मेरा निवेदन है कि मेरा बजट पास कर दें, धन्यवाद.
अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री (श्री नागर सिंह चौहान)- अध्यक्ष महोदय, अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की मांगों की चर्चा में आज कई सदस्यों ने हिस्सा लिया है, अपने विचार रखे और सुझाव भी दिये हैं. जो विभाग की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में काफी लाभदायक साबित होगा. मैं माननीय सदस्य केदार जी, बैरया जी, पंकज जी, बहन कंचन का बहुत धन्यवाद करता हूं, सभी ने अपने वक्तव्य में अनुसूचित जाति कल्याण विभाग की सुविधा के विस्तार के बारे में चिंता व्यक्त की और सभी ने अपेक्षा की है कि विभाग के अंतर्गत संचालित सभी योजनाओं का लाभ अनुसूचित जाति समुदाय के भाई-बहनों को मिले. हमारे देश के प्रधानमंत्री जी के कुशल मार्गदर्शन में एवं प्रदेश के मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में, प्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है. इसी मंशा को आत्मसात करते हुए, प्रदेश की अनुसूचित जाति के विकास हेतु हमारी सरकार अनेक प्रकार की योजनायें संचालित कर रही है.
अध्यक्ष महोदय, हमारी सरकार गरीबों की सरकार है. हमारी सरकार महिलाओं, युवा एवं किसानों की सरकार है. अनुसूचित जाति को अधिकार कैसे मिले, इसकी चिंता हमारी सरकार कर रही है. हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, अनुसूचित जाति के भाई-बहनों को संवैधानिक अधिकार प्रदान करना. अनुसूचित जाति के लोगों को सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक क्षेत्र में सशक्त करना हमारी सरकार का दायित्व है. अनुसूचित जाति के लोगों के रहवासी क्षेत्रों में अधोसंरचनात्मक विकास कार्य को गति देना, अनुसूचित जाति वर्ग के युवाओं को स्वरोजगार व रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना, अनुसूचित जाति के लोगों को संरक्षण प्रदान करना एवं राहत उपलब्ध करवाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल है. अनुसूचित जाति कल्याण का बजट वर्ष 2002-03 में रुपये 298.01 करोड़ था, उसे हमारी सरकार ने बढ़ाकर वर्ष 2026-27 में रुपये 2591 करोड़ 11 लाख 54 हजार कर दिया है अर्थात् वर्ष 2002-03 की तुलना में 8.70 गुना वृद्धि हुई है. शिक्षा विकास की कुंजी है. अनुसूचित जाति के भाइयों, बहनों का शैक्षणिक उत्थान हमारी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है. अनुसूचित जाति के बालक बालिकाओं के शैक्षणिक उत्थान हेतु अनेक योजनाओं का संचालन किया जा रहा है. हमारी सरकार के द्वारा पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है. इस योजना में ग्यारहवीं से महाविद्यालय के जो हमारे विद्यार्थी हैं इस मध्यप्रदेश में करीब 5 लाख 60 हजार से अधिक छात्र, छात्राएं पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना का लाभ ले रहे हैं. इस बार हमने वर्ष 2026-27 में 766 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित किया है. पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति स्वीकृति एवं वितरण में पारदर्शिता लाने हेतु प्रदेश में ऑनलाइन फार्म जमा करने की व्यवस्था लागू की गई है. इस व्यवस्था से छात्र-छात्राएं कहीं भी ऑनलाइन छात्रवृत्ति फार्म भर सकते हैं. एवं छात्रवृत्ति स्वीकृति एवं भुगतान की स्थिति ज्ञात कर सकते हैं.
अध्यक्ष महोदय, अनुसूचित जाति की बहनों के लिए कन्या साक्षरता को प्रोत्साहित करने एवं दसवीं के उपरांत शिक्षा निरंतर रखने के उद्येश्य से कक्षा ग्यारहवीं में छात्राओं को तीन हजार रुपए प्रति वर्ष प्रोत्साहन राशि दी जाती है. मध्यप्रदेश में राज्य छात्रवृत्ति योजना राज्य में 15 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं छात्रवृत्ति योजना का लाभ ले रही हैं. कक्षा एक से आठ तक प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने हेतु इस वर्ष 43 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है. नौवीं और दसवीं में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत, आय सीमा ढ़ाई लाख रुपए तक की है. ऐसे परिवार को भारत सरकार के द्वारा छात्रवृत्ति राज्य मद से भुगतान की जाती है. मध्यप्रदेश में 1933 छात्रावास संचालित हैं. वर्ष 2003 में 1 हजार 14 छात्रावास संचालित थे और आज करीब 1933 छात्रावास संचालित हैं. करीब 1933 छात्रावासों में 46 हजार से अधिक विद्यार्थी सुविधा प्राप्त कर रहे हैं. हमने तय किया है कि आने वाले तीन वर्षों में जो हमारे भवन विहीन छात्रावास हैं उनको शतप्रतिशत भवन बनाने का हमने तय किया है. मैं यह बताना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश में जो अनुसूचित जाति के जो बेटा-बेटी हैं उनको मुख्यालय, संभाग स्तर पर पढ़ने में बहुत दिक्कत होती थी और हमारी सरकार ने तय किया है कि केन्द्र सरकार के जो नवोदय विद्यालय होते हैं उसी तर्ज पर मध्यप्रदेश के हर संभाग पर 10 ज्ञानोदय विद्यालय खोले गये हैं. वहां पर सीबीएसई स्तर की पढ़ाई हमारे बेटा बेटियों के लिए की जा रही है. उसमें इस वर्ष हम लोगों ने करीब तीस करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया है. हमारे जो बेटा-बेटी घर से आते हैं और उनको छात्रावास की सुविधा नहीं मिल पाती है ऐसे बेटा-बेटी को शहर में रहने के लिए आवास सहायता योजना के तहत संभाग स्तर पर 2 हजार रुपए और जिला स्तर पर 1250 रुपए और विकासखण्ड स्तर पर 1 हजार रुपए देने का कानून बनाया है. इस वर्ष 2 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. अनुसूचित जाति के बेटा-बेटी की तो विदेश में भी पढ़ने की योजना है. इस योजना के तहत मध्यप्रदेश में 166 छात्र छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं. इनमें से 156 छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त करके आ चुके हैं. वर्तमान में 10 विद्यार्थी विदेश में पढ़ रहे हैं. हमारी सरकार की सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना भी है जिसके तहत प्रारंभिक परीक्षा पास करने पर अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवार को 20 हजार रुपए और मुख्य परीक्षा पास करने पर 30 हजार रुपए और साक्षात्कार में सफल होने पर 25 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि के रुप में दिए जाते हैं. परीक्षा के पूर्व प्रशिक्षण केन्द्र की योजना हमारी सरकार चला रही है. भोपाल, जबलपुर, रीवा, सागर, ग्वालियर और उज्जैन में सात परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्र संचालित किए जा रहे हैं. प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना भी भारत सरकार के माध्यम से संचालित की जा रही है. करीब 1074 ऐसे ग्रामों का चयन किया गया है जहां 25 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति की आबादी है. वहां पर भारत सरकार द्वारा गांव के विकास के लिए राशि आती है. बस्ती विकास योजना जिसके तहत अनुसूचित जाति बस्ती जैसे वार्ड, ग्राम, मजरे-टोले आदि जिनमें अनुसूचित जाति वर्ग की जनसंख्या 40 प्रतिशत या उससे अधिक हो वहां पर सीसी रोड, नाली निर्माण, मंगल भवन, सामुदायिक भवन, हैंडपंप खनन पहुंच मार्ग पर रपटा, पुलिया मजरे, टोले का विद्युतीकरण कराने का प्रावधान है. जिसके तहत इस वर्ष 60 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है.
अध्यक्ष महोदय, फूल सिंह बरैया जी ने एक विषय रखा है जिसमें उन्होंने मध्यप्रदेश के युवाओं को स्वरोजगार देने की बात कही है. मध्यप्रदेश की सरकार अनुसूचित जाति के भाइयों-बहनों को रोजगार देने के लिए संत रविदास स्वरोजगार योजना और डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना चला रही है.
मैं सभी माननीय सदस्यों से निवेदन करना चाहता हूँ कि जो बजट सदन में लाया गया है उसे सर्वसम्मति से पास किया जाये. आपने बोलने का समय दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय -- मैं पहले कटौती प्रस्तावों पर मत लूंगा.
प्रश्न यह है कि मांग संख्या- 033, 042, 045, 049 पर प्रस्तुत कटौती प्रस्ताव स्वीकृत किए जाएं.
कटौती प्रस्ताव अस्वीकृत हुए.
अध्यक्ष महोदय -- अब, मैं, मांगों पर मत लूंगा.

अध्यक्ष महोदय -- विधान सभा की कार्यवाही गुरुवार, दिनांक 26 फरवरी, 2026 को प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्थगित की जाती है.
रात्रि 09.20 बजे विधान सभा की कार्यवाही गुरुवार, दिनांक 26 फरवरी, 2026 (7 फाल्गुन, शक संवत् 1947) के पूर्वाह्न 11.00 बजे तक के लिए स्थगित की गई.
भोपाल अरविन्द शर्मा,
दिनांक : 25 फरवरी, 2026 प्रमुख सचिव,
मध्यप्रदेश विधान सभा