मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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षोडश विधान सभा                                                                         नवम् सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2026 सत्र

 

मंगलवार, दिनांक 24 फरवरी, 2026

 

(5 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1947)

 

 

[खण्ड- 9]                                                                                         [अंक- 7]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

मंगलवार, दिनांक 24 फरवरी, 2026

 

(5 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1947)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.00 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

 

11.00 बजे                           बधाई एवं शुभकामनाएं

 

          अध्‍यक्ष महोदय--प्रश्‍नकाल शुरू हो रहा है. आज माननीय सदस्‍य डॉ. विक्रांत भूरिया जी का जन्‍मदिन है. हम सदन की ओर से उनको शुभकामनाएं प्रेषित करते हैं. प्रश्‍नकाल के बाद कोई भी बात हो तो उठाएं.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कोई भाषण नहीं दे रहा हूं और न ही कोई प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त कर रहा हूं. मैं और कुछ कहना चाह रहा हूं. जैसा कि माननीय संसदीय कार्यमंत्री जी हमेशा कहते हैं. आज मध्‍यप्रदेश के अंदर आदिवासियों का भगोरिया त्‍यौहार चालू हो रहा है. आज पहला दिन है और राजस्‍थान गुजरात जो हमारी मध्‍यप्रदेश की सीमाओं से लगे हैं वहां भी हो रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको और पूरे सदन को भगोरिया पर्व की बधाई देना चाहता हूं.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- केवल बधाई ही नहीं, आमंत्रित भी कीजिए.

          श्री उमंग सिंघार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं दिल से आप सभी को और पूरे सदन को आमंत्रित करता हूं. स्‍वागत है.

          मुख्‍यमंत्री (डॉ. मोहन यादव)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि आज नेता प्रतिपक्ष जी ने भी भगोरिया पर्व के प्रारंभ होने की सूचना दी लेकिन मैं, यह भी बताना चाहूंगा कि हमारी अपनी सरकार ने इसको राष्‍ट्रीय पर्व की तरह मनाने का निर्णय किया है और दोनों सेक्‍टर में बड़वानी और धार, झाबुआ दोनों सेक्‍टर में कोशिश कर रहे हैं कि हमारी कृषि केबिनेट अच्‍छे से हो ताकि भगोरिया पर्व के साथ-साथ आदिवासी अंचल के साथ सरकार के खड़े होने की प्रतिबद्धता भी दिखाई जा सके. बहुत धन्‍यवाद. 

          अध्‍यक्ष महोदय-- भगोरिया पर्व के अवसर पर सदन की ओर से सभी आदिवासी भाइयों और बहनों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं.

 

 

11.02 बजे                   तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

स्व-सहायता समूहों के माध्यम से गणवेश वितरण

[पंचायत एवं ग्रामीण विकास]

1. ( *क्र. 2264 ) श्रीमती रीती पाठक : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा विद्यालयों में विद्यार्थियों के गणवेश वितरण का कार्य क्या वर्तमान में किया जा रहा है और वित्तीय वर्ष 2022-232023-24 एवं 2024-25 में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से गणवेश वितरण का जो कार्य किया गया था, क्या उसका भुगतान लंबित है(ख) प्रश्‍नांश (क) में वर्णित गणवेश वितरण कार्य का भुगतान यदि लंबित है, तो यह राशि कितनी है? जिलावार एवं वित्तीय वर्षवार जानकारी उपलब्ध कराएँ एवं भुगतान कब तक कर दिया जायेगा(ग) सीधी विधानसभा अंतर्गत गोवंशों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित करने हेतु तीन वृहद गोशालाओं की मांग की जा रही है, इसकी स्वीकृति कब तक प्रदान की जायेगी(घ) वित्तीय वर्ष 2025-26 में सीधी जिले अंतर्गत चयनित गोवर्धन ग्रामों हेतु कितनी राशि स्वीकृति की जा रही है एवं इन्हें किन-किन विकास कार्यों में खर्च किया जायेगा?

पंचायत मंत्री ( श्री प्रहलाद सिंह पटैल ) : (क) वर्तमान में आजीविका मिशन के माध्यम से गणवेश वितरण का कार्य नहीं कराया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 में गणवेश सिलाई का कार्य किया गया है। सत्र 2024-25 के लिये गणवेश सिलाई का कार्य समूहों को नहीं दिया गया है। गणवेश सिलाई का भुगतान संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार लंबित है।  (ख) गणवेश सिलाई के लंबित भुगतान का जिलेवार विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। जिलों से सत्यापन रिपोर्ट प्राप्त होने के उपरांतराज्य शिक्षा केन्द्र से आवंटन प्राप्त कर राशि का भुगतान किया जायेगा। समय-सीमा बताना संभव नहीं है। (ग) मनरेगा अंतर्गत विभाग के पत्र क्रमांक 2258, दिनांक 01.07.2024 के बिन्‍दु क्र. 08 अनुसार 05 पशुओं तथा 10 पशुओं के पशुशेड हेतु जारी मॉडल प्राक्‍कलन अनुसार ही S.H.G. हेतु पशुशेड निर्माण के कार्य वित्तीय वर्ष 2024-25 में लिये जाने का लेख है। अत: निर्देशानुसार वृहद स्‍तर की गौशाला का निर्माण मनरेगा योजनांतर्गत नहीं किया जा सकता है। (घ) जिला-सीधी अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025-26 में कोई भी गोवर्धन ग्राम चयनित नहीं है।

        श्रीमती रीती पाठक-- धन्‍यवाद अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न क्रमांक 2264.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर सभा पटल पर रख दिया गया है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- रीती जी कृपया पूरक प्रश्‍न करें.

          श्रीमती रीती पाठक-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जो प्रश्‍न है वह स्‍वसहायता समूहों के माध्‍यम से गणवेश वि‍तरण किये जाने के विषय में है. मैं माननीय पंचायत मंत्री जी से यह पूछना चाह रही हूं. चूंकि केन्‍द्र सरकार में आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र भाई मोदी जी और हमारी राज्‍य सरकार दोनों का ही एक विशेष उद्देश्‍य रहा है कि निचले स्‍तर पर कैसे अपनी बहनों को स्‍वाबलंबन दें और सशक्तिकरण की दिशा की ओर अग्रेषित करें. मेरा प्रश्‍न है कि राष्‍ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा हमारे जो मध्‍यप्रदेश के विद्यालय हैं, खासकर मैं सीधी विधान सभा क्षेत्र की भी बात करूंगी, सीधी जिले के विद्यालयों में विद्यार्थियों के गणवेश वितरण का कार्य वर्तमान में भी किया जा रहा है. वर्ष 2022-23, वर्ष 2023-24, वर्ष 2024-25 में स्‍वसहायता समूहों के माध्‍यम से, सशक्तिकरण की दिशा के लिए एक सशक्‍त माध्‍यम है. उसमें गणवेश वितरण का कार्य उनके माध्‍यम से किया गया था. जिसमें कई बहनें जुड़ी होती हैं उनका भुगतान अभी तक लंबित है, इसका कारण क्‍या है? आदरणीय मंत्री जी का उत्‍तर मैंने पढ़ा भी है. इसमें यह भी लिखा हुआ है कि भुगतान लंबित है. निश्चित रूप से उसकी जांच भी करा रहे हैं. जांच करवाने का प्रयास भी करेंगे, लेकिन कब तक करेंगे यह हम समय सीमा नहीं बता सकते. इसके साथ मेरा एक प्रमुख प्रश्‍न यह है कि समय सीमा निर्धारित करने की कृपा करें जिससे हम स्‍वाबलंबन की दिशा में और आगे बढ़ें.

          श्री प्रहलाद सिह पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍या का प्रश्‍न बिलकुल वाजिब प्रश्‍न है और मैं उनको धन्‍यवाद भी देता हूं. कुछ जानकारियां आपके माध्‍यम से सदन को भी हो जाएं. यह वर्ष 2022-23 और वर्ष 2023-24 के भुगतान का मामला है जिसमें ईओडब्‍ल्‍यू में भी जांच लंबित है, लेकिन उसके बावजूद भी मैं सदन को यह जानकारी देता हूं कि वर्ष 2022-23 और वर्ष 2023-24 में 428 करोड़ रुपए का कुल भुगतान होना था जिसमें अभी तक 393.25 करोड़ रुपए का भुगतान हो गया है. कुल 34 करोड़ लगभग 35 करोड़ का भुगतान शेष है. 7 जिले ऐसे हैं जहां पर 2 करोड़ रुपए से ज्‍यादा का भुगतान शेष है. जो सीधी जिला है वहां लगभग 1 करोड़ 6 लाख रुपए के आसपास का भुगतान शेष है. लेकिन जो समस्‍या है वह समस्‍या यह है कि शिक्षा विभाग का एक पोर्टल है और राष्‍ट्रीय ग्रामीण आ‍जीविका मिशन दोनों के बीच समन्वय का जो मामला है उसके कारण यह गतिरोध बना हुआ है. जब हमने कलेक्टर से वेरीफिकेशन मांगा, वहां से भुगतान आ जाए क्योंकि पोर्टल शिक्षा विभाग का है. दो साल पहले समन्वय के बीच में कुछ कारण रहे होंगे. वह जो भुगतान है उसका प्रमाणीकरण कौन करेगा. जब कलेक्टर्स को यह कहा गया तो कुल चार जिले हैं, जहां से भुगतान के प्रमाणीकरण आते जा रहे हैं उसके भुगतान होते जा रहे हैं. इस कारण से समय-सीमा के बारे में सदन में मैं कोई बात कहूं और वह गलत साबित हो तो ठीक नहीं होगा. अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सदस्या को कहना चाहता हूँ कि कल हमने फिर से इस पर बात की है. जैसे ही कलेक्टर से प्रमाणीकरण होते जाएंगे हम भुगतान करेंगे. हमें कोई बारीकी भी नहीं करना है. हम जानते हैं कि समूहों का भुगतान है यह समय पर होना चाहिए. बहुत विलम्ब हो गया है हम इसके लिए भरपूर कोशिश कर रहे हैं.

          श्रीमती रीती पाठक -- अध्यक्ष महोदय, बहुत धन्यवाद. मुझे पूरा विश्वास है क्योंकि मंत्री जी बेहद संवेदनशील हैं वे समन्वय बनाकर निर्देश देने की जरुर कोशिश करेंगे जिससे कि समय सीमा के अन्दर भुगतान हो जाए.

          आदरणीय अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न गौवंश पर है. गौवंशों की सुरक्षा को हमारी सरकार ने विशेष ध्यान में रखा है और इसके लिए मैं आदरणीय मुख्यमंत्री जी को हृदय से धन्यवाद और बधाई देती हूं. उन्होंने गौवंशों की सुरक्षा के लिए प्रति गाय 40 रुपए गाय गौ-पालक को भुगतान करने का प्रयास किया है, यह निश्चित रुप से काबिल-ए-तारीफ है. मैं यह कहना चाहती हूँ कि सिर्फ इतना ही पर्याप्त नहीं है. गौवंश की समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है. रोड पर इतनी सारी गायों का होना और गाड़ियां उन पर चढ़ जाने से उनकी मृत्यु हो जाती है. मैं मंत्री जी से इतना पूछना चाहती हूँ कि गौवंशों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तीन वृहद गौशालों की मांग लगातार पिछले समय से की जा रही है इनकी स्वीकृति कब तक प्रदान कर दी जाएगी. वर्ष 2025-26 में सीधी जिले के अन्तर्गत जो चयनित गौवर्धन ग्राम हैं इन ग्रामों हेतु कितनी राशि अब तक विभाग से स्वीकृत की गई है. इन्हें किन-किन विकास कार्यों में खर्च कर पाएंगे.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, पशु पालन विभाग ने राज्य में एक बहुत अच्छी योजना जारी की है. जिसके टेंडर आ भी गए हैं और 22 का वे फिर से प्रावधान कर रहे हैं. यह पीपीपी मॉडल पर भी है. 130 एकड़ भूमि होगी जिसमें गैस गौवर्धन का प्लांट लगेगा. वे बिजली भी बेच सकते हैं, खाद भी बेच सकते हैं, दूध भी बेच सकते हैं, उसमें यह शर्त है कि पांच हजार निराश्रित गायों को रखना होगा. यह एक विस्तारित योजना है. एक समय बहुत बड़ी संख्या में गौशालाएं बनाई गईं थीं जिनके स्ट्रक्चर खड़े हुए हैं. जब नई सरकार बनी थी तब 1200 ऐसी गौशालाएँ थीं जिनका स्वामित्व किसी के पास नहीं था. इसके लिए माननीय मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता मैं बैठक हुई थी उसके बाद में यह फैसला हुआ कि कोई व्यक्ति, कोई समूह या कोई सोसायटी अगर उनको लेना चाहती है तो हम उनको देने के लिए तैयार हैं. उसके बाद 1200 के आसपास गौशाला के जो भवन बने थे उसमें से अभी भी 400 बचे हुए हैं. इनको अभी किसी ने लिया नहीं है. मुझे लगता है गौवर्धन योजना यह बिलकुल अलग बात है. अभी तक प्रदेश में गौवर्धन योजना के तहत 61 गोबर गैस प्लांट बन गए हैं. हमने तय किया है कि जहां पर भी बड़ी गौशाला होगी उन्हीं को हम गौवर्धन गैस का प्लांट देंगे. क्योंकि उतनी मात्रा में गोबर किसी निजी व्यक्ति के पास हो पाना संभव नहीं है. इसलिए उनको क्लब करके भी यह योजना बनाई गई है. माननीय सदस्या को और भी विस्तृत जानकारी चाहिए तो निश्चित तौर पर उनको मिलकर वह भी दूंगा.

          श्रीमती रीती पाठक -- माननीय मंत्री जी को मैं धन्यवाद करती हूँ.

          सुश्री रामश्री राजपूत (बहिन रामसिया भारती) -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 1687 है.

          पंचायत मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल)  -- अध्यक्ष महोदय,उत्तर सदन से पटल पर रखा है.

आजीविका मिशन में गंभीर अनियमितता

[पंचायत एवं ग्रामीण विकास]

2. ( *क्र. 1687 ) सुश्री रामश्री (बहिन रामसिया भारती) राजपूत : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर जिले में आजीविका मिशन के तहत वर्ष 2024 से प्रश्‍न दिनांक तक गणवेश हेतु कितनी राशि का व्यय किया गया? विकासखण्डवार बतायें तथा उक्त कार्य किस-किस एजेंसी/संस्था को शासन के प्रावधानों के तहत दिए गये नियमों की गाइड-लाइन सहित विवरण दें। (ख) क्या बड़ामलहराबक्स्वाहा विकासखंडों में स्व-सहायता समूहों के माध्यम से लाखों की राशि में गंभीर अनियमितताएं प्रमाणित पाई गईयदि हाँ, तो कौन-कौन दोषी है(ग) क्या उक्त योजना के संबंध में जिला पंचायत छतरपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने जाँच टीम अथवा शासन की राशि के दुरुपयोग न होने के संबंध में परीक्षण किया? यदि हाँ, तो कब तक जाँच अभिमत सहित रिपोर्ट उपलब्ध करवा देंगे(घ) क्या सरकार दोषी अधिकारि‍यों के विरुद्ध कार्यवाही करेगी? समय-सीमा बतायें।

पंचायत मंत्री ( श्री प्रहलाद सिंह पटैल ) : (क) छतरपुर जिले में आजीविका मिशन के तहत वर्ष 2024 से प्रश्‍न दिनांक तक गणवेश हेतु राशि रु. 9,52,91,550/- राशि का व्यय किया गया है। विकासखण्डवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है।विभाग का पत्र  क्र. 9119, दिनांक 19.07.2023 अनुरूप स्व-सहायता समूहों की उपार्जन नीति के अनुसार समूहों द्वारा स्वयं संस्था/एजेंसी का चयन किया है। सामग्री क्रय करने हेतु शिखर ट्रेडर्स-सीहोरसंस्कार इन्टरप्राईजेज-दमोहसाथी ट्रेडर्स-अलिपुराश्री माधव जी ट्रेडर्स-खजुराहोआर.आर.इन्टरप्राईजेज-टीकमगढ़स्वरूप ट्रेडर्सनमन ट्रेडर्स-विदिशासाथी टेक्सटाईल-छतरपुररजवी क्लॉथ स्टोर-टीकमगढ़पारस ट्रेडर्स-सीहोर के साथ प्रक्रिया की गई है। शासन के नियमों की गाइड-लाइन प्रपत्रों की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। (ख) बड़ामलहरा विकासखण्ड में प्रभारी विकासखण्ड प्रबंधक श्री प्रेमचन्द यादवसहायक विकासखण्ड प्रबंधक श्री अमित गुप्ता और श्री उपेंद्र गौतम की अनियमितता संबंधी शिकायतें प्राप्त हुईं हैं। शिकायतों की जांच हेतु जिला स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया है। (ग) आदेश क्रमांक 5416/एस.आर.एल.एम./2025, दिनांक 11.12.2025 के माध्यम से जिला स्तरीय जांच समिति गठित की गई है। दिनांक 28 फरवरी, 2026 तक अभिमत सहित जांच रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जायेगी। (घ) जांच प्रतिवेदन में दोषी पाये जाने पर नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। कार्यवाही के समय-सीमा का निर्धारण संभव नहीं है।

 

सुश्री रामश्री राजपूत (बहिन रामसिया भारती) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपना प्रश्‍न लगाया था जो छतरपुर जिले का है और इस प्रश्‍न का जो उत्‍तर माननीय मंत्री जी ने मुझे दिया है उसके (घ) में लिखा है कि जांच रिपोर्ट उपलब्‍ध करा दी जावेगी. यह मामला छोटा नहीं है. मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहूंगी कि यह जो छतरपुर जिले के विकासखंडवार आजीविका मिशन में व्‍यय किया गया है उन संस्‍थाओं में करोड़ों की राशि व्‍यय की गई है, संस्‍थाओं का चयन समूहों के द्वारा किया गया जबकि वास्‍तविकता यह है कि अधिकारियों ने दबाव बनाकर अपने चहेतों को काम दिया है. जिसमें व्‍यापक स्‍तर पर भ्रष्‍टाचार हुआ है. यह मामला छोटा नहीं है. यह बच्‍चों की गणवेश से लेकर उन गरीब महिलाओं की बात मैं कह रही हूं जो बिल्‍कुल गरीबी रेखा के नीचे अपना जीवन यापन कर रही हैं. वह इस समूह से जुड़ी हुई हैं. उनके साथ बहुत भ्रष्‍टाचार किया जा रहा है. जांच छतरपुर जिले की हो इसमें जो माननीय मंत्री जी ने जांच के बारे में लिखा है तो उन्‍होंने यह पूरे तरीके से मुझे उत्‍तर में दे दिया है मैं उससे तो संतुष्‍ट हूं परंतु मैं यह जानना चाहती हूं कि पिछले 11.12.2025 से जो माननीय मंत्री जी ने जिला स्‍तरीय जांच समिति गठित की है तो उसे अभी 2 महीने पूरे होने जा रहे हैं आज तक जांच क्‍यों नहीं हुई है ?

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने उत्‍तर में ही माननीय सदस्‍य को बता दिया था कि 28 फरवरी तक ही उस समिति का समय था तो मुझे लगता है कि एक सप्‍ताह ही बचा है उसके बाद समिति को अपना प्रतिवेदन देना ही होगा. 28 फरवरी बाकायदा मैंने उत्‍तर में लिखकर दिया है कि 28 फरवरी, 2026 तक जांच पूरी हो जाएगी. बाकी लोगों पर हमने कार्यवाहियां की हैं. यह उत्‍तर में भी हमने आपको बताया है. जिन संस्‍थाओं ने वहां पर काम किया है उनके नाम उत्‍तर में पूरी तरह से पारदर्शी ढंग से लिखकर दिए हैं. अगर आप ब्‍लॉकवाइज भी जानना चाहती हैं तो बड़ामलहरा में 1 करोड़, 37 लाख, 34,900 एवं बारीगढ़ में 1 करोड़, 11 लाख, बिजावर में 97 लाख, बक्‍स्‍वाहा में 64 लाख, छतरपुर में 1 करोड़, 49 लाख, लोंडी में 1 करोड़, 12 लाख, नौंगाव में 1 करोड़, 12 लाख, राजनगर में 1 करोड़, 67 लाख, ऐसे कुल 9 करोड़, 52 लाख, 10 हजार 550 रुपये छतरपुर में व्‍यय हुए हैं. यह बात भी सच है कि जो मैंने सूची में बताया है तीन-साढ़े तीन करोड़ का भुगतान सिर्फ छतरपुर में ही लंबित है. अब एक माननीय सदस्‍य का प्रश्‍न था कि भुगतान क्‍यों नहीं हो रहा, दूसरे को आपत्ति है कि भुगतान ऐसे क्‍यों होना चाहिए, तो यह दोनों प्रश्‍न लगातार ऐसे ही हैं लेकिन अभी तक छतरपुर में 19 करोड़, 17 लाख का भुगतान हुआ है. 28 तारीख के बाद रिपोर्ट आएगी और मैं माननीय सदस्‍य को भी यह सूचना दूंगा कि उस रिपोर्ट का विवरण क्‍या है.

सुश्री रामश्री राजपूत (बहिन रामसिया भारती) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से आदरणीय मंत्री जी से विनम्र निवेदन करना चाहूंगी कि मैं केवल इतना जानना चाहती हूं कि लास्‍ट में (घ) में जो लिखा गया है कि जांच की समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है, तो क्‍या जांच की समय सीमा आप निर्धारित करेंगे, क्‍योंकि यह गंभीर मामला है और उस जांच में जिले के कलेक्‍टर और कमिश्‍नर को रखकर क्‍या मुझे उस जांच में शामिल किया जाएगा ?

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, शायद सदस्‍य ने ठीक से पढ़ा नहीं मैंने (ग) में उत्‍तर दिया था कि आदेश क्रमांक 5416/2005 दिनांक 11.12.2025 के माध्‍यम से जिला स्‍तरीय जांच समिति गठित की गई है. दिनांक 28 फरवरी, 2026 तक अभिमत सहित जांच रिपोर्ट उपलब्‍ध करा दी जाएगी. (घ) में लिखा है कि जांच प्रतिवेदन में दोषी पाये जाने पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी. कार्यवाही की समय सीमा का निर्धारण संभव नहीं है. मतलब मुझे लगता है कि जो जांच रिपोर्ट आएगी उसकी कार्यवाही की बात हुई है लेकिन अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य से कहना चाहता हूं जांच रिपोर्ट आने के बाद अगर कोई दोषी पाया जायेगा तो उस पर सख्त कार्यवाही होगी और मैंने पहले ही कहा है कि माननीय सदस्य को मैं उसकी सूचना दूंगा.

          सुश्री रामश्री (बहिन रामसिया भारती) राजपूत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, उसके लिये धन्यवाद है लेकिन अध्यक्ष जी के माध्यम से मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि कहीं ऐसा तो नहीं कि अधिकारियों को बचाने और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का काम तो नहीं हो रहा है, जिन अधिकारियों पर कार्यवाही होना चाहिये, उन अधिकारियों को बचाने के लिये तो कहीं जांच की दिनांक आगे नहीं की जा रही है.

          अध्यक्ष महोदय- रामसिया जी, मै समझता हूं कि  मंत्री जी ने बहुत स्पष्ट उत्तर दिया है. शंका का कोई जवाब नहीं होता है लेकिन बहुत स्पष्टता से उन्होंने उत्तर दिया है. जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जायेगी.

जानकारी प्रदाय करने बाबत्

[उच्च शिक्षा]

3. ( *क्र. 2285 ) श्रीमती झूमा डॉ. ध्यानसिंह सोलंकी : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खरगोन जिले अन्तर्गत क्रांतीसूर्य टंट्या भील विश्‍वविद्यालय में कौन-कौन से विश्‍वविद्यालय और कौन से स्थान पर संचालित हैंवर्तमान में उक्त वर्णित विश्‍वविद्यालय में  कौन-कौन से विषय की शिक्षा प्रदान की जा रही हैक्या वर्तमान में स्वीकृत सभी पाठयक्रम संचालित किये जा रहे हैंयदि हाँतो कौन-कौन से संचालित किये जा रहे हैं? कृपया वर्णन प्रदाय करें तथा ऐसे कौन-कौन से पाठयक्रम हैं, जो वर्तमान में शासन की अनुमति के अभाव में संचालित नहीं है(ख) क्या नवीन विषय की मॉंग अनुसार संचालित करने की शासन द्वारा अनुमति प्रदाय की जायेगीयदि हाँ, तो कब तकयदि नहीं, तो क्या कारण है तथा उक्त विश्‍वविद्यालय में कितने पद व्याख्याता के स्वीकृत हैं तथा कितने पदों पर वर्तमान में पदपूर्ति‍ हैकितने पद रिक्त हैंउक्त रिक्त पदों पर कब तक पदपूर्ति‍ की जायेगी?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री इन्‍दर सिंह परमार ) : (क) खरगोन जिले अंतर्गत क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्‍वविद्यालय खरगोन में ही संचालित है। उक्‍त विश्‍वविद्यालय में विश्‍वविद्यालय के निर्णय से वर्तमान में स्‍नातक स्‍तर पर कृषिकलावाणिज्‍य (कम्‍प्‍यूटर)विज्ञान (कम्‍प्‍यूटर) तथा स्‍नातकोत्‍तर स्‍तर पर अर्थशास्‍त्र पाठयक्रम संचालित है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ख) विश्‍वविद्यालय में विषय संचालन का निर्णय विश्‍वविद्यालय द्वारा अधिनियम/परिनियम/अध्‍यादेश अनुसार किया जाता हैअत: प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। विश्‍वविद्यालय के लिये सहायक प्राध्‍यापक के 80 पदसह प्राध्‍यापक के 40 पद तथा प्राध्‍यापक के 20 पदकुल 140 शैक्षणिक पद स्‍वीकृत किये गये हैं। वर्तमान में सभी पद रिक्‍त हैं। पदपूर्ति की समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्यानसिंह सोलंकी : माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 2285 है.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर सभा पटल पर रख दिया है.

          अध्यक्ष महोदय- माननीय सदस्य अपना पूरक प्रश्न करें.

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्यानसिंह सोलंकी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से प्रश्न का जवाब चाह रही हूं. जिला खरगोन के अंतर्गत क्रांतीसूर्य़ टंट्या भील विश्वविद्यालय पिछले दो वर्षों से संचालित है. जिसमें 25 हजार विद्यार्थी अध्यापन कार्य कर रहे हैं. लेकिन विद्यार्थियों की रूचि के अनुसार वहां पर पाठ्यक्रम संचालित नहीं किये जा रहे हैं. विश्वविद्यालय में 140 के करीब प्राध्यापकों के पद, लगभग सारे के सारे पद भी रिक्त हैं. मेरा मंत्री जी से प्रश्न है कि वहां पर विद्यार्थियों की रूचि के अनुसार एमबीए जो मास्टर डिग्री है, बीबीए भी शुरू करें, इंजीनियरिंग कोर्स , एआई, कृषि में मास्टर डिग्री और अन्य विषय कब तक शुरू कर दिये जायेंगे.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार--माननीय अध्यक्ष महोदय, क्रातीसूर्य टंट्याभील विश्वविद्यालय, खरगोन में शैक्षणिक सत्र 2024-25 में बीए(कम्प्यूटर), बीएससी(कम्प्यूटर)बीकाम(कम्प्यूटर)बीकाम,बीएडएसआई,बीएससी(कृषि)एमएअर्थशास्त्र) और पीजीडीसीए के पाठ्यक्रम शुरू किये गये हैं जो वर्तमान में चल रहे हैं.माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को यह भी बताना चाहूंगा कि चूंकि विश्वविद्यालय द्वारा भर्ती की प्रक्रिया अभी चल रही है, प्रचलन में है, इसलिये शासन से प्रतिनियुक्ति पर 7 पद  हमने वहां पर शासन से दे रखे हैं. साथ ही विजिटिंग फैकल्टी के 14 पद पर वहां अतिथि विद्वान काम कर रहे हैं.

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्यानसिंह सोलंकी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी का जवाब संतुष्टि लायक नहीं है. मैं आपके माध्यम से जानकारी देना चाहूंगी कि यह जितने भी कोर्स शुरू किये गये हैं सभी में मास्टर डिग्री नहीं है सिर्फ अर्थशास्त्र में है और वहां के विद्यार्थी यह चाहते हैं कि इंजीनियरिंग भी करें, वह भी नहीं है. बीबीएमबीए नहीं है, सिर्फ अर्थशास्त्र में ही मास्टर डिग्री करेंगे बाकी में क्या करेंगे, आप मुझे बता दें. और एआई के बारे में प्रधानमंत्री जी ने पूरे देश को कहा कि हमारे विद्यार्थी इंटेलीजेंसी कोर्स करेंगे और रोजगार मिलेगा और यह आज की तारीख की मांग के अनुसार है. तो माननीय मंत्री जी यह विषय वहां पर शुरू करना बहुत आवश्यक है. शिक्षा से संबंधित है. पूरा ट्रायवल क्षेत्र है, 25 हजार विद्यार्थी वहां पर अध्ययनरत हैं.

          श्री इन्दर सिंह परमार -- माननीय अध्यक्ष महोदय,  विश्वविद्यालय वर्ष 2024-25 और 2025-26 अर्थात इसको खुले हुये अभी मात्र दो वर्ष ही हुये हैं. इसलिये अभी प्रारंभ में विश्वविद्यालय का जो केंपस है उसी में यह कोर्स चल रहे हैं. बाकी महाविद्यालय में वहां पर पीजी की और सारी सुविधाये हैं. आने वाले समय में, क्योंकि अभी प्रारंभिक दौर है कई सारे संसाधन वहां पर स्थापित होना है, बिल्डिंग बनना है, और इसलिये जैसी वहां पर आवश्यकता होगी वैसा हम करेंगे. हमने शासन स्तर पर विषय को लेकर के एक बार विश्वविद्यालय को हम सुझाव दे रहे है कि समग्र रूप से फिर से पुन:निर्धारण करें जो वहां के महाविद्यालय में सब्जेक्ट चल रहे हैं उनको छोड़कर के भिन्न भिन्न विषय वहां पर संचालित करेंगे इस प्रकार का सुझाव हमने विश्वविद्यालय को दिया है और अधोसंरचना विकास के लिये भी जो डीपीआर 119 करोड़ की बनी थी उसमें 20 करोड़ रूपये हम इसी बजट में प्रावधान भी कर दिया गया है, इसी प्रकार से उसको ठीक से चलाने के लिये जो जो आवश्यकतायें हैं वह सब हम करने जा रहे हैं. पद पूर्ति  के विषय में  मैं बता चुका हूं,  इसलिये पद पूर्ति भी, क्योंकि सभी  विश्वविद्यालय को  जून तक भारत सरकार ने भी  कहा है और म.प्र. सरकार  ने  सबको, रजिस्ट्रार को  निर्देशित किया  है और कुल गुरुओं को सलाह दी है कि  वह भर्ती प्रक्रिया जल्दी प्रारम्भ करें.

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकीअध्यक्ष महोदय, जवाब थोड़ा स्पष्ट   दें. यह  असमंजस  वाली स्थिति क्यों निर्मित  करते हैं  आप. पद पूर्ति कर दी जायेगी,   एक ही तो बोलना है कि कर दी जायेगी, अन्य कोर्स जो आवश्यकतानुसार शुरु कर दिये जायेंगे.  बस दो शब्द  ही तो आपको कहना है. बहनों का दिन है.  अध्यक्ष जी का हम लोग    बहुत धन्यवाद करते हैं कि  आज की तारीख में  जो बहनें पूछेंगी,  वह  आपको पूरा करना  भी है.  मात्र बोलना ही नहीं है.  बोलने के लिये हमको खड़ा  नहीं किया गया है.  हमारी मांगों को पूरा करना भी है.

          श्री इन्दर सिंह परमारइसलिये जो मैं बोल रहा हूं,  सही सही बोल रहा हूं.

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकीअध्यक्ष महोदय, तो दोनों की समय  सीमा  में  ये कोर्स शुरु किये जायें और यह जो पद खाली हैं,  उसकी पद पूर्ति  की  जाये. बस दोनों चाहिये.  आप समय सीमा भी बताइयेगा.

          अध्यक्ष महोदयमंत्री जी जवाब दे रहे हैं.

          श्री इन्दर सिंह परमारअध्यक्ष महोदय, विश्वविद्यालय   स्वायत्त बॉडी है पूरी और उनको  उनकी कार्य परिषद्  में  निर्णय करके स्वयं को भर्ती  करना रहता है. शासन केवल   उचित मार्गदर्शन  दे  सकता है.  आवश्यकता पड़ने पर  कुल सचिव को कुछ निर्देश दे सकते हैं, बाकी सारी ऑटोनॉमस बॉडी है,  इसलिये  विश्वविद्यालय को ही करना है.  मैंने बताया कि विश्वविद्यालय  को  4-5 महीने का समय   सभी विश्वविद्यालय को केवल  एक विश्वविद्यालय नहीं,  सभी को कहा गया है कि आप  इन 4-5 महीनों में भर्ती  की प्रक्रिया प्रारम्भ करें. रोस्टर का पालन करते हुए  भर्ती की प्रक्रिया प्रारम्भ करें  और  पारदर्शिता  पूर्ण  व्यवस्था  से पालन करें.  वह उनकी प्रक्रिया में लगे हैं,  कार्य परिषदों ने काफी जगह  निर्णय कर लिये हैं,  कुछ  जगह और बचे हैं,  वह कार्य परिषद् निर्णय करके  भर्ती की प्रक्रिया  प्रारम्भ करने जा रहे हैं.  जहां तक..

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकीअध्यक्ष महोदय, कब तक. समय सीमा बताइये. 4-5 महीने.

          श्री इन्दर सिंह परमारअध्यक्ष महोदय,मैंने 4-5 महीने  का टाइम   उनको आलरेडी दे रखा है.  4-5 महीने का टाइम दिया है.  गाइड लाइन  दी थी कि 4-5 महीने  में,  क्योंकि रोस्टर बनाना है,  विज्ञापन जारी करना है, फिर उनकी भर्ती प्रक्रिया  प्रारंभ होगी. तो मैं समझता हूं कि इतना समय  लगेगा ही. लेकिन हमारी तरफ से सरकार  की ओर से उनको निर्देशित कर चुके हैं और पीजी के लिये  भी हमने सुझाव दिया है कि  जैसे कि वहां एक  बड़ा कालेज है. जिस कालेज में  बहुत छात्र हैं, बड़ी संख्या में   छात्र हैं. वहां  पीजी की कक्षायें  सब चल रही हैं और भी जिले में पीजी  की कक्षाएं चल रही हैं. जो  विषय अन्य जगह पर  नहीं  हैं और वहां पर छात्रों की मांग  है,  इसके लिये हमने पुनर्निर्धारण  करने का  विश्वविद्यालय को  अभी  जो विषय  चालू कर  दिये हैं, लेकिन हो सकता है उसमें  किसी  में कम छात्र हों,  लेकिन एग्रीकल्चर  में  बहुत अच्छे छात्र हैं. तो  एग्रीकल्चर   में इस बार द्वितीय वर्ष है,  फिर तृतीय वर्ष होगा.  फिर चौथे वर्ष का,  पांचवे वर्ष का लगातार  उसमें  बढ़ाते जायेंगे, उसमें कोई दिक्कत नहीं है.

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकीअध्यक्ष महोदय, कार्य परिषद्  की समिति  की बात वे कर रहे हैं, वह बनी ही नहीं है.  तो निर्णय होगा कहां पर.  वह करना चाहिये ना.  वह बनी ही नहीं है.

          अध्यक्ष महोदयकार्य परिषद् तो होगी ना.

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकीअध्यक्ष महोदय, नहीं बनी है.  समिति ही नहीं बनी है.  तो निर्णय कहां से होगा.

          श्री इन्दर सिंह परमारअध्यक्ष महोदय,नया विश्वविद्यालय है, दो वर्ष तक के लिये  कुल गुरु को ही  सब अधिकार रहते हैं,  वह प्रक्रिया में  हैं.  जल्दी ही कार्य  परिषद्    उनकी बन जायेगी.  क्योंकि दो वर्ष का अधिकार उनको ही  होता है.  उन्होंने प्रक्रिया प्रारंभ  की  है.  राज्यपाल जी कार्य परिषद्   के सदस्यों की नियुक्ति करते हैं.

          श्री हेमन्त सत्यदेव कटारेअध्यक्ष महोदय,  मंत्री जी ने कहा है कि 4 से 5 महीने में प्रोसेस कम्प्लीट  हो जायेगी.  दूसरी  बात कही कि कार्य परिषद् करेगा और कार्य परिषद् की समय सीमा  दो साल बोली. तो मंत्री जी यदि खुद का अपना  वक्तव्य अपने  अन्तरात्मा में  दोहरा  लेंगे, तो वह खुद ज्ञात होगा कि मंत्री जी असत्य बोल रहे हैं.

          श्री इन्दर सिंह परमारअध्यक्ष महोदय, दो वर्ष का कुल गुरु  को अधिकार रहता है, तब तक कोई जरुरत नहीं रहती है कार्य परिषद् की.  यह माननीय सदस्य अनावश्यक बीच में  बोल रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय--- मैं समझता हूं कि विषयांतर करने की जरुरत नहीं है.

          श्री इन्दर सिंह परमारअध्यक्ष महोदय, आपने भी सुना होगा.  मैं यदि गलत कह रहा हूं, तो  आपने भी बात सुनी है.  मैं  तो उन्हीं की बात को दोहरा रहा हूं.

          अध्यक्ष महोदय--- मंत्री जी ने दोनों बातें कही हैं.  एक तो उन्होंने कहा है कि  5-6 महीने में भर्ती  की जो प्रक्रिया है, उसको वह पूर्ण करेंगे.  विश्वविद्यालय पूर्ण करेगा  और दूसरा उन्होंने यह कहा  है कि जो  विषय आस पास नहीं हैं,  उन विषयों   की  जिनकी जरुरत है, वह भी क्रमबद्ध तरीके  से प्रारंभ करने के निर्देश  दिये हैं.  यह सही है कि उन्होंने कहा है कि  कार्य परिषद् को भी  अधिकार होता है,  साथ ही उन्होंने कहा है कि दो  वर्ष तक जब तक  कार्य परिषद् नहीं बन जाती, कार्य परिषद् के सारे  अधिकार कुल गुरु के अंतर्गत  ही  निहित होते हैं  और कार्य परिषद्   बनने की प्रक्रिया  चालू है.  तो इसलिये मुझे लगता है कि स्पष्टता है,  उसमें कोई दिक्त नहीं होनी चाहिये.

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकीअध्यक्ष महोदय, मैं आपको धन्यवाद दूंगी. मंत्री जी,यह आप करियेगा जरुर.

            श्री हेमंत सत्‍यदेव कटारे- अध्‍यक्ष महोदय, मैं सिर्फ मंत्री जी को बताना चाहूंगा कि मैं, स्‍वयं कार्यपरिषद का अध्‍यक्ष रहा हूं और मुझे यह नियम मालूम है और यदि आपको नहीं पता तो मैं बता देता हूं कि कार्य परिषद को नियुक्तियों का अधिकार होता ही नहीं है. कार्य परिषद सिर्फ की गयी नियुक्तियों का अनुमोदन कार्य परिषद करती है. यदि मैं गलत बोल रहा हूं तो मैं रिकार्ड पर बोल रहा हूं कि माननीय मंत्री जी मना कर दें कि यह बात सही है. नियमानुसार कार्य परिषद का नियुक्तियों से कोई वास्‍ता नहीं है, सिर्फ अनुमोदन होता है.

          अध्‍यक्ष महोदय- आज महिलाओं का दिन है.

          श्री इंदर सिंह परमार- अध्‍यक्ष महोदय, कार्यपरिषद के अधिकार अभी प्रथम कुलगुरू को दो वर्ष तक पूरे रहते हैं और कार्य परिषद से पूरा अनुमोदन होता है, उसके बाद ही उनको नियुक्ति के आदेश जारी होते हैं, लेकिन चयन की प्रक्रिया विश्‍वविद्यालय के कुलगुरू की अध्‍यक्षता में जो समिति बनती है और उस कमेटी में जो एक्‍सपर्ट होते हैं वह भी माननीय राज्‍यपाल जी के अनुमोदन से होते हैं, यह स्‍पष्‍ट है. माननीय सदस्‍य अपने आप में सुधार कर लें. ( मेजों की थपथपाहट)

                   शासन की स्‍वीकृति के बिना कुल सचिव द्वारा करोड़ों का भुगतान

                                                [उच्च शिक्षा]

4. ( *क्र. 1902 ) श्रीमती ललिता यादव : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) महाराजा छत्रसाल बुंदेलखण्ड विश्‍वविद्यालय, छतरपुर में निर्मित कुलपति निवासप्रशासनिक भवनअकादमिक भवन एवं बाउंड्रीवॉल निर्माण पर प्रश्‍न दिनांक तक कुलसचिव द्वारा कुल कितनी राशि का भुगतान किया गया है? (ख) क्या उक्त निर्माण कार्य के भुगतान की कुलसचिव द्वारा उच्च शिक्षा विभाग से प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त की गई? हाँ अथवा नहींयदि प्रशासकीय स्वीकृति‍ ली गई तो कितनी राशि की ली गई(ग) क्या कुलसचिव बिना प्रशासकीय स्वीकृत लिये 40 करोड़ का भुगतान कर सकता हैया नहींयदि हाँ, तो कुलसचिव क्या स्वयं प्रशासकीय स्वीकृति देकर स्वयं भुगतान कर सकता हैयदि हाँ, तो आदेश प्रस्तुत करें। (घ) बिना प्रशासकीय स्वीकृति के कुलसचिव द्वारा किये गये करोड़ों के भुगतान क्‍या वित्‍तीय अनियमितता हैयदि हाँतो शासन इनके द्वारा किये गये भुगतान के लिये इन पर कब तक कार्यवाही करेगा?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री इन्‍दर सिंह परमार ) : (क) विश्‍वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा स्‍वीकृति तथा विश्‍वविद्यालय के वार्षिक बजट में प्रावधानित की गई राशि के अनुसार विश्‍वविद्यालय के द्वारा कुलपति निवास एवं प्रशासनिक भवन के लिये राशि रू. 17 करोड़ एवं बांउड्रीवॉलगेट निर्माण एवं गार्ड रूम निर्माण के लिये राशि रू. 10 करोड़ 50 लाख का भुगतान किया गया। इस प्रकार कुल राशि 27 करोड़ 50 लाख का विश्‍वविद्यालय द्वारा लोक निर्माण विभाग पी.आई.यू. जिला छतरपुर को भुगतान किया गया है। अकादमिक भवन के लिये विश्‍वविद्यालय द्वारा किसी राशि का भुगतान नहीं किया गया है। (ख) जी नहीं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी नहीं। म.प्र. विश्‍वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 24 की उपधारा 14 के अंतर्गत निर्माण कार्य की स्‍वीकृति विश्‍वविद्यालय की कार्यपरिषद द्वारा दी गई हैजिसके आधार पर विश्‍वविद्यालय द्वारा बजट में प्रावधानित की गई राशि में से भुगतान की कार्यवाही की गई है। (घ) उत्‍तरांश 'के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

          श्रीमती ललिता यादव- मेरा प्रश्‍न क्रमांक- 1902.

          श्री इंदर सिंह प‍रमार - अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर है.

          अध्‍यक्ष महोदय- आज महिलाओं का दिन है तो आज ज्‍यादा से ज्‍यादा प्रश्‍न हो जायें, इसकी चिंता हम करें.

          श्रीमती ललिता यादव- अध्‍यक्ष महोदय, आपने आज मंगलवार का दिन महिलाओं के लिये रखा. मैं दो लाईनों से अपनी बात की शुरूआत करती हूं कि '' इस दुनिया की शान है नारी, शक्ति का आवतार है नारी, सरस्‍वती का रूप है नारी, लक्ष्‍मी का स्‍वरूप है नारी''. ऐसा आपने महिलाओं के लिये और डॉ. मोहन यादव जी की सरकार ने सम्‍मान दिया तो आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय, मेरे मूल प्रश्‍न के उत्‍तर में माननीय उच्‍च शिक्षा मंत्री जी द्वारा जो सदन में जानकारी प्रस्‍तुत की गयी है, वह तथ्‍यों के विपरीत है. उच्‍च शिक्षा विभाग द्वारा दिये गये उत्‍तर में बताया गया कि उच्‍च शिक्षा विभाग से प्रशासनिक स्‍वीकृति प्राप्‍त नहीं की गयी. जबकि प्रशासनिक स्‍वीकृति ली गयी. विश्‍वविद्यालय की कार्य परिषद की स्‍वीकृति एवं बजट के प्रावधान पर महाराज क्ष्‍ात्रसाल बुंदेलखण्‍ड विश्‍वविद्यालय में निर्माण पर 27 करोड़ 50 लाख की राशि का भुगतान कार्य परिषद की स्‍वीकृति पर लोक निमार्ण विभाग के पीआईयू को किया गया. अगर कार्य परिषद को राशि भुगतान करने के पावर हैं तो मंत्री जी आदेश की प्रति बतायें.

          अध्‍यक्ष महोदय, अगर कार्य परिषद को भुगतान करने के पावन हैं तो कुल सचिव द्वारा पत्र क्रमांक- आर-428/वित्‍त/2022, दिनांक 11.04. 2022 को पुन: पत्र क्रमांक- आर-673/2021, दिनांक 17.12. 2021 के संदर्भ में आयुक्‍त उच्‍च शिक्षा विभाग से 40 करोड़ के विभिन्‍न कार्यों के लिये शासन से अनुमति क्‍यों मांगी गयी. जिसके एवज में आयुक्‍त उच्‍च शिक्षा द्वारा पत्र क्रमांक- 554/ 286/आ. उच्‍च शिक्षा/2021, दिनांक 25.07. 2022 को 20 करोड़ की अनुमति प्राप्‍त कार्यों की दी गयी.

          अध्‍यक्ष महोदय, आप स्‍वयं स्‍वीकार रहे हैं कि निर्माण कार्यों पर 27 करोड़ 50 लाख रूपये की स्‍वीकृति दी गयी. आपने 50 लाख रूपये खर्च किये हैं और स्‍वीकृति 20 करोड़ रूपये की दी गयी तो मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहती हूं कि अगर आपके प्रश्‍न के उत्‍तर में कहा गया है कि अनुमति की आवश्‍यकता नहीं है, अनु‍मति नहीं दी गयी, लेकिन अनुमति दी गयी है.

          श्री इंदर सिंह परमार- अध्‍यक्ष महोदय, महाराजा क्षत्रसाल बुंदेलखण्‍ड विश्‍वविद्यालय छतरपुर के कार्य परिषद ने निर्माण कार्यों के लिये प्रस्‍ताव पास किये हैं, उसके आधार पर प्राक्‍कलन तैयार हुए हैं, प्राक्‍कलन तैयार होने के बाद में प्रशासनिक अधिकार वहां के कुलगुरू के अनुमोदन से कुल सचिव को होते हैं. उन्‍होंने नियमानुसार काम किये हैं. कार्य परिषद की जो बैठक है, वह तेइसवीं बैठक दिनांक 22.12. 2022 को हुई है उसमें आयुक्‍त, उच्‍च शिक्षा के पत्र दिनांक के परिप्रेक्ष्‍य में विश्‍वविद्यालय के निर्माण कार्य हेतु विश्‍वविद्यालय के स्‍त्रोंतो से राशि रूपये 20 करोड़ की अनुमति कार्य परिषद ने प्रदान की है. और उसके बाद में सरकार ने जो आयुक्त का पत्र है, आप निर्माण कार्य कर सकते हैं कभी कभी मार्गदर्शन लिया जाता है.  जो नया विश्वविद्यालय है वह भी लगभग नया है. विश्वविद्यालय मार्गदर्शन मांगते हैं तो मार्गदर्शन मांगने पर सरकार अपनी तरफ से स्पष्टीकरण भेजकर उनको मार्गदर्शन देती है, इसी प्रकार से तीसवीं बैठक दिनांक 12.12.2025 को भी लगभग 9 करोड़ रुपये की राशि की तकनीकी स्वीकृति लोक निर्माण विभाग को की गई है, जो 28.89 करोड़ रुपये के लगभग है, जिसमें कुल व्यय 27.50 करोड़ रुपये अभी तक व्यय हुआ है, शेष राशि अभी बची हुई है, इसलिए कुल सचिव को जो अधिकार है, कुल सचिव ने उन्हीं अधिकारों का उपयोग किया है और भुगतान किया है.

          श्रीमती ललिता यादव - अध्यक्ष महोदय, कार्यपरिषद को क्या वित्तीय शक्तियां हैं तो हमें आदेश की एक प्रति दी जाय. 7.50 करोड़ रुपये की राशि शासन की बिना अनुमति से खर्च की गई है तो क्या यह सही है और अनुमति ली गई है तो 20 करोड़ रुपये की अनुमति के बाद 7.50 करोड़ रुपये का जो व्यय हुआ है वह किस नियम से हुआ है?

          श्री इन्दर सिंह परमार - अध्यक्ष महोदय, कार्यपरिषद कार्यों का प्रस्ताव करती है, फिर उसका अनुमोदन भी करती है लेकिन वह उनके हस्ताक्षर  से कोई पेमेंट नहीं होता है, वह पमेंट की व्यवस्था कुलगुरू, कुल सचिव और वहां के एकाउंट का काम जो वित्त विभाग से निश्चित होते हैं उनके तीनों के संयुक्त उससे होते हैं उनकी देखरेख में होते हैं, इसलिए कार्यपरिषद को वित्तीय अधिकार नहीं है लेकिन उनको स्वीकृति करने के उनको अनुमोदन करने के अधिकार हैं.

श्रीमती ललिता यादव - अध्यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि आप जांच करा लीजिए. अगर वित्तीय पावर नहीं है और राशि खर्च की है तो जांच करा लीजिए और अनियमितताएं हुई हैं तो कार्यवाही करिए.

श्री इन्दर सिंह परमार - अध्यक्ष महोदय, प्रारंभिक सारा जो कुछ देखा है, उस हिसाब से कोई अनियमितता नहीं हुई है लेकिन माननीय सदस्या का कहना है तो फिर भी हम एक बार पूरा उसको दिखा लेंगे ताकि कोई यदि बात हुई है तो हम आगे कार्यवाही करेंगे.

श्रीमती ललिता यादव - अध्यक्ष महोदय, क्या माननीय मंत्री जी जांच करा लेंगे?

अध्यक्ष महोदय - मंत्री जी ने बोल तो दिया है.

श्रीमती ललिता यादव - धन्यवाद, माननीय मंत्री जी.

जिले में उद्योगों की स्थापना

[तकनीकी शिक्षाकौशल विकास एवं रोजगार (केवल कौशल विकास एवं रोजगार)]

5. ( *क्र. 2234 ) श्रीमती सेना महेश पटेल : क्या राज्‍य मंत्रीकौशल विकास एवं रोजगार महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अलीराजपुर में वर्ष 2023-24 से प्रश्‍न दिनांक तक जिले में बेरोजगारी की वर्तमान स्थिति क्या हैजिले में कुल कितने पंजीकृत बेरोजगार युवक-युवतियाँ हैंवर्षवार एवं विकासखंडवार जानकारी उपलब्ध कराएं। (ख) जिले में उद्योग स्थापित कर रोजगार सृजन हेतु राज्य सरकार द्वारा अब तक कौन-कौन सी योजनाएं एवं नीतियाँ लागू की गई हैंयोजनाओं के अंतर्गत कितने लघुमध्यम एवं बड़े उद्योग स्थापित हुए हैं तथा उनसे कितने स्थानीय युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ? संख्‍या बतायें। (ग) क्या जिले में औद्योगिक क्षेत्रफूड प्रोसेसिंगकृषि आधारित उद्योगहस्तशिल्प अथवा आदिवासी उत्पादों पर आधारित उद्योग स्थापित करने की कोई ठोस कार्ययोजना प्रस्तावित हैयदि हाँतो उसकी समय-सीमा बताई जायेयदि नहींतो बेरोजगारी दूर करने हेतु सरकार की योजना क्या हैजानकारी उपलब्ध करायें।

राज्‍य मंत्रीकौशल विकास एवं रोजगार ( श्री गौतम टेटवाल ) : (क) विभाग द्वारा बेरोजगारों की स्थिति की जानकारी संधारित नहीं की जातीअपितु एम.पी. रोजगार पोर्टल पर जिला अलीराजपुर में पंजीकृत आकांक्षी युवक-युवतियों की जानकारी वर्षवार निम्‍नानुसार है :-

 

वर्ष

पोर्टल पर पंजीकृत आकांक्षी युवाओं की संख्‍या

योग

युवक

युवती

2023-24

1061

948

2809

2024-25

3059

5274

8333

2025-26

(दिनांक 03.02.2026 तक)

963

445

1408

योग

5883

6667

12550

विकासखण्‍डवार जानकारी संधारित नहीं की जाती है। (ख) प्रदेश में उद्योग स्‍थापित कर रोजगार सृजन हेतु राज्‍य सरकार द्वारा औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन विभाग अंतर्गत उद्योग संवर्धन नीति-2025 लागू की गई है। एम.पी. इण्‍डस्‍ट्रीयल डेव्‍हलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड क्षेत्रांतर्गत  जिला-अलीराजपुर में वर्तमान में कोई औद्योगिक क्षेत्र एवं कोई वृहद उद्योग स्‍थापित नहीं है। प्रदेश में निवेश के माध्‍यम से रोजगार की संभावनाओं में वृद्धि करने के उद्देश्‍य से सूक्ष्‍मलघु ओर माध्‍यम उद्यम विभाग द्वारा म.प्र. एम.एस.एम.ई. विकास नीति-2025 लागू की गई है। नीति अंतर्गत औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन विभाग द्वारा स्‍वयं कोई उद्योग स्‍थापित नहीं किया जाता हैअपितु उद्योगों की स्‍थापना को प्रोत्‍साहित करने हेतु स्‍थापना उपरांत प्रोत्‍साहन राशि प्रदान की जाती है। अलीराजपुर जिले में वर्ष 2023-24 से दिनांक 31 जनवरी, 2026 तक भारत सरकार के उद्यम पंजीयन पोर्टल अनुसार 740 विनिर्माण इकाइयां पंजीकृत हुई हैंजिनमें कुल 3027 व्‍यक्तियों को रोजगार प्राप्‍त हुआ है। (ग) औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन विभाग द्वारा जिले में औद्योगिकरण हेतु ग्राम खरपई की 42.95 हेक्‍टेयर एवं ग्राम अजन्‍दा 76.25 हेक्‍टेयर भूमि चिन्हित कर विभाग के पक्ष में हस्‍तांतरण हेतु आर.सी.एम.एस. पोर्टल के माध्‍यम से आवेदन जिला कलेक्‍टर कार्यालय में प्रस्‍तुत किया गया हैसमय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। सूक्ष्‍मलघु और माध्‍यम उद्यम विभाग द्वारा प्रदेश में एम.एस.एम.ई. की स्‍थापना को प्रोत्‍साहित करने हेतु म.प्र. एम.एस.एम.ई. विकास नीति-2025 लागू की गई हैजिसमें अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों हेतु पृथक से अतिरिक्‍त सुविधा का प्रावधान हैनीति अलीराजपुर जिले में भी लागू है। सूक्ष्‍मलघु ओर माध्‍यम उद्यम विभाग द्वारा अलीराजपुर जिले के छकतला में 6 हेक्‍टेयर भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र का विकास किया जा रहा है तथा कुल 21.83 हेक्‍टेयर भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र का निर्माण सेजवाड़ातहसील चंद्रशेखर आजाद नगर में किया गया है। विभाग अंतर्गत संपूर्ण प्रदेश में जिला रोजगार कार्यलयों के माध्‍यम से जॉब फेयर योजनान्‍तर्गत रोजगार मेलों के माध्‍यम से निजी क्षेत्र में नियुक्ति हेतु निजी क्षेत्र के नियोजकों द्वारा आकांक्षी युवाओं को ऑफर लेटर प्रदाय किये जाते हैं।

 

श्रीमती सेना महेश पटेल - अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 2234 है.

श्री गौतम टेटवाल - अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.

श्रीमती सेना महेश पटेल - अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से कौशल विकास एवं रोजगार विभाग के माननीय मंत्री जी द्वारा दिये गये उत्तर से असंतुष्ट हूं. जब वास्तविक बेरोजगारों की संख्या में गलत आंकड़ें बताए गए हैं. इसकी नीति ही नहीं बनाई गई है. 12550 पंजीकृत युवाओं में से कितनों को स्थाई रोजगार मिला और कितने आज भी बेरोजगार हैं. 30027 बेरोजगारों में से कितने निजी क्षेत्र और कितने सरकारी योजनाओं में लगे हैं, क्या सरकार विकासखण्डवार सर्वे करवाकर वास्तविक बेरोजगारी रिपोर्ट सदन में रखेगी? वर्ष 2025-26 में केवल 1408 नये पंजीयन हुए हैं क्या यह प्रशासनिक उदासीनता है? रोजगार कार्यालय के माध्यम से कितने युवाओं को आफर लेटर जारी किये गये हैं? उद्यम पंजीयन पोर्टल अनुसार 740 सूक्ष्म, लघु ईकाई पंजीकृत हुई है जिनमें कुल 2027 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हुआ है, लेकिन  जिले में एक भी वृहद उद्योग नहीं है?

श्री गौतम टेटवाल - अध्यक्ष महोदय, जिला रोजगार कार्यालय अलीराजपुर में कुल जीवित पंजीयन के विषय में पूछा गया है. जिला रोजगार कार्यालय अलीराजपुर में दिनांक 31.1. 2026 की स्थिति में कुल जीवित पंजीयन की संख्या 27185 है, जिसमें सामान्य वर्ग में 586, अनुसूचित जाति के 729, अनुसूचित जनजाति के  24836, तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के 1034 आवेदक हैं. कुल जीवित पंजीयन में महिला-पुरूष की संख्‍या पूछी गई है. मैं बताना चाहता हॅूं कि कुल जीवित पंजीयन में महिलाओं की संख्‍या 12 हजार 815 है एवं पुरूषों की संख्‍या 14 हजार 370 दिखाई गई है. जिला रोजगार कार्यालय, अलीराजपुर में वर्ष 2023-24 के प्रश्‍न दिनांक के अनुसार 14 हजार रोजगार मेले लगाए गए, जिसमें 315 आकांक्षी युवाओं को ऑफर लैटर प्रदान किए गए हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश में वर्ष 2023 के प्रश्‍न दिनांक के अनुसार 1 हजार 79 रोजगार मेले लगाए गए थे, जिसमें 2 लाख 37 हजार 949 आकांक्षी युवाओं को ऑफर लैटर उपलब्‍ध कराया गया था. यह कहना गलत है कि मेरे प्रश्‍न से आप असंतुष्‍ट हैं. वैसे भी आज बहनों का दिवस है और बहनों के दिवस में माननीय अध्‍यक्ष जी ने तय किया है, तो आपको यह सदन संतुष्‍ट करके भेजेगा. दीदी से मैं निवेदन करता हॅूं कि इसमें भी अगर आपको इस विषय में कुछ और जानकारी चाहिए, तो मैं आपको देने के लिए तैयार हॅूं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्रीमती सेना महेश पटेल जी, दूसरा पूरक प्रश्‍न करें.

          श्रीमती सेना महेश पटेल -- जी, माननीय अध्‍यक्ष महोदय. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हॅूं कि उद्योगवार लाभार्थी की सूची सदन में कब तक रखी जायेगी ? 30 हजार 27 रोजगार में से कितने स्‍थानीय आदिवासी युवाओं को स्‍थायी नियुक्‍तियां मिलीं ? जिन ईकाइयों ने उत्‍पादन प्रारंभ नहीं किया, क्‍या उन पर  कार्रवाई हुई है ? बडे़ उद्योगों के अभावों में बडे़ पैमाने पर रोजगार कैसे आएगा. औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन विभाग के अनुसार ग्राम खरपई में 42.95 हेक्‍टेयर एवं ग्राम अजन्‍दा में 76.25 हेक्‍टेयर भूमि है. अलीराजपुर जिले के ग्राम छकतला में 6 हेक्‍टेयर, ग्राम सेजवाड़ा, तहसील चंद्रशेखर आजाद नगर में 21.83 हेक्‍टेयर भूमि है परन्‍तु इसकी समय-सीमा नहीं बतायी गई है. उसकी जमीनी स्‍थिति यह है कि ग्राम सेजवाड़ा में 40 वर्ष से खेती की जा रही है जिसकी भूमि उद्योग हेतु दे दी गई है. उसमें न ही ग्राम सभा की सहमति है और न ही कोई उद्योग स्‍थापित है और न ही कोई रोजगार मिला है.

          अध्‍यक्ष महोदय, ग्राम खरपई और अजन्‍दा की चरनोई भूमि के आधिपत्‍य में ग्राम सभा की असहमति है. ग्राम छकतला भूमि के आंशिक कार्य पर नीति स्‍पष्‍ट नहीं है. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हॅूं कि जिन कंपनियों को भूमि दी गई है, उन्‍होंने अब तक कितना निवेश किया है, उससे कितने स्‍थानीय युवाओं को रोजगार मिला है ? निर्धारित समय पर उद्योग न लगने पर भूमि आवंटन रद्द क्‍यों नहीं किया गया है ? क्‍या ग्राम सभा की विधिवत् सहमति ली गई है ? क्‍या सरकार पेसा कानून का पालन सुनिश्‍चित करेगी या पेसा कानून को मानेगी या नहीं मानेगी. क्‍योंकि नियम के विरूद्ध ग्रामीण क्षेत्र में पेसा कानून को कोई नहीं मान रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्रीमती सेना महेश पटेल जी, प्रश्‍न बहुत लंबा हो रहा है, इतने प्रश्‍नों का जवाब तो आएगा नहीं. प्‍लीज, कोई स्‍पेशिफिक क्‍वेश्‍चन करें, जिस पर जवाब आता है, तो ठीक रहता है. माननीय मंत्री जी.

          श्री गौतम टेटवाल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, औद्योगिक क्षेत्र छकतला के अधोसंरचना विकास कार्य हेतु राशि रूपए 7 करोड़ 94 लाख 75 हजार स्‍वीकृत की गई है. प्रशासनिक एवं वित्‍तीय स्‍वीकृति क्रियान्‍वयन संस्‍था लघु उद्योग निगम मर्यादित, भोपाल के पक्ष में जारी की गई है. रोजगार पोर्टल पर सभी आकांक्षी युवा स्‍वयं पंजीयन कराते हैं. निरंतर युवा संगम का आयोजन किया जा रहा है और यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है. इसमें लघु, मध्‍यम एवं बडे़ उद्योगों द्वारा आवश्‍यक सहयोग प्रदान किया जाता है. जैसा कि बहन जी ने पूछा है कि अलीराजपुर जिले में कितने औद्योगिक क्षेत्र हैं. मैं बताना चाहता हॅूं कि अलीराजपुर जिले में औद्योगिक क्षेत्र सेजवाड़ा स्‍थापित है, जिसमें औद्योगिक प्रयोजन हेतु 34 भूखण्‍ड हैं. उक्‍त 34 भूखण्‍डों में से 30 भूखण्‍ड औद्योगिक ईकाइयों को आवंटित है तथा 4 भूखण्‍ड आवंटित क्षेत्र प्रक्रियाधीन हैं. छकतला औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है. छकतला औद्योगिक क्षेत्र अलीराजपुर विधानसभा के ग्राम छकतला में 6 हेक्‍टेयर भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है, जिसमें 49 भूखण्‍ड आवंटन हेतु उपलब्‍ध होंगे. औद्योगिक क्षेत्र छकतला के अधोसरंचना विकास कार्य हेतु राशि रूपए 7 करोड़ 94 लाख की स्‍वीकृति प्रशासनिक एवं वित्‍तीय स्‍वीकृति क्रियान्‍वयन हेतु संस्‍था लघु उद्योग निगम मर्यादित, भोपाल के पक्ष में जारी की गई है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्रीमती महेश सेना पटेल जी, क्‍या आपका विषय स्‍पष्‍ट हुआ ?

          श्रीमती सेना महेश पटेलमाननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री महोदय जी से निवेदन है कि जितने भी प्रायवेट और जितने भी सरकारी विभाग हैं उनमें कितने युवाओं को रोजगार मिला ? इसकी लिस्ट उपलब्ध कराई जाये.

          अध्यक्ष महोदयमाननीय मंत्री जी आप सदस्य महोदया जी को आज आप बुला लें इस प्रकार की कोई भी शंका है तो उसका समाधान कर दें. श्रीमती अर्चना चिटनीश जी उन्होंने आशीष गोविन्द शर्मा जी को अधिकृत किया है. वह आज नहीं हैं.

हकारी शक्कर कारखाने के वाहन का दुरूपयोग

[सहकारिता]

6. ( *क्र. 1292 ) श्रीमती अर्चना चिटनीस : क्या सहकारिता मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नवलसिंह सहकारी शक्कर कारखाना, बुरहानपुर द्वारा आयुक्तसहकारिता व पंजीयक सहकारी संस्थाएं के पत्र विप/शमी/2017/2524, दिनांक 16.10.2019 तथा म.प्र. शासन, वित्त विभाग द्वारा पत्र एल-179/2009/नियम/4, दिनांक 19.08.2009 के द्वारा निर्देशों के विरूद्ध संचालक मंडल ने निर्णय लेकर लग्‍ज़री वाहन फॉर्च्यूनर रूपए 35 लाख का क्रय कियायदि हाँ, तो वाहन किस पदाधिकारी के द्वारा उपयोग में लाया गया(ख) क्या वाहन कारखाने के हित में अध्यक्ष के उपयोग के लिये क्रय किया गया थायदि हाँ, तो दिनांक 20 जून, 10, 14, 28 जुलाई तथा 7, 10 अगस्त 2020 को वाहन का कहां-कहां उपयोग किया गया। क्या वाहन का उपयोग अन्य बाहरी व्यक्तियों द्वारा किया गयाक्या उपयोग करने वाले व्यक्ति कारखाने के पदाधिकारी या निर्वाचित सदस्य थे? यदि नहींतो वाहन क्रय व अन्य बाहरी व्यक्ति को वाहन उपलब्ध कराने के लिये उत्तदायित्व निर्धारित करते हुए दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगीयदि नहीं, तो कारण स्पष्ट करें। क्रय दिनांक से प्रश्‍न दिनांक तक लॉगबुकवाहन चालक वेतन/भत्ते के समस्त व्यय ब्यौरा उपलब्ध कराएं?

सहकारिता मंत्री ( श्री विश्वास कैलाश सारंग ) : (क) जी हाँ। तत्कालीन अध्यक्ष द्वारा वाहन समय-समय पर उपयोग में लाया गया। (ख) वाहन कारखाने के उपयोग के लिये क्रय किया गया। दिनांक 20 जून, 2020, 10, 14 एवं 28 जुलाई, 2020 तथा 7 एवं 10 अगस्त, 2020 को वाहन उपयोग की जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र 01 अनुसार है। वाहन लॉगबुक अनुसार वाहन का उपयोग कारखाना के अध्यक्ष द्वारा किया जाना दर्शित है। बाहरी व्यक्तियों द्वारा वाहन का उपयोगवाहन क्रय आदि से संबंधित प्राप्त शिकायत की जांच हेतु आयुक्त सहकारिता एवं पंजीयक सहकारी संस्थाएंम.प्र. भोपाल के द्वारा जांच दल गठित किया जाकर जांच कराई जा रही है। कार्यवाही जांच प्रतिवेदन के निष्कर्षाधीन। क्रय दिनांक से प्रश्‍न दिनांक तक वाहन चालकवेतन भत्ता एवं व्यय की जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र 02 अनुसार है।

          प्रश्न क्रमांक 1292

          श्री विश्वास सारंगउत्तर पटल पर रखा है.

          श्री आशीष गोविन्द शर्मामाननीय अध्यक्ष महोदय, जो जानकारियां इस प्रश्न के उत्तर में उपलब्ध कराई गई हैं, वह अपूर्ण हैं. मेरा प्रश्न यह है कि जब नवलसिंह शक्कर कारखाना घाटे की स्थिति में था उसमें वित्त विभाग के द्वारा यह निर्देश दिये गये थे कि यह संस्था घाटे में चल रही है. इसलिये कोई लग्जरी वाहन क्रय न किया जाये. संचालक मंडल द्वारा बिना सक्षम स्वीकृति के मनमाने तरीके से न केवल लग्जरी वाहन क्रय किया गया. बल्कि उस वाहन का उपयोग अध्यक्ष के अलावा भी अन्य व्यक्तियों के लिये किया गया. उसके प्रमाण भी हम लोगों के पास में उपलब्ध हैं. कई लोगों ने वाहन के दुरूपयोग को लेकर के शिकायतें भी कीं. इस लॉग बुक भी उपलब्ध नहीं है कि उक्त वाहन कहां गया ? किस दिनांक को गया ? उसमें मध्यप्रदेश विधान सभा के पास भी लगे हुए पाये गये. साथ ही साथ विभिन्न टोल भूथों पर इसकी एन्ट्री भी हुई है इसलिये मेरी इस प्रश्न के माध्यम से मांग है कि क्या वाहन के दुरूपयोग भोपाल से एक टीम भेजकर उसकी पूर्णतया जांच करवाई जायेगी ? दूसरा वित्तीय अनियमितताएं एवं खरीदी इस दौरान संचालक मंडल के भंग करने के बाद भी 2023 तक होती रही, क्या उसकी भी विस्तृत जांच विभाग के द्वारा कराई जायेगी ?

            श्री विश्वास सारंगअध्यक्ष महोदय, जो प्रश्न माननीय विधायक जी ने किया है उसमें जांच पहले से ही निर्धारित कर दी थी. इन्दौर के जेआर और उज्जैन के डीआर की एक संयुक्त समिति के माध्यम से हमने जांच निष्पादित कराने को कहा था. उसकी जांच का प्रतिवेदन भी आ गया है. प्राईमाफेसी हमें यह लगा है कि गड़बड़ियां हुई हैं उसमें गलतियां पाई गई हैं बल्कि माननीय विधायक जी ने जितने प्रकरण दिये हैं, उससे ज्यादा जांच के दौरान प्रकरण पाये हैं, क्योंकि प्रतिवेदन अभी आया है उसकी स्कूटिनी हो रही है. मैं माननीय विधायक जी को पूरी तरह से विश्वास दिलाता हूं कि इस पर सख्त कार्यवाही हम करेंगे और इस तरह की अनियमितताएं पुनः न हों इसके भी प्रावधान करेंगे.

          श्री आशीष गोविन्द शर्माधन्यवाद अध्यक्ष महोदय.

          परिशिष्ट - "दो"

विभाग की जानकारी व कार्यवाही

[आयुष]

7. ( *क्र. 2259 ) श्रीमती अनुभा मुंजारे : क्या आयुष मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि  (क) क्या म.प्र. शासन द्वारा मध्यप्रदेश की जनता को गुणवत्तापूर्ण दवाइयों की खरीदी के लिये कौन से नियमनीतिनिर्देश बनाये गये हैं, जिसमें दवाइयों के खरीदी एवं गुणवत्ता हेतु पब्लिक हेल्थ कॉर्पोरेशन कार्य करता है(ख) क्या आयुष विभाग आयुर्वेदिक दवाइयों को ओपन टेन्डर से क्रय करता हैक्या म.प्र. राज्य लघु वनोपज संघ से बिना टेंडर प्रक्रिया के सीधे क्रय करता हैवित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24, 2024-25, 2025-26 में आयुर्वेदिक दवाइयों के क्रय हेतु जारी टेंडरों से खरीदी तथा सीधे खरीदी के क्रय आदेशों की प्रति उपलब्ध करायेंफर्म द्वारा जारी क्रय आदेश की शर्तों के अनुसार सभी दवाई सप्लाई नहीं गई है या कितनी दवाइयां गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाई गई हैंयदि हाँ, तो संस्था पर क्या कार्यवाही की गई है? (ग) क्या राज्य लघु वनोपज संघ दवाई सप्लाई के लिये प्रदेश भण्डार एवं सेवा उपार्जन नियम में अनुमोदित संस्था है? यदि नहींतो क्या ये नियमों का उल्लंघन हैयदि हाँ, तो क्या कार्यवाही की जा रही है(घ) प्रश्‍नांश (ख) अंर्तगत विद्या हर्बल को औषधि खरीदी के लिये वर्ष 2024 एवं वर्ष 2025 में क्रय आदेश जारी किये गये हैंतो कितने मूल्य की औषधियां सप्लाई की गई हैं एवं कितने मूल्य की शेष हैं एवं क्योंयदि हाँ, तो दवाई सप्लाई करने वाली संस्था पर कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है?  

आयुष मंत्री ( श्री इन्‍दर सिंह परमार ) : (क) जी हाँ। म.प्र. शासन, सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल का परिपत्र क्रमांक एफ-19-111/2009/1/4, दिनांक 30 सितम्बर, 2009 एवं म.प्र. शासन लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, मंत्रालय के परिपत्र क्रमांक एफ 12-47/2013/सत्रह/मेडि-3, दिनांक 26 सितम्बर, 2013 तथा म.प्र. भण्डार क्रय नियम एवं सेवा उपार्जन नियम 2015 (यथा संशोधित 2022) के नियम '6' के अनुसार म.प्र. पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कॉर्पोरेशन लिमिटेड भोपाल से आयुष औषधि क्रय की कार्यवाही की जा रही है। (ख) जी नहीं। जी हाँ। क्रयादेशों की प्रतियां पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अनुसार है। गुणवत्ता परीक्षण में मानक पाई गई औषधियों की ही आपूर्ति अधीनस्थ संस्थाओं में कराई जाती हैअतः कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) मंत्रिपरिषद् के निर्णयानुसार म.प्र. शासन, सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय वल्लभ भवन, भोपाल के परिपत्र क्रमांक-एफ-19-111/2009/1/4, दिनांक 30 सितम्बर, 2009 के परिपालन में प्रथमतः आयुर्वेद औषधि क्रय की कार्यवाही की जाती है। नियमानुसार होने से कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अनुसार है। औषधियों का प्रदाय निरंतर होने से प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

 

          श्रीमती अनुभा मुंजारेप्रश्न क्रमांक 2259

          श्री इन्दर सिंह परमारउत्तर पटल पर रखा है.

          श्रीमती अनुभा मुंजारेमाननीय अध्यक्ष महोदय, मंगलवार का शुभ दिन सभी के लिये मंगलकारी हो, सभी के लिये शुभ मंगलकारी हो, ऐसी मैं ईश्वर से कामना करती हूं. माननीय मंत्री जी विभाग के द्वारा मेरे के संबंध में जो जानकारी सदन में प्रस्तुत की गई है. इससे मैं संतुष्ट नहीं हूं. माननीय मंत्री जी प्रश्नांश (घ) के उत्तर में विभाग द्वारा स्वयं वित्तीय वर्ष 2024-25 में आयुर्वेदिक औषधि की कुल राशि लगभग 81 करोड़, 57 लाख के क्रय आदेश जिस फर्म को दिये गये हैं उसके द्वारा वर्तमान तक लगभग राशि 42 करोड़, 12 लाख की आयुर्वेदिक औषधियां प्रदाय की गई हैं. वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति हेतु मात्र एक माह शेष बचा है. दवा सप्लाई करने वाली फर्म द्वारा लगभग 39 करोड़, 45 लाख की आयुर्वेदिक औषधि प्रदाय किया जाना अभी शेष है. इससे स्पष्ट है कि फर्म द्वारा एक माह में इतनी अधिक राशि की आयुर्वेदिक औषधि प्रदाय नहीं की जा सकती है. इसलिये औषधि सप्लाई करने वाली फर्म पर तत्काल कार्यवाही की जानी चाहिये.

          विभाग द्वारा विद्या हर्बल संस्‍था को औषधि खरीदी के क्रय आदेश दिए गए हैं, परन्‍तु सदन में प्रस्‍तुत उत्‍तर के संलग्‍न परिशिष्‍ट में विद्या हर्बल संस्‍था के क्रय आदेश की प्रति उपलब्‍ध नहीं करवाई गई है. इसके लिए दोषी अधिकारियों पर माननीय मंत्री जी कब तक कार्यवाही की जाएगी, कृपया बताने का कष्‍ट करें.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार अध्‍यक्ष जी, आयुष विभाग द्वारा जो औषधि खरीदी जाती है, वह वनोपज संघ के माध्‍यम से खरीदी जाती है और इसलिए खरीदते हैं कि वन विभाग के अंतर्गत एक हजार उन्‍हत्‍तर समितियां हैं, जिसमें चालीस लाख वनवासी सदस्‍य हैं, उनके द्वारा जो वन उत्‍पाद का संग्रह करके जो समितियां देती है, वनोपज संघ जो दवाई बनाती है, उसको हम क्रय करते हैं और जो आर्डर दिए हैं, वह आर्डर में विलंब का कारण भी वनोपज संघ को लिखकर दिया है. इसमें वर्ष 2024 में जो दवाई खरीदी है, वर्ष 2025 में जो दवाई खरीदी है, फिर 2024-25 में जो दवाई खरीदी है और वर्ष 2025 में 22 करोड़ 27 लाख रुपए की जो दवाई खरीदी गई है, उसमें अभी दोतीन महीने में पूर्ति करने का वनोपज संघ ने हमें लिखित में किया गया है.

          श्रीमती अनुभा मुंजारे अध्‍यक्ष जी, बहुत अल्‍पसमय में अपनी बात मंत्री जी के सामने सदन में रखना चाहूंगी. आयुर्वेदिक औषधि सप्‍लाई करने वाली संस्‍था के पास दवाईयां उत्‍पादन शाखा के अनुरूप, न फार्मासिस्‍ट है, न ही मान्‍यता प्राप्‍त प्रयोग शाला है, जिससे दवाईयों की गुणवत्‍ता का परीक्षण नहीं हो सकता है. सप्‍लाई फर्म द्वारा जनता के स्‍वास्‍थ्‍य के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है. मंत्री जी से मेरा विनम्र आग्रह है कि जनहित में जनता के स्‍वास्‍थ्‍य को देखते हुए, ऐसी संस्‍था व सप्‍लायरों पर जो समयावधि पर न दवाई उपलब्‍ध करवा रहे हैं, न उसकी क्‍वालिटी मेंटेन कर रहे हैं, इन्‍हें पैनाल्‍टी लगाकर ब्‍लैक लिस्‍टेड करने की तत्‍काल कार्यवाही करें, यही मेरी मांग थी, धन्‍यवाद.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार अध्‍यक्ष जी, 30 सितम्‍बर 2009 में जो कैबिनेट के द्वारा पास हुआ, उसमें वनोपज संघ की जो संस्‍था है, लघु वनोपज संघ का ही विन्‍ध्‍य वैली नाम है, उसी के द्वारा खरीदी की जा रही है और गुणवत्‍तापूर्ण खरीदी की जा रही है. लैब में टेस्टिंग कराने के बाद ही हमारे यहां दवाईयां आती हैं. इसलिए मानक की दवाई ही हम खरीद रहे हैं, अमानक दवाई खरीदने का कोई प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है. जहां तक विलंब का प्रश्‍न है, क्‍योंकि विलंब किसी कारण से और मेरे ख्‍याल से दो वर्ष का टेण्‍डर एक साथ दिया था, इसलिए उन्‍होंने इतनी सप्‍लाई एक साल में नहीं कर पाए हैं, उसको भी तीन चार महीने में पूरी कर देंगे, इसमें किसी अन्‍य प्रकार का कोई विषय नहीं है, क्‍योंकि उन्‍होंने स्‍वीकार किया है और जल्‍द ही पूरी कर देने वाले हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय श्री कमलेश्‍वर डोडियार जी.

वित्त आयोग की राशि से निर्माण कार्यों की जानकारी

[पंचायत एवं ग्रामीण विकास]

8. ( *क्र. 2246 ) श्री कमलेश्‍वर डोडियार : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला रतलाम के सैलाना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत समस्त ग्राम पंचायतों में पांचवां वित्त आयोग एवं पंद्रहवां वित्त आयोग की राशि से वर्ष 2023 से प्रश्‍न दिनांक तक कौन-कौन से निर्माण कार्य कराये गये हैंउपरोक्त प्रत्येक निर्माण कार्य के संबंध में पृथक-पृथक पंचायतवार एवं वर्षवार जानकारी बतावें। (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्लेखित कार्य का नाम एवं प्रकृतिस्वीकृत राशिव्यय की गई राशिकार्य प्रारंभ एवं पूर्ण होने की तिथिसंबंधित ठेकेदार/एजेंसी का नामभुगतान किये गये बिलों की राशि एवं तिथि आदि की जानकारी पृथक-पृथक वर्षवार अनुसार बतावें। (ग) क्या किसी पंचायत में बिना कार्य पूर्ण हुए या गुणवत्ता जांच के बिना भुगतान किया गया हैयदि हाँतो संबंधित पंचायतोंकार्यों एवं जिम्मेदार अधिकारियों/ठेकेदारों की जानकारी बतावेंअनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध कोई कार्यवाही की गई हैयदि हाँतो कार्यवाही का विवरण क्या है और यदि नहींतो क्यों नहीं?

पंचायत मंत्री ( श्री प्रहलाद सिंह पटैल ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) जी नहीं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

          श्री कमलेश्‍वर डोडियार अध्‍यक्ष जी, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 2246 है.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल अध्‍यक्ष जी, उत्‍तर सभा पटल पर है.

          अध्‍यक्ष महोदय सदस्‍य पूरक प्रश्‍न करें.

          श्री कमलेश्‍वर डोडियार अध्‍यक्ष जी, वर्ष 2023-24 में कुछ काम शुरू हुए थे, जो अभी तक पूरे नहीं हुए हैं, तकरीबन पौने दो साल हो गए हैं. जैसे इसमें दो चीज बता रहा हूं, बाजना जनपद के आंबापाड़ा कला में वर्ष 2023-24 में सीसी रोड शुरू हुआ था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ है. इमलीपाड़ा कला में पानी की मोटर लगाने के लिए, पानी की व्‍यवस्‍था के लिए मोटरपंप की व्‍यवस्‍था करनी थी. वर्ष 2023 में इसको खरीदा था और खरीदकर के ट्यूबवेल में डालना था, वह भी अभी तक पूरा नहीं हुआ. इमलीपाड़ा कला में सीसी रोड का काम वर्ष 2023 में शुरू हुआ था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ. ऐसे बहुत सारे काम है, जो आपने जानकारी दी है. इतना समय क्‍यों लग रहा है.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल अध्‍यक्ष महोदय, 15 वें वित्‍त का और 5 वें वित्‍त का पैसा सीधे सरपंच के खाते में जाता है, एजेंसी सरपंच है. माननीय विधायक जी ने ठेकेदार और बाकी एजेंसी का भी पूछा था, तो मैंने कहा कि इसमें तो किसी एजेंसी और ठेकेदार का सवाल ही पैदा नहीं होता, उन्‍होंने जब पूछा था, उसमें अंतर की जो राशि है, जिसका वे उल्‍लेख कर रहे हैं, तो अंतर की राशि किसी न किसी दूसरे मद से देकर  उनको पूरे कराने की कोशिश है. इसलिए उनको समय सीमा बताना संभव नहीं था, यह लिखा गया था कि वास्‍तव में वर्ष 2022-23 के पंद्रहवें वित्‍त के कोई काम चल रहे हैं, पंद्रहवें वित्‍त की भी अंतिम किश्‍त आना बाकी है, तो मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य से कहूंगा की वह जो संबंधित सरपंच है, अगर उनको इस बात का सुझाव दें या जनपद सी.ई.ओ. को कहें कि यह अंतर की राशि वहीं पंद्रहवें वित्‍त का पैसा है, जो सरपंच के पास आयेगा, उन्‍हीं का ही अधूरा काम है, उन्‍हीं ने कैसे उतना बड़ा काम लिया है, तो यह पूरी तरह से सरपंच के कार्य क्षेत्र का था और इसलिए मुझे लगता है कि विधायक जी आप अगर उसमें कोई मदद करेंगे तो ठीक रहेगा, बाकी अंतर की राशि अन्‍य मद में जो हम पैसा देते हैं, हम हमेशा कहते हैं कि अधूरे काम पूरे किये जायें, यह विभाग का निर्देश होता है.

          श्री कमलेश्‍वर डोडियार -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधानसभा क्षेत्र में बोरदा, पाटड़ीकेलदा और वडि़या आमलीपड़ा में तीन तालाब स्‍वीकृत हुए थे और तीनों तालाब का भूमि पूजन भी रतलाम जिले के बीजेपी के जिलाध्‍यक्ष और बीजेपी के पूर्व विधायक ने किया था, लेकिन हमारे ही रतलाम, झाबुआ के सांसद महोदय ने इसको निरस्‍त कराने के लिये एक चिट्ठी लिख दी और फिर शासन स्‍तर पर इसको निरस्‍त भी कर दिया है, जबकि माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सैलाना विधानसभा क्षेत्र में तीनों तालाब बनाये जाने चाहिए थे, इनकी साइट, इनका स्‍थान बदलकर रतलाम ग्रामीण में कर दिया है, यह वैसी साइट है, जहां पर आसपास के तीन-तीन, चार-चार गांव के पशु, गाय, बैल, बकरी ये जानवर यहां आकर पानी पीते हैं, लेकिन वे आज पानी पीने के लिये तरस रहे हैं, तो मेरा इस प्रश्‍न में आपसे अनुरोध है कि इन तीनों जगह पर तालाब स्‍वीकृत  कर दीजिये और तीनों जगह तालाब बना दिया जाये. अध्‍यक्ष महोदय, मैं भारत आदिवासी पार्टी का हूं, यह मेरे साथ और वहां की जनता से ही भेदभाव नहीं है, यह वहां के जानवरों के साथ भी भेद भाव हुआ है, माननीय मंत्री जी आज गाय के साथ भी भेदभाव हो रहा है, गाय को पानी पीने के लिये नहीं मिल रहा है, यह तीन साइट है और तीनों साइट पर अगर तालाब बनता है, तो कम से कम हर तालाब पर तीन-तीन, चार-चार गांव के जानवर भी पानी पी सकते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री कमलेश्‍वर जी, आप बैठ जायें, आपका प्रश्‍न आ गया है. मंत्री जी आप बोलें.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो बात कही उसको मैं जरूर दिखवा लूंगा और जल गंगा अभियान फिर शुरू होगा, तो मुझे लगता है कि अगर वहां का सरपंच अपने पोर्टल पर उसको डालेंगे, तो मुझे लगता है कि ऐसा भेद भाव पहली बार चर्चा में आया है, तो इसकी तो मैं जानकारी ले लूंगा, अभी जल गंगा अभियान की तैयारी शुरू हो गई है, अगर उसको पोर्टल पर डालेंगे, तो हमें किसी से बैर नहीं है, यह तो अच्‍छा काम है, इसको करने में कोई दिक्‍कत नहीं है.

          श्री कमलेश्‍वर डोडियार -- अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

निर्वाचन अवैधानिक किया जाना

[सहकारिता]

9. ( *क्र. 2223 ) श्री अम्बरीष शर्मा ''गुड्डू'': क्या सहकारिता मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा तारांकित प्रश्‍न क्रमांक 2289, दिनांक 15.07.2024 को मार्केटिंग सोसायटी लहार के अध्यक्ष पद हेतु निर्वाचन में अवैधानिक प्रक्रिया अपनाये जाने के संबंध में जानकारी चाही गई थी? (ख) क्या उक्त जानकारी के आधार पर सदन में आश्वासन दिया गया था कि प्रक्रिया की जांच करा कर अध्यक्ष को अयोग्य एवं निर्वाचन प्रक्रिया को अवैध घोषित किया जावेगायदि हाँ, तो आज तक क्या कार्यवाही की गई? (ग) क्या निर्वाचन प्रक्रिया को अवैध एवं अध्यक्ष को अयोग्य घोषित किया जायेगायदि हाँ, तो कब तक? समय-सीमा बताएं।

          सहकारिता मंत्री ( श्री विश्वास कैलाश सारंग ) : (क) जी नहीं। (ख) जी नहीं। शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता। (ग) निर्वाचन प्रक्रिया को अवैध घोषित करने के संबंध में म.प्र. सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1960 की धारा 64 (2) (5) में निर्वाचन दिनांक से 45 दिवस के अंदर विवाद प्रस्तुत करने का प्रावधान है। निर्धारित समय-सीमा में न्यायालय में कोई विवाद प्रस्तुत नहीं किया गया हैअत: शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता है।

          श्री अम्बरीष शर्मा''गुड्डू''-- अध्‍यक्ष महोदय, पूरे सदन को जय श्री राधा कृष्‍ण और आपको धन्‍यवाद. मेरा प्रश्‍न क्रमांक-2223 है.

          श्री विश्‍वास कैलाश सारंग -- अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पर पटल पर रख दिया गया है.

          श्री अम्बरीष शर्मा ''गुड्डू''-- अध्‍यक्ष महोदय, यह किसानों से जुड़ा विषय है, मार्केटिंग लहार संचालक मंडल को अपात्र करने के लिये हमने जुलाई, 2024 में प्रश्‍न क्रमांक-2289 लगाया था, उसमें उत्‍तरांश '''' में आयुक्‍त महोदय ने उसमें जो निर्देश दिये गये थे कि इसमें इनके खिलाफ कार्यवाही की जाये और संचालक मंडल को अयोग्‍य घोषित किया जाये, उसके बाद श्रीमान् अध्‍यक्ष महोदय, दिनांक-05/07/2024 को आयुक्‍त महोदय, सहकारिता ने उपायुक्‍त के लिये पत्र लिखा था कि इसमें तुरंत नियमानुसार कार्यवाही की जाये, तो डेढ़ वर्ष तो कोई कार्यवाही नहीं की गई. आज दिनांक-20/02/2026 को जब हमने दोबारा प्रश्‍न लगाया है,तो उसके बाद अब जाकर उन्‍होंने दिनांक-20/02/2026 को एक नोटिस उपायुक्‍त महोदय भिण्‍ड को भेजा है कि इन पर अभी तक कार्यवाही क्‍यों नहीं कई गई और डेढ़ वर्ष में आपने कोई जवाब क्‍यों नहीं दिया? तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि सदन में इस तरीके से अगर दो-दो वर्ष तक कार्यवाही नहीं होगी, तो किसानों से जुड़ा मामला है, मार्केटिंग लहार खाद की कालाबाजारी करती है, मैंने कई बार निवेदन किया है कि संचालक मण्‍डल को अपात्र घोषित किया जाये और जिन अधिकारियों पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है, उनके विरूद्ध कार्यवाही की जाये.

          श्री विश्‍वास कैलाश सारंग -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने जो प्रश्‍न किया है, उसके विषय में हमने कार्यवाही की है और जैसा माननीय सदस्‍य कह रहे हैं उनके प्रश्‍न लगने के तुरंत बाद भोपाल से हमारे आर.सी.एस. के माध्‍यम से यह निर्देश दिये गये थे कि इस पूरे प्रकरण की जांच की जाये और जो अपात्र हैं, उनको हटाने की प्रक्रिया की जाये. अध्‍यक्ष महोदय यह बात सही है कि उसमें कुछ विलंब हुआ है और जो नोटिस है, हमने देखा है कि उस नोटिस में भी कुछ टेक्‍नीकल खामियां हैं और इस विषय में जो संबंधित अधिकारी हैं उसको भी नोटित दिया है, उनके खिलाफ भी कार्यवाही हम सुनिश्चित करेंगे और क्‍योंकि यह मामला कोर्ट में संबंधित पक्ष को कुछ रियायत मिली है स्‍टे मिला है तो वह स्‍टे भी जल्‍दी वेकेट है इसकी भी व्‍यवस्‍था की जायेगी और जिस संबंधित अधिकारी ने डिले किया है और जो नोटिस है उसको नीति संगत नहीं किया है, उसके खिलाफ भी हम कार्यवाही सुनिश्चित करेंगे.

          श्री अम्‍बरीश शर्मा-- धन्‍यवाद मंत्री जी, धन्‍यवाद अध्‍यक्ष महोदय.

सरपंच व वार्ड पंचों के मानदेय में बढ़ोत्‍तरी

[पंचायत एवं ग्रामीण विकास]

10. ( *क्र. 20 ) श्री मुकेश मल्होत्रा : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सरकार सरपंच व वार्ड पंचों को मानदेय भुगतान कर रही है? यदि हाँ, तो सरपंच व पंच को वर्तमान में कितना-कितना मानदेय प्रतिमाह दिया जा रहा है? (ख) क्या मध्यप्रदेश में सरकार द्वारा सरपंच को 4250/- रूपए एवं वार्ड पंच को ₹200 प्रति माह मानदेय दिया जाता है, क्या इतने कम मानदेय में सरपंच में वार्ड पंच अपनी आजीविका चला सकते हैं? (ग) क्‍या सरपंच का मानदेय ₹25 हजार रुपये एवं वार्ड पंच का मानदेय 15 हजार प्रति माह करने का प्रस्ताव स्वीकृत करेगी, जिससे जनप्रतिनिधियों को लाभांवित किया जा सके। (घ) प्रश्‍नांश (क), (ख) एवं (ग) में उल्लेखित सरपंच एवं पंच के मानदेय में वृद्धि करने का प्रस्ताव कब तक सरकार लायेगी? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? कारण बतावें।

पंचायत मंत्री ( श्री प्रहलाद सिंह पटैल ) : (क) जी हाँ। सरपंच को वर्तमान में रूपये 4250/- प्रतिमाह/पंच को रूपये 300/- प्रति मासिक बैठक के मान से अधिकतम रूपये 1800/- वार्षिक दिये जाने का प्रावधान है। (ख) वर्तमान में सरपंच को रूपये 4250/- प्रतिमाह/पंच को रूपये 300/- प्रति मासिक बैठक के मान से अधिकतम रूपये 1800/- वार्षिक दिया जाता है। सरपंच एवं पंच का चुनाव उनकी स्‍वेच्‍छा से समाज सेवा के लिये होता है, आजीविका अर्जन हेतु नहीं। अत: प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। (घ) मानदेय वृद्धि का कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन नहीं है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

          श्री मुकेश मल्‍होत्रा--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 20 है.

          श्री प्रहलाद सिंह पटैल-- माननीय अध्‍यक्ष जी, उत्‍तर सभा पटल पर रख दिया गया है.

          श्री मुकेश मल्‍होत्रा--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि प्रदेश भर में लगभग 23 हजार से अधिक सरपंच और 4 लाख से अधिक वार्ड पंच कार्यरत हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरपंचों को 4250 रूपये प्रतिमाह तथा वार्ड पंच को 300 प्रति मासिक बैठक के मान से 1800 रूपये वार्षिक मानदेय दिया जाना क्‍या वर्तमान समय में यह पर्याप्‍त है. सरपंच पंचों के साथ क्‍या यह न्‍याय संगत है. सरपंच और पंचों को निर्धारित मानदेय भी समय पर नहीं मिलता है. अभी तक मात्र 14-15 माह का मानदेय ही सरपंचों को दिया गया है और वार्ड पंच के लिये अभी तक इस कार्यकाल में एक पैसा भी नहीं दिया गया है. यह जनता द्वारा चुने हुये जनप्रतिनिधियों के साथ घोर अन्‍याय है और मजाक है.

11.57 बजे                           स्‍वागत उल्‍लेख

          अध्‍यक्ष महोदय--  आज दीर्घा में मध्‍यप्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री एवं वरिष्‍ठ नेता श्री कैलाश चावला जी एवं श्री ध्‍यानेन्‍द्र सिंह जी उपस्थित हैं. सदन की ओर से उनका स्‍वागत है.

          श्री प्रहलाद सिंह पटैल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं सदन को जानकारी देना चाहता हूं कि पंच, सरपंच और जितने भी त्रिस्‍तरीय पंचायत के प्रतिनिधि हैं, वर्ष 2013 और 2013 के बाद में वर्ष 2023 में उनके वेतन बढ़ाये गये थे. अभी तीन साल ही होने वाले हैं. दूसरी बात जो माननीय सदस्‍य ने कही है कि उनको कुल 15 महीने का वेतन मिला है, शायद उनको जानकारी ठीक करनी चाहिये. मैंने कल ही जानकारी ली थी किसी भी पंच सरपंच या जनपद या जिला पंचायत के जो हमारे जनप्रतिनिधि हैं, उनका मानदेय सभी को प्राप्‍त हो रहा है, कोई इतना बैकलॉग नहीं है. मुझे लगता है कि पुन: निरीक्षण करने की जो अवधि है वह सरकार तय करती है, लेकिन वर्ष 2013 के बाद में वर्ष 2023 में हुआ था, मैं यह नहीं कह रहा हूं कि 10 साल बात होगा, लेकिन जब ऐसी स्थिति आयेगी तो निश्चित‍ रूप से इसका पुनरीक्षण होगा.

          श्री अभय मिश्रा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय ने पिछले समय बोला था.....

          अध्‍यक्ष महोदय--  अभय जी, प्‍लीज, आज पहली बार के विधायक जीते हैं वह और महिलायें, उनका दिन है.

          श्री मुकेश मल्‍होत्रा--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी बिलकुल असत्‍य जानकारी दे रहे हैं क्‍योंकि मैं खुद सरपंच था और मैंने दो साल का कार्यकाल पूरा किया, इसमें मात्र मुझे 4 महीने का मानदेय दिया गया है. ऐसे कई सरपंच हैं जिनको अभी मानदेय नहीं दिया गया है. प्रश्‍नांश ख में विभाग द्वारा बताया गया है कि सरपंच एवं पंच समाज सेवा के लिये होते हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बात पूर्णत: सही है कि यह पद समाज सेवा के लिये होता है, लेकिन यह भी सही है कि प्रत्‍येक समाज सेवक की अपनी मूलभूत आवश्‍यकता भी होती है उसके यहां भी परिवार और  बच्‍चे रहते हैं वहां अन्‍य आवश्‍यकता होती है. क्‍या विभाग पंच, सरपंचों के मानदेय में वृद्धि करने के संबंध में विचार करेगा. मेरा माननीय मंत्री महोदय से अनुरोध है कि इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार कर संपूर्ण प्रदेश भर के सरपंचों के मानदेय में....

          अध्‍यक्ष महोदय-- मुकेश जी, बस बैठ जाओ नहीं तो उत्‍तर नहीं आ पायेगा, कुछ सेकेंड ही बचे हैं. 

          श्री प्रहलाद सिंह पटैल--  अध्‍यक्ष जी पहले तो मैं जानना चाहता हूं कि यह अपनी पंचायत का नाम बता दें ताकि हम रिकार्ड निकलवा लें कि इसमें पैसा रह गया है या नहीं.

          श्री मुकेश मल्होत्रा - मेरी ग्राम पंचायत सिलपुरी है और करहल विकासखण्ड में ऐसी कई पंचायतें हैं.       

           श्री प्रहलाद सिंह पटेल -पहले तो मैं उसकी जानकारी ले लूंगा कि जो सरपंच विधायक बन गये हैं लेकिन उनका ही भुगतान नहीं हुआ तो उसकी मैं जानकारी ले लूंगा कि कैसे हो गया दूसरी बात

          अध्यक्ष महोदय - ऐसा तो नहीं मुकेश जी कि बैंक में आ गया हो ध्यान में ही नहीं आया हो छोटी रकम हो.

          श्री मुकेश मल्होत्रा - नहीं माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी मेरा बेटा भी अभी वर्तमान में सरपंच है तो उसको भी एक महिने का नहीं मिला है.

          अध्यक्ष महोदय - प्रश्नकाल समाप्त

 

 

                                                      (प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

                                      नियम 267-क के अधीन विषय

          अध्यक्ष महोदय - निम्नलिखित माननीय सदस्यों की शून्यकाल की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जावेंगी :-

1.       श्री विपिन जैन

2.       श्री मोहन सिंह राठौर

3.       श्री आरिफ मसूद

4.       श्री नितेन्द्र बृजेन्द्र सिंह राठौर

5.       श्री आशीष गोविन्द शर्मा

6.       श्री निलेश पुसाराम उईके

7.       श्री सुरेश राजे

8.       श्री मुकेश टण्डन

9.       श्री दिनेश गुर्जर

10.     श्रीमती चन्दा सुरेन्द्र सिंह गौर

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - अध्यक्ष महोदय, अभी सुबह ही केबिनेट की बैठक हुई और कल ही माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा था कि कृषि वर्ष इस बार हम मना रहे हैं. कृषकों को कैसे लाभ दें उसके ऊपर वक्तव्य दिया था उस वक्तव्य में भी और कृषक भाईयों को सुविधा देने का निर्णय आज मंत्रिमण्डल में लिया गया है. मैं चाहता हूं कि माननीय मुख्यमंत्री जी आज के निर्णय से सदन को अवगत कराएं.

          अध्यक्ष महोदय - मुख्यमंत्री जी.

          श्री अभय मिश्रा - अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी से प्रार्थना करता हूं कि.

          अध्यक्ष महोदय - एक मिनट अभय जी,हमेशा ध्यान रखो कि जब मुख्यमंत्री बोलें नेता प्रतिपक्ष बोलें  तो हमको मर्यादा का पालन करना चाहिये.

          मुख्यमंत्री(डॉ.मोहन यादव) - माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने कल आपकी स्वीकृति के बाद सदन को अवगत कराया था कि हमारी सरकार किसान कल्याण वर्ष मना रही है और किसानों को लेकर उड़द,सरसों और बाकी फसलों को लेकर मैंने विस्तार से अपना वक्तव्य दिया था और उसी के परिप्रेक्ष्य में बताना चाहूंगा कि कल हमने जो घोषणा की थी आज हमने उसको केबिनेट में सम्पन्न करके हमारी किसानों के प्रति प्रतिबद्धता को पुन: सिद्ध किया है कि हम जो कहते हैं करके दिखाते हैं इस निर्णय में उड़द के उपार्जन के लिये मध्यप्रदेश सरकार की ओर से जो संभवत: 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में होना संभावित है. एमएसपी के अलावा 600 रुपये प्रति क्विंटल उड़द पर बोनस दिया जायेगा. इसी प्रकार से सरसों के लिये 28 परसेंट इसका उत्पादन गत वर्ष से बढ़ा है. लगभग 3.38 लाख मेट्रिक टन का मंडी के अंदर इसके उपार्जन की संभावना है ऐसे में हमारे द्वारा अनुमानित 15.71 लाख टन इसके रकबे में वृद्धि होने के बाद उत्पादन होगा हम इस पर भी भावांतर योजना देकर हमारी किसानों के प्रति प्रतिबद्धता स्थापित कर रहे हैं और यह देश में पहली बार होगा कि उड़द और सरसों को हमने इस तरह से प्रमोट किया बाकी अरहर दूसरी सभी प्रकार की दालों का हम उपार्जन करने जा रहे हैं. कुछ और योजना केबिनेट के माध्यम से हुईं माननीय अध्यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से बताना चाहूंगा हमारी राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा पोषण मिशन योजना का धान,गेहूं,दलहन,मोटा अनाज,नगदी फसलों का क्षेत्र का विस्तार यह योजना आगामी 5 वर्ष के लिये हमने इसको पुन: लागू किया है जिसके माध्यम से 3285.49 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है. यह किसानों के लिये एक बड़ी सौगात है इसी के साथ सिंचाई सुविधाओं में हमारी माइक्रो इरीगेशन योजना के अंतर्गत प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई परियोजना मोर ड्राप मोर क्राप के माध्यम से इसमें लगभग 1 अप्रैल,2026 से 31 मार्च,2031 तक 2393.97 करोड़ रुपये की निरंतरता के आधार पर यह राशि भी आज मंजूर की गई है. मैं बधाई देना चाहूंगा मध्यप्रदेश के किसानों को जिनके माध्यम से तीसरी एक योजना पीएम राष्ट्रीय कृषि विकास योजना जिसके माध्यम से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के  समग्र विकास हेतु विभिन्न गतिविधियों के क्रियान्वयन हेतु एवं सहायता एवं कृषि और संबद्ध क्षेत्रों के विकास के लिये वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की आवश्यक्ता थी. हमने अपनी इस योजना को आगामी 2031 तक निरंतर रखते हुए 2008.683 करोड़ रुपये मंजूरी दी है. मैं मध्यप्रदेश के सभी किसानों को आपके माध्यम से बधाई देना चाहूंगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्राकृतिक खेती देश भर में सबसे ज्‍यादा कहीं होती है तो मध्‍यप्रदेश में होती है और मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि हम सब मिलकर के, चाहे पक्ष हो, विपक्ष हो, किसान कल्‍याण वर्ष में यह संकल्‍प करें कि और प्राकृतिक खेती बढ़े. सिंचाई का रकबा बढ़े. इसलिए भी हमारी सरकार इस योजना के माध्‍यम से उत्‍पादन को बढ़ाना, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, पर्यावरण की सुरक्षा रखना, रसायन से मुक्‍त खाद्य उत्‍पादन में भारत सरकार द्वारा सहायित नेशनल मिशन ऑन नेचुनल फॉर्मिंग के अंतर्गत इस योजना का पुन: पांच साल के लिए नवीनीकरण कर रही है, जिसके माध्‍यम से लाखों किसानों को फायदा होगा. इसके लिए भी लगभग 1,101 करोड़ रुपये हम मंजूर कर रहे हैं. आज मैं अपनी ओर से प्राकृतिक खेती के लिए सभी किसानों को प्रेरित करने वाली इस योजना के माध्‍यम से किसानों को बधाई देना चाहता हूँ. प्रदेश की जनता को बधाई देना चाहता हूँ.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तिलहन मिशन, दलहन मिशन, इसमें हमारा राज्‍य बहुत अग्रणी भूमिका में है. ऐसे में तिलहन उत्‍पादन को बढ़ावा देकर के आयातित खाद्य तेलों पर भारत की निर्भरता कम हो, मध्‍यप्रदेश इसमें अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहा है. जिसमें हमने किसानों की आय को बढ़ाने के लिए खासकर के राष्‍ट्रीय खाद्य तेल मिशन हेतु  1,793.87 करोड़ रुपये की योजना की निरंतरता रखने का निर्णय किया है. मैं राष्‍ट्रीय खाद्य तेल मिशन की इस योजना को मध्‍यप्रदेश सरकार के साथ हमारे राज्‍य का भी जो कंट्रीब्‍यूशन है, इसको मंत्रि-परिषद् के माध्‍यम से अनुमोदन चाहा गया था, ये आज दिया गया है. मैं अपने राज्‍य के इससे जुड़े हुए सभी पक्षों को बधाई देना चाहूँगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये पांचों योजना मिलाकर के जो मैंने अलग-अलग क्रमश: बताई है. इसमें हम अपने राज्‍य में आज जिसकी मंजूरी, लगभग 10493.60 करोड़ रुपये की वित्‍तीय आकार की यह बड़ी योजना मंजूर की गई है और भावान्‍तर तथा उड़द का वह अलग से है, जो मैंने बताया है. सब मिला करके हम इस बड़े टारगेट की तरफ आगे बढ़ रहे हैं. इसमें प्रदेश के लगभग सवा करोड़ से ज्‍यादा किसानों को फायदा मिलेगा. एक और योजना नल-जल योजना के माध्‍यम से भी हमने कहा कि पंचायतों के माध्‍यम से हम पीने का पानी भी देने के लिए जा रहे हैं. ऐसी बहुत सारी योजनाओं के साथ हम आपके माध्‍यम से पुन: हमारे नेता प्रतिपक्ष और सब मित्रों से कहना चाहेंगे कि एक सत्र हम किसानों के लिए आयोजित करें, जिसमें हम विस्‍तार से उस पर बात करें. भविष्‍य के लिए किसानों के लिए हम और आप मिलकर के और क्‍या अच्‍छा कर सकते हैं, जो योजना चालू हैं, उनकी समीक्षा करते हुए भविष्‍य की दृष्‍टि से इसमें आगे बढ़ने की आवश्‍यकता है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने का मौका दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- अध्‍यक्ष जी, मुख्‍यमंत्री जी ने किसानों के लिए जो आज सौगातें दी हैं, उसके लिए मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूँ. लेकिन आज ही क्‍यों, क्‍योंकि राहुल गांधी जी आ रहे हैं, उनके दबाव के कारण तो यह आज सरकार ने प्रदेश के किसानों को ये सौगातें नहीं दे दीं. यही बात है. पहले से दे सकती थी. पहले दे सकती थी. आज ही क्‍यों. आज ही का दिन क्‍यों चुना. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राहुल गांधी जी आज प्रदेश में आ रहे हैं. ..(व्‍यवधान)...

          श्री रामेश्‍वर शर्मा -- उनकी बात को कांग्रेसी नहीं मान रहे हैं. हम क्‍या खाक मानेंगे. ये तो धन्‍यवाद दो डॉक्‍टर मोहन यादव जी को कि किसानों के लिए लगातार योजनाओं पर काम कर रहे हैं. ..(व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- रामेश्‍वर जी, एक मिनट. ..(व्‍यवधान)...

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रत्‍येक मंगलवार को.. ..(व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- कैलाश जी, एक मिनट. प्रदीप जी, एक मिनट. मेरा सिर्फ इतना आग्रह है कि जब हाऊस चल रहा हो और उस समय कैबिनेट में अगर कुछ बड़े निर्णय होते हैं तो हाऊस में रखना सदन में यह पद्धति है. मुझे लगता है कि इसमें किसी को कोई आपत्‍ति नहीं होना चाहिए. श्री प्रहलाद पटेल जी.

          डॉ. मोहन यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से नेता प्रतिपक्ष से कहना चाहता हूँ कि नेता प्रतिपक्ष जी राहुल जी के प्रति अपनी निष्‍ठा बता रहे हैं, अच्‍छी बात है. बताना चाहिए. मैं विनम्रता के साथ इतना ही कहना चाहता हूँ कि राहुल गांधी जी आ रहे हैं, उनसे तीन प्रश्‍न पूछ लें. रबी और खरीफ में कौन-कौन सी फसल लगती है, केवल वह बता दें. दलहन में कौन-कौन सी दालें मध्‍यप्रदेश में होती हैं. यह बता दें. तिलहन में हमारे यहां क्‍या होता है. यह बता दें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- यह बहस का विषय नहीं है.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं इनकी सरकार से प्रधानमंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि यूएस डील में क्‍या किया है ? मध्‍यप्रदेश के किसानों का फायदा हुआ ? यूएस डील हुई, यहां पर कपास के भाव गिर गए. मध्‍यप्रदेश के किसान, निमाड़ के किसान परेशान हो गए हैं. सोयाबीन आएगा तो यहां पर भाव नहीं गिरेंगे ? चंबल के अंदर सरसों होती है,  सरसों के भाव नहीं गिरेंगे ? ये बताएं मुख्‍यमंत्री जी, ये बताएं प्रधानमंत्री जी.

         


 

12.10 बजे

पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) मध्‍यप्रदेश राज्‍य रोजगार गारंटी परिषद्, भोपाल की वार्षिक

रिपोर्ट वर्ष 2024-2025.

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) - अध्‍यक्ष महोदय, मैं, राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (क्रमांक 42 सन् 2005) की धारा 12 की उपधारा (3) (च) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश राज्‍य रोजगार गारंटी परिषद्, भोपाल की वार्षिक रिपोर्ट वर्ष 2024-2025 पटल पर रखता हूँ.  

(2) मध्‍यप्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड, भोपाल का 15 वां वार्षिक लेखा

एवं प्रतिवेदन वर्ष 2018-2019, 16 वां वार्षिक लेखा एवं प्रतिवेदन वर्ष

2019-2020, 17 वां वार्षिक लेखा एवं प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021

तथा 18 वां वार्षिक लेखा एवं प्रतिवेदन वर्ष 2021-2022.

          लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) - अध्‍यक्ष महोदय, मैं, कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड, भोपाल का 15 वां वार्षिक लेखा एवं प्रतिवेदन वर्ष 2018-2019, 16 वां वार्षिक लेखा एवं प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020, 17 वां वार्षिक लेखा एवं प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021 तथा 18 वां वार्षिक लेखा एवं प्रतिवेदन वर्ष 2021-2022 पटल पर रखता हूं.

3)  परिवहन विभाग की निम्‍नांकित अधिसूचनाएं:-

(क) क्रमांक TRP-0057-2025-Sec-1आठ-(TRP), दिनांक 12 जनवरी, 2026,

(ख) क्रमांक एफ-22-02-2019-आठ, दिनांक 16 जनवरी, 2026,

(ग) क्रमांक TRP-0086-2025-Sec-1आठ-(TRP), दिनांक 23 जनवरी, 2026,

(घ) क्रमांक 3-3-0004-2025-Sec-1-आठ-(TRP), दिनांक 23 जनवरी, 2026,

(ङ) क्रमांक TRP/15/0007/2025-Sec-1-08(TRP),दिनांक 29 जनवरी, 2026, तथा

(च) क्रमांक TRP-3-0001-2025-Sec-1आठ-(TRP), दिनांक 09 फरवरी, 2026.

             

परिवहन मंत्री (श्री उदय प्रताप सिंह) - अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश मोटरयान कराधान अधिनियम, 1991 (क्रमांक 25 सन् 1991) की धारा 212 की उपधारा (3) की अपेक्षानुसार निम्‍नांकित अधिसूचनाएं:-

(क) क्रमांक TRP-0057-2025-Sec-1आठ-(TRP), दिनांक 12 जनवरी, 2026,

(ख) क्रमांक एफ-22-02-2019-आठ, दिनांक 16 जनवरी, 2026,

(ग) क्रमांक TRP-0086-2025-Sec-1आठ-(TRP), दिनांक 23 जनवरी, 2026,

(घ) क्रमांक 3-3-0004-2025-Sec-1-आठ-(TRP), दिनांक 23 जनवरी, 2026,

(ङ) क्रमांक TRP/15/0007/2025-Sec-1-08(TRP),दिनांक 29 जनवरी, 2026, तथा

(च) क्रमांक TRP-3-0001-2025-Sec-1आठ-(TRP), दिनांक 09 फरवरी, 2026, पटल पर रखता हूँ.

 

12.12 बजे                             ध्‍यान आकर्षण सूचना

(2) खरगोन जिले के भीकनगांव एवं झिरन्‍या क्षेत्र अंतर्गत जमीनों का बन्‍दोबस्‍त

कार्य न कराए जाना.

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्‍यानसिंह सोलंकी (भीकनगांव) - अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यान आकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है:-

          खरगोन जिला अंतर्गत वर्ष 1924-25 से तहसील झिरन्‍या तथा भीकनगांव की जमीनों का बंदोबस्‍त का कार्य नहीं हुआ है, जबकि जिले की अन्‍य तहसीलों में बंदोबस्‍त कार्य हो चुका है. यहां बंदोबस्‍त का कार्य नहीं होने से ग्रामवासियों के समक्ष बड़ी समस्‍याएं आ रही हैं. तहसील अंतर्गत अधिकांश खसरों में नक्‍शा और मौके की स्थिति में भिन्‍नता है. जिला खरगोन अंतर्गत तहसील झिरन्‍या व भीकनगांव की जमीनों का जिला सर्वेक्षण अधिकारी द्वारा नये सिरे से सर्वेक्षण कराए जाने से राज्‍य शासन द्वारा आदेश जारी कर सर्वेक्षण कार्य कराया जावे, तभी मिसल बंदोबस्‍त की त्रुटियां सुधर सकती हैं तथा यहां का राजस्‍व रिकॉर्ड शुद्ध होगा. राजस्‍व संबंधी व्‍यवहारिक कठिनाइयां दूर न होने और बंदोबस्‍त का कार्य नहीं होने से ग्रामवासियों में रोष व्‍याप्‍त है.

          राजस्‍व मंत्री (श्री करण सिंह वर्मा) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तहसील भीकनगांव एवं तहसील झिरन्‍या में वर्ष 1925 की मिसल बंदोबस्‍त उपलब्‍ध है. इन तहसीलों में वर्ष 2024-25 में मिसल बंदोबस्‍त नहीं हुआ है. वर्तमान में पावती/खसरा एवं स्‍थल पर जमीन में किसी प्रकार का अंतर/विसंगति संज्ञान में आने पर म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता की धारा 115 के अनुसार सुधार कार्य किया जाता है. वर्तमान राजस्‍व वर्ष के दौरान अनुविभागीय अधिकारी भीकनगांव द्वारा धारा 115 के अंतर्गत अभिलेख दूरस्‍ती से संबंधित 87 प्रतिशत का निराकरण कर दिया गया है. जिससे ज्ञात है कि अभिलेख दूरस्‍ती के प्रकरणों का त्‍वरित गति से निराकरण किया जा रहा है.

          भूमि सीमांकन के दौरान किसी प्रकार के विवाद की स्थिति निर्मित होने पर म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता की धारा 129 के प्रावधानों के तहत निराकरण किया जाता है. वर्तमान राजस्‍व वर्ष के दौरान तहसील भीकनगांव में 95 प्रतिशत सीमांकन प्रकरणों का निराकरण कर दिया गया है एवं तहसील झिरन्‍या में 94 प्रतिशत सीमांकन प्रकरणों का निराकरण कर दिया है. जिससे स्‍पष्‍ट है कि सीमांकन मामलों में शीघ्रतापूर्वक प्रकरणों का निराकरण किया जा रहा है. तहसील भीकनगांव एवं तहसील झिरन्‍या अंतर्गत वर्तमान खसरा रिकॉर्ड में रेय्यत पट्टेदार व खैड़ पट्टेदार का इंद्राज नहीं है. मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता 1959 (संशोधित 2018) में बंदोबस्‍त अधिकारी की शक्ति कलेक्‍टर को प्रदत्‍त है. वर्तमान में उक्‍त तहसीलों मं बंदोबस्‍त का कोई प्रस्‍ताव नहीं है. इस सम्‍बन्‍ध में किसानों में आक्रोश व्‍याप्‍त नहीं है.

            श्रीमती झूमा डॉ.ध्‍यानसिंह सोलंकी-  अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी से मैं, सिर्फ इतना कहना चाहूंगी कि राजस्‍व विभाग में सुधार की आवश्‍यकता है, इसके लिए मैंने यह ध्‍यानाकर्षण लगाया है. पूरे जिले की सभी तहसीलों में हो गया है, एक महेश्‍वर तहसील में काम नहीं हुआ है, सिर्फ आपको आदेशित करना है कि जैसा कि आपने कहा कि इसकी सारी शक्तियां कलेक्‍टर को प्रदत्‍त है तो सिर्फ आपका आदेश चाहिए. बहुत दिक्‍कतें हैं, बंटे पर बंटा, बंटे पर बंटा, एक प्रकरण तो ऐसा है कि उसे 100 बार इस तरह से ले गए हैं. ये प्रकरण सही हो जायेंगे, किसी के नाम पर किसी की जमीन है, जमीन कहीं और है, नक्‍शों में सुधार नहीं है, हर बात दिक्‍कतें आती हैं, आपका एक आदेश चाहिए, सर्वेक्षण अधिकारी को आप निर्देशित कीजिये कि यहां का काम अधूरा है, इसे सौ प्रतिशत पूरा किया जाये, मैं केवल आपसे इतना चाहती हूं.

          श्री करण सिंह वर्मा-  अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पूर्व में ही अपने उत्‍तर में बताया है कि अगर वहां कोई गड़बड़ होती तो 95 प्रतिशत सीमांकन कैसे होता, 94 प्रतिशत दुरस्‍तीकरण कैसे होता ?  वहां बंदोबस्‍त आदि में यदि कोई दिक्‍कत है तो आप कलेक्‍टर को आवेदन दीजिये, उसका निराकरण किया जायेगा.

          श्रीमती झूमा डॉ.ध्‍यानसिंह सोलंकी-  अध्‍यक्ष महोदय, इस सदन से बड़ी कोई संस्‍था है क्‍या ?  आपके उत्‍तर में लिखा है कि किसी ने प्रस्‍ताव नहीं किया है, मैं आपसे मांग कर रही हूं कि मेरी विधान सभा भीकनगांव, झिरन्‍या में सर्वेक्षण का काम शुरू करें और वह यहां से आदेशित हो कि ये काम पूर्ण हो ताकि राजस्‍व विभाग में जितनी गड़बडि़यां हैं, वे दूर हो सकें, ये मेरा आपसे निवेदन है.

          श्री करण सिंह वर्मा-  अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपने उत्‍तर में बता दिया है कि कलेक्‍टर को अधिकार है, अगर कोई शिकायत दे, अगर सीमांकन का विषय है तो तहसीलदार को अधिकार है, दुरूस्‍तीकरण का अनुविभागीय अधिकारी को अधिकार है, और 94-95 प्रतिशत कार्य वहां हो गया है, फिर भी कोई दिक्‍कत है क्‍योंकि आपने कहा है तो हम कलेक्‍टर निर्देशित कर देंगे कि और भी कोई ऐसे प्रकरण हों तो उन्‍हें देखें.

          श्रीमती झूमा डॉ.ध्‍यानसिंह सोलंकी-  धन्‍यवाद.

          श्री राजन मण्‍डलोई (बड़वानी)-  अध्‍यक्ष महोदय, मेरे बड़वानी क्षेत्र में भी पाटी विकासखण्‍ड में अब बंदोबस्‍त का कार्य बंद हो चुका है, लेकिन उस समय जो त्रुटियां हुई हैं, जिसके कारण किसी की ज़मीन पर काबिज़ कोई दूसरा व्‍यक्ति है और उसे खैड़ कोई और रहा है, उनमें सहमति भी बन जायेगी लेकिन बंदोबस्‍त नहीं हो रहा है और त्रुटि सुधार हेतु SDM के पास जाने से, सीमांकन का तो विवाद नहीं है, त्रुटि सुधार का विवाद है, इसके लिए SDM दोनों पार्टियों को नोटिस देते हैं, जिससे दोनों पार्टियों में विवाद हो जाता है और कई ऐसे प्रकरण हैं, जिनमें बंदोबस्‍त की कमी के कारण लोगों में आपस में विवाद हो रहे हैं, ऐसे कई प्रकरण न्‍यायालय में भी चल रहे हैं. इसके लिए विशेष दल बनाकर कार्य हो.

          श्री करण सिंह वर्मा-  अध्‍यक्ष महोदय, यदि नक्‍शे में कोई गड़बड़ है, पंजी में ज्‍यादा है और नक्‍शा छोटा है तो इसका आवेदन तहसीलदार को दें, वह पटवारी से उसका वाचन करेगा और अनुविभागीय अधिकारी को पत्र भेज देंगे, तत्‍काल उसका दुरूस्‍तीकरण हो जायेगा, इसमें कोई दिक्‍कत नहीं है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(2) जिला सिवनी एवं केवलारी विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत नहर निर्माण/सीमेंटीकरण का कार्य पूर्ण न होने से कृषकों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध न होना

 

          श्री दिनेश राय (मुनमुन) (सिवनी), [श्री रजनीश हरवंश सिंह]-  अध्‍यक्ष महोदय,

 


 

          जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसीराम सिलावट)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा वक्‍तव्‍य निम्‍नानुसार है-

                    


 

 

 

            अध्यक्ष महोदय -- दिनेश जी आप दो पूरक प्रश्न करें उसके बाद रजनीश जी दो पूरक प्रश्न करेंगे.

          श्री दिनेश राय (मुनमुन) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद दूंगा.

          अध्यक्ष महोदय -- धन्यवाद मत दो आप पूरक प्रश्न करो जिससे आपका जवाब आ जाए तो हम संतुष्ट हो जाएंगे.

          श्री दिनेश राय (मुनमुन) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहिए. माननीय मंत्री जी का जवाब क्या आएगा यह मुझे मालूम है. मैं वास्तविक स्थिति बताना चाहता हूँ. अधिकारियों ने माननीय मंत्री जी से उत्तर पढ़वाया है. 21 फरवरी, 2019 को मेरा प्रश्न क्रमांक 617, 20 दिसंबर 2019 को प्रश्न क्रमांक 1708, 29 दिसंबर, 2020 में प्रश्न क्रमांक 538, 15 मार्च 2021 को प्रश्न क्रमांक 4326, 11 अगस्त 2021 को प्रश्न क्रमांक 537, 17 मार्च 2022 को प्रश्न क्रमांक 3152, 27 जुलाई, 2022 को प्रश्न क्रमांक 643, 21 दिसंबर को प्रश्न क्रमांक 734 और 19 जुलाई 2023 को प्रश्न क्रमांक 715. ऐसे मैंने बहुत सारे प्रश्न इस समस्या को लेकर लगाए थे. आज आपने हमें सदन में मौका दिया है. ऐसे कई प्रश्न और पत्र मैंने विभाग और माननीय मंत्री जी को दिए हैं. माननीय मंत्री जी ने इसी सदन में तीन बार आश्वासन दिया है. तीनों बार आपने आश्वासन पूरा नहीं किया है. तीन बार आपने कहा कि मैं खुद आकर देखना चाहूंगा, वो भी नहीं हुआ है. माननीय मंत्री जी, आपने जवाब दिया कि मिलीभगत से गुणवत्‍ताहीन काम नहीं हुआ. पूरा घटिया काम हुआ है. आप कह रहे हैं इसके लिए 3,700 एकड़ रकबा इस योजना के माध्‍यम से सिंचित कर रहे हैं. यह आप नहीं कर रहे हैं. हमारे किसान मोटर से लिफ्ट करके कर रहे हैं. आपकी नहरों की जो स्थिति है क्‍योंकि आपने जवाब दिया है इसलिए मैं बता रहा हूं डी 2-7 नरेला जो अभी आप जवाब दे रहे हैं यहां नहर और किसानों की यह स्थिति हैं. मैं आपको फोटो दे दूंगा. डी-4 गेट में मैंने स्‍वयं निरीक्षण किया है. यहां पानी भरा हुआ है. आप कह रहे हैं पानी भराव नहीं है जो आपके अधिकारी कह रहे हैं. अभी आपने जो जवाब दिया मैं उसी को मैं आया हूं. 1 बजे मुझे मिला. सुबह 5 बजे से मैंने अपने लोगों को बोला कि जाओ भाई देखकर उसे लाओ यह सदन में आया है तो मुझे करना है. डीपी-4 आरडी में खुदाई बाकी है. भौंहाखेड़ा 15-17 किलोमीटर में है जहां नहर टूटी है. यह मेन्‍टेना कंपनी वही मेन्‍टेना कंपनी है जब 15 महीने की सरकार चलाई थी, (XX) नहीं तो वह 3 महीने में ही सरकार गिर जाती, उसका दंश हम आज क्‍यों भोगें. मैं चाहता हूं माननीय मंत्री जी, उस पर रहम तो मत करें. यह है डी टिकारी में 6 एवं 7 में काम कर रहे हैं. यह देखिये यह नहर टूटी पड़ी है. आज सुबह का बता रहा हूं. लेटेस्‍ट है यह कोई पुरानी नहीं है मंत्री जी. (तस्‍वीरें दिखाते हुए)

          अध्‍यक्ष महोदय -- दिनेश जी, अब प्रश्‍न करें. काफी भाषण हो गया. प्‍लीज प्रश्‍न करें.

          श्री दिनेश राय मुनमुन --  ध्‍यक्ष महोदय, जहां दो मीटर का डाया बोल रहे हैं वह एक मीटर है .

          अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है अब बात आ गई, आपने पहले ध्‍यानाकर्षण में उल्‍लेख कर दिया है.

          श्री दिनेश राय मुनमुन -- अध्‍यक्ष महोदय, आपने कहा रोष नहीं है. यह फोटो में जनता रोड पर बैठी है आप कहते हैं रोष नहीं है. मैं आज यही बताना चाहता हूं माननीय मंत्री जी, ऐसी स्थिति है हमारी नहरों की. मैं यह कहना चाहता हूं कि आप कह रहे हैं अभी टाईम है वर्ष 2026 तक करना है. आपने तीन-तीन बार उसको एक्‍सटेंशन दिया है. टेण्‍डर के बाद 3-3, 4-4 बार ठेकेदार को एक्‍सटेंशन दे रहे हैं. माननीय मंत्री जी, आप जैसे जांबाज आदमी से तो उम्‍मीद है कि जिनकी इतनी उम्र होने के बाद भी उम्र नहीं दिखती कम से कम उन किसानों के भले के लिए ऐसे ठेकेदार को क्‍यों छोड़ रहे हैं. ऐसे अधिकारियों को क्‍यों छोड़ रहे हैं जो समय पर नहीं कर रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय --  तुलसी जी, आपको आज तो करना ही पड़ेगा.

          श्री दिनेश राय मुनमुन -- अध्‍यक्ष महोदय, कम से कम तीन बार तो आश्‍वासन हो गया अब आखिरी बार और आश्‍वासन दे दीजिए तो हो जाए. मैं कहता हूं कि अभी होली है आपसे एक ही निवेदन है कि बिल्‍कुल आश्‍वासन मत दीजिए, ठेकेदार वापस बुला लीजिए, अधिकारी वापस बुला लें, हमको आदेश दे दीजिए हम विधायक निधि, जनता से और खुद की तरफ से हम नहर से 4 दिन में उस गांव तक पानी पहुंचा देंगे जहां तक आपके अधिकारी नहीं पहुंचा सक रहे हैं. वह हमें मालूम है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- दिनेश जी, प्रश्‍न आ गया है. मंत्री जी को बोलना है. इसके बाद एक छोटा प्रश्‍न करिएगा.

          श्री तुलसीराम सिलावट -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं खुद भी मानता हूं कि विलंब हुआ है. इस गंभीरता को मैं स्‍वीकार करता हूं और मैं सदन को विश्‍वास दिलाता हूं कि जिस ठेकेदार की बात कर रहे हैं हम उसी मापदण्‍ड पर, उसी आधार पर वह काम करवा रहे हैं, क्‍योंकि वहां पर वर्ष 2013-14 का कार्य अनुबंध है. कई वर्ष हो गए परंतु जो गति आई है मैंने आपको कहा कि वर्ष 2026 में हम पूरा कर लेंगे. यह मैं आपको सिर्फ आश्‍वासन नहीं दे रहा हूं. करके दिखाएगी हमारी सरकार, हम सबकी सरकार यह किसानों की सरकार है.

          श्री दिनेश राय मुनमुन -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी पर विश्‍वास तो करना पड़ेगा अब तीन बार आश्‍वासन के बाद चौथी बार के आश्‍वासन में करेंगे. मेरा तो यह निवेदन है कि अब आने वाली गर्मी में काम हो जाएगा. एक बार अभी जांच करवा ली है. कलेक्‍टर ने भी जांच की. यहां से कमेटी भी बनी है.

          श्री भंवरसिंह शेखावत -- तुलसी भैया ने जो तीन आश्‍वासन दिये थे उस टाइम वह कांग्रेस में थे. अभी जो आश्‍वासन दे रहे हैं वह बीजेपी में दे रहे हैं.

          श्री दिनेश राय मुनमुन -- नहीं-नहीं अभी आपकी पार्टी से आने के बाद ही किया है. मेन्‍टेना कंपनी से 500 करोड़ का डोनेशन उस समय वहीं मिला था.

          श्री अजय विश्‍नोई -- अध्‍यक्ष महोदय, इससे पता चलता है कि कांग्रेसी आश्‍वासन पूरे होते ही नहीं हैं.

          श्री दिनेश राय मुनमुन -- अध्‍यक्ष महोदय, आप जब हमारे केन्‍द्रीय कृषि मंत्री थे तब आपने हमें यह सौगात दी थी. हम चाहते हैं कि अभी इस गर्मी में पानी दे दें तो कम से कम जानवर ही पानी पी लें. किसान को तो आप अन्‍नदाता भगवान बोलते हैं. हमें तो लगता नहीं है कि वह अन्‍नदाता भगवान बचा होगा अगर उसको पानी नहीं मिलेगा, तो मेरा माननीय मंत्री जी से आपके माध्‍यम से विनम्र निवेदन है कि समय सीमा में करा दें. वह अधिकारी वहां रहते नहीं हैं. सब छिन्‍दवाड़ा में रहते हैं. मुझे बोलना नहीं चाहिए, जब हमारी कलेक्‍ट्रे़ट में बैठक होती है पता नहीं 10 बजे से क्‍या भोजन करके आते हैं वह सो जाते हैं, वह लोग आकर ऊंघते हैं, तो वह क्‍या साइडों में जाएंगे. साइडों में नहीं रहते हैं. मेरा निवेदन है माननीय मंत्री जी, गलत जवाब देने वाले गलत अधिकारियों पर थोड़ा आप शिकंजा कसिये.

          श्री तुलसीराम सिलावट -- अध्‍यक्ष महोदय, सम्‍माननीय सदस्‍य के भाव को देखते हुए शेष काम वर्ष 2026 में पूर्ण कर लिया जाएगा. 

            अध्यक्ष महोदय- दिनेश जी, यह वाला ठोस आश्वासन है, पहले वाले हल्के होंगे लेकिन यह वाला ठोस है.

          श्री तुलसीराम सिलावट-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने जो निर्देश दिया है उसका पालन होगा.

          अध्यक्ष महोदय- ठीक है. रजनीश जी.

          श्री रजनीश हरवंश सिंह(केवलारी) -- माननीय अध्यक्ष महोदय,आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से, मैं निवेदन करता हूं कि इस सदन में 2 साल के अंदर लगभग 14 बार मैं प्रश्न के माध्यम से भीमगढ़ संजय सरोवर की नहरों की मरम्मत कार्य के लिये और उनका सीमेंटीकरण कराने के लिये आग्रह कर चुका हूं. हर बार जवाब मंत्री जी तरफ से गोलमोल जवाब मिलता है. अध्यक्ष महोदय, एशिया का, न केवल मध्यप्रदेश का एशिया का सबसे बड़ा मिट्टी का बांध है संजय सरोवर भीमगढ़ जिसकी कैनाले एलबीसी (Left Bank Canal - वाम तट नहर) टीएलबीसी, माइनर, सब माईनर मिलाकर 700 किलोमीटर में इसकी नहर है. और इससे पूरा क्षेत्र लाभान्वित होता है. एक तरफ सरकार किसान कल्याण वर्ष मना रही है और दूसरी तरफ वही अन्नदाताओं को पानी नहीं मिल रहा है. मात्र दो पानी टेल तक मिले हैं, न पर्याप्त अमला है न पर्याप्य रूप से टूटी हुई नहरों को सुधारने की कोई व्यवस्था है, न समय पर काम होता है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, भारत सरकार ने इस योजना की गंभीरता को लेते हुये इसकी स्वीकृति प्रदान कर दी है. परंतु न जाने क्यों मंत्री जी की रूचि इस ओर नहीं है इस कारण से नहरों के सीमेन्टीकरण का कार्य नहीं हो पा रहा है. मेरा माननीय मंत्री जी से यह अनुरोध है कि मंत्री जी ने अपने उत्तर में जो कहा है कि 11.2.2002 को नई दिल्ली में आयोजित डीबीआई की बैठक में भारत सरकार द्वारा चाही गई अतिरिक्त जानकारी विभाग द्वारा 21.8.2025 को उपलब्ध कराई जा चुकी है. मै मानता हूं कि यह सब पत्राचार यहां से हुआ है. पर यह आखिर में कार्यरूप में परिणित क्यों नहीं हो पा रहा है, यह मेरा मंत्री जी से आपके माध्यम से अनुरोध है.

          अध्यक्ष महोदय- रजनीश जी आपने मंत्री जी की आयु के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है. और यह दिनेश जी को मालूम था तो उन्होंने टिप्पणी की तो उनको ठोस आश्वासन मिला.

          श्री तुलसीराम सिलावट-- माननीय अध्यक्ष महोदय सम्माननीय सदस्य ने स्वयं यह कहा है कि दिनांक 11.2.2025 को यह योजना दिल्ली से स्वीकृत हो गई है. मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि 332 करोड़ की लागत से नहरों के सुधार तथा सीमेन्टीकरण हेतु भारत सरकार से योजना की जैसे ही स्वीकृति प्राप्त होती है रजनीश जी आपकी विधानसभा में काम करा लिया जायेगा.

          श्री रजनीश हरवंश सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा एक प्रश्न और है कि यह बहुत महत्वपूर्ण योजना है अगर  भारत सरकार लंबित करती तो बात समझ में आती जब भारत सरकार आलरेडी इसको स्वीकृत कर चुकी है तो हमारी मध्यप्रदेश की सरकार को तो इसको ओर ज्यादा जल्दी से लपक कर लेना चाहिये.अब माननीय मंत्री जी इतने स्मार्ट हैं कि हम तो बहुत वर्ष इनके साथ में रहे हैं, तो हमें तो मालूम है, मुनमुन भाई को नहीं मालूम कि इनकी उम्र क्या है, पर हमें तो मालूम है कि इनकी उम्र कैसी और क्या है और इनकी भी और इनके गुरूदेव दोनों की, तो उस नाते भी पुराने रिश्तों को बनाये रखना चाहिये. (xx). तो दोनों ही स्मार्ट हैं.

          अध्यक्ष महोदय- नाम विलोपित कर दें.

          श्री रजनीश हरवंश सिंह- अध्यक्ष जी यह दोनों ही स्मार्ट हैं तो मेरा यह आग्रह है कि मंत्री जी को हमें तो कम से कम नहीं भूलना चाहिये, ऐसी परिस्थिति में कि जब भी आप उस विभाग के मंत्री हैं तो हमारा तो ज्यादा हक बनता है, वह अलग बात है कि हमें छोड़कर के आप वहां (सत्ता पक्ष) में चले गये, यह अलग बात है.

          श्री तुलसीराम सिलावट -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सभी सदस्यों का सम्मान करना चाहिये यह मेरी जिम्मेदारी है.

          श्री रजनीश हरवंश सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से मंत्री जी से यही अनुरोध है  कि मेरे क्षेत्र की जनता में इसको लेकर के बहुत रोष व्याप्त है. दो पानी बमुश्किल से मिले है और ऐसा नहीं है कि तालाब में पानी नहीं है, सरोवर में पानी नहीं है. आज भी पानी भरा हुआ है परंतु अधिकारियों की उदासीनता के चलते और पर्याप्त अमला न होने के कारण हमको इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.

          श्री तुलसीराम सिलावट-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने पूर्व में भी कहा है कि भारत सरकार के द्वारा मध्यप्रदेश से योजना संबंधी अतिरिक्त जानकारी बुलाई गई है उसको तुरंत हमारे विभाग के द्वारा दिल्ली मुहैया करा दी गई है. अब जैसे ही हमें स्वीकृति मिलती है, अतिशीघ्र काम प्रारंभ कर दिया जायेगा.

          श्री रजनीश हरवंश सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे पूरा भरोसा है माननीय मंत्री जी की बात पर चूंकि आपके समक्ष बात हो रही है कि जल्दी ही इसकी स्वीकृति आ जायेगी और डबल इंजन की सरकार कहते हैं, उस डबल इंजन की सरकार का फायदा तो मिलना चाहिये.

          अध्यक्ष महोदय- चलिये बहुत बढ़िया. जयवर्द्धन सिंह जी..

          डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी भी ध्यानाकर्षण की सूचना है.

          श्री अजय अर्जुन सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से इस संबंध में एक सुझाव है. अध्यक्ष महोदय, अधिकांश सिंचाई योजनाओं में, आपके यहां भी चंबल में है जो हमारे मुनमुन भाई साहब और रजनीश ने कहा कि अमला नहीं रहता है, हर सिंचाई योजना में यही परेशानी है. जब योजना का निर्माण हो जाता है उसके बाद कोई भी अमला वहां पर नहीं रहता है.

हर  सिंचाई  योजना  का जब निर्माण हो जाता है,  उसके बाद कोई भी अमला वहां नहीं रहता है, रख रखाव तक के लिये नहीं. चौकीदार  कहीं रहेगा.  लेकिन बाकी सब अमला  कोई न कोई शहर में शिफ्ट हो जाता है.  मंत्री जी से आग्रह है कि  कम से कम  ऐसी योजनाओं  का जो अमला है, जो निर्धारित उस एरिया में रहना चाहिये, कम से कम वहां तो रहे. यह सुनिश्चित कर लें.

          अध्यक्ष महोदयठीक बात है.

          श्री तुलसीराम सिलावट अध्यक्ष महोदय,  जो भाई साहब ने कहा है,   उसको सरकार गंभीरता से लेगी.

          श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल(कुक्षी) --  अध्यक्ष महोदय,  कुक्षी  विधान  सभा में बेल बिबास सिंचाई योजना का पानी आता है  और विगत् वर्षों से उस  योजना  के माध्यम से जो गांव तक, खेत  तक   पानी पहुंच  रहा है,  सिंचाई के लिये कम   उपयोग हो रहा है और खेती  की नुकसानी उसमें ज्यादा हो रही है.  गुणवत्ताहीन उसमें पाइप लगे हुए हैं, अभी कुछ दिन पहले मैं   वहां कुक्षी में होकर आया, तो गांव वालों ने बताया कि  वापस जब पानी छोड़ा गया,  तो  पाइप  फूटे हैं  और  खेती का नुकसान हो रहा है.  मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि  दल गठित करके सर्वे करवा लें,  अगर नुकसान हुआ है, तो उसका मुआवजा  दे दें और जो निर्माण कार्य में गुणवत्ताहीन पाइप यूज किये गये हैं, उसकी जांच हो जाये और संबंधित अधिकारी, जिन्होंने उसको पास किया है, उन पर कार्यवही हो जाये.

          अध्यक्ष महोदयतुलसी जी, तीनों लोगों का एक साथ जवाब दे देना.

          श्री जयवर्द्धन सिंह (राघोगढ़) --  अध्यक्ष महोदय,  जैसा रजनीश जी और  मुनमुन जी  ने यह कहा था अपने क्षेत्र के बारे में,  वैसे मेरे विधान सभा क्षेत्र  राघोगढ़ में भी संजय सागर बांध परियोजना  सन्  1980  और 1984 के बीच  में  निर्मित  हुई थी. 2021-22  में जो पूरी नहरें थीं,  उसका नवीन टेंडर  किया गया था,  उसका पूरा सीसीकरण करने  के लिये. लगभग कुल लागत थी  12 से 14 करोड़ के बीच में. लेकिन वहां पर भी पूरा काम ठेकेदार छोड़कर  चला  गया है. पूरा काम उपेक्षित है,  न  उसमें कुछ नया निर्माण   किया  गया है और  एक प्रकार से पूरी राशि का दुरुपयोग किया गया है. तो मेरा  आपसे  निवेदन है कि  उसकी भी एक बार आप जांच  करवायें.   उसके  साथ साथ  काली सिंध   पार्वती लिंक  परियोजना  के संबंध में एक बड़ा  डेम  अभी बनने की एक चर्चा चल रही है..

          अध्यक्ष महोदयजयवर्द्धन सिंह जी, यह इस विषय में है नहीं. डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय जी.

          श्री जयवर्द्धन सिंह जी अध्यक्ष महोदय,. बस मेरा यह जो नहर वाला मामला था.  जैसा कि आपने मार्गदर्शन दिया था,  जितने यंग मंत्री जी हैं,   उतनी ही शानदार  और अच्छी नहर  बने, यह हमारी प्रार्थना है.

          अध्यक्ष महोदयबिलकुल, बहुत बढ़िया है.  राहुल भैया का अनुसरण करो  सब लोग बोलने में. 

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) अध्यक्ष महोदय, तुलसी जी पुराने पहलवान हैं.  मैंने इनकी कुश्ती देखी है और जेल के  अन्दर भंवर सिंह जी बतायेंगे कि क्या हुआ था. कुश्ती लड़ते लड़ते  लंगोट ही टूट गई थी.  ..(हंसी)..

          श्री भंवरसिंह शेखावत अध्यक्ष महोदय, जेल के अन्दर तुलसी भैया की कुश्ती लाइव हुई थी. तुलसी भैया ने जिनकी लंगोट पकड़ी,  वह लंगोट लेकर  ये भाग गये  और वह अकेले रह गये. ..(हंसी)..

          अध्यक्ष महोदयलंगोट अभी रखा है कि नहीं. ..(हंसी)..

          डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय (जावरा) अध्यक्ष महोदय,  मेरी ध्यान आकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है कि..

          अध्यक्ष महोदय--  ध्यानाकर्षण कहां से आ गया आपका.

          डॉ. राजेन्द्र पाण्डेयअध्यक्ष महोदय, मैंने आपसे निवेदन किया था और  मैंने आग्रह किया था कि अत्यन्त अभी थोड़ा तत्काल, त्वरित  इस तरह का गंभीर मामला हुआ है और उसके संदर्भ में मैं  सदन में चर्चा करना चाहता हूं.

          अध्यक्ष महोदयनहीं नहीं,  प्लीज.  आपको अलग से अवसर देंगे.  ऐसा मत करो.

          डॉ. राजेन्द्र पाण्डेयअध्यक्ष महोदय, मैंने सूचना दी है. मामला अत्यन्त गंभीर है.  मैंने सूचना दे दी है.

          अध्यक्ष महोदयनहीं, नहीं.

          श्री अजय अर्जुन  सिंहअध्यक्ष महोदय, यदि ये  नई परम्परा  है, तो कल से हम लोग भी   इसी तरह पढ़ेंगे.

          अध्यक्ष महोदयनहीं, नहीं.

          डॉ. राजेन्द्र पाण्डेयअध्यक्ष महोदय, मैं कोई परम्परा को तोड़ना नहीं चाहता हूं.

          अध्यक्ष महोदयमंत्री जी, जयवर्द्धन  सिंह जी और  हनी जी का जवाब दे दें.

          श्री कैलाश विजयवर्गीयअध्यक्ष महोदय,   एक बात बिलकुल सही है कि  उन्होंने आज ही दिया है और  उन्होंने मुझसे भी पूछा कि  मैं क्या करुं, ध्यानाकर्षण  तो आपने सुबह दिया है.  ध्यान में ले आइये.   इन्दौर में और भोपाल में  जो कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने  गुण्डागर्दी की, पत्थरबाजी की,   उसके खिलाफ उन्होंने ध्यानाकर्षण  दिया है.  उसके बारे में वह बोलना चाहते हैं, इसलिये वह बोलना चाहते हैं.  इन्दौर में भी हमारे कार्यकर्ताओं के सिर   फूटे, भोपाल में भी  फूटे.  एक महिला कार्यकर्ता का  सिर फूटा और आज भी वह हास्पिटलाइज्ड  हैं.

          डॉ. राजेन्द्र पाण्डेयअध्यक्ष महोदय, इसमें कई लोग घायल हुए हैं.  इतना गंभीर मामला है, उस पर मैं सदन में चर्चा करना चाहता हूं.

..(व्यवधान)..           

            श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट हुई है और उनके खिलाफ ही आरोप लगा दिये. उनके खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी. हमारे कार्यालयों पर हमला हुआ यह गुण्‍डागर्दी कर रहे हैं.. (व्‍यवधान)

          डॉ.  राजेन्‍द्र पाण्‍डेय- चूंकि शून्‍यकाल में इतना समय नहीं रहता है. यह लोग किस तरह का आंदोलन, किस तरह का प्रदर्शन, जब प्रदर्शन होते है और आंदोलन होते हैं. (व्‍यवधान) इसमें कई लोग घायल हुए हैं. (व्‍यवधान) इतना गंभीर मामला है. मेरा आपसे करबद्ध निवेदन है कि आप इसको सूचना में लें. (व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय- आप लोग कृपया बैठिये. (व्‍यवधान)

          श्री अजय अर्जुन सिंह- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय इस तरह से उकसा रहे हैं. अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या संसदीय कार्य मंत्री इस तरह से करेंगे. इनको यह शोभा नहीं देता है. एक व्‍यक्ति का सिर फट गया और वह भर्ती है. (व्‍यवधान)

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप अपने अधिकारों का उपयोग करते हुए दिशा निर्देश दें. यह परम्‍पराएं यह मान्‍यताएं और यह नीति नियम. लेकिन समयानुसार उसमें कोई बदलाव या कोई आवश्‍यकता हो और कोई त्‍वरित आवश्‍कता है तो आप तो सर्वानुमति के साथ में, सर्वसम्‍मत्ति के साथ में अधिकार सम्‍पन्‍न हैं. आप अधिकार सम्‍पन्‍न हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय- नहीं, नहीं. (व्‍यवधान)

          श्री कैलाश विजयवर्गीय- अध्‍यक्ष महोदय, कोई सदस्‍य स्‍थगन नहीं लगा सकता. ध्‍यानाकर्षण सदन के अंदर ला सकता है. इस प्रकारकांग्रेस के कार्यकर्ता देवास में और उन्‍होंने भोपाल में भी की, इंदौर में भी की. (व्‍यवधान) यह विषय सदन में लाना जरूरी था, इसलिये राजेन्‍द्र जी ने इस विषय को उठाया.  (व्‍यवधान)

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय- अध्‍यक्ष महोदय, पहले से पत्‍थर जमा किये. प्रदर्शन हो रहा है. पहले से पत्‍थर और बाटलें जमा कर ली और प्रदर्शन में पथराव करना शुरू कर दिया. (व्‍यवधान) वहां दिल्‍ली में (XX) के प्रदर्शन कर रहे हैं. दिल्‍ली में (XX) कर के पूरे देश को अपमानित कर रहे हैं.  (व्‍यवधान)  यहां मध्‍यप्रदेश में पूरी तरह से गुण्‍डागर्दी के साथ में इस तरह से हमला करते हुए, सुनियोजित ढंग से इस प्रकार का काम किया गया है. (व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय- कृपया राजेन्‍द्र पाण्‍डेय जी और आप सब लोग बैठें.   (व्‍यवधान)

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय- अध्‍यक्ष महोदय, हम शनिवार और रविवार को छुट्टी होने की वजह से सूचना नहीं दे पाये. मैंने सूचना दी है. आपके पास में अधिकार हैं, आप अधिकार सम्‍पन्‍न हैं. हम सभी लोग आसंदी का सम्‍मान करते हैं.आप अनुभवी हैं, कुशल हैं. इसलिये निश्चित रूप से आप समय प्रदान करें, इस पर चर्चा हो. कांग्रेस चर्चा से क्‍यों घबरा रही है. ( व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय- राजेन्‍द्र जी, कृपया बैठिये.

                                      (व्‍यवधान)

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय- यह कांग्रेस की घबराहट है और कांग्रेस की हताशा है. इसी कारण कांग्रेस इस तरह के हमले करने पर ऊतर आयी है. (व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय- राजेन्‍द्र जी, कृपया आप बैठिये.

          (व्‍यवधान)

          श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव- कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट हुई. (व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय- कृपया आप सभी लोग बैठिये. 

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय- अध्‍यक्ष महोदय, थोड़ा सा समय प्रदान कर दें. शनिवार को घटना हुई. अब विधान सभा की शनिवार और रविवार को छुट्टी थी. हमने आज दिया आपके सामने. आप उस पर चर्चा करायें. इनका आचरण तो दिनों दिन बदलता जा रहा है. (व्‍यवधान)

          श्री फून्‍देलाल सिंह मार्को- अध्‍यक्ष महोदय, इसको विलोपित किया जाये. (व्‍यवधान)

          श्री सोहनलाल बा‍ल्‍मीक- संसदीय कार्य मंत्री की इतनी हिम्‍मत थी तो  भागीरथपुरा पर बात करते, क्‍यों नहीं लिया स्‍थगन को. उस समय डर रहे थे, उस समय भाग रहे थे. (व्‍यवधान) संसदीय कार्य मंत्री इस विधान सभा की व्‍यवस्‍था को बिगाड़ने का काम कर रहे हैं. (व्‍यवधान)

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय- इनका आचरण तो दिनों दिन बदलता जा रहा है. (व्‍यवधान)

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक- भागीरथपुरा के स्‍थगन का क्‍यों स्वीकार नहीं किया. उसमें डर रहे थे क्‍या. उसमें भाग रहे थे. (व्‍यवधान) और यह व्‍यवस्‍था को बिगाड़ने का काम कर रहे हैं. (व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय- अभी आपने यह विषय उठाया तो मेरे ध्‍यान में आया. मैं इसे दिखवाता हूं. प्‍जीज आप सब लोग बैठ जायें.

          (व्‍यवधान)

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक- यह गलत परम्‍परा डाल रहे हैं. इन पर रोक लगायी जाये. (व्‍यवधान) कोई गंभीर विषय होता है तो यह इसी तरह का व्‍यवहार करते हैं. (व्‍यवधान) यह संसदीय कार्य मंत्री जी का काम नहीं है. (व्‍यवधान)

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन- आप लोग गलत बयानी मत करें. (व्‍यवधान)     

          अध्‍यक्ष महोदय- सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिये स्‍थगित.

                    (12.49 बजे सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिये स्‍थगित की गई.)

 

 

12.55 बजे                 {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

            अध्यक्ष महोदय -  श्री हरिशंकर खटीक.

 

12.56 बजे                             प्रतिवेदन की प्रस्तुति

शासकीय आश्वासनों संबंधी समिति का तेईसवां, चौबीसवां, पच्चीसवां, छब्बीसवां, सत्ताईसवां, अट्ठाईसवां एवं उनतीसवां प्रतिवेदन

 

संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - अध्यक्ष महोदय, मेरा एक निवेदन है कि माननीय श्री हरिशंकर खटीक जी ने जो आश्वासन समिति के सभापति हैं, इस समिति ने सर्वाधिक अच्छा काम किया है, 19 बैठकें की हैं.

अध्यक्ष महोदय- बिल्कुल ठीक बात है.

श्री कैलाश विजयवर्गीय - और मेरा ख्याल है कि उन्होंने 7 प्रतिवेदन दिये हैं. सबसे सिनसीयर सभापति हैं, मैं चाहता हूं कि बाकी सभापति महोदय भी इनसे प्रेरणा लें क्योंकि विधान सभा की समिति का महत्व है.

अध्यक्ष महोदय - बिल्कुल सही है.

श्री कैलाश विजयवर्गीय - और मैंने भी एनालिसिस करके देखा है, बहुत कम सदस्य उपस्थित हो रहे हैं.

श्री भंवर सिंह शेखावत - बड़ी मुश्किल से आप तारीफ करने उठे हो. लोक लेखा समिति का भी जरा प्रतिवेदन देख लो. ऐतिहासिक काम किया है, आपके आदेश से माननीय अध्यक्ष महोदय के नेतृत्व में.

श्री कैलाश विजयवर्गीय - आपने पहले बताया नहीं.

श्री भंवर सिंह शेखावत - आपने पूछा ही नहीं.

श्री कैलाश विजयवर्गीय - आपको बताना चाहिए, फिर एकाध पार्टी रखना चाहिए सब मित्रों की. आप ऐसे ही तारीफ करवाएंगे क्या.

खाद्य मंत्री (श्री गोविन्द सिंह राजपूत) - आप बताते ही नहीं हो. आप एक पर्ची लिखकर भेज देते कैलाश भैया के लिए.

अध्यक्ष महोदय - लोक लेखा समिति ने भी अच्छा काम किया है और श्री हरिशंकर खटीक जी की समिति ने भी अच्छा काम किया है. आश्वासन समिति ने साल में 19 बैठकें की हैं. यह अपने आप में रिकॉर्ड है.

श्री हरिशंकर खटीक - अध्यक्ष जी को बहुत बहुत धन्यवाद. आपके मार्गदर्शन में काम किया है.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय - माननीय श्री भवंर सिंह शेखावत जी ने निश्चित रूप से पूरी गंभीरता के साथ में और बहुत चिंता के साथ में लगातार बैठकें की है. बहुत अच्छी कार्यवाही हुई है.

(मेजों की थपथपाहट)..

 

 

 

 

 

 

12.57 बजे                                 याचिकाओं की प्रस्तुति

 

अध्यक्ष महोदय - आज की कार्यसूची में उल्लेखित याचिकाएं 1 लगाए 75 पढ़ी हुई मानी जाएंगी.

 

 

 

12.58 बजे                                      संविहित संकल्प

जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) संशोधन अधिनियम, 2024  (2024 का 5)

 

मैं समझता हूं कि यह संकल्प तो अंगीकृत ही करना है. इसमें चर्चा की आवश्यकता कोई है नहीं. सब लोग सहमत हैं.

 

 

 

 

 

संकल्प सर्वसम्मति से स्वीकृत हुआ.

(मेजों की थपथपाहट)..

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.59 बजे      वर्ष 2026-2027 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमशः)

 

(1)

मांग संख्या 22

नगरीय विकास एवं आवास

 

मांग संख्या 28

राज्‍य विधान मण्‍डल

 

 

 

 

                     

 

 

 

 

1.01 बजे                                      अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

                             भोजन की व्‍यवस्‍था सदन की लॉबी में किए जाने विषयक

 

          अध्‍यक्ष महोदय -- भोजन की व्‍यवस्‍था लॉबी में है. कृपया, सभी सदस्‍य अपनी सुविधानुसार भोजन ग्रहण कर सकते हैं. श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा जी.

 

1.02 बजे             वर्ष 2026-2027 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमशः)

 

          श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा (खातेगांव) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या- 022, 028, नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग पर बोलने के लिए आज सदन में उपस्‍थित हुआ हॅूं. हमारा मध्‍यप्रदेश जो कि देश का हृदय प्रदेश है, जिसके प्राकृतिक संसाधनों की.....

          अध्‍यक्ष महोदय -- आशीष जी, अब सदन की कार्यवाही 3.00 बजे तक के स्‍थगित की जाती है. यह चर्चा जारी रहेगी.

 

 

 

(01.03 बजे से 3.00 बजे तक अन्तराल)

 

 

 

          3.12 बजे   {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए}

          अध्यक्ष महोदयश्री आशीष गोविन्द शर्मा.

            श्री आशीष गोविन्द शर्मामाननीय अध्यक्ष महोदय, बजट पर चर्चा के दौरान नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग की अनुदान मांगों की चर्चा के दौरान मांग संख्या 22 एवं 28 का मैं समर्थन करता हूं. मध्यप्रदेश हमारा भारत का हृदय प्रदेश है. यहां की समृद्ध, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत है, जिस पर हम मध्यप्रदेश वासियों को गर्व होना चाहिये. भारत वो देश है जहां की प्राचीन सभ्यताओं में, इतिहास में, हमें नगरीयकरण और ग्रामीण परिवेश के जीवन के दर्शन होते हैं. ऐतिहासिक अभिलेखों में पुरात्व से प्राप्त साक्ष्यों में हमें भारत की प्राचीन नगरीय प्रणाली का, शासन व्यवस्थाओं का एक दीर्घ अनुभव प्राप्त हुआ है. उसी के दम पर वर्तमान नगरीय संरचनाओं के विकास करने का काम विभिन्न सरकारें कर रही हैं. हमारी सरकार ने नगरीय प्रशासन जैसे महत्वपूर्ण विभाग के लिये, मध्यप्रदेश के नगरों के लिये बजट में लगभग 26 हजार करोड़ की राशि प्रस्तावित की है. यह नगर हमारी न सिर्फ औद्योगिक शक्ति का प्रतीक है, बल्कि इनके माध्यम से व्यापार-व्यवसाय, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में मध्यप्रदेश को आगे बढ़ने का अवसर मिला है. आज के समय में नगरीकरण एक बहुत बड़ी चुनौती है. बेहतर शिक्षा, व्यापार एवं रोजगार के लिये ग्रामीण क्षेत्र में बसने वाली आबादी शहरों की ओर जाती है. आज तो मान्यवर नरेन्द्र मोदी जी की सरकार के कारण पूरे भारत वर्ष में नगरीय तथा ग्रामीण विकास के लिये बहुत व्यापक पैमाने पर प्रबंधन किये गये हैं, जिसके कारण गांव भी पहले से अधिक सुन्दर हुए हैं और नगरों का विकास भी बहुत अच्छे से हम लोग कर पा रहे हैं. नगर जो कि लाखों की आबादी जहां पर निवास करती है. हमारा उज्जैन हो जो कि बाबा महाकाल की नगरी है, इन्दौर लोक माता अहिल्या बाई के बेहतर शासन व्यवस्था का प्रमाण जहां मौजूद है, जबलपुर जिसे संस्कारधानी कहा जाता है, ग्वालियर जहां पर आजादी के संघर्ष की कहानी आज भी इतिहास के पन्नों पर दर्ज है. ऐसे लगभग 16 नगर निगमों में 99 नगर पालिकाओं में और 298 के लगभग नगर परिषद एवं नगर पंचायतों के माध्यम से हम नगरीय विकास एवं आवास विभाग की संरचना हम मध्यप्रदेश के अंदर करते हैं. एक समय था, जब मध्‍यप्रदेश  में कांग्रेस की सरकार हुआ करती थी. आज संयोग से कोई कांग्रेस का विधायक यहां पर सुनने के लिए मौजूद नहीं है. लेकिन उस समय की नगरों की हालत हम सब को पता है. मध्‍यप्रदेश के  बहुत सारे विधायक नगरीय क्षेत्रों से चुनकर आते हैं, इंदौर हो, उज्‍जैन हो, देवास हो जहां पर ..

          श्री उमांकात शर्मा कांग्रेस के भी आ चुके हैं.

          श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा वे, राहुल गांधी की सभा में नहीं गए. (..हंसी)

          श्री भंवर सिंह शेखावत अध्‍यक्ष जी, जाओ तो तकलीफ, नहीं जाओ तो तकलीफ. (..हंसी)

          श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा किन कारणों से नहीं गए, उसके लिए आप बधाई के पात्र हैं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत अध्‍यक्ष जी ,पूछेंगे तो बता देंगे, कैलाश जी पूछेंगे तो बता देंगे कि क्‍या हर किसी को बता दें.

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय एक बात बताइए, आप अकेले सभी को छोड़ आए.

          श्री भंवर सिंह शेखावत एक अकेला सब पर भारी. (..हंसी)

          अध्‍यक्ष महोदय राजेन्‍द्र जी, कुछ बातें ऐसी हैं, जो दबी दबी अच्‍छी लगती है, आशीष जी आगे बढ़ो.

          श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा अध्‍यक्ष जी, एक समय था, जब इन नगरों में टैंकरों से पानी का वितरण होता था. देवास में तो मालगाड़ी से पानी लाया जाता था. कमोवेश हर बड़े महानगरों और ग्रामीण क्षेत्र की यही स्थिति थी. आज हम कह सकते हैं कि अमृत 1 एवं 2 जैसी परियोजनाओं के कारण नगरीय क्षेत्र न सिर्फ पेयजल आपूर्ति में आत्‍मनिर्भर हुए हैं, बल्कि आज नगरीय क्षेत्र की आबादी को भी, मेरे ख्‍याल से मध्‍यप्रदेश में ऐसा कोई नगर नहीं है, जहां हफ्ते या 8-10 दिन में नलों में पानी के दर्शन होते हैं, अन्‍यथा एक समय ऐसा था जब 8-10 दिन तक पानी नहीं मिलता था, उद्योग दम तोड़ चुके थे. इसलिए इन बड़े नगरों को अच्‍छे महानगरों के रूप में विकसित करने का काम भाजपा ने किया. हम इंदौर का वह दौर नहीं भूल सकते, जब अतिक्रमण की कार्यवाही के दौरान पुलिस पर भी हमला हुआ, लेकिन इंदौर हमारी व्‍यवसायिक राजधानी है, भोपाल प्रदेश की राजधानी है. यहां प्रतिदिन हजारों-लाखों की संख्‍या में अपने काम और व्‍यापार के लिए लोग बाहर से आते हैं. इन नगरों में बेहतर शिक्षा के संस्‍थान है, स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं हैं, इसलिए प्रतिदिन इन महानगरों में बड़ी संख्‍या में नागरिक देश और प्रदेश से आते है. इस सबका इंतजाम करना नगरीय निकाय की बहुत बड़ी चुनौती है, नगरीय निकाय जहां पर जनता से जो टैक्‍स, संपत्ति कर, जल कर, समेकित कर, इस रूप में प्राप्‍त होता है, वही निकायों की आमदनी का एकमात्र जरिया होता है. पहले किसी जमाने में यात्री बसों की चुंगी के लिए नाके लगाए जाते थे, लेकिन सरकार ने बाद में संशोधन किया और उसके एवज में चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि नगरीय निकायों को सीधे मिलने लगी. नगरीय निकाय सरकार के भरोसे तो रहता ही है, लेकिन जो अच्‍छा करों का उपार्जन करते हैं, जहां की परिषदें, जहां का मेयर कौंसिल अच्‍छे से प्रबंधन का काम संभालते हैं, वहां की वित्‍तीय स्थितियां पहले से बेहतर होती चली जाती है.

            अध्‍यक्ष जी, हमारे नगरों को पहले झुग्‍गी झोपडि़यों की बस्तियों के रूप में जाना जाता था. आज  भी दिल्‍ली, मुंबई, कलकत्‍ता जैसे महानगरों में जाएंगे तो आपको कई सारी स्‍लम्‍स दिख जाएंगी, लेकिन जब से प्रधानमंत्री मोदी जी की प्रधानमंत्री आवास योजना आई, उसके बाद नगरीय क्षेत्रों में में जो झुग्‍गी बस्तियां हुआ करती थीं, वहां पर रहवासियों को पक्‍के मकान देने का काम हमारी सरकार ने किया. वर्ष 2015 से यह योजना प्रारंभ हुई और प्रथम चरण में लगभग साढ़े नौ लाख प्रधानमंत्री आवास स्‍वीकृत किए गए, जिसमें से 8 लाख 80 हजार से अधिक प्रधानमंत्री आवास बन चुके हैं, जिन लोगों के पास आवास नहीं थे, उनको पट्टे उपलब्‍ध कराएं गए, ऋण दिलाए गए और मुझे कहने में बड़ी प्रसन्‍नता है कि इंदौर हो, भोपाल हो, यहां पर मल्टियों में प्रधानमंत्री आवास के हितग्राहियों को आवास वितरित किए गए. हम गोकुल धाम सोसायटी देखते हैं, जहां पर विभिन्‍न मतों को मानने वाले लोग बड़े प्रेम के साथ रहते हैं, प्रधानमंत्री आवास ने एकता और अखण्‍डता का सूत्रपात इन मलटियों के माध्‍यम से किया है, जहां हर जाति वर्ग के लोग शासन की योजनाओं के माध्‍यम से एक छत के नीचे निवास करते हैं, लिफ्ट की भी सुविधा है, पीने का पानी, बच्‍चों के खेलने के लिये मैदान और हर व्‍यक्ति का सपना अपने जीवन में यही होता है कि मुझे अच्‍छा रहने का मकान, अपने लिये, अपने परिवार के लिये मिल जाये, प्रधानमंत्री आवास योजना में नगरीय क्षेत्रों में बहुत अच्‍छा काम हमारी नगरीय संस्‍थाओं ने किया है, इसके लिये हम सबको गर्व करना चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय, देश में मध्‍यप्रदेश प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी में सेकेंड स्‍थान पर है और आने वाले समय में आर्थिक रूप से कमजोर हमारे जो विभिन्‍न वर्ग के लोग हैं, जिन्‍हें प्रधानमंत्री जी प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्‍यम से ओर जोड़ना चाहते हैं, चाहे वह हमारे सफाई कर्मी हों, चाहे हमारी लाड़ली बहना हों, इनको भी भविष्‍य में प्रधानमंत्री आवास मिल सके, इस‍के लिये लगभग पचास हजार प्रधानमंत्री आवास आने वाले समय में कमजोर आर्थिक वर्ग के लोगों को दिये जाने वाले हैं और सबसे अच्‍छी बात यह है कि जो मकान कमजोर आय वर्ग के लोगों को दिये जा रहे है, इसकी रजिस्‍ट्री में छूट दी गई है और महिलाओं के नाम से रजिस्‍ट्री कराई जा रही है, यह निश्चित ही शहरों के सौंदर्यीकरण के लिये, शहरों में अच्‍छी बसाहटें निर्मित करने के लिये प्रधानमंत्री आवास योजना बहुत कारगर सिद्ध हुई है, जब हमने इस पूरे भारत वर्ष में कोविड का गंभीर समय देखा, जब एक महामारी इस मानवता को काल कवलित करने के लिये आई थी, उस समय लोगों के काम धंधे रोजगार सब बंद हो गये थे और हर कोई एकटक नजर से सरकार की ओर देख रहा था कि सरकार हमारे लिये भोजन की व्‍यवस्‍था करे, उपचार की व्‍यवस्‍था करे, ऐसे समय में हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ने स्‍ट्रीट वेंडर्स योजना, प्रधानमंत्री स्‍वनिधि योजना लेकर आये जिसके माध्‍यम से, दस हजार, बीस हजार, पचास हजार इन तीन श्रेणियों में ऋण प्रदान किया गया, उन छोटे-छोटे व्‍यवसायियों को जो फेरी लगाकर अपना व्‍यापार व्‍यवसाय करते थे और मुझे यह कहते हुए गर्व है कि हमारे मध्‍यप्रदेश में लगभग 18 लाख से अधिक आवेदन पी.एम. स्‍वनिधि योजना के अंतर्गत आये, जिसमें से लगभग 15 लाख से अधिक लोगों को प्रधानमंत्री स्‍वनिधि योजना के अंतर्गत ऋण दिया गया, जिसके ब्‍याज को सबसिडी के रूप में केंद्र सरकार भरती है, साथ ही साथ अब इसमें 15 हजार, 25 हजार और 50 हजार इतना संशोधन सरकार ने ओर किया है, ताकि आने वाले समय में हमारे छोटे-छोटे व्‍यापार और व्‍यवसाय करने वाले लोग इस योजना के माध्‍यम से न केवल आत्‍मनिर्भर बन सके, बल्कि अपने पैरों पर भी खड़े हो सकें.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पी.एम.स्‍ट्रीट वेंडर्स योजना के अंतर्गत हमारे मध्‍यप्रदेश के तीन नगरीय निकायों उज्‍जैन, खरगोन और सारणी को उत्‍कृष्‍ट कार्य हेतु पुरस्‍कृत किया गया है, बड़े राज्‍य जो हैं उत्‍तरप्रदेश, महाराष्‍ट्र इन सबमें मध्‍यप्रदेश ने इसमें उल्‍लेखनीय कार्य किया है और इस योजना के माध्‍यम से शहरी पथ विक्रेताओं द्वारा जो डिजीटल लेन देन किया गया है, उससे लगभग 32 लाख 35 करोड़ रूपये का कैश बैक प्राप्‍त हुआ है और डिजीटल लेन देन के माध्‍यम से हम जो नई तकनीक है, उससे भी बहुत सारे लोगों को जोड़ पा रहे हैं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत -- अरे भाई लिखा हुआ तो ठीक से पढ़ो, वह 32 करोड़ 35 लाख रूपये है .

          श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा -- जी, 32 करोड़ 35 लाख रूपये है, काका साहब मैं क्षमा चाहता हूं. आपकी दृष्टि बिल्‍कुल बाज के जैसी है, आप पकड़ लेते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- हाउस में अगर काका हों तो कितना महत्‍व है.(हंसी)

          श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा -- जी, बहुत महत्‍व है, इसलिए उनको वहां से सबकी तरफ से भेज दिया है उनको 

. नगरीय क्षेत्रों में प्रति दिन बढ़ी संख्‍या में आबादी आती जा रही है, लोग अपने रोजमर्रा के कामों के लिये आते हैं और कई बार उनको रूकना भी पड़ता है. पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने दीनदयाल रसोई और आश्रय योजना जैसे दो महत्‍वपूर्ण प्रकल्‍प चालू किये. वैसे तो शहरों में बड़ी-बड़ी होटलें होती हैं, भोजनालय होते हैं, लेकिन कई बार गरीब आदमी के पास इतने पैसे भी नहीं हो पाते कि जो उनकी भोजन की वह व्‍यवस्‍था कर सकें. मुझे याद है माननीय नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जी जब इंदौर के महापौर थे उस समय उन्‍होंने अन्‍न रक्षाम करके एक योजना चलाई थी. बड़ी-बड़ी शादियों में, कार्यक्रमों में जो भोजन बच जाता था वह व्‍यर्थ न जाये इसलिये संस्‍था के सदस्‍य वहां से भोजन का परिवहन करके उन्‍हें गरीब बस्तियों में ले जाकर तुरंत वितरित करते थे ताकि उन्‍हें भी भोजन प्राप्‍त हो जाये और उस भोजन का सदुपयोग हो जाये. माननीय प्रधानमंत्री जी के द्वारा नि:शुल्‍क  अन्‍न वितरण योजना चालू करने के बाद आज प्रदेश सहित पूरे भारतवर्ष में कहीं पर भी भुखमरी की स्थिति नहीं है, कहीं अन्‍न का संकट नहीं है. लेकिन दीनदयाल रसोई जैसी योजना जहां मात्र 5 रूपये में व्‍यक्ति को भरपेट भोजन मिल सकता है. आज मध्‍यप्रदेश में लगभग 191 केन्‍द्र दीनदयाल रसोई योजना के अंतर्गत चल रहे हैं और इसमें चलित रसोई घर भी चल रहे हैं. इन रसोई घरों का संचालन स्‍वयं सहायता समूह कर रहे हैं और अब तक लगभग इस योजना  के अंतर्गत साढ़े चार करोड़ से अधिक लोगों को भोजन उपलब्‍ध कराया गया है. आश्रय स्‍थल आप लोग देखते होंगे कई बार समाचार पत्रों में, टेलीविजन चेनलों में ठंड से ठिठुरते हुये, बारिस में भीगते हुये लोगों के समाचार में ऐसे दृश्‍य हम लोगों को देखने को मिलते हैं. व्‍यक्ति को जिसके पास रूकने की कोई व्‍यवस्‍था नहीं होती या जो लगभग बेसहारा होता है उसको इधर उधर रात काटना होती है और खासकर के ठंड और बारिस के मौसम में उसके लिये रात काटना बहुत मुश्किल होता है. महंगी-महंगी होटलें होती हैं उसका खर्च वहन कोई आम आदमी नहीं कर सकता. इसलिये आश्रय योजना के अंतर्गत विभिन्‍न स्‍थानों पर आश्रय स्‍थलों का निर्माण किया गया है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी डॉ. मोहन यादव जी जब ठंड की ठिठुरन प्रदेश में बढ़ी थी तब उन आश्रय स्‍थलों में जाकर स्‍वयं वहां पर निवासरत लोगों से मिले थे, उनका हाल चाल जाना था, वहां की व्‍यवस्‍थायें देखी थीं और निश्चित ही गरीब आम आदमी को इन आश्रय स्‍थलों पर रूकने की व्‍यवस्‍था, सुबह अपने काम के लिये तैयार होकर गंतव्‍य तक जाने की व्‍यवस्‍था मध्‍यप्रदेश सरकार उपलब्‍ध करा रही है. 20 नवीन आश्रय स्‍थल निर्माण हेतु स्‍वीकृत किये गये हैं और 117 आश्रय स्‍थलों का संचालन मध्‍यप्रदेश के अंतर्गत किया जा रहा है और यह सब जानकारी विभाग के आश्रय स्‍थल पोर्टल पर आप सब लोगों को प्राप्‍त हो सकती है. आज मध्‍यप्रदेश न सिर्फ गरीबों को भोजन करा रहा है बल्कि उनके रूकने की भी व्‍यवस्‍था कर रहा है. नगरीय क्षेत्रों में बढ़ती हुई आबादी का दवाब एक बहुत बड़ी समस्‍या होता है. गांव में बड़ी जगह में कम लोग निवास करते हैं, लेकिन शहरों में कम जगह में ज्‍यादा लोग निवास करते हैं इसलिये उनके लिये रोजमर्रा के कामों के इंतजाम की व्‍यवस्‍था, सीवरेज की व्‍यवस्‍था, ड्रेनेज की व्‍यवस्‍था, पीने के पानी की व्‍यवस्‍था यह सब करना नगरीय निकार्यों के लिये एक बहुत बड़ी चुनौती होती है. अगर मोहल्‍ले में कोई पशु मर जाये, कोई गंदगी हो जाये, नाली चोक हो जाये, पानी नहीं मिले, स्‍ट्रीट लाइट बंद हो तो सबसे पहले किसी की याद आती है तो उस वार्ड के पार्षद की बात याद आती है, इसलिये सबसे प्राथमिक सरकार अगर कोई है तो वह नगरीय निकाय और उस पार्षद के माध्‍यम से, उस निकाय के माध्‍यम से लोग अपनी समस्‍याओं से तुरत फुरत निजात पाना चाहते हैं, इसलिये नगरीय क्षेत्रों में स्‍वच्‍छ वायु मिले, बगीचे हों, घूमने के स्‍थान हों, मुझे इस बात को कहने में बड़ी प्रसन्‍नता है कि चाहे इंदौर हो, चाहे भोपाल हो, हमारी सरकार के माध्‍यम से साईकिल चालन के लिये स्‍टॉल की व्‍यवस्‍था की गई, भोपाल नगर निगम ने इसका संचालन किया, आप साइकिलिंग कर सकते हैं, फुटपाथ की अच्‍छी व्‍यवस्‍था की है. व्‍हीआईपी रोड हो जहां पर हम लोग भोपाल आते हैं तो रात के समय 11, 12, 1 बजे तक लोग अपने परिवार के साथ सैर सपाटा करते हैं, सुबह चार बजे भी कभी आप आयेंगे तो आपको भोपाल की इन सड़कों पर फुटपाथ पर लोग सुबह की सैर करते हुये या दौड़ते हुये दिख जायेंगे. यह अच्‍छा विकास आंतरिक पथों का नगरीय निकाय ने किया है जिसके कारण आम नागरिकों को अच्‍छी सुविधा मिली है. चूंकि नगरों में जब निर्माण होते हैं तो उसकी बलि पेड़ चढ़ते हैं, जो वृक्ष वर्षों में बड़े होते हैं उन्‍हें काटना पड़ता है. भोपाल में भी हमारे विधान सभा में जो सदस्‍यों के लिये क्‍वार्टर बनाये जा रहे हैं उसमें भी कई बार यह विषय सामने आया, लेकिन हर सरकार और हर निकाय की एक प्राथमिकता होती है कि कम से कम हरियाली को नष्‍ट न किया जाये और अगर करना भी पड़े तो उसका वैकल्पिक पौधारोपण का काम किया जाये माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी के इस विभाग के सम्हालने के बाद माननीय प्रधानमंत्री जी की अपील एक पेड़ मां के नाम इस अभियान को पूरे मध्यप्रदेश में हर नगरीय निकाय ने न सिर्फ अच्छे से संचालित किया बल्कि आज मैं कह सकता हूं कि इन्दौर सहित कई सारे निकायों में जीवित पौधों की संख्या लगभग 90 प्रतिशत तक है और इस अभियान के माध्यम से प्रकृति का संरक्षण और पर्यावरण की सुरक्षा में बहुत महत्वपूर्ण योगदान निकायों ने निभाया है. चूंकि स्वच्छता आज की आवश्यक्ता है.

          अध्यक्ष महोदय - आशीष जी अब पूर्ण करें.

          श्री आशीष गोविन्द शर्मा - अर्चना दीदी को बोलना था वह बाहर चली गई इसीलिये मुझे यह जिम्मेदारी मिली.

          अध्यक्ष महोदय - कोई दिक्कत नहीं अच्छा बोल रहे हो आप. दो मिनट में समाप्त करें.

          श्री आशीष गोविन्द शर्मा -स्वच्छता के बिना अच्छे मानव जीवन और अच्छे मानव समाज की कल्पना नहीं की जा सकती. मान्यवर प्रधानमंत्री जी की पहल के पश्चात् भारत के विभिन्न नगरीय निकायों में ग्रामीण क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम हुआ है और आज मैं कह सकता हूं कि हमारे मध्यप्रदेश के अधिकांश नगर स्वच्छता में विभिन्न श्रेणियों में भारतवर्ष में अच्छा स्थान प्राप्त कर सकते हैं और मध्यप्रदेश के 8 शहरों को 2024 में राष्ट्रीय पुरस्कार स्वच्छता के मामले में प्राप्त हुए हैं और मध्यप्रदेश में कचरे से बिजली बनाई जा रही है जो कि हमारी बिजली की आपूर्ति में निकायों को आत्मनिर्भर करेगी. जबलपुर में 11 मेगावाट,रीवा में 6 मेगावाट और आने वाले समय  में उज्जैन और ग्वालियर में कचरे से बिजली बनाने की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं जिससे ऊर्जा के इस वैकल्पिक स्त्रोत की ओर नगरीय निकायों का ध्यान जा रहा है. कई सारे नगरीय निकायों में वेस्टेज से खाद बनाने का काम भी किया जा रहा है जिसके कारण नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति में बदलाव आया है. अमृत-2 योजना में सड़क नेटवर्क,स्ट्रीट लाईटिंग,ट्रेफिक सुधार,सीवरेज प्रोजेक्ट इन सबके लिये राशि केंद्र और राज्यांश के माध्यम से निकायों तक पहुंची हैऔर इससे निकायों के विकास में पंख लगे हैं.  मैं यह कह सकता हूं कि एक समय कांग्रेस की सरकार में जब नगरीय निकायों में तनख्वाह बांटने के लाले होते थे. कर्मचारियों को बंद कर दिया जाता था. आज तनख्वाह भी बंटरही है और आज विकास के लिये राशि भी प्राप्त हो रही है साथ ही साथ बढ़ती हुई जनसंख्या हमारे शहरों के लिये चुनौती न बने इसके लिये वहां का परिवहन मेट्रो रेल पर  हम बात नहीं करेंगे तो मुझे ऐसा लगेगा कि यह चर्चा अधूरी रह जायेगी इन्दौर और भोपाल में वर्तमान में मेट्रो रेल परियोजनाओं पर काम चल रहा है और जब यह योजनाएं तैयार हो जायेंगी. 2030-31 में इन्दौर की और 2028-29 में भोपाल में जब मेट्रो रेल चालू हो जायेगी तब न सिर्फ यातायात का दबाव कम होगा बल्कि हमारे यात्रियों के रोजमर्रा आने जाने में एक अच्छी परिवहन सेवा साबित हो सकेगी. मध्यप्रदेश के इसी सदन में टाउनशिप पालिसी लेकर आये हैं. अब मध्यप्रदेश में नई कालोनियों में सवालउठते हैं. कालोनाईजर कालोनी काट देते हैं उस पर नियंत्रण नहीं होता. बाद में शिकायतें होती हैं लोगों को सुविधाएं नहीं मिलती. हमने इसी सदन से टाउनशिप के लिये नयी कार्य योजना बनाई नये कानून को पास किया इसके माध्यम से 10 हेक्टेयर से कम की कालोनी की मंजूरी एक समिति जो कलेक्टर की अध्यक्षता में जिले में बनेगी वह इसकी मंजूरी प्रदान करेगी और 20 हेक्टेयर भूमि होने पर बड़े महानगरों में,उज्जैन,इन्दौर,भोपाल,जबलपुर में कालोनाईजर कालोनी काट सकता है और इसकी मंजूरी 5 लाख से अधिक की आबादी वाले शहरों में पी.एस. की अध्यक्षता में जो समिति बनी है वह प्रदान करेगी. मेरे ख्याल से इस तरह के कानून बनने से अवैध कालोनियों पर भी लगाम लग सकेगी. हम सबका सपना है कि हमारा मध्यप्रदेश जो कि विकसित मध्यप्रदेश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है उसमें नगरों का बहुत बड़ा योगदान होने वाला है. आने वाले समय में जब मेट्रोपोलिटन रीजन इस मध्यप्रदेश में बनेंगे तब हमें भी मेट्रो रेल परियोजनाएं और हमारी सिटी बस की अवधारणा है उसके माध्यम से न केवल हम दूरियों को कम करेंगे बल्कि लोगों को जोड़ने के लिये एक बड़े सेतु का काम भी करेंगे. माननीय डॉ.मोहन यादव जी की सरकार और माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी के नेतृत्व में नगरीय प्रशासन विभाग बहुत अच्छा काम कर रहा है. आगे हमारे नगर विकास के मामलों में,स्वच्छता के मामलों में, अच्छा स्थान प्राप्त करें. पहले नंबर पर पहुंचे. यही मेरी शुभकामना है. बहुत-बहुत धन्यवाद.

            अध्‍यक्ष महोदय -- श्री जयवर्द्धन सिंह जी.

 

03.35 बजे          इंदौर के भागीरथपुरा में मृतकों की संख्‍या के संबंध में संसदीय

कार्यमंत्री का स्‍पष्‍टीकरण

          नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्‍यक्ष महोदय, जयवर्द्धन सिंह जी बोलें, उसके पहले मैं जरा सा इंटरप्‍ट करना चाहता हूँ. अध्‍यक्ष महोदय, माननीय जयवर्द्धन सिंह जी ने प्रश्‍नकाल में उस दिन प्रश्‍नोत्‍तरी दिखाकर मुझसे कहा था कि आपके एक ही प्रश्‍न के उत्‍तर में दो मृत्‍यु संख्‍या बताई गई है. आपने शायद उसको पूरा नहीं पढ़ा, बाद में उसको मैंने घर जाकर पूरा पढ़ा तो वास्‍तव में उसमें टोटल 32 मृत्‍यु लिखी है. पर डेथ विथ डायरिया वह 20 प्‍लस 2 बाद में उन्‍होंने बताई. बाकी डेथ ऑडिट और डेथ एनॉलिसिस की रिपोर्ट भी उसमें थी जो कि डायरिया से नहीं हुई है, उनकी नेचुरल डेथ हुई है. इसलिए डेथ तो बराबर थी, पर डायरिया से 22 डेथ ही हुई थी. यह आपको मैं क्‍लियर करना चाह रहा था.

          अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है, इसको दुरुस्‍त करवा लेंगे. मैंने भी कार्यवाही बुलाकर इसको देख लिया था. श्री जयवर्द्धन सिंह जी.

          श्री जयवर्द्धन सिंह (राघोगढ़) -- धन्‍यवाद माननीय अध्‍यक्ष महोदय. मैं मांग संख्‍या 22 नगरीय विकास एवं आवास विभाग की जो अनुदानों की मांगें हैं, उन पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्तमान में मध्‍यप्रदेश में जो बजट प्रस्‍तुत हुआ है. इस बजट के माध्‍यम से एक प्रकार से पूरे प्रदेश में अगले एक साल, वित्‍तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत सरकार की क्‍या प्राथमिकताएं हैं, पूरे मध्‍यप्रदेश के हर एक विभाग के अधीन किन-किन योजनाओं पर सरकार गंभीर प्रकार से अगले एक साल में काम करेगी. उसकी पूरी योजना हमारे सामने इस बजट के माध्‍यम से प्रस्‍तुत होती है और जो माननीय वित्‍त मंत्री महोदय ने घोषणा की है कि मध्‍यप्रदेश का लगभग साढ़े 4 लाख करोड़ का बजट प्रस्‍तुत किया गया है. उसमें से माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लगभग 20-22 हजार करोड़ का बजट नगरीय विकास एवं आवास विभाग के लिए आवंटित हुआ है. जो मात्र 5 प्रतिशत है. इस विभाग के मंत्री माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी बहुत ही वरिष्‍ठ नेता हैं. सारे सदन में अगर किसी का सबसे अधिक अनुभव भी इस विभाग का है तो आदरणीय कैलाश विजयवर्गीय जी का है. लेकिन उनके डिपार्टमेंट को मात्र 5 प्रतिशत बजट देना, यह उचित नहीं है. यह एक ऐसा विभाग है (श्री रामेश्‍वर शर्मा द्वारा अपने आसन से बैठे-बैठे कुछ कहने पर) आदरणीय रामेश्‍वर जी भी मेरे पक्ष में यहां पर कह रहे हैं, उनका आभार व्‍यक्‍त करता हूँ. लेकिन मूल बात यह है कि जिस गति से शहर का क्षेत्र बढ़ रहा है. अधिकतर हम देख रहे हैं कि आज हर एक गांव का व्‍यक्‍ति भी, जिसके पास ठीक-ठाक आमदनी है, वह भी एक कमरा या एक फ्लैट निकट के शहर में लेता है, उनके बच्‍चों की पढ़ाई के लिए, उनके बच्‍चों की स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍थाओं के लिए और यही कारण है कि आज हरेक शहर में, चाहे नगर पंचायत हो, नगर पालिका हो, नगर निगम हो, प्रतिवर्ष वहां की जो जनसंख्‍या है, वह बढ़ती जा रही है. मेरा इस पर मानना है कि कम से कम 10 प्रतिशत बजट शहरी विकास के लिए आवंटित होना चाहिए था. यह मेरा एक सुझाव माननीय मंत्री जी को रहेगा कि भविष्‍य में आप थोड़ा और ध्‍यान दें. जब इतने परिपक्‍व मंत्री कैलाश जी के रूप में हमारे पास मध्‍यप्रदेश में हैं तो उनको उचित प्राथमिकता भी मिलना चाहिए ताकि जो सभी ऐसी योजनाएं हैं, उनका क्रियान्‍वयन हो सके.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय वित्‍त मंत्री जी ने कहा था कि इस साल लगभग 1 लाख करोड़ पूंजीगत व्‍यय के लिए पहली बार पूरे मध्‍यप्रदेश में आवंटित किया गया है. लेकिन अगर हम नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अलग-अलग मद क्रमांक देखें तो इसमें अनेक ऐसी योजनाओं में कमी की गई है. मैं सदन का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूँ मद क्रमाक 9631 पर, जहां नगरीय क्षेत्र में अधोसरंचना निर्माण कार्य जो है, उसकी राशि 220 करोड़ रुपये से कम करके 100 करोड़ रुपये की गई है. मैं उल्‍लेख करना चाहता हूँ मद क्रमांक 7668 का, जिसमें मूलभूत सुविधाओं के लिए एकमुश्‍त अनुदान जो पिछले वर्ष 1617 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, इस वर्ष 1057 करोड़ रुपये का किया गया है. लगभग साढ़े 500 करोड़ रुपये इसमें भी सरकार ने कम किए हैं. इसके साथ-साथ, मैं अभी विषय पर आने वाला हूँ, और क्‍योंकि स्‍वयं माननीय मंत्री जी ने इस बात का उल्‍लेख किया था कि किस प्रकार से जो दुर्घटना हुई थी भागीरथपुरा में, जिसने पूरे प्रदेश और देश को इस बात पर सावधान किया है कि कहीं न कहीं ऐसे अनेक पानी के स्रोत हैं, जिसमें मल मिल सकता है. जो बहुत ही हानिकारक हो सकता है. हमारे देश और प्रदेश के नगरिकों के लिए मद क्रमांक 1249 मल जल निकासी योजना की स्‍थापना के लिए मात्र 15 करोड़ रुपये की राशि दी गई है और अगर हम उसको मद क्रमांक 1215 के साथ जोड़ें, तो जल की जो आपूर्ति है, उसकी सफाई के लिए मूल रूप से कुल मिलाकर मात्र 30 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है. जो मेरे हिसाब से बहुत कम हैं. जब हम बात करें कि आज 400 से अधिक नगरीय क्षेत्र हमारे मध्‍यप्रदेश में हैं, इसके साथ-साथ हम कायाकल्‍प योजना की मद क्रमांक 1179 की बात करें, तो इसमें भी कायाकल्‍प योजना के लिए जहां वर्ष 2024 में 600 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई थी, वर्ष 2025 में 400 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई और इस वर्ष मात्र 200 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है, शायद इसलिए क्‍योंकि योजना अब पूर्ण होने वाली है. लेकिन क्‍या जो शेष काम उसमें रह गया है ? उसके लिए भी आप अन्‍य राशि पर आने वाले समय में विचार करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय, एक मुझे इस विषय पर आपत्ति थी. मैं पुन: अमृत योजना पर आना चाहूंगा, क्‍योंकि उस दिन जब स्‍थगन पर चर्चा हो रही थी, तो समय-सीमा के कारण मैं उस पर बोल नहीं पाया था. लेकिन अगर हम देखें तो वर्ष 2014 से लेकर वर्ष 2026 तक अमृत योजना जिसमें नल जल की व्‍यवस्‍था भी थी, सीवेज का काम भी था, इसमें लगभग 30 से 40 हजार करोड़ रुपये उस पर खर्च हो चुके हैं. जो भागीरथपुरा में हादसा हुआ था, उसमें यह बात सामने आई है और शायद इसके बारे में यह बात जरूर है कि माननीय मंत्री जी को भी इसका अध्‍ययन है और मुझसे बेहतर आइडिया है. लेकिन जो मेरे पास जानकारी आई है कि इसमें कहीं न कहीं, जो नर्मदा जल की भागीरथपुरा में लाईन थी, उसके पैरेलल पूरी जो सीवेज लाईन थी, वह मल की थी, वह उसके साथ रन कर रही थी और जब नर्मदा पाईप लाईन में क्रेक्‍स आये, तो वहीं से जो मल का पानी था, वह उसमें चला गया था, जो अन्‍त में जहरीला साबित हुआ.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इसमें आपसे एक आग्रह रहेगा कि माननीय मंत्री जी की अमृत योजना में पिछले 10-12 वर्षों में जिस गुणवत्‍ता का काम होना चाहिए था, वह नहीं हो पाया. इसका कारण यह था कि जिन ठेकेदारों और जो डीपीआर के निर्माता थे, उनको यह आइडिया ही नहीं था कि सीवेज सिस्‍टम बनता कैसे है ? और मैं आज यह कहना चाहूँगा कि पूरे मध्‍यप्रदेश और देश के सामने अर्बन डेवलपमेंट में सबसे बड़ी चुनौती अगले 30-40 वर्षों में है, तो वह सीवेज की है, खुले मल की है. आज अगर मान कर चलें कि 400 नगरीय निकाय हैं, तो मुश्किल से 10 या 20 निकायों में 100 प्रतिशत सीवेज कवरेज होगा और आज भी वही निकाय जो आज आगे बढ़ते जा रहे हैं, जो नई बस्तियां वहां पर आ रही हैं, वहां पर भी सीवेज कवरेज नहीं है. मेरा सबसे पहले माननीय मंत्री जी से यह निवेदन रहेगा कि पिछले 12 वर्षों में जो काम सीवेज के हुए हैं, उसकी जांच होनी चाहिए. क्‍योंकि उस पर जिस क्‍वालिटी का काम होना चाहिए था, वह काम नहीं हो पाया था और यही कारण है कि आज जो स्थिति भागीरथपुरा में हुई थी, वह स्थिति बनी थी. मेरा इसमें यह भी आग्रह रहेगा कि आने वाले समय में जो यह काम नल जल के हुए थे, नर्मदा पाईपलाईन और अमृत योजना के माध्‍यम से उनमें कौन-कौन ठेकदार थे ? जिन्‍होंने सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया है, उनकी भी जांच होनी चाहिए. अगर हम बात करें, तो ऐसे अनेकों और भी विषय हैं, जिन पर मैं सदन का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूँ. अभी आशीष जी प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में बात कर रहे थे, यह बात सही है कि पिछले कुछ वर्षों में अनेकों घरों का निर्माण हुआ है, चाहे एएचपी के माध्‍यम से हो, चाहे बीएलसी के माध्‍यम से हो. लेकिन कुछ समय पहले माननीय मंत्री जी ने इस बात का उल्‍लेख किया था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बीएलसी के जो आवास होते थे, उनके अब नियमों में काफी बड़ा बदलाव आया है. पहले कोई भी रजिस्‍ट्री अनिवार्य नहीं थी, अब इसमें रजिस्‍ट्री अनिवार्य हो गई है, जिससे कि न के बराबर नए नाम जोड़े जा रहे हैं. मेरा इसमें माननीय मंत्री जी से यही निवेदन रहेगा कि जो बीएलसी के निर्माण के जो नियम हैं, उनको थोड़ा रिलैक्‍स किया जाये, क्‍योंकि आखिर जो व्‍यक्ति मांग कर रहा है कि उसको अपने घर के पक्‍के निर्माण के लिए ढाई लाख रुपये की राशि सरकार से मिले तो ऐसे लोग बहुत कम हो जाएंगे, जिनके पास रजिस्‍ट्री होगी. क्‍योंकि ये लोग अत्‍यंत गरीब हैं. जिनके पास क्षमता नहीं है, पक्‍के मकान निर्माण की. पिछले 1-2 वर्षों में, शहरों में प्रधानमंत्री आवास के नाम लगभग न के बराबर आये हैं, कुछ शहरों में 10-20-30 ही नाम आये हैं लेकिन आज भी एक सोच है कि प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत यूनिवर्सल कवरेज हो, अगर हम यही नियम लागू रखेंगे तो उस लक्ष्‍य के पास नहीं पहुंच पायेंगे, मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि इन नियमों में कुछ छूट दी जाये.

          अध्‍यक्ष महोदय, स्‍वच्‍छ भारत अभियान के विषय में इंदौर ने अपना ऐसा स्‍थान स्‍थापित किया है, जिसकी चर्चा आज भी देश भर में है. 8 बार लगातार पुरस्‍कार जीतना छोटी बात नहीं है. यदि हम स्‍वच्‍छ भारत अभियान के अधीन जो अलग-अलग मद क्रमांक हैं, उन्‍हें देखें तो मद क्रमांक 1335 में, पिछले वर्ष रुपये 40 करोड़ की राशि दी गई थी, इस बार मात्र रुपये 27 करोड़ की राशि दी गई है. वहीं मद क्रमांक 1356 में पिछले साल लगभग रुपये 80-90 करोड़ की राशि दी गई थी, उसमें भी सरकार ने मात्र अब तक रुपये 35 करोड़ खर्च कर पाई, शेष राशि खर्च ही नहीं कर पाई, इस बार उसे भी कम करके रुपये 67 करोड़ की राशि दी गई है. इसमें मैं मंत्री जी को कहना चाहूंगा कि जैसा आशीष जी ने भी कहा था कि आज भी स्‍वच्‍छ भारत अभियान के अंतर्गत अलग-अलग प्रकार की योजनायें, अलग-अलग शहरों में चल रही हैं. आज इंदौर का स्‍वच्‍छ भारत अभियान का मॉडल पूरे देश में प्रसिद्ध है, उसमें ऐसे मॉडल का प्रयोग किया गया, जहां प्रत्‍येक घर पर जाकर सूखे और गीले कचरे को पृथक किया गया, डोर-टू-डोर जाकर यह कार्य किया गया. जबकि जबलपुर में यह उद्देश्‍य था कि जो भी कचरा एकत्रित किया जायेगा, उससे ऊर्जा बनाई जायेगी जो कि अधिक सफल नहीं रहा.

          अध्‍यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि हम सभी मध्‍यप्रदेश के निवासी हैं और हमारे प्रदेश के अधीन ही, एक शहर ने स्‍वच्‍छ भारत अभियान में पूरे देश में प्रथम स्‍थान प्राप्‍त किया है तो क्‍यों न इंदौर मॉडल, प्रदेश के सभी 400 निकायों में लागू किया जाये, इसमें क्‍या बुराई है ? इसे लागू क्‍यों नहीं किया जा रहा है ? आखिर जिस NGO, जिन वॉलंटियर्स, जिस कंपनी, जिन्‍होंने इंदौर नगर निगम के लिए दिन-रात मेहनत की, जिनकी मेहनत के कारण आज इंदौर स्‍वच्‍छ भारत अभियान में नंबर वन है लेकिन वही लोग आज पूरे प्रदेश में काम क्‍यों नहीं कर पा रहे हैं ? मेरा मंत्री जी को सुझाव है कि आप उन लोगों के साथ बैठकर एक ऐसी योजना बनायें, जिसके माध्‍यम से सभी नगर पंचायतों, नगर पालिकों, नगर निगमों में वही इंदौर मॉडल लागू हो, जिससे हम देश को दिखा पायें कि चाहे शहर छोटा हो या बड़ा हो लेकिन अगर इंदौर मॉडल जिसके माध्‍यम से, विकेन्‍द्रीकरण के द्वारा घर-घर से कचरे को एकत्रित किया गया और फिर उसका निष्‍पादन किया गया, अगर यही मॉडल हम पूरे प्रदेश के सभी निकायों में लागू करेंगे तो इससे एक बड़ा संदेश पूरे देश में जायेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, शहर के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के लिए, बुनियादी ढांचे के लिए, अमृत योजना और जिस योजना का मैंने उल्‍लेख किया था, उसके अलावा जो अंतर्राष्‍ट्रीय बैंक हैं, संस्‍थायें हैं, उनके माध्‍यम से प्रदेश को काफी राशि मिलती है. शहरों में होने वाले निर्माण कार्यों में उनका भी बड़ा योगदान होता है, उसमें तीन अलग-अलग अंतर्राष्‍ट्रीय बैंक/संस्‍थायें हैं, जिनके माध्‍यम से प्रदेश में काफी राशि आई है, World Bank, Asian Development Bank (ADB) और KFW इन तीनों संस्‍थाओं से, आज जब हम इस बजट को देखें, अलग-अलग मद क्रमांक को देखें तो ADB में वर्तमान में काम किया जा रहा है लेकिन World Bank और KFW का काम अब शून्‍य हो गया है. अगर हम आज की प्रदेश की स्थिति देखें तो आज भी हमें इसकी जरूरत है कि जो अंतर्राष्‍ट्रीय बेस्‍ट प्रैक्टिस हैं, जो अंतर्राष्‍ट्रीय संस्‍थायें हैं, उनका जो वैल्‍यू-एड है, उनकी जो सलाह हमें मिल सकती है, इस पर हम उनसे और अधिक बात करें, संपर्क करें ताकि हम छोटे शहरों में और नई योजनायें ला सकें. इस संबंध में कहना चाहूंगा कि जब मैं मंत्री था तब मैंने ADB से आग्रह किया था कि वे ऐसा कोई मॉडल प्रोजेक्‍ट लायें, जिसके माध्‍यम से जो सबसे उच्‍च अंतर्राष्‍ट्रीय मापदण्‍ड हैं, आप एक या दो शहर लें और वहां चाहें काम सीवरेज का हो क्‍योंकि आज यदि हम सीवरेज का काम देखें तो ठेकेदार मात्र 5 फीट खोदकर सीवरेज लाईन डाल देता है. जबकि शहरों में कम से कम 10 से 15 फुट नीचे वह सीवरेज लाइन जाती है. पूरा काम पक्‍का किया जाता है. अलग चेंबर बनता है तो वही सफल हो पाता है तो मैंने उनसे रिक्‍वेस्‍ट की थी कि सीवरेज को लेकर एक अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर की डीपीआर बने और मात्र एक या दो शहर में आप उसका उपयोग करें, उसका प्रयास करें. एक प्रकार से उसका उदाहरण बनाएं तो उस समय राघोगढ़ और बैतूल नगरपालिकाएं ली थीं. लेकिन सरकार बदलने के बाद वह शहर बदल दिये गये. माननीय पूर्व मंत्री भूपेन्‍द्र सिंह जी यहां उपस्थित हैं. एक शहर उनके यहां से लिया गया था और एक हमारे पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह जी के क्षेत्र से लिया गया था, लेकिन अगर आप इसमें और कोई शहर ले लें क्‍योंकि इससे अगर हम आने वाले समय में मॉडल टाउन बनाएंगे. अगर हम आज कहें कि हम इंदौर को, भोपाल को या जबलपुर नगर निगम को मॉडल टाउन के बारे में विचार करेंगे तो वह ज्‍यादा बड़े हैं, लेकिन जो छोटे शहर हैं नगर पंचायत, नगर पालिका उनमें आप एक दो शहर ले लीजिए. चाहे वह धार्मिक शहर हों, चाहे वह अन्‍य पर्यटक शहर हों, वहां पर 100 प्रतिशत सीवरज कवरेज दिखाकर और वहां पर एडीबी, वर्ल्‍ड बैंक, केएफडब्‍ल्‍यू के साथ टायअप करके एक या दो मॉडल शहर दिखाएं. यह मेरा आपसे निवेदन रहेगा. इससे अच्‍छा संदेश जा सकता है, क्‍यों‍कि उसी प्रश्‍न के बारे में मैं वापस एक बार उल्‍लेख करना चाहूंगा. मैंने उस प्रश्‍न में यह भी पूछा था कि वर्ष 2023 से लेकर आज त‍क जल को लेकर इंदौर नगर निगम में कितनी शिकायतें आईं हैं. उत्‍तर में आंकड़ा दिया गया कि 45 हजार शिकायतें आईं हैं वो भी मात्र ढाई, तीन वर्ष में तो यह दिखाता है कि आज भी कहीं न कहीं आम नागरिक दूषित पानी का सामना कर रहा है. इस व्‍यवस्‍था को बेहतर करने के लिए बहुत जरूरी है कि हम आज के समय जो आधुनिक तकनीक हैं उनका उपयोग करें जिससे कि हम हर शहर में बेहतर व्‍यवस्‍था दे सकते हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आशीष शर्मा जी ने मेट्रो के बारे में उल्‍लेख किया था. मैं उसमें एक ही बात कहना चाहूंगा कि अभी भी मेट्रो को पूर्ण होने के लिए काफी समय रह गया है. मेट्रो इंदौर या भोपाल में तभी सफल हो पाएगा जब हम मेट्रो को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के साथ जोड़ेंगे. चाहे वह व्‍यवस्‍था बस की हो, चाहे वह व्‍यवस्‍था टेक्‍सीज़ की हो, चाहे ऑटो रिक्‍शा भी हो. हम बात करें अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर की तो सरकार के द्वारा एक कॉमन कार्ड दिया जाता है. उस कॉमन कार्ड के माध्‍यम से कोई भी यात्री चाहे वह मेट्रो हो, चाहे वह बस हो, चाहे वह टेक्‍सी हो, ऑटो भी हो उसका उपयोग कर सकता है. अभी हमारे पास समय है. अभी शायद जो मेट्रो का पूरा काम है उसको पूर्ण होने में कम से कम तीन से चार साल और लगेंगे. इसीलिए अगर आप अभी से पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मेट्रो के साथ जोड़ने का प्रयास करेंगे तो इसमें हमें काफी सफलता मिल सकती है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं केवल दो, तीन बिंदुओं को रखकर अपनी बात को समाप्‍त करूंगा, लेकिन एक बहुत ही गंभीर विषय मास्‍टर प्‍लान का है. आज पूरा प्रदेश यह बात जानता है कि किसी कारण से वर्ष 2005 के बाद भोपाल, इंदौर मास्‍टर प्‍लान बन नहीं पा रहा है जबकि हमने इसको 7 मार्च 2020 को प्रस्‍तुत भी किया था. भंवरसिंह जी कह रहे हैं कि लगातार विलंब होते जा रहा है इसमें इसी विषय को लेकर सीएजी ने भी इस बार आपत्ति की है कि ऐसा क्‍या कारण है कि सरकार जानबूझकर मास्‍टर प्‍लान प्रस्‍तुत करना नहीं चाह रही है. इसमें एक जो बड़ा कारण सामने आ रहा है कि अगर मास्‍टर प्‍लान प्रस्‍तुत नहीं होगा तो सीधा हर नागरिक को, या हर व्‍यक्ति जो बिजनेस कर रहा है उनको टीएनसीपी के, भोपाल के अधिकारियों के चक्‍कर काटना पड़ेंगे और वहीं यह पूरा लेनदेन का काम होता है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं अंत में एक और विषय पर आना चाहूंगा. जब मैं मंत्री बना था तो मैं बाबूलाल गौर साहब से मिलने के लिए गया था और उन्‍होंने मुझे एक बात कही थी कि अब तुम एक विभाग के मंत्री नहीं हो तुम 400 अलग सरकारों के मंत्री हो. क्‍योंकि आज के समय हम नगरीय विकास मंत्रालय को देखें तो हर नगर पंचायत, हर नगर पालिका, हर नगर निगम एक स्‍वतंत्र संस्‍था होती है उनका अलग बजट बनता है, उनकी अलग आय होती है, उनके अलग व्‍यय होते हैं और वह स्‍वयं अध्‍यक्ष या महापौर और कमिश्‍नर या सीएमओ मिलकर अपना बजट बनाते हैं. इसी के संबंध में अगर हम बात करें तो आज हर नगरीय निकाय कहीं न कहीं जो मांग उस शहर की है वो अपने बजट के अनुसार या जो कर  स्थानीय निकाय को मिल रहे हैं या हम अन्य योजनाओं की बात करें उससे आज भी नगर पालिका या नगर निगम पूरा काम नहीं कर पा रही हैं. लेकिन आज भी हर शहर में अनेक ऐसी कीमती जमीनें हैं जो शहर के बीच में हैं, शहर के आसपास के क्षेत्रों में हैं और वे सब शासकीय जमीनें हैं. अगर माननीय मंत्री जी हर सीएमओ और हर आयुक्त को निर्देश दें कि कौन-कौन सी शासकीय जमीनें हैं जिनको नगर पंचायत, नगर पालिका या नगर निगम नीलाम कर सकते हैं जिससे कि उस परिषद की बेहतर आमदनी होगी और उसके माध्यम से हम और बेहतर काम कर सकते हैं. इस पर विचार होना चाहिए.

          अध्यक्ष महोदय, इसके साथ ही साथ भ्रष्टाचार किस प्रकार से इस विभाग को खतरे में डाल रहा है मैं उसका उदाहरण आपके सामने पेश करना चाहता हूँ. मैंने पिछले हफ्ते ही विधान सभा में एक प्रश्न पूछा था. जिसमें मैंने भोपाल में नगर निगम की जो नई बिल्डिंग बन रही है उसके बारे में पूछा था. इस बिल्डिंग का प्रथम टेंडर 22 करोड़ रुपए का हुआ था. टेंडर उस ठेकेदार को मिलने के बाद यह टेंडर तीन बार रिवाइज हो चुका है. आज वही टेंडर जो 22 करोड़ रुपए का था आज उसमें 72 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं. आप समझ सकते हैं कि एक ठेकेदार को लाभ पहुंचाने का काम किया जा रहा है. ऐसे अनेक काम हैं यह मैंने एक उदाहरण पेश किया है. पहले आप टेंडर निकाल रहे हैं 22 करोड़ रुपए का और धीरे-धीरे उसमें आइटम जोड़कर उसी ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए आप उसे तीन गुना कर रहे हैं. इसी कारण से सरकार राशि का सही सदुपयोग नहीं कर पा रही है. क्योंकि कहीं-न-कहीं ऐसे अलग-अलग ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. यही स्थिति जो भी 400 शहर हैं वहां पर जो पाइपलाइन का काम हो रहा है वहां भी है. मैंने यह प्रश्न पूछा था और इसमें मुझे जानकारी मिली है कि जहां नल-जल योजनाओं के लिए जो काम प्रगतिरत हैं उसमें 522 करोड़ रुपए में से केवल 270 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं. बाकी पैसा सरकार खर्च ही नहीं कर पाई है. क्योंकि ठेकेदार की जो मॉनिटरिंग होना चाहिए सरकार वो नहीं कर पा रही है. ठेकेदार सही क्वालिटी का काम नहीं कर रहा है. आज यदि कोई परेशान हो रहा है, त्रस्त हो रहा है, कोई पीड़ित है तो वह हमारे प्रदेश का नागरिक है.

          अध्यक्ष महोदय, मैं चाहता हूँ कि इन बिंदुओं पर माननीय मंत्री महोदय विस्तार से हमको संबोधित करें और इसमें जो अच्छे सुझाव हैं उनको आने वाले बजट में शामिल करें. बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री शैलेन्द्र कुमार जैन (सागर) -- अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ. जो फ्लाईएश का इस्तेमाल भवनों के निर्माण में हो रहा है. गवर्मेंट ऑफ इंडिया ने भी फ्लाईएश को रिकमंड किया है. इससे जो परम्परागत रुप से ईंटे बनाने का धंधा है वो प्रभावित हुआ है. उसमें एक बड़ी दिक्कत यह है कि एक-डेढ़ साल बाद पूरी की पूरी दीवारें फट रही हैं. सागर में आधा दर्जन भवन ऐसे हैं जिनका ठेकेदार को पेमेंट हो गया है और दीवारें फट गई हैं. इनकी रिपेयरिंग अपने आप में एक बहुत बड़ा इश्यू है.

          श्री अनिल जैन (अनुपस्थित)

        अध्यक्ष महोदय -- अब पहले वक्ता दोनों दलों की ओर से हो गए हैं बाकी सभी सदस्य 5 से 7 मिनट के बीच में अपनी बात रखें.

        श्री उमाकांत शर्मा (सिरोंज) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद. माननीय जयवर्द्धन जी ने 21 मिनट बोला वो 3 बजकर 36 मिनट पर शुरु हो गये थे. मैं आपको बहुत बहुत धन्यवाद देता हूँ. संसदीय मंत्री महोदय को बहुत बहुत धन्यवाद कि मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया गया.

          अध्यक्ष महोदय,  मैं मांग संख्या 22 एवं 28 का समर्थन करता हूँ और बगैर सोचे-समझे जो कटौती प्रस्ताव जल्दी-जल्दी एक रुपये की कटौती की जावे, एक रुपये की कटौती की जावे, कांग्रेस ने बगैर तैयारी के प्रेषित किये उसका मैं विरोध करता हूं. सपनों की छत खुला आसमान ही मेरी छत है, कठोर जमीन ही मेरा बिछौना है, न कोई किवाड़ है न कोई मुंडेर, बस परिवार की यादों का एक छोटा सा कोना है. दिन ढला तो डर सा लगता है, कहीं सड़क का शोर कहीं जंगल की शांति यही अपना लगता है. महल वालों, किले वालों को क्‍या मालूम साहब, महल वालों, किले वालों को क्‍या मालूम साहब हमें तो तिरपाल भी सपना लगता है. भूख की आग में नींद कहां आती है, आ‍धी रात को ओस बदन भिगा जाती है, गरीबी ने छीन ली पहचान मेरी, अब बस फुटपाथ, टूटी झोपड़ी में धूल ही मेरे पास आती है. हमारे यहां आशीष जी बहुत अच्‍छा उद्बोधन मार्गदर्शन दे गए हैं. मैं निवेदन करना चाहता हूं हमारी परम्‍परा में नगर क्‍या हैं, कैसे होना चाहिए, कहां रहना चाहिए. कहा गया है कि-

धनिकः श्रोत्रियो राजा नदी वैद्यस्तु पञ्चमः

पञ्च यत्र विद्यन्ते तत्र दिवसं वसेत्.  

 

4.03 बजे     {सभापति महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए.}

        सभापति महोदय, धनिक माने व्‍यापारी. आप देख लेना महानगरों में, नगरों में और ग्रामों में यह होते हैं. व्‍यापारी, ज्ञानी, राजा, नदी अर्थात पानी और डॉक्‍टर अर्थात् वैद्य न हो तो उस जगह एक दिन भी नहीं रुकना चाहिए. इसलिए आपने किला बहुत सोच समझकर बनाया है. यही नहीं इसके अलावा कैलाश जी इस चीज को बहुत अच्‍छे से जानते हैं, समझते हैं, पहचानते हैं, आजमाते हैं. 

यस्मिन् देशे सम्मानो वृत्तिर्न बान्धवाः

विद्यागमोऽप्यस्ति वासस्तत्र कारयेत्

 

सभापति महोदय, अर्थात् जिस नगर में सम्‍मान नहीं, जिस गांव में सम्‍मान नहीं, जिस शहर में सम्‍मान नहीं, पेट की भूख, परिवार की भूख शांत करने के लिए वृत्ति नहीं, व्‍यापार नहीं, आजीविका नहीं, मजदूरी नहीं और कोई बंधु बांधव नहीं और न विद्या प्राप्‍त करने का साधन हो, उस शहर और ग्राम में नहीं रहना चाहिए. मैं कटौती पर ही बोल रहा हूं. केवल बजट के अंतर्गत विचार प्रस्‍तुत करने की स्‍वतंत्रता होनी चाहिए. केवल बजट के बिन्‍दुओं को ध्‍यान में रखकर नहीं, बजट भी प्राचीन रीति और नीति को ध्‍यान में रखकर बनाया जाता है.

          सभापति महोदय -- पंडित जी, मिसाइल इधर दागिये आप कहां उल्‍टा दाग रहे हैं.

          श्री उमाकांत शर्मा --सभापति महोदय, अब हमसे ही कह रहे हैं कि बजट पर बोलो. माननीय सभापति महोदय, यह जो मैंने पंक्ति कही थी शैलेन्द्र भाई साहब बरसती बरसात में शीतल हिमालय से आती हुई हवाओं के कारण  तपती गर्मी में जब कोई गरीब और मजदूर अपनी झोपड़ी में सर नहीं छुपा पाता था, छोने की टपरिया, घास की टपरिया और उसमें रहने वाला गरीब मजदूर आदमी था उस समय कहां थी जवाहर लाल नेहरू जी की योजना, गांव, गरीब , किसान के लिये मजदूर के लिये अगर बजट की बात करते हैं तो प्रथम प्रधान मंत्री आवास योजना (शहरी) 95 प्रतिशत सफल हुई है उसके लिये मैं हमारे नगरीय विकास और आवास मंत्री जी को हृदय से धन्यवाद देता हूं.

          माननीय सभापति महोदय, मेरे ही शहर में आकर के देख लीजिये, बाबा साहब आप लटेरी में बहुत आते हैं, सिंरोंज बहुत आते हैं आप हमें ज्ञान दे रहे थे, आप भी नगरीय निकाय विभाग के मंत्री रहे हैं तब आधार भूत संरचनाओं के साढ़े तीन करोड़ नालों के पैसे भी आप वापस ले गये थे सिंरोज से..कमलनाथ जी की सरकार में पता कर लेना यह बात रिकार्डेड है, नगरीय निकायों से पैसे वापस लाये गये थे.

          श्री जयवर्द्धन सिंह -- माननीय सभापति महोदय, यह बिल्कुल भ्रमित कर रहे हैं सदन को, ऐसा कभी नहीं हुआ है.

          श्री उमाकांत शर्मा- सिंरोंज में शनिश्चरा नाला, थाईनाला..

          श्री जयवर्द्धन सिंह- उमाकांत जी, प्लीज 2 मिनिट. मैं अपनी बात कह लूं.सभापति महोदय, इसमें मैंने स्वयं कहा था कि प्रधान मंत्री आवास योजना के अंतर्गत ..

          श्री उमाकांत शर्मा- मैं प्रधान मंत्री आवास योजना की बात नहीं कर रहा हूं, मैं आधारभूत संरचना की बात कर रहा हूं.

          श्री जयवर्द्धन सिंह -- उमाकांत जी, आपने उससे पहले कहा था .उस पर सीधी बात यह है कि उसमें काम तो हुआ है लेकिन जो पिछले साल से नये नियम आये हैं उसमें रजिष्ट्री अनिवार्य कर दी गई है तो आप स्वयं पता कर लो कि कितने निर्धन परिवार हैं सिंरोज में जिनके पास मे रजिष्ट्री है.

          श्री उमाकांत शर्मा- विषय अलग जा रहा है. मेरे विषय पर नहीं बोल रहे हैं आप. अच्छा इसके अलावा..

          श्री शैलेन्द्र कुमार जैन-- सभापति महोदय, माननीय जयवर्द्धन सिंह जी बात कर रहे हैं यह बहुत सही है, इसमें  डाक्यूमेंट के अभाव में, रजिष्ट्री के अभाव में नहीं हो पा रहे हैं.

          श्री उमाकांत शर्मा -- शैलेन्द्र जी बड़ी मुश्किल से नंबर मिला है बोलने का, बोलने नहीं देते हैं.

          श्री शैलेन्द्र कुमार जैन-- उसके कारण से संख्या बहुत कम हो पा रही है, बहुत बड़ी संख्या है.

          श्री उमाकांत शर्मा -- वैसे भी हमारी आसंदी पर जो बैठे हैं हमारे माननीय वरिष्ठतम महोदय कह देते हैं कि सत्यनारायण की कथा बांच दो, बांच रहे हैं. सभापति महोदय, मैं इस अवसर पर यह भी कहना चाहता हूं कि मैं एक गरीब शिक्षक का बेटा हूं, 1987 से धोती कुर्ता पहनी है, क्या पंडित होना पाप हो गया, और अब तो लोग पंडित भी नहीं पंडत बोलते हैं. तो जयवर्द्धन जी जरा इसका विरोध करो न. और...

          सभापति महोदय-- कृपया बजट पर आ जायें.

          श्री जयवर्द्धन सिंह- सभापति महोदय, मैं पंडित जी को अर्ज करूंगा एक नियम आया है कुछ साल पहले कि जो भी जमीनें मंदिर के अधीन हैं उनको सरकार छीन रही है और मैंने आपके पक्ष में ही विधानसभा का प्रश्न लगाया है.

          सभापति महोदय- यह तो स्पष्ट है कि पंडित जी का सबसे ज्यादा स्नेह आपके ऊपर है.

          श्री उमाकांत शर्मा -- माननीय सभापति महोदय, मध्यप्रदेश को , हमारे माननीय मुख्यमंत्री महोदय को, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय को, मध्यप्रदेश की सरकार को अग्रणी राज्यों में प्रधान मंत्री आवास में सफलता प्राप्त करने के लिये 13 अवार्ड प्राप्त हुये हैं, 13

          सभापति महोदय- उमाकांत जी आप समाप्त करें 11 मिनट हो गये हैं आपको बोलते हुये.

          श्री उमाकांत शर्मा -- सभापति महोदय, प्रधान मंत्री आवास योजना 2.0 यह योजना 17 सितम्बर, 2024 से प्रारंभ हो गई.

          सभापति महोदय- उमाकांत जी, जरा ईधर भी सुन लीजिये. कृपया समाप्त करें.

          श्री उमाकांत शर्मा- आज तो बहुत कम लोग हैं साहब दिल से बोल लेने दीजिये.

          सभापति महोदय- उमाकांत जी अध्यक्ष जी, कह गये हैं उसी के अनुसार में आपको कह रहा हूं. वैसे आपको 10 से 11 मिनट बोलते हुये हो गये हैं.

          श्री उमाकांत शर्मा- प्रधान मंत्री आवास कुल स्वीकृत 9.46 लाख पूर्ण 8.43 लाख, इसके लिये , ऐसे अच्छे बजट के लिये मैं, माननीय नगरीय विकास और आवास मंत्री जी, वित्त मंत्री जी को और मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देता हूं. द्वितीय चरण  आवास जानकारी लक्ष्य  10 लाख, प्रारम्भ 55 हजार.  आप कह रहे हैं कि स्वीकृत नहीं हो रहे हैं.  कैसे स्वीकृत नहीं हो रहे हैं.  यह 55  हजार का चैलेंज दे रहा हूं.मना करके दिखाओ. वित्तीय वर्ष 2026-27 के  लिये  प्रधानमंत्री  आवास योजना  शहरी..

          सभापति महोदयअब आप समाप्त करें, आपको 11 मिनट हो गये हैं. कुछ आंकड़े मंत्री जी के लिये भी छोड़ दें,

          श्री उमाकांत शर्मा--  सभापति  महोदय,  अगर हमें विषय पर बोलने का इतना भी  समय नहीं देंगे..

            सभापति महोदय नहीं माननीय, मैं यह कह रहा हूं कि कुछ आंकड़े छोड़ दो मंत्री जी को  बताने के लिये.

            श्री उमाकांत शर्मासभापति महोदय, अभी आप कह रहे थे कि बजट पर बोलें.  अब बजट के आंकड़े दे रहा हूं, तो मना कर रहे हैं.

            सभापति महोदय आप समाप्त करें, आपको 11-12 मिनट हो गये हैं.

            श्री उमाकांत शर्मासभापति महोदय, इसके अतिरिक्त मैं इन्दौर के संबंध में कहना चाहता हूं कि जयवर्द्धन सिंह जी मैं आपको सैल्यूट करता हूं.  आपने हमारे स्वच्छ शहर   भारत के प्रधानमंत्री,  नरेन्द्र मोदी जी ने जब से स्वच्छता मिशन और  शहरों  की स्वच्छता का परीक्षण कराया,  इन्दौर लगातार  प्रथम रहा, भोपाल द्वितीय रहा. यह हमारे  म.प्र. की भाजपा   की सरकार की सफलता है और आप भी नरेन्द्र मोदी  जी के, गांधी जी के सपनों की स्वच्छता  मिशन को स्वीकार कर रहे हैं, मैं धन्यवाद  देता  हूं.

            सभापति महोदय आप समाप्त करें. आपने धन्यवाद दे दिया है.  बैठ जायें ना.

            श्री उमाकांत शर्मासभापति महोदय, इन्दौर पर थोड़ा तो बोलने दें.

            सभापति महोदय नहीं, अब आप समाप्त करें,  आपको 13 मिनट हो रहे हैं.  अध्यक्ष जी नाराज होंगे, वह कह गये हैं  कि यहां पर किसको कितना बोलना है.  आपको तो ज्यादा समय दे दिया मैंने.

            श्री उमाकांत शर्मासभापति महोदय, इनको आपने 21 मिनट दिये.     

            सभापति महोदय वह पार्टी के प्रथम वक्ता थे इस वजह से.

            श्री उमाकांत शर्मासभापति महोदय, इसके अतिरिक्त  स्वच्छता सर्वेक्षण इन्दौर प्रथम, द्वितीय स्थान पर   भोपाल आये. उसकी  प्रशंसा करता हूं.  अधोसंरचना केंद्र सरकार   एवं म.प्र. सरकार  द्वारा  पर्याप्त बजट प्रति निकाय दिया गया है, उसकी प्रशंसा करता हूं. मेरे शहर लटेरी में  जनता परिवर्तन महसूस कर रही है.

            सभापति महोदय कृपया समाप्त करें. श्री आतिफ आरिफ अकील.  नहीं है.  श्री राजेश कुमार वर्मा जी.

            श्री उमाकांत शर्मासभापति महोदय, साथ ही मेरी कुछ मांगें हैं. मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं.  मेरे 4 सुझाव हैं,  उनको सुन लें, फिर मैं समाप्त करता हूं.  नगर ओलम्पिक का कार्यक्रम,  नगरों में  इन्दौर,  भोपाल,  जबलपुर, ग्वालियर, बाम्बे, दिल्ली, यह सब खेलों के  केंद्र हैं,  लेकिन छोटे शहरों से खिलाड़ियों को  निकाल नहीं  पा रहे हैं. इसलिये एक नगर ओलम्पिक  का कार्यक्रम प्रत्येक निकाय में हो.  ऐसे ही   खेल एवं नगरीय विकास विभाग  का  आपस में कुछ  समन्वय  बनाया जाये. स्टेडियम बन गये,  लेकिन  कुछ सूने पड़े हैं. चौकीदार नहीं, बिजली नहीं,  पानी नहीं.  डेढ़ करोड़ लग चुका अभी तक,  इसलिये  नगरीय निकाय  और खेल विभाग का आपस  में  समन्वय बनाया जाये.

            सभापति महोदय आप कृपया समाप्त करें.

            श्री उमाकांत शर्मासभापति महोदय, एक और निवेदन है, सुझाव है. नगरीय पुरातात्विक  स्थल पुरातत्व विभाग ने जो अंकित किया है, उनकी सूची बनाकर चिह्नित करके  नगरीय पुरातत्व  स्थल  घोषित किये जायें. (xxx)

          सभापति महोदयअब आपका भाषण कार्यवाही में नहीं आ रहा है. यह कार्यवाही में नहीं आ रहा है. राजेश जी,आप शुरु करें.

          श्री राजेश कुमार वर्मा (गुन्नौर)--   सभापति महोदय, नगरीय  विकास एवं आवास  अनुदान मांग संख्या 22 के समर्थन  में मैं खड़ा हुआ हूं  और मैं इसका समर्थन करता हूं.  प्रधानमंत्री आवास योजना  शहर की प्रथम चरण  का  शुभारम्भ देश के  यशस्वी  प्रधानमंत्री, विश्व  के  सबसे लोकप्रिय नेता, नरेन्द्र मोदी   जी द्वारा  25 जून, 2015 को किया गया था.  प्रदेश में  9.46 लाख  आवास स्वीकृत हुए हैं तथा  8.83 लाख आवास  बनकर तैयार हो  चुके हैं.  ऐसे परिवार जो पक्के   घरों का सपना  देखते थे, उनकी  उम्मीदों का घर प्रधानमंत्री  जी  ने  इस योजना के तहत बनाया है.   हमें याद है कि  आज आसंदी पर अभी   विधान सभा अध्यक्ष जी नहीं हैं,  लेकिन  उनके नेतृत्व में जब हम युवा  मोर्चा  में काम किया करते थे, तो  उस समय के जो सांसद  और विधायक हुआ करते थे. उस समय कांग्रेस की सरकारें हुआ करती थीं. हम लोग उस समय क्षेत्र में जाया करते थे तो आवेदन मिला करते थे. लेकिन उस समय शहरी क्षेत्र में आवास नहीं हुआ करते थे. उस समय ग्रामीण क्षेत्रों में आवास हुआ करते थे. जब गांव से वह गरीब आदमी आवेदन लेकर विधायक और मा. सांसदों के पास आवेदन पहुंचाते थे तो माननीय सांसद और विधायक बड़े असहज से लगा करते थे. माननीय उस समय 3 प्रतिशत का कोटा होता था, जिसमें मा. सांसदों और विधायकों के पत्र समाहित किये जाते थे. 3 प्रतिशत में भी इतने ज्‍यादा आया करते थे तो शायद पूरे विधान सभा क्षेत्र में दो या तीन, ऐसे आवेदन होते थे जो उसमें समाहित कर लिये जाते थे. उस समय की स्थिति यह हुआ करती थी कि ग्रामीण क्षेत्रों में तीस से पैंतीस हजार रूपये की राशि उस समय कांग्रेस की एक योजना थी, कुटीर के नाम से. उस कुटीर की योजना वहां से स्‍वीकृत होती थी और जब जिला पंचायत से लेकर गांव तक पहुंचती थी तो उसमें बहुत सारे हाथ लगा करते थे. हाथ लगते-लगते जब गांव तक हितग्राही तक राशि पहुंचती थी तो राशि बहुत कम हो जाती थी. गांव का व्‍यक्ति जब इटें गिरवाता था और मकान की कल्‍पना करता था तो छत तो ठीक है, छ: फुट की दीवार बन पाती थी और जब राशि खत्‍म हो जाती थी तो उसके ऊपर कांस डालकर उसमें गरीब व्‍यक्ति रहा करता था.

          माननीय सभापति महोदय, उस समय ऐसी स्थितियां निर्मित होती थीं. केरल बड़ा प्रांत है और मध्‍यप्रदेश बड़ा प्रांत है, लेकिन जब उस समय कांग्रेस की सरकार वहां हुआ करती थी तो उस समय हुआ करता था कि मध्‍यप्रदेश के साथ भेदभाव हुआ करता था. मध्‍यप्रदेश सबसे बड़ा प्रांत था, लेकिन उस समय जो कुटीर आते थे तो उनकी संख्‍या बड़ी कम रहती थी. आज तो यह स्थिति है कि नगरीय क्षेत्र में जिस पद को मध्‍यप्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री सुशोभित कर रहे हैं, सम्‍माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी. उनके नेतृत्‍व में जब हम लोग नगरों, शहरों के अंदर जाते हैं तो एक नहीं, अनेक-अनेक आवासों की लाईन से कॉलोनी खड़ी है और वह गरीब व्‍यक्ति जो दूसरों के घर तो बनाता था, दूसरे के महल तो बताना था, लेकिन कभी यह कल्‍पना नहीं करता था कि उसका कभी घर भी होगा. उसका सपना अगर किसी ने साकार किया तो मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री, विभागीय मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय हम सबके नेता सम्‍माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी के नेतृत्‍व में आप पूरे भारत के अंदर आवास बनकर खड़े हो रहे हैं वह मील का पत्‍थर साबित हो रहे हैं.

          माननीय सभापति महोदय, प्रधान मंत्री आवास शहरी के अंदर उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन के लिये देश में मध्‍यप्रदेश को दूसरा स्‍थान प्राप्‍त हुआ. इसमें कई नवाचार भी हुए. भूमिहीन हितग्राहियों को आवास बनाने के लिये, भूमि पट्टा उपलब्‍ध भी कराया गया. इसके अतिरिक्‍त मुख्‍यमंत्री भवन एवं सनिर्माण कर्मकार आवास, नगरीय योजनांतर्गत निर्माण श्रमिकों को एक लाख रूपये की अतिरिक्‍त राशि का अनुदान उपलब्‍ध कराया जा रहा है. आर्थिक रूप से कमजोर हितग्राहियों को आवास हेतु रजिस्‍ट्री में शत-प्रतिशत छूट का प्रावधान रखा गया है. प्रधान मंत्री आवास योजना शहर के प्रथम चरण में किसी कारणवश लाभ से वंचित रह गये तो हितग्राहियों को आवास उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से 17 सितम्‍बर, 2025 को प्रधान मंत्री आवास योजना में शहर  2.0 प्राप्‍त की गयी, जिसके अंतर्गत देश में एक करोड़ आवासों का निर्माण प्रस्‍तावित किया गया. तथा प्रदेश में आगामी पांच वर्षों में 10 लाख आवासों के निमार्ण का लक्ष्‍य रखा गया है.

          माननीय सभापति महोदय, आज भी हम लोग जब नीचे जाते हैं, नीचे की स्थितियां जब देखते हैं तो एक निवेदन इसमें माननीय मंत्री जी से जरूर है कि इसमें जो कागज मांग रहे हैं, इसमें कुछ गरीब व्‍यक्ति आज भी हमारे क्षेत्र में रह गये हैं. आज उनके पास में यह स्थिति है कि जमीन नहीं है, वह बेचारे रजिस्‍ट्री कहां से लायें तो सरकार में तो इतना किया, इतना किया कि कभी किसी ने कल्‍पना भी नहीं की थी. मैं मंत्री जी से और मुख्‍यमंत्री जी से आग्रह जरूर करता हूं कि ऐसा भी इसमें कुछ समाहित किया जाये कि जो कुछ दीन दुखी रह गये हैं उनके भी आवास हमारे क्षेत्र में बन जाये.

          सभापति महोदय, इस प्रकार अमृत-2 के अंतर्गत कुल 1136 परियोजना स्‍वीकृत है, जिसकी लागत लगभग 11हजार 778 करोड़ रूपये है. मुख्‍यमंत्री नगरीय क्षेत्र अधोसंरचना निर्माण योजना का विस्‍तार करते हुए 1 हजार 112 परियोजना के लिये राशि 490.80 करोड़ रूपये की स्‍वीकृत की गयी है.

          माननीय सभापति महोदय, शहरों की स्थितियां उस समय यह हुआ करती थी, जब हम लोग युवा थे कि हैंडपंप के सामने लंबी कतारें लगा करती थी, इतनी लं‍बी कतारें हुआ करती थी कि जब हमारी माताएं-बहनें जब पानी भरने जाती थीं और हैंडपंप चलाती थीं तो हाथ दुखने लगते थे.

तथा विभिन्‍न विभागों की सिंहस्‍थ मद कार्ययोजना की समीक्षा हेतु मुख्‍य सचिव, मध्‍यप्रदेश शासन  की अध्‍यक्षता में पर्यवेक्षण समिति का गठन किया गया है. सिंहस्‍थ वर्ष 2028 के कार्यों की समीक्षा, कार्योत्‍तर स्‍वीकृति, अतिरिक्‍त राशि आवंटन के प्रस्‍ताव पर निर्णय हेतु मंत्रिमंडल समिति का गठन किया गया है.

          माननीय सभापति महोदय, आज दिनांक तक मंत्रिमंडलीय समिति की 4 एवं पर्यवेक्षक समिति की 7 बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं. मंत्रिमंडलीय समिति की 4 बैठकों में 10 विभागों के कुल 128 कार्य स्‍वीकृत किए गए हैं, जिनकी कुल स्‍वीकृति 13,891.37 करोड़ है, जिसमें से सिंहस्‍थ मद में राशि 5355.2 करोड़ एवं विभागीय अन्‍य मद में राशि रूपए 8496.35 करोड़ स्‍वीकृत है. मंत्रिपरिषद् से कुल स्‍वीकृत कार्यों में से 102 कार्य प्रगतिरत हैं. 14 निविदाएं प्रक्रियाधीन हैं एवं 12 कार्य प्रशासनिक स्‍वीकृति में प्रक्रियाधीन हैं.

          सभापति महोदय, हमारी सरकार ने सिंहस्‍थ वर्ष 2028 के सफल एवं सुव्‍यस्‍थित आयोजन की दृष्‍टि से विभिन्‍न अधोसंरचनात्‍मक कार्य प्रचलित किए हैं, जिसके अंतर्गत मास्‍टर प्‍लॉन अनुसार सड़क निर्माण, मुख्‍य मार्गों के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण सहित नवीन मार्गों का निर्माण किया जा रहा है.

          सभापति महोदय, क्षिप्रा नदी के तट पर लगभग 29 किलोमीटर की लंबाई में नये घाटों का निर्माण तथा विद्यमान घाटों का उन्‍नयन एवं सौंदर्यीकरण कराया जा रहा है. साथ ही नवीन पुलों का एवं हरी फाटक पुल के चौड़ीकरण का कार्य भी किया जा रहा है तथा ओंकारेश्‍वर स्‍थित वर्तमान झूला पुल के समानांतर एक नये पुल का निर्माण और मुख्‍य मंदिर के विकास कार्य पुराने पुल से मंदिर के रास्‍ते समानांतर एक अतिरिक्‍त पुल और नया प्रतिक्षालय का निर्माण भी हमारी सरकार के माध्‍यम से किया जा रहा है.

          सभापति महोदय, हमारी सरकार के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी, हमारी सरकार के यशस्‍वी मंत्री माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी के मार्गदर्शन में स्‍वच्‍छ जल अभियान 10 जनवरी 2026 से प्रारम्‍भ किया गया. हमारे विभाग के द्वारा निकाय क्षेत्र के सभी वार्डों में समस्‍त शासकीय एवं अशासकीय संस्‍थाएं आंगनवाड़ी, विद्यालय, महाविद्यालय, सामूहिक भवन और घर-घर जाकर जल की गुणवत्‍ता की जांच की जा रही है.

          सभापति महोदय, इसमें स्‍वास्‍थ्‍य विभाग, लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग, महिला बाल विकास विभाग, मान्‍यता प्राप्‍त प्रयोगशालाएं, स्‍कूल शिक्षा विभाग एवं उच्‍च शिक्षा विभाग की सहभागिता है. पानी की टंकी की साफ-सफाई की जीओआई टैगिंग, मैपिंग और जल प्रदाय की गुणवत्‍ता सेंपल की जीओआई मैपिंग हमारी सरकार कर रही है.

          सभापति महोदय, मैं इस सदन के माध्‍यम से बताना चाहती हॅूं कि एक समय वह था, जब वर्ष 1999 में कांग्रेस की सरकार थी और मैं खुद नगरपालिका की अध्‍यक्ष थी. उस समय वेतन के लाले पड़ते थे. नगरपालिका कंगाली की स्‍थिति में थी और साथ ही ओवरड्रॉफ्ट की स्‍थिति बनी रहती थी. लेकिन हमारी सरकार ने पूरे शहरों में सीमेंट-क्रांकीट का जाल बिछाया. साथ ही तालाबों को अतिक्रमण मुक्‍त करके तालाबों का सौंदर्यीकरण किया. स्‍ट्रीट लाइट्स के माध्‍यम से शहर को सुसज्‍जित बनाने का प्रयास किया. हमारी सरकार ने शहर के मुख्‍य मार्गों का चौड़ीकरण करके शहर के आवागमन को सुलभ बनाया है. 

          सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हॅूं कि मुख्‍य मार्गों को अतिक्रमण मुक्‍त कर शहर में चौपाटियां स्‍थापित की जाएं, ताकि शहर में हाथ ठेलों की आवाजाही के कारण मार्गों से जाने वाले राहगीरों को परेशानी का सामना न करना पड़े. इन्‍हीं शब्‍दों के साथ मैं अपनी बात समाप्‍त करती हॅूं. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय -- धन्‍यवाद. श्री लखन घनघोरिया जी.

श्री लखन घनघोरिया (जबलपुर पूर्व)सभापति महोदय, मांग संख्या 22 एवं 28 के विरोध में एवं कटोती प्रस्ताव के समर्थन में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. शहरी क्षेत्र के लिये सबसे महत्वपूर्ण विभाग होता है. बुनियादी सुविधाएं आम जन-मानस की जो होती हैं वह सीधे सीधे विभाग से जुड़ी होती हैं. बजट माननीय मंत्री जी ने मांगा है लगभग 21 हजार करोड़ का, जिस प्रकार के हालात बुनियादी सुविधाओं को लेकर पूरे प्रदेश के हैं. मेरा मानना है कि यह काफी नहीं है. एक तो 21 हजार करोड़ बजट, दूसरा उसमें भी 40 प्रतिशत बजट सिंहस्थ के लिये 40 प्रतिशत कटने के बाद आपके पास कितना रहेगा नहीं मालूम एक अच्छा कांसेप्ट एक अच्छी अवधारणा रही होगी शहरी विकास के सौन्द्रयीकरण की स्मार्ट सिटी की, नये शहर बसाने की अवधारण सरकार की रही होगी. मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि

          यह नये शहर खूब बसाये तुमने,

          क्यों हुए पुराने वीरान देख तो लो,

सभापति महोदय, बुनियादी सुविधाएं पुराने शहरों की बंद कर दीं. कालोनी सेल का पैसा हो तो नयी बसाहटों में जायेगा, स्मार्ट सिटी बनेगी तो नई बसाहट में बनेगी. अधोसंरचना का पैसा पूरा वहां जायेगा. पुराने शहरों की हर जगह स्थिति क्या है ? जल वितरण प्रणाली आपकी कितनी दूषित है ?  मैं दोषारोपण में नहीं जाना चाहता हूं, लेकिन एक आईना भागीरथपुरा की घटना ने तो दिखाया है. हम एसटीपी प्लांट खूब लगा लेते हैं, फिल्टर प्लांट खूब होते हैं, वहां तक तो ठीक, लेकिन जब हमारी सप्लाई लाईन अथवा राईजनिंग लाईन निकलती है तो हर शहरों में जहां नाले-नालियां हों उनके अंदर से निकलती हैं. होता क्या है अभी कैलाश भईया बता रहे थे कि भागीरथपुर से सिर्फ 22 मौतें हुईं. डायरिया किस बेक्टेरिया से आता है माननीय कैलाश भईया. हमारे जबलपुर का जो एस.टू.एस किट से सर्वे किया है. ईकोलाई अथवा कोलीफार्म नामक बैक्टीरिया सब में पाया गया है. इससे फेक्ट है कि इससे डायरिया होता है. यह हार्ट पर जब चोट करती है, यह किडनी पर जब चोट करती है, इसके फेक्ट हैं. यह पुष्टि होती है ईकोलाई और कोलीफार्म नामक बैक्टीरिया थे, यह पुष्टि होती है आपकी सारी पीएम रिपोर्ट में आप कुछ भी लिख लो. लेकिन कारण क्या है पानी तो है ना कारण ? यह कमोवेश सब जगह पर है, यह जबलपुर में भी देखे, जबलपुर का हमने आपको उस दिन बताया था कि एस.टू.एस बहुत सरल है इसका तरीका एस.टू.एस की यह वॉटर किट यदि इसमें पानी जिसको टेस्ट करना हो तो इसको भरकर आप धूप में रख दें.

4.34 बजे       {सभापति महोदय (डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय) पीठासीन हुए}

माननीय सभापति महोदय, दूसरे दिन आप देखें तो अगर पानी सही होगा तो उस समय पानी का कलर सफेद ही रहेगा. लेकिन यदि दूषित होगा ईकोलाई, कोलीफार्म बैक्टीरिया होगा तो फिर पानी ऐसा हो जाता है. (सदन में श्री लखन घनघोरिया जी द्वारा वॉटर किट दिखाई गई) लेकिन यदि दूषित होगा, ई-कोलाई या कोलीफार्म बैक्‍टीरिया होगा तो फिर पानी ऐसा हो जाता है. (सभापति महोदय को बॉटल दिखाते हुए, जिसमें काले/नीले रंग जैसा पानी था) हमने 13 वार्ड का आपको पूरा दिखाया, जिसमें हमारे यहां महापौर का वार्ड नरसिंह वार्ड, हमारे मंत्री जी का वार्ड, विधान सभा, हमारा तो स्‍वाभाविक है, क्‍योंकि घनी बस्‍ती में है, हमारे यहां तो होगा ही, चाहे उत्‍तर विधान सभा हो, सारी विधान सभा में ये उसकी सूची यदि आप पढ़े तो नरसिंह वार्ड, त्रिपुरी वार्ड, हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी, हाथीताल, प्रेमगंज वार्ड, कमला नेहरू वार्ड, मदर टेरेसा नगर, जय प्रकाश वार्ड, श्‍यामाप्रसाद मुखर्जी वार्ड, लाल माटी वार्ड, तिलक वार्ड, छोटी ओमती ये सभी की डिटेल है, उस दिन भी हमने बाटलें दिखाई थीं, अभी भी आप कहे तो आपके पास पहुंचा देंगे. आप उसका टेस्‍ट करवा लें, अमृत-2 बड़ी अच्‍छी योजना है. इसी सदन में आपने पिछले साल मेरे ध्‍यानाकर्षण में आपने बताया था, व्‍यवस्‍था दी थी कि आप नर्मदा जयंती के दिन वहां पहुंचेगे. एक दिन पहले आप पहुंचे भी, एसटीपी प्‍लांट से आपने पानी पीया और बताया कि यह बिल्‍कुल साफ है, वहां तो साफ है, लेकिन उसके बाद जो पानी चलता है ,वहां क्‍या होता है. हमारे यहां वाटर सप्‍लाई की स्थिति यह है कि पांच फिल्‍टर प्‍लांट है, जिसमें ललपुर 1 और 2 इसमें लगभग 55 एमएलडी, फिल्‍टर प्‍लांट 1 में 42 एमएलडी सप्‍लाई होता है और रमनगरा 2, रमनगरा 1, इसमें 120, रांझी मे 64, भोंगाद्वार में 27 एमएलडी पानी, कुल मिलाकर बहुत बड़ा एरिया रमनगरा और ललपुर में जाता है, जिसमें 24 टंकी और 26 टंकी भरती है. रमनगरा में पूरे शहर का नर्मदा जल योजना से जोड़ा तो ये स्थिति है, भोंगाद्वार बिलकुल खराब था, प्रदूषित पानी था, एक बंदर फंसा मिला था सफाई में, सदन में वह बात आई थी, सदन ने स्‍वीकार किया कि हां, वहां कैमिस्‍ट नहीं था, चौकीदार लीचिंग पाउडर डाल रहा था, ये अव्‍यवस्‍थाएं तो हैं, उसके बाद इसी सदन में आपका कथन था, वह हो गया. 18 टंकी बनना है, अभी भी नर्मदा माई की गोद में बसा शहर, जबलपुर पानी के संकट से जूझ रहा है. हमारे विद्वान साथियों से अकेले में ये पूछ लेना. 18 टंकी 312 करोड़ की लागत से, अमृत 2 में बननी है, इसी सदन में आपने आश्‍वासन दिया था. हमने समय सीमा मांगी थी, आप बोले हमारे क्षेत्र की चार टंकिया एक साल के अंदर बन जाएगी, चारों में आप काम की गति पूछ लें, निगम के अधिकारी कोई न कोई विवाद स्‍थल को लेकर खड़ा कर देते हैं, अभी भी वह ज्‍यों के त्‍यों पड़े हैं. हमारी विधान सभा एससी, ओबीसी और अल्‍पसंख्‍यक बहुल्‍य है, शहर का सबसे घना एरिया है, सबसे गरीब क्षेत्र हैं, बसाहट भी अलग है. स्थिति यह होती है कि एक तो एससी, एसटी अल्‍पसंख्‍यक, बहुल्‍य विधान सभा दूसरा कांग्रेस का विधायक. मैं पक्षपात का आरोप नहीं लगा रहा लेकिन एक सच्‍चाई है, पहले अधोसंरचना के कामों में विधायकों से पूछा जाता था, निर्माण ऐजेंसी होती है अब नगर  निगम चूंकि आपने जैसे भी किया है, नगर निगम को अपने पाले में कर लिया है, जैसे भी किया हो, स्थिति यह है कि चाहे अधोसंरचना का काम हो, चाहे कॉलोनी सेल के पैसे का मामला हो और चाहे दीगर कोई भी बात हो, जलकर नगर निगम लेती है, विधायक से लेकर सांसद जल स्‍त्रोत तैयार करते हैं, नलकूप खुदवाते हैं. जलकर नगर निगम लेती है, लेकिन पक्षपात पूरा होता है, अब हम यह कहें कि क्‍या यह जानबूझकर होता है,

          ''वह जहर देता, तो सबकी निगाह में आ जाता,

        वह जहर देता, तो सबकी निगाह में आ जाता,

        तो किया यूं कि मुझे वक्‍त पर दवा न दी''

          सभापति महोदय, तो हालात यह हैं. स्‍ट्राम वॉटर ड्रेनेज सिस्‍टम 374 करोड़ रूपये की लागत का, गोमती नाला, मोती नाला, इसके जितने 80 फिट, 100 फिट के नाले थे, उनको 12 x12 का कवर्ड करना था, पता नहीं कैसी योजना आई, बगैर किसी जानकारी के, बगैर कोई सर्वे के वह चालू कर दी गई, 364 करोड़ रूपये का भुगतान हो गया और वर्ष 2011 की वह योजना 50 प्रतिशत नहीं बन पाई, उससे क्‍या हो रहा है कि जो गरीब बस्‍ती है, वह नाले के किनारे बस्‍ती है. हमारे यहां एस.सी. की जो समाज हैं, वह सब नाले के किनारे बसी हैं, आपने 12 x12 का बना दिया, पेटी कांट्रेक्‍ट में बड़े ठेकेदार ने जिसने ठेका लिया, एल.एन.टी कंपनी थी, उसने ठेका पेटी कांट्रेक्‍ट में सौ लोगों को दिया और सब छोड़ छोड़कर भाग गये, कहीं सौ मीटर बना है, कहीं 400 मीटर बना है, बीच का खुला है, अब स्थिति यह होती है कि बारिश का पानी अपने वेग से अपनी गति से आता है, जो आपने बख्‍शा बनाया, तो वह आज भी कचरों से लदा हुआ पड़ा है, उसके अंदर कोई सफाई की व्‍यवस्‍था नहीं है, कई बार इस सदन में हमने बोला, सरकार की स्थिति यह है कि अब 374 करोड़ रूपये का कैसे डिसमेंटल करें, कोई नई योजना भी नहीं है कि उसको सही करें, आधे से ज्‍यादा जबलपुर का शहर जल प्‍लावन में डूबता है, लोगों के घरों में बर्तन भाड़े पानी में तैरते हैं, गरीब आदमी का एक मंजिल घर रहता है, घरों के अंदर पानी भरता है, कई बार मैं इस सदन में बोल चुका हूं.

          सभापति महोदय -- श्री लखन जी अब समय पर्याप्‍त हो गया है, अब समाप्‍त करें.

          श्री लखन घनघोरिया -- सभापति महोदय, बहुत महत्‍वपूर्ण है. कोई ऐसा बजट लायें कि कम से कम हमारे क्षेत्र के लोगों का यह जो नारकीय जीवन का दंश है, वह तो सही हो, आप यदि डिसमेंटल नहीं कर सकते हैं, तो जो निस्‍तार का पानी है, जो बस्तियों के आउटलेट सीधे खुले हैं, कम से कम उनके लिये दोनों तरफ कुछ तो बना दें, कम से कम नारकीय जीवन तो वहां के लोगों का खत्‍म हो और बीच में कई जगह प्रयोग भी हुआ है, जो बहुत अच्‍छी विधानसभा है, उनने नाले के ऊपर रोड भी बना दी है, लेकिन हमारे यहां यह सब नहीं है, कैलाश भईया मेरा आपसे आग्रह है की यह चीजें ऐसी हैं, यदि आप खुद भी चलकर देख लें तो आपको उस बात का एहसास हो जायेगा, जबलपुर में करीब चार माह से लगभग 150 टेंडर नगर निगम के हुए हैं, माननीय सभापति महोदय, 150 टेंडर में कोई भी ठेकेदार टेंडर नहीं डालता है, डाल ही नहीं रहा है, निर्माण के कार्य पूरे ठप्प पड़े हैं, उनसे पूछों क्‍यों नहीं डाल रहे हो, तो सीधे बोलते हैं कि नगर निगम काम तो करवा लेती है, लेकिन पैसे नहीं दे रही है तो यह हालात हैं, आपसे यह आग्रह है कि इंदौर तो ठीक होगा, आपने बहुत अच्‍छा किया होगा, लेकिन कम से कम धरातल में हम देख तो लें, पुराने शहरों को भी देख लें, नये शहर खूब अच्‍छे अपन बसा देते हैं, नई व्‍यवस्‍थाएं दे देते हैं. चुंगी क्षतिपूर्ति का जो पैसा मिलता था नगरीय विकास के लिये कम से कम कर्मचारियों की चाहे नगर पालिका हो नगर निगम हो नगर पंचायत हो कर्मचारियों की पेमेंट से कम से कम वह बरी रहते थे. होता क्या है टेक्स की वसूली में आपने कह दिया कि सारे नगरीय निकाय स्वावलंबी बने आपने तो कह दिया कि पैसा नहीं आप वहीं से खोदो खाओ कितना करेंगे. अधोसंरचना बहुत जरूरी है कम से कम नारे में न रहे यर्थार्थ में रहे वृक्षारोपण की बात करते हैं.वृक्षारोपण में पैसा खाने का तरीका लोगों ने गजब का चुन लिया हमारे यहां स्मार्ट सिटी के नाम पर वृक्षारोपण हो रहा या नहीं लेकिन वृक्षों की तस्वीर दीवारों पर बना देते हैं लेकिन लंबा चौड़ा टेंडर भुगतान होता है वृक्षों की तस्वीर बनाकर तो यह कुछ ऐसी चीजें हैं जो हमें आपको सोचने पर मजबूर कर रही है इन सब चीजों पर आप ध्यना दीजिये आप कम से कम स्टाप वाटर ड्रेनेज सिस्टम आपके पास वह अधिकारी हैं जो जबलपुर की नस नस से वाकिफ हैं आप कभी उनको बुलाकर पूछें तो वह बता देंगे. जो अच्छा करता है उसकी तारीफ होती है. आपके यहां एक ऐसे अधिकारी हैं जिन्होंने नर्मदा माई के ग्वारीघाट में बगैर सरकार के सहयोग के खुद के प्रयासों से नर्मदा घाट ग्वारी घाट को बहुत अच्छा बनाया कम से कम उनसे पूछो उनको बहुत अच्छी भौगोलिक स्थिति का ज्ञान है. एक बार हमारे यहां देख लें स्टाप वाटर ड्रेनेज सिस्टम हो इन्हीं बातों के साथ अपनी बात को समाप्त करता हूं कटौती प्रस्ताव का समर्थन करता हूं धन्यवाद.

          श्री रामनिवास शाह(सिंगरौली) - माननीय सभापति महोदय,आज हम सरकार की मांग संख्या 22,28 नगरीय विकास आवास एवं राज्य विधान मण्डल के समर्थन में चर्चा करने के लिये उपस्थित हूं. सबसे पहले मैं देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री वित्त मंत्री,नगरीय प्रशासन मंत्री जी को बधाई,धन्यवाद ज्ञापित करता हूं कि आपके नेतृत्व में आज हर शहर में नये-नये कार्य प्रस्तावित हैं. हम मेट्रो रेल के बारे में जब बात करते हैं तो सबसे पहले हमारी राजधानी आज की डेट में सुभाष नगर से लेकर एम्स तक का सफर मेट्रो से कर रहे हैं इसके लिये सरकार को धन्यवाद देना चाहेंगे. हम देखते हैं कि इस परियोजना के उद्देश्य से शहर में सस्ती विश्वसनीय,सुरक्षित,संरक्षित,निर्वर्धन परिवहन प्रणाली को निरंतर गुणवत्ता प्रदान करना ताकि दुर्घटना,प्रदूषण यात्रा,समय,ऊर्जा बचत और इसके साथ साथ यात्रा पर जाने वाले लोगों को सुविधा जिस प्रकार से प्राप्त हो रही है यह बहुत ही सराहनीय है. भारत सरकार की परियोजना में 30.11.2018 को 6941 करोड़ रुपये से प्रारंभ हुई परियोजना,दो कारीडोर,दोनों की स्थिति भोपाल और इन्दौर को हम देखते हैं.इसके संचालन   का कार्य 21 दिसम्बर,2000 से भोपाल में प्रारंभ हुआ. वर्ष 2028-2029 में इस परियोजना को पूर्ण करने का लक्ष्‍य है. वहीं हम देख पा रहे हैं कि इंदौर शहर में भी इसी प्रकार से गांधी नगर से सुपर कॉरिडोर तक 5 स्‍टेशन हैं और लगभग 6 किलोमीटर की दूरी में प्रथम चरण में प्रारंभ हो रही है. इसके साथ ही इंदौर में 11 स्‍टेशनों के साथ रेडिशन तक सुपर कॉरिडर 3 से पूर्ण होगा. इन दोनों परियोजनाओं में जो भोपाल की मेट्रो है, इसमें 10,033 करोड़ रुपये के लागत के खर्च हैं. वहीं इंदौर में 12,889 करोड़ रुपये की लागत है. ऐसी परियोजनाओं से जहां व्‍यक्‍ति की आवागमन की सुविधा की जब हम भोपाल के लिए बात करते हैं, तो एम्‍स तक जाने के लिए सुविधा, मरीजों को ले जाने के लिए सुविधा, समय की बचत, ट्रॉफिक की दिक्‍कत जो आती थी, उन समस्‍याओं का निदान हो रहा है. ऐसे बड़े-बड़े प्रोजेक्‍ट्स के माध्‍यम से शहरों को और अच्‍छा शहर बनाने की दिशा की ओर मध्‍यप्रदेश की सरकार और हमारा नगरीय विकास और आवास विभाग आगे जाकर के काम कर रहा है. मैं माननीय मंत्री जी को और माननीय मुख्‍यमंत्री जी को बहुत-बहुत बधाई देना चाहूँगा. धन्‍यवाद ज्ञापित करना चाहूंगा.

          माननीय सभापति महोदय, शहरों में स्‍वच्‍छता को लेकर के हम देखते हैं कि गीला कचरा और सूखा कचरा अलग-अलग प्रकार से संरक्षित करके हम आज के समय में जहां हम इससे विद्युत उत्‍पादन तो कर ही रहे हैं, साथ में हमारे सिंगरौली में खाद भी बनाने का काम कर रहे हैं. जैविक खाद बनाने का काम हो रहा है. जब हम इस ओर ध्‍यान देते हैं तो हमको लगता है कि पहले के समय से आज के समय में जिस प्रकार की स्‍थितियां बनी हुई हैं. पहले नगर निगम में कर्मचारियों के लिए वेतन भी नहीं मिलता था, वहीं वर्ष 2003 के बाद हम लगातार विकास, अधोसरंचनाएं, निर्माण, हर क्षेत्र में आगे जा रहे हैं और ठीक-ठाक से शहरों को बनाने का काम कर रहे हैं. आज हमें आवश्‍यकता है कि...

          सभापति महोदय -- रामनिवास जी, थोड़ा संक्षिप्‍त करें और अपने क्षेत्र की कोई बात हो तो रख दें. थोड़ा अपने क्षेत्र के बारे में बात कर लें. संक्षिप्‍त करें.

          श्री रामनिवास शाह -- सभापति महोदय, पहली बार का विधायक हूँ. प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत भूमि पट्टा उपलब्‍ध कराया गया. यह भी सरकार की उपलब्‍धि बहुत ही सराहनीय है. मुख्‍यमंत्री भवन एवं अन्‍य संनिर्माण कर्मकार आवास योजना में श्रमिकों को एक लाख रुपये का अनुदान मिला. यह भी सराहनीय है. ईडब्‍ल्‍यूएस आर्थिक कमजोर लोगों को रजिस्‍ट्री में स्‍टांप ड्यूटी में छूट मिली. बहुत ही सराहनीय है. प्रधानमंत्री आवास शहरी 2.0 के अंतर्गत राशि 3,316 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्‍तावित है. हम चाहते हैं कि इसी तरह से विकास की गति बनी रहे. एक कहावत है. उस कहावत की थोड़ी सी चर्चा करने के लिए हम आपसे समय चाहेंगे. सिंगरौली में स्‍मार्ट सिटी के साथ-साथ इसी तरह की मेट्रो ट्रेन सुविधा हो, जहां हम कोयले का उत्‍पादन करते हैं. कल हमारे विपक्ष की ओर से बात आ रही थी कि कोयले के लिए पेड़ काटे जा रहे हैं. पुन: हम कहना चाह रहे हैं कि सिंगरौली पूरा क्षेत्र कोयले के उत्‍पादन और उत्‍खनन का क्षेत्र ही है. जहां पर पेड़ काटना नहीं, बिना कोयले की बिजली नहीं है, बिना बिजली के पानी नहीं है. अगर हम अपने प्रदेश की समस्‍या का निदान करते हैं तो कोयला आवश्‍यक है. मैं तो वहां का विधायक हूँ, बल्‍कि जन्‍म ही उस परिवार में हुआ है, जो उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों का है. हमें अच्‍छी व्‍यवस्‍था मिल जाए. मात्र वहां का व्‍यक्‍ति यही चाहता है. केवल उसको चाहिए कि कम्‍पनसेशन राशि, उसका मुआवजा ठीक-ठाक से मिल जाए. समय पर भू आवंटन मिल जाए और उनका विस्‍थापित कार्ड मिल जाए. वह मात्र इतना ही चाहता है. यह समय पर सरकार उपलब्‍ध करा दे. यह हो भी रहा है. इसके लिए सरकार को धन्‍यवाद और पूरे देश को बिजली सिंगरौली से प्राप्‍त होती है. इसलिए भी सिंगरौली के लिए हम आपसे आग्रह करना चाहेंगे जो हमारा सीएसआर और डीएमएफ फण्‍ड है. मध्‍यप्रदेश सरकार के पास है. उसके माध्‍यम से अधोसंरचना की चीजें, जो निर्माण करना है, जैसे सामुदायिक भवन, कम्‍युनिटी हॉल, बड़े-बड़े पार्क, स्‍मार्ट सिटी एवं ऐसी तमाम चीजों में हमारा काम किया जाये.

          सभापति महोदय, मैं कहता हूँ कि एक बार हम सन्‍त जी के पास गए थे और हमने कहा कि हमारी कुछ समस्‍याएं हैं, जो सुलझ नहीं रही हैं. उन्‍होंने कहा कि आप क्‍या-क्‍या चाहते हो ? तो हमने कहा कि हम अच्‍छा रहना चाहते हैं, अच्‍छा जीवन जीना चाहते हैं और अच्‍छा बनना चाहते हैं, तो उन्‍होंने मध्‍यप्रदेश सरकार जैसी व्‍यवस्‍था बताई. उन्‍होंने कहा कि आप एक घड़ा ले जाओ और इस घड़े को तिरछा करके पेड़ में टांग दो, हमने उसी प्रकार से किया. उस घडे़ को ले जाकर एक पीपल के पेड़ में तिरछा टांग दिया और फिर धीरे-धीरे हमारे सभी काम अच्‍छे होने लगे और पूरे होने लगे. हम विकास की ओर वर्ष 2003 से आगे बढ़ने लगे, आज हमारी सब प्रकार की व्‍यवस्‍थाएं होने लगी हैं. हम पुन: सन्‍त जी के पास गए और उन्‍होंने बताया कि हमारा घर बन गया, मकान बन गया है, स्‍मार्ट सिटी बन गई, तालाब बन गए, सड़कें बन गई हैं तो उन्‍होंने कहा कि फिर जाकर वापस घड़े को देखो कि घड़े में क्‍या है ? तो हमने वापस जाकर देखा तो घड़े में एक चिडि़या का घर बना हुआ था, तो हमने पुन: जाकर सन्‍त जी को यह बताया तो उन्‍होंने बताया कि आप इसी तरह से घर बनाते जाओ, आपका घर बनता जायेगा. प्रदेश की सरकार इसी तरह से एक दूसरे का घर बनाती जा रही है. आप सबको बहुत-बहुत बधाई. सभापति महोदय, आपने समय दिया, उसके लिए धन्‍यवाद.  

          सभापति महोदय - आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद. श्री आतिफ आरिफ अकील जी.

          श्री आतिफ आरिफ अकील (भोपाल उत्‍तर) - माननीय सभापति जी, मैं आज इस सदन में उस पुराने भोपाल की आवाज बनकर खड़ा हूँ, जिसकी रगों में इतिहास बहता है.

          सभापति जी,  मेरा विधान सभा क्षेत्र सीमेन्‍ट और क्रांकीट का जंगल नहीं है, यह गुफा मन्दिर और ताजुल मस्जिद की नक्‍काशी का जीता-जागता सबूत है. मैं बजट पर चर्चा से पहले कहना चाहता हूँ कि मेरे क्षेत्र की हर उस बस्‍ती का नाम सदन की कार्यवाही का हिस्‍सा बने, जिस तरफ सरकार वर्षों से आंखें मूंदी हुई है. गुफा मन्दिर से ईदगाह हिल्‍स दुआओं का यह घेरा है, कोहेफिजा की वादियों में भोपाल का सबेरा है, खानूगांव, फतेहगढ़, बारहमहल की दास्‍तान है, साजिदा नगर, सईद नगर मेरी धड़कन, मेरी जान है, चौक बाजार, बलाईपुरा, इब्राहिमगंज की चमक, बढ़ाईपुरा और पायगा के हुनर की जंग वह धमक, मुंशी हुसैन खां बाग हो या संजय शर्मा का आंगन हो, मजदूर नगर के पसीने से महकता मेरे क्षेत्र का दामन मॉडल ग्राउण्‍ड, मरघटिया मन्दिर, अशोक कॉलोनी, ताज कॉलोनी, शाहजहांनाबाद की वह विरासत, भोपाल की रूह पुरानी, कच्‍ची मस्जिद, टीला जमालपुरा उम्‍मीद की डगर है. नारियलखेड़ा, पीजीबीटी, आरिफ नगर मेरा घर है, रिसालदार कॉलोनी, कॉजी कैम्‍प सुने अब पुकार, सिंधी कॉलोनी, कैंची छोला, मांगे तरक्‍की का अधिकार, दुलीचन्‍द का बाग पुकारे, बापना और कबाड़खाना है साथ, इब्राहिमगंज को जाम से बचाना है, अब तो मेरे हाथ.

          सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी, हर वर्ष बजट के अन्‍दर सैकड़ों अरबों खरबों  रुपये आते हैं. लेकिन धरातल की स्थिति अगर हम देखें तो यह पिछले वर्ष 2025-26 में 18 हजार करोड़ रुपये का बजट था. लेकिन पुराने शहर के अन्‍दर न कोई फ्लाईओवर, न ही ब्रिज का कोई प्रावधान है, न ही पिछले बजट में था और न ही इस बजट में है. माननीय मंत्री जी, अगर हम मेट्रो की बात करें, तो मेट्रो के अन्‍दर, जो पुराने शहर के अन्‍दर व्‍यवस्‍था मिलाकर है, वहां से एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जा रहा है, जबकि उसको अण्‍डरग्राउण्‍ड बनाना चाहिए और अगर आप अण्‍डरग्राउण्‍ड नहीं बना रहे हो, अगर एलिवेटेड बना रहे हो तो आप डबल डेकर की प्‍लानिंग कीजिये, क्‍योंकि वह व्‍यस्‍तम इलाका है. माननीय मंत्री जी, मैं आपका ध्‍यान आकर्षित कराना चाहता हूँ कि कहीं न कहीं पुराने शहर के अन्‍दर मेट्रो की जो प्‍लानिंग है, वह 100 वर्षों की है, लेकिन आप 100 वर्षों की अगर प्‍लानिंग देखें और आपने प्‍लानिंग करके उसका एलिवेटेड कॉरिडोर नहीं बनाया, तो उस पुराने शहर को, भोपाल शहर को 100 वर्ष के लिए आप मेट्रो तो दे रहे हो, लेकिन 100 वर्षों के लिए मेट्रो से पुराने शहर को अन्‍धकार में भी डाल रहे हो. यह सौतेला व्‍यवहार नहीं चलेगा और सबसे अहम बात यह है कि आज जिन्‍दा लोग तो परेशान हैं, लेकिन मेट्रो ने मुर्दों को भी परेशान करना शुरू कर दिया है. सबसे अहम चीज भोपाल टॉकीज से बड़ा बाग, कब्रिस्‍तान की भूमि जो मेट्रो के अन्‍दर आ रही है. माननीय मंत्री जी, मैं उसमें यह कहना चाहता हूँ कि इसको डायवर्ट किया जाये, आप इस पर कुछ अपना वक्‍तव्‍य दें.      

          सभापति महोदय-  आतिफ जी, आप अपनी बात निरंतर जारी रखें.

          श्री आतिफ आरिफ अकील-  सभापति महोदय, पुराने शहर के अंदर जो कब्रिस्‍तान है, वह लगभग 300-400 वर्ष पुराना है, वहां से आप अंडर ग्राउण्‍ड मेट्रो बना रहे हैं, कहीं न कहीं यह ठीक नहीं है, इससे लोगों की आस्‍था को ठेस पहुंच रही है. जब हम मेट्रो बना रहे हैं तो उस सड़क को डाइर्वट क्‍यों नहीं कर सकते मैं चाहता हूं कि आप उसे डाइर्वट करें.

          सभापति महोदय, मुख्‍यमंत्री अधोसंरचना योजना जो कि रूपये 1 हजार करोड़ की है लेकिन मेरी विधान सभा को 1 रूपया नहीं दिया गया. हर बार पत्र पर पत्र लिखने पर भी कहीं न कहीं इसके अंदर पक्षपात होता है. नाले-नालियों के‍ विषय में, मैं, प्रदेश की राजधानी की बात कर रहा हूं और इस बात के लिए चैलेंज भी करता हूं कि अगर मैं इस सदन में असत्‍य बोल रहा हूं तो कोई भी चाहे तो धरातल पर मेरे साथ चलकर भोपाल राजधानी की स्थिति देख ले. न वहां स्‍ट्रीट लाईट है, न वहां सड़कें हैं, बद से बदहाल हालात पुराने शहर के अंदर हैं. SDMF योजना में 3 वर्ष पहले भोपाल-उत्‍तर विधान सभा में करोड़ रुपये स्‍वीकृत किये गए लेकिन आज धरातल पर इसकी प्रशासकीय स्‍वीकृति विगत 3 वर्षों से नहीं मिली है. मैं मंत्री जी का ध्‍यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं. क्षेत्र में सीवरेज की बहुत दिक्‍कतें हैं, अमृत-2 के अंतर्गत भोपाल उत्‍तर विधान सभा की कोई भी नाले-नालियां नहीं जोड़ी गई हैं. विकास कार्यों हेतु बजट आवंटन भेदभावपूर्ण होता है. मानननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा सत्‍तापक्ष के विधायकों को रूपये 15-15 करोड़ दिये जाते हैं और विपक्ष के विधायकों को रूपये 5 करोड़ का वादा दिया जाता जबकि उसमें रूपये 1 करोड़ भी नहीं दिये जाते हैं, कहीं न कहीं इस ओर हमें ध्‍यान आकर्षित करना होगा.

          सभापति महोदय, आप बात करते हैं वर्ष 2047 की मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आप वर्ष 2047 की प्‍लानिंग न करें, आप अगले एक साल की प्‍लानिंग करें जो पुराना शहर, जो राजधानी है, आपके प्रदेश की राजधानी उसको आपको खूबसूरत बनाना होगा. सबसे अहम बात हर चीज़ के अंदर पक्षपात किया जा रहा है. नगर निगम में शिकायतें करो तो स्‍ट्रीट लाईट ठीक नहीं हो रही हैं, नाले-नालियों की परेशानियों हैं, नगरीय विकास एवं आवास विभाग कहीं न कहीं सौतेला व्‍यवहार पुराने शहर के साथ करता है. मैं कहना चाहता हूं कि यहां बहुत सारे भाजपा के विधायक हैं लेकिन मैं चाहता हूं कि आप भी अपनी आवाज उठायें, मैं आपका दर्द भी समझता हूं कि आपके क्षेत्र के अंदर बहुत सारे काम नहीं हो रहे हैं लेकिन आपकी मजबूरियां हैं लेकिन आपको कहीं न कहीं साथ देना पड़ेगा, नहीं तो अगले विधान सभा चुनाव में आप इस विधान सभा के सदस्‍य नहीं होंगे कहीं न कहीं आपको काम करना होगा.

          सभापति महोदय, मुख्‍यमंत्री बीमारी निधि में गरीब वर्ग के व्‍यक्तियों को इलाज़ के लिए मेरे द्वारा 275 पत्र लिखे गए, जिसमें से केवल 10-15 स्‍वीकृत किये गए. इलाज के लिए भी आज धर्म, जाति और पार्टी महत्‍व रखती है. कहीं न कहीं यह चीज़ समझ नहीं आ रही है कि जहां इलाज़ के लिए पैसे मांगे जा रहे हैं, इसके अंदर भी पक्षपात हो रहा है, यह बहुत गलत है. राजधानी में होने के बावजूद सड़कों की स्‍ट्रीट लाईट बदहाल है, मुख्‍य चौराहे अल्‍पना तिराहा, भोपाल टॉकीज़ चौराहा, यहां जल भराव की स्थिति रहती है लेकिन वहां के लिए इस बजट में भी कोई स्‍वीकृति नहीं दी गई.

          सभापति महोदय, उच्‍च शिक्षा के लिए पिछले वर्ष रूपये 43 सौ करोड़ स्‍वीकृत किये गए, इस बार रूपये 42 सौ करोड़ किये, लेकिन मेरी विधान सभा में कोई महाविद्यालय स्‍वीकृ‍त नहीं किया गया, यह राजधानी की बात हो रही है.

          सभापति महोदय- आतिफ भाई, अब समाप्‍त करें. आप नगरीय विकास एवं आवास से बोलते हुए उच्‍च शिक्षा और शिक्षा पर आ गए हैं. नगरीय प्रशासन पर आपने बोल लिया है और आपका समय भी हो गया है. आप अपने क्षेत्र की बात रख दें, समय की मर्यादा रखें.

          श्री आतिफ आरिफ अकील-  सभापति महोदय, मैं, अपने क्षेत्र की ही बात कर रहा हूं. कुछ चीज़ें जो धरातल पर सही नहीं हो पा रही हैं, वे हों. सबसे अहम चीज़ अगर हम कानून व्‍यवस्‍था की बात करें तो रूपये 12 हजार 8 सौ करोड़ का प्रावधान पिछले वर्ष था लेकिन इस बार रूपये 13 हजार 4 सौ करोड़ का प्रावधान है. सरकार बढ़ते हुए अपराधों को रोक नहीं पा रही है. प्रदेश में आये दिन मॉब लिंचिंग हो रही है, भीड़ फैसला कर रही है, किसी को भी पकड़कर, किसी को भी पीट दिया.

          सभापति महोदय-  आतिफ भाई, चर्चा नगरीय विकास एवं आवास पर हो रही है और आप उस पर बोल चुके हैं. अगर कोई नगरीय प्रशासन संबंधी आपके क्षेत्र की बात हो तो आप रखें, अन्‍यथा आपका समय हो गया है, कृपया समाप्‍त करें.

          श्री आतिफ आरिफ अकील-  जी.

          सभापति महोदय-  धन्‍यवाद, शुक्रिया आतिफ भाई.

          श्री दिलीप सिंह परिहार (नीमच)-- माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया. मैं मांग संख्‍या 22 नगरीय प्रशासन पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. मैं माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं. आज डॉ. मोहन यादव जी की सरकार और नगरीय प्रशासन मंत्री माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी के नेतृत्‍व में सभी शहरों को सुंदर बनाने का काम किया जा रहा है. नगरीय विकास और आवास विभाग के शहरीय विकास के सतत् समावेशीय स्‍वच्‍छ शहर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. वर्ष 2047 में भारत को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए हमारी सरकार स्‍मार्ट सिटी आवास योजना, हरित ऊर्जा, डिजिटल सेवाओं के माध्‍यम से शहरी जीवन को गुणवत्‍ता को सुधार एवं स्‍वच्‍छ पेयजल एवं प्रदूषण मुक्‍त शहर जैसी नदियां बनाना चाहते हैं.

          सभापति महोदय, आज हम देख रहे हैं कि इंदौर स्‍वच्‍छता के क्षेत्र में हमेशा पायदान चढ़ता जा रहा है और उसकी वजह से मैं इंदौर की जनता और हमारे नेता माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी को बहुत धन्‍यवाद दूंगा कि आठवीं बार भी इंदौर स्‍वच्‍छता के क्षेत्र में आगे की ओर बढ़ा है. वहां इंदौर के लोगों ने अपने स्‍वयं के मकान को तोड़कर सहयोग किया है. माननीय विजयवर्गीय जी और नगरीय निकाय के माध्‍यम से एक सुंदर इंदौर हमें देखने को मिला है. निश्चित ही शहरीकरण के साथ-साथ अनेक चुनौतियों में भी सामने हैं जैसे आवास की कमी, विशेषकर गरीबों के लिए आवास, भीड़भाड़, प्रदूषण. नागरिक बुनियादे ढ़ांचे जैसे पानी, बिजली और सीवरेज के मामलों में भी नगरीय प्रशासन के माध्‍यम से रोड़ मैप तैयार किया गया है. झुग्‍गी, बस्तियों के विकास के लिए भी लगातार समय -समय पर सरकार ने रोड़मैप तैयार किये हैं. हरित और स्‍वच्‍छता शहर. स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत स्‍वच्‍छ हो, ग्रीन सिटी के रूप में विकसित हो इस बात को ले‍कर लगातार वायु गुणवत्‍ता में विकास हो रहा है और उस विकास की आगे की ओर हम देखते हैं गुजरने वाली नदियां, प्रदूषण मुक्‍त हो रही है. वहीं आवास बुनियादा ढ़ांचा है तो प्रधानमंत्री आवास योजना मध्‍यप्रदेश की सरकार ने लागू की है. 25 जून 2015 से शहरी विकास के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना मंजूर हुई है, वित्‍तीय वर्ष 2026-27 में प्रधानमंत्री आवास 2.0 के अंतर्गत 3316.49 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. इसमें 2 लाख 50 हजार रुपए गरीब को मिलते हैं. प्रथम किश्‍त में एक लाख रुपए, द्वितीय किश्‍त में एक लाख रुपए और 50 हजार रुपए मिलते हैं तो वह अपना घर, अपना आशियाना बनाता है और सरकार को दुआएं देता है कि सरकार की वजह से आज कहीं न कहीं मेरी पक्‍की छत बनी है. नगरीय प्रशासन के माध्‍यम से स्‍वच्‍छता और आवास के क्षेत्र में अनेक काम हुए हैं. जैसे हम कहते हैं कि निर्धन का धन गिरधर. अब हम लोग कहने लगे हैं कि निर्धन का धन मोदी जी और मोहन जी हैं. निर्धन व्‍यक्ति को आज वह सारी सुविधाएं मध्‍यप्रदेश का नगरीय प्रशासन विभाग देने का काम कर रहा है. मैं यह कहूंगा कि नगर वह स्‍थान है जहां स्‍वतंत्र नागरिकों के संगठित सामाजिक जीवन का विकास होता है और उस विकास में मैं नगरीय प्रशासन मंत्री जी से अनुरोध करूंगा कि प्राचीन मंदिर, मठ आदि स्‍थल को भी जीर्णोद्धार हेतु सुनिश्चित बजट में आरक्षित करने का काम करें. आज हम देख रहे हैं मूलभूत सुविधाओं के साथ में मुक्तिधाम, शमशान, कब्रिस्‍तान सुधारने का काम भी नगरीय प्रशासन मंत्री द्वारा किये जा रहे हैं. शहरी नगरीय निकाय को आत्‍मनिर्भर स्‍वपोषित करना है. शहरी क्षेत्र में वैध, अवैध कालोनियों, वास्‍तविक सीमा, जनसंख्‍या और यातायात का जो दबाव है जिसके कारण अतिक्रमण है उसको भी हमें मुक्‍त करना होगा. स्वच्छ भारत हमारे जीवन का मुख्य उद्देश्य है, स्वच्छता के कारण ही व्यक्ति स्वस्थ रहता है. स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है इसके लिए स्वच्छता बहुत आवश्यक है. डोर-डू-डोर कचरे का संग्रह नगर पालिका और नगर निगम द्वारा हर शहर में हो रहा है. पहले खुले में शौच होता था लोग डिब्बा लेकर  शौच के लिए जाते थे. आज खुले में शौच से शहरों और गांवों को मुक्त किया गया है. ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य नगरीय निकायों द्वारा किया गया है. प्रधानमंत्री स्व-निधि योजना के माध्यम से गरीबों को 10-20-50 हजार रुपए का ऋण मिल रहा है जिससे गरीब अपना कोई छोटा-मोटा रोजगार करके सरकार को धन्यवाद दे रहा है. चार शहर  मिलियन प्लस  हैं. 1 से 10 लाख की आबादी वाले 29 शहर हैं. 1 लाख से कम आबादी वाले 379 हैं.  इन विधान सभाओं में हम गीता भवन बना रहे हैं. भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है कि कर्म करो हम कर्म कर रहे हैं और उसी के कारण आज मध्यप्रदेश विकसित प्रदेशों की श्रेणी में पहुंचा है. मध्यप्रदेश लगातार विकास की दौड़ में आगे बढ़ रहा है. प्रधानमंत्री आवास हो, स्वनिधि योजना हो या दीनदयाल थाली योजना हो. नीमच में दीनदयाल जी के नाम से 5 रुपए में मरीज को भोजन देने की व्यवस्था है. प्रधानमंत्री निशुल्क अन्न वितरण किया जा रहा है. वहीं इंदौर, उज्जैन, भोपाल मेट्रो सिटी बनने जा रहे हैं. मुख्यमंत्री जी ने 10 जनवरी, 2026 से प्रदेश में जल सुरक्षा, जल संरक्षण, स्वच्छ जल अभियान की शुरुआत की है. अभियान के अन्तर्गत प्रदेश में नगरीय निकायों में 80 हजार से भी अधिक पाइप लाइनों के लीकेज का सुधार और मरम्मत करने का काम नगरीय प्रशासन के माध्यम से किया गया है. 35 हजार से अधिक ट्यूबवेलों का जल परीक्षण करवाया गया है. 186 ट्यूबवेलों को चिन्हित किया जाकर बंद कराया गया है. लगातार पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 2729 टंकियों की साफ-सफाई की गई है. नगर निकाय के माध्यम से 2 लाख से अधिक वाटर फिल्टर उपलब्ध कराए गए हैं और निरन्तर यह प्रक्रिया जारी है. उक्त क्रम में मध्यप्रदेश में समस्त नगर निकायों में प्रति मंगलवार को सुनवाई की जाती है. जिसमें 55 हजार प्रकरण प्राप्त हुए हैं जिनका निराकरण नगरीय निकायों के द्वारा किया गया है. यह प्रक्रिया निरंतर आगे भी जारी रहने वाली है.

          माननीय सभापति महोदय, मैं जहां से आता हूं वह नीमच है जो यहां से 450 किलोमीटर दूर है. वहां पर पहले अंग्रेजों की छावनी थी. वहां पर बंगला बगीचे की एक समस्या है. पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह जी ने उसका कुछ निदान किया था और अभी डॉ. मोहन यादव जी जब नीमच पधारे थे तो उन्होंने विश्वास दिलाया था कि जो बंगला बगीचे की समस्या है उसमें गरीबों के रहने के लिए हम समस्या का समाधान करेंगे. जो छोटे प्लाट हैं उनकी समस्या का तो निराकरण हुआ है जो 5 हजार वर्गफुट के प्लाट हैं उनका निराकरण करना है. अत: मैं नगरीय प्रशासन मंत्री मान्यवर कैलाश विजयवर्गीय जी और माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन करुंगा कि बंगला बगीचा की समस्या का निराकरण करें जिससे कि गरीब अपना आशियाना बना सकें. जबलपुर में भी यह समस्या है. हमारे ग्वालटोली के तालाब हैं जहां पर नमो पार्क का निर्माण किया जा रहा है. इसके अलावा नीमच से मऊरगुड़ से शहाबुद्दीन बाबा दरगाह होते हुए पुलिया पर सीसी रोड है. मैंने कुछ प्रस्ताव नगरीय प्रशासन के माध्यम से भेजे हैं. उन्हें आप मंजूर करने का काम करेंगे. कहीं-न-कहीं नगर पालिका के जो खेत हैं उनमें कहीं सीएम राइज स्कूल है या अन्य स्कूल बनाने के लिए भी स्वीकृति प्रदान करें. नीमच आज एक बढ़ता हुआ शहर है. यहां सड़कें लोक निर्माण विभाग के माध्यम से बन रही हैं. मैं नगरीय प्रशासन मंत्री से निवेदन करुंगा कि जो साइड की रोड होती है वो नगर पालिका के माध्यम से निकले. मैं  इस अवसर पर मान्यवर कैलाश विजयवर्गीय जी को धन्यवाद दूंगा कि जहां अवैध काम हो रहे थे उसको मुक्‍त कराया उस दिन मेरे प्रश्‍न के माध्‍यम से, तो आज स्‍वीमिंग पूल में हमारे बेटा-बेटी तैराकी प्रतियोगिता में स्‍वर्ण और रजत पदक प्राप्‍त करेंगे. खेल के मैदान सुरक्षित हों इसके लिए डॉ. मोहन यादव जी ने हमारे यहां पैसा भेजा है, तो नगरीय प्रशासन के माध्‍यम से वह खेल का मैदान बन जाए यही निवेदन है. मुख्‍यमंत्री जी ने जो हमें पैसे दिये थे उसमें मैंने सांवरिया जी नाले का सौंदर्यीकरण के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये दिये और इनडोर स्‍टेडियम के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपये दिये थे तो वह काम भी जल्‍दी पूर्ण हो. पुन: मैं मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी, वित्‍त मंत्री मान्‍यवर जगदीश देवड़ा जी और नगरीय प्रशासन सुयोग्‍य मंत्री मान्‍यवर कैलाश विजयवर्गीय जी का बहुत धन्‍यवाद देता हूं. माननीय सभापति जी, आपने बोलने का अवसर दिया इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री दिनेश गुर्जर (मुरैना) -- सभापति महोदय, धन्‍यवाद कि मुझे भी अपने क्षेत्र की बात रखने का अवसर दिया. मुरैना जो अब नगर निगम है दुर्भाग्‍य है कि मुरैना नगर निगम के शहरवासी आज भी नरक का जीवन जी रहे हैं. कई बार हमारे द्वारा बात रखी गई, कई बार नगरीय प्रशासन मंत्री जी को और मुख्‍यमंत्री जी को भी दिया कि शहर में जो सीवर लाइन बनी है वह भ्रष्‍टाचार की बलि चढ़ गई है, जिसके कारण सीवर लाइन चोक पड़ी रहती है. सड़कें खराब पड़ी हैं. गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है. निकासी की कोई व्‍यवस्‍था नहीं है. जिसके कारण आये दिन बीमारी फैल रही हैं. मुरैना शहर के मुख्‍य सदर बाजार की ना‍लियां चोक पड़ी हैं. गलियां गंदी पड़ी हैं परंतु कोई सफाई की व्‍यवस्‍था नहीं है. ट्रैफिक होने की वजह से स्‍टेशन रोड और सदर बाजार मुख्‍य मार्ग पर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है. मुरैना शहर के अंदर कोई पार्किंग की व्‍यवस्‍था की जाए और जब माननीय मुख्‍यमंत्री जी जब मुरैना अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा का उद्घाटन करने गये थे तब मुख्‍यमंत्री जी घोषणा करके आये थे कि हम वार्ड नंबर 45 में आसन नदी छौना पर बोर्ड क्‍लब और मार्ग बनाएंगे. दुर्भाग्‍य यह है कि आज सात महीने से अधिक हो गये माननीय मुख्‍यमंत्री जी घोषणा करके आये मुरैना जिले के हजारों लोगों ने सुनी, या तो मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री की बात को मध्‍यप्रदेश सरकार के अधिकारी नहीं सुनते या माननीय मुख्‍यमंत्री जी असत्‍य घोषणाएं करते हैं. अगर उनकी भावनाएं अच्‍छी होतीं, मुख्‍यमंत्री जी अगर इतने ताकतवर होते कि उनसे प्रशासन सरकार के लोग डरते तो अभी तक मुरैना बोर्ड क्‍लब का काम शुरू हो जाता. यह दुर्भाग्‍यपूर्ण बात है. हमारी मांग है कि मुरैना के वार्ड नंबर 45 में आसन नदी के छौने पर बोर्ड क्‍लब बनाया जाए जिससे मुरैना शहर के लोगों के लिये वहां मनोरंजन का साधन हो सके.

          सभापति महोदय, इसी तरह जो हमारा मुरैना शहर का फ्लाई ओवर है वह बहुत पहले बना जिसके कारण शहर की आबादी ज्‍यादा हो गई, आये दिन मुम्‍बई-आगरा हाईवे पर जाम लगा रहता है जिससे कई बार एक्‍सीडेंट होता है. इसलिये मैं चाहता हूं कि शहर की सीमाओं में जहां हनुमान जी के घरौना का मंदिर है वहां से उसको शुरू करके टोल टैक्‍स के आगे तक का फ्लाई ओवर बनाया जाए. बामौर शहर में कई बार एक्‍सीडेंट हुए. सैकड़ों लोगों की जान चली गईं. दिन भर वहां जाम लगा रहता है परंतु आज तक वहां फ्लाई ओवर नहीं है तो फ्लाई ओवर बामौर शहर में भी बनाया जाए. रिंग रोड मुरैना शहर में बहुत आवश्‍यक है जो मुरैना शहर में मुरैना गांव से होते हुए, देवरी होते हुए छौने पर निकले और वहां से सुआ के पुरा तक जाए जिससे शहरवासियों को जाम का सामना नहीं करना पड़े.

          सभापति महोदय, अभी खुले में शौच की बात कर रहे थे. मैं इस सदन के सभी माननीय सदस्‍यों से यह आग्रह करना चाहता हूं, हाथ जोड़कर, पैर छूकर कि अगर आप में इतना साहस है तो मेरे साथ चलिए. मुरैना नगर निगम है और मुरैना में बीच शहर के अंदर रेलवे की पटरी पर आपको खुले में शौच करते सैकड़ों महिलाएं और पुरुष बता दूंगा कि यह खुले में शौच कर रहे हैं. यह दुर्भाग्‍य है इस मध्‍यप्रदेश में.

          श्री दिलीप सिंह परिहार -- सभापति महोदय, यह असत्‍य बात कर रहे हैं.

          श्री दिनेश गुर्जर -- सभापति महोदय, आप मेरे साथ चलिये. मैं कोई टीका टिप्‍पणी नहीं कर रहा. मैंने तो आपसे हाथ जोड़कर, पैर छूकर बोला है. जो बात है वह कह रहा हूं. जो असत्‍य बात होती है उस पर दु:ख होता है. जो सच्‍चाई है उससे अवगत होना चाहिए. अगर सदन में हम सच्‍चाई नहीं बताएंगे तो आपको कैसे पता चलेगा कि अभी भी शहर के लोग, गांव के लोग कैसे जीवन जी रहे हैं.

          श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल -- सभापति महोदय, उसका इलाज क्‍या है जिसको जबरदश्‍ती बाहर जाना है तो उसका कोई इलाज नहीं है. शौचालय सब जगह बन चुके हैं.

          श्री दिनेश गुर्जर--श्रीमान जी मुरैना शहर में शौचालय नहीं बने हैं. सभापति महोदय वार्ड नंबर 45 मे सविता का पुरा पर बहुत बड़ा क्षेत्र है और वहां पर कोई शासकीय विद्यालय नहीं है, वहां सविता का पुरा पर शासकीय विद्यालय खोला जाये, यह मेरा मंत्री जी से अनुरोध है.

          सभापति महोदय, बानमोर शहर के अंदर, कोई भी खेल का मैदान नहीं है तो वहां पर युवाओं के खेल हेतु , खेलों को प्रोत्साहित करने के लिये बानमोर शहर में एक खेल मैदान स्वीकृत किया जाये. यह मैं आपके माध्यम से सरकार से मांग करता हूं. आपने मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया उसके लिये धन्यवाद.

          श्री आरिफ मसूद --      ( अनुपस्थित )

          श्री हेमन्त सत्यवेद कटारे-- सभापति महोदय, तब तक माननीय राजेन्द्र सिंह जी से बुलवा लें, आरिफ जी अभी आ रहे हैं.

          सभापति महोदय- हेमन्त जी धन्यवाद, मेरी जानकारी में यह बात है. श्रीमती सेना पटेल.. आपसे अनुरोध है कि आपका नाम बाद में जोड़ा गया है इसलिये संक्षिप्त में अपनी बात को रखें. क्योंकि समय की सीमा है. थोड़ा सहयोग करें और अपने क्षेत्र की बात रख दें.

          श्रीमती सेना महेश पटेल (जोबट)-- धन्यवाद सभापति जी, अभी मैंने बोलना प्रारंभ नहीं किया है आपने समय की सीमा में मुझे बांध दिया है. लेकिन मैं  स्वास्थ्य और नगरीय विकास पर थोड़ा आपका संरक्षण चाहूंगी.

          माननीय सभापति महोदय, नगरीय विकास एवं आवास विभाग की मांग पर चर्चा चल रही है . मैं इस संबंध में माननीय मंत्री जी से कहना चाहती हूं कि हमारे अलीराजपुर जिले में जिला मुख्यालय में नगर पालिका है. हमारी नगर पालिका में खुद का भवन नहीं है, नगर पालिका के भवन के लिये कई बार मैंने पत्र लिखे हैं लेकिन आज तक हमें जवाब नही मिला है, हम किराये के भवन में नगर पालिका का संचालन कर रहे हैं.

          सभापति जी , मेरी आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से मांग है कि अलीराजपुर में जहां से नगर पालिका संचालित हो रही है, वहां पर नये भवन की स्वीकृति दी जाये. नये भवन की इसलिये भी आवश्यक है कि सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन नगर पालिका भवन से ही होता है, अगर नगर पालिका का स्वयं का भवन नहीं होगा तो शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में परेशानी आती है. इसलिये मंत्री जी इसको संज्ञान में लेकर के नगर पालिका के नये भवन की स्वीकृति प्रदान करें.

          माननीय सभापति महोदय, पूरे प्रदेश में नगर निगम, नगर पालिका के सफाई कर्मी रहते हैं सुबह से ही स्वच्छ भारत मिशन के काम में लग जाते हैं, हर गली में, चौराहे में , नालियों में सफाई करते हैं लेकिन दुख की बात है कि उन छोटे तबके के कर्मचारियों को नगर पालिका द्वारा समय पर वेतन का भुगतान नहीं किया जाता है. कई ऐसी नगर परिषद, और नगर पंचायते हैं जहां पर 3-4 माह तक इन छोटे तबके के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलता है. मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि इन कर्मचारियों की तनख्वाह समय सीमा में मिल जाये.

          सभापति महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से एक मांग और करना चाहती हूं कि हमारे अलीराजपुर नगर पालिका से मात्र 500 मीटर की दूरी पर एक गौशाला बनी हुई है, उस गौशाला में जाने के लिये रास्ता नहीं है तो आने जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है इसलिये मंत्री जी से अनुरोध है कि गौशाला में आने जाने के लिये एक नया पुल अथवा बैराज स्वीकृत करने की कृपा करें, इस हेतु हमारे यहां से डीपीआर बनाकर के भेजा जा चुका है वह निगम मुख्यालय में लंबित है. गौशाला जो नई स्थापित हुई है, उसमें आने जाने में सुविधा होगी.

          माननीय सभापति महोदय, एक मांग और मैं माननीय मंत्री जी से करना चाहती हूं कि जो कर्मचारी आउट सोर्स के रूप में निगम में या अन्य विभाग में कार्य कर रहे हैं, उनको जो वेतन मिलता है वह निर्धारित मापदण्ड के अनुसार नहीं मिल पा रहा है, इसको भी मंत्री जी संज्ञान में लेकर के मापदंड के अनुसार वेतन दिलाने की व्यवस्था करें.

          सभापति महोदय- श्रीमती सेना जी यदि आपके क्षेत्र की कोई बात हो तो आप रख दें. समय का सदुपयोग करें समय की मर्यादा है.

          श्रीमती सेना महेश पटेल --सभापति महोदय, आज तो वैसे भी महिलाओं का दिन है. थोडा सा समय और आपका संरक्षण और चाहूंगी.

          सभापति महोदय- ठीक है, तभी हम ध्यान से सुन रहे हैं आप अच्छा बोल रही हैं आप अपने क्षेत्र का बोल दें.

            श्रीमती सेना महेश पटेल सभापति महोदय,  नगरीय विकास से संबंधित तो यह है  और बजट की भी कुछ  कमियां आती हैं,  चाहे लाइट्स हो, चाहे निर्माण  संबंधी हो, चाहे आरसीसी रोड हो या  मुख्यमंत्री अधोसंरचना  की जो योजना भी चलती है,  वह  ठीक है चल भी रही है हमारे यहां भी.  पर  इन बातों पर थोड़ा सा ध्यान   में रखें कि हमारे नगर  की जो अंतिम  कड़ी तक जनता है,  उन  तक यह फायदा मिले. एक  जो हमारी डीपीआर बची हुई है,  प्रधानमंत्री आवास की,  उसको संज्ञान में लें कम  से कम  500 मकानों  की लिस्ट बाकी है. वह लिस्ट थोड़ी सी एक बार रिवाइज हो जाये,  तो सभी को आवास मिलेगा, ऐसा मैं  निवेदन करती हूं.   इसके पश्चात् मैं स्वास्थ्य विभाग  पर थोड़ा सा बोलना चाहूंगी.

          सभापति  महोदयनहीं नहीं, नगरीय प्रशासन  पर चर्चा चल रही है. 

          श्रीमती सेना महेश पटेल सभापति महोदय,   आप मुझे बार बार थोड़ी बोलने देंगे.

          सभापति  महोदयमेरा आपसे आग्रह है कि आप कृपया नगरीय  प्रशासन पर बोलें.  अगर  क्षेत्र की  कोई बात हो, तो आप रख दें.

          श्रीमती सेना महेश पटेल सभापति महोदय,   जी.  हमारे क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग में  एक  जोबट में अस्पताल है और  एक जिला  मुख्यालय का अस्पताल है.  मैं यह बोलना चाहती हूं कि  जो  एनेस्थीसिया का डॉक्टर होता है और जब महिलाओं की डिलीवरी पीरियड होती है. प्रसव समय होता है.  ऐसे समय में अस्पताल के अंदर  बेहोश करने  के लिये   एनेस्थीसिया का जो डॉक्टर है, वह समय पर उपस्थित नहीं होता है, क्योंकि  उनके पास वर्क लोड   रहता है.

          सभापति महोदय चलिये, आ गयी आपकी बात. बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्रीमती सेना महेश पटेल सभापति महोदय,    पूरी बात नहीं आई है.

          सभापति  महोदय चूंकि नगरीय प्रशासन  पर चर्चा  चल रही है.  आपसे आग्रह है, समय की मर्यादा है और  भी सदस्य बाकी हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय सभापति महोदय, अभी स्वास्थ्य विभाग के मंत्री जी भी नहीं हैं.  अगर स्वास्थ्य विभाग के मंत्री जी होते तो बात उनके संज्ञान में आ जाती.

          सभापति  महोदय स्वास्थ्य  मंत्री  जी भी नहीं हैं. आपको विशेष समय दिया है नगरीय प्रशासन पर चर्चा करने के लिये और नगरीय प्रशासन पर आपकी सारी बात आ गई है.

          श्रीमती सेना महेश पटेल सभापति महोदय,   स्वास्थ्य मंत्री जी तक मेरा मैसेज चला जाये कि  हमारी जितनी भी ग्रामीण क्षेत्र की  महिलाएं डिलीवरी के लिये  आती हैं,  उनको  बेहोश करने के लिये कोई डॉक्टर नहीं है. मैं चाहूंगी कि ग्रामीण  महिलाओं की सुविधा को  देखते हुए  जो रेफर किया जाता है बड़ौदा और दाहोद. तो  उन महिलाओं के लिये  हमें एनेस्थीसिया का डॉक्टर  चाहिये.  यह मैं स्वास्थ्य मंत्री जी  को मैसेज  आपके माध्यम से देना चाहती हूं.  हमे डॉक्टर चाहिये.  धन्यवाद.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा (जावद)--  सभापति जी,आपका बहुत धन्यवाद.  मैं  मांग संख्या 22 एवं 28  के समर्थन में बोलने  के लिये खड़ा हुआ हूं.  मैं  कोई भी पुरानी  बातों को रिपीट  करने के बजाये  कुछ अलग बिन्दुओं पर चर्चा शुरु करना चाहता हूं, क्योंकि समय  की  सीमा है  और आप टीकें और मैं   उस समय बैठ जाता हूं. तो वह ठीक नहीं रहेगा.  इसलिये मैं अपने आपको   सीमित समय में कवर करने  की कोशिश करुंगा.  मैं  वास्तव में बहुत अभिनन्दन करना चाहता हूं  कि  नालेज एंड  एआई सिटी  का जो काम्प्लेक्स  भोपाल  में प्लान किया है, वह  वास्तव में  आज के  आने वाले समय  में बहुत  जरुरी  है और उसकी जरुरत है. इसमें  नेशनल लेवल का यह इंस्टीट्यूट  जिसमें  83.47  परसेंट  शहर का जो   साक्षरता  भोपाल  में  चयन करने के पीछे  83.47  प्रतिशत साक्षरता के साथ  इसमें  39 प्रतिशत  15 से  34 साल के  उम्र   के शहर में लोग हैं.   उन्हें   अगर एआई  और  पूरी अपडेट  नालेज देंगे,  तो वास्तव में   आत्मनिर्भर भारत   की बुनियाद मजबूत करने का यह सबसे    महत्वपूर्ण  काम  कर रहे हैं. इसलिये मैं  इस विभाग और विभाग के मंत्री जी का बहुत  बहुत अभिनन्दन करता हूं कि ऐसे विषयों पर  भी आज कई बड़े  राज्यों  में काम शुरु नहीं हुआ. म.प्र.   ने शुरु किया और   तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.  इसमें इनोवेशन के बारे में, अन्य कई चीजों  के बारे  में बहुत तेजी से काम  कर रहे हैं.  मैं वास्तव में दूसरे दो विषयों  पर और बोलकर अपने जिले पर आऊंगा.  स्वच्छता और वेस्ट  मेनेजमेंट को लेकर  जिस तेजी, गंभीरता से  पिछले 7-8 साल से  काम हो रहा है, जिसमें फेज-1 में 12858 करोड़ रुपये का सेंक्शन  दिया और उसमें काफी  काम पूर्णता की तरफ चले गये.  लेकिन  साथ ही उसमें दूसरा विषय है कि जो अपूर्ण रह गये.  उनके ऑडिट के सिस्टम के बारे में  बात  कर रहा हूं. मैं  बड़ी गंभीरता से विषय रख रहा हूं कि मेरी  विधान सभा की सिंगोली  नगर पंचायत में वाटर  ट्रीटमेंट प्लांट एवं जो भी वेस्ट मेनेजमेंट का  काम किया है,  वह 6 साल से कम्प्लीशन  का सर्टीफिकेशन कैसे  उसको मिल गया.

 

 

5.30 बजे

अध्‍यक्षीय घोषणा

सदन के समय में वृद्धि विषयक

          सभापति महोदय- आज की कार्यसूची के पद -7 के पद 2 एवं तीन में सम्मिलित मांगें पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाये मैं समझता हूं कि सदन इससे सहमत है.

                                                                          सदन द्वारा सहमति प्रदान की गयी

 

 

 

 

5.31 बजे

स्‍वल्‍पाहार की व्‍यवस्‍था

          सभापति महोदय- माननीय सदस्‍यों के लिये सदन की लॉबी में चाय की व्‍यवस्‍था की गयी है. सदस्‍य सुविधानुसार ग्रहण कर सकते हैं.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा- मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूं कि अभी कई बार ..

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक- सभापति महोदय, मेरा निवेदन है कि सदन की कार्यवाही 6 बजे तक करिये. क्‍योंकि और भी दूसरे काम रहते हैं. रात हो जाती है तो बहुत दिक्‍कत हो जाती है.

          नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) - सभापति महोदय, सोहनलाल बाल्‍मीक जी की भावना भी सभी सदस्‍यों की भावना है. मैं समझता हूं कि संसदीय कार्य मंत्री जी इस पर विचार करेंगे. सभापति महोदय आप भी थोड़ा माननीय अध्‍यक्ष जी से अनुरोध कर लें.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - मेरे भाषण के बाद, आप और मैं दोनों अध्‍यक्ष जी के पास चलते हैं.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा- सभापति महोदय, वास्‍तव में स्‍ट्रेस का विषय है. 8-9 बजे तक यहां बैठेंगे तो क्षेत्र के कार्यकर्ताओं से कब बात होगी. कब हम अगले दिन की तैयारी करेंगे, उस पर सोचना चाहिये.

          सभापति महोदय, मैं इस बात का भी अभिनन्‍दन करता हूं कि हमारे अध्‍यक्ष महोदय कई साल के बाद लगातार पूरी गंभीरता से विधान सभा का पूरा सत्र लगाते हैं और चर्चा भी करते हैं. इस बात पर उनका बहुत-बहुत अभिनन्‍दन है.(मेजों की थपथपाहट) परंतु वह स्‍ट्रेस ज्‍यादा टाईट हो रहा है, वह थोड़ा सा कम हो जाये.

          माननीय सभापति महोदय, इन सब कामों के लिये आपने प्रदेश स्‍तर की समितियां भी बनायी हैं और कलेक्‍टर की समितियां भी जिले में है. अगर वह आब्‍जर्वेशन वह परफार्म नहीं कर रही हैं तो हम अभी तक कितने लोगों को इस मामले में नोटिस दे रहे हैं और चर्चा करके उनसे पूछा जा रहा है.

          सभापति महोदय, मैं दो विषय बड़ी गंभीरता से आपके सामने रखना चाह रहा हूं. एक बार नगर पंचायत के कार्यक्रम में कुछ अशोभनीय कार्य हो गया तो कलेक्‍टर ने दूसरे दिन, मीडिया में भी बहुत छपा, जिसके पास चार्ज था उसको हटा दिया. ठीक दो महीने बाद क्‍या सेटलमेंट हुआ, मैं तो नहीं जानता उसको वापस अपाइंट कर दिया गया. दो साल में छ: बार अलग-अलग व्‍यक्तियों को नगर पंचायत परिषद का चार्ज देते हैं, इससे कैसे काम चलेगा. कहीं न कहीं उसमें कुछ आडिट सिस्‍टम बहुत अनिवार्य है. तीसरी महत्‍वपूर्ण बात जिसके लिये मैं वास्‍तव में इंदौर के स्‍वच्‍छता और बार-बार इनाम इंदौर को मिलता है, बड़े शहर को स्‍वच्‍छता में. फिर आपके मार्गदर्शन में जब चर्चा हुई तो हमारी सातों नगर पंचायत में स्‍वच्‍छता के मामले में, उससे कई गुना आगे हर गली की धुलाई दसवें दिन कर रहे हैं. मैं चाहूंगा कि जब आप मार्च के आखिरी सप्‍ताह में वहां आ रहे हैं तो दो नगर पंचायत को घूमकर देखिये और देखने के बाद उसमें आगे और क्‍या किया जा सकता है. उसके बारे में गंभीरता से चर्चा करें. क्‍योंकि वहां जब-जब प्रेशर वॉश से धुलाई हो रही है तो कई पुरानी कमियां दिख रही हैं, जैसे सड़कों का मेंटेनेंस और अपग्रेडेशन के लिये. हमारे दो और महत्‍वपूर्ण प्रोजेक्‍ट चल रहे हैं. हमारी सातों नगर पंचायतों को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिये दो चीजों में आपका सहयोग चाहिये. एक चाहिये कि वहां पर मैंने सातों नगर पंचायतों में सोलर प्रोजेक्‍ट के लिये तकरीबन डेढ़ से दो करोड़ रूपये एक-एक नगर पंचायत में लग रहा है. मैंने आपसे एक करोड़ के लिये पिछले बार भी बोला था. मैं आज आपसे आग्रह कर रहा हूं कि आपने जैसा कहा, फण्‍ड भले ही अप्रैल में दे दीजियेगा, अगर स्‍वीकृति कल दे देंगे तो मैं टेण्‍डर लगवाकर बाकि फण्‍ड की व्‍यवस्‍था करके, क्‍योंकि अप्रैल से उसकी कास्‍ट में परिवर्तन आ जायेगा. अभी जो बाहर के पैनल आ रहे हैं, उस पर बैन लगकर 100 प्रतिशत सरकारी काम में केवल इंडियन पैनल यूज़ होंगे तो उसकी कास्‍ट बढ़ जायेगी और नगर पंचायत का सबसे बड़ा खर्चा वह है.

          सभापति महोदय, तीसरा जो महत्‍वपूर्ण विषय है. मैं जिसमें अभी थोड़ी सी चर्चा और करना चाहता हूं कि कुछ नगर पंचायतों में खेल के कुछ स्‍टेडियम के मामले में भी अगर आप कुछ सहयोग करें, क्‍योंकि स्‍पोर्टस की बात तो खेल विभाग भी करता है और शिक्षा विभाग भी करता है. अब अगर सबका कांबिनेशन आ जाये तो वास्‍तव में ग्रामीण, यहां से जैसे जावद, नीमच का जो एरिया है, वह स्‍वीमिंग में नेशनल और इंटरनेशनल लेवल तक हमारे खिलाड़ी निकलते हैं तो उसमें अगर आपका और सहयोग हो जाये. क्‍योंकि मैं शिक्षा मंत्री जी से भी कह चुका हूं. उनके सीएम राइज में बजट में पैसा बचा हुआ है. वह पैसा वापस मंगवाने को तैयार हैं लेकिन नगरपालिका ने लिखकर देने के बाद भी वह स्वीमिंग पुल नहीं बना रहा है, अगर वह बन जाय, हमने जगह भी रखी है, नक्शे में भी प्रावधान है. अगर नहीं है तो नगरीय निकाय विभाग से यह स्वीमिंग पुल और सोलर के दो प्रोजेक्ट, इन पर आपका सहयोग मिल जाएगा तो एक नया आपके नेतृत्व में पूरे भारत में पहली बार होगा कि सातों नगर पंचायत बिजली के मामले में भी आत्मनिर्भर होगी. एक और विषय जो कई बार आता है कि नगर पंचायत के जमीनों पर कुछ कमर्श्यिल काम्प्लेक्स बनाकर वह अपना खर्चा मेंटेन करना चाहते हैं, उसके बारे में कहीं न कहीं स्वीकृति में जिस तरीके की स्थितियां हो रही है वह बहुत अच्छी नहीं हो रही है. मैं इससे ज्यादा कुछ बोल नहीं सकता हूं, उसके बारे में आपको थोड़ा सा स्टडी करना होगी कि क्या हो सकता है, उसके बारे में सोचना चाहिए.

          सभापति महोदय, मैं दो विषय और जो प्रदेश लेवल के हैं. मैं वास्तव में बहुत अभिनंदन करता हूं. आने वाली पाप्युलेशन और व्हीकल के मूव्हमेंट पर मेट्रो का प्रावधान करके दो बड़े शहरों में मेट्रो का जो प्राविजन चल रहा है. मैं अभी कुछ देशों में घूम रहा था. मैंने देखा कई देशों ने आज कल मेट्रो के साथ एफएआर की फ्रीडम दे दी और उन बिल्डिंगों के गेट सीधे मेट्रो के गेट में खोल दिये और वह लिखकर दे देते हैं कि हम इतनी गाड़ियां पूरी बिल्डिंग में यानी एक बिल्डिंग में 100 फ्लेट बने हैं और उसका मेट्रो के गेट से आप कनेक्शन का प्रावधान कर दें तो 100 की जगह 200 व्हीकल सड़क से आउट हो जाए. ऐसा कुछ प्रावधान हो. साथ ही जो मेट्रो के स्टेशन हैं उन स्टेशनों पर आप अलग अलग केटेगरी की लोकल एक दो कि.मी. के लिए अलग व्हीकल के लिए प्रावधान करें क्योंकि यह चर्चा भी अभी दिल्ली में शुरू हो गई है और उन्होंने मेट्रो का एक कोच फर्स्ट क्लास का बनाकर  उसमें उसके लिए वहां से लग्जरी गाड़ियां भी मेट्रो के गेट पर लगा दी कि 3 कि.मी. के रेडियस में वह वहां उतार दे तब जाकर हमारा शहर का जो ट्राफिक का लोड है वह कम होगा, केवल मॉसेस के साथ साथ कुछ अदर क्लास भी उस पर चलेगी तो ठीक रहेगा क्योंकि ग्रीन सिटी की हम बात करना चाहते हैं तो उसमें पाल्यूशन के दोनों एंगल को हमें  कवर करना पड़ेगा.

          सभापति महोदय, मेरा एक और आग्रह था पिछली बार जब आप मिनी मेट्रो की बात कर रहे थे तब मैंने आपसे आग्रह किया था कि मिडियम क्लास के शहरों में भी  15 कि.मी. के रेडियस पर मिनी मेट्रो के बारे में भी एक चर्चा की शुरुआत करना चाहिए. मेरा आग्रह है कि उसके लिए आपको एक विशेष किसी दिन घंटे, दो घंटे का समय देकर कैसे मिनी मेट्रो को डेवलप करें जहां पर सब सुविधाएं हों और उसका स्थान ऐसे चयन हो कि रूरल से अर्बन का मूव्हमेंट ठीक हो जाय. शिफ्टिंग कम हो क्योंकि अभी सबसे बड़ा प्रेशर आ रहा है, अर्बन में प्रेशर शिफ्टिंग का हो रहा  है. दो तीन चीजों के कारण अब तीनों चीजें रूरल में भी उपलब्ध हो गई हैं, उसको कैसे मैनेज किया जाय क्योंकि गांव में इंटरनेट पहुंच गया, बिजली पहुंच गई, सड़क पहुंच गई और स्वास्थ्य की सेवा के लिए शहर की तरफ रुझान जो आ रहा है, अगर वहां पर हमारा ट्रांसपोर्ट सिस्टम ठीक हो जाय और एक जैसे केपिटल रीजन को जैसे मिनी मेट्रो रीजन बना दिया जाय, उससे काफी ज्यादा अर्बन ट्रांसफर का दबाव भी कम होगा और पाल्यूशन न होकर शुद्ध हवा पानी में  आदमी रह पाएंगे और काम कर पाएंगे. मैं दो विषय पर और थोड़ा सा आपका ध्यान दिलाना चाहता हूं. सभापति महोदय, मैं कोई भी बात रिपीट नहीं कर रहा हूं.

          सभापति महोदय - आप थोड़ा सा संक्षिप्त कर दें.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा - सभापति महोदय, मेरी एक आदत है मुझे जितना बोल दिया. जब भी आप टोकेंगे. मैंने कहा था कि मैं बैठना चाहूंगा. रेलवे के साथ एक अर्बन प्लानिंग का विषय और डालना चाहता हूं. हमारे यहां जो मास्टर प्लान कई बार डिले होता है और मास्टर प्लान, चलो, बड़े शहरो में भोपाल, इंदौर में समझ में आता है. (किसी माननीय सदस्य के बैठे बैठे कुछ कहने पर) वह आपका विषय है आप रखिएगा, मेरा समय मत लीजिए. वह मुझे बिठा देंगे. 1 लाख से 10 लाख तक की आबादी वाले जो छोटे शहर हैं, वहां का मास्‍टर प्‍लान डिले होना और वहां के मास्‍टर प्‍लान में प्रॉपर वर्किंग और उसको पब्‍लिकली कितनी जल्‍दी आए, उससे बहुत तकलीफ होती है. पिछली सरकार में एक बात आयी थी, उस समय माननीय शिवराज सिंह चौहान जी ने घोषणा की थी कि 10 साल पुरानी जितनी भी कॉलोनियां हैं, जो अनअथराईज्‍ड रह गईं हैं, उसका एक प्रोसीजर अपनाकर नगरपालिका उनसे कुछ कॉस्‍ट लेकर, क्‍योंकि वास्‍तव में इन छोटे शहरों में 80 प्रतिशत कालोनियां विदाउट प्‍लानिंग, विदाउट एप्रुवल, विदाउट किसी नियम के बन गई हैं. 10-10 साल से वह कालोनियां चल रही हैं आज उसको गंभीरता से लेना चाहिए और उसका अंत क्‍या होता है, जब जिस प्रशासक के मन में आया, वह 4 लोगों को नोटिस देगा और 40 लोगों को परेशान करेगा. उसका अंत कुछ भी नहीं होगा. रहेगा वही, लेकिन कहीं न कहीं 100-200 कॉलोनाइजर की हाजिरी उसके यहां लग जाएगी और वह विषय समाप्‍त हो जाएगा. इस बात को थोड़ा-सा गंभीरता से लें. आपने मुझे बोलने का मौका दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय -- बहुत-बहुत धन्‍यवाद, सखलेचा जी.

          श्री उमाकांत शर्मा -- सभापति महोदय, आपका मैं अभिनंदन करता हूँ. सभी वक्‍ताओं को आप बड़ी उदारतापूर्वक समय प्रदान कर रहे हैं, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय -- धन्‍यवाद. डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह जी.

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह (अमरपाटन) -- माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे चर्चा के लिए समय दिया, मैं आपको धन्‍यवाद देता हॅूं. मैं मांग संख्‍या 022 के विरोध में और कटौती प्रस्‍ताव के पक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हॅूं. यह विभाग केवल सड़क, भवन या कॉलोनियों का नहीं है. यह तय करता है कि प्रदेश के हमारे जो शहर हैं, यह नियोजित विकास के उदाहरण बनेंगे या अव्‍यवस्‍था के शिकार बनेंगे. यह बहुत बड़ा विषय है लेकिन चूंकि हमारे विद्वान साथी श्री जयवर्द्धन सिंह जी ने इस पर बहुत ही गहराई से और विस्‍तार से अपनी बातें रखीं. सब चीजें सामने आयीं. लेकिन 3-4 बिन्‍दुओं में मैं अवश्‍य अपनी बात रखना चाहूंगा. यह जो मास्‍टर प्‍लान है, इस पर कुछ लोगों ने इसकी चर्चा की. चूंकि मैं भी इस विभाग का मंत्री रहा हॅूं इसलिए शायद यह समाचीन होगा कि मैं मास्‍टर प्‍लान के बारे में भी कुछ बोलूं. आपका नगर निगम जो मंजूरी देता है, आप नगर पालिकाओं की बात छोड़ दीजिए, जो बडे़-बडे़ 5-6 नगर निगम हैं, वह मंजूरियों के पश्‍चात कम्‍प्‍लीशन सर्टिफिकेट का जो मामला है, वह है.  तीसरा बात यह है कि इस पर सीएजी रिपोर्ट आयी. यह रिपोर्ट पिछले वर्षों की है और एक वर्ष उस बीच में आपकी सरकार नहीं थी लेकिन दो वर्ष आपकी सरकार थी. वह रिपोर्ट आज आयी है. पब्‍लिक ट्रांसपोर्ट है. मैं अपने क्षेत्र की 2-4 बातें रखूंगा, इससे ज्‍यादा नहीं बोलूंगा. माननीय कैलाश जी बीच में बाहर चले गए थे. मुझे लगा कि मुझे बोलने का मौका मिला है, जब वे सदन में नहीं हैं, तो आनंद ही नहीं आएगा.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- आपके कारण ही मैं अधूरा काम छोड़कर आया हॅूं.

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- माननीय सभापति महोदय, पर यह आनंद विभाग कहां है ? यह तो बता दीजिए. हम लोग समझ ही नहीं पाए. आनंद विभाग का 16 करोड़ कहां जा रहा है ? खैर, वह दूसरी बात है. मैं जब वहां आसंदी पर बैठा था, देखिए हमको सबसे सीखना चाहिए. हमें हमेशा विद्यार्थी बने रहना चाहिए. पूर्ण ज्ञान किसी को नहीं होता है. यहां तक कि हमारे शास्‍त्रों में कहा गया है कि पशु और पक्षियों से भी सीखना चाहिए. मैं जब आसंदी में बैठा था, तो मुझे माननीय भंवर सिंह शेखावत जी की बात याद आ गई. उनकी चीनी कुत्‍ते की बात याद आ गई. चीनी कुत्‍ते ने बड़ा हंगामा बरपाया था पूरे सदन में.  मेरी नजर माननीय कैलाश जी की तरफ गई. माननीय कैलाश जी आप बुरा मत मानिएगा. यह लोकोत्‍तियां हैं. पांच मिनट की इन्होंने नींद ली, जिसे झपकी कहते हैं, यह स्वास्थ्य तथा दिमाग के लिये अच्छा है. अपने यहां कहा भी जाता है कि स्वान निद्रा बगुल ध्याना, काग चेष्टा.

          सभापति महोदयमाननीय कैलाश जी इस तरह से चिन्तन करते हैं, बहुत वरिष्ठ तथा अनुभवी हैं, वह चिन्तन में चले जाते हैं.

          राजेन्द्र कुमार सिंह सभापति महोदय, मैं बहुत गहराई से देख रहा था, क्योंकि यह सबके प्रिय हैं. सभापति जी मास्टर प्लान के संबंध में मैं बोलूंगा. भोपाल का मास्टर प्लान विशेषकर पिछला मास्टर प्लान जो लीगली रूप से लागू हुआ.

          5.46 बजे {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए}

            अध्यक्ष महोदय, जो आज भी प्रचलित है. वह 1995 में बना था. अभी हमारी प्रदेश की राजधानी मास्टर प्लान का इंतजार तीस वर्षों से कर रही है. यहां का मास्टर प्लान नहीं बना है. एक प्रयास हुआ बीच में प्रारूप भी भोपाल के मास्टर प्लान का आया उसके बाद उसको फिर से ठंडे बस्ते में डाल दिया गया. अब किसे वाणिज्यिक करें, किसे हाऊजिंग करें, किसे ग्रीन बनायें ? तमाम तरह की चर्चा एवं परिचर्चाएं, लेकिन यह एक संदेह को जन्म देता है. बिना मास्टर प्लान के शहर का विकास संभव नहीं है, शहर का आप फैलाव कह सकते हो, लेकिन विकास नहीं होता है. मैं सीएजी की रिपोर्ट की बात कर रहा था. पांच नगर निगमों का सीएजी ने हवाला दिया है, आज ही अखबारों में छपा है. मैंने सवेरे सवेरे देखा उसमें चालीस-पचास हजार मंजूरियों का जिक्र है कि मंजूरियां दी गई हैं. लेकिन कम्पलीशियन सर्टीफिकेट मात्र तीन का सीएजी की रिपोर्ट में उल्लेख है, यह बड़ी चिन्ता की बात है. किसी ने मंजूरी ली है तो कम्पलीशियन क्यों नहीं हो रहा है ? यह संदेह को जन्म देता है. मैंने सीएजी रिपोर्ट का जिक्र किया शुक्रवार को भी एक सीएजी रिपोर्ट का हवाला दिया था पीएसी के बारे में उसकी विश्वसनीयता और कार्य प्रणाली, तमाम चीजें वह भी सीएजी रिपोर्ट में छप गया. तमाम जिसे डाईटमेंट कहते हैं यह सीएजी रिपोर्ट में जो हमारी पीएसी हमारा प्रीमियर इंस्टीट्यूशन है जहां पर भर्तियां होती हैं उसके बारे में कहा गया है.

            अध्यक्ष महोदय हम मेट्रो तो बना रहे हैं भोपाल तथा इन्दौर में भी शुरू हो गई है. यहां पर भी शुरू है, बहुत ही छोटे से क्षेत्र में. एक दिन मैं अखबारों में पढ़ रहा था कि किसी पत्रकार साथी को सूझा कि देखें कि मेट्रो कहां कहां पर चलती है, कितने रफ्तार से चलती है ? वह डी.व्ही के पास में वह खड़े हो गये जब मेट्रो वहां पर आयी तो इन्होंने सायकिल से एक व्यक्ति को दौड़ा दिया रानी कमलापति स्टेशन की तरफ अब आप विश्वास नहीं करेंगे आपने शायद वह क्लिप नहीं देखी हो, वह सायकिल से पहले पहुंच गया, इनकी मेट्रो ट्रेन बाद में पहुंची. यह विषय नहीं है, विस्तार तो आगे करेंगे ही आगे सब उपयोगी चीजें हैं. लेकिन भोपाल में जहां पर आवश्यकता है वहां पर लाईने नहीं जा रही हैं, यह समझ से परे है. पब्लिक ट्रांसपोर्ट का, शहरी ट्रांसपोर्ट का एक हिस्सा है, इसको कनेक्ट करने के लिये, क्योंकि मेट्रो के स्टेशन तो सीमित होते हैं. वहां से जो यात्री उतरते हैं उनको अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिये बसों की जरूरत पड़ती है. यही हमने मुम्बई में भी देखा है. विदेश में लंदन में देखा है, मास्को तथा न्यूयार्क, टोक्यो में भी देखा, सब जगहों पर देखा. हम जहां पर रहा करते थे कुछ सालों के लिये पढ़ते थे टोरंटों में वहां से हम बस से अपनी जगहों पर जाते थे. मेट्रो से उतरकर बस में जाते थे हम वहां से दरवाजे पर पहुंच जाते थे, ये भी आपको पब्लिक ट्रांसपोर्ट में जोड़ना होगा, ये बहुत जरूरी है. मुझे मालूम है कि मुख्‍यमंत्री जी इस बात को लेकर बहुत चिंतित है. लेकिन उनका जो कान्‍सेप्‍ट है वह रूरल ट्रांसपोर्ट  के लिए है, उसमें बाद में आउंगा. अध्‍यक्ष महोदय, बजट का आकार तो बढ़ा है. 14 हजार 500 करोड़ रुपए, वर्ष 2025-26 से, इस साल 21 हजार 562 करोड़ रुपए काफी वृद्धि हुई, उल्‍लेखनीय वृद्धि, लेकिन इसमें छिपा हुआ मामला है सिंहस्‍थ का और सिंहस्‍थ अगर नहीं होता जिसके लिए काफी बड़ा आवंटन है, तीन हजार करोड़ का. अगर वह नहीं होता तो इसका आकार इतना बड़ा नहीं होता और इतना आकर्षक ये बजट नहीं दिखता. लेकिन जो भी आप मानते हैं, मंत्री जी वह सही तरीके से खर्च हो, उस व्‍यक्ति तक लाभ पहुंच, जिसके लिए हम यहां सदन में बैठकर बनाते हैं. इसका दुष्‍परिणाम क्‍या होता अगर मास्‍टर प्‍लान न होता तो यह मैं बताता हूं, भीषण ट्रेफिक जाम शुरू हो जाते हैं, हर मॉनसून में जल भराव कहीं न कहीं शिकायत आती है, अवैध कॉलोनियों का विस्‍तार, हर एक क्षेत्रों में लगातार अतिक्रमण और नागरिक सुविधाओं का आभाव. आज की स्थिति यह है कि आवासीय क्षेत्रों में व्‍यवसायिक गतिविधियां भी चल रही हैं. औद्योगिक क्षेत्रों के पास घनी बस्तियां बस रही हैं. खुल जगह झील इत्‍यादि वाटर बॉडी धीरे धीरे कम पड़ रहे हैं, सिकुड़ रहे हैं. ये विकास नहीं, ये योजना विहीन विस्‍तार है. मैं यह कहना चाहूंगा.

          अध्‍यक्ष जी, अब थोड़ा स्‍मार्ट सिटी के बारे में कह दूं, इसकी भी बहुत जोर-शोर से घोषणा हुई. दिल्‍ली से माननीय प्रधानमंत्री जी ने की, राशियां भी आईं, लेकिन क्‍या इसका सदुपयोग हो रहा है, जो हमारा टारगेट है क्‍या उस दिशा में पैसा जा रहा है, सिर्फ इमारतें खड़ी कर रहे हैं. हम सतना का उदाहरण देते हैं, पूरा शहर एक तो इनकी जो पेयजल वाली स्‍कीम अमृत योजना है, उसमें पूरा सतना शहर खोदा हुआ पड़ा हुआ है और वहां पर जो स्‍मार्ट सिटी के तहत विकास हुआ है, लोगों में बड़ी नाराजगी है, लोगों की जरूरतों का ध्‍यान नहीं रखा गया है, स्‍मार्ट सिटी के कान्‍सेप्‍ट में कुछ न कुछ सुधार करना पड़ेगा, पुनर्विचार करना पड़ेगा, इसमें बहुत बड़ी राशि आती है, आप खर्च करते हैं, इसका सही उपयोग हो और सही निर्माण हो इस पर ताकि लोगों को सुविधा मिले.

          अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी ने मेट्रोपोलिटन डेव्‍हलपमेंट एरिया कॉन्‍सेप्‍ट के बारे में कहा था, बहुत अच्‍छी बात है उनके ध्‍यान में उज्‍जैन, इंदौर, देवास तो हमेशा ही रहता है, मैं तो चाहूंगा कि भोपाल को भी मेट्रोपोलिटन सिटी बनाए, ग्‍वालियर को भी बना दें.

          अध्‍यक्ष महोदय ग्‍वालियर और जबलपुर भी है, आपने शायद राज्‍यपाल जी का अभिभाषण नहीं पढ़ा.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह (xx) खैर. अध्‍यक्ष जी, ये हमारे जो निकाय हैं, इनके जो मौलिक अधिकार हैं, जो 74 वें संविधान संशोधन ने इनको प्रदत्‍त किए थे, उनका उपयोग करने दीजिए, उनको शक्ति संपन्‍न बनाइए. हर  छोटी छोटी चीजें के लिए ये भोपाल की तरफ देखते रहते हैं, इनके पास धन का अभाव है. हमारे कोई मित्र अभी कह रहे थे कि पहले तन्‍ख्‍वाहें नहीं मिलती थीं, अब समय पर मिल जाती है. तन्‍ख्‍वाहें की भी इसी तरह से समस्‍या है.

          अध्‍यक्ष महोदय मूल बातें तो आ ही गई.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह अध्‍यक्ष जी, अगर आपकी अनुमति हो तो अपने क्षेत्र की भी कुछ बातें कर लूं.

          अध्‍यक्ष महोदय कर लीजिए.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह अध्‍यक्ष जी, हमारे क्षेत्र में दो नगर परिषद हैं, एक रामनगर है और एक अमरपाटन है. यहां भीषण जल संकट रहता है. रामनगर विस्‍तापित ग्राम हैं, जहां 14-15 ग्राम के लोग जो बाण सागर बांध से डूबे थे, विस्‍थापित हुए थे, वह वहां पर आकर बसे हैं, इनके प्रति हमारी विशेष जवाबदेही होनी चाहिए. वर्ष 2003 में एक पेयजल योजना बाण सागर बांध से ही मंजूर हुई थी, लेकिन तत्‍पश्‍चात् उसका जो क्रियान्‍वयन हुआ, उसका निर्माण इतना घटिया हुआ है कि पाईप सब जमीन के ऊपर थे, 12 किलोमीटर से वह वहां तक आती है, पाईप सब जमीन के ऊपर थे,  वह 12 किलोमीटर से वहां तक आती है और रास्‍ते में जिसके भी खेत पड़‍ते हैं, जैसे अपने यहां छोटी लाईन वाली रेल गाड़ी चलती थी, लोग उतर जाते थे, लघुशंका भी कर आते थे और फिर बैठ जाते थे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- अब वह बंद हो गई है, बड़ी लार्इन शुरू हो गई है.

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- बड़ी लाईन शुरू हो गई है, हम बस स्‍मरण दिला रहे हैं, क्‍योंकि इतिहास भी याद रखना चाहिए. अब उसको किसान लोग जगह-जगह फोड़ लेते हैं और खेत सींचतें हैं और नगर के लोग इसी तरह बैठे रहते हैं, बहरहाल मेरा यह सुझाव है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- छोटी गाड़ी का भी अपना आनंद था, उसमें छत पर बैठकर जो आनंद आता था. (हंसी)

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, आपने आनंद लिया है. (हंसी)

          अध्‍यक्ष महोदय -- हां, बिल्‍कुल क्‍यों नहीं (हंसी)

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- हम लोग उससे चूक गये हैं, खैर इनका आनंद विभाग भी है तो इनके आनंद विभाग से कुछ तो लेंगे. मेरा प्रस्‍ताव यह है कि वहीं से जो आपकी घर-घर नल जल योजना है, एडमिनिस्ट्रेटिव डिपार्टमेंट हमारा जल निगम है, वहीं से जल निगम की पाइपलाईन गुजरती है, तो क्‍यों नहीं माननीय मंत्री जी बात करके, आप संबंधित मंत्री से बात करके, वह पानी अगर बाण सागर का है, सिंचाई विभाग का है और आप उनसे बात करके यहां राम नगर के लिये टायअप करा दो, तो यह जो बोर वहां पर सूख जाते हैं, अभी से वहां संकट है और दो तीन दिन में पानी अभी दिया जा रहा है और अभी तो फरवरी का महीना है, एक तो मैं उसको टायअप कराने की मांग करता हूं. इसी तरह से अमरपाटन नगरपरिषद का भी हाल है, वहां तो कोई दूसरी सप्‍लाई नहीं है, वहां सिर्फ बोरों से पानी आता है, आबादी बहुत बढ़ गई है, जल स्‍तर नीचा चला जा रहा है और नीचे से जल दोहन मैं समझता हूं कि हमको रोकना पड़ेगा, मैं सिंचाई का ही देख रहा था,  वहां अभी भी 70 प्रतिशत पानी सिंचाई में ट्यूबवेल से दिया जाता है और यह वाह वाही अपनी लूटते रहते हैं, वॉटर बॉडीज 27-28 प्रतिशत ही है, यह नीचे का जो जल है, वह हमको रोक कर रखना पड़ेगा या हो सकता है कि विज्ञान इतनी तरक्‍की कर ले कि ऐसे केप्‍सूल वगैरह आ जाये कि जल की कम जरूरत पडे़ या न पड़े, यह भी हो सकता है, जब ए.आई. आ सकता है तो कुछ भी आ सकता है, तो यह अमरपाटन को भी वहीं से जल निगम की लाईन शहर से ही जाती है, तो वहां से उनको दिलवा दीजिये, यह आपसे मेरा आग्रह है. (श्री कैलाश‍ विजयवर्गीय, संसदीय कार्य मंत्री जी ओर देखकर) आप आज हमसे कुछ नाराज हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बात मेरे क्षेत्र में दो बड़े बड़े गांव हैं, वहां की जनता बड़ी लालाहित है कि हमें नगर परिषद बनाया जाये, एक ग्राम मुकुंदपुर है, ऐतिहासिक गांव है, वहां पर कम से कम 800 साल, 900 साल अकबर द्वितीय   किसी कारण से रहा है और वहां जगन्‍नाथ स्‍वामी जी का मंदिर है और बहुत बड़ी दरगाह है. वह  गंगा जमुनी संस्‍कृति का बहुत बड़ा उदाहरण है, उनकी मांग है कि हमको नगर परिषद बनाया जाये, ग्राम मुकुंदपुर को कृपा करके नगर परिषद बनाने की दिशा में कार्य करें और उसमें आप पास के गांव हैं, धोबहट है, आमिन है, परिसया है, इन्‍हें मिलाकर कुल आपकी आबादी का जो कोटा है, वह पूरा होता है. इसी तरह हमारे क्षेत्र का सबसे बड़ा गांव ताला है, बहुत बड़ा गांव है, वहां की आबादी करीब दस हजार है, वहां के लोग भी चाह रहे हैं कि उसको आप नगर परिषद बना दें और ताला में हमारा भड़रा है, बिछिया है, तीन चार गांव हैं, उनको जोड़ सकते हैं, तो मेरी आपसे माननीय यह मांगें हैं. (श्री कैलाश‍ विजयवर्गीय, संसदीय कार्य मंत्री जी ओर देखकर) आज लगता है, आप मेहरबान नहीं हैं, कम मेहरबान है, वैसे भी अब क्‍या बताया जाये, दरबार से और आपकी दोनों की मित्रता जो हो गई है, कल से हम लोग देख रहे हैं. बहरहाल मैं अपनी बात खत्‍म करने से पहले यह जरूर कहूंगा,

          ''सच्‍चाई छिप नहीं सकती है, बनावट के उसूलों से

        और खुशबू आ नहीं सकती है कागज के फूलों से''

          आपने बोलने के लिये मुझे अवसर दिया है, आपका बहुत बहुत धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय -- (श्री ओमप्रकाश सखलेचा,सदस्‍य द्वारा अपने आसन से कहने पर) एक मिनट मैंने श्री उमंग सिंघार जी को अनुमति दी है, आप बोलो मत आप याद करके रखो. (श्री ओमप्रकाश सखलेचा,सदस्‍य द्वारा पुन: अपने आसन से कहने पर) मैंने उमंग जी को आपसे पहले पुकार लिया था.                                     

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा - अध्यक्ष महोदय, विषय छूट गया था. 7 में से 6 नगर पालिकाओं में पिछले पांच साल में पेयजल की व्यवस्था नहीं है उन ठेकेदारों के काम अपूर्ण रहते हैं और हर साल एक्सटेंशन भोपाल से मेनेज हो जाता है उस पर थोड़ा गंभीरता से मेरा आग्रह है क्योंकि सभी नगर पंचायतें  बहुत परेशान हैं पेयजल के पानी का वहां तक न पहुंचने के लिये आज सभापति महोदय का दबाव ज्यादा था इसलिये विषय छूट गया. इस पर आप गंभीरता से चिंतन करियेगा.

          डॉ.सीतासरन शर्मा - माननीय मंत्री जी से मेरा आग्रह है कि टेंकर से गर्मी आ रही है तो टेंकर से पानी देने का यहां से प्रतिबंध कर दिया है आपसे अनुरोध है कि इस प्रतिबंध को हटवाएं.

          नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) - माननीय अध्यक्ष महोदय,माननीय नगरीय प्रशासन मंत्री जी का हम पिछले दो साल से सुन रहे हैं कि मास्टर प्लान आयेगा मास्टर प्लान आयेगा चाहे भोपाल का,इन्दौर का. आप कहते हैं कि इन्दौर मेरा प्रिय मेरा भी प्रिय है आप सत्ता में बैठे हो मास्टर प्लान कहां रास्ते में रुक गया. कौन सी बैलगाड़ी में आ रहा है जो सरकार के अनुमोदन तक नहीं पहुंचा.क्या इन्दौर के लोगों को स्वच्छ हवा नहीं मिलनी चाहिये क्या इन्दौर के लोगों को सड़कें साफ नहीं मिलनी चाहिये क्या इन्दौर के लोगों को ड्रेनेज लाईन प्रापर नहीं होना चाहिये. मैं समझता हूं कि हमारे विद्वान साथियों ने सब बातें बता दीं या तो आप यह बता दीजिये कि 2047 में हम मास्टर प्लान बनाएंगे तो तब तक हम चुप बैठ जाएं.अवैध कालोनियां बन रही हैं लेकिन मैं सुझावात्मक कहना चाहता हूं कि हर शहर के मास्टर प्लान समय पर आएं न्याय होना चाहिये.उम्मीद करूंगा कि माननीय संसदीय मंत्री जी का भाषण नहीं रहेगा इस बार वह एक महिने में कराकर देंगे क्योंकि इन्होंने जून तक बोला था अगला जून आ गया धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदय - इस बार आपका भाषण काउंसलिंग जैसा होना चाहिये.सभी सदस्यों को विषय खुल जाए पूरी तरह. माननीय राजेन्द्र कुमार सिंह जी जब बोल रहे थे तो उन्होंने कहा था कि बजट भाषण की कापी नहीं दी गई तो मैं उसको विलोपित कर रहा हूं क्योंकि बजट प्रस्तुत करने के तुरंत बाद भाषण की कापी,मेरा बजट और मुख्य फोकस बजट का, वह सबको उपलब्ध कराई गई है आपके ध्यान में रहे. माननीय मंत्री जी.

          डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह - परंपरा का उल्लेख कर रहा था जो पहले यहां होती थीं मैंने बीसों साल से देखा. वित्त मंत्री अपना पढ़ने लगते थे या राज्यपाल का अभिभाषण  होता था वहां से मिल जाता था जो चाहते थे.

          अध्यक्ष महोदय - इस बार सब टेबलेट में दिया गया.

          श्री गोविन्द सिंह राजपूत,मंत्री,खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति -अध्यक्ष महोदय, आपने लेपटाप दिया है. सुन्दर लेपटाप राजेन्द्र भैया के यहां  पहुंचा होगा और आप तो आधुनिक विदेशों में पढ़े हैं.

          अध्यक्ष महोदय - यह चर्चा का विषय नहीं है व्यवस्था का विषय है व्यवस्था आ गई है.

          श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - वह लेपटाप नहीं है टेबलेट है.

          अध्यक्ष महोदय - आप दोनों एक दूसरे से मिलकर बता दें कि क्या कहते हैं.

          संसदीय कार्य मंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय) - अधयक्ष महोदय, राजेन्द्र सिंह जी के बाद बोलना बड़ा मुश्किल होता है क्योंकि वह इतनी धीमी गति से ऐसे तीर चलाते हैं कि समझ में नहीं आता कि लगा कहां तीर.वह बहुत ब्रिलियेंट हैं बहुत समझदार हैं खूब पढ़ते हैं खूब अध्ययन करते हैं आनंद विभाग मेरे पास नहीं है मैं हमेशा आनंद में रहता हूं और सबको आनंद बांटने की कोशिश करता हूं तो वह समझ रहे हैं कि आनंद मेरे पास है.

          डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह - सबको बांटिये आप अकेले करके बैठे हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय - मैं तो बांटते रहता हूं कहां पेटेंट कराया. यह लो आपको एक परोस देता हूं. आपने बहुत पुराना शेर सुनाया कि कागज के फूलों से खुशबू नहीं आती. शेखावत जी इसको कभी सुनाया करते थे, जवानी के समय. मैं एक नया शेर गुलजार साहब का सुनाता हूँ. बहुत अच्‍छा शेर है. आपको समर्पित कर रहा हूँ क्‍योंकि आपने मेरे बजट पर भाषण की शुरुआत आपने श्‍वान निंद्रा से की, जो आपने मेरा सम्‍मान किया..(हंसी)..

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, हमारी यह मंशा नहीं थी. हम तो कह रहे थे कि यहां सदन में जो कबूतर उड़ रहा है, वह भी हमें कुछ सिखाने के लिए आया है. हमें तो पशु-पक्षियों तक से सीखना चाहिए. सीखने में क्‍या हर्ज है. अच्‍छा चलिए बकुल ध्‍यानम् हम सीख लेते हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे पता नहीं है, इतने समय से, इतने साल से सदन चल रहा है. आज ही कबूतर क्‍यों आया, यह दिल्‍ली से तो नहीं आया...(हंसी)..मैंने पहली बार अंदर कबूतर देखा है.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- कबूतर तो शांति का संदेश लेकर आता है. यह शांति का संदेश ही है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने एक बहुत पुराना शेर सुनाया, मैं बहुत नया शेर आपको सुना देता हूँ. आपने जिस प्रकार मेरा स्‍वागत किया, अपने भाषण में, '' शीशे की अदालत में पत्‍थर की गवाही, कातिल ही लूटेरा है और कातिल ही सिपाही''.

          अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विभाग में भाषण की शुरुआत मेरे मित्र, मेरे छोटे भाई आशीष गोविन्‍द शर्मा ने की. फिर जयवर्द्धन सिंह जी ने बहुत अच्‍छे-अच्‍छे सुझाव दिए. मैं आपको धन्‍यवाद देता हूँ. उमाकान्‍त शर्मा जी तो मिसाइल हैं, अनगाइडेड (हंसी). किधर भी गिर जाएं, क्‍योंकि आजकल विश्‍व में मिसाइलों का दौर चल रहा है. कहीं यूक्रेन से आ रही हैं. कहीं रसिया से आ रही हैं. विधान सभा में भी एक जोरदार मिसाइल हैं, उमाकान्‍त शर्मा जी, जरा तालियां बजाकर इनका स्‍वागत करें. (मेजों की थपथपाहट). भाई राजेश वर्मा जी, श्रीमती ललिता जी, अध्‍यक्ष महोदय, ललिता जी जब भाषण दे रही थी, तब मेरी थोड़ी सी झपकी लग गई थी, यह बात सही है, क्‍योंकि ऐसा लग रहा था कि मां लोरी सुना रही है..(हंसी).. पर मुझे उठाने के लिए भी राधा रानी आईं, राधा रानी अभी सदन में नहीं हैं, राधा रानी ने मुझे उठाया. अध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है. श्री रामनिवास शाह जी, श्री दिलीप परिहार जी, श्री ओमप्रकाश सखलेचा जी, श्री आतिफ अकील साहब, श्री लखन घनघोरिया जी, श्री दिनेश गुर्जर जी, श्रीमती सेना महेश पटेल जी और बहुत ही वरिष्‍ठ हमारे मार्गदर्शक डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह जी, जो आनन्‍द, आनन्‍द विभाग करते रहे. मेरा विभाग नहीं है मालिक. ये मुख्‍यमंत्री जी के पास है और इसलिए प्रदेश में आनन्‍द ही आनन्‍द है क्‍योंकि मुख्‍यमंत्री जी के पास आनन्‍द विभाग है. मेरे पास आनन्‍द विभाग नहीं है.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- जिसके पास आनन्‍द विभाग रहता है, वही मुख्‍यमंत्री बनता है, खिसकते जाइये थोड़ा सा..

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- आपकी सद्भावना मेरे साथ है, इसलिए मैं आपको धन्‍यवाद देता हूँ. अध्‍यक्ष महोदय, हमारे देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री एक बात हमेशा कहते हैं, सबसे कहते हैं और बार-बार कहते हैं कि वर्ष 2047 में, जब देश अपनी स्‍वतंत्रता के सौ साल पूरे करे तो भारत एक विकसित राष्‍ट्र बने, एक आत्‍मनिर्भर राष्‍ट्र बने. इसीलिए मध्‍यप्रदेश ने भी उनके मार्गदर्शन में माननीय मोहन जी के नेतृत्‍व में हम लोग मध्‍यप्रदेश को भी उसी दिशा में ले जा रहे हैं. हमारा विश्‍वास है, रिफॉर्म पर, परफॉर्म पर और ट्रांसफॉर्म पर. अध्‍यक्ष महोदय, ये रिफॉर्म, ट्रांसफॉर्म, यह किसी भी परिवर्तन के लिए बहुत ज्‍यादा जरूरी हैं. जब भी आप विकास की बात करें तो बहुत जरूरी है कि हम आज के विकास के नहीं, कल के विकास के बारे में सोचें. बिल्‍डिंग सिटी फॉर टूमारो, कल का हमारा शहर कैसा हो. और इसीलिए हम मेट्रो भी, मैं यह कह सकता हूँ कि पहले हस्‍ताक्षर मेट्रो पर मेरे थे, जब हमने मेट्रो की कल्‍पना की थी और इसको शहर में चलाने की कोई योजना नहीं थी, शहर को डिसेंट्रलाईज्‍ड करने के लिये भोपाल से विदिशा, भोपाल से होशंगाबाद, भोपाल से रायसेन के लिये, जिससे शहर में घनत्‍व कम हो, इन्‍दौर से देवास, इन्‍दौर से महू, इन्‍दौर से उज्‍जैन के लिए था, पर पता नहीं बीच में आपकी 15 महीने की सरकार आई, उस दिन कमलनाथ जी सदन में बैठे हुए थे, मैं उनके सम्‍मान में कुछ नहीं बोला. आपने योजना बनाई, उद्घाटन कर दिया, भूमिपूजन कर दिया और काम भी चालू हो गया. मैं यह किसी के ऊपर दोषारोपण नहीं करता, पर इस योजना को फिर से हमें दूर तक ले जाना पड़ेगा. आज की तारीख में अभी आपने मेट्रो की बात की थी. 10 वर्ष बाद भी यह मेट्रो ऐसे ही चलेगी, जब तक कि इसके विस्‍तार का दूसरा चरण नहीं आयेगा, तब तक मेट्रो की उपयोगिता नहीं है, मैं किसी को दोष नहीं देता. क्‍योंकि आप इधर थे, हम उधर थे, हम उधर थे, आप इधर थे, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है, पर कोई योजना जनता के लिए लाभदायी हो, यह बहुत ज्‍यादा जरूरी है. मैं इस सदन को विश्‍वास दिलाता हूँ कि मेट्रो इन्‍दौर के लिए, भोपाल के लिए नहीं, प्रदेश में हर शहर के लिए हम उपयोगी बनाएंगे और अच्‍छा प्‍लान बनाकर करेंगे. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन के माध्‍यम से, अर्बन इकोनॉमिक ग्रोथ कोई भी शहर में होता है, तो एक आर्थिक केन्‍द्र होता है, एक आर्थिक हब होता है, क्‍योंकि व्‍यापार-व्‍यवसाय वहीं होता है और गांव के लोग वहीं पर आते हैं. प्रधानमंत्री जी ने इसीलिये चिन्‍ता की कि आज हमारे प्रदेश की पॉपुलेशन 30 से 32 प्रतिशत है, वर्ष 2047 में लगभग 55 प्रतिशत हमारी अर्बन पॉपुलेशन होगी और जब अर्बन पॉपुलेशन 55 प्रतिशत होगी, तो हमें शहरों के विस्‍तार में, अब आप पुरानी सिटी में कोई विस्‍तार नहीं कर सकते, आपको नये शहरों के बारे में सोचना ही पड़ेगा और अब लैण्‍ड एक्‍वीजिशन करना इतना मुश्किल हो गया है, बहुत मुश्किल है कि आप कोई सिस्‍टर सिटी बना ले और इसलिए बहुत जरूरी है कि हम अच्‍छा ट्रांसपोर्टेशन सिस्‍टम लाकर दो शहरों के बीच फास्‍ट यातायात चलायें, पॉल्‍युशन विहीन यातायात चलायें. यह बहुत जरूरी है और इसके लिए हमने इस बजट में पूरे प्रावधान भी किये हैं. मेट्रो का भी किया है और बसेस के बारे में किया है, मैं आपको आगे बताऊंगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, टेक्‍नोलॉजी होना भी बहुत जरूरी है. आजकल टेक्‍नोलॉजी का युग है. जयवर्द्धन जी ने भी अपने भाषण में कहा है, मैं उनको बताऊँगा कि हमने टेक्‍नोलॉजी का उपयोग करके हमें पानी के ढाई लाख मिले हैं, उनमें से 90 हजार लीकेज बन्‍द भी किये हैं, यह सब लेटेस्‍ट टेक्‍नोलॉजी से ही संभव हो पाया है. क्‍लाइमेट स्‍मार्ट, आज शहर रहने लायक बनें और उसके लिये यह बहुत जरूरी है कि हमें उसके बारे में चिन्‍ता करनी पड़ेगी, जैसे हम इन्‍दौर में सफाई को संस्‍कार में लाये हैं, ऐसे सारे प्रदेश में हमको संस्‍कार में लाना पड़ेगा. (मेजों की थपथपाहट) वृक्षारोपण और शुद्ध वायु के लिये शहर में हमें जो भी करना पड़े, उसके लिए हमें संस्‍कार में लाना पड़ेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, वृक्षारोपण पर, मैं शेखावत जी को धन्‍यवाद देता हूँ कि उन्‍होंने बताया कि पितृ पर्वत में 4 लाख पेड़ लगे हुए हैं, एक रेवती रेंज है, कभी आप लोग इन्‍दौर से उज्‍जैन जायें, तो यह लेफ्ट हैण्‍ड में पड़ता है, सांवेर रोड में हमारा अर्ध सैनिक बल बीएसएफ का रेवती रेंज है, वह बड़ी रेंज है, तो आप बीएसएफ की रेंज में जाकर देखें, वहां हमने एक दिन में 12 लाख 40 हजार पेड़ लगाये थे और मुझे यह कहते हुए गर्व है कि दो वर्ष हो गए हैं, वहां पूरे 12 लाख 40 हजार पेड़ जिन्‍दा हैं. (मेजों की थपथपाहट) ये पेड़ इन्‍दौर की जनता ने लगाये थे, हम उनको बिल्‍कुल बच्‍चों की तरह पालते हैं, क्‍योंकि पेड़ों को अगर आप लगाते हैं, तो अपने बच्‍चों की तरह पालेंगे. जैसे देश के प्रधानमंत्री जी ने कहा कि 'एक पेड़ मां के नाम पर' लगाएं, यह भावनात्‍मक जुड़ाव है. जब हम मां के नाम से, बच्‍चों के नाम से पेड़ लगायेंगे, हमने पितृ पर्वत पर, जिसका कल शेखावत जी ने जिक्र किया, 4 लाख पेड़ अपने पूर्वजों के नाम पर लगाये थे, वे 4 लाख के 4 लाख पेड़ आज जिंदा है क्‍योंकि वहां पर इंदौर शहर के लोगों का भावनात्‍म जुड़ाव है, हमें इसे संस्‍कार में लाना होगा कि पेड़ सिर्फ फोटो खिंचवाने की जगह नहीं है कि वृक्षारोपण किया, पेड़ लगाया ऊपर देख रहे हैं, फोटो खिंचवा रहे हैं, तू इधर हट जा, उधर हट जा, ऐसे फोटो खिंचवाते हैं, दूसरे दिन पेपर में आ जाता है, वे भी चले जाते हैं और पेड़ भी गायब हो जाता है. पेड़ अगर आप लगायें, मैं, हमेशा सभी से एक ही बात कहता हूं कि एक पेड़ लगाना, एक शिव मंदिर बनाने के बराबर है. शिवजी नीलकंठ हैं, वे ज़हर पी जाते हैं, पेड़ भी ज़हर पीकर ऑक्‍सीजन अमृत छोड़ता है. आप शिव मंदिर में एक लोटा जल चढ़ाते हैं तो एक लोटा जल पेड़ में भी चढ़ायें, वह शिव मंदिर से कम नहीं है और हमें यह संस्‍कार में लाना होगा और इसलिए मैंने कहा हमें Climate-smart cities बनानी है. यह हम सभी की जवाबदारी है, यह कार्य अकेले नगर निगम कर सकती है, बिल्‍कुल संभव नहीं है. इसके लिए जनप्रतिनिधि, जन-जागरण, सामाजिक संगठन सभी को आगे आना पड़ेगा, तब जाकर होगा. नहीं तो आप दिल्‍ली का हाल देखिये, हम जब ठंड में वहां जाते हैं, गले में इंफेक्‍शन लेकर आते हैं, दिल्‍ली कटोरे की तरह है, उसका बहुत वैज्ञानिकों से प‍रीक्षण करवा लिया गया, आज के समय में दिल्‍ली का वातावरण सुधारना सभी के लिए चुनौती बन गया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश के किसी भी शहर की ऐसी हालात न हो, इसके लिए हम सभी को मिलकर शहर में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलानी होगी और ईमानदारी से उसका पालन करना चाहिए. मैं तो कर रहा हूं और आप सभी से अपेक्षा है कि आप लोग भी भले 100-200 ही पेड़ लगायें, परंतु इस संकल्‍प के साथ लगायें कि एक भी पेड़ मरेगा नहीं और यदि कोई पेड़ मरा तो उसके स्‍थान पर दूसरा पेड़ लगायेंगे और पूरे के पूरे पेड़ जिंदा रहें, यह संकल्‍प यदि कोई व्‍यक्ति कर ले तो मैं समझता हूं कि जो हमारी Climate-smart cities बनाने की सोच, हमारे प्रधानमंत्री जी का जो संदेश है, हम उसे पूरा करने में काफी सफल होंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैंने Economic Growth Hub की बात की है, अभी आपने Metropolitan Area की बात की, Metropolitan Area अभी हमने इंदौर-भोपाल में बनाया है. मैं इस सदन को आश्‍वस्‍त करता हूं कि आने वाले समय में जबलपुर-ग्‍वालियर में भी हमारा काम चल रहा है, उसकी भी Metropolitan Area की घोषणा हम करेंगे और उसके लिए पूरी प्‍लानिंग करेंगे क्‍योंकि जैसा मैंने कहा Cities for Tomorrow कल के लिए हमारे शहर हमें कैसे बनाने हैं, उसके लिए आज हमें कल्‍पना करनी पड़ेगी और और उसकी प्‍लानिंग करनी होगी. Metropolitan Area जैसा इंदौर-भोपाल का बना है, ऐसा जबलपुर-ग्‍वालियर का बनाकर, उस दिशा में हम लोग काम करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय, नये मास्‍टर प्‍लान को लेकर नेता प्रतिपक्ष हमेशा मुझे चिमटी कोढ़ते रहते हैं. मेरे विभाग ने डेढ़ साल पहले उसे बनाकर पूरा कर रखा है और मास्‍टर प्‍लान तैयार है, मुख्‍यमंत्री जी जब भी उसको देखकर और जारी करेंगे, यह मुख्‍यमंत्री जी का अधिकार है, हमारा मास्‍टर प्‍लान पूरी तरह बनकर तैयार है.

          श्री उमंग सिंघार-  अध्‍यक्ष महोदय, डेढ़ साल से मंत्री जी ने कहा कि मेरी तरफ से तैयार है, मुख्‍यमंत्री जी के पास डेढ़ साल से फुरस्‍त नहीं है, इंदौर-भोपाल का मास्‍टर प्‍लान देखने के लिए, यह तो बड़ी विडंबना है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी मेरी 3-4 बार बात हुई है, उन्‍होंने कहा कि हमने जो Metropolitan Area बनाया है, उसको लेकर एक बार फिर से इस मास्‍टर प्‍लान के बारे में हमें रि-कंसीडर करना पड़ेगा, हम एक बार उनकी जो कल्‍पना है, वह देख लें, अगर वे कहेंगे कि इसे फिर से बनाना है, तो उसे    रि-ड्राफ्ट करेंगे, नए तरीके से सोचेंगे. लेकिन हमने पहले ही बनाकर रख दिया है, मुख्‍यमंत्री जी के साथ बैठकर हम इसके बारें में विचार करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय, Integrated Township Policy, पिछली बार हम इसका बिल लाये थे. हमने उसकी पूरी पॉलिसी बना ली है. हमने इसमें Land Poolling का प्रावधान किया है, जिसमें होटल, हॉस्पिटल, ऑफिस, क्‍योंकि वहां रोजगार भी हो, यह बहुत जरूरी है. जैसे मैंने कहा Economic Growth Centre अगर हमें बनाना है तो उस Township की बड़ी अच्‍छी कल्‍पना की गई है. और मेरा दावा है कि एक इंटीग्रेटेड कॉलोनी बनेगी तो पूरे सदन को दिखाने ले जाऊंगा कि आप देखिये. लोग कहते हैं कि अमेरिका में किस प्रकार डेवलपमेंट होता है, इंग्‍लेंड में किस प्रकार डेवलपमेंट होता है. हम मध्‍यप्रदेश में भी इस टाउनशिप के माध्‍यम से ऐसा डेवलपमेंट करके बताएंगे. यह हमारी कल्‍पना है और हमने इसी प्रकार की पॉलिसी बनाई है.

          अध्‍यक्ष महोदय, थ्री टी Transit oriented development, TPS Town planning scheme, TDR Transferable development rights. अध्‍यक्ष महोदय, इसके बारे में अभी चर्चा करूंगा पर जैसे इकोनॉमिक ग्रोथ की बात आई है तो मैं हुकमचंद मिल का जिक्र जरूर करूंगा. अध्‍यक्ष महोदय, मेरे पिताजी ने भी इस मिल में काम किया है. हमारे शेखावत जी के पिताजी ने भी इस मिल में काम किया है. उन्‍होंने स्‍वयं ने भी मिल में काम किया है. हुकमचंद मिल बंद हो गई थी. हमें यह कहते हुए गर्व है कि वहां के मजदूरों ने 35 साल तक आंदोलन चलाया. नगर निगम ने हुकमचंद मिल खरीदी, हमने भी उनकी मदद की और मुझे आज यह कहते हुए गर्व है कि 60 प्रतिशत मजदूरों का पूरा पैसा हमने लौटा दिया है और 40 प्रतिशत अभी बकाया है. हाईकोर्ट के निर्देश पर हम उनका भी पैसा वापस कर देंगे और वहां पर हम कोशिश करेंगे कि इस इंटीग्रेटेड टाउनशिप पॉलिसी को उसको दिखाएं. वह सेन्‍ट्रल इंडिया की एक सबसे अच्‍छी ग्रीन टाउनशिप बने यह हमारी कोशिश है. हम उसको जरूर बताएंगे. टीडीआर पॉलिसी का हमने पोर्टल खोल दिया है. अभी मध्‍यप्रदेश के लिए टीडीआर नया है. परंतु महाराष्‍ट्र में, दक्षिण में इस टीडीआर का बहुत उपयोग हो रहा है. इसलिए अगर हम सड़क चौड़ी करते हैं, किसी का मकान टूटता है तो उसको टीडीआर दे देंगे. वह टीडीआर कहीं पर भी सेल कर सकेगा, क्‍योंकि सरकार के पास अब इतना पैसा नहीं है कि किसी का 50 साल पुराना, 100 साल पुराना बना हुआ मकान अगर सड़क चौड़ी करने के लिए हटाते हैं तो उसको हम मुआवजा दें. इसलिए टीडीआर सिस्‍टम बड़ा सफल है. महाराष्‍ट्र में बहुत सफल है. हमने इंदौर में भी इसकी शुरुआत कर दी है, भोपाल में शुरुआत कर दी है. अन्‍य शहरों में भी हम शुरुआत करने वाले हैं. इसका मार्केट कैसे बने. हमने क्रेडाई के साथ दो बार मीटिंग भी की है और हम सोच रहे हैं कि टीडीआर हम इसे मध्‍यप्रदेश में भी सफल करें.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं सिंहस्‍थ के बारे में ज्‍यादा नहीं बोलूंगा, क्‍योंकि सिंहस्‍थ का बजट इसमें शामिल नहीं है जो 21 हजार करोड़ रुपए जैसा आपने कहा है. वह हमें अभी केन्‍द्र सरकार से भी लाना है. हमने इसकी प्‍लानिंग कर ली है. हमें यह कहते हुए गर्व है कि सिंहस्‍थ को लेकर हमने पूरी प्‍लानिंग कर ली है और लगभग 13 हजार करोड़ रुपए का हमारा बजट बना है. उसमें हमने कुछ काम चालू कर दिया है. इंदौर, उज्‍जैन सिक्‍स लेन रोड, ग्रीन फील्‍ड सिक्‍स लेन रोड भी बनाने का काम भी चालू कर दिया है. ऐसे बहुत सारे काम हमने चालू कर दिये हैं, क्‍योंकि समय बहुत कम है और इसलिए हम भारत सरकार से आग्रह करेंगे कि भारत सरकार इसमें हमारी मदद करेंगी और वह मदद करेगी भी.

          अध्‍यक्ष महोदय. जैसे अभी सेन्‍ट्रल विस्‍टा हम भोपाल में रीडेन्‍सीफिकेशन के लिए बना रहे हैं. यह एक बहुत बड़ा सेंटर बनेगा. हमारा जो पुराना सचिवालय है उसके आसपास की दोनों बिल्डिंग हैं और यह भी हम ग्रीन बिल्डिंग बनाने वाले हैं. इसमें भी हम वह सारी गतिविधियां, वो सारी प्‍लानिंग जो हमने इंटीग्रेटेड टाउनशिप के बारे में सोचा है उसको हम एप्‍लाए करने की कोशिश करेंगे जिससे कि आर्थिक ग्रोथ सेंटर जो हमारी कल्‍पना है कि हर शहर आर्थिक ग्रोथ सेंटर बने. एक एकोनॉमिक इंजन बने. वह इंजन बनाने की हमने प्‍लानिंग की है. टेक्‍नोलॉजी एनेबेल ग्रोथ यह बहुत जरूरी है. मैंने पिछली बार सदन में घोषणा की थी कि 2 हजार वर्ग फीट के जो नक्‍शे हैं वह हम ऑनलाइन 24 घंटे के अंदर दे देंगे. एक बार जो आर्किटेक्‍ट है वह उसको जमा करेगा और उसको डीम्‍ड परमीशन मानकर और यह छोटे लोग जो 2 हजार वर्ग फीट का प्‍लाट बनाते हैं उनको परमीशन मिल रही है. मध्‍यप्रदेश में एक साल में अब तक 27 हजार से ज्‍यादा लोगों को हमने डीम्‍ड परमीशन दे दी है. इसी प्रकार हम बड़े नक्‍शों को भी क्‍योंकि य‍ह सबसे बड़ा आर्थिक लेनदेन का केन्‍द्र है. उसको भी अब ऑनलाइन करने वाले हैं. आर्किटेक्ट जमा करे और लोगों को घर बैठे मिल जाए. फेसलेस नक्शा पास करने की टेक्नॉलॉजी के माध्यम से हमने योजना बनाई है. बड़े बिल्डर भी एबीपास और अलपास के माध्यम से, वो भी हम जल्दी ही करने वाले हैं. अध्यक्ष महोदय, ईवी पॉलिसी, आज सारी दुनिया में पॉल्यूशन की बात हो रही है. मुझे गर्व है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री ने मास ट्रांसपोर्टेशन के लिए हमको 942 ईवी बसें दी हैं जो इंदौर, उज्जैन, देवास,  हम इनका इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ा रहे हैं. सभी जगह पर हम चार्जिंग सिस्टम डेवलप कर रहे हैं.  यह 942 बसें हमारी अरबन ट्रांसपोर्टेशन का काम करेंगी. कुछ सुझाव आए हैं जैसा राजेन्द्र सिंह जी ने भी कहा, ओमप्रकाश सखलेचा जी ने भी कहा, राज्यवर्द्धन जी ने भी कहा. इन सब बसों को मेट्रो से जोड़ना. यह बात सही है कि हमारे प्रदेश में आर्थिक सम्पन्नता के कारण सबसे ज्यादा व्हीकल्स बढ़ते जा रहे हैं. इंदौर एक ऐसा शहर है जो जनसंख्या के मान से देश के अन्दर सर्वाधिक व्हीकल अगर किसी शहर में हैं तो वो इंदौर में हैं. इसलिए ट्रेफिक समस्या हमारे लिए बहुत बड़ी है. हमने देश की अच्छी ट्रेफिक व्यवस्था के लिए काम करने वाली एजेंसियों को बुलाकर एक कांफ्रेंस की थी. कहां पर ब्रिज बनाना है, किस प्रकार से रोड जाम को कम कर सकें इस दिशा में हम काम करने वाले हैं. इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर इन सारे शहरों के लिए हम अच्छी एजेंसी ढूंढ रहे हैं और हम उस दिशा में काम करेंगे.

          अध्यक्ष महोदय, दो नई स्कीम की मैं आज घोषणा कर रहा हूँ. सीएम जनभागीदारी योजना. मैं जब मेयर था मैंने पिछली बार भी कहा था कि मैंने उस जमाने में 36 करोड़ रुपया जनता से लेकर लगभग 150 किलोमीटर सड़कें सीमेंट की बनवाई थीं. जनता से सीमेंट लिया था बाकी सब नगर निगम से लिया था. वर्ष 2003-04 के 36 करोड़ रुपए आज के लगभग पांच गुना हो गए होंगे. अभी सीमेंट की कीमत 250 रुपए  है उस समय 70-80 रुपए कीमत थी. हमने सारी सड़कें बनाईं थीं. हम सीएम जनभागीदारी के माध्यम से जो नगर पालिका, नगर निगम जनभागीदारी से इस प्रकार का कोई सा भी काम करेगी उसको विशेष फंड देंगे. उसी प्रकार बहुत जरूरी है कि हम पर्यावरण की चिंता करें इसीलिए हमने सीएम नगर वन योजना भी चालू की है. यह जरुरी है.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- जनभागीदारी में 75 प्रतिशत होती थी अब आपने जो नई योजना बनाई है इसमें कितना प्रतिशत जनभागीदारी होगा.

          अध्यक्ष महोदय -- मरकाम जी बैठिए, सारा बताया जाएगा.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- हम आपको बताएंगे. हमने अभी योजना बनाई है. मैंने जो किया था वह मैं बता देता हूँ. जो गरीब बस्ती थी उससे हम 25 प्रतिशत लेते थे. जो सम्पन्न, अपर मिडिल क्लास थे उनसे 50 प्रतिशत लेते थे और जो स्लम्स थे उनसे 25 प्रतिशत लेते थे. हम सारे जनप्रतिनिधियों से राय लेंगे. नगर पालिका अध्यक्ष, मेयर से पूछेंगे कि आप किस प्रकार की प्लानिंग जनभागीदारी से करना चाहते हैं. हम अनावश्यक थोपेंगे नहीं. उस नगर की क्षमता के हिसाब से ही करेंगे. मैंने स्मार्ट क्लाइमेट की बात तो कर ही दी है.

          अध्यक्ष महोदय, स्वच्छता में भी मध्यप्रदेश में बहुत काम हुआ है. मुझे आप सबको बताते हुए गर्व है कि स्वच्छता के मामले में मध्यप्रदेश लगातार देश में दूसरे नंबर पर है. हमारे प्रदेश की 8 नगर निगम अलग-अलग क्षेत्रों में नंबर वन आई हैं. जिसमें भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, हमारे लखन भैया चले गये उनका शहर भी है. सबको पुरस्कार मिला है. हमने इस पर काफी काम किया है और भविष्य में भी काम करते रहेंगे.

          अध्यक्ष महोदय, ग्रीन एफएआर इसके बारे में भी हमने प्रावधान किया है. जो अपने प्‍लॉट के अंदर जितनी ज्‍यादा ग्रीनरी करेगा, जो बिल्डिंग के अंदर जितनी ग्रीन बिल्डिंग बनाएगा, हम उसका एफएआर भी बड़ा कर देंगे. यह बहुत महत्‍वपूर्ण और शहर के पॉल्‍यूशन को रोकने के लिए हमारा एक बड़ा मिशन है. मुझे लगता है कि इसमें हम लोग सफल होंगे. हमारे मित्र हैं सखलेचा जी, वह अपनी नगर पालिका के लिए कुछ पैसा मांग रहे थे मैंने अभी हमारे एसीएस महोदय से बात की तो उन्‍होंने कहा कि पैसा देने की जरूरत नहीं है मैं वैसे ही उनके यहां लगवा दूंगा और पर्चेस एग्रीमेंट करवा दूंगा. वह मेरे पास आ जाएं. आने के बारे मेरा विभाग और हमारे रिन्‍युएबल एनर्जी विभाग दोनों के साथ बैठकर आपकी सब नगर पालिका जो चाहेंगी सबसे कम रेट पर उसको हम आपके यहां करवा देंगे, क्‍योंकि इसमें एक चिंता जो मुझे उनकी बात में जंची कि हम तो आने-जाने वाले लोग हैं पता नहीं 5 साल बाद यहां रहेंगे कि नहीं रहेंगे. आप भी रहेंगे कि नहीं रहेंगे. 5 साल बाद वह जो लोग अभी वहां बैठे हैं वह भी रहेंगे कि नहीं रहेंगे. यह डेमोक्रेसी में किसी का भरोसा नहीं है.

          श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत -- अध्‍यक्ष महोदय, अभी आपको वर्ष 2047 तक रहना है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- धन्‍यवाद आपकी संभावना के लिये..(हंसी)..

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- अध्‍यक्ष महोदय, नगर पालिका ही मेंटेन करेगी. माननीय मंत्री जी, अभी एशिया का और मध्‍यप्रदेश का सबसे पहला डेढ़ सौ मेगावॉट का वर्ष 2012 में मैंने जावद में प्राइवेट प्‍लांट लगवाया था. उसके बाद आज 700 मेगावॉट जावद में सोलर पावर प्रोड्यूस हो रही है. नगर पालिकाएं अपनी सक्षम होंगी ऐसा मेरा आग्रह है बाकी आप जैसा बोलेंगे वैसा करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- ओम जी, मंत्री जी जवाब दे रहे हैं आपने पहले विषय बता दिया है प्‍लीज.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जो उनसे कमिटमेंट है मेरी और उनकी बात है, वह मैं आपको दे दूंगा किसी दूसरे काम के लिए चिंता मत करना परंतु आप हमारे एसीएस के साथ बैठ जाना और वहां पर आपकी नगर पालिकाओं के लिए किस प्रकार इस योजना के माध्‍यम से क्‍योंकि यह बहुत जरूरी है और हम इस दिशा में काम भी कर रहे हैं. हमें बहुत प्रसन्‍नता है कि 21,000 करोड़ रुपये तो है ही हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने सहृदयता से हमें 5,000 करोड़ का और लोन दिलवाया है अधोसंरचना विकास और मूलभूत कार्यों के लिये. हमारे जयवर्द्धन सिंह जी भी कह रहे थे कि बहुत सारी योजनाएं अधूरी पड़ी हैं. यह 5,000 करोड़ रुपये से वह सब अधूरी योजनाएं चाहे वह कोई सी भी हो और यह सबके लिये है. नगर निगम की पानी की योजनाएं हैं, सीवरेज की योजनाएं हैं, आपको वृक्षारोपण करना है, किसी भी काम के लिए यह 5,000 करोड़ रखा है, परंतु मैं बार-बार कहूंगा कि जनभागीदारी में भी आप लोगों की सक्रिय भूमिका होनी चाहिए क्‍योंकि जन- भागीदारी से लोगों की भावना जुड़ जाती है और इसलिए आप लोग भी क्‍योंकि हम अगर 5,000 करोड़ रुपये देंगे तो 10,000 करोड़ का काम जनभागीदारी में होता है.

          अध्‍यक्ष महोदय, सिंहस्‍थ के बारे में डीटेल नहीं बताउंगा क्‍योंकि इसके बाद अभी दो विभाग और हैं इसलिये मेरी भी जवाबदारी है. आत्‍मनिर्भर नगर निगम भी हों. हमारे देश के प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि आत्‍मनिर्भर देश बने तो आत्‍मनिर्भर नगर निगम भी जरूरी है. इसलिए हमने जीआईएस सिस्‍टम से पूरे मध्‍यप्रदेश की मैपिंग की है और यह प्रॉपर्टी टैक्‍स मैं सतना का प्रभारी मंत्री हूं, सतना का जीआईएस सिस्‍टम से जो हमने जीआईएस मैपिंग करके उनको जो नक्‍शा दिया है उनकी आय 30 परसेंट बढ़ गई है क्‍योंकि जीआईएस से पूरे शहर का नक्‍शा उसमें आ जाता है. रहवासी क्षेत्र में व्‍यक्ति रहता है और वहां पर कमर्शियल एक्टिविटीज़ करता है. संपत्तिकर वह रहवासी का देता है. बहुत सारे ऐसे लोग हैं. एक मंजिला मकान का वह संपत्तिकर देता है तीन मंजिला का उसने मकान बना रखा है तो यह जीआईएस सिस्‍टम प्रॉपर्टी टैक्‍स कलेक्‍शन के लिए बहुत महती भूमिका अदा कर रहा है. हर नगर निगम में इससे प्रॉपर्टी टैक्‍स में बढ़ोत्‍तरी हुई है और यह बात सही है कि अब एक माहौल बनना चाहिए, खड़ा होना चाहिए कि यूजर शुड पे. विदेश की बात हम करते हैं कि विदेश में हम वहां गए-वहां गए. राजेन्‍द्र सिंह जी टोरंटो में पड़े, कोई वाशिंगटन गया, कोई न्‍यूयॉर्क गया, कोई इंग्‍लैण्‍ड गया, वहां कोई भी चीज फ्री में नहीं कर सकते. यूजर शुड पे. यूजर की जवाबदारी है कि अगर पानी पीता है तो उसका पेमेंट करे. यह माहौल ह‍में खड़ा करना है नहीं तो नगर निगमें समाप्‍त हो जाएंगी, नगर पालिकाएं समाप्‍त हो जाएंगी, क्‍योंकि आय के साधन बहुत सीमित हैं. और इसलिये नगर निगमों से तो मैं सरे आम कहता हूं कि आप प्रापर्टी टेक्स  बढ़ाईये, आप पानी का टेक्स बढाईये. लोग डरते हैं. अध्यक्ष जी मै मेयर था इंदौर का मैने दो बार टेक्स बढ़ाया. और फिर मैं मेरी विधानसभा से 25 प्रतिशत ज्यादा वोट से जीता. 28 हजार से जीता था उसके बाद में 43 हजार वोटों से जीता. तो टेक्स बढ़ाने से लोग नाराज नहीं होते हैं, काम नहीं करने से लोग नाराज होते हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, आप टेक्स बढ़ाईये और काम करिये, लोगों को सुविधायें दीजिये, पता नहीं लोग क्यों डरते हैं. हम पीपीपी मॉडल को इस बार बहुत प्रोत्साहन देने वाले हैं . अभी हमारे मित्रों ने बहुत सारी मांगे रखी हैं. आप हमें स्टेडियम दीजिये, अरे स्टेडियम के आसपास आप ऐसा स्टेडियम बनाये जिससे कि उसके आसपास आप दुकानें बना लें क्योंकि स्टेडियम बन भी जायेगा तो स्टेडियम को मेन्टेन करना बहुत मुश्किल होता है. स्टेडियम में लोग लाईट लगा लेते हैं और बिजली का बिल नहीं भर पाते हैं. गीता भवन, स्टेडियम उसका आप पीपीपी मॉडल बनाईये कि उसमें से हमें आमदनी भी हो जाये और उसका मेंटनेंस भी हो सके, नहीं तो आप हाथी पाल लेंगे और हाथी पाल लेंगे तो उसको आप कैसे चलायेंगे. तो भविष्य के अंदर हमें स्टेडियम बनाना हो, गीता भवन बनाना हो, हाल बनाना हो, बस स्टेन्ड बनाना हो, अब मॉडल आपको ऐसा बनाना चाहिये कि हम बनाये और उसका खर्चा उसी से निकल जाये , ऐसे मॉडल पर काम करना चाहिये यदि आपके पास में ऐसे आर्किटेक्ट नहीं हो तो हम आर्किटेक्ट भोपाल से भेज देंगे. और आप इस पर काम करिये क्योंकि एक शहर में स्टेडियम नहीं है. सब शहर में स्टेडियम देना बड़ा मुश्किल है और उसके बाद उसको मेन्टेन करना बहुत ज्यादा मुश्किल होता है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे भंवर सिंह शेखावत जी जानते हैं, हमारे इंदौर में क्रिकेट का स्टेडियम बना है साल भर में बड़ी मुश्किल से इंटरनेश्नल दो या तीन मैच होते हैं, कितना खर्चा है उसका, उसका बिजली का खर्चा कितना है, उसका मेंटनेंस के लिये कर्मचारियों का खर्चा कितना है. इसलिये बहुत आसान नहीं है स्टेडियम बनाना और उसको मेन्टेन करना . इसलिये यह बात कहते हुये मुझे गर्व है कि हमारी देश की सरकार ने एक चेलेंज फंड बनाया है एक लाख करोड़ का और उन्होंने सभी प्रदेश की नगर निगमों से अपेक्षा की है कि वह ग्रीन बान्ड लायें, इंदौर नगर निगम लाया, भोपाल नगर निगम लाया, जबलपुर की तैयारी चल रही है उसमे वह 25 प्रतिशत केन्द्र सरकार देगी, इस दिशा में हम लोग काम करेंगे. और नगर निगम नगर पालिकाओं को गाईडेंस करने के लिये हमारे भोपाल में हम अच्छे लोगों को रखेंगे जिससे कि वह उनको गाइड कर सके.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, पिछले दिनों एक प्रश्न के उत्तर में मैंने जवाब दिया था लीज को फ्री होल्ड करने के संबंध में. 40-50 साल से लीज में एक प्रश्न हीरालाल अलावा जी का था, मधु वर्मा जी ने, अभिलाष पाण्डेय जी और सबने कहा था तो हमने हमारे अपर मुख्य सचिव को कहा है कि आप तीन माह के अंदर सारे आयुक्त को बुलाकर के कैसे आप लीज को फ्री होल्ड कर सकें, क्योंकि फ्री होल्ड करने से नगर निगम और नगर पालिकाओं की इनकम बढ़ जायेगी. आज वहां पर नक्शे पास नहीं हो रहे हैं. सब शहर के बीच की कामर्शियल लेंड हैं. वहां अगर दुकानें बनेंगी, वहां पर अगर मॉल बनेंगे, वहां पर अगर कामर्शियल एक्टिविटि होगी तो उनकी इनकम बढ़ेगी और जब हम फ्री होल्ड करेंगे तो आपको पैसा भी मिलेगा, नगर निगम को अपनी आय बढ़ाने के लिये यह फ्री होल्ड योजना जो हम लागू कर रहे हैं इससे नगर निगम को बहुत फायदा मिलेगा.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने आत्मनिर्भर नगर निगम की बात की, उसमें खर्च कम करना और आमदनी बढ़ाना , अब खर्च करने के भी हमने उपाय ढूंढें और वह भी प्रारंभ कर दिया है. बिजली का बिल, बिजली विभाग बिजली का बिल दे देता था, कभी उसका आडिट नहीं होता अध्यक्ष महोदय जब बिजली आडिट हमने कराई तो 25 प्रतिशत बिजली के बिल कम हुये हैं. सब नगर निगम, नगर पालिकाओं के बिजली के बिल आडिट करना हमने चालू कर दिया है. पॉवर सेक्टर में सुधार क्योंकि कोई चिंता नहीं करता है 25 प्रतिशत का फर्क आया है इन दोनों बातों से.नगर निगम के बिल में फिर डीजल की बात करें तो हमने सारी गाड़ियों के अंदर जीपीएस सिस्टम लगाने का कहा है, गाड़ी खड़ी रहती थी उसके नाम से डीजल चला जाता था, अध्यक्ष महोदय भोपाल और इंदौर में 20 प्रतिशत डीजल की बचत हुई है, 20-20 प्रतिशत डीजल की बचत , बिजली के खर्चे में बचत हुई है. इसलिये आत्मनिर्भर निकाय बनाना और अब जो आत्मनिर्भर निकाय बनेगी हम उसको प्रोत्साहन राशि भी देंगे. उसके लिये मैंने कहा है कि 750 करोड़ रूपये हम उसमें रख रहे हैं जो आत्मनिर्भर बनेगी. अध्यक्ष महोदय, ईवी पॉलिसी मैंने बता ही दिया है कि एक हरित क्रांति की बहुत अच्छी पहल है और माननीय देश के प्रधान मंत्री इसके लिये हमेशा चिंतित रहते हैं और देश के प्रधानमंत्री जी हमेशा  इसके लिये  चिंतित रहते हैं. प्रदूषण मुक्त यातायात हो,  इसके लिये हम लोग काम कर रहे हैं.  इंटीग्रेटेड पालिसी  के लिये मैंने बता दिया.  पीएम आवास योजना के बारे में जयवर्द्धन सिंह जी ने भी कहा था,  यह बात सही है कि  हमें  पीएम आवास  में  लगातार  म.प्र. को दूसरी बार दूसरे नम्बर का  पुरस्कार प्राप्त हुआ  और  इस बार हम पहले नम्बर  का पुरस्कार प्राप्त करेंगे. क्योंकि पीएम आवास योजना  की अभी  कुछ योजनाएं  हमारी  अधूरी हैं. हमें  जो 5 हजार करोड़ रुपये का लोन  मिला है, हम अन्य माध्यम से  उन  सब अधूरी योजनाओं को पूरा  करेंगे.  अभी हमने 10 लाख  प्रधानमंत्री आवास बनाये.  आने वाले 5 सालों में  10 लाख  आवास और  बनाकर इस  म.प्र. में आवासहीन लोगों को मकान   देने का काम करेंगे और हमारे प्रधानमंत्री जी  का सपना  पूरा करेंगे.  एक  बहुत मेरे दिल की  योजना है, जो प्रधानमंत्री जी ने  स्व निधि योजना.   मैं आज भी उसी  बस्ती में रहता हूं, जहां मेरा जन्म हुआ है,  वहां  बहुत गरीब  लोग  रहते थे  एक समय में.  10-15-20 परसेंट  ब्याज पर सब्जी वाले,  ठेले  वाले   पैसे उठाते थे.  यह स्व निधि योजना ने कमाल कर दिया है.  10 हजार रुपये पहली बार,  दूसरी बार में 20 हजार रुपये, तीसरी बार में 50 हजार रुपये, म.प्र. इसमें भी नम्बर वन आया है और पूरे प्रदेश में हमने  यह जो पटरी पर बैठने वाले लोग,  ठेला चलाने वाले लोग, उन सबको लोन दिया है.  म.प्र. उसमें भी नम्बर वन आया है.  यह भी  इस बार हमने  करके दिखाया है.  दीनदयाल अन्त्योदय योजना, स्पार्क  अवार्ड, स्वरोजगार, ऋण  बहुत सारे  मेरे विभाग ने काम किये हैं.  मैं मेट्रो के बारे में  एक दो  जो जानकारियां हैं और देकर अपनी बात समाप्त करुंगा.   हमारे मित्र आतिफ भाई ने  एक प्रश्न खड़ा कर दिया था कि आप  अण्डर ग्राउण्ड  एलिवेटेड बनाइये. यह जो नई टेक्नालाजी है, इसका   मैं नाम भूल रहा हूं अभी.  एक अच्छी टेक्नालाजी आई है .  आपने बड़ी अच्छी उस टेक्नालाजी की  व्याख्या  की थी.   आपने कहा कि यह केचुआ टेक्नालाजी है. केचुआ जहां   से घुसता है,   अन्दर ही अन्दर जाता है  और  दूसरी जगह से निकलता है और  इसलिये  खेती   ऐसी ही  टेक्नालाजी है.  आस्ट्रेलिया में टेव्हलप हुई.  नेटम टेक्नालाजी,  मुझे याद था परसों मैं उसको  देखकर भी आया हूं  वहां इन्दौर में.  पर मैं  भूल रहा था उसका नाम.  नेटम टेक्नालाजी. मैंने  इसको चांदनी चौक  में दिल्ली  में देखा  भी कैसे काम करता है वह.  सिर्फ एक होल करते हैं वह  और ऐसे वर्टिकल  जाते  हैं, फिर होरिजेंटल जाकर  और  वह  चिंता कर रहे थे कि हमारे  कब्रिस्तान  डिस्टर्व होंगे.  बड़ा संवेदनशील विषय था वह.  इसलिये मैं  सदन में  इसको  क्लीयर करना   बहुत जरुरी  समझता हूं कि साधारणतया  कब्रिस्तान में जो  मुर्दे होते हैं,  वह ज्यादा से ज्याद10-15‑20 फीट से ज्यादा नीचे  नहीं होते.  5-6 फीट. मैक्सिमम अगर अपन कहें, तो  15-20 फीट. मान लो.  यह  20 मीटर तक जाता है.  20 मीटर जाकर यह  टनल बनाते हैं. इसलिये   वह इस प्रकार  का  भ्रम पैदा नहीं करे  समाज  के  अंदर कि अगर मेट्रो  अण्डर ग्राउण्ड   वहां बन रही है,  क्योंकि यह बड़ा  संवेदनशील मुद्दा है.  अगर इस प्रकार की बात  हमारा  जन प्रतिनिधि करेगा बिना जानकारी के, तो समाज में एक तरीके से  अशांति भी हो सकती है.  इसलिये मैं सदन में बड़ी जिम्मेदारी  से यह बात कह रहा हूं कि जहां पर उन्होंने कब्रिस्तान की बात कही है,  वहां कब्रिस्तान  में उन  कब्रों का कुछ भी  नहीं बिगड़ेगा. हां,  उनकी जो दीवार है,  वह जरुर टूट रही है. जैसे ही वह टूटेगी, काम हो जायेगा, हम  नई  दीवार बना देंगे, पर यह भ्रम कृपया समाज   के अन्दर नहीं फैलायें. अध्यक्ष महोदय,  मेरे पास कहने के लिये  बहुत  सारी योजनाएं हैं,  यदि मैं कहूंगा, तो आज के सारे विषय रह जायेंगे. मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि  हमारे राजवर्द्धन  जी  ने कहा था  कि  हमारी जितनी भी योजनाएं हैं,  स्मार्टसिटी,  जयवर्द्धन सिंह जी ने. ( प्रतिपक्ष के सदस्यों द्वारा बैठे बैठ जयवर्द्धन सिंह कहने पर) जब आनन्द विभाग मेरे को दे सकते हो. मैं तो राज्‍य की बात कर रहा हूं कि राज्‍य के वर्द्धन हैं. मैं इनके अच्‍छे भविष्‍य की बात कर रहा हूं. आप आनंद विभाग मेरे को दे सकते हैं तो मैं, राज्‍य की जगह जय नहीं बोल सकता और जय की जगह राज्‍य नहीं बोल सकता.

          नेता प्रतिपक्ष( श्री उमंग सिंघार)- अध्‍यक्ष जी, लगता है कि दोनों की स्थिति एक जैसी है.

          श्री भंवर सिंह शेखावत- एक बात सुन लें मेरे भाई बड़ी देर से दुकान चल रही है. अब इंदौर की मेट्रो के बारे में सम्‍माननीय मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि जहां से इंदौर की मेट्रो बनी है, उस संबंध में न तो किसी जनप्रतिनिधि से सलाह ली गयी, ना ही श्री कैलाश विजयवर्गीय जी ने उस पर कोई कंसर्न दी, ना ही किसी विधायक से पूछा गया. यह बात सही है कि अभी जहां पर मेट्रो पर खर्चा किया जा रहा है और अभी जहां पर बनी है. वैसे इलाके में जहां पर कोई चढ़ने वाला ही नहीं है. 11 मिलोमीटर की बस्‍ती खाली पड़ी हुई है. उसके अंदर बैठेगा कौन या तो कैलाश जी बैठेंगे तो मोहन जी को उतरना पड़ेगा, मोहन जी उतरेंगे तो कैलाश ली को बैठना पड़ेगा, वहां पर चढ़ेगा कौन.

          अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बात यह कि अब आप जहां खजराना से आगे मेट्रो को ले जा रहे हो, अब अंडर ग्राउंड ले जाने की बात कही है तो सही है. केंचुआ जायेगा तो आगे से निकलेगा, लेकिन आप केचुंए को सही तरीके से घुसेड़ना, वह इंदौर है. केचुंआ अगर कहीं बीच में गड़बड़ हो गया ना कैलाश जी तो आपको केचुंआ बना देंगे लोग. क्‍योंकि कारण क्‍या है कि आप रीगल चौराहे से जा रहे हो, राजवाड़े से जा रहे हो और मल्‍हारगंज में जा रहे हो तो यह 100-100 पुरानी बस्तियां हैं और आज वहां पर मेट्रो की जरूरत नहीं है. वह पन्‍द्रह मिनट में आदमी स्‍कूटर से और पैदल भी उसको रिक्‍शे से क्रास कर सकता है. आप मेट्रो वहां ले जाइये, जहां पर पहले आपने कहा कि पहले या तो पीथमपुर से जोडि़ये, इसको उज्‍जैन, देवास से जोडि़ये, बाहर जोडि़ये. शहर के अंदर मेट्रो की क्‍या जरूरत है. वह जयपुर में भी फैल है, बाकि जगह फैल है. पैसा खर्च हो रहा है, इसका आपके नेतृत्‍व में सही विस्‍तार होगा, मैं ऐसा मानता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय- कैलाश जी क्‍या है कि आम आदमी का स्‍तर भी बढ़ाना चाहते हैं और उसकी आमदनी भी बढ़ाना चाहते हैं. वह दोनों काम एक साथ करना चाहते हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय- अध्‍यक्ष महोदय, शेखावत जी हैं, वह फ्री स्‍टाइल आदमी हैं. कुछ भी बोल सकते हैं, अधिकार भी है. मैं उनका बड़े भाई जैसा सम्‍मान करता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय, आदरणीय जयवर्द्धन जी ने जो बात कही थी कि जिले में स्‍मार्ट सिटी का कोई निरीक्षण नहीं होता है और इसका बहुत खराब काम हुआ है. ऐसा नहीं है, काम हुआ है और जहां गलती हुई, वहां सुधारी भी.

          अध्‍यक्ष महोदय, श्री राजेन्‍द्र सिंह जी ने सतना का कहा है. मैं मानता हूं कि शुरू में काम अच्‍छा नहीं था. अब मैं खुद मानीटरिंग कर रहा हूं. वहां एक-एक करके काफी अच्‍छे काम हो रहे हैं और मैं आपसे वादा करता हूं कि उनके पास भले ही पैसा खत्‍म हो गया हो, पर जितना पैसा बचेगा, हम देंगे. पर सतना को स्‍मार्ट शहर बनाकर बतायेंगे, यह मैं आपसे वादा करता हूं. वैसे इसके लिये जिले में निगरानी समिति कलेक्‍टर की अध्‍यक्षता में बनी है यह डिस्ट्रिक्‍ट लेवल और मानीटरिंग कमेटी है. यह भारत सरकार के निर्देश पर बनी है और ..

          श्री महेश परमार- माननीय मंत्री जी, उज्‍जैन का भी आपसे निवेदन है कि वहां भी आप स्‍मार्ट सिटी की समीक्षा करें. उज्‍जैन और सतना में टाटा काम कर रहा था. मेरा आपसे विेशेष उज्‍जैन का निवेदन है. क्‍योंकि वहां भी समय से तीन चार साल ज्‍यादा लग गये हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय- महेश जी, वह टेक्‍नालॉजी का उपयोग कर रहे हैं. कैलाश जी ने बताया तो है नेटम.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय- अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि अभी शेखावत जी ने कहा है. यह बात सही है मैं, आपकी पचास प्रतिशत बात से सहमत था.

          श्री महेश परमार- माननीय, अभी सिंहस्‍थ जैसा महापर्व आने वाला है. यह योजना लगभग दो साल में खत्‍म होनी थी. पर इसको पांच साल हो गये हैं.

           श्री कैलाश विजयवर्गीय- महेश जी और मोहन जी, दोनों की राशि एक है. यह वहीं पर जाकर आपस में कुश्‍ती लड़ लें. यहां पर हमारा समय क्‍यों खराब कर रहे हो. (हंसी)

          अध्‍यक्ष महोदय- दोनों जब बाहर एक साथ मिलें, तब देखो आप. (हंसी)

          श्री कैलाश विजयवर्गीय- अध्‍यक्ष महोदय, यह बात आपने सही कही कि पहले अधिकारियों ने बैठकर के प्‍लानिंग कर ली, इसलिये मेट्रो की जो प्‍लानिंग है. उस पर जनप्रतिनिधियों से ठीक तरीके से चर्चा नहीं हुई और एकदम शहर को थोप दिया. आज मुझे भोपाल के सांसद आलोक जी भी मिले थे. रामेश्‍वर शर्मा जी ने कहा कि एक बार मेट्रो की मीटिंग ले लो. मैं अतिशीघ्र भोपाल की भी मेट्रो की बैठक लेने वाला हूं. तथा भोपाल के जो सब जनप्रतिनिधि हैं, उनको बुलाकर हम चर्चा करेंगे. क्‍योंकि इतना बड़ा प्रोजेक्‍ट आ रहा है और जनप्रतिनिधियों की..

          श्री रामेश्‍वर शर्मा- आप राजभवन वाला काम तो रूकवा दीजिये नहीं तो विधान सभा आना ही मुश्किल हो जायेगा.

श्री कैलाश विजयवर्गीय- मैं दो-चार दिन में ही आपसे बात करता हूं. हम लोग अधिकारियों के साथ में बैठकर बात कर लेंगे. ज्‍यादा से ज्‍यादा विधान सभा खत्‍म होने के बाद एक सप्‍ताह के अंदर बैठ जायेंगे.

अध्यक्ष महोदय, विषय तो बहुत सारे हैं, परन्तु मैं इतना ही कहना चाहता हूं. मैं दोहराना नहीं चाहता हूं क्योंकि बाकी सदस्यों ने सब योजनाओं के बारे में बता दिया है. मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि हम कटिबद्ध हैं मध्यप्रदेश के विकास के लिए (मेजों की थपथपाहट)..और हमारे देश के प्रधानमंत्री जी का जो सपना है कि वर्ष 2047 में भारत विकसित राष्ट्र बने, आत्मनिर्भर राष्ट्र बने, हमारा भी संकल्प है कि हम मध्यप्रदेश को विकसित मध्यप्रदेश बनाएंगे और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश बनाएंगे. (मेजों की थपथपाहट)..इसलिए मैं पूरे सदन से आग्रह करूंगा कि जो हमारा 21 हजार करोड़ रुपये का बजट है, वह आप सब सर्वानुमति से अनुमति प्रदान करें.  अध्यक्ष महोदय, आपने बोलने का अवसर दिया, इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री पंकज उपाध्याय - अध्यक्ष महोदय, आदरणीय श्री कैलाश जी ने मास्टर प्लान के बारे में कुछ नहीं बोला है.

 

 

अध्यक्ष महोदय - सबसे पहले बोल दिया, आप उस समय बाहर गये हुए थे.

मैं पहले कटौती प्रस्तावों पर मत लूंगा.

प्रश्न यह है कि मांग संख्या 022 एवं 028 पर प्रस्तुत कटौती प्रस्ताव स्वीकृत किये जायें.

कटौती प्रस्ताव अस्वीकृत हुए.

 

 

 

 

 

 

अब, मैं, मांगों पर मत लूंगा.

 

 

प्रश्न यह है कि 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने वाले वर्ष में राज्य की संचित निधि में से प्रस्तावित व्यय के निमित्त राज्यपाल महोदय को -

मांग संख्या - 022                                    नगरीय विकास एवं आवास के लिए                                                                             बीस हजार अट्ठासी करोड़, चौसठ                                                                      लाख, इक्तीस हजार रुपये, एवं

मांग संख्या - 028                                    राज्य विधान मंडल के लिए एक सौ                                                                             इक्यावन करोड़, छियानवे लाख,                                                                                  इक्यावन हजार रुपये

                                                             तक की राशि दी जाय.

मांगों का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

(मेजों की थपथपाहट)..

          अध्यक्ष महोदय-  विधानसभा की कार्यवाही बुधवार दिनाँक 25 फरवरी, 2026  के प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्थगित.

            रात्रि 06.52 बजे विधान सभा की कार्यवाही  बुधवारदिनाँक 25 फरवरी, 2026 (6 फाल्‍गुन, शक संवत् 1947के पूर्वाह्न 11.00 बजे तक के लिए स्थगित की गई.

                                                                                                  अरविन्‍द शर्मा,

भोपाल                                                                                         प्रमुख सचिव,

दिनांक : 24 फरवरी, 2026                                                           मध्यप्रदेश विधान सभा