मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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षोडश विधान सभा                                                                                                     नवम् सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2026 सत्र

 

सोमवार, दिनांक 23 फरवरी, 2026

 

(4 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1947)

 

 

[ खण्ड-9 ]                                                                                                                  [अंक- 6 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

सोमवार, दिनांक 23 फरवरी, 2026

 

(4 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1947)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11. 01 बजे समवेत् हुई.

{ अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

11.01 बजे                       तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

सामग्री क्रय में नियमों का पालन

[अनुसूचित जाति कल्याण]

1. ( *क्र. 2133 ) श्री दिनेश जैन बोस : क्या अनुसूचित जाति कल्‍याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि‍ (क) उज्जैन जिले अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र महिदपुर में विभाग द्वारा वर्ष 2020 से प्रश्‍न दिनांक तक किन-किन छात्रावासों में क्या-क्या सामग्री कब-कब कितनी-कितनी किस-किस के द्वारा क्रय की गई है? राशि की जानकारी वर्षवार, सामग्रीवार,दिनांकवार, नामवार देवें।                            (ख) क्या प्रश्‍नांश (क) में क्रय की गई सामग्री भंडार क्रय नियमों के तहत की गई है? यदि हाँ, तो क्रय करने हेतु जारी टेंडर की छायाप्रति उपलब्ध करावें। प्रश्‍नांश (क) में क्रय की गई सामग्री के स्टॉक रजिस्टर की छायाप्रति उपलब्ध करावें। (ग) प्रश्‍नांश (क) व (ख) में क्रय की गई सामग्रियों के भौतिक सत्यापन हेतु गठित की गई समितियों के आदेशों की छायाप्रति एवं उनके द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट की छायाप्रति उपलब्ध करावें। सामग्री सप्लाई करने वाली एजेंसी का नाम एवं उनको किये गये भुगतान राशि की संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करावें। (घ) प्रश्‍नांश (क) में क्रय की गई सामग्री के भुगतान के व्यय व्हाउचर की छायाप्रति उपलब्ध करावें। बताएं कि क्रय की गई सामग्री वर्तमान में भौतिक रूप से उपलब्ध है या नहीं? यदि है तो जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग, जिला उज्जैन के काउंटर साइन से भौतिक रूप से उपलब्ध सामग्री की डिटेल दें।

अनुसूचित जाति कल्‍याण मंत्री ( श्री नागर सिंह चौहान ) : (क) विभागीय छात्रावासों हेतु जिला संयोजक, जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति विकास द्वारा सामग्री क्रय की गई हैजानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ''एक'' एवं ''दो'' अनुसार है। (ख) जी हाँ, जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''तीन एवं ''चार'' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''पांच'' एवं ''छ:'' अनुसार है। भुगतान की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''एक'' अनुसार है। (घ) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''छ: अनुसार है। जी हाँ, जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''सात'' अनुसार है।

        श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं श्री दिनेश जैन जी की ओर से सवाल पूछ सकता हूं ?

          अध्‍यक्ष महोदय --  हां पूछ लीजिए.

          श्री उमंग सिंघार --  अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न क्रमांक 2133 है.

          श्री नागर सिंह चौहान -- अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर प्रस्‍तुत है.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, वहां पर धुएं से बच्‍िचयों की तबियत खराब हुई, उनको अस्‍पताल में भर्ती करना पड़ा. धुआं हॉस्‍टल में कैसे आया कहां से आया ? मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं.

          श्री नागर सिंह चौहान -- अध्‍यक्ष महोदय, जो प्रश्‍न पूछा गया है उसमें कहीं पर भी इस विषय का जिक्र नहीं है.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, अस्‍पताल में बच्चियां भर्ती हुई हैं उनके स्‍वास्‍थ्‍य के कारण, तो इसका कारण पता ही होगा ?

          अध्‍यक्ष महोदय -- विषय तो आपको जानकारी में होगा ना.

          श्री नागर सिंह चौहान -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझसे जो प्रश्‍न पूछा गया है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, शायद नेता प्रतिपक्ष जी को  गलतफहमी हो गई, यह प्रश्‍न दूसरा है. सामग्री को लेकर है. आप पहले पूरा प्रश्‍न पढ़ लीजिए.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न सामग्री को लेकर भी है और जैसा दिनेश जी ने बताया था कि सामग्री की गुणवत्‍ता को लेकर वहां सामग्री नहीं मिल पा रही है, एक यह है और दूसरा, वहां उसी हॉस्‍टल के अंदर इतनी अव्‍यवस्‍थाएं हैं कि कई बच्‍िचयों को इस घटना के कारण अस्‍पताल में भर्ती होना पड़ा. दोनों उसी हॉस्‍टल से संबंधित हैं.

          श्री नागर सिंह चौहान -- अध्‍यक्ष महोदय, हॉस्‍टल में छात्राओं की बीमारी का जिक्र इसमें कहीं पर भी नहीं है. यह प्रश्‍न उद्भूत भी नहीं होता.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, दिनेश जी आ गए हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- दिनेश जी, आप एकाध प्रश्‍न कर लें जो उद्भूत हो जाए.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष जी ने कलाकारी कर ली. इनका प्रश्‍न निकल जाता. जो आपने प्रश्‍न पूछा वह उससे उद्भूत ही नहीं होता. आपने टाईम पास कर दिया. इतनी देर में वह आ गए.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, कलाकारी तो आपको भी पता है. मैंने कहा उनका इंतजार करना होगा. दिनेश जी, आपकी जो दोनों समस्‍याएं हैं आपने बताई थीं एक बाद वापस बता दीजिए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- दिनेश जी, बताइये.                               

            श्री दिनेश जैन बोस -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं महिदपुर की मां कस्तूरबा छात्रावास में एक दिन गया वहां पर 30 बच्चियां बीमार हो गईं, उनको अस्पताल में भर्ती करवाया गया उसके बाद में कुछ बच्चियों को उज्जैन रेफर किया कुछ बच्चियों को इंदौर भी रेफर किया गया. अध्यक्ष महोदय, मैं बच्चियों से मिला था उन्होंने कहा कि छात्रावास में स्वच्छता का ध्यान नहीं है , और जो हम लोगों के उपयोग में आने वाली सामग्री है वह घटिया स्तर की है , हम लोग जिसके कारण बीमार हो गये, हम लोगों को खांसी, सर्दी और जुखाम है . बच्चियां दो दिन तक काफी परेशान रहीं हैं तो मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि उनके बीमार होने के क्या कारण था.

          संसदीय कार्य मंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं बहुत विनम्रता के साथ में आपसे आग्रह करना चाहता हूं. आप पूरा प्रश्न पढ़ लीजिये, माननीय सदस्य ने जो प्रश्न पूछा है क्या वह इस प्रश्न से उद्भूत होता है क्या ?        

          श्री नागर सिंह चौहान-- अध्यक्ष महोदय, वही मेरा भी निवेदन है.

          श्री दिनेश जैन बोस -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे यह बता दीजिये कि स्वच्छता के ऊपर अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के जो भी छात्रावास संचालित हैं उसके अंदर क्या क्या व्यवस्थायें सरकार के द्वारा दी जा रही है, जो सामग्री आप छात्रावास में देते हैं, क्या उसका सही में उपयोग हो पा रहा हैं या नहीं. और बच्चियां जो बीमार हुई, उसका क्या कारण था. यह मंत्री जी बता दें.

          अध्यक्ष महोदय- दिनेश जी, आपने प्रश्न किया, आपके प्रश्न पर सरकार ने जवाब दिया है. अब कुल मिलाकर के हम इसमें प्रश्न के अंतर्गत सप्लीमेन्टरी प्रश्न पूछेंगे तो मंत्री जी जवाब दे पायेंगे.

          श्री दिनेश जैन बोस -- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि बह बच्चियां पानी नहीं मिलने से, स्वच्छता का ध्यान नहीं रखने से, या अच्छा खाना नहीं मिलने से, उनको क्या क्या सामान दिया जाता है. क्योंकि विभाग लाखो रूपये का सामान खरीद लेता है लेकिन वह सामान हास्टल में पहुंचता नहीं है, जब भी हम हास्टल में निरीक्षण करने के लिये जाते हैं तो समस्या यही आती है कि....

          सहकारिता मंत्री (श्री विश्वास कैलाश सारंग) माननीय अध्यक्ष महोदय, यदि यह विषय है तो माननीय सदस्य ध्यानाकर्षण लगायें, किसी और माध्यम से लगायें लेकिन जो प्रश्न माननीय सदस्य ने अभी लगाया है उसका उत्तर तो आ गया है, बाकी के भी प्रश्न हैं उनके उत्तर आने दें. यही निवेदन है.

          श्री दिनेश जैन बोस -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि अनुसूचित जाति वर्ग के जो छात्रावास होते हैं, उसमें व्यवस्थायें अच्छी क्यों नहीं होती हैं, वहां पर रहने वाले बच्चे क्यों शिकायत करते हैं. कभी पानी की समस्या रहती है, कभी सुविधाओं की कमी रहती है कभी घटिया सामग्री के वितरण की बात सामने आती हैं. क्या यह व्यवस्था सरकार को नहीं सुधारनी चाहिये.

          अध्यक्ष महोदय- मंत्री जी कुछ कहना चाहते हैं.

          श्री नागर सिंह चौहान -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को बताना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति के करीब 1933 छात्रावास संचालित हैं और पूरे मध्यप्रदेश में सरकार की जो योजना है उसका लाभ छात्रावास में रहने वालों को मिल रहा है. अभी सरकार ने इस वर्ष मध्यप्रदेश में 362 के लगभग भवनविहीन छात्रावास हैं जिसमें से 84 छात्रावास भवन बनाने का निर्णय लिया है और आने वाले समय में जो भवनविहीन भवन हैं उसको सर्वसुविधायुक्त भवन बनाने जा रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय --(श्री दिनेश जैन बोस के खड़े होने पर) दिनेश जी प्लीज कृपया बैठें. प्रश्न क्रमांक 2..

मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना में बी.पी.एल कार्ड की अनिवार्यता

[सामाजिक न्याय एवं दिव्‍यांगजन कल्‍याण]

2. ( *क्र. 2066 ) डॉ. सतीश सिकरवार : क्या सामाजिक न्‍याय एवं दिव्‍यांगजन कल्‍याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना किस वर्ष से लागू की गई? शासन द्वारा जारी आदेश की प्रति उपलब्ध कराई जावे। (ख) योजना प्रारंभ के दिनांक से योजना अंतर्गत कौन-कौन से अभिलेख आवेदन के साथ संलग्न करने होते थे? वर्षवार जानकारी दी जावे। (ग) प्रदेश में वर्ष 2020 से प्रश्‍न दिनांक तक कितने विवाह सम्पन्न हुये? वर्षवार संख्यात्मक जानकारी दी जावे। (घ) क्या वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत विवाह करने हेतु कन्या के बी.पी.एल. कार्ड की अनिवार्यता कर दी गई है? यदि हाँ, तो आदेश की प्रति सहित जानकारी दी जावे। (ड.) क्‍या बी.पी.एल. की अनिवार्यता कर देने से उक्त योजना का लाभ निर्धन वर्ग के लोगों को नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उद्देशय निष्फल हो रहा है? (च) उक्त योजना के अंतर्गत बी.पी.एल. कार्ड की अनिवार्यता समाप्त करने का प्रस्ताव क्‍या शासन स्तर पर प्रचलित है? यदि हाँ, तो जानकारी दी जावे? यदि नहीं, तो क्‍या बी.पी.एल. की पात्रता समाप्त करने पर निर्णय लिया जावेगा।

सामाजिक न्‍याय एवं दिव्‍यांगजन कल्‍याण मंत्री ( श्री नारायण सिंह कुशवाह ) : (क) प्रदेश में मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान विवाह योजना वर्ष 2006 से लागू की गई है। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) योजना प्रारंभ से योजना अन्‍तर्गत जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (वर्ष 2006, 2013, 2022 एवं 2025)(ग) वर्ष 2020 से प्रश्‍न दिनांक तक कुल 1,94,146 विवाह सम्‍पन्‍न हुए। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है(घ) जी हाँ। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।                          (ड.) जी नहीं। इस योजना का लाभ वास्‍तविक गरीब और जरुरतमंद कन्‍या एवं उनके अभिभावकों को हो, इस दृष्टि से ''कन्‍या तथा कन्‍या के अभिभावक गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हो''। यह शर्त जोड़ी गई है। (च) जी नहीं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

          डॉ.सतीश सिकरवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 2066 है.

          श्री नारायण सिंह कुशवाह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर सदन के पटल पर रख दिया है.

          अध्यक्ष महोदय- सतीश जी अपना पूरक प्रश्न करें.

          डॉ.सतीश सिकरवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने प्रश्न किया था कि मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना में पिछले वर्षों तक गरीबी रेखा का कार्ड अनिवार्य नहीं था उसके कारण हमारी गरीब बहनों की शादी मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना के माध्यम से नगर निगम, जिला पंचायत, जनपद पंचायत, नगरीय निकाय में संपन्न होती थीं. लेकिन 2025 में एक नया नियम बना दिया , सरकार ने एक आदेश जारी कर दिया और मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना में गरीबी रेखा के कार्ड को अनिवार्य कर दिया. वर्ष 2026 में बसंत पंचमी में फुलैरा दूज में ग्वालियर और उसके आसपास, पूरे मध्यप्रदेश का मुझे पता नहीं है, एक भी शादी का जोड़ा नहीं मिल रहा है, बीपीएल कार्ड की अनिवार्यता के कारण. अध्यक्ष महोदय मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना में जो भी शादियां होती थीं वह गरीब बच्चियों की होती थीं. उसमें गरीब बच्चियों  की ही होती थी.  क्योंकि सामूहिक विवाह में  हर आदमी तो शादी   करने जाता नहीं है.  उच्च वर्ग वाले तो  जाते नहीं थे.  गरीब आदिवासी, अनूसूचित  जाति, जनजाति  और पिछड़े वर्ग  की कन्याओं  की शादियां होती थीं, जो गरीब थे.  लेकिन गरीबी रेखा का कार्ड कम्पलसिरी करने से  एक भी जोड़ा नगर निगम  ग्वालियर में ..

          अध्यक्ष महोदयआप प्रश्न तो  करें कि क्या पूछना चाहते हैं.

          डॉ. सतीश सिकरवारअध्यक्ष महोदय,  तो मैं यह कह रहा हूं कि   एक तरफ सरकार कह रही है कि  हम महिलाओं, कन्याओं के लिये  यह योजना बना  रहे हैं, यह कर रहे हैं कि कन्या दुर्गा, सरस्वी, लक्ष्मी है.  दूसरी  तरफ   हम कन्याओं के साथ यह  अपमान कर रहे हैं कि उनकी शादियों  करके, उनके  हाथ पीले जो सरकार करती थी,  वह  करना बंद हो गये हैं. क्या  गरीबी रेखा अनिवार्यता  समाप्त होगी कि नहीं होगी.  होगी तो कब तक होगी.

          श्री नारायण सिंह कुशवाहअध्यक्ष महोदय, जब से यह नियम  गरीबी रेखा का लागू हुआ है, 13642  विभिन्न जिलों में  कन्याओं के विवाह सम्पन्न हुए हैं.

          डॉ. सतीश सिकरवारअध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ग्वालियर के हैं  और  सीधे सादे और भले मंत्री हैं.   इनको जो जानकारी  का पर्चा पकड़ा  दिया, वह बोल रहे हैं.   मंत्री जी,लेकिन आप बतायें  कि ग्वालियर में एक भी शादी बसंत  पंचमी  पर हुई कि नहीं हुई.  इतना बड़ा ग्वालियर है.  क्यों नहीं हुई, यह मुझे मालूम है.  डबरा में हुई,  आप बताइयें ग्वालियर संभाग में  कहां हुई हैं,  आप  एक जवाब दे दीजिये कि ग्वालियर संभाग में  किस नगरीय निकाय में भिण्ड, मुरैना,  ग्वालियर, शिवपुरी में कहां पर शादियां हुई हैं.  इतना आप मुझे बता दीजिये.  बसंत पंचमी में कहां कहां पर  हुई हैं,  पूरे ग्वालियर संभाग में.

          श्री नारायण सिंह कुशवाहअध्यक्ष महोदय, जैसे मैंने  बताया है कि  यह पूरे म.प्र.  के कई जिलों में सम्पन्न हुई हैं. अब  एक गरीबी रेखा का  जो बिन्दु संशोधित किया गया है.  म.प्र. में ऐसे  कई  जन प्रतिनिधियों के  पत्र  भी हैं.  शिकायतें  प्राप्त हुईं कि  मुख्यमंत्री  कन्यादान विवाह योजना में काफी भ्रष्टाचार हो रहा है.  जहां तक कि  पूर्व मंख्यमंत्री, कमलनाथ  जी  की भी  शिकायत है. तो इन सब बिन्दुओं पर विचार करते हुए  मुख्यमंत्री जी ने यह सारे इस तरह के बिन्दु तय किये  और  इसलिये गरीबी रेखा  का  कार्ड  उसमें अनिवार्य किया गया है.

          डॉ. सतीश सिकरवारअध्यक्ष महोदय, इससे भ्रष्टाचार से गरीबी रेखा का क्या लेना देना है.  भ्रष्टाचार हो गया, तो आप रोकिये, क्यों भ्रष्टाचार  हो रहा है.  कमलनाथ जी का पत्र हो, किसी विधायक जी, जन प्रतिनिधि का पत्र  हो.  अगर भ्रष्टाचार  हो रहा है, तो आपकी सरकार काहे के लिले बैठी है.  भ्रष्टाचार पर अंकुश  लगाने के लिये बैठी है.  मंत्री जी, उसमें गरीबी रेखा से क्या लेना देना है.  यह गरीब कन्याओं के साथ अन्याय और अत्याचार  है और  मेरा  मानना है कि आपके द्वारा  यह गरीबी रेखा का कम्पलसिरी  करने  के कारण  एक  भी ग्वालियर चम्बल संभाग  का  पूछा है,  मंत्री जी एक जवाब नहीं दे पाये.  आप एक कन्या का बताओ कि उसका विवाह हुआ हो.  बसंत पंचमी पर एक भी विवाह नहीं हुआ.  तो मैं हाथ जोड़कर निवेदन कर रहा हूं कि  इसके माध्यम से गरीबों की शादियां  नहीं  हो पा रही हैं. जो वास्तव में  गरीब हैं, झाड़ू पोंछा  करने वाली बाइयां हैं, कामकाजी,  हाथ ठेला, मजदूरी  कार्ड वाले,  उनकी भी शादियां नहीं हो रही हैं.  क्योंकि गरीबी रेखा का कार्ड बनाना  सरकार  ने बंद कर दिया है.  केवल गंभीर बीमारी, हार्ट अटैक  वगैरह और जो गंभीर बीमारी  हैं, उनके ही  गरीबी  रेखा के कार्ड बन रहे हैं.  तो वह शादियां हो ही नहीं पा रही है.  इसलिये मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि  गरीबी रेखा का कार्ड अगर  उसमें से कम्पलसिरी हट जाये,  तो उससे.

          अध्यक्ष महोदयआपका प्रश्न आ गया.

          डॉ. सतीश सिकरवारअध्यक्ष महोदय, जवाब तो आया नहीं एक भी शादी का.  मैंने पूछा कि  एक भी शादी  बता दें.  मंत्री जी जहां के क्षेत्र के  रहने वाले हैं,  वहां शादी हुई है क्या.

          अध्यक्ष महोदय--   मंत्री जी जवाब देंगे. श्री विवेक विक्की पटेल जी का भी प्रश्न मंत्री जी सुन लें, फिर एक साथ जवाब दे दीजियेगा.

          श्री विवेक  विक्की पटेल --  अध्यक्ष महोदय,  महंगाई के इस दौर में  चाहे वह गरीब हो,  बीपीएल वाला हो या एपीएल वाला हो,  सब चाहते हैं  कि हमारे बच्चे की शादी  सामूहिक विवाह में हो.  जो दो बंधन आये हैं, एक गरीबी रेखा का, उससे मुक्त किया जाये.  दूसरी लिमिट आई है कि सिर्फ सौ शादी  की.  अभी हमारे विधान सभा में भी शादी होना हैं.  आवेदन आ रहे हैं. मेरे पास  400-500  लोग  आ रहे हैं और सिर्फ सौ  शादी  की लिमिट है,  तो उस लिमिट से फ्री किया जाये कि जितने लोग आना चाहते हैं,  उनकी शादी की जाये. बहुत अच्छी  योजना है.  सबको उसका लाभ मिले  और  गरीबी रेखा से उसको मुक्त किया जाये.  इसमें दो संशोधन किये जायें.  इस सामूहिक विवाह  योजना  को गरीबी रेखा से मुक्त किया जाये. हर व्यक्ति चूंकि इस महंगाई  के समय में  चाहता है कि सामूहिक विवाह में शादी हो.  दूसरा, संख्या की लिमिट न हो.  मात्र सौ संख्या है.  उसको  इससे फ्री किया जाये.  जितने आवेदन आते हैं, सबको  अवसर  दिया जाये सामूहिक विवाह का.  धन्यवाद.

          श्री नारायण सिंह पट्टा--  अध्यक्ष महोदय,  मेरा सुझाव है कि इसमें गरीबी रेखा की अनिवार्यता और लिमिट समाप्त की जाये,इससे बहुत  सी  गरीब कन्याओं का भला हो जायेगा.  बस इतना निवेदन है.

            श्री नारायण सिंह कुशवाह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें कम से कम 11 और ज्‍यादा से ज्‍यादा 200 विवाह यह संशोधित है. उसमें संख्‍या 100 की नहीं है 200 की है. जहां तक गरीबी का विषय है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी के समक्ष बैठक में कि ऐसा विचार माननीय सभी विधायकगणों का ऐसा विचार है. क्‍योंकि यह सारी चीजें इसलिये निश्चित की गयी जैसा कि मैंने पहले भी बताया है कि कई सामूहिक विवाह सम्‍मेलनों में कई जिलों के ऐसे मामले हैं, शिकायतें भी हैं कि वहां दोबारा शादियां हो रही हैं. आप लोगों के पत्र आये हैं कि कहीं दोबारा शादियां हो रही हैं, निकाह भी दोबारा हो रहे हैं. इसीलिये यह बड़े अच्‍छे ढंग से ईमानदारी से शादियां हो. आप एक बार में एक ब्‍लॉक में 200 शादियां कर सकते हैं. दूसरी बात, इसमें 4 तिथियां हैं तो संख्‍या भी बढ़ जायेंगी. कहीं भी कोई भी गरीब इससे वंचित नहीं रहेगा, जो वास्‍तव में गरीब है.

          डॉ.सतीश सिकरवार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आखिरी सवाल है कि ..

          अध्‍यक्ष महोदय- नहीं अब हो गया है, प्‍लीज आप बैठ जाइये.

          डॉ. सतीश सिकरवार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं कि गरीबी रेखा का आपके माध्‍यम से वह बंधन हटेगा तो ही जोड़े मिलेंगे, नहीं तो जोड़े नहीं मिल रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे विनम्र आग्रह है कि आपके माध्‍यम से सदन को आदेशित किया जाये. इसके कारण से एक भी जोड़ा नहीं मिला. ग्‍वालियर शहर के मंत्री जी हैं, ग्‍वालियर में ही नहीं मिल रहे हैं तो पूरे प्रदेश में क्‍या स्थिति होगी.

          अध्‍यक्ष महोदय- सतीश जी, कृपया आप बैठिये. मंत्री जी ने बहुत साफ उत्‍तर दिया है कि विभिन्‍न लोगों के माध्‍यम से इस योजना में कई प्रकार की शिकायतें प्राप्‍त हुईं. इसमें पार‍दर्शिता बनी रहे. पात्र व्‍यक्ति को लाभ मिले इसलिये सरकार ने मानदण्‍ड तय किये. हर योजना का अपना एक मानदण्‍ड होता है और इन मानदण्‍डों के बावजूद भी 13000 हजार से अधिक शादियां सम्‍पन्‍न हुई हैं.

                   (व्‍यवधान)

 

जल जीवन मिशन अंतर्गत स्वीकृत योजनाएं

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

3. ( *क्र. 993 ) श्री नारायण पटेल : क्या लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र में जल जीवन मिशन अंतर्गत कितनी योजनाएं स्वीकृत हुईं? (ख) वर्तमान में उन योजनाओं में कितनी पूर्ण हो चुकी है तथा कितनी अपूर्ण हैं? (ग) जिन पूर्ण योजनाओं में स्वीकृत किये गये डी.पी.आर. के तहत कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा अनापत्ति प्राप्त कर ली गई है, उनकी सूची उपलब्‍ध कराई जाये तथा अपूर्ण योजनाओं को पूर्ण करने में कितना समय लगेगा? (घ) प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जल निगम योजना में कितने ग्रामों में योजना स्वीकृत है तथा किस कम्पनी को कार्य करने हेतु अनुबंधित किया गया है व उन कम्पनियों द्वारा कार्य कब तक पूर्ण कर लिया जायेगा?

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री ( श्रीमती संपतिया उइके ) : (क) विधानसभा क्षेत्र मांधाता में जल जीवन मिशन अंतर्गत 126 एकल ग्राम नल-जल प्रदाय योजनाएं तथा 01 समूह जल प्रदाय योजना स्‍वीकृत है। (ख) 114 एकल ग्राम नल-जल योजना पूर्ण तथा 12 अपूर्ण हैं। 01 समूह जल प्रदाय योजना अपूर्ण है। (ग) 114 पूर्ण की गई एकल ग्राम नल-जल योजनाओं में स्वीकृत डी.पी.आर. के तहत् कार्य पूर्ण कर लिये गये हैं, अपूर्ण एकल ग्राम नल-जल योजना को मार्च 2026 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है। पूर्ण की गई एकल ग्राम नल-जल योजनाओं की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। प्रगतिरत 01 समूह जल प्रदाय योजना को माह सितम्‍बर 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्‍य है। (घ) मध्य प्रदेश जल निगम अंतर्गत स्‍वीकृत इंदिरासागर-1 समूह जल प्रदाय योजना में मांधाता विधानसभा क्षेत्र के 152 ग्राम सम्मिलित हैं। उक्‍त समूह जल प्रदाय योजना का कार्य करने हेतु कंपनी मेसर्स

 

एफ्कोन इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड, मुंबई को अनुबंधित किया गया है व कार्य सितम्बर 2026 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है।

परिशिष्ट - "एक"

            श्री नारायण पटेल- प्रश्‍न क्रमांक- 993.

          श्रीमती संपतिया उइके- माननीय अध्‍यक्ष जी, उत्‍तर पटल पर है.

           श्री नारायण पटेल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के जवाब से मैं संतुष्‍ट हूं. मेरा आग्रह है कि जो जल-जीवन मिशन की टंकियां हैं और जल-निगम मेरे अपने क्षेत्र में चल रहा है, सभी क्षेत्रों में चल रहा है तो यह टंकियां उसी उपयोग में आयेंगी क्‍या ?

          श्रीमती संपतिया उइके- हमारे माननीय सदस्‍य ने सही प्रश्‍न किया किया कि जल-जीवन मिशन के माध्‍यम से जितनी टंकियां उसी के उपयोग के लिये ही बनी हैं और जल-जीवन मिशन के माध्‍यम से जितनी भी टंकियां बन रही हैं. कई जगह यह स्थिति है कि वहां पर वाटर लेवल डाउन होने के कारण उसमें भी हम कोशिश करेंगे कि उन टंकियों को किसी स्‍त्रोत से भरकर के उसका उपयोग करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय- नारायण सिंह जी, कोई दूसरा प्रश्‍न है.

          श्री नारायण पटेल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से अनुरोध है कि यह जो नई बसाहट हैं, मंजरे-टोले के 5-10 मकान जो गांव से सटे हुए हैं तो उस एरिये में भी क्‍या यह जल-मिशन योजना से उनको लाभांवित करेंगे ?

          श्रीमती संपतिया उइके- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को बताना चाहूंगी जो आपका प्रश्‍न है कि हमारे मजरे-टोले, फलिया ऐसे गांवों को चिन्ह्ति करके और एक समिति सरकार के द्वारा बनायी गयी है, जिसमें हमारे लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग, जल निगम और जल संसाधन विभाग की एक संयुक्‍त टीम बनी हुई है, जो भी ऐसे गांव जहां पर शेष रह रहे हैं, उन सभी गांवों को चिन्हित करके उनको भी जोड़ा जायेगा.

                                                                                                         

विभागीय योजनाओं की जानकारी

[जनजातीय कार्य]

4. ( *क्र. 1918 ) श्री मधु भगत : क्या जनजातीय कार्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला बालाघाट अंतर्गत जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति विभाग में कौन-कौन सी योजनाएं संचालित हैं तथा उन योजनाओं में वर्ष 2023-24 से 2025-26 में कितनी-कितनी राशि आवंटित की गयी है? आवंटित राशि में कितनी-कितनी राशि किन मदों में व्यय की गयी है? योजनावार, मदवार जानकारी उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्‍नांक (क) अनुसार संचालित योजनाओं में आवंटित राशि में से सुदृढ़ीकरण मद, लघु निर्माण, विद्युतीकरण, बस्ती विकास परिसंपत्तियों का संधारण आदि अन्य निर्माण योजनाओं से कौन-कौन से निर्माण कार्य कराये गये एवं कराये जा रहे हैं? प्रत्‍येक निर्माण कार्य में कितनी-कितनी राशि खर्च की गयी हैं? विकासखण्डवार, ग्राम पंचायतवार विवरण देवें एवं कार्य एजेंसी निविदा संबंधी समस्त दस्तावेज सहित जानकारी उपलब्ध करावें।  (ग) क्या इस योजना के अंतर्गत कुछ ग्राम पंचायत, विकासखण्ड एवं कार्य एजेंसी को बार-बार लाभ मिला, जबकि अन्य बस्तियां, ब्लॉक अथवा कार्य एजेंसी उपेक्षित रही, विगत तीन वर्ष की सूची देवें, जिनमें सबसे अधिक राशि प्रदाय की गयी है तथा इन्हें किस आधार पर किसकी अनुशंसा पर बार-बार राशि दी गयी है? आवंटित की गई उच्चतम राशि से निम्‍नतम राशि तक कॉलमवार जानकारी उपलब्ध करावें? (घ) प्रश्‍नांक (क) अनुसार संचालित योजनाओं में से सामग्री पूर्ति एवं अन्य मद अंतर्गत विगत तीन वर्षों में क्रय की गयी सामग्रि‍यों की सूची, मय बिल व्‍हाउचर दर, लेजर, बीड की सत्यप्रति सहित उपलब्ध करावें?

जनजातीय कार्य मंत्री ( डॉ. कुंवर विजय शाह ) : (क) जिला बालाघाट अंतर्गत जनजातीय कार्य एवं अनुसूचित जाति विभाग में संचालित योजनाओं तथा उन योजनाओं में वर्ष 2023-24 से 2025-26 में व्‍यय की गई राशि की योजनावार, मदवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है(ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार संचालित योजनाओं में आंवटित राशि में से सुदृढ़ीकरण मद, लघु निर्माण, विद्युतीकरण, बस्‍ती विकास परिसंपत्तियों का संधारण आदि अन्‍य निर्माण योजनाओं में कराए गये कार्यों की विकासखंडवार, ग्रामपंचायतवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है तथा कार्य एजेंसी निविदा से संबंधित समस्‍त दस्‍तावेज पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है(ग) जी नहीं। बालाघाट जिले में अनुसूचित जनजाति बस्‍ती विकास योजना अंतर्गत विगत 03 वर्षों में स्‍वीकृत कार्यों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। योजनांतर्गत गठित समिति की अनुशंसा/अनुमोदन के आधार पर राशि दी जाती है। आ‍ंविटत की गई उच्‍चतम राशि से निम्‍नतम राशि तक जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''ड.'' अनुसार है। (घ) प्रश्‍नांश (क) अनुसार संचालित योजनाओं में से सामग्री पूर्ति एवं अन्‍य मद अंतर्गत विगत 03 वर्षों में सामग्री क्रय नहीं की गई है। शेष प्रश्‍नांश के संबंध में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

 

 

श्री मधु भगत - अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 1918 है.

डॉ. कुंवर विजय शाह - अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा दिया गया है.

श्री मधु भगत - अध्यक्ष महोदय, जनजातीय विभाग के मंत्री से हमने प्रश्न किया है, उसका जो उत्तर आया है, उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं. मैं माननीय मंत्री से जानना चाहता हूं कि एससीए और बस्ती विकास योजना में जो मदवार कार्य किये जाते हैं, उनकी राशि का सही उपयोग हुआ है?

डॉ. कुंवर विजय शाह - अध्यक्ष महोदय, लगभग 60 करोड़ रुपये की राशि सालाना मध्यप्रदेश सरकार ऐसे ट्रायबल जिले, ऐसे मोहल्ले, टोले-मजरे जहां पर आबादी 50 प्रतिशत से ज्यादा है, वहां के लिए हर साल खर्च करती है और प्रभारी मंत्री जी को हमने पूरे अधिकार दे रखे हैं. आप अपने प्रभारी मंत्री से मिलकर उसका अनुमोदन करा लें.

श्री मधु भगत - अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी की जानकारी में लाना चाहता हूं कि निश्चित ही हमारे यहां प्रभारी मंत्री जी भी हैं, लेकिन जो विभाग है, वह जो जानकारी आपको देता है, वह भ्रामक जानकारी होती है. आंकड़ों की बाजीगरी होती है. वर्ष 2021-22 के निर्माण कार्य का भुगतान वर्ष 2025-26 में हो रहा है. 2 लाख रुपये का चबूतरा, उसकी राशि देय हो चुकी है, उसके बाद भी आपके जवाब में आता है कि कार्य प्रगतिरत् है. यह कहां तक राशि का सही उपयोग है? क्या इसमें भ्रष्टाचार नहीं दिखता है? दूसरा, एससीए योजना जो है, वह बिजली के लिए परसवाड़ा जो हमारा जनजातीय ब्लॉक है, वहां अगर बिजली के उपयोग के लिए यह राशि वितरित की जाती है तो क्या इसको टेण्डर के माध्यम से विभाग नहीं बना सकता? अगर विभाग नहीं बना सकता तो अगर पंचायत को कार्य एजेंसी बनाता है तो निश्चित तौर पर वह पंचायत किस प्रकार से ठेकेदार से, किस प्रकार का कार्य करा रही है, इसकी जानकारी आपको मंत्री जी शायद अधिकारियों ने नहीं दी होगी, बहुत ही निम्न स्तर की, बहुत घटिया स्तर की, वहां पर सारी सामग्री का उपयोग किया गया है. मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि बहुत सारे विद्यालय हैं, जिनकी मरम्मत की राशि वर्ष 2021-22, 2022-23, 2024-25 एवं 2025-26, अगर वर्ष 2021-22 की राशि हम अभी तक दे रहे हैं, इसका मतलब साफ स्पष्ट होता है कि वर्ष 2023-24, 2025-26 में कैसे कार्य हुए होंगे? इसका माननीय मंत्री जी जवाब दे दें?

डॉ. कुंवर विजय शाह - अध्यक्ष महोदय, 3-4 प्रश्न हो गये हैं.

श्री मधु भगत - अध्यक्ष महोदय, मैंने यह सिर्फ भ्रष्टाचार बताया है. मैने अभी प्रश्न नहीं किया है. मेरा एक प्रश्न इसके बाद आने का है. यह मैंने एससीए बस्ती का एक ही प्रश्न किया है.

डॉ. कुंवर विजय शाह - अध्यक्ष महोदय, एससीए की राशि की जो आप बात कर रहे हैं, यह वर्ष 2021-22 से  भारत सरकार से बंद है. अभी यह धरती, आबा और जनमन में इसको सम्मिलित करके हर गांव को हमने चिह्नित किया है कि जिस भी टोले मजरे और गांव की आबादी 50 परसेंट से ज्यादा होगी, उसकी पूरी लिस्ट बनाकर भारत सरकार को भेज दी है और वहीं से पैसा सीधे पंचायतों में आ रहा है. दूसरा, 25 लाख रुपये तक की पावर ग्राम पंचायतों को है, इसलिए हम लोग राशि स्वीकृत करके काम नहीं कराते हैं, हम लोग 25 लाख रुपये तक का काम संबंधित ग्राम पंचायत को दे देते हैं. अगर पर्टिक्यूलर कोई ग्राम पंचायत ने उस काम में गड़बड़ी की हो तो आप उसकी जानकारी दें तो हम उसकी जांच करा सकते हैं.

श्री मधु भगत - अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को आपके माध्यम से बताना चाहता हूं कि वर्ष 2022-23 में 38 हायर सेकण्ड्री स्कूलों के लिए 2 करोड़ 40 लाख  रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, जिसमें टेण्डर होना था, 5 लाख 90 हजार रुपये का, कलेक्टर ने इसमें साफ टिप्पणी की है. इसकी एक कमेटी बनायी जाती है जिसमें अपर कलेक्‍टर, जिला कोषालय सहायक आयुक्‍त, सहायक यंत्री और जिला इकाई शामिल है. यह इसका टेंडर निकाले और टेंडर निकालकर 2 करोड़ 12 लाख की राशि का वितरण किया जाये. लेकिन जनजाति सहायक आयुक्‍त ने ऐसा नहीं किया. कलेक्‍टर का आदेश मान्‍य नहीं किया और प्राचार्य लोगों को रूपए 5 लाख 90 हजार की राशि वितरित कर दी. क्रमवार जो राशि वितरित की है उसमें अलग-अलग प्रकार से राशि का उन्‍होंने केन्‍द्रीयकरण कर दिया.

          अध्‍यक्ष महोदय -- भगत जी, आपका प्रश्‍न आ गया. माननीय मंत्री जी उत्‍तर देंगे.

          डॉ.कुंवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश शासन वित्‍तीय अधिकार पुस्‍तिका में जो उल्‍लेख है, वह 5 लाख रूपए तक की राशि का है जिसे हमारे जिला अधिकारी खर्च कर सकते हैं. 25 लाख रूपए तक की राशि कलेक्‍टर खर्च कर सकते हैं और 25 लाख रूपए से ऊपर तक की राशि के टेंडर यहां से होते हैं. आपने वर्ष 2023-24, 2025-26 का जो सवाल पूछा है, लेकिन चूंकि आपने जनहित में पूछा है इसलिए मैं कुछ छिपाना नहीं चाहता, अभी हम लोग यह तय कर रहे हैं कि इसे टुकड़ों में करके कलेक्‍टरों ने दो-दो, ढाई-ढाई लाख रूपए की जो सामग्री खरीदी है और जिसमें तकनीकी मापदण्‍डों का, जहां तक आपने सवाल पूछा है, अब भविष्‍य में हम लोग यह तय कर रहे हैं कि 1 लाख रूपए से अधिक की राशि का अगर कोई सिंगल सामान होगा, जैसा कि आपने कहा कि यहां से गये और बाद में टुकडे़ करके प्राचार्य को दे दिया, तो 1 लाख रूपए तक का कोई सिंगल सामान होगा, तो यहां प्रदेश लेवल से ही उसका टेंडर किया जाएगा.

          श्री मधु भगत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के जवाब से अभी भी संतुष्‍ट नहीं हॅूं..(व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न क्रमांक 5 श्री दिलीप सिंह परिहार जी.

          श्री मधु भगत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सवाल इसी से संदर्भित है. मेरा प्रश्‍न अभी कम्‍प्‍लीट नहीं हुआ है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मधु भगत जी, वह पूरक प्रश्‍न हो सकते थे...(व्‍यवधान)..

          श्री मधु भगत -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो जवाब दिया है, वह भ्रष्‍टाचार वाला है...(व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय -- मधु भगत जी, प्रश्‍न काल नियमों से चलाया जाता है...(व्‍यवधान)..

          श्री मधु भगत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे इसी से संबंधित सवाल करना है, वह इसी प्रश्‍न के अंदर छिपा हुआ है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठिए. श्री दिलीप सिंह परिहार जी.

         

नीमच में बांछड़ा समाज की समस्याएं

                                               [अनुसूचित जाति कल्याण]

5. ( *क्र. 1961 ) श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या अनुसूचित जाति कल्‍याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नीमच, मंदसौर, रतलाम में निवासरत बांछड़ा समाज को मध्यप्रदेश में किस जाति का दर्जा प्राप्त है? अधिसूचना एवं आदेशों की प्रतिलिपि देवें। (ख) प्रश्‍नांश (क) में संदर्भित जाति की कितनी महिलाएँ और बच्चियाँ (किस उम्र की) उक्त जिलों में निवासरत हैं? जिस अवधि की गणना उपलब्ध हो, वह बताएं। इस जाति की कितनी संख्या में महिलाओं व बच्चियों को लाड़ली बहना योजना में किस-किस अवधि में कितनी-कितनी राशि का लाभ दिया गया तथा कितनों को किस कारण से नहीं दिया गया? सभी महिलाओं को लाभ प्राप्त हो, इस हेतु विभागीय स्तर पर क्या प्रयास किये गये? (ग) प्रश्‍नांश (क) और (ख) में संदर्भित उक्त समुदाय की महिलाओं एवं बच्चियों को सेक्स वर्कर के रूप में कार्य करने से रोकने के लिये किये गये कार्यों, योजनाओं, जागरूकता आदि का विवरण देते हुए बताएं कि किस-किस व्यक्ति ने, किस वकील के माध्यम से इस संबंध में जनहित याचिका दायर की? याचिका एवं जवाब की प्रतियाँ दें। (घ) उक्त जाति के कितने व्यक्तियों ने 3 वर्ष की अवधि में किस जाति का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिये कितने आवेदन प्रस्तुत किये? कितने आवेदन किस-किस कारण से निरस्त किये गये और कितने आवेदन किन-किन कारणों से किस दिनांक से लंबित हैं?

अनुसूचित जाति कल्‍याण मंत्री ( श्री नागर सिंह चौहान ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' एवं ''' अनुसार है। (ख) योजना के प्रावधान अनुसार सभी पात्र महिलाओं को (21 से 60 वर्ष तक) लाड़ली बहना योजना का लाभ प्रदान किया जाता है। प्रश्‍नांश में वर्णित श्रेणी की महिलाओं की श्रेणीवार जानकारी संधारित नहीं की जाती है। (ग) मध्‍यप्रदेश में वैश्‍यावृत्ति उन्‍मूलन हेतु जाबाली योजना संचालित है। योजना में स्‍वैच्छिक संस्‍थाओं को अनुदान प्रदान किया जाता है। बच्‍चों के लिये शिक्षा व्‍यवस्‍था (आश्रम शाला) संचालित है। इस बिन्‍दु की जानकारी निरंक है। (घ) मध्‍यप्रदेश शासन, सामान्‍य प्रशासन विभाग के नियमानुसार मध्‍यप्रदेश में निवासरत पात्र व्‍यक्तियों को ''बाछड़ा '' जाति के जाति प्रमाण-पत्र जारी किये जा रहे हैं। शेष जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

          श्री दिलीप सिंह परिहार -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्र.5(1961) है. मैं आपके माध्‍यम से यह निवेदन करना चाहता हॅूं कि नेवर से नयागांव जो फोरलेन बनी है उसमें विशेषतया रतलाम, मंदसौर, नीमच, जावरा जिलों की सड़क के किनारे गांवों में बांछड़ा समुदाय के लोग निवास करते हैं. इस समुदाय की बड़ी गंभीर सामाजिक स्‍थितियां थीं, वह बहुत गंभीर है और चिंताजनक है. कई डेरों में सैकड़ों अनाथ बालिकाएं रह रही हैं जिनका शासन के पास कोई पंजीयन नहीं है और उनके आधार, समग्र आईडी, आवश्‍यक दस्‍तावेज भी नहीं हैं.

          श्री मधु भगत -- माननीय मंत्री जी, आपका वर्ष 2023 में जो भी अधिकारी था, मैंने उसका नाम नहीं लिया है, उस अधिकारी के ऊपर कार्यवाही हो...(व्‍यवधान)..      

          अध्‍यक्ष महोदय -- मधु भगत जी, आप एक समझदार विधायक हैं. आपको समय-समय पर बहुत अवसर मिलता है. प्रश्‍नकाल आगे बढ़ गया है. आप माननीय मंत्री जी से मिलकर बात कर लीजिए. आप, मंत्री जी से मिलकर उन्‍हें अवगत करा दीजिए.

          डॉ.कुंवर विजय शाह -- जी माननीय अध्‍यक्ष महोदय. हम मिलकर देख लेंगे.

          श्री दिलीप सिंह परिहार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उनके पास कोई दस्‍तावेज नहीं हैं. शासन की जो जनकल्‍याणकारी योजनाएं हैं जैसे लाड़ली बहना, लाड़ली लक्ष्‍मी योजनाएं हैं, उसके कारण अनाथ बच्‍चियां इन योजनाओं से वंचित रह जाती हैं और न ही वे इन योजनाओं में शामिल हो पाती हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- दिलीप सिंह जी, आप प्रश्‍न तो करिए.

          श्री दिलीप सिंह परिहार -- जी अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रश्‍न ही कर रहा हॅूं. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से प्रश्‍न पूछना चाहता हॅूं कि जो बांछड़ा समुदाय के उत्‍थानों के लिए, वेश्‍यावृत्‍ति जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए जो एनजीओ व अशासकीय संस्‍थाएं काम कर रही हैं, उन तीन वर्षों के कार्यों की जांच कर कार्यवाही की जाये. संस्‍था सभी तरह के कार्य नहीं कर पा रही है. उनका पंजीयन निरस्‍त करने की कृपा करें और ऐसे एनजीओ में कितनी राशि खर्च हुई है, कृपया कर बताने का कष्‍ट करें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- परिहार जी, आप बैठिए. माननीय मंत्री जी.

          श्री नागर सिंह चौहान -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रश्‍न महिला एवं बाल विकास विभाग से संबंधित है. माननीय सदस्‍य ने जो प्रश्‍न पूछा है, मैं उसके बारे में बताना चाहता हॅूं कि रतलाम, मंदसौर, नीमच, जावरा जिले में बासड़ा समुदाय की जो महिलाएं रहती हैं और उनको सरकार की योजनाओं का क्‍या-क्‍या लाभ मिलता है और लाड़ली बहना योजना का भी प्रश्‍न पूछा है, तो मैं बता देना चाहता हॅूं कि मध्‍यप्रदेश की सरकार ने लाड़ली बहना का जो नियम बनाया है. 21 वर्ष से 60 वर्ष आयु सीमा से कम महिलाओं को लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ दिया जा रहा है. रतलाम, मंदसौर में भी लाड़ली बहना योजना का लाभ दिया जा रहा है. जहां तक बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था के बारे में पूछा है. बच्चों की शिक्षा के लिये अनुसूचित जाति विभाग उनके लिये आश्रम और छात्रावास संचालित किये जा रहे हैं.

श्री दिलीप सिंह परिहारअध्यक्ष महोदय मेरा निवेदन है कि जो बालिकाएं स्नातकोत्तर की पढ़ाई कर चुकी हैं. माननीय प्रभारी मंत्री जी भी यहां पर बैठे हैं महिला एवं बाल विकास के इनके माध्यम से मैं और कलेक्टर एसपी साहब ने कई वहां वर्ग भी किये हैं और कई बेटियों को ट्रेनिंग भी देने के काम किया है, फिर भी वहां की बेटियों के प्रमाण पत्र भी नहीं बनते हैं और न ही उनको सरकार की किसी योजना का केन्द्र है. माननीय मंत्री जी वहां जिला स्तर पर एक ऐसा केन्द्र बना दे जिससे वहां की बेटिया स्वावलंबी बन सकें तथा वह नौकरी अथवा अन्य स्थानों पर जा सके.

श्री नागर सिंह चौहानअध्यक्ष महोदय, नीमच जिले में स्थायी जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिये 433 आवेदन आये थे, मंदसौर में 107, रतलाम में 110 आवेदन प्रस्तुत किये गये थे उसमें से नीमच में 347 जाति प्रमाण पत्र बने हैं, मंदसौर में 93 जाति प्रमाण पत्र बने हैं, रतलाम में 107 जाति प्रमाण पत्र बने हैं. अगर माननीय सदस्य जी के पास में ऐसे कोई आवेदन हैं कि जिनके जाति प्रमाण पत्र नहीं बने हैं तो मैं निश्चित रूप से शासन को निवेदन करूंगा कि उनके आवेदनों की जांच करके उनके प्रमाण पत्र बनाये जायेंगे.

          दिलीप सिंह परिहारअध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

          डॉ.राजेन्द्र पाण्डेयअध्यक्ष महोदय निश्चित रूप से बहुत ही गंभीर विषय है . चूंकि नीमच, मंदसौर तथा रतलाम जिलों में बाछड़ा समुदाय में वेश्यावृत्ति के कारण अनेक विसंगतियां उत्पन्न हो रही हैं. लड़ाई-झगड़े से लेकर के मारपीट तथा हत्या तक हो रही है. मैं एक शर्मनाक घटना व्यक्त करना चाहूंगा. अभी विगत् माह की यह फोरलेन पर बसे गांव हैं वहां पर उनके डेरे हैं. वहां पर नियंत्रण नहीं होने के कारण आवाजाही के कारण अनेक लोग वहां पर रूकते हैं. एक शराब के नशे मे किसी पड़ौसी के घर में जाकर के वहां पर कुंडी खटखटाने लगा उस बात को लेकर के इतना विरोध हुआ कि यह व्यक्त करना मुश्किल है. इसी प्रकार एक का विवाद होने से उसकी हत्या हो गई. मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि इनकी शिक्षा के लिये, इनको रोजगार के लिये और इनकी जागरूकता के लिये, विशेष अभियान शासन के द्वारा चलाये जायेंगे.

          श्री नागर सिंह चौहानअध्यक्ष महोदय,यह प्रश्न महिला एवं बाल विकास विभाग का है. चूंकि महिला एवं बाल विकास विभाग बच्चों की शैक्षणिक व्यवस्था के लिये समय समय पर जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है. मध्यप्रदेश एक संस्था काम कर रही है. चंबाली योजना संचालित है, यह सागर और छतरपुर जिले में संचालित है. मैं माननीय सदस्य से निवेदन करना चाहता हूं कि आपके जिले में कोई स्वयं सेवी संस्था अगर आवेदन करेगी तो सरकार उस पर विचार करेगी.

          डॉ.राजेन्द्र पाण्डेयअध्यक्ष महोदय धन्यवाद.

                                                                                     

पात्र लाड़ली बहनों को योजना में सम्मिलित किया जाना

[महिला एवं बाल विकास]

6. ( *क्र. 1782 ) श्री महेश परमार : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) लाड़ली बहना योजना के प्रारंभ दिनांक से प्रश्‍न दिनांक तक कुल कितनी लाड़ली बहनों का पंजीयन किया गया? इस अवधि में कितने पंजीयन प्रचलन में/सक्रिय हैं? अब तक कितने पंजीयन निरस्त किये गये? सकारण जानकारी देवें। (ख) योजना लागू होने के पश्चात निर्धारित आयु पूर्ण कर चुकी पात्र लाड़ली बहनों का नवीन पंजीयन कब तक कर लाभ दिया जायेगा? उनके पंजीयन हेतु वर्तमान में कोई स्पष्ट नीति/विधिक प्रावधान एवं समय-सीमा लागू है अथवा नहीं? यदि नहीं, तो क्या शासन उचित बजट प्रावधान सहित सभी पात्र बहनों को योजना में सम्मिलित करने का निर्णय लेगा? (ग) क्या प्रश्‍नकर्ता द्वारा लाड़ली बहना योजना से संबंधित अनेक प्रश्‍न विधानसभा में पूछे गये हैं? यदि हाँ, तो अब तक पूछे गये प्रश्‍नों की संख्या, उनकी प्रमाणित प्रतियाँ तथा उन पर अंतिम निर्णय/स्वीकृति की समय-सीमा क्या है? (घ) क्या शासन यह स्वीकार करता है कि पात्र बहनों को पंजीयन से वंचित रखना समानता के अधिकार एवं सामाजिक न्याय की भावना के प्रतिकूल है और क्या योजना को अधिक समावेशी बनाने हेतु आवश्यक नीतिगत/विधिक संशोधन किये जायेंगे? (ड.) लाड़ली बहना योजना में निरस्त/हटाई गई बहनों को किस योजना में शामिल किया गया है? (च) लाड़ली बहनों को मिलने वाली राशि को बढ़ाकर 3000/- रुपये प्रतिमाह कब से प्रदान किये जायेंगे? (छ) क्या इस बजट में नवीन पात्र बहनों को लाभ दिलाने ओर राशि बढ़ाकर 3000/- करने हेतु बजट प्रावधान कितना किया गया है?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( सुश्री निर्मला भूरिया ) : (क) लाड़ली बहना योजना के प्रारंभ दिनांक से प्रश्‍न दिनांक तक 1,31,06,525 महिलाओं का पंजीयन किया गया। वर्तमान में 1,25,29,051 पंजीयन सक्रिय हैं। 40 पंजीयन दावा आपत्ति समिति में अपात्र होने के कारण योजना से पृथक किया गया है। (ख) वर्तमान में नवीन पंजीयन संबंधी कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन नहीं है। अत: शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी हाँ। 02 प्रश्‍न पूछे गये। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। अंतिम निर्णय की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार प्रश्‍न के उत्‍तर में निहित है। (घ) जी नहीं। योजना के वर्तमान नियम निर्देश के अनुरूप ही लाभ दिया जा रहा है।                         (ड.) लाड़ली बहना योजना में मृत्‍यु होने पर, 60 वर्ष से अधिक उम्र के होने के कारण लाड़लियों को योजना से बाहर किया जाता है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के हितग्राही पात्रता अनुसार अन्‍य योजनाओं में आवेदन कर लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं। लाड़ली बहना योजना से अपात्रता के कारण योजना से पृथक की गई महिला पर भी यह लागू होता है। (च) वर्तमान में कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन नहीं है। (छ) वर्तमान में कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन नहीं है।

परिशिष्ट - "दो"

अध्‍यक्ष महोदय श्री महेश परमार जी.

श्री महेश परमार माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 1782 है.

महिला एवं बाल विकास मंत्री(सुश्री निर्मला भूरिया) अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न का जवाब पटल पर रखा है.

अध्‍यक्ष महोदय महेश जी, पूरक प्रश्‍न करें.

श्री महेश परमार माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं आपसे विशेष प्रार्थना करना चाहता हूं. आपकी विशेष कृपा है. ये लाड़ली बहनों का प्रश्‍न है, ये मध्‍यप्रदेश की आधी आबादी है, जब जब मौका मिलता है, बहनों को आगे बढ़ाने के प्रश्‍नों का तो हमेशा आपने बहनों की रक्षा की है, सम्‍मान किया है. आदरणीय अध्‍यक्ष जी, वर्ष  2023 में मध्‍यप्रदेश में सत्‍ता विरोधी लहर थी. तत्‍कालिक मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी ने कहा कि तीन हजार रुपए लाड़ली बहनों को देंगे और ऐसे 100-200, 1000 वीडियो हमने देखें हैं और सरकार बना ली. अध्‍यक्ष जी, आज यदि सबसे ज्‍यादा अगर किसी के साथ धोखा हो रहा है, सबसे ज्‍यादा अत्‍याचार हो रहा है तो हमारी बहनों के ऊपर हो रहा है. मैं बताना चाहता हूं अध्‍यक्ष जी, माननीय मंत्री विजय शाह बैठे हैं. हमारी बहन सोफिया का तो अपमान किया, दिनांक 15.12.2025 रतलाम जिले की बैठक में कहते हैं कि लाड़ली बहनें मुख्‍यमंत्री का सम्‍मान करने नहीं आएगी तो, उनकी जांच करवा देंगे. दूसरा माननीय मंत्री करण सिंह वर्मा जी लाड़ली बहनों को मंच पर बुलाओ जो, न आए उनका नाम काट दो. अध्‍यक्ष जी, जिन बहनों ने सरकार बनाई, जिन बहनों से 3000 रुपए का वादा किया था, उस आधी आबादी के साथ, उन बहनों को आज माननीय मुख्‍यमंत्री जी का कार्यक्रम हो या सरकारी कार्यक्रम को सफल बनाने का जरिया बना लिया है, क्‍या बहनों को सरकार ने 1500 रुपए में खरीद लिया, ये पूछना चाहता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय आपका प्रश्‍न क्‍या है?

श्री महेश परमार अध्‍यक्ष जी, मेरा प्रश्‍न है कि लाड़ली बहना योजना लागू होने के पश्‍चात, निर्धारित आयु पूर्ण कर चुकी, पात्र लाड़ली बहनों को नवीन पंजीयन कब तक, कर लाभ दिया जाएगा, उनके पंजीयन हेतु वर्तमान में कोई स्‍पष्‍ट नीति, विधिक प्रावधन, अथवा कोई समय सीमा लागू है, अथवा नहीं. यदि नहीं तो क्‍या शासन उचित बजट प्रावधान सहित, सभी पात्र बहनों को योजना में सम्मिलित करने का निर्णय लेगा. क्‍या प्रश्‍नकर्ता लाड़ली बहन योजना से संबंधित अनेक प्रश्‍न विधान सभा में पूछे गए हैं.

अध्‍यक्ष महोदय महेश जी, आपका प्रश्‍न आ गया है. प्रश्‍न बहुत सारे आ गए हैं तो जवाब भी आने दीजिए.

श्री महेश परमार अध्‍यक्ष जी, इसमें विशेष कृपा चाहिए, आधी आबादी की बहनों के सम्‍मान की बात है.

अध्‍यक्ष महोदय परमार जी बैठिए, मंत्री जी को जवाब देने दीजिए.

सुश्री निर्मला भूरिया माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को यह बताना चाहूंगी कि हमारी सरकार है, जो बहनों और महिलाओं के लिए, उनको सशक्‍त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है और माननीय सदस्‍य ने जो प्रश्‍न किए थे, उन सारे प्रश्‍नों के उत्‍तर हमने इनको लिखित में दिए हैं और आपके माध्‍यम से बताना चाहूंगी कि मुख्‍यमंत्री लाड़ली बहना योजना का प्रारंभ मार्च, 2023 से किया गया और जून, 2023 से बहनों के खाते में राशि अंतरित की जा रही है. प्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी की सरकार बहनों के खातों में नियमित रूप से राशि को अंतरित करने के लिए प्रतिबद्ध है. महिलाओं के लिए और महिलाओं को सशक्‍त बनाने के लिए, हम लगातार प्रयास कर रहे हैं और इस साल भी हमने वर्ष 2025-26 में भी, अभी तक 18 हजार 528 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है. मैं बताना चाहूंगी कि सरकार द्वारा इस योजना का बहुत अच्‍छा क्रियान्‍वयन किया है और आज तक जो दिनांक सरकार ने राशि जमा करने की तय की है, उसी दिनांक को हमारी राशि अंतरित की जा रही है और तुरंत ही शत प्रतिशत महिलाओं के खाते में राशि चली जाती है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा लाड़ली बहनों को दी जा रही प्रतिमाह की राशि में बढ़ोत्‍तरी जो माननीय सदस्‍य ने पूछा है और पहले भी माननीय सदस्‍य ने दो प्रश्‍न किया था और एक ध्‍यानाकर्षण भी इन्‍होंने लगाया था कि राशि रुपए 3000 किए जाने की जो घोषणा है, उस पर सरकार लगातार काम कर रही है. यही कारण है कि सरकार ने हर रक्षाबंधन पर उन्‍हें 250 रुपए की अतिरिक्‍त सहायत दी है और 1000 रुपए प्रतिमाह से बढ़ाकर 1500 रुपए प्रतिमाह भी कर दी है. आप लोगों को परेशान होने की चिंता नहीं करना चाहिए, क्‍योंकि आपसे ज्‍यादा हम लाड़ली बहनों की चिंता कर रहे हैं और इस प्रदेश की महिलाओं के प्रति हम लोग सजग हैं.(मेजों की थपथपाहट). अध्‍यक्ष महोदय, हमारी लगातार इसमें कोशिश है कि हम लाड़ली बहनों को मदद करें, मैं आपको बताना चाहूंगी की इस योजना से महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से सशक्‍त और स्‍वावलंबी बनी हैं, वरन् इस राशि का उपयोग उन्‍होंने अपने बच्‍चों की शिक्षा, पोषण और दूसरे कामों में की है, तो मैं यह आश्‍वस्‍त करती हूं कि इस ओर हमारा, हमारी सरकार का और हमारे मुख्‍यमंत्री जी का लगातार प्रयास है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- महेश जी, आप दूसरा पूरक प्रश्‍न करें.

          श्री महेश परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरे इसी प्रश्‍न का जवाब नहीं आया है, मैंने नवीन पंजीयन के बारे में प्रश्‍न किया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन तीन सालों में आठ लाख, दस लाख बहनों के नाम हर वर्ष बढ़ें हैं, हमारी बहनें 21 साल की हो रही हैं, पहले हमारी भोली भाली बहन जी से अधिकारियों ने क्‍या पढ़वा दिया है? पहले मेरे प्रश्‍न का जवाब आ जाये, क्‍या इन तीन सालों में आठ से दस लाख बहन दो साल में बढ़ी हैं, उनके पंजीयन की मैं बात कर रहा हूं ? उस समय तात्‍कालिक मुख्‍यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान थे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आपका पंजीयन का प्रश्‍न है, अब आप बैठ जायें, मंत्री जी आप जवाब दें.

          श्री महेश परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इस प्रश्‍न का उत्‍तर सही से आ जाये, फिर मैं दूसरा पूरक प्रश्‍न करूंगा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, नहीं अब पूरक प्रश्‍न नहीं होगा, आपका प्रश्‍न आ गया है.

          श्री महेश परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसी में प्रश्‍न कर लेता हूं, मेरा यह कहना है कि तीन हजार रूपये देने का वायदा किया था, उस समय के श्री शिवराज सिंह चौहान जी के हजारों वीडियों हैं, उन्‍होंने कहा था कि हम पांच साल में पूरा करेंगे, सिर्फ सरकार बनाने के लिये इन बहनों के साथ धोखा हुआ है और साठ साल के ऊपर की बहनें, जिनके नाम काट दिये जा रहे हैं, साठ साल की उम्र के बाद बहनों को ज्‍यादा आर्थिकतता की जरूरत होती है, उन बहनों के नाम काट रहे हैं, यह कौन सा न्‍याय है और इन तीन सालों में कितनी बहनों के नाम कटे हैं और इसमें पहले बहन सही जवाब तो दे, पंजीयन कब चालू होंगे, पोर्टल क्‍यों बद है? कोई भी योजना बनती है, तो लगातार उस योजना को चलना चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- महेश जी, कृपया अब आप बैठ जायें. आपका प्रश्‍न आ गया है और तीन हजार के मामले में उन्‍होंने कहा है कि आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है.

          श्री महेश परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, वह समय तो बतायें, उस समय शिवराज सिंह चौहान जी को यह कहना था कि पांच साल में देंगे(श्री रामेश्‍वर शर्मा, सदस्‍य द्वारा अपने आसन से कहने पर) रामेश्‍वर भईया उन बहनों के आर्शीवाद से ही आप विधायक बने हो, आप तो रहने दो. आपको वह बहनें बाहर सब घेर लेंगी. (व्‍यवधान)..

 

         

          श्री रामेश्‍वर शर्मा --  (XXX)

          श्री महेश परमार -- अरे भईया (XXX)यहां पर है क्‍या? सुन लो (XXX)

 यहां पर उपस्थित नहीं है, जिनके आशीर्वाद से सरकार बनी है, उनको तो आप न्‍याय दिला दो. (व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय -- इनका रिकार्ड में नहीं आयेगा और महेश जी, अब आपका भी रिकार्ड में नहीं आयेगा. माननीय मंत्री महोदया, आप जवाब दें.  

          श्री महेश परमार-- (XXX)

          सुश्री निर्मला  भूरिया -- अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने पहले भी कहा है कि सरकार हमारी बहनों के लिये, लाड़ली बहनों के लिये, लाड़ली लक्ष्‍मी और दूसरी बहनों के लिये भी सजग है और इसके लिये उन्‍हें किस तरह से साक्षर किया जाये, किस तरह से उनको लाभ दिया जाये, इसके लिये कटिबद्ध है और साठ वर्ष के बाद नाम कटने वाली बात है, तो उनको जो अगर पात्र हैं, तो उनको वृद्धा पेंशन दी जाती है, तो ऐसा कुछ नहीं है कि साठ साल के बाद उनके नाम काटे जा रहे हैं.

          श्री महेश परमार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहनों के सम्‍मान की बात है, बहनों के साथ धोखा हो रहा है, पोर्टल बंद हैं, उनको तीन हजार रूपये नहीं मिल रहे हैं, नाम काटे जा रहे हैं, लगभग 25 लाख बहनें, जिनकी आयु 21 वर्ष हो गई है. यह आधी आबादी के सम्‍मान की बात है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- महेश जी, महेश जी प्‍लीज आप वरिष्‍ठ विधायक हैं और आप सब चीजों को जानते हैं, आपने जितने प्रश्‍न कर लिये हैं, एक बार में उनका जवाब नहीं आ सकता है, इसलिए मैं बार-बार आग्रह करता हूं कि स्‍पेसिफिक प्रश्‍न करो, आपने स्‍पेसिफिक प्रश्‍न नहीं किया है तो उसके कारण दिक्‍कत आ रही है. मंत्री जी ने अपना जवाब दिया है.          

          श्री महेश परमार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कौन सा न्‍याय है, आधी आबादी, जिनके कारण सरकार बनी, शिवराज सिंह चौहान जी ने हजारों घोषणाएं की हैं.       

          अध्‍यक्ष महोदय -- नेता प्रतिपक्ष बोल रहे हैं, आप बैठ जायें.

          नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) -- अध्‍यक्ष महोदय, दो-दो सदस्‍य ने, सिकरवार जी ने भी प्रश्‍न किया था और श्री महेश परमार जी ने भी प्रश्‍न किया है. सिर्फ इतनी सी बात है कि क्‍या नये पंजीयन महिलाओं के, बहनों के चालू होंगे, कब होंगे? बस इतना बता दें, उसमें क्‍या है. तीन साल बाद करेंगे तो बता दें कि तीन साल बाद करेंगे.

          सुश्री निर्मला भूरिया-- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने सदन को जैसा बताया है कि हमारी सरकार लाड़ली बहनों के प्रति कटिबद्ध है और अभी यह बताना संभव नहीं है और लगातार बहनों के हित के लिये हम प्रयास कर रहे हैं और उनको किस तरह से आत्‍मनिर्भर बनाया जाये, इसके लिये हमारा प्रयास है और सरकार इसके लिये काम कर रही है(मेजों की थपथपाहट).                    

          श्री उमंग सिंघार-- अध्‍यक्ष जी, समय बताने में क्‍या दिक्‍कत है, सरकार की वित्‍तीय स्थिति खराब है. ..(व्‍यवधान).. कब चालू करेंगे, एक साल बाद, 2 साल बाद, 3 साल बाद, यह बता दें ..(व्‍यवधान)..

          श्री महेश परमार--  माननीय अध्‍यक्ष जी, बहनों के वोट लेते समय ही याद आती है. ..(व्‍यवधान).. एक मिनट बोलने तो दीजिये. ..(व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय--  कृपया एक मिनट बोलने के लिये मत बोलो. यह सदन समाधान तक पहुंचने के लिये है. समाधान के लिये रास्‍ता चाहिये. अब मुख्‍यमंत्री जी बोल रहे हैं.

          मुख्‍यमंत्री (डॉ. मोहन यादव)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी माननीय मंत्री ने प्रश्‍न का सही जवाब दिया है. लाड़ली बहना योजना जब हमने लागू की थी तब यही नेता प्रतिपक्ष और उनके सारे दल के लोग कह रहे थे कि केवल चुनाव तक है. मुझे गर्व है आज ढाई साल के आसपास हो रहा है, हमारी योजना न केवल सबके बीच जा रही है बल्कि बढ़ते हुये एक हजार से योजना चालू करते हुये लगभग डेढ़ हजार रूपया महिना हम दे रहे हैं और हमने अपने घोषणा पत्र में कहा है कि 5 साल के अंदर वर्ष 2028 तक 3 हजार रूपया प्रति बहन हम राशि देने वाले हैं और देकर रहेंगे. ..(मेजों की थपथपाहट)..

          श्री उमंग सिंघार-- अध्‍यक्ष जी, यहां पंजीयन की बात हो रही है. सदस्‍यों ने जो सवाल किया है वह पंजीयन के लिये किया है. क्‍या नये पंजीयन चालू होंगे या नहीं होंगे और कब होंगे यह सवाल है. आपकी योजना चल रही है, वह सबको पता है, लेकिन पंजीयन चालू होंगे कि नहीं होंगे. जो बहनें 18 साल की हो गई हैं उनके पंजीयन कब चालू होंगे, यह पूछना चाह रहे हैं, बस इतनी सी बात है.

          डॉ. मोहन यादव-- धीरे धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय.

                                माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आये फल होय.

 

          चिंता मत करो, वह सब होगा.

          श्री उमंग सिंघार--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कब होगा. कब चालू होंगे पंजीयन. ..(व्‍यवधान).. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार इस पर जवाब नहीं देना चाहती इस बात पर हम बहिर्गमन कर रहे हैं.

11.47 बजे                            बहिर्गमन

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण का लाड़ली बहना के नये पंजीयन न होने के कारण शासन द्वारा संतोषजनक जवाब न देने के विरोध में सदन से बहिर्गमन.

 

        नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-- शासन द्वारा संतोषजनक जवाब न देने के विरोध में हम सदन से बहिर्गमन करते हैं.

          (इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण का लाड़ली बहना के नये पंजीयन न होने के कारण शासन द्वारा संतोषजनक जवाब न देने के विरोध में सदन से बहिर्गमन किया).

आबा योजनातंर्गत श्‍योपुर जिले को आवंटित राशि

[जनजातीय कार्य]

7. ( *क्र. 1821 ) श्री बाबू जन्‍डेल : क्या जनजातीय कार्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रधानमंत्री आदि आर्दश ग्राम/जनमन/धरती आबा योजनांतर्गत श्योपुर जिले के कौन-कौन से ग्रामों/ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है? विधानसभा/विकासखण्डवार विस्‍तृत सूची एवं योजनाओं का स्वरूप तथा नियम निर्देशों की जानकारी उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार उक्त योजनाओं के तहत योजना प्रारंभ से प्रश्‍न दिनांक तक कौन-कौन सी गतिविधियां तथा कौन-कौन से निर्माण कार्य कितनी-कितनी राशि से कहां-कहां कराये गये हैं? निर्माण कार्यवार निर्माण एजेंसी को प्रदाय राशि एवं व्यय की गई राशि की जानकारी तथा निर्माण कार्यवार किये गये मूल्यांकन (माप पुस्तिका) की छायाप्रति एवं कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र तथा निरीक्षण/सत्यापन प्रतिवेदनों की प्रति उपलब्‍ध करावें एवं कार्य की भौतिक स्थिति का प्रतिवेदन देवें? (ग) उक्त योजनाओं में श्योपुर जिले को योजना प्रारंभ से प्रश्‍न दिनांक तक कितनी-कितनी बजट राशि प्राप्त हुई है? वर्षवार, मदवार, जानकारी उपलब्ध करावें तथा कौन-कौन सी ग्राम पंचायत को कब-कब कितनी-कितनी राशि किस-किस निर्माण कार्य हेतु किस नियम निर्देशों के तहत प्रदाय की गई है? गौशवारा सहित विस्‍तृत जानकारी उपलब्ध करावें।

जनजातीय कार्य मंत्री ( डॉ. कुंवर विजय शाह ) : (क) चयनित ग्रामों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र  'एक' एवं नियम निर्देश की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'दो' अनुसार है(ख) उक्‍त योजना अन्‍तर्गत कराये गये निर्माण कार्यों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'तीन', मूल्‍यांकन (माप पुस्तिका) निरीक्षण आदि की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'चार' एवं कार्यों की भौतिक स्थिति की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'तीन' अनुसार है(ग) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'पांच' अनुसार है

          श्री बाबू जन्‍डेल--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 1821 है.

          डॉ. कुंवर विजय शाह-- माननीय अध्‍यक्ष जी, उत्‍तर पटल पर रख दिया है.

          श्री बाबू जन्‍डेल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्‍योपुर जिले में प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम जनमन धरती आबा बस्‍ती विकास योजना के अंतर्गत भारी भ्रष्‍टाचार हो रहा है. वर्ष 2022-23 में 198 निर्माण कार्य 16 करोड़ रूपये की स्‍वीकृति से हुये थे जिनकी प्रथम किश्‍त राशि 8 करोड़ रूपये की ग्राम कार्य एजेंसी को प्रदान की गई, परंतु कोई भी निर्माण कार्य धरातल पर प्रारंभ नहीं हुये, फिर भी द्वितीय किश्‍त की राशि 8 करोड़ रूपये बिना मूल्‍यांकन एवं कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र के जारी कर दिये गये हैं जो नियम विरूद्ध होकर सरेआम भ्रष्‍टाचार है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2023-2024, 2024-2025, 2025-2026 के स्‍वीकृत निर्माण कार्यों की जांच मेरे समक्ष राज्‍य स्‍तर से समिति गठित कर कराई जाये जिससे श्‍योपुर जिले में हो रहे भ्रष्‍टाचार की सच्‍चाई सामने आ सके, माननीय, सरेआम यह भ्रष्‍टाचार है. 8 करोड़ की जो राशि प्रदान की गई है उसको बिना मूल्‍यांकन के दूसरी किश्‍त 8 करोड़ की प्रदान की गई है. आज तक 198 निर्माण कार्य का पता नहीं है कि कार्य क्‍या हुआ क्‍या नहीं हुआ....

          अध्‍यक्ष महोदय-- बाबू भाई प्रश्‍न तो करो, आप मंत्री जी से क्‍या पूछना चाहते हो.

          श्री बाबू जन्‍डेल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम जनमन धरती आबा योजनांतर्गत राशि प्रदान एवं निर्माण कार्यों की जानकारी के संबंध में क्‍या जनजाति कार्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि क्रमांक 6 प्रधानमंत्री आदि आदर्श ग्राम जनमन धरती आबा योजना के अंतर्गत श्‍योपुर जिले में कौन-कौन से ग्राम पंचायतों का चयन किया गया है. विधान सभा विकासखंड वार विस्‍तृत सूची इन योजनाओं का स्‍वरूप तथा नियम निर्देश की जानकारी उपलब्‍ध कराये. प्रश्‍न 6 अनुसार उक्त योजनाओं के तहत योजना प्रारंभ से आज दिनांक तक कौन कौन सी गतिविधियां तथा कौन कौन से निर्माण कार्य कितनी-कितनी राशि से कहां कहां कराए गए हैं. निर्माण कार्यवार निर्माण ऐजेंसी को प्रदान राशि एवं व्यय की गई राशि की जानकारी तथा निर्माणकार्यवार किये गये मूल्यांकन माप पुस्तिका की छायाप्रति एवं कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र..

          अध्यक्ष महोदय - बाबू जण्डेल जी, आपने जो प्रश्न लगाया आप उसी प्रश्न को पढ़ रहे हो. उसका उत्तर मंत्री जी दे चुके हैं वह आपके पास है अब इसके बाद आपको कुछ लगता है तो वह पूछें तो उसका मंत्री जी उत्तर देंगे.

          श्री बाबू जण्डेल - जो 16 करोड़ का भ्रष्टाचार हुआ है उसमें 8 करोड़ की राशि एजेंसी को प्रदान की गई है बगैर निर्माण के 8 करोड़ रुपये फिर डाल दिये गये हैं जिसका कोई मूल्यांकन नहीं है तो राज्य स्तर पर समिति गठित करके इसकी जांच कराई जाए.

          डॉ.कुंवर विजय शाह - माननीय अध्यक्ष जी, इस सदन को और माननीय विधायक साथी जी को भी हम सबको माननीय प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहिये इस देश की आजादी के बाद एक ऐसे प्रधानमंत्री जिन्होंने शहरिया,बैगा,भारिया, उनके लिये स्पेशल पेकेज चाहे वह जनमन के रूप में हो चाहे वह धरती आभा अभियान के रूप में हो और इन सबके रूप में उन्होंने 8 हजार करोड़ रुपये हमें मंजूर किये और आप देख सकते हैं कि अगर मैं मकान की बात करूं तो 2 लाख 84 हजार मकान केवल पीवीवीटी यानि सहरिया,बैगा,भारिया के मंजूर हुए हैं और उसमें से 88 हजार पूर्ण भी हो गये हैं जहां तक बात माननीय विधायक जी ने की है कि श्योपुर जिले में विभागवार,विधानसभा वार,ग्राम पंचायत वार यह आपको प्रस्तुत कर दिया गया है आप चाहें तो और ले सकते हैं. आपकी विधान सभा में इतने-इतने काम हमने प्रस्तुत किये स्वीकृत कार्य अलग-अलग राशि के हैं इसमें लगभग 17 विभाग इन्वाल्व हैं आपको जानकारी है और हम काम उनके माध्यम से कराते हैं चाहे सड़क हो बिजली हो सामुदायिक भवन हो रोड हो अगर कोई पर्टिकुलर शिकायत कोई हो तो उसकी हम जांच करा सकते हैं बाकी विकास कार्य में कहीं कोई कोताही नहीं बरती गई है.केवल जिले मं 125 काम आपके पूर्ण हो रहे हैं 16 करोड़ के काम हैं लिस्ट मेरे पास है आप ले लें या मैं आकर दे दूं.

          अध्यक्ष महोदय - जण्डेल जी और कोई दूसरा पूरक प्रश्न.

          श्री बाबू जण्डेल - जो 16 करोड़ का जनमन योजना रोड का कार्य था और जो आभा योजना है जो 8 करोड़ की प्रथम राशि है वह बिल्कुल कार्य नहीं है धरातल पर जांच तो कराई जाए जो माननीय प्रधानमंत्री जी ने आदिवासी जनमन योजना चालू की है ट्रायवल के लिये योजना चालू की है तो पूरी भ्रष्टाचार में गई धरातल पर काम तो बताईये या राज्य स्तरीय समिति से जांच कराईए मेरे समक्ष पूरे 16 करोड़ का भ्रष्टाचार है यह मात्र कागज की योजना है. मेरे जिले में 1 लाख आदिवासी निवास करते हैं अभी तक  धरातल पर 16 करोड़ की जगह 16 रुपये के काम नहीं हैं. इसकी जांच कराई जाए.प्रधानमंत्री जी की योजना को राज्य सरकार भ्रष्टाचार की चपेट में ले रही है.

          अध्यक्ष महोदय - बाबू भाई प्लीज बैठें. मंत्री जी कुछ कहना चाहते हैं.

          डॉ.कुंवर विजय शाह -  भ्रष्टाचार की कोई भी ऐसी शिकायत नहीं है 17 विभाग काम कर रहे हैं और लगभग काम कम्पलीशन पर है. 80-90 परसेंट काम हो चुका है. प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहिये.आपकी विधान सभा के ही काम हैं. अगर कोई पर्टिकुलर काम है तो.

          श्री बाबू जण्डेल -  अध्यक्ष जी, यह बिल्कुल असत्य बोल रहे हैं.

          डॉ.कुंवर विजय शाह - आप सुन तो लें श्रीमान.

          श्री बाबू जण्डेल - 8 करोड़ की राशि बगैर मूल्यांकन के कैसे डाले गये हैं.

            डॉ. कुंवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष जी, 17 डिपार्टमेंट काम कर रहे हैं.  पर्टिकुलर कौन सा काम कौन डिपार्टमेंट कर रहा है, अगर ऐसी कोई ऑथेन्‍टिक जानकारी मिलेगी तो मैं उसकी जांच करा सकता हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी ने कह दिया है. अगर आपका पर्टिकुलर कोई विषय है तो वह लिखकर दे दें,  वे जांच करा देंगे.

          श्री बाबू जन्‍डेल -- पर्टिकुलर विषय है माननीय अध्‍यक्ष जी, बिना मूल्‍यांकन के दोबारा 8 करोड़ रुपये डाल दिए गए हैं. मैं लिखकर माननीय मंत्री जी को देता हूँ और उसकी जांच कराई जाए.

          स्‍वीकृत नल-जल योजनाओं के कार्य पूर्ण कराए जाना

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

8. ( *क्र. 2037 ) श्री हरिशंकर खटीक : क्या लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) टीकमगढ़ जिले की जतारा वि.स. या संपूर्ण जिले की ग्रामीण जनता को नल-जल योजना के कार्य पूर्ण करवाकर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने जनवरी 2019 से प्रश्‍न दिनांक तक प्रश्‍नकर्ता द्वारा कब-कब प्रश्‍न विधानसभा में किये गये हैं? संपूर्ण जानकारी प्रदाय करें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के आधार पर बतायें कि टीकमगढ़ जिले की जल जीवन अंतर्गत स्‍वीकृत ऐसी कौन-कौन सी नल-जल योजनाएं हैं, जो प्रश्‍न दिनांक तक ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं करा पाई है, क्यों? कारण स्पष्ट करें। इन योजनाओं पर विभाग द्वारा कौन-कौन से ठेकेदारों को कितनी-कितनी राशि का भुगतान किया जा चुका है? इतनी राशि व्यय होने के बावजूद भी ठेकेदार ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल नहीं दे पाये। विभाग ने क्या-क्या प्रश्‍न दिनांक तक कार्यवाही की है? संपूर्ण जानकारी दें। (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के आधार पर निश्चित समय-सीमा सहित जानकारी दें कि कब तक ग्राम पंचायत चंदेरा, बम्हौरी खास, सदगुआ, टोरिया, बम्हौरी कला, कनेरा, स्यावनी, सिमरा खुर्द, बराना सहित सभी स्वीकृत ग्रामों की नल-जल योजनाओं से शुद्ध पेयजल मिलने लगेगा?

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री ( श्रीमती संपतिया उइके ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) एकल ग्राम नल-जल योजनाओं की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। बाणसुजारा समूह जल प्रदाय योजना के कार्य प्रगतिरत हैं, कार्य में विलंब विभिन्न विभागों से अनुमतियों को प्राप्त करने में हुआ है। मेसर्स एन्वायरों इन्फ्रा इंजीनियर्स लि., नई दिल्ली को राशि रु. 225.38 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। जी हाँ, कार्य पूर्ण नहीं करने के कारण फर्म से अनुबंधानुसार माइलस्टोन के अनुरूप राशि रु. 3.93 करोड़ की कटौती देयक से की गई है, कार्य पूर्ण होने के उपरांत विलंब विश्लेषण कर गुणदोष के आधार पर कार्यवाही की जायेगी। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-3 अनुसार है।

          श्री हरिशंकर खटीक -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 2037 है.

          श्रीमती संपतिया उइके -- अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर रख दिया गया है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- हरिशंकर जी, कृपया प्रश्‍न करें.

          श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे टीकमगढ़ जिले में जो नल-जल योजनाएं हैं, उससे संबंधित हमारा विधान सभा प्रश्‍न है. अध्‍यक्ष महोदय, हमारे टीकमगढ़ जिले में पीएचई विभाग के द्वारा काम अच्‍छा हो रहा है. माननीय मंत्री को और माननीय मुख्‍यमंत्री जी को हम धन्‍यवाद देना चाहते हैं कि कार्य की गुणवत्‍ता भी ठीक हो रही है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन जो ठेकेदार हैं, वे काम करने के बाद या काम बीच में छोड़कर के टीकमगढ़ जिले से भागकर जा रहे हैं. जिन नल-जल योजनाओं के कार्य पूर्ण हो गए हैं और जो हैण्‍ड ओवर भी हो गए हैं, उसके बाद ग्राम-पंचायतों के सरपंच भी परेशान हो रहे हैं. इसका मुख्‍य कारण है जल स्रोतों में पानी न आना. यानि कि जल स्‍तर बहुत नीचे चला गया है और पानी नहीं पहुँच पा रहा है तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से हमारा अनुरोध है कि जिस प्रकार से टीकमगढ़ जिले में बांध सुजारा सिंचाई परियोजना के माध्‍यम से टीकमगढ़ और बल्‍देवगढ़ विकासखण्‍डों में समूह जल प्रदाय योजना के माध्‍यम से पानी दिया जा रहा है, उसी प्रकार से हमारे जतारा विधान सभा क्षेत्र के जतारा और पलेरा विकासखण्‍डों में भी बांध सुजारा डैम के माध्‍यम से समूह जल प्रदाय योजना के माध्‍यम से जल प्रदाय किया जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- जल्‍दी प्रश्‍न कर लें, नहीं तो प्रश्‍नकाल खत्‍म हो जाएगा, उत्‍तर नहीं आ पाएगा.

          श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा अनुरोध है कि उसी प्रकार से जतारा और पलेरा विकासखण्‍डों में भी समूह जल प्रदाय योजना के माध्‍यम से स्‍वीकृत किया जाए.

          श्रीमती संपतिया उइके -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को बताना चाहूँगी, जैसे कि टीकमगढ़ जिले में ऐसे गांव, माननीय सदस्‍य ने जैसा कहा कि वहां पर हमारा बांध सुजारा डैम है और जिसके चलते टीकमगढ़ ब्‍लॉक और बल्‍देवगढ़ ब्‍लॉक में हम लोग बांध सुजारा डैम के माध्‍यम से पानी देने का काम करते हैं और बाकी गांव हैं, जिन गांवों में, जैसा कि माननीय सदस्‍य ने कहा कि वॉटर लेवल डाऊन होने के कारण बहुत से ऐसे गांव हैं, जहां पर हम पानी नहीं दे पा रहे हैं, ऐसे गांव हम लोगों ने चिह्नित किए हैं, 99 ऐसे गांव हैं, जिनके लिए माननीय मुख्‍यमंत्री जी के मार्गदर्शन में एक टीम बनाई गई है. उसको चिह्नित करके और हमारे जल संसाधन मंत्री जी भी यहां पर उपस्‍थित हैं, हम उनसे निवेदन करेंगे कि आप बांध सुजारा डैम से हमें 10 एमसीएम पानी दे दें, हमारे पूर्व मंत्री जी और वरिष्‍ठ माननीय विधायक जी ने जैसा कहा कि वहां पर पानी की व्‍यवस्‍था हो तो निश्‍चित ही हम लोग एक कमेटी के माध्‍यम से उसकी विजिट करने के बाद और समीक्षा करने के बाद वहां पर पानी की व्‍यवस्‍था करने की पूरी कोशिश करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- हरिशंकर जी, दूसरा पूरक प्रश्‍न करें.

          श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बांध सुजारा डैम है, जब जल संसाधन मंत्री जी उसमें परमिशन देंगे कि हम पानी देंगे, समूह जल प्रदाय योजना के लिए तभी माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसमें पानी मिल पाएगा क्‍योंकि 280 एमसीएम पानी बांध सुजारा डैम में है, अध्‍यक्ष महोदय, हम ही ने स्‍वीकृत कराया था. उसमें जो पूरा पानी है, वह बड़ा मल्‍हेरा क्षेत्र में पीने के लिए जा रहा है, टीकमगढ़ और बल्‍देवगढ़ विकास खण्‍ड के लिए भी योजना स्‍वीकृत हुई है. 250 एमसीएम पानी किसानों के लिए फसल सिंचित करने के लिए है. तो उसके अलावा, जबकि उसमें बांध सुजारा डैम में पानी की उपलब्‍धता ज्‍यादा है, लेकिन उसमें बताया जा रहा है कि मात्र 280 एमसीएम है, जबकि 300 एमसीएम से भी ज्‍यादा पानी है. हमारे जल संसाधन मंत्री जी भी बैठे हैं. उनसे हमारा अनुरोध है कि पानी की उपलब्‍धता बांध सुजारा डैम में अधिक है और मात्र जतारा विकासखण्‍ड और पलेरा विकासखण्‍ड के लिए पानी की व्‍यवस्‍था करने का कष्‍ट करें. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यही हमारी प्रार्थना है. माननीय मंत्री जी से हमारा अनुरोध है कि इसे स्‍वीकृत करने का कष्‍ट करें.

          जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसीराम सिलावट) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पानी पर्याप्‍त होगा तो दिया जाएगा.

          श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले पीने के पानी की प्राथमिकता है. किसानों के लिए, 181 गांवों के किसानों की 75 हजार हेक्‍टेयर भूमि सिंचित हो रही है. इसके बावजूद भी बांध सुजारा डैम में पानी बचता है. आप 280 एमसीएम बोलते हैं, जबकि उसमें 300 एमसीएम से ज्‍यादा पानी है. अगर हमें जतारा और पलेरा विकासखण्‍ड के लिए 10 एमसीएम ही पानी मिल जाएगा तो हमारी जो समूह नल-जल योजनाएं हैं, वह सब पूरी चालू हो जाएंगी. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसको समूह जल प्रदाय योजना के माध्‍यम से स्‍वीकृत किया जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- संपतिया जी, कुछ कहना चाहेंगी.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय...    

          श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे प्रश्‍न का उत्‍तर आ जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- चलिए, प्रश्‍न काल समाप्‍त हो गया. मैंने बहुत कोशिश की, जवाब आ जाए, लेकिन आप लोग लंबा-लंबा प्रश्‍न करते हैं तो मैं क्‍या करूं. प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 


 

12.00 बजे                        नियम 267-क के अधीन विषय      

          अध्‍यक्ष महोदय - निम्‍नलिखित माननीय सदस्‍यों की शून्‍यकाल की सूचनाएं प्रस्‍तुत की हुई मानी जाएंगी.

          1.       डॉ. हिरालाल अलावा

          2.       श्री मधु भगत

          3.       श्री दिनेश राय मुनमुन

          4.       श्री कैलाश कुशवाहा

          5.       श्री देवेन्‍द्र पटेल

          6.       श्री दिनेश गुर्जर

          7.       श्रीमती कंचन मुकेश तनवे

          8.       श्रीमती अनुभा मुंजारे

          9.       डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय

          10.     श्री भगवानदास सबनानी

          श्री पंकज उपाध्‍याय - अध्‍यक्ष जी, कल भोपाल और इन्‍दौर के कांग्रेस कार्यालयों पर गुण्‍डों के द्वारा हमला किया गया. मैं आपसे ....(..व्‍यवधान..)

(..व्‍यवधान..)

          डॉ. अभिलाष पाण्‍डेय - माननीय अध्‍यक्ष जी ... (..व्‍यवधान..)

          डॉ. विक्रांत भूरिया - अध्‍यक्ष महोदय, (..व्‍यवधान..)

(..व्‍यवधान..)

          अध्‍यक्ष महोदय - प्‍लीज, पंकज जी, बैठ जाइये. कृपया बैठ जाइये. आगे ध्‍यानाकर्षण भी हैं.

 

 

 

12.02 बजे

पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) मध्‍यप्रदेश राज्‍य परिसम्‍पत्ति प्रबंधन कंपनी लिमिटेड का तृतीय वार्षिक

प्रतिवेदन एवं लेखे वर्ष 2024-2025.

 

(2) जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्‍वविद्यालय, जबलपुर (म.प्र.) की वैधानिक

ऑडिट रिपोर्ट वर्ष 2023-2024.

 

 

 

(3) जिला खनिज प्रतिष्‍ठान जिला-भोपल, शहडोल, छतरपुर, शाजापुर, दतिया एवं नर्मदापुरम का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023 तथा जिला-नर्मदापुरम्, अनूपपुर, दमोह, पन्‍ना, धार एवं उमरिया का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025.

(4) (क)(i) महाराजा छत्रसाल बुन्‍देलखण्‍ड विश्‍वविद्यालय, छतरपुर (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2023-2024,

(ii) रानी अवन्‍तीबाई लोधी विश्‍वविद्यालय, सागर (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025,

 (iii) क्रांतिवीर तात्‍या टोपे विश्‍वविद्यालय, गुना (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025,

 (iv) देवी अहिल्‍या विश्‍वविद्यालय, इन्‍दौर (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025,

 (v) क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्‍वविद्यालय, खरगौन (म.प्र.) का प्रथम वार्षिक पालन प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025,

  (vi) पंडित शंभूनाथ शुक्‍ला विश्‍वविद्यालय, शहडोल (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025 एवं

   (vii) जीवाजी विश्‍वविद्यालय, ग्‍वालियर (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025 तथा

(ख) महात्‍मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्‍वविद्यालय (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025,

(ग) अटल बिहारी वाजपेयी हिन्‍दी विश्‍वविद्यालय, भोपाल का तेरहवां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025 तथा

(घ) मध्‍यप्रदेश भोज (मुक्‍त) विश्‍वविद्यालय, भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025.

 

 

 

 

 

 

(5) नानाजी देशमुख पशुचिकित्‍सा विज्ञान विश्‍वविद्यालय, जबलपुर (म.प्र.) का

वार्षिक लेखा विवरण वित्‍तीय वर्ष 2024-2025.

 

         

 

 

 

12.05 बजे

ध्‍यानाकर्षण

(सदन द्वारा स‍हमति प्रदान की गई.)

          डॉ. अभिलाष पाण्‍डेय-  अध्‍यक्ष महोदय, मुझे इस विषय पर बोलने दिया जाये.

          अध्‍यक्ष महोदय-  अभिलाष जी, आप जानते हैं कि आपको किसी नियम के अंतर्गत आना चाहिए और उसके बाद आपको बोलने की अनुमति मिलती है. भूपेन्‍द्र सिंह जी अपनी ध्‍यानाकर्षण की सूचना पढ़ें.  

          डॉ. अभिलाष पाण्‍डेय-  कांग्रेस ने जिस तरह की स्थिति मध्‍यप्रदेश में बना रखी है.

          श्री पंकज उपाध्‍याय-  भारतीय जनता पार्टी ने यह काम किया है.

(...व्‍यवधान...)

          अध्‍यक्ष महोदय- कृपया सभी बैठें, कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं जायेगा, केवल भूपेन्‍द्र जी का लिखा जायेगा.

(...व्‍यवधान...)

          श्री भैरो सिंह (बापू)- (XXX)

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-  (XXX)

          श्री दिनेश जैन (बोस)-  (XXX)

          डॉ. विक्रांत भूरिया-  (XXX)

          श्री पंकज उपाध्‍याय-  (XXX)

          डॉ. अभिलाष पाण्‍डेय-  (XXX)

(...व्‍यवधान...)

          अध्‍यक्ष महोदय-  सभी सदस्‍य कृपया अपने स्‍थान पर बैठ जायें. अभिलाष जी कृपया बैठें, आप समझदार सदस्‍य हैं. अभिलाष जी आप नियम के अंतर्गत सूचना दीजिये. 

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-  अध्‍यक्ष महोदय, AI के ग्‍लोबल समिट में कांग्रेस के लोगों ने कपड़े उतारकर प्रदर्शन किया. उनके खिलाफ इंदौर में भी प्रदर्शन हुए कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पथराव किया है, इसके लिए उन्‍होंने ध्‍यानाकर्षण लगाया है, मेरा निवेदन है कि आप उसे कभी-भी देख लीजियेगा.

(...व्‍यवधान...)

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-  अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या यह रिकॉर्ड में आ रहा है? यदि आ रहा है, तो हम भी बोलने के लिए तैयार खड़े हैं. अभी आपने कहा कि कुछ रिकॉर्ड में नहीं आयेगा. कोई किसी के घर पर जाकर पत्‍थर चलायेगा तो वे क्‍या देखते रहेंगे ? प्रदेश के अंदर कानून व्‍यवस्‍था कैसी है, प्रदेश की कानून व्‍यवस्‍था बिगड़ चुकी है. यह क्‍या लोकतंत्र में ठीक है, विरोध किया जाता है लेकिन अगर ये डंडे चलायेंगे और फिर हम डंडे चलायेंगे तो, मैं, समझता हूं कि इससे विवाद की स्थिति होगी. यह घोर निंदनीय है.

           (...व्‍यवधान...)

          अध्‍यक्ष महोदय-  मेरा आप सभी से अनुरोध है कि आज ध्‍यानाकर्षण की 4 सूचनायें हैं इसलिए आप सभी कृपया बैठें. सदन नियम-प्रक्रिया के अनुसार चलता है. अभी प्रश्‍नकाल हुआ है, बहुत से महत्‍वपूर्ण प्रश्‍नों पर चर्चा हुई है. मैंने 1-2 प्रश्‍न के बाद भी, प्रश्‍न की महत्‍ता को देखते हुए सभी सदस्‍यों को अवसर दिया है. अब सदन की कार्यवाही आगे बढ़ गई है. ध्‍यानाकर्षण पर चर्चा शुरू हो रही है, आप सभी यदि कोई विषय उठाना चाहते हैं तो नियमों के अंतर्गत आयेंगे तो मैं उस पर विचार करूंगा. कृपया शांति बनाये रखें. भूपेन्‍द्र सिंह जी, आप अपना ध्‍यानाकर्षण पढ़ें.

 

                                   

 

 

 

 

 

                                                  ध्‍यानाकर्षण (क्रमश:)

 (1) खुरई विधान सभा क्षेत्रान्‍तर्गत शासकीय महाविद्यालय खुरई में रिक्‍त पदों की पूर्ति, स्‍टेडियम निर्माण एवं बी.एड., विधि संकाय के नवीन पाठ्यक्रम प्रारम्‍भ किया जाना

 

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह (खुरई)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया इसके लिए मैं आपके प्रति ह्दय से कृतज्ञता ज्ञापित करता हूं. हम सभी को इस बात का गर्व है कि आपके अध्‍यक्ष बनने के बाद आपने सदन में उच्‍च संसदीय परम्‍पराएं स्‍थापित की हैं, इसके लिए भी मैं आपका ह्दय से अभिनन्‍दन करता हूं, बधाई देता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी और माननीय उच्‍च शिक्षा मंत्री जी का भी ह्दय से स्‍वागत करता हूं कि हमारे प्रदेश में उच्‍च शिक्षा के क्षेत्र में अनेक जनकल्‍याण के निर्णय सरकार के द्वारा लिये गये हैं. कुछ मेरे क्षेत्र की छोटी समस्‍याएं हैं. मैं इस ध्‍यानाकर्षण के माध्‍यम से माननीय मंत्री जी का ध्‍यानाकर्षित करना चाहता हूं. मेरी ध्‍यानाकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है:- 

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा में खुरई, मालथौन  एवं बांदरी में शासकीय महाविद्यालय संचालित है. जिसमें खुरई महाविद्यालय में वर्तमान में स्‍नातक में 1714 तथा तथा स्‍नातकोत्‍तर मे 363 छात्र, छात्राएं अध्‍यनरत हैं. शासकीय महाविद्यालय खुरई के कुल 2077 छात्र, छात्राओं के लिए वर्तमान में कोई भी स्‍टेडियम उपलब्‍ध नहीं है. भवन की भी थोड़ी कठिनाई है, इसके साथ-साथ मैं यह भी कहना चाहूंगा कि कुछ नवीन संकाय प्रारम्‍भ करने की भी आवश्‍यकता है इसमें खुरई में विज्ञान संकाय में वनस्पतिशास्‍त्र, रसायनशास्‍त्र, प्राणीशास्‍त्र, भौतिकशास्‍त्र, व कला संकाय में अंग्रेजी साहित्‍य में स्‍नातकोत्‍तर पाठ्यक्रम तथा वाणिज्‍य संकाय में स्‍नातक पाठ्यक्रम प्रारम्‍भ किये जाने की आवश्‍यकता है. खुरई महाविद्यालय में विधि संकाय की भी अवश्‍यकता है. बच्‍चों को कई बार उच्‍च शिक्षा ग्रहण करने के कारण से बाहर जाना पड़ता है जिससे आर्थिक बोझ भी आता है. साथ ही हमारा जो विधान सभा में मालथौन महाविद्यालय है वहां पर कुल मिलाकर लगभर 1700 छात्र, छात्राएं अध्‍ययनरत हैं. इसमें भी नवीन पाठ्यक्रम की आवश्‍यकता है. हिन्‍दी, जियोग्राफी, राजनीति विज्ञान, इतिहास तथा विज्ञान संकाय में वनस्‍पति विज्ञान, जूलॉजी में स्‍नातकोत्‍तर, पीजी की कक्षाओं की आवश्‍यकता है. साथ ही शासकीय महाविद्यालय बांदरी जो कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में है यहां पर कुल मिलाकर 900 छात्र, छात्राएं  अध्‍ययनरत हैं और यहां पर भी बांदरी शासकीय महाविद्यालय में वाणिज्‍य संकाय में स्‍नातक तथा कला संकाय में स्‍नातकोत्‍तर, पीजी पाठ्यक्रम प्रारम्‍भ किये जाने की आवश्‍यकता है. मैं यह भी आग्रह करूंगा कि शासकीय महाविद्यालय में जो स्‍वीकृत पद हैं वह 22 हैं उसमें से 6 पद रिक्‍त हैं.  हमारे मालथौन महाविद्यालय में 15 पद स्‍वीकृत हैं जिसमें से 10 पद रिक्‍त हैं तथा शासकीय महाविद्यालय बांदरी में 19 में से 14 पद रिक्‍त हैं. इस कारण से शिक्षण कार्य थोड़ा प्रभावित हो रहा है. इसके साथ-साथ मेरा माननीय मंत्री जी से यही आग्रह है कि वह इस पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करके और जो हो सकता है उसको करेंगे ऐसा मेरा उनसे निवेदन है. 

             

 

 

 

 

 

 

 

          उच्च शिक्षा मंत्री (श्री इन्दर सिंह परमार ) -- माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

          श्री भूपेन्द्र सिंह -- माननीय अध्यक्ष जी, मैं माननीय मंत्री जी का बहुत धन्यवाद करता हूँ. मेरे द्वारा जो विषय उनके ध्यान में लाये गये थे उनमें से लगभग सभी विषयों पर उन्होंने सहमति व्यक्त की है कि यह सब आवश्यकताएं वहां पर हैं. उन्होंने इस बात के लिए भी आश्वस्त किया है कि वे इस हेतु यथासंभव कार्यवाही करेंगे. उन्होंने अपने उत्तर में भी बताया है कि बहुत से संकाय प्राध्यापकों की नियुक्ति हेतु प्राचार्यों को अधिकार दिए हैं. मेरा मंत्री जी से इतना आग्रह है कि इस हेतु आपके निर्देश जारी हो जाएं कि जो नियमानुसार हो सकता है जो अधिकार आपने और शासन ने दिए हैं उनका त्वरित पालन हो जाए. जिससे वहां पर छात्र-छात्राओं को जो असुविधा हो रही है वह न हो. दूसरा मेरा माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि खुरई महाविद्यालय में स्पोर्ट्स की कोई सुविधा नहीं है. जबकि वहां पर 6 एकड़ शासकीय भूमि उपलब्ध है. आप कोई स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स या इंडोर स्टेडियम बनवा देंगे तो बच्चों को सुविधा होगी. यह दो आग्रह मेरे आपसे हैं.   

          श्री इन्‍दर सिंह परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, खुरई, मालथौन और बांदरी इन तीनों महाविद्यालयों का हमने पूरा परीक्षण किया है. सरकार को जो यहां से कुछ विषय प्रारंभ करना होगा वह हम यहां से करने की तैयारी कर रहे हैं, बाकी कुछ हम जो स्‍ववित्‍तीय योजना में संचालित कर सकते हैं उसमें हमने प्राचार्य को भी निर्देश किया है. जहां तक रिक्‍त पदों का विषय है हम लगातार भर्ती कर रहे हैं लेकिन उसकी वैकल्पिक व्‍यवस्‍था के रूप में हमारे अतिथि विद्वान जिनको पूरी पात्रता के साथ रखते हैं उनकी व्‍यवस्‍था की गई है. जहां तक स्‍टेडियम की बात है तो जमीन को लेकर हमें थोड़ी जानकारी थी और अभी माननीय विधायक जी और ज्‍यादा जमीन बता रहे हैं उसका हम परीक्षण करा रहे हैं, लेकिन जो जमीन खाली है जिस पर भवन बना हुआ है उसमें जो खाली स्‍थान बचता है यदि वहां स्‍पोर्ट्स कॉम्‍पलेक्‍स बन सकता है तो जरूर बनाएंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- भूपेन्‍द्र सिंह जी, और प्रश्‍न है. मुझे लग रहा है समाधान हो गया है.

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं पहले आपका धन्‍यवाद तो करता ही हूं फिर मंत्रीजी का फिर से धन्‍यवाद करता हूं. मेरा सिर्फ इतना ही आग्रह है कि आपने जो सारा विषय रखा है इसके निर्देशों का समय पर पालन हो जाए नहीं तो हम सब जानते हैं कि नीचे कठिनाई यह आती है कि नीचे के अधिकारी ऊपर के अधिकारी को मार्गदर्शन के लिए भेज देते हैं, फिर ऊपर के अधिकारी नीचे फिर जानकारी के लिए भेज देते हैं और इसमें विलंब होता है, तो एक समय सीमा इसमें जो प्राचार्य के स्‍तर पर, जे.डी. के स्‍तर पर जो कार्यवाही हो सकती है उसकी अगर आप यहां से समय सीमा तय करेंगे तो बच्‍चों को उसका लाभ होगा. इतना मेरा आग्रह है. समय सीमा तय कर दें और वह शीघ्र हो जाए.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, स्‍ववित्‍तीय योजना में सरकार से या विभाग से अनुमति की वर्तमान में जरूरत नहीं है. 2023 में संशोधन कर दिया है. प्राचार्य ही उस पर चला सकते हैं इसलिए उनको निर्देश कर रहे हैं.

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह -- एक मिनट माननीय मंत्री जी, जब यह निर्देश हैं कि प्राचार्यों को अधिकार है तो फिर प्राचार्यों ने अभी तक क्‍यों नहीं किया ?

          श्री इन्‍दर सिंह परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, जो विषय बता रहे हैं प्राचार्यों को अधिकार है. वह खोल सकते हैं भोपाल से भी अनुमति लेने की जरूरत नहीं है लेकिन नहीं किया तो हम उनसे पूछेगे. उनको कठिनाई होगी तो उसका निराकरण करेंगे और जो यहां से हम कर सकते हैं यहां से भी करेंगे. कुछ विषय ऐसे हैं जिसमें हम यहां से नहीं खोल पाएंगे लेकिन स्‍थानीय स्‍तर पर कई जगह वह विषय चल रहे हैं जो इसमें उल्‍लेख किया गया है. इनमें से शासन स्‍तर पर हमने काफी में काम किया है उनको हम समयावधि में करेंगे ताक‍ि अगले सत्र से वहां पर हम शुरू करा सकें. जहां तक जगह यदि मिल गई है तो हम बहुत जल्‍दी स्‍पोर्ट्स कॉम्‍प्‍लेक्‍स स्‍वीकृत कर देंगे ताकि वहां निर्माण का कार्य प्रारंभ हो जाए.

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह --  अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

          श्रीमती सेना महेश पटेल --  अध्‍यक्ष महोदय,

         


 

            अध्यक्ष महोदय- बैठिये, मंत्री जी.

          राज्य मंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण(श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि सम्माननीय सदस्या श्रीमती सेना पटेल जी ने जो विषय रखा है उसमें आपके माध्यम से बताना चाहूंगा कि ;-

 

          अध्यक्ष महोदय- श्रीमती सेना जी, दो पूरक प्रश्न आप पूछ सकते हैं, एक राजन मण्डलोई जी इसके बाद में पूछ सकते हैं.

12.30 बजे                   {सभापति महोदय(डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय) पीठासीन हुए }

          श्रीमती सेना महेश पटेल -- माननीय सभापति महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी से यह प्रश्न है कि रोशनी कलेश की घटना की क्या सरकार सीबीआई जांच करवायेगी ? सभापति जी मेरी मांग है कि इस प्रकरण की सीबीआई जांच होना चाहिये. मैं मांग करती हूं कि इसकी सीबीआई  जांच  होनी चाहिये और  जो  पोस्ट मार्टम  की बात  कही  जा रही है मंत्री जी के द्वारा, वह गलत है. परिवार  वालों को इस घटना के बारे में पता नहीं है.  वह तो सुबह पहुंचे हैं यहां पर. परिवार वालों को बिना बताये  पोस्ट  मार्टम कर दिया गया है.  मैं इसकी उच्च स्तरीय जांच, सीबीआई  की  मांग करती हूं  और जो  भी दोषी होगा, उसके  विरुद्ध एफआईआर दर्ज  हो, ऐसी  मैं मांग करती हूं.  मैं  यह भी चाहूंगी कि इस प्रकार की घटना  हर  मेडिकल कालेज में होती है.  तो आगे से ऐसी कोई घटना न हो.   इसलिये  इसमें  जो दोषी है, उस पर सख्त से  सख्त कार्यवाही हो, ऐसी मैं मांग करती हूं.  अगर  ऐसा नहीं हुआ, तो  मैं  यह बोलना चाहूंगी कि  हमारा आदिवासी समाज पूरी तरह  से  उग्र आंदोलन करेगा.  ऐसा मैं बोलना चाहती हूं.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेलसभापति महोदय,  जैसा कि  मैंने पूर्व में भी कहा कि  यह कहना उचित नहीं  है कि  परिवार को सूचना नहीं थी.  जो पंचनामा बनाया गया  है, उसमें  उनके परिवार के सदस्यों  के हस्ताक्षर हैं,  उनके पिता जी एवं माता जी के हैं.  उनकी माताजी की   उपस्थिति में ही उनको  पहचान किया गया था और  माता जी की  उपस्थिति में ही चूंकि एक महिला  के  शव परीक्षण के दौरान   महिला का ही होना आवश्यक होता है, तो  उनकी माता जी वहां पर थीं और 5 डाक्टर्स  के  पैनल ने यह   पीएम किया है, इसलिये कोई   गुंजाइश इसमें नहीं  बचती है.   जहां तक  माननीय सदस्य जी ने कहा,  उसके बारे में निवेदन करना चाहूंगा  कि  एसआईटी गठित की गई है और  आपको बताते हुए यह भी संतोष है कि  इस  एसआईटी में  जो  तीनों सदस्य हैं, वह  महिला हैं.  श्रीमती अंकिता खारकर,एसीपी, सहायक  पुलिस  आयुक्त हैं. श्रीमती भूपेन्द्र कौर संधू,  थाना प्रभारी हैं.  उप निरीक्षक,  आरती धुर्वे जी हैं,  तीनों महिलाओं की   एक एसआईटी गठित  की गई है. तो  ये पूरी निष्पक्षता एवं  त्तपरता  के साथ  में  इसकी जांच एसआईटी  कर रही है.  मैं  समझता हूं कि निश्चित रुप से जो  प्रारंभिक  साक्ष्य मिले हैं, उसके आधार पर  मैंने बात पहले भी रखी है.  तो सारा  प्रकरण निश्चित रुप से   केवल  एक समाज का नहीं पूरे म.प्र.. की चिंता का विषय है और हम सब  उसके परिवार के साथ में हैं.  जैसा कि हमारी सदस्या बहन  ने  कहा,  ऐसी घटना दोबारा   मेडिकल कालोजों में न हो,  यह  भी निश्चित रुप से  शासन की भी चिंता है और  पूरे समाज  की भी चिंता होनी चाहिये,  चूंकि उस छात्रा को ज्यादा  समय  नहीं हुआ था. नवम्बर  में  एडमिशन हुआ और फरवरी में यह घटना  हो गई.  अन्यथा मेडिकल कालेजों में यह  व्यवस्था है कि ऐसे  जो विद्यार्थी हैं,  चूंकि स्कूल से आते हैं,  अलग परिवेश से आते हैं, फिर अलग परिवेश  उनको कालेजों में मिलता है.  तो  उनको प्रेरणा का काम करने के लिये  मेंटर  की व्यवस्था मेडिकल कालेजों में   आलेरडी है.  लेकिन  कम समय इस छात्रा को मिला, इसलिये  मैं समझता हूं कि  यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो गई है. लेकिन  शासन इस बात को और सुनिश्चित करेगा  कि  यह  तत्परता से हमारे  मेंटर काम करें.  ताकि भविष्य में    ऐसी कोई घटना दोबारा न हो.

          सभापति महोदयमाननीय सदस्य,  कोई  और पूरक प्रश्न.  वैसे बहुत विस्तार से  मंत्री  जी ने जवाब दिया है.

          श्रीमती सेना महेश पटेलसभापति महोदय,  सीबीआई जांच कब होगी,  मैं यह जानना चाहती हूं.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेलसभापति महोदय,   जैसे  कि इसमें प्रारंभिक साक्ष्य  जो मिले हैं, वह स्पष्ट हैं और  एसआईटी गठित है,  तो  मैं नहीं समझता हूं कि  इसमें  एसआईटी सक्षम नहीं है.  एसआईटी  सक्षम है और वह इस प्रकरण को  निश्चित रुप से  दूध का दूध, पानी का पानी करने में  सक्षम है, तो पर्याप्त है.

          श्री राजन मण्डलोई (बड़वानी) सभापति महोदय, मामला   ग्रामीण  गरीब  आदिवासी  वर्ग की  छात्रा का है और  पहले भी ऐसी कई घटनाएं हुई हैं,  जो  ग्रामीण क्षेत्र से   आदिवासी वर्ग के बच्चे उच्च शिक्षा के लिये आते हैं, तो उनके साथ  महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों में  जातिगत भेदभाव होता है, मानसिक प्रताड़ना होती है,  जिसके कारण पूर्व में भी  ग्वालियर  एवं विदिशा मेडिकल कालेज  में आत्म हत्याएं  और दूसरी प्रताणना के कारण  ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं.  मेरा प्रश्न  यह है कि  जब आदिवासी छात्रा कालेज में  प्रवेश ले चुकी थी,  तो वहां पर  उनको काउंसलिंग क्यों नहीं करवाई गई, यह नये बच्चों को.  उनकी काउंसलिंग के लिये   इनको मेंटर दिया जाना था और दूसरी बात यह है कि पुलिस ने तो शुरू से उनको आत्‍म हत्‍या मान लिया है. इस दिशा में काम ही नहीं किया है. अगर आत्‍म हत्‍या भी की है, तो उस आत्‍म हत्‍या के पीछे क्‍या कारण हैं ? सिर्फ पढ़ाई या कॉलेज के अंदर उसके साथ प्रताड़ना या जातिगत भेदभाव हुआ हो उस पर कोई विचार ही नहीं हुआ है.

          सभापति महोदय- आपका प्रश्‍न क्‍या है. आप प्रश्‍न रखें.

          श्री राजन मण्‍डलोई- मेरा प्रमुख प्रश्‍न यह है कि हमको पुलिस की जांज पर भरोसा नहीं है, भले ही आपने एसआईटी का गठन किया हो. हम तो यह चाहते हैं कि या तो सीबीआई या न्‍यायिक जांच इस घटना की करायी जाये.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल- माननीय सदस्‍य की चिंता निश्चित रूप से उचित है. परन्‍तु कुछ बातों से मैं असहमति व्‍यक्‍त करता हूं और मैं अपना स्‍वयं का उदाहरण देना चाहूंगा कि मैं एक छोटे से गांव में, मैं एक साधारण से परिवार से निकलकर, जब इंजीनियरिंग कॉलेज में गया था और हिन्‍दी मीडियम का छात्र था. मुझे भी बहुत चुनौतियों का सामना करना पड़ा था. मैं प्रथम और द्वितीय साल में, जिसको कह सकते हैं सप्‍लीमेंट्री भी आयी थी, कह सकते हैं और फेल भी हुआ था. लेकिन उन चुनौतियों का सामना करते हुए आगे चलकर मैंने थर्ड, फोर्थ और फिफ्थ ईयर तक, जब पांच साल का इंजीनियरिंग हुआ करता था, तब मैंने महाविद्यालय में भी टाप किया और युनिवसिर्टी में भी टाप किया था और उसके लिये यह आपने विषय उठाया. उसके बारे में बड़ी विनम्रता पूर्वक कहना चाहता हूं कि मैं भी ओबीसी वर्ग से आता हूं, लेकिन महाविद्यालय में जो गुरूजन रहे, निश्चित रूप से वह विभिन्‍न जातियों के थे, हर जाति के थे, उच्‍च जातियों के भी थे और अन्य आरक्षित जातियों के भी थे. लेकिन सबका स्‍नेह और प्रेम मुझे मिला तो हर विषय को हम ऐसा जोड़ दें तो मैं यह समझता हूं कि यह वृद्ध समाज के लिये उचित नहीं है. जहां तक इस विषय में हमने कुछ मान नहीं लिया है. मैंने यह कहा है कि जांच में जो प्रारंभिक साक्ष्‍य मिले हैं, अभी तक की जांच में. अभी जांच जारी है. जांच में अगर कोई तथ्‍य आयेगा तो निश्चित रूप से पुलिस कार्यवाही करेगी.

          श्री राजन मण्‍डलोई- सभापति महोदय, मंत्री जी ने उनकी कालेज लाईफ की बात बताई तो मैंनें खुद भी जीएसआईटीएस से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है इलेक्‍ट्रानिक्‍स में डिग्री ली है. वहां किस प्रकार से प्रताड़ना होती है. आपसे ज्‍यादा हम गुजरे हैं. आप जो यह स्‍टोरी बता रहे हो, इस प्रकार नहीं आप वास्‍तविक रूप से बतायें कि मेडिकल और इंजीनियर कॉलेज में किस प्रकार के जातिगत भेदभाव होते हैं, यह आप नहीं जानते हैं. आज भी यदि एससीएसटी बच्‍चों का दल और विधायक दल हो और वह छात्रों से जाकर संपर्क करेंगे तो सामने बहुत सारे तथ्‍य आयेंगे.

          सभापति महोदय- पूरा जवाब आ गया है.

          श्री राजन मण्‍डलोई- यदि इसकी जरूरत नहीं होती तो मोदी जी को यूजीसी बिल जाने की जरूरत नहीं पड़ती. केन्‍द्र की सरकार ने जो बिल आया है वह इसी कारण से लाया है कि महाविद्यालयों के अंदर जातिगत भेदभाव होता है. हमारा कहना यह है कि जो आप आत्‍म हत्‍या बता रहे हैं. हमारा कहना है कि इसके पीछे कोई मानसिक प्रताड़ना या और कोई कारण रहे हों, इसकी जांच भी पुलिस को करना चाहिये. वह जांच आपने नहीं करी है, सीधा आत्‍म हत्‍या घोषित कर दी है. इसलिये हमको आपकी जांच पर भरोसा नहीं है. आप इसकी न्‍यायिक या सीबीआई जांच करवाइये.

          सभापति महोदय- वैसे एसआईटी गठित हो गयी है. आपकी बात का बहुत विस्‍तार से मंत्री जी ने जवाब दिया है.

          नेता प्रतिपक्ष( श्री उमंग सिंद्यार)- सभपति महोदय, यह बड़ा महत्‍वपूर्ण है कि कई होस्‍टलों के अंदर इस प्रकार की घटना पूर्व में इस प्रदेश में हुई है. रोशनी अलीराजपुर जिले से एक आदिवासी परिवार की थी. उनका परिवार और उनके साथ के सहेलियों और बच्‍चों का कहना है कि वह मेद्यावी छात्रा थी. जब वह पढ़ने में इतनी मेद्यावी थी तो फिर वह कैसे आत्‍म हत्‍या कर सकती है. वह प्रथम मंजिल पर रहती थी और तीसरी मंजिल पर यह घटना हुई और चौथी बात मंत्री जी के संज्ञान में लाना चाहता हूं कि उसके शरीर पर निशान हैं. जब कोई किसी का गाल दबाता है और जोर से दबाता है तो नीले निशान पड़ते हैं. तो क्‍या उस मृतका ने खुद ही अपने हाथ से गाल दबाये. यह तथ्‍य छिपाये जा रहे हैं. उस लड़की के साथ बलात्‍कार हुआ है और क्‍या एसआईटी इन तथ्‍यों पर जांच कर रही है और कब तक करेगी. क्‍या जांच की कोई समय-सीमा रहेगी. नहीं तो मालूम पड़ा कि जांच है तो पांच साल हो जाते हैं, फिर भी नहीं होती. उस आदिवासी लड़की को कब न्‍याय मिलेगा. उस आदिवासी परिवार को, आज उसके मां-बाप आज सुबह मेरे घर पर रो रहे थे. क्‍या आप उनकी भावना को नहीं समझेंगे. सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से जानना चाहता हूं कि जांच कब तक पूर्ण होगी.

          सभापति महोदय- माननीय नेता प्रतिपक्ष जी, अभी माननीय मंत्री जी ने कहा है कि जांच चल रही है. जांच प्रक्रियाधीन है.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल - सभापति महोदय, हमारे संवेदनशील नेता प्रतिपक्ष जी की चिंता से निश्चित रूप से शासन भी सहमत है और उन्होंने समयावधि की बात कही है. निश्चित रूप से न्याय समयावधि में हो तो ही उसको हम न्याय कहेंगे तो मैं सदन को आपके माध्यम से और नेता प्रतिपक्ष जी को भी यह आश्वस्त करता हूं कि 3 माह के अंदर हम एसआईटी की जांच कर लेंगे.

श्री उमंग सिंघार - धन्यवाद.

 (3) पन्ना विधान सभा अंतर्गत छत्रसाल महाविद्यालय अजयगढ़ एवं खोरा महाविद्यालय में शैक्षणिक स्टॉफ की पद पूर्ति, स्नातकोत्तर की कक्षाएं तथा शासकीय विधि महाविद्यालय प्रारंभ किया जाना

 

        श्री ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह (पन्ना) - सभापति महोदय,

                                                       

 

 

 

 

 

 

 

 

 

उच्च शिक्षा मंत्री (श्री इन्दर सिंह परमार) - सभापति महोदय,

 

                                       


 

          श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह (पन्‍ना) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय मंत्री जी ने बताया है कि पन्‍ना कॉलेज में 72 पदों में से 32 पद खाली हैं और 40 पदों पर काम चल रहा है. खोरा में 22 पद हैं और 1 ही अतिथि विद्वान है. इस संबंध में माननीय मंत्री जी से मेरा यह कहना है कि उस 1 अतिथि विद्वान की कहीं न कहीं पन्‍ना कॉलेज से पूर्ति की जाती है, जो कि 50 किलोमीटर दूर है. जिस दिन अतिथि विद्वान नहीं जाता है, उस दिन खोरा कॉलेज में पढ़ाई नहीं होती है. जैसा कि आपने कहा कि कार्यवाही प्रकियाधीन है. माननीय मंत्री जी से मेरा यह कहना है जैसा कि अतिथि विद्वानों के लिए आपने कहा है कि रिक्‍त पदों की पूर्ति की भी चयन सूचियों के अनुसार उनकी पूर्ति की जाएगी लेकिन इसकी पूर्ति कब तक की जाएगी और कब तक अतिथि विद्वानों की नियुक्‍तियां कर दी जाएंगी ?

          उच्‍च शिक्षा मंत्री (श्री इन्‍दर सिंह परमार) -- माननीय सभापति महोदय, जो खोरा का महाविद्यालय है, उसमें कुछ तकनीकी कारणों से अभी फिलहाल वहां से वेतन की कठिनाई होती है इसलिए उनका मैपिंग नहीं हो रहा है इसलिए हम स्‍थायी किसी को भी नहीं भेज सकते. हम अन्‍य जगह से यह व्‍यवस्‍था कर रहे हैं और उसकी वैकल्‍पिक व्‍यवस्‍था कर रहे हैं. वहां ज्‍यादा संख्‍या में अतिथि विद्वान या अन्‍य जगह के असिस्‍टेंट प्रोफेसर वहां करेंगे. अगले सत्र से हम प्रॉपर व्‍यवस्‍था करेंगे कि ज्‍यादा से ज्‍यादा पदों को हम भर सकें.

          श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि अगले सत्र से इसकी पूर्ति हो जाएगी, तो मैं यह मानकर चलूं, मतलब मुझे इतना आश्‍वासन दे दिया जाए.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार -- माननीय सभापति जी, जुलाई में अगला सत्र शुरू होता है, तब से इनको सारी नई व्‍यवस्‍था मिलेगी.

          श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- बहुत-बहुत धन्‍यवाद. दूसरा मेरा एक और आग्रह है कि मैंने पीजी कक्षा के बारे में पूछा है, उसके बारे में माननीय मंत्री जी ने यह बताया है कि यह भी कार्यवाही प्रक्रियाधीन है. मेरा आग्रह यह है कि अजयगढ़ क्षेत्र में 2 कॉलेज आते हैं. एक कॉलेज में 1 हजार बच्‍चे हों, दूसरे में 361 के करीब-करीब 1300-1400 बच्‍चे आते हैं, दोनों जगह स्‍नातक क्‍लॉसेस तो हैं लेकिन एक साइड में हमारा उत्‍तरप्रदेश लग जाता है और दूसरा हमारा जो कॉलेज, जहां पर पोस्‍ट ग्रेजुएशन क्‍लॉसेस हैं, वह 50 किलोमीटर की दूरी में है. मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह कर रहा हॅूं कि क्‍या आप पीजी क्‍लॉसेस अगले सत्र में शुरू कर देंगे ?

          श्री इन्‍दर सिंह परमार -- माननीय सभापति महोदय, अजयगढ़ और पन्‍ना में दोनों जगहों पर, जहां पर जिन विषयों में पीजी की आपकी मांग है, वह प्रक्रिया में है. हम अगले सत्र से उनको प्रारम्‍भ कर देंगे.

          श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- माननीय सभापति महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. मेरा तीसरा प्रश्‍न विधि विद्यालय को लेकर है.    

          सभापति महोदय -- बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह जी, आपके दो प्रश्‍न आ गए हैं.

          श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- सभापति महोदय, मेरा तीसरा प्रश्‍न विधि महाविद्यालय के बारे में है. जैसा कि माननीय मंत्री जी ने बताया है कि दिनांक 13.8.2028 को बीसीआई के द्वारा इसको स्‍थगित किया गया है और यह 3 साल के लिए स्‍थगित किया गया है. मेरा माननीय मंत्री जी से यह आग्रह है कि क्‍या इसे 3 साल बाद, क्‍योंकि 2025 में इसे स्‍थगित किया गया था, तो जब वर्ष 2028 में जैसे ही स्‍थगन खतम होगा, तो क्‍या आप लॉ कॉलेज संचालित करवा देंगे ?

          श्री इन्‍दर सिंह परमार -- माननीय सभापति महोदय, यह केवल मध्‍यप्रदेश की समस्‍या नहीं है, यह पूरे देश भर में माननीय न्‍यायालय के हस्‍तक्षेप से बीसीआई ने यह पत्र जारी किया है और इसमें जैसे ही वहां से निराकरण होगा, हम सैद्धांतिक रूप से सरकार हर जिला केन्‍द्र पर विधि महाविद्यालय होना चाहिए, उसके पक्ष में है, परन्‍तु क्‍योंकि बीसीआई ने ही उस पर रोक लगायी है, इसलिए हम निश्‍चित रूप से मध्‍यप्रदेश के केवल पन्‍ना ही नहीं और भी जिलों में, जहां आवश्‍यकता है, वहां पर विधि महाविद्यालय खोलने के प्रति सरकार प्रतिबद्ध है. हम उस पर कार्यवाही करेंगे.

          सभापति महोदय -- बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- माननीय सभापति महोदय, मेरा केवल इतना आग्रह है कि बीसीआई का स्‍थगन खतम होने के बाद क्‍या आप लॉ कॉलेज शुरू करवा देंगे, मैं केवल इतना पूछ रहा हॅूं.

          सभापति महोदय -- माननीय मंत्री जी ने बहुत स्‍पष्‍ट कहा है.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार -- सभापति महोदय, इतना स्‍पष्‍ट है कि जब तक वहां से उस पर बेन है, तब तक हम नहीं कर पाएंगे, लेकिन उसके बाद करेंगे.

          श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- माननीय मंत्री जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय -- श्री भैरो सिंह "बापू" जी.

 

 

12.44 बजे

        4.     प्रदेश के अनेक जिलों में बेमौसम बारिश एवं ओलावृष्‍टि से फसल नष्‍ट होने से उत्‍पन्‍न स्‍थिति.

 

          श्री भैरो सिंह "बापू" (सुसनेर) (सर्व श्री अनिरूद्ध "माधव" मारू, डॉ.तेजबहादुर सिंह चौहान) -- माननीय सभापति महोदय, मेरे ध्‍यानाकर्षण की सूचना इस प्रकार है-


 

 

                                                                                                           

                                                                                     

सभापति महोदय श्री भैरो सिंह जी, एक प्रश्‍न कीजिए, दो माननीय सदस्‍य और भी है.

श्री भैरो सिंह (बापू) सभापति जी, निवेदन है कि जब किसान पैदा होता है, बच्‍चा पैदा होता है, तब भी कर्ज में पैदा होता है, उसकी युवावस्‍था भी कर्जा में डूबती है. वह शैया पर जाता है, मरता है, तब भी कर्ज में जाता है. आप जवाब दे रहे हैं कि नुकसान नहीं हुआ.

सभापति महोदय भैरो जी, आप पूरक प्रश्‍न करें.

श्री भैरो सिंह (बापू) सभापति जी, हमारे वित्‍त मंत्री जी बैठे हैं, उनके पास में और वे कह रहे हैं कि मंदसौर के अंदर बिलकुल भी ओला वृष्टि नहीं हुई है. मैं वित्‍त मंत्री जी के मुंह से सुनना चाहूंगा कि क्‍या उनकी विधान सभा के अंदर  18 तारीख को ओले नहीं गिरे, ये आपका प्रशासन कह रहा है, ये क्‍या जवाब है, किसान खून के आंसू रो रहा है.

सभापति महोदय आप अपना प्रश्‍न रखिए.

श्री भैरो सिंह (बापू) सभापति जी, आज उमरियाददा, चोहमा, बिजनाखेड़ी, पीलखेड़े, सिंगरौल, फरतखेड़ी आप खुद मान रहे हैं, शाजापुर जिले का मोहनबड़ोदिया के अंदर, जहां सत्‍तापक्ष के अरुण भीमावद स्‍वयं आए हैं, शाजापुर से फसलों का सर्वे करने, फसल चौपट हो चुकी है, सो चुकी है और बता दिया गया कि कोई नुकसान नहीं हुआ है.

सभापति महोदय आपका प्रश्‍न क्‍या है, पूरक प्रश्‍न रखें, भैरो सिंह जी.

श्री भैरो सिंह (बापू) सभापति जी, आपके माध्‍यम से, मैं राजस्‍व मंत्री जी का ध्‍यान मेरी विधानसभा सुसनेर की ओर आकर्षित करना चाहूंगा. मेरे क्षेत्र के किसान विगत कई वर्षों से गंभीर समस्‍याओं का सामना कर रहे हैं. विशेष  रूप से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के संबंध में. पिछले पांच वर्षों से फसलों के नुकसान के संबंध में सेटेलाइट पद्धति से किया जा रहा है. इस पद्धति में न तो पारदर्शिता है और न ही इसकी प्रमाणिकता किसानों के सामने स्‍पष्‍ट की जाती है, परिणामस्‍वरूप फसलों को विभिन्‍न अवस्‍था में नुकसान होने के बावजूद, किसानों को बीमा क्‍लैम प्राप्‍त नहीं हो पा रहा है. विगत वर्षों में, फसलों में व्‍यापक नुकसान होने के बावजूद बहुत ही कम किसानों को नाम मात्र का  भुगतान किया गया है.

सभापति महोदय आप प्रश्‍न रखें, आपका पूरक प्रश्‍न नहीं आ पा रहा है, प्रश्‍न रखें.

श्री भैरो सिंह (बापू) सभापति जी, मेरा निवेदन है कि किसानों को मुआवजा मिलेगा या नहीं, फसलों के दामों का निर्धारण पुन: फसल कटाई क्रॉप कटिंग के आधार पर किया जाए तथ भुगतान प्रक्रिया को पूर्णत:पार‍दर्शी एवं सार्वजनिक बनाए जाए. वर्तमान में बे मौसम बारिश आंधी एवं तेज हवाओं के कारण गेहूं की फसल गिर गई है, जिसमें उपज की गुणवत्‍ता प्रभावित होना स्‍वा‍भाविक है. मेरा निवेदन है कि गेहूं की फसल का जो कलर चेंज हुआ है, क्‍या सरकार उसको खरीदेगी.

श्री करण सिंह वर्मा सभापति महोदय, मैंने ध्‍यानाकर्षण के उत्‍तर में बताया है कि आगर मालवा में हम कृषि विभाग, राजस्‍व विभाग, ग्राम पंचायत एवं उद्यानिकी से चारों विभाग से मिलकर सर्वे करवाते हैं, वहां 10 से 15 प्रतिशत हानि हुई है तो उसमें सवाल ही नहीं उठता है.

         01.00 बजे

                              { अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

          श्री भैरो सिंह बापू -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं वित्‍तमंत्री जी के मुंह से सुनना चाहता हूं कि आपके यहां ओले गिरे की नहीं गिरे हैं. मेरे पास श्‍यामगढ़ का वीडियो है, मेरे पास सुवासरा का वीडियो है, जहां ओलावृष्टि से किसानों की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं, क्‍या वित्‍तमंत्री जी आप किसानों के पक्ष में बोलना चाहेंगे? आपके सामने आपका शासन प्रशासन यह कह रहा है कि मंदसौर में ओले ही नहीं गिरे हैं, यहां माननीय विधायक जी श्री हरदीप डंग साहब बैठे हैं, क्‍या किसानों के वोट आपको नहीं मिलते हैं, क्‍या आप बोलना चाहेंगे? यह क्‍या जवाब है, यह किस तरीके से जवाब आप दे रहे हैं, ओलावृष्टि नहीं हुई है, इसका मतलब मैं झूठ बोल रहा हूं, माननीय वित्‍तमंत्री जी बोलना नहीं चाह रहे हैं.

          श्री हरदीप सिंह डंग(सुवासरा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो भैरों सिंह जी ने बात रखी है. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को पहले तो धन्‍यवाद दूंगा, पीला मोजेक में आर.बी.सी. 6(4) में कभी मुआवजा नहीं मिलता था, इसमें मुआवजा पहली बार देने का काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है (मेजों की थपथपाहट) और रही ओलावृष्टि की बात तो वह बिल्‍कुल अपनी मांग जो रखना चाहते हैं, वह रखें. जहां पर ओलावृष्टि हुई है, उनको मुआवजा मिलना चाहिए और किसानों के हित में जितना भी अच्‍छा काम हो, वह होना चाहिए, जहां पर ओलावृष्टि हुई है, उसका सर्वे करके अगर मुआवजा मिलता है, तो वह देना चाहिए, परंतु मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को बार-बार धन्‍यवाद देता हूं कि आर.बी.सी. 6(4) में पीला मोजेक का मुआवजा देने का काम डॉ. मोहन यादव जी की सरकार ने किया है, इसके लिये बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री भैरो सिंह बापू -- आप ओलावृष्टि की बात करो, ओलावृष्टि हुई कि नहीं हुई है, मैं आपसे यह पूछ रहा हूं और आप पीला मोजेक पर पहुंच गये हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- भैरो सिंह जी बहुत शांति से आप एक ओर प्रश्‍न कर लो, आप ज्‍यादा जोर-जोर से बोलते है, तो विषयांतर ही हो जाता है, आप एक प्रश्‍न ओर करो तो मंत्री जी उसका जवाब देंगे.

          श्री भैरो सिंह बापू -- अध्‍यक्ष महोदय, बीमा कंपनी द्वारा किसानों के लिये टोल फ्री नंबर जारी  किया गया है, पर वास्‍तविक स्थिति यह है कि उस नंबर पर कोई फोन नहीं उठाता है, किसान लगातार काल करते हैं, घंटों इंतजार करते हैं, लेकिन उनकी समस्‍या सुनने वाला कोई नहीं है, जब बीमा कंपनी एक ही गांव से लाखों रूपये की प्रीमियम राशि सीधे किसानों के खातों से काट सकती है, तो किसान की समस्‍या के समाधान हेतु अपने अधिकारियों को गांव में भेजने में असमर्थ क्‍यों हैं, क्‍या किसानों की मेहनत की कमाई केवल प्रीमियम वसूली तक ही सीमित है, समस्‍या उत्‍पन्‍न होने पर भी उसकी जवाबदारी किसकी होगी? अत: आपसे निवेदन है कि इस विषय में तत्‍काल संज्ञान लेकर, बीमा कंपनी को किसानों की शिकायतों के त्‍वरित एवं प्रभावी समाधान हेतु निर्देशित करने की कृपा करें, यही मेरा प्रश्‍न है.

          श्री करण सिंह वर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार में डॉ. मोहन यादव जी मुख्‍यमंत्री हैं, इतिहास में पहली बार किसानों के लिये राहत राशि गत वर्ष 2 हजार 68 करोड़ 99 लाख रूपये दी है ( मेजों की थपथपाहट) जहां आपने प्रश्‍न पूछा है, वहां फसल बीमा में पंचायत विभाग, कृषि विभाग, उद्यानिकी और राजस्‍व विभाग सारे विभागों के द्वारा सर्वे किया जा रहा है.

 

1.03 बजे

                                                 अध्‍यक्षीय घोषणा                             

                                     भोजनावकाश न होने विषयक

          अध्‍यक्ष महोदय-- आज भोजनावकाश नहीं होगा. भोजन की व्‍यवस्‍था सदन की लॉबी में की गई है, माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्‍ट करें.

          श्री अनिरूद्ध माधव मारू(मनासा)-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको धन्‍यवाद देता हूं कि आपने मुझे ध्‍यानाकर्षण में बोलने का अवसर दिया है, एक फरवरी हमारे नीमच जिले में और पास के मंदसौर जिले में, मनासा विधानसभा, नीमच, जावद और मल्‍हागढ़ विधानसभा में ओले गिरे, मैं आधे घण्‍टे में मौके पर पहुंचा और वहीं स्‍पॉट पर से माननीय उपमुख्‍यमंत्री जी से सबसे पहले बात की, फिर माननीय मुख्‍यमंत्री जी से बात की, मैं दिल से माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय और उपमुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि उन्‍होंने उसी टाईम प्रशासन को सक्रिय किया और शाम को प्रशासन क्षेत्र में घूमने लगा ( मेजों की थपथपाहट) दूसरे दिन पूरी सर्वे की टीमें मैदान में उतरी और उन्‍होंने सर्वे प्रांरभ किया, सर्वे करके पूरी जांच रिपोर्ट दे दी और जैसा कि अभी राजस्‍व मंत्री जी बता रहे थे कि दो करोड़ और कुछ लाख मुआवजा दिया जा चुका है. (श्री भैरों सिंह बापू, सदस्‍य द्वारा अपने आसन से कहने पर) बापू जी आपने अपनी बात कही दी अब शांति रखो, मैं अपनी बात कह रहा हूं मेरी भी तो सुनो, आप कह रहो हो किसान रो रहा है, कोई किसान नहीं रो रहा है, पिछली बार भी माननीय मुख्‍यमंत्री जी से मेरी बात हुई, जैसी ही हमारे यहां बारिश हुई, मैं यहां भोपाल आकर बोलकर गया, उन्‍होंने सर्वे कराकर और किसानों को सारी मुआवजा राशि तुरंत बांट दी, फसल नहीं कटी उसके पहले मुआवजा राशि बांट दी है, कैसी बात कर रहो आप ( मेजों की थपथपाहट) मतलब आपको इस सदन में असत्‍य बोलना है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री अनिरूद्ध जी आप लोग आपस में बात नहीं करें, आप हमको देखकर बात करें. आपका कोई प्रश्‍न हो तो वह बतायें.

          श्री अनिरूद्ध माधव मारू-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं धन्‍यवाद देता हूं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को और उपमुख्‍यमंत्री जी को और राजस्‍व मंत्री जी को. हमारे क्षेत्र में विशेष रूप से अफीम की फसल होती है, ईशबगोल की फसल होती है और पान की फसलें होती हैं, ऐसी बहुत सारी फसलें होती हैं. मेरा माननीय मुख्‍यमंत्री जी से आपके माध्‍यम से और राजस्‍व मंत्री जी से आपके माध्‍यम से निवेदन है कि हमारी अफीम की फसल, पान की फसल, ईशबगोल और यह अन्‍य फसलें इसमें कवर नहीं करती हैं, जबकि सबसे बेसकीमती फसलें  हमारा क्षेत्र पैदा करता है, उनको बीमा में कवर किया जाये.

          श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत-- मारू जी अच्‍छा पान खिलाते हैं कभी खाईये आप लोग.

          श्री अनिरूद्ध माधव मारू-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन सब फसलों को अगर बीमा में कवर कर लिया जायेगा तो निश्चित रूप से जो किसान हमारे यहां परेशान होता है और अफीम की फसल में तो अभी हमारे यहां ओलावृष्टि से कुछ खेत तो ऐसे हैं जिसमें एक भी डोड़ा शेष नहीं रहा है. एक निशान देखने को नहीं मिल रहा है. उनका मुआवजा पहले मिले, मेरा आपसे यही निवेदन है. एक बार पुन: राजस्‍व मंत्री जी और मुख्‍यमंत्री जी, उपमुख्‍यमंत्री जी को मैं धन्‍यवाद  देता हूं.

          श्री करण सिंह वर्मा-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद दे दिया है कुछ बोलूं क्‍या. ..(हंसी)..

          श्री कैलाश विजयवर्गीय--  अध्‍यक्ष जी, बिना लेकिन के धन्‍यवाद  दिया है. यह सबसे बड़ी बात है. ..(हंसी)..

          अध्‍यक्ष महोदय-- इसके लिये अनिरूद्ध जी को धन्‍यवाद. डॉ. तेजबहादुर सिंह जी एक प्रश्‍न करें.

          डॉ तेज बहादुर सिंह चौहान (नागदा-खाचरोद)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले माननीय मुख्‍यमंत्री जी को, राजस्‍व मंत्री जी को बहुत धन्‍यवाद करूंगा कि वर्ष 2024-25 में जो फसलों का नुकसान हुआ, सोयाबीन में जो नुकसान हुआ, पीला मोजेक इत्‍यादि का किसानों को भरपूर  मुआवजा मिला है, उसके लिये मैं अपनी ओर से, अपने क्षेत्र की ओर से बहुत धन्‍यवाद करता हूं. लेकिन मैं सदन को अवगत कराना चाहता हूं कि 19 तारीख को, 20 तारीख को, 21 तारीख को उज्‍जैन जिले में 18 से लेकर 20 तक जो भारी बारिस हुई, आंधी के साथ में ओले गिरे हैं इसके कारण गेहूं की फसल पूरी तरीके से टूटकर लेट चुकी है, सो चुकी है, आड़ी पड़ गई है और इस कारण जो सही तरीके से गेहूं का पकना होना चाहिये था वह संभव नहीं हो पायेगा, उत्‍पादन प्रभावित होगा. मैं सरकार को धन्‍यवाद करता हूं जिस दिन पानी गिरा ठीक अगले दिन सुबह से मान्‍यवर मुख्‍यमंत्री जी ने निर्देशित किया और सुबह से सर्वे का कार्य सभी गांवों का प्रारंभ हुआ है पर मैं माननीय मंत्री जी की एक बात से सहमत नहीं हूं कि हम पहले से सुनिश्चित कर लें कि फसलों में नुकसान नहीं है. फसलों में निश्चित रूप से नुकसान है, गेहूं की फसल पक नहीं पायेगी, इसलिये उसका ठीक तरह से सर्वे हो जाये. अभी भी कई गांव पटवारी के, गिरदाबल के न पहुंचने के कारण सर्वे से वंचित हैं, उन समस्‍त गांव का सर्वे हो जाये. खाचरौद नागदा में भी ऐसे ऐसे बहुत सारे गांव बचे हैं, बीमा कंपनी के अधिकारी भी इसके साथ पूरी सक्रियता के साथ उसके साथ जुड़कर आंकलन कर लें ताकि किसानों को ठीक मुआवजा मिल सके. इतना ही मैं ध्‍यान आकर्षित कराना चाहता हूं. आपने मुझे अवसर दिया बहुत धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय--  करण सिंह जी, सभी का एक साथ उत्‍तर दे देना.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा (जावद)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं भी वास्‍तव में दोनों बार तुरंत सर्वे करके कुछ मुआवजा देने के लिये सरकार का और माननीय मुख्‍यमंत्री जी का बहुत बहुत अभिनंदन करता हूं, लेकिन इसमें साथ  में एक छोटी सी बात और है जो किसान रह गये, जिनकी अभी दावे आपत्ति लगे हुये हैं उनके बारे में कब तक चर्चा करके निराकरण करेंगे, क्‍योंकि कुछ लोगों के बच गये हैं सर्वे में जहां-जहां गये, एक विषय.      

          दूसरा विषय जो बीमा में अभी फसलें कवर्ड नहीं हैं उन्‍हें कब तक कवर करने का कैसे संयुक्‍त प्रयास किया जायेगा क्‍योंकि इसमें राज्‍य सरकार और केन्‍द्र सरकार दोनों का इनवाल्‍व है. नीमच मंदसौर जिला पूरी तरह से अफीम के ऊपर आधारित है, वहां सबसे ज्‍यादा तरक्‍की का कारण भी वही है और उसमें जो नुकसान हुआ है इसके लिये कैसे क्‍या कोई समिति बनाकर राज्‍य सरकार और केन्‍द्र सरकार की टीम को मिलाकर कुछ इसका हल ढूंढने का पर्याप्‍त प्रयास करके इस पर करें.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आखिरी मेरा सवाल है कि क्‍या कलेक्‍टर महोदय को यह इंस्‍ट्रक्‍शन जायें कि बीमा कंपनी जो लापरवाही करती है और कई बार जो हमारा सेटेलाइट सर्वे है या पटवारी का रिकार्ड है और बीमा कंपनी अलग रिकार्ड बनाकर इसको डिनाय कर देती है कि आपका इस फसल का हमने नहीं, इस फसल का बीमा किया, उसके बारे में एक परमानेंट व्‍यवस्‍था आये तो किसान बार-बार परेशान न हों ऐसा मेरा इन तीन विषयों पर है, लेकिन मैं इस बात का भी पुन: धन्‍यवाद दे रहा हूँ कि समय पर तुरंत 24 घंटे में सर्वे किया. मैं भी खुद किसान के खेतों में गया था और वहीं से बातें हुईं और यह सब कार्य हुआ, उसके लिये बहुत अभिनंदनबद्ध बचे हुये कार्य भी करवा दें.

            डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय(जावरा) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सर्वप्रथम तो माननीय मुख्यमंत्री जी का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद व्यक्त  करता हूं. पिछली बारिश के समय में भी मैंने मोबाईल के माध्यम से सचिन जी आप भी नोट कर लीजिये. मैंने मोबाईल के माध्यम से सूचना दी थी पहले दिन ही माननीय मुख्यमंत्री जी ने दूसरे ही दिन दौरा बनाकर तीसरे दिन खेत-खेत में जाकर क्षतिपूर्ति का आकलन किया न केवल आकलन किया वरन इसी के साथ पहली बार पीला मोजक से प्रभावित फसलों को उन्होंने फसलों को क्षतिपूर्ति में सम्मिलित किया इससे निश्चित रूप से किसानों का संबल बढ़ा है लेकिन प्राकृतिक आपदाएं हैं फिर से लौटकर आ गईं तो रतलाम जिले में भी इस तरह की आपदा आई है तो रतलाम जिले को भी इसमें सम्मिलित करते हुए वैसे सर्वे का कार्य प्रारंभ हुआ है पिपलौदा और जावरा तहसील में हुआ है इसके लिये माननीय मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद. क्षतिपूर्ति भी शीघ्र मिल जाए ताकि उनकी फसल मंडी में समय पर पहुंच सके धन्यवाद.

          श्री ऋषि अग्रवाल(बमोरी) - माननीय अध्यक्ष महोदय,मैं राजस्व मंत्री का ध्यान गुना जिले की तरफ आकर्षित करना चाहूंगा. उन्होंने अपने उद्बोधन में गुना जिले का नाम नहीं लिया गुना जिले में जनवरी,फरवरी  में अतिवृष्टि और ओले के कारण धनिये और सरसों की फसल में काफी नुकसान हुआ है. मैंने स्वयं जाकर देखा कि धनिये की 100 परसेंट फसल नुकसान हुई है और उसका अभी तक कोई सर्वे न चालू हुआ न मुआवजे का निर्धारण हुआ. मैं कृषि मंत्री जी से भी आग्रह करूंगा कि हमारा प्रदेश धनिये की फसल में नंबर वन पर आता है और गुना जिले का धनिया का मध्य्रदेश,देश,और दुनियां में नाम है लेकिन फसल बीमा में धनिये की फ सल को जोड़ा नहीं गया जिससे किसानों को आपदा की स्थिति में उसका लाभ नहीं मिल पाता. तो मेरा आग्रह है कि फसल बीमे में धनिये की फसल को जोड़ा जाए  ऐसा कृषि मंत्री जी से मेरा आग्रह है और राजस्व मंत्री जी से आग्रह है कि गुना में,बमोरी विधान सभा में जो किसानों की फसल का नुकसान हुआ है उसका भी जल्द से जल्द सर्वे कराया जाए. धन्यवाद.

          श्री करण सिंह वर्मा - माननीय अध्यक्ष महोदय,दो बार बारिश हुई जनवरी और फरवरी में जनवरी में उज्जैन में कोई नुकसान नहीं फरवरी में आप सही कह रहे हैं 10 ग्रामों में नुकसान हुआ है तो फिर उसका सर्वे करवा लूंगा और जहां तक माननीय सदस्य ने कहा कि धनिया भी है आरबीसी 6(4) में पहले से.

          श्री ऋषि अग्रवाल - मेरा निवेदन है आरबीसी 6(4) में धनिया तो है लेकिन फसल बीमा में धनिया नहीं है.

          श्री करण सिंह वर्मा - अध्यक्ष महोदय,जैसे पहले थोड़ी बारिश हुई. अब भी बारिश हुई माननीय मुख्यमंत्री जी ने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि तत्काल फसल का आकलन करे. आरबीसी 6(4) के अंतर्गत गुना जिले में बमोरी तहसील में हल्की ओलावृष्टि हुई थी. फसल की 10 से 15 प्रतिशत हुई थी आपके यहां और जैसे ही माननीय मुख्यमंत्री जी ने घोषणा की.

          श्री ऋषि अग्रवाल - मैं खुद खेत-खेत गया हूं धनिये की फसल 30 से 40 गांवों में 100 परसेंट फसल बर्बाद हुई है. कृषि विभाग,राजस्व विभाग की टीम गठित कर दें.

          श्री करण सिंह वर्मा - सखलेचा जी ने कहा है कि  अभी दो फसल सिंघाड़ा को भी आरबीसी 6(4) में सम्मिलित किया है और केले का क्या कहना 4 लाख का मुआवजा देंगे यह पहली बार हुआ है.

          श्री ऋषि अग्रवाल - फसल बर्बाद गुना जिले में बमोरी विधान सभा में हुई है.

                                     

                                                 याचिकाओं की प्रस्तुति

          अध्यक्ष महोदय -  आज की कार्य सूची से उल्लिखित याचिकाएं क्र. 1 से 73 तक यह सभी प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.

           कृषि के महत्व पर अब माननीय मुख्यमंत्री जी वक्तव्य देना चाहते हैं. माननीय मुख्यमंत्री जी को मैं आमंत्रित करता हूं.

 

01.15 बजे                कृषि के महत्‍व पर माननीय मुख्‍यमंत्री का वक्‍तव्‍य

          मुख्‍यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) -- धन्‍यवाद माननीय अध्‍यक्ष जी. मैं आपके माध्‍यम से सदन को अवगत कराना चाहूँगा कि हमारी सरकार ने इस वर्ष 2026 को कृषक कल्‍याण वर्ष के नाते मनाने की घोषणा की है. (मेजों की थपथपाहट). यह घोषणा हमारे यशस्‍वी प्रधानमंत्री श्रीमान नरेन्‍द्र मोदी जी के उस भाव के आधार पर है, जब हम किसानों की बात करते हैं. किसान, महिला, युवा और गरीब, ये चार विशेष श्रेणियां हैं. इन चार विशेष श्रेणियों में अगर हम काम करते हैं तो सच में हम अपने पूरे देश के, पूरे प्रदेश के विकास के लिए अपनी सारी सरकार का एक तरह से अंतरंग निकाल करके बाहर रख देते हैं. हमें इस बात की प्रसन्‍नता है कि जब किसान कल्‍याण वर्ष की बात हम कर रहे हैं, ऐसे में किसान कल्‍याण वर्ष मध्‍यप्रदेश के इतिहास में एक मील का पत्‍थर साबित होगा. यह वर्ष खेत से लेकर कारखाने तक और बाग से लेकर बाजार तक, सब क्षेत्रों में किसान की बेहतरी के लिए हम लगातार योजनाएं बना रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट). विकास के लिए कड़ी दर कड़ी जोड़ने का हम काम कर रहे हैं. जब किसान अन्‍नदाता के साथ एक और लाइन पर आगे बढ़ रहे हैं, किसान को अन्‍नदाता के साथ ऊर्जादाता की तरफ भी ले जाने के लिए हम संकल्‍प कर रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट). उर्जादाता ही नहीं, ऊर्जादाता के साथ अन्‍नदाता उद्यमी भी बने, इस दिशा में भी हमारी सरकार काम कर रही है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तभी हमारा किसान समृद्ध होगा. प्रदेश समृद्ध होगा, इस स्‍लोगन के आधार पर ही हमने अपने इस सपने को साकार करने के लिए ठोस नीति बनाई है और हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. मध्‍यप्रदेश देश का खाद्य भण्‍डार है और इसको आगे चलकर के वैश्‍विक स्‍तर पर एग्री एक्‍सपोर्ट हब के रूप में भी स्‍थापित करने का हम निर्णय कर रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट). माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि उल्‍लेखनीय है कि बीते समय सोयाबीन के समय हमने एक बड़ा निर्णय लिया और यह पूरे देश का एक आदर्श उदाहरण बना कि हमने अपने किसानों के लिए सोयाबीन में भावान्‍तर योजना का किसानों को लाभ दिलाया. भावान्‍तर योजना के बलबूते पर हमने एक साथ दो लक्ष्‍यों की प्राप्‍ति की. एक लक्ष्‍य हमने यह प्राप्‍त किया कि किसानों के माध्‍यम से मण्‍डी आबाद रहे. जाने-अनजाने मण्‍डी के बजाय शासकीय तौल कांटे पर फसल जाने के कारण मण्‍डी की रौनक कम पड़ रही थी. ऐसे में आपके और हम सबके और मैं तो मानकर चलूंगा कि नेता प्रतिपक्ष और सब मित्रों के सहयोग से सफलता के साथ पूरे समय हमारी सोयाबीन भावान्‍तर योजना चालू रही. कहीं कोई कष्‍ट नहीं आया और बहुत सफलता के साथ भावान्‍तर योजना के इस परिणाम को देश ने देखा. इसलिए मैं आपको भी धन्‍यवाद देना चाहूंगा और पक्ष-विपक्ष के सभी साथियों को भी धन्‍यवाद देना चाहूँगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, इसी तर्ज पर अब हमने और आगे बढ़ने का निर्णय किया है. सरसों की फसल, यद्यपि मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है, इस वर्ष सरसों के रकबे में पूर्व के वर्षों की तुलना में 28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. यह वर्तमान का आंकड़ा है. (मेजों की थपथपाहट). और द्वितीय अग्रिम अनुमान के अनुसार अनुमानित उत्‍पादन 15.71 लाख मैट्रिक टन का होने वाला है. यह बड़ा आंकड़ा है. ऐसे में कृषि उपज के लिए सरकारी एमएसपी की दर पर किसानों को लाभान्‍वित करने के लिए हमने उपज का लाभकारी मूल्‍य सुनिश्‍चित कराने का यह उपक्रम किया है, जिससे सरसों के किसानों को भी प्रोत्‍साहन दिया जा सके और वैसे भी तिलहन को प्रोत्‍साहन देना हमारे राज्‍य के लिए गौरव की बात है. वर्तमान में आज की स्‍थिति में सरसों के अंदर माह जनवरी तक 5,500 रुपये से लेकर 6,000 रुपये तक सरसों का मूल्‍य मिल रहा है. लेकिन सरकारी खरीद भारत सरकार के निर्धारित न्‍यूनतम एमएसपी 6,200 रुपये प्रति क्‍विंटल है, ऐसे में इस तारतम्‍य में सरसों का उपार्जन भारत सरकार की भावान्‍तर योजना के नियत प्रावधानों के अनुसार पात्रता के अनुसार कृषकों को हमने उपज का उचित मूल्‍य दिए जाने की दृष्‍टि से एक बड़ा निर्णय किया है, जिसके आधार पर हमने भारत सरकार को यह प्रस्‍ताव प्रेषित किया है और योजनान्‍तर्गत एफएक्‍यू सरसों को न्‍यूनतम मूल्‍य के बलबूते पर उनकी जो कम से कम राशि प्राप्‍त करते हुए इस योजना को लागू करने का निर्णय हमारी सरकार के द्वारा किया गया है. मैं आपको और आपके माध्‍यम से प्रदेश के सभी किसानों को 80 लाख किसानों को बधाई देना चाहूँगा. मैं भावान्‍तर योजना के माध्‍यम से पंजीकृत कृषकों के सरसों के रकबों की, उनकी उत्‍पादकता के मान से और पात्रता के अनुसार इसमें भुगतान किया जायेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं दोबारा दोहराना नहीं चाहूँगा कि वास्‍तव में यह योजना सरसों के लिए भी, पूरे देश में जिस प्रकार से हमने सोयाबीन की भावान्‍तर योजना देश भर में पहले लागू की थी. उसी प्रकार से यह योजना भी हम लागू करने जा रहे हैं. इस आधार पर, मैं केवल इतना ही बताना चाहूँगा कि जब सोयाबीन की बात आई थी, तब कई प्रकार के प्रश्‍न उठे थे, कई प्रकार से लोगों ने बताया गया था, लेकिन हमारी सरकार ने अपने किसानों को प्राथमिकता पर रखते हुए, लगभग 1,492 करोड़ रुपये की राशि 6.86 लाख किसानों के खातों में हमने राशि डाल कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है (मेजों की थपथपाहट) और इसी प्रकार से, इसी भाव के आधार पर सरसों के लिये भी हम किसानों के खाते में डीबीटी करते हुए उनके माध्‍यम से मण्‍डी के अन्‍दर, मण्‍डी बोर्ड द्वारा यह राशि अन्‍तरित करने का काम किया जायेगा और प्रतिपूर्ति के लिये, हमारे राज्‍य मूल्‍य से स्थिरीकरण कोष के माध्‍यम से इसकी आपूर्ति करेंगे. जब मैं आपसे बात कर रहा हूँ, तो केवल सरसों की बात ही नहीं कर रहा हूँ. जब हमारी सिंचाई का रकबा बढ़ रहा है, किसानों की आय बढ़ रही है. ऐसे में तीसरी फसल के लिए भी अब किसानों के लिए या तो मूंग लगाते हैं या अन्‍य फसल लगाते हैं, हमने कहा कि अपनी फसल को और बढ़ाते हुए मूंग के साथ, मूंग के बजाय वह उड़द लगाते हैं, तो इसमें प्रोत्‍साहन की राशि देना चाहिए. मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है, इस मामले में भी मूंग की बजाय उड़द पर बोनस देने वाला मध्‍यप्रदेश पहला राज्‍य होगा, मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है. (मेजों की थपथपाहट) इसमें हम 600 रुपया प्रति किसान, प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय कर रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट) और यह निर्णय माननीय अध्‍यक्ष जी, आपके माध्‍यम से हमारे राज्‍य की प्रगति के साथ-साथ, दलहनी फसलों के संतुलित उत्‍पादन किसानों की आय में वृद्धि कराते हुए और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और इसी के साथ जैसे मैंने कहा कि मूंग के बजाय, हमारे खेतों में जब बिजली मिल रही है, पानी मिल रहा है, किसान मेहनत करना जानते हैं और चाहते भी हैं, ऐसे में हमको उनको प्रोत्‍साहन देने का काम करना चाहिए, इसीलिये हमने 600 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस प्रदाय करने का निर्णय किया है. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष जी, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहूँगा कि हमारे नेता प्रतिपक्ष और सभी मित्रों से, हमारे किसानों को हम प्रोत्‍साहित करें, उड़द का उत्‍पादन करायें क्‍योंकि उड़द के माध्‍यम से, यह दलहन का हमारा बड़ा निर्णय रहेगा, जो किसानों की आय भी बढ़ायेगा और बड़े पैमाने पर उसका लाभ भी मिलेगा. एक तरफ, जब मैं आपसे सरसों के साथ उड़द की बात कर रहा हूँ, उसी के आधार पर माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने चना, मसूर एवं तुअर दाल का उपार्जन करने का प्रस्‍ताव भी भारत सरकार को भेजा है. मैं अपनी ओर से मध्‍यप्रदेश में चना, मसूर के प्राइस सपोर्ट स्‍कीम के अंतर्गत चना लगभग 6.49 लाख मैट्रिक टन और मसूर 6.1 लाख मैट्रिक टन उपार्जन का प्रस्‍ताव हमने भारत सरकार को भेजा है, चना और मसूर के उपार्जन के लिए हमने तिथि भी प्रस्‍तावित की है. इसमें तिथि दिनांक 24 मार्च, 2026 से दिनांक 30 मई की अवधि प्रस्‍तावित की गई है. इस आधार पर उम्‍मीद करेंगे कि किसानों के पंजीयन की कार्यवाही प्रचलित करते हुए, हम सभी प्रकार से हमारे लिये चना, मसूर एवं तुअर सभी प्रकार की दलहन फसलों के लिए भी लगातार प्रोत्‍साहन देने के लिए आगे बढ़ रहे हैं. मैं उम्‍मीद करता हूँ कि किसानों के कल्‍याण को लेकर जैसा कि अभी थोड़ी देर पहले चर्चा हुई थी. हमारी सरकार एक के बाद इसी प्रकार के कदम उठाते हुए कृषक कल्‍याण वर्ष में हमारी भूमिका भी अदा कर रही है, साथ ही साथ वर्तमान के दौर में जैसा हमने कहा कि जब हम किसानों को बिजली, पानी और उनके सब प्रकार के हितों की तरफ ध्‍यान दे रहे हैं, ऐसे समय में इन योजनाओं का लाभ निश्चित रूप से सब उठायेंगे. यही बात कहने के लिए मैंने आपसे समय चाहा था, आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय - (श्री उमंग सिंघार जी के खड़े होने पर) क्‍या इसमें आपको कुछ बोलना है ?                 

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-  अध्‍यक्ष महोदय, "कृषक कल्‍याण वर्ष" मनाया जा रहा है, मैं, मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि किसानों के लिए बड़ी-बड़ी सौगात की बात की. लेकिन हमने नियम 130 के तहत कर्ज के संबंध में श्‍वेत पत्र की सूचना दी थी. सरकार पहले कर्ज के बारे में बता दे, उसके बाद किसानों के भले की बात करे. निश्चित तौर से मुख्‍यमंत्री जी ने कृषक कल्‍याण वर्ष, 2026 की बात की, अच्‍छी बात है किसान का भला होना चाहिए. मैं समझता हूं कि जिस प्रकार से (XX), सरकार उनके बारे में क्‍या सोच रही है, कपास के भाव सीधे 11 प्रतिशत कम हो गए, निमाड़ में किसान कपास उगाता है, क्‍या सरकार उसके लिए कृषक कल्‍याण वर्ष, 2026 में विचार करेगी, सोयाबीन की बात है कि सोयाबीन बाहर से आयोगा, क्‍या सरकार इस बारे में किसान के लिए विचार करेगी ? आपके पूर्व मुख्‍यमंत्री शिवराज जी से कई बार बात हुई.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-  अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर है. सदन के अंदर माननीय मुख्‍यमंत्री जी किसी भी विषय पर वक्‍तव्‍य, कभी-भी दे सकते हैं, उस वक्‍तव्‍य पर, नेता प्रतिपक्ष उसी ही विषय पर जो वक्‍तव्‍य दिया गया है, अपनी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त कर सकता है, मुझे लगता है कि नेता प्रतिपक्ष ने पहले कहा कि कर्ज, जो इस वक्‍तव्‍य की विषय-वस्‍तु नहीं है, दूसरा जितनी फसलों की बात की गई है, आप उससे असहमत हैं या सहमत हैं, इस पर प्रतिक्रिया दे सकते हैं लेकिन पूरे कृषि विभाग पर आप चर्चा करेंगे तो वक्‍तव्‍य में प्रतिउत्‍तर का कोई प्रावधान नहीं है. मुख्‍यमंत्री जी वक्‍तव्‍य देते हैं और नेता प्रतिपक्ष उस पर प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करते हैं और वे ऐसी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करेंगे.

          श्री उमंग सिंघार-  मंत्री जी.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  उमंग जी, आप उतावले न हों. उस दिन उतावलेपन के कारण ही गड़बड़ हुई थी.

          श्री उमंग सिंघार-  मैं कुछ नहीं बोल रहा हूं, आप ही बोलें और उतावलेपन में आपके मुंह से क्‍या-क्‍या निकल जाता है, ये आप भूल जाते हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  मेरी बात तो पूरी हो जाने दीजिये. मैं हमेशा इस किताब (मंत्री जी द्वारा "मध्‍यप्रदेश विधान सभा प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम" पुस्तिका प्रदर्शित करते हुए) के आधार पर सदन चलाने के लिए जिम्‍मेदार हूं. मैं संसदीय कार्य मंत्री हूं, मेरी जवाबदारी हैं कि इस किताब में जो है, उसके अनुसार सदन चलना चाहिए. यदि ऐसा प्रश्‍न उठायेंगे, जिस पर मुख्‍यमंत्री जी को प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करनी पड़ी तो फिर वह वक्‍तव्‍य नहीं होगा, वह बहस की श्रेणी में आ जायेगा. इसलिए मेरा अनुरोध है, आप मुख्‍यमंत्री जी ने जो वक्‍तव्‍य दिया, उसकी विषय-वस्‍तु पर बोलें, आपको न करना है तो न करें, परंतु दूसरे विषय जोड़कर न बोलें. इसमें अमेरिका डील कहां से आ गई ? अध्‍यक्ष महोदय, ये सब रिकॉर्ड से निकलना चाहिए ऐसा मेरा आग्रह है. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय-  नेता प्रतिपक्ष जी, संसदीय कार्य मंत्री को मैंने सुना, उन्‍होंने जो विषय उठाया है, वह अपने आप में सही है. क्‍योंकि राइट टू रिप्‍लाई का अधिकार नेता प्रतिपक्ष को है और आपका यह अधिकार सुरक्षित है. इसलिए वक्‍तव्‍य पर हमारी प्रतिक्रिया वहीं त‍क सीमित रहें, तो ठीक रहेगा. (मेजों की थपथपाहट)

          श्री उमंग सिंघार-  धन्‍यवाद अध्‍यक्ष महोदय. जैसी लंबी कहानी हमेशा संसदीय कार्य मंत्री जी लेकर बैठते हैं. मैं स्‍पष्‍ट कह रहा हूं कि हमें जवाब चाहिए ही नहीं क्‍योंकि हमें मालूम है जवाब आयेगा ही नहीं लेकिन प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त करने की बात आपने कही है.

          अध्‍यक्ष महोदयनेता प्रतिपक्ष जी, असल में एक-दो प्रश्‍न आपने ऐसे उठाये हैं, यदि वे रिकॉर्ड में रहेंगे तो सत्‍तापक्ष को जवाब देने के लिए खड़ा होना पड़ेगा. यदि आप इसमें सहमत/असहमत हैं और राशि बढ़ाना चाहिए, घटाना चाहिए, ये बतायें.

          श्री उमंग सिंघार-  अध्‍यक्ष महोदय, आपको लगता है श्‍वेत-पत्र पर सरकार चर्चा नहीं करना चाहती है. मैं समझता हूं कि प्रदेश के अंदर सोयाबीन, सरसों का किसान, चाहे दलहन की आपने बात की, इन सभी पर सरकार को आयात-निर्यात की जो पॉलिसी, केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई है, हमारे प्रदेश किसानों पर उसका क्‍या प्रभाव पड़ेगा, इस पर विचार होना चाहिए. आपने डेयरी को लेकर कुछ नहीं कहा लेकिन मैं समझता हूं कि डेयरी भी इसके अंदर महत्‍वपूर्ण विषय है, आपने कृषक कल्‍याण वर्ष 2026, समृद्ध किसान की बात की है मैं समझता हूं कि इस पर विचार होना चाहिए. यह सकारात्‍मक सुझाव दे रहा हूं कि किसान कहता है कि हमें 12 घंटे बिजली नहीं मिलती है. मैं चाहूंगा 12 घंटे सुनिश्चित बिजली मिले. एमएसपी को लेकर बात हुई है पूर्व में भी आपने मक्‍का की बात कही. हम केन्‍द्र सरकार को प्रस्‍ताव नहीं भेज पाए तो यहां के किसानों को 1200, 1300 रुपए में मक्‍का बेचना पड़ रही है. यू.पी. के किसानों को 2400 रुपए में बेचना पड़ रही है. अगर मक्‍का वापस से हमें एमएसपी पर खरीदना है तो मैं समझता हूं कि सरकार गंभीर रहे. मैं गेहूं की
भी बात कहना चाहता हूं. कल भी मैं किसानों के बीच में गया था. पंजीयन सही नहीं चल पा रहे
, सरवर डाउन है. इन सब बातों को लेकर अगर आप किसान कल्‍याण की बात करते हैं तो सार्थक बात होना चाहिए, सार्थक बहस होना चाहिए, लेकिन इस सदन में किसान सिर्फ समृद्ध हों, उसका कल्‍याण हो तो उससे नहीं चलेगा. कथनी और करनी में फर्क होना चाहिए.

 

1.31 बजे             वर्ष 2025-2026 के तृतीय अनुपूरक अनुमान की मांगों पर मतदान

          श्री गौरव सिंह पारधी (कटंगी)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज तृतीय अनुपूरक अनुमान पर चर्चा हो रही है और मेरा सौभाग्‍य है कि इतने शानदार अनुपूरक बजट के लिए मुझे बोलने का सौभाग्‍य मिला. 19 हजार 287 करोड़ रुपए का यह बजट है. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में माननीय वित्‍त मंत्री जी को बार-बार बधाई देता हूं क्‍योंकि जब भी मध्‍यप्रदेश का अनुपूरक बजट भारतीय जनता पार्टी की सरकार में आता है तो उसमें पूंजीगत व्‍यय 50 प्रतिशत से ज्‍यादा ही रहता है. 54 प्रतिशत का पूंजीगत व्‍यय है. रेवेन्‍यू एक्‍सपेंडिचर का कम है, पूंजी का ज्‍यादा है. हम इस प्रदेश को आगे बढ़ाने की चिंता में कार्य कर रहे हैं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने अभी किसान कल्‍याण की बात की और यह वर्ष किसान कल्‍याण का है. मैं दो शब्‍दों के आगे अपनी बात रखूंगा.

          ''खेत में पानी भरो तुम इस तरह से

                   मेढ़ का संयम कभी न टूटे''

        अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह बात इसलिए कहना चाह रहा हूं क्‍योंकि लगभग 26 प्रतिशत राशि किसानों के लिए सिंचाई का पानी उपलब्‍ध कराने के लिए दी गई है. 25 प्रतिशत चार हजार सात सौ करोड़ रुपए की राशि नर्मदा घाटी परियोजना की विभिन्‍न बांध परियोजनाओं को पूर्ण करने के लिए, 300 करोड़ की राशि जल संसाधन विभाग को बांध निर्माण के लिए दी गई है तो निश्चित तौर पर किसानों को आगे रखते हुए भारतीय जनता पार्टी की डॉ. मोहन यादव जी की सरकार ने इस तृतीय अनुपूरक बजट को तैयार किया है. मैं बधाई देना चाहूंगा कि इसमें गृह विभाग के पुलिस बल के आधुनिकीकरण के लिए भी प्रस्‍ताव रखा गया है. मैं इस मौके का लाभ उठाते हुए पुन: माननीय मुख्‍यमंत्री जी को बधाई देना चाहूंगा कि इस प्रदेश से उनके ही शब्‍दों में अगर लाल सलाम को आखिरी सलाम हुआ है तो निश्चित तौर पर मैं हमारे सुरक्षा बालों और भारतीय जनता पार्टी की सारकार को बधाई देता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय, एक बहुत ही सेंसेटिव विषय रहता है जिसके लिए भी इसमें प्रावधान किया गया है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी का स्‍वेच्‍छानुदान. मैं बताना चाहूंगा कि मैं एक पिछड़े जिले से आता हूं और हमारे क्षेत्र के अनेक लोग बीमार पड़ते हैं. जब भी हम माननीय मुख्‍यमंत्री जी से अनुदान के लिए इच्‍छुक होते हैं तो माननीय मुख्यमंत्री जी बड़ा हृदय करके उन बीमार, गरीब, पिछड़े हुए लोगों को सहयोग करते हैं. इस मांग के लिए भी मैं माननीय मुख्यमंत्री जी और वित्त मंत्री जी को धन्यवाद देता हूँ. मध्यप्रदेश धीरे-धीरे अच्छे औद्योगिकरण की ओर बढ़ रहा है उसके लिए इस बजट में 1250 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. इससे रोजगार के साधन उत्पन्न होंगे. यह निवेश प्रोत्साहन योजना के तहत किया जा रहा है. इस मांग के लिए भी मैं माननीय मुख्यमंत्री जी और वित्त मंत्री जी को धन्यवाद देता हूँ. एमएसएमई योजना के लिए भी 200 करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया गया है जिससे लेबर फोर्स को काम मिलेगा, इससे जो टैक्स वसूल होगा उससे प्रदेश उन्नति करेगा. 2630 करोड़ रुपए का प्रावधान जो कि इस बजट का 14 प्रतिशत होता है ऊर्जा कम्पनियों के लिए इसका प्रावधान किया है ताकि हमें अच्छे से ऊर्जा प्राप्त होती रहे. इस मांग के लिए भी मैं माननीय मुख्यमंत्री जी और वित्त मंत्री जी को धन्यवाद देता हूँ. मुख्यमंत्री जनकल्याण संबल योजना इसके लिए 615 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. इसके लिए मैं माननीय वित्त मंत्री जी को धन्यवाद देता हूँ. इससे गरीब लोगों को सहयोग मिलता है जिससे उनकी आजीविका अच्छी हो जाती है. लोक निर्माण विभाग जो इस प्रदेश में सड़कें, पुलिया बनाता है जिससे दूरस्थ क्षेत्र के लोग मार्केट तक पहुंच पाते हैं. जिला कार्यालय और तहसील कार्यालय तक इससे लोग पहुंच पाते हैं. इसके लिए 1703 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. यह बजट का 9 प्रतिशत है. पेयजल की व्यवस्था, जेजेएम के लिए 300 करोड़ रुपए की व्यवस्था की गई है. अंत में हमारे प्रदेश का युवा यह अच्छा पढ़े और आगे गतिमान हो. इसके लिए मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना चल रही है इसके लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. इस मांग के लिए भी मैं माननीय मुख्यमंत्री जी और वित्त मंत्री जी को धन्यवाद देता हूँ. आपने समुचित तृतीय अनुपूरक बजट यहां पर पेश किया है. ऐसा बजट जिसकी आने वाले कई सालों तक चर्चा होती रहेगी. इस बजट को पेश करने के साथ ही हम सभी इसका सहयोग करते हैं, समर्थन करते हैं और बधाई देते हैं. बहुत-बहुत धन्यवाद. भारत माता की जय, बन्दे मातरम्.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जब सरकार मुख्य बजट के बाद अनुपूरक बजट लाती है तो यह कहीं न कहीं वित्त विभाग की चूक है, अधिकारियों और मंत्रियो की चूक है. समीक्षा ही नहीं होती है कि हमें कितना खर्च करना है. मुख्य बजट था 4 लाख 21 हजार 032 करोड़ रुपए का था. प्रथम अनुपूरक 2356 करोड़ रुपए का था. द्वितीय अनुपूरक 13476 करोड़ रुपए का था. तृतीय अनुपूरक 19 हजार 287 करोड़ रुपए का है. मतलब पहले दूसरे अनुपूरक बजट में भी सरकार आंकलन नहीं कर पाई कि हमें कितना खर्च करना है. तीनों अनुपूरक बजट को मिलाएं तो 35 हजार 121 करोड़ रुपए मांगे गए हैं. इसका मलतब मुख्य बजट का 8.34 प्रतिशत होता है. सरकार का वित्त विभाग यह आंकलन नहीं कर पा रहा है. 35 हजार 121 करोड़ रुपए क्या छोटी राशि है, अध्यक्ष महोदय, यह बड़ी राशि है. मैं समझता हूं कि कई ऐसे विभाग हैं जिनका बजट 35 हजार करोड़ रुपए से कम का होता है. कई विभाग ऐसे हैं जिनका सालाना बजट इसके बराबर होता है. मतलब एक विभाग के सालाना बजट के बराबर की राशि का अनुपूरक बजट मांगा जा रहा है. यह बड़ी लज्जा की बात है. यह सवाल प्‍लानिंग का है क्‍या सरकार के पास वित्‍त की प्‍लानिंग नहीं है. क्‍या सरकार जो खर्च आप बता रहे हैं कि अनिवार्य रूप से है क्‍या उस पर आपकी मॉनीटरिंग नहीं है. क्‍यों बार-बार सीएजी रिपोर्ट आती है. क्‍यों सीएज रिपोर्ट बोलती है कि आपने खर्च ज्‍यादा कर दिया है इस कार्य में गड़बड़ी है ? मैं यह भी कहना चाहता हूं एक प्रश्‍न के जवाब में वित्‍तमंत्री जी बैठै हैं यहां पर, जब मैंने वित्‍त विभाग की खर्चों के बारे में जानकारी मांगी तो सरकार की तरफ से जवाब आया कि सीएजी रिपोर्ट सीएजी के पोर्टल पर जाकर देख लें. मतलब केन्‍द्र सरकार की जो एजेंसी है उसके लिए मध्‍यप्रदेश की सरकार बोल रही है कि अगर आपको जानकारी चाहिए तो वहां देख लीजिय, तो क्‍या मध्‍यप्रदेश सरकार के वित्‍त विभाग की जवाबदारी प्रश्‍न का जवाब देने की नहीं है. यह जनहित और लोकहित का प्रश्‍न था कि आपका खर्च कितना हुआ, कितना ब्‍याज दिया, कितना भुगतान किया, ब्‍याज पर ब्‍याज कितना दिया. मैं समझता हूं कि वित्‍तमंत्री जी इस बात का आप विशेष रूप से ध्‍यान रखेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय, एक आश्‍चर्य की बात यह है कि सबसे ज्‍यादा खर्च किया जा रहा है तो ऊर्जा, लोक निर्माण, नगरीय विकास जो 12 परसेंट से 55 परसेंट तक अतिरिक्‍त मांग रहे हैं. इतना पैसा विशेष रूप से मांगा जा रहा है वह भी 2-4 विभागों के अंदर. क्‍या बजट बनाते समय लोग सोये हुए थे. साल के अंत में क्‍यों मांगा जा रहा है ? नर्मदा घाटी विकास 4,700 करोड़, ऊर्जा विभाग 2,630 करोड़, नगरीय विकास एवं आवास 2,237 करोड़, ब्‍याज भुगतान 1,810 करोड़, लोक निर्माण 1,703 करोड़, वाणिज्यिक कर 1,388 करोड़, उद्योग नीति एवं निवेश के लिए 1,250 करोड़. एक तरफ सरकार कहती है कि उद्योग के लिए लाखों, करोड़ों रुपये आ रहे हैं, 11 लाख करोड़ का निवेश आ रहा है लेकिन सरकार न प्रदेश की जनता को बताना चाहती है न पोर्टल पर बताना चाहती है. कहां पैसा आ रहा है. आप कहते हैं कि 1 करोड़ युवाओं को हम नौकरी देंगे लेकिन 1 करोड़ युवाओं को नौकरी कहां मिलेगी. देखिये कहां फैक्‍ट्री खुलेगी. युवा नौकरी के लिए आवेदन करेगा. उनको जानकारी कहां मिलेगी. पोर्टल पर जानकारी नहीं मिल रही.

          अध्‍यक्ष महोदय, तृतीय अनुपूरक बजट में 23 विभागों के नाम हैं लेकिन तृतीय अनुपूरक का 81.5 परसेंट सिर्फ 7 विभागों में चला गया है बाकी विभागों को मिला मात्र 18.5 परसेंट. मुख्‍य बजट में इन जरूरतों को क्‍यों नजरंदाज किया गया, ऐसी क्‍या प्‍लानिंग में बार-बार चूक हो रही है, मैं सरकार को संज्ञान में लाना चाहता हूं. सातों विभागों के अलावा नर्मदा घाटी जिसमें 4,700 करोड़ रुपये जब किसी विभाग का मुख्‍य बजट 8,600 करोड़ का हो, उसके अनुपूरक बजट में 4,700 करोड़ रुपये वह भी साल के अंत में मांगे जा रहे हैं. एनव्‍हीडीए किसके पास है, माननीय मुख्‍यमंत्री जी के पास, यह प्रदेश की बजट की समस्‍या है कि मुख्‍यमंत्री जी अपने ही डिपार्टमेंट की वित्‍तीय समीक्षा नहीं कर पा रहे हैं. बड़े शर्म की बात है. मैं समझता हूं कि अगर मुख्‍यमंत्री जी के पास विभाग है, अगर वह अपने वित्‍तीय जो एनव्‍हीडीए का बजट है उसकी ही समीक्षा अनुमान नहीं लगा पाएंगे तो प्रदेश के विकास का अनुमान वह कैसे लगा पाएंगे. बड़े शर्म की बात है. कैसे किसान कल्‍याण वर्ष मनेगा. कैसे युवाओं को नौकरी मिलेगी. कैसे लाड़ली बहनाओं के नाम जुड़ेंगे. मुख्‍यमंत्री जी आज इस पर जवाब नहीं दे पाए.

          अध्यक्ष महोदय, तृतीय अनुपूरक में बड़े बड़े विभागों को तो आप राशि उपलब्ध करवा रहे हो और दूसरी तरफ सरकार किसान कल्याण की बात करती है. अध्यक्ष महोदय, किसानों के कल्याण के लिये सिर्फ 100 रूपये अनुपूरक बजट में रखे गये हैं. जब अनुपूरक बजट में 100 रूपये का प्रावधान है तो इस प्रदेश के किसानों का कल्याण सरकार कैसे करेगी, यह वित्त मंत्री जी बतायेंगे.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, एनवीडीए का जो बजट है वह बजट किसान कल्याण के लिये रखा जाना चाहिये था जिसमें 7 हजार करोड़ का प्रावधान होना था लेकिन दुख की बात है कि 100 रूपये आपने किसानों के कल्याण के लिये रखा है. क्या यह मध्यप्रदेश के किसानों के साथ में मजाक नहीं है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, यह 100 रूपये आवंटन नहीं है यह 100 रूपये सिर्फ टोकन एन्ट्री है, तो इस तरह से आप प्रदेश के किसानों को मायूस नहीं करें. किसानों को आप समर्थन मूल्य दे नहीं पा रहे हैं, समय पर किसानों को बिजली नहीं दे पा रहे हो, 12 घंटे बिजली दे नहीं पा रहे हो, खाद समय पर किसानों को दे नहीं पा रहे हो, और उनके कल्याण के नाम पर आप तृतीय अनुपूरक बजट में 100 रूपये रख रहे हो. यह गंभीर बात है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, ब्याज के लिये मुख्य शीर्ष 2049 में 160 करोड़ रूपये सरकार को देना है. इसके लिये सरकार ने अपनी स्वीकृति दी है. मतलब ब्याज देना , ब्याज पर ब्याज देना लेकिन किसान का कल्याण कब होगा, किसान कल्याण वर्ष कब मनेगा. कैसे किसान समृद्ध होगा, कैसे किसानों को एमएसपी मिलेगी, कैसे किसानों को मूंग के भाव मिलेंगे, कैसे किसानों को सोयाबीन के भाव मिलेगे, कैसे किसानों को कपास के और कैसे किसान को सरसों के भाव मिलेंगे. यह सिर्फ नाम के लिये किसान कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है.

 

          माननीय अध्यक्ष महोदय, ऊर्जा के क्षेत्र में 2630 करोड़ का अल्पकालीन लोन की बात हुई है, एक तरफ नवकरणीय ऊर्जा के बारे में सरकार कहती है कि हम आत्मनिर्भर हो रहे हैं और एक तरफ बिजली के लिये आप लोन ले रहे हैं. जबकि आज ही सरकार ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगने से 700 करोड़  की हमारी आय दुगनी हुई है, आय ज्यादा बढी है., यह बिजली के मीटर किस कंपनी के हैं. फिर आ गया नाम (XX), (XX) के साथ एमओयू किया, उसके बिजली के मीटर लगे हैं प्रदेश के अंदर. बाहर से बैठकर के आदमी बटन दबा रहा है, यह मीटर कहां चल रहा है.धड़ाधड़ मीटर भाग रहे हैं, जिनके विद्युत के बिल माह मे 2000 रूपये आते थे उनको 4 हजार पांच हजार और छे हजार रूपये तक के बिल आने लग गये हैं. अध्यक्ष महोदय इस कंपनी के तकनीकी सलाहकार कौन हैं, इसके (XX).

          माननीय अध्यक्ष महोदय, एक तरफ आर उर्जा के लिये कर्ज ले रहे हो दूसरी तरफ 700 करोड़ रपये की आय बता रहे हो, किसकी आय हो रही है, क्या सरकार की आय हो रही है. या (XX) ग्रुप की आय हो रही है सरकार को इस बात को स्पष्ट करना चाहिये.

          माननीय अध्यक्ष महोदय पीएसी के अंदर बात हुई 1200 करोड़ रूपये हमको अतिरिक्त चाहिये. कई हजारों करोड़ रूपये की जन जीवन मिशन की. संसदीय कार्य मंत्री जी ने सदन में आश्वासन दिया था  कि हम जांच करायेंगे. जब कांग्रेसी विधायक ने यह बात सदन में उठाई थी कि घर घर पानीं क्यों नहीं पहुंच रहा है, घर घर मोदी पहुंचा देते हैं ,लेकिन घर घर पानी नहीं पहुंच पाता है. मेरी बहन जब उस नल को खोलती है तो पानी नहीं निकलता है. और यहां एक साल पहले हमारे संसदीय कार्य मंत्री जी ने आश्वासन दिया था, क्या सरकार ने इस दिशा में काम किया नहीं किया, क्या इसकी जांच कराई, नहीं कराई. क्या सरकार का पैसा दिल्ली की सरकार ने नहीं रोका है, जन जीवन मिशन का, मध्यप्रदेश का पैसा क्यों रोका जल जीवन मिशन के अंदर. यही कारण है कि मध्यप्रदेश के अंदर घोटाले हुये इसलिये दिल्ली की सरकार ने प्रदेश सरकार का पैसा रोक लिया , कब होगा, क्या होगा दूसरी गर्मी आने वाली हैं हमारी बेचारी बहन फिर से 2 से 6 किलोमीटर तक पैदल जायेंगी पानी भरने के लिये. मैं समझता हूं कि कम से कम इंसानियत के साथ में सरकार को कुछ सोचना चाहिये.  जो बहन कुंए के अंदर बाबड़ी में उतर कर के पानी लेगी, संघर्ष करेगी क्या यह सरकार उस बहन के प्रति इतनी असंवेदनशील है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, कई बाते हैं , मै कहना चाहता हूं कि सरकार पर सवाल बहुत दागते हैं ,विपक्ष की तरफ से लेकिन जब कल्याण की बात आती है तो कुछ नहीं होता है. लेकिन  जन कल्याण को लेकर के एक और मांग संख्या 018 में  श्रम विभाग में मजदूरी   के लिये, जन कल्याण सम्बल योजना को  लेकर बात हुई 375 करोड़ रुपये, 141 करोड़ रुपये  अनुसूचित जनजाति के लिये, एससी के लिये 98 करोड़  और  अन्य समाज के लिये   375  करोड़ सम्बल योजना में.  अगर सम्बल का लाभ  प्रदेश  में मिल रहा है,  तो  फिर बाहर क्यों जा रहे हैं  और एक और इसमें गड़बड़ी होती है,  जिसको नहीं देना है,  उसकी केवाईसी  बंद  कर दी जाती है, उसमें डिलीट कर दी जाती है या एरर कर देते हैं कि  यह  कालम आपका भरा नहीं है.  गरीब आदमी कहां जायेगा सम्बल के लिये.   जब बीमार होता है, किडनी  खराब होती है, लीवर खराब होता है, तो  वह अस्पताल जाता है.  तो उसको मालूम पड़ता है कि   उसकी केवाईसी  पूरी भरी नहीं है.  उसको 2 लाख रुपये, 3 लाख रुपये  नहीं मिल सकते हैं.  क्या यह सरकार की जवाबदारी नहीं है कि  वह अनपढ़, गरीब  आदमी कैसे करेगा. जो पढ़  नहीं सकता,  पेन से लिख नहीं सकता. वह  कैसे बैंक में जाकर केवाईसी  भरेगा, फार्म  भरेगा.  लेकिन वह   मजबूर है,  उसको बीमारी का इलाज कराना है,  उसको अस्पताल से वापस कर दिया जाता है. क्या इसके अंदर   सरकार को विचार नहीं करना चाहिये.  ये करोड़ों रुपये कहा जा रहे हैं,  किसके पास जा रहे हैं. आने वाले समय  में  मैं बताऊंगा कि   किस किस बड़े नेताओं के, किस किस मंत्री के अस्पतालों  में  पैसे गये.  यह भी मैं आपको बताऊंगा.  देवड़ा  जी बड़े सज्जन, सरल हैं.  इनसे सब पैसे ले जाते हैं,  ये साइन कर देते हैं,  लेकिन  मैं समझता हूं कि  व्यापार, फैक्ट्री के अंदर   जिसको हम पुराने जमाने में  मुनीम कहते थे,  आज अकाउंटेंट कहते हैं.  आप  सीनियर अकाउंटेंट, सीनियर मैनेजर  हैं.  चार्टर्ड अकाउंटेंट  इस सरकार के हो.  अगर  आपके ही  विभाग से  इस प्रकार की ऐसे  होगी और मजबूरी में  अनुपूरक बजट लाने पड़ेंगे,  तो मैं समझता हूं कि  इस सरकार की यह प्लानिंग   को लेकर  बड़ी गड़बड़ी है.  प्लानिंग समय पर  नहीं है  या पैसे का दुरुपयोग हो रहा है या  अपव्यय हो रहा है,  मैं कहना चाहता हूं कि इस पर सरकार को विचार करना चाहिये. धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदयदेवड़ा जी, कुछ कहना चाहते हैं. बोलिये.

          उप मुख्यमंत्री,वित्त (श्री जगदीश देवड़ा)--  अध्यक्ष महोदय, तृतीय अनुपूरक  अनुमान के प्रस्ताव पर हमारे साथी  गौरव सिंह पारधी जी,  उमंग सिंघार जी  ने अपने विचार  रखे, बहुत ही आभार.  लेकिन यह   प्रथम, द्वतीय एवं तृतीय अनुपूरक    मुख्य बजट के बाद  एक  संवैधानिक व्यवस्था है.  उसी व्यवस्था में  जब  मुख्य बजट में   प्रावधान जो किये जाते हैं, उसमें  अनेक विभागों में अनेक योजनाओं में जो कमी आती है और  उसकी पूर्ति के लिये आवश्यकतानुसार  प्रावधान किये  जाते हैं.  अभी  उमंग सिंधार जी ने भी विषय रखे हैं.  लेकिन मैं इतना कहना चाहता हूं कि  जब  मुख्य बजट पर सामान्य चर्चा  में  मैंने कहा  था कि यह सरकार पारदर्शिता  से काम कर रही है.  जहां तक सवाल कर्जे का है,  यह  कोई छुपा हुआ नहीं है.  कर्जा भी लिया है और  बजट का आकार भी  मैंने  बताया था कि   शायद म.प्र. के  इतिहास में  इतना बड़ा बजट का आकार  कभी नहीं रहा.  न पहले रहा,  अभी  जो बजट हमने  विधान  सभा में प्रस्तुत किया और  बड़ा  आकार दिया.  और कर्जे का भी वही विषय है और वही बात है . कर्जा समय पर चुकाया जा रहा है, ब्‍याज समय पर दिया जा रहा है. नियम प्रक्रिया से लिया जा रहा है और नियम प्रक्रिया में दिया जा रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने किसान कल्‍याण के बारे में बहुत विस्‍तार से बता दिया मुझे कहने की आवश्‍यकता नहीं है. वह चाहे किसान सम्‍मान निधि की बात हो, भावान्‍तर की बात हो यही सरकार है जो हर संकट में जब-जब भी किसानों पर कोई संकट आया होगा तो यही भारतीय जनता पार्टी की सरकार मजबूती से खड़ी रही है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍य बजट का अभी उमंग जी ने भी बताया कि वर्ष 2025-26 में 4 लाख 21 हजार करोड़ का था. प्रथम अनुपूरक 2 हजार 356 करोड़ का था, द्वितीय अनुपूरक 13 हजार 477 करोड़ रूपये का और अभी जो तृतीय अनुपूरक लाया गया है, वह 19 हजार 247 करोड़ रूपये का. इसमें राजस्‍व मद में रूपये 8 हजार 934 करोड़ रखा है. मैं जैसा कि हमेशा इस बात को कहता हूं कि पूंजीगत व्‍यय में 10 हजार 353 करोड़ की राशि शामिल की. अब पूंजीगत वही विकास के, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के, वहीं सारे काम होंगे. जहां पर कमी आयी है, वह चाहे लोक निर्माण विभाग में हो या नगरीय प्रशासन में हो तो उससे विकास होगा, रोजगार मिलेगा, व्‍यापार बढ़ेगा, आर्थिक समद्धि आयेगी यह सारी बातें इसमें होंगी. क्‍योंकि मुख्‍य बजट की सामान्‍य चर्चा में काफी विस्‍तार से यह विषय आये हैं और जहां आवश्‍यकता है, ऐसा नहीं है कि जिस विभाग में, जिस योजना में  कभी-कभी नई योजना भी इसमें सम्मिलित करते हैं तो नई योजना के लिये भी प्रावधान इस अनुपूरक बजट में रखा जाता है तो इसमें नई योजनाएं हैं, जिनमें प्रावधान किया गया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, प्रमुख जो योजनाएं बतायीं है, जैसा ऊर्जा विभाग का बताया कि 630 करोड़ का, अब नगरीय विकास एवं आवास विभाग में बताया कि 1 हजार 569 करोड़, औद्योगिक विभाग में बताया 1 हजार 250 करोड़ का, लेबर विभाग में, अब यह गरीब आदमी के लिये संबल योजना. इसमें जितनी आवश्‍यकता पड़ती है उस मान से प्रावधान किया है. इसमें अभी 615 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है. गरीब लोगों के लिये ही यह योजना है और मुख्‍यमंत्री मेद्यावी योजना के लिये 600 करोड़ रूपये, सिंचाई योजनाएं हैं. आप सबको पता है कि मध्‍यप्रदेश में अनेक सिंचाई योजनाएं चल रही हैं. जिन योजनाओं में राशि की आवश्‍यकता है, वहां पर प्रावधान किये. मैंने माननीय उमंग सिंघार जी से निवेदन किया था कि मेरा बजट करके, जो पुस्तिका दी है उसमें बहुत विस्‍तार से वित्‍त विभाग के अधिकारियों ने योजनाओं के बारे में जिक्र किया कि राशि का आवंटन कहां-कहां होना है वह पूरा बताया. वह सार्वजनिक है, कोई सदन में कहा ऐसा नहीं है. उस पुस्‍तक के माध्‍यम से हमने पूरे मध्‍यप्रदेश में जानकारी उपलब्‍ध करवायी है और समय पर वह मिल जायेगी. मैंने लोक निर्माण विभाग का भी मैंने आपको बताया.

          अध्‍यक्ष महोदय, अब मुझे बहुत विस्‍तार से कहने की आवश्‍यकता नहीं है. अब नीति एवं निवेश विभाग में संवर्धन विभाग में निवेश प्रोस्‍साहन विभाग के लिये प्रावधान रखे गये. पु‍ल, पुलिया, सड़क इन सबमें भी प्रावधान किये हैं और मैं इतना बताना चाहूंगा कि हमारा राजस्‍व प्राप्ति का जा लक्ष्‍य था वित्‍तीय वर्ष 2025-26 के लिये कुल राजस्‍व प्राप्तियों का लक्ष्‍य 2 लाख 90 हजार 879 करोड़ रूपये का रखा था. मैं अभी जनवरी का सदन में बताना चाहूंगा कि जनवरी,  26 माह तक कुल राशि रूपये 2 लाख 1 हजार 929 करोड़ की राजस्‍व की प्राप्तियां हुई हैं. हमारी सरकार पूरी तरह से गंभीर है और विकास के लिये संकल्पित है.

          मैं और विस्‍तार से कुछ न कहते हुए मैं सभी माननीय सदस्‍यों से अनुरोध करूंगा कि तृतीय अनुपूरक अनुमान को सर्वसम्मति से पारित करने का कष्‍ट करें.                                                                       

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न यह है कि -

"दिनांक 31 मार्च, 2026 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष में अनुदान संख्या 1,3,7,8,10,11,12,13,18,20,22,23,24,25,29,

35,37,40,47,48, 50 एवं 54 के लिए राज्य की संचित निधि में से प्रस्तावित व्यय के निमित्त राज्यपाल महोदय को कुल मिलाकर पंद्रह हजार नौ सौ अट्ठावन करोड़, उनहत्तर लाख, तीस हजार, पिचासी रुपये की अनुपूरक राशि दी जाये."

अनुपूरक मांगों का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

(मेजों की थपथपाहट)..

 

 

 

 

 

 

 

 

 

2.01 बजे                                  शासकीय वित्त विषयक कार्य

                    मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2026 (क्रमांक 1 सन् 2026) का पुरःस्थापन

        उपमुख्यमंत्री, वित्त (श्री जगदीश देवड़ा) - अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2026 का पुरःस्थापन करता हूं.

          श्री जगदीश देवड़ा - अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.

          अध्यक्ष महोदय - प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

          अध्यक्ष महोदय - प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

          अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.

          प्रश्न यह है कि खण्ड 2,3 तथा अनुसूची इस विधेयक के अंग बने.

          खण्ड 2,3 तथा अनुसूची इस विधेयक के अंग बने.

          प्रश्न यह है कि खण्ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

खण्ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

          श्री जगदीश देवड़ा - अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2026 पारित किया जाय.

          अध्यक्ष महोदय - प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

          प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2026 पारित किया जाय.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

विधेयक पारित हुआ.

 

          अध्यक्ष महोदय - अनुदान मांगों पर अब प्रस्ताव आएगा.

 

 

 

 

 

 

2.03 बजे                    वर्ष 2026-2027 की अनुदानों की मांगों पर मतदान

 

 

(1)

मांग संख्या 1

सामान् प्रशासन

 

मांग संख्या 2

विमानन

 

मांग संख्या 3

गृह

 

मांग संख्या 4

पर्यावरण

 

मांग संख्या 5

जेल

 

मांग संख्या 10

वन

 

मांग संख्या 11

औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन 

 

मांग संख्या 21

लोक सेवा प्रबन्‍धन

 

मांग संख्या 25

खनिज साधन

 

मांग संख्या 29

विधि और विधायी कार्य

 

मांग संख्या 32

जनसम्पर्क

 

मांग संख्या 41

प्रवासी भारतीय

 

मांग संख्या 46

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

 

मांग संख्या 48

नर्मदा घाटी विकास

 

मांग संख्या 52

आनंद

 

 

 

 

 

 


 

 

          अध्‍यक्ष महोदय -- उपस्‍थित सदस्‍यों के कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुए. अब मांगों और कटौती प्रस्‍ताव पर एक साथ चर्चा होगी.

          एक बार और स्‍मरण दिला दॅूं कि कार्य-मंत्रणा समिति में यह विचार हुआ और निर्णय हुआ था कि वन और पर्यावरण इन दो विभागों पर चर्चा होगी और उसके पश्‍चात् पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर चर्चा होगी, तो अभी इस ग्रुप में वन और पर्यावरण विभाग की दृष्‍टि से हम सब लोग अपने विचार रखें.                                                                                 

            श्री हेमंत सत्यदेव कटारेअध्यक्ष महोदय, माईनिंग पर भी चर्चा होगी. तो मैं माईंनिंग पर बोलना चाहता हूं. मुख्यमंत्री जी ने कहा था कि मेरा विभाग है मैं उसका उत्तर दे दूंगा.

          अध्यक्ष महोदयआप मुख्यमंत्री जी से बात कर लो.

          श्री हेमंत सत्यदेव कटारेअध्यक्ष महोदय,जी.

          अध्यक्ष महोदयश्री भूपेन्द्र सिंह जी.

          श्री भूपेन्द्र सिंह (खुरई)माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी और हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने जो जन कल्याण का बजट सदन में रखा है.

          2.12 बजे          {सभापति महोदया (श्रीमती झूमा सोलंकी) पीठासीन हुईं}

 

माननीय सभापति महोदया मैं इस बजट का स्वागत करता हूं. यह राज्य की बड़ी उपलब्धि है कि आज हमारा मध्यप्रदेश सरकार का जो बजट है. जो देश के विकसित राज्य हैं उन विकसित राज्यों में आज हमारी राज्य सरकार का बजट देश के पांच विकसित राज्यों वाला हमारा आज का यह बजट है. किसी भी राज्य के विकास का आधार उस राज्य की कानून व्यवस्था होती है. मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का बहुत अभिनन्दन करूंगा कि आज मध्यप्रदेश में उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद लगातार हमने विकास में हमने दो सवा दो साल के अंदर हमने लगातार विकास की ऊंचाइयों को छूआ है. माननीय मुख्यमंत्री जी ने हमारे मध्यप्रदेश के अंदर अनेक आदर्श स्थापित किये हैं. माननीय मुख्यमंत्री जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद जब मध्यप्रदेश में लोकसभा के चुनाव हुए तो मध्यप्रदेश में माननीय मुख्यमंत्री जी मोहन यादव जी नेतृत्व में मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने 29 में से 29 लोक सभा की सीटों पर विजय प्राप्त की. यह हमारे मुख्यमंत्री जी की लोकप्रियता है, जनता में उनके प्रति विश्वास है. सभापति महोदया न केवल राज्य के अंदर अभी पिछले दिनों बिहार के चुनाव हुए तो बिहार के चुनाव में भी हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी मोहन योदव जी के द्वारा बिहार के चुनाव में अनेक स्थानों पर सभाएं आयोजित की गईं. बिहार के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी एनडीए गठबंधन की जो शानदार विजय हुई है उसमें हमारे यशस्वी लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी का महत्वपूर्ण योगदान है.

          सभापति जी, ये हमारे मुख्‍यमंत्री जी ने आदर्श उपस्थित किया, उन्‍होंने स्‍वयं ने अपनी बेटे की शादी मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान कार्यक्रम के अंतर्गत करके, समाज को यह संदेश देने का काम किया कि भारतीय जनता पार्टी, सामाजिक समानता के सिद्धांत के आधार पर पर काम करने वाली पार्टी है. किसी भी राज्‍य के विकास का आधार होता है, उस राज्‍य के विकास का सूचकांक. आज हम सब को गौरव है कि आज मध्‍यप्रदेश की विकास दर, पूरे भारत में अगर सर्वाधिक विकास दर, किसी राज्‍य की है तो वह मध्‍यप्रदेश राज्‍य की है, 11.40 प्रतिशत विकास दर, हमारे राज्‍य की है. यह विकास का पैमाना है, यह विकास का प्रमाण है. हम लोगों को इस बात का भी गौरव है कि आज मध्‍यप्रदेश, पूरे देश के अंदर प्रति व्‍यक्ति औसत आय में, देश का पहला राज्‍य है. हमारी सरकार ने इन दो वर्षों के अंदर, पिछले वर्ष हमारी सरकार ने वर्ष 2025 को औद्योगिक वर्ष घोषित किया और वर्ष 2026 को हमारी सरकार ने कृषि वर्ष घोषित करने का काम किया. अभी माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने यहां पर अपना वक्‍तव्‍य भी दिया. अगर हम पिछले वर्ष की बात करें तो पिछले एक वर्ष के अंदर माननीय मुख्‍यमंत्री जी के प्रयास से हमारी सरकार ने मध्‍यप्रदेश की धरती पर लगभग 40 लाख करोड़ के औद्योगिक निवेश स्‍वीकृत हुए जो एक इतिहास है. न केवल निवेश के प्रस्‍ताव हुए. आज हमारे प्रदेश में 8 लाख करोड़ के उद्योग धरातल पर आ गए हैं. ये हमारे राज्‍य का जो विकास और विकास का जो विजन है, ये इस विजन का परिणाम है कि आज हमारा मध्‍यप्रदेश हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है. आज अगर हम पर्यटन की बात करें. हम जानते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा रेवेन्‍यु कलेक्‍शन यदि किसी चीज से होता है, टोटल रेवेन्‍यु कलेक्‍शन का, 40 प्रतिशत रेवेन्‍यु कलेक्‍शन टूरिज्‍म से होता है. आज पर्यटन में हम देश में नंबर 1 है. आज अगर हम गरीब के लिए मकान बनाने की बात करते हैं, प्रधानमंत्री आवास योजना की बात करते हैं, तो प्रधानमंत्री आवास योजना के अंदर हम देश में नंबर 1 है. आज देश में हम कृषि उत्‍पादन में गेहूं उत्‍पादन की बात करें, तो हमारा राज्‍य आज देश के अंदर दूसरे स्‍थान पर है. सभापति जी अगर हम दुग्‍ध उत्‍पादन की बात करें, तो हमारा राज्‍य आज देश के अंदर पहले स्‍थान पर है. ये हमारी सरकार की नीतियों का परिणाम है.

          मुख्‍यमंत्री के नेतृत्‍व का परिणाम है कि आज हर क्षेत्र में चाहे कृषि का क्षेत्र हो, चाहे उद्योग का क्षेत्र हो और इस बात के भी आंकड़ें है कि देश के अंदर सर्वाधिक रोजगार देने का काम अगर किसी राज्‍य में हुआ है, तो वह मध्‍यप्रदेश की धरती पर हुआ है और इस प्रकार से  सर्वाधिक रोजगार देने का काम हमारी सरकार ने मध्‍यप्रदेश के अंदर किया है. (मेजों की थपथपाहट)

          सभापति महोदया, जब में लॉ एण्‍ड आर्डर की बात करता हूं तो मैं मुख्‍यमंत्री जी को इस बात के लिये धन्‍यवाद करता हूं कि उन्‍होंने पहली बार मध्‍यप्रदेश के इतिहास में इस बार के बजट में 13 हजार 477 करोड़ रूपये गृह विभाग को देने का काम किया है. (मेजों की थपथपाहट) मैं उनका स्‍वागत करता हूं, अभिनंदन करता हूं. मैं भी गृहमंत्री रहा हूं और मैं इस बात को जानता हूं, आज हमारे सामने कुछ ऐसी ताकतें हैं, जो हमारे देश के सामने चुनौतियां हैं. आज हम देश के अंदर देखते हैं, राज्‍य के अंदर देखते हैं, कुछ ताकतें देश के अंदर ड्रग्‍स के माध्‍यम से फॉरेन फंडिंग करना चाहती हैं, कुछ ताकतें देश के अंदर धर्मांतरण के माध्‍यम से भारत को कमजोर करना चाहती हैं, कुछ ताकतें देश के अंदर लव जिहाद जैसे मामलों के माध्‍यम से देश को कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं और कुछ ताकतें साइबर क्राइम जैसे अपराधों के माध्‍यम से या सोशल मीडिया का गलत उपयोग करके हमारी युवा पी‍ढी़ को मानसिक रूप से विकृत करने का भी काम देश के अंदर कर रही हैं.

          सभापति महोदया, हम सब इस बात को जानते हैं कि देश के विकास के लिये, राज्‍य के विकास के लिये सबसे पहली प्राथमिकता कानून व्‍यवस्‍था है और इस बारे में कोड करूंगा आदि गुरू शंकराचार्य जी ने कहा है कि ''दुष्‍टों का दमन और धर्म की रक्षा करना ही एक श्रेष्‍ठ शासक का सर्वोपरि और प्रथम कर्तव्‍य है''. हमारे देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी ने कानून और व्‍यवस्‍था के बारे में कहा है कि ''अगर कानून और व्‍यवस्‍था सुदृढ़ नहीं है, तो विकास के सारे दावे खोखले हो जाते हैं, जहां शांति और सुरक्षा होती है, वही लक्ष्‍मी का वास होता है और वहीं प्रगति के रास्‍ते खुलते हैं''.

          सभापति महोदया, हमारी सरकार ने अग्रेंजों के बनाये कुछ काले कानून, या अग्रेंजी दास्‍ता के कुछ ऐसे कानूनों को समाप्‍त करने का काम किया है और हमने अग्रेंजी कानूनों को, अग्रेंजी दास्‍ता से मुक्‍त कर हमारी भारत की संस्‍कृति के अनुरूप, स्‍वाभिमान के अनुरूप भारतीय न्‍याय संहिता स्‍थापित करने का काम किया है.                                                                                माननीय सभापति जी, मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी का इस बात के लिये भी अभिनंदन करूंगा कि उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री बनने के बाद जिस शक्ति के साथ अपराधियों के खिलाफ कार्यवाही की है उस शक्ति का परिणाम है कि आज मध्‍यप्रदेश शांति का टापू है और इसलिये राज्‍य का विकास हो रहा है. मैं मुख्‍यमंत्री जी का अभिनंदन करूंगा. एक समय हमारा यह राज्‍य नक्‍सलवाद की समस्‍या से जूझ रहा था. हम सबको याद है, मैं इस सदन का उस समय सदस्‍य था, उस समय सरकार के हमारे एक मंत्री की, मैं नाम कोड नहीं करूंगा नक्‍सलवादियों ने गला रेतकर हत्‍या कर दी. आज वही मध्‍यप्रदेश माननीय मुख्‍यमंत्री मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में आज मध्‍यप्रदेश की धरती पर नक्‍सलवाद पूरी तरह से समाप्‍त करने का काम यदि किसी ने किया है तो हमारे मुख्‍यमंत्री माननीय मोहन यादव जी ने. आज हम गर्व से कह सकते हैं कि नक्‍सलवाद मुक्‍त मध्‍यप्रदेश बनाने का काम हमारी सरकार ने किया है.

          सभापति महोदय-- माननीय सदस्‍य, थोड़ा समय का ध्‍यान रखना होगा.

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह-- माननीय सभापति जी, अभी तो शुरूवात कर रहा हूं.

          सभापति महोदय-- शुरूवात कर रहे हैं, लेकिन थोड़ा संक्षिप्‍त.

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह--  जी सभापति जी. माननीय सभापति जी, हमारी सरकार ने भारत के सांस्‍कृतिक मूल्‍यों को, भारत की संस्‍कृति को सहेजने का कार्य भी हमारी सरकार ने किया है. आज हम सबको इस बात का गौरव है कि आज हमारे देश के अंदर अब कोई भी कार्यक्रम होगा तो वह वंदेमातरम गीत के साथ होगा. राष्‍ट्र के हर नागरिक में राष्‍ट्रीयता हो, यह हमारी सरकार का संकल्‍प है. माननीय सभापति जी, मैं मुख्‍यमंत्री जी का इस बात के लिये अभिनंदन करता हूं कि उन्‍होंने बड़े-बड़े सिंडीकेट भोपाल के अंदर शरीफ मछली बुलडोजर चलाकर 100 करोड़ की कार्यवाही को ध्‍वस्‍त करने का काम मोहन यादव जी की सरकार ने किया. इसी भोपाल में शाद और शाहिल जो इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्राओं को लव जिहाद के माध्‍यम से ब्‍लेकमेल करने का काम करते थे, उनके अर्जुन नगर में बने सरकारी जमीन पर अवैध मकानों पर बुलडोजर चलाने का काम भी मोहन यादव की सरकार ने किया. माननीय सभापति जी, चाहे छतरपुर के सहजाद अली जी हों, चाहे अशोक नगर के आजाद खान हों, चाहे भोपाल के फारूख हों, चाहे शाजापुर के रहीम और अन्‍य हों, जबलपुर का कुख्‍यात माफिया अब्‍दुल रज्‍जाक, उसका पूरा नेटवर्क ध्‍वस्‍त करने का काम हमारी सरकार ने किया और उसके अवैध कब्‍जे को जमींदोज कर जो संगठित अपराध था उस संगठित अपराध को समाप्‍त करने का काम मुख्‍यमंत्री मोहन यादव जी ने किया. ग्‍वालियर में चाहे सलीम ऊर्फ सलमान हों, उज्‍जैन में जुनैद खान और उनके साथी हों उन पर एनएसए जैसी कार्यवाही, हिस्‍ट्रीशीटर असलम भूमाफिया, बाबू सिंधी सट्टा किंग, सतीश सनपाल ऐसे अनेक अपराधी कुख्‍यात सट्टेबाज दिलीप कालानी, गैंगस्‍टर जुनैद ऊर्फ बाबा, नशे के सौदागर पिन्टू और उनके गुण्डे,रतलाम इन सबके खिलाफ माननीय मोहन यादव जी की सरकार ने जो सख्ती के साथ कार्यवाही की है बुलडोजर चलाकर कानूनी कार्यवाही करके इनका जो संगठित अपराध था इसको समाप्त करने का काम किया है. मैं इस बात के लिये भी कहूंगा कि आज अगर पूरे देश के अंदर हम देखें तो पूरे देश के अंदर आज भी अगर सबसे पुलिस देश में कहीं पर है तो वह हमारा मध्यप्रदेश राज्य है जहां की पुलिस आज भी अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अच्छा काम कर रही है. चाहे हमारा  इन्वेस्टीगेशन का रेट हो, चाहे अपराधियो पर कार्यवाही का हो चाहे सजा दिलाने का काम हो इस सबके अंदर मैं इनके आंकड़ों पर नहीं जाऊंगा मेरे पास सारे आंकड़े हैं. देश के अंदर अगर सबसे प्रभावी कार्यवाही कीहै तो हमारे मध्यप्रदेश की पुलिस ने करने का काम किया है. पुलिस के आधुनिकीकरण के लिये जैसा हमने कहा आज हमारे सामने कई तरह की चुनौतियां हैं और इन चुनौतियों से निपटने के लिये सुविधाओं के लिये यह जो तेरह हजार करोड़ का प्रावधान हमारी सरकार के द्वारा किया है इससे निश्चित ही हमारे राज्य की कानून व्यवस्था मजबूत होगी. मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का इस बात के लिये भी धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने राज्य में कानून व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिये,युवाओं को रोजगार देने के लिये पुलिस विभाग में 22500 नये पदों पर भर्ती का निर्णय लिया है हमारी सरकार ने. 22500 पदों पर पुलिस में भर्ती की जायेगी. पुलिस आवास के लिये हमारे पुलिस के अधिकारियों,कर्मचारियों के लिये अच्छे आवास की व्यवस्था हो इसके लिये 11 हजार आवास बनाने का निर्णय हमारी सरकार ने लिया है. जैसा मैंने कहा आधुनिकीकरण के लिये सरकार ने प्रावधान करने का काम किया है. इस तरह से हमारा प्रदेश शांति का टापू हो हमारे प्रदेश के अंदर जो भी आज देश के अंदर या दुनियां के अंदर जो अपराधिक चुनौतियां हैं उन पर प्रभावी रूप से कार्यवाही कर सकें. फोरेंसिक लेब इसका आधुनिकीकरण किया जा रहा है. स्मार्ट पुलिसिंग और सीसीटीवी सर्विलांस,जेल सुधार और आधुनिकीकरण जैसे अनेकों काम के लिये हमारी सरकार ने बजट में प्रोवीजन करने का काम किया है और मैं इस आधार पर कह सकता हूं कि हमारी मध्यप्रदेश की सरकार राज्य के अंदर शांति हो,सुरक्षा हो, राज्य का हर नागरिक अपने आप को सुरक्षित महसूस कर सके. इन सबके लिये हमारी सरकार ने काम किया है. मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का,हमारी सरकार का बहुत हृदय से अभिनंदन करता हूं स्वागत करता हूं कि माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश और विकास में आगे बढ़ेगा. माननीय सभापति महोदया जी, मैं बजट का समर्थन करता हूं और आपने जो बोलने का समय दिया इसके लिये मैं आपका हृदय से धन्यवाद करता हूं.

            श्री भंवर सिंह शेखावत (बाबूजी) (बदनावर) -- माननीय सभापति जी, वैसे तो इस विषय को माननीय अध्‍यक्ष महोदय ने सीमित कर दिया था. लेकिन भाई भूपेन्‍द्र जी ने इस विषय को विस्‍तार दिया. आपने अपने भाषण के अंदर सभी विषयों को समाहित कर लिया. अब जो-जो बात रह गई है. बजट पर तो बहस हो ही रही है. बजट का मुख्‍य स्‍वरूप आया, उस पर भी चर्चा हुई है. कर्जे की बात के लिए कई बार आग्रह किया गया कि सरकार कितना कर्जा ले रही है, जनता को बताया जाए. बजट जितना होता है, उसके बाद में कर्जा और लिया जाता है. ठीक से अनुमानित तो रहता नहीं है, दो-तीन-चार अनुपूरक बजट लाकर फिर बार-बार जनता के बीच में जाया जाता है. ऐसा लगता है कि सरकार अनमने मन से काम कर रही है. इन्‍हें समझ ही नहीं आ रहा है कि प्रदेश को चलाना कैसे है. टोटल जितना बजट प्रस्‍तुत किया गया है, उससे 60 प्रतिशत अनुपूरक में आ जाए, डिमाण्‍ड आ जाए. बाद में डिमाण्‍ड की जाए. जिन विभागों के लिए बजट मांगा जा रहा है, उन विभागों की अगर जमीन पर जाकर व्‍यवस्‍था देखी जाएगी तो मालूम पड़ जाएगा कि व्‍यवस्‍थाएं बिल्‍कुल उसके अनुरूप चल ही नहीं रही हैं.

          सभापति महोदया, गृह विभाग की बात आई. अब गृह विभाग के अंदर, पुलिस के अंदर, प्रशासन के अंदर स्‍टॉफ की कमी है. लोग नहीं हैं. उनके रहने की व्‍यवस्‍था नहीं है. पुलिस की मानसिक स्‍थिति ठीक नहीं है और इसके कारण पूरे प्रदेश के अंदर अपराध बढ़ रहे हैं. पुलिस का नियंत्रण समाप्‍त हो रहा है. अभी बहुत सारे गुण्‍डों की बात हुई. भाई भूपेन्‍द्र जी बता रहे थे कि बड़ी कार्यवाही हुई. इतने सारे गुण्‍डों की लिस्‍ट आपने गिनाई, जिन पर कार्यवाही हुई तो 21 साल से सरकार आप ही की है ना भाई, आप ही तो गुण्‍डे पाल रहे थे. इतने गुण्‍डों पर कार्यवाही वर्ष 2026 में हो रही है और वह भी मोहन भाई के आने के बाद, आदरणीय मोहन जी ने कार्यवाही की, मैं धन्‍यवाद देता हूँ. लेकिन इतने साल के अंदर इतने गुण्‍डे पालने का काम किनने किया. ये लोग कितने सालों से अपराध करते रहे. शैलेन्‍द्र भाई, जरा बताएंगे कि इतने सालों से अपराधियों को पालने का काम कौन कर रहा था.

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन -- माननीय सभापति महोदया, वन एवं पर्यावरण पर कुछ विचार व्‍यक्‍त करें.

          श्री भंवर सिंह शेखावत (बाबूजी)  -- वन एवं पर्यावरण का वादा तो भूपेन्‍द्र सिंह जी ने तोड़ दिया है, अब क्‍या है.

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन -- माननीय सभापति महोदया, माननीय अध्‍यक्ष जी ने वह व्‍यवस्‍था दी है, मैं समझता हूँ कि ये वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत (बाबूजी) -- अध्‍यक्ष जी की व्‍यवस्‍था के बाद तो एक घण्‍टे का भाषण हो गया श्री भूपेन्‍द्र सिंह जी का, तो मैं इसलिए कह रहा हूँ कि आखिरकार ये सब पैसा इसी के लिए तो मांगा जा रहा है ना. इसके अंदर जो मांगा गया, उसमें गृह विभाग भी है. गृह विभाग में तो इस प्रदेश के अंदर पुलिस कमिश्‍नरी का एक नया प्रयोग भी किया गया है. कुछ-कुछ बड़े जिलों के अंदर पुलिस कमिश्‍नरी बनाने का एक प्रयोग किया गया और आपने देखा होगा कि जहां-जहां पुलिस कमिश्‍नरेट बने हैं, वहां पर अपराध पहले से ज्‍यादा बढ़े हैं. अनियंत्रित हुए हैं. जनता को असुविधा हो रही है और मुझे लगता है कि यह नया प्रयोग इस प्रदेश में सफल नहीं हुआ है. इसलिए मेरा माननीय मुख्‍यमंत्री जी से आग्रह है, क्‍योंकि गृह मंत्रालय तो मुख्‍यमंत्री जी के ही पास है, मैं अनुरोध करूंगा कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी, इस पर पुनर्विचार करें. पुलिस कमिश्‍नरेट बनाने का प्रयोग जरूर किया गया, लेकिन देश के बहुत सारे हिस्‍सों में भी इसकी उपयोगिता पर प्रश्‍न-चिह्न लगे हुए हैं. बंबई के पुलिस कमिश्‍नर को तो करोड़ों रुपये की रिश्‍वत मांगने के चक्‍कर में जेल में भी जाना पड़ा. पुलिस कमिश्‍नरेट बनने के बाद में पुलिस अनियंत्रित हो गई है. पुलिस के ऊपर कोई नियंत्रण बचा ही नहीं है. क्‍योंकि वह खुद ही वकील, खुद ही अपील और खुद ही जज बन जाती है. सारे फैसले उनको खुद को करने होते हैं, उनके ऊपर किसी का नियंत्रण नहीं रहता और मैं देख रहा हूँ कि लगातार इंदौर के अंदर और भोपाल के अंदर सारी व्‍यवस्‍था छिन्‍न-भिन्‍न हो गई है. अपराध बढ़ गए हैं. अब उनका यह कहना है कि हमारे पास स्‍टॉफ नहीं है. अब स्‍टॉफ नहीं है तो भर्ती कौन करेगा. पुलिस की भर्ती बहुत सालों से नहीं हो रही है. पुलिस के अंदर इतने पद बना दिए गए हैं कि जिनके नाम ही लोगों को ध्‍यान में नहीं रहते. पदों का निर्माण हो रहा है. बड़े-बड़े पद बनाए जा रहे हैं. ऊपर से नीचे तक हम देख रहे हैं. मैं 90 के दशक में देखता था, 80 के दशक के अंदर एक जिले में एक आईजी होता था, एक एसपी होता था और अपराधों पर नियंत्रण रहता था. आज एक-एक जिले में पता नहीं पुलिस के कितने पद क्रिएट कर लिए गए. कितने एसीपी, डीसीपी, एडीशनल पता नहीं आपने कितने पद बना दिये हैं और उसके बाद भी अपराधों में कोई कमी नहीं आ रही है. जनता दुखी है, थाने में जा नहीं सकती है, थाने में रिपोर्ट नहीं लिखवा सकती.

          सभापति महोदया, इन्‍दौर के अन्‍दर तो 25 पुलिसकर्मियों को सिर्फ इसलिए निलंबित किया गया है कि वह थाने के अन्‍दर खड़े होकर लोगों को बुलाकर सेटलमेंट का काम करते थे. पूरा का पूरा डिपार्टमेंट इसी काम में लगा हुआ है और इसलिए अब जनता से बार-बार आप बजट में पैसे लेते हैं, हर बजट में पैसे लेते हैं, अनुपूरक में पैसे लेते हैं. उस पैसे का उपयोग क्‍या हो रहा है, यह जनता को तो पता चले. यह अपराध जो बढ़ रहे हैं, उस पर नियन्‍त्रण कौन करेगा ? आप अपनी पीठ थपथपाते हैं. यह बात तो सही है कि लाल व्‍यवस्‍था आपने खत्‍म कर दी है. लाल सलाम खत्‍म हो गया है. आप बड़ी-बड़ी बातें करते हैं. वह आतंकवादी थे क्‍या ? लेकिन यह जो अपराध बढ़ रहे हैं और संगठित अपराध बढ़ रहे हैं. अभी आपने दो दिन पहले देखा कि भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने  सुनियोजित तरीके से कांग्रेस कार्यालयों पर हमला कर दिया. यह कौन सी कानून व्‍यवस्‍था है ? हम यहां पर आपके बजट का समर्थन करें और आपको बजट का पैसा दें. आप अपने गुण्‍डों को एकट्ठा करके कांग्रेस के कार्यालय पर हमला करवा रहे हो. यह कौन सा तरीका  है ? आदरणीय कैलाश विजयवर्गीय जी यहां नहीं हैं, आज सुबह बोल रहे थे. (श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन जी के खड़े होने पर) शैलेन्‍द्र भाई, आप बैठिये, मैं आप ही की बात कर रहा हूँ. आप बैठ जाओ. सागर में आपका भी फोटो छपा है, पत्‍थर फेंकने वालों में आपका भी था.

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन - सभापति महोदया, दिल्‍ली में वह महानुभाव वहां क्‍या कर रहे थे ? ..(..व्‍यवधान..) हमारे खिलाफ कोई कार्यवाही हो और हम प्रदर्शन भी न करें. ....(..व्‍यवधान..)

          श्री भंवरसिंह शेखावत - माननीय सभापति महोदया, आप सुनिये तो सही. आपने दिल्‍ली के अन्‍दर क्‍या किया ? आपने कहा कि युवक कांग्रेस के लोगों ने कपड़े उतारकर प्रदर्शन किया ? शैलेन्‍द्र बाबू, आपकी सरकार ने एआई समिट के अन्‍दर हिन्‍दुस्‍तान के 140

करोड़ लोगों के कपड़े उतारे है. आपको पता है कैसे ?  (XX)   ..(..व्‍यवधान..) पूरे हिन्‍दुस्‍तान को मूर्ख बनाने का काम किया है. कितनी बड़ी बेइज्‍जती हुई है ? यह (XX) यूनिवर्सिटी के लोगों ने काम किया है ? देश के ऊपर कलंक लगा दिया है. (XX)  ..(..व्‍यवधान..)

..(..व्‍यवधान..)

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय - सभापति महोदया, यह घोर आपत्तिजनक है.

          एक माननीय सदस्‍य - कांग्रेसियों का दिमाग पूरे देश में खराब है.

..(..व्‍यवधान..)

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय - माननीय सभापति महोदया, यह विलोपित किया जाये. ..(..व्‍यवधान..)

          सभापति महोदया - यह विलोपित किया जाये.

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन - सभापति महोदया, ..(..व्‍यवधान..)

          श्री महेश परमार - आदरणीय सभापति महोदया, गलगोटिया ने जो काम किया है. इसको पूरे देश से बहिष्‍कार करना चाहिए. (XX)   

          सभापति महोदया - आप लोग बैठ जाइये.

..(..व्‍यवधान..)

          श्री महेश परमार - माननीय सभापति महोदया, ..(..व्‍यवधान..) माफी मांगना चाहिए. ..(..व्‍यवधान..)

          सभापति महोदया - आप सब लोग बैठ जाइये, बैठ जाइये. ..(..व्‍यवधान..)

          श्री भगवानदास सबनानी - सभापति महोदया, इनको माफी मांगनी चाहिए.

..(..व्‍यवधान..)

 

           सभापति महोदया - आप सब बैठ जाइये. संसदीय कार्य मंत्री जी कुछ कह रहे हैं.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - माननीय सभापति महोदया, वित्‍त मंत्री जी सबके जवाबदार हैं. चूंकि फायनेंस की चर्चा चल रही है, तो वित्‍त मंत्री होने चाहिए, पर समय पर भोजन हो जाये तो बहुत ज्‍यादा जरूरी है. कई बार कुछ शुगर के मरीज होते हैं और शुगर बढ़ जाये तो गुस्‍से में कुछ कम-ज्‍यादा निकल जाये, इसलिए इतनी छूट हम सभी को देना चाहिए. मंत्री महोदया आ गई हैं और वित्‍त मंत्री जी तो सभी विभागों के केंद्र बिंदु हैं और वे सदन में उपस्थित हैं तो किसी अन्‍य मंत्री के रहने की आवश्‍यकता ही नहीं है और भंवर जी आपकी सेवा के लिए तो मैं हूं ही.

          श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)-  मंत्री के बारे में कुछ कहा ही नहीं गया. आपका विषय चल रहा था कि 2 दिन पूर्व, प्रदेश के (xx) ने सभी को बताया कि मेरे पास (xx) का विभाग भी है, आज उसी पर चर्चा हो रही थी.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  मैं तो आपका भी, धार का भी प्रभारी हूं.

          श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)-  सभापति महोदया, आज सदन में AI का विषय आया, जिसका आपने सुबह उल्‍लेख किया था. उसमें क्‍या हुआ, बहुत साधारण सी बात थी, वही तो हम कह रहे थे, उस पर शैलेन्‍द्र जी को गुस्‍सा आ गया, जब (xx). इससे देश की 140 करोड़ जनता का अपमान हुआ है, कुछ लोगों ने वहां प्रदर्शन किया, गलत किया, मैं तो उनका भी समर्थन नहीं करता हूं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  शेखावत जी, जो लोग वहां कपड़े उतारकर गए उससे भारत का सम्‍मान बढ़ा क्‍या ?

          श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)-  सभापति महोदया, मैं, कैलाश जी की बात से सहमत हूं कि कपड़े उतारने से सम्‍मान नहीं बढ़ता है, यह बात सही है लेकिन (xx), देवड़ा जी आज ईमानदारी से बतायें क्‍या ये कोई तरीका है ? मैंने कहा कि अपने यहां कोई (xx)  की कमी है, (xx), इस पर हमारे राजेन्‍द्र भाई नाराज हो गए.

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय (राजु भैया)-  उसे तो विलोपित करवा दिया गया है, उसे पुन: कहने की आवश्‍यकता ही नहीं है. आपने तो पूरे सदन को ही लपेट लिया, आप स्‍वयं भी तो उसके लपेटे में आ रहे हैं.

          श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)-  आप चिंता न करें, अब कैलाश जी आ गए हैं, अब (xx)  तो, विलोपित हो ही जायेगा.

          श्री आशीष गोविंद शर्मा-  आश्‍चर्य की बात यह है कि आपकी ही की पार्टी के सदस्‍यों ने समर्थन किया कि भंवरसिंह जी ने सही कहा, मतलब वे अपने आप को क्‍या मान रहे हैं ?  

          सभापति महोदया-  शेखावत जी, कृपया बजट पर ही अपना ध्‍यान केंद्रित करें.

          श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)-  आशीष जी, बैठ जाओ अब (xx) पर कितनी देर बहस करोगे. वह (xx) कितना भी हो, (XX), भारत का नहीं है, वह तो स्‍पष्‍ट हो गया है. (XX) वालों ने गलती की, उससे हमारे देश का अपमान हुआ है, वह तो हुआ ही, इसे स्‍वीकार करने में क्‍या दिक्‍कत है ? जिन्‍होंने कपड़े उतारे, हम उसका भी विरोध करते हैं, नहीं उतारने चाहिए थे लेकिन (XX), तो अगर कुछ लोगों ने वहां अपने कपड़े उतार लिये, तो उससे कौन-सा बड़ा अपमान हो गया ?

          सभापति महोदया-  (xx)  शब्‍द से संबंधित अंश विलोपित किया जाये और आपसे आग्रह है कि केवल अपनी मांगों पर ही अपनी बात रखें.

          श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)-  सभापति महोदया, मेरा कहना है कि अभी तो पुलिस की बात हो रही थी, अभी कैलाश जी भी आ गए हैं. मैं उस विषय पर ज्‍यादा पुन: नहीं कहना चा‍हता. मेरा देवड़ा जी से आग्रह है कि पुलिस के प्रयोग से आज अपराध बढ़ रहे हैं, अव्‍यवस्‍था बढ़ रही है, जनता परेशान है, हलाकान है, पुलिस वाले भी हलाकान हैं, नीमच में 3 पुलिसकर्मियों ने स्‍वयं को गोली मार ली. पुलिस ने आत्‍महत्‍या कर ली और उसने आरोप लगाया कि पूरी नीमच की पुलिस, एस.पी.साहब बिना पैसे के काम नहीं करते हैं, मुझे भी पैसा देना पड़ता है. अब पुलिस वालों को, पुलिस को पैसा देना पड़ रहा है. राजेन्‍द्र जी आपके पड़ोस में नीमच में यह हुआ है. सिपाही वहां गोली खाकर मर गया और आरोप क्‍या लगाया कि पुलिसवालों को पैसे दिये बिना कोई काम नहीं होता. अब बतायें, जब पुलिसवाला यह कह रहा है, शैलेन्‍द्र भाई ज़रा लज्‍जा करो. पुलिसवाला स्‍वयं कह रहा है, पुलिस बिना पैसे लिये काम नहीं कर रही है तो मेरा कहना है कि इस व्‍यवस्‍था को सुधारा जाये.

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन-  सभापति महोदया, इन्‍होंने मेरा नाम लिया है इसलिए कह दूं-

"काबा किस मुंह से जाओगे गालिब,

लेकिन शर्म है कि उनको आती नहीं."

 

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  सभापति महोदया, शेर-शायरी से शेखावत जी का कोई संबंध नहीं है, वह लखन भईया का काम है क्‍योंकि शेर-शायरी में दिमाग की आवश्‍यकता होती है और वह अपने पास है नहीं. (हंसी)

          श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)-  सभापति महोदया, इतना दिमाग हमारे पास नहीं है और न इतनी फुरस्‍त है कि हम शेर-शायदी सुनें. वैसे ही इंदौर वाले कम शेर-शायरी करते हैं, आजकल कैलाश जी ने करना शुरू कर दिया है, पता नहीं कहां से शेर-शायरी लिखकर ले आते हैं. आप बार-बार अनुपूरक भी लायें, बजट भी लायें. बाकी जो विषय हैं उसके अंदर मैं समझता हूं. मैं ज्‍यादा विषयों पर नहीं बोलूंगा. अध्‍यक्ष जी ने तो उसे सीमित‍ कर दिया था. अध्‍यक्ष महोदय, ने कहा कि वन विभाग पर चर्चा करो. वन में कितने लाख पौधे काटे जा रहे हैं. पांच-पांच लाख, छ:-छ: लाख पौधे शहडोल के अंदर भी आये. पौधे काटने का काम भी कर रहे हो. कोई अडानी है उसको दिया गया है. आजकल देश में तो अडानी, अम्‍बानी चलते हैं. अडानी का नाम आता है तो कैलाश जी को गुस्‍सा आ जाता है. हो सकता है दोस्‍त, यार हो ही सकते हैं, लेकिन यह जो कुछ हो रहा है. सिंगरौली में छ:-छ: लाख पेड़ कट जाएं और हम वन विभाग के लिए पैसा मांगें. इंदौर में माननीय कैलाश जी ने पितृ पर्वत पर पौधे लगाए वह आज भी जिंदा हैं, कम से कम इंदौर को हवा तो दे रहे हैं, लेकिन नर्मदा के किनारे छ: करोड़ पौधे लगाये गये थे. आज वहां जाकर गिन लो तो छ: लाख पौधे भी नहीं मिलेंगे. स्थिति यह है. पैसा देने में कोई आपत्ति नहीं है. बजट तो पास होना है. बजट में पैसा भी देंगे, जनता आपके साथ खड़ी है देवड़ा जी, इसकी चिंता मत करो, लेकिन जो दुरुपयोग हो रहा है, मैं उस ओर आपका ध्‍यानाकर्षित कराना चाहता हूं. अस्‍पताल की हालत देख लीजिए, आपके पास पैरामेडिकल स्‍टॉफ नहीं हैं, अस्‍पतालों में डॉक्‍टर नहीं हैं, मेल नर्सेस नहीं हैं, फीमेल नर्सेस नहीं हैं. नर्सिंग में इतना बड़ा घोटाला हुआ उसकी आज तक जांच नहीं हुई. नर्सिंग भर्ती बंद है, नर्सिंग कॉलेज बंद हैं. न्‍यायालय के अंदर उसके प्रकरण चल रहे हैं. अस्‍पतालों के अंदर मरीज परेशान हो रहे हैं. इंदौर के हास्पिटल के अंदर छ:-छ: करोड़ रुपए की बड़ी-बड़ी मशीनें खरीद ली गई हैं, लेकिन इनको चलाने वाले ऑपरेटर नहीं हैं. आखिर यह तमाशा क्‍या है. एक साल, दो साल, तीन साल, आप तो लगातार बजट मांग रहे हैं. बजट के बाद हर साल एक अनुपूरक बजट लेकर आते हैं. जितना आपका टोटल बजट है उसका 40 से 55 प्रतिशत तो आप अनुपूरक में ले रहे हैं. इसका मतलब यह है कि आपका प्‍लान ही गड़बड है. जरा इसको दिखवाइये. देवड़ा जी अभी बोल रहे थे मैं सुन रहा था कि योजनाएं आती हैं तो नई-नई योजनाओं को जोड़ना पड़ता है. सही बात है कि कई बार किसी का असेसमेंट नहीं हुआ हो. नई योजना जुड़ी हो तो उस पर जोड़ा जाए तो बात समझ में आती है. एक कोई आनंद डिपार्टमेंट है जिसमें आपने 11 करोड़ रुपए मांगे हैं. मुझे कोई एक विधायक खड़ा होकर बता दे कि यह आंनद है क्‍या? कौन सा आंनद है, कौन से विभाग में है और उसने आज तक किस- किस को आनंद दिया जरा किसी एक का नाम बताओ. राजेन्‍द्र बाबू को जरा मिला होगा.

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय (राजू भैया)-- मैं तो मेहनती आदमी हूं और मेहनत करके, परिश्रम करके बहुत आंनद आता है तो मैं तो हमेशा आंनदित हूं. आप क्‍यों इतने अशांत हो.

          श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)--पैसे तो आप मांग रहे हैं देवड़ा जी. आंनद विभाग का कोई फंग्‍शन लोगों को समझ में तो आना चाहिए. आपने पाचं-पांच लाख रुपए विधायकों को उनके ऑफिस के विकास के लिए दिये थे. एक विधायक बता दें, आपको तो मजबूरी में बोलना पड़ेगा, लेकिन बाकी सभी विधायकों के यहां यह हुआ कि वह किसी विधायक के यहां क्‍या सामान पटक कर चले गये यह विधायक को भी नहीं मालूम. 30-30, 40-40 हजार रुपए के इक्‍यूपमेंट पटक गये और पांच लाख रुपए का पेमेंट आपके यहां से ले लिया होगा और आपको बता दिया कि विधायकों के यहां पांच लाख रुपए की मशीनें लगा दीं.

          सभापति महोदया, मैंने तो मेरे विधान सभा क्षेत्र में तो कलेक्‍टर जी को लिखकर दिया कि आदरणीय कलेक्‍टर साहब मुझे बताएं कि कौन सी एजेंसी चाहिए और मेरे कौन से कार्यालय के अंदर सामान रखकर गये. आज तक नहीं मालूम और कह दिया कि हमने विधायकों के यहां पांच-पाचं लाख रुपए का सामान दे दिया. बजट के अंदर इस तरीके का जो दुरुपयोग हो रहा है कैलाश जी इसे तो दिखवाइये. यह पांच लाख का सीधा-सीधा फटका सारे विधायकों को दे दिया. दो तीन विधायको से मैंने पूछा तो पता चला कि 40 हजार रुपए का एक डब्‍बा दे गये, कोई 20 हजार रुपए का डब्‍बा दे गये. 60 हजार रुपए के डब्‍बे रख गये पांच लाख के बिल लग गये होंगे. क्‍या पता पेमेंट हुआ होगा कि नहीं. होम बनाने के लिए दिया तो था, लेकिन जब सामान ही नहीं मिला तो होम है कहां. मेरा यह निवेदन है कि बजट तो पास करना ही पड़ेगा हमारी मजबूरी है, लेकिन, अस्‍पतालों की हालत के बारे में मैंने आपको बता दिया. अब एक लोक निर्माण विभाग का जो विषय आया. यह बहुत ही अच्‍छा विषय है. आज ही पेपरों में छपा है. भोपाल-जबलपुर मार्ग पर हाल का ही बना हुआ पुल जिसकी एक स्लेब पहले टूट गई और कल रात को दूसरी गिर गई. इतने बड़े पुल का इतना बड़ा हिस्सा 6 महीने के अन्दर टूट गया. बजट में पैसा देने से कौन इंकार करेगा. देवड़ा जी जैसा सभ्य और शिक्षित व्यक्ति अगर सामने बैठा है तो हम तो वैसे ही हाँ कर देंगे. लेकिन विभागों में क्या हो रहा है. जबलपुर और भोपाल मार्ग पर बना पुल इस तरह से ढह जाए. आदरणीय प्रहलाद जी पधार रहे हैं शायद वे उस पुल से जाते होंगे. रास्ता तो वही होगा. उस रास्ते पर जाने वालों ने देखा नहीं कि उस पुल का निर्माण जिन भारत माता के सपूतों ने किया है उसका क्या हाल है. छह महीने में दो बार पुल टूट गया. इस तरह का निर्माण न हो इस पर ध्यान दिया जाए. आदरणीय कैलाश जी विराजमान हैं, इंदौर का जो जिला अस्पताल है 7-8 साल हो गए हैं वह अभी तक पूरा नहीं हुआ है. जिला अस्पताल की बिल्डिंग नहीं बनी है.

          सभापति महोदया, उद्योग की बात की जाए. ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट की बात करें. देवड़ा जी आप इस पर भी एक श्वेत-पत्र दे दीजिए. आपने कितनी समिट की हैं. इनवेस्टमेंट लाने के लिए कितने विदेश के दौरे किए गए हैं. कौन-कौन लोग विदेश गए. कितने लाख रुपए का एमओयू किस किस महीने में कौन से समिट में किया गया. मेहरबानी करके यह मध्यप्रदेश की जनता को बता दिया जाए. मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि सारा का सारा पैसा लुट गया है. मेरा यह कहना है कि जितना पैसा समिटों में खर्च किया गया उसको आयोजित करने में पहले 195 करोड़ रुपए खर्च किए गए, 34 करोड़ रुपए का एक खर्चा अलग बताया गया है, 57 करोड़ रुपए का खर्चा भी बताया गया है, 132 करोड़ रुपए का खर्चा अलग से बताया गया है. यह जो सारा पैसा खर्च हुआ है इस प्रदेश की जनता को बता दीजिए. आपने कहा कि 10 लाख करोड़ रुपए के एमओयू हो गए हैं यह बहुत अच्छी बात है. आपने प्रयास किए, विदेशों में आप गए, आपने दौरे किए, वहां से लोगों को बुलाया. यह बहुत अच्छी बात है वे मध्यप्रदेश में आएं और उद्योग खोलें,  इससे अच्छी कोई बात नहीं हो सकती है. लेकिन फील्ड में क्या है, वास्तविकता में क्या है. आपने कहा है कि 3-4 लाख लोगों को हमने रोजगार दे दिया है लेकिन रोजगार कार्यालय का में जो रजिस्ट्रेशन हैं उसमें तो 2 प्रतिशत की भी कमी नहीं आई है. उतने के उतने ही बेरोजगार हैं. किसको कितना रोजगार मिला. किस-किस जिले में मिला. मेहरबानी करके मध्यप्रदेश की जनता को बता दीजिए. मैं आपको बता रहा हूँ कि आप अंधेरे की तरफ दौड़ रहे हैं. आप ईमानदारी से काम करना चाहते हैं लेकिन आप जिस अमले के भरोसे काम कर रहे हैं वो जनता के साथ विश्वासघात कर रहा है.

          सभापति महोदया, इंदौर में 3 हजार करोड़ रुपए का घोटाला तो सिर्फ कान्ह नदी को साफ करने में हो गया है. यह बात सही है कि आजकल कैलाश जी की कम चलती है, हमारा शेर आजकल कम दहाड़ रहा है. इंदौर में गड़बड़ हो रही है. तीन हजार करोड़ रुपए कान्ह नदी को साफ करने में व्यय कर दिया गया और आज भी कान्ह नदी वैसी की वैसी है. इतना गंदा नाला है, देवड़ा जी आप तो रात-दिन इंदौर आते जाते हैं. आदरणीय प्रहलाद जी को भी इंदौर आना जाना पड़ता है. आप कान्ह नदी की हालत तो देखिए तीन हजार करोड़ रुपए खर्च करने के बाद क्या स्थिति है. 700-800 करोड़ रुपए का फर्जी पेमेंट हो गया. आप हमसे यहां पर यह राशि स्वीकृत करवाते हैं. कैलाश जी तो दोनों हाथों से मेजों को थपथपाते हैं. हमने भी इनसे सीख लिया कि जब देवड़ा जी का प्रस्ताव हो तो दोनों हाथों से मेजों को थपथपाओ. लेकिन 700 करोड़ रुपए का पेमेंट इंदौर में निकाल लिया गया, बिना काम के निकाल लिया गया. उस पर मुकदमा दर्ज हुआ. तीन अधिकारियों के ऊपर 3-4 साल बाद मुकदमा दर्ज हुआ. आदरणीय कैलाश जी आज से 8 दिन पहले  माननीय उच्च न्यायालय ने कहा कि हमारे यहां फर्जी कागजों के आधार पर हम मुकदमा दर्ज नहीं करते हैं. 800 करोड़ रुपए जनता के लुट जाएं. उसमें जांच हो, दो लोगों को गिरफ्तार किया जाए वह भी इंजीनियर लेबल के और उसके अंदर जब मुकदमा दायर किया गया चार्जशीट दायर की गई तो अभी तीन दिन पहले हाईकोर्ट ने कहा कि जितने कागज प्रस्‍तुत किए गए हैं चालान में यह सब डुप्‍लीकेट हैं हमको ओरिजनल कागज चाहिए और नगर निगम ने कहा हमारे पास ओरिजनल फाइलें नहीं हैं हमारी सारी ओरिजनल फाइलें गुम गई हैं, हमारे पास यह फोटोकॉपी है और हाईकोर्ट ने कहा हम फोटोकॉपी के आधार पर मुकदमा नहीं चलाते. बताइये 800 करोड़ रुपये जो आदरणीय देवड़ा जी, इस जनता ने आपको दिए आपने इन्‍दौर को दिए और इन्‍दौर में क्‍या हुआ, इन्‍दौर में यह हुआ हाईकोर्ट को क्‍या कहना पड़ रहा है. यह अधिकारियों के भरोसे छोड़ा गया इन्‍दौर यह वह इन्‍दौर नहीं है जो कल हमारे आदरणीय कैलाश जी कह रहे थे कि हम तो गिर सकते हैं तो वापस उठ सकते हैं. इन्‍दौर उठ तो सकता है लेकिन इन्‍दौर को गिराया किसने. इन्‍दौर को इस हालत पर लाया कौन. इन्‍दौर सरीखा राजस्‍व देने वाला कोई है क्‍या पूरे प्रदेश के अंदर. सबसे ज्‍यादा राजस्‍व देने वाला शहर है मेरा इन्‍दौर. सबसे सुन्‍दर शहर मेरा इन्‍दौर और सबसे ज्‍यादा राजस्‍व देने वाले शहर के ना‍गरिकों को गटर का पानी पीना पड़े और उसमें से 30-40 की मौत हो जाए यह है सवाल. सवाल इस बात का है कि 4,000 करोड़ खर्च करने के बाद क्‍यों वहां की ड्रेनेज लाइन आज पानी की लाईन में मिल रही है. क्‍यों ड्रेनेज मिला हुआ पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है ? उसका मूल कारण यह है कि हमारे जो सामने शेर बैठे हैं कैलाश विजयवर्गीय इनकी बात को सुना नहीं जा रहा है. अनदेखा किया जा रहा है. अधिकारी मनमानी कर रहे हैं. यह बात मैं इसलिए कहना चाहता हूं मध्‍यप्रदेश के इस प्‍लेटफार्म से कि आज हमारा शहर इन्‍दौर लावारिश हो गया है. नेतृत्‍व वि‍हीन हो गया है. हमारे वहां पर दो-दो मंत्री हैं और 40 लोग मर जाएं गंदा पानी पीकर, किसी की जवाबदारी तय नहीं. इसीलिए मैंने मांग की, कैलाश जी का इस्‍तीफा तो मैं इसलिए मांग लेता हूं कि रात को मैं कहता हूं कि भैया इस्‍तीफा तुम दोगे नहीं मैं मांगूंगा तो फर्क क्‍या पड़ने वाला है. हम आपस में निपट लेंगे लेकिन महापौर को क्‍यों छोड़ा जा रहा है. क्‍यों उनसे इस्‍तीफा नहीं ले रहे हैं. क्‍यों एमआईसी के लोगों पर इसकी जवाबदारी नहीं आ रही है. अकेले इतने बड़े टेण्‍डर को 4 साल तक क्‍यों रोका गया ? प्रतिभा पाल मैडम जब कमिश्‍नर थीं कैलाश जी, तब उन्‍होंने यह प्रस्‍ताव बनाया था और आपके आदरणीय नये महापौर ने साढे़ तीन-चार साल तक प्रस्‍ताव को होने नहीं दिया. अब वह या तो मौतों का इन्‍तजार कर रहे थे या और किसी 40 परसेंट नोटों का इन्‍तजार कर रहे थे.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- सभापति महोदय, आपके पास यह बिल्‍कुल गलत जानकारी है. एमआईसी ने भी एक साल पहले आपके नेता प्रतिपक्ष जी ने उस दिन अपने भाषण में कहा है कि एक साल पहले महापौर जी ने अधिकारियों के पास कमिश्‍नर के पास भेज दिया था. जिस अधिकारी के पास था उसको माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने सस्‍पेंड कर दिया है इसलिए महापौर और एमआईसी की उसमें कोई गलती नहीं है. जिस अधिकारी की गल्‍ती है उसको सस्‍पेंड भी कर दिया और नेता प्रतिपक्ष जी ने बब्‍लू शर्मा का वह दस्‍तावेज भी रखा था.

          श्री भंवरसिंह शेखावत -- सभापति महोदया, आपकी बात से तो मैं असहमत हो ही नहीं सकता. हम तो बचपन के पुराने मित्र हैं.

          सभापति महोदया -- शेखावत जी, अब आप समाप्‍त करें क्‍योंकि काफी सदस्‍य बाकी हैं. सूची लंबी है जिसमें सभी को अपनी बात रखनी है.

          श्री भंवरसिंह शेखावत -- सभापति महोदया, मैं सिर्फ दो विषय संज्ञान में लाकर अपनी बात समाप्‍त करूंगा. एक तो मनरेगा वाली बात है. बड़ी पीठ थपथपा रहे हैं. मनरेगा जैसी स्‍कीम को आपने बदल दिया. नाम जीरामजी कर दिया. आधे विधायकों को यह पता ही नहीं कि इसका फुल फॉर्म क्‍या है. 5-6 से मैंने पूछा कि आपका बीआरजीसीडीबी गिटपिट इसका क्‍या नाम है, क्‍या मालूम है, तो बोले पता नहीं भैया एक रामजी नाम हमें मालूम है, तो चलिए रामजी क्‍या परिवर्तन किया आपने आदरणीय प्रह्लाद जी, आपसे संबंधित क्षेत्र का विषय आ जाएगा इसमें क्‍योंकि यह मामला पंचायत में है, यह आपने नाम बदल दिया. इसमें कोई आपत्ति नहीं है. योजना का नाम बदला है लेकिन योजना का मूल स्‍वरूप बदल गया है. आपने 125 दिन की ग्‍यारंटी जरूर दी है लेकिन 125 दिन की ग्‍यारंटी क्‍या यह हो सकती है देवड़ा जी. जब पिछली मनरेगा योजना में राज्‍य सरकार को सिर्फ 10 परसेंट देना होता था और केन्‍द्र सरकार 90 परसेंट पैसा देती थी आपने कितना बड़ा काम किया इस बार, पिछली बार भी जब 10 परसेंट पैसा देते समय हमसे चूक हो जाती थी हम नहीं दे पाते थे और यह योजना आधी अधूरी लंगड़ाने लगी थी कि साहब इसके अंदर जो पैसा है वह राज्य सरकार का नही मिल रहा है इसलिये उसमें पैसा केन्द्र सरकार नहीं दे रही है. अब जब 10 प्रतिशत में हम फेल हो रहे थे,तो अब तो आदरणीय प्रहलाद जी इसके अंदर 60x40 का रेश्यो कर दिया आपने. अब 10 प्रतिशत के स्थान पर 40 प्रतिशत राज्य सरकार को देना है, 60 प्रतिशत देगी भारत सरकार . जब 10 प्रतिशत हम नहीं दे पा रहे थे तो यह 40 प्रतिशत हम कहां से देंगे. न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी' कर दिया (XX). अब रामजी राम नाम रखने से क्या होना है. अब मरने के बाद में तो राम राम ही कहना पड़ेगा न. राम नाम सत्य है - मनरेगा मस्त है.

          सभापति महोदय, और क्या बचा है 40 प्रतिशत नहीं दे पायेंगे हम जब 10 प्रतिशत नहीं दे पा रहे थे तो 40 प्रतिशत हम कहां से देंगे.

          सभापति महोदय- शेखावत जी अभी 17 सदस्यों को ओर बोलना है कृपया संक्षिप्त करें. इसके बाद में मंत्री जी को भी बोलना है.

          श्री भंवर सिंह शेखावत-- सभापति महोदय, दूसरे सदस्यों की बात भी मैं कह रहा हूं. इसीलिये एक विषय पर बोलकर के मैं अपनी बात को समाप्त कर रहा हूं.

          सभापति महोदय- कुल 2 घंटे का समय इस विषय पर निर्धारित है.

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) -- समय भूल जाते हैं इसलिये आपको समय याद दिलाना पड़ता है. अच्छी बात है.

          सभापति महोदय- कृपया संक्षिप्त करें ताकि सबको अवसर मिल सके.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल‑ आदरणीय सभापति जी मैं आपसे प्रार्थना कर रहा हूं कि उम्र का असर रहता है समय भूल जाते हैं इसलिये याद दिलाना जरूरी है.

          श्री भंवर सिंह शेखावत--सभापति महोदया, अंतिम बात कहकर के मैं अपनी बात को समाप्त करूंगा. सभापति महोदया, यह भ्रष्टाचार के मामले में प्रदेश में चारो तरफ हा हाकार मचा हुआ है. आप रोज का दैनिक भास्कर समाचार पत्र उठाकर के देख लीजिये. एक भास्कर के अंदर एवरी-डे 3 या विभाग का घोटाला आता है. कोई विभाग नहीं जिसके अंदर, बिना लेन देन की बात आई तो चीफ सेकेट्री जी का बयान आ गया बीच में. छपा है. चीफ सेकेट्री आफ मध्यप्रदेश स्टेट गवर्मेंट सेज ओपनली इन द मार्केट, कि कोई भी कलेक्टर बिना पैसे के काम नहीं कर रहा. यह कथित टिप्पणी भ्रष्टाचार के चरम पर होने और प्रशासन में पैसे के लेनदेन की पोल खोलती है।अब भ्रष्टाचार की क्या सीमायें हम बांधेंगे. जब चीफ सेकेट्री आफ द स्टेट यह कह दे कि कोई भी कलेक्टर बगैर पैसा लिया काम नहीं कर रहा है. यह शिकायत माननीय मुख्यमंत्री जी इनको कर रहे हैं. मुख्यमंत्री का मानना है कि राज्य में कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करते हैं

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-- सभापति महोदय, मेरा ख्याल है कि इस पर माननीय चीफ सेकेट्री महोदय का दूसरे दिन क्लेरिफिकेशन भी आ गया. अखबार में भी आ गया, उन्होंने ऐसा कहा नहीं जिस भी अखबार ने यह दिया है, यह कैसे दिया पता नहीं पर मुख्य सचिव महोदय ने कहा ही नहीं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत--कैलाश जी, आप सही कह रहे हैं, मान लिया, लेकिन जब पब्लिक में आये तब तो बात आई न. आदरणीय करण सिंह जी कह रहे हैं, आपके मंत्री कोई अधिकारी बगेर पैसा लिये बिना काम नहीं कर रहा है. यह तमाशा क्या है. देवड़ा साहब जरा हमको समझाईये न, हमारी समझ मे थोड़ी कमी है, हम लोग गांव के लोग हैं, रहते शहर में जरूर हैं लेकिन कैलाश जी के नेतृत्व में हमें वहां पर रहना पड़ता है. हमें समझओ तो सही कि यह झगड़ा क्या है. कि यह अधिकारी बगैर पैसा लिया काम नहीं कर रहे हैं तो उन पर नियंत्रण क्या है. लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू, आप आंकड़े तो देखिये लोकायुक्त के कितने प्रकरण हुये हैं. कितनों में सजा हुई है, ईओडब्ल्यू के कितने प्रकरण हुये हैं, उन पर क्या कार्यवाही हुई है. तमाशा मचा रखा है पूरे प्रदेश के अंदर. एक अनुपूरक , दो अनुपूरक, तीन अनुपूरक अरे अनुपूरक तो आप अगली बार फिर लाओगे और फिर हाथ जोड़कर के देवड़ा जी सामने बैठे रहेंगे , ऐसे सभ्य आदमी को कौन मना कर सकता है. फिर दे देंगे भैया हम. लेकिन इस पर नियंत्रण करिये यह मेरा निवेदन है. अंत मै, अपनी बात समाप्त कर रहा हूं. क्या करें, वित्त मंत्री जी भले हैं, कंधा इनका- बंदूक किसी ओर की,यह चल रहा है, बहुत बहुत धन्यवाद.

          डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह -- सभापति महोदय, यह पूरे सदन के लोगों ने देखा कि आज इधर दरबार(श्री भंवरसिंह शेखावत) की और भाई (श्री कैलाश विजयवर्गीय) की कितनी बेहतरीन जुगलबंदी थी. खूब सेटिंग से आये थे.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय --माननीय सभापति महोदय, मैं आन रिकार्ड कह रहा हूं कि मेरी तो आपसे भी सेटिंग हैं (हंसी)

          सभापति महोदय- श्री भगवानदास सबनानी जी, प्रारंभ करें.

          श्री भगवानदास सबनानी(भोपाल दक्षिण-पश्चिम) -- माननीय सभापति महोदय, मध्यप्रदेश विकास की नई उड़ान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में भर रहा है. माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित भारत 2047 के  विजन पर काम करते हुये मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बनाकर के काम कर रहा है इसलिये 2025 का वर्ष उद्योग वर्ष के रूप में घोषित हुआ और मध्यप्रदेश जिस तरह से विकास कर रहा है उसके लिये मध्यप्रदेश का वैसा वातावरण बने ,पर्यावरण (Environment) बने , मध्यप्रदेश में वैसी परिस्थिति बने, इसके लिये मध्यप्रदेश शांति का टापू है  निवेशक (इन्वेस्टर्र) को लगता है कि मध्यप्रदेश आज आना चाहिये. आज पूरे देश में म.प्र.  की तरफ  पूरे इन्वेस्टर्स की निगाह है.  इसलिये  प्रधानमंत्री जी के  उस विजन को पूरा करने के लिये,  मुख्यमंत्री, डॉ. मोहन यादव जी  जब म.प्र. में रीजनल  इंडस्ट्री कॉन्क्लेव करते हैं. तो वहां  से जो तस्वीर उभरती है पूरे देश में  और उसकी चर्चा होती है,  पूरी  दुनिया में चर्चा होती है.  मुख्यमंत्री जी जब विदेश जाते हैं,  तो  विदेश की धरती पर भी  न  केवल भारत, भारत में  भी म.प्र.  की संभावनाओं को देखते हुए  और उद्योग के क्या अवसर हो सकते हैं, इसको लेकर  के म.प्र. आगे बढ़ रहा है. म.प्र.  जहां गरीब, युवा, अन्नदाता  और महिला इससे आगे बढ़ करके   इन्फ्रास्ट्रक्चर  और  इंडस्ट्री को जोड़ते हुए  इस वर्ष  में जहां कृषि कल्याण  को वर्ष घोषित किया है, लेकिन इंडस्ट्री  हमारे  मूल में है कि किस  तरह से  हम  इंडस्ट्री के साथ  न केवल उद्योग आये,  उद्योग के साथ ही रोजगार के अवसर म.प्र.  में सृजित हों.  अभी जब पिछली बार  यहां  म.प्र. की राजधानी भोपाल  में  पहली  बार जीआईएस हुआ, तो  जीआईएस में 65 देशों के प्रतिनिधिनियों ने, देश के  25 हजार से ज्यादा प्रतिनिधियों ने  म.प्र. में अपनी  रुचि दिखाई और यहां सम्मिलित हुए.  रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव  में भी  लगभग  2.34  लाख करोड़  के   प्रस्ताव  जिसमें लगभग  पौने  3 लाख लोगों को रोजगार  के अवसर मिल सकें,  यह प्रयास हुआ है और म.प्र. में  आज इंडस्ट्री के मामले में  जो नये  उद्यमी आना चाहते हैं, उनको जो अवसर मिले हैं,  उसमें पहले एक समय हुआ करता था,  अब 4-4,5-5  लाख   रुपये    जो उनको  सब्सिडी  थी, उसकी राशि डाली जाती थी, आज  क्वार्टरली  भी नहीं होता.   तीन महीने  के पहले   ही उनको  उनकी राशि  मिल जाती है.  अनुमतियों की जहां तक बात है,  जो  अनुमतियां लेनी होती थी,  वह  अनुमतियां भी अब कम करके  ज्यादा से ज्यादा उनको अवसर  दिये जायें और  निवेशक यहां आये.  देश  भर की रुचि यहां है. अभी हमने देखा  कि जीआईएस और आरआईएस को लेकर के  पूरे देश को  और पूरी दुनिया में   भारत  के साथ जो समझौते हो रहे हैं,  उसमें म.प्र. में 33 लाख  करोड़ से ज्यादा  के निवेश  आये और उसमें भी  8.63 लाख  करोड़  के  निवेश धरातल पर  उनको लागू किया गया है, जिसमें बड़ी इंडस्ट्री  और  नामी इंडस्ट्री  म.प्र में  आ रही है और पहली बार  इस  ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट  के बाद  एक  वातावरण पूरे देश में बना है.  हमने  जो म.प्र.  में रीजनल ग्लोबल समिट, यह दोनों समिट की  इसको लेकर   भी  अब इसका  अनुसरण   बाकी राज्यों में होने लगा है.  प्रधानमंत्री जी  के इन  नीतियों के साथ ही यह  इन्वेटर्स  समिट 2025 में   एक साथ  18 नवीन निवेश नीतियों को  लागू किया गया है.  इसको लेकर म.प्र. में  बड़े सेक्टर के  चाहे वह टेक्सटाइल हो,  फुटवेयर के हों, खिलौने  के हों,  एयरोस्पेस, रक्षा उत्पादन,  फार्मास्यूटिकल्स,  नवकर्णीय ऊर्जा,  बायो टेक्नालाजी,  मेडिकल डिवाइसेस,  इलेक्ट्रानिक व्हीकलस, विनिर्माण   और वैल्यू एडिट सेक्टर को  शामिल किया गया है. साथ ही म.प्र. में 48  औद्योगिक पार्क, जिसमें लगभग   19300 एकड़ भूमि  में  विकसित किया जा रहा है. हम सबके लिये  प्रसन्नता की बात है कि पहला  पीएम मित्र पार्क  म.प्र.  के धार में आया और  धार में प्रधानमंत्री जी  अपने  जन्म दिन  पर  17  सितम्बर को वहां आये  और वहां से म.प्र. के टेक्सटाइल को  और  आगे ले जाने का काम  और  इसके साथ ही इसका अनुसरण  करते हुए देश  के अन्य राज्यों  में भी इस तरह का काम हो रहा है कि पीएम मित्र  टेक्सटाइल बने. म.प्र. के उज्जैन  में   मेडिकल डिवाइस पार्क, मुरैना में मेगा लेदर  फुटवेयर क्लस्टर  और  नवकरणीय ऊर्जा  के  इस उपकरण विनिर्माण  के लिये  नर्मदापुरक  जैसे क्षेत्र को चुना गया है.   मैं मानता हूं कि  म.प्र. एक अपार संभावनाओं से  भरा हुआ है.  इसको मुख्यमंत्री,  डॉ. मोहन यादव जी के अथक परिश्रम के कारण  एक  उम्मीद जागी है.  निवेशक यहां आना चाहते हैं  और  म.प्र.  में निवेश करना चाहते हैं.  रोजगार के अवसर  यहां सृजित होंगे. और मध्‍य प्रदेश में वि‍क्रम उद्योगपुरी, उज्‍जैन में लगाने का एक प्रस्‍ताव, इसके साथ ही इज़ ऑफ डूईंग के माध्‍यम से मध्‍य प्रदेश में एक जनविश्‍वास कायम करते हुए हम अपने विकास के साथ-साथ, हम मध्‍य प्रदेश में कैसे युवाओं को यह भरोसा दिलाने में सफल हुए हैं कि हम मध्‍यप्रदेश में. यहां मध्‍यप्रदेश आप केवल नौकरी मांगने वाले नहीं नौकरी देने वाले बनें और रोजगार के साथ अपने युवा साथियों को और जोड़कर के काम करें. मध्‍य प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है. मध्‍यप्रदेश के उत्‍पाद आज दुनियां के हर कोने में पहुंच रहे हैं.

          चाहे ऑटोमोबाल के रूप में आयशर और फोर्स मोटर्स के के ट्रक अफ्रीका और लेटिन अमेरिका की सड़कों पर दोड़ रहे हैं. फार्मा के क्षेत्र में आईपीसीएऔर सन फार्मा की दवाइयां डब्‍ल्‍यूएचओ और यूएस-एफडीए प्रमाणित होकर यूरोप और अमेरिका जा रहे हैं.

          टेक्‍सटाइल ट्रायडेंट ग्रुप के उत्‍पाद वॉलमार्ट और आईकेईए, जैसी वेश्विक चेन का हिस्‍सा हैं. कृषि प्रसंस्‍करण आगर-मालवा में मेककाइंड की इकाई से आलू किसानों को वैश्विक बाजार के रूप में वहां अपने उत्‍पाद का निर्यात  के रूप में उनको अवसर मिल रहा है.

          सभापति महोदया, 35 नये औद्योगिक क्षेत्रों का लक्ष्‍य वर्ष 2029  का रखा गया है. इसके साथ ही एक्‍सप्रेस वे के प्रभाव क्षेत्र में औद्योगिक नोड्स विकसित करते हुए कॉरिडोर आ‍धारित विकास को गति देने का लक्ष्‍य हमारी सरकार का है. लॉजिस्टिक्स को सशक्‍त करने हेतु 10 नए कार्गो टर्मिनल एवं इनलैंड कंटेनर डिपो विकसित जायेंगे. नीतियों के क्रियान्‍वयन और उसके तहत उद्योग संवर्धन नीति के माध्‍यम से राज्‍य को एक वैश्विक निवेश गंतव्‍य के रूप में विकसित किया जायेगा और वर्तमान में मध्‍य प्रदेश में सकल राज्‍य घरेलू उत्‍पाद 15 लाख करोड़ को वर्ष्‍ं 2028-29 तक लगभग 25.3 लाख करोड़ रूपये, अर्थात 305 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्‍य है.

          सभापति महोदया, मध्‍यप्रदेश आज केवल सं‍भावनाओं का राज्‍य नहीं है, बल्कि परिणामों का राज्‍य बनकर सरकार के साथ आगे बढ़ते हम माननीय मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में हम आगे बढ़ रहे हैं और मध्‍यप्रदेश देश में औद्योगिक क्षेत्र में नये अवसरों के लिये दुनिया को आमंत्रित कर रहा है, देश को आमंत्रित कर रहा है. एक सुखद वातावरण, ऐसा लगता है कि मध्‍यप्रदेश में एक एनवायरमेंट ऐसा बना है कि हम यहां उद्योग लगायेंगे तो यहां कि सरकार हमको सहयोग करती है और यहां के विभाग हमको सहयोग करते हैं और इस नाते से मध्‍यप्रदेश एक अपार संभावनाओं के साथ आगे बढ़ने वाला मध्‍यप्रदेश बन रहा है. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          डॉ. विक्रांत भूरिया( झाबुआ)- माननीय सभापति महोदया, यह जो बजट है, यह बजट बहुत बड़ा आंकड़ों का खेल है और मैं अपनी बात रखने की शुरूआत कुछ पक्तियों से करूंगा कि '' आंकड़ों के जाल में सच को छिपाया गया, विकास के नाम पर भ्रम फैलाया गया, बजट की किताब में सपने बहुत लिखे हैं, पर हक का पन्‍ना फिर फाड़ा गया'' और यह जो हक का पन्‍ना फाड़ा गया है, यह उन गरीबों का है, उन आदिवासियों का है, जिसको इस बजट में आंकड़ों के हिसाब से तो बहुत कुछ दिया गया है, पर जमीं पर कुछ नहीं मिल रहा है.

          माननीय सभापति महोदया, बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं है. इसमें प्रदेश की जो सरकार है उसकी भावनाएं छुपी होती हैं. आज पर्यावरण पर बात हो रही है तो पर्यावरण का सबसे बड़ा दुश्‍मन कौन है. पर्यावरण का अगर सबसे बड़ा दुश्‍मन है तो वह खनन है. मैं कुछ आंकड़े आपके सामने रखना चाहूंगा कि बजट भाषण में कहा गया कि हमारा मध्‍यप्रदेश चौथा खनिज संपन्‍न है और माइनिंग रेडिनेस इंडेक्‍स में पूरे देश में प्रथम है. अगस्‍त, 2025 में 56 हजार 414 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्‍ताव पास हुए. पर सवाल यह है कि यह निवेश किसने किया है,इसकी सूची क्‍या है किन शर्तों पर समझौता किया गया है. किस कीमत पर सौदा किया गया है और जो सौदा किया गया है, वह प्रदेश के 23 परसेंट आदिवासियों के दम पर सौदा हुआ है. यह जमीन किसकी है, आदिवासियों की. यह पर्यावरण किसका है? सब सबका है. सिंगरौली में जो हुआ वह हम सबने देखा. 6 लाख से ज्यादा पेड़ कट गये.  अभी तक सरकार बोल रही है कि 33 हजार पेड़ कटे हैं. परन्तु आप जमीन पर जाकर देखेंगे तो 6 लाख से ज्यादा पेड़ काटे जा चुके हैं.  वहां पर पेसा कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं.

सभापति महोदया, एक तरफ सब लोग एक पेड़ मां के नाम कहते हैं. बड़े बड़े दावे करते हैं कि एक पेड़ मां के नाम और पूरा का पूरा जंगल अदाणी के नाम, साथियों यह सिर्फ सिंगरौली की बात नहीं है. अभी आपने देखा होगा कि केन-बेतवा परियोजना में जो छतरपुर है वहां पर भी जबर्दस्त आन्दोलन चल रहा है, क्यों चल रहा है क्योंकि 25 गांवों के लोगों का न ग्राम सभा से अनुमति ली गई, न सही मापन किया गया. उचित मुआवजा क्या होगा, यह तक नहीं बताया गया. यही किस्सा कुक्षी में हुआ. वहां पर ग्राम सभाओं की बिना अनुमति के सर्वे करने पहुंच गये. यह पता होना चाहिए कि 5वीं अनुसूची के क्षेत्र में बिना ग्राम सभा के सर्वे नहीं किया जा सकता है, परन्तु क्यों बिना अनुमति के वहां सर्वे करने पहुंचे?

सभापति महोदया, अभी हमारे साथियों ने कहा कि नक्सलवाद को खत्म कर रहे हैं. कांग्रेस ने क्या किया. मैं आपको बता दूं नक्सलवाद की सबसे बड़ी कीमत किसी ने चुकाई है तो वह कांग्रेसियों ने चुकाई है. छत्तीसगढ़ में पूरी लीडरशिप खत्म कर दी. बालाघाट में क्या हुआ, यह हम नहीं जानते क्या? परन्तु आपको समझना पड़ेगा. आदमी को मारने से विचारधारा खत्म नहीं होती है. अगर विचारधारा को खत्म करना है तो आदिवासियों को सम्मान देना पड़ेगा. अगर आप सम्मान नहीं देंगे तो यह लाल सलाम बार बार आकर हम लोगों को परेशान करता रहेगा. क्या आज हम उसी विधान सभा में खड़े हैं, पिछले  साल की 9 मार्च को एक इनकाउंटर मंडला में किया गया. अपनी पीठ ठोंकी गई कि हमने नक्सली को मार दिया. बाद में पता लगा, सबसे पहले उसको मुआवजा देने सरकार पहुंच गई. हमने विधान सभा में जब यह मुद्दा उठाया तो आज श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल जी भी यहां पर बैठे हैं, हमारे श्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी जो माननीय अध्यक्ष हैं, वह भी थे और उन्होंने यह आश्वासन दिया था कि अगर यह इनकाउंटर फर्जी पाया जाएगा तो पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाएगा. आज तक जांच का क्या हुआ. आज तक उनको मुआवजा मिला क्या? आज तक उनको नौकरी मिली क्या, इस चीज का भी जवाब देना चाहिए.

सभापति महोदया, गृह विभाग का जो बजट है. 14 हजार करोड़ रुपये का है. यह हमारी सुरक्षा के लिए है न, अगर हमारे लोगों को मारा जाएगा  तो गृह विभाग का क्या मतलब रह जाएगा. सुरक्षा सबसे पहले हमारे लोगों की होना चाहिए. जो व्यक्ति को मारा गया था उसका नाम हीरेन परते बैगा था. अभी कल मंत्री जी बोल रहे थे कि चाहे बैगा हो, भारिया, सहरिया, इनके लिए जो भी करना पड़ेगा, इनके कल्याण के लिए करेंगे. आप ऐसे कल्याण करेंगे? उनको भून दिया जा रहा है. बेकसूरों को मारा जा रहा है. हम गृह विभाग की बात करते हैं तो महिलाओं और बालिकाओं की भी बात होनी चाहिए. मध्यप्रदेश में अभी तक पिछले 5 सालों में 2 लाख महिलाएं और 65 हजार मासूम बच्चियां गायब हो गईं. किसकी जवाबदारी है? उनमें से 50 हजार महिलाएं और बच्चियां आज तक नहीं मिली. क्या हाल होगा? मैं भी एक पिता हूं, मेरी भी बच्ची है. हमें भी डर लगता है कि हमारी बच्ची के साथ ऐसा कुछ न हो जाय और हमें समझना पड़ेगा यह बहुत बड़ा गिरोह मध्यप्रदेश में काम कर रहा है. हम छोटी छोटी मछलियां पकड़ते हैं परन्तु बड़ा को सरगना पकड़ा गया क्या? जिस तरह से एपस्टिन फाइल में बड़े बड़े लोग शामिल थे, मासूम का शोषण करते थे, वैसा गिरोह मध्यप्रदेश में भी काम कर  रहा है. मैं गृह मंत्री जी से निवेदन करूंगा  कि अलग से जांच एजेंसी बनाया जाय और इस पर त्वरित कार्यवाही की जाय. इसमें जो बच्चियां गायब हो रही हैं, वह सिर्फ शहरी क्षेत्रों से नहीं हो रही हैं. सबसे ज्यादा इंदौर से गायब हुईं 21 हजार से ज्यादा, उसके बाद हमारे धार में 9 हजार से ज्‍यादा हैं और यह वे आंकडे़ हैं जो रिपोर्ट होते हैं. ऐसा बड़ा आंकड़ा है, जो रिपोर्ट ही नहीं होते हैं. इसका बहुत बड़ा कारण पलायन भी है. हमारी बहनें काम करने के लिए बाहर जाती हैं क्‍योंकि मध्‍यप्रदेश में उनको रोजगार नहीं मिल पाता. उनका धड़ल्‍ले से गुजरात और बाकी जगहों पर शोषण हो रहा है. इस पर भी हमें बात रखनी चाहिए.

          सभापति महोदया, हमारे जो उच्‍च शिक्षा स्‍कूल्‍स हैं, उस पर भी मैं अपनी बात रखना चाहूंगा कि जो उच्‍च शिक्षा स्‍कूल्‍स हैं उनमें वर्ष 2022-23 में 16 लाख 11 हजार बच्‍चे पढ़ते थे. आज वह आंकड़ा घटकर 13 लाख 85 हजार हो गया है, तो 3 साल में अगर हम बजट बढ़ा रहे हैं, तो 2 लाख विद्यार्थी कम क्‍यों हुए ? क्‍या बच्‍चे पढ़ना नहीं चाहते ? बच्‍चे पढ़ना चाहते हैं, पर उनको इंफ्रॉस्‍ट्रक्‍चर और टीचर्स उपलब्‍ध करा नहीं पा रहे हैं. ऐसे बजट बढ़ाने से कुछ नहीं होगा. याद रखिए यह छात्र संख्‍या की गिरावट सरकार की प्राथमिकता की गिरावट है. युवा बढ़ना चाहता है लेकिन विश्‍वविद्यालय खाली हैं. एक बहुत बड़ा आंकड़ा मैं आप सबके सामने रखूंगा, आप ध्‍यान से सुनिएगा. आप हर बार कहते हैं कि 70 साल में क्‍या किया, मैं आपसे बोलता हॅूं कि आपने क्‍या किया ? वर्ष 2010 से अभी तक 70 हजार स्‍कूल बंद कर दिए गए हैं. वर्ष 2010 से अभी तक कुछ स्‍कूल्‍स को जीरो करकर और कुछ को मर्जर के बहाने से बंद कर दिए गए. वर्ष 2008-09 में 1 करोड़ 65 लाख विद्यार्थी इन विद्यालयों में पढ़ते थे और आज वह आंकड़ा घटकर सिर्फ 1 करोड़ रह गया है. मैं यह बताना चाहता हूँ कि बजट बढ़ा है, वर्ष 2010 में 6 हजार करोड़ इन स्‍कूलों को मिलता था, पर आज 2026 में यह 36 हजार करोड़ हो गया है, तो पैसा बढ़ रहा है पर विद्यार्थी क्‍यों कम हो रहे हैं, इसका भी जवाब देना चाहिए.

          सभापति महोदया -- विक्रांत जी, कृपया समाप्‍त करें.

          डॉ.विक्रांत भूरिया -- जी, माननीय सभापति महोदया, मैं केवल 2 बातें कहकर अपनी बात समाप्‍त करूंगा. ट्राइबल सबप्‍लॉन के बारे में कहना चाहूंगा. माननीय मंत्री जी भी मेरी बात सुनें कि मछुआ कल्‍याण विभाग है, किसान कल्‍याण विभाग है, अल्‍पसंख्‍यक पिछड़ा कल्‍याण विभाग है, अनुसूचित जाति कल्‍याण विभाग है, पर जनजाति कल्‍याण विभाग क्‍यों नहीं है ?  आपने जनजाति कार्यविभाग रखा है. क्‍या आपको आदिवासियों के कल्‍याण से कोई मतलब नहीं है ? उसको भी तो आप जनजाति कल्‍याण विभाग करिए. क्‍या आदिवासियों पर सिर्फ काम करने का आपका काम है, क्‍या उनके कल्‍याण करने का कोई काम नहीं है. इस पर संज्ञान लिया जाना चाहिए कि आदिवासी कल्‍याण विभाग जनजाति कल्‍याण विभाग क्‍यों नहीं है और पिछले 5 वर्ष में 56 हजार करोड़ विभाग के पास आए और आदिवासी उपयोजना टीएसपी में 2 लाख 60 हजार करोड़ रूपए आए, पर आज तक ट्राइबल्‍स की क्‍या हालत है. कुपोषण तो आप मिटा नहीं पाए, आप बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं.

          सभापति महोदया, यह ट्राइबल सबप्‍लॉन का पैसा नॉन डॉयवर्टेबल है, नॉन लैप्‍सेबल है, पर यह क्‍यों डॉयवर्ट हो रहा है, क्‍यों लैप्‍स हो रहा है. इंदौर की मेट्रो किन पैसों से बन रही है, यह आदिवासियों के ट्राइबल सबप्‍लॉन से बन रही है. भोपाल में जब (XX).

          सभापति महोदया -- कृपया, समाप्‍त करें.

          डॉ.विक्रांत भूरिया -- सभापति महोदय, इन आखिरी पंक्‍तियों के साथ मैं अपनी बात समाप्‍त करता हॅूं.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय ) -- सभापति महोदया, डॉ.साहब, बड़े गुस्‍से में और डांटकर बोल रहे हैं, पर अंत में जो इन्‍होंने कहा कि आदिवासी सबप्‍लॉन के पैसों से मेट्रो आ रही है, तो ऐसा नहीं है. मेट्रो के लिए तो बाकायदा लोन लिया गया है और आपने ही, इस सदन ने ही बजट में प्रस्‍ताव पारित किया है. इसलिए उसका पैसा नहीं है और जहां तक आपने प्रधानमंत्री जी वाली बात की है, मेरा ख्‍याल है कि वह बात इस रिकार्ड में आना ही नहीं चाहिए.

          डॉ.विक्रांत भूरिया -- सभापति महोदया, लैटर जारी हुआ है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- सभापति महोदया, क्‍योंकि प्रधानमंत्री जी के बारे में हम यहां पर कोई डिस्‍कस भी नहीं कर रहे हैं. इसलिए इसको जरा रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए.

          डॉ.विक्रांत भूरिया -- सभापति महोदया, मैं उनकी सभा के बारे में बात कर रहा हॅूं. उसके लिए बाकायदा विभाग का लैटर जारी हुआ है. मैं उसके आधार पर कह रहा हूँ. फोरलेन सड़कें किसके पैसों से बन रही हैं, हम आदिवासियों के पैसों से बन रही है, पर मैं अपनी बात को समाप्‍त करूंगा कि प्रदेश में एयर एम्‍बुलेंस तो हैं. जमीन पर एम्बूलेंस नहीं दिखती. बजट में 4 लाख 70 हजार करोड़ तो है, पर किसानों की जेब आज भी खाली है. महिलाओं के सम्मान में बात तो की जाती है, लेकिन उनकी सुरक्षा की गारंटी नहीं ला जाती. फॉरेस्ट राईट टेग फाइलों में तो है, लेकिन जमीन पर पट्टे नहीं मिलते, पैसा कानून तो है, पर ग्राम सभाओं को कोई अधिकार नहीं दिया जाता, टीएसपी का बजट तो आता है, पर आदिवासियों की जेब में नहीं जाता, अस्पताल का बजट बढ़ा दिया, पर बच्चों को आज भी चूहे कुतर रहे हैं, ब्लड बैंक की संख्या बढ़ी है, पर आज संक्रमित एचआईव्ही ब्लड चढ़ाया जा रहा है, मेडिकल स्टोर तो बढ़ाये जा रहे हैं, पर आज भी नकली सीरप से हमारे लोग मर रहे हैं. नेतागण शर्ट उतारकर प्रदर्शन करें, उस पर आपत्ति है, पर पीने का गंदा पानी मिलाकर अगर कोई मर जाये, तो उस पर आपत्ति नहीं है. सरकार के मंत्रियों का नाम ऐस्टिंग फाईल में आता है, पर इस्तीफा देने के लिये कोई नैतिकता से तैयार नहीं होता है. तो साथियों बात साफ है कि आज मध्यप्रदेश को काम की जरूरत है. अभिनन्दन बंद करों काम का आत्मचिन्तन शुरू करों. बहुत बहुत धन्यवाद.

          डॉ. अभिलाष पाण्डेय (जबलपुर उत्तर)सभापति महोदया, मध्यप्रदेश में डॉ.मोहन यादव जी की सरकार है और जिस तरह से इस सरकार में एक विकास का बजट मध्यप्रदेश के सामने आया है. यह मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास का यह बजट है. मध्यप्रदेश की सरकार इस विकास के मॉडल पर काम कर रही है. हम हमेशा विकास को कहते हैं मल्टी डायमेंशनल विकास होना चाहिये. इस बजट के अंदर जो बातें देखते हैं उस बजट के अंतर्गत मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास की परिकल्पना को साकार करने का काम मध्यप्रदेश की मोहन यादव जी की सरकार कर रही है. लोकतंत्र में हमने यह बात सुनी है कि लोकतंत्र के अंदर जवाबदेही भी स्थापित होनी चाहिेये. जो वायदे हमने जनता से किये हैं, वह वायदे जनता के पूरे करने चाहिये. क्योंकि भारतीय जनता पार्टी की सरकार मध्यप्रदेश में वायदों के साथ नहीं इरादों के साथ मध्यप्रदेश की धरती पर आयी है. इसलिये निरंतर विकास की गाथा लिखी जा रही है. अभी हमारे पूर्व वक्ता अपने अपने विषय पर बोल रहे थे. मैं इस बात को स्पष्ट कर दूं कि जिस जाति वर्ग समाज की यह बात कर रहे हैं. मैं यह मानता हूं कि इस बजट के अंदर हर जाति वर्ग समाज के उत्थान की उनके सृजन की, उनके निर्माण की परिकल्पना को साकार किया गया है. उद्योग की दृष्टि से 3760 करोड़ का जो बजट मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास की तरफ आगे बढ़ता है. मैं आज के इस अवसर पर धन्यवाद देना चाहता हूं मध्यप्रदेश के जननायक मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी को जिन्होंने औद्योगिक विकास की परिकल्पना को साकार किया और पूरा 2025 मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास वर्ष के रूप में जो लेकर आये और मध्यप्रदेश के अंदर जिस प्रकार की विकास की परिकल्पना को साकार किया गया उसके अंतर्गत रीजनल इंडस्ट्रीयल कानक्लेव का कांसेप्ट माननीय मुख्यमंत्र जी लेकर आये हैं. मध्यप्रदेश का सर्वांगीण विकास तभी संभव हो सकता है, जब मध्यप्रदेश में आने वाले चाहे इन्दौर संभाग के अंदर झाबुआ, अलीराजपुर, खरगोन, बड़वानी, खण्डवा, बुरहानपुर उनका विकास यदि संभव हो, वहीं चंबल के अंदर यदि भिण्ड, मुरैना, ग्वालियर, अशोकनगर, दतिया का विकास संभव होगा. इसी तरह से यदि शहडोल की बात करें तो शहडोल के अंदर अनूपपुर, उमरिया, शहडोल, रीवा, सीधी, और सतना का विकास होगा. बुंदेलखंड की अगर बात करें तो पन्ना, दमोह, सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी और छतरपुर का विकास होगा, जबलपुर संभाग की बात करें तो मंडल, डिंडौरी, सवनी, छिन्दवाड़ा, बालाघाट, नरसिंहपुर और कटनी का विकास होगा. इस विकास के मॉडल को लेकर आदरणीय मोहन यादव जी विकास के मॉडल पर काम कर रहे हैं. जिस तरह से विकास की परिकल्पना को साकार किया गया है. जो रीजनल इंडस्ट्रीयल कानक्लेव है जब मध्यप्रदेश में रॉ मटेरियल को लेकर जब हम विचार करते हैं तो मध्यप्रदेश का विकास सर्वांगीण विकास तब होगा हर क्षेत्र का विकास होगा. आज के इस अवसर पर यह कहते हुए बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं कि 1 लाख 43 हजार 920 लाख करोड़ रुपए का इन्‍वेस्‍टमेंट, जो प्रस्‍तावित है, जो रीजनल इंडस्ट्रियल कॉनक्‍लेव के माध्‍यम से आया है, इसके साथ साथ हमारी परिकल्‍पना है कि मध्‍प्रदेश सिर्फ प्रोडक्‍शन का हब न बने, प्रोसेसिंग का भी हब बनना चाहिए, जिससे मध्‍यप्रदेश के निर्यात की संभावनाएं आगे बढ़ सके. इसके साथ साथ अन्‍य राज्‍यों में, मध्‍यप्रदेश का जो रीजनल इंडस्ट्रियल कॉनक्‍लेव है. आप ये सोचिए आज के इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री जी के विजन को कि भारत के अन्‍य राज्‍य भी रीजनल इंडस्ट्रियल कॉनक्‍लेव को अपनी तरफ एडाप्‍ट कर रहे हैं और अपने प्रदेश के सर्वांगीण विकास की परिकल्‍पना इस आधार पर रखने का प्रयास कर रहे हैं कि हर क्षेत्र के अंदर जिस प्रकार के विकास की परिकल्‍पना चल रही है, वह मध्‍यप्रदेश से लोग सीख रहे हैं, तो कुल मिलाकर मध्‍यप्रदेश का अनुकरण करने वाला भी मध्‍यप्रदेश देश का ऐसा राज्‍य है कि देश के अन्‍य राज्‍य भी उसका अनुकरण करते हैं, ये उपलब्धि है, डॉ. मोहन यादव जी की. इसके साथ साथ निवेश प्रस्‍ताव रीजनल इंडस्ट्रियल कॉनक्‍लेव के माध्‍यम से 2.3 लाख करोड़ रुपए का निवेश हुआ है, जिसमें 2.74 लाख रोजगार के भी सृजन करने की बात कही है. हम नौजवान है और नौजवान विधायक के रूप से काम करते हैं और इसके साथ साथ मध्‍यप्रदेश का नौजवान भी  रोजगार की तरफ देख रहा है. मुझे ध्‍यान आता है वर्ष 2003 के पहले का समय जब मध्‍यप्रदेश की ज्ञान संपदा और खनिज संपदा दोनों का पलायन होता था, बगल के राज्‍यों में लोग रोजगार के लिए जाते थे, रोजगार सृजन की संभावना कहीं दिखाई नहीं देती थी, लेकिन रोजगार के सृजन की संभावना किसी पर दिखाई देती है, तो वह सरकार है भाजपा की सरकार, जो देश में नरेन्‍द्र मोदी जी के नेतृत्‍व में और मध्‍यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में चल रही है. इसके साथ साथ विकास की बहुत सारी संभावनाएं हैं.

          सभापति महोदया, हम धरातल पर जितनी जीआईएस और बाकी की रीजनल कॉन्‍क्‍लेव हुई है, उसमें हमने 28 प्रतिशत धरातल पर उतारने का, ये कोई आंकड़ेबाजी की बात नहीं कर रहा हूं, यथार्थ के धरातल पर उतारने का काम मध्‍यप्रदेश सरकार ने किया है. इसके साथ साथ जो ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स सबमिट हुई है, अभी आदरणीय सबनानी जी कह रहे थे, 65 ऐसे देशों को शामिल किया गया, उसमें से नए कई प्रकार के उद्योगों के लिए एमओयू साइन करके मध्‍यप्रदेश में विकास की परिकल्‍पना को साकार करने का काम सरकार कर रही है. पी.एम. मित्र पार्क अपने आपमें एक बड़ा उदाहरण है, पी.एम. मित्र पार्क के माध्‍यम से जिन आदिवासी और जनजाति जिलों की हम बात करते हैं, धार के अंदर बदनावर में पी.एम. मित्र पार्क बनाकर देश के प्रधानमंत्री ने अपने जन्‍मदिन के अवसर पर मध्‍यप्रदेश को एक बड़ी सौगात और आने वाले रोजगार के नए सृजन के नए मार्ग खोलने का काम प्रधानमंत्री जी ने किया है. इसके साथ साथ हम रेनेबेवल एनर्जी पर भी काम कर रहे हैं. आने वाला समय नवकरणीय ऊर्जा का है, इस ऊर्जा के माध्‍यम से भी मध्‍यप्रदेश के अंदर विकास की गाथा लिखी जा रही है. आने वाले समय में किस प्रकार से हम नए संसाधनों से, हम विकास की गाथा लिख सकते हैं, उस दृष्टि से 56 हजार 960 करोड़ रुपए का निवेश रेनेवेबल एनर्जी के माध्‍यम से मध्‍यप्रदेश के अंदर हो रहा है. सभापति महोदया, जब हम इस विकास के मॉडल की बात करते हैं, तो मुझे ध्‍यान आता है कि चाणक्‍य एक बात कहते थे कि, सुख का मूल धर्म है, धर्म का मूल अर्थ है और अर्थ का मूल राज्‍य है. जिस प्रकार से मध्‍यप्रदेश के नौजवानों के अंदर निराशा का भा भाव था, लेकिन नौजवानों को इस भाव से ऊपर उठाने के लिए मुझे एक बात ध्‍यान आती है, सुन्‍दरकांड में एक उल्‍लेख आता है कि, - जब भगवान हनुमान जी समुद्र के किनारे अपने दोनों पैरों के बीच में जब अपना सिर रखकर विचार कर रहे थे, तब जामवंत आए और हनुमान जी से कहा कि :

 

          राम काज लगि, तब अवतारा

        सुनितहीं भयऊ, पर्वताकारा

जब उन्‍होंने इस बात को कहा, तब हनुमान जी उठकर खड़े हुए और पर्वत के आकार के हो गए. ये उसी परिकल्‍पना को साकार करता है. कि वर्ष 2003 के पहले का बजट 23 हजार करोड़ आता है और वर्ष 2026 का बजट 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपए का आता है. ये पर्वताकार मध्‍यप्रदेश विकास की गाथा लिखने का काम मध्‍यप्रदेश सरकार कर रही है. इस विकास के मॉडल पर हम काम करते हैं, इसके साथ साथ जब मध्‍यप्रदेश को बीमारू राज्‍य कहा जाता था, विचार करिए वर्ष 2003 के पहले बीमारू राज्‍य के रूप में बिहार, राजस्‍थान, उड़ीसा, मध्‍यप्रदेश इन राज्‍यों को और उत्‍तरप्रदेश को बीमारू कहा जाता था, लेकिन मैं गर्व के साथ कहता हूं कि आज बीमारू राज्‍यों से ऊपर उठकर इसलिए हम बाहर आ गये हैं, क्‍योंकि पांच राज्‍यों में यदि किसी की सरकार है, तो वह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है.

          सभापति महोदया, मध्‍यप्रदेश के जननायक मुख्‍यमंत्री जी ने इस पूरे विकास की परिकल्‍पना को लेकर उन्‍होंने इस बात का संकल्‍प लिया है, उन्‍होंने इस बात को कहा और इस बात को महसूस किया है और अपने अंतर्मन में उतारने का काम किया है, "कवन सो काज कठिन जग माहीं, जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं" इसका परिणाम यह आया है कि मध्‍यप्रदेश के जननायक मुख्‍यमंत्री जब चले तो न सिर्फ मध्‍यप्रदेश के अंदर बल्कि पूरे विश्‍व में जाकर उन्‍होंने मध्‍यप्रदेश की विजय पताका को फहराने का काम किया है. मध्‍यप्रदेश में उन्‍होंने इंवेस्‍टर्स को लाने के लिये मध्‍यप्रदेश के प्रति आकर्षित किया है, अरे हम है क्‍या यह बताने के लिये आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी जब विदेशों में जाते हैं, तो विदेशों में अलग-अलग स्‍थानों पर वह गये, माननीय मुख्‍यमंत्री जी यू.के. में जब  गये तो 60 हजार करोड़ रूपये के लगभग का बारह कंपनियों का निवेश लेकर आये, जर्मनी के अंदर जब वह जाते हैं, तब 13 कंपनियों के अंदर 18 हजार करोड़ रूपये की संभावनाएं दिखाई देती हैं, यू.ए.ई. के अंदर दुबई के अंदर जाते हैं, स्‍पेन के अंदर जाते हैं, रियल स्‍टेट की बात करते हैं, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर की बात करते हैं, ऑटो मोबाइल्‍स की बात करते हैं, इंजीनियरिंग की बात करते हैं, इसके साथ ग्रीन टैक्‍स सेक्‍टर्स की बात करते हैं. हम जिस तरह से जापान के लिये, दावोस के अंदर निवेश के लिये मुख्‍यमंत्री जी जाते हैं, मैं यही बात कहते हुए अपनी बात समाप्‍त करता हूं कि मध्‍यप्रदेश के अंदर की विकास की गाथा अगर किसी ने लिखी है, तो वह मध्‍यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने लिखी है और आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी का एक संकल्‍प है और वह अपनी जनता से हमेशा यह एक बात कहते हैं कि ''मैं हमेशा तेरे विकास का ही काम करता हूं, तुझे तो पता भी नहीं कि तुझसे ज्‍यादा मैं तुझसे प्‍यार करता हूं''

          सभापति महोदया, मैं इस बजट के लिये माननीय वित्‍तमंत्री जी, माननीय मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं. विकास की जो योजनाएं हैं, जो संपूर्ण सत्‍ता पक्ष हो, चाहे विपक्ष हो सबके विधानसभा क्षेत्र के अंदर सड़कों का विकास हो रहा है, सबके यहां अधोसंरचना का विकास हो रहा है, सबके यहां नवकरणीय ऊर्जा का विकास होगा. इन शुभकामनाओं के साथ एक बार पुन: माननीय मुख्‍यमंत्री और वित्‍तमंत्री जी को बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं देता हूं.

          श्रीमती अनुभा मुंजारे(बालाघाट) -- माननीय सभापति महोदया, मध्‍यप्रदेश  सरकार के द्वारा वर्ष 2026-27 में बजट के लिये 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ का प्रावधान किया गया है, यहां पर सत्‍ता पक्ष के द्वारा मैं लगातार सुन रही हूं, बहुत सारी बातें कहीं जा रही हैं, बहुत सारा उदाहरण प्रस्‍तुत किया जा रहा है कि प्रदेश के विकास में यह हो रहा है, वह हो रहा है, बहुत कुछ हो रहा है, ग्रामीण क्षेत्र में बहुत काम हो रहा है, आदिवासी अंचल में आदिवासियों के आगे बढ़ने की संभावनाएं यहां दिखाई जा रही हैं, महिला सशक्तिकरण पर बहुत सारी बातें हो रही हैं, मैं बहुत सारी बातें नहीं कहूंगी, सीमित समय में मैं महत्‍वपूर्ण बातें यहां सदन के सामने रखना चाहूंगी. सरकार की कथनी और करनी में बहुत अंतर है.

           माननीय सभापति महोदया, हम लोग जमीनी स्‍तर पर काम करते हैं, ग्रामीण क्षेत्र में हम काम करते हैं. मेरा विधानसभा जो क्षेत्र है, उसमें शहर भी आता है और आधे क्षेत्र में ग्रामीण अंचल आते हैं, तो लगभग यही स्थिति पूरे प्रदेश भर में है. मेरे विधानसभा क्षेत्र में लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा के अंतर्गत शहीद भगतसिंह चिकित्‍सालय बालाघाट में 400 बिस्‍तर का अस्‍पताल है, लेकिन बड़े अफसोस की बात है कि प्रथम श्रेणी विशेषज्ञ, द्वितीय श्रेणी चिकित्‍सा अधिकारी एवं प्रशासकीय अधिकारियों के 40 पद स्‍वीकृत हैं, पर वर्तमान में स्थिति क्‍या है? जिला चिकित्‍सालय में प्रथम और द्वितीय श्रेणी के 22 डॉक्‍टर हैं, जो पूरे बालाघाट जिले की 20 लाख की जनता की सेवा कर रहे हैं, कल्‍पना की जा सकती है कि मध्‍यप्रदेश में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं किस तरह से संचालित हो रही हैं. माननीय सभापति महोदया, 18 पद वर्तमान में रिक्‍त हैं, साथ ही जिले  की वर्तमान जनसंख्‍या लगभग बीस लाख है, ऐसे में जनसंख्‍या के अनुपात में डॉक्‍टर्स के पद पूर्ण नहीं होने से बालाघाट की जनता को स्‍वास्‍थ्‍य लाभ मिल पाना बिल्‍कुल असंभव है. साथ ही अस्‍पताल स्‍टॉफ एवं वार्डवाय कर्मचारियों  की संख्‍या भी बहुत कम है जिससे मरीजों का समुचित उपचार नहीं हो पाता है. पर्याप्‍त डॉ. स्‍टॉफ एवं वार्डवाय कर्मचारियों की संख्‍या बढ़ाई जाना नितांत आवश्‍यक है. चूंकि जिला चिकित्‍सालय बालाघाट के तीन भागों में ट्रामा सेंटर, मेडिकल केजुअलटी वार्ड, डीआईसी बच्‍चा वार्ड के रूप में संचालित है. जिले वासियों को समुचित उपचार के लिये हमारा जो पड़ोसी राज्‍य है वहां गोंदिया बालाघाट से 40 किलोमीटर दूर पड़ता है. गोंदिया या पौने  दो सौ किलोमीटर नागपुर पड़ता है तो वहां उपचार के लिये जाना पड़ता है, जो बहुत ही खेद जनक और चिंताजनक है.

          माननीय सभापति महोदया, मेरे विधानसभा क्षेत्र में लालबर्रा सामुदायिक स्‍वास्‍थ केन्‍द्र में 50 विस्‍तर का अस्‍पताल संचालित है, किंतु बहुत ही अफसोस के साथ मुझे कहना पड़ता है कि लालबर्रा सामु‍दायिक स्‍वास्‍थ केन्‍द्र में सोनोग्राफी मशीन नहीं है तथा चिकित्‍सा एवं विशेषज्ञों के 8 पद स्‍वीकृत हैं अब और महत्‍वपूर्ण बात मैं कहना चाहूंगी और सदन का ध्‍यान चाहूंगी. हमारे स्‍वास्‍थ मंत्री जी नहीं हैं मैं उनसे बार-बार आग्रह कर चुकी हूं एक बार फिर कर रही हूं नहीं तो मैं कह देना चाहती हूं सदन में कि अगर मेरी मांग पूरी नहीं की जाती है तो मैं अपनी जनता के साथ आमरण अनशन पर बैठने वाली हूं क्‍योंकि यह महिलाओं के स्‍वास्‍थ का सवाल है और इससे मैं कभी समझौता नहीं करूंगी, चाहे मेरी जान ही क्‍यों न चली जाये.

          माननीय सभापति महोदय, लालबर्रा जो सामुदायिक स्‍वास्‍थ केन्‍द्र है वहां 77 ग्राम पंचायतों के नागरिक इलाज कराने आते हैं, महिलायें इलाज कराने आती हैं, सदन में 3-4 बार यह मुद्दा मैं उठा चुकी हूं, लेकिन अगर हमारी बात सदन में ही नहीं सुनी जायेगी तो हम कहां जायेंगे. हम जनता की आवाज को कैसे उठायेंगे, यह सोचने की बात है. माननीय सारे मंत्रीगणों से मेरा निवेदन है इस पर संवेदनशीलता होना चाहिये, यह राजनीति की बात नहीं है. ठीक है आप सत्‍ता में बैठे हैं, हम विपक्ष में बैठे हैं, लेकिन आप भी ढाई लाख, तीन लाख जनता से आप भी निर्वाचित होकर आये हैं हम भी ढाई, तीन लाख जनता से निर्वाचित होकर आये हैं. हमारी आवाज को अगर दवाया जायेगा तो यह समझ लीजिये कि लोकतंत्र का गला घोंटने वाली बात होगी, इस बात पर जरूर गौर करिये, यह मेरा निवेदन है.

          माननीय सभापति महोदय, 77 ग्राम पंचायतों के बीच में 50 विस्‍तरों का अस्‍पताल संचालित हो रहा है, लेकिन आप सुनेंगे तो आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे, 8 पद डॉक्‍टरों के स्‍वीकृत हैं और वहां पर डॉक्‍टर कितने हैं, मात्र एक. एक महिला डॉक्‍टर है वह भी स्‍पेशलिस्‍ट नहीं है संविदा पर है वह डॉक्‍टर सुश्री रितु धुर्वे, वह 24 घंटे काम कर रही है, यंग लड़की है, बहुत सेवा करती है, बहुत काम करती है, मैं उनकी तारीफ करूंगी यहां सदन में, लेकिन वह बार-बार मुझसे यही निवेदन करती है कि मेडम स्‍टॉफ बढ़वाईये. माननीय आप भोपाल जा रही हैं आप स्‍वास्‍थ मंत्री जी, मुख्‍यमंत्री जी से निवेदन करिये कि हमको डॉक्‍टर दें, हम कैसे इतने सारे लोगों का इलाज करेंगे और खासकर महिलाओं का. अब यह बात सोचने की है कि महिलायें महिला स्‍पेशलिस्‍ट डॉक्‍टर नहीं होने के कारण स्थिति यह होती है कि जब प्रसब की स्थिति आती है और क्रिटिकल कंडीशन होती है उस स्थिति में सामुदायिक स्‍वास्‍थ केन्‍द्र लालबर्रा से बालाघाट हमारा शहर 30 किलोमीटर पड़ता है. डॉ. रिफर कर देते हैं कि बालाघाट चले जाओ. गरीब लोग ग्रामीण जन कई बार साधन न होने के कारण मरीज की स्थिति गंभीर है तो सोचिये जच्‍चा और बच्‍चा दोनों को कितना खतरा है. कई बार मैंने सदन का इस बात पर ध्‍यान आकृष्‍ट किया है. ऐसी स्थिति में मैं खुद दो-तीन बार माननीय सभापति महोदया, मैं अपनी गाड़ी से किसी प्रसव पीडि़ता की अगर मुझे खबर आई अगर मैं आसपास के इलाके में दौरे में हूं मैं अपनी गाड़ी में लेकर गई और जिला अस्‍पताल में मैंने उनको एडमिट कराया, उनका सिजेरियन आपरेशन हुआ, यह स्थिति निर्मित हुई, यह स्‍वास्‍थ सेवायें चल रही हैं हमारे मध्‍यप्रदेश के अंदर, अपनी पीठ थपथपा लेना बहुत बड़ी बात है, लेकिन सच्‍चाई से आप लोग अवगत होईये और विश्‍वास न हो तो मेरे साथ चलिये, मैं अपने क्षेत्र में ही आपको घुमाती हूं. माननीय स्‍वास्‍थ मंत्री जी अभी नहीं हैं, लेकिन उन तक यह बात जायेगी मुझे मालूम है.

          माननीय सभापति महोदया, और  एक महत्‍वपूर्ण बात मैं कहना चाहूंगी यहां मेडिकल अस्‍पताल, मेडिकल कॉलेज की बड़ी-बड़ी बातें हो रही हैं, तीन-चार दिन से हम सुन रहे हैं. वास्‍तविकता मेरे जिले की मैं बताती हूं. दिनांक 28 जून 2023 को मध्‍यप्रदेश केबिनेट में कृपया मेरी बात पर ध्यान देंगे. दिनांक 28 जून,2023 को मध्यप्रदेश केबिनेट में 100 सीट का बालाघाट जिले में मेडिकल कालेज खोलने की अनुमति दी गई है पूर्व मुख्यमंत्री सम्माननीय शिवराज सिंह चौहान जी के द्वारा इसका विधिवत् भूमिपूजन भी किया जा चुका है किन्तु आज वर्तमान में निविदा की प्रक्रिया पूर्ण नहीं की गई है यह अत्यंत खेदनजक है. महिला चिकित्सक नहीं है मैंने अब तक सदन में बार-बार कहा है और जब तत्कालीन मुख्यमंत्री जी भूमिपूजन कर रहे हैं उसके बाद भी काम नहीं होरहा है उसके बाद भी काम नहीं हो रहा फिर कौन काम करेगा सोचने वाली बात है वह भी पीपीपी मोड में.

          सभापति महोदया - अनुभा जी स्वास्थ्य विभाग पर वैसे भी आज चर्चा नहीं है फिर भी आपकी बात आ गई है. कृपया समाप्त करें.

          श्रीमती अनुभा मुंजारे - बहुत गंभीर मुद्दे हैं. महिलाओं से जुड़ा हुआ विषय था इसीलिये मेरा बोलना जरूरी था और मैं सोचकर ही आई थी कि मैं इस बार सदन को अवगत कराऊंगी कि अगर हमको महिला चिकित्सक नहीं दी जाती लालबर्रा में तो मैं लालबर्रा में ही महिलाओं को लेकर आमरण अनशन पर बैठने वाली हूं. स्कूल शिक्षा पर दो मिनट में बोलना चाहूंगी.

          सभापति महोदया - अनुभा जी आज के जो विषय हैं उसी पर रखें ताकि आपकी बात का जवाब भी आ सके.

          श्रीमती अनुभा मुंजारे - कुछ बहुत ही महत्वपूर्ण विषय हैं आज का विषय तो मैं जानती हूं कि वन है पर्यावरण है पर स्कूल चूंकि हमारे बच्चों के भविष्य से जुड़ा होता है इसीलिये बोलना चाहूंगी. मेरे विधान सभा क्षेत्र में 2 हायर सेकेंड्री स्कूल भवन विहीन हैं मुरझर,मोहगांव और जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान,डाईट,बालाघाट शहर में. मेरे विधान सभा क्षेत्र बालाघाट के अंतर्गत 18 विद्यालयों में बाउंड्रीवाल नहीं है जिनका निर्माण कार्य किया जाना अत्यंत आवश्यक है और 34 विद्यालयों में छात्र छात्राओं के बैठने की व्यवस्था हेतु फर्नीचर पर्याप्त मात्रा में नहीं है जिस कारण बच्चे दरी,पट्टी बिछाकर बैठते हैं. 23 विद्यालयों का जीर्णोद्धार व अतिरिक्त कक्ष निर्माण किया जाना अत्यंत आवश्यक है. हमारे स्कूल शिक्षा मंत्री प्रभारी मंत्री हैं बालाघाट जिले के. बहुत संवेदनशील मंत्री हैं मैं उनसे हमेशा कोई मांग करती हूं तो उनका सहयोग मिलता है मैं मंत्री महोदय को धन्यवाद देती हूं मुझे बहुत कुछ बोलना था किसानों के लिये दो लाईन बोलना चाहूंगी. मेरे विधान सभा में सिंचाई हेतु सर्राटी जलाशय,पाथरी जलाशय,मुरमनाला जलाशय और चावरपानी जलाशय मुख्य रूप से हैं लेकिन इन जलाशयों से निकलने वाली नहरों की हालत अत्यंत जर्जर हैं क्योंकि अंग्रेजों के शासनकाल में नहरें बनाई गई थीं इससे मेरे क्षेत्र के लगभग 50 ग्रामों के किसान बुरी तरह से प्रभावित होते हैं और सिंचाई की पर्याप्तता नहीं होने के कारण हमारे किसान भाईयों का अनाज का..

3.53 बजे             सभापति महोदय ( डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय ) पीठासीन हुए

..उत्पादन आशा के अनुरूप नहीं हो पाता जिससे हमारे किसान भाईयों में घोर निराशा व्याप्त होती है और उन्हें आर्थिक क्षति होती है और मैं समय की मर्यादा को समझती हूं मर्यादा का पालन अगर हम नहीं करेंगे तो हम दूसरों को क्या समझाएंगे. मैं कवि दुष्यंत की कविता की इन चार लाईनों के साथ अपनी बात समाप्त करती हूं. मेरे दिल में न सही तेरे दिल में ही सही हो कहीं भी आग लेकिन आग जलना चाहिये बढ़ गई है पीर,पर वह सीप पिघलना चाहिये फिर कोई गंगा हिमालय से निकलना चाहिये. मुझे बोलने का समय दिया धन्यवा.सादर नमन.वंदन

          सभापति महोदय- श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह               (अनुपस्थित)

            श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन (सागर) -- धन्‍यवाद माननीय सभापति महोदय. क्षमा करिएगा, ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सारी मांगों पर चर्चा एक साथ हो रही है और आज ही हो रही है. सारे विषयों को ले लिया गया है, जबकि आसंदी से यह आदेश हम सबको प्राप्‍त हुआ था कि वन एवं पर्यावरण पर फोकस करके ही बोलना है तो आप कृपया मार्गदर्शन करें कि आगे के वक्‍ताओं को किस दिशा में जाना है.

          सभापति महोदय -- आप अपनी बात शुरू करें.

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन -- माननीय सभापति महोदय, मैं वित्‍तीय वर्ष 2026-27 की अनुदानों की मांगों के मांग संख्‍या-10 वन पर अपना वक्‍तव्‍य प्रस्‍तुत करने की अनुमति चाहता हूँ. माननीय सभापति महोदय, 2-3-4 विषय हैं, उनको रखकर अपनी बात समाप्‍त करूंगा. वन एवं पर्यावरण, यह विभाग जो है, यह किसी भी देश के लिए, देश की आर्थिक उन्‍नति, देश की औद्योगिक उन्‍नति और अन्‍य सभी उन्‍नति के लिए देश के इस विभाग की अहम् और महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है.

          माननीय सभापति महोदय, आज हमें सदन को यह बताते हुए अत्‍यन्‍त प्रसन्‍नता होती है कि वनों के प्रतिशत के हिसाब से मध्‍यप्रदेश में भारतवर्ष यानि कि देश के सबसे ज्‍यादा वन हैं. इस नाते से हमारी जिम्‍मेदारी भी ज्‍यादा है और हम उस जिम्‍मेदारी का भलिभांति निर्वहन भी कर रहे हैं. मुझे यह कहते हुए अत्‍यन्‍त प्रसन्‍नता है कि सिटी फॉरेस्‍ट और जो अन्‍य वाटिकाएं हैं, जो केन्‍द्र सरकार की पहल पर, उनकी 100 प्रतिशत फंडिंग पर अनेक स्‍थानों पर हैं. शहर से लगे हुए स्‍थानों पर अगर वन हैं, फॉरेस्‍ट हैं, तो उनको सिटी फॉरेस्‍ट के रूप में डेव्‍हलप करने की व्‍यवस्‍था केन्‍द्र सरकार ने की है. मुझे बताते हुए अत्‍यन्‍त प्रसन्‍न्‍ता होती है कि प्रदेश में 94 नगर वन एवं वाटिकाओं का निर्माण अकेले मध्‍यप्रदेश में हुआ है. देश में एक नंबर पर हमारा प्रदेश है. इस दृष्‍टि से मैं यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री महोदय सम्‍माननीय डॉ. मोहन यादव जी को, जिनके पास वन विभाग का भी दायित्‍व है और माननीय वित्‍त मंत्री जी को बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूँ कि उन्‍होंने इस दिशा में उसके महत्‍व को समझते हुए काम करना शुरू किया है.

          माननीय सभापति महोदय, यहां एक बात मैं जरूर कहना चाह रहा हूँ, जो इस पूरी की पूरी योजना का स्‍याह पक्ष है. इस योजना में केन्‍द्र से पैसा आए, उस पैसे का इस्‍तेमाल करके हमने सिटी वन, नगर वन, सिटी फॉरेस्‍ट डेव्‍हलप किए हैं. बहुत सुंदर हैं. वह हमारे उस क्षेत्र के फेफड़े का काम कर रहे हैं. लंग्‍स के रूप में काम कर रहे हैं. हमें स्‍वच्‍छ वायु मिल रही है. वह हमारे ऑक्‍सीजन बैंक के रूप में काम कर रहे हैं. लेकिन माननीय सभापति महोदय, उनके मेंटेनेंस के लिए कहीं कोई किसी बजट का प्रावधान न केन्‍द्र सरकार ने अपने बजट में रखा है, न राज्‍य सरकार ने अपने बजट में रखा है. परिणति यह हुई है कि वे पौधे और वह निर्माण, जो किया गया है, लेकिन पानी के अभाव में, मेंटेनेंस के अभाव में वे दुर्गति को प्राप्‍त हो रहे हैं. माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय वित्‍त मंत्री जी से और माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूँ कि सिटी फॉरेस्‍ट बहुत महत्‍वपूर्ण संरचना है, उन संरचनाओं के मेंटेनेंस के लिए, उनके रखरखाव के लिए कोई न कोई राशि का प्रावधान बजट में अवश्‍य करना चाहिए ताकि वे जो हमारी संरचनाएं हैं, वे जीवित अवस्‍था में बनी रहें.

          माननीय सभापति महोदय, ऐसे ही हमने मध्‍यप्रदेश सरकार के माध्‍यम से दो जू (चिड़ियाघर) इस मध्‍यप्रदेश के अंदर स्‍थापित करने की दिशा में प्रपोजल सब्‍मिट किए थे. एक रायसेन का था और एक हमारी विधान सभा क्षेत्र सागर का था. सभापति महोदय, मुझे यह कहते हुए अत्‍यन्‍त प्रसन्‍नता है कि हमारे उन दोनों प्रपोजलों को नेशनल जू अथॉरिटी ने स्‍वीकृति प्रदान कर दी है और एप्रूअल दे दिया है, लेकिन जब बजट का विषय आया तो वहां हमारे प्रपोजल आकर अटक गए. अब बजट के मामले में केन्‍द्र सरकार का यह कहना है कि वह बजट राज्‍य सरकार के बजट से आएगा. अब राज्‍य सरकार के पास कैम्‍पा का बहुत बड़ा बजट है. जितना बजट हमारे मध्‍यप्रदेश सरकार का है, उसका लगभग चौथाई से भी अधिक बजट अकेले कैम्‍पा का है, एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि हमारे कैम्‍पा में है, उस पर हमारा अधिकार है. लेकिन हम उसको खर्च नहीं कर पा रहे हैं. माननीय सभापति महोदय, मैं आज सदन के माध्‍यम से, आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूँ कि 'जू' केवल हमारे लिए चिडि़याघर नहीं है, यह हमारे रेस्‍क्‍यू ऑपरेशन के एक बड़े हिस्‍से के रूप में होंगे और साथ में एजुकेशनल प्‍वाइंट ऑफ व्‍यू के हिसाब से बच्‍चों को भी शिक्षित करने की दिशा में बहुत महत्‍वपूर्ण कदम होगा. 

          माननीय सभापति महोदय, मध्‍यप्रदेश इस देश में सबसे ज्‍यादा तेंदूपत्‍ता उत्‍पादन करने वाला प्रदेश है. मुझे यह कहते हुए अत्‍यन्‍त प्रसन्‍नता है कि मध्‍यप्रदेश में इस पूरे के पूरे देश का, अगर हम अनडिवाइडेड मध्‍यप्रदेश की बात करें, तो छत्‍तीसगढ़ और मध्‍यप्रदेश दोनों को मिलाकर 50 प्रतिशत तेंदूपत्‍ता पूरे भारतवर्ष और विेदेश को इम्‍पोर्ट कर रहा है. लेकिन बीड़ी बनाने के मामले में अगर देखें तो वह स्थिति अच्‍छी नहीं है. एक जमाना था कि जब अकेले मध्‍यप्रदेश के अन्‍दर प्रतिदिन 60 करोड़ बीडि़यां रोज बनती थीं, आज बमुश्किल 5 करोड़ से 10 करोड़ बीडि़यां हमारे मध्‍यप्रदेश में बन रही हैं. एक प्रदेश पश्चिम बंगाल है, जिसके पास रॉ मटेरियल के नाम पर न तेंदूपत्‍ता है, न तम्‍बाकू है और न ही कुछ है, वहां पर यह रिवर्स स्थिति बन गई है. वहां पर 60 करोड़ से 80 करोड़ बीडि़यां प्रतिदिन बन रही हैं. उसका इस्‍तेमाल कौन कर रहा है ? उससे रोजगार किसको मिल रहे हैं ? बंगलादेश से आए हुए घुसपैठियों को, रोहिंग्‍याओं को रोजगार मिल रहा है और वह उसका इस्‍तेमाल करके अपनी बेरोजगारी दूर कर रहे हैं, और न केवल बेरोजगारी दूर कर रहे हैं बल्कि सक्षम बन रहे हैं. हमारे यहां के बेरोजगार जिनको रोजगार प्राप्‍त था, उनके हाथ से महत्‍वपूर्ण रोजगार छिन गए हैं. इस संबंध में माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय जी ने इस विषय का स्‍वयं संज्ञान लिया था, अनेक बैठकें कीं, लेकिन अभी तक कोई निर्णय पर नहीं आया है. मेरा आपके माध्‍यम से यह निवेदन है कि जिस तेंदूपत्‍ते से मध्‍यप्रदेश के अन्‍दर बीड़ी बनाई जाये, उस बीड़ी पर कोई न कोई इंसेंटिव जरूर देना चाहिए. हम इण्‍डस्ट्रियल कॉनक्‍लेव कर रहे हैं, हम बहुत सारी ग्‍लोबल समिट कर रहे हैं. हम विदेश जा रहे हैं, हम क्‍यों विेदेश जा रहे हैं ? हम इन्‍वेस्‍टर्स और इन्‍वेस्‍टमेंट के लिए जा रहे हैं. ऐसे समय में जब स्‍वयं इन्‍वेस्‍टमेंट यहां पर विद्यमान है, यहां स्किल लेबल विद्यमान हैं और रोजगार के अभाव में लेबर पलायन कर रहे हैं. ऐसे में क्‍या यह उचित नहीं होगा कि हमें स्‍वयं ऐसे उद्योपतियों को इन्‍सेंटिव देने का काम करना चाहिए ? जो मध्‍यप्रदेश में तेंदूपत्‍ते से बीड़ी बनाने का काम करें. मैं आपसे इस बात के लिए भी निवेदन करता हूँ.

          डॉ. रामकिशोर दोगने - माननीय सभापति जी, यह सरकार की स्थिति बता रहे हैं. सरकार को समझना चाहिए कि विदेशों में पर्यटन की बजाय, मध्‍यप्रदेश में ही ढूँढ़ना चाहिए.

          सभापति महोदय - आप बैठ जाइये. शैलेन्‍द्र जी, आप अपनी बात जारी रखें.

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन - सभापति महोदय, सांस्‍कृतिक वन की अवधारणा मूलत: गुजरात की है. जिसे मध्‍यप्रदेश ने अंगीकार किया है और उज्‍जैन, सतना, छतरपुर, भोपाल और अन्‍य स्‍थानों पर सांस्‍कृतिक वन स्‍थापित करने की दिशा में हम काम कर रहे हैं. जैसे राशि वन, नक्षत्र वन, तीर्थंकर वन एवं नवग्रह वन, जो तमाम वन हैं, वह हमारी दैनन्दिनी आवश्‍यकताओं की पूर्ति करेंगे और हमारे सांस्‍कृतिक महत्‍व को पुष्‍ट करने का काम वन करेंगे. मैं मध्‍यप्रदेश सरकार को, इन सांस्‍कृतिक वनों के लिए बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूँ.

          सभापति महोदय, चीता प्रोजेक्‍ट हमारे मध्‍यप्रदेश के लिये बहुत ही  गौरवान्वित करने वाला प्रोजेक्‍ट था और हम इस देश के अन्‍दर प्रथम राज्‍य बन गए जिस राज्‍य में कूनो-पालपुर के बाद, गांधी सागर में 3 चीते छोड़े जा चुके हैं और तीसरे नंबर पर हमारी विधान सभा से लगा हुआ क्षेत्र, सागर जिले के अंदर नौरादेही अभ्‍यारण अर्थात् वीरांगन रानी दुर्गावती अभ्‍यारण में चीते आने की बांट जोह रहे हैं. सरकार ने सारी व्‍यवस्‍थायें कर ली हैं, मुझे हर्ष है कि टाइगर रिज़र्व के रूप में हम पहले ही मान्‍यता प्राप्‍त कर चुके हैं, ऐसे में टाइगर के साथ चीते भी वहां होंगे तो पर्यटन के क्षेत्र में यह एक अभूतपूर्व कार्य होगा, इसके लिए मैं सरकार को बधाई देता हूं.

          सभापति महोदय, हम टाइगर स्‍टेट, चीता स्‍टेट, लेपर्ड (तेंदुआ) स्‍टेट, घडि़याल स्‍टेट, गिद्ध स्‍टेट भी हैं, ये तमाम तमगे हमें मिले हुए हैं, ये हमारी उपलब्धियां हैं.

          श्री लखन घनघोरिया-  50 से ज्‍यादा तो मर गए.

          सभापति महोदय-  लखन भाई आप बैठें. जैन जी आप शीघ्र समाप्‍त करें, समय की मर्यादा है.

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन-  सभापति महोदय, मैं, सरकार को इसके लिए बधाई देता हूं. हमारी वन समितियां इन सभी योजनाओं का आधार है. हमारे प्रदेश में 15608 वन समितियां हैं और यह प्रसन्‍नता का विषय है कि अन्‍य राज्‍यों की तुलना में लगभग प्रतिवर्ष रुपये 2 सौ करोड़ उन समितियों को देकर, उन्‍हें सुदृढ़ करने का कार्य किया गया है. इस बात के लिए मैं, माननीय मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहूंगा. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया इसके लिए धन्‍यवाद, अंत में एक शेर पढ़ देता हूं-

"उग रहा है दर-ओ-दीवार पर सब्‍ज़ा गालिब,

हम बयाबां में हैं और घर में बहार आई है."

         

          सभापति महोदय-  मेरा सभी माननीय सदस्‍यों से निवेदन है कि कार्य मंत्रणा समिति में प्रस्‍तुत की गई अनुदान की मांगों पर 2 घंटे का समय दिया गया था जो कि लगभग पूरा हो चुका है. अत: मेरा सदस्‍यों से अनुरोध है कि अपनी बात समिति समय में पूरी करें क्‍योंकि इसके बाद मंत्री जी का जवाब भी आना है. अब सभी सदस्‍य केवल 5-5 मिनट में अपनी बात पूरी करें.

          श्रीमती झूमा डॉ.ध्‍यानसिंह सोलंकी (भीकनगांव)-  सभापति महोदय, धन्‍यवाद. आज के बजट की मांग संख्‍या जो कि कार्यसूची में सम्मिलित है, मैं, उसी पर अपनी बात रखूंगी और समय-सीमा में अपनी बात समाप्‍त भी करूंगी. वन-ग्राम, वन-विभाग के अंतर्गत मेरी विधान सभा में लंबा क्षेत्र है और मुझे पता है वहां कितनी अनियमिततायें होती हैं. वन-ग्राम में अधिकतम 99 प्रतिशत आदिवासी समाज ही रहता है और पिछली बार मुख्‍यमंत्री जी ने मानसून सत्र, 2025 में स्‍पष्‍ट रूप से कहा था कि दावों के निस्‍तारण के लिए दिसंबर से सैटेलाईट के सर्वे के आधार पर सत्‍यापन शुरू करेंगे और जितने पट्टे शेष हैं, उन्‍हें दिये जायेंगे. किंतु इसका आज भी इसका काम शुरू नहीं हुआ है और न ही किसी के पट्टे बनाये गए हैं. ये वादे पूरे हों क्‍योंकि दावों को खारिज़ करने में मध्‍यप्रदेश पूरे देश में दूसरे स्‍थान पर है.

          सभापति महोदय, मैं, बहुत बड़ी बात न कहते हुए केवल मेरी विधान सभा की बात करूंगी. वहां कम से कम 8000 पट्टों को निरस्‍त किया गया है. आज भी आदिवासी समाज के लोग जो वहां वर्ष 2006 के पहले से काबिज़ हैं, वे आज भी इंतजार में बैठे हैं कि कब उनके पट्टे बनाये जायेंगे, इन्‍हें बनाया जाए. वन ग्राम को राजस्‍व ग्राम बनाने की योजना भी सरकार ने ही लागू की किंतु धरातल पर देखें दोनों विभागों ने सर्वे शुरू किया, वन ग्राम और राजस्‍व ग्राम ने किंतु हुआ क्‍या है कि सिर्फ ग्राम को ही राजस्‍व घोषित करने की योजना है ऐसा वह कहते हैं और उन्‍हीं को प्राथमिकता से ले रहे हैं. किंतु ग्राम में आने वाली जमीन को भी तो उसमें शामिल किया जाए तो यह एक जो बड़ा रकबा छूटा हुआ है. गांव के लोग असमंजस में हैं कि यह कर रहे हैं कि नहीं कर रहे हैं इस बात को भी स्‍पष्‍ट होना चाहिए और पूरी ग्राम पंचायत को इसमें लें यह मेरी मांग रहेगी.

          सभापति महोदय, वन विभाग का काम सिर्फ पेड़ पौधों को बचाना ही नहीं है नर्सरी भी लगाना है किंतु जलते हुए पेड़ इन्‍हें नजर क्‍यों नहीं आते हैं. अभी मैं कल आ रही थी तो रास्‍ते में देखा कि पेड़, पौधे जल रहे हैं. एक तरफ तो हम बचाने की बात कर रहे हैं, पर्यावरण सुधारने की बात कर रहे हैं और धुआं उठते हुए दिखता तो हम सब आमजनों को दिखता है. परंतु इन पेड़ों को बचाने का काम इस विभाग को देखना चाहिए कि जो जंगल बना है उसको बचाएं तो सही. जलते हुए पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती है.

          सभापति महोदय, टाइगर रिजर्व के नाम पर मध्‍यप्रदेश के वन ग्रामों की जमीनों को अधिग्रहण करने की भी योजना है और कई जगह तो बोर्ड भी लगे हैं अभ्‍यारण्‍य के नाम पर सिंगरौली की कहें या फिर हमारे सतपुड़ा के घने पहाड़ों को कहें तो यह नियम विरुद्ध आदिवासी समाज को विस्‍थापित नहीं किया जाए एक असमंजस वह भी फैला हुआ है कि यह जमीन आपकी जा रही है तो विभाग और शासन यह भी स्‍पष्‍ट करे कि यह जमीन पौधारोपण के लिए है या बसाहट के लिए है ताकि मन में जो एक असमंजस है वह खत्‍म हो. यह वन विभाग को करना चाहिए और चूंकि हमारा वहां रात दिन काम पड़ता है इसलिए हम इन सारी समस्‍याओं का सामना करते हैं. इनका समाधान होना चाहिए.

          सभापति महोदय, कार्यसूची में एनवीडीए विभाग भी है. मैं पूरी भाजपा की सरकार को बधाई देती हूं कि वह कृषक कल्‍याण वर्ष लाए हैं किंतु मेरी विधान सभा क्षेत्र के पहाड़ी अंचल के 34 गांव जो आज भी एक-एक बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं. वहां का पूरा क्षेत्र सूखा है. जिसमें सूखे क्षेत्र में सबसे ज्‍यादा हेलापड़ावा, धूपी खुर्द, झूमकी, भापसी, बिलावेड़, बिलखेद, तितरान्‍या, मांडवाभट्टी, पाडल्या, हरणकुंडीया, सिंदवाडी, पलोना, बोरवाल, कुड़ी, काकोड़ा, खारिया, मलगांव, कोठां, बुजुर्ग, खड्क्‍या नदी, सुलाबेड़ी, रुंदा, बुंदा, सेमलकुट, मेंडांगढ़, मुंडिया, पीठीजामली, गुवाडा, कोटबेडा, गाडग्‍याम, मेहत्‍यारवेड़ी, छेंडियाआंजन, घूपा बु. ऐसे 34 गांव जहां न कोई सिंचाई के साधन हैं. हमारे जल संसाधन मंत्री यहां पर उपस्थित हैं. मैंने उनसे भी बहुत बार आग्रह किया है कि कम से कम वह एक दो तालाब तो बना दें. उसी से सिंचाई कर लेंगे. यदि वास्‍तव में सार्थक बात करनी है, किसानों के कल्‍याण की बात करनी है तो फिर उनको पानी देने की आवश्‍यकता है. एक नवीन परियोजना बनाई जाए जिसमें इन गांवों को शामिल करके पानी दिया जाए, चाहे बुरहानपुर, जिले में जो तात्‍पी नदी है उसका पानी दें या सुक्‍ता डेम एक बड़ा तालाब है उससे बनाकर दे सकते हैं क्‍योंकि नर्मदा जी का पानी हम काफी उपयोग में ले चुके हैं.

          सभापति महोदय, मेरी विधान सभा भीकनगांव की दूसरी तहसील भीकनगांव जहां पर बिंजलवाड़ा योजना के नाम से सिंचाई योजना चल रही है किंतु एक पुनासला गांव है और आसपास के दो, तीन गांव और हैं वहां की कम से कम 250 हेक्‍टेयर जमीन छूट गई है. जो लापरवाही की वजह से छूटी है या जो भी है तो उसकी भी एक डीपीआर बनाकर उसमें शामिल कर दिया जाए ताकि आने वाले दिनों में उतने किसान काफी परेशान हो रहे हैं तो उनकी भी तकलीफ दूर हो जाए. बिंजलवाड़ा योजना वर्ष 2023 में पूर्ण होना थी आज तक उसका काम इतनी धीमी गति से चल रहा है कि इस बार हमने नदी नालों में छुड़वाया किेंतु खेतों में पानी कभी भी नहीं पहुंचा है. नदी नालों के माध्‍यम से सिंचाई के लिए पाइपलाइन से ले जा रहे हैं किंतु योजना खेतों के लिए अभी तैयार नहीं हुई है. यह जल्‍दी तैयार हों क्‍योंकि किसान जो है.

          श्री सचिन विरला-- हम विकास कर रहे हैं. 

          सभापति महोदय-- कृपया व्‍यवधान न करें. बैठ जाइये. वैसे ही समय की कमी है.

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्‍यान सिंह सोलंकी-- यह गांव आप की ही विधान सभा क्षेत्र का गांव है और आप हमेशा चुप बैठते हैं आपको बोलना चाहिए. यह वर्ष 2023 में पूर्ण होना था वर्ष 2026 आ गया है. यह विंजलवाड़ा गांव इनकी विधान सभा क्षेत्र का गांव है इन्‍हीं की सीमा के भीतर है  काम मेरी विधान सभा में हो रहा है. इनके 12 गांव हैं जिनकी लड़ाई यह लड़ते हैं लेकिन वह लड़ाई भी इनकी कभी पूरी नहीं होती है. उधर जाकर भी यह लड़ाई पूरी नहीं कर पा रहे हैं.

          श्री सचिन बिरला -- विकास कर रहे हैं.

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकी -- सभापति महोदय, यह बिंजलवाड़ा योजना हमारी बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है इससे किसानों के खेतों में पानी जाएगा. वे बहुत मेहनत करते हैं, यहां मिर्ची का भी खूब उत्पादन होता है. अन्य फसलें भी होती हैं लेकिन पानी के अभाव में बहुत परेशानी होती है. इस योजना का काम जल्द पूर्ण हो.

          सभापति महोदय, गृह विभाग पर भी मैं अपनी बात रखूंगी. सबसे बड़ी चिंता की बात महिलाओं और बालिकाओं की गुमशुदगी है. वर्ष 2020 से 2026 तक महिलाओं और बालिकाओं की गुमशुदगी की संख्या लगातार बढ़ रही है. यह चिंता का विषय है. यदि पूरे मध्यप्रदेश की बात करें तो बहुत बड़ा आंकड़ा है. मैं सिर्फ मेरे खरगोन जिले की ही बात करूं तो वर्ष 2024 से 2026 तक 5841 महिलाएं और 1893 बालिकाएं लापता हुई हैं. कुछ महिलाओं और बालिकाओं को वापस लाने में सफलता भी मिली है. सभी महिलाएं और बालिकाएं वापस आना चाहिए. यह महाराष्ट्र की सीमा है. सीमा के पार जो पलायन करके चले जाते हैं वे भी वापिस नहीं आते हैं. यह भी एक समस्या है, मैं चाहती हूं कि इसका समाधान हो. जो बड़ी और अन्तर्राष्ट्रीय घटनाएँ हैं उससे हमारी चिंता बढ़ती है. मेरा विधान सभा क्षेत्र हाई-वे से और खण्डवा जिले से लगा हुआ है. वहां पर दोरबा में स्थायी रुप से एक चौकी बनाई जाए, उस चौकी का भवन भी हो. एक बड़नाला में भी चौकी बनाई जाए. खेलापड़ा में चौकी है इसका उन्नयन करके इसे थाना बनाया जाए. मैं मेरी तरफ से यह मांग करती हूँ. मैं चूंकि आसंदी पर बैठती हूं तो मुझे समय की सीमा का भान है, मैं चाहती हूँ कि सभी को बोलने का अवसर मिले, सभी की आशा रहती है इसलिए मैं मेरी बात यहीं पर समाप्त करती हूँ. आपने मुझे बोलने का वक्त दिया, इसके लिए धन्यवाद.

 

          श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह (पन्ना) -- माननीय सभापति महोदय, मैं खनिज संसाधन विभाग व वन विभाग की मांगों के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं.

          सभापति महोदय, आप जानते हैं कि खनिज संसाधनों के मामले में मध्यप्रदेश भरपूर है. देश में चौथा स्थान खनिज में हमारा आ रहा है. राजस्व में भी निरन्तर बढ़ोत्तरी होती जा रही है. जो खनिज का उत्पादन है वह चाहे कोयला हो, चूना पत्थर हो, कॉपर, मैग्नीज, आयरन या बॉक्साइड हो इनकी उपलब्धता पूरे मध्यप्रदेश में हो रही है. हीरा में तो हमारा एकाधिकार है. यह बड़े गौरव की बात है कि माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में इसे जीआई टेगिंग भी मिला है. यह भी मेरा सौभाग्य है कि मैं पन्ना जिले से आता हूँ और हीरा मेरे ही जिले में हो रहा है. इसलिए मैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस करता हूँ. कॉपर में हम पहले स्थान पर हैं. यदि मैग्नीज, रॉक फास्फेट और चूना पत्थर में हमारा प्रदेश दूसरे स्थान पर है. कोयला के उत्पादन में हम चौथे स्थान पर हैं. ऑयरन और बाक्साइड में हम छठवें स्थान पर हैं. राजस्व प्राप्ति यदि वर्ष 2022 में देखें तो 7 हजार करोड़ रुपए थी जो अब बढ़कर 10 हजार करोड़ रुपए पहुंच गयी है. अभी जनवरी तक जो प्राप्तियां हुई हैं वो लगभग 8 हजार करोड़ रुपए की हुई हैं. हमारी 5017 खदानें संचालित हो रही हैं. आज यदि मिनरल एक्सप्लोरेशन को देखा जाए तो इसमें भी हमारा प्रदेश राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण के माध्यम से 26 एक्सप्लोरेशन के काम कर रहा है. जिसमें लाइम स्टोन है, डायमंड भी है, बाक्साइड भी है, ग्रेफाइट भी है, आयरन है, फास्फोसाइड है, ग्लोकोनाइट है, टंग्सटन, कॉपर, मैग्नीज, गोल्ड भी है. आज हम यह भी देख रहे हैं कि हमारे यहां पर डायमंड तो मिल ही रहा है इसके साथ-साथ हमें गोल्‍ड की भी माइंस मिल रही हैं. आज सिंगरौली हो, कटनी हो ऐसे हमारे करीब 6 ब्‍लॉक चह्नित किए गए हैं जो हमारे गोल्‍ड के हैं और इसमें हमें खुशी इस बात की है कि उसमें करीब 3 का हमें कंपोजिट लाइसेंस मिल गया है और 3 माइनिंग के हमारे जो खनिज पट्टे हैं वह भी स्‍वीकृत हो गए हैं. मुझे लगता है कि इससे हमारे प्रदेश को करीब 7.87 मिलियन टन स्‍वर्ण का भंडार मिलने वाला है और इसलिए मैं मानता हूं कि यह निश्चित रूप से हमारे लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. यह सबसे बड़ी बात है और मुझे भी खुशी है कि जब मैं माइनिंग मिनिस्‍टर था तो ऑक्‍शन के मामले में मध्‍यप्रदेश को पहला स्‍थान मिला था. अभी भी मैं देख रहा हूं कि ऑक्‍शन के हमारे करीब 121 ब्‍लॉक चिह्नित हुए हैं जिनको सफलतापूर्वक नीलाम भी किया गया है और उसमें हमारा प्रथम स्‍थान है. इसलिए 4 ब्‍लॉक भारत सरकार के माध्‍यम से और बाकी का हमारी सरकार ने ऑक्‍शन किया है. मैं मानता हूं कि आज करीब 9 खनिज पट्टे और 3 के कंपोजिट लाइसेंस दिए गए हैं और 12 खनिज ब्‍लॉक इसमें नीलाम हुए हैं. इसमें हर तरह के ब्‍लॉक हैं. इसमें लाइम स्‍टोन है, जिंक भी है, आयरन है, मैग्‍नीज है, एल्‍युमिनियम और लैट्राइट है. इस तरह जो हमारी खजिन संपदा है हमारे जो प्रदेश के अंदर मिलती है निश्चित रूप से हमारा सौभाग्‍य है कि इतनी बड़ी खनिज संपदा हमारे मध्‍यप्रदेश के अंदर है जिससे इतना ज्‍यादा रेवेन्‍यू हम जनरेट कर पा रहे हैं. पहले खनिज के मामले में हमारा कोई स्‍थान नहीं होता था उड़ीसा हर दम लेता था लेकिन आज निरंतर हम इसको लेकर बढ़ते चले जा रहे हैं. हम स्‍टेट माइनिंग रेडिनेस इंडेक्‍स के अंदर प्रथम स्‍थान पर आ रहे हैं और इसलिए आज सिर्फ इसमें ही नहीं हमारे यहां करीब 14 कोयला ब्‍लॉक संचालित हुए हैं. इसलिए मैं मानता हूं कि करीब 37 ब्‍लॉक हमारे चिह्नत किए किए हैं जिनका आवंटन अभी होना तय हुआ है.

            सभापति महोदया, आज हमारे माइनिंग कार्पोरेशन में भी कई चीजों के एमओयू साइन हुए हैं. उसमें कोल इंडिया लिमि‍टेड ने आज खोज और प्रसंस्‍करण संवर्द्धन के लिए टैक्‍स मीन एंड आईएसएम धनबाद जो कंपनी है उसमें संयुक्‍त उपक्रम और गठन करने के लिए हिन्‍दुस्‍तान कॉपर लिमिटेड ने इसको खनिज अन्‍वेषण एण्‍ड एक्‍सप्‍लोरेशन के लिए और जो भारतीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्‍थान आईएस ईआर है उसने स्‍वर्ण खनिजों की खोज के लिए उसका एमओयू साइन हुआ है. इसलिए मैं यह मानता हूं कि निरंतर हर फील्‍ड में आज हमारा खनिज डिपार्टमेंट आगे बढ़ता चला जा रहा है. आज स्‍टेट मिनिस्‍टर कॉन्‍फ्रेंस में भी देखा जाए तो मध्‍यप्रदेश को सम्‍मानित किया गया है और उसके अंदर मैं देख रहा हूं कि निरंतर जो भी हमारी कान्‍क्‍लेव हो रही हैं अभी उड़ीसा में हुई इसके पहले हैदराबाद में हुई थी. अभी कटनी में भी हुई, निरंतर उसमें कई तरह के निवेश आ रहे हैं. करीब 56,414 करोड़ के निवेश तो कटनी के माइनिंग कान्‍क्‍लेव में आए हैं. इसलिए आज मैं यह देख रहा हूं कि आज माइनिंग के सेक्‍टर में खुद संपन्‍न हो रहे हैं स्‍वावलंबी हो रहे हैं. आज यदि डीएमएफ की बात की जाए खनिज प्रतिष्‍ठान की तो उसमें हम देख रहे हैं कि 9,598 करोड़ दिसम्‍बर 2025 तक का हमारा कलेक्‍शन हुआ है जिससे हमारी विभिन्‍न योजनाएं, रचनाएं हैं उनके माध्‍यम से खर्च किया जा रहा है. हमारी करीब 28 रेत खदान भी चिह्नित की गई हैं जिसमें 26 जिलों में संचालित हैं और इसमें भी एक बड़ा रेवेन्‍यू हम जनरेट कर पा रहे हैं. हमारा माइनिंग कार्पोरेशन उसको देख रहा है. आज चाहे परिवहन की बात हो, चाहे हमारे उत्‍खनन की बात हो या भंडारण की बात हो इस तरह से अवैध उत्‍खनन को लेकर, अवैध परिवहन को लेकर कई बार उसमें प्रकरण भी दर्ज किए गए हैं और पेनॉल्‍टी भी लगाई गई है. यदि देखा जाए तो वर्ष 2022-23 में करीब 8,660 प्रकरण दर्ज हुए जिसमें 72 करोड़ रॉयल्‍टी वसूली गई. 2023-24 में 9,000 प्रकरण दर्ज हुए जिसमें 70 करोड़ रॉयल्‍टी ली गई. 2025-26 में 7,900 प्रकरण दर्ज हुए जिसमें करीब 62 करोड़ की रॉयल्‍टी ली गई. हमारे कई तरह के नवाचार भी इसके अंदर हो रहे हैं. आज इसमें माइनिंग सर्विलांस सिस्‍टम भी लागू हो रहा है. जिसमें करीब 75 खदानों को आज जियो रेफ्रेशिंग के माध्‍यम से इसको चिह्नित करके कहीं अवैध उत्खनन हो रहा है तो आज (खनन) ट्रिगर करके उसमें पेनाल्टी लगाई जा रही है.  ऐसे 222 क्षेत्रो में जो अवैध उत्खनन चिह्नित हुये थे उनको पेनलाईज किया गया है. ई चेक गेट भी लगाये जा रहे हैं, आज जो हमारी मैनुअल चेकिंग होती थी उसको हटाकर ई चेक गेट लगाकर और आज ऐसे 40 स्थानों को चिह्नित किया गया है. जहां से हमारे अवैध परिवहन भंडारण जो भी होते हैं, इनके माध्यम से हमारी जो भी चीजें निकलती हैं उनकी चेकिंग भी होती है और उसको पेनलाइज भी किया जाता है और उसका मानीटरिंग सिस्टम हमारे स्टेट में भोपाल सेन्टर पर इसको लगाया गया है . आज इसके लिये कई तरह के प्रशिक्षण और कार्यशालायें भी हमारी चल रही हैं, इसमें कई तरह की जो हमारी गलतियां होती हैं उसमें सुधार कैसे किया जाये वह सुधार भी किया जा रहा है.

          माननीय सभापति महोदय, हमारी अंतर विभागीय समितियां हैं. क्योंकि फारेस्ट, माइनिंग का बहुत बड़ा सामंजस्य बनाने के लिये एक अंतर विभागीय समिति भी बनाई गई है.

          श्री सुरेश राजे -- चलिये में ही दिखा दूं अपने क्षेत्र में यह लगातार वहां पर अभी भी चल रहा है.

          सभापति महोदय- प्लीज बैठिये.

          श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- माननीय सभापति महोदय, इसलिये मैं यह मानता हूं कि इसमें जो भी हमारी खदानें आती हैं कि उनका जल्दी निदान हो, जल्दी उसमें एनओसी हो, इसलिये उसको लेकर के भी हमारी ऐसी अंतर विभागीय समितियां बनी हैं. सभापति महोदय, आज ई खनिज पोर्टल भी तैयार हुआ है जिससे कि सभी आन लाइन एक ट्रांसपरेंसी-वे में हमें सब चीजें मिल जायें और इसलिये मैं मानता हूं कि आज जो खनिज विभाग है निश्चित रूप से वह एक अच्छा काम कर रहा है. इसलिये मैं खनिज साधन विभाग की बजट की मांगों के समर्थन में खड़ा हुआ हूं.

          सभापति महोदय,  दो मिनिट में फारेस्ट को लेकर के भी सदन में चर्चा करना चाहता हूं क्योंकि पन्ना से हूं और इसलिये नेश्नल पार्क हमारे यहां है वह हमारे लिये निश्चित रूप से एक गौरव करने की चीज है. क्योंकि नेश्नल पार्क में हमारे टाइगर्स की जिस हिसाब से स्ट्रेंथ बढ़ रही है . आज निश्चित रूप से हमारे नेश्नल पार्क की ख्याति इंटरनेश्नल लेबल पर अर्जित हुई है.लेकिन मैं थोड़ा सा ध्यान मंत्री जी की तरफ आकर्षित करना चाह रहा हूं कि कुछ हमारे जो टाइगर्स हैं या जो पेंथर्स हैं , आज वो मे-निटर (man-eater) हो रहे हैं, आज उनको 8 लाख की मुआवजा राशि मिलती है मेरा कहना है कि सुप्रीम कोर्ट की जो गाइड लाईन आई है उसने 10 लाख के लिये बोल दिया है तो हमारे वन विभाग के जो लोग हैं उनसे मेरा एक आगृह है कि मध्यप्रदेश में भी वह 10 लाख रूपये की राशि जारी की जावे क्योंकि हमारे यहां पर दो घटनायें घट चुकी हैं . और इसमें एक टाईगर ने मारा और एक घटना में अभी लेपर्ड ने भी एक बच्चे को मारा है,जिसमें उनको  8 लाख की राशि दी गई है जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के अनुसार उनको 10 लाख रूपये की राशि मिलनी चाहिये थी. लेकिन मुख्यालय से आदेश जारी न होने के कारण वह राशि उनको नहीं मिल पाई है. माननीय सभापति महोदय अभी वन मुख्यालय से एक आर्डर निकला है कि नेश्नल पार्क से एक या देढ़ किलोमीटर की दूरी पर इनके जो रिसोर्ट बनने हैं या जो हमारी रेग्यूलर एक्टिविटिज हैं वह नहीं हो पा रही हैं. उसके लिये भी एक निश्चित मेप लाईन होनी चाहिये जो ग्रीन लाईन नक्शे के अंदर होना चाहिये जिसमें लोग उसमें बेहिचक काम कर सकें. और जो कमेटी बनाई गई है वह तुरंत एनओसी उनको मिल सके इसलिये कोई काम में रूकावट न आये नहीं तो बहुत से हमारे डेवलेपमेंट के भी काम रूकते हैं, बहुत सी हमारी रेग्यूलर एक्टिविटिज भी रूकती हैं, बहुत से हमारे माइनिंग के भी काम रूकते हैं. और इसलिये उसमें तुरंत डिसिजन लेना चाहिये. इतनी बात करते हुये मांगों के समर्थन में मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं. सभापति जी आपने मुझे अपनी बात रखने का अवसर प्रदान किया उसके लिये आपको बहुत बहुत धन्यवाद.

          सभापति महोदय- बृजेन्द्र जी बहुत बहुत धन्यवाद. रामेश्वर शर्मा जी.

          श्री रामेश्वर शर्मा(हुजूर)-- माननीय सभापति महोदय,(श्री यादवेन्द्र सिंह, सदस्य द्वारा बैठे बैठे यह बोलने पर कि भाई वन विभाग पर आप क्या बोलेंगे) क्यों नहीं बोलेंगे, वन विभाग में बोल देंगे, हमारे यहां पर हैं वन. अभ्यारण्य भी हमारे यहां पर खुल गया है .(xx)

          सभापति महोदय- रामेश्वर जी आप तो प्रारंभ करें.

          श्री रामेश्वर शर्मा -- सभापति महोदय, माननीय वित्त मंत्री जी द्वारा जो बजट प्रस्ताव प्रस्तुत किया है, उसका मैं समर्थन करता हूं. डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में हम लगातार..

          श्री सोहनलाल बाल्मीक -- माननीय सभापति महोदय, आपसे अनुरोध है कि उसको विलोपित करा दें.

          श्री रामेश्वर शर्मा-- उनसे (श्री यादवेन्द्र सिंह) तो पूछ लो आप कि वह विलोपित कराना चाह रहा हैं या नहीं. अगर वह कहें तो विलोपित कर दो हमें क्या परेशानी है.

          सभापति महोदय-- रामेश्वर शर्मा जी आप अपनी बात जारी रखें.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक -- सभापति महोदय, विलोपित करवा दें.

          श्री रामेश्वर शर्मा-- कर दो सर कर दो. सोहनलाल जी आप जो जो कराना चाहें कर दो.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- बहुत बड़ा दिल है आपका मानना पड़ेगा.

          श्री रामेश्वर शर्मा-- (xx)

          श्री उमंग सिंघार -- सभापति महोदय, मुख्यमंत्री जी ने तो कईयो को वहां पर छोड़ भी दिया है. कहां पर छोड़ा है यह आप भी जानते हैं. (हंसी)

          श्री रामेश्वर शर्मा-- आपके पास में तो नहीं छोड़ा न.

          सभापति महोदय-- रामेश्वर जी आप तो आसंदी की तरफ मुखातिव होकर के अपनी बात कहें.  थोड़ा समय का भी ध्यान रखें.

          श्री रामेश्वर शर्मा -- सभापति जी या तो इनको कल की चिंता नहीं है, हम तो चाह रहे हैं कि यह सदन रात के 9 बजे तक चले. सभापति  महोदय, जो  बजट यहां पर  प्रस्ताव  प्रस्तुत  किया है और  जो  अनुदान मांगों पर हम  लोग  बात कर रहे हैं.  बहुत  से  वक्ताओं ने उद्योग, वन, पर्यावरण, जेल, विधि, खनिज या जन सम्पर्क  पर  हो,  सब विषयों पर लगातार  हमारे  वक्ताओं ने  अपनी  बात म.प्र. सरकार की रखी है.  आप  और हम  सभी  जानते हैं और उधर के वक्ताओं  को भी  मैं हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं  कि  उन वक्ताओं ने भी  म.प्र. सरकार की  डॉ. मोहन यादव  जी की   जो नीति है, उसका समर्थन किया है और म.प्र. ने जो   2026  कृषि  वर्ष घोषित किया है, उसके लिये  भी कई   सदस्यों ने धन्यवाद दिया है  और मुख्यमंत्री जी को कहा है कि    एक अच्छी योजना  लेकर आये हैं. तो  हमारी सरकार के  मुखिया का जो दृष्टिपत्र, दृष्टिकोण है,  पूरे  म.प्र. का विकास है.   आज यह भी बात तय हो गई कि  बार बार कई सदस्य भ्रम  पैदा करते थे और वह पूछते थे कि  फलानी लाड़ली बहना का   क्या होगा,  इसका क्या होगा. आज तो डंके की चोट पर  मुख्यमंत्री जी ने कह दिया कि  किसानों का इस तरह से कल्याण करेंगे और बहनों को भी  3 हजार  देने का जो वादा है,  वह डॉ. मोहन यादव  जी की सरकार पूरा करेगी.  आज आप देखे तो सुरक्षा की दृष्टि से  हमारी पुलिस  24  घंटे मेहनत,परिश्रम कर रही है.  जो परिश्रम करता है,  अगर उनको धन्यवाद देना है, तो कोई अतिशयोक्ति  नहीं है.  उनको देना चाहिये.  अगर हमने म.प्र. की धरती से   नक्सलाइट को खतम  किया है, तो  मैं तो चाहता हूं कि सदन पक्ष   विपक्ष छोड़कर  हम  म.प्र. की पुलिस की इस बहादुरी की तारीफ करना चाहिये और  उनको धन्यवाद देना चाहिये.  उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर  हमारे शांति के टापू को जस का तस  किया है.  इस प्रदेश में शांति स्थापित की है. आज आप देखिये  हमारा पुलिस वाला 24 घण्टे  और कभी कभी तो त्यौहार   के जब मौके आते हैं, तो  48  घण्टे   ड्यूटी  निभाती है.  लेकिन  मैं म.प्र. के मुखिया को भी इस बात के लिये  धन्यवाद  देता हूं  कि पुलिस को जितनी सुविधायें हों,  वह  सुविधाएं हम लगातार दे रहे हैं. हम हमारे उनके मुख्यालय  सुधार रहे हैं. हम आवास  तैयार कर रहे हैं. आज राजधानी में  हमारी  पुलिस की बटालियनों को रहने  के आवास नहीं थे.  आज हमने  बड़े से बड़े आवास   समूह उनके तैयार किये हैं.  आने वाले दिनों में हम  और  बड़े प्रपोजल   उनके तैयार कर रहे हैं.  पुलिस को मैं भी आज इस बात का धन्यवाद देना चाहता हूं कि  आज राजधानी में बहुत से   थानों के विस्तार की बात  है. मेरे  ही क्षेत्र में एक नया थाना  अभी  पिछले ही हफ्ते कजलीखेड़ा नया थाना   स्वीकृत किया है और  वह चालू भी हो गया है.  मैं मुख्यमंत्री जी और वित्त मंत्री जी को  धन्यवाद देता हूं,  वह थाना जो है हमारा आज से काम  करने लगा है. आप  देखिये हम राजधानी के पास हैं.  हमारे पास केवल  देखा जाये  तो  नगर  के संबंध में  उपलब्धि  की बात  हमारे  शैलेन्द्र जी ने की थी.  चाहे वह एकांत पार्क  हो,  चाहे हमारा स्वर्ण जयंती पार्क हो,  चाहे हमारा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्क हो.  इस तरह के पार्क थे.  लेकिन  मैं  मुख्यमंत्री जी को हृदय से धन्यवाद देता हूं कि  हरि भाऊ बाकड़कर   जी के नाम से यहां विधान सभा से  16  किलोमीटर की दूरी पर  एक    अभ्यारण भी देश  की पहली राजधानी  है,  जिससे 16  किलोमीटर के पास, जिसके पास खुद का अभ्यारण है.  मैं  आज मुख्यमंत्री जी को इस बात के लिये हृदय से धन्यवाद  देता हूं.  हरिभाऊ बाकड़कर  जी के नाम से  हमने  नया अभ्यारण बनाकर  तैयार किया है  और यह बहुत बड़ा अभ्यारण है.  आज आप देखिये सतगढ़ी में  हम नये उद्योग जगत को  क्रांति ला रहे हैं.  सतगढ़ी में उद्योग ला रहे हैं. बगरोदा  में  उद्योगों का विकास  किया है. प्रदेश के उद्योगों  की बात अभिलाष जी  और   बाकी लोगों ने की थी.  प्रदेश में भी लगातार उद्योग को फैला रहे हैं.  उधर भी मुख्यमंत्री जी  ने  यह कहा है कि  अगर आपके पास जमीन है, तो  बताइये.  मैं तो ढूण्ड ही रहा हूं.   उद्योग तो सब दूर लगायेंगे.  उद्योगों के क्रांति की दृष्टि से  भी  हमारी सरकार लगातार कर रही है.  हमारी  सरकार की कोशिश है कि जो  हमारी  जन संपर्क की नीति है, वह  नीति है कि जो सरकार तय करें,  वह  म.प्र. के 8 करोड़  जनता तक संदेश जाना चाहिये.  इसलिये  जनसंपर्क की इस नीति से  सरकार  की योजनाओं को  कैसे जमीन पर पहुंचाया जाये. आम आदमी  तक  सरकार की योजना कैसे पहुंचे.  सरकार किस किस गरीब को क्या क्या  लाभ देना चाहती है.   किस को आयुष्मान कार्ड बन रहे हैं. किस को हम उद्योगों  में ले रहे हैं.  किसको हम भावांतर दे रहे हैं.  किसान को  किस नीति से हम फसल खरीद रहे हैं.  इस दृष्टि से भी हमारी जन संपर्क नीति  हमारी सरकार  ने बनाकर तैयार की है.  मैं  समझता हूं कि म.प्र. सरकार ने  ने  जो बजट प्रस्तुत किया है,  यह  बजट म.प्र.के विकास  में  और जब म.प्र.  के विकास  की बात आती है, साढ़े 8 करोड़  जनता  की बात आती है, तो उसमें भाजपा  कांग्रेस नहीं,  म.प्र.  की साढ़े 8 करोड़ जनता  को एक दृष्टि  से देखने सबका साथ, सबका विकास ,  जो नारा मोदी जी का है,  वही  नारा मोहन यादव जी जमीन पर  उतारने का काम कर रहे हैं. यह हमारी भाजपा   है.  हमारा दृष्टिकोण नहीं है कि  आपको भेदभाव से देखें.  इसलिये  इस दिशा में हमारी सरकार लगातार काम कर रही है.  जब सरकार  की कोई उपलब्धि  है, तो  वह जनता को बतानी  चाहिये और सरकार अगर कोई  अच्छे काम कर रही है तो  वह जनता तक बताना चाहिये.  जनता की भी  कोई कठिनाई  हैं,  तो वह भी हमारे  जन संपर्क और समाचार, मीडिया पर्सन  के माध्यम से  सरकार तक आती है,  जन प्रतिनिधियों के माध्यम से  आती है.  सरकार उनको भी गंभीरता से लेती है और उस दिशा में हमारी सरकार काम कर रही है.

          सभापति महोदय, मैं तो केवल आपसे यह आग्रह करना चाहता हूं कि जिन मांग संख्‍याओं के समर्थन में हम लोग खड़े हुए है. अब उधर के सदस्‍य तो धीरे-धीरे जा ही रहे हैं. हम ही हम हैं, चाहो तो आप समर्थन लेकर उन मांगों के प्रस्‍ताव को प्रस्‍ताव को स्‍वीकृति दे दो. अभी और बुलवाना है तो हम तो घंटे-दो घंटे बोलने के लिये तो तैयार हैं. क्‍योंकि हमारे पास उपलब्धियां तो इतनी हैं कि यह यह सुन नहीं पाते हैं. अब तो स्थिति यह है कि इनकी सुनने की क्षमता भी खत्‍म हो गयी है. क्‍योंकि भारतीय जनता पार्टी जो काम कर रही है वह जो कहती है, सो करती है.

          सभापति महोदय, यह आप देखिये कि दुनिया के जितने भी देश हैं और उनकी जो संख्‍या है, उससे ज्‍यादा तो हिन्‍दुस्‍तान में आयुष्‍मान कार्ड बना रहे हैं. यह मेरा भारत है. यह बनते भारत की तस्‍वीर है. गरीब के इलाज के कभी किसी ने पैसा जारी नहीं किया. आज मुख्‍यमंत्री सहायता निधि से भी पैसा जारी होता है. यदि और आवश्‍यकता पड़ती है तो यदि जनप्रतिनिधि कहे, डॉक्‍टर कहे, कलेक्‍टर कहे तो वहां से वायुसेना सेवा भी देकर उसकी जान बचाने का काम भी हमारी सरकार करती है.

          सभापति महोदय, हमारी सरकार चाहे राम राजा मंदिर का मामला हो, चाहे महाकाल मंदिर का मामला हो, चाहे संत रविदास जी का हो. हमारी सरकार का जाति में भरोसा नहीं है. मध्‍यप्रदेश का नागरिक किसी भी जातिवर्ग का हो उसका कल्‍याण यही डॉ. मोहन यादव जी की सरकार का मुख्‍य वादा है और मुख्‍य कार्यपद्धति है.

          सभापति महोदय, मैं अपनी बात को यहीं समाप्‍त करता हूं. धन्‍यवाद.

 

          श्री नीरज सिंह ठाकुर - अनुपस्‍थित.

          श्री मोहन शर्मा- अनुपस्‍थित.

          श्री राजकुमार कर्राहे- अनुपस्थित.       

          श्री हेमंत सत्‍यदेव कटारे- अनुपस्थित

          श्री उमाकांत शर्मा- अनुपस्थित.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह- अनुपस्थित.

          श्री विश्‍वनाथ सिंह पटेल (तेंदूखेड़ा)- माननीय सभापति महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद. 

          सभापति महोदय,सबसे पहले कांग्रेस के मित्रों में बहुत विद्धान लोग बैठे हैं. श्री शेखावत जी, श्री लखन भैया, श्री उमंग सिंघार जी.

          सभापति महोदय- आप तो आसंदी की तरफ बोलकर कहें.

          श्री विश्‍वनाथ सिंह पटेल - मैं आपको एक चाहता हूं कि विकास दिखना चाहिये, विकास दिखता है. कांग्रेस की सरकारें होती थी तो एक नारा लगाती थी कि गरीबी हटायेंगे, गरीबी भगायेंगे. ना गरीबी हटी और ना गरी‍बी भगी. इस देश में जब भारतीय जनता पार्टी की सरकारें बनना शुरू हुई, वैसे सदन में बोलना नहीं चाहिये, फिर भी बोल रहा हूं.श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेयी जी ने दो काम ऐसे दिये हैं. एक तो प्रधान मंत्री सड़क और दूसरा किसान क्रेडिट कार्ड. यदि यह दो काम नहीं होते तो प्रधान मंत्री सड़क नहीं होती तो गांव-गांव रोड नहीं होते. गांव की तस्‍वीर और तकदीर बदलने वाले यदि कोई हैं तो श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी हैं. यदि किसान क्रेडिट कार्ड नहीं होता तो किसान मर गया होता. यह है भारतीय जनता पार्टी की सरकार. नहीं तो मध्‍यप्रदेश में वर्ष 2003 के पहले हम खेत में बिजली जलाने जाते थे, मोटर चालू करने, मोटर चालू कि तो इस मेड़ से उस मेड़ पहुंचें तो बिजली गोल. मैं बधाई देना चाहता हूं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी को, उन्होंने इस प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदल दी. किसान को 10 घंटे बिजली, 24 घंटे बिजली गांवों को, यह बिजली देने का काम अगर किसी ने किया तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है, डबल इंजन की सरकार ने किया है. आज हम देख रहे हैं कि हमारी बेटियां, लाड़ली लक्ष्मी बेटी, आज कलेक्टर बन रही हैं, एसपी बन रही हैं, कर्नल बन रही हैं, क्रिकेट के मैदान में जीत रही हैं, यह काम यदि किसी ने किया है तो वह भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है.

 

          सभापति महोदय, एक बात कांग्रेस के मित्रों से पूछना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी जो सौगातें दे रही है, वह आप लोग ले रहे हैं कि नहीं ले रहे हैं? किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड, आवास, देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश की तस्वीर और तकदीर बदल दी. इंदिरा आवास 4-4, 5-5 आते थे. आज गांव में आप जाएं तो लगता है कि हमारे भाइयों के महल खड़े हो गये हैं. यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. हम सड़कों की बात करें. नेशनल हाईवे, ओवर ब्रिज, चमचमाती सड़कें मुझे याद है एक बार लोकसभा में लालू यादव जी बोले थे कि यदि मैं लोक निर्माण मंत्री होता तो चमचमाती फंलाने की गालों जैसी सड़कें बना देता. यह सरकार वह नहीं कहती, यह सरकार ने सड़कें बनाकर दिखाई हैं. आज आप सड़कें देख लें, जबलपुर से भोपाल कहीं पर भी आप जायं, एक घंटे, डेढ़ घंटे के अंदर पहुंच जाते हैं. कांग्रेस के मित्रों विकास को स्वीकार करो. बुराई उस बात की करो, जहां हम गलती कर रहे हैं, हमारी गलती पकड़ो कि आप इस क्षेत्र में गलती कर रहे हो. यदि हम विकास कर रहे हैं तो टेबल ठोंकर हमारा स्वागत करो.

          सभापति महोदय, यह भारतीय जनता पार्टी डॉ. मोहन यादव की सरकार है. डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री बनने के बाद मेरी विधान सभा तेंदूखेड़ा में जो कि पूरी ग्रामीण विधान सभा है, 300 करोड़ रुपये से ऊपर के काम मिले. मैं वित्तमंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं, स्वास्थ्य मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री जी, स्कूल शिक्षा मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं. हमारी सरकार, हमारे मंत्रीगण काम करने में विश्वास रखते हैं. हमारे प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि हम नेता नहीं हैं, हम जनता के सेवक है. हमारा मुख्यमंत्री भी कहता है कि हम नेता नहीं हैं, हम जनता के सेवक हैं. श्री शिवराज सिंह चौहान जी के बाद डॉ. मोहन यादव की बंसी पूरे प्रदेश में बज रही है, कृष्ण कन्हैया की.

          सभापति महोदय, मैं कांग्रेस के मित्रों से कहना चाहता हूं, श्री शेखावत जी जैसे बहुत बुद्धिजीवी, मुझसे ज्यादा बुद्धिजीवी हैं, उनसे मेरा विनम्र निवेदन है कि सरकार की उन खामियों को उठाओ जिनको हम सुधार सकें और प्रदेश का विकास कर सकें. आप लोग कल्पना छोड़ दो कि आप कभी सरकार में आएंगे, सरकार तो भारतीय जनता पार्टी की बनेगी क्योंकि लोग काम को पसंद करेंगे. जय हिन्द, जय भारत.

          श्री मोहन शर्मा (नरसिंहगढ़) - सभापति महोदय, सामान्य प्रशासन एवं सुशासन बजट के ऊपर बोलना है. मैं इस गरिमामयी सदन में आज सामान्य प्रशासन और सुशासन जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण विषय पर अपनी बात रखने के लिए खड़ा हुआ हूं. हमारे लोकप्रिय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में प्रशासन को पारदर्शी, जवाबदेही, जनहित केन्द्रित बनाया है. प्रशासन का जो उद्देश्य है नागरिकों को सुविधा देना, आम नागरिकों को न्याय मिले उसके लिए कार्य करना. सामान्य प्रशासन पूरे शासन तंत्र की रीढ़ की हड्डी होता है. सामान्‍य प्रशासन पूरे शासन तंत्र की रीढ़ की हड्डी होता है. इसके माध्‍यम से पूरे दिशा-निर्देश सामान्‍य प्रशासन से जारी होते हैं. पहले हमें जन्‍म प्रमाण पत्र, मूल निवासी प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए चक्‍कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब एक ही जगह पर यह प्रमाण पत्र बन जाते हैं.

          सभापति महोदय, लोक सेवा केन्‍द्र का शुभारंभ करने के बाद अब हमारे ग्रामीण क्षेत्र के किसान भाइयों को इधर-उधर भटकने की आवश्‍यकता नहीं पड़ती. उनको एक ही जगह पर न्‍याय मिल जाता है. हमारे ग्रामीण क्षेत्र में पटवारी या अन्‍य विभाग के कर्मचारियों, अधिकारियों का भी किसानों से सीधा संबंध बन जाता है. शासकीय अधिकारी, कर्मचारी लोक सेवा गारंटी के माध्‍यम से ईमानदारी के साथ में ग्रामीण क्षेत्र में हमारे किसान भाइयों के बीच में रहकर काम करते हैं. हमारी सरकार का स्‍पष्‍ट निर्देश है कि ईमानदार को सम्‍मान मिले और लापरवाही से कार्य करने पर कार्यवाही करने की आवश्‍यकता पड़ती है तो हमारी सरकार विभागीय कार्यवाही करने में पीछे नहीं हटती है.

          सभापति महोदय, हमारा प्रदेश गांवों में बसता है. अब हमारे नागरिकों को जिला मुख्‍यालय के चक्‍कर लगाने की आवश्‍यकता नहीं है. शहरी क्षेत्रों में ऑनलाइन शिकायत प्रणाली, रियल टाइम मॉनिटरिंग और डिजिटल ट्रैक व्‍यवस्‍था से प्रशासन तेज और पारदर्शी हुआ है. अब शिकायतें दबती नहीं हैं, बल्‍कि सिस्‍टम में शिकायत दर्ज होकर उनका निराकरण भी होता है. हमारी प्रशासनिक व्‍यवस्‍थाओं में वरिष्‍ठ नागरिकों, दिव्‍यांगजनों व आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है. प्रशासनिक व्‍यवस्‍थाओं को सरल, सुलभ और सम्‍मानजनक बनाया गया है. हमने वित्‍तीय प्रबंधन को भी मजबूत किया है. ऑनलाइन भुगतान प्रणाली बजट मॉनिटरिंग कार्यों की डिजिटल ट्रेनिंग से अनावश्‍यक खर्चों में कमी और कार्यों में गुणवत्‍ता में वृद्धि हुई है. भविष्‍य की दिशा हमारा लक्ष्‍य है. इसलिए हम प्रशासन पेपरलेस, कार्यालय एकीकरण सेवा पोर्टल डेटा आधारित निर्णय प्रणाली चाहते हैं. सभापति महोदय, नागरिकों को कम से कम दफ्तर जाना पडे़ और अधिक से अधिक काम घर से हो जाए, यह हमारी सरकार की नीति है. मैं पूर्ण विश्‍वास के साथ कह सकता हॅूं कि आज मध्‍यप्रदेश का प्रशासन परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है.  आज प्रशासन रूकावट नहीं, समाधान बन रहा है. यह प्रशासन दूरी नहीं, विश्‍वास बन रहा है. अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि मजबूत प्रशासन ही, मजबूत मध्‍यप्रदेश की नींव है. माननीय सभापति महोदय, हमारी सरकार ने नीतिगत फैसले लेते हुए हमारे ग्रामीण क्षेत्र के जो किसान भाई हैं, उनके लिए सुविधाजनक निर्णय करने का कार्य किया है. उनका विकास और उनको विश्‍वास दिलाना यह सरकार की नीति रही है. सभापति महोदय, सुशासन की स्‍थापना का एक लक्ष्‍य हमारे परमश्रद्धेय स्‍व.श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का संकल्‍प था. सुशासन देने का कार्य आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार, माननीय डॉ.मोहन यादव जी की सरकार ने बड़ी ईमानदारी के साथ प्रत्‍येक नागरिक की चिन्‍ता करते हुए मध्‍यप्रदेश के विकास में और गति देने का कार्य किया है. हम मध्‍यप्रदेश को आगे बढ़ाने का संकल्‍प लेकर कार्य कर रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी की सरकार, डॉ.मोहन यादव जी की सरकार गरीबों के कल्‍याण के लिए गरीब हितैषी है. गरीबों के कल्‍याण के लिए हमारी सरकार हमेशा कार्य करती है, जो योजना बनती है, जो प्‍लान बनते हैं वह ग्रामीण क्षेत्र के किसान भाइयों के लिए बनाए जाते हैं. ग्रामीण क्षेत्र में सामाजिक सद्भाव बना रहे, इसके लिए कानून की व्‍यवस्‍था मजबूत की है और सबको कानून के दायरे में रहकर काम करने की हमारी सरकार ने नीति भी बनायी है. अटल बिहारी बाजपेयी सुशासन नीति जो हमारे सामने बनी थी उसका पालन हमारी सरकार कर रही है. सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से हमारे मध्यप्रदेश में जितने भी उससे जुड़े हुए विभाग हैं उनके माध्यम से ही सारे आदेश निकलकर मध्यप्रदेश की सरकार कार्य करती है. मध्यप्रदेश की सरकार हमेशा अपने ग्रामीण क्षेत्र के किसान भाईयों के कल्याण के लिये योजना बनाकर नीचे धरातल पर उतारकर कार्य करती है. मैं इस बजट के प्रस्तावों का समर्थन करता हूं.

          श्रीमती कृष्णा गौर (राज्यमंत्री सामान्य प्रशासन) माननीय सभापति महोदय, वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत विभिन्न विभागों की मांग संख्या में बजट आवंटन राशि हेतु जो प्रस्ताव मैंने सदन में प्रस्तुत किया था उसमें सामान्य प्रशासन विभाग के प्रस्ताव पर सरकार का पक्ष रखने के लिये खड़ी हुई हूं. सामान्य प्रशासन विभाग की अनुदान मांगों पर सदन में माननीय सदस्यगण ने अपने विचार व्यक्त किये हैं. मैं अनुदान मांगों पर समर्थन करने वाले सम्मानीय सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त करती हूं. सामान्य प्रशासन विभाग की उपयोगिता और विभाग के सफल संचालन के लिये इस बजट में मांगी गई राशि अनिवार्य ही नहीं है, बल्कि अपरिहार्य है. क्योंकि हम जानते हैं कि यद्यपि हमारा विभाग आम आदमी की सेवाओं से सीधा नहीं जुड़ा फिर भी प्रत्यक्ष रूप से सुशासन अर्थात् गुड गवर्नेंस की स्थापना और उसको लागू करने में सामान्य प्रशासन विभाग बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आज मुझे कहते हुए गर्व है कि मध्यप्रदेश में डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्व में हमारी सरकार सुशासन का पर्याय बनकर निरंतर काम कर रही है. इन दो वर्षों में सरकार ने जिस प्रकार से प्रत्येक विभाग में प्रगति के नये आयाम स्थापित किये हैं. उसका परिलक्ष्ण हमें बजट में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. यह विभाग प्रशासनिक कार्य प्रणाली के सुचारू संचालन के लिये एवं इसमें लगातार सुधार के लिये नियम और निर्देश बनाने के साथ ही सभी विभागों के मध्य समन्वय का भी काम करता है. मानवाधिकार आयोग, लोक सेवा आयोग, राज्य सूचना आयोग, लोकायुक्त संगठन एवं राज्य निर्वाचन आयोग जैसे संवैधानिक संस्थाओं के साथ ही राज्य आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मुख्य तकनीकी परिषद् जैसी जांच संस्थाओं के अलावा मध्यप्रदेश आरसीपीवी नरोना प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी जैसी राष्ट्रीय स्तर की प्रशिक्षण संस्था का यह प्रशासकीय विभाग है. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिये वित्त विभाग द्वारा विभाग के अनुदान मांगों में राशि रूपये 1172 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है. जिसमें राजस्व व्यय की राशि रूपये 1032 करोड़ एवं पूंजीगत व्यय की राशि रूपये 139 करोड़ है. मुझे आज सदन में यह बताते हुए बहुत हर्ष है कि मध्यप्रदेश में हमारी सरकार मध्यप्रदेश की आमजनता के कल्याण और उत्थान के लिये काम कर रही है. जिस संवेदनशीलता का परिचय हमारे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के माध्यम से हमको देखने को मिल रहा है. उसका यह परिणाम है कि स्वेच्छानुदान की राशि में उत्तरोतर वृद्धि इस बजट में की गई है. एक समय था जब मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान की राशि 72 करोड़ 74 लाख रूपये थी जो आज बढ़कर इस वित्तीय वर्ष 2026-27 में 200 करोड़ हो गई है.

          माननीय सभापति महोदय, समाज के सर्वहारा एवं गरीब वर्ग के कल्‍याण के प्रति मुख्‍यमंत्री जी की ये संवेदनशीलता है और इसलिए स्‍वेच्‍छानुदान में मुख्‍यमंत्री जी को जो राशि आवंटित है, उसका उपयोग उनके द्वारा समाज के गरीब व्‍यक्तियों की मदद एवं उपचार के लिए निरंतर किया जा रहा है. देश की आजादी में अपना सर्वस्‍व न्‍यौछावर करने वाले, भारत माता के वीर सपूत, हमारे देश के स्‍वंतत्रता संग्राम सेनानियों के प्रति भी, हमारी सरकार पूरी तरह संवेदनशील है. इस बजट में भी हमारे प्रदेश के स्‍वंतत्रता संग्राम सेनानियों के सम्‍मान का पूरा ध्‍यान रखा गया है. देश की स्‍वतंत्रता की लड़ाई में भाग लेने वाले स्‍वंतत्रता संग्राम सेनानियों को दिनांक 6.10.2023 से सम्‍मान निधि 25 हजार रुपए से बढ़ाकर, 30 हजार रुपए प्रतिमाह इस बजट में की गई है. साथ ही राज्‍य सम्‍मान निधि प्राप्‍त स्‍वंतत्रता संग्राम सेनानियों का स्‍वर्गवास होने पर उनकी अन्‍तेष्टि हेतु भी सरकार आर्थिक सहायता प्रदान करती है. साथ ही साथ चिकित्‍सा प्रतिपूर्ति हेतु राशि रुपए 50 हजार तक कलेक्‍टर के द्वारा एवं 50 हजार से अधिक रुपए संभागायुक्‍त के द्वारा प्रदाय की जाती है. स्‍वंतत्रता संग्राम सेनानियों के परिवार के सदस्‍य को शासकीय सेवा में प्राथमिकता, उच्‍च शिक्षा हेतु प्रवेश में, एवं शासकीय ऐजेंसियो द्वारा निर्मित भवन एवं भू-खंडों में आरक्षण भी दिया जाता है. मध्‍यप्रदेश लोकतंत्र सेनानी सम्‍मान नियम 2018 के अंतर्गत, ऐसे लोकतंत्र सेनानी जो एक माह या एक माह से अधिक की कालावधि के लिए जेल में निरद्ध रहे हो, उन्‍हें 30 हजार रुपए प्रतिमाह एवं एक माह से कम कालावधि के लिए निरद्ध सेनानियों को 10 हजार रुपए प्रतिमाह, लोकतंत्र सम्‍मान निधि दी जा रही है. लोकतंत्र सेनानियों के लिए मरणोपरांत उनकी अंतेष्टि के लिए, रुपए 8 हजार से बढ़ाकर, रुपए 10 हजार की सहायता, उनके परिवार प्रमुख को देने का प्रावधान इस बजट में किया गया है. लोकतंत्र सेनानियों की अंतेष्टि राजकीय सम्‍मान के साथ किए जाने का प्रावधान, हमारी सरकार ने किया है. सामान्‍य प्रशासन विभाग के बारे में बोलने के लिए अगर खड़ी हुई हूं तो मैं गर्व के साथ कहती हूं कि इस विभाग की जो उपलब्धियां हैं, वह निश्चित रूप से हमें इन दो वर्षों में मध्‍यप्रदेश में गुड गवर्नेंस के रूप में दिखाई दी है. ई-आफिस विभागीय परिपत्र, दिनांक 9 जनवरी 2025 एवं 16 जनवरी 2025 द्वारा मध्‍यप्रदेश में मंत्रालय स्‍तर से लेकर जिला, संभाग, विभागाध्‍यक्ष, कार्यालय स्‍तर तक शासकीय कार्य तथा नस्तियों का प्रस्‍तुतिकरण, संचालन, पत्राचार आदि  कार्य पूर्णत: ई-आफिस पोर्टस के माध्‍यम से करने हेतु भी निर्देशित किया गया है. मुझे बताते हुए खुशी है कि वर्तमान स्थिति में 56 मंत्रालय विभागों में 276 विभागाध्‍यक्षों, 10 संभागों और 55 जिलों में ई-आफिस, ई-फाइल कार्यप्रणाली लागू की जा चुकी है. लगभग 60 हजार उपयोगकर्ता ई-फाइल का उपयोग कर रहे हैं, अभी तक 8 लाख ई-फाइलें बनाई जा चुकी है, जो हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है, जिसमें हमारी सरकार ने तय किया था कि हम पेपरलेस वर्क करेंगे और हम अपने कार्यों में निश्चित रूप से ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देंगे. केएमएस अर्थात् नॉलेज मैनेजमेंट सिस्‍टम मंत्रालय के विभागों का अभिलेख रिकार्ड्स के डिजिटलाइजेशन के उद्देश्‍य से अभिलेखागार में जमा अभिलेख को डिजिटल कराते हुए ई- ऑसिफ के केएमएस माड्यूल पर अपलोड कराया गयाहै.      मंत्रालय के 41 विभागों की 2.61 लाख से अधिक फाइलों का डिजिटलाइजेशन किया जा चुका है और उन्‍हें केएमएस पर अपलोड भी किया जा चुका है.

4:58 बजे                {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए}

           माननीय अध्‍यक्ष महोदय स्‍पेरो (SPARROW) अर्थात स्‍मार्ट परफॉरमेंस अप्रेजल रिपोर्ट रिकार्डडिंग ऑनलाइन विंडो शासकीय कर्मचारियों की गोपनीय प्रतिवेदन ऑनलाइन लिखे जाने के उद्देश्‍य से स्‍पेरो एप्‍लीकेशन तैयार की गई है. 26 विभागों द्वारा इस एप्‍लीकेशन का उपयोग किया जा रहा है. अब तक 34 हजार कर्मचारी अपनी वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट एसीआर ऑनलाइन के माध्‍यम से प्रस्‍तुत कर रहे हैं. एनआईसी द्वारा वल्‍लभ भवन क्रमांक 1, 2, 3  में विभागों और अधिकारियों को कक्ष आवंटन हेतु निर्मित ऑनलाइन पोर्टल के माध्‍यम से कक्ष आवंटन संबंधी कार्यवाही भी की जा रही है. मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत राज्‍य शासन के 49 विभागों द्वारा क्षमता विकास योजना तैयार की गई है. आई-गोट, प्‍लेटफार्म पर प्रशिक्षण प्राप्‍त करने हेतु विभिन्‍न विभागों के कुल 9 लाख 36 हजार 569 लोक सेवकों के लक्ष्‍य के विरूद्ध 9 लाख 35 हजार 557 लोक सेवक पंजीकृत हुए हैं, जो निर्धारित लक्ष्‍य का 99.89 प्रतिशत है. इनमें से 4 लाख 8 हजार 334 शासकीय सेवक सक्रिय हैं, जिन्‍होंने कुल पाठ्यक्रम नामांकन 38 लाख 66 हजार 210 प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पंजीयन कराकर 26 लाख 49 हजार 554 प्रशिक्षण पूर्ण कर प्रमाण पत्र भी प्राप्‍त किये हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय,अनुकंपा नियुक्त्‍िा पोर्टल निर्मित कर दिनांक-27/04/2025 से संचालन प्रारंभ कर दिया गया है, वर्ष 2025-26 में माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा दिनांक-15/12/2025 को जनजातीय गौरव दिवस के कार्यक्रम में विशेष भर्ती अभियान अंतर्गत बेगा,सहरिया एवं भारिया जनजाति के 14 अभ्‍यार्थियों को सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्ति पत्र भी वितरित किये गये हैं, दिनांक-17 सिंतबर, 2025 से 02 अक्‍टूबर, 2025 तक सेवा पखवाड़ा अभियान आयोजित किया गया, अभियान के सफल संचालन हेतु विभागवार कार्ययोजना एवं गतिविधियों का निर्धारण कर तदनुसार सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं. अभियान के दौरान जन कल्‍याणकारी योजनाओं का प्रचार प्रसार हितग्राही उन्‍मुख शिविरों का आयोजन, सेवा वितरण कार्य तथा नागरिक सहभागिता सुनिश्चित की गई, प्राप्‍त प्रतिवेदनों के अनुसार विभाग द्वारा निर्धारित लक्ष्‍यों के अनुरूप अभियान का सफल संचालन भी किया गया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी की अध्‍यक्षता में दिनांक-07-08 अक्‍टूबर, 2025 को कलेक्‍टर,कमिश्‍नर कांफ्रेंस का आयोजन, कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्‍वेंशन सेंटर भोपाल में किया गया, जिसमें समस्‍त संभागायुक्‍त, समस्‍त कलेक्‍टर, समस्‍त मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत, समस्‍त पुलिस आयुक्‍त एवं समस्‍त पुलिस अधीक्षक सम्मिलित हुए. कांफ्रेंस हेतु आठ सेक्‍टर्स यथा कृषि स्‍वास्‍थ्‍य एवं पोषण रोजगार, उद्योग एवं निवेश संवर्धन, नगरीय विकास, सुशासन शिक्षा पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा कानून एवं व्‍यवस्‍था निर्धारित की गई, इन सेक्‍टर्स के संयोजकों एवं उनके सहयोगी विभाग के अधिकारियों द्वारा अपने-अपने विषय का प्रस्‍तुतीकरण भी किया गया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍य शासन द्वारा भोपाल, इंदौर, ग्‍वालियर एवं जबलपुर मुख्‍यालयों पर पदस्‍थ तथा इन नगर निगम की सीमा में निवास रत तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के शासकीय सेवकों के वाहन परिवहन भत्‍तों की दर 200  से बढ़ाकर 384 रूपये प्रति माह तथा नि:शक्‍त कर्मचारियों के लिये 350 से बढ़ाकर 671 प्रति माह स्‍वीकृति विषयक निर्देश दिनांक-30 अप्रैल, 2025 को जारी किये गये हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा वर्ष 2025 में कुल 1986 पदों की पूर्ति हेतु रिक्तियां विज्ञापित की गईं, मध्‍यप्रदेश कर्मचारी चयन मण्‍डल द्वारा वर्ष 2025 में कुल 23 हजार 43 पदों की पूर्ति हेतु रिक्तियां विज्ञापित की गईं हैं. सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत प्राप्‍त होने वाले मूल आवेदन एवं प्रथम अपील की समस्‍त नस्तियों का निराकरण पूर्णत: ई-ऑफिस के माध्‍यम से किया जा रहा है. सामान्‍य प्रशासन विभाग, सूचना अधिकार प्रकोष्‍ठ में आर.टी.आई. पोर्टल का निर्माण किया जा चुका है, उपरोक्‍त व्‍यवस्‍था लागू होने से आम जनता के लिये सुविधा जनक रहेगा तथा कार्यों में पार‍दर्शिता भी होगी.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश शासन के महत्‍वपूर्ण विभाग सामान्‍य प्रशासन विभाग के बारे में कहना चाहूंगी कि यह नियम कायदे का विभाग है, इस विभाग में शब्‍द और अक्षर अपने अर्थ एवं मायने रखते हैं, यहां पर आप अपनी मन मर्जी नहीं चला सकते हैं, इस विभाग में तर्क की शक्ति अपना महत्‍व रखती है. अब सभी नियमों को शिथिल कर कार्यवाही करने की परंपरा पुरानी बात हो गई है. मैं माननीय सदस्‍यों की बात सुन रही थी, सामान्‍य प्रशासन विभाग में आपको लोकरंजन की बात नहीं मिलेगी, यहां पर लोक कल्‍याण की बात होती है. माननीय विपक्ष के सदस्‍य तनाव नहीं पाले क्‍योंकि यहां पर आनंद विभाग भी काम करता है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सुशासन कैसे स्‍थापित हो, इसकी व्‍यवस्‍था इस सामान्‍य प्रशासन विभाग के द्वारा की जाती है, इसलिए मेरा सदन से अनुरोध है कि अनुदान की मांगों के बारे में सामान्‍य प्रशासन विभाग के इस प्रस्‍ताव को सदन स्‍वीकृति प्रदान करे, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल जी बोलें, सभी थोड़ा संक्षिप्‍त करें, क्‍योंकि एक भारी भरकम विभाग और आने वाला है..(हंसी)

          राज्‍यमंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) -- अध्‍यक्ष महोदय, गृह विभाग है, इसलिए थोड़ा सा समय लगेगा, फिर भी मैं आपके आदेश का पालन करूंगा.

          संसदीय कार्यमंत्री( श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्‍यक्ष महोदय, खाली विभाग ही भारी भरकम नहीं है, मंत्री भी बहुत भारी भरकम है(हंसी)

          अध्‍यक्ष महोदय -- हां इसलिए मैं कह रहा हूं कि भारी भरकम विभाग आने वाला है..(हंसी)

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश का गृह विभाग निरंतर नये कीर्तिमान स्‍थापित कर रहा है, हमारे यशस्‍वी गृहमंत्री श्री अमित शाह जी ने तय किया था कि दिनांक-31 मार्च, 2026 तक देश से नक्‍सलवाद की समस्‍या को खत्‍म करना है.

हमें बताते हुये संतोष है कि मध्‍यप्रदेश में हमने इसको समय सीमा में समाप्‍त कर दिया है और जैसा कि हमारे पूर्व वक्‍ताओं ने भी बताया था कि हमारी जांबाज पुलिस के 38 वीर पुलिस कर्मियों ने अपना सर्वोच्‍च बलिदान इस समस्‍या के निदान के लिये, मैं एक बार सदन से भी आग्रह करूंगा कि इनके लिये श्रद्धांजलि एक बार मेज बजाकर जरूर दे दें. (मेजों की थपथपाहट) 38 वीर पुलिसकर्मी शहीद हुये हैं, परंतु हमने इस लाल सलाम को आखिरी सलाम कर दिया है. अभी 42 दिनों में 42 नक्‍सलियों ने भी आत्‍मसमर्पण किया है, उनको भी मुख्‍य धारा में लाने का काम किया जा रहा है. हमारे इस तरह के जो ग्राम हैं जिनमें नक्‍सलवाद की जो समस्‍या थी उनमें डेबलपमेंट तेजी से हो, उसमें माइक्रो डेबलपमेंट प्‍लान बनाकर 330 करोड़ रूपये की योजना इसमें क्रियान्वित की जा रही है. मध्‍यप्रदेश में हमारे जैसा कि केन्‍द्र सरकार ने तय किया कि मध्‍यप्रदेश इंटीग्रेटेड एक ही सेवा लागू की जाये, जिसमें स्‍वास्‍थ, एम्‍बूलेंस सेवा का जो 108 नंबर है जिसमें अग्निशमन सेवा का 101, महिला हेल्‍प लाइन का 1090, नेशनल साइबर क्राइम का 1930, राज्‍य परिवहन विभाग का पैनिक बटन या आपदा प्रबंधन का 1079 एक्‍सीडेंट रिस्‍पोंस सर्विस हाई टोल नाका का 1099, महिला एवं चाइल्‍ड हेल्‍प लाइन का 181,1098, रेलवे मदद के लिये 139 इत्‍यादि जो विभिन्‍न नंबर थे उनकी जगह इंटीग्रेटेड केवल एक 112 नंबर की सुविधा मध्‍यप्रदेश में 14 अगस्‍त 2025 को प्रारंभ कर दी गई है जिसके तहत 1200 एफआरबी वाहन तैनात किये गये हैं, जिसमें बॉडीबार्न केमरा, फोन, बायरलेस सेट, नंबर मार्किंग फेसलिटी जैसी आधुनिक सुविधाओं से यह सुसज्जित हमारे वाहन प्रदेश में काम कर रहे हैं. इन वाहनों की उपलब्धियां बताते हुये मुझे संतोष है कि जब से योजना प्रारंभ हुई 14 अगस्‍त 2025 से अभी जनवरी 2026 तक 12 लाख 86 हजार से अधिक पीडि़तों को मदद पहुंचाई गई है, जिसमें 1 लाख 35 हजार से अधिक महिलायें हैं. 70 हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाओं में मदद की गई है. 75 नवजात शिशुओं को भी बचाया गया है. लगभग 2 हजार गुम बालकों को माता पिता से मिलवाया गया है. 13 हजार से अधिक ऐसे महिला पुरूष जो अवसाद से ग्रस्‍त थे, ऐसे महिला पुरूष जो आत्‍महत्‍या के लिये जा रहे थे उनको रोकने का काम हमारे इन वाहनों ने किया है. 15 हजार से अधिक वरिष्‍ठ नागरिकों को सहायता पहुंचाने का काम किया है और 112 पर प्रतिदिन 25 हजार से ज्‍यादा कॉल आते हैं जिनको हमारी पुलिस बहुत सुदृढ़ता से और तत्‍परता से और कर्मशीलता के साथ जनता की सहायता करते हैं. चूंकि इस सेवाकार्य में हमारे पुलिसकर्मियों 365 दिन 24 घंटे निरंतर काम करते हैं तो ऐसे में तनाव के क्षण भी उनमें आते हैं. हमारे पूर्व वक्‍ताओं ने बताया कि हम होली मनाते हैं, दिवाली मनाते हैं, ईद मनाते हैं, लेकिन हमारे यह पुलिसकर्मी उस दौरान भी अपनी ड्यूटी कर रहे होते हैं, अपनी कर्तव्‍यपरायणता के फलस्‍वरूप मैदान में डटे होते हैं तो निश्चित रूप से ऐसे हमारे जांबाज पुलिसकर्मियों को तनाव से गुजरना  पड़ता है उसके लिये भी हार्टफुलनेस संस्‍था से पुलिस विभाग ने एमओयू किया है ताकि उनके तनाव प्रबंधन के लिये प्रशिक्षण दिया जा सके. विश्राम और ध्‍यान कौशल इत्‍यादि के सत्र चलाये जा सकें. मध्‍यप्रदेश पुलिस के लिये संपूर्ण देश में ऐसा प्रथम राज्‍य हैं जहां पर इस तरह का क्रियान्‍वयन किया जा रहा है. ''नशे से दूरी है जरूरी''. नारकोटिक्‍स ड्रग्‍स की समस्‍या को देखते हुये मध्‍यप्रदेश पुलिस ने माह जुलाई 2025 में व्‍यापक राज्‍यव्‍यापी जन जागरूकता अभियान नशे से दूरी है जरूरी चलाया था जिसमें 22 लाख से अधिक लोगों ने नशे से दूर रहने की शपथ ली. करोड़ों लोगों को सोशल मीडिया के माध्‍यम से जाग्रत किया गया है. मध्‍यप्रदेश पुलिस का चलाया जाने वाला अभियान अभी तक के अभियानों में सर्वाधिक नागरिकों तक पहुंचने वाला यह अभियान बना है. अभी चर्चा भी हमारे मित्रों ने की थी विपक्ष के साथियों ने भी यह विषय उठाया था. खाली पदों की भरती के लिये भी मध्‍यप्रदेश तेजी से काम कर रहा है जैसा कि डॉ. मोहन यादव जी ने पहले भी कहा था कि 22 हजार से अधिक रिक्त पदों की भर्ती का अभियान हम चलाएंगे वह 2025 से ही प्रारंभ हो गया है. आरक्षक के लगभग साढ़े सात हजार पद सूबेदार उप निरीक्षक के 500 पद स्टेनो,लिपिक के 500 पद इनकी भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है और  यह प्रतिवर्ष क्रमश: चलने वाला है तीन वर्ष तक यह चलेगा 8 साल से यह भर्ती नहीं हुई थी लेकिन अब यह लगातार तीन साल तक चलने वाली है. सिंहस्थ 2028 की तैयारी के लिये मध्यप्रदेश पुलिस ने अभी से तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं इसके लिये प्रयागराज कुंभ जो 2025 में सम्पन्न हुआ उसके अध्ययन,विशेषज्ञों के व्याख्यान,निगरानी, भीड़ प्रबंधन और ए.आई. आधारित डाटा एनलेसिस,नये एन.टी.ड्रोन सिस्टम इत्यादि आधुनिकतम टेक्नालाजी के उपयोग के साथ में सिंहस्थ के सुचारू रूप से संचालन के लिये मध्यप्रदेश पुलिस ने योजना बना रखी है. मध्यप्रदेश की पुलिस के आधुनिकीकरण के लिये इस वर्ष जो पिछले वर्ष लगभग 25 करोड़ प्रावधान की गई थी इस बार उस राशि को लगभग दुगुना कर दिया है जो 50 करोड़ के आसपास है मध्यप्रदेश देश की राजधानी के बाद दूसरा राज्य है जहां पर ई जीरो एफआईआर प्रारंभ की गई है व्यक्ति  घर बैठे टेक्नालाजी के माध्यम से एफआईआर दर्ज कर सकता है. इस प्रणाली के तहत यह मेडेट्री बनाया गया है कि 1930 हेल्प लाईन या पोर्टल के माध्यम से जो भी साईबर,वित्तीय अपराध एक लाख से अधिक के दर्ज होते हैं उनकी सूचना आती है वह स्वत: ही एफआईआर में परिवर्तित हो जाता है. प्रत्येक माह लगभग 500 ई जीरो एफआईआर दर्ज हुई हैं. साईबर अपराध को रोकने के लिये अथवा जो हो गये हैं उनको पकड़ने के लिये मध्यप्रदेश पुलिस ने भांति भांति के आपरेशन चलाये हैं. आपरेशन मेट्रिक्स,आपरेशन नयन,आपरेशन फास्ट,आपरेशन सेफ क्लिक इस तरह से यह आपरेशन चलाकर साईबर अपराधों को पकड़ने का काम किया है. आपरेशन मेट्रिक्स में 28 से अधिक प्रकरण दर्ज हुए हैं. आपरेशन नयन में बाल यौन शोषण सामग्री के विरुद्ध  अभियान संचालित किया गया है. चाईल्ड सेक्सुअल एबुशिव मटेरियल को रोकने के लिये 50 से अधिक प्रकरण दर्ज किये गये हैं और मध्यप्रदेश पुलिस सजगता के साथ यह काम कर रही है. आपरेशन फास्ट के तहत् साईबर अपराधियों को जिन्होंने नकली सिम दी हैं ऐसे 48 प्रकरण दर्ज किये गये हैं. एक करोड़ से अधिक लोगों को आपरेशन सेफ क्लिक के माध्यम से जागरूक किया गया है और आपको बताते हुए मुझे प्रसन्नता है कि गृह विभाग की कोई जानकारी देते हुए  कोई यह बात कहे तो शायद अचंभा होता है फिर भी प्रसन्नता है. साईबर मुख्यालय को वर्ष 2025 के लिये क्षमता वर्द्धन के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ कानून प्रवर्तन ऐजेंसी हेतु डेटा सिक्योरिटी कांउसिल आफ इंडिया द्वारा सम्मनित किया गया है. यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में जो 3 नये कानून बनाये गये हैं भारतीय न्यायसंहिता अर्थात वीएनएस,भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता अर्थात वीएनएसएस,भारतीय साक्ष्य अधिनियम इन तीनों नये कानूनों को मध्यप्रदेश में सफलतापूर्वक क्रियान्वयन कर दिया गया है और इन नये कानूनों के परिणाम स्वरूप चूंकि इनमें टेक्नालाजी का उपयोग प्रारंभ हुआ है जो दोष सिद्ध करने में वृद्धि हुई है. पहले दोष सिद्ध करना थोड़ा कठिन होता था इन नये कानूनों में सरल हुआ है और 63 प्रतिशत अपराधियों को हम दोष सिद्ध करने में सफल हुए हैं और इन कानूनों को भी हमने अपने पुलिस कर्मियों को,अधिकारियों को,फोरेंसिक इत्यादि जो भी इससे संबंधित हैं उनको प्रशिक्षित किया है. एक नया प्रयोग और मध्यप्रदेश की सरकार ने किया है इसका उल्लेख करना आवश्यक है सभी गंभीर अपराधों में  मोबाईल फोरेंसिक लेब एवं वैज्ञानिक  अधिकारियों को घटना स्थल पर तत्काल पहुंचाने के लिये 1266 पद स्वीकृत किये गये हैं तथा वैज्ञानिक अधिकारियों की उच्च गुणवत्ता की फारेंसिक ट्रेनिंग के लिये नेशनल फारेंसिक साईंस यूनिवर्सिटी गुजरात से एमओयू किया है. इसी क्षेत्र में 14 नवीन मोबाईल फोरेंसिक वेन खरीदी जा चुकी हैं. जो तत्‍काल घटनास्‍थल पर जाकर फॉरेन्‍सिक जांच कर सकती हैं. आगामी समय में 43 और फॉरेन्‍सिक वेन क्रय कर प्रत्‍येक जिले में ये वेन पहुँचाने का संकल्‍प मध्‍यप्रदेश सरकार का है. मध्‍यप्रदेश के थानों का भी आधुनिकीकरण किया जा रहा है. मध्‍यप्रदेश के थानों में अनिवार्य रूप से सीसीटीवी कैमरा सिस्‍टम लगाया जा रहा है. मेरे पास विस्‍तार से जानकारी है, लेकिन अध्‍यक्ष महोदय के आदेश का पालन करते हुए मैं विस्‍तार में नहीं जा रहा हूँ. अध्‍यक्ष महोदय, चिह्नित अपराधों में भी मध्‍यप्रदेश की पुलिस ने बहुत तत्‍परता से काम किया है. 106 अपराधों को चिह्नित किया है. जिनमें 908 प्रकरण अर्थात् 82 प्रतिशत प्रकरणों का निराकरण हुआ है. इसमें 629 प्रकरणों में यानि 69 प्रतिशत, जो अपने आप में बहुत बड़ा आंकड़ा है, 69 प्रतिशत प्रकरणों में दोष सिद्ध करने में हमारे मध्‍यप्रदेश की पुलिस सफल हुई है. इनमें से 6 प्रकरणों में आरोपी को मृत्‍युदण्‍ड से भी दण्‍डित किया गया है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे माननीय सदस्‍यों ने कुछ विषय उठाए थे. हमारे वरिष्‍ठ नेता, इस सदन के वरिष्‍ठ सदस्‍य आदरणीय भंवर सिंह शेखावत जी ने कहा था कि कमिश्‍नर प्रणाली असफल है तो मुझे बताते हुए संतोष है कि कमिश्‍नर प्रणाली आने के बाद अपराधों में वृद्धि नहीं हुई है, बल्‍कि कमी आई है. भोपाल में ही वर्ष 2021 में 19 हजार अपराध थे, जो आज 13 हजार हो गए हैं. इंदौर में वर्ष 2023 में 18 हजार थे, जो अब केवल 17,509 हैं. अपराधों में वृद्धि नहीं हुई है, बल्‍कि जनसंख्‍या में वृद्धि हुई है, उसके बाद भी अपराधों में कमी आई है. यदि हम इसकी तुलना करेंगे तो कमिश्‍नर प्रणाली हमारे यहां पर सफलतापूर्वक काम कर रही है. ऐसा मैं विश्‍वास व्‍यक्‍त करता हूँ. साथ में हमारे क्रांतिकारी नेता, समाज कल्‍याण के लिए अच्‍छे विचार रखते हैं, शायद अभी वे सदन में नहीं है, डॉ. विक्रान्‍त भूरिया जी ने भी कुछ विषय उठाए थे. उस विषय में महिला सुरक्षा के लिए मैं बताना चाहूँगा कि वर्ष 2025 में जो 13,146 बालिकाओं की गुम होने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी, उसके विरुद्ध 14,520 बालिकाओं को खोज लिया गया है. पिछले 5 वर्ष में 54,803 बालिकाओं की गुम होने की शिकायत दर्ज हुई थी, उसके विरुद्ध 55,803 बालिकाओं को खोजा गया है. यानि 1,000 से भी ज्‍यादा बालिकाएं जो पहले सालों में गुम हुई थी, उनको भी खोजने में हमारे मध्‍यप्रदेश की पुलिस सफल हुई है. निश्‍चित रूप से मध्‍यप्रदेश के अंदर हमारी पुलिस अपने प्राणों की आहुति देकर भी मध्‍यप्रदेश के नागरिकों की सुरक्षा कर रही है. इसलिए उनके प्रति सदन के माध्‍यम से आभार व्‍यक्‍त करता हूँ. यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉक्‍टर मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश में कानून की व्‍यवस्‍था सुदृढ़ है और निश्‍चित रूप से मध्‍यप्रदेश शांति का टापू था, है और रहेगा. धन्‍यवाद.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

05.18 बजे                                   अध्‍यक्षीय घोषणा

स्‍वल्‍पाहार की व्‍यवस्‍था विषयक

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय सदस्‍यों के लिए लॉबी में चाय की व्‍यवस्‍था है. सभी लोग चाय अपनी सुविधा से ग्रहण कर सकते हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष जी, एक कृपा और कर दीजिए. एक सिर दर्द की गोली भी वहां पर रखवा दीजिए. (हंसी).

 

05.19 बजे              वर्ष 2026-2027 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमश:)

          राज्‍य मंत्री, वन एवं पर्यावरण (श्री दिलीप अहिरवार) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूँ उन सभी सदस्‍यों को, जिन्‍होंने अनुदानों की मांगों के प्रस्‍ताव पर चर्चा में भाग लिया है. ऐसे सभी हमारे सम्‍माननीय विधायक जी, सदस्‍य, चाहे हमारे वरिष्‍ठ सदस्‍य हों, चाहे हमारे भंवर सिंह शेखावत जी हों, चाहे हमारी आदरणीय श्री विक्रांत भूरिया जी हों, सम्‍माननीय हमारे श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन जी, हमारी सम्‍माननीय श्रीमती झूमा डॉ. ध्‍यान सिंह सोलंकी जी, हमारे सम्‍माननीय श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह जी, हमारे सम्‍माननीय रामेश्‍वर शर्मा जी एवं अन्‍य सभी सदस्‍यों ने जो चर्चा में भाग लिया है. मैं उन सबको धन्‍यवाद भी देता हूँ और साथ में जो उन्‍होंने सुझाव दिए हैं, उन सुझावों पर गंभीरता से हम विचार भी करेंगे और जो जनता के हित में, प्रदेश के हित में होगा, उसको हम ध्‍यान में रखेंगे.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे कहने में बड़ा हर्ष होता है कि वन एवं पर्यावरण के विषय में बोलने के लिए मैं खड़ा हुआ हूँ. वन विभाग जिस प्रकार से नवाचार के माध्‍यम से संपूर्ण मध्‍यप्रदेश में जाना जा रहा है, उसका विषय अभी बीच में हमारे माननीय श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन जी ने भी रखा तथा और भी हमारे सदस्‍यों के माध्‍यम से रखा गया है.जिस प्रकार से हमारा विभाग काम कर रहा है. सरकार का यह दृढ़संकल्‍प है कि वानिकी के माध्‍यम से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुँचाया जाये, ताकि उन्‍हें मुख्‍यधारा से जोड़कर खुशहाल किया जा सके. वन तथा वन्‍यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता में रखते हुए, उनके सर्वहित की दिशा में विभाग लगातार कार्यरत है, इस प्रकार वनों पर आश्रित ग्रामीणों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास की दिशा में प्रभावी पहल की गई है.

          अध्‍यक्ष महोदय, वन अनुसंधान संस्‍थान, देहरादून द्वारा 2 वर्ष के अन्‍तराल पर देश के वनों की स्थिति पर रिपोर्ट प्रकाशित की जाती है. वर्ष 2005 से वर्ष 2023 तक मध्‍यप्रदेश के वन आवरण में 1 हजार 60 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है. मुझे यह बताने में खुशी होती है कि हम जिस प्रकार से काम करते हैं, आत्‍मनिर्भर मध्‍यप्रदेश के अन्‍तर्गत 3 वर्षों में वन समितियों के लगभग 5 हजार माइक्रो प्‍लान तैयार करने के लक्ष्‍य के विरुद्ध वर्तमान में 5 हजार 128 ग्राम वन समितियों पर माइक्रो प्‍लान आधारित प्रबंध लागू कर दिया गया है. हम सबके बीच में बहुत महत्‍वपूर्ण चीजें होती हैं, जैसे 'एक जिला एक उत्‍पाद' को लेकर हम बात करेंगे तो ऐसे हमारे 6 महत्‍वपूर्ण जिले हैं- चाहे वह बैतूल बैतूल जिले में सागौन की बात हो,  देवास, हरदा एवं रीवा में बांस की बात हो,  अलीराजपुर तथा उमरिया में महुआ उत्‍पाद की बात हो, इसमें भी हम बहुत आगे बढ़ रहे हैं. हम निश्चित रूप से बैतूल जिले में सागौन के उत्‍पादन का चयन कर क्‍लस्‍टर हेतु 20 हेक्‍टेयर भूमि का चयन कर क्‍लस्‍टर के विकास के आवंटन हेतु प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी कर ली गई है. ऐसे अनेक काम वन विभाग के द्वारा हो रहे हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिसमें एक बहुत महत्‍वपूर्ण योजना प्रधानमंत्री वन धन विकास योजना, जो हम सबके बीच में निश्चित रूप से, जिस प्रकार से जनजातीय, हमारे भाइयों को, उस समुदाय को कैसे वह आगे बढ़ें ? उनकी आय की वृद्धि कैसे हो ? वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री वन धन विकास योजना का आरंभ किया गया था. जिसमें 20 जिले में लगभग 126 वन धन विकास के अन्‍तर्गत स्‍थापित भी किए गए हैं. जिसमें हमारे जंगलों में रहने वाले आदिवासी भाइयों को मजबूत किया जा सके, अब हम मध्‍यप्रदेश इको पर्यटन विकास बोर्ड की भी बात करें, विभाग द्वारा महत्‍वपूर्ण एक और काम भी है. जागरूकता अभियान. हर वर्ष हम लोग जागरूकता अभियान के माध्‍यम से जिस प्रकार हमारा विभाग काम करता है, ऐसे अनेक काम हैं, इनमें एक अनुभूति प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम भी हम सबके बीच में है. वैसे तो और भी कई कार्यक्रम हैं. हरियाली महोत्‍सव हो, वन्‍यप्राणी सप्‍ताह हो, अनुभूति जैसे अनेक आयोजन हैं, मगर इसमें महत्‍वपूर्ण अनुभूति इसलिए है कि निश्चित रूप से हम लोग हर वर्ष एक थीम के माध्‍यम से, 'मैं भी बाग हूँ', 'हम हैं बदलाव' एवं 'हम हैं धरती के दूत' के माध्‍यम से लगभग हम मध्‍यप्रदेश में 938 स्‍थानों पर एक कैम्‍प लगा चुके हैं, जिसमें उस क्षेत्र के रहने वाले स्‍कूल के बच्‍चे और एक लाख अठारह हजार एक सौ अठयासी प्रतिभागियों ने भाग लिया है, जिनको हम वन संरक्षण के बारे में वन्‍यजीवों के बारे में विस्‍तार से बताते हैं. मुझे सदन को बताने में बड़ी प्रसन्‍नता हो रही है. मैं देश के प्रधानमंत्री मोदी जी को  भी धन्‍यवाद करूँगा कि जिस प्रकार से 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान हमारे मध्‍यप्रदेश के अन्‍दर, पूरे देश के अन्‍दर चला और मध्‍यप्रदेश में हमारे मुख्‍यमंत्री जी के मार्गदर्शन में हम लोगों ने काम किया है. मगर 'एक पेड़ मां के नाम' का अवसर उसमें हम सबको भी मिला. 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान पर चाहे वह अधिकारी हो, चाहे ...(..व्‍यवधान..)

          श्री महेश परमार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अडाणी जी पेड़ कटवा रहे हैं, वह भी रुकवा दीजिये, माननीय मंत्री जी. 'एक पेड़ मां के नाम' पर लाखों करोड़ों पेड़ कट रहे हैं, वह भी रुकवा दीजिये. आपसे निवेदन है.

          श्री दिलीप अहिरवार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे खुशी होती है कि हमारे महेश भाई ने भी 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान में पेड़ लगाया होगा. नर्मदा जी के माध्‍यम से भी हम लोगों ने पेड़ लगाए हैं. अभी हमारे माननीय शेखावत जी भी एक बात कर रहे थे कि अभी नर्मदा के तट पर जो अलग-बगल में पेड़ लगे हैं. शेखावत जी बहुत सीनियर सदस्‍य हैं, बहुत अनुभवी भी है. मगर अनुभवी होने के बाद भी जब हमारे शेखावत जी इतने वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं और यह बात कहेंगे कि 6 करोड़ पेड़ अगल-बगल लगे और जीवित 6 लाख पेड़ भी नहीं हैं. एक प्रतिशत भी पेड़ जीवित नहीं हैं. माननीय शेखावत जी आप बहुत अनुभवी व्‍यक्ति हैं, मैं आपका बहुत सम्‍मान करता हूँ. अगर आप इस प्रकार की बात कहेंगे कि एक प्रतिशत पेड़ भी जीवित नहीं हैं. वन विभाग की एक पॉलिसी होती है. यदि 50-60 प्रतिशत से कम पेड़-पौधे जीवित पाये जाते हैं तो इसमें हमारे अधिकारियों पर कार्रवाई होती है, हमने कई जगह कार्रवाई की है, रिकवरी भी निकाली है. मुझे लगता है कि आप इतने अनुभवी होकर ऐसा कहेंगे तो मुझे यह बड़ा गंभीर विषय लगा लेकिन फिर भी मैं आपका सम्‍मान करता हूं.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंहये शेखावत जी का जुमला है.

          श्री दिलीप अहिरवार-  आप वरिष्‍ठ हैं, आप सब कुछ कह सकते हैं. आपका सम्‍मान करते हैं. संयुक्‍त वन प्रबंधन की बात हो, वन संरक्षण की बात हो, वन संरक्षण को लेकर महत्‍वपूर्ण कार्य हमारा विभाग कर रहा है. अभी कई ऐसी चीजें आईं, चाहें जंगलों में आगज़नी की बात हो, ऐसी कई घटनायें हुई हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  अध्‍यक्ष महोदय, यदि अधिक लंबा भाषण हो तो पटल पर रखवा दीजिये, सभी को विश्‍वास है, पूरे सदन को विश्‍वास है, नेता प्रतिपक्ष भी मेरी बात से सहमत होंगे कि जो मंत्री जी जो कह रहे हैं, सब सही है.

           अध्‍यक्ष महोदय-  कृपया संक्षेप में कहें.

          श्री दिलीप अहिरवार-  अध्‍यक्ष महोदय, जैसा आपका आदेश हो, बिल्‍कुल संक्षेप में कह देता हूं. एक महत्‍वपूर्ण चीज है आगज़नी की घटना हो, इनके नियंत्रण के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में हमने 329 वन चौकियां, 4 जल चौकियां, 387 बैरियर तथा 53 अंतर्राज्‍यीय बैरियर स्‍थापित किए हैं. वन सुरक्षा हेतु मैदान अमले में 12 बोर की 3100 बंदूकें, 7 ड्रोन और 5000 मोबाईल सिम भी दी गई हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय-  शेखावत जी ने प्रारंभ किया था, वे प्रारंभ करते हैं तो लोग घबरा जाते हैं, जूनियर मंत्री हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  मेरे विचार से वे भी इसके लिए तैयार है कि शेष पढ़ा हुआ मान लिया जाये.   

          अध्‍यक्ष महोदय-  मंत्री जी, आप भाषण पूर्ण करें.

          श्री दिलीप अहिरवार- अध्‍यक्ष महोदय, आपने संक्षेप में कहने को कहा था. मुख्‍य-मुख्‍य विषय ही कह देता हूं, वन उत्‍पादन हो या वन प्राणी प्रबंधन की बात हो, इसके लिए मैं मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद दूंगा कि उनके मार्ग दर्शन में आज वन प्रबंधन चल रहा है, हमारे पूर्व वक्‍ताओं ने बताया कि प्रदेश में 11 राष्‍ट्रीय उद्यान, 26 अभ्‍यारण तथा 9 टाइगर रिज़र्व हैं, जो देश में सर्वाधिक हैं. ऐसे अनेक कार्य हमारे टाइगर रिज़र्व क्षेत्रों में हो रहे हैं. वन भूमि की बात हो, कैंपा योजना की बात हो, "नगर वन योजना" यह बहुत महत्‍वपूर्ण योजना है, प्रदेश के 43 जिलों में नगर वन योजना अंतर्गत कुल 3119 हेक्‍टेयर क्षेत्र में 94 नगर वन वाटिकाओं का कार्य हो रहा है, जो राष्‍ट्रीय स्‍तर पर सर्वाधिक है. मुझे गर्व है कि जिस प्रकार से ये नगर वन बन रहे हैं, सांस्‍कृतिक वन बन रहे हैं, इन्‍हें आप देखेंगे तो आपको भी हर्ष होगा. इसके लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी जी एवं मुख्‍यमंत्री जी का अभिनंदन करूंगा, ऐसे अनेक कार्य, समृद्धि वन की बात हो, मध्‍यप्रदेश राज्‍य बांस मिशन की बात हो, जो बांस को बढ़ावा देते हैं, नि‍श्चित रूप से वन विकास निगम में ऐसे अनेक कार्य हो रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, पर्यावरण के विषय में आपकी अनुमति से कहना चाहूंगा कि मेसर्स यूनियन कार्बाइड इंडियन लिमिटेड, भोपाल में संग्रहित 337 टन अपशिष्‍ट का निष्‍पादन सफलतापूर्वक पीथमपुर में किया गया. भारत सरकार द्वारा स्‍वच्‍छ वायु सर्वेक्षण में जबलपुर, देवास, इंदौर को पुरस्‍कृत किया गया है. मध्‍यप्रदेश के 7 मुख्‍य शहरों में, 5 शहरों में वायु गुणवत्‍ता में क्रमश: भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्‍वालियर तथा देवास में सुधार किया गया है. ऐसे अनेक कार्य वन एवं पर्यावरण विभाग में किए जा रहे हैं, हमारे विभाग में बहुत से नवाचार हमें देखने को मिल रहे हैं. आने वाले समय में सदन के माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि मुख्‍यमंत्री जी के मार्गदर्शन में हम, नवाचार के माध्‍यम से और अधिक कार्य करेंगे, धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय-  बहुत अच्‍छा दिलीप भाई.

 

 

05.29 बजे

अध्‍यक्षीय घोषणा

सदन के समय में वृद्धि विषयक

          अध्‍यक्ष महोदयआज की कार्यसूची के पद 7, अनुदान मांगों पर मतदान के पद (2), में उल्‍लेखित मांगें पूर्ण होने तक, सदन के समय में वृद्धि की जाये, मैं समझता हूं कि सदन इससे सहमत है.

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.)      

            श्री उमंग सिंघार-  अध्‍यक्ष जी, हम आपकी भावना से सहमत हैं लेकिन लगता नहीं है कि सदन सहमत है. (हंसी)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अनुदान की मांगों के बारे में प्रस्‍ताव

                                               

 

       अध्‍यक्ष महोदय-- अब इन मांगों पर कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत होंगे. कटौती प्रस्‍तावों की सूची पृथकत: वितरित की जा चुकी है. प्रस्‍तावक सदस्‍य का नाम पुकारे जाने पर जो माननीय सदस्‍य हाथ उठाकर कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किये जाने हेतु सहमति देंगे, उनके कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुए माने जायेंगे.

         मांग संख्‍या- 018                                                         श्रम

                                                                                     क्रमांक

         श्री नारायण सिंह पट्टा                                                   01

         श्री यादवेन्‍द्र सिंह                                                         02

         श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर                                           03

         मांग संख्‍या- 030                                               ग्रामीण विकास

                                                                                  क्रमांक

          श्री राजन मण्‍डलोई                                                     02

          श्री नारायण सिंह पट्टा                                                  03

          श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव                                            07

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्‍यान सिंह सोलंकी                                  09

          श्रीमती अनुभा मुंजारे                                                   10     

          श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर                                          11

          श्री नारायण सिंह पट्टा                                                  12

          श्री फूलसिंह बरैया                                                       14

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह                                                        15

          मांग संख्‍या- 040                                                    पंचायत

                                                                                    क्रमांक

          श्री फूलसिंह बरैया                                                       01

          श्री विवेक (विक्‍की) पटेल                                              02

          श्री कैलाश कुशवाह                                                       04

           श्रीमती झूमा डॉ. ध्‍यान सिंह सोलंकी                                  05

           श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर                                            06

            डॉ. हिरालाल अलावा                                                09

            श्री राजन मण्‍डलोई                                                    13

      

        अध्‍यक्ष महोदय-- उपस्थित सदस्‍यों के कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुए. अब मांगों एवं कटौती प्रस्‍तावों पर एक साथ चर्चा होगी. श्री राजेन्‍द्र मेश्राम जी.

 

            श्री राजेन्द्र मेश्राम (देवसर) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने बोलने का अवसर दिया इसके लिए मैं आपको हृदय की गहराई से बहुत बहुत धन्यवाद करता हूँ.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, आप मेरे आदर्श हैं. संगठन में भी मैंने आपके साथ काम किया है. आपका संरक्षण संगठन में भी मुझे प्राप्त होता रहा है. मुझे विश्वास है कि सदन में भी आज मुझे आपका संरक्षण प्राप्त होगा.

          अध्यक्ष महोदय -- राजेन्द्र जी संरक्षण पूरा है लेकिन संक्षिप्त में करना है.

          श्री राजेन्द्र मेश्राम --  अध्यक्ष महोदय, आपका जो आदेश होगा मैं उसका पालन करुंगा.

          अध्यक्ष महोदय -- मुझे बिलकुल भी दिक्कत नहीं है आप सभी लोग बैठने को तैयार हों तो मैं कितनी भी देर तक सदन चला लूंगा. जितना जल्दी करेंगे तो विषय ठीक से पूरे हो जाएंगे.

          श्री राजेन्द्र मेश्राम -- अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 18, 30 एवं 40 के पक्ष में अपने विचार रखने के लिए खड़ा हुआ हूँ.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से देश के यशस्वी प्रधानमंत्री, विश्व के सर्वमान्य नेता श्रीमान नरेन्द्र भाई मोदी जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ. उन्होंने श्रम कानूनों का सरलीकरण करके देश के श्रमिकों और उनसे जुड़े परिवारों की तकदीर बदलने का जो कार्य किया है उसके लिए हृदय की गहराई से मैं उनको धन्यवाद देना चाहता हूँ. मैं प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को भी धन्यवाद देना चाहता हूँ. मैं विभाग के मंत्री श्रीमान प्रहलाद पटेल जी को भी धन्यवाद देना चाहता हूँ. जिनकी दूरदृष्टि सोच के कारण कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के तहत प्रदेश के करोड़ों संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के कल्याण तथा उनको सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दृष्टि से श्रम विभाग द्वारा चार मण्डलों के माध्यम से कल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया गया है. 1. मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल, भोपाल. 2. मध्यप्रदेश स्टेट पेंसिल कर्मकार मंडल, मंदसौर. 3. मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल, भोपाल. 4. मध्यप्रदेश शहरी एवं ग्रामीण असंगठित कर्मकार मंडल, भोपाल.

          अध्यक्ष महोदय, श्रमिक पहले भी हुआ करते थे उनसे जुड़े उनके परिवार के लोग भी हुआ करते थे. पहले भी सरकार हुआ करती थी. पहले की सरकारों ने कभी उनकी चिंता नहीं की. अगर कोई चिंता करने वाला है तो राष्ट्रवादी विचारों की सरकार भारतीय जनता पार्टी की सरकार है जो केन्द्र में भी है और प्रदेश में भी है. जिसकी वजह से आज यह जनकल्याणकारी योजनाएं इस मंडल के माध्यम से लाई गई हैं. मध्यप्रदेश श्रम कल्याण मंडल, भोपाल द्वारा संचालित योजनाओं तथा शैक्षणिक छात्रवृत्ति योजना, शिक्षा प्रोत्साहन योजना, विवाह सहायता योजना, अंतिम संस्कार सहायता योजना, कल्याणी सहायता योजना, उत्तम श्रमिक पुरस्कार योजना, श्रमिक साहित्य पुरस्कार योजना, अनुग्रह सहायता योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2025-2026 में 31 दिसंबर, 2025 तक 19912 श्रमिकों को रुपए 8 करोड़, 74 लाख, 2 हजार की सहायता राशि का लाभ दिया गया है.

5.39 बजे              {सभापति महोदय (श्री लखन घनघोरिया) पीठासीन हुए}

        श्री राजेन्द्र मेश्राम -- माननीय सभापति महोदय, यह अपने आप में एक मिसाल है. मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल, भोपाल द्वारा निर्माण कार्यों में लगे असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने हेतु आयुष्मान भारत योजना, ई-स्कूटर अनुदान योजना, विवाह सहायता योजना, भवन एवं अन्य संनिर्माण दिव्यांग सहायता अनुदान योजना, प्रसूति सहायता योजना, मृत्यु की दशा में अंत्येष्टि सहायता एवं अनुग्रह भुगतान योजना, कुशल श्रमिक प्रशिक्षण योजना, मुख्यमंत्री जनकल्याण शिक्षा प्रोत्साहन योजना, सुपर 5 हजार योजना, कक्षा दसवीं एवं बारहवीं राज्य लोक सेवा आयोग एवं संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पर सफलता पुरस्कार योजना, खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना, निर्माण पीठा श्रमिक आश्रय शेड योजना, निर्माण श्रमिक रैन बसेरा योजना, सायकल अनुदान योजना, मुख्यमंत्री भवन एवं अन्‍य सन्निर्माण कर्मकार नगरीय एवं ग्रामीण आवास योजना, श्रमोदय आदर्श आईटीआई योजना, निर्माण श्रमिक विश्राम गृह योजना, 2025 सहित 25 योजनाएं संचालित की जाती हैं. वित्‍तीय वर्ष 2025-26 में 31 दिसम्‍बर, 2025 तक इन योजनाओं में असंगठित क्षेत्र के 90,106 हितग्राहियों को रुपये 369.60 करोड़ की सहायता राशि से लाभान्वित किया गया है. मध्‍यप्रदेश शहरी एवं ग्रामीण असंगठित कर्मकार कल्‍याण मण्‍डल भोपाल द्वारा प्रदेश के पंजीकृत असंगठित श्रमिकों हेतु संचालित मुख्‍यमंत्री जनकल्‍याण संबल योजना के तहत अंत्‍येष्ठि सहायता अनुग्रह सहायता, सामान्‍य मृत्‍यु अनुग्रह सहायता, दुर्घटना मृत्‍यु अनुग्रह सहायता, स्‍थाई अपंगता अनुग्रह सहायता, आंशिक स्‍थाई अपंगता का संचालन किया जाता है. वित्‍तीय वर्ष 2025-26 में 31 दिसम्‍बर, 2025 तक इन योजनाओं में कुल 62,029 हितग्राहियों को रुपये 506.10 करोड़ का हित लाभ वितरण किया गया है.

          सभापति महोदय, अब मैं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के ऊपर अपने विचार रख रहा हूं. मैं पुन: देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री को धन्‍यवाद देना चाहता हूं जिनकी दूरदर्शी सोच की वजह से देश में अनेक जनकल्‍याणकारी योजनाओं के माध्‍यम से उन्‍होंने देश का सर्वांगीण विकास किया है. जिसके तहत प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, स्‍वच्‍छ भारत मिशन, राज्‍य ग्रामीण आजीविका मिशन, जीरामजी राज्‍य रोजगार गारंटी परिषद, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, प्रधान- मंत्री पोषण शक्ति निर्माण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, पंचायतराज संचालनालय कार्य कर रहे हैं. हम प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण की बात करें जिसमें अनेकों उपलब्धियां प्रदेश को मिली हैं. योजना प्रारंभ वर्ष 2016-17 से 2021-22 तक प्राप्‍त कुल लक्ष्‍य 37.99 लाख आवास के विरुद्ध 37.98 लाख आवास स्‍वीकृत किए गए जिसमें 36.91 लाख आवास पूर्ण कराए गए जिसमें पूर्णता का प्रतिशत 97.20 रहा. इसलिए देश के प्रधानमंत्री बधाई के पात्र हैं. प्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री और विभागीय मंत्री भी बधाई के पात्र हैं जिन्‍होंने इस योजना को शत् प्रतिशत पूर्ण करने का अद्वितीय कार्य किया है. इसलिए भी मैं प्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी एवं विभाग के विद्वान मंत्री श्रीमान् प्रह्लाद पटेल जी को भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं. वर्ष 2024-25 में प्राप्‍त कुल लक्ष्‍य 11.74 लाख के विरुद्ध 11.47 लाख आवास स्‍वीकृत किए गए जिसमें 4.6 लाख आवास पूर्ण कराए गए. पूर्णता का प्रतिशत् 40.30 रहा. वर्ष 2025-26 में प्राप्‍त कुल लक्ष्‍य 5.31 लाख के विरुद्ध 1.58 लाख आवास स्‍वीकृत किए गए जो प्रगतिरत् हैं. शेष आवासों का पंजीयन एवं स्‍वीकृति की कार्यवाही प्रचलित है. मध्‍यप्रदेश सरकार ने राष्‍ट्रीय स्‍तर पर उल्‍लेखनीय उपलब्धि प्राप्‍त की है. जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत् प्रारंभ से अब तक स्‍वीकृत आवास 91.03 लाख के विरुद्ध 41.53 लाख आवास पूर्ण कर आवास पूर्णता की संख्‍या के आधार पर मध्‍यप्रदेश देश में प्रथम स्‍थान पर है इसलिए भी बधाई के पात्र हैं. योजनांतर्गत वर्ष 2025-26 में राशि रुपये 8,400 करोड़ के प्रावधान के विरुद्ध अब तक राशि रुपये 4,913 करोड़, 42 लाख का व्‍यय किया जा चुका है.

          माननीय सभापति महोदय, प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान पीएमजनमन योजना के अंतर्गत प्रदेश के 24 जिलों में सहरिया, भारिया, बैगा पीवीटीजी जनजातीय समूह के हितग्राहियों को आवास निर्माण हेतु प्रति आवास 2 लाख रूपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत की जाती है. 1 लाख 87  हजार 519 स्वीकृत आवासों में से 1 लाख 35 हजार 631 आवास का निर्माण पूर्ण हुआ है जिसमें 72.3 प्रतिशत उपलब्धि हुई है.

          माननीय सभापति महोदय, प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान पीएमजनमन योजना के अंतर्गत स्वीकृत एवं पूर्ण आवासों की संख्या के मान से मध्यप्रदेश देश में प्रथम स्थान पर रहा है.

          माननीय सभापति महोदय, प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी एवं विभागीय मंत्री माननीय प्रहलाद सिंह पटेल जी को भी धन्यवाद देता हूं योजना की प्रतीक्षा सूची में शामिल होने से शेष रहे पात्र आवासहीन एवं कच्चे आवासधारी परिवारों की सूची बनाने के लिये भारत सरकार के निर्देशानुसार..

          सभापति महोदय-- राजेन्द्र जी कृपया समय सीमा का ध्यान रखें. 11 मिनिट आपको हो गये हैं.

          श्री राजेन्द्र मेश्राम- मैं तो प्रथम वक्ता हूं.अभी तो मैंने शुरू ही किया है. ठीक है . माननीय सभापति महोदय भारत सरकार के निर्देशानुसार आवास प्लस सर्वे 2024 के अंतर्गत प्रदेश में 61.98 लाख आवेदक सर्वे के माध्यम से दर्ज किये गये हैं. इन प्राप्त आवेदनों का सत्यापन कार्य प्रचलित है एवं भारत शासन से निर्धारित मापदंड एवं प्रक्रिया अनुसार प्रतीक्षासूची को अंतिम रूप दिया जा रहा है.

          सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि हम लोग सभी इस सदन में बैठे हुये माननीय लोग अपनी क्षमता प्रतिभा और अपने दल की ओर से चुनाव जीतकर के यहां पर आते हैं. लेकिन हम इस सदन में बैठकर के कहते हैं कि यह हमारा मंदिर है, लेकिन कभी भी सत्य का वाचन नहीं, करते हैं, सच को स्वीकार करना चाहिये. हमने भी देखा है. जब अमूमन 53 साल तक कांग्रेस का शासन रहा है. श्रृद्धेय अटल जी का कार्यकाल छोड़ दीजिये ,कब आपने और हमने देखा था कि देश के दुरांचल में, वनांचल में, गिरिजांचल में, सड़कें हुआ करती थीं और वह सब अटल जी की देन है. यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार की देन है, आप 2003 के पहले का मध्यप्रदेश देख लीजिये . सभापति जी आप तो विद्वान व्यक्ति हैं. मध्यप्रदेश बीमारू राज्य के नाम से जाना जाता था. मैं यह अनुरोध बड़ी ईमानदारी के साथ में करना चाह रहा था, मैं अनुशासनप्रिय हूं, अनुशासनहीनता नहीं करता.

          सभापति महोदय- राजेन्द्र जी समय का ध्यान रखें.

          श्री उमंग सिंघार -- सभापति महोदय, चर्चा करनी है तो फिर बात लंबी जायेगी. इनकी विधानसभा तक जायेगी. (xx) वहां पर कुछ नहीं करते. यह अपने क्षेत्र में नहीं जा पाते हैं, ऐसे विधायक हैं यह.

          श्री राजेन्द्र मेश्राम--माननीय नेता प्रतिपक्ष जी हम चर्चा के लिये सदैव तैयार हैं. नेता प्रतिपक्ष जी अब आप मेरे बारे में सुन लीजिये, मैं वह गरीब घर का लड़का हूं जो आप सपने में नहीं सोच सकते. मैंने 2 लाख 70 हजार की नौकरी को रिजाइन करके जनता की सेवा कर रहा हूं. आप सुनने की आदत डालिये.

          श्री उमंग सिंघार - सेवा करने के लिये राजनीति में आये हैं तो वहां के आदिवासियों के पास में जाओ, सिंगरौली के आदिवासियों की मांग तो आप उठा नहीं पाते हो, गरीब होने की बात कह रहे हो. चलो धरने पर बैठो हम आयेंगे आपके साथ में हम भी बैठेंगे, आप बैठो धरने पर .

                                                ...व्यवधान...

          सभापति महोदय- राजेन्द्र जी आपकी बात आ गई है अब आप बैठें.

          श्री राजेन्द्र मेश्राम- सभापति महोदय, दो मिनट का समय और दे दें. सभापति महोदय मैं आपके माध्यम से बताना चाहता हूं (xx) 12 खदानें सिंगरौली में हैं, कांग्रेस की सरकार के समय वहां पर करोड़ों पेड़ कटे,तब किसी कांग्रेसी ने ऐसा नहीं किया आज क्षेत्र के विकास के लिये, आज 6 हजार पेड़ कट गये, (xx) इनका जमीन में कोई औचित्य नहीं है, इन्होंने क्या किया है, इन्होंने कुछ भी नहीं किया है.

          सभापति महोदय- आदरणीय फूल सिंह बरैया जी अपनी बात कहें.

...व्यवधान...

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- सभापति महोदय, आदरणीय राजेन्द्र जी सफल हो गये, उनको इन्टरेप्ट करने के लिये नेता प्रतिपक्ष को तीन बार खड़ा होना पड़ा.

                                                ...व्यवधान...

          श्री राजेन्द्र मेश्राम -- माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.

            श्री फूलसिंह बरैया (भाण्डेर)सभापति महोदय, प्रहलाद पटंल जी के विभाग से संबंधित  सब मांग संख्या कार्य सूची में शामिल हैं,  मैं इस पर  अपने विचार  रखना चाहता हूं. यह बड़ा विषय है कि बजट इतना भारी भरकम  है और यह भी मान रहे हैं कि बजट क्षेत्र में जाता भी है.  लेकिन  यह और मनवा दीजिये कि  जाता  किनके पास है.  यह बजट जहां जरुरत है, जिनके लिये है,  वहां पर नहीं पहुंच पाता है.  अब यहां पर श्रम  है, तो आपको मालूम है कि  श्रमिक  ज्यादातर  एक ही  वर्ग का व्यक्ति है.  अगर  श्रम के ऊपर सरकार  काम कर रही है,  बजट खर्च करती है,   तो फिर गांव से लोग बाजार  में  मजदूरी  करने क्यों आ रहे हैं.  सूबह सुबह बैठ जायें चौराहे पर  तो रैलियां सी आती हैं.  आज से 20 वर्ष पहले एक चौराहे पर  मजदूर एक भी नहीं बैठता था,  गांव से आने वाला,  आज उस चौराहे पर कम से कम एक हजार  से पन्द्रह सौ   लोग बैठते हैं.  दो चार को काम मिलता है,  बाकी  सब वापस चले जाते हैं.  जब सारी चीज बढ़ी हैं, तो  मजदूरों  की दशा भी तो बढ़े कि उनकी दशा  क्या थी, आज  क्या है.  जनसंख्या बढ़ रही है, मजदूर बढ़ रहे हैं, यह तो  एक  जुमला जैसा हो गया.  अगर सरकार का बजट वास्तव में  सरकार काम कर रही है,  तो फिर मजदूर गांव से निकल कर के  शहरों की तरफ रैली के रुप में न आयें.  यही नहीं है.  कहने में आसान है, प्रेक्टिकल कठिन है.   कहना बहुत आसान है कि हम यह कर रहे हैं, वह कर रहे हैं. सड़कों की भी हम बात करें.  अगर  आप पूरे म.प्र. का  सर्वे करवा लीजिये, सड़कें कहां पर डली हुई हैं,  कहां बनाई जा  रही हैं. हर वर्ग से बात करें.  तो हर वर्ग सहमत नहीं है कि हमारे  यहां नहीं बन रही हैं.  वह कहता है कि हमारे यहां बन नहीं रही हैं.  कांग्रेस  के माननीय सदस्यों की बात आप सुन  रहे हैं कि  कह रहे हैं कि   हमारे यहां वह काम   नहीं कर रहे हैं. हमारे यहां वह बजट नहीं आ रहा है.   मैं  एससी,एसटी और ओबीसी के क्षेत्र में खुद घूम रहा हूं.  माइनरिटी की तो चर्चा होती नहीं है.  उनके गांव  छोड़ दिये जाते हैं. जो गरीब  हैं, गरीबी रेखा में हैं,  निम्न वर्ग  से आते हैं.  वहां पर सड़कें नहीं बनती हैं.  सड़कें मंजूर होती हैं, सड़कें बनती भी हैं,  लेकिन इन  वर्गों के यहां पर सड़कें नहीं बनती हैं.  अगर सड़क कहीं मंजूर भी हो जायें तो ऐसे रोड़े  अटका  देंगे कि यहां  से नहीं बनने देंगे. यह हमारी जगह  प्रायवेट, फलां जगह है.  यह वह है. एक  बार डिस्टर्ब कर दिया तो फिर  वहां पर दोबारा सड़क  बनना बड़ा मुश्किल है.  ऐसे कई कार्य हैं.  हम लोग तो इसी में ज्यादा उलझे रहते हैं.   हमने अपना बजट दिया है,  अभी पंचायत विभाग का बजट  नहीं है,  इसको तो बन जाने दो.  सरकारी रोड को भी वह अपना कहते हैं कि यह हमारी जगह है,  हम  यहां से नहीं निकले देंगे. इसके लिये  जिला पंचायत सीईओ, कलेक्टर  सब इकट्ठे  होते हैं. फिर तहसीलदार, फिर बड़ा भारी ऐसा लगता है, यहां कोई बहुत बड़ा बजट लग रहा हो, तो इतना बड़ा डिस्टर्ब हो गया.   गरीब,  कमजोर लोगों को वह इसी में उलझाये रखते हैं.  ये आगे सोच भी नहीं पाता है.  पंचायत भवन  आप गांव में सर्वे करवाइये.  अभी तो नहीं बने हैं, अब  बनेंगे. पंचायत   भवन  बड़े  दो डिजाइन में आये हैं, मंत्री  जी  के पास उसकी सूची  भी   है.  मैं  मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि पंचायत भवन   जब भी बनें, तो उस  चीज का भी ध्यान रखिये कि  कहां पर जरुरी है.  पंचायत भवन  उसके दरवाजे पर  न बन जाये,  उसके मकान  खुद ही  पंचायत भवन जैसे हैं. पंचायत भवन पिछड़े और गरीब इलाकों में बनना चाहिये. जिससे उनको इसका लाभ भी मिल सके.

          श्री विश्‍वनाथ सिंह पटेल- पंचायत भवन सब जगह बनें है, हर पंचायत में बने हैं.

          श्री फूल सिंह बरैया- मैं साहब की बात का जवाब नहीं देना चाह रहा था. अभी धड़ल्‍ले से यह बोल कर गये हैं कि महिलाओं को कलेक्‍टर बनने का अधिकार भारतीय जनता पार्टी ने दिया है. मैं आपको बता दूं कि महिला के बारे में आपकी विचारधारा में लिखा है.

          श्री विश्‍वनाथ सिंह पटेल- लाड़ली लक्ष्‍मी बेटी बनाकर, हमने उनको इस लायक बनाया है. आज वह कलेक्‍टर बन रही हैं.

          श्री फूल सिंह बरैया- आप सुनने की भी क्षमता रखिये.

          श्री विश्‍वनाथ सिंह पटेल- रखते हैं.

          श्री फूल सिंह बरैया- आप जिस विचारधारा को लेकर चलते हैं उसमें लिखा ''स्‍त्री शुद्रो विद्या न अधिताम, ना स्‍त्री शुद्रो वेदमधियताम'' इनको विद्या नहीं देना चाहिये. जब विद्या ही नहीं देना चाहिये तो कलेक्‍टर कहां से बन जायेंगी. यह तो खैरियत है, मैं, आपको बताना चाहता हूं कि इस देश के ऊपर रहम किया है महात्‍मा ज्‍योति बा फूले ने, संविधान बना दिया बाबा साहब अम्‍बेडकर जी ने, हिन्‍दू कोड बिल पेश कर दिया जिससे महिला का भी पुरूष के बराबर और बेटी को बेटे के बराबर हक दिया है, इसको भी ध्‍यान रखिये कभी-कभी. अगर महिलाएं कलेक्‍टर बनती हैं तो वह सिर्फ और सिर्फ बाबा साहब अम्‍बेडकर के कारण बनती हैं और कोई दूसरा कारण नहीं है.

          इंजी. प्रदीप लारिया- आप यह बतायें कि कांग्रेस की सरकारों ने बाबा साहब अम्‍बेडकर को भारत रत्‍न क्‍यों नहीं दिया. यह केवल दुहाई देने का काम नहीं होना चाहिये.

          श्री फूल सिंह बरैया- अब वह बाद में बात करेंगे.

          सभापति महोदय- आप अपनी बात जारी रखिये.

          श्री फूल सिंह बरैया- 20 जनवरी, 1949 को संविधान सभा को संविधान सौंप दिया गया था और 16 दिन बाद 12 दिसम्‍बर को भारतीय जनता पार्टी पहले जनसंघ में हुआ करती थी. (XX) और अगर आज संविधान लेकर के हम बैठे हैं.. (व्‍यवधान)

          संसदीय कार्य मंत्री( श्री कैलाश विजयवर्गीय)-  सभापति महोदय, यह घोर आपत्तिजनक है. (व्‍यवधान) मेरा व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है, इसको आप विलोपित करें.(व्‍यवधान)

          सभापति महोदय- बरैया जी, आप विषय पर बोले.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय- सभापति महोदय, आप इसको विलोपित करें.(व्‍यवधान)

          सभापति महोदय- इसको विलोपित किया जाये.

          सभापति महोदय- बरैया जी, आप विषय पर बोलें.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल- मैं बहुत आश्‍चर्य से कह रहा हूं कि वर्ष 1950 को संविधान बना बना और जनसंघ वर्ष 1952 में बना. बरैया जी को इतिहास पढ़ना आता है, पढ़े-लिखे हैं तो कम से कम ऐसी बातें सदन में तो मत करो. सभा में तो हम बहुत सारी बातें कर देते हैं, जो तथ्‍य से परे होती है. ऐसा सदन में नहीं करना चाहिये.

          सभापति महोदय- आप अपनी बात जारी रखिये.

          श्री फूल सिंह बरैया- मेरे पास प्रमाण है. मैं प्रमाण पेश दूंगा, ऐसी बात नहीं है. मैं कोई बात ऐसे ही नहीं कह रहा हूं. मैं तो इस बात के ऊपर कह रहा था कि मेरे को वह टोक रहे थे तो आप खुद ही कह गये हैं कि कलेक्‍टर तो हमने ही बनाये हैं. सभापति महोदय, आज भी आजादी को 78 वर्ष हो रहे हैं और आज भी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिला सरपंच, अन्‍य दबंग लोगों के सामने कुर्सी पर नहीं बैठ सकती है. हद तो तब हो गयी कि एक महिला, जब तक दबंग भाई नहीं आ पाये, तब तक कोई नहीं था तो उसने सोचा एक बार कुर्सी पर तो बैठ लूं और वह चारों तरफ देखकर धोखे से बैठ गयी तो उसे गोबर खिला दिया. (व्‍यवधान)

          श्री तुलसीराम सिलावट- सभापति महोदय, इस पर घोर आपत्ति है और आपत्ति इस बात की है कि इस समाज की कई जिला पंचायत अध्‍यक्ष बनी हैं. हमारी बेटी इना सतीश मालवीय, सबके बीच में बोलती है. यह बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं.

          सभापति महोदय- आप विषय पर बोलें.

          श्री फूल सिंह बरैया- यह विषय में ही पंचायत का. इसके बारे में सारा कलेक्‍शन करके दे दूंगा तो क्‍या ये उस दिन घोषणा कर देंगे कि मैं असत्‍य था. (व्‍यवधान)

श्री तुलसीराम सिलावट - आप रखो पटल पर, जो भी बोला है. कुछ भी बात आप कर रहे हैं.

श्री इन्दर सिंह परमार - सभापति महोदय, एक दिन तय कर लीजिए, आपके जितने प्रश्न है, मैं उसके जवाब दे दूंगा लेकिन जब सदन में दूसरे विषय पर चर्चा चले, यह अनावश्यक विषय पर, भड़काने वाले विषय पर बोलते हैं, भेद पैदा करने वाले विषय पर हमेशा बोलते हैं.

श्री फूलसिंह बरैया - मंत्री जी बहुत उपदेश देते हैं. आपके उपदेश सुनेंगे कभी.

सभापति महोदय - आप शीघ्र करें, आपको 12 मिनट हो गये हैं.

श्री फूलसिंह बरैया - सभापति महोदय, यह जो पुल और पुलिया हैं, पीएमजीएसवाइ की सड़कें हैं, आप देखेंगे, क्षेत्र में ऐसा लगेगा कि हम जाने कब के घूम रहे हैं, कहां पिछले समय से घूम रहे हैं. अब आप कहेंगे कांग्रेस थी तब, तो कांग्रेस पर थोड़ा बजट था तो उसने रपटा तो बना दिये थे, लेकिन जब बजट बढ़ गया है तो उसमें पुल बनाइए, उसमें सड़कें बना दीजिए. खास करके गरीब वर्गों की तरफ ध्यान रखकर बनाइए और अगर ये बातें हम अपनी भलाई की करें, अपने विकास की करें तो इसको भड़काना मत कहिए, नहीं तो यह सरकार एकपक्षीय मानी जाएगी. वह अलग बात है कि कुछ भी करिए. पीएम आवास योजना है, आपकी योजना है, देश की योजना है. प्रधानमंत्री के नाम की योजना है. सचिव वह है जो सौदा करता है कि कौन-कौन को हम आवास देंगे, इसके ऊपर कौन कंट्रोल करेगा.

सभापति महोदय, यही नहीं है, पूरे क्षेत्र में अगर आप देखें. श्मशान की पोजिशन, माननीय मंत्री जी को कहना चाहता हूं कि यह किसी के वह काम नहीं हैं कि निंदा करने का विषय है. कई श्मशानों पर दबंगों के कब्जे हो गये हैं. जनसंख्या बढ़ रही है, जमीन घट रही है, उन्होंने श्मशान को जोत लिया. अब श्मशान में निकलने के लिए जगह नहीं है. अब कोई उनका आदमी जाता है वह तो जला देते हैं या उसके घर में काफी खेती है तो खेती में जला देते हैं. गरीब आदमी जाता है तो जलाने नहीं देते हैं तो विषय बन जाता है, जब इस वर्ग को नहीं जलाने दिया. जब श्मशान को आप खाली कराएं. श्मशान की रोड बना दें, उसमें अगर कोई व्यक्ति अपने मुर्दे को जलाने जाएगा तो फिर यह समस्या पैदा ही नहीं होगी. ऐसी समस्याएं पूरे क्षेत्र में हैं. हर तीसरे चौथे गांव में बनी हुई है.

सभापति महोदय, आपके माध्यम से मैं चाहूंगा माननीय मंत्री महोदय इस मसले पर ध्यान दें और यह मैं नहीं कह रहा हूं कि कब्जा कर लेता है कोई दबंग व्यक्ति, उसका असर गरीब पर पड़ता है. उसका असर उस पर नहीं पड़ता है, वह तो अपने खेतों में बना देता है और बड़ा स्मारक भी बना देता है, लेकिन गरीब आदमी कहां पर जलाने जाए. इसके ऊपर सभापति महोदय, आपके माध्यम से कहना चाहूंगा कि माननीय मंत्री जी ध्यान दें और आपने बहुत कुछ किया है तो इसको भी कर दीजिए. उसमें कोई बुराई नहीं है. धन्यवाद.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय - (अनुपस्थित)

            श्री ओमप्रकाश सखलेचा (जावद) - धन्यवाद. सभापति महोदय, मैं वास्तव में धन्यवाद करूंगा पंडित दीनदयाल जी के उस सपने को साकार करने के लिए माननीय विभाग के मंत्री श्रीमान् प्रहलाद सिंह पटेल जी ने तीनों विभागों में जिस गंभीरता से काम किया है, उस गंभीरता से उनके बजट में भी कई गुना वृद्धि हुई है. मैं शुरुआत करता हूं, श्रम विभाग का मेरे पास में चार्ट है वर्ष 2025-26 में जब 779 करोड़ का बजट था, वह बढ़कर 1672 करोड़ रुपये का हो गया है क्योंकि वह वास्तव में सबसे आखिरी और सबसे गरीब वर्ग के उठाने के लिए किया गया है. मैं अभी चर्चा में सुन रहा था. मुझे बहुत अच्छे तरीके से याद है कि 350 गांव मेरे विधान सभा में भी हैं. पहली बार अगर किसी ने सोचना शुरू किया तो चाहे अंतिम छोर के गांव तक सड़क पहुंचाने का प्रधानमंत्री सड़क योजना के माध्यम से जो कार्य किया गया, प्रधानमंत्री सड़क के बजट में भी काफी वृद्धि हुई. मैं देख रहा था, मैं गणित हिसाब लगा रहा था कि वर्ष 2005 में मैंने श्रम विभाग में पहली बार श्रमिक कार्ड बनाने का काम शुरू किया था. उसके पहले ज्यादातर श्रम विभाग के असंगठित श्रमिक के जितने पैसे इकट्ठे हो रहे थे और जब 8 हजार लोगों का पंजीयन हुआ.उसमें सबसे ज्‍यादा श्रमिक लोगों के बच्‍चों की शिक्षा का अनुदान और उनकी किसी भी दुर्घटना में उनको जो आर्थिक सहायता दी जाती है और बेटी के विवाह में जो सहायता दी जाती है, वह 5 हजार परिवारों को जावद में दिलवायी है.

          सभापति महोदय, मैं कहना चाहता हॅूं कि जागरूकता अपने में चाहिए, न कि आरोप विभाग पर लगाया जाए. अगर जागरूकता आप में है, तो यह ऑन रिकॉर्ड है. मुझे आज भी याद है कि वर्ष 2009-10 में पूर्व मुख्‍यमंत्री माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने विधायक दल की बैठक में इस विषय को उठाकर कहा था कि कैसे किसी योजना का अंतिम छोर तक फायदा उठाया जाये. ऐसे ही अगर ग्रामीण विकास के बजट की बात करें, तो वह भी 25-25 प्रतिशत बढ़ाया गया है. यह बढ़ाने का काम रिजल्‍ट ओरिएंटेशन पर होता है. जब हम आखिरी छोर तक किसी योजना को बनाते हैं, उसके लिए बहस करते हैं.

          सभापति महोदय, पहली बार छोटे-छोटे गांवों में सामुदायिक भवन की शुरूआत की गई. मैं माननीय श्री प्रहलाद सिंह पटेल जी को बधाई देना चाहता हॅूं कि उन्‍होंने उस विषय तक सोचकर वहां तक दिया. यह बात अलग है कि मैंने सबसे पहले जाकर आवेदन दिया, मुझे एक भी नहीं दिया गया. फिर भी मुझे तारीफ करनी पडे़गी कि वास्‍तव में एक योजना के बारे में सोचना और उसके बारे में कार्य करना यह महत्‍वपूर्ण है.

          सभापति महोदय, मैं अभी सुन रहा था, जब हमारे सम्‍माननीय विधायक जी कह रहे थे कि हमारे माननीय मंत्री जी ने घोषणा कर दी कि वर्ष 2026 तक हर श्‍मशान घाट तक का सुरक्षित रास्‍ता और वहां की पूरी व्‍यवस्‍था के लिए उन्‍होंने विभाग को प्राथमिकता दी (मेजों की थपथपाहट) और सरपंचों को कडे़ निर्देश दिये और यह पहली बार हुआ. यह आज नहीं, बल्‍कि उन्‍होंने कई महीनों पहले यहीं विधानसभा में ही घोषणा की थी. हमारे विधायक साथी कई बार सुनते नहीं हैं, ध्‍यान नहीं देते हैं केवल राजनैतिक दृष्‍टि से कुछ भी बोलना वास्‍तव में कहीं न कहीं जनता उसका आंकलन करती है. मैं जब भी बात करता हॅूं, पहले तथ्‍यों को इकट्ठा करता हॅूं. मैं अगर बात करूं, तो पिछले साल 1155 अटल पंचायत भवन दिये, जिस पर 438 करोड़ रूपए की राशि खर्च की, लेकिन इस साल 2025-26 में उसकी संख्‍या बढ़ाकर 475 करोड़ रूपए के प्रावधान के साथ 1268 अटल पंचायत भवन किया. इसी प्रकार जहां-जहां जनपद भवन कम थे, वहां 106 जनपद भवन भी स्‍वीकृत किए, जिनकी राशि 557 करोड़ रूपए है. अब सोचिए किसी भी योजना और उसके कार्य को प्रेरित करने के लिए एक बेसिक लाइन का उपयोग किया जाता है. एक अच्‍छी सफलता का 50 प्रतिशत काम होता है, एक गुड प्‍लॉनिंग, व्‍यवस्‍थित, डॉक्‍यूमेंटेशन कागज पर बनाना. मैं माननीय मंत्री जी को इस बात के लिए बधाई दूंगा कि जहां-जहां भवनों की कमी थी, वहां उन्‍होंने दिए. कार्यालय व्‍यवस्‍थित संचालित होगा, तो योजनाएं आखरी तक पूर्णतया से पूरी व्‍यवस्‍था से पहुंचेंगी. माननीय मंत्री जी ने अन्‍य कई कार्य स्‍वीकृत किए. विषय केवल इतने तक नहीं है.

          सभापति महोदय, भावना और आध्‍यात्‍म जीवन का उद्देश्‍य भी जानते हैं. मुझे आज भी याद है कि पुराने जमाने में जब कोई भी किसी वरिष्‍ठ को प्रणाम करता था, तो पहला आशीर्वाद का वाक्‍य होता था- सुखी रहो. कोई महत्‍वपूर्ण ओकेजन होता था, तो सुख, शांति, समृद्धि होता थी. लेकिन अभी कुछ लोगों के मन में कुछ ऐसे भाव आ गए हैं कि हम तंत्र भूल गए, लेकिन मैं माननीय मंत्री जी की इस बात की तारीफ करना चाहता हॅूं कि इन्‍होंने अगर नर्मदा मैया को मन से स्‍वीकारा, उसकी परिक्रमा की, तो वहां परिक्रमा के लिए पौधरोपण और फेंसिंग होने से यदि कुछ पेड़-पौधे कट जाएं, कोई निकाल ले या हटा दे, तो उसके लिए भी प्रावधान किया गया है. कोई हवाई बातें नहीं कीं. जिस चीज को बोला उस पर कार्य करने की रीति पहले बनाई उसके बाद किसी बात की घोषणा की. चाहे नर्मदा परिक्रमा पथ हो, चाहे अन्य विषय हों, मैं थोड़ी सी बात ग्रामीण विकास के बारे में कुछ बातें करना चाहूंगा. अभी प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में बात हो रही थी. कुछ लोग बोलते हैं, लेकिन उसी के पक्ष के मैं गंभीरता के साथ कह रहा हूं दो लाख आवास मध्यप्रदेश के स्वीकृत हुए, कह दिया कि मध्यप्रदेश में आवास की जरूरत नहीं है. उन दो लाख लोगों की आह इनको खा गई. 20 साल और आप विपक्ष में बैठे रहेंगे 2 लाख लोग कभी आपको माफ नहीं करेंगे, जबकि हमारे यहां पर जितना बोला उसका 90 प्रतिशत आवास बनवा के दिखाए हैं, अंतर होता सरकार की सोच और काम करने का. मैं केवल तथ्यों पर बात कर रहा हूं. अगर यह आवास वापस नहीं होते तो शायद आज हम मध्यप्रदेश की सम्पूर्ण जनता तक आवास पहुंचा देते वहां पर अन्य कामों पर आगे बढ़ते. किसी भी योजना को रोकना, बाधित करना दो साल से पटरी पर उतरी, वापस योजना को पटरी पर लाने में समय लगता है वापस केन्द्र सरकार को भी विश्वास दिलाना पड़ता है. इस विश्वास के कारण ही आज पूरे देश में मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री आवास में नंबर वन आया है. यह कार्य की शैली और कार्य का तरीका है.

          श्री सोहनलाल बाल्मीकसभापति महोदय, प्रधानमंत्री आवास का पैसा निकाल लिया गया, किसने गबन किया इसकी भी जानकारी होनी चाहिये. आपकी सरकार में इस प्रकार का गबन हुआ है. ऐस लग रहा है तो मैं प्रमाण के साथ अपनी बात को रख दूंगा.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचासभापति महोदय, स्वच्छता मिशन के बारे में बताना चाहता हूं कि पहली बार स्वच्छता मिशन पर काम किया व्यक्तिगत, पारिवारिक शोचालय के बारे में जब बात रखी थी तो लोग उस पर हंसते थे. लेकिन आज उसका इनपेक्ट इतना बढ़ा जब इतने 2 लाख से ज्यादा शोचालय बने उसका असर यह पड़ा कि हास्पीटल की ओपीडी कम हुई है. मैं स्वच्छता के बारे में बात कर रहा था मेरे जावद में सभी नगर पंचायत अध्यक्षों को बधाई आज इस सदन में देना चाहता हूं जिन्होंने इस दीवाली को संकल्प लिया 7 नगर पंचायतें मेरी विधान सभा में हैं सातों में हर दसवें दिन हर गली में प्रेशर पाईप से सभी गलियों का सड़कों की धुलाई करके उसकी सफाई करते हैं यह जाकर सबके लिये खुला आमंत्रण है कि आप जाकर के देख लीजिये उसका क्या इनपेक्ट आता है गांवों में. मेरी पंचायतों में मेरी विधान सभा की 30 प्रतिशत जनता रहती है. मैं बहुत जल्दी थोड़ा माननीय प्रहलाद जी से सहयोग मिल जाये तो मेरी 72 की 72 पंचायतों में भी वह चीज करना चाहता हूं क्योंकि मैंने 72 की 72 पंचायतों में स्वच्छता रथ पहले अपनी निधि से दिया था उसको मेंटेन करवा रहे हैं, क्योंकि उसको अगले स्टेप पर ले जाना है, क्योंकि 80 प्रतिशत हमारे गांवों में रोड़ों की सीसी हो चुकी है. केवल 20 प्रतिशत की जगह बची.

          सभापति महोदयकृपया समय का ध्यान रखें.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचामैंने एक भी बात का रिपीटेशन नहीं किया है. आपका संरक्षण चाहिये. दो तीन मिनट में अपनी बात को समाप्त करूंगा. मैं गोवर्धन में बायोगैस के बारे में पहली बार प्लान किया है. हम कितनी गैस इनपोर्ट करते थे. यह केवल बायगैस का विषय नहीं है उसके माध्यम से किसान की आमदनी में असर पड़ेगा, उसके माध्यम से पशुधन रखने वाले को उसका बेनिफिट मिलेगा, उसकी आर्थिक तरक्‍की होगी. मैं अगर ध्‍यान से सोचूं तो पहले किसान की दो तरह की कमाई होती थी, पशुधन से उसका रोजाना का गुजारा चलता था और कोई भी महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम होता था, शादी, घर बनाना वह कृषि की आमदनी से बनाता था, लेकिन धीरे धीरे ऑटोमेशन हुआ, उसमें वह थोड़ा इजी हो गया, उपकरण के माध्‍यम से. पशुधन कम हुआ तो उसकी रूटीन आमदनी कम हो गई, इससे किसान परेशान हुआ. मैं वास्‍तव में अलग अलग तरीके से पशुधन की तरक्‍की, उसकी उपयोगिता, उसके माध्‍यम से आमदनी एक गांव के अंतिम छोर के व्‍यक्ति की जब बढ़ती है तो पूरे गांव में समरसता और जेलेसी कम होती है और उस जेलेसी के कारण सबसे ज्‍यादा चिंता और सबसे ज्‍यादा समाज में नाराजगी होती है, इसके बारे में हमें सोचना चाहिए. मैं वास्‍तव में माननीय मंत्री जी का बायो-गैस विषय पर बहुत अभिनंदन करना चाहूंगा.

          सभापति महोदय ओमप्रकाश जी, समय देखिए.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा मैं सेकेण्‍ड वक्‍ता हूं, आप नहीं चाहते कि पार्टी के बारे में और गांव की जानकारी के बारे में ज्ञान पहुंचे, नहीं तो मैं रुक जाता हूं. आप परमिशन नहीं देंगे, तो मैं नहीं बोलूंगा, धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय और भी वक्‍ता है, श्री सोहनलाल बाल्‍मीक.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक(परासिया) सभापति महोदय, अनुदान मांगों में मेरे अपने विचार आपके समक्ष रखना चाहता हूं. वर्ष 2026-27 के बजट में पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम विभाग के बजट में 40 हजार करोड़ रुपए का प्रस्‍तावित अनुमानित बजट रखा गया है. इसके पहले भी मैंने श्रम विभाग और श्रम कानून के बारे में मैंने बोल चुका हूं कि जिस तरह से श्रम कानून में जो बदलाव आया है. उसमें श्रमिकों का ध्‍यान नहीं रखा गया और कई अहित निर्णय लिए गए, जिसमें ठेकेदार और उद्योगपतियों को फायदा दिलाने का प्रयास किया गया है. श्रम विभाग के माध्‍यम से वर्ष 2026-27 में श्रम विभाग में कुल, 1 हजार 355 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है और ये बजट सामाजिक सुरक्षा योजना, असंगठित श्रम मजदूरों के लिए भी इसमें व्‍यवस्‍था है. खासतौर पर संबल योजना के संबंध में, मैं ये जरूर कहूंगा कि बजट का प्रावधान होता है, इसमें माननीय मंत्री जी का ध्‍यान दिलाऊंगा कि संबल योजना जिस तरीके से तत्‍काल रूप में प्रभावित परिवार को मिलना चाहिए, वह प्रभावित परिवार को नहीं मिल पाती है. जिसके चलते परिवार यहां वहां भटकता है, जिसके चलते वह परिवार कभी पंचायत या जनपद पंचायतों में, जिला पंचायत में जाता है और उसी बीच उसका शोषण होने लगता है कि हम पैसा दिलवा देंगे, हम काम करवा देंगे. मेरा इसमें मंत्री जी से आग्रह है कि संबल योजना जैसी चीजें जो मजदूर है, जिसको आवश्‍यकता होती है, यदि किसी प्रकार की दुर्घटना में, उस योजना का उसे लाभ मिलना है तो समय अवधि में मिल जाए, ताकि इस तरह की जो खराब व्‍यवस्‍था होती है, उस व्‍यवस्‍था को हम सब मिलकर रोक सके.

          सभापति जी, महिलाओं के संबंध में सशक्तिकरण के लिए इस बजट में प्रावधान है. मेरी विधान सभा में लगभग 1600 आजीविका स्‍वसहायता महिला समूह बने हैं. मगर हमने अधिकतर रूप से यह देखा है कि जो महिला स्‍वसहायता समूह बनाती है, वह बैंकों और लोन पर निर्भर रहती है और वह लोन जो लेती है उससे कोई रोजगार नहीं पनपता, न वह रोजगार की व्‍यवस्‍था में लगाना चाहती है. वह जो पैसा आजीविका मिशन का लोन के तौर पर, जिसमें उन्‍हें ब्‍याज भी लगता है. कई बार महिलाओं पर प्रकरण भी बन जाते हैं, तो जो वह पैसा लेती है, उस पैसे का उपयोग वह घरेलू उपयोग में ले लेती है और बहुत ज्‍यादा आजीविका मिशन में उनको लाभ नहीं मिल पाता. मैंने बहुत करीब से इस बात को समझा है कि सरकार को इस ओर ध्‍यान देना चाहिए कि आजीविका मिशन की महिलाओं को आप टारगेट जरूर देते हैं कि इतना समूह बना लो, इतना सब कुछ  कर लो, विभाग लगा रहता है समूह बनाता भी है. मगर समूह को जिस तरह से सरकार की तरफ से जो मदद मिलनी चाहिए और जो योजना का लाभ मिलना चाहिए, रोजगार के रूप में जोड़ना चाहिए, वह कहीं भी जोड़ नहीं पा रहे हैं, जिसके चलते समूह कर्जें में डूबते चले जा रहे हैं. माननीय सभापति जी, श्रमिकों की जो बात आई है, श्रमिकों के बारे में एक बात जरूर कहना चाहूंगा कि रोजगार गारंटी जैसी प्रभावशाली योजना जिसने इस देश के अंदर काम करा और जिसने आपदा में भी विशेष रूप से अपनी भूमिका निभाई है और इस बजट के अंदर में बात करूंगा और जी राम जी योजना के बारे में भी मैं बात करूंगा. मैं थोड़ा सा एक डाटा बताना चाहूंगा कि वर्ष 2020-21 में 1 करोड़ 5 लाख मजदूरों को काम मिला था. वर्ष 2021-22 में 95 लाख मजदूरों को काम मिला, वर्ष 2022-23 में 75 लाख मजदूरों को काम मिला, वर्ष 2023-24 में 63 लाख मजदूरों को काम मिला, वर्ष 2024-25 में 57 लाख मजदूरों को काम मिला और वर्ष 2025-26 में 56 लाख मजदूरों को काम मिला, तो यह संख्‍या हमारी बढ़ना चाहिए, दिनों दिन जिस तरह की रोजगार की जो व्‍यवस्‍था है, वह रोजगार की व्‍यवस्‍था न होते हुए और रोजगार की व्‍यवस्‍था पूरी तरीके से घट गई है और यह संख्‍या कम होती चली जा रही है. मैंने जो जानकारी प्राप्‍त की है कि वर्ष 2022-23 से 2025-26 तक मध्‍यप्रदेश में महात्‍मा गांधी का जो डेटाबेस है, उसमें 40 लाख 64 हजार श्रमिकों को इस रोजगार गारंटी से हटा दिया गया है, बताओ उनका नाम काट दिया गया है, नाम कैसे काट दिया गया है, क्‍यों काटा है? इसकी आज तक कोई जानकारी किसी भी मजदूर को नहीं दी गई है और जब मजदूर काम के लिये जाता है, तो उसको कह दिया जाता है कि तेरा नाम कट गया है, तो यह बात हम सब के लिये बहुत गंभीर है कि किस तरह की व्‍यवस्‍था बनाई जाती है.

          सभापति महोदय, केंद्र सरकार के माध्‍यम से रोजगार मंत्रालय ने ई पोर्टल पंजीकरण की व्‍यवस्‍था दिनांक-26 अगस्‍त,2021 को बनाई थी, जिसमें असंगठित श्रमिकों को राष्‍ट्रीय डेटा बेस ई पोर्टल में पंजीकृत किया गया था, तो ऐसे लगभग दिनांक-29/01/2026 तक मध्‍यप्रदेश में श्रम पोर्टल पर 1 करोड़ 92 लाख असंगठित मजदूरों का पंजीकरण हुआ है. अब उसमें कितनी व्‍यवस्‍था राज्‍य सरकार काम देने के लिये बना सकती है, यह राज्‍य सरकार के ऊपर होता है, मगर जिस तरीके से जो जी राम जी की योजना आई है, मध्‍यप्रदेश में रोजगार गारंटी के लिये भारत सरकार ने जो दिया है, उस भारत सरकार की योजना के अनुरूप जो अभी वर्तमान में बजट रखा है, वह लगभग 10 हजार करोड़ रूपये का रखा है. मैं माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि  यह 10 हजार करोड़ रूपये का जो बजट है, इसमें श्रमिकों के पेमेंट के बारे में, वेतन के बारे में और जो मटेरियल का है, उस मटेरियल में कितनी मात्रा का बजट में प्रावधान है, इसकी जानकारी भी देंगे तो अच्‍छा होगा कि हमको पता चलेगा कि 10 हजार करोड़ रूपये में क्‍या वेतन अकेला ही नहीं है, इसमें मजदूरी, मटेरियल दोनों का है, तो उसमें कितना भाग मटेरियल का जायेगा ताकि हमें भी इसकी जानकारी प्राप्‍त हो.  वर्ष 2025-26 में जो आंकड़ा बताते हैं कि सिर्फ 49 प्रतिशत मजदूरों को काम मिला है, बाकी लोगों को काम नहीं मिल पाया है और इसमें भारत देश के राज्‍यों की तुलनात्‍मक यदि बात करें, तो हमारा मध्‍यप्रदेश 16 वें स्‍थान पर मजूदरों को काम देने के लिये है, वर्ष 2025-26 में मात्र 56 लाख मजदूरों को रोजगार प्रदान किया गया है और 10 हजार करोड़ मटेरियल के संबंध में जो मैंने आपसे बात कही, तो अगर इसकी भी पूरी जानकारी मिल जायेगी तो बहुत उचित होगा.

          सभापति महोदय, मैं इस बारे में एक बात और कहना चाहता हूं कि मेरी विधानसभा में लगभग 12 पंचायतें हैं, जो डब्‍ल्‍यूसीएल से प्रभावित हैं, माननीय मंत्री जी बहुत अच्‍छे से करीब से जानते हैं, हमको वर्तमान की स्थिति में 601 प्रधानमंत्री आवास वहां पर मिले हैं और 601 आवासों में से अब ऐसी कोई स्थि‍ति नहीं बन पा रही है कि डब्‍ल्‍यूसीएल की जो लीज की जमीन है, जिसके कारण उनके आवास नहीं बन पा रहे हैं, तो मेरा अशासकीय संकल्‍प भी था और मेरा प्रश्‍न भी था, मैंने कई बार बातें उठाई हैं, नगरीय प्रशासन में मंत्री जी से भी मैंने कई बार निवेदन किया है और यह जो 12 पंचायतें हैं, जिसमें प्रधानमंत्री आवास आये हैं, प्रधानमंत्री आवास में जब तक लीज केस की समाप्ति नहीं होगी, तो यह प्रधानमंत्री आवास उन गरीब लोगों को प्राप्‍त नहीं हो पायेगा, उनको इसका लाभ नहीं मिल पायेगा और वह हमेशा ही आवास हीन रहेंगे तो मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि इस विषय में सरकार को गंभीर रूप से विचार करना चाहिए और आगे की कार्यवाही को हम लोगों को सबको मिलकर कार्य करने की आवश्‍यकता है.(श्री राजेन्‍द्र मेश्राम, सदस्‍य द्वारा अपने आसन से कहने पर) मैं मना नहीं कर रहा हूं मगर समस्‍या भी बता रहा हूं कि आवास तो मिल गये हैं, मगर आवास बनने की स्थिति में नहीं है, क्‍योंकि डब्‍ल्‍यूसीएल की जमीन लीज पर है और लीज उसकी खारिज नहीं हो रही है और जब तक लीज खारिज नहीं होगी, तो शायद मेरा धन्‍यवाद कोई काम का नहीं रह पायेगा. माननीय सभापति महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से इस बात के लिये कहना चाहूंगा कि अभी मनरेगा की जो स्थिति बनी है और जी राम जी की जो योजना आई है उसमें सीधे तौर पर हमारे मध्‍यप्रदेश में उसका अतिरिक्‍त भार पड़ रहा है. ..(व्‍यवधान)..

          श्री बाबू जन्‍डेल--  माननीय, जिन आवास की आप बार-बार बात कर रहे हो वह 3 लाख में बनता है, आप 1.20 लाख दे रहे हो. ..(व्‍यवधान).. गुलाम बना रहे हो, आप क्‍या आवास दे रहे हो.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक--  पहले  जो हमारी व्‍यवस्‍था थी रोजगार गारंटी की 10-90 का रेश्‍यो था, 90 प्रतिशत राशि केन्‍द्र सरकार से मिल जाती थी और 10 प्रतिशत राशि हमारे राज्‍य सरकार की बनती थी, मगर वर्तमान की स्थिति में 60-40 का जब रेश्‍यो आयेगा तो सीधे तौर पर हमारे मध्‍यप्रदेश के अंदर में लगभग 2 से 3 हजार करोड़ रूपये का फर्क पड़ेगा और यह सीधे बजट पर फर्क पड़ेगा. हमारे लिये यह एक चिंता का विषय है, जिस तरीके की जो योजनायें आई हैं और जो फर्क पड़ेगा वह सीधे तौर पर हमारे क्षेत्र के विकास के लिये, मध्‍यप्रदेश के विकास में उसका असर होगा क्‍योंकि पिछली बार हमारे राज्‍य का हिस्‍सा 505 करोड़ रूपये था. आज की तारीख में यदि हम उसका केलकुलेशन करेंगे तो लगभग 2716 करोड़ रूपये का अतिरिक्‍त भार हमारे मध्‍यप्रदेश को इस योजना से पड़ने वाला है तो इस योजना के तहत जो राशि व्‍यय होगी और काम अगर हम सवा सौ दिन देने की बात कहेंगे तो इससे और  भी ज्‍यादा फर्क आने वाले समय में पड़ेगा और मैं माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहूंगा कि रोजगार के लिये व्‍यवस्‍था हमेशा बनी रहना चाहिये क्‍योंकि बहुत सारे जिलों के अंदर क्षेत्र में मजदूरों के पलायन की व्‍यवस्‍था बन जाती है और मैं पंचायत विभाग के माध्‍यम से यह भी कहना चाहूंगा  कि जो पंचायती राज की व्‍यवस्‍था कांग्रेस की सरकार के समय में बनी थी वह धीरे-धीरे समाप्‍त होती चली जा रही है, कमजोर हो गई है और कमजोर कैसे हुई कि हम जनप्रतिनिधियों को जो अधिकार मिलने चाहिये, जो ताकत मिलनी चाहिये वह नहीं मिल पा रही. पंचायती राज की सरकार ने ऐसी व्‍यवस्‍‍था बना दी है कि सरपंच होगा या उप सरपंच होगा या पंच होगा वह अपने हिसाब से कोई काम नहीं करा पायेंगे. हम गांव के अंदर देखते हैं कि अगर पंचायत के अंदर कोई रोड खराब होती है तो 10 ट्रिप मुरम डलवाने के लिये भी सरपंच हाथ उठा लेता है, सचिव हाथ उठा लेता है कि यह व्‍यवस्‍था हमारे पास नहीं है, इसका कोई मद नहीं होता है. मेरा कहना यह है कि आपने पंचायतों को बांध दिया है, टाइड, अनटाइड में बांध दिया है और टाइड, अनटाइड में जो आप व्‍यवस्‍था बनाते हो, जिस मद में आप पैसा रखते हैं उस मद में ही खर्चा होगा यदि अन्‍य मद में खर्चा करना चाहे तो वह नहीं कर पा रही और प्रशासनिक जो अधिकारी कर्मचारी हैं वह इतने अधिक प्रभावशाली हो गये हैं, इतना ज्‍यादा उनका प्रभाव हो गया है कि जनप्रतिनिधि का कोई मतलब नहीं रह गया. सरपंच एक चपरासी की तरह रह गया है. मेरा माननीय मंत्री जी निवेदन है कि यदि जनप्रतिनिधि कोई चुनाव जीतकर आता है तो उसको इतना अधिकार तो रहे कि सचिव उसको न चमकाये, उसको उपयंत्री न चमकाये. उसकी बात न उपयंत्री सुनता है, न सचिव सुनता है, न सहायक रोजगार सुनता है और वह बेचारा हाथ खोलकर खड़ा रहता है और  जनता  अलग गाली बकती है तो यह पंचायती राज की व्‍यवस्‍था जो मजबूत थी वह धीरे-धीरे जो कमजोर हुई है उसको मजबूत करने की आवश्‍यकता है ताकि जनप्रतिनिधियों का मान सम्‍मान बना रहे और जो वह काम चाहते हैं वह काम की व्‍यवस्‍था बने. अब जनपद पंचायत की हालत, जनपद सदस्‍य की हालत यह है कि वह कोई काम का नहीं. जनपद सदस्‍य 4-5 पंचायतों में जीतकर आता है और उसको न पैसे देने का अधिकार है, न चेक में साइन करने का अधिकार है, वह इसके, उसके हाथ पैर जोड़ता रहता है, वह पंचायतों में सरपंच के भरोसे रहता है और सचिव के भरोसे रहता है. मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि पंचायत में यदि जनपद सदस्‍य की व्‍यवस्‍था है और वह जनप्रतिनिधि है तो उसका भी अपना एक अधिकार कहीं न कहीं आपको बनाने की आगे चलकर होना जरूरी है और मैं आपसे यह निवेदन करूंगा कि यदि पंचायती राज को मजबूत करना है और  पंचायती राज में यदि अच्‍छे काम कराना है मजबूती से, तो जनप्रतिनिधियों का अधिकार और उनके पावर बढ़ने चाहिये, नहीं तो आज की तारीख में पूरी तरह से सचिव, उपयंत्री और सीईओ ही अपनी पंचायतें चला रहे हैं, वहां पर जनप्रतिनिधि का कोई काम नहीं रह गया है. माननीय मंत्री जी, मेरा आपसे आग्रह है कि आप भले ही पैसा आवंटन कर दें, जितनी भी राशि आप रख दें, कोई भी योजना ले आयें यदि  जनप्रतिनिधि के साथ में इस तरह का व्‍यवहार होगा तो वह क्रियान्‍वयन ठीक से नहीं होगा और वह भ्रष्‍टाचार की भेंट चढ़ेगा. आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

            श्री दिव्यराज सिंह(सिरमौर) - माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्या 18 श्रम, मांग संख्या 30 ग्रामीण विकास,मांग संख्या40 पंचायत के पक्ष में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. आज मध्यप्रदेश या किसी भी राज्य में अगर उसकी सबसे बड़ी जनसंख्या है हमारे मध्यप्रदेश में तो वह है हमारे ग्रामीण क्षेत्र की जनसंख्या. हमारा मध्यप्रदेश एक ग्रामीण राज्य है और इस राज्य को विकसित करने के लिये  हमारा यह पंचायती राज विभाग ग्रामीण विकास और श्रम विभाग यह बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण कार्य आज कर रहा है. हम आज बात करें हमारे मध्यप्रदेश में जिस प्रकार से भारतीय जनता पार्टी की सरकार माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्व में और हमारे काबिल मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल जी के नेतृत्व में हमारे मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र के लिये अनेकों विकास के कार्य इस बजट में लेकर आई है. निश्चित रूप से मध्यप्रदेश ऐसा राज्य था और खासकर मैं अपनी सिरमौर विधान सभा की बात करूं तो मैं जब  2013 में पहली बार विधायक बना था तो उस समय मैं जब चुनाव के समय पर दौरे पर जा रहा था तो मैंने ऐसे बहुत सारे गांव देखे थे तो बहुत सारे लोग काली सड़कों के अभाव में थे. लालटेन में रहते थे लेकिन आज दस-बारह साल के अंदर मैं आज गर्व के साथ कह सकता हूं कि आज मेरी विधान सभा के हर गांव में काली सड़क से जोड़ने का काम हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है. निश्चित रूप से  इस योजना को और आगे बढ़ाने का काम हमारी सरकार कर रही है.  हम देख रहे हैं कि हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना-2 लाई है क्योंकि हम देखते थे कि गांव तो जुड़ गये लेकिन हमारे टोले,मजरे,छोटे गांव वह भी अभी काली सड़कों से वंचित रहे हैं. मेरी विधान सभा जहां आदिवासी क्षेत्र बहुत है वहां के कई सारे आदिवासी टोलों में अभी तक सड़कों का अभाव था लेकिन अभी जो प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना 2 आई है उसके माध्यम से  वह सभी जो मजरे टोले थे जहां पर लोग वंचित थे उनको भी जोड़ने का काम हमारी यह सरकार करने वाली है निश्चित रूप से आज हम देखते हैं कि हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में जो महत्वपूर्ण चीज चाहिये थी वह आवास थी. आज ..

6.33 बजे             अध्यक्ष महोदय( श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ) पीठासीन हुए.

.. हमारा मध्यप्रदेश आवास योजना में सबसे टाप पर है हमारे पूरे देश में और टाप पर रहने का कारण यह है कि क्योंकि ऐसा था हमारा प्रदेश जहां पहले की कांग्रेस सरकारों ने जो इंदिरा आवास देते थे हम जब पंचायतों में ढूंढने जाते थे तो एक पंचायत में कभी एक आवास,कभी दो आवास कभी तीन आवास मिलते थे और वह आवास भी ढूंढने जाओ अगर तो दिखाई नहीं देते थे और उनको हम ढूंढते रह जाते थे. आज प्रधानमंत्री आवास अगर मैं एवरेज ले लूं तो मेरी अगर 97 पंचायतें हैं तो हर पंचायतों में कहीं 50 आवास कही 100 आवास कहीं 250 आवास हमारी पंचायतों में दिखाई दे रहे हैं यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार की उच्चतर योजना है जो आज गरीबों को उनके सिर पर छत देने का काम हमारी सरकार कर रही है और इस पर हम रुक नहीं रहे हैं. हम ऐसे भी किसी गरीब को नहीं छोड़ेंगे जिसके पास अब आवास नहीं है उन नये लोगों को भी आवास देने का काम हमारी सरकार करेगी. निश्चित रूप से इसके लिये हमें बहुत सारे फंड की आवश्यक्ता है इसलिये मैं मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि इसका पैसा और रोका न जाये और इसमें और वृद्धि हो ताकि जो आवासहीन बचे हैं उनको भी आवास प्राप्त हो. हमारे प्रदेश में जिस प्रकार से गरीबों के लिये हमारी सरकार ने संबल योजना,कल्याणी योजना,कर्मकार मंडल की योजनाएं जो लाई हैं आज हम जाते हैं तो ग्रामीण क्षेत्र में अगर कहीं छोटी सी भी घटना हो जाती है और गरीब के परिवार का कोई व्यक्ति खत्म हो जाता है जो उसका पेट पालने वाला मुखिया खत्म हो जाता है तो उसके परिवार को मदद करने के लिये हमारी सरकार दो लाख,चार लाख रुपये की सहायता देती है. यह ऐतिहासिक योजना हमारी सरकार लेकर आई यह निश्चित रूप से हम कई बार बोलते हैं कि पंचायत हमारा जो विभाग है, इसमें बहुत सारा पैसा आ रहा है. मेरे कांग्रेस के कई साथी विधायक भी बोले कि पैसा आ रहा है, लेकिन कहां चला जा रहा है. मैं बता रहा हूँ कि यह कहां जा रहा है. यह हमारे गरीबों के पेट में जा रहा है. उनके घर पालने में जा रहा है. ये पंचायती राज विभाग का पैसा हमारे मध्‍यप्रदेश को विकसित राज्‍य बनाने में जा रहा है. कई बार हम कहते हैं कि ये पैसा कहां चला गया. मैं कहता हूँ कि अगर आप खाना खाते हैं तो खाना कहीं आपके शरीर में दिखाई देता है कि कहां चला गया. खाना, जिस प्रकार से आपके शरीर में आपको बढ़ाने के लिए जाता है. उसी प्रकार से हमारे मध्‍यप्रदेश को बढ़ाने के लिए यह पैसा हमारे गरीबों के पेट में जा रहा है और हमारे क्षेत्र के गरीबों को विकसित करने के लिए यह पैसा जा रहा है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं ज्‍यादा समय नहीं लूंगा. समय भी काफी हो गया है. मैं बस आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से 2-3 चीजें अपने क्षेत्र के लिए निवेदन करना चाहता हूँ. अपनी विधान सभा के बारे में बात रखना चाहता हूँ. हमारे क्षेत्र में, चूँकि माननीय मंत्री जी हमारे क्षेत्र के प्रभारी मंत्री भी हैं, और मेरी विधान सभा का जो जवा ब्‍लॉक है, उसको अपेक्षित ब्‍लॉक में भी रखा गया है. हमने वहां पर काफी रोडों को जोड़ने का काम किया है. लेकिन अभी भी कुछ सड़कें उसमें बची हुई हैं. अत: मैं आपसे निवेदन करूंगा कि अगर आप वहां पर कह देंगे तो जो सड़कें बची हुई हैं, उनको भी वहां के अधिकारी जोड़ देंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय, साथ में मैं माननीय मंत्री जी से एक और निवेदन करना चाहता हूँ कि आपने जिस प्रकार से ग्रामीण क्षेत्र में, जैसा सखलेचा जी ने भी कहा, कि आपने एक बहुत ऐतिहासिक घोषणा की है कि हर पंचायत में जो श्‍मशान घाट होगा, उसके लिए सड़क बनेगी. लेकिन श्‍मशान घाट, जैसे मेरे विधान सभा क्षेत्र में एक गढ़वा गांव है, उसमें श्‍मशान घाट के लिए रास्‍ता तो छोड़िए, श्‍मशान घाट ही नहीं मिल पा रहा है. अत: मैं निवेदन करूंगा कि अगर हम श्‍मशान घाट के लिए जमीन का अधिग्रहण करने का भी प्रावधान उसमें कर दें तो बहुत अच्‍छा हो जाएगा क्‍योंकि कई ऐसी पंचायतें हैं, जहां पर हमको श्‍मशान घाट के लिए जमीन नहीं मिल पा रही है. अधिग्रहण का उसमें कोई प्रावधान नहीं है, अगर जमीन अधिग्रहण का उसमें प्रावधान डाल देंगे तो श्‍मशान घाट के लिए वहां पर हमको जमीन प्राप्‍त हो जाएगी. यही मैं निवेदन करना चाहता हूँ. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मेरा संसदीय कार्य मंत्री जी से अनुरोध है कि प्रतिपक्ष के पांच नाम हैं. अगर हमारे भी पांच तक सीमित रहें. चार लोग बचेंगे तो चार लोग कल भी बोल सकते हैं. कल भी डिमाण्‍ड हैं. आखिरी के चार लोगों को कल बुलवा लेंगे तो मंत्री जी का जवाब ठीक समय पर आ जाएगा, ऐसा मेरा अनुरोध है.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्‍यक्ष महोदय, बस अब हमारे भी दो ही लोग हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- दो कौन हैं ?

            श्री कैलाश विजयवर्गीय -- एक नागेश जी हैं और एक प्रदीप लारिया जी हैं.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय मंत्री जी का जवाब अगर कल आ जाए तो भी ठीक रहेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, नहीं, आज ही करना है. हो जाएगा.

          श्री कैलाश कुशवाह (पोहरी) -- माननीय अध्‍यक्ष जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. हमारे ग्रामीण क्षेत्र में सबसे मूलभूत समस्‍या खेत सड़क की है. किसान अपनी फसल मण्‍डी ले जाता है तो कई बार गहरे गड्ढे होने के कारण ट्रॉली पलटी है, सामान सहित ट्रॉली पलटी है और कई बार हमारे किसानों की मौत भी हुई है. किसानों के बच्‍चे स्‍कूल जाने में भी असमर्थ हैं क्‍योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में ज्‍यादातर किसानों ने अपने खेतों में मकान बना लिए हैं. खेत सड़क की बहुत ज्‍यादा जरूरत है. आज हमारे ग्रामीण क्षेत्र में बिजली भी कई जगह नहीं आ रही है. कई जगह हमारी महिलाओं को एक-एक, दो-दो किलोमीटर पानी भरने के लिए जाना पड़ता है. हम वर्ष 2047 का विजन बना रहे हैं. लेकिन अभी भी हमारे मध्‍यप्रदेश में गांवों की स्थिति क्‍या है ? मैं आग्रह और निवेदन करता हूँ कि आप मुझे आज्ञा दें, तो मैं इन चीजों के सबूत भी ला दूँगा कि हमारे यहां लोग दो-दो किलोमीटर दूर से पानी ला रहे हैं, कई गांवों में आज भी अंधेरा है और हम वर्ष 2047 का विजन बना रहे हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे आग्रह है कि ग्रामीण क्षेत्र की स्थिति अभी भी बहुत खराब है, हमारे यहां आरोग्‍य स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र बन गए हैं, लेकिन उसके बाहर ताले लगे मिलते हैं, डॉक्‍टर एवं नर्सों की व्‍यवस्‍था नहीं है. ग्रामीणों को जिले में स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पहुँचने में बहुत समय लगता है, उनकी ज्‍यादा तबियत खराब होने की स्थिति में, कभी-कभी रास्‍ते में मृत्‍यु भी हो जाती है. हमारे स्‍कूलों की स्थिति भी बहुत खराब है. अभी एक गांव में तो स्‍कूल के बाहर बच्‍चे पढ़ रहे हैं, स्‍कूल की बिल्डिंग ही नहीं हैं, कई बिल्डिंग क्षतिग्रस्‍त हैं. मैं आग्रह और निवेदन करता हूँ कि अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में हमारी स्थिति बहुत खराब है. हमारे गांव में आवास आए हैं, मैं माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूँ कि आवास तो आए हैं, लेकिन कहीं न कहीं किश्‍तों से पहले ही पैसे की जरूरत पड़ती है, वहां के सचिव और ग्राम रोजगार सहायक को जब उनके आवास में पैसा दिया जाता है, तो ऐसी हमें कई जगह से शिकायत आई हैं,  तो कहीं हमारे आवासों के छतों का प्‍लास्‍टर नहीं हुआ है, किसी की दीवार नहीं उठी है, किसी के दरवाजे नहीं लगे हैं एवं किसी आवास की खिड़की नहीं लगी है. लेकिन कुल मिलाकर अभी भी 50 प्रतिशत हमारे ग्रामीणों के आवास अधूरे हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे यहां ग्रामीण में खेल ग्राउण्‍ड प्रस्‍तावित भी हो गए हैं, पैसे भी निकल गए हैं, लेकिन वहां पर फसलें हो रही हैं. वहां पर दबंग लोगों के कब्‍जे हैं, खेल ग्राउण्‍ड की स्थिति खराब है. मैं यही आग्रह और निवेदन करता हूँ कि एक निगरानी टीम बनाई जाये और हर पंचायत में भेजकर जहां भी हमें जरूरत है, हमारी कई सड़कें मंजूर भी हुई हैं, मनरेगा से पैसे भी निकले हैं. लेकिन मौके पर कार्य नहीं हुए हैं, भुगतान भी हो गया है. मैं विशेष आग्रह और निवेदन करता हूँ कि उनकी जांच होकर, उन पर कार्यवाही हो. इसलिए आज कहीं न कहीं ग्रामीण क्षेत्र में गांवों में रास्‍तों की ज्‍यादा परेशानी है और आज हर किसान परेशान है. अभी हमारे सोहन भैया ने भी बोला कि हमारे सरपंचों, जनपदों एवं जिला पंचायत सदस्‍यों ने भी चुनाव लड़े हैं, उन्‍होंने भी वादे किये हैं, लेकिन हम जब क्षेत्र में जाते हैं तो हमें तो गाली मिलती ही हैं, ब्‍याज में उनको भी दे देते हैं. मेरा विशेष आग्रह है कि उनके लिए कुछ किया जाये, जिससे वह अपने-अपने क्षेत्र की पंचायतों में बैठ सकें और उन्‍हें मान-सम्‍मान मिल सके.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने इसी सदन में, हमारे सभी 230 विधायकों का एक सपना है कि सबकी विधान सभाओं में विकास हो. सभी विधायक विधान सभा में चुनकर आए हैं. सभी विधायकों ने माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने मांग की है. माननीय अध्‍यक्ष जी, इसमें आपने भी हमारा बहुत सहयोग किया है, मैं आपको धन्‍यवाद देता हूँ. इसी सदन में माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने आश्‍वासन दिया था कि इस बजट में आपके लिये विकास निधि बढ़ाई जायेगी. लेकिन अगर माननीय मुख्‍यमंत्री जी की जुबान खाली चली जायेगी, तो जनता किस पर विश्‍वास करेगी, जब विधायकों की बात नहीं मानते हैं,  तो जनता किस पर विश्‍वास करेगी ? यहां पर 230 विधायकों की बात खराब हो रही है, जब माननीय मुख्‍यमंत्री जी इस मंच से घोषणा कर रहे हैं, जब वहीं पर बात पूरी नहीं कर रहे हैं, तो हम किस पर विश्‍वास करें ? मैं आपसे आग्रह और निवेदन करता हूँ कि माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं आपके द्वारा माननीय मुख्‍यमंत्री जी तक संदेश पहुँचाना चाह रहा हूँ कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी आप प्रदेश के प्रथम व्‍यक्ति हैं. आपने जो बोला है, वह आप करके दिखाइये. वही असली मुख्‍यमंत्री है, नहीं तो आप पर जनता कभी विश्‍वास नहीं करेगी.

          जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसीराम सिलावट) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे घोर आपत्ति है. भारतीय जनता पार्टी की सरकार जो बोलती है, वह करती है. मुख्‍यमंत्री जी, जो बोलते हैं, वह करते हैं. आप ऐसी बातें मत करो.

          अध्‍यक्ष महोदय -  कैलाश जी, आप विषय पर ही रहें.                    

          श्री कैलाश कुशवाहअध्‍यक्ष महोदय, मैं, विषय पर ही हूं. मैं, हमारे पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं कि आज लगभग सवा दो साल इस विधान सभा को हो गए हैं, उन्‍होंने प्रत्‍येक विधायक को एक पत्र दिया कि जब विधान सभा सत्र चले तो मुझसे 1.5 घंटे के समय में मंत्रालय में मिलकर जायें और हम मिले भी हैं लेकिन अभी तक किसी अन्‍य मंत्री ने ऐसा पत्र नहीं दिया है. मैं, धन्‍यवाद देता हूं कि कम से कम मंत्री जी विधायकों को समय दे रहे हैं और सुन भी रहे हैं. इसलिए यह भी जरूर है कि हमारे मुख्‍यमंत्री जी भी हमें समय दें, आज इतने समय में सभी विधायकों का एक सम्‍मेलन तक नहीं हुआ है. मुख्‍यमंत्री जी हमारे मालिक हैं, हमारे मुखिया हैं, एक बार हमें बुलाकर हमारा सम्‍मेलन करें. विधायकों से पूछें कि आपके क्षेत्र में क्‍या-क्‍या परेशानी है. मुख्‍यमंत्री जी हमसे वादा करें कि वे यह कार्य करके देंगे तो हमें खुशी होगी.  

          अध्‍यक्ष महोदय, मुझे अपने लिए कुछ नहीं चाहिए लेकिन हमारे विधायकों के क्षेत्र में जो वादे हैं, वे पूरे हों. हमारा कृषि प्रधान देश तथा प्रदेश है, हमारा किसान आज बहुत परेशान है, चाहे वह खेत-सड़क हो, सुदूर-सड़क हो, ये बहुत जरूरी हैं, इसे पूरा किया जाये. मेरा मंत्री जी से आग्रह है कि खेत-सड़क की बहुत जरूरत है, आप कैसे भी करके इसका आदेश दें. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, धन्‍यवाद.

          इंजीनियर प्रदीप लारिया (नरयावली)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मांग संख्‍या 18, 30 और 40 का समर्थन करता हूं. ग्रामीण विकास हम सभी के लिए महत्‍वपूर्ण है, हम सभी को इस बात की प्रसन्‍नता है कि भाजपा की सरकारों ने चाहे हमारी केंद्र सरकार हो या राज्‍य सरकार हो, ग्रामीण विकास को प्रमुखता से लिया है. मैं मुख्‍यमंत्री जी एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री जी का अभिनंदन करता हूं कि एक बहुत बड़ी धनराशि इस बजट में पंचायत एवं ग्रामीण विकास के लिए उन्‍होंने रखी है. हम सभी जानते हैं कि लंबे समय तक इस देश में गांवों के विकास के बारे में चर्चा हुई, गरीब के बारे में चर्चा हुई, किसान के बारे में चर्चा हुई. इस बात को भी हम सभी जानते हैं भारत की आत्‍मा गांव में बसती है लेकिन हमारे मित्रों की सरकार जब देश में 55 साल तक रही, तब उन्‍होंने न गांव की चिंता की, न गरीब की चिंता की, न किसान की चिंता की.

          अध्‍यक्ष महोदय, हमारे एक मित्र अभी कह रहे थे कि रोजगार के लिए लोग शहर में आते हैं लेकिन शायद वे भूल गए थे कि उस समय गांव में सड़कें ही नहीं होती थीं इसलिए लोग गांव से शहर नहीं आ पाते थे. गांव की दुर्दशा ऐसी थी कि आजादी के 55 वर्षों तक विकास, गांव-गरीब-किसान से दूर रखा गया. उसी का परिणाम है कि जनता इस बात को समझ गई और आज उसका परिणाम हम सभी को दिखाई दे रहा है.

"तुम्‍हारे पांव के नीचे कोई ज़मीन नहीं है,

कमाल ये है कि फिर भी तुम्‍हें यकीन नहीं है,

यकीन हो तो कोई रास्‍ता निकलता है,

हवा की ओट लें तो चिराग भी जलता है."

 

(मेजों की थपथपाहट)

 

          अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन कांग्रेस के मित्रों ने कभी चिराग जलाने की जरूरत नहीं समझी. मैं गांव के विकास के लिए, ग्रामीण विकास के लिए सबसे पहले माननीय अटलबिहारी वाजपेयी जी को धन्‍यवाद देता हूं, जब वे प्रधानमंत्री थे तो उन्‍होंने सबसे पहले गांव की चिंता की. हम सभी जानते हैं कि गांव तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं होगी तो गांव में न डॉक्‍टर, न इंजीनियर, न शिक्षक पहुंच पायेगा. पहले हम देखते थे कि 4-4 महीने बारिश के बाद गांव और शहर का कटाव रहता था. गांव के लोग अपनी पूरी व्‍यवस्‍था, खाद्यान्‍न आदि की व्‍यवस्‍था 3-4 महीने के लिए कर लेते थे लेकिन आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार है और गावं में जब प्रधानमंत्री आवास योजना आई तो इसके बाद जिस तेज गति से गांव का विकास हुआ है, मुझे कहते हुए प्रसन्‍नता और गर्व है कि आज गांव शहर जैसे लगने लगे हैं और शहर स्‍मार्ट सिटी बन रहे हैं, हमारे कैलाश जी यहां बैठे हैं. आज हमारे शहर बढ़ रहे हैं. निश्चित तौर पर किसानों की समृद्धि के लिए चाहे हम किसान क्रेडिट कार्ड योजना की बात करें, चाहे फसल बीमा योजना की बात करें. मुझे अच्‍छे से याद है जब मैं वर्ष 2008 में पहली बार विधायक बनकर आया था. उससे पहले मैं सागर का महापौर था. यदि कोई 10, 20 हजार रुपए एक चबूतरे के लिए मांगता था तो हम लोगों को भी यह लगता था कि बीस हजार रुपए एक चबूतरे के लिये या कहीं एक ट्राली मुरम के लिए बात होती थी, क्‍योंकि उस समय जनता भी जनप्रतिनिधियों से इतनी ही अपेक्षा रख सकती थी. यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है कि आज गांवों का चहुमुखी विकास हो रहा है और निश्चित तौर पर आज यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कारण ही हो पाया है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी को बधाई देता हूं. आज बात हो रही है कि हम तेज गति से क्‍यों बढ़ रहे हैं. आज 25 करोड़ से ज्‍यादा लोग गरीबी रेखा की सूची से हट गये हैं. यह हमारी योजनाएं हैं, हमारी योजनाओं का परिणाम है. हम प्रधानमंत्री आवास योजना की बात कर लें. पहले चरण में चार करोड़ प्रधानमंत्री आवास मिले. हमारा द्वितीय चरण हो रहा है उसमें आने वाले समय में तीन करोड़ आवास देंगे. मध्‍यप्रदेश में भी 51 लाख आवास स्‍वीकृत किये हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना को तो हम सभी जानते हैं. एक समय इंदिरा आवास योजना थी. यदि उसकी बात करेंगे तो बहुत ही लंबी बात‍ होगी. उसमे लॉटरी सिस्‍टम होता था. एकाध कुटी इंदिरा आवास की आती थी. 35 हजार रुपए मिलते थे. सरपंच सोचता था कि किसको दें, किसको नहीं दें. वह इसी उधेड़बुन में लगा रहता था. वह तय ही नहीं कर पाता था कि किसको दें, लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना आई है तो मैं आपसे कहना चाहता हूं कि यह अकेली प्रधानमंत्री आवास योजना नहीं है. यह गांव की समृद्धि के लिए है. जब प्रधानमंत्री आवास का एक आवास बनता है तो ईंट वाले का धंधा भी चलता है, सीमेंट वाले की सीमेंट बिकती है, सरिये वाले का लोहा बिकता है, मजदूरी मिलती है और मैं समझता हूं कि हमारी आर्थिक समृद्धि का रास्‍ता इससे खुलता है. निश्चित तौर पर आज यदि 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा की सूची से बाहर आ गये हैं तो इसका परिणाम है कि हमारी इतनी महत्‍वकांक्षी योजनाएं जिससे आर्थिक समृद्धि लगातार आगे बढ़ रही है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निश्चित तौर पर आज प्रधानमंत्री आवास का जो द्वितीय चरण है. मैं माननीय मंत्री जी को बधाई देता हूं कि एक बहुत बड़ी संख्‍या प्रधानमंत्री आवास की इस वर्ष भी बनेगी और प्रधानमंत्री आवास में आज मध्‍यप्रदेश देश में प्रथम है. यह हमारी सरकार ही है जो इस बात को जानती है कि गरीब कल्‍याण के लिए जो योजना है उसमें निरंतरता बनी रहना चाहिए. हमें अच्‍छे से याद है जब 15 महीने हमारे मित्रों की सरकार आई थी तो प्रधानमंत्री आवास योजना को बंद कर दिया गया था. उससे कितने लोगों का नुकसान हुआ और निश्चित तौर पर दोगुनी गति के साथ आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार काम कर रही है.

          अध्‍यक्ष महोदय , आज अधोसंरचना विकास के लिए चाहे वह ग्रामीण विकास हो, चाहे शहरी विकास हो उसके लिए बजट में 1 लाख 6 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना निश्चित तौर पर हम सब जानते हैं अभी कुछ मित्र कह रहे थे कि प्रधानमंत्री सड़क या हमारे गांव की चिंता नहीं होती है आबादी के मान से पहले 1 हजार, फिर 800, फिर 700, फिर 600, फिर 500, 400 और अब मजरा टोला में भी लगभग 30 हजार 900 किलोमीटर सड़कों का निर्माण होगा. अब हमारे 20, 25 घर की जो आबादी है, जो बसाहटें हैं वहां पर भी आवास बनाने का काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार करने वाली है. हम खेत सड़क भी गये हैं, हम मजरा टोला तक भी गये हैं. निश्चित तौर पर यह विकास का पैमाना है. यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने तय किया है. इसलिए मैं माननीय मंत्री जी का भी अभिनन्‍दन करना चाहता हूं. हम सब विकास के लिए जाने जानी वाली सरकार हैं और निश्चित तौर पर हम स‍बके लिए विकास बहुत ही महत्‍वपूर्ण है. हम बात करें प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना वर्ष 2025-26 में 845 किलोमीटर सड़कें जिसमें 867 मार्ग का निर्माण हुआ. 8 हजार किलोमीटर सड़कों का संधारण और 6 हजार किलोमीटर सड़कों का उन्‍नयनीकरण. इसी तरह से पंचायतों के सर्वांगीण विकास के लिए 3736 करोड़ रुपए का अनुदान हमारी पंचायतों के लिए देने का काम सरकार कर रही है. प्रधानमंत्री आवास 6850 करोड़ रुपए और यह केवल भारतीय जनता पार्टी के विधायकों के क्षेत्र में ही नहीं बनेंगे हरेक क्षेत्र में बनेंगे. गरीब व्यक्ति का पक्का मकान बने यह  उसका सपना होता है. उसको बनाने का काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार करेगी. जीरामजी योजना, यह एक अभूतपूर्व बदलाव है, केवल नाम से नहीं यह काम से तय होता है. हम नाम कुछ भी रख लें लेकिन काम नहीं होगा तो कुछ नहीं होगा. नाम से कुछ नहीं होता काम से परिणाम होता है. 100 दिन की जगह 125 दिन का रोजगार आज "विकसित भारत G-RAM-G योजना"  के अन्तर्गत दिया जा रहा है. जिसमें रोजगार के साथ साथ स्थायी विकास होगा. जो मनरेगा योजना थी उसमें मिट्टी को एक जगह से दूसरी जगह डाल देने को विकास मान लिया जाता था. लेकिन अब इस बात को सुनिश्चित किया गया है कि 100 के बजाए 125 दिन का रोजगार मिलेगा. उनको मजदूरी भी मिलेगी और दूसरी तरफ जो पक्के निर्माण हैं. चाहे हम बात करें सड़क की, नाली की, पुल की पुलिया की कुल मिलाकर जो हमारे पक्के निर्माण हैं वो काम भी होंगे. ऐसे अनेक काम आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार कर रही है. आने वाले समय में निश्चित तौर पर मध्यप्रदेश के अनेक गांव विकास की दृष्टि से आगे बढ़ेंगे.

          अध्यक्ष महोदय, मैं कुछ सुझाव भी माननीय मंत्री जी को देना चाहता हूँ. हालांकि यह सूर्य को दीपक दिखाने जैसा है. जिस विधान सभा क्षेत्र से मैं आता हूँ वो सागर के चारों ओर है. एक पांव लोगों का शहर में होता है दूसरा पांव गांव में होता है. इसलिए नगर निगम और नगर पालिका के आसपास होने के कारण जो अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं. निश्चित तौर पर मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि कहीं-न-कहीं आने वाले समय में दिक्कत होगी. वहां पर सड़क, नाली की बात होगी. इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि ये पंचायत के क्षेत्र में कट रही हैं. वहां हमें यह देखना होगा कि अधोसंरचना विकास के साथ कॉलोनी काटी जाएं.

          अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा सुझाव यह था कि हमें पंचायतों के विकास के लिए पंचवर्षीय योजना बनाना चाहिए. कई बार जिस काम की आवश्यकता नहीं होती है वो काम हो जाता है और जिस काम की आवश्यकता होती है वो काम नहीं हो पाता है. इसलिए पंचायतों का भी मास्टर-प्लान हो. पहले, दूसरे, तीसरे, चौथे वर्ष में क्या काम होगा और पांचवे वर्ष में क्या काम होगा. ऐसा मास्टर-प्लान बनाएंगे तो निश्चित तौर पर चरणबद्ध तरीके से हम आगे बढ़ेंगे.

          अध्यक्ष महोदय, जब परिसीमन का काम होगा तब यह ध्यान रखा जाए. कई ऐसी पंचायतें हैं जिनके दो गांव इस विधान सभा क्षेत्र में हैं और दो गांव दूसरे विधान सभा क्षेत्र में हैं. परिसीमन करते समय यह गांव एक ही विधान सभा क्षेत्र में आ जाएं तो ठीक रहेगा.

          अध्यक्ष महोदय, इसी तरह से हमारे यहां जनपद कार्यालय बन रहा है. माननीय मंत्री जी को मैंने इस बारे में अवगत कराया था. यह शहर से 10 किलोमीटर दूरी पर बन रहा है. यहां पर वृद्धा पेंशन के हितग्राही भी आते हैं, सुरक्षा पेंशन के हितग्राही भी आते हैं. यह मुख्यालय पर बन जाए या मुख्यालय से लगे किसी स्थान पर बन जाए तो जो जरुरतमंद लोग हैं उनको सुविधा होगी.

          अध्यक्ष महोदय, कुछ सरपंच और सचिव सक्रिय रहते हैं जिसके कारण उस पंचायत का विकास हो जाता है लेकिन कुछ सरपंच और सचिव उतने सक्रिय नहीं रहते हैं उसके कारण विकास ठीक गति से नहीं हो पाता है. माननीय मंत्री जी इसके संदर्भ में भी कोई योजना बनाएंगे.

          अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया उसके लिए धन्यवाद.

          श्री साहब सिंह गुर्जर (ग्वालियर ग्रामीण) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 18 श्रम, मांग संख्या 30 ग्रामीण विकास एवं मांग संख्या 40 पंचायत पर बोलना चाहता हूँ. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया उसके लिए धन्यवाद देते हुए अपनी बात रखता हूँ.

          अध्यक्ष महोदय, ग्रामीण विकास अन्तर्गत खेत सड़क योजना बंद है जिसके विकल्प के रुप में कोई प्रावधान नहीं होने से गांवों के मजरे, टोले एवं खेतों तक पहुंच मार्ग नहीं है. जैसा अध्यक्ष महोदय जी ने कहा था कि भारी भरकम मंत्री जी हैं और भारी भरकम विभाग भी है. यह बात सच है मैं भी उनका बहुत सम्मान करता हूँ. मैं कहना चाहता हूं कि ‘’तिनका हूं तो क्‍या हुआ मेरा भी अपना वजूद है, उड़-उड़ कर हवाओं का रुख तो बताता हूं.’’ चूंकि हम क्षेत्र में जाते हैं तो हमें मालूम है कि क्षेत्र की जनता क्‍या चाहती है. ग्राम पंचायतों में अधोसंरचना कार्य हेतु निजी भूमि दानपत्र के माध्‍यम से दान करने की पूर्व में व्‍यवस्‍था थी जिसको समाप्‍त करके रजिस्‍ट्री अनिवार्य कर दी गई है. रजिस्‍ट्री की अनिवार्यता से विकास कार्य ठप्‍प हो रहे हैं. विकास कार्यों में निजी भूमि दान हेतु रजिस्‍ट्री की अनिवार्यता को खत्‍म कर पुरानी व्‍यवस्‍था लागू की जानी चाहिए. विभाग की 18 योजनाओं में खर्चा शून्‍य है. मनरेगा योजना के तहत प्रदेश में पंजीकृत मजदूरों में एक प्रतिशत् से भी कम मजदूरों को 100 दिन का रोजगार मिल पाया है जिससे मजदूर पलायन कर रहे हैं और इससे ग्रामीण बेरोजगारी की स्थिति स्‍पष्‍ट है. विभाग की 18 योजनाओं में वित्‍तीय वर्ष 2024-25 के दौरान एक रुपया भी खर्च नहीं किया गया है. स्‍वच्‍छ भारत मिशन और संबल जैसी अहम योजनाओं में भी पिछले दो वर्षों में राशि जारी नहीं की गई. आज भी शत् प्रतिशत ग्राम पंचायतों में पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, श्‍मशान घाट एवं श्‍मशान घाट तक पहुंच मार्ग नहीं हैं. ग्राम पंचायतों में आंगन वाड़ी भवन जर्जर स्थिति में हैं. आंगन वाड़ी में शौचालय नहीं हैं. मेरी विधान सभा में एक भी स्‍टेडियम नहीं है. आरईएस द्वारा बनाया गया ग्राम पंचायत जखारा में 80 लाख का स्‍टेडियम जर्जर स्थिति में है तथा पहुंच मार्ग भी नहीं है. बहुत सारे क्षेत्रों में कई ऐसे श्‍मशान हैं जहां पर पूरे क्षेत्र के लोग शव दाह के लिए जाते हैं. पंचायतों के साथ-साथ ऐसे भी श्‍मशानों को विकसित करना है.

अध्‍यक्ष महोदय, देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्‍व. राजीव गांधी जी ने संविधान में संशोधन कर राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी के ग्राम स्‍वराज के सपनों को पूर्ण कर त्रिस्‍तरीय पंचायतीराज की स्‍थापना की है. पहले पंचायतों को अधिकार संपन्‍न कर लगभग 27 विषयों पर कार्य करने का मौका दिया था. स्‍कूलों में शिक्षकों की भर्ती, विभिन्‍न विकास कार्य कराने के लिए राशि दी जाती थी साथ ही अन्‍य विभागों के द्वारा जो कार्य कराये जाते थे उनका सोशल ऑडिट भी पंचायतें करती थीं तब उन विभागों का भुगतान होता था. अब वर्तमान में पंचायतों से अधिकार छीनकर उनको कमजोर किया जा रहा है. पंचायतों में बहुत कम राशि दी जा रही है और उस राशि को कैसे खर्च करना है उसके दिशा निर्देश भी ऊपर से आते हैं. जिला पंचायत सदस्‍य और जनपद सदस्‍य मीटिंग में मांग और शिकायत करते हैं. उनको कोई महत्‍व नहीं दिया जाता है. पंचायतों की 5 वें और 15 वें वित्‍त आयोग की राशि बढ़ाई जाए. स्‍वच्‍छता एवं नाली निर्माण आदि छोटे-छोटे कार्य सरपंच आसानी से कर सकें. रोजगार मेले में बेरोजगारों से धोखा हो रहा है. बेरोजगार युवाओं को नौकरी देने के नाम पर ठगी करने के मामले सामने आ रहे हैं. आऊट सोर्स कंपनी ईपीएफ कटोत्रा की राशि भी जमा नहीं करती हैं जिस कारण युवाओं को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. नौकरी देने का झांसा देकर ड्रेस और फीस के नाम पर बेरोजगार युवाओं से पैसा लिया जा रहा है. कौशल प्रशिक्षण योजना के तहत ट्रेनिंग देने के दावे तो किए गए लेकिन न तो ट्रेनिंग देने वालों के पास इसका कोई प्रमाण है और न ही ट्रेनिंग लेने वालों के पास कोई सर्टिफिकेट है. पूर्व मंत्री सखलेचा जी ने एक शब्‍द आहा पर कुछ बात कही थी तो मैं कहना चाहता हूं कि ‘’हम आहा भी करें तो बदनाम हो जाते हैं, आप कत्‍ल करें तो चर्चा में नहीं आते.’’

          अध्‍यक्ष महोदय -- अब इसी शेर के साथ समाप्‍त कर दें.

          श्री साहब सिंह गुर्जर -- अध्‍यक्ष महोदय, एक शेर और है फिर समाप्‍त कर देता हूं ‘’जुल्‍मों के साये में जुबां खोलेगा कौन, हम भी चुप रहेंगे तो बोलेगा कौन.’’  

            श्री महेन्द्र नागेश (गोटेगांव) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया इसके लिये धन्यवाद. देश के प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में 2047 के विकसित भारत के सपने को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में हमारे पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री आदरणीय भाई साहब के मार्गदर्शन में आज हम पंचायत विभाग की मांग पर चर्चा करने के लिये खड़े हुये हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, जो वीबीजी राम जी कानून बना है, निश्चित ही उस योजना के अंतर्गत मजदूरों को जो काम देना है, किसानों की बोनी के समय और किसानों की फसल कटावनी के समय दो माह के समय में मजदूरों को खुद के काम करने की और किसानों को काम करने की छूट दी गई है और 10 माह में 100 दिन के स्थान पर 125 दिन का रोजगार दिया जायेगा.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, इसके अलावा भी जो मजदूर हैं बटाई-बगैहरा लेते हैं तो वह भी अपना काम करेंगे. और एक सप्ताह में उनको मजदूरी दी जायेगी ऐसा प्रावधान है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं 2004 से 2009 तक नरसिंहपुर जिले का जिला पंचायत का अध्यक्ष रहा हूं. प्रधान मंत्री आवास उस समय एक पंचायत में दो-दो, चार चार आते थे. वह भी एससी, एसटी और तीन प्रतिशत विकलांग के नाम पर. आज हम कहना चाहते हैं कि देश के प्रधानमंत्री जी ने गरीबों की दशा देखी और बिना मांगे, बिना आवेदन और निवेदन किये 100-200 और बड़ी पंचायतों में 500 आवास स्वीकृत किये हैं. बीच में 15 माह की सरकार आई थी जिसके कारण इन्होंने हिसाब नहीं दिया तो बीच में गति में कुछ अवरोध आया . निश्चित रूप से हम कह सकते हैं कि माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में माननीय प्रहलाद जी के मार्गदर्शन में एक से देढ साल के बाद पूरे प्रधान मंत्री आवास बन जायेंगे.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, इसी तरह से 15 माह की सरकार में संबल योजना भी बंद कर दी थी जिसके कारण से गरीब को लाभ नहीं मिल पाया. आज हम कह सकते हैं कि हमारे मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्व और माननीय प्रहलाद जी के मार्गदर्शन में आज मजरा टोला जो जोड रहे हैं, आने वाले समय में एक भी ऐसा गांव नहीं रहेगा जो सड़क विहीन होगा.माननीय अध्यक्ष महोदय, पूरे गांव में सड़कें बन जायेंगी, सड़कों का जाल बिछ जायेगा.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, इसी तरह से हम कह सकते हैं कि नर्मदा पथ पर भी माननीय प्रहलाद जी ने, चूंकि भाई साहब नर्मदा की परिक्रमा भी कर चुके हैं, बीच में योजना बन गई है जहां पर पुल पुलिया बनना है , रोड बनना है शीघ्र ही उसका भी काम शुरू होगा. मुक्तिधाम में हम कह सकते हैं, शांतिधाम के रूप में जैसे गांव में बहुत सी जगह सड़कें नहीं थी, अतिक्रमण था माननीय मंत्री जी ने निर्देश दिये हैं, मैंने भी देखा है मेरे क्षेत्र में भी सभी मुक्तिधाम अतिक्रमण से मुक्त हो चुके हैं, और उन पर सड़कें बन रही हैं, और भी उनकी तार-वाउन्ड्री हो रही है.

          माननीय अध्यक्ष महोदचय,  हम कह सकते हैं जहां पर पंचायत भवन नहीं थे, पंचायत भवन ग्राम पंचायत में, जनपद पंचायत भवन  जहां पर  नहीं थे, ऐसे ही जिला पंचायत भवन जहां पर नहीं थे, वहां पर ऐसे कार्य माननीय मंत्री जी के नेतृत्व में किये जा रहे हैं. सामुदायिक भवन भी दिये जा रहे हैं. ऐसे ही मैं संबल योजना के बारे में कहना चाहता हूं. संबल योजना आज चालू है तो बहुत सारे काम हो रहे हैं. स्व सहायता समूह के माध्यम से हमारी दीदी लखपति बनने जा रही हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना भी कांग्रेस के समय में जो बंद हो गई थी हमारी सरकार में चालू हुई है और अभी उस पर काम चल रहा है. माननीय अध्यक्ष महोदय, दिव्यांगजनों को भी दिव्यांगता के प्रमाण पत्र शिविर लगाकर के बनवाये जा रहे हैं, उनके लिये उपकरण भी बंटवाये जा रहे हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी की यह सरकार जिनके नेता हमारे डॉ. मोहन यादव जी हैं, माननीय वित्त मंत्री जी ने और माननीय सभी विभागीय मंत्री ने सभी क्षेत्रों में काम किया है. हमारे गोटेगांव विधानसभा में भी चहुंमुखी विकास के लिये माननीय सभी वरिष्ठ मंत्रियों ने पैसा दिया है. हम दो साल में इतना काम करवा चुके हैं कि हमारे क्षेत्र के लोग बोलते हैं कि ऐसा काम अभी तक कोई भी विधायक ने नहीं करवाया है. कहां से पैसा ला रहे हैं. मैं कहता हूं कि यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, डॉ. मोहन यादव जी की सरकार है हम तीन वर्षों में क्षेत्र में चहुंमुखी विकास करके जनता का आशीर्वाद पुन: लेंगे . आप सबको धन्यवाद. माननीय अध्यक्ष महोदय, आपका विशेष धन्यवाद जो आपने मुझे अपनी बात को सदन में रखने का अवसर प्रदान किया. आपका बहुत बहुत आभार .

          श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव (कसरावद) अध्यक्ष महोदय, मेरा एक छोटा सा सुझाव है.  मैं मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि  जिस प्रकार से सरकार  प्रत्येक ग्राम पंचायतों  में  श्मशानों के निर्माण  की बात कर रही है.  ऐसे कई क्षेत्र हैं,  जहां पर पीढ़ियों से, परंपराओं से  कुछ श्मशान  क्षेत्र हैं, जहां पर लोग शवदाह  के लिये लेकर जाते हैं.  तो पंचायतों के साथ साथ  ऐसे जो श्मशान हैं,  उनको  भी विकसित करने की  योजना सरकार  बनाने का काम करे. धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदयडॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह जी. राजेंद्र जी का संक्षिप्त  कैसे होगा,  इसका तो मंत्र आप बता दो. ..(हंसी)..

          डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह (अमरपाटन) अध्यक्ष महोदय,  मैं ही उसका हल निकालूंगा .

          श्री कैलाश विजयवर्गीय--  अध्यक्ष महोदय,  मैं बता देता हूं.   ये क्या धीमी गति के समाचार हैं.   थोड़ा सा अगर फास्ट चल  लेंगे, तो  थोड़ा सा समय बच जायेगा. ..(हंसी)..

          डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंहअध्यक्ष महोदय,  आपने बोलने का  मुझे समय दिया,  मेरे दल के नेता  ने  मेरा नाम दिया, मैं बहुत आभारी हूं. मैं ज्यादा समय  नहीं लूंगा.  आसंदी से संकेत मिल चुका है और कैलाश जी ने धीमी गति का समाचार  बता ही दिया है.  हमारे प्रहलाद जी, जो  पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री हैं,  बहुत योग्य व्यक्ति हैं,  बड़े वरिष्ठ राजनेता हैं. कहावत है कि  आसमान से   गिरे खजूर में अटके.  अब  काम तो बहुत करना चाहते हैं ये. लेकिन विडम्बना यह है कि  आपको स्मरण होगा,   एक शोले फिल्म है.  उसमें जो ठाकुर था,  उसके दोनों हाथ कटे थे. तो सामने की पंक्ति में कई ठाकुर बैठे हुए हैं.  ..(हंसी).. अब यह सरकार कैसे चल रही होगी.  इनके ये विभाग कैसे चलाते होंगे. बहरहाल मैंने जैसे वादा  किया,   मैं बहुत समय नहीं लूंगा.  मैं दो तीन सुझाव और दो मांगें रखना चाहता हूं.

          अध्यक्ष महोदयआप तो संकेत कर दो प्रहलाद जी  समझ जायेंगे.

          डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह--  अध्यक्ष महोदय, चूंकि  बजट पर बोलते समय  मैं  मांगें नहीं रख पाया और रखना भी नहीं चाहिये उस समय. पर विधायक तो हूं, क्षेत्र  है हमारा. हमारे लोग उम्मीद करते हैं.  दो मांगें पहले कह दूं,  फिर  सुझाव दूंगा.   2014-15 में  मेरे  विधान सभा क्षेत्र के ग्राम  जुड़मानिया में  प्रधानमंत्री सड़क बनी थी. यह  ग्राम  खरमसेड़ा  से लेकर, वहां से शुरु होकर  ढाई किलोमीटर   की सड़क  थी.  इसमें प्रहलाद जी ध्यान देंगे.  वह  मार्ग बनीं,  लेकिन 70-80 मीटर का  टुकड़ा बीच  में छोड़ दिया गया.  इसका कारण यह था कि  वह  व्यक्ति, मार्ग चल रहा था.  70-80  सालों से  वह मार्ग चल रहा था, लेकिन निजी जमीन थी. तो उस व्यक्ति ने  बनने नहीं दिया  और हमारे तबके प्रशासकीय  अधिकारियों की  उदासीनता के कारण मैं कहूंगा,  उसको समझाया जा सकता था.  कलेक्टर  और अधिकारियों के पास बहुत सारे रास्ते  होते हैं.  यह बंद कर देना, वह बंद कर देना. लेकिन रुचि नहीं ली गई  और वह न बनने के कारण  वह गांव दो हिस्सों  में बंटा है. एक  में पिछड़ों की  आबादी है ज्यादा और दूसरा  हिस्सा जो  है, उसमें अनुसूचित जाति, जनजाति  के लोग निवास करते हैं. लेकिन बारिश के समय   आवागमन पूरी तरह से बंद हो जाता है.   चुनाव के वक्त जब भी चुनाव  आये पिछले  4  चुनाव मैं लूं. दो लोक सभा,  दो  विधान सभा.  हमेशा वहां मोर्चा  खुलता है  और गांव के लोग इकट्ठे होकर के बोलते हैं कि रोड नहीं तो वोट  नहीं, यह नारा लगता है.  कलेक्टर और अधिकारी आते हैं और   लोगों को आश्वासन देते हैं कि  बस वोट डाल लो,  चुनाव खतम हो जाये,  तुम्हारी रोड पूरी करा देंगे. लेकिन  आज तक वह हो नहीं पाया है.  इसके लिये कोई न कोई  रास्ता  निकालना पड़ेगा. चूंकि संयोग से मैंने भी उसी गांव में  जन्म लिया है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीयउस समय क्या गब्बर सिंह   नहीं होगा.  नहीं तो कह देता कि कितने  आदमी हैं. ..(हंसी)..                                             

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह- अब वह कैलाश जी का अंदाज है, निराला है क्‍या कहा जाए. एक तो यह मार्ग बनना बहुत जरूरी है. चूंकि कई बार कलेक्‍टर्स ने आश्‍वासन दिया, कलेक्‍टर का आश्‍वासन मतलब सरकार का आश्‍वासन. क्‍योंकि डिप्‍टी सैक्रेटरी भी होता है, मजिस्‍ट्रेट के साथ-साथ, तो यह बननी चाहिये.

          अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह भंवराह है, वहां पर हमारी अनुसूचित जाति बसती है. वहां करीब ढाई सौ लोग निवास करते हैं. लेकिन एक आधा किलोमीटर का टुकड़ा न बनने के कारण वह लोग आ-जा नहीं सकते हैं. बारिश में तो बड़ा दुश्‍वार हो जाता है. कुछ लोग हैं उसमें उनकी निजी जमीने हैं. लेकिन इसका रास्‍ता खोजा जाना चाहिये.

          अध्‍यक्ष महोदय, अब दो-तीन सुझाव भी दे दूं और मैं ज्‍यादा नहीं रखूंगा. यहां पर प्रधान मंत्री आवास और मनरेगा का बदला हुआ स्‍वरूप विकसित भारत G-RAM -G पर बड़ी चर्चा हुई. अब चिंता का विषय यह है जो मैं समझता हूं कि आप कहते हैं कि आपने इतने आवास दिये. मानता हूं आपने आवास दिये, आपकी प्राथमिकता है. लेकिन क्‍या आपने यह अध्‍ययन किया कि जो राशि आप ग्रामीण क्षेत्रों में दे रहे हैं, वह डेढ़ लाख रूपये की राशि है, परंतु उसके हाथ में शायद एक लाख तीस या पैंतीस हजार रूपये ही आते हैं, तो क्‍या उसमें आवास बन जायेगा. आज बिल्डिंग मटेरियल की कीमतें इतनी बढ़ गयी हैं. मैंने प्रत्‍यक्ष देखा है एक गांव में. मैं आपको उदाहरण बता देता हूं. मैं एक गांव में गया और देखा कि वहां पर 5-7 घरों में ताले लटके हैं तो मैंने वहां पड़ोसी से पूछा कि क्‍या हो गया, सभी लोग कहां चले गये हैं. उन्‍होंने बताया कि साहब यह लोग काम करने के लिये गये हैं, इनके ऊपर बड़ा कर्जा चढ़ गया था. इन्‍होंने प्रधान मंत्री आवास से घर लिये थे. माननीय प्रहलाद जी, ढाचां तो खड़ा हो जाता है, लेकिन उसकी फिनिशिंग के लिये उसको लोन लेना पड़ता है, उधार लेना पड़ता है तो वह सारे लोग गुजरात काम करने के लिये गये थे ताकि वहां से कमाकर लायें और लोन चुकता करें. शहरी क्षेत्र में आप ढाई लाख रूपये देतो हो और ग्रामीण में आप डेढ़ लाख रूपये देते हो. ऐसा भेदभाव क्‍यों है ? बहुत सी चीजें तो शहर से ही गांव में आती है. आपको इस पर जरूर विचार करना चाहिये. ऐसा मेरा आग्रह है. यह सबके हित की बात है, पूरे प्रदेश की बात है.

          दूसरा सुझाव मैं यह देना चाहता हूं विकसित भारत G-RAM -G, हम लोग मनरेगा कहते थे. नाम से कुछ नहीं होता है, काम होना चाहिये, उसके परिणाम आने चाहिये. बाल्‍मीक जी ने यह जो आंकड़ा पेश किया था कि मजदूर नहीं मिल रहे हैं, घट रहे हैं. उसका भी एक कारण है कि मजदूरी और काम से मिलती है, वहां मजदूरी कम है. अब आप इसको कैसे सुलझायेंगे, मजदूरी कम होने से और कम होने के कारण लोग जाते नहीं, सरपंच सब मशीनों से काम करवा लेते हैं और उनका जॉब कार्ड लेकर उसमें भर लेते हैं. इस तरह से काम हो रहा है. इसमें भी आप थोड़ा सा पुनरीक्षण करिये कि कैसे इसको ठीक किया जा सकता है.

          अध्‍यक्ष महोदय, अब रहा सरपंच, क्‍योंकि जो हमारी ग्राम इकाई है. सबसे निचली इकाई है प्रशासिक इकाई, ग्राम पंचायत की. वहां पर जो सबसे निरीह प्राणी है, वह हमारा सरपंच है. कई लोगों ने यह बात यहां पर रखी, कुछ ने तो कहा सचिव ताकतवर है. मैंने देखा आधी जगह रोजगार सहायक बहुत ताकतवर है, उसके पास लैपटॉप है, कम्‍प्‍यूटर है, चाबी उसके पास है. की-बोर्ड पर उसकी ऊगंलियां उसकी चलती है, वह ताकतवर है. आप सरपंच की हालत सुधारिये, उसके पास कोई अधिकार नहीं है. इसी तरह की हालत जनपद सदस्‍यों की है, जनपद अध्‍यक्ष ब्‍लॉक में सबसे निरीह है. सीईओ उसको चारों तरफ घुमाता रहता है. क्‍या यह स्थिति प्रजातंत्र में उचित है, यह विचारणीय है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि मुझे और कहना नहीं है, कुछ चीजें थीं. आपने बड़ उदारता दिखायी. मैं तो सोच रहा था कि आप पहले ही बैठा देंगे कि बजट पर आपने बहुत बोल लिया. मैं इसी के साथ अपनी बात समाप्‍त करूंगा और लारिया जी एक करेक्‍शन कर लीजिये कि 55-60 साल कांग्रेस की सरकार, कांग्रेस की सरकार तो मैं अभी बैठकर गणित लगा रहा था कि उस 55-60 सालों में 27 साल तो आपकी सरकार रही. अगर हमारी गलती 20 प्रतिशत है तो 10-15 प्रतिशत आपकी भी है, अगर कहीं कमी रही गई है. यह जरूर ध्यान दिया कीजिए. सब माननीय साथी यहां पर यही कहा करते हैं. सब लोग वर्ष 2003 की बात करते हैं और बीमारू मध्यप्रदेश. अध्यक्ष जी, तब बीमारू थे, आज भी बीमारू हैं, तब भी मध्यप्रदेश का नम्बर 10वें, 11वें नम्बर पर था, आज भी हम विकास के सूचकांक में 10वें, 11वें नम्बर पर हिन्दुस्तान में हैं. तब भी वही स्थिति थी, लेकिन हो गया. आपको कहना है. बहरहाल, आपने समय दिया. मैंने जो सुझाव दिये हैं. माननीय मंत्री जी बहुत वरिष्ठ हैं. बहुत काम करना चाहते हैं. जैसे मैंने कहा कि थोड़ा हाथ खोल दो या ट्रांसप्लांट हम लोग करा देते हैं. आजकल तो ट्रांसप्लांट का जमाना है. हम जितने विधायक दल के लोग हैं. इधर वाले, उधर नहीं कराएंगे तो हम लोग कराएंगे. हम लोग चाहते हैं कि आप काम करो.

          अध्यक्ष महोदय - डॉ. राजेन्द्र जी वाली आपको सड़क बनानी ही पड़ेगी, ऐसा लगता है.

          डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह - अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया. बहुत बहुत धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी.

          (मेजों की थपथपाहट)..

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) - अध्यक्ष महोदय.

          अध्यक्ष महोदय - आपको अगर खड़े होने में तकलीफ हो तो बैठने की अनुमति आप मांग सकते हैं.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल - अध्यक्ष महोदय, उन्होंने रहम नहीं किया, आप क्यों कर रहे हैं? जिन्होंने कहा कि हाथ नहीं, पैर भी टूटे हैं. (हंसी)..अध्यक्ष महोदय, इस मंत्रालय की मांगों के संदर्भ में माननीय सदस्य सर्व श्री राजेन्द्र मेश्राम जी, फूलसिंह बरैया जी, ओमप्रकाश सखलेचा जी, सोहनलाल बाल्मीक जी, दिव्यराज सिंह जी, कैलाश जी, इंजी. प्रदीप लारिया जी, साहबसिंह गुर्जर जी, महेन्द्र नागेश जी, सचिन सुभाषचन्द्र यादव जी, डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह जी सहित, मैं सदन के सभी सदस्यों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि इस चर्चा में आपने सकारात्मकता के साथ भाग लिया, लेकिन एक बात तो सच है कि आपको स्वीकार करना पड़ेगा कि बजट में जो बढ़ोतरी हुई है, वह बहुत बड़ी बढोतरी है. (मेजों की थपथपाहट).. ग्रामीण विकास में अगर अकेले हम देखें तो 34 फीसदी है और ग्रामीण विकास और पंचायत जोड़ते हैं तो 25 फीसदी की बढ़ोतरी है. मुझे लगता है कि दूसरा हम जिन बातों पर बातचीत करते हैं तो मैं इतना ही आग्रह करूंगा कि ग्रामीण विकास अब हम सबकी प्राथमिकता होनी चाहिए, वह प्राथमिकता सिर्फ इसलिए नहीं कि हम पीछे रह गये. आने वाले भविष्य अगर हमने गांवों को स्वावलंबी नहीं बनाया तो इतनी बड़ी
आबादी वही संसाधन और जो भारतीय अर्थव्यवस्था की गति बढ़ रही है उस पर निश्चित रूप से गांव के लोगों की हिस्सेदारी उतनी ही सक्रियता के साथ होनी चाहिए. लेकिन हर बार जब मनरेगा की चर्चा होती है तो यह मान लिया जाता है कि यह सिर्फ मजदूरों के लिए है. यह डिमांड बेस्ड थी, पहले दिन ही जिस दिन यह राष्ट्रीय रोजगार योजना थी, जिस दिन यह नेहरू रोजगार योजना बनी, जब यह महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना बनी, यह रोजगार के लिए थी कि किसी को रोजगार न मिले तो उसको रोजगार मिल जाय. इस पर डिपेंडेंसी नहीं थी. अगर कहीं रोजगार नहीं है तो आप इस योजना के तहत अपने ही गांव में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं. यह डिमांड बेस्ड योजना थी.

          अध्यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि यह सब जानने के बाद भी हम जिस भाषा का प्रयोग करते हैं, यह उचित नहीं है. आज वह विकसित भारत G-RAM-G है, G-RAM-G में जो पहली बात कही गई, वह यही कही गई कि यदि कोई मजदूर है और वह स्कील्ड है, अगर उसके पास कोई हुनर है तो उसको स्वावलंबी बनने की तरफ आगे जाना चाहिए कि उसका खुद का रोजगार हो, उदाहरण के लिए अगर कोई कन्नी चलाता है और उसके बाद भी अगर वह कहता है कि साहब मजदूर हैं तो उसके नीचे भी काम करने वाले मजदूर हैं तो जिनके पास कोई हुनर नहीं है वह मजदूरी करे, परन्तु जिनके पास में हुनर है तो वह अपने बूते पर स्वावलंबन के 4 कदम आगे बढ़ाएं, यह देश के प्रधानमंत्री का कहना है. (मेजों की थपथपाहट)..और ग्रामीण विकास की इस अर्थव्यवस्था में हर बार हम यही बात कहते हैं कि इतना पैसा आया, पैसा कम नहीं है. 15 वें वित्त की किस्त अगर मैं कभी माननीय सदस्यों से कहूंगा, वह किसी भी पक्ष के हों, आप एक बार किसी पंचायत में जाकर बैठकर देखिए. 15वें वित्‍त का भारत सरकार का जो पैसा किसी पंचायत में जाता है, वह जनसंख्‍या के आधार पर जाता है और सीधे उसी के खाते में जाता है. उसी में मैंने जो टाइप्‍ड और अनटाइप्‍ड की बात कही है या जिस पर बड़ा जोर रहा है, जब मैं देश में स्‍वच्‍छता और पेयजल का राज्‍यमंत्री था, तब ही यह बात आयी थी कि जब हर गांवों में, हर घर में पाइप के द्वारा पीने का पानी होगा, अगर नल की टोटी टूट जाए, पाइप लाईन में लीकेज हो जाए, अगर उसको सुधारना है, तो पैसे कहां से लेकर आएंगे. वह टाइप्‍ड और अनटाइप्‍ड का पैसा किसी के खर्च करने में प्रतिबंध नहीं है. अगर कहीं गंदा पानी है, वॉटर मैनेजमेंट के लिए अगर आपको काम करना है तो पेयजल और स्‍वच्‍छता में उस पैसे का उपयोग हो सकता है. क्‍या पंचायतों को जरूरत नहीं है कि वे पेयजल की स्‍वच्‍छता सुनिश्‍चित करे. जिस अधिकार की बात हमारे माननीय सदस्‍य करते हैं, मैं विनम्रता से उनसे कहता हॅूं कि 30 साल पहले जब यह कानून पास हुआ था, तो उसमें अधिकार चिन्‍हित हुए थे. उसमें बिजली, सड़क, पानी, आवास यह सब राज्‍य के विषय हैं. यह सब पंचायत का अधिकार है. लेकिन मैं पूछता हॅूं कि उन 30 वर्षों में चाहे वह राज्‍य सरकार हो, चाहे ग्राम पंचायतें हों, हमने किसी भी इस अधिकार पर अपनी जिम्‍मेदारी का निर्वहन किया हो, तो हमें आज आत्‍मविलोकन करना चाहिए. मुझे लगता है कि सिर्फ हमें राज्‍य सरकार या केन्‍द्र सरकार के पैसों पर हम अपनी पंचायतें चलाएंगे, अगर यह धारणा है तो यह शायद देश के लिए और उनके खुद के लिए अच्‍छी नहीं होगी.

          अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए जब कभी आजीविका मिशन की बात आती है, तो देश के प्रधानमंत्री जी ने कहा है और आज से डेढ़ साल पहले ही कहा है कि जब देश तीसरी अर्थव्‍यवस्‍था बनेगा, तो उसमें हिन्‍दुस्‍तान की आजीविका मिशन की बहनों का योगदान होगा. मुझे लगता है कि यह सरल-सी बात है कि जो लोग निठल्‍ले बैठे हैं, या जो काम ही नहीं करना चाहते, उनसे अच्‍छा अगर कोई चार कदम चल रहा है या परिश्रम कर रहा है, वह समाज को भी योगदान कर रहा है, परिवार को भी योगदान कर रहा है और देश को भी योगदान कर रहा है. आत्‍मनिर्भरता भाषणों में नहीं हो सकती और मैं समझता हॅूं कि जब कभी हम कहते हैं कि कोई एससी, एसटी, पिछडे़ वर्ग के लोग ही मजदूर हैं, तो यह कहना पूरी तरह से सही नहीं है. अधिक संख्‍या हो सकती है लेकिन क्‍या हम सब उन्‍हें मजदूर ही देखना चाहते हैं ? हम उनके हाथ में कोई हुनर नहीं देना चाहते ? यही एक कथन है, मुझे लगता है कि यह सही नहीं है. और इसलिए मैं इस बार एक आंकड़ा दूंगा. पिछले वर्ष मध्‍यप्रदेश का 15 करोड़ मानव दिवस का लक्ष्‍य था. लेकिन जब अचानक हमारे सामने 11 लाख 66 हजार मकान मध्‍यप्रदेश में बनने की समस्‍या आयी और जब हमें स्‍वीकृति मिली, तब हमारे सामने चुनौती थी कि हम 40 प्रतिशत राशि कहां से लेकर आएं. माननीय शिवराज सिंह चौहान जी ने हमसे कहा कि हम साढे़ सात और करने के लिए तैयार हैं तब हमने कहा कि  किसी राज्‍य की व्‍यवस्‍था ऐसी नहीं हो सकती. उसमें दो कम्‍पोनेंट तो राज्‍य के हैं, जिसका 40 प्रतिशत पैसा हमको देना है. दूसरा, 90 दिन की उसकी मनरेगा की मजदूरी है जो हमारे कार्यदिवस थे, वह 11 लाख 66 हजार मकानों में 90 दिन के रोजगार को मल्‍टीप्‍लाई कर दीजिए, तो उसी में समाप्‍त हो जाएंगे. तब मैंने केन्‍द्र सरकार से कहा कि आपको इसके लिए अलग से मानव दिवस देना चाहिए. और उन्‍होंने 5 करोड़ मानव दिवस हमको दिए. इस साल का हमारा जो लक्ष्‍य है वह 20 करोड़ मानव दिवस का है (मेजों की थपथपाहट) और इसमें हमने अभी तक 17 करोड़ 48 लाख मानव दिवस पूरे किए हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, एसटी, एससी की हम बहुत बात करते हैं. मैं बैकअप भी आपको कहता हॅूं. इसमें 13.94 प्रतिशत एससी वर्ग के लोगों को जॉब मिला है. 31.22 प्रतिशत एसटी वर्ग के लोगों को जॉब मिला है और उन्‍होंने ज्‍यादा काम किया है. तीसरा महिलाओं का जो आंकड़ा है, वह 42.80 प्रतिशत है. (मेजों की थपथपाहट) अब आप कल्‍पना कीजिए कि मनरेगा जैसी योजना में जो यह बैकअप है, यह इस बात का संदेश दे रहा है कि महिलाओं को, जिनको हम कहते हैं कि वे काम नहीं करती, सर्वाधिक काम उस वर्ग ने किया है और इसलिए कम से कम इन बातों पर हमें एकजुट होना होगा, इसमें हमारे बीच में कोई मतभेद होना नहीं चाहिए. अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा जब आप "जी राम जी" की बात करते हैं, तो मध्‍यप्रदेश का जो इस बार का बजट है और मध्‍यप्रदेश सरकार ने इसी सत्र में जो बजट रखा है वह 10 हजार 423 करोड़ रूपए का है. पिछली बार जो हमारे पास मनरेगा का बजट था, वह 5 हजार करोड़ रूपए के आसपास था. अब उसमें 40 फीसदी पैसा हमको देना है. 60 फीसदी पैसा भारत सरकार देगी. लेकिन इस बार यह फर्क हो गया है कि भारत सरकार बजट तय करेगी. अगर आपके पास में 40 प्रतिशत अंशदान है, तो आप शामिल करिए और उसके बाद आपके पास में पैसा होगा. आज अगर हम 10 हजार करोड़ में से 8 हजार करोड़ की शेयरिंग करते हैं और भारत सरकार अगर हमें 12 हजार करोड़ देती है, तो आप कल्‍पना कीजिए कि 20 हजार करोड़ रूपए हमारे पास इस मद में होगा, जो आज हमारे पास मिला जुला कर 6 हजार भी होता है. अगर हम स्टाम्प ड्यूटी को ही उसमें जोड़ दें तो भी हमारे पास साढ़े छः हजार करोड़ से ज्यादा नहीं होता है. अब बात आती है कि हम काम कैसे करेंगे ? जिन बातों पर आपत्ति रही है वह आपत्ति आप कर नहीं सकते ? पहले 100 दिन रोजगार की गारंटी थी, अब 125 दिन रोजगार की गारंटी है. इतना फर्क जरूर है इसमें पहले हम सब शिकायत करते थे. सदन में खड़े होकर के मैंने भी कहा है आप भी उस विभाग के मंत्री रहे हैं. मैंने कहा था कि सरपंच शिकायत करता कि हमको मजदूर नहीं मिल रहे हैं, वह मशीन से काम करा रहा है. जितने 56 लाख जॉप कार्डधारी हैं मैंने पिछली बार भी सदन में कहा था अभी भी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि जिस व्यक्ति के पास जॉब कार्ड है. अगर आपके पास किसी समाचार पत्र वाले के पास या किसी मीडिया पर्सनल के पास कोई जॉब कार्ड लेकर के गया हो कि साहब मेरे पास में जॉब कार्ड है और मुझे जॉब नहीं मिला तो निश्चित रूप से सरकार जिम्मेदार है. मैं उसकी जिम्मेदारी लेता हूं. लेकिन तरफ हम यह कह रहे हैं कि यह वास्तव में भ्रष्टाचार कहना उचित नहीं है, बल्कि यह विसंगति थी. इसमें जी राम जी में दूर हुआ है. अब हमें यह तो तय करना पड़ेगा कि हम काम क्या करना चाहते हैं हमें काम तो लेने पड़ेंगे. जैसे पिछले सत्र में मैं उपलब्धि नहीं गिना रहा हूं. ओम जी ने यह संख्या बतायी है. वही बजट था अध्यक्ष जी जिसमें कम से कम ढाई हजार अटल ग्राम सेवा सदन के नाम पर पंचायत भवन नहीं थे. अब भवन बन गये हैं बाकी बनने के लिये तैयार हैं. जनपद 313 हैं, 106 जनपद के भवन नक्शे बदले गये. हम ही पंचायत की बात करते हैं. हमारे पास में पंचायतों का सेटअप कहां है, हमारे पास में भवन कहां हैं ? लेकिन हमने भवन बनाने की बात की है. पांच जिला पंचायत के भवन उसमें दतिया कब जिला बना उसके पास में जिला पंचायत का भवन नहीं था ? चार तो नये जिले बने हैं. मुझे लगता है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर के बारे में खुले दिलों-दिमाग से सोचना होगा कि ग्रामीण विकास का काम हम कैसे करेंगे ? लेकिन जहां सवाल रोजगार का है. तो मैं आपसे गर्मी आने के बाद पानी खत्‍म हो जाएगा, तो हमने असेसमेंट करवाया कि 8 महीने कितने तालाबों में, कितना पानी रहा है. क्‍योंकि हम सभी की चिंता यह होनी चाहिए कि हमारे जो स्‍त्रोत हैं, उनका अस्तित्‍व बचेगा या नहीं बचेगा, लेकिन अभी किन कारणों से बंद हुआ जो 35 काम थे, उसमें तालाबों के गहरीकरण का काम बंद कर दिया गया था. ये मैंने नहीं किया, ये पहले से बंद है, क्‍यों हुआ क्‍योंकि वह बरसात शुरू होने के पहले शुरू होते थे, मूल्‍यांकन न हो तो इसमें जो गोलमाल होता था उसके कारण बाहर हुए, लेकिन उसके बाद भी स्‍त्रोत तो हैं न हमारे, उन स्‍त्रोत की सुरक्षा के लिए हमें कोई रास्‍ता निकालना होगा. ये जो जी-राम-जी है, ये इसी का रास्‍ता है. उन्‍होंने कहा कि यदि आप कोई मजदूरी करते हो और आपके पास जॉब कार्ड है, तब भी आपको थंब इम्‍प्रेशन देना पड़ेगा, तभी आपको मजदूर माना जाएगा. अगर आप कोई काम करते हो तो उसको जीयो-टैग करना पड़ेगा. यदि  कोई बड़ा काम किया है तो उसको पोर्टल पर डालना पड़ेगा. इसी भ्रष्‍टाचार के खिलाफ तो हम सभी है, सभी इसी बात की आलोचना करते हैं. इस पारदर्शिता को इसमें जिम्‍मेदारी के साथ रखा गया गया है. दूसरी बात इसके बारे में भ्रम है, हर विधायक को यह लगता है कि मेरी मर्जी से प्रस्‍ताव आना चाहिए. मैं इसका विरोध नहीं हूं, लेकिन पंचायती राज में ऐसा नहीं हो सकता. आप एक तरफ अधिकार की बात कर रहे हो, दूसरी तरफ यह अपेक्षा भी कर रहे हो कि मेरी मर्जी का प्रस्‍ताव यहां पर आना चाहिए. तब भी मैं यह बात मानता हूं कि जी-राम-जी में एक बात बड़ी साफ हो गई है कि जो भी पैसा होगा, उसका 80 फीसदी ग्राम पंचायत के पास होगा, 10 फीसदी जनपद के पास और 10 फीसदी जिला पंचायत के पास होगा. योजन बनाने का काम ग्राम पंचायत के पास होगा, जनपद के पास होगा, जिला पंचायत के पास सुपरविजन का काम होगा. लेकिन अगर हमको अगले साल खर्च करना है तो इस वर्ष आपको पोर्टल पर डालना पड़ेगा कि मैं ये दस काम करुंगा. मैं आपको इस सदन में जिम्‍मेदारी के साथ कहता हूं कि पैसे की कमी नहीं है, पैसा आपको मिलेगा, लेकिन आप तो कहते हैं कि हम डिक्‍टेट कर रहे हैं, हम डिक्‍टेट नहीं कर रहे हैं, उसमें सिर्फ इतना ही कहा गया है कि हम राज्‍य के स्‍तर और केन्‍द्र के स्‍तर पर हम सलाह देंगे और इसका उदाहरण मैं आपको देता हूं. पिछले सत्र में मैंने इस सदन में कहा था कि पांचवें वित्‍त का 6 हजार करोड़ रुपए का बजट पहली बार मध्‍यप्रदेश सरकार ने दिया था. मैं वित्‍त मंत्री और मुख्‍यमंत्री जी का आभारी हूं. जब 6 हजार करोड़ रुपए हमें मिले हम तीन किश्‍त ही दे पाएं, लोगों ने खर्च नहीं किया. आप कल्‍पना कर सकते हो और हमारे पास 6 हजार करोड़ होने के बाद भी हम तीसरी किश्‍त ही दे पा रहे, चौथी किश्‍त कोई ले नहीं पाया, ये सच्‍चाई है.

          अध्‍यक्ष जी, मैं बहुत आग्रह पूर्वक कहता हूं कि हम पैसे के यूटिलाइजेशन के बारे में तो विचार करें कि हम वास्‍तव में उस पैसे का सदुपयोग करेंगे या नहीं करेंगे. जो जी-राम-जी है, वह सिर्फ यही संदेश देता हैं. हां, उसके भी अभी नियम बनने बाकी है. पहले 60-40 था, 60 मजदूरी का था 40 मटेरियल का था. उसको अब 50-50 किया गया है. अभी भी कई कामों में ये बड़ी चुनौती हो गई कि 50 फीसदी मजदूर कहां से लेकर आएं या मजदूरी हम दें. बाकी असेट बनने के लिए कहा कि हां अब आप असेट बनेंगे. पहले मनरेगा में गड्ढे खोदो, गड्ढे भरो यही होता था. खेत सड़क की बहुत बात होती है. मैं विनम्रता से कहूंगा कि पंचायतें, ग्राम पंचायत में जितनी भी खेत- सड़क है, एक बार पोर्टल में डाल दें. आप भी अपने क्षेत्र में पूछ लीजिए. मैंने कहा आप सिर्फ इतना कीजिए, मुझे कोई कार्यवाही नहीं करनी आप ये बताइए कि कितनी बार आपने इस खेत सड़क पर काम किया है. अगर आपने तीन बार किया और उसके बाद भी उसकी स्थिति जस की तस है तो मुझे जवाब नहीं देना चाहिए, ये सदन इस बात को अच्‍छी तरह से जानता  है. खेत सड़क में तो कोई ट्रक नहीं चलते, ट्रेक्‍टर  जाते हैं, खेत का काम होता है. ऐसा तो नहीं है कि किसी पंचायत में 10 होगी, मैं तो मानने के लिए तैयार नहीं हूं, लेकिन अगर तीन साल में उसको कम से कम मुरम वाली सड़क यदि बना देते, तो शायद हमें दोबार उस पर काम करने का मौका 5-7 या 8 साल बाद पड़ता तो, पड़ता अन्‍यथा शायद हमको नहीं पड़ता. गोहो को ऊपर उठा देना, अगर हम देसी भाषा में कहें तो उसके बाद किसी की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन हमने काम ही नहीं किया. इसलिए मैंने कहा कि आप पोर्टल पर डाल दीजिए और अगर आप कहते हैं तो यह लिख दीजिए कि हमें इसके अपग्रेडेशन के लिए चाहिए, तो मैं पैसे देने के लिए तैयार हूं, तब जाकर यह प्रतिबंध लगा और भारत सरकार ने मेरी इस राय को माना और जी-राम-जी में स्‍पष्‍ट लिखा  है कि कम से ऐसे कामों के लिए पैसे नहीं दिए जाने चाहिए, आखिर एक रोड के अपग्रेडेशन के लिए. प्रधानमंत्री सड़क है, प्रधानमंत्री सड़क के आंकड़ों में मैं नहीं जाना चाहता. पहले चरण का, दूसरे चरण का, तीसरे चरण का अब चौथा चरण शुरू हुआ. 500 की आबादी के गांव मध्‍यप्रदेश के जुड़ रहे हैं, आप बिल्‍कुल कोई लिखे  चिट्ठी या न लिखे उनके टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो गई, मगर हां अगर एक विधानसभा में दो ब्‍लॉक हैं, तो शायद एक ब्‍लॉक पहले ले रहे हैं और एक अगली साल 500 की आबादी पर लेंगे,  लेकिन दूसरी योजना अध्‍यक्ष महोदय, अगर सत शत प्रतिशत जनजाति के हैं तो उसको 500 की आबादी नहीं, वह 250 की आबादी में भी वह गांव जुड़ेगा, वह प्रधानमंत्री सड़क योजना के चौ‍थे चरण में है (मेजों की थपथपाहट) हमने कभी ध्‍यान नहीं दिया है, जो आदिवासी क्षेत्र में जनप्रतिनिधि हैं, मैं उनको बड़ी विनम्रता से कहता हूं, आपने शायद गलती की है, योजना के पहले- दूसरे चरण में ही सारे मजरे, टोले जुड़ जाना चाहिए था, यह नियम तो तभी से है, पहली बार से ही है कि 250 की जनजाति क्षेत्रों की आबादी जुड़ सकती थी, दूसरा एक ओर बड़ी गलती हुई थी कि पहले और दूसरे चरण में कहीं रिपटा था, कहीं किसी भी मद से पुल-पुलिया बने थे, उसको बारहमासी मान लिया गया था, पंद्रह दिन में अगर 4, 6 घण्‍टे, 10 घण्‍टे, 12 घण्‍टे या तीन दिन भी बंद होता था, तो उस रोड की परिभाषा बारहमासी तब भी मानी जाती थी, बाद में भारत सरकार ने वह नार्म्‍स कम किये, फिर 74 घण्‍टे की बात आई, फिर उसके बाद में अब 48 घण्‍टे हो गया और इसलिए बिना कहे भारत सरकार का नियम है कि जहां तक बाढ़ का पानी आता है, उससे तीन फुट ऊपर वही पुलिया बनेगी, ताकि भविष्‍य में उसके ऊपर कभी पानी न आये और पहली बार चूंकि उस समय हमको भारत सरकार ने जो पैसा दिया था, शायद किसी कारण से हम दे नहीं पाये होंगे, लेकिन इस बार 1756 ऐसे पुल पुलिया विभाग ने चिन्हि्त किये हैं, जो हमें ही बनाना है और हम तीन साल के भीतर उनको बनायेंगे और इसमें उसके बजट का प्रावधान है, तो मुझे लगता है कि हम ऐसा नहीं है कि उस काम को कोई छोटे उसमें ले रहे हैं, हमको किसी न किसी काम को स्‍थाई तौर पर पूरा करना पड़ेगा. प्रधानमंत्री सड़क है, पांच साल के बाद में उसका रिनोवेशन होता है, वह रिनोवेशन के काम चल रहे हैं, जो छोटे-मोटे सुधार होते हैं, उसके काम चल रहे हैं, मुख्‍यमंत्री सड़क योजना शिवराज सिंह चौहान जी के समय शुरू हुई थी, हमारे सड़क प्राधिकरण ने 12 हजार किलीमोटर डामरीकरण उसको पूरा किया है, तो मुख्‍यमंत्री सड़कें भी अपग्रेड हो गई हैं, उस समय जो बनी थी, लेकिन इस बार मेरा आग्रह सदन से यह है और यह मेरी सलाह है, जैसे मैंने कहा था कि अभी भी मैं इस बात को स्‍वीकार करता हूं कि हां मैं प्रभारी मंत्री हूं और जिले का नाम लेना ठीक नहीं है. मुझे वह घटना वहीं से याद आई है, याने दो गांव के बीच में एक मरघट था, एक गांव के लोग शव घर से लेकर शमशान आये और दूसरे गांव के कुछ सिरफिरे दो, चार, पांच लोगों ने उस शव को वहां जलने नहीं दिया और वह उसको सड़क के किनारे जलाकर चले गये. यह विवाद कलेक्‍टर के पास आया, प्रभारी मंत्री के नाते मैंने बुलाकर उनसे बात की, तब ऐसा लगा कि ऐसे कितने गांव होंगे, देश की आजादी के इतने वर्षों बाद भी जहां पर शमशान की जमीन नहीं है और अगर जहां पर शमशान की जमीन है, तो उस पर कब्‍जा है, शमशाम है, जमीन है, लेकिन उसके पास में पक्‍की सड़क नहीं है, उसकी फैंसिंग नहीं है. आज भी देश की आजादी के 80 साल होने वाले हैं और उसके बाद भी जो सबकी जरूरत की चीजें हैं, इनको अगर हमने फोकस नहीं किया, तो यह ठीक नहीं होगा तो मैंने सलाह दी थी कि पांचवे वित्‍त का पैसा जो सरपचों के पास है, उसको कर लें और कम पड़ेगा तो मैं दूसरे मत से दे दूंगा लेकिन क्‍या हम लक्ष्‍य रख सकते हैं?यह बात मैंने वर्ष 2025 में इसी सदन में कही थी और मैंने कहा था कि क्‍या दिसंबर 2026 तक क्‍या राज्‍य के प्रत्‍येक गांव में हम शमशान घाट की गारंटी दे सकते हैं कि वहां सड़क भी है, फैंसिंग भी है, जमीन भी है? यह गारंटी हमको देना पड़ेगी और मुझे लगता है कि यह ऐसी सलाह तो नहीं है कि जो न मानी जाये, इसलिए राज्‍य सरकार हो या भारत सरकार हो, वह खाली सलाह देने का काम करेगी बाकी सारे का सारा काम त्रिस्‍तरीय पंचायती राज को ही करना है. एक और सफलता के लिये मैं कहूंगा कि इस साल हमारा जो है, वह सर्वाधिक प्रधानमंत्री आवास बनाने का वर्ष है, जबसे प्रधानमंत्री आवास योजना प्रारंभ हुई है, इस वर्ष हम 11 लाख 66 हजार मकान बना रहे हैं, जिसमें से 7 लाख पूरे हो गये हैं, बाकी अभी बचे हैं (मेजों की थपथापहट) अब आप एक बार एक स्‍लेब में देखिये कि जब पहली बार प्रधानमंत्री आवास योजना शुरू हुई, तो बहुत लोगों ने शिकायत की थी कि हम पात्र थे और छूट गये, सर्वे हुआ 27 लाख आवास प्‍लस के लोगों की सूची उस पर आई थी, आज वह पहले वाले तो पूरे हो गये हैं, 27 लाख के अब केवल पौने 8 लाख ही बचे हैं, जो इस साल हमने स्‍वीकृत करना शुरू कर दिया है और दो लाख स्‍वीकृत भी हो गये हैं और वर्ष 2027 तक हम इनको स्‍वीकृत करेंगे और वर्ष 2028 तक हम इस राज्‍य को यह गारंटी दे पायेंगे कि हम आवास प्‍लस के सभी मकानों को बनाने में सफल हो गये हैं. लेकिन अभी प्रधानमंत्री जी को आपको धन्‍यवाद देना पड़ेगा, आप कहोगे वाह-वाह प्रधानमंत्री कह रहे हैं. उनसे जब कहा गया तो लोगों ने कहा कि हम पात्र होने के बाद भी रह गये. आवास प्‍लस के बाद भी आखिरी सर्वे भारत सरकार ने शुरू किया और मध्‍यप्रदेश में वह सूची 62 लाख है. अब इसमें पात्र कितने हैं, अपात्र कितने हैं, इसकी अभी जांच चल रही है, लेकिन इसमें से भी कुछ निकलेंगे, यह बचेंगे जो वर्ष 2028-2029 में जिनको मिलता जायेगा तो यह प्रधानमंत्री आवास योजना की है, लेकिन इसमें 40 फीसदी राज्‍य सरकार को देना है, 90 दिन की मजदूरी मनरेगा से उसमें मिलनी है, 12 हजार रूपया हमारे स्‍वच्‍छता विभाग से मिलने हैं, शौचालय के लिये यह 1 लाख 20 हजार से अलग हैं और इसलिये मुझे लगता है कि हम उस ढंग से देखेंगे तो यह हमें अनजस्‍टेड लगेगा नहीं, लेकिन हां जनजाति क्षेत्रों में जो अति पिछड़ी जनजाति हैं बैगा, सहरिया, भारिया कुछ मित्र कह भी रहे थे इसमें एक परिवार को 2 लाख रूपया आवास के लिये है 90 दिन की उनको मजदूरी मिलेगी और साथ में 12 हजार रूपये उनको स्‍वच्‍छता विभाग से शौचालय बनाने के लिये मिलेंगे, यह सिर्फ उन वर्गों के लिये है जो अति पिछड़ी जनजातियां है. जब हम एक तरफ प्रधानमंत्री सड़क की बात करते हैं तो दूसरी तरफ इन्‍हीं जनजातियों के लिये पीएम जनमन योजना में सड़क का प्रावधान भी है अध्‍यक्ष महोदय, जिसमें इस बार 900 करोड़ रूपया, फिर से हम देश में नंबर वन पर हैं मकान बनाने में, सड़क बनाने में और अगले साल के बाद 100 प्रतिशत 24 जिलों में जितने भी बैगा, सहरिया और भारिया जाति के हमारे जनजाति बंधू रहते हैं, सरकारी नौकारी करने वालों को छोड़कर, ऐसा कोई परिवार नहीं होगा जिनके पास पक्‍का मकान न हो और उसके गांव में पक्‍की सड़क न हो. लेकिन इसमें तो 100 तक का है, इनको अधिकार 100 तक का है कि अगर 100 की आबादी होगी तो भी सड़क वहां तक जायेगी. यह अधिकार सिर्फ नक्‍सलवादी क्षेत्रों को मिला है और दूसरा सहरिया, भारिया और बैगा अति पिछड़ी जाति को मिला है तो तीन श्रेणियां हैं. अध्‍यक्ष महोदय, एक 100 की आबादी की है, एक ढाई सौ की है जहां एसटी 100 प्रतिशत हैं और फिर 500 की आबादी जो प्रधानमंत्री सड़क योजना का चौथा चरण है, लेकिन अभी तक कोई हेवीटेशन की परिभाषा नहीं थी. हम सब समाज में राजनीति में काम करते हैं हमसे कोई कहता है कि 20 मकान बने हैं हमको सड़क चाहिये, कोई 5-10 मकान वाला भी ताकतवर है तो वह भी चाहता है कि मुझे सड़क मिले, लेकिन मध्‍यप्रदेश सरकार को और मुख्‍यमंत्री जी को मैं धन्‍यवाद दूंगा, हेवीटेशन की परिभाषा बन गई है. 6 हजार वर्गमीटर में अगर आबादी होगी तो हम हेवीटेशन मानेंगे, अगर 20 मकान होंगे तो हम हेवीटेशन मानेंगे, अगर 100 की आबादी होगी तो हम हेवीटेशन मानेंगे. इन तीन में एक भी कोई नार्म्‍स पूरा होगा तो वहां पर मुख्‍यमंत्री मजरा टोला और फलिया क्‍योंकि झाबुआ में इसको फलिया कहते हैं, उसको जोड़कर हम उस सड़क को पहुंचायेंगे और अभी तक 20 हजार 600 ऐसे हेवीटेशन चिन्हित हुये हैं शिवपुरी से, लेकिन उसके बाद भी फिजीकल वेरीफिकेशन करा रहे हैं. तो मुझे लगता है कि सड़क है, आवास है, पानी है अभी तक पानी के ऊपर भी बात चलती थी, लेकिन अभी भारत सरकार ने एक बैठक की है कि जो भी पेयजल की योजनायें होंगी उसे पंचायत ही संचालित करेगी मेंटेनेंस करने के लिये जनपद के स्‍तर पर एक टेक्‍नीकल सपोर्ट होगा जो पीएचई जैसा तंत्र होगा जो बड़े कामों को वहां पर देखेगा और छोटे मोटे कामों के लिये पंचायत खुद जवाबदेही होगी.

          अध्‍यक्ष महोदय, कुछ नवाचार किये हैं, लंबी बात न करते हुये मैं अपनी बात को खत्‍म करूंगा एक बगिया मां के नाम हमारे जो समूह हैं उसमें अगर किसी बहन के पास में आधा एकड़, एक एकड़ जमीन है तो उसको 3 लाख रूपया 3 साल में देकर पहले साल में फेंसिंग का, उसके पानी के प्रबंध के लिये तालाब का, पौधे लगाने के लिये और पहले साल उसको नुकसान न हो इसलिये दूसरे साल और तीसरे साल भी नुकसान की भरपाई के लिये पैसा देकर ताकि स्‍वावलंबी उसकी बगिया हो सके. रोजगार का अवसर उसके घर में हो सके, एक नवाचार है. इस बात के लिये भी मैं मानता हूं कि सरकार को इस बात के लिये तो कम से कम बधाई मिलना चाहिये. अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा नदियों के उद्गम पर मैं खुद अध्‍यक्ष जी 108 नदियों के उद्गम पर गया हूं. भले ही मेरे हाथ कटे हों लेकिन मेरे पैर बचे थे तो मैं चला गया, लेकिन मैं  अकेला आदमी रहूंगा जो 108 नदियों के उद्गम पर गया हूं क्‍योंकि इसके लिये पैर चाहिये थे उसके लिये हाथ की जरूरत नहीं थी तो मुझे लगता है कि नदियों के उद्गम पर हमने अगर बेहतर वृक्षारोपण किया, क्‍योंकि पानी का स्रोत सिर्फ वृक्ष हो सकता है.भाषण में हम सब यह कहते हैं कि लेकिन जमीन पर जब तक हम नहीं करेंगे और वृक्ष कौन से, मैं सिर्फ अनुभव के आधार पर ही कह सकता हूं मैं कोई पीएचडी स्कालर नहीं है लेकिन जितना मेरा जीवन का अनुभव है उस आधार पर मैं कह सकता हूं कि हर नदी के किनारे कुछ चिन्हित और ऐसे अलग वृक्ष होते हैं जो उस पानी की तासीर को बदलते हैं और उसके किनारे रहने वाले लोगों के स्वभाव को भी बदलते हैं इसलिये मुझे लगता है हम उस बायोडायवर्सिटी को जरूर बचाकर चलें. प्लांट वेरायटीज तो मनुष्य बदल सकता है लेकिन बायोडायवर्सिटी नहीं बदल सकता है. हमारे यहां कोई हिमालय का पौधा नहीं होगा हम पुरुषार्थ से लेकर आयेंगे औरलगायेंगे तो हो जायेगा लेकिन बायोडायवर्सिटी मनुष्य के पहले पैदा हुई हैऔर उद्गम हमने नहीं बनाया किसी मनुष्य ने भी नहीं बनाया और उसको बिगाड़ा जरूर है उसे बचा पाएं तो शायद हम आने वाली पीढ़ियों केलिये बेहतर काम करेंगे और इसीलिये मैं मानता हूं कि आसमान से गिरे और खजूर में लटके तो यहां आने का फायदा मुझे यह हुआ कि मैं नदियों के उद्गम पर चला गया तो मैं इस बात को मानता हूं कि मेरी पार्टी ने मेरे साथ जो कुछ किया मैं उसका हृदय से सदन में खड़े होकर धन्यवाद देता हूं बाकी लोग क्या सोचते हैं मुझे नहीं पता लेकिन मैं बड़े गर्व के साथ कहता हूं कि अगर मैं मध्यप्रदेश नहीं आया होता तो मैं नदियों के उद्गम पर नहीं जा पाता लोग मुझे नर्मदा का परिक्रमावासी तो कहते लेकिन यह बड़ा काम मैं अपने जीवन में नहीं कर पाता. एक जल गंगा अभियान की सफलता पर जरूर कहूंगा इस पर मुझे लगता है सभी को चर्चा करनी चाहिये. जब मैं मंत्री बना था तो मुझे कहा गया कि जल गंगा अभियान शुरू करना है. तीन दिन बचे थे तो मैंने मुख्यमंत्री जी से पूछा कि कोई रोड मैप होगा क्योंकि मैं तो राज्य के कामकाज से थोड़ा अनभिज्ञ था तो मैंने कहा तालाब तो देखेंगे नहीं तो मेरे मन में आया नदी के उद्गम पर जाकर देखें  क्योंकि जब मैं भारत सरकार में मंत्री था तो मैं बेतवा के उद्गम पर आया था तो जो हालत मैंने देखी थी कि भोपाल के इतने निकट है कि 15-20 मिनट में आप वहां पहुंच सकते हो लेकिन लोगों को पता नहीं कि बेतवा का उद्गम यहां पर है और आश्चर्यजनक बात है कि अगर किसी को जुलाजिकल डाटा देखना है तो वहां पर जाए ऊपर कोलार का बांध है जो कोलार नदी है वह नर्मदा में मिलती हैं बेतवा गंगा बेसिन में मिलती है कोलार का बांध बेतवा के उद्गम से ऊपर है लेकिन उसका पानी नर्मदा में जाता है और बेतवा का पानी गंगा बेसिन में जाता है जब मैं गया मुख्यमंत्री जी  भी वहां उपस्थित थे और वहीं से इस बात की शुरुआत हुई. लेकिन जल गंगा अभियान में पहली बार हमने साफ्टवेयर का उपयोग किया. हमने किसान से भी कहा है आपके खेत में ढाल कहां है आप ढाल के आधार पर अपना तालाब या कुंआ बनाते हो यह सफल नहीं है आपको देखना है कि आपको किस कोने में बनाना है और इस बार जितने भी हमारे खेत तालाब अमृत सरोवर बने हैं या कुंए को रीचार्ज करने का सिस्टम हमने बनाया वह सिपरी के तहत बना अध्यक्ष जी और आज मैं गर्व के साथ कह सकता हूं उसमें कम से कम आधे  मछली पालन के लायक हैं इससे रोजगार पैदा हो सकता है और जो खेत,तालाब बने थे उनमें भी हमें कहीं विफलता नहीं मिली. पहली बार प्रयोग किया था इसीलिये मैं पिछले साल बहुत दावे से बोल नहीं पा रहा था और मैं मानता हूं कि हमें तीन साल तक इसका इंतजार करना भी चाहिये और इसलिये मैंने हर 6 महिने में उसकी रिपोर्ट बुलाई है यह हमारी बड़ी सफलता है दूसरा हमारे पास में हैंडपंप हैं जो ड्राई हो गये हम उसकी चिंता नहीं करते और गिनती गिनते रहते हैं कि यह बंद हैं हमें बिल्कुल ईमानदारी  के साथ उनको रीचार्ज पिट के रूप में उपयोग करके उस सिलेंडर को अलग करके अपने रचनात्मक काम की तरफ लगाना चाहिये यह मनरेगा का बड़ा काम हो सकता है इसलिये मैं यह अपेक्षा सदन से करता हूं कि हमें यह करना चाहिये. ऐसे अनेक नवाचार हैं लेकिन जहां तक सवाल श्रम मंत्रालय का है श्रम मंत्रालय में चाहे हमारे निर्माण मजदूर हों. संबल सबसे बड़ी योजना है इसमें 1 करोड़ 84 लाख पंजीयन हो गये हैं और उसके बाद दूसरे नंबर पर जो पंजीयन हमारे पास है निर्माण मजदूरों का तो निर्माण मजदूरों में 17 लाख 58 हजार हमारे पास पंजीकृत मजदूर हैं लेकिन जब मैं संबल की बात करता हूं तो अभी तक 7.99 लगभग 8 लाख हितग्राहियों को 7552 करोड़ का लाभ यह सरकार दे चुकी है. मैं कांग्रेस के मित्रों से  विनम्रता से पूछना चाहता हूं. डेढ़ साल आप भी रहे आपने संबल को खत्म नहीं किया लेकिन रोका क्यों उसका परिणाम जानते हैं अध्यक्ष जी, डेढ़ साल का बेकलाग है जब आप कहते हो महिने भर में मिल जाना चाहिये और 4 महीने में मिल जाना चाहिए. आप रिकॉर्ड उठाकर देखिए. डेढ़ वर्ष का बैकलॉग है. आज किसी परिवार में मृत्‍यु हो और उसको डेढ़ साल बाद मुआवजा मिले. यह कहीं का न्‍याय नहीं है. अध्‍यक्ष जी, इस बात को सरकार मानती है और इसलिए पिछली बार जो बजट सरकार ने तय किया था, उससे दोगुना, एडिशनल हमको सप्‍लीमेंट्री में 800 करोड़ रुपये वित्‍त मंत्री जी और मुख्‍यमंत्री जी ने दिया. मैं धन्‍यवाद करता हूँ. लेकिन उससे 6 महीने का बैकलॉग खत्‍म हुआ. अभी भी एक साल का बैकलॉग शेष है. ये सच्‍चाई हम सबको स्‍वीकार करनी पड़ेगी. इसको स्‍वीकार करने के लिए ही सदन है कि आप उससे इतर जाकर अपनी घोषणा थोड़ी कर सकते हैं. ऐसे ही आपने सप्‍लीमेंट्री बजट में देखा होगा कि प्रधानमंत्री आवास, जिसकी मैंने अभी गिनती बताई. 17 हजार में 4200 करोड़ रुपये प्रधानमंत्री आवास के लिए हमको सप्‍लीमेंट्री ग्रांट में मिले थे. पैसे का प्रावधान करना सरकार की जिम्‍मेदारी है कि हम अपनी चीजों को कैसे ठीक करेंगे. दूसरी तरफ निर्माण श्रमिक हैं, जहां 17 लाख 58 हजार हमारे पंजीकृत हैं. इस साल 15 हजार नए लोगों ने इसमें पंजीकरण किया है. यानि एवरेज आप मानकर चलिए कि 14 से 15 हजार निर्माण श्रमिक हर साल इसमें अपने आपको पंजीकृत कर रहे हैं. अध्‍यक्ष जी, और इतना पैसा उसमें कि 3400 करोड़ रुपया हमारे पास एफडी में है. जो पैसा हमारे पास आता है, हम उसको खर्च कैसे करें. अब तो हम सबको मिलकर यह तय करना पड़ेगा कि हम, और ये सेस का पैसा है, इसको कहीं हम और उपयोग नहीं कर सकते. हम इसका कहीं और उपयोग नहीं कर सकते. इसलिए वह पैसा बढ़ता जा रहा है. लेकिन हमारे पांच श्रमोदय विद्यालय हैं. अब वहां पर एक समस्‍या थी कि वे सीबीएसई कोर्स के थे. तो यहां पर जब मध्‍यप्रदेश बोर्ड बच्‍चियों को स्‍कूटी देता है. मेधावी बच्‍चों को टैब या कंप्‍यूटर देता है. वहां पर नहीं मिलते. जबकि वे भी मध्‍यप्रदेश के बच्‍चे हैं. मजदूर के बच्‍चे हैं. तो मैं गर्व के साथ कहता हूँ कि इस बार बोर्ड में हमने फैसला किया कि इस साल से उन बच्‍चों को हम स्‍कूटी देंगे. कहीं पर भी चाहे सीबीएसई में पढ़ रहे हैं, क्‍योंकि वे मजदूर के बच्‍चे हैं. पैसा हमारे पास है. (मेजों की थपथपाहट).

          अध्‍यक्ष महोदय, हम टॉप 500 की भी कल्‍पना करते हैं कि हम उनको कैसे उच्‍च शिक्षा तक पहुँचाने के बारे में काम करें. मुझे लगता है कि उसका भी अगर हम आंकड़ा देखें तो इसमें पिछले साल 89 हजार निर्माण श्रमिकों को 340 करोड़ रुपये का लाभ मिला. यह संबल छोड़कर है. यह हमारे निर्माण श्रमिकों के लिए है. कल भी मैंने अपने बोर्ड की बैठक ली थी, कन्‍सलटेटिव कमेटी में तो हम सभी पार्टियों के लोग हैं. मैं उनसे भी अध्‍यक्ष जी, प्रार्थना करता हूँ कि हमें कुछ नवाचार की तरफ आगे बढ़ना चाहिए. श्रम मंत्रालय ने एक नवाचार किया है. क्‍या हम उद्योग मजदूर फ्रेंडली हैं ? क्‍या वह स्‍वच्‍छता और पर्यावरण की चिंता करता है ? ''श्री'' नाम की एक उसमें हम लोगों ने स्‍टार रेटिंग की है. यदि आप मजदूरों का हित देखते हैं तो आपको एक स्‍टार मिलेगा. आप पर्यावरण की चिंता करते हैं तो एक स्‍टार मिलेगा. आप अगर स्‍वच्‍छता रखते हैं तो एक स्‍टार मिलेगा. मुझे गर्व है कि आज की तारीख में 2 हजार से ऊपर इंडस्‍ट्रीज ने वह स्‍टार रेटिंग ले ली. मुझे लगता है कि ये चीजें हैं जो हमें नवाचार में करनी होंगी. हमने एक और काम किया है. अभी पटाखा फैक्‍टरियों में जो लगातार घटनाएं घटती थीं. हरदा की घटना दुर्भाग्‍यपूर्ण है. तीसरी बार वहां पर विस्‍फोट हुआ. मैंने आने के बाद कहा कि इनको अति खतरनाक श्रेणी में डालना चाहिए और वह फैसला मैंने कर लिया. ऐसा नहीं है कि हम चीजों को देखें और उसकी अनदेखी करें. किसकी रुचि के लिए. आदमी मर गया. उसकी संख्‍या का पता नहीं. एक तरफ तो हम यह कहते हैं कि मजदूरों का नाम नहीं होना चाहिए क्‍योंकि वे तो असंगठित मजदूर हैं. चार दिन काम करते हैं और फिर चले जाते हैं. अरे ठीक है भाई, नाम मत लिखें, लेकिन जितने दिन उसने काम किया है, सूची में तो नाम लिखें. हरदा की घटना में एक का भी नाम नहीं था. एक कोई कलेक्‍टर थे, जो लिखकर चले गए थे कि 17 लोग ऐसे ऐसे होंगे, उसके अलावा कोई रिकॉर्ड नहीं था. हमने कार्यवाही की है. मुझे लगता है कि श्रम विभाग का मतलब अगर हम मजदूर की चिंता करते हैं, लेकिन अभी भी चुनौतियां हैं. जो असंगठित क्षेत्र का मजदूर है, उसकी आइडेन्‍टिटी का सवाल है. घर में काम करने वाली महिला है जो दिन-रात चार परिवारों में काम करती है. उसके कार्ड तो हैं, लेकिन बाकी सुविधाएं कहां पर हैं. शिवराज जी ने वह शुरू किया था. यह काम भारतीय जनता पार्टी की सरकारों ने शुरू किया है. सबसे पहले अटल जी की सरकार के समय साहब सिंह वर्मा जी ने शुरू किया. बाद में मैंने उस क्षेत्र में काम किया है. मैं समझ सकता हूँ कि उनका दर्द क्‍या होता है. मुझे लगता है कि हम सदन में खाली पैसा न देखें. पैसे की कमी नहीं है. सदन के भीतर मैं आपसे कह रहा हूँ कि किसी संगठन के पास 3400 करोड़ रुपये एफडी में पड़े हों, यह मामूली रकम नहीं होती. उसका ब्‍याज ही लगभग 250 करोड़ रुपये के आसपास आता है. अत: मुझे लगता है कि हम चीजों का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन टैक्‍स का पैसा हम यहां बैठकर तय करते हैं, सेस का पैसा. हम उसका बर्ताव नहीं बदल सकते हैं, तो ऐसी अनेक चीजें हो सकती हैं. लेकिन एक-एक कर मैं यह दावे के साथ कहता हूँ कि एक बात की मैं पुनरावृत्ति कर रहा हूँ कि जो अधिकार ग्राम पंचायतों के थे, क्‍या उन्‍होंने पूरे किये ? जो अधिकार राज्‍य सरकार के थे, जिस दिन संविधान बना था. मौलिक अधिकारों के अलावा, जो जनसुविधाएं थीं, वह राज्‍य को देनी थी. देश के प्रधानमंत्री जी को आज नहीं कल इतिहास में स्‍थान देना पडे़गा. जो काम राज्‍यों को करने थे, वह देश के प्रधानमंत्री ने किये, चाहे प्रधानमंत्री आवास योजना हो (मेजों की थपथपाहट), प्रधानमंत्री सड़क योजना हो, चाहे बिजली हो, चाहे पेयजल हो, आप कितनी चीजें कहेंगे ? यह सारी की सारी चीजें राज्‍य की हैं. इसलिए मैं बड़ी विनम्रता से सदन से आग्रह करना चाहता हूँ कि विकसित भारत जी राम जी को बिना देखे उसकी आलोचना मत कीजिये. उसके नाम से तकलीफ हो सकती है, बाकि कोई तकलीफ नहीं हो सकती है. हां, राज्‍य में नियम बनेंगे. एक बार फिर से विधान सभा में आप सबके सामने आएंगे, हम किन नॉर्म्‍स के आधार पर इनको खर्च करें ? चुनौतियां इसमें आएंगी, लेकिन इतना पैसा सामने आने के बाद एक करोड़ रुपया एक विधान सभा में कम से कम जायेगा.

          श्री अजय विश्‍नोई - माननीय मंत्री जी, मेरा एक आग्रह है कि आपके भाषण में सफाई मित्र की चर्चा जरूर करें. वह भी एक अद्भुत प्रयोग है.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल - फुन्‍देलाल जी आप भी कुछ पूछ रहे थे न.

          श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को (पुष्‍पराजगढ़) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं खटास पैदा नहीं करना चाहता हूँ. वैसे आपने बहुत अच्‍छा बता दिया है. मेरा एक सुझाव था. अभी सभी विधान सभाओं में जनवरी माह में जल गंगा रैली चली, एक ग्राम पंचायत जीलन में मैं भी शामिल हुआ था और तमाम हितग्राहियों से भी हम लोगों ने व्‍यक्तिश: चर्चा की कि आपका पोखर निर्माण हुआ है, आपके छोटे-छोटे तालाब बनाये गये हैं. एक हितग्राही ने खड़े होकर बोला कि मेरा भी 4 लाख रुपये का बना है, उसमें 7 हजार हमने मछलियां डाली थीं, फिर तालाब धीरे-धीरे सूखने लगा, उसमें पानी लगातार कम होने लगा और सारी मछलियां कौए खा गये.

          अध्‍यक्ष महोदय - फुन्‍देलाल जी, अगर आपका कोई सुझाव हो तो एक लाईन में दे दें. चर्चा दोबारा नहीं हो रही है. जैसा अजय विश्‍नोई जी ने एक लाईन में बोला था.

          श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को - अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह था कि जो तालाब बना रहे हैं, जो कर्मचारी वहां कार्यरत् हैं, कृपया इस बात का ध्‍यान रखें कि जहां निर्माण कर रहे हैं, दोबारा पानी का ठहराव हो, उसमें पानी रुके, ताकि हितग्राही को लाभ हो.

          अध्‍यक्ष महोदय - सचिन जी, आप एक लाईन में बोलें.

          श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूँ कि जो खेत सड़क योजना है, क्‍या खेत सड़क योजना के जो मापदण्‍ड हैं, उसको क्‍या हम मुख्‍यमंत्री ग्राम सड़क योजना के उन मापदण्‍डों पर आगे भविष्‍य में, हम उन रोडों को विकसित करने का काम कर सकते हैं ?

          अध्‍यक्ष महोदय - (श्री पंकज उपाध्‍याय के खड़े होकर बोलने पर) नहीं, आप बैठ जाएं. यह प्रश्‍नकाल नहीं हैं. मंत्री जी, आप पूरा कीजिये.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल - माननीय अध्‍यक्ष जी, स्‍वच्‍छता को लेकर एक प्रयोग छिन्‍दवाड़ा से शुरू हुआ है. ''वॉश ऑन व्‍हील्‍स'' अभी तक जितने भी सार्वजनिक शौचालय होते थे, वह छ: महीने बाद डिफेक्‍ट हो जाते थे, यह हम सबका दुखद अनुभव है. लेकिन एक जाति विशेष पर यह सफाई का ठेका हो गया है, ऐसी बातें चलती थीं. ''वॉश ऑन व्‍हील्‍स'' ने एक नया प्रयोग छिन्‍दवाड़ा के तामिया तहसील से किया. मैं वहां खुद गया था, जब मैंने उनसे पूछा, तो उसमें 4 लोग थे, 1 महिला थी और चारों में से एक भी अनुसूचित जाति का नहीं था, यह बात मैं जिम्‍मेदारी से कहता हूँ. उसमें एक व्‍यक्ति बेंगलुरु में नौकरी करता था और जिनकी सैलरी 62 हजार रुपये थी, तो स्‍वाभाविक था कि मुझे पूछना ही था कि 62 हजार रुपये की नौकरी छोड़कर यहां क्‍यों आए हो ? तो उस व्‍यक्ति ने मुझे जवाब दिया कि मेरे माता-पिता यहीं पर हैं, मैं अकेला बेटा हूँ, मेरी पत्‍नी-बच्‍चे यहीं पर रहते हैं. मैं वहां 62 हजार रुपये की नौकरी करता था, इसमें 30 हजार मेरे रहने और बाकि व्‍यवस्‍था में जाते थे. मैंने जबसे आकर यहां यह काम किया है, वह सारा मशीनीकृत काम है, शुरुआत में उनको तकनीक दी थी, जो जिला पंचायत के सीईओ थे, उन्‍होंने उसको इनिसिएट किया था. उसने बाद में बताया है कि जो ऑर्डर उसके पास हैं, आज की तारीख में मुझे 37 हजार रुपये महीना तो कैश आ रहा है, मैं निजी शौचालय साफ करता हूँ तो मुझे 200 रुपये मिलते हैं, उसके बाद में सार्वजनिक शौचालय हैं, उनमें स्‍कूल को छोड़कर बाकि उसमें काम लेता हूँ. उन्‍होंने कहा कि जो ऑर्डर मेरे पास हैं, मैं दो महीने के बाद इसे 60 हजार पार कर जाऊँगा. मैं घर में भी हूँ और पैसा मेरे पास आ रहा है और पूरे प्रदेश में अभी तक 2 हजार लोगों ने इसमें पंजीयन कराया है. सभी जाति के लोग हैं. हमें उससे दो सफलता मिली है कि कम से कम सार्वजनिक शौचालय वे चाहें पंचायत के हों या अन्‍य कहीं और के हों, वे कम से कम साफ होंगे, इसकी गारंटी है. किसी निजी व्‍यक्ति को बुलाने से वह रुपये 500 मांगता था, अब उसका काम रुपये 100-200 में हो जाता है. रोजगार भी है और हम एक बड़ी चुनौती का सामना सफलतापूर्वक कर रहे हैं. मार्को जी ने जो बात कही है, मैं, मानता हूं कि बिना जानकारी के ऐसा करना, उस उपभोक्‍ता का नुकसान कर देगा, वह कर्जदार हो सकता है, मैं संबंधित विषय को देखूंगा. जो बात सचिन जी ने कही है तो मैं इस पर कहूंगा कि अभी विकसित भारत G-RAM-G के नियम आने दीजिये, उनसे कहिये कि वे अभी से इसे पोर्टल पर चढ़ा दें तो उनके पास जो पैसा होगा, वह पर्याप्‍त पैसा होगा. एक साथ तो सारा काम नहीं होगा, यदि 8 सड़कें होंगी लेकिन वे 2-3 करके पूरी सड़कों को ठीक कर सकते हैं परंतु यदि वे पोर्टल पर नहीं डालेंगे तो यह काम नहीं हो सकता. मुझे लगता है कि विषय लंबे हो सकते हैं, श्रम विभाग पर और बड़ी-बड़ी बातें कहीं जा सकती हैं, लेकिन आज मैं, बड़ी विनम्रता के साथ कहूंगा कि सभी ने सकारात्‍मक चर्चा में भाग लिया, सदन का अभिमत यही रहता है कि भ्रष्‍टाचार रूके, यह पूरी तरह से ऑनलाईन सिस्‍टम है, जिसमें पूरी पारदर्शिता है, त्रि-स्‍तरीय पंचायत में पंचायत ही उसका निर्माण करेगी इसलिए कोई दुविधा नहीं होनी चाहिए. जी हां, नियम बनाते समय हम सभी सजग रहें, यही अपेक्षा करते हुए, मैं, आपको और सदन को धन्‍यवाद देते हुए, अपनी बात समाप्‍त करता हूं और आग्रह करता हू कि इन मांगों पर अपना समर्थन दें.

(मेजों की थपथपाहट)

 

(मेजों की थपथपाहट)

 

अध्यक्ष महोदय-  विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार दिनाँक 24 फरवरी, 2026  के प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्थगित.

                      रात्रि 08.08 बजे विधान सभा की कार्यवाही  मंगलवार, दिनाँक 24 फरवरी, 2026 (5 फाल्‍गुन, शक संवत् 1947) के पूर्वाह्न 11.00 बजे तक के लिए स्थगित की गई.

 

 

भोपाल,                                                                                              अरविन्‍द शर्मा,

दिनांक : 23 फरवरी, 2026                                                       प्रमुख सचिव,

                                                                                                      मध्यप्रदेश विधान सभा