मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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षोडश विधान सभा                                                                                          एकादश सत्र

 

 

जुलाई, 2026 सत्र

 

बुधवार, दिनांक 22 जुलाई, 2026

 

(31 आषाढ़, शक संवत्‌1948)

 

 

[खण्ड- 11 ]                                                                                                         [अंक- 3 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

बुधवार, दिनांक 22 जुलाई, 2026

 

(31 आषाढ़, शक संवत्‌1948)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.07 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर.


ई-अटेंडेंस प्रणाली के क्रियान्वयन संबंधी नीति

[स्कूल शिक्षा]

1. ( *क्र. 1122 ) श्री सुनील उईके : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षकों एवं कर्मचारियों की ई-अटेंडेंस प्रणाली लागू करने हेतु निविदा (टेंडर) के माध्‍यम से किसी निजी कंपनी/एजेंसी का चयन किया गया है(ख) उक्‍त कार्य हेतु चयनित कंपनी का नामनिविदा प्रक्रिया का विवरण एवं अनुबंध की शर्तों की जानकारी प्रदान करें(ग) ई-अटेंडेंस प्रणाली के अंतर्गत शिक्षकों एवं कर्मचारियों से कौन-कौन सा व्‍यक्तिगत एवं बायोमेट्रिक/डिजिटल डेटा एकत्रित किया गया है(घ) क्या उक्‍त डेटा की सुरक्षागोपनीयता एवं दुरुपयोग की रोकथाम हेतु साइबर सुरक्षाएनक्रिप्‍शनडेटा संरक्षण तथा सर्वर सुरक्षा के संबंध में कोई मानक (प्रोटोकॉल) निर्धारित किये गये हैंयदि हाँतो उनका विवरण देंयदि नहींतो कारण बताएं(ड.) यदि कर्मचारियों का डेटा लीक होता है अथवा उसका दुरुपयोग होता हैतो इसकी जिम्‍मेदारी किसकी होगी तथा संबंधित कंपनी के विरूद्ध अनुबंध में क्‍या दंडात्‍मक प्रावधान किये गये हैं?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री उदय प्रताप सिंह ) : (क) जी नहीं। (ख) ई-अटेंडेंस प्रणाली के लिये पृथक से कोई कार्यादेश नहीं दिया गया है। ई-अटेंडेंस प्रणाली एजुकेशन पोर्टल 3.0 का ही एक मॉड्यूल है। एजुकेशन पोर्टल 3.0 का कार्य सक्षम स्वीकृति उपरांत भारत सरकार के उपक्रम नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर सर्विसेज इंकॉर्पोरेटेड (NICSI) द्वारा किया जा रहा है। MoU की प्रति की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ग) ई-अटेंडेंस मॉड्यूल के लिये शिक्षकों एवं कर्मचारियों का पृथक से कोई डेटा एकत्रित नहीं किया गया है। (घ) जी हाँ। डेटा की सुरक्षा एवं गोपनीयता से संबंधित प्रावधान अनुबंध में किये गये हैं। डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के संबंध में निक्सी के माध्यम से तकनीकी एजेंसी द्वारा अवगत कराया गया है कि डाटा सुरक्षित है एवं एप्लीकेशन का सिक्योरिटी ऑडिट है। विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (ड.) डेटा की सुरक्षा एवं गोपनीयता हेतु संबंधित एजेंसी जबावदेह हैइस संबंध में अनुबंध में स्पष्ट प्रावधान किये गये हैं। शेषांश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 में समाहित है।

          श्री सुनील उईके अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 1122 है.

          मंत्री, खेल एवं युवा कल्याण,सहकारिता(श्री विश्वास सारंग) अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.

          अध्यक्ष महोदय- सुनील जी पूरक प्रश्न करें.

          श्री सुनील उईके माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि जो आन लाईन प्रक्रिया ई अटेंडैंस की शिक्षकों के लिये चालू की गई थी उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री आदरणीय शिवराज सिंह चौहान जी ने घोषणा की थी कि अगर कोई तकनीकी प्राब्लम है और हमारे प्रदेश के शिक्षक चाहते हैं कि यह अव्यवहारिक है तो हम इसे लागू नहीं करेंगे, तो विभाग को ऐसी क्या जरूरत पड़ी कि पूर्व मुख्यमंत्री जी ने जो वायदा किया था, मुख्यमंत्री बदलने के बाद उस वायदा खिलाफी के लिये यह ई-अटेंडैस प्रणाली को लागू किया गया है . यह मेरा पहला प्रश्न है.

          श्री विश्वास सारंगमाननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि वैसे तो यह प्रश्न मूल प्रश्न से संबंधित नहीं है , न ही कोई वायदा खिलाफी है, न पहले यह कहा गया, मुझे सदन में बताते हुये बहुत प्रसन्नता है कि हमारी सरकार ने लगातार शिक्षा के क्षेत्र में उन्नयन के लिये काम किया है और खासकर स्कूली शिक्षा जो किसी भी छात्र का बेस होता है, उसके लिये चाहे वह इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट की बात हो, चाहे सांदीपनी स्कूल बनाने की बात हो, Teacher के Recruitment की बात हो, चाहे  टीचर के अटेंडेंस की बात हो, यह पूरी प्रक्रिया को उच्च स्तर तक पहुंचाने का काम किया है. मुझे लगता है कि सुनील भाई को विभाग को बहुत बधाई देना चाहिये कि ई-अटेंडेंस के माध्यम से ,मुझे सदन में बताते हुये प्रसन्नता है कि माननीय विधायक जी कह रहे हैं कि टीचर ने इसका विरोध किया है तो, मैं कहना चाहता हूं कि टीचर ने इसका कोई विरोध नहीं किया है. लगभग इस प्रक्रिया के तहत 95.9 प्रतिशत टीचर ई अटेंडैंस दे रहे हैं और आन लाईन दे रहे हैं. रोज 95 प्रतिशत. यदि हम अतिथि शिक्षक की बात करें तो वह भी लगभग 95 प्रतिशत कर रहे हैं. इसको लेकर के कहीं कोई दिक्कत नहीं है बल्कि यह लागू होने से टीचर समय पर स्कूल में पहुंच रहे हैं, अच्छी पढ़ाई हो रही है दिन में दो बार वह अपनी अटेंडेंस  देते हैं और सबसे अच्छी बात मैं विभाग के अधिकारियों को भी बधाई दूंगा कि इस पूरी प्रक्रिया में कोई पैसा खर्च नहीं किया जो भी हमारा पुराना एप था उसी में यह मॉड्यूल जोड़ दिया गया और उसके माध्यम से सब टीचर की अटेंडेंस हो  रही है. मुझे लगता है कि इस सदन को तो पूरी तरह से सरकार को बधाई देना चाहिये कि अब टीचर स्कूल में समय पर पहुंच रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय- सुनील जी दूसरा प्रश्न कोई हो तो कर लें.

          श्री सुनील उईके माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मैं मंत्री जी की बात से बिल्कुल सहमत हूं और उसमें कोई शक नहीं है कि शिक्षक समय पर पहुंच रहा है और गुणवत्ता में सुधार आया है लेकिन इसमें मेरी दो शंका है, उसका समाधान चाहता हूं. शंका यह है कि जहां पर नेटवर्क नहीं है वहां कैसे होगा और दूसरा जो टीचर का सर्विस बुक का डॉटा है पूरा उसमें पेच करने सर्विस बुक का पूरा डेटा सही करने या उसमें सुधार करना है तो उसमें क्या गारंटी है भविष्य में कोई डॉटा चौरी नहीं होगा और टीचर के साथ में कोई अन्होनी नहीं होगी, यदि मान लो कोई अन्होनी होती है तो क्या सरकार उसकी जवाबदारी लेगी. क्योंकि जिस भी कंपनी को हमने काम दिया है वह कंपनी आज नहीं तो कल छोड़कर के जायेगी और उस कंपनी में छोटे छोटे लोग 15000-20000 की तनख्वाह वाले लोग काम करते हैं. कल को अगर वह डॉटा लीक हुआ तो क्या हमारे टीचर्स का फंड ग्रज्युटी, जो उनके पैसे इकट्ठा होते हैं, क्योंकि उसमें सर्विस बुक का एक एक डॉटा जो पेंच किया गया है मुझे उस पर शंका है, मैं उस पर जवाब चाहता हूं.

श्री विश्वास सारंग अध्यक्ष महोदय, पहली बात तो माननीय सदस्य ने कहा कि जहां नेटवर्क नहीं है वहां पर यह कैसे संचालित होती है तो उसकी फिजिकली अटेंडेंस की भी व्यवस्था की गई है. यह जो मैंने डेटा बताया है 95.9 परसेंट, उसमें जो 4.5-5 परसेंट का गैप है वह वहीं पर है जहां पर नेटवर्क की प्राब्लम् है. नहीं तो 100 परसेंट ई-अटेंडेंस हो रही है. दूसरी बात जो माननीय विधायक जी की शंका है इसमें सभी तरह के साइबर सिक्युरिटी के जितने भी टूल्स हैं उनको एप्लाय किया है और क्योंकि निक्सी जो भारत सरकार की प्रतिष्ठित एजेंसी है उसके माध्यम से यह टेंडर हुआ है बहुत ही व्यवस्थित कंपनी  इसको संचालित कर रही है और सभी तरह के साइबर सिक्युरिटी के जो टूल्स हैं वह लगाये गये हैं. कहीं कोई दिक्त नहीं है. इसमें एक बात और बताना चाहता हूं कि ई-अटेंडेंस को लेकर हमने कोई अलग से डेटा नहीं लिया है, यह पहले से जो डेटा सरकार के पास था, चाहे वह टीचर्स का हो या शिक्षा विभाग के बाकी कर्मचारियों का, वह पहले से है उसी का उपयोग करके ई-अटेंडेंस की प्रक्रिया पूरी की गई है. इसमें कहीं कोई शक नहीं करना चाहिए, कोई डेटा लीक नहीं होगा, किसी भी तरह की कोई दिक्कत कर्मचारियों को या शिक्षकों को आगे नहीं आएगी.

प्रश्न संख्या - 2 श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा (अनुपस्थित)

अनुसूचित जनजातियों की भूमि के अंतरण की पुनर्बहाली

[राजस्व]

3. ( *क्र. 992 ) डॉ. हिरालाल अलावा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि () क्‍या म.प्र. भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 170-ख मुख्यतः अनुसूचित जनजातियों की भूमि के ऐतिहासिक अवैध अंतरणों की जांच एवं पुनर्बहाली हेतु लागू की गई थी() वर्ष 1980 के बाद छलकपटकूटरचनाफर्जी अनुमतिमिथ्या अभिलेख अथवा अन्य अवैध उपायों से अनुसूचित जनजातियों की भूमि के गैर-जनजातियों को हुए अंतरणों के निरस्तीकरण एवं भूमि पुनर्बहाली हेतु वर्तमान में कौन-कौन से वैधानिक प्रावधान लागू हैं() क्या 2018 के पूर्व म.प्र. भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 11 में "Collector (including Additional Collector)" का उल्लेख होने के कारण वर्ष 1959 से वर्ष 2018 तक अतिरिक्त कलेक्टर को कलेक्टर की पदश्रेणी में माना जाता रहा हैयदि हाँतो संबंधित अधिसूचनाओंनियमों एवं शासन निर्देशों की प्रतिलिपि सदन के पटल पर रखी जाए। () यदि अतिरिक्त कलेक्टरकलेक्‍टर की पदश्रेणी में थातो राज्य में वर्ष 1959 से 2018 तक अतिरिक्त कलेक्टर द्वारा अनुसूचित जनजातियों की भूमि के अंतरण संबंधी दी गयी अनुमतियोंआदेशों एवं निर्णयों की वैधानिक स्थिति क्या है? (.) क्या शासन ऐसे सभी मामलों की समीक्षा करायेगा, जिनमें अनुसूचित जनजातियों की भूमि के अंतरण की अनुमति अतिरिक्त कलेक्टर द्वारा प्रदान की गई थीयदि नहींतो कारण बताएं।

राजस्व मंत्री ( श्री करण सिंह वर्मा ) : () जी हाँ। (ख) म.प्र. भू-राजस्व संहिता, 1959 (यथा संशोधित 2018) की धारा 170-ख के प्रावधान लागू हैं. (ग) म.प्र. भू-राजस्व संहिता, 1959 वर्ष 2018 के पूर्व धारा-11 में राजस्व अधिकारियों के वर्ग का उल्लेख है, जिसमें कलेक्टर (अपर कलेक्टर सम्मिलित हैं), अंकित है. पद श्रेणी का उल्लेख नहीं है. शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता. (घ) म.प्र. भू-राजस्व संहिता की धारा 165 (6) में प्रावधान विहित है. (ड.) उत्‍तरांश (घ) अनुसार।

डॉ. हिरालाल अलावा धन्यवाद अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न संख्या 992 है.

श्री करण सिंह वर्मा अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.

डॉ. हिरालाल अलावा अध्यक्ष महोदय, चूंकि विधान सभा लोकतंत्र का मंदिर है और इस लोकतंत्र के मंदिर में प्रदेश और देश के नागरिकों की आस्था है और प्रदेश का नागरिक उम्मीद करता है कि उनको न्याय मिलना चाहिए. मेरा बहुत ही महत्वपूर्ण प्रश्न है और सदन को इसको बहुत गंभीरता से लेना चाहिए ताकि इस देश के अंतिम पायदान में खड़े आदिवासी वर्ग को न्याय मिलना चाहिए. अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैंने प्रश्न किया था कि जो मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 170-ख जो कि आदिवासियों की जमीन के अवैध अंतरण को रोकने का काम करती है. दूसरा, मेरा प्रश्न था कि  वर्ष 1980 के बाद से छल कपट करके फर्जी अनुमति, मिथ्या अभिलेख अथवा अन्य अवैध उपायों से अनुसूचित जनजातियों की भूमि के  गैर जनजातियों को हुए अंतरणों के निरस्तीकरण एवं भूमि पर पुनर्बहाली हेतु कौन-कौन से वैधानिक प्रावधान लागू हैं? (ग) वर्ष 2018 के पूर्व म.प्र. भू-राजस्व संहिता, 1959  की धारा 11 में कलेक्टर (including Additional Collector) का उल्लेख होने के कारण वर्ष 1959 से वर्ष 2018 तक अतिरिक्त कलेक्टर को कलेक्टर की पदश्रेणी में माना जाता रहा है? यदि हां, तो संबंधित अधिसूचनाओं, नियमों एवं शासन के निर्देशों की प्रतिलिपि सदन के पटल पर रखी जाय.

अध्यक्ष महोदय, मुझे उत्तर मिला है कि आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को हस्तांतरित होने से रोकने के लिए एक तो भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 170-ख और भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 165 () जो अधिसूचित क्षेत्रों और सामान्य क्षेत्रों में आदिवासी की जमीन को गैर आदिवासी को ट्रांसफर होने से रोकती है. अब इसमें जो 1959 की धारा 11 में कलेक्टर (including Additional Collector) तो एडिशनल कलेक्टर के माध्यम से वर्ष 1959 से 2018 तक कितनी जमीन आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को हस्तांतरित की गई है इसमें मैंने सवाल उठाया था. मुझे जवाब मिला है. इसमें एडिशनल कलेक्टर को श्रेणी वन में नहीं माना गया है तो सवाल यह है कि एडिशनल कलेक्टर को जब श्रेणी वन में नहीं रखा गया है तो उसे आदिवासियों की जमीन गैर आदिवासियों को बेचने की अनुमति क्यों दी गई है? अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2023 की कैग की रिपोर्ट कहती है कि मध्यप्रदेश के दमोह, छतरपुर और बालाघाट जिले में 39 किसानों की लगभग 59 हेक्टेयर जमीन गैर-आदिवासियों को हस्तांतरित की गई है. आदिवासियों की जमीन सिर्फ 3 जिलों तक ही सीमित नहीं है. मध्यप्रदेश के धार जिले में अल्ट्राटेक कंपनी को आदिवासियों की लगभग 53 हेक्टेयर जमीन दे दी गई है. रतलाम में तत्कालीन एडिशनल कलेक्टर कैलाश बुंदेला ने आदिवासियों की करीब 100 करोड़ की जमीन गैर-आदिवासियों को ट्रांसफर कर दी, तो मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री से यह कहना है कि क्या आप मध्यप्रदेश में आदिवासियों की जमीन गैर-आदिवासियों को हस्तांतरित होने से रोकने के लिए भू-राजस्व संहिता की जो महत्वपूर्ण धाराएं 170 (ख), 165 (क) हैं, यह जो प्रावधान लागू होना चाहिए, लागू होने के बावजूद भी अगर जमीनें ट्रांसफर हो रही हैं, तो इसको रोकने के लिए आपकी अध्यक्षता में क्या नये सिरे से कोई समीक्षा कमेटी बनाई जाएगी ? या जो जमीनें अभी तक हस्तांतरित की गई हैं, वह जमीन आदिवासियों को वापस की जायेगी, यह मेरा सवाल है.

          श्री करण सिंह वर्मा माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो पूछा है, मैं उन्हें अवगत कराना चाहता हूँ कि अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति की कृषि भूमि पर किसी गैर- जनजाति के व्यक्ति ने अगर कपटपूर्वक कब्जा कर लिया है या बिना अनुमति के रजिस्ट्री करा ली है, यदि नामांतरण भी करा लिया है, तो अनुविभागीय अधिकारी को संपूर्ण अधिकार है कि आवेदन देकर संबंधित जांच करायी जायेगी और नामांतरण गलत पाये जाने पर अनुविभागीय अधिकारी उसे खारिज करेगा और उस व्यक्ति के बेदखल पर अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति को वापस कब्जा दिलायेगा.

अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने दूसरा सवाल पूछा है कि मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 170 (ख) के प्रावधान में किसी भी अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति की जमीन अगर वह बेचना चाहता है तो वह आवेदन करेगा और उसको हमारा तहसीलदार, अनुविभागीय अधिकारी देखेगा, फिर उसकी पूरी पुष्टि करेगा. कलेक्टर को वह अधिकार है और कलेक्टर के अलावा बंटवारे में अगर कलेक्टर एडीएम को, अनुग्रहित कर देता है, तो वह भी परमीशन दे सकता है. ऐसी अनुमति के मामले में माननीय उच्च न्यायालय और माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दोबारा में भी ऐसी विक्रय अनुमति को सही माना है.

          डॉ.हिरालाल अलावा माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय मंत्री जी ने कहा कि कलेक्टर अगर चाहे तो, लेकिन जिन मामलों का मैंने जिक्र किया है जो कैग की रिपोर्ट 2023 की है कि दमोह, छतरपुर और बालाघाट जिले के 39 केस ऐसे है जिनमें कलेक्टर ने अनुमति नहीं दी, उसके बावजूद भी जमीन गैर-आदिवासियों को ट्रांसफर हो गई. दूसरी बात मैं बताना चाहता हूँ कि जो शेड्यूल एरिया अनुसूची 5 है, वह आदिवासियों की जमीन को प्रोटेक्ट करने के लिए सिर्फ भू-राजस्व संहिता की धारा 170 (ख) 170(ए) या 165 (6) ही नहीं है, इसमें अनुसूची 5 का भी महत्वपूर्ण योगदान है. अनुसूची 5 क्षेत्र में कलेक्टर भी परमीशन नहीं दे सकता है, यह स्पष्ट प्रावधान है. लेकिन मैं जो आपको उदाहरण देना चाहता हूँ कि जो अनुसूचित क्षेत्र है, जो मेरे विधानसभा क्षेत्र मनावर का भी शेड्यूल 5 एरिया है, इसमें पटवारी हलका नंबर 27/7 सर्वे क्रमांक-265/136000 है. यह जमीन भील कम्यूनिटी के आदिवासी की है. उसकी जमीन एक सामान्य व्यक्ति को ट्रांसफर कर दी गई, तो शेड्यूल एरिया में तो प्रावधान ही नहीं हैं तो ऐसे मामले सिर्फ एक उदाहरण नहीं हैं. आज की तारीख में पूरे मध्यप्रदेश में हाइवे के आसपास की, शहर के आसपास की जो जमीनें हैं, जैसे मैंने रतलाम का उदाहरण दिया, कि मेडिकल कॉलेज के आसपास की लगभग 100 करोड़ की आदिवासियों की जमीन गैर-आदिवासियों को ट्रांसफर हो गई, तो यह सिर्फ एक जिले का मामला नहीं है. पूरे मध्यप्रदेश में ऐसे मामले हो रहे हैं चूंकि आदिवासी ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं होता है. आसानी से उनके फर्जी दस्तखत कर लिये जाते हैं और उनकी जमीनें सस्ते में खरीदी जाती हैं.

अध्यक्ष महोदय, छिंदवाड़ा में तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री कमल नाथ जी ने हाल ही में मुख्यमंत्री जी को भी पत्र लिखा है. यह पूरे प्रदेश स्तर का मामला है, तो मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूँ कि यह जो आदिवासियों की जमीन गैर- आदिवासियों में ट्रांसफर हो रही है, क्योंकि आदिवासियों के पास जमीन के सिवाय जीविकोपार्जन के लिए और कोई संसाधन नहीं हैं, तो ऐसे मामलों को रोकने के लिए जो धोखाधड़ी हो रही है क्योंकि आदिवासियों के पास इतने संसाधन नहीं हैं, पैसे नहीं हैं तो यह मामले हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट तक नहीं पहुंच पाते हैं. अगर आप, हम सब चाहेंगे, तो इसका समाधान हो सकता है. मैं कहना चाहता हूँ कि ऐसी कोई निगरानी कमेटी बने कि आदिवासियों की जो जमीनें ट्रांसफर हुई हैं, वह वापस हो जाए.

          अध्यक्ष महोदय डॉ. अलावा जी, आपका प्रश्न आ गया. माननीय मंत्री जी.

          श्री करण सिंह वर्मामाननीय अध्यक्ष महोदय, जो भी अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति जमीन बेचना चाहता है वह कलेक्टर को आवेदन देता है कलेक्टर एस.डी.एम.से जांच करवाते हैं उस जांच के आधार के बाद वह अनुमति देते हैं कि उस आदमी के पास जमीन है अथवा नहीं है. या वह यह जमीन बेचकर के अच्छी जमीन लेना चाहता है. तो कलक्टर को अधिकार है कि उसको अनुमति दे. सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय भी है. इस संबंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्पेशल लीव पिटीशन क्रमांक 10111 वर्ष 2024 में पारित आदेश में उल्लेख किया गया है कि अतिरिक्त कलेक्टर धारा 165 (6) के तहत किया गया आदेश भी उचित एवं उसको न्यायिक क्षेत्राधिकार के अंतर्गत है. इससे स्पष्ट है कि अतिरिक्त कलेक्टर जिसे कलेक्टर ने दोबारा अधिकृत किया गया है. वो भी धारा 165 (6) की शक्तियों का प्रयोग कर सकता है.

          अध्यक्ष महोदयमाननीय करण सिंह जी विधायक जी यह जानना चाहते थे कि कुछ स्थान ऐसे हैं जिनका उन्होंने उल्लेख किया जहां पर कलेक्टर की अनुमति के बिना गैर आदिवासी को स्थानांतरित हो गई है. उन्होंने कुछ क्षेत्रों का भी उल्लेख किया जहां पर यह प्रावधान नहीं है कि वहां की जमीन की कलेक्टर भी अनुमति दे. जिन स्थानों का उन्होंने उल्लेख किया है उनके बारे में आप जांच करके दिखवा लें.

          श्री करण सिंह वर्माअध्यक्ष महोदय, मैं इस बारे में जांच करके दिखवा लूंगा.

          डॉ. हीरालाल अलावाअध्यक्ष महोदय मेरा आखिरी प्रश्न यह है कि--

          अध्यक्ष महोदयहीरालाल जी आपके पास में जो भी कागज वह मंत्री जी को दे दो वो जांच करवा लेंगे.

          डॉ. हीरालाल अलावाधन्यवाद अध्यक्ष महोदय.

          श्री विपिन जैनमाननीय अध्यक्ष महोदय मेरा प्रश्न क्रमांक है 439.

          श्री करण सिंह वर्माउत्तर पटल पर रखा है.

         

राहत राशि का प्रदाय

[राजस्व]

4. ( *क्र. 439 ) श्री विपीन जैन : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि   (क) शासन द्वारा प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों की फसलों के खराब होने पर आर.बी.सी. 6-4 के प्रावधानों के अंतर्गत मुआवजा राशि दी जाती रही हैप्रश्‍नकर्ता के प्रश्‍न क्रमांक 767, दिनांक 24 मार्च, 2025 में दिये गये उत्तर अनुसार मंदसौर जिले में 51179 किसानों के लिये 80,08,46,518/- की राहत राशि स्वीकृत की गई थी(ख) उक्त स्वीकृत राशि में से 27,47,55,734/- की राशि का वितरण किन-किन किसानों को देना शेष है? वंचित किसानों की सूची देवें। (ग) वंचित किसानों को प्रावधान के अंतर्गत राशि प्रदाय क्यों नहीं की गई है, जबकि इसके बाद की प्राकृतिक आपदाओं के प्रकरणों की राशि वितरित कर दी गई है(घ) स्वीकृत राशि कब तक प्रदाय कर वंचित किसानों को लाभान्वित कर दिया जायेगा?

राजस्व मंत्री ( श्री करण सिंह वर्मा ) : (क) जी हाँ। (ख) तत्‍समय वित्‍तीय संसाधनों की उपलब्‍धता की सीमा में पात्र कृषकों को राहत राशि का भुगतान किया गया है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) उत्‍तरांश '''' अनुसार। (घ) उत्‍तरांश '''' एवं '''' के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

          श्री विपिन जैनमाननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी मंदसौर विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत 2020 में अतिवृष्टि से आरबीसी 6 (4) के अंतर्गत 80 रूपये मुआवजा राशि के स्वीकृत हुए थे उसमें में 52 करोड़ 60 लाख रूपये की राशि सरकार ने मुआवजा राशि वितरित कर दी, लेकिन 15 हजार 186 किसानों के 27 करोड़ रूपये 6 साल हो गये हैं, अभी तक बाकी है, तो मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि उक्त राशि कब तक किसानों को दे दी जायेगी ?

          श्री करण सिंह वर्मामाननीय अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2020 में मंदसौर विधान सभा के अंतर्गत अतिवृष्टि से फसल क्षति हेतु 51 हजार 189 प्रभावित किसानों को 180 करोड़ 8 लाख 46 हजार 518 रूपये की राहत राशि स्वीकृत की गई. इतना ही नहीं अध्यक्ष महोदय पिछले मानसून सत्र में 2025 में जिला मंदसौर में अतिवृष्टि से हुई फसल क्षति के लिये 38 हजार 142 किसानों को राहत राशि रूपये 35 करोड़ रूपये का वितरण किया गया है.

          श्री विपिन जैनमाननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने 2025 का नहीं पूछा है, मैंने 2020 की राहत राशि जो बाकी है. मैंने पूर्व में दो बार तारांकित प्रश्न लगाये थे उसमें माननीय मंत्री जी ने 15 हजार किसानों की कितनी कितनी राशि बाकी है उसकी लिस्ट भी दी है और उसका उत्तर भी दिया था कि धन की उपलब्धता होने पर राशि वितरित की जायेगी. लेकिन 6 साल हो गये हैं. किसान कल्याण वर्ष इस बार हम लोग मना रहे हैं और अभी मुझे उत्तर दिया है कि प्रश्न उपस्थित नहीं होता है. तो दो बार मैंने तारांकित प्रश्न लगाये, तब तो प्रश्न उपस्थित नहीं हुआ था तब तो आपने माना था कि 27 करोड़ रूपये मेरे 15 हजार किसानों के बाकी हैं तो आपके माध्यम से मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि अभी जो उत्तर दिया है वह गलत है जो पहले दिया है वो गलत है.

          श्री करण सिंह वर्मामाननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने पहले भी बताया है कि हमने 80 करोड़ 8 लाख 46 राहत राशि वितरित की गई. हमने 35 करोड़ रूपये मंदसौर जिले को दिया है. इतना ही नहीं मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा पैसा मंदसौर को दिया है.

          श्री विपिन जैनअध्यक्ष महोदय, मैं 2020 की बात कर रहा हूं, यह किसानों का अधिकार था.

श्री सोहन लाल बाल्‍मीक अध्‍यक्ष जी, पिछली विधान सभा के प्रश्‍न में आपने ये मान लिया.

श्री विपीन जैन – आपने वर्ष 2025 में दिया उसकी बात थोड़ी कर रहा हूं.

अध्‍यक्ष महोदय – एक मिनट उत्‍तर तो आ जाने दो, फिर बात समझ में आएगी.

श्री करण सिंह वर्मा – अध्‍यक्ष जी, पूरे मध्‍यप्रदेश को 1860 करोड़ रुपए राहत राशि दी है.

श्री सोहल लाल बाल्‍मीक – मंत्री जी, वे व्‍यक्तिगत रूप से जो उनके क्षेत्र की बात है जो आपने कहा था कि 15 हजार लोगों की राशि बाकी है, राशि की व्‍यवस्‍था होगी तो आप भुगतान कर देंगे, आप उसको बता दीजिए.

श्री विपीन जैन – अध्‍यक्ष जी, मेरे पास प्रश्‍न के उत्‍तर है, तारांकित प्रश्‍न में आपने माना कि 27 करोड़ रुपए 15 हजार 186 किसानों का मुआवजा राशि बाकी है.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे – अध्‍यक्ष जी, एक छोटी सी बात पर ध्‍यान अंकित करना चाहूंगा. माननीय मंत्री जी ने कहा कि 35 करोड़ रुपए मंदसौर में दिए, लगभग 38 हजार 142 किसानों को, तो एक किसान को 9100 रुपए दिया, इससे ज्‍यादा रूपए तो उसका आने जाने में चक्‍कर लगाने में खर्च हो जाता है, 9100 रुपए प्रति किसानों को यदि ये मुआवजा दे रहे हैं, तो किसानों का ये उपहास उड़ा रहे हैं. सिर्फ 9100 रुपए एक किसान को दिए, इन्‍हीं के आंकड़ों के अनुसार मैं आपको बता रहा हूं.

श्री विपीन जैन – माननीय मंत्री जी, मेरा आपसे हाथ जोड़कर निवेदन है कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा की थी कि इस वर्ष किसान कल्‍याण वर्ष मना रहे हैं. अगर आप मेरे मंदसौर विधान सभा के 15,186 किसानों को ये 27 करोड़ रुपए देंगे, तो वास्‍तव में मेरे किसान भाईयों को लगेगा कि सरकार ने किसान कल्‍याण वर्ष मनाया है. मेरी प्रार्थना है, मैं पहली बार का, ढाई साल का विधायक हूं, आप मुझे घुमाफिराकर मत जवाब दो, आप सीनियर विधायक है, मंत्री हैं. मेरे ये 27 करोड़ रुपए बाकी है और आपने ये माना है और इन किसानों की आपने मुझे लिस्‍ट दी और कितनी राशि बाकी है,वह भी दी. मुझे केवल इतना निवेदन है कि आप ये पैसे कब देंगे और हमारे जिले के ही वित्‍तमंत्री जगदीश जी देवड़ा है, आप उनकी ओर इशारा कर दो वे आपको इशारा कर देंगे तो मेरा काम हो जाएगा. बहुत बहुत धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय – माननीय मंत्री जी(...हंसी) देवड़ा जी पर ते आपका अधिकार वैसे ही, मंदसौर के नाते.

श्री करण सिंह वर्मा – अध्‍यक्ष जी, माननीय सदस्‍य जानते हैं, पूरे मध्‍यप्रदेश में सबसे ज्‍यादा पैसा मंदसौर को दिया गया है.(..व्‍यवधान)

श्री महेश परमार – अध्‍यक्ष जी, वही मंदसौर है, जहां किसानों को गोली मारी गई थी, उन किसानों को तो कम से कम मुआवजा दे दीजिए. (..व्‍यवधान)

श्री दिलीप सिंह परिहार – आप बैठ जाइए, हमारे मंदसौर, नीमच का मामला है, उनको प्रश्‍न करने दीजिए. (..व्‍यवधान)

श्री विपीन जैन – मंत्री जी, आपसे हाथ जोड़कर निवेदन है, आप मुझे आश्‍वासन दे दे, वास्‍तविक में ये फेयर काम है, इन किसानों का मुआवजा बाकी है.

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) – अध्‍यक्ष जी, हमारे माननीय सदस्‍य का सीधा सीधा सवाल है कि 15186 किसान है, जिनको 6 साल से 27 करोड़ रुपए मुआवजा नहीं मिला ये सरकार ने माना. अब सरकार कह रही है पैसा नहीं है, पैसा कब आएगा खजाने में, कर्ज तो इतना ले रही है सरकार, क्‍या किसानों के लिए 27 करोड़ रुपए अलग से नहीं ले सकती, ये बता दीजिए ,कब मिलेगा इतनी सी बात है और आपने दो बार माना भी है.

श्री करण सिंह वर्मा – अध्‍यक्ष जी, मैंने पहले भी निवेदन किया था कि मंदसौर में सबसे ज्‍यादा पीला मौजेक का पैसा दिया है हमारी सरकार ने, पहले कितना पैसा मिलता था, पर्याप्‍त पैसा दिया है.

श्री उमंग सिंघार – अध्‍यक्ष जी, जवाब तो दिलवाए, हमारे सदस्‍य का सीधा सीधा मामला है. आपने दो बार एक्‍सेप्‍ट कर लिया, आप 27 करोड़ रुपए कब देंगे अब 6 साल तो हो गए, अगली 6 साल की पंचवर्षीय योजना हो तो किसानों को ऐसा बता दें, स्‍पष्‍ट कर दें, कब देंगे, इतनी सी बात है.

श्री विपीन जैन – अध्‍यक्ष जी, मेरा हाथ जोड़कर निवेदन है कि आप इस इसमें संज्ञान ले.

अध्‍यक्ष महोदय – विपीन जी, एक मिनट, विधायक जी के प्रश्‍न को और उनकी पीड़ा को देखते हुए मैंने मंत्री जी को कहा और मंत्री जी ने अपना जवाब दिया है, दो तीन बार अवसर दिया, उन्‍होंने बताया है कि मंदसौर को सबसे अधिक पैसा दिया है.

श्री विपीन जैन – अध्‍यक्ष जी, जो पैसा बाकी है, मैं उसकी बात कर रहा हूं.

अध्‍यक्ष महोदय – आपकी बात से मैं असहमत नहीं हूं. आज जो कह रहे होंगे आपकी जानकारी ठीक हो सकती है, लेकिन अब मंत्री जी का भी जो उत्‍तर है, वह भी अधिकृत उत्‍तर है, सरकार का अधिकृत उत्‍तर है.

श्री विपीन जैन – अध्‍यक्ष जी, मंत्री जी ने भी मुझे दो बार उत्‍तर दिया उन्‍होंने मुझे दो बार उत्‍तर दिया उन्‍होंने खुद ने कहा कि 80 करोड़ रुपए स्‍वीकृत हुए थे उसमें से 52 करोड़ रुपए दे दिए और 27 करोड़ रुपए बाकी है 15186 किसानों के.

          अध्‍यक्ष महोदय – अब माननीय नेता प्रतिपक्ष का पांचवा प्रश्‍न है.

 श्री उमंग सिंघार – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं फिर इस प्रश्‍न के संबंध में कहना चाहता हूं कि आप किसानों का वर्ष मानते हो, छ: साल हो गये हैं, क्‍या उन किसानों को 27 करोड़ रूपये मिलेंगे और मिलेंगे तो कब मिलेंगे ? इतना बता दें, क्‍योंकि छ: साल तो मंदसौर के किसानों के बीत गये हैं, यह मंदसौर के किसानों की बात है, उनको मिलेंगे कि नहीं मिलेंगे? यह बता दें. आपने बांटा, किसको बांटा, कितना बांटा वह बात नहीं है, जो शेष रहे गये हैं और इसको दो बार सरकार एक्‍सेप्‍ट कर चुकी है, तो उन किसानों को कब मिलेगा ? इतनी सी बात है, इसमें सरकार को बताने में क्‍या परेशानी है. सरकार समय लेना चाहे तो समय बता दे.

डॉ. सीतासरन शर्मा – अध्‍यक्ष महोदय, एक ही प्रश्‍न में इतना समय लिया जायेगा तो कैसे चलेगा और भी सदस्‍यों के प्रश्‍न हैं. 

सहकारिता मंत्री(श्री विश्‍वास सारंग) – अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जवाब दे दिया, जवाब हो गया है. (व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय – श्री उमंग सिंघार जी प्रश्‍न क्रमांक-5. (व्‍यवधान)....

श्री उमंग सिंघार – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसानों को अगर सरकार पैसा नहीं देना चाहती हैं, तो वह बता दे या मना कर दें. सरकार अपना पक्ष तो रखे, सरकार दो बार एक्‍सेप्‍ट कर चुकी है कि हमें 27 करोड़ रूपये मंदसौर के किसानों को देना है, तो सरकार क्‍यों नहीं देना चाहती है? 15 हजार 186 किसान हैं, मतलब 15 हजार 186 परिवारों की बात हैं.

अध्‍यक्ष महोदय – मैं उसको पता करवाता हूं, श्री उमंग सिंघार जी आपका प्रश्‍न क्रमांक-5 है.

श्री उमंग सिंघार – सरकार के पास किसानों के लिये पैसा ही नहीं और ये किसानों की बात कर रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय – (श्री विपीन जैन, सदस्‍य द्वारा अपने आसन से कुछ कहने पर) प्‍लीज विपीन जी मैंने आपको पर्याप्‍त अवसर दिया है, माननीय नेता प्रतिपक्ष का प्रश्‍न है, आप बैठ जायें.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक – इस गलत जवाब के लिये हम सब सभी लोग सदन से बर्हिगमन करते हैं.

11.32 बजे                                    बहिर्गमन

                          इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगणों का सदन से बहिर्गमन

 ( श्री सोहनलाल बाल्‍मीक, सदस्‍य के नेतृत्व में शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगणों द्वारा सदन से बहिर्गमन किया गया.)

 

अध्‍यक्ष महोदय – प्रश्‍न क्रमांक-5 श्री उमंग सिंघार जी.

केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित परिवारों का पुनर्वास/मुआवजे का प्रदाय

[राजस्व]

5. ( *क्र. 1191 ) श्री उमंग सिंघार : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) केन-बेतवा परियोजना के अंतर्गत छतरपुर एवं पन्ना जिलों के कुल कितने ग्राम एवं कितने परिवार विस्थापनभूमि अधिग्रहण अथवा डूब क्षेत्र से प्रभावित हैं(ख) प्रभावित परिवारों में से कुल कितने परिवारों को भूमि अधिग्रहण मुआवजापुनर्वास पैकेज एवं अन्य देय लाभ स्वीकृत किये गये हैं तथा कितने परिवार अभी तक इन लाभों से वंचित हैं(ग) क्या परियोजना प्रभावित परिवारों द्वारा पुनर्वास सूची से पात्र व्यक्तियों के छूट जानेमुआवजा निर्धारण में त्रुटियों तथा पुनर्वास लाभों के वितरण में अनियमितताओं संबंधी शिकायतें की गई थीजिसके फलस्वरूप पुनः सर्वेक्षण   (Fresh Survey) कराये जाने का निर्णय लिया गया थायदि हाँतो सर्वेक्षण की वर्तमान स्थिति एवं अब तक के प्रमुख निष्कर्ष क्या हैं?

राजस्व मंत्री ( श्री करण सिंह वर्मा ) : (क) पन्ना जिले में केन-बेतवा परियोजना के अंतर्गत पन्ना जिले के कुल 07 ग्रामों के 1321 परिवारों का विस्थापन किया गया तथा कुल 08 ग्रामों के 644 खातेदारों (1699 कृषकों की भूमि) अधिग्रहण से प्रभावित है। छतरपुर जिले में अनुभाग-बिजावर जिला छतरपुर अन्तर्गत कुल 14 ग्राम एवं कुल 3718 परिवार विस्थापित भूमि अधिग्रहण अथवा डूब क्षेत्र से प्रभावित है। (ख) पन्ना जिले में प्रभावित परिवारों में से कुल 1321 परिवारों को पुनर्वास पैकेज एवं 644 खातेदारों (1699 कृषकों की भूमि) अधिग्रहण की जाकर मुआवजा राशि स्वीकृत की गई है तथा कोई भी परिवार इन लाभों से वंचित नहीं है। छतरपुर जिले में कुल 3718 परिवार में से समस्त 3718 परिवार को देय लाभ स्वीकृत कर दिये गये हैं। उत्तर दिनांक तक कोई परिवार स्वीकृत किये जाने से वंचित नहीं है। (ग) जी हाँपन्‍ना जिला परियोजना प्रभावित परिवारों द्वारा पुनर्वास सूची से पात्र व्‍यक्तियों के छूट जानेमुआवजा निर्धारण में त्रुटियों तथा पुनर्वास लाभों के वितरण में अनियमितताओं संबंधी शिकायतें की गई थीजिसके फलस्‍वरूप पुन: सर्वेक्षण (Fresh Survey) कराये जाने हेतु दल का गठन किया गयाजिसमें परियोजना में प्रभावित कोई पात्र व्‍यक्ति नहीं छूटा हैभूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्‍यवस्‍थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 में निहित प्रावधानों के तहत मुआवजा निर्धारण किया गया हैजिसमें किसी प्रकार की त्रुटि नहीं की गई तथा पुनर्वास लाभों के वितरण में कोई अनियमितता नहीं पाई गई। जी हाँछतरपुर जिला परियोजना प्रभावित परिवारों द्वारा पुनर्वासन सूची में छूटे परिवारों को जोड़े जाने की शिकायतें की गई थीजिसके निराकरण हेतु कार्यलयीन आदेश क्रमांक 195/भू-अर्जन/2026, दिनांक 15.04.2026 से सर्वेक्षण का कार्य करने हेतु ग्रामवार दल गठित कर सर्वे कार्य कराया गया। पूर्व में कुल 3080 परिवारों को निर्धारित लाभ स्‍वीकृत किये गये थेसर्वेक्षण दलों द्वारा ग्रामवार रिर्पोट प्रस्‍तुत किये जाने पर अतिरिक्‍त 638 पात्र परिवारों को निर्धारित राशि स्‍वीकृत की जा चुकी है।

श्री उमंग सिंघार – मेरा प्रश्‍न क्रमांक – 1191 है.

श्री करण सिंह वर्मा – अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर रख दिया गया है.

श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार ने माना है कि हमने पन्‍ना जिले में, छतरपुर जिले में सबको मुआवजा दे दिया है, मेरा पहला सवाल है कि क्‍या स‍बको मुआवजा मिल गया है? यह मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में उन्‍होंने कहा है. दूसरी बात जो आपने पुन: सर्वे कराया था, उस सर्वे की क्‍या जानकारी है, क्‍या जांच दल की जो कार्यवाही हुई? क्‍या वह आप पटल पर रखेंगे और साथ में जो आपके ग्राम सभा के अनुमोदन हुए, क्‍या वह पटल पर जानकारी आयेगी?

श्री करण सिंह वर्मा – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय नेता प्रतिपक्ष जी ने केन बेतवा योजना के बारे में पूछा था, मैं उनको बताना चाहता हूं कि इसमें दो जिले आते हैं, केन बेतवा परियोजना भारत की पहली प्रमुख नदी जोड़ी परियोजना है, जिसमें मध्‍यप्रदेश की केन नदी को उत्‍तरप्रदेश में प्रवाहित हो रही बेतवा नदी से जोड़ा जा रहा है, इस परियोजना से मध्‍यप्रदेश, उत्‍तरप्रदेश के सूखाग्रस्‍त क्षेत्रों में सिंचाई पेयजल एवं जल विद्युत उपलब्‍ध करवाना है. केन बेतवा लिंक परियोजना में भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनर्व्‍यवस्‍थापन की उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 में मध्‍यप्रदेश शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा अंतर्गत विशेष पैकेज के तहत की गई है. माननीय नेता प्रतिपक्ष जी ने पूछा है, तो मैं बताना चाहता हूं कि इसमें दो जिले आते हैं, कुल पन्‍ना जिले में 7 ग्रामों में 1321 परिवारों का विस्‍थापन किया गया है. पन्‍ना जिले के आठ ग्रामों का कुल निजी अधिग्रहण रकबा 653.859 हेक्‍टेयर है, अध्‍यक्ष महोदय, इसमें एक गांव विरान है. पुन: पैकेज अस्‍वीकृत परिवार 1321, वितरित परिवार 1319 को हम पुनर्वास पैकेज  दे चुके हैं, शेष दो परिवार वाकी हैं, कुल स्‍वीकृत मुआवजा राशि 165 करोड़ 12 लाख 50 हजार, वितरित राशि 164 करोड़ 87 लाख 50 हजार, शेष राशि 25 लाख अभी बंटना बाकी हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पुनर्वास पैकेज में एक परिवार को साढ़े 12 हजार रूपये एकमुश्‍त प्रदान किया गया है. इसके अंतर्गत भूखंड सामान ले जाने का भाड़ा 3 हजार रूपये प्रतिमाह हिसाब से किराया शामिल है, इसके अंतर्गत प्रभावित किसानों को 12 लाख 50 हजार रूपये के प्रति हेक्‍टेयर भूमि अर्जन पुनर्वास स्‍थापना उचित प्रतिकर की पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 द्वारा दिये गये विकल्‍प अनुसार भुगतान किया गया है. इसके अंतर्गत यदि कृषि भूमि में मकान, पेड़, कुआ इत्‍यादि परिसम्‍पत्ति होने पर उसका भी मूल्‍यांकन कर भुगतान किया जायेगा. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिला छतरपुर हेतु निजी भूमि पर स्थित मकान रहवासियों को बालिग होने पर मालिक माना गया है एवं आवासीय शासकीय भूमि पर स्थित प्रभावित मकान के रहवासियों को वयस्‍क होने की स्थिति में 16 फरवरी 2024 माना गया है. सभी पात्र परिवार व्‍यक्तियों को मुआवजा राशि का भुगतान किया गया है, इसके लिये भी कोई पात्र परिवार दावा करता है तो परीक्षण कर उसे भी सम्मिलित किया जायेगा.

          श्री उमंग सिंघार--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे 3 सवाल थे, 3 सवाल के स्‍पेशिफिक जवाब दे दें, मैंने कहा कि क्‍या ग्रामसभा की जो कार्यवाही हुई, क्‍या प्रो‍सीडिंग हुई उसे आप विधान सभा के पटल पर रखेंगे. मैंने आपसे कहा कि कितने लोग बाकी है अभी क्‍योंकि सरकार के प्रश्‍न में की हमने सबको दे दिया और आप कह रहे हैं कि कई लोगों को नहीं दिया. यह स्‍पष्‍ट करें.

          अध्‍यक्ष महोदय--  यह तो मंत्री जी ने बताया न कि कुछ लोगों को देना शेष है.

          श्री उमंग सिंघार--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, फिर सवाल यह उठता है  कि अगर मुआवजा, पहले मेरे 2 सवाल का जवाब तो दे दें कि पटल पर रखेंगे कि नहीं, सर्वें दल की जो रिपोर्ट है क्‍या वह सार्वजनिक नहीं होना चाहिये जो आपत्ति आईं, क्‍या ग्राम सभा की कार्यवाही सार्वजनिक नहीं होना चाहिये.

          अध्‍यक्ष महोदय--  माननीय मंत्री जी.

          श्री करण सिंह वर्मा--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा आपका निर्देश है पटल पर रख दूंगा.

          श्री उमंग सिंघार—अब सवाल यह है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि यह गड़बडि़यां हुई हैं मैं यह बताना चाहता हूं एक खरियानी गांव है जहां पर मुस्लिम परिवार रहते हैं, लेकिन 11 से ज्‍यादा लोगों को 8 करोड़ रूपये का मुआवजा बांट दिया गया एक सवाल, दूसरा कई ग्रामसभा ऐसी हुई हैं जिसके अंदर उस समय सरपंच नहीं था, मैं इनसे जानना चाहता हूं क्‍या यह सब जो पेंचीदगियां आई हैं वहां पर अमित भटनागर जी और जो आदिवासियों के संगठन बैठे हैं क्‍या आप पुन: जांच करायेंगे, क्‍या ऐसी सरकार कमेटी बनायेगी कि उन लोगों की पूरी मांग आ जाये, यह स्‍पष्‍ट करें. एक संयुक्‍त विधान सभा की इसमें कमेटी बनेगी, यह बतायें. सबसे महत्‍वपूर्ण सवाल कि जब मुआवजा बाकी है तो कैसे आपको अनुमति मिल गई डेम बनाने की, यह तो अपना एक्‍ट है 2013 के हिसाब से और आपके फॉरेस्‍ट के हिसाब से यह जो आपको क्‍लीयरेंस मिला है, पर्यावरण भवन से आपको क्‍लीयरेंस मिला है 3 अक्‍टूबर 2023 को, इसमें स्‍पष्‍ट शर्तें हैं कि जब तक पूरा विस्‍थापन क्‍लीयर नहीं हो जायेगा, जमीनें क्‍लीयर नहीं हो जायेंगी, मुआवजा क्‍लीयर नहीं हो जायेगा तब तक डेम का काम नहीं हो सकता, तो क्‍या कारण है इतनी जल्‍दबाजी आपको.

          श्री करण सिंह वर्मा--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले भी उत्‍तर में बताया है कि पूरा पैसा हमने पुनर्वास विस्‍थापन पैकेज आज तक की तारीख में कभी साढ़े 12 हजार रूपये पहले नहीं मिलता था. हमारे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी ने साढ़े बारह लाख का पेकेज दिया है. जो मकान बना है उसका पीडब्लूडी से सर्वे करवाएंगे अगर उसका ट्यूबवेल है उसका भी पैसा देंगे अगर गाय,भैंस,मवेशी बांधने का भी हम पैसा देंगे और सारे विस्थापित किये हैं और 2-4-10 मामले ऐसे रह गये हैं जैसा मैंने प्रश्न के उत्तर में बताया कि नामांतरण वगैरह में एक परिवार में बच्चियां नहीं पाईं गईं बैंक के कारण तो पन्ना में थोड़े रह गये हैं और शेष परिवार 2 रह गये हैं बाकी परिवारों को कर दिया है फिर भी नेता प्रतिपक्ष कह रहे हैं मैं कलेक्टर से बोलकर परीक्षण करवा लूंगा.

          श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह 44 हजार करोड़ की परियोजना है छोटी परियोजना नहीं है और कलेक्टर तो वहां के मैं मानता हूं कि बड़े अल्प ज्ञानी हैं उनको समझ में नहीं आता कि वास्तविकता क्या है. द्वितीय चरण की स्वीकृति जब मिलती है जब पूरा व्यवस्थापन हो जाये सबको मुआवजा मिल जाये तो केन्द्र सरकार से द्वितीय चरण की अनुमति में इतनी जल्दबाजी क्यों. वहां व्यवस्थापन पूरा नहीं हुआ. आपने खुद ने माना है कि कई लोगों को पैसे अभी नहीं मिले यह भी है जो सर्वे करवाया तो 638 परिवार कैसे छूट गये थे एक सुकवा गांव है वहां पर जो ग्राम सभा हुई उस समय वहां सरपंच ही नहीं था. फिर किसने अँगूठे लगाए क्या भूत ने आकर ग्राम सभा कर ली तो कई विसंगतियां हैं कई परिवार छूट गये जिनको 18 साल हो ये कटआफ डेट के अनुसार उनको पैसा नहीं मिला. कई महिलाएं वहां बेचारी परेशान हैं 1200 रुपये के अंदर घर कैसे बनेगा. 1200 रुपये दिये जा रहे हैं. एक कवेलू का घर बनाने में लाख रुपये लगते हैं.ऐसी तमाम विसंगतियां हैं क्या इस पर जांच होगी. जिला प्रशासन पर भरोसा नहीं है. या तो यहां पर एक कमेटी बने क्योंकि 44 हजार करोड़ छोटी राशि नहीं बड़ी राशि है इसमें कमेटी बने आपका संरक्षण चाहता हूं.

          श्री करण सिंह वर्मा - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने पहले भी कहा कि 165 करोड़ रुपये हम दे चुके हैं बस मात्र 25 लाख रुपये बचे हैं 2 परिवार बचे हैं आपने कहा तो मैं कलेक्टर से जांच करा लूंगा.वह भी दे देंगे.

          श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्यक्ष महोदय,करोड़ों का घोटाला है 25 परिवार की बात नहीं जो विसंगति है और जिनको पैसा मिल गया गलत है जो वहां रहते ही नहीं उनको 8-10 करोड़ रुपये क्या इसकी जांच नहीं होना चाहिये.

          श्री करण सिंह वर्मा - कोई घोटाला नहीं हुआ. नेता प्रतिपक्ष जी, एक व्यक्ति को साढ़े बारह लाख रुपये का पेकेज दिया है माननीय मुख्यमंत्री जी ने.

          श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्यक्ष महोदय, वहां पर कोई रहता नहीं है उसको पैसे मिल गये मेरा सवाल यह है. 8-10 करोड़ रुपये ऐसे बंटे.

          मुख्यमंत्री(डॉ.मोहन यादव) - माननीय अध्यक्ष महोदय,आपके माध्यम से नेता प्रतिपक्ष को बताना चाहूंगा. वैसे तो माननीय मंत्री जी ने उत्तर स्पष्ट दे दिया है लेकिन फिर भी आपके संज्ञान में हो कि कुछ विसंगति हुई है या उस संबंध में शिकायत है तो निश्चित रूप से उसकी जांच कराकर उनके साथ न्याय करेंगे. अपनी सरकार में किसी को कोई कष्ट हो ऐसा कोई भी नहीं चाहेगा आप भी नहीं चाहेंगे कि किसानों के साथ उनके हक का पैसा उनको जरूर मिलेगा.

          श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्यक्ष महोदय,मैं धन्यवाद देना चाहता हूं लेकिन मुख्यमंत्री जी स्पष्ट करें कि डैम का काम चालू हो चुका है तो एक समय सीमा बता दें कि कब तक जांच हो जायेगी. वहां पर व्यवस्थापन हो चुका है.लोगों को पुलिस लाठी मार रही है भगा रही है क्या वहां के किसानों और आदिवासियों पर संवेदनशीलता नहीं होनी चाहिये. आप समय बता दें.

          डॉ.मोहन यादव - मैं अगले महिने की दृष्टि से एक महिने के अंदर इसका निराकरण कर देंगे. यह मैं आपको बताना चाहता हूं.

          श्री उमंग सिंघार - धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदय - केन-बेतवा बड़ा मेगा प्रोजेक्ट है और मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश दोनों के लिये  बहुत ही लाभप्रद है और यह बहुत लंबे कालखंड से चल रहा है और उमंग जी मेरी जानकारी यदि सही है तो किसी भी प्रोजेक्ट में 80 परसेंट अगर जमीन का अधिग्रहण हो जाता है तो उसके बाद प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो सकता है लेकिन  मुख्यमंत्री जी को सर्वाधिकार है उन्होंने कहा है.

          श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्यक्ष महोदय,जो भारत सरकार की गाईड लाई न है वही मैं बता रहा था.

          अध्यक्ष महोदय - आपकी बात ठीक है.

 

घटिया कार्यों की जांच कर ठेकेदारों को ब्लेक लिस्टेड किया जाना

[जल संसाधन]

6. ( *क्र. 959 ) श्री बाबू जन्‍डेल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि  (क) चम्बल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना श्योपुर में 175 करोड़ की लागत से निर्मित कार्य का उद्घाटन के 06 वर्षों के बाद भी अभी भी अधूरा हैजिससे किसानों को इस परियोजना का कोई लाभ नहीं मिला हैऐसा क्यों(ख) घटिया निर्माण कार्य के चलते कई बार पाइप-लाइन जगह-जगह फूट चुकी हैलिकेज होने से खेतों तक सिंचाई हेतु प्रेशर से पानी नहीं पहुंच रहा हैयोजना पूरी तरह असफल हो चुकी हैक्या शासन प्रदेश स्तरीय तकनीकी एवं उच्च स्तरीय अधिकारियों का दल गठित कर स्थानीय कृषकों के समक्ष परीक्षण एवं जांच कराई जावेगीयदि हाँतो कब तकयदि नहींतो क्यों कारण बतावें(ग) कलेक्टर जिला श्योपुर द्वारा कई बार उक्त परियोजना के परीक्षण हेतु विभागीय अधिकारियों को किसानों के समक्ष निरीक्षणपरीक्षण एवं जांच करने के आदेश/निर्देश दिये गये थेयदि हाँतो प्रश्‍न दिनांक तक किसानों के समक्ष अधिकारियों द्वारा परीक्षण क्यों नहीं किया गयायदि‍नहींतो कब तक करा लिया जावेगासमय सीमा बतावें। यदि नहींतो क्यों(घ) क्या उक्त परियोजना अभी भी गारंटी समय में हैयदि हाँतो संबंधित कंपनी ठेकेदार द्वारा डी.पी.आर. अनुसार कार्य न करने तथा घटिया निर्माण करने नकलीसामग्री का उपयोग करने एवं समय-समय पर संधारण एवं मरम्मत कार्य नहीं करने के कारण क्या म.प्र. शासन जल संसाधन विभाग द्वारा संबंधित कंपनी की धरोवर (एफ.डी. डिपोजिट) राशि जप्त कर संबंधित कंपनी को ब्लेक लिस्ट किया जायेगायदि हाँतो कब तकसमय सीमा बतावें। यदि नहींतो क्यों कारण बतावें?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) श्योपुर जिले के अंतर्गत चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति राशि रू. 167.58 करोड़ की दिनांक 27.07.2018 को प्रदान की गई थी। वर्ष 2023 में परियोजना के अंतर्गत जी.एम. 1 (सिंचित क्षेत्र 7088 हेक्टेयर) एवं जी.एम.-2 (सिंचित क्षेत्र 455.75 हेक्टेयर) पूर्ण कर लिया गया था तथा जी.एम.-3 (सिंचित क्षेत्र 4927.02 हेक्टेयर) का कार्य आंशिक रूप से पूर्ण किया जा चुका था। किसानों को परियोजना से त्वरित लाभ प्रदान करने हेतु तत्कालीन माननीय मुख्यमंत्री महोदय के माध्यम से दिनांक 12.03.2023 को परियोजना का उद्घाटन किया गया था। उद्घाटन के उपरांत विगत 03 वर्षों में परियोजना से उपलब्‍ध कराई गई सिंचाई सुविधा का विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। परियोजना से पूर्ण रूप से सिंचाई न होने का मुख्य कारण निम्नानुसार प्रतिवेदित है :- 1. कमाण्ड क्षेत्र में विगत वर्षों में पर्याप्त वर्षा होने के कारण कृषकों के निजी बोरवेल एवं खेत तालाबों में पानी की उपलब्धता होना। 2. राजस्थानजल संसाधन विभाग द्वारा ग्रीष्मऋतु में जी.एम. 3 के कमाण्ड क्षेत्र (4927.02 हेक्टेयर) की टेस्टिंग हेतु चंबल दाहिनी मुख्य नहर में पानी उपलब्ध न कराना। 3. श्योपुर जिले में चंबल दाहिनी मुख्य नहर प्रणाली होने के कारण क्षेत्र के कृषक फ्लो सिंचाई से अवगत हैइस नई तकनीक से वाकिफ होने एवं इसे अपनाने का माईंडसेट कृषकों का न होने के कारण पाईप प्रणाली को बार-बार क्षतिग्रस्त करनाओ.एम.एस. बॉक्स को क्षतिग्रस्त करना इत्यादि घटनाएं आम हो गई हैजिससे उक्त परियोजना के सफल संचालन में समस्या उत्‍पन्‍न होना। (ख) परियोजना का कार्य आई.एस. कोडविभागीय तकनीकी सर्कुलर एवं विभागीय स्पेसिफिकेशन के अनुरूप समस्त तकनीकी परीक्षण/टेस्टिंग उपरांत गुणवत्तापूर्वक कराया जाना प्रतिवेदित है। कृषकों के द्वारा पाइप-लाइन को अनेक स्थानों पर क्षतिग्रस्त करने के कारण लीकेज की समस्या का सामना करना पड़ता हैजिसे एजेन्सी द्वारा तुरन्त ठीक किया जाता है। यह कहना कि‍परियोजना पूरी तरह असफल हैअसत्य है। परियोजना की तकनीकी जांच प्रमुख अभियंताभोपाल द्वारा गठित दल के द्वारा स्थानीय कृषकों एवं कृषक प्रतिनिधियों के समक्ष दिनांक 24.07.2024 से 26.07.2024 तक एवं दिनांक 26.12.2024 को कराई जाना प्रतिवेदित है। अत: शेष प्रश्‍नांश का प्रश्‍न ही नहीं उठता है। (ग) कलेक्टरजिला श्योपुर के द्वारा दिये गये निर्देशानुसार परिप्रेक्ष्‍य में विभाग द्वारा उत्‍तरांश 'में वर्णित कार्यवाही की गई है। अत: शेष प्रश्‍नांश का कोई प्रश्‍न ही नहीं है। (घ) जी हाँ। निर्माण एजेन्सी द्वारा डी.पी.आर. के अनुसार एवं अनुबंध में निहित प्रावधान अनुसार कार्य कराया जाना प्रतिवेदित है। विभागीय तकनीकी परिपत्र/आई.एस. कोड एवं विभागीय स्पेसिफिकेशन अनुसार निर्माण सामग्री से संबंधित सभी गुणवत्ता परीक्षण कराये जाना प्रतिवेदित है। घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग का कथन निराधार है। वर्तमान में परियोजना निर्माणाधीन है एवं एजेन्सी द्वारा शेष कार्यों को पूर्ण किया जा रहा है। अनुबंधानुसार एजेन्सी द्वारा निर्माण कार्य प्रबंधनसंचालन और रख-रखाव न करने की स्थिति में अनुबंध में निहित प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही की जाती है। अतः शेष प्रश्‍न लागू नहीं होता है।

          श्री बाबू जन्डेल अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 959 है.

          श्रीमती कृष्णा गौर अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.

          श्री बाबू जन्डेल मैं प्रश्न के उत्तर से असंतुष्ट हूँ.

          अध्यक्ष महोदय आप प्रश्न करें, आपकी संतुष्टि के लिए क्या करना चाहिए.

          श्री बाबू जन्डेल अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2018 में चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना लागू हुई थी और मंजूर हुई थी. वर्ष 2023 में हमारे केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी ने 167 करोड़ रुपये की इस परियोजना को मंजूर कराया था. वर्ष 2023 में ही इसका उद्घाटन हो चुका था. फिर भी अभी तक 3 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन कार्य अपूर्ण है. जब मैंने विधान सभा सदन में यह बात रखी तो मुझे असत्य आश्वासन दिया गया है कि 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में किसान की जमीन सिंचित हो चुकी है. पर यह बिल्कुल असत्य है, 12 हेक्टेयर में भी जमीन सिंचित नहीं हुई है. जो कंपनी की परियोजना है, डीपीआर है, उसके अनुसार मिट्टी में आधे फुट पाइप गड़े हुए हैं. पाइप नकली थे. जगह-जगह से पाइप फूट गए हैं. जब टेस्टिंग का मामला आया तो कलेक्टर महोदय अर्पित वर्मा जी ने किसानों के साथ बैठकर मिटिंग ली और जब टेस्टिंग करवाई तो पूरी लाइन खुदकर किसानों के खेत की जमीन भी खुद गई. मेरा यह अनुरोध है कि जो भ्रष्टाचार में कंपनी और विभाग लिप्त हैं, इसकी सरकार द्वारा समिति से जांच करवाई जाए और किसानों को भी उस समिति में रखा जाए. मैं वादा कर रहा हूँ कि अगर 12 हेक्टेयर में भी पानी लगा हो तो मैं विधायक पद से इस्तीफा दे दूंगा. मैं किसान का बेटा हूँ. 35 गांव सूखे में बर्बाद हैं. अभी धान की बोवनी का समय है, पर पानी का अभाव है, उनके ट्यूबवेलों में भी पानी नहीं है.

          अध्यक्ष महोदय बाबू भाई, अब जवाब आने दो, फिर दूसरा प्रश्न कर लेना. माननीय मंत्री जी.

          पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री (श्रीमती कृष्णा गौर) माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जिस परियोजना के संदर्भ में अपना प्रश्न लगाया है, वह श्योपुर जिले के अंतर्गत चंबल सूक्ष्म सिंचाई परियोजना है. इसकी लागत 167 करोड़ 58 लाख रुपये है. इसका सिंचाई का रकबा 12,770 हेक्टेयर है. माननीय अध्यक्ष महोदय, ये ऐसी योजना है, जिससे श्योपुर के 52 गांव के किसान लाभान्वित होंगे. परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है और वर्तमान में एजेंसी द्वारा 5 वर्ष का एमओएम अर्थात् संचालन, संधारण और प्रंबधन का कार्य किया जा रहा है जो अगस्त, 2028 तक प्रभावशील है. जहां भी टूट-फूट होती है, जहां भी कोई लाइन क्षतिग्रस्त होती है, उसको दुरुस्त करने का काम, मरम्मत करने का काम एजेंसी के माध्यम से किया जाता है और इसलिए अगर माननीय सदस्य को इस बात की आपत्ति है तो निश्चित रूप से जहां भी अगर कोई ऐसी क्षत-विक्षत पाइप लाइन हो या कहीं पर ऐसी जर्जर स्थिति हो, वह हमारे संज्ञान में लिखित में दें, हम परीक्षण करा के उसे भी ठीक करा लेंगे.

          अध्यक्ष महोदय माननीय सदस्य दूसरा पूरक प्रश्न करें.

          श्री बाबू जन्डेल माननीय अध्यक्ष महोदय, इस परियोजना को 8 वर्ष हो चुके हैं और जो मुझे जवाब मिल रहा है कि 12 हजार हेक्टेयर में सिंचित है, मैं कह रहा हूँ कि 12 हेक्टेयर में भी सिंचित नहीं है, जबकि 8 वर्ष हो चुके हैं. ये जो कंपनी ने घटिया काम किया है और हमारे सिंचाई विभाग ने भी स्वीकार किया है कि कंपनी ने अपूर्ण काम किया है और इसमें भ्रष्टाचार है. अत: मेरा निवेदन है कि कंपनी की धरोहर राशि को जप्त करके ब्लैक-लिस्ट में डाला जाए. मैं तत्समय के कृषि मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी को धन्यवाद देता हूँ कि हमारे क्षेत्र के लिए बहुत बड़ी परियोजना लाए हैं. पर वर्तमान में बहुत खराब स्थिति है. हमारे मुख्यमंत्री जी भी बैठे हुए हैं. इनसे भी मैं हाथ जोड़कर के अनुरोध करता हूँ कि हमारे किसानों के लिए 167 करोड़ की परियोजना पूर्ण कराए. मुख्यमंत्री जी, अगर इसमें 12 हेक्टेयर में पानी लगा हो तो मैं आज विधायक पद से इस्तीफा दे दूंगा. मैं कोई पेट भरने के लिए विधायक नहीं बना हूँ. मैं किसान का बेटा हूँ. किसान की सेवा करने के लिए विधायक बना हूँ. उचित समिति बनाकर जांच कराई जाए. उस समिति में किसान भी रखे जाएं. दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. माननीय मुख्यमंत्री जी भी सामने बैठे हुए हैं और माननीय तोमर साहब को भी बार-बार धन्यवाद देता हूँ कि वे कृषि मंत्री रहे और हमारे लिए बहुत बड़ी योजना लाए थे.

          अध्यक्ष महोदय बाबू भाई, बैठिए, माननीय मंत्री जी को जवाब देने दीजिए.

श्रीमती कृष्‍णा गौर – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य की यह बात असत्‍य है कि वहां पर सिंचाई नहीं हो रही है. मैं आपको बताना चाहूँगी कि वर्ष 2023 में परियोजना के अंतर्गत जी.एम.-1 (सिंचित क्षेत्र 7088 हेक्‍टेयर) एवं जी.एम.-2 (सिंचित क्षेत्र 455.75 हेक्‍टेयर) का काम पूर्ण कर लिया गया है तथा जी.एम.-3 (सिंचित क्षेत्र 4927.02 हेक्‍टेयर) का कार्य आंशिक रूप से पूर्ण किया जा चुका है और इन तीन वर्षों में वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 में क्रमश: 2223 हेक्‍टेयर, 1103 हेक्‍टेयर और 1572 हेक्‍टेयर क्षेत्र में किसानों को सिंचाई सुविधा उपनलब्‍ध कराई गई है. अगर इसके बावजूद भी कहीं कोई लाईन क्षतिग्रस्‍त होती है, तो अभी वह गारन्‍टी पीरियड में है, पांच साल के गारंटी पीरियड में है. अगर कहीं क्षतिग्रस्‍त होती है, तो उसका मैटेनेंस करने का काम कम्‍पनी एजेन्‍सी कर रही है. इसलिए मुझे लगाता है कि पांच साल की गारन्‍टी पीरियड में अभी एजेन्‍सी काम कर रही है और इसलिए किसी भी प्रकार की जांच का प्रश्‍न नहीं उठता है.

श्री बाबू जन्‍डेल – माननी अध्‍यक्ष महोदय.

अध्‍यक्ष महोदय - बाबू जन्‍डेल जी, एक मिनट. मेरा इस मामले में अनुरोध है कि कुल मिलाकर जब यह परियोजना बनी थी, तो यह माइक्रो इरिगेशन के आधार पर बनी थी, मैं भी बीच में साल- डेढ़ साल पहले गया था और देखने में आया था कि उसका ठीक से क्रियान्‍वयन नहीं हो पा रहा है. इसमें मेरा सरकार से अनुरोध रहेगा कि इरिगेशन के कोई बड़े अधिकारी और एग्रीकल्‍चर के बड़े अधिकारी को भेजकर उस योजना का पूरा क्रियान्‍वयन, क्‍योंकि अगर पूरा क्रियान्‍वयन नहीं होगा तो क्‍या यह पांच वर्ष की गारन्‍टी पीरियड में 3 वर्ष तो निकल ही गए होंगे, 2 वर्ष बचे होंगे, तो पाईपलाइन का हम क्‍या करेंगे बाकि माइक्रो इरिगेशन के उपकरण उनको नहीं मिले हैं, तो वह सिंचाई का पूरा काम नहीं हो पा रहा है. इसलिए अपना पैसा बर्बाद न हो और हर किसान आपासी भी दे सके, आपासी वह तभी देगा, जब उसको सिंचाई सुविधा मिलेगी, जिसे सिंचाई सुविधा नहीं मिलेगी, वह आपासी देगा नहीं, तो मुझे लगता है कि दोनों विभागों के अधिकारी संयुक्‍त रूप से इसका निरीक्षण कर लें और जो परेशानी है, उस परेशानी को दूर करें. अभी गारन्‍टी पीरियड में है तो हमको दिक्‍कत नहीं है और कृषि विभाग में माइक्रो इरिगेशन के उपकरण हैं, तो हमको एक प्रोजेक्‍ट बनाकर कम से कम उन किसानों को तो फुलफिल कर देना चाहिए, जिससे यह प्रोजेक्‍ट अपूर्ण न रहे.

श्रीमती कृष्‍णा गौर – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो निर्देश आपने दिए हैं, उसका पालन होगा.

अध्‍यक्ष महोदय – श्री चैन सिंह वरकड़े जी. 

श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इसी से जुड़ा हुआ प्रश्‍न है.

अध्‍यक्ष महोदय – इससे जुड़ा हुआ प्रश्‍न नहीं है. सचिन भाई, वह प्रश्‍न सीधा श्‍योपुर जिले से संबंधित है और एक योजना से संबंधित है. (श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव एवं श्री रजनीश जी के खड़े होकर कुछ बोलने पर) प्‍लीज सचिन जी, प्‍लीज रजनीश जी. यह प्रश्‍न अलग है. यह एक जिले और एक योजना का है. श्री चैन सिंह वरकड़े जी. 

भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड की शक्तियां एवं कार्यप्रणाली

[परिवहन]

7. ( *क्र. 978 ) श्री चैन सिंह वरकड़े : क्या परिवहन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (B.C.L.L.) विभाग/प्रबंधनकिसी निविदाकार बस ऑपरेटर (Tenderer) को बिना कारण बताओ नोटिस दिये या बिना उसका पक्ष सुने सीधे पेनल्टी का आदेश दे सकता हैयदि हाँतो किस नियमउप-विधि या अनुबंध की शर्तों के तहतयदि ऐसा कोई नियम नहीं हैतो इस प्रकार सीधे शास्ति आरोपित करना क्या प्रशासनिक एवं वैधानिक प्रक्रियाओं का उल्लंघन नहीं है(ख) क्‍या कोई ऑपरेटर पिछले 14 महीनों से लिखित रूप में अपनी पेनल्टी का विवरण या जवाब मांग रहा होतो B.C.L.L. प्रबंधन ‌द्वारा विवरण न देकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी (C.E.O.) द्वारा प्रकरण को टालना या गुमराह करना कानूनन कितना वैध है(ग) क्या मध्य प्रदेश शासन का कोई नियम या प्रशासनिक आदेश बी.सी.एल.एल. के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को यह शक्ति देता है कि वह महापौरजो कि बी.सी.एल.एल. की अध्यक्ष हैंद्वारा जारी नोटशीट का समय सीमा में जवाब न दें या उसकी अवहेलना करें(घ) क्या सिविल सेवा आचरण नियमों या सामान्य प्रशासन विभाग (G.A.D.) के निर्देशों के तहत किसी भी लोक सेवक या सी.ई.ओ. को यह अधिकार है कि वह माननीय विधायक ‌द्वारा प्रेषित शासकीय पत्रों का जवाब न दें या उनकी उपेक्षा करेंयदि उपर्युक्त कृत्य (महापौर की नोटशीट एवं विधायक के पत्र का जवाब न देना तथा ऑपरेटर को गुमराह करना) नियमों के विरुद्ध हैतो क्या राज्य शासन ऐसे मनमाने ढंग से कार्य करने वाले सी.ई.ओ. के विरुद्ध अनुशासनात्मक या दंडात्मक कार्रवाई करने का विचार रखता हैयदि हाँतो कब तक और क्या कार्रवाई की जायेगी?

परिवहन मंत्री ( श्री उदय प्रताप सिंह ) : (क) जी हाँ। अनुबंध की शर्तों के अनुसार पेनाल्टी का नोटिस दिया जाता है एवं गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाता है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। () मेसर्स कैपिटल रोडवेज एंड फाइनेंस प्रा.लि. (बस ऑपरेटर) द्वारा निविदा क्रमांक 13 के अंतर्गत जमा की गई Adjustable Security Deposit की राशि को वापस किये जाने की मांग की गई थी। परन्तु उक्त बस ऑपरेटर द्वारा बसों का संचालन नहीं करने की स्थिति में बस ऑपरेटर के विरुद्ध पेनल्टी अधिरोपित की गई है। बस ऑपरेटर की उक्त Adjustable Security Deposit वापसी संबंधी प्रकरण बी.सी.एल.एल. की 41वीं बोर्ड बैठक दिनांक 04.04.2025 एवं 43वीं बोर्ड बैठक दिनांक 25.02.2026 में प्रस्तुत किया गया थापरन्तु प्रकरण को आगामी बोर्ड बैठक में रखे जाने का निर्णय लिया गयासाथ ही मेसर्स कैपिटल रोडवेज एंड फाइनेंस प्रा.लि. द्वारा मान. उच्च न्यायालय में दायर प्रकरण क्रमांक WP/40149/2025 में न्यायालय द्वारा दिनांक 12.01.2026 को आदेश पारित किया गया हैजिसकी प्रति संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। माननीय द्वारा पारित निर्णय के परिपालन में मेसर्स कैपिटल रोडवेज एंड फाइनेंस प्रा.लि‍. द्वारा सक्षम प्राधिकारी के समक्ष ही कार्यवाही किया जाना हैअत: प्रकरण मुख्य कार्यपालन अधिकारी के कार्यक्षेत्र से बाहर होने के कारण शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। (घ) जी नहीं। मध्‍यप्रदेश शासनसामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के अनुसार जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों पर नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही की जाती है। सक्षम प्राधिकारी से प्राप्त माननीय विधायक महोदय के पत्रों के संबंध में नियमानुसार अभिस्वीकृति पत्र प्रेषित किये जाते हैं तथा पत्र में उल्लेखित विषयों के संबंध में कार्यालय में उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर परीक्षण उपरांत तथ्यात्मक प्रतिवेदन तैयार कर जानकारी संबंधित विभाग को प्रेषित की गई है। अतः अनुशासनात्मक अथवा दंडात्मक कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री चैन सिंह वरकड़े – मेरा तारांकित प्रश्‍न क्रमांक 978 है.

खेल एवं युवा कल्‍याण मंत्री (श्री विश्‍वास सारंग) – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर रखा है.

श्री चैन सिंह वरकड़े – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपने प्रश्‍न में यह पूछा था कि क्‍या परिवहन मंत्री महोदय यह बताने का कष्‍ट करेंगे कि भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड को किसी निविदाकार को बिना सूचना दिये और उन पर पैनाल्‍टी आरोपित करने का अधिकार है या नहीं ? पर उसमें जवाब नहीं दिया गया है. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि क्‍या यह नियम है कि बिना करण बताए किसी के ऊपर पैनाल्‍टी लगाई जा सकती है ?         

          श्री विश्‍वास सारंग-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, सदस्‍य को बताना चाहूंगा कि जिस एग्रीमेंट के तहत ये पूरी निविदा का क्रियान्‍वयन हुआ था. उसकी शर्तों में ही जो अर्हतायें थीं, नियम थे, उसका पालन किया गया और उन्‍हीं नियमों के तहत निविदाकार को नोटिस दिया गया है.

          श्री चैन सिंह वरकड़ेअध्‍यक्ष महोदय, निविदाकार को कारण बताओ नोटिस जारी ही नहीं किया गया और उसे सीधे पेनाल्‍टी आरोपित कर दी गई है. लगभग 14 महीने से निविदाकार इसके कारणों को जानना चाहता है कि किन कारणों से उसे पेनाल्‍टी लगाई गई है. परंतु विभाग द्वारा आज तक उसे नहीं बताया गया है. मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि इस पूरे प्रकरण का निरीक्षण करवाकर, जांच कर आदेश करेंगे कि उस पर किन कारणों से पेनाल्‍टी लगाई गई है और लगभग 10 वर्ष बाद उस पर पेनाल्‍टी आरोपित की गई है साथ ही निविदाकार की जमा राशि, एडजस्‍टेबल सिक्‍योरिटी डिपॉजिट उसे वापस की जायेगी या नहीं ?  

          मुख्‍यमंत्री (डॉ. मोहन यादव)-  अध्‍यक्ष महोदय, आज सदन की अध्‍यक्षीय दीर्घा में पूर्व मंत्री श्री कैलाश चावला जी, श्री ध्‍यानेन्‍द्र सिंह जी एवं हमारे अन्‍य वरिष्‍ठ नेता भी बैठे हैं. मैं सदन का इस ओर ध्‍यान आकर्षित करवाना चाहूंगा. हम सदन की कार्यवाही के माध्‍यम से उनके प्रति कृतज्ञता व्‍यक्‍त करते हैं और साथ ही साथ उम्‍मीद करते हैं कि सदन के बाद आपके साथ बैठकर, उनके अनुभव भी साझा करेंगे.

 

11.57 बजे

स्‍वागत उल्‍लेख

श्री कैलाश चावला एवं श्री ध्‍यानेन्‍द्र सिंह, पूर्व मंत्री की दर्शक दीर्घा में उपस्थिति

          अध्‍यक्ष महोदय-  माननीय श्री कैलाश चावला जी, श्री ध्‍यानेन्‍द्र सिंह जी जो कि वर्षों तक राज्‍य सरकार में मंत्री रहे, इस सदन के सदस्‍य रहे, आज दर्शक दीर्घा में हैं सदन की ओर से उनका हार्दिक स्‍वागत है.

(मेजों की थपथपाहट)

11.58 बजे

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर क्रमश:

          श्री विश्‍वास सारंग- अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने पहले भी उल्‍लेख किया है कि जो भी कार्रवाई की गई है, जो भी नोटिस दिया गया है, वह नियमानुसार किया गया है. परंतु इसमें विभाग का स्‍पष्‍ट मत है हम किसी को भी किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाने की मंशा से, किसी निविदा को नहीं बुलाते हैं. यदि विधायक जी कह रहे हैं तो हम नेचुरल जस्टिस के हिसाब से निविदाकार को बुलाकर, उससे बातचीत कर ली जायेगी क्‍योंकि हमारी मंशा कहीं भी यह नहीं है कि उस पर किसी तरह से राशि को आरोपित किया जाए. उससे बात कर ली जायेगी. परंतु मेरा पुन: निवेदन है कि विभाग द्वारा, B.C.L.L. द्वारा नियमानुसार ही कार्रवाई की गई है. फिर भी हम निविदाकार को बुलाकर उससे बातचीत कर लेंगे. यदि उनकी कोई शिकायत होगी, कोई स्‍पष्‍टीकरण होगा, तो उसे भी ध्‍यान में रखते हुए कार्रवाई की जायेगी.

पट्टे की शर्तों का उल्‍लंघन

[राजस्व]

        8. ( *क्र. 117 ) डॉ. सीतासरन शर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रश्‍नकर्ता के अतारांकित प्रश्‍न क्र. 1100, दिनांक 04.12.2025 के उत्‍तरांश (ख) में दी गई जानकारी अनुसार प‌ट्टाग्रहिता द्वारा दुकान हेतु आवंटित प‌ट्टे की शर्तों की उल्लंघन की शिकायतों की जाँच हेतु न्यायालय नजूल अधिकारी नर्मदापुरम में राजस्व प्रकरण क्रमांक 0031/ब-121/2025-26 दर्ज किया गया है(ख) क्या उक्त प्रकरण में राजस्व निरीक्षक द्वारा जांच प्रतिवेदन दे दिया गया हैयदि हाँतो प्रतिवेदन उपलब्ध करावें। (ग) शासन द्वारा आवंटित प‌ट्टे की शर्त अनुसार शर्तों का उल्लंघन करने पर क्‍या पट्टा स्वमेव निरस्त हो जावेगा। क्या इसका पालन किया गयायदि नहींतो क्योंइसका उत्तरदायित्व किसका था। प‌ट्टेधारी द्वारा पट्टे की किन-किन शर्तों का उल्लंघन किया गया(घ) प‌ट्टा ग्रहिता द्वारा सीढ़ी बनानेबिना अनुमति दुकान पर द्वितीय तल बनाने एवं प‌ट्टे की शर्तों के उल्लंघन के संबंध में नर्मदापुरम के कलेक्टर नजूल अधिकारी एवं अनुविभागीय अधिकारी को विगत पांच वर्षों में सी.एम. हेल्पलाइन सहित कब-कबकितनी शिकायतें प्राप्त हुईं(ड.) क्या शर्तों के उल्लंघन के बाद भी प‌ट्टाधारी का प‌ट्टे का नवीनीकरण कर दिया गया हैयदि हाँतो कब एवं किस अधिकारी द्वारा?

राजस्व मंत्री ( श्री करण सिंह वर्मा ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँराजस्व निरीक्षक के जांच प्रतिवेदन की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अनुसार है। (ग) नजूल निर्वर्तन निर्देश 2020 की कंडिका 82 (1) अनुसार स्थायी पट्टे की शर्त उल्‍लंघन या अपालन प्रतिवेदित होने या पाए जाने पर सक्षम अधिकारी पट्टेदार को सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान करने के उपरांत प्रकरण का निराकरण करेगा। इसी प्रकार नजूल निर्वर्तन निर्देश 2020 की कंडिका 82 (2) के अनुसार सक्षम अधिकारी शमन राशि लेकर पुनप्रविश के अधिकार का त्यजन करते हुए शर्त उल्‍लंघन के मामले का निराकरण करेगा। प्रस्तुत प्रकरण में शिकायत में उल्लेखित पट्टा दिनांक 07 अप्रैल, 2012 की अवधि अवसान उपरांत शर्त उल्‍लंघन का शमन करते हुए नवीनीकृत पट्टा दिनांक 08.07.2025 को जारी किया जा चुका है एवं पट्टे का पंजीयन भी दिनांक 18.08.2025 को किये जाने से शेष जानकारी निरंक है। (घ) पट्टा ग्रहिता द्वारा सीढ़ी बनानेबिना अनुमति दुकान पर द्वितीय तल बनाने एवं पट्टे की शर्तों के उल्लंघन के संबंध में नजूल अधिकारी नर्मदापुरम के कार्यालय के सी.एम. हेल्पलाईन पोर्टल पर विगत तीन वर्षों में कोई भी शिकायत प्रदर्शित नहीं हो रही है। इसके अतिरिक्त उक्त संबंध में शिकायती पत्र दिनांक 10.11.2025, दिनांक 08.12.2025 व दिनांक 29.12.2025 को प्राप्त हुये हैं। जानकारीपुस्तकालय मेंरखेपरिशिष्ट केप्रपत्र 'अनुसार है। (ड.) जी हाँ। सक्षम अधिकारी अपर कलेक्टर श्री डी.के. सिंह द्वारा पट्टे की शर्त उल्‍लंघन का शमन करते हुए नवीनीकृत पट्टा दिनांक 08.07.2025 को जारी किया जा चुका है एवं पट्टे का पंजीयन भी दिनांक 18.08.2025 को किया जा चुका है।

          डॉ. सीतासरन शर्माअध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 117 है.

          श्री करण सिंह वर्माअध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर सदन के पटल पर प्रस्‍तुत है.

          डॉ. सीतासरन शर्माअध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी द्वारा जो कंडिशन रखी गई हैं, क्‍या उन कंडिशन को सामने वाले ने, जिसने उसका उल्‍लंघन किया था, उसने पूरा कर दिया है या नहीं किया है, कृपया ये जानकारी दे दें.

          श्री करण सिंह वर्माअध्‍यक्ष महोदय, उन्‍होंने कार्रवाई पूरी कर दी है. पहले पट्टा मिला, समय निकल गया, उसके बाद उन्‍होंने दुकान लगाई, उसका पैसा भी उन्‍होंने जमा करवा दिया है. पूरा हो गया है.

          अध्‍यक्ष महोदयडॉ. साहब कोई पूरक प्रश्‍न ?

          डॉ. सीतासरन शर्मा-  नहीं.

 

वसीयत के आधार पर फौती नामांतरण के प्रकरण

[राजस्व]

        9. ( *क्र. 1020 ) श्री मोहन सिंह राठौर : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वसीयत के आधार पर फौती नामांतरण के लिये शासन के क्या नियम निर्देश हैंक्या प्रकरणों के निराकरण की समय सीमा निर्धारित हैनियमनिर्देशोंकी प्रति उपलब्ध करायें। (ख) ग्वालियर एवं शिवपुरी जिले में 1 जनवरी, 2022 से प्रश्‍न दिनांक तक वसीयत के आधार पर फौती नामांतरण के कितने प्रकरण प्राप्त हुए हैंतहसीलवार जानकारी दें। प्राप्त प्रकरणों में से कितने प्रकरणों के निराकरण हुए हैंकितने लंबित हैंवर्षवार तहसीलवार जानकारी दें। (ग) ग्वालियर जिले की भितरवारघाटीगांव तहसील एवं शिवपुरी जिले की पोहरी तहसील में प्रश्‍नांश '''' अवधि में किन-किन आवेदकों ने कब-कब वसीयत के आधार पर फौती नामांतरण कराने हेतु आवेदन दिये गयेआवेदकों की ग्रामवारनामवार जानकारी दें। क्या राजस्व अभियान अन्‍तर्गत आवेदन प्राप्त हुए हैंयदि हाँतो कितने(घ) प्रश्‍नांश (ख) अवधि में प्रश्‍नांश (ग) में उल्लेखित तहसीलों के कितने प्रकरण मान्यअमान्य किये गयेकितने लंबित हैंमान्यअमान्य एवं लंबित रहने की सूचना आवेदकों को दी गई या नहींयदि हाँतो पत्रों की छायाप्रति उपलब्ध करावें। क्‍या सूचना नहीं देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर शासन कार्यवाही करेगायदि हाँतो कब तक समय सीमा बताएंयदि नहींतो क्यों?

        राजस्व मंत्री ( श्री करण सिंह वर्मा ) : (क) मध्‍य प्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 (संशोधित अधिनियम 2018) की धारा 109 एवं 110 के तहत वसीयत के आधार पर फौती के नामांतरण किये जाते हैं। जी हाँ। निर्देश की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अनुसार है। (ग) जिला ग्‍वालियर की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'एवं जिला शिवपुरी की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अनुसार है। (घ) मान्‍यअमान्‍य एवं लंबित प्रकरणों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अनुसार है। मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता संशोधित अधिनियम के तहत नियमानुसार सभी प्रकरणों का गुणदोष के आधार पर निराकरण किया गया हैजो आर.सी.एम.एस. पोर्टल पर अपलोड किया जाता हैजिस पर आवेदक स्वयं जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। शेष जानकारी निरंक है।

          श्री मोहन सिंह राठौरअध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 1020 है.

          श्री करण सिंह वर्माअध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर सदन के पटल पर प्रस्‍तुत है.

          अध्‍यक्ष महोदयआज के मैन ऑफ द डे करण सिंह जी ही हैं. (हंसी)

          श्री मोहन सिंह राठौरअध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में मंत्री जी द्वारा ग्‍वालियर एवं शिवपुरी जिले में दिनांक 01.01.2022 से प्रश्‍न दिनांक तक वसीयत के आधार पर फौती नामांतरण के प्रकरणों की जानकारी दी गई है. उत्‍तर के परिशिष्‍ट में ग्‍वालियर में वर्ष 2026-27 में 80 प्रकरण लंबित बताये गए हैं. उसी प्रकरण में शिवपुरी में 133 प्रकरण लंबित बताये गए हैं. मेरे प्रश्‍न के के उत्‍तर में परिशिष्‍ट एवं पर दी गई जानकारी के अंतिम कॉलम में सभी प्रकरणों को ऑर्डर दिखाया गया है लेकिन इसमें यह स्‍पष्‍ट नहीं किया गया है कि ऑर्डर में प्रकरण मान्‍य हैं या अमान्‍य हैं. दी गई जानकारी के में एक तरफ तो ग्वालियर में 2026-27 में प्रकरण लंबित बताए गए हैं और एक में ऑर्डर दर्शा रहे हैं. अगर लंबित हैं तो ऑर्डर हुए हैं या नहीं हुए हैं इसकी कोई जानकारी माननीय मंत्री जी द्वारा नहीं दी गई है. मंत्री जी द्वारा अवगत कराया गया है कि...

          अधघ्यक्ष महोदय मंत्री जी, एक लाइन में उत्तर दे दीजिए. प्रश्नकाल समाप्त हो रहा है.

          श्री करण सिंह वर्मा माननीय अध्यक्ष महोदय, वसीयत के आधार पर नामांतरण के लिए मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 109 एवं 110 के तहत वसीयत के आधार पर फौती के नामांतरण किये जाते हैं. यह  वर्ष 2018 से लागू है. प्रकरणों के निराकरण की समय सीमा उपरोक्त संहिता अनुसार पंजीयन होने की तारीख से संबंधित मामले की दशा 5 माह है.

 

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) माननीय अध्यक्ष महोदय, लगता है मंत्री जी ने सुना नहीं की प्रश्नकाल समाप्त हो रहा है.

          अध्यक्ष महोदय प्रश्नकाल समाप्त.

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

12.01 बजे                             नियम 267-क के अधीन विषय

         

 

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) माननीय अध्यक्ष महोदय, कल जो सदन के अन्दर घटना घटी. हमारे वरिष्ठ विधायक शेखावत जी ने जो कहा कि दिल्ली में किस प्रकार से लाठी चार्ज हुआ है. उसमें मध्यप्रदेश के भी हजारों छात्र थे. मध्यप्रदेश की भी दो छात्राओं की नीट की परीक्षा में मौत हो गई है. दिल्ली के अन्दर राहुल गांधी जी धरने पर बैठे थे. कल रात को मोदी जी ने कहा कि हम इस पर चर्चा कराएंगे. हमारे दल के कई सदस्यों ने इस पर स्थगन प्रस्ताव दिया है. मैं समझता हूँ प्रदेश के हजारों-लाखों छात्र हैं. चाहे नीट हो या स्थानीय परीक्षाओं को लेकर. आप युवा वर्ष मना रहे हैं तो मैं चाहता हूँ इस स्थगन पर चर्चा हो जाए. प्रदेश के युवाओं की बात है. रही बात कैलाश विजयवर्गीय, संसदीय कार्य मंत्री जी ने जिस प्रकार से छात्रों को कीड़ा कहा. अराजकता का राष्ट्रद्रोही का, यह वीडियो के अन्दर बात है. यह वीडियो में बात है. (व्यवधान)

          सहकारिता मंत्री (श्री विश्वास सारंग) अध्यक्ष महोदय, मेरा पाइंट ऑफ ऑर्डर है. माननीय अध्यक्ष महोदय, कैलाश जी ने ऐसा कुछ नहीं कहा है. संसदीय कार्य मंत्री जी ने ऐसा कुछ नहीं कहा है. हम कटिबद्ध हैं. (व्यवधान)

          श्री उमंग सिंघार यह वीडियो में बात है. यह छात्रों का अपमान है. माफी नहीं मांगना चाहिए इन्हें. यह पूरे प्रदेश के छात्रों की अवमानना है..(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय उमंग जी, अभी मैंने राकेश सिंह जी को अनुमति दी है उनके बाद में आप बोलना.

          लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) अध्यक्ष जी, सदन की प्रक्रिया. व्यवस्था, अध्यक्षीय आदेश और परम्परा से चलती है. नियम यह है और जो विधान सभा के अध्यक्ष के स्थायी आदेश में भी उल्लिखित है और विधान सभा का पत्रक-दो है उसमें भी उल्लिखित है. जो सूचनाएं सुबह 9 बजे के बाद स्थगन या ध्यानाकर्षण की दी जाएंगी. उन्हें अगले दिन के लिए माना जाएगा. यह तो हुई एक बात. दूसरी बात यह है कि वो सूचनाएं यदि राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र के अन्तर्गत हैं. उसके उत्तरदायित्व से संबंधित हैं तब तो उनको ग्राह्य किया जायेगा. अगर वे उससे संबंधित नहीं हैं तो उन्हें ग्राह्य नहीं किया जा सकता है. ऐसी स्थिति में चूंकि यह केन्द्र सरकार से संबंधित है तो स्वाभाविक है कि राज्य सरकार का इसमें कोई ग्राह्यता का संबंध ही नहीं होता है. तीसरी बात यह है कि अगर कोई विषय आता है और अध्यक्ष महोदय को यह लगता है कि यह राज्य सरकार से संबंधित है तो फिर राज्य सरकार के पास भेजा जाता है उनका मंतव्य लिया जाता है. लेकिन जो विषय राज्य सरकार से संबंधित ही नहीं है तो स्वाभाविक है कि अध्यक्ष महोदय उसकी ग्राह्यता नहीं कर सकते हैं. लेकिन यह केवल निवेदन है और इसका अंतिम निर्णय जो आदेश है वह अध्यक्ष जी का है. लेकिन व्यवस्था यही है और इसके बारे में और इसके बारे में बड़ी स्‍पष्‍टता के साथ यह जो राजेन्‍द्र प्रसाद शुक्‍ल की जो पुस्‍तक है प्रश्‍नकाल से शून्‍यकाल तक उसमें भी स्‍पष्‍टता के साथ में लिखा है कि स्‍थगन प्रस्‍ताव का विषय वही हो सकता है जो शासन के प्रशासनिक दायित्‍वों से संबंधित हो. लोकसभा में राज्‍य शासन से संबंधित और विधान सभाओं में केन्‍द्रीय शासन से संबंधित विषयों को स्‍थगन प्रस्‍ताव का विषय नहीं बनाया जा सकता है. यह स्‍पष्‍टता से लिखा हुआ है तो इसके बाद इसकी कहीं पर स्‍वीकार्यता का कोई प्रश्‍न ही नहीं उठता है.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, आपने खुद विद्वान मंत्री जी ने कहा कि सदन नियम और परम्‍पराओं से चलता है और नियम के साथ परम्‍पराएं भी हैं. कई बार सदन के अंदर कोई घटना घटी या कहीं बाहर प्रदेश में या कहीं राष्‍ट्रीय घटना घटी है उसकी सूचना दी गई है. यह एक चीज है. रही बात हमने आपसे अनुरोध किया है कि इस स्‍थगन पर जैसे राकेश सिंह जी ने बोला कि आज चर्चा नहीं होगी कल चर्चा होगी, तो क्‍या प्रदेश के युवा भी वहां पर उस धरने, प्रदर्शन में थे, यहां प्रदेश की दो छात्राओं की नीट में मृत्‍यु भी हुई और तमाम ऐसी परीक्षाएं, घोटाले मध्‍यप्रदेश में भी हुए हैं, तो क्‍या इन छात्रों के भविष्‍य के लिए आप चर्चा नहीं करा सकते. भले आप कल करा लें जैसा आप नियम बता रहे हैं. मुझे कोई परेशानी नहीं है. कल करा लें.

          श्री राकेश सिंह -- उमंग जी, मैंने यह कहा कि नियम यह है कि जो 9 बजे के बाद दिया जाता है वह अगले दिन के लिए तब माना जाता है जब वह राज्‍य सरकार से संबंधित हो. जो संबंधित ही नहीं है वह विषय चर्चा में नहीं आता.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, सवा लाख से ज्‍यादा छात्र नीट का एक्‍जाम दे रहे हैं मध्‍यप्रदेश के यह रिकॉर्ड है वर्ष 2026 का और कई परीक्षाएं, लाखों छात्र यहां पर भी 20 से 25 लाख छात्र हैं, क्‍या प्रदेश के इन छात्रों के ऊपर बात नहीं होनी चाहिए और उल्‍टा संसदीय मंत्री उनको काक्रोच कह रहे हैं.

          श्री राकेश सिंह -- केन्‍द्र सरकार के स्‍तर पर उसमें माननीय प्रधान मंत्री जी ने स्‍पष्‍टता से कहा है कि.. 

          श्री विश्‍वास सारंग -- अध्‍यक्ष महोदय, इसको डिलीट किया जाए ऐसा कुछ भी नहीं कहा है.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, रिकार्ड में है आपके वीडियो में है. मैं बताऊं यह आपकी सरकार ने टैबलेट दिया है इसी के अंदर रिकॉर्डिंग है आपकी, डिलीट किया जाए. 

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय नेता प्रतिपक्ष जी, मैंने राकेश जी को भी सुना है और आपको भी सुना है मैं इस पर व्‍यवस्‍था दूंगा. जरा प्रोसीडिंग को थोड़ा आगे बढ़ने दीजिए. श्री जगदीश देवड़ा जी.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, इस स्‍थगन पर चर्चा करा लें या आप व्‍यवस्‍था दे दें कि कल कराना है तो कल करा लें. हम आपकी बात से सहमत हैं जैसा आप कहें. प्रदेश के छात्रों के साथ अन्‍याय हुआ है. परीक्षाओं का गंभीर मुद्दा है. प्रदेश के छात्र, युवाओं के भविष्‍य के ऊपर क्‍या चर्चा नहीं होना चाहिए. अध्‍यक्ष महोदय, आप व्‍यवस्‍था दे दें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप 5 मिनट रुकिए. 

12.08 बजे                      पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1)   (i)  भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का 2024-2025 के लिए राज्‍य वित्‍त पर प्रतिवेदन  मध्‍यप्रदेश शासन वर्ष 2026 का प्रतिवेदन संख्‍या-1 (राज्‍य वित्‍त लेखापरीक्षा प्रतिवेदन),

(ii)  भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का मध्‍यप्रदेश में आंगनबाड़ी की स्‍थापना एवं कार्यप्रणाली तथा कामकाजी महिला वसतिगृह एवं बाल देखरेख संस्‍थानों की पर्याप्‍ता पर प्रतिवेदन मध्‍यप्रदेश शासन वर्ष 2026 का प्रतिवेदन संख्‍या-2 (निष्‍पादन लेखापरीक्षा-सिविल),

(iii) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का प्रतिवेदन मार्च 2024 को समाप्‍त अवधि हेतु मध्‍यप्रदेश शासन वर्ष 2026 का प्रतिवेदन संख्‍या-3 (अनुपालन लेखापरीक्षा-सिविल),

(iv) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का मध्‍यप्रदेश में महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के क्रियान्‍वयन पर प्रतिवेदन मध्‍यप्रदेश शासन, वर्ष 2026 का प्रतिवेदन संख्‍या-4 (निष्‍पादन लेखापरीक्षा-सिविल), एवं

(v) भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का मध्‍यप्रदेश में जल जीवन मिशन के कार्यान्‍वयन पर निष्‍पादन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन मध्‍यप्रदेश शासन, वर्ष 2026 का प्रतिवेदन संख्‍या-5 (निष्‍पादन लेखापरीक्षा-सिविल), तथा

(ख) कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार दि प्रोविडेंट इन्‍वेस्‍टमेंट कंपनी लिमिटेड का 95वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2021-2022

 

उपमुख्‍यमंत्री (वित्‍त) (श्री जगदीश देवड़ा) --  अध्‍यक्ष महोदय, मैं,

(क)             भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 151 के खण्‍ड (2) की अपेक्षानुसार-

(i)  भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का 2024-2025 के लिए राज्‍य वित्‍त पर प्रतिवेदन  मध्‍यप्रदेश शासन वर्ष 2026 का प्रतिवेदन संख्‍या-1 (राज्‍य वित्‍त लेखापरीक्षा प्रतिवेदन),

(ii)  भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का मध्‍यप्रदेश में आंगनबाड़ी की स्‍थापना एवं कार्यप्रणाली तथा कामकाजी महिला वसतिगृह एवं बाल देखरेख संस्‍थानों की पर्याप्‍ता पर प्रतिवेदन मध्‍यप्रदेश शासन वर्ष 2026 का प्रतिवेदन संख्‍या-2 (निष्‍पादन लेखापरीक्षा-सिविल),

(iii) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का प्रतिवेदन मार्च 2024 को समाप्‍त अवधि हेतु मध्‍यप्रदेश शासन वर्ष 2026 का प्रतिवेदन संख्‍या-3 (अनुपालन लेखापरीक्षा-सिविल),

(iv) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का मध्‍यप्रदेश में महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के क्रियान्‍वयन पर प्रतिवेदन मध्‍यप्रदेश शासन, वर्ष 2026 का प्रतिवेदन संख्‍या-4 (निष्‍पादन लेखापरीक्षा-सिविल), एवं

(v) भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का मध्‍यप्रदेश में जल जीवन मिशन के कार्यान्‍वयन पर निष्‍पादन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन मध्‍यप्रदेश शासन, वर्ष 2026 का प्रतिवेदन संख्‍या-5 (निष्‍पादन लेखापरीक्षा-सिविल), तथा

(ख) कंपनी अधिनियम, 2013 कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार दि प्रोविडेंट इन्‍वेस्‍टमेंट कंपनी लिमिटेड का 95वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2021-2022 पटल पर रखता हूं.

 

(2) मध्यप्रदेश भवन विकास निगम लिमिटेड का प्रथम वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

 

लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं, कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश भवन विकास निगम लिमिटेड का प्रथम वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023 पटल पर रखता हूं.

 

(3) मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम का वार्षिक प्रतिवेदन एवं अंकेक्षित लेखे वित्‍तीय वर्ष 2024-2025

 

खेल एवं युवा कल्‍याण मंत्री (श्री विश्‍वास सारंग) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम नियम, 1974 की कंडिका 48 की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निगम का वार्षिक प्रतिवेदन एवं अंकेक्षित लेखे वित्‍तीय वर्ष 2024-2025 पटल पर रखता हूं.

 


 

(4)       उर्जा विभाग की अधिसूचना क्रमांक 1016/मप्रविनिआ/2026 दिनांक 18 जून,2026

          राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार) तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार (श्री गौतम टेटवाल)माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, विद्युत अधिनियम, 2003 (क्रमांक 36 सन्, 2003) की धारा 182 की अपेक्षानुसार अधिसूचना क्रमांक 1016/मप्रविनिआ/2026 भोपाल, दिनांक 18 जून, 2026 पटल पर रखता हूं.

(5)     जिला खनिज प्रतिष्ठान डिण्डौरी का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023 एवं 2023-2024. जिला हरदा, बालाघाट, सिंगरौली, कटनी एवं उज्जैन के वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-205 एवं जिला खनिज प्रतिष्ठान जिला रायसेन, सीहोर, नीमच एवं बालाघाट मध्यप्रदेश का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2025-26 पटल पर रखा जाना.

मंत्री, सुक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (श्री चेतन्य कुमार काश्यप)माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं खनिज प्रतिष्ठान नियम, 2016 के नियम 18(3) की अपेक्षानुसार

(क) जिला खनिज प्रतिष्ठान डिण्डौरी का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023 एवं 2023-2024.

(ख) जिला हरदा, बालाघाट, सिंगरौली, कटनी एवं उज्जैन के वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-205 एवं

(ग)  जिला खनिज प्रतिष्ठान जिला रायसेन, सीहोर, नीमच एवं बालाघाट( मध्यप्रदेश का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2025-26 पटल पर रखता हूं.

(6)     रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2025-26

          मंत्री, उच्च शिक्षा (श्री इन्दर सिंह परमार) माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 की धारा 47 की अपेक्षानुसार रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर (मध्यप्रदेश का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025 पटल पर रखता हूं.

 

(7)     मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2025

          राज्य मंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण (श्रीमती कृष्णा गौर)माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 25 की उपधारा (4) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2025 पटल पर रखती हूं.

(8)     मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021

          उप मुख्यमंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण(श्री राजेन्द्र शुक्ल)माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मध्यप्रदेश ग्रामोद्योग अधिनियम ,1978 (क्रमांक 16 सन् 1978) की धारा 18 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021 पटल पर रखता हूं.

(9)     मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड का 10वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-25

उप मुख्यमंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण(श्री राजेन्द्र शुक्ल)माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कंपनी अधिनियम 2013(क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 394 की उप धारा (2) की अपेक्षानुनसार मध्यप्रदेश मेट्रो रेल कार्पोरेशन लिमिटेड का 10वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-25 पटल पर रखता हूं.

 

 

12.13 बजे

अध्यक्षीय व्यवस्था

दिल्ली स्थित जंतर मंतर में आंदोलनकारी छात्रों पर किये गये लाठी चार्ज संबंधी स्थगन प्रस्ताव राज्य शासन के प्रशासनिक दायित्वों से संबंधित नहीं होने के कारण अग्राह्य किया जाना.

अध्यक्ष महोदय- स्थगन के बारे में जो बात चीत आ रही थी उसमें मैंने पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों को सुना है. श्री भैरोसिंह बापू, श्री सचिन सुभाष चन्द्र यादव, श्री दिनेश जैन बोस, श्री ऋषि अग्रवाल, डॉ राम किशोर दोगने, श्री सुरेश राजे, सदस्य ने दिल्ली स्थित जंतरमंतर में आंदोलनकारी छात्रों पर किये गये लाठी चार्ज के संबंध में प्राप्त स्थगन सूचनाओं का मेरे द्वारा अवलोकन किया गया जिसमें यह पाया गया कि यह सूचनायें 9 बजे के बाद अर्थात 10.25 बजे प्राप्त हुई हैं. तथा राज्य शासन के प्रशासनिक कार्यों एवं उसके उत्तरदायित्व से भी संबंधित नहीं हैं. स्थगन, ध्यानाकर्षण सूचनायें प्राप्त करने के संबंध में अध्यक्ष के स्थायी आदेश 22 (3) में एवं पत्रक भाग दो क्रमांक 38 दिनाक 16 जून 2026 में भी स्पष्ट उल्लेख है कि पूर्वाह्न 9.00 बजे के बाद प्राप्त सूचनाओं को अगले दिन प्राप्त की हुई माना जायेगा. इसके अतिरिक्त स्थगन प्रस्ताव की ग्राह्यता के लिये आवश्यक है कि उसका विषय राज्य सरकार के प्रशासनिक कार्यों अथवा उसके उत्तरदायित्व से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित हो.

सभापति व्यवस्थाओं में एवं पूर्व अध्यक्ष राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल जी की पुस्तक प्रश्नकाल से शून्यकाल तक पृष्ठ क्रमांक 234 में स्पष्ट लिखा है कि विषय शासन के कार्य कलापों से संबंधित होना चाहिये . स्थगन प्रस्ताव का विषय वही हो सकता है जो राज्य शासन के प्रशासनिक दायित्वों से संबंधित हो. सारे तथ्यों पर विचार करने के बाद विधानसभा की नियमावली प्रक्रिया के तहत मैं इस स्थगन प्रस्ताव को उठाने की अनुमति नहीं देता.

श्री सोहनलाल बाल्मिक अध्यक्ष महोदय, प्रदेश के लाखों छात्रों ने भी इस एग्जाम को दिया था और मध्यप्रदेश की 2 छात्राओं ने रिजल्ट गलत आने पर आत्महत्या की थी तो यह सीधे तौर पर मामला जुड़ा हुआ है. आज भी कई छात्रों के साथ में मारपीट हुई है.

मंत्री, खेल एवं युवक कल्याण (श्री विश्वास सारंग)अध्यक्ष महोदय, अध्यक्षीय व्यवस्था आने के बाद इस तरह की बात नहीं हो सकती है.

श्री सोहनलाल बाल्मिकअध्यक्ष जी विधानसभा नियम और परम्परा से चलती है, क्या परम्परा को भुला दिया जा रहा है.यह स्थगन महत्वपूर्ण है.

अध्यक्ष महोदय आज की कार्यसूची में 9 ध्यान आकर्षण सूचनाओं को उनके विषय की गंभीरता और महत्व को देखते हुए सम्मिलित किया गया है. विधान सभा नियमावली के नियम 138 (3) को शिथिल करके यह प्रक्रिया निर्धारित की गई है कि इनमें से क्रमशः प्रथम 2 ध्यान आकर्षण सूचनाओं को संबंधित मंत्री द्वारा सदन में पढ़ी जाने के पश्चात् संबंधित मंत्री द्वारा वक्तव्य दिया जाएगा तथा उनके संबंध में सदस्यों द्वारा नियमानुसार प्रश्न पूछे जा सकेंगे, उसके बाद अन्य सूचनाओं के संबंध में प्रक्रिया यह होगी कि वे सूचनाएं सदन में उपस्थित सदस्यों द्वारा पढ़ी हुई मानी जाएगी तथा उनके संबंध में लिखित वक्तव्य संबंधित मंत्री द्वारा पटल पर रखा माना जाएगा. लिखित वक्तव्य की एक एक प्रति सूचना देने वाले सदस्यों को दी जाएगी. उपस्थित सदस्यों की सूचनाएं तथा उन पर संबंधित मंत्री का वक्तव्य कार्यवाही में मुद्रित किया जाएगा. मैं समझता हूं कि सदन इससे सहमत है. पहले क्रमांक 1 से 2 तक की सूचनाएं ली जाएंगी.

सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.

श्री सोहनलाल बाल्मीक अध्यक्ष महोदय, लाखों लोग हैं इसमें, आज ही प्रभावित हुए हैं कई छात्रों के साथ में मारपीट की गई है. इस सदन में उन छात्रों को राजद्रोह कहा गया मंत्री के माध्यम से, कीड़े कहा गया है. यह सीधे तौर पर यह कहीं न कहीं लोकतांत्रिक व्यवस्था पर कुठाराघात किया जा रहा है, यह बात सुनी नहीं जा रही है. आप नियमों के पालन की बात कर रहे थे. नियमों परम्पराओं से ही विधान सभा चलती है, क्या परम्परा को भूला दिया जा रहा है. यह स्थगन हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण है. आप बात समझिए, पूरे देश में आज युवा इससे प्रभावित हो रहा है. सीधे तौर पर और सरकार सुन नहीं रही है. न केन्द्र सरकार सुनेगी, न राज्य सरकार सुनेगी तो किस तरीके से (व्यवधान) स्थगन को स्वीकार करें और चर्चा कराएं.

12.16 बजे                                       गर्भ गृह में प्रवेश

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा

गर्भ गृह में प्रवेश किया जाना

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार ) अध्यक्ष महोदय, संवेदनशील मुद्दा है प्रदेश के लाखों छात्र नीट हो, चाहे सारी परीक्षाएं हों, इन सबके अंदर घोटाले चल रहे हैं. छात्रों का वर्ष मना रहे हैं मुख्यमंत्री जी, छात्रों के वर्ष में छात्रों के लिए चर्चा नहीं, यूसीसी पर चर्चा हो सकती है, लेकिन प्रदेश के छात्रों के संबंध में बात नहीं हो सकती है. समान नागरिकता पर बात हो सकती है 2-2, 3-3 घंटे और प्रदेश के युवा छात्रों पर बात नहीं हो सकती. यह कैसा वर्ष है? यह कैसा वर्ष भारतीय जनता पार्टी मना रही है. कीड़े बोल रहे हैं. कॉकरोच बोल रहे हैं.

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के कई माननीय सदस्यगण स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराए जाने की मांग को लेकर गर्भ गृह में आए. )

(व्यवधान)

डॉ. सीतासरन शर्मा अध्यक्ष महोदय, यदि अध्यक्ष की व्यवस्था को भी नकारा जाएगा तो काम कैसे चलेगा?

अध्यक्ष महोदय मैं समझता हूं कि इस पर सारा विचार करने के बाद व्यवस्था दे चुका हूं.

(व्यवधान)

लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) अध्यक्ष महोदय, एक बार आपकी व्यवस्था आ गई.

सहकारिता मंत्री (श्री विश्वास सारंग) यह बहुत आपत्तिजनक है, एक बार आपकी व्यवस्था आने के बाद नहीं बोला जा सकता है.

(व्यवधान)

श्री उमंग सिंघार अराजक बोल रहे हैं, कीड़े बोल रहे हैं, कॉकरोच बोल रहे हैं. यह प्रमाण है.

उप मुख्यमंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा (श्री राजेन्द्र शुक्ल) अध्यक्ष महोदय, आपका निर्णय आ चुका है.

श्री विश्वास सारंग अध्यक्ष महोदय, किसी ने नहीं बोला है.

श्री उमंग सिंघार क्या मंत्री को माफी नहीं मांगना चाहिए?

श्री विश्वास सारंग अध्यक्ष महोदय, किसी ने नहीं बोला है. यह गलत बात है. अपने शब्द किसी के मुहं में डाल देना.

अध्यक्ष महोदय मैंने आपको भी सुना है, उसके बाद व्यवस्था दी गई है. (व्यवधान)

श्री उमंग सिंघार क्या मंत्री को माफी नहीं मांगना चाहिए?

श्री विश्वास सारंग अध्यक्ष महोदय, मुझे आश्चर्य होता है बिना मुद्दे पर मुद्दा बनाना और बहिर्गमन और फोटो अपॉर्च्युनिटी और मीडिया में आने के लिए सदन का उपयोग करना यह उचित नहीं है.

श्री उमंग सिंघार यह रिकॉर्ड पर है, यह बोला है. आप दिखवा लें.

श्री राकेश सिंह अध्यक्ष महोदय, सदन के बाहर की गई कोई भी बात पर चर्चा कैसे हो सकती है?

श्री विश्वास सारंग अध्यक्ष महोदय,  यह केवल मीडिया में आने की राजनीति है.

डॉ. सीतासरन शर्मा यह विधेयक पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं. इनके पास  प्रदेश की जनता के लिए समय नहीं है.

(व्यवधान)

श्री विश्वास सारंग अध्यक्ष महोदय, इनकी फोटो खिंचाऊ राजनीति है. एक बार अध्यक्ष ने व्यवस्था दे दी, उस विषय पर अब कोई चर्चा नहीं हो सकती है.

(व्यवधान)

श्री उमंग सिंघार युवा छात्र वर्ष मना रहे हो और युवाओं छात्रों की बात नहीं, मुख्यमंत्री जी आपसे अनुरोध है कि इस पर चर्चा होना चाहिए. आप चुप क्यों बैठे हैं? आपको छात्रों की चर्चा में क्या परेशानी है?

(व्यवधान)

श्री विश्वास सारंग अध्यक्ष महोदय के निर्णय पर प्रश्न चिह्न नहीं लगाया जा सकता है. यह आपत्तिजनक है.

श्री राजेन्द्र शुक्ल अध्यक्ष महोदय, यह आसंदी का अपमान है.

अध्यक्ष महोदय- कृपया सभी सदस्यों से अनुरोध है कि आज ध्यान आकर्षण भी लगे हैं. वह भी जनहित के हैं, कानून भी आने वाले हैं वह भी प्रदेश की जनता के कल्याण के लिए हैं यह सदन चर्चा के लिए है. संवाद के लिए है. समाधान करने के लिए है. मेरा सभी से आग्रह है कि अपने अपने स्थान पर जायं. जो विषय आपने उठाया था, स्थगन के विषय पर मैं व्यवस्था दे चुका हूं. यह व्यवस्था अंतिम है. मेरा अनुरोध है कि सभी अपने अपने स्थान पर जाय.

श्री उमंग सिंघार क्या प्रदेश के छात्रों का अपमान हम सुनने के लिए बैठे हैं? उनको कीड़े बोल रहे हैं, उनको कॉकरोच बोल रहे हैं. अराजक बोल रहे हैं, यह रिकॉर्ड में है. पंडित जी आप रिकॉर्ड में देख लें.

अध्यक्ष महोदय श्री गिरीश गौतम जी अपनी ध्यान आकर्षण की सूचना पढ़ रहे हैं.

श्री गिरीश गौतम अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यान आकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है.

श्री उमंग सिंघार माननीय मुख्यमंत्री जी क्या युवाओं के लिए आपके पास समय नहीं है. प्रदेश के छात्रों के लिए आपके पास क्या समय नहीं है? माननीय मुख्यमंत्री जी, आप यूसीसी पर बात करना चाहते हो, प्रदेश के छात्रों की बात नहीं करना चाहते हो.

(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय विधान सभा की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित की जाती है.

                     (12.20 बजे सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित की गई.)

 

 

 

12.28 बजे           {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

अध्यक्ष महोदयमाननीय गिरीश गौतम जी.

श्री अभय मिश्रा माननीय अध्यक्ष महोदय जी, मैं एक औचित्य का प्रश्न खड़ा कर रहा हूँ.

अध्यक्ष महोदय अभी ध्यानाकर्षण चल रहा है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.38 बजे                                     ध्यान आकर्षण

1.           रीवा जिले की ग्राम पंचायत महमूदपुर विकासखण्ड गंगेव में हुये वित्तीय     

              अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार की शिकायत पर कार्यवाही न किया जाना.

          श्री गिरीश गौतम (देवतालाब)- माननीय अध्यक्ष महोदय,


 

          राज्यमंत्री पंचायत एवं ग्रामीण विकास (श्रीमती राधा रविन्द्र सिंह)अध्यक्ष महोदय ,

                                                                                     

        

12:45 बजे                                     अध्‍यक्षीय घोषणा

                                             भोजनावकाश न होने विषयक

 

अध्‍यक्ष महोदय - भोजन की व्‍यवस्‍था सदन की लॉबी में की गई है, माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्‍ट करें.

श्री गिरीश गौतम – अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदया जी, ने आंशिक तौर पर दो तीन बातें स्‍वीकार की है, इसमें चार, पांच चीजें मैं कहकर के छोटा सा उत्‍तर मांग लूंगा. इसमें अभी सामान्‍य प्रशासन विभाग का एक आदेश है, शायद सरकार ने उसको वापस नहीं किया है, वह यह है कि विधायकों और सांसदों के पत्रों में सरकार को, या अधिकारियों को 15 दिवस या जो टाइम है, उसके भीतर उनको जवाब देना है कि पत्र में क्‍या कार्यवाही हो रही और क्‍या नहीं हो सकती है. हमारे ध्‍यानाकर्षण की सूचना में इस बात का उल्‍लेख है कि दिनांक 08.05.26 को मैंने स्‍वत:, जो गांव वालों ने शिकायत की है मैंने स्‍वयं उनका कव्‍हरिंग लेटर लगाकर कलेक्‍टर, कमिश्‍नर और जिला पंचायत सीईओ को पत्र दिया, दिनांक 08.05.26 को और आज तक उसकी कोई जानकारी न इसमें ध्‍यानाकर्षण के उत्‍तर में कोई इसका उल्‍लेख है नंबर 1, तो क्‍या वह आदेश खत्‍म हो गया है. नंबर एक क्‍या वह सामान्‍य प्रशासन द्वारा विथड्रा कर लिया गया है? नंबर दो इसमें यह है कि इस जानकारी को जो वहां गांव वालों ने निकाला, क्‍योंकि आजकल तो सूचना के अधिकार का जमाना है, जब उन्‍होंने निकाला तो इसमें गलत जानकारी दे रहे हैं, यह कह रहे हैं कि टी.एस. जो है, वह 18-11 को हो रहा है, जबकि यह सर्टिफाइड कॉपी वहां से निकाली है, उसमें मैंने जो बात उठाई है और इसमें जो गड़बड़ हुआ है, गड़बड़ यह ह‍ुआ है कि ए.एस. पहले हुआ, टी.एस. बाद में हुआ है और भुगतान पहले हो गया है, इसके माने भुगतान पहले हो गया, टी.एस. बाद में हुआ, ए.एस. पहले हुआ है. क्‍या ऐसा हो सकता है? तो इसी की जांच की मांग की गई थी.

अध्‍यक्ष महोदय, नंबर दो दूसरी बात इसमें उठाई थी, जो भुगतान, जिसका नाम है, उसमें मैं डिटेल में नहीं जाना चाहता हूं, जो भुगतान हुआ है, बिल का भुगतान 20 लाख रूपये के आसपास का मामला है. बिल का भुगतान हुआ तो पहले एक ही ट्रेडर्स प्रियांश से लिया गया है और इन्‍होंने उसका भुगतान किया है, तो पहले का 70 नंबर बिल है, जो 29-09 का है और 69 नंबर बिल 11 वें महिने का है, ऐसा हो सकता है क्‍या, 69 नंबर की रसीद बाद में आयेगी और 70 की रसीद पहले आ जायेगी? यह साफ दिखाई पड़ता है कि इसमें करप्‍शन हुआ है, इसलिए जांच की मांग की गई है.तीसरा उसमें जो ट्राई साइकल खरीदी, टेंडर कहीं से मंगाया, खरीदी किसी से और उसमें जवाब दिया कि उसका भी टेंडर है, उसकी भी सर्टिफाईड कॉपी है, उसमें कोई टेंडर नहीं लिया है, जिससे खरीदा है और यह पहली मर्तबा देखने को मिल रहा है कि अभी सामान नहीं आया और उसका मेंटेनेंस का पेंमेंट कर दिया गया है, उसमें 16हजार 500 रूपये ट्राई साइकल के साल भर एडवांस का पेमेंट है, अभी शासद ट्राई साइकल आई नहीं है, केवल भुगतान हो गया है, इसलिए इसमें जरूरी तीन-चार बातें हैं, एक तो यह जांच हो और जांच जो लोग कर रहे हैं वह जांच नहीं करेंगे क्‍योंकि वह सब शामिल हैं, जिला पंचायत तक शामिल है, सीओ जनपद शामिल है, जिला पंचायत के लोग शामिल है, पंचायत सरपंच, सचिव शामिल हैं, तीसरा अभी आपने उत्‍तर दिया है, जो वो दीपा सरपंच प्रभारी थी, उनका कार्यकाल 04-02 को खत्‍म हो गया, मतलब 04-02 को उसका समापन हो गया और नया सरपंच चुनकर के आ गया, 20-02 को उनने दस्तखत किया है, आप यह कह रहे हैं कि धोखे से फाईल में उसने हस्‍ताक्षर कर दिया, जब वह 20-02 को सरपंच थीं ही नहीं, डीएसपी में नीशा पटेल सरपंच दर्ज है, श्‍यामसरण शुक्‍ला सचिव दर्ज है, तो फाईल उसके पास क्‍यों ले गये? जब 20-02 को वह सरपंच ही नहीं है, उसके पास फाईल लेकर ही नहीं जाना चाहिए, किसी प्रकार की फाईल क्‍यों ले गये? इसका मतलब तो यह है कि बेक डेट में आप कोई दस्‍तखत कराना चाहते थे, जब वह सरपंच नहीं थी, उसके पास फाईल क्‍यों ले गये, यह चार पांच बिंदु हैं, जिसमें से मेरा आग्रह केवल इतना है कि यहां भोपाल से बड़े अधिकारियों को भेजकर के उसकी जांच करावें और जो शिकायकर्ता है, कम से कम उनको भी बुलावें, जिससे वह अपने डाक्‍यूमेंट और तमाम सारी सर्टिफाईड कॉपी दी गई है, यहां कुछ दूसरी बात कर रहे हैं, वहां दूसरी बात कर रहे हैं, वह सब पेश करें, केवल दो आग्रह माननीय मंत्री महोदया इसका जवाब दे दें.

          श्रीमती राधा रविन्‍द्र सिंह – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं अपने  वरिष्‍ठ सदस्‍य जी को विश्‍वास दिलाती हूं कि मैं यहां भोपाल से अधिकारी भेजकर जांच करवाऊॅगी.

          अध्‍यक्ष महोदय – उन्‍होंने दूसरी बात भी की है.

          श्री गिरीश गौतम – भोपाल से कोई बड़ा अधिकारी जाये, कमिश्‍नर जाये.

          श्रीमती राधा रविन्‍द्र सिंह – आपको विश्‍वास दिलाते हैं कि यहां से हम बड़े अधिकारी को भेजकर ही जांच करवायेंगे, वहां के कोई भी अधिकारी नहीं होंगे, न जिला सी.ओ. से, न जनपद सी.ओ. किसी से जांच नहीं करवायेंगे, हम भोपाल से बड़े अधिकारी को भेजकर जांच करवायेंगे.    श्री गिरीश गौतम – दूसरी मांग हमारी यह है कि जिन्‍होंने शिकायत की है, वह कागज पेश करे.

          अध्‍यक्ष महोदय – वह लोग शिकायकर्ता को भी बुला लें.

          श्रीमती राधा रविन्‍द्र सिंह – जी, जरूर बुला लेंगे.

          श्री गिरीश गौतम – बहुत बहुत धन्‍यवाद अध्‍यक्ष जी, मंत्री महोदया जी का भी धन्‍यवाद.

12.52 बजे              (2) राजपुर विधानसभा क्षेत्र में भूमि का अवैधानिक अधिग्रहण किये जाने से उत्‍पन्‍न स्थिति.

श्री बाला बच्‍चन (राजपुर) – माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

                                                                            


 

            (राजस्‍व मंत्री) श्री करण सिंह वर्मा-- 

          श्री बाला बच्‍चन--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से और सरकार से इस बात का निवेदन है कि राजपुर विधान सभा जो बड़वानी के अंतर्गत आती है, जो मेरी अपनी विधान सभा है, जिसकी ठेकरी तहसील है और ठेकरी तहसीलों का मैंने जिन ग्राम पंचायतों का उल्‍लेख किया है वहां पेसा एक्‍ट लागू है और पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है. दूसरा आपने कहा भूमि अधिग्रहण नहीं, भूमि आवंटन करने की प्रक्रिया चल रही है तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वह जो जमीन है, आदिवासियों के गांव के बीच की जमीन है, आदिवासियों की मवेसियों के चरनोई हेतु वह काम में आती है और निजी और सार्वजनिक कार्यक्रम करने के काम में आती है. मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन है कि जहां पेसा एक्‍ट लागू है, पांचवीं अनुसूची प्रभावशील है तो वहां पेसा एक्‍ट या पांचवीं अनुसूची के दिशा निर्देश चलेंगे या फिर आपकी सरकार का तानाशाहीपूर्ण रवैया चलेगा और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक आपने अपने उत्‍तर में बोला है कि ग्राम पंचायातों से अनुशंसा हेतु ग्राम सभा के प्रस्‍ताव ठहराव हेतु पत्र जारी किये हैं वहां किसी भी ग्राम पंचायत ने किसी भी ग्रामसभा ने अनुशंसा करने से मना कर दिया है, प्रशासन उन पर दवाब बना रहा है, तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्‍टर के द्वारा दवाब बनाया जा रहा है तो मेरा सरकार आपके माध्‍यम से सरकार से आग्रह है कि ऐसा आनन फानन में और इतनी जल्‍दबाजी में क्‍यों कर रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय आपके माध्‍यम से मैं यह भी मंत्री जी की जानकारी में लाना चाहता हूं कि माननीय मंत्री जी मैंने जब उनसे सर्कुलर का पूछा कि कौन सा सर्कुलर शासन का है, आप हमको दिखा दो तो उन्‍होंने नहीं दिखाया बाद में कहा कि किसी की एप्‍लीकेशन आई है तो मैंने खुद ने एसडीएम साहब से बात की कि भैया मुझको एप्‍लीकेशन दिखा दो, उन्‍होंने एप्‍लीकेशन तक नहीं दिखाई है तो मैं समझता कि हम सबका पांचवीं अनुसूची का पेसा एक्‍ट का यह हम सबके लिये उचित नहीं है, सरकार इसको तत्‍काल रोके, इसकी कार्यवाही को बंद करे. ग्राम सभा और ग्राम पंचायत ने कोई प्रस्‍ताव पारित करके नहीं दिये हैं. यह मेरा आग्रह है कि कब तक इस प्रक्रिया को तत्‍काल रोका जायेगा.

          श्री करण सिंह वर्मा--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश शासन के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा प्रस्‍तावित एक योजना है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य जी को मैंने बोला है कि अभी परीक्षण किया जा रहा है, इसके बाद निर्णय लिया जायेगा, प्रारंभिक स्‍तर पर है. माननीय सदस्‍य जी किसी का भी अहित नहीं होने देंगे. अभी मामला प्रक्रिया में है शुरूआती स्थिति में है.

          श्री दिनेश जैन बोस -  माननीय अध्यक्ष महोदय, उस योजना का नाम क्या है. नवकरणीय ऊर्जा में उस योजना का नाम क्या है.

          श्री करण सिंह वर्मा - मध्यप्रदेश सोलर पार्क प्रोजेक्ट. मध्यप्रदेश शासन के नवीन एवं नवकरणीय उर्जा विभाग द्वारा प्रस्तावित योजना.

          श्री दिनेश जैन बोस -  उस योजना का क्या नाम है. कुसुम ए,कुसुम बी,कुसुम सी यह सब किसानों की योजना हैं मैं चाहता हूं उस योजना का नाम क्या है.

          श्री करण सिंह वर्मा - योजना का नाम बताया ना मैंने. सोलर प्रोजेक्ट है मध्यप्रदेश शासन की नवीन एवं नवकरणीय उर्जा विभाग द्वारा प्रस्तावित योजना

          अध्यक्ष महोदय - बाला बच्चन जी के प्रश्न का जवाब दीजिये आप.

          श्री करण सिंह वर्मा - माननीय अध्यक्ष महोदय,मैंने उनसे निवेदन किया यह एक प्रोजेक्ट है इसमें गांव के लोगों से चर्चा चल रही है यह मानता हूं मैं आपने सही कहा कि बिना ग्राम पंचायत से चर्चा किये वह नहीं होगा. जो  उनसे चर्चा करके प्रस्ताव देगी ग्राम सभा,वह हित में ही है. 400 एकड़ में सोलर पार्क योजना बनाई है तो उसमें  बिना आदिवासियों से चर्चा किये ग्राम पंचायत का कोई मामला हो वहां पेसा कानून लागू है बिना प्रस्ताव से वहां कोई कार्य नहीं चल रहा है.

          श्री बाला बच्चन - माननीय अध्यक्ष महोदय,मैं यही चाहता हूं कि माननीय मंत्री जी के द्वारा,शासन के द्वारा,सरकार के द्वारा यह निर्देश चला जाये क्योंकि वहां तहसीलदार,एसडीएम,कलेक्टर,पटवारी यह आदिवासियों में खौफ और डर का माहौल बना रहे हैं लोग डरे हुए हैं आदिवासी वर्ग से आते हैं. दूसरा माननीय मंत्री जी आपने राजपुर अंतर्गत प्रश्न क्रमांक क का उल्लेख किया है कोई प्रश्न तो है नहीं यह ध्यानाकर्षण है. ऐसे दिशा निर्देश चले जाएं. मैंने उल्लेख किया है कि पांचवीं अनुसूची पेसा एक्ट प्रभावशील है उसके बाद वहां के अधिकारियों को और सोलर पार्क वालों को वहां जाना ही नहीं चाहिये. मैं यहां कल सुन रहा था कि पूरी भारतीय जनता पार्टी के सारे मंत्रीगण,मुख्यमंत्री सब आदिवासी हितों की बात कर रहे थे लेकिन आज देख लीजिये कि आदिवासियों की जमीनों को हड़पने की नजर आपने बना रखी है उनके लिये कानून बना है. आप आदिवासियों के हित में हैं या आदिवासियों के अहित में हैं.

          श्री करण सिंह वर्मा - प्रारंभिक प्रक्रिया है न किसी को डराया है न किसी आदिवासी की जमीन है वहां आदिवासियों की जमीन नहीं है वहां ऐसी जमीन प ड़ी हुई है जहां सोलर पंप की योजना बना रही है सरकार. प्रारंभिक योजना है. डरा नहीं रहे हैं उनसे प्रस्ताव मांगेंगे. उनको समझाएंगे,बुझाएंगे परामर्श लेंगे फिर नहीं मानेंगे तो फिर अलग बात है.

          श्री बाला बच्चन - ग्राम सभा ग्राम पंचायतों में उन्होंने कोई प्रस्ताव नहीं किया और उसके खिलाफ किया है उसके बाद भी बार-बार उनको टार्चर कर रहे हैं. तो यह तो उनके ऊपर एक डर और भय का वातावरण शासन, प्रशासन बना रहा है और पांचवीं अनुसूची,पेसा एक्ट का निर्देश चलेगा या आपका चलेगा. मेरे हिसाब से कथनी और करनी में जमीन आसमान के फर्क का मामला है तो तत्काल यहां से आदेश और निर्देश जाने चाहिये जिससे इस प्रक्रिया पर रोक लगे.

          अध्यक्ष महोदय -वैसे बाला जी, मैं समझता हूं कि मंत्री जी ने कहा है कि बिना  पंचायत और ग्राम सभा की सहमति के बिना कोई कार्यवाही नहीं की जायेगी. यह अपने आप में स्पष्टता है बाकी मुझे जहां तक लगता है यह कुसुम सी के प्रोजेक्ट होंगे उसमें सरकार कोई जमीन दे रही होगी उस क्षेत्र में जो भी टेण्डर हुआ होगा तो सामान्य तौर पर जब भी जमीन का आवंटन जब भी हम करते हैं तो एक तो सामूहिक हितों का ध्यान रखा जाना चाहिये.आदिवासियों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिये और पेसा चूंकि कानून है तो उसके कानून का उल्लंघन का कोई भी रेवेन्यू डिपार्टमेंट नहीं करेगा फिर भी मंत्री जी ने ध्यान आकर्षित किया है तो उसका ध्यान रखा जाना चाहिये और संबंधितों से बात की जानी चाहिये.

          श्री बाला बच्चन - ऐसा आदेश निर्देश चले जाएं जिससे डर और खौफ का एक वातावरण बनाया हुआ है और नीचे स्तर पर अलग-अलग पक्षपात जो चलता है ऐसे निर्देश चले जाएं. मेरा ध्यानाकर्षण लाने के पीछे मकसद पूरा बड़वानी जिला  पांचवीं अनुसूची और पेसा एक्ट के अंतर्गत आता है उसके बाद अलिराजपुर है,झाबुआ है,धार है सब जगह ऐसा करेंगे. कल ही खूब नारेबाजी हुई है भाजपा की तरफ से तो ऐसे निर्देश चले जाएं.

          श्री आरिफ मसूद - मैंने तो पहले ही कहा था कि आदिवासियों के साथ बाद में धोखा होगा.

          श्री विजयपाल सिंह आदिवासियों के साथ कभी धोखा नहीं होगा. आप ध्यान रखना.

अध्यक्ष महोदय मैंने स्वयं भी यह बात कही है कि आदिवासियों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए. मैंने स्पष्ट ही कहा है. बाकी डर वाली बात है तो मंत्री जी कह रहे हैं कि शांति बनी हुई है.

लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) माननीय अध्यक्ष महोदय, चूँकि सरकार पर बात आ रही है, ये सरकार मध्यप्रदेश के आदिवासी भाइयों के हितों के लिए संकल्पित है और सरकार के लगातार जितने भी निर्णय हुए हैं, वे सारे निर्णय यह बताते हैं कि सरकार ने वही सारे निर्णय किए हैं, जिनसे आदिवासियों के हितों का सरंक्षण होता है. मंत्री जी अपने उत्तर में बार-बार स्पष्टता से कह चुके हैं कि कहीं कोई ऐसा कार्य नहीं हो रहा है, जो आदिवासी भाइयों के हितों के विपरीत जाए. इसलिए केवल पॉलिटिकल माइलेज के लिए कोई गलत टिप्पणी सदन में नहीं होना चाहिए. अध्यक्ष महोदय, आपने स्वयं भी निर्देशित कर दिया है. उसके बाद मुझे लगता है कि इस विषय पर चर्चा उचित नहीं है.

 

01.06 बजे                                  अध्यक्षीय व्यवस्था

                ध्यानाकर्षण की शेष सूचनाएं एवं उनके वक्तव्य पढ़े हुए माने जाने संबंधी

अध्यक्ष महोदय अब मैं कार्यसूची के पद 3 के उप पद (3) से (9) तक सूचना देने वाले सदस्यों के नाम पुकारूंगा, संबंधित सदस्यों की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई तथा संबंधित मंत्रियों द्वारा उन पर वक्तव्य पढ़े माने जाएंगे :- 

(3) श्री भूपेन्द्र सिंह

(4) श्री लखन घनघोरिया

(5) श्री अजय अर्जुन सिंह

(6) श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह

(7) श्री अभय मिश्रा

(8) श्री अरूण भीमवद

(9) श्री पन्नालाल शाक्य

 

01.07 बजे                         औचित्य का प्रश्न एवं अध्यक्षीय व्यवस्था

श्री अभय मिश्रा माननीय अध्यक्ष महोदय, सभापति व्यवस्था को लेकर मेरा एक औचित्य का प्रश्न है. बस मुझे 2 मिनिट दे दीजिए. मुझे सबके लिए एक बात कहनी है. अभी तक ध्यानाकर्षण जो भी हम लगाते थे, उनके उत्तर आ जाते थे. वर्ष 2019 से यह व्यवस्था थी. भले ही वे चर्चा में न आएं, लेकिन आगे-पीछे हमारे उत्तर आ जाते थे तो हमारी बहुत सी समस्याएं उससे हल हो जाती थीं. चाहे सत्ता पक्ष के सदस्य हों, चाहे विपक्ष के सदस्य हों, सभी का उत्तर आ जाने से बहुत सारी समस्याएं शॉर्ट आऊट हो जाती थीं और अधिकारियों में एक मेसेज जाता था. श्री गोपाल भार्गव ने जी लगाया था, जब कांग्रेस की सरकार थी और 23 जुलाई, 2019 से यह ऑर्डर प्रभावी था. अब इसके बाद ये परंपरा अभी-अभी बंद कर दी गई है. अभी हमारे उत्तर आना बंद हो गए हैं, इससे हमारे लिए समस्या खड़ी हो गई है. अत: आपसे यह अनुरोध है कि उसको यथावत रहने दें.

अध्यक्ष महोदय अभय जी, प्रक्रिया कोई बंद नहीं की गई है. जो प्रक्रिया नियमों में थी, उसको स्थापित किया गया है, जो बीच में शिथिल हो गई थी.

 

 

01.08 बजे                                 मौखिक उल्लेख

बालाघाट जिले के परसवाड़ा में असामाजिक तत्वों द्वारा राजा भोज की प्रतिमा को

खण्डित किया जाना

श्री मधु भगत (परसवाड़ा) माननीय अध्यक्ष महोदय, बालाघाट जिले के परसवाड़ा में विगत दिवस पंवार समाज के आराध्य महान प्रतापी राजा भोज की मूर्ति को असामाजिक तत्वों द्वारा खण्डित करके उसे चार टुकड़ों में तोड़ दिया गया है. समस्त जिले के अंदर, पूरे प्रदेश के अंदर पंवार समाज की जनता में आक्रोश व्याप्त है. कानून की व्यवस्था कमजोर होने के कारण आज दिनांक तक अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है. प्रतिमा खण्डित करने वाले दोषियों को तत्काल गिरफ्तार कर दण्डात्मक कार्यवाही किए जाने हेतु माननीय सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ. यह बालाघाट जिले के परसवाड़ा की घटना है.

 

01.09 बजे                              प्रतिवेदनों की प्रस्तुति

        (1) पटल पर रखे गए पत्रों का परीक्षण करने संबंधी समिति का कार्यान्वयन से संबंधित सप्तम प्रतिवेदन

        (2) प्रश्न एवं संदर्भ समिति के पंचदश विधान सभा के अपूर्ण उत्तरों के पूर्ण उत्तरों संबंधी षष्ठम् प्रतिवेदन

       

(3) महिला एवं बाल कल्याण संबंधी समिति का कार्यान्वयन से संबंधित चतुर्थ एवं पंचम प्रतिवेदन

01.10 बजे                           याचिकाओं की प्रस्तुति

        अध्यक्ष महोदय क्रमांक (1) से लेकर (66) तक जो याचिकाएं हैं, वह सब सदन में पढ़ी हुई मानी जाएंगी.

(1)  श्री फूलसिंह बरैया जी

(2)  श्री पंकज उपाध्याय जी

(3)  श्री विवेक विक्की पटेल जी

(4)  श्री दिनेश राय मुनमुन जी

(5)  श्रीमती अनुभा मुंजारे जी

(6)  श्री नितेन्द्र बृजेन्द्र सिंह राठौर जी

(7)  श्री फुन्देलाल सिंह मार्को जी

(8)  श्री आशीष गोविंद शर्मा जी

(9)  श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल जी

(10)      श्री विश्वनाथ सिंह मुलाम भैया जी

(11)      श्री वीरसिंह भूरिया जी

(12)      श्री भैरो सिंह बापू जी

(13)      श्री सोहनलाल बाल्मीक जी

(14)      श्री विपीन जैन जी

(15)      श्री अरूण भीमावद जी

(16)      श्री प्रताप ग्रेवाल जी

(17)      श्री मधु भगत जी

(18)      श्री राजेश कुमार वर्मा जी

(19)      श्री बिसाहूलाल सिंह जी

(20)      श्री यादवेन्द्र सिंह जी

(21)      श्री प्रदीप पटेल जी

(22)      श्रीमती सेना महेश पटेल जी

(23)      श्री बृजेन्द्र सिंह यादव जी

(24)      श्री सुनील उईके जी

(25)      श्री मोंटू सोलंकी जी

(26)      डॉ. हिरालाल अलावा जी

(27)      श्री राजन मण्डलोई

(28)      श्रीमती झूमा डॉ. ध्यानसिंह सोलंकी जी

 (29)   श्री श्रीकान्‍त चतुर्वेदी

(30)    श्री केदार चिड़ाभाई डावर

(31)    श्री मथुरालाल डामर

(32)    श्री अनिल जैन

(33)    श्री हजारीलाल दांगी

(34)    श्री दिलीप सिंह परिहार

(35)    श्री शरद जुगलाल कोल,

(36)    श्री चन्‍दरसिंह सिसौदिया

(37)    श्री विक्रम सिंह

(38)    श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर

(39)    श्री घनश्‍याम चन्‍द्रवंशी

(40)    श्री  राजेन्‍द्र पाण्‍डेय

(41)    श्री राजेश कुमार शुक्‍ला

(42)    श्री श्‍याम बरडे

(43)    श्री विश्‍वामित्र पाठक,

(44)    श्री मोहन सिंह राठौर

(45)    श्री अभय मिश्रा

(46)    श्री कैलाश कुशवाहा

(47)    डॉ. सतीश सिकरवार

(48)    इंजी. प्रदीप लारिया

(49)    श्री सुरेश राजे

(50)    श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव

(51)    श्री केशव देसाई

(52)    श्रीमती छाया गोविन्‍द मोरे

(53)    श्री हेमंत सत्‍यदेव कटारे

(54)    श्री दिनेश गुर्जर

(55)    सुश्री रामश्री (बहिन रामसिया भारती) राजपूत

(56)    श्री कालू सिंह ठाकुर

(57)    श्री गौरव सिंह पारधी

(58)    श्री साहब सिंह गुर्जर

(59)    श्री सचिन बिरला

(60)    श्री आतिफ आरिफ अकील

(61)    श्री उमाकांत शर्मा

(62)    श्रीमती प्रियंका पैंची

(63)    श्री बाबू जन्‍डेल

(64)    डॉ. रामकिशोर दोगने

(65)    श्री देवेन्‍द्र रामनारायन सखवार

(66)    डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह

अध्यक्ष महोदय- अब, श्री उदय प्रताप सिंह, स्‍कूल शिक्षा मंत्री दिनांक 30 जुलाई, 2025 को पूछे गये तारांकित प्रश्‍न संख्‍या 23 (क्रमाक 1300) के उत्‍तर में संशोधन किये जाने के संबंध में वक्‍तव्‍य देंगे.

 

 

1.12 बजे                                        (6) वक्‍तव्‍य

दिनांक 30 जुलाई, 2025 को पूछे गये तारांकित प्रश्‍न संख्‍या 23 (क्रमांक 1300) के

     उत्‍तर में संशोधन किये जाने के संबंध में श्री विश्वास सारंग, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री 

का वक्‍तव्‍य

          खेल एवं युवा कल्‍याण मंत्री (श्री विश्‍वास सारंग) – माननीय अध्‍यक्ष महोदय,दिनांक 30 जुलाई, 2025 की प्रश्‍नोत्‍तर सूची के पृष्‍ठ क्रमांक 23 में मुद्रित तारांकित प्रश्‍न संख्‍या 23 में, मैं निम्‍नानुसार संशोधन करना चाहता हूँ. प्रश्‍नोत्‍तर सूची में मुद्रित उत्‍तर के भाग में सभी संवर्ग के शिक्षकों को आवेदन प्रस्‍तुत करने की सुविधा दी गई है. पैंतालीस सौ तीन आवेदन प्राप्‍त हुए, स्‍थानान्‍तरण प्रक्रिया में कोई विलम्‍ब न होने से शेषांश प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता के स्‍थान पर कृपया निम्‍नानुसार संशोधित उत्‍तर पढ़ा जावे. सभी संवर्ग के शिक्षकों को आवेदन प्रस्‍तुत करने की सुविधा दी गई है. 45,043 आवेदन प्राप्‍त हुए है, स्‍थानान्‍तरण प्रक्रिया में कोई विलम्‍ब न होने से शेषांश प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता.  

1.13 बजे                         (7) शासकीय विधि विषयक कार्य

(1) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्‍यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2026

(क्रमांक 6 सन् 2026) पर विचार

राज्‍य मंत्री, अधिकृत विधि और विधायी (श्री गौतम टेटवाल) – अध्‍यक्ष महोदय, मैं, प्रस्‍ताव करता हूँ कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्‍यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.  

अध्‍यक्ष महोदय – प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ. प्रतिपक्ष की ओर से कोई नाम नहीं हैं ?

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक – अध्‍यक्ष जी, इसमें नहीं हैं.

अध्‍यक्ष महोदय – श्री जीतेन्‍द्र उदयसिंह पण्‍ड्या जी.

श्री जीतेन्‍द्र उदयसिंह पण्‍ड्या (बड़नगर) – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्‍यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2026 के समर्थन में अपने विचार व्‍यक्‍त करने के लिए खड़ा हुआ हूँ. सबसे पहले मैं स्‍पष्‍ट करना चाहता हूँ कि यह जो विधेयक है, समाज में किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए, विधेयक न तो किसी अपराध को समाप्‍त करने के लिए लाया गया है और न ही अपराधियों को कोई विशेष लाभ देने के लिए, यह केवल ऐसी व्‍यवस्‍था को पुन: लागू करने के लिए लाया गया है. जो मध्‍यप्रदेश में पहले से लागू थी और जिसका व्‍यवहारिक रूप से लाभ भी मिला है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2019 में मध्‍यप्रदेश से दण्‍ड प्रक्रिया संहिता की धारा 320 में राज्‍य संशोधन करके कुछ अपराधों को न्‍यायालय की अनुमति से समझौता योग्‍य बनाया गया था, इसके पीछे उद्देश्‍य यही था कि जिन मामलों में पक्षकारों के बीच वास्‍तविक रूप से विवाद समाप्‍त हो गया हो, जहां केवल कानूनी बाधा के कारण मुकदमा वर्षों तक लंबित न रहे. आज भारतीय न्‍यायिक संहिता और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू हो चुकी है, इसलिए उसी व्‍यवस्‍था को नई संहिताओं के अनुरूप पुन: लागू करने के लिए विधेयक लाया गया है. इस विधेयक में स्‍पष्‍ट व्‍यवस्‍था है यदि कोई फरियादी समझौता करना चाहता है, तो उसे न्‍यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्‍तुत करना होगा, उसके बाद न्‍यायालय पूरे मामले का परीक्षण करेगा. न्‍यायालय यह देखेगा कि समझौता स्‍वेच्‍छा से किया गया है या नहीं. किसी प्रकार का दबाव भय प्रलोभन या अनुचित प्रभाव तो नहीं है. न्‍यायालय पूरी तरह संतुष्‍ट होने के बाद ही समझौते की अनुमति देना अर्थात् अंतिम निर्णय किसी व्‍यक्ति का नहीं, अपितु न्‍यायालय का होगा. महिलाओं से संबंधित धारा 85 के मामले में और भी अधिक सावधानी रखाी गई है. केवल पीडि़त महिला आवेदन प्रस्‍तुत कर सकेगी. न्‍यायालय यह भी देखेगा कि विधेयक में निर्धारित शर्तों का पालन किया गया है या नहीं ? तथा समझौता वास्‍तविकता में महिलाओं के हित में है. यदि न्‍यायालय को लगे कि महिला पर किसी प्रकार का दबाव है या समझौता उसके हित में नहीं है तो वह अनुमति नहीं देगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, इसी प्रकार बलवा अर्थात् सार्वजनिक स्‍थान पर अश्‍लील शब्‍दों के प्रयोग जैसे मामलों में भी अंतिम निर्णय न्‍यायालय का रहेगा. इसीलिए यह कहना कि इस विधेयक से अपराधियों को खुली छूट मिलेगी, यह निराधार है. यह विधेयक न्‍यायालय की निगरानी में वास्‍तविक समझौते को वैधानिक मान्‍यता देने का प्रयास है, इससे अनावश्‍यक मुकदमाबाज़ी कम होगी, न्‍यायालय का समय बचेगा और जहां पक्षकर वास्‍तव में अपने विवाद का समाधान कर चुके हैं, वहां उन्‍हें विधिक राय भी मिल सकेगी. अत: मैं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्‍यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2026 का स‍मर्थन करता हूं. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, धन्‍यवाद.

01.17 बजे

{सभापति महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय) पीठासीन हुए.}

          श्री अनिरूद्ध (माधव) मारू (मनासा)-  सभापति महोदय, मैं, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्‍यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2026 का समर्थन में अपने विचार रख रहा हूं. इस विधेयक के संबंध में सबसे अधिक चर्चा भारतीय न्‍याय संहिता की धारा 85 को लेकर हो रही है. पूर्व में यह भारतीय दण्‍ड संहिता की धारा 91 (ए) थी. इसलिए इस विषय में, मैं, कुछ बातें स्‍पष्‍ट करना चाहता हूं. सबसे पहले यह समझना आवश्‍यक है कि इस धारा को बिना किसी शर्त के समझौते योग्‍य नहीं बनाया है. इसके विपरित महिलाओं के हितों की रक्षा के लिए इस विधेयक में कुछ विशेष सुरक्षा के प्रावधान किए गए हैं. यदि कोई महिला स्‍वयं यह महसूस कर रही है, उसका वैवाहिक विवाद समाप्‍त हो रहा है और वह समझौता करना चाहती है तो केवल आवेदन देने मात्र से समझौता प्रभावी नहीं हो जायेगा. विधेयक में स्‍पष्‍ट व्‍यवस्‍था की गई है कि प्रथम सूचना रिपोर्ट की पंजीयन तिथि से कम से कम 6 माह की अवधि व्‍यतीत होना आवश्‍यक होगा, उसके बाद भी अंतिम निर्णय न्‍यायालय के समक्ष होगा. न्‍यायालय यह देखेगा कि समझौता वास्‍तव में स्‍वेच्‍छा से किया गया है या नहीं किया गया है. महिला पर किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन, अनुचित प्रभाव का प्रयोग तो नहीं किया गया. सबसे महत्‍वपूर्ण यह है कि समझौता वास्‍तव में उस महिला के हित में हो, न्‍यायालय जब तक इन बातों से संतुष्‍ट नहीं होगा, तब तक उस समझौते का आवेदन स्‍वीकार नहीं किया जायेगा. अर्थात् इस पूरे प्रावधान में प्रत्‍येक स्‍तर पर न्‍यायालय की निगरानी और संतुष्टि को महत्‍व दिया गया है इसलिए इससे महिलाओं के अधिकारों एवं सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा. ऐसा इस संशोधन में परिलक्षित होता है.

          सभापति महोदय, मैं यह भी स्‍पष्‍ट करना चाहता हूं कि यह कोई नई व्‍यवस्‍था नहीं है, मध्‍यप्रदेश में इसी प्रकार की व्‍यवस्‍था वर्ष 2019 में लागू रही है. अब केवल नई भारतीय न्‍याय संहिता एवं भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता कानून लागू होने के कारण, उसी व्‍यवस्‍था को नई विधिक संरचना के अनुरूप पुन:स्‍थापित किया जा रहा है. इसलिए इस विधेयक को महिलाओं के हितों के विरूद्ध नहीं, अपितु महिलाओं की सुरक्षा बनाए रखने के लिए न्‍यायालय की निगरानी में वास्‍तविक समझौते को वैधानिक मान्‍यता देने हेतु संतुलित विधेयक के रूप में देखा जाना चाहिए. इन शब्‍दों के साथ, मैं, इस विधेयक का समर्थन करता हूं.

          श्री गौतम टेटवालसभापति महोदय, मैं, अपने माननीय सदस्‍यों को धन्‍यवाद दूंगा. इस विधेयक को कोई नई नीति बनाने के लिए नहीं लाया गया है. इसका उद्देश्‍य केवल प्रदेश में वर्ष 2019 से लागू एक व्‍यवस्‍था को नई केंद्रीय संहिता के अनुरूप पुन: लागू करना है. वर्ष 2019 में मध्‍यप्रदेश ने दण्‍ड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 320 में संशोधन कर, भारतीय दण्‍ड संहिता की कुछ गंभीर प्रकृति के अपराधों को न्‍यायालय की अनुमति से समझौता योग्‍य बनाया है. बाद में भारत सरकार ने नई भारतीय न्‍याय संहिता, 2023 तथा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 लागू कर दी है. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 लागू होने के कारण दण्‍ड प्रक्रिया संहिता, 1973 के अंतर्गत मध्यप्रदेश द्वारा किए गए राज्य संशोधन नई संहिता में समाहित नहीं हो सके. परिणाम स्वरुप जिन अपराधों को मध्यप्रदेश में राज्य संशोधन द्वारा समझौता योग्य बनाया गया है वे भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 359 के अधीन समझौता योग्य अपराधों की सूची में सम्मिलित नहीं हैं. अत: उक्त व्यवस्था को पुन: लागू करने के उद्देश्य से संशोधन प्रस्तावित किया गया है. इस विधेयक के अन्तर्गत तीन धाराओं को न्यायालय की अनुमति एवं विधेयक में निर्धारित शर्तों के अधीन पुन: समझौता योग्य बनाया गया है. पहली धारा भारतीय न्याय संहिता की 191 (2) जो बलवा से संबंधित है. सामान्य जीवन में अनेक बार धरना, प्रदर्शन, आन्दोलन या सार्वजनिक विरोध के दौरान 5 या 5 से अधिक व्यक्तियों का समूह बन जाता है और उस दौरान बल या हिंसा का प्रयोग हो जाए तो ऐसी परिस्थिति में बलवा का अपराध बन जाता है. यह अपराध मात्र दो वर्ष के कारावास, जुर्माने या दोनों से दंडनीय होकर जमानती प्रकृति का है. ऐसी प्रकृति के मामले को मध्यप्रदेश में वर्ष 2019 से समझौतायोग्य रखा गया है. अब उसी व्यवस्था को पुन: लागू किया जा रहा है. दूसरी धारा भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 है. जो सार्वजनिक स्थान पर अश्लील कृत्य करने अथवा अश्लील शब्द, गाली गलौज जैसे व्यवहार से संबंधित है. इसमें तीन मास तक के कारावास या 1 हजार रुपये तक का अर्थदण्ड दिया जा सकता है. यह भी अपेक्षाकृत कम गंभीर प्रकृति का अपराध है. ऐसे मामलों में यदि पक्षकार अपनी सहमति से विवाह समाप्त करना चाहे तो न्यायालय की अनुमति से समझौते का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है. तीसरी धारा भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 है. जो पति या उसके संबंधी द्वारा महिला के प्रति क्रूरता से संबंधित है. इसमें 3 वर्ष तक का कारावास और जुर्माना किया जा सकता है. इस धारा को बिना शर्त समझौता योग्य नहीं बनाया जा रहा है. महिलाओं के हितों की पूर्ण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष सुरक्षा प्रावधान रखे गए हैं. इसमें केवल पीड़ित महिला ही समझौते के लिए आवेदन कर सकेगी. न्यायालय का समझौता स्वीकार नहीं करेगा. हमारी सरकार ने मातृशक्ति और बहनों की शक्ति और उसके सम्मान की व्यवस्था रखी है उसके सम्मान के साथ डॉ. मोहन यादव जी की सरकार काम कर रही है. विधेयक में निर्धारित शर्तों का पालन होने तथा संतुष्टि होने पर कि समझौता वास्तव में महिला के हित में है और उस पर किसी प्रकार का दवाब नहीं है. तभी समझौते की अनुमति दी जाएगी. अत: यह स्पष्ट है कि यह विधेयक किसी अपराध को समाप्त करने के लिए नहीं है और न ही महिलाओं के अधिकार को कमजोर करने के लिए है.इसका उद्देश्य केवल ऐसे मामलों में जहां पक्षकार वास्तव में विवाह समाप्त करना चाहते हैं. न्यायालय की निगरानी में वैधानिक रुप से समझौते तक अवसर उपलब्ध कराना है. यह व्यवस्था मध्यप्रदेश में पहले भी प्रभावी थी. उसका लाभ भी मिल रहा था. इस विधेयक के माध्यम से उसी व्यवस्था को नई संहिता के अनुरुप पुन: स्थापित किया जा रहा है. इन्हीं शब्दों के साथ मैं सम्मानीय सदन से इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करने का अनुरोध करता हूँ.

          सभापति महोदय प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

 

          प्रश्न यह है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2026 पर विचार किया जाए.

                                                                                      प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

          सभापति महोदय अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.

          प्रश्न यह है कि खण्ड 2 से 3 इस विधेयक का अंग बने.

खण्ड 2 से 3 इस विधेयक का अंग बने.

          सभापति महोदय प्रश्न यह है कि खण्ड 1,पूर्ण नाम तथा अधिनयिमन सूत्र इस विधेयक का अंग बने.

          खण्ड 1,पूर्ण नाम तथा अधिनयिमन सूत्र इस विधेयक का अंग बना.

          श्री गौतम टेटवाल माननीय सभापति महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूँ कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया जाए.

          सभापति महोदय प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

          प्रश्न यह है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2026  पारित किया जाए.

          प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

विधेयक पारित हुआ.

         

 

उच्‍च शिक्षा मंत्री (श्री इन्‍दर सिंह परमार) -- सभापति महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.

श्री महेश परमार (तराना) -- धन्‍यवाद सभापति महोदय. मुझे मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍व- विद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 पर बोलना है. मैं इसका विरोध करता हूं. जिस उज्‍जैन से मैं आता हूं भगवान श्रीकृष्‍ण की शिक्षास्‍थली रही है और आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी की भी शिक्षा स्‍थली मध्‍यप्रदेश उज्‍जैन है, आदरणीय उच्‍च शिक्षा मंत्री जी भी उसी विश्‍वविद्यालय से उज्‍जैन संभाग से आते हैं और सभापति महोदय आप भी विक्रम विश्‍वविद्यालय से पढ़कर उसी परम्‍परा से विक्रम विश्‍वविद्यालय से आपकी शिक्षा दीक्षा हुई और मैं भी उसी विक्रम विश्‍वविद्यालय से पढ़ा हूं. मध्‍यप्रदेश का शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा गौरवशाली इतिहास है.

          सभापति महोदय, आज हम मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा कर रहे हैं. यह विधेयक निजी विश्‍वविद्यालयों के नियमों को इतना शिथिल कर देगा कि मध्‍यप्रदेश की पूरी शिक्षा व्‍यवस्‍था तहस नहस हो जाएगी. यह तहस नहस करने वाला कदम साबित होगा ही सही इसलिए वर्ष 2007 के अधिनियम की धारा 7 के लिए संशोधन का मैं और हमारी पार्टी विरोध करती है क्‍योंकि ऐसे नियम और संशोधन देश में अराजकता और बेरोजगारी बढ़ाएंगे. व्‍यापम, नर्सिंग कॉलेज घोटाला और अभी नीट पेपर लीक घोटाले के घाव भरे नहीं थे कि मध्‍यप्रदेश की सरकार पूरी तरह से देश की शिक्षा व्‍यवस्‍था पर एक और इतने बड़े कुठाराघात की तैयारी में है. इस विधेयक का मैं और मेरी पार्टी पुरजोर विरोध करते हैं. सबसे पहले तथ्‍य देखिए कि जिन महत्‍वपूर्ण धाराओं में संशोधन किया गया है, वह धारा 7 के उपबंध जो कि मूल अधिनियम की आत्‍मा है, जिसे सरकार खत्‍म करना चाहती है, 25 एकड़ भूमि की अनिवार्यता को समाप्‍त करना और बड़ा तुक मार अंदाज में लिखना कि पर्याप्‍त जमीन होना चाहिए. पहले 25 एकड़ थी. पर्याप्‍त जमीन कितनी होना चाहिए माननीय शिक्षा मंत्री जी यह बताएं कि निजी विश्‍वविद्यालय के लिए कितनी पर्याप्‍त जमीन होना चाहिए. सरकार अब क्‍या एक एकड़ जमीन में विश्‍वविद्यालय चलाने की छूट देगी. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं. सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक प्रोफेसर यशपाल बनाम छत्‍तीसगढ़ सरकार के फैसले में साफ कहा गया था कि बिना प्रॉपर और पर्याप्‍त कैम्‍पस के कोई  विश्‍वविद्यालय अस्तित्‍व में नहीं आ सकता तो इतनी क्‍या आवश्‍यकता है कि इतना बड़ा निर्णय माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय का है तो फिर मध्‍यप्रदेश की विधान सभा में या फिर मध्‍यप्रदेश की शिक्षा नीति में यह क्‍यों परिवर्तन आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी, सरकार एवं उच्‍च शिक्षा मंत्री जी कर रहे हैं

समय 1.30 बजे                                 अध्यक्षीय घोषणा.

                                               भोजनावकाश नहीं होने संबंधी

सभापति महोदय आज भोजन अवकाश नहीं होगा. भोजन की व्यवस्था सदन की लॉबी में की गई है. माननीय सदस्यों से आग्रह है कि सुविधानुसार भोजन करने का कष्ट करें.

श्री महेश परमार माननीय सभापति महोदय, बिना पर्याप्त कैंपस के कोई विश्वविद्यालय अस्तित्व में नहीं आ सकता, भूमि अनिवार्य शर्त है. यूजीसी  एक्सपर्ट कमेटी ने कम से कम 20  एकड़ की सिफारिश की थी, जिसे मध्यप्रदेश की तत्कालीन बीजेपी सरकार ने 25 एकड़  रखा जब यूजीसी ने 20 एकड़ की तो आपकी सरकार इसको  क्यों कमजोर कर रही है, यह किसके दवाब में सरकार है, कौन वह शिक्षा माफिया है मंत्री जी अपने उत्तर में इस बात को बतायें. नियम यह था 5 करोड़ की एफडी रखी जाये इसकी अनिवार्यता को खत्म करना यह कौन सा न्याय है, सरकार बताये.  यह एफडी यूनिवर्सिटी के डिफाल्ट होने पर  छात्रों की फीस की वापसी और कर्मचारियों की देनदारियों के लिये सुरक्षा कवच थी, क्या वह निजी विश्वविद्यालय जब विश्वविद्यालय बंद करके भागेगा तो कर्मचारियों की सेलरी या छात्रों की फीस है उसकी अदायगी कैसे होगी इस बात को भी मंत्री जी अपने उत्तर में बतायें.

यूनिवर्सिटी बंद होने पर बड़ा संकट होगा छात्र छात्रायों और कर्मचारी सड़क पर आ जायेंगे उनकी फीस और तनख्वाह की कौन गारंटी देगा, संशोधन के माध्यम से उनके अधिकारी एवं उनकी रक्षा के लिये आपने क्या नियम बनाये हैं. मंत्री जी बतायें. पहले 2500 वर्ग मीटर में प्रशासनिक भवन, विश्वविद्यालय खोलने, हेतु आवश्यक था अब संशोधन में परिहार्थ लिखकर के अराजकता फैलाना चाहती है, परिहार्थ कितने एक कमरे, दो कमरे या फिर कागजों में, मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं यह शिक्षा के साथ मजाक है, खिलवाड़ है भावी पीढ़ी के साथ में . छत्तीसगढ़ का सबब हम सब लोग क्यों भूल गये हैं, 2003 में  छत्तीसगढ़ में नियम शिथिल किये गये थे. कुकुरमुत्तों की तरह 200 से ज्यादा निजी विश्वविद्यालय खुल गये फर्जी डिग्रियां  बांटी, लाखों छात्रों का भविष्य चोपट हुआ . प्रोफेसर यशपाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और कोर्ट ने पूरा कानून रद्द कर के सभी फर्जी विश्वविद्यालय बंद कर दिये, फिर मध्यप्रदेश की सरकार ने छत्तीसगढ़ सरकार का जो काला कानून रद्द किया था उसका अध्ययन क्यों नहीं किया.  मंत्री जी इसका उत्तर दें. उसी फैसले के आधार पर मध्यप्रदेश की तत्कालीन भाजपा की सरकार ने कड़ा अधिनियम बनाया था आज फिर से वही भाजपा सरकार उस अधिनियम को कमजोर करने जा रही है.  ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस  ओपनिंग..शिक्षाविद के मुताबिक यूनिर्वसिटी कोई व्यवसायिक प्रतिष्ठान नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण के केन्द्र हैं. ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस  का मतलब यूनिवर्सिटी खोलने के लिये आसान छूट नहीं होना चाहिये.

          सभापति महोदय,  आज मध्यप्रदेश में 60 निजी विश्वविद्यालय कार्यरत हैं. छत्तीसगढ़ मॉडल को अपनाने से क्या होगा. सैकड़ों विश्वविद्यालय खुलेंगे ,मुट्ठी भर बचेंगे और बाकी के छात्रों की फीस लेकर के भाग जायेंगे. सरकार जवाब  दे इस बड़े बदलाव से पूरे प्रदेश का शिक्षा तंत्र  प्रभावित होगा, सरकार ने संशोधन से पहले कोई समिति गठित क्यों नहीं की, शिक्षाविदों, कुलपतियों,उद्योगजगत और अन्य स्टेट होल्डर की कितनी बैठकें हुई इसका ब्यौरा सदन में आना चाहिये क्योंकि राष्ट्रीय स्तर पर इसका विरोध है शिक्षा के अनेक प्रबुद्धजन यह कह रहे हैं कि यह संख्या बढ़ाने की अंधी दौड़ गुणवत्ता की नहीं ईमानदार संस्थानों को सब स्टेंडर्ड यूनिवर्सिटी से अनुचित  प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा. मध्यप्रदेश की डिग्री की विश्वसनीयता पूरे देश दुनियां में खत्म हो जायेगी, मध्यप्रदेश का छात्र लाचार और मध्यप्रदेश का छात्र बेरोजगार हो जायेगा.

          सभापति महोदय, अभी सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है, सरकार इतनी जल्दी में क्यों है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय में रिट पिटीशन नंबर 00531/2025 में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना शर्तों पर अभी सुनवाई चल रही है. मध्यप्रदेश सरकार ने खुद शपथ पत्र देकर के अपने कड़े मापदंड बताये हैं. ऐसे समय में यह संशोधन लाना अदालत की अवमानना नहीं है क्या, मैं पूछना चाहता हूं माननीय उच्च शिक्षा मंत्री जी से, नयी केन्द्रीय शिक्षा नीति शिक्षा बिल आने वाला है,  वर्ष 2020 राष्ट्रीय शिक्षा नीति जब आपकी केन्द्र सरकार बना रही है तो इसमें गुणवत्ता की शिक्षा पर जोर देती है. सरकार को केन्द्रीय कानून का इंतजार करना चाहिए था कि नहीं, मैं पूछना चाहता हूं. इस पर व्यापक विचार विमर्श करना चाहिए था. इस संधोशन के परिणाम विनाशकारी होंगे छात्र बाहरों के राज्यों में पढ़ने के लिए मजबूर होंगे. अभिभावकों को विद्यार्थियों का भरोसा टूटेगा. रोजगार बाजार में मध्यप्रदेश के पिछड़ जाएंगे. प्रदेश की शिक्षा ब्रांड पूरी तरह से धूमिल हो जाएगी. यह पूछना चाहता हूं. आपके माध्यम से सरकार से मांग है कि यह विधेयक तुरन्त वापस लिया जाय.

सभापति महोदय,  सदन की समिति को इसको भेजा जाय.  सभी स्टॉक होल्डर से चर्चा हो और उसकी रिपोर्ट आने के बाद सदन में चर्चा हो. पहले विधेयक का कानूनी परीक्षण करवाया जाय और मध्यप्रदेश शिक्षा गढ़ रहा है. हमें इसे व्यापार का अड्डा नहीं बनने देना है. यह और आप हम सबकी जिम्मेदारी है. हमें साढ़े 8 करोड़ लोगों ने यहां चुनकर भेजा है. और उनके बच्चों का, उनकी भावी पीढ़ी का, उनके भविष्य का सपना है. सरकार किसके दबाव में है. यह भाजपा सरकार और इनसे जुड़े हुए संगठन, जिनके छोटे छोटे निजी स्कूल हैं उन निजी स्कूलों को, उन निजी बिल्डिंगों को उन 4 कमरों के स्कूल में यह सरकार मान्यता देना चाहती है, इसलिए काला कानून लेकर यह विधेयक लेकर सरकार आई है. मैं इसका विरोध करता हूं. ये निजी विश्वविद्यालय खोलकर क्या नाले से गैस बनाएंगे?

सभापति महोदय आप थोड़ा संक्षिप्त करें. इस विधेयक पर पूरे 30 मिनट का समय दिया है, इसमें 9 सदस्यों के नाम हैं. आपका पर्याप्त समय हुआ है. मूल सार की बात संक्षेप में पिन पाइंट करें.

श्री महेश परमार सभापति महोदय, मूल बात यह है कि उस तरफ लॉबी में बैठे हुए वरिष्ठ आईएएस आईपीएस, ये उच्चाधिकारी, क्या उन 4 कमरों से बन जाएंगे? मैं पूछना चाहता हूं उच्च शिक्षा मंत्री और सरकार से, उन 4 कमरों, 2 कमरों के निजी विश्वविद्यालय से इस तरह के अधिकारी क्या निकलेंगे? ये बैठे छात्र उन 2 कमरों में पढ़ पाएंगे क्या? यह किसका दबाव है. आज सबसे ज्यादा जरूरत है शिक्षा, बाबा साहब ने भी कहा था कि शिक्षा अगर होगी तो आप हर परिस्थिति से हर समय लड़ सकते हैं तो सरकार की ऐसी क्या मजबूरी है, क्या इस तरह से विश्व गुरू बनाएंगे आदरणीय प्रधानमंत्री जी कहते हैं, वह छात्र उन 2 कमरों से निकलकर क्या उनसे नाले से गैस बनवाएंगे और चूल्हा जलवाएंगे. मैं पूछना चाहता हूं उच्च शिक्षा मंत्री जी से, पूरी सरकार से उस तरफ बैठे हुए आदरणीय जितने भी सम्मानित मंत्रियों से किसका दबाव है और फिर इस बात को मैं दोहराना चाहता हूं कि मेरा आपसे निवेदन है कि हमें अगर वाकई विश्व गुरू बनना है तो नीति निर्धारित करें. सरकार को प्रोफेसर यशपाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले छात्र हित और युवाओं के भविष्य का सम्मान करना चाहिए अन्यथा इतिहास इसे शिक्षा के साथ किया गया सबसे बड़ा घोटाले के रूप में याद करेगा.

सभापति महोदय, यह बड़ा सोचना का प्रश्न है आप सोचिए कि जब हम इन बड़े बड़े विश्वविद्यालयों में विक्रम विश्वविद्यालय हो, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय हो, हरिसिंग गौर विश्वविद्यालय सागर हो, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय अमरकंटक,  बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल हो, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर हो, रानी दुर्गावति विश्वविद्यालय जबलपुर हो, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन हो, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा हो, राजीव गांधी प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय भोपाल या राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय हो या अन्य बड़े बड़े विश्वविद्यालय हों, महाविद्यालय हों, ये कांग्रेस पार्टी की देन हैं. यह सदन इतिहास इस काले विधेयक से हमेशा हमेशा हमारे मध्यप्रदेश की भावी पीढ़ी के सपने चकनाचूर हो जाएंगे, अगर शिक्षा का स्तर गिरा देंगे तो आदरणीय सभापति महोदय, चारों तरफ तो हाहाकार मचा हुआ है, पेपर लीक हो रहे हैं, नीट से लेकर हर परीक्षा, उसके बाद हमारी शिक्षा की गुणवत्ता शून्य हो जाएगी तो मेरा आपसे निवेदन है कि आप निर्देश दीजिए. मध्यप्रदेश के करोड़ों उन छात्र-छात्राओं के लिए यह काला विधेयक सरकार लेकर आयी है. माननीय उच्च शिक्षा मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार जी से हाथ जोड़कर निवेदन है कि प्रभु श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली है. मुख्यमंत्री जी कहते हैं, तो कम से कम आप प्रभु श्रीराम के नाम पर सरकार बनाते हैं, तो प्रभु श्रीकृष्ण जी के नाम का भी ध्यान रखिए. इस देश की शिक्षास्थली को, मध्यप्रदेश की शिक्षास्थली को नीचे मत गिराइए और मेरा आप सब से निवेदन है कि शिक्षा नीति को मजबूत करने के लिए इस विधेयक को वापस लेना चाहिए. यह काला विधेयक है, यह मेरी मांग है. आपने मुझे बोलने का मौका दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद. जय हिन्द, जय भारत.

          सभापति महोदय बहुत- बहुत धन्यवाद. डॉ.चिन्तामणि मालवीय जी.

          डॉ.चिन्तामणि मालवीय (आलोट) माननीय सभापति जी, धन्यवाद. मैं मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन संशोधन विधेयक 2026 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ. यह विधेयक मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय स्थापना एवं संचालन अधिनियम 2007 में समयानुकूल कुछ सुधार करता है. 2007 के अधिनियम में प्राइवेट विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए 10 हेक्टेयर जमीन, जिसे 25 एकड़ भी माना जाता है और 25 हजार स्क्वेयर बिल्टअप एरिया के साथ ही इसमें कुछ संशोधन किया गया है और इसके साथ  प्रतिभूति राशि के रूप में 5 करोड़ रूपए का फंड निर्धारित किया गया था. समय की आवश्यकता के अनुरूप इसमें कुछ संशोधन करके आवश्यकतानुसार भूमि और जो फंड 5 करोड़ रूपए का रखा गया था, जिसे प्रतिभूति राशि जिस कहते हैं, उसके स्थान पर जो विश्वविद्यालय रेग्यूलेटरी कमीशन है, उसको वार्षिक शुल्क दिया जाएगा. यह दो तरह के संशोधन हैं. वह जो 5 करोड़ रूपए की राशि जो प्रतिभूति राशि होती थी, उससे विश्वविद्यालय अपना इंफ्रॉस्ट्रक्चर अपनी तकनीकी उच्चता और उसके साथ ही जो अन्य आवश्यकताएं हैं जो मशीनरी है, उसमें लगा सकेगा.

          श्री महेश परमार सभापति महोदय, आप तो प्रोफेसर रहे हैं, विद्वान हैं. आपने किसानों की लड़ाई लड़ी है.. इसमें आप बिल्कुल मत झुकिएगा. यह इस तरह से गुंडा-गर्दी मचा रहे हैं. माननीय हमारे गुरू हैं. मैं इनको प्रणाम करता हूँ. चरण वंदन करता हूँ और यह लड़ने वाले जुझारू हैंऔर इनको मालूम है.

          सभापति महोदय महेश जी, कृपया, आप उन्हें बोलने दीजिए. प्लीज, यह ठीक बात नहीं है.

          श्री महेश परमार सभापति महोदय, आप जिस तरह किसानों के लिए लडे़ थे, यही लड़ाई लड़एिगा. मेरा आपसे निवेदन है. यह उज्जैन का मामला है.

          सभापति महोदय महेश जी, बैठ जाइए. श्री मालवीय जी, आप अपनी बात जारी रखें.

          डॉ.चिन्तामणि मालवीय सभापति महोदय, उच्च शिक्षा किसी भी राष्ट्र बौद्धिक, आर्थिक और सामाजिक प्रगति का आधार होती है और भारत आज विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देशों में से एक है. भारत में जो कार्यशील युवा यानि 15 से 60 वर्ष की आबादी वाले युवा सबसे अधिक हमारे देश में है और आज दुनिया का सबसे बड़ा कार्यबल भारत में है और इस कार्यबल को अवसर देना बहुत जरूरी है. स्वतंत्रता के समय भारत में विश्वविद्यालयों की संख्या अत्यंत सीमित थी. जबकि आज देश में सैकड़ों सरकारी और निजी विश्वविद्यालय कार्यरत हैं. बढ़ती जनसंख्या, तकनीकी विकास और रोजगार की बदलती आवश्यकताओं और उच्च शिक्षा के विस्तार को इस आवश्यकता ने अनिवार्य बना दिया है. इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए निजी विश्वविद्यालय की संकल्पना का उदय हुआ और आज भारत में निजी विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं. उन्होंने लाखों विद्यार्थियों को शिक्षा का अवसर दिया है आधुनिक अधोसरंचना विकसित की है और उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप नवाचार सहित नये पाठ्यक्रम प्रारम्भ किए हैं. प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा शुरू किए गए मेक इन इंडिया, स्टेंडअप जैसी योजनाओं से तकनीकी क्षेत्र में उच्च शिक्षा की मांग तेजी से बढ़ी है. सरकारी संसाधन सीमित होते हैं, इससे नये विश्वविद्यालयों की स्थापना की गति अपेक्षाकृत धीमी होती है. ऐसे में विभिन्न राज्यों ने कानून बनाकर निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना की. उसका मार्ग प्रशस्त किया. आज लगभग प्रत्येक राज्य में निजी विश्वविद्यालय कार्यरत हैं और वे इंजीनियरिंग, हैल्थ, मैनेजमेंट, एग्रीकल्चर, लॉ, पत्रकारिता, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और डेटा साइंस जैसे आधुनिक विषयों की शिक्षा प्रदान कर रहे हैं. समय बदलता है, तकनीक बदलती है तो तकनीक समाज को भी बदलती है और समाज बदलता है, तो हमें शिक्षा संस्थानों और शिक्षा की आवश्यकताओं को भी परिवर्तित करके उसके समय के अनुसार उसमें समीचीन बदलाव करने पड़ते हैं और करने भी चाहिए.

सभापति महोदय, आज मध्यप्रदेश में विश्वविद्यालयों में लाखों विद्यार्थी प्रवेश चाहते हैं, जबकि सरकारी संस्थाओं में सीटें बहुत सीमित हैं. मध्यप्रदेश में कुल 89 विश्वविद्यालय हैं, इनमें से 28 राज्य सरकार के नियंत्रण में हैं या यह कहें कि राज्य द्वारा वित्त पोषित अनुदान दिये हुए हैं एक केन्द्रीय विश्वविद्यालय, सागर विश्वविद्यालय इसके अतिरिक्त 60 प्रायवेट विश्वविद्यालय आज मध्यप्रदेश में काम कर रहे हैं. शासकीय अनुदान प्राप्त विश्वविद्यालयों में उनसे एफिलिएटेड विद्यार्थियों की संख्या 60 हजार से लेकर के 3 लाख तक है. तो बाकी विद्यार्थियों के लिये प्रायवेट विश्वविद्यालयों की स्थापना तथा उनको सुविधा देना आवश्यक प्रतीत होता है. शिक्षा मंत्रालय द्वारा नवीनतम आल इंडिया सर्वे तथा हायर एज्यूकेशन की रिपोर्ट 2023-24 के अनुसार 12 वीं पास करके उच्च शिक्षा यानि यूनिवर्सिटी में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों का ग्रास इनरोलमेंट रेश्यो मात्र 30 प्रतिशत है. जो लड़का 12 वीं पास करता है, जितने 100 विद्यार्थी पास करते हैं तो हायर एज्यूकेशन में जो ग्रेज्यूएशन का फस्ट ईयर है उसमें मात्र 30 प्रतिशत प्रवेश ले पाते हैं. यह जो रेश्यो है पोस्ट ग्रेज्यूएशन के लिये मात्र 12 /13 प्रतिशत ही है. यानि बहुत बड़ी संख्या में हम हमारे कार्यबल को, हमारी युवा आबादी को प्रवेश नहीं दे पा रहे हैं इसलिये निश्चित रूप से और अधिक संस्थानों की हमें आवश्यकता है. सरकार की वित्तीय सीमाएं होती हैं और प्रत्येक नये विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन में भारी सार्वजनिक निवेश की आवश्यकता होती है. निजी निवेश इस दबाव को कम करेगा और हमारी शिक्षा व्यवस्था को बल देने का काम करेगा. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उद्देश्य उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना, बहु विषयक शिक्षा को प्रोत्साहित करना, अनुसंधान को बढ़ावा देना और बौद्धिक स्तर की संस्थाएं विकसित करना है. निजी विश्वविद्यालय इस लक्ष्य की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भागीदार हो सकते हैं वशर्ते वह गुणवत्ता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्वों के उच्च मानकों का पालन करें. मध्यप्रदेश में अनेक इनवेस्टमेंट मीट हुई हैं उनके परिणाम में बहुत सारे उद्योग आने भी हैं. निजी विश्वविद्यालय उन उद्योगों की आवश्यकता की पूर्ति करेगा, आवश्यक शिक्षा देकर रोजगार के अवसर खोलेगा, वही उन उद्योगों के सुचारू संचालन के लिये भी उनकी आवश्यकता के अनुरूप शिक्षा और तकनीकी ज्ञान के लिये युवाओं को उपलब्ध करेगा. आज कई विश्वविद्यालय उद्योगों के साथ निरंतर मिलकर के उनकी जरूरतों के अनुसार शिक्षा दे रहे हैं उनको किस तरह की मशीनरी चलाना है, किस तरह की उनको तकनीक चाहिये, किस तरह का उनको तकनीकी ज्ञान चाहिये उनकी जरूरत को उपलब्ध कराना यह आज समय की आवश्यकता है. इसलिये आज आवश्यक है कि प्रायवेट विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 के माध्यम से जो बाध्यताएं थी उन्हे सरल किया जाये ताकि अधिक विश्वविद्यालय खुल सकें, नया इन्वेस्टमेंट आये यह इन्वेस्टमेंट में नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के युवाओं के भविष्य में इन्वेस्टमेंट हैं. यह इन्फ्रास्ट्रक्चर का इनवेस्टमेट नहीं है. यह युवाओं के भविष्य का इन्वेसमेंट है. क्योंकि शिक्षा में लगा हुआ पैसा इन्वेस्टमेंट ही होता है और यह रिटर्न होकर समाज को मिलता है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने समाज और व्यक्ति के संबंधों की एक बड़ी रचना प्रस्तुत की थी. उन्होंने कहा था कि समाज व्यक्ति को शिक्षा देता है. जब समाज व्यक्ति को शिक्षा देता है तो उस शिक्षा को ग्रहण करके अपना कर्म समाज को लौटाता है. जैसी शिक्षा हम व्यक्ति को देंगे, वैसा कर्म वह समाज को लौटायेगा और जब समाज को व्यक्ति कर्म लौटाता है तो समाज व्यक्ति को एक चीज लौटाता है वह है योगाच्छम क्योंकि कोई व्यक्ति शिक्षा पाकर के डॉक्टर बन सकता है, इंजीनियर बन सकता है, लेकिन कपड़ा नहीं बुन सकता है, वह कृषि नहीं कर सकता है, वह गाड़ी नहीं बना सकता है, वह मैकेनिक नहीं हो सकता है. उसके जीवन की आवश्यकताएं समाज प्रस्तुत करता है और जब समाज उसके योगाच्छम की चिन्ता करता है तो उसके बाद हम देखते हैं कि व्यक्ति भी यज्ञ के माध्यम से समाज को लौटाने का काम करता है. जो उसके पास में अतिरिक्त होता है, वह समाज को देता है. इसलिये अध्यक्ष जी समाज और व्यक्ति के संबंधों का तानाबाना है इस शिक्षा के माध्यम से फलित होता है और शिक्षा के माध्यम से ही आगे बढ़ता है. निजी विश्वविद्यालयों से निश्चित रूप से बहुत सारे लाभ होंगे, उच्च शिक्षा का विस्तार होगा, आधुनिक अधोसंरचनाएं विकसित होंगी. अनेक निजी विश्वविद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजीटल पुस्तकालय, स्मार्ट कक्षाएं, अनुसंधान केन्द्र, नवाचार प्रयोगशालाएं और आधुनिक छात्रावास की संरचना विकसित होगी. सभापति जी उद्योगों से जुड़े हुए कई निजी विश्वविद्यालय उद्योगों के साथ साझेदारी कर इंटरशिप, लाइव प्रोजेक्ट, कौशल विकास और प्लेसमेंट की व्यवस्था करते हैं. जिससे विद्याथियों को रोजगार की क्षमता बढ़ती है, उनकी संभावनाएं बढ़ेगी और यह जो नवाचार और अनुसंधान है, यह कई क्षेत्रों में विकसित किए जा सकते हैं. कई निजी संस्‍थाएं, स्‍टार्टअप की संस्‍कृति इन्‍क्‍यूवेशन सेंटर और अनुसंधान परियोजनाओं को भी बढ़ाया दे रही है और उनको सुविधाएं मिलेगी तो इस दिशा में भी काम होगा और ये जो निजी संस्‍थाएं हैं, क्‍योंकि जो सरकारी विश्‍वविद्यालय है उनकी अपनी सीमाएं होती है, उनके रेग्‍युलेशन होते हैं, बाध्‍यताएं होती है और सरकार के अंडर में भी काम करते हैं और राज्‍यपाल के अंडर में भी काम करते हैं और जो एग्‍ज्‍युक्यिुटिव कौंसिल है, उसकी भी बाध्‍यता होती है, समाज का भी दबाव रहता है, लेकिन प्रायवेट विश्‍विद्यालयों में निर्णयों की स्‍वतंत्रता के कारण वे अनेक नवाचारी निर्णय ले सकते हैं, जो समय की आवश्‍यकता और हमारी बढ़ती हुई औद्योगिक संभावनाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर काम करने का काम करेंगे.

सभापति जी, ये बात सही है कि जब हम नि‍जी विश्‍वविद्यालयों को अवसर देंगे, तो उसके साथ हमें कुछ सावधानियां भी रखनी होगी और रखनी चाहिए, क्‍योंकि राष्‍ट्रीय और राज्‍य स्‍तर पर कठोर गुणवत्‍ता मूल्‍यांकन इसके साथ बहुत आवश्‍यकता है और फीस के निर्धारण में पारदर्शिता और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को छात्रवृत्ति और शुल्‍क सहायता, ऐसी भी कुछ बाध्‍यताएं या कुछ मार्गदर्शन उन्‍हें होना चाहिए. इसके अतिरिक्‍त जो बहुत बढ़े चढ़े दावे होते हैं, कई बार प्‍लेसमेंट के दावे और इस तरह के जो दावे किए जाते हैं, उनको भी एक अच्‍छी रेगुलरटी अथॉरिटी के साथ नियंत्रण करने की आवश्‍यकता है. यह बिल बहुत जरूरी है हमारे औद्योगिक विकास को गति देने के लिए, जो लोग शिक्षा से वंचित रह जाते हैं बहुत बढ़ी मात्रा में जैसा मैंने आंकड़ा दिया हूं ये सर्च का सरकारी आंकड़ा है, 70 प्रतिशत बच्‍चे तो उच्‍च शिक्षा में प्रवेश ही नहीं पा पाते हैं, गेजुएशन तक में, तो उनको भी अवसर मिले, सरकार उनके साथ है. भारत के भविष्‍य के साथ है. मैं माननीय उच्‍च शिक्षा मंत्री श्री इन्‍दर सिंह जी परमार द्वारा प्रस्‍तुत, इस संशोधन विधेयक का समर्थन करता हूं और सदन से आग्रह करता हूं कि इसका समर्थन करें, धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय – डॉ. साहब बहुत बहुत धन्‍यवाद, मेरा सभी माननीय सदस्‍यों ने आग्रह है कि इस विधेयक पर मात्र तीस मिनट की चर्चा का समय निर्धारित है और अभी भी सात नाम शेष है, थोड़ा सहयोग करें, काफी समय हो रहा है, श्रीमती झूमा सोलंकी जी.

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्‍यान सिंह सोलंकी(भीकनगांव) – माननीय सभापति जी, जब मेरा नाम आता है तो समय सीमा 2 से 3 मिनट ही रह जाती है. कोशिश रहेगी कि संक्षिप्‍त में बोलूंगी, क्‍योंकि शिक्षा से जुड़ा हुआ विधेयक है और बहुत महत्‍पूर्ण है. छात्रों के भविष्‍य की बात है, इसलिए मैं इस मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय संशोधन विधेयक, 2026 का विरोध करती हूं. यह विधेयक वर्ष 2007, जो पहले से लागू है उसमें संशोधन करने का विधेयक है और निजी विश्‍वविद्यालय स्‍थापित करने की प्रक्रिया जो सरल बनाना तथा निजी निवेश को आकर्षित करने का विधेयक है और सरकार ने न्‍यूनतम भूमि निर्मित क्षेत्र और विन्‍यास निधि, ये तीन पाइंट दिए हैं, जिमसें विस्‍तृत रूप से विन्‍यास निधि और भूमि का तो है, किन्‍तु वार्षिक रूप से जो उनसे ली गई राशि का स्‍पष्‍टीकरण इसमें नहीं दिया गया है. इसका जो उद्देश्‍य बताया गया है कि दस हेक्‍टेयर भूमि और 2500 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र की अनिवार्यता को हटाया जाना, दूसरा विन्‍यास निधि और पांच करोड़ रुपए की अनिवार्यता को भी समाप्‍त करना. ये प्रतिवर्ष की फीस ये तीन चार चीजें जो सही मायने में देखा जाए तो हमारे जितने शासकीय विश्‍वविद्यालय है, वे पूरी तरह से प्रभावित होंगे और सीधा सरकार शिक्षा के निजीकरण को बढ़ाया दे रही है और विश्‍वविद्यालय को ज्ञान का केन्‍द्र नहीं, बल्कि स्‍टार्टअप की तरह देख रही है. छात्रों के भविष्‍य को देखते हुए इन तीनों ही शर्तों की आवश्‍यकता नहीं है. मेरे हिसाब से शिक्षाविदों की एक कमेटी बने और कमेटी के माध्‍यम से राय ली जाए और फिर इसको लाए तो ज्‍यादा बेहतर रहेगा और आपको यह भी मैं बताना चाहती हूं कि इसमें छात्रों के हितों की सुरक्षा कमजोर होगी और उनकी सुरक्षा की वित्‍तीय कवर समाप्‍त हो रही है और साथ साथ में विन्‍यास निधि से छात्रो के हितों की सुरक्षा के साथ-साथ में उनकी वित्‍तीय सुरक्षा और खुद की सुरक्षा भी समाप्‍त कर दी गई है, तो यह विधेयक इस मायने में सही नहीं है, निजी विश्‍वविद्यालय बंद हो जायें तो छात्रों के हितों की सुरक्षा भी खत्‍म होगी ही होगी, किंतु उसकी गारंटी का भी कोई दावा नहीं किया गया है.

माननीय सभापति महोदय, एक दो प्‍वाइंट और हैं जो मैं बता देना चाहती हूं कि सरकार ने निेवेशकों को तो राहत देने का प्रावधान कर दिया है, छात्रों और अभिभावकों को सुरक्षा मिले इसका भी कोई प्रावधान नहीं है और छात्रों के हितों की सुरक्षा में कितनी गुणवत्‍ता का सुधार होगा, कैसी निगरानी होगी? इसको भी कोई स्‍पष्‍ट रूप से विेधेयक में शामिल नहीं किया गया है. आज की स्थिति में देखें तो पूर्व में ही विधानसभा में ही प्रश्‍नों के जवाब माननीय मंत्री जी की ओर से दिये गये हैं, कि पूरे मध्‍यप्रदेश में 19 शासकीय विश्‍वविद्यालयों में से 15 विश्‍वविद्यालयों में 70 प्रतिशत से अधिक आज भी प्राध्‍यापक और सहायक प्राध्‍यापकों के पद रिक्‍त हैं, वही फुल फिल नहीं कर पा रहे हैं और उसमें और चेजेंस करने की कोशिश की जा रही है और प्रदेश का उच्‍च शिक्षा तंत्र गंभीर रूप से शिक्षक विहीन संकट से जूझ रहा है और इसके साथ में जो बजट आया है, उससे शिक्षा विभाग के लिये 4.246 करोड़ मतलब कुल बजट का केवल शिक्षा के ऊपर ज्‍यादा खर्च होना चाहिए, पर केवल 0.96 प्रतिशत इतना बजट दिया गया है, तो व्‍यवस्‍थाएं सुधरेंगी कैसे? यह एक बहुत बड़ा सवाल है. मेरे जिलों में जो यूनिवर्सिटी खोली गई है, क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय (KTBU) जहां मैंने पिछली बार प्रश्‍न लगाया था, तब जवाब मिला था कि 140 प्राध्‍यपकों के पद पूरे के पूरे खाली हैं और खाली ही नहीं अव्‍यवस्‍था और प्रशासनिक लापरवाही के कारण इस यूनिवर्सिटी में 22 हजार विद्यार्थी का भविष्‍य अधर में है, वहां परीक्षाएं समय से होती नहीं है, मार्च-अप्रैल के समय जब कॉलेज में परीक्षाएं होती हैं, उसका अगस्‍त से लगाकर जुलाई-अगस्‍त तक का भी आयोजन नहीं कर पा रहे हैं और यह सभी गरीब आदिवासी क्षेत्र हैं, जितने भी यह खण्‍डवा से लगाकर बड़वानी, अलीराजपुर, धार और खरगौन यह सारे इस यूनिवर्सिटी में शामिल हैं, तो ऐसे जितने विद्यार्थी जो कि ट्रायबल के विद्यार्थी हैं, तो उनकी छात्रवृत्तियां भी उनको नहीं दी जा रही हैं , माननीय मंत्री जी इस ओर ज्‍यादा ध्‍यान देना चाहिए और फीस की बात करें तो बच्‍चों की जो फीस है, वह एक साल में चार गुना बढ़ा दी गई है, तो यह अच्‍छी व्‍यवस्‍था देने के बजाय आप इस तरह का कानून लेकर आये हैं, यह कहीं से कहीं तक उपयोगी साबित नहीं होगा और पांच कमरों में यूनिवर्सिटी का काम चल रहा है, न उनके  भवन हैं और न उनकी कोई व्‍यवस्‍था है, इनमें सुधारने की आवश्‍यकता है और मैं समझती हूं यह इस तरह का जो कानून है वह पास न किया जाये, बल्कि इस विधेयक में सुधार की आवश्‍यकता है ताकि विद्यार्थियों को और आने वाली पी‍ढी़ जिन्‍हें कि हम कहते हैं कि भारत युवा देश है और यहां पर 65 प्रतिशत युवा मौजूद हैं, बहुत बड़ी बात है कि उनके भविष्‍य की चिंता हमकों करनी चाहिए, उन्‍हें काम कैसे दिया जाये, नौकरी कैसे दी जाये?यही बात कहकर मैं इस विधेयक का विरोध करती हूं और इसको लागू न किया जाये.

          श्री दिव्‍यराज सिंह(सिरमौर) – सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय संशोधन विधेयक का समर्थन करता हूं. मैं निश्‍चित रूप से एक युवा पीढ़ी से आता हूं और युवाओं की इच्‍छाएं हैं, उनको देखते हुए इस संशोधन बिल का मैं समर्थन कर रहा हूं. आज के समय पर हमारा भारत देश और हमारा मध्‍यप्रदेश एक युवा प्रदेश है और निश्चित रूप से हमारे प्रदेश में आज बच्‍चे स्‍कूली शिक्षा जो पहले प्राप्‍त नहीं कर पाते थे. वह आज गांव में भी अच्‍छे ढंग से स्‍कूली शिक्षा प्राप्‍त कर रहे हैं और अब आने वाले समय में युवाओं की एक लंबी डिमांड आने वाली है कि उनको उच्‍च शिक्षा भी प्राप्‍त हो और निश्चित रूप से इस उच्‍च शिक्षा को प्राप्‍त करने के लिये एक Mixture of private as well as पब्लिक यूनिवर्सिटी की आवश्‍यकता पड़ेगी. निश्चित रूप से माननीय मंत्री जी के माध्‍यम से जो संशोधन लाया गया है इसके माध्‍यम से हमारे युवाओं के लिये अनेकों द्वार खुल जायेंगे, चाहे वह शासकीय यूनिवर्सिटी हो, चाहे वह प्राइवेट यूनिवर्सिटी हों और निश्चित रूप से आज इसकी बहुत बड़ी मांग है. कई जो पहले के नियम थे जिसमें 25 एकड़ की भूमि की आवश्‍यता थी, हम लोग अभी देखते हैं शहरों में 25 एकड़ भूमि लेना बहुत ही कठिन काम है और हर शहर में आप जायेंगे तो किसी भी शहर में अगर एक एकड़ भूमि आपको खरीदनी है तो डेढ़ से दो करोड़ से कम की भूमि नहीं होती है और वहीं आप 25 एकड़ लेना चाहेंगे तो वह 50 करोड़ से ऊपर की केवल भूमि की लागत ही उसमें लग जायेगी तो निश्चित रूप से आज की टेक्‍नालॅजी में हमको इतनी बड़ी भूमि की आवश्‍यकता नहीं है, आज मल्‍टी स्‍टोरीज का जमाना है और हम मल्‍टी लेबल स्‍टोरीज की बिल्डिंग में ही अपनी यूनिवर्सिटीज वहां चला सकते हैं. निश्चित रूप से मध्‍यप्रदेश की सरकार ने इसको दृष्टिगत रखते हुये इस संशोधन का यहां पर उपयोग किया है. माननीय सभापति महोदय, मैं ज्‍यादा नहीं कहूंगा, केवल इतना ही चाहता हूं कि हमारे इस विधेयक के माध्‍यम से हमारी नौजवान पीढ़ी को भविष्‍य में आने वाले समय पर अच्‍छी शिक्षा प्राप्‍त होगी और निजी और प्राइवेट दोनों के माध्‍यम से हमारे मध्‍यप्रदेश की सरकार उनको अच्‍छी शिक्षा देने का काम करेगी. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          डॉ. हिरालाल अलावा (मनावर)--  सभापति महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद, आपने मुझे मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय संशोधन विधेयक, 2026 पर बोलने का मौका दिया, आपका आभार प्रकट करता हूं. इस संशोधन विधेयक में धारा (2) धारा (7) धारा (11) धारा (36) धारा (40) धारा (41) और धारा (42) में संशोधन किया गया और आपके माध्‍यम से मैं सदन को बताना चाहता हूं कि जो यह संशोधन लाया गया है इस संशोधन के विधेयक में जो उद्देश्‍य बताये गये हैं कि निजी निवेश को बढ़ावा देना और प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को मध्‍यप्रदेश में ज्‍यादा से ज्‍यादा बढ़ावा देना, निश्चित ही निजी निवेश के माध्‍यम से हम गुणवत्‍ता पूर्ण शिक्षा अगर छात्रों को और प्रदेश और देश के भविष्‍य को दे सकते हैं तो देना चाहिये. इस विधेयक के माध्‍यम से जो संशोधन है, संशोधनों में जो बड़ी बात यह है कि छात्रों के भविष्‍य को बिलकुल भी ध्‍यान में नहीं रखा गया, दूसरा इसमें गुणवत्‍तापूर्ण शिक्षा की कोई बात नहीं की गई और जो यूनिवर्सिटी को बेहतर बनाने की दिशा में जो काम करना चाहिये था वह भी बिलकुल नहीं है, इसमें सीधा-सीधा यह है कि प्राइवेटाईजेशन को बढ़ावा देना. माननीय सभापति महोदय, आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार जिस प्रकार से प्राइवेटाईजेशन के माध्‍यम से देश की सरकारी संस्‍थाओं को खोखला करने का काम कर रही है यह कहीं न कहीं दुर्भाग्‍यपूर्ण है. माननीय सभापति महोदय, हम चाहते हैं कि हमारे देश की यूनिवर्सिटीज विश्‍व रेंकिंग में आयें, बेहतर शिक्षा  छात्रों को मिले, लेकिन अगर इस तरह के संशोधन लायेंगे तो कोई संभावना नहीं दिखती. आज इसमें जो विन्‍यास निधि की बात कही गई थी, विन्‍यास निधि जो 5 करोड़ के लगभग हुआ करती थी और इस राशि उपयोग छात्रों की सुरक्षा के लिये हुआ करता था. कई बार यूनिवर्सिटीज खुलती है और कई बार बीच में बंद हो जाती है और बोरिया बिस्‍तर समेटकर चली जाती है. सवाल यह उठता है कि जो यूनिवर्सिटीज में छात्र छात्रायें पढ़ रहे हैं, बहुत सारे छात्र ऐसे होते हैं जो लोन लेकर यूनिवर्सिटी में एडमीशन लेते हैं अगर इस बीच में यूनिवर्सिटी बंद होती है तो उन छात्रों की आगे की पढ़ाई का खर्चा कौन उठायेगा, इसकी गारंटी इस बिल में कुछ नहीं है, उन छात्रों को हॉस्‍टल में रहने की व्‍यवस्‍था कौन करायेगा, अगर दूसरी जगह एडमीशन लेना है तो उस फीस की व्‍यवस्‍था कौन करायेगा, क्‍योंकि इस बिल में जो 5 करोड़ की राशि इससे पहले जो हुआ करती थी कई यूनिवर्सिटी जो बंद होती थीं तो उनसे 5 करोड़ रूपये की राशि वसूलने का भी अधिकार था. अब इस बिल में वह 5 करोड़ रूपये की राशि वसूलने का प्रावधान ही खत्‍म कर दिया गया. निश्चित ही इससे निवेशकों में उत्‍साह जगेगा कि हम ज्‍यादा से ज्‍यादा यूनिवर्सिटी खोलें लेकिन छात्रों के भविष्‍य के साथ जो खिलवाड़ होगा उनकी फीस कौन भरेगा जो कर्ज लेकर पढ़ाई कर रहे हैं उनका क्‍या होगा.

          यह बड़ा सवाल है इस पर मंत्री जी स्पष्ट करें दूसरा प्रायवेट यूनिवर्सिटी खोलने के लिये जो 2007 का विधेयक था उसमें मिनिमम 2500 वर्गमीटर का कोई भी प्रशासकीय भवन होना सुनिश्चित था और 10 हेक्टेयर जमीन की आवश्यक्ता थी अब दोनों प्रावधान खत्म कर दिये गये मतलब  जो न्यूनतम का क्राईटीरिया था आपने पर्याप्त में बदल दिया और पर्याप्त की क्या परिभाषा होगी इसकी न तो यूजीसी गाईडलाईन के माध्यम से कोई पालन होना है तो मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि पर्याप्त कौन तय करेगा क्या सरकार तय करेगी या प्रायवेट यूनिवर्सिटी तय करेगी. आज यदि पर्याप्त की छूट दे दी जाये तो एक कमरे में यूनिवर्सिटी खोलकर बैठ जायेंगे. आज मेडिकल यूनिवर्सिटी,इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटी,अच्छे कालेजों की जरूरत है. आयुर्वेदिकयूनिवर्सिटी,लेकिन उसके लिये कम से कम एक केम्पस होना चाहिये. आज हम विश्व गुरू  की बात करते हैं. हम विश्व स्तरीय शिक्षा देने की बात करते हैं लेकिन क्या जिस प्रकार स्कूलों का प्रायवेटाईजेशन हुआ. आज मध्यप्रदेश के हाई स्कूल,हायर सेकेंड्री स्कूलों का प्रायवेटाईजेशन हुआ. आज कई शहरों में देख लो एक कमरे में पहली कक्षा से दसवीं कक्षा तक बच्चे पढ़ रहे हैं हम उनको क्यों एक अच्छा केम्पस प्रदान कर पा रहे. आज हम स्कूल ग्राउण्ड देखते हैं तो कई स्कूलों में दूर-दूर तक नहीं मिलता है. आज हम खेलों में क्यों पिछड़ रहे हैं. ओलम्पिक में हम एक गोल्ड मेडल के लिये तरस जाते हैं क्योंकि हम बच्चों को अच्छा इनवायरमेंट नहीं दे पा रहे हैं और हम इस तरह से संशोधन ला रहे हैं तो क्या यह विश्वविद्यालय जो भारत का भविष्य हम 2047 में विश्व गुरू बनने जा रहे हैं तो एक कमरे में यूनिवर्सिटी खोलेंगे तो कैसे विश्व गुरू बनेंगे.आज प्रायवेटाईजेशन को हम बढ़ावा जरूर दे रहे हैं लेकिन क्या सरकारी यूनिवर्सिटी में पद भर रहे हैं आज मध्यप्रदेश की जितनी यूनिवर्सिटी हैं वहां प्रोफेसर,एसोसियेट प्रोफेसर,असिस्टेंट प्रोफेसर के सैकड़ों की संख्या में पद खाली प ड़े हुए हैं उस पर सरकार क्यों नहीं ध्यान दे रही है. नयी  यूनिवर्सिटी खोलना एक अच्छी बात है. प्रायवेटाईजेशन को बढ़ावा हम दे रहे हैं. आपने देखा होगा अडानी पोर्ट प्रायवेट किया जो भारत सरकार का हुआ करता था आज वहां 20 हजार करोड़ की ड्रग्स पकड़ी जा रही है.परमाणु संयंत्र को हम प्रायवे कर रहे हैं. अभी तमिलनाडु में 20 हजार फाईलें डार्क वेबसाईट पर डाल दी गईं यह प्रायवेट यूनिवर्सिटी खोल रहे हैं इसकी सुरक्षा की क्या गारंटी है. इस प्रावधान में कहीं कोई जिक्र नहीं किया गया. यह छात्रों के भविष्य की बात है आज देश में छात्र आंदोलन कर रहे हैं वह एक ही मांग  कर रहे हैं कि शिक्षा की पारदर्शिता होनी चाहिये परीक्षाओं की पारदर्शिता होनी चाहिये ताकि जो मेहनत करने वाले छात्र,छात्राओं का चयन होना चाहिये. आज हर परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं आज छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ा हो रहा है ऐसे में हम कैसे विश्व गुरू बनेंगे. कैसे हम 2047 का विकसित भारत बनाएंगे यह मंत्री जी के सामने मेरे सवाल हैं. आखिरी में जो यूनिवर्सिटी केम्पस के अंदर क्राईटीरिया किया है. कोई भी यूनिवर्सिटी खोलना है तो उसके लिये लायब्रेरी होना जरूरी है.लैब होना जरूरी है.हास्टल होना जरूरी है. मेडिकल फेसिलिटी होनी जरूरी है वहां पर रिसर्च सेंटर होना जरूरी है. शिक्षकों के लिये आवासीय केम्पस होना जरूरी है अगर यह बाध्यता खत्म कर रहे हैं तो कैसे हम छात्रों को बेहतर शिक्षा,व्यवस्था दे पाएंगे.आज देश की एक भी यूनिवर्सिटी का नाम विश्व रेंकिंग में 100 के अंदर नहीं आता है तो यह कहीं न कहीं हमारी बदतर शिक्षा व्यवस्था जो ऐसी व्यवस्थाएं,ऐसे नियम संशोधन ला रहे हैं हम बेहतर यूनिवर्सिटी बनाएं लेकिन उसके लिये जो भी यूजीसी के क्राईटीरिया हो या जो भी बेहतर क्राईटीरिया हो लाना चाहिये. एक और महत्वपूर्ण सुझाव है हमारी आदरणीय विधायक झूमा सोलंकी जी ने कहा कि जो कांति सूर्य टंट्या भील यूनिवर्सिटी खरगोन में बनाई गई है वहां पर सैकड़ों की संख्या में स्टूडेंट तो आ रहे हैं लेकिन एक भी विभाग में पद नहीं भरे न असिस्टेंट प्रोफेसर है, न एसोसियेट प्रोफेसर है बस दो कमरों में एक यूनिवर्सिटी बना दी गई है. आज अमरकंटक यूनिवर्सिटी जो ट्रायवल यूनिवर्सिटी है वहां ट्रायवल के नाम पर बनाई गई है लेकिन वहां पर ट्रायवल स्टूडेंट्स को ट्रायवल का कोई लाभ नहीं दिया जा रहा है उनकी जो वहां सीटें निर्धारित की गईं थीं आज जहां 75 परसेंट एसटी वर्ग के स्टूडेंट होने चाहिये वहां पर 15 परसेंट बच गये और अन्य वर्गों को भर दिया जा रहा है तो क्या इन यूनिवर्सिटी एससी,एसटी वर्ग का भी ध्यान रखा जायेगा प्रायवेटाईजेशन में क्या इन पदों में इनको आरक्षण मिलेगा तो यह बड़े सवाल है अच्छी बेहतर यूनिवर्सिटी बनाएं लेकिन जो मापदण्ड हैं उद्योगपतियों को छूट मत दो.उद्योगपतियों के हवाले देश को मत करो नहीं तो हमारा देश जिस तरह अंग्रेज लूट कर भाग गये थे यह उद्योगपति भी लूट कर भाग जायेंगे. यही मेरा कहना है. सभापति महोदय, मैं इससंशोधन विधेयक का विरोध करता हूं और यह भी मांग है कि पहले इसकी जांच की जाए उसके बाद ही इसको लागू किया जाए वरना न  किया जा. धन्यवाद.

          श्री प्रताप ग्रेवाल (सरदारपुर) माननीय सभापति महोदय, आपने जो मुझे बोलने का अवसर दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.

          माननीय सभापति महोदय, मैं मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 का विरोध करने के लिए खड़ा हुआ हूँ. सरकार इस विधेयक को सुधार और निवेश को बढ़ावा देने वाला बता रही है. लेकिन सभापति महोदय, यह संशोधन शिक्षा को निजीकरण की ओर अधिक बढ़ावा देने वाला तथा छात्र के हित को कमजोर करने वाला विधेयक है. मैंने इस विधेयक को पढ़ा और इस निजी विश्वविद्यालय से पहले लागू की गई कई महत्वपूर्ण शर्तों को हटाया या शिथिल किया जा रहा है.

          माननीय सभापति महोदय, प्रश्न यह है कि आखिर सरकार ऐसा करना क्यों चाहती है. क्या मध्यप्रदेश में निजी विश्वविद्यालय खोलने में इतनी अधिक छूट देना आवश्यक हो गया है. क्या गुणवत्ता और जवाबदेही के साथ सरकार ने समझौता कर लिया है. इस विधेयक में मुख्य परिसर के लिए जो विश्वविद्यालय में होना चाहिए, भूमि, भवन संबंधी न्यूनतम प्रावधानों को भी शिथिल किया जा रहा है. सरकार ऐसा कर रही है. इससे निवेशक आएगा तो क्या बिना पर्याप्त भूमि के प्रयोगशाला, पुस्तकालय, खेल परिसर, छात्रों की सुविधाओं से उच्च शिक्षा संभव है.

          माननीय सभापति महोदय, अगर मानक में ढील दी जाएगी तो इसका सबसे बड़ा नुकसान प्रदेश के युवाओं को होगा. छात्रों को होगा. फिर इस देश के अंदर एक नई काक्रोच पार्टी पैदा हो जाएगी. यूनिवर्सिटी छात्रों की सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार होती है. यदि कोई निजी विश्वविद्यालय अचानक बंद हो जाए, यदि कोई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ दे या विश्वविद्यालय अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल हो जाए, इस नीति के माध्यम से छात्रों की सुरक्षा होती है. अगर सुरक्षा के प्रावधानों को कमजोर किया जाएगा तो नुकसान किसका होगा, उद्योगपतियों का नुकसान नहीं होगा. नुकसान उस आदिवासी गरीब मजदूर का, उस किसान के बेटे का होगा, जिसने खेत गिरवी रखकर अपने बच्चों की फीस भरी है, उस मां का नुकसान होगा, जिसने अपने गहने गिरवी रखकर अपने बच्चों की फीस भरी है.

          माननीय सभापति महोदय, आज पूरी शिक्षा का बाजारीकरण कर देंगे तो कल गरीब आदिवासी किसान, मध्यम वर्ग परिवार के बच्चे गुणवत्ता का आधार उच्च शिक्षा केवल एक सपना बनकर रह जाएगी. इसलिए मैं इस सरकार से आग्रह करता हूँ कि इस विधेयक को वापस लेकर शिक्षाविदों, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के विशेषज्ञों और छात्र संगठनों के साथ-साथ में हमारे विपक्ष के विधायकों से भी आप चर्चा करें. सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद.

           श्री भगवान दास सबनानी (अनुपस्थित)

          श्री उमाकांत शर्मा सभापति महोदय, आपके माध्यम से मेरा निवेदन यह है कि पहले जो निजी यूनवर्सिटीज़ खुली हैं, उनके पास 20 हेक्टेयर जमीन और उसके बाद में कम लिमिट कर दी गई थी, वह जमीनें सुरक्षित रहेंगी अथवा वह उसका व्‍यापारिक उपयोग करेंगे, इसमें क्‍या प्रावधान है ? यह मेरे मन में शंका है, समाधान करवाने की कृपा करें.

          सभापति महोदय – धन्‍यवाद. श्री भगवानदास सबनानी उपस्थित नहीं हैं. कैलाश कुशवाह जी, सारी बातें आ ही गई हैं. आप तो मुख्‍य-मुख्‍य बिन्‍दु बोल दें.

श्री कैलाश कुशवाह (पोहरी) – जी, माननीय सभापति महोदय. आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद. हां, मुख्य बिन्‍दु ही बोलूँगा. वैसे शिक्षा की बात चल रही है. अगर शिक्षा नहीं होती, तो यहां पर सभी विधायक नहीं होते. आपको सभी बोलने वाले विधायकों को ज्‍यादा समय देना चाहिए. यह जो निजी विश्‍वविद्यालय का विधेयक हैं, मैं इसका विरोध करता हूँ कि जो मुख्‍य जरूरी कुछ चीजें हैं, वह इसमें होनी चाहिए, विशेषकर जो निजी विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना के लिये निर्धारित 25 एकड़ भूमि अनिवार्य है, उसे कम किया गया है. मेरा एक निवेदन है कि इसको अस्‍थायी न बनायें, स्‍थायी बनायें, कभी भी बच्‍चों की शिक्षा से खिलवाड़ न हों क्‍योंकि वसूली कई कॉलेजों में चल रही है. हमारे सभी माननीय विधायकों ने बोला कि चार कमरों में कॉलेज चल रहे हैं और वह कब बच्‍चों को धोखा देकर भाग जायें ? उनसे अधिक फीस लेते हैं, और बच्‍चे  घर पर रहते हैं, कभी कॉलेज में पढ़ने नहीं आते हैं, कागजों में कॉलेज चल रहे हैं. अभी तक सरकार ने किसको सजा दी है ? मेरा यही कहना है कि लैब की क्‍या व्‍यवस्‍था है, लायब्ररी की क्‍या व्‍यवस्‍था है, क्‍या कोई चैक करने गया ? कई कॉलेजों में नशा बिक रहा है, आप कहें तो मैं आपको सबूत दे दूँगा. मेरे कहने का मतलब यह है कि शिक्षा ही महत्‍वपूर्ण है.  अगर हमारे देश में शिक्षा एवं स्‍वास्‍थ्‍य न हो, तो हम कहां एवं कैसे जियेंगे ? हम इसमें इतनी सुविधाएं दे रहे हैं कि शिक्षा को व्‍यापार बना रखा है, खिलवाड़ हो रहा है शिक्षा से.

माननीय सभापति महोदय, मेरा यही निवेदन और आग्रह है कि सभी ने अपनी-अपनी बातें रखीं हैं. लेकिन सच्‍चाई यह है कि चाहे  एग्रीकल्‍चर हो, मेडिकल हो, ऐसे हमारे कई कॉलेज होते हैं, क्‍या चार कमरों में सभी कॉलेज चल जायेंगे ? लैब खुल जाएंगी, लायब्रेरी खुल जाएगी, खेलग्राउण्‍ड बन जायेगा. हम हर बार एक पेड़ मां के नाम करते हैं, उसमें पेड़ों के जगह नहीं चाहिए, गार्डन नहीं चाहिए. मेरा यही निवेदन है कि हम शिक्षा की बात कर रहे हैं, शिक्षा को शिक्षा बनायें, आप व्‍यापार न बनायें और हमारी गरीबी रेखा के बच्‍चों के लिए क्‍या व्‍यवस्‍था है ? आदिवासी भाइयों के लिए क्‍या व्‍यवस्‍था है ? एससी एवं एसटी के बच्‍चों के लिए क्‍या व्‍यवस्‍था है ? दिव्‍यांग बच्‍चों के लिए क्‍या व्‍यवस्‍था है ? मेरा निवेदन है कि शिक्षा को व्‍यापार न बनायें क्‍योंकि शिक्षा ही हमारे देश का भविष्‍य है और शिक्षा नहीं होगी तो आप भी इस गद्दी पर बैठ नहीं पाते. सभी विधासकों ने अपनी-अपनी बात रखीं. मेरा यह निवेदन है कि जो भी हमारा कॉलेज हो, विश्‍वविद्श्‍यालय हों, उसमें खेल ग्राउण्‍ड, सुरक्षा यह सब चीजें होना जरूरी हैं और अगर कोई खिलवाड़ कर रहा है तो उसकी जांच होनी चाहिए और उसे सजा मिलनी चाहिए. जिससे आने वाले भविष्‍य में बच्‍चों की शिक्षा से कोई खिलवाड़ न कर सके. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.     

सभापति महोदय -कैलाश जी,आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद. श्री माधव सिंह (मधु गहलोत) जी. 

            श्री माधवसिंह (मधु गहलोत) (आगर)-  सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, धन्‍यवाद. मैं, मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 के पक्ष में अपनी बात रखना चाहता हूं. मैंने सभी माननीय की बात सुनी. मेरा कहना है कि आने वाले समय में शिक्षा में बहुत अच्‍छा सुधार होने वाला है. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी एवं मंत्री जी को धन्‍यवाद दूंगा कि जिन्‍होंने शिक्षा के क्षेत्र में दीप जलाने का काम किया है. रुपये 5 करोड़ की बात हो रही है, यदि कोई बाहर से आ रहा है, यदि उसे इसकी छूट दी जाये, तो वह इस राशि से पुस्‍तकालय, लैब और फर्नीचर आदि का कार्य कर सकेगा. आज हम कहीं भी जायें 12वीं पास करने के बाद हमारे किसान और मजदूरों के बच्‍चे पढ़ नहीं पाते हैं. अगर परिवार में 2 बच्‍चे हैं और 1 बेटी है तो परिवार केवल बेटे पर ही पूरी मेहनत और फसल लगाकर उसे इंदौर-भोपाल में पढ़ाता है लेकिन बेटी शिक्षा से वंचित रह जाती है.

          सभापति महोदय, मेरा निवेदन है कि मेरी विधान सभा में अभी एक मकैन्‍स् की फैक्‍ट्री आई है. एथेनॉल के 2 प्‍लांट चालू हैं. सोयाबीन का भी एक प्‍लांट लगने वाला है, उसकी नींव डाल दी गई है. लेकिन हमारे वहां के लोगों को वहां रोजगार नहीं मिल पाता है क्‍योंकि उनके पास डिग्री नहीं होती है और हमारे बच्‍चे वंचित रह जाते हैं. रुपये 10-15 हजार के वेतन में वे परेशान रहते हैं. इसलिए शिक्षा के क्षेत्र में आए इस सरलीकरण का मैं समर्थन करता हूं और धन्‍यवाद देता हूं, ऐसी सरकार को जिसने 25 एकड़ की भूमि को कम किया. ऐसे कई शहर हैं, जहां जमीनों के अभाव में महाविद्यालय नहीं खुल पाते हैं.

          सभापति महोदय, शिक्षा के क्षेत्र की बात हो रही है, 200 सांदीपनि विद्यालयों के लिए हमारी सरकार ने पूरी तैयारी कर ली, लेकिन कई स्‍थानों पर भूमि के अभाव में हम ऐसे विद्यालयों को बनाने का काम नहीं कर पा रहे हैं. इस कारण वे क्षेत्र शिक्षा से वंचित हो रहे हैं. मैं सौभाग्‍यशाली हूं कि मेरी विधान सभा में सांदीपनि विद्यालय बन चुका है और 4 सांदीपनि विद्यालयों के लिए भूमि का आवंटन जल्‍द होने वाला है. मैं, इस बिल का समर्थन करता हूं और पुन: मंत्री जी को धन्‍यवाद दूंगा कि आपने इस बिल के माध्‍यम से इस प्रदेश को आने वाले समय में शिक्षा के क्षेत्र में नंबर 1 पर लाने का काम किया है. जय हिन्‍द, जय भारत.

          श्री इन्‍दर सिंह परमारसभापति महोदय, आज सदन में मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 पर हमारे सम्‍माननीय सदस्‍यों द्वारा महत्‍वपूर्ण सुझाव दिये गए हैं. आदरणीय श्री महेश परमार, डॉ. चिन्‍तामणि मालवीय, श्रीमती झूमा डॉ.ध्‍यानसिंह सोलंकी, श्री दिव्‍यराज सिंह, डॉ. हिरालाल अलावा, श्री प्रताप ग्रेवाल, श्री कैलाश कुशवाह, श्री माधवसिंह (मधु गहलोत) आप सभी ने कई अच्‍छे विषय उठाये हैं. जिसका हम अपनी व्‍यवस्‍था में ध्‍यान रखेंगे.

          सभापति महोदय, इस बिल को लाने का उद्देश्‍य शिक्षा की गुणवत्‍ता बढ़ाना, ज्‍यादा लोगों को अवसर देना और नियमों की जटिलता के कारण शिक्षा में जो लोग अधिक योगदान दे सकते थे, उनकी कठिनाई को समाप्‍त करने का संकल्‍प है. मैं समझता हूं कि राष्‍ट्रीय शिक्षा न‍ीति, 2020 में भी स्‍पष्‍ट दिशा दी गई है कि उच्‍च शिक्षा संस्‍थानों के नियमों में लचीलापन होना चाहिए और मात्रात्‍मक इंपुट आधारित मानदण्‍डों के स्‍थान पर, गुणवत्‍ता एवं परिणाम आधारित मानदण्‍डों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. साथ ही भारत सरकार की ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस पहल अंतर्गत भी राज्‍यों को यह सुझाव दिया है कि वे अपने निजी विश्‍वविद्यालय अधिनियमों में ऐसे परिवर्तन करे. मैं समझता हूं कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के परिप्रेक्ष्‍य में ही जो लचीलापन आना चाहिए इसलिए शिक्षा नीति में कई बदलाव अकादमिक भाग एवं दूसरे भाग में भी किए गए हैं. वर्ष 2007 के अधिनियम में भी हमने कई बदलाव किए थे. जहां अधिक जमीन की आवश्‍यकता थी, उसे कम किया. पहले 20 हेक्‍टेयर थी, उसे हमने 10 हेक्‍टेयर किया और एक प्रकार से रुपये 5 करोड़ की निधि का प्रावधान किया गया है उसको भी हमने, पहले थी अधिक थी उसके कारण छात्रों को कोई फायदा नहीं होता था. वो डिपाजिट राशि रहती थी. वो फिक्स राशि रहती थी इसलिए उसका उपयोग हो जाए. वह विश्वविद्यालय करे या हमारा आयोग करे इस दृष्टि से उसके प्रावधान पर विचार किया है. इसमें मुख्य रुप से एक तो भूमि संबंधी विषय है. दूसरा निर्मित क्षेत्र के बारे में डेढ. हजार वर्ग मीटर का उल्लेख है वर्ष 2007 से, उसको लेकर है. तीसरा विन्यास निधि के बारे में. तीसरा संशोधन वार्षिक फीस को लेकर है. उसमें सामान्य निधि बनाने की भी व्यवस्था बनी रहे इसका प्रावधान भी रखेंगे. मुख्य रुप से जो सारे प्रश्न खड़े किए हैं. जिनसे लगता है कि संशोधन करने से जो निवेश करेंगे उससे निवेशकों को बहुत फायदा हो जाएगा.ऐसा नहीं है. केवल भूमि को लेकर जो आपत्तियां हैं उसके बाद भी मध्यप्रदेश सरकार के विश्वविद्यालय और कॉलेज खोलने के जो नियम हैं.

          श्री महेश परमार माननीय सभापति जी, मेरा माननीय मंत्री जी से कहना है कि..

          श्री इंदर सिंह परमार महेश जी आपने बहुत बोला है, यह गलत तरीका है. सभापति महोदय, मैं सभी बातों के जवाब दूंगा. एक-एक बात का जवाब दूंगा, पुराना रिकार्ड लाया हूँ उसका भी जवाब दूंगा. आप चिंता मत कीजिए.

          श्री महेश परमार माननीय मंत्री जी आप गुस्सा न करें, नाराज न हों. उच्च शिक्षा का मामला है आप नाराज न हों.  आप नाराज क्यों हो रहे हैं.

          सभापति महोदय महेश जी यह सही तरीका नहीं है. आप बैठिए. माननीय मंत्री जी आप अपनी बात जारी रखिए.

          श्री इंदर सिंह परमार मैं मेरा पूरा विषय रख दूं. फिर आप बोलना. आपका कोई विषय छूटे तो जवाब दूंगा. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानि यूजीसी के साथ-साथ एआईसीटीई, एनसीटीई, एनसीआईएसएम, एनएमसी, बीसीआई और पीसीआई. यह ऐसे हमारे विनियामक परिषद की अथारटियां हैं. जो अलग-अलग विषयों को लेकर मान्यता देते समय अपने मापदण्ड निर्धारित करती हैं. और उनके मापदण्ड का निर्धारण करने का काम भारत सरकार का है. राज्य सरकार के अधीन नहीं है. हमारे अधीन जो पार्ट थे हम केवल उन पर विचार कर रहे हैं. इसमें स्पष्ट है कि यदि किसी को कोई कॉलेज या विश्वविद्यालय खोलना है, क्या-क्या वे पाठ्यक्रम चलाने वाले हैं. उसमें कितने लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी. कितने बाई कितने रुम होंगे. कितनी लेब होंगी. कितनी लायब्रेरी होंगी. कितना प्रशासनिक भवन होगा. यह सारा, इन सारी संस्थाओं के द्वारा निर्धारित मापदण्ड के अनुसार चलता है. इसलिए हमने कहा जरुर है पर्याप्त, मतलब जितनी आवश्यकता लगेगी उस आवश्यकता की पूर्ति के अनुसार कोई व्यक्ति आवेदन करेगा. उस समय उनको जांचने का काम हम इनके मापदण्डों के अनुसार यानि एआईसीटीई के मापदण्डों के अनुसार, एनसीटीई के मापदण्डों के अनुसार, एनसीआईएसएम के मापदण्डों के अनुसार एनएमसी, बीसीआई के मापदण्डों के अनुसार, पीसीआई के अनुसार, लॉ का विश्वविद्यालय खोलना होगा तो बीसीआई के तहत. यदि मेडिकल कॉलेज खोलना है तो एनएमसी के तहत और यदि आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय खोलना है तो एनसीआईएसएम के मापदण्डों का पालन करेंगे. यूजीसी से लेकर तमाम इन संस्थाओं के जो मापदण्ड हैं उनका पालन हम करेंगे. इसलिए यह जो संशोधन लाए हैं, इसमें सभी ने उल्लेख भी किया है. 2, 7, 11, 36, 40, 41 और 42 में. 7 और 11 में बहुत ज्यादा है बाकी में कुछ शब्दों को हटाना, जोड़ना है.

सभापति महोदय,  फीस के बारे में बहुत स्पष्ट उल्लेख किया है. प्रत्येक निधि विश्वविद्यालय 1 अप्रैल, 2027 से प्रभावी प्रभावी होने अथवा अपने निगमन की तारीख से जो भी पश्चातवर्ती हो नियामक आयोग को ऐसी वार्षिक फीस का भुगतान करेगा जैसा कि विहित किया जाए. वार्षिक फीस का भुगतान ऐसी रीति में तथा ऐसी कालावधि के भीतर किया जाएगा जैसा कि विहित किया जाए. यह करता है कि हम उसके लिए फीस का निर्धारण करेंगे, वह अधिकार हमारे पास है. जहां तक रहा सवाल अन्‍य राज्‍यों का तो कई राज्‍यों ने इसको स्‍वीकार किया है क्‍योंकि हम नियमों को सरल बनाना चाहते हैं. उसके अनुसार हमने ज्‍यादातर काम करने का काम किया है. दूसरा, जो प्रश्‍न खड़ा किया था, तो पूर्व से संचालित विश्‍वविद्यालय द्वारा धारित भूमि के उपयोग में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा. प्रस्‍तावित विधेयक का कोई भूतलक्षी प्रभाव नहीं होगा. महेश जी ने प्रोफेसर यशपाल विरुद्ध छत्‍तीसगढ़ राज्‍य की याचिका का जो उल्‍लेख किया था उसमें माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने पर्याप्‍त भूमि की आवश्‍यकता का उल्‍लेख किया है, न्‍यूनतम भूमि की आवश्‍यकता का उल्‍लेख उसमें नहीं है. फिर दूसरा, माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने वर्तमान में प्रचलित रिट याचिका क्रमांक 531/2025 आयशा जैन विरुद्ध एम.ए.टी. यूनिवर्सिटी नोयडा निजी विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना से मूलत: संबंधित नहीं है.

          सभापति महोदय, वार्षिक शुल्‍क के उपयोग के संबंध में नियम बनाने का उल्‍लेख विधेयक में किया गया है. किसी भी निजी विश्‍वविद्यालय द्वारा डिफाल्‍ट की स्थिति में उनसे प्राप्‍त वार्षिक फीस की राशि में से छात्रों के हितों का हम संरक्षण करेंगे यह सुनिश्चित किया जाएगा. यूजीसी द्वारा गठित समिति द्वारा भूमि की आवश्‍यकता, संबंधित प्रस्‍तुत प्रतिवेदन, यूजीसी द्वारा अंतिम रूप से स्‍वीकृत नहीं किया गया है. वर्तमान में निजी विश्‍वविद्यालयों से संबंधित यूजीसी रेगुलेशन 2003 प्रभावशील है, जिसमें भूमि की न्‍यूनतम आवश्‍यकता का उल्‍लेख नहीं है, पर्याप्‍त सुविधाओं के साथ विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना का उल्‍लेख किया गया है. निजी विश्‍वविद्यालयों से संबंधित मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) अधिनियम 2007 की धारा 42 में इस अधिनियम के प्रावधानों के लिए नियम बनाने की शक्तियां ऑलरेडी प्राप्‍त हैं. जो भी प्रश्‍न खड़े किए हैं जो छात्रों के हित में होगा, वहां के कर्मचारियों के हित में होगा, इस धारा के तहत उनको शक्तियां जो मिली हैं हम उसके अनुसार कार्यवाही करेंगे. निजी विश्‍वविद्यालयों के लिए पुस्‍तकालय, प्रयोगशाला आदि सुविधाओं की आवश्‍यकता को बिल्‍कुल भी समाप्‍त नहीं किया जाएगा. मैंने जैसा बताया कि जब कोई मेडिकल कॉलेज खोलना चाहता है, मेडिकल यूनिवर्सिटी खोलना चाहता है तो मेडिकल यूनिवर्सिटी के लिए किस प्रकार के कक्षों की आवश्‍यकता होगी, किस प्रकार की लैब होगी यह सब उसके मापदण्‍डों के अनुसार हम पूरा करेंगे. इसलिए किसी भी प्रकार की छूट, हर विषय के साथ में जहां लैब की जरूरत है वहां लैब होगी, लाइब्रेरी तो सभी जगह रहती हैं, सभी में रखेंगे और अभी भी हैं, उन सारी चीजों को समाप्‍त नहीं किया जा रहा है. सभापति महोदय, शिक्षा की गुणवत्‍ता की जो बात हुई थी, तो इसमें शिक्षा की गुणवत्‍ता से कोई समझौता वाला पार्ट नहीं है. यह केवल अधोसंरचना की दृष्टि से भूमि और पैसा जिसका कोई उपयोग हमारे पास नहीं होता था और विश्‍वविद्यालयों के पास जो पैसा जमा करते थे उसके लिए होता था, इसलिए वह पैसा जिसको विन्‍यास निधि बोलते हैं उसका प्रावधान हम समाप्‍त करने जा रहे हैं. एक प्रकार से यह जो विधेयक है, यह विधेयक मूलत: राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के उन मापदण्‍डों को पूरा करने के लिए जिसके लिए विश्‍वविद्यालयों को मान्‍यता देने में सरल हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उनको किसी भी प्रकार की हम छूट दे रहे हैं. हम सरलता प्रदान कर रहे हैं जिससे कोई जल्‍दी से जल्‍दी अपना निवेश करना चाहता है, क्‍योंकि आज की जो परिस्थिति है, भारत के अलावा और भारत के अन्‍य राज्‍यों में कई अच्‍छे कैम्‍पस हैं, उन राज्‍यों में उनको जमीन की छूट मिली हुई है, वह चाहते हैं कि शहरों में जमीन कम होती है, शहरों में जमीन उपलब्‍ध नहीं होती है, शहरी क्षेत्र ज्‍यादा हो रहे हैं, तो उसमें हमको कुछ छूट दी जाए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जितनी आवश्‍यकता है यानि पर्याप्‍त भूमि के बारे में जो कहा था तो पर्याप्‍त भूमि यानि वह जितनी आवश्‍यक है, पाठ्यक्रम शुरू करेंगे, उसके लिए जितने कक्ष, लैब, लाइब्रेरी आदि, साथ ही खेल का मैदान और उसके साथ-साथ जो एक प्रश्‍न हमारे माननीय सदस्‍य ने किया कि वृक्ष कहां लगेंगे, तो उसकी भी व्‍यवस्‍था उसमें होगी. एकदम ऐसा नहीं होगा कि केवल हम सीमा को समाप्‍त कर रहे हैं, लेकिन इतना भी नहीं होगा कि हम उसको नहीं रखेंगे क्‍योंकि जब अनुमति लेने के लिए आवेदन आएंगे, तो उस समय पूरा परीक्षण करेंगे, परीक्षण करने के बाद ही उनकी मान्‍यता को देने का काम हम करने वाले हैं.

          माननीय सभापति महोदय, हमारी दीदी ने कुछ  विषय उठाये हैं, वह इस एक्ट से संबंधित नहीं हैं किंतु फिर भी मैं उनका समाधान करने जा रहा हूं. मध्यप्रदेश में लगातार भर्ती का काम चल रहा है. हायर एजूकेशन ने काफी बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती की है, प्रोफेसरों की भर्ती की है. हमारे जो विश्वविद्यालय हैं, क्योंकि दीदी के यहां का जो विश्वविद्यालय है वह नया है, क्रांति सूर्य टंट्या मामा उस विश्वविद्यालय में भी हमने भर्ती के लिये महामहिम राज्यपाल महोदय की अध्यक्षता में जो समिति होती है, समन्वय समिति होती है और सरकार ने भी हमारे कुल सचिवों को निर्देशित किया है कि भर्ती प्रक्रिया तत्काल चालू करें. हमारे मध्यप्रदेश के जो विश्वविद्यालय हैं उसमें से काफी विश्वविद्यालयों ने रोस्टर बना लिया है , विज्ञापन जारी हो गये हैं दो से तीन महीने में उनकी भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ जायेगी केवल दो तीन जो नये विश्वविद्यालय हैं उसमें थोड़ा सा समय लग रहा है तब तक हम उनको हमारे यहां से प्रतिनियुक्ति पर शिक्षकों को भेजकर के वहां की जो एकेडमिक जो आवश्यकता है उसकी पूर्ति हम लगातार करते जा रहे हैं. क्योंकि नये विश्वविद्यालय को स्थापित होने में चार से पांच साल का समय लगता है इसलिये मैं समझता हूं कि उनका भी निराकरण करने की ओर हम धीरे धीरे आगे बढ़ेंगे.

          माननीय सभापति  महोदय, परीक्षा और परिणाम, प्रवेश. प्रवेश को लेकर के हमने नीति बनाई है और इस वर्ष से ही , इस साल जो एडमीशन हुये थे, उससे इस साल में अभी आज की तारीख तक ज्यादा हमारे एडमीशन विश्वविद्यालयों में, कालेजों मे हो चुके हैं और हम कौशिश करेंगे कि 31 जुलाई के बाद तक जो बच्चे कालेज में पढ़ना चाहते हैं उन सबके एडमीशन हो जायें. सत्र समय पर चले, फिर परीक्षा समय पर करें, सख्ती के साथ में परीक्षा समय पर करेंगे. हमारे सभी विश्वविद्यालय केलेन्डर का पालन करने के लिये अग्रसर हो रहे हैं और हम एक ओर उसमें पार्ट जोडते जा रहे हैं कि जो हमारे वेल्यूवेशन में विलंब होता है उस वेल्यूवेशन के विलंब को हम कैसे समाप्त करें. तो हम डिजिटल वेल्यूयेशन की ओर आगे बढ़ रहे हैं. इसका मतलब जो हमारी उत्तर पुस्तिकायें हैं वह विश्वविद्यालय में सुरक्षित रहेंगी  डिजिटल रूप से कापी जांचने वालों तक वह पहुंचेगी समय पर कापी वापस हो जाये इसकी चिंता करते हुये हम डिजिटल वेल्यूयेशन की ओर आगे बढ़ रहे हैं. मध्यप्रदेश के एक भी विश्वविद्यालय में, क्योंकि विश्वविद्यालय का मुख्य रूप से काम परीक्षा संपादित करना है, एक भी विश्वविद्यालय में प्रश्न पत्र लीक होने से संबंधित कोई भी शिकायत प्राप्त नहीं होती है, जिस जिस क्षेत्र में जहां जहां पर भी गड़बड़ी होती थी उनको हमने सख्ती से ठीक करने की कोशिश की है और एक बड़े गिरोह का एक प्रकार से हमने पर्दाफाश किया है  और उनके खिलाफ यदि आवश्यकता पड़ती है तो उनके खिलाफ एफआईआर करने से भी हम पीछे नहीं हटते हैं. इसलिये मध्यप्रदेश में हम परीक्षा प्रणाली सुधारने, परिणाम सुधारने और प्रवेश प्रक्रिया को सुधारने पर लगातार काम करते जा रहे हैं. हमारे विश्वविद्यालयों में हमने शिक्षकों की और प्रोफेसरों की उपस्थिति के लिये भी हमने सार्थक  एप से जोड़कर के हमने उनकी समय पर उपस्थिति सुनिश्चित की है एक प्रकार से जो सुधार की प्रक्रिया राष्ट्रीय शिक्षा नीति में अपेक्षित की गई है उस और हम लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं.

          सभापति महोदयमाननीय मंत्री जी, पूरी बात आ गई है आपकी. काफी विस्तार से आपकी बात आ गई है. इस विधेयक पर 30 मिनिट का समय निर्धारित किया था. कृपया जल्दी समाप्त करें.

          श्री इन्दर सिंह परमार- जी सभापति जी. सभापति महोदय, हमारे माननीय सदस्य हीरालाल अलावा जी ने कुछ चिंता व्यक्त की हैं उसके बारे में मैं, सदन को बताना चाहता हूं कि यह जो 5 करोड़ की निधि जमा होती थी उस 5 करोड की निधि से जिस प्रकार मानते थे कि छात्रों के बारे में चिंता रहती थी कि मान लो कोई कालेज बंद हो जाता है . मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि यदि कोई विश्वविद्यालय बंद होगा तो उन बच्चों की भी चिंता की जायेगी उनको दूसरी ओर पढ़ाने की व्यवस्था भी सरकार की तरफ से की जायेगी और उस विश्वविद्यालय के पास में जो सामान्य निधि हैं, दूसरी निधि हैं , फीस है .उसको हम सुनिश्चित करेंगे कि उन बच्चों को यदि फीस भी देना होगी, वापस भी करना होगी तो उस निधि से उससे भरपाई करने का प्रावधान करने जा रहे हैं, एक्ट में  प्रावधान कर रहे हैं, आगे जाकर के नियमों में जो  नियेम हम बोल रहे हैं वह नियम हम जोड़ने जा रहे हैं

 

          श्री महेश परमारमाननीय सभापति महोदय, मैं मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि..

          सभापति महोदय- महेश भाई, यह उचित नहीं है. मंत्री जी सामान्य उत्तर दे रहे हैं. सभी पर रोका टोकी करना उचित नहीं है. कृपया बैठें. महेश जी बैठें.

श्री इन्दर सिंह परमार- सभापति महोदय, एक समय मध्यप्रदेश में ऐसा दौर था, जब परीक्षाएं होती थी तो कंठाल चौराहे पर उज्जैन में वहां से पेपर पूरे विश्वविद्यालय क्षेत्र में बिकने जाते थे, ऐसी परीक्षा पद्धति इनकी सरकार के समय होती थी, इनके नेता लोग, इनके मंत्री लोगों के घरों से परीक्षा पत्र आउट होते थे, मध्यप्रदेश में हमारे घर से या हमारे विश्वविद्यालय से कहीं से परीक्षा पत्र आउट नहीं होते हैं और आज ये बात कर रहे हैं. समय को लेकर बात कर रहे हैं, एक अराजकता का मौहाल था पूरे शिक्षा जगत में, वह अराजकता के माहौल को हमने समाप्त करके एक व्यवस्थित व्यवस्था पटरी पर लाने का काम किया है. मध्यप्रदेश को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का हमारे संकल्प को भारतीय जनता पार्टी की सरकार पूरी करेगी.

सभापति महोदय (श्री महेश परमार, सदस्य के कुछ बोलने पर) आप व्यवधान मत करिए, आप प्लीज बैठिए. आपकी पूरी बात आ गई है, यह तरीका ठीक नहीं है. हम निवेदन कर रहे हैं, आपको पूरा समय दिया है.

श्री इन्दर सिंह परमार सभापति महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि इस विधेयक को पास करें. मैं यही आपसे चाहता हूं.

सभापति महोदय संयोग है मध्यप्रदेश का कि माननीय मुख्यमंत्री जी भी छात्र राजनीति से आए हैं, माननीय मंत्री जी भी छात्र राजनीति से आए हैं लम्बा छात्र जीवन का अनुभव है और आज तो संयोग है. दर्शक दीर्घा में भी छात्राएं बैठी हैं, यह मध्यप्रदेश का सुखद भविष्य सदन से उम्मीद, आशाएं रखता है, थोड़ी मर्यादा रखें. माननीय मंत्री जी अपनी बात जारी करें. (व्यवधान) श्री महेश जी बार बार खड़ा होना जरूरी नहीं है. आपकी पूरी बात आ गई है. श्री उमाकांत जी, श्री अनिल जी व्यवधान नहीं. पूरी चर्चा इतनी अच्छी हुई है.

श्री इन्दर सिंह परमार सभापति महोदय, हमने पूरी बात सुनी है. हम भी इस प्रकार से व्यवधान कर सकते थे. हमने पूरी बात सुनी है, अब आप हमारी बात सुनिए. हम आपके हाथ जोड़ते हैं. ऐसा मत करिए. यह गलत तरीका है.

सभापति महोदय सब लोगों ने शांति पूर्ण तरीके से बोला, श्री उमाकांत जी, श्री अनिल जी बैठें. श्री महेश जी यह अच्छी बात नहीं है. आपको पूरा समय दिया. आप प्लीज बैठिए. आपका बिन्दुवार माननीय मंत्री जी जवाब दे रहे हैं. श्री महेश जी सुने. आप सामने वाले को बोलने नहीं देते हैं. यह अच्छी आदत नहीं है. माननीय मंत्री जी विधेयक पर बिन्दुवार जवाब दे रहे हैं, नामजद माननीय सदस्यों ने अपनी जो जिज्ञासा थी या जो सुझाव था, माननीय मंत्री जी उसका बिन्दुवार जवाब दे रहे हैं. आप हम सब जवाब जानना चाहते हैं और जो व्यवस्था है उस व्यवस्था के अनुसार आपके पास जानकारी आ रही है. अब पूरी बात होने को है, लगभग उनका वक्तव्य पूरा हो गया तो इस तरह से व्यवधान किया जाना यह मर्यादा में नहीं है. अब माननीय मंत्री जी अपनी बात जारी रखें.

श्री इन्दर सिंह परमार मेरा विषय पूरा हो गया है.

2.42 बजे                                                 स्वागत

पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री, मध्यप्रदेश शासन, श्री रामकृष्ण कुसमरिया का दर्शक दीर्घा में स्वागत

सभापति महोदय यह प्रसन्नता की बात है, पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री मध्यप्रदेश शासन श्री रामकृष्ण कुसमरिया जी दर्शक दीर्घा में बैठे हैं, सदन उनका स्वागत एवं अभिनंदन करता है. (मजों की थपथपाहट).

 

प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.

प्रश्न यह है कि खण्ड 2 से 8 इस विधेयक का अंग बने.

खण्ड 2 से 8 इस विधेयक के अंग बने.

प्रश्न यह है कि खण्ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र इस विधेयक का अंग बने.

खण्ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र इस विधेयक का अंग बना.

श्री इन्दर सिंह परमार सभापति महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026  पारित किया जाय.

प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया जाय.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

विधेयक पारित हुआ.

 

 

            सभापति महादेय आज की कार्यसूची के पद 7 के उपपद 3 पर मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2026 के भारसाधक सदस्य के अनुरोध पर विधेयक को सभा में विचारार्थ प्रस्तुत किए जाने हेतु विधान सभा नियमावली के नियम 66 के परन्तुक के अधीन श्रीमती राधा सिंह, राज्यमंत्री को अनुमति प्रदान की है.

          मैं समझता हूँ कि सदन इससे सहमत है.

          (सदन द्वारा अनुमति प्रदान की गई.)

(3)      मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2026(क्रमांक 9 सन् 2026)

          राज्य मंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, (श्रीमती राधा सिंह) सभापति महोदय, मैं प्रस्ताव करती हूँ कि मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.

          सभापति महोदय श्री अभय मिश्रा जी.

          श्री अभय मिश्रा (सेमरिया) माननीय सभापति महोदय, मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 75 की उपधारा (1) में अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क अधिरोपित करने का अधिकार मिला हुआ है. यह अधिकार आज का नहीं है. वर्ष 1993 में जब श्री बलवंत राय मेहता की एक सदस्यीय कमेटी की सिफारिश पर पंचायती राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम बनाया गया, उसमें यह प्रावधान रहा है. आज हम जो संशोधन विधेयक, 2026 ला रहे हैं, इसको एक तरह से विलोपित करना कह लीजिए या अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क को  हटाये जाने या छोड़ दिये जाने का प्रावधान रखा गया है. इस संबंध में यह प्रस्ताव लाया गया है. बड़ा स्वाभाविक है कि जब पद आता है तो प्रमाद भी आता ही है और फिर कोई भी सरकार लगातार 3-3 बार 4-4 बार सत्ता में रहती है, तो अंहकार बढ़ना स्वाभाविक है. बड़ी मछली छोटी मछली को लील लेना चाहती है. इस देश में जो संविधान है, उसमें तीन तरह की सरकारें हैं. केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय सरकार. स्थानीय सरकार में नगर निगम, नगर पंचायत, कॉपरेटिव यह सब है. चूंकि वर्ष 1994 का विधेयक हमारे विधानसभा में पारित हुआ है. केन्द्र सरकार के संविधान संशोधन विधेयक बनाने का अधिकार हमको मिला है, तो आप उसका सुदपयोग मान लीजिए या दुरूपयोग मान लीजिए. हम नीचे क्लेश करते जा रहे हैं.

सभापति महोदय, हमारे गांव में एक भल्लू पंडित जी हैं, वे सबका बड़ा नुकसान करते हैं. उनको किसी ने समझाया कि अब बहुत हो गया, आप क्यों उसके पीछे पडे़ हैं, तो उन्होंने कहा कि हम इसका बीज ही तोड़ देंगे. सरकार ने जैसे ठान लिया है कि पंचायती राज का पूरा बीज ही तोड़ देंगे. हमारा जो पंचायती राज अधिनियम है, इसका मूल संविधान है उसमें स्टाम्प शुल्क का प्रावधान था. पंचों का 100 रूपए का मानदेय था. आप सोचिए, दुनिया कहां से कहां चली गई. नियम है कि पंचों की प्रत्येक माह एक बैठक होगी, उसमें प्रति बैठक पंचों को 100 रूपए देने का प्रावधान है. यह वर्ष 1993-94 का प्रावधान है. एक तरह से पूरा क्लेश कर दिया गया है.

सभापति महोदय, यह भारत किसानों का देश है, यह नीदरलैंड नहीं है. आज हम कितनी बातें करते हैं कि हमारा एग्रीकल्चर का बिजनेस है. किसान-किसान हम खेलते हैं किसान के नाम पर योजनाएं बनाते हैं, उनको समर्थन मूल्य देते हैं. बडे़-बडे़ घोटाले होते हैं. मूल बात क्या है. मूल बात तो यह है कि नीदरलैंड में एग्रीकल्चर एक बिजनेस है. वहां लोग बिजनेस की अवधारणा से काम करते हैं और लोग खूब पैसा कमाते हैं. हमारे यहां कृषि एक कल्चर है, एक संस्कार है. गांवों में रहने वाले हर किसान को चाहे फायदा हो, चाहे नुकसान हो, 60 प्रतिशत आबादी ऐसी है जो करेगी और मांग और पूर्ति का सिद्धांत है. पैदा करने वाले ज्यादा हैं. ज्यादा उत्पादन है. जितनी हमारी खपत है, सरकार कितना भी कुछ कर ले लेकिन भारत देश में किसान की तरक्की नहीं हो सकती. महात्मा गांधी जी ने कहा था कि भारत का उत्थान तभी होगा, जब यहां के गांवों का उत्थान होगा. भारत की आत्मा गांवों में निवास करती है. यहां रहने वाले किसानों में निवास करती है और जब तक ग्राम स्वराज मजबूत नहीं होगा, तब तक भारत का उत्थान नहीं हो सकता. उन्होंने पंच परमेश्वर की अवधारणा दी है..

2.50 बजे            {सभापति महोदया (श्रीमती झूमा डॉ. ध्यानसिंह सोलंकी) पीठासीन हुईं}

.. पंचायतों को वेंडर बनाकर के रख दिया गया है. पंचायतों में समितियां हैं, लेकिन उनका कोई तात्पर्य नहीं है, पंचों की कोई उपयोगित नहीं है. एक बार उन्होंने रजिस्टर में साईन कर दिया उसके बाद बस. अब आ जाईये इस अधिनियम में जो भी ग्राम पंचायतों में कैसे काम कर रहा है तब ग्राम पंचायतों को 15 वां वित्त मिल जाता है, यह भी बड़ा दुर्भाग्य है कि इतना अधिकारी राज है, इतना तंत्र बन जाता है बड़ा स्वाभाविक है. 20 साल तक वह राजा रहेगा, 20 साल तक एक ही मंत्री रहेगा, उसके नीचे के बाबू भी वो ही रहेंगे, यह पूरे कागज पर रहेंगे. फिर वह कागज बनेगा तो फिर उसको राजतंत्र कह लो, या प्रजातंत्र कह हो, मैं समझता हूं कि राजतंत्र है. अगर राजतंत्र होगा तो भ्रष्टाचार तो अपने आप में होगा ही. पंचायतों की आज गांवों में क्या स्थिति है ? हमारे गांव में मास्टर साहब कहते हैं कि हमारे तीन बच्चे हैं दो लाईन से लग गये हैं एक काम नहीं कर रहा है तो सोचते हैं कि इस बार इसको सरपंच बनवा देते हैं तो यह भी अपने पैरों पर खड़ा हो जायेगा तो वह सरपंच बन जाता है, वह वेंडर बन जाता है, वह अपने रोजगार से लग जाता है. 15 वें वित्त की राशि हमारे यहां दोनों जनपद पंचायते हैं पूरी की पूरी 15 वें वित्त की राशि का भी डस्टबिन. एक हेंडपम्प के लिये मई-जून में तरस गये शायद ही कोई ग्राम पंचायतें एक हेंडपम्प में कोई पाईप डलवाया हो. लेकिन डस्टबिन लग गई 18-18 हजार की जो बाजार में 18 सौ में बाजार में मिल रही है, कोई देखने वाला नहीं है. हमारे पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री जी इतने विद्वान हैं हमारे रीवा के प्रभारी मंत्री हैं यह हमारा सौभाग्य है. लेकिन क्या बतायें दुर्भाग्य है कि हम देख रहे हैं और कुछ नहीं कर रहे हैं. मैं कहना चाहता हूं कि इसमें नुकसान और फायदा क्या होगा. पंचायतों में इसको हम हटाएंगे तो एक तरह से आंकड़े गवाह हैं कि मध्यप्रदेश की औसत बड़ी ग्राम पंचायतें हैं और जनपद पंचायतें अपने कुल स्वयं के वित्तीय राजस्व का 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा इसी अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क से प्राप्त करते हैं, इसका क्या होगा. जो थोड़ा बहुत भी काम हो जाता है. ग्राम स्वराज्य में एक तरह से नौकरशाही की तैयारी है. यह संशोधन शक्तियों का विकेन्द्रीयकरण नहीं कहलाएगा. यह एक तरह का केन्द्रीयकरण है. छोटी छोटी स्ट्रीट लाईट, नल जल मरम्मत भले ही नहीं हो रही हो, पर उसके लिये गुंजाइश है. हम चाहें तो करवा सकते हैं तो वह गुंजाइश भी हमारी खत्म हो जायेगी तो फिर विकास कार्यों में भी यही स्थिति होगी. सबसे बड़ी बात यह है कि एक तरफ तो हम कह रहे हैं केन्द्र सरकार और 15 वें वित्त में वित्त आयोग की स्पष्ट गाईड लाईन है कि ग्राम पंचायतों को आत्म निर्भर बनाने के लिये उन्हें अपने स्वयं के कर राजस्व स्रोतों को बढ़ाना होगा. कई प्रगतिशील पंचायतें इस राजस्व के दम पर बैंकों से विकास कार्यों के लिये ऋण लेने की भी योजना बना रही हैं. अब ऐसा होकर के जायेगा तो एक तरह से उल्टा हो जायेगा. फिर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भेदभाव क्यों ? शहरी क्षेत्रों में नगर निगमों और नगर पालिकाओं को मजबूत करने के लिये तरह तरह के यूजर्स चार और टैक्स लगाने की खुली छूट दी जा रही है. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में संस्थाओं एवं पंचायतों के पास जो भी सीमित वित्तीय अधिकार हैं उन्हें भी छीना जा रहा है. आप भ्रष्टाचार रोकिये ना. आप इतने सालों में मिसरूल कर रहे हैं, वह बंद करिये. आप खुद में अच्छा रूल करिये और उनको कंट्रोल करिये. आप उनका पैर क्यों काट रहे हैं. फिर तीसरा आ जाईये रंगराजन समिति और अन्य वित्तीय समितियों के सिफारिशों के विपरीत देश में पंचायती राज को मजबूत करने के लिये बनी केन्द्रीय समितियों ने हमेशा सिफारिश की है कि राज्य सरकारों का करों का हस्तांतरण बढ़ाना चाहिये, न कि उसे घटाना चाहिये. यह संशोधन उस सभी राष्ट्रीय स्तर की सिफारिशों के ठीक विपरीत दिशा में उठाया गया कदम है. हमारा जो भी बुनियादी ढांचा है, खत्म हो रहा है. मेरा फिर से सरकार से अनुरोध है कि इसका कुछ बेहतर विकल्प करें. पंचायती राज में जो समितियां होती थीं जिसके अध्यक्ष वहां के सभापति होते थे. उन सबको खत्म करके अधिकारी राज कर दिये गये. एक एक कर पूरे संशोधन आज पंचायती राज को शून्य कर दिया गया है. आज केन्द्र सरकार और राज्य सरकार तो काम कर रही है. लेकिन जो तीसरी सरकार थी जो महत्वपूर्ण सरकार थी. जो जिला सरकार की अवधारणा को लेकर आई थी, जो गांव के विकास के विकेन्‍द्रीकरण की अवधारणा को लेकर आई थी. जब से भाजपा की सरकार आई है वर्ष 2003 के बाद से, धीरे धीरे करके आज उसको पूरी तरह से कोलेप्‍स कर दिया गया है और ये अंतिम कील ठोकी जा रही है, उसकी रीढ़ पर जो भी बचा कुचा है, वह भी समाप्‍त किए दे रहे हैं. सबसे बड़ा दुर्भाग्‍य यह है कि पंचायती राज के लोग अपनी तन्‍ख्‍वाह ,अपने छोटे मोटे फायदों को लेकर एक नहीं हो पा रहे हैं, जनपद अध्‍यक्ष, जिला पंचायत अध्‍यक्ष टिकट ढूंढ रहे हैं, उनको अपनी तन्‍ख्‍वाह दिख रही है. नीचे पंचों की कोई चिंता नहीं है, हमारे बीच में ऐसा कोई लीडर नहीं आ रहा है जो इनको एक सूत्र में खड़ा कर दें. हालांकि पूरे देश में जिस तरह से अत्‍याचार बढ़ रहे हैं और जनता की आवाजें निकलना शुरू हो गई हैं, लोग विद्रोह करने लगे हैं, तो मैं उम्‍मीद करता हूं कि एक दिन गांव में रहने वाला किसान, गरीब, पंच जो पचास पचास वोट का मालिका है, जो गांवों में आज भी मजदूरी कर रहा है और किसी तरह से गांव में सम्‍मान के साथ रहता है, जरूर इनके विरूद्ध एक दिन खड़ा होगा. मैं आपसे अनुरोध फिर से करता हूं, इस पर आप एक बार विचार कीजिए और ये करना हमारी दृष्टिकोण से तो उचित नहीं है, इसका कोई दूसरा सब्‍सिट्यूट करवाइए, केवल प्रताड़ना किया जाना आपका ध्‍येय है तो आपको बहुत शुभकामनाएं हैं, लेकिन मैं पंचायती राज को समझता हूं, मेरा उदय उसी से हुआ है, तो मैं फिर से अनुरोध करता हूं कि आप इसको हटाने का प्रबंध मत की‍जिए, धन्‍यवाद.

          सभापति महोदया – धन्‍यवाद अभय जी.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय – सभापति जी, अभय जी बहुत अच्‍छा बोलते हैं, बहुत विद्वान भी है, लेकिन इनकी एक बात पर मुझे आपत्ति है, हालांकि ये विधायक बन गए पर सरपंच बिरादरी के बारे में जो इनके कमेंट्स हैं कि दो भाई की नौकरी लग गई, तीसरा कुछ नहीं कर रहा, तो जाओ सरपंच बन जाओ. ऐसा नहीं है इस प्रदेश के अंदर सैंकड़ों की संख्‍या में ऐसे सरपंच है, जिन्‍होंने गांव की दशा बदल दी इसलिए पूरी बिरादरी के ऊपर इस प्रकार के कमेंट्स करना ठीक नहीं (..मेजो की थपथपाहट.)

          श्री अभय मिश्रा – मैं आपसे अनुरोध करता हूं, मैं बुरा आदमी हूं, आप अच्‍छे आदमी हैं, आप अच्‍छा सोचते हैं, आप उनके लिए ये जो हटाने जा रहे हैं, मत हटाइए, ये आपके हाथ में है. हम मानेंगे कि आप सही में उनके शुभचिंतक है, धन्‍यवाद.

          श्री महेन्‍द्र नागेश(गोटेगांव) – माननीय सभापति महोदया, मप्र पंचायत एवं ग्राम स्‍वराज संशोधन विधेयक 2026 का मैं समर्थन करता हूं. हमारी सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि की जो शासन की भू‍मि मानी जाती थी, उस पर बसे हुए ग्रामीण ना‍गरिकों को मालिकाना हक देने के लिए स्‍वामित्‍व योजना राजस्‍व विभाग के माध्‍यम से चलाई है. इसके तहत नागरिकों को उनके कब्‍जे में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आती आबादी भूमि अथवा विभिन्‍न समय पर आबादी भूमि पर दिए गए रहवासी पट्टों के आधार पर काबिज भूमि पर स्‍वामित्‍व हक विस्‍तृत सर्वे करवाकर दिए जाने हेतु स्‍वामित्‍व दस्‍तावेज प्रदान किए जा रहे हैं. इस स्‍वामित्‍व संबंधी दस्‍तावेजों के रजिस्‍ट्रेशन के माध्‍यम से आबादी भूमि का, भूमि स्‍वामित्‍व का अधिकार अब शासन से नागरिक के पक्ष में हस्‍तांतरित हो जाएगा. इस रजिस्‍ट्रेशन से नागरिकों पर कोई वित्‍तीय भार न आए इस हेतु मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज अधिनियम 1993 की धारा 75(1) में ग्रामीण क्षेत्र की प्रत्‍येक रजिस्‍ट्री पर जो अतिरिक्‍त स्‍टाम्‍प शुल्‍क लगता था उससे छूट दिए जाने के लिए अभी तक मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज अधिनियम 1993 में शासन के पास जो अधिकार नहीं था, इसी तथ्‍य को ध्‍यान में रखते हुए जनहित में यह प्रावधान माननीय मंत्री जी द्वारा लाया जा रहा है. मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज अधिनियम 1993 में अतिरिक्‍त स्‍टाम्‍प शुल्‍क में छूट देने की अधिकारिता राज्‍य शासन को मिल जाने के उपरांत राज्‍य शासन जनहित की इस अति लाभकारी योजना में ग्रामीण नागरिकों को अतिरिक्‍त शुल्‍क में छूट दे सकेगी, इसलिए माननीय सदन से अनुरोध है कि इस विधेयक को सर्व सम्‍मति से पारित करने की कृपा करें, धन्‍यवाद सभापति महोदया.

          सभापति महोदया – धन्‍यवाद नागेश जी, समय सीमा पर आपने अपनी बात कही.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल – सभापति महोदया, आपके माध्‍यम से मिश्रा जी से आग्रह है, मैं बोलना नहीं चाहता था, मैं मानता था कि वे पढ़ते लिखते भी है, बाकी तो हमारी मंत्री जी जवाब देंगी, कम से कम यह तो पढ़ लेते कि हम वास्‍तव में क्‍या ले रहे हैं और क्‍या दे रहे हैं. स्‍वामित्‍व योजना में जिन गरीबों की रजिस्‍ट्री होनी है, उनको पांच प्रतिशत शुल्‍क लगती है उनमें एक प्रतिशत हम दे रहे हैं और हमारा ही पैसा दे रहे हैं, न किसी से पैसा ले रहे हैं, न दे रहे हैं पर उसमें प्रावधान नहीं था, इसलिए इस एक पंक्ति के लिये हम सदन में आये हैं. मुझे लगता है कि आपने इतना लंबा भाषण देकर इसकी  आलोचना कर दी है, वैसे तो मैं बीच में बोलना नहीं चाह रहा था, लेकिन मेरी प्रार्थना है कि बिल ऐसा नहीं है, बस एक लाईन का संशोधन मात्र है.

          श्री अभय मिश्रा – अब वह अगर हटेगा तो ग्राम पंचायत की आय ही तो रूकेगी.

          श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत – पढ़े लिखे होते तो फिर आप यहां पर बैठते(हंसी)

          श्री अभय मिश्रा – मुझे डर लगता है, मुझे चंद्रकांता सीरियल याद आता है.(हंसी)

          श्री नारायण सिंह पट्टा (बिछिया) – सभापति महोदया, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री द्वारा प्रस्‍तुत मध्‍यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज संशोधन विधेयक 2026 पर मैं अपने विचार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं. सभापति महोदया, सबसे पहले मैं यह स्‍पष्‍ट कर दूं कि हमारी पार्टी यानि कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र की सबसे मजबूत और मूलभूत ग्राम पंचायतों को इकाई मानती है. महात्‍मा गांधी जी का ग्राम स्‍वराज केवल एक नारा नहीं था, बल्कि ऐसा भारत बनाने का सपना था जहां निर्णय लेने की वास्‍‍तविक शक्ति गांव के लोगों के हाथ में हो, दुर्भाग्‍य से आज मध्‍यप्रदेश में पंचायतें लगातार कमजोर होती जा रही हैं और सत्‍ता का केंद्रीकरण बढ़ता जा रहा है. सरकार इस संशोधन विधेयक को पंचायतों को सशक्‍त बनाने वाला बता रही है, लेकिन वास्‍तविकता यह है कि पंचायत के सामने सबसे बड़ी समस्‍या कानून की नहीं बल्कि अधिकार संसाधन और वित्‍तीय स्‍वायत्‍ता की है. आज ग्राम पंचायतों के पास पर्याप्‍त धन नहीं है, समय पर राशि जारी नहीं होती है, अनेक योजनाओं का भुगतान समय पर नहीं हो पाता है, सरपंच और पंच जनता के बीच में जवाबदेह तो है लेकिन उन्‍हें निर्णय लेने की स्‍वतंत्रता नहीं है, अधिकारी और विभाग द्वारा पंचायतों के अधिकार और क्षेत्र में लगातार हस्‍तक्षेप करके पंचायतों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है. यदि सरकार वास्‍तव में पंचायतों को मजबूत करना चाहती है तो बताये कि ग्राम सभाओं के निर्णय को बाध्‍यकारी क्‍यों नहीं बनाया गया है? पंचायतों को वित्‍तीय अधिकारी क्‍यों नहीं दिये गये हैं? पंचायत प्रतिनिधियों का नियमित प्रशिक्षण और क्षमता का विकास क्‍यों नहीं हो रहा है ?पंचायतों में आज भी बहुत से ऐसे रिक्‍त पद हैं, वह भरे नहीं जा पा रहे हैं. मैं आदिवासी बाहुल्‍य मंडला जिले की विधानसभा बिछिया का प्रतिधिनित्‍व करता हूं, आज भी ग्रामीण क्षेत्र के कुछ ऐसे मजरे टोले गांव हैं, जो कच्‍चे मार्ग हैं, वर्षाकाल के समय में विद्यार्थियों को आमजनों को स्‍कूल जाने में आवागमन की सुविधा में अवरोध होता है. पंचायतों के पास पहले की सरकारों में बजट की व्‍यवस्‍था होती थी, उसमें पंचायत और ग्राम सभा प्रस्‍ताव करती थीं और ऐसे मार्गों को सुगम बनाने का काम किया करते थे, आज पंचायतें बार बार प्रस्‍ताव करती हैं, लेकिन फाईलों में दबकर रह जाते हैं, ग्राम सभा की अनुशंसा का सम्‍मान नहीं होता है और ग्राम स्‍वराज केवल कागजों तक सीमित रह गया है. सभापति महोदया, आज पंचायत प्रतिनिधियों पर जिम्‍मेदारियां बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन अधिकार नहीं. योजनाओं का क्रियान्‍वयन पंचायतों से अपेक्षित है, परंतु निर्णय अधिकारी लेते हैं, इससे स्‍थानीय लोकतंत्र कमजोर होता है, सभापति महोदया, हमारी पार्टी का मानना है कि पंचायतें केवल निर्माण कराने की एजेंसी नहीं है. बल्कि स्‍थानीय लोकतंत्र की आत्‍मा है इसलिये सरकार को चाहिये कि पंचायतों को कार्य, वित्‍त और कार्मिक ये तीनों अधिकार पूरी तरह से उपलब्‍ध कराये जायें. हम सरकार से और माननीय मंत्री जी से आग्रह करते हैं कि इस संशोधन विधेयक को केवल औपचारिक संशोधन तक सीमित न रखकर इसमें निम्‍न प्रकार के सुधार भी शामिल किये जायें. पहला ग्राम सभा के निर्णय को अधिक प्रभावी और बाध्‍यकारी बनाया जाये. सभापति महोदय, दूसरा पंचायतों को समयबद्ध वित्‍तीय संसाधन उपलब्‍ध कराने की कानूनी व्‍यवस्‍था हो, तीसरा पंचायतों के अधिकारों में अनावश्‍यक प्रशासनिक हस्‍तक्षेप समाप्‍त किये जायें. चौथा सामाजिक अंकेक्षण जो सोशल आडिट को मजबूत कर भ्रष्‍टाचार पर प्रभावी नियंत्रण किया जाये, पांचवां अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा अधिनियम की भावनाओं के अनुरूप ग्रामसभाओं को वास्‍तविक अधिकार दिये जायें. अंत में मैं यह चाहता हूं कि जो लोकतंत्र है वह भोपाल के मंत्रालय से नहीं बल्कि गांव की चौपाल से मजबूत होता है. यदि सरकार सचमुच ग्राम स्‍वराज चाहती है तो पंचायत पर भरोसा करना होगा, उन्‍हें अधिकार देने होंगे, उनके निर्णयों का सम्‍मान करना होगा और सरकार से हम यह भी आग्रह करते हैं कि इस विधेयक पर यह जो सारी बातें हमने कहीं हैं इन पर पुन: विचार करें और आवश्‍यक संशोधन स्‍वीकार करें और पंचायतों को वास्‍तव में स्‍वायत्‍त एवं सशक्‍त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाये जायें ताकि हमारी ग्राम पंचायत और ग्राम सभायें मजबूत हो सकें और जो वित्‍तीय संसाधनों का अधिकार हमारे सरपंच और पंचों को दिया जा सके यह संशोधन इस विधेयक में शामिल किया जाये. सभपति महोदय, आपने बोलने का समय दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री दिव्‍यराज सिंह (सिरमौर)—माननीय सभापति महोदया, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी द्वारा लाये गये पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज संशोधन विधेयक, 2026 के पक्ष में अपना वक्‍तव्‍य रखूंगा. माननीय सभापति महोदया, जैसा कि माननीय हमारे मंत्री जी ने स्‍पष्‍ट किया है, मैं बहुत ज्‍यादा लंबा नहीं बोलूंगा, इसमें केवल इतना ही मेरे ख्‍याल से विधेयक के संशोधन से हमारी सरकार करना चाहती है कि जो हमारे ग्रामीण क्षेत्र में सरकार ने जो अभी स्‍वामित्‍व योजना के माध्‍यम से जो पट्टे दिये गये थे उसमें अतिरिक्‍त स्‍टॉम्‍प शुल्‍क का भार उन गरीबों पर पड़ता था और उस स्‍टॉम्‍प शुल्‍क में कोई राहत हम लोग सरकार के माध्‍यम से नहीं दे पाते थे केवल उस स्‍टॉम्‍प शुल्‍क पर राहत देने का काम इस संशोधन के माध्‍यम से दिया जायेगा और बाकी में जो हम लोग नार्मल जो रजिस्ट्रियां होती थीं उनमें कोई आपत्ति नहीं आयेगी, उसमें स्‍टॉम्‍प शुल्‍क जो पंचायत को पैसा मिलना था वह पहले की तरह अभी भी प्राप्‍त होता रहेगा. निश्चित रूप से ग्रामीण क्षेत्र में अभी हमारे मध्‍यप्रदेश में खासकर हमारे ग्रामीण विधान सभाओं में ऐसे बहुत सारे गरीब वर्ग हैं, हमारे आदिवासी वर्ग हैं, छोटे समाज के लोग हैं जो आबादी की भूमि पर अपना जीवन व्‍यतीत कर रहे हैं, उनको हमारी सरकार ने स्‍वामित्‍व योजना के माध्‍यम से उन सबको पट्टा देने का काम तेजी से शुरू कर दिया है और उनको अगर यह स्‍टॉम्‍प शुल्‍क लगता है तो जो पहले से ही गरीब हैं और अगर उसको शुल्‍क देना पड़ेगा तो उसके ऊपर एक बहुत बड़ा भार कहीं न कहीं से आ जाता था तो सरकार ने, माननीय मोहन यादव जी ने, माननीय मंत्री जी ने इसको हटाने का काम किया है, इसके लिये मैं उनको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूँ और आशा करता हूं कि इसके माध्‍यम से जो गरीबों का अधिकार है, हमारी सरकार चाहती है कि हर गरीब के पास खुद के रहने की जमीन हो, खुद के रहने का पट्टा हो, और खुद के रहने का मकान हो और इसके माध्‍यम से जो हमारी सरकार की मंशा है कि उसका खुद का घर, खुद की जमीन और खुद का पक्‍का मकान प्राप्‍त हो सके इसके लिये बहुत महत्‍वपूर्ण स्‍टॉम्‍प शुल्‍क जो आप लोगों ने लाया है, इसके लिये मैं आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूं. धन्‍यवाद.

            श्री विजय रेवनाथ चौरे(सौंसर) - माननीय सभापति महोदय, किसान और मजदूर इस देश की आत्मा है और सरकार बड़े बड़े दावे करती है कि किसान की आय दुगुनी हो गई चार गुनी हो गई शिवराज सिंह जी  तो 8 गुना कहते हैं किसान की आय दुगुनी तो नहीं लेकिन आत्महत्या जरूर दुगुनी हो गईं.स्टाम्प से संबंधित विधेयक है मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि पारिवारिक बटवारा जो होता है उसमें अधिकार पहले ग्राम पंचायतों को दिये जाते थे और अब तहसीलदार के पास हो गये हैं मान लीजिये उदाहरण के लिये एक परिवार में दो भाई दो बहन हैं और बहन अपना हिस्सा भाई को देना चाहती है तो उसमें भी स्टाम्प ड्यूटी के पैसे तहसीलदार के यहां जमा करना है और उसके बाद पहले उसके नाम रजिस्ट्री होगी तब भाईयों के नाम चढ़ेगा तो जो पहले अधिकार थे उस अधिकार को ग्राम पंचायत को दिये जायें और पारिवारिक बंटवारा पहले से स्टाम्प पेपर पर लिख लें 500 रुपये,1000 रुपये के दफ्तरों के चक्कर जो लगाना पड़ते हैं तहसीलदार के यहां चक्कर लगाना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाना है कोई भी तहसील आफिस में चले जाओ बिना भ्रष्टाचार के काम ही नहीं होता.वापस ग्राम पंचायत को अधिकार दिये जायें पारिवारिक बंटवारे के चाहे जमीन हो,खेत हो,उसका अधिकार ग्राम पंचायत को मिलना चाहिये. एक सुझाव माननीय पंचायत मंत्री जी,मनरेगा भी आपके पास है और विशेषकर मेरा अनुरोध है कि एक बिल ऐसा भी लाया जाये कि बहुत सारे किसान जिनके खेत मेन रोड से दो-दो किमी दूर हैं.कच्ची सड़क है सड़क भी नहीं हैतो मनरेगा के माध्यम से बहुत बड़ा काम आप कर लेंगे जिसको आपने जीरामजी योजना नाम दिया है तो खेत में किसानों को जाने के लिये बहुत परेशानी होती है आपके हमारे बड़े-बड़े नेताओं के,मंत्रियों के,मुख्यमंत्री की,उद्योगपति की जमीनें हैं वह तो हाईवे पर चमचमाती सड़क पर हैं उनके पैर में तो कंकड़ भी नहीं लगता लेकिन हजारों की संख्या में किसानों के खेत जो बहुत अंदर हैं और उनको माल लाने ले जाने में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है तो एक कानून इस पर भी बने तो हम लोग भी आपको धन्यवाद देंगे क्योंकि यह मामला किसानों से जुड़ा है और पंचायत विभाग आपके पास है तो मनरेगा के माध्यम से न पक्की सड़क बने कच्ची सड़क बन जाये तो वह किसान भी आपको दुआ देगा वह अन्नदाता इस देश का मालिक है और किसान और मजदूर इस देश की आत्मा है. मेरा एक और सुझाव है यह जो बिल आप लाये हैं कानून स्टाम्प ड्यूटी लाये हैं उसके बारे में मैं इसलिये कहना चाह रहा हूं कि हमारे क्षेत्र में जंगली सुअर,नीलगाय का बहुत आतंक है तो आपकी मनरेगा की योजना के माध्यम से इसमें फेंसिंग कराई जाये.सरकार ने घोषणा तो की है लेकिन अमल नहीं हुआ है तो मनरेगा के माध्यम से फेंसिंग की सुविधा दी जाये तो कम से कम 60 प्रतिशत अनुदान मिले तो किसान की जो भारी समस्या है वह मक्का बोता है मूंगफली बोता है दूसरी फसल बोता है तो बहुत संघर्ष करना होता है. हमारे मिश्रा जी ने जो कहा पंचों की बात,तो ग्राम पंचायत इतनी सक्षम नहीं है. एक तो आप 16वें वित्त आयोग, 17वें वित्त आयोग उनको देते हैं तो उसमें बहुत कम राशि होती है आप सोचेंगे कि पंचायतें टेक्स वसूल कर ले या नल बिल वसूल कर ले तो यह संभव नहीं है क्योंकि वह अगर वसूल करने जायेगा तो उसे पता है कि मैं अगर वसूली करूंगा सख्ती का रुख अपनाऊंगा तो अगली बार मुझे फिर चुनाव में जाना है मैं बदनाम क्यों होऊं तो पंचायतों को सक्षम बनाया जाये पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत करिये उनकी 15वें,16वें,17वें वित्त आयोग की राशि बढ़ाईये जो आज आप दे रहे हैं उसको दुगुनी करिये क्योंकि कई गांवों में बिजली की लाईन बिल के कारण कट जाती है नलजल योजना  बंद हो जाती है. कई ऐसे गांव हैं मेरे विधान सभा क्षेत्र में 25-30 गांव हैं जिनके ऊपर 5-5 लाख बिल बकाया है बिल इसलिये नहीं देते क्योंकि टेक्स वसूल होता नहीं है. इतना टेक्स ग्राम पंचायत को आता ही नहीं है.इतनी वसूली करते ही नहीं है तो इतनी बड़ी राशि पंचायतें कहां से देंगी तो बहुत सारे मेरे सुझाव हैं मंत्री जी को आने वाले समय में उन पर जरूर अमल करेंगे. आपने समय दिया बहुत-बहुत धन्यवाद.

03.15 बजे                {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}        

श्री राजन मण्डलोई (बड़वानी) माननीय अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद, मुझे पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2026 की चर्चा में बोलने का मौका मिला. मैं इसके विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ.

अध्यक्ष महोदय, जैसा कि हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय आदरणीय श्री राजीव गांधी ने संविधान में 73वां और 74वां संशोधन करने के बाद पंचायतों को और स्थानीय प्रशासन को वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सौंपे हैं. इसके बाद एक नारा चल पड़ा था कि ‘’ विधानसभा ना लोकसभा, सबसे बड़ी ग्रामसभा’’, पर इसके बावजूद आज ग्रामसभाओं की क्या स्थिति है. ग्रामसभा में विकास के लिए उनको राज्य शासन, केन्द्र शासन और अन्य विभागों की ओर भागना पड़ता है. यहां तक कि सरपंच और सचिव की यह हालत हो गई है कि वे अपने गांवों की मूलभूत समस्याओं को हल कराने के लिए और विकास कार्य कराने के लिए बार-बार जनपद पंचायत में, जिला पंचायत में, मुख्यमंत्री जी को, मंत्रियों को, विधायकों को और सांसदों को आवेदन निवेदन करते रहते हैं.

अध्यक्ष महोदय, आज गांवों की स्थिति बहुत खराब है. गांवों में विकास कार्य पूरी तरह

ठप्प हैं. गांवों में विकास कार्यों के लिए नाममात्र का पैसा आ रहा है. अब यह जो संशोधन विधेयक आया है, इस संशोधन विधेयक में अधिनियम की धारा 75 (1) में जो संपत्ति के हस्तांतरण पर अतिरिक्त स्टॉम्प शुल्क का अधिकार पंचायत को था और अतिरिक्त स्टॉम्प शुल्क लगभग 1 प्रतिशत था, जो राज्य शासन के पास ही इकट्ठा होता था और राज्य शासन उसको वापस पंचायतों को उनके विकास कार्यों के लिए, यहां तक कि पंचायत विभाग में जो कार्यरत कर्मचारी हैं, उनके वेतन-भत्तों के लिए भुगतान करती थी. अब ये स्थिति है कि पंचायतों में, ये जो शुल्क दिया है, इसका एक बहाना यह लिया जा रहा है कि स्वामित्व की रजिस्ट्री कहा जा रहा है. क्या केवल स्वामित्व की रजिस्ट्री के लिए ही यह छूट दी जा रही है. यह केवल बहाना है. इस संशोधन विधेयक में इसका कहीं उल्लेख नहीं है कि यह केवल स्वामित्व की रजिस्ट्री के लिए दी जा रही है. इसमें स्पष्ट है कि रजिस्ट्री या बंधक दान या ऐसी कोई लिखित जिसमें स्टॉम्प ड्यूटी लगती है, उसके लिए यह संशोधन लाया जा रहा है. तो जो पंचायतों को एक अतिरिक्त स्टॉम्प ड्यूटी का पैसा मिलता था, इस बिल के बाद वह पैसा खत्म हो जाएगा. पंचायतों की आर्थिक स्थिति क्या है. पंचायतों को राशि कैसे आएगी. पंचायतें अपने क्षेत्र में मूलभूत समस्याओं को कैसे हल कर पाएंगी, विकास कार्य कैसे करा पाएगी, यह विचारणीय प्रश्न है. इसलिए मैं इस विधेयक के विरोध में बोल रहा हूँ.

          अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री बैठे हुए हैं, मैं उनके ध्यान में एक बात लाना चाहता हूँ कि शहरी क्षेत्रों के समीप जो पंचायतें लगी हुई हैं, उन पंचायतों के अंदर बहुत ज्यादा निर्माण कार्य और विकास कार्य हो रहे हैं और चूँकि जो जमीनों की रजिस्ट्री होती हैं, लोग अपने मकानों के लिए, घर-प्लॉट आदि के लिए निर्माण की अनुमति चाहते हैं तो इन पंचायतों में यह हो रहा है कि जो पंचायत सचिव है, वह जो निर्वाचित सरंपच और पंच हैं, उनको धोखे में रखकर पंचायत की एक रसीद कट्टा रखता है, जिसके द्वारा निर्माण अनुमति शुल्क, संपत्ति शुल्क और जलकर शुल्क जैसे बहुत से शुल्क लेता है. वह शुल्क कहां जाता है, उसकी न तो सरपंच को जानकारी होती है, न पंचों को जानकारी होती है और न ग्रामसभा को जानकारी होती है. उस शुल्क का वह गबन करके खर्च कर देता है. यहां तक कि जनपद पंचायत के सीईओ या जिला पंचायत के सीईओ तक को इसकी जानकारी नहीं होती है. मेरे बड़वानी विधान सभा के अंतर्गत जिला मुख्यालय बड़वानी से लगी हुई एक पंचायत है, ग्राम पंचायत बड़गांव, वहां की यही स्थिति है. मैंने जनपद पंचायत में और जिला पंचायत में जानकारी मांगने की कोशिश की लेकिन आज तक मुझे कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है. मैंने यहां विधानसभा में प्रश्न लगाया था और अपर मुख्य सचिव को भी पत्र लिखा था, लेकिन वे बोल रहे हैं कि वह पत्र प्राप्त ही नहीं हुआ, इसलिए जानकारी देना संभव नहीं है. लेकिन वास्तविक स्थिति यह है कि ग्राम पंचायत बड़गांव में पंचायत के सचिव द्वारा जो निर्माण कार्य की अनुमति के नाम से, संपत्ति कर के नाम से, जल कर के नाम से जो रसीद कट्टे लगाए गए हैं, वह पूरी तरह से फर्जी लगाए गए हैं. उसने राशि अपने जेब में रखी. उसका कोई हिसाब-किताब नहीं है. बैंक में कोई एकाउंट नहीं है. उस पैसे का क्या उपयोग किया गया, उसका कोई रिकार्ड नहीं है. अत: ऐसा कोई मेकेनिज्म बनना चाहिए, ऐसा कोई सिस्टम बनना चाहिए कि उस पर निगरानी हो. जिला पंचायत सीईओ की निगरानी हो या जनपद पंचायत सीईओ की निगरानी होनी चाहिए, लेकिन ऐसी कोई निगरानी का प्रावधान नहीं है. मैं अंत में यही कहना चाहूँगा कि ये जो संशोधन विधेयक आया है, इससे जो पंचायतों को एक प्रतिशत अतिरिक्त स्टॉम्प शुल्क मिलने वाला था, वह रुक जाएगा और पंचायतों में विकास कार्य नहीं हो पाएंगे. इसलिए अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूँ कि इस बिल को वापस लिया जाए. धन्यवाद. जय हिन्द, जय भारत.

श्री बाबू जन्‍डेल – (अनुपस्थित)

श्री दिनेश गुर्जर (मुरैना) – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज (संशोधन) विधेयक, 2026 का विरोध करता हूँ. इस विधेयक में पंचायतों में जनप्रतिनिधियों के अधिकार कम करके, अधिकारियों को अधिकार देने की बात है. यह विधेयक भेदभावपूर्ण तरीके से लाया गया है. मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूँ कि स्‍वामित्‍व योजना, जो लोगों की आबादी की जमीन है,मु फ्त में रजिस्ट्रियां करनी थीं, तो फिर यह किसके लिये आप संशोधन विधेयक ला रहे हैं, इसकी जानकारी हमको अभी दी जाये. दूसरा, हम लोग ग्रामीण परिवेश से आते हैं, लगभग ढाई वर्ष मुझे सदन में बैठे हुए हो गये हैं, पर आज तक कभी गरीब किसान, मजदूर और ग्रामीण क्षेत्र के लिए ऐसी कोई योजना नहीं बनी, शहर के लिये हम सुनते हैं कि बड़े-बड़े अस्‍पताल बनाये जा रहे हैं, विद्यालय-महाविद्यालय अच्‍छे-अच्‍छे बनाये जा रहे हैं, सड़कें अच्‍छी बनाई जा रही हैं, बायपास रोड बनाये जा रहे हैं तो ग्रामीण लोगों का कौन सा पाप है ? ग्रामीण छात्र-छात्राओं का कौन सा अपराध है ? हम लोग ग्रामीण क्षेत्रों में मांग करते हैं कि वहां विद्यालय खोले जायें तो सरकार की तरफ से जवाब आता है कि डेढ़ -दो किलोमीटर की दूरी पर विद्यालय होने के कारण हम वहां विद्यालय नहीं खोल सकते हैं. क्‍या हमारी बहन-बेटियां जो ग्रामीण परिवेश में रहती हैं, वह अपने आपको सुरक्षित महसूस करेंगी. इस परिवेश में, जिसमें आये दिन अपराध हो रहे हैं. ऐसी स्थिति में एक गांव की बेटी 2 किलोमीटर पढ़ने कैसे जायेगी ? शहर के बेटा-बेटी रिक्‍शे से, ई-रिक्‍शे से, ऑटो एवं बस में बैठकर चले जायेंगे. ग्रामीण क्षेत्रों में संसाधनों की कमी रहती है, क्‍या इस पर सरकार ने कभी कोई विचार किया है ? क्‍या ग्रामीण क्षेत्र में बिजली किसानों को पर्याप्‍त मिल रही है ? क्‍या विद्यार्थियों को शिक्षा मिल रही है ? सामुदायिक भवन, पंचायत भवन हैं कि नहीं. शहरी क्षेत्र की जनता की सरकार चिन्‍ता करती है, ऐसी ग्रामीण क्षेत्र की जनता की चिन्‍ता क्‍यों नहीं करती है.

अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पंचायत मंत्री महोदय से आग्रह है कि जो पूरे मध्‍यप्रदेश में भेदभाव होता है और खास तौर पर, मैं मुरैना जिले की बात करूँगा. आपने किसी विधान सभा में 50-50 सामुदायिक भवन दे दिए हैं, किसी विधान सभा में 4 सामुदायिक भवन भी नहीं हैं, किसी विधान सभा में सड़कें 10-10 दी हैं, किसी में 50-50 दे दीं,किसी विधान सभा में 1-1 भी नहीं दी. माननीय पंचायत मंत्री जी बहुत ही संवेदनशील हैं और उनका भाव है कि मध्‍यप्रदेश में विकास हो, ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का उत्‍थान हो. यह  जो भेदभाव किया जा रहा है, यह न करके सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, सड़कें तथा अन्‍य जो हमारी विकास योजनाएं हैं, आप सभी विधायकों को समान रूप से दें क्‍योंकि मुरैना विधान सभा में भी भारतीय जनता पार्टी के प्रत्‍याशी को 50 हजार वोट मिले थे, तो आप उनके साथ भेदभाव करके 50 हजार वोटों का भी अपमान कर रहे हैं. मेरा आग्रह है कि क्‍या हम लोगों को मुरैना के अन्‍दर विकास करना, हम लोग भी जनता के आशीर्वाद से जीतकर आए हैं.  हम चाहते हैं कि मुरैना विधान सभा क्षेत्र के अन्‍दर ग्रामीण परिवेश में भी हमारे लोगों के लिए भी अच्‍छे हॉस्पिटल्‍स हों, स्‍कूल हों, पंचायत भवन हों, सामुदायिक भवन हों, सड़कें हो. यह सब चीजें जब आएंगी, तो निश्चित तौर पर हमारे किसान के बेटा-बेटी भी अच्‍छी शिक्षा ग्रहण करेगा, अच्‍छे वातावरण में रहेगा. मेरा पंचायत मंत्री जी से आग्रह है कि आगे आप जो भी विधेयक लायें, तो उसमें यह अनिवार्य करें कि हर पंचायत में एक विद्यालय होगा, हर पंचायत में सड़क दी जाये, स्‍वास्‍थ्‍य के लिए स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र होगा, जिसमें अच्‍छे डॉक्‍टर बैठेंगे, जो प्रायवेट विद्यालयों में हमारे ग्रामीण क्षेत्र के छात्रा-छात्राएं जाते हैं, कई माता-पिताओं के पास स्‍कूटर और मोटर साइकिल नहीं हैं, साइकिलों से छोड़ने जाते हैं और पैदल ले आते हैं. क्‍या मध्‍यप्रदेश की सरकार ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छत्राओं के लिए बसों की व्‍यवस्‍था करेगी ? जिससे की वह अपने समय पर स्‍कूल जा सकें.  मेरा आग्रह है कि इस तरह के विधेयक लाये जायें, जिससे हमारे ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएं भी बहुत अच्‍छा जीवन जी सकें, अच्‍छे से शिक्षा ग्रहण कर सकें. मुझे अपने विचार रखने का माननीय अध्‍यक्ष जी आपने अवसर दिया, मैं इसके लिये हृदय की गहराई से आपको धन्‍यवाद देता हूँ और यह विश्‍वास करता हूँ कि माननीय पंचायत मंत्री जी इस पर विशेष ध्‍यान देकर भेदभाव खत्‍म कर सभी क्षेत्रों में विकास के कार्य करेंगे. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.       

            राज्‍यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास (श्रीमती राधा रविन्‍द्र सिंह)-  अध्‍यक्ष महोदय, आज इस चर्चा के दौरान बहुत से सुझाव आए. हमारे सदस्‍य श्री अभय मिश्रा ने कहा है कि पंचों को मानदेय केवल रुपये 100 दिया जाता है और उनकी बैठक नहीं की जाती है. मैं आपको बताना चाहूंगी कि हमने पंचों का मानदेय रुपये 100 से बढ़ाकर, रुपये 300 कर दिया है और समय-समय पर अपनी व्‍यवस्‍थानुसार सरपंच अपनी बैठक करते हैं. उनकी बैठक होती है, मुझे लगता है कि मिश्रा जी को अपने क्षेत्र में घूमना चाहिए.  

(मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, हमारे सदस्‍य श्री नारायण सिंह पट्टा ने भी बहुत सारी बातें कहीं हैं. मुझे लगता है कि आपको जानकारी है या नहीं, मुझे नहीं पता लेकिन मैं आपको बताना चाहूंगी कि हमने पिछले वर्ष अपनी ग्राम पंचायतों में सामुदायिक भवन रुपये 25 लाख के दिए थे, उनमें पंचायतों को ही एजेंसी बनाया था. हमने पंचायत भवन रुपये 37.5 लाख दिए हैं, उसके लिए भी हमने पंचायतों को ही एजेंसी बनाया है. केवल रुपये 25 लाख तक की सीमा थी लेकिन हमने उसे बढ़ाकर रुपये 37.5 लाख किया है, ये आपकी जानकारी में होना चाहिए.

(मेजों की थपथपाहट)

          श्री नारायण सिंह पट्टाहमारे यहां भवन मिला ही नहीं है.

          श्रीमती राधा रविन्‍द्र सिंहअध्‍यक्ष महोदय, मैं, अपने विभाग के विषय में बहुत अच्‍छे से जानती हूं और आपको बता रही हूं और सही बातों को ग्रहण करना चाहिए. हम भी जानते हैं, पहले कांग्रेस के जमाने में क्‍या होता था, एक आवास के लिए भी बहुत गिड़गिड़ाना पड़ता था. लेकिन आज हम ढूंढ-ढूंढकर, सर्वे करके अपने विभाग से आवास भी दे रहे हैं, इसके लिए मैं अपने प्रधानमंत्री जी एवं मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद दूंगी कि वे उन गरीबों के लिए कितने तटस्‍थ हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, अभी श्री दिनेश गुर्जर जी ने कहा कि सड़कें नहीं है. गांव में सड़कें नहीं हैं. मैं भी जानती हूं कि आपके जमाने सड़कें कितनी थीं.

          श्री दिनेश गुर्जरमंत्री जी, इस बिल में जो संशोधन है, उसके विषय में तो  बतायें. 

          श्रीमती राधा रविन्‍द्र सिंहभाई, आप सुनो तो सही, सुनने का ह्दय तो रखो. आपकी बातों को हमने शांति से सुना है, आप भी सुनें. मैं बताना चाहूंगी कि आज हमारी बेटियां-बेटे, वे गरीब बच्‍चे आज स्‍कूल साइकिल से जाते हैं. वे 3-5 किलोमीटर दूर जाते हैं, वे सड़कें बनी हैं, तभी तो हमारे बच्‍चे स्‍कूल जाते हैं. यदि सड़कें नहीं बनी होती तो हम जो साइकिल देते हैं, उससे बच्‍चे स्‍कूल कैसे जा पाते ? आपका कहना है कि सड़कें नहीं बनी हैं. (मेजों की थपथपाहट)

          आप भी क्षेत्र में भ्रमण किया करें. अगली बार और विधायक बनना है तो भ्रमण किया करें.

          श्री दिनेश गुर्जरमैंने विद्यालय की बात की है. सड़कों का नहीं बोला है. मुरैना जिले में विद्यालय कितने हैं, आप बतायें.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेलभाई, आपने सड़क का भी बोला है.

          श्रीमती राधा रविन्‍द्र सिंहअध्‍यक्ष महोदय, विद्यालय के विषय में बता दूं, हमने अपने शिक्षा मंत्री जी को पूरी लिस्‍ट पकड़ाई है. कृपया करके ऐसी बातें कहने के पहले ढर्रे से बाहर आइये. यह आपकी प्रवृत्ति हो सकती है हमारी कार्यप्रणाली का हिस्‍सा नहीं है. दूसरा, जब हम बिल पर बोलने की बात करते हैं, सत्‍ता पक्ष से केवल दो ही लोग बोले हैं, वहां से 6 लोग बोले हैं, लेकिन उसके बावजूद भी हम मांग ही करते रहे बिल पर नहीं बोले. इसमें सिर्फ एक ही पंक्ति का संशोधन था कि हमारे पास पैसा हमारा ही है, हमें किसी से लेना नहीं, हमें किसी को देना नहीं, लेकिन जो स्‍वा‍मित्‍व योजना माननीय प्रधानमंत्री जी ने चलाई थी कि जिनको पट्टे मिलते हैं, क्‍योंकि अब रजिस्‍ट्री होगी तब जाकर बाकी चीजें आगे बढ़ेंगी. वह गरीब लोग ही हैं जिनको पट्टे मिले हैं लेकिन रजिस्‍ट्री का 5 प्रतिशत पैसा लगता है. सामान्‍यत: राजस्‍व विभाग ने उसको पैसा दिया है 4 प्रतिशत, अगर 1 प्रतिशत हमने दे दिया उन गरीबों के लिए, तो आपको आपत्ति नहीं होनी चाहिए. आपको तो उसका धन्‍यवाद करना चाहिए. खाली हमारे पास यह अधिकार नहीं था इस कारण से हमें यह मनी बिल लेकर आना पड़ा. पैसा हमारा ही है. हम उसको पंचायत भवन के निर्माण में दे दें या हम अपने गरीब आदमी की रजिस्‍ट्री में कुछ अंशदान कर दें. इतनी सी बात है. चूंकि हमारे कानून में इस बिंदु का कोई प्रावधान नहीं था इसलिए हम यह बिल लेकर आए हैं, अन्‍यथा इससे कहीं ज्‍यादा उसमें कुछ है नहीं. इसलिए मुझे लगता है कि कम से कम अगर बिल के उद्देश्‍य को या बाकी चीजों को पढ़ा होता तो चूंकि अधिकार हमारे पास नहीं था इसलिए अध्‍यादेश पहले निकाला और उसको बिल के रूप में आपके सामने लेकर आए हैं. इसलिए मैं प्रार्थना करता हूं कि इस बिल का आप समर्थन करें. धन्‍यवाद अध्‍यक्ष महोदय.

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज (संशोधन) विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.

          प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

          अब विधेयक के खण्‍डों पर विचार होगा.

          प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 2 तथा 3 इस विधेयक का अंग बनें.

          खण्‍ड 2 तथा 3 विधेयक का अंग बने.

          प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 1 पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र इस विधेयक का अंग बने.

          खण्‍ड 1 पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र इस विधेयक का अंग बना.

          श्रीमती राधा सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं, प्रस्‍ताव करती हूं कि मध्‍यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय --  प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ.

          प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया जाय.

          प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

          विधेयक पारित हुआ.

 

 

(4) मध्‍यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026

          उप मुख्‍यमंत्री (लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा) (श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं, प्रस्‍ताव करता हूं कि मध्‍यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ.

          श्री लखन घनघोरिया (जबलपुर पूर्व) -- अध्‍यक्ष महोदय, आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 के संदर्भ में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. हमारे जबलपुर में एक अच्‍छे कवि, स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानी और बाद में महापौर बने, श्री भवानी प्रसाद तिवारी जी का यह दो लाइन राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी को सुनाना चाहता हूं कि ‘’हमको तो उस वैद्य की विद्या पर तरस आता है, जो भूखे पेट को सेहत की दवा देता है.’’

अध्‍यक्ष महोदय, हमारे यह ऐसे वैद्य हैं जिन्‍होंने मेडिकल यूनिवर्सिटी की ही सर्जरी कर दी. जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी वर्ष 2002 में हीरक जयंती समारोह में तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह जी ने वहीं पर घोषणा की थी. उसके बाद में 2003 में पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती जी ने उसकी वहीं पर पुष्टि की थी, वर्ष 2004 में  बाबूलाल जी गौर मुख्यमंत्री बने वहीं जाकर के उन्होंने पुष्टि की, कि यहीं पर बनेगी, बहुत वक्र-दृष्टि भी पड़ी उस पर , अनूप मिश्रा जी स्वास्थ्य मंत्री थे 2008 में उनकी भी दृष्टि पड़ी कि यह यूनिवर्सिटी ग्वालियर के चन्द्रपुर में जाना चाहिये. लेकिन अंतत: यह आसंदी की वजह से क्योंकि उस समय स्वर्गीय ईश्वरदास रोहाणी जी आसंदी पर बैठे थे. उन्होंने जबलपुर के इस पक्ष को मजबूती से सरकार के सामने रखा 6.5.2011 में यह यूनिवर्सिटी के स्वरूप में आई और कारण भी था हमारा, दावा अकारण नहीं था कि अकारण आ गया हो, लंबे समय का मेडिकल कालेज जिसमें 24 विभाग  635  एकड़ निजी जमीन, और दावा इसलिये था कि तीन अंचल इसमें शामिल थे, महाकौशल, बुन्देलखण्ड और विंध्य. दमोह-सागर जबलपुर से 100 पर लगा हुआ है, सतना रीवा भी लगा हुआ क्षेत्र है और आदिवासी बहुलता का क्षेत्र था, बड़ी जद्दोजगद के बाद में यूनिवर्सिटी का निर्माण हुआ. जैसे तैसे यूनिवर्सिटी बनी 26 करोड़ रूपया माननीय मंत्री जी ने खर्चा बताया तो यूनिवर्सिटी तो बनी लेकिन चूंकि शिवराज सिंह चौहान जी के कार्यकाल में बनी थी 2011 में बनी थी, 15 साल ही हुआ है, इतना लंबा समय भी नहीं हुआ है कि उसका बिखंडन इतनी जल्दी हो जाये, सिर्फ इसलिये हो जाये, कारण भी नहीं है कोई, इसलिये बिभंडन हो जाये कि शिवराज सिंह चौहान के समय पर बनी थी.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, जबलपुर शैक्षणिक स्तर पर एक महत्वपूर्ण स्थान और शहर इसलिये रहा है कि यहां पर एक नहीं दो दो यूनिवर्सिटी थी. पहले जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय पूरे मध्यप्रदेश का एक था और रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय था, बिखंडन हुआ जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय का, एक दंश था जबलपुर के लोगों को, इसीलिये जबलपुर को संस्कारधारी भी बोला जाता था , शैक्षणिक महत्व था, यूनिवर्सिटी का जब विभाजन हुआ तो एक यूनिवर्सिटी ग्वालियर चली गई , 2011 में जब यह यूनिवर्सिटी बनी तो चूरन जो देते हैं, गजब का 2025 में आपने बढ़िया नाम दिया,यहीं पर आपने बोला कि महर्षि सुश्रुत जिनको प्राचीन भारत का महान शल्यचिकित्सक (सर्जन) और शल्य चिकित्सा का जनक (Father of Surgery) माना जाता है महर्षि सुश्रुत के नाम पर इसका नाम रखा जायेगा ,यह 2025 में आपने बोला था, अभी 2026 में बोला एमबीबीएस की पढ़ाई हिंदी में होगी, यहीं पर बिल लाये और बिल्कुल वैसा ही करते रहे आप जैसे किसी बकरे की कुर्बानी देना हो उसको बढ़िया खिलाया और पिलाया जाता है उसी प्रकार से हमारे राजेन्द्र शुक्ल जी की कुछ मजबूरियां रही होंगी लेकिन हमारे यहां की जो शैक्षणिक पहचान थी इस पर तो प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा क्योंकि हमारे साथ में उस समय भी अन्याय हुआ जब जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय का बिखंडन हुआ और इस पर नजर क्यों लगी थी, वक्र दृष्टि क्यों थी उसका कारण भी है कि यह यूनिवर्सिटी की खुद की स्वअर्जित राशि जो है वह 200 करोड़ है. फंड 1 अरब 40 करोड़ रुपये है. घाटे में भी नहीं है. कहीं पर घाटे में नहीं है. पहले तो कटौती की गई, जब से यह सरकार आई, इसके अधीन जितने पैरा मेडिकल कालेज आते थे, जितने नर्सिंग कालेज आते थे, उन सबको क्षेत्रीय विश्वविद्यालय में अटैच कर दिया रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में. यूनिवर्सिटी की आवश्यकता क्यों पड़ी, उसका सबसे बड़ा कारण भी यह रहा है. सबसे बड़ा कारण रहा कि कोई एक विश्वविद्यालय मेडिकल विश्वविद्यालय बने, जिसमें तमाम आयुर्वेदिक, यूनानी, हौम्योपैथी, पैरा मेडिकल, डेंटल, सारे कालेज समाहित हों. सबकी व्यवस्था, व्यवस्थित रूप से चले. अकारण कोई कारण नहीं, घाटे में भी नहीं चल रहे. स्व अर्जित राशि 200 करोड़ रुपये हर साल की है. घाटे में भी नहीं हैं. लेकिन विखण्डन करना है. पहले उसके पर काटे गये. पर काटकर बकायदा कोई दूसरी यूनिवर्सिटी का कुलगुरू किसी का चेला है. और उसके कहने पर सारे पैरा मेडिकल कालेज, नर्सिंग कालेज वहां पर अटैच कर दिये गये. अब पैरा मेडिकल कालेज, नर्सिंग कालेज उसी मेडिकल परिसर में भी हैं. प्राइवेट से लेकर शासकीय सारे पैरा मेडिकल कालेज जबलपुर संभाग के वहां पर अटैच कर दिये हैं.

अध्यक्ष महोदय, पहला पर काटा, दूसरा अभी यह चालू हुआ. बड़ी विचित्र स्थिति है कि यदि यूनिवर्सिटी में कोई खामी थी कोई विफलता यूनिवर्सिटी की है समस्या कहां से आई, समस्या कहां है? समस्या क्या उसके संचालन में है, सरकार बताए विश्वविद्यालय में सरकार की कार्यप्रणाली क्या है? विफलता किसकी है, विश्वविद्यालय की है कि सरकार की कार्यप्रणाली की है. यदि पद रिक्त हैं तो आप उन रिक्त पदों को भरने की कोशिश क्यों नहीं की, यदि पद रिक्त हैं. दूसरा, पहला प्रदेश होगा हमारा मध्यप्रदेश, पूरे हिन्दुस्तान में किसी भी प्रांत में 2 मेडिकल यूनिवर्सिटी नहीं है. किसी भी प्रांत में, हमसे विकसित प्रदेश जो हैं, हमसे बड़ी आबादी में हैं. हमसे ज्यादा विस्तारित हैं, वहां भी 2 मेडिकल यूनिवर्सिटी नहीं हैं. सिर्फ इसलिए न नीति, न नियम, न नीयत, हम सरकार हैं इसलिए हमारे कहने पर यहां आना चाहिए, पहले देहली साइंस कालेज ले गये, जबलपुर से अब मेडिकल यूनिवर्सिटी का विखण्डन, सरकार को यह समझना चाहिए कि समस्या विश्वविद्यालय में है कि सरकार की कार्यप्रणाली में है.

अध्यक्ष महोदय, यदि सरकार की कार्यप्रणाली में है तो मेडिकल यूनिवर्सिटी की प्रशासनिक कठिनाइयां जो हैं उनका समाधान विश्वविद्यालय के विखण्डन से नहीं, प्रशासनिक सुधार जो होना चाहिए, बड़ा अजीब है. आपने दो भागों में बांटने की बात की, आपने क्षेत्राधिकार भी बड़ा अजीब टाइप से बताया है. दमोह, जबलपुर से 100 कि.मी. की दूरी पर है, सागर 185 कि.मी. की दूरी पर है, आपने जोड़ दिया वहां उज्जैन, आपने उज्जैन जोड़ा है, हमने पढ़ा है. उज्जैन में जोड़ा है. (श्री राजेन्द्र शुक्ल की ओर देखते हुए) आप बोल लेना. हमारा मकसद यह है कि जबलपुर के शैक्षणिक महत्व को आप खत्म क्यों करना चाहते हैं अकारण, कारण क्या है? यदि आपकी सारी व्यवस्थाएं अच्छी हैं, तो माननीय मंत्री जी आप यह बताएं कि मेडिकल कॉलेज से ही सारी चिकित्सा व्यवस्थाएं संचालित होती हैं तो फिर क्या कारण हैं कि इंदौर के खजराना में 100 बिस्तर का अस्पताल वर्ष 2020 से बगैर जमीन के चल रहा है. वहां 87 लोगों की पदस्थापना हो गई. वहां बगैर जमीन के तनख्वाह जा रही है. क्या कारण है ? यदि यह सारी व्यवस्थाएं अच्छी हैं, तो क्यों एक फर्जी डॉक्टर तीन जिले शहडोल, खरगौन और श्योपुर में फर्जी डिग्री से पेमेन्ट ले रहा है. वहां उसकी पोस्टिंग है. यह क्या हो रहा है ? आप 18 पीएससी निजी क्षेत्रों में दे रहे हैं. यदि व्यवस्थाएं बहुत अच्छी हैं तो...

          उपमुख्यमंत्री (श्री राजेन्द्र शुक्ल) माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय घनघोरिया जी विधेयक पर इतना अच्छा बोल रहे थे, अब थोड़ा विषय से हट गये हैं.

          श्री लखन घनघोरिया माननीय अध्यक्ष महोदय, विषय से तो हट गये. अभी हम अनुपूरक में बोलेंगे. आपके स्वास्थ्य विभाग पर भी बोलेंगे.

          अध्यक्ष महोदय समय पूरा हो रहा है.

          श्री लखन घनघोरिया अध्यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहते हैं जो विश्वविद्यालय आसंदी से बना था, हम चाहते हैं कि इसका विखंडन आप ही रोकें.

          अध्यक्ष महोदय विश्वविद्यालय से पीएससी पर मत आइए. विश्वविद्यालय पर ही रहिए...(हंसी)..

          श्री लखन घनघोरिया माननीय अध्यक्ष महोदय, शैक्षणिक संस्थाओं को सरकार को मजबूत करना चाहिए, बजाय उसको टुकड़ों में बांटने के. किसी भी सरकार की दूरदर्शिता इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपने सरकारी संस्थानों को मजबूत करें, बजाय टुकड़ों में बांटने के. आप सामर्थ्यवान हैं, आप सक्षम हैं लेकिन आप जहां भी ले जाएंगे, आप परिसंपत्ति का क्या करेंगे ? 200 करोड़ का क्या करेंगे. सारी चीजों का क्या करेंगे ? हमारे पास जमीन थी, सरकारी जमीन थी, सरकार को मिली. क्या उज्जैन में सरकारी जमीन बची है ? सब निजी हाथों में चली गई. फिर वही खरीद-फरोख्त और जिस तरीके से निजी हाथों में चिकित्सा व्यवस्था दी जा रही है जैसे अभी निजी विश्वविद्यालयों को लेकर बात हो रही थी. क्या यह मेडिकल कॉलेज भी उसी तर्ज पर जा रहा है ? क्या निजी हाथों में सौंप दिया जाएगा ?

अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूँ कि यह न केवल जबलपुर महाकौशल की उपेक्षा का प्रश्न है, बल्कि यह मेडिकल साइंस के उन तमाम लोगों का, जिनकी अवमानना हुई, क्या आपने चिकित्सा विशेषज्ञों से पूछा, क्या आपने राय ली. क्या आपने उन छात्रों से राय ली ? जिसकी उम्र ही 15 साल हुई, आप उसका विखंडन करने लगे. मेरी आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि यह जो आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय की सर्जरी हो रही है, यह सर्जरी माननीय मंत्री महोदय आपके लिए भी नजदीक है चाहे रीवा हो या जबलपुर. चोली-दामन का साथ है. खैर आपके अपने कई दायरे होंगे. लेकिन तार्किक बात यह है कि अकारण कोई चीज कही शिफ्ट की जाए और सिर्फ इसलिए कि हम सरकार हैं, इसलिए यहां आना चाहिए. हमारे पास कारण था. बरसों से 50 साल से मेडिकल कॉलेज था. आपका तो 25 साल से एक प्राइवेट कॉलेज कब से चला आ रहा है. गांधी मेडिकल कॉलेज है. आपका तो शासकीय बना भी नहीं है. आप तो हर चीज शासकीय करेंगे. उसका निर्माण होगा. स्वाभाविक है. जमीन खरीदी जाएगी. संपत्ति बनेगी. निर्माण कार्य होगा.

            श्री लखन घनघोरियाबिल्डिंग बनेंगी फिर सब कुछ होगा तभी तो लोगों को मौका मिलेगा इधर से उधर होने का तो मेरा इसमें आग्रह है कि सरकार अपनी धनराशि भी बचाये और जो अच्छे से चल रहा है जो उसमें प्रशासनिक कमी है तो उसमें सुधार करें. मेरा अध्यक्ष महोदय आपसे निवेदन है कि आपने बोलने का समय दिया इस विधेयक को माननीय मंत्री जी वापस लें. इसमें सारे विशेषज्ञों से तथा एम.सी.आई.से चर्चा कर लें. मेडिकल, मेडिकल कॉलेज हम बनाते जाते हैं आज कितने डॉक्टरों के पद रिक्त हैं. हम शीर्ष बढ़ाने की बात कर ही नहीं रहे हैं. हम मेडिकल यूनिवर्सिटी की बात कर रहे हैं. हमारे पास 5200 सीट्स हैं एम.बी.बी.एस.की सिर्फ 3200 पी.जी.की सीट्स हैं. हम सीट्स बढ़ाने की बात नहीं कर रहे हैं सिर्फ विखंडन की बात कर रहे हैं. तो मेरा मंत्री जी माननीय अध्यक्ष महोदय जी के माध्यम से निवेदन है कि इस मामले को बहुत संवेदनशीलता के साथ लें अकेले क्षेत्रीय संतुलन की बात नहीं है. कितना असंतुलित हो जायेगा, यह बात आप खुद समझ सकते हैं. इसलिये गंभीरता से इस पर चिन्तन होना चाहिये और यह विधेयक वापस लेना चाहिये बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्री सोहनलाल बाल्मीकअध्यक्ष महोदय आपका बहुत बहुत धन्यवाद आपने मेरा कल ध्यानाकर्षण स्वीकार किया. जिस मजदूर की बात मैं बात कर रहा था माननीय मंत्री जी उसका आज देहांत हो गया है. कृपया करके उसके आगे की कार्यवाही जो भी करनी है, कर दीजिये.

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद पटेल)माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे इस संबंध में विभाग से जानकारी मिल गई है, उस पर कार्यवाही हो भी गई है.

          श्री अरूण भीमावद (शाजापुर)अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान संशोधन विधेयक के समर्थन में खड़ा हुआ हूं. यह संशोधन केवल शब्द परिवर्तन नहीं है, बल्कि हमारी ज्ञान परम्परा, सांस्कृतिक शिक्षा दर्शन का सम्मान भी है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 भी भारतीय ज्ञान परम्परा, भारतीय भाषाओं एवं भारतीय मूल्यों को शिक्षा व्यवस्था के केन्द्र में स्थापित करने की बात करती है. यह संशोधन उसी राष्ट्रीय दृष्टि को आगे बढ़ाने वाला बड़ा कदम है. मध्यप्रदेश में चिकित्सा क्षेत्र में पिछले दो दशक में अभूतपूर्व विस्तार देखा गया है. अगर हम बात करें कुल मेडिकल कॉलेजों की 2003 में जहां पर 6 मेडिकल कॉलेज हुआ करते थे. आज 2026 में 33 मेडिकल कॉलेज हैं. कुल एमबीबीएस की सीटें 2003 में 760 हुआ करती थीं आज 5 हजार 50 सीटे हैं. कुल पीजी की सीटें 2003 में 140 हुआ करती थीं आज 2862 सीटें हैं. साथ ही दंत चिकित्सा एवं नर्सिंग एवं शिक्षा का व्यापक विस्तार हुआ है. सवाल यह है कि शिक्षा का दायर पला बढ़ा है तब विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था का भी उसी अनुरूप विस्तार होना आवश्यक है. इस संशोधन से विश्वविद्यालय का कार्य भार संतुलित होगा, प्रशासनिक दक्षता में वृद्धि होगी. परीक्षा परिणाम अधिक समयबद्ध होंगे. शोध, नवाचार एवं शैक्षणिक गुणवत्ता को नयी गति मिलेगी. प्रतिभा का दायर भी बढ़ेगा. योग्यता तथा चयन को बढ़ावा भी मिलेगा. मैं इस अवसर पर मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री जी को माननीय स्वास्थ्य मंत्री आदरणीय धन्यवाद दूंगा कि पूर्व व्यवस्था में गुरूकुल में कुलपति की नियुक्ति के लिये किसी शासकीय महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय में आचार्य के रूप से कम से कम 10 वर्ष का अनुभव अनिवार्य था. उल्‍लेखनीय है कि पूर्व प्रावधानों में विषय की कोई विशेष बाध्‍यता नहीं हुआ करती थी, किसी भी संकाय के शासकीय आचार्य भी कुलगुरू पद हेतु पात्र होते थे, भले उनका स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा से प्रत्‍यक्ष संबंध न हो. इस कारण देश में अनेक प्रतिष्ठित निजी विश्‍वविद्यालय राष्‍ट्रीय महत्‍व के संसाधन एवं उत्‍कृष्‍ट स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा संस्‍थानों में कार्यरत अनेक योग्‍य शिक्षाविद् केवल शासकीय शब्‍द के कारण पात्र नहीं हो पाते थे. इस संशोधन द्वारा सरकार ने दोनों कमियों को दूर किया है. शासकीय संस्‍था में आचार्य की शर्त हटाकर अब पात्रता को सीधे स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा के क्षेत्र में जोड़ दिया है. अब केवल स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले विषय विशेषज्ञ शिक्षाविद् भी कुलगुरू बनने के पात्र होंगे. ये सब परिवर्तन और संशेधन आ रहा है तो निश्चित रूप से राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति को जो पूरे देश में नीचे तक उतारने का जो प्रयास देश के प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी कर रहे हैं और ये विकसित भारत की संकल्‍पना को लेकर कार्य कर रहे हैं, निश्चित रूप से चिकित्‍सा क्षेत्र में भी उनका यह संकल्‍प को पूरा करने के लिए इस प्रकार के संशोधनों की आवश्‍यकता है. मैं इस अवसर पर मध्‍यप्रदेश जैसे राज्‍य में स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा में निरंतर विस्‍तार को देखते हुए विश्‍वविद्यालय व्‍यवस्‍था का पुनर्संतुलन समय की आवश्‍यकता बन गया है. आदरणीय रजनीश जी, ये जो समय की आवश्‍यकता है इस बात पर आप गौर कीजिए. वर्तमान में मप्र आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय, जबलपुर के अधीन विभिन्‍न प्रकार के लगभग 80 स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा संस्‍थानों की अधिकारिता थी, स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा संस्‍थानों की निरंतर बढ़ती संख्‍या एवं कार्यभार को देखते हुए विश्‍वविद्यालयों की अधिकारिता का पुनर्गठन आवश्‍यक हो गया है. इसी दृष्टि से सरकार ने विश्‍वविद्यालयों की अधिकारिता का पुनर्गठन हो गया है. अभी बातें आई थी कि जिलों का संतुलन बिगड़ रहा है. अगर आप ध्‍यान देंगे ये आज की आवश्‍यकता है, एक तरफ जबलपुर और एक तरफ उज्‍जैन में इस प्रकार की व्‍यवस्‍था करते हैं तो निश्चित रूप से क्षेत्र के विद्याथियों को फायदा मिलेगा. इस अवसर पर यह विकेन्‍द्रीकरण नहीं है, बल्कि मप्र की चिकित्‍सा शिक्षा को अगले 25 वर्षों तक सशक्‍त बनाने की दूरदर्शी आधारशिला रखी जा रही है. अंत में मैं इस विधेयक का समर्थन करता हूं और माननीय पक्ष के सदस्‍य तो समर्थन कर ही रहे हैं, लेकिन विपक्ष के साथियों से भी इस विधेयक का समर्थन करने का अनुरोध करुंगा. आज के इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री और माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी को धन्‍यवाद देता हूं. बहुत बहुत धन्‍यवाद.

 

04:03 बजे                               अध्‍यक्षीय घोषणा.

आगर विधान सभा क्षेत्र के विद्यार्थियों का सदन में स्‍वागत

          अध्‍यक्ष महोदय - आज सदन की दर्शक दीर्घा में आगर विधान सभा क्षेत्र के विद्यार्थी कार्यवाही देखने हेतु उपस्थित हुए हैं. सदन की ओर से समस्‍त छात्रों का बहुत स्‍वागत है.

          श्री दिनेश जैन (बोस) (महिदपुर) – अध्‍यक्ष जी, आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय संशोधन विधेयक 2026 पर मुझे बोलने का मौका दिया इसके लिए मैं आपको बहुत धन्‍यवाद देता हूं. यह विधेयक मप्र आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय अधिनियम 2011 में संशोधन कर उज्‍जैन में प्रस्‍तावित नवीन मप्र धनवंतरी स्‍वास्‍थ्‍य विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना के लिए किया जा रहा है. तो मेरी इस विधेयक पर कुछ आपत्तियां भी हैं, लेकिन ये धनवंतरी स्‍वास्‍थ्‍य विश्‍वविद्यालय उज्‍जैन में बन रहा है इसलिए मैं इस विधेयक के पक्ष में भी हूं कि कम से कम उज्‍जैन में एक विश्‍वविद्यालय बन रहा है, लेकिन विश्‍वविद्यालय का नाम आयुर्विज्ञान के स्‍थान पर स्‍वास्‍थ्‍य किया जा रहा है कुलपति एवं  कुलाधि सचिव के पदनाम बदलकर कुलगुरू और प्रति कुलगुरू किए जा रहे हैं मप्र आयुर्विज्ञान अधिनियम में जहां जहां विभाग का नाम चिकित्‍स शिक्षा आया है उनके स्‍थान पर लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा स्‍थापित किया जा रहा है, जो प्रशासनिक दृष्टि से विभाग की भूमिका को विस्‍तार का संकेत देते हैं. लेकिन मेरा विरोध यह है कि नया विश्‍वविद्यालय बना दिया, लेकिन स्‍वास्‍थ्‍य शिक्षा की असली समस्‍याओं का समाधान कहां है, उसके अलावा जो स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं  आज की तारीख में केवल नाम बदलने से विद्यालय इधर से उधर बदलने से, मैं थोड़ा सब्‍जेक्‍ट से हटकर भी बात करूंगा कि आज जरूरत किस चीज की है, आज मेरी विधानसभा में अगर जाते हैं, तो एक्‍सरे करने वाले एक्‍सपर्ट नहीं है, मेरी विधानसभा में सोनाग्राफी करने वाले एक्‍सपर्ट नहीं है, रेडियोलॉजिस्‍ट नहीं है, डॉक्‍टर्स नहीं है, छोटे-छोटे स्‍वास्‍थ्‍य भवन हैं, उसके अंदर एक भी डॉक्‍टर नहीं है, अभी हमारे यहां मुख्‍यमंत्री जी चार पांच दिन पहले आये थे, उन्‍होंने 16 उपस्‍वास्‍थ्‍य केंद्रों का उद्घाटन किया था, लेकिन एक भी उस उप स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र पर न डॉक्‍टर है, न एएनएम है वहां केवल और केवल चपरासी हैं, तो मैं धन्‍यवाद देता हूं कि धन्‍वंतरि विश्‍वविद्यालय बन रहा है, सभी फैकल्‍टीज को एक जगह करके बहुत करोड़ों, खरबों रूपये का खर्चा किया जा रहा है, बहुत अच्‍छी बात है, लेकिन हेल्‍थ और एज्‍युकेशन का अभी पूरा ढांचा बिखरा हुआ है और हर एक गांव में मतलब एक्‍सरे नहीं हो रहा है, सोनाग्राफी नहीं होती है, मेरे यहां एक हफ्ते में केवल एक दिन सोनाग्राफी होती और केवल बीस लोगों की सोनोग्राफी कर सकते हैं, तो पूरा हेल्‍थ का ढांचा चरमर्रा रहा है, इसमें तो जहां तक मैंने इस अधिनियम को समझा है, तो उसमें केवल और केवल इन सुविधाओं के अंदर आपका इंटरफेयरेंस कैसे हो? मतलब विशेष परिस्थितियों में विश्‍वविद्यालय का वित्‍तीय नियंत्रण लेने तथा उसके प्रशासन में हस्‍तक्षेप करने की शक्तियां दी गई हैं, इससे विश्‍वविद्यालय की संस्‍थागत स्‍वतंत्रता प्रभावित होने की आशंका है, यदि हर महत्‍वपूर्ण निर्णय में सरकार का हस्‍तक्षेप होगा, तो विश्‍वविद्यालय की स्‍वायत्‍ता का क्‍या उद्देश्‍य रह जायेगा? इस चीज का मैं विरोध भी करता हूं, लेकिन जहां तक हेल्‍थ की बात है, बार-बार बोल दिया जाता है कि आप सब्‍जेक्‍ट से बाहर चले जाते हैं, लेकिन मैं हेल्‍थ मिनिस्‍टर से जरूर एक बात कहूंगा कि जो भागीरथपुरा में 30 से 35 लोग मर गये थे, मैं ऐसा सोचता हूं कि उनके मरने का कारण जो इंडस्‍ट्रीज रहती है, मैं थोड़ा सब्‍जेक्‍ट से हटकर बात कर रहा हूं, लेकिन यह हेल्‍थ और एज्‍युकेशन से संबंधित तो है, ऐसा प्‍लेटफार्म मुझे बोलने के लिये कभी नहीं मिलेगा, यह हेल्‍थ और एज्‍युकेशन से संबंधित हैं, मेरा ऐसा मानना है कि वह जो मौतें हुए थीं, वह जो इंडस्‍ट्रीज अपने खतरनाक (Hazardous) कचरे और रासायनिक अपशिष्ट (Chemical Waste) जो सुप्रीमकोर्ट का आदेश है कि वह जमीन में थ्रो नहीं कर सकते हैं, पानी में थ्रो नहीं कर सकते हैं, वह जब बारिश का मौसम आता है तो उनको नदी नालों में बहा देते हैं और इसी तरीके से अनसिस्‍टमेटिक हजार,बारह सौ फिट का ट्यूबवेल लगा देते हैं, तो क्‍लोराइड प्रतिशत बहुत ज्‍यादा आता है, तो इन सब‍ चीजों के कारण मौतें होती हैं, तो इसका डायरेक्‍ट रिलेशन हेल्‍थ डिपार्टमेंट से होता है, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग से होता है, तो मैं समझता हूं इस चीज पर भी थोड़ा ध्‍यान दिया जाये, हेल्‍थ पर ध्‍यान दिया जाये और कहीं भी अगर अपना सबका स्‍वास्थ्‍य परीक्षण करा लिया जाये तो 80 प्रतिशत लोगों को पेट की बीमारी होगी,बहुत सारी बीमारी होगी, यह मुझे बोलना बहुत जरूरी है.

          डॉ. सीतासरन शर्मा – अध्‍यक्ष महोदय, ये विषय से बिल्‍कुल बाहर हो गये हैं, बिल्‍कुल ही गाड़ी पटरी से उतर गई है.

          अध्‍यक्ष महोदय – श्री दिनेश जी उज्‍जैन के हैं, तो दिक्‍कत उनके साथ यह है कि वह उज्‍जैन में हैं तो विश्‍वविद्यालय बन रहा है, तो समर्थन भी करना है, फिर कुछ किंतु परंतु भी लगाना है, तो उसमें थोड़ी मशक्‍कत लगती है(हंसी)

          श्री दिनेश जैन बोस – अध्‍यक्ष महोदय, इसमें अधिकार क्षेत्र का विभाजन कर दिया है, लेकिन विद्यार्थियों और कॉलजों के लिये कोई स्‍पष्‍ट रोडमेप कहां हैं. सरकार का पूरा ध्‍यान प्रशासनिक पुनर्गठन पर दिखाई देता है, विधेयक में विश्‍वविद्यालय का नाम, क्षेत्राधिकार,प्रशासनिक ढांचा और पद नाम बदलने की विस्‍तृत व्‍यवस्‍था है, लेकिन चिकित्‍सा शिक्षा की गुणवत्‍ता, मेडिकल कॉलेजों में फैकल्‍टी की कमी, शोध, आधुनिक प्रयोगशाला, सुपर स्‍पेशलिस्‍ट शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य अधोसंरचना को मजबूत करने के लिये कोई ठोस और वैधानिक प्रावधान नहीं जोड़ा गया है, विद्यार्थियों की परीक्षा एवं डिग्रियों का स्‍थानांरण कैसे होगा? शोध परियोजना लंबित मामलों में शैक्षणिक रिकार्ड का हस्‍तांतरण किस प्रकार किया जायेगा? इतने बड़े पुनर्गठन के बावजूद भविष्‍य में प्रशासनिक भ्रम उत्‍पन्‍न हो सकता है, क्‍या सरकार इन सब चीजों पर ध्‍यान देगी? लेकिन मेरा ऐसा मानना है कि शिक्षा से संबंधित है तो स्‍वास्‍थ और शिक्षा के कितने ही पद खाली है इन सब चीजों के लिये, एक्‍सरे के लिये, सोनोग्राफी के लिये, डायलिसिस के लिये, खून ब्‍लड की जांच करने के लिये अच्‍छे शिक्षित एक्‍सपर्टों की जरूरत है, लेकिन मध्‍यप्रदेश के अंदर यह ढांचा चरमरा गया है, कहीं भी ऐसे शिक्षित एक्‍सपट नहीं हैं, उनके लिये कोई व्‍यवस्‍था नहीं हो सकती, बड़े-बड़े कॉलेज नहीं बनाये जा सकते. इसमें सब सिस्‍टम को जोड़ दिया गया है, लेकिन मुख्‍य इसमें सीटें कितनी रहेंगी केवल 20, 30, 40, 50, 100, 200 एक अरब चालीस करोड़ लोग हम हैं और एक अरब चालीस करोड़ में हम हर साल डॉक्‍टर्स कितने पैदा करते हैं. बड़े-बड़े विश्‍वविद्यालय तो बना रहे हैं मतलब आउट ऑफ बे जाकर तो हम सब काम कर रहे हैं, लेकिन हकीकत क्‍या है, हकीकत यह है कि सभी डॉक्‍टरों की कमी है तो मैं चाहूंगा कि हमारे विपक्ष का जो विरोध है उस पर भी ध्‍यान दिया जाये. अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री साहब सिंह गुर्जर (ग्‍वालियर ग्रामीण)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज मध्‍यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय संशोधन विधेयक, 2026 के विरोध में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. माननीय मंत्री जी नाम बदलने से क्‍या होगा, सिस्‍टम बदलना चाहिये. आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय क्षेत्रीय स्‍तर पर स्‍थापित किये जायें, जिससे कि अध्‍ययन करने के लिये छात्रों का समय और पैसों की भी बचत होगी. ग्‍वालियर संभाग के साथ-साथ राजस्‍थान और मध्‍यप्रदेश के अलावा उत्‍तर प्रदेश से गर्भवती महिलायें अधिक संख्‍या में ग्‍वालियर मेडिकल कॉलेज में जयारोग अस्‍पताल में आती हैं. इस मुद्दे को पूर्व में भी मैंने सदन में उठाया था, लेकिन आज भी खबरें और सूचनायें यह प्राप्‍त होती हैं कि आज भी अस्‍पताल में आगजनी हुई और यही स्थिति नवनिर्मित हजार विस्‍तर अस्‍पताल की है जिसका नामकरण आज दिनांक तक नहीं किया गया, जब नामकरण करना ही है तो फिर हजार विस्‍तर अस्‍पताल का आज तक नाम क्‍यों नहीं दिया गया और पूर्व में प्रभारी मंत्री जी जब दौरा करने गये थे उस समय भी हास्पिटल में 8-10 म‍ंजिल तक की लिफ्ट बंद पड़ी हुई थीं, जब लिफ्ट बंद पड़ी हैं तो मरीज कैसे अपना इलाज कराने के लिये 10 मंजिल तक चढ़कर जायेगा तो ऐसी व्‍यवस्‍थायें जब वहां पर नहीं हैं तो इससे यह स्‍पष्‍ट होता है कि माननीय मंत्री जी काम अभी भी अधूरे पड़े हुये हैं. स्‍वास्‍थ विभाग की व्‍यवस्‍थायें ठीक नहीं हैं. मास्‍टर प्‍लान आप बनाते हैं गजराजा अस्‍पताल के लिये और फिर बदल देते हैं, वह मास्‍टर प्‍लान अभी तक क्‍यों नहीं बन पाया. कार्डियक सर्जरी विभाग बनकर तैयार है, लेकिन चालू अभी तक नहीं हुआ, यह हम ग्‍वालियर वासियों का दुर्भाग्‍य है कि वर्तमान में ग्‍वालियर सीएमएचओ का खुद का कार्यालय तक नहीं हैं, क्‍या किराये के घर से व्‍यवस्‍थायें सुधरेंगी, सरकारी बिल्डिंग नहीं बनी है. वर्ष 2024-25 में प्रदेश में नवजात शिशु की मृत्‍यु के मामले आखिरी पांच पायदान में हैं और प्रदेश में ग्‍वालियर में अकेले हजार से अधिक मृत्‍यु हुई हैं जो प्रदेश में सर्वाधिक हैं. जिला अस्‍पताल मुरार में रेडियोलॉजिस्‍ट नहीं होने की वजह से अल्‍ट्रासाउंड ठप्‍प पड़ा है, मरीज भटक रहे हैं, क्‍या जल्‍द पद पूर्ति होगी. मैं यही मांग करता हूं मंत्री जी और अंत में इस विधेयक का मैं विरोध करता हूं. धन्‍यवाद.

          इंजीनियर नरेन्‍द्र प्रजापति (मनगंवा)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पहली बार का विधायक हूं और ऐसे महत्‍वपूर्ण विषय को सरकार के द्वारा मुझे दिया गया है कि इस विषय पर मैं बोलूं. यह जो अधिनियम है मध्‍यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय अधिनियम 2011 को संशोधित करने का यह विषय है. कुछ विषय यहां पर हमारे साथियों द्वारा लाये भी गये उनसे मैं चाहूंगा कि उन विषयों को रिपीट न करते हुए मैं अपनी बात को रखूं. हमारा जो देश है ऋषियों,संतों,प्राचीन परंपराओं वाला देश है और ऐसे विज्ञान को ऋषि मुनियों,संतों ने जो प्रतिपादित किया उन्हीं परंपराओं को अग्रेषित करने वाला यह अधिनियम यहां हम लोगों के सामने प्रस्तुत किया गया है. हमपरंपराओं को जीने वाले लोग हैं.भारत माता को जय बोलते हैं और हमारा पुराना जो आयु्र्विज्ञान है आज उसको अगर कसौटी पर कसा जाये तो जो पुरानी विद्या है जो ऋषि मुनियों ने परंपरा हमको दी है सुश्रुत ऋषि,चरक ऋषि,वशिष्ठ ऋषि,वाल्मीकि ऋषि,संत रविदास ऐसे संतों ने हमको ऐसी-ऐसी विद्या दी है जिनका हम जब अनुसरण करते हैं तो विज्ञान की कसौटी पर पूरा खरा उतरता है यह संशोधन केवल शब्दों में संशोधन नहीं है जैसे अभी यहां पर विषय आया किकुलपति को कुलगुरू कह दिया गया यह तो ऐसा विषय हो गया कि हम अगर आज की डेट में माता पिता को हम मम्मी,डैडी बोलते हैं उसी जगह पर हमको माता पिता कहने की सीख दी जाती है एक उदाहरण मैं दे रहा हूं वही विषय यहां पर कुलगुरु,प्रति कुलगुरू का भाव हमारी सरकार के द्वारा लाने का प्रयास किया गया है. वर्षों से विश्वविद्यालयों में औपनिवेशिक परंपरा से चले आ रहे पदनाम जैसा मैंने कहा कि कुलपति और प्रति कुलपति प्रचलित थे. प्रदेश सरकार ने भारतीय परंपरा के अनुसार इन पदनामों को कुलगुरू और प्रति कुलगुरू रखा है.राष्ट्रीय शिक्षा नीति,2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा भारतीय भाषा और भारतीय मूल्यों को शिक्षा व्यवस्था के केन्द्र में स्थापित करने की बात इस अधिनिय में की गई है. अभी विषय आया कि क्या परिवर्तन है.अभी माननीय अरुण जी ने भी इस विषय को यहां पर रखा और यही विषय मैं यहां पर पुन: बोल रहा हूं कि कुल मेडिकल कालेज जो 2003 में 6 थे उनकी संख्या 33 हो गई. कुल एमबीबीएस की सीटें जो 2003 में 760 थीं उनकी संख्या बढ़ते क्रम में हो जाती है 5550 और कुल पीजी की सीटें जो 2003 में 140 थीं उन्हें हमारी सरकार और हमारे मंत्री जी और मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में 862. यह आंकड़े अचंभित करते हैं और इन आँकड़ों को जब हम जमीन पर जाकर देखते हैं जैसा अभी मंत्री जी ने कहा कि विपक्ष जमीन पर जाए और क्षेत्र भ्रमण करे वहां पर जाकर डाक्टरों से डायरेक्टर्स से मिलें या वहां पढ़ने वाले छात्र,छात्राओं से मिलें तो उन्हें परिवर्तन दिखेगा. उनसे अगर आप बातचीत करते हैं यहां पर आप आते हैं विषय आप रखते है मेरी वही बात है जो अभी बहन राधा जी ने कहा कि आपको भी क्षेत्र में जाना चाहिये बजाय कि आप यहां सिर्फ और सिर्फ विरोध करें. पिछले वर्षों में चिकित्सा महाविद्यालयों में एमबीबीएस और पीजी सीटों में कई गुना वृद्धि हुई जो आंकड़े यहां पर प्रस्तुत हैं. इन आंकड़ों की मैं हवा में बात नही कर रहा हूं और आग्रह भी कर रहा हूं कि आप लोग जब उन संस्थानों में जायेंगे तो उन पोर्टल पर जाकर देखिये छात्रों और डायरेक्टर्स हैं जो अधीक्षक हैं टीचर्स हैं उनसे आप बातचीत कर सकते हैं. यह जो बिल है विकेन्द्रीकरण का विषय नहीं है. किसी भी संस्था में कार्यकुशलता केवल उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं बल्कि उसकी प्रशासनिक क्षमता से निर्धारित होती है यहां पर एक विषय भी अधिनियम में स्पष्ट किया गया है जैसे बात आई कि नाम बदलने से क्या होगा. अब उस कुलगुरू की किस प्रकार से नियुक्ति होगी इसको बहुत स्पष्टता से क्लियर किया गया है. सर्वोच्च स्तर की सक्षमता,सत्यनिष्ठा,नैतिकता और संस्थागत प्रतिबद्धता रखने वाले व्यक्ति को ही कुलगुरु नियुक्त किया जायेगा.इस प्रकार कुलगुरू के रूप में नियुक्त किये जाने वाले व्यक्ति को स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में महाविद्यालय या विश्वविद्यालय के आचार्य के रूप में कम से कम दस वर्ष का अनुभव होना चाहिये. इस अधिनियम से जब हमें वह कुलगुरु प्राप्त होगा. स्वाभाविक सी बात है कि जो संस्थान है, इंस्टीट्यूट है, उसको संचालित करने वाला भी व्यक्ति अनुभवी होना चाहिए. यह एक प्रक्रिया भी इस अधिनियम में क्लियर की गई है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, अंत में मैं ज्यादा समय न लेते हुए यह जरूर कहूँगा कि यह निर्णय चिकित्सा शिक्षा के भविष्य को ध्यान में रखते हुए किया गया एक दूरदर्शी एवं छात्र हितैषी प्रशासनिक सुधार है. हमारी सरकार जिस प्रकार से काम कर रही है, शैक्षणिक जगत में, चिकित्सा जगत में, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, यहां पर भी यह परिवर्तन जो अधिनियम में मैं पढ़ रहा था, उसमें किया गया है. जब आप क्षेत्र में जाते हैं या लोगों से मिलते हैं तो लोग कहते हैं कि हम मोदी जी के साथ में हैं. हम भारतीय जनता पार्टी के साथ में हैं और यदि यह कहें, यह बात विषय से अलग जरूर हो रही है, चूँकि मैं पहली बार का विधायक हूँ तो यह बात मैं यहां पर अवश्य रखना चाहूँगा कि जब क्षेत्र में जाते हैं और कॉलेजों में जाते हैं, एमबीबीएस के स्टूडेन्ट्स से मैं मिलता हूँ, बात करता हूँ, वहां पर जब सेमिनार होता है तो वहां पर यह अनुभव होता है कि वाकई में मोदी जी के नेतृत्च में और डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में आमूल-चूल परिवर्तन हो रहा है. मैं इस अधिनियम का एक बार पुन: समर्थन करता हूँ. मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 का मैं समर्थन करता हूँ. बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री महेश परमार (तराना) माननीय अध्यक्ष जी, मैं आदरणीय मुख्यमंत्री जी को, आदरणीय उप मुख्यमंत्री जी को और सरकार को उज्जैन का विधायक होने के नाते धन्यवाद देता हूँ कि उज्जैन में आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय खुल रहा है. इसके लिए माननीय मुख्यमंत्री जी को और उप मुख्यमंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद. लेकिन अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मेरा अनुरोध है कि सिंहस्थ जैसा महापर्व होने वाला है और विश्व का सबसे बड़ा मेला, सनातन का सबसे बड़ा मेला उज्जैन में होने वाला है तो विश्वविद्यालय बनकर तैयार हो जाए और कम से कम एक हजार बिस्तरों का विश्वविद्यालय बने तो यह उज्जैन के लिए बहुत बड़ी सौगात होगी. लाखों, करोड़ों लोग वहां आएंगे तो उनको भी लाभ मिलेगा. यह सर्वसुविधायुक्त बने. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, एक बार पुन: माननीय मुख्यमंत्री जी का, माननीय उप मुख्यमंत्री जी का और सरकार का बहुत-बहुत धन्यवाद क्योंकि उज्जैन में जो आयुर्वेदिक महाविद्यालय है, वह अति प्राचीन महाविद्यालय है और वह विश्वविद्यालय हो रहा है तो यह हमारे लिए बड़े गौरव की बात है. आपका बहुत-बहुत आभार.

          उप मुख्यमंत्री (लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) श्री राजेन्द्र शुक्ल माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 पर अभी विपक्ष की ओर से श्री लखन घनघोरिया जी और कई माननीय सदस्यों ने अपने विचार रखे हैं. सत्ता पक्ष से भी बहुत ही अच्छी तरीके से श्री नरेन्द्र प्रजापति जी ने, श्री अरूण भीमावद जी ने तर्क रखे हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बहुत व्यापक और बहुत तेजी के साथ विकास हो रहा है. उस विकास का कारण यह है कि विधेयक पर बोलते समय भी विपक्ष के हमारी माननीय सदस्यों ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में डॉक्टरों की कमी और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था हो जाए, इसका आग्रह उन्होंने किया है. उसका एक ही समाधान है कि हम ज्यादा डॉक्टर तैयार करें. ज्यादा मेडिकल कॉलेज खोलें. ज्यादा मेडिकल कॉलेज जब हम खोलेंगे तो स्वाभाविक है कि जो विश्वविद्यालय होगा, उसका बोझ बढ़ेगा. उस पर अतिरिक्त भार आएगा क्योंकि परीक्षाएं कराना, उसका मूल्यांकन कराना, फिर परिणाम समय से घोषित हो, उसके अलावा शोध के काम होते हैं, नवाचार के काम होते हैं, एफिलिएशन का काम होता है. इतना व्यापक ये मध्यप्रदेश का क्षेत्रफल है, मध्यप्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है. जब तक हमारे एमबीबीएस की सीटें, जैसा बताया कि 300 से बढ़कर 5500 हो गईं. हमारी पीजी की सीटें 150 से बढ़कर 2800 हो गईं. वर्ष 2003 के पहले 6 मेडिकल कॉलेज थे, आज 33 हो गए हैं और लगातार हमारे मेडिकल कॉलेज बनकर तैयार हो रहे हैं, जैसे बुधनी, छतरपुर, दमोह, राजगढ़, मण्डला. उज्जैन में बहुत तेजी से काम चल रहा है. पीपीपी मोड में भी चाहे वह कटनी हो, चाहे वह टीकमगढ़ हो, चाहे वह सीधी हो, प्रदेश में करीब 13 जिलों में पीपीपी मोड में मेडिकल कॉलेज आ जाएं, इसके लिए हम लोग प्रयास भी कर रहे हैं. उद्देश्य यह है कि जो 5500 सीटें हुई हैं, वह आने वाले समय में 10 हजार एमबीबीएस की सीटें हो जाएं. पीजी की सीटें जो 2800 हैं वह 5000 हो जाएं, क्योंकि विशेषज्ञ तो हमको पीजी करने के बाद ही हमको मिलते हैं यदि ग्रामीण क्षेत्रों में हमें डॉक्‍टरों को पहुँचाना है, तो डॉक्‍टरों की उपलब्‍धता को हमें सुनिश्चित करना पड़ेगा. इसके लिये सरकार बहुत गंभीरता के साथ काम कर रही है. चिकित्‍सा शिक्षा के क्षेत्र में सिर्फ मेडिकल कॉलेज ही नहीं, यदि आप आयुर्वेद कॉलेज देखिये, तो वह पहले 7 थे,  अब 15 हो गए हैं, इसी प्रकार से यूनानी और होम्‍योपैथी में भी तेजी के साथ किस तरीके से हम सीटें बढ़ा सकते हैं ? और जो हमारी प्राचीन चिकित्‍सा पद्धति है, एलोपैथी के साथ उससे कैसे हम समन्‍वय बनाकर बेहतर तरीके से हम लोगों के सामने स्‍वास्‍थ्‍य की सुविधाओं को प्रस्‍तुत कर सकते हैं ? इन सब चीजों को ध्‍यान में रखकर सरकार की सर्वोच्‍च प्राथमिकता स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र को बेहतर बनाना है और इसके लिये यदि हमने समस्‍या आने पर समाधान किया, तो इसका मतलब हम जिमम्‍मेदार सरकार नहीं है. जिम्‍मेदार सरकार वह है, जो 20-25 वर्ष आगे का सोचे और जब हम उसके बारे में सोचेंगे तो फिर हमें अभी से उसका इन्‍तजाम करना शुरू करना पड़ेगा. सिर्फ समस्‍या आ जाये, तो उसका समाधान हम समय से नहीं करते हैं, तो वह बाद में आम आदमी के लिये समस्‍या पैदा करती है. 

          अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए सरकार ने सोच-समझकर यह निर्णय लिया है कि आने वाले दिनों को ध्‍यान में रखते हुए हमें क्षेत्रीय संतुलन को ध्‍यान में रखते हुए एक और मेडिकल स्‍वास्‍थ्‍य विश्‍वविद्यालय की आवश्‍यकता है और वह स्‍वास्‍थ्‍य विश्‍वविद्यालय, भगवान धनवन्‍तरि जी के नाम पर खोलने का निर्णय हुआ है, वह विधेयक कल प्रस्‍तुत हुआ और पारित भी हो गया. जो शंका घनघोरिया जी की है कि दमोह को उज्‍जैन में जोड़ा जा रहा है,तो यह बिल्‍कुल निराधार है. यह जो आपकी शंका थी कि उज्‍जैन में दमोह जा रहा है. जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल चार संभाग हमारे जबलपुर का मेडिकल स्‍वास्‍थ्‍य विश्‍वविद्यालय है, उसमें रहेगा और इसका काम कम नहीं होगा बल्कि इसका काम भी बढ़ेगा क्‍योंकि मेडिकल कॉलेज लगतार बढ़ते जा रहे हैं, गुणवत्‍ता हमारी सर्वोच्‍च प्राथमिकता है. हम डॉक्‍टर बनायें तो वह मेडिकल कॉलेज जो उससे संबद्ध हैं, उनकी मॉनिटरिंग बहुत जरूरी है, उनके बीच में समन्‍वय बहुत जरूरी है. उनकी परीक्षाएं समय से होना बहुत जरूरी है, उनका मूल्‍यांकन समय से होना जरूरी है, नहीं तो छात्राओं में फ्रस्‍ट्रेशन होता है. इसलिए इन सब चीजों को ध्‍यान में रखते हुए उज्‍जैन विश्‍वविद्यालय में 6 संभाग रहेंगे और हमारे जबलपुर के स्‍वास्‍थ्‍य विश्‍वविद्यालय में 4 संभाग रहेंगे और कुल मिलाकर आने वाले दिनों में जो डॉक्‍टरों की कमी है, ग्रामीण क्षेत्रों में विशेषज्ञों की कमी है, उसकी पूर्ति करना ही हमारा अंतिम लक्ष्‍य है, अच्‍छे डॉक्‍टर पूरे डेडिकेशन के साथ जाएं.

अध्‍यक्ष महोदय, भारतीय ज्ञान और परम्‍परा को ध्‍यान में रखकर, जो हमारे पूरे शिक्षा व्‍यवस्‍था का केन्‍द्र बिन्‍दु है. राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति जो वर्ष 2020 में बनी है, उसमें भारतीय ज्ञान परम्‍पराएं, भारतीय भाषाएं, भारतीय मूल्‍य यह हमारी राष्‍ट्रीय नीति का केन्‍द्र है, जिसको आगे लेकर हमको चलना है क्‍योंकि एजुकेशन के साथ यदि भारत में संस्‍कार नहीं होगा, तो एजुकेशन वरदान बनने के बजाय अभिशाप बन जायेगी, इसलिए मैं आपकी यह शंकाएं दूर करना चाहता हूँ कि इसमें कोई विखण्‍डन नहीं है. यह आने वाले दिनों में उसका विस्‍तार है, आने वाले दिनों में हम जिस प्रकार स्‍वास्‍थ्‍य की बेहतर सुविधाएं करना चाहते हैं. कुलगुरु के चयन में भी, स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र के ही जो विशेषज्ञ हैं, जो राष्‍ट्रीय स्‍तर पर किसी बड़े इंस्टिट्यूशन में 10 वर्षों का जिनका अनुभव है, जो प्रोफेसर रहे हैं, इसमें एक संशोधन यह भी किया गया है कि रेग्‍युलर शासकीय महाविद्यालयों का बंधन हटाया गया है. स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों को कुलगुरु के रूप में नियुक्‍त करने का इसमें संशोधन लाया गया है, जिससे कि उनके जो दीर्घकालिक अनुभव हैं, वह चिकित्‍सा शिक्षा के क्षेत्र में और बेहतर इनपुट उनके माध्‍यम से मिल सकें और हम न सिर्फ मेडिकल कॉलेज बढ़ायें, न सिर्फ हम डॉक्‍टरों की संख्‍या बढ़ायें, विशेषज्ञों की संख्‍या बढ़ायें, बल्कि उनमें गुणवत्‍ता भी रहे, वह पीडि़त मानवता की सेवा करने के लिये आने वाले दिनों में लम्‍बे समय तक हमारे मध्‍यप्रदेश में एक आदर्श स्थिति पैदा करके मध्‍यप्रदेश को हेल्‍थ इंडीकेटर्स के माध्‍यम से हिन्‍दुस्‍तान में सबसे बेहतर राज्‍य के रूप में हम स्‍थापित कर सकें. यह इस संशोधन का मूल उउद्देश्‍य है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय. इसलिए मैं आपके माध्‍यम से सदन से यह निवेदन करता हूँ कि अपनी शंकाओं को दूर करते हुए इस विधेयक को पारित करने का सभी सहयोग करें. धन्‍यवाद.                

            अध्‍यक्ष महोदय- प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 पर विचार किया जाए.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ. ............................................................................................................

अध्‍यक्ष महोदयअब विधेयक के खण्‍डों पर विचार होगा.

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          अध्‍यक्ष महोदयप्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 2 से 15 इस विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 2 से 15 इस विधेयक का अंग बने.

(मेजों की थपथपाहट)

        संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, आपकी अनुमति से एक मिनट लूंगा.

          अध्‍यक्ष महोदयजी कहें.

          श्री कैलाश विजयवर्गीयअध्‍यक्ष महोदय, मैं, अभी आपसे कक्ष में मिला और बहुत ही विनम्रता से एक निवेदन करना चाहता हूं आज मेरी अनुपस्थिति में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मैंने आंदोलनकारियों को कीड़ा कहा. मैंने आपको विधान सभा की कार्यवाही दिखाई. ऑडियो-वीडियो दोनों दिखाये और मैंने ये जरूर कहा कि क्‍या आप कॉकरोज पार्टी के समर्थक हैं ? इसके अलावा एक भी ऐसा शब्‍द नहीं था, जो कि किसी भी आंदोलनकारी के खिलाफ हो, परंतु माननीय नेता प्रतिपक्ष ने मीडिया से कहा और सदन में भी कहा, जो कि ऑन रिकॉर्ड है, जो मैंने अभी देखा कि मैंने कीड़ा कहा. ये बहुत ही गलत है. मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि आप इस पर व्‍यवस्‍था दें. आप इस सदन के न्‍याय देने वाले हैं और आपने स्‍वयं पूरा वीडियो देखा ही है और सारी रिकॉर्डिंग भी देखी है. मैं यह नहीं कहूंगा कि नेता प्रतिपक्ष माफी मांगें, यह उनके विवेक के ऊपर है कि वे क्‍या करते हैं ? परंतु मैं आपका निर्णय चाहता हूं कि क्‍या इस प्रकार सदन में कहना उचित है ?

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-  कॉकरोच आप कहो प्रदेश के युवाओं को, अराजकता आप करो और आप कहो कि ये अराजक हैं और माफी हम मांगें. वाह !

          डॉ. सीतासरन शर्माअध्‍यक्ष महोदय, हमने तब भी विरोध किया था कि ये बात गलत बोल रहे हैं. तब उन्‍होंने कहा कि मेरे पास रिकॉर्ड रखा है, ऐसा उठाकर कहा कि मेरे पास टैबलेट रखा है, पीछे के एक सदस्‍य ने भी बोला.

          श्री उमंग सिंघारअध्‍यक्ष महोदय, मैं, आपको एक उदाहरण देना चाहता हूं.    

डॉ. सीतासरन शर्माअध्‍यक्ष महोदय, इस तरह से असत्‍य फैलाना ठीक बात नहीं है. कायदे से उनको खेद प्रकट करना चाहिए, यदि उन्‍होंने गलत बात बोली है तो खेद प्रकट करना चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदयउमंग जी बोल लें.

          श्री उमंग सिंघारअध्‍यक्ष महोदय, आज फिर एक घटना घटी कि किस प्रकार से संविधान को देश और प्रदेश में खत्‍म किया जा रहा है. आज भारतीय जनता पार्टी ने जो प्रदर्शन किया, उसमें (xx) आज सोशल मीडिया में चल रहा है. (नेता प्रतिपक्ष जी द्वारा सदन में कागज दिखाते हुए.)

          ये भारतीय जनता पार्टी (xx) चाहती है.

(...व्‍यवधान...)

          श्रम मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल)-  अध्‍यक्ष महोदय, ये विषयांतर करने की कोशिश है. आपने जो सदन में कहा है, उस पर बात करो. बात बदलने का काम मत करिेये. आपने जो सदन में बोला है, पहले उस पर सफाई दो.

(...व्‍यवधान...)

          डॉ. सीतासरन शर्मायह अत्‍यंत आपत्तिजनक है. यह कहां का है ?  

          श्री उमंग सिंघारयह भोपाल का ही है.

          अध्‍यक्ष महोदयमैंने सभी को अनुमति नहीं दी है. 

                                                        (व्यवधान)

डॉ. सीतासरन शर्मा यह कौन-सा पेपर लाए, कौन सी परमीशन है. अध्यक्ष महोदय, इनसे इस पेपर को पटल पर रखवाइए. (व्यवधान)

श्री उमंग सिंघार आपके सदस्य बोल रहे हैं कि उसको पटल पर रखें तो आप अनुमति दें मैं इसे पटल पर रख देता हूँ. (कागज दिखाते हुए)

अध्यक्ष महोदय नहीं, नहीं पटल पर नहीं. आप बैठ जाएं. मैंने प्रहलाद जी को अनुमति दी है. (व्यवधान)

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सदन की कार्यवाही की चर्चा है. सदन की कार्यवाही में बिना प्रमाण के आप नहीं कह सकते हैं यदि आप गलत कहते हैं तब तो मुझे लगता है कि यह अपराध ही है. जब यह चर्चा हो रही है कि आपने सदन के भीतर क्या कहा है. बाहर जाकर मीडिया को क्या कहा है उसके लिए हम दावा नहीं कर सकते हैं. लेकिन यदि आपने सदन में कहा है तो आपको अपनी गलती माननी पड़ेगी, या आपको स्वीकार करना पड़ेगा, या तो आसंदी को फैसला करना पड़ेगा. नेता प्रतिपक्ष हो या कोई भी हो. यह तरीका थोड़ी हो सकता है. आपको कुछ भी कहने की छूट नहीं है. यह तो बहुत तमाशा होता है. सोशल मीडिया में ऐसे तमाशे चलते हैं. यह तमाशे मत करो. पहले जो तुमने कहा है उसकी बात करो. आप असत्य बोलोगे. आप सदन के रिकार्ड में असत्य बोलोगे. बाहर जाकर तमाशा करोगे. (व्यवधान)

श्री उमंग सिंघार जवाबदारी से कह रहा हूँ यह आपके पोस्टर हैं. मैं सदन में जवाबदारी से कह रहा हूँ. असत्य नहीं बोलता हूँ. जवाबदारी से कह रहा हूँ. पूरे वीडियो वायरल हुए हैं. जवाबदारी के साथ कह रहा हूँ. (व्यवधान)

डॉ. सीतासरन शर्मा इनको खेद व्यक्त करना चाहिए. इन्होंने यहां गलत बयानबाजी की है. (व्यवधान)

श्री प्रहलाद सिंह पटेल ऐसे थोड़ी हो सकता है भाई. आप नेता प्रतिपक्ष हैं. इस सदन में आपकी जिम्मेदारी है. अगर आप यहां असत्य बोल रहे हैं. वहां जाकर असत्य बोल रहे हैं. (व्यवधान)

श्री उमंग सिंघार जो बात बोलता हूं जवाबदारी से बोलता हूँ. (व्यवधान)

श्री प्रहलाद सिंह पटेल तो फिर फैसला छोड़ो सच्चाई क्या है, फिर सामने आनी चाहिए. यह कोई तरीका नहीं है. (व्यवधान)

श्री उमंग सिंघार माननीय मैं जो बोलता हूँ जवाबदारी से बोलता हूँ. (व्यवधान)

श्री प्रहलाद सिंह पटेल सोशल मीडिया की बातें, पम्पलेट यहां पर प्रतिबंधित हैं. यदि आप नियम की बात करते हैं तो. यह कोई तरीका नहीं है. (व्यवधान)

श्री उमंग सिंघार आप युवा वर्ष मना रहे हो.  (व्यवधान)

डॉ. सीतासरन शर्मा अध्यक्ष महोदय, यह क्या कोई तरीका है. (व्यवधान)

उप मुख्यमंत्री, चिकित्सा शिक्षा (श्री राजेन्द्र शुक्ल) अध्यक्ष महोदय, मेरा पाइंट ऑफ ऑर्डर है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय राजेन्द्र शुक्ल जी. (व्यवधान)

श्री प्रहलाद सिंह पटेल अध्यक्ष महोदय, नियम के अनुसार कोई भी पर्चा बिना आपकी अनुमति के नहीं दिखा सकते हैं. क्या यह नेता प्रतिपक्ष को समझ नहीं है. हम सोशल मीडिया की बातें यहां पर कर रहे हैं. जो बात आपने सदन में कही और उसी बात को जाकर आपने मीडिया के सामने कहा तो फिर आपके अधिकार क्षेत्र में आता है. आप यह मानते हो अध्यक्ष पर छोड़ो कि क्या कैलाश जी ने ऐसा बोला था, जो आपने बोला.

श्री उमंग सिंघार मैं भी देख रहा हूँ कि इस सदन के अन्दर किस प्रकार से. सब देख रहा हूँ मैं.. (व्यवधान)

डॉ. सीतासरन शर्मा अध्यक्ष पर कोई दबाव नहीं होता है. यह आसंदी पर आरोप है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय मैंने राजेन्द्र शुक्ल जी को अनुमति दी है. (व्यवधान)

श्री उमंग सिंघार है सदन को .. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय मैंने राजेन्द्र शुक्ल जी को अनुमति दी है. (व्यवधान)

श्री राजेन्द्र शुक्ल इस विधान सभा की गौरवशाली परम्परा और इतिहास है. नेता प्रतिपक्ष इतने जिम्मेदार पद पर हैं. मुझे भी बड़ा आश्चर्य हुआ जब मैंने सुबह दैनिक भास्कर में पढ़ा कि नेता प्रतिपक्ष ने कहा है कि कैलाश जी ने छात्रों को कीड़ा कहा है. मैं तो उनके बगल में ही बैठा था. जब आज सुबह जब फिर से आपने उसको रिपीट किया तो मैंने टोका और मैंने कहा कि ऐसा नहीं कहा है. तो आपने कहा कि नहीं मेरे पास रिकार्ड है.

श्री उमंग सिंघार फिर क्या कहा कॉकरोच कहा. कीड़ा के बजाए कॉकरोच कहा. कीड़ा और कॉकरोच में क्या फर्क है यह बता दें.

श्री राजेन्द्र शुक्ल अभी बताया न. पूरी बात हो जाए. पूरी बात हो जाए. (व्यवधान)

श्री उमंग सिंघार बगैर इसके बोलता नहीं हूँ जो बोला. कीड़ा नहीं मान रहे तो कॉकरोच बोल दो.

डॉ. सीतासरन शर्मा सब रिकार्ड में है.

श्री प्रहलाद सिंह पटेल अध्यक्ष जी पर छोड़ दो ना वो फैसला करें.

श्री राजेन्द्र शुक्ल उसके बाद जब अभी यह बात जब अभी यह बात आई. बिलकुल सही है कल कैलाश जी ने कहा था कि क्या आप कॉकरोच पार्टी से मिल गए हैं. आप उस पार्टी में हैं क्या, समर्थन करते हैं क्या. इसका मतलब तो यह नहीं हुआ. इसका मतलब तो यह नहीं हुआ कि उन्होंने छात्रों को कॉकरोच कहा है.

श्री उमंग सिंघार हां. (जोर से चिल्लाते हुए) अराजक कहा. कॉकरोच कहा, कहा. (व्यवधान)

डॉ. सीतासरन शर्मा हमको भी चिल्लाना आता है. यह भाषा है. चिल्लाना हमको भी आता है.(व्यवधान)

श्री राजेन्द्र शुक्ल पूरी बात तो आ जाए. (व्यवधान)

श्री उमंग सिंघार हां जवाबदारी से कहा आप वीडियो देखिए. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपको वीडियो दिखा दूंगा. (व्यवधान)

श्री राजेन्द्र शुक्ल अभी मेरी बात पूरी नहीं हुई है. अभी मेरा पाइंट ऑफ ऑर्डर पूरा नहीं हुआ है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय सब अपनी जगह पर बैठें. राजेन्द्र जी बात कर रहे हैं.. (व्यवधान)

          श्री राजेन्द्र शुक्ल जब आज सुबह आपने बोला हम लोगों ने टोका भी. आज जब माननीय कैलाश जी.

          श्री भंवरसिंह शेखावत यह तो जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने इनको कॉकरोच कह दिया. उसके बाद में कैलाश जी कहें तो कोई बहुत  बड़ी बात नहीं है. (व्यवधान)

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- अध्‍यक्ष महोदय, आप लोग विषय को डायवर्ट कर रहे हैं. इतने सीनियर मेंबर होकर आप विषय को डायवर्ट कर रहे हैं. विषय यह था कि जब अभी माननीय कैलाश जी ने स्‍वयं प्रस्‍तुत होकर उसको बोला तो माननीय नेता प्रतिपक्ष ने दूसरा पम्‍पलेट निकालकर विषय को डायवर्ट करने की कोशिश की. उनको टू द पॉइंट जवाब देना चाहिए था कि अध्‍यक्ष महोदय के सामने वह भी वीडियो प्रस्‍तुत कर दें और जो वीडियो कैलाश जी का आपके सामने प्रस्‍तुत हुआ वह भी आप देख लें और उसके बाद फिर आप आसंदी से निर्देश दे दें, व्‍यवस्‍था दे दें. कोई सामान्‍य सदस्‍य ने ऐसा बोला होता और वह अखबार की हेडलाइन बन रही है, किसी भी व्‍यक्ति के चरित्र की हत्‍या करने का ऐसा प्रयास हो रहा है, झूठा बयान देते हुए यह तो किसी भी तरह से स्‍वीकार नहीं किया जा सकता लोकतंत्र में और वह भी विधान सभा के अंदर. आप आमसभा में जाकर कुछ भी बोलिए चलता है, लेकिन यहां पर आकर आप हाऊस के अंदर और उसी कैम्‍पस में आप ऐसी बातें कर रहे हैं. इसलिए अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत ही चिंता की बात है और यह कोई ईगो की बात नहीं है. विधान सभा की बहस में यदि आपको समझने में, आप कॉकरोच पार्टी से मिल गए हैं, उसको समझने में आपको यदि ऐसा लगा कि इन्‍होंने छात्रों को कॉकरोच कहा है, तो उसको आप समझकर खेद व्‍यक्‍त कर सकते हैं. उसमें क्‍या बुराई है.

श्री भंवरसिंह शेखावत -- कॉकरोच पार्टी से मिल गए हैं यह रेफरेंस आया कहां से. बात कहां से आई. यह तो चीफ जिस्‍टस ने कह दिया है.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- भंवरसिंह जी, यह बहस का मुद्दा नहीं है. विषय यह है टू द पॉइंट कि मैं आज यह कहूं कि भंवरसिंह जी ने छात्रों को कीड़ा कहा तो आपको बुरा नहीं लगेगा, आपको खराब नहीं लगेगा.

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय -- अब यह जबरन् में बात थोप रहे हैं. छात्रों को जब कीड़ा नहीं कहा गया तो नहीं कहा गया. विषय यह है. अब विषय के बाहर क्‍यों जा रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- भंवरसिंह जी, प्‍लीज..(व्‍यवधान)..

श्री भंवरसिंह शेखावत -- मेरा माइक बंद कर दिया जाता है. माइक कहां चालू है.

अध्‍यक्ष महोदय --  आपका माइक चालू है. लाइट जल रही है.

श्री भंवरसिंह शेखावत -- कहां चालू है. अब चालू हुआ है आपने जब बोला तब. आपने बोला तब चालू हुआ, पहले तो बंद ही हो गया था. कैलाश जी ने इशारा किया और बंद. आपने इशारा किया और चालू. अभी जो विषय आया है वह यह विषय आया है कि आज भारतीय जनता पार्टी की महिलाओं ने आंदोलन किया और उसमें संविधान के खिलाफ वह विषय है जो फोटो दिखाया गया है वह यह है. कैलाश जी की व्‍यवस्‍था तो ठीक है, कैलाश जी ने बाहर कहा होगा तो कह दिया होगा, कोई बात नहीं.

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय,  मेरी प्रार्थना यह है कि आपकी तरफ से इस पर रूलिंग आना चाहिए. अभी फिर से दोबारा नेता प्रतिपक्ष ने जो टिप्‍पणी की है आप रिकार्ड उठाकर देखिए कि अध्‍यक्ष जी से नियम बदलवा लेते हैं, यह उनकी दूसरी गलती है. मुझे लगता है कि जवाब दे दें. ..(व्‍यवधान)..

श्री उमंग सिंघार -- आप अध्‍यक्ष जी को निष्‍पक्ष काम करने दें. आप निष्‍पक्ष काम करने दें. आप लोग क्‍यों दबाव बनाते हैं.

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे पहले बात पूरी करने दें. यह तरीका नहीं है कि आपको जो मन में आए आप बोलें. पहले मेरी बात पूरी होनें दें. आप रिकार्ड उठाकर देखें. यह सदन की कार्यवाहियां किसी की मर्जी से नहीं चलती हैं. जो रिकार्ड में आप बोलते हैं  वही लिखा जाता है. वही दिखता है और इसलिए यदि सदन के भीतर आपने गलत बयानबाजी की है और किसी को कटघरे में खड़ा करने की आप बात करते हैं, आप जिम्‍मेदार पद पर हैं. अगर चूक हुई है तो आपको माफी मांगनी चाहिए. अभी तक तो माफी की बात ही नहीं कर रहा था लेकिन आपको माफी मांगनी चाहिए या दूसरा विकल्‍प है कि आप रिकार्ड दें, अध्‍यक्ष जी उसका फैसला करें. उसके बाद तय होना चाहिए.

श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है कि पहले आप जांच करा लें. जांच करा लें अगर छात्रों को काकरोच कहा है, उसकी पहले जांच करा लें. प्रह्लाद भाई, मैं आपसे कहना चाहता हूं. प्रमाण के साथ बोलता हूं, नहीं तो आपको माफी मांगना पड़ेगी ध्‍यान रखा.

अध्‍यक्ष महोदय -- उमंग जी, प्‍लीज.

श्री प्रह्लाद सिंह पटेल -- बिल्‍कुल तैयार हूं. अगर मुझसे गल्‍ती हो गई तो एक सेकेण्‍ड नहीं लगता. एक सेकेण्‍ड नहीं लगेगा. आप तय कर लीजिए हम तैयार हैं.

श्री उमाकान्‍त शर्मा -- यह धमकाने का काम मत करो.

4.44 बजे                     अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

अध्‍यक्ष महोदय -- पंडित जी, एक मिनट. पंडित जी रुकिए. मेरा आप सबसे अनुरोध है कि दरअसल हम सब इस बात को जानते हैं कि सदन की परम्‍पराएं क्‍या हैं, नियम क्‍या हैं, लेकिन फिर भी कई बार निश्चित रूप से वरिष्‍ठ सदस्‍यों से चूक होती है जो एकदम स्‍वीकार्य नहीं होना चाहिए. सदन की जो कार्यवाही है उस मामले में हम सबको गंभीर रहना चाहिये क्योंकि यह रिकार्ड भविष्य के लिये रहता है और भविष्य में उदाहरण बनता है. हमारी आने वाली पीढियां इसका अनुसरण करेंगी इसलिये हम सबको अपनी बात रखते समय इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिये.

          जहां तक प्रोसीडिंग में कुछ शब्द का उल्लेख यहां पर किया .नेता प्रतिपक्ष के मुंह से हुआ, कैलाश जी के लिये हुआ, उसकी तकलीफ कैलाश जी को हुई, कैलाश जी की ओर से जो हुआ उसकी तकलीफ प्रतिपक्ष के लोगों को हुई, लेकिन मैं समझता हूं कि कुल मिलाकर के जब हम व्यक्ति के लिये बोल रहे हैं तो हमें ध्यान रखना चाहिये. क्योंकि व्यक्ति के लिये बोलते हैं तो वह बात बहुत दूर तक जाती है. तो सामान्य तौर पर जो शब्द यहां उल्लेख किया गया कि कैलाश जी ने छात्रों को कीड़ा कहा, मैंने भी प्रोसीडिंग को देखा है क्योंकि कैलाश जी  बहुत दुखी थे, वह मेरे पास भी आये फिर  मैंने प्रोसीडिंग बुलाकर के भी देखी और वह इसलिये भी दुखी थे कि कुल मिलाकर के मैं इंदौर महानगर में रहता हूं. और इतनी बड़ी मात्रा में वहां पर छात्र रहते हैं उन पर क्या असर जायेगा, मेरी प्रतिष्ठा को वह कैसे लेंगे और मेरे खिलाफ भी आंदोलन खड़ा हो जाये, एक व्यक्ति के जरा से असत्य बोलने के कारण जो मैंने नहीं कहा है तो निश्चित  रूप से उनके मन की तकलीफ थी इसलिये मैंने इस सारी चीज को दिखवाया और मैं फिर आप सबसे अनुरोध करता हूं कि इस प्रकार के शब्दों का उपयोग नहीं होना चाहिये. सदन में अगर हम कोई कागज लेकर के आते हैं, बिना अनुमति के उसे हम लहराते हैं वह भी उपयुक्त नहीं है, सब इस बात को जानते हैं और हम इस बात को भी जानते हैं कि हम लहरा भी रहे हैं और उसके बाद भी वह कार्यवाही से विलोपित हो जायेगा फिर भी हम लहरा ही देते हैं . तो  इन सब बातों का हम सब लोगों को ध्यान रखना चाहिये.

          हमारे पूर्वज मध्यप्रदेश विधानसभा की बहुत उज्जवल परम्परायें बनाकर के हमको विरासत में देकर के गये हैं और हम सब लोगों की कौशिश यह होना चाहिये कि इस विरासत को न सिर्फ अच्क्षुण रखें इसको और मजबूत बनायें, इसको और लोकतांत्रिक बनाये, इसको और अविस्मरणीय बनायें, इस दिशा में  हमारा कदम होना चाहिये और मैं इस मामले में आप सब लोगों से यही अनुरोध करना चाहता हूं कि आगे से इस प्रकार की कोई बात आयेगी तो वह सदन को स्वीकार्य नहीं होगी.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल इस पर नेता प्रतिपक्ष को कुछ कहना चाहिये न.

          श्री हेमंत सत्यदेव कटारे-दोनों तरफ से अध्यक्ष जी ने कह दिया उन्होंने कैलाश जी का भी पक्ष रखा, नेता प्रतिपक्ष का भी रखा है मुझे लगता है कि इस बात को पुन: निकालना उचित नहीं है. अध्यक्ष जी आपने कह दिया उसको हम सब स्वीकार करते हैं.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल-यह सदन की कार्यवाही के भीतर की चर्चा है, मैं अध्यक्ष जी का धन्यवाद करता हूं लेकिन नेता प्रतिपक्ष की कोई राय नहीं आई है. आपने पब्लिकली मीडिया के सामने कहा है, इसकी सफाई कौन देगा. जो चीजें हुई हैं वह क्या अच्छी हुई हैं. अध्यक्ष जी यहां पर किसी से किसी की कोई शत्रुता नहीं है, अध्यक्ष जी ने नियमानुसार जो सदन की मर्यादा के भीतर जो चीजें होना चाहिये वह उन्होंने कही है, लेकिन जो गलती नेता प्रतिपक्ष से हुई है, क्या वह इतना बड़ा मन कहकर के नहीं कह सकते कि मुझसे चूक हुई है और वह मीडिया में कह दें एक लाईन. क्योंकि यह संकट से बाहर तो होना चाहिये न.

          श्री उमंग सिंघार अध्यक्ष जी, बात निकलेगी तो लंबी जायेगी. अध्यक्ष जी आपका आदेश है तो हम शांत हैं.

          अध्यक्ष महोदय- मै, समझता हूं अब जो है इस पर कोई टिप्पणी नहीं होना चाहिये और इस विषय को यहीं समाप्त किया जाना चाहिये. आगे से हम सब लोगों को ध्यान रखना चाहिये कि अपनी शब्दावली का हम हमेशा ध्यान रखें और किसी भी सदस्य पर कोई भी व्यक्तिगत ऐसा आक्षेप नहीं आये जिस आक्षेप के कारण उसकी प्रतिष्ठा को आघात लगे यह हमारी सबकी जिम्मेदारी है, यह हम सबको ध्यान में रखना चाहिये. नेता प्रतिपक्ष को भी, विशेष रूप से मंत्रिगणों को भी, और सदस्यों को भी.

          श्री राजेन्द्र शुक्ल माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा अभी आपने उल्लेख किया नेता प्रतिपक्ष को सिर्फ इतना ध्यान रहे कि आज सुबह दो छात्र कैलाश जी के घर में इंदौर में पहुंचे थे, एक छात्र था और एक छात्रा थी और उस अखबार की कटिंग से ही भ्रमित होकर के उन लोगों ने वहां पर आकर इस प्रकार से हमारे बारे में ऐसा कमेंट किया गया है..तो जो आपने कहा न कि इसका जो मैसेज बाहर जाता है वह किसी की राजनैतिक प्रतिष्ठा को पूरी तरह से क्षतिग्रस्त करता है.

श्री सोहनलाल बाल्मीक मैं बात को दोहरना नहीं चाहता हूं, जो चीज हुई है वह बाहर हुई है, सदन के अंदर तो नहीं हुई है, मान लीजिए कोई इनके घर भी गया होगा तो वह अलग बात है, जब आपने मना कर दिया है.

अध्यक्ष महोदय मैंने अपनी बात में यह बात कही थी कि श्री कैलाश जी ने मुझे आकर बताया, इंदौर में बड़ी मात्रा में छात्र रहते हैं वह उनके निवास पर गये, ऐसा उनको जानकारी मिली. इस प्रकार से किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध असत्य बोलने से अगर आन्दोलन भड़क सकता है तो यह असहनीय है और इसीलिए मैंने यह बात कही कि कोई वरिष्ठ आदमी हो, कितना भी वरिष्ठ आदमी हो, मैं स्वयं भी अपने आपको आपके साथ जोड़ता हूं, इस प्रकार की अशोभनीय बातें किसी के भी मुहं से नहीं निकलनी चाहिए.

श्री अनिरूद्ध माधव मारू परन्तु इसका खण्डन तो करना पड़ेगा. इसका खण्डन करो. अध्यक्ष महोदय, इसका खण्डन करवाइए.

एक माननीय सदस्य यह स्पष्ट कहां होता है, मीडिया में बोले, जहां से भी हो इसका खण्डन आना चाहिए.

श्री सोहनलाल बाल्मीक अध्यक्ष महोदय, आपकी बात हम मान गये, लेकिन बार बार खड़े होकर क्या बताना चाहते हैं, आपकी बात हम सब समझ गये. हमारे नेता प्रतिपक्ष ने कोई बात नहीं बोली और यह खड़े होकर खण्डन की बात करेंगे. फिर ये लोग भी माफी मांगे.

श्री रजनीश हरवंश सिंह यह आग में घी डाल रहे हैं.

(व्यवधान)

श्री आशीष गोविन्द सिंह अध्यक्ष महोदय, अगर कोई किसी के बारे में असत्य बातें फैलाता है, भ्रामक चीजें फैलाता है तो यह हम सब के लिए जवाबदारी है. कल से हमारे किसी शब्द से आपका नुकसान हो सकता है. हम कोई गलत बात कह दें तो उस व्यक्ति के खिलाफ आन्दोलन खड़ा हो सकता है, इसलिए हम सबकी जिम्मेदारी है क्योंकि हम राजनीतिक और सार्वजनिक क्षेत्र के लोग हैं.

श्री रजनीश हरवंश सिंह अध्यक्ष महोदय ने उसका पटाक्षेप कर दिया तो उस बात की पुनरावृत्ति नहीं होना चाहिए.

श्री आशीष गोविन्द सिंह सोशल मीडिया पर और अन्य किसी प्लेटफार्म पर यदि किसी के बारे में गलत चीजें डाली जाएंगी(व्यवधान)ऐसी स्थिति निर्मित होगी.

(व्यवधान)

श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे अध्यक्ष जी, आपके दिये हुए निर्देशों का भी सम्मान नहीं करते हैं भारतीय जनता पार्टी के सदस्य.

अध्यक्ष महोदय कृपया आप बैठ जाइए.

श्री सोहनलाल बाल्मीक अध्यक्ष महोदय, अब कोई विषय नहीं रह गया है. आपने बोल दिया, हमारे पूरे पक्ष ने मान लिया.

संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -  अध्यक्ष महोदय, मैं नेता प्रतिपक्ष से कुछ नहीं चाहता कि वह माफे मांगे, क्लियरिफिकेशन दे, मैं तो आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि  आपने पूरा रिकॉर्ड देखा है, क्या वहां पर कीड़े शब्द का उपयोग आया है क्या? बस, आसंदी से यह स्पष्ट हो जाय तो मुझे और कुछ भी नहीं कहना. नेता प्रतिपक्ष ने जो बोला वह उनके ऊपर छोड़ देता हूं, मेरी उनसे अपेक्षा भी नहीं है कोई और मैं अपेक्षा भी नहीं कर रहा हूं और मैं यह भी नहीं कह रहा हूं कि वह खेद प्रकट करें, अपने शब्द वापस लें, कुछ नहीं. परन्तु आपने पूरा रिकॉर्ड देखा है, आपको यह शब्द कहीं दिखा क्या? बस, आसंदी से यह व्यवस्था चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय नहीं, नहीं. मैंने तो अपनी बात में यह बात कही है कि जो इनके मुहं से निकला वह पूरी तरह अशोभनीय था और उसके कारण जो श्री कैलाश जी के मन को तकलीफ हुई, उसी से यह प्रेरणा लेकर हम सब लोगों को जैसा व्यवस्था में उल्लेख किया गया है, यह करना चाहिए.

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) अध्यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि अगर आपने एक पक्ष सुना तो हमारा पक्ष भी सुन लेते. हमें भी देख लेते, हमारे वीडियो भी देख लेते. बात स्पष्ट हो जाती. मैं उसी बात को पुनः दोहराना नहीं चाह रहा हूं.

अध्यक्ष महोदय मैंने तो सिर्फ रिकॉर्ड ही देखा, बाकी न उनको सुना. उन्होंने मुझे आकर जरूर कहा कि ऐसा कहा गया है. मैंने कहा कि मुझे नहीं लगता. आज सवेरे मुझे ध्यान नहीं है फिर श्री राजेन्द्र जी भी वहां बैठे थे तो फिर रिकॉर्ड मंगाकर देखा, तब वह ध्यान में आया, इसलिए मेरा सबसे आग्रह यही है कि हम लोगों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि सदन की गरिमा रहे और हमारे किसी भी शब्द से किसी की प्रतिष्ठा को ठेस न लगे.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल)  - हम कहना यह चाहते हैं कि आसंदी से अगर एक लाइन यह कह दी जाय कि उस वीडियो में श्री कैलाश जी ने कीड़ा नहीं कहा तो भी कहीं न कहीं एक प्रकार से प्रेस में और बाकी जगह पर क्लियरिफिकेशन होगा. सच बात है कि यह उनके विवेक पर ही छोड़ना चाहिए, उनसे कोई अपेक्षा नहीं है. लेकिन सदन की कार्यवाही में क्या श्री कैलाश जी ने कीड़ा शब्द  का उपयोग किया. अगर आसंदी कहती है कि नहीं, नहीं किया है. हमें इससे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए.

अध्यक्ष महोदय यह बात श्री प्रहलाद जी मैंने अभी कहा कि श्री कैलाश जी के मुहं से कीड़ा शब्द नहीं निकला. (मेजों की थपथपाहट) यह मैंने कह दिया है. श्री जगदीश देवड़ा जी.

4.54 बजे     मध्यप्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026    (क्रमांक 16 सन् 2026)

उपमुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर (श्री जगदीश देवड़ा) अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.

अध्यक्ष महोदय प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

इस बिल पर दोनों तरफ से कोई बोलने वाला नहीं है. माननीय मंत्री जी को आग्रह करूंगा कि..

श्री अभय मिश्रा अध्यक्ष महोदय, मैंने नाम दिया है.

अध्यक्ष महोदय मेरे पास नाम नहीं आया है.

श्री भंवर सिंह शेखावत अध्यक्ष महोदय, 15 करोड़ आप करते नहीं, 5 करोड़ आप करते नहीं हैं. अब हमने इसलिए तय किया कि बोलने से कोई फायदा नहीं है. अगर आप 5 करोड़ करते हैं.....    

वित्त मंत्री (श्री जगदीश देवड़ा) माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर संशोधन विधेयक, 2026 पर....

          अध्यक्ष महोदय माननीय जगदीश जी, एक मिनट..... माननीय अभय मिश्रा जी कह रहे हैं कि वे बोलना चाहते हैं. मेरा पास नाम नहीं आया है. यह मेरे पास रखा हुआ है.

श्री भंवर सिंह शेखावत अध्यक्ष महोदय, हमने कहा कि बार-बार बोलने से फायदा कुछ नहीं है. हमने कहा विधायकों की तनख्वाह बढ़ाइए. हमने कहा उसका वेतन मत बढ़ाइए. लेकिन विधायकों की जो राशि है, इसके लिए सब लोग मांग कर रहे हैं. वह तो कम से कम 5 करोड़ कर दीजिए. अगर आप चाहते हैं कि हम बहस करें, आपकी तारीफ करें, आपके लिए बोलें, हम बोलना चाहते हैं.

अध्यक्ष महोदय माननीय अभय मिश्रा जी.

श्री अभय मिश्रा (सेमरिया) अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं यह कहूंगा कि हमारे लिए यह सौभाग्य की बात है कि आसंदी पर इतने गंभीर और गरिमामयी व्यक्ति विराजमान हैं और उनके निर्देश पर हम सब काम करते हैं. (मेजों की थपथपाहट) उनको देखकर हम कहीं न कहीं गौरवान्वित महसूस करते हैं.

अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम 2017 में संशोधन 2026 लाया गया है. इसकी धारा 34 और धारा 52 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है. धारा 34 के अंतर्गत धारा 15 में डेबिट-क्रेडिट इनपुट की बात है और धारा 54 में रिफंड की बात है. इसमें चर्चा करने के लिए थोड़ा बहुत आवश्यक है कि देश की आर्थिक परिस्थितियों के संबंध में हम थोड़ी-सी चर्चा कर लें. तभी हम मूल रूप से विषय में आएंगे. देखिए भारत देश की जो आर्थिक स्थिति है, जो हमारे देश की कुल नेटवर्थ है, उसमें पूरे देश में 300 से 500 लोग ऐसे हैं, जिनके पास देश का आधा पैसा है. वे आधे कैपिटल के मालिक हैं. 500 लोग ऐसे होंगे और जिन्हें उल्टा सरकार से फायदा मिलता है और वह भी टैक्स देते होंगे लेकिन उनसे देश नहीं चलता. बल्कि वे देश का लाभ उठाते हैं. दूसरी तरफ देश की 70 परसेंट आबादी ऐसी है, जो केवल जीती है, अपना जीवनयापन करती है. 1500 रूपए में निर्भर रहती है. यह अपनी मजदूरी करके केवल इस दुनिया में आना, जीना और एक दिन दुनिया से चले जाना और वोट दे देना, यह करती है. इस नब्ज़ को शायद भारतीय जनता पार्टी से अच्छा कोई नहीं समझता. दूसरी तरफ 35 परसेंट लोग ऐसे हैं जो जीवन में संघर्ष करते हैं जो जीवन में कुछ बनना चाहते हैं. जो जीरों से शुरू करके मेहनत कर-करके छोटे-छोटे काम से लेकर बडे़-बडे़ काम करने का प्रयास करते हैं. जिनमें निम्न मध्यम वर्गीय से लेकर उच्च मध्यम वर्गीय तक के लोग हैं जिनको जीएसटी का सामना करना पड़ता है. जिन्हें इनकम टैक्स का सामना करना पड़ता है.आप यकीन करिए इस वर्ग से जो लोग काम करते हैं उनकी आज इस देश में स्थिति यह है कि जैसे किसी के गले में रस्सी कस दी जाये कि अब तुम जी कर बताओ तो जाने और उसके अंदर इतना हौसला होता है कि उसके बाद भी जीता है. उसके बाद भी लड़ता है, वह हार नहीं मानता है. अगर हम टैक्स की ओर देखें, तो कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि हमने कैसे इतनी यात्रा पार कर ली. अगर शुरू में हमको यह पिक्चर दिख जाती, तो शायद हम कर ही नहीं पाते, पर एक लगन, एक अंधाधुंध जीत के चलते और अंत में क्या लगता है कि जब आदमी काम करता है, तो उसके हाथ में केवल उम्मीद रहती है कि बस आगे, बस आगे और वह जितना कमाता है, मतलब ऐसा लगता है कि वह केवल दूसरे के लिए काम कर रहा है, टैक्स के लिए ही काम कर रहा है, इनकम टैक्स के लिए ही काम कर रहा है. मुख्य रूप से सीजीएसटी और एसजीएसटी के लिए ही काम कर रहा है. 9 परसेंट सीजीएसटी हो गई और 9 परसेंट एसजीएसटी हो गई.

अध्यक्ष महोद, इसमें मैं अब सीधे मुद्दे पर आ रहा हूँ. डेबिट-क्रेडिट नोट और रिफंड के लिए यह जो आप अधिनियम लाए हैं, जीएसटी में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि उसमें अकाउंटिबिलिटी नहीं है. इसको लिबरल करने की ज्यादा आवश्यकता है. मुझे जो प्रैक्टिकल अनुभव है, मैं तीन साल पहले तक काम करता था. खुद ही काम करता था. जब बीच में मैं विधायक नहीं था. मैं कॉन्ट्रैक्टर ही था, तो मेरा बड़ा प्रैक्टीकल अनुभव है कि अगर हमने साल में 500 करोड़ का काम किया है, तो आप यह समझिए कि 90 करोड़ की जीएसटी देना ही देना है. उसमें जो विभाग ने काट लिया, उसके बाद जो है तो मतलब साल में 30-40 करोड़ रूपए जमा करना ही है और इसलिए यह इतना कठिन होता है कि यह 20 तारीख को आएगा, पहले से टेंशन रहती है कि 11 तारीख तक जमा करना है. यह सॉफ्टवेयर ऐसा बना हुआ है. नहीं, तो फिर हमारा अकाउंट लॉक हो जाएगा. फिर उसको खुलवाना है. बहुत झंझट है. मतलब कि एक तरह से दंड सा है जो काम कर रहा है उसके ऊपर बहुत प्रताड़ना है, जो काम नहीं कर रहा है बड़ा सुखी है. तो मेरा सरकार से यह आग्रह है कि जो हमारे करदाता हैं जिनसे हमें टैक्स मिलता है उनको अपना पार्ट मानते हुए उनके प्रति थोड़ा सा लिबरल होने की जरूरत है तथा टैक्स का दायरा अधिक लोगों में बढ़ायें. लेकिन लोड थोड़ा सा कम करें. इस बारे में विचार सरकार करें दूसरा कम्पलाईंस में जो बर्डन है उसको कम कर दें. पैरलर प्रोसीडिंग बंद करें. पैरलर प्रोसीडिंग यह होता है कि हम सेन्ट्रल वाला भी और राज्य वाला भी जब कि वह एक्ट में है कि पैरलर प्रोसीडिंग नहीं होनी चाहिये, लेकिन सेन्ट्रल का जो कानून है 62 बी उसके तहत राज्य अलग करती है हम इतना टैक्स भी देते हैं. डरे डरे घूमते भी हैं. जांच भी कराते हैं और सर्वे का छापा अलग झेलते हैं. मतलब आप उस आम आदमी के बारे में सोचिये जो मध्यवर्गीय जो आपकी एकानामी के लिये आपकी बहुत सारी मदद करता है. राज्य में स्टाम्प ड्यूटी शुल्क अन्य राज्यों से बहुत अधिक है, यह भी हम देखें. यदि कभी बैंक की गलती या सरवर की गलती है तब भी अकाऊंट सस्पेंड हो जाता है. जीएसटी पंजीयन केंसिल कर देते हैं उसके बाद हमको अपील करना पड़ता है और लड़ना पड़ता है. 12 दिन का समय अगर आपने अधिकतम दे रखा है तो आप रिकार्ड उठाकर के देख लें आपके अधिकारी 12 वें दिन करते हैं आखिर बीच में क्यों नहीं करते हैं. एक ही काम के लिये सेन्ट्रल की टीम अलग छापामारी कर रही है, स्टेट की टीम अलग कर रही है. आपको एक उदाहरण बताता हूं. जब हम कार खरीदने जाते हैं एक नेचरल जस्टिस है कि टैक्स के ऊपर टैक्स नहीं लगेगा. जब कार खरीदने जाते हैं तो कई कारों में 40 प्रतिशत जीएसटी है, कई कारों में 20 प्रतिशत जीएसटी है. अगर हमने कोई ऐसी कम्पनी बना रखी है कि हम अपने ही कारों का उपयोग अपने ही उसमें दिखाते हैं तो उसमें हम जीएसटी का इनपुट ले लेते हैं. हमें कई बार 40 प्रतिशत का भी लाभ हो जाता है. जिनको यह कलाकारी आती उनको यह लाभ हो जाता है. अगर हमने 40 प्रतिशत जीएसटी दी है या 20 प्रतिशत जीएसटी दी है तो जब हम आरटीओ में रजिस्ट्रेशन कराने जाते हैं उसमें जीएसटी की कीमत जोड़कर आरटीओ का टैक्स लगता है, जबकि आपको जीएसटी की प्राईस मायनस करके टैक्स उगाहना चाहिये. पर जो कार बेचने वाले हैं उन्होंने आपसे सम्पर्क किया आपने उनका नहीं माना उनका क्या है, वह तो पब्लिक की जेब से उतना ले लेंगे. एक ओर है जो हम नहीं कर रहे हैं. अपने यहां पर वेट टैक्स है आप लीकर में, पेट्रोल डीजल में तो समझ में आता है. लीकर में आप बहुत कुछ खो रहे हैं. आपने वेट टैक्स लगा रखा है और आप एक्साइड ड्यूटी ले रहे हैं. एक्साइड ड्यूटी में आप पैसा सही में बनाना चाहते हैं तो आपको यह पता है कि यह एक ऐसी चीज है. आज पूरे देश में नशा है आज मुख्य रूप से देश की समस्या क्या है ? भ्रष्टाचार, लाल-फीताशाही और नशा, नशा पूरे देश में है, कोई मध्यप्रदेश में नहीं है आज पूरे देश में कहीं पर भी चले जाईये एक दौर सा नशे का आया हुआ है. जैसा एक समय दौर चाईना में था आज इंडिया में है. आप नशे को रोक नहीं पा रहे हैं. उत्तरप्रदेश में नशे की 35 हजार दुकाने हैं हर गली में उन्होंने खोल दी है तो नंबर दो की शराब बंद हो गई है. आपने दिखाने के लिये आडम्बर तो किया लेकिन आप शराब को रोक पाये, वह शराब आ कहां से रही है. एक ही परमिट पर तीन से चार बार घूम रही है. तब तो डम्प हो रही है बाकी अलग से तो बन नहीं रही है. नुकसान सरकार की रेवेन्यू का हो रहा है. आप यूपी की नकल कर लेते हैं तो आज आपका 17-18-20 हजार करोड़ उसमें 45 से 40 हजार करोड़ रूपये आता पर आप इसको नहीं कर पा रहे हैं. एक और बात यह एक ऐसा विभाग है जिसको बहुत कम लोग समझते हैं. हमारा दुर्भाग्य यह है कि चाहे सत्तापक्ष हो, चाहे विपक्ष हो, हमारे बीच हमारे बीच में कोई भी विधायक सीए नहीं है, सीए होना चाहिये. आप एकाध ऐसे लोगों को टिकिट दीजिये जो कम से कम सीए हों. हम लोग भी थोड़ा अनुभव से समझ गये हैं. लेकिन पढ़ाई तो अपनी जगह पर है. जो पढ़े हैं वहीं समझ सकते हैं ऊपर ऊपर हम थोड़ा बहुत भले जान जाए. आपका विभाग ऐसा है मंत्री जी, मैं आपको क्रिटिसाइज नहीं कर रहा हूं, टू मच करप्‍शन, बहुत तंग करते हैं. मैं रीवा की बात करता हूं, मैंने भुगता है, सब कुछ सही होने के बाद भी परेशान. पहले मैं खुद करता था कि भैया जो कहो, एकाउंट बंद कर देना ,जबरन का नाटक करना, दावा करना, उनकी मनमानी को मानना. सबसे दुर्भाग्‍य की बात यह है कि 15-15 साल से एक ही जगह आप पदस्‍थ हैं. अगर हम सच बोलते हैं कि आप कह देते हो कि आपका व्‍यक्तिगत झगड़ा हो, हमने अपने एकाउंट ट्रांसफर करवा लिया, रीवा से भोपाल जब मैं नहीं झेल पाया तो चला आया भोपाल कि भोपाल में पटा दूं पर हो क्‍या रहा है वहीं पर इंस्‍पेक्‍टर, वहीं असिस्‍टेंट कमिश्‍नर, वहीं डिप्‍टी कमिश्‍नर. आप पता कर लीजिए आज भी 15 साल हो गए एक अधिकारी है, वह आज तक नहीं हटीं, वहीं की है, वहीं उनका वोटर लिस्‍ट में नाम है और एक तरह से शुद्ध दादागिरी और मनमानी वसूली और आप जानते हो. आप स्‍थानांतरण नीति बनाते हो, किस बात की स्‍थानांतरण नीति, क्‍या देखकर आप स्‍थानांतरण करते हो, आपका मापदंड क्‍या है, लेकिन उसकी प्रताड़ना कौन झेल रहा है व्‍यापारी, और व्‍यापारी ऐसा वर्ग है जो चूं नहीं करता, कभी डर के मारे शिकायत भी नहीं करता है. मैं तो राजनीतिक क्षेत्र में हूं तो मैं बोल लेता हूं, लेकिन आप किसी व्‍यापारी को किनारे ले जाकर पूछो तो वह डर के कारण नहीं बताएंगे. आपसे मेरा आग्रह है कि वर्ष 2015 से ये तो आपको बता ही दिया लगातार पदस्‍थ हैं, इन्‍होंने जितने भी आर्डर किए हैं उनकी आप अपने यहां एक टीम से जांच करवा लीजिए जो भी प्रो‍सीजर इन्‍होंने किया है तो वह आखिर छूट कैसे गए अपील में, हम यहां पर जबरन केस बनाते हैं, ऊपर अगर अपील में छूट जाता है इसका मतलब कि किसी को आप टार्चर करने के लिए केस बना रहे, उससे अपनी मनमानी कर रहे हैं. यदि आपने केस बनाया तो वह नहीं छूटना चाहिए. आपके ऊपर के अधिकारी उसको क्‍यों छोड़ रहे हैं, यदि छोड़ रहे है तो या तो वह गलत है या तो ये गलत है. अगर ये गलत है तो इन पर कार्यवाही होनी चाहिए. वह व्‍यक्ति जो आपको टैक्‍स दे रहा लगातार उसको आप पिसने के लिए छोड़ देते हैं, मेरा आपसे आग्रह है कि रीवा की पिछले पांच साल की एक डिटेल स्‍क्रूटनी करवाए और बाकी मध्‍यप्रदेश के बेहतर भविष्‍य के लिए आप ये जो संशोधन ला रहे हैं, इसमें जो मुझे समझ में आ रहा है. एक तो आप ये गलती करते हो कि आप पूरा लिटरेचर नहीं देते, बस दो पन्‍ने दे दिए, उसमें क्‍या समझ में आएगा. हम जो सीखते हैं आप ही के कागज से ही तो पढ़कर सीखते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय – दो पन्‍ने में इतना समझ गए, पूरा लिटरेचर दे देते तो क्‍या होता(....हंसी)

          श्री अभय मिश्रा – अध्‍यक्ष जी, चलिए कोई बात नहीं मेरा यह कहना है कि थोड़ा लिबरल करें. मैं उम्‍मीद करता हूं कि जो आप विधेयक लाए हैं, इसमें थोड़ा लिबरल करने की शायद मुझे जो महक आ रही है कि करने की कोशिश हुई होगी, बहुत बहुत धन्‍यवाद.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा(जावद) – अध्‍यक्ष जी, मध्‍यप्रदेश माल और सेवा कर संशोधन विधेयक 2026 में मूलत: तीन धाराओं में परिवर्तन किया है. ये धाराएं बेसिकली जनता की और टैक्‍स पेयर की सुविधा बढ़ाने के लिए किया है. धारा 15 धारा 34 के माध्‍यम से करदाताओं में अगर किसी कारण बाद में कंसेशन हो या किसी बिल में कोई डिडक्‍शन हो तो उसका टैक्‍स उसके इनप्रपोर्शन कम कर दिया जाए, जो शायद हमारे पूर्व वक्‍ता समझ नहीं पाए, उन्‍होंने पूरा इतिहास बाकी सब समस्‍याओं का इस बिल के माध्‍यम से रख दिया, इस बिल में तो मात्र तीन बातें हैं कि अगर बाद में डिस्‍काउंट दी जाती है तो उसका उतने प्रतिशत टैक्‍स के डिडक्‍शन भी होती है, सरकार को भी फायदा है और आदमी भी वास्‍तविकता में जाने का प्रयास करता है. मूल बात इतनी सी है. दूसरा इन्‍होंने जो एक धारा 54 है, उसमें जो मिनिमम उसकी ..

5.10 बजे        सभापति महोदय (डॉ.राजेन्‍द्र पाण्‍डेय) पीठासीन हुये

          ..उप धारा 14 में जो संशोधन किया है, उसमें निर्यात के मामलों में जहां भुगतान किया गया है, प्रतिदाय दावा करने हेतु हजार रूपये की न्‍यूनतम सीमा को हटाया जाना प्रस्‍तावित है, क्‍योंकि कई बार व्‍यापार विषय वेल्‍यू का नहीं होता है, प्रतिष्‍ठा का होता है और कहीं न कहीं यह सरकार अब इस बात पर सोचने लगी है कि करदाता को सम्‍मानित, प्रतिष्ठित व्‍यक्ति मानते हुए, उसे सम्‍मानित तरीके से बात रखने का अवसर दे. मैं वास्‍तव में इस बात का अभिनंदन करता हूं कि करदाता को सम्‍मान देने के प्रयास के लिये, उसकी सुविधा के लिये जो संशोधन किया गया है, मैं उसका समर्थन करता हूं, लंबी बात करने का अवसर नहीं है, क्‍योंकि समय की सीमा भी दिख रही है और अभी एक बिल और भी है और इसके बाद अनुपूरक बजट भी है, मैं वास्‍तव में सब लोगों के मन की पीड़ा को समझते हुए अपनी वाणी को इस बिल का समर्थन देते हुए, यही विराम देता हूं, धन्‍यवाद.

          उप मुख्‍यमंत्री, वाणिज्यिक कर(श्री जगदीश देवड़ा) – सभापति महोदय, मध्‍यप्रदेश माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 पर अभी हमारे सम्‍माननीय सदस्‍य श्री अभय मिश्रा एवं श्री ओमप्रकाश सखलेचा जी दोनों ने अपने विचार रखे हैं, निश्चित रूप से अभय जी ने भी बहुत सारी बातें कहीं हैं और यह बात सही है कि जब से 2017 से जीएसटी लागू हुआ है, वन नेशन वन टैक्‍स और सही कहा है हमारे श्री ओमप्रकाश सखलेचा जी ने और श्री अभय मिश्रा जी ने भी कि समय-समय पर कई संशोधन करदाताओं के लिये व्‍यापारियों के लिये और भी छोटे बड़े सारे व्‍यापारी जो इससे संबंधित हैं, उन्‍हें अनेक कठिनाइयां आती हैं और व्‍यावहारिक तौर पर कई कठिनाइयां नियम प्रक्रिया में आती हैं, तो समय-समय पर इस प्रकार के संशोधन आते हैं और कई बार अच्‍छे सुझाव आते हैं, तो उन सुझावों को विभाग की ओर से भी जीएसटी कांउसिल में हम लिखकर भेजते हैं, वहां रखते भी जब जीएसटी काउंसिल की बैठक होती है, तो उसमें इन सुझावों को रखते भी हैं और मुझे लगता है कि वहां बड़े गंभीरता से चूंकि जीएसटी काउंसिल में सभी राज्‍यों के प्रतिनिधि उसमें होते हैं, कोई दल का सवाल नहीं है, सभी राज्‍यों के या तो मुख्‍यमंत्री रहते हैं, या वित्‍तमंत्री रहते हैं, या जीएसटी विभाग के कोई मंत्री रहते हैं, तो लगभग सभी राज्‍यों के प्रतिनिधि उसमें होते हैं और सर्वानुमति से उसमें अनुंशसाएं होती है और फिर वह भारत सरकार के संसद में पारित होती हैं, इसलिए मुझे लगता है कि सर्वानुमति से जितना बेहतर हो सकता है और अनुभव के आधार पर लगातार जो अनुभव जीएसटी में आ रहे हैं, धीरे-धीरे करके ऐसे सुझाव आते हैं, उसकी कड़ी में माननीय सभापति महोदय, तीन संशोधन आये हैं जो कि जीएसटी काउंसिल में भी हो गये हैं और भारतीय संसद में भी इनको पारित किया गया है, तो अब विधानसभा में भी यह अपेक्षित है कि यह यहां पर भी पारित हों. मैं संक्षिप्‍त में तीनों धाराओं के बारे में बताना चाहूंगा. धारा 15(3)(ख), धारा 34, धारा 54(6), उपधारा 54(14). सभापति महोदय, इनमें छोटे-छोटे व्‍यापारियों के लिये भी जो संशोधन आये हैं, वह वास्‍तव में बहुत महत्‍वपूर्ण आये हैं, पहला संशोधन आया है, जो धारा 15(3)(ख) से संबंधित है, मैं इसको दो लाईन में बताना चाहूंगा कि वर्तमान में जो प्रावधान है, इस धारा में प्रावधान है कि पोस्‍ट सेल डिस्‍काउंट अर्थात ऐसे डिस्‍काउंट जो वस्‍तु या सेवा की सप्‍लाई के बाद दिये जाते हैं, खरीद करते समय नहीं दिये जाते हैं, पर टैक्‍स भुगतान की छूट प्राप्‍त करने के लिये अनुबंध होना आवश्‍यक है. पहले अनुबंध करना बहुत आवश्‍यक था, लेकिन यह कठिनाई थी, इसमें हर सामान का अलग-अलग अनुबंध करना पड़ता था, लेकिन इस कठिनाई को दूर करके अभी जो संशोधन आया है , उस संशोधन प्रस्‍ताव के अनुसार पोस्‍ट सेल पर टैक्‍स भुगतान की छूट प्राप्‍त करने के लिये क्रेडिट नोट जारी करना होगा और अनुबंध की अनिवार्यता समाप्‍त की जा रही है. सभापति महोदय, मुझे लगता है इसके कारण वर्तमान क्रेडिट नोट की व्‍यवस्‍था न होने के कारण विवाद उत्‍पन्‍न होते थे, संशोधन के पश्‍चात विवाद की गुंजाइश समाप्‍त हो जायेगी, इसके साथ ही शासन को समय पर राजस्‍व प्राप्‍त होगा. माननीय सभापति महोदय, दूसरा संशोधन धारा (34) में वर्तमान प्रावधान है कि वर्तमान में क्रेडिट नोट जारी करने के कारण कई कारण इसमें सीमित कारण हैं जैसे इनवॉइस में अधिक वेल्‍यू दिखा दी गई हो, टैक्‍स अधिक लिख गया हो, माल की वापसी की गई हो अथवा सप्‍लाई की गई वस्‍तु या सेवा में कमी पाई गई हो, इसमें अब तक पोस्‍ट सेल डिस्‍काउंट का सीधा उल्‍लेख नहीं है जिसके कारण विवाद की स्थिति उत्‍पन्‍न होती थी, अब जो यह संशोधन किया गया है, विधेयक से हम पोस्‍ट सेल डिस्‍काउंट के लिये प्रावधान जोड़ रहे हैं जिसके अनुसार धारा (15) से प्रदान की जा रही पोस्‍ट सेल डिस्‍काउंट छूट के लिये भी क्रेडिट नोट जारी करना होगा. इतना ही नहीं इस प्रावधान से यह भी स्‍पष्‍ट किया गया है कि एक ही ग्राहक की कई चालान इनवॉइस के लिये यानी कंसोलिटेड अर्थात एक साल भर के लिये क्रेडिट नोट जारी किया जा सकेगा. यह माननीय सभापति महोदय, इसमें संशोधन किया गया है, इसका लाभ सभी ग्राहकों को मिलेगा.

          माननीय सभापति महोदय, तीसरा संशोधन यह छोटे-छोटे व्‍यापारियों के लिये किया गया है धारा (54) में प्रस्‍तावित है जो रिफंड से संबंधित है, इसमें दो भागों में संशोधन किया जाना प्रस्‍तावित है. पहला संशोधन धारा (54) की उपधारा (6) से संबंधित है जिसमें प्रॉविजनल रिफंड का प्रावधान है. वर्तमान में 90 प्रतिशत राशि का प्रॉविजनल अर्थात त्‍वरित रिफंड एक्‍सपोर्ट या एसईजेड स्‍पेशल इकोनॉमिक जोन से जुडे़ मामलों में ही मिलता है अब जो संशोधन होगा माननीय सभापति महोदय एक्‍सपोर्ट के अतिरिक्‍त ऐसे मामले जिनमें इंनवर्टेड ड्यूटी स्‍ट्रक्‍चर उसे शामिल किया जा रहा है जिसमें व्‍यापारी के पास आईटीसी इनपुट टैक्‍स क्रेडिट सेस रह जाती है इसमें एक लाभ होगा कि व्‍यवसायी के द्वारा 10 लाख का रिफंड एप्‍लाई किया जाता है तो उसे 9 लाख का रिफंड पहले अधिकतम 7 दिन में प्राप्‍त हो सकेगा पहले यह 60 दिन में प्राप्‍त होता था. 60 दिन से इसको 7 दिन में उसको मिलना चालू हो जायेगा, यह बहुत बड़ा उसका लाभ होगा.

          माननीय सभापति महोदय, दूसरा संशोधन धारा (54) की उपधारा 14 में किया जा रहा है जो 1 हजार रूपये की राशि से कम के रिफंड दिये जाने से संबंधित है. पहले 1 हजार से कम की राशि का रिफंड होता ही नहीं था, वर्तमान में यह था, अब संशोधन हुआ है इसमें कि इस संशोधन में एक्‍सपोर्ट के मामलों में एक हजार रूपये की सीमा समाप्‍त की जा रही है अर्थात अब 1 हजार रूपये से कम राशि के रिफंड भी स्‍वीकृत किये जा सकेंगे. यह पूरे देश में एक हजार रूपये का बड़ा महत्‍व है, लेकिन पहले एक हजार रूपये का नहीं था तो संशोधन में जैसे-जैसे आवश्‍यकता लगी यह संशोधन किया है, इसका लाभ यह होगा कि छोटे और मझोले निर्यातकों के हक में जो प्रतिदिन परिश्रम से अपना व्‍यापार आगे बढ़ा रहे हैं उनको इसका लाभ मिलेगा. माननीय सभापति महोदय, यह तीन संशोधन हैं और सही कहा, आपने जो सुझाव दिये मैंने नोट किये हैं और भी सुझाव हमारे पास में जो आते हैं जीएसटी काउंसिल में हम विभाग की ओर से समय-समय पर लिखकर के भेजते हैं और मुझे पूरी उम्‍मीद है कि उन सुझावों को पूरी गंभीरता से वहां पर लेते हैं और सभी राज्‍य के वहां पर प्रतिनिधि होते हैं इसलिये उसमें किसी भी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होता, सर्वानुमति से अनुशंसा भारत सरकार में आती है और फिर भारत सरकार में वह पारित होता है तो निश्चित रूप से यह तीनों धारायें हैं इसमें जो संशोधन लाये हैं माननीय सभापति महोदय, मुझे लगता है कि इसको सर्वानुमति से पारित किया जाये.                                                                     

          सभापति महोदय - प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश माल और सेवा कर(संशोधन)विधेयक,2026 पर विचार किया जाय.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

          सभापति महोदय - अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.

          सभापति महोदय -प्रश्न यह है कि खण्ड 2 से 4 इस विधेयक का अंग बने.

खण्ड 2 से 4 इस विधेयक के अंग बने

          सभापति महोदय - प्रश्न यह है कि पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र इस विधेयक का अंग बने

पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र इस विधेयक का अंग बना

          श्री जगदीश देवड़ा,उपमुख्यमंत्री(वाणिज्यिक कर) - सभापति महोदय,मैं प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश माल और सेवा कर(संशोधन) विधेयक,2026 पारित किया जाय.

          सभापति महोदय - प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

          सभापति महोदय - प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश माल और सेवा कर(संशोधन) विधेयक,2026 पारित किया जाय.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

विधेयक सर्वानुमति से पारित हुआ.

          (6) मध्यप्रदेश निरसन विधेयक,2026(क्रमांक10सन्2026)

        श्री गौतम टेटवाल,राज्यमंत्री(अधिकृत विधि और विधायी) - सभापति महोदय,मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश निरसन विधेयक,2026 पर विचार किया जाय.

          सभापति महोदय - प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

          श्री अनिरुद्ध (माधव) मारू(मनासा) - सभापति महोदय,मैं माननीय मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत मध्यप्रदेश निरसन विधेयक,2026 के समर्थन में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. सबसे पहले तो इसके बारे में यह कहना चाहूंगा कि यह विधेयक किसी का अधिकार छीनने वाला नहीं न कोई नयी व्यवस्था करने वाला है. यह केवल ऐसे कानून जो अंग्रेजों के समय में बनाए गए थे उनको विधि की पुस्तक से हटाने का काम कर रहा है जिनकी आज कोई व्यवहारिक उपयोगिता नहीं रह गई है क्योंकि उन सब बातों के लिये  अन्य कानूनों में,अन्य धाराओं में प्रावधन कर दिये गये हैं और अंग्रेजों के समय के बने हुए हैं इनमें 7 ऐसे कानून हैं जिन्हें निरसित किया जा रहा है. वर्ष 1933 में डेट कन्सीलेशन एक्ट किसानों एवं ऋणग्रस्त व्यक्तियों के समझौते के लिये इसको बनाया गया था लेकिन आज चूंकि बैंकिंग व्यवस्था हो गई लोक अदालतें हो गईं.वैकल्पिक विवाद निवारण के दूसरे तंत्र हो गये और इन आधुनिक व्यवस्थाओं में यह अधिनियम अप्रासंगिक हो गया इसलिये हटाये जा रहे हैं. ऐसे ही वर्ष 1937 का प्रोटेक्शन आफ डेटर्स एक्ट ऋणी और महाजनों के उत्पीड़न,संरक्षण देने के उद्देश्य से बनाया गया था लेकिन दूसरे कानूनों में इनका प्रावधान कर दिया गया है और इसीलिये इसकी व्यवहारिक उपयोगिता समाप्त हो गई. अंग्रेजों के समय में अलग अलग तरह की व्यवस्थाएं थीं समाज की अलग परिस्थितियां थीं और आज सारी परिस्थितियां अलग हैं इसलिये इन कानूनों का औचित्य नहीं रहा.वर्ष 1937 में फेमाईन रिलीफ फंड अकाल एवं प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कोष बनाने के लिये था आज राहत आपदा प्रबंधन के लिये अलग अधिनियम है. राष्ट्रीय राज्य आपदा प्रबंध तंत्र अलग है.एसडीआरएफ,एनडीआरएफ जैसी व्यवस्थाएं प्रभावी काम कर रही हैं इसलिये इस एक्ट की उपयोगिता भी खत्म हो गई. वर्ष 1939 में रिलीफ आफ इनडेटेडनेस एक्ट का उद्देश्य कृषकों को ऋण से राहत देना था आज ऋण निस्तारण के लिये आधुनिक बैंकिंग व्यवस्थाएं हैं. लोक अदालतें हैं. ऐसे ही वर्ष 1940 में विद्या मंदिर एक्ट लाया गया था. वर्तमान में शिक्षा के अधिकार अधिनियम में माध्यमिक शिक्षा अधिनियम,निजी शिक्षण संस्थाओं में विस्तृत कानून और नियमों की व्यवस्था हो गई है और इसलिये इसकी आवश्यक्ता भी समाप्त हो गई. वर्, 1944 में मध्यप्रदेश रेगुलेशन आफ काउचिंग एक्ट जो मोतियाबिंद के पारंपरिक उपचार हेतु एक नियंत्रण था लेकिन आज चूंकि मोतियाबिंद के आपरेशनों में बहुत अत्याधुनिक  तकनीकें आ गई हैं तब आंखें चली जाती थीं तो उसके लिये कानून बनाया गया था लेकिन आज मोतियाबिंद का आपरेशन बहुत साधारण हो गया है तो उस कानून की कोई आवश्यक्ता ही नहीं रह गई है दूसरे कानूनों में सब प्रावधान किये गये हैं सर्जरी के लिये ऐसे ही वर्ष 1947 में लैण्ड सर्वे एक्ट बनाया गया था जो भूमि के कटाव के लिये था लेकिन आज सारा सेटेलाईट सिस्टम के माध्यम से सब चीजों का कंट्रोल हो गया है तो अलग से सर्वे की कोई जरूरत नहीं रही इसलिये उस कानून का भी निरसन किया जाना आवश्यक था और अनावश्यक रूप से लगभग मृत समान धाराएं पड़ी हुई थीं अधिनियम थे जिनकी कोई उपयोगिता नहीं रह गई थी इसलिये आज इन सबको निरसित किया जा रहा है और इससे कानून अपना काम चाक चौबंद कर पाएगा. मेरा इस अधिनियम में जो निरसन होना है इसका मैं समर्थन देता हूं. धन्यवाद.

            राज्य मंत्री, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार (श्री गौतम टेटवाल) माननीय सभापति महोदय, किसी भी राज्य की विधि पुस्तक में केवल वही कानून बने रहने चाहिए, जो वर्तमान समय में आवश्यक हैं. सभापति महोदय, उपयोगी और प्रभावी हो सके, ऐसे में समय के साथ कई कानून अपनी उपयोगिता खो चुके हैं. परंतु औपचारिक रूप से निरसित न होने के कारण वे विधि की पुस्तक में बने रहते हैं.

          माननीय सभापति महोदय, हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी द्वारा परिषद् में दिए गए निर्देशों के अनुपालन में राज्य शासन द्वारा विभागों से उनके अधीन प्रशासित पुराने अधिनियमों की समीक्षा की गई. संबंधित विभागों से प्राप्त जानकारी और परीक्षण के आधार पर वर्ष 1947 से पूर्व के 7 अधिनियम ऐसे पाए गए, जिनकी वर्तमान समय में कोई स्वतंत्र व्यावहारिक उपयोगिता शेष नहीं रह गई है. ये अधिनियम तत्कालीन सेन्ट्रल प्रोविन्स एण्ड बरार रीजन की विशेष प्रशासनिक, आर्थिक एवं सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे. स्वतंत्रता के पश्चात् शासन की संरचना, राजस्व एवं भूमि व्यवस्था, ऋण राहत, आपदा सहायता, शिक्षा एवं अन्य विषयों पर नई विधि एवं नियम तथा प्रशासनिक व्यवस्था लागू हुई थी. परिणामस्वरूप इन पुराने अधिनियमों का व्यवहार में उपयोग समाप्त हो चुका है अथवा उनके विषय वर्तमान विधिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं में समाहित हो चुके हैं. इस विधेयक द्वारा केवल अप्रचलित एवं अनुपयोगी अधिनियमों का निरसन किया जा रहा है. किसी नागरिक पर कोई नया दायित्व नहीं डाला जा रहा है और न ही किसी वर्तमान अधिकार को समाप्त किया जा रहा है. विधेयक में आवश्यक व्यावृत्ति का प्रावधान भी रखा गया है, इसलिए निरसित अधिनियम के अंतर्गत पूर्व में विधिपूर्वक किए गए कार्य, अर्जित अधिकार, उत्पन्न दायित्व तथा प्रारंभ की गई कार्यवाहियां केवल निरसन के कारण प्रभावित नहीं होंगी.

          माननीय सभापति महोदय, यह विधेयक विधियों की संख्या कम करने मात्र का प्रयास नहीं है, बल्कि राज्य की विधि पुस्तक को, कानून की पुस्तक को सरल, स्पष्ट, अद्यतन एवं सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में एक नया और आवश्यक कदम होगा.

          माननीय सभापति महोदय, इस विधेयक द्वारा ऐसे सात अधिनियम निरसित किए जा रहे हैं, जिनकी वर्तमान समय में कोई व्यावहारिक उपयोगिता शेष नहीं रह गई है. वर्ष 1933 में आजादी के पूर्व और गुलामी के समय में वर्ष 1933 का डेट कन्सीलिएशन एक्ट किसानों एवं ऋणग्रस्त व्यक्तियों के ऋण संबंधी समझौते के लिए बनाया गया था. आज बैंकिंग व्यवस्था, लोक अदालतें, वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्र तथा अन्य सुविधाएं व्यवस्थित उपलब्ध हैं. इसलिए यह अधिनियम अप्रासंगिक हो चुका है.

          माननीय सभापति महोदय, ऐसे ही वर्ष 1937 का प्रोटेक्शन ऑफ डेटर्स एक्ट ऋणियों को महाजन के उत्पीड़न से संरक्षण देने के उद्देश्य से बनाया गया था. मध्यप्रदेश में अधिनियम की धारा (2) के अंतर्गत धारा (4) एवं (5) लागू करने हेतु किसी क्षेत्र, जिले के अधिसूचित किए जाने का अभिलेख उपलब्ध नहीं है. परिणामस्वरूप अधिनियम की दण्डात्मक व्यवस्था व्यवहार में परिवर्तित नहीं है तथा इसकी स्वतंत्र, व्यावहारिक उपयोगिता समाप्त हो चुकी है.

          माननीय सभापति महोदय, इसी प्रकार 1937 का फेमाइन रिलीफ फण्ड एक्ट अकाल एवं प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत कोष बनाने के लिए बनाया गया था. आज आपदा प्रबंधन अधिनियम राष्ट्रीय एवं राज्य आपदा प्रबंधन तंत्र तथा एसडीआरएफ एवं एनडीआरएफ जैसी व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से काम कर रही हैं. इसी प्रकार वर्ष 1939 का रिलीफ ऑफ इनडेटेडनेस एक्ट का उद्देश्य कृषकों को ऋण राहत देना था. आज ऋण निरस्तिकरण के लिए आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था, लोक अदालतें तथा अन्य विविध व्यवस्था उपलब्ध हैं. वर्ष 1940 का विद्या मंदिर एक्ट ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रसार के उद्देश्य से बनाया गया था. वर्तमान में शिक्षा का अधिकार अधिनियम माध्यमिक शिक्षा अधिनियम तथा निजी शिक्षण संस्थाओं के संबंध में विस्तृत कानून एवं नियम लागू हैं. वर्ष 1944 का द मध्यप्रदेश रेगूलेशन ऑफ काउचिंग एक्ट मोतियाबिंद के प्रारंभिक उपचार..

5.30 बजे                                     अध्‍यक्षीय घोषणा

                      सदन के समय में वृद्धि विषयक एवं स्‍वल्‍पाहार संबंधी

          सभापति महोदय – आज की कार्यसूची में सम्मिलित समस्‍त कार्य पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाये. मैं समझता हूँ कि सदन इससे सहमत है. माननीय सदस्‍यों के लिए चाय की व्‍यवस्‍था लॉबी में की गई है, कृपया सुविधानुसार ग्रहण करें. 

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.)

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक – माननीय सभापति जी, सदन कल तक चले. आज समय बढ़ाने की जरूरत नहीं है. सदन कल तक चले.

सभापति महोदय – सदन चल ही रहा है. मंत्री जी का भाषण जारी है, पूरा हो जाये. 

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक – सभापति जी, उनका भाषण जारी है. जैसे आपने समय बढ़ाने की बात कही, तो समय बढ़ाने की जरूरत नहीं है. इसको आगे बढ़ाकर कल भी कर सकते हैं. आप कल सदन चला लें.

सभापति महोदय – कार्यमंत्रणा समिति में चर्चा हुई होगी. माननीय मंत्री जी आप अपना भाषण जारी रखें.

श्री गौतम टेटवाल – माननीय सभापति महोदय, वर्ष 1944 का द मध्‍यप्रदेश रेगूलेशन ऑफ काउचिंग एक्‍ट जैसे मोतियाबिन्‍द के पारम्‍परिक उपचार, काउन्सिल को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया था. आधुनिक चिकित्‍सा विज्ञान में यह पद्धति समाप्‍त हो चुकी है तथा मोतिया बिन्‍द का उपचार अब वैज्ञानिक एवं मान्‍यता प्राप्‍त चिकित्‍सा प्रणाली से समाप्‍त किया जा रहा है. वर्ष 1947 का लैण्‍ड सर्वे एक्‍ट (सेन्‍ट्रल प्रोविन्‍स एण्‍ड बरार रीजन) के सर्वेक्षण में संबंधित था, वर्तमान में इस अधिनियम के अंतर्गत कोई कार्यवाही व्‍यवहार में नहीं होती है. अत: राजस्‍व विभाग अन्‍य विधियों के अंतर्गत कार्य करता है, इसलिए इन सभी अधिनियमों को विधि पुस्‍तक में बनाये रखने का कोई औचित्‍य नहीं हो रहा है.

माननीय सभापति महोदय, जो-जो गुलामियां की निशानी थी, उन सब निशानियों को मध्‍यप्रदेश की सरकार समाप्‍त कर रही है और इस्‍लाम नगर से उसकी शुरुआत माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने प्रारंभ कर दी है. गुलामी की भारतीय संस्‍कृति को नीचा दिखाने की सारी निशानियों को हम समाप्‍त कर देंगे. मैं इस अवसर पर इन्‍हीं शब्‍दों के साथ सम्‍मानीय सदन से इस विधेयक को सर्वसम्‍मति से पारित करने का अनुरोध करता हूँ. धन्‍यवाद.

सभापति महोदय – धन्‍यवाद, मंत्री जी.  

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) – माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूँ कि इन्‍होंने कानून खत्‍म किये, इसमें धाराएं कितनी थीं ? सिर्फ धाराएं बता दो के किस-किसमें कितनी धाराएं थीं ? सिर्फ आंकड़ा बता दो.

सभापति महोदय – प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश निरसन विधेयक,2026 पर विचार किया जाय.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

अब विधेयक के खण्‍डों पर विचार होगा.

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 2 तथा 3 एवं अनुसूची इस विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 2 तथा 3 एवं अनुसूची इस विधेयक का अंग बने.

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 1,पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र इस विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 1,पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र इस विधेयक का अंग बना.

राज्‍य मंत्री, अधिकृत विधि और विधायी (श्री गौतम टेटवाल) – अध्‍यक्ष महोदय, मैं, प्रस्‍ताव करता हूँ कि मध्‍यप्रदेश निरसन विधेयक, 2026 पारित किया जाय.

सभापति महोदय – प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ, प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश निरसन विधेयक, 2026 पारित किया जाय.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

विधेयक पारित हुआ. (मेजों की थपथपाहट)

5.34 बजे

       

 


 

          श्री बाला बच्‍चन (राजपुर)-  सभापति महोदय, जैसा कि माननीय उपमुख्‍यमंत्री जी, जो कि वित्‍त मंत्री के प्रभार में भी हैं. उन्‍होंने वित्‍तीय वर्ष 2026-27 का प्रथम अनुपूरक अनुमान, जो हमारे सामने रखा है, उसमें लगभग 54 विभागों में से 29 विभागों के लिए रुपये सात हजार, चार सौ पचपन करोड़, छिहत्‍तर लाख, पचपन हजार, चौवन की मांग की है. यह अभी इस वर्ष का प्रथम अनुपूरक है. इसके पहले मुख्‍य बजट लगभग रुपये 4 लाख 38 हजार करोड़ का था. इस अनुपूरक की जड़े गुजरात से जुड़ी हुई हैं. इसलिए मैं यह बात पहले कहना चाहूंगा कि अभी तीनों राज्‍यों के मुख्‍यमंत्रियों की बैठक दिल्‍ली में हुई थी. लेकिन अभी हमें जो राशि गुजरात से लेनी थी, चूंकि मैं बड़वानी जिले से आता हूं और नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) के लिए इस बजट की 38 प्रतिशत राशि रखी गई है.

          सभापति महोदय, हम इस बात को भूले नहीं हैं, मैंने और मेरे दल के साथियों ने इस बात की मांग की थी. मेरा स्‍वयं का प्रश्‍न क्रमांक 2663, दिनांक 25.02.2026 को था. उसमें सरकार ने जवाब दिया था, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण विभाग मुख्‍यमंत्री जी के पास ही है. हमें गुजरात सरकार से राशि लेनी थी लेकिन अब हम उन्‍हें लगभग रुपये 231 करोड़ दे रहे हैं लेकिन मैं बताना चाहता हूं जो राशि हमें गुजरात से लेनी थी, वह रुपये 7 हजार 6 सौ 69 करोड़ थी लेकिन पता नहीं क्‍या हुआ इस डबल इंजन की सरकार ने महीने भर पहले दिल्‍ली में बैठक की, जिसमें गुजरात, महाराष्‍ट्र और मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री थे. रुपये 7 हजार 6 सौ 69 करोड़ जो कि हमें गुजरात से लेने थे, वह राशि समाप्‍त करके, रुपये 231 करोड़ अब हमें गुजरात को देने पड़ रहे हैं. मैं समझता हूं कि यह दुर्भाग्‍य है. यह डबल इंजन की सरकार हमारे साथ भेदभाव कर रही है.

          वित्‍त मंत्री जी, जब आप बोलें तो इस बात का जवाब भी दें कि हमारे साथ इस प्रकार का धोखा, अन्‍याय, छलावा क्‍यों हो रहा है. मैं जानता हूं, मैं बड़वानी जिले से आता हूं, हमारे साथी बड़वानी, धार, खरगोन जिले से आते हैं. हम नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण से जुड़े हैं, हम इस बात को जानते हैं, यह राशि जो कि इस बजट की लगभग 38 प्रतिशत है और यदि यह राशि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के स्‍थान पर अन्‍य विभागों को मिलती तो उससे प्रदेश के विकास के कार्य होते.

          सभापति महोदय, दुर्भाग्‍य यह है कि बड़वानी जिले में राजपुर विधान सभा में पुनर्वास स्‍थलों में जो मूलभूत सुविधायें होनी चाहिए, अभी तक इतने वर्षों के बाद भी बड़वानी जिले, राजपुर, अलीराजपुर, धार, खरगोन जिले कहीं भी नहीं हैं. सरकार को इस पर ध्‍यान देना चाहिए. सरदार सरोवर बांध से संबंधित इंदिरा सागर बांध से संबंधित, हमने कई बार सदन में प्रश्‍न लगाये हैं और उनके जो जवाब आये इसलिए मैंने यह बात कही है. कहीं न कहीं ये जो प्रथम अनुपूरक बजट है, जिसकी 38 प्रतिशत राशि जो कि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण को दी गई है, कहीं न कहीं इसके तार गुजरात से जुड़े हुए हैं, इसलिए मैंने इस बात को कहा है.

          सभापति महोदय, बात यहीं समाप्‍त नहीं हो जाती है. मेरा आग्रह है कि 54 विभाग माननीय वित्त मंत्री जी ने लगभग साढ़े सात हजार करोड़ रुपए की राशि अनुदान मांगों के माध्यम से मांगी है. उसमें 25 ऐसे विभाग हैं जो इस अनुपूरक से बाहर हैं. उनको छोड़ दिया गया है. 12 ऐसे विभाग हैं जिनमें हजार रुपए या उससे भी कम का प्रावधान किया गया है. जिस वर्ग से माननीय उप मुख्यमंत्री जी आते हैं, जिन्होंने बजट प्रस्तुत किया है.  अनुसूचित जाति विभाग इसके लिए मात्र 200 रुपए का प्रावधान किया है. मैं जिस वर्ग से आता हूँ. अनुसूचित जनजाति वर्ग. इस विभाग में केवल 100 रुपए का प्रावधान है. माननीय पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल जी आप जिस पिछड़ा वर्ग से आते हैं उस वर्ग तो इसमें छुआ भी नहीं गया है. इस अनुपूरक बजट में उसको पूरी तरह से छोड़ दिया गया है. एफआरबीएम के अन्तर्गत जो बजट का प्रबंधन होता है. इसमें इन सभी चीजों का देखना चाहिए. मैं मानता हूँ कि यह अनुपूरक बजट है इसलिए आप इस बात को कह सकते हैं. लेकिन आप कर्ज कितना ले रहे हैं. आपने कर्ज लेने की सारी सीमाएं लांघ दी हैं. अब तो एक महीने में तीन बार कर्ज लेने लगे हैं. राजकोषीय घाटे की सीमा को आप लांघ गए हैं. शुद्ध ऋण लेने की सीमा को आप लांघ गए हैं. जीएसडीपी जिसके अन्तर्गत सरकार को कर्ज लेना चाहिए. तीन या साढ़े तीन प्रतिशत उसको भी बढ़ाकर कर्ज देने के लिए यह केन्द्र सरकार को पत्र लिखते हैं, यदि अनुमति मिल जाती तो उसको भी लांघकर यह कर्ज लेते. 5 लाख करोड़ से भी अधिक का कर्ज अभी सरकार पर हो गया है. यह सरकार उधार लेकर घी पीने का काम कर रही है. कर्ज को ब्याज को चुकाना पड़ता है वो 80 करोड़ रुपए है. इस पर विचार करना पड़ेगा. प्रदेश कहां जा रहा है लेकिन कोई बात नहीं सुनी जाती है. न ही इस पर कोई रोक लगाई जा रही है. इसमें कब कमी आएगी यह समझना भी समझ से परे है. मैं हमेशा वित्त मंत्री जी को बोलता हूँ. जहां तक बजट खर्च करने की बात है. बजट बन गया, कर्ज ले लिया, उधारी लेकर घी आपने पी लिया.लेकिन उसके बाद बजट को जो खर्च करने की बात है वो आप सुन लीजिए.

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) बाला जी मुझसे बहुत सीनियर हैं. जितना खर्च जब जहां हो जाता है, वहां ज्यादा पैसा डाल दिया जाता है. यह व्यवस्था बदल गई है. जो आपने एससी, एसटी और ओबीसी की बात कही है. अगर वहां बजट नहीं है, पैसा नहीं है तो फिर अनुपूरक में हम डालेंगे. अगर वहां पैसा उपलब्ध है तो फिर वहां पैसा डालने का कोई काम नहीं है. दूसरा जब से केन्द्र की सरकार का एक वित्तीय प्रबंधन बना है कि जो बजट में एलोकेशन होता है उससे भी ज्यादा यदि आप खर्च करते हो तो आपको मिल जाता है. उसका उदाहरण पिछले अनुपूरक में हमको ही 4200 करोड़ रुपए मिला था. क्योंकि प्रधानमंत्री आवास के 40 प्रतिशत पैसे देने थे ताकि हमारे लेप्स न हों. तो मुझे लगता है कि वित्तीय प्रबंधन अनुपूरक कर्जा लेकर घी पीने के लिए नहीं है. यह काम आप करते रहे हैं. यह अच्छे कामों के लिए है.

          श्री बाला बच्चन जी. मैं उसको स्पष्ट करता हूँ.  आपने वर्ष 2025-2026 में बजट लिया था. आरएसएस के जो संस्थापक रहे हैं डॉ. हेडगेवार. जिनके संग्रहालय के लिए 5 करोड़ रुपए के बजट का प्रोवीजन किया था. 5 करोड़ में से मात्र 50 लाख रुपए खर्च हुए हैं. यह बात हम तक आपके ही लोगों के द्वारा आती है. लोग बोलते हैं कि बाला भैया क्या बोलें. हेडगेवार जी के संग्रहालय की स्थापना के लिए 5 करोड़ रुपए का बजट था. 50 लाख रुपए ही खर्च करना बता रहे हैं लेकिन जाकर काम देखोगे तो 10 लाख रुपए का भी काम नहीं हुआ है. मेरा कहना यह है कि जब आपने इस संग्रहालय की स्थापना खर्च करने का जो प्रबंधन होना चाहिए उस पर आप करप्शन करने से नहीं चूके हैं तो आम जनता का जो बजट एलोकेट करते हो. उनका क्या होता होगा. जिनके लिए आप बजट बनाते हैं, एलोकेट करते हो, लेकिन अलोकेट करते हैं लेकिन उनको बराबर उन योजनाओं के लिए, उन क्षेत्रों के लिए, उन वर्गों के लिए आप बिल्‍कुल भी खर्च नहीं करते हैं. आए दिन हम लोग हर सत्र में इन बातों को उठाते हैं तो माननीय मंत्री जी, जब आप बोलें तो इन चीजों को बताएं और इस कारण अब इस वर्ष इसी संग्रहालय के लिए जहां 5 करोड़ रुपये का बजट दिया था अब वह मात्र एक करोड़ का बजट करना पड़ गया है, तो इससे स्‍पष्‍ट होता है कि बजट को खर्च करना भी सरकार को ठीक ढंग से नहीं आता है और जो खर्च करना चाहिए वह भी सरकार खर्च नहीं कर पा रही है. बात यहीं समाप्‍त नहीं होती है. मेरा आपसे कहना है कि अभी तक की जितनी भी आपकी जो दिसम्‍बर 2023 के बाद से रीजनल समिट हुई हैं, ग्‍लोबल समिट हुई हैं, लेकिन रोजगार में कहीं भी वृद्धि नहीं हुई है. बेरोजगारों की संख्‍या बढ़ी हुई है. उसके बाद बेरोजगारों का भविष्‍य पूरी तरह से अंधकार में है और यही कारण है, यही इसका परिणाम है कि देश में आज जी-जेन के माध्‍यम से जो स्थिति बनती जा रही है, जी-जेन ने जो अन्‍य देशों में किया, हमारा देश, हमारा प्रदेश भी बारूद की ढेर पर है. सरकारों को चाहे वह डबल इंजन की सरकार हो, चाहे मोहन यादव जी की सरकार हो, देश में मोदी जी की सरकार हो, उनको विचार करना पड़ेगा नहीं तो अब यह आंदोलन रुकने वाले नहीं हैं और अगर ऐसी ही आप लालीपाप देते रहे, उनको अगर आपने काम और रोजगार नहीं दिया तो भयावह स्थिति आगे बन जाएगी.

सभापति महोदय, प्रदेश की पूरी आशा, ऊषा कार्यकर्ता हैं उनको 4-4 महीने से वेतन नहीं मिला है और सरकार ने वेतन में वृद्धि करने की जो घोषणा की है 1,000 और 1,500 रुपये बढ़ाने की वह भी अभी तक उनको नहीं मिली है. कल स्‍थानीय निकाय से संबंधित एक विधेयक पर मैंने एक मिनट का आपसे समय मांगा था लेकिन आपने मुझे उसमें समय नहीं दिया था. मेरा उसमें यह आग्रह था कि जो नई नगर पंचायतें बन रही हैं, विशेषकर जो अनुसूचित जाति और पेसा एक्‍ट वाले जिलों में, वहां पहले ग्राम पंचायतों से जो नगर पंचायतों में मिली हैं, वह वार्ड फॉरेस्‍ट एरिया में थे और उन वार्डों को फिर नगर पंचायत में जोड़ने के बाद उनको जो दोनों सरकारों से लाभ मिलना चाहिए राज्‍य सरकार और केन्‍द्र सरकार से वह नहीं मिल पा रहे हैं. मैं राजपुर विधान सभा क्षेत्र बड़वानी जिले की जिस विधान सभा से मैं चुनकर आता हूं, एक ठीकरी नगर पंचायत है उसका वार्ड नंबर 12 है, वह ग्राम पंचायत पहले ट्राइबल थी. उसका वार्ड 12 जिसमें एक सामरतलई करके स्‍थान रहा है, आउलीदर करके रहा है, उसको बेड़ी मद में लिया है. बेड़ी मद में लेने से उनका नुकसान हो रहा है. इसलिए उनको आबादी मद में जोड़ा जाए जिससे उनको उसका लाभ मिल सके.

श्री उमाकान्‍त शर्मा -- बेड़ी मद क्‍या इसको स्‍पष्‍ट कर दें.

श्री बाला बच्‍चन -- फॉरेस्‍ट लैंड गांव की बोली में उसको बेड़ी मद बोलते हैं. मतलब   फॉरेस्‍ट लैंड, बेड़ी पहाड़ी जो होती है, मजरे, पाले, टोले जो होते हैं मैं समझता हूं कि हम आपके इधर आएंगे तो आपको बता देंगे कि मजरा, पाला, टोला या बेड़ी किसको बोलते हैं. अगर इंग्लिश में सुनना चाहते हैं तो फॉरेस्‍ट लैंड. ठीक है पंडित जी. कल मेरा एक निवेदन था कैलाश विजयवर्गीय जी जो बोल रहे थे, उन्‍होंने कहा था कि 200 करोड़ हमको केन्‍द्र सरकार ने दिए हैं और 100 करोड़ हम राज्‍य सरकार से लेंगे. इसमें केवल 21 करोड़ का प्रावधान किया है. वह अभी यहां हैं नहीं, मुझे सुन रहे होंगे, मैंने यह पूरी प्रथम अनुपूरक अनुमान की जो बुक 68 पेज की है, इसकी सभी अनुदान मांगों को पढ़ा है, मुख्‍य शीर्ष पढ़े हैं, इसके मद को पढ़े हैं. विजयवर्गीय संसदीय कार्य मंत्री जी को मैं कहना चाहता हूं कि 100 करोड़ रुपये आप कहां से लेंगे. केवल 21 करोड़ रुपये का ही प्रावधान है और यह जो संशोधन विधेयक बिल कल आप अग्निशमन के लिए लाए हैं इसमें वर्षों लग जाएंगे. कल जो आया है जिस पर चर्चा हुई है संशोधन विधेयक पर, उस पर खर्च 40 करोड़ रुपये हुआ है. मुझे बोलने का चांस नहीं मिला था और लास्‍ट में एक-एक एमएलए को ही बोलने के लिए कर दिया था इसलिए मैं आज यह बात इसमें डाल रहा हूं.

सभापति महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि निवेश प्रोत्‍साहन योजना जिसके अंतर्गत उद्योग विभाग, एमएसएमई विभाग आते हैं, अनुसूचित जाति, जनजाति और सब स्‍कीम की राशियां मैं समझता हूं कि अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़े वर्ग के स्‍टूडेंट्स को नहीं मिल पा रही है, इस कारण से भी बेरोजगारी बढ़ती जा रही है. हमारे माननीय मंत्री जी जब बोलें तो इस पर भी ध्‍यान दें. मेरा आग्रह है कि सीखो कमाओ योजना केवल-केवल चुनाव तक आती है और उसके बाद उस पर कोई ध्‍यान नहीं दिया जाता है. इस कारण से भी आज स्थिति प्रदेश में बनती जा रही है. प्रदेश में आयोजित रोजगार मेले केवल दिखावटी बनकर रह गए हैं वह रिजल्ट ओरियेंटेड होना चाहिये केवल फार्मेलिटी होती है इसको मैं समझता हूं कि ठीक ढंग से करेंगे तो बेरोजगारों को इसकी आवश्यकता है और हमारे पास में जो अच्छे स्किल वाले बच्चे हैं उनको रोजगार मिलेगा और जो रोजगार की कमी होती जा रही है इससे रोजगार की संख्या बढेगी.

          माननीय सभापति महोदय, बड़वानी जिले में स्व सहायता समूह द्वारा निर्मित गणवेश का भुगतान पिछले 3 वर्षों से बाकी है उसका पेमेंट अभी तक नहीं हुआ है, दूसरा जिस जिले से मैं आता हूं और मैंने जैसे कि उल्लेख किया है एनवीडीए का खूब जबर्दस्त तरीके से रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है चाहे वह बिछोड़ी हो, बरदा हो, ब्राह्मण गांव, नंदगांव हो ओछर हो, खूब अवैध उत्खनन हो रहा है सरकार को इस अवैध रेत के उत्खनन पर रोक लगाना चाहिये और मेरे ख्याल से तो अवैध रेत का व्यापार, अलीराजपुर में, धार में, बड़वानी में हो  रहा है इस पर सरकार को तत्काल रोक लगाना चाहिये.

          माननीय सभापति महोदय, प्रदेश में अपराधों का ग्राफ बहुत तेजी से बढ़ा है, भले ही हम बहुत खुश हो लें, चाहे वह इंदौर या भोपाल की आयुक्त प्रणाली की बात कह कर के हम खुश हो ले, लेकिन महिलाओं पर जुर्म और अत्याचार ,अन्याय जो बढ़ा है, महिलाओं और बच्चियों की गुमशुदगी जो बढी है और उसके बाद चोरी है , डकैती है, लूट है इसकी संख्या जो बढ़ी है तो सरकार को इस पर रोक लगाना चाहिये और जो आंकड़े हमारे सामने आ रहे हैं वह चिंता वाले आंकड़े हैं. 15 माह की हमारी सरकार में बड़े बड़े जो गुंडे थे वह भूमिगत हो चुके थे, गुंडा एलीमेंट मध्यप्रदेश छोड़ चुके थे  ऐसा खोफ  और डर गुंडों पर बनाना पड़ेगा यहां तो उल्टा पुलिस पर और खाकी बर्दी पर यह डर बनता जा रहा है, तो कहीं पर भी कानून और व्यवस्था के नाम पर मध्यप्रदेश सुरक्षित नहीं है. इस पर भी मंत्री आप ध्यान देंगे तो ज्यादा अच्छा होगा.

          माननीय सभापति महोदय, दो तीन पाईंट और मैं कहना चाहूंगा. प्रदेश में आदिवासियों की जमीन को गैर आदिवासियों को विक्रय करने के प्रकरणों की संख्या बहुत बढ़ती जा रही है . बुरहानपुर में लगभग 196 हेक्टेयर, इंदौर में लगभग 153 हेक्टेयर और खंडवा जिले की 288 हेक्टेयर  भूमि ऐसे गैर आदिवासियों की दी जा रही है. कल सदन मे, मैं नारेबाजी सुन रहा था यह सरकार आदिवासियों को बे जमीन और बे घर करती जा रही है, इस पर रोक लगना चाहिये नहीं तो आगे भयावह स्थिति बनेगी. लगभग 22 से 23 प्रतिशत की आबादी वाला यह वर्ग है और इस पर ध्यान देना चाहिये.

          सभापति महोदय, महत्वपूर्ण बात एक ओर यह है कि अनुसूचित जाति बस्ती विकास का फंड जनप्रतिनिधियों की बिना राय के दिया जाता है, जहां तक मुझे जानकारी है, मेरे यहां पर जो मुझे फीडबेक मिला है, पूरे बजट को बेचा जाता है, इसी कारण से मैंने यह बात की है चाहे मेरे वर्ग के लिये विकास की राशि दी जाती है या फिर उप मुख्यमंत्री देवड़ा जी के वर्ग के लिये विकास की राशि दी जाती है, वार्ड और मोहल्लों के विकास के लिये जो राशि दी जाती है उस पर रोक लगायें, राशि बेची जाती है और जनप्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया जाता है इस कारण से ऐसी स्थिति बनती है इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिये.

          माननीय सभापित महोदय, मेरी राजपुर विधानसभा की तीन नगर पंचायतें हैं ठीकरी, अंजड़ और राजपुर जो अग्निशमन सेवा संबंधी विधेयक आया था इस पर उसका लाभ हम लोगों को भी मिल पाये तो बेहतर होगा.

          सभापति महोदय, अंतिम बात प्रदेश में जल जीवन मिशन की बहुत खराब स्थिति है. कल भाई रामेश्वर शर्मा जी जब सदन में बोल रहे थे तब इटली का नाम ले रहे थे, उस समय हमने कहा था कि इटली नहीं भैया केवल गुजरात वालों को रोको, केवल राजपुर विधानसभा क्षेत्र जहां से मैं विधायक हूं 115 गांव में 300 करोड़ रूपये का काम हुआ था लेकिन एक भी ऐसा गांव नहीं है जहां पर पीने के लिये पानी की टंकियां जो बनी हों वह ठीक ढंग से बनी हो, पाईप अगर बिछे हों तो अच्छे बिछे हों, पंप अगर है तो अच्छे चले 115 गांव में 300  करोड़ रूपये खर्च करके भी बिल्कुल भी पानी नहीं मिल पा रहा है रिजल्ट ओरियेंटेड वह योजनायें नहीं हैं  यह नमूने के बतौर मैंने आपको बताया है बाकी तो पूरे बड़वानी जिले में और पूरे मध्यप्रदेश में ऐसी स्थिति बनी है और जहां कहीं अगर हम अन्य राज्यों में भी गये हैं तो खबर यह आती है कि गुजरात के ठेकेदार हैं . माननीय सभापति महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी, दोनों उप मुख्यमंत्री जी यहां बैठे हैं इस पर आप रोक लगायें और इसको रिजल्ट ओरियेंटेड बनायें, बहुत  सारे अन्य जो मुद्दे हैं जब कभी समय मिलेगा तो मैं अपनी बातों को मध्यप्रदेश की जनता के लिये चाहे वह किसानों के मुद्दे हों क्योंकि किसानों पर चर्चा हो चुकी है, महिलाओ के लिये भी विशेष सत्र में चर्चा हो चुकी है, बेरोजगारी की बात मैं कह चुका हूं तमाम मुद्दों से मध्यप्रदेश बारूद के ढेर पर बैठा है उस पर ध्यान नहीं दिया, सरकार जो मेंडेड लगातार मिलता जा रहा है , तो सरकार को इस बात का गुरूर है कि हम तो व्यवस्थायें चुनाव के समय जुटा ही लेंगे और अगर एकाध बात अगर निकली तो सम्हलने वाली बात नहीं है तो माननीय सभापति महोदय, आपने जो विधानसभा, लोकसभा में या जनता से जो वायदे किये हैं उन वायदों को निभायें  नहीं तो जनता आपको माफ नहीं करेगी.

          माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे प्रथम अनुपूरक पर अपनी बात को रखने का अवसर प्रदान किया उसके लिये आपको भी बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री गौरव सिंह पारधी (कटंगी) सभापति महोदय, आज अनुपूरक बजट पर पुनः बोलने का सौभाग्य मिला है. शुरुआत में इस बात से कहूंगा कि यह एक अतिरिक्त धन है. अतिरिक्त धन का मतलब अतिरिक्त जिम्मेदारी है और जब बजट में अनुपूरक अनुदान की बात आती है तो हर एक पैसे का हिसाब विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने की तरफ जाता है और इसी प्रकार मध्यप्रदेश विधान सभा में आज हम वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट पर चर्चा कर रहे हैं. 7765 करोड़ रुपये का यह बजट, लेकिन इस बजट की खूबी यह है कि 88 परसेंट, 6858 करोड़ रुपये जो है वह पूंजीगत व्यय में है. केपिटल इनवेस्टमेंट. 907 करोड़ रुपये यानि 12 परसेंट वह राजस्व व्यय में है और यह इसलिए मैं गंभीरता से कह रहा हूं कि वर्ष 2019-20 में भी एक अनुपूरक बजट आया था, तब सरकार किसकी थी, यह हम सब जानते हैं. दिसम्बर, 2019 में यह आया था.  उस समय 88 परसेंट राजस्व व्यय में था और 12 परसेंट केपिटल इनवेस्टमेंट में था तो मुझे आज लगा कि यह बात सबके ध्यान में जरूर ला दूं. बड़े आंकड़ें बदल गये हैं., हमारी सरकार की प्राथमिकता पूंजीगत व्यय है.  जब किसी और की सरकार थी  तो उनकी प्राथमिकता राजस्व व्यय थी तो अंतर के साथ मैं आपसे शुरुआत करूंगा.

सभापति महोदय, इस बजट में सबसे बड़ा अंग जो है वह किसानों के लिए रखा गया है. देखने का नजरिया है. लगभग 3000 करोड़ रुपये की राशि नर्मदा घाटी विकास परियोजनाओं के लिए है और ये विकास परियोजनाएं जो हैं वह सिंचाई से जुड़ी हैं. लगभग 20 योजनाएं हैं. मैं पढ़ने तो वाला नहीं था, लेकिन हमारे बड़े भाई बाला भैया ने मजबूर कर दिया कि मैं जरा नाम ले लूं. मैं फिर पूछना चाहूंगा कि क्या ये योजनाएं गुजरात में है कि मध्यप्रदेश में है. खंडवा उद्वहन माइक्रो सिंचाई योजना, शहीद इलाप सिंह माइक्रो सिंचाई योजना, बोहरीबंद सिंचाई योजना, महेश्वर जानापाव सिंचाई योजना, पार्वती लिंक परियोजना, बड़ा देव संयुक्त सिंचाई योजना, मारेवा उद्वहन सिंचाई परियोजना, सोंडवा परियोजना, नीवाली परियोजना, सेंधवा परियोजना, धार परियोजना, चिंकी बोरास बैराज परियोजना, बरगी नहर परियोजना, इस प्रकार लगभग 20 सिंचाई परियोजनाएं हैं वह पूरी की पूरी 20 मध्यप्रदेश में संचालित हैं. एक बात और बताऊंगा कि इसमें लगभग 450 करोड़ रुपये जो है वह अनुसूचित जाति की सब-स्कीम के तहत है.  मुझे लगता है कि बाला भैया ने वह ध्यान से नहीं पढ़ा होगा जिसकी वह बोल रहे थे कि मैंने बहुत अच्छे से पढ़ा हूं. 450 करोड़ रुपये की जो परियोजनाएं हैं, बोहरीबंद, मारेवा, सेंधवा, खंडवा में 150 करोड़ रुपये की तो यह अनुसूचित जाति सब-स्कीम की तहत की गई है. खैर सभापति महोदय, मैं यह बात आप सबके ध्यान में लाना चाहूंगा कि मुख्य बजट में लगभग 15000 करोड़ रुपये हमने सिंचाई व्यवस्था के लिए दिया था जिसमें एनवीडीए और जल संसाधन  विभाग दोनों ही था.

सभापति महोदय, साथ ही साथ हम सबके लिए बहुत बड़ी चिंता का विषय है कि मध्यप्रदेश में जो ग्राउंड वाटर एक्सट्रेक्शन होता है लगभग उसका 90 प्रतिशत हिस्सा सिंचाई में उपयोग किया जाता है. मध्यप्रदेश में लगभग 48 प्रतिशत सिंचाई जो है वह ट्यूबवेल और वेल के माध्यम से होती है तो निश्चित ही ऐसी परिस्थिति में लगातार डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व वाली सरकार हमारे माननीय वित्तमंत्री जी के मार्गदर्शन में जो सिंचाई परियोजनाओं के लिए लगातार दिल खोलकर खर्चा कर रही है ताकि इस क्षेत्र के किसानों को भगवान भरोसे जल पर निर्भर न रहना पड़े, उस चीज के लिए मैं बधाई देना चाहूंगा. जरूर इस उम्मीद के साथ कि भविष्य में एकाध बार मेरी भी विधान सभा की सिंचाई परियोजना यहां पर रहेगी, और उसके बारे में भी मुझे बोलने का सौभाग्य मिलेगा.

सभापति महोदय, दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा लगभग 29 प्रतिशत हिस्सा 2020 करोड़ रुपये का जो है खाद्य विभाग की उपार्जन संस्थाओं  को ऋण के रूप में दिया जा रहा है,  जो निश्चित ही हम सब किसानों के लिए ही दर्शाता है तो मैं समझता हूं कि अगर हम किसानी की बात करें तो लगभग 70 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा जो है इस बजट का वह किसानों के हित में है और किसान की कोई जाति नहीं होती है. किसान सामान्य वर्ग से भी आ सकता है, अन्य पिछड़ा वर्ग से भी आ सकता है, अनुसूचित जाति वर्ग से भी आ सकता है, अनुसूचित जनजाति से भी आ सकता है, वह सिर्फ इस देश के लालन-पालन को पूरा करता है. हमारे आम आदमी के पेट का पालन करता है. इस बजट में लगभग 17 प्रतिशत राशि जो है वह लोक निर्माण विभाग के लिए है. जिसमें 1 हजार करोड़ हमारी ग्रामीण सड़कें, वृहृद पुल, कुछ हमारी सीआरएफ की योजनाएं हैं और 300 करोड़ बीओटी की योजनाओं के भारित भार के रूप में किया गया. इसके पहले मुख्य बजट में 13 हजार करोड़ दिया गया था. मैं समझता हूँ कि कैपिटल इन्वेस्टमेंट जो लगभग हमारे बजट के 20 परसेंट को टच कर रहा है. पहली बार मध्यप्रदेश इतना बड़ा अनुदान, बजट का इतना बड़ा हिस्सा कैपिटल इन्वेस्टमेंट के लिए जा रहा है और मैं कैपिटल इन्वेस्टमेंट की बात करूं, तो इस बार मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना के लिए लगभग 100 करोड़, साथ ही साथ उच्च शिक्षा में पीएम ऊषा के लिए 50 करोड़ की राशि का इसमें भी हिस्सा है. 30 करोड़ जो है, वह सामान्य वर्ग के लिए है. अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 11करोड़ है और अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 8 करोड़ है. यह कैसे मिस हो गया. कैसे मिस हो गया कि यहां पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए नहीं है. कैसे कोई बोल सकता है. मुझे इस बात से बड़ा दुख हो रहा है, बड़ी पीड़ा हो रही है.

          माननीय सभापति महोदय, गृह विभाग के लिए 157 करोड़ है. इसकी एक विशेषता है. 58 करोड़ तो पुलिस बल के आधुनिकीकरण के लिए है लेकिन जो 99 करोड़ दिया गया है मैं सदन के ध्यान में लाना चाहूंगा कि एक देशव्यापी इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम लागू हो रहा है. उसके तहत पूरी हमारी पुलिस प्रीजन कोर्ट, प्रॉसिक्यूशन फारेंसिक यह सब एकीकृत हो रहे हैं. इस दिशा में एक नेशनल लेवल डिजिटल डॉयरेक्ट्री पैदा हो रही है इसके लिए 99 करोड़ का प्रावधान किया गया है. इसके लिए मैं पुन: अपनी तरफ से हमारे वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा जी को बहुत सारी बधाइयां देता हूँ.

          माननीय सभापति महोदय, कुछ बातें मैं राजस्व मद की भी जरूर करना चाहूंगा कि किसान कल्याण के लिए 3 सौ 52 करोड़ रखा गया है और इसमें जो कपास किसान हैं उनके लिए जो राशि रखी गई है, उसमें भी 24 करोड़ सामान्य किसानों के लिए है. 8.24 करोड़ अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों के लिए है और 6.67 करोड़ अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए है. मैं इतना डिटेल नहीं देना चाह रहा था लेकिन मुझे मजबूर कर दिया गया यह बोलकर कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए कुछ भी नहीं दिया गया है.

          माननीय सभापति महोदय, इसी के साथ 397 करोड़ राष्ट्रीय आपदा निधि में दिया गया है और जो प्रतिभाशाली छात्र-छात्राएं, विद्यार्थी होते हैं, जिनकी हर वर्ष बड़ी इच्छा रहती है, बड़ी लालसा रहती है कि अच्छे नंबर लाने पर, अच्छा प्रयास करने पर हमें लैपटॉप दिया जाएगा, तो उसके लिए 58 करोड़ की राशि रखी गई है.

सभापति महोदय, साथ ही साथ इस प्रदेश को नई नीति दिखाते हुए नया रास्ता दिखाते हुए अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के लिए भी एक राशि रखी गई है. साथ ही साथ मैं एक बात बताना चाहूंगा कि यह विश्व जो है यह ईवी की तरफ जा रहा है और मध्यप्रदेश भी केन्द्र की सहायता से केन्द्र के मार्गदर्शन में पीएम ई-सेवा के माध्यम से ऐसी लोकल पब्लिक यूटिलिटी ला रहा है, ताकि आने वाले समय में हमारी जो बसें हैं, वह भी इलेक्ट्रिक बसें रहें. इस दिशा में 28 करोड़ परिवहन विभाग को और 21 करोड़ नगरीय विभाग को दिया गया है. जो 21 करोड़ दिया गया है, वह पूंजीगत व्यय है और जो 28 करोड़ दिया गया है, वह राजस्व व्यय के तहत दिया गया है. मैं आखिर में पुन: एक बात बोलूंगा कि पंचायत विभाग को जो साढ़े सात करोड़ की राशि दी गई है, उसमें साढे़ चार करोड़ की राशि सामान्य के लिए, अनुसूचित जनजाति के लिए 1.75 और अनुसूचित जाति के लिए 1.2 दिया गया है. इस प्रकार एक बहुत ही बैलेंस बजट हमारे बीच में आया है और हम सब जानते हैं कि 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ के बजट का यह एक अंश है. अगर हम देखें तो यह पाइंट जीरो वन है. अगर हम पाइंट जीरो वन से अपेक्षा करेंगे कि यह फिर से पूरे 52 विभागों को जाए, तो मैं समझता हूँ कि हम अनुपूरक बजट को समझ नहीं पा रहे हैं. इन्ही आशाओं और विश्वास के साथ मैं चंद लाइनों से अपनी बातों को समाप्त करूंगा, यह हमारे माननीय वित्त मंत्री जी की तरफ से है और यह उनके लिए है. बहुत-बहुत धन्यवाद.

          कस्ती चलाने वालों ने जब हार कर दी पतवार हमें,

                      लहर-लहर तूफान मिले और मौज-मौज मझधार हमें,

                                  फिर भी दिखाया है हमनें और फिर से दिखाकर देंगे सबको.

                                              फिर से दिखाकर देंगे सबको.

            सभापति महोदय बहुत-बहुत धन्यवाद गौरव जी.

 

 

          श्री लखन घनघोरिया (जबलपुर पूर्व)सभापति महोदय, अनुपूरक बजट 29 विभागों के लिये 7 हजार 455 करोड़ 76 लाख रूपये अभी हमारे साथी गौरव भाई ने एक शेर पढ़ा. अजीब लोग हैं

                                                          इन पर तो तरस आता है

                                              जो कांटे बोकर जमीन से गुलाब मांगते हैं.

          सभापति महोदय वर्ष 2026-27 का राजकोषीय घाटा लगभग 71 हजार 458 करोड़ रहने का अनुमान है इसमें बहुत स्वाभाविक है आय से अधिक खर्च. सरकार ने स्वयं इस बात को माना कि शुद्ध उधारी 71 हजार 753 करोड़ रूपये रहेगी. लगातार हम कर्जे में डूबते जा रहे हैं, बोझ बढ़ रहा है. जनता जानना चाहती है कि इस कर्ज का फायदा जनता को कब मिलेगा. स्वाभाविक है कि जनता को पूछने का एक हक भी है. वर्ष 2026-27 में हमने मुख्य बजट में लिया 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ का बजट कुछ महीनों के बाद हमें फिर से अनुपूरक बजट की जरूरत पड़ जाती है. समझ में यह नहीं आता कि बजट का आंकलन करते समय कहीं अपन प्रबंधन में कोई गंभीर चूक तो नहीं हो जाती है. क्यों हमें बार बार कर्ज की स्थिति में आना पड़ता है. आज तक मध्यप्रदेश के ऊपर 5 लाख 21 हजार करोड़ रूपये का कर्ज है. प्रत्येक नागरिक जो अभी छोटे बच्चे भी होंगे उनके ऊपर कर्ज कितना पड़ रहा होगा. कर्ज दर कर्ज और हम बड़े गुलाब की बात करते हैं. कांटे बोकर के गुलाब की बात कर रहे हैं. बच्चों का भविष्य क्या होगा, बच्चों की स्थिति क्या होगी विभागवार बता देंगे हम. किसी ने यह भी लिखा है कि

          यह जबर भी देखा है.

          तारीख की आंखों ने.

          लम्हें ने खता की है,

 तो सदियों ने सजा पाई है.

आज जो गलती कर रहे हैं हमारे आने वाली पीढ़ा सजा पाएंगी. ज्यादातर बजट किसान के ऊपर जाता है, स्थिति क्या है कि फसल के उचित दाम समय पर खाद-बीज मिल रहा है क्या, बिजली में कितनी मशक्कत किसानों को हो रही है, कैसा बिल जा रहा है, किसानों के हालात क्या हैं, मध्यप्रदेश में एम.एस.पी.की स्थिति क्या है, हमारे साथी खाद्यमंत्री जी बैठे हैं. उपार्जन में बड़ी अनियमितता सामने आयी 86 हजार क्विंटल गेहूं जो खरीदा गया था जिसकी अनुमानित कीमत 23 करोड़ रूपये बतायी जा रही है. किसी ओर की नहीं सागर जिले में गायब पाया गया, कहीं ओर नहीं. यदि जिलेवार देखें तो 13 हजार क्विंटल जबलपुर जिले में, नर्मदापुर में 7300 क्विंटल, विदिशा में 6300 क्विंटल और सतना में 5000 क्विंटल, इन जिलों में गेहूं की कमी दर्ज की गई. जबलपुर में गोदामों में करीब 25 करोड़ रुपए का गेहूं सड़ा दिया गया, अब इसमें कौन सी दक्षता मानेंगे कि हम कांटे बो कर फूल गुलाब की उम्‍मीद करते हैं. इसके बाद 17 प्रतिशत पीडब्‍ल्‍यूडी का बजट मांगा गया. हमारे मित्र कर कह रहे थे, राजमार्ग का संशोधन विधेयक लाए थे, और बहुत बड़ी बड़ी बातें हुई थी, जबलपुर का 300 करोड़ रुपए का एक राष्‍ट्रीय राजमार्ग का पुल चार साल के अंदर टूटकर गिर गया. 6 महीने हो गया, पहले कहा गया था कि तीन महीने में बन जाएगा, आने जाने वाले को तकलीफ हो रही है. आप जबलपुर से आएंगे तो शहपुरा भिटौनी के पास पांच-छह महीने से आवागमन बंद है. अब ये सुना गया है कि ठेकेदार को तीन साल का समय बढ़ा दिया गया. मतलब तीन साल तक जो भ्रष्‍टाचार हुआ वह अलग है. आमजन को जो तकलीफ कितनी हो रही. अब उसके बाद सिवनी-केवलारी मार्ग मोहबर्रा और सारसडोल गांव जोड़ने वाला जो पुल है, तीन करोड़ की लागत का है एक जुलाई को माननीय मुख्‍यमंत्री जी लोकार्पण करके आए और तीन जुलाई की बारिश में बह गया, दो दिन के बाद बह गया. तेबात सावेर रोड का पुल, सात करोड़ की पुलिया, होशियार नदी का ब्रिज, होशियार खेड़ी की पुलिया, 28 मार्च को लोकार्पण हुआ और एक बारिश में बह गया.

          श्री मनोज नारायण चौधरी – 28 मार्च को भूमिपूजन हुआ था निर्माण कार्य चल रहा था. आप आज चलकर देखो, बहुत अच्‍छे से है ये असत्‍य बोलते हैं, असत्‍य बोलने से पहले परीक्षण करवाना चाहिए.

          श्री लखन घनघोरिया – बहा कि नहीं बहा..

          श्री मनोज नारायण चौधरी – मेरे विधान सभा से जुड़ी बात है इसलिए बोल रहा हूं, ये भाजपा की सरकार है जो काम कर रही है.(..व्‍यवधान) मैं सभी को आमंत्रित करता हूं सभी आए और देखें.

          सभापति महोदय – कृपया बैठिए. आप अपनी बात जारी रखें.

          श्री लखन घनघोरिया – सभापति जी, अब अपराध की स्थिति 157 करोड़ रुपए हम गृह विभाग को देते हैं. महिला अपराध में मध्‍यप्रदेश नंबर 5 पर है, 32832 मामले साल भर में अकेले जबलपुर में, 6 महीने में 275 लड़कियां गायब हैं. एसटी वर्ग के अपराध में प्रदेश देश भर में नंबर वन है 3165 मामले हैं. एससी वर्ग पर अपराध में ये हम नहीं नेशनल क्राइम ब्‍यूरो की रिपोर्ट कह रही है, एससी वर्ग में देश में नंबर दो पर है अपराध एससी वर्ग के साथ जो रहा है 7765 अपराध है, इसके अलावा बच्‍चों के अपराध में पूरा प्रदेश नंबर तीन पर है 21908. अब आप इसके बाद बताइए आप जो पैसा दे रहे हैं इसका सदुपयोग हो कहां रहा है. ये तो गृह विभाग है अब शिक्षा विभाग में आ जाए. शिक्षा विभाग की स्थिति यह है

          सभापति महोदय – लखन जी, थोड़ा संक्षिप्‍त कर दें, आपको दस मिनट से ज्‍यादा हो गये हैं.

          श्री लखन घनघोरिया— सभापति महोदय, उच्‍च शिक्षा में प्रदेश में 125  बीएड कॉलेज फर्जी हैं, जो कागज में हैं लेकिन वह भौतिक रूप में नहीं है, यह बात उजागर हुई. हमारे यहां रानी दुर्गावती विश्‍वविद्यालय में पचास प्रतिशत पद रिक्‍त हैं और यहां बड़ी विचित्र विसंगतियां हैं, जो कॉपी छापते हैं, जिनकी प्रिटिंग प्रेस हैं, उन्‍होंने परीक्षा कॉपी छापकर दी, उनका पचास लाख रूपये का पेमेंट सरकार साल भर से नहीं कर रही है, इसी प्रकार जो टीचर प्राध्‍यापक, जो टीचर अतिथि शिक्षक कॉपी जांचते हैं, उनका चालीस लाख रूपये का पेमेंट सरकार ने दो साल से नहीं किया है. हम नहीं यह सारे आंकड़े कहते हैं. हमारे रानी दुर्गावती विश्‍वविद्यालय में छ: हजार सीटों में से मात्र केवल 645 सीटें एडमिशन करके भरी गई हैं. 60 कोर्स ऐसे हैं, जिनमें एडमिशन नहीं हुआ है. कोर्स भी बड़ी विचित्र स्थिति में है, बीएससी एग्रीकल्‍चर आपने वहां चालू कर दिया है, जहां न लैब है, न टीचर हैं, न जहां रिसर्च की जमीन हैं, इतने बड़े एग्रीकल्‍चर यूनिवर्सिटी के होते हुए, आपने उसको चालू कर दिया है और वहां कोई एडमिशन नहीं ले रहा है. आपने बीटेक चालू कर दिया है, बीटेक की कोई लैब नहीं है, कहां मैकेनिकल पढे़ंगे, कहां इलेक्‍ट्रीकल पढ़ेंगे? न टीचर है, न लैब है, आपने कोर्स चालू कर दिया है, कोई एडमिशन नहीं ले रहा है, आप कल्‍पना कीजिये कि सात विश्‍वविद्यालय में कुल गुरू की नियुक्ति नियम विरूद्ध है, उसमें एक हमारा जबलपुर विश्‍वविद्यालय भी है और मध्‍यप्रदेश हाईकोर्ट बार बार टिप्‍पणी कर रहा है, यह तो उच्‍च शिक्षा की स्थिति हुई.

सभापति महोदय, अब स्‍कूल शिक्षा में देख लें. मैं उस समय चूंकि आदरणीय राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी को पहले बता चुका हूं, जितना कहना था, लेकिन स्‍कूल शिक्षा में 7 हजार 165 करोड़ रूपये का बजट था, अभी अनुपूरक में उसको और बढ़ाया है. 1895 स्‍कूल बिना शिक्षकों के चल रहे हैं, 3400 स्‍कूलों में शौचालय नहीं है, टॉयलेट नहीं है, इसमें अधिकतर बच्चियों के स्‍कूल हैं, बच्चियों की स्थिति हम समझ सकते हैं. दस हजार स्‍कूलों में बिजली नहीं है और कम से कम आधे से ज्‍यादा स्‍कूलों के भवन जर्जर हैं, हमारे जबलपुर जिले में कम से 25 ऐसे स्‍कूल हैं, जो भवनों में नहीं लग रहे हैं, बाहर खुले में लग रहे हैं, यह स्‍कूल शिक्षा की स्थिति है.

          सभापति महोदय – श्री लखन जी थोड़ा संक्षिप्‍त कर लें, काफी नाम हैं, आप थोड़ा सा सहयोग करें.

          श्री लखन घनघोरिया – सभापति महोदय, बस दो मिनट में समाप्‍त कर दूंगा. स्‍वास्‍थ्‍य विभाग में मंत्री महोदय से कह चुका हूं. नगरीय निकाय में भागीरथपुरा की घटना के संबंध में बताना चाहता हूं.

          श्री आरिफ मसूद(भोपाल-मध्‍य) – स्‍कूल के भवनों का जिक्र आया है, मैं चाहता हूं कि इसमें सिर्फ जबलपुर को ही नहीं इस पर सबको गंभीर होना चाहिए.

          सभापति महोदय – वह पूरे प्रदेश का ही बता रहे हैं.

          श्री आरिफ मसूद –- सभापति महोदय, स्‍कूल के भवन वास्‍तव में बहुत खराब हैं और भोपाल के ही नहीं सभी जगह के सरकारी भवनों की स्थिति यही है, तो बच्‍चों के भविष्‍य को देखते हुए इस पर कोई न कोई निर्णय जरूर लेना चाहिए. मैं उम्‍मीद करूंगा कि इस पर अनुपूरक में जरूर निर्णय ले लेंगे.

            श्री उमाकांत शर्मा—मदरसों की स्थिति बहुत बेकार है...(व्‍यवधान)...

          श्री विजय रेवनाथ चौरे--  माननीय सभापति महोदय, सांदीपनि स्‍कूल में बसों की व्‍यवस्‍था करवा दीजिये. ...(व्‍यवधान)...

श्री लखन घनघोरिया--  माननीय सभापति महोदय, नगरीय निकाय  माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी का विभाग है, इंदौर में भागीरथपुरा की घटना ने बहुत कुछ बताया. 35 लोगों की जान दूषित पानी से गई तब प्रदेश भर में एक मुहिम चली कि हर नगर निगम में, नगर पालिका में कहां से राइजिनिंग लाइन, कहां से सप्‍लाई लाइन नाले के अंदर से गई है उनको शिफ्ट किया जायेगा. हर जगह यह हालत है, जितने बैठे हैं यह खुद अपनी आत्‍मा पर हाथ रखकर बोलें क्‍या इनकी विधान सभा में नहीं है पेयजल की जो लाइन गई है वह नालों के अंदर से गई है सरकार क्‍या कर रही है, स्‍मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ कमाई. अमृत-2 हमारे जबलपुर में 18 टंकियां बनना थीं, 18 में जो वर्ष 2024 से चालू हुईं और वर्ष 2026 में खत्‍म होना है, 18 में 8 में काम शुरू नहीं हुआ, 10 तो छोड़ दो क्‍योंकि हमारी विधान सभा है, 4 टंकियां बनना है, अभी तक काम शुरू नहीं हुआ. वाटर ड्रेनेज सिस्‍टम का 374 का एक कवर्ड नाला कम से कम जो 80-80 फीट के चौड़े नाले थे उनको 12 बाई 12 कर दिया और वह 40 परसेंट भी अभी तक नहीं बने, 374 करोड़ की उस योजना में 367 करोड़ रूपया बाकायदा भुगतान हो गया, लेकिन वह योजना जस की तस पड़ी हुई है, कम से कम एक बारिस में, आधे घंटे की बारिस में जबलपुर में जल प्‍लावन होता है, पूरा शहर डूबता है, अब सरकार तो उस योजना को बंद कर रही न उसे डिस्‍मेंटल कर रही न दूसरी योजना ला रही और सबसे ज्‍यादा हमारे यहां मुख्‍य शहर जबलपुर पूर्व विधान सभा से लेकर जबलपुर उत्‍तर विधान सभा, अभिलाष जी होंगे तो वह भी बता देंगे कि उनकी विधान सभा में आधे घंटे की बारिस में यहां-यहां तक पानी रहता है. गरीब आदमी जो नाले के किनारे बसा है  उसके पास सिर्फ ग्राउंड फ्लोर है, फर्स्‍ट फ्लोर नहीं है, जब पानी उनके घरों में घुसता है उसके घर का राशन से लेकर, बर्तन भाड़े से लेकर, सोने के कपड़े तक पानी में तैरते हैं और पूरी रात जब पानी गिरता है तो वह कैसे रहता है, नारकीय जीवन है. माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं, आप प्रभारी मंत्री भी हैं जबलपुर के आपको वस्‍तुस्थिति तुरंत पता चल सकती है तुरंत कुछ योजना, उसके लिये कुछ तो करें, आप पूछ लें वहां के किसी भी अधिकारी से लेकर, वहां के किसी भी जनप्रतिनिधि से यदि यह सच न हो तो आप जो कहेंगे, मैं वह करूंगा. दूसरा मेरा आपसे आग्रह है आप चूंकि जबलपुर के पालक मंत्री हैं, एक फ्लाई ओवर ब्रिज, फ्लाई ओवर ब्रिज खूब करते हैं माननीय हमारे मित्र मंत्री महोदय, लेकिन घोषणा कर आते हैं उसके बाद वह कहां पड़ी, कहां नहीं पड़ी अलग मेटर है, उनकी अपनी विधान सभा में करें अच्‍छा है जो उसके पहले से न केवल आम जनमानस की मांग थी, बल्कि उसकी प्रशासकीय स्‍वीकृति हो गई थी, उसको लंबित किये पड़े हैं. मेरा आग्रह है कि हमारी जबलपुर हाईकोर्ट के सामने से बिरसामुंडा चौक तक का जो फ्लाई ओवर ब्रिज का प्रस्‍ताव था और जो प्रस्‍ताव वर्ष 2019 में बाकायदा जिसकी स्‍वीकृति ईएनसी कार्यालय भोपाल से हो चुकी थी उसको वैसा ही डाल दिया गया है, वैसे 269 करोड़ की लागत का था हमारे मंत्री महोदय की कृपा नहीं हो रही आप ही प्रभु कृपा कर दो कम से कम वहां यातायात की व्‍यवस्‍था सुगम हो जाये, लोग वहां पर परेशान हैं, 3-3 घंटे के जाम से. वैसे तो यह आम बात है. पूरे प्रदेश में यातायात की व्यवस्था करवा रहे हैं लेकिन जब हम श्रेय लेते हैं बहुत बड़े फ्लाई ओवर की तो एक छोटा सा बनवा दो. सब वहां आपका अच्छा स्वागत करेंगे. आप वित्त मंत्री हो यह हमारी आपसे अपेक्षा है. अनुपूरक का उपयोग नहीं हो रहा इसलिये हम इस अनुपूरक का विरोध कर रहे हैं. धन्यवाद.

          श्री अनिरुद्ध(माधव)मारू(मनासा) - सभापति महोदय, माननीय वित्त मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत 2026-27 के प्रथम अनुपूरक अनुमान बजट पर मैं बोलने के लिये खड़ा हूं. विस्तृत आंकड़े हमारे मित्र गौरव भाई ने सुना ही दिया है उसका अलग-अलग क्लेरिफिकेशन भी हमने सुना है. हर विभाग को आवश्यक्ता के अनुसार यह बहुत अच्छी बात है कि अनुपूरक में जिस विभाग में जिस-जिस मद में पैसे की  जरूरत थी उसकी स्वीकृति ली गई. इसमें कोई फालतू स्वीकृतियां नहीं हैं वास्तविक जरूरतों के आधार पर स्वीकृतियां ली गईं. गृह विभाग को मशीन क्रय योजना मद में पैसे चाहिये थे उसमें 58 करोड़ 83 लाख रुपये दिये.आधुनिकीकरण के लिये 58 करोड़ 52 लाख मिले. सबसे अच्छी बात राजस्व आपदा विभाग,राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि में 358 करोड़ रुपये आवंटित हुए.

          श्री दिनेश जैन बोस -  मैं इस आपदा प्रबंधन कोष में जो बहुत कम राशि दी गई है. इस आपदा प्रबंधन कोष से ही किसानों को राहत राशि मिलती है.

          श्री अनिरुद्ध(माधव)मारू - अतिरिक्त राशि स्वीकृत हुई है.मूल राशि तो मूल बजट में स्वीकृत की गई है 4 लाख 39 हजार रुपये.

          श्री दिनेश जैन बोस -  आपदा प्रबंधन कोष में किसानों को राहत राशि दी जाती है. किसानों को राहत राशि 5 हजार रुपये हेक्टेयर आरबीसी 6(4) के तहत नियम है और अभी अल्प वर्षा की स्थिति है मैं यह चाहता हूं राहत राशि किसानों को सबको मिले और बजट में उसका प्रावधान हो.आने वाले कल में राहत राशि सबको मिले और बजट में प्रावधान हो.आरबीसी 6(4) के तहत ही हमको राहत राशि मिलती है.

          सभापति महोदय - आपकी बात मंत्री जी के संज्ञान में आ गई. अनिरुद्ध जी अपनी चर्चा जारी रखें.

          श्री अनिरुद्ध(माधव)मारू - केन्द्र की हमारी प्रवर्तित ई बस योजना के लिये 28 करोड़ 26 लाख दिये गये तो इंफ्रास्ट्रक्चर के लिये भी परिवहन विभाग को 101 करोड़. किसान कल्याण के लिये लगातार हमारी सरकार समर्पित है भले ही वह खरीदी योजना हो भले ही खेती में अनुदान का मामला हो भले सिंचाई योजना हो भले बिजली के लिये हो लगातार सबसे ज्यादा बजट हमारी सरकार किसानों के लिये देती है और जरूरत के आधार पर आज उसमें भी पैसा दिया गया है. नगरीय कल्याण के लिये भी 21.41 करोड़. मैं लोक निर्माण विभाग को 83 करोड़ मिले मतलब मूल बजट में इतना पैसा देने के बाद जरूरत पड़ी मतलब लगातार योजनाओं पर काम चल रहा है और प्रदेश का विकास मुंह से बोल रहा है.आज सड़कों का जाल पूरे भारत में हम चले जाएं सबसे अच्छी सड़कें मध्यप्रदेश की दिखती हैं. ठेठ किसी गांव में चले जाएं सब जगह सड़कों के नवीनीकरण का काम चल रहा है अपग्रेडेशन हो रहा है. निश्चित रूप से पहले जब कांग्रेस की सरकार थी हम राजस्थान जाते थे तो लगता था कि मध्यप्रदेश में विकट परिस्थिति में घूम रहे हैं और राजस्थान जाते ही रिलेक्स मोड में आ जाते हैं आराम में आ जाते हैं कि इतनी अच्ची सड़कें राजस्थान की हैं लेकिन आज जैसे ही हम मध्यप्रदेश छोड़कर राजस्थान या और किसी प्रदेश में जाते हैं तो हमें लगता है कि मध्यप्रदेश की सड़कें वाकई बहुत अच्छी क्वालिटी की बनी हैं बहुत अच्छा काम चल रहा है और इतना बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर सड़कों के मामले में है. मध्यप्रदेश सड़कों के मामले में भाग्यशाली है.मुख्यमंत्री जी,वित्त मंत्री जी लगातार उस पर काम कर रहे हैं. मैं सिर्फ इतना निवेदन करना चाहूंगा कि ऐसी सड़कें, आप स्वीकृत तो सब करते हैं, लेकिन ऐसी ग्रामीण क्षेत्र की हमारी छोटी-छोटी सड़कें हैं जहां वन विभाग का क्षेत्र पड़ता है, मेरा निवेदन है कि जहां वन क्षेत्र पड़ते हैं, वहां सड़कों की अनुमतियों में, वन विभाग से अनुमति आने में पांच-पांच साल लग जाते हैं. जो सड़कें आवागमन के काम में आ रही हैं, कच्ची सड़कें, जहां गिट्टी रोड बनी हुई है, उसके बाद वन विभाग की अनुमति लेनी पड़ रही है. उसके बाद वे हमसे कैम्पा मद में पैसे लेते हैं. इस पर विचार क्यों नहीं होता, जब किसी सड़क को बनने में एक भी पेड़ नहीं कटना तो फिर कैम्पा फण्ड का क्या प्रावधान है और उनको जमीनें भी ट्रांसफर करनी पड़ती हैं. मतलब दोनों चीजें हो रही हैं कि वहां अगर हमें कच्ची सड़क पर डामर रोड बनानी है तो फिर उसके लिए सारी अनुमतियों की क्या आवश्यकता है. एक बार वन विभाग के साथ बैठ करके, भले ही केन्द्रीय वन विभाग के साथ बैठना पड़े तो बैठे और इसकी अलग से बैठक करके कि जो सड़कें पहले से बनी हुई हैं, हालांकि वह कच्ची हैं, गिट्टी रोड हैं, उनको अगर हम डामर रोड बनाते हैं तो उसके लिए अनुमति की क्या आवश्यकता है. उसके लिए हम उनको अलग से क्यों रेवेन्यू लैंड देंगे, उनके लिए हम क्यों कैम्पा फण्ड देते हैं, जब एक भी पेड़ हम नहीं काट रहे हैं तो यह बहुत गंभीर विषय है और इसकी वजह से यह हो रहा है कि हमारा ग्रामीण क्षेत्र वंचित रह जाता है. हम खुश होते हैं कि सड़कें हमने मंजूर कर दीं, लेकिन वास्तविकता क्या है. मेरे क्षेत्र में ऐसी कई सड़कें हैं, जो पांच-पांच से मंजूर पड़ी हैं, लेकिन वहां अभी तक अनुमतियों के अते पते नही हैं और उसके लिए अलग से प्रावधान कॉ-ऑर्डिनेशन का होना चाहिए. प्रदेश में जो फॉरेस्ट विभाग की सड़कें हैं, जिनमें फॉरेस्ट पड़ रहा है, जिनमें अनुमतियां आनी हैं तो उसका कॉ-ऑर्डिनेशन विभाग अलग से करके, अलग से अधिकारी बैठा करके उसके कॉ-ऑर्डिनेशन की व्यवस्था की जाए ताकि हम किसी से पूछ तो सकें कि इसकी क्या पोजिशन है, अनुमति कब आएगी. उन सड़कों के लिए जवाब देने वाला कोई नहीं होता है. यह परेशानी का कारक है. मेरा निवेदन है कि हम स्वीकृत तो कर रहे हैं, यहां से बजट भी डाल रहे हैं, टेण्डर भी हो रहे हैं, लेकिन अनुमति के अभाव में वह आपका पैसा भी रुका हुआ है, काम भी नहीं हो पा रहा है और लोगों को हम लाभ भी नहीं दे पा रहे हैं तो थोड़ा सा इसमें आधिकारिक रूप से व्यवस्था करेंगे तो निश्चित रूप से सड़कों का जाल, जिसका कि हमारा संकल्प है कि हम हर गांव तक सड़क पहुँचाएंगे. वह संकल्प भी पूरा होगा. निश्चित रूप से मैं इस बजट के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देता हूँ. माननीय वित्तमंत्री जी को धन्यवाद देता हूँ कि सभी विभागों की चिंता करते हुए यह बजट बनाया गया है. मैं इस बजट का समर्थन करता हूँ. बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री फुन्देलाल सिंह मार्को (पुष्पराजगढ़) माननीय सभापति महोदय, मैं तो सबसे पहले माननीय मुख्यमंत्री जी और माननीय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहूँगा कि मेरे क्षेत्र में, जो कि आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां जंगल, पहाड़ों में लोग निवास करते हैं और बीमार होने पर कहीं शहडोल, कहीं अनूपपुर और अन्य राज्यों में भी जाया करते थे तो पुष्पराजगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का आपने सिविल अस्पताल में भवन सहित उन्नयन कर दिया. दूसरा, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, बेनीवारी का आपने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन किया है. इसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री जी और माननीय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री जी को अपनी ओर से तथा अपने क्षेत्र की ओर से तहे दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ कि पीड़ित मानवता की हम सेवा कर पाएंगे. बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री गोविन्द सिंह राजपूत लखन भैया, इतने अच्छे लोग भी आपके यहां हैं. आप कितनी बुराई करेंगे. मार्को जी, आपको बहुत धन्यवाद. सभी लोग तालियां बजाएं.

          श्री नारायण सिंह पट्टा (बिछिया) सभापति महोदय, मैं सिर्फ यह कहना चाहता हूँ, हालांकि मैं अवगत करा चुका है, लेकिन ये सारे विधायक हो सकता है, जिन-जिन की वर्ष 2022-23 की विधायक निधि की राशि लैप्स हुई है. मैं पत्र भी लिख चुका हूँ. पिछली बार विधानसभा भी हम लोग लगा चुके हैं. अब ये योजना मण्डल या कलेक्टर की चूकवश हुआ हो या जिस परिस्थिति में हुआ हो, छोटे-छोटे कार्य होते हैं जैसे रंगमंच हैं, चबूतरे हैं, वह राशि लैप्स हो गई है, कृपा कर अनुपूरक बजट में जोड़ने का कष्ट करें.

          श्री यादवेन्द्र सिंह ‘’जग्गू भैया’’ (टीकमगढ़) आदरणीय सभापति महोदय, मैं जो प्रथम अनुपूरक अनुमान पेश किया गया है, उसका विरोध करता हूँ. मैंने एक विधान सभा प्रश्न लगाया था. टीकमगढ़ जिले में एक स्थान है बेदोरा, बेदोरा के जंगलों में लगभग 300 हेक्‍टेयर जमीन के ऊपर ग्रेनाइट का अवैध उत्‍खनन किया गया है. हमारे प्रश्‍न के बाद विधान सभा की तरफ से कमेटी गठित हुई, कमेटी में तीन आईएफएस रैंक के अधिकारी उसकी जांच करने के लिए गए. मैंने उनसे निवेदन किया कि यह लगभग 100 करोड़ रुपये की चोरी का मामला है, आप इसको थोड़ा बारीकी से देखियेगा. 

सभापति जी, आप विश्‍वास नहीं करेंगे, जब कमेटी जांच के लिए वहां पर गई, तो उन्‍होंने कहा कि यादवेन्‍द्र सिंह जी 300 हेक्‍टेयर में फॉरेस्‍ट लैंड में खुदाई हुई है और यह कम से कम 1000 करोड़ रुपये का मामला है, जहां पर ग्रेनाइट की चोरी हुई है. इसकी पूरी जांच हुई, जांच के बाद आज तक हमें पता नहीं चला कि किनके खिलाफ कार्यवाही हुई ? केवल एक डिप्‍टी रेंजर को सस्‍पेंड कर दिया गया और उसके बाद कोई कार्यवाही आज तक हमें नजर नहीं आई, लगभग 2-3 महीने जांच में हो गए हैं और इसको रफा-दफा करने का प्रयास हो रहा है. मेरा मललब यह है कि इतनी बड़ी चोरी के ऊपर आप ध्‍यान नहीं दे रहे हैं और छोटी-छोटी बातों पर ध्‍यान दे रहे हैं. एक ठेकेदार हमारे यहां आया, जिसको सरकार ने रेत का टेण्‍डर दिया, वह हरियाणा से आया है. इनके पहले वाले जो मुख्‍यमंत्री थे, ठक्‍कर साहब उनका बहुत खास आदमी है, वह यहां से लेकर प्रभारी मंत्री के पास गया, माइनिंग के पीएस महोदय के पास गया, उसे कलेक्‍टर सरकारी ठेका होने के बाद काम नहीं करने दे रहे हैं, वह मुख्‍यमंत्री जी से भी मिलने गया. लेकिन मैं समझता हूँ कि जो लीगल तरीके से काम करना चाहता है, उसको आप काम नहीं करने देंगे और जो इल्‍लीगल तरीके से काम करना चाहता है, उसको आप पर्याप्‍त काम करने देंगे, तो सबसे पहले तो इन सब बातों के ऊपर आपको रोक लगाना चाहिए. अगर आप वास्‍तव में चाहते हैं कि सरकार की रेवेन्‍यू बढ़े.

सभापति महोदय, मैं कई बार अपनी बात रख चुका हूँ. आजकल जल जीवन मिशन का काम चल रहा है, अमृत 2 योजना टीकमगढ़ जिले की आबादी पर पेयजल योजना यहां पर बनी थी, उस समय केवल 20 हजार आबादी थी और आज एक लाख 50 हजार की आबादी हो गई है. जल जीवन मिशन की योजनाएं आगामी 50 वर्षों के लिए आप बना रहे हैं, लेकिन आज तक टीकमगढ़ जिले के लिए पानी का कोई सोर्स नहीं दे पाये, हमें केवल एक एमसीएच पानी मिलता है, हमें 7 एमसीएच पानी की आवश्‍यकता है. दर्शन योजना बनी, उसके ऊपर आपने कोई काम नहीं दिया, बानसुजारा बनी, उसके ऊपर हमारी टीकमगढ़ की योजना को नहीं जोड़ा. अब आप कह रहे हैं कि केन-बेतवा लिंक को हम जोड़ रहे हैं, उसमें भी आपने प्रोविजन नहीं किया. उससे टीकमगढ़ को फायदा तो होना नहीं है, लेकिन हम चाहते हैं कि कम से कम पीने का पानी तो मिले. आज 4 दिन में पानी पीने के लिए मिल रहा है और उस समय जब इसका अमृत 2 के लिए प्रस्‍ताव किया था, तो कलेक्‍टर उस समय नगरपालिका के प्रशासक थे, उन्‍होंने उस प्रस्‍ताव का अनुमोदन कर दिया, अनुमोदन करने के बाद टीकमगढ़ नगर के लोगों को 400 रुपये महीना पानी का पैसा देना पड़ रहा है. मैं बार-बार विधान सभा के माध्‍यम से अनुरोध कर चुका हूँ कि आप कम से कम टैक्‍स तो मत बढ़ाइये, जब तक यह योजना चालू नहीं हुई. उसमें जवाब आ जाता है कि वह स्‍थानीय निकाय है, वह जो निर्णय करेगा, वह करना पड़ेगा. लेकिन 4 दिन में एक बार पानी मिलना और आप 400 रुपये महीना वसूल कर रहे हैं. मैं समझता हूँ कि भोपाल में भी पेयजल के 400 रुपये वसूल नहीं होते होंगे, इन्‍दौर में भी नहीं होते होंगे और कोई बड़ा शहर होगा उसमें भी नहीं होता होगा. हमारा आपसे अनुरोध है कि इस पर ध्‍यान दें और कम से कम पानी का पैसा कम कर दें, जब तक की हम लोग उसको पर्याप्‍त पानी न दे चुके. एक स्‍थान है हमारे यहां बड़ा गांव दशन है, वह हमारा ब्‍लॉक भी है, अभी आपने नये स्‍कूल भी दिए हैं, लगभग 10 हाई सेकेण्‍डरी स्‍कूल उसके आसपास के इलाके में हैं, टीकमगढ़ जिले से 40 किलोमीटर दूर है, तो हमारी बार-बार यह मांग है कि वहां पर महाविद्यालय खोला जाये, बच्चियां खासकर पढ़ने के लिए आगे नहीं जाती हैं, वहां पर महाविद्यालय की व्‍यवस्‍था की जाये. एक हमारा कुण्‍डेश्‍वर शंकर जी का स्‍थान है, तो वहां पर हमारी मांग है कि आप उसका महादेव  लोक के रूप में विस्‍तार कर दें. माननीय मंत्री जी मैंने आज ही आपसे निवेदन किया है कि टीकमगढ़ बहुत छोटा जिला है, उसमें कोई बहुत बड़ा औद्योगिक क्षेत्र भी नहीं है, उसमें कोई बहुत बड़ी औद्योगिक जगह भी नहीं है, लेकिन हमारे कलेक्‍टर ने जो जमीनों की खरीद-फरोख्‍त की गाईडलाईन बनाई है, उस गाईडलाईन में 900 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी. मुझे लगता है कि 900 प्रतिशत भोपाल में भी वृद्धि नहीं होगी. इनके ऊपर प्रतिबंध लगाइये कि जब भी वह एक-दो साल में गाईडलाईन बनाये. तो वे कम से कम कितने प्रतिशत की वृद्धि कर सकते हैं. ऐसा तो नहीं है कि मनमानी वृद्धि कर देंगे. यह उन्‍होंने इसलिए किया है क्‍योंकि वे एक ऐसे कलेक्‍टर हैं जब पूरे प्रदेश में रजिस्ट्रियों पर रोक नहीं लगी है, आपने नए आदेश जारी कर दिये हैं कि रजिस्ट्रियां होंगी, उन पर कार्रवाई होगी लेकिन टीकमगढ़ में रजिस्ट्रियों पर रोक है और इस रोक से रेवेन्‍यू घट गया और जब रेवेन्‍यू घट गया तो आपने शायद उनकी खबर ली होगी, तो उन्‍होंने दूसरा रास्‍ता निकाल लिया कि गाईडलाईन में इतनी ज्‍यादा बढ़ोत्‍तरी कर दो कि उस रेवेन्‍यू की पूर्ति हो जाए, लेकिन क्‍या आप केवल रेवेन्‍यू बढ़ाने के लिए गरीबों पर इस तरीके से अत्‍याचार करेंगे ? मैं समझता हूं इस पर तत्‍काल रोक लगायें. एक कमेटी गठित करके जो उचित हो उसकी कार्रवाई करें.

          सभापति महोदय, एक DMF फण्‍ड है, मैंने आपसे पूर्व में 2-3 बार व्‍यक्तिगत रूप से भी मिलकर कहा है कि इस फण्‍ड में जो माइनिंग वाला फण्‍ड होता है, उसमें विधायकों की कोई भागीदारी नहीं है, किसी जनप्रतिनिधि की भागीदारी नहीं है. मैं समझता हूं कि आप कलेक्‍टर को निर्देश दें या वह फण्‍ड अपने पास बुला लें. आप विधायक निधि बढ़ा नहीं रहें हैं, आप दूसरे और काम दे नहीं रहे हैं. इधर नरेगा पूरी तरह से बंद है. DMF फण्‍ड का रुपये 4-6 करोड़ कलेक्‍टर अपने हिसाब से खर्च करता है. किसी से पूछते भी नहीं है. एक उदाहरण आपको दूंगा. हमारे यहां महाराजा सवाई में एक हायर सेकण्‍डरी स्‍कूल था. मेरे पिताजी और कई स्‍वतंत्रता संग्राम सेनानी वहां पढ़े हैं. उसका भवन जीर्णशीर्ण हो गया था, उसके लिए कलेक्‍टर ने DMF फण्‍ड से रुपये 90 लाख की राशि दी. उसके बाद वहां गीता भवन का पैसा रुपये 3 करोड़ पहुंच गया, अब उसी भवन को गीता भवन बनाया जा रहा है. मतलब कुल रुपये 4 करोड़ उस पर खर्च होंगे, उसकी मरम्‍मत पर, इतने में तो कितना अच्‍छा स्‍कूल का भवन बन जाता. सभापति महोदय, लड़कियों का स्‍कूल बीच शहर में है, जो भी टीकमगढ़ गए होंगे, सभी ने उसे देखा होगा लेकिन उसके ऊपर कार्रवाई नहीं हो रही है, लड़कियों का स्‍कूल खाली करवाकर, 5 किलोमीटर दूर भेज दिया गया है. इस पर भी विचार करने की आवश्‍यकता है.

          सभापति महोदय, कई मुद्दे ऐसे हैं, टीकमगढ़ में 6 माह से निराश्रितों की, विकलांगों की पेंशन नहीं पहुंची है. आप कहते हैं हम लाड़ली लक्ष्‍मी में पैसा दे रहे हैं, इसके लिए बजट में प्रावधान किया है, बहुत सारे लोग यहां होंगे, इनके क्षेत्र में भी निराश्रितों की पेंशन नहीं पहुंच रही है. पूरे प्रदेश में निराश्रितों की पेंशन रोकने का काम यदि आप कर रहे हैं तो इससे बुरा काम और कोई नहीं है.

          श्री विजय रेवनाथ चौरेमेरे यहां 4 माह से निराश्रितों की, विकलांगों की, विधवा, सामाजिक सुरक्षा की पेंशन नहीं पहुंची है.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंहनहीं, मेरे यहां 6 माह से नहीं पहुंची है. इसके ऊपर ध्‍यान देने की जरूरत है. 

          सभापति महोदय-  कृपया समाप्‍त करें.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंहजी हां. मेरा निवेदन है कि इन बातों पर ध्‍यान दें और कार्रवाई करें. मैं बार-बार लगातार ढाई साल से खासकर पानी की समस्‍या, बड़ागांव के कॉलेज की समस्‍या और हमारे बड़ागांव में दो जगह अधूरा स्‍टेडियम है और अस्‍तौन में नए स्‍टेडियम की, वहां के लोगों की मांग है, इनके ऊपर भी ध्‍यान दीजिये. जय हिंद.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीकसभापति महोदय, यादवेन्‍द्र जी ने जो पेंशन का विषय रखा है, मेरा वित्‍त मंत्री जी से निवेदन है कि वे अपने भाषण में यह जरूर बतायें और 6 माह से जो पेंशन नहीं आई है, वह कब तक आ जायेगी, इसका भी उल्‍लेख करें.

          श्री विश्‍वनाथ सिंह "मुलाम भैया" (तेंदुखेड़ा)-  सभापति महोदय, मैं, प्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी एवं वित्‍त मंत्री देवड़ा जी को बधाई देता हूं कि हम जो सात हजार चार सौ पचपन करोड़, छिहत्‍तर लाख, पचपन हजार, चौवन रुपये का अनुपूरक बजट लाये हैं, इस पर कांग्रेस के हमारे साथी लखन भईया जैसे बड़े-बड़े नेता बड़ी शेर शायरी के साथ बात शुरु करते हैं. आप बताएं कभी किसान के बारे में आप बात करते हैं. कभी किसान के बारे में आपने सोचा है. लगातार वर्षों शासन किया 55-55 साल देश में और प्रदेश में, पहली बार भारतीय जनता पार्टी का आशीर्वाद मिला. स्व. अटल बिहारी बाजपेई जी को मैं प्रणाम करता हूँ. श्रृद्धांजलि देता हूँ कि पहली बार किसानों के लिए किसान क्रेडिट कार्ड शुरु किया.  यह है भारतीय जनता पार्टी की सरकार की सोच. अरे कांग्रेस के मित्रों कर्ज की बात करते हो कर्ज लेना कोई बुराई नहीं है यदि प्रदेश के विकास के लिए हम कर्ज ले रहे हैं, तो हम कोई जुआं नहीं खेल रहे हैं. हम प्रदेश का विकास कर रहे हैं. सड़कों का जाल देखो, स्कूलों की बिल्डिंगे देखो. सीएम राइज, पीएमश्री. हम शिक्षा के क्षेत्र में इतने आगे बढ़ रहे हैं. आपके जमाने में प्रायमरी स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए फट्टियां नहीं होती थीं. जरा अच्छे काम की तारीफ करना शुरु करो. बुरा काम करता है उसकी बुराई करो. कहीं कोई संकोच नहीं करो. हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बहनों को लखपति बनाना चाहते हैं. इसमें हम आगे बढ़ रहे हैं. मेरे नरसिंहपुर जिले की बात करूं तो 20 हजार बहनें लखपति दीदी बन गई हैं. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के भाइयों को आपके जमाने में 5 आवास आते थे. हमारे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जी ने गांव की तस्वीर और तकदीर बदल दी है. गांव में जिन भाईयों को कच्चे मकान थे उन्हें छत वाले मकान मिल गए हैं. स्वास्थ्य की बात कर रहे थे. मैं आदरणीय राजेन्द्र शुक्ल जी को बधाई देता हूँ. कोरोना की महामारी में घर के लोग बीमार आदमी से दूर भागते थे. मैं स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को बधाई देना चाहता हूँ कि कोरोना की महामारी में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों ने अपनी जान पर खेलकर लोगों की जानें बचाई थीं. यह है भारतीय जनता पार्टी की सरकार और सेवा.कभी कभी देख लिया करें अपनी तरफ कि हमने क्या किया है. 14 महीने की कमलनाथ जी की सरकार. संबल जैसी योजनाएँ बंद कर दीं. बेटियों की शादी बंद कर दी.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक माननीय सभापति महोदय, विश्वनाथ जी बजट पर कब बोलेंगे. काका बजट पर बोलो न.

          श्री विश्वनाथ सिंह लखन भैया. आप दिग्विजय सिंह की सरकार में बिजली देते थे. मोटर चालू होती थी, किसान मेढ़ तक पहुंचता था इतने में बिजली बंद हो जाती थी. वाह रे हमारे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान

          श्री गोविन्द सिंह राजपूत मुलाम भैया दिल से बोल रहे हैं.

          श्री विश्वनाथ सिंह किसानों को दस घंटे बिजली दी गई. 24 घंटे गांवों को बिजली दी गई. यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक दतिया में चुनाव चल रहा है इनको वहां भेज दो.

          श्री विश्वनाथ सिंह आदरणीय सभापति महोदय, हम किसानों की भी सुनते हैं. हम गरीबों की भी सुनते हैं. हम व्यापारियों की भी सुनते हैं. हमने रोडों का जाल बिछा दिया है. किसानों के हित में हमने किसान सम्मान निधि देने का काम किया है. हमने मुख्यमंत्री सम्मान निधि देने का काम शुरु किया है. किसानों को हम खाद, बीज, एमएसपी पर आपने कभी एक दाना नहीं खरीदा, एक दाना. आपके जमाने में 1200 रुपए क्विंटल गेहूं बिकता था. हमारे जमाने में 2700 रुपए क्विंटल बिक रहा है. यह हमने किसान की हालत को सुधारा है. मित्रों मैं आप सभी का वंदन करता हूँ कि शांति से अच्छे कामों की तारीफ करना शुरु करें. जय हिंद, जय भारत.                               

          श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर (पृथ्‍वीपुर) -- सभापति महोदय, मैं प्रथम अनुपूरक अनुमान की मांग पर सरकार के विरोध में अपनी बात रख रहा हूं. मध्‍यप्रदेश की उस जनता की आवाज बनकर अपनी बात रख रहा हूं जिसने उम्‍मीद की थी कि यह सरकार उनके जीवन में बदलाव लाएगी. सात हजार चार सौ पचपन करोड़, छिहत्‍तर लाख, पचपन हजार, चौवन रुपये की राशि का यह बजट है. मैं कहूंगा सरकार घी पीकर कर्ज ले रही है तो मंत्री जी कहेंगे यह कर्ज नहीं यह तो निवेश है. खैर, बजट केवल आय-व्‍यय का हिसाब नहीं होता. बजट सरकार की नीयत, प्राथमिकता और दृष्टि का आईना होता है और इस आईने में मध्‍यप्रदेश की जनता को अपना भविष्‍य नहीं, केवल सरकार की असफलताएं दिखाई देती हैं. अगर हम किसान की बात करें तो प्रदेश का किसान आज खाद के लिए संकट से जूझता है, लगातार लाइन में खड़ा रहता है, समय पर उसको खाद नहीं मिलता, बीज नहीं मिलता, सिंचाई की व्‍यवस्‍था नहीं होती. अतिवृष्टि, ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद हुईं, लेकिन मुआवजे के लिए किसान आज भी दफ्तरों के चक्‍कर काट रहा है. एमएसपी की बात होती है, लेकिन किसान को उसकी उपज का पूरा मूल्‍य नहीं मिलता. मंडियों पर समय में तुलाई नहीं होती, भुगतान में देरी होती है. किसान का दर्द भाषणों से नहीं नीति से दूर होगा. याद रखिये, जिस खेत ने अन्‍न उगाया वही सबसे ज्‍यादा रोया है, सरकार ने हर बार वादा किया लेकिन किसान ही धोखा खाया है.

          सभापति महोदय, अगर हम युवाओं की बात करें तो प्रदेश का युवा पूछ रहा है कि रोजगार कहां है. हर साल लाखों नौजवान पढ़ाई पूरी करते हैं, भर्ती निकलती है तो परीक्षा नहीं होती है, परीक्षा होती है तो परिणाम अटक जाते हैं, परिणाम आते हैं तो नियुक्ति अटक जाती है. युवाओं के हाथों में डिग्री है लेकिन रोजगार नहीं है. अगर यह सरकार सच में गरीबों की सरकार है तो बताइये सरकारी अस्‍पतालों में डॉक्‍टर्स की कमी क्‍यों है ? दवाइयां समय पर क्‍यों नहीं मिलतीं ? मरीजों को निजी अस्‍पतालों की ओर क्‍यों ढकेला जा रहा है ? सरकारी स्‍कूलों में शिक्षक क्‍यों नहीं हैं ? कई स्‍कूल्‍स की बिल्डिंग आज भी जीर्ण-क्षीर्ण हालत में हैं उस पर सरकार ध्‍यान नहीं दे रही है. क्‍या यही विकसित मध्‍यप्रदेश का मॉडल है ? सरकार से मेरा सवाल है कि अनुपूरक बजट में शिक्षा और स्‍वास्‍थ्‍य को कितनी प्राथमिकता दी जाएगी या फिर प्राथमिकता सिर्फ प्रचार, आयोजन और दिखावे में दी जाएगी. सरकार बार-बार कहती है कि प्रदेश निवेश का केन्‍द्र बन गया है, लेकिन निवेश तभी सफल होता है जब स्‍थानीय युवाओं को रोजगार मिले. केवल बड़े-बड़े कार्यक्रम कर देने से विकास नहीं होता. विकास तब होता है जब किसान खुश हों, युवा रोजगार पाए, महिलाएं सुरक्षित महसूस करें, गरीबों का इलाज मुफ्त हो और हर बच्‍चे को अच्‍छी शिक्षा मिले, परंतु इस अनुपूरक बजट में इन सवालों के जवाब भी हम सब चाहेंगे. दो पंक्तियां मैं रखना चाहता हूं कि ‘’महलों की रोशनी से गांव नहीं चमकते, अखबारों की सुर्खियों से पेट नहीं भरते, जनता को भाषण नहीं समाधान चाहिए, सरकार को प्रचार नहीं जवाब देना चाहिए.’’ ..(मेजों की थपथपाहट)..

          सभापति महोदय -- धन्‍यवाद. मैंने समझा सेर सुना दिया बात पूरी हो गई.

          श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर -- सभापति महोदय, बस दो मिनट. मैं तो वैसे ही लिमिटेड बोलता हूं. दो मिनट का समय लूंगा. यह सरकार हर आलोचना पर विपक्ष को दोष देती है, लेकिन सच यह है कि महंगाई विपक्ष ने नहीं बढ़ाई, बेरोजगारी विपक्ष ने नहीं बढ़ाई, किसानों की परेशानी विपक्ष ने पैदा नहीं की, इन सबकी जिम्‍मेदारी सरकार की है और सरकार जवाबदेही से बच नहीं सकती. आज प्रदेश पूछ रहा है कि अगर पर्याप्‍त फंड्स हैं तो किसान का पूरा कर्ज क्‍यों नहीं चुकाया जाता. युवाओं के लिए नई भर्तियां क्‍यों नहीं निकलतीं. सरकारी अस्‍पतालों में डॉक्‍टर्स की भर्ती क्‍यों नहीं होती और स्‍कूलों में शिक्षक के खाली पद क्‍यों नहीं भरे जाते. अगर अनुपूरक बजट जनता के लिए है तो जनता को उसका लाभ दिखाई क्‍यों नहीं देता ?

          माननीय सभापति महोदय,मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि मैंने पिछले सदन में भी इस बात को रखा था कि मेरे टीकमगढ और निवाड़ी जिले में कई ऐतिहासिक धरोहर हैं, कई धार्मिक स्थल हैं  जिनको जोड़कर के पर्यटन के सर्किट बनाये जायें और उसमें बहुत सारे, औरछा में रामलला की नगरी मेरे निवाड़ी जिले में आती है उसको जोड़कर के बहुत सारे स्थल ऐसे हैं जहां पर्यटन को जोड़कर के पर्यटन सर्किट बनाये जा सकते हैं. मैं उम्मीद करूंगा कि इस अनुपूरक बजट में  उस सर्किट के लिये कुछ किया जाये. क्योंकि उस सर्किट के लिये मेरे पास में फोन आया था  किसी का और मुझे कहा गया था कि आपने जो पर्यटन के सर्किट की मांग की है उसके लिये 50 लाख रूपये की राशि दी जाती है. तो मेरा अनुरोध है और माननीय मंत्री जी भी यहां पर उपस्थित हैं कि जो भी कलेक्ट्रेट से किसी का फोन आया था रूपये 50 लाख की राशि  में कितना विकास होता है, आप भी समझते हैं. इस ओर अगर माननीय मंत्री जी ध्यान देंगे तो बेहतर होगा.

सभापति महोदय, बुंदेलखंड में तो वैसे ही सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी बहुत है और वहां के युवा प्रदेश से पलायन करके बाहर जाते हैं काम करने के लिये तो सभापति जी अगर इस ओर ध्यान दिया गया तो निश्चित रूप से पर्यटन के विस्तार के साथ साथ रोजगार की समस्या दूर होगी.

          माननीय सभापति महोदय, अभी नल जल योजना की बात आई थी . मेरे अपने विधानसभा क्षेत्र में भी कई ऐसे गांव हैं जहां पर पानी की टंकी बन गई है लेकिन आज भी वह गांव की बस्तियां पानी से वंचित हैं, वहां पर आज भी पानी नहीं पहुंचा है तो मैं चाहता हूं कि सरकार इस ओर भी ध्यान दे.

          सभापति महोदय, मैंने इसके पूर्व में भी मांग की थी कि मेरे जिले में और समूचे बुंदेलखंड में जमीन से नीचे होने वाली सब्जियां बहुत अधिक मात्रा में होती हैं. अदरक है, हल्दी है, लहसन है इस तरह की सब्जियां काफी होती हैं इससे संबंधित कोई बड़ा फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट (फल प्रसंस्करण इकाई) वहां खोला जायेगा तो इसका लाभ समूचे बुंदेलखंड के नो जवान साथियों को होगा उनको रोजगार के अवसर भी मिल सकेंगे, इस दिशा में माननीय मुख्यमंत्री जी ने घोषणा भी की थी लेकिन अभी तक आगे उस पर कोई काम होता नजर नहीं आ रहा है. मैं चाहूंगा कि मंत्री जी इस पर भी विशेष ध्यान देंगे जिससे हमारे बुंदेलखंड के लोगों को फायदा मिले. साथ ही साथ मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि अनुपूरक बजट केवल खर्च बढ़ाने का माध्यम न बने बल्कि किसान, युवाओ, महिलाओं, गरीबों और मध्यप्रदेश के भविष्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी का दस्तावेज बने.

          माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे अपन बात को रखने का अवसर प्रदान किया उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्री नीरज सिंह ठाकुर(बरगी) माननीय सभापति महोदय,  मैं, रूपये 7 हजार 455 करोड़ 76 लाख 55 हजार 54 रूपये की प्रथम अनुपूरक अनुदान मांगों का पूर्ण समर्थन करता हूं और वित्त मंत्री आदरणीय श्री जगदीश देवड़ा जी को इस डेवलेपमेंटेड ओरिएंटेड अप्रोच के लिये भी बधाई देता हूं. 

          सभापति महोदय, संविधान का अनुच्छेद 205  सरकार को यह छूट देता है कि मुख्य बजट के अलावा जो प्रावधान किये गये हैं यदि उसके अतिरिक्त किसी विभाग  या योजना के लिये जब राशि पर्याप्त  न हो और राशि की आवश्यकता हो, कोई नई आवश्यकता खड़ी हो जाये, कोई नई योजना खड़ी हो जाये या प्राकृतिक आपदा या कोई आकस्मिक परिस्थिति निर्मित हो उस समय अनुपूरक अनुदान के माध्यम से सरकार सभी विभागों को छूट देती है कि वह ऐसी मांग कर सकते हैं.

          सभापति महोदय, अभी हमारे सम्माननीय विपक्ष के विधायक साथी कह रहे थे कि शिक्षा और स्वास्थ्य पर जौर नहीं दिया गया है . यह सारी बातें यदि आप मुख्य बजट के समय कहते तो शायद बहुत अच्छी बात होती क्योंकि  हमारे मध्यप्रदेश का जो बजट आया था उसमें  सभी क्षेत्रों पर ध्यान दिया गया था. शिक्षा और स्वास्थ्य पर भी बात की गई थी. यह जो अनुपूरक बजट या अनुदान है यह अतिरिक्त धन राशि का प्रावधान नहीं है बल्कि बदली हुई परिस्थितियों , जन आकांक्षाओं और विकास  कार्यों को गति देने का एक निरंतर और सशक्त माध्यम है. हमारी प्रगतिशील सरकार  की यह पहचान है कि हम समय रहते संसाधनों की व्यवस्था कर जनता जनार्दन  की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं को पूरा करते हैं यही मध्यप्रदेश सरकार की पहचान है.

          माननीय सभापति महोदय, अनुपूरक अनुदान की मांगों की लगभग 88 प्रतिशत से ज्यादा राशि पूंजीगत श्रेणी के लिये है और इन पूंजीगत निवेश से ही भविष्य की संपत्ति और परिसंपत्ति का निर्माण होता है. मैं यहां यह भी कहना चाहता हूं कि सिर्फ 12 प्रतिशत राशि राजस्व व्यय के लिए रखी गई है. यदि सामान्य रूप से व्यवस्था को चलाना हो तो राजस्व व्यय करना पड़ता है लेकिन जब हम पूंजीगत व्यय की बात करते हैं तो यह निवेश होता है जो भविष्य की समृद्धि के लिए संपत्तियों का निर्माण करता है. इस पूंजीगत व्यय को देखने का नजरिया बदलना पड़ेगा. इसका गुणक प्रभाव पड़ता है और जब 1 रुपये की राशि पूंजीगत निवेश में लगती है तो मध्यम अवधि में ढाई से साढ़े तीन रुपये का आर्थिक उत्पादन होता है. यह इस पूंजीगत व्यय को इसलिए भी पूंजीगत निवेश कहा जाता है.

सभापति महोदय, मुझे यह कहते हुए गर्व होता है कि डॉ. मोहन यादव जी हमारे सम्माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में, हमारे वित्तमंत्री जी के कुशल वित्त प्रबंधन में हमारा हर पांचवां रुपया पूंजीगत व्यय पर खर्च होता है. पूंजीगत निवेश में जाता है और यह मध्यप्रदेश को उन अग्रणी राज्यों में खड़ा करता है, जो आज तेजी से विकास कर रहे हैं. हम 20 से 22 प्रतिशत कैपिटल एक्सपेंडिचर मैंने कहा कि लगभग हर पांचवा रुपया हम पूंजीगत व्यय पर खर्च करते हैं और इस कारण से आज मध्यप्रदेश उत्तरप्रदेश गुजरात महाराष्ट्र तमिलनाडू जैसे राज्यों से भी हम इस क्षेत्र में बेहतर कार्य कर पा रहे हैं.

मैं प्रमुख अनुदान मांगों की जब बात करता हूं तो एनवीडीए के लिए रुपये 3000 करोड़, खाद्य नागरिक आपूर्ति  उपभोक्ता संक्षण के लिए 2220 करोड़ रुपये, लोक निर्माण विभाग के लिए 1000 करोड़ रुपये, परिवहन विभाग के लिए 129 करोड़ रुपये, जिसमें से 101 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय में खर्च होना है. गृह विभाग के लिए 157 करोड़ रुपये, उच्च शिक्षा विभाग के लिए 50 करोड़ रुपये, नगरीय विकास एवं आवास विभाग के लिए 21 करोड़ रुपये, इस तरह से हम देखें तो लगभग 6600 करोड़ रुपये के आसपास पूंजीगत व्यय का प्रावधान किया है. किसान कल्याण तथा कृषि विकास के लिए 352 करोड़ रुपये, भू-राजस्व जिला प्रशासन और आपदा राहत के लिए 297 करोड़ रुपये, स्कूल शिक्षा के लिए 58 करोड़ रुपये, लोक सेवा प्रबंधन के लिए 25 करोड़, पर्यटन के लिए 30 करोड़ रुपये, ऐसा राजस्व व्यय के लिए भी प्रावधान  किया गया है.

सभापति महोदय, अब मैं विभागवार, कुछ विभागों पर जोर देना चाहूंगा. ग्रामीण क्षेत्र और ओडीआर मार्ग बेहतर रोडों के लिए 4000 करोड़ रुपये का प्रावधान और भू-अर्जन के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. हम सब जानते हैं कि भूमि की उपलब्धता से ही ये सारी सड़क की परियोजनाएं पूर्ण होती हैं, चाहे राष्ट्रीय राजमार्ग हो, राज्य राजमार्ग हो या अन्य जनहित के कार्य हों, सभी के लिए समय पर भूमि का अधिग्रहण एक आवश्यक प्रक्रिया है और इस प्रावधान से संबंधित किसान और भूमि स्वामी को समय पर और उचित मुआवजा भी मिलेगा. साथ ही अधूरी और लंबित सड़क परियोजनाएं हैं उनको गति मिलेगी. बीओटी माडल पर जो सड़कें बनी हैं वह मध्यप्रदेश के विकास में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. यह पीपीपी माडल है और इसमें ठेकेदार और सरकार के विभाग का अनुबंध होता है. अनुबंध की समाप्ति पर भुगतान करना आवश्यक होता है क्योंकि इससे सरकार की विश्वसनीयता बढ़ती है और उक्त परियोजनाओं का संचालन आगे भी होता रहता है.  ऐसा करने से भविष्य में निवेशक जो हैं वह सड़क बनाने के लिए राज्य में आएंगे. मजबूत परिवहन व्यवस्था से ही प्रदेश की प्रगति तय होती है. मध्यप्रदेश यात्री परिवहन और इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के लिए 101 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के लिए 28 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इससे परिवहन अवसंरचना को मजबूती मिलेगी.वहीं ई-बसों के माध्यम से स्वच्छ, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी. मध्यप्रदेश विकसित और ग्रीन मोबिलिटी की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रहा है. आज पूरे प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसेस के संचालन का जो सपना था, जैसा कि हमारे वित्त मंत्री जी ने पूर्व के बजट में कहा था. उसके अनुरूप ही यह सपना भी पूरा होने जा रहा है.

सभापति महोदय, किसान हमेशा से हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहा है. बाजार में जब भी कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जाता है तो सबसे अधिक प्रभाव किसान पर पड़ता है और इसी को ध्यान में रखते हुए हमारे मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्व वाली सरकार ने भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को उचित मूल्य, सुरक्षा, आय, संरक्षण देकर कृषि उत्पादन बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने का काम किया है. भावांतर योजना के लिए 352 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है. खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के लिए भी 2 हजार 220 करोड़ रूपए  का प्रावधान किया गया है, जिससे किसानों को उपज का उचित मूल्य और समय पर भुगतान मिले, यह वैसे भी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है. जितनी भी उपार्जन की संस्थाएं हैं, चाहे नागरिक आपूर्ति निगम हो, मॉर्कफेड हो, प्राइमरी सोसायटियां हों, इनको उपार्जन के लिए कार्यशील पूंजी की जरूरत होती है. वह उनको उपलब्ध होगी. एमएसपी पर जो खरीदी चल रही है, वह सुचारू रूप से चलती रहेगी और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था मध्यप्रदेश की मजबूत होगी.

सभापति महोदय, खासतौर से मेधावी छात्र-छात्राओं को लैपटॉप के लिए 58 करोड़ रूपए देने की बात कही गई है. अंत में मैं जिस विभाग के बारे में सबसे ज्यादा बोलना चाहता हूँ, वह नर्मदा घाटी विकास विभाग है. इसमें 3 हजार करोड़ की राशि की अनुपूरक अनुदान मांग की बात की है. 20 से ज्यादा जिलों में जो विभिन्न योजनाएं या परियोजनाएं चल रही हैं, उनमें गति आएगी और इसके अलावा भू-अर्जन के लिए भी 135 करोड़ रूपए का प्रावधान किया है, जिससे लंबित और अधूरी सिंचाई परियोजनाएं जल्द ही कम समय में पूरी हो सकेंगी और हमने जो मध्यप्रदेश के लिए सिंचाई का लक्ष्य रखा है, उससे मध्यप्रदेश में आगामी समय में हमारा 1 लाख हेक्टेयर सिंचाई का रकबा होगा. उसको भी निर्धारित समय पर हम पूरा करेंगे.

          सभापति महोदय, जब मैं अपने विधानसभा क्षेत्र की बात करना चाहता हूँ. यहां सम्माननीय लोक निर्माण विभाग के मंत्री और हमारे सम्माननीय वित्त मंत्री जी भी हैं. मेरी आपसे एक ही प्रमुख मांग है कि एक अंतर जिला रोड है, जो दमोह और जबलपुर जिले को जोड़ती है. उसमें भी बरगी और जबेरा विधानसभा को कनेक्टिविटी मिलने वाली है. यह रोड नेशनल हाइवे पर स्थित बेलखेड़ा, जो मेरा स्वयं का गांव है और यह जबेरा विधानसभा के समनापुर को जोडे़गी. अभी इस राजमार्ग पर आने के लिए हमें पाटन और सहपुरा से होकर आना पड़ता है, जिसमें हमें 70 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है और जो रोड प्रस्तावित की गई है, उसकी लंबाई मात्र 22 किलोमीटर है. बहुत-सा मार्ग तो पहले से ही बन चुका है. सिर्फ 4 किलोमीटर का रामपुर और पिंडरई गांव के बीच का पहाड़ी मार्ग है, जिसमें अभी भी चार पहिया वाहन का आवागमन होता है लेकिन सिर्फ बारिश के दिनों में नहीं होता है. इस रोड के लिए यदि हमारे माननीय वित्त मंत्री जी इस अनुपूरक मांग में शामिल करेंगे, तो बहुत अच्छा होगा. इस अनुपूरक मांग में एक बड़ादेव सिंचाई परियोजना के लिए 34 करोड़ रूपए देने के लिए हमारे सम्माननीय वित्त मंत्री जी और माननीय मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी को मैं धन्यवाद देता हूँ. अंत में मैं कुछ पंक्तियों के साथ अपनी बात को समाप्त करूंगा.

          सपनों को अब पंख मिले हैं, सपनों को अब पंख मिले हैं,         

                   नये इरादों के रंग खिले हैं, हर गांवों को विकास की पहचान,

                             हर शहर बने प्रगति की उड़ान, हर चेहरे पर विश्वास रहे,

                                         हर घर में सुख का वास रहे, यही हमारा संकल्प विशेष,

                                                  विकसित, समृद्ध मध्यप्रदेश.’’

          सभापति महोदय, मैं पुन: अनुपूरक अनुदान मांग का पूर्ण समर्थन करते हुए अपनी बात को यही विराम देता हूँ. जय हिन्द-जय मध्यप्रदेश.

          सभापति महोदय बहुत-बहुत धन्यवाद नीरज जी.


 

            श्री सुरेश राजे (डबरा)सभापति महोदय, अनुपूरक मांग पर हमारे सत्तापक्ष के जितने

भी मित्रों ने जितनी भी बातें रखीं ठीक है. हर पक्ष का अपना महत्व है. लेकिन बाकी बातें बाद में करूंगा सबसे पहली बात जो सरकार छाती ठोक ठोक कर कहती है, प्रचार-प्रसार में भी कहती है अभी चर्चा में जो देखने को मिला उसका मूल सार भी यही है. सरकार कहती है कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास तो जब सदन में हम खड़े हैं एक तरफ सबका साथ, सबका विश्वास कैसे संभव है. जब यह मेरा अकेले का मुद्दा नहीं है. यह एक विधायक का मुद्दा नहीं है. यह मुद्दा है 230 विधायकों का जब सबका साथ और सबके विकास की बात आती है तो हमारी जो विधायक निधि की राशि है हम इतने लंबे समय से मांग कर रहे हैं कम से कम उसे 5 करोड़ बढ़ा दी जाये. विधायक कोई अपने घर के लिये राशि नहीं मांग रहा है. जब हमें जानकारी मिलती है और सुनने को आता है कि सत्तापक्ष के विधायकों को 15-15 करोड़ के प्रस्ताव मंगा रहे हैं इसमें कोई आपत्ति नहीं है आप उनके 20 करोड़ रूपये के कर दो. हमने निवेदन यह किया है कि आप हमारी राशि 230 विधायकों को मिलने वाली है उसको कम से कम पांच करोड़ रूपये तो कर दो. अब हुजूर समझने की स्थिति यह है कि जो राशि हमें मिलती है उसमें 18 प्रतिशत जीएसटी है. जब 2020 में पहली बार विधायक बनकर के आये तो जो निर्माण कार्य की लागत थी एक किलोमीटर का ग्रेवल रोड़ जिसको सिर्फ मिट्टी मुरम का ही रोड़ कहते हैं ग्रेवल रोड़ में कंडे गिट्टे डलते नहीं हैं उसकी लागत आती थी 9 से साढ़े 9 लाख रूपये. जब हमारे पास में कोई सरपंच आता था तो हमारी कोशिश रहती थी कि उन्हें एक किलोमीटर का रोड़ दे दो, कुछ तो क्षेत्र का भला होगा, लेकिन आज उसकी कीमत हो गई है 18 लाख रूपये. अब आप कल्पना कीजिये कि एक तरफ एक विधायक को पांच साल में 75 करोड़ रूपये देंगे विकास के लिये एक तरफ विपक्ष का विधायक है उसको टोटल समय में ही 10 करोड़ रूपये मिलेगा तो वह कैसे अपने क्षेत्र में समानता के आधार पर विकास करेगा, यह सबका दर्द है सभापति महोदय इसलिये मैंने निवेदन किया है इसमें सरकार पर अतिरिक्त भार पड़ने वाला नहीं है. सिर्फ इतना भर कर दें ये उनको 15 करोड़ रूपये दे रहे हैं
उनके 12-12 करोड़ कर दें बाकी के पैसे इधर बांट दें तो सबको समान भागों में पांच पांच करोड़ रूपये हो जायेगा. तो मैं समझता हूं कि सरकार ने जो वायदा किया था वह भी पूरा हो जायेगा उसकी साख को भी कोई बटा नहीं लगेगा. इतना मेरा सबकी ओर से निवेदन है. मैं फिर यह आग्रह कर रहा हूं कि मात्र दो साल बचे हैं कुल ढाई साल शेष हैं. 6 महीने चुनाव में चले जायेंगे. 2 साल में सरकार के ऊपर कोई बहुत बड़ा अतिरिक्त बोझ नहीं है. मैं आपके माध्यम से सरकार के बंधुओं से कहना चाहता हूं. हो सकता है कि आज इधर बैठकर 60 -65 विधायक आपसे मांग कर रहे हैं. कल के दिन जब आप उधर होंगे तो आप इधर होंगे तो यही मांग कर रहे होंगे तो कैसा लगेगा मेरा यह अनुरोध है.

            सभापति महोदयकृपया समाप्त करें.

          श्री सुरेश राजेमाननीय सभापति महोदय मैं अपने क्षेत्र की मांग रखते हुए अपनी बात को समाप्त करूंगा. हमारी सबसे प्रमुख मांग है कि जब सरकार खेलों को बढ़ावा देने का कर रही है और सदन में भी कहती है न तो आम बजट में हमारे लिये कोई प्रावधान था अब तो यह अनुपूरक बजट है तो हमारे यहां पर बच्चों के खेल स्टेडियम नहीं है. एक बार सरकार ने पैसा भेजा भी पता नहीं वह चुनावी वायदा था, क्या था, तो हमारे क्षेत्र में खेल स्टेडियम की महत्ती आवश्यकता है. एक और निवेदन करना चाहता हूं कि हमारे यहां पर नगर पालिका की स्थिति जर से जर्जर है कभी आप एक बार मेरे क्षेत्र डबरा की तरफ घूमने चले जाओ तो आपको कहीं से नहीं लगेगा कि आप कहीं शहर में घूम रहे हो वहां की स्थिति बद से बदतर स्थिति है. ऐसा तो नहीं है मैं कांग्रेस का विधायक हूं. वहां तो नगरपालिका भी भाजपा की है, एक नहीं तीनों नगर पंचायतें वहां भारतीय जनता पार्टी की हैं, वहां पर सांसद भारतीय जनता पार्टी के हैं, वहां पर जिला पंचायत अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी के हैं, वहां पर जनपद अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी के हैं. सिर्फ अकेला विधायक ही तो नहीं है. आखिरकार आप सबकी यह नैतिक जिम्मेदारी है.

          एक माननीय सदस्यआप भी इधर आ जाओ.

          श्री सुरेश राजेसभापति महोदय, फिर तो लोकतंत्र का मतलब ही खत्म हो जायेगा कोई विपक्ष में भी बोलने वाला चाहिये. मैं जहां पर हूं वहां पर संतुष्ट हूं. चिन्ता नहीं करें.                                                                                       

            सभापति महोदय – सुरेश जी थोड़ा संक्षिप्‍त करें.

श्री सुरेश राजे – सभापति महोदय, डबरा की सबसे बड़ी समस्‍या है, सब्‍जी मंडी. मेरी मां वर्ष 2000 में मंडी अध्‍यक्ष थी, तो एक मंडी का निर्माण किया गया था, लेकिन वर्ष 2000 से मंडी पूर्ण है, बन गई है, लेकिन आज तक उस सब्‍जी मंडी को शिफ्ट नहीं किया और ऐसी दयनीय स्थिति में वहां लोग सब्‍जी लेने जाते हैं. जब सब्‍जी मंडी बन गई, टीन शेड बन गए, चबूतरे बन गए हैं, तो ऐसी क्‍या दिक्‍कत है कि वहां सब्‍जी मंडी शिफ्ट नहीं कर रहे हैं और ऐसा भी नहीं है कि कृषि उपज मंडी फल और सब्‍जी मंडी से करोड़ों रुपए का टैक्‍स वसूल किया जाता है और अभी भी वसूला जा रहा है जो बद से बदतर स्थिति में है. ये मामला आपके संज्ञान में लाना जरूरी था. हमारे यहां रेत का बड़े पैमाने पर अवैध उत्‍खनन जारी है, उसके कारण राजस्‍व में भी सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लग रहा है. वहां की सड़कें बदहाल है और इसका दूसरा पहलू ओवरलोड के लिए रेत को छूट दे रखी है, लेकिन वहां पर जो मिट्टी के ट्रेक्‍टर चलते थे, वहां शासन ने रोक लगा दी कि आप ज्‍यादा मिट्टी भरकर नहीं ले जा सकते, वह मिट्टी कोई अबरपतियों के घर में तो जाती नहीं है, मुरम की भी यही स्थिति है कि आप फट्टा लगाकर ट्रेक्‍टर नहीं ले जा सकते, ओवरलोड हो रहा है. इसी विभाग को, इन्‍हीं अधिकारियों को, ओवरलोड ट्रेक्‍टर और ओवरलोड वाहन थाने के सामने गुजरते हैं, वह दिखते नहीं है, लेकिन गरीब को काम आने वाली जो चीज है, वह इनको दिख जाती है. आपके माध्‍यम से यह भी जरूरी था और हर बार सरकार से निवेदन करता हूं कि मेरे डबरा को एक कन्‍या महाविद्यालय की बहुत महती आवश्‍यकता है, क्‍योंकि हमारी कन्‍याएं बीच में ही पढ़ाई छोड़कर घर बैठ जाती है. सभापति जी आपने मुझे बोलने का अवसर दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद.

सभापति महोदय – बहुत बहुत धन्‍यवाद सुरेश जी.

श्री आशीष शर्मा(खातेगांव) – बहुत बहुत धन्‍यवाद माननीय सभापति महोदय, मैं इस प्रथम अनुपूरक बजट का समर्थन करता हूं सरकार ने जो विकास कार्यों की गति प्रारंभ की है, इसे आगे बढ़ाने के लिए इस सप्‍लीमेंट्री बजट में जो प्रावधान किए गए हैं, निश्चित ही समृद्ध और सशक्‍त मध्‍यप्रदेश को आगे बढ़ाने में सहायक होंगे, अच्‍छी कानून व्‍यवस्‍था के लिए आवश्‍यक है कि पुलिस बल को आधुनिक तकनीक मिले. पिछले एक डेढ़ वर्ष से पुलिस विभाग को सरकार स्‍मार्ट बनाने की दिशा में काम कर रही है. उनके पास आधुनिक उपकरण हैं, वाहन दिए गए हैं पेट्रोलिंग के लिए, साथ ही साथ संचार की आधुनिक सुविधाएं पुलिस विभाग को मुहैया कराई गई है. कई बार जांच के दौरान और मुकदमों को निर्णायक निर्णय तक पहुंचाने में अपराधी को सजा दिलाने में साक्ष्‍य बहुत कारगर होते हैं और आजकल डिजीटल साक्ष्‍य माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय ने भी स्‍वीकार किया है, जो डिजीटल साक्ष्‍य है, विडियो, ऑडियो है, इन सभी को पुलिस आधुनिक संसाधनों के माध्‍यम से अब जांच में और डायरी में प्रस्‍तुत कर रही है, जिसके कारण विवेचना आसान हुई है और भविष्‍य में शतप्रतिशत अपराधों में अपराधियों को दंड मिल सकेगा, इस दिशा में इस बजट में प्रावधान किया गया है, लगभग 98 करोड़ रुपए का मैं ऐसा मानता हूं कि पुलिस बल के लिए यह बहुत कारगर होगा, सहायक होगा और जो आपदाएं मध्‍यप्रदेश में समय समय पर आती है बहुत सारे हमारे वक्‍ता इस पर बोल चुके हैं. मैं रिपीट नहीं करना चाहता, लेकिन जब प्राकृतिक आपदाएं आती है तो आम आदमी के लिए सरकार ही एक भरोसा होती है. बिजली गिरने और सर्पदंश होने के कई सारे लोगों की असमय मृत्‍यु हो जाती है या अतिवृष्टि बाढ़ के कारण फसलें खराब हो जाती है ओलावृष्टि के कारण इन्‍हें प्राकृतिक आपदाओं के लिए भी सरकार ने पर्याप्‍त बजट में प्रावधान रखा है. चूंकि आपदाएं कहकर नहीं आती इसलिए इसमें कई बार बजट बढ़ाना चाहिए और ये सरकार की संवेदनशीलता है. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री और वित्‍त मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं कि प्राकृतिक आपदाएं में त्‍वरित सहायता इस माध्‍यम से लोगों को मिल सकेगी. मध्‍यप्रदेश कृषि प्रधान राज्‍य है और उन टॉप पांच राज्‍यों में मध्‍यप्रदेश शामिल है, जहां पर कपास का उत्‍पादन होता है और खासकर के मालवा का क्षेत्र, जो कभी कपास का प्रचुर उत्‍पादन करता था, इंदौर की बड़ी बड़ी कॉटन की मिलें हुआ करती थी, हमारे क्षेत्र से भी बड़ी मात्रा में कपास जाता था, लेकिन अब निमाड़ के कुछ हिस्‍सों तक खरगौन, बड़वानी के कुछ हिस्‍सों तक कपास की खेती बची है इसलिए सरकार कपास की खेती को प्रोत्‍साहन दे रही है, माननीय प्रधानमंत्री जी जब कपड़ा सयंत्र का उद्घाटन करने के लिये धार जिले में आये थे, उस समय उन्‍होंने यह संदेश दिया था कि मध्‍यप्रदेश का कपास का उत्‍पादन बढ़ना चाहिए और इसलिए मध्‍यप्रदेश की अनुसूचित जाति और जनजाति के जो किसान हैं, उनके लिये बहुत सारा प्रावधान लगभग 24 करोड़ 60 लाख रूपये का प्रावधान इस अनुपूरक बजट में किया गया है, ताकि हमारे जो छोटे लघु सीमांत किसान हैं, जो अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति वर्ग के हैं, वह भी कपास की खेती के लिये प्रोत्‍साहित हों, सरकार नई तकनीकें इस माध्‍यम से देने जा रही है और जिससे मुझे लगता है कि मध्‍यप्रदेश जिस तरह से गेहूं उत्‍पादन में, दलहन के उत्‍पादन में बढ़ते क्रम की तरफ जा रहा है, उसी तरह कपास उत्‍पादन में भी हम आने वाले समय में नंबर वन, नंबर टू, नंबर थ्री की पोजिशन हासिल करेंगे. सरकार ने घुमंतू अर्द्ध-घुमंतू जनजाति जो होती है, जिनका कहीं एक जगह ठिकाना नहीं होता है, व्‍यवसाय के लिये कुछ दिन यहां रहते हैं, कुछ दिन वहां रहते हैं. ऐसी जो जातियां हैं, उनको कई बार आवास और इस तरह की सुविधाएं नहीं मिल पाती हैं, लेकिन सरकार इनके भी जो बच्‍चे हैं, जो मध्‍यप्रदेश सरकार का प्रयास है कि हर बच्‍चा स्‍कूल जाये, इसके लिये नवीं और ग्‍यारहवीं की जो बच्चियां हैं, उनको छात्रवृत्ति हेतु लगभग 61 करोड़ रूपये का प्रावधान इन्‍होंने घुमंतू अर्द्ध-घुमंतू जनजातियों के लिये किया है, यह भी मैं मानता हूं एक बड़ा प्रावधान है, खासकर के आठवीं, दसवीं के बाद इन परिवारों की बच्चियों का या तो विवाह कर दिया जाता है या वह स्‍कूल नहीं जा पाती हैं, लेकिन जो नवीं और ग्‍यारहवीं कक्षा में इनको सहायता छात्रवृत्ति के रूप में दी जायेगी, वह इनको आगे पढ़ने में सहायक होगी, जिससे यह उच्‍च शिक्षा प्राप्‍त करके समाज में एक अच्‍छा मुकाम हासिल कर सकेंगी, इसके लिये भी मैं माननीय वित्‍तमंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं.

सभापति महोदय, वर्तमान समय में ऊर्जा का जो संकट हमको देखने के लिये मिल रहा है, इसके लिये वैकल्पिक ऊर्जा के स्‍त्रोत की ओर जाना आवश्‍यक है, इसलिए ई.वी. बसें चलाने के लिये खासकर नगरीय क्षेत्रों में प्रावधान किया है. हमारे देवास से भी बहुत सारी सिटी बसें हमारे हरदा, टिमरनी और सिवनी मालवा तक जाती हैं. मैं यह मांग भी माननीय वित्‍तमंत्री जी से करता हूं कि इंदौर से,देवास से और उज्‍जैन से चलने वाली जो ई.वी. बसें हैं, उनके लिये हमारे कन्‍नौद, खातेगांव, हरदा,बैतूल तक के लिये परमिट जारी किये जाये और यहां के यात्रियों के लिये भी बसों की व्‍यवस्‍था की जाये. साथ ही साथ माननीय प्रधानमंत्री जी की एक महत्‍वपूर्ण योजना है पी.एम.ऊषा जिसके अंतर्गत प्रधानमंत्री उच्‍चतर शिक्षा अभियान सरकार चलाती है और जिसमें सरकारी कॉलेजों की गुणवत्‍ता बढ़ाने के लिये पैसा खर्च किया जाता है. हमारे जिले के भी कॉलेज को इसके लिये राशि दी गई है, इसके अंतर्गत दस नये डिग्री कॉलेज खुले हैं, जो हमारी उच्‍च शिक्षा है, वहां पर अच्‍छी लैब है और नेट की जो रैकिंग है, उसमें भी उनको अच्‍छे नंबर मिले हैं, स्‍मार्ट लायब्रेरी हो,क्‍लासेस हों,होस्‍टल बने इसके लिये लगभग 50 करोड़ रूपये केंद्र सरकार ने मध्‍यप्रदेश का भी अंशदान हम शामिल कर रहे हैं, तो यह उच्‍चतर शिक्षा के लिये बजट में एक बहुत अच्‍छा प्रावधान किया गया है.

सभापति महोदय, साथ ही साथ लेपटॉप योजना, देखिये सरकार जो करती है उसके परिणाम लंबे समय तक समाज में देखने के लिये मिलते हैं, एक समय गरीब परिवारों के लिये बेटा, बेटी को पढ़ाना और खासकर उच्‍च शिक्षा दिलाना बहुत दुस्‍कर कार्य था, लेकिन बारहवीं पास करने वाले 75 प्रतिशत से अधिक वाले मेधावी छात्र, छात्राओं को मुख्‍यमंत्री मेधावी छात्र योजना के अंतर्गत जो लेपटॉप के लिये 25 हजार रूपये की राशि दे रही है, वह उनके भविष्‍य को बनाने के लिये बहुत कारगर है. आज के समय में एंड्रायड फोन भी उतनी जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता है, इसलिए वह इस पच्‍चीस हजार रूपये से वह अपना लेपटॉप क्रय करके अपनी पढ़ाई को बहुत व्‍यवस्थित तरीके से कर सकता है और इस योजना के आने के बाद खासकर के ग्रामीण क्षेत्र में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के परिवारों में एक तो बच्‍चों में पढ़ने का गजब का उत्‍साह जागा है, उनको इस बात को भरोसा है कि सरकार हमारे उन खर्चों की भी पूर्ति कर रही है, जो हमारे माता पिता को करना चाहिए.

सभापति महोदय, ग्राम स्‍वराज अभियान के अंतर्गत पंचायतों में शिविर लगाकर शासन की विभिन्‍न योजनाओं का लाभ देने का काम मुख्‍यमंत्री जन कल्‍याण शिविर लगाकर पूरे मध्‍यप्रदेश के समस्‍त ब्‍लॉक्‍स में किया जा रहा है और यह एक अच्‍छी पहल है शासन की जितनी योजनाएं हैं, कई बार आम आदमी को उन योजनाओं के बारे में पता नहीं होता है, कई बार तो जनप्रतिनिधियों को भी पता नहीं होता है, लेकिन इस प्रकार के जनकल्‍याण शिविरों के माध्‍यम से यह योजनाएं हितग्राहियों तक पहुचंती है और इसलिए मैं माननीय वित्‍तमंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं.

सभापति महोदय, मैं आखिरी बात कहना चाहता हूं कि नर्मदाघाटी विकास विभाग के माध्‍यम से मेरे विधानसभा क्षेत्र में हंडिया बैराज परियोजना, मां रेवा सिंचाई परियोजना और हाटपिपलिया और देवास जिले के अधिकांश क्षेत्रों में हाटपिपलिया माइक्रोइरीगेशन परियोजना चल रही है, जिसके माध्‍यम से हजारों हेक्‍टेयर भूमि हमारे जिले में सिंचित होगी. मैं माननीय वित्‍तमंत्री जी को इस अनुपूरक में उन योजनाओं के परिवर्धन के लिये यह बजट प्रस्‍तावित किया है, उसके लिये धन्‍यवाद देता हूं. यह अनुपूरक शासन की ओर केंद्र सरकार की उन सब मंशाओं की पूर्ति करेगा, जो एक विकसित भारत के निर्माण में आवश्‍यक है.सभापति महोदय, आपने बोलने के लिये अवसर दिया उसके लिये बहुत-बहुत धन्‍यवाद.                                      

            सभापति महोदय--  मेरा सभी माननीय सदस्‍यों से आग्रह है समय का थोड़ा ध्‍यान रखें, मर्यादा रखें, कृपया 3 मिनट में अपनी बात पूरी करें.  श्री राजन मण्‍डलोई.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक--  माननीय सभापति महोदय, आपने समय बढ़ाने की बात कही थी, समय इतना अधिक हो गया है, इसको कल कंटीन्‍यू कर दें.

          सभापति महोदय--  कुछ ही नाम बचे हैं. कार्यमंत्रणा समिति में..

          श्री उमंग सिंघार--  माननीय सभापति महोदय, कार्यमंत्रणा समिति के अंदर सिर्फ समय तय हुआ, यह तय नहीं हुआ था कि 3 दिन में सत्र खत्‍म हो. तमाम मुद्दे हैं हमारे विधायकों के, सत्‍ता पक्ष और विपक्ष दोनों के प्रश्‍न आते हैं, ध्‍यानाकर्षण आते हैं, अशासकीय संकल्‍प रहते हैं, विभागों के प्रतिवेदन होते हैं इन सब पर चर्चा होना चाहिये. अगर आपका काम खत्‍म तो विधान सभा खत्‍म, मतलब प्रदेश की कोई समस्‍या ही नहीं है. हर विषय महत्‍वपूर्ण है, इतनी दूर से आ रहे हैं, कोई विंध्‍य से आ रहे हैं, कोई शहडोल से आ रहे हैं, अनूपपुर से आ रहे, मैं समझता हूं जनप्रतिनिधि हैं, 230 विधायकों की बात है, सदन पूरा चलना चाहिये. मुझे जानकारी मिली कि आज खत्‍म हो रहा है. मजाक बना रखा है.

          सभापति महोदय--  चर्चा तो पूरी हुई है, पूरे दिन-दिन भर बैठे हैं. काफी विषय रिपीट भी होने लगे.

          श्री उमंग सिंघार--  सबके प्रश्‍न लगे हैं, ध्‍यानाकर्षण लगे हैं, अशासकीय संकल्‍प आते हैं. माननीय सभापति महोदय, सिर्फ शासकीय कार्य पूरा करना है. विधान सभा के अंदर विधायकों के जवाब नहीं देना. यह कौन सी बात है.

          सभापति महोदय—यह आज के लिये किया था, सदन की अनुमति से.

          श्री उमंग सिंघार--  कल चलेगा, आप बता दें, परसों चलेगा आप बता दें, हम बैठ जाते हैं.

          सभापति महोदय—माननीय संसदीय कार्यमंत्री जी कुछ कह रहे हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय--  सभापति महोदय, आपने जब कार्यमंत्रणा समिति की बात कही है, कार्यमंत्रणा समिति में एक घंटे का समय इसके लिये निर्धारित हुआ था, दो घंटे कर लें, पर आपकी अनुकृपा है माननीय सदस्‍यों के ऊपर की आप सभी को सुन रहे हैं, यह आपकी आसंदी की कृपा है, नहीं तो आप चाहते एक घंटा हो जाता और कह देते समाप्‍त और यह आसंदी चाहती है कि सभी बोलें, इसलिये समय हो रहा है, अदरवाइज एक घंटे के अंदर आप खत्‍म कर दें तो कुछ भी नहीं, समय पर ही सारा कार्यक्रम हो रहा है. हर बिल पर आधा घंटा, आधा घंटा, आधा घंटा, वह आधे घंटे वाले में डेढ़ घंटा लग गया. यह आसंदी की कृपा है कि उन्‍होंने सबको बोलने का अवसर दिया है. जो आधे घंटे का बिल था उसमें डेढ़ घंटा लगा, अब उसमें हमने ही बोला न उसमें आसंदी की कोई गलती नहीं है. लंच ब्रेक आपने खत्‍म कर दिया, आपने कहा यहीं भोजन करें इसलिये कि सब लोगों को बोलने का अवसर मिले और सबको मिल भी रहा है, पर्याप्‍त अवसर मिल रहा है और लास्‍ट 3-4 लोग बचे हैं अब. अगर जल्‍दी है तो आप मंत्री जी को बुला लीजिये.

          श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत--  माननीय सभापति महोदय, नेता प्रतिपक्ष जी की बात का सम्‍मान करना है, उनको 10-15 साल बोलने का अवसर और वहीं देना है. आपको बहुत अवसर मिलेगा, खूब बोलिये, लंबा बोलिये.

          सभापति महोदय--  वैसे माननीय संसदीय मंत्री जी ने भी आपने भी चिंता व्‍यक्‍त की है, लेकिन सदन की कार्यवाही हम लोगों ने ही सहमति से बढ़ाई है आपसे अनुमति लेकर बढ़ाई है.

          श्री उमंग सिंघार--  माननीय सभापति महोदय, मैं आसंदी पर कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं, मैं आपका सम्‍मान करता हूं, आसंदी का सम्‍मान करता हूं. मेरा विषय यह नहीं है कि समय कितना लग रहा है, विषय यह है कि क्‍या पूरे 5 दिन सत्र चलेगा. आज सत्र क्‍यों खत्‍म करने जा रहे हो, क्‍या विधायकों के प्रश्‍न कल के, परसों के नहीं लगे हुये हैं, इनके जवाब नहीं आना चाहिये, इनके ध्‍यानाकर्षण नहीं आना चाहिये, इनके अशासकीय संकल्‍प नहीं आना चाहिये, मैं समझता हूं शून्‍यकाल की सूचनायें नहीं आना चाहिये, क्‍या मासिक प्रतिवेदन जो हैं उन पर चर्चा नहीं होना चाहिये, बहुत सारा काम है, क्‍यों खत्‍म करना चाह रहे हैं.

          सभापति महोदय--  अभी तो चर्चा जारी है. श्री राजन मण्‍डलोई जी. आपसे आग्रह है थोड़ा संक्षिप्‍त करें.

          श्री राजन मण्‍डलोई (बड़वानी)—धन्‍यवाद सभापति महोदय, आज जो प्रथम अनुपूरक अनुदान मांगों पर चर्चा चल रही है मैं उसके विरोध में बोलने आया हूं. इस अनुपूरक अनुदान में गृह विभाग, लोक निर्माण विभाग, परिवहन विभाग, खाद्य आपूर्ति और नर्मदा घाटी इसमें अत्‍यधिक राशि का उल्‍लेख किया है, लेकिन महिला एवं बाल विकास, जनजाति, अनुसूचित जाति, पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग जो ग्रामीण क्षेत्रों में और खासकर महिलाओं से जुड़ा महिला एवं बाल विकास विभाग जैसे हैं इनमें बहुत कम प्रोवीजन दिया है.बातकरें तो मैं जिस क्षेत्र बड़वानी से आता हूं जो दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्र है और एक तरफ नर्मदा घाटी है दूसरी तरफ महाराष्ट्र की सीमा शेयर करते हैं तो वहां पर जो आदिवासी क्षेत्र है अत्यधिक पिछड़ा क्षेत्र है वहां पर कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं हुए हैं जो वहां के लोग मुख्य धारा से जुड़ सकें.जलजीवन मिशन की बात करूं जिसका लक्ष्य 2024 में पूर्ति करने का था लेकिन आज भी मेरे विधान सभा क्षेत्र में नलजल तो पूरी तरह से फ्लाप है कोई ऐसा गांव नहीं है या कोई ऐसी पंचायत नहीं जहां पूरी तरह से नलजल योजना चालू हो गई और घरों में नलों से पानी आने लगा हो. मेरे क्षेत्र में आज भी पेयजल के लिये लोग नाले और झिरियां,जो नालों पर गढ्ढा खोदकर पानी निकालते हैं उस पर निर्भर हैं और बड़ी दूर-दूर से गधों पर लादकर लाना पड़ता है और जो पाटी विकासखण्ड क्षेत्र है मेरे विधान सभा क्षेत्र का वह पहाड़ी ब्लाक भी है लेकिन उसके बावजूद वह पूरी तरह से अत्यधिक पिछड़ा है. वहां हमने पीएचई विभाग से बार बार मांग की लेकिन  ट्यूबवेल खनन नहीं हुए क्योंकि बहुत कम लक्ष्य मिला था 10 से 15 इससे ज्यादा नहीं हो रहे. एक भी सिंगल फेज मोटर हमको नहीं मिली जिससे हम गांव के लोगों कोपानी उपलब्ध करा सकें. नलजल के चक्कर में पीएचई विभाग ने ट्यूबवेल खनन प्रतिबंधित ही कर दिया बहुत कम स्वीकृतियां प्रदान करते हैं. मेरे क्षेत्र में सड़क की बात करूं पूरा पहाड़ी क्षेत्र है आवागमन के कोई साधन नहीं हैं. आपने देखा होगा समाचारपत्रों में आये दिन प्रकाशित होता है कि वहां के स्थानीय रहवासी गेंती,फावड़ा,तगाड़ी लेकर खुद कच्ची सड़क बना रहे हैं पहुंच के लिये वहां पर यदि कोई  बीमार हो जाये. कोई प्रेगनेंट महिला हो तो रास्ते में डिलेवरी हो जाए और यदि कोई बीमार अधिक है तो उसको मुख्य सड़क तक लाते लाते बीच में ही वह दम तोड़ देता है क्योंकि एंबुलेंस वहां पहुंच नहीं सकती ऐसी स्थिति वाला हमारा क्षेत्र है. बिजली की बात करूं तो उधर महाराष्ट्र कुछ पंचायतों के सामने लगता है तो वहां बिजली टिमटिमाती है लेकिन हमारे बड़वानी विधान सभा क्षेत्र के कई गांवों में बिजली नहीं है. सरकार दावे करती है कि हम कृषि के लिये 10 घंटे सतत बिजली दे रहे हैं और 24 घंटे घरेलू बिजली दे रहे हैं.सब दूर फीडर सेपरेशन हो गया लेकिन मेरे यहां बिजली नहीं पहुंची. आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां वे बिजली का एक बल्ब नहीं जला पाए और वहां पर खेती के लिये गरीब आदिवासी हैं उस क्षेत्र में ट्रांसफार्मर लगाने की लेकिन ट्रांसफार्मर लगते नहीं हैं. ट्रांसफार्मर के लिये विधायक निधि,सांसद निधि अन्यथा गांव के लोग चंदा इकट्ठा करते हैं तब ट्रांसफार्मर लगते हैं.कोई अपग्रेडेशन नहीं विद्युत विभाग का. बिल भरते हैं लेकिन ट्रांसफार्मर नहीं लगाये जाते. बिजली की स्थिति वहां बहुत खराब है मेरे पाटी विकासखण्ड में जो सबस्टेशन और ट्रांसफार्मरों की संख्या उस क्षेत्र में बढ़ना चाहिये. जिससे आदिवासी गरीब कृषक लोग हैं उनको बिजली मिल सके. स्वास्थ्य सुविधा की बात करें तो बड़वानी जिला मुख्यालय पर जिला अस्पताल है वह अच्छा है दूर-दूर से मरीज आते हैं लेकिन पाटी विकासखण्ड में और सिलावद क्षेत्र है बड़वानी विकासखण्ड का एक हिस्सा वहां स्वास्थ्य सुविधा निल है. पाटी विधान सभा में मात्र एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र और 3 पीएचसी हैं.बोगराटा,गंदावल और रोसर लेकिन वहां डाक्टरों की पूर्ति नहीं हैं. नर्सें हैं नहीं डाक्टर नहीं हो तो भी नर्स काम चला दें लेकिन नर्सें भी नहीं हैं. आप वहां आंकड़ा देखेंगे तो पेरामेडिकल स्टॉफ पूरी तरह से वहां खत्म है. ऐसी स्थिति में वह जो क्षेत्र है वहां सिकल सेल की बीमारी अत्यधिक है साथ ही कुपोषण से बच्चे बहुत पीड़ित हैं. महिलाएं एनीमिक हैं. यदि डिलीवरी पीरियेड में आती हैं तो बिना खून चढ़ाए उनका आपरेशन,उनका बच्चा नहीं पाता ऐसी स्थिति में उस दूरस्थ क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा का यह हाल है तो हम कैसे मान लें कि हमारे आदिवासी क्षेत्र का सरकार ध्यान दे रही है. आंगनवाड़ी केंद्र  5-7 कि.मी. दूर हैं तो कैसे बच्चे आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंच पाएंगे और कई आंगनवाड़ी तो किसी के घरों में चल रहे हैं. कोई  पुराना स्कूल टूटा हुआ है उसमें चल रहा है तो आंगनवाड़ी केंद्र भी हमारे क्षेत्र में खासकर पाटी क्षेत्र में स्वीकृत होने चाहिये.शिक्षा की स्थिति यह है जिला मुख्यालय पर तो स्कूल हैं लेकिन हमारे पाटी विधान सभा क्षेत्र में आपके विभाग की जानकारी में 13 स्कूल ऐसे हैं जहां झोपड़ों में स्कूल संचालित हो रहे हैं. कई जगह शिक्षक हैं, लेकिन भवन नहीं हैं. कई जगह भवन हैं, लेकिन शिक्षक नहीं हैं.

          सभापति महोदय धन्यवाद राजन जी. आपकी सारी बातें आ गई हैं.

          श्री राजन मण्डलोई मैं सिर्फ दो मिनिट में खत्म कर रहा हूँ. भेड़-बकरियों की तरह गिरते पानी में नौनिहाल पढ़ने के लिए मजबूर हैं.

          सभापति महोदय आ गई आपकी बात, श्री उमाकांत शर्मा जी.

          श्री राजन मण्डलोई बस, बस आखिरी बात करके खत्म कर रहा हूँ. बड़वानी में गर्ल्स हायर सेकेण्डरी स्कूल है, जिसके अंदर एक-एक क्लास में सौ-सौ बच्चियां पढ़ रही हैं. ऐसी स्थिति में वे कैसे पढ़ पाएंगी, इसलिए बड़वानी के अंदर एक गर्ल्स हायर सेकेण्डरी स्कूल और एक ब्वॉयज हायर सेकेण्डरी की स्वीकृति मिलनी चाहिए. उनके प्रस्ताव भी गए हुए हैं.

          सभापति महोदय राजन जी, आ गई आपकी बात. उमाकांत जी.

          श्री उमाकांत शर्मा (सिरौंज) माननीय सभापति महोदय, मैं माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के दृष्टि पत्र, विकसित मध्यप्रदेश, विरासत से विकास की ओर ले जाने वाले मध्यप्रदेश को जो उन्होंने नया दृष्टिकोण और नया दृष्टि पत्र दिया है. उसको धन्यवाद करते हुए भारत के अभूतपूर्व प्रभावी प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प को पूर्ण करने के लिए हमारे मध्यप्रदेश सरकार के वित्त मंत्री महोदय ने जो अनुपूरक बजट अनुमान प्रस्तुत किया है और उसके माध्यम से जो मुख्य लक्ष्य हमारे बजट में आ गया था कि हमारा विकसित मध्यप्रदेश बनेगा. हमारा विकसित भारत देश बनेगा. उसकी पूर्ति के लिए 3 लाख 88 हजार 923, ऋण अदायगी को छोड़कर 2026-27 का जो अनुपूरक बजट किया गया है, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान से 10 प्रतिशत अधिक है और ये हमें विकास की उम्मीद बढ़ाता है. विश्वास देता है कि मध्यप्रदेश की धरती खुशहाल होगी, यहां किसान खुशहाल होंगे, मजदूर खुशहाल होंगे.

          सभापति महोदय उमाकांत जी, धन्यवाद देकर अपने क्षेत्र की बात कर लें संक्षेप में.

          श्री उमाकांत शर्मा साहब, मना ही कर देते तो बढ़िया था. (हंसी).

          सभापति महोदय ऐसा नहीं है, नाम और बचे हैं, समय के कारण बोल रहा हूँ.

          श्री उमाकांत शर्मा हम तो बचे कटे मुश्किल से आ पाए हैं. (हंसी).

          सभापति महोदय चलो, थोड़ा स्पीड से करके गागर में सागर भर लें. आप तो विद्वान सदस्य हैं.

          श्री उमाकांत शर्मा सभापति महोदय, बहुत संतुलित मध्यप्रदेश के विकास के लिए लक्षित जो हमारे बिंदु हैं, उनको प्राप्त करने में हम समर्थ हो रहे हैं. इस बजट अनुमान के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी का और माननीय वित्त मंत्री जी का बहुत-बहुत आभार प्रकट करता हूँ. धन्यवाद देता हूँ. बधाई देता हूँ.

          सभापति महोदय, जल ही जीवन है. यह उन परस्थितियों में अनुमान बजट आया है, जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच लड़ाई हो रही है. यूक्रेन और रूस के बीच लड़ाई हो रही है. तब आप लोग ऊँचे उठ-उठ कर बार-बार चिल्ला कर कहते हैं कि ये नहीं मिल रहा है, वह नहीं मिल रहा है, मैं धन्यवाद देता हूँ मुख्यमंत्री जी को, धन्यवाद देता हूँ प्रधानमंत्री जी को, जो सारे अस्थिर हो रहे संसार में भारत को स्थिर बनाए हुए है.

          सभापति महोदय, माननीय वित्त मंत्री जी, हम बड़े उपेक्षित हैं. बड़े पीड़ित है. एक जमाने में इल्तुतमिश ने हमें बर्बाद किया. विदेशी लोगों ने सिरौंज पर कब्जा कर लिया. महाराजा छत्रसाल ने छुड़ाया. देवी अहिल्याबाई का राज रहा, लेकिन बाद में हम टोंक स्टेट में फंस गए. 400 किलोमीटर दूर हमारी राजधानी थी, इसलिए हमारे सिरोंज की बहुत सी उम्‍मीदें हैं, उनकी आप पूर्ति करने की कृपा करें. सबसे पहले मैं निवेदन कर रहा हूँ कि माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय की घोषणा है- कस्‍बा आनंदपुर, तहसील लटेरी में शासकीय महाविद्यालय की स्‍थापना, कृपया उसकी पूर्ति करवाने की कृपा करें, साथ ही मेरा मुख्‍यमंत्री महोदय जी से निवेदन है कि पशु चिकित्‍सा महाविद्यालय सिरोंज में स्‍थापित किया जाये. अगर इस बजट में प्रावधान हो जायेगा, तो हमारे क्षेत्र का विकास होगा. मैं बड़े गर्व के साथ एवं पीड़ा के साथ कहना चाहता हूँ, मेरे कांग्रेस के और अन्‍य सभी दलों के मित्रों से भी कहना चाहता हूं कि आज का सिरोंज जो कभी सोलहवीं, सत्रहवीं सदी में विश्‍व के व्‍यापार का केन्‍द्र होती थी, आज पिछड़ी हुई है, तो उसके लिये कांग्रेस और दिग्विजय सिंह बहुत जिम्‍मेदार हैं. मैं अपने क्षेत्र के लोगों की ओर से कहना चाहता हूँ कि सिरोंज को जिला बना दिया जाये, हाथ जोड़कर प्रार्थना करना चाहता हूँ. वर्ष 1931 तक सबसे ज्‍यादा विदिशा जिले की जनसंख्‍या थी. हमारे व्‍यापारी भोपाल के चौक में बैठे हुए हैं, न हमारे यहां रेल है, न औद्योगिक क्षेत्र है. इसलिए मेरा माननीय मुख्‍यमंत्री जी से, माननीय वित्‍त मंत्री जी से, माननीय सरकार से, माननीय सभापति महोदय के माध्‍यम से मेरा निवेदन है कि हमारे क्षेत्र में जो पिछड़ापन है, बहुत अच्‍छी खेती होती है, बासमती के लिये जैसे छत्‍तीसगढ़ विख्‍यात है, ऐसे ही विदिशा के गेहूँ के लिये, सफेद पिसी के लिये, सरबती के लिये हमारा सिरोंज विदिशा प्रसिद्ध है. सफेद पिसी को क्‍या बोलते हैं ? हम अंग्रेजी नहीं जानते हैं, हम समझने भी कमजोर हैं. हम गांव के देहाती से भी हम कमजोर हैं.

          सभापति महोदय – उमाकांत जी, आप हिन्‍दी में ही बोलें. गंभीरता से बोलें. संक्षिप्‍त करके समापन करें.

          श्री उमाकांत शर्मा – सभापति महोदय, माननीय सिंचाई मंत्री जी आज दिखाई नहीं दिये. मेरा निवेदन है कि हमारे यहां की टेम नदी जिससे वहां पर जो बांध बन रहा है, वह वन विभाग और सिंचाई विभाग की लड़ाई के कारण वहां पर काम बन्‍द है, उससे 210 गांव को पेयजल मिलेगा, तो टेम नदी से मिलेगा, इसलिए हमारे यहां व्‍यवस्‍था पूरी बिगड़ जायेगी. वर्ष 2028 तक हमारे यहां वह पूर्ण नहीं हुआ, तो लोगों को पानी नहीं मिल सकेगा.

          सभापति महोदय – उमाकांत जी, मेरा आग्रह स्‍वीकार कीजिये और समाप्‍त करें.

          श्री उमाकांत शर्मा – सभापति महोदय, मेरा निवेदन है कि हमारे यहां टेम नदी का डेम, जालपुर का डेम एवं सिंध नदी का डेम, अभी-अभी समधी डबरा की बात कर रहे थे. आपके यहां जो नदी का पानी जाता है, वह गोपीतलाई लगाकर निकलता है, माननीय प्रहलाद जी. वहां पर दौरा करके आयें, हमारे लिये सिंध बैराज की मांग मैं करता हूँ. सिंध में गोपीतलाई से सिरोंज लटेरी की सीमा तक बैराज बनाकर, हमारे अन्‍नदाता को प्रसन्‍न करने की कृपा करें. नवीन कन्‍या महाविद्यालय सिरोंज में प्रारंभ करने की कृपा करें और गुना से लेकर सिरोंज और सिरोंज से लेकर बैरसिया होते हुए भोपाल दोनों राजमार्गों को जोड़कर सिरोंज को उपकृत करने की कृपा करें. सरकार ने बहुत दिया है, हमारी चकाचक रोड हैं. कुछ लोग असत्‍य बोलते हैं और जो कांटे लगाने की बात कर रहे थे गांव में, मैंने आज तक नहीं देखी कि कांटों की खेती कैसी होती है ? मेरा निवेदन है, हम तो विकास के फूल उगाते रहेंगे, आप कांटे बिछाओ, हम उनको भी नष्‍ट करते रहेंगे, हमारी भारतीय जनता पार्टी की मध्‍यप्रदेश की सरकार और केन्‍द्र की मोदी जी की सरकार ने विकसित भारत का संकल्‍प लिया है. विकसित सिरोंज लटेरी, विकसित मध्‍यप्रदेश, विकसित भारत देश, विश्‍व गुरु भारत माता, यही कहते हुए मध्‍यप्रदेश सरकार ने जितने अच्‍छे काम किए हैं, उतने काम कभी नहीं हुए. सबके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद. मेरी बातें अधूरी रह गई हैं. 

          सभापति महोदय-  नहीं नहीं. कल फिर मौका आयेगा, धन्‍यवाद. अभी दोनों ओर से 2-2 शेष हैं. समय की मर्यादा है इसलिए नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार जी.

          श्री दिलीप सिंह परिहारसभापति महोदय, मेरा निवेदन है कि हमारे यहां हरबार महादेव का स्‍थान है उसकी सड़क केवल 800 मीटर से बाकी है. उसे कैंपावन से मंत्री जी बनवा दें. प्रदेश में और मेरे जिले में बहुत अच्‍छी सड़कें बनी हैं, उसके लिए धन्‍यवाद. 

          सभापति महोदय-  आप मंत्री जी से मिल लीजियेगा.      

          श्री उमाकांत शर्मासभापति महोदय, किसानों के खेतों में आग लग जाती है लेकिन उसे मुआवज़ा नहीं मिल पाता है.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीकसभापति महोदय, अभी और नाम शेष हैं. लोग बैठे हुए हैं.

          सभापति महोदय-  दोनों ओर से 2-2 नाम शेष हैं. आप देख सकते हैं.

          श्री उमंग सिंघारसभापति महोदय, मेरा अनुरोध है कि केवल 2-2 मिनट दे दीजिये.

          सभापति महोदय-  ठीक है. लेकिन संक्षिप्‍त में अपनी बात रखें.

          श्रीमती सेना महेश पटेल (जोबट)-  सभापति महोदय, मैं, प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्‍तुत सात हजार चार सौ पचपन करोड़, छिहत्‍तर लाख, पचपन हजार, चौवन रुपये के प्रथम अनुपूरक बजट का विरोध करती हूं और कहना चाहती हूं कि यह बजट प्रदेश की जनता, किसान, युवा, आदिवासियों की वास्‍तविक आवश्‍यकताओं को पूरा करने में विफल रही है. सरकार अतिरिक्‍त बजट लेकर आई लेकिन प्रदेश के आदिवासी अंचलों में सड़क, बिजली, पानी, सिंचाई, स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का आज भी अभाव है. मेरी विधान सभा जोबट और जिला अलीराजपुर की वर्षों पुरानी मांग इस बजट में भी उपेक्षित की गई है.

          सभापति महोदय, मैं, अपने यहां की सड़कों की मांग रखती हूं. मैंने ये मांग पिछली बार भी रखी थी लेकिन एक भी सड़क अभी तक नहीं आई है. अब दूसरी बार मांग रख रही हूं, यदि इस बार भी सड़क नहीं आई तो आगे क्‍या बोल सकते हैं. मेरे यहां की सड़कें निम्‍नानुसार हैं :-

1. रोड निर्माण सूखा आम्‍बा फलिया से मेन रोड तक कालुवाट उदयगढ.

2. रोड निर्माण उलबड़ हिरापुर से व्‍याहा होली फलिया होकर पटेल फलिया तक उलबड़, जोबट.

3. रोड निर्माण खारी मेन रोड से सिंधी मेन रोड तक खारी जोबट.

4. रोड निर्माण करेलीमउड़ी से ग्राम छोटी खट्टाल तक.

5. रोड निर्माण ग्राम खामडका से ग्राम केवड़ी तक

6. रोड निर्माण ग्राम बड़ी जुवारी से ग्राम उबगारी तक

7. रोड निर्माण बलदमुंग होते हुए हिरण से बड़ी मिरियावट बड़ी फलिया तक बलदमुंग, जोबट.

8. रोड निर्माण कनवाड़ा सेवरिया सीमा से जमेरी बलेड़ी सीमा तक

9. रोड निर्माण ग्राम उम्‍दा भानपुर से नदी फलिया होते हुए पंचायत तक

10. रोड निर्माण मेन रोड साजनपुर से पटेल फलिया पुजारा फलिया सापलिया फलिया पाजरिया फलिया एवं खाड़ा फलिया तक

11. ग्राम बड़ागुड़ा में गिट्टी खदान से कनासिया फलिया रिंजी फलिया भारी सेमल फलिया होते हुए रायणी फलिया एवं बाड़ी सेमल फलिया तक सड़क निर्माण

12. ग्राम उम्‍दा मेन रोड से कुंडालिया फलिया तक सड़क निर्माण

13. पलासदा मेन रोड से घटवानी मार्ग का निर्माण

14. रामसिंह की चौकी से जिला पंचायत अलीराजपुर होकर ग्राम बड़ा उण्‍डवा तक सड़क निर्माण

15. ग्राम लिलउमरी आश्रम से पोची आमली होते हुए मेन रोड चंद्रशेखर आजाद नगर तक सड़क निर्माण

          सभापति महोदय, इसके अतिरिक्‍त एक महत्‍वपूर्ण विषय है, माननीय नितिन गडकरी जी ने लाल परेड मैदान, भोपाल से शिलान्‍यास किया था, 2 NH की सड़क है, आम्‍बुआ से सेजावाड़ा तक. पता नहीं उसकी कहां ऐसी प्रक्रिया अटक गई है, टेण्‍डर भी हो गया है, ऐसा बोल रहे हैं लेकिन आज दिनांक तक कार्य चालू नहीं हुआ है. मेरी मांग है कि आम्‍बुआ से सेजावाड़ा तक जितना जल्‍दी हो सके सड़क बन जाये क्‍योंकि वहां कई दुर्घटनायें हुई हैं और कई लोगों की मृत्‍यु हो गई है, इसे शब्‍दों मे बयान नहीं कर सकते. इसी प्रकार मेरे क्षेत्र में अलीराजपुर नगरपालिका वाटर प्‍लांट में जाने हेतु मुख्‍य मार्ग पर नाले के ऊपर पुल का निर्माण कराया जाए. साथ ही अलीराजपुर नगर पालिका का स्‍वयं का भवन नहीं है अत: नगरपालिका भवन निर्माण हेतु राशि स्‍वीकृत की जाए.

चन्द्रशेखर आचाद नगर के भुराघाट में तालाब निर्माण कराया जाए. क्योंकि नगरीय क्षेत्र में होने के बावजूद आज भी वहां पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता है. जोबट विधान सभा क्षेत्र में गंभीर विद्युत समस्या को देखते हुए आरडीएसएस योजना जैसी विशेष योजना लागू कर किसानों को सिंचाई हेतु पर्याप्त एवं नियमित बिजली उपलब्ध कराई जाए. भोरकुंडिया से खंडाला गमीर होतु हुए खंडाला राव से पिपलिया तक सिंचाई नहर पूर्णत: क्षतिग्रस्त हो चुकी है. इसके पुनर्निर्माण हेतु राशि स्वीकृत की जाए.

          सभापति महोदय, हर जिले में मेडिकल कॉलेज मिल रहा है और माननीय मुख्यमंत्री जी का आश्वासन है कि हर जिले को मेडिकल कॉलेज मिलेगा. मैं मेडिकल कॉलेज की मांग करती हूँ कि अलीराजपुर जिले में भी मेडिकल कॉलेज दिया जाए. मेरी मांगे पूरी नहीं हुई हैं. अब यह मांगे पूरी हो जाएं नहीं तो मैं अगली बार धरने पर बैठ जाउंगी. धन्यवाद.

          श्री मोहन शर्मा (अनुपस्थित)

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकी (भीकनगांव) माननीय सभापति महोदय, मेरा आपसे निवेदन है कि हम सारे पक्ष और विपक्ष के विधायक के जो बोल रहे हैं. क्या इन सारी समस्याओं को नोट किया जा रहा है.

          सभापति महोदय माननीय मंत्री जी लिख रहे हैं.

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकी पहले जब विभागों पर चर्चा होती थी उस समय मुख्य बजट हो या अनुपूरक बजट हो अलग-अलग मांगों पर चर्चा होती थी. विस्तृत रुप से हर विधायक अपनी बात रखता था और सभी विभागों के माननीय मंत्रीगण और सारे अधिकारीगण उपस्थित होते थे और उनका निदान भी होता था. यहां एक साथ आप सारी मांगों पर बोलने के लिए कह रहे हैं. यह क्या है, ऐसा लग रहा है जैसे खिचड़ी बना रहे हैं. टालने का प्रयास है एक तरह से.

          माननीय सभापति महोदय, 7 हजार 455 करोड़ 76 लाख, 55 हजार, 54 रुपए का अनुपूरक बजट माननीय वित्त मंत्री जी द्वारा पेश किया गया है. मैं उन लोगों से शुरुआत करुंगी जिनको पिछले 5-6 महीने से पेंशन नहीं मिली है. वृद्धावस्था पेंशन, सामाजिक पेंशन, विधवा पेंशन, विकलांग पेंशन यह सबसे ज्यादा तकलीफ वाले लोग हैं. इनकी पेंशन रोकी गई है. एक साथ इनकी पेंशन जारी करें इन व्यक्तियों की मदद करना जरुरी है.

          सभापति महोदय, मेरा क्षेत्र दूरस्थ एरिया है वहां पर पिछड़ापन ज्यादा है और कई बिल्डिंगे आज भी नहीं हैं. 100 से ज्यादा बिल्डिंगों की आवश्यकता है. पूरी न दें तो कम से कम आधी दे दें. आधी मेन बजट में भी करेंगे तो बहुत मेहरबानी होगी. महिला बाल विकास विभाग की ओर से भी आंगनवाड़ी भवन नहीं है. बच्चे पढ़ना चाहते हैं, बालिकाएं पढ़ना चाहती हैं. बच्चों का आंगनवाड़ी केन्द्रों में बेस बनता है. घुम्मकड़ जाति की बड़ी संख्या मेरे क्षेत्र में निवासरत् है. बालकों के लिए तो होस्टल है परन्तु बालिकाओं के लिए नहीं है बालिकाओं के लिए भी यह व्यवस्था मुख्यालय पर हो जाएगी तो जरुर वे बच्चे पढ़ेंगे. नर्मदा घाटी विकास विभाग से मेरे क्षेत्र में दो माइक्रो सिंचाई योजनाएँ चल रही हैं. भीकनगांव उद्वहन सिंचाई योजना और दूसरी झिरिन्या में उसमें 32 गांव छूटे हुए हैं. इनको भी झिरिन्या सिंचाई उद्वहन योजना में जोड़ दिया जाए तो शायद पूरा क्षेत्र सिंचित हो जाएगा. यह क्षेत्र ऐसा है जहां पर सिंचाई के अभाव में 90 प्रतिशत लोग रोजगार के लिए अन्य राज्यों में चले जाते हैं. इस बड़ी समस्या का भी इससे समाधान होगा. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में प्रति एकड़ 1400 रुपए इस साल निर्धारित किया है. यह राशि अधिक है इसे कम किया जाए. बीमा तो किसान करवाना चाह रहा है. किन्तु राशि अधिक होने की वजह से नहीं करवा पा रहा है. फिर अवर्षा, अधिक वर्षा या सूखे की स्थिति बनेगी तो उसे बीमे का लाभ नहीं मिलेगा. इस समस्या का समाधान एक ही है कि उसको कम किया जाए. बच्‍चों की छात्रवृत्ति का यह भी एक बड़ा विषय है. एससी, एसटी, ओबीसी और अन्‍य गरीब विद्यार्थियों को, स्‍कूली और कॉलेज की छात्रवृत्ति जो हर महीने, ज्‍यादा से ज्‍यादा दो महीने में भी दे दें तो उन पर बहुत मेहरबानी होगी, क्‍योंकि साल-डेढ़ साल में कई बार तो अगले वर्ष दी जा रही है. यह छात्रवृत्ति के अभाव में कई विद्यार्थी स्‍कूल नहीं जा पा रहे हैं, तो इस व्‍यवस्‍था को भी सुचारू रूप से करने की आवश्‍यकता है. लोक निर्माण विभाग, चूंकि माननीय मंत्री जी को भी मैंने अवगत कराया था कि मेरे छोटे-छोटे चार रोड हैं जो शामिल कर लेंगे, तो उन्‍होंने मुझे आश्‍वस्‍त किया है कि मेन बजट में करेंगे. फिर भी मैं नाम पढ़ देती हूं. ग्राम कोदला से कोदलाबेड़ी एक किलोमीटर, ग्राम बलका से ग्राम पोखराबाद, पिछोडि़या से खंडवा जिले की सीमा तक, सोनखेड़ी से रेटफल तक और रामपुरा से नौजाखेड़ी यह 5 रोड हैं जो एक-एक, दो-दो किलोमीटर की कम दूरी के हैं, यदि हो जाएंगे तो आमजन को आने-जाने की सुविधा मिलेगी और उनको बड़ी राहत मिलेगी. बहुत ज्‍यादा बजट नहीं मांगा. काफी भेदभाव हमारे साथ हो रहा है. यह समानता का भाव जो इनके नारे में है वह सदन में भी पेश हो, ऐसा मैं कामना करती हूं सरकार में बैठे सभी विद्वान माननीयों से कि सरकार सबके साथ समान व्‍यवहार करे, तो शायद ज्‍यादा जय जयकार होगी, नहीं तो ऊपर वाला ईश्‍वर देख रहा है कि जो अयोध्‍या में हुआ वह ईश्‍वर फिर सब कुछ करेगा. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- सभापति महोदय, मुझे बोलने का मौका देंगे तो मैं थोड़ा सा बोलूंगा.

          सभापति महोदय -- ईमानदारी वाला बिल्‍कुल एकदम एक मिनट में कर दें.

          श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को (पुष्‍पराजगढ़) -- सभापति महोदय, मैं सदन का ध्‍यान आकृष्‍ट कराना चाहूंगा कि मेरे क्षेत्र में इंदिरा गांधी राष्‍ट्रीय जनजातीय विश्‍वविद्यालय वर्ष 2008 से संचालित है. वहां अंग्रेजी माध्‍यम से अध्‍ययन, अध्‍यापन कराया जाता है. वर्तमान में मध्‍यप्रदेश सरकार का कोई डायरेक्‍ट हस्‍तक्षेप नहीं है और जब वहां पर कोई समस्‍या उत्‍पन्‍न होती है तो हमारे जिला प्रशासन और सरकार की ओर बात करते हैं. अभी कई घटनाएं उस विश्‍वविद्यालय में घटी हैं जो सदन में बताने लायक नहीं हैं. कोई विधायक वहां का मेंबर नहीं है और न ही सांसद मेंबर है. हमारे मध्‍यप्रदेश के कोई भी मेंबर नहीं हैं. वहां एक ट्राइबल मॉडल स्‍कूल संचालित था 6 वीं से 8 वीं तक, उसकी मान्‍यता जो सरलता से मिल जाती थी, वह बच्‍चे पढ़ लिए. अंग्रेजी माध्‍यम से ही पढ़ते थे, इसके बाद सीबीएसई की मान्‍यता उनको लेनी चाहिए और वह मान्‍यता वहां के कुलपति को लेना चाहिए. उनके आदेशानुसार वह संचालित था कि हमारे आदिवासी बच्‍चे अंग्रेजी माध्‍यम से पढ़कर और वही बच्‍चे जाकर 12 वीं तक पढ़ें और पढ़ने के बाद उस विश्‍वविद्यालय में विद्याध्‍ययन करें.

7.59 बजे             {अध्‍यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए}

          अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन उनकी हठधर्मी के कारण पूरा उनका भवन बना हुआ है, उनकी सारी व्‍यवस्‍था है, 12 वीं तक की कक्षाएं, वहां सारी सुविधाएं हैं, 500 छात्रों की व्‍यवस्‍था है लेकिन वहां की जो व्‍यवस्‍था है, सीबीएसई की मान्‍यता न लेने के कारण हमारे बच्‍चे आज आंदोलित हैं. उनके अभिभावक आंदोलित हैं. मैं मध्‍यप्रदेश सरकार से और माननीय मंत्रीगण से चाहूंगा कि कोई ऐसा रास्‍ता निकालें कि उन बच्‍चों का कक्षा 9 वीं में एडमीशन हो जाए और ट्राइबल स्‍कूल जो कक्षा 6 से 8 तक चलता था वह अनवरत् 9 वीं, 10 वीं, 12 वीं तक चलता रहे, यही मेरा निवेदन है. धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय -- बहुत बढि़या. बहुत धन्‍यवाद आपको समय का ख्‍याल रखने के लिए.

          श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- अध्‍यक्ष महोदय, आप बैठ गए तो हम वैसे ही जल्‍दी बैठ जाते हैं.  

          अध्‍यक्ष महोदय -- धन्‍यवाद. धन्‍यवाद ..(हंसी)..

          श्री माधवसिंह (मधु गहलोत) (आगर) -- अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे इस प्रथम अनुपूरक बजट पर बोलने का अवसर दिया मैं उसके लिए आपका आभारी हूं. माननीय डॉ. मोहन यादव जी और माननीय वित्‍त मंत्री देवड़ा जी द्वारा जो प्रथम अनुपूरक पेश किया गया है उसके लिये बहुत धन्यवाद. समय की कमी है इसलिये क्षेत्र की बात तक सीमित रहूंगा. माननीय अध्यक्ष महोदय, 159 करोड़ 21 लाख रूपये की हमारी आऊ नदी डेम की परियोजना के लिये काम चल रहा है लेकिन वहां पर 200 किसान हैं, 60 किसानों की रजिष्ट्री हो चुकी है जो 2 गुना मुआवजे के माध्यम से हो गई है और अब  सरकार ने किसानों के लिये एक अच्छा कदम उठाया है , किसानों को चार गुना मुआवजा देने का जो उन्होंने प्रावधान किया  है, तो चार गुना मुआवजे के चक्कर में वह 60 किसान  वहां पर अभी काम करने नहीं दे रहे हैं तो मेरा आग्रह है कि उन 60 किसानों को चार गुना मुआवजा की सूची में जोड़ने का काम करें.ताकि आने वाले समय में यह 159 करोड़ की योजना खेतों तक पानी और पाईप लग चुके है, डेम का निर्माण हो चुका है बस थोड़ी सी एक पाल की व्यवस्था करना है तो लगभग 25 से 30 गांव में पानी पहुंचाने का काम चालू हो जायेगा.  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में लगभग 200 गांव सूखे हैं उन्हें चंबल-कालीसिंघ नदी से जोड़ने का काम करें ताकि आने वाले समय में हमारे किसान वहां पर संपन्न हो सकें.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन को बताना चाहता हूं कि मेरे क्षेत्र के अंतर्गत मात्र एक सांदीपनी स्कूल है, एक ओर अभी आपने बड़ोद के अंदर देने की कृपा की है. पर मेरे विधानसभा में 4 से 5  ऐसे बड़े बड़े क्षेत्र हैं जैसे गंगापुर, बीजा नगरी, मदकोटा ,कानड, तनोडिया ऐसे कई स्कूल हैं जहां से 25-25 गांव लगते हैं वहां के बच्चे सांदीपनी स्कूल में जाने के लिये बेताव है. अभी हमारे यहां एक ही सांदीपनी स्कूल है वहां पर हर व्यक्ति आता है कि आप हमें एडमीशन दिलाओ लेकिन वहां स्कूल में 2 से ढाई हजार बच्चों की ही व्यवस्था हो पाती है .

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से माननीय वित्त मंत्री जी से अनुरोध है शिक्षा के क्षेत्र में स्वास्थ्य के क्षेत्र में आपने बहुत अच्छा काम किया है . अभी आपने उप स्वास्थ्य केन्द्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में बदलने का काम किया है उसके लिये मैं आपको धन्यवाद देता हूं. मेरे यहां पर मदकोटा से बड़ोद तक 20 किलोमीटर तक रोड देने का काम किया है और उसके लिये टेंडर लग चुका है उसके लिये भी मैं सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं, किंतु अभी आने वाले समय में सिंहस्थ आने वाला है 2028 में तो सुसनेर से बड़ोद तक टू-लेन करने की कृपा करें ताकि वहां पर जो करोड़ों लोग सिंहस्थ में आयेंगे उनको सुविधा प्राप्त हो सके, मेरा क्षेत्र लगभग 65 किलोमीटर की दूरी पर ही है. हमारे पास में गंगापुर से लेकर के आगर तक के मार्ग को टू-लेन करने की कृपा करें. मजरा टोला अभी हमारे साथ में विधानसभा के जोड़ दिये गये हैं परंतु उसका बहुत जल्दी आप टेंडर लगा दें क्योंकि हमारी सरकार को आये हुये ढाई वर्ष हो चुके हैं और रोड बनने की संभावनायें कम दिख रही हैं, बरसात के बाद इस पर भी कार्य करें ताकि आने वाले समय में हम गांव में जायें तो लोगों को लगे कि हां काम हुये हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि डॉ.मोहन यादव जी की सरकार ने प्रत्येक गांव में लगभग 450 गांव में 50X100 के टीनशेड लगाकर के कीर्तिमान रचने का काम किया है. मेरी विधानसभा एक आदर्श विधानसभा बन चुकी है. वहां पर हमने शिक्षा के क्षेत्र में काम किया है, स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम किया है, हर क्षेत्र में काम किया है और डॉ.मोहन यादव जी हमारे क्षेत्र के अंदर कहीं न कहीं से कई प्रकार की मेहरबानियां करते ही रहते हैं.

माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि  हमें भी एक मेडिकल कालेज की आवश्यकता है क्योंकि इंदौर लगभग हमारे यहां से 121 किलोमीटर की दूरी पर है, उज्जैन 65 किलोमीटर की दूरी पर है आसपास मेडिकल कालेज कहीं पर भी नहीं है और बच्चों को बहुत ज्यादा परेशानी आती है क्योंकि आगर से इंदौर जाकर के पढ़ाई करने में 30 से 35 हजार रूपये खाने और रहने में खर्चा होता है. इसलिये वह पढ़ाई  नहीं कर पाते हैं और पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है. मैं सरकार को धन्यवाद देता हूं रोजगार के लिये मेकैन फूड्स (McCain Foods) कंपनी वहां स्थापित करके इतिहास रचने का काम किया है जिससे 2 से ढाई हजार लोगों को काम मिलने की संभावना है, जीरकॉन इथेनॉल प्लांट लगा है उसके दो प्लांट आ गये हैं उसमें हजार लोगों को काम मिलना चालू हो गया है और 2 लाख लीटर इथेनाल बनकर के हर दिन हम इंडिन आइल और अन्य कंपनियों को देने का काम कर रहे हैं. माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे यहां एमएसएमई के माध्यम से 300 लघु उद्योग आ चुके हैं जिसमें 150 लघु उद्योग आवंटित हो चुके हैं और वहां पर भी उद्योगपति आकर के छोटे छोटे उद्योग लगाकर के वहां पर रोजगार देने का काम कर रहे हैं.

सरकार को मैं धन्यवाद देता हूं, हर क्षेत्र में काम कर रहे हैं परन्तु मेरे किसानों को भी एक बार पानी देने का काम कर लें ताकि 200 गांवों में अगर हम पानी पहुंचाने का काम करेंगे तो किसान संपन्न हो जाएगा. मेरे यहां पर राजस्थान से लगी हुई सीमा है, इसलिए वहां पर हम लोग नदियां नहीं हैं तो तालाब के माध्यम से और चंबल कालीसिंध के माध्यम से पानी लाने का काम करेंगे तभी हम लोग सफल हो पाएंगे. मेरे आपसे यही निवेदन है. अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया है, बहुत बहुत धन्यवाद.

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद, आपने बोलने का मौका दिया है. प्रथम अनुपूरक अनुमान वर्ष 2026-27, 5 महीने पहले इस शून्य आधारित बजट और ज्ञानी का ढोंग का जवाब, सरकार ने फरवरी, 2026 में दावा किया था कि 4 लाख 38 हजार करोड़ रुपये का बजट प्रदेश की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. केवल 5 महीने में क्या आवश्यकता पड़ी कि लगभग 7675 करोड़ रुपये की आपको आवश्यकता पड़ गई. अतिरिक्त मांग, एक तरफ सरकार के द्वारा ज्ञानी, गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी, उद्योग, इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भव्य प्रदर्शन किया गया और फिर आप मांगने लग गये. इससे स्पष्ट है कि आपकी योजनाएं और क्रियान्वयन में और कहीं न कहीं कमी है, मॉनिटरिंग में कमी है. पैसा सरकार कहां खर्च कर रही है पूरे प्रदेश को पता है, लेकिन विधायकों के लिए माननीय मुख्यमंत्री के पास पैसा नहीं है कि विकास निधि के अंदर 5-5 करोड़ दे. आज तक नहीं दे पाए. आपकी मुस्कराहट बहुत अच्छी है लेकिन विधायकों को कब मिलेंगे, यह बता दो. साथी विधायक चाहे आपके पक्ष के हों, चाहे हमारे पक्ष के हों, हम हमारे लिए पैसा नहीं मांग रहे हैं, क्षेत्र के विकास के लिए मांग रहे हैं जो 2 करोड़ रुपये कम पड़ते हैं, लेकिन मुझे विश्वास है कि आप आश्वासन नहीं देंगे, इस बार कहेंगे कि इस तारीख से इस महीने से मिलने लग जाएगा. अगर आप नहीं बोलेंगे तो कोई बात ही नहीं. आप भाषण 20-20 की बजाय टेस्ट मैच का देते हो तो हम टेस्ट मैच के आदी हो गये हैं. हमको पूरा मैच देखने की आदत पड़ गई है.

अध्यक्ष महोदय तालियां थोड़ी कम हैं. (मेजों की थपथपाहट)

श्री उमंग सिंघार अध्यक्ष महोदय, कहीं न कहीं सरकार खर्च का पूर्वानुमान नहीं लगा पा रही है, वित्त विभाग नहीं लगा रहा है. सरकार रिएक्टिव है, प्रोएक्टिव नहीं है.  अध्यक्ष महोदय, दिल्ली में चार्टर्ड एकाउंटेंट मेरा एक मित्र है. मैंने उसको फोन लगाया पूछा कि बजट की सबसे परीक्षा क्या होती है. चार्टर्ड एकाउंटेंट ने कहा कि इस बजट का सबसे बड़ा पैमाना होता है एक्यूरेसी, तो मैं समझता हूं कि बजट की एक्यूरेसी गायब है. जब ही आपको यह अनुपूरक बजट लाना पड़ रहा है तो वित्त विभाग का इतना कुप्रबंधन क्यों है? क्या अधिकारियों मानिटरिंग नहीं है, क्या सरकार के कैबिनेट मिनिस्टर्स की मानिटरिंग नहीं है. मैं समझता हूं कि निश्चित तौर से जिन विभागों में पैसा जा रहा है, प्राथमिक बजट था नर्मदा घाटी विकास विभाग का 7499 करोड़ रुपये, जबकि उसको 3000 करोड़ रुपये दिये जा रहे हैं. मलाई वाला विभाग है. यही कह सकते हैं.

नागरिक आपूर्ति विभाग के लिए मूल बजट 2 हजार 220 करोड़ था. किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के लिए 31 हजार 758 करोड़ था, लेकिन अनुपूरक बजट में 352 करोड़ रूपए की मांग की गई है. मैं समझता हूँ कि यह नयी योजनाओं के लिए नहीं है और जो योजनाएं चल रही हैं उसकी कोई प्री-प्लॉनिंग नहीं है कि कितना खर्च होने वाला है. सरकार के पास इसकी कोई प्लॉनिंग नहीं है. करोड़ों का ऋण लिया जा रहा है. 17 हजार करोड़ का नया ऋण लिया जा चुका है. मतलब मध्यप्रदेश में पिछले 10 साल के अंदर 300 प्रतिशत अधिक ऋण लिया गया. खर्च का बोझ बढ़ता जा रहा है, लेकिन आय कैसे होगी. जीएसटी में बॉर्डरों पर जितनी गाड़ियां हैं, वह फर्जी एयर बिल के नाम पर निकल रही है. सेंधवा से लेकर, गुजरात से लेकर तमाम पैसा कहां जा रहा है. अगर जीएसटी की ईमानदारी से मध्यप्रदेश में गाड़ियां आ रही हैं, अगर उनकी इंट्री हो, तो आपकी आय बढ़ सकती है. दो नंबर का जो 200-300 करोड़ रूपए का भ्रष्टाचार हो रहा है, वह कहां जा रहा है. कहीं न कहीं तो जा रहा है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, शिक्षा को लेकर आपने इसे युवाओं का वर्ष कहा कि हम इस बार युवा वर्ष मनाएंगे. जबकि वर्ष 2026-27 का बजट आपने 4 हजार 246 करोड़ रूपए का रखा. मतलब कुल बजट का 0.96 परसेंट सिर्फ युवाओं के लिए रखा. जब पैसा ही नहीं है, तो कैसा युवा वर्ष, कैसा कैलेण्डर है आपका. आप सिर्फ युवाओं को सपने दिखा रहे हैं. क्या युवाओं को सिर्फ लाठियां मिलेंगी ? नौकरियों के लिए फर्जी परीक्षाएं हो रही हैं, पेपर लीक हो रहे हैं. मध्यप्रदेश में कई परीक्षाएं हो गईं, कभी परिणाम समय पर नहीं आते. मैं समझता हूँ कि अभी अनुपूरक बजट में जो प्रावधान रखा गया, तो सिर्फ 50 करोड़ रूपए का प्रावधान रखा गया. मतलब 0.6 परसेंट है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, सबसे बड़ी नर्मदा नदी की कुल 41 परियोजनाएं हैं. सूची लंबी है. मैं समझता हूँ कि मध्यप्रदेश के अंदर सदन को मालूम होना चाहिए कि क्यों इतने सालों से यह परियोजनाएं पेंडिंग चल रही हैं. अगर यह परियोजनाएं बनतीं, मध्यप्रदेश की सहायक नदियों पर बनतीं, तो मध्यप्रदेश का पानी गुजरात नहीं जाता. मध्यप्रदेश को पानी मिलता, मध्यप्रदेश के किसानों को मिलता. इसके पीछे गुजरात से साजिश हुई कि मध्यप्रदेश में पानी नहीं रूके, वह गुजरात जाये. इस कारण गुजरात की कंपनियों ने सहायक नदियों पर नहीं बनाया. आज भी परियोजनाएं चल रही हैं. एस्केलेशन पर एस्केलेशन चल रहा है. मध्यप्रदेश सबसे ज्यादा डूबा. मध्यप्रदेश में पानी का अधिकार, बिजली का अधिकार. साढे़ सात हजार करोड़ का हमने क्लेम किया था और उलटा साढे़ पांच सौ करोड़ गुजरात को देने चले गये. (शेम-शेम की आवाज)

माननीय अध्यक्ष महोदय, जब वर्ष 1979 में इस पर डेम बनाने का प्रस्ताव रखा गया था, तब 90 मीटर था. गुजरात ने कहा कि 136 मीटर प्वाइंट 68 इसको किया जाए. मतलब 138 मीटर किया जाए. ठीक है, लागत बढ़ी. गुजरात में कच्छ तक पानी चला गया. लेकिन ऊंचाई बढ़ने से मध्यप्रदेश के गांव ज्यादा डूबे. आज भी नर्मदा नदी के किनारे के लोगों को, चाहे वह बड़वानी के हों, चाहे धार जिले के हों, चाहे खंडवा जिले के हों, जहां से नर्मदा नदी निकली है, आज भी वहां पर लोग प्रभावित हैं. आपने सेटिलमेंट कर दिया (XX) के पास दिल्ली में आपको इतनी जल्दी क्या थी आपको मध्यप्रदेश के किसानों के हित नहीं देखने थे ? मध्यप्रदेश को पानी मिले, मध्यप्रदेश को बिजली मिले इसकी बात आपको नहीं करनी थी. मध्यप्रदेश को साढ़ सात हजार करोड़ रूपये मिले वह बात नहीं करनी थी ? सब चीज (XX) रख आये आप साढ़े पांच सौ करोड़ रूपये देने की बात कर रहे हैं. आज मध्यप्रदेश के अंदर बिजली संकट है तो शायद जितनी भी परियोजनाएं बंद पड़ी हैं इसका बहुत बड़ा कारण है. अगर यह डेम मध्यप्रदेश में बनते तो मध्यप्रदेश में पानी ज्यादा रूकता तो हम बिजली मध्यप्रदेश में ज्यादा बनाते.आज किसान को बिजली नहीं मिल रही है, चार घंटे पांच घंटे मिल रही है उनको नहीं मिल रही है 12 घंटे और 24 घंटे बिजली. पूरे प्रदेश के अंदर किसान परेशान हैं, यह सचाई है. मैं समझता हूं कि इस पर सरकार गंभीरता के साथ विचार करेगी. अगर हमें (XX) रखना था तो अलग बात है. अभी मैं सुन रहा था माधवसिंह जी गेहलोत की बात कि सिंहस्थ में यह होना चाहिये टू लेन होना चाहिए, फोर लेन होना चाहिये. मैं साथी विधायक जी को कहना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री जी पूरे उज्जैन का ध्यान रख रहे हैं सब सड़कें बना रहे सब ओव्हर ब्रिज बना रहे हैं. बड़ी बड़ी कॉलोनियां कट रही हैं, सब हो रहा है. अब माधव जी आप मुख्यमंत्री जी से मिलना जो आपको चाहिये, वह मिल जायेगा. मुलायम भईया हमारे तेन्दूखेड़ा के कह रहे थे किसान संघ जो भारतीय जनता पार्टी का (XX) सिवनी मालवा में कलेक्टर के सामने मांग रहा था कि इन मूंग के किसानों का मूंग का एक एक दाना खरीदा जाये, नहीं खरीदा साढ़े 17 लाख टन लगभग मूंग का उत्पादन हुआ. सरकार सिर्फ 7 से 6 लाख टन खरीद रही है क्यों ? दो हजार रूपये क्विंटल का नुकसान मूंग के किसानों का हो रहा है, यही हालत गेहूं के अंदर रही बड़ी बड़ी लाईने लगी रहीं बार बार तारीख पर तारीख बदलती रही, लेकिन गेहूं की खरीदी भी समय पर नहीं हो पायी. सिलाट बुकिंग बंद कर दिया.

(xx)  आदेशानुसार विलोपित

यही स्थिति खाद की, ई टोकन सिस्टम आ गया उसको आपने पहले वेरीफाई किया नहीं किसान को सिर्फ टोकन दे रहे हो. किसान को खाद चाहिये, बोरी चाहिये वह नहीं मिल रही है. टोकन आ रहा है, ओटीपी आ रही है. रात को 12 बजे किसान परेशान हो रहे हैं. सर्वर बंद. यू.डायस की रिपोर्ट है उसमें हिन्दुस्तान में 13 स्कूल रोज बंद होते हैं उसमें मध्यप्रदेश में 50 परसेंट सबसे 2426 स्कूल बंद हो रहे हैं क्यों ? यह सरकार की रिपोर्ट है, क्यों बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं ? क्या स्कूल बंद किया जा रहे हैं या नयी बिल्डिंग बनाकर के बड़े ठेकेदारों को गुजरात के ठेकेदारों के लिये नये स्कूल बनाये जा रहे हैं ताकि दूसरे छोटे स्कूल तोड़ दिये जायें. गांव का बच्चा कहां जायेगा 5 से 10 किलोमीटर जो पहले स्कूल था गांव के अंदर आज उसको 10 से 20 किलोमीटर जाना पड़ेगा तो वह कैसे जायेगा ? इस बारे में सरकार ने सोचा, नहीं सोचा. नगरीय निकाय संचालनालय में तो बड़ा अजब-गजब चल रहा है यहां पर अफसर 1 हजार हैं लगभग, उस पर 11 सौ सलाहकार हैं. अफसरों से ज्यादा सलाहकार सरकार का प्रबंधन समझ में आता है कि किस प्रकार से पैस खर्च हो रहा है ? जितने सलाहकारों पर 8 करोड़ रूपये रोज के खर्च हो रहे हैं, यह आपको कुप्रबंधन नहीं दिखता ? वृद्धा पेंशन नहीं मिल रही है, गरीब माताएं 50- 60-70 साल की बिचारी हाथ जोड़ रही है हम लोग क्षेत्र में जाते हैं तो वह हाथ पैर जोड़ने लगती हैं. हमें दुःख होता है कि एक वृद्ध महिला पांच सौ रूपये के लिये संघर्ष कर रही है.

          उसको तीन-चार महीने के अंदर पैसे क्‍यों, आप बड़ी बिल्डिंगें बना रहे हो, सब कुछ बड़ा कर रहे हो. लेकिन एक वृद्ध महिला की पेंशन का क्‍या हो रहा इसमें आप सोचना नहीं चाहते हो. अभी स्‍कूलों में तो हाईकोर्ट ने भी नोटिस दिया है, उसका जवाब सरकार को देना है. माननीय संसदीय कार्यमंत्री जी ने एक साल पहले जल जीवन मिशन को लेकर आश्‍वासन दिया था कि हम जांच करवाएंगे, जब विपक्ष ने इस बात को उठाई कि हर जिले के अंदर जांच करवाएं. एक गर्मी निकल गई, दूसरी गर्मी निकल गई, (xx) जैसे चंपत हो गए, माल लेकर के यहां से, मध्‍यप्रदेश का पैसा. लेकिन क्‍या मप्र में जल जीवन मिशन से हर गांव के अंदर पानी मिला, इसकी समीक्षा की, क्‍यों नहीं की. एक साल क्‍यों लग गया. क्‍या कलेक्‍टर समीक्षा नहीं कर सकते, आपने कहा था कि कलेक्‍टर समीक्षा करेंगे, आप सभी सदस्‍यों को बुलाएंगे आज तक समीक्षा नहीं हुई है. लाखों, करोड़ों का घोटाला हो गया, अब तक बात नहीं हुई, जांच प्रतिवेदन आते नहीं है, क्‍योंकि जांच प्रतिवेदन आएंगे, लोकायुक्‍त या अन्‍य के, तो घोटाले सामने आएंगे कि सरकार में कितने करोड़ों, अरबों रुपए के घोटाले हो रहे, लेकिन सरकार इस पर सदन में चर्चा नहीं करवाना चाहती क्‍यों, आप ईमानदार बनते हो, तो ईमानदारी बताएं.

अध्‍यक्ष महोदय, अभी गरीबों को चावल नहीं मिल रहा और गरीबों का चावल जा रहा इथेनॉल प्‍लांट में. ये कैसी सरकार है. ज्ञान की बात करती है, उस पर जीवबेला नाम है गरीब का, उस गरीब के लिए चावल नहीं दे पा रही है, इथेनॉल के लिए बड़े बड़े करोड़पति और अरबपति के लिए चावल जा रहे. कई ट्रक पकड़ा रहे घोटोले हो रहे, सरकार ने क्‍या किया उस पर, किस पर कार्यवाही की, कितने इथेनॉल प्‍लांट पर कार्यवाही की, नहीं की. यही स्थिति शिक्षकों की है. डीईटी परीक्षा को लेकर पूरे प्रदेश के डेढ़ लाख शिक्षक परेशान है, परीक्षा को कम्‍पलसरी कर दिया जो इतने सालों से शिक्षक पढ़ा रहा है, उसके अनुभव को चैलेंज किया जा रहा है, उसकी योग्‍यता को चैलेंज किया जा रहा है. अगर आज वह कर्ज लिया, घर बनाने के लिए, बच्‍चों की शादी या पढ़ाई के लिए, अगर वह उस परीक्षा में बाहर हो जाता है टेस्‍ट में बाहर हो जाता है तो क्‍या उस शिक्षक के परिवार के बारे मे सरकार सोचेगी प्रदेश के डेढ़ लाख शिक्षक है, आज उनके जीवन और भरण पोषण की बात आ गई, उनके सपने टूटने वाले हैं, उन सपनों को कैसे हम बचाएंगे, मैं सरकार से जानना चाहता हूं.

          अध्‍यक्ष जी, आज मैं एक ट्रायबल एससी के हॉस्‍टल में गया, जर्जर मुख्‍यमंत्री जी के घर के बाहर का हॉस्‍टल. इस पार मुख्‍यमंत्री जी का आलीशान आवास और दूसरी तरफ गरीब बच्‍चों एसटी, एससी, दलित और आदिवासियों का हॉस्‍टल देखकर आया हूं. वहां टॉयलेट नहीं है, शौचालय नहीं है, पूरा जर्जर हो रहा है. नहाने के लिए बाहर गंदी वाली टंकी में वे लोग नहाते हैं. ये मुख्‍यमंत्री आवास से बाहर 200 मीटर की दूरी की बात कर रहा हूं. ये है स्थिति, और अभी तक वह पुराना हॉस्‍टल में कई आपके और हमारे लोग वहां के एससी, एसटी के हास्‍टल से पढ़कर निकले है. मुझे बताया गया कि हमारे प्रभुराम चौधरी भी यहां से पढ़कर निकले, उस बेशकीमती जमीन को बेचने की तैयार सरकार कर रही है. अगर सरकार की मंशा साफ है तो वहां पर एसटी, एससी का हॉस्‍टल बनना चाहिए, श्‍यामला हिल्‍स का पुराना इतिहास है उस हॉस्‍टल का. अध्‍यक्ष महोदय, एक और ट्रायबल हॉस्‍टल के अधीक्षक को हटाकर प्रायवेट लोगों को काम देने का काम चल रहा है कि वे हॉस्‍टल चलाएंगे, ये कैसी नीति, ये कैसी पॉलिसी, क्‍या गारंटी रहेगी, क्‍या जवाबदारी रहेगी उस प्रायवेट व्‍यक्ति की, क्‍या वह सही खाना खिलाएगा, बच्‍चे बीमार नहीं होंगे, उनके स्‍वास्‍थ्‍य का ध्‍यान रखा जाएगा, नीति बनाने के पहले सरकार इसकी जवाबादारी तय करें, क्‍या आपने किसी से राय ली, नहीं ली और जो गांव में छोटे छोटे हॉस्‍टल हैं, वे वहां के लोग हैं, वे जानते हैं कि आसपास की और बच्‍चों की क्‍या प्रवृत्ति है, बच्‍चों की उनको किस प्रकार से संभालना है. 

माननीय अध्‍यक्ष महोदय,निश्चित तौर पर यही स्थिति वर्ग एक, दो, तीन के अतिथि शिक्षकों की भी है, वह भी परेशान है, लेकिन हमेशा सरकार की तरफ से आश्‍वासन मिलता है कि देखेंगे, सोचेंगे वेट करेंगे, अरे कब नौकरी मिलेगी, कब वह लोग आयेंगे? क्‍यों आप हर विभाग को आउटसोर्स कर रहे हो, 13 प्रतिशत ओबीसी के छात्र ऐसे ही परेशान हैं. आपने पूरा एमपीएससी का रिजेल्‍ट होल्‍ड किया हुआ है. 27 प्रतिशत ओबीसी को आरक्षण नहीं मिल पा रहा है. आज आप भी पिछड़ों के मुख्‍यमंत्री हैं, आप पिछड़ा समाज से आते हैं, इसके पहले उमा भारती थीं, इसके पहले बाबूलाल गौर जी थे, श्री शिवराज सिंह चौहान जी थे, क्‍यों इतना भेदभाव पिछड़ों के साथ हैं, क्‍या वह हमारे इस प्रदेश के पिछड़े साथी नहीं है, क्‍या वह हमारे साथ के समाज के लोग नहीं हैं? 52 प्रतिशत आबादी मध्‍यप्रदेश के अंदर पिछड़ों की  है, उनके लिये न्‍याय होना चाहिए, सरकार कभी उनके बारे में नहीं सोचना चाहती है(मेजों की थपथपाहट)

अध्‍यक्ष महोदय, धरती आबा योजना भी गांव गांव बहुत चली, आपके ज्ञानेश्‍वर पाटिल सांसद आपके पार्टी के ही हैं, शेड नेट में जांच के लिये उन्‍होंने लेटर लिखा, बुरहानपुर, खण्‍डवा,दमोह में शेड नेट के प्रस्‍ताव बन गये और साढ़े तेरह करोड़ के प्रस्‍ताव सिर्फ बारह घंटे के अंदर तैयार हो गये, 82 आवेदन रेडी हो गये, टी.एस. हो गई, ए.एस. हो गई, बस बटन दबाना बाकी था. सीधे-सीधे साढ़े तेरह करोड़ रूपये देने के लिये पोर्टल पर बता दिया कि सौ प्रतिशत शेड नेट बन गये और वास्‍तविकता धरातल पर यह है और यह स्थिति है कि शेड नेट पूरे नहीं बन पाये, यह आपके सांसद ने बात उठाई है. यह इस प्रकार खुलेआम धरती आबा योजना में घोटाले हो रहे हैं, लाखों करोड़ों का बजट उसके अंदर हैं, गरीबों के लिये, किसानों के लिये, दलित के लिये, आदिवासी के लिये, पिछड़ों के लिये, उनके गांव के लिये, अगर इस प्रकार से इन योजनाओं का दुरूपयोग होगा, तो आपका कैसा बजट होगा, आपकी  कैसी योजनाओं की मानिटरिंग हो रही है ? मैं यह जानना चाहता हूं और ऐसा नहीं है कि यह खण्‍डवा, बुरहानपुर की स्थिति है, यह दमोह से लेकर सिंगरौली तक की शेड नेट की स्थिति है, लेकिन मैं समझता हूं कि परीक्षाओं के अंदर भी इस प्रकार से हो रहा है, एमपीईबी के असिस्‍टेंट ग्रेड की परीक्षा थर्ड केस में भी हुआ, 818 पद थे, आपको 717 मेरिट पर रखना था, लेकिन आपने 545 की सूची जारी हुई. आप क्‍यों सपने दिखा रहे हो? बाकी लोग कहां से आयेंगे, पीछे से भर्ती हो रही है, बेक डोर से भर्ती हो रही है, यह बताये सरकार. या तो आपको 545 का ही रिजलेल्‍ट निकालना था, क्‍यों आपने 818 की बात की? माननीय अध्‍यक्ष महोदय मैं समझता हूं कि मैरिट कट, वेटिंग, दस्‍तावेज सत्‍यापन के संबंध में बार बार छात्र सरकार से सवाल  पूछ रहे हैं, पोर्टल पर जा रहे हैं, रोज युवा छात्र रिजेल्‍ट देखते हैं कि हम पास हुए कि नहीं, हमारा रिजेल्‍ट आया कि नहीं, मालूम पड़ता है कि रिजेल्‍ट कैंसिल हो गया, परीक्षा निरस्‍त हो गई, लेकिन सरकार उनसे 400-500 रूपये परीक्षा फार्म भरने के लिये ले रही थीं, क्‍या सरकार जिनका नहीं हुआ, जिन्‍होंने नहीं किया उनको पैसा वापस देगी? नहीं देगी, वह छोटा गरीब छात्र पैसे नहीं मांग सकता है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं सदन को लेकर कि चार दिन का, पांच दिन का सत्र है. मैं आपने अनुरोध करना चाहता हूं कि सदन पूरा चले, अगर पांच दिन के लिये सदन है तो पूरा पांच दिन सदन चले(मेजों की थपथपाहट) क्‍यों हम पांच दिन का सत्र बुलाते हैं और दो दिन, तीन दिन में खत्‍म कर देते हैं, क्‍यों सत्‍ता पक्ष ऐसा चाहता है? यह सवाल है, यह जनता के सवाल हैं, यह प्रश्‍न हैं, यह जनता के प्रश्‍न हैं, हमारे प्रश्‍न नहीं है. एक एक विधायक तीन तीन लाख जनता का प्रतिनिधित्‍व करता है और उनके सवाल क्‍या होते हैं? उनके सवाल किसानों को लेकर होते हैं, उनके सवाल सड़क को लेकर होते हैं, उनके सवाल बिजली को लेकर होते हैं, डेम को लेकर होते हैं, डी.पी. को लेकर होते हैं, तालाब को लेकर होते हैं, यह सवाल हैं, इन सवालों के जवाब सरकार नहीं देना चाहती हैं, मैं यह जानना चाहता हूं.                                                                                    माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे निवेदन है आप सरकार को कहें कि जब सत्र बुलायें तो पूरा बुलायें, अगर 2 दिन, 3 दिन में होगा तो फिर इतनी पैसे की बर्बादी क्‍यों कर रहे हो, या फिर सरकार बोल दे कि हम लोकतंत्र में विश्‍वास नहीं रखते. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कई जांच आयोग के प्रतिवेदन पटल पर नहीं आये, लंबित पड़े हैं, क्‍यों उन पर चर्चा नहीं होती, क्‍यों मासिक प्रतिवेदनों पर चर्चा नहीं होती, क्‍यों मांग संख्‍याओं पर चर्चा नहीं होती, यह शासकीय कार्य है, कई साथियों के अशासकीय संकल्‍प हैं, कई ध्‍यानाकर्षण लगाते हैं, उस पर बात नहीं होती. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हर विषय पर चर्चा होना चाहिये. मैं समझता हूं कि जनप्रतिनिधि और कार्यपालिका एक दूसरे के पूरक हैं. सवाल उठाना हमारा फर्ज है जनहित में, कार्यपालिका का जवाब देना, क्‍यों नहीं देना चाहते.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस सदन में जब बात आती है जब किसी आम व्‍यक्ति को न्‍याय नहीं मिलता, छोटा व्‍यक्ति पटवारी के पास चक्‍कर काटता है, जनसुनवाई में कलेक्‍टर के पास बार-बार चक्‍कर काटता है, राशन नहीं मिलता है, राशन की दुकानों में लाइन लग रही है, बिजली नहीं मिल रही, उसके साथ अन्‍याय हो रहा है, थानों में हो रहा है तो हमारा फर्ज नहीं है, थाने में जा रहा, एसपी तक जा रहा. सरकार को सोचना चाहिये अगर यहां पर छोटे-छोटे प्रश्‍न आ रहे हैं तो कहीं न कहीं जनता दुखी है, प्रदेश की जनता दुखी है, उसको न्‍याय नहीं मिल रहा. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, और मुझे मालूम है कि बड़े-बड़े अधिकारी घंटों इंतजार कराते हैं, कई विधायकों के तो फोन नहीं उठाते होंगे, मैं तो मुंह पर इनके कह सकता हूं. जब इस विधान सभा के जनप्रतिनिधियों का सम्‍मान नहीं है तो आम जनता के कहां से काम होंगे. क्‍या यह सरकार की जवाबदारी नहीं है कि हमें जनहितैषी सरकार चाहिये, उन पर विश्‍वास होना चाहिये, जनता का विश्‍वास. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि भरोसा, संवेदनायें, विश्‍वास आम जनता में सरकार के प्रति होना चाहिये और वह कहीं न कहीं खोती जा रही है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, योजनायें कागजों पर जनोनमुखी कई बनती हैं, लेकिन नीचे जमीन तक नहीं पहुंच पातीं, यह सच है. हमने जैसा कहा, खाद को लेकर कहा, दोनों माननीय मंत्रियों से कहा कि साथ में चलिये, उस किसान के घर पर जाकर रोटी खायेंगे, उसके खेत में जाकर बात करेंगे, उसकी झोपड़ी में जाकर बात करेंगे कि क्‍या वास्‍तव में उसको दर्द है कि नहीं है. खाद उसको मिल रही है या नहीं, बीज उसको सही मिल रहा है कि नहीं, यहां आंकड़े गिना दिये जाते हैं, लेकिन हम किसान के पास नहीं जाना चाहते. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी से कि हम आपका भाषण इतने समय से सब लोग सुन रहे हैं, लेकिन निराकरण होना चाहिये, योजनाओं के आंकड़े गिनाने से कुछ नहीं होता. अगर यहां पर कोई प्रश्‍न आये, चर्चा आई है तो उस पर क्‍या आपकी पॉलिसी है, क्‍या आपकी नीति है, कब क्रियान्‍वयन होगा, कब जनोनमुखी होगी, कब जनता को लाभ मिलेगा, उनकी भावनाओं को कब हम सम्‍मान दे पायेंगे, कब उनके आंसू पोंछ पायेंगे मुख्‍यमंत्री जी बतायें, नहीं तो भाषण तो ठीक है, सुन लेंगे हम टेस्‍ट मैच सरीखे. अध्‍यक्ष जी धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय--  माननीय मंत्री जी.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय--  अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री बोलें उसके पहले मैं सदन को और आपको अवगत कराना चाहता हूं कि मैंने नियम 164 के अंतर्गत विशेषाधिकार भंग की सूचना नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ दी है. यदि आप अनुमति देंगे तो मैं पढ़कर सुना दूंगा, अन्‍यथा मैं इसको टेबल करता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय--  दीजिये, मुझे पढ़ने दीजिये, मेरे पास आयेगी तो मुझे उसे पूरा पढ़ तो लेने दीजिये.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय--  मैं पढ़कर सुनाऊं.

          अध्‍यक्ष महोदय—नहीं-नहीं. माननीय मंत्री जी.                    

          श्री जगदीश देवड़ा,वित्त मंत्री - माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रथम अनुपूरक अनुमान पर आज यहां पर चर्चा हुई. चर्चा में आज हमारे विद्वान साथी माननीय बाला बच्चन जी, माननीय गौरव पारधी जी,माननीय लखन घनघोरिया जी,माननीय अनिरुद्ध मारू जी,माननीय अनिरुद्ध मारू जी,माननीय यादवेन्द्र सिंह जी,माननीय नीरज सिंह ठाकुर,माननीय विश्वनाथ सिंह जी,माननीय नितेन्द्र सिंह जी, माननीय सुरेश राजे जी,माननीय आशीष शर्मा जी,माननीय राजन मण्डलोई जी,माननीय उमाकांत शर्मा जी,माननीय श्रीमती सेना महेश पटेल जी,माननीय श्रीमती डॉ.ध्यान सिंह सोलंकी,माननीय श्री फुन्देलाल जी, माननीय मधु गेहलोत जी,माननीय नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जी,प्रथम अनुपूरक अनुमान में सभी साथियों ने विस्तार से यहां पर चर्चा की. पक्ष,विपक्ष के हमारे साथियों ने सरकार की उपलब्धियों के बारे में भी बहुत विस्तार से हमारे साथियों ने यहां पर बताया और हमारे साथियों ने बहुत सारे सुझाव भी दिये हैं. सरकार को क्या करना क्या नहीं करना बहुत सारी कमियां भी बताईं लेकिन मैं आपको यह आश्वस्त  कर रहा हूं कि आपकी बात को पूरी गंभीरता से हमने सुना है. बहन झूमा जी बोल रही थीं कि लिखा कि नहीं लिखा. आपकी सारी समस्याओं को पूरी तरह लिखा है. मैं सबसे पहले तो यह बताना चाहता हूं कि सामाजिक सुरक्षा और वृद्धावस्था पेंशन के बारे में जो चिंता व्यक्त की थी. 210 करोड़ 44 लाख रुपये अभी जारी कर दिये हैं जुलाई माह में अभी. बिल्कुल भी उसमें कोताही नहीं बरती जायेगी. यह चिंता सरकार की ओर से की है. मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को भी धन्यवाद देना चाहता हूं. अध्यक्ष महोदय, मुख्य बजट जब आया तो मुख्य बजट में सारे विभागों में पर्याप्त राशि का प्रावधान किया था और राशि दी और अभी प्रथम अनुपूरक अनुमान में भी पर्याप्त राशि दी है आवश्यक्ता के अनुसार और प्रथम अनुपूरक लाया ही इसलिये जाता है यह संविधान में व्यवस्था है कि अतिरिक्त राशि की जब आवश्यक्ता पड़ती है तो इसमें राशि का प्रावधान होता है और जो राशि दी है उसमें टोकन भी दिये हैं जिनमें पर्याप्त राशि मुख्य बजट में जो प्रावधान किया था. मुख्य बजट में जो राशि दी पर्याप्त. मुझे लगता है कि इनमें भी अगर राशि की आवश्यक्ता होगी तो उसमें राशि उपलब्ध करवाई जायेगी लेकिन अभी इस बजट में जो मुख्य प्रावधान किये हैं मैं केवल उन पर ध्यान आकर्षित कर दूं फिर मैं अपनी बात करूंगा. हमारे अभी विपक्ष के साथियों ने बहुत सारी बातें कहीं लेकिन बहुत सारी नयी योजनाएं भी हैं जिनके लिये आवश्यक्ता थी उनके लिये भी प्रावधान किया है अनुपूरक में. जिन योजनाओं में अतिरिक्त जरूरत थी उसका भी किया.जो मुख्य बात जो अभी हमारे भाई गौरव पारधी ने भी कही थी कि बजट में मुख्य बात पूंजीगत कितनी राशि रखी आज तक के इतिहास में जब-जब भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार रही सब उठाकर आप देख लें कि पूंजीगत व्यय में हमने सबसे ज्यादा राशि रखी. मैंने पहले भी कहा था मैं उस पर नहीं जा रहा हूं कि पिछली सरकार ने क्या किया क्या नहीं किया लेकिन इतना जरूर कहना चाहूंगा कि पूंजीगत राशि भी जो रहती थी उससे भी वेतन,भत्ते दे दिये जाते थे और आज यह स्थिति नहीं है. आज पूंजीगत व्यय लगातार बढ़ रहा है. अभी 7766 करोड़ का अभी बजट अनुपूरक रखा इसमें पूंजीगत हमारा 6858 करोड़ का प्रस्ताव है और 908 करोड़ का हमारा राजस्व का है.इसी से यह पता लगता है कि यह सरकार जमीन पर काम करना चाहती है और यह विकास के काम करना चाहती है. ये अध्यक्ष महोदय अभी जो प्रावधान किए हैं, मैं केवल प्रकाश डाल रहा हूँ क्योंकि अभी बहुत सारी बातें हमारे साथियों ने कीं, लेकिन राजस्व विभाग में जैसे 397 करोड़ रुपये, परिवहन विभाग में किए 101 करोड़ रुपये, किसान कल्याण विभाग के लिए भी 313 करोड़ रुपये, लोक निर्माण विभाग में 1300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया. स्कूल शिक्षा विभाग में अभी 58 करोड़ रुपये का, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में 2,220 करोड़ रुपये का, नर्मदा घाटी विकास विभाग में कुल 3 हजार करोड़ का, पर्यटन विभाग में 30 करोड़ रुपये का, उच्च शिक्षा में 50 करोड़ रुपये का, लोक सेवा प्रबंधन में 25 करोड़ का और गृह विभाग में 98 करोड़ रुपये का, पुलिस बल आधुनिकीकरण के लिए 58 करोड़ रुपये का और प्रावधान किया गया है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी चर्चा आई कि प्रदेश में क्या हुआ, क्या नहीं हुआ. लेकिन मैं यह बताना चाहूँगा कि सड़कें, अब आपने कहा जरूर है, लेकिन मैंने पहले भी कहा था, जब मैं खड़ा हुआ था, तब मैंने कहा था, पीडब्ल्यूडी मंत्री भी हैं. उनके भाषण में भी विस्तार से आया था कि कितने पुल-पुलिया, सड़क, 4 लेन, 8 लेन कितनी बनी. अब इस सत्यता को स्वीकार करें. पुल-पुलिया और सड़कें, जितनी मध्यप्रदेश में बनीं, मुझे नहीं लगता कि पहले कभी इस प्रकार की सड़कें बनी हों. नहीं बनीं.

          अध्यक्ष महोदय, सांदिपनी विद्यालय, मेडिकल कॉलेज, सड़कें, पुल-पुलिया, फ्लाई ओव्हर, प्रधानमंत्री आवास, जल जीवन. अभी जल जीवन मिशन की बात की. मैंने पहले यहां खड़े होकर कहा था कि कमी हो सकती है. उसको दूर किया जा सकता है. लेकिन इच्छाशक्ति की हर घर में शुद्ध पीने का पानी नल से जल मिले. यशस्वी हमारे प्रधानमंत्री जी को हम धन्यवाद देंगे. हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को हम धन्यवाद देंगे कि मध्यप्रदेश की सरकार ने 9 हजार करोड़ रुपये इस पर अभी खर्च कर दिए. (मेजों की थपथपाहट). ये सरकार की इच्छाशक्ति है. देर हो सकती है. योजना में कहीं विलम्ब हो सकता है. लेकिन ये खर्च किया है.

          अध्यक्ष महोदय, आयुष्मान कार्ड, अब ये सारे काम इसी सरकार में हो रहे हैं. मध्यप्रदेश की सरकार में हो रहे हैं. मैं यशस्वी मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि कितनी सारी योजनाएं, जनकल्याणकारी योजनाएं, लाडली बहना योजना, किसान सम्मान निधि में मध्यप्रदेश सरकार भी 6 हजार रुपये किसानों के खाते में डाल रही है. यह किसान कल्याण वर्ष चल रहा है. अनेक योजनाएं मध्यप्रदेश की सरकार ने इस जमीन पर उतारी है, हवा में नहीं, और आप कह रहे हैं कि इसका हिसाब दो, एक-एक पैसा, जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा, मध्यप्रदेश के खजाने का पैसा जमीन पर लगाया जा रहा है. जनता के लिए लगाया जा रहा है. जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए लगाया जा रहा है. ये केवल हाऊस में बोलने की बात नहीं है. आप जाकर के गांव-गांव में पूछ लें, ठीक है, आपने कहा, आपका विषय था, आपने कहा कि भई कमियां हैं. मैं पहले भी कह चुका हूँ कि कमियां हैं तो उनको दूर करने का काम भी सरकार करेगी. यह सरकार की जिम्मेदारी है. सरकार का राजधर्म है. हम इसके लिए मना नहीं कर रहे हैं. लेकिन पहले भी सरकारें थीं आपकी, लेकिन पहले हमने कभी ऐसा नहीं देखा, जितने विकास के काम आज हो रहे हैं, जितनी जनकल्याणकारी योजनाएं आज चल रही हैं. वह कभी नहीं चलीं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी अनुसूचित जाति, जनजाति के बारे में बात की गई. अभी भी हमने उसमें प्रावधान किया है. बाला बच्चन जी, ऐसा नहीं है कि उसमें प्रावधान नहीं हुआ है और पर्याप्त बजट हमने मुख्य बजट में दिया. जहां तक छात्रावासों का सवाल है, बहुत से छात्रावास बनाए गए हैं, अभी संख्या मेरे पास नहीं है, लेकिन मैं संख्या भी बता सकता हूँ कि बहुत बड़ी संख्या में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रावास अभी इस मध्यप्रदेश में बने हैं. उनके रहने का प्रबंध हमने किया है. हो सकता है कमी हो. आपने कमी बताई है, आपने संज्ञान में बात डाली है तो वहां हम ठीक करेंगे. यह सरकार की जिम्मेदारी है. मैं इसको स्वीकार कर रहा हूँ. लेकिन मैं इस बात को भी कहना चाहता हूँ कि पहली बार अनुसूचित जाति के और अनुसूचित जनजाति के हमारे विद्यार्थी विदेश पढ़ने के लिए गए, ये मध्यप्रदेश की सरकार ने बहुत बड़ी संख्‍या में हमारे यहां के बालक-बालिकाएं विदेश पढ़ने के लिए गए हैं, मैंने पहले ही कहा है कि यह राजधर्म है. हम सदन में खड़े होकर यह नहीं कह रहे हैं कि हमने कोई बहुत बड़ा एहसान कर दिया है. जो भी सरकार में बैठता है, उसका कर्तव्‍य है, उसका राजधर्म है. लेकिन यह राजधर्म का पालन पहले नहीं हुआ. यह राजधर्म का पालन अभी हुआ है. मैं देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी को भी धन्‍यवाद देना चाहता हूँ कि उन्‍होंने वर्ष 2047 का विकसित भारत का जो संकल्‍प लिया है, ऐसा ही संकल्‍प हमारे यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने विकसित मध्‍यप्रदेश का लिया है. विकसित भारत के संकल्‍प को पूरा करने के लिये मध्‍यप्रदेश की सरकार भी कृतसंकल्पित है और उसी दिशा में मध्‍यप्रदेश सरकार भी काम कर रही है. बहुत सारे विषय हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, सभी विभागों के सभी क्षेत्र में, चाहे चिकित्‍सा के क्षेत्र में हो, शिक्षा के क्षेत्र में हो, फिर चाहे वह गरीबों की योजनाओं के बारे में हो. लेकिन यह प्रथम अनुपूरक अनुमान बजट पर चर्चा है, इसलिए मुख्‍य बजट में बहुत सारी बातें हमारे सामने आ गई हैं. मैं चाहता हूँ कि कोई बहुत विस्‍तार से बोलने की जरूरत नहीं है. मैं सदन से यही प्रार्थना करूँगा कि इस प्रथम अनुपूरक अनुमान को पारित करने का कष्‍ट करें. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय – माननीय मुख्‍यमंत्री जी कुछ बोलना चाहेंगे.

          श्री भंवर सिंह शेखावत – अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट. (बंद माईक पर बोलने पर) जब कैलाश जी बोलेंगे, तभी मेरा माईक चालू होगा.

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) – अध्‍यक्ष महोदय, सपने में भी मैं ही आपको दिखाई देता हूँ.

श्री भंवर सिंह शेखावत – अध्‍यक्ष महोदय, अब माईक चालू हो गया है. आप बैठ जाएं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी भी यहां विराजमान हैं. मेरा निवेदन है कि सभी विधायकों को एक चीज बहुत परेशान करती है कि जब वह अपने क्षेत्र के दौरे पर जाते हैं, एक तो महिलाओं की जो पेंशन है, आपने कर तो दी है, इसकी राशि थोड़ी सी बढ़ा दें. आप मेहरबानी करके विकलांगों की राशि बढ़ाइये, विकलांग तो विकलांग है, सभी विधायकों की यही परेशानी है और विकलांगों की राशि हम टाइम पर दे दें, वह बात अलग है, उनकी राशि बढ़ा दीजिये. (मेजों की थपथपाहट) इतनी कम राशि में विकलांग अपना जीवन नहीं चला पाता है, आप इतनी मेहरबानी कीजिये तो बहुत अच्‍छा होगा. 

श्री उमाकांत शर्मा – अध्‍यक्ष महोदय, विकलांग नहीं, दिव्‍यांग बोलिये. 

अध्‍यक्ष महोदय – उमाकांत जी,आप बैठिये. माननीय मुख्‍यमंत्री जी.

मुख्‍यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सोलहवीं विधान सभा के ऐतिहासिक अभूतपूर्व मानसून सत्र के दरम्यिान सेवा, सुशासन, जनकल्‍याण की दिशा में जो प्रतिमान स्‍थापित किए गए हैं. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको, नेता प्रतिपक्ष और सभी मित्रों को धन्‍यवाद देना चाहूँगा. आज भले ही इस सत्र का विधायी समापन हो रहा है लेकिन मध्‍यप्रदेश की प्रगति, प्रशासनिक पारदर्शिता, समाजिक समरसता एवं नारी सशक्तिकरण के युग का शुभारंभ है. मुझे यह कहते हुए अत्‍यन्‍त मन में गर्व भी है, इस सत्र में न केवल हमने बैठकें की और हमारे कामकाज की चिन्‍ता की, बल्कि आने वाली पीढि़यों की सुरक्षित, सशक्‍त और समृद्ध भविष्‍य के लिये अमिट अध्‍याय भी लिखा है. मैं आपको बधाई देना चाहता हूँ. मैं आपके माध्‍यम से, नेता प्रतिपक्ष जी को याद दिलाना चाहूँगा, उनके मित्रों को याद दिलाना चाहूँगा कि आप कह रहे हैं कि कर्मकाण्‍ड और छोटा समय. छोटा समय, लेकिन वह हनुमान जी की उस लम्‍बी छलांग को याद करें, जब वह लंका तक कूदकर चले गए थे. 15 बिल का पास होना, यह हमारे लिये बहुत बड़ी बात है. यह मामूली बात नहीं है, एक विनियोग और 14 विधेयक, माननीय नेता प्रतिपक्ष जी को सारी बातें याद रहीं, सारे मित्रों को याद रहीं, लेकिन काम की बात जानबूझकर नहीं बोले कि आंखों में दो नम्‍बर वाला चश्‍मा लगा है, हिन्‍दू अलग और मुसलमान अलग. आप यूसीसी को भूल गए, इससे बड़े दुर्भाग्‍य की बात क्‍या होगी ?   देश के लिए, प्रदेश के लिए सौभाग्‍य की बात है. हम तो बाबा साहेब अंबेडकर की संविधान की किताब को लहराते हुए, आपके नेता को भी देखते हैं. एक समान कानून की बात करते-करते महात्‍मा गांधी जी के भजन तक चले जाते हैं- ईश्‍वर अल्‍लाह तेरा नाम, सबको सन्‍मति दे भगवान. भगवान ही जाने कांग्रेस को कब सन्‍मति आयेगी ? कभी तो समानता की बात कहे, लेकिन वे जहां खड़े, वहीं के वहीं चलें. मैं आज के इस अवसर पर इस सत्र समापन के साथ, अगले सत्र की ओर जब हम बढ़ेंगे लेकिन यह एक अद्भुत काम किया है, मैं बधाई देना चाहूंगा, नेता प्रतिपक्ष जी ने कहा विनियोग में पूंजीगत और राजस्‍व. मैं वित्‍त मंत्री जी को धन्‍यवाद दूंगा कि ये समझाने जा रहे थे. मुझे लगता है कि हमारे प्रतिपक्ष के मित्र ने कहा कि मैं सी.ए. से अकाउंट सिखकर आया हूं. पता नहीं इनका कौन सा सी.ए. जो पूंजीगत और राजस्‍व का अंतर ही नहीं बता पा रहा है. मुझे लगता है वह आदमी ही गलत है. कम से कम सही आदमी के पास जायें.

          श्री उमंग सिंघारआपने सुना ही नहीं, मैंने ये बात कही ही नहीं है.

          डॉ.मोहन यादवआपने नहीं की तो किसने की ?

          श्री उमंग सिंघार- आपके साथियों ने की है, आप अपने साथियों से पूछिए. मैंने बोला क्‍या है, जवाब क्‍या दे रहे हैं, मुख्‍यमंत्री जी की गंभीरता समझ में आ रही है.

          श्री विश्‍वास सारंगबजट समझना है तो इकोनॉमिस्‍ट के पास जायें, सी.ए. के पास नहीं.  

          डॉ.मोहन यादव-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, आज के इस अवसर पर यह बजट पास करने के लिए, आपकी तरफ से, सरकार की ओर से धन्‍यवाद देना चाहूंगा. लेकिन खासकर आज के अवसर पर जो बिल बजट के साथ-साथ पारित हुए, हमारे लिए मध्‍यप्रदेश ईज़ ऑफ डू‍इंग बिजनेस, 2026 का औद्योगिक क्रांति के साथ ही, विधेयक जिसका मैं उल्‍लेख करूंगा, श्रम संहिता, 2026 जो 8 घंटे प्रतिदिन के हिसाब से यह वाकई क्रांतिकारी बिल है. जिसके भरोसे भविष्‍य में 8 घंटे के बजाए, 12-12 घंटे काम करके, 6 दिन के बजाए, 4 दिन में ही 48 घंटे पूरे कर ले तो 3 दिन उस मजदूर को आराम मिलेगा, वह बाकी काम कर सकेगा. इसी के साथ पुरानी ढांचागत व्‍यवस्‍था से मुक्ति मिलेगी. कुछ बातें मैं और बोल सकता हूं लेकिन हमारे उपमुख्‍यमंत्री जी ने सारी बजट की बातें कर दी हैं.

          (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, 900 तारांकित, 856 अतारांकित प्रश्‍न, 522 ध्‍यानाकर्षण, 171 शून्‍यकाल, 21 अशासकीय संकल्‍प और खासकर नियम 139 के तहत जो चर्चा हुई, उसके लिए मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा. इस सत्र के माध्‍यम से यह बड़ा काम हुआ है. मैं आज के अवसर पर, लेकिन जो बात दिख रही है, कुछ बातें मेरे प्रतिपक्ष के नेता और उनके मित्रों की जानकारी के लिए बताना चाहूंगा. आपने सदन में मूंग, गेहूं की बात निकाल दी. पूरे देश में सबसे ज्‍यादा अगर कहीं गेहूं किसानों से खरीदा गया तो वह मध्‍यप्रदेश की धरती पर खरीदा गया. कभी इतिहास में इतना गेहूं नहीं खरीदा गया.

(मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं, 14 लाख के लगभग किसानों से खरीदा जाना और रुपये 2625 का भाव देना, यह भाव पूरे देश में कहीं नहीं मिला. रुपये 2585 का भाव MSP का है लेकिन हमारी प्रतिबद्धता है कि हम इसे रुपये 2700 तक ले जायेंगे, इसलिए धीरे-धीरे करके रुपये 2625 का भाव दिया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, हमने पहले भी इसे प्रेस में कहा है लेकिन यहां बात निकली है तो दूर तक जायेगी. आपने कहा नर्मदा वैली की शुरूआत वर्ष 1977 में हुई. वर्ष 1977 से हमारी सरकार साध्‍वी उमा भारती के मुख्‍यमंत्री बनने तक..........

          श्री उमंग सिंघारमैंने वर्ष 1977 बोला ही नहीं है मैंने वर्ष 1979 बोला है. वर्ष 1977 में कुछ हुआ ही नहीं है. मैं सुधार कर दूं, नहीं तो यह बात रिकॉर्ड में आ आयेगी. 

          डॉ.मोहन यादवसुन लो भाई. जल्‍दी मत करो. रिकॉर्ड में आयेगी तो मेरी तरफ से आयेगी, आप चिंता मत करो. अब मैं आपकी तरफ से बोलता हूं कि नर्मदा जी का पानी, इसी सदन में कांग्रेस के मुख्‍यमंत्री ने कई बार कहा था कि इंदौर, माननीय कैलाश जी भाई साहब गवाह हैं. कहा जाता था कि यह असंभव है, नदी नीचे है ऊपर कैसे आएगा. उज्जैन संभव ही नहीं है. लेकिन हमारे तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के कारण से सरदार सरोवर डेम पूरा हुआ. 31 लाख हेक्टेयर में पानी अगर मिल रहा है तो यह बड़ा चमत्कार हुआ है. हमारे गुजरात के साथ  उस समय के घटनाक्रम के बलबूते पर. यह कांग्रेस के शासन में कर सकते थे. 31 लाख हेक्टेयर का रकबा किसानों के साथ अन्याय करने का पाप अगर किसी ने किया है तो मैं जवाबदारी के साथ बोलना चाहूंगा कि तत्कालीन कांग्रेस की सरकारों के समय हुआ है. हमको इस बात को भूलना नहीं चाहिए. बिजली उस डेम के कारण से पूरे देश में सबसे ज्यादा सस्ती बिजली 57 प्रतिशत, केवल 85 पैसे यूनिट में मध्यप्रदेश सरकार को मिल रही है. जिससे हम अपने गांवों को रोशन कर रहे हैं. उद्योग धंधों को दे रहे हैं. पीने के पानी के सभी संयंत्रों को बिजली दे रहे हैं. कांग्रेस के शासनकाल में राज्यों को आपस में लड़ने के लिए छोड़ दिया गया था. हमारे पड़ोसी राज्यों के साथ सोहार्द्रपूर्ण संबंध हों और विकास का नया अध्याय लिखा जाए. इस दिशा में बढ़ने की आवश्यकता है. मुझे बड़ा आश्चर्य लगता है केन-बेतवा नदी जोड़ो, बुंदेलखण्ड की धरती क्यों प्यासी थी. पार्वती-कालीसिंध चंबल योजना 20 साल पहले क्यों राजस्थान के साथ समझौता नहीं हो सकता था. उसी प्रकार से पूरा पैसा डेम का गुजरात ने लगाया. 31 लाख हेक्टेयर की सिंचाई हमारे प्रदेश में हो रही है. 57 प्रतिशत बिजली 85 पैसे यूनिट के हिसाब से हमें मिली. पैसा एक नहीं लग रहा है. हमने क्लेम के आधार पर आप 500 करोड़ रुपए कह रहे हैं. केवल 230 करोड़ रुपए में विषय खत्म करके हमारे अपने राज्य के लिए बड़े पैमाने पर, वो तो 8 हजार करोड़ रुपए मांग रहे थे. केवल 230 करोड़ रुपए देकर हमने इस राजीनामे को समाधान तक पहुंचाया है. कभी मौका पड़ेगा तो आपके साथ नेता प्रतिपक्ष और उनके मित्रों के साथ पूरे दस्तावेज दिखाएंगे. राज्यों के बीच कोई भारत पाकिस्तान के संबंध नहीं हैं. परस्पर सोहार्दपूर्ण संबंध बनाने की जरुरत है. राज्यों के साथ हमारे विकास के और कई कीर्तिमान बनेंगे.

          अध्यक्ष महोदय, आज के इस अवसर पर सांदीपनि विद्यालय. कभी आप यह भी तो बोल दो कि आज स्कूल के अन्दर जीरो ड्राप आउट अगर हुआ है तो मध्यप्रदेश की धरती पर हुआ है. वास्तव में हम हमारे सारे बच्चों को स्कूल तक पहुंचा रहे हैं. यह हमारी प्रतिबद्धता है. पूंजीगत व्यय की बात आपने कर दी है. मैं अध्यक्ष महोदय आपके माध्यम से नेता प्रतिपक्ष और उनके मित्रों को बताना चाहूंगा. आप बजट को ढंग से पढ़ते आप किसी अर्थशास्त्री के पास चले जाना. अभी तो हमारे माननीय डिप्टी सीएम ने कहा है कि सच में हमारा 4 लाख 38 हजार करोड़ रुपए का सबसे बड़ा बजट, हमने कहा इस बजट को धीरे-धीरे 5 साल में डबल करेंगे. इसलिए पूंजीगत व्यय के लिए हमको भारत सरकार के उस 3 प्रतिशत की लिमिट के अन्दर मार्केट से लोन लेकर हमको जाना पड़ेगा. अभी तो यह 17 हजार करोड़ रुपए है लेकिन इस साल का सत्र समापन होगा और अगला सत्र 2027-2028 का चालू होगा तब तक 80 हजार करोड़ रुपए का लेना पड़ेगा. तब जाकर वो 4 लाख 38 हजार का बराबर होगा. आप तो यह समझते हैं कि बैंक से अगर कोई कार लें, स्कूटर लें या कोई भी गाड़ी का लोन लें तो क्या उतना ही पैसा होता है. 4 लाख 38 हजार करोड़ रुपए का हमारा बजट तो क्या प्रदेश के अन्दर हमने अपने वर्ष 1956 से बना हुआ मध्यप्रदेश आज वर्ष 2026 चल रहा है. ऐसे में हमारे पास सब मिलाकर क्योंकि हमने अपने बजट की जीडीपी, जीएसडीपी बढ़ाने के लिए हर साल अपनी लिमिट के आधार पर, हमारी अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाना चाहते हैं तो पूंजीगत व्यय तो हमको उस तरह से उठाना ही पड़ेगा और वो उठाने के लिए भारत सरकार की लिमिट में रखना पड़ेगा. इसका उलट आप कांग्रेस के राज्यों की तरफ देखो. हम 3 प्रतिशत के अन्दर चल रहे हैं. आज कर्नाटक 40 प्रतिशत के ऊपर जा रहा है पूरा राज्य रसातल में जा रहा है. कांग्रेस की सारी सरकारें डूब रही हैं. लेकिन हमारी सारी जनकल्याणकारी योजनाओं को चलाते-चलाते हम हमेशा उस लिमिट के अन्दर काम कर रहे हैं. लेकिन बजट की सीमा और राज्य की आर्थिक ताकत बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं. यह हमारी प्रतिबद्धता है और संकल्प भी है, हमको कोई रोक नहीं सकता है. इसी के भरोसे से आच आप बताइए, कभी मौका पड़ेगा तो नेता प्रतिपक्ष जी आपको भी ले चलेंगे. अभी थोड़े 4 दिन पहले की चार दिन पहले की बात है अब हमारे यहां एक के बाद एक नई सौगातें मिलती जा रही हैं. ऐविएशन के माध्‍यम से एयर एम्‍बुलेंस की सौगात अगर कहीं मिली है तो मध्‍यप्रदेश की धरती पर मिली है. यह हमारी बड़ी सौगात है. हेलीकॉप्‍टर की सर्विसेस जो धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ शेष पर्यटन के स्‍थलों को कव्‍हर कर रही है. विमान की सुविधा राज्‍य के अंदर भी, राज्‍य के बाहर भी और अब तो अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर अभी इंदौर-अबूधाबी की फ्लाइट 15 लाख रुपये प्रति उड़ान हमारी सरकार देकर हमारी आर्थिक ताकत का नया कीर्तिमान बना रही है. जब हम व्‍यापार, व्‍यवसाय के आधार पर भारत को आगे बढ़ते देखना चाहते हैं तो मध्‍यप्रदेश को पीछे नहीं रखना चाहते. मध्‍यप्रदेश सबसे पहले नंबर की कतार पर पहले नंबर पर खड़ा रहना चाहता है. हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं जब सभी प्रकार के विकास के काम कर रहे हैं, उन सारे कामों में हमारे आदिवासी भाई-बहनों के लिए अब आप बताओ एक विषय निकाल दिया, मैं नेता प्रतिपक्ष जी को बताना चाहूंगा कि छात्रावास के अंदर अगर हमारे शिक्षक जिनका काम पढ़ाना है वह पढ़ाना छोड़कर छात्रावास संभाल रहे हैं, तो हमने कहा जिनका काम पढ़ाना है वह क्‍लास में जाकर पढ़ाएं बाकी अधीक्षक चाहिए तो नये भर्ती कर लेंगे. उसमें क्‍या गलत है. हमारे लिए दोनों काम होना चाहिए. छात्रावास का संचालन भी होना चाहिए और क्‍लास रूम के अंदर पढ़ाई में छात्रों को कोई तकलीफ नहीं आना चाहिए. अनुसूचित जाति, जनजाति हो, सामान्‍य हो, पिछड़ा हो सबको साथ लेकर चलने का, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्‍वास, सबका प्रयास यह माननीय प्रधानमंत्री जी का ध्‍येय वाक्‍य है और मध्‍यप्रदेश सरकार शत् प्रतिशत उस ध्‍येय वाक्‍य को लेकर आगे चलने वाली है. यह हमारी संकल्‍प शक्ति है. एक नहीं ऐसी बहुत सारी बातें मैं कह सकता हूं. 27 परसेंट आरक्षण की बात आपने निकाल दी. 27 परसेंट आरक्षण की बात आपको मालूम है कि सर्वदलीय बैठक भी हमने बुलाई थी. यह अलग बात है कि कांग्रेस ने यह गलती की, न कोई आए, न दलील, न अपील, कोई कमेटी के बजाय सीधे विधान सभा के अंदर वह एक्‍ट पारित करा लिया और अब उस बात को लेकर चल रहे हैं. फिर भी हमने कहा न्‍यायालय में हम आपके साथ खड़े हैं. मैं तो धन्‍यवाद देना चाहूंगा माननीय प्रधान मंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी को जिन्‍होंने जातिगत जनगणना का आजादी के बाद पहली बार देश के अंदर यह जनगणना की घोषणा की है. जो उनके अंदर की प्रतिबद्धता बताती है. हर वर्ग के बारे में सोचना और हर वर्ग को लेकर चलने के लिए एक जो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए उस दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक बड़ा संकल्‍प जो फरवरी के बाद शुरू होने वाला है. आप बताइये इतनी सारी बातें हुई. एक नहीं कितने विभागों में प्रमोशन, एक साथ दो लाख से ज्‍यादा अधिकारी, कर्मचारियों के प्रमोशन हमारी सरकार के माध्‍यम से हुए. अब एक नहीं और बहुत सारी बात बता सकता हूं थोड़ा समय कम पड़ेगा, लेकिन मैं आज के अवसर पर पुन: माननीय अध्‍यक्ष महोदय को धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि यह हमारे विनियोग को आपने पारित कराया.

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे अपील भी करता हूं. बात आ गई है लेकिन एक और बात विधान सभा का जनकल्‍याणकारी सोलवीं विधान सभा के इस कार्यकाल के साथ हमारे दो वर्ष की एक पुस्‍तक का प्रकाशन भी अध्‍यक्ष महोदय के माध्‍यम से हुआ. जोरदार अभिनंदन करें हमारे माननीय विधान सभा अध्‍यक्ष जी का..(मेजों की थपथपाहट).. जिनके माध्‍यम से विधान सभा की अपनी गौरवशाली परम्‍परा और आपके मार्गदर्शन में सोलवीं विधान सभा में कई नई परम्‍परा आपने प्रारंभ की हैं. उन नई परम्‍परा में हमारे सभी पूर्व मुख्‍यमंत्री, सभी विधान सभा अध्‍यक्ष, नाम धन्‍य अलग-अलग प्रकार की हस्तियों का जन्‍मदिन मनाने की आपने परम्‍परा चालू की. इसी प्रकार से आपने सत्र के समापन में प्रश्‍न आमतौर पर नहीं होते थे लेकिन प्रथमत: सदस्‍यों को बोलने का मौका नहीं मिलता था, माता-बहनों को, खासकर बहनों को, महिलाओं को बोलने के लिए एक दिन पूरा उनके जिम्‍मे किया. लोक सभा अध्‍यक्ष जी ने समिति प्रणाली के माध्‍यम से जो 7 राज्‍यों को सबके विधान कई प्रकार से आपने उनके कार्य की जो तारीफ की है, उनके सुझावों के आधार पर प्रतिवेदन आपने तैयार कराया, मैं माननीय अध्‍यक्ष जी को बधाई देना चाहूंगा. निश्चित ही आपके मार्गदर्शन में तैयार इस प्रतिवेदन में सिफारिशों से पूरे देश के अंदर मध्‍यप्रदेश का मान बढ़ेगा, सम्‍मान बढ़ेगा. मैं आपको बधाई देना चाहता हूं और कितने बदलाव कर दिए आपने देखते-देखते. अपने हर टेबल के ऊपर यह जो आपने ई-फाइल के साथ हमारा सारा दस्‍तावेजीकरण इस तरह से कराया यह वाकई में  बधाई के पात्र हैं. हमारे इस सदन के अंदर हरेक सदस्‍य को लगता है कि हमारी अपनी विधान सभा सबसे अत्‍याधुनिक संसाधनों से युक्‍त है. अत्‍याधुनिक बहुमंजिला फ्लैट की आपने सौगात दिलाई है. ई-विधान के माध्‍यम से प्रभावी प्रगति की है. अधिकारी, कर्मचारी कितना अच्‍छा लगता है पहले मालूम नहीं पड़ता था कि यह विधायक है या नहीं, आपकी ड्रेस बता देती है कि हमारे अधिकारी, कर्मचारी विधान सभा के अलग दिख रहे हैं और हमारे बाकी विधायक अलग दिख रहे हैं. यह छोटी-छोटी लेकिन प्रत्‍येक महत्‍व की जिसमें ड्रेस कोड के माध्‍यम से और युवा विधायकों का सम्‍मेलन, ऐसे कई नवाचार आपके माध्‍यम से हुए हैं. मैं विशेष रूप से इन सब बातों के लिए आपको धन्‍यवाद देता हूं और अपनी बात को विराम देता हूं.

          अध्यक्ष महोदय, और एक बार फिर उम्मीद करेंगे इसी प्रकार  से आपके मार्गदर्शन में और यह बात सही है और इसके लिये मैं नेता प्रतिपक्ष और सभी सदस्यों को भी धन्यवाद देना चाहूंगा विचार गंगा में वह सारी बातें आयेंगी. यह भी बात सही है कि जो विकलांग या दिव्यांग जिनको कहा गया है ऐसे वर्ग के लिये अगले सत्र तक हम उनकी निश्चित रूप से राशि बढ़ाने वाले हैं . बहुत बहुत धन्यवाद.

 

 

 

 

 

 

9.04 बजे

सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिये स्थगित करने संबंधी प्रस्ताव.

          संसदीय कार्य मंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय)—माननीय अध्यक्ष महोदय, विधानसभा के वर्तमान सत्र के लिये निर्धारित समय में समस्त वित्तीय एवं अन्य आवश्यक शासकीय कार्य पूर्ण हो चुके हैं. अत: मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम  12(ख) के द्वितीय परंतुक के अंदर मैं प्रस्ताव करता हूं कि सदन की कार्यवाही अनिश्चित काल के लिये स्थगित की जाये.

          अध्यक्ष महोदय- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

                                                (प्रस्ताव स्वीकृत)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

9.10 बजे              सत्र का समापन

         अध्यक्ष महोदय –

            मुख्यमंत्री (डॉ.मोहन यादव) – माननीय अध्यक्ष महोदय, वैसे तो मैंने अपनी सारी बातें रख दीं. इस सत्र में अन्य सभी विषयों के लिए आपने पर्याप्त समय दिया. हमारी सरकार की ओर से मैं माननीय अध्यक्ष महोदय, पक्ष और विपक्ष के सभी माननीय सदस्यों का मैं हृदय से आभार मानता हूँ. हमारे शासन के सभी कर्मचारी/अधिकारियों ने यथायोग्य अपनी पूरी ताकत लगाकर सभी योजनाओं को पहुंचाने के साथ उनके दस्तावेजों के आधार पर हमारी अपनी बातों को रखने में मदद की, मैं उनका भी आभार मानता हूँ और खासकर के विधानसभा सचिवालय के सभी अधिकारी/कर्मचारियों और पत्रकार साथियों का मैं हृदय से आभार मानता हूँ.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) – माननीय अध्यक्ष महोदय, सर्वप्रथम मैं आपको धन्यवाद देता हूँ कि आपने माननीय सदस्यों को बोलने का पर्याप्त समय दिया. और सफल, धैर्यता, संवेदनशीलता के साथ इस सदन की कार्यवाही आपने चलाई, इसलिए मैं आपको सह्दयता से धन्यवाद देता हूँ. साथ में सभी माननीय सदस्य, मंत्रीगण, विधानसभा सचिवालय के कर्मचारी, अधिकारीगण, मध्यप्रदेश शासन के कर्मचारी, अधिकारीगण, रिपोर्टर्स, मीडियाकर्मी, मॉर्शल, सुरक्षाकर्मियों को, सभी सम्माननीयों को इस सत्र को लेकर धन्यवाद देना चाहता हूँ. इस सत्र को लेकर माननीय अध्यक्ष महोदय यह एक लोकतांत्रिक मंच है और मैं समझता हूं कि जो आवाज उठती है वह प्रदेश की उम्मीद रहती है आम-जनता की और जो संघर्ष कर रहे हैं उनकी उम्मीद रहती है कि हमारी आवाज वहां तक पहुंचे. निश्चित तौर से विपक्ष ने प्रदेश के तमाम मुद्दे किसान, महिला, युवा, कर्मचारी, व्यापारी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति पिछड़े वर्गों का आवाज उठाने का काम किया. मुद्दों को समाधान की प्रतीक्षा है. समाधान सरकार को करना है. तो मैं समझता हूं कि हमने जो बातें कहीं. हमें आलोचना करना नहीं आता है समाधान हम चाहते हैं उसमें सकारात्मक बहस हो. निश्चित तौर पर सरकार समस्याओं पर ध्यान देगी, ऐसा मुझे विश्वास है और मैं यह मानता हूं कि एक सरकार जितनी मजबूत रहे उसके साथ उतना मजबूत एक विपक्ष भी होना चाहिए. सत्‍ता का सरकार का दायित्‍व निर्णय लेना और हमारा दायित्‍व है निर्णयों की समीक्षा करना. अध्‍यक्ष जी यही शायद जैसे आपने अपने उद्बोधन में कहा कि यही लोकतंत्र की आत्‍मा है मैं यह भी कहना चाहता हूं कि सुझावों को महत्‍वपूर्ण प्रश्‍नों को गंभीरता से सरकार विचार करें, और राजनीतिक लाभ के बजाए उसे सामाजिक रूप से कैसे हम हर समाज के वर्ग को राहत पहुंचा सके, योजनाओं के माध्‍यम से दे सके. उस पर मैं समझता हूं कि सरकार को विचार करना चाहिए. निश्चित तौर से अध्‍यक्ष महोदय यह भी कहना चाहता हूं कि जो सदन में आश्‍वासन दिए जाते हैं वह कागजों पर नहीं रहे, आश्‍वासन पूरे होना चाहिए. इससे जनता का विश्‍वास सरकार के प्रति बढ़ेगा और मैं यही कहना चाहता हूं कि सभी विधायक अपने अपने क्षेत्रों में लौट रहे हैं, लेकिन जन आकांक्षाओं और उनकी उम्‍मीदों को लेकर लौटेंगे. सरकार उनकी पूरी योजना और सुविधाओं का लाभ पहुंचाएगी,ऐसा मैं समझता हूं. अंत में मैं यही कहना चाहता हूं कि :

                    तकरार भी जरूरी थी, इकरार भी जरूरी था

                   तकरार भी जरूरी थी, इकरार भी जरूरी था

                   सदन का हर पल लोकतंत्र के लिए जरूरी था.

                   मदभेदों की गूंज में भी एक संदेश साफ है

                   मध्‍यप्रदेश का हित सबसे ऊपर था.

                   जय हिन्‍द, जय मध्‍यप्रदेश, धन्‍यवाद.

 

9.24 बजे                           राष्‍ट्रगान ''जन-गण-मन'' का समूहगान

          अध्‍यक्ष महोदय-  अब राष्‍ट्रगान होगा.

(सदन के माननीय सदस्‍यों द्वारा राष्‍ट्रगान ''जन-गण-मन'' का समूहगान किया गया.)

 

 

  9.25 बजे

          सदन की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्‍थगित किया जाना: घोषणा 

          अध्‍यक्ष महोदय-  विधान सभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्‍थगित.

          रात्रि 9.25 बजे विधान सभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्‍थगित की गई.

 

 

भोपाल                                                                                               अरविन्‍द शर्मा,

दिनांक: 22 जुलाई2026                                                                      प्रमुख सचिव,

                                                                                                    मध्‍यप्रदेश विधान सभा.