मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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पंचदश विधान सभा त्रयोदश सत्र

 

 

दिसंबर, 2022 सत्र

 

बुधवार, दिनांक 21 दिसंबर, 2022

 

(30 अग्रहायण, शक संवत्‌ 1944)

 

 

[खण्ड- 13 ] [अंक- 3]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

बुधवार, दिनांक 21 दिसंबर, 2022

 

(30 अग्रहायण, शक संवत्‌ 1944)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (श्री गिरीश गौतम) पीठासीन हुए.}

 

 

हास-परिहास

अध्यक्ष महोदय--नरोत्तम जी जब मैं सदन में आता हूं तो गोविंद सिंह जी मेरी तरफ नहीं देखते हैं आपकी तरफ देखते हैं. जब मैं दो तीन बार प्रणाम करता हूं तभी जवाब देते हैं.(हंसी)

डॉ.नरोत्तम मिश्र--अध्यक्ष महोदय, नजर बाद में नजर में उनको पढ़ते देखा था. नजर पड़ी जब उनके ऊपर नजर को झुकते देखा था. (हंसी)

श्री सज्जन सिंह वर्मा--यह यक्ष प्रश्न सदियों तक गूंजता रहेगा. (हंसी)

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

 

वन विभाग के कार्यों की जानकारी

[वन]

1. ( *क्र. 938 ) श्री अनिल जैन : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या निवाड़ी विधानसभा क्षेत्र में विकास हेतु एवं आदिवासियों की मूलभूत सुविधाओं हेतु सरकार के द्वारा वन विभाग के विभिन्न कार्य स्वीकृत किये गए हैं? (ख) प्रश्‍नांकित (क) अनुसार यदि हाँ, तो विगत 03 वर्षों में कौन-कौन से मद से कितनी-कितनी राशि के कौन-कौन से कार्य स्वीकृत किये गये थे? कार्यवार, राशिवार एवं किन-किन स्थानों पर उक्त कार्य किये गये? सम्पूर्ण जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) उक्त स्वीकृत कार्यों में से कितने कार्य पूर्ण, अपूर्ण एवं प्रगतिरत हैं? अपूर्ण कार्यों को कब तक पूर्ण कर लिया जायेगा? उक्त कार्यों की कितनी-कितनी राशि का भुगतान किया गया है, कितनी राशि भुगतान हेतु शेष है तथा सत्यापनकर्ता अधिकारी का नाम एवं निर्माण कार्य एजेंसी का नाम बतावें।

वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जी हाँ। (ख) एवं (ग) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है।

 

श्री अनिल जैन--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान क्षेत्र में वन विभाग के द्वारा जो विकास के कार्य कराये गये हैं उसकी सम्पूर्ण जानकारी माननीय मंत्री जी के द्वारा मुझे उपलब्ध करा दी गई है उसके लिये धन्यवाद देता हूं. लेकिन इसमें कई कार्य ऐसे भी हैं. जो पूर्ण नहीं हुए हैं उनको भी पूर्ण बता दिया गया है. कई कार्य ऐसे भी हैं जो कागजों पर भी हुए हैं उनका सत्यापन भी कर दिया गया है. माननीय मंत्री जी से चाहता हूं कि इन सारे विकास कार्य जो कराये गये हैं उनकी सम्पूर्ण जांच करायेंगे ?

कुंवर विजय शाह--अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय विधायक जी के प्रश्नानुसार जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया है. इन सारे कामों की लिस्ट दी गई है. विभागीय कार्य थे. विभाग ने ही सत्यापन कराया केवल कुछ 4-5 कार्य रह गये थे. कोविड के कारण विकास कार्यों में लेट हुआ है. लेकिन आने वाले एक से डेढ़ महीने में सारे काम कम्पलीट करा दिये जायेंगे.

अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री जी मैंने उसमें देखा है आपके उसमें 46 काम हैं.46 में से 9 काम प्रगतिशील हैं, 2 काम अपूर्ण हैं बाकी कामों को आपने कहा कि पूर्ण करा देंगे. विधायक जी का कहना है कि जिन कामों को आपने पूर्ण लिखा है वह मौके पर कोई काम हुआ ही नहीं है. उनका कहना है कि इसकी जांच करा लेंगे क्या ?

कुंवर विजय शाह--अध्यक्ष महोदय,7 दिन के अंदर इनकी जांच करा करके विधायक जी को जानकारी उपलब्ध करवा देंगे.

अध्यक्ष महोदय--विधायक जी भी उस जांच में शामिल हैं.

कुंवर विजय शाह-- जी अध्यक्ष महोदय.

2. ( *क्र. 951 ) श्री धर्मेन्द्र भावसिंह लोधी : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या दमोह जिले की जबेरा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत पारना जलाशय के निर्माण हेतु तीन बार निविदाओं का आमंत्रण किया गया है? निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात निर्माण एजेंसी निर्धारित की गई, किंतु एजेंसी द्वारा कार्य न किए जाने के कारण तीन बार निविदा प्रक्रिया निरस्त हुई है, इसका क्या कारण है? क्या निविदा प्रक्रिया के नियमों में शिथिलता व सरलीकरण की आवश्यकता है? चौथी बार निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर कब तक निर्माण कार्य पूर्ण किया जायेगा? (ख) जल संसाधन विभाग, उप संभाग तेंदूखेड़ा के अंतर्गत झापन नाला जलाशय, देवरी जलाशय आदि योजनाएं मुख्य अभियंता जल संसाधन विभाग भोपाल में लंबित हैं? यदि हाँ, तो उक्त योजनाओं पर आज दिनांक तक क्या कार्यवाही की गई है? (ग) उक्त योजनाओं की विभागीय स्वीकृतियां कब तक पूर्ण की जावेगी?

जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसीराम सिलावट)--

(ख) तथ्‍यात्‍मक स्थिति यह है कि झापन नाला जलाशय योजना की हाइड्रोलॉजी की स्वीकृति एवं देवरी जलाशय योजना की डी.पी.आर. अधीक्षण यंत्री, जल संसाधन मण्डल सागर कार्यालय में परीक्षणाधीन होना प्रतिवेदित है। (ग) शासन स्‍तर पर डी.पी.आर. प्राप्‍त होने पर गुण-दोष के आधार पर स्‍वीकृति हेतु निर्णय लिया जाना संभव होगा। स्वीकृति हेतु निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

श्री धर्मेन्‍द्र भाव सिंह लोधी:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक हमारे क्षेत्र में बहुत ही महत्‍वपूर्ण पारना जलाशय परियोजना है, जो लंबे समय से लम्बित पड़ी है. बीच-बीच में उसमें निविदाएं आमंत्रित होती हैं और टेण्‍डर भी लगते हैं. लेकिन तीन बार टेण्‍डर लगने के बाद वह निरस्‍त हो चुके हैं और फिर नये व्‍यक्ति के लिये टेण्‍डर लगने की प्रक्रिया शुरू होती है. मैं मंत्री महोदय जी से जानना चाहता हूं कि यह बार-बार टेण्‍डर लगते हैं और फिर निरस्‍त हो जाते हैं उसके कारण हमारे विधान सभा क्षेत्र में यह जो सिंचाई की परियोजना है, इससे लोगों में बड़ा आक्रोश है तो मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि यह प्रक्रिया कब तक पूर्ण होगी और हमारे विधान सभा क्षेत्र के लोगों को कब तक राहत मिलेगी ?

श्री तुलसीराम सिलावट:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य का प्रश्‍न सही है. पारना जलाशल के निर्माण में तीन बार निविदाएं आमंत्रित की गयी हैं. पहली बार दिनांक 20, 2017 में निविदा आमंत्रित की गयी थी, किन्‍तु वन भूमि की स्‍वीकृति न होने के कारण निविदा को निरस्‍त करना पड़ा, दूसरी बार जून, 2019 में निविदा आमंत्रित की गयी, किन्‍तु मात्र एक मात्र एक टेण्‍डर निविदा होने के कारण नियमानुसार निविदा को निरस्‍त करना पड़ा, इसके पश्‍चात पुन: तीसरी बार जनवरी, 2022 को निविदा आमंत्रित की गयी, जिसे जुलाई, 2022 में खोला गया. शीघ्र निमार्ण एजेंसी से अनुबंध के बाद कार्य प्रारंभ किया जायेगा.

श्री धर्मेन्‍द्रभाव सिंह लोधी:-माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शीघ्रता बता दें ?

अध्‍यक्ष महोदय:- मंत्री जी आगे बता रहे हैं. वह जवाब दे रहे हैं,आप बैठ जाइये.

श्री तुलसीराम सिलावट:-माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सम्‍माननीय सदस्‍य को यह विश्‍वास दिलाना चाहता हूं कि एक सप्‍ताह के भीतर इसका अनुबंध कर लिया जायेगा और सम्‍माननीय विधायक जी 24 जनवरी को जाकर भूमिपूजन भी कर लेना.

अध्‍यक्ष महोदय:- बस ठीक है.

श्री धर्मेन्‍द्र भाव सिंह लोधी:- अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के ख में..

अध्‍यक्ष महोदय:- नहीं, आपके प्रश्‍न का निराकरण हो गया है. मंत्री जी ने पूरा तो बता दिया है.

श्री धर्मेन्‍द्रभाव सिंह लोधी:- माननीय मंत्री मैं, आपको धन्‍यवाद ज्ञापित करता हूं और मेरे प्रश्‍न के ख में यह पूछा है कि तेंदूखेड़ा के अंतर्गत झापन जलाशल..

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा:- टेण्‍डर हो गया ?

श्री तुलसीराम सिलावट:- सज्‍जन जी, मैं आपको बता दूं कि हो गया है और अनुबंध भी हो गया है .

श्री धर्मेन्‍द्रभाव सिंह लोधी:- माननीय दूसरा पार्ट भी है कि हमारे यहां झापन नाला जलाशय और देवरी जलाशय यह दो मुख्‍य परियोजनाएं हैं, जो हमने दी हैं और बहुत समय से लम्बित हैं. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि कब तक इनकी स्‍वीकृति मिलेगा और कब तक यह काम पूरे होंगे. ?

श्री तुलसीराम सिलावट:-अध्‍यक्ष महोदय, जलाशय का निर्माण किया जाना बहुत ही जिम्‍मेदारी का काम है, दोनों योजनाओं का परीक्षण किया जा रहा है, सभी तकनीकी परीक्षण किये जाने के बाद डीपीआर तैयार कर प्रशासकीय स्‍वीकृति प्रदान की जायेगी. यह दोनों योजना को विभाग से यथाशीघ्र स्‍वीकृति प्रदान की जायेगी, इसी तीन माह के समय में हम कार्य चालू करेंगे.

श्री धर्मेन्‍द्रभाव सिंह लोधी:- धन्‍यवाद, माननीय मंत्री जी.

 

 

 

नहरों की लाईनिंग का गुणवत्‍ताहीन कार्य

[जल संसाधन]

3. ( *क्र. 919 ) श्री विजयपाल सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र सोहागपुर के अंतर्गत वर्ष 2022 तक कितनी वृहद/मध्‍यम/लघु सिंचाई परियोजनायें संचालित हैं? नाम सहित जानकारी देवें। (ख) इन परियोजनाओं में जो लाईनिंग एवं पक्‍कीकरण का कार्य हुआ है, वह अत्‍यन्‍त ही गुणवत्‍ताहीन है, इस पर विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की जा रही है? (ग) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा नहरों का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं होने एवं गुणवत्‍ताहीन कार्य होने के संबंध में विभाग को पत्र प्रेषित किये गये थे? यदि हाँ, तो कब-कब तथा प्रश्‍नकर्ता के पत्र पर विभाग द्वारा प्रश्‍न दिनांक की स्थिति में कब-कब और क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? सम्‍पूर्ण विवरण सहित बतावें। (घ) बाईं तट नहरों का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं होने तथा गुणवत्‍ताहीन कार्य होने से कौन-कौन अधिकारी एवं एजेन्‍सी जिम्‍मेदार हैं? अधिकारी एवं ठेकेदार का नाम बताते हुये क्‍या विभाग द्वारा उनके विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो क्‍या?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) विधानसभा क्षेत्र सोहागपुर के अंतर्गत वर्ष 2022 तक तवा वृहद परियोजना की दायीं तट नहर 0 से 07.10 कि.मी. तक दायीं तट नहर की पिपरिया शाखा नहर के 0 से 28.29 कि.मी. तक, बागरा शाखा नहर के कि.मी. 0 से कि.मी. 23.59 तक बायीं तट नहर प्रणाली के 0 से 23.47 कि.मी. तक तथा एक गुड्डीखेड़ा लघु जलाशय संचालित होना प्रतिवेदित है। (ख) नहर लाईनिंग एवं पक्कीकरण का कार्य मापदण्डों के अनुरूप कराया गया है, जिस स्थान पर गुणवत्ताहीन कार्य हुआ था, वहाँ लाईनिंग के कार्य को तोड़कर ठेकेदार से स्वयं के व्यय पर पुनः लाईनिंग का कार्य कराया जाना प्रतिवेदित है। (ग) अभिलेख अनुसार कार्य पूर्ण नहीं होने तथा गुणवत्ताहीन कार्य से संबंधित माननीय सदस्य का कोई पत्र शासन स्तर पर विभाग में प्राप्त नहीं होना प्रतिवेदित है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) बायीं तट नहर का कार्य पूर्ण हो चुका है। बायीं तट नहर की आर.डी. 6523 से 23470 मीटर के मध्य लाईनिंग कार्य में कुछ स्थान पर गुणवत्ता अनुसार कार्य नहीं पाये जाने पर तत्काल कार्यवाही करते हुये उक्त स्थानों की लाईनिंग को तोड़कर संबंधित ठेकेदार मेसर्स सोरठिया वेलजी रतनम एण्ड कम्पनी से स्वयं के व्यय पर पुनः विभागीय मापदण्ड एवं गुणवत्तानुसार कार्य संपादित कराया जाना प्रतिवेदित है। कार्य से संबंधित अधिकारियों को जाँच उपरांत दोषी पाये जाने पर प्रमुख अभियंता जल संसाधन विभाग के आदेश दिनांक 08.02.2018 द्वारा दण्डित कर एक-एक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकी जाना प्रतिवेदित है। दोषी अधिकारी के नाम निम्नानुसार है :- (1.) श्री अरविंद कुमार यादव, सहायक यंत्री। (2.) श्री एम. एल. चन्द्रोल, उपयंत्री। (3.) श्री बी. के. उपाध्याय, उपयंत्री। (4) श्री एन.के. सूर्यवंशी, उपयंत्री।

श्री ठाकुर दास नागवंशी:- माननीय अध्‍यक्ष जी के माध्‍यम से मैं, माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि नहर की लाइनों की पक्‍कीकरण का कार्य गुणवत्‍ताहीन था. अधिकारियों और ठेकेदार के खिलाफ उन्‍होंने जो कार्यवाही की है, उसके मैं आभार करता हूं. परन्‍तु उन्‍होंने यह कहा है कि जिस ठेकेदार ने गुणवत्‍ताहीन काम किया है वह स्‍वयं के व्‍यय पर उन लाइनों को ठीक कराया जायेगा.

मैं माननीय मंत्री जी से इतना ही जानना चाहता हूं कि समय -सीमा और अवधि बता दें ?

श्री तुलसीराम सिलावट:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदस्‍य की पीड़ा से मैं वाकिफ हूं. आप निश्चिंत रहें विधायक जी ऐसा आपको लगता है कि कहीं भी खराब काम हुआ है तो किसी वरिष्‍ठ अधिकारी को आपके साथ,जो भी अधिकारी उसमें दोषी पाया जायेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी.

अध्‍यक्ष महोदय:- ठीक है.

श्री ठाकुर दास नागवंशी:- आपको पुन: धन्‍यवाद. मैं इतना चाहता हूं लाइनों का काम कब तक पूरा किया जायेगा आप समय-सीमा बता दें ?

श्रीतुलसीराम सिलावट:- अतिशीघ्र.

अनुग्रह सहायता के लंबित प्रकरण

[श्रम]

4. ( *क्र. 814 ) श्री बाबू जन्‍डेल : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सम्बल योजनान्तर्गत जनपद पंचायत श्योपुर में सामान्य मृत्यु के सामान्य अनुग्रह सहायता के पात्र हितग्राही 202 तथा दुर्घटना मृत्यु के 15 प्रकरण स्वीकृत होकर भुगतान हेतु लंबित हैं? यदि हाँ, तो प्रकरणवार (हितग्राहियों का), दिनांकवार कब से लंबित हैं? अवगत करायें। (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार स्वीकृत एवं पात्र प्रकरणों का भुगतान लंबित रहने का क्या कारण है? (ग) क्या ज.पं. श्योपुर में लम्बे समय से लंबित पात्र प्रकरणों की भांति ही श्योपुर जिले के समीपस्थ जिले शिवपुरी की ज.पं. करैरा, पोहरी या अन्य जनपदों में भी उक्त अवधि का भुगतान लंबित है? यदि नहीं, तो क्यों? क्या उक्त जनपदों में भुगतान किये जाने के नियम मापदण्ड पृथक से बने हैं? यदि हाँ, तो अवगत करावें। (घ) प्रश्‍नांश (क) अनुसार ज.पं. श्योपुर में अनुग्रह सहायता के लंबित प्रकरणों का भुगतान कब तक किया जावेगा? यदि नहीं, तो कारण बतावें।

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) जी नहीं। वस्तुतः जनपद पंचायत, श्योपुर में सामान्य मृत्यु के 190 प्रकरण भुगतान हेतु, 13 प्रकरण पात्रता सत्यापन हेतु लंबित है एवं दुर्घटना मृत्यु के 13 प्रकरण भुगतान हेतु एवं पात्रता सत्यापन हेतु 02 प्रकरण लंबित हैं, जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) स्वीकृत एवं पात्र प्रकरणों में बजट उपलब्धता अनुसार भुगतान किया जाता है। (ग) जी नहीं। पूरे प्रदेश में समान नियम से भुगतान किया जाता है। (घ) स्वीकृत एवं पात्र प्रकरणों में बजट उपलब्धता अनुसार भुगतान किया जाता है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्री बाबू जण्‍डेल:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे द्वारा पूछे गये प्रश्‍न क्रमांक- 814 के उत्‍तर में माननीय मंत्री महोदय ने स्‍वीकार किया है कि जनपद पंचायत श्‍योपुर में सम्‍बल योजना अंतर्गत सामान्‍य मृत्‍यु अनुग्रह सहायता 190 प्रकरण 2 लाख वाले 3 करोड़ 80 लाख रूपये दुर्घटना मृत्‍यु अनुग्रह सहायता के 13 प्रकरण, 4 लाख रुपये वाले, कुल राशि 52 लाख रुपये, इस प्रकार पात्र 203 हितग्राहियों को राशि 4 करोड़ 32 लाख रुपये का भुगतान, विगत 2 वर्ष से अधिक समय से, बजट उपलब्‍ध नहीं होने से लंबित हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे मुख्‍यमंत्री जी प्रदेश में जहां भी जाते हैं, हर सभा में, आयोजन में दावा करते हैं कि शासन की गरीब हितैषी योजनाओं के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी.

अध्‍यक्ष महोदय- जन्‍डेल जी, आप अपना प्रश्‍न पूछें ?

श्री बाबू जन्‍डेल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये प्रकरण 2 वर्षों से लंबित हैं, ये कब तक किये जायेंगे. मेरे पड़ोसी जिले शिवपुरी में राशि लोगों को मिली है. अन्‍य जिलों में राशि प्रभावितों के खाते में डाली जा रही है. मैं कांग्रेस विधायक हूं इसलिए मेरे जिले के साथ भेदभाव हो रहा है, मेरे जिले में पैसे खाते में कब तक डलेंगे ?

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि हमारे माननीय सदस्‍य ने अपनी बात रखी है, 190 प्रकरण पहले भुगतान हेतु लंबित थे. जिसमें 13 प्रकरण सत्‍यापन हेतु लंबित थे लेकिन उन सभी प्रकरणों का सत्‍यापन हो गया है. कुल 203 प्रकरण हैं, जो स्‍वीकृत हैं. इसी तरह 15 दुर्घटना के प्रकरण थे, जिनमें से 13 प्रकरण सत्‍यापित हो चुके थे और 2 का सत्‍यापन होना था लेकिन अब 15 सत्‍यापित हो चुके हैं और वे भी स्‍वीकृत हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्‍य ने कहा कि उनके जिले में भुगतान नहीं हो रहा है जबकि मैं, श्‍योपुर नगर पालिका का बता दूं कि इनके यहां पर जनपद में कुल-मिलाकर 14 करोड़ रुपये के करीब भुगतान हुआ है. जनपद पंचायत पोहरी और करैरा में क्रमश: 1.7 करोड़ और 1.9 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है. जहां तक विधायक जी के स्‍वीकृत प्रकरणों के भुगतान का विषय है, इन्‍हें हमने अपनी ओर से बढ़ाया है और जैसे ही वित्‍त विभाग से हमें राशि उपलब्‍ध होगी, हम इसका भुगतान कर देंगे.

श्री बाबू जन्‍डेल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे इस बात से अवगत करवाया जाये कि जनपद पंचायत श्‍योपुर में यह राशि कब तक आवंटित हो जायेगी.

अध्‍यक्ष महोदय- मंत्री जी कह तो रहे हैं कि जैसे ही वित्‍त विभाग से राशि उपलब्‍ध हो जायेगी, हम दे देंगे.

श्री बाबू जन्‍डेल- धन्‍यवाद.

खनिज प्रतिष्‍ठान निधि

[खनिज साधन]

5. ( *क्र. 911 ) श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्तमान में प्रदेश में जिला खनिज निधि की कुल कितनी राशि संग्रहित है? जिलेवार जानकारी उपलब्‍ध करावें। (ख) जिला अनूपपुर में वर्ष 2018 से प्रश्‍न दिनांक तक खनिज प्रतिष्‍ठान मद से कुल कितनी राशि जिले की रॉयल्‍टी के नाम पर प्राप्‍त हुई? वर्षवार प्राप्‍त राशि की जानकारी उपलब्‍ध करावें। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के अनुसार अनूपपुर जिले की पुष्‍पराजगढ़, कोतमा एवं अनूपपुर विधानसभा क्षेत्र में जनसंख्‍या और स्‍थानीय आवश्‍यकतानुसार कितनी-कितनी राशि के कौन-कौन से निर्माण उक्‍त निधि से स्‍वीकृत किये गये? कार्य का स्‍वरूप सहित वर्षवार, विधानसभा क्षेत्रवार कार्य की जानकारी उपलब्‍ध करावें। (घ) उक्‍त अवधि एवं जिले में खनिज प्रतिष्‍ठान मद से कितने प्राथमिक, माध्‍यमिक, हायर सेकेन्‍डरी भवनों का निर्माण, मरम्‍मत, साज सज्‍जा, रख-रखाव पर कितनी राशि व्‍यय की गई? वर्षवार विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी उपलब्‍ध करावें। (ड.) विधानसभा क्षेत्र पुष्‍पराजगढ़ में स्‍थानीय विधायक की सिफारिश पर कौन-कौन से कार्य उक्‍त अवधि में स्‍वीकृत किये गये? स्‍वीकृत न होने के क्‍या कारण रहे? उक्‍त जिले में उक्‍त अवधि में खनिज प्रतिष्‍ठान निधि का कहां-कहां उपयोग किया गया तथा कौन-कौन से कार्यों को किया गया? कौन से कार्य पूर्ण हो गये तथा कौन से कार्य अपूर्ण हैं? अपूर्ण रहने के कारण सहित विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी उपलब्‍ध करावें।

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) प्रदेश में जिला खनिज निधि की कुल राशि रूपये 5461.615 करोड़ संग्रहित है। जिलेवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ पर दर्शित है। (ख) अनूपपुर जिला खनिज प्रतिष्ठान मद में वर्ष 2018 से प्रश्‍न दिनांक तक रॉयल्टी जमा करने का प्रावधान न होने से रॉयल्टी के नाम पर कोई राशि प्राप्त नहीं हुई है। अतः शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के उत्तर अनुसार प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) उक्त अवधि में वर्ष 2018 से प्रश्‍न दिनांक तक जिला खनिज प्रतिष्ठान मद से प्रश्‍नांश अनुसार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब पर दर्शित है। (ड.) विधानसभा क्षेत्र पुष्पराजगढ़ में स्थानीय विधायक की सिफारिश पर स्वीकृत किये गये कार्यों की सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-स पर दर्शित है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। प्रश्‍नांश अनुसार अनूपपुर जिले में वर्ष 2018 से प्रश्‍न दिनांक तक जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि के उपयोग के संबंध में वांछित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-द पर दर्शित है।

अध्‍यक्ष महोदय- मार्को जी, आप अपनी बात प्रश्‍न पर अधिक आधारित रखियेगा.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, आपका संरक्षण चाहता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय- मैं, पूरा संरक्षण दूंगा लेकिन कल वाली बात याद मत कीजियेगा, आज सीधे प्रश्‍न कीजियेगा.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न खनिज प्रतिष्‍ठान मद से है. मुझे विभाग से जो उत्‍तर प्राप्‍त हुआ है, उसमें लिखा गया है कि अनूपपुर जिला खनिज प्रतिष्‍ठान मद में वर्ष 2018 से प्रश्‍न दिनांक त‍क रॉयल्‍टी जमा करने का प्रावधान न होने से रॉयल्‍टी के नाम पर कोई राशि प्राप्‍त नहीं हुई है. यह आपने उत्‍तर दिया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे परिशिष्‍ट-स में, आपने उत्‍तर दिया है, पुष्‍पराजगढ़ विधान सभा के लिए जो राशि आपने खनिज प्रतिष्‍ठान मद से स्‍वीकृत की है, वर्ष 2018-19 में निरंक, वर्ष 2020-21 में निरंक, वर्ष 2021-22 में निरंक और वर्ष 2019-20 में मात्र 16 लाख रुपये पुष्‍पराजगढ़ विधान सभा को मिले हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खनिज प्रतिष्‍ठान मद की सब धूल-धकड़ पुष्‍पराजगढ़ विधान सभा के लोग खायें और "" में मुझे जो जानकारी मिली उसमें आपने 421 करोड़ रुपये की राजस्‍व वसूली की बात लिखी है और "" में आप कह रहे हैं कि हमारे यहां राजस्‍व वसूली का कोई नियम ही नहीं है. हमने विभाग के मंत्री को आवेदन, निवेदन किया है कि मेरी पुष्‍पराजगढ़ विधान सभा आदिवासी क्षेत्र है, जहां जंगल-पहाड़ों में लोग निवास करते हैं. वहां मुझे पानी दे दें, रोड, पुल-पुलिया की कनेक्टिविटी दे दें, वहां जो हाई और हायर सेकण्‍डरी स्‍कूल जर्जर स्थिति में हैं, उनको कृपया इस राशि से बनवाने की कृपा करें.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब मंत्री महोदय जी ने नहीं सुना तो हमने माननीय मुख्‍यमंत्री जी को भी आवेदन दिया और हमने प्रश्‍न में यह पूछा कि प्रश्‍नकर्ता विधायक की अनुशंसा पर पुष्‍पराजगढ़ विधान सभा में आपने कौन-कौन से काम किये मुझे उसकी जानकारी दे दें. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आम की जानकारी मांग रहा हूं और मुझे इमली की जानकारी मिल रही है. मैं आपसे निवेदन क‍रता हूं कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी को अनुसूचित जनजाति बाहुल्‍य क्षेत्र विभिन्‍न निर्माण कार्यों के लिए जो हमने आवेदन दिया और जिसको विभाग ने पंजीकृत किया सी.एम. साहब के यहां पत्र पंजीयन क्र. 2185/CMS/MLA/088/2022/ पत्र पंजीयन क्र. 2184/CMS/MLA/088/2022/ पत्र पंजीयन क्र. 2183/CMS/2022 पत्र पंजीयन क्र. 2182/CMS/MLA/088/2022/ पत्र पंजीयन क्र. 1934/CMS/MLA/088/2022/ पत्र पंजीयन क्र. 1934/CMS/MLA/088/2022 के तहत हमने आवेदन माननीय मुख्‍यमंत्री जी को दिया. मैं खनिज मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि मेरे इन पत्रों पर क्‍या-क्‍या कार्यवाही हुई? कितनों का स्‍वीकृत हुआ ? कितनों का नहीं हुआ और कब त‍क स्‍वीकृत होगा कृपया यह बताने का कष्‍ट करें?

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक रायल्‍टी की बात की है जो प्रश्‍न था उसमें रायल्‍टी लिख गया था मैं मानता हूं कि वह त्रुटिपूर्ण होगा क्‍योंकि आपने डी.एम.एफ. की बात की है तो डी.एम.एफ. की राशि जो वर्षवार है वह करीब हमने वर्ष 2018-19 में 32.80 करोड़ रुपए, वर्ष 2019-20 में 57.77 करोड़ रुपए, वर्ष 2020-21 में 44.19 करोड़ रुपए, वर्ष 2021-22 में 76.46 करोड़ रुपए, वर्ष 2022-23 में 35.32 करोड़ रुपए इस तरह से कुल 246.53 करोड़ राशि हमें डी.एम.एफ. के माध्‍यम से प्राप्‍त हुई है. जहां तक आपके कार्यों की बात है आपने पुष्‍पराजगढ़ की बात की है.

अध्‍यक्ष महोदय-- मंत्री जी इसका मतलब है कि जो शून्‍य कह रहे हैं वह क्‍या डी.एम.एफ. नहीं रायल्‍टी की बात कर रहे हैं.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जी हां वह रायल्‍टी की बात थी जो उन्‍होंने बोला था उसमें इसलिए उस बात को कहा. दूसरी बात पुष्‍पराजगढ़ में जो बात कही गई है वह बात में बता दूं जो इनके काम हैं जो स्‍वीकृत किये गए हैं क्‍योंकि इन्‍होंने दो प्रश्‍न लगाए हैं एक स्‍कूल बाउण्‍ड्री और उसकी सुविधाओं को लेकर की हमारे स्‍कूल शिक्षा में क्‍या पैसा दिया गया और दूसरा अन्‍य कार्यों को लेकर किया गया है तो अन्‍य कार्यों में वर्ष 2018-19 में इनके जो कार्य स्‍वीकृत हुए हैं वह 22 कार्य हैं जिसमें कि 178 लाख रुपए के करीब राशि स्‍वीकृत हुई है, वर्ष 2019-20 में 42 कार्य हैं जिसके लिए 263 लाख रुपए की राशि स्‍वीकृत हुई है, वर्ष 2020-21 में 15 कार्य हैं जिसमें 18 लाख रुपए स्‍वीकृत हुए हैं और वर्ष 2021-22 में 36 कार्य हैं जिसमें 439 लाख रुपए स्‍वीकृत हुए हैं और इसी तरह से आपने जो स्‍कूल शिक्षा की बाउण्‍ड्री और हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूलों के सुदृढ़ीकरण की भी बात की है उसमें भी हमने वर्ष 2019-20 में 9 कार्य स्‍वीकृत हुए जिसके लिए 21.20 लाख रुपए दिये गये, वर्ष 2021-22 में 36 कार्य स्‍वीकृत हुए जिसमें 439.21 लाख रुपए आपको पुष्‍पराजगढ़ के लिए दिए गए इस तरह से जहां-जहां आपने कह रहे हैं कि हमारे पुष्‍पराजगढ़ में कहीं पर भी पैसा नहीं दिया गया है तो डी.एम.एफ. के माध्‍यम से आपके पैसे दिये गये हैं. जहां तक आपने जो लेटर बताए हैं कि हमने जो विभिन्‍न पत्र दिये हैं आपके उन पत्रों के माध्‍यम से आपने करीब 98 कार्य दिये चाहे वह हमारे डी.एम.एफ. के माध्‍यम से स्‍वीकृत करने के लिए 98 कार्य में जिसमें से आपके 4 कार्य स्‍वीकृत हुए हैं और बाकी 94 कार्य अस्‍वीकृत हुए हैं, लेकिन उसका मूल कारण हम नहीं हैं. वहां के जो आपके प्रभारी मंत्री हैं और वहां पर आप स्‍वयं मेम्‍बर हो क्‍योंकि वहां पर दो बोर्ड हैं गर्वनिंग बॉडी को बोर्ड प्रभारी मंत्री जो चेयरमेन हैं और उसके एग्‍जीक्‍यूटिव बॉडी के चेयममेन कलेक्‍टर होते हैं तो वहां पर जो स्‍वीकृतियां मिली हैं उस हिसाब से काम स्‍वीकृत हुए हैं और इनकी एजेंसी जिला पंचायत के सी.ई.ओ. रहते हैं वह काम कराते हैं इस तरह से इनका पूरा काम है.

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को -- माननीय अध्यक्ष महोदय, डीएमएफ को स्वीकृत करने का पहले नियम यह था कि जिला स्तर पर जो बॉडी है वह और विधायकगण, कलेक्टर, सीईओ जिला पंचायत इसका निर्णय लिया करते थे. प्रभारी मंत्री का आपने जिक्र किया है. आपने लिखा है कि स्वीकृत किया जाता है आदेश जारी करें. प्रभारी मंत्री जी बैठे हुए हैं. जिन कामों का मैं उल्लेख कर रहा हूँ.

माननीय अध्यक्ष महोदय, वह माँ नर्मदा का उद्गम स्थल है, सैंकड़ों लोग पुष्पराजगढ़ से माँ नर्मदा की परिक्रमा करते हैं. माननीय मुख्यमंत्री जी और मंत्री जी से मैंने निवेदन किया था कि वे गांव में लोगों के रुकने की व्यवस्था कर दें. हैण्डपम्प लगा दें. सौर ऊर्जा से वहां पर लाइट की व्यवस्था हो जाए. जो लोग परिक्रमा करते हैं उनको एक आश्रय मिल जाए. सरकार माँ नर्मदा के नाम का उपयोग कर रही है लेकिन जब हम सुविधा देने की बात करते हैं तो इनके पास पैसा नहीं हैं. यह 4-5 लाख रुपए का भवन नहीं बना पा रहे हैं. लोग ठण्ड में ठिठुर रहे हैं, बरसात में भीग रहे हैं. रोड, पुल-पुलिया जिसमें कमीशनबाजी ज्यादा हो उन कामों को डीएमएफ से स्वीकृत किया जाता है. हमने पेयजल की मांग की थी.

अध्यक्ष महोदय -- मार्को जी अभी आपको ज्यादा लम्बा भाषण करने का मौका आएगा उसमें बोल लीजिएगा. अभी क्या चाहते हैं वह पूछ लीजिए.

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को -- माननीय अध्यक्ष महोदय. डीएमएफ के माध्यम से माननीय प्रभारी मंत्री ने जिन कार्यों को स्वीकृति प्रदान की है और उन्होंने लिखा की स्वीकृत किया जाता है आदेश जारी करें. क्या इन कार्यों की स्वीकृति का प्रशासकीय आदेश जारी करेंगे. आपके कहने से मैंने भूमि पूजन कर दिया. यदि प्रभारी मंत्री लिखता है कि स्वीकृत, आदेश जारी करें तो काम क्यों नहीं हुए. माननीय मंत्री जी यह बताएं कि कब काम होंगे, होंगे कि नहीं होंगे या फिर मैं अपने भूमि पूजन के नारियल को वापस ले लूं. (हँसी) मैं, मुख्यमंत्री जी जैसे नारियल रखकर नहीं चलने वाला हूँ कि जहां कहें वहीं फोड़ दें. ऐसा मैं नहीं करता हूँ.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया -- आपको नारियल लेकर घूमने की इतनी जल्दी क्यों हो रही थी. हाथ में नारियल लेकर घूमते हो.

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को -- आप बैठिए मैं मंत्री जी से बात कर रहा हूँ. (व्यवधान)

श्री हरिसिंह सप्रे -- मार्को जी आप तो प्रश्न पूछो. तुम तो नारियल के लायक भी नहीं हो. (व्यवधान)

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया -- इतनी जल्दी क्या हो रही थी हुजूर. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय - जवाब आने दीजिए. (व्यवधान)

श्री बाला बच्चन -- माननीय अध्यक्ष महोदय..

अध्यक्ष महोदय -- बाला बच्चन जी उनका जवाब आने दीजिए, माननीय सदस्य को कुछ मिलने दीजिए. मैं खुद मार्को जी के साथ खड़ा हुआ हूँ. मंत्री जी हमारे माननीय विधायक ने वहां भूमि पूजन किया है. चुनाव के लिए साल भर बचा है जरा ख्याल अपने को करने की आवश्यकता है. अब आप बताइए.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, बेसिकली किसी पत्र के माध्यम से यदि उसमें स्वीकृति लिख दी जाए तो मैं नहीं मानता, जब तक पूरी कमेटी और उसके मेम्बर उसमें साइन न कर लें. जब तक गर्वनिंग बॉडी से स्वीकृति न मिलकर, एक्जीक्यूटिव बॉडी उसके ऑर्डर जारी न कर दे.

अध्यक्ष महोदय -- अब यह कानूनी तरीका हो गया. कैसे मदद करेंगे यह आप बताइए जिससे कि उनका काम हो जाए.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- अध्यक्ष महोदय, जो नए सर्कुलर हैं उसमें कलेक्टर को वहां का इंचार्ज बना दिया गया है, डीएमएफ बोर्ड का चेयरमैन बना दिया गया है. माननीय सदस्य के जो भी काम हैं जो वे बोल रहे हैं जिनकी चिंता है, निश्चित रुप से जनप्रतिनिधि को होनी भी चाहिए. आप हमें जो भी प्रस्तावित करेंगे उसे हम वहां के कलेक्टर को प्रस्तावित कर देंगे. मीटिंग में रख लें वहां सभी विधायकों, मेम्बर्स को रहना है वहां पर अपनी बात कर लें.

श्री सज्जन सिंह वर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, अधिकारियों के आगे मंत्रियों की चलती नहीं है यह बात मार्को जी के प्रश्न से स्पष्ट हो गई है.

अध्यक्ष महोदय -- सज्जन सिंह जी आप सुन लीजिए. आप स्वयं सब इस बात के लिए चिंता कर रहे हैं. मंत्री जी, माननीय विधायक ने कुछ किया है तो उनका सम्नान रहना चाहिए तो यह प्रस्तावित करके हमारा प्रस्ताव जाए इसके एवज में यह भी प्रयास करिए कि कलेक्टर उनके कामों में से कुछ को स्वीकृत करें. यह प्रयास करिए.

श्री सोहनलाल बाल्मीक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, दो साल से बैठक नहीं हो रही है.

अध्‍यक्ष महोदय -- अरे, अभी आपको मौका मिलेगा, बैठ जाइए.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, दो साल से बैठक नहीं हो पायी है. हमारे प्रभारी मंत्री जाते नहीं हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- अरे आप चाहते हैं कि मार्कों जी को कुछ न मिले. आप बैठ तो जाइए.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- उनको मिले. मेरी बात भी हो जाए.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठिए तो थोड़ा-सा, बैठिए.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक छोटा-सा प्रश्‍न करना चाहता हॅूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- अभी आप बैठ जाइए न.

श्री बृजेन्‍द प्रताप सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, जैसा आपका आसंदी से निर्देश है, निश्‍चित रूप से हम पालन करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- बस ठीक है.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- अध्‍यक्ष महोदय,....

अध्‍यक्ष महोदय -- आपका काम हो गया मार्को जी.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- माननीय अध्‍यक्ष जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. कृपा बनाए रखिएगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न क्रमांक-5 श्री आरिफ अकील जी. डॉ.नरोत्‍तम जी, इनके स्‍वास्‍थ्‍य की शुभकामना दे दीजिए.

 

वनग्रामों की भूमि का अन्‍तरण

[वन]

6. ( *क्र. 903 ) श्री आरिफ अक़ील : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या भोपाल, सीहोर एवं रायसेन जिले के वनग्रामों के अन्‍तरण हेतु मंत्रालय से जारी आदेश क्रमांक 12427/1/64, दिनांक 07.10.1964 एवं आदेश क्रमांक 3263/10/62, दिनांक 26.4.1962 से अन्‍तरित ग्रामों की भूमि भा.व.अ. 1927 संशोधन 1965 धारा 20 '' के अनुसार आरक्षित वन प्रतिवेदित की जा रही है? (ख) यदि हाँ, तो वनग्राम की कितनी आबादी भूमि, कृषि भूमि, निस्‍तार मद की भूमि शासन के किस आदेश दिनांक के अनुसार राजस्‍व विभाग को किस दिनांक को हस्‍तांतरित की गई? इनमें से किस ग्राम की भूमि को धारा 20 '' के अनुसार आरक्षित वन भूमि प्रतिवेदित कर रहा है? (ग) 1962 एवं 1964 में अन्‍तरण के लिए आदेशित वनग्रामों की भूमि को 1965 में स्‍थापित धारा 20 अ के तहत आरक्षित वन प्रतिवेदित करने का आदेश या निर्देश वनमंडल को किस दिनांक को किसने दिया? यदि कोई आदेश नहीं है, तो आरक्षित वन प्रतिवेदित करने का कारण क्‍या है?

वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जी हाँ। (ख) मध्यप्रदेश शासन, वन विभाग की अधिसूचना क्रमांक 3263-10-62, दिनांक 26.04.1962 एवं आदेश क्रमांक/5730/4640/10/2/75, दिनांक 4/12/1975 तथा 4670/3238/10/2/75, दिनांक 06.10.1975 से प्राप्त निर्देशानुसार भोपाल, सीहोर एवं रायसेन जिले के अंतर्गत आने वाले वन मण्डल भोपाल, सीहोर, रायसेन एवं औबेदुल्लागंज के अंतर्गत वनग्रामों को राजस्व विभाग को हस्तांतरित किया गया है। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) 1962 एवं 1964 में अन्तरण के लिए आदेशित वनग्रामों की भूमि को 1965 में स्थापित धारा-20 '''' के तहत आरक्षित वन प्रतिवेदित करने संबंधी कोई आदेश, प्रश्‍नाधीन जिलों के अंतर्गत आने वाले वनमंडलों के अभिलेख में उपलब्ध नहीं हैं। राजस्व विभाग को हस्तांतरित आरक्षित वनक्षेत्रों में स्थित वनग्रामों की उक्त भूमियां डिनोटिफाइड नहीं होने से भा.व.अ. 1927 की धारा-20 '''' के तहत आरक्षित वन प्रतिवेदित की जा रही है।

श्री आरिफ अकील -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हॅूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आरिफ जी, एक सेकेंड रूक जाइए.

डॉ.नरोत्‍तम मिश्र -- अध्‍यक्ष महोदय, आरिफ भाई काफी दिन बाद आए हैं. वह लंबे समय से अस्‍वस्‍थ थे. उनके शीघ्र स्‍वस्‍थ होने की हम सबने सदन में भी प्रार्थना की थी.

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय गृह मंत्री जी, आप संसदीय कार्यमंत्री भी हैं, वह डेली आ रहे हैं.

डॉ.नरोत्‍तम मिश्र -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरे रूम के पास में कल बैठे थे, मुझे जानकारी मत दो आप, आप अभी तक नहीं बैठे हो, उनके पास जाकर. मैं कल उनके पास बैठकर आया हॅूं. आप मुझे जानकारी मत दो. मैं आया था कल आपके पास.

श्री आरिफ अकील -- हां.

डॉ.नरोत्‍तम मिश्र -- यह बता दो, बाला भाई को. जब आप अस्‍वस्‍थ हुए थे, मैं तब की बात कर रहा हॅूं तो उसके बाद हमने सतत् उनके स्‍वास्‍थ्‍य की कामना की. परमपिता परमात्‍मा ने हमारी सुनी और इसी तरह से जल्‍दी स्‍वस्‍थ होकर वे जनता की सेवा करें, यही हमारी कामना है.

श्री आरिफ अकील -- धन्‍यवाद. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हॅूं कि अधिनियम की धारा 20 "" के अनुसार आरक्षित वन प्रतिवेदित करने का आदेश कब-कब पारित किया आपने ? मेरा दूसरा प्रश्‍न यह है कि अगर आदेश पारित नहीं हुए हैं तो जिन लोगों ने आरक्षित कर दिया है उनके विरूद्ध क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई है, कब की गई है और अभी कार्यवाही नहीं की है, तो कब कर देंगे ?

कॅुंवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वन भूमि के जो आदेश की बात आप कर रहे हैं यह सारी जानकारी पूरे परिशिष्‍ट ए और बी में दे दी गई है. इसके अलावा आपने जो पूछा है चूंकि सारे जो गांव हैं, उसमें 24 गांव छोड़कर के 142 गांव थे, उसमें से 118 गांव कर दिये गये हैं. 24 गांव के लिये वन अधिनियम के अंतर्गत हम अपनी तरफ से कुछ कार्यवाही नहीं कर सकते. अब यह दिनांक 13.11.2000 से माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय का जो आदेश है उसके पालन में हमारी तरफ से हम कोई कार्यवाही अभी इसमें नहीं कर रहे हैं.

श्री आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय न्‍यायालय के आदेश की प्रत्‍याशा में पहले क्‍या आदेश कर दिये गये, जो आदेश के पहले काम हुए हैं.

कॅुंवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिले की जो कमेटी थी, उनसे जो प्रस्‍ताव बनकर आए थे और इस कारण से उनको राजस्‍व विभाग में दिया गया. अभी जो पहले हो चुके हैं उस पर तो कोई प्रश्‍न उपस्‍थित होना नहीं चाहिए. अब जो है आपकी असुविधा आपने जो व्‍यक्‍त की है लेकिन माननीय सुप्रीम कोर्ट के कारण हमारी थोड़ी-सी असमर्थता है.

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है. प्रश्‍न क्रमांक-7

अवैध उत्‍खनन के प्रकरणों में वसूली

[खनिज साधन]

7. ( *क्र. 890 ) श्री प्रियव्रत सिंह : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता द्वारा प्रश्‍न क्रमांक 3346, दिनांक 17.03.2022 के माध्‍यम से अवैध उत्‍खनन की जानकारी मांगी गई थी, जिसके उत्‍तर में माननीय मंत्री महोदय द्वारा बताया गया था कि 15 अवैध उत्‍खनन के प्रकरण दर्ज हुए थे, जिनमें से 13 प्रकरणों में कलेक्‍टर न्‍यायालय राजगढ़ द्वारा जुर्माना राशि जमा कराई जा चुकी है? शेष दो प्रकरण कलेक्‍टर न्‍यायालय राजगढ़ के समक्ष विचाराधीन बताये गए? (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित कलेक्‍टर न्‍यायालय राजगढ़ में शेष दो प्रकरण किस कारण से विचाराधीन हैं? क्‍या उपरोक्‍त दोनों प्रकरणों में करोड़ों रूपयों का जुर्माना लगाया गया है? यदि हाँ, तो कब तक वसूली हो जायेगी? (ग) प्रश्‍नांश (ख) में उल्‍लेखित जुर्माना नहीं वसूले जाने से शासन को जो वित्‍तीय हानि हो रही है, इसके लिये जिम्‍मेदार अधिकारी/कर्मचारियों पर क्‍या कार्यवाही की जायेगी? (घ) प्रश्‍नांश (ख) में उल्‍लेखित जुर्माना को शीघ्र वसूलने हेतु क्‍या कार्यवाही की जा रही है? कब तक वसूली हो जाएगी?

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्लेखित प्रकरणों में से 02 प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत् विचाराधीन हैं। एक प्रकरण में अर्थदण्ड राशि रुपये 11,51,05,500/- अधिरोपित की गई थी। इस आदेश के विरूद्ध अपील प्रकरण में संचालक, भौमिकी तथा खनिकर्म द्वारा अर्थदण्ड संबंधी आदेश को अपास्त किया जाकर शिकायत की जाँच तथा प्रकरण में पुनः विधि संगत कार्यवाही के निर्देश दिये गये थे। शेष 01 प्रकरण न्यायालय में आदेश हेतु नियत है। न्‍यायालयीन प्रक्रिया होने से जुर्माने की राशि वसूली की समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के उत्तर में उल्लेखित जुर्माने की राशि की वसूली के संबंध में पारित आदेश के विरुद्ध प्रस्तुत अपील प्रकरण में आदेश अपास्‍त किया गया है एवं निर्देशानुसार कार्यवाही प्रचलित है। अत: जुर्मान की राशि वसूली का प्रश्‍न नहीं है व शासन को वित्‍तीय हानि जैसी स्थिति नहीं है। शेष 01 प्रकरण में न्‍यायालयीन आदेश अपेक्षित है। अत: अधिकारी/कर्मचारियों पर किसी प्रकार की कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) प्रश्‍नांश (ग) के उत्तर अनुसार।

श्री प्रियव्रत सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में माननीय मंत्री जी ने...

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रियव्रत सिंह जी, इस बार प्रयास करो कि अभी सबको मौका मिलेगा. प्रश्‍न ज्‍यादा निकल सकें, इस तरह का प्रयास करो.

श्री प्रियव्रत सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रयास तो करूंगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, फिर वह लंबा बोलने लगते हैं.

श्री प्रियव्रत सिंह -- नहीं, मैं लंबा नहीं बोलूंगा, मैं तो एक मिनट में खतम कर दूंगा, पर मुझे जवाब सही मिल जाए और कार्यवाही सही से हो जाए. चार साल से मामला लंबित है.

अध्‍यक्ष महोदय -- मैं अपनी तरफ से प्रयास कर रहा हॅूं कि जवाब सबका आ जाए, ठीक आए.

श्री प्रियव्रत सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे यही अपेक्षा है. इसमें मैंने जो प्रश्‍न पूछा था कि यह जो खनिज प्रकरण बने हैं उनकी रिकवरी के मामले में था. इसमें मुझे एक में उत्‍तर मिला है जिसमें 11 करोड़ रूपए की रिकवरी होनी थी उसमें अर्थदंड संबंधी आदेश अपास्‍त किया जाकर शिकायत की जांच व प्रकरण में विधि संगत करने के निर्देश संचालक, भौमिक और खनिकर्म ने दिये हैं. अब यह जो आदेश उन्‍होंने दिया है, यह जो आदेश अपास्‍त किया है, करीबन इस बात को 3 साल बीत गये हैं और 3 साल से इसमें कोई कार्यवाही नहीं हुई है. मामला यह है कि जांच के लिये शिकायतकर्ता ने दिनांक-5.7.2018 को आवेदन कलेक्‍टर, राजगढ़ को दिया था. कलेक्‍टर राजगढ़ ने एसडीएम खिलचीपुर को इस प्रकरण की जांच करने के लिये निर्देशित किया था. एसडीएम, खिलचीपुर और कलेक्‍टर, राजगढ़ ने जब वर्ष 2019 तक कोई जांच नहीं की तो शिकायतकर्ता द्वारा मुख्‍यमंत्री जी को अनुरोध किया गया और उनके आदेश पर संचालक द्वारा भोपाल से एक टीम बनाई गई और उसने जाकर इस अवैध उत्‍खनन की जांच की. नापा-तौली की, पूरा अपना प्रतिवेदन दिया, जिसके आधार पर कलेक्‍टर, राजगढ़ द्वारा वर्ष 2019 में दिनांक 8.9.2019 को 11 करोड़ रुपये की वसूली आरोपित की गई. उसके पश्‍चात् एक महीने बाद जिन्‍होंने टीम बनाई थी, संचालक, भौमिक ने, उन्‍हीं ने इस ऑर्डर की अपील सुनी और उन्‍हीं ने इस ऑर्डर को स्‍टे कर दिया. तब से यह स्‍टे में रहा और उसके बाद दिनांक 5.9.2020 को यह ऑर्डर जारी किया कि इसको अपास्‍त करके वापस कलेक्‍टर को भेजा जाए. कलेक्‍टर, राजगढ़ दो बार संचालक, भौमिक को पत्र लिख चुके हैं, क्‍योंकि हाई-पॉवर कमेटी ने इसकी जांच पहले ही की थी, खनिज की कमेटी ने जांच की थी, जो कि संचालक, भौमिक और खनिकर्म ने बनाई थी, तो अब मैं जांच करने में इसमें असमर्थ हूँ. जब हॉयर अथॉरिटी ने जांच कर ली है तो जिला खनिज अधिकारी इसमें जांच करने के लिए अधिकृत ही नहीं है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह खुले रूप से एक व्‍यक्‍ति को बचाने के लिए विभाग इस पूरे प्रकरण को फुटबॉल बना रहा है. मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि क्‍या इसकी भोपाल से टीम गठित करके इसमें वे पुन: कार्यवाही करवाएंगे और यह जो 11 करोड़ रुपये की राशि आरोपित की गई थी, क्‍या उसमें वसूली की कार्यवाही करेंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय -- कार्यवाही करेंगे या जांच कराएंगे ?

श्री प्रियव्रत सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जांच कराने की तो बात ही नहीं है, क्‍योंकि जिसने इसको रिटर्न किया है, जांच को, उन्‍हीं की टीम ने पूरी जांच करके प्रतिवेदन दिया है तो अब वहां पर तो इसकी कोई जांच हो ही नहीं सकती, जिला खनिज अधिकारी तो इसकी कोई जांच कर ही नहीं सकता.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप भोपाल से जांच टीम का कह रहे हैं ना.

श्री प्रियव्रत सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस बीच में एक और चीज हुई है, जिस व्‍यक्‍ति के ऊपर यह रिकवरी आरोपित की गई थी, उसको पुन: लीज दे दी गई है. राजगढ़ में उसी तहसील जीरापुर में, मतलब पुन: उसको खनिज लीज दे दी गई है, एक तो जब तक यह 11 करोड़ रुपये वसूली का प्रकरण नहीं निपटता, उसकी खनिज लीज तो आप निरस्‍त करें.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्‍य ने बात कही है, निश्‍चित रूप से कलेक्‍टर, राजगढ़ के द्वारा उसमें अर्थदण्‍ड आरोपित किया गया था, लेकिन जो जांच टीम बनाई गई थी, जांच टीम का जो जांच प्रतिवेदन है, उसमें कई तरह की विसंगतियां भी थीं. इसलिए इन सब चीजों को देखकर जो हमारे डॉयरेक्‍टर, माइनिंग हैं, क्‍योंकि उसमें ऐसा लग रहा था कि इसमें एकतरफा कुछ चीजें चल रही हैं तो उसको प्रत्‍यावर्तित करके पुन: जांच के लिए कलेक्‍टर को आदेशित किया था. कलेक्‍टर से जो आदेशित हुआ है, उसमें कलेक्‍टर ने निश्‍चित रूप से पत्र लिखा कि इसकी जांच डायरेक्‍टरेट से हुई थी, अपर अथॉरिटी ने जांच की थी, लेकिन मैं यह मानता हूँ, क्‍योंकि जैसा कि यहां से शासन की तरफ से भी पत्र गया है कि कलेक्‍टर खुद एक न्‍यायालय है और न्‍यायालय में कोई भी यदि हमारा ज्‍युरिडिक्‍शन है तो उसमें निर्णय लेना चाहिए. आज निर्णय लेने के लिए कलेक्‍टर सक्षम है और जो भी न्‍यायालय है, वह सक्षम है और ये बेसिकली सब-ज्‍युडिस मामला है. यदि कलेक्‍टर नहीं कर पा रहे हैं तो उसमें निर्णय कर दें. उसके बाद जो अपील में आएगा तो यहां पर निराकरण होगा. लेकिन आज कलेक्‍टर न्‍यायालय में वह पेंडेंसी है तो उस पर हम अभी कैसे बात कर सकते हैं ?

श्री प्रियव्रत सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिसके न्‍यायालय में अभी पेंडेंसी है, वह खुद चिट्टी लिख रहा है कि मैं इसकी जांच करने में अक्षम हूँ. मेरे पास जो अमला है, यहां पर खनिज का, वहां जिला खनिज अधिकारी जिले में सबसे बड़ा अधिकारी होता है, उससे ऊपर के अधिकारी ने जांच की है तो अब मैं किससे जांच करवाऊँ. दिक्‍कत तो अध्‍यक्ष महोदय, वहां आ रही है कि जब कलेक्‍टर यह लिख रहा है कि मैं जांच करने में अक्षम हूँ और मंत्री जी कह रहे हैं कि कलेक्‍टर एक न्‍यायालय है तो जब जो न्‍यायालय जांच करने में अक्षम है, तो फिर उसके ऊपर कौन सा न्‍यायालय बनेगा. इसकी जांच शासन स्‍तर पर हो सकती है. आप शासन स्‍तर पर कराएं और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दिनांक 5.9.2020 के बाद मैं स्‍वयं तत्‍कालीन प्रमुख सचिव के पास गया. मैंने तत्‍कालीन प्रमुख सचिव को लिखित में पत्र दिया कि इस प्रकरण में संचालक, भौमिक ने जो आदेश पारित किया, उसमें उल्‍लेख किया है कि दिनांक 21.11.2019 को, 10.12.2019 को, 2.1.2020 को, 20.2.2020 को और 28.5.2020 को पांच बार संचालक, भौमिक और खनिकर्म ने कलेक्‍टर से इस मामले में अगर कोई विसंगति है तो प्रतिवेदन मांगा. एसडीएम से प्रतिवेदन मांगा. एसडीएम ऑफिस में फाइल गायब है, कलेक्‍टर ऑफिस में फाइल गायब है. कलेक्‍टर के पास कोई तरीका नहीं है इसकी जांच करने का और यहां संचालक, भौमिक और पूरा विभाग इस प्रकरण की जांच नहीं कराना चाहता, इसको उछालना चाहता है. अध्‍यक्ष महोदय, यह बड़ा मामला है, रॉयल्‍टी चोरी का, इसमें जो लोग अपराधी हैं, वे बड़े राजनीतिक रसूख वाले हैं. राजनीतिक रसूख रखते हैं इस वजह से इस प्रकार इसको फुटबॉल की तरह खेला जा रहा है. मंत्री जी पहुंचाते हैं कलेक्‍टर के पास, कलेक्‍टर किक लगाते हैं, पहुंचा देते हैं वल्‍लभ भवन में और मामला वहीं का वहीं अटका हुआ है. मध्‍यप्रदेश में मुख्‍यमंत्री जी की जो मंशा है कि माफिया के खिलाफ कार्यवाही हो यह आदेश उसकी धज्जियां उड़ा रहा है. मेरा आपसे सिर्फ यह अनुरोध है, मैं भाषण नहीं देना चाहता हूं, मैं तो यह चाहता हूं कि आप प्रमुख सचिव या सचिव स्‍तर के अधिकारी के द्वारा एक टीम गठित करके इसकी जांच करा लें और अगर हम लोग संतुष्‍ट नहीं होंगे तो हम अपील में जाएंगे, न्‍यायालय में जाएंगे, परंतु कम से कम जांच कराकर इसको क्‍लीयर तो करें और वहां पर प्रमाण हैं और इसी व्‍यक्ति को पुन: माइनिंग लीज़ दे दी गई है, उसी तहसील में, उसके एक अलग गांव में मतलब यह एक राजस्‍व गांव में थी, उसके बगल के राजस्‍व गांव में उसी व्‍यक्ति को माइनिंग लीज़ पुन: दे दी गई है. एक तो 11 करोड़ उसने जमा नहीं किए और वह खुले आम वापस अवैध उत्‍खनन कर रहा है, तो इसके खिलाफ तो कार्यवाही होनी चाहिए.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नेचुरल जस्टिस वाला मामला है. बेसिकली जब यह प्रकरण बना तो उस समय भी कुछ शिकायतें आईं और एकतरफा सब कार्यवाई हुई हैं. अब डायरेक्‍टर ने कोई चीज जांच में पाई हैं कि इसमें थोड़ा सा दूसरे पक्ष को भी सुनकर और एक वैधानिक तरीके से यदि कलेक्‍टर न्‍यायालय कोई फैसला कर देता है क्‍योंकि आज कलेक्‍टर न्‍यायालय के अंदर केस है, यदि वह सक्षम नहीं है या जांच नहीं करा पा रहे हैं तो निर्णय दे दें सीधी बात यह है, हमारे यहां डायरेक्‍ट्रेट में अपील आ जाएगी, प्रशासन में आ जाएगी तो हम यहां से जांच करा लेंगे.

श्री प्रियव्रत सिंह -- वह दे चुके हैं. कलेक्‍टर लिखित में दे चुके हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं-नहीं, एक सेकेंड, माननीय मंत्री जी, जिसको आप न्‍यायालय कह रहे हैं यदि न्‍यायालय स्‍वत: यह कह रहा है कि हम यह कार्यवाही नहीं करेंगे तो बार-बार हम क्‍यों कहते हैं कि वही कार्यवाही करे ?

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, बेसिकली अर्द्धन्‍यायिक प्रक्रिया में सब केस जाते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं-नहीं, सारी चीज मान ली आपने, आप मानते हैं तो इंट्रिम ऑर्डर मानिए ना कि कलेक्‍टर यह कहते हैं कि हम कार्यवाही नहीं कर सकते तो उसको इंट्रिम ऑर्डर मानिए ना.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- अब उसके लिए हमने फिर से लिखा है कि यदि आप नहीं कर सकते हैं तो एक वैधानिक तरीके से उसका ऑर्डर जारी करें और उसके बाद हम यहां से टीम गठित कर लेंगे या यहां पर हम काम कर लेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- हां, ठीक है.

श्री प्रियव्रत सिंह -- वह तो लिख चुके हैं, ''कलेक्‍टर हैज़ रिटन.'' मतलब कलेक्‍टर ने इनको लिखित में दे दिया है.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं-नहीं, प्रियव्रत सिंह जी, उन्‍होंने यह स्‍वीकार कर लिया है, अब फिर लिख रहे हैं, यदि नहीं करते तो वह सीधे ऑर्डर यहां से करेंगे.

श्री प्रियव्रत सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, अगर कलेक्‍टर वापस रिर्टन करते हैं चिट्ठी लिखकर तो उसमें तो आप कार्यवाही करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- हां करेंगे. कह रहे हैं करेंगे.

श्री प्रियव्रत सिंह -- आश्‍वासन दे दें.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- न्‍यायालय का कोई यदि प्रकरण होता है कलेक्‍टर लेबल से और फिर यदि वह हमारे पास आता है तो निश्चित रूप से हम उस पर कार्यवाही करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है.

श्री प्रियव्रत सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, उसको जो पुन: माइनिंग लीज़ दे दी गई है उस पर कुछ कार्यवाही, क्‍या उसकी जांच की कार्यवाही करेंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय -- अभी तो नेचुरल जस्टिस कह रहे हैं ना वह.

श्री प्रियव्रत सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, उसी को माइनिंग लीज़ वापस से दे दी है उस पर तो कार्यवाही करवा दें, उस चीज की कम से कम जांच तो कर लें.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, वह तो नेचुरल जस्टिस की कह रहे हैं.

नेता प्रतिपक्ष (डॉ. गोविंद सिंह) -- अध्‍यक्ष महोदय, शासन को अधिकार है. नामांतरण बंटवारे यह भी राजस्‍व न्‍यायालय में चलते हैं, लेकिन शासन निर्देश देता है कि एक महीने में, इतने दिन में आप निराकरण करें. यह कोई सिविल न्‍यायालय नहीं है, प्रशासनिक न्‍यायालय हैं, इनमें कई बार सरकार ने निर्देश दिए हैं. मुख्‍यमंत्री जी ने भी दिए हैं कि नामांतरण, बंटवारा तत्‍काल करें, तो इसमें निर्देश देने में आपको क्‍या आपत्ति है ? कलेक्‍टर अगर आपकी नहीं मान रहा है तो कलेक्‍टर के खिलाफ कार्यवाही करिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है. प्रश्‍न क्रमांक 8 पुरुषोत्‍तम लाल तंतुवाय जी.

श्री प्रियव्रत सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, आप निर्देश कर दें, मैं आपका समय नहीं लेना चाहता, मैं दूसरे सदस्‍यों का भी सम्‍मान करता हूं. उसी व्‍यक्ति को आपने वापस लीज़ दे दी, हर चीज़ कलेक्‍टर पर थोड़ी डाली जा सकती है. मतलब अभी फुंदेलाल मार्को जी के मामले में कलेक्‍टर को चली गई, अब प्रियव्रत सिंह ने मामला पूछा तो वह भी कलेक्‍टर को चला गया. अगर कलेक्‍टर सरकार की नहीं सुन रहे हैं तो वह किसके प्रतिनिधि हैं ? आपके नहीं हैं ? सरकार कौन है, गवर्नमेंट कौन है ? यह स्‍पष्‍ट करें. कलेक्‍टर गवर्नमेंट हैं कि आप गवर्नमेंट हैं ? आप गवर्नमेंट चला रहे हैं कि वहां पर अधिकारी गवर्नमेंट चला रहे हैं ? अधिकारी आपकी नहीं सुनेंगे तो फिर इस विधायिका का क्‍या मामला निकलता है ? यहां मैं प्रश्‍न क्‍यों पूछूं ? मैं अपना समय क्‍यों जाया करूं ? मैं अपना कुछ और करूं. मैं विधायक बनकर आया हूं, एक प्रश्‍न पूछ रहा हूं बात कर रहा हूं, अपनी बात रख रहा हूं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं तीसरी बार इलेक्‍ट होकर आया हूं इस असेम्‍बली में. इस प्रकार से मुझे कभी भी मतलब एक तरीके से मैं आपने आपको अपमानित समझ रहा हूं, मेरी विधायिका को अपमानित समझ रहा हूं कि मैं यहां विधायक बनकर बैठा क्‍यों हूं ? अगर सरकार आदेश जारी नहीं कर सकती, सरकार कार्यवाही नहीं कर सकती तो अध्‍यक्ष महोदयय, मुझे पीड़ा है और यह मेरी पीड़ा नहीं यह 230 लोगों की पीड़ा होगी.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं-नहीं, उन्‍होंने कार्यवाही के लिए कहा है.

श्री प्रियव्रत सिंह -- आप उसी को माइनिंग लीज दे रहे हैं. उसी तहसील में दे रहे हैं, तो कम से कम आप उसकी अभी की माइनिंग लीज़ की तो जांच करवाएं.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - अध्यक्ष महोदय, कलेक्टर एक न्यायालय है, कलेक्ट्रेट में जिला दण्डाधिकारी कहलाता है. यदि कोई न्यायालय में मामला प्रिज्यूडिस है, वहां मामला चल रहा है, जब तक वहां का निर्णय नहीं हो जाएगा. आज आपने दोषी बना दिया कि वह दोषी हो गया, उसको लीज न दी जाय. पहले दोष तो सिद्ध हो. हम आगे कैसे बढ़ें? आज आपने कलेक्टर की बात कही, कलेक्टर एक न्यायालय है, वह निर्णय दे दे. यदि वह सक्षम नहीं है तो निर्णय दे दें. हमने उसको सिलेक्ट किया है.

श्री प्रियव्रत सिंह - अध्यक्ष महोदय, कलेक्टर ने तो लिख दिया कि मैं निर्णय लेने में अक्षम हूं. कलेक्टर यह बात लिख रहा है.

श्री तरुण भनोत - आप उसकी जांच तो करा दें. आप लीज कैंसिल नहीं कर रहे हैं, वह सही दी गई कि नहीं दी गई, माननीय सदस्य, वह यही तो कह रहे हैं कि उसकी जांच करा दें? जांच कराने में उसका कोई न्यायालयीन आदेश से मतलब नहीं है.

श्री आलोक चतुर्वेदी - अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदय एनओसी अनिवार्य है और उसके ऊपर 11 करोड़ रुपये की रिकवरी है तो यह एनओसी उसको कैसे मिल गई? एनओसी के बिना आप लीज नहीं दे सकते हैं.

श्री प्रियव्रत सिंह - उस व्यक्ति को एनओसी कैसे मिली, उसके भाई को एनओसी मिल गई, उसके परिवार के लोगों को माइनिंग लीज मिल गई?

श्री तरुण भनोत - आप जांच तो करा सकते हैं? हम यह नहीं कह रहे हैं आप निरस्त कीजिए, जो डिफाल्टर होते हुए उसको दूसरी लीज दी गई है. मैं नहीं मानता कि वह अभी डिफाल्टर घोषित हुआ है, लेकिन आप उसकी जांच तो करा सकते हैं कि नियमों का पालन किया गया कि नहीं किया गया? उसमें क्या रोक है?

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - अध्यक्ष महोदय, ठीक है, यदि आप उसकी बात कर रहे हैं हम उसकी जांच करा लेंगे कि वह वैधानिक तरीके से दी गई कि नहीं दी गई.

श्री प्रियव्रत सिंह - अध्यक्ष महोदय, वैधानिक तरीके से तो हो ही नहीं सकती है, एनओसी कैसे मिल गई?

अध्यक्ष महोदय - आप जांच तो होने दीजिए.

श्री प्रियव्रत सिंह - अध्यक्ष महोदय, वैधानिक तो हो ही नहीं सकती है. विधान तो हम सब समझते हैं.

अध्यक्ष महोदय - श्री तरुण भनोत के प्रस्ताव को उन्होंने मान लिया है.

श्री प्रियव्रत सिंह - अध्यक्ष महोदय, जांच करा दें और कलेक्टर को यह पत्र लिख दें कि उसका जल्दी निराकरण करें, नहीं तो संचालक भौमिक के माध्यम से या सचिव स्तर की समिति बना दें, सचिव स्तर की समिति जाकर वहां पर जांच कर ले.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - अध्यक्ष महोदय, उसके लिए हमने अभी पत्र लिख दिया है, जो आप कह रहे हैं कि जल्दी निराकरण के लिए, उसके लिए पत्र जा चुका है.

श्री प्रियव्रत सिंह - आप तो सचिव स्तर की समिति बना दो, काम हो जाएगा.

अध्यक्ष महोदय - अभी समिति कैसे? अभी तो वह जांच करा रहे हैं.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - अध्यक्ष महोदय,उसका निराकरण हो जाय, हम बना देंगे.

श्री प्रियव्रत सिंह - बना देंगे?

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - पहले निराकरण तो हो जाय.

अध्यक्ष महोदय - श्री पुरुषोत्तम लाल तंतुवाय.

श्री प्रियव्रत सिंह - अब बना देंगे तो मैं संतुष्ट हो जाऊंगा अध्यक्ष महोदय. सचिव स्तर की समिति बना दें.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - अध्यक्ष महोदय,अभी न्यायालय का डिसीजन तो आने दें, आपके कलेक्टर न्यायालय से डिसीजन आ जाय उसके बाद अपील में आएंगे तो हम उस पर कार्यवाही करेंगे.

श्री प्रियव्रत सिंह - उसकी जांच करा दें जो उसके परिवार को और उसको जो लीज दी गई है.

अध्यक्ष महोदय - क्यों रिपीट करना, उसको कह दिया है.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - अध्यक्ष महोदय, वैधानिक तरीके से यदि वह नहीं है तो उसमें हम कार्यवाही करेंगे.

श्री प्रियव्रत सिंह - माननीय मंत्री जी अपने प्रभाव का इस्तेमाल करें, अधिकारियों से न दबे.

अध्यक्ष महोदय - श्री प्रियव्रत सिंह जी बैठिए.

रेत/पत्‍थर का अवैध उत्‍खनन

[खनिज साधन]

8. ( *क्र. 114 ) श्री पुरुषोत्तम लाल तंतुवाय : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला दमोह में रेत खदान व पत्‍थर खदान हेतु कितने घाट/स्‍थल चयनित हैं व रेत/पत्‍थर हेतु किन-किन ठेकेदारों को वर्ष 2022-23 का ठेका दिया गया है? नाम, पतावार, राशिवार जानकारी उपलब्‍ध करायें। (ख) क्‍या जिला दमोह में अवैध रेत/पत्‍थर उत्‍खनन का धंधा जोरों पर चल रहा है? यदि हाँ, तो प्रशासन द्वारा क्‍यों कार्यवाही नहीं की जा रही है? विगत वर्ष में प्रशासन द्वारा जिला दमोह में कितने केस दर्ज किये व क्‍या कार्यवाही की एवं जिला प्रशासन द्वारा अवैध उत्‍खनन रोके जाने हेतु क्‍या प्रयास किये हैं?

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' एवं 'पर दर्शित है। (ख) जी नहीं। विगत तीन वर्ष में दर्ज किये गये प्रकरणों की जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' पर दर्शित है। मध्‍यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) नियम, 2022 अनुसार कार्यवाही की जा रही है।

परिशिष्ट - "एक"

 

श्री पुरुषोत्तम लाल तंतुवाय - अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से हमारे प्रश्न के बिन्दु ख का जो जवाब माननीय मंत्री के द्वारा आया है. दमोह जिले में अवैध उत्खनन के लिए मना किया गया है जबकि दमोह जिले में लगातार अवैध उत्खनन जारी है. हमारी विधान सभा क्षेत्र के सुनान नदी, ब्यारवा नदी पर लगातार अवैध उत्खनन जारी है. हम मंत्री जी से आपके माध्यम से पुनः निवेदन करते हैं कि जो प्रशासन की मिली-भगत से लगातार अवैध उत्खनन जारी है, पुनः जांच कराकर उसको रोका जाय और संबंधित अधिकारियों पर कार्यवाही की जाय. अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

श्री कमलेश्वर पटेल - पूरे प्रदेश में यही हो रहा है.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - अध्यक्ष महोदय, वहां पर जो कांट्रेक्टर थे, उनके खिलाफ उसको टर्मिनेट किया गया था, फिर दूसरा कांट्रेक्टर वहां पर आया उसकी भी जब वहां पर शिकायतें मिली और उसकी जो इंस्टालमेंट वगैरह है ठीक से काम न होने का, उसको भी टर्मिनेट किया गया, लेकिन वह हाईकोर्ट से जाकर स्टे लाया हुआ है और इसलिए स्टे होने के कारण वहां पर संचालन है लेकिन हमने विधिवत् जो भी हमारे विभाग के माध्यम से कार्यवाही होती है, वह हमने की हैं और उसमें करीब 71 लाख रुपये तक की हमने वसूली की है. उसमें हमने अवैध उत्खनन, अवैध परिवहन, अवैध भण्डारण के हमने केसेस बनाए हैं और लगातार इसी तरह दूसरे अन्य खनिजों में भी हमने करीब 53 अवैध उत्खनन के और अवैध परिवहन के 147, अवैध भण्डारण के 11, इससे 83 लाख रुपये करीब के उसमें भी अर्थदण्ड अधिरोपित किया है और वसूली की है. इसमें निरंतर जो अपने विभाग की तरफ से हम कर सकते हैं वह वहां पर हम कर रहे हैं. लेकिन वह उच्च न्यायालय से स्थगन होने के कारण वह कार्य वहां पर अभी भी है.

अध्यक्ष महोदय - विधायक जी का कहना यह है कि स्टे वह लाए हैं. एक पाइंट पर कोई आर्डर हुआ, उस पर स्टे आ गया. उनका कहना है कि अधिकारियों की, किसकी मिलीभगत से उनके क्षेत्र में उत्खनन हो रहा है, कम से कम उनके क्षेत्र की रक्षा हो जाय, यह तो जांच करा लेंगे.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - अध्यक्ष महोदय,माननीय सदस्य से वह जानकारी ले लेंगे, जहां की बात कर रहे हैं, हम उसकी जांच करा लेंगे.

संबल योजना में स्‍वघोषित प्रमाणीकरण व्‍यवस्‍था

[श्रम]

9. ( *क्र. 992 ) श्री चेतन्‍य कुमार काश्‍यप : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या संबल योजना में शहरी क्षेत्रों में नये पंजीकरण हेतु आवश्‍यक पटवारी प्रमाणीकरण के स्‍थान पर स्‍वघोषित प्रमाणीकरण व्‍यवस्‍था लागू करेंगे? (ख) पटवारी के प्रमाणीकरण प्रारूप के कारण हितग्राहियों को हो रही परेशानियों के संबंध में प्रश्‍नकर्ता द्वारा मंत्री जी को अवगत कराया था और मंत्री जी ने स्‍वघोषित प्रमाणीकरण व्‍यवस्‍था लागू करने का आश्‍वासन दिया था, इस आश्‍वासन की पूर्ति कब तक कर दी जायेगी?

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) मुख्‍यमंत्री जनकल्‍याण (संबल 2.0) योजनांतर्गत पंजीयन हेतु वर्तमान में पटवारी प्रमाणीकरण आवश्‍यक नहीं है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) मुख्‍यमंत्री जनकल्‍याण (संबल 2.0) योजनांतर्गत पंजीयन हेतु जारी दिशा निर्देश क्रमांक 745, दिनांक 05.05.2022 अनुसार भूमि प्रमाणीकरण हेतु पटवारी से प्रमाणीकरण आवश्‍यक था, जिसके स्‍थान पर संशोधित जारी आदेश क्रमांक 2504, दिनांक 29.08.2022 द्वारा भूमि प्रमाणीकरण हेतु भू-अभिलेख पोर्टल से बी-1 की प्रति के आधार पर भूमि प्रमाणीकरण किया जाना प्रावधानित किया गया है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

अध्यक्ष महोदय - चेतन्य जी हैं. हमें पहले ही दिखाई पड़ना चाहिए. आप तो पहले ही दिख जाना चाहिए हम सबको, पता नहीं कैसे हो गया.

श्री चेतन्य कुमार काश्यप - अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री जी की महत्वाकांक्षी योजना है. मैंने माननीय मंत्री जी से प्रश्न किया है. संबल योजना में शहरी क्षेत्रों में नये पंजीकरण हेतु आवश्यक पटवारी प्रमाणीकरण के स्थान पर स्वघोषित प्रमाणीकरण व्यवस्था लागू करेंगे. और इस प्रश्न के संबंध में मैंने अवगत भी कराया था मंत्री जी को और उन्होंने आश्वस्त भी किया था, परन्तु मुझे अभी जो जवाब प्राप्त हुआ है, उसमें आपने लिखा है कि हमने पटवारी का बी-1 लगाने का उसमें जो मध्यप्रदेश पोर्टल से मिलता है, बी-1 लगाने का निश्चित किया है. मुझे लगता है कि मंत्री जी को अधिकारियों ने गुमराह किया है, क्योंकि जो स्व प्रमाणीकरण है, उसकी जगह बी-1 लगाना, अगर जिसका खाता ही नहीं है शहरी क्षेत्र में, जमीन ही नहीं है, तो उसको बी-1 से कोई प्रमाण पत्र नहीं मिलता है और सारे सम्बल के जो नये कार्ड बन रहे हैं, उन सारे व्यक्तियों को पटवारी के यहां पर जाना पड़ता है और पटवारी से एनओसी लाने का मतलब मंत्री जी भी समझते हैं कि किस तरीके का समय लगता है. तो मेरा उनसे आग्रह है कि यह स्व घोषित करने के बारे में स्पष्ट जवाब दें.क्योंकि यह जो जवाब है, यह खाली बी-1 लगाने का है. जबकि बी-1 से भूमि नहीं होने का कोई प्रमाण नहीं आता है. दूसरा, एक प्रश्न इसमें यह है कि सम्बल योजना के सारे विज्ञापनों में और उसकी सारी जानकारी में वेबसाइट में लिखा है कि इस योजना को आयुष्मान भारत का लाभ मिलेगा. जबकि आयुष्मन भारत के उसमें पोर्टल में सम्बल योजना के पात्र होने के बाद भी अभी तक कोई लाभ नहीं दिया जा रहा है और आयुष्मान के डायरेक्टर का कहना है कि इस तरीके की कोई व्यवस्था अभी तक शासन द्वारा नहीं दी गई है.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह-- अध्यक्ष महोदय, जहां तक वह पटवारी के प्रमाणीकरण की जो बात कही थी माननीय सदस्य ने, उसको हमने हटा दिया है और अब सीधे सीधे पोर्टल से उसको किसी पटवारी से कोई भी प्रतिवेदन नहीं लेना है. वह पोर्टल पर अपने बी-1 की कॉपी निकाल ले और उसकी जो पात्रता है, क्योंकि उसमें वह सब पात्रताओं की अर्हताएं हैं कि क्या क्या चीजें होनी चाहिये और वह सीधा दे सकता है. हमने नया चेंज कर दिया है, उस हिसाब से हमारी कार्यवाही चालू भी हो गई है.

श्री चैतन्य कुमार काश्यप--अध्यक्ष महोदय, मैंने वही प्रश्न कहा है कि जब व्यक्ति भूमिहीन है, शहरी क्षेत्र में सारे असंगठित मजदूर भूमिहीन होते हैं, तो उनके लिये पोर्टल से कोई जानकारी नहीं निकलती है. तो उसे पटवारी के यहां पर चक्कर लगाने ही पड़ते हैं और पटवारी के यहां चक्कर लगाने का मतलब पूरा सदन भी जानता है और आप भी जानते हैं कि एक एनओसी लाने में कितना समय लगता है और क्या क्या व्यवस्थाएं होती हैं. तो य हजो प्रश्न का जवाब आप जो दे रहे हैं,यह उस बात का कोई जवाब ही नहीं है.

अध्यक्ष महोदय-- विधायक जी, आप चाहते क्या हैं.

श्री चैतन्य कुमार काश्यप--अध्यक्ष महोदय, स्व प्रमाणीकररण लागू किया जाये कि जिसकी भूमि नहीं है, वह स्व प्रमाणीकरण करे. मुख्यमंत्री जी हमेशा कहते रहे हैं इस बात को.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह-- अध्यक्ष महोदय, यह जो आज का इसका फार्मेट है, इसमें खुद ही नीचे लिखा है कि मैं यह शपथ पूर्वक कथन करता हूं कि मेरे द्वारा दी गई उपरोक्त जानकारी सही है. यह उन्हीं का है कि जो स्व प्रमाणीकरण करके अपना शपथ देते हैं. सीधा सीधा है. इसमें कोई प्रमाणीकरण की जरुरत ही नहीं है. वह उसी से हम लिखकर के ले लेंगे. जो वह देगा, उसी को हम मान रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं नहीं, यह आश्वासन आ जाये कि यह मानेंगे, यह चला जाये न. अभी तो उनका कहना है कि नहीं मानते हैं इसको. तो यह आपका चला जाये, आपकी तरफ से यह आश्वासन हो जाये कि इसको माना जायेगा.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह-- अध्यक्ष महोदय, हां, यह फार्मेट है, इसको माना जायेगा, जो स्व प्रमाणीकरण है.

अध्यक्ष महोदय--ठीक है.

श्री चैतन्य कुमार काश्यप--अध्यक्ष महोदय, मैं इसमें वही आपसे कह रहा है कि उसके फार्म में बी-1 की आवश्यकता लिखी गई है.

अध्यक्ष महोदय-- फार्म में है क्या बी-1.

श्री चैतन्य कुमार काश्यप--अध्यक्ष महोदय,मंत्री जी इसका जवाब दे दें.

अध्यक्ष महोदय-- फार्म आपके पास भी होगा ना.

श्री चैतन्य कुमार काश्यप--अध्यक्ष महोदय,फार्म है मेरे पास. उसमें लिखा है कि बी-1 की कॉपी लगाई जाये. तो जो भूमिहीन है, उसको बी-1 मिलेगा ही नहीं.

अध्यक्ष महोदय-- जरा देखिये उसमें बी-1 कहां है.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह-- अध्यक्ष महोदय, जो वहां का जांच अधिकारी है, क्योंकि इसका एक प्रमाणीकरण होता है, यदि वह लिख देगा कि इसमें इसकी जरुरत नहीं है तो वह मान लिया जायेगा, उसमें कोई दिक्कत नहीं है. जब है ही नहीं उसकी जमीन तो कैसे उसकी जरुरत है.

अध्यक्ष महोदय-- वह यही तो कह रहे हैं न कि वह पटवारी वाला हो गया ना.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह-- अध्यक्ष महोदय, तो उसमें निरंक की एंट्री हो जायेगी न. जहां पटवारी वाला कालम है, वहां निरंक हो जायेगा. जब बी-1 ही नहीं है. पटवारी वाला तो कालम ही हटा दिया है.

अध्यक्ष महोदय-- कौन प्रमाणीकरण करेगा. उसका जैसे जिसने सत्यापन किया स्वयं का, उसका प्रमाणीकरण फिर कौन करेगा.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह-- अध्यक्ष महोदय, जो वहां के विहित अधिकारी हैं, जो वहां पर जमा करते हैं, उसका देखेंगे और फार्मेट में यदि वह निरंक लिख देगा जमीन की जगह पर तो उसको वह मान लेगा, पोर्टल पर देख लेगा कि निरंक है.

श्री चैतन्य कुमार काश्यप--अध्यक्ष महोदय,मेरा कहना है कि ऐसा एक परिपत्र मंत्री जी आश्वस्त कर दें कि ऐसा परिपत्र जारी कर दिया जायेगा. क्योंकि उसमें बी-1 का कम्पलशन है.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह-- अध्यक्ष महोदय, परिपत्र जारी है. उसमें विहित अधिकारी लिख देगा, जब पोर्टल में है ही नहीं, तो वह तो माना ही जायेगा कि वह निरंक है.

श्री चैतन्य कुमार काश्यप--अध्यक्ष महोदय, आयुष्मान भारत का जो मैंने प्रश्न साथ में पूछा था, आयुष्मान भारत की सम्बद्धता का, उसका भी मंत्री जी ने जवाब नहीं दिया, वह कब तक पोर्टल पर सम्बद्धता हो जायेगी.

अध्यक्ष महोदय-- सम्बल कार्ड को आयुष्मान में नहीं मान रहे हैं.

 

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - अध्यक्ष महोदय, बेसिकली आयुष्मान क्योंकि केन्द्र की योजना है. संबल, हम लोगों ने प्रदेश की योजना चलाई है. हम उसमें भी चाह रहे हैं कि हमारे जितने भी रजिस्टर्ड संबल के लोग हैं वह आयुष्मान के कार्ड की पात्रता रखें उस पर हमारी कार्यवाही चल रही है.

 

 

बीना परियोजना के डूब क्षेत्र में प्रतिपूरक वनीकरण

[वन]

10. ( *क्र. 710 ) श्री हर्ष यादव : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जिले की बहुउद्देशीय बीना-परियोजना के निर्माण में डूब में आई वनभूमि के एवज में प्रतिपूरक वनीकरण कार्य कराया गया है? विभागीय जांच में गड़बड़ी पाई गई? यदि हाँ, तो उक्त वनीकरण कार्य किन स्थानों पर कराया गया है, उसका स्थल-चयन एवं निगरानी के लिए किन-किन अधिकारियों को नियुक्त किया गया? उसकी प्रस्तावित रिर्पोर्ट में दर्ज व्यय का अनुमान क्या था, जिसे पूर्ण करने के लिए कितनी राशि जारी की गई एवं उसमें कितनी राशि व्यय कर कितना कार्य पूर्ण कराया गया है? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार वनीकरण-कार्य की विभागीय जांच में क्या गड़बड़ी पाई गई है? यदि हाँ, तो जांचकर्ता अधिकारी का नाम, जांच प्रतिवेदन एवं कृत कार्रवाई से अवगत करायें। (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) अनुसार क्या विभागीय जांच एवं कार्यवाही में जिला-स्तरीय एवं निगरानीकर्ता अधिकारियों को बचाया गया है? यदि हाँ, तो क्यों? यदि नहीं, तो कृत कार्यवाही बतावें। नियमानुसार उनकी पदस्थापना अन्‍यत्र क्यों नहीं हुई? जांच में जिला-स्तरीय अधिकारियों की संलिप्तता एवं लापरवाही उजागर होने के बाद भी कार्यवाही लंबित है? लंबित कार्यवाही कब तक की जावेगी? जांच अनुसार दोषियों के विरूद्ध विभाग कब तक कार्यवाही करेगा? यदि नहीं, तो क्यों?

वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) सागर जिला के अंतर्गत बीना बहुउद्देशीय परियोजना के डूब क्षेत्र में आई वन भूमि के बदले गैर वन भूमि एवं बिगड़े वन क्षेत्रों में वन मण्डल दक्षिण सागर में रकबा 166.61 हेक्‍टेयर एवं उत्तर सागर में रकबा 1206.02 हेक्‍टेयर में प्रतिपूरक वनीकरण कार्य कराया गया है। रोपण स्थलों पर कराये गये कार्यों की मुख्यालय स्तर से हुई जांच में कार्यों में कमी पाई गई है। वर्नीकरण कार्य की स्थलवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 में है। वन विभाग में रोपण स्थलों के चयन का दायित्व परिक्षेत्र अधिकारी व उप वन मण्डल अधिकारी एवं निगरानी का दायित्व क्षेत्रीय वन अधिकारियों का होता है। वन मण्डल दक्षिण सागर एवं उत्तर सागर के अंतर्गत उपरोक्त योजनांतर्गत वनीकरण कार्यों को कराने हेतु तैयार की गई योजना का अनुमानित व्यय, कार्यों को कराने हेतु आवंटित राशि एवं कार्यों को कराने पर व्यय की गई राशि की स्थलवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 में है। (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार मुख्यालय स्तर से वन मण्डल दक्षिण सागर के अंतर्गत कराये गये कार्यों की जांच श्री असीम श्रीवास्तव, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) म.प्र. भोपाल एवं वन मण्डल उत्तर सागर के अंतर्गत कराये गये कार्यों की जांच श्री संजय शुक्ला, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (सूचना प्रौद्योगिकी) व श्री एस. पी. शर्मा, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (उत्पादन) म.प्र. भोपाल के द्वारा की गई है। जांच प्रतिवेदनों की प्रतियाँ पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-02 में है। जांच प्रतिवेदन अनुसार दोषी अधिकारी/कर्मचारियों के विरूद्ध प्रस्तावित अनुशासनात्मक कार्यवाही/विभागीय जांच की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-03 में है। (ग) जी नहीं, जिला स्तरीय एवं निगरानीकर्ता अधिकारियों के विरूद्ध की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-4 में है। तत्समय वन मण्डल दक्षिण सागर एवं उत्तर सागर में पदस्थ रहे वन मण्डल अधिकारियों की प्रशासकीय आधार पर पदस्थापना अन्यत्र की गई है। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-5 में है।

 

श्री हर्ष यादव - माननीय अध्यक्ष महोदय, बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला है. मेरे सागर जिले में बीना परियोजना के अंतर्गत जो वन भूमि डूब क्षेत्र में आई थी. उसमें उत्तर वन मण्डल और दक्षिण वन मण्डल में बहुत सारी जमीन प्लांटेशन के लिये आरक्षित की गई थी. उसमें बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है. जांच प्रतिवेदन भी मंत्री जी के द्वारा प्राप्त हुआ है मगर मेरा मानना है कि जो बड़े अधिकारी हैं जो रसूखदार लोग हैं उनको बचाने का काम किया जा रहा और छोटे कर्मचारियों के ऊपर जो कार्यवाही हुई है उनको भी बहाल करके पद स्थापना कर दी गई है. जबकि करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है. हमारे जिले के अखबार रंगे पड़े हैं. माननीय भूपेन्द्र सिंह जी जी के क्षेत्र का ही मामला है. इन्होंने ही पत्र लिखा था. वह प्रतिवेदन भी मेरे पास है. उसके बाद भी ए.सी.एफ. स्तर पर जांच होने के बाद भी न जिले के अधिकारियों के ऊपर कार्यवाही हुई न ऐसे लोगों के ऊपर कार्यवाही हुई है जो इसमें संलिप्त थे. ऐसे भ्रष्टाचार करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कब तक कार्यवाही करेंगे ?

कुंवर विजय शाह - माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं माननीय सदस्य को बता देना चाहता हूं कि यह सरकार किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी.

श्री हर्ष यादव - माननीय मंत्री जी यह जांच प्रतिवेदन मेरे पास है. अखबार मेरे पास हैं. करोड़ों रुपये प्रदेश सरकार ने खर्च किये हैं. 20 करोड़ रुपये के पौधे गायब हैं.

अध्यक्ष महोदय - पहले जवाब आ जाने दीजिये.

कुंवर विजय शाह - माननीय अध्यक्ष महोदय, जांच प्रक्रियाधीन है. दो अधिकारियों को हटा दिया गया है और बाकी जो एक अधिकारी है उसको यथाशीघ्र हम वहां से हटा रहे है.

श्री हर्ष यादव - अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जो जवाब दिया है उससे मैं बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हूं. कहीं न कहीं संरक्षण दिया जा रहा है.

अध्यक्ष महोदय - हटाने का कह दिया. संरक्षण कहां दिया जा रहा है.

श्री हर्ष यादव - डी.एफ.ओ. स्तर के अधिकारी हैं उनको अभी भी फील्ड में रखा गया है. उनकी देखरेख में,मेरे पास पूरी जानकारी है. मैं तथ्यात्मक बात करता हूं.

अध्यक्ष महोदय - मंत्री जी आपको आश्वासन दे रहे हैं. जिसके खिलाफ आप कह रहे हैं उनको भी हटा देंगे. अभी आपने उनको सुना नहीं.

श्री हर्ष यादव - वित्तीय अनियमितताओं की जांच हो, रिकवरी हो. मेरा ऐसा निवेदन है. आप आसंदी से निर्देश देने का कष्ट करें.

अध्यक्ष महोदय - अभी तो उन्होंने सब कह दिया.

कुंवर विजय शाह - माननीय अध्यक्ष महोदय, जांच भी यह सरकार कराएगी और आवश्यकता पड़ी तो हम ई.ओ.डब्लू. में भी केस देंगे.

अध्यक्ष महोदय - अब तो धन्यवाद कर दो.

श्री हर्ष यादव - अध्यक्ष महोदय, बहुत संवेदनशील मामला था. पूरे जिले से जुड़ा हुआ मामला था. बहुत-बहुत धन्यवाद मंत्री जी.

 

जांच प्रतिवेदन पर कार्यवाही

[खनिज साधन]

11. ( *क्र. 1053 ) श्री सुनील सराफ : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा में दिनांक 10.03.2022 को प्रश्‍न क्रमांक 1175 के आश्‍वासन संबंधी गठित जांच दल ने क्‍या कार्यवाही पूर्ण कर ली है? यदि हाँ, तो इस जांच रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति देवें। (ख) यदि जांच अभी तक पूर्ण नहीं हुई है तो कब तक पूर्ण कर ली जावेगी? (ग) जांच को लंबित रखने वाले अधिकारियों पर विभाग कब तक कार्यवाही करेगा?

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) जी हाँ। जाँच दल की रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट पर दर्शित है। (ख) प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर अनुसार प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर अनुसार प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता।

श्री सुनील सराफ - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा जो सवाल है वह इस सदन में 22.12.2021 से गूंज रहा है. यह पांचवीं बार सवाल लगा है और यह स्थिति इसलिये आई कि पांच बार से खनिज मंत्री महोदय को अधिकारी जो लिखकर दे रहे हैं वह यहां हमारी आवाज न सुनकर उसको पढ़ रहे हैं. प्रश्न क्रमांक 878 में जवाब आया था कि खटकोना में वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध न होने के कारण से गांव के अंदर से रेत का परिवहन किया जा रहा है. प्रश्न क्रमांक 880 में जवाब आया कि गांव के अंदर से नहीं किया जा रहा है. मैंने प्रश्न लगाया क्रमांक 1175 में तो उसमें जवाब आया कि दोनों में सही क्या है तो आपने फिर कमेटी बना दी. आपके निर्देश से कमेटी बनी मुझे भी उसमें शामिल किया गया. फिर प्रश्न क्रमांक 1096 प्रश्न लगाया कि क्या रिपोर्ट आई तो उत्तर आया कि जानकारी एकत्रित की जा रही है. आज जो जानकारी जांच की आई है उसमें स्पष्ट है कि मेरी उपस्थिति में जो पंचनामा बना उसमें ग्रामीणों ने यह कहा कि गांव के अंदर से परिवहन हो रहा है. मैं खनिज मंत्री महोदय से यह पूछना चाहूंगा निवेदन के साथ कि क्या ऐसे अधिकारियों पर आप कार्यवाही करेंगे जो लगातार दो साल से सदन की गरिमा, विधायिका को हंसी खेल बनकर खेल रहे हैं. मैं मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि आज कार्यवाही की घोषणा करें.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह लगातार इस पर बात चलती रही.

अध्‍यक्ष महोदय-- पहले तो वह बड़े भाग्‍यशाली हैं कि 5 बार लगातार उनका तारांकित प्रश्‍न लगा. लॉटरी में उनका बार-बार आ रहा...

श्री सुनील सराफ-- इसके लिये आपकी कृपा, आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद अध्‍यक्ष जी.

अध्‍यक्ष महोदय-- हमारा कोई कमाल नहीं, वह तो लॉटरी का कमाल है, आपके भाग्‍य का कमाल है.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कटकोना और बैहरटोला वाला पहले बसाहट का मामला आया फिर कटकोना का मामला आया फिर माननीय सदस्‍य ने बोला कि इसमें जांच कमेटी बनना चाहिये फिर जांच कमेटी बनाई गई उसमें बोला गया कि माननीय सदस्‍य भी साथ में रहें और माननीय सदस्‍य भी साथ में गये थे. जहां तक परिवहन की बात है उन्‍होंने बोला कि मैं खुद ही क्‍योंकि दिनांक 13.4 को निरीक्षण हुआ जिसमें माननीय सदस्‍य साथ में ही थे उसमें यह बात आई कि जो मुख्‍य रोग है, जो आपके कटकोना से बैहरटोला जो रास्‍ता जाता है वह अंडरब्रिज से होते हुये एन.एच. 43 में जाकर मिलती है. अब उसके बाद एक बात और आई कि वहां पर जब ग्रामीणों से पूछा गया तो यह बात भी आई कि इसके अतिरिक्‍त एक कोई देवीचौरा वाला मार्ग है उस कच्‍चे रास्‍ते से गाडि़यां आती हैं और कुछ गांव के अंदर से भी अपनी सुविधा अनुसार लोग बाग वहां से भी रेत को लेने के लिये जाते हैं, लेकिन जो वहां की मेन रोड है वह आज भी वही रोड है जो कटकोना से माइनिंग से होते हुये जाती है. अब कुछ ट्रेक्‍टर ट्राली सुविधानुसार अन्‍य कई रास्‍तों से निकलकर आ जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद वहां पर यह निर्देशित भी किया था और यह पंचनामा में भी आया है, आपके पंचनामा में ही लिखा है जिसमें आपके हस्‍ताक्षर हैं क्‍योंकि इसमें मैं पढ़कर भी सुना सकता हूं जो पंचनामा है कि इसके अतिरिक्‍त वह कटकोना और बैहरटोला में स्‍टेशन मार्ग में कुछ अन्‍य मार्गों से भी लोग बाग घुस जाते थे, वहां पर निर्देशित भी किया है और माइनिंग अधिकारी ने भी वहां पर निर्देशित किया कि अन्‍य मार्गों से कोई गाडि़यां न आयें और वहां का सुदृढ़ीकरण भी हो और वहां पर पानी के छिड़काव की व्‍यवस्‍था हो जिससे कोई परेशानी न हो, इसलिये गांव की सुविधा के हिसाब से लोग बाग चले जाते हैं, लेकिन मेन रोड आज भी बाहर से ही है.

श्री सुनील सराफ-- माननीय मंत्री महोदय, बड़े दुख का विषय है कि आज भी आप वही गोल-गोल बात कर रहे हैं. आपके प्रश्‍न क्रमांक 880 में स्‍पष्‍ट उत्‍तर आया कि गांव के भीतर से कोई परिवहन नहीं हो रहा है. प्रश्‍न क्रमांक 878 में आया कि गांव के भीतर से वैकल्पिक मार्ग नहीं होने के कारण गांव के भीतर से परिवहन हो रहा है. दो में से सच क्‍या है जब हमने पूछा, आपके इस पंचनामा में स्‍पष्‍ट लिखा है कि जब हमने पूर्व में पंचनामा बनाया था तो ग्रामीणों ने बताया था कि बाहर से हो रहा है किंतु आज भी बता रहा है कि देवीचौरा के सामने से भी हो रहा है. यह जो सदन को इसके पहले गलत जानकारी दी गई, आपसे यहां पर असत्‍य बुलवाया गया, ऐसे अधिकारी के ऊपर क्‍या कार्यवाही करेंगे, क्‍या यह सदन लगातार 2 साल से एक असत्‍य को सत्‍य साबित करने में इतना समय जायेगा. बहुत छोटी सी बात है, क्‍यों आप अधिकारी का इतना पक्ष ले रहे हैं. सरकार चली जायेगी कोई नमस्‍कार नहीं करेगा. मंत्री महोदय, पक्ष न लें इस तरह से जिन अधिकारियों ने सदन को मजाक बनाकर रखा है. कृपा पूर्वक आप उन पर कार्यवाही का आश्‍वासन दें.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- आपके साथ यही हो रहा है क्‍या ?

श्री सुनील सराफ-- बिलकुल हो रहा है. ...(हंसी)...

अध्‍यक्ष महोदय-- सराफ जी अब आप यह मत कहो, आपके सबसे सीनियर नेता कमल नाथ जी आश्‍वासन देकर, आशीर्वाद देकर गये हैं कि यह वहीं रहेंगे, हम यहीं रहेंगे, तो ऐसा क्‍यों कह रहे हो कि बदलने वाला है. माननीय मंत्री जी कुछ समाधान निकले.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं जो पंचनामा जिसमें माननीय सदस्‍य के खुद हस्‍ताक्षर हैं उसमें ...

श्री बाला बच्‍चन-- आदरणीय कमल नाथ जी ने शिव‍राज सिंह जी को यह बोला है कि आपके लिये यह सीट गरम रखेंगे, उधर के लिये नहीं, इधर के लिये. आपने उसकी व्‍याख्‍या गलत कर दी.

अध्‍यक्ष महोदय-- व्‍याख्‍या हमने गलत नहीं की, आप गलत व्‍याख्‍या कर रहे हैं.

श्री सुखदेव पांसे-- आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, आप ऊपर बैठे हैं, आप न्‍याय कीजिये, स्‍पष्‍ट बात कीजिये.

अध्‍यक्ष महोदय-- अब उन्‍होंने जो कहा है वही मैंने कहा है. आशीर्वाद दिया है तो आशीर्वाद में तो हम भी हैं न, दूसरा थोड़ी है.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो पंचनामा बनकर आया है जिसमें माननीय के हस्‍ताक्षर हैं.

श्री सुनील सराफ-- वह मेरे पास भी है, उसकी कापी मेरे पास भी है.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह-- मैं वही पढ़ रहा हूं, आप उसको देख लें.

श्री सुनील सराफ-- आप नीचे की लाइन पढ़ें.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह-- आज दिनांक को उपस्थित ग्रामीणों द्वारा रेत परिवहन मार्ग उक्‍त मार्ग पूर्व से बताये गये मार्ग के अतिरिक्‍त कटकोना के अन्‍य अंदर मार्गों से परिवहन होना भी बताया गया.

श्री सुनील सराफ-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय....

अध्‍यक्ष महोदय-- हो गया सराफ जी, प्रश्‍नकाल की सूचना समाप्‍त, आप जवाब लेना नहीं चाहते.

 

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 


 

12.01बजे नियम 267(क) के अधीन विषय

अध्‍यक्ष महोदय -- निम्‍नलिखित माननीय सदस्‍यों की शून्‍यकाल की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जायेगी.

1. श्री उमाकांत शर्मा

2. डॉ. अशोक मर्सकोले

3. श्री पुरूषोत्‍तम लाल तंतुवाय

4. श्री तरूण भनोत

5. श्री सूबेदार सिंह सिकरवार राजौधा

6. श्री संजय सत्‍येन्‍द्र पाठक

7. श्री कमलेश्‍वर पटेल

8. कुंवर विक्रम सिंह नातीराजा

9. श्री बहादुर सिंह चौहान

10. श्री जालम सिंह पटेल

 

 

12.02 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना.

अध्‍यक्ष महोदय -- आज की कार्य सूची के पद 2 के उप पद 1 से 11 में उल्लिखित प्रतिवेदन एवं अधिसूचनाएं पटल पर रखी हुईं मानी जाएंगी.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.02 बजे प्रतिवेदनों की प्रस्‍तुति

(1) प्रत्यायुक्त विधान समिति का पंचम्, षष्टम् एवं सप्तम् प्रतिवेदन.

श्रीमती गायत्री राजे पवार (सभापति) - - अध्‍यक्ष महोदय , मैं, प्रत्यायुक्त विधान समिति का पंचम्, षष्टम् एवं सप्तम् प्रतिवेदन प्रस्‍तुत करती हूं.

 

(2) लोक लेखा समिति का चालीसवां से तैंतालीसवां प्रतिवेदन .

श्री पी.सी. शर्मा( सभापति) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं लोक लेखा समिति का चालीसवां से तैंतालीसवां प्रतिवेदन प्रस्‍तुत करता हूं.

 

(3) विशेषाधिकार समिति का प्रथम प्रतिवेदन .

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय( सभापति) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं विशेषाधिकार समिति का प्रथम प्रतिवेदन प्रस्‍तुत करता हूं.

(4) कृषि विकास समिति का द्वितीय कार्यान्वयन प्रतिवेदन .

श्री बहादुर सिंह चौहान (सभापति) --अध्‍यक्ष महोदय, मैं कृषि विकास समिति का द्वितीय कार्यान्वयन प्रतिवेदन प्रस्‍तुत करता हूं और विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सक्रियता और माननीय सदस्‍यों को भी धन्‍यवाद देता हूं.

 

 

 

 

 

 

 

12.03 बजे आवेदनों की प्रस्‍तुति .

अध्‍यक्ष महोदय -- आज की कार्यसूची में सम्मिलित माननीय सदस्‍यों के सभी आवेदन प्रस्‍तुत हुए माने जायेंगे.

 

12.04 बजे मंत्रि-परिषद् में अविश्वास का प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अनुमति के लिए प्रस्ताव.

 


12.04 बजे स्‍वागत उल्‍लेख

श्री पी.सी.शर्मा -- सदन की अध्‍यक्षीय दीर्घा में हमारे प्रमुख सचिव श्री ए.पी.सिंह की माता जी रामकुमारी जी गांव से आर्शीवाद देने आई हैं, हम उनका स्‍वागत करते हैं.

 

12.05 बजे शासकीय विधि विषयक कार्य.

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई)


 

1. मध्यप्रदेश निरसन विधेयक, 2022 (क्रमांक 25 सन् 2022) का पुर:स्‍थापन

 

विधि एवं विधायी कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्यप्रदेश निरसन विधेयक, 2022 (क्रमांक 25 सन् 2022) के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूं.

 

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न यह है कि मध्यप्रदेश निरसन विधेयक, 2022 (क्रमांक 25 सन् 2022) के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाये.

अनुमति प्रदान की गई.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्यप्रदेश निरसन विधेयक, 2022 (क्रमांक 25 सन् 2022) का पुर:स्‍थापन करता हूं.

(2) मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 26 सन् 2022) का पुर:स्‍थापन

सहकारिता मंत्री (डॉ. अरविन्‍द सिंह भदौरिया) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाय.

अनुमति प्रदान की गई.

डॉ. अरविन्‍द सिंह भदौरिया माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 का पुर:स्‍थापन करता हूँ.

 

(3) मध्‍यप्रदेश पेय जल परिरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 28 सन् 2022) का पुर:स्‍थापन

राज्‍यमंत्री लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी (श्री बृजेन्‍द्र सिंह यादव) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश पेय जल परिरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश पेय जल परिरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाय.

अनुमति प्रदान की गई.

श्री बृजेन्‍द्र सिंह यादव माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश पेय जल परिरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 का पुर:स्‍थापन करता हूँ.

(4) मध्‍यप्रदेश सिनेमा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2022 (क्रमांक 29 सन् 2022) का पुर:स्‍थापन

नगरीय विकास और आवास मंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश सिनेमा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2022 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश सिनेमा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2022 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाय.

अनुमति प्रदान की गई.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश सिनेमा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2022 का पुर:स्‍थापन करता हूँ.

 

(5) मध्‍यप्रदेश नगरपालिक विधि (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 30 सन् 2022) का पुर:स्‍थापन

नगरीय विकास और आवास मंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश नगरपालिक विधि (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 2022 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश नगरपालिक विधि (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 2022 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाय.

अनुमति प्रदान की गई.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश नगरपालिक विधि (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 2022 का पुर:स्‍थापन करता हूँ.

 

 

 

(6) मध्‍यप्रदेश निरसन विधेयक, 2022 (क्रमांक 25 सन् 2022)

विधि और विधायी कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, प्रस्‍ताव करता हूँ कि मध्‍यप्रदेश निरसन विधेयक, 2022 पर विचार किया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्‍यप्रदेश निरसन विधेयक, 2022 पर विचार किया जाए.

प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश निरसन विधेयक, 2022 पर विचार किया जाए.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

अध्‍यक्ष महोदय - अब विधेयक के खण्‍डों पर विचार होगा.

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 2 तथा 3 इस विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 2 तथा 3 इस विधेयक के अंग बने.

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 1 इस विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 1 इस विधेयक का अंग बना.

प्रश्‍न यह है कि पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूँ कि मध्‍यप्रदेश निरसन विधेयक, 2022 पारित किया जाये.

 

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्‍यप्रदेश निरसन विधेयक, 2022 पारित किया जाए.

प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश निरसन विधेयक, 2022 पारित किया जाए.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ

विधेयक पारित हुआ.

 

 

 

 

 

 

 

 

(7) मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 26 सन् 2022)

सहकारिता मंत्री (डॉ. अरविन्‍द सिंह भदौरिया) - अध्‍यक्ष महोदय, मैं, प्रस्‍ताव करता हूँ कि मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 पर विचार किया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 पर विचार किया जाए.

प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 पर विचार किया जाए.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

अध्‍यक्ष महोदय - अब विधेयक के खण्‍डों पर विचार होगा.

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 2 तथा 3 इस विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 2 तथा 3 इस विधेयक के अंग बने.

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 1 इस विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 1 इस विधेयक का अंग बना.

प्रश्‍न यह है कि पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक के अंग बने.

डॉ. अरविन्‍द सिंह भदौरिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, प्रस्‍ताव करता हूँ कि मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 पारित किया जाये.

 

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 पारित किया जाए.

प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2022 पारित किया जाए.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ

विधेयक पारित हुआ.

 


 

(8) मध्यप्रदेश पेय जल परिरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 28 सन् 2022)

अध्‍यक्ष महोदय - मध्यप्रदेश पेय जल परिरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 28 सन् 2022)

श्री बृजेन्द्र सिंह यादव, राज्यमंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी,- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश पेय जल परिरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 28 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्यप्रदेश पेय जल परिरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 28 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न यह है कि मध्यप्रदेश पेय जल परिरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 28 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

अध्‍यक्ष महोदय - अब, विधेयक के खण्‍डों पर विचार होगा.

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 2 इस विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 2 इस विधेयक का अंग बने.

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 1 इस विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 1 इस विधेयक का अंग बना.

प्रश्‍न यह है कि पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने

श्री बृजेन्द्र सिंह यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूँ कि मध्यप्रदेश पेय जल परिरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 28 सन् 2022) पारित किया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्यप्रदेश पेय जल परिरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 28 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

प्रश्‍न यह है कि मध्यप्रदेश पेय जल परिरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 28 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

विधेयक पारित हुआ.

(9) श्री भूपेन्द्र सिंह, नगरीय विकास एवं आवास मंत्री, प्रस्ताव करेंगे कि मध्यप्रदेश सिनेमा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2022 (क्रमांक 29 सन् 2022)

अध्‍यक्ष महोदय - मध्यप्रदेश सिनेमा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2022 (क्रमांक 29 सन् 2022)

श्री भूपेन्द्र सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, प्रस्‍ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश सिनेमा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2022 (क्रमांक 29 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्यप्रदेश सिनेमा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2022 (क्रमांक 29 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

प्रश्‍न यह है कि मध्यप्रदेश सिनेमा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2022 (क्रमांक 29 सन् 2022) पर विचार किया जाए

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

अब विधेयक के खंडों पर विचार होगा.

प्रश्‍न यह है कि खंड 1 से 4 तथा पूर्ण नाम अधिनियम सूत्र इस विधेयक के अंग बने.

खंड 1 से 4 तथा पूर्ण नाम अधिनियम सूत्र इस विधेयक के अंग बने.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश सिनेमा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2022 (क्रमांक 29 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्यप्रदेश सिनेमा (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2022 (क्रमांक 29 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

विधेयक पारित हुआ.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(10) मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 30 सन् 2022)

 

अध्‍यक्ष महोदय - मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 30 सन् 2022)

श्री भूपेन्‍द्र सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 30 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 30 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

प्रश्‍न यह है कि मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 30 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

अब विधेयक के खंडों पर विचार होगा.

प्रश्‍न यह है कि खंड 1 से 4 तथा पूर्ण नाम तथा अधिनियम सूत्र इस विधेयक के अंग बने.

खंड 1 से 4 तथा पूर्ण नाम तथा अधिनियम सूत्र इस विधेयक के अंग बने.

श्री भूपेन्‍द्र सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, प्रस्‍ताव करता हूं कि कि मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 30 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि कि मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 30 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

प्रश्‍न यह है कि कि मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि (चतुर्थ संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 30 सन् 2022) पर विचार किया जाए.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

विधेयक पारित हुआ.

 

 


 

वर्ष 2022-2023 के द्वितीय अनुपूरक अनुमान की मांगों पर मतदान

 

 

 

शासकीय विधि विषयक कार्य

 

 

 

 

 

 

 

12.18

मंत्रि-परिषद के प्रति अविश्वास प्रस्ताव

नेता प्रतिपक्ष (डॉ.गोविन्द सिंह)--अध्यक्ष महोदय, मैं निम्नलिखित प्रस्ताव प्रस्तुत करता हूं--

" यह सदन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में गठित मंत्रि-मंडल के प्रति अविश्वास प्रकट करता है".

अध्यक्ष महोदय--प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ--

" यह सदन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में गठित मंत्रि-परिषद के प्रति अविश्वास प्रकट करता है".

विधान सभा की प्रक्रिया नियम 143 (3) के तहत इस प्रस्ताव पर चर्चा के लिये 4 घंटे का समय निर्धारित किया जाता है. माननीय सदस्यों से अपेक्षा है कि समय सीमा को दृष्टिगत रखते हुए कार्यवाही के सुचारू संचालन में सहयोग करेंगे. इससे पहले अविश्वास के प्रस्ताव पर चर्चा प्रारंभ हो. मैं सदन में स्थापित परम्पराओं-प्रक्रियाओं नियमों की ओर माननीय सदस्यों का ध्यानाकर्षित करना चाहूंगा. सदन की मान्य स्थापित परम्परा यह है कि ऐसे व्यक्ति जो इस सदन के सदस्य नहीं हैं. उन पर आरोप एवं टिप्पणी नहीं की जानी चाहिये. न्याय निर्णायाधीन मामलों पर चर्चा निश्चित है. विधान सभा की नियमावली में इस बात का उल्लेख है कि व्यक्तिगत आरोपों से बचा जाये. ऐसे आरोप भी सदस्य नहीं लगाये जाये जो सभा की गरिमा के विरूद्ध हों जिससे लोकहित सिद्ध न होता हो. मैं चाहूंगा कि दोनों पक्षों के माननीय सदस्य ऐसे आरोपों तथा आरोपों की पुनरावृत्ति से बचें ताकि चर्चा सार्थक हो. मुझे विश्वास है कि दोनों पक्षों के सदस्य इन बातों पर ध्यान रखकर ही चर्चा करेंगे. सदन की व्यवस्था बनाये रखने में मुझे सहयोग करेंगे. एक बात और इसमें लिखा नहीं है लेकिन मैं अलग से कह रहा हूं. मेरा सारे सदस्यों से आग्रह यह है कि बहुत गंभीर विषय पर आप चर्चा करने जा रहे हैं. मेरा आग्रह यह है कि जब नेता प्रतिपक्ष खड़े हों तब कोई टोका-टाकी न हो. जब कोई विशेष बात हो तो हमसे अनुमति लें इसी तरह से जब सदन के नेता खड़े हों. अकसर यह देखा गया है कि अपनी बात कहने के बाद यदि कोई सदन का नेता खड़ा होता है तो फिर थोड़ी सी दिक्‍कत आती है. इसलिये मेरा दोनों पक्षों से आग्रह है कि जब नेता प्रतिपक्ष बोल रहे हों या हमारे सदन के नेता बोल रहे हैं तो शांतिपूर्वक एक बार आप इसको सुनो. अब मैं माननीय गोविन्‍द सिंह से चर्चा आरंभ करने का अनुरोध करता हूं.

नेता प्रतिपक्ष( डॉ. गोविंद सिंह):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कल आपसे चर्चा हुई थी और संसदीय कार्य मंत्री जी भी थे. इस सदन की कार्यवाही अभी भी शाम के 5.30 बजे तक सदन चलता है. ऐसा लगता है कि आज 4.30 बजे ही खत्‍म हो जायेगा, आपने सदन की कार्यवाही और कम कर दी, जबकि पहले यह तय हुआ था कि सदन लम्‍बा चलाइये और अविश्‍वास प्रस्‍ताव लंबा चलेगा.

अध्‍यक्ष महोदय:- नहीं, अब इसको कहने की आवश्‍यकता नहीं है. यदि ऐसा लगता है तो सदन का समय तो हमेशा बढ़ा लेते हैं, उसमें कौन सी दिक्‍कत है. यह कहने की आवश्‍यकता थोड़े ही है, यदि ऐसा लगता तो समय बढ़ा लेंगे. समय तो हर बार बढ़ाया जाता है, उल्‍लेख करने की इसकी आवश्‍यकता नहीं है.

डॉ. गोविंद सिंह:- प्रश्‍न यह है कि यद सदन मुख्‍य मंत्री शिवराज...

अध्‍यक्ष महोदय:- नहीं यह हो गया है, आप शुरू करें.

मुख्‍य मंत्री (श्री शिवराज सिंह चौहान):- अब तो आप सीधे आ जाओ और बॉलिंग करो.

अध्‍यक्ष महोदय:- अब पिच सब लग गयी है तो केवल बैटिंग शुरू करो ना. अब वह बैट कमजोर पकड़ कर बेटिंग करेंगे तो हम क्‍या कर सकते हैं.

डॉ. गोविंद सिंह:- माननीय अध्‍यक्ष जी, सबसे पहले वर्ष 1990 में, जब मैं, इस सदन में आया तो उसी समय माननीय शिवराज सिंह जी भी इस सदन के सदस्‍य के रूप में पहुंचे थे. उस समय मैं, यह देखता और सुनता था, मुख्‍य मंत्री जी तत्‍कालीन पूर्व विधायक उस समय लगातार धाराप्रवाह भाषण देते थे और मैं और गजराज सिंह जी थे. तो मैंने सोचा कि यह व्‍यक्ति आगे लंबे समय तक ऊंची की राजनीति में जायेंगे. सोचा था जायेंगे और ईश्‍वर ने उनको अवसर भी दिया और इनका एक भाषण और सुना था कि पांव में चक्‍कर, मुंह में शक्‍कर और दिमाग में ठंडक, लेकिन यह उस समय की बातें थीं. आज पूरी तरह से सत्‍ता के घमण्‍ड में मुख्‍य मंत्री जी ने इन बातों को तिलांजली दे दी. अब आप के आज के समय के भाषण सुनते हैं तो वह इस तरह के आक्रामक होते हैं कि भ्रष्‍टाचारियों को टंगवा दूंगा, गड्डे में गाड़ दूंगा. परन्‍तु आज तक एक वर्ष के अंदर न किसी को भाषण के अनुकूल गड्डे में गड़ा देखा, ना ही किसी को टंगा देखा. कई बार मैंने खुदे हुए गड्डे भी देखे कि यहां ना कोई गड़ गया हो, लेकिन वहां कोई गड़ा नहीं मिला. (हंसी) अब इसके बाद में कहना चाहता हूं कि आप कहते हैं कि यह हुआ, सत्‍ता में रहने के बाद मैंने यह सोचा था कि 17-18 वर्ष मुख्‍य मंत्री रहने पर बड़प्‍पन बढ़ जायेगा, गंभीरता आयेगी...

श्री उमाकांत शर्मा:- यह कोई बात है, शुरूआत में ही..

अध्‍यक्ष महोदय:- नहीं उमाकांत जी.

डॉ. गोविंद सिंह:- लेकिन वह सब समाप्‍त हो गयी. ना ही गंभीरता है, ना बड़प्‍पन है, (XXX) प्रजातंत्र के मूल्‍यों का धीरे-धीरे अवमूल्‍यन कर रहे हैं. पहले तो पंचायती राज में जो अधिकार दिये, वह सब अधिकार आपने छीन लिये. जिस प्रकार विधायक चुनते हैं और वह मंत्री बनते हैं तो वह अपने अधिकारों का उपयोग करते हैं, जो दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में जिला सरकार और पंचायती राज के संबंध में अधिकार दिये वह सब छीनकर शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को ट्रांसफर कर दिया, ताकि मनमानी तरीके से जो चाहें सो करायें. आज ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव के सब पॉवर रोक दिये, सब छीन लिये. जनपद और जिला पंचायत सब पॉवर लेस हो चुके हैं. केवल वहां के प्रतिनिधि CEO जिला पंचायत और ग्राम पंचायत के सचिव रह गये हैं. हमारे पास तमाम सरपंच आते हैं कि सचिव हस्‍ताक्षर ही नहीं करता है, कहता है हमें 20-25 प्रतिशत चाहिए. आज आपने धीरे-धीरे इसका अवमूल्‍यन कर दिया है. विधान सभा में जब पहली बार वर्तमान मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह जी सदन में उपस्थित थे, उस समय पटवा जी और जगदंबा प्रसाद निगम जी की एक विषय पर चर्चा प्रारंभ हुई और लगातार एक के बाद एक, चर्चा में रूलिंग रखी जाती थी, पौन घंटे तक एक ही प्रश्‍न पर विधान सभा चली. कहीं पटवा जी हाऊस ऑफ कॉमन की रूलिंग की बात कर रहे थे, तो कहीं कौल एण्‍ड शकधर की किताबों का उल्‍लेख हो रहा था. उस समय लगता था कि हम प्रजातंत्र के इस पवित्र मंदिर में आये हैं और प्रदेश का कल्‍याण करने, जनता की समस्‍या को सुलझाने के लिए, प्रदेश के विकास के लिए यहां आये हैं. परंतु अब मुख्‍यमंत्री जी ने ये सब परम्‍परायें समाप्‍त कर दी हैं. दिग्विजय सिंह जी के कार्यकाल में लंबे समय तक सदन चलता था. अभी पीठासीन अधिकारियों का सम्‍मेलन माननीय लोकसभा अध्‍यक्ष जी द्वारा बुलाया गया था, उसमें आप भी उपस्थित हुए थे. उसमें तय हुआ था कि बड़ी विधान सभायें कम से कम 75-90 दिन चलें, लोकसभा कम से कम 120 दिन चले और छोटे राज्‍यों की विधान सभायें भी 30-40 दिन चलें.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब से माननीय मुख्‍यमंत्री जी का 15-18 वर्ष का कार्यकाल हो गया, सबसे लंबे समय रहकर, इतिहास बनाया परंतु आपने सदन को कम से कम चलाने का इतिहास भी बनाया. मुख्‍यमंत्री जी आपको इस मामले में भी गोल्‍ड मैडल मिलेगा, जनता की आवाज नहीं चलने देना. राजनैतिक आधार पर सुशासन, पहले तो मैंने सोचा सुशासन होता क्‍या है ? मुख्‍यमंत्री जी का सुशासन, मैं सुनता रहा, देखता रहा.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज लगातार विपक्षी दलों के साथ क्‍या बर्ताव किया जा रहा है ? आपने, भारतीय जनता पार्टी की सरकार के समय माननीय अध्‍यक्ष जी, आपके निर्देश पर करीब-करीब 17 आदेश सामान्‍य प्रशासन विभाग ने जारी किये. उनमें से 15 आदेश आपकी सरकार के समय के हैं. विधायकों का सम्‍मान किया जाये, कलेक्‍टर, एस.पी. के यहां जब विधायक जायें, तो वे उठकर उनका सम्‍मान करें. सम्‍मान से बैठायें, उन्‍हें कुर्सी दें. परंतु हमारे आठ विधायक साथी एक समस्‍या को लेकर रतलाम पहुंचे और वहां के कलेक्‍टर ने करीब 1 घंटा 45 मिनट उन्‍हें बाहर बैठाये रखा, उनसे मिले ही नहीं. आपके अधिकारी इतने निरंकुश हो गए हैं. प्रजातंत्र पर तंत्र हावी हो गया है, प्रजा रह गई है, तंत्र हावी है. आपने अपने सर्कुलर में लिखा है कि यदि कोई सम्‍माननीय विधायक या सांसद अगर किसी शासकीय अधिकारी, कर्मचारी को किसी समस्‍या से संबंधित कोई पत्र लिखता है तो वहां रजिस्‍टर रखा जायेगा और उसमें पत्र को दर्ज किया जायेगा और तीन दिन में जवाब दिया जायेगा कि आपका पत्र मिला और एक माह के भीतर यदि समस्‍या का निदान हो सकता है तो उससे अवगत करवाया जायेगा और यदि नहीं है तो बताया जायेगा कि यह काम इस तरह से संभव नहीं है. यह आपके समय का नया आदेश है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश में यहां पक्ष-विपक्ष के सम्‍माननीय विधायक बैठे हैं, एक भी अधिकारी ने इस प्रकार का बर्ताव किया हो, पत्र का जवाब शासन के आदेशों का पालन करते हुए दिया हो, आजकल सभी अधिकारी निरंकुश होकर तानाशाही तरीके से काम करने में लगे हुए हैं. हमारे पत्रों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, क्‍यों न उड़ायें, इसलिए उड़ा रहे हैं क्‍योंकि पहले परंपरा थी, संसद और विधान सभा दोनों जगहों पर थी, जब कोई सम्‍माननीय विधायक या सांसद, यदि मुख्‍यमंत्री अथवा मंत्री जी को पत्र लिखते थे तो वहां से जवाब आता था लेकिन श्रीमान जी जब से आप इस पद पर विराजमान हुए हैं. तब से उसका भी कोई मूल्‍य नहीं रहा है. न काई सुनने वाला है और न ही कोई जवाब देते हैं. कोई गंभीर समस्‍या है तो उसका भी जवाब नहीं मिल रहा है. हमने आज भी दिल्‍ली में सरकार को पत्र लिखे और हम केवल माननीय गडकरी जी का धन्‍यवाद देते हैं कि उन्‍होंने हमसे बिना कभी मिले-जुले हमारे पत्र का उत्‍तर भी दिया और जो काम होने लायक था वह काम भी किया. यह परम्‍परा ऊपर से नीचे तक चालू हो गई है तो उसका पालन श्रीमान जी क्‍यों नहीं करेंगे? क्‍या यह आपका सुशासन है? विपक्षी दलों का अपमान करना, उनको झूठे मुकदमें में फंसाना, प्रताडि़त करना और अपनी पार्टी में शामिल करा लेना यह काम आपकी सरकार का चल रहा है. आपने सोचा कि जिस प्रकार के आपके भाषण हैं, काम हैं आप वही जनता के लिए करेंगे. आपने विकास तो किया नहीं पूरे प्रदेश को कर्ज की गर्त में डाल दिया है .मध्‍यप्रदेश की जो संस्‍थाएं खड़ी हुई थीं, जो संपत्तियां आजादी के बाद सृजित की गईं थीं जो कि करीब 38 संपत्तियां हैं, काफी उपयोगी संपत्तियां हैं और बड़ी कीमत वाली हैं. हजारों करोड़ की संपत्ति आपने केवल 459 करोड़ रुपए में बेच दी है. क्‍या यह सुशासन है जो इकट्ठा किया है हमारे बाप-दादाओं ने, हमारे पूर्वजों ने, पूर्व के मुख्‍यमंत्रियों ने उसको भी आप बेचने लगे. हमें नहीं लगता कभी ऐसा न हो कि (XXX). यह आपको अपनी क्षमता दिखाना था.

श्री उमाकांत शर्मा-- यह असंसदीय है. विधान सभा बेची नहीं जा सकती.

डॉ. गोविन्‍द सिंह-- जब हमारे पोरसा का, अंबाह के बस स्‍टेण्‍ड बिक गए. बसे खड़ी होने को जगह नहीं है. करीब 80 करोड़ की जमीन 17, 18 करोड़ रुपए में बेच दी तो यहां मुख्‍यमंत्री जी के राज में सब हो सकता है. पंडित जी आपके राज में नहीं होगा.

श्री उमाकांत शर्मा-- आपके नेता (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय-- उमाकांत जी आप बैठ जाइए. (गोविन्‍द सिंह जी के पानी पीने पर) गोविन्‍द सिंह जी उन्‍होंने ऐसा कुछ थोडी़ बोला है कि आपको पानी पीना पड़े

डॉ. गोविन्‍द सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, आजकल हमारा गला खराब चल रहा है. मैं यह कहना चाहता हूं कि पिछले माह हमारे नेता राहुल गांधी जी पद यात्रा पर आए थे. मैं भी वहां पहुंचा मैंने आगर मालवा के कलेक्‍टर को, प्रशासन को पूर्व में सूचना दी वैसे तो हमें सैर-सपाटा करने का 5 स्‍टार होटल में ठहरने का ज्‍यादा शौक नहीं है. मैं गांव का किसान हूं, किसान का बेटा हूं और मुख्‍यमंत्री जी भी हैं, लेकिन उनके और हमारे रहन-सहन में काफी फर्क है. हम अपनी जीप से चलते हैं और आप उड़न-खटौला से चलते हैं तो यह तो आप मुख्‍यमंत्री होने के नाते व्‍यस्‍त रहते हैं समय कम होने के कारण आपको जाना भी पड़ता है इसमें हमें कोई एतराज नहीं है, लेकिन कम से कम निर्वाचित जनप्रतिनिधियों का तो अपमान न कराएं. हमने इसके पूर्व में भी लिखा कि जो विधायक नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से सुविधाएं सरकार को देना चाहिए, लेकिन जब हम वहां वहां सर्किट हाऊस में पहुंचे तो पत्र आ गया कि यह आरक्षित है. जब हम वहां गए तो वहां कोई एस.डी.एम. रघुवंशी जी थे. वहां ताला लगा था, गंदगी का ढेर लगा था. उन्‍होंने कहा कि आपके लिए 4 नंबर कमरा खाली है आप 3 नंबर कमरे में नहीं ठहर सकते हैं तो हमने कहा कि क्‍या इसमें कोई और ठहरा है तो उन्‍होंने कहा कि यह सभी कमरे बुक हैं. आप जांच करा लें कि उस दिन कोई कमरा बुक नहीं था. बाहर के गेट में कुन्डी नहीं थी, नारियल की रस्सी से वह बंधा हुआ था. मैं उसका फोटो लाया हूँ और शायद मैंने आपको भी फोटो सहित लिखकर भेजा है. अन्दर जाकर जैसे ही मैंने बाथरुम की सीट पर पैर रखा तो बाथरुम की सीट गिर गई. उसके फोटो भी मैं लाया हूँ. वहां पर हमने नायब तहसीलदार को दिखाया. फिर मैं वहां पर मेरे एक मित्र के घर पर जाकर ठहरा था. यह हालत है. वल्लभ भवन के कई अधिकारी मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव इनको फोन करें तो फोन नहीं उठाते हैं. यदि उनके स्टाफ को मिलने के लिए नोट करा दें तो दोबारा खुद कभी फोन नहीं करते हैं. जब यह नेता प्रतिपक्ष की स्थिति है तो बाकी हमारे साथी विधायकों की क्या दशा होगी. सत्तापक्ष के सदस्य तो मुख्यमंत्री जी के दबाव में ज्यादा कुछ नहीं कह सकते हैं. लेकिन हम लोगों को तो कहना पड़ेगा. आज बजट पास हुआ है. आपने भिण्ड जिले में करीब 30-35 सड़कें स्वीकृत की हैं. इसके पहले के बजट में भी इतनी संख्या थी. उसके पहले सप्लीमेंट्री में भी कुछ सकड़ें आईं थीं. लेकिन जो विधायक विपक्ष में हैं पत्र लिख रहे है, प्रस्ताव भिजवा रहे हैं. यही आपका सुशासन है, यही आपका न्याय है. जब आपने विधायक और मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तब आपने कहा था कि राग द्वेष, बिना पक्षपात के न्याय करेंगे. क्या आपका यही न्याय है जो आप कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भाजपा के प्रत्येक विधायक से 15 करोड़ रुपए के 4-4 मेगा प्रोजेक्ट लें. हम लोगों ने कौन-सा अपराध किया है जनता से चुनकर आए हैं. हो सकता है कि हमारे भी कुछ मंत्रियों ने भेदभाव किया होगा लेकिन गोविन्द सिंह ने कभी नहीं किया. मैं तो सोचता हूँ कि चुनाव जीत गए तो हम पूरे क्षेत्र के एमएलए हैं, एक क्षेत्र के या कांग्रेस पार्टी के नहीं हैं. विधायक पूरे क्षेत्र का होता है हम उसी प्रकार से बर्ताव करते हैं. हम लोगों का क्या दोष है, जनता का तो दोष नहीं है. हो सकता है हमसे आपकी नाराजगी हो परन्तु जनता के काम के लिए तो बड़ा दिल दिखाइए.

अध्यक्ष महोदय, एक तरफ सर्कुलर जारी कर रहे हैं और दूसरी तरफ जनप्रतिनिधियों का अपमान हो रहा है. राजगढ़ में मुख्यमंत्री जी आप मेडिकल कॉलेज का घोषणा अनुसार शिलान्यास करने के लिए गए थे. वहां पर हमारे विधायक बापू सिंह तंवर भी थे. आपके निर्देश हैं कि आमंत्रण पत्र पर विधायक का नाम लिखा जाएगा. सम्मान सहित कुर्सी मिलेगी. लेकिन कुर्सी नीचे दी गई, आमंत्रण पत्र में कहीं नाम नहीं लिखा गया. न पट्टिका पर लिखा है. लेकिन उन्होंने सोचा कि जनता के प्रतिनिधि हैं...

मुख्यमंत्री (श्री शिवराज सिंह चौहान) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं टोका-टाकी नहीं करूंगा लेकिन मैं यह निवेदन कर रहा था कि बापू सिंह तंवर भी अच्छी तरह जानते हैं मैंने उनका भाषण करवाया था क्योंकि वे स्थानीय विधायक हैं तो वे जरुर बोलें. पहले जरुर यह था कि हम लोग लेट पहुंचे थे तो मंत्री और मुख्यमंत्री के ही बोलने का था लेकिन उन्होंने कहा कि हम बोलेंगे तो हमने बाकायदा कहा बोलिए. मैं बीच में नहीं टोकता हूँ लेकिन यह सच नहीं है.


 

डॉ.गोविन्‍द सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम यह बात कहने वाले थे कि आपने बुलवाया लेकिन क्‍या आपके सामने आपके उच्‍च शिक्षा मंत्री डॉ.मोहन यादव जी वह आपका कुर्ता खींच रहे थे.

उच्‍च शिक्षा मंत्री (डॉ.मोहन यादव) -- नेता प्रतिपक्ष जी, अभी बापूसिंह तंवर जी भी यहां मौजूद हैं, आप जरा उनसे भी पूछ लीजिए कि क्‍या हुआ...(व्‍यवधान)..

डॉ.गोविन्‍द सिंह -- उन्‍होंने ही मुझे बताया है.

डॉ.मोहन यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि आपकी जानकारी के लिये मैं बड़ी विनम्रता के साथ कह रहा हॅूं कि मैंने अपना भाषण समाप्‍त किया, मैंने नहीं बोला. मैं प्रभारी मंत्री था लेकिन बापूसिंह जी को बोलने का मौका दिया. मैंने कहा कि आप बोल लीजिए, मैं नहीं बोलता. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी की....(व्‍यवधान)....

डॉ.गोविन्‍द सिंह -- अगर ऐसा है उन्‍होंने हमें बताया नहीं....(व्‍यवधान)..

डॉ.मोहन यादव -- इसीलिए मैंने आपसे विनम्रता से कहा कि इसमें कोई वाद-विवाद नहीं कर रहा हॅूं....(व्‍यवधान)...

श्री बापूसिंह तंवर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि आप पूछ लीजिए. मैं स्‍वयं यहां उपस्‍थित हॅूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- बैठ जाइए. मैंने पहले भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष जी खडे़ हैं तो आप मत खडे़ होइए. मत खडे़ होइए. मैं अनुमति नहीं देता हॅूं आपको. बैठ जाइए.

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, जवाब तो देने दीजिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- वह सक्षम हैं सारी बात का जवाब देंगे. अभी नहीं. नहीं, नहीं आप बैठ जाइए.

डॉ.गोविन्‍द सिंह -- सज्‍जन भाई, हम दे देंगे जवाब. अध्‍यक्ष महोदय, यह बात मैं कह रहा हॅूं कि अगर ऐसा नहीं है तो मैं अपनी बात वापस लेता हॅूं. उसमें क्‍या दिक्‍कत है. अगर बात आपकी है नहीं लेकिन हमें बताया गया, वह मैं कह रहा हॅूं. इसके साथ ही मैं कहना चाहता हॅूं कि हमारी माननीय विधायक डॉ.विजयलक्ष्‍मी साधौ जी हैं. इनके महेश्‍वर में कार्यक्रम हुआ. इनका पट्टिका में न नाम लिखा गया और न आमंत्रण दिया गया और जबकि यह खुद विधायक हैं. कोरोना काल में अपने विधायक फंड से गैस के प्रोजेक्‍ट का प्‍लांट लगवाया और उसी के लिये पट्टिका में न नाम लिखा और न ही आमंत्रण दिया. ऐसे ही हमारे विधायक रामलाल मालवीय जी के साथ हुआ. खैर, अगर आपकी यही संस्‍कृति है तो हमें इसमें कोई बुराई नहीं है. हम लोग विपक्ष के लोग हैं. यह सब अपमान सहने के लिये पैदा हुए हैं. हम सहेंगे, सहर्ष सहेंगे.

डॉ.विजयलक्ष्‍मी साधौ -- जनता के लिये सहेंगे.

डॉ.गोविन्‍द सिंह -- माननीय मुख्‍यमंत्री जी, पहले तो एक बात किसानों की कर लें. आप किसान परिवार के बेटे हैं और हम भी किसान के बेटे हैं. हमारे पिताजी भी खेती करते थे. आपने बेरोजगारी के लिये जो योजना बनायी थी. मुख्‍यमंत्री के नाम से चल रही तीन योजनाएं हैं. उद्यमी योजना, स्‍वरोजगार योजना, कृषि उद्यमी योजना, यह सब योजनाएं आपने बंद कर दीं. जो नगरीय प्रशासन विभाग है उसमें करीब 50-60 परसेंट पद खाली पडे़ हैं. शिक्षकों के भी पद खाली पडे़ हैं, करीब 60-70 हजार पद खाली पडे़ हैं. जैसा कि हम समाचार पत्रों में पढ़ते हैं और ऐसा कोई विभाग नहीं है कि जहां काम चल रहे हों. अब आपने बिजली विभाग में संविदा कर दिया. वह आज क्‍या रहे हैं. वह गांव में जाते हैं उनको कोई डर नहीं है. उनकी सेवा की कोई गारंटी नहीं है कि सस्‍पेंड होंगे. डेलीवेजेस पर हैं ठेकेदारी पर हैं, जब चाहे निकाल दिये जाते हैं तो वह फर्जी बिल बनाते हैं और जिनके कारखाने चल रहे हैं उनका बिल आ रहा है 5000 रूपए और जो किसान परिवार के हैं किसान हैं साढ़े पांच हार्सपावर पर साढे़ बारह हार्सपावर का बिल आ रहा है और साढे़ बारह हार्सपावर पर पन्‍द्रह हार्सपावर का बिल आ रहा है. यह दतिया, भिण्‍ड जिले में, हमारे क्षेत्र में सेंवड़ा में कम से कम 60-70 लोगों ने बिल के दिये. हम स्‍वयं गये. हम इंजीनियर को लेकर गये कि आप चैक करो तो जैसा उन्‍होंने कनेक्‍शन दिया पांच का तो पांच निकला, लेकिन वसूली जारी है तो इसलिए संविदा के नहीं, भले ही आप काम ज्‍यादा लें. काम के जो आप 6 घंटे लेते हैं वह आप 8 घंटे, 10 घंटे लें. उनको आप परमानेंट रखेंगे तो उनको डर भी रहेगा. इसलिए यह संविदा और आउटसोर्स समाप्‍त कर देना चाहिए. यह हमारा आपसे आग्रह है. इन सब योजनाओं के बाद भारत सरकार के द्वारा आपके जो लिखित रजिस्‍टर्ड आपके रोजगार कार्यालय में करीब 32 लाख और भारत सरकार का एक जो आंकड़ा आया है वह तो पढे़-लिखे और बिना पढ़े-लिखे रजिस्‍टर्ड और बिना रजिस्‍टर्ड बेरोजगारों की संख्‍या 1 करोड़ 30 लाख है. यह आंकड़ा भारत सरकार द्वारा मध्‍यप्रदेश के बारे में बताया गया है. इसमें गांव के किसान के बेटे भी सम्‍मिलित हैं. मैंने आपसे कहा था कि जब सरकार द्वारा आरक्षण की व्‍यवस्‍था है, सरकार कमजोर वर्ग को, सबको आरक्षण देती है. गांव के जो पढ़े-लिखे बच्‍चे हैं, इंटर पास हैं, बीए पास हैं, वे आज बिल्‍कुल बेरोजगार हैं. गांवों में सामान्‍य परिवार का किसान का बेटा, मजदूर का बेटा बेरोजगार है. पुलिस की भर्ती में जाता है, एसएफ की भर्ती में जाता है और छोटे-मोटे काम करता है. पुलिस की भर्ती की परीक्षा में आपने हमारी एक बात मानी, उसके लिए धन्‍यवाद. हालांकि वह बात भी आधी मानी है. गांव में जो बच्‍चा इंटर पास कर लेता है, वह घर में भैंस दोहता है, उनके लिए चारा लाता है, शाम को फिर उसके लिए पानी भरता है. एक तरफ शहर के पैसे वाले लोग हैं, धनाढ्य लोग हैं, 12-12 हजार रुपये की तो एक महीने की ट्यूशन लगाते हैं. अब आप उनकी बराबरी गांव वालों से करेंगे. 15 साल में सिपाही को एक फीता देते हैं, वे हवलदार की फीता लगाते हैं. 15 वर्ष में उसको फीता तो लगा रहे हैं, लेकिन तफ्दीश का अधिकार नहीं है. उसका काम है सुरक्षा गार्ड का, चोरों को पकड़ना, अपराधियों को पकड़ना, सुरक्षा गार्ड की ड्यूटी वह देता है. उसके लिए आपने परीक्षा का प्रावधान किया था. जो बड़ी-बड़ी सेवाएं हैं, कंप्‍यूटर चलाना है, जहां परीक्षा की जरूरत है, वहां तो आप परीक्षा कराएं. पहले परंपरा थी कि पहले फिजीकल परीक्षा होती थी तो गांव के लड़कों का कम से कम फिजीकल कराएं. आज के कम्‍पीटिशन के युग में बाहर के कई प्रांतों के बच्‍चे हमारे यहां नौकरी में आ जाते हैं, हमारे यहां के बच्‍चे नहीं आ पा रहे हैं. इसलिए कृपा करके इस पर सुधार कर सकें तो करा दें.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसान की एक ही बात करूंगा, महंगाई की, पूरी महंगाई की लंबी बात तो नहीं करूंगा. लेकिन आपके किसान के लड़के गांव में बीए, इंजीनियरिंग, बीटेक, एमटेक करके बेरोजगार फिर रहे हैं. कंप्‍यूटर साइंस करने वाले बच्‍चे को 5 हजार रुपये में भी नौकरी नहीं मिल रही है. अभी एक छात्र मेरे पास आए कि मुझे माधोपुर में फैक्‍टरी में लगवा दीजिए. हमने दो-तीन बार बात की, एक बार खुद गए तो उन्‍होंने कहा कि 5 हजार रुपये तनख्‍वाह देंगे. वह छात्र 5 हजार रुपये में नौकरी करने के लिए तैयार है. यह हालत आज के बच्‍चों की हो गई है. मां-बाप अपने बच्‍चों की पढ़ाई-लिखाई पर लाखों रुपये खर्च करते हैं और जब बच्‍चों को रोजगार नहीं मिलता तो वे गलत कदम उठाते हैं. बुढ़ापे में बेटा अपने मां-बाप का सहारा बनना चाहता है, उसके पिताजी भी कहते हैं कि जाओ, कुछ कमाओ, बहन की शादी करना है. मां बीमार है, इलाज की व्‍यवस्‍था करना है. दिन भर वह बच्‍चा नौकरी के लिए घूमता है और जब उसे नौकरी नहीं मिलती तो वे पढ़े-लिखे बेरोजगार बच्‍चे फांसी लगा लेते हैं, कोई जहर खा लेता है और वे आत्‍महत्‍या करने को मजबूर हैं. इसलिए हमारा अनुरोध है कि उन बच्‍चों के रोजगार के लिए आप व्‍यवस्‍था करें.

अध्‍यक्ष महोदय, किसान परेशान है. जनता परेशान है. आपने जनता पर बहुत टैक्‍स लाद दिए हैं. 10 बीघा जमीन, 2 हेक्‍टेयर वाले किसानों को प्रधानमंत्री सम्‍मान निधि के 6 हजार रुपये सालाना मिल रहे हैं और मुख्‍यमंत्री जी आप भी अलग से 4 हजार रुपये उनको दे रहे हैं. इस तरह 10 हजार रुपये सालाना हो गए. मैं खुद भी किसान हूँ. मैंने पूरा हिसाब लगाया है. पटेल साहब, आप भी हिसाब लगा लेना. वर्ष 2014 में डीजल का जो भाव था, उसमें अभी तक कितनी बढ़ोतरी हुई है. किसान को निंदाई, गुड़ाई, कटाई, थ्रेसिंग सब करना पड़ना है. ट्रैक्‍टर ट्राली से गन्‍ना ले जाना और फिर उसको जाकर मण्‍डी में बेचना, इन सब कामों पर 10 बीघा जमीन वाले किसान को, 2 हेक्‍टेयर वाले किसान को 7,300 रुपये खर्चा आया. यह अकेले डीजल के भाव बढ़ने से हुआ है. अब 10 हजार रुपये सालाना में से 2,700 बच गए. वह भी कल्‍टीवेटर, थ्रेसर, ट्रैक्‍टर और जो कृषि यंत्र हैं, उन पर भाव बढ़ा दिए. कुल मिलाकर किसान को देना और दूसरी जेब से निकालना. आज पूरे विश्‍व में भोजन पर कहीं टैक्‍स नहीं लगता. बीमारी होती है उस पर जीएसटी लग गई, तो कम से कम कुछ ऐसे काम हैं, बीमार है तो पलंग पर टैक्‍स जीएसटी, दूध पर टैक्‍स, आटा पर टैक्‍स, शक्‍कर पर टैक्‍स, तो इस तरह किसान की जेबें, आम गरीब आदमी की जेबें खाली करने का काम सरकार कर रही है. उनको कमजोर कर रही है और कमजोर क्‍यों यह एक नीति के तहत है, इसलिए कमजोर किया जा रहा है ताकि यह लोग इतने कमजोर रहें, पेट की भूख में ही लगे रहें, बच्‍चों की पढ़ाई लिखाई में लगे रहें, सोचते रहें, सरकार क्‍या गड़‍बडि़यां कर रही है उस तरफ उनका ध्‍यान ही नहीं जाए. लंबे समय तक राज करने के लिए यह योजना योजनाबद्ध तरीके से साजि़श चल रही है.

अध्‍यक्ष महोदय, अब मैं आपसे पूछना चाहता हूं मुख्‍यमंत्री जी, कि आप सबको चेतावनी दे रहे हैं तो आपका ईओडब्‍ल्‍यू क्‍या कर रहा है ? ईओडब्‍ल्‍यू में ई-टेंडरिंग की जांच पहले कांग्रेस की सरकार में हुई और उसके बाद आपने सबूत नष्‍ट किए, कोर्ट में गवाह, सबूत नहीं दिए तो सभी 6 लोग बरी हो गए. आप उसको वापस ले लो, कानून को खत्‍म कर दो. आर्थिक अपराध ब्‍यूरो को मैं देख रहा हूं कि इसका नाम बदलकर अब (XXX) कर दो क्‍योंकि इसमें कुछ हो ही नहीं रहा है, कई केस हैं कि केस लगाकर बदल जाते हैं, इधर उसकी एफआईआर दर्ज करो और उधर एफआईआर बाद में मिलजुलकर समाप्‍त करवाने का काम हो रहा है. यह इसलिए क्‍योंकि लोकायुक्‍त में आप 280 अधिकारियों पर चालान की परमीशन नहीं दे रहे हैं. भाई, जब आप पाक-साफ हो तो उनको परमीशन देने का काम करो, तो परमीशन मिल जाए. जब मैं सामान्‍य प्रशासन मंत्री था तब मेरे सामने केवल दो मामले सामने आए, अधिकारी नहीं चाहते थे कि इसकी परमीशन मिले, हमने दी. आपसे भी हमारा अनुरोध है कि ऐसे भ्रष्‍टाचारियों से प्रदेश नहीं चलेगा. ऐसे लुटेरे अगर प्रदेश में हमारे तंत्र को नष्‍ट कर रहे हैं, उनके विरुद्ध भी जैसी आपकी कथनी है वैसा करने का काम भी करो.

अध्‍यक्ष महोदय, जब सरकार की हालत करीब साढ़े तीन-चार लाख करोड़ का कर्जा हो गया, बजट से दोगुना, तो आप जरा अपव्‍यय करना भी थोड़ा बंद करो. भाई-भाई हैं किस्‍मत में होगा तो बनेगा मुख्‍यमंत्री (XXX) करने से कुछ होता नहीं है. वह तो किस्‍मत में होगा तो होगा, नहीं होगा तो कोई बात नहीं. अब आपने महाकाल लोक के उद्घाटन में 12 करोड़ खर्च कर दिए. मोदी जी चीते लाए, चीता छोड़ने के लिए भी आपने लाखों, करोड़ों रुपये की बसें लगवाईं, क्‍या जरूरत थी, पिंजरे में चीते आए छोड़ देते ? हजार, दो-चार, पांच हजार में छूट जाते. उसके लिए आपने 12-15 करोड़ रुपये खर्च कर डाले ? तमाम विज्ञापन, रोजाना विज्ञापन छप रहे हैं. कहावत है कि ''घर में नहीं हैं दाने, तो अम्‍मा चली भुनाने.'' जब कुछ है नहीं, जब आपके पास खजाना खाली पड़ा है तो फिर उसके लिए आप क्‍यों पैसे की बर्बादी करा रहे हैं ?

सीएजी तो भारत सरकार के अधीन है उसकी रिपोर्ट आ गई. उन सभी में आपके घोटाले बताए थे, उस दिन आपने बहस नहीं होने दी. टेक होम में, जब मध्‍यप्रदेश में कोरोना था, कर्फ्यू लगा हुआ था मार्च 2020 से जुलाई 2020 तक मात्र 4 माह की अवधि में ही 2 अरब, 8 करोड़, 339 लाख रुपये का पोषण आहार, और टेक होम राशन में आपने 89 करोड़, 50 लाख का व्‍यय कर दिया. सीएजी ने तो रिपोर्ट में लिखा है. जो आया नहीं उसका करोड़ों का भी भुगतान हो गया. मोटरसाईकिल से, 100 क्विंटल एक मोटरसाईकिल पर धरकर आ गये. हम अपने भिण्ड जिले की बात करते हैं वहां पर आपके सामाजिक विकास विभाग का अधिकारी बैठा दिया है. सब तरह की खरीदी हो रही है. वह इंदौर का रहने वाला है वहीं से खरीदी हो रही है. जो वस्तु का मूल्य 100 रुपये है तो वह 200, 250 रुपये में खरीदी जा रही है, पता नहीं सरकार और हमारे जिले के कलेक्टर क्यों उस पर मेहरबान हैं?

अध्यक्ष महोदय, कोरोना के समय में जब तक कर्फ्यू रहा, किसी को घर से बाहर निकलने का अधिकार नहीं था, घर से निकलने नहीं दिया गया. एक बार हम निकल गये. बाहर पैदल सामने के घर में जा रहे थे तो बोले नहीं, नहीं साहब, कर्फ्यू लगा है. आप इसका उल्लंघन कर रहे हो तो हम वापस लौट गये. जब कोई निकल नहीं सकता था, गाड़ी चल नहीं सकती थी तो फिर उस समय भिण्ड जिले में कैसे अकेले लहार क्षेत्र में साढ़े 5 करोड़ रुपये का खाद्यान्न बंट गया? जब हमने विधान सभा में शिकायत की. मुख्यमंत्री जी को पत्र लिखा, कलेक्टर को लिखा. जोरदारी से प्रेस कांफ्रेंस की तो फिर क्या किया कि अधिकारियों ने जाकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं पर बाद में हमारे मुद्दा उठाने के बाद, उन पर दबाव देकर, तुम्हारी नौकरी नहीं रहेगी. आपको हटा देंगे तो उनसे लिखवा लिया कुछ पैसे देकर कि कुछ ले लो और लिख दो कि हमें मिला है. आखिर वहां ले जाने की किसने परमिशन दी? परमिशन है नहीं तो कम से कम ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर भी तो आप कार्यवाही करें. अध्यक्ष महोदय, अब एक कोरोना की बात करता हूं. कोरोना में आपात संकट था. यह अचानक आया. दूसरी कोरोना की जब बाढ़ आई तो उस समय काफी लोगों हमारे साथी नहीं रहे. कोरोना में चिरायु अस्पताल पर आप बहुत मेहरबान रहे. चिरायु में करीब 70 करोड़ रुपये आपने दे दिये. अब आप कह सकते हो कि जमीन आपके समय की है. कांग्रेस की सरकार में उसको 30 एकड़ जमीन दी थी, 25 एकड़ मेडीकल कॉलेज को और 5 एकड़ डेंटल कॉलेज को दी थी. हालांकि वह कैचमेंट की एरिया जमीन है. पिछली बार जब बाढ़ आई तो पलंग डूब चुके थे. कई लोगों ने बताया कि इतना पानी था, अखबारों में दिखा, कमर से नीचे तक डूबे थे. उसमें क्या हुआ. हम नहीं कहते, हमारे भी कुछ मित्र हैं. उसको संरक्षण दे रहे हैं. उनका स्वागत सम्मान हो रहा है. लेकिन आपने इतनी मेहरबानी उस पर क्यों की? एक ही अस्पताल को सबसे ज्यादा पैसा दिया. शासकीय अस्पतालों को पैसा दे देते. इनको ज्यादा फायदा हो सकता था, यंत्र आ सकते थे. उसने क्या किया है मैं आपको जरा एक दर्दनाक बात कहना चाहता हूं. हमारे मित्र श्री लक्ष्मीकांत शर्मा जी पूर्व मंत्री, यह जब गये तो उनसे परिवार के लोगों को मिलने नहीं दिया गया, वहां पर कोई डॉक्टर नहीं, दिन दिन भर कोई देखने वाला नहीं था. सबसे ज्यादा अगर 455 मौतें कहीं हुई हैं तो उस अस्पताल चिरायु में हुई है. उसके बाद भी उस पर मेहरबानी? मुख्यमंत्री जी क्यों इतने मेहरबान हैं, कम से कम यह तो देखिए श्री बृजेन्द्र सिंह राठौर हमारे मित्र साथी थे, उनका यह पत्र हमारे पास में रखा है. मार्मिक पत्र है वह ठीक से लिख भी नहीं पाए. उन्होंने लिखा है,वे राइटिंग ठीक से नहीं लिख पा रहे थे. विशेष आग्रह है, डी.एम., भोपाल. लवानिया जी, एच.एम. के दामाद हैं. आप उनके घर जाकर एच.एम. से कहकर हमारे प्राण बचायें. यहां कोई देखने नहीं आता है. छोटी स्लिप लिखी थी. कमलनाथ जी और मैं जब उनके घर गये श्रृद्धांजलि देने, तब उनके परिवार के लोगों ने रो-रो कर यह दिखाईं. यह दो चिट्ठी, पत्र हैं. अब एक पत्र तो इसमें आया, दूसरा पत्र है कि डॉक्टर साहब, कभी कभी तो ध्यान दो. यहां कोई आता नहीं है, मैं तड़फ रहा हूं. ठीक से सांसें नहीं चल रही हैं. वह आदमी तड़फ तड़फ कर मर गया. हमारे राजगढ़ जिले के विधायक वह भी और आप तो हमारे यहां विधायक जी बैठे हैं सामने, क्या बीती इन पर. इन्होंने भी जो सच्चाई थी, उस पर नाराजगी व्यक्त की है, उसके खिलाफ बोले भी. इसी प्रकार हमारे पूर्व विधायक थे मनमोहन सिंह बट्टी जी. उनकी बेटी को, जब उन्होंने कहा कि हम तो मर ही रहे हैं, कम से कम हमारी बेटी को मिलवा दो एक बार. हम उनको देख लें, उनको भी नहीं जाने दिया. वार्ड में दिन दिन भर कोई जाता नहीं था. एक हमारे मित्र हैं सुबोध अग्निहोत्री जी, 25 साल उन्होंने आपकी पत्रिका स्वदेश में काम किया और प्रभास जी के भी पारिवारिक संबंध हैं. उन्होंने उसको भर्ती तो करवा दिया. लेकिन वह तड़फ तड़फ कर बीच में वहां से छोड़ कर आये, तब बच पाये. अगर उसी अस्पताल में बने रहते तो वे भी शायद आज हमें दोबारा देखने को नहीं मिलते. तो ऐसे लोगों की अगर हम कहें कि कांग्रेस के समय में गलत आवंटन हुआ है, तो आपने तमाम सुधार किये, तो उसका भी सुधार करो और ऐसे आदमी को जो लगातार व्यापारी है, बड़ा आदमी बन जाता है पैसे के लिये, कमा कमा कर के तो लोगों की फिर उसके प्रति रुचि बढ़ जाती है. ये व्यापारी लोग जो हैं ऐसे, सभी के लिये नहीं कह रहा हूं, बहुत अच्छे भी हैं, लेकिन ऐसे कुछ लोग हैं, जो बेरहम हैं, जिन्होंने सुनवाई नहीं की.तो ऐसे लोगों को तो कुछ दंडित करना चाहिये. ऐसे लोगों को चिरायु अस्पताल जैसे, जिसका नाम चिरायु है, लेकिन काम कर रहा है, मरायु जैसा. (हंसी).. ऐसे लोगों पर कड़ा प्रतिबंध लगाना चाहिये. आयुष्मान योजना का भी पैसा उसी को ज्यादा जा रहा है. अगर कोई जन प्रतिनिधि, एमएलए, परिवार के लोग हैं, बोलते हैं कि कैसे भी हम लोग अपने परिवार के व्यक्ति के दर्शन कर लें, बात कर लें. डाक्टर साहब से बात करा दो, हमारे भाई के प्राण बचायें. अस्पताल में मतलब दिन में देखने की व्यवस्था करा दो. इस वार्ड से जनरल वार्ड में शिफ्ट करा दो, तो कम से कम कोई देखने आये. इसके लिये भी उसने बात करना, जो पीड़ित परिवार थे, उनके लोगों से, परिवार के लोगों से बात करना उचित नहीं समझा. कई गये मिलने. जैसे डॉक्टर साहब के घर में बड़े भाई हैं एक, अरुण गोयनका जी, उनके घर पहुंचे. उनसे निवेदन किया कि आप हमारे परिवार को मिलवा दो. जनरल वार्ड में शिफ्ट करवा दो. उसने कह दिया कि मेरे पास टाइम नहीं है. आप अपना काम करिये, मैं अपना काम करुंगा. यह इतना विद्वान आदमी है अजय गोयनका. कोरोना में क्या क्या नहीं हुआ. पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री जी, आपने आश्वासन दिया था कि जो पीड़ित लोग हैं, सरकारी कर्मचारी हैं, अगर उनकी कोरोना में मृत्यु हुई है, तो उनके परिवार को नौकरियां दी जायेंगी, कुछ राहत दी जायेगी. लेकिन ऐसे परिवार के तमाम लोग अभी तक भटक रहे हैं. उनको अभी तक नौकरी नहीं मिल पाई. कई लोगों को आपने पैसा देने की बात कही थी. हम 50 लाख रुपये देंगे. वह भी अभी नहीं मिल पाये. इस पर भी जरा आप सहृदयता से उनकी मदद करें.

मैं एक उदाहरण मुख्यमंत्री जी आपको देना चाहता हूं. मैं आपसे दो बार मिल चुका. यह भिण्ड जिले का है. भिण्ड जिले में 2018 और 2020 में ओला और अतिवृष्टि से 46 किसानों के खेत में नुकसान हुआ. आर.आई.,पटवारी,नायब तहसीलदार और कृषि विभाग के अधिकारियों ने सर्वे किया और जो सर्वे हुआ उसमें जिन किसानों का नुकसान पाया गया उनके लिये सरकार ने 32 करोड़ रुपये स्वीकृत किये और एस.डी.एम.,तहसीलदार ने क्या किया जो पीड़ित किसान थे बकनासा,बरोना,केथोदा,छरेटा गांव के इनको पैसे नहीं दिये और जहां ओले नहीं गिरे थे और सरकार की जो सूची आई गांव के नाम से कि इन गांवों के खाते में राशि दी जाए परन्तु कनीपुरा और तीन गांव ऐसे हैं जहां किसानों के खेत में ओले नहीं गिरे,कोई नुकसान नहीं हुआ उनके खाते में पैसे डाल दिये. तरकीब क्या सोची कि पैसा जिनको डाला उन्हीं के नाम से लिस्ट में मंजूर किया और ट्रेजरी के अधिकारी,एस.डी.एम. जिनके पास ड्राईंग,डिस्बर्सिंग पावर थी इन लोगों ने मिलकर जिन गांवों में ओले नहीं पड़े वहां के लोगों के खाते में पैसे डाल दिये. मेरे पास प्रमाण हैं. मैंने प्रमाण दिये. सिद्ध हो गये. किसान दो साल से लड़ रहे हैं. हमने धरना दिया. प्रदर्शन किया. आंदोलन किया. कलेक्टर के पास 17 बार लोगों ने शिकायत की. कमिश्नर को की. भोपाल में शिकायत की और हमने दो बार मुख्यमंत्री जी से मिलकर बताया और जब हमने जोर लगाया तो  95 लाख रुपये वसूल लिये. दो पटवारी सस्पेंड कर दिये लेकिन जिन ट्रेजरी के अधिकारियों,एस.डी.एम.,तहसीलदार पर, जांच में रिपोर्ट भी आई कि भ्रष्टाचार हुआ है. हमने मार्च में ध्यानाकर्षण भी लगाया. उस दिन गोविन्द सिंह राजपूत उपस्थित नहीं थे. उसका जवाब दिया विश्वास सारंग जी ने और आपने स्वीकार किया कि भ्रष्टाचार हुआ है. हम कार्यवाही करेंगे. जांच करेंगे. हमने कहा कि जब सिद्ध हो चुका तो जांच काहे की. हमने प्रमाण दिये. खाते नंबर दिये और जिन गांवों में ओले नहीं गिरे वहां एक व्यक्ति के नाम पर 16 बार पैसे डाले गये. उसमें पटवारी भी शामिल थे. सब शामिल थे नीचे से ऊपर तक. पैसा निकालो. 5-10 हजार दूसरों को दो और बाकी के ले लो और उसके बाद भी कार्यवाही हुई. मुख्यमंत्री जी मैं आपसे दो बार घर पर मिला हूं. आपने कहा कि सजा मिल गई. 95 लाख अगर दो पटवारियों ने जमा करा दिये लेकिन उसमें करीब 5 करोड़ रुपये खाये हैं. 2018 में भी ग्राम- बालन के पास वहां सरकारी जमीन पर मुआवजा बंट गया. वह खसरा नंबर भी मंत्री जी ने जवाब में स्वीकार किया कि सरकारी जमीन पर मिला है. हमने कहा कि प्रमुख सचिव रस्तोगी साहब को जांच दे दो. वह ईमानदार व्यक्ति हैं और सही दोषी व्यक्तियों पर कार्यवाही होगी वे जेल जाएंगे. मंत्री,विश्वास सारंग जी ने कहा कि कमिश्नर,चंबल से जांच करा देंगे. दो महीने हो गये आपके विधान सभा में आश्वासन के बाद भी. जांच के बाद काहे की जांच.

जब पूरे प्रमाण दे दिये, देख लो, ट्रेजरी के दस्‍तावेज हैं, खजाने में पैसा जमा कराने के दस्‍तावेज हैं, पूरी जांच आपके सामने रखी है. हमारा अनुरोध है कि कम से कम न्‍याय दो जो किसान भटक रहे हैं उनको मुआवजा मिल जाये. जो नुकसान हुआ है वह क्षतिपूर्ति हो जाये, सरकार चाहेगी तो वसूली हो जायेगी, जब हमने अकेले लड़कर 95 लाख करा दिये. (श्री सज्‍जन सिंह वर्मा जी के बैठे-बैठे कुछ कहने पर) बजट पर नहीं है, यह बजट थोड़ी है, यह सरकार का भ्रष्‍टाचार है, हम भ्रष्‍टाचार पर बोल रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय, अब दूसरा उदाहरण उसी तहसील का, सरकार में बड़े-बड़े कारनामें हो रहे हैं. भिंड जिले की गोहद तहसील में क्‍योंकि वहां एमएलए ज्‍यादा बदल जाते हैं, रिजर्व सीट से एक बार आते हैं दोबारा हार जाते हैं. अध्‍यक्ष जी वहां तीन कोटवारों की नियुक्ति....

अध्‍यक्ष महोदय-- कितना समय लेंगे, 50 मिनट हो गया.

डॉ. गोविन्‍द सिंह-- ठीक है हम जल्‍दी-जल्‍दी बताते हैं. 3 कोटवार और एक भृत्‍य की वर्ष 2018 में नियुक्ति हो गई, वर्ष 2021 के बीच जब हमने मामला उठाया वहां न कोटवार हैं न उनके नाम हैं दूसरे लोगों के नाम से उनकी नियुक्‍त वहां है नहीं और आपका तहसीलदार और एसडीएम जो बिल मंजूर करता है तो वह मंजूर करता रहा, करीब 3 साल तक तनख्‍वाह लेता रहा और ट्रेजरी वाले बिल पास करते रहे, जब उसकी शिकायत हुई, जांच हुई तो जांच में पाया गया, उन्‍होंने लिखकर दे दिया कि हमें तो पता ही नहीं है, एक ने कहा कि हमारे भाई वहां रहते हैं, मजदूरी करते हैं पैसा आता है तो उनके पास खाता नहीं है, जब जांच हुई जांच में रिपोर्ट आ गई कि सब फर्जी है. दो-दो साल खजाने से फर्जी पैसा जा रहा है, राजस्‍व का पूरा का पूरा आहरण हो रहा है और उसके बाद भी, कलेक्‍टर पर 17 शिकायतें हैं 17 बार शिकायतें कीं, अब आपने नहीं सुनी तो कलेक्‍टर कहां से हमारी सुनेगा, हम तो खुद मिले थे हमारे पास दो पत्र रखे हैं एक बार खुद मिले थे एक बार डाक से भेजा था, एक दिनांक 28.09.22 का है और एक वर्ष 2021 का है. अब क्‍या ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होना चाहिये, हालांकि करोड़ों नहीं है वह लाखों रूपये है, करीब 30-40 लाख के आसपास भुगतान हुआ है. अब उनको नौकरी से निकाल दिया और फिर क्‍या किया एक कोटवार है उसको बर्खास्‍त कर दिया कि यह बिल लेकर जाता है, वह बिल ले जाकर जमा करता था और उनके आदेश से पैसा लाकर दे देता था तो उसको बर्खास्‍त कर दिया, लेकिन जो दोषी हैं, इतना बड़ा घोटाला ट्रेजरी में हो गया, एसडीएम खुद फंसा हुआ है, हमने सब जगह लिखित में दीं, शिकायतें की, आंदोलन किया, धरना भी दिया लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई. आखिर यह सरकार कैसे चल रही है, कभी सच्‍चाई पर जांच होगी, हम तो मय दस्‍तावेज के सारे प्रमाण दे देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय, नर्सिंग कॉलेजों के घोटाले तो जगजाहिर हैं, क्‍या-क्‍या नहीं हुआ नर्सिंग कॉलेजों में, नर्सिंग कॉजेल के जो नॉर्म्‍स थे 100 बेड का अस्‍पताल और 22 हजार वर्गफीट में भवन बनना चाहिये. हमारे पास यह रिकार्ड है एक में तो आगे भैंसे बंधी है, एक कमरे का है वहां पर नर्सिंग कॉलेज चल रहा है. ऐसे करीब साढ़े पांच सौ नर्सिंग कॉलेज हैं, एफआईआर दर्ज हो गई इसके लिये धन्‍यवाद, दो, तीन, चार लोग गिरफ्तार हो गये, लेकिन छात्रों को बर्बाद करने का मानव बम बना दिये बिना पढ़े लिखे.

हरियाणा के, पंजाब के, दिल्‍ली के, बिहार के लोग यहां से फर्जी डिग्री लेकर चले गये हैं, न कभी कॉलेज लगे, न अस्‍पताल है, न डॉक्‍टर है, एक-एक व्‍यक्ति, कई ऐसे फैकल्‍टी में लोग हैं, जो वहां पर कहीं प्रिंसिपल हैं, कहीं प्रोफेसर हैं, कहीं असिस्टेंट प्रोफेसर हैं, पांच जगह एक व्‍यक्ति, यह कौन सा जादू पढ़ आये बंगाल से, ये जगह-जगह पहुंच जाते हैं. जैसे एक बार रावतपुरा महाराज मंदिर दर्शन करने हम गये, तो हमने कहा कि महाराज कहां हैं? तो बोले ऊपर हैं, हम गये ऊपर तो बोले नहीं-नहीं अभी नहीं जाओगे छत पर, हमने कहा काये क्‍यों नहीं जायेंगे, अरे बोले अभी बंगाल में काली माई की पूजा कर रहे हैं.

श्री उमाकांत शर्मा -- अरे कम्‍प्यूटर बाबा कहां हैं?

डॉ.गोविन्‍द सिंह -- देखो (XXX) पंडित जी, सुबह सुबह जब पांचवी क्‍लास में थे, तब से हनुमान चालिसा, बजरंग बाण, गायत्री जी का मंत्र, शिवजी का मंत्र और लेकर हमने लगाई अगरबत्‍ती, जय बजरंग बली तोड़ दुश्‍मन की नली और निकल गये (हंसी..) इसलिये कह रहे हैं कि इनको जरा देखें मुख्‍यमंत्री जी, इसमें बहुत से बच गये हैं, इन पर कार्यवाही करा दें, दोषियों को जरा पता लगे कि जे गढ़ गये, हालांकि गढ़ना तो आपको अधिकार नहीं है, सजा देना तो न्‍यायालय का काम है, लेकिन आज आप इतने सत्‍ता में, मद में बिल्‍कुल घमंडी हो गये हो. हम दो भाईयों की संपत्ति संयुक्‍त परिवार में रहते थे, बंटवारा हो गया, आपने बुलडोजर दूसरे के ऊपर कर दिया, अरे भाई यह आपका कहां न्‍याय है? न्‍यायपालिका को दंड देने का अधिकार है, कार्यपालिका को नहीं है, लेकिन आजकल हमारे मुख्‍यमंत्री जी न्‍यायाधीश भी बन गये हैं, लगातार लोगों को रोंधते चले जा रहे हैं, जे नहीं देख रहे हैं, अरे भाई अपराध किया है तो आप गवाह दो, सबूत दो, उनको फांसी पर लटकवाओ, जेल पहुंचाओ, सजा कराओ, आप ही न्‍याय करने लगे, लेकिन चल रहा है, जब तक आपका है चलेगा, समय है. इस प्रकार रावण का भी अंत हुआ था सबका होगा, हमारा भी होगा (हंसी...) अंत तो सबका होता है, का जिंदा रहें, अमर होकर आये का हम आप (हंसी..) अब आप बताओ एक ओर घोटाला. दूसरा यह एक हजार करोड़ रूपये का एन.पी.एस. घोटाला है, यह शायद आपकी जानकारी में नहीं आया होगा, यह शायद भोपाल का ही है, भोपाल में जो 13 मेडीकल कॉलेज हैं, उनमें करीब तीन हजार तीन सौ शासकीय मेडीकल चिकित्‍सक डॉक्‍टर हैं, नर्सिंग हैं, पैरामेडीकल स्‍टॉफ है, क्‍लेरीकल कर्मचारियों की संख्‍या कुल मिलाकर ऐसे लगभग पचास हजार के आसपास कर्मचारी हैं. न्‍यू पेंशन स्‍कीम आपने लागू की है, न्‍यू पेंशन स्‍कीम में उनका फंड कटता है और उतना ही दिया जाता है, यह भारत सरकार के तहत योजना है. आठ सौ करोड़ रूपये जमा हो गये हैं. कर्मचारी तीन महीने से मेडीकल कॉलेजों के परेशान हैं, धरना दे रहे हैं, ज्ञापन दिया, हमसे भी कई बार मिले, विधानसभा प्रश्‍न भी लगवाया. यह पैसा जमा होना चाहिये था, एक नये खाते में जमा होना चाहिये था, लेकिन पूरे मध्‍यप्रदेश के उसमें न कराकर मेडीकल कॉलेज के डीन के खाते में जमा करा दिया है, अब वह पैसा कहां उपयोग हो रहा है? डीन को क्‍या अधिकार, किस नियम के तहत, आठ सौ करोड़ रूपये मेडीकल के कॉलेज में कर दिया और उसका ब्‍याज भी नहीं मिल रहा है, अब जब रिटायर होंगे तो एन.पी.एस. में उनको कैसे पेंशन देंगे आप, इसका भी पता कर लें यह खाते में हैं भी या पूरा गायब हो गया है. बस एक आध विषय थोड़ा सा है. इसी प्रकार से इसमें बताया है. उसी प्रकार से आयुष्‍मान कार्ड से घोटाला, उनको प्रायवेट अस्‍पताल बिना देखे कैसे मंजूरी दे रहे हैं ? अस्‍पतालों में डॉक्‍टर्स नहीं हैं, कम्‍पाउण्‍डर नहीं हैं, उपकरण नहीं हैं, मरीज भर्ती नहीं हो रहे हैं. फिर एक-एक हॉस्पिटल से आपने एक-एक, दो-दो करोड़ रुपये वहां से ले लिये हैं और वीडियो भी वायरल हो चुका है कि पैसा लेन-देन कैसे हो रहा है. जिनके भी वीडियो वायरल हुए, उनकी भी जांच नहीं हुई, उन पर कार्यवाही नहीं हुई. मुख्‍यमंत्री जी, क्‍या आपका इसी प्रकार सुशासन चलेगा ? ठीक है, जब तक चलता है, तब तक आप चलाइये. रावण का भी चल गया, हिटलर का भी ऐसे ही चला था. कल के दैनिक भास्‍कर समाचार-पत्र में छपा है कि मनरेगा में अकेले हमारे भिण्‍ड जिले में जांच करा लो, अन्‍यथा हमारे खिलाफ कार्यवाही कर देना. मनरेगा के तहत भिण्‍ड जिले में सबसे ज्‍यादा गोहद में और सबसे कम लहार में है, इसलिए मेरी थोड़ी निगाह रहती है. कम से कम भिण्‍ड जिले में 50 करोड़ रुपये से ऊपर का ही घोटाला हुआ है, तालाब बने नहीं हैं, आपकी सुदूर सड़क योजना में सड़क बनती थी, वह सड़क नहीं बनी है. मुख्‍यमंत्री जी, यह सच्‍चाई है. भिण्‍ड जिले में लेबर नहीं है. भिण्‍ड जिले में एक भी मजदूर नहीं मिलता क्‍योंकि हमारे क्षेत्र के 1 से 1.25 लाख लोग 18 वर्ष के सामान्‍य परिवार के किसान के बेटे पूरे देश में रोजगार करने चले गए हैं. वे हर जगह मिल जायेंगे. अभी हम कन्‍याकुमारी गये थे, वहां कुछ लोग पानी पुरी के ठेले लगाए हुए मिल गए. उन्‍होंने कहा कि 'डॉक्‍टर साहब, राम राम, तो हमने कहा कि तुम कहां के रहने वाले हो ?' तो उन्‍होंने कहा कि हम करियावली के हैं. मैंने कहा कि तुम यहां क्‍या कर रहे हो तो उन्‍होंने कहा कि फुल्‍की बेचने का काम कर रहे हैं. उनकी एक दिन कमाई वहां पर 1,000 रुपये, 1,200 रुपये तथा 1,500 रुपये हो जाती है, तो सब गांव के गांव खाली हो गए हैं, वहां केवल बुजुर्ग लोग मिल रहे हैं, तो इसलिए वहां पर एक सिंगल मजदूर भी नहीं है. अब वहां मजदूर नहीं मिल रहे हैं, यह 100 प्रतिशत सच्‍चाई है, लेकिन मशीनों में भी काम तो हो जाये, लेकिन काम ही नहीं हो रहा है, केवल बस कागजों में बन जाता है, कागजों में हो गया, हम नाम ही नहीं ले रहे हैं, आपको प्रमाण भी देंगे और 20 प्रतिशत तो जिला पंचायतें को वहां दे दो. अब मिल-बांटकर खाओ, जब चोर-चोर मौसेरे भाई हैं, का किस्‍सा हो गया है, तुम भी खाओ, हम भी खाएं, तुम भी चोर, हम भी चोर हैं. मिल-बांटकर खाओ, यह हालात हैं.

खण्‍डवा में 5 करोड़ रुपये रोजगार गारंटी का अकेले एक पंचायत में घोटाला हो गया है. सिवाना में दुबई, कतर और दुबई में रहने वाले उनके रिश्‍तेदार के नाम पर मजदूरी निकाल ली गई. हिन्‍दू परिवार में मुस्लिम सदस्‍यों को जोड़कर 3,000 फर्जी जॉबकार्ड बनाये गए. फिर हम लोगों ने कुछ साथियों से पूछा, जिस पत्रकार से भी हमने बात की तो वे बोले कि हम गांव में गए थे, हमने जॉब कार्ड देखे, सब फर्जी थे, तब हमने यह लिखा है. हमने कहा कि इसमें ऐसा तो नहीं है कि गप्‍प लिख दिया गया हो. यह बिल्‍कुल सच्‍चाई है, आप आ जाओ, हम दिखा देंगे. इस तरह का पूरे प्रदेश में हो रहा है. हम यह नहीं कहते हैं कि यह आपकी देख-रेख में हो रहा है, लेकिन आखिर अधिकारी इतने निरंकुश क्‍यों हैं ? इतनी छूट उन्‍हें क्‍यों है कि खुले आम लूट हो रही है ? फिर हम आपको शिकायतें कर रहे हैं. हमने जो गोहद का मामला बताया था, उसकी कम से कम 20 शिकायतें हुईं. हम कलेक्‍टर से मिले, हमने कलेक्‍टर को पत्रकार वार्ता में कहा. हालांकि कलेक्‍टर के पैसे लेने की शिकायत नहीं है, वह स्‍वयं नहीं हैं. वे 2-3 अधिकारियों की गिरफ्त में हैं. वह खुद सज्‍जन व्‍यक्ति हैं. अभी हमने जब उसके खिलाफ पत्रकार वार्ता लगाई तो उसको बड़ा कष्‍ट हुआ कि वह इसमें नहीं हैं. लेकिन कहीं न कहीं से पता चल ही जाता है कि कौन सा कैसा अधिकारी है ? क्‍या कर रहा है ? श्री पघारे एडीएम, जिसका आपने अभी-अभी ट्रांसफर कर दिया. उसे साल भर भी नहीं हुआ, वह खुद ही चला गया. विधायक निधि में हम राशि मंजूर करें, लेकिन 4-4 महीने तक फाईल ही नहीं लौट रही है. हमने कहा कि दुबे, हमारा सब इंजीनियर है, हमने कहा कि फाईल 4 महीने से क्‍यों नहीं लौट रही है. वहां एक अधिकारी है.

वहां एक योजना अधिकारी है, उसको हमने डांटा, 4-4 महीने फाइल रखे हों, वह बोला साहब आप हमें क्‍यों डांट रहे हो, हम क्‍या करें, फाइल तो वहां रखी है. तो वह चाहता था कि विधायक निधि, सांसद निधि से कमीशन मिले, उसने पीडब्‍ल्‍यूडी के इंजीनियर से कहा कि आप तो कमीशन खाते हो, हमें भी दो, पहले यहां दो, तब होगा. हमने कहा कि फाइल कहां रखी है तो फाइल उसके टेबल पर रखी है, वहां पर करीब 40 फाइलें रखी थी. मैंने उसको फोन लगाया कि पगारे जी, हमने कहा विधायकों की बड़े हिम्‍मती हो, बताओ कितने का चैक काट दे, तो कहने लगा, अरे साहब मैं नहीं हूं, मैंने तो कर दिया, वहां करीब 40 फाइलें रखी थी, हमारी भी फाइल थी और माननीय विधायकों की थी, तो मैंने कहा कि मैं यहीं भिण्‍ड में हूं मैं आ रहा हूं आपके पास, जब तक मैं पहुंचा, मैं तो लहार में था, ऐसे ही कह दिया था, जब तक मैं पहुंचा तो उसने उसको बुलाया कहां है, किसको शिकायत की है, तो उन्‍होंने कहा हमें पता नहीं. तत्‍काल उसने सभी में दस्‍तखत किया और फाइलें दे दिया. हमने कì