
मध्यप्रदेश विधान सभा
की
कार्यवाही
(अधिकृत विवरण)
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षोडश विधान सभा एकादश सत्र
जुलाई, 2026 सत्र
मंगलवार, दिनांक 21 जुलाई, 2026
(30 आषाढ़, शक संवत्1948)
[खण्ड-11 ] [अंक-2]
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मध्यप्रदेश विधान सभा
मंगलवार, दिनांक 21जुलाई, 2026
(30 आषाढ़, शक संवत्1948)
विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.
{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)—माननीय अध्यक्ष महोदय, भोपाल के आसपास सब किसान भाईयों को पूरे सदन की ओर बहुत बहुत बधाई आज बरखा रानी झमाझम बरस गई.
श्री बाला बच्चन—माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा पॉईंट ऑफ आर्डर इस बात का है कि सरकार इतनी जल्दबाजी में क्यों है? एक तो 16 संशोधन विधेयक आज पढ़ना था वह कल पढ़े. आज की जो कार्यसूची है उसमें कार्यमंत्रणा का टाईंमिंग का अलाटमेंट भी नहीं डाला वह संशोधित सूची दे रहे हैं. तो सरकार इतनी जल्दबाजी में क्यों हैं ? यह आशंका है कि 24 जुलाई 2026 तक के लिये सदन आहूत हुआ है. मुझे नहीं लगता कि 24 जुलाई 2026 तक यह सदन चलेगा. माननीय अध्यक्ष महोदय इस पर विचार करना चाहिये. माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी कल बोल रहे थे, लेकिन सरकार बहुत जल्दबाजी में सरकार लग रही है.
अध्यक्ष महोदय—आप बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं.
श्री कैलाश विजयवर्गीय—प्रश्नकाल में पाईंट ऑफ आर्डर आता भी नहीं है बाला जी. जब समय आयेगा तब जरूर बोलिएगा.
11.04 बजे
तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर
अध्यक्ष महोदय—श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर
श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर—माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 590 है.
1. ( *क्र. 590 ) श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वन वृत्त कार्यालय छतरपुर में मुख्य लिपिक एवं स्थापना प्रभारी आर.पी. द्विवेदी को कब पदस्थ किया गया था? वन कर्मचारियों की पदस्थिति/कार्य आवंटन, परिक्षेत्र सहायक वृत्तों/वीटों में स्थानांतरण एवं पदोन्नति जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश क्र. एफ 6-1/2019/1/9, दिनांक 04.06.2021 पर क्या कार्यवाही की गई? संपूर्ण जानकारी दस्तावेजों सहित उपलब्ध करायें। (ख) क्या तत्कालीन सी.सी.एफ. छतरपुर के आदेश क्र./118, दिनांक 05.10.2023 एवं पत्र क्र./स्थापना/2024/3359, दिनांक 04.12.2024 एवं पत्र क्र./स्थापना/2024/2851, दिनांक 18.10.2024 एवं दिनांक 16.05.2024 एवं आदेश क्र./स्थापना/2024/42, दिनांक 17.05.2024 के आदेशों एवं पत्रों पर क्या कार्यवाही हुई? संपूर्ण कार्यवाही के आदेशों की छायाप्रतियां उपलब्ध करायें। (ग) क्या सतर्कता एवं शिकायत शाखा भोपाल के द्वारा पत्र क्र. 1440, दिनांक 05.06.2026 एवं पत्र क्र. 1559, दिनांक 17.06.2025 एवं पत्र क्र. 1678, दिनांक 25.06.2025 एवं पत्र क्र. 1105, दिनांक 10.04.2026 एवं पत्र क्र. 3230, दिनांक 13.04.2026 पर क्या कार्यवाही की गई? जानकारी से अवगत करायें तथा आज दिनांक तक कार्यवाही नहीं किये जाने के जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही क्यों नहीं की गई? कारण स्पष्ट करें। (घ) क्या पत्र क्र. 138 एवं 139 दिनांक 24.01.2024 के द्वारा न्यायालय एवं वरिष्ठ अधिकारी छतरपुर को वाहन जब्ती के लिये राजसात की कार्यवाही सूचना निर्धारित प्रपत्र में भरकर दी गई थी? क्या न्यायालय एवं वरिष्ठ कार्यालय में उक्त कार्यवाही की सूचना निरस्त किये जाने की सूचना पत्र क्र. 159 एवं 160 दिनांक 24.01.2024 द्वारा दी गई थी? क्या प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराकर एस.डी.ओ. टीकमगढ़ एवं सी.सी.एफ. छतरपुर के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? कारण स्पष्ट करें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - मंत्री (श्री चेतन्य कुमार काश्यप) : (क) वन वृत्त कार्यालय छतरपुर में मुख्य लिपिक एवं स्थापना प्रभारी श्री आर.पी. द्विवेदी, लेखापाल की पदस्थिति प्रधान मुख्य वन संरक्षक, म.प्र. भोपाल के आदेश दिनांक 11.09.2008 द्वारा कार्यालय वन संरक्षक वृत्त छतरपुर में की गई थी। तदुपरांत मुख्य वन संरक्षक छतरपुर, वृत्त छतरपुर के आदेश क्रमांक/स्था./2013/19, दिनांक 02.02.2013 द्वारा मुख्य लिपिक के रिक्त पद पर पदस्थ किया गया था। सामान्य प्रशासन विभाग का आदेश क्रमांक एफ 6-1/2019/1/9, दिनांक 04.06.2021 वन कर्मचारियों की पदस्थिति, कार्य आवंटन, परिक्षेत्र सहायक वृत्तों, बीटों में स्थानांतरण एवं पदोन्नति कार्यों के संबंध में नहीं है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) मुख्य वन संरक्षक छतरपुर के आदेश क्रमांक 118, दिनांक 05.10.2023 द्वारा कुल 83 वनरक्षकों को प्रभारी कार्यवाहक वनपाल के पद पर पदस्थ किया गया। मुख्य वन संरक्षक छतरपुर के पत्र क्रमांक/स्था./2024/3359, दिनांक 04.12.2024 द्वारा श्रीमती राजकुमारी प्रजापति, प्रभारी वनपाल को जतारा के स्थान पर उड़नदस्ता दल वनमण्डल टीकमगढ़ में संशोधित पदस्थिति की गई। मुख्य वन संरक्षक छतरपुर द्वारा पत्र क्रमांक/स्थापना/2024/2851, दिनांक 18.10.2024 से श्री डालचंद अहिरवार, कार्यवाहक वनपाल को वृत्त कार्यालय की ड्यूटी से मुक्त कर वनमण्डल छतरपुर में पदस्थ किया गया। वनमंडल छतरपुर में विर्निमता/व्यापारी, उपभोक्ता फुटकर विक्रेताओं के कुल 190 ऑनलाईन पंजीयन दिनांक 16.05.2024 की स्थिति में लंबित पाये जाने के कारण मुख्य वन संरक्षक छतरपुर के आदेश क्रमांक/स्था./2024/42, दिनांक 17.05.2024 द्वारा श्री सुखदेव कुशवाहा, सहायक ग्रेड-3 को निलंबित किया गया था। प्रश्नाधीन शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) श्री आर.पी. द्विवेदी के विरुद्ध विभिन्न माध्यमों से प्राप्त शिकायतों को सतर्कता शिकायत शाखा के प्रश्नाधीन पत्रों से मुख्य वन संरक्षक छतरपुर को जांच हेतु प्रेषित किया गया था। प्रश्नांश में उल्लेखित पत्र क्रमांक 3230, दिनांक 13.04.2026 सतर्कता/शिकायत शाखा द्वारा जारी नहीं किया गया है। मुख्य वन संरक्षक छतरपुर द्वारा दिनांक 09.07.2026 से उक्त शिकायतों के संबंध में जांच प्रतिवेदन प्रेषित किया गया है। प्रतिवेदन अनुसार शिकायतें निराधार होने एवं किसी भी अधिकारी/कर्मचारी को दोषी नहीं पाये जाने से कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) जी हाँ। प्रकरण जांच की प्रक्रिया में है, जांच उपरान्त गुण-दोष के आधार पर विधिसम्मत कार्यवाही संभव है।
श्री चेतन्य कुमार काश्यप- अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रख दिया गया है.
श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर- माननीय अध्यक्ष जी, मेरे प्रश्न के उत्तर में ‘क’ ‘घ’ में जो जानकारी दी गई है वह असत्य है. मेरा प्रश्न ‘घ’ से शुरू होता है कि जब एसडीओ वन विभाग टीकमगढ़ द्वारा अपने पत्र क्रमांक 138, 139, दिनांक 24.01.2024, वाहन राजसात की सूचना सीसीएफ छतरपुर एवं न्यायालय को दी गई थी, फिर पुन: आदेश क्रमांक 159, 160 में क्यों निरस्त किया गया है, क्या कारण था, इसकी जांच सीसीएफ द्वारा क्यों नहीं की गई, इसलिए सीसीएफ छतरपुर एवं एसडीओ वन विभाग टीकमगढ़ को इस कृत्य के तहत निलंबित करते हुए विधान सभा में जांच कमेटी गठित की जाए.
अध्यक्ष महोदय – श्रीमती चंदा जी, कृपया पूरक प्रश्न तो करें, यह तो प्रश्न में लिखा ही हुआ है. प्रश्न और उत्तर के बीच में आपको जो लगता है कि यह चीज नहीं आई वह पूरक प्रश्न करें ,तो जवाब आएगा.
श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर – अध्यक्ष जी, आपके आदेशानुसार वही कर रहे हैं कि ये लोग निलंबित क्यों नहीं हुए और इनके खिलाफ जांच क्यों नहीं हुई, क्या बात है.
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री (श्री चेतन्य कुमार काश्यप) – अध्यक्ष जी, विधायिका जी को कहना चाहूंगा कि 11 मई 2026, को विभाग से एक पत्र देकर के मुख्य वन संरक्षक को जांच के लिए आदेशित किया गया था और इसके बाद आपका प्रश्न आने के बाद भी, कल फिर से 20 जुलाई को शासन के द्वारा आदेशित किया गया है और इसकी जांच हम पूर्ण करवाएंगे. आपने जो दो बिन्दु बताए, दोनों पत्रों की हम गंभीरता से जांच करवाएंगे, क्योंकि कंपाउंडिंग का मामला था, हम इस पर पूरी जांच करके आपके सामने रख देंगे.
श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर – अध्यक्ष जी, जांच भी करवाई जाए, इन्हें निलंबित भी किया जाए, यह हमारा अनुरोध है.
श्री चेतन्य कुमार काश्यप – मैंने विधायिका जी को बता दिया है और जो भी उचित कार्यवाही होगी, वह सारी कार्यवाही हम उसके ऊपर करेंगे.
श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर – मंत्री जी, आपका कहना ठीक है, लेकिन इसमें निलंबन किया जाए, क्योंकि इसमें बहुत बड़ा भ्रष्टाचार हुआ है. मेरा आपसे अनुरोध है कि इन्हें निलंबित किया जाए और इनकी जांच अच्छी तरह की जाए.
अध्यक्ष महोदय – चंदा जी, मंत्री जी ने कहा है कि वे गंभीरता से जांच करवा रहे हैं, जांच के जो भी निष्कर्ष आएंगे, जो कार्यवाही होगी, उससे आपको भी अवगत कराया जाएगा, आपको यह मंत्री जी ने स्पष्ट रूप से कहा है.
अध्यक्ष महोदय – प्रश्न क्रमांक 2 श्रीमती अनुभा मुंजारे जी.
संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण
[सामान्य प्रशासन]
2. ( *क्र. 690 ) श्रीमती अनुभा मुंजारे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) माननीय मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश में कार्यरत संविदा कर्मचारियों के हित में दिनांक 30.01.2026 को संविदा महासम्मेलन में की गई घोषणा अनुसार 10 वर्ष से अधिक की सेवाएं दे चुके अनुभवी संविदा कर्मचारियों को विभाग में नियमित करेंगे? उक्त घोषणा को अमल में लाने के लिये विभाग कब तक आदेश जारी करेगा? (ख) क्या शासन संविदा कर्मचारियों को अन्य विभागों/अन्य स्टाफ में प्रतिनियुक्ति पर जाने की अनुमति प्रदान करेगा? यदि नहीं, तो क्यों, कारण बतायें? (ग) क्या शासन द्वारा 10 वर्ष से अधिक की सेवा कर चुके संविदा कर्मचारियों को नियमित नहीं करेगा, तो क्या उन्हें भी नियमित कर्मचारियों की तरह ही डी.ए. (मंहगाई भत्ता), ग्रेच्युटी, एन.पी.सी., स्वास्थ्य बीमा, अनुकम्पा नियुक्ति, सेवा समाप्ति के मामले में सी.सी.ए. सुरक्षा, रिक्त होने पर शासकीय आवास की सुविधा और उपलब्ध न होने पर आवास भत्ता दिया जायेगा? यदि नहीं, तो क्यों? यदि हाँ, तो शासन कब तक यह मूलभूत सुविधाएं संविदा कर्मचारियों को मुहैया करायेगी? समय-सीमा बतायें। संविदा कर्मचारी को नियमित करने का प्लान कब तक लागू होगा? समय-सीमा बतायें। (घ) क्या शासन द्वारा 10 वर्ष से अधिक संविदा कर्मचारियों को यदि नियमित नहीं करती है, तो क्या नियमित कर्मचारियों की तरह ही महिला संविदा कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव का प्रावधान लागू करेगी? यदि नहीं, तो क्यों? यदि हाँ, तो कब तक? समय-सीमा बतायें।
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्रीमती कृष्णा गौर) : (क) माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा दिनांक 30.01.2026 को घोषणा की गई थी कि ''10 वर्ष से अधिक अनुभवी संविदा कर्मियों को नियमित पदों पर संविलियन की अभी तक 50 प्रतिशत प्रक्रिया जारी है। इस दिशा में आगे और काम किया जायेगा।'' इस घोषणा के अनुरूप संविदा नीति 2023 अनुसार विभागों में सीधी भर्ती के रिक्त पद के 50 प्रतिशत पद संविदा कर्मियों हेतु आरक्षित रखे जाने संबंधी प्रावधान वर्तमान में लागू हैं। इस प्रावधान का पालन शासन के विभागों द्वारा किये जाने के निर्देश हैं, जो एक सतत् प्रक्रिया है। संविदा नीति 2023 पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। अत: शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। (ख) जी नहीं। संविदा नीति 2023 में प्रावधान नहीं होने से। (ग) राज्य शासन के विभागों में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को नियमित शासकीय सेवकों के समान ग्रेज्युटी, एन.पी.एस., स्वास्थ्य बीमा योजना, अनुकंपा नियुक्ति प्रदान किये जाने संबंधी प्रावधान किये गये हैं। उत्तरांश ''क'' अनुसार संविदा कर्मियों को नियमित किये जाने संबंधी निर्देश वर्तमान में लागू हैं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) जी नहीं। महिला संविदा कर्मचारियों को महिला शासकीय सेवकों के समान प्रसूति अवकाश की पात्रता है।
श्रीमती अनुभा मुंजारे – अध्यक्ष महोदय, मेरा तारांकित प्रश्न क्रमांक 690 है.
श्रीमती कृष्णा गौर – अध्यक्ष जी, उत्तर सदन के पटल पर है.
अध्यक्ष महोदय – माननीय सदस्य पूरक प्रश्न करें.
श्रीमती अनुभा मुंजारे – अध्यक्ष महोदय, आज मंगलवार का शुभ दिन है. सभी मातृ शक्तियों को मैं शत शत नमन करती हूं और सभी माननीय सदस्यों का जीवन मंगलमय हो, यह कामना करती हूं. मंत्री जी विभाग द्वारा मेरे प्रश्न के संबंध में जो उत्तर सदन में प्रस्तुत किया गया है, इससे मैं पूर्णत: संतुष्ट नहीं हूं. मंत्री जी मध्यप्रदेश में वर्तमान में लगभग 1.5 लाख संविदा अधिकारी एवं कर्मचारी विभिन्न विभागों, मंत्रालय एवं विधान सभा में भी कार्यरत है. विभाग के द्वारा प्रस्तुत जानकारी के अनुसार शासन के द्वारा विभिन्न विभागों मे सीधी भर्ती के 50 प्रतिशत पद संविदा कर्मियों के लिए आरक्षित किए गए हैं, 50 प्रतिशत पदों पर संविदा कर्मियों को परीक्षा के माध्यम से नियमित होने का अवसर सरकार दे रही है. संविदा कर्मी 10 वर्षों से अधिक समय से शासन को अपनी सेवाएं दे रहे हैं. ऐसे में क्या परीक्षा परिणाम के माध्यम से ही संविदा कर्मियों का नियमितीकरण किया जाएगा, क्या उनका माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा के अनुसार नियमित पदों पर बिना परीक्षा लिए नियमितीकरण नहीं किया जाएगा. यदि किया जाएगा तो कब तक किया जाएगा, यदि नहीं किया जाएगा तो क्यों नहीं किया जाएगा, कृपया बताने का कष्ट करें.
अध्यक्ष महोदय – अनुभा जी, मेरा अनुरोध है कि ये जो आपने बोला यह लगभग सब प्रश्न में है, जो चीज जवाब में नहीं है, उस पर पूरक प्रश्न करेंगे तो स्पष्टता से उत्तर आ जाएगा.
श्रीमती अनुभा मुंजारे – जी माननीय अध्यक्ष महोदय.
श्रीमती कृष्णा गौर – अध्यक्ष जी, आपके माध्यम से मैं माननीय सदस्या को बताना चाहूंगी कि मध्यप्रदेश में हमारी सरकार और मुख्यमंत्री जी स्वयं हमारे प्रदेश के संवेदनशील संविदाकर्मियों के लिए लगातार काम कर रहे हैं और उनके हितों की रक्षा के लिए वे संकल्पित है
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से बताना चाहूंगी कि हमारी सरकार द्वारा लागू की गई मध्यप्रदेश संविदा नीति 2023 देश की अग्रणी और कर्मचारी हितैषी नीतियों में से एक है, इसमें सेवा सुरक्षा, ग्रेच्युटी, एन.पी.एस, स्वास्थ्य सुरक्षा, अनुकंपा नियुक्ति तथा पात्र संविदा कर्मियों को नियमित भर्ती के अवसर जैसे विशिष्ट प्रावधान शामिल किये गये हैं. अध्यक्ष महोदय, अधिकांश राज्यों में ऐसी समेकित एवं एकरूप संविदा नीति उपलब्ध नहीं है, जिससे मध्यप्रदेश की संविदा नीति विशिष्ट और अनुकरणीय बनती है. आपने यह कहा कि बहुत सारे विभागों में संविदा कर्मियों की नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं, आपने जो प्रश्न किया है, निश्चित रूप से मैं मानती हूं कि अभी लगातार इस दिशा में काम चल रहा है, माननीय मुख्यमंत्री जी ने स्वयं ही पचास प्रतिशत सीधी भर्ती के लिये घोषणा की थी और उस पर भी प्रक्रिया जारी है, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा की कहीं अनदेखी की जा रही है, बल्कि इस दिशा में काम भी चल रहा है और आगे काम भी किया जायेगा. इस घोषणा के अनुरूप संविदा नीति 2023 के अनुसार विभागों में सीधी भर्ती के रिक्त पद के पचास प्रतिशत पर संविदा कर्मियों हेतु आरक्षित रखे जाने संबंधी प्रावधान वर्तमान में लागू हैं और इस प्रावधान का पालन शासन के विभागों द्वारा किया जा रहा है और उन्हें निर्देश है कि जो सतत् प्रक्रिया है उसका पालन हो और उस प्रक्रिया के तहत यह कार्य लगातार किया जा रहा है.
श्रीमती अनुभा मुंजारे – अध्यक्ष महोदय, यह बहुत ही संवेदनशील सवाल है और इसमें प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख संविदा कर्मियों के भविष्य का मामला यह है. माननीय मंत्री जी आपके द्वारा दिये गये उत्तर के अनुसार महिला संविदा एवं नियमित कर्मियों को प्रसूति अवकाश 180 दिन का दिया जाता है, किंतु मेरे द्वारा प्रश्न में महिला संविदा कर्मियों के चाइल्ड केयर लीव के विषय में प्रश्न पूछा गया था, जो नियमित महिला कर्मचारियों को 730 दिन का दिया जाता है. आपके द्वारा दिये गये उत्तर में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि संविदा महिला कर्मियों को क्या 730 दिन की चाइल्ड केयर लीव दी जायेगी या नहीं, यदि दी जायेगी तो सरकार कब देगी, यह एक महिलाओं से जुड़ा मामला है, इसलिए इसको मैं बहुत गंभीरता से उठाना चाहती हूं और मैं चाहती हूं कि मुझे इसका संतोषप्रद जवाब मिले क्योंकि यह विशेष तौर पर महिला कर्मचारियों का मामला है, यही मैं कहना चाहती हूँ.
श्रीमती कृष्णा गौर – माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्या को बताना चाहूंगी की संविदा कर्मचारियों को सामान्यत: वही अवकाश मिलते हैं, जो संविदा नीति या अनुबंध में स्पष्ट रूप से उल्लेखित हैं, संविदा कर्मी संविदा अनुबंध की शर्तों से संचालित होते हैं न कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम के तहत, इसलिए सी.सी.एल. अर्थात चाइल्ड केयर लीव जैसे प्रावधान लागू नहीं होते हैं, सी.सी.एल. एक सर्विस बेनिफिट है, जो सिर्फ नियमित सेवकों पर ही लागू होता है.
प्रश्न संख्या -3 अनुपस्थित.
प्रश्न संख्या -4 अनुपस्थित.
विभागों में रिक्त पदों के विरूद्ध नवीन भर्तियों की वर्तमान स्थिति
[सामान्य प्रशासन]
5. ( *क्र. 125 ) श्रीमती सेना महेश पटेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश के जिले में समस्त विभागों में प्रश्न दिनांक तक कितने संख्या में पद रिक्त हैं? यदि हाँ, तो विभागवार रिक्त पदों की वर्तमान स्थिति का आरक्षणवार विवरण प्रदान किया जाये। (ख) रिक्त पदों के विरुद्ध नवीन भर्तियों की वर्तमान स्थिति क्या है? समस्त विभागवार कितने पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रचलित है? (ग) भर्ती प्रक्रियाओं में विलंब के प्रमुख कारण क्या हैं? शासन द्वारा इन प्रक्रियाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने हेतु क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं? (घ) क्या प्रदेश के जिलों में समस्त विभागों के अनुकम्पा नियुक्ति हेतु प्रकरण लंबित हैं? यदि हाँ, तो रिक्त पदों पर अनुकम्पा नियुक्ति क्यों नहीं दी गई है? क्या कारण है? कब तक रिक्त पदों पर अनुकम्पा नियुक्ति दी जावेगी।
मुख्यमंत्री
( डॉ. मोहन यादव )
अधिकृत - राज्य
मंत्री
(श्रीमती कृष्णा
गौर) : 
श्रीमती सेना महेश पटेल – मेरा प्रश्न क्रमांक-125 है.
श्रीमती कृष्णा गौर – माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर सदन के पटल पर प्रस्तुत है.
श्रीमती सेना महेश पटेल – माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी के उत्तर से संतुष्ट नहीं हूं, सरकार ने पूरे प्रश्न के जवाब में कहा है कि जानकारी विभागवार उपलब्ध नहीं है और सामान्य प्रशासन विभाग के पास समेकित आंकडे़ भी नहीं है, लेकिन मंत्री जी के उत्तर के साथ लगाये गये परिशिष्ट स्वयं सरकार की पोल खोल रहे हैं, परिशिष्ट में बताया गया है कि जनवरी 2024 से जुलाई 2026 में 59 हजार 394 पदों के परीक्षा परिणाम जारी हुए हैं, लेकिन केवल 54 हजार 681 पदों पर ही आवंटन हुआ है और 6 हजार 200 पद 13 प्रतिशत होल्ड रखकर खाली छोड़ दिये गये हैं, अर्थात हजारों पद आज भी रिक्त हैं, दूसरी ओर कर्मचारी चयन मंडल ने वर्ष 2024 से 2026 में 46 हजार 124 पदों की भर्ती परीक्षाएं आयोजित की हैं, जबकि प्रदेश में रिक्त पदों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक है और सबसे गंभीर बात यह है कि सरकार के 29 सितंबर, 2014 के अनुकंपा नियुक्ति नियम स्पष्ट कहते हैं कि पात्र, आश्रित को रिक्त पद पर अनुकंपा नियुक्ति दी जावेगी, लेकिन सरकार यह तक नहीं बता पा रही है कि कितने मामले लंबित हैं.
श्रीमती कृष्णा गौर-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य के पूरक प्रश्न के जवाब में कहना चाहूंगी कि भरती प्रक्रिया में विलंब सामान्यत: माननीय न्यायालय के अंतरिम आदेशों या स्थगन या अन्य प्रक्रियात्मक परिस्थितियों के कारण होता है. तदुपरांत भरती की कार्यवाही समयबद्ध रूप से संपादित की जाती है और यह एक सतत प्रक्रिया है. सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी परिपत्र दिनांक 29 सितम्बर 2014 की कंडिका 7.5 एवं 7.7 के अंतर्गत पद उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन पत्र विभागाध्यक्ष एवं संबंधित विभाग के प्रमुख सचिव और सचिव को भेजने का प्रावधान है. अत: प्रदेश में केवल जिले में समस्त विभागों में अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों की जानकारी संकलित किया जाना संभव नहीं है.
श्रीमती सेना महेश पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा पूरक प्रश्न इस प्रकार रहेगा. माननीय अध्यक्ष महोदय, जब आपके परिशिष्ट में 59394 पदों के परिणाम जारी करने के बावजूद केवल 54681 पदों पर आवंटन हुआ और 6200 पद होल्ड रखे गये हैं तो सरकार इन पदों पर नियुक्तियां कब तक करेगी और क्या सरकार सदन को बतायेगी कि प्रदेश के सभी विभागों में स्वीकृत पद, कार्यरत कर्मचारियों के रिक्त पदों का डाटा क्यों नहीं रखा जा रहा है. क्या यह सही नहीं है कि सरकार बेरोजगार युवाओं से वास्तविक रिक्तियों की संख्या छुपा रही है. सरकार के वर्ष 2014 अनुकंपा नियुक्ति में स्पष्ट प्रावधान है कि पात्र आश्रितों को रिक्त पद उपलब्ध होने पर नियुक्तियां दी जावेंगी.
अध्यक्ष महोदय—सेना जी, आपके दो प्रश्न हो गये थे. प्लीज.
श्रीमती सेना महेश पटेल—जी. धन्यवाद, अध्यक्ष महोदय.
अध्यक्ष महोदय— आज महिलाओं का दिन है और देखिये सौभाग्य की बात की महिला मंत्री ही जवाब दे रही हैं. नीना जी बोलिये.
श्रीमती नीना विक्रम वर्मा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, महिलाओं का सम्मान बढ़ाने के लिये आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.
बदनावर उद्वहन सिंचाई परियोजना में विलंब से धार क्षेत्र में जल संकट
[नर्मदा घाटी विकास]
6. ( *क्र. 232 ) श्रीमती नीना विक्रम वर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बदनावर उद्वहन सिंचाई परियोजना कब स्वीकृत हुई? कार्य कब प्रारंभ हुआ तथा कार्य पूर्णता की अवधि क्या थी? क्या परियोजना में समयावधि बढ़ाई गयी? यदि हाँ, तो कब-कब बढ़ायी गई? (ख) क्या प्रश्नकर्ता द्वारा इस परियोजना के धीमी गति से कार्य करने को लेकर वि.स. सत्र जनवरी-2024 में प्रश्न पूछा था? इन दो वर्ष में परियोजना की भौतिक प्रगति किस स्तर पर है? (ग) क्या परियोजनाओं में विलम्बता से कच्चे माल के बाजार मूल्यों में वृद्धि होने से इन वृहद परियोजना की लागत में वृद्धि होती है? यदि हाँ, तो यह वित्तीय भार कौन वहन करता है? क्या इससे परियोजना की गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है? (घ) विभाग द्वारा निविदा शर्तों में इस प्रकार विलम्बता से कार्य करने वाले ठेकेदारों के विरूद्ध नोटिस दिये जाने के अतिरिक्त अर्थदण्ड/ब्लेक लिस्टेड सहित क्या कोई ठोस कार्यवाही किये जाने का प्रावधान है? यदि नहीं, तो क्या विभाग जनहित में इस हेतु समाधान कारक प्रयास करेगा? यदि हाँ, तो अब तक कौन-कौन सी कार्यवाहियां की गई? (ड.) परियोजना को शीघ्र पूर्ण करवाये जाने हेतु क्या कोई विशेष प्रयास विभाग द्वारा किये जायेंगे?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री धर्मेन्द्र भाव सिंह लोधी) : (क) दिनांक 07 अगस्त, 2018 को। दिनांक 17.02.2020 को। 48 माह दिनांक 16.02.2024 तक थी। प्रथम समयावधि दिनांक 17.02.2024 से 30.06.2024 तक 4 माह एवं द्वितीय समयावधि दिनांक 01.07.2024 से 30.06.2026 तक कुल 24 माह बढ़ाई गई है। (ख) जी हाँ। भौतिक प्रगति 65 प्रतिशत हो गई है। (ग) परियोजना का निर्माण कार्य टर्न की पद्धति से किया जा रहा है, जिसकी अनुबंधित राशि निर्धारित है। परियोजना के निर्माण में लगने वाली सामग्री की दरों में वृद्धि से लागत में बढ़ोत्तरी होती है। किन्तु अनुबंध की कंडिका अनुसार एवं मूल्य सूचकांक में वृद्धि/कमी का आंकलन कर भुगतान किया जाता है, जिसका वहन शासन द्वारा किया जाता है। परियोजना की द्वितीय समयावृद्धि मूल्य सूचकांक फरवरी 2024 की स्थिति में फ्रीज करते हुए प्रदान की गई है। कच्चे माल की दरों में वृद्धि से परियोजना की गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। (घ) जी हाँ। ठेकेदार को निर्माण कार्य की प्रगति बढ़ाये जाने हेतु समय-समय पर पत्र जारी किये गये, इसके साथ ही परियोजना की द्वितीय समयावृद्धि मूल्य सूचकांक फरवरी-2024 की स्थिति में फ्रीज करते हुए प्रदान की गई। (ड.) जी हाँ। निर्माण कार्य की सतत् मॉनिटरिंग तथा तकनीकी जांच के माध्यम से कार्य शीघ्र पूर्ण करने के प्रयास किये जायेंगे।
श्रीमती नीना विक्रम वर्मा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 232 है.
तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री (श्री गौतम टैटवाल)-- माननीय अध्यक्ष महोदय उत्तर सभा पटल पर रख दिया है.
श्रीमती नीना विक्रम वर्मा— माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा जो विषय है वह इस तरह का है कि जो सिंचाई योजना बदनावर उद्वहन सिंचाई योजना जो स्वीकृत की गई थी उसके अंदर यह उद्देश्य था कि हम सिंचाई का रकवा बढ़ायें, किसानों को उसका फायदा मिले और लागातार इसको फायदा देने के साथ-साथ उस समय जब यह स्वीकृत हुई वर्ष 2018 के अंदर अगस्त में तब मैंने तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय शिवराज सिंह जी से विशेष निवेदन किया था कि हमारे गांव की बहुत सारी जमीन में से होते हुये यह सिंचाई योजना जारी है, पाइप डल रहे हैं और मात्र कुछ किलोमीटर की दूरी पर यदि धार शहर है तो उसके पीने के पानी की व्यवस्था क्यों न इसमें से कर दी जाये और इसके लिये मुझे स्वीकृति मिल गई थी और स्वीकृति मिलने के बाद इस पर कार्य शुरू हुआ, कार्य लगातार जारी है, लेकिन इसके अंदर कार्य की विलंबता का परिणाम यह है कि आज तक यह पूर्ण नहीं हो पाई है और धार के शहर के अंदर अभी भी पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो पाया है. इसमें दो बार समयावधि बढ़ाई है जैसा कि मुझे बताया गया है. 24 माह की समयावधि बढ़ा दी गई है, जबकि इसके पूर्ण होने की जो समय सीमा थी वह ही वर्ष 2024 में थी 16.02.24 को इसको पूर्ण होने की, 48 माह में इसको पूरा करना था, लेकिन वह इसको पूरा कहीं भी नहीं कर पाये दो बार समयावधि बढ़ा दी गई 24 महीने और जो लागत के बारे में हमने पूछा तो बताया गया कि जैसे-जैसे समय बढ़ता है जो डीपीआर बनती है, जो लागत आती है वह बढ़ती चली जाती है क्योंकि कच्चा माल जो होता है वह महंगा होता जाता है और उसको फ्रीज करने के बाद आज तक स्थिति यह है कि अभी तक अगर इसको धरातल पर जाकर देखा जाये तो वहां पर 75 प्रतिशत भी काम पूरा नहीं हुआ है और जो डिस्ट्रीब्यूशन पाइप लाइन, फिल्टर प्लांट वगैरह जो हैं केवल उनमें ही जो छोटे-छोटे काम हैं वह किये गये हैं, लेकिन मेन जो बड़ा काम है उस काम के अंदर अभी कहीं कोई प्रगति नहीं है इसलिये मेरा आपके माध्यम से निवेदन है कि अगर इस सिंचाई योजना पर थोड़ा हम कुछ ठेकेदार पर सख्ती से कार्यवाही करें या उसको ब्लेकलिस्ट करें, पेनाल्टी लगायें या जो भी करें, लेकिन यदि कार्य समय सीमा में पूरा नहीं हो रहा है उसके बाद दो साल और ज्यादा हो गये हैं, आज वर्ष 2026 हो गया है, अगर इसको हम जल्दी से जल्दी पूरा करायेंगे तो किसानों का तो फायदा होगा साथ ही धार शहर में जो पीने के पानी की समस्या है उसका भी निराकरण होगा. माननीय मंत्री जी समय-सीमा बतायेंगे कि कब तक पूरा करेंगे.
श्री गौतम टेटवाल - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है कि सिंचाई परियोजना के निर्माण में विलंब होने से तथा बाजार मूल्य में वृद्धि होने से परियोजना की लागत में वृद्धि होती है यह वित्तीय भार शासन द्वारा वहन किया जाता है किन्तु इससे परियोजना की गुणवत्ता पर कोई भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता. जहां तक बदनावर सिंचाई परियोजना का सवाल है परियोजना के लिये मूल्य सूचकांक को फरवरी,2024 की स्थिति में फ्रीज करके समयावृद्धि प्रदान की गई है अत; परियोजना में होने वाली मूल्य वृद्धि का वित्तीय भार शासन द्वारा वहन नहीं किया जा सकता. विगत 2 वर्षों में परियोजना की भौतिक प्रगति 15 प्रतिशत से बढ़कर 65 प्रतिशत हो गई है. परियोजना में हुए विलंब का कारण कोविड महामारी,भूअर्जन में हुई देरी,वन स्वीकृति में विलंब, विद्युत आपूर्ति में विलंब है. हमारी सरकार प्रदेश के किसान भाईयों को शतप्रतिशत सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिये प्रतिबद्ध है. यह डॉ.मोहन यादव की सरकार है इस सरकार में 55 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई हो चुकी है और आगे भी हम 100 लाख हेक्टेयर में सिंचाई करने जा रहे हैं यह हमारी कल्पना है. प्रदेश में इसके लिये माननीय मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में अनेक संचाई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं. सरकार का प्रयास है कि सिंचाई परियोजनाएं निर्धारित समयावधि में पूर्ण हों इसके लिये विभाग द्वारा लगातार जांच और मानीटरिंग की जा रही है. जहां तक बदनावर सिंचाई परियोजना का सवाल है विभाग द्वारा सिंचाई परियोजना को शीघ्र पूर्ण किये जाने के लिये लगातार उच्च स्तर में मानीटरिंग की जा रही है. मैं माननीय सदस्या को विश्वास दिलाता हूं कि इस परियोजना को शीघ्र पूर्ण किये जाने का प्रयास करेंगे और भी कोई हो तो मुझे मेरे आफिस में मिलकर बात कर सकते हैं धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय - माननीय सदस्या कह रही हैं कि और कोई नहीं है यही वाली पूर्ण करा दो आप.
श्री गौतम टेटवाल - अध्यक्ष महोदय, निश्चित ही समय सीमा में हम पूर्ण करने की कोशिश करेंगे.
श्रीमती नीना विक्रम वर्मा - अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी भी यहां हैं.काफी संवेदनशील हैं और जैसा किसानों को लेकर हम संवेदनशील हैं और उनके हक में काफी प्रयास हो रहे हैं काम हो रहे हैं मैं इसे नकार नहीं रही हूं लेकिन जिस सिंचाई योजना की मैं बात कर रही हूं उस सिंचाई परियोजना में जैसे हमने उनकी राशि फ्रीज कर दी है लेकिन कोई ठेकेदार अपने नुकसान के अंदर यह काम पूरा करेगा थोड़ा समझने वाली बात है अगर उसने 200 करोड़ की लागत लगाई है तो आज की तारीख में वह 250 करोड़ से ज्यादा चली है मैं अनुमानित बता रही हूं लेकिन जैसा वह कह रहे हैं कि हमने फ्रीज कर दी है ठेकेदार पूर्ण कर देगा मुझे धरातल पर कहीं नजर नहीं आ रहा है. मैं मुख्यमंत्री जी से कहूंगी कि इसमें अपना अनुग्रह बढ़ाते हुए इसे शीघ्र से शीघ्र पूर्ण करा दें और समय सीमा यहां अवश्य बता दें क्योंकि मैं पहले एक बार प्रश्न इसमें लगा चुकी हूं मैं तीसरा प्रश्न नहीं चाहती आप समय सीमा सही बता दें कि आप कब तक पूर्ण कर देंगे. माननीय मुख्यमंत्री जी प्लीज थोड़ा सा सहयोग कर दीजिये.
श्री गौतम टेटवाल - अध्यक्ष महोदय, अक्टूबर,2027 में पूर्ण कर ली जायेगी.रबी 2027-28 में सिंचाई का पानी किसानों को उपलब्ध कराया जायेगा. धन्यवाद.
श्रीमती नीना विक्रम वर्मा - अध्यक्ष महोदय, धार के पीने के पानी का क्या हुआ.धार में पीने के पानी की बहुत समस्या है.
श्री गौतम टेटवाल - उसकी भी यथाशीघ्र व्यवस्था की जायेगी.
श्रीमती नीना विक्रम वर्मा - अध्यक्ष महोदय,समय-सीमा बता दें.धार शहर के पीने के पानी के लिये समय सीमा बताएं कि कब तक उपलब्ध करवा देंगे.
श्री गौतम टेटवाल - अध्यक्ष महोदय,जैसा मैंने कहा है अक्टूबर,2027 में पूर्ण कर ली जायेगी तो पीने के पानी की व्यवस्था भी 2027-28 में सिंचाई का पानी किसानों को उपलब्धता के साथ-साथ यह भी व्यवस्था पूर्ण की जायेगी.दीदी धन्यवाद.
श्री भंवर सिंह शेखावत - अध्यक्ष महोदय, आदरणीय भाभी जी ने यह जो प्रश्न बदनावर की उद्वहन सिंचाई योजना का उठाया है यह तीसरी बार यह प्रश्न इस विधान सभा में आ रहा है. 2018 में इसी सरकार ने इस उद्वहन सिंचाई योजना को स्वीकृत किया था जब मैं बदनावर का विधायक हुआ करता था. इस योजना के लिए मैंने शिवराज जी से निवेदन किया था और उस समय उन्होंने यह योजना स्वीकृत की थी. वर्ष 2018 के बाद में यह योजना लागू हो गई, पैसे उनके एकाउंट में ट्रांसफर हो गए. ठेकेदार का टेण्डर हो गया था, लेकिन वर्ष 2018 के अंदर आदरणीय कैलाश जी की वजह से मेरी दुकान ही वहां बदनावर में बंद हो गई. (हंसी). मुझे वहां से रवाना कर दिया गया और वर्ष 2018 के बाद में वर्ष 2023 में फिर उस दुकान के शटर खुल गए और मुझे फिर जनता के द्वारा अपनी सेवा देने का और काम करने का मौका मिला, लेकिन तब तक पाला बदल चुका था.
श्री अजय विश्नोई – भंवर सिंह जी, शटर तो खुल गए, लेकिन साईन बोर्ड बदल गया. (हंसी).
श्री भंवर सिंह शेखावत – साईन बोर्ड बदला, यही मानकर चलो, लेकिन बदलने वाला प्राणी यही है. (हंसी). सबसे बड़ा झंझट तो इसकी वजह से ही हुआ, लेकिन अध्यक्ष महोदय, ये जो योजना थी, बहुत अच्छी योजना थी, वर्ष 2018 में प्रारंभ हुई. आज वर्ष 2026 में, जब आदरणीय भाभी जी ने प्रश्न लगाया है, आदरणीय भाभी जी ने प्रश्न इसलिए भी लगाया है कि धार जिले के भी बहुत से गांव, इनकी विधानसभा के मेरी विधान सभा से लगे हुए हैं, इस योजना का लाभ उनको भी मिलना है लेकिन यह योजना आज वर्ष 2026 तक भी पूर्ण नहीं हुई है. माननीय मुख्यमंत्री जी, मैं आपसे निवेदन करूंगा कि इस योजना को पूरा करने में इतना समय कैसे लग रहा है, इसकी भी जांच की जाए. कोविड का विषय तो 2 साल का रहा, बीच में आया. कोई हैदराबाद की कंपनी है, जिसको ठेका दिया गया था, तीन बार उसका ठेका कैंसिल करने का नोटिस उसको दिया गया, लेकिन उसका ठेका कैंसिल हुआ नहीं और अपने राजनीतिक प्रभाव के कारण वह टिका रहा और आज की स्थिति में यह है कि आपने जो जवाब दिया है, सरकार ने जो जवाब दिया है, उसमें 2026 के इस माह तक भी केवल 65 प्रतिशत ही काम हुआ है. ऐसा आपने आज के उत्तर में बताया है. 65 प्रतिशत काम हुआ है और माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि हम सितंबर, अक्टूबर में पानी दे देंगे. अरे, 65 प्रतिशत तो काम हुआ है मेरे भारत माता के सपूतों, अब तो मुझे ईमानदारी से बता दें कि कब इसको लाएंगे और कब बदनावर और धार जिले की जनता को पानी मिलेगा. मेहरबानी करके माननीय मुख्यमंत्री जी से मेरा आग्रह है, आप इसमें थोड़ा सा प्रयास करेंगे तो हो जाएगा.
श्री गौतम टेटवाल – माननीय अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2023 में यह योजना स्वीकृत हुई थी. योजना का संपूर्ण लाभ, सिंचाई एवं पेयजल, अक्टूबर, 2027 तक पूर्ण किया जाएगा. आदरणीय भंवर सिंह भाई साहब, इसका लाभ आपकी विधान सभा को भी मिलने जा रहा है. धन्यवाद भाई साहब.
अध्यक्ष महोदय – मिलेगा, आप चिंता नहीं करें.
मुख्यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) – माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इसमें थोड़ा सा बताना चाहूँगा कि ये जितनी भी पेयजल की योजनाएं हैं, मोटे तौर पर पहले केवल नर्मदा वेली, नर्मदा की नदी से ही सब जगह दूर-दूर तक पानी पहुँचाने का आग्रह होने लगा और कई बार उसकी दूरी इतनी ज्यादा बढ़ गई कि ये योजना आज तो चलेगी, लेकिन कल उसका क्या होगा, माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें बहुत कष्ट है. लेकिन फिर भी अब हमने इसमें आगे बढ़ते हुए जो पार्वती कालीसिंध चंबल योजना है, जैसे उदाहरण के लिए नर्मदा से पानी देने के लिए डिमाण्ड अब रतलाम में भी होने लगी. रतलाम के आगे की तहसीलों में होने लगी तो यह अव्यावहारिक बातें हैं तो हमने कहा कि पार्वती कालीसिंध चंबल योजना के माध्यम से जहां से नजदीक से नदी से पानी मिल सकता है एक, दूसरा केवल उद्वहन परियोजना में नदी से पानी लिफ्ट करने के बजाय हमारे बड़े डैम बना करके वहां से ग्रेविटी से भी पानी चालू करें. ये पूरा सघन पुनर्विचार का एक विषय है, जो पूरे प्रदेश के लिए ज्यादा उपयोगी रहेगा. मुझे लगता है कि आने वाले समय में हम एक सर्वदलीय बैठक करके पानी के संबंध में लंबे समय तक के लिए योजना बनाएंगे और किसान कल्याण वर्ष के माध्यम से इन सब बातों पर विचार करने का विषय ला रहे हैं.
श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल – अध्यक्ष महोदय, इस विभाग के मंत्री के रूप में मुझे पिछली सरकार में काम करने का अवसर मिला है और हम उन चीजों को आगे बढ़ा रहे थे. उद्वहन सिंचाई योजना से हम सिंचाई के लिए तो खेतों में पानी देंगे ही, पर माननीय मुख्यमंत्री जी को मेरा सुझाव है कि इन योजनाओं को हम पेयजल के लिए भी जोड़ दें ताकि एक योजना से दो काम हो जाएंगे. जैसे भाभी जी ने बोला ही है कि धार को मिल जाए. इस तरह से बहुत से नगर पंचायत, बहुत सारे गांव उन उद्वहन सिंचाई योजनाओं से जुड़े हुए हैं तो इन योजनाओं को आप सिंचाई के साथ-साथ पेयजल के लिए भी जोड़ देंगे तो कहीं न कहीं जो पेयजल की समस्या पूरे प्रदेश में उत्पन्न होती है, वह खत्म हो जाएगी.
श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव – अध्यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से, चूँकि माननीय मुख्यमंत्री जी भी सदन में उपस्थित हैं और कल जो किसानों के विषय में चर्चा हुई थी और हमने एक मांग रखी थी, चूँकि सरकार किसान कल्याण वर्ष मना रही है तो हम चाहते हैं कि एक सर्वदलीय बैठक हो, मैं समझता हूँ कि माननीय मुख्यमंत्री जी भी इससे सहमत होंगे ताकि आने वाले समय में हमारे जो किसानों से जुड़े हुए विषय हैं, उन विषयों पर सब लोग मिलकर एक आम राय के माध्यम से एक नई नीति बनाने का काम हम लोग कर सकें.
अध्यक्ष महोदय - मंत्री जी, आप कुछ कहना चाहते हैं. वैसे मैं समझता हूँ कि भंवर सिंह का रसूख अभी कायम है और माननीय मुख्यमंत्री जी ने बोल दिया है, तो इसके बाद कुछ बचता नहीं है. श्री कैलाश जी कुछ कहना चाह रहे हैं.
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) – अध्यक्ष महोदय, भंवर सिंह जी का इकबाल चारों तरफ बुलंद रहता है, चाहे इधर रहें या उधर रहें. उनका इकबाल बुलंद है. (हंसी)
श्री भंवर सिंह शेखावत – अध्यक्ष महोदय, कैलाश जी, इधर-उधर की बातें न कर, यह बता कि यह कारवां लुटा कैसे ? (हंसी)
अध्यक्ष महोदय – कैलाश जी, जहां हाथ रखो, वहीं दर्द है. (हंसी) श्रीमती रीती पाठक जी.
सीधी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्र का विकास
[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]
7. ( *क्र. 793 ) श्रीमती रीती पाठक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सीधी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कोई नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किये जाने की योजना है? (ख) यदि हाँ, तो इस औद्योगिक क्षेत्र को विधानसभा के किन पंचायतों में विकसित किया जायेगा और इसके लिये कितनी भूमि की आवश्यकता होगी? (ग) यदि नहीं, तो युवाओं को रोजगार देने व उत्पादनशीलता बढ़ाने के लिये सरकार द्वारा क्या प्रयास किये जा रहे हैं? (घ) क्या प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में सीधी जिले में कोई औद्योगिक इकाई स्थापित करने की सहमति बनी है या कोई योजना है? (ड.) सीधी विधानसभा में औद्योगिक इकाइयों के क्षेत्र में विभिन्न सरकारों द्वारा अब तक क्या-क्या कार्य किये गये हैं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - मंत्री (श्री चेतन्य काश्यप) : (क) जी हाँ। (ख) सीधी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने हेतु विभाग के अधीन एम.पी.आई.डी.सी.लि. क्षेत्रीय कार्यालय रीवा द्वारा ग्राम बरिगवां जिला सीधी में 52.810 हेक्टेयर भूमि चिन्हांकित की गई है। चिन्हांकित भूमि औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग के पक्ष में हस्तांतरित किये जाने हेतु कलेक्टर जिला सीधी के समक्ष आवेदन पत्र भी प्रस्तुत किया गया है। विभाग के पक्ष में भूमि हस्तांतरण उपरांत औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की कार्यवाही की जावेगी। सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार सीधी विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम–बाडीटोला, तहसील गोपदबनास में औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हेतु 09.49 हेक्टेयर भूमि पर राशि रु. 11.22 करोड़ की लागत से नवीन औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना की जा रही है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) प्रश्नांश 'क' के उत्तर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना का उल्लेख है। औद्योगिक इकाइयां स्थापित होने से रोजगार के अवसर सृजित होने एवं उत्पादनशीलता बढ़ने की संभावना है। (घ) प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में सीधी जिले में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग को कुल 08 इकाइयों के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुये थे, जिसमें से 03 इकाइयां वर्तमान में स्थापित हो गयी हैं। 01 इकाई का प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है तथा शेष 04 इकाइयों द्वारा इकाई स्थापना में रूचि प्रदर्शित नहीं की गयी है। (ड.) जानकारी उत्तरांश (क) अनुसार है। उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार विभाग में संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (P.M.F.M.E.) अंतर्गत सीधी विधानसभा में योजना प्रारंभ से वर्तमान तक कुल 32 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की गई हैं।
श्रीमती रीती पाठक – मेरा तारांकित प्रश्न 793 है.
राज्यमंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण (श्रीमती कृष्णा गौर)- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर सदन के पटल पर रखा है.
श्रीमती रीती पाठक – माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत विस्तार से खासकर माननीय मुख्यमंत्री जी के माध्यम से मुझे उत्तर प्राप्त हुआ है. लेकिन मेरा प्रश्न सीधी विधान सभा और सीधी जिले के औद्योगिक विकास की चिन्ता के लिए है. मैंने माननीय मुख्यमंत्री जी से प्रश्न पूछा था, जिसके लिये अधिकृत मंत्री माननीय श्रीमती कृष्णा गौर जी हैं.
अध्यक्ष महोदय, सीधी विधान सभा के अंतर्गत, मैं लगातार यह जानना चाह रही थी कि कोई नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित करवाये जाने की संभावना है या नहीं, तो माननीया ने इस प्रश्न का उत्तर भी बहुत विस्तार से दिया है, लेकिन मैं उस उत्तर के पक्ष में इतना ही पूछना चाहती हूँ कि औद्योगिक क्षेत्र के लिए जो भूमि आवंटित की गई है. चाहे वह 53 हेक्टेयर औद्योगिक क्षेत्र के लिए हो, चाहे वह 10 हेक्टेयर एमएसएमई के लिए हो. यह भूमियां तो आवंटित हो चुकी हैं, लेकिन मैं इसके माध्यम से यह जानना चाहती हूँ कि आवंटन के बाद इसकी और क्या प्रक्रिया है ? क्या जमीन आवंटित करना ही औद्योगिक विकास के पक्ष में यह उत्तर हो जाता है. माननीय मुख्यमंत्री जी की लगातार इसमें चिन्ता रही है कि हर क्षेत्र विकसित हो, मैं उनको धन्यवाद भी देना चाहती हूँ कि आदरणीय मुख्यमंत्री जी ने ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की थी, तो उसके माध्यम से सीधी जिले में करीब-करीब 8 इकाइयों का प्रस्ताव प्रस्तावित हुआ था, जिसमें से 3 तो जमीन पर हैं, लेकिन 1 प्रस्तावित है, लेकिन 4 का कहीं भी कोई अभी इस उत्तर के माध्यम से हमें भान नहीं हो पा रहा है, तो माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से इतना ही पूछना चाहती हूँ कि जो हमारी आवंटित की गई जमीनें हैं, उस पर जो बाधाएं आ रही हैं, जो जमीनी स्तर पर कई सारी अड़चनें हैं, उनको कब दूर करके उसको मूर्त रूप दिया जायेगा ? दूसरी बात यह है कि जितने निवेशक हमारे जिले में हमारी इकाइयों के लिए आये थे, क्या उन पूरे निवेशकों को स्थापित करने का प्रयास किेया जायेगा ? और आगे इसकी और क्या संभावनाएं हो सकती हैं ?
श्रीमती कृष्णा गौर – माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या की चिन्ता अपनी सीधी विधान सभा क्षेत्र में औद्योगिक प्रगति की जानकारी की थी, हमने जिसे विस्तार से उत्तर में हर एक औद्योगिक इकाई के बारे में उन्हें जानकारी उपलब्ध करवाई है. निश्चित रूप से, आज वह यह जानकारी चाहती हैं कि जो औद्योगिक इकाइयां चिन्हित की गई हैं, जहां जमीनें चिन्हित की गई हैं, उन पर काम कब शुरू होगा और कितने समय में शुरू होगा ? इसलिए मैं उनको बताना चाहूँगी कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने मध्यप्रदेश को वर्ष 2025 में उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाने का जब उन्होंने निर्णय लिया था, तो यह उनका संकल्प भी था कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक प्रगति को बढ़ावा देना और जितनी भी रुकावटें आ रही हैं, उन सारी रुकावटों को दूर करके जल्द से जल्द निवेश हमारे प्रदेश में आए और इस दृष्टि से सीधी विधान सभा क्षेत्र के लिए भी जो प्रावधान किये गये हैं, हमारी औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो रही हैं. मैं जानकारी के रूप में बताना चाहूँगी कि एमएसएमई की इकाइयां जब लगती हैं, तो उन्हें 2 वर्ष का समय दिया जाता है, सारे अवरोधों को दूर करने के लिए और इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास करने के लिए. यदि कोई बड़ा उद्योग लगता है तो उसे 3 वर्ष का समय दिया जाता है. इसलिए स्वाभाविक रूप से आपके विधान सभा क्षेत्र की, जो विस्तार से हमने जानकारी उपलब्ध करवाई है, उसके अनुसार बहुत सारी ईकाइयां वहां लग रही हैं, बहुत सारे रोजगार के अवसर सृजित होंगे और जितना जल्दी हो सकेगा, ये ईकाइयां धरातल पर आयेंगी और आपकी मंशा पूरी होगी.
श्रीमती रीती पाठक- अध्यक्ष महोदय, मैं, माननीय मंत्री जी के उत्तर से पूर्ण रूप से सहमत हूं. लेकिन मेरा इस सदन के माध्यम से आग्रह है कि हमारी सरकार को ढाई साल हो चुके हैं और हमारा सीधी जिला औद्योगिक क्षेत्र में विकास के लिए काफी पिछड़ा हुआ है और हर दृष्टि से पिछड़ा माना जाता है. इसलिए आपके माध्यम से मेरे लिए यह बहुत मजबूत जगह है, जहां मैं अपनी विधान सभा और जिले के लिए आवाज उठा सकूं. माननीय मुख्यमंत्री जी भी यहां बैठे हैं. समय-सीमा लगातार बहुत तीव्र गति से जा रही है, मेरा केवल इतना ही कहना है कि Global Investors Summit को लगभग डेढ़ वर्ष होने जा रहा है, जब हमने ये प्रस्ताव प्रक्रिया अधीन लिया था. अब समय कम है और काम हमें ज्यादा करने हैं. तीव्र गति से काम हो, इसके लिए अध्यक्ष महोदय आप, मुख्यमंत्री जी एवं मंत्री के माध्यम से मुझे और हमारे सीधी जिले और मेरी विधान सभा के लोगों को आश्वस्त करवायें.
अध्यक्ष महोदय, दूसरा और एक छोटा सा विषय यह है कि हमारे यहां बेरोजगार युवाओं की संख्या बढ़ती जा रही है. मैं आपके माध्यम से कहना चाहती हूं कि बेरोजगारी हमारे यहां ज्यादा से ज्यादा संख्या में न हो, इसके लिए चूंकि वे सभी खेती से जुड़े हुए हैं इसलिए अपने आपको कहीं न कहीं मुख्यमंत्री जी की जो किसान कल्याण योजना का जो मूर्त रूप है, वह धरातल पर दिखाई देता है. परंतु वे औद्योगिक क्षेत्र से स्वयं को संबद्ध करें, इसके लिए आवश्यक है कि सरकार के माध्यम से, अन्य विभागों के माध्यम पर विचार किया जाये, जिससे हम अपने यहां उद्योग स्थापित कर सकें.
श्रीमती कृष्णा गौर- अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2025 में आयोजित Global Investors Summit में सीधी जिले के 8 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे. जिनकी स्थिति इस प्रकार है, 3 ईकाइयां स्थापित हो चुकी हैं, 1 ईकाई का प्रस्ताव प्रक्रियाधीन है, 1 ईकाई के लिए भूमि चिहांकन हेतु चर्चा की जा रही है और 3 निवेशकों द्वारा ईकाई स्थापना में रूचि प्रदर्शित नहीं की गई इसलिए उन पर काम नहीं हो रहा है.
अध्यक्ष महोदय, इसके अलावा अन्य विभागों के माध्यम से सीधी जिले में और प्रगति हो रही है. मैं बताना चाहूंगी कि उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण विभाग की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) अंतर्गत सीधी में योजना प्रारंभ से वर्तमान तक 32 सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण ईकाइयों को रुपये 145.10 लाख का अनुदान प्रदान किया गया है, इससे लगभग 92 व्यक्तियों को रोजगार प्राप्त हुआ. MSME प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत 5 ईकाइयों को लाभान्वित किया गया, जिससे लगभग रुपये 381 लाख का निवेश प्राप्त हुआ. इसके साथ मुख्यमंत्री उद्म क्रांति योजना अंतर्गत 4 वर्षों में 532 हितग्राहियों को लगभग रुपये 34 करोड़ का ऋण वितरित किया गया. MSME विभाग द्वारा सीधी विधान सभा क्षेत्र में वर्तमान में ग्रामीण कर्मशाला उत्तरी करोंदिया रकबा 1.57 वन हेक्टेयर स्थापित है, जिसमें 2 ईकाइयां स्थापित होकर संचालित हो रही है. उद्यम पोर्टल के अनुसार सीधी विधान सभा में कुल 93 औद्योगिक ईकाइयां स्थापित हैं, जिनके माध्यम से कुल 331 युवाओं को रोजगार प्रदान किया जा रहा है. लगातार सीधी विधान सभा में औद्योगिक प्रगति चरम पर है और निश्चित रूप से भविष्य में और बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे.
श्रीमती रीती पाठक- धन्यवाद.
आयुक्त, जिला निर्वाचन एवं तहसील निर्वाचन कार्यालयों में संयोजित कर्मचारी
[विधि एवं विधायी कार्य]
8. ( *क्र. 786 ) श्री दिनेश जैन बोस : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या उज्जैन जिला अंतर्गत विधानसभा एवं लोकसभा आम निर्वाचन की समाप्ति के पश्चात् भी कई कर्मचारियों को निर्वाचन कार्यालयों में अन्य विभागों से संयोजित कर रखा है? वर्तमान में आयुक्त कार्यालयों, जिला निर्वाचन कार्यालयों एवं तहसील निर्वाचन कार्यालयों आदि में किस-किस विभाग से कितने कर्मचारी संयोजित हैं? नाम, पदनाम एवं संस्था के नाम सहित उन्हें संयोजित किये जाने के कारण सहित जानकारी उपलब्ध करावें। (ख) कितने कर्मचारियों को निर्वाचन आयोग से आवंटित विशेष मानदेय का भुगतान किया गया एवं क्यों? जिन संयोजित कर्मचारियों को मानदेय भुगतान नहीं किया गया क्या उनके द्वारा निर्वाचन कार्यालय में कोई कार्य नहीं किया गया? (ग) विधानसभा 2023 एवं लोकसभा निर्वाचन 2024 के दौरान स्टेशनरी, टेण्ट, लाईट माईक आदि कार्यों हेतु जिला उज्जैन के निर्वाचन कार्यालय में किन-किन फर्मों के देयक भुगतान नहीं किये गये और क्यों? क्या विभिन्न निर्वाचन सामग्री कय करने के लिये स्वीकृत निविदाकारों से ही सामग्री कय की गई? यदि नहीं, तो क्यों? क्या सामग्री कय करने हेतु भण्डार क्रय नियमों का पालन किया गया है? (घ) जिला निर्वाचन कार्यालय में लेखा शाखा के कार्य संपादन हेतु क्या योग्यता निर्धारित है? जिला निर्वाचन कार्यालय उज्जैन में वर्ष 2023 से वर्तमान तक लेखा शाखा का कार्य किसके द्वारा संपादित किया जा रहा है एवं क्या उक्त लेखापाल लेखा शाखा के लिये योग्य है? यदि नहीं, तो नियम विरूद्ध अयोग्य कर्मचारी से लेखा शाखा का कार्य संपादित करवाने के लिये जिम्मेदार अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री गौतम टेटवाल) :


श्री दिनेश जैन (बोस)- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 786 है.
राज्यमंत्री, तकनीकी शिक्षा कौशल विकास एवं रोजगार (श्री गौतम टेटवाल)- अध्यक्ष महोदय, उत्तर सदन के पटल पर प्रस्तुत है.
अध्यक्ष महोदय- जैन जी, पूरक प्रश्न करें.
श्री दिनेश जैन (बोस)- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यह है कि विधानसभा 2023 एवं लोकसभा निर्वाचन 2024 के दौरान स्टेशनरी, टेण्ट, लाईट माईक आदि कार्यों हेतु जिला उज्जैन के निर्वाचन कार्यालय में किन-किन फर्मों के देयक भुगतान नहीं किये गये और क्यों? क्या विभिन्न निर्वाचन सामग्री कय करने के लिये स्वीकृत निविदाकारों से ही सामग्री कय की गई? यदि नहीं, तो क्यों? क्या सामग्री कय करने हेतु भण्डार क्रय नियमों का पालन किया गया है? यह मेरा पहला प्रश्न है.
श्री गौतम टेटवाल – माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को अवगत कराना चाहता हूँ कि सदस्य की मंशानुसार, नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है. उज्जैन में वर्तमान में निर्वाचन शाखा में कोई भी देयक, भुगतान हेतु लंबित नहीं है. जो भी देयक नियमानुसार प्रस्तुत किया जाएगा उसका भुगतान भी यथाशीघ्र कर दिया जाएगा. अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि आवश्यकता अनुसार अधिकारियों और कर्मचारियों का समायोजन भी किया जाए. साथ ही अतिरिक्त स्टाफ को हटाने के निर्देश भी दिए गए हैं जिसके अनुक्रम में 8 कर्मचारियों को रिलीव कर दिया गया है. वर्तमान में एक भी शिक्षक निर्वाचन कार्य में संयोजित नहीं है. वैसे भी माननीय दिनेश जैन जी मेरे अच्छे साथी हैं. मैं उनसे कहना चाहता हूँ कि कोई और विषय है तो आप मेरे कार्यालय में आकर संपर्क करें आपकी बात पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे.
अध्यक्ष महोदय – विधायक जी और मंत्री जी दोनों एक दूसरे के काफी खास प्रतीत होते हैं. (हंसी)
श्री दिनेश जैन – अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का जवाब ही नहीं आया है. कार्यालय मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, भोपाल, मध्यप्रदेश के पत्र क्रमांक 786/ 5 के संबंध में जो जानकारी भेजी गई थी. बिंदु क्रमांक 3 (ग) में उल्लेखित मध्यप्रदेश बुक स्टाल की दरें एल-1 पर अधिक होने से तुलनात्मक अध्ययन किये जाने के कारण स्टेशनरी का काम किसी अन्य संस्था से कराया गया था. जिसकी पूरी जानकारी मुझे नहीं दी गई. मेरा प्रश्न यह है कि जो एल-1 वाला क्वालीफाइड था. तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद उसको काम नहीं देकर किसी दूसरे को दे दिया गया था. इसकी जानकारी मैंने मांगी थी. यह मेरा पहला प्रश्न था कि एल-1 वाले को न देकर किसी दूसरे को दे दिया गया. इसका पत्र क्रमांक आपका ही है, कार्यालय मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी का, वो भी जानकारी मांग रहे हैं. लेकिन वो जानकारी नहीं दी गई है. मेरा दूसरा प्रश्न है कि जिला निर्वाचन कार्यालय में लेखा शाखा में कार्य संपादन हेतु क्या योग्यता निर्धारित है. यदि प्रजापति के पास योग्यता है तो वो काम करे और योग्यता नहीं है तो काम नहीं करे. मेरे छोटे-छोटे दो प्रश्न हैं मैं चाहता हूँ कि इनका सटीक उत्तर मुझे मिल जाए.
अध्यक्ष महोदय – प्रश्न छोटे-छोटे हैं, आन्सर सटीक चाहिए.
श्री गौतम टेटवाल – माननीय अध्यक्ष महोदय, जिला निर्वाचन कार्यालय में वर्ष 2023 से वर्तमान तक लेखा शाखा का कार्य प्रमोद प्रजापति, सहायक ग्रेड-2 द्वारा संपादित किया गया था. हां उक्त लेखापाल जिला निर्वाचन कार्यालय में लेखा शाखा का कार्य करने योग्य है. वर्तमान में उज्जैन में निर्वाचन शाखा में कोई भी भुगतान शेष नहीं बचा है.
श्री दिनेश जैन – माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं केवल इतना जानना चाहता हूँ कि क्या वह व्यक्ति योग्यता रखता है या नहीं रखता है. इस पद पर योग्यता के क्या मापदण्ड हैं. वो यदि योग्य है तो उसको रखें और यदि अयोग्य है तो नहीं रखें. योग्यता का मापदण्ड क्या है.
श्री गौतम टेटवाल – माननीय अध्यक्ष महोदय, मापदण्डों की जांच करवा ली जाएगी. (हंसी)
श्री दिनेश जैन – माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे कब तक जवाब मिल जाएगा.
श्री गौतम टेटवाल – माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य को मैं अवगत कराना चाहता हूँ कि वे मेरे साथ ऑफिस में बैठ जाएं हम बैठकर बात कर लेंगे.
9. ( *क्र. 669 ) श्री पंकज उपाध्याय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या थाना जौरा में दर्ज अपराध क्रमांक 719/23, दिनांक 30.11.2023 को प्रकरण में प्री-इन्वेस्टिगेशन के उपरांत दर्ज किया गया था? यदि हाँ, तो विवेचना में विलंब होने का कारण क्या है? क्या पुलिस विवेचना में विलंब करके अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रही है? (ख) प्रश्नकर्ता द्वारा प्रश्नांश 'क' अनुसार प्रकरण के संबंध में प्रश्न क्रमांक 591, दिनांक 02.07.2024, प्रश्न क्रमांक 2642, दिनांक 05.08.2025, प्रश्न क्रमांक 779, दिनांक 02.12.2025 एवं प्रश्न क्रमांक 637, दिनांक 18.02.2026 के माध्यम से जानकारी चाही गई, किन्तु प्रत्येक बार विवेचना जारी होने के संबंध में उत्तर प्राप्त हुआ। प्रकरण दर्ज हुए लगभग दो साल छह माह से अधिक समय व्यतीत हो जाने के बाद भी विवेचना पूर्ण न होने का क्या कारण है? स्पष्ट जानकारी दें। (ग) क्या थाना जौरा में पदस्थ पुलिस अधिकारी विवेचना पूर्ण करने में असफल होने की स्थिति में क्या जांच के लिये एस.आई.टी. का गठन किया जायेगा? (घ) प्रश्नांश (क) अनुसार प्रकरण में विवेचना पूर्ण कराने हेतु प्रश्नकर्ता द्वारा पुलिस महानिदेशक मध्यप्रदेश पुलिस को प्रेषित पत्र क्रमांक 82/26, दिनांक 25.02.2026 के क्रम में क्या कार्यवाही की गई संपूर्ण विवरण दस्तावेजों एवं पत्राचारों की प्रतियों सहित उपलब्ध कराएं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल) : (क) जी हाँ, थाना जौरा के अपराध क्रमांक 719/23, धारा 365, 342, 294, 323,506 वी भा.द.वि. का प्रथम सूचना पत्र घटना के संबंध में आवेदक विनोद कुमार दुबे से प्राप्त शिकायत पत्र की प्रारंभिक जांच के उपरांत मुलायम सिंह सिकरवार व अन्य के विरुद्ध पंजीबद्ध किया गया था। प्रकरण वर्तमान में विवेचनाधीन है। प्रस्तुत शिकायती आवेदन पत्रों में उल्लेखित तथ्यों से विवेचना की जा रही है। जी नहीं, पुलिस द्वारा विवेचना में विलंब नहीं किया जा रहा है और न ही अपराधियों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। साक्ष्यों के परीक्षण उपरांत ही प्रकरण का निराकरण किया जाता है। (ख) आवेदक एवं अनावेदक पक्षों द्वारा शिकायत आवेदन प्रस्तुत किये गये हैं, जिनमें उल्लेखित तथ्यों पर सूक्ष्मता से विवेचना जारी है, संकलित साक्ष्यों के अनुसार ही प्रकरण का यथाशीघ्र उचित निराकरण किया जाना है। प्रकरण वर्तमान में विवेचनाधीन है। (ग) प्रकरण की विधिवत विवेचना की जा रही है, एस.आई.टी. के गठन का कोई प्रस्ताव नहीं है। (घ) प्रश्नाश "क" के संबंध में विस्तृत प्रतिवेदन पुलिस अधीक्षक, मुरैना द्वारा समनि (शिकायत) पुलिस मुख्यालय को प्रेषित किया गया है। जांच प्रतिवेदन अनुसार प्रकरण विवेचनाधीन है। जांच प्रतिवेदन संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।
श्री पंकज उपाध्याय – मेरा प्रश्न क्रमांक 669 है.
राज्यमंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण (श्रीमती कृष्णा गौर) – माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर सदन के पटल पर रखा हुआ है.
श्री पंकज उपाध्याय – अध्यक्ष महोदय, वैसे तो उत्तर माननीय मुख्यमंत्री जी को देना था, गृह विभाग माननीय मुख्यमंत्री जी के पास है. उन्होंने नरेन्द्र भाई को अधिकृत कर दिया था. अब हमारी बहन इसका उत्तर दे रही हैं, ठीक है. मेरा प्रश्न यह था कि आरोपी मुलायम सिंह सिकरवार और उसके जो 25-26 सहयोगी थे उनको कब तक गिरफ्तार कर लिया जाएगा. 719/23 यह एफआईआर हुई थी यह प्री इन्वेस्टीगेशन के बाद हुई थी. पहले आवेदन की जांच हुई थी उसके 10 दिन बाद एफआईआर दर्ज हुई थी. उसके बावजूद भी 3 साल हो गए हैं. जिस व्यक्ति के साथ मारपीट हुई, जिसका अपहरण हुआ, उसके साथ लूट की गई. 3 साल बाद तक कोई कार्यवाही नहीं की गई. आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया. मैंने सिम्पल तरीके से पूछा कि उनको गिरफ्तार कब तक किया जाएगा. इसमें उत्तर में दिया गया है कि कार्यवाही जारी है. जस्टिस डिले जस्टिस डिनाय. मतलब अगर आप तीन साल में जांच ही नहीं कर पा रहे हैं तो गृह मंत्रालय कैसे चल रहा है यह आप भी देख सकते हैं. साथ ही मैंने पूछा था कि जो लूट की धारा बढ़वाने के लिए कई सारे आवेदन दिए हैं उसके बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई. एसआईटी की मांग की गई उसमें भी कोई कार्यवाही नहीं की गई. आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो तीन साल बाद भी अगर ऐसा हो रहा है तो फिर कैसे न्याय मिलेगा.
श्रीमती कृष्णा गौर -- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को बताना चाहूंगी कि कोई भी घटना जब घटती है तो प्रकरण पंजीबद्ध होता है और उल्लिखित तथ्यों के आधार पर सूक्ष्म विवेचना होती है. जो भी साक्ष्य उपलब्ध होते हैं उन संकलित साक्ष्य के आधार पर ही प्रकरण का यथाशीघ्र उचित निराकरण किया जाता है. इसलिए मैं माननीय सदस्य को कहना चाहूंगी कि पुलिस द्वारा इस विवेचना में किसी भी प्रकार से जानबूझकर कोई विलम्ब नहीं किया गया है न ही अपराधियों को बचाने का प्रयास किया गया. इसलिए जो साक्ष्य उपलब्ध और संकलित है उसके आधार पर थाना जौरा जिला मुरैना के उपरोक्त अपराध क्रमांक 719/2023 में निम्न लिखित 5 आरोपीगण के विरुद्ध उपरोक्त धाराओं में अभियोगपत्र दिनांक 19.07.2026 तैयार कर दिनांक 20.07.2026 को सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है. यह जो 5 आरोपी थे वह मुलायम सिंह सिकरवार, गोविन्दा उर्फ शिवम शर्मा, विवेक त्यागी, गौरव उर्फ पप्पू सिकरवार और विपिन सिकरवार हैं. कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी गई है.
श्री पंकज उपाध्याय -- अध्यक्ष महोदय, यहां पर देखिए कि वर्ष 2023 में एफआईआर दर्ज हुई है, आज लगभग तीन साल निकल गए अभी तक एक भी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ है. मैं यहां पर आपके सामने बड़े विश्वास से कह रहा हूं और आपसे आशा करते हैं कि आप न्याय दिलाएंगे. तीन साल बाद हमारी बहन जी कह रही हैं कि चार्जशीट दाखिल हुई है. अभी तक कोई भी आरोपी गिरफ्तार नहीं हुआ. उसमें 25 लोग अन्य हैं. मुलायम सिंह चूंकि एक बड़े राजनीतिक घराने से आते हैं, उनके फोटो थाने के अंदर लगे हुए हैं कि स्वागत, वंदन अभिनंदन, स्वागत किया जाता है. लगातार शिकायत एसपी को की गई, आईजी को की गई, डीजीपी को की गई और माननीय गृह मंत्री और मुख्यमंत्री जी को की गई कि आरोपी का लगातार तीन साल से होर्डिंग, बैनर, पोस्टर लगा है, वह लगातार वहां रह रहे हैं, थाने के सामने बैठकर वह लोग अपनी धमकियां लोगों को दे रहे हैं, गवाहों को लगातार प्रताडि़त किया जा रहा है. तीन साल हो गए हैं, उसके बावजूद केवल चार्जशीट दाखिल की गई, कोई एसआईटी का गठन नहीं किया गया. अगर हम तीन साल तक केवल जांच ही कर रहे हैं और अभी मैंने आपको बताया कि एफआईआर 10 दिन बाद दर्ज की गई. हमने पहले आवेदन दिलवाया, उसके 10 दिन बाद उसकी एफआईआर दर्ज हुई. इसका मतलब 10 दिन तक आपने इन्वेस्टीगेशन की थी. जांच हुई थी. मैं इस बारे में 6 बार क्वेशचन पूछ चुका हूं और 6 बार में एक बार भी मुझे उसमें सही उत्तर नहीं मिला है. न कोई कार्यवाही की गई, न ही कोई गिरफ्तारी की गई है तो मेरा आपसे निवेदन है कि इसमें आपसे न्याय की अपेक्षा की जाती है.
श्रीमती कृष्णा गौर -- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य की मंशा आरोपियों को गिरफ्तार करने की है. कोर्ट में चार्जशीट पेश हो गई है. आगे की कार्यवाही भी शीघ्र हो जाएगी और जहां तक एसआईटी के गठन की बात है तो एसआईटी का गठन हो चुका है और इसलिए आपको शायद यह जानकारी भी नहीं है कि एसआईटी का गठन हुआ है और कोर्ट में चार्जशीट पेश हो गई है.
श्री पंकज उपाध्याय -- अध्यक्ष महोदय, आप यह देखिए कि यह मेरा क्वेश्चन तारांकित होने के बाद में यहां आया है, तब यह कार्यवाही दिनांक 19.07.2026 को हुई है. जब उनको पता लग गया है, आपके गृह मंत्रालय को, आपके गृह विभाग को, पुलिस को पता लग गया कि इसका जवाब सदन में देना पड़ेगा इसलिए यह कार्यवाही थोड़ी जल्दी की गई. मुझे आज तक इसके बारे में जानकारी नहीं दी गई और मैं, माननीय मुख्यमंत्री जी यहां बैठे हुए हैं, चूंकि गृहमंत्री भी हैं और मुख्यमंत्री जी, आपसे करबद्ध निवेदन है कि आरोपी किसी भी पार्टी, दल का या किसी भी बड़े राजघराने का हो हमें न्याय दिलाना चाहिए, क्योंकि किसी व्यक्ति के साथ, किसी गरीब ब्राह्मण का अपहरण कर लिया जाता है, उससे लूट होती है, उसको बेरहमी से मारा जाता है और अगर हम न्याय नहीं दिला पाए तो निश्चित रूप से जब आने वाला इतिहास लिखा जाएगा तो काले अक्षरों में लिखा जाएगा कि तीन साल हो गए चार्जशीट दाखिल नहीं हुई, आरोपी खुलेआम घूमते रहे, तो मेरा अध्यक्ष महोदय, आपसे भी करबद्ध निवेदन है, मुख्यमंत्री जी, आपसे भी निवेदन है कि व्यक्तिगत संज्ञान लेकर आरोपियों को गिरफ्तार करें और जितने भी 25 आरोपी अभी खुलेआम घूम रहे हैं उन पर भी कार्यवाही की जाए. धन्यवाद.
क्रय की गई कृषि भूमि से अधिक रकबे की रजिस्ट्रियों को शून्य किया जाना
[वाणिज्यिक कर]
10. ( *क्र. 461 ) श्री कैलाश कुशवाहा : क्या उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जिला भिण्ड स्थित, कस्बा भिण्ड के वार्ड नंबर-35, स्वतंत्र नगर, नगर पालिका सीमा के अंदर भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका क्रमांक सी.एल.आर. नं-11092110245, आरजी नं.-2835, कुल रकबा-0.5640 हेक्टेयर कृषि भूमि में से 0.07 विश्वा एवं 0.09 विश्वा कुल-16 विश्वा कृषि भूमि भू-स्वामियों द्वारा दिनांक 01 फरवरी, 2024 एवं 06 जून, 2024 का विक्रय पंजीयक कार्यालय में पंजीबद्ध हुआ है? (ख) यदि हाँ, तो क्या प्रश्नांकित कृषि भूमि को विक्रय करते समय रजिस्ट्रियों में शासन द्वारा स्वीकृत नक्शा लगाया गया था? यदि नहीं, तो क्यों? बगैर नक्शा लगे रजिस्ट्रीयां क्यों की गई? (ग) क्या प्रश्नांकित कृषि भूमि से अधिक रकबे की रजिस्ट्रियां, म.प्र. शासन द्वारा ई-रजिस्ट्रीकरण का डिजीटाइजेशन हो जाने के बावजूद भी अधिक रजिस्ट्रियां की गई है? यदि हाँ, तो कुल कितनी रजिस्ट्री की जानी थी और कितनी की गई, बतायें? (घ) क्या विक्रय किये गये रकबे से अधिक की रजिस्ट्रियों को शून्य किया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक ? समय-सीमा बतायें तथा क्या दोषी अधिकारियों के विरूद्ध दण्डात्मक कार्यवाही की जावेगी ? (ड.) क्या प्रश्नांकित प्रकरणों में दिनांक 22.5.2026 को उप पंजीयक कार्यालय, जिला-भिण्ड, भिण्ड (म.प्र.) को कृषक (भू-स्वामी) के साथ हुई धोखाधड़ी का शिकायती पत्र धारा-72 या धारा-73 के अधीन आवेदन कर जमा की गई थी? यदि हाँ, तो उस पर क्या कार्यवाही की गई? की गई कार्यवाही की प्रति उपलब्ध करावें?
उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर (श्री जगदीश देवड़ा) : (क) जी हाँ, दस्तावेज क्रमांक MP0429020 24A1130345, दिनांक 01.02.2024 से क्रेता अयोध्याशरण चौबे, रामस्वरूप बघेल द्वारा आराजी नंबर 2835 की कृषि भूमि एवं दस्तावेज क्रमांक MP042902024A1712811 दिनांक 06.06.2024 से क्रेता सुनीता शर्मा, रामस्वरूप बघेल, अखिलेश शर्मा द्वारा आराजी नंबर 2835 की कृषि भूमि क्रय की गई थी। (ख) जी हाँ, विक्रय करते समय रजिस्ट्रियों में राजस्व विभाग की भू-अभिलेख शाखा द्वारा जनरेट कम्प्यूटरीकृत सत्यापित नक्शा लगाया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) दस्तावेज क्रमांक MP042902024A1130345, दिनांक 01.02.2024 से क्रेता अयोध्याशरण चौबे, रामस्वरूप बघेल द्वारा आराजी नंबर 2835 की कृषि भूमि एवं दस्तावेज क्रमांक MP042902024A1712811, दिनांक 06.06.2024 से क्रेता सुनीता शर्मा, रामस्वरूप बघेल, अखिलेश शर्मा द्वारा आराजी नंबर 2835 की कृषि भूमि क्रय की गई थी। श्री रामस्वरूप बघेल द्वारा क्रय भूमि में से कुल 08 दस्तावेजों के माध्यम से 08 भूखण्डों का विक्रय एवं श्री अयोध्याशरण चौबे द्वारा क्रय भूमि में से कुल 2 दस्तावेजों के माध्यम से 02 भूखण्डों का विक्रय किया गया है, जिनका विवरण संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। ई-रजिस्ट्रीकरण के डिजीटाईजेशन उपरांत पक्षकारों को केवल पुराने पंजीबद्ध दस्तावेजों की सर्च करने की सुविधा प्रदाय की गई है। पक्षकारों द्वारा तत्समय प्रस्तुत खसरा एवं भू-अधिकार ऋण पुस्तिका के आधार पर उप पंजीयक द्वारा दस्तावेजों का पंजीयन किया गया है। पक्षकारों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों की सत्यता की जांच करने के लिये पंजीयन अधिकारी, पंजीयन अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत सक्षम नहीं हैं। (घ) रजिस्ट्री शून्य घोषित करवाने संबंधी अधिकार पंजीयन विभाग के क्षेत्राधिकार में नहीं है। संबंधित पक्षकारों द्वारा व्यवहार न्यायालय में वाद दायर कर तदाशय की कार्यवाही की जा सकती है, अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ड.) आवेदक श्री रामशंकर शर्मा द्वारा आपत्ति आवेदन मय शुल्क के प्रस्तुत करने के उपरांत आराजी नंबर 2835 से संबंधित कोई दस्तावेज पंजीबद्ध नहीं हुआ, अत: शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
श्री कैलाश कुशवाहा -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 461 है.
श्री जगदीश देवड़ा -- अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर प्रस्तुत है.
अध्यक्ष महोदय -- कैलाश जी, पूरक प्रश्न करें.
श्री कैलाश कुशवाहा –माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न था कि भिंड के स्वतंत्र नगर के वार्ड क्रमांक 35 में जो ई-रजिष्ट्री हुई है, वह डबल कैसे हुई हैं. यह केवल भिंड जिले का मामला नहीं है . मेरा सोचना यह है कि यह पूरे प्रदेश का मामला है. एक गरीब आदमी कितनी मुश्किल से प्लाट खरीदता है अपने जीवनभर की कमाई प्लाट खरीदने में लगा देता है और उसी प्लाट को व्यापारी अथवा रजिष्टार दो दो बार बिकवा देता है तो उस गरीब आदमी पर क्या बीतती होगी. यह शिवपुरी में भी हो रहा है और प्रदेश में भी कई जगहों पर हो रहा है, यह तो भिंड का वार्ड क्रमांक 35 का प्रकरण मात्र एक नमूना है. मेरे हिसाब से जो डबल प्लाट बिक रहे हैं या जो डबल रजिष्ट्रयां हो रही हैं वह न हों तो उसका रास्ता क्या है. नहीं तो इससे प्रभावित लोग न्यायालय के चक्कर लगाते-लगाते मर जाते हैं, उनका जीवन न्यायालय के चक्कर लगाकर के खतम हो जाता है लेकिन वह प्लान उनको नहीं मिल पाता है. इसलिये अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से उत्तर चाहता हूं कि इस समस्या का हल क्या है.
अध्यक्ष महोदय- माननीय मंत्री जी.
श्री जगदीश देवड़ा- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह रामशंकर शर्मा द्वारा रामस्वरूप बघेल को 6994 वर्ग फिट भूमि का विक्रय किया गया, यह दो लोगों के बीच में है. रामस्वरूप बघेल द्वारा 8 दस्तावेज के माध्यम से दिनांक 29.3.2024 से 9.9.2024 के मध्य 7408 वर्गफिट भूमि का विक्रय किया गया. इस प्रकार उसने 8 लोगों को यह जमीन बेची जिसमें 414 वर्गफिट अधिक भूमि का विक्रय किया गया. यह विभाग के संज्ञान में 22.5.2026 को आया और विभाग ने इसको गंभीरता से लिया है . मैं माननीय सदस्य को यह आश्वस्त कर रहा हूं कि हम विभाग के किसी वरिष्ठ अधिकारी से इसमें पूरी तरह से छानबीन करवा करके जांच करवा करके जो भी इसमें दोषी होंगे उनके खिलाफ हम कार्यवाही करेंगे, विधि सम्मत कार्यवाही होगी और चूंकि यह 414 वर्गफिट जो ज्यादा हुआ है इसको शून्य करने का अधिकार माननीय न्यायालय को है, विभाग को इस भूमि को शून्य करने का अधिकार नहीं है, लेकिन मैं माननीय सदस्य को यह आश्वस्त कर रहा हूं कि हम विभाग के किसी वरिष्ठ अधिकारी से इसमें जांच करवा लेंगे जहां अगर कोई दोषी होंगे तो विधि सम्मत हम कार्यवाही करेंगे.
अध्यक्ष महोदय—कैलाश जी दूसरा पूरक प्रश्न . मतलब प्रश्न करना जरूरी नहीं है. यदि आपको लगता है कि मंत्री जी के उत्तर से आप संतुष्ट हो तो जरूरी नहीं है कि आप दूसरा प्रश्न करें. (हंसी)
श्री कैलाश कुशवाहा –माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा यह निवेदन है कि माननीय मंत्री जी ने जो जवाब दिया है वह कहीं न कहीं कुछ हद तक सही भी है और कुछ हद तक असत्य भी है. (हंसी) लेकिन मैंने क्या पूछा कि हमारे मध्यप्रदेश में कितने गरीबों के साथ में ऐसा हुआ है जो जीवन भर की कमाई प्लाट खरीदने में लगा देते हैं और वह प्लाट दो दो बार बिक जाता है इसके लिये दोषी रजिष्टार है, व्यापारी है या सरकार है. मैं यह कहना चाह रहा हूं कि ऐसा आगे न हो और जो प्रकरण प्रदेश में डबल रजिष्ट्री के जहां जहां भी चल रहे हैं, शिवपुरी जिले में भी चल रहे हैं तो वह प्रकरण जल्दी जल्दी कैसे फ्री हों , क्या इनका जीवन न्यायालय में ही चक्कर लगाते लगाते निकल जायेगा, विशेषकर मंत्री जी से यह पूछना चाह रहा हूं कि उनका जीवन ऐसे ही निकल जायेगा और उनका मकान जीवन में कभी नहीं मिल पायेगा यह है मेरा कहने का मतलब तो इसका हल क्या है. मंत्री जी बता दें. एक बात और है आज माननीय मुख्यमंत्री जी भी सदन में बैठे हैं, हम भाग्यशाली है कि आज उनके सामने बैठे हैं. मैं कहना चाहता हूं कि अनुपूरक बजट में हमारे मुख्यमंत्री जी ने वायदा किया था कि जो विधायक निधि है वह ढाई करोड से पांच करोड़ सबको दी जायेगी. तो मैं मुख्यमंत्री जी से कहना चाहता हूं कि आप जवान के बिल्कुल पक्के हैं, तो आज आपने जो बोला है , जो घोषणा की है उसको आप पूर्ण करें धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय- माननीय मंत्री जी इनके प्रश्न पर आप कुछ कहना चाहते हैं.
श्री जगदीश देवड़ा—माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो चिंता व्यक्त की है उसकी हम पूरी तरह से चिंता करेंगे.
अध्यक्ष महोदय- वैसे इसमें कुछ मैकेनिज्म डेवलप (तंत्र विकसित करना) होना चाहिये. कई फर्जी लोग दो दो तीन तीन जगह जो रजिष्ट्री करते हैं इसके बारे में कोई मैकेनिज्म बनाना चाहिये यह सफल नहीं होना चाहिये, इसमें क्या होता है कि दो रजिष्टियां हो जाती हैं फिर मामला न्यायालय में जाता है, गरीब आदमी फिर न्यायालय में दीवानी लड़ता रहता है. मतलब मालिक होकर के भी मालिक नहीं है तो इसको आप देखिये. श्री कमलेश्वर डोडियार जी....
श्री भंवर सिंह शेखावत—माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने गंभीर बात कही है. मुख्यमंत्री जी 5 करोड़ की राशि कर दीजिये. यह जनता के ऊपर बहुत बड़ा एहसान होगा. विधायकों की यह मांग नहीं है, यह जनता की मांग है और मैं समझता हूं कि आदरणीय देवड़ा जी आज घोषणा कर दें, आदरणीय मुख्यमंत्री जी घोषणा कर दें, मैं समझ रहा हूं कि मुख्यमंत्री जी चाहते हैं किंतु आपने (श्री जगदीश देवड़ा की तरफ देखते हुये) अडंगा फंसा रखा है. बीच में.
अध्यक्ष महोदय – मुख्यमंत्री जी बहुत गौर से सुन रहे हैं.
श्री गिरीश गौतम – अध्यक्ष महोदय, इसमें जो रजिस्ट्री वाली बात है. माननीय मुख्यमंत्री जी, वित्त मंत्री जी बैठे हैं. इसमें जो एक्सट्रा आ रहा है, उसकी गड़बड़ी समझ लीजिए. आदमी जब रजिस्ट्री कराता है तो 60*40 का प्लाट लेता है और उसी के साथ-साथ बगल में 60*10 का रास्ता भी रजिस्ट्री में दर्ज करता है तो उसने बेच दिया 2400 वर्ग फीट, 600 वर्ग फीट और बेच दिया, परन्तु रजिस्ट्री का जब नामान्तरण होता है तो केवल 2400 वर्गफीट का होता है, वह 600 वर्ग फीट जमीन रह जाती है और अन्तत्वोगत्वा वह प्लाट बेचता है 75 डिस्मिल का और 25 डिस्मिल सरकारी होना चाहिए तो वह नहीं होती तो वह एक एकड़ पूरा बेचता है. मेरा आग्रह है कि उसमें ऐसी व्यवस्था करें कि जैसे रजिस्ट्री में जो लिखा हुआ है रास्ते का, वह मध्यप्रदेश शासन हो जाय तो यह झगड़ा खत्म हो जाएगा.
अध्यक्ष महोदय – ठीक है, अच्छी बात है.
प्रश्न संख्या – 11 श्री कमलेश्वर डोडियार (अनुपस्थित)
वन्य जीवों का रेस्क्यू अभियान
[वन]
12. ( *क्र. 169 ) श्री घनश्याम चन्द्रवंशी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वर्ष 2025 में कालापीपल विधानसभा में पायलेट प्रोजेक्ट के तहत बीमा तकनीक से फसल को नुकसान पहुँचाने वाले वन्यजीवों को रेस्क्यू किया गया था? यदि हाँ, तो उक्त प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य क्या था? (ख) क्या शासन द्वारा फसलों को नुकसान पहुँचानें वाले वन्यजीवों को अन्यत्र स्थानों पर भेजने हेतु पुनः कोई अभियान चलाया जाना प्रस्तावित है? यदि हाँ, तो उस अभियान कि जानकारी प्रदान करें? यदि कोई अभियान प्रस्तावित नहीं है, तो क्या विभाग कोई अभियान चलायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों नहीं बतावें? (ग) क्या विभाग वन्यजीवों से किसानों की फसलों के संरक्षण के लिये नियमित रूप से कोई कार्य योजना बनायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्य मंत्री (श्री दिलीप अहिरवार) : (क) जी हाँ, पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य कृष्ण मृगों एवं नीलगायों से फसल नुकसान को कम करना था। (ख) माह सितम्बर-अक्टूबर, 2026 के दौरान अनुकूल मौसम एवं वन्यजीवों की पर्याप्त उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए अभियान का संचालन शाजापुर तथा उज्जैन जिलों के फसल प्रभावित क्षेत्रों में किये जाने की योजना है। (ग) वित्तीय वर्ष 2025-26 से योजना क्रमांक 1621 टाइगर रिज़र्व के अंतर्गत बफर क्षेत्रों का विकास हेतु प्रारंभ की गई, जिसमें ग्रामों से लगे संवेदनशील वन क्षेत्रों जहां पर मानव-वन्यजीव द्वंद्व अधिक है, में किसानों की फसल हानि के रोकथाम एवं सुरक्षा की दृष्टि से वन क्षेत्र की तरफ फैंसिंग कार्य का प्रावधान है।
श्री घनश्याम चन्द्रवंशी – अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 169 है.
राज्यमंत्री, वन (श्री दिलीप अहिरवार) – अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रख दिया गया है.
अध्यक्ष महोदय – श्री घनश्याम जी पूरक प्रश्न करें.
श्री घनश्याम चन्द्रवंशी – अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न है वन्य जीवों के रेस्क्यू को लेकर है और हमारी सरकार ने इसकी चिंता भी की है. हमारे लिये एक गर्व की बात है कि पूरे देश भर में से मध्यप्रदेश को चुना गया है और साउथ अफ्रीका की टीम हमारे मध्यप्रदेश में और वह भी हमारे शाजापुर जिले में आई है, इसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद और बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने यह किसानों की गंभीर चिंता को देखते हुए पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कालापीपल विधान सभा में जो रेस्क्यू वर्ष 2025 में हुआ था, वह सफल भी हुआ और क्योंकि किसान हितैषी सरकार है और माननीय मुख्यमंत्री जी इतने संवेदनशील हैं कि कांग्रेस के लोगों ने बहुत विषय उठाए कि गेहूं नहीं तुलेगा, भावान्तर के पैसे नहीं आएंगे, और भी अन्य चीजें कही थी, कांग्रेस के लोग सब उसमें फेल हो गये. जबकि समय पर पैसा आया, भावान्तर का पैसा आया, 10 घंटे बिजली की व्यवस्था किसानों के लिए की है. इसके साथ साथ यह रेस्क्यू पायलट प्रोजेक्ट सफल भी हुआ. मेरा प्रश्न भी यही था और उसमें जवाब भी आया है कि वर्ष 2026 के अंत में सितम्बर, अक्टूबर में इस प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारकर किसानों को राहत मिलेगी, किसानों के बीच माननीय मुख्यमंत्री जी आए थे, किसान खुश हैं मैं बताना चाहता हूं कि पिछले 9 तारीख को माननीय मुख्यमंत्री जी कालापीपल विधान सभा में आए थे, लगभग 30 से 35 हजार किसान वहां पर उपस्थित हुए और उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री जी की इन योजनाओं और इस प्रकार के कार्यों को देखते हुए खुद चलकर किसान कालापीपल में आए और उनका सम्मान किया है. यह हैं हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी, जिन्होंने किसान की एक-एक बात को बहुत ही गंभीरता के साथ लिया. मेरा पूरक प्रश्न यही है कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने मुझे जो जवाब दिया है, उसमें मैं संतुष्ट हूं. वर्ष 2026 के अंत में इस पायलट प्रोजेक्ट को क्योंकि कालापीपल विधान सभा और शाजापुर जिला जो है जीरो प्रतिशत वहां पर वन क्षेत्र है तो इसलिए यह पायलट प्रोजेक्ट को शाजापुर जिले में आप चलाएंगे इसके लिए धन्यवाद देना चाहता हूं. लेकिन इसके आसपास भी सीहोर जिला, राजगढ़ जिला,यह भी प्रभावित है तो माननीय मुख्यमंत्री जी से यही निवेदन है कि क्या यह पायलट प्रोजेक्ट जो है, यह धरातल पर चलकर निरन्तर चलेगा तो अध्यक्ष महोदय के माध्यम से यह मेरा प्रश्न है.
अध्यक्ष महोदय – घनश्याम जी प्रश्न और निवेदन दोनों में अंतर होता है. कायदे में आपने निवेदन किया है, प्रश्न नही किया है.
मुख्यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) – अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है कि किसानों की फसल को सुरक्षित करने के लिए यह जो हमारे ग्रामीण क्षेत्र में नीलगाय या कई बार इसको अलग अलग नाम से पुकारा जाता है. इसमें कृष्ण मृग भी इनके क्षेत्र की तकलीफ का विषय था, यह किसान कल्याण वर्ष की जो बात प्रतिपक्ष की तरफ से आई है. हम ज्वाइंट मीटिंग करके किसानों के लिए ऐसे पशुओं जिनके कारण से नुकसान होता है, उनको उठाकर हमारे जो टाइगर अभ्यारण्य के अगल-बगल के बफर जोन हैं, वहां हमने शिफ्ट करने का यह प्रकल्प लिया था, उसी में यह कृष्ण मृगों को ले जाकर गांधी सागर में जहां चीता प्रोजेक्ट है, वहां छोड़ा गया था.
अध्यक्ष महोदय, मैं एक तरह से आपके माध्यम से सभी माननीय सदस्यों को बताना चाहूंगा कि ऐसे और भी विषय जिन विषयों को समसामयिक माना जा सकता है. जैसे आपने एक विषय उठाया. वह विषय भी गंभीर है कि रजिस्ट्रियों को लेकर के केवल एक डिपार्टमेंट के बजाय जैसे रजिस्ट्रार ऑफिस जो रजिस्ट्री करते हैं, उनका अपना काम है लेकिन लॉ डिपॉर्टमेंट को मिलाकर के जो ऐसी अवैध रजिस्ट्रियां हैं, जिसके कारण से कष्ट होता है. इसका समाधान मिल-बैठकर के और वह जिनकी अपनी कठिनाई है, उसका हल निकालने की बात है.
श्री घनश्याम चन्द्रवंशी – माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री महोदय, बहुत- बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय – श्री अम्बरीश शर्मा......
प्रश्न संख्या 13 श्री अम्बरीश शर्मा - (अनुपस्थित)
अध्यक्ष महोदय – प्रश्नकाल समाप्त.
(प्रश्नकाल समाप्त)
12.02 बजे नियम-267 क के अधीन शून्यकाल की सूचनाएं
अध्यक्ष महोदय – शून्यकाल की सूचनाएं.
1. श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे,
2. श्री नारायण पटेल जी,
3. श्री बाला बच्चन जी,
4. इंजी.प्रदीप लारिया जी,
5. श्री विपीन जैन जी,
6. श्री घनश्याम चंद्रवंशी जी,
7. श्रीमती रीति पाठक जी,
8. श्री नारायण सिंह पट्टा जी,
9. श्री सुरेश राजे जी,
10.श्रीमती सेना महेश पटेल जी
1 से लेकर 10 तक शून्यकाल की सूचनाएं पढ़ी हुई मानी जाएंगी.
12.03 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना
1. मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2025-2026

2. मध्यप्रदेश दिव्यांगजन अधिकार नियम, 2017 की कंडिका 56 की उप कंडिका (1) की अपेक्षानुसार आयुक्त, दिव्यांगजन मध्यप्रदेश का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2025-2026

3. (क) मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, भोपाल का 23 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025
(ख) विद्युत अधिनियम 2003 (क्रमांक 36 सन् 2003) की धारा 182 की
अपेक्षानुसार निम्न अधिसूचनाएं-

4. मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड, भोपाल का 41वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

5. डीएमआईसी विक्रम उद्योगपुरी लिमिटेड भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025

6. राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय, छिन्दवाड़ा (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025


अध्यक्षीय घोषणा
अध्यक्ष महोदय—आज भोजनावकाश नहीं होगा. लॉबी में भोजन की व्यवस्था की गई है. सभी सदस्य अपनी सुविधानुसार भोजन ग्रहण कर सकते हैं. आज सांयकाल 7.30 बजे के बाद संसदीय कार्य मंत्री जी द्वारा भुट्टा पार्टी का आयोजन के साथ भोजन भी है. आप सब उनकी ओर से आमंत्रित हैं.
12.07 बजे नियम् 138 (1) के अधीन मंत्री के ध्यान आकर्षण की सूचना.
श्री अजय विश्नोई—(पाटन)—माननीय अध्यक्ष महोदय,




श्री अजय विश्नोई – अध्यक्ष जी, वक्तव्य काफी लंबा आया, सदन की समझ और आसान करने के लिए उसको छोटा कर देता हूं. जबलपुर जिले का गेहूं और धान का उपार्जन, जो गेहूं और धान लेकर नहीं आए उनको भुगतान कर और जो बेचारे गेहूं और धान लाकर जमा किए उनको बता दिया कि आपका गेहूं धान आया नहीं आप घर जाइए आपको पैसा नहीं मिलेगा, इनशॉर्ट इतनी भर बातचीत है. अब ये सीजी वेयर हाउस जो दिसम्बर और जनवरी में जहां 174 किसानों की बात चीत की गई है वह इनके वक्तव्य में ही लिखा हुआ है कि इसकी सूची किसने दी है, वह केंद्र के प्रभारी ने दी है, जो मुख्य आरोपी है, उस केंद्र के प्रभारी के पास में एक रजिस्टर होता है, जिसमें लिखा पढ़ी होती है, वह रजिस्टर गायब है, आपके वक्तव्य में ही यह स्पष्ट किया गया है कि जो सी.सी.टी.वी. की फुटेज थी, वह भी उसने डिलीट कर दी है और उसके बाद केंद्र प्रभारी के खिलाफ एफ.आई.आर. हो गई, जो केंद्र प्रभारी पहले आपकी जांच में सहयोग कर रहा था, उसके बाद वह फरार हो गया और जब तक उसको जमानत नहीं मिल गई, तब तक वह फरार रहा, जांच कमेटी जो पहले बनी उसमें कलेक्टर ने मुझको रिपोर्ट उपलब्ध करवाई थी, उसमें 22 लोग ऐसे थे, जो दूरस्थ अंचलों से आकर तुलवा गये थे, उनके नाम दिये, उनके पते दिये थे, उनके खाते नंबर दिये थे, उनके खातों में भुगतान हो गया है, उस भुगतान को रोकने की कार्यवाही भी कलेक्टर ने की थी, वह 22 की जानकारी वक्तव्य में आते आते 22 से 3 रह गई है, यह बीच में गड़बड़ झाला कहां हैं, यह अधिकारी और जिले के लोग भी उसमें मिले हुए हैं. मैं इस पर स्पष्ट करना चाहता था कि यह इसलिए हुआ है. जिन लोगों को अपात्र घोषित किया गया है. अब देखिये उस 174 की सूची में से 46 इन्होंने फिर पाये कि नहीं वह तो सही थे, क्यों सही थे, क्योंकि उस दिन उनका मोबाईल वहां मझोली के टॉवर की रेंज में था, बाकी 122 लोगों को उन्होंने अपात्र इसलिए घोषित कर दिया क्योंकि उनका मोबाईल वहां उस रेंज में नहीं था. अब यह मोबाईल के रेंज में होने या नहीं होने से कैसे जांच संभव हो सकती है, कैसे किसी को न्याय मिल सकता है? इसकी बात नहीं है, एफ.आई.आर. कर ली, जमानत कराने की पूरी उनको सुविधा दे दी, जांच करने में भी उन अधिकारियों को शामिल किया गया, जो सिर्फ इस घपलेबाजी में शामिल थे. मैंने जबलपुर के कलेक्टर को बताया भी कि साहब इन लोगों को जांच में शामिल नहीं करना, यह इस घपले में शामिल हैं, उसके बाद भी उनको जांच में शामिल किया गया है और उसके कारण जांच के परिणाम में इस प्रकार की त्रुटि देखने को आ रही है. अच्छा उस एक परिणाम से शिक्षा नहीं मिली तो जनवरी में गड़बड़ हुई, अप्रैल में फिर वही मझोली विकासखंड के गेहूं की खरीदी के समय में अन्नपूर्णा वेयर हाउस में फिर पांच हजार क्विंटल की खरीदी में कमी पाई गई और जो कमी पाई गई, उसका दोषी उन्होंने उन 175 किसानों को मान लिया, जो गेहूं जमा करके भटक रहे थे और पैसा मांग रहे थे. मान्यवर जिले के अधिकारी इसमें शामिल हैं, मैं यह इस अधिकार से कह रहा हूं कि आजकल का जो अपना डिजिटाईज्ड सिस्टम है, किसी भी गोदाम में जब खरीदी होती है, तो कितनी खरीदी हुई यह जबलपुर जिले के कार्यालय में सेंटर पर एक स्क्रीन पर दिखता है, उस गोदाम में जितना खरीदा गया, उसमें से कितना गोदाम के अंदर जमा किया गया, यह मात्रा भी वहां दिखती है, पर जब खरीदी ज्यादा दिखे और गोदाम में कम माल आया दिखे, तो समझ में आ जाता है कि घपला हो रहा है. त्वरित कार्यवाही करो तो वह पकड़ में आ जायेगी, पर त्वरित कार्यवाही करने की लूट को अंजाम होने का अवसर अधिकारियों ने दिया है और इस कारण यह लूट संभव हुई है,अब इस लूट से लोगों को बचाना है और किसानों को न्याय दिलाना है, उनको उनका भुगतान दिलाना है, इसके लिये यह ध्यानाकर्षण लेकर मैं आज आपके सामने आया हूं.
श्री गोविन्द सिंह राजपूत—अध्यक्ष महोदय, इनका इतना लंबा प्रश्न था कि यह पूछना क्या चाहते हैं, यह मुझे समझ में ही नहीं आया है, तो मैं भी इतना लंबा उत्तर देता हूं ताकि सदस्य संतुष्ट हो जायें. अध्यक्ष महोदय, इन्होंने धान का और गेहूं का लमशम पूछा है, मझोली विकासखंड में वर्ष 2025 एवं 26 में धान खरीदी में जो फर्जी कार्य संबंधी जांच आई है, उसमें कलेक्टर ने जांच कराई है, एफ.आई.आर. भी उसमें दर्ज की है.
श्री अजय विश्नोई – अध्यक्ष महोदय 22 में से 3 कैसे रह गये, 3 कहां गायब हो गये, लूट किसने की है? मेरे पास कलेक्टर की रिपोर्ट है, आपको अभी चाहिए मैं अभी आपको दिखा दूंगा.
श्री गोविन्द सिंह राजपूत -- मैं उसी पर आ रहा हूं, मैं आपको समझा देता हूं. उस पर एफ.आई.आर. दर्ज की है . मैं मझोली वाली कह रहा हूं और अगर सदस्य उस एफ.आई.आर. से संतुष्ट नहीं है, अगर आप कहते तो हम पुन: उसकी जांच करा देंगे, एक प्रश्न का उत्तर आपका हो गया, दूसरा आपने यह कहा है कि धान, गेहूं खरीदी में शासकीय कर्मचारियों पर कार्यवाही आप चाहते हैं, जो उन्होंने की है और मैंने पहले भी कहा है कि दिसंबर, 2025-26 में धान खरीदी में रत्नेश भट्ट,अमन सेन, आकाश साहू, भूपेन्द्र कुरमी गोदाम के मालिक के विरूद्ध एफ.आई.आर. दर्ज करवाई है और वह माननीय उच्चतम न्यायालय से जमानत पर हैं. अप्रैल 2026 से दस लोगों पर एफ.आई.आर. दर्ज की गई है, एक गेहूं खरीदी में कोई आकाश पांडे का नाम आया है, उस पर भी गिरफतारी का आदेश है, उसे भी गिरफतार किया गया है, यह भी आ गया है. अब मोबाईल टॉवर की बात जो माननीय सदस्य ने की है, तो निश्चित रूप से अपराधी को जब भी अपराध होता है तो पुलिस हो या कोई हो मोबाईल टॉवर आज के आधुनिक युग में होता है, उसके द्वारा हम लोग परफेक्ट स्थिति पर पहुंच सकते हैं. इसलिये मोबाइल टॉवर से जो जांच की थी, रेंज का मिलान किया था, उसे पुलिस ने मोबाइल टॉवर में पंजीकृत मोबाइल लोकेशन से जो अपात्र थे उन किसानों का भुगतान रोका गया है और माननीय सदस्य अगर टॉवर की लोकेशन से संतुष्ट नहीं हैं तो पुन: जांच करा देंगे, विस्तृत जांच करा देंगे ताकि जो वास्तविकता है वह आपके सामने आ जाये.
श्री अयज विश्नोई-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सीधे प्रश्न कर लेता हूं. एक तो जांच कराने की सहमति दी है, पर मेरा निवेदन यह है कि क्या शासन खरीदी में शामिल जिले के अधिकारियों को निलंबित करके उच्च स्तरीय समिति में मुझे भी शामिल करके निश्चित समय सीमा में जांच करवाकर लुटे हुये किसानों को उनका भुगतान कर न्याय दिलवायेंगे, अभी आपने वक्तव्य में कहा कि अपराधियों को, तो इन लुटे हुये किसानों को कृपया अपराधी न माना जाये. मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि क्या विभाग लूट के अपराधियों को गिरफ्तार करके खरीदी का रिकार्ड और गायब की गई सीसीटीव्ही के फुटेज प्राप्त करके सच्चाई सामने लाने का प्रयास करेगा. यदि हां तो कितने समय में. एक तीसरा और अंतिम मेरा निवेदन है, प्रश्न नहीं निवेदन है कि क्या विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में उपार्जन के दौरान फर्जी उपार्जन नहीं होगा और कोई भी किसान लुटेगा नहीं. धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय-- निवेदन तो पूरा स्वीकार कर लो, इसमें तो कोई दिक्कत है ही नहीं ...(हंसी)...
श्री अभय मिश्रा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, दो बार उत्तर दिये हैं. सेमरिया में 58 किसानों को 1 करोड़ 59 लाख रूपये देने का आश्वासन है और आज तक एक रूपया नहीं मिला है, वह दर-दर भटक रहे हैं, उनका भी पैसा दिलवा दें. पूरे मध्यप्रदेश में हाहाकार मचा है, किसान के नाम पर खेलो लूटो योजना चल रही है.
श्री गोविन्द सिंह राजपूत-- पंडित जी, आप पर भारी हैं हमारे सदस्य महोदय, आप चिंता न करें.
श्री अभय मिश्रा-- हल्का भारी से तो अच्छा है कि उनके साथ न्याय करवा दें. चंद्रकांता सीरियल याद आता है, चंद्रकांता सीरियल में एक पात्र दिखता था, उससे डर लगता है. ...(हंसी)...
श्री गोविन्द सिंह राजपूत— आप अभी राहुल भैया के पास बैठकर आये हैं, उनसे कान में कोई मंत्र मिल गया क्या. अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य बहुत वरिष्ठ हैं और इनकी जो भी जिज्ञासा है, जो भी इनकी इच्छा है उसको पूर्ण करने का प्रयास किया जायेगा और मैं एक कमेटी बनाऊंगा और उस कमेटी में आपको भी शामिल रखूंगा और निश्चित रूप से जो आपने कहा है कि जिन लोगों का भुगतान लंबित है, मैं जांच कराकर सबका भुगतान कराने की कोशिश करूंगा.
श्री सोहनलाल बाल्मीक-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कल भी यही बात हुई थी किसानों को लेकर तो उसमें भी सहमति जता दें कि कल हमारी जो 139 पर चर्चा हुई है हम लोगों ने मांग रखी थी....
अध्यक्ष महोदय-- आज मुख्यमंत्री जी ने कहा है उस विषय को लेकर, यह तो सीमित है ध्यानाकर्षण.
श्री सोहनलाल बाल्मीक—उसके लिये सर्वदलीय कमेटी बना दी जाये.
अध्यक्ष महोदय-- मुख्यमंत्री जी ने अभी सबेरे कहा है न.
श्री उमंग सिंघार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री जी ने सिर्फ आश्वासन दिया है, जांच कमेटी की घोषणा नहीं की. एक सदस्य भी किसानों की बात कर रहे हैं उनके लिये कमेटी बन जाती है, लेकिन पूरे प्रदेश के किसानों की बात है खाद, बीज को लेकर उस पर ज्वाइंट कमेटी नहीं बनती, यह भेदभाव है. क्या यह प्रदेश के किसानों के साथ भेदभाव नहीं है. इसमें तो मैं समझता हूं आपका संरक्षण चाहिये. माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश के किसानों के लिये इसमें एक जांच कमेटी बनना चाहिये और निष्पक्ष जांच होना चाहिये, दोनों सत्ता पक्ष और विपक्ष के लोगों को लेकर.
अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी कुछ कहना चाहेंगे.
श्री गोविन्द सिंह राजपूत—अध्यक्ष महोदय, यह बात चूंकि माननीय मुख्यमंत्री जी ने स्वयं कही है, इसलिये मैं समझता हूं कि विस्तृत बात वह बतायेंगे और जो भी विपक्ष के नेता जी की भावनायें हैं, हम उनको अवगत करा देंगे.
12.24 बजे (सभापति महोदय, श्री लखन घनघोरिया पीठासीन हुये)
श्री सोहनलाल बाल्मीक—कल जो बातें हुई थीं किसानों को लेकर उसकी बात कर रहा हूं. मुख्यमंत्री जी ने कहा है तो इसका कब तक गठन कर देंगे.
श्री गोविन्द सिंह राजपूत—यह वक्तव्य चूंकि माननीय मुख्यमंत्री जी की तरफ से आया है इसलिये विपक्ष की भावनाओं को ध्यान में रखते हुये हम मुख्यमंत्री जी को अवगत करा देंगे.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- सभापति महोदय इस ध्यानाकर्षण से यह प्रश्न उद्भूत होता नहीं है, माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा दिया है कि हम सर्वदलीय बैठक बुलायेंगे, उसमें आप सुझाव दे दीजिये.
श्री सोहनलाल बाल्मीक - माननीय सभापति जी, कल हमारी मांग थी.139 पर दिन भर चर्चा हुई है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय - कल वाली मांग के लिये आज बोलेंगे क्या आप.
श्री सोहनलाल बाल्मीक - जिस तरह से वह एक सदस्य के लिये कमेटी में उनको समावेश कर रहे हैं तो हमारे दल को भी समावेश किया जाये. पूरे किसानों के हित में पूरे मध्यप्रदेश के.
श्री कैलाश विजयवर्गीय - सदन की एक कमेटी है कृषि विकास समिति दोनों दल के सदस्य हैं उसमें.
श्री सोहनलाल बाल्मीक - वह अलग है. जांच कमेटी के लिये जो बात हो रही थी कल. यही आग्रह है सभापति महोदय कि इसमें भी ध्यान दिया जाये और मुख्यमंत्री जी घोषणा करें.
सभापति महोदय -आदरणीय सोहनलाल बाल्मीक जी अपने ध्यानाकर्षण की सूचना पढ़ें.
(2)परासिया के ग्राम जमुनिया जेठू स्थित ग्रीन लाईट एसीसी ब्लाक्स फैक्ट्री में हुए विस्फोट
श्री सोहनलाल बाल्मीक(परासिया) - अध्यक्ष महोदय,

राज्य मंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण (श्रीमती कृष्णा गौर) – अध्यक्ष महोदय,



श्री सोहनलाल बाल्मीक – सभापति जी, रिपोर्ट तो मुझे भी प्राप्त हुई है और आपने जो जानकारी दी है, मैं इसमें अपनी बात रखना चाहता हूँ कि जो घटनाक्रम हुआ, जो मंगलू यादव और दूसरा व्यक्ति राहुल चौरे है, क्या उनको वोकेशनल ट्रेनिंग दी गई थी ? जहां पर घटनाक्रम होने के अधिक चांस रहते हैं, ऐसी जगहों पर इन कामों के लिए अलग से ट्रेनिंग दी जाती है. क्या उन मजदूरों को काम पर लगाने के पहले ट्रेनिंग दी गई थी ? इसकी जानकारी इसमें नहीं है.
श्रीमती कृष्णा गौर – माननीय सभापति महोदय, अभी जांच चल रही है. सक्षम अधिकारी, वरिष्ठ अधिकारी लेबर डिपार्टमेंट, इंडस्ट्रियल सेफ्टी और पुलिस विभाग के अधिकारी इसकी जांच कर रहे हैं. इसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद सब बातें स्पष्ट हो जायेंगी और जो भी दोषी होगा, उस पर सख्त से सख्त कार्यवाही होगी.
श्री सोहनलाल बाल्मीक – सभापति जी, इसमें आपने इस बात का उल्लेख किया है कि बॉयलर संरक्षित संचालन योग्य पाया गया. यदि बॉयलर संरक्षित संचालन योग्य पाया गया था, तो दुर्घटना कैसे हो गई और किस कारण से हो गई ? कारण तो उसमें बताया ही हुआ है कि कहीं न कहीं लापरवाही के कारण दुर्घटना हुई है और इसमें एक बात मैं और जोड़ देता हूँ कि जो ईपीएफ की बात आ रही है, यहां पर माननीय मंत्री जी बैठे हुए हैं. श्रम कानूनों में बदलाव लाया गया था, उनका ईपीएफ नहीं कट रहा है, उसमें बता दिया गया कि इसमें मान्यता नहीं पाई गई कि उनका ईपीएफ कटे. हम लोगों की यही बात थी कि कम मजदूरों में, पहले 19 में ईपीएफ का पीएफ कट जाता था. लेकिन अब नहीं कट रहा है, तो इसका भी एक नुकसान है. दूसरा, मेरा सबसे पहले यह प्रश्न है कि आपकी जांच में यह जरूर आना चाहिए कि वे वोकेशनल ट्रेनिंग किए हुए थे, यदि किए हुए होते तो फिर इस तरह की घटना नहीं होती. सभापति जी, दूसरा उनके इलाज का जो उल्लेख किया गया है. आज भी वह मजदूर 90 प्रतिशत जला हुआ है, वह किसी भी काम को करने लायक स्थिति में नहीं है. ईश्वर करे कि उसकी जान बच जाये. मगर उनका इलाज उन्होंने प्रायवेट अस्पताल में कराया और प्रायवेट इलाज कराने के बाद उसको छिन्दवाड़ा से नागपुर भेज दिया गया, जहां उसका उपचार आज भी नहीं हो पा रहा है, तो ऐसी स्थिति में कैसे काम होगा ?
श्रम मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) - माननीय सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया है कि बॉयलर और जो उसमें ऑटो क्लिप प्रणालियां थीं, वह संचालित होना पाई गई हैं, मानवीय गलती के कारण वह दुर्घटना घटी है. उसको मंत्री जी ने बड़ा स्पष्ट किया है, शायद आपके सुनने में फर्क हुआ है. आपने जो बात मुझसे पूछी है, तो उस इंडस्ट्री का रजिस्ट्रेशन कहीं पर नहीं था और जो विभाग ने नीति तय कर रखी है कि सूचना के आधार पर पंजीयन होगा, बाकि चीजें होंगी, इसलिए जब यह दुर्घटना घटी, तो बकायदा वहां के जो श्रम अधिकारी हैं, उन्होंने दिनांक 9/7/26 को ही हमसे परमिशन मांगी थी, जो परमिशन बकायदा मंत्री जी का इन्तजार किये बगैर हमारे प्रमुख सचिव ने वह जारी कर दी कि श्रम अधिकारी को जाकर वहां जांच करना चाहिए, जिसका उल्लेख भी मंत्री जी ने किया है. तीसरी बात जो आपने कहा है कि उनको स्वास्थ्य संबंधी जो समस्याएं आ रही हैं, तो मैं आपकी जानकारी में बता दूँ कि सौभाग्य से सम्बल के दोनों के रजिस्ट्रेशन हैं और इसलिए बाकि जो परिस्थिति बनेंगी, उसके आधार पर उनको वह सहायता उपलब्ध की जायेगी. हां, यह सच है कि मंत्री जी ने कहा है कि 90 फीसदी से ज्यादा जले हुए हैं, उनके सामने जो चुनौती है, उसमें मानवीय आधार पर जो कुछ हो सकता है, उसको करने की कोशिश करेंगे. लेकिन मैं आपको बता दूँ कि मंगलू यादव और राहुल चौरे जी दोनों के सम्बल के रजिस्ट्रेशन हैं, तो जो सरकार करती है, जैसे अगर मान लो कि दिव्यांगता थोडी बहुत होगी, तो उसे एक लाख रुपये, अधिक होगी तो दो लाख रुपये या अन्य परिस्थितियों में भी सरकार उनके साथ खड़ी हुई है और उनकी मदद करेगी.
श्री सोहनलाल बाल्मीक – माननीय सभापति महोदय, यह तो मध्यप्रदेश सरकार की सरकारी योजना थी. फैक्ट्री एक्ट के अनुसार फैक्ट्री मालिक की भी जवाबदारी बनती है कि जो कंपनसेशन एक्ट है, क्या उस कंपनसेशन एक्ट में उसका निरीक्षण किया जा रहा है, मेडिकल जांच की जा रही है, यदि वह 90 प्रतिशत जला है, तो उसका कंपनसेशन देने की क्या व्यवस्था है, इसमें कितना पैसा मिलेगा और कब तक उसकी जानकारी मिल जायेगी ?
श्रीमती कृष्णा गौर- सभापति महोदय, फैक्ट्री अधिनियम के तहत यह फैक्ट्री पंजीकृत नहीं थी. इस वजह से जो भी विलंब हो रहा है, उसके अलावा दोनों मजदूरों को न्याय दिलाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं, जैसा कि मंत्री जी ने बताया कि दोनों संबल योजना के पात्र हैं, तो उन्हें संबल योजना का लाभ तो मिलेगा.
श्री सोहनलाल बाल्मीक- सभापति महोदय, मैं, संबल योजना की बात नहीं कर रहा हूं, वह तो उन्हें लाभ मिलेगा. अब सवाल यह है कि अगर यदि फैक्ट्री अधिनियम के तहत उसका पंजीयन नहीं तो फिर भी वह फैक्ट्री आज भी संचालित है, वह आज क्यों संचालित हो रही है ?
श्री प्रहलाद सिंह पटेल- सभापति महोदय, कई बार ऐसा होता है. उस फैक्ट्री का न तो फैक्ट्री अधिनियम में पंजीयन है, न सुरक्षा के लिए श्रम विभाग का जो रजिस्ट्रेशन है, वह भी नहीं था, केवल बॉयलर का पंजीयन था. उसके कारण से फैक्ट्री अधिनियम उस पर लागू होगा या नहीं, आप भी ट्रेड यूनियन के लीडर हैं. इसलिए मैं मानता हूं कि इस प्रक्रिया में विलंब हो रहा है, यही बात मंत्री जी ने कही है. लेकिन हम उसे छोड़ेंगे नहीं. फैक्ट्री अधिनियम में पंजीयन नहीं होने के बावजूद भी हमारे श्रमिक सभी लाभ पाने के अधिकारी है. इसके लिए मंत्री जी ने कहा है कि वे कार्रवाई करेंगे.
12.41 बजे
{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}
श्री सोहनलाल बाल्मीक- सभापति महोदय, मैं, आपकी बात समझ गया. मेरा यह कहना है कि हमारे प्रदेश में फैक्ट्री अधिनियम में पंजीयन के बिना उसने फैक्ट्री चालू कर ली और फैक्ट्री अधिनियम का पालन नहीं किया. इतनी बड़ी घटना करने के बाद भी बिना प्रशासन की स्वीकृति के उसने फिर से फैक्ट्री चालू कर दी. पहली बात उसकी फैक्ट्री चालू नहीं होनी चाहिए क्योंकि उसका पंजीयन नहीं है. आज उसकी फैक्ट्री में ताला क्यों नहीं लगाया जा रहा है ? फिर उसने उसी प्रक्रिया और उन्हीं कामगारों के साथ काम शुरू कर दिया है. किसी प्रकार की कोई ट्रेनिंग इतनी बड़ी घटना के बाद भी नहीं दी जा रही है. उस फैक्ट्री को बंद क्यों नहीं किया जा रहा है, मेरा यह कहना है.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल- सभापति महोदय, हमने 7 तारीख को परमिशन दी है, उसके बाद क्योंकि उसका सुरक्षा का रजिस्ट्रेशन भी हमारे पास नहीं था. आपकी भावनाओं का मैं आदर करता हूं. उस पर कार्रवाई होगी क्योंकि अब हमारे श्रम अधिकारी ने हमसे परमिशन ली है. नए कानूनों के तहत हमने यह तय किया था कि इंस्पेक्टर राज न बढ़े. इसलिए पहले से जाकर जांच नहीं कर सकते या तो वे पहले अनुमति लें, शायद इसका भी उसने लाभ लिया होगा. अब कार्रवाई होगी और आपकी भावना की पूर्ति भी होगी.
सभापति महोदय, मैं, सदन से एक बात कहना चाहूंगा कि बाल्मीक जी ने कहा कि उसने फैक्ट्री कैसे लगा ली, इन्हीं कारणों से लोग फैक्ट्री लगा लेते हैं इसलिए श्रम विभाग ने कुछ नीति तय की है. हमने एक श्रम प्रहरी की व्यवस्था की है जो कोई वेतनभोगी व्यक्ति नहीं है. कोई भी हो सकता है. ग्राम पंचायत, नगरीय निकाय अगर वहां कोई फैक्ट्री है और आपको लगता कि इसकी परमिशन नहीं है तो आप सुओ मोटो इसकी जानकारी दे सकते हैं. दूसरा हम एक सर्कुलर पर विचार कर रहे हैं क्योंकि ऐसी 2-3 घटनायें हुई हैं, जहां उनका किसी प्रकार का कोई पंजीयन नहीं था लेकिन ग्राम पंचायत, नगरीय निकाय सूचना दे सकते हैं. राजस्व अधिकारी, पुलिस, अन्य कोई जनप्रतिनिधि भी सुओ मोटो सूचना दे सकते हैं. श्रम विभाग ने तय किया है कि श्रम प्रहरी की भूमिका हमें निभानी होगी. एक तरफ हम चाहते हैं कि इंस्पेक्टर राज न हो, इसलिए हमें अपनी मानवीय जिम्मेदारी पूरी करनी होगी. मैं मानता हूं इन घटनाओं ने हमारी इन बातों को और अधिक सचेत किया है कि हम जिस रास्ते पर चल रहे हैं वह सही हैं. इसलिए हमें अपनी नागरिक जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा. दुर्घटना के बाद यदि वह फैक्ट्री चल रही है तो श्रम अधिकारी को हमने परमिशन दी है, आप विश्वास करें कि उस पर सख्त कार्रवाई होगी.
श्री सोहनलाल बाल्मीक- सभापति महोदय, शुरूआती तौर पर यह गलती है कि बिना फैक्ट्री के रजिस्ट्रेशन करे वह संचालित है. इसमें कोई कार्रवाई नहीं की गई. मेरा इसमें अंतिम रूप से यह कहना है कि इसमें जो मुआवज़ा बनता है जो 90 प्रतिशत और 45 प्रतिशत जला हुआ व्यक्ति है, उसे मुआवज़ा कब तक दिया जायेगा.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल- सभापति महोदय, दोनों बातें मैंने अभी कही हैं कि संबल कार्डधारी वे दोनों हैं, एक तो श्रम विभाग की नीति के आधार पर मुआवज़ा मिलेगा. माननीय सदस्य का कहना है कि औद्योगिक तरीके से उन्हें मुआवज़ा मिलना चाहिए चूंकि वह फैक्ट्री कहीं पंजीकृत नहीं थी, इसलिए उस पर हमें कार्रवाई करनी होगी या तो ट्रिब्यूनल में जाना होगा या कोर्ट में जाना होगा. अभी इस बारे में श्रम विभाग ने अपनी कार्रवाई प्रारंभ की है. और मुझे विश्वास है कि जो श्रमिकों का हक है. इंडस्ट्रीयल दुर्घटना में उनको जो मुआवजा मिलना चाहिए, उस पर सरकार खुद कार्यवाही कर रही है.
श्री सोहनलाल बाल्मीक – अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि फेक्ट्री एक्ट के तहत यदि आप आदेश जारी करेंगे. जो कम्पनसेशन एक्ट बोलता है उस एक्ट के तहत कार्यवाही करें. आप कह रहे हैं वो कोर्ट में जाएगा. वह तो एक गरीब आदमी है और 90 प्रतिशत जल गया है.
अध्यक्ष महोदय – मैं समझता हूं मंत्री जी ने काफी बोल दिया है.
श्री सोहनलाल बाल्मीक – अध्यक्ष महोदय, मैं उनकी बात से सहमत हूँ. मैं उस गरीब की बात कर रहा हूँ जो कि 90 प्रतिशत जल गया है. जिसके दो छोटे-छोटे बच्चे उस पर निर्भर हैं.
अध्यक्ष महोदय – जो बाकी विषय है उसके लिए आप मंत्री जी से अलग से चर्चा कर लें.
श्री सोहनलाल बाल्मीक – मेरा इतना कहना है कि कम्पनसेशन एक्ट के तहत उसका जो पैसा बनता है वो बनवाकर दे दिया जाए.
अध्यक्ष महोदय – मंत्री जी ने इसके लिए कहा है. आप उनसे और विस्तार से बात कर लेना.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल – हम खुद इनिशिएट करेंगे.
अध्यक्ष महोदय – सोहन जी को आप आज शाम को ही बुला लेना.
12.46 बजे अनुपस्थिति की अनुज्ञा
(1) श्री रमेश प्रसाद खटीक, निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 23 - करैरा
(2) इंजी. प्रदीप लारिया, निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 40 - नरयावली

12.47 बजे प्रतिवेदनों की प्रस्तुति
(1) याचिका एवं अभ्यावेदन समिति के याचिकाओं से संबंधित बारहवां से इक्सीसवां एवं अभ्यावेदन से संबंधित पैंतालीसवां से पचासवां प्रतिवेदन
श्री विश्वनाथ सिंह “मुलाम भैया” (अधिकृत) – अध्यक्ष महोदय, मैं, याचिका एवं अभ्यावेदन समिति के याचिकाओं से संबंधित बारहवां से इक्सीसवां एवं अभ्यावेदन से संबंधित पैंतालीसवां से पचासवां प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूँ.
(2) प्रत्यायुक्त विधान समिति का षष्टम्, सप्तम् एवं अष्टम् प्रतिवेदन
श्री रमेश मेन्दोला (सभापति) – अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रत्यायुक्त विधान समिति का षष्टम्, सप्तम् एवं अष्टम् प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूँ.
(3) सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति का पंचम् से उन्नीसवा प्रतिवेदन
श्रीमती अर्चना चिटनीस (सभापति) – अध्यक्ष महोदय, मैं, सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति का पंचम् से उन्नीसवा प्रतिवेदन प्रस्तुत करती हूँ.
(4) शासकीय आश्वासनों संबंधी समिति का तीसवां से अड़तालीसवां प्रतिवेदन
श्री हरिशंकर खटीक (सभापति) – अध्यक्ष महोदय, मैं, शासकीय आश्वासनों संबंधी समिति का तीसवां से अड़तालीसवां (कुल 19) प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूँ.
माननीय अध्यक्ष महोदय जी, हम आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहते हैं कि आपके दिशा-निर्देशों में शासकीय आश्वासनों से संबंधित समिति की बैठक लगातार हो रही है. एक दिन में 5-5 विभागों की समीक्षा बैठक कर रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय – आश्वासन समिति का काम काफी तीव्र गति से चल रहा है. मैं समझता हूँ कि सभापति जी और समिति के सदस्यों को मैं हृदय से बधाई देता हूँ. समिति बहुत तीव्रता से काम कर रही है, सभी लोग उनका स्वागत करें.
(5) महिला एवं बाल कल्याण संबंधी समिति का कार्यान्वयन से संबंधित प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय प्रतिवेदन
श्रीमती ललिता यादव (सभापति) – अध्यक्ष महोदय, मैं, महिला एवं बाल कल्याण संबंधी समिति का कार्यान्वयन से संबंधित प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करती हूँ.
(6) स्थानीय निकाय एवं पंचायतीराज लेखा समिति का प्रथम प्रतिवेदन
डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय (सभापति) – अध्यक्ष महोदय, मैं, स्थानीय निकाय एवं पंचायतीराज लेखा समिति का प्रथम प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूँ. साथ ही आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ. एजी को धन्यवाद देना चाहता हूँ. लोकल फण्ड के ऑडिटरों को धन्यवाद देना चाहता हूँ. विधान सभा सचिवालय के समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों को धन्यवाद देना चाहता हूँ. बहुत लंबे समय के बाद में यह हो रहा है. आपका अनुभव, आपका मार्गदर्शन, आपकी चिन्ता, आपकी गंभीरता और लगातार आप बार-बार निर्देशित करते हैं कि काम में तेजी लाई जाए. यही कारण है कि आपके समक्ष यह प्रतिवेदन आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ. बहुत-बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय – पंचायती राज लेखा समिति ने भी बहुत अच्छे से काम प्रारंभ कर दिया है सभी लोग इस समिति का भी उत्साहवर्धन करें.
श्री ठाकुरदास नागवंशी -- अध्यक्ष महोदय, मैं, कृषि विकास समिति का तृतीय, चतुर्थ प्रतिवेदन तथा कार्यान्वयन से संबंधित सप्तम्, अष्टम्, नवम् एवं दशम् प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं. अध्यक्ष महोदय, आपके मार्गदर्शन में सारे प्रतिवेदन प्रस्तुत हो गए हैं. मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं.
अध्यक्ष महोदय -- समितियों की प्रगति बहुत अच्छी है. सभी सदस्यों को बहुत बधाई. महेन्द्र हार्डिया जी.
श्री कैलाश विजवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, महेन्द्र हार्डिया जी भी आज बोलेंगे.
श्री महेन्द्र हार्डिया -- अध्यक्ष महोदय, मैं, पिछड़े वर्गों के कल्याण संबंधी समिति का नवम् एवं दशम् प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.
अध्यक्ष महोदय -- महेन्द्र जी और रमेश जी कभी-कभी बोलते हैं.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह -- अध्यक्ष महोदय, पांच सेकेण्ड में अपनी बात कहना चाहता हूं.
अध्यक्ष महोदय -- पांच ही सेकेण्ड लेंगे.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह -- अध्यक्ष महोदय, आपने बहुत परिवर्तन किए हैं सचिवालय की कार्यप्रणाली में, हम लोगों का जो तौर तरीका है, सुविधाएं हैं, अन्य-अन्य बातें हैं, लोकसभा में प्रवर समितियां होती हैं, स्थाई समितियां होती हैं और कई माननीय विपक्ष के नेता कुछ समितियों के अध्यक्ष भी होते हैं, परंतु यह विधान सभा में परम्परा नहीं है. एक लोक लेखा समिति के बाद दूसरा कोई विपक्ष का अध्यक्ष नहीं होता, तो नई परम्परा एक यह भी शुरू करें.
12.52 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति
याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जाना
अध्यक्ष महोदय -- आज की कार्यसूची में पद क्रमांक 1 से 65 तक याचिकाएं जो उल्लिखित हैं, वह सभी प्रस्तुत की हुई मानी जाएंगी.
वर्ष 2026-2027 के प्रथम अनुपूरक अनुमान का उपस्थापन
श्री जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री (वित्त) -- अध्यक्ष महोदय, मैं, राज्यपाल महोदय के निर्देशानुसार वर्ष 2026-2027 के प्रथम अनुपूरक अनुमान का उपस्थापन करता हूं.
अध्यक्ष महोदय -- मैं, प्रथम अनुपूरक अनुमान पर चर्चा और मतदान के लिये दिनांक 22 जुलाई, 2026 को 1 घण्टा का समय नियत करता हूं.
12.53 बजे शासकीय विधि विषयक कार्य
श्री गौतम टेटवाल, राज्यमंत्री तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार (मुख्यमंत्री द्वारा अधिकृत) -- अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.
अध्यक्ष महोदय -- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ. श्री आरिफ मसूद जी.
श्री आरिफ मसूद (भेापाल-मध्य) -- अध्यक्ष महोदय, मेरा इस प्रस्ताव पर संशोधन है जो आपने ग्राह्य किया.
अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि खण्ड 2 के उपखण्ड (2) के पश्चात् उपखण्ड (3) निम्नानुसार जोड़ा जाए.
अध्यक्ष महोदय -- शासन को दे दीजिए. एक साथ ही उस पर चर्चा हो जाएगी.
श्री आरिफ मसूद --अध्यक्ष महोदय, यह जो प्रस्ताव है इस प्रस्ताव में बहुत सारी विसंगतियां हैं. सेंट्रल गवर्नमेंट ने अभी इसको लागू नहीं किया है. लॉ कमीशन की बैठक हो चुकी. तीन साल हो गए. लॉ कमीशन का भी सेंट्रल गवर्नमेंट का निर्णय नहीं आया है. उन्होंने भी उसको पेंडिंग रखा. बावजूद उसके मध्यप्रदेश सरकार को ऐसी क्या आवश्यकता है कि इतनी जल्दी पड़ गई जो यूसीसी को लागू करना चाहती है. जो कार्यसूची में कल दिया उसमें भी हमें समय नहीं था. जिस वक्त दिया गया उसके बाद हमारे पास समय नहीं था और उसके साथ-साथ एक बात और बार-बार कही जा रही है कि साहब वह दो बीवियों का मसला. बार-बार कहा जा रहा है तो अध्यक्ष महोदय, यह सरकार का ही आंकड़ा है 1.5, वर्ष 2005 से 2006 तक में था. वर्ष 2015 से वर्ष 2016 में मात्र .1 बढ़ा, अर्थात् 1.6 हुआ. अभी भी उसमें कुछ आवश्यकता ऐसी नहीं है, तो मैं नहीं समझ पाता कि यह क्यों हो रहा है. फिर सबसे बड़ी बात कि जब आप धारा 44 के तहत कुछ ला रहे हैं तो धारा 25 और धारा 29 का उसमें उल्लंघन हो रहा है, क्योंकि अब आप इसको सिविल से, पति पत्नी के झगड़े होते हैं वह दीवानी मसले होते हैं, उसको आप सिविल से क्रिमिनल में ला रहे हैं. आप पनिश्मेंट दे रहे हैं, तो जब आप परिश्मेंट देंगे तो वह क्रिमिनल में चला गया. इतने सारे इसमें खण्ड दिए हुए हैं 402 या 408. अब 408 खण्डों को पढ़ पाना, उसको पूरा कर पाना कैसे संभव है. मंत्री जी ही बता दें अगर मंत्री जी ही बता दें अगर यह पढ़ दें, यही बता दें 408 में से कुछ तो हम मान लेंगे तो इतनी जल्दी इसकी आवश्यकता नहीं है और अगर है तो आपने इसमें जिस तरह से एसटी को बाहर किया है तो अनुच्छेद (ढ़) 29 अल्पसंख्यक मुस्लिम वर्ग को प्रोटेक्ट करती है कि उनको उनके संवैधानिक अधिकार के साथ में रहने दिया जाये, जो भी उनकी धार्मिक चीजें हैं वह उनको पूरी करने दी जायें, तो फिर आप धारा 29 को जोड़ दीजिये, फिर आप धारा 29 का उल्लंघन (Violation of Section 29) कर रहे हैं. तो एक तरफ आप कह रहे हैं कि हम न्याय दिलाना चाहते हैं, दूसरी तरफ आप समान कानून की बात कर रहे हैं. समान कानून ला रहे हैं तो देश में जब समान कानून नहीं बन पा रहा है तो फिर प्रदेश में क्यों बना रहे हैं, ऐसी क्या जरूरत पड़ गई, केवल आप राजनैतिक एजेंडे को लाना चाह रहे हैं. केवल आप लोगों को आपस में भिड़ाने का काम करना चाह रहे हैं, बार बार आप ऐसी दुर्भावना फैला रहे हैं जिससे लोगों में अलग अलग माहौल बने, तो मैं चाहता हूं कि धारा 29 को प्रोटेक्ट (संरक्षण) किया जाये और अगर आपको उसमें दिक्कत है तो मुख्यमंत्री जी ने, क्योंकि मुख्यमंत्री जी के बयान को मैंने अखबार में देखा है, अब वह कितने सच हैं क्योंकि अखबार ने छापा है कि दो पत्नियों वाला, तो अध्यक्ष महोदय, इसके तो मैं आपको आंकड़े दे चुका हूं, यह सरकार का ही आंकड़ा है. लॉ कमीशन जो है वह मोदी सरकार का लॉ कमीशन है उस लॉ कमीशन में 3 साल में आज तक यूसीसी लागू नहीं किया तो जब उन्होंने नहीं किया तो मध्यप्रदेश की सरकार को ऐसी क्या आवश्यकता पड़ रही है और फिर इतने खंडों पर बिना चर्चा कराये, किस तरह से आप इसको लागू करने का प्रयास करेंगे यह हमें बतायें, सदन को बतायें, जनता को बताने का प्रयास करें.
अध्यक्ष महोदय, जब इसकी प्रक्रिया शुरू हुई तो जब मुख्यमंत्री जी..
मंत्री, संसदीय कार्य एवं नगरीय विकास एवं आवास(श्री कैलाश विजयवर्गीय)-अध्यक्ष महोदय, मेरा पाईंट आफ आर्डर है.
अध्यक्ष महोदय- आरिफ जी एक मिनिट.
श्री कैलाश विजयवर्गीय – माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बिल आया है, सरकार ने एक कमेटी बनाई है और उसमें सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज महोदया इसकी अध्यक्ष थीं. और यह सिर्फ कोई सरकार का लाया हुआ बिल नहीं है यह जनता के पास में, हर जिले में उन्होंने जाकर के लोगों का मत लिया है और मत लेने के बाद, 10 लाख से ज्यादा लोगो ने इसमे अपना मत दिया है. उसके बाद यह बिल बना है और यह बिल बनाने वाला मध्यप्रदेश पहला प्रदेश नहीं है . यह उत्तराखंड में हो गया है, यह गुजरात में हो गया है, गोवा में हो गया, आसाम में हो गया. जहां तक हमारे मित्र ने लॉ कमीशन की बात कही है तो लॉ कमीशन से हमें हर बिल बनाने के लिये परमीशन की कोई आवश्यकता नहीं है, राज्य स्वतंत्र है, अपने राज्य के लिये कोई सा भी बिल ला सकता है और इसलिये मेरा आपसे करबद्ध निवेदन है कि यह बिल बहुत महत्वपूर्ण बिल है इसकी आप दिशा मत बदलें और हमें लगता है कि सरकार ने बहुत सोच समझकर के लिये है और समान नागरिक कानून , यह हमारा आज का नहीं है, जब हमारी जनसंघ की यात्रा प्रारंभ हुई थी तब से हम एक देश में एक निशान की बात करते हुये आये हैं. और इसलिये हमारी आर्डियोलाजी का यह हिस्सा है और एक देश में एक विधान, एक प्रधान और एक निशान यह हमारा नारा था और इसलिये इसमें कोई नई बात नहीं है, वही पुरानी बात और यह सिर्फ सरकार का नहीं है, मैं इस बात को फिर से रिपीट करना चाहता हूं कि इसमें जनमत संग्रह है और 10 लाख लोगों ने अपना मत दिया है .
नेता प्रतिपक्ष( श्री उमंग सिंघार)- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह पाईंट आफ आर्डर है, इतना लंबा.
अध्यक्ष महोदय- आऱिफ मसूद जी अपनी बात को पूरा करें.
श्री आरिफ मसूद—अध्यक्ष महोदय, संसदीय कार्य मंत्री जी ने बात को बहुत सलीके से घुमाने का प्रयास किया है कि जन मत संग्रह हासिल किया है हमने. अध्यक्ष महोदय, जब मुख्यमंत्री जी ने इस संबंध में बैठक ली यूसीसी के जनमत संग्रह को बुलाने के लिये तो इनकी ही बेवसाइड पर लगभग 2200 कमेंट डले थे जिस कारण से एक सप्ताह की समय सीमा बढ़ा दी गई और उस एक हप्ते की समय सीमा में 10 लाख या 20 लाख जो आप कह रहे हैं वह आ गये तो यह कहां से हो गये, वह भी एक हप्ते के अंदर बाकी आपने जो 6 माह काम किया उसमें आपके पास में आंकड़े 2200 थे और एक हप्ते के अंदर में आप लाखों में पहुंच गये. लॉ कमीशन की बात मंत्री जी ने कही है तो लॉ कमीशन के बारे मे मैंने यह कहा है कि मोदी जी ने स्वयं ने लॉ कमीशन बनाया है जब सेन्ट्रल में नहीं है, और मंत्री जी ने कहा कि गुजरात में पास हो गया है, गुजरात में मेरी जानकारी है कि विधानसभ में अभी पारित नहीं हुआ है, वहां पर रखा है, कैबिनेट ने इसको पारित किया है किंतु विधानसभा ने इसको अभी पारित नहीं किया है. माननीय अध्यक्ष महोदय , मैं तो केवल इतनी सी बात कह रहा हूं कि आप अच्छा कानून ला रहे हैं तो आप अल्पसंख्यक के आर्टिकल 29 का हमको जवाब दे दीजिये कि हमारा 29 आर्टिकल रिफलेक्ट हो रहा है कि नहीं हो रहा है. हमको आजादी संविधान ने दी है और उस आजादी को आपने हमको दिया है तो जब आपने हमको आजादी में हमको आजादी संविधान में दी है और उस आजादी को आपने हमको दिया है तो जब आजादी में वह सब चीज दी है. आपने आर्टिकल 25 में सबको दिया है और आर्टिकल 29 में आप कह रहे हैं. अभी आपने कहा कि एक विधान, एक संविधान तो फिर आपने एक कम्युनिटी को भी तो अलग किया है. उनको आपने कहा है कि रिलीजियस बाउंड्रीज़ आपकी बाहर है, लेकिन हमारे लिये आपने कह दिया कि नहीं, तो हमारा आर्टिकल 29 का क्या होगा, मेरा कहना बहुत स्पष्ट है कि आर्टिकल 29 की रक्षा करना होगी आपको क्योंकि यह तो सीधा सीधा आप सिविल से क्रीमिनल में ला रहे हो और आर्टिकल 29 को उड़ा रहे हैं तो आर्टिकल 44 को आप आर्टिकल 29 से क्लेश कर रहे हैं. अगर आप बिल्कुल चाहते हो तो अध्यक्ष महोदय, मैं इस बात पर भी सहमत हूं कि आप प्रवर कमेटी में इसको भेजिए, जैसे आपने पहले बहुत सारे प्रस्ताव भेजे हैं. आप इसको वहां भेजिए, आप इस पर विस्तृत चर्चा कराइए क्योंकि 402 खण्डों का पूरा का पूरा विश्लेषण करना बड़ा मुश्किल काम है. ऐसे एक कानून को लाकर एक वर्ग विशेष को आप परेशान करने का काम कर रहे हैं उसके संवैधानिक अधिकार छीनने का काम कर रहे हैं तो यह कहां का न्याय हुआ?
अध्यक्ष महोदय, इसको आप प्रवर समिति में भेज दीजिए, मुख्यमंत्री जी से हमारा अनुरोध है कि इसको आप उस समिति के अंदर भेजिए. हम लोग चाहते हैं कि अगर आपको इतना ही लगता है कि यूसीसी लाना है और आपकी आवश्यकता है और आपको यह लगता है कि मोदी सरकार से पहले आपको लाना है, केन्द्र सरकार से पहले लाना है तो फिर आप समिति में भेजिए, चर्चा कराइए, जैसे बाकी पहले आपने कराया है. लेकिन आप नहीं कराना चाहते हैं. आप कहते हैं कि नहीं, हमने तो जो कह दिया वह कर लेंगे तो अध्यक्ष महोदय, हमारा फिर आपसे अनुरोध है कि आर्टिकल 29 खराब हो रहा है जो हमको संवैधानिक राइट्स मिला हुआ है, उसका संरक्षण हम आपसे चाहते हैं, यह प्रस्ताव हर हाल में बिना चर्चा के कभी पास नहीं कराना चाहिए और प्रवर समिति में भेजना चाहिए. जब सब चर्चा हो जाय उसके बाद जो निर्णय होगा, उसको सब स्वीकार करेंगे. मैं चाहता हूं कि माननीय नेता प्रतिपक्ष से भी मेरा अनुरोध है कि इस बात को जो हमने रखी है, उसको माना जाय क्योंकि आर्टिकल 29 में प्रोटेक्शन है मुस्लिम्स को और उस प्रोटेक्शन का वॉयलेंस हो रहा है और यह धारा 44 पर ला रहे हैं और एक जगह 4/4 आपने कर दिया है कि वह वाइफ के साथ जो परिवार है, उसको हम संपत्ति दे देंगे तो आप ऐसा क्यों कर रहे हैं? (श्री उमाकांत शर्मा, सदस्य के कुछ बोलने पर) बैठ जाओ यार, पंडित जी, हर कहीं मत बोला करो. अभी जरा बैठ जाओ. मैं सिर्फ चाह रहा हूं कि प्रवर समिति में यह जाना चाहिए.
श्री कैलाश विजयवर्गीय – पंडित जी को आप ऐसे मत बोलिए. आप सम्मान से बोलिए.
अध्यक्ष महोदय – श्री उमाकांत जी, प्लीज़. वह पहले वक्ता हैं, उनको अपनी बात पूरी रखने दीजिए, उसके बाद अपना जब नम्बर आएगा तो आप बोलना.
श्री उमाकांत शर्मा – मजहबी शब्दों का प्रयोग क्यों किया जा रहा है?
अध्यक्ष महोदय – पंडित जी, प्लीज़.
श्री आरिफ मसूद – अध्यक्ष महोदय, मैं तो बहुत विनम्रता से आपसे दरख्वास्त करता हूं कि यह आर्टिकल 29 की रक्षा के लिए मैं आपसे पूरे सदन से कहता हूं, मेहरबानी करके इसको प्रवर समिति में भेज दीजिए. हम आपसे कह रहे हैं. आप उसमें विस्तृत चर्चा कराइए, फिर जो निर्णय होगा, वह सबको स्वीकार्य होगा, लेकिन इसको वहां लेकर जायं. मेरा आपसे अनुरोध है और यह आंकड़ा रखा है वह असत्य है. इस आंकड़ें को मैं नहीं मानता.
श्री रामेश्वर शर्मा – अध्यक्ष महोदय, यह आंकड़ा असत्य है, यह गलत है. कमेटी बुलाई थी, उसमें स्वयं माननीय भी थे, हम भी थे. भोपाल के जनप्रतिनिधियों को, विधायकों को भी बुलाया था और 3 करोड़ से ज्यादा एसएमएस हैं और सरकार के पास यह आन-रिकार्ड है, यह कहना गलत है कि यह आंकड़ा असत्य है.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) – अध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है कि अध्यक्ष के स्थायी आदेश, जैसे कल हमारे माननीय सदस्यों ने भी बात उठाई थी कि कई जानकारियां अचानक आती हैं. इसमें अध्याय-5 में स्पष्ट है कि – “पुरःस्थापन के लिये कोई विधेयक किसी दिन की कार्यसूची में तब तक सम्मिलित नहीं किया जाएगा, जब तक की उसकी प्रतियां उस दिन से, जब कि विधेयक का पुरःस्थापन आशयित हो, कम से कम दो दिन पूर्व सदस्यों के उपयोग के लिए सूचना कार्यालय में उपलब्ध न करा दी गई हो: अध्यक्ष महोदय, यह दो दिन पहले तो आया नहीं, कल ही अचानक आया. यह तो स्थाई आदेश है. आज इतनी अचानक आवश्यकता क्यों, इसमें मैं समझता हूं कि प्रोसिडिंग के अंदर भी कोई व्यवस्था आपने नहीं दी है.
अध्यक्ष महोदय – नहीं, नहीं. व्यवस्था दे देंगे.
श्री उमंग सिंघार – इसमें व्यवस्था नहीं है. आप प्रोसिडिंग में बता दें. मैं आप पर प्रश्न चिह्न नहीं कर रहा हूं लेकिन यह प्रोसिडिंग में नहीं है. यह मैंने देख लिया है.
1.00 बजे अध्यक्षीय व्यवस्था
विधेयक के पुरःस्थापन संबंधी
अध्यक्ष महोदय – सामान्य तौर पर हम सब इस बात को भलीभांति जानते हैं कि कार्यमंत्रणा समिति में चर्चा के पश्चात् ही बिल सदन में इंट्रोडक्शन के लिए आते हैं.और सदस्यों को वितरित भी होते हैं. यही प्रक्रिया अपनायी गई है और सामान्य तौर पर कभी-कभी ऐसी परिस्थिति भी आती है कि सरकार को अगर बिल की अर्जेन्सी अगर हो, तो सरकार तत्काल भी बिल ला सकती है और उसमें पूर्व आदेश लेकर उस बिल पर उस दिन भी चर्चा करायी जा सकती है. (मेजों की थपथपाहट)
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) – माननीय अध्यक्ष महोदय, यह चीज तो प्रोसीडिंग में होनी चाहिए थी, लेकिन प्रोसीडिंग में नहीं है.
अध्यक्ष महोदय – माननीय प्रहलाद सिंह पटेल जी, क्या कह रहे हैं.
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, आपकी बात तो ठीक है जैसा आपका आदेश है मैं उसको मानता हूँ.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल – माननीय अध्यक्ष जी, मेरा तो केवल इतना ही निवेदन है कि..
श्री उमंग सिंघार – माननीय मंत्री जी, प्रोसीडिंग आगे बढ़ गई है.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल – अच्छा, आगे बढ़ गई, तो धन्यवाद आपको. हम तो यही कह रहे थे कि आगे बढ़ जाए.
अध्यक्ष महोदय – उमंग सिंघार जी, क्या आप भाषण शुरू कर रहे हैं.
श्री उमंग सिंघार – जी हां, अध्यक्ष महोदय. जो माननीय आरिफ मसूद जी ने बात कही है हमारे सदस्यों की भी भावना है.
अध्यक्ष महोदय – अभी आरिफ जी के बाद कायदे में डॉ.सीतासरन जी को बोलना है, फिर उसके बाद आपको बोलना चाहिए.
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, यह बहुत महत्वपूर्ण है प्रवर समिति को लेकर बात हो. चूंकि मैं समझता हूँ कि.....
अध्यक्ष महोदय – क्योंकि परम्परा अपनी यही है.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल – अध्यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि यह प्रक्रिया का उल्लघंन जैसा है.
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, वह तो संशोधन मांगा था.
अध्यक्ष महोदय – आप उसके बाद बोलें न.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल – अध्यक्ष महोदय, मेरा एक निवेदन है. यह तो संशोधन दे रहे हैं या तो संशोधन पर पहले...(व्यवधान)...
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, आरिफ भाई ने प्रवर समिति की बात की. मैं समझता हूँ कि गोवंश प्रतिषेध संशोधन 2019 को लेकर श्री रामेश्वर शर्मा जी ने भी बात रखी थी. हमारी सरकार थी. उस समय भी प्रवर समिति के पास गया था.
अध्यक्ष महोदय – माननीय उमंग जी, आप किसी भी समय बोल सकते हैं. नेता प्रतिपक्ष का विशेषाधिकार है. लेकिन सामान्य तौर पर जब बिल पर चर्चा होती है तो आपकी तरफ से पहले वक्ता श्री आरिफ मसूद जी थे.
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, संशोधन था इसलिए था.
अध्यक्ष महोदय – आरिफ मसूद जी ने अपनी बात कही है. अब सत्ता पक्ष से एक व्यक्ति बोले, फिर उसके बाद आप बोलें और आप अपनी तरफ से पूरा बोले. आपको पूरा अधिकार है उसमें कोई दिक्कत नहीं है. मेरा आपसे यह अनुरोध है कि यह परंपरा टूटनी नहीं चाहिए.
श्री आरिफ मसूद – अध्यक्ष महोदय, मैंने तो एक ही निवेदन किया.
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, हमारी मांग है कि यह सिर्फ प्रवर समिति में जाए. चर्चा के बजाय सिर्फ प्रवर समिति में जाए और मैं समझता हूँ कि यह यूसीसी से ज्यादा ओबीसी के लिए ...(व्यवधान)...कि आज यूसीसी आवश्यकता है कि प्रदेश के 27 परसेंट आज ओबीसी को आरक्षण की आवश्यकता है...(व्यवधान)...
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) – अध्यक्ष महोदय, मेरा पाइंट ऑफ ऑर्डर है.
श्री रामेश्वर शर्मा – वह भी दे रहे हैं...(व्यवधान)..
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, ओबीसी को 27 परसेंट आरक्षण की आवश्यकता है यूसीसी की आवश्यकता नहीं है..(व्यवधान)...
श्री कैलाश विजयवर्गीय – माननीय अध्यक्ष महोदय, वह तो हम दे ही रहे हैं. सरकार उसके पक्ष में है.
श्री रामेश्वर शर्मा – वह भी दे रहे हैं. डंके की चोट पर दे रहे हैं...(व्यवधान)..
श्री कैलाश विजयवर्गीय – सरकार उसके पक्ष में है श्रीमान..
श्री उमंग सिंघार – माननीय अध्यक्ष महोदय,….(व्यवधान)...समान नागरिकता की बात हो रही है...(व्यवधान)..
श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव – अध्यक्ष महोदय, यदि इसी प्रकार हर राज्य में कानून बनेगा. हमने प्रवर समिति बनाने की बात की है...(व्यवधान)...
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, पिछड़ा वर्ग को 52 परसेंट से...(व्यवधान)...
अध्यक्ष महोदय – कृपया सभी माननीय सदस्यों से मेरा निवेदन है कि....(व्यवधान)...
श्री विश्वास सारंग – अध्यक्ष महोदय, आप चर्चा तो करिए..(व्यवधान)...पहले चर्चा होगी...(व्यवधान)...
अध्यक्ष महोदय – समान नागरिक संहिता में सबको विचार करने की....(व्यवधान)...
श्री उमंग सिंघार – माननीय अध्यक्ष महोदय, समान नागरिकता से ज्यादा पिछड़े वर्ग को 27 परसेंट आरक्षण मिलना चाहिए...(व्यवधान)...
.......(व्यवधान)....
वित्त मंत्री (श्री जगदीश देवड़ा) – यूसीसी पर बात करो. सुन ही नहीं रह रहे हैं...(व्यवधान)..
श्री प्रहलाद सिंह पटेल – अध्यक्ष महोदय, यह फिर से भागने की कोशिश है..(व्यवधान)..
अध्यक्ष महोदय – कृपया, आप योगदान दें. यूसीसी का यह बिल अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है...(व्यवधान)...
श्री जगदीश देवड़ा – पहले आप बात कीजिए न...(व्यवधान)..
श्री रामेश्वर शर्मा – अध्यक्ष महोदय, यही मुस्लिम तुष्टीकरण है. इसी के लिए यूसीसी जरूरी है...(व्यवधान)...
अध्यक्ष महोदय --...(व्यवधान)...कृपया,अपने-अपने स्थान पर बैठें.. .(व्यवधान).आप चर्चा के बाद अपनी बात रख सकते हैं. संशोधन पर मतदान होगा, उस समय बात आएगी, तो निश्चित रूप से सदन जो निर्णय करेगा, वह निर्णय होगा. इसलिए मेरा सभी सदस्यों से अनुरोध है कि आज यूसीसी का विषय यह अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है इसलिए इस महत्वपूर्ण विषय पर हम लोगों को गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए है. कृपया, सभी सदस्य अपने स्थान पर जाएं और अपने स्थान पर जाकर चर्चा करें....(व्यवधान)..
श्री उमंग सिंघार – माननीय अध्यक्ष महोदय, यूसीसी से ज्यादा ओबीसी को आरक्षण मिलना चाहिए..(व्यवधान)...
....(व्यवधान)....
1.09 बजे गर्भगृह में प्रवेश
इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण नेता प्रतिपक्ष, श्री उमंग सिंघार के नेतृत्व में गर्भगृह में अपनी बात कहते हुए नारेबाजी करने लगे.
(व्यवधान) श्री रामेश्वर शर्मा—अध्यक्ष महोदय, मुस्लिम तुष्टिकरण बंद करो.
(व्यवधान) नेता प्रतिपक्ष—अध्यक्ष महोदय, यू.सी.सी.की रिपोर्ट को समिति में क्यों नहीं भेजना चाहते (व्यवधान)
श्री कैलाश विजयवर्गीय—मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति बंद करो. (व्यवधान)
नेता प्रतिपक्ष—समान नागरिकता से ज्यादा 27 प्रतिशत पिछड़े वर्ग को आरक्षण मिले, इस पर अध्यक्ष महोदय, चर्चा होना चाहिये. (व्यवधान) 27 प्रतिशत आरक्षण पिछड़े वर्ग को मिल रहा है. यह भारतीय जनता पार्टी की नीति है.
(कांग्रेस के माननीय सदस्यगण गर्भ गृह में आकर नारेबाजी करने लगे)
अध्यक्ष महोदय—विधान सभा की कार्यवाही 10 मिनट के लिये स्थगित की जाती है.
(1.11 बजे विधान सभा की कार्यवाही 10 मिनट के लिये स्थगित की गई.)
01.23 बजे विधान सभा पुन: समवेत हुई
{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}
(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा गर्भगृह में नारेबाजी जारी रही..)
श्री उमंग सिंघार – माननीय अध्यक्ष महोदय, इस पर चर्चा करने की बजाए पहले यह प्रवर समिति में भेजा जाए और यह यूसीसी से बड़ा मुद्दा है, ओबीसी आरक्षण को लेकर 27 प्रतिशत ओबीसी को आरक्षण मिलना चाहिए (..व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय – आपने अपनी बात संशोधन के समय कही है, जब संशोधन पर विषय आएगा, उस समय आपको अवसर मिलेगा तब आप बोलना. अभी नेता प्रतिपक्ष बोलना चाहते हो क्या. (गर्भगृह में विपक्ष के कई माननीय सदस्य अपनी बात रखते रहे ) सचिन जी एक मिनट नेता प्रतिपक्ष जी बोलना चाहते हैं क्या. (..व्यवधान)
श्री प्रहलाद पटेल – अध्यक्ष जी, सरकार को भी अपना पक्ष रखने का अधिकार है.
डॉ. सीतासरन शर्मा – अध्यक्ष जी, यदि इनको विधेयक को रोकना था तो पुर:स्थापन के समय इनको आपत्ति लेना था. (..व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय – मेरा अनुरोध है, नेता प्रतिपक्ष ने कहा था कि वे भाषण दे रहे हैं, अगर नेता प्रतिपक्ष भाषण देना चाहते हैं, तो मैं सीतासरन जी से पहले उनके विशेषाधिकार के तहत अनुमति दे सकता हूं.
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष जी, भाषण वाली बात नहीं है.
श्री रामेश्वर शर्मा – अध्यक्ष जी, मुझे तो यह समझ नहीं आता कि नेता प्रतिपक्ष भाषण ही नहीं देना चाहते हैं, तो क्या देना चाहते हैं, इस सदन में. (..व्यवधान)
श्री कैलाश विजयवर्गीय – अध्यक्ष जी, मेरा पाइंट आफ आर्डर है. (..व्यवधान)
श्री उमंग सिंघार – यूसीसी से ज्यादा 27 प्रतिशत ओबीसी को आरक्षण मिलना चाहिए, यह महत्वपूर्ण है, इस विधान सभा में यह चर्चा होनी चाहिए और रही बिल की बात तो बिल प्रवर समिति को भेजा जाना चाहिए, यह हमारी मांग है 27 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं. (..व्यवधान)
(नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक को प्रवर समिति को भेजने एवं ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देना होगा कहते हुए गर्भगृह में नारेबाजी करते रहे)
(व्यवधान)...
श्रम मंत्री(श्री प्रहलाद सिंह पटेल) – अध्यक्ष महोदय, मेरा नेता प्रतिपक्ष जी से आपके माध्यम से कहना है कि उनको भी दो बातों का जवाब देना होगा. संविधान सभी जनजातियों को एक संरक्षण देता है, अनुच्छेद 366(25) और अनुच्छेद 342 के तहत जनजातियों को जो अधिकार दिया गया है, उस अधिकार के तहत ही हमने अनुसूचित जाति के लोगों को अलग रखा है, मैं आपके माध्यम से कांग्रेस पार्टी से, नेता प्रतिपक्ष से और उनके सदस्यों से पूछना चाहता हूं कि क्या वह आदिवासियों को उनके अधिकारों से वंचित करना चाहते हैं, इतना स्पष्ट प्रावधान राष्ट्रपति जी के द्वारा किया गया है और उसके कारण से ही यूसीसी में आदिवासियों को दूर रखा गया है, उनकी पंरपराओं को दूर रखा गया है और इसलिए मुझे लगता है कि आर्टिकल 21 की बात हमारे एक सम्माननीय सदस्य कह रहे थे, उसी के तहत ही इन जनजातियों को यूसीसी से बाहर रखा गया है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष हो या कांग्रेस के लोग उनको इस पर जवाब देने की हिम्मत नहीं है. मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या वह जनजातियों को इस अधिकार से वंचित करना चाहते हैं. चाहे आंध्र का फैसला हो, या न्यायालय के फैसलें हो, इन फैसलों के तहत आदिवासी का वह अधिकार सुरक्षित रखा गया है और इस नाते इस पर यह बहस बनती नहीं है, लेकिन कांग्रेस इसको सुनना नहीं चाहती है और इसलिए मैं आपके माध्यम से निवेदन करता हूं कि प्रक्रिया के तहत कांग्रेस में हिम्मत है, तो वह चर्चा में भाग ले, या फिर जो सत्ताधारी दल के लोग बोलना चाहते हैं, उसको सुनने की कोशिश करेंगे तो ज्यादा बेहतर होगा.
(व्यवधान)...
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक को प्रवर समिति में भेजा जाये, उसके बाद ही इस पर सदन में चर्चा होना चाहिए. (व्यवधान)..माननीय अध्यक्ष महोदय, ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए. सरकार इस बिल को पास कराने को लेकर इतनी जल्दबाजी में क्यों हैं, क्या ओबीसी से बड़ा मुद्दा यूसीसी है. मैं समझता हूं कि ओबीसी 55 प्रतिशत प्रदेश के अंदर है. (व्यवधान)..
माननीय अध्यक्ष महोदय, अगर इतनी हिम्मत है तो इसको प्रवर समिति में भेजने में क्यों आपत्ति है, आपकी दिल्ली से तो आप मंजूर नहीं करा पाये. यह सरकार आज मध्यप्रदेश में करवाना चाहती है पर इसको यह दिल्ली से क्यों नहीं करा पाये हैं. ओबीसी के आरक्षण को लेकर सरकार बात क्यों नहीं करना चाहती है? दिल्ली से आप पास नहीं करा पा रहे हो.
डॉ. सीतासरन शर्मा – अध्यक्ष महोदय, मैं कुछ कहना चाहता हूं. (व्यवधान)..
श्री रामेश्वर शर्मा – आदिवासियों के सम्मान में भाजपा है मैदान में, मुस्लिम तुष्टीकरण बंद करो, (व्यवधान).XX (व्यवधान)..
अध्यक्ष महोदय – मैं सभी सदस्यों से अनुरोध करना चाहता हूं कि यह जो बिल आ रहा है, यह ऐतिहासिक बिल है, यह सदन चर्चा के लिये है, विपक्ष के लिये है, संवाद के जरिये हम अपनी बात रखें और जब आप अपनी बात रखेंगे तो निश्चित रूप से निराकरण तक पहुंचेंगे, मैं समझता हूं कि कार्यवाही को बाधित करना ठीक नहीं है, यह ऐतिहासिक बिल है, इस ऐतिहासिक बिल पर हम चर्चा के जरिये अपनी बात रखें (एक साथ अनेक सदस्यों के खड़े होने पर) मेरा सभी सदस्यों से अनुरोध है, मेरा पक्ष के सदस्यों से अनुरोध है, मेरा विपक्ष के सभी सदस्यों से अनुरोध है कि वह अपने-अपने स्थल पर जायें. अपने-अपने स्थान पर बैठें.
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, यहां पर 27 प्रतिशत ओबीसी को आरक्षण मिलने को लेकर बात होना चाहिए, यूसीसी इतना महत्वपूर्ण नहीं है, यह पिछड़ों को आरक्षण नहीं देना चाहते हैं. (व्यवधान)..
श्री रामेश्वर शर्मा – आदिवासियों का अपमान करना बंद करो. (व्यवधान)..
श्री उमंग सिंघार – वैसे भी आदिवासी आपके साथ नहीं है. (व्यवधान)..
(भारतीय जनता पार्टी के सदस्यगण अपने अपने आसन से आदिवासियों के सम्मान में भाजपा मैदान में कहते हुए नारेबाजी करते रहे)
(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा गर्भगृह में नारेबाजी की जाती रही)
(..व्यवधान..)
श्री रामेश्वर शर्मा - कांग्रेसियों आदिवासियों का अपमान कर रहे हो. आदिवासी बहन बेटियों का अपमान कर रहे हो.
(..व्यवधान...)
डॉ.सीतासरन शर्मा - अध्यक्ष महोदय, इनको लज्जा नहीं आ रही. यह किस बात का विरोध करने के लिये खड़े हो रहे.
(..व्यवधान..)
श्री रामेश्वर शर्मा - हमारे पास ओबीसी मुख्यमंत्री है. ओबीसी प्रधानमंत्री है.तुम्हारे पास ओबीसी में क्या है.
(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा गर्भगृह में नारेबाजी की जाती रही)
श्री गोविन्द सिंह राजपूत - इनके लिये यूसीसी से बड़ा मुद्दा 27 प्रतिशत आरक्षण का है पिछड़ों का,माननीय अध्यक्ष महोदय,
(..व्यवधान..)
डॉ.सीतासरन शर्मा - (..व्यवधान..) यह तुष्टीकरण की बात नहीं चलेगी.
अध्यक्ष महोदय - मेरा सदस्यों से अनुरोध है कि वे अपने स्थान पर जाएं और बिल पर जो चर्चा हो रही है उस बिल पर अपने विचार व्यक्त करे.
श्री उमंग सिंघार - यह विधेयक प्रवर समिति को जाना चाहिये.
अध्यक्ष महोदय - यह सदन चर्चा के लिये है. सदन को बाधित करना उचित नहीं है. आज की कार्य सूची में अनेक बिल लगे हुए हैं. सभी बिलों को पारित कराना हम सबकी जिम्मेदारी है. जनता ने हमको बड़ी आशा और अपेक्षा के साथ इस सदन में भेजा है. हमको जनता की अपेक्षा पर खरा उतरना चाहिये और अपने दायित्व का निर्वहन करना चाहिये. सदन की कार्यवाही को बाधित करना यह किसी भी तरह से उचित नहीं है. मेरा सबसे अनुरोध है कि अपने स्थान पर जाएं.
श्री गोविन्द सिंह राजपूत - यह मुद्दा नहीं है. इनके लिये पिछड़ा वर्ग का बड़ा मुद्दा है.
डॉ.सीतासरन शर्मा - अध्यक्ष जी, इनके पितृ पुरुष पंडित जवाहर लाल नेहरू ने क्या कहा था वह सुन लीजिये. कांग्रेसी आज किस बात का विरोध कर रहे हैं जरा इस बात पर ध्यान दीजिये. पंडित जवाहर लाल नेहरू ने कहा था Pt. Nehru asserted that he firmly believe that no modern democratic nation could thrive while denying its women equal economic and legal rights.
He publicly championed monogamy and the daughters right to property. यह पंडित जवाहरलाल नेहरू की बात नहीं मान रहे हमारी क्या मानेंगे प्रदेश की जनता की क्या मानेंगे.
श्री उमंग सिंघार - 27 प्रतिशत पिछड़ों को आरक्षण मिलना चाहिये. यह कानून इतना महत्वपूर्ण नहीं है. यह हमारी मांग है और आप इसको प्रवर समिति में भेजिये.
डॉ.सीतासरन शर्मा - पंडित नेहरू ने क्या कहा था वह सुन लीजिये. We can not carry centuries old customs in the name of religion, that opposes women and stop them from progressing. Religion does not mean social orthodoxy or stagnation. रिलीजन धर्म की बात कर रहे हैं. इनके पितृपुरुष कह रहे हैं.
(..व्यवधान..)
श्री भंवर सिंह शेखावत - इस नेशनल इशू पर दिल्ली में बहस होनी चाहिये. पहले दिल्ली की सरकार पास कराए इसको. दिल्ली के अंदर पास करके फिर आईये विधान सभा के अंदर.चाहे जो बिल ले आते हो. दिल्ली में तो पास कराओ.
डॉ.सीतासरन शर्मा - शेड्यूल में है.
(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा गर्भगृह में खड़े होकर नारे लगाये जाते रहे.)
…(व्यवधान)...
श्री भंवर सिंह शेखावत – इस नेशनल इश्यू पर बहस दिल्ली में होना चाहिए. पहले दिल्ली की सरकार इसको पास कराए. दिल्ली के अंदर पास करके फिर विधान सभा के अंदर आइये. चाहे जो बिल ले आते हो…(व्यवधान)...
डॉ. सीतासरन शर्मा – माननीय शेखावत जी, संविधान के सेवंथ शेड्यूल में है. संविधान की समवर्ती सूची में है. …(व्यवधान)...
श्री भंवर सिंह शेखावत – ओबीसी की बात करते नहीं, आदिवासी की बात करते नहीं, आदिवासी की चिंता कौन करेगा. …(व्यवधान)... पहले देश की लोकसभा में पास कराइये. देश की जनता ने आपको बहुमत दिया है. पहले वहां पास कराइये. …(व्यवधान)...
डॉ. सीतासरन शर्मा – इनको कौन समझाए. ये संविधान का विरोध कर रहे हैं. …(व्यवधान)...
श्री भंवर सिंह शेखावत – पहले मोदी जी इसको पास करा लें, फिर यहां भोपाल के अंदर आएं आप. …(व्यवधान)...
डॉ. सीतासरन शर्मा – तो किसकी सरकार चलेगी, तुम्हारी चलेगी क्या. …(व्यवधान)...
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, समान नागरिक संहिता से बड़ा मुद्दा इस प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण है. …(व्यवधान)... इस बिल को प्रवर समिति में भेजना चाहिए. आपके मोदी जी जब दिल्ली में इसको पास नहीं करा पाए, 56 इंच की बात करने वाले दिल्ली में नहीं कर पाए. …(व्यवधान)... ये आरएसएस के लोग हैं, जो चाहते हैं.
डॉ. सीतासरन शर्मा – तुष्टिकरण वालों, तुम कभी नहीं चलोगे. …(व्यवधान)... तेलंगाना की सरकार कैसे चलेगी, ये सारा संदेश पूरे देश में जाएगा. …(व्यवधान)...
श्री उमंग सिंघार – माननीय अध्यक्ष महोदय, आपसे न्याय की गुहार है कि समान नागरिक संहिता इतना महत्वपूर्ण विषय नहीं है, जितना कि ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देना है. …(व्यवधान)...
डॉ. सीतासरन शर्मा – अध्यक्ष जी, समान नागरिक संहिता बहुत जरूरी है. …(व्यवधान)... मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का आभार मानता हूँ. सामाजिक न्याय के क्षेत्र में …(व्यवधान)...
श्री सोहनलाल बाल्मीक – माननीय अध्यक्ष जी, हमारी मांग है कि इस बिल को प्रवर समिति में भेजा जाए. अध्यक्ष जी, हम आपसे उम्मीद रखते हैं, आपका संरक्षण चाहते हैं. ओबीसी आरक्षण आवश्यक है. पहले ओबीसी आरक्षण पर चर्चा की जाए और ओबीसी आरक्षण को लागू किया जाए…(व्यवधान)... इस संशोधन को प्रवर समिति में भेजा जाए. यूसीसी की अभी आवश्यकता नहीं है. …(व्यवधान)...
अध्यक्ष महोदय – मेरा प्रतिपक्ष के सदस्यों से आग्रह है कि कृपया सभी अपने स्थान पर जाएं. आज की कार्यसूची में प्रदेश के जनकल्याण के लिए बहुत से विषय उल्लिखित हैं, जिन पर चर्चा होनी है. …(व्यवधान)...चर्चा करना हम सबकी जिम्मेवारी है, इसलिए मेरा प्रतिपक्ष के सभी सदस्यों से अनुरोध है कि वे कृपया अपने-अपने स्थान पर जाएं. …(व्यवधान)...यह सदन विचार-विमर्श के लिए है. चर्चा के लिए है. …(व्यवधान)...
श्री सोहनलाल बाल्मीक – इतने सारे बिंदु हैं. 404 बिंदु हैं. पहले उनको पूरा पढ़ा जाए. इसे प्रवर समिति में भेजा जाए. …(व्यवधान)...
(....व्यवधान.....)
(इंडियन नेशनल कांग्रेस के माननीय सदस्यगण द्वारा गर्भगृह में खड़े
होकर नारेबाजी की जाती रही.)
श्री सोहनलाल बाल्मीक – माननीय अध्यक्ष जी, ओबीसी आरक्षण लाया जाये. ....(व्यवधान).... हम लोगों की बात सुनी जाये. यह यूसीसी प्रवर समिति में भेजा जाये. इसकी अभी आवश्यकता नहीं है. इसे लागू करने की जरूरत नहीं है. जब इसको सेन्ट्रल गवर्नमेंट लागू नहीं कर पाई है. यूसीसी को ....(व्यवधान)....
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -माननीय अध्यक्ष महोदय ....(व्यवधान).... यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल इस समय आवश्यक नहीं है. ....(व्यवधान)....
(....व्यवधान.....)
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह)- माननीय अध्यक्ष महोदय, उमंग जी, आप मेरी एक बात सुन लीजिये. मैं आप सभी कांग्रेस के मित्रों से कहना चाहता हूँ कि आप किसी पार्टी के हैं.लेकिन जनता ने आपको चुनकर भेजा है कि आप जनता के बीच में जाकर यह कह सकें कि आपने यूसीसी का विरोध किया है. ....(व्यवधान)....
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, दिनांक 31 अगस्त, 2018 को ....(व्यवधान).... यह बिल इस समय आवश्यक नहीं है.
श्री राकेश सिंह – अध्यक्ष महोदय,उमंग जी आप बाहर जाइये, वहां मीडिया है, ....(व्यवधान).... कि हम यूसीसी का विरोध कर रहे हैं,फिर आप उसके बाद रिएक्शन देखिये,उसके बाद क्या होता है. ....(व्यवधान)....
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, हम पिछड़ों की बात करेंगे.
श्री राकेश सिंह – अध्यक्ष महोदय,हम इसीलिये आपसे आग्रह है कि आपके हित में यह बात कर रहे हैं कि आप यूसीसी का विरोध मत कीजिये,वरना आप यहां पर नहीं आ पायेंगे. फिर भी आप यह हिम्मत कर रहे हैं, तो जाइये, बाहर जाइये और कहिये आप यूसीसी के विरोध में हैं. आदिवासियों के सम्मान के साथ ....(व्यवधान)....
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय,आदिवासी तो इस बिल के अन्दर हैं ही नहीं. आप जबरदस्ती आदिवासियों की बात किए जा रहे हो. ....(व्यवधान)....
(....व्यवधान.....)
अध्यक्ष महोदय - माननीय सदस्यगण, समान नागरिक संहिता पर चर्चा चल रही है. चर्चा में भाग लेने के बजाय व्यवधान उत्पन्न किया जा रहा है. यह संसदीय परम्पराओं के अनुरूप नहीं है, ....(व्यवधान)....लोकतंत्र में असहमति का अधिकार है और उसकी अभिव्यक्ति चर्चा के माध्यम से ही होना चाहिए, नारेबाजी या व्यवधान के माध्यम से नहीं. ....(व्यवधान).... विधान सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के तहत माननीय सदस्यों को विधेयक पर अपने विचार रखने का पूर्ण अवसर दिया जायेगा, यदि कोई सदस्य चर्चा नहीं करना चाहता है, तो उसका विषय....(व्यवधान)....लेकिन उसे चर्चा में भाग लेने से ....(व्यवधान).... मैं माननीय सदस्यों से अपेक्षा करता हूँ कि आप अपना-अपना स्थान ग्रहण करें और चर्चा को आगे बढ़ने दें, मेरा सभी माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि अपना-अपना स्थान ग्रहण करें और चर्चा को आगे चलने दें. यह बहुत ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण बिल है. सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित.
(1.43 बजे सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित की गई.)
2.02 बजे अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.
डॉ. सीतासरन शर्मा – माननीय मुख्यमंमत्री जी के प्रति आभार प्रकट करता हूँ कि उन्होंने इतना अच्छा विधेयक सामाजिक न्याय का इस प्रदेश में प्रस्तुत किया है. यह विधेयक इस प्रदेश के सामाजिक न्याय के इतिहास में एक बड़ा लेंडमार्क होगा. किसी भी राष्ट्र या समाज की प्रगति उसकी इकॉनॉमी से नहीं बल्कि सामाजिक न्याय से समझी जाती है. अध्यक्ष महोदय, यह लोग हल्ला-गुल्ला मचा रहे हैं उसके पहले मैं सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला बताना चाहता हूँ. यह प्रतिक्रियावादी लोग न सुप्रीम कोर्ट की बात मानते हैं, न ही संविधान की मानते हैं. पहले मैं आर्टिकल 44 पढ़ना चाहता हूँ. आर्टिकल 44 में बहुत क्लियर शब्द “The state shall endeavour to secure for citizens a uniform civil code through out the territory of India.” है. State Shall. Shall का अर्थ होता है कि यह करना ही है. मैं इस पर सुप्रीम कोर्ट के दो-तीन फैसले आपको बताना चाहता हूँ. शाहबानो प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कांग्रेस ने बदल दिया उसके बाद एक केस, डेनियल लतीफ शमीमा फारुकी में 5 जजों की कांस्टीट्यूशन बेंच ने “The code of criminal procedures controls the proceedings in such matters and overrides the personal law of the parties.” निर्णय दिया. (व्यवधान)
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) – माननीय अध्यक्ष महोदय, यह प्रवर समिति को जाना चाहिए था. अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण मिलना चाहिए. प्रवर समिति को सौंपे उसके बाद लाएं. 21 वां लॉ कमीशन जो सरकार का था. उसमें कहा गया है कि यूसीसी की आवश्यकता नहीं है. इसकी मध्यप्रदेश को क्या आवश्यकता है. (व्यवधान)
श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव – अध्यक्ष महोदय, अन्य पिछड़ा वर्ग को आरक्षण मिलना चाहिए. असल मुद्दा ओबीसी का है. हमारी 52 प्रतिशत आबादी है. (व्यवधान)
2.03 बजे गर्भगृह में प्रवेश एवं नारेबाजी
इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों का गर्भगृह में प्रवेश एवं नारेबाजी.
(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्य अपनी बात कहते हुए गर्भगृह में आए एवं नारेबाजी की जाती रही)
डॉ. सीतासरन शर्मा – उन्होंने फाइंडिंग्स दीं कि “The code of criminal procedures controls the proceedings in such matters and overrides the personal law of the parties.” (व्यवधान)
श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव – अध्यक्ष महोदय, यह मध्यप्रदेश का ओबीसी वर्ग देख रहा है (व्यवधान)
डॉ. सीतासरन शर्मा – अध्यक्ष महोदय एक विषय सुप्रीम कोर्ट का और बताना चाहता हूँ. साफिया नाम की एक महिला है, यह केरला की है. इसने सुप्रीम कोर्ट में एक दरख्वास्त लगाई है कि उसके पिता उसको अपनी संपत्ति देना चाहते हैं किन्तु उसके पिता के भाई मुस्लिम पर्सनल लॉ के कारण संपत्ति पर कब्जा करना चाहते हैं. मुझे मुस्लिम पर्सनल लॉ नहीं चाहिए 1925 का उत्तराधिकार अधिनियम लागू किया जाए और मुझे मुस्लिम समाज से निकाला जाए. पर्सनल लॉ की यह स्थिति है और इसको यह लोग उनके पक्ष में बोलते हैं. अध्यक्ष महोदय, इन्होंने 55 साल के राज में डायरेक्टर प्रिंसिपल्स थे, इसमें डायरेक्टर प्रिंसिपल्स में इन्होंने आर्टिकल 44 इसकी भाषा बड़ी साफ है. यह विषय को बदलना चाहते हैं. ..(व्यवधान)..
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, आपने डॉ. सीतासरन शर्मा जी को बोलने का मौका दिया है बाकी लोगों को नहीं दिया है, तो वह रिकॉर्ड नहीं होगा.
डॉ. सीतासरन शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, आर्टिकल 44 कहता है कि पर्सनल लॉज को मोडीफाइ एंड डिफाइंड किया जा सकता है. आर्टिकल 44 कहता है कि यूनिफार्म सिविल कोड लागू किया जाए. यह मेनडेट्री है. इसी प्रकार से आर्टिकल 14 कहता है कि जो स्टेट है वह सबसे लिए एक समान कानून की व्यवस्था करे. कानून के सामने सभी समान हैं. आरिफ भाई ने जो बात बोली, मुस्लिम समाज के जावेद जी हैं उनका स्टेटमेंट पढ़ना चाहता हूं ‘’कोई भी सभ्यता केवल इसलिए जिन्दा नहीं रहती कि उसने अपने अतीत को संभालकर रखा है, वह इसलिए आगे बढ़ती है कि अपने अतीत का सम्मान करते हुए उससे सवाल पूछने का साहस भी रखे, विरासत का मतलब उसे सिर पर उठाकर ढोना नहीं बल्कि उसे समझना, परखना और नई रोशनी में देखना है. हमारे हाथ में आधुनिक तकनीक होती है, हमारी सोच का एक हिस्सा अपनी मजबईन धारणाओं से चिपका रहता है.’’ जावेद अख्तर ने कहा है जो इन्हीं के समाज के हैं. अध्यक्ष महोदय, यह बहुत है जो मैं अपनी बात, मैंने कानून के विषय रखे, सुप्रीम कोर्ट के फैसले रखे, यह शाह बानो प्रकरण के बाद के फैसले हैं जो सुप्रीम कोर्ट ने किए हैं और पर्सनल लॉ के अगेंस्ट किए हैं. कांग्रेस संविधान को सिर पर रखकर घूमती है. संविधान की बात करती है. संविधान की बात करने वाली कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर्स को नहीं मान रही और यहां आंदोलन करके समाज के एक बहुत बड़े वर्ग को जो उनकी बहनें, बेटियां हैं उनके अधिकारों से उनको वंचित करना चाहती है. इन लोगों के ऊपर धिक्कार है. इसी के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं. ..(व्यवधान)..
2.08 बजे अध्यक्षीय घोषणा
विद्यालय के छात्रों का दर्शक दीर्घा में स्वागत किया जाना
अध्यक्ष महोदय -- आज दर्शक दीर्घा में हमारे देवरी क्षेत्र के उत्कृष्ट विद्यालय के छात्र उपस्थित हैं सदन की ओर से उनका स्वागत है.
मेरा सभी सदस्यों से अनुरोध है कि अपने स्थान पर जाएं. आज समान नागरिक संहिता के बिल पर चर्चा हो रही है. यह बिल बहुत ऐतिहासिक है. बहुत महत्वपूर्ण है. सुप्रीम कोर्ट की गाईडलाइन के अनुरूप है और इसलिए हम सबको विचार विमर्श के उपरांत इस पर निर्णय करना है. मत भिन्नता होना स्वाभाविक है. अभिव्यक्ति की सबको स्वतंत्रता है. अपनी चेयर पर बैठकर हम अपने विचार को, अपने मत को व्यक्त कर सकते हैं. मेरा सभी सदस्यों से अनुरोध है कि वह अपने स्थान पर जाएं. सदन में व्यवधान करना यह संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप नहीं है. कृपया नेता प्रतिपक्ष भी इस मामले पर ध्यान देंगे और अपने सदस्यों को अपने स्थान पर बैठने के लिए कहेंगे. मेरा सभी सदस्यों से अनुरोध है कि जो इस बिल पर अपने विचार रखना चाहते हैं और वह नहीं रख पा रहे हैं तो वह ले कर सकते हैं सदन की कार्यवाही में उसको सम्मिलित किया हुआ माना जाएगा. श्री रामेश्वर शर्मा जी ..(मेजों की थपथपाहट) ..
(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा गर्भगृह में नारेबाजी की जाती रही.)
अध्यक्ष महोदय- श्री रामेश्वर शर्मा जी.
श्री रामेश्वर शर्मा (हुजूर)- अध्यक्ष महोदय, मैं, इस बिल के माध्यम से संविधान निर्माता बाबा साहेब को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं क्योंकि उनका मानना था कि इस देश में बहुविवाह प्रथा बंद होनी चाहिए. इस देश में एक शादी राम करेगा तो एक शादी रहमान करेगा. सबसे बड़ी बात यह है कि आज आदिवासी समाज को इस बिल ने जो अधिकार दिए हैं, वे देश में पहले कभी नहीं थे.
(...व्यवधान...)
श्री उमंग सिंघार- पहले बिल तो पढ़ लो.
श्री रामेश्वर शर्मा- अध्यक्ष महोदय, मैं नेता प्रतिपक्ष से अनुरोध करूंगा कि वे आदिवासियों के हित देखें, क्यों मुसलमानों के चक्कर में आदिवासियों के हित मार रहे हो. कांग्रेसी मित्रों आप इंदिरा गांधी जी को तो मानते हो न उन्होंने ही कहा था कि पहला बच्चा अभी नहीं, दूसरा बच्चा जल्दी नहीं और तीसरा बच्चा कभी नहीं. इसलिए इस बात का ध्यान रखो कि दो शादी करना अपराध होगा, गैरकानूनी होगा. इसलिए (xx) उन्हें कोई रोक नहीं सकता. (मेजों की थपथपाहट)
उमंग जी, आप आदिवासियों का हित देखो. मैं भारत के प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने बेसहारा महिलाओं के बारे में सोचा.
श्री उमंग सिंघार- अध्यक्ष महोदय, प्रधानमंत्री जी ने इसके लिए कमेटी बनाई थी, उस कमेटी ने मना कर दिया. (...व्यवधान...)
श्री रामेश्वर शर्मा- अध्यक्ष महोदय, आज अनुसूचित जनजाति की महिला देश की राष्ट्रपति है. हम उनका सम्मान करते हैं. आज देश में अनुसूचित जाति, जनजाति सामान्य वर्ग के सभी लोगों को एक समान कानून देने का काम अगर किसी ने किया है तो वह डॉ. मोहन यादव की सरकार ने किया है. इसलिए कांग्रेसी मित्रों ये ध्यान रखो, आप कुछ भी बोल लो, सदन में बैठे हुए बच्चे, यहां बैठे लोग आपको देख रहे हैं. (सदन की दीर्घा में बैठे हुए स्कूली छात्रों की ओर इशारा करते हुए.)
साथियों, बताओ UCC का विरोध करने वाला ये चेहरा, तुष्टिकरण का यह चेहरा, जनता में दिखाओगे कि नहीं ? हाथ उठाकर बताओ (सत्तापक्ष के सदस्यों द्वारा हाथ खड़े किए गए) और यह ध्यान रखना इसी तुष्टिकरण के खिलाफ बाबा साहेब थे, अब बेटियों का अपमान नहीं होगा. अब तलाक तलाक तलाक नहीं होगा. उनका हलाला नहीं होगा, इसलिए ध्यान रखो
(...व्यवधान...)
श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव- अध्यक्ष महोदय, UCC से बड़ा मुद्दा ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण का है, उनको हक मिलना चाहिए.
श्री उमंग सिंघार- अरे पंडित जी आपको कुछ पता ही नहीं है. आप सिर्फ भाषण दे रहे हो.
(...व्यवधान...)
श्री रामेश्वर शर्मा- अध्यक्ष महोदय, ये वे लोग हैं जो भारत की प्रगति नहीं देखना चाहते, ये वे लोग हैं जिन्होंने देश का विभाजन किया, ये वे हैं जो आबादी बढ़ा बढ़ाकर (xx)
(...व्यवधान...)
श्री उमंग सिंघार- RSS का एजेंडा प्रदेश के अंदर नहीं चलेगा.
श्री रामेश्वर शर्मा- अध्यक्ष महोदय, इसलिए आप सभी ध्यान रखें, आदिवासियों का विरोध कांग्रेसियों बर्दाश्त नहीं कर पाओगे. इस बार जितने हो अगली बार इतने भी नहीं रहोगे, सब के सब समाप्त हो जाओगे. आप ध्यान रखो मैं नाम ले रहा हूं.
...व्यवधान...
श्री उमंग सिंघार – रामेश्वर शर्मा जी जब आप वोट लेने आओगे तो हमारे यहां ही आओगे. सब बेखबर हो जाओगे.
श्री रामेश्वर शर्मा— श्रीमान याद रखो मैं नाम ले रहा हूं. सचिव यादव जी आप आदिवासियों का विरोध कर रहे हो, आपका नाम ले रहा हूं, उमंग सिंघार जी आप आदिवासियों का विरोध कर रहे हो मैं आपका नाम ले रहा हूं., हीरालाल अलावा जी आप आदिवासियों का विरोध कर रहे हो मैं आपका नाम ले रहा हूं. सुरेन्द्र सिंह बघेल, मैं आपका नाम ले रहा हूं,.
...व्यवधान...
श्री उमंग सिंघार—यूसीसी से ज्यादा आवश्यकता पिछड़ो को आरक्षण देने की थी, उस पर आप क्यों नहीं बोल रहे हैं.
...व्यवधान...
श्री रामेश्वर शर्मा -- बाला बच्चन जी मैं आपका नाम ले रहा हूं, सोलंकी जी मैं आपका नाम ले रहा हूं और कांग्रेस के मित्रों अगर आपने आदिवासियों का विरोध किया तो आदिवासी आगे से वोट नहीं ठेंगा दिखायेंगे. याद रखिये और इसलिये मैं फिर आपसे कह रहा हूं. फूल सिंह बरैया जी आप सुन लें हम हैं जो बाबा साहब का सम्मान कायम करेंगे. और उनके बताये हुये मार्ग पर इस देश में कानून लागू करेंगे.
...व्यवधान...
श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव- हम महिलाओं को आरक्षण देने के पक्षधर थे, आपकी सरकार ने दिल्ली में मना कर दिया.
...व्यवधान...
श्री रामेश्वर शर्मा- यूसीसी का विरोध भारी पड़ेगा जो आये हो दुबारा जीतकर के नहीं आओगे. हिन्दुस्तान का हिंदू जानता है आप हिंदू विरोधी हो. इसलिये अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि इसको पास किया जाये और डॉ.मोहन यादव जी भारत सरकार को, प्रधानमंत्री जी को और गृह मंत्री जी को हृदय से बधाई दो. बोलो भारत माता की जय.
श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव- – हम अपना अधिकार मांग रहे , नहीं किसी से भीख मांग रहे हैं. पिछड़ों को आरक्षण दो, महिलाओं को आरक्षण दो, यह हमारी मांग है.
श्री रामेश्वर शर्मा – एक बार सब लोग खड़े होकर के नारा लगा दो- आदिवासियों के सम्मान में , बोलो भारत माता की जय.
अध्यक्ष महोदय- कृपा करके पक्ष और विपक्ष के लोग अपने स्थान पर बैठ जायें और सदन की कार्यवाही चलने दें.
श्री उमंग सिंघार—पिछड़ो का आरक्षण का लाभ मिलना चाहिये यह मेरा आपसे अनुरोध है.
अध्यक्ष महोदय- मेरा सभी से यह अनुरोध है कि कृपया सभी लोग अपने स्थान पर बैठ जायें. और चर्चा में भाग लें.
श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव- असली मुद्दा देश के नौ जवानों का है, उस पर चर्चा क्यों नहीं करते हैं.
अध्यक्ष महोदय—रामेश्वर जी कृपया बैठें. उमाकांत शर्मा जी..
श्री उमंग सिंघार—अध्यक्ष महोदय जी, मेरी आपसे मांग है कि इस बात पर सार्थक चर्चा होना चाहिये, लेकिन इस यूसीसी का मामला प्रवर समिति को भेजा जाये.चर्चा होना चाहिये.
श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव- अगर यही हालात रहे तो भाजपा का एक भी विधायक जीतकर के नहीं आयेगा.
श्री उमंग सिंघार—भारतीय जनता पार्टी की सरकार असली मुद्दों पर बात नहीं करना चाहती है. इसी तरह के मुद्दे लेकर के आती है.
श्री उमाकांत शर्मा(सिंरोज) – माननीय अध्यक्ष महोदय, जो लोग विधेयक का विरोध कर रहे हैं मैं उनके लिये कहना चाहता हूं. सभी आदमी एक समान हैं, जो उपस्थित हैं जो नहीं है सभी से कहना चाहता हूं. पुर्तगाल का शासक मुगलों में था उसका आपने कभी विरोध किया यह बात पूरी तरह सच है कि गोवा में लागू इस पुर्तगाली नागरिक संहिता को लेकर स्थानीय स्तर पर कभी कोई बड़ा सांप्रदायिक या सामाजिक विरोध नहीं देखा गया। गोवा के हिंदू, मुस्लिम और ईसाई सभी समुदायों ने इसे अपनी जीवनशैली का हिस्सा मान लिया है। लेकिन आपने कभी उसका विरोध किया क्या. आपकी कांग्रेस की सरकार रही, जवाहर लाल नेहरू ने भी कहा था ,समान नागरिक संहिता होना चाहिये.
(व्यवधान)
श्री उमाकांत शर्मा (सिरोंज) – अध्यक्ष महोदय, जब आदम और हव्वा हुए तब अल्लाह ने कहा कि सभी आदमी एक समान है, महिला और पुरुष एक समान हैं. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से, उपस्थित और अनुपस्थित, सभी से कहना चाहता हूं पुर्तगाल का शासन गोवा में था तब से समान नागरिक संहिता गोवा में चल रही है. आपने कभी गोवा में विरोध किया क्या. आपकी कांग्रेस की सरकार (व्यवधान) जवाहरलाल नेहरू ने भी कहा कि एक समान संहिता होना चाहिए. अम्बेडकर जी ने भी कहा है कि एक समान नागरिक संहिता होना चाहिए, जनाबे आली.
(व्यवधान)
श्री उमंग सिंघार – इसको विधायकों की विधान सभा की प्रवर समिति के पास जाना चाहिए. इसको आप एक रात में नहीं कर सकते हैं.
(व्यवधान)
श्री उमाकांत शर्मा – सारे मुस्लिम देश, तुर्किए में भी समान नागरिक संहिता है. आदरणीय अब्बा हुजूर, आप तुर्किए का अध्ययन करो, आप चाहते हैं कि यहां का संविधान मजहब के आधार पर चले. एक सम्प्रदाय के आधार पर चले, आप चाहते हैं कि जो लोग यह कहते हैं कि भारत तेरे टुकड़े होंगे, इंशाह अल्लाह, इंशाह अल्लाह. ऐसे लोगों को पढ़ाने के लिए ऐसा एक संविधान जरूरी है.
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, प्रवर समिति में इस पर क्यों नहीं चर्चा कराना चाहते हैं?
(व्यवधान)
श्री उमाकांत शर्मा – उमंग सिंघार जी, मुझे पता लगा है कि लिव इन रिलेशन खत्म होने वाली है. (XX) जो अभी तक लिव इन रिलेशन में चल रहा था, वह भारत के अनुकूल नहीं है, वह व्यक्ति के अनुकूल नहीं है. यह लिव इन रिलेशन भारत की ज्ञान परंपरा में नहीं है. धर्म में नहीं है. (व्यवधान) मैं मध्यप्रदेश सरकार के मुखिया डॉ. मोहन यादव जी और देश के प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद करता हूं. समान नागरिक संहिता का कानून लाकर नारी शक्ति को सम्मान मिला है. (व्यवधान) नारी शक्ति की जय जयकार हो रही है. मैं देख रहा हूं बहुत देर से, आपके इधर की नारी शक्ति मौन खड़ी है और आपकी नारियां, आपके आदिवासी बंधु, आपके जनजाति बंधु, आपके साथी हैं. यह कानून देश में एक मिसाल बनेगा. जनाबे आली, क्या पाकिस्तान, बंगलादेश का एक कानून था, बंगलादेश का बच्चा क्यों पैदा हो गया? अमेरिका में समान कानून, बौद्ध देशों में समान कानून, मुस्लिम देशों में समान कानून, इसलिए मध्यप्रदेश की सरकार को बधाई देते हुए इस कानून का समर्थन करता हूं, यूसीसी का समर्थन करता हूं. भारत माता की जय.
(व्यवधान)
श्री हरदीप सिंह डंग (सुवासरा)- अध्यक्ष महोदय, इनको यही नहीं मालूम है कि हम किसका विरोध कर रहे हैं. उन्होंने नाम लिखवाया था, फिर खुद ने नाम कटा लिया कि हम बोलना नहीं चाहते हैं. अगर इनमें ताकत हो तो माइक पर जाकर इस पर चर्चा करें. खाली अपनी बात शोरगुल में बर्बाद कर रहे हैं और इनको पता है कि हम किस बात का विरोध कर रहे हैं. मैं समान नागरिक संहिता का समर्थन करता हूं. मैं सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न भागों में ऐसे मामले सामने आए हैं.
(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा गर्भगृह में नारेबाजी की जाती रही)
श्री हरदीप सिंह डंग– देश के विभिन्न भागों में ऐसे मामले सामने आए हैं कि कभी-कभी अपराधी प्रवृत्तियों के व्यक्तियों ने लिव-इन संबंधों में युवतियों और कभी-कभी नाबालिक बच्चियों के साथ शोषण किया है. अपनी वास्तविक पहचान छिपायी है और लंबे समय तक उनका आर्थिक, मानसिक, शोषण किया है. ऐसे मामलों में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कोई आधिकारिक अभिलेख नहीं होते थे. .....(व्यवधान)....
अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि कुछ लोग भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं कि समान नागरिकता संहिता लिव-इन संबंधों को बढ़ावा देती है. वास्तविकता इसके बिल्कुल विपरीत है. यह कानून लिव-इन संबंधों को नियंत्रित और अनुशासित करता है और उत्तरदायित्व से जोड़ता है. पहले यदि कोई व्यक्ति बिना किसी सूचना के लिव-इन संबंध में रहता था, तो उसके संबंध में सरकार के पास कोई अभिलेख नहीं होता था. ...
..(व्यवधान)....
(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा गर्भगृह में नारेबाजी की जाती रही)
अध्यक्ष महोदय, इस विधेयक का एक और महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि लिव-इन संबंध विवाह संस्था का विकल्प नहीं बन सकते. समान नागरिक संहिता यह सुनिश्चित करती है कि लिव-इन संबंध में रहने वाले व्यक्तियों पर भी वही मूलभूत शर्तें लागू होंगी, जो विधिसम्मत विवाह के लिए आवश्यक होती है. अर्थात् दोनों पक्षों का वयस्क होना, स्वतंत्र एवं स्वैच्छिक सहमति होना तथा वैध विवाह में विद्यमान निषेधों का पालन करना अनिवार्य होगा. कोई विवाहित व्यक्ति लिव-इन संबंध में नहीं रह सकता और विवाह के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु से कम आयु के विवाह के लिए व्यक्तियों के बीच ऐसा संबंध भी कानून के संरक्षण का पात्र नहीं होगा. इस प्रकार यह व्यवस्था स्पष्ट करती है कि लिव-इन संबंधों के नाम पर बाल विवाह अथवा अन्य अवैध संबंधों को वैधता प्रदान नहीं की जा सकती.
.....(व्यवधान)....
अध्यक्ष महोदय, यदि दो वयस्क लिव-इन संबंध में रहना चाहते हैं, तो उन्हें निर्धारित अवधि के भीतर अपने संबंध का पंजीकरण कराना होगा. यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर पंजीकरण नहीं कराता अथवा असत्य जानकारी देता है तो उसके विरूद्ध जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान किया गया है.
अध्यक्ष महोदय, यह स्पष्ट करता है कि सरकार ने लिव-इन संबंधों को खुली छूट नहीं दी है बल्कि उन्हें कानूनी जवाबदेही के दायरे में ला दिया है. यह विधेयक का सबसे सशक्त संदेश यह है कि कोई भी विवाहित व्यक्ति लिव-इन संबंध में नहीं रह सकता. यदि कोई विवाहित व्यक्ति ऐसा करता है तो उसके लिए 5 वर्ष तक के कारावास का प्रावधान किया गया है. यह व्यवस्था भारतीय परिवार संस्था की रक्षा करती है. यह विवाह संस्था को कमजोर नहीं करती, बल्कि उसके प्रति उत्तरदायित्व को और अधिक मजबूत करती है. यह संदेश देती है कि विवाह कोई औपचारिक अनुबंध मात्र नहीं, बल्कि सामाजिक और कानूनी दायित्व है.
अध्यक्ष महोदय, तीसरा प्रावधान यह है कि यह महिलाओं एवं बच्चों का संरक्षण करती है. जहां कठोरता आवश्यक थी, वहां कठोरता दिखाई गई है. किन्तु जहां सरंक्षण आवश्यक था, वहां संवदेनशीलता भी दिखाई गई है. यदि किसी महिला को लिव-इन संबंध में छोड़ दिया जाता है, तो उसे भरण-पोषण के लिए कानूनी उपचार उपलब्ध होगा. इसी प्रकार ऐसे संबंध से जन्म लेने वाले बच्चों को वैध माना जाएगा तथा उन्हें उत्तराधिकार संबंधी अधिकार प्राप्त होंगे. अर्थात् यदि किसी वयस्क ने कोई निर्णय लिया है, तो उसका दुष्परिणाम किसी महिला या बच्चे को नहीं भुगतना पडे़गा.
.....(व्यवधान)....
अध्यक्ष महोदय, संबंध की समाप्ति भी पंजीकृत होगी. यह भी एक महत्वपूर्ण सुधार है कि केवल संबंध की शुरूआत ही नहीं, बल्कि उसकी समाप्ति का भी विधिवत् पंजीयन होगा. इससे भविष्य में संपत्ति, भरण-पोषण, उत्तराधिकार अथवा अन्य विवादों में तथ्य स्पष्ट रहेंगे और अनावश्यक मुकदमेबाजी कम होगी.
(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा गर्भगृह में नारेबाजी की जाती रही)
अध्यक्ष महोदय, भारतीय जनता पार्टी का स्पष्ट मत है कि भारतीय समाज की आधारशिला विवाह और परिवार है. हमारा उद्देश्य लिव-इन संबंधों को सामाजिक आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना नहीं है.
अध्यक्ष महोदय – हरदीप सिंह डंग जी, कृपया समाप्त करें.
श्री हरदीप सिंह डंग – अध्यक्ष महोदय, हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि ऐसे संबंध अस्तित्व में हैं, तो वे कानून से बाहर नहीं, बल्कि कानून के अधीन हों.धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय – धन्यवाद. श्री ओमप्रकाश धुर्वे जी.
.....(व्यवधान)....
(इंडियन कांग्रेस के माननीय सदस्यगण द्वारा गर्भ गृह में नारेबाजी की जाती रही)
श्री ओमप्रकाश धुर्वे—(शहपुरा)—माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारी सरकार ने ओ.बी.सी.आरक्षण को मध्यप्रदेश में लागू किया है. हमारी सरकार ने आदिवासियों की संस्कृति तथा हमारी जो रूढ़िवादी परम्परा है, हमारी जो मान्यताएं हैं उनको संरक्षित करने के लिये समान नागरिक कानून में संशोधन किया है. (व्यवधान)
श्री सचिन यादव—कैमरा बंद करने का जो षड़यंत्र रच रहे हो, वह बंद होने वाला है. (व्यवधान)
श्री ओमप्रकाश धुर्वे—अध्यक्ष महोदय, मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण कुछ नये प्रावधान किये जा रहे हैं. (व्यवधान) अध्यक्ष महोदय, इसमें संशोधन आ रहे हैं. कांग्रेस के लोग इसमें जो प्रावधान किये गये हैं, इससे साफ जाहिर हो रहा है कि वह उसका विरोध कर रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी की सरकार और हमारे मोहन यादव जी के नेतृत्व में इस कानून में लोगों को संरक्षित करने का प्रयास किया है. हमारी सरकार आदिवासी हितैषी सरकार है. हमारी सरकार ने एक अलग से मंत्रालय देने का काम भी किया गया है, वहीं कांग्रेस के लोग आदिवासी हितों के अपमान करने का काम कर रही है. हमारे जितने भी आदिवासी मित्र विधायकगण हैं उनको मैं कहना चाहता हूं कि आप लोग आदिवासियों के हित में आवाज नहीं उठा रहे हैं. आने वाले समय में कांग्रेस के जो आदिवासी नेता हैं वह जनता के बीच में जायेंगे तो आपको जगह जगह पर आप लोगों को आदिवासी भाई ठेंगा दिखाने का काम करेंगे. (व्यवधान) आने वाले समय में कांग्रेस के जो नेता हैं, वह जनता के बीच में नहीं जा पायेंगे. मैं दावे के साथ कहना चाहता हूं कि आने वाले समय में आपको आदिवासी जनता नकारने का काम करेगी. आपको अपने क्षेत्र में अपमान की स्थिति का सामना करना पड़ेगा. हमारी जो भारतीय जनता पार्टी की सरकार है वह आदिवासियों के संरक्षण करने का काम करती है. (व्यवधान) हमारी सरकार आदिवासियों का सम्मान करने का काम किया जाता है. (व्यवधान) इसमें हमारी सरकार ने बहुत अच्छे कानून बनाये हैं. आने वाले समय में जनता आपको परिणाम देगी तो निश्चित रूप से भारतीय जनता पार्टी की सरकार अच्छा काम कर रही है, यह कहकर के मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं. भारत माता की जय.
अध्यक्ष महोदय—मेरा सभी माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि वह इस बिल पर अपने विचार नहीं रख पा रहे हैं, वह पटल पर रख सकते हैं. मैं पुनः इस बात को दोहरा रहा हूं.(व्यवधान)
(विपक्ष के सदस्यगण गर्भगृह में नारे लगाते रहे...)
(....व्यवधान)
मुख्यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) – माननीय अध्यक्ष महोदय, जय जय श्रीराम.... जय जय श्रीराम... जो हिन्दू हित की बात करेगा..वही देश पर राज करेगा.. मुस्लिम तुष्टिकरण बंद करो... दोहरी नीति बंद करो.. जो हिन्दु हित की बात करेगा.. वही देश पर राज करेगा.. जय जय श्रीराम.. (....व्यवधान) जय जय श्रीराम..
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अपनी ओर से यूसीसी के माध्यम से इस प्रकार से जो महौल बनाया गया है, मैं अपनी ओर से खासकर मध्यप्रदेश के इतिहास के अंदर ये इतिहास बना है, इस इतिहास में एक बार फिर मध्यप्रदेश की विधान सभा में एक नया स्वर्णिम इतिहास बना है. मैं सभी से निवेदन करूंगा कि सभी अपने अपने ईयर फोन/हेडफोन लगाए और हमारे सदन के माध्यम से जिस प्रकार से वर्तमान का समय चल रहा है. हमारे बीच में आज इस अवसर पर हिन्दू-मुसलमान को बंटवारा करने वाले सिस्टम के आधार पर, जिस प्रकार से खासकर के साढ़े आठ करोड़ जनता की ओर से अटूट विश्वास के आधार पर हमारे बीच में रानी दुर्गावती, रानी कमलावती, रानी अवंति बाई जैसी वीरांगना, जननी नायकों के बलबूतों पर माता बहनों की संस्कृति, मध्यप्रदेश की एक अलग प्रकार की संस्कृति रही है. ऐसे समय में हमारी संस्कृति को गौरान्वित करने के लिए, ये जो वर्तमान का समय चल रहा है. मैं अपने राज्य के अंदर राजा भोज की समानता, सम्राट विक्रमादित्य के न्याय और अहिल्या माता के सुशासन के आधार पर, आज जब मैं आपके बीच बात कर रहा हूं, सच में समान नागरिक संहिता के ठिकाने आज का ये ऐतिहासिक दिन है. भगवान राम की इस बेला में पूरे देश और दुनिया की निगाह हमारी तरफ जुड़ी हुई है. कांग्रेस का दो मुंहा रूप इसके माध्यम से दिखाई दे रहा है. मैं अपनी ओर से आज एक एक शब्द, एक एक तर्क और एक एक विचार और निर्णय मध्यप्रदेश की सुविधाओं और (....व्यवधान) भावना के अनुरूप रखने का ये अवसर मानता हूं. स्वर्णिम अवसर की इस बेला में मैं प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं(..मेजों की थपथपाहट) शुभकामनाएं देते हो तो दिल खोलकर देना चाहिए, आनंद के साथ देना चाहिए. मुझे इस बात की प्रसन्नता है, समानता तो हमारी संस्कृति का मूल है, हमने तो संपूर्ण विश्व को अपना परिवार माना है, सभी के मंगल की कामना की है. त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने और द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने समानता, न्याय और समान अधिकार के लिए अपना सब कुछ अर्पित किया है. जब विधाता की दृष्टि में सब कुछ एक है तो इंसानों के बनाए विधान में विसंगति क्यों होना चाहिए. निश्चित रूप से वह एक होना चाहिए. अंबेडकर जी की इस भावना के बलबूते पर जब एक संविधान देश ने लागू किया और डॉ. मुखर्जी, सरदार वल्लभ भाई पटेल सभी ने मिलकर एक देश, एक विधान, एक मिशाल की बात कही है, ऐसे में ये विविधता की बात क्यों होनी चाहिए, विविधता हमारी संस्कृति की सुन्दरता है, लेकिन विधिक विसंगति यह समाज का कोढ़ है, इससे बाहर आने की आवश्यकता है. हमारे लिए यह सौभाग्य की बात है. आजादी के सात दशक तक गुलाम मानसिकता में जकड़ी, हमारी सरकारों ने तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के लिए देश की संप्रभुता से सदैव समझौता किया और उसके लिए अग्रणी रूप में कोई पार्टी रही है तो हमेशा कांग्रेस पार्टी रही है जिसने वोटों के आधार पर जब देखों तब, हमेशा अपनी समाज के साथ उनकी पीठ में खंजर घोंपने का काम किया है, यह दुर्भाग्य की बात है. मैं अपनी ओर से जब आज इस कानून को लेकर अपनी सरकार के साथ आगे बढ़ रहा हूं, ऐसे में अमर से लेकर अकबर तक, अमनदीप से लेकर एंथोनी तक, राम से रहीम तक, रविन्दर से रॉबिन तक देश का प्रत्येक नागरिक, एक विधान से चले, मध्यप्रदेश एक विधान से चले, इसलिए कानून को लगाया जा रहा है. जैसा कि वर्ष 2024 में स्वतंत्रता दिवस के दिन लाल किले से प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि जिस सिविल कोड का हम पालन कर रहे हैं.
(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण गर्भगृह में नारेबाजी करते रहे)
(व्यवधान)......
डॉ.मोहन यादव.....(जारी)
वास्तव में वह कम्यूनल सिविल कोड है, समय की मांग है, देश में एक सेक्यूलर सिविल कोड होना चाहिए और मध्यप्रदेश उस दिशा में ठोस कदम आज बढ़ा रहा है, यह हमारे लिये सौभाग्य की बात है(मेजों की थपथपाहट) (व्यवधान)......
अध्यक्ष महोदय, आज के बाद मध्यप्रदेश में इस भेद भाव से मुक्ति मिलेगी. मैं आज के अवसर पर माननीय अध्यक्ष महोदय, गोवा, उत्तराखंड, गुजरात, असम के बाद मध्यप्रदेश उन चुने हुए राज्यों में शामिल होगा, जिन्होंने अपने नागरिकों की समानता के लिये सब कुछ देने का प्रयास किया है. (मेजों की थपथपाहट) (व्यवधान)......
अध्यक्ष महोदय, मैं अपनी ओर से विपक्ष के साथियों से भी अपील करना चाहूंगा आईये हम सब मिलकर के समाज कल्याण की भावना के बलबूते पर सामाजिक एकता और समरसता के लिये इस कानून का समर्थन करें. आज यशस्वी प्रधानमंत्री श्रीमान् नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश जब आगे बढ़ रहा है, तो मध्यप्रदेश भी समान नागरिकता की दिशा में ठोस कदम उठा रहा है, मुझे इस बात की प्रसन्नता है. (मेजों की थपथपाहट) (व्यवधान)......
अध्यक्ष महोदय, हमारे लिये अब अपने राज्य के अंदर अलग-अलग मजहबी तोल कांटा नहीं होगा, सब एक ही बांट से तोले जायेंगे, इस महत्वपूर्ण विषय पर सबसे गैर जिम्मेदाराना और दोहरा रवैया विपक्ष के लोग अपना रहे हैं, इनके खाने के दांत भी अलग और दिखाने के दांत भी अलग हैं, दुनिया इनको देख रही है, यह अपने आचरण के कारण से स्वयं लज्जित होंगे, घर में इनकी माताएं बहनें भी इनको माफ नहीं करेंगी कि यह उनको समानता के अधिकार से वंचित करना चाहते हैं, यह वही इतिहास दोहराना चाहते हैं, जो थोड़े दिन पहले इन्होंने लोकसभा में अपनाया था, जब देश की आधी आबादी के साथ उस समानता के कानून का विरोध करके इन्होंने अपनी असलियत को दिखाने का काम किया है. विपक्ष की हालत थाली में रखे उस बैगन की तरह है, जिसका कोई सिद्धांत नहीं है और न ही कोई विचार है, यह वर्तमान की हालत विपक्ष की है. (मेजों की थपथपाहट) (व्यवधान)......
अध्यक्ष महोदय, मैं हमारे अपने विपक्ष के साथियों से पूछना चाहता हूं, हम अपने दो बेटों को अलग-अलग दृष्टिकोण से क्यों देखते हैं, एक ही संप्रभू राष्ट्र में नागरिकों को अलग अलग मजहबी चश्में से देखने की वकालत क्यों होना चाहिए, मैं डॉ. अंबेडकर जी की संविधान सभा की उस भावना के बलबूते पर देश की अखंडता के लिये समान नागरिक संहिता को अपना समर्थन, अपनी सरकार और अपने मित्रों के साथ देना चाहता हूं, दशकों तक बाबा साहब ने उस सपने की फाईल को दबाकर रखने वालों के खिलाफ और मजाक बनाने वाले लोगों के खिलाफ, संविधान की किताब लहराने वाले लोगों के लिये आज का दिन वह सबक है, अब आपका पाखंड नहीं चलेगा, जनता के साथ आपको रहना पड़ेगा, आखिर दो-मुंहा रोल नहीं चलने वाला है, यूसीसी में आपके मुंह पर लगने वाला ताला यह आपको कभी माफ नहीं करने वाला है. मैं खुली चुनौती देना चाहता हूं, बाबा साहब के सम्मान में अगर रद्दी भर भी सम्मान हो, तो कृपा करके, इस समान नागरिक संहिता को समर्थन आपको करना चाहिए, यह अपील मैं आपसे करना चाहता हूं. माफ करना, आपको चुना सबने है, लेकिन इस प्रदेश की आधी माताओं, बहनों के साथ खासकर धर्मों के आधार पर जो आपने अभी तक व्यवहार किया है, यह आज एक रूपता की तरफ ले जाने का पुण्य मौका आपको मिल रहा है, आप आज भी समझे तो आपकी पीढि़यां आपको दुआ दे पायेंगी, अन्यथा आपके इस पाप से आप सदैव कलंकित होने वाले हैं, कोई इस कलंक से आपको मुक्त नहीं कर सकता है. (मेजों की थपथपाहट) (व्यवधान)......
अध्यक्ष महोदय, खासकर मैं हमारे मित्रों से बोलना चाहता हूं, आप अपना कांग्रेस का 1959 का सन् देखें, वर्ष 1959 में इसी विधानसभा के अंदर कांग्रेस के ही मित्रों ने कृषि भूमि के बंटवारे के बलबूते पर आपने यह कानून पास कराया था, आपने इसी विधानसभा के अंदर, यह वर्ष 1959 का रिकार्ड है, जब आपके माध्यम से हमारे बीच यह कानून कांग्रेस ने भू-राजस्व की धारा 164 के अंतर्गत कृषि भूमि में उत्तराधिकार के लिये एक समान व्यवस्था बनाई थी, इसका सीधा अर्थ है सन् 1959 में स्वयं कांग्रेस ने माना था कि नागरिक मामलों में समान कानून का न होना यह माताओं, बहनों और एक धर्म विशेष के साथ अन्याय है, लेकिन अध्यक्ष महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि दो साल के अंदर जो कानून आप पारित करते हो, क्या सांप सूंघ जाता है आपको, कौन सा मच्छर आपको काटता है कि आपको अक्ल आ जाती है, आपका कानून आप बदल देते हो. मध्यप्रदेश माफ नहीं करने वाला कांग्रेस के इस दोहरे चरित्र को. मैं पूछना चाहता हूं कि आपने जो पाप किया है इसको पुन: धोने का मौका है. मैं एक बात और बताना चाहता हूं सच्चाई तो इस बात की है कि जब भी देशहित में समानता, वोट बैंक में से किसी को एक चुनना पड़े तो कांग्रेस ने बार-बार वोट बैंक के आधार पर हिन्दू मुसलमान का चश्मा लगाकर के देश को गलत मार्ग में पहुंचाया है. मैं एक और बात बताना चाहता हूं, हमारे बीच अध्यक्ष महोदय इनका दोहरा चरित्र केवल देश की सीमा तक नहीं है, अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी यह रिकार्ड बना है. वर्ष 1994 में कांग्रेस की केन्द्र सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर जाकर के एक समान नागरिक कानून के प्रस्ताव का समर्थन करके अपने लिये तालियां जुटाने का प्रयास किया, लेकिन आज उससे पीछे आते हुये कांग्रेस अपनी असलियत बता रही है. कांग्रेस का यह पाप कांग्रेस को ले डूबेगा, कांग्रेस इससे बचने वाली नहीं है. आज भारत ने अनुच्छेद 5 और अनुच्छेद 16 के लिये ऐसी वैधानिक घोषणायें और आरक्षण लागू किया मुझे इस बात की प्रसन्नता है. विवाह, उत्तराधिकार परिवार और माता बहनें खासकर मुस्लिम बहनों के लिये सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1985 में फैसला दिया, सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा गया कि तलाकशुदा महिलाओं के लिये उनके भरण पोषण का अधिकार होना चाहिये. हमारी सरकार ने इस बात को धर्म से ऊपर लिया है, लेकिन वोट के भूखे राजनीतिक दलों ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को भी धता बताने का काम किया है, यह इनका इतिहास है, देश इनको कभी भूलेगा नहीं. देश की आधी आबादी को उनका अधिकार देने के लिये नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जिस प्रकार से इन्होंने लज्जित करने का काम किया है, यह बड़े दुर्भाग्य की बात है. समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन में विलंब भी कांग्रेस के सिर पर सबसे बड़ा कलंक साबित होगा, मैं इस बात को बताना चाहता हूं. कांग्रेस हमेशा अपने वोट बैंक के बलबूते पर कुप्रथाओं को बढ़ाने में विश्वास करती है. कांग्रेस को इसका जवाब देना पड़ेगा. समान नागरिक संहिता में आज आप आंकड़ा उठाकर देखें जो माननीय सुप्रीम कोर्ट की अध्यक्षता में पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में बनी कमेटी में इसी प्रदेश में 76 माता बहनों ने, मुस्लिम बहनों ने अगर इसका समर्थन किया हो यह अपने आप में कांच बताने के बराबर है, आपको इसका जवाब देना पड़ेगा. 40 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम भाईयों ने भी इसका समर्थन किया है, यह भी उल्लेखनीय है.
लाखों बार गगरियाँ फूटीं, शिकन न आई पनघट पर,
लाखों बार कश्तियाँ डूबीं, चहल-पहल वो ही है तट पर.
गम की उम्र गाने वालों, लौ की आयु घटाने वालों,
लाख करे पतझड़ कोशिश पर, उपवन वहीं मरा करता है.
अब यह सदैव का इतिहास है.
कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करते हैं.
हम वह सारे देशभक्त हैं, जो इस मार्ग पर चला करते हैं.
यह सौभाग्य की बात है. आज के इस अवसर पर प्रदेश के नागरिक समानताओं के आधार पर आज मैं सदन के माध्यम से प्रदेशवासियों को इस विधेयक की यात्रा के बारे में अवगत कराने जा रहा हूं. तुष्टिकरण की राजनीति के कारण से समाज के कुछ वर्गों खासकर हमारी बहनों ने जो अन्याय झेले हैं, कांग्रेस के लिये यह उनके पाप को धोने का मौका है. धोखा, झूठ, बेईमानी से रिश्ते नहीं निभाते, जैसे तैसे निभाये जाते हैं, हमने देखा है कि अपने हितों के लिये पुरूषों के पास तो कानून था, लेकिन बहनें अपने अधिकार के प्रति लड़ रहीं थीं, लेकिन उनके पास कोई व्यवस्था नहीं थी. माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में जब देश में एक विधान की बात कही गई तो मुझे कबीरदास जी की वह बात याद आई कि ‘’काल करे सो आज कर, आज करे सो अब’’ इसी भावना के आधार पर हम बढ़ रहे हैं, मुझे इस बात के लिये भी प्रसन्नता है. थोड़े दिन बाद राखी का त्यौहार आने वाला है और राखी के समय लाड़ली बहनों की बंधने वाली राखियां कोई हिन्दू मुसलमान में फर्क नहीं करती हैं. न हमारी सनातन संस्कृति सिखाती है मुझे इस बात पर गर्व है. मुझे तो केवल अपनी बहनों का चेहरा याद है. कांग्रेस चाहे जो कहे हमारी सब धर्मों की बहनों के लिये हमारी प्रतिबद्धता कायम रहेगी.अभी मैं आसन से सुन रहा था कांग्रेस के एक विधायक ने कहा कि 6 महिने से कमेटी बनी आप यहां वक्तव्य दे रहे हो. आप चुने हुए विधायक हो. आप आंकड़ा तो देखो. यह समिति बनी 27 अप्रैल,2025 को और माननीय न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई में बनने वाली समिति का गठन जब वह 27 अप्रैल को बनी यह तो आप नींद में बोल रहे हो. आपको होश ही नहीं कि आप कर क्या रहे हो. आपकी बात आप तक रखते हुए मैं दोबारा इस तरफ आता हूं. क्या इस समिति द्वारा विभिन्न व्यक्तिगत और अप्रचलित कानूनों का तुलनात्मक अध्ययन किया गया. अन्य राज्यों के यूसीसी माडलों की व्यवहारिक उपयोगिता को भी परखा गया. मध्यप्रदेश के नागरिकों को सुदृढ़ विधिक ढांचा बनाया गया. मैं आज के इस अवसर पर अध्यक्ष महोदय, लोकतंत्र में जनभावना को सर्वोपरि मानते हुए आज हमारी सरकार ने समाज के अंतिम पायदान पर खड़े नागरिकों के विचारों को भी इस संहिता में स्थान दिया है. लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनभागीदारी सुनिश्चित करने और पारदर्शी बनाने के लिये विशिष्ट शासकीय वेब पोर्टल तैयार कर लांच किया गया. वह लोग जो इसे थोपा हुआ कानून बता रहे हैं वह कान खोलकर सुन लें प्रदेश में 3 करोड़ 49 लाख से ज्यादा नागरिकों को हमारी सरकार ने विमर्श हेतु सुझाव के लिये आमंत्रित किया था. मुझे गर्व है इस बात का कि मध्यप्रदेश के विधायी इतिहास में पहली बार विधिक मसौदों को 10 लाख से ज्यादा लोगों का समर्थन मिला और उनकी जनभागीदारी हुई है. जिला स्तर पर,राज्य स्तर पर 50 से अधिक प्रापर बैठकें की गई हैं. हमारी जिला स्तरीय बैठकों के माध्यम से 1164 से अधिक विशिष्ट और व्यवहारिक सुझावों का संकलन किया गया. अध्यक्ष महोदय, सम्मानित सदस्यों को यह बताना अत्यंत आवश्यक है कि प्रदेश की जनता ने इस ऐतिहासिक विधिक सुधार पर किस प्रकार मोहर लगाई. मैं इसके आंकड़े देना चाहूंगा. राज्य की 93 प्रतिशत से अधिक नागरिकों ने इस एतिहासिक मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता का समर्थन किया है यह हमारे लिये सौभाग्य की बात है. 92 परसेंट नागरिकों ने पुरुषों और महिलाओं के लिये समान कानून के पक्ष में खड़े होकर अपनी प्रतिबद्धता बताई है मुझे इस बात की प्रसन्नता है. 91 परसेंट से अधिक लोगों ने पुरजोर अनुशंसा करते हुए समान नागरिक संहिता के माध्यम से उन सभी भेदभावपूर्ण तलाक कानूनों को समाप्त किया जो लैंगिक आधार पर विसंगति पैदा करते हैं. महिलाओं के विधिक अधिकारों का हनन करते हैं. 92 प रसेंट से अधिक जनता ने सुझाव दिया कि सभी समुदायों की बेटियों और माताओं को सम्पत्ति और उत्तराधिकार के समान कानून होना चाहिये. जब आनंद आये तो धूमधाम से आना चाहिये. हमारे अपने आनंद के साथ आज का यह इतिहास बन रहा है. अध्यक्ष महोदय, 90 परसेंट से अधिक नागरिकों ने स्वीकार किया है कि अलग-अलग कानूनों से जटिलताएं उत्पन्न होती हैं. प्रताड़ना होती है जो राजनीतिक दल इस प्रगतिशील कानून को किसी विशिष्ट वर्ग के इतिहास में बताकर भ्रम फैलाना चाहते हैं उनके लिये गोस्वामी तुलसीदास पहले ही लिख गये हैं " जाकी रही भावना जैसा प्रभु मूरत देखी तिन तैसी" आपकी निगाह तिरछा देखे तो दुनिया उसको तिरछी नजर आती है. तुम्हारी निगाह खराब है भाई,निगाह सुधार लो. यह अभी भी समय है. इस संहिता को समाज के हर वर्ग का हर मजहब का अभूतपूर्व समर्थ प्राप्त हुआ. आस्था से लेकर आर्था तक,एना से लेकर गुर्लिन तक हमारी सभी बहनें बड़ी संख्या में इस संवैधानिक कानून सुधार के साथ खड़ी हैं. अध्यक्ष महोदय, सबसे महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय पहलू यह है कि 72 परसेंट से ज्यादा वैसे तो 74 परसेंट से ज्यादा मुस्लिम बहनों ने और 38 परसेंट से ज्यादा मुस्लिम भाईयों का समर्थन इस बात का जबर्दस्त प्रमाण है कि यह सुधार लागू होना चाहिये. 95 प्रतिशत से अधिक हिन्दु पुरुष और 96 परसेंट से हमारी हिन्दू बहनों ने सहमति दी है. 90 प्रतिशत से अधिक ईसाई पुरुष,95 प्रतिशत से अधिक ईसाई बहनों ने भी यूसीसी का समर्थन किया है. यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है. आज जब मैं आपकी तरफ देखता हूँ तो सिक्ख भाई-बहनों, क्या हिन्दू, क्या मुसलमान, क्या सिक्ख, क्या ईसाई, सब उसका समर्थन कर रहे हैं. लेकिन वोट के अंधे अपने चश्मे से देखने वालों आपको दुनिया देख रही है. यह आपके सोचने का विषय है. मैं एक बार फिर आपसे निवेदन करता हूँ कि आइये, सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास जीतने का जनता के लिए जनता के सुझावों के बलबूते पर जनता के हित में तैयार किया कानून आपको समर्थन के लिए बुला रहा है. यह आपकी आत्मा पर निर्भर करता है. आपकी अंतर्मन की आत्मा को इस कानून के साथ आप जबरदस्ती पार्टी के अध्यादेश के निर्णय के आधार पर विरोध कर रहे हैं. आपका सबका समर्थन मैं आपकी आंखों से समझ रहा हूँ. आप इससे अलग होने वाले नहीं हैं. हमारे लिए तो हम भारत के लोग, जिसकी प्रस्तावना संविधान के माध्यम से लिखी गई है, संपूर्ण राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोते हुए प्रत्येक नागरिक के लिए सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय और प्रतिष्ठा तथा अवसर की समानता की बात संविधान में लिखी गई है. ये दुनिया के सामने स्पष्ट है. मुझे कहते हुए दु:ख होता है कि असमानता का खामियाजा जो हमारी माता-बहनों को भुगतना पड़ा, उसमें सबसे बड़ा योगदान कांग्रेस और कांग्रेस की मानसिकता के कारण है. हमारे देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी बार-बार धार्मिक प्रथाओं के आधार पर आधी आबादी को उनके मूलभूत मानवीय और कानूनी अधिकारों से वंचित नहीं करने की बात कही है.
अध्यक्ष महोदय, इसी को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता का प्रशासनिक और विधिक ढांचा चार आधार स्तंभों पर विवाह, विवाह पश्चात् विच्छेद, उत्तराधिकार और लिव-इन पर आधारित है. अध्यक्ष महोदय, मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि नागरिकों के धार्मिक समारोह, अनुष्ठान, परंपराएं, रीति-रिवाज, सब पहले की तरह चलते रहेंगे. इसमें कोई हस्तक्षेप होने वाला नहीं है. ये हमारी अपनी प्रतिबद्धता है. सभी धर्मों का सम्मान और आदिवासी भाई-बहनों को इससे मुक्त करते हुए हमारी प्रतिबद्धता हम जाहिर करते हैं कि हां, हम अपने राज्य के अंदर सबकी बेहतरी के लिए काम कर रहे हैं. विवाह भी अपनी पद्धति से कीजिए. विधिक और कानूनी ढांचा भी संपूर्ण मध्यप्रदेश में सबके लिए एक समान होगा. विवाह के तरीके अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन कर्तव्य, नियम और शर्तें सबके लिए समान होने वाली है. प्रदेश में विवाह की न्यूनतम आयु पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष प्रत्येक समुदाय पर लागू होगी. तय आयु सीमा से कम उम्र को बाल विवाह मानने और दण्ड का प्रावधान भी आज के लिए सम-सामयिक होगा. मध्यप्रदेश की धरती पर होने वाले प्रत्येक विवाह का शासकीय पंजीयन कराना भी अनिवार्यत: होगा. निश्चित अवधि के अंदर रजिस्ट्रेशन न कराने पर जुर्माने का प्रावधान भी किया गया है. इससे प्रशासनिक रूप से अभिलेख पूर्ण पारदर्शिता के साथ काम करेंगे. महिलाओं को उनके वैवाहिक अधिकारों का अचूक विधिक कवच मिलेगा. मध्यप्रदेश की धरती पर केवल वही रहेगा, जिसने एक विवाह किया है और एक जीवनसाथी के रहते हुए दूसरे विवाह की अनुमति नहीं होगी. अर्थात् हम बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रहे हैं. कुछ लोग महिलाओं को खिलौना मान लेते हैं. न तो महिलाओं की शारीरिक परेशानियों से उनका लेना-देना, न उनके मानसिक तनाव की कोई चिंता होती है. अब बहनों का जीवन नरक बनाने वालों के लिए इस धरती पर जहन्नुम में पहुँचाने का रास्ता हमारी सरकार खोलने वाली है. यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है. कोई भी व्यक्ति न्यायालय की परिधि से बाहर जाकर मनमाना विवाह और विच्छेद नहीं कर सकेगा. अर्थात् शब्द के आधार पर केवल तलाक, तलाक, तलाक कर दे, यह बहनों के साथ मजाक है. हम इसके खिलाफ हैं और यह हमारे इस कानून के आधार पर प्रतिबंधित रहेगा. इन संबंधों को प्रशासनिक नियंत्रण में लाया जा रहा है. लिव-इन के लिए भी शासकीय विधिक पंजीकरण आवश्यक होगा. यदि कोई विवाहित व्यक्ति पत्नी को धोखा देकर चोरी-छिपे या किसी और प्रकार से लिव-इन में संबंध बनाता है तो 5 साल के लिए हमारी सरकार उसको जेल में डालने वाली है. यह हमारी प्रतिबद्धता है. इसी के साथ-साथ मध्यप्रदेश में धर्म के आधार पर अधर्म नहीं चलेगा, जब मन में आया रख लो, जब मन में आया, तब छोड़ दो. यह मानसिकता नहीं चलने वाली है. सभी के लिये समान आधार, लैंगिक रूप से समान अधिकार, संपत्ति के पैतृक अधिकारों में पुत्र और पुत्रियों को बराबर अपना-अपना हिस्सा मिलेगा. विधिक रूप से महिलाओं की संपत्ति का हस्तांतरण भी उसी प्रकार से होगा, जैसे पुरूषों के लिये होगा. यह माताओं और बहनों के लिये समानता का अधिकार है. (मेजों की थपथपाहट)
माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारी सांस्कृतिक, भौगोलिक, विविधता का सम्मान करते हुए अनुसूचित जनजाति एवं संरक्षित रुढि़गत आधारों पर विशिष्ट समुदायों को इस संहिता के दायरे से मुक्त किया गया है. संविधान के अनुच्छेद 44 में वर्णित नीति-निर्देशक तत्वों के अनुरूप राज्यों के सभी नागरिकों में सामाजिक समरसता एवं लैंगिक न्याय सुनिश्चित करने के पावन ध्येय के साथ, हमारी सरकार मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता सम्पूर्ण प्रदेश में लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है. यह कदम अनुच्छेद 14 के अनुसार नागरिकों के समान विधिक अधिकार और समान अवसर सुनिश्चित करने का एक पुनीत प्रयास है. आज के इस शुभ अवसर पर, मैं फिर आपसे अपील करना चाहूँगा कि समान नागरिक संहिता संशय, शंका और भय के लिए कोई जगह नहीं देती है. यह हमारे लिये सौभाग्य की बात है. अब मध्यप्रदेश की धरती पर समान नागरिक, समान अधिकार, समान न्याय और समान अवसर के नये सूर्योदय का मौका है. मैं प्रदेश के साढ़े 8 करोड़ लोगों की ओर से कहना चाहूँगा कि जिस प्रकार विविधता में एकता को हमने अपनी पहचान बनाई है, ठीक इसी प्रकार से विविध एकता को स्वीकार करना होगा, जैसा कि श्रद्धेय अटल जी ने कहा कि ‘कदम मिलाकर चलना होगा’, मैं सभी राजनीतिक दलों से सामाजिक और अलग-अलग प्रकार की समितियों के अलग-अलग पदाधिकारियों से अपील करना चाहूँगा कि महिलाओं के सम्मान और राष्ट्रीय एकता के प्रतिबिंब के आधार पर इस कानून को आप सब समर्थन दें. (मेजों की थपथपाहट)
माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सामाजिक समानता का विधेयक है, सामाजिक समरसता का विधेयक है, महिला सशक्तिकरण का विधेयक है, समान अवसर देने वालों का विधेयक है, समान न्याय देने वाला विधेयक है. महिलाओं पर सदियों से हो रहे अन्याय एवं अत्याचार को जड़ से खत्म करने वाला विधेयक है. राष्ट्रीय एकता, अखण्डता और बंधुता को बढ़ाने वाला विधेयक है. मैं आपको बताना चाहूँगा कि यह उल्लेखनीय है कि इसी मध्यप्रदेश की धरती पर इस विधेयक को पेश करने के पहले, हमारे प्रदेश के अन्दर अगर शरिया कानून लगाने वाली कोई जगह थी, तो वह जगदीशपुर थी. हमारे लिये यह दुर्भाग्य की बात है, जहां मध्यप्रदेश की धरती पर एक ऐसा कानून लगाने का प्रयास किया गया, जो धर्म विशेष के आधार पर पूरे प्रदेश की फिजा बदलता है, उसका परिणाम भी देखा. कांग्रेस के शासनकाल में शरिया कानून भोपाल की धरती पर इस्लामपुर बनकर जो लागू हुआ, वह परिणाम निकला. वर्ष 1947 में जब पाकिस्तान में मिलने की बात आई तो इसी मानसिकता के लोग भोपाल की पूरी एस्टेट को पाकिस्तान के साथ मिलाना चाहते थे. उस भावना के आधार पर, उन्हें डूब मरना चाहिए, आज यह पूरी मानसिकता बदलकर के हमारी सनातन संस्कृति की ‘एक देश,एक विधान’, सर्वे भवन्तु सुखन: सर्वे सन्तु निरामय: सर्वे भद्राणि पश्यन्तु. इस पवित्र वाक्य के आधार पर पूरे सदन की ओर से, मैं इस विधेयक का समर्थन करता हूँ और आपके माध्यम से, मैं अपील करता हूं कि जब यह विधेयक लागू हो जायेगा, तो मध्यप्रदेश में जो एक से ज्यादा जो विवाह करेगा, वह जेल जायेगा, उसको यहां छूट नहीं होने वाली है. मेरी अपनी ओर से एक बार फिर पक्ष और विपक्ष के सभी मित्रों का आभार भी मानता हूँ. आप कर्मकांड के लिये विरोध कर रहे हो, आपकी आत्मा हमारे साथ है, निश्चित रूप से हम सब मिलकर आज एक नया इतिहास बना रहे हैं. आदिवासियों के सम्मान में, आदिवासियों के सम्मान में. बहुत-बहुत धन्यवाद, माननीय अध्यक्ष महोदय. (मेजों की थपथपाहट)
अध्यक्ष महोदय – कृपया शांति बनाये रखें. सभी लोग अपने स्थान पर बैठ जाएं. मैं नेता प्रतिपक्ष जी सहित हमारे सदस्यगण को भी आग्रह करूँगा कि सभी अपने स्थान पर बैठ जाएं.
(...व्यवधान...)
अध्यक्ष महोदय- प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 पर विचार किया जाए.
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.
___________________________________________________________
अध्यक्ष महोदय- अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.
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अध्यक्ष महोदय- खण्ड 2 में दो माननीय सदस्यों द्वारा समान संशोधन दिए गए हैं.
श्री आरिफ मसूद और श्री आतिफ आरिफ अकील, माननीय सदस्य- अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि खण्ड 2 के उपखण्ड (2) के पश्चात् उपखण्ड (3) निम्नानुसार जोड़ा जाए, अर्थात् :-
“उपखण्ड (3) उन व्यक्तियों के समूहों पर जिनके परंपरागत अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 29 के अंतर्गत संरक्षित हैं, लागू नहीं होगी.”
अध्यक्ष महोदय- मैं श्री आरिफ मसूद जी से कहना चाहता हूं कि अगर आप संशोधन सदन में पेश करना चाहते हैं तो अपनी सीट पर जाकर, अपनी बात रख सकते हैं. यदि आप अपने संशोधन के पक्ष में कुछ कहना चाहते हैं, तो आप अपनी सीट पर जाकर अपनी बात कह सकते हैं.
(...व्यवधान...)
श्री आरिफ मसूद- अध्यक्ष महोदय, मैं, संशोधन दे चुका हूं और मैं आपसे निवेदन भी कर चुका हूं कि उसे प्रवर समिति में भेजा जाए.
(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा गर्भगृह में नारेबाजी की जाती रही.)
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)- अध्यक्ष महोदय, इसे प्रवर समिति को दिया जाना चाहिए. इतना बड़ा बिल है.
(...व्यवधान...)
अध्यक्ष महोदय- आप संशोधन प्रस्तुत कर रहे हैं ?
श्री आरिफ मसूद- अध्यक्ष महोदय, मैंने संशोधन दिया है.
अध्यक्ष महोदय- संशोधन पुन: सदन में बोलना पड़ता है कि मैं संशोधन प्रस्तुत कर रहा हूं.
श्री आरिफ मसूद- अध्यक्ष महोदय, मैंने प्रस्तुत किया है.
अध्यक्ष महोदय- संशोधन प्रस्तुत हुआ, प्रश्न यह है कि खण्ड 2 के उपखण्ड (2) के पश्चात् उपखण्ड (3) निम्नानुसार जोड़ा जाए अर्थात् :-
“उपखण्ड (3) उन व्यक्तियों के समूहों पर जिनके परंपरागत अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 29 के अंतर्गत संरक्षित हैं, लागू नहीं होगी.”
जो प्रस्ताव के पक्ष में हों वे कृपया हां कहें.
जो प्रस्ताव के पक्ष में हों वे कृपया ना कहें.
ना की जीत हुई ?
ना की जीत हुई.
संशोधन अस्वीकृत हुआ.
(...व्यवधान...)

(...व्यवधान...)
(मेजों
की थपथपाहट)
(2) मध्यप्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026

अध्यक्ष महोदय- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.
(...व्यवधान...)
अध्यक्ष महोदय- सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित.
(3.10 बजे सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित की गई.)
3.29 बजे सभापति महोदय (डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय) पीठासीन हुए.
श्री पंकज उपाध्याय (अनुपस्थित)
श्री नीलेश उइके (अनुपस्थित)
श्री दिनेश गुर्जर (अनुपस्थित)
श्री अभय मिश्रा (सेमरिया)—माननीय सभापति महोदय, मध्यप्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026 के संबंध में मैं अपने विचार रख रहा हूँ. यह बहुत पुराना एक्ट है जब देश स्वतंत्र नहीं हुआ था. जब अंग्रेजों का शासन था तो वे नावों पर, बंदरगाहों पर टोल लगाया करते थे. इसी तरह उन्होंने सड़कों पर भी टोल बनाया था. इंडियन टोल एक्ट 1851 उनका बना रहा. 1853 में लॉर्ड डलहौजी ने PWD की स्थापना की. हालांकि उन्होंने रेलवे और रेवेन्यू एक्ट की भी स्थापना की थी. उसके बाद जो हमारी केन्द्र सरकार ने टोल एक्ट बनाया यह मुख्य रुप से उसी से चल रहा था. अभी हमको याद आई है कि हम इसको रीवील करें. स्टेट हाइवे में पुलों के जाल बिछाएं. एक तरह से यह अभी हमारे ध्यान में आया है. इसमें उद्देश्य एवं कारण मेन बात है. मध्यप्रदेश राजमार्ग अधिनियम 2004 जो अभी चल रहा है. इसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो राज्य सरकार को राज्य के राजमार्गों के विकास, संरक्षण, प्रबंधन, संचालन हेतु अनुबंधों के माध्यम से उपयोगकर्ता शुल्क अधिरोपित करने और उसकी वसूली करने में सक्षम बनाता हो. इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि हम सब देखते हैं कि नेशनल हाइवे जो केन्द्र की सरकार करती है, एनएचआई को टोल उसके अलावा हम राजमार्गों में हम टोल वसूल रहे हैं. इससे यह प्रतीत होता है कि यह नियमानुरुप नहीं थे. यदि कोई व्यक्ति कोर्ट में जाता तो इसको रोक सकता था. भारत देश का यह दुर्भाग्य है कि जब कोई नागरिक यहां पर जब रोड का उपयोग करता है तो सबसे पहले वो कार या मोटर साइकिल खरीदता है. उसमें जीएसटी देता है. इसके बाद जब वो आरटीओ में पंजीयन कराने जाता है तो जीएसटी पर जीएसटी देता है. मान लीजिए कार की कीमत पर 18 या 40 प्रतिशत जीएसटी जुड़ा हुआ है तो जो आरटीओ के पंजीयन का शुल्क होगा उस टेक्स को हटाकर टेक्स लगना चाहिए. लेकिन कुल पर टेक्स लगता है. यह नेचुरल जस्टिस के खिलाफ है. लेकिन जो गाड़ी बेचने वाली बहुत सी संस्थाएं हैं उन्होंने इस संबंध में बातें कीं. इस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया तो उन्होंने सोचा कि मेरी जेब से क्या जाता है. मुझे तो उपभोक्ता से लेना है. एक कहावत है अभी हम लोग प्रेक्टिकल रुप से सरकार में भी देखते हैं. जब कसाई मुर्गे को वो करता है तो बाकी के मुर्गे दाना चुनते रहते हैं और वो अलग-अलग सभी को निपटाता रहता है. दुनिया में यह प्रक्रिया चल ही रही है. हम टोल पर बात करते हैं कि हमें यह अधिकार नहीं था अब हम इसमें धारा 8 जोड़ने आए हैं. राजमार्गों पर प्रदान की जाने सेवाओं एवं लाभों का शुल्क और फिर इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए राज्य सरकार किसी राजमार्ग. इसमें दो पार्ट हैं. मुख्य बात यह है कि हम रोड टेक्स अलग देते हैं. बड़े-बड़े पुलों का सरकार का अलग टेक्स देते हैं. अभी हम अंदर की सड़कें जिनको हम बेहतर मानते हैं अब हम उस पर भी टेक्स देंगे. इसमें यहां तक तो बात ठीक थी. हालांकि यह भी अन्याय ही है कि भारत देश का आदमी घर से निकले तो 1 हजार रुपए जेब में टोल टेक्स देने के लिए हो तब वो भोपाल तक पहुंचेगा. इसमें दुख वाली बात यह है कि जो बिजनेस का केन्द्रीयकरण हो रहा है. आज यदि सब्जी भी बेचना है तो रिलायंस की छाया के नीचे बेचना है. रिलायंस के स्टोर से कम्पीट करना है. हर चीज में (XX) और (XX) हैं. हम दो हमारे दो. (XX), (XX) की छाया में उन्हीं का यह देश हो गया है. उन्हीं के नीचे बिजनेस की पूरी संभावनाएं हैं. आज केन्द्र सरकार क्या कर रही है. पहले टोल निकलते थे तो 500 करोड़ रुपए या 1000 करोड़ रुपए के निकलते थे. आज 4-4 हजार करोड़ों के पैकेज हैं. (XX), (XX). मुख्य रुप से (XX) जिन्होंने कभी इस सेक्टर में काम नहीं किया. आज वो बड़े पैकेज लेते हैं और नीचे कर रहे हैं. अभी एक और योजना पिछले 5-7 सालों से चली है कि बड़े-बड़े पैकेज बना दो. कुछ रोडों पर यह प्रयोग हुआ भी है. जैसे कांडला बंदरगाह तरफ हुए कि 4-4 हजार करोड़ रुपए की रोड बना दो. उनका काम इकट्ठा एक आदमी को दे दो और उससे पूरा 10 साल का मेंटेनेंस वसूलो. यह पैसा कमाने की या खींचने की चाहत है इसका कोई अंत नहीं है. बड़े लोगों की आत्मा कभी भरेगी नहीं. अब उनकी ट्रेन हो गई, एयरपोर्ट हो गई हर जगह कब्जा हो गया. अब छोटी-छोटी रोड भी मध्यप्रदेश की, केन्द्र का दबाव तो है ही राज्य सरकार के ऊपर कि हमारे (XX) जी के लिए सोचो, (XX) जी के हिसाब से कानून बनाओ, उनके लिए सुविधा बनाओ, तो किस एक्ट के तहत क्योंकि कोई कोर्ट न चला जाए तो उनके लिए यह व्यवस्था बनाई जा रही है कि इस एक्ट में धारा 8 के अंतर्गत इसका प्रावधान कर दो ताकि इन छोटी-छोटी रोडों का भी हम ग्रुप बनाकर एक बड़े ग्रुप के रूप में लगा दें और यह लोग इस पर टोल ले लें और अंत में यही हो. हम किस दिशा में जा रहे हैं यह हम सबको दिख रहा है.
सभापति महोदय, बिन्दु 8 पर आ जाते हैं कि 8 है क्या, तो 8(क) में राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना द्वारा राजमार्गों के संपूर्ण या किसी भाग के उपयोग के संबंध में प्रदान की गई सेवाओं या लाभों के लिए इस संबंध में बनाए गए नियमों द्वारा निर्धारित दरों पर शुल्क लगा सकेगी. यह शुल्क अधिरोपित करने का जैसे जब भी कोई कानून बनता है, हम वोट देते हैं तो किसलिए देते हैं, हम इसलिए वोट देते हैं कि कौन सी सरकार हमको कम प्रताडि़त करेगी. यह बात अलग है कि जब सरकार बनती है तो पहले वाली से ज्यादा प्रताडि़त करती है. इसी तरह एक तो यह अधिरोपित करने का हो गया फिर दूसरा आ गया राजमार्ग के विकास और रखरखाव के लिए समझौते करने की राज्य सरकार की शक्ति. यह है मुख्य विषय. आप 8(ख) को पढि़ए. इस अधिनियम में किसी बात के होते हुए राज्य सरकार किसी राजमार्ग के संपूर्ण या उसके किसी भाग के विकास एवं रखरखाव के संबंध में किसी व्यक्ति के साथ अनुबंध कर सकेगी. यह आ गया इसका अंतिम निचोड़ बिंदु कि हम गेंद को कहां से कहां घुमाकर कहां पहुंचाना चाहते हैं. धारा 8(क) में किसी बात के होते हुए भी उपधारा 1 में निर्दिष्ट व्यक्ति राज्य सरकार द्वारा अधिकारिक राजपत्र में अधिसूचना द्वारा निर्दिष्ट दर पर राजमार्ग के संपूर्ण या आंशिक निर्माण, रखरखाव, प्रबंधन, संचालन में शामिल व्यय, निवेशित पूंजी पर ब्याज, उचित प्रतिफल, यातायात की मात्रा, ऐसे समझौते की अवधि को ध्यान में रखते हुए उसके द्वारा प्रदत्त सेवाओं या लाभों के लिए शुल्क एकत्र करने और रखने का हकदार होगा. कुल मिलाकर मैं यह कहना चाहता हूं कि यह जो संशोधन लाया गया है यह किसी जनता के हित के लिए नहीं है, न इससे किसी जनता का भला होना है, न राज्य सरकार का भला होना है, यह किसी व्यापारी को लाभ पहुंचाने के लिए, उद्योगपति को लाभ पहुंचाने के लिए यह पूरी व्यवस्था रची गई है ताकि यहां पर भी (XX) की जो सबसेट्री कंपनियां हैं, उनके जो ग्रुप हैं, उनका यहां कब्जा हो सके और देश एक तरह अप्रत्यक्ष रूप से, आर्थिक रूप से आज पूंजीपतियों का गुलाम तो हो ही चुका है, उसी दिशा में आगे बढ़ाया जा सके इस दिशा में यह काम किया जा रहा है. मैं इसका अपनी ओर से विरोध करता हूं. बाकी मैं जानता हूं कि आपका बहुमत है और इस समय जो आप कह दें, समय आपके साथ है, जो आप करेंगे वही सच है. आप इसको कर लीजिए, पर मैं अपनी ओर से इस पर विरोध दर्ज कराता हूं. धन्यवाद.
श्री रामेश्वर शर्मा (हुजूर) -- सभापति महोदय, राष्ट्रीय राजमार्ग तो चाहिए. अब मुझे नहीं लगता कि हमारी सरकार के माननीय मंत्री जी ने जो प्रस्ताव दिया है सबसे बड़ी बात है कि अभय जी उसके खिलाफ बोल रहे हैं, मुझे तो समझ में नहीं आता है यह कैसे उसके खिलाफ बोल रहे हैं. अभय जी को तो कम से कम नहीं बोलना चाहिए. क्योंकि जो रोडों का विस्तार है, आज आप और हम देखते हैं कि जितने भी नए रोड आधुनिकीकरण से बन रहे हैं, सरकार की अपनी अर्थव्यवस्था होती है लेकिन साथ में हमें और भी व्यवस्थाएं लेना पड़ती हैं. आज मैं भोपाल का ही एक उदाहरण दूं कि इंदौर और भोपाल जो हमारा मार्ग है उस पर टोल टैक्स लगता है, यह बात मानते हैं लेकिन आज से नहीं लग रहा बहुत पहले से कांग्रेस सरकार के समय से ही लग रहा है. लेकिन आज इंदौर जाने वाला आदमी जो संत हिरदारामनगर बैरागढ़ से जाता है, लालाघाटी से थोड़ा सा बैरागढ़ में हमारा एलीवेटेड पुल बन रहा है, कॉरीडोर, वहां थोड़ी प्रॉब्लम हो सकती है लेकिन एक साल बाद वह प्रॉब्लम भी हम हल कर देंगे. आज वह कह सकता है कि दो-सवा दो घण्टे के अंदर वह इंदौर टच हो रहा है, तो यह जो व्यवस्था है यह किसी को उपकृत करने के लिए नहीं है, यह अपने प्रदेश के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए और तत्काल सुविधाओं के लिए, यातायात का समय कम करने के लिए और यह बात सब जानते हैं कि पंडित जवाहरलाल नेहरू जी से लेकर आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी तक भारत के जितने भी प्रधानमंत्री हुए हैं. स्टेट में जितने भी मुख्यमंत्री हुये हैं, मुझे बताओ बिना सड़क के किसी प्रदेश ने विकास किया है . आज हम डंके की चौट पर यह बात इसलिये कहते हैं कि अगर श्रीमान अटल बिहारी वाजपेई जी गांव गांव में प्रधानमंत्री सड़क नहीं बनाते तो राजधानी में झुग्गियों के डेरे लग जाते. आज अटल जी के कारण 200-250 किलोमीटर तक के नागरिक भोपाल में नहीं आते हैं क्योंकि उनको मालूम है कि उनके गांव में सड़क बन गई है वह 30 मिनट के अंदर शहर में आ जायेंगे वह अपनी सब्जी लाकर के यहां पर बेच देंगे, वह दूध लाकर के यहां बेच देंगे और व्यापार यहां पर कर लेंगे और रात को 10 बजे भी अपने घर जायेंगे तो पहुंच जायेंगे तो यह सरकार इस विधेयक के माध्यम से किसी को उपकृत नहीं कर रही है, सरकार अपने प्रदेश के साढ़े आठ करोड़ नागरिकों के साथ साथ दूसरे प्रदेशों से आने वाले लोगों को यातायात सुविधा बढ़ा रही है और इस विधेयक में माननीय राकेश सिंह जी ने कहीं पर भी यह नहीं लिखा है कि इसमें बीजेपी वाले ही चलेंगे, इसमें सभी के लिये है और मैं इसमें बोलना तो नहीं चाह रहा था लेकिन फिर भी मैं इसमें कहना चाहता हूं कि रोड अच्छे बनेंगे लंबे बनेंगे, बल्कि हम तो मंत्री जी से एक निवेदन करना चाहते हैं कि आजकल सरकार 4 किलोमीटर रोड का एक टेंडर निकाल देती है जबकि वह रोड बनाना होता है 30 किलोमीटर का तो हम तो सरकार से कहेंगे कि वह रोड एक बार में एक ही कंपनी बनाये और 30 किलोमीटर रोड का टेंडर निकलें चाहे वह 3 साल में बने, क्योंकि 3 साल में मौटे तौर पर 6 बजट हमारे सामने आ जाते हैं और 6 बजट आते हैं तो अलग अलग समय पर टेंडर होते हैं तो अलग अलग कंपनियां आती हैं , अलग अलग कंपनी आती है तो रोड जो समय से पहले खराब हो जाता है तो उसका मेंटनेंस करने के लिये भी कंपनी को अलग अलग देखना पड़ता है इसलिये सरकार एकजाई लंबी व्यवस्था करके 100, 400 500 किलोमीटर के रोड बनाये और मैं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को आदरणीय लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह जी को और खासकर के भारत सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं हम राजधानी में बैठे हैं और राजधानी भी 5-6 कारीडोर से कनेक्ट होने वाली है. हम कानपुर भोपाल व्हाया जुड़ रहे हैं, हम इंदौर से जबलपुर जुड़ रहे हैं और कई रोड ग्रीन कारीडोर के रूप में भी विकसित हो रहे हैं. हमारे यहां पर भी पश्चिम बायपास रोड सरकार बनाने जा रही है, दूसरा बायपास जो पुराना है उसका उन्नयन करने की भी हमारी तैयारी है, उसको भी 6लेन करने की हमारी तैयारी है. रोड की सुविधा जितनी भी बढेगी उसमें आपके भी अगर कोई हो तो उसको ले आईये, व्यक्तिगत किसी की नाम लेने से कोई लाभ नहीं होता है, भला नहीं होता है, अगर आपको लगता है कि इटली में कोई बड़ा ठेकेदार है तो आप उसको ला सकते हैं, कोई परेशानी नहीं है अगर वह मध्यप्रदेश के विकास में योगदान देना चाहता है, मध्यप्रदेश सरकार के नियमों का पालन करना चाह सकता है तो वह आ सकता है अब मिश्रा जी को हर चीज का विरोध करना है.
श्री बाला बच्चन—अरे आप गुजरात वालों को सम्हाल लो, पूरे देश वालों को सम्हाल लो, पूरे मध्यप्रदेश की नल जल योजना का करोड़ो अरबों रूपये खा गये हैं.
सभापति महोदय- बाला बच्चन जी आप अनुभवी हैं. माननीय सदस्य को बोलने दें.
श्री बाला बच्चन—सभापति महोदय जी, रामेश्वर जी खुद ही चर्चा नहीं चाहते हैं, चर्चा की सार्थकता नहीं चाहते हैं ये.
सभापति महोदय- रामेश्वर जी आप अपनी बात जारी रखें.
श्री रामेश्वर शर्मा—माननीय सभापति महोदय, यह इटली के नाम पर जबकि अभी जो यूसीसी बिल आया था न वह इटली में भी लागू है. इटली में भी बहु विवाह प्रथा नहीं है. इसीलिये मैंने कहा कि एक आदिवासी भी आपको नहीं पूछने वाला. यह अनुसूचित जाति वाले भी नहीं पूछने वाला, हिन्दुस्तान का आदमी जान गया है कि केवल तुष्टिकरण के चक्कर में रहते हो.
श्री लखन घनघोरिया—मेलोडी का भी बता दो भैया, अपने क्षेत्र में भी मेलोडी खिला दो, यहां बात कर रहे हैं.
श्री दिनेश गुर्जर—सभापति महोदय, दिल्ली में हिन्दू छात्र छात्राओं को मारा जा रहा है. आप बचाईये उनको.
श्री रामेश्वर शर्मा- अरे आप तो हमारे साथ में ही बजरंग दल में थे यहां वहां कहां जा रहे हो, यही आ जाओ. सबकी रक्षा करेंगे. तुम वापस आओ सब करेंगे, पहले तो अपन करते ही थे. इसलिये मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि यह जो कानून या प्रावधान लेकर के आ रहे हैं यह प्रावधान जनहित में है. जनहितैषी है. और इसलिये मैं मानता हूं बाला बच्चन जी हो या लखन भाई हों हम जब पार्षद हुआ करते थे तब आप मंत्री हुआ करते थे, इसलिये यह जो टेंडर प्रक्रिया है यह शायद उस समय भी चलती होगी टेंडर प्रक्रिया एक जैसी है इसमें किसी को लाभान्वित नहीं किया जा सकता है. और अगर ऐसा आपने किया होगा तो चल रहा होगा पर मैं यह मानता हूं कि टेंडर प्रक्रिया एक जैसी है उसमें फैरबदल नहीं हो सकता, सरकार चलाने की नीति और नियत में डिफरेंस हो सकता है यह बात हम मान सकते हैं लेकिन सभापति मैं फिर से यह कह रहा हूं कि यह जो विधेयक माननीय मंत्री जी लाये हैं. इस विधेयक के माध्यम से मध्यप्रदेश की सुचारू सरंचना होगी, यातायात को बढ़ावा मिलेगा. हमारी रोड बेहतर होगी और राष्ट्रीय राजमार्गों की कनेक्टिविटी बढे़गी. बल्कि और कई राष्ट्रीय राजमार्ग भी प्रावधानों के तहत आएंगे, खडे़ होंगे और मध्यप्रदेश को 10-20 नए राष्ट्रीय राजमार्ग भी मिलें, ऐसी हम तो प्रार्थना करते हैं और वह मिलेगी. जिसके क्षेत्र से निकल राष्ट्रीय राजमार्ग जाएगा, तो 10-20 हजार वोट तो वैसे ही बढ़ जाएंगे. इसलिए आप तो माननीय डॉ.मोहन यादव जी को धन्यवाद दीजिए. माननीय श्री राकेश सिंह जी को धन्यवाद दीजिए कि वे अच्छा प्रस्ताव लेकर आए. मैं इतना ही निवेदन करना चाहता हूँ, बहुत-बहुत धन्यवाद.
सभापति महोदय – बहुत-बहुत धन्यवाद, रामेश्वर शर्मा जी. श्री ओमकार सिंह मरकाम जी.
श्री भंवर सिंह शेखावत – सभापति महोदय, टेंडर का बटन कहीं भी दबाओ, वह जाता गुजरात ही है. अब आप इटली का बोल रहे हैं, अब आप कहां से लाएंगे. आप जिसको टेंडर करोगे, गुजरात के अलावा किसी को मिलेगा ही नहीं.
श्री रामेश्वर शर्मा – माननीय, आप तो ऐसे नहीं थे..(हंसी)..
श्री ओमकार सिंह मरकाम (डिण्डौरी) – माननीय सभापति महोदय जी, माननीय लोक निर्माण मंत्री जी आज जो विधेयक लाए हैं, इसमें मेरा ऐसा मानना था कि वे सड़कों के विषय में, संपूर्ण विषयों में गंभीर होंगे. जिस तरह से मध्यप्रदेश में दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं, राष्ट्रीय राजमार्गों में जिस तरह से घटनाएं घटित हो रही हैं, प्रतिदिन सूचना मिलती है कि यहां दुर्घटना हो गई. उस दुर्घटना के कारण में जब आप जाएंगे, तो आप पाएंगे कि आपके निर्माण की तकनीकी त्रुटि है, यह प्रमुख रूप से उसका कारण है और उस तकनीकी त्रुटि को सुधारने के लिए माननीय मंत्री को कोई चिंता नहीं है. दुख होता है कि किसी भी व्यक्ति की दुर्घटना में जब मृत्यु होती है, तो दुख सबको होता है और इस बात का एहसास विभाग को होना चाहिए, परन्तु माननीय मंत्री जी को सिर्फ इस बात की चिंता है कि टैक्स कैसे आए. दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कोई चिंता नहीं है.
सभापति महोदय, राष्ट्रीय राजमार्ग का मैं एक सिंपल उदाहरण देना चाहता हूँ. मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि जबलपुर से अमरकंटक की स्वीकृति के लिए आपका प्रयास था, पर मैं हृदय से अपने कष्ट को भी बयां कर रहा हूँ कि वहां पर जितनी दुर्घटनाएं हो रही हैं और अत्यंत महत्वपूर्ण बात यह है कि मां नर्मदा के उद्गम स्थल को जोड़ने वाली सड़क पर जिस तरह से आपने वहां लापरवाही बरती है, उससे अनेक परिवारों का जीवन उजड़ जाता है. आपके ही दल के एक सरपंच हैं. उनका एक बेटा था. उनका घर सूना हो गया. हमने कहा कि आपके मंत्री होने का हमें गर्व था कि हमारे मंत्री जबलपुर के हैं. आपसे हम कुछ सुधार करवा लेंगे, लेकिन उसमें कोई सकारात्मक सुधार नहीं हुआ. हुआ यह है कि मां नर्मदा का पुल आप नहीं बना पा रहे हैं. आपका जो डीपीआर बना था, जिसको आपने कॉन्ट्रैक्ट दिया था, जिसको आपने पैसा दिया, उसने गलत डीपीआर बनाया. उसके कारण काम शुरू नहीं हुआ और जब रिवाइज़ डीपीआर बनी, तो 50 करोड़ रूपए का एक्सटेंशन हो रहा है और इस पर आपका कोई संज्ञान नहीं है.
सभापति महोदय, एक सिलगी नदी है. सिलगी नदी के लिए हम लोग लगातार प्रयास कर रहे हैं, पर आपका कोई सुधार नहीं हो रहा है. दूसरी बात राष्ट्रीय राजमार्गों में जमीनों के अधिग्रहण की है. यह उच्च स्तर का खेल होता है. यह खेल ऐसा होता है कि आपकी जो सर्वे करने वाली कंपनी है, इसमें मेरा तो सीधा यह कहना है कि इसमें सब अधिकारियों की मिलीभगत रहती है. इनको पता रहता है कि कहां से रोड जाना है और वहां पर मुआवजा दे दिया जाता है उनको पहले चिह्नित करा दिया जाता है और उसमें रोड ही नहीं बनता है जिसका आप मुआवजा दे देते हैं, क्या यह आपके कर्तव्य से जुड़ा हुआ विषय नहीं है और ताज्जुब तो तब हो गया सभापति महोदय जी, हमें गर्व हुआ कि हमारे महाकौशल से आप मंत्री बने हैं. तीन महीने हो गये हैं डायवर्शन से आते हैं भटक जाते हैं. मैं अभी आ रहा था फिर उस दिन भटक गया. एक तो छोटा सा पुल गिर गया है सिहोरा के पास अब आप तो मंत्री हैं, आपकी तो दुनिया भर की प्रोटोकाल है. जनता का भी दर्द तो आप समझ लें. भोपाल राजमार्ग में तीन महीना हो गया है, आप उसका 10 परसेंट रिपेयरिंग नहीं कर पा रहे हैं. जबलपुर से लगा हुआ है. मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि क्या आपकी जिम्मेदारी में नहीं है वहां मैंने आते समय आरडीसी के जीएम से बात की तो पता चला कि साहब वह अभी 4 महीने और लग सकता है. धन्य हैं मंत्री जी, आपकी कृपा से. आज आप जो कर लगाने की बात कर रहे हैं. मंडला जिला में आपके गडकरी साहब आए थे.
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) – सभापति महोदय, मुझे लगता है कि मूल विषय पर हम जा ही नहीं रहे हैं.
श्री ओमकार सिंह मरकाम – यह मूल विषय ही है.
श्री राकेश सिंह – मैं तो केवल सुधार दे दूं, फिर आपकी मर्जी है, जो आपको बोलना है वह आप बोलना, फाइनली जो आपको कहना है आप वही कहेंगे लेकिन यह राष्ट्रीय राजमार्ग नहीं है. यह मध्यप्रदेश राजमार्ग अधिनियम है. जिसमें संशोधन आ रहा है, उसमें मैं विस्तार से बताऊंगा लेकिन विषय से चूंकि हम भटक रहे हैं इसलिए मुझे लगा कि इतना मैं बता दूं, बाकी जो आपको कहना है, आप स्वतंत्र हैं.
श्री आशीष गोविन्द शर्मा – अकेले ओमकार सिंह जी नहीं भटके हैं, पूरी पार्टी भटक गई है.
3.51 बजे स्वागत
नरसिंहपुर विधान सभा के ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं का सदन की दीर्घा में स्वागत
सभापति महोदय – दर्शक दीर्घा में नरसिंहपुर विधान सभा के ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राएं सदन की कार्यवाही देख रहे हैं, सदन का उनका हार्दिक स्वागत करता है. अभिनंदन करता है. (मेजों की थपथपाहट)
श्री ओमकार सिंह मरकाम – सभापति महोदय, मैं भी हमारे नरसिंहपुर के छात्र-छात्राओं का स्वागत करता हूं. लोकसभा लड़ा था तो गोटेगांव उसी लोकसभा के अंतर्गत आता है. हम भी स्वागत करते हैं. सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी ने मुझे बहुत व्यवस्थित रूप से कहा कि आप दिशा से भटक गये हैं ठीक है, आपकी जो सोच है वह आपके स्वरूप में है. मैं दिशा से नहीं भटका हूं. मैं मुद्दे पर ही बात कर रहा हूं. आप जो टैक्स की बात कर रह हैं, मैं आपको बता दूं कि एनएच के दो नियम हैं एक नेशनल हाईवे है जबलपुर से अमरकंटक, आपका ही डिपार्टमेंट कर रहा है. एक एनएच डायरेक्ट करता है और एक आप करते हैं. आपका ही डिपार्टमेंट है. आपकी संज्ञान में यह बात ला दूं.
श्री राकेश सिंह – मैं फिर से बता रहा हूं कि यह एनएच नहीं है. कृपया एक बार उसको पढ़ लेते तो आप विषय से नहीं भटकते. यह मध्यप्रदेश राजमार्ग अधिनियम है, फिर भी आप राष्ट्रीय राजमार्ग पर बोलना चाहें तो जरूर बोलें.
श्री ओमकार सिंह मरकाम –जबलपुर से अमरकंटक आप ही बना रहे हैं. सभापति महोदय, अगर दुर्घटनाओं से मृत्यु हो रही है और राष्ट्रीय राजमार्गों में हो रही है. एक तरफ आप पैसा वसूलने के लिए यहां पर गणित चला रहे हैं और मृत्यु हो रही है उस पर आपको भी अगर तरस नहीं आएगा. जनता का विश्वास उठ चुका है. नेताओं के प्रति क्या प्रतिक्रिया होती है और यह जो अधिकारी बैठे हैं इनके शब्द बता दूं. अगर हम आप बात करते हैं तो कहते हैं कि नान टेक्निकल लोग बैठ जाते हो, सदन में 5 साल, हम तो 60 साल वाले हैं. यह बताते हैं और इनका क्या होना है, यह कहते हैं कि मंत्री को जो हम लिखकर देंगे वही बताएंगे. मैं 15 महीने के लिए मंत्री था. मैंने कभी अधिकारियों का लिखा हुआ नहीं पढ़ा. मैंने कहा था कि अगर जिस दिन मैं अधिकारियों का लिखा हुआ पढ़ूंगा, उस दिन छोड़ दूंगा मंत्री पद.
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल)—माननीय सभापति महोदय जबलपुर से अमरकंटक का मार्ग 40 साल तो मुझे ही जाते हुए हो गये हैं. यह तो अभी पैदा हुए हैं. पहली बार तो बहुत ज्यादा अच्छा बन गया है तो उससे भी ज्यादा तकलीफ है.
श्री ओमकार सिंह मरकाम—सभापति महोदय, माननीय कदावर मंत्री के भाव मुझे पता है. आपको दर्द का क्या पता आप तो मजदूरों को भी भिखारी कहते हैं. आपकी दृष्टि अलग है भाई साहब आपने कहा था कि आप भिखारी की तरह आ जाते हो. जब हमने बात की हमारे मजदूरों ने आप भिखारी बोले. आपकी दृष्टि मुझे पता है. माननीय लोक निर्माण मंत्री जी से मेरा अनुरोध है कि हमारी जो स्थिति है.
श्री उमाकांत शर्मा—सभापति महोदय, आप कह रहे हैं कि अधिकारियों के लिखे टिप्पणी की स्वीकृति दी, यह नियम विरूद्ध है, इसकी जांच करवायी जानी चाहिये.
श्री ओमकार सिंह मरकाम—सभापति महोदय, बिल्कुल जांच कराई जानी चाहिये, आपकी सरकार है. मैं कहना कहना चाहता हूं कि साढ़े तीन लाख आदिवासियों के पट्टे आपने निरस्त कर दिये थे. मैंने स्वीकृत कर दिया था आप इसकी जांच कर लो, मैं तैयार हूं. दम है तो जांच कराईये. आप यह समझ लो कि आपने आदिवासियों के साढ़े तीन लाख के पट्टे निरस्त कर दिये थे. माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उनको बेदखल करने का रिकार्ड में है.
सभापति महोदय—आप विषय पर बोलकर अपनी बात समाप्त करें.
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह)—सभापति महोदय, विषय से हटकर बात कर रहे हैं. यह सदन चर्चा के लिये है. चाहे इधर के बैठे लोग हों, चाहे उधर के बैठे लोग हों, सब चर्चा के लिये यहां पर बैठे हुए हैं. यदि आपके पास में कंटेंट नहीं है, तैयारी नहीं है तो कृपया आप बैठ जाईये या अपनी बात पूरी कर लीजिये. आप दायें-बायें की बातें मत करिये आप कम से कम विषय के आसपास तो रहिये कम से कम.
श्री ओमकार सिंह मरकाम—सभापति महोदय, आपके विद्वान सदस्यों की मंशा है उनको बताना भी जरूरी होता है. आप तो बताते नहीं हैं, हम ही बता दिया करें. माननीय लोक निर्माण मंत्री के विषय में बहुत ज्यादा नहीं बोलना चाहिये, नहीं तो कब निपटा दें, रोड़ो को, कोई भरोसा नहीं रहता, कहां स्वीकृति ना दें. प्रहलाद भाई तो नर्मदा किनारे के परिक्रमा वालों के लिये सामुदायिक भवन की मांग करता हूं तो भी वह नहीं देते हैं.
सभापति महोदय—फिर आप दायें-बायें चले गये, बड़ा मुश्किल है.
श्री ओमकार सिंह मरकाम—माननीय लोक निर्माण मंत्री जी से मेरा यह अनुरोध है कि यह जो आपने प्रावधान किये हैं धारा 8 (अ) इसमें आपने लिखा है कि व्यक्ति के साथ आप समझौता कर सकेंगे तो मेरा अनुरोध है कि इसमें व्यक्ति के साथ जहां पर आप लिख रहे हैं. कृपया नियमानुसार लिख दें. व्यक्ति के साथ सीधे, आपका जो शब्द है. अगर व्यक्ति के साथ नियमानुसार समझौता करेंगे, यह बड़ा गंभीर विषय है. एक व्यक्ति के साथ समझौता करोगे और नियमानुसार नहीं करोगे. अगर नियमानुसार आप नहीं करोगे. आपका जो व्यक्ति है, कई जो आरोप लगते हैं हम आपके लिये कह रहे हैं. वैसे हम आपके लिये कह रहे हैं आपको माननीय नहीं है. एक मेरा आपसे अनुरोध है. दूसरा मेरा अनुरोध है कि मध्यप्रदेश के सड़कों की रखरखाव की आपने बात की उसके रख-रखाव की आपके पास तैयारी भी है. वर्तमान समय में जो आपकी सड़क है. मध्य राज्य की जो स्वात्व से जुड़ी सड़कें हैं जिसके रख-रखाव की आपकी जो परिकल्पना है. उस परिकल्पना पर आप जो संशोधन ला रहे हैं.इसमें जिस तरह से एक समूह में रख-रखाव से जुड़ी हुई प्रक्रिया का आप निर्धारण करते हैं, यह बहुत ही गंभीर विषय है. हमारे पढ़-लिखे बच्चे जब इंजीनियरिंग करके आते हैं उनकी नौकरी नहीं लगती है तो व्यावसाय की तरफ बढ़ते हैं. व्यवसाय में जब आप ग्रुप पॉलिसी बनाते हैं. ग्रुप पालिस में बड़े पैकेज को वो कैसे वह चुनौती को फेस करें. बड़ा कठिन है. इसके कारण ग्रामीण स्तर का और शहर के गरीब बच्चे जो छोटे ठेके के माध्यम से मेहनत करके जीवन जीते थे अब वह बेरोजगार हो गये हैं. अब उनको 5 हजारे से लेकर 25 हजार तक कंपनी वाले नौकरी में रखते हैं. माननीय मंत्री जी आपके रख-रखाव में जो छोटे लोग जिनका जीवन से जुड़ा हुआ विषय है. जिनका जीवन से जुड़ा हुआ व्यवसाय चल सकता है.
उसके लिए आप कृपा करके छोटे स्तर पर जैसे कांग्रेस के समय पहले अगर एक इंजीनियर है तो उसको कुछ कंस्ट्रक्शन जैसी योजनाओं में लोन देकर के प्रमोट किया जाता था, जिसमें 30 प्रतिशत सुरक्षा थी, आप ऐसे प्रावधान करें, आप ग्रुप की पॉलिसी बना रहे हैं, ग्रुप की पॉलिसी के कारण जो बेरोजगार युवा है, जो काम करना चाहता है, उसके प्रति आपकी कृपा हो जाए, यह हमारा आपसे अनुरोध है कि इस पर आप जरूर ध्यान देंगे. आपसे एक और अनुरोध है कि सिर्फ आपके विषय में बोलते हैं तो आलोचना बस नहीं करते, हमें भी लगता है कि हमारा जबलपुर का चाहे किसी भी दल का नेता हो, वह पावरफुल हो. वैसे जब हम प्रहलाद भैया और आप लोगों को समझते थे, हमारी उम्मीद थी कि बड़ी नेतृत्व के तार अब जुडेंगे, पर आप लोग यहां है तो यहीं भी संभाल कर रखें, यही हमारा अनुरोध है. एक अंतिम अनुरोध के साथ माननीय लोक निर्माण मंत्री जी आप है, आपसे अनुरोध है, आप नाराज मत होना नहीं तो पता चला कि बजट में जो कुछ काम लिए है, उनको न कटवा देना, ये अधिकारी बैठे हैं, ये सब लिख रहे हैं, हमारा अनुरोध है कि ये संकीर्णता न लाना, हम आपके सुधार के लिए कहे हैं. सभापति जी, बहुत बहुत धन्यवाद.
श्री सोहनलाल बाल्मीक – सभापति जी, हमारे दो नाम रह गए हैं, उनको भी बुला लीजिए, दिनेश गुर्जर और नीलेश उईके.
सभापति महोदय – कोई नहीं रहा अभी नाम पुकारे थे.
श्री अशोक ईश्वरदास रोहाणी(जबलपुर) – माननीय सभापति जी, यह बात तो सच है कि भले ही दबी जुबान से ही सही विपक्ष को इस बात के लिए तो स्वीकार करना पड़ता है कि पूरे प्रदेश में पिछले बीस सालों में अगर सड़कें किसी ने बनाई है तो भाजपा की सरकार में बनी है. ओमकार भैया अभी कह रहे थे. मार्ग भटक जाते हैं..आप क्या भटके, पूरी कांग्रेस अभी एक घंटा पहले यूसीसी में भटक गई थी, तो आपके भटकने की क्या बात है, पूरा विपक्ष ही भटका हुआ है.
सभापति जी, ओमकार भैया ने जो हमारे सीनियर सदस्य और पूर्व मंत्री भी रह चुके हैं, बहुत सारी बातें लोक निर्माण मंत्री और सरकार के बारे में बोली है, डर भी रहे थे कि कहीं सड़क भी न चली जाए लेकिन जब बोलना है, तो बोलना है, वह उन्होंने बोला, सभापति जी मैं मप्र राजमार्ग (संशोधन) विधेयक 2026 पर वर्तमान में उपयोग कर्ता शुल्क के अधिरोपण एवं संग्रहण संबंधी व्यवस्था का आधार भारतीय टोल अधिनियम 1751 एवं भारतीय टोल मध्यप्रदेश संशोधन एक्ट 1932 है, यह अधिनियम अपने समय की आवश्यकता के अनुरूप भले ही बनाया गया था, लेकिन लंबे समय तक इस विषय ने विधिक आधार प्रदान किया है. ऐसी स्थिति में यह आवश्यक है कि राजमार्गों पर उपयोगकर्ता शुल्क के अधिरोपण एवं संग्रहण के लिए मध्यप्रदेश के अपनी विधिक ढांचे में स्पष्ट एवं सक्षम प्रावधान उपलब्ध हो, प्रस्तावित संशोधन इसी उद्देश्य की पूर्ति करेगा. साथ ही मप्र राजमार्ग संशोधन विधेयक 2026 के लागू होने के पश्चात वेसाइट एमिनिटीज प्रभावी रूप से विकसित की जा सकेगी, जिससे शहरी क्षेत्रों के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार के एक नए अवसर प्रदान होंगे. राजमार्ग के दोनों तरफ क्षेत्र विकसित होने से औद्योगिकीकरण को लाभ और बढ़ावा मिलेगा, साथ ही निवेशकर्ता को आकर्षण मिलेगा साथ ही साथ नए आवासीय क्षेत्र भी विकसित होंगे. फायर सेफ्टी दुर्घटना एक्ट की बात कर रहे थे. मध्यप्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक 2026 के लागू होने के पश्चात मोटर व्हीकल एक्ट के रोड सेफ्टी संबंधी प्रावधानों को सुगमता से लागू किया जा सकेगा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी. सभापति महोदय निश्चित रूप से इस विधेयक से जो उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, हमारे ग्रामीणों को रोजगार मिलेगा, साथ ही साथ मध्यप्रदेश राजमार्ग विधेयक 2026 का मैं समर्थन करता हूं.
सभापति महोदय – बहुत बहुत धन्यवाद रोहाणी जी.
श्रीमती झूमा ध्यानसिंह सोलंकी(भीकनगांव) – सभापति महोदय, मध्यप्रदेश राजमार्ग विधेयक के संबंध में सिर्फ एक ही प्वाइंट पर बोलना चाह रही हूं. इसमें स्कीम के अधीन अपेक्षित भूमि के भूमि अर्जन के संबंध में जिसमें किसानों के स्वामित्व या किसी भी व्यक्ति की जमीन यदि रोड के उपयोग के समय जा रही है, तो नियम तो पारित हो गया है कि उन्हें चार गुना जमीनों का मुआवजा दिया जायेगा, पर जो पहले से मंजूर है, इसको थोड़ा सा स्पष्ट करेंगे तो ठीक रहेगा, जो पहले से मंजूर है, चूंकि मेरे यहां भी देश गांव से लगाकर जुलवानिया रोड पहले से सेंक्शन था और अब बनने वाला है, तो वहां के किसानों को एक गुना ही मुआवजा दिया जायेगा, ऐसा अधिकारी वर्ग उन्हें बता रहे हैं, तो मैं चाहती हूं कि चूंकि रोड तो अब बनना शुरू होगा, तो निश्चित ही उनको इस नियम के तहत चार गुना मुआवजा दिया जाये तो ज्यादा मेहरबानी होगी, यही कहना था मुझे, धन्यवाद.
डॉ.चिंतामणि मालवीय(आलोट) – अनुपस्थित.
श्री दिनेश गुर्जर – अध्यक्ष महोदय, मुझे समय दे दिया जाये.
सभापति महोदय—कार्यवाही आगे बढ़ गई है, आप पहले उपस्थित नहीं थे. चिंतामणि जी अनुपस्थित हैं, तो आप दिनेश जी बिल्कुल पिन प्वाइंटेड, भूमिका नहीं बनाते हुए संक्षिप्त में अपनी बात रखें, अभी विधेयक ओर भी हैं, इसलिए आप दो मिनिट में अपनी बात रखें.
श्री दिनेश गुर्जर(मुरैना)—सभापति महोदय, मैं मध्यप्रदेश राजमार्ग(संशोधन)विधेयक का विरोध करता हूं. माननीय जो भी हमारी सड़कें बनी हुईं हैं, चाहे पिछोर शिवपुरी वाला जो मार्ग है, करेरा से निकला है, दिनारा से निकला है
, वह जर्जर हालत में है, मुरैना नगर निगम क्षेत्र है, पर आज भी कोई मुरैना में छोपोर कोटा मार्ग से बायपास मुरैना के लिये नहीं है, जहां आये दिन जाम लगता है, तो हमारी मांग सरकार से है, माननीय वित्तमंत्री जी से, पी.डब्ल्यू.डी मंत्री जी से है कि मुरैना गांव से सहराने होते हुए, छौंदा बायपास बनाया जाये जिससे कि मुरैना के शहर में जो ट्रेफिक जाम रहता है, वह न रहे. सभापति महोदय, दूसरा बामौर में आये दिन जाम लगा रहता है, कई बार बड़ी-बड़ी दुर्घटनाएं हो गई हैं, वहां फ्लाई ओवर के लिये मैंने पहले भी मांग की थी, आज भी मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं कि मुरैना के अंदर करौला मार्ग जो रिठौरा मुख्य मार्ग से बामौर शहर से गया है, वह पूरा जर्जर हालत में है, तो उसको भी माननीय मंत्री जी अपने संज्ञान में लेकर बनायें.
सभापति महोदय – आप तो बजट अनुपूरक की मांग पर जा रहे हैं, दिनेश जी थोड़ा संक्षिप्त में बात रखें और दो मिनिट में समाप्त करें.
श्री दिनेश गुर्जर – सभापति महोदय, कुछ मांग ही कर लूं, मैं तो अपने क्षेत्र के अलावा कभी बात ही नहीं करता हूं, चूंकि यह हम लोगों का नैतिक धर्म है कि सदन में आये हैं, तो हम लोगों को हमारे क्षेत्र की बात रखना चाहिए और हम लोग नये लोग हैं, तो हमको कम समय मिलता है, इसलिए हम चाहते हैं कि हमारे क्षेत्र की ज्यादा से ज्यादा समस्याएं सदन में आयें और माननीय मुख्यमंत्री जी इन पर विचार करें. मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि जो हमने आग्रह किया है, इस पर विचार करके, इसको भी बनाया जाये, जिससे मुरैना के लोगों को भी सुविधा हो सके धन्यवाद.
श्री निलेश पुसाराम उईके(पांढुर्णा) – सभापति महोदय, मेरा पांढुर्णा से वर्धा नदी तक जो सड़क पिछले बजट में स्वीकृत हुआ है, मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं कि उसका काम जल्द से जल्द चालू हो. दूसरा यह था कि हमारा पांढुर्णा में रेल्वे ब्रिज भी स्वीकृत है, पर इसका काम लेट क्यों हो रहा है, जिसके कारण लोगों को बहुत परेशानी हो रही है, इसका काम जल्दी प्रारंभ कर दिया जाये. मेरे क्षेत्र में चार पांच पुल की बहुत आवश्यकता है, जिसके कारण बारिश के दिनों में आवागमन बंद हो जाता है. धगडिया से उमरडोह के बीच, बिजागोरा से भवारी के बीच, पलास पानी से नारायण घाट के बीच, रायबासा से बुचनखापा के बीच, सिराटा मुख्य मार्ग से टेमनी के बीच आवश्यकता है. पांढुर्णा अभी नया जिला बना है, वहां रिंग रोड की बहुत आवश्यकता है, रिंग रोड की भी स्वीकृति प्रदान करें और तीन चार रोडें हैं, उनकी स्वीकृति प्रदान करने की कृपा करें. डोडिया से डोडिया ढाना, कोहट से बिजागोरा, बाकुल से जायदेही, प्रधानघोघरी से नींबूखेड़ा, खेरवाड़ा से खेरवाड़ा कॉलोनी, उत्तमडेरा से ढोलनखापा, धनोरा मुख्य मार्ग से छाबड़ी, लेन्डोरी से डोलनखापा रैयर, तंसरा से नोनछापर इन रोडों की स्वीकृति प्रदान करने की कृपा करें सभापति महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्री सोहनलाल बाल्मीक (परासिया)-- माननीय सभापति जी, वैसे संशोधन विधेयक मैंने पढ़ा नहीं है, मगर चूंकि चर्चा चल रही है....
सभापति महोदय-- चूंकि आपका नाम आया है, इसलिये आप इसे संक्षिप्त में कर दें.
श्री सोहनलाल बाल्मीक-- जी हां, मैं संक्षिप्त में ही बात कर लूंगा. मैं आपके माध्यम से मंत्री जी का ध्यान दिलाना चाहता हूं कि मेरी विधान सभा में दो टोल नाके हैं, एक छिंदवाड़ा से मटकुली का है और एक परासिया से बरेठा तक का है और यह दोनों टोल में व्यवस्था पूर्ण रूप से नहीं होती. एक इकलहरा में जो टोल बना हुआ है वह सिर्फ एक गेट चालू करता है जिससे आवागमन में सबको परेशानी होती है और इसमें कई बार विवाद की स्थिति बनती है. मैंने पत्र एमपीआरडीसी को लिखा था, चूंकि एमपीआरडीसी की रोड है. एमपीआरडीसी ने जब मुझे जवाब दिया तो उसमें फोटो लगाकर भेज दिये कि दोनों टोल के जो बेरियर हैं वह चालू हैं जबकि वह बेरियर बंद करके रखते हैं, मगर मुझे जब शिकायत मिली थी और मैंने शिकायत की तो मुझे गुमराह करके इस तरह के फोटो भेज दिये. मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि इस तरह की व्यवस्था टोल में बनना चाहिये जो कि नहीं बन पा रही है. यदि आप उसमें सख्ती से बात करेंगे तो निश्चित रूप से आमजनों को आवागमन में दिक्कत नहीं होगी, फायदा होगा. दूसरा छिंदवाड़ा से मटकुली का जो रोड है वर्ष 2009 में जो रोड चालू हुआ और वर्ष 2033 तक चलेगा. उस समय जब प्रोजेक्ट रिपोर्ट थी वह 98 करोड़ की थी उसके बाद और कुल मिलाकर 152 करोड़ रूपये का पूरा प्रोजेक्ट बना मगर उसमें और भी जो राशियां लगाई हैं मैं तो आश्चर्य में हूं कि 112 किलोमीटर का रोड 300 करोड़ रूपये में बना है और वह 300 करोड़ रूपये जो जोड़ा गया है उसमें सारी मेंटेनेंस की वसूली है, उसमें और भी जो रखरखाव है एमपीआरडीसी को जो पैसा देना है वह पूरा आम जनता से लिया जा रह है, जबकि जो प्रोजेक्ट रिपोर्ट है उसके हिसाब से जो लागत लगी है वह करना चाहिये मगर 300 करोड़ रूपये का रोड बन गया और उसमें मेंटेनेंस का और भी अन्य चीजें जोड़ दी गई हैं. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि इस टोल को बंद कराया जाये संतूर जो टोल नाका बना है और उसने लगभग 168 करोड़ रूपये की वसूली कर ली है तो अब वह बंद होना चाहिये, मेरा आपसे निवेदन है.
श्री चिंतामणि मालवीय - (अनुपस्थित)
श्री पंकज उपाध्याय - (अनुपस्थित)
डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान (नागदा खाचरोद)-- माननीय सभापति महोदय जी, अभी वर्तमान में जावरा उज्जैन सड़क जो बनने वाली है उस पर जमीन के अधिग्रहण संबंधी अनुभव जो देखने को मिला. यह जो अधिग्रहण करते समय अलग-अगल क्लस्टर बनाये जाते हैं. खाचरोद विधान सभा क्षेत्र में 3 क्लस्टर बनाये गये जबकि मैं मानता हूं कि सारी जमीन उपयोगी है सब लगभग सड़क और शहरों के पास की जमीन है, लेकिन 3-3, 4-4 क्लस्टर बनने के कारण पहले दूसरे क्लस्टर के किसानों को तो फायदा हो जाता है, लेकिन जो क्लस्टर तीसरी और चौथी श्रेणी में ले जाते हैं उन किसानों को जमीन के भाव चार गुना, गाइड लाइन के चार गुना करने के बाद वर्तमान मूल्य का दोगुना दिया गया है, लेकिन बावजूद उसके भी उनको पर्याप्त कीमत नहीं मिल पाती है. हमको अधिनियम में संशोधन में इस बात का जरूर ध्यान रखना चाहिये. एक बात और कहना चाहता हूं कि यह जो किसानों की जमीन के ट्यूबबेल उनके कुंए और इस तरह के जो मुख्य मार्ग के जमीन अधिग्रहण के नजदीक में आते हैं और कई बार जब उनके खेत दो हिस्सों में डिवाइड हो जाते हैं तो वहां पर उनकी जमीन के ट्यूबबेल और कुंए आदि की कीमतों का सही मूल्यांकन नहीं हो पाता हमें इस ओर ध्यान देना चाहिये. धन्यवाद.
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह)-- धन्यवाद माननीय सभापति महोदय, सबसे पहले मैं आपके प्रति और माननीय अध्यक्ष जी के प्रति आभार प्रकट करता हूं कि इस विषय को रखने का अवसर आपने दिया है. महोदय कई बार कोई संशोधन आता है चर्चा में हम यह भी नहीं समझ पाते कि संशोधन का मूल विषय और मूल उद्देश्य क्या है. मैं यह भी मानता हूं कि जो ड्राफ्ट तैयार होते हैं यह विधिक भाषा में होते है, विधायी भाषा में होते. बहुत बार चूंकि हम अंतिम रूप में उस पर एक नजर मारते हैं तो हम ध्यान में नहीं रख पाते कि वह वास्तव में है क्या. अभी जिन लोगों ने इसके पक्ष में और विपक्ष में दोनों ने ही कहा है पक्ष के लोग हों या विपक्ष के लोग हों मैं दोनों के प्रति आभार प्रकट करता हूं कि आखिरकार सभी की चिंता राजमार्गों को, मार्गों को कुलमिलाकर सड़कों को लेकर ही है. और होना भी चाहिये.यदि हमें विकास चाहिये विकास का पहला आधार या पहली धुरी सड़के ही हैं.हमें अच्छी शिक्षा चाहिये तो सड़कें चाहिये हमें व्यापार व्यवसाय चाहिये तो सड़कें चाहिये इंडस्ट्रीज चाहिये तो सड़कें चाहिये कुल मिलाकर सड़कें सभी के लिये आवश्यक हैं और सड़कें ही दिखाई देती हैं कि विकास हो रहा है या नहीं और इसीलिये सबकी उस पर चिंता भी रहती है. माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी देश में ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को सुधारने में विशेष भूमिका निभाई और जो उनका विजन था कभी कभी राजनीतिक रूप से पक्ष में विपक्ष में बोलना आसान है लेकिन 2047 के बारे में हमारे प्रधानमंत्री विचार करें और उस संकल्प के साथ पूरे देश को जोड़ें यह मामूली बात नहीं है क्योंकि हम सभी सदन में बैठे हैं जिम्मेदार लोग हैं हम पांच साल के लिये चुनकर आते हैं. योजनाएं बनाते हैं अपने क्षेत्र में कम से कम पांच साल के लिये सोचते हैं लेकिन हम यह भी जानते हैं कि कई विषय़ इन पांच सालों में होने वाले नहीं हैं. देश का एक बड़ा कैनवास है और जब उस कैनवास पर नजर डालते हैं देश के हर हिस्से में नजर डालते हैं और विकसित भारत का संकल्प उस पर विचार करते हैं तो ध्यान में आता है कि इसमें लगने वाला विषय कितना होना चाहिये और उस दृष्टि से उन्होंने 2047 तक पर विचार करके लक्ष्य तय किया है और मुझे यह कहते हुए खुशी है कि उनके विजन पर हमारे देश के माननीय भूतल परिवहन मंत्री माननीय नितिन गड़करी जी ने जो विचार किया उस कार्य को आगे बढ़ाया उसका परिणाम चारों तरफ देखने को मिलता है. आज का जो विषय है यह मध्यप्रदेश राजमार्ग संशोधन विधेयक,2026 यह वैसे तो एक छोटा सा संशोधन है लेकिन आने वाले समय में एक बड़ी खाली जगह को भरने वाला है. अभय मिश्रा जी बैठे हैं मुझे उम्मीद थी कि व्यवसाय से कांट्रेक्टर हैं उस दृष्टि से इसका अध्ययन अच्छे से किया होगा. ऐसा नहीं है कि अभी बिना किसी अधिनियम के टेक्स या टोल वसूला जा रहा है. यह तो वसूली अभी से नहीं हो रही है. कांग्रेस की सरकारें रही हों भारतीय जनता पार्टी की सरकारें रही हों. यह क्रम चल रहा है. देश में पहली बार ब्रिटिश टाईम पर 1851 में भारतीय टोल अधिनियम आया था जब देश में बैलगाड़ियां चलती थीं. आज तो हम हाईवे की बात करते हैं. एक्सप्रेस वे की बात करते हैं. हाई स्पीड कारीडोर की बात करते हैं. इंटैलीजेंट ट्रेफिक सिस्टम की बात करते हैं और हम यह भी मानते हैं कि जो औपनिवेषिक काल के कानून हैं वह इतने पुराने हो चुके हैं कि बहुत बार सामयिक भी नहीं हैं और हम स्वतंत्र देश में सांस ले रहे हैं. हमारे अपने कानून होने चाहिये. उस दृष्टि से धीरे-धीरे उन सभी कानूनों को सामयिक बनाते हुए उनको खत्म कर रहे हैं और वर्तमान में अपनी आवश्यक्ताओं के अनुरूप हम कानून बना रहे हैं अधिनियम ला रहे हैं और वर्तमान में जो आज का संशोधन है यह उसी दिशा में है इसके बाद 1932 में भी संशोधन हुआ. 1956 में अब किसकी सरकार थी क्योंकि मैं राजनीतिक बात नहीं कहना चाहता लेकिन विचार करिये कि 1956 में जो नेशनल हाईवे एक्ट बना उसके तहत् वर्तमान में टोल वसूली हो रही है लेकिन अब आवश्यक्ता इस बात की है कि मध्यप्रदेश का अपना अधिनियम हो. बाकी जो छोटी बड़ी विसंगतियां हैं आज की कठिनाईयां हैं उनको हम दूर कर सकें. जब बात आती है व्यक्ति जिसके बारे में अभी ओंकार जी कह रहे थे तो एक विधिक विधायी भाषा है. कंशेसनायर के साथ में सरकार का एग्रीमेंट होता है. तो स्वाभाविक है इन सबको हमारा एक कानूनी स्वरूप देने के लिए यदि हमने 1851 का एक्ट समाप्त कर दिया तो हमारे पास कुछ तो आधार होना चाहिए और उसी खाली जगह को भरने के लिए ये अधिनियम लाया गया है. यह पूरे तौर पर मध्यप्रदेश राजमार्गों के लिए है. इसके आधार हमें आने वाले समय में जो लाभ होने वाले हैं, सड़कों का जो रखरखाव है, विकास है, इसके लिए यूजर फीस अधिरोपित करने का हमको कानूनी अधिकार मिलने वाला है. ये अन्य संस्थाओं यानि जो कन्सेसनायर हैं, वे संस्था के रूप में भी हो सकते हैं, व्यक्ति के रूप में भी हो सकते हैं. ये अधिकार सरकार उनको सौंप सकती है. इसके साथ-साथ जो ट्रैफिक का बेहतर मैनेजमेंट है, उसके लिए जो हमारा मोटरयान अधिनियम, 1988 है, उसके अनुरूप ट्रैफिक रेगुलेशन की जो शक्तियां हैं, वह भी उनको दी जा सकती है. जो आज की आवश्यकता है. अब बहुत बार बात आती है कि ये टोल लगना क्यों. सभापति महोदय, यहां बैठे सभी लोग जानते हैं कि हमारी अपनी आवश्यकताएं असीमित हैं. पहले किसी जमाने में गांव में मुरम की भी सड़कें हो जाए तो गांव के लोग खुश हुआ करते थे कि चलिए, चलने के लिए हमारे पास कुछ जगह तो बन गई. आज हर गांव में पक्की सड़क चाहिए. बारहमासी सड़कें चाहिए. हम आभार प्रकट करना चाहेंगे हमारे पूर्व यशस्वी प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्रद्धेय अटल जी के प्रति, जिनके समय में प्रधानमंत्री सड़क योजना की शुरुआत हुई और माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उसको विस्तारित किया. इसके कारण गांव-गांव में आज हम पक्की और बारहमासी सड़कें देखते हैं. वर्ष 2004 में पहली बार मैं सांसद बना था और वर्ष 2022 तक लगातार मैं सांसद ही था. गांवों में जब जाते थे तो वर्ष 2004 की स्थितियां और बाद की स्थितियां, दोनों में फर्क है. उसके लिए मैं किसी पार्टी को या किसी को दोष नहीं दे रहा हूँ. मैं तो केवल व्यवस्था की बात कर रहा हूँ. लेकिन यह जो परिवर्तन हुआ, देश में आज हम कहीं भी जाते हैं और एकाएक हमको पक्की सड़कें बनी हुई दिखाई देती हैं, 4 लेन, 6 लेन, 8 लेन, अब तो हम हाई स्पीड कोरिडोर की बात कर रहे हैं. एक्सप्रेस वे की बात कर रहे हैं, ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस वे की बात कर रहे हैं. यह कैसे हो पा रहे हैं. अगर हम ये टोल आधारित व्यवस्था को समाप्त कर दें तो क्या यह संभव होगा. वर्ष 1851 में अंग्रेजों को भी इसकी आवश्यकता थी. जब हम विकासवादी सोच के साथ में सोचेंगे तो ध्यान में आएगा कि ये सड़कें आज हमको कितनी राहत पहुँचा रही हैं. कितना लाभ हमको दे रही हैं. इसके कारण से आज एकाएक ही बड़े परिवर्तन, सकारात्मक परिवर्तन हमको दिखाई देते हैं.
श्री सोहनलाल बाल्मीक – माननीय सभापति महोदय, जो बोझ आम जनता पर पड़ रहा है क्योंकि जो गाड़ी लेता है वह तो रोड का टैक्स पटाता ही है. उसके बाद टोल की भी बात हो रही है तो सरकार की भी जिम्मेदारी रहे इसमें, जो मैंने बात उठाई है कि 300 करोड़ रुपये का 112 किलोमीटर रोड बनेगा तो फिर आम जनता पर सीधा भार पड़ेगा और 25-25 साल वसूली हो रही है.
माननीय सभापति महोदय – देखिए मैं राजनीतिक बात नहीं कहना चाहता सोहन जी, केन्द्र में भी आपकी सरकारें रही हैं. माननीय कमलनाथ जी के पास भूतल परिवहन मंत्रालय रहा है. व्यवस्थाएं आज की नहीं हैं. मैं फिर से कहता हूँ और आपको आंकड़े देता हूँ कि अभी हमने तय किया है कि हमको एक लाख किलोमीटर सड़कें मध्यप्रदेश में बनाना है. अब जब हम एक लाख किलोमीटर सड़कों की बात करेंगे, अतिरिक्त अभी हम चाहते हैं कि सड़कें वे भी बनें जहां आज सड़कें नहीं हैं. जहां 2 लेन है, वहां 4 लेन हो जाए, जहां 4 लेन है, वहां पर 6 लेन हो जाए, जहां पर 6 लेन है, वहां पर 8 लेन हो जाए. यह किसी एक क्षेत्र विशेष की आवश्यकता नहीं है. एक साथ हर जगह यह चाहिए. आज अगर हम बात करें कि आज जबलपुर और महाकौशल की बात ओमकार जी कर रहे थे, अभी शायद यहां पर नहीं हैं, आज जबलपुर से भोपाल का अगर हमको ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे बनाना है, तो 15 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता है. सभापति महोदय, यह पैसा कहां से आयेगा ? क्या हम जनता पर टैक्स बढ़ायेंगे और कितना टैक्स बढ़ायेंगे ? इसीलिये यही तरीका सोचा गया कि क्यों नहीं जो हम सुविधा का उपयोग करते हैं और जितने समय के लिये करते हैं, केवल उतने समय उससे शुल्क लेकर यह सुविधा दी जाये और आज लोग खुश हैं बल्कि चर्चा में हमारे उधर के लोग हों या इधर के लोग हों, दोनों ही जब चर्चा में व्यक्तिगत रूप से आते हैं तो यही कहते हैं कि सड़कें तो ऐसी ही बननी चाहिए. टोल लग जाये, तो लग जाये. हम राजनीतिक बात करें, वह अलग बात हैं. सदन में क्या कह रहे हैं ? यह अलग विषय है. व्यक्तिगत चर्चा में तो यही कहते हैं कि सड़कें तो वैसी ही बननी चाहिए, टोल वाली बनाइये, आप हमारे यहां भी बनवाइये.
सभापति महोदय, मैं अभी बात करना चाहूंगा कि मैं पिछले दिनों महाराष्ट्र के अध्यययन दौरे पर गया था. मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से अनुमति लेकर गया था और साथ में हमारे विभाग के उच्च अधिकारी भी गए थे, हमारा और भी राज्यों में जाना हुआ. महाराष्ट्र चूंकि अभी-अभी गए हैं, इसके लिए मुझे लगा कि इसका जिक्र जरूर करना चाहिए. वहां माननीय मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडनवीस जी खुद बैठे, उन्होंने खुद भी प्रिजेंटेशन दिया और उनसे मुम्बई नागपुर समृद्धि महामार्ग पर चर्चा विस्तृत हुई. वह 55 हजार करोड़ रुपये की सड़क है, वह महामार्ग है. नागपुर से गोवा एक सड़क का निर्माण होने जा रहा है, उसकी लागत लगभग एक लाख करोड़ रुपये है. अब देश में किस राज्य के पास इतना बजट होगा कि वह अपने बजट से यह रोड बनवाये, तो उसके दो ही रास्ते हैं या तो जब पैसा आयेगा, तब हम इस सड़क के निर्माण के बारे में विचार करेंगे या फिर आज की जो हमारी आवश्यकताएं हैं, उनकी पूर्ति के लिये हम वह रास्ते निकालें, जिनके माध्यम से विकास स्पष्ट रूप से न केवल दिखाई दे, बल्कि उसका लाभ भी वर्तमान पीढ़ी को मिले. उन्होंने चर्चा में बताया कि कैसे लैंड एक्वीजिशन के लिए भी पैसे नहीं हैं ? तो उसके लिये रास्ते कैसे होंगे, वह भी तय किये और अलग-अलग फायनेंस के जो मॉडल है, उनसे पैसा लिया और 55 हजार करोड़ रुपये की विशाल परियोजना को समय सीमा में पूरा किया, लेकिन अब रीपेमेंट होगा, बैंकों को पैसा जायेगा, तो वह पैसा कहां से जायेगा, तो टोल ही उसका एकमात्र तरीका है और इससे यह भी समझ में आया कि राज्यों की जो उधारी सीमा है यानि फिजकल रिस्पोंसिबिलिटी एण्ड बजट मैनेजमेंट इसको टच किये बिना, इसको छेड़े बिना कैसे इतनी बड़ी परियोजनाओं के लिए भी फंडिंग हो सकती है ? सड़कें राज्य की सम्पत्ति हैं. अगर इनका हम ठीक तरीके से सदुपयोग करें, प्लानिंग करें, मैनेजमेंट करें तो सड़कें तो बनेंगी लेकिन टोल से मिलने वाली जो राशि है, उससे लेकर हम दूसरी सड़कों का भी मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं. हम लोगों ने मुम्बई-पुणे एक्सप्रेसवे के मिसिंग लिंक टनल परियोजना भी देखी, जिसकी आज पूरे देश में चर्चा होती है, यह भी लगभग 6,700 करोड़ रुपये की परियोजना है, जो रिकॉर्ड साढ़े 4 वर्ष में बनी है, इसके लिये भी यही तरीका अपनाया गया. आज उसको देखने के लिये दूसरे राज्यों के लोग आते हैं कि कैसे इतना बड़ा काम हुआ है. अब इसमें समय के साथ-साथ सुधारों की भी आवश्यकता होती है.
4.28 बजे {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}
अध्यक्ष महोदय, अभी थोड़ी देर पहले ही आपमें से किसी ने कहा था कि मुआवजे के रूप में जब मिलता है, तब वहां पर जो कुएं हैं, पेड़ हैं, कच्चे मकान हैं, कई बार इनको राशि का लाभ नहीं मिलता है. उन्होंने एक बड़ा अच्छा किस्सा बताया. उन्होंने कहा कि एक परियोजना में केवल मुआवजे की राशि ही 500 करोड़ रुपये थी, तो उन्होंने यह तय किया कि हम ड्रोन सर्वे कराते हैं और जब ड्रोन सर्वे करवाया गया, तो वह राशि घटकर केवल 9 करोड़ रुपये हो गई क्योंकि आज जहां पेड़ का मुआवजा मांगा जा रहा है, वहां पर पेड़ था ही नहीं, वहां कोई ठूंठ लगा था, वह पेड़ हो गया, जहां पर कुएं की मांग हो रही है, वहां पर एक गड्डा हो गया, वह कुआं हो गया. जहां मकान की बात की जा रही है, वहां एक झोपड़ी बन गई. तो रुपये 500 करोड़ के बदले केवल रुपये 9 करोड़ में परियोजना आगे बढ़ गई. हमने तय किया है कि हम भविष्य में अब जो भी इस तरह की बड़ी परियोजनायें लेंगे, उनमें ड्रोन सर्वे आवश्यक रूप से करेंगे ताकि सरकार का पैसा, वह वास्तव में जिन्हें आवश्यकता है, उन्हें तो मिले लेकिन वह पैसा बेकार में न जाए और विकास के कार्यों में उपयोगी हो.
अध्यक्ष महोदय, आज का यह संशोधन विधेयक हम वास्तव में बड़ी परियोजनाओं को ध्यान में रखकर ही लेकर आ रहे हैं क्योंकि हम ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे और हाई स्पीड कॉरिडोर पर जाना चाहते हैं. इसके लिए हमें निर्माण कार्यों के लिए फडिंग और बजट की आवश्यकता पड़ेगी. इसके लिए हमारा अपना अगर कोई अधिनियम नहीं होगा तो निश्चित रूप से इस कारण से कुछ कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा और इसीलिए यह संशोधन अधिनियम हम लेकर आए हैं.
अध्यक्ष महोदय, इसमें बहुत बार बात आती है कि पैसा लगता है. मैं आपको कुछ उदाहरण देना चाहता हूं क्योंकि यह विषय आना चाहिए, कई बार हमसे भी लोग सवाल पूछते हैं, कभी मुझे भी लगता था कि इतना पैसा क्यों लगता है. अभी प्रदेश में 16 बीओटी (Build-Operate-Transfer) टोल मार्ग हैं. जिनकी कुल निर्माण लागत रुपये 3 हजार 178.84 करोड़, लंबाई 1238 किलोमीटर है. अर्थात् ये वह राशि है जो केवल निर्माण में लगी है और टोल के रूप में संग्रहित राशि रुपये 8 हजार 8 सौ 73 करोड़ है, इसी तरह 28 बीओटी मार्गों की कुल निर्माण लागत रुपये 2 हजार 730 और जून 2026 तक कुल रुपये 1 हजार 30 करोड़ इसमें संग्रहित किए गए. बहुत बार हमें यह ध्यान में नहीं आता कि आज से 15-20 साल पहले अगर किसी सड़क के निर्माण के लिए रुपये 50-100 करोड़ का कर्ज लिया गया तो उस पर लगने वाला ब्याज, ब्याज पर लगने वाला चक्रवृद्धि ब्याज, उस सड़क का मेंटेनेंस, वर्तमान की स्थिति तक उसे बनाकर रखना, उसमें लगने वाले इंजीनियर और उसमें बाकी के सारे अन्य खर्च भी जुड़ते हैं. यदि हम एक छोटा सा उदाहरण लें कि यदि हम रुपये 1 लाख का घर बनाते हैं, उसके लिए 12 प्रतिशत की दर से कर्ज लेते हैं तो वह राशि 20 वर्षों में ब्याज मिलाकर लगभग ढाई गुना पहुंच जाती है. जहां इतनी बड़ी राशि होती है, आमतौर पर हम तुलना करते हैं, 20 साल पहले की निर्माण लागत से, जबकि उसमें इन 20 वर्षों का मेंटेनेंस, उसका ब्याज आदि भी शामिल होता है. मेरे पास एक-एक टोल के बारे में आंकड़े हैं चूंकि समय बहुत लगेगा इसलिए मैंने संक्षेप में कहा है.
अध्यक्ष महोदय- मंत्री जी आप और कितना समय लेंगे ?
श्री राकेश सिंह- मैं 10 मिनट में समाप्त कर दूंगा. मैं और जल्दी समाप्त करना चाहता था लेकिन कुछ विषय इस तरह के आ गए इसलिए मुझे लगा कि सदन के सामने कम से कम स्पष्टता होनी चाहिए.
अध्यक्ष महोदय- क्योंकि काफी काम बाकी है. भुट्टा पार्टी भी है. संसदीय कार्य मंत्री जी बार-बार इशारा कर रहे हैं.
श्री राकेश सिंह- यदि विषय स्पष्ट हो जाएगा तो लोगों को भुट्टे का स्वाद अच्छे से आयेगा.
श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)- हर साल ये जो भुट्टा पार्टी होती है, ये भुट्टा आता कहां से है ? इतने भुट्टे आते कहां से हैं ?
श्री कैलाश विजयवर्गीय- सब बदनावर से ही आते हैं. आपकी ही विधान सभा से आते हैं. (हंसी)
श्री अभय मिश्रा- अध्यक्ष महोदय......
अध्यक्ष महोदय- अभय जी आपने चर्चा शुरू की थी. कृपया अब आप बैठ जायें.
श्री बाला बच्चन (राजपुर)- अध्यक्ष महोदय, अनुदान की मांग के समय इतना विस्तार से बताया जाता है. अभी तो केवल संशोधन विधेयक है, क्या जोड़ना है, क्या काटना है और इसे कैसे आगे बढ़ाना है, उसके लिए संशोधन विधेयक है.
श्री राकेश सिंह – माननीय बाला जी आप तो इतने वरिष्ठ कम से कम यह बात वहीं समझा दी होती तो मुझे यह विषय नहीं समझाना पड़ता. आप तो राष्ट्रीय राजमार्ग और राजमार्ग में अन्तर नहीं समझा पाए.
श्री बाला बच्चन – यह तो जिन्होंने अपनी बात बोलना थी वह बोल ली.
श्री राकेश सिंह – मुझे उत्तर तो देना पड़ेगा.
अध्यक्ष महोदय – बाला जी मंत्री जी काट पीट कर ही बता रहे हैं.
श्री राकेश सिंह – मेरे पास बहुत सारी जानकारी है लेकिन मैं कम से कम में ही बता रहा हूँ. मैंने अभी कहा था कि एक लाख किलोमीटर सड़कों के बारे में विस्तार से नहीं जाउंगा कब कितनी बनाने वाले हैं. लेकिन कुछ चीजों को समझना पड़ेगा. अब हम नए ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे की बात कर रहे हैं. इसमें हम देख रहे हैं कि एरियल डिस्टेंस के आधार पर यह बनना चाहिए. बहुत बार होता है कि दूरी होती है 105 किलोमीटर और एरियल डिस्टेंस होता है केवल 60-65 किलोमीटर. इसके आधार पर हम बनाएंगे तो हमारी लागत भी कम आएगी. कम समय में हम लक्ष्य तक भी पहुंचेंगे. अभी तीन बड़े ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे के बारे में बात हो रही है. भोपाल-मंदसौर है, 11550 करोड़ रुपए की लागत का. सागर-सतना है 9850 करोड़ रुपए की लागत का. जबलपुर-आशापुर है 17050 करोड़ रुपए. पीएम गतिशक्ति प्लेटफार्म के साइंटिफिक प्लेटफार्म से इन सबका निर्धारण हो रहा है. अभी जो राष्ट्रीय औसत है. अब बात फिर पीछे तक जाएगी और बाला जी मैं कोई पॉलिटिकल बात नहीं करना चाहूंगा. राष्ट्रीय औसत से भी हम क्यों पीछे रह गए. क्या हम 10-15 सालों में हम पीछे हो गए.
अध्यक्ष महोदय – यह भी अपने आप में बड़ी बात है कि विधान सभा में कोई आदमी कहे कि मैं राजनैतिक बात नहीं करना चाहूंगा. यह अपने आप में उल्लेखनीय है.
श्री राकेश सिंह – मैं केवल विकास के आंकड़ों पर बात कर रहा हूं. अन्यथा इन पर पॉलिटिकल बातें बहुत हो सकती हैं.
श्री बाला बच्चन – माननीय अध्यक्ष महोदय, आप बजट पर पूरी चर्चा नहीं कराते, अनुदान मांगों पर चर्चा नहीं कराते हैं उसके कारण यह हो रहा है. पहले बजट पर एक सप्ताह चर्चा होती थी. मंत्रियों को खुलकर समय दिया जाता था.
अध्यक्ष महोदय – बाला जी इसीलिए कहा जाता है कि जिनको राजनीतिक समझना है वे राजनीतिक समझ लें.
श्री राकेश सिंह – अध्यक्ष महोदय, अभी विपक्ष की ओर से ज्यादातर मांग ही की गई हैं. कुल मिलाकर यह राशि कहां से आएगी. वैसे तो नेशनल हाइवे से तय हुआ है एक लाख करोड़ रुपए का एमओयू हुआ है. लेकिन मान लीजिए कि उन्होंने कहा कि हम सेकण्ड या थर्ड फेज में बनाएंगे तो ऐसे में या तो हमें इंतजार करना होगा. या मध्यप्रदेश अपने बजट से बनाए. क्या आप नहीं चाहेंगे कि हम भोपाल से इंदौर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे के माध्यम से जाएं. भोपाल से ग्वालियर जाएं. भोपाल से जबलपुर जाएं. आखिरकार यह जो रास्ते बनेंगे यह आधे समय में हमको वहां तक पहुंचाएंगे और यह समृद्धि का मार्ग खोलेंगे. आज जहां से भी एक्सप्रेस वे बनता है वहां पर किसानों के किस तरह से लाभ होता है यह बताने की आवश्यकता नहीं है. आखिरकार इन सब चीजों के लिए कहीं न कहीं फण्डस् की आवश्यकता होगी. फण्डस् के लिए हमें टोल के किसी न किसी मॉडल पर जाना होगा. उन मॉडल्स पर जाने के लिए हमारे पास अपना अध्यादेश चाहिए. क्योंकि 1851 का हम समाप्त कर रहे हैं तो हमें अपना अध्यादेश चाहिए. माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने इशारा किया है मैं उसको समझ रहा हूँ. कैलाश जी की भुट्टा पार्टी की भी मैं चिंता कर रहा हूँ. विषय बहुत हैं केवल विकास पर बात करने के लिए, आमतौर पर मेरी कोशिश होती है कि अपने विभाग से संबंधित वो बहुत सारी बातें आपके ध्यान में आएं जो अभी तक नहीं हुई हैं. आने वाले संकट को देखते हुए,अभी हम सड़क के किनारे री-चार्ज बोर भी बनाएंगे. लोक कल्याण सरोवर तो हम बना ही रहे हैं. लेकिन अब हम सड़कों के किनारे री-चार्ज बोर भी बनाएँगे. कोई कह सकता है कि यह काम तो PHE विभाग का है. PHE सड़क कब बनाएगी, जब वो सड़क बनाएगी तब बोर बनाएगी. इन सारे कामों को भी हम अपने हाथ में ले रहे हैं. अभी बहुत सी चीजें हैं. अगले बजट में आप मांग कीजिए, समय तय कीजिए. मैं आपको बताउंगा कि हम कितना आगे जा रहे हैं. आज देश के दूसरे राज्य मध्यप्रदेश का अनुसरण कर रहे हैं. मैं आने वाले समय में उसके बारे में विस्तार से बताउंगा. लेकिन पिछली बार मैंने ईशारे में कहा था आज कहता हूँ कि बहुत जल्दी किसी भी परियोजना का समय का निर्धारण सांइंटिफिक आधार से हम करेंगे. यानि हमारा सॉफ्टवेयर हमको बता देगा कि इसमें लगने वाला समय कितना है. कोई इंजीनियर हमको कागज पर यह नहीं बताएगा. एक ही परियोजना में 18 महीने लगते हैं, उसी परियोजना में 24 महीने लगते हैं, उसी में 32 महीने लगते हैं. हम इसको भी समाप्त कर रहे हैं. सांइंटिफिक आधार पर समय का निर्धारण हमारा सॉफ्टवेयर करके देगा. जिसके लिए हम भास्कराचार्य इंस्टीट्यूट से लगातार संपर्क में हैं. वहां जाते हैं. वहां से हमने बहुत सारी चीजों को लिया है, जिनमें आज देश के कई राज्य हैं जो अब यह कह रहे हैं कि जो मध्यप्रदेश के पास उपलब्ध हुआ है वह हमको भी मिलना चाहिए, तो कुल मिलाकर मुझे लगता है कि मध्यप्रदेश के जनप्रतिनिधि होने के नाते हम सभी को इस बात पर गर्व होना चाहिए कि हम उस व्यवस्था का हिस्सा हैं जहां पर बहुत तेजी के साथ विकास के रास्ते पर हम आगे बढ़ रहे हैं. विकास के रास्ते पर जब हम आगे बढ़ते हैं तो यह ठीक प्रसव की तरह होता है कि प्रसव वेदना होती है लेकिन जब प्रसव हो जाता है तो सभी को खुशी होती है. विकास देखकर, सड़क देखकर, हम सबको खुशी होती है लेकिन सड़क बनने की जो प्रक्रिया है उसमें कहीं न कहीं थोड़ा-बहुत आंशिक कष्ट हम सबको झेलना होता है. मैं उम्मीद करता हूं कि सभी इस बात से सहमत होंगे और मिल जुलकर इस विधेयक को आज पारित करेंगे आप सभी से मेरा इतना ही आग्रह है. बहुत-बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.
अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.
प्रश्न यह है कि खण्ड 2 से 4 इस विधेयक का अंग बनें.
हां और ना थोड़ा जोर से बोलें मुझे समझ में आ जाएगा कि दम किधर है.
खण्ड 2 से 4 विधेयक के अंग बने.
प्रश्न यह है कि खण्ड 1 पूर्ण नाम तथा अधिनियम सूत्र इस विधेयक का अंग बने.
खण्ड 1 पूर्ण नाम तथा अधिनियम सूत्र इस विधेयक का अंग बना.
श्री राकेश सिंह -- मैं प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया जाय.
अध्यक्ष महोदय -- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.
प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किया जाय.
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.
विधेयक पारित हुआ.
अब मैं उसमें ज्यादा कुछ कर नहीं सकता. वजन इधर ही ज्यादा है.
श्री प्रह्लाद पटेल जी को कहीं जाना है इसलिए मैं उनका विधेयक पहले ले रहा हूं.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, इसके लिए नेता प्रतिपक्ष जी से अनुमति ले ली थी.
श्री उमंग सिंघार -- अध्यक्ष महोदय, सर्वमान्य हैं.
अध्यक्ष महोदय -- समाप्त होने तक वह लौटकर आ जाएंगे.
श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, लेकिन हमने संसदीय कार्य मंत्री जी के संशोधन विधेयक की तैयारी की थी.
श्री प्रह्लाद सिंह पटेल -- इसमें ज्यादा टाइम नहीं लगेगा, आपको मौका मिलने वाला है.
श्री बाला बच्चन -- टाइम लग जाएगा क्योंकि शायद इसमें हमको ओपनिंग करनी है. आपने अपने लेबल पर चेंज कर लिया है, देख लीजिए यही तो हम कल से बोलते आए हैं.
श्री आशीष गोविंद शर्मा -- बाला भैया, आप किसी भी डाउन पर उतर सकते हैं.
श्री बाला बच्चन -- आपका तो छठवें नंबर पर था और माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी का तीसरे नंबर पर विधेयक था.
श्री प्रह्लाद सिंह पटेल -- मैंने उनको धन्यवाद कर दिया है.
श्री राकेश सिंह -- बाला बच्चन जी, क्षमा कीजिएगा लेकिन यह सारे अधिकार अध्यक्ष के पास होते हैं, जरूरी नहीं है कि इसके लिए सदन को विश्वास में लिया जाए.
श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, हम एग्री हैं. वह तो सुप्रीमो हैं.
4.43 बजे मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता)
विधेयक, 2026
श्री प्रह्लाद सिंह पटेल -- आप कितना भी लड़ाओ हम लोग लड़ने वाले नहीं हैं. अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) विधेयक, 2026 मैं सदन में लेकर आया हूं और इसमें सबसे पहले मैं देश के प्रधानमंत्री जी का हृदय से आभारी हूं और मध्यप्रदेश विधान सभा में हम इस संशोधन को लेकर आए हैं इसलिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जी और सदन के सभी सदस्यों के प्रति भी मैं अपना आभार व्यक्त करता हूं.
मैं प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) विधेयक, 2026 पर विचार किया जाए.
अध्यक्ष महोदय – प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ..श्री बाला बच्चन जी.
श्री बाला बच्चन (राजपुर)—माननीय अध्यक्ष महोदय, इसीलिये मैंने आपसे निवेदन किया था. मैं कल की ही बात कर लूं कि सरकार बहुत जल्दबाजी में है जो आज विधेयक प्रस्तुत किये जाने थे और कल सदन में चर्चा में आना था, वह आज ही आ गये हैं अब हम लोगों को समय मिलना चाहिये पढ़ने के लिये और बहुत बड़े संशोधन विधेयक हैं.
श्री आशीष गोविंद शर्मा – बाला भैया 2047 तक विकसित भारत बनाना है तो जल्दी तो करना ही पडेगा.
श्री बाला बच्चन—कोई बात नहीं. वह हो जायेगा उसकी आप चिंता मत कीजिये. माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) विधेयक 2026 में लगभग 9 अध्याय हैं, जैसा कि मैंने बताया कि तीसरे नंबर जो संसदीय कार्य मंत्री जी का विधेयक आ रहा था हम लोग उसकी तैयारी कर रहे थे, फिर भी माननीय मंत्री जी ने जो विधेयक प्रस्तुत किया है उसके बारे में कहना चाहता हूं कि प्रदेश में श्रम कानून का खुला उल्लंघन हो रहा है और बाल श्रमिक भी जगह जगह देखे जाते हैं. आप अध्याय एक में देखें. इसकी परिभाषा के कालम (2) के (क) को आप देखें केन्द्रीय श्रम संहिता के तहत संशोधित मजदूरी संहिता 2019 का उल्लेख है लेकिन प्रदेश के उद्योगों में जो ठेका प्रणाली लागू हुई है उसमें निर्धारित मापदंडों से कम मजदूरी दी जा रही है, मंत्री जी इसको आप देखें. क्योंकि जितने कम समय में मैं, इस विधेयक को पढ़ सकता था, नोट कर सकता था वह मैंने किया और उसी आधार पर मैं यह बात कह रहा हूं. इससे संबंधित स्थान, पीथमपुर, मंडीदीप है, नागदा जंग्शन है, सारणी एवं अन्य स्थानों पर भी मजदूरों की शिकायतें मिलती हैं पर इस पर विभाग कार्यवाही नहीं करता है, इस पर आप कार्यवाही सुनिश्चित करावें.
अध्यक्ष महोदय, इसी के (घ) में मैंने देखा है कि 100 नियामक संगठन का उल्लेख है. मंत्री जी आप उत्तर देते समय इसका जवाब अवश्य दें कि भोपाल और इंदौर में इन संगठनों की संख्या कितनी है, श्रम विभाग, श्रमिकों के हित में पूरे प्रदेश में ऐसे 100 नियामक संगठनों की स्थापना कब तक करेगा. यह भी आप अपने जवाब में बतायें. इसके अध्याय(2) में स्थापना का रजिष्ट्रीकरण इसके बिंदु 3 में केन्द्र/राज्य डॉटा के जुड़ने का उल्लेख किया गया है. इसे रोजगार पोर्टल से भी जोड़ा जाये जिससे बेरोजगार युवाओं को ज़ॉब भी मिल सके और उनकी समस्यायें दूर भी हो सकें. यह अध्याय दो जो मैंने पढ़ा है जो मैंने समझा है उसके आधार पर बोल रहा हूं.
माननीय अधअयक्ष महोदय, इसी प्रकार से अध्याय (3) मजदूरी काम की स्थिति और उससे संबंधित जो सुरक्षा का बिंदु क्रमांक 9 है उसमें काम के घंटे साप्ताहिक अवकाश का जिक्र है लेकिन इसके लिये नगरानी की व्यवस्था न होने के कारण मजदूरों का शोषण हो रहा है. इसमें आपने जिक्र किया है मानीटरिंग का उल्लेख नहीं है. मजदूरों को इस शोषण को बचाने के लिये बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य की जाये जिसका कमांड सेन्ट्रल श्रम विभाग के अधिकारियों के पास में होना चाहिये, यह मेरा मानना है करना है या नहीं करना है यह आपके ऊपर निर्भर करता है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, इसी के बिंदु क्रमांक 11 के तहत महिलाओं की सुरक्षा के उपाय पर विभाग निगरानी रखे, चूंकि यह विधेयक कार्य स्थल से संबंधित है इसलिये सुझाव है कार्य स्थलों पर सीसीटीवी भी अनिवार्य होना चाहिये, जिससे ठीक प्रकार से मानीटरिंग हो सकेगी इससे महिलाओं के लिये पृथक से हैल्प लाईन नंबर हो जिसमें श्रम विभाग के अधिकारी इसमें दर्ज समस्या का निराकरण करें. क्योंकि यह छोटी छोटी चीजें मेरे बोलने में या फिर आपके समझने आपको छोटी लग रही है लेकिन इन सब वर्गों के लिये यह अति महत्व की बात हैं. माननीय मंत्री जी आपके पास बहुत महत्वपूर्ण विभाग है और मैं समझता हूं कि इससे संबंधित आप जो संशोधन विधेयक लाए हैं, अगर इन छोटे छोटे सुझावों को आप जोड़ेंगे और इस पर उपाय करेंगे तो मैं समझता हूं कि सबका भला होगा. अध्यक्ष महोदय, इसी के बिन्दु क्रमांक 15 में सुरक्षा उपाय से संबंधित एक मैं माननीय मंत्री जी का और सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि आज ही श्री सोहनलाल बाल्मीक जी एक ध्यानाकर्षण लाए थे. इस संबंध में बहुत कार्य करने की आवश्यकता है. उद्योगों में आगामी दुर्घटना की बहुत व्यापक समस्या है. पूरे प्रदेश में घायल मृतकों को मुआवजा राशि निर्धारित हो और अभी वह हो नहीं पाती है या समय पर मिल नहीं पाती है. मान लो कि काम करते वक्त कोई घायल हो गया या किसी की डैथ हो गई है तो उनको न्याय नहीं मिल पाता. समय पर नहीं मिल पाता है और न उनको मुआवजा राशि मिल पाती है.
अध्यक्ष महोदय, आज ही मैं श्री सोहनलाल बाल्मीक जी के ध्यानाकर्षण को ध्यान से सुन रहा था. चूंकि आज इस पर मुझे बोलना भी था तो इसलिए मैंने इस पर ध्यान दिया है. माननीय मंत्री जी आप इस पर भी ध्यान दें और व्यवस्था दे जिससे इन वर्ग के लोगों का भला हो सके. माननीय मंत्री जी और सरकार का मैं ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूं कि अध्याय 4 में कानूनी शक्तियां प्रदेश के श्रम न्यायालयों में जो हजारों प्रकरण लंबित हैं उनके शीघ्र निराकरण के आदेश जारी होना चाहिए जिससे कि श्रमिकों को समय रहते न्याय मिल सके और इस तरह की उनकी पुनरावृत्ति न हो और जिससे उनका समय खराब नहीं हो. इसके लिए भी सरकार ध्यान दे.
अध्यक्ष महोदय, अध्याय 5 असंगठित कर्मकार कल्याण के बिन्दु 21 में जो कल्याण निधि है, उसका लाभ श्रमिकों को और उनके परिवार वालों को एक समय सीमा पर मिल सके. ऐसे मेरे जो छोटे छोटे सुझाव थे. ऐसे ही अध्याय 6 है, संगठित कर्मकार कल्याण, इसके बिन्दु 24, 26 निधि के उपयोग में बहुत देरी हो जाती है जो इसके हितग्राही होते हैं उनको इसका लाभ समय पर नहीं मिल पाता है और पर्याप्त नहीं मिल पाता है. इस कारण से उनको दिक्कत भी होती है और इनका पालन नहीं हो पाता है, इस कारण से दिक्कतें होती हैं.
अध्यक्ष महोदय, अध्याय 8, यह बड़े बड़े संशोधन विधेयक हैं, इसलिए मैंने इस बात को बोला था, जिससे हम ढंग से पढ़कर समझकर सरकारों और मंत्रियों को भी हम समझा सकें जिससे मंत्री भी अपनी ब्रीफिंग लेते समय ढंग से पकड़ भी बना सकें अधिकारियों के ऊपर और उसके लिए प्रदेश के लिए ठीक ढंग से लागू भी करा सकें. अध्याय 8 निरीक्षण वसूली अपराध, इसके बिन्दु 29 के क्रमांक 3 में जो जांच प्रक्रिया का उल्लेख है, उसकी समय सीमा सदन तय करे, वह समय सीमा तय नहीं है. हजारों की संख्या में केस पेंडिंग हैं. बड़ी पेडेंसी है. बिन्दु 32 और 33 में शक्ति जो निर्धारित की है लेकिन कारावास जैसी दांडिक कार्यवाही इसमें शामिल की जाय, मैं समझता हूं कि जितनी होना चाहिए, जिससे कि इस तरह की पुनरावृत्ति न हो, खौफ और डर भी होना चाहिए और जिन्हें समय से न्याय मिलना चाहिए, समय सीमा पर मिलना चाहिए और उसका मुआवजा भी मिलना चाहिए.
अध्यक्ष महोदय, अध्याय 9 प्रकीर्ण, इसके बिन्दु 37 में माननीय मंत्री जी लंबित कार्यवाही का अंतरण जब पुराने प्रकरण इस नयी संहिता के अधीन हो जाएंगे तो इसकी आड़ में प्रकरणों में विलंब न लगे और इसका शीघ्र निराकरण हो यह मेरा आपसे निवेदन है. प्रदेश के श्रमिकों को पूरी मजदूरी मिले. समय पर मिले. अन्याय की दिशा में विभाग श्रमिकों के साथ खड़ा भी रहे और इस तरह का उनके साथ अन्याय नहीं हो सके उनको न्याय मिले, समय सीमा में न्याय मिले. सरकार के प्रति उनका विश्वास हो और भरोसा भी बना रहे. यह हमारा माननीय मंत्री जी से आग्रह है. मैं समझता हूं कि निश्चित ही मैंने जो सुझाव दिये हैं मैंने विधेयक को जितना पढ़ा और समझा और जो सुझाव दे सकता था प्रदेश के हित में और इन वर्गों के लिए वह मैंने रखे हैं और इसीलिए मैंने आपसे निवेदन किया था कि बड़े बड़े संशोधन विधेयक हैं. मैं अभी नम्बर तीन पर आने वाला संशोधन विधेयक संसदीय कार्यमंत्री जी का था उसमें मैं लगा हुआ था और यह तो मुझे लगा कि कल तक आएगा तो अध्यक्ष महोदय, इसलिए थोड़े परफार्मेंस में यह बात आई है, लेकिन मेरा आपसे आग्रह और निवेदन है कि मैं समझता हूं कि प्रदेश हित में और श्रमिक वर्ग के हित में आप निर्णय करेंगे, ऐसा मुझे उम्मीद विश्वास और भरोसा है. आपने जो समय दिया है उसके लिए धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय – धन्यवाद. श्री ओमप्रकाश सखलेचा जी. आज की कार्यसूची तो आज ही पूरी करिए. कल के लिए मत छोड़िए. पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों से मेरा आग्रह है कि बिल पर एक ही एक व्यक्ति बोलेंगे, जैसा प्रतिपक्ष ने पालन किया, वैसे ही सत्ता पक्ष भी इसका पालन करे, तो ठीक रहेगा.
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) – ठीक है अध्यक्ष महोदय जी. जैसा आपका आदेश हो. आप प्रथम क्रम के व्यक्ति को बुला लीजिए.
अध्यक्ष महोदय – आप अपने क्रम वाले सदस्य का नाम निकाल लीजिए.
श्री कैलाश विजयवर्गीय – जी अध्यक्ष महोदय.
श्री ओमप्रकाश सखलेचा (जावद) – माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय श्रम मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल जी द्वारा लाए गए इस बिल का तहेदिल से समर्थन भी करता हूँ और उनका अभिनन्दन भी करना चाहता हूँ. इस बिल कानूनों का सरलीकरण से लेकर कई कानूनों को मिलाकर इसे सामान्य परिभाषा में सीधा करने की बात कही गई है. जितने कानून के दांवपेंच होते हैं. चाहे श्रमिकों को रखने वाला उद्योगपति हो या श्रम हो, यह दोनों ही एक-दूसरे की विपरीत परिभाषा से जब बातें शुरू करते हैं, तो उस बात का अंत अविश्वास से शुरू होकर लड़ाई और पूरे औद्योगिकरण पर भी असर पड़ता है और उनकी नौकरियों पर भी असर पड़ता है. मैंने बहुत बारीकी से इन सब को ऑब्जर्व भी किया.
अध्यक्ष महोदय, मैं आज बड़ी गंभीरता से यह बात कहता हूँ कि इन नियमों में सबसे पहले जिस चीज की जरूरत है कि दोनों पक्ष को यह लगे कि यह उनके लिए बिल आया है और दोनों पक्ष में कम से कम विवाद की गुंजाइश हो, तब जाकर श्रम और हमारे देश का प्रोडक्शन बढे़गा, जिससे हम आत्मनिर्भरता की तरफ बढे़गें. बेरोजगारी के उस कलंक से भी धीरे-धीरे हमें मुक्ति मिलने की गुंजाइश होगी. लेकिन जब हम बात करते हैं, इन्होंने चार राज्यों के पुराने कानूनों का समेकन करके एक कानून बनाने की कोशिश की, ताकि कोर्ट में कम से कम मामले जाएं और उनका जीवन वकीलों के भरोसे न रहे. हम देखते हैं कि मध्यप्रदेश में भी अभी 20-30 सालों से बंद टेक्सटाइल मिल्स के निपटारे हो रहे हैं और 30 साल बाद भी निपटारे क्यों हो रहे हैं क्योंकि जमीनों की वैल्यूएशन मिल गई, इसलिए निपटारे हो गए. वरना दो-दो पीढ़ियां खतम हो जाए, तो भी श्रम का निपटारा न हो. मुझे बहुत अच्छे से याद है कि सबसे पहले वेस्ट बंगाल से यह विवाद शुरू हुआ. उद्योग, श्रमिकों और कर्मचारियों का विवाद शुरू हुआ. बाद में यह विवाद फरीदाबाद आया. वहां से सब इंडस्ट्री खतम हुई. अगर मैं इन सब चीजों को देखते हुए देखूं, तो आज जब हम आत्मनिर्भर भारत की बात कर रहे हैं, हम इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन की बात कर रहे हैं, हम बेराजगारी कम करने की बात कर रहे हैं, तो नियमों में जितना संशोधन करके, पुराने अनुपयोगी नियमों को खतम करके जब तक हम नहीं लाएंगे, तब तक छोटे-छोटे उद्योगों में यह बातें कैसे खतम होंगी.
अध्यक्ष महोदय, मुझे याद है जब मैंने वर्ष 1997 में 17 साल की उम्र में इमरजेंसी काल में पहली इंडस्ट्री लगायी थी. कितने नियम थे. धीरे-धीरे वह नियम कम हुए, तो लगा. आज तो माननीय मंत्री जी ने कहा कि अब उद्योगों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण की जटिलताओं से मुक्त करके केवल आवेदन को ही मानेंगे. इस पुरानी प्रणाली से मुक्ति दिलाएंगे. क्योंकि वह मध्यम उद्योग के लिए सबसे बड़ा चैलेंज होता था और अधिकारियों का जरूरत से ज्यादा डर और यह केवल एक पक्ष का नहीं होता, दूसरा पक्ष भी है, तो कहीं न कहीं दोनों पक्षों का जब तक विश्वास नहीं जीता जाएगा, तब तक कुछ नहीं होगा. इसलिए इन सब चीजों का प्रयास किया है. ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को भी अगर मैं बेस लाइन मानूं, तो श्रम नियम और वह श्रम नियम ऐसे बने कि दोनों ही यह महसूस करें कि दोनों के लिए विन-विन सिचुएशन है. मुझे आज भी एक और विषय याद आ रहा है कि एक बार चर्चा हो रही थी कि दंतोपंत ढेंगडे़ जी जिन्होंने भारतीय मजदूर संद्य की स्थापना की थी और एक वक्तव्य दिया था कि हम काम पूरा करेंगे, लेकिन दाम भी पूरा लेंगे. उन्होंने स्ट्राइक की बात नहीं की, काम रोकने की बात नहीं की. उन्होंने औद्योगिकरण को बढ़ाने की बात की लेकिन व्यवस्था से, नियम से उसके प्रापर नियम, चाहे महिलाओं की सुरक्षा की बात आये, परिवहन की सुरक्षा की बात आये, अन्य सभी बातों पर जब हम चर्चाएं करते हैं तो यह बातें हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं. मैं एक एक नियम की व्याख्या में नहीं जाऊंगा जैसा कि मेरे पूर्व वक्ता ने कहा, लेकिन कहीं न कहीं असंगठित श्रमिकों के कल्याण बोर्ड जैसी चीजें उनके पास कितना फंड पड़ा है और उसका कैसे सदुपयोग किया जाये उसके बारे में चर्चा और विषय की बात रखी है. मुझे आज भी याद है कि 2004 के आखिर में या 2005 के शुरूआत में जब बाबूलाल गौर मुख्यमंत्री के रूप में पहली बार जावद आये थे. तो हमने 10 दिन में 10 हजार असंगठित श्रमिकों का पंजीयन करवाकर के सबसे पहले उस नियम का उपयोग किया था माननीय बाबूलाल गौर माननीय मुख्यमंत्री थे वह कहने लगे मैंने पूरा श्रम विभाग से अपनी राजनीति शुरू की. लेकिन मुझे नहीं पता था कि इस खाते में इतना फंड पड़ा हुआ है तो मध्यप्रदेश में इस फंड का उसका उपयोग करके लाखों लोगों का इसमें फायदा हुआ.यह हमको समझना पड़ेगा कि दो विंग न बनाकर कैसे यह विश्वास दिलाया जाये कि दोनों पक्ष के लिये यह बात की इसका यह प्रयास वास्तव में बहुत सराहनीय है. मैं यह चाहूंगा कि वास्तव में तहेदिल से माननीय प्रहलाद जी का भी अभिनन्दन करता हूं तथा माननीय मुख्यमंत्री जी का भी अभिनन्दन करता हूं कि इस विषय पर इन्होंने प्रयास करके संशोधन लाये और नियमों की जटिलता को कम करके कम नियमों से इसमें कंफ्यूजन न हो, कंफ्यूजन से विवाद न हो, इसमें विवाद न हो, विवाद से इंडस्ट्रियलाईजेशन में रूकावट न हो, लेकिन साथ में दो तीन विषय और उनके ध्यान में लाना चाहूंगा. हमारे यहां एक विक्रम सीमेंट जैसी एक फैक्ट्री है, यह बहुत बड़ी इंडस्ट्री है. एक ही कम्पनी में दो दो नियमों का, जब राज्य सरकार का नियम बनाते हैं तो 50 वेजेज देने के लिये राज्य सरकार का नियम यूज करते हैं और रिटायरमेंट के लिये केन्द्र सरकार का नियम यूज करते हैं. मैं चाहूंगा कि माननीय मंत्री जी मैं चिट्ठी भी उनको दे रहा हूं कि उसके बारे में जांच करवा के सीमेंट इम्पलाईज की चिट्ठियां भी मेरे पास में आयी हैं कि कम्पनी ने सेवानिवृत्ति का नियम तो लिया केन्द्र सरकार का 58 वर्ष में जब किसी ने किया तो उसको नौकरी से निकाल दिया जब तंख्वाह की बातें आती हैं स्टेट के नियम. उन्होंने माईंनिंग विभाग में अलग नियम से वेजेज देते हैं और दूसरे विभाग में अलग नियम से मिनिमम वेजेज का शोषण करते हैं. तो हमें कहीं न कहीं सुविधाएं भी देनी हैं, साथ में यह भी बहुत सख्ती से निर्देश देना पड़ेगा कि एक कम्पनी दो राज्यों के दो दो सुविधा के पार्ट के नियम का उपयोग करके मजदूरों का शोषण भी न कर पाये और मजदूरों को भी यह विश्वास दिलाना पड़ेगा कि सरकार पूरी शक्ति के साथ उनके साथ में खड़ी है ताकि वह उत्पादन बढ़ाकर आज के इस काम्पिटिशन की दुनिया में दोनों के बेलेंस का समावेश होकर आगे बढ़े. समय सीमा का ध्यान रखते हुए मैं इस बिल का दिल से समर्थन करता हूं. बस इतना आग्रह है कि यह जो मैंने कहा है उसकी जांच करवा दें उसका आदेश दे दें मैं उसकी चिट्ठी आज ही दे दूंगा धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय – माननीय मंत्री जी.
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) – धन्यवाद अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय बाला जी का, माननीय ओम जी का, हृदय से आभार व्यक्त करता हूं. इतने कम समय में आपने इतने अच्छे सुझाव दिए हैं, मैं कोशिश करूंगा कि आपकी सारी बातों का जवाब दूं.
अध्यक्ष महोदय – बाला जी से संपर्क रखा करो, लेबर के बारे में काफी अच्छा ज्ञान है इनका. कम समय में अच्छी तैयारी कर ली है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय – ओम जी को किस क्षेत्र में नॉलेज नहीं है आप बैठिए तो सही एक घंटे.
सभापति महोदय – सभी को रखना चाहिए, जिनको ज्ञान अर्जित करना है.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल – अध्यक्ष जी, आपको तो जानकारी है ही, लेकिन सदन को भी जानकारी है कि देश के प्रधानमंत्री ने, देश के श्रमिक क्षेत्र में जो आजादी के पूर्व के 29 कानून थे, उनको रिपील करते हुए चार संहिताओं में उनको देश के सामने रखा. वर्ष 2019 से ये प्रक्रिया शुरू हुई थी और चारों की चार संहिता उन 19 कानूनों को कम्पाइल करके बनाई गई है. पहली है, वेतन संहिता, दूसरी है सामाजिक सुरक्षा संहिता, तीसरी है औद्योगिक संबंध संहिता और चौथी है उपजीविका जन्य सुरक्षा एवं स्वास्थ्य संहिता. आज इस बिल का उद्देश्य भी यही है कि भारत सरकार ने अपने कानून रिपील करके चार संहिताएं बनाई है, मध्यप्रदेश सरकार भी उसी को एडाप्ट करते हुए अपने संशोधनों को सदन के सामने लेकर आई है. मप्र में भी राज्य के छह श्रम कानून है, जिनमें से 4 मप्र औद्योगिक ऋण समायोजन और परिसमापन अधिनियम 1936, मप्र दुकान और स्थापना अधिनियम 1958, मप्र औद्योगिक संबंध अधिनियम 1960, मप्र औद्योगिक रोजगार अधिनियम 1961, इन चारों कानूनों को रिपील करके हम इस संशोधन को लेकर आए हैं. हमने दो लक्ष्य प्राप्त करने की कोशिश की है. एक भारत सरकार के चारों संहिताओं को स्वीकार करना, उसके परिप्रेक्ष्य में अपने नियमों का संशोधन करना और साथ में मप्र राज्य के जो 6 कानून है, 2 को छोड़कर जो हमारे वेलफेयर के लिए, जिसमें आपने मुझसे बात की है तो हमारे जितने भी बोर्ड है, उसमें एक को हमने समायोजित किया था, जिसमें हमने स्टे लेकर आए थे, सेलेक्ट पेंशन बोर्ड को जिसको हमने अपने साथ मर्जर किया है, लेकिन बचे हुए बोर्ड यथावत् काम करेंगे, इसलिए उन दो कानूनों को छोड़कर बाकी कानूनों को इसमें शामिल किया गया.
दूसरी बात है कि भारत सरकार का जो डे लेबरेशन नीति का पालन करना और श्रम हितैषी और उद्योग हितैषी निर्णय करना, अत: दुकानदारों का पंजीयन अब सूचना मात्र देने पर किया जाएगा, जो जीवन भर वैध रहेगा. हम सब इंस्पेक्टर राज का विरोध करते हैं और सब यह मानते हैं कि कई बार अनावश्यक परेशानियां होती है. इसलिए जब यह देश में भारत सरकार ने कानून की बात की थी, पंजीयन की बात की थी, तब मैंने सुझाव दिया था कि हमें सिर्फ पंजीयन करना चाहिए ,उसकी कोई फीस नहीं होनी चाहिए, कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन कर सकता है. क्योंकि कभी गृह मंत्रालय और शहरी विकास मंत्रालय को कभी डेटा कलेक्शन की जरूरत पड़े, तो वह पंजीयन उसमें काम आए, लेकिन कोई भी श्रम अधिकारी वहां पर जाकर किसी भी प्रकार का निरीक्षण नहीं कर सकता. यह मप्र सरकार ने इस कानून को संशोधित किया है. 24 घंटे और सातों दिन दुकानें खुली रह सकती है, सिर्फ एक शर्त के साथ कि हर 8 घंटे में आपको व्यक्ति को बदलना पड़ेगा. 8 घंटे से ज्यादा की ड्यूटी व्यक्ति नहीं कर सकता, जो बात आपने कही कि इसमें घंटे का प्रावधान नहीं है, अब अगर आप संहिता को पढ़ेंगे, तो उसमें बड़ा स्पष्ट है कि कोई भी मजदूर एक सप्ताह में 48 घंटे की ड्यूटी कर सकता है. लेकिन अगर उसको ओव्हर टाइम करना है तो 4 दिन में भी वह 12 घंटे से ज्यादा ड्यूटी नहीं कर सकता ये सारे परिवर्तन अब कानून के भीतर हो गए हैं. लेकिन कोई व्यक्ति चाहे कि 4 दिन में हम 12-12 घंटे काम करके, अपने 48 घंटे पूरे कर ले और तीन दिन हम अपने दूसरे काम में लगाना चाहे, तो वह यह काम भी कर सकता है नियोक्ता को घंटों से मतलब है, इससे नए लोगों को भी काम करने का मौका मिलेगा. एक उदाहरण इंदौर का देता हूं, पांच बेटियों ने इस काम को शुरू किया, वह 12-12 घंटे चार दिन काम करती है और तीन दिन अपने घर जाकर अपने परिवार का काम करती है, यह उदाहरण भी इसमें देखने को मिला. छटवां है कि पुराने जितने भी हमारे श्रम कल्याण के कानून है, कल्याण मंडल है और संबल बोर्ड है, वह यथावत् रहेंगे, यह बात मैंने आपके सामने कह दी है. महिलाओं दिव्यांगों और सभी श्रमिकों की सुरक्षा और गरिमा का ख्याल रखा जाएगा. गिग वर्कर्स को पहली बार जोड़ा गया है, इसके पहले कहीं पर भी किसी भी सूची में गिग वर्कर्स को नहीं रखा गया था. भारत सरकार ने इस काम की शुरूआत की और मध्यप्रदेश सरकार ने इस काम को पूरा कर दिया. मजदूरों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जितने भी 10 से कम की संख्या भारत सरकार ने तय किया है कि जहां पर 20 लोग काम करें, वहां पर जाकर श्रम अधिकारी अनुमति से जाकर काम देख सकता है, हमने उस संख्या को मजदूरों के हितों को ध्यान में रखकर हमने 10 लोग भी किया है दस लोग भी जहां पर काम करेंगे, हम वहां पर भी उसका ध्यान रखेंगे, छोटी-छोटी गलतियों के कारण दुकानदारों के सामने जिस प्रकार से उनको तंग किया जाता था, उस इंस्पेक्टर राज्य की अब समाप्ति हो गई है, यह संहिता है, जिसको मैं लेकर आया हूं, वह पूरी तरह से मजदूरों के हित में भी है और औद्योगिक तरीके से जिस प्रकार से हम गतिशीलता के साथ काम कर रहे हैं, दोनों के मधुर संबंध में बनाने में योगदान करेंगे. आपने जिस प्रकार से सेल्फ रेगुलेटर आर्गिनाईजेशन की बात की थी, इस विधेयक में उसका प्रावधान है और यह अब बनेगा और इसमें स्पष्ट रूप से उस बात का प्रावधान है. दूसरा आपने सीसीटीवी की बात की थी, वह नियमों में है और महिलाओं के लिये विशेषकर जब हम रात्रि की पाली शुरू कर रहे हैं, सातों दिन 24 घंटे काम करने की अनुमति दे रहे हैं, तो सबसे पहली जिम्मेदारी, उस इंस्टीट्यूशन की भी है और सरकार की भी है कि हम महिलाओं को सुरक्षा की गारंटी दें और गारंटी सिर्फ सड़क पर ही नहीं काम काज के स्थल पर भी दें, सड़क पर भी और घर पहुंचते समय उसके घर तक पहुंचने की गारंटी पर भी सुरक्षा की गारंटी का अध्यक्ष महोदय इसमें सुनिश्चित करने का प्रावधान है, इसलिए जो सुरक्षा संहिता उसमें इन बातों का बड़ा स्पष्ट उल्लेख है, आपने एक बात कही है कि कारावास का प्रावधान होना चाहिए, मैं इस बात को स्वीकार नहीं कर पाऊंगा क्योंकि भारत सरकार ने सारे कानूनों से डीक्रिमिनलाइज किया है कि जहां-जहां पर भी जेल का प्रावधान था, उसको अर्थदंड से करके उसको समाप्त करने की बात कही है. श्रम न्यायालय की जगह पर ट्रिब्यूनल बनाने का काम अभी प्रारंभ हो गया है. जब तक ट्रिब्यूनल नहीं बनेंगे तब तक श्रम न्यायालय काम करेंगे लेकिन मैं इन दो वर्षों का आंकड़ा बता सकता हूं, मध्यप्रदेश में चूंकि आप हैं, इंदौर में हमारा कार्यालय है, आप वर्ष 2026 तक के आंकड़े देख सकते हैं कि लगभग 26 हजार में से 25 हजार से ज्यादा मामलों को हमने सामाधान के तौर पर आगे बढ़ाया है, और यह सिर्फ डेसबोर्ड बनाने का परिणाम है और इसलिए मुझे लगता है कि कुछ ऐसे काम्पलीकेशंस आते हैं जैसे माननीय ओम जी ने जो बात कही है, अगर ऐसे मामले आते हैं, तो इसी बात के लिये सरकार होती है, इसी बात के लिये प्रशासनिक तंत्र होता है, हम निश्चित रूप से उसमें काम करेंगे. आपने कहा कि बायोमैट्रिक विभाग के पास हो, आप भी जानते हैं कि कोई इंडस्ट्री रहेगी तो उपस्थिति उसको लेनी है, तो स्वाभाविक है कि बायोमैट्रिक का कमांड विभाग लेगा तो फिर मुझे लगता है कि यह काम बहुत व्यावहारिक नहीं लगता है, हां उसमें कोई संशोधन हो कि नियमों में कोई चीज डालनी है तो निश्चित रूप से जब हम नियम बनायेंगे, तो अगर माननीय सदस्यों का या सदन के किसी सदस्य का सुझाव होगा, तो हम उन नियमों में उनको स्वीकार करेंगे.
अध्यक्ष महोदय, आपने वेतन की बात की थी, संस्था की बात मैंने बता दी है , रोजगार पोर्टल की बात आपने की थी, काम के घंटे की बात की थी, बायोमैट्रिक्स की बात की थी, सीसीटीवी की बात की थी,तुरंत न्याय की बात की थी, कल्याण निधि के बारे में बोर्ड यथावत है, इसमें कहीं कोई संशोधन अध्यक्ष जी नहीं है और इसलिए मुझे लगता है कि जितने प्रकार से मजदूरों के और उद्योगों के बारे में विचार हो सकता था, वह निश्चित रूप से इस विेधेयक में हम लेकर के आये हैं.
अध्यक्ष महोदय, हमने भारत सरकार की उस मंशा को भी पूर्ण किया है जो उन्होंने 29 कानूनों को खत्म चार संहिता बनाई हैं, उसकी परिधि में ही यह विधेयक है और राज्य के जो हमारे कानून थे, जो हम रिपीलस कर सकते थे, वह हमने वह किया है. जैसे अर्थदण्ड है, अब सजा जेल तक जाने जैसी बातें, बहुत ही ऐसे दुर्घटना के कोई ऐसे मामले होंगे तो बात अलग है, जिसको न्यायालय करेगा, अन्यथा सामान्यत: भारत सरकार ने तय किया है कि छोटे मोटे मामलों में यह प्रताड़ना के अधिकार नहीं देना चाहिए, जवाब देते समय ध्यानाकर्षण में मैंने इसलिए इंटरबीन किया था कि कहीं न कहीं हम अपनी जिम्मेदारी से न मुकरे, मजदूर के प्रति जो संवदेनशीलता के साथ हमें उसके साथ खड़ा होना चाहिए, सरकार पूरी ताकत के साथ पूरी संकल्प के साथ , मजदूर के हितों के साथ खड़ी है, इतना ही कहते हुए मैं सदन से प्रार्थना करता हूं कि यह विधेयक जो उद्योग और मजदूर दोनों के हित में है, उसके समर्थन में निवेदन करते हुए सदन को धन्यवाद देते हुए और अध्यक्ष महोदय आपको धन्यवाद करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं.
अध्यक्ष महोदय – प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता(श्रम शक्ति संहिता)विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.
अध्यक्ष महोदय – अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.
प्रश्न यह है कि खण्ड 2 से 40 इस विधेयक का अंग बने.
खण्ड 2 से 40 इस विधेयक का अंग बने.
अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न यह है कि खण्ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियम सूत्र इस विधेयक का अंग बने.
खण्ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र इस विधेयक का अंग बना.
श्रम मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) विधेयक, 2026 पारित किया जाय.
अध्यक्ष महोदय-- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.
प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश कार्यस्थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) विधेयक, 2026 पारित किया जाये.
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.
विधेयक पारित हुआ.
(3) मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, 2026
(क्रमांक 12 सन् 2026)
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.
अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी, कुछ बोलना चाहते हैं.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, अग्निशमन का कोई प्रभावी एक्ट राज्यस्तरीय एक्ट नहीं था और नगर निगम और नगर पालिकाओं के अलग-अलग एक्ट हैं और अभी तक सिर्फ आग बुझाने तक ही हम सीमित थे, अब हम आग नहीं लगे इसकी तैयारी अभी उपभोक्ताओं से करायेंगे, इस एक्ट में ऐसे प्रावधान किये गये हैं और मुझे उम्मीद है कि यह एक्ट मध्यप्रदेश में जो आग लगने के बाद जनहानि होती है, धन हानि होती है, उसके बचाव में बहुत बड़ी भूमिका अदा करेगा. इसलिये आज एक्ट लाया गया है. अध्यक्ष महोदय, मैं इसके बारे में विस्तृत चर्चा अपने उत्तर में करूंगा.
श्री नारायण सिंह पट्टा (बिछिया)-- अध्यक्ष महोदय, मैं मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवायें विधेयक 2026 पर अपना विचार प्रस्तुत करना चाहता हूं. अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि आग से सुरक्षा आपदा प्रबंधन और नागरिकों के जीवन की रक्षा किसी भी सरकार का सर्वोच्च दायित्व है. प्रदेश में एक आधुनिक सक्षम और जवाबदेही अग्निशमन व्यवस्था की आवश्यकता से कोई भी असहमत नहीं हो सकता इसलिये इस विधेयक का उद्देश्य और महत्व एक अलग ही है, लेकिन लोकतंत्र में केवल उद्देश्य अच्छे होना पर्याप्त नहीं है, कानून ऐसे होना चाहिये जो जनहित, पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक अधिकारों के प्रति संतुलन स्थापित करे. भाग्य से इस विधेयक में कई ऐसे प्रावधान है जो सरकार को अत्यधिक शक्तियां तो देते हैं लेकिन उन शक्तियों के उपयोग पर पर्याप्त नियंत्रण और जवाबदेही का प्रावधान नहीं करते. माननीय अध्यक्ष महोदय, इस विधेयक पर सक्षम प्राधिकारी को भवनों में प्रवेश करने, मार्ग बंद करने, भवनों को सील करने, लोगों को हटाने, निरीक्षण करने, जुर्माना लगाने तथा विभिन्न आदेश जारी करने जैसी व्यपाक शक्तियां प्रदान की गई हैं. अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न मंत्री जी से और सरकार से है. क्या इन शक्तियों के दुरूपयोग को रोकने के लिये कोई स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था बनाई गई, क्या यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी व्यापारी, उद्योगपति, स्कूल, अस्पताल, होटल या आम नागरिकों को अनावश्यक प्रशासनिक उत्पीड़न का सामना न करना पड़े. अध्यक्ष महोदय, यह विधेयक कहता है कि भवनों को सील भी किया जा सकता है, लेकिन यदि किसी अधिकारी के गलत निर्णय से किसी व्यक्ति का व्यवसाय बंद हो जाये, आर्थिक नुकसान हो जाये या बाद में वह आदेश गलत सिद्ध हो जाये तो उसकी जवाबदेही कौन तय करेगा. कानून केवल अधिकार नहीं देता कानून जवाबदेही भी तय करता है दुर्भाग्य से इस विधेयक में जवाबदेही का पक्ष कमजोर दिखाई देता है. इस विधेयक में अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र निरीक्षण,अग्नि सुरक्षा पर्यवेक्षक की नियुक्ति विभिन्न प्रकार की स्वीकृतियों का विस्तृत प्रावधान किया गया है. हम माननीय मंत्री जी से पूछना चाहते हैं कि क्या इन प्रक्रियाओं को पूरी तरह आनलाईन समयबद्ध बनाया जायेगा.क्या सिंगल विंडो सिस्टम लागू होगा. क्या निर्धारित समय में अधिकारी निर्णय नहीं देगा तो आवेदन स्वत: स्वीकृत माना जायेगा यदि ऐसा नहीं होगा तो क्या कानून भ्रष्टाचार के नये अवसर पैदा कर सकता है. इस विधेयक में यह भी प्रावधान किया गया है कि 5 लाख रुपये तक का जुर्माना तथा निरंतर उल्लंघन पर प्रतिदिन अतिरिक्त दण्ड का प्रावधान है. मैं पूछना चाहता हूं मंत्री जी से कि क्या प्रदेश के छोटे दुकानदार,छोटे उद्योग,निजी विद्यालय,धर्मशालाएं और ग्रामीण क्षेत्र के छोटे प्रतिष्ठान इतना भारी अर्थदण्ड राशि का वहन कर पाएंगे. सरकार बार-बार स्मार्ट सिटी और आधुनिक विकास की बात करती है लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रदेश के अनेक जिलों में आज भी पर्याप्त फायर स्टेशन नहीं हैं. आधुनिक फायर टेण्डर उपलब्ध नहीं हैं. प्रशिक्षित कर्मचारियों की भारी कमी है. अनेक वाहनों की स्थिति जर्जर है. ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में आग लगने पर दमकल घंटो बाद पहुंचती है. ऐसी स्थिति में केवल जनता पर भार डाल देना उचित नहीं है. सरकार पहले यह बताए कि प्रदेश में कितने फायर स्टेशन स्वीकृत हैं कितने संचालित हैं कितने पदरिक्त हैं कितने अग्निशमन वाहन अनुपयोगी पड़े हैं. पिछले पांच वर्षों में कितने फायर स्टेशन स्थापित किये गये हैं. यह विधेयक स्थाई निकायों पर भी नयी जिम्मेदारी डालता है लेकिन क्या नगर पालिकाओं,नगर परिषदों और ग्राम पंचायतों को इसके लिये पर्याप्त वित्तीय सहायता और संसाधन दिये जायेंगे.यदि संसाधन नहीं दिये जायेंगे तो यह कानून केवल कागजों तक सीमित रह जायेगा. जनता की सुरक्षा सर्वोपरि हो. अग्नि सुरक्षा व्यापक आधुनिक बने. भ्रष्टाचार की संभावना खत्म हो. निरीक्षण पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी हो. छोटे व्यापारियों और संस्थानों को अनुपालन के लिये पर्याप्त समय और तकनीकी सहायता मिले. ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर नये फायर स्टेशन स्थापित किये जाएं. प्रत्येक जिले में आधुनिक उपकरण,प्रशिक्षित कर्मचारी और त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित किये जायें. हम विकास के विरोधी नहीं लेकिन ऐसा कोई भी कानून स्वीकार नहीं किया जा सके जिसमें सरकार के अधिकार तो बढ़ जायें लेकिन नागरिकों की सुरक्षा पारदर्शी और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित न हो. सरकार से हम आग्रह करते हैं कि यह बिल लोक हित में बहुत ही महत्वपूर्ण है लेकिन इसमें संशोधन करते हुए जो लोक हित और जनहित में हो वह समाहित किये जाएं बस यही मैं माननीय मंत्री जी और सरकार से निवेदन करना चाहता हूं. आपने समय दिया बहुत-बहुत धन्यवाद.
स्वागत उल्लेख
श्री शिवमंगल सिंह,सांसद,श्योपुर मुरैना का स्वागत
अध्यक्ष महोदय - आज दीर्घा में श्योपुर मुरैना के सांसद श्री शिवमंगल सिंह जी उपस्थित हैं. सदन की ओर से उनका स्वागत है.
डॉ. अभिलाष पाण्डेय (जबलपुर-उत्तर) – धन्यवाद माननीय अध्यक्ष महोदय. मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, 2026 के समर्थन में मैं अपनी बात रख रहा हूँ. प्रदेश में बढ़ती अग्नि दुर्घटनाओं के लिए यह बिल बहुत आवश्यक था.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं हमेशा इस बात को विश्वास के साथ कहता हूँ कि वर्तमान की कही हुई बातें ही भविष्य का मार्ग प्रशस्त करती हैं. मैं जब विधानसभा में आया और विधानसभा के प्रश्नों में मैंने कई बार यह बात कही. चाहे 11 जुलाई, 2024 हो, 19 दिसम्बर, 2024 हो, 7 अगस्त, 2025 हो, 5 दिसम्बर, 2025 हो और चाहे 25 फरवरी, 2026 हो, इन तारीखों में ध्यानाकर्षण और प्रश्नों के माध्यम से मैंने माननीय मंत्री जी, जो हमारे संवेदनशील मंत्री हैं, आदरणीय कैलाश विजयवर्गीय जी के समक्ष आपके माध्यम से यह बात जब मैंने रखी.
अध्यक्ष महोदय – कैलाश जी संवेदनशील हैं. (हंसी). भंवर सिंह जी, आपने कुछ बोला नहीं. कैलाश जी की बात आई, आप कुछ बोले नहीं.
श्री भंवर सिंह शेखावत – संवेदनशीलता और कैलाश जी का कोई रिश्ता नहीं है. (हंसी).
श्री कैलाश विजयवर्गीय – यह वही रिश्ता है, जो आपका और मेरा रिश्ता है. (हंसी).
डॉ. अभिलाष पाण्डेय – अध्यक्ष जी, तब आज इस बात को मुझे कहते हुए बड़ी प्रसन्नता है कि माननीय मंत्री जी ने, जो बहुत ही संवेदनशील मंत्री हैं, मैं उनके प्रति आभार इस बात के लिए व्यक्त करता हूँ कि जो ये विषय आपके समक्ष रखे. आदरणीय अध्यक्ष जी, आपके मार्गदर्शन में रखे, तो आदरणीय कैलाश जी ने पिछली बार बड़े विश्वास के साथ मुझे इस बात को कहा कि जिस तरह का मैंने जो ध्यानाकर्षण लगाया था, वह हमारे उत्तर मध्य विधान सभा के अंतर्गत चाहे हमारा गलगला, गंजीपूरा, दरहाई, कोतवाली, लॉडगंज, निवाड़गंज, अन्धेरदेव, बड़ा फुहारा, मिलोनीगंज जैसे क्षेत्र जो माननीय अध्यक्ष जी, हमारे पूरे जबलपुर संभाग का बड़ा व्यापारिक केन्द्र है. जिस व्यापारिक केन्द्र के अंदर कई ऐसी गलियां हैं, जहां पर मोटरसाइकिल से जाया जा सकता है, फायर ब्रिगेड भी नहीं पहुँच पाती हैं. जब मैं लगातार इन प्रश्नों के माध्यम से और ध्यानाकर्षण के माध्यम से आदरणीय कैलाश जी से लगातार आग्रह कर रहा था. मुझे आज यह कहते हुए प्रसन्नता है कि ये विधेयक लाने की बात आदरणीय कैलाश जी ने पिछले सत्र में दिनांक 25 फरवरी, 2026 को कही थी कि जब आने वाला सदन होगा, तब मध्यप्रदेश में फायर सेफ्टी एक्ट और आपातकालीन सेवाओं का विधेयक आएगा. मैं आपके प्रति आभार व्यक्त करता हूँ कि इस संवेदनशीलता के साथ मध्यप्रदेश के अंदर आपने यह विधेयक लाया है. मैं आपका आभार भी व्यक्त करता हूँ.
अध्यक्ष महोदय, अभी मैं सुन रहा था. ये सारे विधेयकों के विषय में बहुत सारी बातें हो रही थीं. नगर पालिक अधिनियम, 1956, जिसके अंतर्गत अग्नि रोकथाम फायर प्रबंधन नगरीय क्षेत्र और नगर पालिक अधिनियम, 1961 के अंदर सिर्फ अग्निशमन सेवाओं के संचालन का प्रंबधन नगरीय निकाय क्षेत्रों के अंतर्गत इसके अंदर समाहित किया गया था. लेकिन आज जो बिल अग्निशम एवं आपातकालीन सेवाएं, 2026 हमारे समक्ष आया है. प्रदेश के एकीकृत फायर सेफ्टी एक्ट लाने का यह अभियान और ये काम मध्यप्रदेश के अंदर भारतीय जनता पार्टी की सरकार डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में कर रही है. इसके साथ-साथ कार्यकारी नियंत्रण नगरीय निकायों के जो 74वें संविधान संशोधन है, उसका वायलेशन भी इस विधेयक के अंतर्गत नहीं किया जा रहा है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, इस एक्ट में न सिर्फ अग्नि रोकथाम बल्कि आपातकालीन स्थिति पर भी आपातकालीन सुविधाओं के लिए जैसे एनडीआरएफ की टीम काम करती है, उस हिसाब से भी लोगों की तैयारी कराने का काम इस विधेयक के अंदर समाहित किया गया है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, इसके अंतर्गत कई बार हमको ध्यान में आता है. हम सब अपने-अपने क्षेत्रों के जनप्रतिनिधि हैं. जब भी कहीं कोई आगजनी होती है या आग की कोई घटना होती है, सबसे पहले आसानी से किसी भी जनप्रतिनिधि के ऊपर उंगली उठा दी जाती है और यह कह दिया जाता है कि इस प्रकार की व्यवस्थाएं नहीं हैं. लेकिन माननीय अध्यक्ष महोदय, चाहे अस्थाई पंडाल हों.
5.30 बजे सदन के समय में वृद्धि विषयक
अध्यक्ष महोदय – आज की कार्यसूची में सम्मिलित समस्त कार्य पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाये, मैं समझता हूँ सदन इससे सहमत है. डॉ. अभिलाष पाण्डेय जी, आप थोड़ा संक्षिप्त कीजिये.
(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.)
डॉ. अभिलाष पाण्डेय – जी, माननीय अध्यक्ष महोदय. जिस तरह से विभिन्न स्थानों पर दुर्गा पण्डाल, गणेश पण्डाल, वैवाहिक स्थल एवं अन्य बहुत सारी ऐसी चीजें होती हैं, पण्डाल लगाकर अन्य जाति-वर्ग एवं समाज के लोग जो सामाजिक काम करते हैं, उन स्थानों पर किसी प्रकार की कोई अनुमति फायर सेफ्टी को लेकर नहीं ली जाती है, जिसके कारण कई बार आगजनी होती है, लेकिन इस एक्ट के अन्दर जो आदरणीय श्री कैलाश जी भाईसाहब के माध्यम से आया है, इसमें जनहित को सर्वोपरि रखा गया है और इस हिसाब से उनके लिये भी शहरीय क्षेत्रों में नगर निगम कमिश्नर और ग्रामीण क्षेत्रों में कलेक्टर और सक्षम अधिकारी द्वारा उसकी अनुमति लेकर भी उन स्थानों के अन्दर इस काम को संचालित किया जायेगा, साथ में वर्ष में एक बार फायर सेफ्टी ऑडिट को भी बहुत महत्वपूर्ण दृष्टि से इसके अन्दर समाहित किया गया है. फायर सेफ्टी ऑडिट करने के पीछे का जो उद्देश्य मुझे सरकार का समझ में आता है कि सारे नॉर्म्स यदि हम फॉलो करेंगे,तो आगजनी जैसे घटनाएं हमारे क्षेत्र में नहीं होंगी, उन प्रतिष्ठानों में नहीं होंगी, उन दुकानों में नहीं होंगी. इसलिए एक वर्ष के अन्दर फायर सेफ्टी ऑडिट कराना अनिवार्यता रखी गई है. मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आदरणीय श्री कैलाश जी भाई साहब पहली बार मध्यप्रदेश के अन्दर राज्य स्तर पर डायरेक्टर फायर एण्ड इमरजेंसी के नाम से मॉनिटरिंग करने के लिए आप स्थापित करने वाले हैं. यह भी एक महत्वपूर्ण कदम मध्यप्रदेश सरकार का है. इसके साथ ही, मैं देख रहा हूँ कि इस विधेयक के अन्दर फायर स्टेशन की आवश्यकतानुसार सक्षम अधिकारियों की अनुशंसा पर फायर स्टेशन बनाये जायेंगे. इसमें जो केन्द्र सरकार के नॉर्म्स हैं, जिसमें भारत सरकार की गाइडलाईन्स है, उसमें यह कहा गया है कि नगरीय क्षेत्रों में 10 किलोमीटर के अन्दर फायर स्टेशन बनेगा और ग्रामीण क्षेत्रों के अन्दर और नगरीय क्षेत्रों में भी इस बात को यदि समाहित किया जाये, तो 50 हजार की जनसंख्या पर एक फायर स्टेशन बनाने का इस विधेयक के अन्दर जो सक्षम अधिकारी होंगे, उनकी अनुशंसा पर इसको गति देने का काम सरकार करने वाली है. इसके साथ-साथ वॉलेन्टियर का भी प्रावधान इस विधेयक के अन्दर किया गया है, जिसमें निकाय अपनी आवश्यकता के अनुसार वॉलेन्टियर बना सकता है और उनका प्रशिक्षण करवा सकता है. अध्यक्ष जी, मैं जानता हूँ कि समय कम है, इसलिए जल्दी इस विषय को समाप्त करूँगा. 15 मीटर से ऊँची बिल्डिंग और 500 स्क्वायर मीटर के अंतर्गत जो ऐसे फ्लोर होंगे, उसके आधार पर उसकी फायर एनओसी लेने की अनिवार्यता इसमें है.
5.33 बजे {सभापति महोदय (डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय) पीठासीन हुए.}
सभापति महोदय, इसके साथ-साथ बिल्डिंग का निर्माण, कंप्लीशन के बाद प्रतिष्ठान ओपन करने के पहले फायर ऑडिट आपको कराना होगा, यह इसमें समाहित है. इसके साथ-साथ इस विधेयक के अंतर्गत आग लगने की असत्य जानकारी देना, कई बार हम गांव के अन्दर देखते हैं कि नलों से पानी नहीं आ रहा है, तो लोग फायर को फोन लगा देते हैं और फिर वहां से टैंकर मंगवा कर उसके पानी का उपयेाग करते हैं, लेकिन ऐसी असत्य सूचना पर भी इस पर अर्थदण्ड है, इसके साथ-साथ स्कूलों में, कॉलेजों में, कोचिंग सेंटर्स को बहुत गंभीरता से इसके अंतर्गत लिया गया है. इसमें स्कूलों के अन्दर 9 मीटर हाइट या 500 स्क्वेयर मीटर प्रति फ्लोर के हिसाब से एनओसी लेना अनिवार्य होगा. यह कहीं न कहीं हमारे बच्चों के प्रति हमारी सरकार की जवाबदेही को सुनिश्चित करता है. हॉस्पिटल्स को भी गंभीरता से इसके अंतर्गत लिया गया है, उसमें भी 15 मीटर यदि उसकी हाइट है, तो इस बिल्डिंग की एनओसी लेना और फायर सेफ्टी के नॉर्म्स को पूरा करना, इन हॉस्पिटल्स की भी जिम्मेदारी रहेगी.
सभापति महोदय, राज्य दमकलकर्मियों के लिये राज्य स्तर पर ट्रेनिंग सेंटर की स्थापना भी इस विधेयक के अन्दर समाहित की गई है, जिनका ट्रेनिंग प्रोग्राम होगा, जो राज्य स्तर पर होगा. हम भी यही चाहते हैं कि कभी आपातकाल की कोई स्थिति बनती है, जैसी अभी हमने मॉक ड्रिल जैसी समस्याएं देखी थीं, जब पाकिस्तान के साथ युद्ध की स्थिति बनी, तब मॉक ड्रिल का प्रशिक्षण प्रारंभ करने की बात देखी गई, कई जगह मॉक ड्रिल सिखाई जा रही थी. आदरणीय कैलाश जी भाई साहब के माध्यम से यह विधेयक आया है, इसमें प्रशिक्षित रूप से ऐसे फायर दमकलकर्मियों को उनको प्रशिक्षण देने का काम भी राज्य स्तर पर किया जायेगा, इसके लिये भी मैं आपको बहुत-बहुत बधाई और धन्यवाद देता हूँ. इसके साथ- साथ सब-स्टेशन बनाने की बात आई जो कि भारत सरकार के नॉर्मस् के आधार पर होगा. साथ ही फैक्ट्रियों के अंदर के अभी, हमने हरदा की घटना देखी जो कि दिल दहलाने वाली थी. इसमें जी-1, जी-2 और जी-3 जो खतरनाक हैं जो अलग-अलग प्रकार की फैक्ट्रियां हैं, उनके लिए अलग-अलग प्रावधान है. ये सारे प्रावधान फायर सेफ्टी एक्ट में आदरणीय कैलाश जी के माध्यम से रखे गए हैं.
सभापति महोदय, मेरा हमेशा से प्रयास रहा है और मानना है कि यदि आग किसी प्रतिष्ठान, दुकान या मकान पर लगती तो सिर्फ वहां की संप्पति नहीं जलती, उस घर में रहने वालों के सपने, बच्चों का भविष्य और उस व्यक्ति के आत्मविश्वास को जलाकर खाक कर देती है. आज इस सरकार ने जवाबदेही की बात की है, लोकतंत्र में हम जवाबदेही की बात करते हैं, हम जब चुनाव में जाते हैं, हम जनता से कहते हैं कि हम अपने हर वादे को पूरा करेंगे, आपके भविष्य को सुरक्षित रखेंगे. आज के दिन मैं मध्यप्रदेश सरकर को, कैलाश जी को, मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि राजनीति में हम जवाबदेही की बात को लेकर आगे बढ़ते हैं. आज सरकार ने इस विधेयक को लाकर प्रदेश की जनता के सामने जवाबदेही तय की है और यह विधेयक प्रदेश के नागरिकों के लिए, आने वाले समय में मील का पत्थर, उनकी सुरक्षा की दृष्टि से साबित होगा.
सभापति महोदय, देश के प्रधानमंत्री जी का सपना विज़न 2047 की ओर हम बढ़ रहे हैं, आज प्रदेश में फायर सेफ्टी एक्ट लाकर प्रदेश को हम सुरक्षा की दृष्टि से आगे बढ़ा रहे हैं. न सिर्फ बच्चे, नौजवान, युवा, महिलायें, बुजुर्ग और वे व्यापारी भी खुश होंगे, जिनके प्रतिष्ठान चल रहे हैं. प्रदेश सरकार ने यह विधेयक लाकर भविष्य की अग्नि की संभावनाओं की रोकथाम के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है, इसके लिए मंत्री जी और सरकार को बधाई देता हूं. मेरी विधान सभा सहित संपूर्ण प्रदेश के लिए यह विधेयक आया है, उसके लिए आपका आभार व्यक्त करता हूं, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, धन्यवाद.
श्री कैलाश कुशवाह (पोहरी)- सभापति महोदय, मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक, 2026 आया है. मैं कहना चाहता हूं कि इस विधेयक को रखा है वह तो ठीक है लेकिन इसमें कई कमियां हैं. मेरा आपके माध्यम से आग्रह है कि इसमें वित्तीय प्रावधानों का स्पष्ट उल्लेख न होना, विधेयक में अग्निशमन कर, फण्ड की स्थापना या बजट आवंटन से संबंधित कोई अलग अध्याय या खण्ड स्पष्ट रूप से नहीं है. किसी भी सेवा के प्रभावी संचालन के लिए वित्तीय आधार की आवश्यकता होती है. यह विधेयक क्या केवल कागजों तक सीमित रहेगा, क्या यह केवल अधिकारियों की जेब भरेगा, क्या जनता के बचाव के लिए जो अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था है, वहां तक हम पहुंचेंगे.
सभापति महोदय, मैंने देखा है और आपने भी कई बार देखा होगा कि लोग फोन लगाते हैं कभी-कभी गांव में लोगों के पास फायर स्टेशन के नंबर नहीं होते हैं तो लोग थाने में फोन लगा देते हैं तो थाने वाले बोलते हैं कि यह हमारा नंबर नहीं है. क्या उनकी जवाबदारी नहीं बनती है कि वे जल्दी गाड़ी भिजवायें. जब किसान का खेत जलता है, ज्यादातर किसानों के खेत में ऊपर बिजली के तारों से ही आग लगती है. आज बिजली के तार सुरक्षित नहीं हैं वो कमजोर है या क्षतिग्रस्त है तो क्या यह उनकी जिम्मेदारी नहीं है, इससे किसानों का नुकसान होगा. ऐसे कई प्रावधान है जो विधेयक में नहीं हैं. कोशिश यह की जाए कि आग से नुकसान न हो, जनहानि न हो. हमारे जहां भी फायर स्टेशन हैं वहां पर 24 घंटे ड्रायवर और पानी की व्यवस्था होना चाहिए. 99 प्रतिशत प्रकरणों में जब आग से नुकसान हो जाता है उसके बाद फायर ब्रिगेड पहुंचती है. ऐसा क्यों होता है. यह महत्वपूर्ण मुद्दा है. कई बसों में, होटलों में आग लगी है, कई कोचिंग सेंटर्स में आग लगी है. किसानों का आग से नुकसान हुआ है. मैं पोहरी विधान सभा क्षेत्र के बारे में बता रहा हूँ. 100 मीटर दूरी पर फायर स्टेशन था लेकिन गाड़ी नहीं पहुंच पाई जिसके कारण एक परचून की दुकान, मोबाइल की दुकान और मिठाई की दुकान लाखों रुपए का नुकसान हो गया. शिवपुरी जिले से 10 किलोमीटर दूर एक डोंगर नाम का गांव है. वहां पर 80 बीघा में गेहूं जल गए लेकिन गाड़ी नहीं पहुंच पाई. ऐसे कई उदाहरण हैं. मैं आग्रह करता हूँ इसमें यदि कोई अधिकारी, कर्मचारी गलती करता है या विभाग गलती करता है. उस पर भी कार्यवाही होना चाहिए. जब तक दण्ड नहीं दिया जाएगा तब तक हम सफल नहीं हो पाएंगे. आजकल चाहे शादी गार्डन हो या बड़े ऑफिस हों. पैसे से हर विभाग में हरी झण्डी मिल जाती है. इसके सबूत चाहिए तो मैं कई सबूत दे सकता हूँ. चाहे होटल में कोई व्यवस्था न हो, कोई व्यवस्था न हो मैरिज गार्डन में, कोई व्यवस्था न हो कोचिंग सेंटर्स में लेकिन पैसे लेकर आपको हरी झण्डी दे दी जाती है. जो नियम हैं उनका पूरा पालन होना चाहिए. धन्यवाद.
श्रीमती अर्चना चिटनीस (बुरहानपुर) – माननीय सभापति महोदय, आज जिस विधेयक को हमारे वरिष्ठ नेता और मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय जी ने सदन में रखा है. मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, 2026. यह निश्चित ही स्वागतयोग्य है. जैसा की मेरे पूर्व के वक्ता बोल रहे थे. मैं भी यह महसूस करती हूँ कि समयानुकूल और युगानुकूल प्रगति और परिवर्तन के लिए जवाबदेह सरकार और जवाबदान नागरिकों की भी आवश्यकता है. सरकार की जवाबदेही है. परन्तु जनसामान्य को रिस्पॉन्सिबल बनाने की तरह यदि हम नहीं बढ़ेंगे तो जिस प्रकार से हम विशेषकर अपने प्रदेश में हम औद्योगिक और व्यावसायिक विकास की दृष्टि से जो प्रगति कर रहे हैं. इसमें इसकी और भी अनिवार्यता और आवश्यकता महसूस होती है.
सभापति महोदय, सभ्य, बुद्धिमान और सुशिक्षित समाज और सरकार इस दिशा में चलती है कि प्रिकॉशन इज बेटर देन क्योर और इन प्रिकॉशनरी मेजर्स की तरफ विभाग ने बहुत माइक्रो लेवल तक प्लान करके बड़ा प्लान करके बड़ा मॉयन्यूट सोच विचार करके, बहुत बुद्धिमानी से इस विधेयक के प्रारूप को तैयार किया है. 9 अध्यायों में विभाजित इस विधेयक की बहुत अच्छी तरह डीटेलिंग की गई है. जब कोई विधेयक, जब कोई कानून हमारे सम्मुख आता है तो उसके साथ-साथ भविष्य में आर्थिक प्रावधान भी आवश्यकताओं के अनुसार होते जाते हैं और इस विधेयक के साथ ही जिस प्रकार हमने दर्दनाक घटनाएं पिछले दिनों में इंडस्ट्रियल एरियाज में, हॉस्पिटल्स में, यहां तक कि कोचिंग क्लासेज में देखीं, उन घटनाओं को हम रोक सकेंगे और मध्यप्रदेश एक डिजास्टर रिसेलिएंट स्टेट बनने की तरफ आगे बढ़ेगा. इस विधेयक को 74 वें संविधान संशोधन की भावना के अनुरूप ही तैयार किया गया है और इस विधेयक को जिसे सदन में माननीय मंत्री जी ने प्रस्तुत किया है हम सबको उसका स्वागत करना चाहिए और मैं तो समझती हूं कि सर्वसम्मति से इस विधेयक को पारित होना चाहिए.
श्री बाला बच्चन -- सभापति महोदय, एक महत्वपूर्ण बात है.
सभापति महोदय -- नहीं, बाला बच्चन जी, क्षमा करें. प्लीज.
श्री बाला बच्चन -- सभापति महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं उनसे रिलेवेंट एक मामला है और वैसे एक घण्टे की चर्चा है और एक मिनट नहीं केवल आधा मिनट में बात एंड कर दूंगा. आपसे रिलेवेंट मामला है नगर पंचायत ठीकरी का.
सभापति महोदय -- ठीक है बताइए.
श्री बाला बच्चन -- सभापति महोदय, मैंने इसलिए इजाजत ली है कि नई नगर पंचायत ठीकरी जो बनी है आप ठीकरी को जानते हैं, उसका वार्ड नंबर 12 सामर तलय और आउलीदर के नाम से है, वह पहले आदिवासी ग्राम पंचायत का वार्ड था और फॉरेस्ट लैंड में बसा हुआ था, अब वह नगर पंचायत में वार्ड नंबर 12 के रूप में आ गया है लेकिन अब वह बेड़ीमद में आ रहा है तो बेड़ीमद में आने के कारण उनको दोनों सरकारों की सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, तो कृपा करके बेड़ीमद को आप आबादी मद में बदल देंगे तो उन लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाएगा. ठीकरी का वार्ड नंबर 12 है. नाम है सामर तलय और आउलीदर तो जो फड़े थे अब नगर का वार्ड बन चुके हैं.
सभापति महोदय -- बाला जी, यह विषयानुकूल ही नहीं है. प्लीज आप माननीय मंत्री जी से मिल लीजिएगा.
श्री बाला बच्चन -- सभापति महोदय, हां इससे रिलेवेंट नहीं है लेकिन मैंने निवेदन किया है. बहुत लंबे समय से यह प्रस्ताव आया हुआ है. माननीय मंत्री जी की जानकारी में मैं लाना चाहता था.
श्री अभय मिश्रा -- सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी से एक प्रश्न है वह अपने उत्तर में थोड़ा सा बता देंगे प्लीज. सुना था कि जो फायर एनओसी है वह बीच में मिलेगी, कम्प्लीशन सर्टिफिकेट के पहले मिल जाएगी, क्योंकि कम्प्लीशन सर्टिफिकेट में कम्पाउडिंग और बहुत सारी दिक्कतें आती हैं. फिर वह नहीं हो पाता तो क्या बीच में मिल सकती है ऐसा प्रावधान है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- सभापति महोदय, मैं सबसे पहले नारायण भाई को, अभिलाष जी को, कैलाश कुशवाहा जी और अर्चना जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने मेरा मनोबल भी बढ़ाया और अच्छे सुझाव भी दिए हैं. जब पिछली विधान सभा में अभिलाष जी ने ध्यानाकर्षण लगाया था और हम लोग पिछले एक वर्ष से इस पर काम कर रहे हैं क्योंकि यह मध्यप्रदेश के लिए बहुत जरूरी था और भारत सरकार के भी निर्देश थे कि मध्यप्रदेश सरकार को भी एक्ट बनाना चाहिए, इसलिए हम काम भी कर रहे थे और पिछली विधान सभा में मैंने उनसे प्रॉमिस किया था उनके ध्यानाकर्षण पर कि जब भी अगला सत्र होगा हम यह विधेयक लाएंगे. यह मध्यप्रदेश के लिए बहुत जरूरी है क्योंकि हमने देखा वल्लभ भवन में आग लगी, हमें सेना को बुलाना पड़ा. हमारी तैयारी नहीं थी क्योंकि मध्यप्रदेश में फायर एक्ट ही नहीं था. फायर एक्ट के अनुसार सुविधाएं नहीं थीं. सुविधाएं नहीं होने के कारण सिर्फ नगर निगम, नगर पालिका एक्ट के अनुसार उनके पास छोटे-छोटे संसाधन थे जो इतनी बड़ी आग को संभाल नहीं पाए. ऐसे बहुत सारे उदाहरण हैं मध्यप्रदेश में परंतु यह फायर एक्ट आने के बाद हम जवाबदारी से बात कह सकते हैं कि जनहानि भी बचेगी, धनहानि भी बचेगी और यह सिर्फ फायर एक्ट इस बात के लिए नहीं है कि आग लगने के बाद हम पहुंचें, आग नहीं लगे इसके लिए भी लोगों को तैयार रहना है. .(मेजों की थपथपाहट).. यह बहुत ज्यादा जरूरी है और इसलिए जितने भी बड़े-बडे़ मॉल्स हैं, मल्टी स्टोरी हैं उन सबको फायर की एनओसी लेना बहुत ज्यादा जरूरी है.
..(जारी)...
सभापति महोदय, शहरीकरण प्रदेश में जबर्दस्त हो रहा है, औद्योगीकरण बहुत जबर्दस्त हो रहा है, आधुनिक निर्माण और आधुनिक जितने भी संसाधन है वह हम खबरों में देखते हैं कि चलते चलते गाड़ी में आग लग जाती है, कभी कभी एसी बस्ट हो जाता है, सभापति महोदय मुझे याद आता है आज से 20-25 साल पहले की बात है मेरे एक मित्र की कैमिकल फैक्ट्री में आग लगी, मैंने फोन किया इंदौर से फायरबिग्रेड आया और जैसे ही उन्होंने पानी डाला आग और ज्यादा भभक गई, क्योंकि उन फायरबिग्रेड वालों को पता ही नहीं था कि आग किस चीज की लगी है तो वहां पर फोमिंग चाहिये था, वहां पर फॉगिंग मशीन ही नहीं थी, यह सब बहुत सारी विसंगतियां थी, यह फायर एक्ट आने के बाद वह सारी विसंगतियां दूर हो जायेंगी. हम एक अनुशासित फोर्स बनायेंगे, अनुशासन बल (Discipline Force) बनायेंगे, और अनुशासन बल बनाकर के उनको हम यहां पर ट्रेनिंग भी देंगे और टेक्नोक्रेट्स लायेंगे यह हमारा नगर निगम का जो संचालनालय है उसके अधिनस्थ एक अधिकारियों की टीम बनेगी जो कि तकनीकी रूप से सक्षम होगी, यहां पर एक प्रशिक्षण केन्द्र होगा जो प्रदेश भर के लोगों को समय समय पर आधुनिक तकनीकी के आधार पर प्रशिक्षण भी देता रहेगा. क्योंकि रोज तकनीकी अब हमारे यहां औद्योगीकरण बहुत जबर्दस्त हुआ है, कहां पर अगर किसी फेक्ट्री में आग लग गई है तो क्या चीज की आवश्यकता है यह हमें. पता होना चाहिये, आयल फेक्ट्री में आग लगी है तो आयल बुझाने के लिये हमें क्या करना है, कैमिकल फेक्ट्री में आग लगी, तो कौन सा कैमिकल है, उसकी फैक्ट्री में आग लगी है तो उसको बुझाने के लिये क्या सामग्री लगती है, कौन सी मशीन लगती है यह सब हमारी फोर्स को पता होना चाहिये और इसलिये इस एक्ट के अंदर हमने बहुत छोटी छोटी बातों को ध्यान देकर के मध्यप्रदेश में एक बहुत अच्छा मॉडल एक्ट बनाया है और यह सिर्फ भारत शासन का एक्ट हमने देखा, जिन राज्यों में बन गया है उनका हमने एक्ट देखा और आज मैं दावे से कह सकता हूं कि देश के किसी भी राज्य का सबसे सर्वश्रेष्ठ अगर फायर एक्ट बना है तो हमारे मध्यप्रदेश का बना है.(मेजों की थपथपाहट)
सभापति महोदय, एक तो मैंने बताया कि पूरे प्रदेश में एक समान कानून हो जायेगा, पहले नगर पालिका का अलग कानून था, नगर निगम का अलग कानून था, वहां कोई बहुत ज्यादा तकनीकी लोग नहीं थे और संसाधन भी बहुत ज्यादा नहीं थे, अभी कैलाश कुशवाहा जी ने कहा और सदन के कई सदस्यों को इस बात की शिकायत होगी कि हम फोन करते हैं तो एक दो घंटे के बाद में लोग आते नहीं है, यह सबकी शिकायत होगी, सभापति जी आपकी भी यह शिकायत होगी. पर अब हम इसके लिये पूरे प्रदेश की मैपिंग करेंगे और कहां कहां पर कितनी कितनी दूरी पर फायर स्टेशन होना चाहिये, शहर के अंदर 10 मिनिट में पहुंचना चाहिये, ग्रामीण क्षेत्र है तो कम से कम 20 मिनिट में तो पहुंचना चाहिये . 20 मिनिट में पहुंचना के लिये पूरे प्रदेश में इस प्रकार का मैपिंग करके हम सारे फायर स्टेशन बनायेंगे, इस दिशा में हमारा काम भी चालू हो गया है. मैं सदन को अवगत कराना चाहता हूं और मुझे इस बात का गर्व है कि भारत सरकार ने अभी 300 करोड़ रूपये दे दिये हैं, 100 करोड़ रूपये हमने राज्य शासन से लिये हैं और हमने काम भी चालू कर दिया है, हमारे फायर स्टेशन बनना भी चालू हो गये हैं.
सभापति महोदय, जो उच्च जोखिम वाले भवन होते हैं जो मल्टीस्टोरी होते हैं, आज कल तो इन्ड्रस्ट्रियां भी मल्टीस्टोरी हो रही हैं. उसमें भी फायर सेफ्टी के संसाधन उस उद्योगपति को लगाना बहुत ज्यादा जरूरी है. बिल्डिंग वालों को लगाना बहुत ज्यादा जरूरी है . हमारे महेश जी ने पूछ लिया कि पहले प्लान देना होगा, अगर आप बिल्डिंग बना रहे हैं तो फायर प्लान दीजिये उसके बाद अगर आपको कंप्लीशन सर्टिफिकेट (पूर्णता प्रमाण पत्र) चाहिये तो फिर वही मिलेगा. उसके लिये हम एक पोर्टल बनायेंगे मेनलेस आप डालिये, और आपको समय सीमा में मिल जाये, वह निर्धारित करेगे, उसके लिये जवाबदारी सुनिश्चित करेंगे कि 24 घंटे के अंदर 48 घंटे के अंदर उनको रिप्लाय मिल जाना चाहिये और यह हम सुनिश्चित करेंगे.
माननीय सभापति महोदय, वैसे इतने आधुनिक संसाधन अभी आ गये हैं मैंने अभी पिछले दिनों काफी फायर वालों से चर्चा की है, उनके कैटलाक देखे हैं, मध्यप्रदेश में ऐसी मशीने हैं ही नहीं, अभी हमने उन सब मशीनों के आर्डर किये हैं, तो यह सब मशीनें जो आधुनिक बनी हैं वह सारी मशीनें मध्यप्रदेश के अंदर आयेंगी आकर हम जन धन दोनों की सुरक्षा करने में कामयाब होंगे.जहां तक श्री नारायण जी ने भी प्रश्न उठाया था, उसका उत्तर श्री अभिलाष जी ने दे ही दिया है. परन्तु हमारी एक व्यवस्था होगी, जो बड़ी बिल्डिंग होगी जोखिम वाली बिल्डिंग होगी, उसको स्वयं की व्यवस्था करना पड़ेगी और साथ ही एक थर्ड पार्टी का फायर इंस्पेक्शन बहुत ज्यादा जरूरी लगेगा. हर वर्ष उसे अपनी फायर सेफ्टी का प्रमाण पत्र सर्टिफिकेशन हमें देना पड़ेगा कि हमारी बिल्डिंग फायर प्रूफ हैं, सारे संसाधन हैं.
सभापति महोदय, कम से कम 5 साल के अंदर हमारी टीम भी जाकर उसको देखेगी. थर्ड पार्टी हम कुछ लोगों को लाइसेंस देंगे जो कि इन सब बिल्डिंगों को गाइड करेंगे और मैं यह कह सकता हूं कि मध्यप्रदेश का जो यह फायर एक्ट बन रहा है, अब लोगों को निराशा नहीं होगी, परन्तु हां, इसको एक्जिक्यूट करने में हमें लगभग 6 माह लेंगे. क्योंकि अभी बिल्डिंग बनाना है. कुछ लोगों की भर्ती करना है, ट्रेनिंग सेंटर बनाना है. सुन्दरलाल पटवा, जो हमारा नगर निकाय का ट्रेनिंग सेंटर बन रहा है, हम फायर की ट्रेनिंग भी वहां देंगे, यह सुनिश्चित करेंगे. हमारे संचालनालय में एक डायरेक्टर लेवल का अधिकारी होगा और एक पिरामिड बनेगा, जिसमें टेक्नीकल लोग भी होंगे. क्योंकि यह एक अनुशासित ऑर्गनाइजेशन है तो वहां पर जवानों की फिजिकल फिटनेस बहुत ज्यादा जरूरी है, यह 24*7 काम करने वाली संस्था होगी. क्योंकि जो भी फायर स्टेशन बनेगा वहां पर 24 घंटे व्यक्ति को जागना पड़ेगा तो जो भी फायर स्टेशन बने, वह इतना सुव्यवस्थित हो कि वहां पर लोग बैठ सकें, लेट सकें और जैसे ही फोन आए तत्काल दौड़कर जा सकें. यह सारे स्टेशन वेल इक्विप्ड बनाएंगे. सुविधा संपन्न बनाएंगे जहां हमारे कर्मचारी वहां पर आराम से रहकर आंधी तूफान में भी रह सकें. यह सिर्फ फायर सेफ्टी के लिए काम नहीं करेंगे. बाढ़ आ गई तो उसके लिए भी काम करेंगे. कहीं बिल्डिंग ढह गई तो उसके लिए भी काम करेंगे. इन सबके लिए हम लोग ट्रेनिंग देंगे. यह जो हमारी फोर्स होगी, वह आपदा प्रबंधन में बड़ी महत्वपूर्ण रहेगी.
श्री नारायण सिंह पट्टा – सभापति महोदय, यह जो आधुनिक उपकरण आप उपलब्ध कराने जा रहे हैं. क्या यह जिला मुख्यालय में होंगे या फिर हमारे जो नगर परिषद् या नगरपालिकाएं हैं, उनमें रहेंगे, यह थोड़ा-सा बता दें.
श्री कैलाश विजयवर्गीय – मैंने आपको बताया कि अब सिर्फ यह नगरपालिका, नगर निगम तक सीमित नहीं होंगे, पूरे मध्यप्रदेश को हम मैपिंग करके और शहर में कम से कम 10 मिनट में पहुंच जाय. ग्रामीण क्षेत्र में कम से कम 20 मिनट में पहुंच जाय, इतने फायर ब्रिगेड बनाएंगे. नगर निगम सीमा में होंगे, नगर निगम के बाहर होंगे, नगरपालिका क्षेत्र में होंगे, नगर पंचायत क्षेत्र में होंगे. हम इस कहीं पर भी पक्षपात नहीं करेंगे. परन्तु हमारी पहुंच समय-सीमा में होना चाहिए, इस प्रकार हम फायर स्टेशन बनाने वाले हैं. कुल मिलाकर पूरी पारदर्शी व्यवस्था रहेगी. आप बेफ्रिक रहिए. कुछ लोगों ने कहा कि भ्रष्टाचार होगा. भ्रष्टाचार की कहीं पर भी गुंजाईश नहीं है. एक पोर्टल हम बनाएंगे, पोर्टल के अंदर व्यक्ति जब बिल्डिंग बनाएगा, उसके पहले अपना प्लान देगा, उस प्लान को स्वीकृत करेंगे, उसके बाद जब कम्प्लीशन सर्टिफिकेट के लिए आएगा तो फिर वह पोर्टल पर डाल देगा. हम समय सीमा सुनिश्चित कर देंगे, उस सीमा में उसको कम्प्लीशन का सर्टिफिकेट भी मिल जाएगा. इसलिए इसमें पूरा पारदर्शी काम हो, लोगों को असुविधा नहीं हो. हम इसकी बिल्कुल इस एक्ट के अंदर चिंता कर रहे हैं. इसमें जवाबदेही भी सुनिश्चित करेंगे. यह सबसे महत्वपूर्ण बात है. जो व्यक्ति जहां पर ड्यूटी पर होगा, उसकी जवाबदेही भी सुनिश्चित करेंगे. यदि कहीं पर आग लगी तो आग लगने के पहले वहां पर जहां आग लगी है वहां फायर प्रूफ बिल्डिंग थी या नहीं थी. यदि नहीं थी तो उस क्षेत्र के अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही होगी उसने क्या देखा, और इसलिए बहुत ज्यादा जरूरी है कि एक एक्टिव अच्छा ऑर्गनाइजेशन बने, वह व्यक्ति जिसने बिल्डिंग बनाई है, उसकी भी जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे कि वह बिल्डिंग को फायर प्रूफ बनाए. वह सारे संसाधन यदि आग लग जाय तो वह होना ही चाहिए. यदि नहीं होगा तो उसकी भी जवाबदेही सुनिश्चित करेंगे. उस बिल्डिंग वाले की भी जवाबदारी सुनिश्चित होगी और हमारे अधिकारियों की भी जवाबदारी सुनिश्चित होगी. मैं एक बात और बताना चाहता हूं कि यह एक एसेंश्यल सर्विस में आएगा, एक्ट में हम प्रावधान कर रहे हैं कि यह आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में आएगा. और हम इन्हें अधिकार भी दे रहे हैं. अभी किसी माननीय सदस्य ने कहा कि यह बात सही है कि कई बार फायर ब्रिगेड चला जाता है. जैसे तिलक नगर में अभी आग लगी थी. उसमें 8 लोग जिंदा जल गए. बहुत छोटी गली थी, वहां फायर ब्रिगेड पहुंचा. पहुंचने के बाद वहां पानी नहीं मिला. अब हम हमारे अधिकारी को मजिस्ट्रेट के पॉवर दे रहे हैं. चाहे कहीं पर भी सड़क तोड़ना पडे़, तो सड़क तोडे़गा. कई बार नैरो सड़क होती है, दीवार तोड़ना पडे़, तो दीवार तोडे़गा. यह सब अधिकार हम हमारे अधिकारी को दे रहे हैं. जिससे कि जन-धन हानि कम से कम हो. विशेषकर हमारा फोकस जनहानि पर ज्यादा है कि जनहानि नहीं होना चाहिए. क्योंकि मैं देख रहा था कि मध्यप्रदेश में लगभग विभिन्न घटनाओं में पिछले दो साल में आगजनी से ही 100 लोगों की मौत हुई है और यह बहुत चिंताजनक है. यह फॉयर एक्ट जनहानि और धनहानि को बचाने में बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा.
सभापति महोदय, भारत सरकार के जितने भी मानक मापदंड हैं, हम उसका पालन कर रहे हैं. भारत सरकार ने जो मॉडल बिल बनाया है Model bill to Provide for the Maintenance of Fire and Emergency Service for the State 2019, यह राष्ट्रीय भवन संहिता जो NBC 2016 है, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के अनुरूप यह सारे जितने प्रावधान थे, इस एक्ट में हमने किए हैं इसलिए मैंने कहा कि मध्यप्रदेश का जो एक्ट है, वह देश के सारे प्रदेशों में से सबसे अच्छे एक्ट में से एक होगा, यह हमारा प्रयास है.
सभापति महोदय, जैसा मैंने बताया कि सक्षम जवाबदेही रोकथाम आधारित पूरी की पूरी सर्विसेस और टेक्नीकल डिसीप्लीन यह बहुत ज्यादा जरूरी है. इसमें भी हम लोग बहुत चिंता से काम करेंगे और मुझे इस बात को कहते हुए गर्व है कि हमने इस एक्ट को बनाने में, हमारे विभाग की टीम ने एक बार नहीं, इसमें घंटों बैठकर मेहनत की है. मैं खुद भी उनके साथ 2-2, 3-3 घंटे बैठा हूँ और खुद मैंने रिटायर्ड फायर ऑफिसर्स से बात करके इसमें क्या -क्या प्रावधान हो सकते हैं, क्या-क्या कमियां हैं, क्या-क्या हो सकता है, इन सब बातों का अध्ययन करने के बाद हमने यह एक्ट बनाया है.
सभापति महोदय, अभी माननीय सदस्य श्री नारायण सिंह पट्टा जी ने कुछ शंका व्यक्त की थी. मेरा ख्याल है कि मेरे जवाब से वे संतुष्ट हो पाए होंगे. हम इसमें सबकी जवाबदेही भी सुनिश्चित करेंगे, उनको अधिकार भी देंगे. जब अधिकार देंगे, तो जवाबदेही भी सुनिश्चित करेंगे. कोई किसी के साथ जबरदस्ती करेगा, तो उनके खिलाफ कार्यवाही भी करेंगे. जैसा कि मैंने बताया, फॉयर एनओसी के लिए हम समय सुनिश्चित करेंगे. इसमें अपीलीय प्रावधान भी होगा. यदि गलती से हमने अधिकार दे दिये, पर उन्होंने यदि कहीं ज्यादती की, तो अपील कर सकेंगे. यदि हमारे अधिकारी की कहीं गलती पायी जाएगी, तो हम उसे निश्चित रूप से दंडित करेंगे.
सभापति महोदय, नगर निगम क्षेत्र में नगर निगम कमिश्नर और ग्रामीण क्षेत्र में कलेक्टर पूरे फायर सिस्टम की पूरी चिंता करेंगे और सभी परमीशन समयसीमा में हो, जैसा कि मैंने पहले ही बता दिया है कि हम सुनिश्चित भी करेंगे.
सभापति महोदय, मैं सदन को विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि अभी एक और माननीय सदस्य ने कहा था कि आप इतना बड़ा ढांचा बना रहे हैं. मैं बताना चाहता हूँ कि जितने भी प्रॉपर्टी टैक्स हैं, लगभग हमारे पास 1700 करोड़ रूपए का प्रॉपर्टी टैक्स आता है. उसमें हम सेस लगाने वाले हैं. फिर जो बिल्डिंग हमसे फायर एनओसी लेगी, उनसे भी हम कुछ फीस लेंगे. इसके अलावा हम राज्य शासन से भी आग्रह करेंगे कि हमें एक निर्धारित वार्षिक बजट दे. क्योंकि नहीं तो हमारे विभाग के पास यह सफेद हाथी की तरह हो जाएगा. वन टाइम तो केन्द्र शासन ने पैसा दे दिया, पर इसको चलाने के लिए हम हमारे आय के स्त्रोत भी बनाएंगे और राज्य सरकार से भी हम वार्षिक बजट का प्रावधान कराएंगे. मुझे कहते हुए प्रसन्नता है कि यह बिल मध्यप्रदेश में आनेवाले समय में फायर के कारण से होने वाली जनहानि, धनहानि से बचाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा. इसलिए मेरा सभी माननीय सदस्यों से निवेदन है कि इस बिल को सर्वानुमति से पास करें. (मेजों की थपथपाहट)
सभापति महोदय – धन्यवाद माननीय मंत्री जी.
अध्यक्षीय घोषणा
सभापति महोदय—सदन की लॉबी में चाय की व्यवस्था की गई है. माननीय सदस्यगण से अनुरोध है सुविधानुसार चाय ग्रहण करने का कष्ट करें.

बहिर्गमन
इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर सदन से बहिर्गमन
(व्यवधान)
श्री भंवर सिंह शेखावत—माननीय सभापति जी, देश में एक अप्रत्याशित घटना हुई है उसकी सूचना सदन को देना बहुत आवश्यक है. लाखों की संख्या में जो छात्र नीट की परीक्षा से पीड़ित थे. उन्होंने दिल्ली में आंदोलन किया, लगातार आंदोलन किया, लेकिन उनकी अनदेखी की गई. आज प्रधानमंत्री जी को निवेदन करने के बाद भी उस निवेदन को सुना नहीं गया. आदरणीय राहुल गांधी जी प्रधानमंत्री जी के घर के बाहर धरना देना प्रारंभ कर दिया है.
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)—सभापति महोदय, इसमें विधान सभा क्या करेगी ?
श्री भंवरसिंह शेखावत—सभापति महोदय विधान सभा इसलिये करेगी कि हम सब लोग विधान सभा के सदस्य हैं.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)—सभापति महोदय, प्रदेश के नीट की परीक्षाओं में गड़बड़ियां हो रही हैं. विधान सभा क्यों नहीं करेगी.
श्री कैलाश विजयवर्गीय—यह विधान सभा का विषय ही नहीं है.
(व्यवधान)
उच्च शिक्षा मंत्री(श्री इन्दर सिंह परमार)—सभापति महोदय छात्रों की फिर से परीक्षाओं हो गईं छात्रों को कोई परेशानी नहीं हुई इन लोगों को परेशानी हो रही है, यह देश भर में नाटक कर रहे हैं. लेकिन वास्तव में उनकी परीक्षा फिर से हो गई है. अब आप यहां पर खड़े हो गये हैं. (व्यवधान)
(इंडियन कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा श्री भंवर सिंह शेखावत जी के नीट परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों को लेकर के सदन से बहिर्गमन किया गया.
श्री इन्दर सिंह परमार—सभापति महोदय, परीक्षाएं हो गईं नीट की उसके परिणाम भी आ गये. यह अब जग रहे हैं.
श्री कैलाश विजयवर्गीय—सभापति महोदय मुझे सिर्फ इतना स्पष्टीकरण करना है, चूंकि इन लोगों ने विधान सभा से बहिर्गमन किया है. पहली बात तो यह है कि राज्य से संबंधित विषय ही नहीं है. दूसरी बात नीट की परीक्षा में कुछ गड़बड़ियां हुई थीं उसकी दूसरी बार फिर से परीक्षा होगी. उसमें 20 लाख से ज्यादा विद्यार्थी बैठ गये वह विषय समाप्त हो गया. अब उसके बाद कुछ लोग आंदोलन कर रहे हैं. अपनी दुकान सजाने के लिये अध्यक्ष महोदय क्योंकि सरकार तो अपना काम कर चुकी है. विद्यार्थी जो पढ़ रहे थे, वह परीक्षा दे चुके हैं और वह छात्र कालेज में प्रवेश भी ले चुके हैं. कुछ लोग जो केन्द्र सरकार और मोदी जी के विरोधी हैं, वह संगठित होकर देश में अस्थिरता पैदा करना चाहते हैं. ऐसे लोगों की, सभापति महोदय यह सदन निन्दा करता है.
06:10 बजे (4) मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026(क्रमांक 18 सन् 2026).
सभापति महोदय – माननीय मंत्री, श्रीमती कृष्णा गौर जी.
राज्यमंत्री पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री (श्रीमती कृष्णा गौर) – माननीय सभापति जी, मैं प्रस्ताव करती हूं कि मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026 (क्रमांक 18 सन् 2026) पर विचार किया जाय.
अध्यक्ष महोदय – प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ. श्री अजय विश्नोई जी.
श्री अजय विश्नोई(पाटन) – माननीय सभापति महोदय, मैं मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026 (क्रमांक 18 सन् 2026) के समर्थन में खड़ा हुआ हूं. सभापति जी पूरा प्रदेश देख रहा है कि प्रदेश मे निवेश तेजी से आ रहा है. देश और विदेश से भी आ रहा है. जब निवेशक आता है तो अपनी कुछ कठिनाईयां भी गिनाता है, संवेदनशील सरकार सुनती है और उसको दूर करने का काम भी करती है. इसलिए मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूइंग बिजनेस विधेयक, 2026 लाया गया है. नियम कम होंगे, सरल होंगे, समय सीमा में निपटारा बंधा होगा, तो उद्योग तेजी से आएंगे, निवेश तेजी से आएगा, निवेश रोजगार लाएगा, जो लोग ऑलरेडी आ गए हैं, जब उनको सरलता, सहजता मिलेगी, उद्योग चलाने और लगाने में तो उसकी चर्चा बाहर तक जाएगी तो और निवेश आएगा, रोजगार आएगा. इस तरीके से यह हमारा विधेयक प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने की तैयारी के साथ में लाया गया है. केन्द्र में मोदी जी की सरकार है, उन्होंने भी जन विश्वास के साथ ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को देशव्यापी पहल प्रारंभ की है. मप्र की डॉ. मोहन यादव जी की सरकार ने उनके कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए आज यह विधेयक सदन में लेकर आई है. मप्र सरकार कटिबद्ध है, प्रदेश के विकास के लिए नौजवानों को रोजगार के अवसर और अधिक उपलब्ध कराने के लिए. इन सभी के लिए हमारी सरकार ने क्रमबद्ध कदम उठाए हैं. सबसे पहले क्षेत्रीय इंडस्ट्रीयल कॉन्क्लेव जबलपुर, ग्वालियर, सागर, रीवा, नर्मदापुरा एवं शहडोल में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव कराए और किस रीजन में किस प्रकार का निवेश आ सकता है, किस प्रकार का उद्योग लग सकता है, उद्यमियों को वहां के वातावरण से परिचित करवाया गया. इसी क्रम में भोपाल में फरवरी 2025 में, मप्र का एक बड़ा व्यापक इन्वेस्ट का आयोजन हुआ, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025, का आयोजन हुआ, देश और दुनिया भर के उद्यमी यहां आए और हमें लाखों, करोड़ों रुपए के प्रस्ताव निवेश के लिए प्राप्त हुए.
सभापति महोदय, इस समिट में 6 अलग अलग व्यवस्थाएं की गई थी. एक आईटी एवं टेक्नॉलाजी का समिट था, एक रिन्युएबल एनर्जी पर, एक एमएसएमई और स्टार्टअप का समिट अलग था. एक टूरिज्म उद्योग में किस तरह से हम निवेशक लगा सकते हैं उसका समिट था, हमारे यहां बहुत अधिक उर्वरक उपलब्ध है तो माइनिंग समिट अलग से बनाया गया था, अर्बन डेवलपमेंट समिट की कल्पना अलग से की गई थी. इन सभी को समाहित करते हुए एक ट्रेड एग्जिविशन भी लगाई थी. यह आयोजन में उपस्थिति इतनी व्यापक थी कि इस आयोजन ने मप्र को वैश्विक निवेश मानचित्र पर एक सशक्त पहचान दिलवा दी. हमारी सरकार ने दिल्ली में एक इंटरऐक्टिव सेशन किया, यहां भोपाल में फ्रांस के राजदूत की सक्रिय भागीदारी को साथ में लेते हुए, एक इंडोफ्रेंच चैबर्स आफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री का समिट भी कराया. यदि हमको निवेश लाना है तो निश्चित रूप से हमें नीतियों को सरल करना पड़ेगा और वर्ष 2025 में निवेश को गति देने वाली कुछ नई नीतियां मप्र की डॉ. मोहन यादव की सरकार लेकर आई. मप्र उद्योग संवर्धन नीति वर्ष 2025, मप्र लॉजिस्टिक नीति 2025, मप्र एक्सपोर्ट संवर्धन नीति 2025. सभापति जी मैं सदन को बताना चाहता हूं कि इस प्रकार की यह नीति है, देश में पहला प्रदेश है ,मध्यप्रदेश जिसमें इस प्रकार की नीति की कल्पना की गई और उस नीति को जमीन पर उतारा गया. मप्र एग्रो प्रोसेसिंग नीति एग्रीकल्चर प्रोड्यूस को संवर्धन के लिए भी यह नीति बनाई गई. औद्योगिक विकास के साथ साथ श्रमिकों को बेहतर जीवन मिले, इसलिये औद्योगिक आवास नीति 2026 भी बनाई गई, कोयले की प्रचुर मात्रा हमारे यहां उपलब्ध है, मध्यप्रदेश कोल गैसीकरण प्रोत्साहन नीति 2026 (Madhya Pradesh Coal Gasification Promotion Policy 2026) भी इसी अवसर पर बनाई गई है. मध्यप्रदेश भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम बनाये गये है.
माननीय सभापति महोदय, मैं सदन को यह बताना चाहता हूं कि यह सभी योजनाएं मध्यप्रदेश के समग्र औद्योगिक परिवर्तन की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा थीं, दूर तक की सोच के साथ में यह कदम एक के बाद एक उठाये जा रहे हैं, माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में यू.के. में, जापान में, जर्मनी में, स्पेन में, दुबई में भी रोड शो किये गये, वहां भी इंवेस्टर्स आकर्षित हुए और उन्होंने उद्यम लगाने के लिये अपने प्रस्ताव दिये, यह जो कदम माननीय मोहन यादव जी की सरकार उठा रही थी, इसमें भारत सरकार की कुछ गाइडलाईन का भी लगातार पालन होता जा रहा था, भारत सरकार की एक 'डिरेगुलेशन रिफॉर्म एक्सरसाइज' के अंतर्गत मध्यप्रदेश में सभी 23 प्रायरिटी एरियाज में सुधार करके सौ प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित किया था और हम कुछ श्रेणियों में 'टॉप अचीवर' के रूप में पहचाने गये. केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्री हमारे पीयूष गोयल जी ने हमको इन चार श्रेणियों में 'टॉप अचीवर' (Top Achiever State) का दर्जा प्रदान किया, देश में, लैंड एडमिनिस्ट्रेशन, बिज़नेस एंट्री, लेबर रेगुलेशन और सर्विस सेक्टर यह सारे प्रयास जो थे, तेजी से परिणाम के रूप में बदलने लग गये, इंवेस्टमेंट आने लग गया और उद्यमियों का विश्वास मध्यप्रदेश में ओर गहरा जम गया. ब्रिटेन से निवेश आया, कनाडा से निवेश आया, अमेरिका से आया निवेश, दक्षिण कोरिया की छ: वैश्विक कंपनियों ने प्रदेश के पांच जिलों में भूमि आवंटन एवं शिलान्यास प्रारंभ कर दिया है और 7 हजार 800 करोड़ का निवेश दे दिया है. मेसर्स हेलीयॉन ब्रिटेन द्वारा फार्मास्टिकल क्षेत्र में पीथमपुर इंदौर में 3 हजार करोड़ के निवेश हेतु मई, 2025 में भूमि प्राप्त कर ली है.मेसर्स मैक्केन फूड्स (McCain Foods) कनाडा द्वारा खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में आगर मालवा में 3 हजार 800 करोड़ के निवेश के लिये 2025 में भूमि प्राप्त कर ली है, मेसर्स टू एस स्प्लिट वॉटर्स (2S Split Waters, USA) अमेरिका की संस्था है, इनके द्वारा नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में मुहासा नर्मदापुरम में 500 करोड़ के निवेश हेतु भूमि प्राप्त कर ली गई है. मेसर्स बू यंग शीप कार (Boo Young Sheep Car) यह दक्षिण कोरियाई संस्थान है, इनको चमड़ा एवं फुटवेयर के क्षेत्र में ग्वालियर में 225 करोड़ के निवेश हेतु अप्रैल,2025 में भूमि आवंटित कर दी गई है, दक्षिण कोरिया की प्रतिष्ठित फर्म मेसर्स एफीबार ग्रुप (EFibbar Group) द्वारा मेडिकल डिवाईस लगाने की जो संरचना है, इनको भी 2 हजार 7 करोड़ के निवेश के साथ दिसंबर में भूमि दे दी गई है. ब्रिटेन (UK) की प्रतिष्ठित कंपनी मेसर्स क्लीनजाइजर (M/s Cleanziser, UK) द्वारा उज्जैन में ₹127 करोड़ के निवेश प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन (Implementation) की प्रक्रिया वर्तमान में तेजी से जारी है। इन छ:परियोजनाओं से मध्यप्रदेश में 3 हजार से अधिक रोजगार मिलेंगे और प्रत्यक्ष रोजगार से ढाई से चार हजार अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित होते हैं, अर्थात कुल दस हजार तक हमारा यह रोजगार का आंकड़ा पहुंचेगा.
माननीय सभापति महोदय, पहले आरोप लगते थे कि सारा उद्योग इंदौर और भोपाल तक ही सीमित है, माननीय मोहन यादव जी की सरकार के नेतृत्व में जिस तरीके का निवेश मध्यप्रदेश में आ रहा है, तो छ: वैश्विक कंपनियों ने पांच अलग अलग जिलों में निवेश करे हैं, जो यह दर्शाता है कि पूरा मध्यप्रदेश आज की तारीख में निवेश की प्राथमिकता में आ चुका है, निवेशकों को त्वरित एवं पारदर्शी शीघ्र निर्णय के लिये मंत्रिपरिषद ने एक उप समिति का भी गठन किया है, इस समिति ने भी तेज गति के साथ काम किया है, माननीय सभापति महोदय, ग्यारह बैठकें करके इस समिति ने 56 इकाइयों को 32 हजार 540 करोड़ के प्रस्ताव स्वीकृत करवाये हैं. 56 इकाईयों में से 18 औद्योगिक इकाईयों ने तो वाणिज्यिक उत्पादन भी प्रारंभ कर दिया, शेष 38 योजनायें जो हैं यह भी क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में काम कर रही हैं. इन योजनाओं के माध्यम से प्रदेश में 31451 रोजगार आने की संभावना बनी हुई है. इसके अलावा इस समिति के द्वारा 14177 करोड़ के नवीन प्रस्ताव जिसमें 7265 रोजगार मिलेंगे, जल्द ही स्वीकृत करने की प्रक्रिया चल रही है. माननीय मुख्यमंत्री जी के कार्यकाल में 17194 करोड़ के निवेश के साथ 109 वृहद श्रेणी की इकाईयों ने उत्पादन प्रारंभ कर दिया है. रेनेवल निजी पार्क खास तौर से मुहास बाबई में एक के बाद एक कंपनी आईं, एक कंपनी का तो पहले ही नाम गिना चुका हूं. 10 हजार करोड़ का निवेश करके 25 सौ रोजगार देने का वादा करने के साथ में उसने मुहास में कार्य प्रारंभ किया है. एक ग्रुप पीबी लिमिटेड कंपनी आई है, 5533 करोड़ रूपये का निवेश लेकर आ रही है और उसमें 1320 रोजगार देने की बात उन्होंने स्वीकार की है. यहीं पर रिनोवल एनर्जी के और 3 प्रोजेक्ट ओरियन पॉवर लिमिटेड के द्वारा 4 हजार 500 करोड़ का निवेश कास्मिक पॉवर के द्वारा 4 हजार करोड़ का निवेश और गौतम सोलर प्रा.लि. के द्वारा भी 4 हजार करोड़ के प्रस्ताव का निवेश मध्यप्रदेश की सरकार को प्राप्त हुआ है. एक बड़ा कदम हमने उठाया था धार जैसे दूरस्थ स्थान में पीएम मित्र पार्क का एक यूनिट हमारे पास आया, माननीय प्रधानमंत्री जी की एक व्यापक सोच है, दूरदृष्टि वाली सोच है, उसका एक हिस्सा हमको भी मिला धार के अंदर, टोटल 7 देश के अंदर है, उसमें से एक धार के अंदर उन्होंने कल्पना की और इस कल्पना में जो किसान उत्पादित करता है अपना कपास, उसको विदेश तक कैसे पहुंचाया जाये और उसमें उन्होंने कल्पना दी कि फार्म से फाइबर बनायेंगे, फाइबर से फेक्को फैक्ट्री तक ले जायेंगे और फैक्ट्री में जो फेसनेवल वस्त्र हैं वह बनेंगे और उनको विदेश तक बेचने के लिये जायेंगे, इस तरह की फार्म टू फाइबर टू फैक्ट्री टू फैशन एण्ड फॉरेन इस प्रकार की कल्पना के साथ एक बड़ा कदम मध्यप्रदेश की मोहन यादव जी की सरकार ने धार के अंदर उठाया है, यह टेक्सटाइल पार्क बन रहा है जिसमें 20 हजार करोड़ रूपये का निवेश आया हुआ है और 46 हजार रोजगार यहां पर पैदा होने जा रहे हैं और जब इतने उद्योग आ रहे हैं, निवेश आ रहा है, रोजगार आ रहे हैं, उद्योग की स्थापना विस्तार एवं संचालन के नियम सरल एवं समयबद्ध बनाना जरूरी है, इसीलिये लाये हैं ईज ऑफ बिजनिस डूइंग विधेयक, 2026. जिला स्तर पर भी इसकी इकाई बनेगी और राज्य स्तर पर भी इसकी नोडल एजेंसी बनेगी. इस नोडल एजेंसी में उन सभी विभागों के अधिकारी होंगे और अधिकार होंगे. इनको स्वीकृति आवश्यक हो जाती है किसी उद्योग की स्थापना के विभिन्न चरणों को देने के लिये. अब बनी है यह सिंगल विंडो कि जहां जिस प्रकार की स्वीकृति की जरूरत है, जिस प्रकार के विभाग की स्वीकृति की जरूरत है वह विभाग का अधिकारी भी बैठा हुआ है उस विभाग के अधिकार भी इस नोडल एजेंसी के पास स्वीकृत हैं, हमें अलग विभाग के पास नहीं जाना पड़ेगा, यही विभाग हमको स्वीकृति दे देगा और हमारे काम प्रारंभ हो जायेंगे. माननीय सभापति महोदय, समय सीमा भी तय कर दी गई है, आवेदन जिस दिन मिलेगा इस राज्य नोडल एजेंसी को उसके 7 दिन के अंदर यदि उसमें कोई कमी है, कुछ और जानकारी उससे लेना है तो आपको प्रस्ताव पास हुआ है उसके 7 दिन के अंदर एक बार में सब कुछ पूछ लीजिये, बार-बार आपको क्रमश: पूछने की अनुमति उसमें नहीं है और साथ में एक और नियम बनाया गया है मध्यप्रदेश में एक पुराना नियम लागू है मध्यप्रदेश लोक सेवा प्रदाय की गारंटी योजना वर्ष 2010 में बनाई थी. इस नियम को बनाने में हमको अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार भी अमेरिका में लाकर दिया गया था उसी प्रकार से जैसे उसमें इंडीजुअल अधिकारी का दायित्व तय होता है और यदि वह दायित्व समय पर नहीं निभाता है तो पर डे के हिसाब से उसके ऊपर आर्थिक पेनल्टी लगती है इस नियम को इस नियम में समाहित कर लिया गया है राज्य नोडल ऐजेंसी का कोई अधिकारी यदि समय सीमा में काम नहीं करेगा तो उसके हिसाब से उसको पर्सनल पेनल्टी भी देनी होगी. एक बात हम सब अच्छे से जानते हैं कि हम सब कुछ कराना चाहते हैं पर चीजों को कोर्ट कचहरी में उलझा दिया जाता है.इस बात का ख्याल भी इस विधेयक में रखा गया है कि इसकी किसी भी कार्यवाही को किसी भी प्रकार की कोई विधिक चुनौती नहीं दी जा सकेगी यानि वह अड़चन भी इसकी दूर कर ली गई है. कई बार यह होता था कि काम करते करते लगता था कि इसमें यह नियम और होता तो अच्छा था तो नियम का उपबंध बनाना पड़ जाता उसके लिये फिर कहां किससे अनुमति लेने के लिये जाएं तो कहीं जाने की जरूरत नहीं है. आपको जहां जैसी जरूरत लगे उस प्रकार का उपबंध बनाने की शक्ति वह भी नोडल ऐजेंसी को दी गई है और यह सब कार्यवाही दो साल की उनको एक समय सीमा दी गई है अपने आपको परफेक्ट करने के लिये दो साल में उनको कर लेना है.इस अधिनियम को लागू करेंगे तो 2 पुराने अधिनियम निरसन होंगे. मध्यप्रदेश निवेश संवर्द्धन अधिनियम 2008 और मध्यप्रदेश उद्योगों की स्थापना एवं परिपालन का सरलीकरण अधिनियम 2023 उक्त दोनों अधिनियमों के तहत किसी कार्यरत् या स्थापित होने जा रहे उद्योग को दी गई जो विभिन्न अनुमतियां हैं उनको इसी अधिनियम के अंतर्गत दी गई अनुमति के द्वारा स्वीकार किया जायेगा. मुझे विश्वास है सभापति महोदय और सारा सदन इस बात से सहमत होगा कि यह ईज आफ डूईंग बिजनेस विधेयक लागू हो जाने के बाद वाकई में हमारे देश की ख्याति दूर-दूर तक फैलेगी. निवेशक इस खुश्बू को देखकर,सूंघकर मध्यप्रदेश की ओर खिंचे चले आयेंगे. मैं एक बार फिर से बहन श्रीमती कृष्णा गौर को और मध्यप्रदेश की मोहन सरकार को इस बात के लिये बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने सही समय पर सही कदम उठाया है और सही विधेयक लेकर आये हैं. माननीय सदन से भी अपेक्षा है कि वह हम सबके साथ खड़े होंगे. माननीय सभापति जी आपको बहुत-बहुत धन्यवाद.
सभापति महोदय - श्री अभय मिश्रा जी (अनुपस्थित) श्री गौरव सिंह पारधी जी.
श्री गौरव सिंह पारधी - सभापति महोदय, मैं नहीं बोलना चाहता.
श्रीमती कृष्णा गौर - धन्यवाद माननीय सभापति महोदय, मैं आज इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सदन में अपने बहुत ही महत्वपूर्ण विचार व्यक्त करने पर हृदय से धन्यवाद व्यक्त करती हूं हमारे वरिष्ठ विधायक,पूर्व मंत्री,आदरणीय श्री अजय विश्नोई जी के प्रति और अपनी बात प्रारंभ करने के पहले माननीय मुख्यमंत्री जी और माननीय अध्यक्ष जी का हृदय से धन्यवाद व्यक्त करती हूं कि उन्होंने इस बहुत ही महत्वपूर्ण विधेयक पर मुझे इस विधेयक को प्रस्तुत करने का अवसर दिया. जिस विधेयक की महत्ता को इस बात से समझ सकते हैं कि निश्चित रूप से आने वाले समय में यह मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति का बहुत बड़ा आधार होगा. माननीय सभापति महोदय, आज इस सदन में मध्यप्रदेश ईज आफ डूईंग बिजनेस,2026 को विचारार्थ एवं पारित करने हेतु प्रस्तुत किया गया है. मैं हृदय से बहुत आभार और धन्यवाद व्यक्त करती हूं हमारे देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रति,हमारे मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के प्रति जिनके संकल्प और कर्मठ प्रयासों के कारण आज हमारा प्रदेश औद्योगिक प्रगति और निवेश संवर्द्धन के क्षेत्र में नित नयी ऊंचाईयों को छू रहा है नित नये आयाम स्थापित कर रहा है. यह हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी की दृढ़ इच्छा शक्ति और अटूट जीजिविषा का ही परिणाम है कि मध्यप्रदेश में ज्यादा से ज्यादा निवेश आए. इस दृष्टि से उन्होंने पूरे देश में, विदेश में घूम-घूम कर एक वातावरण तैयार किया और हम जानते हैं कि 2025 का वर्ष मध्यप्रदेश ने औद्योगिक एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाया.
माननीय सभापति महोदय, औद्योगिक एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाते हुए वर्ष 2025 के फरवरी माह में मध्यप्रदेश के इतिहास में भोपाल में पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर सम्मिट का आयोजन हुआ. हम सब साक्षी हैं कि उस ग्लोबल इन्वेस्टर सम्मिट का शुभारंभ करने के लिए हमारे देश के प्रधानमंत्री स्वयं उपस्थित हुए थे और उस सम्मिट का समापन करने के लिए हमारे देश के गृहमंत्री भी उस सम्मिट में उपस्थित हुए.
माननीय सभापति महोदय, माननीय प्रधानमंत्री जी का और माननीय गृहमंत्री जी का आना सिर्फ एक कार्यक्रम की औपचारिकता करना भर नहीं था. बल्कि उस सम्मिट में देश-विदेश से आए हुए समस्त निवेशकों को इस बात का भरोसा दिलाना था कि आप इस मध्यप्रदेश की धरती पर निवेश करिए. मध्यप्रदेश का सहयोग करने के लिए भारत सरकार मजबूती के साथ खड़ी है. सभापति महोदय, हमने यह देखा भी था कि उसका परिणाम यह निकला कि उस जीआईएस में मध्यप्रदेश में 30 लाख 77 हजार करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव हमें मिले. यह भी एक अद्भुत उदाहरण है कि लगभग 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश मध्यप्रदेश में धरातल पर उतर आए हैं. सभापति महोदय, यह इस बात का प्रतीक है कि मध्यप्रदेश अब उद्योगों और निवेशकों के लिए एक अनुकूल प्रदेश बन गया है और अब ज्यादा से ज्यादा निवेशक मध्यप्रदेश में निवेश करने के लिए आतुर हैं, आकर्षित हैं.
माननीय सभापति महोदय, इसीलिए मैं कहना चाहूँगी कि यह विधेयक मात्र एक कानून भर नहीं है बल्कि यह मध्यप्रदेश की एक नई आर्थिक सोच, सुशासन और विकसित भारत के संकल्प की दिशा में मध्यप्रदेश के बढ़ते हुए महत्वपूर्ण कदम है, जिसका उद्देश्य हमारे प्रदेश में उद्योगों के लिए, व्यापार के लिए, सेवा क्षेत्रों के लिए, स्टार्ट अप्स के लिए, एमएसएमई इकाइयों के लिए एक ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां निवेश सरल हो, व्यवसाय सुगम हो और रोजगार पाना आसान हो.
माननीय सभापति महोदय, आज वास्तव में मुझे गर्व है अपने देश के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी पर, जिनके नेतृत्व में हमारे देश में मिनिमम गवर्न्मेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों के माध्यम से उद्योग और व्यापार की संस्कृति को एक नई दिशा मिली है और उन्हीं की प्रेरणा से मध्यप्रदेश में हमारे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के कुशल नेतृत्व में हमारी सरकार निवेशकों के लिए एक उत्तरदायी, पारदर्शी और समयबद्ध व्यवस्था स्थापित करने का निरंतर काम कर रही है और इसीलिए ऐसे समय में जब हमारे प्रदेश में पूरी तरह से निवेश का वातावरण तैयार हो गया है.
06.34 बजे {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}
माननीय अध्यक्ष महोदय, हम इस बात को सुनिश्चित करना चाहते थे कि मध्यप्रदेश में आने वाले कोई भी निवेशक को किसी भी प्रकार की कोई परेशानी न हो और वह ज्यादा से ज्यादा मध्यप्रदेश में निवेश करें और सुविधाजनक निवेश हो. मैं छोटे से उदाहरण के माध्यम से बताना चाहूँगी कि मध्यप्रदेश के किसी जिले में अगर किसी युवा उद्यमी को उसके पास संकल्प है, उसके पास पूंजी है और उसे अपने ही अंचल में कोई उद्यम लगाना है तो यह विधेयक उसके स्वागत के लिए खड़ा है. उसे पोर्टल पर एक फॉर्म भरना है, स्वघोषणा करनी है और उद्योग की नींव रखने के लिए निकल पड़ना है. उसके साथ कंधे से कंधा और कदम से कदम मिलाकर मध्यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार डॉ. मोहन यादव जी की सरकार खड़ी होगी यही सही अर्थों में इस विधेयक की आत्मा है. इसलिए मैं कहना चाहूँगी कि हमारे वरिष्ठ सदस्य आदरणीय विश्नोई जी ने बहुत विस्तार से इस संबंध में अपने विचार व्यक्त करते हुए बात रखी है. लेकिन इस विधेयक को बनाते हुए हमारे विभाग ने बहुत मेहनत की है, बहुत परिश्रम किया है और देश के विभिन्न राज्यों की अच्छाइयों को इसमें समाहित करके, एक श्रेष्ठ विधेयक बनाने का प्रयास किया है. इसलिए मैं अन्त में बस इतना ही कहना चाहूँगी कि यह विधेयक किसी दल का नहीं, प्रदेश के भविष्य का विधेयक है. जब कोई उद्योग लगता है, तो वह रोजगार किसी दल विशेष के कार्यकर्ता को नहीं, बल्कि प्रदेश के बेटा-बेटियों को मिलता है. इसलिए मैं संपूर्ण सदन के पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों से विनम्र आग्रह करती हूँ कि इस विधेयक को एक स्वर से पारित कर हम सब लोग मिलकर इतिहास के सही पक्ष में खड़े हों, इन्हीं शब्दों के साथ, मैं मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूईंग बिजनेस विधेयक, 2026 इस सदन के विचारार्थ एवं पारित किये जाने हेतु अनुरोध करती हूँ. बहुत-बहुत धन्यवाद.
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) – माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें तो सर्वानुमति हो जाये. उधर कोई है ही नहीं.
अध्यक्ष महोदय- प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूईंग बिजनेस विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.
अध्यक्ष महोदय - अब, विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.
प्रश्न यह है कि खण्ड 2 से 27 एवं अनुसूची 1 से 5 इस विधेयक का अंग बने.
खण्ड 2 से 27 एवं अनुसूची 1 से 5 इस विधेयक के अंग बने.
प्रश्न यह है कि खण्ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र इस विधेयक का अंग बने.
खण्ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र इस विधेयक का अंग बना.
राज्य मंत्री, अधिकृत औद्योगिक नीति एवं निवेश (श्रीमती कृष्णा गौर) – अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करती हूँ कि मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूईंग बिजनेस विधेयक, 2026 पारित किया जाय.
अध्यक्ष महोदय – प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.
प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूईंग बिजनेस विधेयक, 2026 पारित किया जाय.
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ
विधेयक पारित हुआ.
(5) मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 (क्रमांक 5 सन् 2026) पर विचार
उप मुख्यमंत्री, वित्त (श्री जगदीश देवड़ा) – अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूँ कि मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.
अध्यक्ष महोदय – प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ. श्री नारायण सिंह पट्टा जी.
श्री नारायण सिंह पट्टा – (अनुपस्थित.)
श्री गौरव सिंह पारधी (कटंगी) – माननीय अध्यक्ष महोदय, आज हम सब यहां पर मध्यप्रदेश उपकर अधिनियम,1981 के संशोधन पर चर्चा कर रहे हैं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, निश्चित ही मैं समझता हूँ कि मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व वाली सरकार, हमारे वित्त मंत्री जी के नेतृत्व वाली सरकार, जो मानवता के आधार पर ऐसे संशोधनों को सामने ला रही है. यह संशोधन हमारी सरकार की स्वामित्व योजना जिसमें ग्रामीण परिवारों को उनके जो आबादी में पट्टे हुआ करते थे, उनकी रजिस्ट्री करके सरकार के द्वारा दी गई है, तो उसमें जो 0.05 प्रतिशत सेस लगता था, उसको मुक्त करने के लिए दी जा रही है. मैं इसके लिए माननीय वित्त मंत्री जी को बधाई देते हुए अन्त में, इतना जरूर कहना चाहूँगा कि आज आप हमारे ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की अपनी भूमि के सपने को पूर्ण कर रहे हैं, साथ ही साथ मैं यह जरूर बताना चाहूँगा कि संविधान के अनुच्छेद 286 की स्टेट लिस्ट के अन्दर यह सेस लगाने का अधिकार राज्य सरकार को मिलता है, इसी के तहत सेस लगा और इस योजना को सफल बनाने के लिए माननीय वित्त मंत्री जी को मैं बधाई दूँगा. अन्त में, व्यक्ति को अपनी भूमि, अपना घर मिलेगा, इन्हीं बधाइयों के साथ, मैं दो लाइनों से अपनी बात को समाप्त करूँगा. ‘वो गांव की पक्की सड़कें, वो पगडंडियों का प्यार, हमेशा याद आता है, वह गांव का अपना घर, हमेशा याद आता है, वह गांव का अपना घर’. बहुत बहुत धन्यवाद.


अध्यक्ष महोदय- वित्त मंत्री जी यदि आप कुछ कहना चाहते हैं तो कह दें और प्रस्ताव भी प्रस्तुत कर दें.
उपमुख्यमंत्री, वित्त (श्री जगदीश देवड़ा)- अध्यक्ष महोदय, इसमें एक संशोधन है कि अधिनियम की धारा 9 (1) में यह प्रावधान है कि विभिन्न दस्तावेजों जैसे रजिस्ट्री, विक्रय पत्र, दान पत्र एवं बंधक पत्र आदि पर उपकर सेस लागने का अधिकार राज्य शासन का है. संशोधन केवल इतना है कि अधिनियम की धारा 9(1) में परंतुक जोड़कर यह प्रावधान किया गया है कि राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा किसी दस्तावेज या उसके किसी भाग पर उपकर की देयता और भुगतान से छूट दे सकेगी. पहले छूट देने का प्रावधान नहीं था. इस संशोधन से छूट देने का प्रावधान राज्य सरकार को है. मैं केवल इतना कहूंगा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं डॉ. मोहन यादव जी को मैं धन्यवाद दूंगा कि स्वामित्व योजना के तहत 48 लाख संपत्ति अभिलेखों के पंजीयन की प्रक्रियात्मक जटिलतायें पूरी तरह दूर होगी और 0.5 प्रतिशत उपकर स्टाम्प ड्यूटी पर जो लगता है, उससे पूरी तरह छूट मध्यप्रदेश सरकार की ओर से होगी, इसके लिए हम मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देते हैं.

(6) मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 (क्रमांक 14 सन् 2026)
उपमुख्यमंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा (श्री राजेन्द्र शुक्ल)- अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 पर विचार किया जाए.
अध्यक्ष महोदय- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.
श्री दिनेश जैन (बोस)- अनुपस्थित.
श्री अनिल जैन कालूहेड़ा (उज्जैन-उत्तर)- अध्यक्ष महोदय, मैं, कहना चाहता हूं कि बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु विधेयक लाया गया है. मैं इसके समर्थन में अपना पक्ष रख रहा हूं. किसी भी विश्वविद्यालय की सफलता इस बात से नहीं मापी जा सकती कि वह कितनी परीक्षायें आयोजित करता है. उसकी सफलता इस बात से मापी जाती है कि वह कितने उत्कृष्ट चिकित्सक, शोधकर्ता, शिक्षक और नवाचारकर्ता तैयार करता है. धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय की स्थापना इसी व्यापक सोच के साथ की जा रही है.
अध्यक्ष महोदय, इस विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव के लिए माननीय स्वास्थ्य मंत्री एवं मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद ज्ञापित करता हूं. यह विश्वविद्यालय चिकित्सा, दंत चिकित्सा, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा जैसी विभिन्न स्वास्थ्य शिक्षा धाराओं के बीच बेहतर शैक्षणिक समन्वय स्थापित करेगा. आज पूरी दुनिया स्वास्थ्य अनुसंधान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल हेल्थ और नई उपचार पद्धतियों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. ऐसे समय में मध्यप्रदेश का अपना समर्पित स्वास्थ्य विश्वविद्यालय होना अत्यंत आवश्यक है.
अध्यक्ष महोदय, इस विश्वविद्यालय के माध्यम से गुणवत्तापूर्वक शिक्षा, समयबद्ध परीक्षा और बेहतर शोध को नई गति मिलेगी. मुझे विश्वास है कि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में विद्यार्थियों के लिए नए अवसर के द्वार खोलेगा. उज्जैन में विश्वविद्यालय गठित हो रहा है इसलिए मुझे विश्वास है इसके माध्यम से चाहे परीक्षा हो, संचालन हो, स्वास्थ्य से संबंधित जितने भी कॉलेज हों इनके संचालन में यह बिल कारगर सिद्ध होगा. मैं इस बिल का समर्थन करता हूँ.
अध्यक्ष महोदय – माननीय मंत्री जी कुछ कहना चाहेंगे.
उप मुख्यमंत्री (लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) (श्री राजेन्द्र शुक्ल) – माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस प्रकार से मेडिकल कॉलेजों का विस्तार हो रहा है. 19 मेडिकल कॉलेज मध्यप्रदेश शासन के हो गए हैं. 14 प्रायवेट सेक्टर के भी हमारे प्रदेश में मेडिकल कॉलेज संचालित हैं. आने वाले दिनों में और भी तेजी के साथ मेडिकल कॉलेज, डेंटल कॉलेज, आयुष के जितने भी संस्थान है उसका भी मध्यप्रदेश में लगातार विस्तार हो रहा है. इसलिए यह महसूस किया गया कि क्षेत्रफल की दृष्टि से व्यवस्था बेहतर हो सके इसके लिए एक नये स्वास्थ्य विश्वविद्यालय की आवश्यकता है. इसलिए उज्जैन में यह नए विश्वविद्यालय की स्थापना जिसका धन्वंतरि जी के नाम से नामकरण इस विधेयक में हमने प्रस्तुत किया है. उज्जैन विश्वविद्यालय में 6 संभाग रहेंगे. जो पुरानी मेडिकल यूनिवर्सिटी,जबलपुर में है उसमें 4 संभाग रहेंगे. इस प्रकार से पूरे मध्यप्रदेश में बेहतर तरीके से समय पर एग्जाम हो, समय पर मूल्यांकन हो, समय पर रिजल्ट निकले और बच्चों का इनरोलमेंट भी समय पर हो. रिसर्च और अन्य प्रकार की व्यवस्थाएं ठीक प्रकार से हो सकें. इसके लिए यह विधेयक प्रस्तुत हुआ है. एक नये विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए. मैं आपके माध्यम से निवेदन करता हूँ कि इस विधेयक को पारित किया जाए.
अध्यक्ष महोदय – प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 पर विचार किया जाए.
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.
अध्यक्ष महोदय – अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा. प्रश्न यह है कि खण्ड 2 से 66 एवं अनुसूची एक एवं दो इस विधेयक का अंग बने.
खण्ड 2 से 66 एवं अनुसूची एक एवं दो इस विधेयक के अंग बने.
अध्यक्ष महोदय – प्रश्न यह है कि खण्ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र इस विधेयक का अंग बने.
खण्ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र इस विधेयक का अंग बना.
श्री राजेन्द्र शुक्ल, मंत्री (लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) – मैं, प्रस्ताव करता हूँ कि मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 पारित किया जाए.
अध्यक्ष महोदय – प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ. प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, 2026 पारित किया जाए.
विधेयक पारित हुआ.
(8) मध्यप्रदेश वेट (संशोधन) विधेयक 2026 (क्रमांक 15 सन् 2026)
श्री जगदीश देवड़ा, उप मुख्यमंत्री (वाणिज्यिक कर) – अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूँ कि मध्यप्रदेश वेट (संशोधन) विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.
अध्यक्ष महोदय – प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.
श्री अभय मिश्रा (अनुपस्थित)
श्रीमती अर्चना चिटनीस (अनुपस्थित)
श्री जगदीश देवड़ा – माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश वेट कर अधिनियम 2002 की धारा 4 (5) 46 (3) तथा अधिनियम की धारा (9) के अनुसार वर्णित अनुसूची दो में संशोधन प्रस्तावित है. तीन संशोधन हैं. प्रथम संशोधन अधिनियम की धारा 4 की उपधारा 5 में प्रस्तावित है. जिसके द्वारा वाण्जियक कर बोर्ड के अपीलीय अध्यक्ष तथा सदस्यों की अधिकतम आयु, अध्यक्ष तथा सदस्यों की अधिकतम आयु 65 वर्ष से बढ़ाकर 67 वर्ष किए जाने से संबंधित है. दूसरा संशोधन अधिनियम की धारा 46 की उपधारा 3 में प्रस्तावित है जिसमें अपीलीय उपायुक्त द्वारा पारित ऐसे अपील आदेशों के विरुद्ध जिनमें राजस्व की क्षति संभावित है, के विरुद्ध वाणिज्यक कर आयुक्त को अपील बोर्ड में अपील करने का अधिकार प्राप्त हो सकेगा. तीसरा संशोधन वेट अधिनियम की अनुसूची 2 में क्रूड ऑयल की प्रविष्टि को संशोधित किए जाने से संबंधित है जिसके तहत क्रूड ऑयल के स्थान पर पेट्रोलियम क्रूड प्रतिस्थापित किया जा रहा है क्योंकि जीएसटी अधिनियम में क्रूड ऑयल के लिए यही शब्दावली है तथा केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम 1956 की धारा 14 के विलोपित हो जाने के कारण क्रूड ऑयल की वर्तमान प्रविष्टि में धारा 14 का संदर्भ विलोपित किया जाना वैधानिक दृष्टि से आवश्यक है इसलिए अध्यक्ष महोदय, यह कुल तीन संशोधन हैं, मुझे लगता है कि संशोधन पारित करने का कष्ट करें.
अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश वेट संशोधन विधेयक, 2026 पर विचार किया जाय.
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.
अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.
प्रश्न यह है कि खण्ड 2 से 4 इस विधेयक का अंग बनें.
खण्ड 2 से 4 इस विधेयक के अंग बने.
प्रश्न यह है कि खण्ड 1 पूर्ण नाम तथा अधिनियम सूत्र इस विधेयक का अंग बने.
खण्ड 1 पूर्ण नाम तथा अधिनियम सूत्र इस विधेयक का अंग बना.
श्री जगदीश देवड़ा -- अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश वेट संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया जाय.
प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.
प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश वेट संशोधन विधेयक, 2026 पारित किया जाय.
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.
विधेयक पारित हुआ.
विधान सभा की कार्यवाही बुधवार, दिनांक 22 जुलाई, 2026 को प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्थगित की जाती है.
अपराह्न 6.53 बजे विधान सभा की कार्यवाही बुधवार, दिनांक 22 जुलाई, 2026 (आषाढ़ 31,1948) को पूर्वाह्न 11.00 बजे तक के लिए स्थगित की गई.
भोपाल. अरविन्द शर्मा
दिनांक : 21 जुलाई, 2026 प्रमुख सचिव,
मध्यप्रदेश विधान सभा