मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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षोडश विधान सभा                                                                      पंचम सत्र

 

 

मार्च, 2025 सत्र

शुक्रवार, दिनांक 21 मार्च, 2025

(30 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1946 )

 

 

[खण्ड- 5]                                                                                  [अंक- 8 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

शुक्रवार, दिनांक 21 मार्च, 2025

 

(30 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1946 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02  बजे समवेत हुई.

 

{ अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

 

 

11.02 बजे    1.                                  बधाई

 

          श्री सिद्धार्थ तिवारी एवं श्री कमलेश प्रताप शाह, सदस्‍य को जन्‍म दिन की बधाई

          अध्‍यक्ष महोदय- माननीय सदस्‍य सिद्धार्थ तिवारी, त्‍यौंथर, रीवा और माननीय सदस्‍य श्री कमलेश प्रताप शाह, अमरवाड़ा, छि़ंदवाड़ा दोनों का आज जन्‍म दिन है. सदन की ओर से उनको बहुत-बहुत बधाई, बहुत-बहुत शुभकामनाएं.

11.02    2.                                          बधाई

फाग उत्‍सव की बधाई

          जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसीराम सिलावट)- अध्‍यक्ष महोदय, मैं कल के लिये बधाई देता हूं. जो फाग उत्‍सव कराया उसके लिये मैं आपको बधाई दे दूं.

(मेजों की थपथपाहट)

11.03 बजे                                  विशेष उल्‍लेख

                                            अंतर्रा‍ष्‍ट्रीय वन दिवस

          अध्‍यक्ष महोदय- आज अंतर्रा‍ष्‍ट्रीय वन दिवस है, जो पर्यावरण का प्रतीक है. हर साल 21 मार्च को दुनिया के सभी प्रकार के वनों का उत्‍सव मनाने, पेड़ों और वनों के महत्‍व को पहचानने और उनकी रक्षा के लिये कार्यवाही करने के लिये अंतर्रा‍ष्‍ट्रीय वन दिवस मनाया जाता है. हम सब भी मिलकर आज संकल्‍प करें की पर्यावरण की रक्षा के अपने दायित्‍व के निर्वहन के लिये हम लोग वृक्षों को बचायें, वृक्षों को लगायें और उनका संरक्षण करें.

 

 

 

11.04 बजे                           तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

विधायकों के पत्रों पर कार्यवाही

[वाणिज्यिक कर]

1. ( *क्र. 1988 ) श्री साहब सिंह गुर्जर : क्या उप मुख्‍यमंत्री, वाणिज्यिक कर महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा सदस्यों द्वारा चाहे जाने पर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत विभागों से लोकहित में जानकारी उपलब्ध कराये जाने के संबंध में शासन के क्या नियम हैं? नियम/अधिनियम की प्रति उपलब्ध करावें। (ख) क्‍या ग्वालियर में संचालित बापूना एल्क्रोबू प्रायवेट लिमिटेड (रायरू डिस्टलरी) से संबंधित कुछ अनियमिततायें संबंधी शिकायतें प्राप्त होने पर प्रकरण में वस्तुस्थिति चाहे जाने के लिये शिकायत में वर्णित बिन्दुओं के आधार पर जानकारी प्रदाय किये जाने हेतु पत्र क्रमांक/MLA/243 ग्वालियर, दिनांक 17.09.2024 के द्वारा लेख किया गया, साथ ही कलेक्टर जिला ग्वालियर को भी पत्र क्रमांक/MLA/242 ग्वालियर, दिनांक 17.09.2024 के द्वारा प्रकरण में वस्तुस्थिति की जांच/कार्यवाही हेतु लेख किया गया? जानकारी प्राप्त नहीं होने से पुनः पत्र क्रमांक/280/2024/विधायक ग्वालियर, दिनांक 14.10.2024 से रायरू डिस्टलरी के संचालक को स्मरण पत्र भेजा गया? (ग) प्रश्‍नांश (ख) अनुसार जानकारी प्राप्त नहीं होने पर कलेक्टर जिला ग्वालियर को पुनः पत्र क्रमांक/364/2024/MLA ग्वालियर, दिनांक 28.01.2025 तथा आयुक्त संभाग ग्वालियर को पत्र क्रमांक/353/2024/MLA ग्वालियर, दिनांक 18.01.2025 के माध्यम से लेख किया गया प्रश्‍नांकित दिनांक तक वांछित जानकारी, कार्यवाही प्रतिवेदन अप्राप्त है? जानकारी प्रदान की जाये। (घ) उपरोक्तानुसार पत्रों के आधार पर जांच दल का विवरण, जांच प्रतिवेदन, कथन, निष्कर्ष मय नोटशीट समस्त दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति उपलब्ध करावें? यदि जांच/कार्यवाही नहीं की गई है तो कारण बतावें।

उप मुख्‍यमंत्री, वाणिज्यिक कर ( श्री जगदीश देवड़ा ) : (क) सामान्‍य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमंक एफ 19-76/2007/1//4, दिनांक 22 मार्च, 2011 द्वारा प्राप्‍त जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'एक' अनुसार है। (ख) कलेक्टर जिला ग्‍वालियर द्वारा आदेश पत्र क्रमांक/क्यू/ए.डी.एम./स्टेनो/2025/134 ग्वालियर, दिनांक 24.02.2025 द्वारा जांच समिति गठित की गई है। आदेश की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'दो' अनुसार है। जांच प्रचलन में है। (ग) एवं (घ) प्रश्‍नांश '''' के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

          श्री साहब सिंह गुर्जर- अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न क्रमांक- 1988.     

          श्री जगदीश देवड़ा- अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर रखा गया है.

          अध्‍यक्ष महोदय- माननीय सदस्‍य आप पूरक प्रश्‍न करें.

          श्री साहब सिंह गुर्जर- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे द्वारा सदन में उठाये गये प्रश्‍न क्रमांक- 1988 के संबंध में कहना चाहूंगा कि रायरू डिस्‍टलरी में हो रही अनियमितताओं के संबंध में मेरे द्वारा एक पत्र क्रमांक रायरू डिस्‍टलरी के प्रबंधक को तथा पत्र क्रमांक-2  कलेक्‍टर महोदय एवं पत्र क्रमांक-1 संभागीय आयुक्‍त को लिखे गये. परन्‍तु उन भेजे गये पत्रों पर स्‍थानीय प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही की गयी और ना ही इस संबंध में मुझे की गयी कार्यवाही से अवगत कराया गया. इसके बाद विधान सभा प्रश्‍न लगाये जाने के उत्‍तर में दिनांक 20.03. 2025 को ...

          अध्‍यक्ष महोदय- साहिब सिंह जी यह तो आप प्रश्‍न ही पढ़ रहे हो. यह तो प्रश्‍न उनके सामने है. आप क्‍या पूछना चाहते हो वह बताओ.

          श्री साहिब सिंह गुर्जर- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं वाणिज्यिक कर मंत्री यह बताने की कृपा करेंगे कि रायरू डिस्‍टलरी द्वारा पुरानी नहर जो जिनावली से नरावली तक जाती है उक्‍त नहर को तोड़कर अवैध रूप से भवन निर्माण की बाउंड्रीवाल का निर्माण किया गया है, क्‍या इसके विरूद्ध आप कार्यवाही करेंगे ?

            दूसरा प्रश्‍न यह है कि लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग की बिना अनुमति के डिस्‍टलरी संचालन हेतु पानी की व्‍यवस्‍था के लिये.

            अध्यक्ष महोदययह मोबाइल पर रिकार्ड कौन कर रहा है.  साहब सिंह जी, आपका मोबाइल चालू है.

            श्री साहब सिंह गुर्जरअध्यक्ष महोदय, नहीं.

            अध्यक्ष महोदयअगल बगल कौन कर रहा है.  यह सदन में  अन्दर की कार्यवाही  को  कोई हम लोग रिकार्ड  नहीं करेंगे.  यह सभी लोग ध्यान दें.

            श्री साहब सिंह गुर्जरअध्यक्ष महोदय, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग  की  बिना  अनुमति के डिस्टलरी संचालन हेतु पानी  की व्यवस्था के लिये  अनेकों अत्यन्त चौड़े  और गहराई के  नलकूपों का खनन किया गया है,  जिससे स्थानीय स्तर पर ग्रामों  में  जल स्तर अत्यन्त  कम  हो गया है. डिस्टलरी से  लगे आस पास के ग्रामों में जल स्तर  500 फीट से भी नीचे  जा चुका है.   क्या राज्य स्तरीय   जांच कमेटी, दल गठित  कर   इसकी जांच कराई जायेगी.

            अध्यक्ष महोदयचलिये, बैठिये. आपका प्रश्न आ गया है.  मंत्री जी.

            श्री जगदीश देवड़ा--  अध्यक्ष महोदय, सदस्य  जी ने 4 पत्र दिये थे और चारों पत्र  के ऊपर  एक समिति गठित हुई.  जांच दल 24 फरवरी,2025 को  गठित हुआ.  9 अधिकारियों की टीम बनाई, जिसमें  जिस  विषय की जो शिकायत   थी,  उन सारे विभागों के   अलग अलग  अधिकारी  उसमें सम्मिलित किये.  ऐसे 9 अधिकारी सम्मिलित करके  जांच उन्होंने कर भी दी और  जिन बिन्दुओं पर  सदस्य जी की शिकायत  थी,  उन सारे बिन्दुओं  की जांच होकर के आ भी गई है,  शायद  मुझे लगता है कि  सदस्य जी को भी  वह  जांच की जो रिपोर्ट आई  होगी,  वह प्राप्त हो गई होगी.  मुझे जो जानकारी है,  वह उनको मिल गई होगी,  लेकिन  नहीं भी हो, तो  मैं वह  पूरी जो जांच होकर के आई है,  वह मैं आपको उपलब्ध  करवा दूंगा.  लेकिन  यह  आपका बिन्दु   क्रमांक एक जो था, पुराना नाला तोड़कर  अवैध  बाउंड्रीवॉल का   निर्माण किया गया है,  तो   इस पर भी मुख्य नहर के दोनों ओर कोई  बाउउंड्रीवॉल  नहीं पाई गई, परन्तु सब  माइनर नहर पर  बनी  प्रीकास्ट बाउंड्री को  मौके पर तोड़ा गया.जहां गलत लगा, वहां पर जाकर के समिति गई थी..  (श्री साहब सिंह, सदस्य के खड़े होने पर)

            अध्यक्ष महोदय-- साहब सिंह जी एक मिनट. मंत्री जी को आप बोलने दें, फिर आपको एक  प्रश्न करने  की अनुमति मिलेगी.

            श्री जगदीश देवड़ा--  सदस्य जी,  यह सातों बिन्दु हैं,   अगर आपको लगता है कि किसी बिन्दु पर  कुछ  कार्यवाही नहीं हो पाई, तो  उस पर हम विचार कर लेंगे.  कोई दिक्कत नहीं है. पूरी  टीम बनी है और सारे विभाग के लोग  हैं,  आपके सारे बिन्दु , जितने बिन्दु आपने  दिये हैं,  उन पर पूरी जांच हुई.

            श्री साहब सिंह गुर्जरअध्यक्ष महोदय, मैं  मंत्री जी से पूछना  चाहता हूं कि जो जांच दल  गठित किया गया है.  उसकी जानकारी  मुझे नहीं  मिल पाई है, मैं चाहता हूं कि   राज्य स्तरीय दल   गठित किया जाये, उसमें मुझे शामिल  किया जाये  और जो जांच वहां की गई है,  उससे  बिलकुल मैं सहमत  नहीं हूं. जब  जांच दल गठित राज्य स्तर पर होगा,  तो निश्चित तौर पर   दूध का दूध पानी का पानी  होगा.

            श्री जगदीश देवड़ा--  अध्यक्ष महोदय, मैं सदस्य जी की बात से सहमत हूं,  आप एक बार  जांच की जो रिपोर्ट आई है,  वह जांच रिपोर्ट देख लें,  अगर आप संतुष्ट नहीं होंगे,  तो  मैं सदन में कह रहा हूं कि   कोई  उच्च  अधिकारियों को भेज करके  उसकी जांच करवा लेंगे.

            श्री साहब सिंह गुर्जरअध्यक्ष महोदय, मैंने जांच देख ली है,  उस जांच से मैं सहमत नहीं हूं.

            श्री  दिनेश गुर्जरमंत्री जी, स्थानीय नहीं, प्रदेश स्तरीय जांच  कमेटी  गठित होना चाहिये.  स्थानीय  स्तर के  सब अधिकारी  मिले रहते हैं.

            श्री साहब सिंह गुर्जरअध्यक्ष महोदय, जांच दल दल में मुझे शामिल  किया जाये.

            श्री जगदीश देवड़ा--  अध्यक्ष महोदय, वरिष्ठ अधिकारियों को भेज करके  हम एक बार उसकी जांच  करवा लेंगे.

            नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)अध्यक्ष महोदय,  सवाल साहब सिंह जी का जो है,  पहली बात  तो यह है कि  विधायक  जी प्रश्न पूछते हैं, तो  जनता के कहने पर पूछते हैं,  क्योंकि विधायक का उसमें कोई व्यक्तिगत इंट्रेस्ट नहीं होता है.  निरावली,बीलपुरा,जिनावली,जिगसोली,गजीपुरा,नायकापुरा ऐसे करके कम से कम   25 गांव है.  25 गांव के लोग शिकायत कर रहे हैं.   आपने समिति बनाई.  अब जिस दिन समिति जाये,  तो सदस्य भी उनके साथ में रहें, वे सामने अवगत हो जायें,  इसमें क्या परेशानी है.  आप बोल दीजिये.       श्री जगदीश देवड़ा--  अध्यक्ष महोदय, जांच के  समय अगर   विधायक जी साथ में रहें, तो  कोई दिक्कत नहीं है,  क्योंकि  दूध का दूध पानी का पानी सब साफ हो जायेगा.

            श्री साहब सिंह गुर्जरमंत्री जी, जांच दल मैं मुझे शामिल तो करायें.

            अध्यक्ष महोदयसाहब सिंह जी, मंत्री जी ने बता दिया है.   नेता प्रतिपक्ष जी ने आपकी बात  कही है. प्रश्न संख्या 2 श्री विजय रेवनाथ चौरे.

सी.एम. हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतें

[लोक सेवा प्रबन्धन]

2. ( *क्र. 1738 ) श्री विजय रेवनाथ चौरे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि          (क) सी.एम. हेल्पलाइन में वर्तमान में कुल कितनी शिकायतें दर्ज हैं? (ख) वर्तमान स्थिति में राजस्व विभाग में कितनी शिकायतें दर्ज हैं? (ग) प्रश्‍न (क) के प्रकाश में समय पर शिकायतें किन कारणों से निराकृत नहीं हो पा रही हैं? (घ) कब तक इनका निराकरण कर दिया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री (श्रीमती राधा सिंह) : (क) सी.एम. हेल्‍पलाईन में वर्तमान में कुल 564440 शिकायतें दर्ज हैं। (ख) वर्तमान स्थिति में राजस्‍व विभाग में 96727 शिकायतें दर्ज हैं। (ग) लोक सेवा प्रबंधन विभाग का पत्र क्र. 710/PSM/2014/61, दिनांक 30.07.2014 के कंडिका क्र. 04, बिंदु 4.1 अनुसार शिकायत के निराकरण संबंधी समस्‍त दायित्‍व संबंधित विभाग का होता है, जिसमें सभी विभागों के लिये लेवल-1 से लेवल-4 तक अधिकारी द्वारा किया जाता है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) प्रश्‍नांश '' के उत्‍तर में समाहित है। 

            श्री विजय रेवनाथ चौरे अध्यक्ष महोदय, प्रश्न क्र. 1738.

            श्रीमती राधा रविन्द्र सिंहअध्यक्ष महोदय,आपको मैं प्रणाम करती हूं, मैं पहली  बार   सदन में खड़ी हुई हूं.  उत्तर पटल पर रखा है.

          श्री विजय रेवनाथ चौरे -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सीएम हेल्प लाइन की शिकायतों के संबंध में मेरा प्रश्न है और मुझे इसका उत्तर मिला है कि लगभग 5 लाख 64 हजार से अधिक शिकायतें लंबित हैं और इसमें राजस्व विभाग की शिकायतें देखी जायें तो लगभग 1 लाख शिकायतें अभी लंबित हैं, मैं माननीय मंत्री महोदया से जानना चाहता हूं कि इस प्रकार से शिकायतें जो लंबित हैं जिसको लेकर के अधिकारी और कर्मचारी अपने नंबर बढ़ाने के लिये शिकायतकर्ता पर दवाब बनाते हैं. मैं तो कहता हूं कि यह सीएम हेल्पलाइन नहीं है यह धमकी हेल्पलाइन है. यह दवाब हेल्पलाइन है.  अध्यक्ष जी मैं आपके माध्यम से सिर्फ इतना निवेदन करना चाहता हूं कि जितनी लंबित शिकायतें हैं उसका निराकरण नहीं हो पाता है. सचिव से लेकर के कलेक्टर तक सारे अधिकारी दवाब बनाते हैं तुम शिकायत वापस ले लो नहीं तो घर नहीं देंगे, राशन नहीं मिलेगा, बिजली काट देंगे, यह बहुत सारी समस्यायें क्षेत्र में आ रही हैं. हालांकि मुझे उत्तर तो मिल गया है परंतु मेरा मंत्री जी से यह प्रश्न है कि मुख्यमंत्री महोदय ने एक बार घोषणा भी की थी कि हर तीन माह में इसकी मैं स्वयं समीक्षा करूंगा, उन्होंने स्वयं समीक्षा भी नहीं की और यह जो दवाब बनाया जा रहा है इसके ऊपर माननीय मंत्री जी का उत्तर चाहूंगा.

          श्रीमती राधा रविन्द्र सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय,मैं माननीय सदस्य को बताना चाहती हूं कि सीएम हेल्पलाइन में 5 लाख 64 हजार 440 शिकायतें दर्ज थी, वर्तमान स्थिति में राजस्व के मामलों की शिकायतें 96 हजार 727 दर्ज हैं. इन शिकायतों का निराकरण समय समय पर होता रहता है. हर स्तर पर नियमित रूप से इन शिकायतों का निराकरण किया जा रहा है और माननीय मुख्यमंत्री जी भी हर माह इसकी समीक्षा करते हैं.

          श्री विजय रेवनाथ चौरे -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बड़ा महत्वाकांक्षी कार्यक्रम था जो कि तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने चालू किया था. मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि जब शिकायतों का निराकरण ही नहीं हो रहा है, इतनी शिकायतें पेंडिंग हैं तो यह सीएस हेल्पलाइन क्यों चालू की गई. आज लोग इससे पीड़ित हैं, परेशान हैं, थाने में पुलिस वाले बैठा लेते हैं और दिन दिनभर बैठालते हैं और धमकी देकर कहते हैं कि शिकायत वापस ले ले, शिकायत उठा लो, अधिकारियों द्वारा सिर्फ नंबर बढ़ाने का काम किया जा रहा है कोई शिकायतों का निराकरण नहीं हो रहा है. 6 लाख शिकायतें लंबित हैं, राजस्व की 1 लाख शिकायते लंबित हैं. इतनी बड़ी चिंता का विषय है और इसका समाधान नहीं हो पा रहा है तो इस बात को लेकर मैं निवेदन करना चाह रहा हूं कि शिकायतों के निराकरण हेतु क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाये, क्षेत्र का विधायक है, जिला पंचायत अध्यक्ष है, जिला पंचायत सदस्य है, एक एसडीएम, तहसीलदार के समक्ष इन शिकायतों का निराकरण हो ताकि भविष्य  में अधिकारियों की किसी प्रकार  की धमकी और गुंडागर्दी से आम लोग परेशान न हो, शिकायतकर्ता परेशान न हो क्योंकि अभी उसकी शिकायतों का निराकरण नहीं हो पाता है, लोग परेशान हैं, लोग दुखी हैं फिर सीएम हेल्पलाइन का मतलब क्या है. क्या आप ऐसी कोई समिति बनायेंगे जिससे लोगों की शिकायतों का निराकरण हो सके, जिले की और प्रदेश की जनता को इसका लाभ मिल सके.

          श्रीमती राधा रविन्द्र सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को बताना चाहूंगी यह समय समय पर दर्ज शिकायतों का निराकरण होता रहता है. शिकायतों का नियमितरूप से निराकरण हो रहा है. माननीय सदस्य का यदि कोई विशेष ईश्यू हो तो विधायक जी मेरे से मिल लें चर्चा कर लें.

          श्री विजय रेवनाथ चौरे--माननीय मंत्री जी, ऐसा पूरे प्रदेश में हो रहा है.कोई एक दो गांव का उदाहरण नहीं है. मैं पूरे प्रदेश की बात कर रहा हूं और हम भी चाहते हैं कि इन शिकायतों का निराकरण तुरंत होना चाहिये. इसके लिये मेरा सुझाव है कि एक ऐसी समिति माननीय मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में बना दीजिये कि उस निराकरण समिति में जनप्रतिनिधि भी शामिल हों क्योंकि जब निराकरण समिति में जनप्रतिनिधि भी शामिल हो जायेगा तो अधिकारी की क्षमता नहीं है कि वह किसी प्रकार का शिकायतकर्ता पर दवाब डाले. माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बहुत अच्छी योजना है, इस पर सार्थक पहल भी हो रही है, मैं एकदम ऐसा नहीं कह रहा हूं कि यह सीएम हेल्पलाइन एकदम बेकार काम है, कुछ काम अच्छा भी हो रहा है 20 से 30 प्रतिशत अच्छा भी काम हो रहा है, मैं प्रशंसा भी कर रहा हूं. परंतु मेरा अनुरोध है कि इसकी समिति बनाई जाये उसमें जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाये.

          अध्यक्ष महोदय--जो अच्छा है उसमें प्रशंसा करने में संकोच क्यों कर रहे हो.

          श्री विजय रेवनाथ चौरे- अध्यक्ष जी, मैं प्रशंसा कर रहा हूं न. इसलिये मैं कह रहा हूं कि इसमें जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाये. अध्यक्ष महोदय, आपकी तरफ से निर्देश हो जायें, आदेश कर दें कि इसमें जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाये, यदि कोई शिकायत आती है उसका निराकरण करने के लिये कोई भी जनप्रतिनिधि होगा उसका समाधान निकालने का प्रयास करेगा.

          अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी को उत्तर तो देने दें.

          श्रीमती राधा रविन्द्र सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को जानकारी देना चाहूंगी कि 98 प्रतिशत शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है और स्वयं मुख्यमंत्री जी समय समय पर इसकी समीक्षा भी करते हैं. शिकायतों का निराकरण करना एक नियमित प्रक्रिया है और अगर आपको ऐसा लगता है कि शिकायतों के निराकरण से आप संतुष्ट नहीं हैं तो आप मुझसे आकर के चर्चा कर लें, बैठ लें, बैठकर के उसका समाधान हो जायेगा.

          श्री विजय रेवनाथ चौरे- ठीक है माननीय मंत्री जी .

मध्य प्रदेश जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि

[खनिज साधन]

3. ( *क्र. 2648 ) श्री राजन मण्‍डलोई : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                  (क) क्‍या वर्ष 2021 से प्रश्‍न दिनांक तक मध्यप्रदेश जिला खनिज प्रतिष्ठान नियम, 2016 अंतर्गत उच्च प्राथमिकता क्षेत्र एवं अन्य प्राथमिक क्षेत्र में निधि का उपयोग‍किये जाने के निर्देश हैं?                                  (ख) प्रतिष्ठान की निधि के लिये आय के स्त्रोत क्‍या हैं? स्त्रोतवार आय/राशि का विवरण उपलब्ध करायें। (ग) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार यदि हाँ, तो उच्च प्राथमिकता क्षेत्र में पेयजल, पर्यावरण संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण के उपाय, स्वास्‍थ्‍य कल्या‍ण, शिक्षा, महिला एवं बाल कल्याण, वृद्ध एवं नि:शक्त जनकल्याण, कौशल विकास एवं स्‍वच्‍छता तथा अन्य प्राथमिकता के क्षेत्र भौतिक अवसंरचना, सिंचाई, ऊर्जा एवं वाटरशेड विकास पर निधि का कितना व्यय किया गया?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री (श्री दिलीप अहिरवार) : (क) जी हाँ।                 (ख) प्रतिष्‍ठान की निधि के संबंध में प्रावधान म.प्र. जिला खनिज प्रतिष्‍ठान नियम, 2016 के नियम 8 के तहत अधिसूचित है। प्रश्‍नांश अनुसार स्‍त्रोतवार आय/राशि का विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - "एक"

          श्री राजन मण्‍डलोई -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 2648 है.

          श्री दिलीप अहिरवार -- अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर प्रस्‍तुत है.

          श्री राजन मण्‍डलोई -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपने प्रश्‍न में खनिज प्रतिष्‍ठान मद से कितना आय-व्‍यय हुआ है इसकी जानकारी मांगी थी. इसमें मुझे उत्‍तर के रूप में दो पेज संलग्‍न दिये हैं, जिसमें प्रतिष्‍ठान निधि के आय का आंकलन बताया है. उसकी आय में कौन से और कितने वर्ष इसका उल्‍लेख नहीं है. उसमें बताया गया है कि 8,911 करोड़ और दूसरे पेज पर जिला खनिज बोर्ड से 2015-16 से अब तक का खर्च इन्‍होंने 3,276 करोड़, तो शेष 3,580 करोड़ रुपये इस मद का कहां उपयोग हुआ है इसका कोई उल्‍लेख नहीं है और साथ में प्रश्‍न यह भी था कि यह खनिज मद से हमारे जो अनुसूचित आदिवासी जिला है उस जिले में इस राशि का उपयोग होगा या नहीं या सीधे विभाग के खर्च में ही पैसा जाएगा.

          श्री दिलीप अहिरवार -- अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं माननीय सदस्‍य को बता दूं चूंकि उन्‍होंने तीन प्रश्‍न किये थे, तीनों के उत्‍तर उनके पास हैं मगर उन्‍होंने राशि की बात पूछी है तो मैं आपको उसका भी विवरण बता दूं. आपने जो प्रश्‍न किया है उसमें (क) के अनुसार यदि हां, तो उच्‍च प्राथमिक क्षेत्र में पेयजल, पर्यावरण को लेकर जो प्रश्‍न किया है, उसमें पूरा ब्‍योरा भी आपके पास है कि कुल व्‍यय की राशि 359.29 करोड़ 2015 से है. जबसे यह हमारा डीएमएफ फण्‍ड चालू हुआ है तब से आज तक का विवरण भी आपके पास उपलब्‍ध है और फिर भी आपको लगता है कि किसी चीज की कमी है तो फिर निश्चित रूप से मैं आपको अवगत करा दूंगा. बाकी जो आपने प्रश्‍न किया है उस प्रश्‍न के अनुसार तो मैंने उत्‍तर के माध्‍यम से पूरा ब्‍यौरा आपको उपलब्‍ध करा दिया है.

          श्री राजन मण्‍डलोई -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो जवाब दिया है उसमें यह जो आय का स्‍त्रोत है उसमें कौन से वर्ष से है. यदि मान भी लिया जाय कि वर्ष 2015-16 से अभी तक का है तो इसमें 8,911करोड़ रुपये है और जो कुल खर्च 5,359 करोड़, तो जो शेष 3,550 करोड़ की राशि किस मद में और कहां खर्च की और मेरा अगला प्रश्‍न यही था कि यह राशि हमारे आदिवासी बाहुल्‍य जिलों में भी इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर के लिये खर्च की जाएगी या नहीं.

          श्री दिलीप अहिरवार -- अध्‍यक्ष महोदय, हमारे डीएमएफ फंड का सीधा-सीधा यह है कि जो राशि होती है 0 से 5 करोड़ से लेकर कुल 100 प्रतिशत् वह जिले में होती है और 5 करोड़ से 25 करोड़ तक 50 प्रतिशत् वह जिले में होती है और नियम के अनुसार जो राशि खर्च होती है वह हमारे विधायक, सांसद और अन्‍य जनप्रतिनिधियों से प्रस्‍ताव लिये जाते हैं और पूरी कमेटी बैठती है. पहले कमेटी के अध्‍यक्ष हमारे प्रभारी मंत्री होते थे. हमारे केन्‍द्र के आदेश से अब कलेक्‍टर इनके अध्‍यक्ष हैं और निश्चित रूप से सब कुछ देखकर जहां जैसी उपलब्‍धता के हिसाब से राशि उपलब्‍ध होती है उस हिसाब से हम लोग काम करते हैं, हमारा विभाग काम करता है.

संविदा कर्मचारियों को से‍वानिवृत्ति उपरांत सामाजिक सुरक्षा

[सामान्य प्रशासन]

4. ( *क्र. 1715 ) श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि संविदा कर्मी के रिटायरमेंट उपरांत सामाजिक सुरक्षा के लिये सरकार के पास क्या प्लान है? एक ही पद संविदा कर्मी और सरकारी कर्मचारी को मिलने वाली सुविधा में क्या-क्या अंतर है?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री (श्रीमती कृष्‍णा गौर) : सामान्‍य प्रशासन विभाग के परिपत्र दिनांक 22.07.2023 द्वारा संविदा पर नियुक्‍त अधिकारियों/कर्मचारियों हेतु जारी दिशा-निर्देश की कंडिका-7 में शासकीय सेवकों की भांति उपादान भुगतान एवं कंडिका-8 के अंतर्गत राष्‍ट्रीय पेंशन योजना का लाभ प्रदान किये जाने के प्रावधान हैं, परिपत्र की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। संविदा कर्मियों को राज्‍य शासन के नियमित पदों के विरूद्ध पदस्‍थ किये जाने का प्रावधान नहीं है। दोनों श्रेणी के नियम पृथक-पृथक होने से शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता।

          श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 1715 है.

          श्रीमती कृष्‍णा गौर --  अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर प्रस्‍तुत है.

          श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि क्‍या संविदा कर्मी को सरकारी कर्मचारियों की तरह सुविधा नहीं मिलनी चाहिये, जबकि यह बेचारे आधी अधूरी तनख्‍वाह में काम करते हैं. बुढ़ापे के लिये भी इनको कोई सुरक्षा नहीं मिलती है. तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह जी ने भी कहा था कि संविदा कर्मियों को नियमित कर्मचारियों की तरह लाभ मिलेगा और रिटायरमेंट के बाद इनको ग्रेच्‍युटी का लाभ भी मिलेगा. मेरा मानना है कि सरकार धीरे-धीरे सरकारी नौकरी खत्‍म कर संविदा कल्‍चर को बढ़ावा दे रही है. यदि संविदा कर्मियों से काम ले रही है तो इन्‍हें सरकारी कर्मचारियों की तरह सुविधा भी देनी चाहिये. मैं सिर्फ यह पूछना चाहता हूं कि इनके रिटायरमेंट के बाद इनकी सुरक्षा का कोई नियम है कि इनको सुरक्षा मिलेगी.

          श्रीमती कृष्‍णा गौर -- अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं माननीय सदस्‍य को बताना चाहूंगी कि मध्‍यप्रदेश में हमारी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि संविदा नीति के तहत प्रदेश के समस्‍त संविदा कर्मियों को रिटायरमेंट के उपरांत सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से राष्ट्रीय सुरक्षा पेंशन और उपादान भुगतान की कार्यवाही की जाएगी. जिसके तहत संविदा पर कार्यरत् अधिकारियों और कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों को नियमित शासकीय सेवकों की भांति उपादान भुगतान 1972 के सुसंगत प्रावधानों के अनुसार उपादान के भुगतान की कार्यवाही की जाएगी. संविदा पर कार्यरत् अधिकारी/ कर्मचारियों को राष्ट्रीय पेंशन योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा. इस संबंध में पृथक से दिशा निर्देश वित्त विभाग द्वारा जारी किए जाएंगे. वर्तमान में उपादान हेतु एवं राष्ट्रीय पेंशन योजना का लाभ दिए जाने हेतु नियम वित्त विभाग द्वारा बनाए जा रहे हैं.

          श्री नितेन्द्र बृजेन्द्र सिंह राठौर -- मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि नियम कब तक बनाए जाएंगे.

          श्रीमती कृष्णा गौर -- माननीय अध्यक्ष महोदय, वित्त विभाग द्वारा जो नियम बनाए जा रहे हैं उसमें 3 से 4 महीने का समय लगेगा.

          श्री नितेन्द्र बृजेन्द्र सिंह राठौर -- बहुत-बहुत धन्यवाद.

          विभागों एवं शासकीय उपक्रमों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी

          [सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम]

5. ( *क्र. 122 ) श्री जयंत मलैया : क्या सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्यप्रदेश शासन के विभिन्न विभागों एवं शासकीय उपक्रमों में किस-किस पद पर वर्तमान में कितने कर्मचारी आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत हैं? श्रेणीवार जानकारी दें।                    (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्लेखित आउटसोर्स कर्मचारियों को वार्षिक आधार पर कितनी वेतनवृद्धि प्रदान की जाती है? श्रेणीवार जानकारी दें। (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में उल्लेखित आउटसोर्स कर्मचारियों के सुरक्षित भविष्य को लेकर शासन की कोई कार्ययोजना है? यदि हाँ, तो क्या? कार्ययोजना कब तक लागू की जावेगी?

सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम मंत्री ( श्री चेतन्‍य कुमार काश्‍यप ) : (क) मध्यप्रदेश शासन के विभिन्न विभागों एवं शासकीय उपक्रमों में विभाग की मांग अनुसार आउटसोर्स सेवाएं उपलब्‍ध कराई जा रही हैं। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा शर्तें, नियमित कर्मचारियों के समतुल्‍य नहीं हैं। आउटसोर्स कर्मचारियों को श्रम आयुक्‍त, मध्‍यप्रदेश द्वारा श्रमिकों के वर्ग अनुसार घोषित न्‍यूनतम मूल वेतन एवं परिवर्तनशील मंहगाई भत्‍ते की मासिक एवं दैनिक वेतन की दरों के अनुसार पारिश्रमिक भुगतान किया जाता है। अत: शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) वर्तमान में ऐसी कोई कार्ययोजना विचाराधीन नहीं है।

परिशिष्ट - "दो"

          श्री जयंत मलैया -- प्रश्न क्रमांक 122.

          स्कूल शिक्षा मंश्री (श्री उदय प्रताप सिंह) -- उत्तर सदन के पटल पर रखा है.

           श्री जयंत मलैया -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न भी कुछ नितेन्द्र जी के प्रश्न से मिलता जुलता है. उन्होंने संविदाकर्मियों की बात की और मैं आउटसोर्स कर्मियों की बात करना चाह रहा हूँ.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, पिछले कुछ दशकों में हजारों शासकीय कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं उनकी जगह पर सरकारी नौकरियों में और अर्धसरकारी नौकरियों में आउटसोर्स पर कर्मचारी रखे गए हैं. सैंकड़ों आउटसोर्स कर्मियों को तो 15-15 वर्ष हो गए हैं. स्वास्थ्य विभाग में करीब 2 हजार कर्मचारी हैं. शिक्षा विभाग और स्थानीय शासन विभाग में 1 हजार से ऊपर कर्मचारी हैं. आपने जो सूची दी उसको मैंने पढ़ा है. मेरा निवेदन यह है कि क्या सरकार स्थायी कर्मियों के समान आउटसोर्स कर्मियों के वेतन के लिए कोई एकजाई नीति बनाएगी. जिससे वे सम्मानजनक ढंग से जीवनयापन कर सकें.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, इनके और इनके परिवार को क्या आयुष्मान योजना का लाभ दिया जाएगा. क्या यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जो आउटसोर्स कर्मचारी हैं इन्हें ईपीएफ या एनपीएस में से किसी एक सुविधा का लाभ दिया जाए. यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनको यह सुविधा मिल रही है, क्या प्रतिमाह इसकी जानकारी इकट्ठी करके यह राशि भरने की कोशिश की जाएगी. मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूँ.

          श्री उदय प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूँ कि माननीय सदस्य बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं मुझे लगता है कि फायनेंशियल सिस्टम का सर्वाधिक जानकार कोई व्यक्ति इस सदन में है तो वे माननीय मलैया जी ही हैं. वे लम्बे समय तक वित्त मंत्री की भूमिका में भी रहे हैं. आप मेरी बात से सहमत होंगे कि जो आउटसोर्स कर्मचारी हैं उसके नाम से ही स्पष्ट होता है कि इनकी आउटसोर्सिंग की गई है. मध्यप्रदेश के विभिन्न विभागों में जैसा आपने कहा है शासकीय उपक्रमों में सेवाओं की आउटसोर्सिंग से सेवाओं का उपार्जन मध्यप्रदेश भण्डार क्रय तथा सेवा उपार्जन नियम 2015 यथा संशोधित 2022 में नियत प्रावधान अनुसार संबंधित विभाग आवश्यकता के अनुसार सेवाएं आउटसोर्स करता है. यह आउटसोर्स सेवा कभी महीने भर के लिए, कभी 3 महीने के लिए, कभी 8 महीने के लिए लेते हैं. कभी 10 कर्मचारी चाहिए, कभी 20 कर्मचारी चाहिए. विभाग आवश्यकता के अनुसार लेता रहता है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जैसा कहा कि वेतन आदि व दूसरी सुविधाओं के संबंध में मेरा एक आग्रह था. क्योंकि आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा शर्तें नियमित कर्मचारियों के समान न होकर पृथक होने से आउटसोर्स कर्मचारियों की समय-समय पर श्रम आयुक्त, मध्यप्रदेश उनके द्वारा श्रमिकों के वर्ग अनुसार न्यूनतम मूल वेतन एवं परिवर्तनशील मंहगाई भत्ते की जो घोषित मासिक एवं दैनिक वेतन की दरों के अनुसार उनका पारिश्रमिक भुगतान किया जाता है. हर 4-6-8 महीने में उनका एक सिस्टम है यदि दैनिक वेतन के अनुसार उनकी दरें बढ़ाना है. एकाध अवसर ऐसा भी आया है जब अवसर ऐसा आया जब उनके जो डेली वेजेस हैं उसको घटाने का काम भी श्रम विभाग ने किया है तो इस तरह से आउटसोर्स कर्मचारियों को चूंकि निर्धारित समयावधि में उपयोग के लिए लिया जाता है बाद में अलग कर दिया जाता है, फिर आवश्‍यकता पड़ती है फिर ले लिया जाता है इसलिए शासन के जो हमारे परमानेन्‍ट कर्मचारी है उनकी तरह से सरकार इनको इन्‍टरटेन नहीं करती है.

          श्री जयंत मलैया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे ज्‍यादा कुछ नहीं कहना है बस मंत्री जी से यह कहना है कि हमारा प्रदेश भी वेलफेयर प्रदेश है. आप थोड़ा ख्‍याल रखें.

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रश्‍न थोड़ा सा मानवीय है. इसमें मानवीय संवेदनाएं जुड़ी हुई हैं. आउटसोर्स का विषय थोड़ा सा भिन्‍न है लेकिन संविदाकर्मियों का विषय तो निश्चित रूप से गंभीर विषय है और खासतौर से जो नगरीय निकाय हैं, 15 साल, 17 साल में हजारों लोग रिटायर हो गए हैं. मेरा आपसे निवेदन है कि इसमें ऐसी नीति बनाई जाए कि उनकी सोशल सिक्‍योरिटी का ख्‍याल रखा जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय-- ठीक है.

          श्री दिनेश जैन (बोस)-- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने एक प्रश्‍न लगाया था कि जो भी कंपनी आउटसोर्स से भर्ती करती है उसके भुगतान में और आउटसोर्स में जो व्‍यक्ति काम कर रहा है उसमें काफी अंतर आता है. मान लिया जाए कि 18 हजार रुपया सरकार कंपनी को दे रही है लेकिन जो व्‍यक्ति काम कर रहा है उसको जो वेतन मिलता है वह केवल 13 या 14 हजार रुपए ही मिलती है. दो हजार रुपए पीएफ का कट जाता है और उसके अंदर 2 से 3 हजार रुपए तक का अंतर रहता है. मैं यह चाहता हूं कि सरकार इस पर जरूर ध्‍यान दे कि एक व्‍यक्ति पर कंपनी को इतनी अधिक कमाई नहीं होना चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय-- ठीक है.

 

 

थाना प्रभारी के विरूद्ध कार्यवाही

[गृह]

6. ( *क्र. 962 ) श्री अभय मिश्रा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या थाना चोरहटा विधानसभा क्षेत्र सेमरिया अन्तर्गत अपराध क्रमांक 893/22, दिनांक 16.12.2022 के तहत श्री अभय मिश्रा (विधायक सेमरिया), पिता श्री बृजकिशोर मिश्रा एवं श्री विभूति नयन मिश्रा, पिता श्री अभय मिश्रा के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था? प्रकरण पंजीबद्ध किये जाने वाले थाना प्रभारी का नाम क्या था? प्रकरण का विस्तृत विवरण देवें। (ख) क्या प्रश्‍नांश (क) अनुसार पंजीबद्ध अपराधिक प्रकरण पर जांच उपरान्त खात्मे की कार्यवाही की गई थी? खात्मा किये जाने वाले थाना प्रभारी का नाम क्या था? खात्में का विवरण देवें। (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) अनुसार उसी विधानसभा क्षेत्र के एक जनप्रतिनिधि एवं उसके परिवार के विरूद्ध विधानसभा क्षेत्र सेमरिया अन्तर्गत थाना चोरहटा में प्रकरण दर्ज करने वाला एवं खात्मा करने वाला थाना प्रभारी क्या एक ही व्यक्ति था, जिसका नाम श्री अवनीश पाण्डेय था? (घ) यदि प्रश्‍नांश (ग) अनुसार प्रकरण दर्जकर्ता एवं खात्मा लगाकर प्रकरण समाप्त करने वाला थाना प्रभारी एक ही व्यक्ति था तो एक सम्मानित जनप्रतिनिधि एवं उसके बच्चों के विरूद्ध खात्मा हो जाने से झूठा प्रकरण स्वमेव प्रमाणित होने पर उत्तरदायी थाना प्रभारी के विरूद्ध निलंबन की कार्यवाही बावत क्या निर्देश देंगे? अगर नहीं तो क्यों?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

          श्री अभय मिश्रा-- प्रश्‍न क्रमांक 962

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल-- अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर रखा है.

          श्री अभय मिश्रा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न (क) के उत्‍तर में माननीय मंत्री महोदय ने जो उत्‍तर दिया है उसमें बताया है कि मेरी ही विधान सभा क्षेत्र सिमरिया का थाना चोरहटा जहां से मैं विधायक हूं वहां पर एक मोटरसायकिल और स्‍कॉर्पियो में एक्‍सीडेंट होता है उसमें सड़क निर्माता कंपनी को मुजरिम बनाया जाता है. बाद में मालूम पड़ा कि मेरी नहीं है तो उसमें यह कल्‍पना आ गई जैसे कि विधान सभा के बाहर किसी का एक्‍सीडेंट हो जाए और किसी को कल्‍पना आ जाए कि उमंग जी का पैसा लगा है तो इसमें अभय मिश्रा उनके बेटे एडवोकेट विभूति नयन मिश्रा इन सबको मुजरिम बनाया गया था. मैंने इसमें यह प्रश्‍न पूछा है कि उस थाना प्रभारी का नाम बताएं जिसने मामला दर्ज किया है. इसमें मुंशी का नाम हीरामणी पटेल बताया गया है और थाना प्रभारी का नाम नहीं बताया गया. दूसरा यह कि क्‍या इसका खत्‍मा किया गया है और खात्‍मा करने वाला अधिकारी कौन था तो उत्‍तर (स) में बताया गया है कि खात्‍मा किया गया है जांच की गई तो निराधार पाया गया और खात्‍मा करने वाले अधिकारी का नाम अवनीश पाण्‍डेय था. फिर हमारा अगला (द) कि प्रकरण को पंजीबद्ध करने वाले अधिकारी एवं..

          अध्‍यक्ष महोदय-- अभय जी आप पुराने विधायक हैं प्रश्‍न भी पढ़ रहे हैं और उत्‍तर भी पढ़ रहे हैं. मंत्री जी से कोई पूरक प्रश्‍न करना है तो बताइये.

          श्री अभय मिश्रा--अध्‍यक्ष महोदय, बस यह अंतिम लाइन है इसके बाद पूरक प्रश्‍न ही पूछ रहा हूं. प्रकरण को पंजीबद्ध करने वाले अधिकारी एवं प्रकरण की विवेचना कर खात्‍मा लगाने वाले अधिकारी यदि एक ही व्‍यक्ति नहीं थे, इन्‍होंने उत्‍तर दिया है कि नहीं थे अत: थाना प्रभारी के विरुद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न ही नहीं उठता. मतलब यह कह रहे हैं कि अगर प्रकरण दर्ज करने वाला आदमी वही होता जिसने खात्‍मा भी किया तो मैं मानता कि उस आदमी ने गलत किया इन्‍होंने खात्‍मा में अवनीश पाण्‍डेय का नाम बताया है. पटल पर यह एफआईआर रखी है. आपके सामने उसमें भी अवनीश पाण्‍डेय लिखा है. मैंने यह प्रूव कर दिया कि जिसने मामला पंजीबद्ध किया वह भी उप निरीक्षक प्रभारी टीआई अवनीश पाण्‍डेय और जिसने खात्‍मा लगाया वह भी अवनीश पाण्‍डेय तो यह बताईये कि क्‍या हम लोग राजनीति करने, जनता की सेवा करने के पीछे अब क्‍या हम अपने बाल-बच्‍चों को बचा नहीं पायेंगे ? क्‍या हम इस स्‍तर तक नीचे उतर जायेंगे कि अब हक एक-दूसरे के परिवार को बीच में लायेंगे. ऐसे TI के विरूद्ध आप क्‍या कार्यवाही करेंगे, यह मुझे थोड़ा बता दीजिये, निलंबन की मैंने मांग की है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  बैठ जाईये. वैसे खात्‍मे के बाद बचा ही क्‍या है ?

          श्री अभय मिश्रा-  अध्‍यक्ष महोदय, यह एक प्रक्रिया है, आपको क्‍या लगता है क्‍या केवल मुकदमे वाली बात है, एक विधायक के सम्‍मान की बात है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  अभय जी, मंत्री जी को उत्‍तर देने दीजिये. सामान्‍य तौर पर हम सभी को ध्‍यान रखना चाहिए कि यदि इस प्रकार का प्रश्‍न भी है तो हम कोई और रास्‍ता इसके लिए अपना सकते हैं, सामान्‍य तौर पर अपने पुत्र के मामले में हम ही प्रश्‍न पूछें, यह ठीक स्थिति नहीं है.

          श्री अजय अर्जुन सिंह-  अध्‍यक्ष महोदय, तो क्‍या किसी दूसरे से प्रश्‍न करवाते.

          अध्‍यक्ष महोदय-  नहीं, कोई दूसरा रास्‍ता भी हम अख्तियार कर सकते हैं.

          श्री अजय अर्जुन सिंह-  अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रकरण में वे स्‍वयं भी शामिल थे, आप शायद समझ नहीं पाये. उनके स्‍वयं एवं उनके लड़के के नाम पर, दोनों के नाम पर आपराधिक प्रकरण पंजी‍बद्ध किया गया था.

          श्री अभय मिश्रा-  अध्‍यक्ष महोदय, दोनों का नाम है. मेरा बेटा लंदन में रहता है, कभी रीवा में रहा करता था, दो वर्षों से त्‍यौहार मनाने नहीं आया, इस डर से कि उसे मामले में फंसा दिया जायेगा. ये स्थिति है, विधायक होना पाप हो गया है. मतलब विधायक का चुनाव लड़ लेना और इस सदन में सच बोलना, मैं जानना चाहता हूं.

          श्री अजय अर्जुन सिंह- अध्‍यक्ष महोदय, यह pure and simple harassment है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  मंत्री जी, का उत्‍तर आ जाने दीजिये.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेलअध्‍यक्ष महोदय, मैं, सदन के वरिष्‍ठ सदस्‍य की भावना से पूर्णत: सहमत हूं, आपने स्‍वयं ने चिंता व्‍यक्‍त की है. निश्चित रूप से माननीय अध्‍यक्ष जी का यही भाव है कि यदि परिवार से जुड़ा विषय हो तो दूसरे रास्‍ते हो सकते हैं. निश्चित रूप से मैं, अभय जी की भावनाओं से पूर्णत: सहमत हूं लेकिन आपने जो बात कही, उससे भी पूर्णत: सहमत हूं. (माननीय मंत्री महोदय के सदन में भावुक होने पर)

          अध्‍यक्ष महोदय-  मंत्री जी, कृपया भावुक न हों. आप धैर्य से जवाब दीजिये.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेलअध्‍यक्ष महोदय, लेकिन अभय जी ने जो बात कही कि क्‍या दोनों अधिकारी एक थे, माननीय अभय जी दोनों अधिकारी एक नहीं थे,. रिपोर्ट दर्ज करने वाले श्री हीरामणि पटेल थे और विवेचक श्री राजेश तिवारी थे. दोनों अलग-अलग अधिकारी हैं, मुंशी नहीं थे, उप निरीक्षक स्‍तर के अधिकारी हैं, यह सच है कि थाना प्रभारी एक ही थे और आपकी भावनाओं को ध्‍यान में रखते हुए, मैं, इस बात से सहमत हूं कि एक उच्‍च स्‍तरीय जांच करवा ली जाये और उच्‍च स्‍तरीय जांच करवाने के लिए भोपाल से उच्‍च अधिकारी भेज दिये जायेंगे और जांच में दोषी पाये जाने पर निश्चित रूप से सख्‍त कार्यवाही करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय-  माननीय सदस्‍य.

          श्री अभय मिश्रा-  अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न का क्रमांक (ख), यह प्रश्‍न ऐसा है पूरा प्रदेश इस प्रश्‍न को देखेगा, देख रहा है, इससे हमारी असली स्थिति दिखती है, हम कहां खड़े हैं, किसी दूसरे को न्‍याय दिला पायेंगे कि अपने लिए ही, हमारी क्‍या औकात है, क्‍या स्थिति है, यह परिलक्षित होगा. आपने उत्‍तर दिया है थाना प्रभारी श्री अवनीश कुमार पाण्‍डेय. खात्‍मा में साईन अवनीश कुमार पाण्‍डेय का है और यह एफ.आई.आर. की कॉपी है, जिसे मैंने सदन के पटल पर रखा है, उसमें भी अवनीश कुमार पाण्‍डेय का नाम है. (माननीय सदस्‍य द्वारा सदन में कागज दिखाते हुए.)

          मुंशी ही विवेचना करता है लेकिन पूरी जिम्‍मेदारी TI की होती है, इतना तो आजकल 12वीं पास बच्‍चा भी जानता है. जो हस्‍ताक्षर करता है उसकी जिम्‍मेदारी है. आपके यहां कोई गड़बड़ हो जाये तो आप बाबू पर डाल देंगे क्‍या, जो अधिकारी हस्‍ताक्षर करेगा, वह होगा. देखिये दोनों में TI एक है और आप स्‍वयं सोचिये वहां से मैं वर्ष 2008 में विधायक था, वर्ष 2013 में मेरी पत्‍नी श्रीमती नीलम मिश्रा विधायक थी, अभी फिर मैं वहां से विधायक हूं, वह मेरा गांव है, वहां मैं क्‍या मुंह लेकर जाऊं. आपको यह नहीं लगता कि यह हमारा विधायक है, विरोधी पक्ष का हो, सत्‍तापक्ष का हो, कल तक तो हम आपके ही साथ थे, इतना भी अत्‍याचार मत करवाईये और फिर इसमें कोई राजनैतिक स्थिति नहीं थी. TI ने अगर वहां यह स्थिति की है, यह वही TI है जो पिछले मर्डर में आपने कहा था कि चालान पेश हो गया, चालान पेश हो गया वही खोमचा वाले, दही वाले चले गए, साम सृष्टि में बात करी थी, वे सब बरी हो गए. उस दिन अगर कार्यवाही हो गई होती तो कुछ होता. मैं, आपसे हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं कि मुझे आज न्‍याय चाहिए, नहीं तो मैं यह नहीं पहनूंगा, यहीं से. (माननीय सदस्‍य द्वारा अपने कुर्ते को हाथ लगाते हुए)

          अध्‍यक्ष महोदय, आज मैं वह करूंगा जो शायद शोभा नहीं देगा. मैं आपसे हाथ जोड़कर, आपके चरणों में गिर रहा हूं, न्‍याय दीजिये विधायकों का मान रख लीजिये, क्‍यों लज्जित कर रहें हैं ? हम लोगों को यहां आने पर लज्‍जा आयेगी. सबकी यही स्थिति है. आपके दल वाला बोल नहीं पा रहा है, मैं बोल पा रहा हूँ. आप लोगों ने विधायकों को कहां से कहां पहुँचा दिया है ?

            अध्‍यक्ष महोदय - अभय जी, अब मंत्री जी को जवाब देने दीजिये.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके संरक्षण में और आदरणीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश में सभी लोग सुरक्षित हैं और किसी भी तरह का अन्‍याय हम होने नहीं देंगे. (मेजों की थपथपाहट) लेकिन मेरा एक आग्रह है कि पुलिस का मनोबल बढ़ा रहे, यह भी अत्‍यन्‍त आवश्‍यक है क्‍योंकि उन्‍हें किन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है ? यह हम सब लोग जानते हैं. कई बार उनको अपने प्राणों का भी उत्‍सर्ग करना पड़ता है. अभी हाल ही में घटना हुई है, तो निश्चित रूप से मेरा ऐसा मत है. माननीय (श्री अजय अर्जुन सिंह को देखकर) आप बैठिये.    

          श्री अजय अर्जुन सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मनोबल यही बढ़ रहा है, अभी जैसे मऊगंज में घटना हुई. यदि आप पहले कार्यवाही कर लेते तो मऊगंज में उस तरह की घटना नहीं होती. एक विधायक के साथ ऐसी बात हो रही है और आप मनोबल बढ़ा रहे हैं.

          श्री अभय मिश्रा - अध्‍यक्ष महोदय, मेरा बच्‍चा सुसाइड कर ले. मेरा बच्‍चा फर्जी मुकदमे में सुसाइड कर ले. वह आपको मंजूर है.

          श्री महेश परमार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक जब भ्रष्‍टाचार या जनहित की लड़ाई लड़ता है, तो उस पर असत्‍य प्रकरण दर्ज हो जाते हैं.

          श्री अभय मिश्रा - आपको लज्‍जा आनी चाहिए. मेरे बच्‍चा फर्जी मुकदमे में सुसाइड कर ले.

          अध्‍यक्ष महोदय - अभय जी, महेश जी, आप लोग बैठिये.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं उसी उत्‍तर पर आ रहा हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी की बात पूरी नहीं हुई थी, उनकी बात पूरी हो जाने दें.   

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि सम्‍माननीय सदस्‍य को ऐसा लगता है तो इनको हम जिले से हटा देते हैं और जिले से हटाकर जांच करवा लेते हैं.

          श्री अभय मिश्रा - यह कौन सी बात हुई ? निलंबन कब होगा ?

          श्री अजय अर्जुन सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, आप ऐसे अधिकारी की आज ही हाउस में सस्‍पेंड की घोषणा कीजिये, तब तो पता चले कि यह डॉ. मोहन यादव की सरकार है.

          श्री अभय मिश्रा - आप मेरिट पर उत्‍तर दीजिये. आपके पास कोई रास्‍ता नहीं है.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रकार से घटनाएं हो रही हैं, श्री नारायण सिंह पट्टा के साथ हुई, कई ऐसे असत्‍य प्रकरण कई लोगों पर लगाये जा रहे हैं, इन पर प्रकरण हुआ, फिर वही अधिकारी उस पर खात्‍मा बना रहा है और सब चीजें प्रमाण हैं और मंत्री जी जवाब दे रहे हैं कि हमको पुलिस का मनोबल बढ़ाना है. पुलिस वाले अगर गलत कार्य करें, तो क्‍या उसका मनोबल बढ़ाना चाहिए ? जो अच्‍छा करें, उसको इनाम मिलना चाहिए. आप इस पर व्‍यवस्‍था दें, आप संरक्षण दें कि यह पूरे विधायकों की बात है, चाहे सत्‍ता पक्ष के हों, चाहे विपक्ष के विधायक हों. इस पर तत्‍काल निलंबन होना चाहिए. इस प्रकार से अगर विधायक के साथ होगा, तो कैसे काम चलेगा ?

          श्री अभय मिश्रा  - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा तो एक बार चल भी जाता, लेकिन मेरे बच्‍चे को क्‍यों फंसवा दिया ?

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभय मिश्रा जी के पुत्र का सिर्फ इतना दोष है कि उसने एक राजनीति करने वाले परिवार में जन्‍म लिया, उसके ऊपर एफआईआर दर्ज होती है, बकायदा आईपीसी में प्रावधान था क्‍योंकि अब वह बीएनएस में तब्‍दील हो गई है. आप धारा चैक करवा लीजियेगा. सेक्‍शन 182, सेक्‍शन 211 में प्रावधान है कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ लीगल प्रोसिडिंग्‍स इनिशिएट की जायेगी. क्रिमिनल डिफमेशन का भी केस चलेगा, मैं आपसे आग्रह करता हूँ कि ऐसे पुलिसकर्मियों को बर्खास्‍त करना चाहिए और टीआई, बिना एसपी के अनुमोदन के विधायक या उनके परिवार पर एफआईआर नहीं कर सकता है. डीई इनिशिएट करनी चाहिए, उस पर जो भी एसपी था, उसके खिलाफ भी. इसको बर्खास्‍त करना चाहिए. इसके खिलाफ लीगल प्रोसिडिंग्‍स चलनी चाहिए क्‍योंकि उनके पुत्र और पूरे परिवार पर इस प्रकार से पुलिस ने आक्रमण किया है. मैं माननीय मंत्री जी आपका और माननीय अध्‍यक्ष जी, आपका भी संरक्षण चाहूँगा कि ऐसे दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्‍त कार्यवाही होनी चाहिए. मैं इस पर आपसे हाथ जोड़कर निवेदन कर रहा हूँ. आप हाउस में ऐसी व्‍यवस्‍था दें. आज हम हैं, कल कोई और होगा, लेकिन ये पुलिस वाले बीच में मजा लेंगे, इनके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए. 

          श्री सुरेन्‍द्र सिंह हनी बघेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूर्व में इनके बेटे के साथ भी पुलिस द्वारा भोपाल में इस तरह की घटना हुई थी.  यह बहुत बड़ी बात है. अगर आज नहीं होगा, तो यह आदत में आ जायेगा.     

          अध्‍यक्ष महोदय - आप कृपया बैठिये.

          श्री भंवर सिंह शेखावत - माननीय अध्‍यक्ष जी, यह बहुत गंभीर विषय है, जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों की अगर यह दुर्गति होगी. आज माननीय मुख्‍यमंत्री जी सदन में उपस्थित नहीं हैं. जनता के साथ हो क्‍या रहा है. आपकी पुलिस अलग पिट रही है, आपका एक सिपाही पुलिसवाला मर गया तो आपने उसको शहीद बता दिया और यह जो जिन्‍दे शहीद किए जा रहे हैं, इनका क्‍या  ? सारी पुलिस अपराध में लग गई है.

          अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍दौर में 8-15 दिन पहले 12 एसआई  सस्‍पेंड हुए हैं. वे थाने में बैठक सेटिंग का काम करने लग गए, पुलिस अपराध में लग गई, पुलिस सुरक्षा नहीं कर रही है. आज भी अखबार में छपा है कि आपकी पुलिस कल फिर पिटी है. यह पुलिस को पिटने का तमगा लगा है, यह सिलसिला मध्‍यप्रदेश में मनोबल गिराने वाला है. आज दमोह में पुलिस पिटी है. यहां आदरणीय श्री जयंत मलैया जी बैठे हुए हैं और पुलिस को पीटने का मूल कारण, मैंने उस दिन भी आपसे निवेदन किया था कि पुलिस का व्‍यवहार जनता के प्रति दुर्व्‍यवहार में परिवर्तित हो गया है.

और इसके कारण आज विधायकों को रोना पड़ रहा है. आपको भी, माननीय मंत्री जी, मैं आपके साथ भी संवेदना रखता हूँ. आपको जवाब जबरदस्‍ती देना पड़ा रहा है. गृह विभाग तो माननीय मुख्‍यमंत्री जी का है, मुख्‍यमंत्री जी एक भी दिन गृह विभाग का जवाब देने नहीं आए. जवाब तो उन्‍होंने देना चाहिए. भाई, गृह विभाग तो गृह विभाग है ना. एक राज्‍यमंत्री के जिम्‍मे कर दिया, उनके आंसू निकल रहे हैं. माननीय मंत्री जी, मैं आपकी संवेदनाओं के साथ हूँ. आप पुलिस को बिल्‍कुल मत बख्‍शिए. ये अपराध में शामिल हो गई है और मध्‍यप्रदेश की जनता त्रस्‍त है.

          श्री नरेन्‍द्र सिंह पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चूँकि जो एफआईआर की गई थी, वह सूचनाकर्ता जो था, फरियादी जो था, उसने असत्‍य रिपोर्ट लिखाई थी तो निश्‍चित रूप से उप नेता प्रतिपक्ष ने जो बात कही है कि उस पर लीगल कार्यवाही होना चाहिए तो निश्‍चित रूप से असत्‍य रिपोर्टकर्ता के खिलाफ लीगल कार्यवाही हम करेंगे. शेष इस सदन के सभी सदस्‍यों की भावनाओं से सहमत होते हुए उपरोक्‍त थाना प्रभारी को निलंबित करेंगे और जांच कराएंगे.

          श्री अभय मिश्रा -- माननीय मंत्री जी को मेरी ओर से धन्‍यवाद. आपने हम लोगों की प्रतिष्‍ठा की लाज रखी. इसके लिए ...

          अध्‍यक्ष महोदय --  अभय जी, अब तो कृपया बैठ जाएं.

          एक माननीय सदस्‍य -- वे धन्‍यवाद दे रहे हैं.

          पुलिस आवासों का निर्माण

           [गृह]

7. ( *क्र. 1136 ) श्री सोहनलाल बाल्‍मीक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या परासिया विधानसभा क्षेत्र में 4 पुलिस थाने (परासिया, चांदामेटा, शिवपुरी व उमरेठ) स्थित हैं, उपरोक्त चारों पुलिस थानों में लगभग 100 से अधिक पुलिस अधिकारी/कर्मचारी पदस्थ हैं, परन्तु इनमें से किसी भी अधिकारी/कर्मचारी के पास शासकीय आवास नहीं है? आवास नहीं होने के कारण पुलिस अधिकारी/कर्मचारियों को पुलिस थाने से अधिक दूरी पर किराये का मकान लेकर निवास करना पड़ता है, जिससे कई बार कानून व्यवस्था प्रभावित होती है, चूंकी चांदामेटा व परासिया थाना प्रांगण में पुलिस अधिकारी/कर्मचारी के लिये आवास निर्माण हेतु पर्याप्त शासकीय भूमि उपलब्ध है, जिसमें 50 से भी अधिक आवासों का निर्माण कार्य कराया जा सकता है, आवास निर्माण होने से पुलिस विभाग में अधिकारी/कर्मचारी को बहुत अधिक सुविधा व राहत प्राप्त होगी। आवास निर्माण कार्य हेतु विभाग द्वारा कार्यवाही की जायेगी? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार उपरोक्त संबंध में कब तक कार्यवाही करते हुए विभिन्न औपचारिकताओं को पूर्ण कर आवास निर्माण कार्य की स्वीकृति प्रदान कर दी जायेगी? (ग) पुलिस अधिकारी/कर्मचारी की सुविधा हेतु आवास निर्माण कार्य की स्वीकृति प्रदान किये जाने के संबंध में प्रश्‍नकर्ता द्वारा मान. मुख्यमंत्री जी एवं पुलिस महानिदेशक महोदय को पत्र क्र.वि.स./परासिया/127/2024/777, दिनांक 07.08.2024 तथा अनुस्मरण पत्र 01 पत्र क्र.वि.स./परासिया/127/2025/64, दिनांक 10.02.2025 प्रेषित किये गये थे, इन पत्रों पर विभाग द्वारा अभी तक क्या कार्यवाही की गई है?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) :                                             (क) जिला छिंदवाड़ा की परासिया विधानसभा अंतर्गत थाना परासिया-18, थाना चांदामेटा-8, थाना उमरेठ-14 शासकीय आवास उपलब्ध हैं तथा रावनवाड़ा (शिवपुरी) में आवास उपलब्ध नहीं है। मुख्यमंत्री पुलिस आवास योजना अंतर्गत जिला छिंदवाड़ा में कुल 458 आवास स्वीकृत हैं, जिसके विरूद्ध 356 आवासों का निर्माण कार्य किया जा चुका है। शेष आवासों का निर्माण आगामी चरणों में किया जावेगा। (ख) उत्तरांश (क) अनुसार मुख्यमंत्री पुलिस आवास योजना अंतर्गत जिला छिंदवाड़ा में स्वीकृत आवासों में से शेष आवासों का निर्माण आगामी चरणों में चरणबद्ध किया जावेगा। (ग) प्रश्‍नकर्ता माननीय विधायक के पत्र क्रमांक वि.स./परासिया/127/2024/777, दिनांक 07.08.2024 के पालन में की गई कार्यवाही से प्रश्‍नकर्ता माननीय विधायक को अवगत कराया जा रहा है एवं पत्र क्रमांक वि.स./परासिया/127/2025/64, दिनांक 10.02.2025 वर्तमान समय तक विभाग में आना नहीं पाया गया है।

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न क्रमांक 1136.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर रखता हूँ.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैंने प्रश्‍न लगाया था कि मेरी विधान सभा में लगभग 4 थाने हैं और चारों थानों के अंदर में लगभग 103 का स्‍टॉफ है. उनके आवास नहीं हैं और आवास होना आवश्‍यक है. मगर मुझे जो जवाब माननीय मंत्री जी से प्राप्‍त हुआ है, उसमें मुझे छिंदवाड़ा जिले के 458 आवासों के बारे में बताया गया है. मेरा मूल प्रश्‍न यही था कि क्‍या परासिया में पुलिस आवासों का निर्माण किया जाएगा ?

            श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं सम्‍माननीय सदस्‍य आदरणीय सोहनलाल बाल्‍मीक जी का विभाग की ओर से और समस्‍त पुलिस दल की ओर से भी आभार व्‍यक्‍त करता हूँ कि उन्‍होंने उनके आवास की चिंता की है. छिंदवाड़ा में भी और पूरे मध्‍यप्रदेश में भी मुख्‍यमंत्री आवास योजना के नाम से 25 हजार से अधिक के आवास निर्माण का लक्ष्‍य तय किया गया है. जिसमें से 12 हजार आवास बन चुके हैं, इस बजट में अभी 400 करोड़ रुपये का प्रावधान आवास के लिए किया गया है. माननीय सदस्‍य जो चाहते हैं, निश्‍चित रूप से वहां पर भी प्रक्रिया में आकर, जब उसका क्रम आएगा तो वहां पर भी निर्माण हो जाएगा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- दूसरा पूरक प्रश्‍न पूछें.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरा निवेदन है कि आपने बताया कि बजट का प्रावधान भी रखा है. मेरा तो मूल प्रश्‍न यही है कि आने वाले समय में पुलिस विभाग को कितने आवासों की स्‍वीकृति मिल जाएगी और कब तक निर्माण हो जाएगा, यही मेरा मंत्री जी से निवेदन है.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैंने पूर्व में भी कहा कि अभी 12 हजार आवास बनने हैं, क्रम उनका तय है, जब भी क्रम आएगा, माननीय सदस्‍य जहां चाहते हैं तो वहां निश्‍चित रूप से निर्माण हो जाएगा.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे भी यही आश्‍वासन चाहिए था कि जब 12 हजार आवास का निर्माण हो तो मेरे परासिया विधान सभा में पुलिस के आवासों की व्‍यवस्‍था बना दें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, कुछ कहना चाहेंगे.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, निश्‍चित रूप से जहां की माननीय सदस्‍य ने चिंता की है, वहां पर कोशिश करेंगे कि प्राथमिकता मिल जाए.

बजट आवंटन की जानकारी

[कुटीर एवं ग्रामोद्योग]

8. ( *क्र. 2630 ) श्री संजय उइके : क्या राज्‍य मंत्री, कुटीर एवं ग्रामोद्योग महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विभाग को सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों की योजनाओं अन्तर्गत अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने हेतु पृथक प्रावधान योजना (सब स्की‍म) के रूप में योजनावार बजट आवंटन प्राप्त होता है? (ख) यदि हाँ, तो वित्तीय वर्ष 2022-23 से प्रश्‍न दिनांक तक किस-किस योजना में कितनी-कितनी राशि कब-कब आवंटित की गई?

राज्‍य मंत्री, कुटीर एवं ग्रामोद्योग ( श्री दिलीप जायसवाल ) : (क) जी हाँ। (ख) वित्‍तीय वर्ष 2022-23 से प्रश्‍न दिनांक तक योजनावार आवंटित राशि के विवरण की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - "तीन"

          श्री संजय उइके -- अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न क्रमांक 2630.

          श्री दिलीप जायसवाल -- अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर रखा है.

          श्री संजय उइके -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जो प्रश्‍न था, वह आदिवासी उपयोजना क्षेत्र में उनके सामाजिक और आर्थिक योजनाओं के लिए अनुसूचित जनजाति को प्रत्‍यक्ष लाभ पहुँचाने के लिए जो बजट आवंटन होता है, उस पर मेरा प्रश्‍न है कि क्‍या विभाग के पास इस राशि के आवंटन के संबंध में कोई आदेश, निर्देश या दिशानिर्देश हैं ?

            श्री दिलीप जायसवाल - माननीय अध्यक्ष महोदय,हमको जो भी राशि प्राप्त होता है अनुसूचित जाति,जनजाति उसमें हमारे पास तीन घटक अलग-अलग हैं. रेशम भी है.हथकरघा भी है और खादी भी है खादी में हम ट्रेनिंग कराते हैं और शतप्रतिशत हुआ है और हथकरघा में भी काम लगभग पूरा हुआ है.रेशम में चूंकि जैसी डिमांड आती है उसमें खेती से संबद्ध होता है रेशम उत्पादन होता है जहां से जैसी डिमांड आती है वैसा उनको उपलब्ध कराते हैं अगर माननीय सदस्य चाहेंगे कि यहां पर कराएं तो पैसा पर्याप्त रहता है हम उपलब्ध कराएंगे.काम देंगे.

          श्री संजय उइके - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जो राशि बजट में आवंटन होती है यह प्रत्यक्ष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में और आदिवासी भाईयों को इस योजना का लाभ पहुंचाने के लिये होता है मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि बालाघाट जिले में बैहर,बिरसा और परसवाड़ा जो आदिवासी उपयोजना क्षेत्र है यहां के कितने आदिवासी हितग्राहियों को इससे लाभान्वित किया गया है.

          श्री दिलीप जायसवाल - माननीय अध्यक्ष महोदय,जो बालाघाट जिले की इन्होंने बात कही उसमें अनुसूचित जनजाति को रेशम संचालनालय की योजना के अनुसार आवंटन था 114.16 लाख व्यय हुआ है 54.35 लाख और इसमें 215 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है. इसी प्रकार से हथकरघा में 51.35 लाख मिला और  व्यय हुआ 29.35 लाख और 21 हितग्राहियों को लाभ पहुंचाया गया. इसी प्रकार से खादी में 86.29 लाख मिला और शतप्रतिशत इसमें लाभ दिया गया. अनुसूचित जाति में रेशम संचालनालय की योजना में 45.89 लाख मिला,30.88 लाख खर्च हुआ,85 रेशम कृषक हितग्राही अनुसूचित जाति के लाभान्वित हुए हैं. इसी प्रकार से हथकरघा संचालनालय से शतप्रतिशत लाभ हुआ है और खादी में 154.86 मिला. इसमें ट्रेनिंग का काम कराते हैं उसमें 448 हितग्राहियों को लाभ दिया गया अगर आप चाहेंगे तो इसकी सूची भी आपको उपलब्ध करा देंगे.

          श्री संजय उइके - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाह रहा हूं कि इसमें कितने आदिवासी हितग्राही इन तीनों योजनाओं में लाभान्वित हुए हैं अगर उसकी सूची मुझे मिल जाए.

          अध्यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी ने आपको सूची उपलब्ध कराने के लिये कह दिया है तो मंत्री जी पूरी सूची उपलब्ध करा दें.

          श्री दिलीप जायसवाल - माननीय अध्यक्ष महोदय,जिले की भी सूची उपलब्ध करा देंगे और माननीय सदस्य पूरे प्रदेश का कहेंगे तो वह भी उनको दे देंगे.

आंगनवाड़ी भवनों की स्वीकृति

[महिला एवं बाल विकास]

9. ( *क्र. 2351 ) श्री नीरज सिंह ठाकुर : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) बरगी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कुल कितने आंगनवाड़ी केन्द्रों को खोला गया है? इन केन्द्रों में कुल कितने बच्चे हैं? केन्द्रवार बच्चों की संख्या बतायें। (ख) प्रश्‍नांश '''' में संचालित कितनी आंगनवाड़ी शासकीय भवनों में संचालित हो रही हैं? किराये पर संचालित आंगनवाड़ी केन्द्रों में कितना किराया मासिक दिया जा रहा है? शासकीय एवं अशासकीय भवनों की जानकारी अलग-अलग पता सहित बतावें। (ग) क्या प्रश्‍नकर्ता द्वारा क्षेत्र में आंगनवाड़ी भवनों की स्वीकृति हेतु संबंधित विभाग को लिखा गया था? यदि हाँ, तो कब-कब? क्या पत्र पर कार्यवाही करते हुये आंगनवाड़ी केन्द्र भवनों के निर्माण की स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है? यदि हाँ, तो कितने भवनों की? भवन कहाँ-कहाँ पर कितनी-कितनी राशि से निर्मित होंगे?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( सुश्री निर्मला भूरिया ) : (क) बरगी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कुल 541 आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित हैं। इन केन्द्रों में कुल 27507 बच्चें हैं। केन्द्रवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1 अनुसार है। (ख) शासकीय एवं किराये पर संचालित आंगनवाड़ी भवनों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। किराये पर संचालित आंगनवाड़ी केन्द्रों के भवनों के किराये से संबंधित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट-के प्रपत्र 3 अनुसार है। शासकीय एवं अशासकीय भवनों के नाम एवं पते सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (ग) प्रश्‍नकर्ता द्वारा क्षेत्र में आंगनवाड़ी भवनों की स्वीकृति हेतु विभाग को लिखे गये पत्र एवं उन पर की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में बरगी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत स्वीकृत आंगनवाड़ी भवन एवं राशि की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है।

          श्री नीरज सिंह ठाकुर - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 2351 है.

          सुश्री निर्मला भूरिया - माननीय अध्यक्ष महोदय,उत्तर पटल पर रखा गया है.

          श्री नीरज सिंह ठाकुर - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न मेरे विधान सभा क्षेत्र बरगी की भवन विहीन आंगनवाड़ियों के संबंध में है. जो जानकारी परिशिष्ट एक से छह तक दी गयी है उसके हिसाब से लगभग 256 ऐसी आंगनवाड़ी हैं जो भवन विहीन हैं. 2024-25 में 12 आंगनवाड़ी मेरी विधान सभा को प्राप्त हुई थीं. उसके लिये मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं. मेरा प्रश्न है कि आगामी चार वर्षों में इन 256 आंगनवाड़ी भवनों की स्वीकृति प्रदान की जायेगी.

          सुश्री निर्मला भूरिया - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से कहना चाहूंगी कि माननीय सदस्य ने जो चिंता व्यक्त की है आंगनवाड़ी भवनों की तो अभी हमने अपने उत्तर में भी दिया है कि बरगी विधान सभा में 12 भवन तो हमने स्वीकृत कर दिये हैं और आने वाले समय में हमें जैसे-जैसे बजट मिलेगा वैसे वैसे हम और आंगनवाड़ी भवन बनाएंगे. इस वर्ष हमने 350 करोड़ का प्रावधान रखा है और इससे आंगनवाड़ी भवन और जो अपूर्ण भवन हैं उनके लिये भी प्रावधान किया है. तो निश्चित तौर पर हम आने वाले समय में और  आंगनवाड़ी भवन बनाएंगे.

          श्री नीरज सिंह ठाकुर - माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस 350 करोड़ का प्रावधान योजना क्रमांक 5360 जिसके तहत् आंगनवाड़ी केंद्रो  में जो भवन विहीन हैं वहां भवन निर्माण करना है तो क्या मंत्री महोदय आगामी वर्ष 2025-26 में कम से कम 50 आंगनवाड़ी भवन स्वीकृत करेंगी.

          सुश्री निर्मला भूरिया - माननीय अध्यक्ष महोदय, आंकड़ा बताना तो संभव नहीं है लेकिन निश्चित तौर पर जितना भी संभव होग हम उनको भवन उपलब्ध करवा देंगे.

सडक निर्माण में लापरवाही से सड़क दुर्घटना

[गृह]

10. ( *क्र. 753 ) श्री वीरेन्द्र सिंह लोधी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर से कबरई फोरलेन निर्माण प्रोजेक्ट के प्रथम-चरण अंतर्गत सागर-मोहारी के मध्य निर्माण प्रारंभ होने से अब तक हुई दुर्घटनाओं का स्थान, दिनांक एवं कुल-संख्या का ब्‍यौरा प्रदान किया जाये? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार दुर्घटना में अब तक कितने लोगों की असमय मौत हुई है? (ग) उक्त प्रोजेक्ट में द्वितीय चरण के तहत निर्माण कार्य प्रारंभ होने से अब तक हुई सड़क दुर्घटनाओं के स्थान, दिनांक एवं कुल संख्या का ब्यौरा प्रदान करें? (घ) प्रश्‍नांश (ग) अनुसार दुर्घटनाओं में अब तक कितने लोगो की असमय मौत हुई है? (ड.) क्या प्रोजेक्ट के दोनों चरणों में कार्यरत समस्त श्रमिकों/कर्मियों के नाम-पते की सूची प्रदान की जायेगी? (च) क्या प्रोजेक्ट के प्रारंभ से प्रश्‍न-दिनांक तक घायल एवं मृत श्रमिकों की संख्या, नाम, संपर्क-नम्बर, घटना स्थल एवं कंपनी द्वारा प्रदत्त सहायता राशि का ब्‍यौरा प्राप्त हो पायेगा? (छ) क्या जीत कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा निर्माण के दौरान यातायात बहाल रखने के उपायों एवं सुरक्षा-मानकों के पालन में लापरवाही बरतना सड़क-दुर्घटनायें अधिक होने का प्रमुख कारण है? (ज) क्या जीत कंस्ट्रक्शन द्वारा निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों में कमी एवं डायवर्सन आदि के मानकों एवं निर्माण-कार्य की जांच कर लापरवाही के दोषियों पर कार्यवाही की जावेगी? (झ) क्या उक्त प्रोजेक्ट अंतर्गत निर्माणाधीन एरिया में दुर्घटनाओं पर नियंत्रण हेतु अतिशीघ्र सुरक्षामानकों का पालन करवाकर प्रतिवेदन प्रश्‍नकर्ता को दिया जायेगा?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) दुर्घटना में कुल 97 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (घ) दुर्घटना में कुल 06 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है। (ड.) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (च) प्रोजेक्ट के प्रारंभ से प्रश्‍न दिनांक तक प्रोजेक्ट निर्माण स्थल पर कोई भी श्रमिक घायल एवं मृत नहीं हुआ है। जानकारी निरंक है। (छ) निर्माण स्थल पर सभी कार्य सुरक्षा मानकों के अनुसार किये जा रहे हैं। (ज) निर्माण कार्य सभी सुरक्षा मानकों के अनुसार किये जा रहे हैं। यदि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों में कमी एवं डायवर्सन आदि में कमी पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी। (झ) भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण इकाई छतरपुर के निर्माण कार्य सभी सुरक्षा मानकों के अनुसार किये जा रहे हैं। यदि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों में कमी एवं डायवर्सन आदि में कमी पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।

            श्री वीरेन्‍द्र सिंह लोधी--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 753 है.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल--  माननीय अध्‍यक्ष जी, उत्‍तर पटल पर रखा हुआ है.

          श्री वीरेन्‍द्र सिंह लोधी--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, आपके माध्‍यम से मेरा माननीय मंत्री जी से यह आग्रह है कि मेरी विधान सभा में सागर से कबरई फोरलेन का काम चल रहा है उसके निर्माण कार्य में सुरक्षा एवं मानकों में लापरवाही बरतने से दुर्घटनायें अधिक हो रही हैं. प्रश्‍न के माध्‍यम से प्राप्‍त जानकारी अनुसार दुर्घटना में अब तक 103 लोगों की मौत हुई है. अत: सुरक्षा मानकों का सख्‍ती से पालन करवाया जाये ताकि निर्माण के कारण हो रही दुर्घटनाओं पर नियंत्रण हो सके.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सम्‍मानीय सदस्‍य की भावनाओं से सहमत हूं और उनका अभिनंदन भी करता हूं कि उन्‍होंने जनहित का प्रश्‍न उठाया है. निश्चित रूप से कंस्‍ट्रक्‍शन कंपनी को भी और विभाग को भी सख्‍त आदेश दे दिये जायेंगे कि अगर सुरक्षा मानकों में कहीं भी कोई कमी है तो उसकी पूर्ति कर ली जाये और यह भी निर्देश दे देंगे कि माननीय विधायक जी को भी वह दिखा लें.

          श्री वीरेन्‍द्र सिंह लोधी--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मजदूरों के साथ घटित होने वाली दुर्घटनायें प्रश्‍न के उत्‍तर में नहीं बताई गईं जबकि एक मजदूर का पोकलेन मशीन से पैर कट गया था और एक घटना में 4 मजदूरों की निर्मम मृत्‍यु हो गई थी जो एक ही गांव अगरा गांव के थे और यादव समाज के थे. मैं चाहता हूं कि उन मजदूरों के बारे में भी कुछ प्रावधान हो उनको बीमा और उचित मुआवजा दिलाया जाना सुनिश्चित हो.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल--  माननीय अध्‍यक्ष जी, प्राप्‍त जानकारी के अनुसार ऐसी कोई रिपोर्ट नहीं की गई है, लेकिन माननीय विधायक जी जो सूचना दे रहे हैं उसको गंभीरता से लेते हुये जांच करा लेते हैं और यदि कोई दोषी पाये जाते हैं तो उनके खिलाफ कार्यवाही करेंगे और जो श्रमिक हैं उनको उचित मुआवजा मिल जाये इसकी चिंता करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न संख्‍या 11, श्री अमर यादव जी. एक मिनट प्रदीप लारिया जी कुछ कह रहे हैं.

          इंजीनियर प्रदीप लारिया--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद. मैंने दिनांक 31.07.2024 को एक पत्र लिखा था रोड के संदर्भ में जो गुणवत्‍ता को लेकर भी था और जो एक्‍सीडेंट हुये थे जो ठेकेदार की लापरवाही के कारण हुये थे, उस समय बरसात का समय था तो अमानक मुरम डाली गई थी और जो पुलिया थी वह भी बैठ गई थी तो उसके कारण दुर्घटना बहुत हुई. मेरा यह कहना था कि इसके लिये कोई कमेटी जांच की आई, नहीं आई इसके बारे में माननीय मंत्री जी बतायेंगे और मेरा निवेदन है कि उक्‍त सड़क जो बन रही हैं इसमें बहेरिया से लेकर हर्रापुर तक मेरी विधान सभा है, इसमें पुलिया बैठ गई है, पानी का भराव हो रहा है तो मेरा आपसे निवेदन है कि इसकी जांच हो जाये और गुणवत्‍ता पर जो सवाल उठे हैं उनका समाधान हो जाये. मैंने पत्र लिखा था कि पुलिया दोबारा बनना चाहिये क्‍योंकि आने वाले समय में वह बैठ जायेंगी तो उसके बारे में भी कुछ निर्णय हो जाये और मेरा निवेदन है कि ठेकेदार की लापरवाही के कारण जो दुर्घटनायें हुई हैं, सां‍केतिक बोर्ड नहीं लगाये गये, डायवर्सन का ठीक से नहीं हुआ उसके कारण जो दुर्घटना हुई है इसमें 107 या जो भी दुर्घटनायें हुई हैं उसमें 10-15 दुर्घटनायें मेरी विधान सभा में हुई हैं तो उसके बारे में कोई न कोई जांच होकर ऐसे ठेकेदारों के खिलाफ कार्यवाही होना चाहिये.

          अध्‍यक्ष महोदय--  मंत्री जी कुछ कहना चाहेंगे.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष जी, सम्‍मानीय सदस्‍य की भावनाओं को देखते हुये हम संबंधित विभाग को सूचित कर देंगे की उनका चिंता से समाधान किया जाये.

जिला जेल के नवीन भवन का निर्माण

[जेल]

11. ( *क्र. 2344 ) श्री अमर सिंह यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजगढ़ जिले की विधानसभा राजगढ़ के जिला जेल के नाम वर्तमान में कुल कितनी भूमि आवंटित है और उस पर जिला जेल के भवन का निर्माण किस वर्ष तथा कितने क्षेत्र में किया गया था? (ख) क्‍या राजगढ़ जिले की विधानसभा राजगढ़ के जिला जेल का भवन काफी पुराना होकर काफी छोटा है, जिससे कैदियों को क्षमता से अधिक रखे जाने से उन्‍हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है? (ग) जिला जेल में कितने कैदियों को रखे जाने की क्षमता है तथा प्रश्‍न दिनांक को कितने कैदी जिला जेल में रखे गये हैं? (घ) क्‍या नवीन जिला जेल के नवीन भवन हेतु शासन द्वारा भूमि आवंटित की गई है? यदि हाँ, तो कहां पर और कितनी? (ड.) क्‍या नवीन जिला जेल के नवीन भवन का निर्माण किया जावेगा? यदि हाँ, तो समयावधि बतावें और यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) : (क) 0.49 हेक्टेयर। वर्ष 1905 में 2325.85 वर्गमीटर में। (ख) जी हाँ। (ग) जेल की क्षमता 239 कैदियों की है, जबकि दिनांक 27.02.2025 को कुल 343 कैदी परिरूद्ध हैं। (घ) जी नहीं। (ड.) उपयुक्त एवं पर्याप्त भूमि आवंटित होने पर पुनर्घनत्वीकरण की योजना में राजगढ़ में नवीन जेल का निर्माण प्रस्तावित है। समय-सीमा निर्धारित करना संभव नहीं है।

          श्री अमर सिंह यादव--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 2344 है.    श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष जी, उत्‍तर पटल पर रखा हुआ है.

          श्री अमर सिंह यादव--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजगढ़ जिला मुख्‍यालय पर माननीय मंत्री जी से मैंने आग्रह किया कि जिला मुख्‍यालय जिला जेल राजगढ़ भवन निर्माण 1905 में इसका निर्माण हुआ था. 120 वर्ष पूर्ण हो गये हैं, उक्‍त भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्‍त हो चुका है और लोकनिर्माण द्वारा उसका जो निर्माण का जो परीक्षण कराया है, वह भी कंडम घोषित किया गया है, तो माननीय मंत्री जी से मेरा यह आग्रह है कि जिला जेल के लिये भूमि  उपलब्‍ध कराई गई है और उस जिला जिला जेल के लिये कोई राशि उपलब्‍ध करायेंगे?

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पुन: सदस्‍य का बहुत बहुत अभिनंदन करता हूं कि उन्‍होंने एक अच्‍छा विषय उठाया है, लेकिन विभाग भी इसके बारे में सजग है. राजगढ़ में पुनर्धत्‍वीकरण की योजना के तहत नवीन जेल का निर्माण प्रस्‍तावित है, उपयुक्‍त भूमि मिलते से ही, इस योजना के तहत उसका निर्माण कार्य प्रारंभ हो जायेगा.

          श्री अमर‍ सिंह यादव -- अध्‍यक्ष महोदय, इसमें पूर्व में भी जमीन आवंटित हो चुकी थी, मगर वह जमीन भी आबादी के क्षेत्र में आने के कारण उस जमीन को वापस निरस्‍ती कराई गई और दूसरी जमीन का भी हमने वहां पर कलेक्‍टर महोदय के यहां पर चिट्ठी और आवेदन लगा दिया गया है कि पुन: इसको जेल के लिये भूमि आवंटन किया जाये, क्‍योंकि जो वर्तमान जेल है, वह बीच शहर में है और जेल के आसपास इतनी बिल्डिंग बन चुकी हैं कि उसकी जो गोपनीयता रहती है, वह नहीं रही है और दुकानें इतनी बन चुकी हैं कि वह वहां पर असुरक्षित रहती है और आये दिन बीच मार्केट में जेल है, तो जो भी कैदी और कोई भी गाड़ी आती है, तो उसको भी वहां पर बहुत परेशानी आती है, तो सुरक्षा की दृष्टि से भी वहां पर कठिनाई है, तो माननीय मंत्री महोदय से मेरा यही आग्रह है कि इसकी राशि की शीघ्र आज घोषणा कर दें, तो अच्‍छा रहेगा क्‍योंकि जमीन तो उपलब्‍ध है, केवल स्‍थान परिवर्तन होना है, जमीन आवंटित हो चुकी थी.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चूंकि यह नवीन जेल राजगढ़ में जो प्रस्‍तावित है, वह पुनर्घनत्‍वीकरण योजना के तहत प्रस्‍तावित है, जिसमें हम जो अभी जेल है, वह निर्माणकर्ता को दे देंगे और उसके बदले में हम उससे दूसरी जमीन पर निर्माण करवायेंगे और उसके लिये हमको निश्चित रूप से पार्टी यहां मिल भी जायेंगी, लेकिन केवल जमीन अकेले का विषय है और जैसा कि माननीय सदस्‍य ने भी कहा कि पहले एक जमीन चिन्ह्ति की थी, लेकिन वह भी आबादी के बीच में है, तो जब भी जमीन उपलब्‍ध हो जायेगी, तत्‍काल इसका कार्य प्रारंभ हो जायेगा.

          श्री अमर सिंह यादव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री महोदय से आग्रह है कि आप तो राशि की घोषणा कर दें, तो वहां पर शीघ्र जमीन उपलब्‍ध है, राजगढ़ जिला मुख्‍यालय पर बहुत जमीन है, तो मेरा आपसे आग्रह है कि बहुत अत्‍यंत आवश्‍यकता है, यह शहर के बीचों बीच में है, 120 वर्ष पुरानी जेल है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- अमर सिंह जी माननीय मंत्री जी ने आपको बताया कि वह रीडेंसीफिकेशन योजना के अंतर्गत प्रस्‍तावित है, रीडेंसीफिकेशन योजना का प्रोजेक्‍ट चल रहा होगा, कुछ पुराने भवन होंगे, वह रीडेंसीफिकेशन योजना में लिये गये होंगे, उस योजना में जब काम शुरू होगा, उससे जो राशि बचेगी, उससे यह प्रस्‍तावित किया गया होगा, इसलिए उनको दिक्‍कत आ रही है, लेकिन मंत्री जी मुझे लगता है कि राजगढ़ को बहुत अच्‍छे से जानते भी हैं और जो आपने परेशानी बताई हैं, उस हिसाब से शीघ्रता करेंगे.

          श्री अमर सिंह यादव -- अध्‍यक्ष महोदय, बहुत बहुत धन्‍यवाद.

                             खनिज प्रतिष्ठान मद में प्राप्‍त राशि एवं वितरण

                                                [खनिज साधन]

12. ( *क्र. 2230 ) डॉ. हिरालाल अलावा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि  (क) जिला खनिज प्रतिष्ठान मद जिला धार में विगत 4 वर्षों में किन-किन उद्योगों/कंपनियों/संस्थाओं से कितनी-कितनी राशि प्राप्त हुई? संस्थाओं/कंपनी/उद्योगों के नाम, प्राप्त राशि सहित पृथक-पृथक वर्षवार ब्यौरा देवें। (ख) जिला खनिज प्रतिष्ठान मद की राशि व्यय करने का क्या नियम/प्रावधान/प्रथा प्रचलित है? राशि व्यय करने में जिले के जनप्रतिनिधि विधायकों एवं सांसद के अनुमोदन/सहमति/सुझाव लेने की क्या प्रक्रिया है? (ग) जिला खनिज प्रतिष्ठान मद की राशि का जिले के सभी विकासखंडों/विधानसभा क्षेत्रों में एक समान वितरण/व्यय के लिये क्या प्रावधान/प्रक्रिया है? यदि एक समान वितरण/व्यय का प्रावधान नहीं है तो इसका विधिसम्मत कारण बतायें। (घ) विगत 4 वर्षों में जिला खनिज प्रतिष्ठान मद जिला धार की कितनी-कितनी राशि किन कार्यों के लिये किन अधिकारियों/नोडल पर्सन की स्वीकृति से कब-कब कहां-कहां किन-किन कार्यों में खर्च की गई? वर्षवार, कार्यवार पृथक-पृथक ब्यौरा देवें। (ड.) विगत 3 वर्षों में प्रश्‍नकर्ता ने जिला खनिज प्रतिष्ठान मद जिला धार से किन-किन कार्यों के लिये राशि आवंटित करने के लिये पत्र लिखा? उक्त पत्रों पर क्या कार्यवाही की गई? किन-किन कार्यों के लिये किन कारणों से राशि आवंटित नहीं की गई?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री (श्री दिलीप अहिरवार) :                                              (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ख) जिला खनिज प्रतिष्ठान मद की राशि व्यय करने के संबंध में म.प्र. जिला खनिज प्रतिष्ठान नियम, 2016 के नियम 13 के तहत निधियों का उपयोग किया जाता है तथा उप नियम 6 एवं 7 व संशोधित नियम 2020 के नियम 7 उप नियम (2) में खण्ड (च) के पश्चात खण्ड (छ) अनुसार वार्षिक कार्ययोजना अनुसार कार्य संपादित किये जाते हैं। जिला स्तर पर समय-समय पर आयोजित मण्डल की बैठकों, उपस्थित विधायकों एवं सांसद के सुझाव/सहमति में अनुमोदन की प्रक्रिया है। (ग) प्रश्‍नांश अनुसार मध्यप्रदेश जिला खनिज प्रतिष्ठान नियम, 2016 के तहत प्रावधान नहीं है। अतः शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) जिला खनिज प्रतिष्ठान मद जिला धार में विगत 4 वर्षों के कार्यों की स्वीकृति म.प्र. राजपत्र (असाधारण) क्रमांक 464, दिनांक 25 अगस्त, 2022 मध्यप्रदेश जिला खनिज प्रतिष्ठान नियम 2016 संशोधन नियम 7 अनुसार कार्यवाही की जाती है। स्वीकृत कार्यों एवं व्यय की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। (ड.) माननीय विधायक विधानसभा क्षेत्र मनावर द्वारा जिला खनिज प्रतिष्ठान मद अंतर्गत स्कूल भवन, बाउण्‍ड्रीवॉल, आंगनवाड़ी भवन, सी.सी. रोड, आर.एम.एस. पुलिया, नाली, ऊर्जा आदि कार्यों के प्रस्ताव राशि आवंटित करने हेतु पत्र प्राप्त हुए थे, जिनका विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-स अनुसार है। प्राप्त पत्रों में से मध्यप्रदेश जिला खनिज प्रतिष्ठान नियम, 2016 में उपलब्ध राशि एवं प्रतिष्ठान निर्धारित प्राथमिकताओं के आधार पर न्यास मंडल द्वारा कुल 09 कार्य राशि 93.53 लाख का अनुमोदन किया गया है। जिला खनिज प्रतिष्ठान धार अंतर्गत प्राप्त पत्र अनुसार अन्य प्राथमिकता के कार्य होने के कारण, कार्य की प्राथमिकता न होने एवं जिला खनिज प्रतिष्ठान में राशि उपलब्ध न होने से राशि आवंटित नहीं की गयी है। विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-द अनुसार है।

          डॉ. हिरालाल अलावा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न संख्‍या 12 है.

          श्री दिलीप अहिरवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर रखा है.

          डॉ.हिरालाल अलावा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जो प्रश्‍न है, संविधान में आर्टिकल 244(1) के तहत अधिसूचित शेड्यूलड एरिये में खनिज प्रतिष्‍ठान मद के आवंटन के संबंध में था और मुझे जवाब मिला कि खनिज प्रतिष्‍ठान अधिनियम 2016 और संशोधन अधिनियम 2022 के तहत खनिज प्रतिष्‍ठान मद आवंटन किया जाता है और अंत में मैंने राशि के संबंध में प्रश्‍न पूछा था, उसमें कहा है कि न्‍यास मंडल के माध्‍यम से आवंटित किया गया है. अगर सारा मद न्‍याय मंडल के माध्‍यम से दिया जाना था, तो संविधान में जो पेसा कानून पांचवी अनुसूची बनी, उसका क्‍या औचित्‍य रह गया?

          श्री दिलीप अहिरवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, न्‍यास मंडल तो है ही मगर जो मत का पैसा जाता है, मैंने अपने पूर्व के उत्‍तर में भी दिया था, उसकी एक विधि एक नियम है कि वहां के जनप्रतिनिधि विधायक हो, सांसद हो और अन्‍य हमारे अधिकारी हैं, उनके प्रस्‍ताव आते हैं और प्रस्‍ताव के बाद फिर वह न्‍यास मंडल में जाता है और उसके अध्‍यक्ष जो कलेक्‍टर होते हैं, फिर उसमें तय होता है, इसी प्रक्रिया के तहत इसका उपयोग होता है और फिर हम विकास के कार्यों में लगाते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी चूंकि प्रश्‍नकाल समाप्‍त हो रहा है, बाकी दूसरे प्रश्‍न के संबंध में आप हिरालाल जी को बुलाकर बात कर लेंगे और उनका समाधन कर देंगे.

          श्री दिलीप अहिरवार -- जी, माननीय अध्‍यक्ष महोदय.

          डॉ.हिरालाल अलावा -- धन्‍यवाद, माननीय अध्‍यक्ष महोदय.

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

                                                (प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

                                                                         


 

12:00 बजे                                   अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

भोजनावकाश न होने विषयक

          अध्‍यक्ष महोदय-  आज भोजनावकाश नहीं होगा. सभी माननीय सदस्‍यों के लिए सदन की लॉबी में भोजन की व्‍यवस्‍था है. सदस्‍यों से अनुरोध है कि वे अपनी सुविधानुसार भोजन ग्रहण करें.

आज की कार्य सूची में ध्‍यानाकर्षण की सूचनाएं 7 ली गई हैं. सभी के उत्‍तर पटल पर रखें जाएंगे. पहली दो सूचनाओं में चर्चा होगी. आज अनुदान मांगों पर भी चर्चा है, विनियोग पर भी चर्चा है और आज अशासकीय काम काज का दिन भी है. मैं समझता हूं कि विनियोग का काम पूरा होने के बाद जो अशासकीय काम है, उसको लिया जाएगा. इसलिए हम सभी लोग उस समय उपस्थित रहे.

 

12:01 बजे                                 शून्‍यकाल की सूचनाएं.

आज शून्‍यकाल की सूचनाएं पढ़ी हुई मानी जाएगी. मैं सूचना देने वाले सदस्‍यों के नाम पुकारता हूं.

क्र. सदस्‍य का नाम.

1. श्री संजय सत्‍येन्‍द्र पाठक जी.

2. श्री लखन घनघोरिया.

3. श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर.

4. श्री मधु भाऊ भगत.

5. इंजी. प्रदीप लारिया.

6. डॉ रामकिशोर दोगने.

7. श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे.

8. श्री प्रदीप अग्रवाल.

9. श्री अभय मिश्रा.

10. श्री सचिव सुभाषचन्‍द्र यादव.

11. श्री मोहन सिंह राठौर.

12. श्री दिनेश गुर्जर.

13. श्री यादवेन्‍द्र सिंह.

14. श्री फूल सिंह बरैया.

15. श्री महेन्‍द्र रामसिंह यादव.

16. श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह.

17. श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाह.

18. डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय.

19. श्री राजेश कुमार शुक्‍ला.

20. श्री राजन मण्‍डलोई.

 

12:02 बजे                                       पत्रों का पटल पर रखा जाना.

मध्यप्रदेश राज्य खाद्य आयोग,  भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025

जल संसाधन मंत्री (तुलसीराम सिलावट) अध्‍यक्ष महोदय, मैं, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 16 की उपधारा (6) एवं मध्यप्रदेश खाद्य सुरक्षा नियम, 2017 के नियम 15 के उप नियम (5) की  अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश राज्य खाद्य आयोग,  भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025 पटल पर रखता हूँ.


 

12:03 बजे                                            ध्‍यानाकर्षण

      (1) टीकमगढ़ सहित प्रदेश में भू-अभिलेख के राजस्‍व रिकार्ड का संधारण न होना.                                                         

श्री यादवेन्‍द्र सिंह (टीकमगढ़) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

राजस्‍व मंत्री(श्री करण सिंह वर्मा) अध्‍यक्ष महोदय,

            श्री यादवेन्द्र सिंहअध्यक्ष महोदय, राजस्व भू-अभिलेख जो तैयार किया गया था वह 84 साल पुराना है. भू-अभिलेख जब देखने के लिये जाएं तो वहां कागज ही टीकमगढ़ के नहीं मिलते हैं. 84 साल का रिकार्ड कैसे उपलब्ध हैं, यह बता दें. टीकमगढ़ में कब आपने भू-अभिलेख अद्यतन कराये थे ? एक प्रकरण आपके सामने रख रहे हैं टीकमगढ़ तहसीलदार गोविन्द सिंह ने क्रमांक 8.12, 101 से लेकर 500 तक नामांतरण एक कलम से निरस्त कर दिये यह लिखकर कि पटवारी ने इस पर प्रतिवेदन नहीं दिया है. जबकि पटवारी का प्रतिवेदन उसमें लगा था मैंने कमिश्नर जी से शिकायत की वहां पर कमिश्नर ने छापा डाला. यह सारी कार्यवाही उन्होंने अपने अधीन ले ली. लेकिन तहसीलदार के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई. जिस काम के लिये पैसे मिल जाते हैं उस काम को तो तहसीलदार तत्काल कर देते हैं जिसमें पैसा नहीं मिलता है उसमें बोल देते हैं रिकार्ड में 20-15 का नकल नहीं है. हमारा निवेदन केवल यह है कि आप फिर से भू-अभिलेख को व्यवस्थित करा दें. 20-15 की नकल का केवल टीकमगढ़ में आप पूछ लें कि एससीएस की मीटिंग हुई थी सागर संभाग में उस मीटिंग में दिलीप अहिरवार जी खुद मंत्री जी मौजूद थे. उन्होंने नाराजगी व्यक्त की थी, माननीय हरीशंकर खटीक जी ने भी नाराजगी व्यक्त की. जितने भी सदस्य थे उन सब ने केवल बुंदेलखण्ड में यह मामला चल रहा है 20-15 का नकल का बाकी पूरे प्रदेश में कहीं नहीं है. मंत्री जी मैंने आपसे भी मिलकर के बात की थी आप कृपया इसको देखें, लेकिन आपने भी इसके ऊपर तवज्जह नहीं दी. तो हमें इस विधान सभा में आना पड़ा. कृपया करके जो 84 साल पुराना भू-अभिलेख को अद्यतन कराईये, उसके आदेश करिये. जब तक उसमें सुधार नहीं होगा तब तक नामांतरण करने में तहसीलदार इस तरीके से भ्रष्टाचार करते रहेंगे, आपकी कार्यवाही पूरी नहीं होगी.

          श्री करन सिंह वर्माअध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में 1995 में बंदोबस्त का कार्य बंद कर दिया गया है. कलेक्टर को अधिकार है. आप आवेदन देंगे तो आपका बंदोबस्त कर देंगे.

          श्री यादवेन्द्र सिंहअध्यक्ष महोदय, यह मैंने राजस्व सचिव को पत्र लिखा था कि 84 साल पुराना भू-अभिलेख है. यहां से भी कोई लेटर नहीं गया है. कलेक्टर कहते हैं कि हमें निर्देश ही प्राप्त नहीं हैं कि हम कैसे भू-अभिलेख को अद्यतन करा देंगे. आप कृपया करके इसमें सलाहदेश करें विधान सभा में कि टीकमगढ़ जिले के नहीं बल्कि पूरे बुंदेलखण्ड का रिकार्ड, बंदोबस्त हम दुरूस्त करेंगे.

          श्री करन सिंह वर्माअध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि आप कलेक्टर को आवेदन दें. वहां से बंदोबस्त की कार्यवाही की जायेगी. उन्होंने बहुत सारे प्रश्नों का उत्तर दिया है कि पहली बार मध्यप्रदेश में राजस्व विभाग में 1 करोड़ प्रकरणों का निराकरण हुआ है. आपके जिले में ही सिर्फ 389 प्रकरण लंबित हैं.

          श्री यादवेन्द्र सिंहअध्यक्ष महोदय, 13 हजार प्रकरण लंबित हैं. तीन हजार प्रकरण तो टीकमगढ़ विधान सभा के आपको दिये हैं. मैं आपके ऊपर आरोप नहीं लगा रहा हूं. आपसे निवेदन कर रहा हूं कि टीकमगढ़ जिले में जिसमें आपका राजस्व महाअभियान हो, चाहे, स्पेशल रूप से नामांतरण के मामले हों, जितने मुख्यमंत्री जी के निर्देश होते हैं, सब बेअसर होते हैं. इसलिये कृपया करके आप टीकमगढ़ की तरफ ध्यान दीजिये.

          श्री करन सिंह वर्माअध्यक्ष महोदय, लोक सेवा गारंटी के अंतर्गत आप जानकारी ले सकते हैं. आप मुझे बतायें .

          श्री यादवेन्द्र सिंहअध्यक्ष महोदय,लोक सेवा गारंटी में 929 मामले इनके पास भेजे उसमें से आपने 814 निरस्त कर दिये केवल उसमें 115 मामले स्वीकृत किये, इतनी अच्छी आपकी प्रगति है लोक सेवा गारंटी की. हमारा निवेदन है कि नीचे से रिकमण्ड होकर के फायल आती है. तो तहसीलदार को निरस्त करने का क्या अधिकार है. आप उससे एप्‍लीकेशन लगाने के 200 रूपए ले लेते हैं और फिर तहसीलदार अलग पैसा मांगता है, तो मेरा निवेदन यह है कि लोक सेवा केन्‍द्र जो रिकमंडेशन करता है, उसको तहसीलदारों को मानने के लिए विवश करिए कि आपको मानना ही पडे़गा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- यादवेन्‍द्र सिंह जी, आप बैठिए. माननीय मंत्री जी.

           श्री करण सिंह वर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले भी एक बार प्रश्‍न के उत्‍तर में बताया है कि कलेक्‍टर को अधिकार है और पहले तो आपने वर्ष 2015 का प्रश्‍न पूछा.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- माननीय मंत्री जी, तो आप आदेश कर दीजिए.

          श्री करण सिंह वर्मा -- वर्ष 2015 का पूछा है. वर्ष 2015 से आपने प्रश्‍न पूछा है जबकि हमारा यह अधिनियम पहले ही खत्‍म हो गया.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- माननीय मंत्री जी, यह हमने राजस्‍व सचिव को पत्र लिखा है और उसमें यह निवेदन किया है कि टीकमगढ़ के राजस्‍व रिकार्ड को दुरूस्‍त करवा दीजिए. आप कह रहे हैं कि कलेक्‍टर को अधिकार है, यहां सचिव कुछ नहीं कर पा रहे हैं.

          श्री करण सिंह वर्मा -- माननीय अध्‍क्ष महोदय, यह अधिकार कलेक्‍टर को है. दोबारा आपको बता रहा हॅूं कि आपने जो प्रश्‍न किया है उसका उत्‍तर तो सुन लीजिए. हमारे जितने प्रकरण हैं, पहली बार हिन्‍दुस्‍तान में मध्‍यप्रदेश में हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी ने भी कहा कि मध्‍यप्रदेश में राजस्‍व विभाग सच्‍चा-अच्‍छा काम है. (मेजों की थपथपाहट) आप सायबर तहसील में जाइए, वहां आपका चाहे नामांतरण हो, बंटवारा हो, सीमांकन हो, बटान हो, चाहे कोई भी मामला हो, आपका काम उसमें होगा. अगर कोई सायबर तहसील में कोई प्रकरण शिकायत का होगा, तो उसका निराकरण हम तहसीलदार से करवाएंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री हरीशंकर खटीक जी. विषय पूरा टीकमगढ़ का चल रहा है.

          श्री हरिशंकर खटीक (जतारा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारा यह अनुरोध है कि हमारे टीकमगढ़ जिले में सच्‍चाई की बात है कि जो भी किसान हैं, वह जमीन खरीदता है तो उसका नामांतरण और बंटवारा इस शर्त के आधार पर निरस्‍त कर दिया जाता है कि संवत् 2015 यानि 1957-58 की नकल लेकर के आओ और जब वह तहसील से जिला कार्यालय में जाता है तो वहां सरकारी भूमि लिखी रहती है तो उसका नामांतरण परिवर्तन नहीं हो पाता है. हमारा विनम्र अनुरोध है कि हमने भी पिछले सत्र में बंदोबस्‍त का प्रश्‍न लगाया था कि बंदोबस्‍त किया जाये. यानि टीकमगढ़ जिले का जो रिकार्ड है वह अपडेट नहीं है. मध्‍यप्रदेश का हो गया, आपने करवा लिया, वह अच्‍छी बात है. हम मंत्री जी को धन्‍यवाद भी करना चाहते हैं हमारी सरकार है. हम बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहते हैं लेकिन टीकमगढ़ जिले के कलेक्‍टर महोदय को या भू-अभिलेख, ग्‍वालियर को आप यहीं आज सदन से आदेश जारी करें कि हम टीकमगढ़ जिले का रिकार्ड अपडेट कराएंगे. नामांतरण और जो बंटवारा होता है उसमें कोई विलंब नहीं होगा. जैसे ही रजिस्‍ट्री होगी और सायबर तहसील जो आपने बनाया है, उसके माध्‍यम से या सीधा तहसीलदार नामांतरण, बंटवारा करेंगे. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऐसा निर्देश आज ही जारी करवा दें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- एक मिनट मंत्री जी, एक साथ आप नोट कर लीजिए. आप एक साथ जवाब दे दीजिएगा. माननीय नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह जी.

          श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह (भिण्‍ड) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हॅूं कि प्रश्‍न हमारा 13वें नंबर पर था. मैं महिला एवं बाल विकास मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हॅूं और धन्‍यवाद इस बात के लिए देना चाहता हॅूं कि मैंने प्रश्‍न लगाया था, तो उस प्रश्‍न के जवाब में उन्‍होंने जांच करवाई. उन्‍होंने उस अधिकारी को तत्‍काल सस्‍पेंड किया. इसलिए मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हॅूं. (मेजों की थपथपाहट) बहुत बड़ा भ्रष्‍टाचार हुआ था.

          अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है. बहुत-बहुत धन्‍यवाद. माननीय मंत्री जी.

          श्री करण सिंह वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले भी प्रश्‍न के उत्‍तर में बताया है कि कलेक्‍टर को अधिकार है. कलेक्‍टर को निर्देश कर देंगे कि वे बंदोबस्‍त की कार्यवाही करे और जो ऐसे पट्टे दिये हैं सरकार ने, हमारे पूर्व मुख्‍यमंत्री श्री दिग्‍विजय सिंह साहब ने पट्टे दिये हैं. बहुत सारे कांग्रेस के जमाने में पट्टे दिये गये हैं उसको बेचने की अनुमति नहीं होती है. वह अपने जीवन उपयोग के लिए लिया जाता है. अगर उसको बेचने की अनुमति है तो वह कलेक्‍टर से ली जाती है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह जी.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- माननीय मंत्री जी, अब तो दूसरी पीढ़ी आ गई है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- एक मिनट यादवेन्‍द्र सिंह जी, माननीय राजेन्‍द्र कुमार सिंह जी को बोलने दीजिए.

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह (अमरपाटन) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिला तो अलग है लेकिन विषय वही है. अगर आप इजाजत दें, तो क्‍या मैं कुछ पूछ सकता हॅूं ?

          अध्‍यक्ष महोदय -- बोलिए, बोलिए.     

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खसरा सुधार का मामला है. जब डिजिटाइजेशन हुआ, तो जितने आपके खसरे थे, वह डिजिटल फार्म में आ गए और उस प्रक्रिया में बहुत गलतियां हुई हैं. बहुत ज्‍यादा गलतियां हुई हैं. रामू की जमीन कालूराम के नाम हो गई. भगवानदास की जमीन मध्‍यप्रदेश शासन की हो गई. इन दोनों की आपस में हो गई, श्री अजय सिंह जी की और श्री जयवर्द्धन सिंह जी की, शायद ऐसा भी हुआ है. अब इसमें प्रश्न यह है कि वह प्रभावित व्यक्ति तहसीलदार को आवेदन देता है. तहसीलदार उसका परीक्षण करते हैं, नहीं करते हैं, कागज को लेकर वह बैठे रहते हैं, क्यों बैठे रहते हैं यह आदरणीय श्री यादवेन्द्र सिंह जी ने उसका विवरण बताया, उसका उल्लेख किया. यह मैं दोहराना नहीं चाहूंगा, लेकिन शायद उसमें यह प्रक्रिया है कि अगर 3 साल तक निर्णय नहीं करते हैं तो एसडीएम के पास चली जाती है. एसडीएम साहब अगर 5 साल नहीं करते हैं तो कलेक्टर के यहां चली जाती है. कलेक्टर के पास तो फुर्सत ही नहीं है इतने सारे काम हैं उनके पास में तो वह बेचारा कृषक  दर-दर की ठोकर खाता है तो उसकी पुश्तैनी भूमि है. 80 साल, 100 साल, 200 साल पुरानी जमीन है. कई पुश्तों से जोत रहा है, बो रहा है और  जो डिजिटाइजेशन के कारण त्रुटि हुई है उसका खसरा सुधार ही नहीं होता तो इस पर माननीय मंत्री जी को गंभीरता से विचार करना चाहिए. कोई एक प्रक्रिया आप बनाइए कि तहसीलदार को ही अधिकृत कर दीजिए और समय-सीमा दे दीजिए. चूंकि कोई नयी चीज तो आ नहीं रही है, उसी की जमीन है, रिकॉर्ड में उसके नाम है. अगर रिकॉर्ड में नाम है प्रथम दृष्टया दिख ही रहे हैं तो उसका खसरा सुधार हो जाना चाहिए, यह माननीय मंत्री जी कराएंगे, मैं यह जानना चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी कुछ कहना चाहेंगे. बहुत लोकप्रिय विषय है, मुझे मालूम है,  इसलिए मैं अब किसी और को  अनुमति नहीं दूंगा.

श्री करण सिंह वर्मा - अध्यक्ष महोदय, मैंने पहले भी निवेदन किया है कि पहली बार मध्यप्रदेश में ऐसे प्रकरण हैं जो लाखों की तादाद में हमने किये हैं. जो आपने कहा है, वह सही है. पहले यह तहसीलदार के ही अधिकार में था, परन्तु बाद में अनुविभागीय अधिकारी को भी इसमें अधिकृत किया गया. इस मामले में तहसीलदार के पास कोई नामांतरण का प्रकरण आता है, कोई त्रुटिवश किसी का नाम हो जाता है, आपका नाम है और मेरा नाम हो गया तो तहसीलदार 45 दिन में उसका निराकरण करेगा. अगर कोई दिक्कत है, वह अनुविभागीय न्यायालयीन प्रक्रिया है, मगर ऐसा देखने में आया है कि एसडीएम करके तहसीलदार आदेश कर देगा, कोई उसमें दिक्कत नहीं है. अब हमने नये नियम बनाये हैं जिसमें यह है कि कोई भी त्रुटिवश किसी का नाम आता है तो खसरे की नकल निकालें और उसके आधार पर उसका निराकरण कर दिया जाएगा.

श्री यादवेन्द्र सिंह - अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

12.17 बजे                                  अध्यक्षीय व्यवस्था

अध्यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, बहुत सारे लोग हाथ खड़ा कर रहे हैं और मुझे लगता है कि काफी प्रश्न खड़े हैं तो मैं आपको यह कहना चाहता हूं कि हम लोगों को एक अभियान बनाकर यह नामांतरण संबंधी, बन्दोबस्त संबंधी, बंटवारा संबंधी इन सारे विषयों का निराकरण करना चाहिए. यह आम आदमी से जुड़ा हुआ विषय है और इसके लिए कलेक्टर को जिम्मेवार बनाइए जिससे वह समय-सीमा के भीतर निराकरण करे. (मेजों की थपथपाहट)

श्री करण सिंह वर्मा - हमारे देश के प्रधानमंत्री बहुत ही लोकप्रिय हैं, वजनदार हैं. उन्होंने यह महाभियान चलाया है. 3 बार महाभियान चलाया है और मैं स्वयं गया हूं.

श्री सोहनलाल बाल्मीक - अध्यक्ष जी ने जो बोला है आप उसका जवाब दे दो.

श्री करण सिंह वर्मा - अध्यक्ष महोदय की बात का पालन कर रहा हूं. 3 बार महाभियान चलाया जिसमें (व्यवधान)..1 लाख प्रकरण इतिहास में पहली बार निराकरण किये हैं और जो बचे हैं उनका भी तत्काल निराकरण करेंगे.

अध्यक्ष महोदय - श्री भगवानदास सबनानी जी अपने ध्यानाकर्षण की सूचना पढ़ें.

 

 

(2) भोपाल के कोटरा स्थित गंगा नगर में

प्रधानमंत्री आवास निर्माण का कार्य पूर्ण न होना

 

श्री भगवानदास सबनानी (भोपाल दक्षिण-पश्चिम) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

                                                             


 

          परिवहन मंत्री (श्री उदय प्रताप सिंह)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनके क्षेत्र की एक महत्‍वपूर्ण समस्‍या की तरफ ध्‍यान आकर्षित कराया है.       

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य को बताना चाहता हूं कि

          माह दिसम्‍बर, 2025 तक पूर्ण किया जाकर आवंटियों को आधिपत्‍य सौंपा जा सकेगा. विभाग का प्रयास रहेगा कि दिसंबर, 2025 तक इनका हम आधिपत्‍य सौंप दें. इसलिये मुझे लगता है कि यह कहना सही नहीं है कि योजना के अंतर्गत पंजीकृत हितग्राहियों में कोई रोष व्‍याप्‍त है.

          श्री भगवानदास सबनानी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रधान मंत्री जी ने जब देश की आजादी के 75 पूर्ण हो रहे थे, तब उन्‍होंने कहा था कि यह दुर्भाग्‍य है कि एक सम्‍मानजनक छत भी आम आदमी को नसीब नहीं होती, तब से लेकर के प्रधान मंत्री आवास की कल्‍पना आयी. वर्ष 2017 से इसको मूर्तरूप देने का काम आरंभ हुआ और भोपाल में भी तमाम विज्ञापनों के माध्‍यम से वहां बोर्ड लगाकर के नगर निगम ने इस काम को आंरभ किया. मिडिल क्‍लास वर्ग को जो आवास देने की माननीय प्रधान मंत्री जी की सोच थी उसको इस जमीन पर उतारने का काम वहां की लोकल एजेंसियों पर था और भोपाल में नगर निगम को दिया और कार्य आरंभ हुआ और कार्य आरंभ होने के बाद सारी राशि ई.डब्‍यू.एस. के 9 लाख रूपये की राशि से, एल.आई.जी. की 22 लाख से 28 लाख रूपये, पहले आओ, पहले पाओ अपना स्‍थान सुरक्षित कर लो. एम.आई.जी 29 लाख रूपये में आवास देने के लिये पूरी राशि लोगों ने जमा की. लोगों को लगा कि जल्‍दी से जल्‍दी हम अपना आवास एक अच्‍छी लोकेशन में है, शहर के मध्‍य में है और उन्‍होंने बैंक से पैसा लेकर के राशि जमा कर दी और यह राशि जो माननीय मंत्री जी ने बतायी है कि 342 लोगों की जमा है उसमें एम.आई.जी के लगभग 216 मकान बनना है और 200 लोगों ने अपनी राशि जमा कर दी है और एल.आई.जी के भी दो प्रोजेक्‍ट 72-72 फ्लैट्स के बनना है, उसमें 72 फ्लैट्स की राशि लगभग पूर्ण जमा हो गयी है. शेष 72 फ्लैट्स की भी अभी नयी लांचिग शुरू हुई है. यह आवास बनाने के लिये लोग इंतजार कर रहे हैं. 6 साल विलंब यह योजना हो गयी है. एक मिडिल क्‍लास व्‍यक्ति और एक कर्मचारी जो रिटायरमेंट के बाद वहां रहना चाहता है, वह हर सप्‍ताह जब शनिवार, रविवार को जब छुट्टी होती है तो वहां अपने बच्‍चों को लेकर के जाता है, अपने मकान की प्रोग्रेस देखने जाता है तो यथास्थिति रहती है. जहां पिछले हफ्ते देखा, दो हफ्ते पहले देखा और महीनों पहले देखा तो वह यथास्थिति में वहीं के वहीं मकान खड़े हैं और इसके कारण उनके ऊपर डबल भार आ रहा है..

          अध्‍यक्ष महोदय- माननीय सदस्‍य प्रश्‍न तो करें.                                                                           श्री भगवानदास  सबनानीअध्यक्ष महोदय, मेरा आग्रह यह है कि हम समयावधि बढ़ाते  जा रहे हैं,  अभी अवधि फिर से बढ़ा  दी गई है,  मंत्री जी ने कहा है और इन लोगों को,  जिनका मकान है, उनको या तो जहां अभी मकान किराये पर रह रहे  हैं, इस अवधि की राशि उनको उपलब्ध कराई जाये,  उनको किराया दिया जाये.  इसमें बहुत सारी विसंगतियां हैं.  मैं इसलिये इन विसंगतियों  की तरफ भी ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि  इन विसंगतियों के कारण  भोपाल और  इन्दौर  के भी जो नियम हैं,  रेरा का नियम एक होगा,  इसलिये किस   ईडब्ल्यूएस में भी  वह मकान बेच   सकता  है, तीन साल बाद   वह  अपनी सम्पत्ति को बेच भी सकता है.  लेकिन इनके साथ  दूसरा व्यवहार किया गया है कि  नहीं आप जिस प्रकार से  बीपीएल या झुग्गी  मुक्त आवास युक्त योजना के अंतर्गत   वह  मकान नहीं  बेच सकते,  वैसा ही है. तो इनको  भी ये मिडिल क्लास  के लोग हैं, कल इनको कोई बेहतर अपॉर्चुनिटी  मिलेगी, बेच सकते हैं. तो  3 साल की अवधि इन्दौर   में है, तो भोपाल में क्यों नहीं.  ऐसी बहुत सारी बातें हैं. अब दिव्यांग  हैं,  अब मेरे ये सारे प्रश्न  इनके साथ जुड़े हुए हैं.  अब दिव्यांग हैं,  तो दिव्यांग  को द्वितीय फ्लोर पर आपने दिया, पहली मंजिल पर भी दे सकते थे.

          अध्यक्ष महोदयभगवानदास जी, मेरा आपसे अनुरोध है कि  प्रश्न बहुत सारे होंगे,  उनको एक सूत्र में  बांधकर एक  और दो, दो की संख्या में करें,  तो जवाब  आयेगा,  नहीं तो भाषण का जवाब  भाषण से आयेगा  और  कुछ रास्ता निकेलगा नहीं, किसी  को रिलीफ मिलेगी नहीं.

          श्री भगवानदास सबनानीअध्यक्ष महोदय, मैं आपके संरक्षण का आभारी हूं.  मैं निवेदन यह करना चाहूंगा  कि यह मकान अतिशीघ्र बन जायें.

          अध्यक्ष महोदयसंरक्षण ऑलरेडी हो चुका है.

          श्री भगवानदास  सबनानीअध्यक्ष महोदय, जी. मेरा फिर से निवेदन है कि  अतिशीघ्र ये मकान बन जायें

          सहकारिता मंत्री (श्री विश्वास सारंग) सबनानी जी, अध्यक्ष जी का  संरक्षण आप पर 30-35 साल से है.

          श्री भगवानदास  सबनानी38 साल से है.  अध्यक्ष महोदय,मेरा निवेदन है कि जल्दी से जल्दी ये मकान  मिल जायें और इसमें जो एक दूसरा प्रश्न  है, उसके साथ पूरक प्रश्न है कि जो  सम्पत्ति कर की छूट का  मामला आता है,  उसमें  भी कलेक्टर को जाने वाली सूची जो है, वह सूची भी  216 के स्थान पर   केवल 98 लोगों की गई,  शेष 152 लोगों  के बारे में कोई जानकारी  नहीं है कि उनको कितनी राशि जमा करना है.  क्योंकि जो प्रावधान है  कि 25  परसेंट उनको  छूट  मिलने वाली है,  उसकी भी जानकारी नहीं है.  तो मेरी  प्रार्थना है कि  यह  अतिशीघ्र मकान बन जायें और उन लोगों को अपना वाजिब  हक मिल सकें.  बस इतना आग्रह करते हुए मैं अपनी बात को पूर्ण करता हूं.

          अध्यक्ष महोदयमंत्री जी, जो प्रश्न  हैं,  उन्हीं का आप जवाब दीजिये, भाषण  मत दो.

          श्री उदय प्रताप सिंहधन्यवाद, अध्यक्ष जी. जैसा माननीय सदस्य ने स्वयं   इस बात को स्वीकार किया है कि हमारे प्रधानमंत्री जी की  बहुत  देश  व्यापी. ..

 

12.27 बजे                                  स्वागत उल्लेख

गंधवानी जिला धार से दसवीं और बारहवीं क्लास के आदिवासी समाज के बच्चों का सदन की दीर्घा में उपस्थिति पर स्वागत.

                   अध्यक्ष महोदयएक मिनट मंत्री जी.  आज गंधवानी जिला धार से दसवीं और बारहवीं क्लास के आदिवासी समाज के काफी बच्चे सदन की कार्यवाही देखने के लिये आये हैं, वे  दीर्घा में उपस्थित हैं, सदन की ओर से उनकी हौसला अफजाई करें. उनका स्वागत है. (सदन में मेजों की थपथपाहट)

12.28 बजे                                  ध्यानाकर्षण (क्रमशः)

          श्री उदय प्रताप सिंह--  धन्यवाद, अध्यक्ष जी. जैसा कि  हमारे वरिष्ठ साथी,  आदरणीय सबनानी जी ने स्वयं इस बात को कहा है कि  हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्रद्धेय,  नरेन्द्र मोदी जी का  एक सपना था,  2014 में  जब वे देश के प्रधानमंत्री बनें,  आपके साथ,  मैं भी सौभाग्यशाली था  कि  उनके साथ काम करने का  और सदन में  मौका  मिला. प्रधानमंत्री जी ने  एक बड़ा परिवर्तन   इस देश में किया.  आवास योजना  में,गरीब  आदमी की मदद के लिये कि जहां 30-30,  40-40 हजार,  45 हजार रुपये की  राशि  आवास निर्माण के लिये मिलती थी,  उस राशि को बढ़ाकर  के  ग्रामीण क्षेत्र में डेढ़ लाख  और शहरी क्षेत्र में   ढाई लाख  रुपये  और अन्य स्कीम्स में उन्होंने  आम आदमी  के लिये अवसर  दिया कि  अपने घर निर्माण में,  अपने सपनों को साकार  कर सके.  मैं सदस्य जी को उनके  प्रश्नों  के सीधे जवाब की तरफ जाना चाहता हूं.  जैसा उन्होंने आग्रह किया है कि  समयावधि क्या है.  कई बार परिस्थितियां विपरीत हो जाती हैं, तो उस कारण निर्माण प्रभावित होता है  और कई बार ठेकेदार की गलतियों के कारण होता  है   और उसका  दण्ड भी उसको मिलता है.  इस परियोजना मे भी  ठेकेदार के स्तर पर कार्य  नहीं किया गया, तो  उसको दंडित भी किया गया,   उसका जो कांट्रेक्ट था,  वह टर्मिनेट  किया गया. कोविड का प्रकोप भी बीच  में  आया इस परियोजना के दौरान. कुछ भूमि की  उपलब्धता का भी संकट रहा.  हितग्राहियों द्वारा समय पर कई बार राशि जमा नहीं हो पाती है,  उसके कारण भी विलम्ब होता है. और कई बार निकायों की  वित्तीय जो स्थिति रहती है,  उसके असंतुलन के कारण भी परिस्थितियां प्रतिकूल हो जाती हैं. तो माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को आश्वस्त करना चाहता हूं कि लगातार इसकी मानीटरिंग करते हुये हमारा प्रयास होगा कि दिसम्बर 2025 तक हितग्राहियों को आवास मिल जायें और जो एक समस्या आपके क्षेत्र की है उसका निराकरण हो सके.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, दूसरी बात माननीय सदस्य ने कही है कि संपत्तिकर की कुछ समस्याये हैं और कलेक्टर के स्तर पर उनका निराकरण नहीं हो रहा है तो अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को आश्वस्त करना चाहता हूं कि संबंधित कलेक्टर को विभाग की तरफ से निर्देशित कर दिया जायेगा कि जो भी हितग्राहियों की समस्यायें हैं, सम्पत्तिकर को लेकर उनका निराकरण समयावधि में किया जाये. धन्यवाद.

          श्री भगवान दास सबनानी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, रजिष्ट्री में जो 25 प्रतिशत की छूट थी उसके लिये मैंने कहा है कि उसकी पूरी सूची कलेक्ट्रट से नहीं गई है. दूसरा मैं कहना चाहता हूं कि पूरे भोपाल में इस प्रकार के 14 प्रोजेक्ट हैं, एक प्रोजेक्ट की मैंने बात कही है. लेकिन इसके साथ में 13 प्रोजेक्ट ओर हैं. 12 नंबर बस स्टाप पर है, बाग मुंगालिया एक्सटेंशन में है, श्याम नगर ,कोकता, हिनोतिया, कलखेड़ा, मालीखेड़ी, रासलाखेड़ी तमाम इन सारे प्रोजेक्ट की स्तिथि कमोवेश एक जैसी  है तो मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि इसको भी समय सीमा में पूरा करेंगे तो भोपाल के ऊपर उपकार होगा.

          श्री उदय प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने पहले भी कहा है कि माननीय मोहन यादव जी के नेतृत्व में हमारी संवेदनशील सरकार आम आदमी के लिये अंत्योदय की कल्पना के साथ काम करने के संकल्प से जो आगे बढ़ रही है.स्वाभाविक रूप से हमारे हितग्राहियों को उनकी समस्याओं से शीघ्र निराकरण किया जायेगा और जो एक प्रोजेक्ट पर बात हमने आपके माध्यम से कही है वह अमूमन हर प्रोजेक्ट पर लागू होती है और नियमानुसार उनके निराकरण की प्रक्रिया में भी मुझे लगता है कि उसके क्रियान्वयन में, लागू करने में विभाग की तरफ से प्रयास रहता है.माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो संपत्तिकर की बात कही है तो कलेक्टर को उस सम्बन्ध में बताया जायेगा.

          श्री भगवान दास सबनानी-- मंत्री जी मैंने रजिष्ट्री शुल्क की बात कही है .

          श्री उदय प्रताप सिंह -- अध्यक्ष महोदय, रजिष्ट्री शुल्क में भी अगर कलेक्टर के स्तर पर निराकरण है, तो स्वाभाविक रूप से हमारे विभाग के कुछ अधिकारियों के माध्यम से संबंधित कलेक्टर को निर्देशित करेंगे कि समस्या का निराकरण निर्धारित समयावधि में करे.

          अध्यक्ष महोदय- ठीक है, धन्यवाद.

 

समय 1.52 बजे                             अनुपस्थिति की अनुज्ञा

निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 137-होशंगाबाद से निर्वाचित सदस्य डॉ.सीतासरन शर्मा की अनुपस्थिति की अनुज्ञा

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

समय 1.54 बजे                        समितियों का निर्वाचन

लोक लेखा, प्राक्कलन,सरकारी उपक्रमों संबंधी तथा स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज लेखा समितियों के सदस्यों के निर्वाचन की घोषणा.

 

 

 

 

 

 

 


 

 

 

       

12.36 बजे                   प्रतिवेदनों की प्रस्‍तुति

12.37 बजे           प्रतिवेदन प्रस्‍तुत करने की अवधि में वृद्धि का प्रस्‍ताव

याचिकाएं प्रस्‍तुत हुई मानी जाना.

        अध्‍यक्ष महोदय   आज की कार्यसूची में जो याचिकाएं उल्लिखित की गई हैं वह सभी याचिकाएं प्रस्‍तुत की हुई मानी जाएंगी.

 

 

12.38 बजे                           ऊर्जा मंत्री का वक्‍तव्‍य

मध्‍यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड की संगठनात्‍मक संरचना में

संशोधन किये जाने के संबंध में

 

ऊर्जा मंत्री (श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर) अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

12.39 बजे                   शासकीय विधि विषयक कार्य

     मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2025 (क्रमांक 4 सन् 2025)

       

12.40 बजे      वर्ष 2025-2026 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमश:

            अध्यक्ष महोदय -- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

          अब, इन मांग पर कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत होंगे. कटौती प्रस्तावों की सूची पृथकत: वितरित की जा चुकी है. प्रस्तावक सदस्य का नाम पुकारे जाने पर जो माननीय सदस्य हाथ उठाकर कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत किए जाने हेतु सहमति देंगे, उनके कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए माने जाएंगे.

          मांग संख्या - 023                                      जल संसाधन

                                                                       क्रमांक

          श्री बाला बच्चन                                                            01      

          श्री उमंग सिंघार                                                         04

          श्री यादवेन्द्र सिंह                                                         07

          डॉ. हिरालाल अलावा                                                   10

          श्री अभय मिश्रा                                                           16

          उपस्थित सदस्यों के कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए. अब मांग और कटौती प्रस्ताव पर एक साथ चर्चा होगी.

          श्री अभिजीत शाह (अनुपस्थित)

          डॉ. प्रभुराम चौधरी (सांची) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मांग संख्या 23 जल संसाधन विभाग, माननीय मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत की गई है मैं उसके समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, देश के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिए पूरे देश में प्रयास कर रहे हैं. वहीं मध्यप्रदेश में वर्तमान सरकार के मुखिया माननीय मोहन यादव जी के नेतृत्व में कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिए मध्यप्रदेश में  सिंचाई की क्षमता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं. वर्तमान सिंचाई मंत्री माननीय तुलसी सिलावट जी भी पुरजोर मेहनत कर रहे हैं कि मध्यप्रदेश में सिंचाई की क्षमता बढ़ाई जा सके. सिंचाई के साथ साथ पेयजल की भी सुविधा बढ़ाई जा सके. कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में जल संसाधन विभाग सतत् प्रयास कर रहा है. जहां वर्ष 2003 में मात्र साढ़े सात लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता थी. पिछली भारतीय जनता पार्टी की सरकार और वर्तमान सरकार में अभी तक 50 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता को विकसित किया जा चुका है. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री आदरणीय मोहन यादव जी के नेतृत्व में 2 वर्षों के अन्दर 65 लाख हेक्टेयर की सिंचाई क्षमता की वृद्धि की जाएगी. माननीय मुख्यमंत्री जी ने अपने वक्तव्य में कहा, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट जी ने भी कहा है कि अगले 5 वर्षों में 65 लाख से बढ़ाकर 1 लाख हेक्टेयर तक सिंचाई की क्षमता कर दी जाएगी. इस अभूतपूर्व उपलब्धि के लिए मैं भारतीय जनता पार्टी की सरकार और वर्तमान मुख्यमंत्री जी और सिंचाई मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूँ.  सिंचाई की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. वर्तमान में मध्यप्रदेश में 25 वृहद, 114 मध्यम और 5992 लघु सिंचाई परियोजनाओं के द्वारा 5830 परियोजनाओं को पूर्ण रुप से निर्मित किया जा चुका है. वर्तमान में जल संसाधन विभाग के अन्तर्गत 42 वृहद, 68 मध्यम 381 लघु सिंचाई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं. जिनकी लागत 89 हजार 30 करोड़ रुपए है. इन परियोजनाओं का शेष इन परियोजनाओं का शेष कार्य पूर्ण होने पर लगभग 25 लाख हेक्‍टेयर की सिंचाई क्षमता में वृद्धि की जा सकेगी. जलसंसाधन विभाग के द्वारा अंतर्राज्‍यीय परियोजनाओं को जो स्‍वीकृति मिली है. मैं प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्‍द्र मोदी जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहता हूं और मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री जी को जो केन बेतवा लिंक परियोजना है, जो बहुप्रतीक्षित मांग थी जिससे पूरे बुंदेलखण्‍ड को फायदा होगा, पेयजल की सुविधा बढ़ेगी, सिंचाई की क्षमता बढ़ेगी यहां पर सिंचाई के माध्‍यम से 44 हजार 605 करोड़ रुपए की इतनी बड़ी परियोजना की स्‍वीकृति मिली है.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह--रायसेन को तो पैसा मिल रहा है. रायसेन को तो पानी मिलेगा. आप बुंदेलखण्‍ड की बात कर रहे हैं बुंदेलखण्‍ड को एक एकड़ जमीन के लिए पानी नहीं मिल रहा है.

          डॉ. प्रभुराम चौधरी-- अभी तो भूमि पूजन हुआ है, अभी तो शुरुआत हुई है अगर पहले बन गई होती तो आज पानी मिल रहा होता अब जब योजना बनकर तैयार होगी अभी आज प्रधानमंत्री जी खजुराहो में आए थे और उन्‍होंने उसका शिलान्‍यास किया है जिससे पेयजेल की सुविधा बढ़ेगी. क्‍या आप इससे सहमत नहीं हैं. यह बनना चाहिए कि नहीं बनना चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय-. चौधरी जी आप उनसे प्रश्‍न मत पूछिये आप अपनी बात को पूरा करो.

          डॉ. प्रभुराम चौधरी-- 24 हजार 293 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी की जा चुकी है और इसमें केन्‍द्र से भी राशि मिलेगी और मध्‍यप्रदेश की सरकार के द्वारा भी 60, 40 के रेश्‍यों में राशि उपलब्‍ध कराई जा रही है. इससे वार्षिक सिंचाई क्षमता 8.11 लाख की होगी और दस जिलों को इसमें लाभ मिलेगा. 2028 ग्रामों की 8.11 लाख हेक्‍टेयर भूमि की सिंचाई, 44 लाख आबादी को पेयजल की सुविधा इस योजना के साथ मिलेगी. इसमें विद्युत का उत्‍पादन भी होगा और जैसा कि यादवेन्‍द्र सिंह जी ने कहा रायसेन जिले को भी इस योजना से लाभ मिलेगा. यह बहुत ही बड़ी योजना है इसका लाभ हमारे मध्‍यप्रदेश के किसानों को मिलेगा.    दूसरी पार्वती कालीसिंध चम्‍बल लिंक परियोजना जो राष्‍ट्रीय परियोजना है जिसमें राजस्‍थान और मध्‍यप्रदेश दोनों प्रदेशों को, ग्‍वालियर और चंबल के साथ-साथ मालवा को भी इस योजना से लाभ प्राप्‍त होगा और यह योजना 72 हजार करोड़ रुपए की है. मध्‍यप्रदेश में 35 हजार करोड़ और राजस्‍थान में 37 हजार करोड़ इस प्रकार....

          श्री बाला बच्‍चन-- अध्‍यक्ष महोदय, बजट कितना है. जिस अनुदान मांग पर चर्चा हो रही है वह 9 हजार करोड़ रुपए है. एक आपने 72 हजार करोड़ रुपए का बताया, 44 हजार करोड़ रुपए का बताया, 89 हजार करोड़ रुपए का बताया. बजट ही केवल 9 हजार करोड़ रुपए का है. य‍ह सिर्फ प्रस्‍तावना है

          अध्‍यक्ष महोदय-- बाला जी वह पूरे प्रोजेक्‍ट की कीमत बता रहे हैं. प्रभुराम जी आप अपनी बात को पूरा करें आपको समय का ध्‍यान रखना होगा.

          डॉ. प्रभुराम चौधरी-- अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रकार लगातार मध्‍यप्रदेश में सिंचाई क्षमताओं में वृद्धि की जा रही है. जहां जिला मंदसौर की श्‍यामगढ़ सुवासरा वृहद सिंचाई परियोजना की स्‍वीकृति, जिला राजगढ़ की मोहनपुरा वृहद सिंचाई परियोजना, जिला राजगढ़ के आगर, मालवा की कुंडलिया वृहद सिंचाई परियोजना ऐसी अनेक जो योजनाएं हैं जिनकी स्‍वीकृति दी जा रही है. जिससे मध्‍यप्रदेश में सिंचाई की क्षमता बढ़ेगी और माइक्रो सिंचाई में मध्‍यप्रदेश देश में अग्रणी राज्‍य रहा है. यह मध्‍यप्रदेश के लिए उपलब्धि है कि व‍ह पूरे भारत वर्ष में अग्रणी राज्‍य रहा है इस पद्धति के माध्‍यम से जल का अधिकतम उपयोग पाइप के माध्‍यम से प्रत्‍येक किसान के खेत तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा है. दूसरा मध्‍यप्रदेश राज्‍य को वर्ष 2023 में भारत के केन्‍द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा National award from best state for transformation and conversion system to pressurized pipe system from reserveive to from हेतु यहां पर गतवर्ष दाब सिंचाई पद्धति द्वारा जल के अनुकूलतम दक्ष उपयोग के लिए ईनाम दिया गया है और मध्‍यप्रदेश राज्‍य को लगातार सिंचाई के लिए केंद्र द्वारा एवं राज्‍य के द्वारा राशि मिल रही है. अध्‍यक्ष महोदय, मैं, आपके माध्‍यम से मुख्‍यमंत्री और सिंचाई मंत्री को इसके लिए बधाई देना चाहता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि मेरी विधान सभा क्षेत्र की कुछ योजनायें, जो पहले से प्रचलित हैं, हमारे पूर्व मुख्‍यमंत्री द्वारा जिनकी घोषणायें भी की गई थीं, मैं उनके नाम पढ़ देता हूं, जिनका विधान सभा में प्रश्‍न के माध्‍यम से, मंत्री जी ने आश्‍वासन भी दिया था, उनकी स्‍वीकृति एवं उसे इस बजट में शामिल करने की कृपा करेंगे. ग्राम भादनेर तहसील रायसेन का एक बांध है, दूसरा ग्राम बहेड़ तहसील रायसेन इसकी प्रशासकीय स्‍वीकृति भी हो चुकी है. चांदपुर तहसील रायसेन, मदनपुर तहसील गैरतगंज, बेलनागड़ी तहसील गैरतगंज, ग्राम शहीदपुर गैरतगंज में ही ग्राम मडि़या, कस्‍बागड़ी, इनमें से कई के प्राक्‍कलन भी तैयार हो चुके हैं. मैं, आपके माध्‍यम से मंत्री जी को इन मांगों का समर्थन करते हुए, उनसे निवेदन करूंगा कि इन योजनाओं को भी शामिल करने का कष्‍ट करेंगे. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, धन्‍यवाद

          श्री निलेश पुसाराम उईके-  (अनुपस्थित)

          श्री चैन सिंह वरकड़े (निवास)-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मांग संख्‍या 23 के संदर्भ में अपनी बात रखना चाहता हूं कि जिस दिन से बजट पेश हुआ है, उसी दिन से पूरे प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ने की बात हो रही है. मध्‍यप्रदेश के अन्‍य जिलों में सिंचाई का रकबा निश्चित बढ़ा है लेकिन मैं मण्‍डला जिले की निवास विधान सभा की बात करूं तो वहां सिंचाई का रकबा बिलकुल नहीं बढ़ा है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं, आपके माध्‍यम से मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि निवास नगर परिषद क्षेत्र में एक कोर जलाशय का निर्माण अधूरा है, विगत 10 वर्षों से उसका काम अधूरा है, कृपया उसे पूर्ण करवाने का कष्‍ट करें. साथ ही पूर्व में जिन जलाशयों का निर्माण हुआ, जिसमें मझगांव जलाशय, लावर, मोहानी, भटगांव, इस तरीके से और भी मेरे विधान सभा क्षेत्र में जलाशल तो बने हैं लेकिन उनके उचित रखरखाव न होने की वजह से, नहरों का सुधार न होने की वजह से, क्षेत्र के किसानों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है. साथ ही पूर्व में जल संसाधन विभाग के माध्‍यम से      गांव-गांव में, छोटे-छोटे स्‍टॉप डैम बनाये गए थे लेकिन उनके रख-रखाव और उनके गेट बंद न होने की वजह से, उसका भी लाभ हमारे किसानों को नहीं मिल पा रहा है.         अध्‍यक्ष महोदय, मैं, माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि चूंकि विभाग ने उनका निर्माण किया है तो उनके रखरखाव का जिम्‍मा भी विभाग को ही मिले ताकि समय-समय पर उनके गेट बंद हो सकें और किसानों को लाभ मिल सके. साथ ही हमारे निवास विधान सभा से लगा हुआ छीताखुदरी जलाशय है, जिसमें निवास विधान सभा क्षेत्र की भूमि भी भराव क्षेत्र में आती है, उसका भराव वहां है. मैं, आपके माध्‍यम से मंत्री जी से मांग करना चाहता हूं कि उससे उद्वहन सिंचाई योजना के माध्‍यम से निवास ब्‍लॉक को पानी उपलब्‍ध करवाया जाये ताकि हमारे किसानों को सिंचाई सुविधा मिल सके. साथ ही नर्मदा जी का अपार जल भरा हुआ है, वहां कोई स्‍ट्रक्‍चर नहीं बनाना है, वहां प्राकृतिक गड्ढे भरे हुए हैं, बारह महीने भरे रहते हैं, ऐसे स्‍थान हैं, कापा नारायणगंज ब्‍लॉक सकरी मोहगांव ब्‍लॉक, सिंगारपुर मोहगांव ब्‍लॉक इन स्‍थानों पर यदि उद्वहन सिंचाई योजना के माध्‍यम से हम किसानों को पानी देना चाहेंगे, तो न किसी का विस्‍थापन करना पड़ेगा और न ही किसी का नुकसान होगा और लगभग 10-10, 20-20 गांव के लोगों को हम उद्वहन सिंचाई के माध्‍यम से सिंचाई की व्‍यवस्‍था कर सकते हैं. चूंकि हमारे यहां सिंचाई की व्‍यवस्‍था न होने की वजह से पूरे क्षेत्र के लोग मुश्किल से बरसात के समय 3-4 महीने निवास करते हैं, बाकी पूरे लोग अन्‍य प्रदेशों में बाहर पलायन कर जाते हैं और वहां जाकर अपना जीवन-यापन करते हैं. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि निवास विधान सभा की जो मांग मैंने अभी आपके सम्‍मुख रखी है, उसमें तत्‍काल क्रियान्‍वयन किया जाये ताकि क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा मिल सके. धन्‍यवाद.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा (जावद)  - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 23 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ. हम सब जानते हैं कि जल ही जीवन का मूल स्‍वरूप है. अगर हम अपने शरीर को भी देखें तो उसमें केवल 66 प्रतिशत जल है. पूरी पृथ्‍वी पर 1.41 अरब घनमीटर जल की उपलब्‍धता है और उसका करीब 67 प्रतिशत खारा जल है, 2 प्रतिशत ग्‍लेशियर से पानी आता है और 36.6 प्रतिशत कुल सतही जल उपलब्‍ध है. मैं अगर इसमें देखूं तो 20 प्रतिशत जल हमारा वर्षा का जल है, जबकि हम केवल 20 प्रतिशत ही जल का उपयोग कर पा रहे हैं, इसको अगर किसी सरकार ने गंभीरता से लिया है, तो वह वर्ष 1978 में पहली बार नर्मदा के वाटर डिस्‍ट्रीब्‍यूशन के सेटलमेंट से शुरू हुआ.

12.58 बजे               {सभापति महोदय (श्री लखन घनघोरिया) पीठासीन हुए.}

          सभापति महोदय, मुझे तब पानी पूरे मध्‍यप्रदेश में केवल 7 लाख हेक्‍टेयर जमीन में सिंचित रकबा था, जो पूरे प्रदेश के 150 लाख हेक्‍टेयर, जो संभावित था, उसका 155.25 लाख हेक्‍टेयर टोटल रकबा मध्‍यप्रदेश का है,  जिसको सिंचित करना है. मैं वास्‍तव में देखूंगा कि वर्ष 2006 से एक नया प्रोसेस माननीय श्री शिवराज सिंह जी सरकार में शुरू हुआ था, जब उज्‍जैन की बैठक में पहली बार माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने उस संभाग के सभी विधायकों को बुलाकर चर्चा की, तब जल के बारे में वहां पर निर्णय लिया गया. चूंकि कृषि उनका मूल विषय था, नर्मदा के नजदीक रहते थे और जल के महत्‍व को जरूरत और प्रदेश की तरक्‍की का कारण समझते थे, तो उन्‍होंने उसी प्रकार से जल और बिजली क्‍योंकि अकेला जल काम नहीं आता है तो जल के साथ बिजली का भी उतनी ही तेजी से उन्‍होंने विकास के बारे में सोचा, जब दोनों का समन्‍वय हुआ, तब जाकर मध्‍यप्रदेश की ग्रोथ की और मध्‍यप्रदेश पिछड़े से प्रगतिशील राज्‍यों में आने की श्रृंखला की शुरूआत हुई.

          सभापति महोदय, मैं वास्‍तव में बहुत अभिनन्‍दन करना चाहता हूँ. वर्तमान बजट में भी अगर मैं बात करूँ तो उन सब बातों का समावेश किया है कि चाहे प्रधानमंत्री जी ने ''पर ड्रॉप मोर क्रॉप'' की बात की हो, चाहे प्रधानमंत्री जी ने केन्‍द्रीय मंत्रालय से भी अटल सरोवर की बात करते हुए, जो कि बहते हुए पानी को कैसे ज्‍यादा से ज्‍यादा रोककर प्रदेश की तरक्‍की का हिस्‍सा बनायें और यह जो सपने हैं, नवाचार हैं, यह केवल बातों से नहीं, बल्कि अगर आज मैं बात करूं तो जल संसाधन विभाग ने 7.50 लाख हेक्‍टेयर से उनमें डिफरेंट योजनाओं के माध्‍यम से 5,865 सरंचनाओं से 40 लाख हेक्‍टेयर का सिंचित रकबा बढ़ाया है, जो वास्‍तव में प्रदेश की जरूरत की एक तिहाई जमीन को कवर करेगा. और साथ ही नर्मदा घाटी में भी 12 लाख हेक्‍टेयर के करीब, उसमें से 6 लाख में अभी उन्‍होंने एक्‍चुअल सिंचाई का काम किया, 6 लाख 59 हजार हेक्‍टेयर क्षेत्र में किया. अगर मैं दोनों को मिलाकर अगले 4 साल का प्‍लान टोटल जोड़ता हूँ तो 1 लाख हेक्‍टेयर का टारगेट जो बनाया है, उसके लिए वास्‍तव में माननीय मंत्री जी, जैसा उनका नाम है, तुलसी, तुलसी मतलब पवित्र भाव, उस भाव का पूरा उपयोग और उस उपयोग को करने की क्षमता देने वाले हमारे मुख्‍यमंत्री का भी मैं इस विषय में बहुत अभिनन्‍दन करता हूँ क्‍योंकि अगर वे यह न चाहते तो, विषय और प्राथमिकताएं तय करनी पड़ती हैं किसी भी प्रदेश को विकसित बनाने के लिए 3 या 4 माध्‍यम होते हैं. अभी सिंचाई और सिंचाई के माध्‍यम से कृषि का बहुत तेजी से विस्‍तार होगा और उसी के कारण हमारा एक नया अध्‍याय शुरू होने वाला है.

          सभापति महोदय, मैं यहां पर कुछ और अन्‍य बातें कहना चाहता हूँ. अगर मैं बात करूँ कि पानी सीमित था, सीमित पानी का उपयोग हम रोक सकते हैं तो उसके लिए प्रेशर ड्रिप इरिगेशन के प्रेशर प्‍वॉइन्‍ट के माध्‍यम से उन्‍होंने उसी पानी से तीन गुनी खेती कैसे की जाए, उसके बारे में सोचा, उसके बारे में योजना बनाई. योजनाएं तो बनी थीं सन 1980 के पहले की लेकिन क्रियान्‍वयन का अब समय आया और क्रियान्‍वयन के समय मैं क्‍यों बिजली विभाग को साथ में कनेक्‍ट कर रहा हूँ क्‍योंकि जब उस प्रेशन प्‍वॉइन्‍ट से, मैं केवल एक नीमच जिले की बात करूँ तो नीमच जिले में उतने प्रेशर से पानी लाने के लिए 100 मेगावॉट बिजली की जरूरत थी, तो कॉस्‍ट पर, एनॉलिसिस पर जब सवाल आया तो यह चर्चा की शुरूआत हुई कि 100 मेगावॉट पॉवर, हम अगर आज कमर्शियल पॉवर खरीदते हैं तो 6-7 रुपये पर यूनिट है, तो उसी जिले में माननीय मुख्‍यमंत्री जी और सबके निर्देश से यह तय हुआ कि कैसे सोलर की 2 रुपये 15 पैसे की बिजली ली जाए ताकि उसका वजन किसान पर और खेती पर न पड़े. यह प्रदेश की तरक्‍की और समन्‍वय के लिए काफी जरूरत की बात थी. ऐसी सोच करना सामान्‍य व्‍यक्‍ति उतनी गहराई तक जा पाए या न जा पाए, मैं मध्‍यप्रदेश का इस विषय पर बहुत-बहुत अभिनन्‍दन करता हूँ और यह संभव तभी हुआ कि 3,200 करोड़ केवल ड्रिप योजना के लिए दो विधान सभा के लिए खर्च करके उसका प्रस्‍ताव पास करके कैबिनेट से एप्रूव करके टेण्‍डर लगा दिया. मैं बस आज इतना ही आग्रह करूंगा कि तुंरत तय करके..

          सभापति महोदय -- आदरणीय ओमप्रकाश जी, समय का थोड़ा विशेष ध्‍यान रखें.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- जितनी देर आप बोलेंगे, मैं एक भी विषय रिपीट नहीं करूंगा और एक भी बिंदु ऐसा नहीं रखूँगा जो सामान्‍य हो.

          सभापति महोदय -- समय का ध्‍यान रखें.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- जी, जैसा आपका आदेश. तो मैं आपसे यह बात कर रहा था कि उसको तुरंत करें और उसमें डिले न हो, समय से वह पूरा हो सके क्‍योंकि हमारा मालवा जहां पर पहले सबसे ज्‍यादा पानी था, लेकिन बीच की सरकारों के कारण पानी की कमी हुई. पानी का स्‍तर 200 फिट से 1,000 फिट के बीच में चला गया. क्‍योंकि अब पानी की जरूरत केवल सिंचाई के लिए नहीं, जिस तेजी से इंडस्‍ट्रियल एरिया बढ़ रहा है, इंडस्‍ट्रीज हम बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, वहां पर पानी की खपत उससे कई गुना ज्‍यादा आने वाली है. मैं अगर बात करूँ तो अभी मैं दो विषय पर जैसे बात कर रहा हूँ कि देश की इकॉनॉमी के लिए पेट्रोल में एथेनॉल की जरूरत थी. एथेनॉल का अगर हम सोचते हैं तो एथेनॉल में सबसे ज्‍यादा पानी की खपत होती है. इससे स्‍टेट के पानी के कन्‍जम्‍प्‍शन में अंतर आएगा क्‍योंकि एथेनॉल के लिए पानी की कन्‍जम्‍प्‍शन जरूरत से ज्‍यादा है. हम टैक्‍सटाइल में ग्रो कर रहे हैं. पूरे उस एरिए में, मैं सिर्फ बता रहा हूँ नीमच में एथेनॉल के तीन प्‍लान्‍ट आ गए. तकरीबन 700-800 करोड़ रुपये का इन्‍वेस्‍टमेंट हो गया. अब ये सब जो पानी की जरूरत है, इसलिए मैं तो यह कहूँगा और मेरा यह आग्रह होगा. मध्यप्रदेश की सरकार और माननीय मुख्यमंत्री और सिंचाई मंत्री जी से कि हमारा सिंचाई विभाग का पानी रोकने के बजट में और ज्यादा बजट देना चाहिये और ज्यादा मांग आना चाहिये ताकि और ज्यादा बेहतर और जल्दी क्योंकि अगर पैसा उपलब्ध होगा

          सभापति महोदय - कृपया समाप्त करें.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा - जी सभापति महोदय, मुझे यह बताया गया था कि मेरा नाम पहला है और समय सीमित नहीं रखेंगे. 2-3 बातें और महत्वपूर्ण आपके ध्यान में रखना चाहता हूं कि अगर हम चाहेंगे तो इसको और अधिक गहराई से देखते हुए कि इसके कई और प्रयोग भी है. जब के बारे में पुराने शास्त्रों की बात करूं तो उस जमाने में बड़े-बड़े पेड़ लगाये जाते थे और उन पेड़ों के मान से जमीन के पानी के स्तर का आकलन कराया जाता था कि अगर बड़ का पेड़ है तो उसके कितने फिट दूरी पर उसका पूरा चार्ट है मैं बाद में पटल पर रख दूंगा पूरा चार्ट क्योंकि समय की कमी के कारण में उसे रख नहीं पा रहा हूं जिसकी माननीय मंत्री जी और मैंने बैठकर काफी तैयारी की थी लेकिन मैं 2 बातें और जरूर कहना चाहूंगा कि अगर हम इन बातों पर ध्यान नहीं देंगे तो हमको वास्तव में आने वाले समय में यह चीजें बहुत ज्यादा तकलीफ देने वाली है.

          सभापति महोदय - आप मंत्री जी को अवगत भी करा सकते हैं.

          श्री ओमप्रकास सखलेचा - जी अवगत करा देंगे.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस - सभापति जी, यह बहुत महत्वपूर्ण बिन्दु है मुझे लगता है इतना तो इनको बोलने देना चाहिये. यह बहुत महत्वपूर्ण और बेसिक विषय है.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा - अलग-अलग अगर मैं बात करूं तो आप अगर पुराने जमाने के इतिहास को देखें.

          सभापति महोदय - ओमप्रकाश जी समय का ध्यान रखें.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा - ठीक है आपका बहुत-बहुत धन्यवाद और यह बात मैं रिकार्ड पर रख दूंगा और वह जानकारी सबके लिये है हमारी पुरानी संस्कृति,पानी रोकने के लिये कि किन पेड़ों को लगाने से कैसे और बावड़ी के माध्यम से कैसे  हर हर गांव में शुद्ध पानी और अगर शुद्ध पानी ही नहीं तो स्वस्थ शरीर नहीं रह पाएगा. इतनी ही बात कहते हुए मैं सिर्फ यह रिक्वेस्ट करूंगा कि हमारे इस विभाग का बजट और बढ़ाने के लिये अगली बार सबको संयुक्त रूप से कहना चाहिये क्योंकि जल ही जीवन है और इतना पुन: आग्रह करते हुए कि ड्रिप योजना के टेण्डर को जल्दी एप्रूव करके  उसका काम जल्दी कराएं. सभापति महोदय बहुत-बहुत धन्यवाद.

            श्रीमती सेना महेश पटेल (जोवट)--  माननीय सभापति महोदय, जोवट विधान सभा के अंतर्गत जल संसाधन से संबंधित बात करना चाहूंगी. मेरे विधान सभा में जिस प्रकार से तालाब डेम बैराज पुल पुलिया वगैरह अति आवश्‍यक है और वह इसलिये आवश्‍यक है वहां के किसानों को कृषि के लिये पानी पर्याप्‍त हो सके और जिस प्रकार से पु‍ल पुलिया की जो हमें जरूरत है, हमारे आदिवासी समा‍ज के जो बच्‍चे स्‍टूडेंट स्‍कूल जाते हैं और वर्षा के कारण वह नाला क्रासिंग नहीं कर पाते हैं जिसके कारण हमें छोटे-छोटे पुल पुलिया की जरूरत पड़ती है. बरसात के समय में इन्‍हें स्‍कूल जाने में जिस प्रकार से असुविधा होती है. सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सरकार से निवेदन करना चाहूं‍गी कि जहां-जहां आवश्‍यकता अनुसार पुल पुलिया बैराज और तालाब और कई बार मैंने हमारे माननीय मंत्री जी को लेटर भी लिखे हैं और उन्‍होंने मुझे आश्‍वासन भी दिया है और लेटर में यह भी बताया है कि बजट में भी बड़े-बड़े बैराज वगैरह शामिल किया जाये तो माननीय सभापति महोदय, आपके संरक्षण में मंत्री महोदय से निवेदन करूंगी कि आप इस बात का विशेष ध्‍यान रखें ताकि शिक्षा में जिस प्रकार से हमारे बच्‍चों को आने जाने में दिक्‍कत होती है तो निश्चित ही पुल पुलिया और यह छोटे-छोटे निर्माण हो जायेंगे तो हमें शिक्षा के क्षेत्र में और रोज स्‍कूल जाने में कोई परेशानियां नहीं आयेंगी जिससे हमारी शिक्षा का स्‍तर थोड़ा सा बढ़ेगा, नहीं तो अति वर्षा के कारण, वर्षा के समय में सभी बच्‍चे स्‍कूल नहीं पहुंच पाते हैं. धन्‍यवाद.

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन (सागर)-- सभापति महोदय, मैं बजट 20025-26 की मांग संख्‍या 23 जल संसाधन के समर्थन में अपनी बात रखूंगा. माननीय सभापति महोदय, यह सर्व विदित है और हमारे पूर्व वक्‍ता, हमारे वरिष्‍ठ और बहुत ही बुद्धिजीवी जिन्‍होंने बहुत ही ज्ञानवर्द्धक समाचार, जानकारियां हमको दी हैं सम्‍मानीय ओमप्रकाश जी ने मैं बहुत निवेदन करना चाहता हूं सदन की ओर से माननीय सभापति महोदय, आपका कि ऐसे महत्‍वपूर्ण विषय पर जरूर हमें अपने क्षेत्र की बात करना चाहिये, हर व्‍यक्ति का अधिकार है, लेकिन हमें जल प्रबंधन के लिये कहीं एक बहुत अच्‍छा कोई सेमीनार करना चाहिये, वर्कशाप करना चाहिये. जल प्रबंधन जो है आज की महती आवश्‍यकता है, बाकी अन्‍य संसाधन जो हैं वह जुटाये जा सकते हैं, लेकिन जल पैदा नहीं किया जा सकता और आप जानते हैं कि जैसा आप बता रहे थे कि पूरी दुनिया में सबसे ज्‍यादा मात्रा में अगर कोई चीज उपलब्‍ध है तो वह जल है, लेकिन उपयोग करने हेतु, सिंचाई करने हेतु और उसका उपभोग करने के लिये पेयजल के लिये जो जल उपलब्‍ध है वह बहुत सीमित है और माननीय सभापति महोदय, एक विषय ध्‍यान में आ रहा है कि जो बहुत सारे नगरीय निकाय हैं उन नगरीय निकायों में ट्रीटेड वाटर जो जा रहा है उस ट्रीटेड वाटर को भी लोग इरीगेशन में इस्‍तेमाल कर रहे हैं, ऐसे ट्रीटेड वाटर को अगर हम इस्‍तेमाल कर रहे हैं इरीगेशन में तो यह न केवल उसका दुरूपयोग है वरन् ट्रीटमेंट करने में पानी को पेयजल योग्‍य बनाने में जो खर्चा नगरीय निकायों का आता है यह विशेष रूप हम अपनी विधान सभा सागर के संबंध में आपके माध्‍यम से मंत्री जी का ध्‍यान आकृष्‍ट करना चाहता हूं कि इस तरह की गतिविधियां हैं उनको निश्चित रूप से रोक लगानी चाहिये. माननीय सभापति महोदय, मैं विशेष रूप से हमारी जो पेयजल की बहुत बड़ी आवश्‍यकता है जिसकी पूर्ति राजघाट परियोजना के माध्‍यम से हो रही है, मैं उस परियोजना के संबंध में आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा और मैं चाहूंगा कि मंत्री महोदय जब अपना वक्‍तव्‍य देवें तो हमारी विधान सभा के इस प्रोजेक्‍ट के बारे में जरूर बतायें. राजघाट परियोजना जब बनाई गई थी उसके सेकेण्‍ड फेज में 2 मीटर उसकी हाइड बढ़ाने का प्रावधान था क्‍योंकि जनसंख्‍या मान से तात्‍कालिक जो आवश्‍यकतायें थीं उस आवश्‍यकता की पूर्ति उसके मान से हो गई थी, लेकिन भविष्‍य को देखते हुये और न केवल सागर शहर हमारे मकरोनिया और जो हमारा सैन्‍य क्षेत्र है पूरा का पूरा कंटोनमेंट को पानी की सप्‍लाई ट्रीटेड वाटर जो है वह राजघाट परियोजना के माध्‍यम से नगर पालिक निगम सागर के माध्‍यम से जा रही है तो पानी की आवश्‍यकता बढ़ती जा रही है और हमारा जो फेस-2 का काम है. जो दो मीटर की हाईट बढ़नी है, वह नहीं बढ़ पा रही है, माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय ने सागर में जो गौरव दिवस था, गौरव दिवस पर 200 करोड़ की इस परियोजना की स्‍वीकृति भी दी थी, लेकिन बाद में हम लोगों के ध्‍यान में आया है कि लगभग 150 पौने 200 करोड़ रूपये सिर्फ लैंड एक्‍वीजेशन में लग रहे थे, तो उसके विकल्‍प के रूप में, एक योजना बनाई गई है और बेबस नदी पर एक डेम बनाकर और पानी की सप्‍लाई को निर्बाध गति से 24 x 7 देने के लिये, अभी जो आपकी   व्‍यवस्‍था है वह पूरे देश में लागू है. हर घर में जल देने की, सागर में उस योजना पर हम लोग पहले से ही काम कर रहे हैं और टाटा नामक कंपनी उस काम को कर रही है. मेरा आपसे अनुरोध है कि 24 x 7 तभी संभव हो पायेगा, जब हम राजघाट की या तो हाईट बढ़ाने का काम करें या बेबस नदी पर जो हमारा डेम बनना है, उस डेम की स्‍वीकृति आप दें, उसकी बोधी में उसके प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट वगैरह जो है वह कहीं पेंडिंग हैं, आप जरूर मंत्री महोदय, उस दिशा में सहयोग करेंगे तो बहुत‍ अच्‍छा होगा.

सभापति महोदय, यहां मैं इस बात का उल्‍लेख करना चाहता हूं कि हमारा समूचा बुंदेलखंड पूरे के पूरे भारत वर्ष का सबसे कम सिंचित क्षेत्र था, लेकिन विगत 15 वर्षों में कुछ महत्‍वपूर्ण प्रोजेक्‍ट जो जल संसाधन विभाग द्वारा सिंचाई के लिये समूचे बुंदेलखंड के एक छोटे से अंचल सागर जिले में किये गये हैं, कालीपठार जलाशय, पढ़रिया कला, टिपरिया जलाशय, प्रहलाद ओरिया, कंदेला, परकुल मध्‍यम परियोजना, हिलगंज जलाशय, भगवंतपुर जलाशय, आपचंद मध्‍यम परियोजना, यह गढ़ाकोटा की है, यह ऊपर वाली हमारे सागर की है, नरियावली क्षेत्र की है, बरोदा जलाशय, जमदर्रा जलाशय, किशनगढ़ जलाशय एवं केसली यह तमाम योजनाएं निश्चित रूप से यह हमारा ट्रायबल एरिया है, वहां पर जल साधन, सिंचाई के साधन लगभग शून्‍य थे, आप देखियेगा माननीय सभापति महोदय, खतोला काम्‍पलेक्‍स, सोलपुर मध्‍यम परियोजना, तुलसीपारा जलाशय, सूरजपुरा, पिपरिया, लक्षासिर, नयाखेड़ा, बीजरी, बरौदा इस समय लगभग दो दर्जन से अधिक परियोजनाएं सिर्फ सागर जिले में सिंचाई विभाग के द्वारा जल संसाधन विभाग द्वारा या तो पूर्ण कर ली गई हैं, या पूर्णता की ओर हैं, यहां  मैं ध्‍यानाकर्षित करना  चाहता हूं कि जहां पर फॉरेस्‍ट डिपार्टमेंट की जमीन आ रही है, वहां पर यह योजनाएं कहीं बाधित हो रही हैं, इस संबंध में एक कुछ एजेंसी बनाना चाहिए, जो वन विभाग से इस संबंध में उनकी जो आपत्तियां हैं, उन आपतित्‍यों का निराकरण करके और इन परियोजनाओं को पूर्ण कराने में सहयोग करेंगे तो माननीय सभापति महोदय बहुत अच्‍छा होगा. सभापति महोदय, अभी माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय का हमारे बुंदेलखंड में आना हुआ था. गढ़ाकोटा में माननीय भार्गव जी एक बहुत बड़ा आयोजन करते हैं, उस समय माननीय भार्गव जी ने नर्मदा मैया को हमारी कोपरा और सुनार नदी के साथ लिंक करके और हमारे बुंदेलखण्‍ड की प्‍यास बुझाने का उनसे निवेदन किया था, माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय, ने उसे सहर्ष स्‍वीकार किया है और घोषणा की है, माननीय मंत्री महोदय आपसे इस संबंध में निवेदन है, यह जो है 21 किलोमीटर पानी की पाईप लाईन डलेगी मुर्गाटोला से लेकर कोपरा नदी और सुनार नदी तक वहां पर न केवल सागर को लाभ होगा, दमोह को लाभ होगा वरन् पन्‍ना जिले को जो सर्वाधिक पानी की विभिषिका से जूझता रहा, मैं पिछले 25-30 साल से देख रहा हूं पन्‍ना जिले को भी उसका पूरा का पूरा लाभ होगा, जो काम बेतबा और केन नदी के लिंक के माध्‍यम से पूरे के पूरे दस जिलों में होने वाला है, हरित क्रांति आने वाली है और निश्चित रूप से उससे पूरे के पूरे बुंदेलखण्‍ड के न केवल 44 लाख परिवारों के कंठों की प्‍यास बूझेगी. वरन जो 8 लाख हेक्‍टेयर भूमि सिंचित होने वाली है, उससे निश्चित रूप से बुन्‍देलखंड का जो आने वाला भविष्‍य है, बहुत अच्‍छा होगा, लेकिन यह जो नर्मदा जी वाला प्रोजेक्‍ट है, यह भी प्रोजेक्‍ट किसी भी दृष्टि से कमतर नहीं है. यहां भी अगर काम होगा तो बुन्‍देलखंड के विकास की दृष्टि से बहुत अच्‍छा होगा. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, बहुत धन्‍यवाद जय हिन्‍द.

श्री अभय मिश्रा(सेमरिया) माननीय सभापति महोदय, मांग संख्या 23, जल संसाधन विभाग में 9 हजार करोड़ रुपए का बजट है, लघु अन् लघु सिंचाई योजनाओं के लिए मात्र 140 करोड़, हम इसको पढ़ रहे थे, हमें यह लगा कि यह जो बजट बनाया गया है, यह समतामूलक नहीं है. मुख्यरूप से हमारे विन्ध् में जहां सत्ताधारी दल को तीस में से 26 सीटें मिली हैं या कि हमारे नेतृत्‍व में कमी है या सरकार उनको वजन नहीं दे रही ही है, या उसकी कोई वैल्यू नहीं है. हमें नहीं लगता कि कहीं भी हमारे विन्ध् का ध्यान रखा गया. हम हमारे क्षेत्र में आते हैं हमारे यहां जरमोहरा जलाशय है, बायीं और दायीं तट नहर है, नहरों की हालत इतनी खराब है, पुराने टाइम से आप कभी नहरों की मरम्मत के लिए अलग से बजट नहीं देते जबकि ये छोटे छोटे कामों से हमारी उपयोगिता बढ़ जाती है, इसके लिए आपने कोई प्रावधान नहीं किया है. दूसरा हम देख रहे हैं कि बांध सुरक्षा संबंधी जो केन्द्रांश से मात्र 25 करोड़ रुपए है, यह हमें समझ नहीं रहा है, हमारे सेमरिया में थाने के पीछे दो पहाड़ हैं, जहां नेचुरल जलाशय बनता है और बहुत बड़ा डैम मुश्किल से 60 से 70 करोड़ की लागतसे दो पहाड़ों को जोड़ देने से हमारे सेमरिया और सतना क्षेत्र का कुछ भला हो जाएगा. मैं आपसे निवेदन करता हूं कि उस दिशा में उसको आप किसी योजना के अंतर्गत ले लें. मध्यम परियोजना निर्माण के लिए बजट कम है, मात्र 14 करोड़ रुपए, मध्यम सिंचाई कार्य के लिए मात्र 10 करोड़ रुपए, लघु एवं लघुतम सिंचाई योजना के लिए आपने 500 करोड़ रुपए रखें हैं. उसी के अंतर्गत मैं उस डैम की मांग कर रहा था. लघु सिंचाई योजना ये सब बातें मैंने आपको बता दी. हमारे यहां बाणसागर से जो निकलती है, क्योटी कैनाल अपरपुर्वा इसके लिए आपने कोई आवंटन नहीं किया है. आज से तीन चार साल पहले तक आपने बड़ी तेजी से काम किया है और इसके बाद पता नहीं किसकी नजर लग गई मेंटेना जो छोड़कर गई और उसने काफी हम तो सीधा सीधा कहें तो हम तो घोटाला ही कहेंगे हजारों करोड़ का, पूरा प्रदेश जानता है, वह जहां का तहां पड़ा हुआ है उसको पूरा कराने की जिम्‍मेदारी किसकी है. क्‍योटी कैनाल अपर पूर्वा में मरम्‍मत की जरुरत है, इसकी और ब्रांचेज खोली जा सकती है . हमने अपने कटौती प्रस्‍ताव में मांग किया है रीवा जिले के विधान सभा क्षेत्र सेमरिया में सिरमौर मैन कैनाल से मझगवां माइक्रो लिफ्ट तैयार कर सिंचाई हेतु पानी उपलब्‍ध कराए जाने का प्रावधान नहीं किया गया है उसे कर दिया जाए. अब मैं आपको एक चित्रण दिखाता हूं यह है परियोजना प्रशासक अपने यहां जल उपभोक्‍ता संस्‍थाओं के माध्‍यम से एक समय कल्‍चर चला था काम कराए जाने का उसकी हालत वही है जैसे भूमि विकास बैंक और कॉपरेटिव बैंक नहीं होते थे पूरे के पूरे बैठ गए आज वह कर्ज से लदें हैं, इसमें अगर आप देखेंगे सीएलआर महोदय ने लिखा है जो इसके परियोजना प्रशासक, 180 करोड़ के रिकवर जल उपभोक्‍ता संरक्षण वाले चले गए आप उनका कुछ नहीं कर पा रहे हो. आज हमारा यहां ध्‍यानाकर्षण भी था इसका जो यहां 2 ध्‍यानाकर्षण के बाद नहीं हुआ, लेकिन उसमें आपका उत्‍तर आया. मैंने उस उत्‍तर को भी पढ़ा आपने भी माना है कि इसमें बहुत ज्‍यादा पैसे हो गए, उसमें कार्यवाही होगी. हमारा आपसे सीधा सीधा कहना है कि एक तरफ आप बेस्‍टेज को रोकिए, इसमें थोड़ी तब्‍दीली आप को करना चाहिए. लकीर का फकीर बजट, जैसे एक बार किसी ने लाइन खींच दी और आप केवल उसमें डाटा भरते हो, इस बार इसमें दो रुपए बढ़ा देना, इसमें दो रुपए कम कर देना, कभी आप नए सिरे से विचार करने को तैयार नहीं है कि 20 साल में आपने जितने काम किये, उसके बाद हमारे सामने नया परिदृश्य क्या है अब हमको नये ढंग से तथा एक बार नये सिरे से कैसे सोचना है ? कुछ जगहों पर हमारा फेल्यूअर है उसको कम करना है. जहां पर वेस्टेज ऑफ मनी है उसको कम करना है. इधर आप बजट बना देते हैं तथा अधिकारियों से बात करते हैं एक दो जमीन यहां पर खरीद लें कहते हैं कि रूक जाओ इस बार के बजट में प्रावधान हम लोगों ने डलवाया है अपने हिसाब से आ जायेगा तो खरीद लेंगे. यह बजट उनके लिये बन जाता है. बजट में आप विधायकों की राय ही नहीं लेते हैं, हमारी तो छोड़िये हम तो विपक्ष के हैं. सत्तापक्ष के विधायकों से कभी आप डिस्कस नहीं करते हैं कि कहां कहां पर क्या जरूरत है ? कहां कुछ नया नवाचार करना है तब तो कोई चीज निकल कर आयेगी. हमारा अनुरोध है कि हमारे क्षेत्र में कुछ काम करा दीजिये आप फिर से नोट कर लीजिये हो सके तो उसको बता भी दिजियेगा ? मुश्किल से आपसे हम 10 से 25 लाख रूपये मांग रहे हैं. जरमोरा बायीं तट एवं दायीं तट की मरम्मत के लिये कार्य करिये. सिरमोर में लिफ्ट एरिगेशन में बड़ा पैसा मांग रहे हैं. हम डेम के लिये 60 से 65 करोड़ रूपये मांग रहे हैं. हमारी छोटी छोटी जितनी शाखाएं हो सके उस पर कृपा कर दीजिये. आप विन्ध्य को इतना दरकिनार मत करिये. विन्ध्य ने आपको 30 में से 26 सीटें दी हैं. अब हमारा दुर्भाग्य है कि अपने ही नेता कुछ बोल ही नहीं रहे हैं ना ही आपका विरोध कर सकते हैं, ना ही आपसे कुछ मांग सकते हैं जनता उनको वोट देकर के मुंह ताके बैठी है, मैं अकेला मुंह चलाकर के क्या कर लूंगा ? अब आप ही कुछ कर दें तो बड़ी कृपा होगी. धन्यवाद.

श्री दिनेश जैन (बोस)(महिदपुर)सभापति महोदय, मैं एक बात मंत्री जी को बोलना चाहता हूं कि जल संसाधन विभाग पर बात चल रही है इजराइल में 13 इंच बारिश में दोनों फसलें ली जाती हैं. इसी तरीके से हमारे यहां मालवा अंचल में ऐसी चीजें विकसित हैं वहां पर भी 10-10, 12-12 लाख रूपये के डेम बनाये जायें. वहां पर रिचार्ज भी बढ़ जायेगा. आप एक्सपर्ट के साथ बैठकर इस प्लानिंग पर जरूर बात करें. वहां पर छोटे छोटे डेम बनाये जायेंगे. तो वहां का रिचार्ज भी ऊपर आयेगा तथा किसानों का भी फायदा होगा.

            श्रीमती अर्चना चिटनीस(बुरहानपुर)जल संसाधन विभाग की मांग संख्या 23 के समर्थन में बोलने के लिये खड़ी हुई हूं. मैं सभी अपने विधायक साथियों से तथा माननीय मंत्री जी से आग्रह पूर्वक एक महत्वपूर्ण बात कहना चाहती हूं कि जब हम जल संसाधन विभाग की बात करते हैं तो हम सभी इसको सिंचाई विभाग के तौर पर समझकर केवल सिंचाई की, पानी के स्टोरेज की, पानी के उपयोग की, पानी के अधिकतम उपयोग को ही हम सब अपनी सफलता व अपना लक्ष्य मानकर बात करते हैं. मेरा आग्रहपूर्वक निवेदन है कि बजट बनाने से लेकर बजट के क्रियान्वयन तक पानी का दोहन करने वाला विभाग केवल ना माने. इसको अप्रोपरीएिटव वॉटर मेनेजमेंट का, पानी के कंजरवेटिव का भी विभाग मानकर चला जाये. जिस गति से हम पानी का उपयोग कर रहे हैं. हमारा व्यक्तिगत पानी का खर्चा, खेती में पानी का खर्चा, उद्योग में पानी का खर्चा, हमारी जीवन शैली में परिवर्तन का पानी का खर्चा, जिस गति से हम पानी का उपयोग निरंतर बढ़ाते जा रहे हैं उसकी आधी गति से भी हम पानी को संभालने की कार्य योजना बनाना, उस पर काम करना, उस पर बजट का आवंटन ही नहीं होना, उसके साथ समाज को जोड़ना, यह अकेली सरकार का काम नहीं है पानी की संभाल, वह समाज का भी काम है. उससे हमारा विभाग समाज से कैसे कनेक्ट हो रहा है. उस पर क्‍या कार्ययोजना है, उस पर क्‍या विचार है वह भी सदन के सामने सभी विधायकों के साथ मिलकर स्‍पष्‍ट होना बहुत आवश्‍यक है. निश्‍चित तौर पर कहां साढे़ सात लाख हेक्‍टेयर की सिंचाई, कहां 50 लाख हेक्‍टेयर की सिंचाई और कहां 1 करोड़ हेक्‍टेयर की सिंचाई का लक्ष्‍य, यह साधारण बात नहीं है. मैं बहुत सिंचाई की योजनाओं के विस्‍तार में न जाते हुए माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी को और आदरणीय श्री तुलसी सिलावट जी को विशेषकर के बुरहानपुर की ताप्‍ती नदी योजना, जिसके पीछे हम सतत् 25-30 से लगे थे और जिसको लेकर बड़ी निगेटिविटी थी, कोई समझने को ही राजी नहीं था. माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मध्‍यप्रदेश की पूर्व मुख्‍यमंत्री और उस समय की हमारी जल संसाधन मंत्री सुश्री उमा भारती जी ने टॉस्‍कफोर्स का गठन किया. उस टॉस्‍कफोर्स ने इसकी फिजियोबिलिटी को माना और सरकार ने आज अपने कैबिनेट से भी उसको एप्रुवल दिया. सारे कैबिनेट के सदस्‍यों का, माननीय मंत्रीगण का मैं धन्‍यवाद करती हॅूं.

          माननीय सभापति जी, मैं आपके माध्‍यम से इस बात का आग्रह करना चाहती हॅूं कि जैसे हम किसी भी बडे़ बांध में सरफेस पर पानी का स्‍टोरेज करते हैं, इस योजना में सरफेस पर नहीं बल्‍कि, पानी का स्‍टोरेज भूघर में होने वाला है. धरती के अंदर पानी का स्‍टोरेज है. अर्थात् हम जमीन भी बचा रहे हैं. जो हम बडे़ बांध बनाते हैं तो हम जितना बड़ा तालाब बनाकर ऊपर पानी को स्‍टोर करते हैं, जमीन का हम उपयोग करते हैं इसमें जल का स्‍टोरेज नीचे होने जा रहा है. अद्भुत योजना आपने और आपके विभाग ने आगे बढ़ायी है और केन्‍द्र निश्‍चित तौर पर इसको सपोर्ट करेगा. महाराष्‍ट्र सरकार भी और उनका जो तापी इरिगेशन जलगांव का जो विभाग है उसने उस पर बहुत मेहनत की है, पर इसको लेकर मैं चाहती हॅूं कि सारे सदस्‍य इस योजना के डिटेल्‍स को, इसके हाइड्रोलॉजी को, हाइड्रोजियोलॉजी को समझें. इसमें हम पानी के रिचार्ज, आमतौर पर हम लीटर्स में पानी का रिचार्ज गिनते हैं इसमें हम टीएमसी में पानी का रिचार्ज गिनने जा रहे हैं. 1 टीएमसी अर्थात् 2 हजार 8 सौ 31 करोड़ लीटर, यानि 1 टीएमसी. हम एक नेचर की, प्रकृति की फॉल्‍ट का बाजाड़ा जोन का उपयोग करने जा रहे हैं. इस योजना के लिए देश और दुनिया में अद्भुत, अनोखी योजना को स्‍वीकृति देने, आगे बढ़ाने के लिए मैं दिल की गहराईयों से आपको बार-बार जितना धन्‍यवाद दूं, उतना कम है, पर उसका प्रजेंटेशन सभी के सामने आगे कभी रखें.

          माननीय सभापति महोदय, पूर्व में जब हमारी योजनाएं बनती थीं, तब उसके प्रोजेक्‍ट कॉस्‍ट में कैचमेंट डेवलपमेंट एरिया की भी कॉस्‍ट जुड़ी होती थी. अब वह जुड़ी नहीं होती है. अगर कैचमेंट एरिया नहीं होगा, अगर छोटे-छोटे नाले होंगे, तो नदियां होंगी. अगर नदियां होंगी, तो बांध होंगे. महाराष्‍ट्र में इन्‍होंने सरकार ने बहुत खर्चा किया. बहुत बडे़-बडे़ बांध बनाये. लेकिन पानी के अभाव में नालों पर हो रहे कब्‍जों से और वहां पर हमसे वर्षा कम है, अनेक कारणों से जो बांध बने हैं, वह पूरे भर नहीं पाते हैं. मुश्‍किल से कोई बांध 20, 25, 30 या कोई 40 परसेंट भर पाता है, तो हमको इसकी चिंता करनी पडे़गी. हम पानी लें तो सही. 

          सभापति महोदय, सबसे अधिक पानी का उपयोग इस संसार में कोई करता है तो अधिकतम पानी का उपयोग सूर्य भगवान करते हैं. अधिकांश पानी जो व्‍यय होता है वह सूर्य के सोखने से होता है, पर सूर्य भगवान जितना पानी लेते हैं उतना पलटकर वर्षाकाल में हमें दे भी देते हैं, तो हम, सारा समाज जितना पानी ले रहे हैं क्‍या हम पानी को उतना संभाल पा रहे हैं. हम पानी को प्रोड्यूज नहीं कर सकते. हम बना नहीं सकते. हम केवल बरसे हुए ईश्‍वर की कृपा की जो बरसात है, हम केवल उसको संभाल सकते हैं. उसको संभालने की, कंजर्वेशन की योजना बनाना आपके डिपार्टमेंट का बहुत महत्‍वपूर्ण काम है और उसका कोई न कोई प्रोवीजन बजट में हो. हमारे क्षेत्र में ये वन ग्राम हैं और वन ग्रामों में सिंचाई परियोजनाओं को लागू करने में जो सबसे बड़ी तकलीफ है, वह आपके जो प्रति हैक्‍टेयर मानक होना चाहिये, वह अभी मात्र साढ़े तीन लाख रूपया प्रति हैक्‍टेयर है, जो आज की स्थिति में मंहगाई की मार है. निर्माण के जितने भी काम होते हैं, जमीन के बदले आप जमीन देते हैं या निजी भूमि है उनको भी देना है तो यह सबसे बड़ी रूकावट है. इस रूकावट की वजह से हमारे कोई से भी तालाब निर्माण और जितनी परियोजनाओं को हम लागू करते हैं तो यह रूकावट आती है और जिससे उसको पूर्ण करने में दिक्‍कतें हैं. माननीय मंत्री जी से मेरा आग्रह भी है कि इसको आप दूर करें और वजह के कारण ही कालीकुंडी तालाब, मिटावल तालाब, बेरछा तालाब, दामखेड़ा तालाब और रोशिया तेराज में भी यह तकलीफें आ रही है. हम लोग रूकावटें दूर करते-करते स्‍वीकृत तालाब को बनने में तीन से चार वर्ष लग जाते हैं. इसमें वन विभाग की अनुमति और साथ में लागत अधिक होना, यह दो तकलीफें दूर होना चाहिये. आप बहुत सीनियर मंत्री जी हैं और उनको बहुत लंबा अनुभव है तो आप इन  समस्‍याओं का जरूर समाधान करेंगे.

          सभापति महोदय, मेरी एक मांग और है, मुझे मालूम है कि हमारी एन.वी.डी.ए विभाग के माध्‍यम से जो परियोजनाएं चल रही हैं वह माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना है. वाटर लेवल को बढ़ाने के लिये तालाब और बेराज को बनाना भी बहुत आवश्‍यक है. क्‍योंकि जिस हिसाब से यदि इस वर्ष की बात करें तो जल स्‍तर इतना ज्‍यादा नीचे चला गया है कि पीने के पानी की भी बहुत किल्‍लत हो रही है. पी.एच.ई विभाग से बहुत सारी हमारी योजनाएं बन गयी हैं, टंकियां बन गयी हैं और पाइप लाइन डल गयी हैं तो जब जमीन में ही पानी नहीं है तो हम किस तरह से इन सबको सुचारू रूप से चालू कर पायेंगे. मेरी आपसे मांग है कि बोरवाल, कुड़ी गाड़ग्‍याम, घूपा बुर्जुग, मलगांव तालाब इनकी साध्‍यता के लिये कई साल से मैं आपसे मांग कर रही हूं. आज इस बार फिर निवेदन कर रही हूं कि इनको आप साध्‍यता दें और फिर प्रशासकीय स्‍वीकृति दें, ताकि क्षेत्र में जल स्‍तर भी बढ़े, किसानों को पानी भी मिले और पेयजल की समस्‍या भी हल हो. यह मेरा आपसे निवेदन है और बहुत आग्रह के साथ कहा है. सभापति महोदय, जो योजनाएं स्‍वीकृत हैं वह प्रारंभ हों. यह तीन चीजें मैंने आपसे कही हैं. मैं बहुत ज्‍यादा न बोलते हुए अपनी बात को विराम देती हूं. आपने बोलने का समय दिया उसके लिये बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          सुश्री ऊषा बाबू सिंह ठाकुर(डॉ.अम्‍बेडकर नगर)- माननीय सभापति जी, मैं जल संसाधन विभाग की मांग संख्‍या- 23 पर अपने विचार रखना चाहती हूं. जल संसाधन प्रभु प्रदत्‍त ऐसा अनुपम उपहार है, जिसकी एक बूंद भी आज तक विज्ञान, तकनीकी चाहे कितनी ही आगे बढ़ जाये पर पानी की एक बूंद बना नहीं सकती. इसीलिये सब विद्वतजन कहते हैं कि बूंद को सहेजा जाये, सदुपयोग किया जाये और प्रदेश और की समृद्धि को निरंतर बढ़ाया जाये. हमारे युगदृष्‍टा प्रधान मंत्री जी ने कहा कि वन ड्राप, मोर क्राप. उनके इस महामंत्र को हमारे कर्मठ कर्मयोगी मुख्‍य मंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने अपने आत्‍मसात किया और हमारे जल संसाधन मंत्री भाई तुलसी सिलावट जी अपनी पूरी क्षमता और पूरी मेहनत और लगन के साथ, इसे व्‍यावहारिक धरातल पर उतारने के लिये प्रतिबद्धित हो गये.

          माननीय सभापति जी, वर्ष 2003 में मध्‍य प्रदेश की वह दुर्गति थी कि सिर्फ साढ़े सात लाख हैक्‍टेयर सिंचित था. भारतीय पार्टी जब-जब नेतृत्‍व में आयी तो अपनी पंच निष्‍ठाओं को पूरी क्षमता के साथ धरातल पर उतारा. हमने जो कहा वह हमने करके दिखाया. हम रघुकुल रीति वाले हैं. हमने वादा किया था कि हम सिंचित क्षेत्र बढ़ायेंगे और वह हमने करके दिखाया,सिर्फ बयानबाजी नहीं की.

          सभापति जी, हम इस सिंचाई के रकबे को 50 लाख हैक्‍टेयर तक ले गये और इसके लिये 25 वृहद्, 114 मध्‍यम और 5692 लघु सिंचाई परियोजनाओं ने पूर्णता प्राप्‍त की तो ही हम इस लक्ष्‍य तक पहुंच पाये. हमारे हौसले अभी भी बुलंद हैं. हमारे मंत्री जी ने यह प्रण किया है कि 100 लाख हैक्‍टेयर अब हम सिंचित करेंगे, अगले कार्यकाल में और यह सिर्फ बयानबाजी नहीं है. इसके लिये  89 हजार 30  करोड़ का प्रावधान किया, 42  वृहद, 68 मध्यम, 381  लघु परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं और हम दावे से कह सकते हैं कि  जब ये योजनाएं पूर्णता  को प्राप्त करेंगी, तो  निश्चित रुप से  यह हम  100 लाख हेक्टेयर  के  लक्ष्य को प्राप्त कर लेंगे.  उसी मनुष्य का जीवन  सार्थक  माना जाता है शास्त्रों में, जो अपनी पूरी क्षमता, अपना सामर्थ्य, पुरखों के सपनों को  साकार करने में लगाये. हमारे भारत रत्न परम्  श्रद्धेय  अटल जी का एक सपना था कि  इस देश की   नदियों को जोड़ दिया जाये, ताकि देश अतिवृष्टि और अनावृष्टि से  बच सके  और समृद्धि के मार्ग  पर  अग्रसर हो.  हमारे  मुख्यमंत्री जी, हमारे जल संसाधन मंत्री, सिलावट  जी  ने दो अन्तर्राज्यीय  योजनाओं को स्वीकृति  दी है और इस काम को  युद्ध स्तर पर व्याव्हारिक धरातल  पर उतारेंगे.  पहली अन्तर्राज्यीय  नदी योजना केन बेतवा है.  इसमें 221   किलोमीटर की लिंक केनाल  बनाकर  बेतवा में  पानी डाल दिया जायेगा और इसके लिये जो 44605 करोड़ लगे, इसमें केंद्रांश 60 प्रतिशत है, राज्यांश  40 प्रतिशत है.  जो  माननीय साथी चिंता कर रहे हैं कि  बजट तो 9 हजार करोड़  का  है, तो केंद्र की असीम कृपा है कि  इस जल संसाधन के लिये  वह हमें बहुत बड़ा  अनुदान देने वाले हैं और  हमारी हर  योजना व्यावहारिक धरातल पर  उतने वाली है.  इससे बुन्देलखण्ड के  10 जिले,  228 गांव,  8 लाख 11 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी.  103 मेगावाट बिजली  बनेगी और  44 लाख आबादी  पीने का पानी प्राप्त करेगी.  दूसरी  जो अन्तर्राज्यीय  नदी  जोड़ो योजना है पार्वती काली सिंध  चम्बल लिंक  राष्ट्रीय योजना. इसमें  भी 72   हजार करोड़  का प्रावधान,  35 हजार करोड़ मध्यप्रदेश देगा,  37 हजार करोड़ राजस्थान देगा.  इसमें मालवा चम्बल के  13 जिले,  2094 गांव, 6 लाख 14 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी.  83 लाख  आबादी को पानी मिलेगा.  अब यह  अन्तर्राज्यीय  नदी  जोड़ो योजना है,  यह बुन्देलखण्ड के भाग्य  और भविष्य को  बदलेंगे, क्योंकि इससे  औद्योगीकरण आयेगा,  निवेश आयेगा, पर्यटन बढ़ेगा  और इस क्षेत्र के नागरिकों को रोजगार के नये अवसर  भी  मिलेंगे. ताप्ती  बेसिन मेगा रिचार्ज योजना  पर यह भूगर्भ  जल पुनर्भरण  की  बहुत ही बेहतर योजना  है, जो जल का भण्डारण  प्राकृतिक रुप से करेगी. यह आने वाली पीढ़ियों की समृद्धि  का मार्ग  प्रशस्त करेगी. इससे महाराष्ट्र  और  मध्यप्रदेश में हमारा खण्डवा, बुरहानपुर,  नेपानगर, खकनार, खालवा तहसीलें  इससे लाभान्वित होने वाली हैं.   जो सूक्ष्म,  लघु सिंचाई  परियोजनाएं हैं,  वह बहुत ही बेहतर मानी गईं, क्योंकि कम लागत  की और पानी का एक बूंद भी बर्बाद नहीं होता. पाइप  के माध्यम से सीधे खेत  में  पहुंचता है.  इन सब श्रेष्ठ कार्यों के लिये 2023 में केंद्रीय शक्ति जल मंत्रालय  ने हमारे जल संसाधन विभाग को पुरस्कृत भी किया.  हम पहला प्रदेश हैं,  जिसने बांध सुरक्षा अधिनियम,2021  के प्रावधानों को यहां पर लागू कर दिया. बांध की सुरक्षा के लिये  विषय विशेषज्ञों   की कमेटी  को भी हमने गठित कर दिया है.  इन सब बेहतरीन कार्यों के साथ साथ  जल संसाधन मंत्री, तुलसी भाई सिलावट  जी  की संवेदनशीलता को प्रणाम करती हूं कि  उन्होंने अपने विभाग में   45 अनुकम्पा   नियुक्तियां,  7 उत्कृष्ट खिलाड़ियों को और  303 उप यंत्री  और  153 सहायक यंत्रियों को  नियुक्ति पत्र देकर रोजगार का अवसर प्रदान  किया है.  इस मौके पर  धन्यवाद देना चाहती हूं कर्मठ कर्म योगी  मुख्यमंत्री, डॉ. मोहन यादव जी  को  और मेरे बहुत ही स्नेही भाई तुलसी  सिलावट जी  को, जो बिना मांगे ही  चिंता करते हैं सब क्षेत्रों की और  बड़ी उदारता के साथ  योजनाओं की स्वीकृति देते हैं.  मैं  डॉ. भीमराव अंबेडकर नगर महू से आती हूं, वहां  जानापाव  महेश्वर लिफ्ट इरीगेशन  परियोजना, 2008 से यह योजना चिर प्रतीक्षित थी,  कोई  इसे उठाकर स्वीकृति  देने को तैयार नहीं था, पर  मंत्री  जी ने बड़ी उदारता से इसकी चिंता की.  अब इसके माध्यम से  61  गांव  पेयजल का पानी प्राप्त करेंगे और  14 968 हेक्टेयर एरिया सिंचित होगा.  मैं उनकी इस उदारता के लिये  उनका कोटि कोटि धन्यवाद करती हूं.  प्रभु से प्रार्थना करती हूं  कि जल संसाधन विभाग इसी प्रकार सफलता के आयाम तय करता रहे, धन्यवाद, जयहिन्द.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक (परासिया)-- माननीय सभापति महोदय, मांग 23 पर अपने विचार व्यक्त करना चाहता हूं. माननीय जल संसाधन मंत्री जी का  ध्यान मेरे विधानसभा क्षेत्र परासिया को और ले जाना चाहता हूं और निवेदन करना चाहता हूं कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में  4 जलाशय हैं जो बहुत महत्वपूर्ण जलाशय हैं. मैं पहली बात कहना चाहता हू कि एक जलाशय मेरा ग्राम पंचायत दमुआ में है जो भीमसेन घाटी, घटामाली नदी का है इसका उल्लेख मैं इसलिये कर रहा हूं क्योंकि यह मेरे विधानसभा क्षेत्र का पूरा ट्रायवल एरिया है और इस ट्रायवल एरिया में अधिकतर लोग जो है उनके पास में कम रकवा की भूमि है, किसी के पास 3 एकड़ भूमि है, किसी के पास में 4 एकड़ की भूमि है और कोदो-कुटकी-सांवा के सीजन पर यह काम करते हैं, बोवनी करते हैं बाकी समय में जितने भी मेरी पंचायत क्षेत्र के लोग हैं यह ट्रायवल के लोग अपने गांव से पलायन कर जाते हैं, अपने छोटे छोटे बच्चों को अपने घर में छोड़ देते हैं जिससे कुपोषण भी बढ़ता है और बच्चों की पढ़ाई भी नहीं हो पाती है तो मेरा बोलने का तात्पर्य यह है कि यह इरी जलाशय दमुआ भीमसेन घाटी घटा माली नदी का यह जलाशय बनता है तो जो मेरे ट्रायवल एरिया के जो लोग वहां निवास करते हैं जो पलायन कर जाते हैं , जलाशय बनने के बाद में यदि इनको पानी मिल जायेगा तो निश्चित रूप से यह रूकेंगे और अपनी जितनी भी जमीन है चाहे वह 3 एकड़ हो, 4 एकड़ हो बहुत कम कम भूमि है तो उससे अपने खेतों में काम करके अपनी रोजी रोटी कमा सकते हैं अपने बच्चों का पालन पोषण कर सकते हैं. मेरा मंत्री जी से यही अनुरोध है कि मेरे क्षेत्र की यह बहुत महत्वपूर्ण योजना है, यदि इसको आप स्वीकृति प्रदान करेंगे तो निश्चित रूप से वहां के लोगों को इसका लाभ मिलेगा. इस योजना में डीपीआर बनने का काम चालू है, वॉटर स्कीम भी इसकी स्वीकृत हो गई है, तो अनुरोध है कि इसको आप स्वीकृति प्रदान कर देंगे तो आपकी कृपा होगी. साथ ही साथ ग्राम पंचायत मंडला-पंडापुर जो गांव है इसकी भी वॉटर स्कीम स्वीकृत है, डीपीआर का काम चालू है, मैं लगातार विभाग को बोल रहा हूं मगर विभाग कभी बोलता है कि ठेकेदार को हमने काम दे दिया है, ठेकेदार काम छोड़कर के चला जाता है, तो फिर विभाग करने लगता है तो ऐसे लगभग 3 साल से यह काम अभी डीपीआर का ही चल रहा है. इसके बाद जो झुर्रीटोला ग्राम है वहां पर भी यही स्थिति है कि डीपीआर बनने को तैयार है मगर वह स्वीकृति हेतु आप तक नहीं पहुंच पा रहा है. एक जोनबर्रा  का छोटा सा जलाशय है वहां पर पानी की बहुत दिक्कत है, क्योंकि यहां तीन चार गांव ऐसे हैं जो पहाड़ी पर बसे हुये हैं और इनकी जमीन नीचे हैं यदि इसमें बनेगा तो निश्चित रूप से उनको लाभ मिलेगा.

          माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान दिलाना चाहूंगा कि मेरे छिंदवाड़ा जिले की बहुत बड़ी योजना है. 2019 में जब कमलनाथ जी प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो साढ़े 4 हजार एकड़ की योजना आई थी संगम-टू का जो बांध है , जो कराहम काम्पलेक्स के नाम से पहले वो था, अभी उसमें बजट नहीं मिलने के कारण काम नहीं हो पा रहा है और इसमें एक दिक्कत और आ रही है कि जो भूमि का इसमे अधिग्रहण होना है उसमें बहुत ज्यादा विरोध पैदा हो रहा है भूमि का अधिग्रहण नहीं होने से इसका काम लगातार रूक रहा है.  मैं सरकार से अनुरोध करना चाहता हूं कि चूंकि जलाशय बनाना हमारे देश के अंदर आवश्यक हो गया है यदि समय पर जलाशय नहीं बनेंगे तो आने वाले समय में 25-50 साल के अंदर बहुत स्थिति पानी की बिगड़ेगी इसलिये जलाशय का होना जरूरी है. और जलाशय बनाने में सबसे ज्यादा कठिनाई का सामना करना पड़ता है भूमि अधिग्रहण करने का और भूमि अधिग्रहण करने की यदि अच्छी योजना बने, अभी तो कुछ योजना है परंतु इसके बाद भी ज्यादा से ज्यादा लोगों को मुआवजे मिले, नोकरी का प्रावधान हो , कुछ इस तरीके की योजना बनायेंगे तो भूमि के अधिग्रहण में जो दिक्कत आती है वह दिक्कत निश्चित रूप से आने वाले समय में समाप्त होगी.

          माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय जल संसाधन मंत्री जी का ध्यान दिलाना चाहता हूं कि जो संगम-टू का जो बांध बन रहा है, जलाशय बन रहा है. मेरे क्षेत्र में 4 नगरीय पंचायतें हैं जहां पर हमेशा पानी की दिक्कत होती है, कष्ट होता है, गर्मी के समय में पानी नहीं मिल पाता है, तो मेरा निवेदन है कि जो चांदामीटर नगर पंचायत, परासिया , नगर पालिका, बड़कुई, नगर पंचायत और न्यूटन नगर पंचायत को इस संगम-टू से यदि जोड़ दिया जाये तो पीने के पानी की उपलब्धता, निस्तार के पानी की उपलब्धता इस बांध से यदि हो जाती है तो निश्चित रूप से बहुत बड़ा क्षेत्र नगरीय निकाय का है, बड़ी संख्या में लोग यहां पर रहते हैं तो निश्चित  रूप से इसका लाभ वहां के रहने वाले लोगों को मिलेगा तो मेरा आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन है इसके लिये कई बार मैं मंत्री जी से मिला हूं, कई मैंने आपको पत्र भी दिये हैं लगभग 10-12 पत्र आपको दिये हैं और तीन चार बार मिलकर के भी आपसे आग्रह किया है तो सभापति जी मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि मैं बहुत बार आपसे मिला हूं, आग्रह कर चुका हूं अनुरोध है कि मेरे क्षेत्र के जो तीन चार जलाशय हैं यदि इसको आप स्वीकृत कर देंगे तो मेरे क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिलेगा. सभापति जी आपने बोलने का अवसर प्रदान किया उसके लिये आपको धन्यवाद.

          श्री आशीष गोविंद शर्मा (खातेगांव) -- धन्‍यवाद माननीय सभापति महोदय. बहुत सारे सदस्‍य इस मांग संख्‍या पर बोल चुके हैं मैं रिपिटेशन नहीं करना चाहता हूं. मांग संख्‍या 23 का समर्थन करता हूं. पानी मनुष्‍य के लिये, प्राणी के लिये, जीव, वनस्‍पति के लिये एक अत्‍यंत आवश्‍यक पदार्थ है जिसकी रचना वास्‍तव में किसी लैब में नहीं की जा सकती. यह प्रकृति प्रदत्‍त वह वस्‍तु है जिससे प्राणों का संचार होता है जिससे प्राण शरीर में बने रहते हैं. इसलिये चाहे खेती हो, उद्योग हो, मनुष्‍य मात्र हो, इन सबको पानी की आवश्‍यकता होती है. मध्‍यप्रदेश जिसे नदियों का मायका कहा जाता है. मध्‍यप्रदेश से लगभग 207 नदियां निकलती हैं और विभिन्‍न महासागरों में मिलती हैं. इस कारण से हमारे इस प्रदेश में हमारी नदियों के जल का समुचित उपयोग हो इसकी व्‍यवस्‍था, इसका प्रबंधन, मध्‍यप्रदेश की सरकार ने किया है. निश्चित ही प्राचीन समय में राजा-महाराजाओं के समय पेयजल के लिये बावड़ी और कुँओं का निर्माण कराया जाता था और खेतों पर कुँआ ही किसान की सिंचाई का एक साधन होता था जिससे वह परम्‍परागत तरीकों से अपनी फसलों की सिंचाई करता था, अन्‍यथा केवल बारिश के मौसम पर ही किसान की खेती निर्भर रहती थी. बारिश में खरीफ की फसल ले पाता था इसके अलावा अन्‍य फसलें लेना उसके वश की बात नहीं थी, लेकिन वास्‍तव में वर्ष 2003 के पश्‍चात् जब मध्‍यप्रदेश में किसान को सिंचाई और बिजली की सुविधा देने का वचन देने वाली सरकार बनी, भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सिंचाई सुविधाओं के विकास के लिये, ग्रामीण क्षेत्र के पेयजल के विस्‍तार के लिये लगातार काम किये और जब लगातार काम किसी एक दिशा में होते हैं तो अनुकूल परिणाम सामने आते हैं. आज मध्‍यप्रदेश की सिंचाई क्षमता निश्चित ही 50 लाख हेक्‍टेयर के आस-पास हम प्राप्‍त कर चुके हैं और जब यह 100 लाख हेक्‍टेयर के आंकड़े को छुएगी तो हम कह सकेंगे कि हमारा प्रदेश सिंचाई की सुविधाओं में आत्‍मनिर्भर हो गया है. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी, माननीय हमारे जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट जी को धन्‍यवाद देता हूं जो जन प्रतिनिधियों की आवश्‍यकताओं के अनुरूप छोटे-छोटे बैराज डेम छोटी-छोटी जल संरचना की इकाइयां बनाकर हमारे क्षेत्र को सिंचाई सुविधा देने की दिशा में काम कर रहे हैं. चाहे पार्वती हो, नर्मदा मैया हो, चम्‍बल, बेतवा, ताप्‍ती, माही, सोन इन सब नदियों पर विभिन्‍न सिंचाई परियोजनाओं का विकास आने वाले समय में मध्‍यप्रदेश की खेती की विकास गाथा को लिखने में सक्षम होगा. इन परियोजनाओं से न सिर्फ अन्‍य परियोजनाओं पर आधारित उद्योग भी फलते-फूलते हैं साथ ही साथ कृषि के क्षेत्र में किसानों को एक बहुत बड़ी सुविधा मिलती है. जो सिंचाई परियोजनाएं बन रही हैं उसके कारण किसानों का बिजली का जो भार है वह भी कम होगा. हमारी इंदिरा सागर परियोजना में बांध के कारण जो बहुत सारा जल पर आधारित पर्यटन प्रारंभ हुआ है उससे मध्‍यप्रदेश के पर्यटन के क्षेत्र को उचाइयां मिलती हैं. मैं माननीय प्रधान मंत्री जी की महत्‍वाकांक्षी योजनाओं के विषय में बताना चाहता हूं.

          सभापति महोदय -- आशीष जी, अपने क्षेत्र की समस्‍याओं पर बोलकर समाप्‍त करें.

          श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा -- सभापति महोदय, आधा मिनट. नदियों को जोड़ना इसलिये आवश्‍यक है क्‍योंकि जो बारिश का जल होता है उसको यदि सहेज लिया जाए और सही दिशा में भेज दिया जाए तो सूखे क्षेत्र में पानी की व्‍यवस्‍था हो सकती है. मैं नदी जोड़ो परियोजना में मध्‍यप्रदेश के द्वारा किये जा रहे कार्यों की सराहना करता हूं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी, माननीय जल संसाधन मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं. जल शक्ति मंत्रालय द्वारा मध्‍यप्रदेश को जो अवार्ड दिये गये हैं, नेशनल अवार्ड फॉर बेस्‍ट स्‍टेट फॉर ट्रांसफार्मेशन ऑफ कन्‍वेंशनल सिस्‍टम टू प्रिस्‍टाइप पाइप सिस्‍टम फ्रॉम रिजरवायर टू फॉर्म किया गया. इसके लिये मध्‍यप्रदेश की सरकार को बधाई देता हूं और अपने क्षेत्र में मॉं रेवा सिंचाई परियोजना, छीपानेर माइक्रो इरीगेशन परियोजना, जो सरकार के द्वारा दी गई हैं उसके लिये सरकार को धन्‍यवाद देता हूं और यह मांग करता हूं कि जो गांव इन परियोजनाओं से छूटे हैं उनका भी सर्वे कराकर उन्‍हें इन परियोजनाओं में शामिल किया जाए. साथ ही साथ सिंचाई के लिये जो नहरें हमारे विभाग के द्वारा बनाई जाती हैं उनका वर्ष में एक बार ठीक से मेंटेनेंस होना ही चाहिये. मेरे विधान सभा क्षेत्र के विक्रमपुर, आमला, सुलगांव के बैराज की साध्‍यता हो चुकी है लेकिन इनकी स्‍वीकृति अगर आपके द्वारा कर दी जाएगी तो इन गांवों के किसानों को भी सिंचाई सुविधा का लाभ मिल सकेगा. माननीय सभापति जी, आपके बोलने का अवसर दिया इसके लिये धन्‍यवाद देता हूं.

            श्री सोहनलाल बाल्मिक -- सभापति महोदय, दो माननीय सदस्य बोलने के लिए रह गए हैं.   श्री नीलेश उइके और अभिजीत शाह यह बाहर चले गए थे. इनको भी बोलने का मौका दे दीजिएगा.

          श्री सुरेश राजे (डबरा) -- माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्या 23 पर अपनी बात रखने के लिए खड़ा हुआ हूं.

          माननीय सभापति महोदय, तमाम वरिष्ठ सदस्य अभी सदन को यह जानकारी दे रहे थे कि हमारी कौन-कौन सी बड़ी परियोजनाएं चल रही हैं. चलना भी चाहिए. 20-30 साल पहले जो जरुरत थी, इस पर भी विचार करें जब हम कुछ नहीं थे तब भी परियोजनाएं शुरु हुईं. उनका भी अपना महत्व था. प्रदेश में नई योजनाएं बनना चाहिए, परियोजनाएं चलना चाहिए. समय पर पूर्ण होना चाहिए. यह अच्छी बात है.

          माननीय सभापति महोदय, मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा. हमारे यहां हरसी नहर है. इसके बारे में कहते हैं यह एशिया में मिट्टी से बना पहला डेम था. इससे लाखों की संख्या में अन्नदाता अन्न उपजाते हैं और उस क्षेत्र में समृद्धि लाने का काम करते हैं. यह नहर अब जीर्णशीर्ण स्थिति में आ गई है. लंबे समय से वहां प्रतीक्षा की जा रही है कि इस नहर का जीर्णोद्धार किया जाए. हरसी से नहर चलकर डी-17 तक जाती है. उसके नीचे का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है इस कारण जितना पानी हमारे खेतों में जाना चाहिए उतना पानी अपव्यय में चला जाता है. इस पर मंत्री महोदय ध्यान देंगे तो हमारे क्षेत्र के किसानों पर बहुत बड़ी मेहरबानी होगी. इसी क्रम में डी-17 से निकलने वाली जो माइनर नहरें हैं. अभी हाल ही में जब किसान को पानी की जरुरत थी तो डी-15 में पानी उतनी गति से नहीं पहुंचा सके क्योंकि उसके गेट खराब थे और जब वहां जरुरत नहीं थी गेट को बंद करना था, गेट बंद होते तो बी-16, एस आर और डी-17 में पानी जाता.

          माननीय सभापति महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के संज्ञान में लाना चाहता हूँ कि इस कारण जब पानी की जरुरत नहीं थी गेट खराब होने के कारण वह डी-15 में चला गया वहां पर करीब 250-300 बीघा जमीन में आई हुई फसल, जो तैयार होने को थी उसका नुकसान हो गया, क्योंकि वहां पानी की जरुरत नहीं थी. इसी तरह जो पानी डी-17 से नीचे डी-16 को, एसआर को जाना था, टेल पोर्शन पर जाना था. वह पानी वहां नहीं पहुंच पा रहा है. गेटों और नहर दोनों की हालत बद से बदतर है.

          माननीय सभापति महोदय, वहां जो छोटे-छोटे कर्मचारी हैं वो रिटायर होते जा रहे हैं और उनकी जगह नई भर्ती नहीं कर रहे हैं. एसडीओ, ईई, सीई तो ऑर्डर दे सकते हैं लेकिन पानी की देखरेख करने का काम तो छोटे कर्मचारी करते हैं, इस पर कृपया मंत्री जी ध्यान देंगे. केनाल में जहां से पानी छोड़ा जाता है वहां पर गुमठियां होती हैं जो कि आजादी के पहले से बनी हुई थीं वे पूरी की पूरी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं बरसात और धूप के समय में कर्मचारियों को परेशानी होती है. कृपा करके इनका नवीनीकरण कराएं.

          माननीय सभापति महोदय, एक बहुत ही महती योजना है माँ रतनगढ़ नहर परियोजना जिसको मेरे विधान सभा क्षेत्र में जिगनिया बारकरी नहर कहते हैं. इसका 2-3 बार भूमि पूजन और शिलान्यास भी हो चुका है. सभापति महोदय, समझ में ही नहीं आ रहा कि यह नहर किस गति से और किस डिजाइन से बन रही है. जब किसान की फसल बोने का समय आता है तो कर्मचारी पाइप लेकर पहुंच जाते हैं या कहूं कि जैसे ही चुनाव आता है तो बड़े-बड़े ट्रकों में भरकर पाइप पहुंच जाते हैं. मैं मंत्री जी के संज्ञान में लाना चाहता हूं कि जैसे ही चुनाव जाता है तो वह पाइप भी चले जाते हैं, वह नहर भी चली जाती है और पता ही नहीं चलता. आखिरकार यह नहर जिसकी लागत लगभग 1400 करोड़ रुपए आना थी तो अब जो जानकारी आई है कि लागत बढ़ गई है लेकिन काम पूर्ण नहीं हो रहा है तो मेरा आपसे आग्रह है कि कम से कम इस परियोजना पर सरकार का इतना पैसा खर्च हो चुका है और समयसीमा भी निकल चुकी है कृपया कर अब इसे पूरा कराएं.

          मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि हमारे यहां एक लढ़ेरा डेम जिसे कहते हैं कि बहुत लंबे समय से प्रतीक्षारत है बहुत छोटा डेम है, बहुत कम लागत आएगी आप इस डेम को बनवा दें तो इससे कम से कम 70 से 80 गांव लाभान्वित होंगे. उनको न जिगनियावारकरी से लाभ मिलने वाला है और न ही हमारी जो हर्शी नहर है उससे यह गांव लाभान्वित हो रहे हैं. अगर यह लढ़ेरा डेम बनवाने की कृपा करेंगे तो हमारे क्षेत्र की जनता और मैं स्‍वयं आपका बहुत आभारी रहूंगा आपने बोलने का मौका दिया इसके लिए धन्‍यवाद.

          श्री अनिल जैन कालूहेड़ा (उज्‍जैन-उत्‍तर)-- माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 23 का समर्थन करता हूं. जल ही जीवन है और जल एक ऐसा स्‍त्रोत है कि जिसके अभाव में जीव जन्‍तु, पशु, पक्षी पेड़, पौधे उनका जीना मुश्किल है इसीलिए जल के साथ-साथ जितने भी तत्‍व हैं चाहे वह पृथ्‍वी तत्‍व हो, आकाश तत्‍व हो, अग्नि तत्‍व हो इन सबकी हमारे जीवन में आवश्‍यकता है. इसमें से एक जल है और जल के बारे में तो हमारे मालवा में कहा गया है कि ''मालव माटी गहन गंभीर'' पग-पग रोटी डग-डग नीर'' चूंकि जल के बिना मैं तो ऐसा मानता हूं और कहा भी जाता है कि यदि विश्‍व के अंदर अब कोई बड़ा युद्ध होगा तो वह जल के कारण ही होगा क्‍योंकि जल का स्‍त्रोत इतना महत्‍वपूर्ण होता जा रहा है. मैं पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी जी को नमन करता हूं जिन्‍होंने कहा था कि रिवर इंटर लिंकिंग प्रोजेक्‍ट इस देश में लाएंगे और उस सपने को साकार करने का काम देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश के डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में और जल संसाधन मंत्री जी की अगुवाई में यह काम पूरा होता दिखाई दे रहा है. केन, बेतवा हो या चम्‍ब‍ल, कालीसिंध, पार्वती हो इन नदियों पर बड़े-बडे़ स्‍टॉप डेम बनाकर जहां तक हो सके तो पाइप के द्वारा इंटरलिंकिंग किया जाएगा. जहां डेल्‍टा भाग है वहां पर केनाल के माध्‍यम से एक नदी से दूसरी नदी को जोड़ने का काम किया जाए. इससे हमारे बुंदेलखण्‍ड का क्षेत्र मालवा का क्षेत्र, ग्‍वालियर का क्षेत्र  है जहां बड़ी मात्रा में इन क्षेत्रों में सिंचाई होगी. यह योजना जब पूर्ण हो जाएगी तो मैं मानता हूं कि मध्‍यप्रदेश के अधिकांश भाग में सिंचाई के संसाधन और सिंचाई की योजना सरकार के द्वारा पहुंच जाएगी. वर्ष 2003 के अंदर जहां हम 7.5 लाख हेक्‍टेयर भूमि पर सिंचाई करते थे परंतु वर्तमान में वर्ष 2025 में 50 लाख हेक्‍टेयर भूमि पर सिंचाई की योजना है और उसमें जल संसाधन विभाग के द्वारा 44 लाख हेक्‍टेयर भूमि पर सिंचाई योजना विकसित की गई है. इसलिए मैं, माननीय मुख्‍यमंत्री जी का और जल संसाधन मंत्री जी का, बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं. आगामी 2 वर्षों में 65 लाख हेक्‍टेयर और 5 वर्षों में 1 लाख हेक्‍टेयर भूमि पर सिंचाई के संसाधन विकसित किये जायेंगे. यह उपलब्धि मध्‍यप्रदेश सरकार की, डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में होने वाली है. हमारी सरकार ने, जल संसाधन विभाग ने, 2 नदियों के साथ ही, ताप्‍ती-बेसिन और मेगा रिचार्ज योजना, यह अपने आप में एक नई योजना है, जहां बड़े-बड़े डैम बन जायेंगे और अंदर ही अंदर उस क्षेत्र और पठारीय भाग का रिचार्ज होगा, उससे भी अनुमानित 1 लाख 23 हजार हेक्‍टेयर भूमि, रिचार्ज के द्वारा या कैनाल के द्वारा या अंडरग्राउण्‍ड पाईप के द्वारा या पाईप लाईन के द्वारा वहां सिंचाई के साधन विकसित होंगे. हमारे प्रदेश में सिंचाई के क्षेत्र के विकास के लिए, मुख्‍यमंत्री जी और जल संसाधन मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं कि आपके कुशल नेतृत्‍व में, आपके कामों के कारण, आपकी दूरदर्शिता के कारण, मध्‍यप्रदेश को दो अवॉर्ड मिले हैं. पहला National Water Award in the Best State for transmission of the conservation system to pressurizes pipes system from reserve water for और दूसरा पुरस्‍कार Central Board of Irrigation and power award प्रदान किया गया. मंत्री जी आपकी योजनायें, मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में कारगर सिद्ध होती जा रही हैं.

2.11 बजे

{अध्‍यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

          अध्‍यक्ष महोदय, उज्‍जैन के अंदर अनेक योजनाओं के लिए भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं. उज्‍जैन में अभी दो बड़ी योजनाओं के साथ-साथ, तीसरी योजना चितावद परियोजना जो कि 22 सौ करोड़ रुपये की है, जिसमें 65 हजार हेक्‍टेयर भूमि में सिंचाई होगी, यह चितावद परियोजना, क्षिप्रा नदी पर बनने जा रही है, इसके लिए माननीय मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद ज्ञापित करना चाहूंगा. भारत वर्ष में एक नई तकनीक के हिसाब से उज्‍जैन में क्षिप्रा नदी से सेवरखेड़ी सिलारखेड़ी तक, एक डैम इस प्रकार का डैम, जो कि एक तालाब था, उस तालाब के आस-पास पूरी सीमेंट कांक्रीट की दीवार बनाकर, जिससे किसानों की अधिक भूमि का अधिग्रहण न हो, कम क्षेत्रफल में बड़ी-बड़ी कांक्रीट की दीवार बनाकर, सेलारखेड़ी में पानी का स्‍टोरेज बारिश के दिनों में, क्षिप्रा मैय्या से किया जायेगा. क्षिप्रा मैय्या में भी छोटा डैम बनाया गया है, जिससे किसानों की अधिक जमीन डूब में न आये.

          अध्‍यक्ष महोदय, सिलारखेड़ी से साइफन के सिद्धांत के अनुसार वापस पानी को छोड़ दिया जायेगा, जिससे क्षिप्रा मैय्या के अंदर पानी आयेगा और क्षिप्रा मैय्या अविरल निर्मल बहती रहेगी.

          अध्‍यक्ष महोदय, कान्‍ह क्‍लोज़ डक्‍ट परियोजना जो कि 9 सौ 19 करोड़ रुपये की है, उसमें 12 किलोमीटर की टनल है जो‍ कि 100 फीट गहरी है और 18 किलोमीटर की कैनाल है, यह भी अपने आप में देखने लायक परियोजना है, आप सभी से आग्रह है कि आप वहां पधारें तो मैं आप सभी को वहां ले जाऊंगा, इतनी अच्‍छी परियोजना मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में, जल संसाधन मंत्री जी ने हमें यह योजना दी है, यह बहुत बड़ी उपलब्धि है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  कृपया समाप्‍त करें, अभी और बहुत से विभाग चर्चा हेतु शेष हैं.

          श्री अनिल जैन कालूहेड़ा-  अध्‍यक्ष महोदय, कान्‍ह नदी पर 250 MLD का Water Effluent treatment plant. लगेगा, जिसके कारण कान्‍ह नदी भी शुद्ध होकर बहेगी. इस प्रकार से क्षिप्रा मैय्या निर्मल बहती रहेगी, इसके लिए अध्‍यक्ष महोदय आपको, माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी एवं जल संसाधन मंत्री को बहुत-बहुत धन्‍यवाद ज्ञापित करना चाहता हूं.

          श्री मधु भगत (परसवाड़ा) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद. मैं मांग संख्‍या 23 के विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं ज्‍यादा भूमिका न बांधते हुए यह कहना चाहता हूँ कि जल किसान के लिए भगवान के बराबर है. किसान के अन्‍न पर पूरा भारत निर्भर है, जो सिंचाई योजनाएं हैं, परसवाड़ा विधान सभा के अंतर्गत लगभग-लगभग जो टैंक हैं, जो जलाशय हैं, जो निर्माणाधीन योजनाएं हैं, जो भविष्‍य की योजनाएं है. उनमें सबसे महत्‍वपूर्ण योजना माइक्रो इरिगेशन की है, उस माइक्रो इरिगेशन में लामटा में कार्य लगभग पूर्णता की ओर है, उसके लिए मैं माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ. दूसरा, माइक्रो इरिगेशन की एक योजना बगलीपाट है, जो लगभग 55 गांवों को जोड़ती है और उसकी प्रशासकीय सारी स्‍वीकृतियां हो गई हैं, सिर्फ अनुबंध के लिए रखा हुआ है. अगर अनुबंध की स्‍वीकृति, ईएनसी और मंत्री महोदय कर देंगे तो अच्‍छा होगा. निश्चित तौर पर इसमें काफी समय से विलम्‍ब हो रहा है, ताकि टेण्‍डर कॉल हो और यह वर्किंग पर आए. उसी प्रकार पैतालटैंक है, जिसके अन्‍दर धारा 11 की कार्यवाही हो चुकी है, धारा 19 की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है, वहां मुआवजा अगर मिल जाता है, तो वहां पर भी किसानों को लाभ पहुँचेगा और मुआवजा किसानों को मिल सकेगा.         

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसी प्रकार मानपुर नहर, जो धारा-4 की प्रक्रिया में है, इसमें एसडीएम कार्यवाही रोककर रखे हुए हैं. ये छोटी-छोटी चीजें हैं. अगर कार्यवाही यहां से एसडीएम, ईई, सीई एवं ईएनसी यहीं तक घूमती रहेगी तो हमारा जो वित्‍तीय बजट होता है, जो नहर के माध्‍यम से किसानों को लाभ पहुँचाने में कहीं न कहीं प्रभावित होता है. मैं वर्ष 2013 में सदन में था, सतनारी बांध की मैंने मांग की थी, चूंकि मैं वर्ष 2018 में सदन का सदस्‍य नहीं था, मैं वर्ष 2023 में पुन: विधायक बना, तो वह योजना उस समय तक सफल हो गई, लेकिन वह योजना महत्‍वपूर्ण है, वह सिर्फ फॉरेस्‍ट विभाग और जल संसाधन विभाग में कोऑर्डिनेशन नहीं होने की वजह से वह योजना डम्‍प पड़ी हुई है, जिसमें भ्रष्‍टाचार हुआ है, वह ठेकेदार वहां से भाग गया है. अगर आप यह करेंगे तो बहुत ही अच्‍छा होगा, किसानों के हित में होगा. इसी प्रकार मैं और ज्‍यादा नहीं बोलूँगा. मैं काम की बातें ज्‍यादा करता हूँ और मुझे शेरो-शायरी नहीं आती है. मैं कोशिश कर रहा हूँ कि कुछ नवीन जलाशय हैं कि जिनके ऊपर अगर आप ध्‍यान देंगे, तो अच्‍छा होगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक बैगा नगरी है, जिसकी डीपीआर ईएनसी के पास है. मंत्री महोदय अगर उस पर ध्‍यान देंगे तो निश्चित तौर पर वह डीपीआर कम्‍प‍लीट हो जायेगी, तो वह आगे जाकर नवीन निर्माण में आएगा. एक चरेगांव का जलाशय है, जिस जलाशय की डीपीआर सीई ऑफिस में रखी हुई है. यह सब चीजें कहीं न कहीं विभाग में रुकते हुए जाती हैं और जिनकी वजह से विलम्‍ब होता है. एक झालीटोला स्‍टॉपडेम भी अगर डिपार्टमेंट नोट कर लें, तो यह सारी परसवाड़ा विधान सभा के अंतर्गत की बातें हैं. एक और विषय है- धूति बांध. धूति हमारा बहुत ही प्राचीन ब्रिटेन के जमाने का वह बांध है, जहां पानी थोड़ा कम होता है तो हमको सिवनी से, भीमगढ़ से पानी लेकर उस डेम में डालना पड़ता है और धूति से बाइटेड से लगभग-लगभग 80 किलोमीटर तक वह किसान को सिंचाई में बहुत मदद करता है, उसकी नहर जर्जर है और उसका भी टेण्‍डर लग चुका है, वह भी कहीं न कहीं पर भोपाल में ईएनसी के पास है, उस पर भी ध्‍यान दें. ऐसी महत्‍वपूर्ण चीजें हैं, अगर जल संसाधन विभाग ध्‍यान देगा तो वह किसानों के हित में होगा और अगर आप लोग किसान की आय दोगुनी करना चाहते हैं, तो उनको जल्‍दी वहां तक पहुँचाएं और विभाग पर ध्‍यान दें. अध्‍यक्ष जी, आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद.      

            श्री कमल मर्सकोले (बरघाट) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं वित्‍तीय वर्ष 2025-26 की अनुदान मांग संख्‍या-23 जल संसाधन विभाग पर अपनी बात रखने के लिए खड़ा हुआ हूँ. हमारे देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री माननीय नरेन्‍द्र भाई मोदी जी ने विकसित भारत का, समृद्ध भारत का, शक्‍तिशाली भारत का जो संकल्‍प लिया है, उसी दिशा में कृषि को लाभ का धन्‍धा बनाने के लिए हर किसान के खेत तक सिंचाई की व्‍यवस्‍था हो और उनको पेयजल सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी की सरकार प्रतिबद्ध है, संकल्‍पबद्ध है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसानों को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए सिंचाई का रकबा बढ़ाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं. जहां पर पानी रुक सकता है, जहां पर पानी ठहर सकता है, स्‍टोर हो सकता है, वहां पर छोटे-छोटे तालाब और जलाशय बनाने का कार्य निरंतर भाजपा की सरकार ने किया है. जो सिंचाई परियोजनाएं वर्षों से लंबित थीं, उन्‍हें भी पूर्ण करने का काम सरकार ने किया है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे बताते हुए खुशी और प्रसन्‍नता है कि जहां वर्ष 2003 में साढ़े 7 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती थी, इन 20-22 सालों में भाजपा की सरकार के द्वारा विभिन्‍न सिंचाई परियोजनाओं के माध्‍यम से 50 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है. जिसमें से केवल जल संसाधन विभाग द्वारा कृषि के क्षेत्र में आज 44 लाख हेक्‍टेयर  में सिंचाई हो रही है. अगले 5 वर्ष में सरकार ने लक्ष्‍य निर्धारित किया है कि 50 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र से बढ़ाकर के 100 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई का रकबा होगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे देश के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्‍न परम आदरणीय अटल बिहारी वाजपेई जी की महात्‍वाकांक्षी योजना नदी जोड़ो योजना थी. उस महात्‍वाकांक्षी योजना को भी मूर्त रूप देने का काम सरकार द्वारा निरंतर किया जा रहा है. इस दिशा में प्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी की सरकार संकल्‍पबद्ध है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र की कुछ मांगें और समस्‍याएं हैं. काचना मण्‍डी जलाशय की स्‍वीकृति वर्ष 2012-13 में मिली थी. इससे रबि और खरीफ की लगभग 10 हजार एकड़ जमीन सिंचित होनी है. इसका कार्य वर्ष 2018 में पूरा हो गया और जल भराव भी हो रहा है, लेकिन नहरों का निर्माण कार्य आज भी आधा-अधूरा है और काम बंद है. इससे हमारे किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है. मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि शीघ्र नहरों का निर्माण कार्य प्रारंभ कराएं ताकि अन्‍नदाता किसानों के खेतों में पानी पहुँच सके.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे विधान क्षेत्र के एरमा जलाशय के निर्माण की स्‍वीकृति वर्ष 2017-18 में मिली थी, इसका भी काम आधा-अधूरा है और काम बंद है. आपके माध्‍यम से मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करता हूँ कि शीघ्र ही जलाशय निर्माण का कार्य पूर्ण हो जाए ताकि किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सके.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा के ग्राम जाम में स्‍थित जामरान एक जगह है, यदि जलाशय निर्माण के लिए सर्वे करा के जामरान जलाशय के निर्माण की स्‍वीकृति मिल जाती है तो इससे 12 से 15 गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा के अरी-शुक्‍ला जलाशय, बोरी जलाशय, भालीवाड़ा चक्‍की, खमरिया जलाशय, चीचवन जलाशय, सागर जलाशय...

          अध्‍यक्ष महोदय -- कमल जी, कृपया समाप्‍त करें.

          श्री कमल मर्सकोले -- अध्‍यक्ष महोदय, यहां की नहरें अत्‍यन्‍त जर्जर अवस्‍था में हैं. टूटी-फूटी अवस्‍था में हैं और इस कारण किसानों को टेल तक सिंचाई के लिये पानी नहीं मिल पाता अत: मेरा आपसे अनुरोध है कि इन चारों जलाशयों की नहरों का सीमेंट कांक्रीट,नहर निर्माण,लाईनिंग का काम यदि हो जाता है तो निश्चित रूप से किसानों को पानी का लाभ मिलेगा. माचागोरा जलाशय की नहरों का विस्तारीकरण,माइक्रो इरीगेशन के माध्यम से यदि मेरे विधान सभा क्षेत्र में सुकतरा,धोबोसर्रा,मोहगांव,भारतपाक,चक्की खमरिया,ग्वारी,बेलपेट,परतापुर क्षेत्र में हो जाये तो किसानों को सिंचाई का बहुत लाभ मिलेगा. मेरे विधान सभा क्षेत्र के ऐरमा में स्थित एक खंडूबगरा एक स्थान है यहां जलाशय निर्माण के लिये सर्वे करवाकर जलाशय निर्माण की स्वीकृति मिल जाए तो लगभग 7 से 10 गांवों के किसानों को सिंचाई के लिये पानी मिल सकेगा. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया धन्यवाद.

          श्री रजनीश हरवंश सिंह(केवलारी) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 23 पर अपने विचार रखने जा रहा हूं. आपका पूरा-पूरा संरक्षण चाहूंगा कि यह विभाग सारे विभागों में अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है क्योंकि सीधे इस विभाग से अन्नदाता किसान जुड़ा हुआ है और जब किसान खुशहाल रहेगा तो हमारा पूरा प्रदेश यश वैभव कीर्ति उन्नति और प्रगति की ओर अग्रसर होगा. सबकी यही मंशा है कि अन्नदाता किसानों को पानी मिलना चाहिये और सरकार इस ओर पहल भी कर रही है काम भी कर रही है. मैंने ध्यानाकर्षण के माध्यम से 11 तारीख को आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी के संज्ञान में लाने का प्रयास किया और मैं उनको धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने आज के 11 दिन पूर्व आपके आदेशानुसार एक जांच समिति गठित करने के लिये भी बोला था कि हमारे सरकारी अमले की गल्ती के कारण जो टेल के 8 संस्थाओं तक पानी नहीं पहुंचा है उसका सर्वे कराकर कुछ न कुछ मुआवजे  के रूप में सहयोग की धनराशि देने की कृपा मेरे क्षेत्र के किसानों के लिये करेंगे. मैं फिर से मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि अभी तक जिला कलेक्टर के पास यहां से कोई आदेश उनके पास नहीं गया है कि सर्वे कराना है कि सर्वे नहीं कराना है. आज ही आप एक आदेश का कागज जिला कलेक्टर को भेज दें अभी वहां गुंजाईश है अभी 8 से 10 दिन है कि हमारे यहां की कटाई रुकी हुई है अगर मौके पर फसल नहीं दिखी तो हम सर्वे किस बात का करेंगे. मेरी यह प्रार्थना मंत्री जी से है. मैं सुझाव देना चाहूंगा कि जब बांध की नहरें बनती हैं तो उनमें सीपेज होता है एक ओर किसान की जमीन जाती है उसको उस समय तत्कालीन व्यवस्था में मुआवजा मिल जाता है लेकिन साल दो साल तीन साल के बाद जब वह नहर पानी पी लेती है धीरे-धीरे सुराख बनता है और सीपेज होता है वाटर लागिंग होती है और उन किसानों की जमीन में किसी की पांच,किसी की दस एकड़ जिसकी जैसी जमीन है तो वह वहां पर फसल नहीं बो पाता तो ऐसे कृषकों को चिन्हित करके जो हमारी बड़ी-बड़ी योजनाएं हैं जिससे हजारों किसानों को लाभ मिलता है लेकिन कुछ किसान जिनकी जमीन भी जाती है और सीपेज के होने से वह अपने परिवार का जीवन यापन नहीं कर सकते तो उस दूरी पर सीमेंट कांक्रीटीकरण हो जाये तो उनके खेतों में वाटर लॉगिंग,सीपेज नहीं होगा. फिर मेरे क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं बांध बनने की, बड़े बांध तो संजय सरोवर का बन गया है इतना बड़ा बांध कि वहां कोई ऐसी जगह नहीं है परन्तु लघु बांध बन सकते हैं तो मेरा जो आदिवासी ब्लाक धनौरा आता है. वहां उमरपानी,साजपानी,धनेरी इसके बीच में पहाड़ियां हैं यहां पर अगर सर्वे करवा दें तो एक लघु बांध बन सकता है जहां से हमारे आदिवासी भाईयों के रूखे और सूखे खेत आबाद हो सकते हैं, वहां पर भी हरित क्रांति आ सकती है. फिर मेरा आपसे आग्रह है कि आपकी अपार संपदा है जल संसाधन विभाग की डेम के चारों तरफ जो आपके रेस्‍ट हाउस हैं, उनके केम्‍पस हैं, आज उन  केम्‍पसों का रखरखाव नहीं है, आपके रेस्‍ट हाउस जो हैं वह गिरने की कगार पर हैं, आपके शासन की इतनी भारी व्‍यवस्‍था है आज उसकी कोई देख रेख नहीं कर रहा है, अगर उसकी मरम्‍मत हो तो निश्चित रूप से अधिकारी वहां पर रूकेंगे, जायेंगे, जब छाव रहेगी तो कोई भी वहां जा सकता है और लोगों की जब आवाजाही बढ़ेगी तो निश्चित रूप से उस बांध के रखरखाव में एक कारगर सिद्ध होगी, इस पर आप जरूर पहल करें. ऐसे मेरे पास कई उदाहरण हैं कि मैं आज आपके सामने पेश कर सकता हूं. मैं मिलकर आपसे इसमें बता दूंगा.

          अध्‍यक्ष महोदय-- रजनीश जी समाप्‍त करें.

          श्री रजनीश हरवंश सिंह--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विनम्रता से प्रार्थना है कि बहुत कम अवसर मिलते हैं, जब हम जल संसाधन विभाग पर बात करें और जहां संभावनायें हैं तो वहां आप मुझे बोलने की अनुमति दें.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पेंच, पेंच ऐसी महत्‍वपूर्ण योजना है जो बारिस के एक ही पानी पर पूरा पेंच भर जाता है. मेरा आपसे आग्रह है कि संजय सरोवर बांध पर एक मदर केनाल के रूप में वहां से एक केनाल आ जाये तो हमारा भीमगढ़ का संजय सरोवर 12 से 12 महीने लबालब भरा रहेगा और जो उसका 20 प्रतिशत पानी पड़ोस के जिले बालाघाट में जाता है उसमें भी दिक्‍कत नहीं जायेगी और लोग गर्मी में भी धान लगाकर जो आपकी मंशा है, आपकी सरकार की मंशा है कि खेती को हम लाभ का धंधा कैसे बनायें तो मैं वह लाभ का धंधा बनाने का मूल मंत्र देने का प्रयास कर रहा हूं. इसके बाद आपकी जो पेंच की महती योजना है पर जो डीपीआर में जहां तक नहर पहुंचना है वहां तक नहर नहीं पहुंची है. आज कई वर्ष हो गये मेरा आपसे अनुरोध है कि चाहे मेरे क्षेत्र का पाइली खैरी, पिपरिया खैरी टोला हो यहां तक नहर सिर्फ खुद कर रह गई है छोटी सी, एक बार आप सर्वे करा लें, दूध का दूध और पानी का पानी उसमें आपको मिल जायेगा. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बांध बने हैं वर्ष 2003 के पहले मैं थोड़ा सा संज्ञान में लाना चाहूंगा कि चाहे माताटीला हो, चाहे राजघाट दतिया हो, चाहे आपके इलाके का माननीय अध्‍यक्ष महोदय हरसी डेम हो, चाहे मंडी डेम हो, चाहे तिगरा डेम हो, चाहे ककेटू डेम हो, मैं आपके क्षेत्र की बात कर रहा हूं. फिर मैं शहडोल में आता हूं जोहिला जलाशय हो, बाण सागर जलाशय बहोरी शहडोल हो, चाहे मालवा क्षेत्र में इंदिरा सागर परियोजना हो, ओमकारेश्‍वर हो, देजला हो, दिवाड़ा हो, अम्‍बक नाला हो, अपरवेदा हो, सरदार सरोवर हो, चाहे हमारा लोवर कोई परियोजना हो, मान परियोजना हो, माही परियोजना झाबुआ हो, जोबट परियोजना हो, अरनिया डेम हो, काजीखेड़ी हो, पगाराजोरा हो, कोतवाल मुरैना हो, कूनो वन विजयपुर श्‍योपुर हो, सिलारखेड़ी बांध हो, ढाबला हो, हरियाणा देवीखेड़ा हो और हमारे महाकौशल क्षेत्र का चाहे बरगी बांध जो बरगी से रीवा को जोड़ने का काम कर रहा हो, विंध्‍य तक पानी पहुंचाने की परियोजना रही हो, पेंच परियोजना रही हो, संजय सरोवर हो, बारना जलाशय हो, चाहे सुकबा ढुकबा बांध छतरपुर हो, चाहे अपरवेदा डेम हो, चाहे पिलुआ डेम हो, चाहे गांधीसागर मंदसौर हो, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या आज बन गये, वर्ष 2003 के पहले जब हमें आजादी मिली तो भारत के पास क्‍या था पूरा विश्‍व जानता है, हमारा देश गुलाम था, कांग्रेस ने आजादी दिलाई...

          श्री कमल मर्सकोले-- माचाडोला जलाशय के बारे में भी बता दीजिये...(व्‍यवधान)... भाजपा की सरकार बनने का बाद काम शुरू हुआ है. ...(व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय--  रजनीश जी कृपया समाप्‍त कीजिये.

          श्री रजनीश हरवंश सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनको इतना क्‍यों बुरा लग रहा है. 

मेरे भाई सुनो और माचागौरा के लिये जीवन भर मेरे स्‍वर्गीय पिता ने (व्‍यवधान).....    

          अध्‍यक्ष महोदय -- रजनीश जी बैठ जाईये.

          श्री रजनीश हरवंश सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, आधा सेंकेंड में एक बात कहना चाहता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- राजेन्‍द्र सिंह जी बोल रहे हैं, राजेन्‍द्र सिंह जी बहुत वरिष्‍ठ हैं, उन्‍होंने बोलना शुरू कर दिया है.

          श्री रजनीश हरवंश सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, आधा सेंकेंड मैं आपका संरक्षण चाहता हूं.माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी को  मेरे सिवनी जिले के केवलारी में आने का निमंत्रण देता हूं, इस समय होला का, होली का समय चल रहा है, मैं चना का होला खिलाऊंगा, गेहूं का होला खिलाऊंगा, मूंगफली का होला खिलाऊंगा और जो कहेंगे वह खिलाऊंगा, पर कृपया करके आ जायें, मेरी यह विनती, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया है, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे दो सदस्‍य नीलेश उईके और अभिजीत शाह छूट गये थे, इनको दो दो मिनट मिल जाये.

          अध्‍यक्ष महोदय -- राजेन्‍द्र कुमार सिंह जी लास्‍ट वक्‍ता हैं. अभी हम एक ही डिमांड पर चल रहे हैं, सारे डिमांड आज रात तक करना है, समय तब तक ब‍ढ़ता ही रहेगा जब तक आज का एजेंडा पूरा नहीं हो जाता. आप यह मानसिकता बनाकर रखो, आज का एजेंडा पूरा करना ही पडे़गा.

          श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी तो मांग थी कि सदन का सत्र बढ़ाया जाये, बैठके बढ़ाई जायें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप राजेन्‍द्र कुमार सिंह जी को बोलने दीजिये, आप बैठ जायें.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह (अमरपाटन) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय वित्‍तमंत्री जी के द्वारा प्रस्‍तुत मांग संख्‍या 23 जल संसाधन विभाग के विरोध में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं और कटौती प्रस्‍तावों का समर्थन करता हूं, इस वर्ष लगभग 16 प्रतिशत की वृद्धि जो पिछले वर्ष का इनका एलाटमेंट है, पिछले वर्ष 7 हजार 248 करोड़ रूपये जल संसाधन विभाग का था और इस वर्ष 9 हजार 196 करोड़ रूपये का है. लेकिन दु:खद पहलू यह है कि यह राशि खर्च ही नहीं कर पाते हैं. अब आपधापी इनके विभाग में मची होगी, किस ठेकेदार को कितना दे दें, क्‍या करें, क्‍या नहीं. अब आप तो खेल जानते ही हैं, सभी माननीय सदस्‍य जानते हैं, समय पर यह राशि खर्च हो जाये तो मैं समझता हूं जिस उद्देश्‍य के लिये यह विधानसभा देती है, जनता प्रदेश से अपेक्षा करती है, उसकी पूर्ति हो.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे माननीय तुलसीराम जी आज (जल संसाधन मंत्री(श्री तुलसीराम सिलावट) की ओर देखकर) जिस रंग की जैकेट पहने हैं, उससे मिलता जुलता रंग मैंने आज इसलिए चुना है कि शायद इनकी सहानुभूति रहे और हमारे विधानसभा क्षेत्र पर कुछ मेहरबानी रहे, विंध्‍य पर कुछ इनकी मेहरबानी रहे.

          जल संसाधन मंत्री(श्री तुलसीराम सिलावट) -- माननीय आप बहुत वरिष्‍ठ हैं.

        डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, आज यहां पर कई लोगों के भाषण हुए. माननीय अर्चना जी बैठे हैं, बड़ा विद्वतापूर्ण उनका भाषण रहता है,  सारे तथ्‍य, सारे सब्‍सटेंस उन्‍होंने कवर किये हैं और जो मैं बोलना चाहता था, उसमें से बहुत सारी चीजें अर्चना जी ने, कुछ चीजें रजनीश जी ने बोल दी है, अब बहुत कुछ बोलने के लिये बचा नहीं है, लेकिन जो दो तीन चीजों को मैं उनके भाषण से समेट सका और जिसके प्रति मेरी भी रूचि रही है. मेरी संवेदना हमेशा रही है कि सिंचाई सफल हो, मांग सफल हो, योजनाएं सफल हों तो उसमें कैचमेंट एरिया के डेव्‍हलपमेंट जिसकी बात इन्‍होंने की है और एक अंडरग्रांउड वॉटर रिर्चाजिंग वह निरंतर होते रहने चाहिए चूंकि आज डिप्‍लीशन 80 प्रतिशत हो गया है और जो 80 फीसदी पेय जल है, जल के नीचे पीने योग्‍य पानी है, उसे हम 70 से 80 फीसदी तक इस्‍तेमाल कर चुके हैं, यह स्थिति है और कैचमेंट एरिया डेव्‍हलपमेंट वाली बात महाराष्‍ट्र का बहुत बढि़या उदाहरण उन्‍होंने दिया है, आज वहां के राजनेता हैं, वह उपमुख्‍यमंत्री भी हैं, उनके ऊपर तुलसीराम भाई, आदरणीय अध्‍यक्ष जी 80 हजार करोड़ रूपये के भ्रष्‍टाचार के आरोप लगे थे और यही बड़े-बड़े बांधों के कारण बहुत बड़े बांध वहां पर बने हैं और महाराष्‍ट्र में सरकार के ऊपर लगभग साढ़े सात लाख करोड़ का कर्ज है और सिंचाई विभाग के कारण ही कम से कम दो लाख करोड़ रूपये का कर्ज है, वह आज बांध भरते नहीं है, कोई बीस प्रतिशत, कोई तीस प्रतिशत पूरी तरह से वहां की योजना असफल है. इसलिए कि उन्‍होंने कैचमेंट एरिया डेवलपमेंट एक महत्‍वपूर्ण पहलू हैं, उसको बड़ी गंभीरता से लेना चाहिए. ड्रोन टेक्‍नालॉजी का भी हम जानकारी के लिए इस्‍तेमाल कर सकते हैं कि कहां क्‍या कर सकते हैं. ये महत्‍वपूर्ण पहलू है, जिसका मैं समर्थन करता हूं जैसा मैंने कहा मैं दो तीन मिनट में मेरी बात खत्‍म कर दूंगा. हमारे क्षेत्र में बाणसागर परियोजना है, उस परियोजना से तीन चार छोटी छोटी नहर निकली हैं जो हमारे क्षेत्र को सींचती है सींचेगी. एक है बहोती नगर नहर परियोजना जो 8-9 वर्षों से बन रही है, लेकिन उसका कोई पता नहीं. हमारे यहां रामनगर माइक्रो पिछले 15 साल से बन रही है, कब पानी देंगे सिंचाई के लिए, किसान टकटकी लगाए देख रहा है, क्‍या होगा, क्‍या नहीं, समझ में नहीं आ रहा है. झिन्‍ना माइक्रो परियोजना है हमारे यहां उसका भी यही हाल है 10 साल से बन रही है, जब इन छोटी योजनाओं का ये हाल है तो कल्‍पना कीजिए कि जो हमारी नदी जोड़ो परियोजना है, केन, बेतवा जोड़ने की बात, ताप्‍ती, काली सिंध, चंबल जोड़ने की परियोजना, मैं समझता हूं कि जब ये पूरी होगी तो यहां जितने माननीय सदस्‍य हैं सोलहवीं विधान सभा के तो मुश्किल से चार पांच प्रतिशत ही जीवित रह जाएंगे. मैं अशुभ नहीं चाहता किसी का, लेकिन इतना लंबा समय लग जाता है. लोग देखते रहते हैं, छोटी छोटी परियोजनाओं को महत्‍व देना चाहिए जो हमारे मध्‍यप्रदेश के लिए विशेषकर हितकर है. क्‍योंकि हमारी अर्थव्‍यवस्‍था एग्रो बेस्‍ड है, कृषि पर आधारित है, ऐसे बहुत कम बड़े प्रदेश है जहां कृषि पर आधारित अर्थव्‍यवस्‍था है, यहां सेवा का क्षेत्र, उद्योग का क्षेत्र, इन सबको मिला ले तो उसके बाद भी हमारी जो कृषि की अर्थव्‍यवस्‍था है, उससे बड़ी है. किसान जुड़ा है अन्‍न का, सब्‍जी का उत्‍पादन करता है, अनेक वस्‍तुएं उगाता है, उसे बाजार में बेचता है, किसान के पास आमदनी आती है, किसान भी खुद उपभोक्‍ता है, बहुत सारी चीजें खरीदता, है व्‍यापारी कमाता है, मिडिल मैन होल सेलर कई बीच में है फिर उद्योग चलते हैं, जब उद्योग चलते हैं तो रोजगार के अवसर पैदा होते हैं तो इतना महत्‍वपूर्ण है यह सिंचाई का मामला, इसके प्रति अति गंभीर होना चाहिए. मुझे ऐसा लग रहा है कि बहुत सीनियर अधिकारी दीर्घा में है नहीं इस विभाग की चर्चा जब हो रही है, आदरणीय मंत्री जी जरुर गंभीरता बरतें. हमारी दो तीन मांगें है उनको रख दूं, हमारे यहां दो तीन इलाके हैं, जहां पर सिंचाई नहीं रही और संभावना भी नहीं है अभी तक  एक है कैमोर पहाड़ का इलाका जो कैमोर से शुरू होकर मिर्जापुर तक जाता है यहां बरछाई, नामझर, पठरा, धौसड़ा, घोघन और पपरा 6 गांव है जहां संकट है और यहां की 80 प्रतिशत आबादी आदिवासी है. इसी तरह कलवारी मचकोलवा का बेल्‍ट है, तीन चार गांवों का और ठीक बाण सागर बांध के नीचे बसे ये गांव वहां से इनको पानी दिखता है अगर ये अपनी छत के ऊपर खड़े हो जाते हैं तो उनको पानी दिखता है, लेकिन दिखता भर ही है या जब बरसात में ओवर फलो होता है तब उनके घरों में पानी घुसता है, लेकिन सिंचाई नहीं होती. आपके माध्‍यम से मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि यहां के लिए भी कोई स्‍कीम बना दें. एक हमारे यहां इसी कैमोर पहाड़ में एक मोहास बांध परियोजना है छोटी सी परियोजना है, बांध बन गया है, नहर बनी है, उस नहर का मुआवजा नहीं मिला है किसानों को. बहुत लोग पा गए हैं, कुछ लोग नहीं पाए हैं, उसमें भी आदिवासी हैं उनके परिवार पिछले 7-8 साल से भटक रहे हैं हुआ यूं कि जब वह बांध बना जमीनों का अधिग्रहण हुआ तो वर्ष 2013 का कानून प्रभावशाली हुआ जब भू अधिग्रहण का यूपीए सरकार तो उसमें चार गुना राशि दे दी गई जब चार गुना राशि किसानों को दे दी गई. तो प्रोजेक्ट में पैसा कम पड़ गया तो किसके ऊपर यह परेशानी आयी. बचे हुए किसानों पर वह जागे तो अफसरों ने रास्ता बताया कि कैसे चार गुना से कम करके हम दो गुना कर सकते हैं . आपने दो गुना कर दिया है, बहुत से लोग घूम रहे हैं इसको थोड़ा सा देख लें. अंत में एक दर्द है, एक शिकायत आप अनुमति दें तो वह भी कह दूं.

          अध्यक्ष महोदयदर्द तो व्यक्त कर दो नहीं तो आगे तबियत आपकी खराब हो जायेगी. (हंसी)

          डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंहअध्यक्ष महोदय, हमारे यहां अमरपाटन में सिंचाई विभाग का सब डिवीजन हेडक्वाटर था. बहुत सालों से आपने खुलवाया था. पिछले कुछ सालों से उसको मैहर में शिफ्ट कर दिया गया है. मैहर भी तहसील, अमरपाटन भी तहसील, अमरपाटन में जितना सिचांई का काम है, उतना मैहर में भी है, कोई कम ज्यादा नहीं. मैं जानता हूं कि सब डिवीजन का फारमेशन डिवीजन का फारमेशन किस तरह से होता है. काम के आधार पर कितना काम चल रहा है, मुझे ज्ञात है. लेकिन कोई आवश्यकता नहीं, लेकिन उस कार्यालय को ले गये हैं मैहर. अब मैहर जिला बन गया है, वह तो है ही है. अब जिला मुख्यालय में सिंचाई, अगर डिवीजन भी बनेगा, अभी तो सतना डिवीजन में आता है. अगर डिवीजन बना तो वह भी मैहर में बना देंगे. हमारा सब डिवीजन अमरपाटन में आना चाहिये. दो ही विधान सभा क्षेत्र हैं जिले में इक्यूट्यूबिल डिस्ट्रीब्यूशन के तहत बड़े भाई तथा छोटे भाई मान लीजिये, लेकिन कुछ कार्यालय प्रमुख जो हैं अपरपाटन में होने चाहिये थे, आप सिंचाई से शुरूआत कर दीजिये. सिंचाई का सब डिवीजन वापस आ जाये. अगर सिंचाई डिवीजन खुलता है तो उसका मुख्यालय भी अमरपाटन में उन्होंने दिया. आपने समय दिया धन्यवाद.

          जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसी राम सिलावट)अध्यक्ष महोदय, मैं कृतज्ञता व्यक्त करता हूं लगभग 17 वरिष्ठ सदस्यों ने जिन्होंने मांग संख्या 23 पर अपने विचार गंभीरता के साथ रखे. मैं आपके माध्यम से प्रत्येक सदस्य को यह आश्वस्त करना चाहूंगा कि आपकी हर बात को, आपकी हर मांग को, आपके हर विचार को मध्यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार गंभीरता से लेगी. हमारे वरिष्ठ सदस्य श्री प्रभुराम चौधरी जी, हमारे वरिष्ठ पूर्व मंत्री ओम प्रकाश सखलेचा जी, हमारी बहन सेना महेश पटेल जी, आदरणीय शैलेन्द्र जी, सोहनलाल बाल्मीक, अभय मिश्रा, मेरी बहन अर्चना जी, आपकी भावनाओं को हमने ताप्ती वालों को लिया है. हमारी भाभी झूमा सोलंकी जी, मेरी छोटी बहन उषा जी, आशीष जी, सुरेश राजे जी, अनिल जैन जी, मधु भगत जी, श्री रजनीश जी, हम सब के वरिष्ठ सम्मानीय राजेन्द्र जी, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप जानते हैं कि हमारे राष्‍ट्र की आत्‍मा, हमारे प्रदेश की आत्‍मा गांवों में बसती है. हमारा विकास और प्रगति तब ही संभव होगी, जब हमारा यह अन्‍नदाता शक्‍तिशाली बने. इसी बात को लेकर जल संसाधन विभाग अपना कार्य कर रहा है. प्राचीन काल से भारत की कई अन्‍य प्राचीन सभ्‍यताओं में जल को अमृत माना गया है. जल को जीवन का स्रोत मानकर हम इसकी पूजा करते हैं. रघुवेद में जल को जीवनदायिनी, उपचारक बताया गया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मूल भावना के अनुरूप देश के तेजस्‍वी और ओजस्‍वी प्रधानमंत्री जी के कुशल मार्गदर्शन और प्रदेश के सम्‍माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में हमारी जनकल्‍याणकारी सरकार सतत् रूप से जनहित के कार्यों में कृतसंकल्‍पित है. हमारी सरकार का मानना है कि जनसेवा ही ईश्‍वर की सच्‍ची सेवा है. मुझे सदन को यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि विभाग द्वारा पाइप सिंचाई प्रणाली पर आधारित सिंचाई परियोजना का निर्माण मध्‍यप्रदेश में जल अनुकूलता का अधिकतम उपयोग कर सिंचाई क्षमता की दक्षता को बढ़ाया गया है. ऐसे क्षेत्र जहां खुली नहरों की बात पर आपने चिंता व्‍यक्‍त की. वहां सिंचाई संभव नहीं थी. वहां भी सिंचाई कर पाने में भारतीय जनता पार्टी की सरकार सफल हुई है. सिंचाई प्रबंधन में जल का अधिकतम उपयोग करने में मध्‍यप्रदेश देश में प्रथम स्‍थान पर है. जल के क्षेत्र में उत्‍कृष्‍ट तथा जल प्रबंधन में अभूतपूर्व कार्य किया जाना मध्‍यप्रदेश के लिए गौरव की बात है. राष्‍ट्र का सर्वश्रेष्‍ठ राष्‍ट्रीय जल अवॉर्ड भारत के उपराष्‍ट्रपति को राष्‍ट्रपति जी द्वारा 23 जून को मध्‍यप्रदेश को प्रदान किया गया.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कृषक को आत्‍मनिर्भर बनाने की दिशा में जल संसाधन विभाग द्वारा सतत् प्रयास किए जा रहे हैं. आप जानते हैं कि मध्‍यप्रदेश का सिंचाई का रकबा मात्र साढे़ सात लाख हेक्‍टेयर हुआ करता था. अब वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार में माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में 50 लाख हेक्‍टेयर की सिंचाई क्षमता विकसित की जा चुकी है. (मेजों की थपथपाहट)

          श्री बाला बच्‍चन -- माननीय मंत्री जी, आपने 2023 बोला है और साढे़ सात लाख हेक्‍टेयर बोला है.

          श्री तुलसीराम सिलावट -- आपने 2023 सुना ही नहीं. जो सर्वस्‍व है वह मिला है.

          श्री बाला बच्‍चन -- आपने 2023 बोला है.

          श्री तुलसीराम सिलावट -- सन् 2023 बोला है जो जून में सर्वश्रेष्‍ठ राष्‍ट्रीय जल अवॉर्ड मिला है.

          श्री बाला बच्‍चन --  अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2003 में 7 लाख हेक्‍टेयर तो हम लोग कर चुके थे. आपने 2023 बोला है.

          श्री तुलसीराम सिलावट -- आप सुन लीजिए. माननीय बाला बच्‍चन जी, जब सिंचाई क्षमता साढे़ सात लाख हेक्‍टेयर थी, आजकल वर्तमान में 50 लाख हेक्‍टेयर में हम सिंचाई विकसित कर रहे हैं. आप नोट कर लीजिए और अगले 2 वर्षों में और सुन लीजिए, जल संसाधन विभाग द्वारा आज तक 44 लाख हेक्‍टेयर की सिंचाई क्षमता विकसित की जा चुकी है. माननीय बाला बच्‍चन जी, आगामी 2 वर्षों में इसे बढ़ाकर लगभग-लगभग 65 लाख हेक्‍टेयर एवं अगले 5 वर्षों में 100 लाख हेक्‍टेयर करने का भारतीय जनता पार्टी की सरकार का लक्ष्‍य है. (मेजों की थपथपाहट) इस अभूतपूर्व उपलब्‍धि के लिए हमारी पूर्व की भाजपा सरकार को मैं बधाई देता हॅूं. निरंतर आगे बढ़ाने हेतु प्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में हम कटिबद्ध भी हैं और कृतसंकल्‍पित भी हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्तमान में जल संसाधन विभाग के अंतर्गत 42 वृहद्, 68 मध्‍यम एवं 341 लघु सिंचाई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं. इनकी कुल लागत 89 हजार 30 करोड़ रूपए हैं. इन परियोजनाओं के शेष पूर्ण होने पर 25 लाख हेक्‍टेयर की सिंचाई क्षमता में वृद्धि भारतीय जनता पार्टी की सरकार करेगी.

श्री बाला बच्चन - इसको कितने सालों में करेंगे, आपका बजट तो 9194 करोड़ रुपये है. आप 89 हजार करोड़ रुपये की बात कर रहे हैं तो उसको करेंगे कब?

श्री शैलेन्द्र कुमार जैन - आपको कितने साल लगे भाई?

श्री तुलसीराम सिलावट - आप धैर्य रखो, संयम रखो. अध्यक्ष महोदय, आप जानते हैं कि इस प्रकार विभाग द्वारा वर्ष 2024-25 में कुल 40 लाख 68 हजार हैक्टेयर में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई है. जो वर्तमान में एक नया प्रयास माइक्रो पाईप  सिंचाई प्रणाली पर आधारित सिंचाई परियोजना का निर्माण करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना है. (मेजों की थपथपाहट) प्रदेश में पाईप आधारित सिंचाई प्रणाली के माध्यम से किसान के 1 हैक्टेयर की तुलना में 2.5 हैक्टेयर तक सिंचाई हेतु पानी पहुंचाया जा रहा है. ऐसा करने वाला भी मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है. (मेजों की थपथपाहट) अध्यक्ष महोदय ने मेरे ऊपर सीमा लगा दी है.

अध्यक्ष महोदय - जिंदगी भर बताते ही रहना है, कोई एक दिन थोड़े ही है.

श्री तुलसीराम सिलावट - अध्यक्ष महोदय, राज्य सरकार द्वारा बांधों की खोई हुई जल भराव क्षमता पुनः प्राप्त करने के लिए एक नीति बनाई गई, जिसके अंतर्गत बड़े जलाशयों से गाद निकालकर उनसे भी मिट्टी एवं रेत को पृथक किया जाएगा. प्राप्त मिट्टी हमारे अन्न दाताओं को प्रदान की जाएगी, जिससे कि उनके खेतों की उपज क्षमता बढ़ेगी. जलाशयों की क्षमता में वृद्धि होगी तथा निकलने वाली रेत से मध्यप्रदेश में राज्यांश की बढ़ोतरी की जाएगी.

श्री ओमप्रकाश सखलेचा - इसको फ्री में किसानों को ले जाने देंगे या कुछ चार्ज लेंगे क्योंकि हम पिछले 5-7 सालों से हमारे यहां क्या है कि जितने भी तालाब हैं उनका गहरीकरण वहां के पंचायत को फ्री ऑफ कास्ट अलाऊ करते हैं. किसान ले जा सकता है.

अध्यक्ष महोदय - श्री ओमप्रकाश जी सभी लोग ऐसे पूरक प्रश्न करने लगे तो मंत्री जी का भाषण पूरा ही नहीं होगा.

श्री तुलसीराम सिलावट - अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मुझे सदन को बताते हुए अत्यंत हर्ष है कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का भारत वर्ष की नदियों को जोड़ने का जो सपना था. माननीय प्रधानमंत्री जी के आशीष से तथा प्रदेश के सम्माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के प्रयास से केन बेतवा लिंक एवं कालीसिंध चंबल लिंक राष्ट्रीय परियोजनाओं के रूप में साकार हो रही है. केन बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना है, जिससे केन नदी पर दौधन बांध पर लिंक नहर का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है. भारत के ओजस्वी प्रधानमंत्री परमसम्माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा दिनांक 25.12.24 को स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के जन्मदिवस पर दौधन बांध पर इसकी आधारशिला रखी गई, जिसकी लागत 44605 करोड़ रुपये है, यह परियोजना पूर्ण होने पर इससे आप जानते हैं कि सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड क्षेत्र में लगभग 8 लाख 11 हजार हैक्टेयर में हम सिंचाई की सुविधा प्रदान करेंगे.  44 लाख आबादी को शुद्ध पीने का जल प्राप्त होगा. साथ ही इस परियोजना से 103 मेगावाट बिजली का भी उत्पादन होगा, जिससे मध्यप्रदेश आगे बढ़ेगा. रोजगार आएगा.

            अध्यक्ष महोदय, केन बेतवा परियोजना से मध्यप्रदेश के 10 जिले छतरपुर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, शिवपुरी, दतिया, रायसेन, विदिशा, सागर के लगभग 2000 ग्राम के लगभग 7 लाख 25 हजार किसान परिवार को इससे लाभ होगा. सूखाग्रस्त बुन्देलखण्ड में भूजल की स्थिति सुधरेगी. औद्योगिकीकरण, निवेश और पर्यटन को बढ़वा मिलेगा. रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे. इससे स्थायी स्तर पर हम लोगों में आत्मनिर्भरता आएगी तथा लोगों को पलायन से रोकने में निश्चित रूप से केन बेतवा परियोजना साकार रूप लेने पर मध्‍य प्रदेश का बुंदेलखंड जो एक-एक बूंद जल के लिये तरसता था, उसके विकास और प्रगति में एक नयी तस्‍वीर और तकदीर सुधरेगी.

          अध्‍यक्ष महोदय, हम सौभाग्‍यशाली हैं कि हमें प्रधान मंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी के नेतृत्‍व में प्रदेश के सम्‍माननीय मुख्‍य मंत्री डॉ. मोहन यादव जी के प्रयास से मध्‍यप्रदेश में एक नहीं बल्कि दो-दो राष्‍ट्रीय नदी लिंक परियोजनाओं की स्‍वीकृति मिली है. यह हमारे लिये गौरव की बात है. हमारे लिये गर्व का विषय है कि देश की प्रथम केन-बेतवा लिंक परियोजना का कार्य प्रारंभ हो चुका है. संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल अंतरार्ज्‍जीय नदी लिंक परियोजना परियोजना के क्रियान्‍वयन हेतु दोनों राज्‍यों एवं केन्‍द्र के मध्‍य दिनांक 28.01. 24 को त्रिपक्षीय समझौते के ज्ञापन पर हस्‍तारित होने के साथ ही दोनों राज्‍य एवं केन्‍द्र के मध्‍य दिनांक 17.12. 24 को जयपुर में अनुबंध सहमति हस्‍तारित की गयी है. परियोजना की अनुमानित लागत 72 हजार करोड़ रूपये है. जिसमें मध्‍यप्रदेश को 35 हजार करोड़ रूपये और राजस्‍थान को 37 हजार करोड़ रूपये की हिस्‍सेदारी होगी. परियोजना से मध्‍यप्रदेश के मालवा चंबल के 13 जिले गुना,शिवपुरी, मुरैना,उज्‍जैन, सीहोर, मंदसौर, देवास, इंदौर, आगर-मालवा, शाजापुर, श्‍योपुर, ग्‍वालियर एवं भिण्‍ड जिले में कुल 6 लाख 14 हजार हैक्‍टेयर की नवीन सिंचाई एवं चंबल नहर प्रणाली आधुनिक से भिण्‍ड, मुरैना एवं श्‍योपुर में 3 लाख 62 हजार हैक्‍टेयर में सिंचाई की सुविधा सुनिश्चित की जायेगी.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं सदन को अवगत कराना चाहता हूं कि मध्‍य प्रदेश एवं महाराष्‍ट्र राज्‍य के मध्‍य जो हमारी बहन अर्चना जी बैठी हैं, वह हमेशा टोकती रहती थी कि मध्‍य ताप्‍ती बेसिन मेगा रिचार्ज योजना हेतु भी दोनों राज्‍य के मध्‍य समिति के आधार पर चर्चा प्रक्रियाधीन है. परियोजना के अंतर्गत पारंपरिक जल भण्‍डारण के स्‍थान पर भू-गर्भ जल पुन: भरण योजना द्वारा किया जाना प्रस्‍तावित हैजिसकीक अनुमानित लागत 19 हजार 244 करोड़ है, जिससे प्रदेश के बरहानपुर एवं खंडवा जिले में 01लाख 23 हजार हैक्‍टेयर क्षेत्र में हम सिंचाई करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय, पवित्र शिप्रा  नदी के जल को कान्‍ह नदी के दूषित जल से बचारे के लिये, जल संसाधन विभाग का कान्‍ह डायवर्शन क्‍लोज डक्‍ट परियोजना का निर्माण किया जा रहा है. लगभग 900 करोड़ रूपये की लागत से बनने वाली इस योजना के द्वारा कान्‍ह नदी के दूषित जल को क्षिप्रा नदी में मिलने रोका जायेगा. इस योजना का सार्थक स्‍वरूप वर्ष- 2028 के महाकुंभ में दिखाई देगा. वर्ष 2028 तक से पहले इस योजना को पमर्ण कर लिया जायेगा. आगामी सिंहस्‍थ महापर्व 2028 को देखते हुए माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के संकल्‍प के अनुरूप क्षिप्रा को वर्षभर अविरल, प्रवाहमान बनाने के लिये उज्‍जैन जिले की सेवरखेडी एवं सिलारखेडी की लागत लगभग 615 करोड़ की योजना का कार्य आरंभ हो गया है. इससे आमजन एवं श्रद्धालुओं को विशेष पर्वों पर उनकी धार्मिक भावनाओं के अनुरूप क्षिप्रा नदी में स्‍नान करने का अवसर मिलेगा. क्षिप्रा नदी पर सिंहस्‍थ में स्‍नान सुविधा सुविधा हेतु क्षिप्रा नदी के दोनों तटों पर लगभग 29 किलोमीटर लंबाई से घाटों का निर्माण किया जायेगा.  जिस हेतु  राशि रुप. 778.91  करोड़  की  प्रशासकीय स्वीकृति  दी जा चुकी है.

          अध्यक्ष महोदय--  आप पन्ने थोड़े ज्यादा ज्यादा पलट लें.

          श्री तुलसीराम सिलावटअध्यक्ष महोदय, आपने कम करने का बोला है.

          श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव--  अध्यक्ष महोदय, इनका बाकी भाषण पढ़ा हुआ माना जाये.

          अध्यक्ष महोदयसचिन  जी, आप बैठ जायें.

          श्री तुलसीराम सिलावट सचिन जी, सुभाष जी भी इस विभाग के मंत्री रहे हैं.  आप कहें, तो मैं विस्तृत रुप से बोल लूं.  आप जैसा बोलें.

          अध्यक्ष महोदयआप कन्टीन्यू  रखें,लेकिन शीघ्रता करें.

          श्री तुलसीराम सिलावटअध्यक्ष महोदय,जल संसाधन विभाग के अन्तर्गत बांध की सुरक्षा  को लेकर कई सदस्यों  ने  इस  महत्वपूर्ण मुद्दे पर बात की है.  मैं आपके माध्यम से सदन को अवगत कराना चाहता हूं कि  बांधों की  सुरक्षा को लेकर हमारी सरकार पूरी सजगता के साथ काम कर रही है, इसके लिये मध्यप्रदेश में डेम सेफ्टी रिव्यू पेनल गठित  किया गया है,  जो प्रति वर्ष संवेदनशील बांधों का निरीक्षण कर अपनी  रिपोर्ट प्रस्तुत  करता है. प्रदेश में सिंचाई के संसाधनों की बढ़ोतरी  में आशातीत  सफलता पाई है,  वहीं तालाबों, कुंओं, बावड़ी के पुनर्जीवन एवं इनके जीर्णोद्धार के लिये कई  व्यापक काम  किये जा रहे हैं.  सरकार की प्राथमिकता प्राकृतिक जल स्त्रोतों एवं तालाबों को बचाने की है.  इसके लिये माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व  में योजनाबद्ध तरीके से काम  किया जा रहा है.  इसी क्रम में सरकार द्वारा जल संरक्षण एवं जल संवर्धन  की दिशा में   अभियान चलाकर राजनैतिक, सामाजिक,  सांस्कृतिक, खेल  संस्थानों  के  पदाधिकारीगण, शैक्षणिक संस्थानों, संत-महंतों,  धर्मगुरुओं के मार्गदर्शन तथा बुद्धिजीवी वर्गों (डॉक्टर,वकील, शिक्षाविद्, पर्यावरणविद्)  को जोड़कर  इसे जन आंदोलन के रुप में आव्हान किया गया है. जो केचमेंट एरिये  की बात आपने, सम्मानीय राजेन्द्र कुमार सिंह जी ने की थी, उस दिशा में भी हमारी सरकार  यह खोज रही है. इस अभियान के तहत प्रदेश के प्रत्येक गांव के पुराने तालाबों,  कुओं, बावड़ी  एवं जल स्त्रोतों के मूल स्वरुप को बनाये  रखने  एवं वर्तमान में गिरते भू-जल  स्तर एवं  जल को सहेजने तथा जल के प्रबंधन के समुचित उपयोग  हेतु  इन स्त्रोतों का सौंदर्यीकरण,गहरीकरण तथा पर्यावरण के शुद्ध संरक्षण एवं अतिक्रमण  मुक्त   करने की दिशा में अभियान चलाया जा रहा है.  हमारी सनातन संस्कृति का मूल भाव है. इसी मूल भावना  को अपने हृदय में संजोकर माननीय मुख्यमंत्री, डॉ. मोहन यादव जी  के कुशल नेतृत्व में  हमारी  जनकल्याणकारी सरकार प्रदेश के गरीबों, किसानों, जन जातियों, महिलाओं, युवाओं एवं समाज के पिछड़े वर्गों  के समुचित कल्याण में निरंतर कार्यरत्  है. इसी क्रम में हम प्रदेश में  उपलब्ध   जल संसाधनों का अधिकतम  उपयोग कर प्रदेश  के प्रत्येक  किसान के खेत तक सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने  के लिये प्रतिबद्ध हैं.  मैं सदन से  निवेदन करना चाहूंगा कि जल संसाधन विभाग से संबंधित वर्ष 2025-26 हेतु विभाग के अन्तर्गत मांग संख्या-23 में उपरोक्तानुसार    कुल  राशि रुपये 9 हजार  183 करोड़ 21 लाख 58 हजार  का अनुदान पारित करने का कष्ट करें.  अध्यक्ष महोदय,  एक मिनट और लूंगा.  मैं सभी माननीय सदस्यों को  फिर से  धन्यवाद देना चाहूंगा कि जिन्होंने जल संसाधन विभाग  के बजट पर चर्चा में भाग  लिया है.  मैं पहले भी सदन को विश्वास दिला चुका हूं,  मैं अंत में  इन पंक्तियों   को बोलकर अपना भाषण समाप्त करुंगा कि- हो गई है पीर  पर्वत-सी पिघलनी चाहिये, इस हिमालय से कोई गंगा निकली चाहिये. सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद  नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिये. मेरे सीने में नहीं,  तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन  आग जलनी चाहिये.  धन्यवाद.

          श्री बाला बच्चन अध्यक्ष महोदय,  यह तो पूरा सदन जान रहा है कि हंगामा किसने किया.

 

(जल संसाधन मंत्री श्री तुलसी सिलावट द्वारा अधिकारी दीर्घा में विभागीय अधिकारियों से खड़े होकर के बात करने पर )

          श्री बाला बच्चन--माननीय अध्यक्ष महोदय, देखिये जल संसाधन विभाग का आफिस यहीं पर चालू हो गया.

          अध्यक्ष महोदय-- चलो भाई यह मीटिंग यहां नहीं करो, चेंबर में भी हो सकती है, हमारे चेंबर में भी कर सकते हो लेकिन विधानसभा में मत करो.

 

 

समय 3.11 बजे

वर्ष 2025-26 की अनुदानों की मांगों पर मतदान.

मांग संख्या-13

 

 

 

 

        उपस्थित सदस्यों के कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए.

          अब मांग और कटौती प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा होगी.श्री सचिन यादव....

          श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव (कसरावद)-- माननीय अध्यक्ष , मैं मांग संख्या 13 के विरोध में बोलने के लिये खड़ा हूं. अध्यक्ष महोदय, मुझे बड़ा आश्चर्य लग रहा है कि किस प्रकार से कृषि कल्याण विभाग मध्यप्रदेश के करोड़ो अन्नदाताओं कि जो सरकार से आकांक्षा है, उनको कैसे यह पूरा करेगा. मेरे यह कहने के पीछे बहुत महत्वपूर्ण तर्क है और वह यह है कि मेरे पास में विभाग की कम से कम  25 ऐसी योजनायें हैं जो या सिर्फ कागजों पर चल रही है या उन योजनाओं को कागजों पर चलाने के लिये नाम मात्र का बजट देने का काम सरकार के द्वारा किया जा रहा है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, कृषि विभाग ने जो योजनायें बंद की हैं उसमें प्रमुख रूप से पोध-संरक्षण प्रयोगशाला, गन्ना विकास योजना, कपास विकास योजना, बलराम तालाब योजना, कृषि में महिलाओं की भागीदारी वाली योजना, कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन, मुख्यमंत्री खेत तीर्थ योजना , कृषि अभियांत्रिकरण अंतर्गत ई-गवर्नस संबंधित कार्य योजना, कस्टम हायरिंग सेन्टर की स्थापना पर अनुदान योजना, कृषि यंत्री गतिविधियों-ग्राम विकास योजना, ब्रिंगा कृषि योजना, यही नहीं ओर भी बहुत महत्वपूर्ण योजनायें हैं जैसे कि मुख्यमंत्री फसल ऋण माफी योजना, जिसमें  मात्र 3 हजार रूपये के बजट का प्रावधान किया गया है. मुख्‍यमंत्री भावान्‍तर योजना में मात्र 1,000 रुपये बजट का प्रावधान किया गया है. राज्‍य कृषक आयोग, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनाएं हैं. मैं आज आपके माध्‍यम से जो एक वाकया है वह सदन के सामने साझा करना चाहता हूं. मैं भी इस विभाग का मंत्री रहा हूं और इस विभाग का मंत्री रहते हुये जब हम समीक्षाएं कर रहे थे. जो मुख्‍यमंत्री भावान्‍तर योजना है उसमें हमारे कुछ पत्रकार साथियों से अनौपचारिक चर्चा हो रही थी और उस चर्चा में जो त्रुटियां और शिकायतें प्राप्‍त हो रही थीं उन पर चर्चा हो रही थी. कहीं भी इस योजना को बंद करने की कोई बात नहीं हो रही थी. उस योजना को और कैसे प्रभावी बनाया जा सके इस दिशा में हम लोग चर्चा कर रहे थे, लेकिन अगले दिन समाचार पत्रों में बड़ी-बड़ी हेडलाइन छपती है कि कृषि मंत्री, सचिन यादव मुख्‍यमंत्री भावान्‍तर योजना को बंद करने जा रहे हैं. यह जो बयान आया यह बयान एक बहुत ही जिम्‍मेदार व्‍यक्ति जो इस सदन के सदस्‍य नहीं हैं लेकिन इस मध्‍यप्रदेश में लगभग लंबे समय तक इस प्रदेश का नेतृत्‍व करने का काम किया है. मेरे कहने का तात्‍पर्य यह है कि भारतीय जनता पार्टी की कथनी और करनी में कितना अंतर है. एक तरफ आप कृषि कल्‍याण विभाग की जितनी योजनाएं हैं लगभग 25 योजनाओं को आपकी सरकार में बंद करने का काम करते हैं और हम जिन योजनाओं को और प्रभावी करना चाहते थे उन योजनाओं के ऊपर आप कीचड़ उछालने का काम कर रहे हैं. यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार की कथनी और करनी में अंतर है. इसके अलावा हम लोग लगातार सुन रहे हैं कि खेती को लाभ का धंधा बनाने का काम किया जा रहा है. वर्ष 2022 तक कृषकों की आय दोगुनी करने का काम किया जाएगा, लेकिन आप सब हम लोग यहां बैठे हैं, क्‍या यह जो बड़े-बड़े दावे किये गये, बड़े-बड़े वायदे किये गये, क्‍या यह वायदे पूरे हुये. एनएसओ की एक रिपोर्ट आई है. उस रिपोर्ट के अनुसार एक किसान परिवार की वार्षिक आय मात्र 9,000 रुपये है जो कि राष्‍ट्रीय औसत से बहुत कम है. अभी हमने देखा कि जितने भी हमारे माननीय मंत्रीगण ने जो अपने जवाब प्रस्‍तुत किये उसमें उन्‍होंने वर्ष 2003 की बात जरूर की. हर बात उन्‍होंने 2003 से शुरू करने का काम किया और मैं भी इस सदन को यह बताना चाहता हूं कि किस प्रकार से कृषि की लागत मूल्‍य कितने गुना बढ़ गया. अगर हम 2003 की सोयाबीन के बीज की बात करें, तो सोयाबीन का बीज मात्र 2,500 रुपये क्विंटल में मिलता था. अगर हम डीएपी की बात करें मैं इसकी तुलना भी करना चहूंगा, सोयाबीन का बीज 2003 में 2,500 रुपये क्विंटल में मिलता था और आज वही सोयाबीन का बीज 7,000 रुपये क्विंटल मिल रहा है.

 

 

3.19 बजे                 {सभापति महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय) पीठासीन हुए.}

सभापति महोदय, वर्ष 2003 में डीएपी 400 रुपये में मिलता था और आज वही डीएपी 1,450 रुपये में मिल रही है. पोटाश बहुत ही कम दरों पर मिलता था लेकिन आज 1,500 रुपये प्रति बोरी में मिल रहा है. डीजल 2003 में 20 रुपये लीटर मिलता था और आज वही डीजल 100 प्रति लीटर मिल रहा है. कांग्रेस के जमाने में वर्ष 2003 में यूरिया सोसायटियों के माध्यम से दिया जाता था. मेरे स्वर्गीय पिता जी इस विभाग के मंत्री हुआ करते थे. उन्होंने यूरिया की कालाबाजारी न हो, समय पर किसानों को यूरिया मिले इसलिए इसे 100 प्रतिशत सोसायटियों के माध्यम से वितरित करने की योजना कांग्रेस के जमाने में वर्ष 2003 में बनाई थी. उस समय यूरिया की बोरी 50 किलो की मिलती थी. आज 259 रुपए में यूरिया दिया जा रहा है. आज यूरिया के बैग का वजन कम करके 45 किलो कर दिया गया है. वर्ष 2003 में जब कांग्रेस की सरकार थी उस समय 3 और 5 हॉर्स पॉवर का बिजली का बिल पूर्ण रुप से माफ किया जाता था. किसान साथियों को मुफ्त में बिजली देने का काम किया जाता था. आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा बिजली के बड़े-बड़े बिल किसान साथियों को देने का काम किया जा रहा है.

          माननीय सभापति महोदय, मैं यह सारे आंकड़े इसलिए बता रहा हूँ कि किसान के लागत मूल्य में कई गुना की वृद्धि हो चुकी है फसल के दामों में उसकी तुलना में वृद्धि नहीं हुई है. मेरे पास भारतीय जनता पार्टी का संकल्प पत्र है. इस संकल्प पत्र में बहुत सारी बातें कृषि कल्याण को लेकर की गई हैं. मैं भारतीय जनता पार्टी के संकल्प पत्र के पेज नंबर 26 को खोल रहा हूँ. कृषि मंत्री जी ने भी इस पेज को खोलकर देखा होगा. लेकिन मुझे ऐसा लगता नहीं है. आखिरी में जब चुनाव आएगा तब कह देंगे कि जुमला है जब वादा निभाने की बात आएगी तो कहेंगे हमने जुमला बोलकर बात से इतिश्री करने का काम किया है.

          माननीय सभापति महोदय, इस संकल्प पत्र में साफ लिखा हुआ है कि किसानों का गेहूँ  2700 रुपए प्रति क्विंटल खरीदने का काम किया जाएगा. धान 3100 रुपए प्रति क्विंटल खरीदने का काम किया जाएगा. इसके अलावा कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर एवं अनुसंधान में 25 हजार करोड़ रुपए के निवेश के साथ एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अन्तर्गत प्रदेश भर में छटाई एवं ग्रेडिंग यूनिट, कोल्ड चेन चेम्बर्स, गोदाम,  प्रोसेसिंग सेन्टर आदि का निर्माण करेंगे. इसमें आगे लिखा गया है कि हम कृषि क्षेत्र में स्टार्ट-अप उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए एक हजार करोड़ रुपए के निवेश के साथ मध्यप्रदेश एग्रीकल्चर एक्सीलेटर फंड स्थापित करेंगे. हम केन्द्र सरकार के साथ मिलकर प्रदेश में सेन्ट्रल फूड टेक्नालॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना करेंगे.

          सभापति महोदय -- सचिन जी थोड़ा संक्षिप्त में करें.

          श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव -- माननीय सभापति महोदय, मैं अपने दल का ओपनिंग बैटर हूँ इस नाते ज्यादा से ज्यादा गेंदे खेलने को मिलना चाहिए ऐसी आशा करता हूँ. मैं कोशिश करता हूँ.

          माननीय सभापति महोदय, हम गेहूँ और धान सीधे किसानों से खरीदी के लिए प्रोक्योरमेंट के नेटवर्क को शुरु करने का काम करेंगे. हम उज्जैन में चना अनुसंधान संस्थान स्थापित करने का काम करेंगे. ग्वालियर में सरसों अनुसंधान संस्थान स्थापित करने का काम करेंगे.

          माननीय सभापति महोदय, मैंने पूरा बजट देखा लेकिन संकल्प पत्र में भारतीय जनता पार्टी ने जो वादे किए थे उन वादों को पूरा करने के लिए इस बजट में कोई प्रावधान नहीं किए गए हैं. हम सब किसान हित की बात करते हैं. हमारे कृषि मंत्री जी भी बहुत ही संवेदनशील हैं. सभी माननीय सदस्य कहीं न कहीं  किसान परिवार से आते हैं. पूरे देश के किसानों की एक बहुत बड़ी चिंता है कि फसल का उचित दाम उसे मिले. हमने देखा कि हरियाणा की बॉर्डर पर लाखों की संख्या में हमारे किसान साथी एमएसपी को कानूनी दर्जा देने की मांग को लेकर  धरने पर बैठे हुए हैं. माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कृषि मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि एमएसपी को लीगल गारंटी देने के लिए सर्वसम्‍मति से इस सदन से एक कानून पारित करके केन्‍द्र सरकार में भेजने का काम करे. मैं समझता हूं कि सदन में बैठे हुए जितने भी साथी हैं मेरी इस बात से पूर्ण रूप से सहमत होंगे. जब तक किसान को उसकी उपज का सही दाम नहीं मिलेगा हम जितनी भी बातें कर लें मैं समझता हूं कि वह सारी बेमानी साबित होंगी. एक ओर बहुत ही महत्‍वपूर्ण बात मैं पिछले कई दिनों से और कई सालों से सुन रहा हूं कि बिजली के मामले में हमारा मध्‍यप्रदेश सरप्‍लस स्‍टेट है. एक तरफ तो हम सरप्‍लस स्‍टेट होने का दावा करते हैं और दूसरी तरफ मेरे अन्‍नदाता, मेरे किसान साथियों से क्‍या दुश्‍मनी है कि उनको मात्र कहने के लिए, कागज पर 10 घंटे बिजली देने का काम सरकार कर रही है और जो बिजली देने का काम कर भी रही है उसमें भी जो शेड्यूल तय किया गया है वह इतना अमानवीय है कि जो आम किसान की पीड़ा है वह मैं शब्‍दों में बयान नहीं कर सकता हूं. उसे रात के दो बजे उठकर सिंचाई के‍ लिए अपने खेतों में जाना पड़ता है. मैं पूछना चाहता हूं कि जो अधिकारी लोग बैठकर के यह शेड्यूल तय करने का काम करते हैं वह अपने आप को उन किसानों की जगह रखकर देखें. अपना सारा कामकाज छोड़कर दो बजे से लेकर पांच से छ: बजे तक आपको जब अंधेरे में खेतों में जाकर सिंचाई करना पड़ेगा तब आपको मालूम चलेगा. मेरा आपके माध्‍यम से माननीय कृषि मंत्री जी से अनुरोध है कि यह जो अव्‍यावहारिक शेड्यूल है उस शेड्यूल को चेंज करने का काम करें और किसानों को लगातार बिजली देने का काम करें. अब जब हम सरप्‍लस स्‍टेट हैं तो सरप्‍लस स्‍टेट होने के नाते मैं नहीं समझता हूं कि किसानों को  24 घंटे बिजली देने में किसी प्रकार की कोई बाधा होगी और अगर यह बाधा है तो फिर 24 घण्‍टे आप मध्‍यप्रदेश को सरप्‍लस स्‍टेट बिजली होने के बारे में जो बातें करते हैं वह बातें करना बंद कर दीजिए. इसके अलावा हम ऋण माफी की बात करें.

          सभापति महोदय, जब वर्ष 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी और मुझे कृषि मंत्री बनने का अवसर मिला और उस समय हमारे किसानों की जो स्थिति थी हमारे किसान लगातार कर्ज की दलदल में फंसते चले जा रहे थे और मध्‍यप्रदेश किसान आत्‍महत्‍या के मामले में देश में नंबर एक पर आ गया था उस दौरान हमारी सरकार ने ऋण माफी योजना लागू करने का काम किया है और इस ऋण माफी योजना के तहत हम लोगों ने 27 लाख किसानों के 11 हजार 600 करोड़ रुपए का ऋण माफ करने का ऐतिहासिक काम हमारी सरकार और मेरे द्वारा करने का प्रयास किया है. मेरा कहने का तात्‍पर्य यह है कि जब किसान कर्ज माफी की बात आती है तो क्‍यों भारतीय जनता पार्टी की सरकारें पीछे कदम हटाने की बात करती हैं. इन्‍होंने वर्ष 2019 में हमारी चलती हुए सरकार का जो जनमत हमको प्राप्‍त हुआ था उस जनमत को छीनने का काम किया और जनमत छीनने के बाद हमारी फसल ऋण माफी योजना को बंद करने का काम किया है. यह काम अगर किसी ने किया है तो वह भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है.  मेरा आपसे अनुरोध है कि बजट में तो आप कई सालों से फसल ऋण माफी योजना को सिर्फ कागजों में दिखाने के लिए आप 3 हजार रुपए का बजट आवंटित करने का काम कर रहे हैं. आप जब इसको चलाना चाहते हैं तो उसको पूरा बजट देने का काम करें. जो हमारे शेष किसान साथी रह गए थे उन सभी किसान साथियों को भी हमारी फसल ऋण माफी का लाभ देने का काम करें. कहने के लिए तो ओर भी बहुत बातें हैं एक और बात मेरा आखिरी विषय है. इस वर्ष हम इसे उद्योग और रोजगार वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा सरकार ने की है. लेकिन जो हमारे मध्‍यप्रदेश उद्योग हैं जो कृषि पर आधारित उद्योग हैं जैसे मैं निमाड़ क्षेत्र से आता हूं मेरे क्षेत्र में जो हमारा कपास है उस पर जिस प्रकार से पिछले वर्षों में जो सरकार का ध्‍यान नहीं गया है. टैक्‍स अधिक होने के कारण, हमारे यहां के उद्योग महाराष्‍ट्र जा रहे हैं. इसका मुख्‍य कारण यह है कि सरकार इसमें किसी प्रकार की राहत नहीं दे रही है, जो राहत महाराष्‍ट्र की सरकार उन्‍हें दे रही हैं, चाहे वह मण्‍डी शुल्‍क में राहत देने की बात हो, चाहे बिजली में राहत देने की बात हो, इस कारण हमारी बहुत सारी कॉटन की मिलें महाराष्‍ट्र चलीं गई हैं. यही नहीं पिछले 10 वर्षों में लगभग 250 दाल मिलें, वे भी सरकार के निराशापूर्ण रवैया के कारण, मण्‍डी शुल्‍क अधिक होने के कारण, बंद हो गई हैं. मेरा कृषि मंत्री जी से अनुरोध है कि आप इस विषय पर अपने अधिकारियों से चर्चा करें कि कैसे हम, हमारे कृषि आ‍धारित उद्योगों को पुन: स्‍थापित कर सकते हैं, मण्‍डी शुल्‍क कैसे कम कर सकते हैं, इस दिशा में सरकार को प्रयास करने की आवश्‍यकता है.

          सभापति महोदय, मेरा सरकार से अनुरोध है कि अभी गेहूं, चना, सरसों, मसूर की तुलाई प्रारंभ नहीं हुई है और अभी आप किसान से ऋण वसूली प्रारंभ करने जा रहे हैं तो इसे 2 माह के लिए स्‍थगित करने का काम, सरकार करे.

          सभापति महोदय, कल पूरे प्रदेश के कई जिलों से खबरें आई है, बारिश और ओलावृष्टि के कारण हमारे किसानों की फसलें खराब हुई हैं, सरकार तत्‍काल उसका सर्वे कराये और सर्वे करवाकर उन्‍हें मुआवज़ा वितरित करने का काम आपके द्वारा हो, यही मेरा अनुरोध है. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, धन्‍यवाद. जय हिन्‍द, जय भारत, जय जवान, जय किसान.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा (जावद)-  सभापति महोदय, मैं, मांग संख्‍या 13 के पक्ष में अपनी बात रखना चाहता हूं. मांग संख्‍या 13 भारत देश एवं मध्‍यप्रदेश के अन्‍नदाता के विषय में चर्चा करना चाहता हूं. एक वह अन्‍नदाता जो लंबे समय से पसीना बहाते हुए, किसी ज़माने में लंबे कर्ज में डूब गया था क्‍योंकि जैसे ही प्राकृतिक खेती से हम मशीनी खेती की तरफ या ऑटोमेशन की तरफ गए, उस ऑटोमेशन की कॉस्‍ट ऑफ प्रोडक्‍शन और उसके उतने ही समय पर, उसके बारे में, उसके अल्‍टरनेट एक्‍ट्रा इन्‍कम के बारे में सोचा नहीं गया. उसको भरपूर बिजली नहीं दी गई, वह पठानी ब्‍याज, बाजार के ब्‍याज में बर्बाद होता गया. उस समय कभी, किसी भी पुरानी सरकार ने इस विषय में नहीं सोचा कि जैसे-जैसे ऑटोमेशन हुआ, डेयरी किसान से अलग हट गया, उसके पास काम भी कम रह गया और आमदनी भी समाप्‍त हो गई.

          सभापति महोदय, हमें समझना पड़ेगा कि खेती और किसानी में कैसे हम काम करें कि किसान भी खुश हो और यह वापस पहली बार हुआ वर्ष 2003 में. उस समय जब शुरू हुआ तो भरपूर बिजली की बात से शुरू हुआ, बिजली के साथ ही ब्‍याज की दरों की कमी से शुरू से हुआ, धीरे-धीरे हम उस बात पर आ रहे हैं कि कैसे हमारा किसान समृद्ध हो. मैं, अभी देख रहा था कि 84 लाख किसानों का डाटा प्रधानमंत्री योजना में सर्टिफाइड हुआ. 84 लाख परिवारों के बारे में चर्चा करना और जो मध्‍यप्रदेश, पहले किसी ज़माने में अन्‍न के लिए इधर-उधर हाथ फैलाता था, प्रदेश में एक क्षेत्र था, जहां कई बार एक समय ही भोजन मिलता था. बातें हम बहुत करते हैं, सब कुछ कर लेते हैं लेकिन किसान की व्‍यवस्‍था करने के बारे में हमने क्‍या किया ?

          सभापति महोदय, मैं, इसलिए इस मांग संख्‍या 13 के समर्थन में आज खड़ा हुआ हूं, यह समर्थन केवल बातों के लिए नहीं है, यदि आज हम देखें तो मध्‍यप्रदेश में 155.25 लाख हेक्‍टेयर कृषि योग्‍य भूमि है, इसमें से सिंचित रकबा जो कि पहले 7.5 लाख हेक्‍टेयर था, उसे हम 50 लाख हेक्‍टेयर त‍क लाये हैं और अगले 4 वर्षों में 1 करोड़ हेक्‍टेयर तक जा रहे हैं और उसके बाद हम अगले 3-4 वर्षों में हर खेत तक पानी पहुंचा देंगे, किसान के लिए तीन सबसे महत्‍वपूर्ण बातें हैं कि उसके खेत तक पानी पहुँचना, उसको दूसरे तरीके से भरपूर बिजली, सड़क और आने-जाने का साधन, क्‍योंकि मैंने तो वह दिन भी देखे हैं, जब सबसे बड़ा काम विधायक का यह होता था कि जब किसान रात में खेत पर जाता था, तो उसे कोई जानवर काट लेता था और वह वहीं भगवान को प्‍यारा हो जाता था, फिर उसे देखने जाते थे. लेकिन हम तो आज उससे दो कदम आगे बढ़ गए हैं.

          माननीय सभापति महोदय, हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने सोलर पम्‍प के माध्‍यम से इस बार 2 लाख पम्‍प से शुरूआत की और यह 2 लाख से ले जाकर 10 लाख तक बहुत जल्‍दी पहुँचाने का प्रयास होगा. 2 लाख किसान और उसमें भी यह तय कर दिया कि जिसके पास पहले टेम्‍परेरी कनेक्‍शन होगा, उसको पहले पम्‍प दे दें क्‍योंकि वहां तक वायर ले जाकर पहुँचाने में जो समय लग रहा है, तो किसान को पूरा भरपूर दिन में, क्‍योंकि किसान को बिजली की कब जरूरत होती है ? जब सूरज की गर्मी तेज पड़ती है, क्‍योंकि बरसात में और बाकी समय उसको पानी की जरूरत नहीं है, उसको उतनी बिजली की जरूरत नहीं हैं, तो हमने बैलेंस करते हुए कैसे सरकार ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों तक  अपनी बात पहुँचाए ? मैं अगर बात करूँ तो केवल इतनी ही बात नहीं करना चाहता हूँ. यह मध्‍यप्रदेश वह राज्‍य है, जहां हमने 5.85 लाख किसानों का स्‍वाईल हेल्‍थ कार्ड बनाकर उनको नि:शुल्‍क दिया है, 5,85,281 किसानों को यह समझ में आया कि कितना और कौन सी खाद उसे जमीन पर डालना है ? वरना एक अंधी दौड़ में इतनी ज्‍यादा खाद और दवाइयां आने लगीं कि मनुष्‍य के जीवन पर उसका असर दिखने लगा है. यह केवल किसानी बातें नहीं हैं, यह सभी के हेल्‍थ की बातें हैं, जहां तक सवाल है कि किसानों को खरीफ के लिए 22.87 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज भी पहुंचाया, जिसके बारे में पहले कभी कोई कल्‍पना नहीं करता था.

          माननीय सभा‍पति महोदय, अगर हम बात करें, पीएम कृषि सिंचाई में पहली बार 662 तालाब बनाए गए, स्प्रिंकल और ड्रिप इरिगेशन के माध्‍यम से उसको सब्सिडी देकर काफी ज्‍यादा उसके आगे बढ़ने के रास्‍ते कि कम पानी में बेहतर खेती कैसे करें ? क्‍योंकि पहले किसान रात में खेत में पानी छोड़ देता था, पानी लबालब कई बार भर जाता था, उसके पौधे की जड़ को पानी के साथ हवा एवं ऑक्‍सीजन की भी उतनी ही जरूरत होती है, बहुत ज्‍यादा पानी देने से भी खेती की तरक्‍की नहीं होती है. इस बात को पहली बार समझ कर ड्रिप सिंचाई की एक्‍सरसाईज की गई. फसल बीमा अपने आप में अलग प्रयोग हैं.

          माननीय सभापति महोदय, वास्‍तव में सबसे ज्‍यादा, चाहे वह किसी भी पक्ष का नेता हो, सबसे ज्‍यादा आरोप उसके ऊपर लगते थे कि हमारे यहां बीमे का सही आंकलन नहीं हो रहा है, लेकिन अब सरकार ने ऐसी व्‍यवस्‍था कर दी है कि सैटेलाइट से उसकी मैपिंग करके उसका सही आंकलन करके उसका मुआवजा फसल बीमा में दिलवाने का एक प्रयास, अपने आप में वास्‍तव में इसे सोशल जस्टिस का, मैं नाम दूँगा. अगर हम बात करें तो यह सब धीरे-धीरे टेक्‍नोलॉजी को, खेती को भी इण्‍डस्ट्रियल जैसे सिस्‍टम से खेती करने की आदत हो, क्‍योंकि अब जैसे हमारे किसान की अगली पीढ़ी पढ़ी-लिखी है तो उसको पूरी टेक्‍नोलॉजी के साथ कैसे 3 फसल लें ? और उसके लिए पूरे प्रदेश में पानी और बिजली का कैसे सही इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर क्रियेट हो ? उसके बारे में अगर सोचा जाता है तो यह एक बड़ी महत्‍वपूर्ण बात है. मैं बात कर रहा था कि  मैपकॉस्‍ट में सिंचाई के साथ-साथ पूरे मध्‍यप्रदेश की हर तहसील का मैपिंग किया हुआ है लेकिन सभापति महोदय मुझे यह बताते हुए बड़ी तकलीफ भी हो रही है कि उस मैप का एक्‍चुअल उपयोग, जिसमें हर जगह जमीन के सौ मीटर, दो सौ मीटर, तीन सौ मीटर कितना पानी किधर से किधर मूव हो रहा है, कितना स्‍टोर है, उसका डेटा पीएचई और अन्‍य विभाग को कि जब वह ट्यूबवेल या कुँआ खोदता है तो कहां खोदना चाहिए, उस पूरे डेटा को अनिवार्य रूप से देखकर अगर यूज करे तो किसानों के लाखों रुपये बचेंगे क्‍योंकि जैसे ही पानी कम हो गया, वह ट्यूबवेल के लिए गया, एक ने और सौ-दौ फिट गहरा खोदा तो आसपास के पांच ट्यूबवेल खराब हो गए, तो वे पांच फिर खोदेंगे, फिर पच्‍चीस खराब होंगे तो हमें इस प्रोसेस से बचाने के लिए कहीं न कहीं इस पूरे मध्‍यप्रदेश का जो डेटा है, यह हर जिले में होना चाहिए और उसका अनिवार्य रूप से उपयोग करना सिखाएं. मैं जब मैपकास्‍ट में बैठता था तो मैंने पूरा देखा कि मेरी विधान सभा के हर गांव में कितना पानी जमीन में किस प्‍वॉइन्‍ट पर है. उसका एनॉलिसिस करके वहां गांवों में दिया. कई बार डेटा होने के बाद भी हम केवल राजनीतिक रूप से राजनीतिक चर्चा करते हैं, न कि वास्‍तव में जिनके लिए हम चुनकर आए हैं, उनके बारे में कभी ढंग से प्रॉपरली बैठकर बात करते हैं. मैं यह चाहूँगा कि वह डेटा कृषि विभाग भी वहां से लेकर अपने सभी कृषि विस्‍तार अधिकारियों के पास उपलब्‍ध कराए क्‍योंकि कहीं न कहीं नुकसान आपके किसानों का हो रहा है. उन किसानों के नुकसान को बचाने के लिए आपको उसको प्राथमिकता से लेना चाहिए. सभापति महोदय, मैं अगर थोड़ी सी बात और करूँ...

          सभापति महोदय -- ओमप्रकाश जी, थोड़ा सा संक्षिप्‍त कर दें.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- आप बोलेंगे, मैं बैठ जाऊँगा, आप मेरे अभिन्‍न भी हैं और मेरे से हाइट में थोड़े बड़े भी हैं. इसलिए आपकी बात मैं टालूंगा नहीं. (हंसी).

          सभापति महोदय -- थोड़ी शीघ्रता करें.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- माननीय सभापति महोदय, मैं दो-तीन विषयों पर और थोड़ा सा ध्‍यान दिलाना चाहूँगा. कृषि मंत्री के साथ मण्‍डी का एक बहुत बड़ा नेटवर्क भी है. नीमच, मंदसौर की मण्‍डी अपने आप में बड़ी फेमस मण्‍डी है. जहां नीमच की मण्‍डी एशिया की सबसे बड़ी हर्ब्‍स की मण्‍डी है. लेकिन साथ ही वहां की दूसरी सब्‍जी मण्‍डी और फ्रुट्स की मण्‍डी पर आज भी 8 प्रतिशत टैक्‍स वसूला जा रहा है. मैंने तो मेरी विधान सभा में जिले से हटकर हाट-बाजार बनाने का प्रयोग किया. मैंने इस बार 15 करोड़ रुपये में से 2 करोड़ रुपये दो जगह देकर हाट-बाजार बनावाया ताकि किसानों का 8 प्रतिशत अतिरिक्‍त पैसा जो लग रहा है, वह बचे और वह हाट-बाजार में ले जाकर हार्टिकल्‍चर के जितने भी प्रोडक्‍ट हैं, उनको वह बेच सके. यह बड़ी महत्‍वपूर्ण चीज है, जैसे-जैसे आपका पानी और खेती का रकबा बढ़ेगा क्‍योंकि हम तालाब से भी मिट्टी निकालकर और जो बंजर जमीन है, उसे भी खेती योग्‍य बना रहे हैं तो उस जमीन का जैसे प्रोडक्‍शन आएगा. यहां सबसे बड़ा दूसरा चेलेन्‍ज किसानों के लिए यह है कि जब किसी एक प्रोडक्‍ट का थोडा सा ज्‍यादा उत्‍पादन हुआ, रेट एकदम क्रैश हो जाता है तो उस रेट को गिरने से रोकने के लिए अच्‍छी मण्‍डियां, डिजिटल मण्‍डियां और ये फ्रुट्स और वेजेटेबल्‍स के लिए भी इन मण्‍डियों का प्रॉपरली प्रावधान करके और मेरा तो यह आग्रह होगा कि सबसे ...

          श्री भंवर सिंह शेखावत -- ओमप्रकाश जी जो मण्‍डियों के बारे में बात कर रहे हैं, कृषि उपज मण्‍डियों के चुनाव तो करा लें महाराज. मण्‍डियों के अंदर अधिकारी बैठे हुए हैं, व्‍यवस्‍थाएं जो हैं, वे अव्‍यवस्‍थाओं में बदल गई हैं, इलेक्‍शन आप करा नहीं रहे हैं, जनप्रतिनिधियों को आप बैठने नहीं देते. सोसाइटियों के माध्‍यम से पूरा का पूरा सिस्‍टम होता है आप तो जानते हैं, 20 साल से सोसाइटियों के चुनाव नहीं हुए हैं. क्‍या कृषि की बात कर रहे हैं और कितनी विकास की चर्चा कर रहे हैं.

          सभापति महोदय -- माननीय कृपया बैठ जाएं, ओमप्रकाश जी, आप अपनी बात जारी रखें.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- देखिए, सुझाव, सकारात्‍मकता और अच्‍छे प्रयोग और ज्‍यादा फायदा पहुँचाना एक लगातार प्रक्रिया है. यह प्रक्रिया न कभी खत्‍म हुई, जैसे टेक्‍नॉलॉजी हो, लेकिन मैं सिर्फ अभी यही आग्रह करूंगा कि इन हार्टिकल्‍चर मण्‍डियों के लिए हमारी एग्रोप्रोसेसिंग इण्‍डस्‍ट्री जो डायरेक्‍टली आपका विभाग नहीं है, लेकिन इस पर भी एक हमने क्‍लस्‍टर फॉरमेशन की एक्‍सरसाइज जो की है, वन प्रोडक्‍ट के साथ लेकिन उसी के साथ वहां प्रोसेसिंग कराने के लिये टेक्निकल सेशंस आपको हर तहसील में यंग किसानों के बच्चों का कराना चाहिये कि इस-इसका यह-यह प्रोसेसिंग हो सकता था. हमने एमएसएमई डिपार्टमेंट में कई बार यह प्रयोग किया था और उसके बहुत अच्छे रिजल्ट आये. मैं आपसे यहां पर यह भी बात करूंगा कि जो बीमा की हमने बात कर ली है लेकिन प्राकृतिक खेती बहुत बड़ा विषय है यहां पशुपालन मंत्री जी बैठे हुए हैं. पशुपालन में भी हमने काफी एक्सरसाईज की है. दूध में हमने जैसे 5 रुपये लीटर का प्रयोग किया ऐसे ही मैं चाहूंगा कि लोकल खाद और पेस्ट्रीसाईड्स बनाने वालों को अगर हम कुछ ग्रांट दें तो हम दो तरफ से फायदे में आयेंगे. एक तो देशी खाद से आर्गेनिक फसलें होंगी तो किसानों को उतनी ही मेहनत में कई गुना आमदनी बढ़ेगी और साथ हमारे मनुष्यों की हेल्थ में भी सुधार आयेगा क्योंकि कोरोना के बाद एक बात की बहुत तेजी से जागरूकता आई कि किस चीज का हमें कंजम्शन लेना चाहिये और कैसे यह करना चाहिये. मैं इस बात के लिये भी आपका बहुत धन्यवाद दूंगा कि हमने प्रधानमंत्री जी की उस बात को ध्यान में रखते हुए देशी हमारा मोटा अनाज जिसको हम अलग-अलग तरीके से उपयोग करें उसके बढ़ावे के लिये भी आपके प्रयोग काफी प्रशंसनीय है. मैं थोड़ा सा आपके ध्यान में सोयाबीन के मामले को भी ध्यान में लाना चाहता हूं. हमने इस अवधि में 2 लाख 12 हजार से ज्यादा किसानों का 6 लाख 32 हजार मीट्रिक टन सोयाबीन का उपार्जन किया लेकिन मैं यहां पर एक बात का ध्यान डालना चाहूंगा. मैं सोया एसोसियेशन में भी जब बैठा था तो कहा था कि सोयाबीन का आउटपुट प्रति हेक्टेयर अब बढ़ना रुक गया इसीलिये बहुत तेजी से सोयाबीन से वापस मक्का की तरफ मालवा में रुझान आ रहा है इससे होगा क्या कि सोयाबीन की फैक्ट्रियां जो चालू हैं वह बंद होंगी तो उस चीज को डायरेक्टली इस विभाग का न होते हुए भी हमें सोचना चाहिये. मैं सिर्फ आखिरी में यही निवेदन करूंगा कि आप हार्टीकल्चर की मंडियां,अतिरिक्त पैसा जो वसूल हो रहा है इन दो बातों पर ध्यान देंगे मैं इस मांग का समर्थन करूंगा और यह आग्रह करूंगा कि बजट में और बढ़ोत्तरी होनी चाहिये ताकि और ज्यादा नये प्रयोग करके हमारे अन्नदाता किसानों को और सक्षम बनाएं और उनकी शक्ति बढ़ाएं और उनकी आने वाली पीढ़ी को खेती की रा फसल बेचने के बजाय उसकी प्रोसेसिंग करके हर गांव में कुटीर उद्योग या लघु उद्योग के माध्यम से गांवों से पलायन भी रुकेगा. इन सब बातों का ध्यान मैं मंत्री जी का दिलाते हुए पुन: आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे बोलने का समय दिया.धन्यवाद.

          श्रीमती झूमा सोलंकी (भीकनगांव) - माननीय सभापति महोदय,किसान कल्याण विभाग की मांग संख्या 13 पर अपनी बात रख रही हूं. पूरा देश कृषि प्रधान देश है और इसी तरह हमारा राज्य भी कई तरह की उन्नति कर रहा है और वह भी प्रथम स्थान पर आ रहा है और इसके लिये कई अवार्ड भी मिले हैं. इसके लिये मैं बधाई देती हूं किन्तु इसके साथ मैं यह भी कहना चाहती हूं कि जिस तरह से अवार्ड मिलता है और प्रदेश के मुखिया दिल्ली जाते हैं तो साथ में किसानों का भी एक दल जाना चाहिये क्‍योंकि मेहनत तो किसानों की है तो किसानों को तवज्‍जो मिलना चाहिये, ऐसा मेरा मानना है. माननीय सभापति महोदय, पूरे मध्‍यप्रदेश के बजट में जैसे जनसंख्‍या के आधार पर साढ़े आठ करोड़ की जनसंख्‍या मध्‍यप्रदेश की है और बजट भी 421 लाख करोड़ का है और कर्ज से अधिक तो हमारा प्रदेश विकास की ओर बढ़ने की वजाय कर्ज में डूबता रहा है. माननीय पूर्व मुख्‍यमंत्री कमलनाथ जी ने इस बात को विशेष तौर से जाना जब उनकी सरकार थी वर्ष 2019 में उन्‍होंने पूरे प्रदेश के किसानों का कर्जा माफ किया है, इस बात को हमको नहीं भूलना चाहिये. सिर्फ मेरी विधान सभा की बात करें तो 2 किश्‍तों में एक अरब के लगभग किसानों का कर्ज माफ हुआ और उसमें विशेष तौर पर यह बात भी आई कि जो मृतक किसान थे उनको भी सूची से हटाया गया तो यह बहुत बड़ी बात है, यह अच्‍छे विचार रखने वाला व्‍यक्ति ही इस तरह से कर सकता है.

          श्री अमर सिंह यादव-- माननीय सभापति महोदय, किसी का कर्जा माफ नहीं हुआ...(व्‍यवधान)...

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्‍यान सिंह सोलंकी-- माननीय सभापति महोदय, यह सच्‍चाई है यह मानना चाहिये, आपकी हर बात हम मान रहे हैं और जो नहीं होती वह भी मान रहे हैं और सुन रहे हैं तो आप सुनिये इस बात को और मानिये कि 27 लाख किसानों के कर्ज माफ हुये हैं. माननीय सभापति महोदय, इसी विधान सभा में और ज्‍यादा लंबी बात नहीं है, यह वर्ष 2019 की ही बात है.

          श्री अमर सिंह यादव--  माननीय सभापति महोदय सारे किसान डिफाल्‍टर हो गये हैं. एक भी किसान का कर्जा माफ नहीं हुआ है. इसलिये आप सब लोग उधर बैठे हैं.

          श्रीमती झूमा डॉ. ध्‍यान सिंह सोलंकी--  माननीय सभापति महोदय, सभी किसानों का हुआ है और माननीय को कोई गलतफहमी है तो सूची समेत हम इनको उपलब्‍ध करा सकते हैं. माननीय सभापति महोदय, हमारे किसानों के सामने जो दिक्‍कतें आती हैं उन सुझावों के रूप में मैं रख रही हूं, बहुत वरिष्‍ठ मंत्री हैं इस बात को जरूर ध्‍यान देंगे. मिट्टी परीक्षण के लेब के लिये इन्‍होंने बहुत भवन दिये हैं हर तहसील पर बने यह बहुत अच्‍छी बात है. किंतु स्‍टाफ के अभाव में सबमें ताले लगे हैं आज का जागरूक किसान यह चाहता है कि मिट्टी का परीक्षण हो और उस हिसाब से वह खाद बीज और दवाईयों का उपयोग करे, किंतु स्‍टाफ के अभाव में इनके सारे के सारे लेब बंद पड़े हैं इनको चालू किया जाये और इसी तरह से मध्‍यप्रदेश में वर्ष 2023 में एक पशु संजीवनी योजना लागू की गई बहुत अच्‍छी योजना थी यह भी जिसके लिये आपने सर्वसुविधायुक्‍त वाहन दिये किंतु उनका भी कोई अता पता नहीं है. उनको चालू किये जायें सिर्फ भोपाल से योजना चालू करके वह धरातल पर कहां तक पहुंची उसकी भी मॉनीटरिंग करना बहुत जरूरी है और कोई छोटी रकम नहीं है, 65 करोड़ की लागत से 406 संजीवनी एंबूलेंस खरीदी गईं जो चिकित्‍सा सुविधा से लेस थीं, किंतु कहीं भी नजर नहीं आ रही हैं, उनको सुचारू रूप से चालू की जायें. माननीय सभापति महोदय, मेरी विधान सभा के क्षेत्र के अंतर्गत आसपास के चार जिलों की आवक है. 4 जिलों से फसलें आती हैं और वजह है मंडी की साख अच्‍छी होना और मंडी की साख इसलिये अच्‍छी होना क्‍योंकि व्‍यापारियों का ईमानदारी से किसानों के प्रति व्‍यवहार और लेनदेन अच्‍छा होना तो इस वजह से मंडियों की कमी पड़ती है, भारी संख्‍या में वाहन आते हैं तो मेरी मांग रहेगी की एक नवीन मंडी स्‍वीकृत की जाये वहां पर जमीन की व्‍यवस्‍था है ताकि किसानों को इसका फायदा मिल सके. इसी तरह से झिरनिया तहसील में भी मिर्ची मंडी हमारा जिला पूरी तरह से पूरे प्रदेश में मानी हुई मिर्ची मंडी बेडि़या में स्‍थापित है और मिर्ची का अच्‍छा उत्‍पादन होता है तो इस उत्‍पादन की बढ़ोत्‍तरी मेरी विधान सभा में भी हुई है तो झिरनिया तहसील में बड़ी संख्‍या में किसान इसका उत्‍पादन करते हैं किंतु बेडि़या तक लाने में उनको बहुत तकलीफ होती है वहां पर भी एक मिर्ची मंडी की व्‍यवस्‍था की जाये ताकि उनकी तकलीफ दूर हो सके. माननीय सभापति महोदय, दो रोड जो मंडी बोर्ड से पहले भी हुये हैं 2 किलोमीटर तो हुये हैं एक पोखर मार्ग जहां पर एक नाग मंदिर जहां पर लाखों दर्शक आते हैं तो उन्‍हें बड़ी तकलीफ होती है तो वहां से आधा किलोमीटर का रोड और शेष है जो पत्‍थरवाड़ा तक लगता है तो उसे भी पूरा किया जाये ताकि आमजन की इससे दूरी और खरबी से दसौरा मार्ग यह विधान सभा बड़वाहा को जोड़ने वाला है यहां भी किसानों को आवागमन में भारी तकलीफ होती है इसको भी दूर किया जाये.

          माननीय सभापति महोदय, खरगोन जिले की बात करें तो कृषि महाविद्यालय की मांग पिछले कई सालों से है, वहां के विद्यार्थियों को इंदौर या फिर अन्‍य संभाग में जाना होता है और हमारा पूरा खरगोन जिला गरीब क्षेत्र है, वहां पर आदिवासी बाहुल्‍यता है, तो यह महाविद्यालय वहां पर खोला जाये ताकि विद्यार्थियों को इसका लाभ मिले और कुछ योजनाएं जो हमारी आदिवासी क्षेत्रों में नहीं मिल रही हैं, इसमें प्रमुख रूप से गरीब आदिवासी किसानों को सूरज धारा और अन्‍नपूर्णा योजना पिछले तीन सालों से इसका कुछ भी फायदा नहीं मिल रहा है, आपकी योजना तो है, बजट भी आप दर्शाते हैं, किंतु आमजन तक इसका फायदा नहीं मिल पा रहा है, इस ओर जरूर ध्‍यान दें. खाद और बीज दोनों के लिये वह लोग परेशान होते हैं और 75 प्रतिशत इस योजना की राशि इन्‍हीं वर्गों में जाती है, तो वह इनको नहीं मिल पा रही है और जैविक खेती के लिये आज की मांग है, बिल्‍कुल होना चाहिए, किंतु उसका किसानों को लाभ कितना मिल रहा है, इस और ध्‍यान देना जरूरी है, एक बोर्ड बने जिसमें किसानों को फायदा कैसे हो? व्‍यापारी को तो फायदा मिल रहा है, यह हम सब देख रहे हैं, किंतु किसानों को कैसे फायदा हो? इसके लिये एक बोर्ड बने और इसकी मानिटरिंग हो, मध्‍यप्रदेश में एन.जी.ओ. के माध्‍यम से किसानों की कई योजनाएं सी.एस.बी फंड से संचालित हो रही हैं, पर परिणाम इसका क्‍या है? जानकारी इसकी किसी के पास नहीं होती है, विभाग की मानिटरिंग यहां भी होना चाहिए. इसी तरह से कपास खरीदी सी.सी.आई. द्वारा की जाती है जिसमें पंजीयन एवं गुणवत्‍ता संबंधी निर्देश हैं, किंतु किसान इसको समय पर बेच नहीं पाते हैं, यह बड़ी समस्‍या है, इस पर भी ध्‍यान दिये जाने की आवश्‍यकता है, कपास बेचने की प्रक्रिया भी थोड़ी सरल हो, जिसमें किसान आराम से अपनी फसल बेच सकें और उनको समय पर क्‍योंकि भाड़े के सारे वाहन होते हैं, वह दो-दो, तीन-तीन दिन या हफ्ता भर लगता है, जिसमें उनको भारी नुकसान होता है, इस ओर भी ध्‍यान देना चाहिए. माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय -- माननीय सदस्‍यों से निवेदन है कि कार्यमंत्रणा समिति के द्वारा विभाग को एक घण्‍टे का समय निर्धारित किया गया है, इसलिए अपनी बात संक्षिप्‍त से संक्षिप्‍त रूप से रखें, ताकि अन्‍य विभागों पर भी चर्चा हो सके. अभी काफी सदस्‍य शेष हैं.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस(बुराहनपुर) -- माननीय सभापति महोदय, कृषि विभाग न केवल देश और प्रदेश बल्कि मानवमात्र के लिये बहुत महत्‍वपूर्ण है. मैं मांग संख्‍या -13 के लिये अपना समर्थन व्‍यक्‍त करने हेतु उपस्थित हुईं हूं. मेरे पूर्व हमारी विधायक ने बड़ी अच्‍छी बात कहीं है कि दरसल हम जितनी उपलब्धि गिनाते हैं, वह उपलब्धि जितनी सरकार की है, उससे ज्‍यादा वह उपलब्धि किसानों की है. हमारे यहां ऐसी प्रार्थना किसान करता है कि है सत करने वाली धरती माता भरपूर अन्‍न उत्‍पन्‍न करना, बहन और बेटी के भाग का भी देना, न हो भूमि जिसके पास उसके लिये भी देना, घर आया मेहमान भूखा न जाये, साधू महात्‍मा के लिये भी देना, प्राणियों, पक्षियों, चिडि़यों के लिये भी देना, चोर चकोर के लिये भी देना, राजा का खजाना भी भर देना और सबको देने के बाद तेरे भण्‍डार में कुछ बचे तो मेरे बच्‍चों के लिये भी देना, ऐसे अन्नदाता को प्रणाम करते हुए मैं अपनी बात संक्षिप्‍त में रखकर कुछ सुझाव माननीय मंत्री जी के लिये रखना चाहूंगी.

माननीय सभापति महोदय, एक आवश्‍यकता जो मुझे लगती है, उपलब्धियां तो निश्चित तौर पर अनेक हैं, पर यह बजट पिछली बार के बजट से थोड़ा बहुत नहीं बल्कि पिछली बार के बजट से 19 हजार 717 करोड़ यह वर्ष 2003 की कहानी नहीं हो रही है, यह पिछली बार की बात हो रही है, 19 हजार 717 करोड़ रूपये से बजट बढ़ाकर माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी की सरकार ने और हमारे वित्‍तमंत्री जी ने 19 हजार करोड़ के बजट को बढ़ाकर 32308 करोड़ किया है, मतलब 12 हजार से अधिक यह बजट बढ़ा है, जो निश्चित रूप से प्रशंसनीय और वंदनीय है. जब हम कृषि विभाग की बात करते हैं तो वह मात्र कृषि विभाग ही नहीं, वह कृषि भी है, जल संसाधन भी है, उद्यानिकी भी है, ग्रामीण विकास भी है, कुटीर, पीएचई और वन विभाग भी है और इन सभी कामों के अच्‍छे काम या कमियां हमारे कृषि विभाग को प्रभावित करती हैं. मैं मां को कृषि से कनेक्‍ट करती हूं, वह कृषि के लिए बहुत मार्मिक है, बहुत जरुरी है, वही इस देश का इतिहास रहा है, वही इस देश के वैभव का कारण रहा है और जब मैं मां कहती हूं तो वह गौ-माता भी है और महिला भी है, जिसका कृषि से जुड़ाव रहना बहुत जरुरी है और जो हमारे वैज्ञानिक है, जो टेक्‍नॉलाजी बनाते हैं, उन्‍हें भी थोड़ा वुमन फ्रेंडली टेक्‍नालाजी की तरफ बढ़कर काम करना चाहिए. मैं जिस जिले से आती हूं, उस जिले में पशु संख्‍या बहुत तेज गति से कम हो रही है और वही स्थिति प्रदेश की भी है, जब तक गौवंश और यहां तक मैं कहूंगी की बकरी भी, सभी हमारे जो पशु धन है, उसको हम पशु धन ही कहते हैं, पशुधन का और गौवंश का, गाय का, बैल की खेती के साथ में कनेक्टिविटी बनी रहना बहुत जरुरी है. इस विभाग को इसमें काम करने की आवश्‍यकता है. आइंस्‍टीन ने उस समय जो देश ही नहीं पूरी दुनिया के बड़े वैज्ञानिक हैं, उन्‍होंने तत्‍कालीन वैज्ञानिक प्रोफेसर अमरनाथ झा के माध्‍यम से भारत के किसानों को संदेश भेजा था कि जो तुम्‍हारी परम्‍परागत विधि है, खेती करने की, उस विधि से तुम युगों से उसी जमीन को जोत रहे हो, हम जिस तरीके से खेती कर रहे हैं उससे हम 15-20 साल में उस खेती को छोड़कर दूसरी जगह खेती करने के लिए जाना प्रारंभ कर देते हैं. मतलब हमें एक पराम्‍परागत ज्ञान और मॉडर्न टेक्‍नॉलाजी दोनों को मिक्‍स एंड मैच करके जो माननीय प्रधानमंत्री जी कहती हैं सस्‍टेन एबिलिटी ऑफ एग्रीकल्‍चर उस ओर विचार करने के साथ साथ, बातें करने के साथ साथ, प्रभावी काम करने की जरुरत है और कृषि विभाग, विषय मात्र बजट का नहीं ,है बजट के साथ साथ जरुरत है गुड प्रेक्टिसेस पर हम ध्‍यान दें, एप्रोप्रिएट प्रेक्टिसेस को हम किसानों तक पहुंचाए और मोटी मोटी बात कहें तो हमें किसानों को सही क्रॉप काम्‍बिनेशन की तरफ जोड़ने और मोड़ने की आवश्‍यकता है, वही किसान कई बार खेती के इस प्रकार के क्रॉप को एक साथ करता है कि एक क्रॉप दूसरे क्रॉप को नुकसान करती है, जैसे अगर आप मक्‍का  और साथ में केले लगा रहे हो तो मक्‍के का कीट केले में सीएमबी वायरस प्रपोगेट करता है तो किसानों को सही खेती के क्रॉप के काम्बिनेश के बारे में जागरुक करना बहुत आवश्‍यक काम है.

          हमने लगातार अपनी उपलब्धियों में इस बात को बार बार कहा कि किस प्रकार हमारी खेती का रकबा बढ़ रहा है, जिस प्रकार हमारा बजट बढ़ रहा है, जिस प्रकार खेती की विकास दर और बुआई का क्षेत्रत् बढ़ रहा है, इस पर विस्‍तार से न जाते हुए एक ही फिगर को कोट करुं, तो हमारा फसल का उत्‍पादन 224 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 723 लाख मीट्रिक टन हुआ है जो कि लगभग 4 गुना अधिक हमारी खेती का उत्‍पादन बढ़ा है, जिसके लिए मैं डा मोहन यादव जी की सरकार और माननीय कृषि मंत्री जी को बहुत बहुत बधाई देती हूं और इस देश के किसान को प्रणाम करती हूं. माननीय सभापति जी जो एक बहुत महत्‍वपूर्ण बात है उसी को करुंगी.

          सभापति महोदय थोड़ा संक्षिप्‍त कर दें.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस जी, मैं एक से डेढ़ मिनट में अपनी बात पूरी करूंगी. सभापति जी हमारी जिस प्रकार उत्‍पादकता बढ़ी है और सचिव महोदय जी अपनी बात ठीक कह रहे थे कि कॉस्‍ट भी बढ़ी है खेती की, उसका भी आंकलन करना उसको कैसे मिनिमाइज करना और खेती को लाभ का धंधा बनाना है तो ..

                      4.05 बजे {सभापति महोदय (डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए}

श्रीमती अर्चना चिटनीस—...उसकी लागत भी कैसे कम हो, यह जरूरी है. इसके साथ साथ आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है जिसका हल किसान के पास नहीं है, उसका हल सरकार को देना होगा. वह आवश्यकता है कि हमें किसान को अपने उत्पाद को प्रोसेसिंग की तरफ कैसे ले जाये ? उसकी मार्केटिंग कैसे करें, उसका एक्सपोर्ट कैसे करे ? इस पर विभाग ने प्रदेश के स्तर से लेकर संभाग के स्तर तक अपनी एक इनफरमेशन टेक्नॉलॉजी की मार्केटिंग सेल की स्थापना करना चाहिये. जिसके जिले में भी काम होना जरूरी है. किसान जो उत्पादन कर रहा है मध्यप्रदेश के किस जिले में सबसे अधिक भाव में बिकेगा किसान को आज भी इसके बारे में बहुत समझ नहीं है. मार्केटिंग के बारे में, प्रोसेसिंग के बारे में, एक्सपोर्ट के बारे में कम से कम सरकार एक अधिकारी जो जिले में किसानों को उसके उत्पाद का उचित मूल्य मिले तथा वह मार्केटिंग की तरफ ले जा सके. अब किसान उत्पन तो कर रहा है, उसका उत्पन जो है वह सचमुच सोना उगले की स्थिति में तब पहुंचेगा जब हम मार्केटिंग एवं प्रोसेसिंग में हमारे किसान को कुछ गाईड कर पायेंगे. कपास का बीज जिसकी तरफ ध्यानाकर्षित करना जरूरी है. आज हमारा कपास का जो क्षेत्र है वह 48 हजार हैक्टेयर से कम होकर 38 हजार हैक्टेयर हुआ है. बी.टी.कपास के बीज से किसान परेशान है इसके समाधान के ऊपर विभाग काम भी कर रहा होगा. यह भी कहना चाहूंगी कि मिट्टी परीक्षण की प्रयोगशालाएं हैं उनका प्रभावी होना बहुत जरूरी है. इसके साथ साथ हमारी मंडिया हम ब्लेक टॉप की जो हमारी पक्की सड़कें हैं वह बनाने की बजाय खेत सड़क मार्ग पर मंडिया खर्च करें. किसान को सबसे बड़ा संकट अपने उत्पाद को बाजार तक लाना है तो खेत-सड़क मार्ग पर किसानों की मदद करने की कुछ न कुछ कार्य योजना बनाने की बहुत आवश्यकता है. हमारे ड्रिप इरीगेशन, टिश्यू के टारगेट हैं, वह बढ़ायें जायें. खजूर एवं अंजीर पर एमआईडीएस के अंतर्गत तो सबसिडी मिलती है उसमें मध्यप्रदेश की सरकार भी इसमें सबसिडी दे. खजूर एवं अंजीर अगर नागपुर में हो सकता है हमारे प्रदेश में भी हो सकता है. इसकी सबसिडी अगर दी तो यह वह उत्पाद है जिसको बाजार तक किसान को नहीं ले जाना पड़ेगा. खुद व्यापारी आकर उससे खरीदने आयेगा. डाईवर्सिफिकेशन ऑफ क्राप्स करने का प्रयास करना चाहिये. धन्यवाद.

श्री दिनेश जैन (बोस) (महिदपुर)सभापति महोदय, मैं मांग संख्या 13 का विरोध करता हूं. किसान कल्याण तथा कृषि विभाग, किसान कल्याण के बारे में यहां पर बैठे बैठे सोच रहा था कि भारतीय जनता पार्टी का किसानों ने कल्याण कर दिया. 29 में से 29 सीटें दे दीं. यहां पर भी दो तिहाई बहुमत दे दिया. लेकिन आज की तारीख में किसान हम लोगों से विधान सभा तथा लोक सभा में भी चाहता है जो उनको जरूरत है, जो उनकी मांग है. जिसके लिये आपको बनाया है जिसमें आपकी सरकार बनी है. आज किसानों का मुख्य मुद्दा होता है उसे एमएसपी पर भाव मिले, उसे बीमा मिले, उसे बिजली मिले, उसको सिंचाई के अच्छे साधन मिलें. लेकिन सदन में किसी ने भी खास तौर से पक्ष की ओर से किसानों की जो मेन समस्या है एमएसपी एवं बीमा उस पर कोई बात नहीं कर रहा है. सब अपनी अपनी बड़ी बड़ी बातें कर रहे हैं. जहां तक मैं समझता हूं कि हम में से भी बहुत सारे लोग समझ नहीं सकते हैं. किसान क्या समझेगा, यह आंकड़ो का खेल है. लेकिन किसान चाहता है कि एमएसपी पर लड़ाई लड़े. आज सोयाबीन का मिनिमम सपोर्ट प्राईज 4892 रूपये कर रखा है. लेकिन पिछली बार भी मंडी कमेटी में 4200-4300 रूपए में सोयाबीन बिकी. जब आपने मिनिमम सपोर्ट प्राइज 4892/- रूपए कर रखा है तो आपकी संस्‍था उसको इससे कम में क्‍यों खरीदे. मेरे हिसाब से तो यह जुल्‍म है और व्‍यापारी भी खरीदते हैं,  तो फिर मिनिमम सपोर्ट प्राइज का मतलब क्‍या है. किसानों की सबसे बड़ी समस्‍या है कि उसको भावांतर मिले. अगर मंडी कमेटी सस्‍ते भाव में खरीदती है तो मैं चाहता हॅूं कि यहां पर ऐसा कानून बने कि उसको भावांतर मिले. व्‍यापारी भी खरीदते हैं तो भी मिलना चाहिए. लेकिन सरकार की संस्‍था खरीदती है, तो मिलना ही चाहिए. सभापति महोदय, इसी तरीके से गेहूं के बारे में कहना चाहता हॅूं कि अभी आपके तौल चालू भी नहीं हुए हैं. बहुत सारे लोगों को 2200-2300-2400/- रूपए में गेहूं बेचना पड़ रहा है और मंडी कमेटी भी खरीदती है तो वहां पर भी किसानों के हित के लिए उनको भावांतर मिलना चाहिए. मैं यह बात नहीं कर रहा हॅूं कि उनको ज्‍यादा मिलना चाहिए लेकिन अगर मिनिमम सपोर्ट प्राइज हम बोलते हैं तो बहुत अच्‍छा लगता है. बोलने में तो इसके ऊपर जरूर बात होना चाहिए. किसानों की एमएसपी अगर किसान को सबसे ज्‍यादा फायदा अगर किसी चीज से होता है तो वह लहसुन से होता है. लेकिन यह कैसा वायदा-व्‍यापार-कम्‍युनिटी है कि उसके भाव को ऐसा कर देते हैं कि 2 साल तक तो वह 20 हजार-25 हजार रूपए बहुत ज्‍यादा चला जाएगा. 2 साल होने के बाद चाइना से लहसुन आ जाएगी, कहीं से भी आ जाएगी या अन्‍तर्राष्‍ट्रीय व्‍यापार के अंदर सरकार ऐसा खेल खेलती है कि उनका रेट वापस कम आ जाता है. इसके ऊपर बात क्‍यों नहीं होती ? इसके ऊपर कानून क्‍यों नहीं बनते. अगर यह सब चीजें होंगी, तो ही किसान की आय दोगुनी होगी. यह सब चीजें होंगी, तो ही किसान आगे बढे़गा. अभी माननीय अर्चना चिटनीस जी बोल रहीं थीं. माननीय सखलेचा जी बोल रहे थे. अरे, हजारों रजिस्‍ट्रियां हो रही हैं किसान भूमिहीन हो रहा है. किसान कौन बन जाएगा, यह भी हमको पता नहीं है. किसान वह बन जाएंगे, जो बडे़-बडे़ अधिकारी हैं. किसान वह बन जाएंगे, जो बडे़-बडे़ व्‍यापारी हैं. किसान वह बन जाएंगे, जो उद्योगपति हैं. रोज हजारों रजिस्‍ट्रियां हो रही हैं. किसान, किसान ही नहीं रहेगा. वह मजदूर हो जाएगा. गरीब हो जाएगा, वह भूमिहीन हो जाएगा और किसान हो सकता है कि हम सब बन बैठैं तो यह बहुत बड़ा विषय है.

          सभापति महोदय, इसी तरह से दूसरा विषय बीमा का आता है. अरे, हजारों-करोड़ों रूपए बीमा कंपनियां कमा रही हैं. मैंने अभी इफको टोकिया कंपनी जिसने उज्‍जैन में किया है, उससे मैंने एक चार्ट लिया. उसमें मुझे बताया गया कि 47 हजार रूपए हमको आपको देना रहता है और बीमा कंपनी को इसके लिए फायनेंस का 10 परसेंट प्रीमियम राशि देना पड़ता है. इसका बजट में कोई प्रावधान ही नहीं है. इतना बड़ा विषय है बीमा. 10 परसेंट से मतलब 2 परसेंट किसान को देना है, अगर 1 हेक्‍टेयर जमीन है. 47 हजार रूपए अगर उसको मैक्‍सिमम बीमा मिलेगा, तो 920 रूपए हमको देना है. 4 परसेंट स्‍टेट गवर्नमेंट और 4 परसेंट सेन्‍ट्रल गवर्नमेंट देगी. मतलब 4700 रूपए हम सब मिलकर उसको देते हैं. लेकिन उसको बीमा मिलता ही नहीं है. बीमा कंपनियां 280 करोड़ रूपए हमसे ले लेती है. पूरे साल भर का जोड़ा जाए, तो 500 से 700 करोड़ रूपए है लेकिन हमको बीमा मिलता ही नहीं है.

          सभापति महोदय, मेरी महिदपुर विधानसभा उज्‍जैन जिले में आती है. चुनाव के पहले मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा की थी, कि मैं एक क्‍लिक दबाऊंगा तो 265 करोड़ रूपए का बीमा आपके खाते में आएगा. लेकिन 265 करोड़ रूपए नहीं आया. दूसरा अभी सखलेचा जी सैटेलाइट के बारे में बोल रहे थे. अरे, सैटेलाइट इमेजरी से होता है. लेकिन अभी तक किसानों को यह भी नहीं मालूम कि बीमा मिलता कैसे है. सैटेलाइट से मिल रहा है, पर कहां मिला. सैटेलाइट से और वह एडजेस्‍टमेंट हो जाएगा. एप्‍लीकेशन ऑफ रिमोट सेंसिंग. वह साइंस ऑफ टेक्‍नॉलाजी में जाएंगे. वहां से सैटेलाइट्स को देखेंगे. बीमा मिलता ही नहीं है. 10-12 सालों में एक-दो बार बीमा मिलता है और सरकार भी प्रीमियम देती है, नहीं देती है, इसका भी कोई खुलासा नहीं है. सरकार ने इसमें बजट में 4 परसेंट रखा है, नहीं रखा है. सेंट्रल गवर्नमेंट का 4 परसेंट आता है कि नहीं आता है. यह कुछ भी रखा हुआ नहीं है. किसानों के साथ बहुत गलत हो रहा है.

          सभापति महोदय, सोयाबीन के भाव के बारे में कहना चाहता हॅूं कि उसकी लागत ही नहीं निकलती. जितना पैसा किसानों को लगता है, उतना भाव भी नहीं मिलता है. सोयाबीन में हमारा मध्‍यप्रदेश देश में प्रथम स्‍थान पर है. अरे, देश का सबसे गरीब इंसान है, सबसे खराब इंसान है जो सोयाबीन भी बेचता है न उसको भावांतर मिलता है और न ही बीमा मिलता है और न ही उसको सम्‍मान मिलता है.

श्री आशीष गोविन्द शर्मा - सोयाबीन मध्यप्रदेश में पहली बार 4892 रुपये में खरीदा गया है सरकार को आप धन्यवाद तो दें. अगली बार और बढ़ाएंगे, परन्तु आपको सरकार के प्रयासों की सराहना तो करनी चाहिए.

श्री दिनेश जैन बोस - उसकी लागत भी नहीं बनती है. मैं चाहता हूं कि उनको मिनिमम सपोर्ट प्राइस में ही खरीदा जाय. 6000 रुपये का भाव होना चाहिए और मिनिमम सपोर्ट प्राइस में खरीदा जाना चाहिए. एक राहत राशि बड़ा विषय है. यह राहत राशि आपदा प्रबंधन में भी मैंने बोला है. मैं यह बोलना चाहता हूं, लेकिन जब राहत राशि भी नहीं  मिलती है तो बीमा के क्राइटेरिया में भी नहीं आता है.

श्री भवंर सिंह शेखावत - 6000 रुपये से कम में सोयाबीन पूर्ति ही नहीं है महाराज. एक सदस्य बोलता है तुरन्त आप खड़े हो जाते हो, सरकार के बड़े हमदर्द बन जाते हो, अरे, किसान को मिल जाने दो  जो कुछ मिल रहा है. लेकिन किसानों को नहीं मिल रहा है.

श्री आशीष गोविन्द शर्मा- सरकार तो हमारी है.

श्री भवंर सिंह शेखावत -हमारी सरकार नहीं, सबकी सरकार है यह. यह मध्यप्रदेश की जनता की सरकार है.

श्री आशीष गोविन्द शर्मा - आपकी सरकार के समय सोयाबीन खरीदा जाता था क्या?

(व्यवधान)..

श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल - आप खड़े इसलिए हुए हैं कि जो कभी नहीं होता था, वह होने लग गया है तो सरकार ने किसानों के लिए अच्छे प्रयास चालू कर दिये हैं और लगातार अच्छे काम करते जा रहे हैं. अब मैं एक उदाहरण दूं, श्री सचिन भैया बैठे हुए हैं, वह भी कृषि विभाग पर बोल रहे थे. वह मेरे क्षेत्र में आये थे, मंत्री जी वहां पर घोषणा करके गये थे कि मुआवजा देंगे और उस समय सवा साल में एक रुपया नहीं दिया. अच्छे काम हो रहे हैं और धीरे धीरे और अच्छे होंगे.

सभापति महोदय - आप तो पूरा भाषण दे गये. इंटरवेंशन छोटा समझ में आता है. यह तो गलत बात है.

श्री दिनेश जैन बोस - सभापति महोदय, एक मिनट और बोलना चाहूंगा.आपदा प्रबंधन के अंदर सरकार राहत राशि देती है. अकस्मात् प्राकृतिक आपदा के कारण ओले गिर जायं, ठंड गिर जाय और फसल खराब हो जाय तो उसके अंदर राहत राशि और मुआवजे का प्रावधान है लेकिन न तो राजस्व अधिकारी आकर सर्वे करते हैं. सर्वे करने के बावजूद भी राहत राशि में नहीं आते हैं क्योंकि वह केवल बीमा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बात होती है, क्योंकि राहत राशि में अगर किसान उस क्राइटेरिया में आ जाएगा तो उसको बीमा भी जरूरी देना पड़ जाएगा, इसलिए हमें राहत राशि भी नहीं मिलती है. सभापति महोदय, आपने मुझे समय दिया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान (नागदा खाचरोद) - सभापति महोदय, मैं मांग संख्या 13 किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. मैं बताना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश की सरकार लगातार कृषि के विकास के क्षेत्र में किसानों की उन्नति और उनके सुदृढ़ीकरण के क्षेत्र में लगातार प्रयास रही है. मान्यवर श्री मोदी जी के नेतृत्व में सरकार का अपना संकल्प है कि खेती को फायदा का धंधा बनाया जाय और सरकार उस दिशा में लगातार काम कर रही है. मैं बताना चाहता हूं कि पिछले वर्ष सरकार का जो बजट था, 19718 करोड़ रुपये का बजट था, जिसमें लगभग 64 प्रतिशत की वृद्धि करके और 32308 करोड़ रुपये का प्रावधान इस वर्ष सरकार ने किया है. मैं इसके लिए मध्यप्रदेश की सरकार को मान्यवर डॉ. मोहन यादव मुख्यमंत्री जी को, कृषि मंत्री जी को बहुत सारा साधुवाद देता हूं, उन्हें बधाई और धन्यवाद देता हूं. मैं इस बात की प्रसन्नता व्यक्त करता हूं कि सरकार मध्यप्रदेश में 5 हार्स पावर के विद्युत पंपों पर लगातार सब्सिडी देने का काम, उनके बिलों को भरने का काम करती है. एक बत्ती कनेक्शन प्रदान करके निशुल्क उनका भी भुगतान करने का काम करती है. मध्यप्रदेश की सरकार मुख्यमंत्री कृषि कल्याण योजना के माध्यम से और अटल कृषि योजना के माध्यम से लगातार कृषि और किसानों के क्षेत्र में उनके मजबूतीकरण का काम कर रही है. किसानों को फसल बीमा मिले इसके लिए लगातार कृतसंकल्पित होकर किसानों को उनका बीमा दिलाने के लिए तैयार रहती है. समर्थन मूल्य पर किसानों की फसल बिके जैसा मान्यवर मुख्यमंत्री जी ने कहा था. चुनाव के वर्ष में कहा था कि हम किसानों का गेहूं 2700 क्विंटल के रूप में खरीदेंगे और पिछले वर्ष जब हमारे सारे मित्र कह रहे थे कि सरकार उसको खरीदने का काम नहीं कर रही है. वर्तमान में मुख्यमंत्री जी ने जब अभी 2600  से अधिक रुपये में खरीदने की घोषणा की है. मैं इसलिए भी मध्यप्रदेश की सरकार को बहुत धन्यवाद करता हूं और सभी जगह में मध्यप्रदेश में लगभग गेहूं खरीदी के लिए उपार्जन केन्द्र प्रारंभ हो गये हैं. गेहूं खरीदी का काम प्रारंभ हो चुका है. सरकार ट्रेक्टर हो या कृषि के उपकरण हों, लगातार उनकी खरीदी पर किसानों को अनुदान देने के लिए काम करती है. किसानों को किसान सम्‍मान निधि के माध्‍यम से प्रधान मंत्री निधि से 6 हजार रूपये केन्‍द्र की सरकार और 6 हजार रूपये मध्‍य प्रदेश की सरकार देकर 12 हजार रूपये सालाना देने का काम कर रही है. मैं प्रधान मंत्री जी और कृषि मंत्री जी को इसके लिये भी धन्‍यवाद ज्ञापित करता हूं.

          मान्‍यवर् सभापति महोदय, मध्‍य प्रदेश की सरकार पशु पालन विकास को प्रोत्‍साहित करने के लिये भी कृत संकल्पित है. दुध उत्‍पादकों के हित में मुख्‍यमंत्री डेयरी विकास योजना को सरकार ने प्रारंभ किया है. दुग्‍ध उत्‍पादन पर और दुग्‍ध के संकल्‍प पर पांच रूपये बोनस देने का काम भी जो सरकार ने किया है. मैं इसके लिये भी सरकार को धन्‍यवाद देना चाहता हूं. कृषि मंडियों के विकास में सरकार लगातार काम कर रही है. वर्ष 2024-25 में चना, मसूर और सरसों का उपार्जन किया गया है और 2 लाख 10 हजार कृषकों से कुल 6 हजार मीट्रिक टन चना, मसूर और सरसों का उपार्जन किया गया है, जिसका न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य 3575 करोड़ रूपये से अधिक है. मैं मध्‍यप्रदेश में बलराम तालाब निर्माण, जो प्रधान मंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत है. लगातार सरकार का उस पर काम करने के लिये और किसानों को सिंचाई के यंत्र है जैसे स्प्रिंकलर, ड्रिप आदि में 45 से 55 प्रतिशत अनुदान के लिये भी धन्‍यवाद करता हूं. कृषि मण्डियों को आधुनिक बनाने की दिशा में भी सरकार को धन्‍यवाद करता हूं और राज्‍य पोषित नलकूप खनन योजना के अंतर्गत जो गरीब लोगों को अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को जो 25 हजार रूपये या 25 हजार रूपये से कम दोनों में से किसी एक पर सहयोग करने का काम सरकार करती है. मैं इसके लिये भी धन्‍यवाद करता हूं औेर इस मांग के समर्थन के साथ मैं अपने क्षेत्र की दो प्रमुख बातों की भी अपेक्षा माननीय मंत्री जी से रखते हुए कि खाचरौद मध्‍य प्रदेश का एक कृषि उत्‍पादन का एक महत्‍वपूर्ण केन्‍द्र है. वहां मटर का उत्‍पादन बड़ी मात्रा में होता है और मटर यहां से पूरे देश में जाती है. यदि आप फूड प्रोसेसिंग प्‍लांट की स्‍थापना करने का काम भी सरकार वहां पर करे तो ज्‍यादा उचित होगा. फल उत्‍पादन, फल मण्‍डी और कृषि मण्‍डी, सब्‍जी मण्‍डी के रूप में भी यदि खाचरौद में उसकी राशि को स्‍वीकृत कर दिया जाये. ऐसी मांग करते हुए मैं अपनी बात को यही पर समाप्‍त करता हूं और मान्‍यवर् मख्‍य मंत्री जी को और माननीय कृषि मंत्री जी को इस नये बजट प्रावधान के लिये जो 64 प्रतिशत अधिक है, उसके लिये धन्‍यवाद ज्ञापित करता हूं. धन्‍यवाद.

          श्री अभीजित शाह (टिमरनी)- माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या-13 के बारे में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. इस 32 हजार करोड़ के बजट में, कृषि मंत्री जी यहां पर मौजूद हैं. हम सभी ने सुना है कि मध्‍यप्रदेश गेहूं उत्‍पादन में पंजाब को पीछे छोड़ चुका है, उससे आगे निकल चुका है और उसमें एक बहुत बड़ा योगदान हरदा जिले का भी है. लेकिन आज हरदा जिले का किसान हम सब पर टकटकियां लगाकर के देख रहा है कि उसको क्‍या मिला. 55 जिले हैं, मेरे ख्‍याल से कम से कम 580 करोड़ रूपये का बजट हरदा जिले को भी मिलना चाहिये था, जो नहीं मिल पाया. मैं कहना चाहूंगा कि अभी यहां पर सैटेलाइट की बात हो रही थी. मैं सरकार से कहूंगा कि एक बार सैटेलाइट लगाकर आप किसानों के खेत में जाने का जो रास्‍ता है उसको देख लीजिये. वर्ष 2017 से खेत सड़क योजना बंद पड़ी हुई है. एक किसान जितनी मेहनत करता है फसल को पैदा करने में, उससे कई ज्‍यादा मेहनत करता है बारिश के समय में उसी फसल को लाने में. कभी-कभी कीचड़ में फंसकर ट्राली पलट जाती है और किसान की मृत्‍यु भी हो जाती है. आज मध्‍य प्रदेश का किसान और हरदा जिले का किसान आपकी तरफ देख रहा है कि कृपा करके आप खेत सड़क योजना को चालू करें.

          मैं एक चीज और कहना चाहूंगा कि जो बजरी होती है उसको निकालने की अनुमति ग्राम पंचायत स्‍तर पर मिलना चाहिये, क्‍योंकि उस बजरी का इस्‍तेमाल किसान अपने घर को सुधारने मे कर सकता है. मैं यह भी कहना चाहूंगा कृषि विभाग का बजट बहुत बड़ा बजट होता है. कृषि मंत्री जी यहां पर मौजूद हैं आप हरदा जिले में जो मण्‍डी निधि सड़क मिलती है वह आप देने की कृपा करें. क्‍योंकि मेरी विधान सभा आदिवासी बाहुल्‍य क्षेत्र है.  जंगल का क्षेत्र है. सड़कें नहीं हैं. सरकार तो यहां तक नहीं मानती है कि जंगल के जो 42 गांव हैं,  वहां किसान रहते हैं,  क्योंकि वहां कृषि  फीडर ही नहीं है. यह आपसे संबंधित  नहीं है, लेकिन  में  सरकार को एड्रेस कर रहा हूं कि जब कृषि फीडर ही नहीं  है, तो वह खेती कैसे कर रहे हैं.  डोमेस्टिक  फीडर  से  मिक्स फीडर  बनाकर.  इसीलिये कम से कम मंत्री जी सड़क तो दे दें मंडी निधि से वहां पर.  टिमरनी मंडी जो है,  वह एक बहुत बड़ी मंडी है,  वह अब छोटी पड़ने  लगी है.  वहां आवक बहुत ज्यादा है.   पिछले वर्ष वहां आवक इतनी बढ़ गई थी कि  7-7,8-8 दिन तक   किसानों को मंडी प्रांगण  के  बाहर सोना पड़ा.  ट्रेक्टर लगाकर  रखना पड़ा.  मंडी में घुसने के बाद 4-5 दिन लगे  वह अलग. तो मंडी  बड़ी करने की आवश्यकता है.  उसी प्रकार  से मैं आपको धन्यवाद देना  चाहूंगा, क्योंकि मैंने  आपसे मांग की थी रेहटगांव  मंडी चालू करने की.  आपने वह चालू करवाई, लेकिन वहां पर अभी बजट की आवश्यकता है.  इसलिये सिराली  और रेहटगांव मंडी  में  अतिरिक्त बजट दिया जाये.  मंडी के जो चुनाव हैं,  वह  बहुत समय से पेंडिंग हैं, उसे करवाया जाये.  साथ ही आपके  घोषणा पत्र  में  2700  रुपये प्रति क्विंटल देने का  आपने वादा किया था.  आपका  वादा  2700 रुपये समर्थन मूल्य का था.  अभी आपने 2425  रुपये किया  है और 150 रुपये या  175 रुपये शायद   बोनस दे रहे हैं.  लेकिन मैं  सभी सदस्यों को याद दिलाना चाहूंगा कि  अंतिम बोनस  2013 में  आया था,  जो 150 रुपये था,  यह भी आप ही की सरकार ने बंद किया था. आज  12 साल में, क्योंकि बहुत वाहवाही हुई थी कि  बहुत ज्यादा  बोनस बढ़ा दिया है. तो मैं सदन में एक आंकड़ा रखना चाहूंगा कि  12 साल  में उस 150 रुपये को बढ़ाकर  175 रुपये किया गया है.  यानि 25 रुपये, 12 साल में 25 रुपये क्या होता है.  2 रुपये साल.  मतलब किसान के लिये  2 रुपये  साल  की  वृ्द्धि, बल्कि  मेरी तो मांग है कि जो  12 साल से  बोनस रुका हुआ था, वह  भी किसान को मिलना चाहिये.  इसके साथ हरदा जिले में हर बार  बहुत बड़ी समस्या आती है,  जब मूंग को तोलने की बारी आती है, तो न जाने पता नहीं क्या हो जाता है.  आस  पास के जो जिले हैं,  वहां पर प्लेट कांटा चलता है,  लेकिन  हरदा  जिले में  न जाने कौन सी राजनीति है कि  वहां हाथ कांटे  का इस्तेमाल होने लगता है, जिससे किसान को  आर्थिक  घाटा होता है, उसे लूटा जाता है.  इसलिये मेरा मंत्री जी से निवेदन है, क्योंकि  हम लोग कलेक्टर साहब के पास जाते हैं, कलेक्टर साहब  बोलते हैं,  भैया मंत्री जी आदेश करेंगे, तो  हमें कोई दिक्कत नहीं है. तो मंत्री जी से मेरा विनम्र आग्रह है कि   इस बार हरदा जिले में  मूंग खरीदी  प्लेट कांटे के माध्यम से होनी चाहिये. इसके साथ ही हरदा कृषि प्रधान जिला है.  यहां पर  फूड प्रोसेसिंग प्लांट होना चाहिये. कोल्ड स्टोरेज होने चाहिये.  इससे  आर्थिक फायदा होगा.  खाद बीज, मैं असत्य नहीं बोलूंगा.  मेरे जिले में खाद बीज मिल तो जाता  है,  लेकिन समय से नहीं  मिल पाता है. तो कृपया सरकार इस बार पहले से प्री प्लानिंग करके  खाद बीज मुहैया कराये,  क्योंकि  खाद अगर फसल होने के बाद मिले, तो उससे कोई फायदा नहीं होता है.  दूसरा एक निवेदन और है कि  जिले में  खाद बीज के मानक को जांच करने  वाली प्रयोगशालाएं होनी चाहिये, क्योंकि नकली खाद भी बहुत  जा रहा है.   अगर जिले में वह प्रयोगशाला होगी,  तो  मेरा हर किसान भाई  अपने खाद बीज को ले जाकर  वह किस मानक का है,  इसकी वह जांच करा सकता है, इससे उसे धोखा नहीं मिलेगा.  नहीं तो कई बार ऐसा होता है कि  बीज बोने के बाद पैदा नहीं होता है.  जब पैदा नहीं होता है, तो किसान आर्थिक घाटे में डूब जाता है. कई बार वह आत्महत्या भी कर लेता है.  अब मैं कुछ अलग हटकर बोलना चाहूंगा, क्योंकि यहां सरकार  के सभी  मंत्रीगण मौजूद हैं. हमारे कैलाश विजयवर्गीय जी भी मौजूद हैं, वे बहुत सम्मानीय एवं  वरिष्ठ हैं.  मैं चाहूंगा कि आप लोगों  के  माध्यम से  एक बात ऊपर जाये. हमारे जो देश के प्रधानमंत्री जी हैं, वह सौर ऊर्जा की बात कर रहे हैं. यह एक अच्छी सोच है.  क्यों न म.प्र.  पूरे भारत देश  में  वह प्रथम राज्य बने, जो   अपने नागरिकों को  फ्री का पानी पिला सके.  आज जो नल जल योजना है,  उसको 25  की डीपी के साथ जोड़ा जाता है.  उसका जब बिजली का बिल  आता है,  तो उसकी वसूली मात्र  50 प्रतिशत हो पाती है. अगर सौर ऊर्जा के माध्यम से वह जो योजना है, नल जल की जो मोटर की उस पर अगर सौर ऊर्जा लगाई जाये तो मध्यप्रदेश इस देश का पहला राज्य बनेगा जो अपने नागरिकों को फ्री में पानी पिला सकेगा. दूसरा जो इसका पैसा बचेगा तो 15वें वित्त आयोग का जो पंचायतें खर्च करती हैं, जो पैसा बचेगा वह पैसा हम वॉटर रिचार्जिंग के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं. सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.

 

 

 

          श्री अनिरूद्ध माधव मारू                                      अनुपस्थित

          श्री मनोज चौधरी                                              अनुपस्थित

 

          श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाह डब्बू (सतना ) -- माननीय सभापति महोदय, आपको बहुत धन्यवाद. मैं मांग संख्या 13 पर बोलने के लिये खड़ा हुआ हं, इसके लिये मैं सदन का और अपने विधायक दल का धन्यवाद करता हूं.

          सभापति महोदय, लगातार पिछले एक घंटे से आंकड़ों की बात यहां पर हो रही है. लगातार किसानों की व्यवस्था और सरकार की उपलब्धि की बात हो रही है, उसकी प्रशंसा हो रही है. मैं सिर्फ कुछ बात की ओर कृषि मंत्री जी का ध्यान दिलाना चाहता हूं. क्योंकि हम सब जनप्रतिनिधि हैं, हमारी अपनी जिम्मेदारी है, और जिन लोगों ने हमें यहां पर चुनकर के भेजा है उनकी बात को अगर हम यहां पर सदन में नहीं पहुंचा पाये तो हम अपने काम के प्रति वफादार नहीं कहलायेंगे. आज जब बजट बनता है तब भी विधायकों से नहीं पूछा जाता , अब जब बजट पर चर्चा होनी है तब भी विधायकों को बोलने के लिये मोका नहीं मिल रहा है. 230 विधायक लगभग सारे के सारे विधायक खेती किसानी के काम से जुड़े हुये हैं, इतने कम समय में पूरी बात को रख पाना, पूरे प्रदेश को समझ पाना जबकि मध्यप्रदेश के जितने संभाग हैं, जितने जिले हैं, जितने ब्लाक हैं उसमें  अलग अलग किस्म की खेतियां हैं और अलग अलग किस्म की समस्यायें भी हैं. किस समस्या पर सरकार को ज्यादा फोकस करना है, किस पर कम करना है, कौन सी भगवान के भरोसे है और कौन सी सरकार के भरोसे है यह तो हमें और आपको तय करना पड़ेगा.

          माननीय सभापति महोदय, हम उस किसान की बात यहां पर कर रहे हैं जब देश में लोकतंत्र नहीं था तब किसान अपने आपमें एक संस्था होता था और अपने पूरे गांव की देखभाल करता था उस गांव का सारी अर्थ व्यवस्था सबका जीवन उसी खेती किसानी से जुड़ा था आज वह किसान दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर है, आज वह किसान ब्लेकमेल होता है. जब उसे अनाज बेचना हो, तो वहां भी ब्लेकमेल होता है, जब उसे खाद बीज चाहिये हो तो वहां भी वह ब्लेकमेल होता है, तो मैं इस सदन के माध्यम से माननीय कृषि मंत्री जी से और इस सरकार से यह अनुरोध करना चाहता हूं कि किसानों की व्यवस्था जो हो वह तो करे कम से कम उनके मान सम्मान के सुरक्षा की व्यवस्था भी करे. उनके परिवार के सुरक्षा की तो बात करे, हमें संतुलन बनाना है व्यापारियों के बीच में भी, और किसानों के बीच में भी और यह दोनो परस्पर एक दूसरे से जुड़े हुये लोग हैं, उसी तरीके से जो हमारी प्रशासनिक व्यवस्था है मैं उसके लिये भी कुछ कहना चाहता हूं. हमारे सतना में एक सब्जी मंडी थी विश्वास राव सब्जी मंडी के नाम से जिसको आचरण संहिता के दौरान 2018 में ध्वस्त कर दिया गया अब वहां पर जो काम करने वाले व्यापारी थे जो छोटे व्यापारी थे फुटपाथ पर व्यापार करते थे और जो इससे जुड़े लोग हैं जैसे हम्माल हो उनके पास में कोई छत नहीं थी कोई जगह नहीं थी, सरकार ने कोई व्यवस्था नहीं की, प्रशासन ने कोई व्यवस्था नहीं की कि उनको शिफ्ट कहां पर किया जाये. उन लोगों ने आपस में संगठित होकर एक निजी भूमि पर ऐसे ही मंडी लगाना शुरू किया जो धीरे-धीरे गांधी सब्‍जी बाजार के नाम से चर्चित हो गया. अब हर दिन कृषि विभाग के अधिकारी जाते हैं, मण्‍डी के अधिकारी जाते हैं और उन व्‍यापारियों को, उन किसानों को ब्‍लैकमेल करते हैं, उन्‍हें हटाने की बात करते हैं. जब उनसे पूछा जाता है कि इसका हल क्‍या है तो वह कहते हैं जहां पर अनाज मण्‍डी है आप वहां पर आओ. अनाज मण्‍डी की जो दुकानें आवंटित करना चाहते हैं उनके रेट इतने ज्‍यादा हैं कि वह व्‍यापारी उन्‍हें खरीदने में सक्षम नहीं हैं. वह दुकानदार उसे खरीदने में सक्षम नहीं हैं. मैं इस चर्चा के माध्‍यम से इस सदन में सरकार से, आदरणीय कृषि मंत्री जी से यह अनुरोध करता हूं कि उस गांधी बाजार को जो भी सरकार की नीतियां हों, मण्‍डी टैक्‍स लगे, वहां पर मण्‍डी इंस्‍पेक्‍टर जाए, उसको अपनी निगरानी में रखे, लेकिन उनको वहां व्‍यवस्‍था दे. उनको वहां सुरक्षित करे ताकि उनका परिवार और उनका जीवन सुरक्षित हो सके. दूसरा, इसी तरीके से हमारे यहां जो मण्‍डी के अधिकारी हैं, लगातार शिकायतें आती हैं. अभी कुछ दिन पहले मैं अपने क्षेत्र के दौरे पर था. बुन्‍देलखंड, चम्‍बल के दौरे पर, जब मूंगफली की फसल आती है तो कई मंडियां ऐसी थीं जहां मूंगफली नहीं खरीदी जा रही थी. जबकि उसकी सरकारी एमएसपी है. उस एमएसपी पर व्‍यापारी भी मंडी पर कोई खरीदी नहीं कर रहे थे. उनमें से करेरा मंडी, शिवपुरी मंडी और एक छतरपुर मंडी प्रमुख है. मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि जो भी फसलें आती हैं, जिस समय पर फसलें आती हैं किसानों को वह सुविधा दी जाए. वह व्‍यवस्‍थाएं की जाएं कि उन्‍हें यहां-वहां भटकने की जरूरत न पड़े और उन्‍हें ब्‍लैकमेल होने से बचाया जा सके. आज इतना भोला-भाला किसान है, इतना सीधा-साधा किसान है जिसे कई बार अगर आप बात करेंगे, क्षेत्र में जाएंगे तो वह अपनी जमीनों के रखरखाव के लिये जब उसकी व्‍यवस्‍था के लिये अधिकारियों के पास जाता है तो अधिकारी भी उसे गुमराह करते हैं. मेरा इस सरकार से इस सदन में यह अनुरोध है कि उन किसानों को यह सुविधा मिले. उनको यहां-वहां भटकना न पड़े. उनके साथ कोई छल न हो.

          सभापति महोदय -- सिद्धार्थ जी, बस दो मिनट में समाप्‍त करें.

          श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाह -- सभापति महोदय, मेरी बात पूरी हो गई. मैं बहुत भाषण देने की स्थिति में नहीं हूं. मेरा सिर्फ यह कहना है कि हमारे यहां की जो मंडी है, जो कभी सरसों का भाव हमारे यहां से तय हुआ करता था, आज उस मंडी की वह दुर्दशा हुई है कि व्‍यापारी अपना ट्रेड बदलकर दूसरे कारोबार में चले गये हैं. मंडी ऐसी जगह पर है कि नो-इन्‍ट्री के टाइम पर वहां पर ट्रक तक नहीं जा पाते बाहर खड़े रहते हैं. जब रात को नो-इन्‍ट्री खुलती है तो व्‍यापारी घर पर, हम्‍माल घर पर, तो काम कब होगा. ऐसे में हमारी सतना मंडी को एक व्‍यवस्‍था दी जाए. सतना की मंडी का मध्‍यप्रदेश और उत्‍तरप्रदेश के रिश्‍तों को जोड़ने में, उनको मजबूत करने में एक महत्‍वपूर्ण योगदान है. आज हमारे यहां सोयाबीन की फसल न के बराबर हो गई सिर्फ व्‍यापारियों के कारण. सिर्फ उसके अच्‍छे भाव न मिलने के कारण. उसका रखरखाव न होने के कारण. मेरा यह अनुरोध है कि समय-समय पर हर फसल को, हर किसान को, हर क्षेत्र को गंभीरता से लें. इन्‍हीं बातों के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद. जय हिन्‍द. जय जवान, जय किसान.

          श्री भैरो सिंह बापू (सुसनेर) -- सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 13 के बजट का विरोध करता हूं. मैं आपका ध्‍यान मालवा क्षेत्र के संतरों की ओर आकर्षित करना चाहता हूं. हमारे क्षेत्र में संतरे की अधिक पैदावार होती है. यह पैदावार यूं ही नहीं होती, हमारे क्षेत्र के किसान बड़ी मेहनत करते हैं लेकिन जब मेहनत के फल के दाम की बात आती है तो मजबूरन कम दाम में किसानों को बगीचा व्‍यापारियों को बेचना पड़ता है. मेरी विधान सभा और आसपास मंदसौर, नीमच, शाजापुर और कुछ उज्‍जैन का क्षेत्र, झालावाड़ इसी क्षेत्र में ज्‍यादा से ज्‍यादा संतरे की पैदावार होती है. आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में या आसपास कहीं भी एक फूड प्रोसेसिंग प्लांट की सौगात मिल जाए तो मेरे विधान सभा क्षेत्र में संतरे की खेती करने वाले हजारों किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम मिल जाएगा. पहले उद्यानिकी के माध्यम से अनुदान के पौधे मिलते थे लेकिन वह भी अब बंद हो गए हैं.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- सभापति महोदय, विडंबना देखिए कि मालवा का संतरा है और व्यापारी नागपुर के हैं और हमारा संतरा नागपुर के संतरे के नाम से बिकता है. नागपुर का संतरा सारे देश में फेमस है और मालवा से पूरा का पूरा जाता है. क्यों बापू क्या मैं गलत बोल रहा हूँ. पूरा मालवा से जाता है.

          श्री भैरोसिंह "बापू" -- मंत्री जी आप एकदम सही बोल रहे हैं.

          श्री माधव सिंह (मधु गेहलोत) --  बापू जी मैं आपका समर्थन करता हूँ. आगर मालवा क्षेत्र में हजारों टन संतरा पैदा होता है. उसके लिए मैं बापू जी का समर्थन करता हूँ.

          श्री भैरोसिंह "बापू" -- धन्यवाद विधायक जी.

          डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय -- मंदसौर, नीमच जिले में इसकी भरमार है.

          सभापति महोदय -- संसदीय कार्य मंत्री जी जानते थे कि आज आप संतरे के बारे में बोलेंगे वे संतरे के रंग की जैकेट पहनकर आए हैं.

          श्री भैरोसिंह "बापू" -- सभापति महोदय, संसदीय कार्य मंत्री आगर क्षेत्र से हमेशा जुड़े रहे हैं और आपका आशीर्वाद रहा है. मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से मांग करूंगा कि 100 प्रतिशत अनुदान पर किसानों को पौधा दिया जाए. इससे संतरे का रकबा बढ़ेगा. आगर मालवा सहित उज्जैन संभाग पूरे मालवा में ऐतिहासिक तौर पर लहसुन की खेती करता है. आज से तीन महीने पहले की स्थिति देखें तो 80 से 90 हजार रुपए क्विंटल के भाव में किसान बीज लेकर आया और आज उस किसान की यह स्थिति है कि सीधे 10 प्रतिशत नीचे 6-7-8 हजार रुपए का भाव लहसुन का मिल रहा है. ऊंटी जाकर किसान बीज लेकर आता है. जिसमें मैं स्वयं भी हूँ. हम 80 से 85 हजार रुपए क्विंटल का बीज लेकर आए हैं. मार्केट में आज बेचने गए तो 7 और 8 हजार का रेट है. इसका कारण है कि चायना से जो लहसुन आ रही है जो कि जहरीली लहसुन है. चार दिन पहले टीवी पर भी इसके बारे में एक इंटरव्यू आ रहा था. इस जहरीली लहसुन को खाने से कैंसर होता है. लेकिन आज भी वह लहसुन चायना से गुपचुप तरीके से भारत में आ रहा है और यहां के किसानों को इसके कारण नुकसान उठाना पड़ता है.

          श्री बाला बच्चन -- सभापति महोदय, हम यह चाहते हैं कि माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी और सरकार इस इश्यू पर, इस टॉपिक पर भी ध्यान दे. चायना से लहसुन आ रहा है आप इस पर भी ध्यान दें. इस पर भी अपनी एक प्रतिक्रिया व्यक्त करें.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- जो आदेश.

          श्री भैरोसिंह "बापू" -- इस पर ठोस कदम उठाया जाए. माननीय कृषि मंत्री जी और मुख्यमंत्री जी से अनुरोध करुंगा कि किसानों को लहसुन का अच्छा भाव मिल सके. इस हेतु लहसुन की लागत अनुसार समर्थन मूल्य तय किया जाए. जिससे किसानों को अपनी उपज का अच्छा दाम मिल सके. किसान हित में इस महत्वपूर्ण विषय पर सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा. हमारे क्षेत्र की सबसे बड़ी मंडी नीमच है. यहां अरंडी हो, धनिया हो, जीरा हो, लहसुन हो हरेक की ऐसी-ऐसी जिंसें होती हैं जिन्हें भोपाल की मंडी में किसान लेकर खड़ा हो जाए तो यहां का व्यापारी जानता भी नहीं है कि यह क्या है और इसे कैसे लें. यह सिर्फ नीमच मंडी में बिकती है. हमारे क्षेत्र का चाहे राजगढ़ हो, खिलचीपुर हो, जीरापुर हो, शाजापुर हो, आगर हो इस क्षेत्र में अधिकतर किसान इस तरह की फसलों की खेती करता है.

          श्री दिलीप सिंह परिहार -- नीमच मंडी ए क्लास मंडी है. यहां सब प्रकार की जिंस आती हैं. बाबा रामदेव जी भी यहां से ले जाते हैं. मंत्री जी ने नई मंडी बनाई है इसके लिए उन्हें धन्यवाद देता हूँ.

          सभापति महोदय -- आपने उनसे योगासान सीखा या नहीं सीखा. (हंसी)

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- सभापति महोदय, हाथों की उंगलियों के नाखूनों को आपस में रगड़ रगड़कर उनके बाल अभी तक काले हैं.

          श्री भैरोसिंह "बापू" -- आज नीमच और मंदसौर के पूरे किसान अपनी जिंस बेचने के लिए जाते हैं. बड़े दुख की बात है कि आज उन किसानों के आवागमन में विगत 5 वर्षों से हाइवे की मंदसौर ओर की पुलिया टूटी हुई है. हमारे माननीय उप मुख्यमंत्री जी के क्षेत्र का मामला है. इस पुलिया के टूटे होने के कारण किसान को 50 से 100 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है. उसके साथ आए दिन लूटमार होती है. आदरणीय डांगी जी हाथ उठा रहे हैं अभी 4 दिन पहले इनके क्षेत्र के किसानों को लूटा गया है. यह राजगढ़-खिलचीपुर क्षेत्र के किसान थे. मैं आपके सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मांग करूंगा कि जल्‍द से जल्‍द उस पुलिया को बनाया जाए और विगत पांच वर्षों से मंदसौर ही नहीं अपितु राजस्‍थान का चौहमेला (चौमेला) एवं आसपास के किसानों की आर्थिक स्थिति खराब हो चुकी है. मैं आपके माध्‍यम से पुलिया बनाने की मांग रखता हूं. आज जंगली जानवरों की बात होती है  सभी ने सुअर, नीलगाय की बात रखी है, लेकिन इनकी रोकथाम कैसे की जाए. नीलगाय को यूपी में मारा गया था जब कई संगठन इसे रोकने के लिए सामने आए. मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करता हूं कि क्‍यों नहीं फायर से नसबंदी की जाए. यह एक प्रैक्टिकल है कि अगर फायर से रोजड़ों की नसबंदी की जाएगी तो कहीं न कहीं इसकी रोकथाम होगी. अभी मैंने आदरणीय सखलेचा जी को सुना. वे बता रहे थे कि मक्‍का बोयें. मक्‍का कैसे होगी. जहां तक रोज़ड़ा और सुअर है. आज अगर हम मक्‍का बोते हैं तो इसे सुअर खा जाएंगे, रोज़डे़ खा जाएंगे, सोयाबीज को बो नहीं सकते. सोयाबीज को अडानी खा गये, बाबा रामदेव खा गये तो सोयाबीन तो बो ही नहीं सकते हैं. आज स्थिति यह है कि चार हजार की सोयाबीन मार्केट में है और तेल का रेट 200 रुपए है. मक्‍का के लिए विचार किया जाए.

          सभापति महोदय, आगर की एक महत्‍वाकांक्षी योजना है मध्‍यम सिंचाई परियोजना बाबचा रत्‍नाखेड़ी डेम जो डेम 159.21 करोड़ परियोजना 18 गांव 48 हेक्‍टेयर जमीन होगी. आगर, मालवा जिले की तहसील आगर या बडौद तहसील के आठ गांव इस परियोजना से लाभान्वित होंगे लेकिन सबसे बड़ी समस्‍या यह है कि ग्राम तौलाखेड़ी, भीमलौद, कांकरिया, रत्‍नाखेड़ी, ढ़ाबडि़या, बाबचा आज इन क्षेत्र के किसानों का जो मुआवजा है किसानों की यह हालत है कि उनको इतना कम मुआवजा मिल रहा है कि वह किस तरीके से जमीन खरीद पायें. मैं आपके माध्‍यम से सरकार से मांग करता हूं कि उनको उचित मुआवजा दिलाया जाए ताकि किसान अपनी जमीन ले सके. मेरे क्षेत्र में कुंडलिया की सिंचाई से आज परीसिमन बड़ा गांव क्षेत्र वंचित रह चुका है इसके अलावा सालरिया गौ-शाला जहां अभी 25 तारीख को माननीय मुख्‍यमंत्री जी आने वाले हैं लेकिन उस सालरिया गौशाला में पानी की कुछ भी व्‍यवस्‍था नहीं है. मैं आपके माध्‍यम से मांग करूंगा कि वहां पर कम से कम आठ हजार गाय हैं उसके आस पास के कम से कम 10 गांव जो कुंडलिया डेम से छूट चुके हैं उसे कुंडलिया डेम से जुडवायें ताकि किसानों को फायदा हो सके. जैविक खेती की बात करता हूं. हम जहर खा रहे हैं. हम यदि गेहूं खाते हैं तो उसमें जहर होता है. आज जो बीमारियां हो रही हैं चाहे कैंसर हो या हृदय की बीमारी हो किसानों का सारा पैसा केवल बीमारी में जाता है. अगर सरकार इस पर पाबंदी चाहती है तो  आपके माध्‍यम से यह रासायनिक दवाएं बंद कर दी जाएं. हिन्‍दुस्‍तान के अंदर रासायनिक दवाइयों को बंद किया जाना चाहिए. अगर दवाई बंद हो जाएगी तो शायद किसानों को उचित मूल्‍य भी मिलेगा और गौमाता की भी कद्र होगी. उन्‍हीं के गोबर से फसल उगाएंगे और हिन्‍दुस्‍तान की जनता का भला होगा. आपने बालने का समय दिया इसके लिए धन्‍यवाद.

          श्री अनिरूद्ध (माधव) मारू (मनासा)--सभापति महोदय, आपने बोलने का अवसर दिया इसके लिए धन्‍यवाद. मैं मांग  संख्‍या 13 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. कृषि जिसमें आंकड़ों पर तो सभी ने बात की है मैं मूल मुद्दों पर ही बात करूंगा. कृषि सम्‍पूर्ण भारत की अर्थव्‍यवस्‍था का, रोजगार का सबसे मुख्‍य स्‍त्रोत है अगर आजादी के बाद इस पर ढ़ंग से काम हो जाता अगर बिजली बिल माफ करने वाली सरकार, बिजली माफ नहीं करती और बिजल दे देती तो किसानों को शायद देश में वह लाल गेहूं नहीं खाना पड़ता जो अमेरिका से आया था. हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सिंचाई का रकबा बढ़ाया ,बिजली की सप्‍लाई बढ़ाई और आज अनाज के उत्‍पादन में भारत आत्‍मनिर्भर है तो यह भारत के किसानों की वजह से और भारतीय जनता पार्टी की सरकार की वजह से है हमारे प्रधानमंत्री, मुख्‍यमंत्री एवं मंत्री जी की विकासवादी सोच का परिणाम है कि अनाज उत्‍पादन के साथ, मोटे अनाजों के उत्‍पादन में भी प्रदेश में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है. ऐसी वृद्धि की योजना, हमारे यहां दालों और तेल बीज के लिए भी योजनाबद्ध तरीके से काम करेंगे तो निश्चित रूप से इन चीजों में भी हम आत्‍मनिर्भर बनेंगे.

          सभापति महोदय, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसान के लिए वरदान साबित हुई हैं और निश्चित रूप से विपरीत परिस्थितियों में होने वाले नुकसान की भरपाई किसान को हो जाती है तो किसान को तसल्‍ली हो जाती है कि उसकी कोई चिंता कर रहा है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी और मंत्री से मेरा निवेदन है कि हमारे क्षेत्र में "पान" का उत्‍पादन बहुतायत में होता है. पूरे नीमच, मंदसौर और सागर क्षेत्र में भी उसका उत्‍पादन काफी होता है लेकिन पान, को फसल बीमा योजना में कवर नहीं दिया गया, अगर उस अधिसूची में इसे शामिल कर लिया जायेगा तो निश्चित रूप से हर साल जो नुकसान, पान उत्‍पादकों को होता है, उसकी भी भरपाई की जा सकेगी, उस किसान के चेहरे पर भी हम खुशहाली देख पायेंगे.

          सभापति महोदय, प्रदेश में निरंतर यूरिया की आपूर्ति हो रही है इसलिए इस वर्ष यूरिया को लेकर कोई सूचना भी नहीं आई है. असंतोष की कोई खबर भी नहीं आई है कि यूरिया की दिक्‍कत है. लेकिन धीरे-धीरे नैनो यूरिया का चलन बढ़ रहा है, पर अभी भी इसके लिए किसानों में संशय की स्थिति बनी रहती है, इसलिए मंत्री जी से निवेदन है कि नैनो यूरिया के लिए प्रदर्शन प्‍लांट तैयार किये जायें, सरकारी स्‍तर पर छिड़काव हेतु ड्रोन की व्‍यवस्‍था की जाये, इन प्रदर्शन प्‍लांटों के माध्‍यम से नैनो यूरिया और डी.ए.पी. का छिड़काव करेंगे तो निश्चित रूप से जो किसान यह देखेंगे, उनमें हम नई जागृति ला सकेंगे. आप यह मानकर चलें कि नैनो यूरिया की खपत जितनी बढ़ेगी, उतनी हम विदेशी मुद्रा की बचत कर सकेंगे और फसलों में सुधार भी कर पायेंगे. निश्चित रूप से नैनो यूरिया फसलों के लिए ज्‍यादा लाभदायी है. हमें किसानों को इस बात के लिए जागरूक करना होगा इसलिए नैनो यूरिया के लिए यह व्‍यवस्‍था करनी चाहिए.

          सभापति महोदय, सिंचाई योजना जिस हिसाब से प्रदेश में बढ़ी है, सिंचाई का रकबा बढ़ा है, अनाज, दालें, तेल बीज इनकी बढ़ोत्‍तरी हुई है, साथ ही हमारे फल उद्यान भी बढ़े हैं. जैसा कि मेरे पूर्व वक्‍ता ने भी इस बात को कहा कि फलोद्यान इतने बढ़े हैं कि उन क्षेत्रों को चिह्नित करके, मैंने मंत्री जी को भी अवगत करवाया था कि हमारे क्षेत्र रामपुरा में अगर एक मण्‍डी स्‍थापित होती है, फल प्रोसेसिंग की यूनिट स्‍थापित होती है, कोल्‍ड स्‍टोरेज स्‍थापित होंगे तो निश्चित रूप से हम भविष्‍य की तैयारी कर सकेंगे. जिस हिसाब से उत्‍पादन बढ़ रहा है, मण्डियों में आवकें बढ़ रही हैं, स्‍थानीय स्‍तर पर उनका प्रोसेस हो, फलों की मण्डियां बनें, साथ ही जो पुरानी मण्डियां हैं, उनको भी अपग्रेड किया जाना चाहिए क्‍योंकि मण्डियों में आवक बढ़ रही है, जब मण्‍डी में माल खाली करने की जगह नहीं होती है, तौल करने में देरी होती है, व्‍यवस्‍था गड़बड़ होती हैं तो किसानों में असंतोष फैलता है. हम ये सारी सुविधायें अभी से विकसित करना प्रारंभ करें क्‍योंकि अभी तो प्रदेश में 50 लाख हेक्‍टेयर में सिंचाई हो रही है, इसे हम 1 करोड़ हेक्‍टेयर तक करने जा रहे हैं तो निश्चित रूप से उतना उत्‍पादन भी बढ़ेगा तो उतनी विपणन क्षमता भी होनी चाहिए. हम इन सभी पर विचार करके, अभी से इसे चिह्नित करके नई मण्डियों की व्‍यवस्‍था करेंगे तो बेहतर होगा.

          सभापति महोदय,  एक और निवेदन है कि अभी तक "खेत रोड योजना" नरेगा में नॉन NRM में जोड़ी जाती है जबकि खेत रोड शुद्ध रूप से किसानों के हित के लिए है, वे सिर्फ कृषि कार्यों में उपयोग में आते हैं और कृषि कार्य नरेगा में NRM में जोड़े जाते हैं ताकि उसमें लेबर का पूरा पैसा मिल सके. इसलिए जितने भी खेत रोड बनते हैं, उस खेत रोड के कार्य को नरेगा में NRM में कर दिया जायेगा तो यह संकट ही समाप्‍त हो जायेगा और मध्‍यप्रदेश में खेतों की सड़कें बनाना आसान हो जायेगा. अभी किसान को सिर्फ एक ही दिक्‍कत शेष है, केवल इतना करने से कि इसे नरेगा में नॉन NRM मद से, NRM में कर दिया जाये तो ये संकट समाप्‍त हो जायेगा. कृषि मंत्री जी इसके लिए मुख्‍यमंत्री जी के माध्‍यम से प्रयास करेंगे, केंद्रीय कृषि मंत्री जी भी हमारे यहां के ही हैं हमारे पूर्व मुख्‍यमंत्री रहे हैं, निश्चित रूप से वे आपकी बात मानेंगे, ऐसा मेरा विश्‍वास है. इसके साथ मैं, इस बजट का समर्थन करते हुए, अपनी बात को विराम देता हूं, धन्‍यवाद.

          किसान कल्‍याण तथा कृषि विकास मंत्री (श्री एदल सिंह कंषाना) - माननीय सभापति महोदय, अभी हमारे पक्ष और विपक्ष के मित्रों ने बड़े महत्‍वपूर्ण सुझाव दिए हैं. मैं इन सुझावों का सम्‍मान करता हूँ और आपके माध्‍यम से सदन को यह विश्‍वास दिलाता हूँ कि जैसे हमारे कई पूर्व कृषि मंत्री एवं हमारे इधर के पूर्व मंत्री के बड़े महत्‍वपूर्ण सुझाव आए हैं, इन सुझावों पर हम अधिकारियों को निर्देश देंगे और उसमें जो भी सुझाव किसानों के हित में होंगे. उन सुझावों पर हम विचार करेंगे.

          माननीय सभापति महोदय, किसान हमारे देश का अन्‍नदाता है. इनके परिश्रम एवं मेहनत से ही प्रदेश में उन्‍नति एवं समृद्धि की फसल लहलहाती है. किसानों के बारे में कहा गया है कि ''जब खेतों में पसीना किसान का बहता है, तब जाकर इंसान का पेट भरता है''. (मेजों की थपथपाहट) मध्‍यप्रदेश मूलत: कृषि आधारित राज्‍य है. प्रदेश में विगत 20 वर्षों में खेती का रकबा एवं उत्‍पादन में आशातीत वृद्धि हुई है. देश में प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्‍द्र भाई मोदी जी एवं प्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है.  

          माननीय सभापति जी, फसलों के उत्‍पादन में मध्‍यप्रदेश अग्रणी राज्‍य बना है. सोयाबीन के रकबे तथा उत्‍पादन में प्रदेश का देश में अग्रणी स्‍थान है. मध्‍यप्रदेश राज्‍य, देश में दलहनी फसलों के उत्‍पादन में नम्‍बर वन है, एवं रकबे में नम्‍बर दो है. (मेजों की थपथपाहट) तिलहनी फसलों में रकबे में हमारे देश का स्‍थान पहला एवं उत्‍पादन में देश में दूसरा स्‍थान है. मुख्‍य अनाज फसलों के रकबे एवं उत्‍पादन में देश में हमारा स्‍थान दूसरा है, विभाग के बजट में लगभग 65 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. (मेजों की थपथपाहट) हमारी सरकार ने किसानों हेतु संचालित योजनाओं के बजट में विगत वर्ष की तुलना में लगभग 65 प्रतिशत बढ़ोतरी की है. वर्ष 2024-25 में बजट प्रावधान 19,717 करोड़ रुपये से बढ़ाकर, वर्ष 2025-26 में 32,308 करोड़ रुपये किया गया है. विभाग के बजट में 12,590 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की गई है.

          माननीय सभापति महोदय, गेहूँ उपार्जन पर बोनस में वृद्धि की गई है. रबी विपणन एवं वर्ष 2025-26 में 2,425 रुपये प्रति क्विंटल के न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य के स्‍थान पर 2,600 रुपये प्रति क्विंटल पर गेहूँ खरीद रहे हैं. गेहूँ के समर्थन मूल्‍य के अतिरिक्‍त बोनस की राशि 125 रुपये से बढ़ाकर, 175 रुपये प्रति क्विंटल की गई है.

          माननीय सभापति महोदय, सूक्ष्‍म सिंचाई पद्धति को प्रोत्‍साहन, हमारी सरकार ने जल ही जीवन है, मंत्र को साकार करने के लिए सूक्ष्‍म सिंचाई पद्धति को प्रोत्‍साहित करने का निर्णय लिया है. कृषि क्षेत्र में जल के अपव्‍यय को कम करने के लिए ड्रिप एवं स्‍प्रिंकलर सिंचाई उपकरणों को प्रोत्‍साहित किया जा रहा है. 'पर ड्राप, मोर क्रॉप' योजना में वर्ष 2025-26 में 350 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

          माननीय सभापति महोदय, तिलहनी फसलों को प्रोत्‍साहन, तिलहनी फसलों के उत्‍पादन के लिए हमारे प्रदेश की जलवायु और मिट्टी अनुकूल है. खाद्य तेलों के मामले में प्रदेश को आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए तिलहनी फसल के रकबे, उत्‍पादन एवं गुणवत्‍ता में वृद्धि के लिए 'नेशनल मिशन ऑन इडिबल ऑइल' योजना के बजट प्रावधान को वित्‍त वर्ष की तुलना में दोगुने से अधिक करने के लिए 193 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

          माननीय सभापति महोदय, किसानों को सम्‍मान निधि, किसानों की आय में वृद्धि हेतु हमारी सरकार कृत संकल्‍पित है. प्रधानमंत्री किसान सम्‍मान निधि अंतर्गत रुपये 6 हजार प्रतिवर्ष प्रावधान किए गए हैं. इसके अतिरिक्‍त मुख्‍यमंत्री किसान योजना में भी रुपये 6 प्रतिवर्ष प्रदान किए गए हैं. सरकार की इन योजनाओं में 11वीं किश्‍त का वितरण किया जा चुका है. मुख्‍यमंत्री किसान कल्‍याण योजना में वर्ष 2025-26 में 5,220 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

          अंत में मैं दो लाइन के साथ अपने उद्बोधन को समाप्‍त करूंगा-  

        चीर के जमीन को मैं उम्‍मीद बोता हूँ,      

        मैं किसान हूँ, चैन से कहां सोता हूँ.

          मेरे प्रदेश का किसान दिन-रात मेहनत कर प्रदेश एवं देश की उन्‍नति में सहभागी बनता है. धन्‍यवाद. जय हिन्‍द.

           संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- सभापति महोदय, विपक्ष को सराहना करनी चाहिए कि 60 प्रतिशत से ऊपर बजट बढ़ा है. ये डबल इंजन की सरकार का कमाल है. बजट 65 प्रतिशत से ऊपर बढ़ा है. मेरा ख्‍याल है मध्‍यप्रदेश के इतिहास में कृषि का इतना बजट कभी नहीं बढ़ा.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय सभपति महोदय, बजट जरूर बढ़ गया है, लेकिन किसान की आय डबल नहीं हुई है.

          श्री लखन घनघोरिया -- 60 प्रतिशत आबादी को मात्र 9 प्रतिशत है..(व्‍यवधान)..

          श्री बाला बच्‍चन -- माननीय सभापति महोदय, हम ये सुनना चाह रहे थे कि कमलनाथ जी की सरकार ने लगभग साढ़े ग्‍यारह हजार करोड़ रुपये का कर्जा माफ किया था. हमें उम्‍मीद थी कि ये सरकार भी कुछ कर्जा माफ करेगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं. कर्ज के कारण किसान फिर आत्‍महत्‍या करने लग गए हैं. ..(व्‍यवधान)..

          सहकारिता मंत्री (श्री विश्‍वास सारंग) -- बच्‍चन भैया, एकाध किसान का नाम बता दो, जिसका 2 लाख का कर्जा माफ हुआ हो..(व्‍यवधान)..

          श्री बाला बच्‍चन -- हमने 27 लाख किसानों का साढ़े ग्‍यारह करोड़ रुपये का कर्जा माफ किया था..(व्‍यवधान)..

          श्री विश्‍वास सारंग -- इसीलिए वहां पहुँच गए हो..(व्‍यवधान)..

          सभापति महोदय -- बाला जी, बैठ जाएं. ..(व्‍यवधान)..

          श्री सचिन यादव -- मैं आपको एक-एक किसान के घर ले चलूंगा. ..(व्‍यवधान)..

          सभापति महोदय -- सचिन यादव जी, प्‍लीज बैठ जाइये.

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय -- माननीय सभापति महोदय, किसान डिफॉल्‍टर हो गए थे और डिफॉल्‍टर होने से परेशान हो गए थे और जो किसान डिफॉल्‍टर हुए, उनको तो दुनिया याद आ गई थी..(व्‍यवधान)..

          सभापति महोदय -- कृपया बैठ जाएं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

5.05 बजे

                  

                   (3)  मांग संख्या  -  43     खेल और युवा कल्याण

                        मांग संख्या  -  17   सहकारिता

           

          अब,इन मांगों पर कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत होंगे. कटौती प्रस्तावों की सूची पृथकत: वितरित की जा चुकी है. प्रस्तावक सदस्य का नाम पुकारे जाने पर जो माननीय सदस्य हाथ उठाकर कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाने हेतु सहमति देंगे,उनके कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए माने जायेंगे.

         

मांग संख्या -  43                    खेल और युवा कल्याण

          नाम                                          क्रमांक

          श्री अभय मिश्रा                               01

          श्री दिनेश जैन"बोस"                             04

          श्री रजनीश हरवंश सिंह          05

          श्री बाला बच्चन                               07

          श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव              16

          मांग संख्या  -  17                       सहकारिता

          नाम                                          क्रमांक

          श्री अभिजीत शाह                          06

          उपस्थित सदस्यों के कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए.

          अब मांगों और कटौती प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

          श्री भंवर सिंह शेखावत (बदनावर) - माननीय सभापति महोदय, आज माननीय विश्वास जी के विभाग को बजट है और मांग संख्या 43 और 17 पर चर्चा मुझे करने का आपने मुझे आदेश दिया है. वैसे विश्वास जी कापरेटिव्ह के एक पुराने नेता हैं और सहकारिता की समझ भी अच्छी है लेकिन आज जो विषय विश्वास जी आया है और जिस बजट में आप जनता से पैसा मांग रहे हैं तो मुझे लगता है कि सहकारिता विभाग को पैसा देने का मतलब जनता के जनधन का दुरुपयोग करना है क्योंकि जिस विश्वास से इस विभाग को लगातार इस बजट में पैसा मिलता रहा है मुझे लगता है कि उसका सही उपयोग जनता के हित में नहीं हो रहा है. आज कुछ विषय हैं जो मैं आपके संज्ञान में लाऊंगा. सहकारिता विभाग अपने आप में एक गंभीर विभाग है. ग्रास रुट लेबल पर जनता से जुड़ा हुआ विभाग है. सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों की सेवा करने वाला विभाग है वैसे कृषि विभाग की 80 परसेंट व्यवस्था सहकारिता विभाग से ही चलती है लेकिन दुर्भाग्य से मैं आज कुछ बिन्दुओं की तरफ आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि लगातार इस सहकारी आंदोलन की अनदेखी हो रही है और यहां जितने सदस्य बैठे हैं चाहे इस पक्ष के हों या उस पक्ष के हों सहकारिता विभाग से उनका सीधा-सीधा संबंध आता है.

            श्री भंवर सिंह शेखावत (जारी)--  सोसाइटियों का चाहे खाद, बीज देने का मामला हो फसल खरीदने का मामला हो फसलों का जो दाम है किसानों तक पहुंचाने का मामला हो, यह सारे मामले में सोसाइटियां अपना काम करती हैं. माननीय सभापति महोदय, मुझे लगता है कि सहकारी संस्‍थाओं के निर्वाचन के मामले में भारत सरकार के संविधान और माननीय उच्‍च न्‍यायालय के निर्देश दोनों की लगातार अवहेलना हो रही है. मेरे ख्‍याल से माननीय विश्‍वास जी आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने जो अमेंडमेंट किया है केन्‍द्र में को-आपरेटिव का उसका आपने अध्‍ययन तो किया ही होगा. सहकारी संस्‍थाओं के चुनाव के मामले में भी माननीय उच्‍च न्‍यायालय ने भी बहुत निर्देश दिये हैं. कम से कम 3 से 4 बार सहकारी संस्‍थाओं के चुनाव के लिये हाईकोर्ट के अंदर सरकार को आदेशित किया गया, लेकिन उसके बाद भी पिछले 20 साल से अवधि ज्‍यादा हो गई है प्रजातांत्रिक रूप से सरकार ने संस्‍थाओं के चुनाव नहीं कराये. माननीय प्रधानमंत्री जी की इच्‍छा के अनुरूप जो अमेंडमेंट केन्‍द्र में हुआ है माननीय सभापति जी, उसका भी पालन नहीं हुआ और मध्‍यप्रदेश के हाईकोर्ट ने भी जितनी बार आपको निर्देशित किया है कि इन संस्‍थाओं के चुनाव कराकर जनप्रतिनिधियों को सौंपा जाये, मैं समझता हूं कि 20 साल से ज्‍यादा अवधि हो गई, बार-बार आग्रह, अनुग्रह करने के बाद भी संस्‍थाओं के चुनाव को टाला जा रहा है और अब तो ऐसा लगता है कि इनका प्रजातांत्रिक स्‍वरूप ही समाप्‍त हो गया है. जब जनता के प्रतिनिधि उसमें जा ही नहीं सकते, जनप्रतिनिधियों को चुनकर के उसमें बैठने का अधिकार जो संविधान ने दिया है उसका पालन ही नहीं हो रहा तो आप बताईये यह सहकारी संस्‍थायें अब सरकारी संस्‍थायें बनकर रह गई हैं.

          आदरणीय सभापति जी, आदरणीय मोदी जी ने 97 बार संशोधन पारित किया था दिनांक 15.2.2012 को, केन्‍द्र में यह पारित हुआ था और इसमें संविधान के तहत अनुच्‍छेद 243 इसमें इन्‍होंने काफी व्‍यापक अमेंडमेंट किये थे. मैं सारी धाराओं की बात तो नहीं करता लेकिन उस अमेंडमेंट की धारा 243जेड का यहां मैं उल्‍लेख करना चाहता हूं. इसमें प्रावधान किया गया है कि किसी भी सहकारी संस्‍था का संचालक मंडल 6 माह से अधिक भंग नहीं रहेगा. It is part of the central government amendment और सेंट्रल गवर्नमेंट के अमेंडमेंट के बाद में we are bound वह constitutional amendment है विश्‍वास जी that is the constitutional amendment has been done in the parliament with the majority मैं चाहता हूं कि हम सब उससे बाउंड हैं. हम भारत के संविधान में किये गये संशोधन को दरकिनार करने का अधिकार नहीं रखते, लेकिन माननीय मोदी जी की भी जनभावना को यहां से दरकिनार कर दिया गया, उसमें साफ प्रावधान है कि सहकारी संस्‍था का संचालक मंडल 6 माह से अधिक भंग नहीं रह सकता और 20-20 साल हो जायें सहकारी संस्‍थाओं के चुनाव न हो, जनता निर्वाचित संचालक मंडल में जाने के लिये तरस रही है, उन व्‍यवस्‍थाओं को देखना चाहती है, लेकिन मध्‍यप्रदेश की सरकार आदरणीय विश्‍वास जी यह जो अधिकारी आपके पास बैठे हैं यह आपको पता नहीं कौन सी दिशा दिखा रहे हैं. 20 साल से इनका निर्वाचन नहीं हुआ है, हम केन्‍द्र के अमेंडमेंट संविधान की भी खिलाफत कर रहे हैं और मध्‍यप्रदेश के हाईकोर्ट का भी अनादर कर रहे हैं.

          सभापति महोदय--  भंवर सिंह जी यह संवैधानिक अमेंडमेंट नहीं है, यह सेंट्रल गवर्मेंट के एक्‍ट का अमेंडमेंट है.

          श्री भंवर सिंह शेखावत--  एक्‍ट का अमेंडमेंट तो है लेकिन we are bound for that. हम लोग उसका पालन करने के लिये बाध्‍य हैं. मैंने उसी का उल्‍लेख किया है जिसको हमें अपने आचरण में लाना है. अनुच्‍छेद की कंडिका 5 में स्‍पष्‍ट प्रावधान किया गया है कि राज्‍य सरकार 243जेड के अनुसार 6 माह की समयावधि को को-आपरेटिव सोसाइटियों के चुनाव को करा लेगी, लेकिन 38 जिला सहकारी बैंकों में अपेक्‍स बैंक की शीर्ष संस्‍थाओं के अंतर्गत 5 हजार पैक्‍स सोसायटियां हैं और 5 हजार पैक्‍स सोसायटियां आपको याद है विश्‍वास जी आप तो उस टाइम एक बहुत बड़ी संस्‍था के अध्‍यक्ष भी थे.  

          माननीय सभापति महोदय, यह बहुत महत्‍वपूर्ण है, यह विषय बहुत गंभीर है, समय तो थोड़ा सा जरूर लगेगा, लेकिन दो तीन प्‍वाइंट्स के अंदर बात करके समाप्‍त करूंगा, विश्‍वास जी को यह सारा मामला पता है, इसलिए मैं बता रहा हूं.

          सभापति महोदय -- समय की सीमा होती है, आज मांगों पर चर्चा होनी है.

          श्री भंवर सिंह शेखावत -- सभापति महोदय, आपको याद होगा यह पांच हजार पैक सोसाइटियों के चुनाव कराये गये थे, एक-एक सोसाइटी का चुनाव हुआ था, उसके बाद से लगातार संचालक मंडल का कार्यकाल पांच वर्ष पूर्ण हो गया, प्रशासक का कार्यकाल छ: माह संविधान के अनुसार कोऑपरेटिव सोसाइटी की धारा 49(7) के अनुसार छ: माह, एक वर्ष के बीच में चुनाव कराने के लिये प्रावधान की व्‍यवस्‍था है, किंतु माननीय हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी दस वर्षों से अधिक से इन संस्‍थाओं के चुनाव नहीं हुए हैं. वर्ष 2004 के संचालक मंडल भंग हैं, वर्ष 2004में संचालक मंडल भंग हुए थे, आज वर्ष 2025 चल रहा है, बीस साल से अधिक की अवधि हो गई है, प्रदेश में 38 जिला सहकारी बैंक हैं. माननीय विश्‍वास जी, माननीय सभापति महोदय जी, इन 38 जिला सहकारी बैंकों के चुनाव निर्वाचित संचालक मंडल के होते थे, निर्वाचक संचालक मंडल उस पर बैठता था और आज की स्थिति यह है कि इन 38 बैंकों की वह स्थिति बना दी गई है कि इसमें से 11 बैंकों को तो रिजर्व बैंकों ने नोटिस दे दिये हैं, वह धारा 11 में आ गये हैं, जिसका हम पालन नहीं कर रहे हैं. वह 11 बैंकों से ज्‍यादा हैं, मैं नाम नहीं लेना चाहता हूं वह 11 बैंक हैं, जिनका धारा 11 के अंदर हम प्रावधान में पालन नहीं कर पा रहे हैं और रिजर्व बैंक ने भी कह दिया है कि इन बैंकों को ताला लगा दिया जाये लेकिन वह बैंक चल रही हैं.

          सभापति महोदय, एक बात का उल्‍लेख मैं यहां ओर करना चाहता हूं, माननीय विश्‍वास जी इस बात के समर्थक थे, 40 साल, 50 साल तक जब तक कोऑपरेटिव बैंक यहां मध्‍यप्रदेश के अंदर चली, विश्‍वास जी अपेक्‍स बैंक भी थी, रिजर्व बैंक से इनको लाईसेंस नहीं मिला था, जब मैं अपेक्‍स बैंक का चेयरमेन था, पहली बार हिंदुस्‍तान में इस मध्‍यप्रदेश की संस्‍थाओं को रिजर्व बैंक ने वर्किंग लाईसेंस जारी किये थे, 40 साल तक बिना लाईसेंस के बैंक काम करती रहीं और जब लाईसेंस मिल गये, हमने उनको दिलवा दिये, अब वापस धारा 11 का पालन नहीं करने की स्थिति में उनके लाईसेंस वापस निरस्‍त होने की स्थित आ रही है इसलिए माननीय विश्‍वास जी मैंने आपको बताया, इसमें जरा आप ध्‍यान दीजिये, प्रदेश की पांच हजार पैक सोसाइटियों में 38 सौ पैक सोसाइटियों की हालत ऐसी हो चुकी है कि तनख्‍वाह देने के भी पैसे इन सोसाइटियों के पास नहीं है. माननीय अमित शाह जी ने अभी दिल्‍ली में  सेंट्रल में बड़ी घोषणा की थी कि हम हमारी पैक सोसाइटियों को मल्‍टी सिस्‍टम में लाकर इनको वैभवशाली बनाना  चाहते हैं, लेकिन वैभवशाली कहां बना पायेंगे? हम इन संस्‍थाओं के चुनाव ही नहीं करवा पा रहे हैं.इन सोसाइटियों की हालत यह हो गई है कि यह अपने एक चाय पीने के पैसे का पेमेंट करने की स्थिति में नहीं है और इसके अंदर एक-एक ऑडिटर सब ऑडिटर के पास में बीस-बीस से पच्‍चीस-पच्‍चीस, तीस-तीस सोसाइटियां हैं, एक-एक इंस्‍पेक्‍टर के पास में तीस-तीस सोसाइटियां हैं, जिनका वह प्रशासक बनकर बैठा है, तो कैसे सोसाइटियां चलेंगी, यह तो पूरा का पूरा सहकारी ढांचा ढह गया है. मैं सरकार को यह बताना चाहता हूं कि मेहरबानी करके इसको देखिये, थोड़ी सी निगाह लगाईये, यह एक बहुत बड़ा मोमेंट है, जिससे हिंदुस्‍तान का किसान और देश चलता है, अगर इस सिस्‍टम को हमने मध्‍यप्रदेश में खत्‍म कर दिया, तो यह सब कालिख हमारे माथे आयेगी, आप और हम सब इसके लिये जवाबदार रहेंगे, आप मुझे एक बात बताईये वैजनाथन कमेटी का एग्रीमेंट भी आपके समय हुआ था और 2800 करोड़ रूपये का बजट मध्‍यप्रदेश के अंदर दिया गया था, उसके अंदर सारी सोसाइटियों को सेंक्‍शन करने के लिये और सारी सोसाइटियों को वह सारा पैसा आने के बाद में मजबूतीकरण के लिये उसकेइनइन उनक उनके दिया था, आपने मजबूतीकरण की दिशा में कदम उठाये थे. आज वर्ष 2013 में रिजर्व बैंक ने एक निर्देश दिया है, आर.बी.आई. की गाईडलाइन देख लीजिये बगैर रिजर्व बैंक की अनुमति के जिला सहकारी बैंक और अपेक्‍स बैंक में सेवा नियमों में अमूल परिवर्तन करना है, तो हमको रिजर्व बैंक के निर्देशों का पालन करना पड़ेगा, लेकिन हमने इसका पालन नहीं किया, हम रिजर्व बैंक की जो गाईडलाइन है, उसकी अनदेखी लगातार कर रहे हैं और बार-बार हम उसकी अनदेखी करके हम हमारे मनमाने तरीके से अमेंडमेंट करके और इसके अंदर सारा परिवर्तन हमने कर लिया है, इससे इस मोमेंट को बहुत बड़ा नुकसान होगा, सेवा नियमों में कोई भी संशोधन नाबार्ड और परामर्श के बिना नहीं किया जा सकता है, यह भी इसके अंदर है, लेकिन हमने नाबार्ड के परामर्श लेने के बगैर, नाबार्ड को बताये बगैर सेवा नियमों में भी हमारा परिवर्तन किया है, माननीय विश्‍वास जी जरा इसको दिखवा लीजिये. बाकी सब बातें आपको मालूम है, नाबार्ड ने 3 जुलाई 2024 को आदेश जारी किया था कि किसी भी जिला के सहकारी बैंक और राज्‍य सहकारी बैंक के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी की नियुक्‍त, पुन: नियुक्ति या हटाने का निर्देश भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व अनुमोदन प्राप्‍त किए बिना नहीं किया जा सकता, लेकिन हमने यह सारे काम किए हैं, न हमने रिजर्व बैंक को, न नाबार्ड को, न केन्‍द्र सरकार के, अमेंडमेंड जो एक्‍ट में किया गया उसको सभी को दरकिनार करते हुए, मुझे समझ नहीं आ रहा कि ये कॉ-आपरेटिव विभाग चल कैसे रहा है. ये विभाग यदि भगवान भरोसे और अधिकारियों के भरोसे छोड़ दिया जाए, माननीय विश्‍वास जी तो आप मानकर चलिए आप मेरे छोटे भाई के तरह हो, आपने और हमने सभी ने एक साथ कॉ-ऑपरेटिव शुरू किया है. आज हमारे सामने यह ढांचा ढह रहा है, तो यह हमारे लिए लज्‍जा की बात है. आज सोसायटियां बिना निर्वाचित संचालक मंडल के अधिकारियों की मनमानी से चल रही है. चाहे जैसे अमेंडमेंड, चाहे जैसी पोस्टिंग, नो रिजर्व बैंक, नो नबार्ड, कुछ नहीं, किसी काम का नहीं, अमित शाह जी की भी नहीं सुन रहे उन्‍होंने साफ कहा है कि हमारी सोसायटियों को मजबूत करना है, उनके भी निर्देशों का पालन नहीं कर रहे. माननीय महोदय, अब ये बजट जो आप पास कराएंगे बजट दिया जाएगा, क्‍योंकि आपके यहां की प्रथा है, लेकिन मैं इसलिए विरोध करने के लिए खड़ा हुआ हूं क्‍योंकि ये जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा है आदरणीय विश्‍वास जी, जो हम इन अधिकारियों के हाथ में सौंपते हैं, लेकिन इन अधिकारियों से हमें जो प्राप्‍त हो रहा है उस पर आप अंकुश लगाइए.

          आप माननीय न्‍यायालय का, माननीय रिजर्व बैंक का, माननीय प्रधानमंत्री जी, ने जो अमेंडमेंड किया वह और माननीय अमित शाह जी ने जो निर्देश दिए वह उन सबका पालन करते हुए आज घोषणा कीजिए कि आप कितने समय के अंदर इन समितियों के अंदर निर्वाचित संचालक मंडल बैठा देंगे. ये निर्वाचन इस राष्‍ट्र की लोकतंत्र की जान है. सभापति जी यह जो विभाग है, यह बेलगाम घोड़ा हो गया है यहां पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है. सारे किसान एक टक आंखों से देख रहे हैं ये जीरो प्रतिशत का कान्‍सेप्‍ट भी हम लाए थे, आपको याद है. जीरो प्रतिशत ब्‍याज पर पैसा देने का काम मप्र में सबसे पहली बार इस कॉ-ऑपरेटिव समिति ने किया था.

          श्री विश्‍वास सारंग भाजपा की सरकार ने किया था.

          श्री भंवर सिंह शेखावत मैं भाजपा को धन्‍यवाद दे रहा हूं, मैंने कहां इंकार किया. मैं तो भाजपा में ही था यार ऐसी क्‍या बात कर रहे हो. कॉ-ऑपरेटिव में भाजपा-कांग्रेस क्‍या होती है.

          श्री बाला बच्‍चन मंत्री जी, आप इतना तो धैर्य रखिए, थोड़ी देर बाद आपको ही जवाब देना है, तब इसको जोड़ लेना, इतनी तसल्‍ली रखिए, लेकिन चुनाव करवा दीजिए, जो माननीय सदस्‍य बोल रहे हैं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत कहां कांग्रेस-बीजेपे आ गई सोसायटी में. ये सहकारिता ऐसी जान है, जिसमें ने कांग्रेस है, न बीजेपी है, सिर्फ जनता है और किसान है(...मेजों की थपथपाहट) इसमें क्‍या कांग्रेस और बीजेपी करना है, लेकिन आपने किया है तो इसका श्रेय तो आपको जाएगा ही, लेकिन अगर यह श्रेय जाएगा विश्‍वास जी आपको तो इस संस्‍था का सत्‍यानाश होने का श्रेय भी आपको लेना पड़ेगा, यह भी ध्‍यान रखना. यह पाप भी आपके माथे मढ़ेगा बेटा, तुम छोटे भतीजे हो हमारे, मैं तो आदरणीय कैलाश जी सारंग का बड़ा चहेता पुत्र रहा हूं, पट्ठा कह दो उनका, लेकिन वे मेरे आदरणीय थे, उन्‍होंने मुझे आगे बढ़ाया है और आज मैंने ही इनको आगे बढ़ाने की कोशिश की और आज मैं ये निर्देश भी अपने हक से दे रहा हूं कि ये कालिख अपने मुंह पर मत पुतने देना. ये जो सहकारी है, इसको मेहरबानी करके जिन्‍दा रखिए, पूरी केन्‍द्र सरकार इसको जिन्‍दा करने में और संजीवनी देने में लगी हुई है. आपने समय दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद. मैं तो इसका विरोध तो क्‍या करुंगा, भाई बजट तो नहीं देना चाहिए फिर भी विश्‍वास है, विश्‍वास तो एक बार करना पड़ेगा, किया जाना चाहिए, लेकिन इन अधिकारियों पर थोड़ा सा लगाम लगाइए, नियंत्रित कीजिए. अब तो आज एक अमेंडमेंड और लाए हो आप. मैंने उसको बारीकी से देखा है मैं 24 मार्च को उस पर बोलूंगा वह अमेंडमेंड भी अपने आपको सारे मूवमेंट को स्‍वछंद अधिकारियों को साथ देने का है, लेकिन हम समय पर आकर इसमें चर्चा करेंगे, धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय भंवर सिंह जी, एक कहावत है.

          Old Habits Die Hard पुरानी आदतें, जल्‍दी मरती नहीं हैं.

            श्री आशीष गोविन्द शर्मा (खातेगांव)सभापति महोदय, मांग संख्या 43 एवं 17 का समर्थन करता हूं. सहकारिता, खेल एवं युवक कल्याण विभाग इन दोनों विभागों की जिम्मेदारी एक युवा नेतृत्व आदरणीय मोहन यादव जी ने माननीय विश्वास जी को दी है. जैसा कि माननीय शेखावत जी कह रहे थे कि विश्वास जी इन विभागों के प्रति जो जनता की आकांक्षाएं हैं उसके विश्वास पर ना सिर्फ खरा उतरेंगे, बल्कि नवाचारों के माध्यम से, युवा सोच के माध्यम से इन दोनों विभागों के उत्कृष्टता के लिये काम करेंगे. 2047 के विकसित भारत में मध्यप्रदेश का योगदान भी खेलों के क्षेत्रों में हो. सहकारिता जो कि साथ साथ काम करने का एक मिशन है. एक सबके लिये सब एक के लिये इसकी मूल भावना जिसमें निहित है उसके लिये मंत्रालय के माध्यम से काम करेंगे. भारत भूमि से सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे संतु निरामयाः यह जो संदेश पूरी दुनिया में गया यही सहकारिता का मूलाधार है. साथ साथ काम करते हुये आर्थिक उद्देश्यों की पूर्ति भी होती रहे. संगठन के माध्यम से राष्ट्र और समाज की सेवा के पुनीत उद्देश्यों को भी हम पूरा कर सकें. सहकारिता की मूल भावना जो कि इस वर्ष को अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. संयुक्त राष्ट्र संघ ने जो भावना व्यक्त की है कि सहकारिता एक बेहतर दुनिया का निर्माण करती है. इस बेहतर दुनिया को बनाने की जिम्मेदारी सहकारिता के क्षेत्र पर है. मध्यप्रदेश के संदर्भ में हम बात करें तो चाहे उपार्जन हो, उचित मूल्य की दुकानों का संचालन हो, तेन्दू पत्ता श्रमिकों को बोनस का वितरण हो, या वर्तमान समय में जन औषद्धि केन्द्र हो, एल.पी.जी.गैस वितरण की व्यवस्था का काम हो, पेट्रोल पम्प के आवंटन का काम हो, सहकारिता के आंदोलन को एक नयी दिशा देने का काम इस सरकार ने किया है. मैं ऐसा मानता हूं कि उपार्जन के माध्यम से सहकारी समितियों की आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हुई है. सबसे बड़ी बात है कि हमारी जो केन्द्र सरकार ने इन सहकारी समितियों के कम्प्यूटरीकरण करने के लिये जो अभियान चलाया है, उससे भी इनके काम करने में बहुत आसानी हुई है. मैं आज यह कहना चाहता हूं कि लगभग मध्यप्रदेश में 40 लाख किसानों को क्रेडिट कार्ड जारी हुए हैं, इन बैंकों से भी क्रेडिट कार्ड जारी होते हैं, लेकिन सहकारिता के प्रति लोगों का विश्वास है. वर्ष 2023-24 में 20 हजार करोड़ रूपये का अल्पावधि ऋण जीरो प्रतिशत ब्याज पर किसानों को दिया गया है. हमारी सरकार ने जीरो प्रतिशत ब्याज पर मध्यप्रदेश के किसानों को ऋण देना प्रारंभ किया इसमें केन्द्र और राज्य दोनों लगभग 10 प्रतिशत ब्याज वहन करते हैं और इस राशि को समितियों को दिया जाता है. 17 जनवरी, 2025 तक लगभग 18392 करोड़ का फसल ऋण बांटा गया है. जीरो प्रतिशत ब्याज दर पर किसानों को ऋण मिलने से उनकी जो आर्थिक सम्पन्नता है या यह कहें कि उनकी साहूकारों पर निर्भरता कम हुई है. एटीएम भी प्रारंभ किये गये हैं. एटीएम कार्ड के माध्यम से अपने छोटे मोटे लेन देन के माध्यम से किसान कर पा रहा है, साथ ही साथ खेती लाभ का धंधा बने इसके सरकार विभिन्न मोर्चों पर काम कर रही है, लेकिन पेड संस्थाओं की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिये काम करना जरूरी है.

5.04 बजे

                                                अध्यक्षीय घोषणा

          सभापति महोदयआज की कार्य सूची में सम्मिलित विषय पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाये. मैं समझता हूं कि सदन इससे सहमत है.

          श्री आशीष गोविन्द शर्मासभापति महोदय, विभिन्न सारे आयामों पर जब हम काम करते हैं तब खेती किसान के लिये लाभदायक होती है. आज सहकारिता के माध्यम से हमारी सरकार ने प्रयास किया है कि जो लगभग 4500 से अधिक पेक्स समितियां हैं उनके उत्कृष्ट कार्य को देखते हुए सिंगल प्लेटफार्म पर जो कार्य कर रहे हैं. इन्‍हें विपणन संघ हेतु नई दिल्‍ली में 100वें राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन में केन्‍द्र सरकार के द्वारा अवॉर्ड दिया गया. देश की सभी सहकारी संस्‍थाओं की जानकारी राष्‍ट्रीय सहकारी डेटाबेस एनसीडी पोर्टल पर अपलोड कराई जा रही है जिससे सहकारी संस्‍थाओं की समस्‍त जानकारियां पोर्टल पर हमको प्राप्‍त हो सकेगी. लगभग 4800 माइक्रो एटीएम का संचालन किया जा रहा है. इन एटीएम के माध्‍यम से ग्रामीण जनता छोटी राशि में नगद का आहरण कर सकेगी. बैंक स्‍तर के छोटे-छोटे कार्यों के लिए किसानों को बैंकों की शाखाओं में आने-जाने की आवश्‍यकता नहीं है. सहकारिता के माध्‍यम से चाहे किसान हो, चाहे हमारे वर्तमान समय में जो विभिन्‍न काम और नवाचार सरकार इस दिशा में कर रही है, यह सब आने वाले समय में सहकारिता के आंदोलन को और गति देंगे.

          सभापति महोदय, विभाग ने जो संकल्‍प व्‍यक्‍त किया है कि प्रत्‍येक ग्राम पंचायत में एक पीएम किसान समृद्धि केन्‍द्र की स्‍थापना हो, जिसके माध्‍यम से किसान अपने रोजमर्रा के कामों को उस सेंटर से संपादित कर सकेगा. मध्‍यप्रदेश में जन-औषधि केन्‍द्र जो कि केन्‍द्र सरकार के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की महत्‍वपूर्ण योजना है, इसको खोलने के लिए मध्‍यप्रदेश में 53 पैक्‍स को अनुमति मिली है और लगभग 30 केन्‍द्र केन्‍द्र प्रारम्‍भ हो चुके हैं.

          सभापति महोदय, मध्‍यप्रदेश में गेहूं, चना, मूंग, सरसों, मसूर, धान, उड़द, सोयाबीन इसका उपार्जन विभिन्‍न समितियों के माध्‍यम से किया जाता है और कहीं न कहीं किसानों का एक विश्‍वास इन संस्‍थाओं पर है. डिजिटलाइजेशन होने से पहले जो रजिस्‍टर हुआ करते थे या हाथ से लिखकर दस्‍तावेज संग्रहित किये जाते थे, उस काम से मुक्‍ति मिली है. पहले से विश्‍वनीय काम अब पैक्‍स में हो रहा है.

          सभापति महोदय, रचना टॉवर के माध्‍यम से हमारे जनप्रतिनिधियों के लगभग 368 क्‍वार्टर्स यहां पर बनाएं गए हैं. हमारी जो खाद्य भंडारण की क्षमता है, उसके लिए 1 हजार मीट्रिक टन के लिए लगभग 168 भवन हमारे मध्‍यप्रदेश में निर्मित किए गए हैं. सहकारिता के पश्‍चात् चूंकि मध्‍यप्रदेश खेलों में बहुत आगे बढ़ रहा है और इस बात की प्रसन्‍नता है कि एक समय में जो विभाग का बजट नाममात्र का हुआ करता था, आज सरकार बजट का एक बड़ा हिस्‍सा अपने खेलों के विकास के लिए खर्च कर रही है. हमारे मध्‍यप्रदेश में 18 खेल लगभग उनकी 11 अकादमियां वर्तमान में संचालित हैं. चाहे वह हॉकी हो, तीरंदाजी हो, वॉटर स्‍पोटर्स हो. इन खेलों में भी हमारे खिलाड़ी अच्‍छा प्रदर्शन कर सकें, इसके लिए इन अकादमियों के माध्‍यम से फीडर सेंटरों के माध्‍यम से खिलाड़ियों का चयन कर सरकार उनके पीछे प्रशिक्षकों की नियुक्‍ति करके और उनके रहने, खेल के विकास के लिए जो संसाधन उनको आवश्‍यक है, उनका सहयोग प्रदान करके खेलों के विकास के लिए काम कर रही है. हॉकी के मध्‍यप्रदेश में 26 फीडर सेंटर हैं और मलखंभ जो कि हमारे राज्‍य का पारम्‍परिक खेल है, इसके 13 फीडर सेंटर हमारे मध्‍यप्रदेश में इस समय काम कर रहे हैं. जब सरकार का खेलों के विकास के लिए प्रयास होता है तो अच्‍छे सकारात्‍मक परिणाम सामने आते हैं.

          सभापति महोदय, हमारे पूर्ववर्ती खेल मंत्री चाहे वह श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया जी रही हों, चाहे वर्तमान में माननीय विश्‍वास सारंग जी हैं जब खिलाड़ियों के साथ हम खडे़ होते हैं उन्‍हें इस बात का विश्‍वास दिलाते हैं कि तुम्‍हारे प्रशिक्षण का पूरा इंतजाम सरकार कर रही है. आने-जाने की व्‍यवस्‍था कर रही है. राष्‍ट्रीय-अन्‍तर्राष्‍ट्रीय प्रतिस्‍पर्धाओं में प्रदर्शन करने के माकूल इंतजाम कर रही है तो सकारात्‍मक परिणाम सामने आते हैं.

सभापति महोदय, ओलंपिक गेम्‍स पेरिस में हमारे मध्‍यप्रदेश के 2 खिलाड़ियों ने 2 पदक जीतकर मध्‍यप्रदेश का नाम बढ़ाया है. पेरालिम्‍पिक गेम्‍स में 2 पदक हमारे प्रदेश के खिलाड़ियों ने जीते. एशियन गेम्‍स में लगभग 14 पदक हमारे खिलाड़ी जीतकर आए. पेरा एशियन गेम्‍स में 3 पदक, अन्‍तर्राष्‍ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगभग 44 पदक, राष्‍ट्रीय खेल में 82 पद, जिसमें मेरे खातेगांव विधानसभा क्षेत्र के एक बच्‍चे देव मीणा ने पोल वॉल्‍ट में नया राष्‍ट्रीय रिकॉर्ड कायम किया. यह सब परिणाम तब आते हैं जब सरकार वास्‍तव में प्रयास करती है. अन्‍यथा एक समय में मध्‍यप्रदेश के खेलों के नाम कितने पदक होते थे, यह हम सबको पता है. मैं उसके इतिहास में नहीं जाना चाहता. सरकार के खेलों के क्षेत्र में विधायक कप हो, चाहे माननीय प्रधानमंत्री जी की मंशा के अनुरूप हमारे सांसदों को भी कहा गया है कि आप भी खेलों से संबंधित प्रतियोगिताएं अपने यहां पर आयोजित करें. निश्चित ही जब विधायक कप, सासंद कप अपने अपने क्षेत्रों में आयोजित होंगे. हजारों की संख्या में प्रतिभागी उसमें आएंगे तो खेलों के वातावरण को और आगे बढ़ाने में हम सबको सहयोग मिलेगा. इसके अलावा हमारी सरकार खेल संघों को खेल प्रतियोगिता के आयोजन हेतु वित्तीय सहायता भी देती है. कबड्डी के मुकाबले हों, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र के बहुत अच्छे खिलाड़ी निकलकर आते हैं उसमें अगर सरकार आयोजन को कराने के लिए मदद देती है तो एक अच्छा कार्यक्रम हम लोग करा पाते हैं. साथ ही साथ सरकार ने प्रदेश स्तर पर विभागीय स्वामित्व के 139 स्टेडियम तो निर्मित किये ही गये हैं लेकिन हर तहसील मुख्यालय पर एक स्टेडियम बनाने की सरकार की मंशा है.

सभापति महोदय, मैं ऐसा मानता हूं कि इससे ग्रामीण क्षेत्र की जो खेल प्रतिभाएं हैं जो नगरीय क्षेत्र में खेलों को कराने वाली संस्थाएं हैं उनको इसमें मदद मिल सकेंगी. साथ ही साथ मैं यह भी कहना चाहता हूं कि हमारी सरकार ने एक जिले में एक खेल को चयनित किया है उसके विकास के लिए उस जिले में काम किया जाएगा. मेरे विधान सभा क्षेत्र देवास जिले में भी मै चाहता हूं कि कबड्डी और तैराकी चूंकि नर्मदा जी का समृद्ध क्षेत्र हैं जो बच्चा बाल्यकाल से नर्मदा में तैराकी करता है,  बहुत अच्छा तैराक बनने की उसमें संभावना होती है, इसलिए कबड्डी अथवा तैराकी की एकाध अकादमी हमारे देवास जिले में भी प्रारंभ की जाएगी, ऐसी मेरी भावना है.

सभापति महोदय, युवाओं में राष्ट्रप्रेम की भावना  रहे इसके लिए आवश्यक है कि राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा यात्रा जैसे आयोजन जो कि विभाग के द्वारा आयोजित किये गये. 15000 से अधिक युवा उसमें शामिल हुए. यह अपने आपमें तिरंगे के सम्मान का एक बहुत अच्छा आयोजन विभाग के द्वारा किया गया है. इसके बाद जो संविधान दिवस पर संविधान  यात्रा निकाली गई, वह भी पद यात्रा उसमें भी बड़ी संख्या में युवाओं की सहभागिता रही, मां तुझे प्रमाण के अंतर्गत मध्यप्रदेश के असंख्य युवाओं को बार्डर क्षेत्र पर उन स्थानों का अवलोकन कराया गया, उन स्थानों तक ले जाया गया, जिनका ऐतिहासिक और भारत की आजादी में विशेष महत्व है. निश्चित ही इस तरह के दौरों पर या इस तरह के आयोजनों में जब मां तुझे प्रणाम जैसे मिशन के अंतर्गत प्रदेश का युवा बाहर जाता है चाहे वह सेल्यूलर जेल को देखने जाता हो, चाहे बाघा बार्डर के दर्शन करने जाता हो, उसके अंदर राष्ट्र प्रेम की भावना है हिलोर लेती ही हैं. केन्द्र सरकार के माध्यम से सरकार चाहती है कि हमारे जो युवा हैं कई नवाचार हमारी सरकार ने प्रारंभ किये हैं मैं उसके लिए श्री विश्वास जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि हमारी सरकार के माध्यम से फिट इंडिया क्लब भारत सरकार की जो पहल है इसके अंतर्गत युवा हो, चाहे बुजुर्ग हों, उनको फिट रहने के लिए एक सेंटर का निर्माण किया जा रहा है और इसमें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और क्रांतिकारियों के जीवन से प्रेरणा लेकर इन युवाओं को और भारत के मध्यप्रदेश के नागरिकों को फिट रहने के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा.

सभापति महोदय, हमारे युवा, सेना और पुलिस में जा सकें, इसके लिए पार्थ योजना प्रारंभ की गई है. मैं आपके माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जी और माननीय विभाग के मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं, आपका यह नवाचार और आपकी नवीन योजनाएं इन दोनों विभागों को सुदृढ़ करने में कामयाब होगी. सभापति महोदय, आपने जो बोलने का अवसर दिया, उसके लिए धन्यवाद.

            श्री यादवेन्द्र सिंह (टीकमगढ़) - सभापति महोदय, श्री आशीष जी बढ़िया भाषण दे रहे थे. श्री विश्वास जी आपको मालूम है आपने अभी जब वित्तमंत्री जी का बजट भाषण हो रहा था तो आपने कहा था कि 1 लाख 43 हजार रुपये प्रति व्यक्ति हमारी आमदनी हो गई है. ठीक है ? आपको मालूम है कि वर्ष 2011 सेंसस में प्रदेश की आबादी 7 करोड़ है और उसमें से 5 करोड़ 46 लाख 42 हजार लोग गरीबी रेखा से नीचे आ गये हैं फिर आप किसकी आमदनी बढ़ा रहे हैं, हमारी समझ में नहीं आ रही है. कितने परसेंट लोगों की आमदनी बढ़ा रहे हैं? अब तो हमें यह लगता है कि वही केवल बचे हैं जिनके गरीबी रेखा में नाम नहीं हैं, जिन्होंने या तो खुद नहीं लिखा है या फिर इस विधान सभा के सदस्य होंगे, इसके अलावा तो कोई बचा नहीं है. यह आपकी उपलब्धि है और आप जिस मॉडल की बात करते हैं, गुजरात मॉडल की. वहां पर 80 परसेंट लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन कर रहे हैं तो जो आप लोग सुबह से लेकर शाम तक केवल असत्‍य बोलने का काम करते हैं. आप लोग सही आंकडे़ं बताते नहीं हैं.

          माननीय सभापति महोदय, आपने पहले सभी बैंकों को कम्‍प्‍यूटराईज कराया उसमें आपको मालूम है कि कितना अंतर निकला, 6 हजार करोड़ का. आपने कहा कि कि हम कार्यवाही करेंगे लेकिन आपने किसी के खिलाफ कार्यवाही नहीं करी. आपकी इच्‍छा शक्ति ही नहीं है. आप कार्यवाही कर नहीं सकते हैं. फिर आपने अपेक्‍स सोसाइटियों को कम्‍प्‍यूटराईज कराया तो उसमें 3 हजार करोड़ का अंतर निकला. आप दोनों को मिला दो तो 9 हजार करोड़ रूपये का तो केवल अपेक्‍स में गबन है, धोखाधड़ी है, बेइमानी है और आपको यह सब मालूम है. आप इसके ऊपर कोई निर्णय नहीं कर पा रहे हैं. इसलिये आपको इसके ऊपर ध्‍यान देना चाहिये. जितने का आपका बजट है उससे ज्‍यादा तो आपके कर्मचारी पैसा खा गये.

          माननीय सभापति महोदय, आदरणीय भंवर सिंह जी बोल चुके हैं, इसलिये मैं ज्‍यादा नहीं बोलना चाहता. आपके 14  बैंको को धारा-11 के नोटिस मिल गये हैं. 5 बैंक डूबने की कगार पर पहुंच ही गये हैं, खत्‍म ही हो गये हैं. जिसमें दतिया भी है, ग्‍वालियर भी है और अध्‍यक्ष जी का बैंक भी है, शिवपुरी भी है और सीधी भी है. आपने इन बैंकों को पुनर्जीवित करने के लिये अभी तक क्‍या किया ? जिन 14 बैंकों को धारा-11 के नोटिस हैं, आपने उनके लिये क्‍या किया ? यह बैंक बंद हो जायेंगे, यदि आपने इनके ऊपर ध्‍यान नहीं दिया तो. आप इसके ऊपर भी ध्‍यान दीजिये. आप भर्ती करने में लगे हैं, भर्ती करने में जो मजा है वह इनका पुनर्जीवित करने में थोड़े ही मजा है. इसलिये आप उसकी तरफ ध्‍यान मत दीजिये, बैंको की तरफ ध्‍यान दीजिये.

          माननीय सभापति महोदय, मैंने एक प्रश्‍न वर्ष 2011 में लगाया था और उसका प्रश्‍न क्रमांक था '' 1571 '', फिर हमने वह प्रश्‍न इसी सत्र में लगाया, वह कल आया था. मतलब आपने उसकी लाइनें तक नहीं बदली. वही का वही जवाब आपने 14 साल बाद दे दिया कि यह जांच चल रही है, कार्यवाही करेंगे, देखेंगे अधिकारी वही हैं. मतलब आप एक चपरासी को भी हटाने की क्षमता नहीं रखते हैं, अपने बैंक में. आपको कुछ तो सोचना चाहिये. आप जवाब तो पढ़ लेते, दोनों का मिलान तो कर लेते. मेरे पास दोनों प्रश्‍नों के जवाब हैं. आप कम से कम उनका मिलान तो कर लेते कि विधान सभा में हम क्‍या जवाब देने जा रहे हैं और कैसी आपकी सरकार चली और कितना अच्‍छा आपका मैनेजमेंट है. आप कम से कम इसके ऊपर तो ध्‍यान देते.

          श्री हजारीलाल दांगी- भूमि विकास बैंक आपके समय ही डूबा है.

          श्री यादवेन्‍द सिंह- हां, जब आज कांग्रेस में थे, उसी समय की बात हैं ना. आप थे भूमि विकास बैंक को डूबाने वाले. हम तो विश्‍वास जी के लिये इतनी अच्‍छी बात कर रहे हैं और इतना सीरियस हमने कैलाश जी को नहीं देखा, जितना विजयवर्गीय जी सीरियस होकर सुन रहे हैं.  कितना खा गये हमको तो पता ही नहीं चला.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)- आप कभी-कभी बोलते हो और अच्‍छा बोलते हो तो कभी-कभी सुनने की इच्‍छा भी होती है.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह- धन्‍यवाद. च्‍माननीय सभापति महोदय, बैंकों में कर्मचारी नहीं हैं, सोसाइटियों में समिति प्रबंधक नहीं हैं आप आउट सोर्स के कर्मचारियों से काम चला रहे हैं. वैसे ही पुराने लोग गबन और धोखाधड़ी करके चले गये. अगर आप आउट सोर्स वाले कर्मचारियों से काम चलाओगे तो उनसे आप क्‍या उम्‍मीद कर रहे हो कि वह आपके बैंक को बहुत आगे बढ़ायेंगे. आपकी सस्‍थाओं को उन्‍हें बहुत आगे बढ़ाना है. वह केवल वहां पर खाने के लिये हैं. आप फिर रिटायर्ड आदमी  को फिर  लगा देते हो कि  और अभी आप काम करो.  आपने कहा कि हम  प्रशासक केवल 6 महीने के लिये नियुक्त करते हैं. 6 महीने के बाद  उनकी समीक्षा करते हैं. यहां तो जो है, हमें लगता है कि  22 साल से वही प्रशासक बना बैठा है, जो  22 साल पहले था.  उसको आपको हटाने की हैसियत नहीं है, क्योंकि वे इतने पावरफुल हैं, इतने शक्तिशाली हैं कि  आप हटाओगे तो  वह पहली कुर्सी पर  पहुंच जायेंगे.  आप उनको हटा नहीं सकते हैं.  इसलिये हमारा आपसे निवेदन है कि इस  तरफ ध्यान दीजिये. कर्मचारियों को अदलते-बदलते रहिये, ताकि वह एक ही संस्था में  लूट खसोट नहीं करते रहें और आगे काम करते रहें. अभी हमारे एक साथी ने जब बोला कि  आशीष भाई चले गये,  आशीष कह रहे थे कि कहां कर्जा माफ हुआ.  पांडेय जी कह रहे थे कि कहां खर्चा हुआ. हमारे पास यह उपलब्ध है,  आप कह रहे थे कि उपलब्ध करवा दो जिलेवार. कमलनाथ जी ने जो कर्जे माफ  किये थे,  उसका आप एक रत्ती भर   भी नहीं कर पाये.  उनकी भरपाई भी   नहीं कर पा रहे हैं. तो इसके ऊपर भी ध्यान दीजिये. जैसा भंवरसिंह जी ने कहा है कि  जो केंद्र सरकार  के  निर्देश मिले थे,  आपको बार बार  इस समय सहकारिता मंत्री जी,   अमित शाह जी हैं. हमें तो यह लगता था कि जो अमित  शाह जी बोलते हैं, उसको  आपको मानना पड़ता है. लेकिन मध्यप्रदेश में तो अमित शाह जी  ही की बात नहीं मानी जा रही है.  वह जो निर्देश देते हैं,  उनके ऊपर  अमल नहीं होता है. तो इसके ऊपर भी अमल करिये.  अंत में हमारा आपसे निवेदन है कि  हमने  बुन्देलखण्ड विकास प्राधिकरण  की राशि से हमारे क्षेत्र में एक   बड़ा गांव तहसील मुख्यालय है.  वहां पर हमने स्टेडियम  बनाया था,  कुछ  पैसे उससे दिये थे हमने.  लेकिन  उतनी राशि से वह पूरा नहीं हो पाया. जो आपके स्टेडियम  के निर्माण की स्कीम है,  उसमें बड़ा गांव का स्टेडियम  आप ले लें, तो बड़ी मेहरबानी  होगी,जय हिन्द, धन्यवाद.

          श्री दिलीप सिंह परिहार (नीमच)--  सभापति महोदय,  मैं  मांग संख्या 43  खेल  और युवा कल्याण तथा मांग संख्या 17 सहकारिता  के समर्थन में अपनी बात कहने के लिये खड़ा हुआ हूं.  स्वस्थ शरीर होता है और स्वस्थ शरीर को बनाये रखने के लिये  खेल के मैदान होना  बहुत  आवश्यक हैं.  पुराने समय में कहावत थी कि खेलोगे,कूदोगे, तो बनोगे खराब.  आज खूलने, कूदने वाले  भारत में स्वर्ण पदक, रजत पदक  और अनेक पद लाकर भारत का सम्मान बढ़ाने का काम  कर रहे हैं.  हम देख रहे हैं कि  खेलो का हब बनाने की दिशा में हमारा  संकल्प है कि हमारे  युवा को  अपनी प्रतिभाओं का प्रदर्शन  करने के लिये मंच मिला है और प्रदेश के युवाओं   को प्रदेश, राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय  स्तर पर गौरव दिलाने हेतु  अवसर, सुविधायें प्रदान की हैं, खेल एवं युवा कल्याण विभाग ने.  मैं विभाग की 662 करोड़ॉ 82 लाख  उनचास हजार की जो  मांग है,  मैं उसका समर्थन करता हूं  और इस राशि को  और बढ़ाने की आवश्यकता  है,  जिससे खेल को और प्रोत्साहन मिलेगा. हम देख रहे हैं कि हमारे युवा   को भविष्य और  उनकी  ऊर्जा, सामर्थ्य एवं कौशल को सही  दिशा  देने के लिये  खेल विभाग  अनेक योजनाएं और अवसर प्रदान करता है. मैं खेल एवं युवा कल्याण विभाग को  धन्यवाद दूंगा कि  मध्यप्रदेश में खेल  प्राधिकरण  खेल को लेकर खेल एवं युवा कल्याण विभाग  को सलाह एवं सुझाव प्रदान  करता है, जो जिला स्तर पर  भी होते है.  अभियान में साहसिक  खेल गतिविधियों  के आयोजन हेतु कार्यरत् है, मैं  इसके लिये धन्यवाद देता हूं.  युवा संधि, युवा कल्याण  गतिविधि को संचालित करती है.  विभाग  में  संभागीय  कार्यालय संभागीय स्तर पर है.  जिला स्तर  परहै.  इस वजह से लगातार कार्य चल रहा है.  खेल अकादमी  में  उच्च तकनीकी विशेषज्ञ, प्रशिक्षक, सह सलाहका रहोने की वजह से बेटमिंटन, मार्शल आर्ट,  घुड़सवारी, पुरुष एवं महिला हाकी, क्रिकेट,  फुटबाल, शूटिंग काम्प्टीशन अकादमी  एवं  18 खेल और 11 अकादमी, फिट सेन्टर से चयन कर प्रशिक्षण दे रही हैं. इससे   आने वाले समय में और अच्छे खिलाड़ी मिलेंगे, मैं स्वयं भी एक खिलाड़ी रहा हूं और खेल अकादमी के माध्यम से हम युवा जब तैयार करते हैं, तो कहीं न कहीं  नेशनल   स्तर पर एवं  अन्तर  विश्वविद्यालय में वहां खेलने का अवसर मिलता है और मध्यप्रदेश का वह नाम रोशन करते हैं.  खेल विभाग द्वारा लगातार जो रचनाएं रची गई हैं खेलों में, खेलो एमपी यूथ गेम्स,  जो खेलों  इंडिया यूथ गेम्स की तर्ज  पर  खेलो एमपीयूथ  गेम्स आरम्भ किये गये हैं.  इसके लिये मैं धन्यवाद देना चाहता हूं.

          सभापति महोदय, आज हम देख रहे हैं कि हर विधानसभा मे विधायक ट्राफी और सांसद ट्राफी हो रही है. जिन खिलाडियों को कहीं अवसर नहीं मिलता है वह विधायक ट्राफी के माध्यम से खेल में भाग लेते हैं. अपनी प्रतिभा दिखाते हैं. आज हमारे नीमच जिला जो कि फुटबाल का गढ़ रहा है जहां पर भारत की टीम में भी फुटबाल में कालू गुप्ता और अन्य लोगों ने भाग लिया है. तो खेल गतिविधियों को  बढ़ाने के लिये विभाग लगातार काम कर रहा है.

          सभापति महोदय, विधायक ट्राफी 2016 से प्रारंभ हुई थी आज उसकी लोकप्रियता बढ़ी है. माननीय देश के प्रधानमंत्री मान्यवर मोदी जी के मार्गदर्शन में सांसद लोग भी ट्राफी करवा रहे हैं वहां पर खेल उपकरण प्रदान कराने का काम कर रहे हैं. संभागीय और जिला स्तर पर भी यह प्रतियोगितायें लगातार आयोजित हो रही हैं. इस प्रतियोगिता के माध्यम से मैं अपने क्षेत्र की मांग भी करना चाहता हूं. माननीय मंत्री जी हमारे यहां तैराकी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में नन्ही तैराक सुश्री कनकश्री धारवाल जो हमारी बेटी है उसने गोल्ड मैडल प्राप्त किया है और उसको हमने सम्मानित करने का भी काम किया है. दिव्यानी गंगवाल ने बास्केट बाल में भारत का प्रतिनिधित्व किया जब वह प्रतिनिधित्व करके नीमच में आई थी तो स्टेशन पर खेल प्रेमियों की भीड़ लगी थी, उसका स्वागत कराने का हमने काम किया, कीर्तिराज जुन्नावत हाकी प्लेयर ने जूनियर एकेडमी में भाग लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेलों में भाग लिया है.

          माननीय सभापति महोदय, हम देखते हैं कि खेल के क्षेत्र में पुरूष और महिलायें दोनों आगे बढ़ रही हैं, इसलिये विभाग द्वारा हाकी में हाकी महिला एकेडमी का निर्माण किया है, 2006 में ग्वालियर में राज्य महिला हाकी एकादमी की स्थापना की गई है. अतंरराष्ट्रीय स्तर पर हाकी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है.ओलंपिक 2016 में भारतीय महिला हाकी टीम खेल एकेडमी में 7 खिलाडियों ने प्रतिभागिता की है इसके लिये भी मैं मान्यवर मंत्री जी को बधाई देता हूं.

          माननीय सभापति महोदय, राज्य महिला क्रिकेट अकादमी, शिवपुरी में 2022 में प्रारंभ की गई थी जिसमें 24 बालिकाओं ने भाग लिया, 20 खिलाड़ियो ने बेडमिंटन खेल में बेस्ट पुरस्कार प्राप्त किया है. विभाग द्वारा 38वें राष्ट्रीय खेल में 2024 में उत्तराखंड में 28वें राष्ट्रीय खेल में एवं अंतरराष्ट्रीय  25 खेलों में 165 महिला बालिकाओं ने भी प्रतियोगिताओं में प्रतिनिधित्व किया है. आज खेलो इंडिया यूथ गेम्स के माध्यम से भी 2024 में भारत सरकार के खेल मंत्रालय के निर्देशों के तहत खेलो इंडिया गैम्स तमिलमाडु में आयोजित किये गये थे, 19 से 31 जनवरी, 2024 तक यहां पर प्रदेश की महिला खिलाडियों को 6 स्वर्ण पदक, 12 रजत पदक और 11 कांस्य पदक प्राप्त हुये हैं. उसके लिये मंत्री जी को बधाई देता हूं.

          माननीय सभापति महोदय, विश्व महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च 2024 को बालिकाओं को खेल गतिविधियों में प्रोत्साहन दिया गया. विभाग में  खेल अकादमी संचालित की जा रही है, खेल अकादमी में 50 प्रतिशत सीटें..

          सभापति महोदय- दिलीप जी कृपया समाप्त करें.

          श्री दिलीप सिंह परिहार -- माननीय सभापति महोदय, मैं अपने क्षेत्र की मांग कर लेता हूं. मंत्री जी आप प्रत्येक जिले में जो स्टेडियम दे रहे हैं उसके लिये मैं धन्यवाद देता हूं. नीमच जिला खेल में हमेशा से आगे रहा है. नीमच  में आल इंडिया जूनियर महिलाओं की प्रतियोगिता कराई थी उसमें सफलता भी हमें मिली थी. मेरे जिले में जीरन एक तहसील है उस तहसील के  कई युवा खेल के क्षेत्र में, कई सेना में भर्ती हुये हैं. मैं खेल मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि जीरन तहसील में में खेल मैदान उपलब्ध करवायें. नीमच में भी खेल मैदान के लिये हमने जमीन उपलब्ध कराई है, कलेक्टर और एसपी के माध्यम से वहां पर भी इनडोर स्टेडियम तो विधायक निधि का जो पैसा माननीय मुख्यमंत्री जी ने दिया था वह पैसा इंडोर स्टेडियम में लगाकर के हम बना रहे हैं. एक आउटडोर स्टेडियम बनाने के लिये मांग करते हैं कि इस बजट में उसके लिये राशि का आवंटन करें.

          माननीय सभापति महोदय, सहकारिता के क्षेत्र में भी जीरो प्रतिशत पर जो ऋण की सुविधा दे रही है उसके लिये मैं मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं. आओ हम सब मिलकर के खेल के क्षेत्र में मध्यप्रदेश का नाम रोशन करें देश का नाम रोशन करें, अच्छे खिलाड़ियों को प्रोत्साहन देते हुये खेलों इंडिया के माध्यम से राष्ट्रभक्ति का भाव जागृत करते हुये और आगे बढ़ें. सभापति महोदय, आपने मुझे अपनी बात कहने का अवसर प्रदान किया उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.

          सभापति महोदय -- धन्‍यवाद दिलीप सिंह जी, वैसे यह तो बता दें कौन सा खेल आप खेलते थे इस राजनीति खेल के अलावा.

          श्री दिलीप सिंह परिहार -- सभापति महोदय, फुटबॉल में अंतरविश्‍व- विद्यालय तक मैंने रिप्रजेंट किया है. एथलेटिक्‍स में 24 वीं एथलेटिक्‍स प्रतियोगिता में दौड़ा हूं. आज हम खेल के क्षेत्र में जो लोग काम करते हैं वह सभी क्षेत्रों में जा सकते हैं. इसलिये खेल के मैदान हमारे मंत्री जी के नेतृत्‍व में हरे-भरे रहेंगे और यह तो ऊर्जावान हैं, हमारे यहां मेडिकल कॉलेज की सौगात भी भाई विश्‍वास जी ने, मुख्‍यमंत्री जी ने दी है. इसके लिये मैं धन्‍यवाद देता हूं और खेल के लिये भी आप निश्चित ही जीरन और नीमच दोनों ही स्‍थान पर स्‍टेडियम देंगे. मैं धन्‍यवाद देता हूं.

          श्री दिनेश गुर्जर (मुरैना) -- सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मुरैना विधान सभा क्षेत्र के संबंध में माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि मुरैना में नौजवानों में खेल के प्रति बहुत अच्‍छा उत्‍साह रहता है. बामोर नगर पंचायत लगभग एक लाख की आबादी का शहर मुरैना विधान सभा क्षेत्र में है. नौजवानों के खेलने के लिये वहां एक भी स्‍टेडियम नहीं है जहां वह अपनी प्रतिभाओं के लिये तैयारी कर सकें. मैं आपके माध्‍यम से मांग करता हूं कि बामोर शहर में एक खेल का मैदान बनाया जाए जिससे नौजवानों को अपनी प्रतिभाएं दिखाने का एक अवसर मिले. दूसरा, जो मुरैना के अंदर अंबेडकर स्‍टेडियम है उसमें कई हजार नौजवान और बुजुर्ग सुबह-शाम आते हैं. जिस तरह से अभी उसके हालात हैं, खुदा पड़ा है, कोई व्‍यवस्‍था उसमें ठीक ढंग से नहीं हो पा रही है, साल भार से बहुत खराब स्थिति में स्‍टेडियम है, उस स्‍टेडियम को बनवाया जाये और उसका रखरखाव नियमित रूप से हो माननीय मंत्री जी से मेरी यह मांग है. तीसरा, पूरे हिन्‍दुस्‍तान में मुरैना के नौजवानों ने नाम रोशन किया है. चाहे देश की सीमा की बात हो, चाहे खेलों में हो.

सभापति महोदय, मुरैना के अंदर भी बहुत बड़े-बड़े पहलवान रहते हैं, परंतु मेट पर कुश्‍ती की तैयारी वह नहीं कर पाते हैं. मिट्टी की कुश्‍ती लड़ते हैं. आज एक आधुनिक युग है. पूरे भारतवर्ष में और पूरे विश्‍व में मेट की कुश्‍ती होती है. हमारे मुरैना के जो नौजवान और पहलवान हैं उनको तैयारी करने के लिये किसी अखाड़े में ऐसी कोई व्‍यवस्‍था नहीं है. मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि जो खाकी वाले बाबा बगिया जो रेलवे स्‍टेशन पर अखाड़ा है उसमें भवन बनाकर, मेट लगाकर पहलवानों को वहां तैयारी के लिये एक अवसर आप दें. मेरा मानना है कि उससे मुरैना के पहलवान पूरे देश और विश्‍व में मध्‍यप्रदेश का नाम रोशन करेंगे. यह मैं माननीय मंत्री महोदय से आपके माध्‍यम से मांग करता हूं. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री देवेन्‍द्र रामनारायण सखवार--  सभापति महोदय, मैं थोड़ी सी बात कहना चाहता हूं कि मुरैना खेल विभाग में मेट पड़े हैं लेकिन बांटे नहीं जाते हैं. 

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय                -        अनुपस्थित.

          श्री अमर सिंह यादव              -        अनुपस्थित.

          श्री अरुण भीमावद (शाजापुर) --  सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 43 और 17 की अनुदान मांगों पर कुछ कहने के लिये खड़ा हुआ हूं. मैं सबसे पहले तो धन्‍यवाद देना चाहूंगा मध्‍यप्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री आदरणीय मोहन यादव जी को और खेल एवं युवा कल्‍याण मंत्री आदरणीय विश्‍वास सारंग जी को जिन्‍होंने युवाओं के लिये इस मध्‍यप्रदेश में नवाचारों को करते हुये पुराने परम्‍परागत खेलों को महत्‍व देते हुये इस मध्‍यप्रदेश में एक नई धारा लाने का प्रयास किया है. साथ ही माननीय प्रधानमंत्री जी एवं मुख्‍यमंत्री जी के एक भारत, श्रेष्‍ठ भारत की कल्‍पना को साकार करने के लिये खेल अकादमियों में प्रदेश के खिलाडि़यों के लिये 80 प्रतिशत् खिलाडि़यों को प्रवेश दिलाने का अगर काम कर रहे हैं वह निश्चित रूप से मध्‍यप्रदेश के खिलाडि़यों के लिये बहुत बड़ी सौगात है. साथ ही इसमें बालिकाओं के लिये 50 प्रतिशत् का आरक्षण करके निश्चित रूप से नारी सम्‍मान करने का काम मध्‍यप्रदेश की सरकार ने किया है. राष्ट्रीय खेलों में पिछले 2 वर्षों में मध्यप्रदेश लगातार तीसरे स्थान पर रहा है. साथ ही अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हमारे खिलाड़ियों ने 12 स्वर्ण , 14 रजत, 18 कांस्य पदक लेकर. कुल मिलाकर 44 पदक लेकर मध्यप्रदेश का नाम रोशन किया है. राष्ट्रीय खेलों में भी मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने प्रदेश का नाम रोशन करते हुए. 34 स्वर्ण पदक, 25 रजत पदक और 23 कांस्य पदक लेकर मध्यप्रदेश का नाम रोशन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

          सभापति महोदय, श्री देव मीणा ने पोल वॉल्ट गेम में नया राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया है. यह मध्यप्रदेश के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है. खेल संघों में खेल प्रतियोगिता के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है. प्रदेश में स्पोर्ट्स हब बनाने के लिए भोपाल में नाथुबरखेड़ा में अन्तर्राष्ट्रीय खेल काम्पलेक्स 985 करोड़ रुपए से बनाने का फैसला सरकार ने लिया है.  निश्चित रुप से यह खिलाड़ियों को सुविधा प्रदान करेगा. मैं खेल मंत्री जी को अपनी ओर से साधुवाद देता हूँ. मंत्री जी ने मध्यप्रदेश में विधायक और सांसदों की प्रतियोगिता कराकर ग्रामीण क्षेत्रों में जो खिलाड़ी हैं उन्हें अवसर देने का काम किया है. मैं आदरणीय मुख्यमंत्री मोहन यादव जी और खेल मंत्री विश्वास सारंग जी को बधाई देता हूँ.

          सभापति महोदय, खेलो इंडिया, भारत सरकार की योजना के अन्तर्गत प्रदेश के 52 जिलों में इंडिया स्मार्ट सेंटर स्वीकृत कर खिलाड़ियों को सुविधा देने का का जो कार्य किया जा रहा है, यह खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने का काम करेगा. साथ ही खेलो इंडिया एथलीट योजना के अन्तर्गत 54 खिलाड़ियों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपए प्रति खिलाड़ी और प्रशिक्षण देने का काम मध्यप्रदेश की सरकार कर रही है.

          सभापति महोदय, नवाचारों में खेल विभाग ने अभिनव योजना के माध्यम से पार्थ योजना प्रारंभ की है. प्रदेश के ऊर्जावान युवाओं को पुलिस और आर्मी में देश प्रेम की भावना जागृत करने के उद्देश्य से, यह योजना निश्चित रुप से कारगर साबित होगी. साथ ही "मां तुझे प्रणाम" योजना युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक योजना है. इसके माध्यम से अनेक स्थानों पर युवाओं ने जाकर अनुभव लिया है. 15659 युवाओं ने इस अनुभव यात्रा का लाभ लिया है. आदरणीय मुख्यमंत्री मोहन यादव जी और खेल मंत्री विश्वास सारंग जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र में एक स्टेडियम देने की जो घोषणा की है यह ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों के लिए विशेष रुप से कारगर साबित होने वाला है.

          सभापति महोदय, सहकारिता के क्षेत्र में जीरो परसेंट ब्याज, आदरणीय भंवरसिंह जी आपका ही सुझाव होगा, क्योंकि आप अपेक्स बैंक में थे और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता के रुप में आपने किसानों की चिंता की होगी. लेकिन इस मध्यप्रदेश में "बिना सहकार नहीं उद्धार" के नारे के साथ भारतीय जनता पार्टी की सरकार काम कर रही है. आने वाले समय में आपकी जो थोड़ी सी पीड़ा है. जो आपने अपने बेटे से रखी है. आने वाले समय में मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री आदरणीय मोहन  यादव जी के नेतृत्व में पैक्स के भी चुनाव होंगे और अपेक्स के भी चुनाव होंगे. यह आगामी समय में निश्चित रुप से होने वाला है. आप धीरज रखें क्योंकि आपने उन पदों पर रहकर किसानों की सेवा की है. यह थोड़ा सा जो अभी अंतर आया है. वह आया है जब वर्ष 2003 का नाम सदन में लिया जाता है तो उधर की कुर्सियों में करंट सा आ जाता है. वर्ष 2003 का नाम हर विभाग में इसलिए लिया जाता है क्योंकि वर्ष 2003 के पहले कहीं न कहीं बहुत सारी खामियां थीं. उसकी पूर्ति करने का काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है. सहकारिता के क्षेत्र में हो या खेल एवं युवक कल्याण मंत्रालय के विभाग के क्षेत्र में हो. भारतीय जनता पार्टी की ....   

6.05 बजे       {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए}

...भारतीय जनता पार्टी की सरकार बहुत सारे काम ऐसे कर रही है जिसमें किसानों को भी फायदा मिल रहा है. जीरी प्रतिशत ब्‍याज कभी किसानों ने कल्‍पना नहीं की थी. 17.5 प्रतिशत का ब्‍याज आपकी सरकार में था उसको कम करते-करते यदि जीरो प्रतिशत पर किसानों को सुविधा दे रही है तो यह एक मात्र भारतीय जनता पार्टी की सरकार की हिम्‍मत है जो इस प्रकार के निर्णय लेने जा रही है. मैं आज इस अवसर पर ज्‍यादा नहीं कहते हुए आदरणीय विश्‍वास सारंग जी और सदन में माननीय मुख्‍यमंत्री जी भी आ चुके हैं मैं उनसे भी निवेदन करना चाहूंगा कि शाजापुर विधान सभा क्षेत्र में आप एक स्‍टेडियम तो दे ही रहे हैं, लेकिन वर्तमान में वहां पर जो खेल का मैदान है उसका जो रूफ है वहां पर सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रम होने के कारण से वह कहीं न कहीं खेल के मैदान से दूर हो गया है. इसलिए आप वहां नया अत्‍याधुनिक स्‍टेडियम देंगे तो शाजापुर विधान सभा जिला मुख्‍यालय है हमें निश्चित रूप से उसका फायदा मिलेगा. मैं आज इस अवसर पर आपको धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि आपके अध्‍यक्षीय कार्यकाल में सदन का जिस प्रकार का वातावरण बना है सकारात्‍मकता के साथ सदन चल रहा है. एक दूसरे से नई सोच के साथ वार्तालाप चल रही है. उसका उदाहरण हमने कार्यक्रमों में भी देखा है और सदन में भी देखा है. मैं कल मुख्‍यमंत्री जी के साथ तराना विधान सभा क्षेत्र के कार्यक्रम में था वहां के विधायक हमारे विपक्ष के साथी महेश परमार जी उन्‍होंने जिस प्रकार से सरकार की तारीफ की है क्‍योंकि नर्मदा का पानी तराना में भी आया है, शाजापुर में भी आया है और जिस प्रकार से उन्‍होंने तारीफ की है वह सीधे-सीधे मंच से जनता के बीच में गया है. इसलिए मैं आपको धन्‍यवाद देना चाहूंगा. मैं इस अनुदान मांग का समर्थन करता हूं धन्‍यवाद.

          डॉ. रामकिशोर दोगने (हरदा)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 43 के विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. खेल एवं युवा कल्‍याण, युवाओं से जुड़ा हुआ मामला है. हम कहते हैं कि युवा ही देश का भाग्‍यविधाता है. देश का खेवनहार है, पर युवाओं के लिए जो बजट रखा गया है वह बहुत ही कम है. सिर्फ 662 करोड़ रुपए का बजट युवाओं के लिए रखा गया है. इसमें अगर हम देखें कि 55 जिलों का भाग दें तो एक जिले को केवल 12 करोड़ रुपए आता है और 12 करोड़ रुपए में तो एक स्‍टेडियम भी नहीं बन पर रहा है तो यह कैसे चलेगा जब हम युवाओं के लिए काम कर रहे हैं, युवाओं को आगे बढ़ाने की बात कर रहे हैं तो युवाओं को नौकरी के लिए भी स्‍टेडियम की जरूरत होती है, खेल की जरूरत होती है. उसमें भी उनको प्रैक्टिस करने के लिए साधन नहीं मिलेगा तो वह कैसे प्रैक्टिस करेंगे. इसलिए मेरी आपके माध्‍यम से यह गुजारिश है कि सरकार को यह बजट बढ़ाना चाहिए और जिला लेबल पर योजनाएं देना चाहिए. खेलो इंडिया में इन्‍होंने 180 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. खेल अकादमियों के लिए 170 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. स्‍टेडियम खेल अधोसंरचना के लिए 159 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है लेकिन इसमें कुछ नहीं होगा. इसके साथ ही मेरा आपसे एक ही निवेदन है कि हमारा हरदा सन् 1998 में नया जिला बना था परंतु उसके बाद वहां एक सिंगल स्‍टेडियम है जिसमें क्रिकेट के बच्‍चे भी खेलते हैं, हॉकी के भी खेलते हैं, फुटबॉल के भी खेलते हैं और पुलिस, फौज सर्विस की तैयारी वाले भी प्रैक्टिस करते हैं. लॉग जम्‍प, दौड़ की प्रैक्टिस भी उसी में की जाती है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से अनुरोध है कि हरदा जिले में कम से कम तहसील स्‍तर पर एक-एक स्‍टेडियम दे दिया जाए. एक स्‍टेडियम खिरकिया में दे दिया जाए, एक हरदा में बनाया जाए और एक टिमरनी में भी बनाया जाए. हमारे क्षेत्र में कबड्डी खेल बहुत अच्‍छा है. हरदा की पहलवानी भी बहुत अच्‍छी है और हरदा के बच्‍चे क्रिकेट में भी बाहर निकल रहे हैं, परंतु इनके खेलने की व्‍यवस्‍था नहीं हो रही है इसलिए बच्‍चों को सुविधा नहीं मिल पा रही है और वह आगे नहीं निकल पर रहे हैं. मेरा आपके माध्‍यम से यही निवेदन है कि हरदा में खेल की व्‍यवस्‍था करा देंगे तो अच्‍छा होगा. एक ही स्‍टेडियम में सभी खेल होते हैं तो सभी को तकलीफ होती है. यह जो बड़े खेल क्रिकेट, हॉकी और फुटबॉल एक ही ग्राउंड में खेलेंगे तो कैसे काम चलेगा. मुख्‍यमंत्री जी भी बैठे हैं इसलिए एक बहुत अच्‍छा सुसज्जित स्‍टेडियम हो. एक इनडोर स्‍टेडियम भी बने, इनडोर स्‍टेडियम वहां काफी समय से डिक्‍लेयर है लेकिन आज तक नहीं बना है, घोषणायें काफी हुई हैं पर घोषण के बाद भी आज तक नहीं बना है इसलिए निवेदन है कि इनडोर स्‍टेडियम बने और एक और बड़ा स्‍टेडियम बने, जिसमें हॉकी, क्रिकेट की व्‍यवस्‍था अलग से हो जाये और क्रिकेट का अलग स्‍टेडियम हो जाये और अन्‍य खेलों के लिए भी उसमें सुविधायें हो जायें, ये मेरी मांगें हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से अमरपाटन के विधायक माननीय डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह जी चूंकि सदन में सभापति थे आसंदी पर थे इसलिए वे अपनी मांग यहां रख नहीं पा रहे थे, मुझे निर्देशित किया है, मैं, उनकी तरफ से निवेदन करना चाहता हूं कि अमरपाटन विधान सभा में भी ग्राम मुकुंदपुर में स्‍थानीय युवाओं, खिलाडि़यों की बहुत पुरानी मांग है, उसे पूरा करने के लिए राजस्‍व विभाग से समन्‍वय करके वहां एक खेल मैदान या स्‍टेडियम को मंजूर करवाया जाये, जिससे उन्‍हें सुविधा होगी और उनके क्षेत्र में काम होगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, इसके सा‍थ ही सहकारिता के क्षेत्र में बात करना चाहता हूं कि हरदा भी बहुत बड़ा सहकारिता का केंद्र रहा है, पूरी फसल की खरीदी वहां होती है, सहकारिता का पुराना इतिहास बहुत खराब रहा है, सहकारिता में जितनी भी खरीदी हुई है, उसमें दलाली, कमीशन बहुत ज्‍यादा हुआ करता था. ये चीजें अब न हों. इसके साथ ही सहकारिता में हमारी एक सोसायटी चौकड़ी सोसायटी, खिड़किया तहसील की है, उसमें 150 किसानों का आज तक भुगतान नहीं हुआ है, वहां प्रबंधक गबन करके चला गया था, उसके ऊपर एफ.आई.आर. करके उसे छोड़ दिया गया. वहां 150 किसानों को चने का भुगतान दिलवाया जाये, ऐसा मेरा आपसे निवेदन है. आपने बोलने का अवसर दिया, धन्‍यवाद. जय हिन्‍द, जय भारत.

          श्री चैन सिंह वरकड़े (निवास)-  अध्‍यक्ष महोदय मैं मांग संख्‍या 43 के संदर्भ में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. खेल से हमारा शरीर स्‍वस्‍थ रहता है और हम अच्‍छा जीवन जीते हैं. इसे बढ़ावा देने के लिए सरकार बहुत कदम उठा रही है. लेकिन उसकी शुरूआत जब बच्‍चा स्‍कूल जाता है वहां से होती है. पहले स्‍कूल में ही एक कालखण्‍ड होता था खेलकूद का लेकिन विगत कई दिनों से न स्‍कूलों में पी.टी.आई. है, न खेलकूद हो रहा है. पहले युवा खेलकूद, स्‍कूल से ही सीखकर आते थे तो मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि स्‍कूल शिक्षा विभाग से भी समन्‍वय बनाकर, स्‍कूल में भी खेलकूद का कालखण्‍ड जोड़कर, बच्‍चों को सीखाने का काम करें. साथ ही मध्‍यप्रदेश में बहुत से क्षेत्रों के अच्‍छे युवा प्रतिभागी खेलों में आगे आ रहे हैं लेकिन मैं मण्‍डला जिले से हूं, आदिवासी जिला है, जहां संसाधनों की कमी की वजह से हमारे ग्रामीण क्षेत्र के जो प्रतिभागी हैं, उनको अपनी प्रतिभा को निखारने का अवसर नहीं मिल पा रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं, आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि मण्‍डला जिले में एक खेलकूद को लेकर कोचिंग सेंटर हो, जहां सारी व्‍यवस्‍थायें हों ताकि बच्‍चों की रूचि के अनुसार उनको खेल सीखाया जा सके और वे खेलकूद के जो मापदण्‍ड हैं, उसके अनुसार अपनी प्रतिभा निखार सकें. अभी विधायक कप, सांसद कप में गांव से प्रतिभागी आते हैं लेकिन वे जितना अपने मन से जानते हैं, सिर्फ वही प्रदर्शन कर पाते हैं.

           अध्‍यक्ष महोदय-  चैन सिंह जी, पूरा करना पड़ेगा.

          श्री चैन सिंह वरकड़े - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यही चाहता हूँ कि मेरे निवास विधान सभा क्षेत्र के विकासखण्‍ड मुख्‍यालय निवास बीजाडाण्‍डी, नारायणगंज, मोहगांव और सेमरखापा में स्‍टेडियम के साथ-साथ मण्‍डला जिले में एक अच्‍छा खेल-कूद का स्‍टेडियम कोचिंग सेन्‍टर खोला जाये और उनके विभाग में अभी बहुत सारे स्‍टॉफ की कमी है, हर जिले में एक बाबू और एक जिला खेलकूद अधिकारी है, जो कोचिंग सेन्‍टर बने, उसमें पर्याप्‍त कोचिंग कराने वाला हो, उसकी अच्‍छी व्‍यवस्‍था हो ताकि वह बच्‍चों को अच्‍छा सिखा सके और साथ ही जबलपुर महाकौशल में एक अन्‍तर्राष्‍ट्रीय स्‍टेडियम का निर्माण हो, जहां हमारे कम से कम 5-6 जिले जो ग्रामीण क्षेत्र हैं एवं जो अन्‍य जिले हैं, उनके युवा प्रतिभागी भी वहां अपने खेल का प्रदर्शन कर सकें. मैं इन्‍हीं मांगों के साथ अपनी बात को समाप्‍त करता हूँ. धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय - श्री सुरेश राजे जी. आप अपनी बात 3 मिनट में समाप्‍त करें. 

          श्री सुरेश राजे (डबरा) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पूरी कोशिश करूँगा. मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि डबरा एक महत्‍वपूर्ण तहसील है और इसमें वर्तमान में कोई भी स्‍टेडियम नहीं है. वर्ष 2020 में उपचुनाव के दौरान माननीय श्री शिवराज सिंह जी जब मुख्‍यमंत्री थे, तो उन्‍होंने घोषणा की थी. चांदपुर, वार्ड क्रमांक-28 में जगह भी चिन्ह्ति हो गई थी और उसके लिए एक करोड़ रुपया डबरा नगरपालिका में पहुँच भी गया था, ऐसी क्‍या बात हुई ? माननीय मंत्री जी कि वह पैसा वापस आ गया. यह महत्‍वपूर्ण विषय है. मेरा मंत्री जी से यह अनुरोध है कि आप कैसे भी करके, कम से कम हमारे यहां एक स्‍टेडियम बन जाये.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से, माननीय मंत्री जी से यह भी निवेदन करूँगा कि जिस तरह छोटे-छोटे स्‍टेडियम ग्राम पंचायत स्‍तर पर बनाने की सरकार की योजना थी, वह एकाध जगह बने भी. क्‍या अब वह योजना पूरी तरह बन्‍द हो गई है ? क्‍योंकि लगभग 4 वर्ष हो गए हैं. किसी ग्राम पंचायत में वह देखने को नहीं मिल रही है. मेरे यहां दो नगर पंचायतें हैं, मानननीय मंत्री जी, दोनों नगर पंचायतों में चाहे बिलौआ नगर पंचायत हो, चाहे पिछोर नगर पंचायत हो, एक भी नगर पंचायत में कोई भी खेल स्‍टेडियम नहीं हैं. आपसे अनुरोध है और हमारे बच्‍चे चाहे वह पुलिस विभाग की भर्ती के लिए प्रैक्टिस करें, या खेल विभाग की भर्ती के लिए प्रैक्टिस करें. वहां कोई भी एक स्‍थान स्‍टेडियम ऐसा नहीं है, जहां वह जाकर खेल-कूद की प्रैक्टिस कर सकते हों. अध्‍यक्ष जी, आपसे अनुरोध है कि आप सहानुभूतिपूर्वक इस पर विचार करें और कम से कम डबरा को जल्‍द से जल्‍द एक खेल स्‍टेडियम देने की कृपा करें. अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, बहुत-बहुत बधाई, धन्‍यवाद.

          श्री अमर सिंह यादव - अनुपस्थित.

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय (राजु भैया) (जावरा) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 43 एवं 17 पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ और मैं आपके माध्‍यम से, माननीय मुख्‍यमंत्री जी, माननीय वित्‍त मंत्री जी एवं विभागीय मंत्री माननीय श्री विश्‍वास सारंग जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूँ. जैसा कि उनका नाम है विश्‍वास, उस विश्‍वास में ही निश्चित रूप से जन-जन का विश्‍वास सम्मिलित है (मेजों की थपथपाहट) और इस विश्‍वास को कायम रखते हुए वह युवाओं के भी चहेते रहे हैं. वह युवा मोर्चा के मध्‍यप्रदेश के अध्‍यक्ष रहे हैं और पूरे मध्‍यप्रदेश में आपके ही मार्गदर्शन और आपके ही नेतृत्‍व में निश्चित रूप से उन्‍होंने भ्रमण किया है और वह जन-जन के दुलारे हैं, लाड़ले हैं. यह संयोग सुखद है, खेल मंत्रालय की भी बात है, सहकारिता विभाग की भी बात है. उनके पिताजी स्‍व. श्री कैलाश सारंग जी, वह भी पूरे मध्‍यप्रदेश को जानने वाले रहे थे, तो आपका किसानों से भी, गांव-गांव तक दूर-दराज तक का नाता है.        

          अध्‍यक्ष महोदय - वह भंवर सिंह जी के भी चहेते हैं.

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय (राजु भैया) - जी, माननीय अध्‍यक्ष महोदय.   

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- भंवर सिंह जी भले ही उधर चले गए हों. बाकी चहेते सब हैं उनके, पूछ लो उनसे.

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी आप अपने कक्ष में थे, निश्‍चित रूप से पूरा सदन बहुत प्रसन्‍न हुआ, माननीय भंवर सिंह जी ने बहुत सारी बातें नीतिगत बताईं.  निश्‍चित रूप से बहुत सारी आवश्‍यक बातों के बारे में विभागीय अधिकारियों और माननीय मंत्री जी का ध्‍यान आकृष्‍ट किया. लेकिन पूरे मन के साथ कहा कि यार विश्‍वास, पूरे विश्‍वास से कह रहा हूँ कि तेरा विरोध कैसे करूँ.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- भंवर सिंह जी ने सहकारिता के क्षेत्र में ही खेल-खेल के अपने सारे बाल खत्‍म किए हैं. (हंसी).

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय -- अब आप दोनों बड़े भाई हैं. दोनों इन्‍दौर से हैं. दोनों पुराने साथी भी हैं और दोनों बड़े खिलाड़ी भी हैं. (हंसी).

          अध्‍यक्ष महोदय -- राजेन्‍द्र भाई, आप अंतिम वक्‍ता हो, विषय पर आ जाओ.

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम कमियों की तो बहुत बात करते हैं, लेकिन निश्‍चित रूप से हमारे मध्‍यप्रदेश में बहुत अनुकरणीय भी हो रहा है, बहुत अच्‍छा भी हो रहा है. मैं संक्षेप में उल्‍लेख भी करना चाहता हूँ ताकि रिकॉर्ड में भी आ जाए. अध्‍यक्ष महोदय, हम खेल विभाग की उपलब्‍धियां तो देखें. ओलम्‍पिक गेम्‍स में विवेक सागर प्रसाद कांस्‍य पदक लेकर के आए. पैरालम्‍पिक गेम्‍स में, जो कि 28 अगस्‍त से 8 सितम्‍बर, 2024 तक आयोजित हुए थे, उसमें कुमारी रूबिना फ्रांसिस ने पैरा शूटिंग में 10 मीटर एयर पिस्‍टल में कांस्‍य पद फिर लेकर के आईं. श्री कपिल परमार ने ब्‍लाइंड जूडो में कांस्‍य पद लेकर के आए. सुश्री प्राची यादव कैनो स्‍प्रिंट में प्रतिभागी रही. एशियन गेम्‍स में खिलाड़ियों ने 6 स्‍वर्ण, 5 रजत और 3 कांस्‍य पद लेकर के आए. इसमें हमारी उपलब्‍धियां रहीं कि ऐश्‍वर्य प्रताप सिंह ने शूटिंग में 2 स्‍वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्‍य,  पूजा वस्‍त्रकार ने महिला क्रिकेट में 1 स्‍वर्ण, सुदिप्‍ती हजेला ने घुड़सवारी में 1 स्‍वर्ण, विवेक सागर प्रसाद ने पुरुष हॉकी में 1 स्‍वर्ण, आवेश खान ने पुरुष क्रिकेट में 1 स्‍वर्ण, ऐश्‍वर्य प्रताप सिंह द्वारा वर्ल्‍ड रिकॉर्ड भी बनाया गया है. यह निश्‍चित रूप में पूरे मध्‍यप्रदेश को गौरवान्‍वित करने वाली बात होती है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पैरा एशियन गेम्‍स, 2023 में सुश्री प्राची यादव ने 1 स्‍वर्ण, 1 रजत, श्री मनीष कौरव ने 1 कांस्‍य पदक, कु. रूबिना फ्रांसिस ने 1 कांस्‍य पदक भी प्राप्‍त किया. अध्‍यक्ष महोदय, ये उपलब्‍धियां यहीं पर नहीं रुकतीं. अंतर्राष्‍ट्रीय प्रतियोगिता में तो सीधे 12 स्‍वर्ण पदक मध्‍यप्रदेश को प्राप्‍त होना बहुत बड़ी उपलब्‍धि होती है. इसमें 14 रजत पदक प्राप्‍त किए हैं और 18 कांस्‍य पदक हमने प्राप्‍त किए हैं, इस तरह से कुल 44 पदक प्राप्‍त कर पूरे मध्‍यप्रदेश का जन-जन गौरवान्‍वित हुआ है. इससे खिलाड़ी प्रतिभा प्रोत्‍साहित होती है. यह निश्‍चित रूप से माननीय विश्‍वास सारंग जी का बहुत अच्‍छा नेतृत्‍व है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राष्‍ट्रीय खेल, जो खिलाड़ियों में बहुत लोकप्रिय होते हैं. उसमें 34 स्‍वर्ण पदक प्राप्‍त हुए हैं. 25 रजत पदक प्राप्‍त हुए हैं और 23 कांस्‍य पदक प्राप्‍त हुए हैं. इस तरह से राष्‍ट्रीय खेल में कुल 82 पदक हमारे मध्‍यप्रदेश की उन खेल प्रतिभाओं ने प्राप्‍त किए हैं. निश्‍चित रूप से पूरे सदन को करतल ध्‍वनि के साथ में इसका स्‍वागत करना चाहिए, क्‍योंकि हम कमियों पर बहुत चर्चा करते हैं लेकिन हमारी खेल प्रतिभाएं कितने अच्‍छे खेल का प्रदर्शन कर रही है. मलखम्‍ब एवं रोईंग खेल में भी हम ओवरऑल चैम्‍पियन रहे. श्री देव मीणा ने पोल वॉल्‍ट में नया राष्‍ट्रीय रिकार्ड कायम किया है और जो राष्‍ट्रीय चैम्‍पियनशिप हुई माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2024-25 में, उसमें भी 106 स्‍वर्ण पदक प्राप्‍त किए, 68 रजत पदक प्राप्‍त किए और 60 कांस्‍य पदक प्राप्‍त किए, इस तरह से कुल 234 पदक प्राप्‍त कर पूरा प्रदेश निश्‍चित रूप से गौरवान्‍वित होता है.

          अध्‍यक्ष महोदय, इसी के साथ-साथ खिलाड़ियों का सम्‍मान भी किया जा रहा है और खिलाड़ियों को पुरस्‍कार भी दिए जा रहे हैं. ओलम्‍पिक गेम्‍स में पदक प्रतिभागिता में 180 लाख रुपये प्रदान किए गए. एशियन गेम्‍स और पैरा एशियन में पदक प्रतिभागिता में 1,585 लाख रुपये प्रदान किए गए. 37वें नेशनल गेम्‍स गोवा में पदक प्राप्‍तकर्ताओं को 703 लाख रुपये प्रदान किए गए. राष्‍ट्रीय चैम्‍पियनशिप में पदक प्राप्‍तकर्ताओं को 153 लाख रुपये दिए गए. राज्‍य स्‍तरीय खेलवृत्‍ति और स्‍कॉलरशिप में 116 लाख रुपये दिए गए. खेल संघ संस्‍थानों को विभिन्‍न स्‍तरीय प्रतियोगिताओं के आयोजन हेतु अनुदान के रूप में 50.80 लाख रुपये प्रदान किए गए. इस प्रकार 2,787.80 लाख की राशि प्रोत्‍साहन और खेल अनुदान के रूप में प्रदान की गई. यह राशि उन खेल अकादमियों को मिली जो निजी रूप से खेल का आयोजन करती है और करवाती है. निश्चित रूप से उनको भी प्रोत्साहित किया है मेरे जावरा विधान सभा क्षेत्र में चूंकि मुख्यमंत्री जी ने घोषणा की है और उन्होंने इनडोर और आउटडोर स्टेडियम पूरे विधान सभा क्षेत्रों में दिये जाने की बात कही है तो जावरा विधान सभा क्षेत्र में 2 ब्लाक लगते हैं एक जावरा जिला मुख्यालय पर आउटडोर और इनडोर स्टेडियम और एक पिपलोदा मुख्यालय पर आउटडोर स्टेडियम अगर प्रदान कर दिये जाएंगे तो मध्यप्रदेश की सारी खेल प्रतिभाओं के साथ-साथ में जावरा विधान सभा क्षेत्र की खेल प्रतिभाएं निश्चित रूप से प्रोत्साहित होंगी और माननीय विश्वास जी के प्रति पूरे मध्यप्रदेश के साथ-साथ में मुझे भी पूरा विश्वास है कि वे आशीर्वाद प्रदान करेंगे. मैं बहुत-बहुत समर्थन करता हूं और अपनी बात यहीं समाप्त करता हूं.

          अध्यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी,सदस्यों को तो ज्यादा बोलना पड़ता है लेकिन मंत्री जी, गागर में सागर.

          श्री विश्वास कैलाश सारंग,मंत्री,सहकारिता -माननीय अध्यक्ष महोदय, आपकी विशेष कृपा मुझ पर रही है मैं देखता रहा हूं और मैं अपेक्षा करता हूं कि आगे भी रहेगी. साल भर का लेखा-जोखा मंत्री को इसी समय बताने का मौका मिलता है और आपका जो भी आदेश है उसका पूरे तरीके से पालन होगा. आज हमारी सहकारिता और खेल विभाग की चर्चा में हमारे अनेक वरिष्ठ और विद्वान सदस्यों ने हिस्सा लिया. आदरणीय भंवर सिंह जी,आशीष शर्मा जी,यादवेन्द्र सिंह जी,दिलीप परिहार जी,दिनेश गुर्जर जी,अरुण भीमावद जी,रामकिशोर दोगने,चैन सिंह जी, सुरेश राजे,राजेन्द्र पाण्डेय जी. भंवर सिंह जी और यादवेन्द्र जी ने कुछ-कुछ बातें कहीं हैं उनके बारे में मैं जरूर विस्तार से अपनी बात रखूंगा.आज ऐसा संयोग है कि आज विश्व कविता दिवस भी है. विश्व कविता दिवस मनाने का जो निर्णय लिया था 90 के दशक में और इस बार संयोग है आज सहकारिता विभाग की चर्चा हो रही है और यूनेस्को ने कविता दिवस पर कविता का इस साल का जो विषय दिया है वह है शांति और समावेश के लिये एक पुल के रूप में कविता. मैं सहकारिता की बात करता हूं तो उसमें समावेश का सबसे ज्यादा और मुख्य स्थान है. आज कविता दिवस है तो चार लाईनों से ही मैं अपनी बात को शुरू करता हूं. " मिलकर करो काम तो काम,दुष्कर भी सरल लगता है,मिलकर जियो तो बोझ जीवन का भी सहज लगता है,सहकार की जय बोलकर सुख शांति के रस में पलो,है मांग यह सबसे बड़ी,मिलकर चलो,मिलकर चलो" सहकारिता के बिना जीवन की परिकल्पना नहीं की जा सकती. यदि समाज का सुव्यवस्थित निर्माण करना है और व्यक्ति का विकास करना है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय,संसदीय कार्य मंत्री - माननीय अध्यक्ष महोदय, इससे मिलती जुलती शायरी मुझको भी याद आ गई है.

          "मुलाकात नहीं तेरी,मेरी पर बात जरूरी है, हाथों में हाथ नहीं पर मन का साथ जरूरी है,तुम अपनी सुना सको,मैं कुछ अपनी कह सकूं,है मेरा कोई अपना,यह अहसास जरूरी है"

          श्री विश्वास कैलाश सारंग - माननीय अध्यक्ष महोदय, कहा जाता है बिना सहकार नहीं उद्धार,जैसा मैंने कहा कि समाज की सुव्यवस्थित संरचना करनी है तो उसमें सहकारिता का बहुत विशेष स्थान है और यदि उस सुव्यवस्थित समाज में हमें व्यक्ति के अच्छे भविष्य का निर्माण करना है तो उसमें भी सहकारिता का बहुत विशेष स्थान है.आदि अनादिकाल से सहकारिता एक बड़ा विषय रहा है समाज के उन्नयन के लिये. 1844 में जब पहली बार स्ट्रक्चर मूवमेंट सहकारिता का शुरू हुआ तो इसी परिकल्पना को साकार रूप देने का शायद मन बना होगा. जैसा मैंने कहा,सहकारिता केवल एक शब्द नहीं है.समन्वय,सद्भाव,सहभागिता,संवाद,सौहार्द और उसके लिये संस्कार.निश्चित रूप से भंवर सिंह जी और यादवेन्द्र सिंह जी ने जो बात कही. मैं उसको आलोचना के रूप में नहीं लेना चाहता, आपका भी मन है, हमारा भी मन है कि यह सहकारी आंदोलन मजबूत हो और इसके पीछे का मंतव्‍य यही है कि यह सहकारी आंदोलन यदि मजबूत होगा तो निश्चित रूप से हमारे गरीब किसान के भविष्‍य का सही निर्धारण होगा. हमारे देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी का जो कहना है कि वर्ष 2047 में इस देश को आजादी के 100 वर्ष पूर्ण होने पर यदि विकसित भारत के रूप में स्‍थापित करना है तो हमें गांव की अर्थव्‍यवस्‍था को भी सुदृढ़ करना पड़ेगा, रोजगार के नये अवसर भी श्रजित करना पड़ेंगे, समाज के हर वर्ग का उन्‍नयन करना होगा, विकास की नई अवधारणा को स्‍थापित करना होगा और उसमें यदि कोई सबसे बड़ा आयाम हो सकता है तो वह सहकारिता हो सकता है और इसीलिये माननीय अध्‍यक्ष महोदय सहकार से समृद्धि यह केन्‍द्र सरकार ने हमें नारा दिया. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दीनदयाल उपाध्‍याय जी ने कहा था सहकारिता भारतीय जीवन दर्शन, जीवन व्‍यवस्‍था का अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण एवं केन्‍द्रीय तत्‍व रहा है, उसके आधार पर अर्थनीति की पुनर्रचना का प्रयास करना चाहिये. बहुत सारे दार्शनिक ने चूंकि मेरे पास समय की कमी है सहकारिता को लेकर बहुत सकारात्‍मक बात कही है और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसको मैं इस सदन से माननीय इस देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी को बधाई देना चाहता हूं. सहकारिता की जो आवश्‍यकता है और उसको गंभीरता प्रदान करने के लिये इस देश की आजादी के बाद पहली बार किसी सरकार ने सहकारिता एक अलग विभाग के रूप में स्‍थापित किया. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सहकारिता के मामले में नरेन्‍द्र मोदी जी की सोच को उजागर करता है और इस सहकारिता विभाग में मंत्री किसको बनाया, अमित शाह जी को, एक बहुत ही व्‍य‍वस्थित हमारा नेतृत्‍व आज सहकारिता विभाग का नेतृत्‍व कर रहा है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैंने कहा कि सहकारिता से समृद्धि इस कंसेप्‍ट को लेकर केन्‍द्र सरकार ने काम किया और मुझे इस बात की बहुत प्रसन्‍नता है. इस फेडरल सिस्‍टम में जहां अलग-अलग राज्‍य एक केन्‍द्र की सरकार बड़ा भाई और राज्‍य की सरकारें छोटे भाई की भूमिका में रहती है. सहकार से समृद्धि को लेकर केन्‍द्र की सरकार के सहकारिता विभाग ने जो हमें निर्देश दिये मुझे यह बताते हुये बहुत प्रसन्‍नता है कि इन सब आयामों में मध्‍यप्रदेश अव्‍वल नंबर पर रहा है, डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में हमने हर आयाम को छुआ भी है और उसको परिपूर्ण करने का प्रयास भी किया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राष्‍ट्रीय स्‍तर पर यहां पर अभी किसान की बात हुई, किसान की खेती के उन्‍नयन की बात हुई, उसकी चिंता की भी बात हुई पर इस पूरे अभियान को और गति देने के लिये केन्‍द्र सरकार ने सहकार से समृद्धि यदि इस विषय को आगे लाये तो उन्‍होंने राष्‍ट्रीय स्‍‍तर पर बहुत शीर्ष स्‍तर की 3 सहकारी संस्‍थायें बनाई और यदि उसमें हर राज्‍य ने बहुत अच्‍छे स्‍तर पर काम किया तो मुझे लगता है आमूलचूल परिवर्तन इस देश की कृषि और किसान के जीवन में आने वाला है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राष्‍ट्रीय स्‍तर पर नेशनल को-ऑपरेटिव एक्‍सपोर्ट लिमिटेड जिसके माध्‍यम से हमारे किसानों की खेती या उसके वेल्‍यू एडीशन के बाद यदि कोई प्रोडक्‍ट बनता है तो उसके एक्‍सपोर्ट के लिये यह एक नई संस्‍था का निर्माण हुआ. दूसरा नेशनल को-ऑपरेटिव आर्गेनिक लिमिटेड माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निश्चित रूप से आर्गेनिक इस देश की बड़ी यूएसपी है. यह हमारे आदि अनादि काल से हमने देखा है कि आर्गेनिक एक ऐसा विषय रहा है जिसमें दुनिया को हम लीड कर सकते हैं. भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड और उसके माध्‍यम से बीज का सुव्‍यवस्थित उत्‍पादन हो, उसका वितरण हो इस पर सरकार काम करने वाली है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह भी एक संयोग है कि इस साल दुनिया में अंतर्राष्‍ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. मैं फिर रिपीट करूंगा कि हमारे देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री आज केवल इस देश के प्रधानमंत्री ही नहीं हैं, नरेन्‍द्र मोदी जी ने अपने व्‍यक्तिव से अपने कृतित्‍व से अपने काम करने के तरीके से अपने आपको वैश्विक नेता के रूप में स्‍थापित किया है. आज इस देश इस दुनिया में दो देशों के युद्ध के विराम की बात आती है तो नरेन्‍द्र मोदी जी दिखते हैं, उस विराम की बात को आगे बढ़ाने के लिये यदि शांति स्‍थापित करने की बात आती है तो नरेन्‍द्र मोदी जी का नाम आता है. इस दुनिया में अलग-अलग देशों के बीच में समन्‍वय स्‍थापित करने की बात आती है तो नरेन्‍द्र मोदी जी का नाम आता है. अंतर्राष्‍ट्रीय सहकारिता वर्ष यदि दुनिया के देश मिलकर मनाने का निर्णय लेते हैं तो वह कहां पर आयोजित होगा, उसकी शुरूआत कहां से होगी, उसका नेतृत्‍व कौन करेगा यदि यह भी विचार होता है तो उसमें नरेन्‍द्र मोदी जी का नाम आता है.

           अंतर्राष्‍ट्रीय सहकारिता वर्ष की शुरूआत 25 नवंबर, 2024 को नरेन्‍द्र मोदी जी के मुख्‍य आतिथ्‍य में दिल्‍ली में होती है, भारत में होती है. इसको लेकर वर्ष 2025 में पूरे देश में अलग-अलग आयोजन हो रहे हैं, प्रदेश में भी हमने एक कैलेण्‍डर बनाया है और मैं सत्‍ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों से कहना चाहता हूं कि साल भर में हमने यह कैलेण्‍डर बनाये हैं, सहकारिता में लोगों को जोड़ने के लिये, सहकारिता में पारदर्शिता लाने के लिये, सहकारी आंदोलन को और उन्‍नत बनाने के लिये और मैं आप सभी विधायकों से अनुरोध करूंगा कि विभाग के माध्‍यम से हम उसमें आपको पूरी तरह से जोड़ेंगे और सहकारिता वर्ष के अलग-अलग कार्यक्रमों में यदि आप जुड़ेंगे तो मुझे लगता है कि किसानों को सहकारिता आंदोलन को उसका बहुत फायदा मिलेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, सहकार सभा अभी हम हर पंचायत स्‍तर पर करने वाले हैं, पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों को बुलाया जायेगा और सहकारी आंदोलन को लेकर हमें क्‍या कुछ करना है, उस पर हम विचार विमर्श जरूर करेंगे. अभी भंवर सिंह जी ने कहा और राजेन्‍द्र जी ने जरूर उस बात को दोहराया है, भंवर सिंह जी ने निश्चित रूप से मेरे बड़े भाई, छोटे भाई का कहा है, लेकिन वह सही मायने में मेरे चाचा हैं, मैं उनके बेटे जैसा हूं. आपका बेटा मेरे साथ राजनीतिक क्षेत्र में रहा है, भंवर सिंह जी और हमने भी सहकारी आंदोलन में साथ में काम किया है, पर मुझे लगता है कि कुछ जानकारी की थोड़ी सी कमी रह गई है, आपने कहा कि वर्ष 2012 में संविधान संशोधन हुआ और नरेन्‍द्र मोदी जी ने वह किया, वर्ष 2012 में यू.पी.ए.की सरकार थी, मोदी जी वर्ष 2014 में आये हैं और फिर मैं यू.पी.ए. की सरकार की बात करूंगा, तो सामने वालों के पेट में दर्द होगा. बातें तो बहुत की गई संविधान संशोधन की, सहकारिता को मजबूत करना है, सहकारी आंदोलन को मजबूत करना है, इसलिए अमेंडमेंट लेकर आ गये, पर माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उस समय की सरकार कैसे काम करती थी? मुझे आश्‍चर्य होता है, सहकारिता यह राज्‍य का विषय है और यदि संविधान में संशोधन राज्‍य के सब्‍जेक्‍ट में होता है तो उसमें आधे से ज्‍यादा देश के राज्‍यों की सहमति ली जाती है, उसके बाद आते हैं और इस बात को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने इस संशोधन को क्‍वेस कर दिया है, शून्‍य कर दिया है, आपकी जानकारी के लिये बताना चाहता हूं और उन्‍होंने कहा है कि यह राज्‍य का निर्णय है. राज्‍य चाहे तो इसको माने और न चाहे तो न माने. केवल बहुराज्‍यीय सहकारी समितियों में यह अमेंडमेंट जो हुआ है, वह लागू है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी जानकारी के लिये बता रहा हूं. पहले हमने जो किया है, वह बताऊंगा, फिर आपने जो गलतियां बताईं हैं, उसके बारे में बताऊंगा, यह बात सही है कि सहकारी आंदोलन को लेकर बहुत सारे प्रश्‍न चिह्न हैं, भ्रष्‍टाचार की बात आती है, भ्रष्‍टाचार को लेकर बहुत बात आती है. श्री यादवेन्‍द्र सिंह जी ने बोला कि छ: हजार करोड़ रूपये आपने उस समय के पकड़े है, पैक्स में तीन हजार करोड़ रूपये पकडे़ हैं. अब मैं आंकड़ा बता दूंगा कि वह छ: हजार करोड़ रूपये वर्ष 2003 के पहले के थे भाई साहब, वह हमने पकड़े, वह जो भ्रष्‍टाचार हुआ था, वह जब कांग्रेस की सरकार थी, उस समय हुआ था. आप पूरे आंकड़े लेकर आओ,आपने यहां बोल तो दिया छ: हजार करोड़ रूपये, तीन हजार करोड़ रूपये.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- भईया सुन लो, न आपने पकड़े न हमने पकड़े, वह तो जब कम्‍प्‍यूटराईजेशन हुआ, उस समय पकड़ में आये और आपने आज तक उनकी वसूली की कार्यवाही नहीं कर पाये हैं, यह शब्‍द थे मेरे. आपने पकड़े, हमने पकड़े, यह कोई बात नहीं हुई.

          श्री विश्‍वास सारंग -- अरे आपने तो यह भी बोल दिया कि तुमने कितने खाये, यह हमें नहीं मालूम है, तो आप बोलने से पहले थोड़ा समझ तो लो, कम्‍प्‍यूटर ने पकड़े हैं, पर वह वर्ष 2003 के पहले के थे, हमारे समय के नहीं थे, एक बात.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- जब कम्‍प्‍यूटरीकरण हुआ, उसके बाद यह पकड़ में आया.

          श्री विश्‍वास सारंग -- हमने किया है, अभी हुआ है, अभी पैक्‍स का कम्‍प्‍यूटराईजेशन चल रहा है.

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- तो पकड़ में आया, आप यही शब्‍द तो बोल रहे हैं और अगर सुनिये विश्‍वास जी, अगर हमने बोला तो हमने कहा कि भर्ती करने में आपका भरोसा है, अब उसमें आपने जो किया हो, आपने खाया हो, चाहे नहीं खाया हो, हमें नहीं पता है.

          श्री विश्‍वास सारंग -- अध्‍यक्ष महोदय, उसकी भी बात कर लेता हॅूं, श्री यादवेन्‍द्र सिंह जी ने बोला कि भर्ती क्‍यों कर रहे हैं, पहली लाईन यह बोली, फिर भूल गये चौथी लाईने यह बोली कि कर्मचारियों की बहुत कमी है, आउटसोर्स वाले गड़बड़ कर रहे हैं. आप रिकार्ड में उठाकर देख लीजिये. मैं लिख रहा था आप पहले कहने लगे कि भर्ती में काला हो रहा है, भर्ती नहीं करना चाहिए और चौथी लाइन में बोला कि भर्ती करिए और ऑउटसोर्स को हटाइए. माननीय यादवेन्‍द्र सिंह जी मैं आपको बताना चाहता हूं. भर्ती के मामले में मप्र सहकारिता विभाग देश भर में अव्‍वल है और हम आईबीपीएस के माध्‍यम से भर्ती कर रहे हैं, रिजर्व बैंक और नाबार्ड की भर्ती भी उसी माध्‍यम से होती है. हमने सुशासन को लेकर बहुत काम किया. जैसे मैंने कहा कि भर्ती के मामले में हमने देश की जो सबसे अव्‍वल संस्‍था है, उसके माध्‍यम से भर्ती की है. मैं देश के सहकारिता मंत्री अमित शाह जी को बधाई देना चाहता हूं, उन्‍होंने कम्‍प्‍यूटराइजेशन को लेकर एक अभियान चलाया और मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि पैक्‍स कम्‍प्‍यूटराइजेशन में हम देश में नंबर वन आए हैं. सबसे पहले हमने कम्‍प्‍यूटराइजेशन किया है. उसके लिए सरकार और केन्‍द्र सरकार ने हमें पैसा दिया. अब ईज ऑफ डूइंग बिजनेस यह बहुत बड़ा विषय है, जिसके माध्‍यम से विभाग की योजनाओं को जनता तक पहुंचा सकते हैं, इसको लिए मैं डॉ. मोहन यादव जी को बधाई दूंगा. हमारी सरकार ने जनविश्‍वास विधेयक के माध्‍यम से अलग अलग विभाग में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को लेकर हम क्‍या कुछ कर सकते हैं ,इस पर काम किया और सहकारिता विभाग ने भी इस पर काम करके हमारे जो अलग अलग सिटीजन चार्टर उसमें अलग अलग समय से हमारी संस्‍थाओं का पंजीयन, ऑडिट और जानकारी, उपविधियों में यदि परिवर्तन है तो लोगों को समय से जानकारी मिले, पूरी सेवाओं की पूर्ति हो सके इस पर हमने काम किया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं यादवेन्‍द्र सिंह जी को बतान चाहता हूं कि यहां पर पैक्‍स की बहुत बात हुई. निश्चित रूप से सहकारी आंदोलन की आत्‍मा प्राथमिक समितियां होती है और मुझे यह कहते हुए संकोच नहीं है. मेरी बात से भंवर सिंह जी इत्‍तेफाक रखेंगे कि सही मायने में ऊपर जो एपेक्‍स बॉडी होती है, वह शायद पैक्‍स की बहुत चिन्‍ता नहीं कर पाती. एक बार स्‍ट्रक्‍चर बन जाता है और जब तक पैक्‍स की चिंता नहीं होगी, प्राथमिक सोसायटी की चिन्‍ता नहीं होगी तो यह आंदोलन अपना सही रूप नहीं ले पाएगा, उसमें एक बड़ी बात थी उसका जो प्रबंधक था, जो मैनेजर था उसकी नियुक्ति को लेकर बहुत सारी बातें थी, कोई भी संचालक मंडल अपने हिसाब से नियुक्ति कर लेता था, उसकी अर्हता क्‍या है, वह केपेबल है या नहीं, उस पर बातचीत नहीं होती थी. मप्र में हमने बहुत सफल प्रयोग किया भंवर सिंह जी मुझे लगता है आप इस बात पर हमारी तारीफ करेंगे कि आईबीपीएस के माध्‍यम से हम अब मैनेजर की नियुक्ति कर रहे हैं और लगभग डेढ़ हजार मैनेजर की हमने उससे नियुक्ति कर दी है और बाकी कैडर को हम अगले चार-पांच वर्षों में हम सभी प्राथमिक सोसायटी में आईबीपीएस से भर्ती, इससे बहुत अच्‍छे बच्‍चे आ रहे हैं जो  इंजीनियरिंग, एमबीए, लॉ ग्रेजुएट है जिनके माध्‍यम से हम इस पूरे आंदोलन को बहुत अच्‍छा करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय, कृषि के उन्‍नयन की बात हुई. देश के माननीय प्रधानमंत्री जी का जो सपना है कि कृषि उन्‍नत क्षेत्र में तब्‍दील हो, उसको लेकर हम बहुत काम कर रहे हैं. ये आंकड़े कहते हैं कि मप्र की कृषि विकास दर लगभग 11 प्रतिशत है. अब मैं 2003 से तुलना करुंगा तो इसमें बहुत अंतर आया है. पर यह बात सही है, अभी कृषि मंत्री जी ने अपना वक्‍तव्‍य दिया. आज ऐसा संयोग है कि जल संसाधन मंत्री जी ने भी अपना वक्‍तव्‍य पेश किया और कृषि के मामले में कृषि विभाग और जल संसाधन विभाग ने बहुत अच्‍छा काम किया है .पर मैं यह कहना चाहता हूं कि इस उन्‍नयन में सहकारिता विभाग का भी बहुत बड़ा योगदान है, क्‍योंकि हम कृषि के मामले में चाहे इनपुट या इन्‍वेस्‍टमेंट या इम्‍पलीमेंटेशन प्रोक्‍योरमेंट की बात हो हम तीनों आई पर काम करते हैं. हम खाद और बीज को पूरी तरह से लोगों तक हमारे पैक्‍स से माध्‍यम से पहुंचाते हैं, शार्ट टर्म लोन देते हैं जो कि एक इन्‍वेस्‍टमेंट होता है और उपार्जन के माध्‍यम से हम किसानों की जो खेती है, उसको सही दाम देकर उसको फेसिलेट करते हैं. यहां पर भंवर सिंह जी ने कहा था जीरो प्रतिशत ब्‍याज के बारे में, निश्चित रूप से भारतीय जनता पार्टी की बड़ी योजना है, उसको लेकर हमने लगातर काम किया है और यदि मैं आंकड़ों की बात करुं तो 2003 के पहले किसानों की क्‍या स्थिति है और आज क्‍या है, यह बहुत बहस का विषय रह नहीं गया है. खाद और उर्वरक की आपूर्ति के मामले में हमारा मार्केटिंग फेडरेशन बहुत अच्छा काम करता है. लगभग 5296 केन्द्रों के माध्यम से किसानों को खाद की आपूर्ति कराते हैं. इसको लेकर हम लगातार काम कर रहे हैं. नेता प्रतिपक्ष जी ने विगत् दिनों भी एक सुझाव दिया था. मैं बताना चाहता हूं कि हमारा विभाग उस पर काम कर रहा है कि पंचायत स्तर पर जाकर क्या हम खाद का वितरण कर सकते हैं ? उस पर हम काम कर रहे हैं. मैं बधाई देना चाहता हूं हमारी मार्केटिंग फेडरेशन की टीम को इन्ट्रीग्रेटेड फर्टीलाइजर स्टोरेज साफ्टवेयर को देश में अव्वल पुरस्कार मिला है. यहां पर मैं सभी सदस्यों को एक जानकारी देना चाहता हूं यदि हम खेती की बात करें तो उसमें बहुत बड़ा एलीमेट है बीज उन्नत बीज होगा तो उन्नत फसल होगी. पर यह बात भी सही है कि बीज को लेकर जो काम होना था, वह नहीं हो पाया. बीज संघ को अब हम बहुत उन्नत स्तर तक पहुंचाना चाहते हैं. अब हम मध्यप्रदेश के सहकारिता विभाग के माध्यम से बीज संघ का एक नया ब्रांड चीता लेकर के आ रहे हैं. यह सुनिश्चित करेंगे कि पूरे प्रदेश में जिस प्रकार से खाद का वितरण होता है, ऐसा बीज का भी वितरण हो पेक्स के माध्यम से एक बड़ा काम करने वाले हैं. जिस प्रकार से इफ्को क्रफ्को फर्टीलाइजर के मामले में देश को लीड करते हैं. आगे सब कुछ अच्छा होगा. मैं कहना चाहता हूं कि बीज के मामले में मध्यप्रदेश का बीज संघ पूरे प्रदेश और देश को को लीड करेगा. अभी कमजोर बैंक को लेकर बहुत सारी बातें आयीं. यादवेन्द्र सिंह जी ने बहुत सारी बातें कीं. धारा 11 की बात हुई ऐसा लगा कि हमने ही सब कुछ कर दिया. 2003 धारा 12 में 38 में से 28 बैंक थे और अब केवल 11 बचे हैं हम लगातार काम कर रहे हैं. हम जल्द से जल्द इसमें और उन्नयन करेंगे. 2003 में कृष्यों की संख्या 41 लाख थी आज 75 लाख है भंवर सिंह जी. फसल ऋण में कांग्रेस की सरकार 1273 करोड़ रूपये देती थी आज हम 20 हजार 490 करोड़ रूपये किसानों को ऋण देते हैं. कार्यशील पूंजी यदि हम बैंकिंग की बात करेंगे तो यह एक बहुत बड़ा एलीमेंट है उस समय केवल 12 हजार 472 करोड़ थी आज लगभग 50 हजार करोड़ रूपये कार्यशील पूंजी बैंकों की है. बैंक हानि में हैं हम मानते हैं, पर हमने उसको ठीक करने का काम किया है. आपके समय में 28 के 28 बैंक हानि में थे आज केवल 9 बैंक हानि में हैं. अगले दो महीने में हम चार बैंकों को इससे बाहर निकालने वाले हैं. बैंकिंग लायसेंस अभी भंवरसिंह जी ने इस बात को सहमति दी. 2003 में केवल तीन बैंक बैंकिंग लायसेंस के दायरे में थे आज 38 बैंक बैंकिंग लायसेंस में हैं. पेक्स को ऊपर उठाना है जैसा मैंने कहा है इसलिये पहली बार हमारी सरकार ने पेक्स अनुदान केवल 24 हजार रूपये दिया जाता था, लेम्स को  आदिवासी की उसको 48 हजार रूपये दिया जाता था. इसको हमने 3 लाख रूपये बढ़ा दिया है. अब 3 लाख 24 हजार और 3 लाख 48 हजार रूपये है. सहकारिता से समृद्धि अभी भंवरसिंह जी ने इस बात का जिक्र किया. फिर मैं माननीय अमित शाह जी को धन्यवाद देता हूं. आपने कह दिया कि पेक्स में वेतन बांटने के पैसे नहीं हैं, पर अब मल्टी यूटिलिटी पेक्स एम पेक्स की अवधारणा को हम स्थापित कर रहे हैं, उसको लेकर हमने बहुत सारे नवाचार किये हैं. अब हमारी प्राथमिक सहकारी समिति केवल क्रेडिट का काम ही नहीं करेगी अब वह दूध का भी काम करेगी, मिल्क रूट में भी हम उसको जोड़ रहे हैं, हम उनसे मत्स्य का काम भी करवाएंगे. मध्‍यप्रदेश में हमारी 2 पैक्‍स को पेट्रोल की डीलरशिप मिली है. अब हम एलपीजी का काम भी करेंगे. शादी हॉल बनाकर वहां पर उनकी आमदनी को बढ़ाने का काम करेंगे और मुझे यह कहते हुए फिर प्रसन्‍नता है कि देश में मध्‍यप्रदेश का सहकारिता विभाग पहली बार इन्‍वेस्‍टमेंट समिट में अपने आप को लेकर आया और अभी जो माननीय मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में जीआईएस की बहुत सफलतापूर्वक आयोजन हुआ, उसमें सहकारिता को भी हमने जोड़ा. शायद देश और दुनिया के इतिहास में पहली बार हम एक नया कॉन्‍सेप्‍ट लेकर आए हैं. सीपीपीपी (कोआपरेटिव पब्‍लिक प्राइवेट पॉटर्नरशिप) और उसके माध्‍यम से हम हमारी पैक्‍स को जो प्राइवेट प्‍लेयर्स हैं, उनके साथ एमओयू कराकर एक-दूसरे के समन्‍वय के साथ पैक्‍स को नये व्‍यापार हम देंगे. उसको लेकर लगभग 19 एमओयू लगभग 2500 करोड़ रूपए के हमने इस जीआईएस में किए हैं, जिसके माध्‍यम से पैक्‍स हमारा यदि एग्री बेस्‍ड कोई प्राइवेट पॉटर्नर अपना प्रोडक्‍ट बनाना चाहता है जिसका रॉ मटेरियल एग्री बेस्‍ड है, तो उसकी आपूर्ति पैक्‍स के माध्‍यम से होगी, जिसमें जो प्राइवेट प्‍लेयर हैं जिससे सुनिश्‍चित होगा कि उसको रॉ मटेरियल मिल सके और हमारे किसान और पैक्‍स को उसमें आमदनी होगी. एक नया कॉन्‍सेप्‍ट हम लेकर आए हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कहने को बहुत है पर एक मिनट का समय मैं खेल विभाग के लिए लूंगा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया, अब समाप्‍त करें.

          श्री भंवर सिंह शेखावत -- अरे, खेल से पहले दूसरा खेल देख लेते हैं.

          श्री विश्‍वास सारंग -- जी, बताइए.

          श्री भंवर सिंह शेखावत -- आप बैठ तो जाइए. जब आप खेल पर आ रहे हो, मतलब कोआपरेटिव खतम कर रहे हो. कोआपरेटिव के बारे में मैंने जो बात की. दो बार में उल्‍लेख करके अपनी बात खतम करूंगा और श्रीमान से कहूंगा कि जो बात मूल रूप से जिस पर अध्‍यादेश पर चर्चा हुई, उसमें तो आपने किसी एक बात का जवाब नहीं दिया. वर्ष 2012 का आपने उल्‍लेख किया कि यूपीए की गवर्नमेंट थी. मैंने तो यह कहा था कि इसमें सेंट्रल के अंदर कोआपरेटिव का अमेंडमेंट हो चुका है और उसके तहत उसमें यह परिधि थी कि कितनी समयसीमा तक सीमाओं में सोसायटी को चुनाव कराना चाहिए या बिना चुनाव के रखना चाहिए. उतनी-सी ही बात है. अब स्‍टेट गवर्नमेंट ने क्‍या किया, मैं उस पर नहीं जाना चाहता, नंबर वन. मेरी बात पूरी हो जाने दीजिए. दूसरी बात, आपने पैक्‍स की बात की कम्‍प्‍यूटराइजेशन की. सेंट्रल ने पैसा दिया, आपने पैसा दिया. पैक्‍स है कहां ? न ही पैक्‍स के 20 साल से चुनाव हुए. न पैक्‍स अभी अस्‍तित्‍व में बची है.  20-20 सोसायटी को एक-एक इंस्‍पेक्‍टर चला रहे हैं. पैक्‍स है ही नहीं, तो आप कहां की बड़ी-बड़ी बात कर रहे हैं कि हम पैक्‍स से पेट्रोल पंप भी बेच देंगे और गैस भी चला लेंगे और यह भी कर लेंगे. चाहे जो, कुछ भी दिये जा रहे हो.

          श्री विश्‍वास सारंग -- अच्‍छा, पैक्‍स नहीं है तो यह फर्टिलाइजर ऐसे ही बंट गया. पैक्‍स नहीं है तो ऐसे ही उपार्जन हो गया. यदि पैक्‍स नहीं है, तो ऐसे ही काम चल रहा है.

          श्री भंवर सिंह शेखावत -- अच्‍छा, एक मिनट सुन लीजिए. मेरी पूरी बात तो सुन लीजिए. आप पूरी बात का जवाब दे दीजिएगा. आपने अभी बीज निगम की बात की. बीज निगम ऐसा करेगा, बीज निगम वैसा करेगा. माननीय विश्‍वास सारंग जी, मुझे यह बताइए कि जिस दिन से बीज निगम का निर्माण हुआ है, आज से 40 साल पहले आज तक उस बीज निगम का चुनाव नहीं हुआ. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बिना चुनाव के वह बीज निगम जिस दिन पैदा हुआ था, उस दिन से आज तक उस बीज निगम का निर्वाचन नहीं हुआ. कहां आप बीज की बातें कर रहे हैं. आपने सोसायटी की बात की. अब मैंने आपसे निर्वाचन की बात की, तो आपने निर्वाचन की बात तो की नहीं. भई, सोसायटी के चुनाव कब कराएंगे. माननीय प्रधानमंत्री जी ने यह विभाग बनाया..

           अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी.

          संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह इंटरेप्‍शन कितनी देर का होगा.

          श्री भंवर सिंह शेखावत -- अध्‍यक्ष महोदय, हम माननीय प्रधानमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहते हैं जिन्‍होंने यह कोआपरेटिव डिपार्टमेंट का नया निर्माण केंद्र में किया. आप तो वहां मंत्री थे. आप उसी विभाग के मंत्री भी थे. पहली बार उन्‍होंने पूरे देश में कोआपरेटिव को जिंदा रखने की बात की. माननीय अमित शाह जी उसको आगे बढ़ाना चाहते हैं. पैक्‍स को कम्‍प्‍यूटराइज करके काम लेना चाहते हैं. आप उनके चुनाव ही नहीं करा रहे. मैं चुनाव की बात कर रहा हॅूं, आप दुनिया भर की इधर से उधर की बातें कर रहे हैं. अरे, इससे क्‍या मतलब है. आपने जितनी बातें बतायीं, इसका मतलब क्‍या निकला. आप मुझे बताइए कि प्रदेश के चुनाव कब होंगे ?

          माननीय मंत्री जी, जवाब इस बात का दीजिए कि सोसायटियों के चुनाव केन्‍द्र की इच्‍छा के विपरीत होने तक हाईकोर्ट के निर्देश होने के बाद 20 साल में सोसायटियों के चुनाव क्‍यों नहीं हुए ? इधर-उधर की बातें मत कर, यह बता कि कारवां क्‍यों लुटा, यह बता.

अध्यक्ष महोदय - आप कृपया बैठ जाओ, दोबारा चर्चा नहीं होगी.

श्री महेश परमार - अध्यक्ष महोदय, गेहूं उपार्जन का काम वेयर हाऊस वाले कर रहे हैं और 1 साल से पैसा नहीं मिला है. हमारे यहां उज्जैन से मुख्यमंत्री बनने के बाद बीज निगम जिले का ऑफिस देवास पहुंचा और संभाग का ऑफिस इंदौर पहुंचा, बीज निगम की यह स्थिति है.

श्री विश्वास सारंग - अध्यक्ष महोदय,  श्री भंवर सिंह जी ने बात की. अभी तक यह बोल रहे थे कि आप हाईकोर्ट की अवमानना कर रहे हो. आप श्री अमित शाह जी की बात नहीं मान रहे. आप उनसे डरते नहीं हो, इसलिए मैंने बताया कि आप तथ्य गलत रख रहे हो, यह जो अमेंडमेंट हुआ है, यह किसको मानना है, किसको नहीं मानना है आप इस पर बातचीत कर रहे थे, वह मैंने फैक्ट बताया. अब आप क्या, कौन कर रहा था यह मैं बोलना नहीं चाहता. अध्यक्ष महोदय, क्योंकि चुनाव की बात हुई, यह बात सही है कि पेक्स के चुनाव होना है और यह डॉ. मोहन यादव जी की सरकार है, सहकारी आन्दोलन मजबूत होगा और पेक्स के भी चुनाव होंगे और अपेक्स के भी चुनाव होंगे, कहीं कोई फिक्र की बात मत करिए. परन्तु आपने बोला कि कुछ नहीं हुआ तो अध्यक्ष महोदय, आप बोलें तो आंकड़ें बता देता हूं. क्योंकि आप तो सहकारिता को समझ रहें हैं केवल पेक्स तक. मध्यप्रदेश में 50000 सोसाइटिज़ हैं उसमें से 38975 के चुनाव हुए हैं, यह मैं बता देता हूं बाकी सोसाइटिज़ के भी, इसलिए मैं कह रहा हूं कि जबरदस्ती के आंकड़ें हम कुछ तो भी देंगे तो काम नहीं चलेगा.

अध्यक्ष महोदय, खेल के मामले में मैं बधाई देना चाहता हूं भारतीय जनता पार्टी की सरकार को, डॉ. मोहन यादव जी की सरकार को कि बजट में आमूल-चूल परिवर्तन हुआ है. वर्ष 2003 में जब केवल 6 करोड़ रुपये बजट था. आज लगभग 600 करोड़ रुपये से ज्यादा खेल विभाग में बजट हमने किया है. हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने जिस प्रकार से खेल के उन्नयन के लिए हम सबको जो आदेश दिया है हम उसका पालन कर रहे हैं. हम अकेडमी के माध्यम से खिलाड़ियों के विकास पर काम कर रहे हैं. खेल, खिलाड़ी और खेल मैदान, इन तीनों का उन्नयन करके खेल को एकरूपता देना का हम काम कर रहे हैं. अभी यहां पर बहुत सारे हमारे विधायकों ने स्टेडियम बनाने की बात की. माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा है और यह देश में पहला राज्य होगा कि विधान सभा स्तर पर हम खेल का मैदान बना रहे हैं और सभी के लिए बना रहे हैं. (मजों की थपथपाहट) हम इसमें कोई दलगत राजनीति को आगे नहीं लाएंगे.

अध्यक्ष महोदय, हम यह खेल और युवा कल्याण, युवा कल्याण पर मैं जरूर आधा मिनट बोलना चाहता हूं. इस बात को लेकर शायद वह काम नहीं हो पाया जो होना था. माननीय प्रधानमंत्री जी ने एक नया बीड़ा उठाया है. वर्ष 2047 में भारत क्या बनेगा, कैसे बनेगा इसको लेकर युवाओं को एकरूपता लाने के लिए उन्होंने यंग लीडर विकसित भारत, यंग लीडर डॉयलॉग की शुरुआत की और उन्होंने मध्यप्रदेश में सबसे अहम भूमिका निर्वहन की.

अध्यक्ष महोदय, हम युवाओं के उन्नयन के लिए अलग अलग योजना ला रहे हैं. पार्थ योजना के माध्यम से हम देश में एक आमूल-चूल परिवर्तन करना चाहते हैं. पार्थ मतलब 'पुलिस एंड ऑर्मी रिक्रूटमेंट ट्रेनिंग हाऊस योजना', उसके माध्यम से हमारे वह युवा जो पुलिस और आर्मी में भर्ती के लिए इच्छुक हों, उनको खेल विभाग फिजिकल ट्रेनिंग भी देगा. लिखित और बाकी इंटरव्यू की ट्रेनिंग है वह भी देगा. यह देश में पहली बार हम कर रहे हैं. एमपीवायपी, हम युवा प्रेरक योजना लेकर आ रहे हैं. हमने मध्यप्रदेश युवा पोर्टल की शुरुआत की. खेल के उन्नयन के लिए और युवाओं के उन्नयन के लिए हम लगातार काम कर रहे हैं. यहां पर बातें बहुत सारी हुईं. यह बात भी हुई कि बहुत सारी चीजों पर दिक्कतें हैं. यह मैं कहना चाहता हूं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार चाहे केन्द्र में हो, श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में या मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में, समेकित विकास लोगों के कल्याण और ज्ञान पर ध्यान देते हुए विकास और कल्याण की नयी अवधारणा स्थापित करने का हम काम  करेंगे. अध्यक्ष महोदय, अटल जी ने कहा है -

 

 

"बाधाएं आती हैं आएं,

घिरें प्रलय की घोर घटाएं,

पांवों के नीचे अंगारे,

सिर पर बरसे यदि ज्वालाएं,

निज हाथों से हंसते हंसते,

आग लगाकर जलना होगा,

कदम मिलाकर चलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा,

हास्य रुदन में, तूफानों में,

अमर असंख्यक बलिदानों में,

उद्यानों में, वीरानों में,

अपमानों में, सम्मानों में,

उन्नत मस्तक, उभरा सीना,

पीढ़ाओं में पलना होगा,

कदम मिलाकर चलना होगा, कदम मिलाकर चलना होगा."

(मेजों की थपथपाहट)

 

अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन से अपील करता हूं कि दोनों मांगों का समर्थन करें, हमें अनुमति दें जिसमें विकास की नयी अवधारणा को स्थापित करें, बहुत बहुत धन्यवाद. (मेजों की थपथपाहट)

            अध्‍यक्ष महोदय- मैं पहले कटौती प्रस्‍तावों पर मत लूंगा.

          अध्‍यक्ष महोदय- प्रश्‍न यह है कि मांग संख्‍या -043 एवं 017

पर प्रस्‍तुत कटौती प्रस्‍ताव स्‍वीकृत किये जायें. 

                                                          कटौती प्रस्‍ताव अस्‍वीकृत हुए.

          अध्‍यक्ष महोदय- अब मैं मांगों पर मत लूंगा.

          अध्‍यक्ष महोदय- प्रश्‍न यह है कि 31 मार्च, 2026 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में राज्‍य की संचित निधि में से प्रस्‍तावित व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को-

अनुदान संख्‍या            -043                      खेल और युवा कल्‍याण के लिये छह सौ                                                                      बासठ करोड़, बयासी लाख उनचास                                                                         हजार रूपये, एवं

अनुदान संख्‍या            -017                      सहकारिता के लिये दो हजार सैंतीस                                                                         करोड़, उनसठ लाख, उनतालीस हजार                                                                      रूपये

                             तक की राशि दी जाय.

 

                                                                   मांगों का प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

7.02 बजे                 मांग संख्‍या-22 नगरीय विकास एवं आवास

                             मांग संख्‍या-28 राज्‍य विधान मंडल

          नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)- अध्‍यक्ष महोदय, मैं, राज्‍यपाल महोदय की सिफारिश के अनुसार प्रस्‍ताव करता हूं कि 31 मार्च, 2026 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में राज्‍य की संचित निधि में से प्रस्‍तावित व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को-

अनुदान संख्‍या            022                       नगरीय विकास एवं आवास के लिये                                                                          सोलह हजार सात सौ इक्‍कीस करोड़,                                                                       पांच लाख, अड़सठ हमार रूपये, एवं

अनुदान संख्‍या            028                       राज्‍य विधान मंडल के लिये एक सौ                                                                          सतावन करोड़, उनतालीस लाख, बारह                                                           हजार रूपये

                                                          तक की राशि दी जाय.

          अध्‍यक्ष महोदय- अब, इन मांगों पर कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत होंगे. कटौती प्रस्‍तावों की सूची पृथकत: वितरित की जा चुकी है. प्रस्‍तावक सदस्‍य का नाम पुकारे जाने पर जो माननीय सदस्‍य हाथ उठाकर कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किये जाने हेतु सहमति देंगे, उनके कटौती प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुए माने जायेंगे.

                   मांग संख्‍या- 022                           नगरीय विकास एवं आवास

                                                                                      क्रमांक

श्री रजनीश हरवंश सिंह                                                01

श्री यादवेन्‍द्र सिंह                                                                  02

श्री लखन घनघोरिया                                                             03

श्री चैन सिंह वरकड़े                                                               04

श्री कैलाश कुशवाह                                                                05

श्री अभय मिश्रा                                                                    06

श्री देवेन्‍द्र रामनारायण सखवार                                                  07

                   मांग संख्‍या- 028                                     राज्‍य विधान मंडल

डॉ. हिरालाल अलावा                                                            01

          अध्‍यक्ष महोदय- अब मांगों और कटौती प्रस्‍तावों पर एक साथ चर्चा शुरू होगी.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह- माननीय अध्‍यक्ष जी, विश्‍वास जी के भाषण के समय आपने कैलाश जी कि कला देखी ना. एक कहावत है कि रनिंग विथ द हेल, एण्‍ड हंटिंग विथ द हाउंड. आपको देखकर उनको भाषण देने से रोक रहे थे कि बढ़े चलो आगे.

7.03 बजे       { सभापति महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय) पीठासीन हुए.}

          श्री पंकज उपाध्‍याय( जौरा)- मैं मांग संख्‍या 28, राज्‍य विधान मंडल के बारे में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. अभी हमने थोड़ी देर पहले माननीय अध्‍यक्ष जी से मैंने और मेरे कई साथी विधायकों ने चर्चा करी कि कांग्रेस के विधायकों के साथ लगातार भेदभाव हो रहा है.

          माननीय मंत्री जी, कई हमारे जो सहयोगी विधायक हैं और साथ में बैठते हैं, भारतीय जनता पार्टी के हैं, उन्‍हें 15-15 करोड़ रूपये उनके क्षेत्रों में विकास के लिये दिया गया है, लेकिन हमारे साथ भेदभाव किया जाकर आज तक एक रूपये हमारे क्षेत्र में विकास के लिये नहीं दिया गया है. लगातार इस बारे में हमारे कांग्रेस पार्टी के कई मेरे सहयोगी और विधायकों ने लगातार इस मांग को उठाया है. कई बार आश्‍वासन मिला लेकिन आज तक इस बारे में कोई कार्यवाही नहीं की गयी. माननीय मंत्री जी मैं आपका ध्‍यान आकर्षित कराना चाहता हूं कि जनता ने हमें भी चुना है और जनता ने आप को भी चुना है तो इतना भेदभाव करना संविधान के विरूद्ध है, और मानवता के विरुद्ध है.  जनता हमारी, सबकी एक जैसी होती है. कांग्रेस को वोट देकर  के  उन्होंने कोई गलती नहीं की है.  इसलिये मेरा अनुरोध है कि सभी को समान रुप से देख कर  15-15 करोड़ रुपये  दिये जायें.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय --   आप  बजट का विरोध भी करोगे  और पैसे भी मांगोगे. बजट का समर्थन कर दो, दे देंगे आपको भी. ..(हंसी)..

          श्री पंकज उपाध्यायमंत्री जी, मैंने कहा  कि जनता सब समान रुप से होती है  और यह भेदभाव  आपने स्वीकार कर लिया है.   सभापति महोदय,  ये इनके इस वक्तव्य को  आप इसमें नोट करें कि इन्होंने  इस भेदभाव को स्वीकार कर लिया है कि आप हमारा साथ दोगे,तो ही 15 करोड़ मिलेंगे विकास के लिये, अन्यथा  आपके क्षेत्र में  विकास के कार्य नहीं हो पायेंगे. तो इसको नोट किया जाये,  यह मेरा अनुरोध है आपसे.

          श्री दिलीप जायसवालसभापति महोदय, उन्होंने कहा है कि आप बजट में सपोर्ट करिये,हमारा साथ दीजिये  नहीं बोला है.  बजट में सपोर्ट करिये, तो  आपको भी मिलेगा.

          श्री पंकज उपाध्यायमैं आदरणीय नया आदमी हूं,  मैं इस पर आऊंगा.  थोड़ा मुझे आप सुन लें.

          सभापति महोदयपंकज जी, आप तो अपनी बात जारी रखिये, इसमें आपका समय जा रहा है.

          श्री पंकज उपाध्यायसभापति महोदय,  विधायक निधि दिल्ली  में   7 करोड़ रुपया है,  13 करोड़ रुपये का प्रस्ताव हो चुका है.  पंजाब में 5 करोड़, बहुत छोटी विधान सभाएं हैं,  पंजाब और हरियाणा में.  संख्या बहुत कम है,  वोटों की संख्या कम है,  क्षेत्र बहुत कम  है.  हमारे क्षेत्र उनसे दोगुने हैं. वोटों की संख्या तीन गुनी है.  उसके बाद भी हमें ढाई करोड़ रुपये  दिये गये हैं.  वहां 5-5 करोड़ रुपये विधायक निधि के रुप में दिये जा रहे हैं.  मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि  यह भी संख्या बढ़ाई जाये. मंत्री जी, स्वेच्छा निधि  भी बहुत कम है विधायकों की, 75 लाख रुपये से कुछ  नहीं होता.   बहुत क्षेत्र में गरीब हैं,  दलित हैं, मजलूम हैं,  इतने मरीज लोग आते हैं, जिनका हम सहयोग नहीं कर पाते हैं. यह 75 लाख रुपये कम है,  इसको भी दो करोड़ रुपये किया जाये.  एक बहुत महत्वपूर्ण बात है. इससे मेरे सभी 230 विधायकों  में से 230 विधायक सहमत  होंगे कि  हमें लगता है कि सरकार हम चला रहे हैं.  लेकिन गिने,चुने जो आईएएस बैठे रहते हैं, सरकार वह चलाते हैं. हमें अधिकार होना चाहिये कि  अधिकारियों की  सीआर लिखने  में भी  हमें कुछ अधिकार दिये जायें.  आप अगर मेरी बात से सहमत हों,  सहमत हैं मेरे साथी, सब हंस रहे हैं, देखिये आप. हमारे बीजेपी के भी साथी  सहमत हैं कि सीआर लिखने का भी अधिकार हमें  दिया जाये. भले ही हम 5 साल  के लिये चुने जायें, लेकिन हमसे  पूछा तो जाये कम से कम कि फलाने अधिकारी   आये  हैं,  कलेक्टर, एसपी, तहसीलदार आये हैं, इन्होंने कैसा काम किया है.   मंत्री जी, इतनी तो  आप हमसे अनुशंसा कराइये. कम से कम जो आदमी खुलेआम  भ्रष्टाचार कर रहा है, लगातार रिश्वत ले रहा है, मैं लगातार   एक अधिकारी की शिकायत  एक साल से कर रहा हूं और  वह भ्रष्टाचार के नये आयाम  स्थापित करते जा रहा है.  लगातार वह चैलेंज  करता है कि  मैं नीचे से लेकर के ऊपर  तक पैसा बांटता हूं.  आप मेरा कुछ नहीं बिगाड़ पाओगे.  मेरे बड़े भाई या  मेरे कोई रिश्तेदार  यहां पर बैठे हुए हैं एसीएस बने हुए.तो वह खुले आम भ्रष्टाचार  कर रहा है. जनपद का सीईओ है.  लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई  एक साल से. मैंने   इतनी  मोटी फाइल बना दी है शिकायक कर करके.  इतना भ्रष्टाचार, अति कर दी है.  तो मेरा निवेदन है कि यह 230  विधायकों की चिंता कीजिये.  मैं अकेले कांग्रेस पार्टी के विधायकों  की बात  नहीं कर रहा हूं. यहां पर जितने लोग सदन में बैठे  हुए हैं, हमें लगता है कि सरकार में हमारी  कोई सहभागिता  है, लेकिन वहां पर ये अधिकारी  हमें बिलकुल इसमें बीजेपी  के यहां  कई मेरे मित्र हैं, मैं यहां सदन में कह रहा हूं कि  कई मित्र हैं. हम यहां पर प्रतिद्वंद्विता  दिखा सकते हैं. हम विरोध की  बात कर सकते हैं,लेकिन इस बात से सहमत हैं कि  मुझे आकर के बताते हैं कि  ये कलेक्टर,एसपी, कई अधिकारी नहीं सुनते हैं. कई बार लगातार फोन लगाते रहते  हैं,  फोन नहीं उठाते हैं, तो इसमें   कुछ न कुछ तो कार्यवाही कीजिये, कुछ तो अधिकार दीजिये कि  किसी ने 10 बार फोन नहीं उठाये,  किसी ने फोन नहीं उठाये, तो  कुछ तो  हो न उसका. सभापति महोदय, तो मेरा आपसे निवेदन है कि  सीआर में हमारा कहीं न कहीं हस्तक्षेप हो. मंत्री जी, आप कर सकते हैं, क्योंकि आप में बहुत हिम्मत है, आप कर सकते हैं. मेरा आपसे अनुरोध है कि  यह इतनी ताकत तो विधायक को दीजिये कि  यह सदन आपको हमेशा याद रखेगा. दूसरा,   जितनी भी क्रियान्वयन समितियां होती हैं और जितनी भी जांच करने वाली समितियां हैं. हमारे विधायकों ने लगातार किसी भी चीज की शिकायत  की हो, चाहे नल जल योजना की हो, चाहे स्वास्थ्य विभाग की हो,  चाहे पीडब्ल्यूडी की हो, हम जांच की मांग करते हैं,  हमें  किसी  भी जांच में,  आज तक आप पूछ लीजिये 230  हैं. 230  में से कि किसी भी जांच में आपको कहीं रखा गया है क्या. हर जांच में,  नियम बना दीजिये कि हर जांच में   क्षेत्रीय विधायक को रहना ही जरुरी है. जिले के प्रत्येक विधायक को  उस समिति में, जिसकी  भी जांच हो रही है, जरुर उसको लिया जाये. उनसे पूछा जाये कि आपका इसमें क्या अभिमत है. आदरणीय सभापति महोदय, हमारे कई विधायक साथी हैं. मैं कर्मचारियों का विरोधी नहीं हूं क्योंकि मेरे पिता जी भी खुद कर्मचारी हैं, नगर पालिका में नौकरी करते थे, इसलिये मै कर्मचारी विरोधी नहीं हूं. आप कर्मचारियों को भी जो नौकरी में हैं उनको एक शासकीय मकान दे देते हैं, रहने के लिये. हम विधायकों के लिये भी एक सरकारी मकान क्षेत्र मे आवंटित होना चाहिये. जो जितने समय के लिये विधायक रहेगा उसको उतने समय के लिये एक शासकीय आवास क्षेत्र में आवंटित होना चाहिये, इसके लिये आपको व्यवस्था करनी चाहिये कि अपने क्षेत्र में विधायक की इच्छा से कम से कम एक शासकीय भवन आवंटित हो सके जिसमें वह अपना शासकीय कार्यालय, विधायक कार्यालय चला सके.

          माननीय सभापति महोदय, एक ओर बात मैं कहना चाहता हूं. बहुत गंभीर विषय है. हमारे जो पूर्व विधायक हैं, सभी का सेवा से निवृत्त होने का समय आता है, एक दिन सभी रिटायर होते हैं, कई लोग सक्षम होते हैं कई लोग सक्षम नहीं होते हैं.कई लोग सेवा में ही जीवन भर लगे रहते हैं. मैं ऐसे कई विधायकों को जानता हूं उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है इसलिये मेरा मंत्री जी से यह निवेदन है कि उनकी पेंशन बढ़ाई जाए और उनके प्रति मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुये मंहगाई के हिसाब से उनकी सारी व्यवस्थायें की जायें. उनको भी कहीं न कहीं सुविधा का लाभ दिया जाये. जहां पर प्लाट मिलते हों उनको प्लाट दिलाया जाये और निश्चित रूप से उनकी पेंशन को बढाया जाये.

          सभापति महोदय- पंकज जी कृपया समाप्त करें. कार्य मंत्रणा समिति ने विभागों की मांग पर समय निर्धारित किया हैं, इसलिये समय सीमा का ध्यान तो सभी को रखना पड़ेगा. कृपया आप संक्षिप्त में अपनी बात कहकर के समाप्त करें.

          श्री पंकज उपाध्याय-- ठीक है साहब मैं अगली मांग पर बोल लूंगा लेकिन मेरा आपसे अनुरोध है कि सदन में बैठे हुये लोगों के हित की रक्षा करने का दायित्व आसंदी का है. जो इस चेयर पर बैठता है उनको हमारे अधिकारों का संरक्षण करने का अधिकार है. आपको है. लोकतंत्र ने आपको यह ताकत दी है कि आप हमारा संरक्षण करें. मेरा अनुरोध है और हम सभी 230 सदस्य आपसे यह अपेक्षा करते हैं कि हमारी सुनवाई की जाये, संविधान की जिस भावना के साथ में विधायक का दायित्व दिया है उसमें यह आईएएस और आईपीएस तय नहीं करेंगे कि हमें क्या करना है और क्या नहीं करना है. धन्यवाद, जय भारत, सभापति महोदय आपने मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया उसके लिये बहुत आभारी हूं.

          श्री भगवान दास सबनानी (भोपाल दक्षिण-पश्चिम)- माननीय सभापति महोदय,  धन्यवाद. आज बजट की मांग संख्या 22 के समर्थन में बोलने के लिये मैं खड़ा हुआ हूं. नगरीय प्रशासन विभाग पर चर्चा चल रही है और मैं यह कह सकता हूं कि मध्यप्रदेश में जो बजट 18 हजार 676 करोड़ 43 लाख का जो बजट है .मैं तुलना करता हूं वर्ष 2002-03 की तो 435.56 करोड़ की तुलना में यह साढ़े चारसौ गुना से ज्यादा यह बजट है. मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिये उपयोग बजट है.

          माननीय सभापति महोदय, माननीय प्रधान मंत्री जी नरेन्द्र मोदी जी ने 2014 में प्रधान मंत्री बनने के पश्चात जब लाल किले की प्राचीर से एक स्वच्छता का नारा दिया था, तब कांग्रेस के नेताओं ने उपहास उडाया था कि देश के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से स्वच्छता की बात कर रहे हैं. लेकिन वह बाद में एक आंदोलन बन गया जन आंदोलन बन गया और उसके बाद में उसकी जो प्रतिस्पर्धायें हुईं, लगातार हर क्षेत्र में हम यह देखते हैं कि किस तरह से हर शहर अपने आपको स्वच्छ रखने के लिये और वहां के जनप्रतिनिधि उसमें लगकर के कि कैसे हम अपने शहर को अच्छा कर सकते हैं. नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद् में प्रतिस्पर्धायें होने लगी और उसके लिये मैं बहुत बधाई देता हूं मध्यप्रदेश शासन के हमारे वरिष्ठ और स्थानीय शासन मंत्री जब वह महापौर और विधायक की भूमिका में इंदौर में रहे तब उन्होंने जो विकास के काम शुरू किये और आज लगातार सात बार मध्यप्रदेश के इस इंदौर शहर को प्रथम स्थान स्वच्छता में मिला और उससे पूरे देश में एक नया संदेश गया . जब प्रदेश की राजधानियों की बात आती है तो मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल ने स्वच्छ राजधानी का अपना कीर्तिमान स्थापित किया है और लगातार आगे बढते हुये लोगों को नगर निगम से अपेक्षा है कि  कोई भी व्यक्ति नगर निगम , नगर पालिका और नगर परिषद इस पर लोगों को सबसे ज्यादा भरोसा होता है कि कोई भी काम होगा, नगर निगम से होगा और इसके अलावा बड़े बड़े प्रोजेक्ट भी कैसे आ सकते हैं इसको लेकर के मध्यप्रदेश की डॉ.मोहन यादव जी की सरकार माननीय श्री कैलाश विजयवर्गीय जी के माध्यम से लगातार मध्य प्रदेश को कैसे हम आगे बढ़ा सकते हैं , तो एक अमृत योजना लाकर के जिस तरह से माननीय प्रधानमंत्री जी की इच्छा है, केन्द्र सरकार की योजना से भारत सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना में प्रदेश सरकार ने प्रदेश के 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले धार्मिक और पर्यटन शहरों को सम्मलित करते हुये 34 शहर का चयन इस योजना में किया है. योजना के क्रियान्‍वयन में मध्‍यप्रदेश को देश में चौथा स्‍थान मिला है. यह उल्‍लेखनीय है कि मध्‍यप्रदेश को चौथा स्‍थान अमृत योजना के अंतर्गत मिला है. मिशन अंतर्गत् राशि रुपये 6,801 करोड़ की 215 परियोजनाएं स्‍वीकृत हैं जिसमें से 204 परियोजनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा शेष 11 परियोजनाएं क्रियान्‍वयन के लिये विभिन्‍न चरणों में हैं. मिशन अंतर्गत् 33 शहरों में कुल 215 परियोजनाएं और ऐसे ही हरित क्षेत्र में लगातार 111 योजनाएं सम्मिलित हैं. मध्‍यप्रदेश में अमृत योजना 2.0 के अंतर्गत भारत सरकार की इस योजना में भी मध्‍यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के समस्‍त 413 नगरीय निकायों एवं 5 केंटोन्‍मेंट बोर्ड जबलपुर, सागर, पचमढ़ी, महू, मुरार को शामिल किया है. मिशन कार्यकाल 5 वर्ष लगभग राशि 11,786 करोड़ का प्रावधान किया है. 11,786 करोड़ से केंटोन्‍मेंट क्षेत्र का भी हम कैसे वहां विकास कर सकते हैं इसको लेकर नगरीय प्रशासन विभाग ने इस पर पूरी योजना बनाई है. उसमें जल प्रदाय, सीवरेज, जल स्‍त्रोतों का उन्‍नयन एवं हरित क्षेत्रों का हम प्रावधान करने जा रहे हैं. अमृत योजना 2.0 के अंतर्गत् नगरीय निकायों तक पेयजल एवं एक लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में सीवरेज योजना का विस्‍तार किया जाएगा. जिसमें आगामी 5 वर्षों में लगभग राशि 11,786 करोड़ का निवेश और उसमें भी केन्‍द्र का जो अंश है वह 4,045 करोड़ है. इस प्रकार आगामी वित्‍तीय वर्ष में हमारी सरकार ने अमृत योजना के अंतर्गत 1,071 करोड़ रुपये प्रावधानित किये हैं. मैं बहुत बधाई देना चाहता हूं माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी को कि मुख्‍यमंत्री जी की सहभागिता निर्माण योजना में प्रतिवर्ष नगर पालिका, नगर निगमों को 5 करोड़ रुपये की राशि जिसमें अधोसंरचना विकास योजना, मुख्‍यमंत्री सहभागिता निर्माण के माध्‍यम से होगी. जिसमें नगर पालिकाओं को 1 करोड़ और नगर परिषदों को 25 लाख अर्थात् डेढ़ सौ करोड़ रुपये प्रतिवर्ष के मान से यह राशि दी जाने वाली है.

          सभापति महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी के उज्‍जैन शहर के सिंहस्‍थ के लिये भी वर्ष 2028 की तैयारी मध्‍यप्रदेश की सरकार ने आरंभ की है. मैं बधाई देता हूं आदरणीय कैलाश विजयवर्गीय जी को कि वर्ष 2024-25 में 500 करोड़ का बजट प्रावधान किया है. सिंहस्‍थ 2028 की तैयारी के लिये मंत्री मंडलीय समिति द्वारा उज्‍जैन शहर की सीवरेज परियोजना हेतु राशि 198 करोड़ स्‍वीकृत हुई है. मंत्री मण्‍डल समिति की उज्‍जैन शहर की सड़कों के विकास हेतु 90.35 करोड़ की योजनाएं स्‍वीकृत हुई हैं. एक बड़ी राशि इस नाते से दी गई है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा 5 से 30 जून, 2024 तक जल गंगा संवर्द्धन अभियान चलाया गया. सभी नगरीय निकायों में जल निकायों के पुनर्जीवन, गहरीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य किया गया. अभियान में नागरिकों एवं संगठनों ने भाग लिया. अभियान में जल निकायों के समीप पौधारोपण का कार्य भी किया गया. माननीय मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा 1 जुलाई से 15 जुलाई, 2024 तक 1 पेड़ मॉं के नाम का अभियान चलाया गया. मैं बधाई देता हूं माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी को कि 50 लाख से ज्‍यादा पौधे लगाने का एक कीर्तिमान इंदौर शहर ने विश्‍व में बनाया है. निश्चित रूप से यह बधाई के योग्‍य है. जल गंगा संवर्द्धन अभियान 5 जून से आरंभ हुआ और 30 जून तक चला. इसके अंतर्गत् जल संरचनाओं की क्षमता वर्द्धन, निकाली गई मिट्टी और गाद का प्रबंधन तथा जल संरचनाओं के आसपास वृक्षारोपण करके हमने पर्यावरण की दृष्‍िट से एक बड़ा काम मध्‍यप्रदेश में किया है. नगरीय क्षेत्रों में पौधारोपण अभियान एक जुलाई से आरंभ किया गया था उसमें सर्वसमाज और समाज के संगठनों ने भी मिल कर भागीदारी की है. मेट्रो रेल यह मध्‍यप्रदेश के लिये एक बड़ी महत्‍वाकांक्षी योजना है. जब भोपाल की मेट्रो की प्रगति के लिये हमारी इस्‍टीमेट कमेटी का विजिट हुआ तो उन्‍होंने बताया कि 15 अगस्‍त को हम भोपाल की यह योजना आरंभ करने जा रहे हैं. मेट्रो यहां से 15 अगस्‍त को आरंभ होगी. पैरलली उन्‍होंने जो अपना वहां वृत्‍त रखा था उसमें बताया था कि इंदौर की भी मेट्रो योजना 7500.40  करोड़ रुपए की योजना पर इंदौर में भी काम चल रहा है, भोपाल में भी 6941 करोड़ रुपए की योजना चल रही है. आने वाले समय में भोपाल और इंदौर मेट्रो सिटी के नाम से जाना जाएगा कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और आर्थिक राजधानी इंदौर में भी हमने मेट्रो लाकर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. आने वाले 20-30 सालों की महत्वाकांक्षी योजना को हम पूरा करने जा रहे हैं. महाकालेश्वर उज्जैन में भी पीथमपुर व्हाया इंदौर मेट्रो रेल कॉरीडोर की भी तैयारी हुई है. उज्जैन-इंदौर-पीथमपुर कॉरीडोर के लिए मेट्रो रेल योजना की तकनीकी रिपोर्ट दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन द्वारा प्रस्तुत की गई है.  इस योजना के प्रथम चरण में भी महाकालेश्वर मंदिर उज्जैन से नानाखेड़ी बस स्टेण्ड से लवकुश चौराहे से सुपर कॉरीडोर इंदौर तक डीपीआर बनाने का काम भी दिल्ली मेट्रो कॉर्पोरेशन ने कर लिया है. मैं माननीय मंत्री जी को बहुत बधाई देना चाहता हूँ. कायाकल्प योजना के अन्तर्गत मध्यप्रदेश में सड़कों के उन्नयन, निर्माण, सुधार अनुरक्षण हेतु राज्य सरकार द्वारा 1550 करोड़ रुपए की राशि के कार्य स्वीकृत किए गए हैं. जो एक कीर्तिमान है आज तक की किसी भी वर्ष की यह सर्वाधिक राशि मानी जाएगी. गृह निर्माण के अधोसंरचना के कार्य लगातार प्रगति पर हैं. हुकुमचंद मिल का जो कार्य था वर्षों से उसकी मांग हो रही थी उसकी देनदारियों का निपटान करके वहां पर 5 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के कार्य होने की संभावना है. जिसमें 3700 करोड़ रुपए का कमर्शियल क्षेत्र का निर्माण कार्य प्रस्तावित है. प्रोजेक्ट लगभग 1400 करोड़ रुपए का है. साथ ही इस परियोजना के माध्यम से एक समस्या का समाधान हुआ है जिसकी वर्षों से मांग की जा रही थी. परियोजना में 500 करोड़ रुपए  के निर्माण होंगे वहीं राजस्व करीब 400 करोड़ रुपए होगा. 650 करोड़ रुपए के इस काम के साथ ही 43 लाख मानव दिवस एवं योजना उपरांत 8 से 10 हजार लोगों के लिए रोजगार सृजित करने का अवसर भी इस स्थान से किया जाने वाला है. री-डेंसीफिकेशन के माध्यम से 550 करोड़ रुपए से ज्यादा के 100 से अधिक प्रोजेक्ट संचालित किए जा रहे हैं. मंडल के 3 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के प्रोजेक्ट में मुख्य रुप से भोपाल के प्रोफेसर कॉलोनी, मेरी विधान सभा का क्षेत्र है. 5 नंबर स्टाप, सरस्वती और शास्त्री नगर इसमें भी निवेश आने की संभावना है. री-डेंसीफिकेशन में भोपाल के प्लेटिनम प्लाजा, रीवा के कलेक्ट्रेट, जबलपुर में छोटी ओमती, ग्वालियर में खाटीपुरा जैसे अहम प्रोजेक्ट किए गए हैं. मंडल द्वारा सभी विभागों के डिपाजिट वर्क के तहत 360 प्रोजेक्ट किए जा रहे हैं. पीएम स्वनिधि के माध्यम से मध्यप्रदेश के कोने-कोने में छोटे-छोटे वेंडर हैं. कोविड के समय से यह योजना आरंभ हुई है. आज हम कह सकते हैं कि उन वेंडरों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश की सरकार ने अहम भूमिका निभाई है.

          सभापति महोदय, मैं एक निवेदन के साथ अपनी बात को समाप्त करुंगा कि अभी माननीय मंत्री जी की उपस्थिति में अभी गुजरे दिनों (5 मार्च, 2025) माननीय अध्यक्ष महोदय की कृपा से प्राक्कलन समिति ने स्मार्ट सिटी के कार्यों का अवलोकन किया है और उसकी रिपोर्ट भी हम पटल पर रखने जा रहे हैं. वह समिति के माध्यम से आएगी उसमें भी हमने कुछ सुझाव दिए हैं. जिससे न केवल भोपाल बल्कि जहां-जहां भी स्मार्ट सिटी बनाई जा रही है उसमें जो आने वाली दिक्कतें हैं वह भी इससे दूर होंगी. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करुंगा कि पूर्व में बाल्मिकी अंबेडकर योजना हो, जेएनएनयूआरएम के माध्यम से हो या मल्टीस्टोरी जो बनी हैं. इनका निर्माण तो हो जाता है, लोगों को बसा दिया जाता है लेकिन उसके बाद उसका मेंटेनेंस नहीं होने के कारण वहां के लोगों को दिक्कत जाती है. इसके लिए एक निधि सुरक्षित रखी जाना चाहिए ताकि वहां पर समिति बना करके उनको तो काम सौंपे ही लेकिन सरकार भी इस नाते से काम करे कि जिन बेघरों को हमने घर दिया है जिन झुग्गी वालों को वहां से हटाकर हमने मल्टी में शिफ्ट किया है. इसके बाद उनका जीवन बेहतर बने इसके लिए भी हमारी भूमिका का निर्वहन होना चाहिए. मैं डॉ. मोहन यादव जी मुख्यमंत्री जी को, माननीय मंत्री जी को बहुत बहुत बधाई देता हूँ कि उन्होंने मध्यप्रदेश के विकास में शहरी विकास की अहम भूमिका होगी. हम मध्यप्रदेश को और उन्नति की ओर ले जाएंगे. सभापति महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद.                                                                                  

          श्री लखन घनघोरिया (जबलपुर पूर्व)-- माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 22 के विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं और कटौती प्रस्‍ताव के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से दो, चार बातें करना चाहता हूं. नगरीय विकास एवं आवास विभाग का बजट 18 हजार 744 करोड़ रुपए का है. नगरीय विकास विभाग एक ऐसा विभाग है जो कि आम जनमानस की मौलिक सुविधाओं से जुड़ा हुआ है. यदि कोई विभाग डायरेक्‍ट किन्‍हीं आवश्‍यकताओं से जुड़ा हुआ है तो वह नगरीय विकास विभाग है. और वहां आम नागरिकों की सुविधाओं का संधारण और संरक्षण दोनों चीजें बहुत ही महत्‍वपूर्ण हैं. माननीय मंत्री महोदय ने इंदौर में किसी पत्रकार वार्ता में कहा कि नगर निगम, नगर पालिकाओं को अपने संसाधन स्‍वयं जुटाना चाहिए और टैक्‍स बढ़ाओ. मैं समझता हूं कि इस विभाग की सारी वस्‍तुस्थिति उनके उद्गार से स्‍पष्‍ट होती है, उनकी इस बात से स्‍पष्‍ट होती है. मैं छोटे-छोटे चार, पांच सुझाव दूंगा.

          माननीय सभापति महोदय, मैं सबसे पहले यह आग्रह करूंगा कि सन् 1886 में चुंगी छतिपूर्ति का एक अहम करार हुआ था. जिसमें हर तीन वर्ष में 10 प्रतिशत राशि बढ़ाकर नगरीय निकायों को दी जाएगी. हमारे पूरे मध्‍यप्रदेश में 418 नगरीय निकाय हैं और मुख्‍स रूप से पांच नगर निगम हैं. नगर निगम तो और भी हैं लेकिन पांच मुख्‍य हैं जो अपने संसाधन से पेशंन की अंशपूंजी जमा करती हैं वह पांच नगर निगम है. तीन साल के अंदर जो 10 प्रतिशत बढ़ाना था यह सन् 1986 से 2006 तक तो चला और वर्ष 2006 के बाद इसको बंद कर दिया और प्रतिशत को नहीं बढ़ाया गया. इसकी जो राशि थी नगरीय निकाय की अपनी पूंजी है आप प्रवेश कर चुंगी के रूप में लेते थे. नगरीय निकाय लेती थी आपने उसको बंद किया उसी बात का करार था. यह वहां की स्‍थानीय निकाय का अपना हक है, उनका हिस्‍सा है. 36 हजार करोड़ की चुंगी छतिपूर्ति एक वर्ष में होती थी और हमारे प्रदेश में हम यह मान लें कि एक माह में 300 करोड़ होना चाहिए. जो नियमानुसार कर्मचारियों के वेतन, पेशंन भुगतान के लिए होती है और अगर बचे तो विकास और अन्‍य मदों में खर्च कर सकते हैं. चुंगी छतिपूर्ति से बिजली का बिल हुडको का लोन, यांत्रिकी प्रकोष्‍ठ, पेंशन, अंशदान में हर माह 220 करोड़ रुपया और अगर साल का जोड़ लें तो 26 हजार 200 करोड़ रुपया प्रतिवर्ष आपके विभाग को मिलता है. माननीय मंत्री जी से उल्‍लेख करना चाहता हूं कि जबलपुर नगर निगम को प्रतिमाह 18 करोड़ रुपये मिलना चाहिए. एक तो आप पहले ही 36 हजार करोड़ रुपये में, जो पैसा आप बिजली के बिल के रूप में काट लेते हैं, हुडको के लोन के रूप में काट लेते हैं, यांत्रिकी प्रकोष्‍ठ में काट लेते हैं, पेंशन अंशदान में काट लेते हैं, इसके अलावा जब आप 18 करोड़ रुपये नगर निगम को देते हैं तो 5 करोड़ रुपये बिजली का बिल काटकर देते हैं, यह डबल-डबल कट रहा है. 13 करोड़ रुपये आप देते हैं. 50 हजार रुपये प्रतिमाह बिजली का बिल यहां भी देना पड़ता है, ये हमारे संसाधन हैं.

          सभापति महोदय, मैं, मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि ये विसंगतियां हैं, और इन विसंगति के कारण, मेरा मानना है कि नगरीय निकायों के आय के स्त्रोत कम से कम वेतन, पेंशन में काम आते थे. ये यहीं पर, कहीं न कहीं इस बात में रूकावट है कि नगरीय निकायों को इनका हक मिलना चाहिए था, वह हक नहीं मिल रहा है.       सभापति महोदय, दूसरा यह कि नगर परिषद और नगर निगम को बाजार बैठकी से 3 प्रतिशत स्‍टाम्‍प ड्यूटी का पैसा मिलता था, उसे पिछली सरकार ने शिवराज सिंह जी की सरकार ने, उसे कम करके 2 प्रतिशत कर दिया था, इस बार आपकी सरकार ने उसे 1 प्रतिशत कर दिया. यह नगर निगम की आय थी, यदि हम नगरीय निकायों के इस हक को ही दे दें तो हम समझते हैं कि टैक्‍स बढ़ाने की आवश्‍यकता नहीं पड़ेगी. हमें वेतन देने के लाले पड़ रहे हैं. आज स्थितियां पूरे नगर निगम, नगरीय निकायों की बिलकुल विचित्र है. इसलिए मंत्री जी से आग्रह है कि यदि उनका हक हम, उन्‍हें दे दें तो मैं समझता हूं कि उनके लिए बहुत बड़ा संबल मिल जायेगा.

          सभापति महोदय-  लखन जी, थोड़ा सा बिंदुवार करके संक्षिप्‍त में विषय रख दें.

          श्री लखन घनघोरिया-  सभापति महोदय, अब मैं, अपने यहां की बात करूंगा.  मेरा एक तारांकित प्रश्‍न दिनांक 19.12.2024 को था. चर्चा में नहीं आया लेकिन मेरे पास जवाब आया था. हमारे यहां एक स्‍टॉर्म वॉटर ड्रेनेज़ सिस्‍टम 374.99 करोड़ रुपये की लागत का बनना था, जिसमें 5 बड़े नाले और 130 छोटे नाले थे, ओमती नाला मोती नाला सभी थे. दिनांक 9.9.2010 से यह कार्य प्रारंभ हुआ और वर्ष 2017 में यह कार्य बंद हो गया जो कि अधूरा छूटा हुआ है. आप सोचिये जो नाले 60-80 फुट के थे, उनको 12x12 का कर दिया गया, वो भी कवर्ड. उसे पेटी कांट्रेक्‍ट में दिया गया, कोई हैदराबाद की L&T कंपनी ने ठेका लिया था, उसने कम से कम 100 लोगों को पेटी कांट्रेक्‍ट में काम दे दिया. अब हालात ये हैं कि नाले के किनारे सिर्फ गरीब बस्तियां बसती हैं, 60 फुट के नाले को यदि हम 12 फुट का कर दें और उसे कवर्ड कर दें जो कि पूरा न बना हो और वह योजना वर्ष 2017 में समाप्‍त कर दी गई, नाला अधूरा बना हुआ है. अब लोकल शासन, नगर निगम की दुविधा यह है कि न तो वह 374 करोड़ रुपये के नाले को डिस्‍मेंटल कर सकती है, न ही आगे बना सकती है क्‍योंकि योजना ही समाप्‍त हो गई. वहां के गरीब लोगों का नारकीय जीवन हो गया है. अकेले ऐसा नहीं कि मेरी ही विधान सभा, पूरा शहर इससे प्रभावित है. हमारे मित्र, माननीय मंत्री जी को अपनी विधान सभा में, आधा घंटे की ही बारिश में, घुटने-घुटने पानी में घूमना पड़ा था. यह पूरे शहर के लिए एक विचित्र स्थिति बनी हुई है. मैं माननीय मंत्री महोदय से आग्रह करना चाहता हूँ कि आप कोई भी योजना लायें, उसके लिए कुछ तो करें. वर्ष 2017 से आप सोचिये कि अभी तक वहां के लोग नारकीय जीवन जी रहे हैं. जब भी आप इस पर जवाब देने के लिए खड़े हों. तो मेरा आपसे निवेदन है कि इस चीज को जरूर सम्मिलित करें.

          सभापति महोदय - लखन जी, आप समाप्‍त करें. आप संक्षिप्‍त कर दें.

          श्री लखन घनघोरिया - माननीय सभापति महोदय, मेरे एक-दो प्‍वाइंट्स हैं. हमारे यहां जबलपुर में जल संकट अमृत-2 में 17 ओवरहेड टैंक बनना प्रस्‍तावित थे, लागत भी 14.18 करोड़ रुपये के लगभग है. इसमें लगभग एक वर्ष से विलम्‍ब हो रहा है. इसका कारण भी साफ है कि जमीन का अधिग्रहण नहीं हो रहा है. जल संकट भी हमारे यहां बहुत जबदस्‍त होता है, यह हमारे बाकी साथी बता सकते हैं. भले ही हमारा शहर नर्मदा माई की गोद में बसा हो. लेकिन यह कटु सत्‍य है कि जल प्रदाय की व्‍यवस्‍थाएं, जल वितरण की व्‍यवस्‍थाएं बहुत ज्‍यादा दूषित हैं. हमारे यहां जो फिल्‍टर प्‍लांट है, मनगरा फिल्‍टर प्‍लांट और ललपुर फिल्‍टर प्‍लांट में कम से कम एक महीने में जब लीकेज होता है, तो एक लीकेज को 7-7 दिन तक सुधारा जाता है और इससे जल आपूर्ति बाधित होती है. मेरा आपसे आग्रह है कि जबलपुर की इस जल संकट की समस्‍या पर आप अवश्‍य ध्‍यान देंगे.    

          सभापति महोदय - लखन जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल जी.

          श्री लखन घनघोरिया - सभापति जी, मैं एक मिनट में समाप्‍त कर दूँगा. जबलपुर नगर निगम की स्‍थापना, दिनांक 1 जून, 1950 को हुई थी, जब जबलपुर सीपी एण्‍ड बरार स्‍टेट में आता था, नागपुर में आता था और जब वर्ष 1956 में राज्‍य पुनर्गठन आयोग ने जब मध्‍यप्रदेश बनाया, तब से ही आप समझ लें. यह लगभग 75 वर्ष का है, यह पहला नगर निगम है, जो 75 वर्ष के अमृतकाल में है और जब अमृतकाल में हों, तो हम उसका जन्‍मदिन मना सकते हैं.

          सभापति महोदय - लखन जी, आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद. आप बैठ जाइये. श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल जी.

          श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल - अनुपस्थित. 

          श्री लखन घनघोरिया - माननीय सभापति महोदय, हमारे नगर निगम को कम से कम कोई एक स्‍पेशल पैकेज को दे दें. मेरा यह आग्रह है क्‍योंकि अमृतकाल में हैं. दूसरा, आपका जबलपुर का मास्‍टर प्‍लान 20 वर्ष से लम्बित है. वृक्षरोपण की स्थिति  पर भी, भले ही आप इन्‍दौर में 50 लाख वृक्ष लगा रहे हों, इन्‍दौर में अच्‍छा भी हो सकता है.

          सभापति महोदय - लखन जी, आपको पर्याप्‍त समय दिया जा चुका है. क्षमा चाहेंगे. समय की मर्यादा है. आप एक सेकेण्‍ड में बात पूरी करें. आपको एक-एक मिनट करते हुए पर्याप्‍त समय हो गया है प्‍लीज.   

          श्री लखन घनघोरिया - जी, सभापति महोदय. माननीय मंत्री जी, हम आपसे बगैर शेर के कह रहे हैं. ''खामोशी गवाह है, अन्‍दर से सब तबाह है''. (हंसी) इसलिए मेरा आग्रह है, खामोशी को तोडि़ये, और आवाज कीजिये. यह बात न रहे कि ''खामोशी गवाह है, अन्‍दर से सब तबाह है''.

          सभापति महोदय - लखन जी, आपको धन्‍यवाद. श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन जी.

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन  - माननीय सभापति महोदय, यह बयान उनके दल की स्थिति के बारे में उनकी अभिव्‍यक्ति है. (मेजों की थपथपाहट) जी, आप कुछ कह रहे हैं.

          सभापति महोदय - माननीय दोनों ही परिपक्‍व अनुभवी हैं, दोनों वरिष्‍ठ हैं. शैलेन्‍द्र जी, आप अपनी बात रखें.   

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन (सागर) - माननीय सभापति महोदय, ये भी बुन्‍देलखण्‍डी हैं. मैं सर्वप्रथम नगरीय विकास एवं आवास मंत्री सम्‍माननीय और इस मध्‍यप्रदेश के वरिष्‍ठ और हमारे दल के एक वरिष्‍ठ नेता सम्‍माननीय श्री कैलाश विजयवर्गीय जी को इन लाइनों के साथ नगरीय विकास एवं आवास की मांग संख्‍या 22 है, उसके समर्थन में इन  लाइनों के साथ शुरू करना चाहता हूँ कि

            हो के सूरज, हम दिशाओं के रहें मोहताज क्‍यों,

            हम जिधर पर चल पड़ेंगे, पूरब उधर आ जाएगा.

          माननीय सभापति महोदय, मुझे ध्‍यान आता है कि जब भी माइनिंग की बात होती है या कोल की बात होती है या पॉवर की बात होती है, तब हमारा ध्‍यान सिंगरौली की ओर जाता है. सिंगरौली ऐसा पॉल्‍यूटेड शहर हो गया था, ऐसा पॉल्‍यूटेड कस्‍बा हो गया था, जिसको दोहने का काम सारी सरकारों ने किया लेकिन उसको संवारने के काम की चिंता कभी किसी ने नहीं की. मैं इस बात के लिए माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय को और माननीय नगरीय प्रशासन मंत्री महोदय को धन्‍यवाद देना चाहता हूँ कि इतने दूध देने वाली जो हमारी गाय है, उसकी चिंता करने का काम उन्‍होंने किया और सिंगरौली को एक विकसित शहर के रूप में 50 हजार की जनसंख्‍या के मान से उसमें सारी सुविधाएं सिंगरौली में हो, यह सुनिश्‍चित करने का काम इस बार के बजट में किया है. माननीय मंत्री महोदय को बहुत-बहुत साधुवाद है.

          माननीय सभापति महोदय, यहां मैं एक बात का उल्‍लेख करना चाहता हूँ कि प्रधानमंत्री स्‍वनिधि योजना, कोविड काल में जब पूरा का पूरा देश और पूरा का पूरा भारतवर्ष उसकी विभीषिका से जूझ रहा था, उस समय उन स्‍ट्रीट वेंडर्स की चिंता करने का काम सम्‍माननीय प्रधानमंत्री जी ने किया था और मध्‍यप्रदेश के भारतीय जनता पार्टी की सरकार को मैं बधाई देना चाहता हूँ कि उन्‍होंने इतने श्रेष्‍ठ तरीके से इस योजना को लागू किया कि पूरे भारतवर्ष में मध्‍यप्रदेश ने एक नंबर का सर्वोच्‍च स्‍थान प्राप्‍त किया. 10 हजार रुपये से लेकर 20 हजार रुपये तक के ऋण इसके तहत दिए जाते थे. माननीय सभापति महोदय, यहां एक बहुत महत्‍वपूर्ण बात है. हम आमतौर से यह मानकर चलते हैं कि इस तरह के जो लोन होते हैं, इस तरह के जो ऋण होते हैं, उनकी अदायगी नहीं होती. लेकिन 10 हजार रुपये की अदायगी करके 20 हजार रुपये का ऋण लेने वालों की संख्‍या हजारों में नहीं लाखों में है. मैं ऐसे स्‍ट्रीट वेण्‍डर्स को साधुवाद देना चाहता हूँ, जिन्‍होंने प्रधानमंत्री जी की उस योजना का न केवल लाभ उठाया, वरन् उनकी भावना को मरने नहीं दिया.

          माननीय सभापति महोदय, एक और योजना, जिसमें मध्‍यप्रदेश ने बहुत बड़ा और बहुत अच्‍छा काम किया है, प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना. पूरे देश में दूसरे स्‍थान पर रहकर और जो मध्‍यप्रदेश के अंदर आवासहीन परिवारों को मकान देने का काम किया है. ऐसे आवासहीन लोगों की ओर से मध्‍यप्रदेश सरकार का हृदय की गहराइयों से बहुत-बहुत धन्‍यवाद करना चाहता हूँ.

          माननीय सभापति महोदय, हमारे पूर्ववक्‍ता जी ने स्‍वच्‍छता के विषय को रखा है. इंदौर जो है, न केवल 7वीं बार पूरे देश का सबसे स्‍वच्‍छ शहर बना है, मैं भोपाल वालों को भी बधाई देना चाहता हूँ कि स्‍वच्‍छतम राजधानी का तमगा उनके माथे पर है. उनको भी बहुत-बहुत बधाई है.

          माननीय सभापति महोदय, माननीय प्रधानमंत्री जी ने पॉल्‍यूशन को कम करने के लिए और आवागमन को सुलभ तथा सस्‍ता बनाने की दृष्‍टि से ई-बसेस की जो सौगात पूरे नगरों को दी है. मैं इस बात के लिए भी उनको बधाई देना चाहता हूँ. सभापति महोदय, आज आप देखते हैं कि हमारी परिस्‍थितियां पहले जैसी नहीं हैं. देश में उस समय 80 प्रतिशत लोग गांवों में रहते थे, कृषि पर आधारित थे, लेकिन अब आप देखें, शहरीकरण बढ़ता जा रहा है. शहर की सीमाएं बढ़ती जा रही हैं. शहर पर अधिक दबाव पड़ रहा है. ऐसे समय में शहरों की चिंता करना हम सबका बहुत बड़ा कर्तव्‍य है. किसी भी सभ्‍यता की पहचान शहरों से ही होती है.

          सभापति महोदय -- शैलेन्‍द्र जी, संक्षिप्‍त करें.

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन --  माननीय सभापति महोदय, अभी तो शुरुआत की है. यदि संक्षिप्‍त करना है तो मैं..

          सभापति महोदय -- गागर में सागर कर दें, आप अनुभवी हैं.

          श्री शैलेन्द्र कुमार जैन - मैं अपने विधान सभा क्षेत्र की कुछ बातें कहकरअपनी बात समाप्त करूंगा. सागर शहर के अंदर एक बहुत सुंदर नगर वन है लगभग 100 हेक्टेयर का हमारा नगर वन है और उस समय केंद्र सरकार  के सहयोग से हमने उसको डेवलप करने का काम किया था उसी तर्ज पर  मंत्री जी ने मुख्यमंत्री नगर वन योजना जो बनाई है उसके तहत् जिन शहरों में इस तरह के वन उपलब्ध हैं यह बहुत बड़े आक्सीजन बैंक का काम करते हैं. यह हमारे फेफड़ों को आक्सीजन देने का काम करते हैं. उनको विकसित  करने की दिशा में आपने जो काम किया है उसके लिये मैं मंत्री जी आपका और मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करना चाहता हूं. गीता भवन के लिये जो हमारी भारतीय संस्कृति और भारतीय सभ्यता की और हमारी मान्य परंपराओं का एक बहुत अभिव्यक्ति करने का एक बहुत बड़ा साधन है मैं गीता भवन स्थापित करने के लिये भी सरकार का धन्यवाद करना चाहता हूं. मेरी सागर विधान सभा जहां का मैं प्रतिनिधित्व करता हूं वहां दो योजनाएं अमृत योजना के माध्यम से मिली थीं सीवरेज की और 24x7 वाटर सप्लाई की. हम लोग सोचते हैं कि यह इस वर्ष पूर्ण हो जायेगी. इस वर्ष पूर्ण हो जायेगी. 2016 से वह योजनाएं चल रही हैं 2019,2020 में उनको पूर्ण होना था. दो दर्जन बार उनको एक्सटेंशन दिया जा चुका है और पूरे शहर की सड़कें उसकी वजह से खुदी पड़ी हैं और मुझे कहते हुए बड़ी लज्जा आती है कि टाटा जैसी कंपनी वह हमारे यहां सागर में काम कर रही है लेकिन लोग टाटा के नाम से घबराने लगे हैं. वह कहते हैं कि यह कब टाटा कर लें और कब निकल जाएं पूरा शहर खुदा पड़ा है.

          श्री लखन घनघोरिया - है न यह दशा.यह व्यथा है न आपकी. आगे खुदा,पीछे खुदा.

दायें खुदा,बायें खुदा जहां आज न मिले वहां कल जाकर देखना वहां मिलेगा खुदा.

          श्री सचिन यादव -  सभापति जी, हमारे विधान सभा कसरावद में पिछले 6-7 साल से काम चल रहा है. किसी को नहीं पता कि क्या हो रहा है. यही हाल खरगौन का है.

          सभापति महोदय - कृपया सभी सहयोग करें.कृपया बैठें.

          श्री शैलेन्द्र कुमार जैन - यह पीड़ा मेरी भी है यह पीड़ा अनेक लोगों की हो सकती है. ऐसी कंपनियों के कामों की मानीटरिंग करके प्रदेश के किसी बड़े अफसर को भेजकर इनकी मानीटरिंग करके अगर ये करने की स्थिति में हों तो इनकी समय-सीमा निश्चित कर ली जाए या इनके काम को टर्मिनेट किया जाए उसका मूल्यांकन कर लिया जाए. यही हाल प्रधानमंत्री आवास योजना में जहां-जहां भी वे अपूर्ण स्थिति में हैं वहां पर उनका मूल्यांकन करके,ठेकेदार से बातचीत करके,समीक्षा करके माननीय सभापति महोदय, आपके माध्यम से मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि अनेक प्रोजेक्ट कंपलीट नहीं हो पाए हैं और जिन लोगों ने 50 हजार या  पूरे 2 लाख रुपये जमा कर दिये हैं वे बाट जोह रहे हैं कि हमें मकान मिल जाए और मकान मिलना अभी बहुत जल्दी मिलना संभव प्रतीत नहीं हो रहा है. इन दोनों तीनों योजनाओं पर माननीय मंत्री जी विशेष चिंता करेंगे. मैं सरकार को और माननीय मंत्री महोदय को इस बजट के लिये बधाई भी देता हूं. इस बजट का समर्थन भी करता हूं और जिस दिशा में वह हमारे शहरों के विकास के लिये ले जा रहे हैं मैं समझता हूं कि भूतो न भविष्यति,सम्माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी को पहले से ही इस विभाग का लंबे समय का अनुभव है. उनके लिये मैं कहना चाहता हूं कि "चले चलिये कि चलना ही दलीले कामयाबी है,चले चलिये कि चलना ही दलीले कामयाबी है जो थककर बैठ जाते हैं वह मंजिल पा नहीं पाते. आपने बोलने का अवसर दिया बहुत-बहुत धन्यवाद माननीय सभापति महोदय.

          सभापति महोदय - श्रीमती सेना महेश पटेल,श्री फूल सिंह बरैया          (अनुपस्थित)

          श्री दिनेश गुर्जर (मुरैना)-- माननीय सभापति महोदय, मैं मुरैना विधान सभा क्षेत्र से कुछ बातें माननीय मंत्री जी के सामने रखना चाहता हूं. अभी हाल ही में माननीय मुख्‍यमंत्री जी मुरैना गये थे उन्‍होंने घोषणा की है कि छोंगा नदी आसन पर बोर्ड क्‍लब और भव्‍य मनोरंजन पार्क बनाया जायेगा. मेरी मांग है कि उसको जल्‍दी बनाया जाये जिससे कि मुरैना शहरवासियों को एक मनोरंजन पार्क मिले, एक बोर्ड क्‍लब मिले, वहां के लोगों को सुविधा हो. दूसरा बानमोर नेशनल हाइवे बम्‍बई आगरा मार्ग पर आता है, प्रतिदिन वहां जाम लगा रहता है, लोगों को वहां परेशानी होती है. माननीय मंत्री जी से हमारा आग्रह है कि बानमोर शहर में फ्लाईओवर बनाया जाये जिससे कि वहां के बानमोर शहर के और नेशनल हाइवे के पूरे भारतवर्ष के जो लोग निकलते हैं, जो जाम का सामना करते हैं, उनको सुविधा हो, इसलिये बानमोर शहर में फ्लाईओवर बनाया जाये. एक फुटब्रिज बनाया जाये जिससे कि सड़क पार करने में बानमोर शहर के लोगों को सुविधा हो. माननीय मंत्री जी, आप बहुत वरिष्‍ठ मंत्री हैं, हम यह सोच रहे थे कि कैलाश विजयवर्गीय जी सदन में बैठेंगे हम लोगों को अनुभव मिलेगा, एक प्रेरणा मिलेगी और आपके आगे एक छोटा सदस्‍य कोई बात रख रहा है तो मेरी आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि आप उसको गंभीरता से सुन लें तो हमारा भी मनोबल बढ़ेगा कि हम अपनी बात को सदन में रखकर आये हैं, उस पर कोई काम होगा. मैं माननीय यह प्रार्थना करना चाहता हूँ पूरे भारतवर्ष के लोग मुम्‍बई आगर हाईवे से निकलते हैं और शहर में आये दिन जाम लगा रहता है और वहां फ्लाईओवर नहीं है, प्रतिदिन जाम लगता है और माननीय विधान सभा के अध्‍यक्ष महोदय जी भी ग्‍वालियर से मुरैना जब जाते हैं तो डेली जाम में फंसकर जाते हैं और मुरैना शहर में सीवर लाइन कई वार्डों में है जो देहात के वार्ड जोड़े गये हैं, कई वार्डों में सीवर लाइन नहीं है, पार्ट-2 सीवर लाइन मुरैना शहर में चालू की जाये और पुरानी जो सीवर लाइन डली हैं उनमें गुणवत्‍ता का ध्‍यान नहीं दिया गया जिसके कारण शहर की सीवर लाइनें चोक पड़ी हैं, गंदे पानी में से लोगों को निकलना पड़ता है. पानी की मुरैना शहर में निकासी की कोई व्‍यवस्‍था नहीं है. बड़े नाले नालियां शहर में देकर पानी की निकासी की जाये, सड़कें बनाई जायें, मुरैना शहर का जो हृदय स्‍थल और मुख्‍य बाजार है वार्ड नं. 23 में वहां सिकरवारी बाजार में, सदन बाजार में जो गंदी गलियां हैं, रेलवे स्‍टेशन के आसपास की जो गंदी गली हैं उनकी सफाई कराकर उनकी मरम्‍मत कराई जाये जिससे वहां के व्‍यापारियों को, वहां के नागरिकों को सुविधा हो सके.

          माननीय सभाप‍ति महोदय, वार्ड नं. 35 में अनुसूचित जाति क्षेत्र के लोग रहते हैं वहां पर विद्यालय था वह बंद हो गया है, वहां पर एक विद्यालय खोला जाये और एक मेरी करबद्ध प्रार्थना है माननीय मंत्री जी से कि जो प्रधानमंत्री जी की आवास योजना जो चल रही है हम लोगों को यही पता नहीं लगता कि किन लोगों को चयन करके, किन लोगों को आवास दिये जा रहे हैं. अगर हमको क्षेत्र के प्रतिनिधि होने के नाते एक कोई चयन समिति, आवास समिति जिला स्‍तर पर बनाई जाये जिसमें क्षेत्रीय प्रतिनिधि का होना आवश्‍यक कर दिया जाये जिससे कि उस प्रतिनिधि को यह पता लगे कि मेरी विधान सभा क्षेत्र में किसी गरीब आदमी को आवास योजना का लाभ मिला है. इसलिये विधायकों को वहां जिला स्‍तरीय समिति बनाकर उसमें डाला जाये और मेरा मुरैना का अनुभव है और माननीय मंत्री जी कभी मुरैना आयें तो कभी समय निकले तो मेरा आग्रह है कि वहां जो आवास बने हैं प्रधानमंत्री के जिन लोगों को दिये हैं उनके रहन सहन को देखकर, उनके गाड़ी घोड़ा देखकर आप खुद समझ जायेंगे कि मुरैना में जो प्रधानमंत्री आवास दिये गये हैं, वह किन लोगों को दिये गये हैं. इसलिये मैं चाहता हूं कि एक समिति का मध्‍यप्रदेश में गठन होकर प्रधानमंत्री आवास का वितरण किया जाये जिससे प्रतिनिधियों का भी सम्‍मान बढ़ेगा और अपने क्षेत्र के गरीब लोगों को आवास मिलने का लाभ होगा. बानमोर नगर पंचायत में लगभग कम से कम 7 वार्ड ऐसे हैं जहां आज भी सड़कें नहीं हैं, नाली नहीं हैं. मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि बानमोर नगर पंचायत के वार्डों में मुख्‍य मार्ग की जो मुख्‍य सड़कें हैं, नाली हैं उनको बनाया जाये जिससे बानमोर शहरवासियों को भी एक अच्‍छे वातावरण में रहने का अवसर मिले, यह मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूं.

          दूसरा माननीय मंत्री जी बामौर नगर पंचायत के जो सी.एम.ओ. हैं, उनके द्वारा  जो वहां टेंडर होकर सड़कें बनती हैं, वह किस क्‍वॉलिटी की बन रही हैं, उसकी क्‍या गुणवत्‍ता है? आप कोई जांच दल भेजकर जानकारी कर लें. वैसे ही बामौर शहर में विकास नहीं है ओर और जो अगर थोड़ी बहुत काम हो भी रहे हैं, तो उसमें लीपापोती के काम हो रहे हैं, कोई काम नहीं हो रहे हैं, इसलिए मैं प्रार्थना करता हूं कि जो काम एक वर्ष में बामौर नगर पंचायत में हुए हैं, उनकी गुणवत्‍ता की जांच कराई जाये, अगर उसमें गुणवत्‍ता में खराबी है, तो आप ठेकेदार के खिलाफ और सी.एम.ओ. के खिलाफ कार्यवाही करें, यह मेरा आपसे आग्रह है.

          सभापति महोदय, मेरी एक प्रार्थना यह है कि अभी हाल ही में जिला जो अस्‍पताल बने हैं, उनमें 500 रूपये का कमरा मिलने लगा है, तो जिस तरीके से उन गरीबों के लिये भारतीय जनता पार्टी की सरकार को सोचना चाहिए और जो वह दावे करती है और एक तरफ आप 500 रूपये पलंग के ले रहे हैं, कमरे के ले रहे हैं. सरकारी अस्‍पतालों में पर्चे के आप बीस-बीस रूपये ले रहे हैं. एक गरीब के पास बीस रूपये नहीं है, वह आपको 500-1000 रूपये किराया कहा से देगा. मैं आपसे यह प्रार्थना करना चाहता हूं कि यह जो नियम लागू किया गया है, इससे मुरैना जिले को बचाया जाये और उसमें मरीजों से जो राशि ली जा रही है, वह न ली जाये.

          सभापति महोदय, मुरैना शहर के अंदर मेडीकल कॉलेज की भी घोषणा हुई थी, जो आज तक पूरी नहीं हुर्इ है और मुरैना जिला अस्‍पताल में डॉक्‍टरों की बहुत कमी है. मैं माननीय मंत्री महोदय से और प्रभारी मंत्री से भी प्रार्थना करता हूं कि जिला अस्‍पताल में डॉक्‍टरों की पूर्ति की जाये. मैं माननीय मंत्री जी के ऊपर विश्‍वास रखता हूं कि हमारे क्षेत्र में विकास की ओर आप ध्‍यान देंगे और मुरैना नगर निगम के अंदर जो विकास के काम होने हैं, उनमें आप अलग से अतिरिक्‍त फंड देकर, एक अच्‍छे वातावरण में मुरैना के नागरिकों को रहने का आप अवसर देंगे. सभापति महोदय, आपने बोलने का मौका दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री हजारी लाल दांगी(खिलचीपुर) -- माननीय सभापति महोदय, नगरीय विकास की मांग संख्‍या -22 के पक्ष में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. माननीय सभापति महोदय, हमारे देश के सम्‍माननीय प्रधानमंत्री जी के आह्वान पर जो मध्‍यप्रदेश की सरकार के मुखिया माननीय डॉ.मोहन यादव जी और नगरीय प्रशासन के मंत्री माननीय श्री कैलाश विजयवर्गीय जी के नेतृत्‍व में जो काम स्‍वच्‍छ भारत मिशन के अंतर्गत मध्‍यप्रदेश में चला है, उसके अंतर्गत जो काम प्रदेश में हुआ है, वह स्‍मरणीय काम हुआ है, उसमें प्रदेश को स्‍वच्‍छता में सातवां राष्‍ट्रीय सम्‍मान प्राप्‍त हुआ है. इंदौर तो लगातार सात बार पुरस्‍कार प्राप्‍त कर चुका है.  

          सभापति महोदय, इसके अलावा उसका नीचे स्‍तर पर ग्रामीण क्षेत्र में और नगरीय क्षेत्र में छ: लाख परिवारों के व्‍यक्तिगत शौचालय और 22 हजार से अधिक सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण हुआ है, यह अपने मध्‍यप्रदेश के लिये बहुत बड़ी उपलब्धि है. आज मध्‍यप्रदेश में प्रधानमंत्री आवास के अंतर्गत छोटी से छोटी नगर पंचायत, बड़ी नगर निगम की बात तो अलग है, छोटी से छोटी नगर पंचायतों में भी जो प्रधानमंत्री आवास योजना में जो काम हुआ है, वास्‍तव में पूरे मध्‍यप्रदेश में आवास का जो लक्ष्‍य था, उससे ज्‍यादा आवास, आवास योजना में 9 लाख 45 हजार आवास स्‍वीकृत हुए हैं, जिसमें से 8 लाख 41 हजार आवास पूर्ण हो चुके हैं और बाकी का काम अभी चालू है. अभी स्‍वीकृत आवासों के लिये 10 वर्ष के लिये जो स्‍वीकृत हुए हैं, 23 हजार करोड़ रूपये अधिक अनुदान अभी दिया जा चुका है और वर्ष 2025-26 के लिये 436 करोड़ रूपये का प्रावधान अभी जो किया गया है, इसके अलावा जो नगरीय क्षेत्र में माननीय प्रधानमंत्री शहरी आवास जो योजना है, उसमें बहुत से लोगों को प्रधानमंत्री आवास का लाभ नहीं मिल रहा था, उसमें अभी सरकार के निर्णय के अनुसार उनको भू-अधिकार योजना के तहत पट्टे दिये जाकर, अभी जो पट्टे मध्‍यप्रदेश सरकार ने वितरित किये हैं, तो उसके तहत पट्टे दिये गये हैं. अभी आवास का सर्वे जो चल रहा है, उसमें ऐसे सारे गरीब हितग्राहियों के नाम जोड़कर और माननीय मुख्‍यमंत्री जी और नगरीय प्रशासन मंत्री जी ने जो गरीबों को सौगात दी है, वास्‍तव में गरीबों के घर बनने का काम अविस्‍मरणीय हुआ है.                                                                                      

          सभापति महोदय हजारीलाल जी संक्षिप्‍त करें. मुख्‍य बात रख दें.

श्री हजारीलाल दांगी जी, इसी तरह से देश के 413 नगरों में अमृत-2 योजना के अंतर्गत जो पूर्व के समय में छोटी छोटी नगर पंचायतों में एक हफ्ता दस दिस में गर्मी के समय में जो पानी मिलता था, उसके अंतर्गत अमृत-2 योजना में प्रत्‍येक नगर पंचायत में शुद्ध जल प्राप्‍त करने की जो योजना आई थी, उसके अंतर्गत छोटी से छोटी नगर पंचायत में भी पर्याप्‍त मात्रा में पानी मिलना प्रारंभ हो गया है और उसका ट्रीटमेंट प्‍लांट बनाकर के उसको शुद्ध करके भी पानी देने की योजना चालू है. इसी तरह से प्रधानमंत्री जी की कायाकल्‍प योजना में भी आज पूरे मप्र में इस योजना के तहत पूरे शहरी क्षेत्र की एक एक गली को सुन्‍दर बनाने के लिए सीसी रोड का निर्माण किया जा रहा है.

माननीय सभापति महोदय, नगरीय प्रशासन मंत्री जी के द्वारा एक बहुत अच्‍छी घोषणा की है कि पूरे नगरीय क्षेत्र, नगर पंचायतों में जो दस करोड़ रुपए गीता भवन के नाम से देने की घोषणा हुई है, उससे पूरे नगरीय क्षेत्र में खुशी की लहर है कि वास्‍तव में धार्मिक कार्य को ध्‍यान में रखा गया है. इसका जो काम होगा उससे सारी धार्मिक संस्‍थाएं जुड़ेगी, इसके लिए भी मैं नगरीय प्रशासन मंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूं.

एक निवेदन और है बड़े बड़े नगर निगम और उज्‍जैन में सिंहस्‍थ के लिए जो कार्यक्रम चालू किया है, पहले ऐसा नियम था कि 150 या 200 किलोमीटर तक जो नगर पंचायत आती उनमें भी विकास के लिए वहां सड़कें बस स्‍टैण्‍ड आदि इस तरह के निर्माण कराए जाते हैं, तो मेरा जीरापुर नगर पचांयत और छापेड़ा नगर पंचायत भी 130 किलोमीटर के अंदर आते हैं. ऐसी नगर पंचायत में हमारे आगर जिले की  आगर सुसनेर जीरापुर और नलखेड़ा और छापेड़ा भी उसी क्षेत्र में आती है तो वहां भी कार्य होना चाहिए. माननीय अध्‍यक्ष जी आपने समय दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद.

श्री उमाकांत शर्मा(सिरोंज) माननीय सभापति जी, आपका आभार व्‍यक्‍त करते हुए मैं संसदीय कार्यमंत्री, नगर विकास मंत्री का हृदय से धन्‍यवाद करता हूं कि मप्र के शहर जगमग हो रहे हैं, चकाचक, जोरदार, बेहतरीन, स्‍वच्‍छता में, निर्माण में, विकास में, देश में अग्रणण्‍य है और हमारे इंदौर, भोपाल सहित सभी नगरों का संपूर्ण दृष्टि से समग्र विकास के रूप में सर्वस्‍पर्शी विकास, सर्वव्‍यापी विकास, बगैर भेदभाव के विकास, प्रत्‍येक विधायक के क्षेत्र में विकास करने का जो कार्य किया है आदरणीय कैलाश जी संसदीय मंत्री महोदय और मुख्‍यमंत्री महोदय के लिए बार बार धन्‍यवाद देता हूं, अभिनंदन करता हूं सभापति जी.

अयोध्‍या, मथुरा, माया, कांशी, कांची, अवंतिका.

           पुरीवति चैव: सप्‍ततैते मोक्ष दायक:    

          यह पुरी, यह नगर, यह सिन्धु घाटी की सभ्यता हड़प्पाकाल से नदी के किनारे जो सभ्यताएं विकसित हुईं उन शहरों को, उन पुलों को, उन नगरों को, कैलाश जी एवं मोहन यादव जी देश के स्वच्छता में श्रेष्ठतम मापदण्ड स्थापित करने वाले हमारे प्रधानमंत्री महोदय के नेतृत्व में उत्कृष्ट कार्य करके उत्तम सेवा का काम जो आपने किया है उसके लिये मध्यप्रदेश शासन का, मुख्यमंत्री जी, आपका बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं. आपने शहरी ध्वनि प्रदूषण उसे भी खत्म कर दिया. इन्दौर जैसे स्वच्छ आदर्श शहर को देखकर लोग हमारे पुराने महापौर लंबे समय से शेखावत जी आपको बोलना पड़ता है कि कैलाश जी ने हमारे नगरीय विकास मंत्री जी ने स्वयं इन्दौर के विकास का मॉडल सारे देश के सामने रखा है, यह मध्यप्रदेश सरकार की उपलब्धि है. इसके साथ ही मैं धन्यवाद देना चाहता हूं संसदीय कार्य मंत्री के नाते भी माननीय अध्यक्ष महोदय को, माननीय सदस्यों को जो लोग भेदभाव का आरोप सदस्य लगा रहे हैं. सर्वाधिक विपक्ष को बोलने का मौका मिला है तो इस कार्यकाल में मैंने देखा है. इसके लिये संसदीय कार्य मंत्री जी तथा हमारे अध्यक्ष महोदय और हमारे उदार सबके हृदय सम्राट मनमोहक मुस्कान रखने वाले मोहन यादव जी को धन्यवाद देना चाहता हूं. आप लोग मुझे समझ में नहीं आता विनाशकाले विपरीत बुद्धि कांग्रेस मिट रही है, गायब हो रही है, ढूंढने पर भी नहीं मिल रही है.

          श्री सोहनलाल बाल्मीकऐसा लगा रहा है कि कैलाश जी को डांट रहे हैं.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)पंडित जी की हम डांट भी हम खा सकते हैं.

          सभापति महोदययह उनके प्यार करने का तरीका है.

          श्री उमाकांत शर्मासभापति महोदय, मेरे शहर में प्रधानमंत्री आवास जो स्वीकृत हुए हैं, बने हैं, आईये विपक्ष के मित्रों, नेता प्रतिपक्ष जी आप जो उखड़े उखड़े लगते हो, आपकी मैं उमंग और उत्साह कुछ बुझा बुझा सा लगता है. माननीय कटारे जी माननीय सदस्य जी कह रहे थे कि हमारे लिये भवन बनवाओ आपके संसदीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत विधान सभा का यह विषय भी आता है क्यों बनवाएं विधायकों का ठेका है क्या ? सांसदों का ठेका है क्या ? हमने राजनीति सेवा के लिये चुनी है. ‘’कौन बनाये घरोंदा हाथों चुन चुन माटी, ठाट फकीराना है अपना बाघम्बर सोहे अपने तन”’ हम अनिकेतन हम अनिकेतन’’. राजनीति सेवा के लिये की जा रही है और इसका आदर्श जिनके पास स्वयं का घर नहीं. हमारे प्रधानमंत्री स्वयं हमारे लिये, माननीय विधायकों के लिये, सांसदों के लिये ईमानदार से तनख्वाह लेना भी छोड़ रहे हैं.

          एक माननीय सदस्यआप भी पंडित जी तनख्वाह लेना छोड़ दो.

          श्री उमाकांत शर्माआज मैं भी तनख्वाह लेना छोड़ रहा हूं. मैं प्रधानमंत्री जी के, मुख्यमंत्री जी के राहत कोष में मैं अपना वेतन दूंगा और आप भी दें.

          श्री कैलाश विजयवर्गीयआप वेतन देंगे तो वो वेतन देंगे, यह पंडित जी हैं भईया. (हंसी)

          श्री उमाकांत शर्मासभापति महोदय, मैंने तनख्वाह छोड़ी सार्वजनिक परमपिता परमात्मा को लोकतंत्र के मंदिर में अपनी ओर से तनख्वाह भी नहीं लूंगा, यह संकल्प लेता हूं.

                                                                                     

          सभापति महोदय -- धन्‍यवाद उमाकांत जी. आपकी बात पूरी हो गई.

          श्री उमाकांत शर्मा -- सभापति महोदय, एक विषय और रख दूं. माननीय संसदीय कार्यमंत्री महोदय, नगरीय विकास मंत्री महोदय कल परसों हमारे कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता, मार्गदर्शक डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह जी गधों की चिंता कर रहे थे. उन्‍हें गधों की कम संख्‍या चिंतापरक लगी. जितने गधे चाहिए, मैं आपके लिए उपलब्‍ध करवा दूंगा. माननीय अध्‍यक्ष जी के माध्‍यम से मैा माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करता हॅूं कि आजकल कुत्‍ते बहुत बढ़ गए हैं और नगरों में रेबीज के इंजेक्‍शन की बहुत जरूरत पड़ रही है. इसलिए इसे गंभीरता से लें. मेरे जिले में 30-30, 40-40 इंजेक्‍शंस लग जाते हैं और सब लोग नेहरू गांधी परिवार से डरते हैं. माननीय पशुपालन मंत्री जी भी बैठे हैं.

          सभापति महोदय, मेरे क्षेत्र में शनिचरा नाला है जो सिरोंज के 10-12 वॉर्डों की समस्‍या है उसके निर्माण की मांग करता हॅूं. लटेरी में वॉर्ड नंबर-1 में भैया कॉलोनी गले-गले तक डूब जाती है. यह कांग्रेसियों की नगरपालिका के कारण है. इसलिए भांकानाला निर्माण करने की कृपा करें और सिरोंज का ऐतिहासिक तालाब है उसके जीर्णोद्धार, पुनर्रोद्धार करने का निवेदन करता हॅूं. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय का, माननीय वित्‍त मंत्री महोदय का, संसदीय कार्यमंत्री महोदय का और हमारे सभी भारतीय जनता पार्टी की केन्‍द्र और प्रदेश की सरकार का शहरों के उत्‍तम विकास के लिए छाती ठोककर धन्‍यवाद देता हॅूं, अभिनन्‍दन करता हॅूं.

          सभापति महोदय, कैलाश पर्वत पर आज तक कोई नहीं चढ़ सका. एवरेस्‍ट पर चढ़ गए लेकिन कैलाश ऐसे हैं जिन पर कोई सवारी नहीं कर सकता. सावधान, कैलाश जी से सावधान रहना. आज जिस प्रकार से ललकारने की भाषा माननीय विश्‍वास सारंग जी के प्रति, माननीय कैलाश जी के प्रति, मंत्रियों के प्रति नेता प्रतिपक्षी दल के द्वारा जिस प्रकार के शब्‍द डिबेट में प्रयोग किए गए, मैं उसकी निंदा करते हुए इस सरकार की सफलता की सीढ़ियों को बहुत अच्‍छे से प्राप्‍त करेंगे, बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हॅूं.

          श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा -- माननीय सभापति महोदय, बहुत सारी बातें आ चुकी हैं. जनप्रतिनिधियों के जीवन में तनाव से मुक्‍ति के लिए थोड़ा हास-परिहास आवश्‍यक है ही और इसलिए उमाकांत जी बहुत अच्‍छा बोले, हमारे वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत -- अच्‍छा बोले, लेकिन अंत में जो बोल गए कि कैलाश जी से सावधान रहिए. ऐसा क्‍यों बोले. कैलाश जी से सावधान रहने के लिए क्‍यों बोले. बाकी सब तो अच्‍छा बोले.(हंसी)

          श्री उमाकांत शर्मा -- जो बोलेंगे, जोर से बोलेंगे..(हंसी)..

          सभापति महोदय -- आशीष जी, गागर में सागर कर दें. काफी समय हो गया है.

          श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा (खातेगांव) -- जी सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 22 एवं 28 का समर्थन करता हॅूं. भारत में पिछले 90 के दशक में नगरीकरण बहुत तेजी के साथ हुआ. क्‍योंकि गांवों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव होने के कारण बड़ी संख्‍या में रोजगार, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य के लिए लोगों ने शहरों की ओर पलायन किया. इसका परिणाम यह हुआ कि नगरों का विकास असंयमित हो गया. लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद माननीय प्रधानमंत्री जी के विज़न के अनुरूप पूरे भारतवर्ष में स्‍मार्ट सिटी बनायी जाने लगीं. मेट्रो रेल परियोजनाओं का काम नागपुर, भोपाल, इंदौर जैसे छोटे-छोटे नगरों में प्रारंभ हुआ और मुझे इस बात का गर्व है कि जिन्‍होंने सर्वश्रेष्‍ठ महापौर के रूप में पूरे भारतवर्ष में अपनी पहचान बनायी. एक पार्षद जो कि नगरीय निकाय की एक सबसे छोटी इकाई होती है. जिसके पास अनुभव पर्याप्त होता है, उन्होंने इंदौर में पितृ पर्वत, रिंग रोड चाहे गरीबों को निःशुल्क भोजन कराने के लिए अन्नम रक्षाम जैसी योजनाएं चलाईं. ऐसे श्री कैलाश विजयवर्गीय जी के हाथों में नगरीय विकास की बागडोर है, चाहे पीडब्ल्यूडी विभाग उनके पास में रहा हो, उन्होंने सभी विभागों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है, इसलिए मध्यप्रदेश के नगरों का समग्र विकास हो सके, इसकी पूर्ण संभावना है.

          सभापति महोदय, नगर पंचायत हो, नगर पालिकाएं हों, नगर निगम हों इन सबमें स्वच्छता को लेकर  ललक देखी जा सकती है. बुलंदियों पर पहुंचना कमाल है लेकिन  बुलंदियों पर ठहरना बड़ी बात हुआ करती है. लगातार 7 वर्षों तक इंदौर स्वच्छता में नंबर वन, भोपाल जैसे शहर, जबलपुर जैसे शहर ये भी स्वच्छता की प्रतिस्पर्धा में अच्छा काम कर रहे हैं. एक समय में कचरे के निपटाने की व्यवस्थाएं, कालोनियों में, मोहल्लों में नहीं हुआ करती थीं, लेकिन आज हर सुबह हम सबको एक आवाज सुनाती है गाड़ी वाला आया, घर से कचरा निकाल. इतनी बड़ी संख्या में वाहन नगरीय निकायों को सरकार ने प्रदान किये हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि स्वच्छता एक जुनून बन गया है.

          सभापति महोदय, आम नागरिकों की जब तक सहभागिता नहीं होती चाहे पेयजल के संरक्षण में, चाहे स्वच्छता में तब तक यह अभियान सफल नहीं होते. इंदौर जैसे शहरों में जहां पानी के लिए हम देखते थे. बड़े बड़े टैंकर इनके फोटो अखबारों के फ्रंट पर छपते थे. आज नर्मदा जी के तृतीय चरण के आने के बाद कई सारे नगरों में पेयजल की समस्या का समुचित समाधान हुआ है. सबसे बड़ी बात है कि इंदौर और भोपाल ने प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर जो मल्टियां बनाई गई हैं. बड़ी बड़ी बहुमंजिला इमारतें बनाई गई हैं उससे जगह का सदुपयोग भी हुआ है और एक साथ एक मल्टी में रहने से अलग-अलग जाति अलग-अलग सम्प्रदाय में रहने वाले लोगों में भी एकता के परिचायक के रूप में  हमें देखने के लिए मिला है, इसलिए नगर निगमों में चाहे छोटी छोटी नगर पंचायतें, नगर पालिकाएं हों, कम जगहों पर भी बड़ी 2 मंजिला, 4 मंजिला, 5 मंजिला, प्रधानमंत्री आवास के स्ट्रक्चर बनाये जाकर जगह की समस्या का समाधान किया जा सकता है.

          सभापति महोदय, अमृत योजना हो, अमृत-2 हो, या कायाकल्प अभियान हो. नगर निकायों की सबसे मूलभूत जो आवश्यकताएं होती थीं. नाली का निर्माण, नाले का निर्माण, स्ट्रीट लाइट का विकास, बगीचों का विकास, फुटपाथ का विकास, इन सबके लिए बहुत सुगमता के साथ आज धनराशि मिल रही है. केन्द्र सरकार को भी धन्यवाद देता हूं. माननीय मुख्यमंत्री जी को, माननीय विभाग के मंत्री आदरणीय श्री कैलाश जी को धन्यवाद देता हूं. इसके कारण नगर निकायों के कारण जो कभी कभी वेतन भी बांट नहीं पाते थे. आज उनकी आबादी के अनुरूप 1 लाख से अधिक जनसंख्या वाले शहर  और उससे कम जनसंख्या वाले शहरों को उनकी आबादी के अनुरूप राशि दी जाने लगी है.

          सभापति महोदय, आश्रय स्थल नगर निकायों ने बनाये हैं. 51 जिलों में हमारे आश्रय स्थल चल रहे हैं. रेन बेसरा जिसे कहा जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों में अपने काम के लिए, इलाज के लिए जो लोग आते हैं. उनको निःशुल्क ठहरने की अच्छी व्यवस्था है. इन निकायों में यह अच्छे से संचालित की जा रही है. दीनदयाल रसोई एक सरकार की बहुत संवेदनापूर्ण योजना है. गरीब व्यक्ति को मात्र 5 रुपये में चलित रसोई के माध्यम से भी भोजन दिया जा रहा है और सरकार इन दीनदयाल रसोई का संचालन आज भी बहुत अच्छे से कर रही है, इसके लिए मैं धन्यवाद देता हूं.

          पीएम स्वनिधि योजना जिसके बारे में बहुत कहा गया है. कोरोना का संकट हम सबने देखा जब लोगों के छोटे मोटे रोजगार भी बंद हो गये थे. लेकिन पीएम स्वनिधि योजना और सरकार के द्वारा हमारे खातों में 500-500 रुपये की जो राशि डाली गई, उसके माध्यम से कोरोना का संकट टला. आज 10 हजार, 20 हजार, 50 हजार रुपये की जो राशि लोगों को दी गई है, उसके माध्यम से भारत में मध्यप्रदेश नंबर वन पर इस योजना के संचालन में आया है. आने वाले समय में स्वच्छ, सुंदर मध्यप्रदेश बने, इसके लिए स्मार्ट सिटी की अवधारणा को और आगे बढ़ाने की आवश्कता है. आदरणीय श्री कैलाश जी ने इंदौर को हरा-भरा बनाने के लिए 50 लाख से अधिक पौधों का जो रोपण किया है, वह हम सबके लिए अनुकरणीय है. उन्हीं के अनुकरण को करते हुए हम लोगों ने भी अपने यहां पर पितृ पर्वत की अवधारणा को विकसित करने का प्रयास किया है. फुटपाथ के आसपास हरे-भरे वृक्ष लगाने का काम किया है. इसलिए मैं आदरणीय मंत्री जी को माननीय मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देता हूं. नगरीय विकास की अवधारणा को मूर्तरूप देते हुए वर्ष 2047 के भारत में मध्यप्रदेश के नगर भी अग्रणी स्थान पाएं, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ धन्यवाद.

                                                                                     

8.20 बजे       { अध्‍यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

          श्री देवेन्‍द्र रामनारायण सखवार( अम्‍बाह)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या 22 नगरीय विकास एवं आवास पर बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. मेरी विधान सभा में एक बहुत बड़ी समस्‍या जल भराव की है. मेरी विधान सभा में दो नगर पालिकाएं हैं, एक अम्‍बाह और एक पोरसा, दोनों नगरीय क्षेत्रों के वार्डों में आये दिन जल भराव की समस्‍या रहती है, जिसकी वजह से कई मकान गिर गये हैं. यह बहुत बड़ा समस्‍या है. मैं सरकार से मांग करता हूं कि इस समस्‍या से निपटने के लिये दोनों शहरी और नगरीय क्षेत्र में सीवेज़ की व्‍यवस्‍था देने की कृपा करें. जिससे मेरी विधान सभा के दोनों नगरीय क्षेत्र के लोगों को बहुत बड़ी मदद मिलेगी. दूसरा, नगरीय क्षेत्र के लोगों को गंदगी से निजात मिलेगी.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा में एक समस्‍या और है, वह है मेरी विधान सभा के दोनों नगरीय क्षेत्र में बस स्‍टैंड नहीं हैं, जो बसें यात्रियों को लेने के लिये आती हैं वह बीच रोड में बस खड़ी करके यात्रियों को बैठाते हैं. जिसकी वजह से आये दिन रोडों पर जाम लगा रहता है. मैं इसके लिये सरकार से मांग करता हूं कि दोनों नगरीय क्षेत्रों में बस स्‍टैंड बनाने की कृपा करें, जिससे जाम की जो स्थिति बनती है, वह ना बने और अंत में मैं, शहरी विकास के लिये नगर परिषद पंचायत, नगर पालिका एवं नगर निगम क्षेत्रों में आमजन की समस्‍याओं के समाधान एवं विकास हेतु कहना चाहता हूं कि नगरीय क्षेत्रों में प्रत्‍येक माह बैठक करायी जाये, जिसमें विधायकों को अनिवार्य रूप से बुलाया जाये, जिससे शहरी क्षेत्र के लोगों को लाभ होगा.

          कपया इस संबंध में नगर पंचायत परिषद, नगर पालिकाओं और नगर निगमों में निेर्देश जारी करने का कष्‍ट करें. मुझे आपने बोलने का मौका दिया उसके लिये आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री रामनिवास शाह (सिंगरौली)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनिट का समय चाहता हूं कि सिंगरौली विधान सभा में, सिंगरौली जिले में मध्‍यप्रदेश सरकार की और से नया शहर बसाने के लिये जो बजट में प्रस्‍ताव लाया गया है, उसके लिये धन्‍यवाद ज्ञापित करने के लिये उपस्थित हुआ हूं. हममें और वहां की जनता में चिंताएं थीं. वहां पर11 कोयला खदानें 11 मिलियन टन कोयले का उत्‍पादन करती हैं. वहीं 12 हजार मेगावाट से ऊपर विद्युत का उत्‍पादन भी करते हैं और रोज प्रदूषण से हमारा शहर भरा रहता था. एक नया शहर बनाने के लिये, नया नगर बसाने के लिये जहां सारी सुविधायुक्‍त पढ़ाई, लिखाई, दवाई और खेदकूद जैसी सभी चीजें हमको उपलब्‍ध होंगी. इस नाते हमारी समस्‍या य‍ह थी कि जहां 50 हजार परिवार एन.सी.एल. की ओर से विस्‍थापित हो रहे थे. 10 हजार घर वहां से उजड़ रहे थे तो हमारी चिंता बिना कहे, बिना मांगे आपने हमारे क्षेत्र की समस्‍या को समझते हुए, माननीय नगरीय आवास एवं विकास मंत्री जी और प्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍य मंत्री जी ने नया शहर बसाने के लिये इस बजट में सिंगरौली को लिया है. हम सिंगरौली विधान सभा और सिंगरौली जिले के सभी विधायकों की ओर से मध्‍य प्रदेश सरकार के मुख्‍य मंत्री डॉ. मोहन यादव जी को और माननीय नगरीय आवास एवं विकास मंत्री जी का बहुत-बहुत धन्‍यवाद ज्ञापित करता हूं. आपने बोलने के लिये समय दिया उसके लिये धन्‍यवाद.

          श्री माधवसिंह(मधु गहलोत) (आगर)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मांग संख्‍या- 22 के पक्ष में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि मध्‍य प्रदेश की सरकार को और नगरीय प्रशासन मंत्री, आदरणी कैलाश विजयवर्गीय जी को. डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में जो बजट पेश किया गया है नगर पालिका, नगर परिषद इन क्षेत्रों के लिये, पर्याप्‍त बजट दिया गया है. मैं ज्‍यादा बात ना करते हुए क्‍योंकि बहुत समय हो गया है. मैं मुद्दे की बात करता हूं. मेरे क्षेत्र की बात करता हूं. मेरे क्षेत्र के अंदर नगर पालिका आगर आता है, नगर परिषद बड़ौद आता है और नगर परिषद कानड़ आता है. नगर परिषद कानड़ में 15 वार्ड हैं,  जहां सी.सी. रोड का काम बा‍की हैं, उन्‍हें कराने का काम करें. वहां पर आप सौंदर्यीकरण कराने का काम करें. वहां के लिये विशेष निधि देने का काम करें. यही समस्‍या बड़ौद में भी है, उसके लिये भी विशेष निधि देने का काम करें और क्षेत्र का विकास करें. नगर पालिका आगर के अंदर पेयजल की बहुत ज्‍यादा समस्‍या है. मेरे ही नगर पालिका क्षेत्र से कुंडलिया डेम की एक लाईन निकली हुई है, सिर्फ उसमें पानी के पाइप  को जोड़ने  का काम  अगर हो जाता है, तो टेंकरों से पानी लाने में जो हमको अभी असुविधा हो रही है,  उससे हमें सुविधा मिल  जायेगी और अभी गर्मी का टाइम चल रहा है, तो  मैं निवेदन करना चाहता हूं कि  इसे जोड़ने का काम करें.  मेरे क्षेत्र के अंदर, मेरी  नगरपालिका के अंदर सभी लोगों का आना जाना लगा रहता है.  मां बगलामुखी  के दर्शन के लिये  आते हैं लोग.  महाकाल लोक के  दर्शन के  लिये आते हैं, तो विशेष पैकेज देने का काम करें,  ताकि हम क्षेत्र का विकास करें और  वह नगर पालिका,  नगर पंचायत  लगे कि हम किसी शहर के  अंदर से गुजर रहे हैं.  मैं डॉ. मोहन यादव जी की सरकार  को  धन्यवाद देना चाहता हूं,  उनके नेतृत्व में  इन्दौर में अभी, संसदीय कार्य मंत्री, कैलाश विजयवर्गीय जी  ने  एक रिकार्ड कायम करने का काम किया है पर्यावरण के क्षेत्र में.  50 लाख पौधे  उन्होंने लगाये. उसी प्रेरणा से  पूरे मध्यप्रदेश के अन्दर डॉ. मोहन यादव जी की सरकार   में सभी जन प्रतिनिधियों  ने करोड़ों करोड़ पौधे लगाने का  काम  किया.  ऐसी सरकार को मैं धन्यवाद देता हूं.  प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी जी ने  जब  आव्हान किया कि सफाई करना है, तो  सिर्फ इन्दौर  ने उस पर ध्यान दिया  और आज  इन्दौर 7 बार  भी  नम्बर वन की पोजीशन पर है.  मेरा निवेदन है कि इस बार हमारी नगर परिषद्,  नगर पंचायत, नगर पालिकाएं नम्बर वन  की पोजीशन हासिल करेगी मध्यप्रदेश में, यह  आप थोड़ा सा हम लोगों को वहां पर संसाधन जुटाने  का काम करें. हमारे पास सफाई के संसाधन, गाड़ियां इन सबकी कमियां हैं, तो इस ओर भी ध्यान दें.  मंत्री जी  भी सदन में  आ चुके हैं.  मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने नगर पंचायत, नगर पालिकाओं में  अभी जो  हमारे यहां  राशि दी है,  उससे काम अच्छे चल रहे हैं, पर मेरा आपसे निवेदन है कि  जब जब  मंत्री जी को कोई काम दिया गया है,  उन्होंने इतिहास रचने का काम किया है. तो  मैं उनसे निवेदन करना चाहता हूं कि मेरी नगर पालिका, नगर  परिषद् भी इतिहास  रचने  का काम करेगी, पर थोड़ी सी दया दृष्टि  उस  नगर पालिका और नगर पंचायत पर रहे.  मैं पुनः आपसे एक निवेदन करना चाहता हूं कि  एक कुण्डालिया डैम से  मेरी दो नगर परिषद्  और एक नगर पालिका को पानी की लाइन से जोड़ने  की कृपा करें. जय हिन्द, जय भारत.   आपने मुझे बोलने का  अवसर दिया, बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्री महेन्द्र नागेश (गोटेगांव)अध्यक्ष महोदय,  मैं मांग संख्या 22  नगरीय  विकास एवं आवास  के समर्थन में  खड़ा हुआ है. देश में पहली बार माननीय प्रधानमंत्री, नरेन्द्र मोदी  जी ने  शहरी क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास देकर शहर के निवासियों के मकान  बनवाकर बहुत बड़ा बड़ा  कार्य किया है.  पुनः इसका सर्वे भी चल रहा है ,जो छूटे हैं, उनको भी लाभ  मिलेगा. स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत  शहरी क्षेत्र में  सार्वजनिक शौचालय  एवं   व्यक्तिगत शौचालय बनवाकर भी वहां के निवासियों को सुविधायें  दी जा रही हैं.  नगरीय निकाय में प्रति दिन वाहनों से कचरा  उठवाकर,  सफाई करवाकर   नागरिकों को सुविधायें दी जा रही हैं.  प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत  बेरोजगारों को भी   आजीविका चलाने केलिये  उनको राशि दी जा रही है.  ठण्ड के समय में हमारी सरकार  के माध्यम से  बचाव  हेतु  अलाव की व्यवस्था की जाती है.  आश्रय  स्थल भी बनवाये जा रहे हैं.  शहरी क्षेत्र में रोड्स, नाली  भी बनवायी जा रही हैं. हमारी सरकार ने अवैध कालोनियों  को  वैध करवाकर  वहां के निवासियों  को सुविधायें प्रदान की जा रही हैं. हमारी सरकार में शहरी एवं ग्रामीण  क्षेत्र में  घर घर नल जल योजना के माध्यम से जल पहुंचाया जा रहा है. कई स्थानों में तो मां नर्मदा  जी का जल भी  उपयोग किया जा रहा है.  नगरीय क्षेत्र में सभी इलेक्ट्रिक पोलों पर लाइट लगवाकर लोगों को सुविधायें दी जा रही हैं.  तालाबों का सौंदर्यीकरण करवाकर सुविधायें दी जा रही हैं.  बस स्टाप बनवाये जा रहे हैं. पार्क बनवाये जा रहे हैं. नगर में स्टेडियम बनवाये जा रहे हैं.  अधोसंरचना मद से भी सभी विकास कार्य करवाये जा रहे हैं.  नगरीय क्षेत्र में एक पेड़ मां के नाम  का भी अभियान चलाया है. तालाब, नदी, बावड़ी को पुनः जीवित करने हेतु गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य करवाये जा रहे हैं.  शहरी क्षेत्र में  दुकानें खुलवाकर बेरोजगारों को दुकानें उपलब्ध करवाई जा रही हैं.  प्रधानमंत्री अमृत  भारत स्टेशन के माध्यम से बहुत बड़ा  काम हो रहा है.    नगर में तालाबों का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है.  हमारी सरकार   में सफाई कर्मचारियों को भी सम्मान दिया जा रहा है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय मैं कहना चाहता हूं कि हमारी गाड़ी में यदि स्टेपनी होती है तो हमें उसका उपयोग आड़े समय में  करना होता है. मंत्री जी से अनुरोध है सभी नगर पालिका में गढ्डे में मोटर डली है लेकिन जब वह मोटर जल जाती है तो कई दिनों तक पानी नहीं मिल पाता है जिससे टेंकरों में पानी पहुंचाया जाता है मोटरें जलने के कारण टेंकरों में पानी नहीं पहुंच पाता है, पानी की समस्या खड़ी हो जाती है इसलिये मेरा आपसे अनुरोध है कि ऐसे निर्देश जारी करें कि जिससे सभी नगर पालिका को जहां 5 हार्स पावर या 10 हार्स पावर की मोटरे हैं जब वह किसी कारण से खराब हो जाये तो स्टेपनी के रूप में रखी दूसरी मोटर का तत्काल उपयोग कर सकें इसलिये वहा पर मोटरें एक्सट्रा रखें.माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा गोटेगांव है नगर पालिका परिषद् है, 2020 में कांग्रेस की परिषद थी जिसने टैक्स बढाया है  उस टैक्स से लोगों को बहुत असुविधा हो रही है, लोग टैक्स नहीं दे पा रहे हैं इस संबंध में हम स्वयं माननीय मंत्री जी से मिले थे और उनको एक आवेदन दिया था और पुन: नगर पालिका 2024 में नगर पालिका परिषद ने एक प्रस्ताव  पास किया है इसलिये अनुरोध है कि नगर पालिका परिषद गोटेगांव के टैक्स कम हो जाये जिससे लोगों को जनता को सुविधा मिल सके.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, एक ओर निवेदन करना चाहते हैं कि गोटेगांव नगर पालिका परिषद में तीन ग्राम पंचायते हैं, गोटेगांव खेडा, कुम्हड़ा खेडा और बगलई उजर आदि हम लोगों ने प्रस्ताव पारित किये हैं उसको नगर में सम्मलित किया जाये जिससे बड़ी नगर पालिका बन जाये जिससे कि आने वाले समय में लोगों को सुविधा मिल सके.अध्यक्ष महोदय, अंत में कहना चाहता हूं कि आपको माननीय मुख्यंत्री जी, माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी को धन्यवाद देना चाहता हूं जिनके कारण हमें यहां पर बोलने का अवसर मिला है , आप सभी का सहयोग इसी तरह मिलता रहे जिससे हम आपके आशीर्वाद और सहयोग से विकास के लिये क्षेत्र की बात रख सकें. अध्यक्ष जी धन्यवाद.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, पहली बार के ये विधायक हैं इन्होंने कांग्रेस के बड़े  नेता को हराया है.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार )-- माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत अच्छी चर्चा हो रही थी मैं शार्ट में बोलना चाहूंगा क्योंकि ज्यादा समय कैलाश जी को देना चाहते है कि बड़े विकास की बात कर रहे थे. अध्यक्ष जी, मैं संसदीय कार्य मंत्री जी से एक बात ओर कहना चाहता हूं कि माननीय उमाकांत शर्मा जी की सिरोंज विधानसभा का आप जरूर ध्यान रखना क्योंकि सबसे ज्यादा उन्होंने तारीख की है, इसलिये बजट उनके क्षेत्र में जरूर जाना चाहिये, हमें मिले या न मिले.क्योंकि  आपने कह तो दिया था कि बजट पास करा दो तो हम आपको भी पैसे दे देंगे लेकिन मुझे लगता है कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है. अगर आपने सदन में बोला है तो आपकी भावना का मैं सम्मान करूंगा , मेरे पक्ष के पूरे विधायक आपका सम्मान करेंगे यदि आप पैसा दिलवा पाये तो.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश में स्मार्ट सिटी को लेकर के करोड़ो रूपये दिये गये. मैं ग्वालियर गया , मैहर गया, खण्डवा गया, सागर गया, वहां क्या स्थिति है .मैं समझता हूं कि इस पर सरकार को विचार करना चाहिये क्योंकि स्मार्ट सिटी एक महत्वपूर्ण योजना थी आज उसकी क्या स्थिति हो गई है ?क्यों वहां पर शहरों में सड़के खुदी हुई पड़ी हैं ? क्यों ठेकेदार काम नहीं कर पा रहे हैं ?इस पर सरकार को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, यूनियन कार्बाइड का कचरा भोपाल से पीथमपुर भिजवा दिया जो भी कारण रहे हैं यह तो सरकार जाने लेकिन मैं चाहता हूं कि जब आप इस पर इतना खर्चा कर रहे हो तो इस कचरे को विदेश में जाकर के डिस्पोज कराते. वहां भी सुविधायें हैं क्यों आप पीथमपुर में कचरा नष्ट करना चाहते हैं. इस पर भी सरकार को विचार करना चाहिये. एक महत्वपूर्ण बात और कहना चाहता हूं कि मेट्रो को लेकर के सरकार ने न राज्यपाल महोदय के अभिभाषण में कुछ कहा, न वित्त मंत्री जी के भाषण में बात थी, न ही मुख्यमंत्री जी के सदन में दिये गये भाषण में इसकी बात थी. मैं चाहूंगा कि इंदौर और भोपाल में मेट्रो का प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा इसके लिये सरकार की प्राथमिकता होना चाहिये. यह एक बड़ी सौगात थी और माननीय कमलनाथ जी के समय में यह चालू हुई थी, श्रेय आप लीजिये हम आपको देना चाहेंगे लेकिन यह मेट्रो चालू कब होगी यह आप अपने उत्तर में जरूर बतायें.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, एक महत्वपूर्ण बात के बारे में कहना चाहूंगा आप भी उस समय थे मुख्यमंत्री जी ने कहा था कि 15 करोड़ रूपये क्षेत्र में विकास हेतु देने की बात हुई तो देखने में आया है कि सत्ता पक्ष के कई सदस्यों के यहां 15 करोड़ रूपये मिल गये हैं, कईयों को मिल गये हैं, हम मुख्यमंत्री जी के पास में गये भी उन्होंने कहा कि आपको भी 5 करोड़ रूपये देंगे तो हमने अपने लिये पैसा थोड़े ही मांगा था, हमने तो जनता के लिये पैसा मांगा था, क्षेत्र के विकास के लिये मांगा, डीपी के लिये मांगा, सड़क के लिये मांगा, स्कूल के लिये मांगा, अस्पताल के लिये मांगा. बड़ी शर्म की बात है कि इस प्रकार से दो नजरियों से सरकार देखती है. इस प्रकार का भेदभाव मुझे समझ में नहीं आता. ढाई करोड़ तो विकास निधि है लेकिन मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि ढाई करोड़ की विकास निधि में होता क्‍या है. अगर 5 लाख का किसी को सीमेंट कांक्रीट रोड भी दें तो मेरे ख्‍याल से 50 जगह ढाई करोड़ रुपये वहां खर्च हो जाएंगे और हर विधान सभा में लगभग 300-350 पोलिंग हैं. गांव, पोलिंग, उसके नीचे फलिये हैं, उसके नीचे मजरे हैं. ऐसे ही शहरी क्षेत्र में हैं. ऊंट के मुंह में जीरा. आप एक मुट्ठी से बोलते हैं कि एक विधायक विकास करे. एक मुट्ठी अनाज आप एक व्‍यक्‍ित को खिला सकते हैं पूरे विधान सभा के क्षेत्र का विकास नहीं हो सकता है. एक तरफ सरकार अपनी सरकारी योजनाओं में करोड़ों रुपये तालाब, सड़क के नाम से देती है. फिर आप बोलते हैं कि भ्रष्‍टाचार हो रहा है. कैग की रिपोर्ट में आता है कि करोड़ों के भ्रष्‍टाचार हो रहे हैं. सड़क में हो रहे हैं, प्रधानमंत्री सड़क में हो रहे हैं. विधायक अगर सत्‍ता पक्ष का या विपक्ष का विकास कराना चाहता है तो आप उसको क्‍यों नहीं देना चाहते हैं. एक सरपंच को एक पंचायत में 25 से 50 लाख रुपये डायरेक्‍ट मिल जाते हैं लेकिन विधायक को ढाई करोड़. कई विधायक साथी 40 परसेंट कई बार चुनाव जीतकर नहीं आते. उसके पीछे मूल कारण यह है कि वह विधायक तो बन गया लेकिन विकास के लिये पैसा नहीं है. अपने क्षेत्र में विकास नहीं कर सकता है. लोग बोलते हैं कि हमारे यहां तालाब नहीं आया, सड़क नहीं आई, विधायक जी बोल गये थे, डीपी, ट्रांसफार्मर की बात कर गये थे, स्‍कूल की बात कर गये थे, आंगनवाड़ी की बात कर गये थे, नलजल की बात कर गये थे, लेकिन नहीं हुआ. लोकतंत्र में यह कैसी व्‍यवस्‍था है. क्षेत्र में जनता काम चाहती है. क्‍या हम यहां पर सिर्फ नियम और कानून बनाने आते हैं. सिर्फ विधेयक और विनियोग की बात करने आते हैं. क्‍या हम विकास की बात करना नहीं चाहते. क्‍या विकास के लिये सरकार पैसा नहीं देना चाहती.

          अध्‍यक्ष महोदय, इस लोकतंत्र की व्‍यवस्‍था को मजबूत करने के लिये मैं सोचता हूं कि इसमें पार्टी से ऊपर उठकर और निष्‍पक्ष रूप से 230 विधायकों की बात होना चाहिये. कम से कम 5 करोड़ रुपये आपको एक विधान सभा में देना चाहिये. ढाई करोड़ रुपये आप दे रहे हैं. अब आप 600 करोड़ रुपये ऐसे ही खर्च कर रहे हैं. पूरे प्रदेश में 1,100 करोड़ का बजट है, 600 करोड़ और खर्च कर दिया. जीआईएस हुई 500-600 करोड़ रुपये खर्च कर दिये, लेकिन विधायक के लिये, विकास के लिये, जनता के कामों के लिये आपके पास पैसा नहीं है. (मेजों की थपथपाहट) साढ़े तीन सौ, चार सौ करोड़ रुपये आप पौधारोपण में खर्च कर रहे हैं. पहले कर चुके, फिर नर्मदा 2 घोटाला आने वाला है. आपके पास विकास के लिये, विधायक के लिये पैसे नहीं हैं. विज्ञापनों में बड़े-बड़े ब्रांडिंग करने में 600 करोड़ रुपये का अभी बजट आ रहा है. उसमें आप खर्च कर रहे हैं लेकिन विधायक के लिये, विकास के लिये, सड़क के लिये, पानी के लिये, बिजली के लिये उस विधायक के पास पैसा नहीं है. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहता हूं कि यह एक बड़ा संवेदनशील मुद्दा है चूंकि पूरे विधायक हैं. सब अपने क्षेत्र में काम कराना चाहते हैं तो इस पर एक नीतिगत निर्णय होना चाहिये. अगर नहीं होगा तो हम सब यहां पर जितने भी विधायक हैं अपनी अंतर्रात्‍मा से पूछेंगे क्‍योंकि आपको चुनाव भी लड़ना है और आपने क्‍या वायदे क्षेत्र में किये थे जनता को जवाब देने के लिये. क्‍या हम जनता से आंखें मिला पाएंगे. क्‍या जनता के हम विकास पूरे कर पाएंगे. क्‍या उनके सपने पूरे कर पाएंगे. इस बात को लेकर हमें सोचना चाहिये. मैं यही कहता हूं कि एक नीतिगत इस पर भी विचार होना चाहिये और यह चूंकि विधायक निधि वाला मामला है, विधायकों से संबंधित है, इस पर अध्‍यक्ष महोदय, आपका भी विशेषाधिकार रहता है. इस पर भी आपको विचार करना चाहिये. धन्‍यवाद. (मेजों की थपथपाहट)

            नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले हमारे माननीय सदस्य जिन्होंने इस चर्चा में भाग लिया. माननीय पंकज उपाध्याय जी, सबनानी जी, लखन घनघोरिया जी,  शैलेन्द्र जैन जी, दिनेश गुर्जर जी, हजारीलाल दांगी जी, उमाकांत जी, आशीष शर्मा जी, देवेन्द्र जी, रामनिवास शाह जी, मधु गेहलोत जी, महेन्द्र नागेश जी और अंत में हमारे विपक्ष के नेता उमंग सिंघार जी.

          अध्यक्ष महोदय, मैं सभी को दिल की गहराइयों से धन्यवाद देना चाहता हूँ. बहुत मूल्यवान सुझाव आपके आए हैं. निश्चित रुप से मेरा विभाग उस पर अध्ययन करेगा और जो मानने वाले होंगे हम उनका अनुपालन निश्चित रुप से करेंगे.

          अध्यक्ष महोदय, मैं उमंग जी की बात से ही शुरुआत करना चाहता हूँ. उन्होंने कहा कि यूनियन कार्बाइड का कचरा पीथमपुर में जल रहा है. यह बात सही है कि मैं भी पहले उसका विरोध कर रहा था. मैंने भी माननीय मुख्य सचिव से कहा था कि मैं इससे सहमत नहीं हूँ. जब मैं असहमत था उस समय जो साइंटिस्ट हैं उनके साथ सभी लोगों की बैठक हुई. उन्होंने पूरे कचरे के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा कि अभी हाई कोर्ट के निर्देश पर थोड़ा-थोड़ा कचरा, लगभग 10 टन जलाया जा रहा है. उससे निकलने वाली गैस, उससे निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक एनालिसिस होगा. उसमें जरा सा भी जहरीला पार्ट होगा तो हम उस पर पुनर्विचार करेंगे. जो 10 टन कचरा जला है उसकी रिपोर्ट आई है. मेरे पास उसकी अपुष्ट जानकारी है. पूरी जानकारी नहीं है उसमें ऐसी कोई विषैली चीज नहीं है जिससे कि वहां पर किसी भी प्रकार की जनहानि होने की संभावना है. मैं चाहूंगा कि वह पूरी की पूरी रिपोर्ट हम जनता के सामने रखेंगे और बताएंगे कि भ्रमित होने की जरुरत नहीं है. लोगों ने जबरदस्ती भ्रम फैला रखा है कि यूनियन कार्बाइड का कचरा है तो कैंसर हो जाएगा. अध्यक्ष महोदय, ऐसा बिलकुल नहीं है. यदि ऐसा होगा तो डॉ. मोहन यादव की सरकार जनकल्याणकारी सरकार है, जनहितकारी सरकार है. हम ऐसा कोई काम नहीं करेंगे जिससे जिससे जनता का अहित हो.

          अध्यक्ष महोदय, मुझे कहते हुए बहुत गर्व है कि मैं वर्ष 2003 में पहली बार  मंत्री बना था. उस समय मेरे पास लोक निर्माण विभाग था साथ ही सिंहस्थ का पूरा प्रभार भी मेरे पास था. सिंहस्थ भी नगरीय प्रशासन विभाग का एक पार्ट था. उस समय नगरीय प्रशासन विभाग के बजट को जानकर आपको आश्चर्य होगा मात्र 650-700 करोड़ रुपए था. आज का बजट जानकर आपको आश्चर्य होगा, आज यह लगभग 19 हजार करोड़ रुपए का हो गया है. इसके लिए मैं देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि डबल इंजन की सरकार का प्रभाव है कि यह बजट यहां तक पहुंचा है. हमारे देश के प्रधानमंत्री जी हमेशा कहते हैं कि आने वाला कल शहरों का है. वर्ष 2047 में जब देश स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा तब इस देश की शहरी क्षेत्र की जनसंख्या 50 प्रतिशत से अधिक होगी. इसलिए उन्होंने सारे राज्यों को निर्देश दिए हैं कि 25 साल बाद का शहर कैसा हो उसके बारे में आप अभी से कल्पना करिए. अभी से आप प्लान करिए. मास्टर प्लान में प्रावधान करिए. मुझे कहते हुए गर्व है कि मध्यप्रदेश ने इंदौर Metropolitan area, भोपाल Metropolitan area यह सब अभी से बनाने का प्लान कर दिया है. इंदौर के आसपास देवास, उज्जैन, धार इन सभी का हम एक Metropolitan area घोषित करने वाले हैं. ऐसे ही भोपाल में भी भोपाल के आसपास विदिशा, रायसेन, नर्मदापुरम् इनकी भविष्य में जनसंख्या कितनी होगी, वाहन कितने होंगे, सड़क कैसी चाहिए, वहां पर्यावरण कैसा हो. कितना ग्रीन क्षेत्र इस पूरे एरिया के लिए हो. हमारी जनसंख्या उस समय कितनी हो जाएगी. सीमेंट कांक्रीट के कितने महल बनेंगे, कितना हमारा ग्रीन एरिया होगा. उस समय पोल्यूशन कैसा होगा, उस वक्त पर्यावरण कैसा होगा. इस सब की प्लानिंग हम आज करने वाले हैं. अतिशीघ्र हम मध्यप्रदेश की विधान सभा में Madhya Pradesh Metropolitan act  लाएंगे.

          अध्यक्ष महोदय, मैं सौभाग्यशाली हूँ आदरणीय शेखावत जी भी यहां बैठे हैं. उन्होंने भी मिल में काम किया है, मेरे पिताजी ने भी मिल में काम किया है. मिलें बंद होती गईं. हुकुमचंद मिल जब बंद हुई उसके बाद से लगातार आंदोलन चल रहे थे. मुझे कहते हुए गर्व है कि हमारी सरकार ने मजदूरों के हित की जो मांग थीं उनको ध्यान में रखते हुए हमने समझौता किया. समझौता करने के बाद जवाबदारी ली कि मजदूर जो 30 सालों से अपनी तनख्वाह प्राप्त नहीं कर पाए उनको हम देंगे. हमने हुकुमचंद मिल की जवाबदारी ली, जमीन बैंक का पैसा, मजदूरों का पैसा यह बैंक का पैसा, मजदूरों का पैसा यह सब देने के बाद आज मैं इस सदन में घोषणा कर रहा हूं कि वहां पर एक ऐसा आइकॉनिक टॉवर बनेगा जो कि एक ऐसी ग्रीन बिल्डिंग होगी और वह देश की सर्वश्रेष्‍ठ ग्रीन बिल्डिंग बने, हम वहां पर यह बनाने का प्रयास करेंगे. हम लोग पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय जी को अपनी विचारधारा का प्रणेता मानते हैं. पंडित दीनदयाल उपाध्‍याय जी ने अपनी राजनैतिक डायरी में कहा है कि पांच साल में अगर मतदाता वोट डाल दे और उसके बाद फिर उसके पास पांच साल तक कोई काम नहीं हो तो ऐसा नहीं होना चाहिए. हर निर्णय के अंदर विशेषकर विकास के अंदर जनता की सहभागिता बहुत ज्‍यादा जरूरी है.

          अध्‍यक्ष महोदय, इंदौर एक जनभागीदारी का मॉडल है. हमने जनभागीदारी के माध्‍यम से इंदौर में इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर खड़ा किया है. मैं आज यहां सदन में बोल रहा हूं कि इंदौर में एक भी ऐसी कच्‍ची बस्‍ती नहीं है जहां पर सीमेंट कांक्रीट की सड़क न हो और वहां के लोगों ने सीमेंट का पैसा दिया और बाकी का सारा काम नगर निगम ने किया. इंदौर जनभागीदारी का सबसे बड़ा उदाहरण है. इसलिए इंदौर को अमेरिका ने जब ऑल इंडिया वर्ल्‍ड मेयर कॉन्‍फ्रेंस हुई थी तो सम्‍मानित किया था. अभी-अभी जनभागीदारी के माध्‍यम से हमने 51 लाख पेड़ लगाए हैं. और एक पहाड़ पर 12 लाख 40 हजार पेड़ लगाए हैं. वहां एक पृत पर्वत है जिसका आशीष ने जिक्र किया है वहां 4 लाख पेड़ लगाए गए हैं. वह जब मैं मेयर था, तब लगाये गये थे. वह आज भी लहलहा रहे हैं और उसके बीच में हनुमान जी बैठे हैं और चार लाख पेड़ों को देखकर वह मुस्‍कुरा रहे हैं. राजेन्‍द्र शुक्‍ला जी भी अभी आकर गये हैं. बहुत प्रसन्‍न होकर गए, अमित शाह जी तो हमेशा पूछते रहते हैं कि मुझे इन पेड़ों को देखकर आनंद आ गया.

          अध्‍यक्ष महोदय, ऐसे ही 12 लाख 40 हजार पेड़ इंदौर की जनता ने रेवती रेंज पर लगाए हैं. हमने एक दिन में 12 लाख 40 हजार पेड़ लगाकर वर्ल्‍ड रिकार्ड बनाया है. हम यह वर्ल्‍ड रिकार्ड भी बनाएंगे कि यह 12 लाख 40 हजार पेड़ पूरे जिंदा रहें इसके लिए हम पूरा प्रयास कर रहे हैं क्‍योंकि इंदौर की जनता की भावना उससे जुड़ी हुई है. मैं सब मित्रों से कहना चाहता हूं जनभागीदारी एक जनआंदोलन होना चाहिए. मैं महू से विधायक था वह एक ग्रामीण क्षेत्र था. मैं एक गांव में गया तो उन्‍होंने कहा कि हमको यहां पर सीमेंट, कांक्रीट की सड़क चाहिए है. मैंने कहा कि आपको पंचायत से कितना पैसा मिला तो उन्‍होंने कहा कि 10 लाख रुपए मिला है. मैंने पूछा कि सड़क कितने की बन रही है तो उन्‍होंने बताया कि 50 लाख रुपए की मैंने उन्‍हें कहा कि मैं आपको विधायक कोटे से 15 लाख रुपए दे देता हूं. कोई गांव का पटेल है क्‍या जो यहां पर जो उसके नाम से 25 लाख रुपए दे दे और हम उसके नाम से सड़क कर दें. एक पटेल साहब मिल गए. उन्‍होंने कहा कि मेरे दादाजी के नाम से सड़क बना दो. उन्‍होंने 25 लाख रुपए दे दिये हमने सड़क बना दी. उनके नाम की एक नाम पट्टिका लगा दी. हमें जनभागीदारी से काम करना चाहिए. जनता का विश्‍वास जीतना चाहिए. इसमें सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि जनभागीदारी होती है तो जनता उसका ऑडिट करती है कि कितनी सीमेंट लगी, क्‍वेरी हुई कि नहीं, पानी गिरा कि नहीं गिरा, पानी डाला गया कि नहीं डाला गया.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-- अध्‍यक्ष महोदय, जनभागीदारी की जो बात चल रही है, जनभागीदारी का प्रावधान बजट में नहीं रखा गया है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न उत्‍तर न करें.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्‍यक्ष महोदय, इसीलिए हमने इस विभाग में भी जनभागीदारी के लिए अलग से बजट में प्रावधान किया है. आत्‍मनिर्भर निकाय बनाना. अभी हमारे सभी मित्र कह रहे थे, लोगों ने कहा कि तनख्‍वाह बांटने के लिए पैसे नहीं हैं. मैं आपसे कहना चाहता हूं कि यूयर शूट पर यदि आप सड़क का उपयोग कर रहे हैं तो आपको टैक्‍स देना चाहिए, यदि आप पानी का उपयोग कर रहे हैं तो आपको टैक्‍स देना चाहिए, यदि आप ड्रेनेज लाइन का उपयोग कर रहे हैं तो आपको टैक्‍स देना चाहिए.यह आदत हमको जनता के बीच में डालना पड़ेगी. इंदौर इसका मॉडल है. मैं मेयर था मैंने पांच साल में दो बार टैक्‍स बढ़ाया था. अभी हमारे मेयर जी ने टैक्‍स बढ़ाया तो इंदौर नगर निगम को सालभर में 100 करोड़ अतिरिक्‍त मिलेंगे. क्‍या यह कम राशि है. उन्‍होंने चिंता नहीं की. आप जनसुविधाएं दीजिए लोग टैक्‍स देना चाहते हैं, लेकिन हम वोट के लालच में अतिक्रमण नहीं हटाते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, जितना अति‍क्रमण मैंने इंदौर में हटाया है शेखावत जी साक्षी हैं कि इनके घर के पास पाटलीपुरे में 250 मकान एक रात में मैंने तोड़ दिये थे. दो-दो, तीन-तीन मंजिल के उन मकानों की कीमत उस वक्‍त दस-दस लाख थी आधे-आधे मकान बचे हैं और अब उन मकानों की कीमत दो-दो करोड़ रुपए हो गई है. पूरा मार्केट बन गया है. इसीलिए थोड़ा सा आगे बढ़कर जनप्रतिनिधि को निर्णय लेना चाहिए भले ही कठोर निर्णय हो पर जनहितकारी हो. जब मैंने अतिक्रमण हटाया, उसमें मेरे एक कार्यकर्ता का भी मकान था, उनका भी आधा मकान तोड़ दिया था, एक रस्‍सी खींची और पूरे 250 मकान तोड़ दिये थे. जन प्रतिनिधि को आगे बढ़कर अपने शहर के विकास के लिए काम करना चाहिए, जनता सहयोग देती है. जब ये मकान टूट गए, सड़क बन गई तो लोगों ने कहा कि इस बार कैलाश जी की जमानत जब्‍त हो जायेगी लेकिन मैं उस बार सबसे ज्‍यादा वोट, 42 हजार वोटों से जीता था, उसके पहले 28 हजार वोटों से जीता था.

(मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, ऐसा नहीं है आप काम करें, जनता वोट देती है. आज इंदौर इतना शानदार शहर है तो उसमें जन भागीदारी है, जनता उससे जुड़ी है, अब तो जनता क्‍या, इंदौर के बच्‍चे भी जुड़े हुए हैं. मैं, दावे के साथ कह सकता हूं कि हम यदि 10 शहरों के 200 बच्‍चों को बुलायें, सभी को चॉकलेट दीजिये, सभी चॉकलेट खायेंगे और रैपर फेंक देंगे परंतु इंदौर का बच्‍चा पूछेगा WHERE IS DUSTBIN क्‍योंकि उसके संस्‍कारों में स्‍वच्‍छता है. ये संस्‍कार हम सभी लीडर डाल सकते हैं, मैदान में जाकर सभी को समझायें कि यह हमारा शहर है, हमें इसे स्‍वच्‍छ रखना है, इसे ग्रीन बनाना है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैंने 51 लाख पेड़ लगाये तो मैं अगली बार फिर 51 लाख पेड़ और लगाऊंगा, इस प्रकार 4-5 साल तक करके, कम से कम 2-3 करोड़ पेड़ लगाकर हम आगामी 10 वर्षों में, इंदौर का गर्मी में तापमान 4 डिग्री कम करेंगे. मैं रहूं या न रहूं परंतु इंदौर का तापमान 4 डिग्री कम हो जायेगा. हमारे प्रयासों का यह परिणाम होगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, आत्‍मनिर्भर निकाय जैसे मैंने कहा, हम उसके लिए काम कर रहे हैं. लखन जी ने कहा कि नगर निगम की आय कम हो गई है. देखिये नगर निगम की आय सिर्फ वह नहीं है, क्‍या मुख्‍यमंत्री अधोसंरचना योजना पहले थी, आज उसमें 2 हजार 500 करोड़ रुपये का बजट है, उस समय नहीं था, आज हम ये दे रहे हैं, बहुत सारी ऐसी योजनायें अब हैं.

          श्री लखन घनघोरिया-  आपका इंदौर बहुत विकसित शहर है, आपके प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय हैं लेकिन पूरे मध्‍यप्रदेश की स्थिति क्‍या है ? आप जिन पक्‍के मकान और सड़क की बात कर रहे हैं, ये पूरे मध्‍यप्रदेश में नहीं हैं. जबलपुर की स्थिति बहुत बेकार है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  मैं ऐसा नहीं मानता हूं. मैं, जब विद्यार्थी परिषद का काम करता था, तब से जबलपुर आता रहा हूं.

          श्री लखन घनघोरिया-  कृपया आप सुन लें. हमारा आग्रह है कि पहली बार ऐसा हुआ है कि निगम की कमिश्‍नर ने ऐलान कर कहा है कि वित्‍तीय संकट गहराया है. आप जबलपुर की वस्‍तुस्थिति जानें, जमीनी हकीकत क्‍या है वह जानें. किसी शायर ने लिखा है-

"तुम्‍हारे रास्‍ते में कच्‍चे मकान नहीं आते, इसलिए गरीब तुमको नज़र नहीं आते,

ज़हन बनाते हैं शहर के अखबार, अफसोस तो यह है वो भी सच्‍ची खबर नहीं लाते." 

 

(मेजों की थपथपाहट)

          आप सच्‍ची खबर लें, फिर देखें क्‍या है. 

          अध्‍यक्ष महोदय- लखन जी, आप बैठ जायें, आपकी भावना आ गई है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  ऐसा है कि

"जहां सोच न पहुंचे वहां तक हम पहुंचेंगे, हर नई ऊंचाई को हम गले लगायेंगे,

विकास की धार से हमने ये सीखा है (इंदौर वालों ने)

इतिहास नहीं, अब हम भविष्‍य बनायेंगे."

 

(मेजों की थपथपाहट)

 

          अध्‍यक्ष महोदय, भविष्‍य बनाने के लिए हमें आज निर्णय करना पड़ेगा और हमने किया है. 10 साल पहले इंदौर में और आज फिर हम कर रहे हैं. इंदौर एक मॉडल शहर इसलिए है, हमने सात बार स्‍वच्‍छता का पुरस्‍कार जीता है, सभी ने मेज थपथपाई. हम 8वीं बार भी स्‍वच्‍छता में नंबर वन आयेंगे क्‍योंकि इंदौर के संस्‍कार में स्‍वच्‍छता आ गई है.

          अध्‍यक्ष महोदय, आत्‍मनिर्भर निकायों को बनना पड़ेगा, निकायों का सबसे बड़ा खर्च वेतन पर होता है. अभी हमने GIS मैपिंग करके, वे मैप सभी नगर निगम, नगर पालिकाओं को दे दिये हैं. जबलपुर में कम से कम 22 प्रतिशत ऐसे मकान हैं, जो संपत्ति कर के दायरे में नहीं आते हैं. सतना में इसी प्रकार 30 प्रतिशत ऐसे मकान हैं जो दायरे में नहीं आते. अब उन्‍हें दायरे में लेकर वसूली उनको करना चाहिए. यह काम मंत्री या सरकार तो नहीं करेगी यह काम लोकल बॉडी को करना है. मेरा निवेदन यह है कि जनप्रतिनिधियों को एक्टिव रहना होगा.

          श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा "डब्‍बू"-  अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट

          अध्‍यक्ष महोदय-  वे सभी नगरीय निकायों के लिए कह रहे हैं.

          श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा - अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी, मैं भी एक निवेदन करना चाहता हूँ. आप सतना के प्रभारी मंत्री हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय - सिद्धार्थ जी, अगर दोबारा चर्चा शुरू करेंगे, तो मुझे कोई दिक्‍कत नहीं हैं.

          श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा - नहीं, मैं सिर्फ याद दिलाना चाह रहा हूँ. मंत्री जी, हमारे सतना के प्रभारी हैं. हमारे मेयर ने 70 लाख रुपये प्रॉपर्टी टैक्‍स जमा नहीं किया है. 

          अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाएं. वैसा नहीं होगा. डेढ़ पौने दो घण्‍टे मंत्री जी ने सुना है तो मंत्री जी को बोलने दीजिये.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्‍यक्ष महोदय, नगर निगम का पहला सैलरी का सबसे बड़ा खर्चा है, दूसरा खर्चा बिजली का बिल का होता है. बिजली के बिल का खर्च कम करने के लिए हम मध्‍यप्रदेश में 4 सोलर प्‍लांट लगा रहे हैं. हम कोशिश कर रहे हैं कि नगर निगम में उपयोग आने वाली बिजली हम सोलर प्‍लांट से दें, जिससे कि उनका बिजली बिल का खर्चा कम हो सके.

          अध्‍यक्ष महोदय, इकोनॉमिक विकास, यह किसी भी शहर के लिए बहुत ज्‍यादा जरूरी है. उसमें नगरीय निकाय की भूमिका बहुत महत्‍वपूर्ण है. जैसे हम दो मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र का तो विकास कर रहे हैं, वैसे ही ट्रांजिट ओरिएंट डेवलपमेंट (टीओडी) अभी हम मास्‍टर प्‍लान बना रहे हैं, केन्‍द्र सरकार से भी निर्देश प्राप्‍त हुए हैं. हमारे देश के प्रधानमंत्री जी भी कह रहे हैं कि नगर को आप होरिजेंटल-वर्टिकली भी बढ़ाएं, इसलिए एफएआर बढ़ाया. हम अभी निर्णय करने वाले हैं कि वह मेट्रो का इलाका, जहां से मेट्रो निकलेगी, हम वहां पर एफएआर बढ़ाएं, कमर्शियल क्षेत्र बढ़ाएं, जिससे कि कमर्शियल गतिविधियां बढ़ें एवं शहर की इनकम बढ़े.

          अध्‍यक्ष महोदय, हम टीडीआर के माध्‍यम से जितनी भी लोक हित की भूमि है, उसको अधिग्रहण करके और वहां पर हम किस प्रकार पब्लिक सुविधा के केन्‍द्र बना सकें, चाहे वह स्‍टेडियम हों, चाहे वह खेल-कूद के मैदान हों, चाहे वह गीता भवन हों, इस प्रकार से हम बना रहे हैं. सभी माननीय सदस्‍य अभी गीता भवन के बारे में चर्चा कर रहे थे. गीता भवन के लिए स्‍टेट बजट तो होगा ही, पर साथ में यह भी उनसे निवेदन करना चाहेंगे कि ऐसी कोई जमीन जहां पर थोड़ी सी कमर्शियल एक्टिविटीज़ भी चल सकें और गीता भवन फ्री में बन जाये, आप इसके लिए प्‍लान कीजिये. हमें अपने शहर की चिन्‍ता करने के लिए, हमारे यहां कौन सी चीज, हम बिना पैसों के कर सकते हैं, इसके लिए हमें प्‍लान भी करना पड़ेगा. अध्‍यक्ष महोदय, नर्मदा जी की बात करता हूँ. शायद लखन भाई इस बात से सहमत होंगे कि पहले बहुत सारे नाले नर्मदा जी में मिलते थे. जबलपुर में हमने करीब-करीब सभी जितने नाले थे, वहां पर एचटीपी प्‍लांट बना दिये.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं इस सदन में घोषणा कर रहा हूँ कि हमारी जितनी भी अर्बन बॉडीज़ हैं, वहां से निकलने वाले नाले अगले बजट में, मैं घोषणा करूँगा कि हमारे मध्‍यप्रदेश में ऐसी एक भी अर्बन बॉडीज़ न हो, जिसका नाला नर्मदा जी को अपवित्र कर रहा हो. अध्‍यक्ष महोदय, यह मैं आपके माध्‍यम से सदन से वायदा करता हूँ. यह अर्बन एरिया है, हमारे प्रहलाद सिंह पटेल जी, आज सदन में उपस्थित नहीं हैं. हम लोगों ने बैठक प्‍लान बनाया है कि ग्रामीण क्षेत्र की भी जितनी पंचायतें हैं, हम लोग इसी प्रकार नर्मदा जी को पवित्र रखने के लिए काम करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय, उज्‍जैन, मेरा ख्‍याल है कि सभी लोग गए होंगे. महाकाल लोक बनने के बाद उज्‍जैन की इकोनॉमी 10 गुना बढ़ गई है. मुझे ऐसा लगता है कि अब वहां कोई बेरोजगारी नहीं है, हर व्‍यक्ति के पास कुछ न कुछ काम है, हर व्‍यक्ति कुछ न कुछ कर रहा है. मेरे ख्‍याल से एक वर्ष के अन्‍दर वहां 10 करोड़ लोगों से ज्‍यादा ने दर्शन किए होंगे. होटल, रेस्‍टोरेंट सब हम पूरे प्रदेश के अन्‍दर, वे सब अर्बन एरिया के पर्यटक स्‍थल चाहे वह चित्रकूट हो, चाहे ओंकारेश्‍वर हो, हम ओंकारेश्‍वर लोक बनाएंगे. आप सभी जानते हैं कि आचार्य शंकर अन्‍तर्राष्‍ट्रीय अद्वैत वहां पर बन रहा है, वहां आदि शंकराचार्य जी की विशाल प्रतिमा बनी है. वहां से लेकर जितने भी ऐसे स्‍थल हैं, हम उन सबका डेवलपमेंट करेंगे और कैसे हमारा धार्मिक पर्यटक स्‍थल बढ़े ? इसके लिए हम लोग काम करने वाले हैं. श्रीकृष्‍ण पाथेय पर सब माननीय सदस्‍यों ने बोल दिया है, मैं रिपीट नहीं करूँगा. रामपथ गमन मार्ग, मैं उस पर भी रिपीट नहीं करूँगा, इस पर माननीय सब सदस्‍यों ने अपनी-अपनी बात कह दी है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं इतना ही कहना चाहता हूँ. शहर किसी भी प्रदेश की सभ्‍यता के भी सूचक हैं और जो बुराइयां प्रारंभ होती हैं, वह भी शहरों से ही प्रारंभ होती हैं. हम कैसे शहर में होने वाली अनैतिक गतिविधियों को रोकें ? इसके लिए भी हमें पहल करनी पड़ेगी.         अध्‍यक्ष महोदय, मेरे यहां काफी अवैध ब्राउन शुगर वगैरह बिक रही थी. हम लोगों ने बिल्‍कुल मुख्‍यमंत्री जी से कहा कि मुख्‍यमंत्री जी, आप प्रभारी मंत्री हैं. ताकत से कार्यवाही हो गई. वहां पर सारी नौजवान पीढ़ी, जो इस नशे की ओर बढ़ रही थी, हमने उनको बढ़ने से रोका. हम सामाजिक कार्य भी करें. हम धार्मिक कार्य करें. हम विकास करें. अपने शहर को एक आदर्श शहर हम कैसे बना सकते हैं, इसके लिए सब जनप्रतिनिधि अगर सोचेंगे तो मैं समझता हूँ कि मध्‍यप्रदेश के शहर बहुत आदर्श शहर बन जाएंगे. अच्‍छाइयां जो भी होंगी, वह हम ग्रहण करें.

          अध्‍यक्ष महोदय, रिडेन्‍शिफिकेशन की योजना है, रिडेन्‍शिफिकेशन की योजना के माध्‍यम से बहुत काम हुए हैं. विशेषकर रीवा में तो बहुत जबरदस्‍त काम हुए हैं. रीवा की तो पूरी उन्‍नति हो गई. मतलब किसी जमाने में पूरा क्षेत्र रीवा एक छोटा सा शहरी गांव था. शहर भी था और गांव भी था. आज रीवा का विकास देखकर आश्‍चर्य होता है. उसमें रिडेन्‍शिफिकेशन की बहुत महत्‍वपूर्ण भूमिका है. अध्‍यक्ष महोदय, इस रिडेन्‍शिफिकेशन के कारण बहुत सारा पैसा राज्‍य के खजाने में आता है. हम इसमें संशोधन करने वाले हैं कि रिडेन्‍शिफिकेशन के बाद जो शहर की कमाई हो, उसका पैसा उसके विकास में भी लगे. उसका प्रतिशत हम बढ़ाएंगे, जिससे शहर के विकास में वह पैसा काम आ सके.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं पहले भी कह चुका हूँ कि सभी नगर निगम और नगर पालिकाओं को अपने आय के स्रोत कैसे बढ़े, इसके ऊपर काम करना चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय, मास ट्रांसपोर्टेशन, शहरी क्षेत्र के अंदर यह एक बहुत बड़ा विषय है. मेट्रो, जैसा कि नेता प्रतिपक्ष ने कहा, उन्‍होंने कहा, कमलनाथ जी ने उद्घाटन किया. भाई साहब, फाइल मैं आपको लाकर दे दूंगा, सबसे पहले मेरे दिमाग की उपज थी. मैंने उसका प्‍लान बनाया, मैं उसको केन्‍द्र सरकार से पास करवा कर लाया. मौका आपको उद्घाटन करने का मिला, आपने कर दिया. इसलिए आप...

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऐसे तो चीते की फाइल पर मैंने साइन किए थे, लेकिन मोदी जी ने छोड़े..(हंसी).

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- इसीलिए इसको ऐसा लें कि सरकार चलती हुई प्रक्रिया है. आप जबरदस्‍ती में श्रेय क्‍यों लेते हैं. सरकार ने किया है. कमलनाथ जी का नाम हम थोड़ी हटा रहे हैं..

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय, मेरी भावना यह थी कि वह जल्‍दी चालू हो. एक बात और, आपने इंदौर, इंदौर की बात की, धारा 16 बंद कराएं और मास्‍टर प्‍लान कब घोषित होगा, आज सदन को बताएं. ये दो चीजें छूट गई थीं, आप स्‍पष्‍ट करना.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, बहुत अच्‍छा उमंग जी ने बताया है. इंदौर और भोपाल का हमारा मास्‍टर प्‍लान तो तैयार है. हम मार्च के पहले, क्‍योंकि मैंने कहा कि हम उसमें थोड़ा सा परिवर्तन कर रहे हैं. केन्‍द्र सरकार के थोड़े से निर्देश हमें आए कि थोड़ा एफएआर बढ़ाइये, कमर्शियल एरिया बढ़ाइये क्‍योंकि शहर का कितना विस्‍तार करेंगे, जैसे-जैसे हम विस्‍तार करते जाएंगे, कृषि भूमि कम होती जाएगी. हमें कृषि भूमि भी रखना है और शहर का विस्‍तार भी करना है. वर्टिकल शहर हो, उसके लिए इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर वैसा हो. पाइप-लाइन, सड़कें, ये सब. बहुत सारी बातें हैं, जो मुझे लगता है कि नगर निगम ने पहली बार देखी है. अध्‍यक्ष महोदय, मुझे तीन बार इस विभाग को देखने का अवसर प्राप्‍त हुआ है. मैं फिर से डॉ. मोहन यादव जी को और प्रधानमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूँ, इतना बड़ा बजट होगा, इसकी कोई कल्‍पना नहीं कर सकता है. नगरीय निकाय बड़ा उपेक्षित विभाग था. आज 18-19 हजार करोड़ रुपये का बजट है और अनुपूरक बजट में मैं फिर 4,5 हजार करोड़ रुपये की योजना लेकर आऊँगा, तो कम से कम 20, 22 हजार करोड़ रुपये का बजट हो जाएगा. अध्‍यक्ष महोदय, हमारा इंदौर और भोपाल का ड्रॉफ्ट तैयार है. अतिशीघ्र, हम सोच रहे हैं कि मार्च के पहले ही हम उस ड्रॉफ्ट को तैयार कर दें और बाकी भी, हमारे जितने भी मास्‍टर प्‍लान हैं, सब बनने वाले हैं. जहां तक धारा 16 का प्रश्‍न है, वह हमने पहले ही बंद कर दी है. अब उसमें धारा 16 में किसी प्रकार की कोई स्‍वीकृति नहीं दी जा रही है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मास ट्रांसपोर्टेशन, हमें गर्व है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री ने ई-बस के लिए सोचा. अभी हमारे पास मध्‍यप्रदेश में लगभग 500 ई-बसें आ रही हैं. 500 ई-बसें बाद में और आएंगी. ये सब इलैक्‍ट्रिक बसें हैं. इन इलैक्‍ट्रिक बसों के लिए हमने नई ईव्‍ही पॉलिसी भी बनाई है. इस ईव्‍ही पॉलिसी के माध्‍यम से हम कैसे मास ट्रांसपोर्टेशन को सुगम बना सकें, लोग अपने वाहन से कम चलें, जिससे पॉल्‍यूशन भी कम हो और वे ई-बस का इस्‍तेमाल करें. इस प्रकार की हम लोग प्‍लानिंग कर रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, अगला चैलेंज हमारे पास ट्रेफिक का है, जो इंदौर में भी हम महसूस कर रहे हैं. हमने देश के सर्वश्रेष्‍ठ जो ट्रेफिक केन्‍द्र में काम करने वाली सिचुएशन है. उनको इन्दौर में बुलाया और उनसे कहा कि एक स्थान से दूसरे स्थान पहुंचने में 15 मिनट  का समय लगे ऐसा कोई प्लान बनाईये.  यह प्लान के माध्यम से हम शहर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक  जल्दी कैसे पहुंच सकें इसके लिये हम प्लान कर रहे हैं. इसमें हमें अंडर ब्रिज भी बनाना पड़ेंगे.ओवर ब्रिज भी बनाना पड़ेंगे पर इसमें मास ट्रांसपोर्टेशन की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है. हम जनता से भी अपील करेंगे कि वह अपने वाहन का उपयोग कम करें और जो ई बस आ रही है उसमें सब्सीडाईज रेट में लोग जा सकें,सस्ते में जा सकें और वहां से किसी को ई बस पकड़ना है तो अपने घर से ई बस तक आने के लिये ई रिक्शा उसका किराया हम तय करेंगे फिर उसको ई बस से अपने आफिस तक जाना है तो फिर ई रिक्शा इन सबका किराया हम तय करेंगे. अभी ई रिक्शा का लाईसेंस भी नहीं मिलता.केन्द्र सरकार ने कह दिया कि इनको चलाने दो तो अभी बेतरतीब तरीके से चल रही हैं. हम इसको व्यवस्थित करेंगे और मास ट्रासपोर्टेशन के माध्यम से शहर व्यवस्थित हो उसका आवागमन व्यवस्थित हो इसके लिये अध्यक्ष महोदय, हम प्लान कर रहे हैं. पहले इन्दौर से शुरुआत करेंगे फिर अन्य शहरों में भी इसका इम्प्लीशन करेंगे.अध्यक्ष महोदय, मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि हमारी इच्छा है कि मध्यप्रदेश के शहर देश के बड़े शहर की तुलना में आकर खड़े हो जाएं तो वह सारी सुविधाएं जो बड़े शहरों में मिलती हैं वह हमारे यहां होनी चाहिये. दूसरा हमारे शहरों का भविष्य अच्छा हो इसीलिये हमारी अर्बन प्लानिंग 25 साल की हो हर शहर की उसके लिये हम अभी से प्लानिंग एरिया हमारा बढ़ा रहे हैं और अभी सिर्फ 2-3 चीज पर फोकस कर रहे हैं पर उसके बाद हर चीज पर फोकस करेंगे. अध्यक्ष महोदय, मेरा आप सब सदस्यों से निवेदन है कि यह विभाग शहरी क्षेत्र में एक नयी क्रांति ला रहा है उसके लिये हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी का विशेष हमें आशीर्वाद है. मैं एक शेर आप सबको सम्मिलित करते हुए कहूंगा क्योंकि सबके साथ सबके सहयोग से ही होगा. हम सब अगर मिल जायेंगे तो यह शेर सबके लिये है सबकी तरफ से आपको सुनाना चाहता हूं कि "हवा के रुख को मोड़ने का हुनर रखते हैं,हम अपने हौंसलों में वह असर भी रखते हैं कोई तूफान भी हमें रोक न सकेगा क्योंकि हम दिल से जीत का जिगर रखते हैं"  बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री उमंग सिंघार - अध्यक्ष महोदय, बड़ा अच्छा था. विकास की बात की.सबके साथ की लेकिन 230 विधायकों की विधायक निधि के बारे में भी कुछ बोल देते.माननीय,आपसे अनुरोध है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष महोदय, मैं क्षमा चाहता हूं. भूल गया मैं, अध्यक्ष महोदय, विधान सभा की वेतन भत्ता की कमेटी बनी हुई है.उस कमेटी के सुझाव अगर आपकी ओर से वित्त मंत्रालय तक आ जायें तो हम वित्त मंत्रालय से दबाव बनाएंगे. माननीय मुख्यमंत्री जी से भी कहेंगे क्योंकि सदन की आम सहमति है.

          श्री उमंग सिंघार - माननीय, वेतन भत्ता नहीं विकास निधि का कहा मैंने.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय - विकास निधि तो मुख्यमंत्री देंगे. मैं वेतन,भत्ते की बात कर रहा हूं. तो जो सुविधा कमेटी बनी है अगर उसका प्रस्ताव आ जाये तो हम हमारे विभाग की ओर से संसदीय मंत्रालय की ओर से भेज देंगे और माननीय विधायकों के वाहन ऋण के लिये भी हमने प्रस्ताव भेजा,पहले कम था,उसको भी हम बढ़ाने के लिये प्रस्ताव हमने वित्त मंत्रालय को भेजा है अभी-अभी हमारी नेशनल ई विधान परियोजना,नेवा से हम सभी विधान सभा के अंदर यहां पर भी कम्प्यूटराईजेशन आपके निर्देश पर हो रहा है अध्यक्ष महोदय, और हम माननीय सब विधायकों को अच्छा लेपटाप भी उपलब्ध कराएंगे. आपने समय दिया इसके लिये बहुत-बहुत धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदय - आम तौर पर सभी विधायक विकास निधि बढ़ाने के पक्ष में चर्चा करते रहते हैं मैं समझता हूं कि उस मामले में भी सरकार को विचार करना चाहिये और पूर्व विधायकों की भी जो समस्या है उस समस्या को भी जानकर उसका भी निराकरण करना चाहिये.

          श्री उमंग सिंघार - धन्यवाद अध्यक्ष जी,आपने पूरे विधायकों की भावना को समझा.

         

 

          अध्यक्ष महोदय - मैं,पहले कटौती प्रस्तावों पर मत लूंगा.

          प्रश्न यह है कि मांग संख्या 22 एवं 28 पर प्रस्तुत कटौती प्रस्ताव स्वीकृत किये जायें.

कटौती प्रस्ताव अस्वीकृत हुए.

                   अब,मैं, मांगों पर मत लूंगा.


 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

9.11 बजे                                      मुखबंध प्रस्‍ताव

          श्री उमंग‍ सिंघार--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लोक निर्माण विभाग रह गया था. आपसे जो कार्यमंत्रणा समिति में चर्चा हुई, लोक निर्माण विभाग महत्‍वपूर्ण विभाग रह गया है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय नेता प्रतिपक्ष जी और सभी विधायकों से मेरा अनुरोध है कि हम सबने बहुत विस्‍तार से चर्चा की है, लेकिन आज हम सब इस बात को जानते हैं कि आज अशासकीय कार्य का दिन भी था और 4 अशासकीय संकल्‍प हैं तो मैं समझता हूं कि संकल्‍प पर चर्चा नहीं होगी तो वह शुक्रवार के अलावा अन्‍य दिन नहीं हो सकती है और इसलिये मुझे लगता है कि समय का हम सब लोग ध्‍यान करें और कृपया सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाने में मदद करें ऐसा मेरा नेता प्रतिपक्ष और बाकी सदस्‍यों से अनुरोध है.

          शेष विभागों की अनुदान मांगें माननीय उपमुख्‍यमंत्री जी, वित्‍त एक साथ प्रस्‍तुत करेंगे, उन पर एक साथ मत लिया जायेगा.

         

 

 


 

                                                                                                                                                                                                          


 

9:20 बजे                         वित्‍तीय विधि विषयक कार्य

मध्‍यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-2) विधेयक, 2025.

श्री जगदीश देवड़ा, उप मुख्‍यमंत्री(वित्‍त) अध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-2) विधेयक, 2025 का पुर:स्‍थापन करता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि मध्‍यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-2) विधेयक, 2025 पर विचार किया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ.

श्री सोहनलाल बाल्मीक(परासिया) माननीय अध्यक्ष महोदय, विनियोग के प्रस्ताव के अनुरूप बजट जो प्रस्तावित किया गया है, 4 लाख करोड़, 21 हजार और जो बजट प्रस्तुत किया गया है इस बजट के अंदर जितना बजट आपने प्रस्तुत किया है उतना ही बजट आपके मध्यप्रदेश में आज के वर्तमान की स्थिति में कर्ज है. इस बजट में इस बात का भी उल्लेख है कि वर्ष 2025-26 में जो अनुमानित घाटा हमारा है 78 हजार 902 करोड़ रुपए बताया है, तो निश्चित रूप से मैं इस बात पर विचार करना चाहिए कि यदि  हम बजट प्रस्तुत करते हैं और अनुमानित घाटा बताने लगते हैं और राजस्‍व की जो वसूली है, वह पूर्ण रूप से नहीं होती है, तो आने वाले समय में मध्‍यप्रदेश में जो आप लक्ष्‍य लेकर चल रहे हैं कि 2047 में 2 ट्रिलियन डॉलर की जो योजना आपने प्रस्‍तावित किया है, वह किस तरह से पूर्ण होगी. इसमें भी हम लोगों को विचार करना चाहिए कि कागजों में और प्रस्‍तावित करने से ही हम 2047 का जो हमारा सपना है, उसको किस तरह से पूर्ण कर पाएंगे और जो 2 ट्रिलियन डॉलर की योजना है, उसको किस तरह से पूर्ण किया जाएगा. इसमें कहीं न कहीं जो आंकड़े हैं, जो बता रहे हैं जो प्रदेश के अंदर में प्रस्‍तुत करना चाहते हैं, वह एक भ्रम फैलाने की स्थिति में हम सबको प्रतीत होता है. वर्तमान की जो स्थिति देख रहे हैं बजट तो हर विभाग में आपने प्रस्‍तुत किया है, कहीं छोटा, तो कहीं बड़ा बजट है, पर वास्‍तविकता है, जैसे जो बेसिक चीजें हैं, चाहे हम अस्‍पताल की बात करें, शिक्षा या अन्‍य चीजों की हम बात करें, वर्तमान में जिस तरह से जो परिस्थितियां निर्मित हो रही है हमारे पास जो स्‍ट्रक्‍चर खड़ा हुआ है, वर्तमान में जो संसाधन हमारे पास में है उस संसाधन के अनुरूप व्‍यवस्‍था नहीं बन पा रही है. आज अस्‍पताल के अंदर आप देखिए पहले भी हम लोगों की चर्चा हो चुकी है, डाक्‍टर्स की कमी है, पैरामेडिकल स्‍टाफ की कमी है, सबसे पहले हमें इस बात पर ध्‍यान देना चाहिए कि जो वर्तमान में चीजें चल रही है उसमें कितना सुधार हो सकता है और कैसे सुधार कर सकते हैं. बहुत सारे निर्माण के कार्य आपने प्रस्‍तावित किया है. बहुत सारी स्‍वास्‍थ्‍य भवन आपने हमें दिया है मगर उसको बना देने से ही क्‍या स्‍वास्‍थ्‍य की व्‍यवस्‍था सुधर पाएगी. शिक्षा के क्षेत्र में सीएम राइज की बात हो रही है. सीएम राइज की बिल्डिंग 35-40 करोड़ रपए की बन रही है, जो छोटे स्‍कूल है, जो गांव के अंदर प्राथमिक शालाएं हैं, जो शिक्षा गांव तक पहुंचती थी जो हम लोगों का जो एक दृढ़ संकल्‍प था कि गांव के छोटी से जगह में जाकर हम शिक्षा को हम किस तरह से बढ़ावा दें. पर सीएम राइज जो स्‍कूल का कान्‍सेप्‍ट है, वह स्‍पष्‍ट नहीं हो पा रहा है कि हम छोटे स्‍कूलों को बंद करके सीएम राइज स्‍कूलों में परिवर्तित करेंगे तो क्‍या गांव के बच्‍चे उस सीएम राइज स्‍कूल में पढ़ पाएंगे क्‍या वे इतना समय दे पाएंगे ये सारी चीजें हैं. साथ ही साथ उद्योग की बात आई है कि 14500 एकड़ भूमि 39 नए उद्योग क्षेत्र को विकसित करने का उल्‍लेख है मेरे विधान सभा में भी 118 एकड़ भूमि है जो एमपीआरडीसी को दिया है, मगर दुर्भाग्‍य से इस बात को कहना पड़ रहा है कि जल संसाधन के द्वारा मेरे जिला कलेक्‍टर ने उस 47 हेक्‍टेयर भूमि को परिवर्तित करके विस्‍थापना के लिए कर दिया है. गरीब कल्‍याण योजना की जो बात आई है गरीब कल्‍याण का जो उल्‍लेख आपने किया है पर मैं आपके माध्‍यम से वित्‍त मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि 2023 से जिन गरीबों के लिए संबल योजना बनी थी उनको 2023 से आज तक उनको पैसा नहीं मिल पा रही है लोगों की मृत्‍यु हो गई है उनका परिवार आज भी देख रहा है कि कब तक पैसा मिलेगा. जो पांच हजार रुपए की राशि मृत्‍यु के उपरांत मिलती थी अंत्‍येष्टि के लिए मिलती थी, वह राशि तक नहीं मिल पा रही है इस तरह की अव्‍यवस्‍था पूरे क्षेत्र में चल रही है. मैं आपका ध्‍यान दिलाना चाहता हूं उसमें व्‍यवस्‍था बनाने की बात करता हूं. अनुसूचित जनजाति की छात्रवृत्ति का प्रावधान आपने रखा है. विदेशों में जो छात्र पढ़ने के लिये आपने प्रावधान रखा है, सिर्फ 50 छात्रों का रखा है. मध्यप्रदेश हमारा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र राज्य है. उसके अंदर यदि 50 छात्रों को यदि विदेश में शिक्षा देने का प्रावधान रखेंगे तो निश्चित रूप से बहुत कम है, इस प्रावधान को बढ़ाने की आवश्यकता है. इसमें एक त्रुटि यह भी हुई है कि अनुसूचित जाति के लिये आपने प्रावधान तो रखा है, यह अच्छी बात है. मगर अनुसूचित जाति के लिये आपने प्रावधान नहीं रखा है. लेकिन अनुसूचित जाति के बच्चे जो विदेश में पढ़ना चाहते हैं तो उनके आंकड़ो का बजट के अंदर उल्लेख नहीं है. मैं आपके माध्यम से वित्तमंत्री जी को कहना चाहता हूं कि अनुसूचित जाति के लिये भी इसका प्रावधान इसके अंदर में होने की आवश्यकता है. किसानों के लिये जल संसाधन विभाग में एक जो लक्ष्य रखा है कि हम 100 लाख हैक्टेयर भूमि सिंचित करेंगे. मगर 100 लाख हैक्टेयर भूमि सिंचित करने के लिये आपने बड़ी बड़ी योजनाएं जरूर बना ली हैं. मगर जो छोटे छोटे स्थानों में जैसे मेरे ही क्षेत्र में छोटे छोटे डेम हैं उनके निर्माण के लिये स्वीकृति नहीं मिल पा रही है. उसकी डीपीआर तैयार है उनका बजट न मिलने के कारण वह प्रभावित हो रहे हैं. क्योंकि मेरे विधान सभा क्षेत्र में चार ऐसे जलाशय हैं जो कि बहुत आवश्यक हैं, उनकी डीपीआर तैयार है. मैंने आज इस बात को भी रखा था तो मेरा आपसे निवेदन है कि इसमें भी बजट का प्रावधान आप जरूर रखेंग. जल जीवन मिशन में भी बड़ा बजट हमको मिला है. पर निश्चित रूप से यह जल जीवन मिशन एक बहुत बड़ी महत्वकांक्षी योजना है. इस योजना में बजट आने के बाद बहुत ध्यान देने की आवश्यकता है कि इसमें कितना भ्रष्टाचार हो रहा है ? जो हमारा लक्ष्य है कि घर घर पानी पहुंचे, पर यह पानी घर घर नहीं पहुंच पा रहा है. यह हम सबके लिये बड़ा ही खेद का विषय है उसमें चर्चा करने की आवश्यकता है. बजट में बहुत सारी बातें बोलनी थीं अंत में मैं निवेदन करूंगा कि जैसा हमारे माननीय नेता प्रतिपक्ष ने जो बात रखी है कि विधायक निधि को बढ़ाना चाहिये, विधायक सुरक्षा निधि बढ़ना चाहिये. जो 15 करोड़ रूपये की राशि की बार बार बात आ रही है कि मध्यप्रदेश के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है कि इस पवित्र सदन में यदि कोई भेदभाव होगा तो हम मध्यप्रदेश की जनता के साथ में क्या इस तरह के भेदभाव को दूर कर पायेंगे. तो मेरा आपसे आग्रह है कि हम सबकी भावनाओं को समझते हुए यह जो 15 करोड़ रूपये की राशि है, वह भी करें, उसके साथ विधायक निधि एवं स्वैच्छानुदान की राशि को भी बढ़ाने की कृपा करेंगे. धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदयआपको मंत्री जी बोलना है क्या वैसे आपकी बात विस्तार से आ गई है ?

          उप मुख्यमंत्री वित्त (श्री जगदीश देवड़ा)अध्यक्ष महोदय, विनियोग विधेयक पर माननीय सोहनलाल बाल्मीक जी ने अपने विचार रखे हैं, लेकिन कहना सही है कि सामान्य चर्चा में सदन के सभी माननीय सदस्यों ने बहुत विस्तार से अपनी बात रखी है. बहुत महत्वपूर्ण विभागों पर भी चर्चा हुई है. माननीय मंत्रिगण ने भी अपने विभाग की उपलब्धियों के बारे में भी बताया. काफी सदस्य पक्ष एवं प्रतिपक्ष के सदस्यों ने अपनी बात विस्तार से रखी है. मैं इतना जरूर आश्वस्त करना चाहूंगा कि चाहे पक्ष हो या विपक्ष हो,

          अध्यक्ष महोदयविपक्ष को बहुत पहले से ही प्रतिपक्ष कहना शुरू किया है. अब विपक्ष शब्दावली में नहीं है. पक्ष एवं प्रतिपक्ष.

          श्री जगदीश देवड़ाअध्यक्ष महोदय, पक्ष एवं प्रतिपक्ष के साथियों को पूरी तरह से मैं आश्वस्त करना चाहूंगा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का उल्लेख करूंगा कि अंतोदय जो अंत में खड़ा है उसको उदय करने का मध्यप्रदेश की सरकार पूरी तरह से काम करेगी. मैं माननीय यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में जो सरकार काम कर रही है, जो प्रदेश हमारा विकास कर रहा है. अभी बहुत सारी बातें हमारे माननीय कैलाश जी ने भी यहां पर रखी है. मैं पूरी तरह से सदन को आश्वस्त कर रहा हूं कि सरकार का जो बजट है विकास में सर्वस्पर्शी सभी वर्गों के लिये है. यह निश्चित रूप से उसका हम उपयोग करेंगे. सरकार का पैसा उपयोग में आयेगा, पूरा पैसा प्रदेश के विकास के लिये ही लगायेंगे. मैं इतना ही आपको आश्वस्त कर रहा हूं. सभी सदन के साथियों से अनुरोध करना चाहूंगा कि विनियोग विधेयक पारित किया जाये.

         

                                                                                     

 

 

 

         

 

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप सबको शत्-शत् बधाईयां. (मेजों की थपथपाहट)

 

 

9.32 बजे                             अशासकीय संकल्‍प

 

(1) प्रदेश में निर्मित होने वाली सड़कों के बाजू में प्रत्‍येक 5 कि.मी. पर "वाटर हार्वेस्‍टिंग" सिस्‍टम की स्‍थापना की जाना.

 

       

 

        श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा (खातेगांव) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रतिवर्ष बारिश के समय जब मूसलाधार बारिश होती है, उस समय सड़कों के किनारे से होते हुए पानी नदी और नालों तक पहुंचता है और वह पानी जो कि हमारे लिए उपयोगी हो सकता है जिसे हम सहेज नहीं पाते, क्‍योंकि हमारी वॉटर स्‍टोरेज कैपेसिटी इतनी नहीं होती. वह पानी व्‍यर्थ चला जाता है. मेरा ऐसा मानना है मध्‍यप्रदेश में उच्‍च गुणवत्‍ता की सड़कें इस समय बन रही हैं. एनएचआई के जो राष्‍ट्रीय राजमार्ग हैं उनका भी गुणवत्‍तापूर्ण निर्माण प्रदेश में हो रहा है और नई तकनीकों का प्रयोग विभाग समय-समय पर करता ही है. इसलिए मैं यह चाहता हॅूं कि हमारी जो प्रधानमंत्री सड़कें हैं, एमडीआर हैं, हाईवेज हैं, नेशनल हाईवे हैं इसमें 2 किलोमीटर, 4 किलोमीटर, 5 किलोमीटर के अंतराल पर एक वॉटर हार्वेस्‍टिंग सिस्‍टम लगाया जाये, ताकि बारिश के दिनों में जो पानी सड़कों के बाजू से होकर बहता है और अनावश्‍यक रूप से चला जाता है, उस पानी का स्‍टोरेज वहां पर हो सके. भूमिगत जल का स्‍तर इससे ऊंचा उठेगा और उसके कारण से उन हाईवेज के आसपास के किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा. जो गांव स्‍थित होंगे, उनको भी पेयजल की समस्‍या से निजात मिल सकेगी. इसलिए मैं यह मांग करता हॅूं कि इस तरह के प्रपोजल का आप तकनीकी परीक्षण करा लें और यदि संभव हो सके, तो हाईवेज के आसपास इस तरह का वॉटर हार्वेस्‍टिंग सिस्‍टम लगाया जाये.

          उपमुख्‍यमंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण (श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल)  -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा जी ने बहुत ही अच्‍छा संकल्‍प यहां पर प्रस्‍तुत किया है. गिरता हुआ जल स्‍तर निश्‍चित रूप से भविष्‍य में आने वाली पीढ़ी के लिए एक गंभीर समस्‍या का विषय बन सकता है. जल जीवन मिशन के माध्‍यम से भी जो गांव-गांव में घर-घर में हम नल से जल देने की योजना पर काम कर रहे हैं वह भी योजना तभी लंबे समय तक रहेगी, जब हमारा भूजल का स्‍तर सही स्‍तर पर रहेगा. यदि जरूरत से ज्‍यादा जल स्‍तर नीचे चला गया, तो वॉटर के हमारे सारे जो सोर्सेज हैं जिससे पानी लेकर, हम जिसको फिल्‍टर करके टंकियों को भरकर पानी देने का काम कर पाएंगे. जब हमारा जल का स्‍तर ठीक होगा. इसलिए मैं आज माननीय शर्मा जी को इस बात के लिए संकल्‍प प्रस्‍तुत करने के लिए उनको बधाई भी देता हॅूं और साथ ही यह बताते हुए बड़ी प्रसन्‍नता है कि लोक निर्माण विभाग ने इस दिशा में बहुत ही ठोस कदम उठाया है. यहां तक कि आने वाले समय में जो नये रोडो के प्रस्‍ताव आएंगे, इसमें एसओआर में ही इसको शामिल कर दिया है. मैं सिर्फ 5 किलोमीटर, बल्‍कि हर किलोमीटर में हम जहां पानी ड्रेन होकर के जहां पर उसका लोएस्‍ट लेवल है वहां पर पिट बनाएंगे और उस पिट के माध्‍यम से पानी जमीन के अंदर जा सके, इसकी व्‍यवस्‍था होगी और वह रोड के निर्माण का ही पार्ट हो जाएगा तो इसलिए जो 5 कि.मी. पर आपने बात कही है, वह हर किलोमीटर में इस प्रकार की व्यवस्था पीडब्ल्यूडी के अपने प्रस्ताव में जिसको रिचार्ज पिट का नाम दिया जाएगा, जिससे कि एक गंभीर समस्या भविष्य में न हो, इस पर काबू पाया जा सकेगा. सड़कों के निर्माण में व्यापक रूप से मिट्टी का उपयोग होता है. वर्तमान में पीडब्ल्यूडी द्वारा किसी स्थान में खोदी गई मिट्टी को सड़क निर्माण हेतु लिये जाने के पश्चात् उस स्थान पर लोक कल्याण सरोवर भी जगह जगह निर्मित किये जा रहे हैं जिससे भू-जल का स्तर बढ़ रहा है. यह भली-भांति विदित है कि भू-जल स्तर में निरंतर गिरावट हो रही है. उस समस्या की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए लोक कल्याण सरोवर निर्माण के साथ ही सड़क किनारे वाटर हार्वेस्टिंग हेतु उपाय किये जाने की आवश्यकता है. नवीन निर्मित किये जाने वाले सड़कों के डीपीआर में उपयुक्तता के आधार पर जैसा मैंने अभी बताया रिचार्ज पिट निर्माण का प्रावधान किया जाएगा, जिससे भू-जल स्तर को बढ़ाने में सहायता मिलेगी तो मैं समझता हूं कि हमारे जो माननीय सदस्य हैं, जिन्होंने इस बात की चिंता व्यक्त की है उनका प्रस्ताव आलरेडी शासन ने स्वीकार किया हुआ है.

          श्री शैलेन्द्र कुमार जैन (सागर)- अध्यक्ष महोदय, इसमें छूट गया है. शहरी क्षेत्र को भी इसमें शामिल किया जाय और शहरी क्षेत्र के लिए भी जो अधोसंरचनाएं बन रही है, उसके लिए भी कुछ संवैधानिक, वैधानिक बाध्यता निश्चित हो जाय तो बेहतर होगा.

          संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - अध्यक्ष महोदय, श्री शैलेन्द्र भाई जी का सुझाव बहुत अच्छा है. इंदौर नगर निगम ने वहां  जितने भी हाऊस होल्ड हैं उनसे निवेदन किया है कि जितने भी नक्शे पास हो रहे हैं, उसमें वाटर हार्वेस्टिंग के लिए आवश्यक रूप से प्रावधान उन्हें करना होगा, यह नगर निगम इंदौर ने पहले ही जारी कर दिया है. हम राज्य के सारे नगर निकायों को भी इस बारे में निर्देश जारी कर देंगे. सिर्फ मेरा एक सुझाव यह है कि इसमें वाटर लेवल लो जहां पर हो. वहीं पर बनाएं. अगर आपने कर दिया कि हर किलोमीटर पर बनाएंगे तो कहीं ऊंची सड़क है तो वहां पर भी बना देंगे तो वहां पर पानी रुकेगा तो नहीं. इसलिए तकनीकी रूप से उस बात का ध्यान देना चाहिए कि जहां पर भी  वाटर हार्वेस्टिंग के लिए रिचार्ज पिट्स बनाएं तो उसका लेवल जहां लो लेवल है वहां पर बनाएं तो यह  एकदम ऐसा आऊट स्टैंडिंग आर्डर नहीं हो जाय कि हर किलोमीटर पर बनाएंगे, हर 5 किलोमीटर पर बनाएंगे. डेढ़ किलोमीटर पर भी बन सकता है, दो किलोमीटर पर भी बन सकता है, तीन किलोमीटर पर भी बन सकता है, तीन किलोमीटर में चार भी बन सकते हैं तो जहां यह लो लेवल हो, जहां पानी रुकता हो, वहां पर बनाएंगे तो ज्यादा लाभप्रद होगा.

          श्री राजेन्द्र शुक्ल - अध्यक्ष महोदय, बिल्कुल स्वाभाविक है, जैसा मैंने वक्तव्य में भी कहा है कि जहां पर पानी एक्यूम्युलेट होकर नेचुरल तरीके से इकट्ठा होता है, वहीं पर वह रिचार्ज पिट बनेगा, जिससे वह पानी पूरा का पूरा नीचे चला जाय.

          श्री आशीष गोविन्द शर्मा - माननीय मंत्री जी, आपने विचार को स्वीकार किया. धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदय - क्या आप संकल्प वापस ले रहे हैं?

श्री शैलेन्द्र कुमार जैन - अध्यक्ष महोदय, संशोधन कर लिया जाय. इसमें नगरीय निकाय भी शामिल हो जायं.

श्री आशीष गोविन्द शर्मा - संकल्प मेरे ख्याल से सर्वानुमति से पारित होना चाहिए. सदन की भी सबकी इच्छा है.

अध्यक्ष महोदय - आपने इसमें 5 कि.मी. का कहा है, सरकार 1 कि.मी. पर करना चाह रही है.

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) - अध्यक्ष महोदय, टोपोग्राफी के हिसाब से होना चाहिए, जैसा श्री कैलाश जी ने भी कहा है.

अध्यक्ष महोदय - श्री कैलाश जी ने जो कहा है वह बात ध्यान में रखना चाहिए और नगरीय क्षेत्र में भी वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की स्थापना की जावे.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न यह है कि -

"सदन का यह मत है कि प्रदेश में निर्मित होने वाली सड़कों के बाजू में प्रत्येक 5 कि.मी. पर "वाटर हार्वेस्टिंग" सिस्टम की स्थापना की जावे."

संकल्प स्वीकृत हुआ.

श्री अभिजीत शाह - अध्यक्ष महोदय, इसको सर्वसम्मति से पास कर लीजिए.

अध्यक्ष महोदय - श्री भैरोसिंह (बापू) जी (अनुपस्थित).

(3) कोल इण्डिया की सहायक कंपनी (वे.को.लि.) वेस्टर्न कोल्डफील्ड लिमिटेड पेंच क्षेत्र परासिया में वे.को.लि. भूमि की लीज समाप्त कर गरीब परिवार को पट्टा/मकान का मालिकाना हक प्रदान किया जाना

 

 

         

          श्री करण सिंह वर्मा- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सोहनलाल बाल्‍मीक जी ने वेस्‍टर्न कोल्‍डफील्‍ड लिमिटेड, कोल इंडिया लिमिटेड की सहयोगी इकाई है, जो कि भारत सरकार के अधीन हैं. ऐसी स्थिति में कोयले की लीज़ पर आवंटित भूमि के संबंध में, कोई भी निर्णय भारत सरकार के बिना राज्‍य सरकार नहीं ले सकती है. उनकी वर्ष 2030 तक उनकी लीज़ है. हम उस जमीन को नहीं दे सकते, इसलिये मैं आपसे निवेदन करूंगा. जब कोई ऐसा मामला हो तो आप मुझे बताइयेगा. इसमें तो कुछ नहीं कर सकते हैं. इसलिये मेरा आपसे निवेदन है कि आप यह संकल्‍प वापस ले लें.

          कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (श्री दिलीप जायसवाल)- माननीय अध्‍यक्ष जी, आपकी अनुमति से मैं भी इसमें कुछ कहना चाहता हूं कि सोलनलाल जी ने बहुत अच्‍छी बात उठायी है और मेरा भी जो क्षेत्र है और संभाग है, कोल माइंस का क्षेत्र है, वहां पर भारत सरकार की एसईसीएल यूनिट है, जो माननीय मंत्री जी ने कहा कि भारत सरकार जमीन अधिग्रहण करती है. उसमें दो प्रकार से अधिग्रहण होता है, एक तो अपने मध्‍यप्रदेश के 247 के अंतर्गत करता है और दूसरा भारत सरकार अपने कोल बियरिंग एक्‍ट के अंतर्गत करता है तो जो कोल बियरिंग एक्‍ट के अंतर्गत करता है, उसको तो हमको लेने में दिक्‍कत है, लेकिन जो 247 के अंतर्गत लेते हैं, जब उनका वहां पर कोयला निकल गया, सब कुछ हो गया, डिप्‍लेरिंग हो गई, पूरी कालोनी खाली पड़ी है तो उसको हमको कंपनी एक्‍ट के अंतर्गत राज्‍य सरकार को वापस देना है. तो हम वापस लेकर के वहां पर प्रधानमंत्री आवास बनवा सकते हैं, गरीबों के लिए दे सकते हैं, ऐसे बहुत सारे उपयोग में ले सकते हैं. इसलिए जो यह लाया है, उसका मैं भी समर्थन करता हूँ. उसमें ऐसा होना चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- सोहनलाल बाल्‍मीक जी, कुछ बोलना चाहते हैं.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सदन का ध्‍यान दिलाना चाहता हूँ कि वर्ष 1972-73 से पहले ये सारी कोयला खदानें प्राइवेट में चलती थीं और निजी क्षेत्र के मालिक इन कोयला खदानों को चलाते थे. माननीय स्‍वर्गीय इंदिरा गांधी जी ने वर्ष 1972-73 में कोयला खदानों का राष्‍ट्रीयकरण किया. उसमें फिर पब्लिक सेक्‍टर में कोल इण्डिया ने इन सारी खदानों को अपने कब्‍जे में लेकर चलाना चालू किया. मैं आपको अवगत कराना चाहता हूँ कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में जो कोयला खदानें हैं, बहुत पुरानी खदानें थीं, और वे खदानें आज बंद हो गई हैं. ऐसा बहुत बड़ा क्षेत्र मेरा है, जहां कोयला खदानें बंद हो गई हैं. अण्‍डर ग्राउंड माइन थी और कोल प्रॉपर्टी थी, कोल प्रॉपर्टी समाप्‍त होने के बाद में कोल इण्डिया ने क्‍लोजर का नोटिस जारी करके पूरी जो कोल इण्डिया की माइनें थीं, उनको बंद कर दिया. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से बताना चाहता हूँ कि मेरी जो कोयला खदानें बंद हुईं, इकलहरा जो माइन चलती थी, वह वर्ष 2000 में बंद हुई. चान्‍दामेटा कोयला खदान वर्ष 2000 में बंद हुई है. नॉर्थ चान्‍दामेटा खदान वर्ष 1990 में बंद हुई है. भमोड़ी कोयला खदान वर्ष 1994 में बंद हुई है. बड़कुई ओपन कॉस्‍ट वर्ष 2018 में बंद हुई है. न्‍यूटन कोयला खदान वर्ष 1995 में बंद हुई है. रावनवाड़ा कोयला खदान वर्ष 2010 में बंद हुई है. रावनवाड़ा खास कोयला खदान वर्ष 2012 में बंद हुई है. गनपती माइन वर्ष 2018 में बंद हुई है और गाजनडो माइन वर्ष 2008 में बंद हुई है. मेरा उसमें अध्‍यक्ष जी, यह कहना है कि‍ लीज यदि कोई सरकार देती है तो जहां कोई उद्योग स्‍थापित होता है या कोई नया उद्योग लगता है, उनके लिए सरकार की लीज दी जाती है, मगर यदि लीज लेने के बाद में कोयला खदानें बंद हो गईं, जब इनके लिए वह जमीन अनुपयोगी है, वहां कोई उपयोग ही नहीं हो पा रहा है तो उनको लीज को हमको वापस करना चाहिए. ये गजट में वर्ष 2021 में राजपत्र जारी हुआ है. फिर से इसको वर्ष 2030 तक के लिए रिन्‍यू कर दिया, मैं माननीय मंत्री से पूछना चाहता हूँ कि जब हमें उसकी आवश्‍यकता नहीं थी, कोयला खदानें वहां सारी बंद हो गईं, नया कोई प्रोजेक्‍ट आना नहीं है, तो उनको रिन्‍यू क्‍यों किया गया, उसको उसी समय समाप्‍त करके आज माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं बताना चाहता हूँ कि वहां मेरे विधान सभा क्षेत्र में यह स्थिति है कि चार मेरी नगरीय निकाय हैं और बहुत बड़ा क्षेत्र है, चारों नगर निकायों में पूरा डब्‍ल्‍यूसीएल, वेकोली का ही फंसता है और इसी तरीके से 12 पंचायतें ऐसी हैं, जो वेकोली क्षेत्र में फंसती हैं और इन सभी क्षेत्रों में, चारों नगरीय निकायों में और 12 ग्राम पंचायतों में यहां सारी खदानें बंद हो गई हैं. अब प्रधानमंत्री आवास यहां पर किसी का नहीं आ पा रहा है. इसलिए नहीं आ पा रहा है कि उसमें वह अधिकार नहीं रख पा रहा है. मेरे विधान सभा क्षेत्र में आंगनवाड़ी आती है, तो वह आंगनवाड़ी नहीं बन पाती है और कोई सामुदायिक भवन आता है तो सामुदायिक भवन नहीं बन पाता क्‍योंकि उसमें डब्‍ल्‍यूसीएल की अनुमति नहीं मिलती है. शासकीय योजना का जो हमको बहुत बड़ा लाभ मिलना चाहिए, आम जनता को लाभ मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पा रहा है. माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरा आपसे निवेदन है और जो ये कोयला खदानें बंद हुई हैं, ये अंडर ग्राउंड माइनें हैं, जो अंडर ग्राउंड सरफेस में, अंडर ग्राउंड माइन जो चलती है, वह 60 मीटर अंदर रहती है, 60 मीटर का सरफेस आपको खाली मिलता है, उसमें कोई दिक्‍कत नहीं होती है, न माइन को दिक्‍कत होती है और न रहने वालों को कोई दिक्‍कत होती है तो फिर उस जमीन के लीज का उपयोग होना चाहिए, जमीन को आना चाहिए. आज  यदि बहुत सारे  ऐसे जो वर्ग हैं, जो कई वर्षों से रह रहे हैं.  उनको पट्टा नहीं मिल पा रहा है. यदि आज उनको पट्टा  मिलता,  तो निश्चित रुप से वे प्रधानमंत्री  आवास के, शौचालय  के  इन सब चीजों का उनको फायदा मिलता.  मेरे विधान सभा क्षेत्र में  जो नगरीय निकाय हैं,  मेरे क्षेत्र में  2019 में 9  आंगनवाड़ी  की स्वीकृति हुई है, आज तक नहीं बन पाईं, टेंडर होते हैं,  उसको जमीन  नहीं  मिल पाती है,  जिसके चलते   वह कैंसिल हो  जाते हैं.  ऐसी  अनेक  योजनाएं जो हैं प्रदेश सरकार की, वह  उसमें लाभान्वित नहीं हो पा रहा है.  वह तो ज्यादा प्रभावित हो रहा है.  मेरा आपसे निवेदन है, मैंने  मुख्यमंत्री  जी को भी कई पत्र  लिखे हैं इस बारे में  कि  इसमें ध्यान दिया जाये, इसमें कार्यवाही  की जाये.  तो मेरा आपसे निवेदन है कि  मेरे अशासकीय संकल्प  को  स्वीकार करते हुए केंद्र सरकार को  इसमें प्रस्ताव  पहुंचाया  जाये, ताकि  वह जमीन को फिर से राज्य सरकार को मिले, ताकि   वहां के रहने वाले  निवासियों को  शासकीय लाभ  मिल सके.

          अध्यक्ष महोदय(श्री दिलीप जायसवाल के खड़े होने पर)  दिलीप जी, कृपया बैठें.

          श्री करण सिंह  वर्माअध्यक्ष महोदय,  मैंने पहले भी निवेदन किया था कि ये  वे.को. लि. वेस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड  की जमीन है.  2030 तक   तो हम दे भी नहीं सकते हैं.  लीज पर हमने दे दी है.  तो उसका सवाल भी  नहीं उठता है.  इसके बाद वे इसमें खनन करेंगे.   वहां उत्खनन करेंगे 2030 के पहले ही.   तो वह हम दे नहीं  सकते हैं.  इसलिये मैं आपसे प्रार्थना करुंगा कि  यह संकल्प वापस ले लें.  आप मुझसे ज्यादा विद्वान हैं,  हम दे ही नहीं सकते, अगर किसी को एक बार दे दी.

          अध्यक्ष महोदय आप सदस्य क्या चाहते हैं.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक--  अध्यक्ष महोदय, मेरा एक प्रश्न है कि  वहां  कोई  नया प्रोजेक्ट नहीं आ रहा है.  जैसा कहा कि  उनके उपयोग की चीज है, तो उपयोग होना चाहिये. हम कहते हैं कि यदि उपयोग में होती, यदि कोई नया प्रोजेक्ट रहता, कोई नई माइंस खुलती, तो हम  उसमें बात नहीं करते.  जब कोई नई माइंस  उसमें आना ही नहीं है, कोल प्रापर्टी खतम हो चुकी,कोल प्रापर्टी है ही नहीं, कोई  बोर, जो एमसीएल ने बोर किया,  उसमें बता दिया कि  कोई माइंस यहां नहीं खुल सकती अब. तो उसमें लीज को  समाप्त करना चाहिये.

          श्री करण सिंह  वर्माअध्यक्ष महोदय, मैंने पहले भी निवेदन किया कि  उन्होंने भेजा है, हमने जानकारी मंगाई है.  उन्होंने भेजा है कि  इसमें अभी भविष्य में  इसका खनन किया जायेगा.  क्योंकि 2030 तक  उन्होंने  लीज पर लिया है,  तो बीच में हम खतम नहीं कर सकते हैं. आप मुझसे ज्यादा जानते हैं.  बोल रहे हैं विधान सभा में.

          श्री सोहनलाल बाल्मीकयदि वे.को.लि. ने   आपको कोई  बताया है कि  आप मुझे बता दें कि कौन सा प्रोजेक्ट आ रहा है.

          श्री करण सिंह  वर्माअध्यक्ष महोदय, नहीं, उसमें  वह उत्खनन करेंगे और भी.

          श्री सोहनलाल बाल्मीकवह क्या उत्खनन करेंगे.

          श्री करण सिंह  वर्माअध्यक्ष महोदय,2030 तक  हमने किसी चीज को  किसी को दे दी, अब हम बीच में वापस नहीं ले सकते हैं.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक--  वह गलत दे दी. मेरा प्रस्ताव यही था कि  जो अण्डर ग्राउंड माइन्स नहीं चल रही है, दोबारा खोलना इतना आसान नहीं होता है.

          श्री करण सिंह  वर्माअध्यक्ष महोदय, मैं आपसे प्रार्थना कर रहा हूं कि  आप इसको वापस ले लें.

          अध्यक्ष महोदय  मुझे लगता है कि संकल्प जो है मूलतः केंद्र शासन से अनुरोध  करने का है.  अब स्वाभाविक रुप से   आपने बताया है कि  उनकी लीज अवधि अभी खतम नहीं हुई है  और सामान्य तौर पर क्या है कि जब कोई कम्पनी सरकार  से लीज पर लेती है, तो वह पैसे जमा  करके ही लेती है, जहां तक मेरी जानकारी है.  तो  इसलिये यह थोड़ा  इनको मुझे लग रहा है कि   जवाब देने में संकोच हो रहा है.  इसलिये मुझे लगता है कि  हमें  ऐसा करना चाहिये कि  सदस्य जी विस्तार से उस  क्षेत्र  की जो स्थिति  आपने यहां भी  व्यक्त की  है,  इससे और अधिक भी होगी और उनके लिये  वह जमीन  क्यों अनुपयोगी  हो गई है,  उस पर विस्तार से लिखते हुए  मंत्री जी को आप पत्र लिखो और केंद्र सरकार से आप पत्राचार कर सकते हो कि  आपके उपयोग की नहीं है, तो यह कम से कम जनता  के उपयोग में आवे.  तो मुझे लगता है कि  यह ठीक है.

          श्री सोहनलाल बाल्मीकठीक है, अध्यक्ष जी.  एक मेरा प्रस्ताव है,  जैसा आपने जो  व्यवस्था बनाई  है कि और इसकी पूरी  सारी रिपोर्ट  बनाकर पहुंचा दें, तो  मेरा आपसे निवेदन है कि   एक बार कलेक्टर और वहां के जो जीएम  हैं और जो नागपुर हैडक्वार्टर में  सीएमडी  बैठते हैं,  उनके साथ एक बार बैठक करा दीजिये, ताकि पूरी विस्तार से रिपोर्ट  आ  जायेगी और वह मुझे बता देंगे कि कौन सा प्रोजेक्ट आने वाला है और उस भूमि   पर क्या करेंगे  और बाकी प्रस्ताव  आप वहां पहुंचा देंगे.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)अध्यक्ष महोदय,  प्रस्ताव बहुत अच्छा है, क्योंकि लैंड  बेकार  पड़ी हुई है वहां पर जब भी मैं दौरे पर गया था, तो मैंने देखा है.  बहुत बड़ा क्षेत्र  जहां पर अनुपयोगी पड़ा हुआ है.  जमीन है, तो उसका उपयोग होना चाहिये.  यदि नीचे मटेरियल नहीं है, नीचे अगर कोल नहीं है तो  उसका उपयोग भी क्या करेंगे.  एक बार हमें पत्राचार तो प्रारम्भ कर देना चाहिये सरकार की ओर से और मैं मंत्री जी से आग्रह करुंगा कि  आपके विभाग की ओर से पत्राचार प्रारम्भ कर दीजिये और  सदस्य जी को कहूंगा कि  इस  संकल्प को वापस ले लें.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक जैसा अध्यक्ष जी आदेश करें.

          अध्यक्ष महोदय क्या  माननीय सदस्य संकल्प वापस लेने के पक्ष में हैं.

          श्री सोहनलाल बाल्मीकअध्यक्ष महोदय, आपके  आदेश  के अनुसार संकल्प  वापस लेता हूं  और एक प्रस्ताव जरुर वे वहां पहुंचा दें केंद्र सरकार को.

          अध्यक्ष महोदय क्या सदन संकल्प वापस  लेने की अनुमति प्रदान करता है.

                                                                             अनुमति दी गई.

                                                                             संकल्प वापस हुआ.

 

                  

समय 9.50 बजे

नवीन राजस्व अनुविभाग चित्रकूट(मुख्यालय चित्रकूट) में नगर पंचायत चित्रकूट के साथ खरहा, सेजवार, टेढी, पालदेव, आधी पडमनिया के ग्राम शामिल करके अनुभाग बनाया जाये.

          श्री सुरेन्द्र सिंह गरहवार(चित्रकूट) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह संकल्प प्रस्तुत करता हूं कि सदन का यह मत है कि नवीन राजस्व अनुविभाग चित्रकूट(मुख्यालय चित्रकूट) में नगर पंचायत चित्रकूट के साथ खरहा, सेजवार, टेढी, पालदेव, आधी-पडमनिया के ग्राम शामिल करके अनुभाग बनाया जाये.

          अध्यक्ष महोदय- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ.

          श्री सुरेन्द्र सिंह गहरवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, संक्षिप्त में बता दूं कि लोकहित में नवीन राजस्व अनुविभाग चित्रकुट मुख्यालय, चित्रकूट में केवल नगर पंचायत चित्रकूट के साथ खरहा, सेजवार, टेढी, पालदेव, आधी पडमनिया के ग्राम शामिल कर अनुविभाग बनाये जाने हेतु में अपनी बात रख रहा हूं. अध्यक्ष महोदय, चित्रकूट विधानसभा जंगली घाटी एवं पहाड़ी गरीब पिछड़ा क्षेत्र है, भौगोलिक दृष्टि से अलग अलग हिस्सों में बंटा हुआ है रउंधा उप तहसील एवं मझगवां तहसील के जिन ग्राम पंचायत के राजस्व ग्रामों को अनुविभाग चित्रकूट, मुख्यालय चित्रकूट से जोड़ा जा रहा है उनकी दूरी 50 से 100 किलोमीटर तक है. मझगवां तहसील जनपद मुख्यालय अनुविभाग मझगवां मुख्यालय पहले से ही है, इसमें 10-15 किलोमीटर  से  40 से 50 किलोमीटर तक की दूरी के पूरे गांव आ जाते हैं. मझगवां सतना मुख्यालय के रास्ते में होने से किसी भी तरह से आने जाने में बीच में पड़ता है, कम दूरी में है लोगों के लिये सुविधाजनक है, आवागमन के पर्याप्त साधन हैं, चित्रकूट उल्टा 30 किलोमीटर दूर निर्जन  जंगल पार करके जाना पड़ता है , 5 बजे शाम के बाद में यात्री बसें बंद हो जाती है, 30 किलोमीटर जंगल व डकैती क्षेत्र है ,जहां पर डकैतों की दहशत बनी रहती है, ओहारी, गोपालपुर, जवारन पंचायतो के 18 गांव आथरकचार, रानीपुर, खोई,बियामयी.. पंचायतों के 38 गांव के लोगों को 3 बार बस बदलना पड़ेगा, लोग परेशान होंगे. घाटी ऊपर के गांव के लिये मझगवां 20-, 25, 30 किलोमीटर है जिन्हें भी चित्रकूट 60-70 किलोमीटर दूर जाना बेहद असुविधापूर्ण परेशानी दायक होगा, मझगवां सुविधाजनक है, एक दिन की पेशी 3 दिन में होगी तो आम जनता को अत्यंत परेशानी होगी. अतएव लोकहित में कृपया संकल्प पारित किये जाने का कष्ट करें.

          राजस्व मंत्री (श्री करण सिंह वर्मा) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी माननीय सदस्य से, मंत्री जी से  इस संबंध में चर्चा हुई है. दो तीन बार चर्चा हुई. माननीय अध्यक्ष महोदय,  राज्य शासन द्वारा इस हेतु मध्यप्रदेश प्रशासन इकाई पुनर्गठन आयोग का गठन किया गया है, अगर कोई मामले तहसील में, अनुविभाग में इस गांव को उसमें  करना है इसके लिये पहले से ही एक आयोग बना हुआ है आयोग की अनुशंसा के आधार पर शासन इस पर विचार करता है इसलिये माननीय सुरेन्द्र सिंह जी से निवेदन करूंगा कि वे अपनी सारी बातें 10 किलोमीटर अथवा 15 किलोमीटर कैसे नहीं आया, क्यों नहीं आया, मुझसे भी आपने चर्चा की थी, वह आयोग में, मैं भी उनके साथ में रहूंगा, मैं भी पत्र लिखूंगा और कलेक्टर और पीएस को बुलाकर के चर्चा करके मेरी भी मंशा उनकी मंशा में समाहित है ,अध्यक्ष महोदय  मैं उनको मिलाकर के पत्र लिखूंगा.

          अध्यक्ष महोदय-- मुझे लगता है कि इसमें मैंने जो अभी सुरेन्द्र सिंह जी की बात सुनी, स्वाभाविक रूप से जो वर्तमान में कार्यवाही प्रचलित है उसमें इनकी चर्चा से ऐसा लगता है कि जनता को अधिक दूरी तय करना पडेगी और असुविधा का सामना करना पड़ेगा, वस्तु स्थिति जो कार्यवाही अभी प्रचलित है उसकी वस्तुस्थिति क्या है यह मुझे ध्यान में नहीं है, लेकिन मैं ऐसा समझता हूं कि एक बार अगर यह अनुविभाग बन गया तो फिर हमेशा लोग मांग करते रहेंगे, ज्ञापन देते रहेंगे और जनता को परेशानी होती रहेगी. तो समय रहते मुझे लगता है कि आप माननीय सदस्य की, माननीय सांसद जी को भी बुला लें और अपने राजस्व के अधिकारी और कलेक्टर इनके साथ, इनके प्रस्ताव को भी देख लें वर्तमान में जो कार्यवाही प्रचलित है उसको भी देख लें और जो ठीक हो उस दिशा में हम आगे बढ़ें जनहित में और मुझे लगता है कि शायद माननीय सदस्य की समस्या का समाधान हो जायेगा.

          श्री करण सिंह वर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैंने पहले भी बोला है और आपके निर्देश का पालन करेंगे. पीएस, कलेक्‍टर, सांसद महोदय, विधायक महोदय के साथ बैठकर चर्चा कर लेंगे. क्‍या संभव हो सकता है. उस आयोग को हम अपनी सिफारिश करके भेज देंगे.

          संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) --  अध्‍यक्ष महोदय, मैं उस शहर सतना जिले का प्रभारी मंत्री भी हूं. मैं कलेक्‍टर को निर्देश भी दे दूंगा और माननीय जनप्रतिनिधियों से चर्चा करके उस संबंध में जिले का एक प्रस्‍ताव बनाकर हम आयोग को भेज देंगे. माननीय मंत्री जी से भी मदद प्राप्‍त कर लेंगे. यदि फिजिबल होगा तो निश्चित रूप से उस पर कार्यवाही होगी.

          अध्‍यक्ष महोदय --  मंत्री जी, का सदस्‍य से क्‍या आग्रह है ?

          श्री करण सिंह वर्मा --  अध्‍यक्ष महोदय, हमारे संसदीय कार्य मंत्री वहां के प्रभारी मंत्री भी हैं. उनकी अध्‍यक्षता में मैं भी रहूंगा. उस पर सारी चर्चा करके उनकी पूरी समस्‍या का निराकरण करूंगा और मेरी यही प्रार्थना है कि संकल्‍प वापस ले लें.

          अध्‍यक्ष महोदय क्‍या माननीय सदस्‍य संकल्‍प वापस लेने के पक्ष में हैं ?

          श्री सुरेन्‍द्र सिंह गहरवार -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरी कुछ बात सुन लें इसके बाद जैसी आप व्‍यवस्‍था देंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- अब बात के लिये मंच तय हो गया है. इतने उच्‍च स्‍तरीय लोग बैठेंगे, बातचीत करेंगे तो वहां ठीक से बात रख देंगे.

          श्री सुरेन्‍द्र सिंह गहरवार -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं थोड़ी अपनी पीड़ा भी व्‍यक्‍त करूंगा. एक तो जिला प्रशासन ने कोई जानकारी नहीं दी. मैंने जनसूत्र के आधार पर कलेक्‍टर सतना को दिनांक 17.11.2024 को आपत्ति प्रस्‍तुत की. कलेक्‍टर ने कोई संज्ञान नहीं लिया.

          अध्‍यक्ष महोदय --  सुरेन्‍द्र सिंह जी, मैं आसंदी से कह रहा हूं. मंत्री जी ने भी कहा. प्रभारी मंत्री जी ने भी कहा. राजस्‍व का राज्‍य का अमला, कलेक्‍टर, सांसद, विधायक, प्रभारी मंत्री, विभागीय मंत्री इतने लोग बैठकर आपकी बात सुनेंगे और जो जनहित का रास्‍ता होगा उसको आगे अख्तियार करेंगे. इससे ज्‍यादा और क्‍या होगा. बाकी मुझे कुछ कहने की जरूरत नहीं थी.

          श्री सुरेन्‍द्र सिंह गहरवार -- अध्‍यक्ष महोदय, जनहित में जो भी निर्णय उचित हो वैसा लें ताकि आम जनता प्रताडि़त न हो.

          अध्‍यक्ष महोदय --  क्‍या आप संकल्‍प वापस लेने के पक्ष में हैं ?

          श्री सुरेन्‍द्र सिंह गहरवार -- अध्‍यक्ष महोदय, इसी शर्त के साथ कि जो भी निर्णय आगे हो वह जनहित में माने जाएं. धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय --  हां बोलिये या ना बोलिये.

          श्री सुरेन्‍द्र सिंह गहरवार -- अध्‍यक्ष महोदय, इसी शर्त के साथ वापस लूंगा कि अगला जो भी निर्णय हो वह जनहित, लोकहित में हो जैसा मैंने अपने निवेदन में उल्‍लेख किया है. इस शर्त पर वापस लेता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय --  सुरेन्‍द्र सिंह जी, शर्त इसमें नहीं होती है. कुल मिलाकर जब आप बात करेंगे तब क्‍लीयर होगा ना.

          श्री सुरेन्‍द्र सिंह गहरवार --  ठीक है अध्‍यक्ष महोदय, हमारी शर्त आप स्‍वयं हैं. जैसी व्‍यवस्‍था देंगे लोकहित में जो उचित होगा.

          अध्‍यक्ष महोदय हमने व्‍यवस्‍था दे दी है.

          श्री सुरेन्‍द्र सिंह गहरवार मैं संकल्‍प वापस लेता हूं.

          श्री पंकज उपाध्‍याय   मैं बोल रहा था कि अधिकारी सत्‍ता पक्ष के विधायकों की ही सुनवाई नहीं कर रहे हैं तो आप इस बात को समझिये.

          अध्‍यक्ष महोदय --  क्‍या सदन संकल्‍प वापस लेने की अनुमति प्रदान करता   है ?

          संकल्‍प वापस हुआ.  

सबको बहुत धन्‍यवाद.

          विधान सभा की कार्यवाही सोमवार, दिनांक 24 मार्च, 2025 को प्रात: 11.00 बजे तक के लिये स्‍थगित.

          अपराह्न 9.59 बजे विधान सभा की कार्यवाही सोमवार, दिनांक 24 मार्च, 2025 (3 चैत्र, शक संवत् 1947) को प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्‍थगित की गई.

 

                         ए.पी.सिंह

भोपाल,                                                                                          प्रमुख सचिव,

 दिनांक : 21 मार्च, 2025                                                             मध्‍यप्रदेश विधान सभा