मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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षोडश विधान सभा                                                                                      एकादश सत्र

 

 

जुलाई, 2026 सत्र

 

सोमवार, दिनांक 20 जुलाई, 2026

 

(29 आषाढ़, शक संवत्‌ 1948)

 

 

[खण्ड- 11 ]                                                                                                     [अंक- 1 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

सोमवार, दिनांक 20 जुलाई, 2026

 

(29 आषाढ़, शक संवत्‌ 1948)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.01   बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

 

राष्ट्रगीत

राष्ट्रगीत ‘’वन्दे मातरम्’’ का समूहगान

 

          अध्यक्ष महोदय—अब, राष्ट्रगीत ‘’वन्दे मातरम्’’  होगा, सदस्यों से अनुरोध है कि वे कृपया अपने स्थान पर खड़े हो जायें.

 

(सदन में राष्ट्रगीत ‘’वन्दे मातरम् का छ:छंदों सहित समूहगान किया गया )

 

11.03 बजे.

 

1. निधन का उल्लेख

 

निम्नलिखित के निधन संबंधी उल्लेख :-

(1) श्री अश्विन जोशी, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य,

(2) श्री पहाड़ सिंह कन्नौजे, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य,

(3) मेजर जनरल भुवन चन्द्र खंडूरी, एवीएसएम (सेवानिवृत्त), भूतपूर्व केन्द्रीय मंत्री,

(4) डॉ. बशीर बद्र, सुप्रसिद्ध शायर,

(5) श्रीमती तीजन बाई, सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका.

 

 

 

 

 

मुख्यमंत्री (डॉ.मोहन यादव) – माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे सदन को सूचित करते हुए अत्यंत दुख हो रहा है कि मध्यप्रदेश विधानसभा के भूतपूर्व सदस्य श्री अश्विन जोशी जी, जो व्यक्तिगत रूप से मेरे मित्र भी थे, उनका निधन दिनांक 8 मई को हुआ है.

          अध्यक्ष महोदय, श्री पहाड़ सिंह कन्नौजे जी, जिन्होंने पिछली विधानसभा में हम सबके साथ ही यहां विधायक के रूप में काम संभाला था. उनका 8 जुलाई को तथा मेजर जनरल भुवन चन्द्र खंडूरी जी (सेवानिवृत्त) का निधन 19 मई को तथा प्रसिद्ध शायर डॉ.बशीर बद्र जी और पंडवानी गायिका श्रीमती तीजन बाई जी का निधन हुआ है.

          अध्यक्ष महोदय, श्री अश्विन जोशी जी से विक्रम विश्वविद्यालय छात्रसंद्य के चुनाव के समय कांग्रेस की तरफ से कई बार मेरे उनसे व्यक्तिगत संबंध भी रहे हैं. इंदौर की तरफ से वे अपने कॉलेज के युवाओं और प्रेसिडेंट को लेकर आते थे. यहां विधानसभा में भी जैसा कि आपने अभी बताया कि वे 11वीं, 12वीं, 13वीं विधानसभा में विधायक भी रहे हैं. वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पदाधिकारी, युवा कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं. उन्होंने कई दायित्वों का निर्वहन किया. आपके निधन से प्रदेश के सार्वजनिक जीवन की अपूरणीय क्षति हुई है.

          अध्यक्ष महोदय, पहाड़ सिंह कन्नौजे जी, जो यद्यपि वे पुलिस में जवान के पद पर भर्ती हुए थे और वे पुलिस के क्रमश: पद पर अलग-अलग प्रमोशन होते-होते डीएसपी के पद से रिटायर हुए और डीएसपी के पद से रिटायर होने के बाद बागली विधानसभा से हमारे नेता माननीय श्री कैलाश जोशी जी की विधानसभा से वे विधायक के नाते से आए. वे बहुत सरल व्यक्तित्व के धनी और जनता की सेवा करने वाले थे. आपके निधन से भी प्रदेश के सार्वजनिक जीवन की अपूरणीय क्षति हुई है.

          अध्यक्ष महोदय, एक ऐसे राजनेता मेजर जनरल भुवन चन्द्र खंडूरी जी (सेवानिवृत्त) जिन्होंने सेना में और सेना के बाद राजनेता के नाते से भी भारत सरकार के मंत्री और मुख्यमंत्री के नाते से अलग-अलग दायित्वों का उत्कृष्ठ तरीके से निर्वहन किया है. श्री खंडूरी जी को अति विशिष्ट सेवा पदक से भी अलंकृत किया गया है. वे 10वी, 12वीं, 13वीं, 14वीं, 16वीं लोकसभा में सदस्य निर्वाचित हुए. वे केन्द्र सरकार में अलग-अलग विभागों के मंत्री रहे. वे दो बार उत्तराखंड मुख्यमंत्री के रहे. हमने आपके निधन से एक वरिष्ठ नेता, कुशल प्रशासक खोया है. 

          अध्यक्ष महोदय, सुप्रसिद्ध शायर डॉ.बशीर बद्र एक बार भोपाल आए, तो वे हमेशा के लिए मध्यप्रदेश के हो गए. ऐसे डॉ.बशीर बद्र जिनका मूलत: जन्म तो अयोध्या (उत्तरप्रदेश) में हुआ था लेकिन वे उर्दू अकादमी मध्यप्रदेश के अध्यक्ष, बाद में साहित्य अकादमी दिल्ली के सदस्य रहे और आपने अपनी गज़लों के माध्यम से हिन्दी भाषा का सुदंर संयोजन करते हुए असरदार गज़लों के साथ फिल्मों के अंदर भी आपकी रचनाओं ने भी सबको सदैव एक दिशा दिखाई है. आपको उर्दू साहित्य और गज़ल लेखन के क्षेत्र में उर्दू अकादमी मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार सरकार ने सम्मानित किया और भारत सरकार ने वर्ष 1999 में पद्म श्री से आपको अलंकृत किया था. आपके निधन से देश-प्रदेश के उर्दू अदब के कद्दावर और नामचीन शायर को हमने खोया है.

          अध्यक्ष महोदय, श्रीमती तीजन बाई जी वास्तव में आदिवासी अंचल से आने वाली एक ऐसी गायिका थीं, जिनका छत्तीसगड़ से अपना संबंध भी रहा. जब वे महाभारत के अलग-अलग पात्रों को जीवंत रूप से बोलती थीं, उनकी खनकती आवाज और अभिनय शैली थी. एक तरफ जब जांघ पर गदा मारने के लिए उत्साहवर्धन करने के लिए श्रीमती तीजन बाई जी बोलती थीं, तो दर्शकों की सांसें रूक जाती थीं, ऐसा लगता था कि महाभारत का वह दृश्य सामने दिखाई देने लगा है. ऐसी महान हस्ती श्रीमती तीजन बाई जी के लिए हमारे सबके मन में उनका विशेष आदर भी था और उनको भारत सरकार की तरफ से वर्ष 1988 में पद्म श्री, वर्ष 2003 में पद्म भूषण, वर्ष 2019 में पद्म विभूषण से अलंकृत किया. ऐसी पंडवानी शैली की प्रतिभाशाली कलाकार का जाना हम सभी के लिए कष्टकारी है. मैं सभी धन्य हस्तियों को अपनी ओर से, सरकार की ओर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) – माननीय अध्यक्ष महोदय, श्री अश्विन जोशी जी 3 बार विधायक रहे. उनके साथ के कई साथी आज इस सदन में बैठे हैं. उनकी बेबाकी, स्पष्टवादिता को लेकर वे जाने जाते थे. मैं इसलिए भी उनको व्यक्तिगत सम्मान देता हूँ, क्योंकि वे कामों को तुरंत निपटाते थे. वे इंतजार नहीं कराते थे. वे तत्काल समाधान की बात करते थे. जब उनका निधन हुआ, उसके कुछ समय पहले मैं उनसे मिलने उनके घर गया था मिलने वह बड़े अच्छे थे. मुझे कहा कि मैं कुछ दिनों में ठीक हो जाऊंगा उमंग जी फिर मैं सामाजिक क्षेत्र में काम करूंगा, लेकिन ईश्वर ने जो लिखा है, वह किसी को पता नहीं है. लेकिन मैं इस बात को मानता हूं कि जिस प्रकार से इन्दौर में एक छात्र राजनीति से निकलकर के बाहर आये, जिस प्रकार से क्षेत्र क्रमांक-3 को लेकर के उन्होंने अपना योगदान दिया. हमारे माननीय तुलसी सिलावट जी उनके अच्छे मित्र रहे हैं. तो इस बात को मैं कहना भी चाहता हूं कि स्पष्टवादिता होना चाहिये, व सकारात्मक सोच होना चाहिये. अगर कोई संवाद करना चाहे, बात करना चाहे तो करना चाहिये. इस बात को हमेशा माननीय अश्विन भाई ने ध्यान रखा उनकी बात किसी को जरूर कड़वी लगती थी, लेकिन दिल के कभी बुरे नहीं थे, यह बात सारे हमारे साथी अच्छी तरह से जानते हैं. माननीय पहाड़ सिंह कन्नौजे विधान सभा में विधायक रहे हैं, वह डीएसपी भी रहे हैं. उनका कर्तव्यनिष्ठ व्यक्तित्व सदैव स्मरणीय रहेगा. मेजर जनरल खंडूरी जी उत्तराखंड में मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने सेवाएं दीं. एक सैन्य अधिकारी का जीवन नियम वह अनुशासन का रहता है. निश्चित तौर से उन्होंने सामाजिक जीवन के अंदर, राजनीतिक क्षेत्र के अंदर उस चीज को हमेशा अपने उत्तराखंड के कार्यकर्ताओं से कभी बात होती है एक अलग तरह से बात होती है कि वह बहुत अनुशासित थे हमेशा उन्होंने संगठन को लेकर, गवर्नेंस को लेकर हमेशा इस बात का ध्यान रखा डॉ.बशीर बद्र, सुप्रसिद्ध उर्दू शायर उत्तरप्रदेश के अयोध्या में उनका जन्म हुआ था. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से स्नातक हुए. उनकी गजलों में प्रेम और मानवीय रिश्तों एवं जीवन में संघर्ष एवं संवेदनाओं को अत्यंत ही प्रभावशाली तरीके से रखा. 1999 में उनको पद्मश्री अवार्ड भी मिला. नयी पीढ़ी के लिये हमेशा सोचते थे कि नफरत की राजनीति में नहीं है आप उनकी एक भावना रहती थी. गजल के माध्यम से उनकी कविताओं के माध्यम से हमेशा प्रेम एवं मानवीय मूल्यों से संरक्षण की ओर नयी पीढ़ी जाये इसको लेकर हमेशा वह चिंतित रहते थे. बशीर बद्र जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए एक शेर का स्मरण आता है. नयी पीढ़ी के लिये जो कहते थे.

          नये दौर के नये ख्वाब हैं, नये मौसमों के गुलाब हैं, यह मौहब्बतों के चिराग हैं इन्हें नफरतों की हवा ना दें. यह उनकी भावना थी, जो उनकी लेखनी में सामने दिखी. छत्तीसगढ़ की तीजन बाई कई बार हमारे मध्यप्रदेश में भी इन्होंने अपनी प्रस्तुति दी. पद्मश्री अवार्ड मिला, संगीत नाटक अकादमी में भी मिले, लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूं कि जो भी महान विभूतियां होती हैं, वह किसी भी क्षेत्र की होती हैं. उनका अंतिम समय अंतिम दौर बड़ा कष्ट वाला था, दुःखदायी था. मुझे ऐसा लगता है कि समाज में इन्होंने इतनी सेवाएं कीं तथा योगदान दिया मंदिरों में तो चन्दा देते हैं एक परिवार ने जिसने यह योगदान दिया किसी कलाकार ने वह किसी भी विषय का हो सकता है. उसके लिये भी हमारी जवाबदारी होना चाहिये कि हम उनको उसकी अंतिम सांस तक उसके परिवार का किस प्रकार से ध्‍यान रखें मैं समझता हूं कि इस चीज का हमें ध्‍यान रखना चाहिए.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार कुछ लोगों को श्रद्धांजलि सूची में नहीं रखना चाहती. 30 अप्रैल 2026 को बरगी हादसे में 13 लोगों की जान चली गईं, संवदेनाओं का विषय है, मैं इस पर कोई आरोप प्रत्‍यारोप नहीं करना चाहता, इसमें उन परिवारों की गलती नहीं थी, अधिकतर जबलपुर और आसपास के अन्‍य राज्‍यों के लोग थे, ये अलग विषय है कि उसमें क्‍या हुआ, लेकिन उन परिवारों के प्रति भी हमारी संवदेना होनी चाहिए. नीट पेपर लीक को लेकर हमारे मध्‍यप्रदेश की आकांक्षा चतुर्वेदी और अवंतिका मौर्य, अवंतिका मौर्य  तो मेरी विधान सभा से ही है. क्‍या कारण रहे क्‍यों आत्‍म हत्‍या हुई, क्‍या परिवार ने बताया यह अलग जांच का विषय है, लेकिन मैं समझता हूं कि छात्र जब एक साल पूरा पढ़ते हैं और कोई परीक्षा लीक होती है, तो उसके परिवार पर क्‍या बीतती है, मैं समझता हूं कि यह भी हमें ध्‍यान रखना चाहिए.

श्री कैलाश विजयवर्गीय – अध्‍यक्ष महोदय, इस विषय पर मुझे पाइंट ऑफ आर्डर नहीं उठाना चाहिए, लेकिन मुझे लगता है कि ये सचिवालय पर टिप्‍पणी है.

श्री उमंग सिंघार – संवेदना व्‍यक्‍त कर रहा हूं, मैं आरोप तो लगा नहीं रहा हूं.

अध्‍यक्ष महोदय –  कैलाश जी, अभी आपको बोलना है.

श्री कैलाश विजयवर्गीय –  अध्‍यक्ष जी, ये सचिवालय पर टिप्‍पणी है. इस प्रकार की टिप्‍पणी नेता प्रतिपक्ष द्वारा करना उचित नहीं है. विधान सभा सचिवालय पर टिप्‍पणी है, इसलिए मैं निवेदन कर रहा हूं.

श्री उमंग सिंघार – तो सचिवालय गलती क्‍यों कर रहा है. माननीय अध्‍यक्ष महोदयटोंककला पटाखा फैक्‍ट्री में नौ श्रमिकों की जान गई. मैं मेरे दल की ओर से शोकाकुल परिवार के प्रति संवदेना व्‍यक्‍त करता हूं एवं दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

श्री कैलाश विजयवर्गीय – अध्‍यक्ष महोदय,

          मुसाफिर है हम भी, मुसाफिर हो तुम भी

 फिर किसी मोड़ पर मुलाकात होगी..

ये शेर था बशीर बद्र साहब का मुझे याद है वर्ष 2019 के चुनाव में उन्‍होंने मोदी जी का घर घर जाकर प्रचार किया था. मोदी जी से उनकी व्‍यक्तिगत मित्रता थी, बहुत ही महान शायर थे. मैं उनको विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय, अश्‍विन जोशी जी मेरे मित्र थे. कई बार आमने सामने हम छात्र राजनीति में साथ में रहे, पर दोस्‍ती दोस्‍ती होती है. जब अचानक पार्टी ने मुझे टिकट नहीं देकर मेरे बेटे को टिकट दिया तो अश्विन भाई का फोन आया कि कैलाश भैया आपको मेरी विधान सभा में नहीं आना चाहिए क्‍योंकि मेरे और आपके संबंध है. मैंने कहा मेरा बेट चुनाव लड़ रहा मैं कैसे नहीं आऊंगा, वे बोले मेरे आपके बेटे से पहले के संबंध है आपका बेटा बाद में पैदा हुआ. तो मैंने कहा ठीक है प्रॉमिश मैं तुम्‍हारी विधान सभा में नहीं आऊंगा, अध्‍यक्ष जी मैं उनकी विधान सभा नहीं गया और इत्‍तेफाक से वे चुनाव हार गए चुनाव हारे उसके एक साल बाद ही उनके छोटे भाई का निधन हो गया था उसके बाद वे बिल्‍कुल टूट गए थे. विंधास व्‍यक्ति थे, जिसको बोलना हो मुंह परबोलते थे कितना भी बड़ा व्‍यक्ति हो कभी चिंता नहीं करते थे कि मेरा राजनीतिक फायदा होगा या नुकसान होगा. एकदम निर्मल मन के थे. वास्‍तव में हमने उनके निधन से हमने एक अच्‍छा दोस्‍त खोया है, एक अच्‍छा नेता इंदौर में खोया है. मैं विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय, हमारे विधायक माननीय पहाड़ सिंह जी, जब मैं महू से विधायक था तब वे टीआई थे, मुझे पता नहीं मैं साधारणत: टीआई लोगों से कम ही मुलाकात करता हूं, पर वे एक दिन रेस्‍टहाउस में आ गए, बोले मेरा नाम पहाड़ सिंह है और अब मैं राजनीति में काम करना चाहता हूं. मैंने कहा अच्‍छी भली नौकरी छोड़कर कहां आ रहे हो भैंया.. वे बोले बस तीन महीने बाद एक प्रमोशन हो जाएगा तो मेरी बड़ी इच्‍छा है कि मैं मोदी जी के नेतृत्‍व में भारतीय जनता पार्टी में काम करूं. तीन महीने बाद प्रमोशन हो गया और उन्‍होंने नौकरी छोड़ दी और उसके बाद फिर वह पार्टी में आ गये और विधायक बन गये. वह बहुत सहज  थे, मतलब कोई कह नहीं सकता था कि वह पुलिस वाले हैं, इतने सहज, इतने सरल और आदिवासी भाइयों के नेता थे.हमने निश्चित रूप से एक बहुत अच्‍छे व्‍यक्ति को खोया है, बहुत अच्‍छे इंसान को खोया है. मैं ऐसे इंसान के प्रति अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.अध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने का समय दिया उसके धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय, मैं क्षमा चाहता हूं कि मैंने इसमें इंटरप्‍ट किया, पर उमंग जी ने एक गलत परंपरा प्रारंभ कर दी है, इस समय इस प्रकार की बात नहीं होना चाहिए. व्‍यक्तिगत रूप से सदन आने के पहले या सदन आने के बाद आप करते तो बहुत अच्‍छा होता. श्रीमती तीजन बाई ने इस सदन के अंदर जब मध्‍यप्रदेश एक था, तब हमारा सांस्‍कृतिक क्‍लब था, हमने तीजन बाई को बुलवाया था और तीजन बाई जो कि महाभारत पर जो जिस तरीके की उनकी भाव-भंगिमा थी, हमें छत्‍तीसगढ़ी भाषा समझ नहीं आती थी, उस समय शायद अध्‍यक्ष महोदय आप भी उस कार्यक्रम में थे, वह अदभुत नृत्‍य नाटिका करती थीं और इसलिए उनको अर्जुन सिंह जी ने भी सम्‍मानित किया था और पदम श्री की उपाधि थी. श्रीमती तीजन बाई को मैं अपनी ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज आपने जिन मूर्धन्‍य व्‍यक्तियों का उनके निधन पर उल्‍लेख किया है, उनमें से दो ऐसे व्‍यक्ति थे, जिनके साथ सहज रूप से उनके साथ में और उनके अंडर में मुझे काम करने का मौका मिला था, जैसा कि भाई कैलाश जी ने बताया है कि श्री अश्विन जोशी इंदौर के छात्र नेता ही नहीं थे, वह यारों के यार थे और अपनी शैली के लिये पहचाने जाते थे. किसी को बुरा लगे तो अच्‍छी बात है, लेकिन वह साफ-साफ और सही-सही बोलते थे. वह बहुत कम उम्र में चले गये, इसका अफसोस है, मेरा काफी मिलना जुलना उनसे होता था. कैलाश जी के पुत्र उनके साथ चुनाव में लड़े थे, वास्‍तव में लड़े तो यही थे, पुत्र तो आगे था पीछे बड़ा पहाड़ था.

          अध्‍यक्ष महोदय – भंवर सिंह जी विषयांतर नहीं करें.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय – मैं ईमानदारी से कह रहा हूं, मैं उसकी विधानसभा में कभी नहीं गया था.

          अध्‍यक्ष महोदय – यह बहस का विषय नहीं है, अभी शोक प्रस्‍ताव हो रहा है, तो वही तक सीमित रहें.

          श्री भंवर सिंह शेखावत – कैलाश जी अपन यह बहस नहीं कर रहे हैं. अपना मित्र गया है, वह मेरे भी मित्र रहे हैं और आपके भी मित्र रहे हैं और इंदौर की क्षति हुई है. यह निश्चित रूप से एक दुखद क्षण है और निश्चित रूप से हम सब उन्‍हें याद करते हैं और मैं उन्‍हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. दूसरा एक बड़ा नाम जो आपने इसमें लिया है मेजर जनरल भुवन चन्‍द्र खंडूरी जी का. मुझे इस बात का सौभाग्‍य मिला है. वर्ष 1967 में जब मेरी ब्रिगेड त्रिवेन्‍द्रम में पोस्‍टेड थी, उस समय भुवन जी हमारे बिग्रेड कमांडर रहे हैं और मुझे उनके अंडर काम करने का सौभाग्‍य मिला था और इसलिए मैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस करता हूं. आज वह नहीं हैं, लेकिन ऐसा लड़ाका और ऐसा देश का योद्धा आज देश ने खोया है. वह राजनीति में अपना स्‍थान बड़ा बनाये हुए थे, लेकिन सेना के अंदर जो खंडूरी जी का स्‍थान है, वह निश्चित रूप से याद करने लायक है. मुझे उनके अंडर में काम करने का मौका मिला है, मैं उन्‍हें याद करते हुए अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिये आपका धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय – (श्री ओमप्रकाश सखलेचा, सदस्‍य के खड़े होने पर) प्‍लीज पूरा प्रश्‍न काल इसी में चला जायेगा, आप बैठ जायें. श्रीमती तीजन बाई हमारी आदिवासी बहन थीं, अपने अभिनय से और गायन से निश्चित रूप से पूरी दुनिया में देश का उन्‍होंने नाम रोशन किया है, लेकिन मैं इसलिए विशेष उल्‍लेख कर रहा हूं कि कुल मिलाकर उनके व्‍यक्तिव, कृतित्‍व और अभिनय के कारण उनको पदमश्री भी मिला, पद भूषण भी मिला और पदम विभूषण भी मिला, मतलब यह क्रमश: जो यात्रा है, यह बहुत उल्‍लेखनीय है और बहुत प्रेरणास्‍पद है.

   मैं एक उल्‍लेख कर सभी सदस्‍यों को अनुरोध करना चाहता हूं कि यह सचिवालय मेरा नहीं है, यह सचिवालय आप सबका है और इसलिए कभी अगर आपके क्षेत्र में, या आसपास में कोई घटना दुर्घटना होती है और ऐसा लगता है कि शोक प्रस्‍ताव में उसको शामिल करना चाहिए तो मुझे लगता है कि एक दो दिन पहले अगर आप सचिवालय को अवगत करा देंगे तो सचिवालय को आपकी तरफ से बड़ा सहयोग होगा और उसको जोड़ा जा सकेगा. मैं अपनी ओर से और पूरे सदन की ओर से शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं. अब सदन कुछ समय मौन रखकर दिवंगतों के सम्‍मान में श्रद्धा सुमन अर्पित करेगा.

   (सदन द्वारा दो मिनट मौन खड़े रहकर दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई.)

          अध्‍यक्ष महोदय -- ऊँ शांतिशांतिशांति: .....

          दिवंगतों के सम्‍मान में सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिये स्‍थगित की जाती है.

 (11.30 बजे दिवंगतों के सम्‍मान में सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिये स्‍थगित की गई)

 

11.43 बजे               (अध्‍यक्ष महोदय, श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर पीठासीन हुये.)

      तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

प्रश्‍न संख्‍या-1   श्री जगन्‍नाथ सिंह रघुवंशी -     (अनुपस्थित)

 

खेल गतिविधियों हेतु राशि का आवंटन

[खेल एवं युवा कल्याण]

2. ( *क्र. 316 ) श्री लखन घनघोरिया : क्या खेल एवं युवा कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश शासन ने जिला खेल एवं युवा कल्‍याण विभाग जबलपुर को खिलाड़ि‍यों को खेल सुविधाएं संसाधन उपलब्‍ध कराने उन्‍हें प्रोत्‍साहित करने, खेल गतिविधियों का आयोजन व खेल मैदानों का रख-रखाव आदि के लिये किस-किस योजना मद में कितनी-कितनी राशि आवंटित की गई है एवं कितनी-कितनी राशि व्‍यय हुई है? वर्ष 2022-23 से प्रश्‍न दिनांक तक की जानकारी दें। (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार कहां-कहां पर निर्मित आउटडोर, इनडोर स्‍टेडियम खेल मैदानों में खिलाड़ि‍यों के लिये किन-किन खेलों से संबंधित क्‍या-क्‍या सुविधाएं संसाधन खेल सामग्री व खिलाड़ि‍यों को प्रशिक्षित करने की क्‍या व्‍यवस्‍था है? किन-किन इनडोर, आउटडोर व खेल मैदानों का रख-रखाव संधारण आदि पर कब-कब, कितनी-कितनी राशि व्‍यय हुई? कौन-कौन सी खेल गतिविधियां कब-कब, कहां-कहां पर किस स्‍तर पर आयोजित की गई? इसमें कहां-कहां की टीमों ने भाग लिया तथा इस पर कितनी-कितनी राशि व्‍यय हुई? (ग) प्रश्‍नांश (क) अनुसार किन-किन खेलों से संबंधित कितनी-कितनी राशि की खेल सामग्री क्रय की गई? इस खेल सामग्री का क्‍या उपयोग किया गया? कौन-कौन सी खेल सामग्री कितनी-कितनी मात्रा में कितनी-कितनी राशि की कब से बेकार, अनुपयोगी व टूटफूटी पड़ी हैं? जानकारी दें। क्‍या शासन खेल सामग्री के क्रय में वित्तीय अनियमितता, राशि का दुरूपयोग अपव्‍यय व भ्रष्‍टाचार की जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही करेगा?

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री ( श्री विश्वास कैलाश सारंग ) : (क) खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा जिला खेल एवं युवा कल्याण विभाग जबलपुर को खिलाड़ियों, खेल सुविधाएं संसाधन उपलब्ध कराने उन्हें प्रोत्साहित करने, खेल गतिविधियों के आयोजन व खेल मैदानों का रख-रखाव आदि के लिये आवंटित एवं व्यय राशि की वर्ष 2022-23 से प्रश्‍न दिनांक तक की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1 अनुसार है। (ख) वर्ष 2022-23 से प्रश्‍न दिनांक तक निर्मित आउटडोर, इनडोर स्टेडियम खेल मैदानों में खिलाड़ियों के लिये खेलों से संबंधित सुविधाएं संसाधन खेल सामग्री व खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने हेतु प्रशिक्षक की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 2 अनुसार है एवं इनडोर, आउटडोर व खेल मैदानों का रख-रखाव संधारण पर व्यय राशि की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 3 अनुसार है एवं आयोजित खेल गतिविधियों, टीमों द्वारा प्रतिनिधित्व एवं व्यय राशि की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 4 अनुसार है। (ग) वर्ष 2022-23 से प्रश्‍न दिनांक तक क्रय खेल सामग्री की राशि सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 5 अनुसार है। खेल सामग्री का उपयोग खिलाड़ियों के प्रशिक्षण एवं प्रतियोगिताओं के दौरान किया गया। खेल सामग्री बेकार अनुपयोगी एवं टूटफूट नहीं हुई है। अतः शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

          श्री लखन घनघोरिया--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 316 है.

          श्री विश्‍वास कैलाश सारंग--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर सभा पटल पर रख दिया है.

          अध्‍यक्ष महोदय--  माननीय लखन जी, पूरक प्रश्‍न करें.

          श्री लखन घनघोरिया—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारा पूरक प्रश्‍न है वर्ष 2022-23, वर्ष 2023-24, वर्ष 2024-25 और वर्ष 2026-27 खेल प्रतिभाओं को संरक्षण देने के लिये खेल मंत्रालय से संबंधित था. हालांकि इसकी कटौती की गई, प्रश्‍न के उत्‍तर देने में कटौती हुई है. यह कटौती कितनी-कितनी चीजों में हुई, परिशिष्‍ट नंबर 1 में बाकायदा पूरा खेल सुविधायें, संसाधन उपलब्‍ध कराने का पूरा विवरण दिया है और मैदानों के रखरखाव का. वर्ष 2022-23 में खेल प्रतिभाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिये पूरी राशि कहां-कहां खर्च हुई है, यह विस्‍तार से दिया है.

          हर विधान सभा में जबलपुर की आठों विधान सभा में विधायक कप के लिये वह राशि दी गई थी. 2023-24 में 2024-25 में यह खत्म कर दी.2025-26 में भी नहीं दी गई. सांसद खेल महोत्सव होता है. सेंट्रल गवर्नमेंट खेल प्रतिभाओं के लिये अपना फंड खर्च करती है.ऐसे ही महापौर कप होता है नगर निगम करती है. 815 करोड़ का हमारा बजट जो पक्षपात हो तो बात समझ में आती है लेकिन वह प्रतियोगिता ही खत्म कर दी जाये. कप खत्म कर दिया जाय.ऐसे हम खेल प्रतिभाओं का कितना संरक्षण कर रहे हैं कितना संधारण कर रहे हैं. एक प्रश्न मेरा यह है.

          अध्यक्ष महोदय‑ एक ही प्रश्न कर लें दूसरे का मौका मिलेगा.

          श्री विश्वास कैलाश सारंग - अध्यक्ष महोदय, इस प्रश्न से यह विषय कहीं उद्भूत नहीं होता.मुझे प्रसन्नता है कि लखन घनघोरिया जी ने हमारे उत्तर से पूरी सहमति व्यक्त की और उन्होंने जो-जो मांगा खुद ही ने बोला पूरा दिया पूरा दिया.

          श्री लखन घनघोरिया - आपने पूरा जवाब दिया. जवाब सही दिया कि गलत यह क्लियर तो होने दो. आपने जवाब दिया और बहुत होशियारी से दिया बड़ी चालाकी से जवाब दिया.

          संसदीय कार्य मंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय) - होशियार आदमी हैं तो होशियारी से जवाब देंगे.

          श्री विश्वास कैलाश सारंग -घनघोरिया जी ने जो-जो प्रश्न उठाये थे हमने उसका विस्तृत जवाब दिया है. बैठते-बैठते लखन भाई ने कह दिया कि ऐसा कुछ होगा तो फिर खेल प्रतिभाओं का क्या होगा. मैं लखन भाई को बताना चाहता हूं कि जब कांग्रेस की सरकार थी तो खेल का बजट केवल 6 करोड़ था. आज 815 करोड़ रुपये है. कहीं कोई कमी नहीं है. खिलाड़ियों की बात हो,खेल मैदान बनाने वाली बात हो,कोच लाने वाली बात हो.

          श्री लखन घनघोरिया - 815 करोड़ का खर्च भी तो बताओ कहां किया. पूरे विधायकों के नाम पर जो कप होते थे उस राशि का आप क्या कर रहे हैं. 2 साल से क्यों नहीं कराए. यह मेरा प्रश्न और पूरे सदन का प्रश्न है. जब देश की संसद सेंट्रल गवर्नमेंट का पैसा खेल पर खर्च करता है.जब नगर निगम का महापौर महापौर कप कराता है तब यह विधायकों का जो अधिकार था उसमें आप कटौती क्यों कर रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय‑ लखन भाई.जवाब आ जाने दो. हो सकता है वह कहने वाले हों आपकी बात.

          श्री विश्वास कैलाश सारंग - मैं लखन भाई की जानकारी में देना चाहता हूं तो जो सांसद महोत्सव होता है तो उसमें सरकार की ओर से कोई राशि नहीं दी जाती. मुझे लग ही नहीं रहा कि यह प्रश्न पूछना चाहते थे. यह तो मुझे लगता है लाटरी में. अब बोलना है तो इसलिये बोल रहे हैं. मेरी बात तो पूरी सुन लीजिये. सांसद महोत्सव का जो कार्यक्रम होता है उसमें सरकार का वित्तीय बेकअप नहीं दिया जाता. यह केंद्र से ही निश्चित है. जहां तक विधायक कप की बात है इसको लेकर बहुत सारी बातें आ रही थीं क्योंकि वह राशि बहुत कम थी और विधायकों की अपेक्षा यह थी कि यदि इतनी कम राशि के साथ कोई कप होता है तो अपेक्षाएं जनता की बहुत होती हैं और उस स्तर का हो नहीं पाता पर हमने उसके सबस्टीट्यूट को किया. इस सदन को मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि पहली बार हमने खेल एम.पी.यूथ गेम को इंटरनेशनल लेबल तक पहुंचाया.

          (..व्यवधान..)

          श्री भंवर सिंह शेखावत - विधायक ट्राफी का क्या हुआ.

          अध्यक्ष महोदय‑ भंवर जी प्लीज.

          श्री विश्वास कैलाश सारंग - भंवर सिंह जी को लगता है मैं सहकारिता पर ही बोल रहा हूं.

          अध्यक्ष महोदय‑ मेरा सदस्यों से और मंत्रियों से भी आग्रह है प्रश्नकाल का समय कम रह गया है तो 2-3 प्रश्न आ जाएं तो थोड़ा उत्तर भी संक्षिप्त रहे और प्रश्न भी संक्षिप्त रहे.

          श्री विश्वास कैलाश सारंग – अध्यक्ष महोदय, मैं फिर निवेदन करना चाहता हूँ कि विधायक जी ने जबलपुर से संबंधित जो-जो जानकारी मांगी थी, वह हमने दी है. इसके अलावा मैं इस सदन को यह बताना चाहता हूँ कि माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर और माननीय प्रधानमंत्री जी का जो संकल्प है, उसमें खेल के उन्नयन के लिए हम कटिबद्ध हैं. इसीलिए हमने 815 करोड़ रुपये तक का बजट किया है. जल्दी से जल्दी हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम खेल का एक परिसर बनाने की घोषणा माननीय मुख्यमंत्री जी ने की है और मध्यप्रदेश इस मामले में देश का पहला राज्य बनेगा. अध्यक्ष महोदय, हर विधायक को हम खेल का एक स्टेडियम दे रहे हैं. ये खेल प्रतियोगिता की बात कर रहे हैं. यदि किसी विधायक को कोई खेल प्रतियोगिता आयोजित करनी है, हमें प्रस्ताव भेजे, यदि वह राष्ट्रीय स्तर की होगी या प्रदेश स्तर की होगी तो उसमें जो हमारे नियम हैं, उस हिसाब से हम सहयोग करेंगे. अध्यक्ष महोदय, सहयोग करने में कहीं कोई दिक्कत नहीं है. पहली बार हमने एसोसिएशन और फेडरेशन को मिलाकर एमपी खेलो यूथ गेम का आयोजन किया. यह बहुत प्रसन्नता की बात है कि देश की सरकार ने भी स्वीकार किया है. घनघोरिया जी को यदि कोई प्रतियोगिता आयोजित करनी है, यदि एसोसिएशन के साथ मिलकर करेंगे तो उनको सहयोग किया जाएगा. अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि हम खेल विभाग से प्रतियोगिताएं केवल इसलिए आयोजित नहीं करना चाहते कि किसी की फोटो लग जाए, बल्कि हम इसलिए आयोजित करना चाहते हैं कि उससे खिलाड़ी निकलकर आएं. खिलाड़ी जब तक नहीं निकलेंगे, तब तक ऐसी खेल प्रतियोगिताओं का कोई मतलब नहीं है. इसलिए यदि आप एसोसिएशन के साथ मिलकर करेंगे, खेल विभाग के साथ मिलकर करेंगे तो हम उसमें वित्तीय सहायता देंगे.

          अध्यक्ष महोदय – घनघोरिया जी, दूसरा पूरक प्रश्न करें.

          श्री लखन घनघोरिया – आदरणीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने पूरे आठों विधाानसभा की विधायक कप की जानकारी अपने परिशिष्ट में दी है. यह प्रश्न इसी से उद्भुत हुआ है, इनके जवाब से उद्भुत हुआ है. दूसरा मेरा निवेदन है कि माननीय मंत्री जी अभी कह रहे थे कि सारे विधायकों की यह शिकायत थी कि वह राशि कम है. यदि राशि कम थी तो क्या उस राशि को बढ़ाया नहीं जा सकता था ? खेल प्रतिभाओं के संधारण और संरक्षण के लिए क्या इतना नहीं किया जा सकता था. दूसरा, रखरखाव की जहां तक बात है, हर विधान सभा में खेल के एक ग्राउण्ड की बात कर रहे हैं, ये विधायक कप तो खत्म कर रहे हैं. जहां ग्राउण्ड है, रखरखाव होता नहीं है. जबलपुर में ढाई करोड़ का रानी दुर्गावती एकेडमी में वेलोड्रम बना है. 15-20 साल पहले बना है और उसकी सरिया निकल गई हैं. अध्यक्ष महोदय, हमारे माननीय वरिष्ठ मंत्री जी खुद जाकर मुआयना कर लें कि वेलोड्रम की क्या स्थिति है. ये रखरखाव में उसका उल्लेख नहीं है. हमारे एकेडमी के स्टेडियमों का उल्लेख नहीं है. जरा-जरा से ब्लॉक के स्टेडियम का आपने बता दिया. दूसरी बात, इतने बड़े जबलपुर शहर में जो फुटबॉल का मुख्यालय कहलाता है, अध्यक्ष महोदय, वहां पर एक फुटबॉल ग्राउण्ड नहीं है. आप बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं कि हर विधान सभा में एक ग्राउण्ड देंगे. हमारी विधान सभा में मिनी स्टेडियम बना था, 4 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत से बना था, बाउण्ड्री वॉल बन गई, सरकार गिरी, आपने काम बंद कर दिया. आपने स्मार्ट होकर स्मार्ट सिटी के सर पर मढ़ दिया. पहले के बने का तो रखरखाव कर दें. उसी को कम्प्लीट कर दें.

          अध्यक्ष महोदय – लखन भाई, प्रश्न करें.

          श्री लखन घनघोरिया – अध्यक्ष महोदय, हमारा दूसरा प्रश्न यह है कि आपने जो बात कही, क्या आप वह राशि बढ़ाकर विधायकों के अधिकारों को संरक्षित करेंगे ? जब देश की सरकार सांसद खेल महोत्सव कराती है तब आप क्यों नहीं करेंगे ? माननीय अध्यक्ष महोदय, इसके अलावा हमारे जितने ग्राउण्ड हैं, रानी दुर्गावती एकेडमी में जब पानी भर जाता है और बच्चियां जब कबड्डी खेलती हैं तो बच्चियां वर्क आऊट घर पर करती हैं. ग्राउण्ड की बहुत बुरी स्थिति है. आपने परिशिष्ट में तो ग्राउण्ड के रखरखाव का बता दिया लेकिन वहां पर जमीन पर कुछ नहीं है. इनके रखरखाव के लिए क्या करेंगे ?

          अध्यक्ष महोदय – लखन जी, पूरक प्रश्न आ गया. माननीय मंत्री जी.

          श्री विश्वास कैलाश सारंग --  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने कहा कि हम हर विधान सभा में स्टेडियम दे रहे हैं. इन्होंने कहा कि आप कप तो बंद कर रहे हैं, दे रहे हैं कि नहीं दे रहे हैं, आप उमंग सिंघार जी से पूछिए हमने दिया है कि नहीं दिया है. आप बोल रहे हैं कि हम आयोजन के लिए पैसे नहीं दे रहे हैं, आप डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह जी से पूछिए, हमने पैसे दिए या नहीं दिए. मैं फिर इस सदन में पूरी जिम्मेदारी से कह रहा हूँ कि कोई भी विधायक एसोसिएशनों के साथ मिलकर, खेल संघों के साथ मिलकर कोई प्रतियोगिता का आयोजन करेगा तो जो भी उसकी पात्रता होगी, वह पैसा दिया जाएगा यह आज मैं घोषणा कर रहा हूँ. कहीं कोई बात नहीं हैं. हम केवल अपनी फोटो लगाने के लिये कोई इवेंट करें, तो मुझे नहीं लगता है कि वह ठीक है. हमारा मन्‍तव्‍य होना चाहिए, अच्‍छे खिलाड़ी बनें, उन्‍नत खिलाड़ी बनें. खिलाडि़यों को हम राष्‍ट्रीय एवं अन्‍तर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर भेज पाएं, उसके लिए हम आयोजन करें.

अध्‍यक्ष महोदय - श्री हरिशंकर खटीक जी.

श्री लखन घनघोरिया – माननीय अध्‍यक्ष महोदय,एक मिनट.

अध्‍यक्ष महोदय – लखन जी केवल 5 मिनट बचे हैं, एक प्रश्‍न और हो जायेगा.

श्री लखन घनघोरिया – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट. फिजिकल एजुकेशन से बीपीएड,एमपीएड किए हुए हमारे जो कोच हैं, उनको संविदा पर रखा गया है. उनको वर्ष 2006 में रखा गया था,उनको 20 वर्ष हो गए हैं, 5 वर्ष का नियम है. उनको आज तक न तो नियमित किया गया और उनको 7 महीने से पेमेन्‍ट भी नहीं किया गया है.

अध्‍यक्ष महोदय - श्री हरिशंकर खटीक जी.

श्री लखन घनघोरिया – माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, इसका जवाब तो आ जाये.

अध्‍यक्ष महोदय – लखन जी,प्‍लीज. आप मंत्री जी से व्‍यक्तिगत रूप से बता दें. 5 मिनट बचे हैं. हरिशंकर खटीक जी का प्रश्‍न पूरा रह जायेगा.

जनपद पंचायत के भवन निर्माण हेतु राशि की स्‍वीकृति

[पंचायत एवं ग्रामीण विकास]

3. ( *क्र. 646 ) श्री हरिशंकर खटीक : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) टीकमगढ़ जिले के जनपद पंचायत जतारा एवं पलेरा के भवन निर्माण हेतु किस-किस खसरा नम्बर के कितने-कितने रकबा में कितनी-कितनी राशि व्यय करके, कब-कब भवन निर्माण कराये गये थे? संपूर्ण जानकारी प्रदाय करें। क्या यह भवन सही और पर्याप्त हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) के आधार पर जानकारी दें कि क्या यह भवन अत्याधुनिक तरीके से बनाये जाना अतिआवश्यक है(ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के आधार पर जानकारी दें कि क्या प्रश्‍नकर्ता द्वारा नवीन भवन बनाये जाने हेतु मांग की जा रही है? (घ) प्रश्‍नांश (क), (ख) एवं (ग) के आधार पर निश्चित समय-सीमा बतायें कि कब तक अत्याधुनिक भवनों के निर्माण हेतु पांच-पांच करोड़ की धनराशि विभाग  स्वीकृत करेगा?

पंचायत मंत्री ( श्री प्रहलाद सिंह पटैल ) : (क) टीकमगढ़ जिले की जनपद पंचायत जतारा का भवन खसरा क्रमांक-2071, रकबा 0.129 हेक्‍ट. एवं खसरा क्रमांक-2072, रकबा 0.150 हेक्‍ट. में स्थि‍त है। जनपद पंचायत भवन का निर्माण वर्ष 1997-98 में राशि रूपये 15.00 लाख से निर्मित है तथा जनपद पंचायत पलेरा का भवन खसरा नं. 1620/3/9501, रकबा-1.00 हेक्‍ट. में स्थित है। जनपद पंचायत भवन का निर्माण वर्ष 2004-05 में राशि रूपये 7.50 लाख से निर्मित है। जनपद पंचायत जतारा एवं पलेरा में अत्‍या‍धुनिक भवन की आवश्‍यकता व्‍यक्‍त की गई है। (ख) जनपद पंचायत जतारा एवं पलेरा में यद्यपि वर्तमान भवनों में कार्यालय संचालित है तथापि भवन के पुराने होने एवं अपर्याप्त स्थान होने के कारण इन जनपदों में मानक प्राक्कलन के आधार पर जनपद भवन बनाये जाने की आवश्‍यकता व्‍यक्‍त की गई है। (ग) जी हाँ। (घ) वर्तमान में योजना का हिस्‍सा नहीं है।

श्री हरिशंकर खटीक – माननीय अध्‍यक्ष महोदय,मेरा तारांकित प्रश्‍न क्रमांक 646 है.

श्री प्रहलाद सिंह पटेल – माननीय अध्‍यक्ष महोदय,उत्‍तर सदन के पटल पर रख दिया गया है.

अध्‍यक्ष महोदय – आप पूरक प्रश्‍न कीजिये.

श्री हरिशंकर खटीक – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय, माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहता हूँ कि मध्‍यप्रदेश में जो जनपद पंचायतों के भवन बने थे, वह वर्षों पुराने बने थे. अत्‍याधुनिक सुविधा से युक्‍त भवन बनाने के लिए माननीय मुख्‍यमंत्री जी और माननीय मंत्री जी ने लगभग मध्‍यप्रदेश में 105 से अधिक नवीन जनपद पंचायत भवन बनाने के लिए 5-5 करोड़ रुपये स्‍वीकृत किए हैं, मैं उन्‍हें बहुत बहुत धन्‍यवाद देना चाहता हूँ. दूसरा, धन्‍यवाद हमारे विधान सभा का जो प्रश्‍न था कि टीकमगढ़ जिले के जनपद पंचायत जतारा एवं पलेरा में अत्‍याधुनिक भवन बनाने के लिए भी राशि स्‍वीकृत की जाये, तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय मेरा निवेदन है कि हम दो विनय पत्र दे चुके हैं, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि हमारे टीकमगढ़ जिले के जनपद पंचायत जतारा एवं पलेरा के लिये भी 5-5 करोड़ रुपये की भवन राशि स्‍वीकृत करने का कष्‍ट करें.

श्री प्रहलाद सिंह पटेल – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍य को हृदय से धन्‍यवाद देता हूँ. श्रद्धेय अटल जी जन्‍म शताब्‍दी पर पिछले 2 वर्षों में सरकार ने 2390 अटल ग्राम सेवा सदन,जिसको पंचायत भवन कहते हैं,उसका नाम भी है अटल ग्राम सेवा सदन. दूसरा,106 जनपद भवन जिनको अटल सुशासन भवन के नाम से बनाया, जो सवा 5 करोड़ रुपये की लागत से थे और 5 जिला पंचायत भवन जो नये जिले बने हैं और एक पुराना जिला था, जहां पर भवन नहीं था. एक यह हमारे मन में था कि श्रद्धेय अटल जी जन्‍म शताब्‍दी है, तो मैंने माननीय मुख्‍यमंत्री जी से विमर्श के बाद लगभग 2,500 करोड़ रुपये इस पर खर्च किये हैं और हमने कोई भेदभाव किये बगैर जो जिले से जानकारियां आईं,उसके आधार पर इन निर्माण कार्यों की स्‍वीकृतियां दी हैं. माननीय सदस्‍य ने अलग से चाहा है कि हमको मिल जाये,जब उस समय रिपोर्ट इस जनपद भवन की आई कि भवन ठीक है, एक-दो अतिरिक्‍त कमरे हो सकते हैं, ऐसी रिपोर्ट आई थी.अब माननीय सदस्‍य ने स्‍पेसिफिक कहा है, तो मैं आपके माध्‍यम से उनसे यह आग्रह करना चाहता हूँ कि जब भी कोई वित्‍तीय प्रावधान या ऐसी योजना को हम फिर से लेंगे, तो उस सूची में उनका नाम रहेगा, हम उसमें जरूर करेंगे.

श्री हरिशंकर खटीक – माननीय अध्‍यक्ष महोदय,जनपद पंचायत जतारा का भवन वर्ष 1997-98 में 15 लाख रुपये और वर्ष 2004-2005 में पलेरा का भवन साढ़े 7 लाख रुपये की लागत से बनाया गया था. यह वर्षों पुराने भवन हैं और वास्‍तव में जीर्ण-शीर्ण हो गए हैं. जहां हम लोग जनपद पंचायत के कार्यालय में जाते हैं,तो ऊपर और नीचे से सीमेंट निकलती हुई दिखाई देती है. बजट राशि में इसके प्रावधान की बात आई कि अतिरिक्‍त स्‍टाम्‍प शुल्‍क राशि इस बजट में शून्‍य है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि जनपद पंचायत जतारा और पलेरा के भवन भी इसमें स्‍वीकृत करें और इससे हमारे क्षेत्र में एक बहुत जबर्दस्‍त तरीके से उत्‍साह होगा. सरपंच  लोग भी बैठने आते हैं,तो उनके बैठने के लिए भी व्‍यवस्‍था नहीं है. अत्‍याधुनिक भवन बनाने के लिए जतारा और पलेरा के लिए 5-5 करोड़ रुपये की राशि स्‍वीकृत करने के लिए,मेरा आपके माध्‍यम से, आज माननीय मंत्री महोदय जी से यह विनम्र प्रार्थना है कि मंत्री जी घोषणा करेंगे.

श्री प्रहलाद सिंह पटेल – माननीय अध्‍यक्ष महोदय,मेरा स्‍वभाव एक्‍सीड करने का नहीं है. बजटीय प्रावधान के आधार पर ही हमें कोई आश्‍वासन देना चाहिए और आश्‍वासनों की भीड़ सदन में न लगे,यह कोशिश भी करते हैं और मैं आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍य से फिर आग्रह करता हूँ कि उनका जो प्रश्‍न आया है,मैंने उसको अपनी सूची में रखा है और मैं अन्‍य सदस्‍यों से भी यही बात करता हूं कि यह सूची में है, पैसा आयेगा, तो आपको कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आपके इस काम को हम पूरा करेंगे.

श्री हरिशंकर खटीक – धन्‍यवाद, माननीय अध्‍यक्ष महोदय. मंत्री जी को भी धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय – प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

 

12.00 बजे

 

 

          अध्‍यक्ष महोदय-  अब इसके संबंध में मंत्री जी प्रस्‍ताव करेंगे.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-  अध्‍यक्ष महोदय, प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ.

          प्रश्‍न यह है कि जिन शासकीय विधेयकों एवं अन्‍य कार्यों पर चर्चा के लिए समय निर्धारण करने के संबंध में, कार्य मंत्रणा समिति की सिफारिशें पढ़कर सुनाईं, उन्‍हें सदन स्‍वीकृति प्रदान करता है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ.

          जिन शासकीय विधेयकों एवं अन्‍य कार्यों पर चर्चा के लिए समय निर्धारण करने के संबंध में, कार्य मंत्रणा समिति की सिफारिशें पढ़कर सुनाईं, उन्‍हें सदन स्‍वीकृति प्रदान करता है.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

 

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पिछली बार भी निवेदन किया था कि कार्य मंत्रणा समिति में सर्वदलीय निर्णय होता है, वहां हां और ना की जीत को समाप्‍त कर, यही होना चाहिए कि सदन इससे सहमत है.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-  जिस बात पर सह‍मति होगी, उसी पर सहमति देंगे, जिस पर नहीं होगी उस पर क्‍यों सहमति देंगे ?

          श्री कैलाश विजयवर्गीयजिन बातों पर स‍हमति होती है, वही इसमें आता है, दूसरा कुछ आता ही नहीं है.

          श्री उमंग सिंघारबंद कमरे की बात बाहर आ जायेगी, फिर आप कहेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय-  कुल मिलाकर कैलाश जी का कहना यह है कि कार्यमंत्रणा में जो तय होता है, वह सर्वसम्मिति से ही तय होता है. मुख्‍य रूप से समय आवंटन और कार्यसूची, वही कार्य मंत्रणा समिति का विषय होता है. सामान्‍य तौर पर सदन में इस प्रकार की परंपरा पूर्व से निर्धारित इसलिए है कि बाद में भी कोई प्रश्‍न न उठे. इसलिए हमारे पूर्वजों ने ऐसा सोचकर किया होगा.

          श्री उमंग सिंघार-  अध्‍यक्ष महोदय, कार्य मंत्रणा समिति में, जिसमें असहमति होती है, उसका क्‍या होगा ? उन विषयों का क्‍या होगा ?

          अध्‍यक्ष महोदय-  वह इसमें आता ही नहीं है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीयइसमें वे विषय आते ही नहीं हैं. जिसमें आपकी सहमति होती है, केवल वही आता है.

12.02 बजे

बधाई

श्रीमती प्रतिमा बागरी एवं श्री संतोष वरकड़े सदस्‍य के जन्‍मदिवस पर शुभकामना

          अध्‍यक्ष महोदय-  आज माननीय मंत्री, श्रीमती प्रतिमा बागरी एवं सदस्‍य, श्री संतोष वरकड़े, दोनों का जन्‍मदिन है, सदन की ओर से उन्‍हें बहुत-बहुत शुभकामनायें.

(मेजों की थपथपाहट)

 

 12.03 बजे

नियम 267-(क) के अधीन विषय

          अध्‍यक्ष महोदय-  शून्‍यकाल की सभी सूचनायें पढ़ी हुई मानी जायेंगी.

 

          श्री उमंग सिंघारअध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस पक्ष की ओर से हमने एक स्‍थगन लगाया है. उज्‍जैन की जमीनें जिस प्रकार से रियल स्‍टेट और वहां की कंपनियों में अवैध घोटाले हुए और (xx) मैं चाहता हूं इस स्‍थगन को स्‍वीकार किया जाये, चर्चा होनी चाहिए.

          डॉ. सीतासरन शर्माअध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीयअध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर है. कृपया सुन लीजिये.

(....व्‍यवधान...)

          श्री उमंग सिंघारअध्‍यक्ष महोदय, मेरा आग्रह है कि इस पर चर्चा होनी चाहिए. इस पर स्‍पष्‍टीकरण आना चाहिए.

          श्री विश्‍वास सारंगअध्‍यक्ष महोदय, ये विषय ही नहीं उत्‍पन्‍न होता है. कुछ भी बोलते हैं.

(....व्‍यवधान...)

          अध्‍यक्ष महोदय-  आज कार्यसूची में किसानों से संबंधित चर्चा भी होनी है.

          श्री उमंग सिंघारअध्‍यक्ष महोदय, आप इस पर कोई व्‍यवस्‍था दे दीजिये.

          श्री कैलाश विजयवर्गीयअध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर है. कृपया करके सभी मुझे विनम्रता से सुन लें. (…व्‍यवधान...) ये इनके स्‍थगन में है, जबकि स्‍थगन में, स्‍थगन के जो नियम हैं, वे मैं बता देता हूं. कंडिका तीन में प्रस्‍ताव हाल ही में घटित किसी विशिष्‍ट विषय तक सीमित रहेगा. यह हाल ही में घटित नहीं है. इनके प्रस्‍ताव में ही यह है कि यह वर्ष 2023 से हो रहा है इसलिये यह स्‍थगन में तो आ ही नहीं सकता है. यह स्‍थगन प्रस्‍ताव का विषय ही नहीं है. आप इसे और किसी माध्‍यम से लाइये यह. यह स्‍थगन का विषय है ही नहीं.

          डॉ. सीतासरन शर्मा—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दो सत्रों के बीच में जो घटनाएं घटती हैं. उस पर ही अविलम्‍बनीय लोक महत्‍व के विषय आते हैं. (व्‍यवधान)...

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पूरे प्रदेश का विषय है कि मुख्‍यमंत्री जी पर आरोप लगे हैं. क्‍या उन पर स्‍पष्‍टीकरण नहीं देना चाहिए.(व्‍यवधान)...

          श्री बाला बच्‍चन— माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा भी निवेदन है, मैं भी बोलना चाहता हूं. (व्‍यवधान)...

डॉ. सीतासरन शर्मा—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बात ठीक नहीं है. आपकी व्‍यवस्‍था आए. (व्‍यवधान)..

श्री उमंग सिंघार—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनको क्‍या परेशनी है. क्‍यों विचलित हो रहे हो. (व्‍यवधान)..

श्री बाला बच्‍चन—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय संसदीय कार्यमंत्री जी ने जो बोला कि हाल की बात और हाल को तत्‍काल घटित होने के बाद बोली है तो वह हाल की लाइफ बता दें कि हाल की कितनी उम्र है, हाल कितने समय तक का है आप हाल को कितने समय तक का मानते हैं. (व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय—मेरा सभी माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि आज की कार्यसूची में ध्‍यानाकर्षण भी हैं. उसमें जनता से जुडे़ हुए विषय हैं. नियम 139 के अधीन अविलम्‍बनीय लोक महत्‍व के विषय पर चर्चा नेता प्रतिपक्ष जी की ओर से लगी है वह महत्‍वपूर्ण विषय है. सारगर्भित विषय है. मेरा सभी से आग्रह है कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने दें जिससे कि महत्‍वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो सके. (व्‍यवधान)..

श्री बाला बच्‍चन—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह चर्चा नहीं कराना चाहते हैं, यह  चर्चा से बचना चाहते हैं. अध्‍यक्ष महोदय, हमारे इस आग्रह को स्‍वीकार करना चाहिए. यही हमारा मानना है, यही हमारा कहना है. (व्‍यवधान)..

श्री विश्‍वास कैलाश सारंग—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह इस तरह से राजनीति का मंच नहीं है. (व्‍यवधान)..

श्री उमंग सिंघार—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत ही महत्‍वपूर्ण विषय है कि  [xx] आरोप लगे हैं. (व्‍यवधान)..

श्री रामेश्‍वर शर्मा—कार्यसूची पर चर्चा करो न. (व्‍यवधान)...

श्री कैलाश विजयवर्गीय—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह रिकार्ड में नहीं आ सकता है. मेरा आपसे करबद्ध निवेदन है कि जो भी कहा गया है यह रिकार्ड में नहीं आना चाहिए. यह पूरी तरीके से असंवैधानिक है. यह असंसदीय है. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय—यह नहीं आएगा.

श्री उमंग सिंघार—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चर्चा कराने में क्‍या परेशानी है. (व्‍यवधान)...

12.08 बजे                                  गर्भगृह में प्रवेश

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यों का नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में प्रवेश

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण नारेबाजी करते हुए गर्भगृह में आ गये)

अध्‍यक्ष महोदय—आप सभी सदस्‍यों से निवेदन है कि कृपया करके अपने स्‍थान पर जाएं. (व्‍यवधान)...

श्री उमंग सिंघार— अध्‍यक्ष महोदय, सिंहस्‍थ हो रहा है. (व्‍यवधान)...

श्री कैलाश विजयवर्गीय—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसे रिकार्ड से हटाइये. यह पूरे तरीके से असंवैधानिक है. यह रिकार्ड से हटाइये. (व्‍यवधान)...

श्री रामेश्‍वर शर्मा—जो कार्यसूची है उस पर चर्चा करो. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय—मेरा सभी माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है. मैं माननीय नेता प्रतिपक्ष से आग्रह करना चाहता हूं कि आपने अपने विषय को इंगित किया है इस पर विचार होगा और मैं व्‍यवस्‍था दूंगा लेकिन आज 139 पर चर्चा है वह मैं कराउंगा इसलिए कृपया सदन को चलने दें. कृपा करके सभी अपने स्‍थान पर बैठें. (व्‍यवधान)...

श्री उमंग सिंघार—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप कब चर्चा करांएगे. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय— नियम 139 के अधीन अविलम्‍बनीय लोक महत्‍व के विषय पर आज ही चर्चा होगी. (व्‍यवधान)..

श्री उमंग सिंघार—माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप स्‍थगन को लेकर कब चर्चा कराएंगे. इसमें जमीन का घोटाला हो रहा है. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय—आपकी भावना आ गई है.

श्री उमंग सिंघार— उज्‍जैन के अंदर सिंहस्‍थ के करोड़ों के घोटाले हैं. कौन-कौन कंपनियों ने खरीदे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय—सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्‍थगित की जाती है.

 

(विधान सभा की कार्यवाही 12.09 बजे आधे घंटे के लिए स्‍थगित)

 

 

12.42 बजे              

अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.

                                   अध्यादेशों का पटल पर रखा जाना

(क)    मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) अध्यादेश, 2026 (क्रमांक 1 सन् 2026), एवं

(ख)            मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 (क्रमांक 2 सन् 2026)

          राज्यमंत्री, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार (मुख्यमंत्री द्वारा अधिकृत) (श्री गौतम टेटवाल) :- अध्यक्ष महोदय, मैं, भारत के संविधान के अनुच्छेद 213 की अपेक्षानुसार—

(ग)     मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज (संशोधन) अध्यादेश, 2026 (क्रमांक 1 सन् 2026), एवं

(घ) मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 (क्रमांक 2 सन् 2026) पटल पर रखता हूँ.

 

 

12.43 बजे                                पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) (क) क्रमांक एफ ए-3-13-2017-1-पांच (04), दिनांक 03 फरवरी, 2026,

    (ख)        क्रमांक CT-8-0002-2026-Sec-1-पांच(CT)(05),दिनांक 26 फरवरी, 2026,

    (ग)        क्रमांक एफ ए 3-02/2017/1/पांच(06), दिनांक 06 मार्च, 2026,

    (घ)        क्रमांक CT-4-0001-2022-Sec-1-पांच(CT) (07), दिनांक 31 मार्च, 2026,

    (ङ)        क्रमांक CT-15-0001-2025-Sec-1-पांच(CT)(08),दिनांक 31 मार्च, 2026,

    (च)        क्रमांक CT-4-2-0001-2023-Sec-1-05(CT)(09), दिनांक 31 मार्च, 2026,

    (छ)        क्रमांक CT-4-2-0001-2023-Sec-1-पांच(CT)(10), दिनांक 22 अप्रैल,  2026, (शुद्धिपत्र), एवं

    (ज) क्रमांक CT-8-0004-2026-Sec-1-पांच (12), दिनांक 18 मई, 2026

 

          उप मुख्यमंत्री (वाणिज्यक कर) (श्री जगदीश देवड़ा) :-- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश माल और सेवा कर अधिनियम, 2017 की धारा 166 एवं मध्यप्रदेश वेट अधिनियम, 2002 की धारा 71 की उपधारा (5) तथा मध्यप्रदेश वृत्तिकर अधिनियम, 1995 की धारा 28 की उपधारा (3) के अधीन, आज की कार्यसूची के पद 4 के उपपद (1) में उल्लिखित क्रमांक (क) से (ज) तक की अधिसूचनाएं पटल पर रखता हूँ.

 

(2)     मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कार्पोरेशन लिमिटेड का 9 वां वार्षिक प्रतिवेदन    वित्तीय वर्ष 2022-2023

          उप मुख्यमंत्री (लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा) (श्री राजेन्द्र शुक्ल) :-- अध्यक्ष महोदय, मैं, कंपनी अधिनियम, 2013 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कार्पोरेशन लिमिटेड का 9 वां वार्षिक प्रतिवेदन वित्तीय वर्ष 2022-2023 पटल पर रखता हूँ.

 

 

(3)  समग्र शिक्षा अभियान मध्यप्रदेश का वार्षिक प्रतिवेदन एवं अंकेक्षित लेखे वित्तीय वर्ष 2024-2025

          लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री (श्री उदय प्रताप सिंह (स्कूल शिक्षा मंत्री) द्वारा अधिकृत)-

अध्यक्ष महोदय, मैं, भारत सरकार की गाईड लाइन के बिन्दु क्रमांक-2 के उप बिन्दु (7) की अपेक्षानुसार समग्र शिक्षा अभियान मध्यप्रदेश का वार्षिक प्रतिवेदन एवं अंकेक्षित लेखे वित्तीय वर्ष 2024-2025 पटल पर रखती हूँ.

(4)  (क) शहपुरा थर्मल पॉवर कंपनी लिमिटेड, जबलपुर (म.प्र.) का 19वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025, एवं

(ख) बाणसागर थर्मल पॉवर कंपनी लिमिटेड, जबलपुर (म.प्र.) का 14वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025

 

          जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसीराम सिलावट) (श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर (ऊर्जा मंत्री) द्वारा अधिकृत) – अध्यक्ष महोदय, मैं, कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार –

(क)           शहपुरा थर्मल पॉवर कंपनी लिमिटेड, जबलपुर (म.प्र.) का 19वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025, एवं

(ख) बाणसागर थर्मल पॉवर कंपनी लिमिटेड, जबलपुर (म.प्र.) का 14 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025 पटल पर रखता हूँ.

 


 

12.45 बजे   (5)(iम.प्र. प्‍लास्टिक पार्क डेव्‍हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के अन्तिम लेखे वर्ष 2024-2025,   

(ii)   डी.एम.आई.सी.पीथमपुर जल प्रबंधन लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2023-2024,

(iii)  एमपी इण्‍डस्ट्रियल डेवलपमेन्‍ट कार्पोरेशन लिमिटेड का 45वां वार्षिक प्रतिवेदन तथा लेखे वित्‍तीय वर्ष 2021-2022, एवं

(ख) मध्‍यप्रदेश लघु उद्योग निगम मर्यादित, भोपाल का 59वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021

       

 

(6) बरकतउल्‍ला विश्‍वविद्यालय, भोपाल (म.प्र.) का 53वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025 

उच्‍च शिक्षा मंत्री (श्री इन्‍दर सिंह परमार) --  अध्‍यक्ष महोदय,  मैं, मध्‍यप्रदेश विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 1973 (क्रमांक 22 सन् 1973) की धारा 47 की अपेक्षानुसार बरकतउल्‍ला विश्‍वविद्यालय, भोपाल (म.प्र.) का 53वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025  पटल पर रखता हूं.

 

12. 46 बजे, फरवरी-मार्च 2026 सत्र की स्‍थगित बैठकों की प्रश्‍नोत्‍तर सूचियां तथा प्रश्‍नों के अपूर्ण उत्‍तरों के पूर्ण उत्‍तरों का संकलन खण्‍ड-7

अध्‍यक्ष महोदय -- फरवरी-मार्च 2026 सत्र की स्‍थगित बैठकों की प्रश्‍नोत्‍तर सूचियां तथा प्रश्‍नों के अपूर्ण उत्‍तरों के पूर्ण उत्‍तरों का संकलन खण्‍ड-7 पटल पर रखा गया है.

 

12.47 बजे,  नियम 267-क के अधीन फरवरी-मार्च, 2026 सत्र में सदन में पढ़ी गई सूचनाओं तथा उत्‍तरों का संकलन पटल पर रखा जाना

        अध्‍यक्ष महोदय -- नियम 267-क के अधीन फरवरी-मार्च, 2026 सत्र में सदन में पढ़ी गई सूचनाएं तथा उनके संबंध में शासन से प्राप्‍त उत्‍तरों का संकलन पटल पर रखा गया है.

 

12.48 बजे,      राष्‍ट्रपति/राज्‍यपाल की अनुमति प्राप्‍त विधेयकों की सूचना

(1) मध्‍यप्रदेश विनियोग विधेयक, 2026 (क्रमांक 1 सन् 2026)

(2) मध्‍यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-2) विधेयक, 2026 (क्रमांक 2 सन् 2026)

(3) मध्‍यप्रदेश श्रम कल्‍याण निधि (संशोधन) विधेयक, 2026 (क्रमांक 3 सन् 2026)

(4) मध्‍यप्रदेश माध्‍यस्‍थम् अधिकरण (संशोधन) विधेयक, 2025 (क्रमांक 17 सन् 2025)

 

12.49 बजे                                   ध्‍यानाकर्षण

(1)   मध्‍यप्रदेश में तेज आवाज के डी.जे. साउण्‍ड सिस्‍टम लगाने वालों पर कार्यवाही

न किया जाना

 

श्री देवेन्‍द्र पटेल --  (अनुपस्थित)

 

 

 

 

 

 

(2)     महाराष्‍ट्र के पंढरपुर स्थित मध्‍यप्रदेश सदन के वारकरी के श्रद्धालुओं हेतु मरम्‍मत एवं विकास कार्य कराया जाना

श्रीमती अर्चना चिटनीस (बुरहानपुर) --  अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 


 

            मंत्री, संसदीय कार्य,नगरीय विकास एवं आवास (श्री कैलाश विजयवर्गीय)—माननीय अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं, माननीय विधायक महोदय को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं कि देश भर के जितने भी वारकरी समाज के लोग हैं जो वहां पर जाते हैं, उनकी समस्या पर उन्होंने ध्यानाकर्षित किया है. अध्यक्ष महोदय, मेरा वक्तव्य निम्नामुसार है :-

 

          अध्यक्ष महोदय—माननीय सदस्य, पूरक प्रश्न करेंगी.

            श्रीमती अर्चना चिटनीस—जी हां.माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने इस महत्व के ध्यानाकर्षण के लिये मुझे अवसर दिया, मैं आपकी हृदय की गहराईयों से बहुत आभारी हूं.मध्यप्रदेश सरकार की बड़े मौके की जगह पर वह प्रापर्टी है, और माननीय मंत्री जी अगर इसका पता लगायेंगे वह एक बड़े स्क्वायर फिट एरिया में वहां पर एक छोटा सा भवन संचालित है और मैंनें जब इस विषय को पिछले कुछ समय से पकडना शुरू किया तो कुछ समय तक तो किसी को अंदाज ही नहीं था कि यह है किसके पास में, धर्मस्व के पास है, कि संस्कृति विभाग के पास है क्योंकि उस समय हाउसिंग बोर्ड ने इसका निर्माण किया था.

माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह विनम्र आग्रह है कि आज जब हम इस पर बात कर रहे हैं आज आषाढ़ माह की  शुक्ल सप्तमी है. आज के दिन भी 25 से 30 लाख लोग पंढरपुर में उपस्थित हैं. पंढरपुर बहुत बड़ा तीर्थ है और मध्यप्रदेश के बड़ी संख्या में लोग, इंदौर से , छिंदवाड़ा से, सिवनी से, बुहराहनपुर से, खंडवा से खरगौन और बड़वानी से सब जगह से लोग वहां पर जाते हैं. अध्यक्ष महोदय, अगर एक तो उस स्थान का समुचित उपयोग करते हुए, सबसे पहले उस भवन को पुनर्निर्मित किया जाय, उसको वर्टिकली अपवर्ड ग्राउंड प्लस IInd, IIIrd फ्लोर बनाकर बड़ी संख्या में उसका वारकरी लोग उपयोग कर सकें. आज भी लोग पैदल-पैदल हजारों किलोमीटर चलकर जाते हैं. भगवान विट्ठल के वहां दर्शन करते हैं. भक्त पुंडलिक के अपने माता-पिता की सेवा से श्री हरिविष्णु इतने प्रसन्न हुए कि उन्हें दर्शन देने के लिए वह उनके दरवाजे पर आ गये. यह कोई अति प्राचीन घटना नहीं है. 800 साल से भगवान वहां पर खड़े हैं, वहां पर विराजमान हैं. जब भगवान उनके दरवाजे पर आए, तब भक्त पुंडलिक ने कहा कि आप थोड़ी देर इंतजार करें, मैं मेरे पिता के पैर दबाकर आपके पास आता हूं.

इतने अच्छे, इतने बड़े, इतने संस्कार देने वाले स्थान का हमारे अपने मध्यप्रदेश की प्रापर्टी, हमारे लोगों के लिए उपयोग में नहीं आए, यह अच्छी परिस्थिति नहीं है.  उसका आन-लाइन रजिस्ट्रेशन हो जाय, कम से कम शुल्क पर हो जाय. उसका पुनर्निर्माण हो जाय और पंढरपुर के हमारे इस भक्त सदन का समुचित उपयोग हो. मध्यप्रदेश से जाने वाले लोग, अन्य प्रदेशों के लोग वहां रेस्ट हाउस के लिए, धर्मशालाओं के लिए दर-दर भटकते हैं परेशान होते हैं. हमारे यहां के संस्कृति विभाग या कोई जिले के कलेक्टर को इसका नोडल अधिकारी बना दिया जाय जो कि उसकी व्यवस्थाएं भी देखे. रजिस्ट्रेशन भी कराए एवं शासन में और उस सदन की व्यवस्था में एक बाउंडिंग के रूप में, एक इंटर कनेक्शन के रूप में वह काम कर सके. ऐसे स्पष्ट निर्देश दें और वह मध्यप्रदेश सरकार के पास ही रहे, तभी वह आम जन के काम में आएगा, अगर मध्यप्रदेश शासन के अलावा हमने किसी और व्यवस्था के अंतर्गत उसको दिया तो वह मध्यप्रदेश की आम जनता के उपयोग में तो नहीं आएगा. ऐसा मेरा आपसे आग्रह है. यह बहुत सालों से मैं इस विषय के पीछे लगी हूं.

अध्यक्ष महोदय, कृपया आप जिस महत्व के और इतने गरिमामय स्थान पर आप बैठे हैं, करोड़ों लाखों वारकरियों के लिए एक बड़ा सेवा का और उनके भक्तों के लिए एक व्यवस्था बनाने के लिए सदन के सभी सदस्य अपना इस विषय में सहयोग करे और अध्यक्ष महोदय, आपके मार्ददर्शन में, आपके निर्देश पर हमारे माननीय मंत्री जी इस पर  स्पष्ट निर्देश दें.

अध्यक्ष महोदय – माननीय मंत्री जी, विषय अच्छा है.

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) – अध्यक्ष महोदय, यह तो मेरा सौभाग्य है कि मुझे इस विषय पर उत्तर देने का अवसर मिला है क्योंकि मैंने भी माननीय मुख्यमंत्री जी को इस बारे में चिट्ठी लिखी थी और माननीय मुख्यमंत्री जी ने श्री नीरज मंडलोई जी को निर्देश भी दिये थे और श्री नीरज मंडलोई जी का मेरे पास में फोन आया, यह डिपार्टमेंट ने मुझे नहीं बताया, मैं आपको बता रहा हूं.

श्री भंवर सिंह शेखावत – यह डिपार्टमेंट आपको नहीं बताए, यह गड़बड़ है. विभाग आपको तो बताए. आपने मुख्यमंत्री जी को चिट्ठी लिखी.

श्री कैलाश विजयवर्गीय – नहीं, यह मेरा डिपार्टमेंट नहीं है. मैंने यह संस्कृति विभाग का लिखा हुआ उत्तर पढ़ा है. आप मेरा पूरा उत्तर तो सुन लीजिए.

अध्यक्ष महोदय, मेरे यहां से भी काफी लोग जाते हैं और मैं स्वयं भी उनके साथ इंदौर में नंगे पैर पदयात्रा करता हूं. अध्यक्ष महोदय, एक बड़ा समाज मध्यप्रदेश से जाता है और इसीलिए तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह जी ने वह स्थान को यहां पर बनाया था, परन्तु उसके रख-रखाव की व्यवस्था तब भी नहीं हुई थी और आज भी नहीं है. हम इस बार सुनिश्चित कर रहे हैं कि अभी वन टाइम उसमें बहुत अच्छा डेवलपमेंट करेंगे, उसके बाद एक या तो जिलाधीश या कोई अच्छी संस्था  या मंदिर की ही संस्था लें, वह उसको रख-रखाव के लिए ले ले. प्रापर्टी मध्यप्रदेश की रहेगी और जिस प्रकार श्रीमती अर्चना जी ने कहा है कि आन-लाइन लोगों का वहां पर नाममात्र शुल्क पर रजिस्ट्रेशन हो जाय, उनका आरक्षण हो जाय, वह सारी व्यवस्था करेंगे. मैं सदन को आश्वस्त करता हूं कि अगली आषाढ़ी हमारे मध्यप्रदेश के जो लोग वहां पर जाएंगे , वहां पर अच्छी सुविधा वाला भवन उपलब्ध होगा, इतना मैं आपके माध्यम से सदन को आश्वस्त करता हूं. (मेजों की थपथपाहट) 

श्रीमती अर्चना चिटनीस – अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी की बहुत आभारी हूं. आप बेशक इसके अगली आषाढ़ी सप्तमी तक भी व्यवस्था कर दें, आपको बड़ा कार्य सेंग्शन करना पड़ेगा, टेंडर करना पड़ेगा, बड़ा भवन बनाना पड़ेगा. अब क्योंकि प्रश्न आपके पास आ ही गया है, अब जवाबदारी आपकी भी बनती है और जब वह टीम गई, मैं टीम की आफिश्यल सदस्य नहीं थी, जब मेरी जानकारी में आया, मैं स्वयं गई, मैं उनके साथ थी. आज की स्थिति में उस भवन की हालत बहुत जर्जर है. वहां एक बड़ी डॉरमेट्री हॉल, कीर्तन के लिए व्यवस्था संपूर्ण हो जाय, आप कहेंगे तो मैं व्यक्तिगत तौर पर आप जब कहेंगे, जो भी शासकीय डिपार्टमेंट वहां जाएगा, मैं उनके साथ स्वयं जाऊंगी.

            नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) अध्यक्ष महोदय, हमारे जो प्रमुख सचिव, श्री शेखर शुक्ला जी हैं, उनको अभी मैं आपके समक्ष निर्देश दे रहा हूँ कि माननीय श्रीमती अर्चना चिटनीस जी से इस संबंध में एक बार बात करके और वहां पर इनका सुझाव क्या है, उन सुझावों को लेकर और एक अच्छा भवन वहां पर बने, उसमें जितने भी बजट की आवश्यकता हो, सरकार वहां पर बजट प्रदान करेगी. माननीय वित्त मंत्री जी ने भी अपनी गरदन हिला दी है.

          श्री विजय रेवनाथ चौरे (सौंसर) – माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे विधानसभा क्षेत्र से भी लगभग 10 हजार लोग पंढरपुर जाते हैं. वे सभी भगवान विट्ठल के भक्त हैं. माननीय मंत्री जी का बहुत अच्छा सुझाव है. मैं माननीय मंत्री जी का स्वागत करता हूँ.

          अध्यक्ष महोदय – माननीय कैलाश जी, यह आश्वासन बन गया है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय – माननीय अध्यक्ष महोदय, 100 परसेंट आश्वासन और मैं स्वयं भी वहां अगले साल जाऊंगा.

          अध्यक्ष महोदय – ठीक है.

          श्री विजय रेवनाथ चौरे – अध्यक्ष महोदय जी, आषाढ़ी एकादशी को मेरे क्षेत्र से भी लगभग 10 हजार लोग पंढरपुर जाते हैं. बहुत बड़ी यात्रा होती है. माननीय श्रीमती अर्चना चिटनीस जी को भी मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ. वहां पर बहुत छोटा भवन बना हुआ है लेकिन वहां पर हजारों लोगों के रूकने की कोई व्यवस्था नहीं है. माननीय मंत्री जी ने आश्वासन दिया है, तो वहां एक बहुत बड़ा हॉल बन जाए. वहां वॉशरूम वगैरह बन जाए. तीर्थ स्थान बन जाए. वहां पर कीर्तन-भजन वगैरह होते हैं. अगर वहां यह व्यवस्था बन जाए, तो बहुत अच्छा होगा. निश्चित रूप से हम सब श्रद्धालुओं के लिए यह बहुत बड़ा आस्था का केंद्र है. हमारे सौंसर और पांढुर्ना क्षेत्र से लगभग 15 से 20 हजार लोग वहां जाते हैं. मैं माननीय मंत्री जी को और माननीय श्रीमती अर्चना चिटनीस जी को भी धन्यवाद देता हूँ कि जिन्होंने इस सराहनीय पहल को और आगे बढ़ाने का आश्वासन दिया. बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय – माननीय अध्यक्ष जी, मैं इतना आश्वस्त करता हूँ कि अभी जो भवन है, वह तो अगले साल तक बढ़िया हो जाएगा, लेकिन उसके एक्सपान्शन के लिए थोड़ा समय और लगेगा. लेकिन मैं इस सदन को यह आश्वस्त करता हूँ कि मध्यप्रदेश के जो श्रद्धालु हैं वे वहां जाएंगे और उन्हें वहां अच्छी सुविधाएं प्राप्त होंगी. अभी का भवन तो अगले साल तक हम बहुत अच्छा कर देंगे, पर उसके बाद अगर एक्शपान्शन करना होगा, तो उसमें हो सकता है कि उसमें थोड़ा समय एक साल और लगे, पर अभी का भवन बहुत अच्छा हो जाएगा. उसमें सारी सुविधाएं मिल जाएंगी.

          अध्यक्ष महोदय – आश्वासन में संशोधन है यह..(हंसी)...

          श्री सोहनलाल बाल्मीक (परासिया) – माननीय अध्यक्ष महोदय जी, यह धर्मस्थल से जुड़ा हुआ मध्यप्रदेश का एक महत्वपूर्ण धर्मस्थान है. इसमें मेरा सुझाव है कि पचमढ़ी में स्थित चौरागढ़ में हर वर्ष महाशिवरात्रि में लाखों लोग मेले में वहां जाते हैं और देश के विभिन्न राज्यों से वहां पर हजारों-लाखों की संख्या में आते हैं. चाहे वह महाराष्ट्र हो, राजस्थान हो, गुजरात हो.  मध्यप्रदेश से भी काफी लोग जाते हैं लेकिन वहां पर व्यवस्था नहीं हो पा रही है. क्योंकि वहां पर फॉरेस्ट डिपार्टमेंट कोई काम नहीं करने देता है और प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग वहां जाते हैं लेकिन जब वर्ष में एक बार महाशिवरात्रि में वहां पर लगभग एक महीने का मेला लगता है, तो एक महीने के अंदर वहां इतनी व्यवस्था नहीं बन पाती कि वहां जो हजारों-लाखों श्रद्धालु जाते हैं वहां उनके रूकने की व्यवस्था हो पाए या उनके अन्य काम की जो व्यवस्था है, वह भी नहीं हो पाती. इसलिए मेरा आपके माध्यम से निवेदन है कि माननीय मंत्री जी उस ओर भी ध्यान दें और व्यवस्था बनाने की बात करें. वहां पर अगर व्यवस्था बन जाएगी, तो निश्चित रूप से श्रद्धालुओं को उसका लाभ प्राप्त होगा. धन्यवाद.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय – माननीय अध्यक्ष महोदय, इस ध्यानाकर्षण से तो यह प्रश्न उद्भुत नहीं होता, पर मैं इसको दिखवा दूंगा.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक – अध्यक्ष महोदय, धर्मस्थानों की बात हो रही है, तो यह बहुत बड़ा धार्मिक स्थान है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय – आपकी बात रिकार्ड में आ गई है, पर मैं यहां इस पर कुछ प्रॉमिस नहीं कर सकता, पर उसको देखूंगा और विभाग को बता दूंगा.

          अध्यक्ष महोदय – इनका कहना यह है कि ध्यानाकर्षण में से उद्भुत नहीं हो रहा है.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक – अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी बात समझ गया, लेकिन चूंकि यह सुझाव दिया है.

          अध्यक्ष महोदय – आप माननीय सदस्य की भावना का सम्मान करिए.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय – अध्यक्ष महोदय, आपकी बात का सम्मान है.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक – अध्यक्ष महोदय, कुछ आश्वासन दे दीजिए, तो अच्छा हो जाएगा.

            अध्यक्ष महोदय – आपकी बात पूरी हो गई ?

          श्री सोहनलाल बाल्मीक – जी अध्यक्ष महोदय.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस – धन्यवाद अध्यक्ष महोदय.

          अध्यक्ष महोदय – ठीक है. ध्यानाकर्षण समाप्त.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक – माननीय अध्यक्ष महोदय, एक सूचना माननीय दिनेश गुर्जर जी की है. इसी ध्यानाकर्षण में श्री देवेन्द्र पटेल जी के बारे में है.

          अध्यक्ष महोदय – नहीं, नहीं. अब तो आगे बढ़ गए हैं.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक – अध्यक्ष महोदय, समय के पहले दे दिया था.

          अध्यक्ष महोदय – मैंने उस समय पूछा था. किसी ने भी बताया नहीं.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक – अध्यक्ष महोदय जी, आपको दिया है.

          अध्यक्ष महोदय – अब कार्यसूची आगे बढ़ गई है. अब दूसरा ध्यानाकर्षण हो गया है.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक – अध्यक्ष महोदय, समय पर देना चाहिए न. इस तरीके से तो यदि सूचना दी गई है, समय पर दे दी गई है, तो वह आप तक नहीं पहुंचेगी तो....

          अध्यक्ष महोदय – प्लीज, प्लीज...

          श्री कैलाश विजयवर्गीय –  अध्यक्ष महोदय, विधानसभा की ट्रेन में बैक गियर नहीं है.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक – अध्यक्ष महोदय, मैं समझ गया. यह जो बैक गियर है किसके कारण गलत लग रहा है ?

 

01.04 बजे                             अनुपस्थिति की अनुज्ञा

निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 58-पवई से निर्वाचित सदस्य, श्री प्रहलाद लोधी, निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 60-पन्ना से निर्वाचित सदस्य, श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह एवं निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 63-सतना से निर्वाचित सदस्य, श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा को विधान सभा के जुलाई, 2026 सत्र की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुज्ञा.

 


 1.02 बजे                                      याचिकाओं की प्रस्तुति

          अध्यक्ष महोदय--1 से लेकर 25 तक माननीय सदस्यों की याचिकाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जायेंगी.

1.       श्री पंकज उपाध्याय,

2.       श्री प्रीतम लोधी

3.       श्री आतिफ आरिफ अकील

4.       श्री धीरेन्द्र बहादुर सिंह

5.       डॉ.सतीश सिकरवार

6.       श्रीमती छाया गोविन्द मोरे

7.       श्री विश्वनाथ सिंह मुलाम भैया

8.       श्री कमल मर्सकोले

9.       श्री विक्रम सिंह

10      श्री मधु भगत

11.     डॉ.सीतासरन शर्मा

12.     श्री गौरव सिंह पारधी

13.     श्री यादवेन्द्र सिंह

14.     इंजीनियर हरिबाबू राय

15.     श्री कैलाश कुशवाहा

16.     श्रीमती रीति पाठक

17.     श्री रमेश प्रसाद खटीक

18.     डॉ.हिरालाल अलावा

19.     श्री हेमंत सत्यदेव कटारे

20.     श्री आशीष गोविंद शर्मा

21.     श्री नितेन्द्र बृजेन्द्र सिंह राठौर

22.     श्री विश्वामित्र पाठक

23.     श्री महेन्द्र नागेश

24.     श्री राजेश कुमार शुक्ला

25.     श्री फुन्देलाल सिंह मार्को

          नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार)—माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा पाइंट ऑफ आर्डर है. अभी माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी कह रहे थे आपने भी कहा कि जब सदन की कार्यवाही आगे चलती है तो पीछे नहीं होती. मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं सदन को याद दिलाना चाहता हूं आपने ही आप सर्वोपरि हैं आप व्यवस्था को बदल सकते हैं. जब नारी वंदन हो रहा था बिल को लेकर के बात हो रही थी. जब आपने व्यवस्था दे दी थी कि वोटिंग को लेकर वोटिंग की शुरूआत के आदेश कर दिये कि वोटिंग होना चाहिये. फिर व्यवस्था वापस रिपीट हुई. आप सर्वोपरि हैं, लेकिन मैं समझता हूं कि अगर दूसरी कोई बात आ जाती है उसके अंदर यह बात आ जाती है कि कार्यवाही आगे बढ़ गई, यह दोहरी व्यवस्था क्यों?

          अध्यक्ष महोदय—सामान्य तौर पर ध्यानाकर्षण का जो विषय है उसमें अधिकृत करने की परम्परा नहीं है. इसलिये सूचना भी देर से मिली मैंने देवेन्द्र जी का नाम दो तीन बार पुकारा उस समय दिनेश गुर्जर जी हाथ उठा सकते थे, खड़ा कर सकते हैं, तो मैं उनको जरूर बोलने का अवसर देता, इसमें कहीं कोई दिक्कत नहीं है. लिहाजा हम आगे बढ़ गये हैं.

          श्री उमंग सिंघार—अध्यक्ष महोदय, मेरा अनुरोध यह है कि विषय ध्यानाकर्षण का नहीं था अगर यह व्यवस्था है आगे कार्यवाही बढ़ गई है तो वापस नहीं होगी, (xx) इस पर मैं समझता हूं कि—(व्यवधान) महिलाओं पर आरक्षण बिल पास हो जाये. आरक्षण बिल पास हो जाता है,यहां से चला भी जाता है. फिर आप चुप हो गये.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)—बहुत आपत्तिजनक है.

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल)—यह टिप्पणी उचित नहीं है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय—यह टिप्पणी करना उचित नहीं है, यह टिप्पणी आपत्तिजनक है. अच्छा यह होता कि नेता प्रतिपक्ष जी कहें.

          श्री उमंग सिंघार— (xx)  आसंदी पर कोई दबाव नहीं बनना चाहिये.

          अध्यक्ष महोदय—कोई दबाव बनाने की आवश्यकता नहीं है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय—अध्यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष जी बहुत सकारात्मक हैं. यदि इनको चर्चा कराना है तो निवेदन कर लेते कि अध्यक्ष महोदय इसको कल ले लें, और ले

सकते हैं, यह परम्परा रही है. आप वो तो कर नहीं रहे हैं. हम पर आरोप कर रहे हैं.

लोक निर्माण मंत्री(श्री राकेश सिंह)—माननीय अध्यक्ष महोदय, आपकी अनुमति हो तो इसका स्पष्टीकरण दिया जा सकता है.                          

          श्री उमंग सिंघार - अभी आपको स्‍थगन दिया, आप चर्चा करवाओ, बोल दो आप आश्‍वासन दे दो, चर्चा करवाएंगे हम (xx) चर्चा करवाएंगे बोले आप.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय - आसंदी से निवेदन कर लीजिए. भाई साहब कृपया विषयांतर न करें.

          अध्‍यक्ष महोदय - कृपया अपना स्‍थान गृहण करें.

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद पटेल) - अध्‍यक्ष जी, मेरा निवेदन है कि जो वाक्‍य माननीय नेता प्रतिपक्ष ने कही है, वह आसंदी पर एक प्रकार से टिप्‍पणी है, उसको विलोपित करना चाहिए. मुझे लगता है कि आसंदी पर कौन दबाव बना सकता है सरकार और सत्‍ता का सवाल नहीं है. मुझे लगता है यह भाषा, आप इतने सीनियर नेता है, मुझे लगता है उसको डिलीट कर देना चाहिए. 

          अध्‍यक्ष महोदय - विलोपित कर दें. (अध्‍यक्ष जी द्वारा विलोपित करने के लिए हाथ से संकेत किया गया).मेरा आग्रह सिर्फ इतना ही है कि अगर ध्‍यानाकर्षण आपको बहुत महत्‍वपूर्ण लगता है तो दिनेश जी अपने नाम से दे दे या देवेन्‍द्र पटेल जी कर आ जाए तो उसकी विषय वस्‍तु से ध्‍यानाकर्षण पर चर्चा कराने में कोई दिक्‍कत थोड़ी न है. हमने तो पहले लगाया उनका.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय - ये परम्‍परा रही है कई बार हम चिट्टी लिख देते हैं कि इसको कल ले लीजिए तो आप लेते हैं.

          लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) - अध्‍यक्ष जी, जो अभी प्रहलाद जी ने कहा उससे मैं पूरी तौर पर सहमत हूं. दूसरी बात जो थी वह नियमों से जुड़ा हुआ विषय था उमंग जी और मैंने उसको उठाया था कि उस समय यह भी हुआ है  केन्‍द्र में जब कांग्रेस की सरकार थी तब रात में 12 बजे चूंकि नियमों में विसंगति हो गई थी और इसलिए हाउस को खुलवाया गया था और उसको ठीक किया गया था यह दोनों बातों में फर्क है इसलिए माननीय अध्‍यक्ष जी की व्‍यवस्‍था पर कभी प्रश्‍न किसी भी सदन में नहीं खड़ा किया जा सकता.

          अध्‍यक्ष महोदय - अब हमारे आदिवासी मंत्री जी को बोलने दीजिए.

 

 

         


 

1.15 बजे                           शासकीय विधि विषयक कार्य.  

(1) मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026(क्रमांक 12 सन् 2026) का पुर:स्‍थापन.

 

राज्‍य मंत्री, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार (श्री गौतम टेटवाल ) - अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति की अनुमति चाहता हूं. 

अध्‍यक्ष महोदय – प्रश्‍न यह है कि मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाये.

                                                                             (अनुमति प्रदान की गई)

श्री गौतम टेटवाल -- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 का पुर:स्‍थापन करता हूं. 

 

(2) मध्यप्रदेश कार्य स्‍थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) विधेयक, 2026(क्रमांक 13 सन् 2026) का पुर:स्‍थापन.

 

श्रम मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल ) - अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश कार्य स्‍थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति की अनुमति चाहता हूं. 

अध्‍यक्ष महोदय – प्रश्‍न यह है कि मध्यप्रदेश कार्य स्‍थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) विधेयक, 2026  के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाये.

 

                                                                             (अनुमति प्रदान की गई)

श्री प्रहलाद सिंह पटेल-- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश कार्य स्‍थल सशक्तिकरण संहिता (श्रम शक्ति संहिता) विधेयक, 2026  का पुर:स्‍थापन करता हूं. 

 

(3) मध्यप्रदेश धन्‍वंतरि स्‍वास्‍थ्‍य विश्‍वविद्यालय विधेयक, 2026

(क्रमांक 14 सन् 2026) का पुर:स्‍थापन.

 

उप मुख्‍य मंत्री,लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा, (श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल) - अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश धन्‍वंतरि स्‍वास्‍थ्‍य विश्‍वविद्यालय विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति की अनुमति चाहता हूं. 

अध्‍यक्ष महोदय – प्रश्‍न यह है कि मध्यप्रदेश धन्‍वंतरि स्‍वास्‍थ्‍य विश्‍वविद्यालय विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाये.

 

                                                                             (अनुमति प्रदान की गई)

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल-- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश धन्‍वंतरि स्‍वास्‍थ्‍य विश्‍वविद्यालय विधेयक, 2026 का पुर:स्‍थापन करता हूं. 

 

(4) मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक, 2026

(क्रमांक 17 सन् 2026) का पुर:स्‍थापन.

 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति की अनुमति चाहता हूं. 

अध्‍यक्ष महोदय – प्रश्‍न यह है कि मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाये.

                                                                             (अनुमति प्रदान की गई)

 

श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक, 2026 का पुर:स्‍थापन करता हूं. 

 

(5) मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूईंग बिजनेस विधेयक, 2026(क्रमांक 18 सन् 2026) का पुर:स्‍थापन.

 

 राज्‍यमंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण(मुख्‍यमंत्री द्वारा अधिकृत) (श्रीमती कृष्‍णा गौर) - अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूईंग बिजनेस विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति की अनुमति चाहती हूं. 

अध्‍यक्ष महोदय – प्रश्‍न यह है कि मध्यप्रदेश ईज ऑफ डूईंग बिजनेस विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाये.

                                                                             (अनुमति प्रदान की गई)

श्रीमती कृष्‍णा गौर-- अध्यक्ष महोदय, मैं,  मध्यप्रदेश इज ऑफ डूईंग बिजनेस विधेयक, 2026  का पुर:स्‍थापन करती हूं.

 

(6) मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026(क्रमांक 5 सन् 2026) का पुर:स्‍थापन.

 

 उप मुख्‍यमंत्री,वित्‍त(श्री जगदीश देवड़ा) - अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति की अनुमति चाहता हूं. 

अध्‍यक्ष महोदय – प्रश्‍न यह है कि मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाये.

                                                                             (अनुमति प्रदान की गई)

श्री जगदीश देवड़ा-- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026  का पुर:स्‍थापन करता हूं. 

                                                                                                                                                                                                                                 

(7) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (मध्‍यप्रदेश संशोशन) विधेयक, 2026

(क्रमांक 6 सन् 2026) का पुर:स्‍थापन.

श्री गौतम टेटवाल, राज्‍य मंत्री (अधिकृत विधि और विधायी)—अध्‍यक्ष महोदय, मैं, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय--  प्रश्‍न यह है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाय.

(अनुमति प्रदान की गई)

श्री गौतम टेटवाल, राज्‍य मंत्री (अधिकृत विधि और विधायी)—अध्‍यक्ष महोदय, मैं, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 का पुर:स्‍थापन करता हूं.

(8) मध्‍यप्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026 (क्रमांक 7 सन् 2026) का पुर:स्‍थापन.

श्री राकेश सिंह, मंत्री (लोक निर्माण)--  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय--  प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाय.

(अनुमति प्रदान की गई)

श्री राकेश सिंह, मंत्री (लोक निर्माण)--  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश राजमार्ग (संशोधन) विधेयक, 2026 का पुर:स्‍थापन करता हूं.

 

(9) मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 (क्रमांक 8 सन् 2026) का पुर:स्‍थापन.

श्री इंदर सिंह परमार, मंत्री (उच्‍च शिक्षा)—अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय—प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाय.

(अनुमति प्रदान की गई)

श्री इंदर सिंह परमार, मंत्री (उच्‍च शिक्षा)—अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2026 का पुर:स्‍थापन करता हूं.

 

(10) मध्‍यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज (संशोधन) विधेयक, 2026

(क्रमांक 9 सन् 2026) का पुर:स्‍थापन.

श्री प्रहलाद सिंह पटेल, मंत्री (पंचायत एवं ग्रामीण विकास)--  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय--  प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाय.

(अनुमति प्रदान की गई)

श्री प्रहलाद सिंह पटेल, मंत्री (पंचायत एवं ग्रामीण विकास)--  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज (संशोधन) विधेयक, 2026 का पुर:स्‍थापन करता हूं.

(11) मध्‍यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026

(क्रमांक 11 सन् 2026) का पुर:स्‍थापन.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल, मंत्री (लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा)—अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय--  प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाय.

          (अनुमति प्रदान की गई)

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल, मंत्री (लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा)—अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश आयुर्विज्ञान विश्‍वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 का पुर:स्‍थापन करता हूं.

 

(12) मध्‍यप्रदेश वेट (संशोधन) विधेयक, 2026 (क्रमांक 15 सन् 2026) का पुर:स्‍थापन.

          श्री जगदीश देवड़ा, उपमुख्‍यमंत्री (वाणिज्यिक कर)--  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश वेट (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय--  प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश वेट (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाय.

(अनुमति प्रदान की गई)

          श्री जगदीश देवड़ा, उपमुख्‍यमंत्री (वाणिज्यिक कर)--  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश वेट (संशोधन) विधेयक, 2026 का पुर:स्‍थापन करता हूं.

(13) मध्‍यप्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026

(क्रमांक 16 सन् 2026) का पुर:स्‍थापन.

          श्री जगदीश देवड़ा, उपमुख्‍यमंत्री (वाणिज्यिक कर)--  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय--  प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाय.

(अनुमति प्रदान की गई)

          श्री जगदीश देवड़ा, उपमुख्‍यमंत्री (वाणिज्यिक कर)--  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 का पुर:स्‍थापन करता हूं.

 

(14) मध्‍यप्रदेश निरसन (संशोधन) विधेयक, 2026 (क्रमांक 10 सन् 2026) का पुर:स्‍थापन.

          श्री गौतम टेटवाल, राज्‍य मंत्री (अधिकृत विधि और विधायी)—अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश निरसन (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय--  प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश निरसन (संशोधन) विधेयक, 2026 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाय.

(अनुमति प्रदान की गई)

          श्री गौतम टेटवाल, राज्‍य मंत्री (अधिकृत विधि और विधायी)—अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश निरसन (संशोधन) विधेयक, 2026 का पुर:स्‍थापन करता हूं.

          श्री बाला बच्चन - अध्यक्ष महोदय, जितने भी विधेयक अभी प्रस्तुत हुए हैं.आज की कार्य सूची में तो यह हैं नहीं यह लगभग 16 हैं इन पर चर्चाएं कब होंगी और क्या इस सत्र में हो जायेंगी या फिर आज की कार्य सूची में लाना उचित क्यों नहीं समझा मैं जानना चाहता हूं.

          अध्यक्ष महोदय - माननीय बाला बच्चन जी, कार्य मंत्रणा समिति की बैठक हुई थी उसमें सब लोगों ने बातचीत की और उसके बाद सप्लीमेंट्री सूची जारी की गई कार्य मंत्रणा के बाद और इसीलिये आज पुर:स्थापन कराया जा रहा है कल से इन बिलों पर चर्चा प्रारंभ होगी. आज चूंकि 139 के तहत नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जी की चर्चा लगी हुई है और इसीलिये आगे उस चर्चा को लिया जायेगा.

          श्री आरिफ मसूद -  यह जो विधेयक आये हैं उस सप्लीमेंट्री कार्यसूची की हमें वैसे जानकारी नहीं है और लेपटाप पर चल नहीं रही.

          श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव - अध्यक्ष महोदय, किसी सदस्य को जानकारी नहीं.

          अध्यक्ष महोदय - सचिन जी, अभी आप सूचना कार्यालय में जाओ सारे बिल आपको उपलब्ध होंगे.

          श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव - कार्यमंत्रणा में तय हुआ यहां सदन में प्रस्तुत हुए उसमें कोई आपत्ति नहीं पर कम से कम  जो माननीय सदस्य हैं उन सदस्यों को जानकारी तो उपलब्ध होनी चाहिये.

          संसदीय कार्य मंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय) - परंपरा यही है.

          श्री आरिफ मसूद -  अध्यक्ष महोदय नयी टेक्नालाजी का जब हम उपयोग कर रहे हैं तो उस पर तो लोड हो सकता था उस पर भी नहीं है.

          श्री बाला बच्चन - यह फर्स्ट टाईम मैंने देखा है इसीलिये मैंने आपको इंट्रप्ट किया है. माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी फर्स्ट टाईम है कि आपने 16 विधेयक प्रस्तुत किये हैं तो आज सत्र का पहला दिन है तो यह गलत परंपरा की शुरुआत हो रही है यह नहीं होना चाहिये. सदन को अगर आप विश्वास में नहीं लोगे तो मेरे हिसाब से ठीक नहीं होगा.हम लोगों की गरिमा के लिये इसका ध्यान  रखना होगा.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय - आप बहुत वरिष्ठ मंत्री रहे हैं.

          (..व्यवधान..)

          श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव - अगर यह विधेयक इतने महत्वपूर्ण थे  तो पहले तय कर लिया जाता.

          अध्यक्ष महोदय -संसदीय कार्य मंत्री बोल रहे हैं उनका जवाब आ जाने दो.

          (..व्यवधान..)

          श्री बाला बच्चन - मैं आधा मिनट का निवेदन करना चाहता हूं.

          अध्यक्ष महोदय - संसदीय कार्य मंत्री जी क्या  कहना चाहते हैं वह तो सुन लें.

          श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव - अध्यक्ष महोदय,सिर्फ यही विषय नहीं है लगातार इस तरह की चीजें हो रही हैं.

          श्री आरिफ मसूद -  अध्यक्ष महोदय,जो बात मैंने कही है उस पर भी तो ध्यान दे दें.

          अध्यक्ष महोदय - पूरक कार्य सूची आज से नहीं वर्षों से निकलती आ रही है और समय-समय पर ऐसा किया ही जाता है.

          श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव - अध्यक्ष महोदय,कोई भी नया अध्यादेश आता है कोई भी संशोधन आता है न उसकी पूर्व से जानकारी होती है न हम उसका अध्ययन कर पाते हैं. सदन चाहता है कि इतने महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हो औॅर कोई जानकारी माननीय सदस्यों को नहीं है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष महोदय, मैं सचिन भाई को और बाला भाई को बता देता हूं. देखिये सदन तो परंपरा से ही चलता है.

          श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव - अगर यह विषय इतने महत्वपूर्ण हैं तो इनको पहले से लेकर आना था.

          अध्यक्ष महोदय - सचिन जी,प्लीज एक बार कैलाश विजयवर्गीय जी को सुन लें फिर जरूरत होगी तो आप फिर बोल लेना.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय - माननीय सभी सदस्य इस बात का ध्यान रखें. साधारणतया सदन की परंपरा यही रही है कि प्रथम दिन कार्य मंत्रणा समिति की बैठक होती है और कौन-कौन से विधेयक लेना हैं यह विधेयक कार्य मंत्रणा समिति में तय होते हैं फिर कार्य मंत्रणा समिति के बाद वह विधेयक टेबल पर आते हैं. टेबल पर आने के बाद जैसे ही टेबल हुआ वैसे ही आपके खानों में सारे विधेयक की प्रतियां पहुंच जायेंगी. आपके पास दिन भर है रात भर है आप पढ़िये और यह सदन की परंपरा रही है  आज की नहीं है इसमें ऐसा कोई भी ऐसा काम नहीं हुआ है जो नियम विपरीत हो.

          श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव - इसकी जानकारी हमको मिलनी चाहिये थी.

          अध्यक्ष महोदय -सचिन जी इसको आप पता कर लो.

          श्री बाला बच्चन - अध्यक्ष महोदय,यह विषय मैंने उठाया और मैं आपकी जानकारी में लाना चाहता हूं ऐसा कभी नहीं देखा है अगर यह 16 विधेयक आपको प्रस्तुत करना था तो आज की कार्यसूची में उसको क्यों नहीं रखा मेरा प्रश्न यह है.

अध्यक्ष महोदय – बाला बच्चन जी, कैलाश विजयवर्गीय जी भी बता रहे हैं, कार्यमंत्रणा समिति में जब विषय आता है, उसके बाद ही हाऊस में इंट्रोड्यूज होता है.

श्री कैलाश विजयवर्गीय – अध्यक्ष महोदय, उसके बाद सप्लीमेंट्री कार्यसूची निकलती है. सप्लीमेंट्री कार्यसूची निकल गई है. आपके खाने में पहुँच गई है.

श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव – माननीय अध्यक्ष महोदय, ऐसी क्या जरूरत थी कि इसको आज ही आना है. ये चीज कल भी आ सकती थी.

अध्यक्ष महोदय --  आज पुर:स्थापित हो गए तो कल से चर्चा शुरू होगी. कल पुर:स्थापित होते तो चर्चा और लेट होती.

श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव – कल प्रस्तुत कर देते. उसको बाकायदा सूची में ले लेते.

अध्यक्ष महोदय – ठीक है. और किसी को कुछ कहना है ? डॉ. सीतासरन शर्मा जी क्या कह रहे हैं.

श्री कैलाश विजयवर्गीय – अध्यक्ष महोदय, ऐसे उदाहरण हैं कि तत्काल बिल प्रस्तुत हुआ और चर्चा प्रारंभ हुई है. अनेक उदाहरण हैं.

डॉ. सीतासरन शर्मा – अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी ने कहा कि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में आने के बाद ही होता है. उसका सीधा कारण है, क्योंकि उसमें विधेयक पर चर्चा के लिए समय क्या लिखते, कार्यमंत्रणा समिति में आने के बाद उस विधेयक पर चर्चा का समय तय होता है. समय तय होने के बाद वह कार्यसूची में आता है. अब चूँकि आज ही कार्यमंत्रणा समिति की बैठक हुई, इस कारण से वह सप्लीमेंट्री कार्यसूची में आया. सप्लीमेंट्री कार्यसूची का प्रावधान पहले से है और पहले भी ऐसा हुआ है. सप्लीमेंट्री कार्यसूची आपके खाने में डली है.

श्री बाला बच्चन – आज की कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में तय हुआ है तो कल की कार्यसूची में आना था, कल की कार्यसूची में आता तो यह नियम के अनुसार होता.

अध्यक्ष महोदय – माननीय नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार जी और श्री दिनेश जैन (बोस) जी, सदस्य से प्राप्त स्थगन प्रस्ताव की सूचनाओं की विषय वस्तु का मेरे द्वारा अवलोकन किया गया. आपका स्थगन अस्वीकार कर दिया गया है क्योंकि वह तात्कालिक विषय नहीं है. सामान्यत: स्थगन प्रस्ताव प्रदेश में तत्कालीन घटनाओं एवं कानूनी व्यवस्था के संबंध में उत्पन्न स्थिति पर लाया जाता है और उस पर ही चर्चा कराए जाने की परंपरा रही है. ..(व्यवधान)..

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) – माननीय अध्यक्ष महोदय, पूरा तात्कालिक विषय है यह. अभी तक जमीनें खरीदी जा रही हैं और सौदे किए जा रहे हैं और घोटाले हो रहे हैं. यह तात्कालिक विषय क्यों नहीं है. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- यह जो विषय है उसे सदन में अनेक ऐसे अवसर आएंगे, जिसमें इसे उठाया जा सकता है. पूर्व की परंपराओं में भी यह देखने में आया है कि यदि किसी विषय पर अन्य माध्यमों से चर्चा हो तो उस विषय पर स्थगन प्रस्ताव नहीं लिया गया है. ..(व्यवधान)..

श्री उमंग सिंघार -- पूरे प्रदेश के अंदर, उज्जैन के लोग जानते हैं, पूरे घोटाले हो रहे हैं. माननीय अध्यक्ष महोदय, योजनाएं बदल के जमीनें खरीदी जा रही हैं. (XX) क्या उनको स्पष्टीकरण नहीं देना चाहिए माननीय अध्यक्ष महोदय. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- इस सत्र में भी आगे विधेयक, विनियोग विधेयक एवं अनुपूरक बजट पर चर्चा के समय इस विषय पर आपको अवसर रहेगा. ..(व्यवधान)..

लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह ) – एक बार व्यवस्था आ गई, उस पर टिप्पणियां नहीं हो सकतीं. ..(व्यवधान)..

श्री सोहनलाल बाल्मीक – माननीय अध्यक्ष महोदय, जब कोई चीज आई है तो उस पर बात करने में क्या दिक्कत है. मुख्यमंत्री जी अपना स्पष्टीकरण कर दें. ..(व्यवधान)..

श्री उमंग सिंघार – माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी को क्यों डर लग रहा है.  ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- सदन की कार्यवाही 3.00 बजे तक के लिए स्थगित की जाती है. भोजनावकाश के बाद नियम 139 के अधीन विषय पर चर्चा होगी. श्री उमंग सिंघार जी का वह महत्वपूर्ण विषय है.

 

 

(1.33 बजे से 3.00 बजे तक अंतराल)

 

 

3.11 बजे                            विधान सभा पुन: समवेत हुई

{अध्‍यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

13. नियम 139 के अधीन अविलम्‍बनीय लोक महत्‍व के विषय पर चर्चा

अध्‍यक्ष महोदय – मध्‍यप्रदेश में किसानों को खरीफ फसल हेतु खाद/बीज नहीं मिलने एवं अवर्षा से उत्‍पन्‍न स्थिति के संबंध में श्री भंवरसिंह शेखावत,सदस्‍य चर्चा प्रारंभ करेंगे.

श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी) (बदनावर) – माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत महत्‍वपूर्ण विषय है, जो आपने चर्चा में लिया है. किसान और खेती, इस देश और प्रदेश दोनों की आर्थिक रीढ़ की हड्डी है, हमारा सारा आर्थिक ढांचा, आर्थिक आधार हमारी ग्रामीण व्‍यवस्‍था सब किसानों और कृषि पर आधारित है. इसमें हमें तकलीफ तब होती है कि जब हम किसान का उपयोग तो करते हैं, कृषि को आधार तो बनाते हैं, लेकिन आज की परिस्थिति में जब हम इस बात को फील्‍ड और ग्राउण्‍ड लेवल पर जाकर देखते हैं तो ऐसा लगता है कि सरकारें किसानों का उपयोग करती हैं, किसानों के कंधों पर रखकर अपनी सरकार चला लेती हैं, लेकिन जब किसान की बारी आती है, उसके हितों की बारी आती है, किसानों को उसका लाभ और हक देने की बारी आती है, तो सब सरकारें अपना पांव पीछे खींच लेती हैं. आज प्रदेश के अन्‍दर सरकार अपने सारे वायदों से मुकर गई है. किसान हलाकान है, आप तो उसी क्षेत्र से आते हैं, आपके क्षेत्र में भी किसान पर्याप्‍त संख्‍या में हैं. आज जो किसानों की दुर्दशा हो रही है, बारिश नहीं हो रही है, यह प्रकृति का प्रकोप है, यह तो एक विषय है ही, लेकिन सरकार का जो व्‍यवहार है. सरकार जो किसानों के साथ कर रही है, यह बहुत ही महत्‍वपूर्ण और घातक है और अंधेरे में रखने वाला विषय है. आप लोग कहने के लिए बड़ी-बड़ी बातें करते हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप किसानों की बातें करते हो, सिंचाई का रकबा हमने बढ़ाया, हम किसान को बिजली दे रहे हैं, हमारा उत्‍पादन बढ़ रहा है. हम हरियाणा और पंजाब से आगे निकल गए हैं, बात बड़ी अच्‍छी दिखती है. हम हरियाणा और पंजाब से आगे निकल गए हैं. लेकिन माननीय आदरणीय कैलाश जी आप भी जरा कभी-कभी गांवों की तरफ देख लिया कीजिये. सारा माल शहरों में ही नहीं है, गांव में भी है. अब आप तो सिर्फ शहरों में अटक गए हैं, शहरों की जमीन, शहरों का खेल मास्‍टर प्‍लान और किसान का मास्‍टर प्‍लान कौन देखेगा ? इतने उत्‍पादन के बाद आप अपनी पीठ थपथपाते हैं कि हमने बहुत उत्‍पादन किया, रिकॉर्ड उत्‍पादन किया है. आदरणीय देवड़ा जी,आप तो वित्‍त देखते हैं. हर वर्ष इतना उत्‍पादन होने के बाद भी सरकार उस उत्‍पादन के रख-रखाव की व्‍यवस्‍था नहीं कर पाई है. वेयरहाउसों की क्‍या हालत है ? हर१ वर्ष क्‍यों ऐसा होता है ? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोई भी वर्ष ऐसा नहीं होगा कि जब किसानों के द्वारा मेहनत और खून-पसीने से उपजाया हुआ उत्‍पादन बाहर पानी में न सड़ रहा हो. अध्‍यक्ष महोदय, हर साल 10 लाख टन गेहूं खुले में सड़ता है. ये आंकड़े हैं, भारत माता के सपूतों ये तो बताओ, जिस उत्‍पादन के लिए पीठ थपथपाते हो, कृषि कर्मण पुरस्‍कार भी ले आते हो, लेकिन किसान का उत्‍पादन सड़ता है, उसमें कीड़े पड़ जाते हैं, किसी के खाने लायक नहीं रहता है. आप इस साल के आंकड़े बतायें, अभी 15 दिन पहले छपा था कि 10 हजार टन गेहूं किसी माननीय आदरणीय विधायक के वेयरहाऊस से गायब हो गया. किसान ने गेहूं दिया, सरकार ने MSP पर खरीदा, वेयरहाऊस में भेजा लेकिन गेहूं कहां गया ? 8-10-15 हजार टन गेहूं गायब हो जाये, वेयरहाऊस पहुंचा ही नहीं. अकेले सागर जिले में 80 हजार टन गेहूं गायब हो गया. आदरणीय कैलाश जी, प्रहलाद जी ये गेहूं कहां चला गया, आप बतायें ये गेहूं जाता कहां है ? किसान धूप में घंटों खड़े रहकर गेहूं तुलवाता है, किराये का ट्रैक्‍टर लाता है लेकिन सरकार गेहूं खरीद नहीं पाती है, गेहूं तुल नहीं पाता है. आप कहते हैं कि हम MSP पर खरीदेंगे, वाह रे बहादुर, बयान दे दिया. आप बतायें इस साल आपने कब और कितना गेहूं खरीदा ? खरीदी की दिनांक 3 बार बदल दी गई. किसान घर से गेहूं लेकर निकाला, मंडी गया, लाईन लगा, धूप में खड़ा है लेकिन आपने तारीख बदल दी. 8-15-22 तारीख से खरीदेंगे, ये क्‍या फूफा की दुकान है, जब मर्जी शटर खोला, जब मर्जी शटर गिरा दिया. बेचारा किसान किराये का ट्रैक्‍टर लेकर, अपनी फसल लेकर खड़ा रहता है लेकिन आप उसकी फसल नहीं खरीद पाते हैं. उसके दर्द को कोई नहीं समझता है. आज यहां जब किसानों पर चर्चा हो रही है तो सदन की सारी बेंचें खाली पड़ी हैं. सभी गायब हैं, कोई सुनने को तैयार नहीं है, उन्‍हें मालूम है सरकार सुनेगी नहीं, चर्चा करने से होगा क्‍या ? लेकिन इस विषय पर सरकार को गंभीरता से सोचना चाहिए. किसान हमारा अधिष्‍ठाता है, हमारा प्राण देने वाला है, हमारा परिवार चलाने वाला है, हमारे प्रदेश की रीढ़ की हड्डी है. उसके परिश्रम का गेहूं आप पहली बात तो खरीद नहीं रहे हैं और खरीद रहे हैं तो वह गेहूं स्‍टोर तक नहीं पहुंच रहा, उसे स्‍टोर करने के लिए हमारे पास साधन नहीं है. 10-20 साल से आपकी सरकार है, हम आज तक गोदाम बनाकर उस गेहूं को सुरक्षित रखने की व्‍यवस्‍था नहीं कर सके.

          अध्‍यक्ष महोदय, हमारे वरिष्‍ठ सदस्‍य जबलपुर के श्री अजय विश्‍नोई जी ने मामला उठाया था कि बोरा खरीदी में घपला हो गया. आज उसकी जांच हो रही है. बोरे नहीं हैं, अगर गेहूं ले लिया गया है तो उसे भरने के लिए बोरे नहीं हैं. बोरे के अंदर घोटाला, इस घोटाले ने किसान की जान को हलाकान कर दिया है. कितने घोटाले करोगे ? खाद और बीज में घोटाला, आज खाद और बीज पर चर्चा है, क्‍या किसान को बीज मिल रहा है और बीज मिल भी रहा है तो कौन सा बीज मिल रहा है ? कहीं छापे डलवायें तो नकली खाद, नकली बीज, नकली दुकानें तमाशा बना रखा है. क्‍या आप किसान की जान ले लेंगे ? उसे कम से कम सही बीज दे दो, प्रामाणिक बीज दे दो, समय पर बीज दे दो, गुणवत्‍तायुक्‍त बीज दे दीजिये, कुछ तो कीजिये. खाद में भी वही हाल है, एक-एक कट्टे के लिए किसान को परेशान होना पड़ रहा है. प्रहलाद जी आप तो किसान के बेटे हैं. आपने कोटा बांध दिया कि एक बोरा खाद मिलेगी. आपने किसान को ऑनलाईन खाद की बुकिंग करने को कहा है. क्‍या किसान ऑनलाईन बुकिंग करेगा ? लेकिन उसे कंप्‍यूटर-डाटा किसी चीज़ का पता नहीं है, वह मोबाईल पर कैसे बुकिंग करेगा ? आपने फरमान निकाल दिया कि ऑनलाइन देंगे और एक कट्टा देंगे. क्‍या तमाशा है, किसान के साथ क्‍यों खेल कर रहे हो, क्‍यों उसकी जान के साथ खेल रहे हो. नकली खाद और नकली बीज से बनने वाला अनाज भी नकली निकल रहा है और नकली अनाज खा खाकर अस्‍पतालों में भीड़ बढ़ रही है. चिकित्‍सा मंत्री जी सामने बैठे हैं. आंकड़े निकालिये कि अस्‍पतालों में भीड़ क्‍यों बढ़ रही है. यह फर्जी खाद कहां से आ रहा है. फर्जी खाद के कारण जो गेहूं उत्‍पन्‍न हो रहा है उसको खाकर आदमी बीमार क्‍यों पड़ रहा है? क्‍या कभी इस बात पर भी विचार किया है. यह पवित्र सदन है हम यहां चर्चा करते हैं, हम आज यहां इस विषय को लेकर हैं. अध्‍यक्ष महोदय ने हमें बात करने का मौका दिया है, लेकिन किसान के मामले में आप देखिये जो सोयाबीन है हमारा प्रदेश सोयाबीन के अंदर बहुत नाम रखता है. सोयाबीन हमारी प्रमुख फसल है. पूरे उत्‍पादन के अदंर 45 से 50 प्रतिशत का योगदान सोयाबीन का है. अभी बारिश भी नहीं हो रही है. आपकी यह सरकारी आपदा से तो किसान परेशान था ही, लेकिन अब प्रकृति की वजह से भी यह जो पानी 20 दिनों से नहीं गिर रहा है उसकी वजह से किसान की जान हलक में आ गई है. किसान सुबह से लेकर शाम तक ताकता रहता है. भगवान की तरफ देखता रहता है कि है प्रभु हमारे ऊपर कृपा करो और प्रभु कहते हैं कि जब तुमने ही मेरे ऊपर कृपा नहीं करी तो मैं क्‍या तुम पर कृपा करूंगा. प्रभु का हम पैसा खा जाएं, चंदा खा जाएं, सब खा जाएं, प्रभु के साथ अन्‍याय करें तो प्रभु हमारे साथ न्‍याय कहां से करेगा. आज पानी नहीं आने की वजह से किसान क्‍या करेगा. किसान को फिर से बोरिंग करना पड़ेगी. किसान की आय घटेगी. मंडियों में आवक कम होगी. तेल का जो उत्‍पादन है वह प्रभावित हो जाएगा. ग्रामीण बाजारों की क्षमता घटेगी. छोटे व्‍यापारी से लेकर सभी परेशान होंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय, कृषि का उत्‍पादन कम होगा. बाजारों की हालत खराब हो जाएगी. मार्केट डाउन और ऐसी परिस्थिति के अंदर सरकार को आगे आना पड़ेगा. जो आदरणीय मंत्री जी सामने बैठे हैं उनको बता दूं कि राष्‍ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार आपकी साल की औसत आय 13 हजार रुपए है. यह आपकी सरकार के आंकड़े हैं और उस पर भी यदि पानी की कमी है, नकली बीज, नकली खाद है तो क्‍या होगा. किसान का क्‍या होगा, इसकी कल्‍पना तो करें. एमएसपी की बात आती है. बात हम बड़ी-बड़ी करते हैं कि एमएसपी पर देंगे. आज तक हम एमएसपी के लिए सेंट्रल में कानून भी नहीं बना पाये. किसानों को एमएसपी पर लेने की कोई बाध्‍यता है. आज तक कोई ऐसी कल्‍पना करने के लिए तैयार नहीं है. बात करने को तैयार नहीं है. किसान आंदोलन करते हैं, सालभर आंदोलन चला, 700 किसान मर गये सिर्फ एमएसपी के लिए. एमएसपी को अधिकार दे दीजिये. एमएसपी पर ऐसा कानून बना दीजिए कि सरकार को किसी भी कीमत पर एमएसपी से ऊपर खरीदने के लिए बाध्‍य होना पड़ेगा.  मैं देखता हूं कि यहां सारे केन्‍द्रीय मंत्री हैं. हमारे पूर्व मुख्‍यमंत्री जी भी केन्‍द्रीय कृषि मंत्री हैं. आप भी कृषि मंत्री रहे हैं. किसानों से आपका सीधा जुड़ाव रहा है, लेकिन हम आज तक एमएसपी की गांरटी संविधान में कानून में नहीं दे पाये हैं. मलैया जी बैठे हैं वह वित्‍त मंत्री रहे हैं वह जानते हैं. एक महीने तक गेहूं खाते में आ गया, खरीद लिया गया, तुल गया, लेकिन किसान के खाते में पैसे ट्रांसफर नहीं होते. किसान इंतजार कर रहा है कि मेरे पैसे कब मिलेंगे. दो दो महीने, ढा़ई-ढा़ई महीने बाद पेमेंट तमाशा बन गया है.

      श्री कैलाश विजयवर्गीय— यह टेप पुरानी है.

श्री भंवर सिंह शेखावत  –  टेप तो पुरानी है, बार-बार यह टेप इसलिए सुनानी पड़ती है क्योंकि सरकार सुन नहीं रही है. बार-बार आपके सामने किसानों का वही रोना क्यों रोना पड़ता है.

          अध्यक्ष महोदय – भंवर सिंह जी भी पुराने आदमी हैं.  (हंसी)

          श्री बालकृष्ण पाटीदार – भंवर सिंह जी एक पुरानी फिल्म थी दो बीघा जमीन उसमें जो किसान था आप उसका वर्णन कर रहे हैं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत – आप तो बैठ जाओ. आप तो बड़े केवाईसी वाले हो. आपका पूरा कपास कहां चला गया. कपास के भाव कहां पर हैं.

          अध्यक्ष महोदय – भंवर सिंह जी, आप आपस में चर्चा न करें.

          श्री भंवर सिंह शेखावत – आप खड़े होते हो तो अध्यक्ष महोदय के सामने जरा बताओ कि आज किसान की हालत क्या है.

          अध्यक्ष महोदय – भंवर सिंह जी आसंदी इधर है.

          श्री भंवर सिंह शेखावत – अध्यक्ष महोदय, यह कहां से पुरानी कैसेट निकलकर आ जाती है.

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद पटेल) – भंवर सिंह जी इन्टरप्शन तो अच्छा था, आप भले गुस्सा हो जाएं. किसान आदमी बोल रहा है, किसान की बात सुनना चाहिए.

          श्री भंवर सिंह शेखावत – प्रहलाद जी मुझे आपकी बात तो मानना पड़ेगी. प्रहलाद जी की बात मुझे इसलिए भी मानना पड़ती है क्योंकि मैं आपका बड़ा सम्मान करता हूं और आप तो बड़े अनुभवी हैं. मैं इन्हीं दो-तीन बातों को कह रहा था कि आखिरकार हम अभी तक स्थिति को सुधार क्यों नहीं पा रहे हैं. बार-बार हमें उन्हीं बातों को रिपीट क्यों करना पड़ता है. यदि इन्हीं बातों को कैलाश जी आप ठीक कर देंगे तो यह कैसेट विधान सभा में दोबारा नहीं आएगी. यदि ठीक नहीं किया तो अगली बार फिर वही किसान, खाद, बीज, वही पानी और वही गेहूं का घोटाला सुनेंगे. जब तक किसान को उसका हक नहीं मिलेगा तो हम अपनी बात कहते रहेंगे और अध्यक्ष महोदय हमें अपनी बात रखने का समय देते रहेंगे. हम अपनी कैसेट आपको सुनाते रहेंगे, आप सुनते रहो.

          अध्यक्ष महोदय, बड़ी दिक्कत यह है कि खाद और बीज की चर्चा चल रही है तो खाद के मामले में आपको बता दूं. खाद आज की तारीख में किसानों को नहीं मिल रहा है. खाद का कोटा आपने बांधा है, ऑनलाइन बुकिंग का सिस्टम जो आपने लागू किया है, यह सिस्टम फॉल्टी है. डिफाल्टर है. इससे किसान बहुत दुखी है. किसान का काम एक बोरी खाद से नहीं चलेगा. किसान जब यूरिया लेने जाता है तो 2-3 बोतल नेनो लिक्विड यूरिया उसके साथ दिया जाता है. कहते हैं कि नेनो यूरिया लोगे तो एक बोरी देंगे. ऐसा क्यों. यह नेनो यूरिया किसकी दुकान है, कौन इसका मालिक है. यह आप किसान को क्यों टिकाना चाहते हो. खाद की बोरी के साथ इसे कम्पलसरी क्यों कर रहे हैं. किसी को नेनो यूरिया लेना तो वह ले ले नहीं लेना है तो न ले ऐसी व्यवस्था करें. यह तमाशा किसानों के साथ चल रहा है. किसान समझ रहा है. आपका समय भी आ रहा है, चिंता मत करो. अब यह दुकान ज्यादा दिन नहीं चलने वाली है. अगर दुकान चलाना चाहते हो तो कई फार्मूले आपके पास हैं. किसी का फार्म कैंसिल कर दो, किसी का वोटर लिस्ट में से नाम काट दो. किसी को चुनाव मत लड़ने दो और आप इस तरह से चुनाव जीत ही जाओगे. जब आपने चुनाव जीतने का फार्मूला अपने हाथ में ले लिया है और जनता की आंख में धूल ही झोंकना है तो आप करते रहो फिर हम यहां पर कितना भी चिल्ला लें उससे क्या होना है. लेकिन किसान जिस दिन सड़कों पर आ जाएगा, आज जिस तरह से नौजवान बेरोजगारी के कारण दिल्ली में सड़कों पर खड़ा है. कोई सुनने वाला है, परीक्षा के पेपर लीक हो रहे हैं. विद्यार्थी आत्महत्या कर रहे हैं, किसको चिंता है. एक मंत्री इस्तीफा नहीं दे सकता है. आन्दोलन में 700-800 किसान मर चुके हैं. अभी विद्यार्थी मर रहे हैं. यह सरकार असंवेदनशील हो गई है. पेपर लीक तमाशा हो गया है. बिजनेस हो गया है. किसानों के बच्चे पढ़ते हैं नीट की परीक्षा देने जाते हैं उनकी क्या हालत कर रखी है. आत्महत्या करने वालों का यदि हम यहां उल्लेख करें तो उसमें भी आपको तकलीफ होती है. यह विषय नहीं है कैलाश जी खड़े हो गए हैं कहेंगे कि आप छात्रों पर बोलने लग गए हैं. ठीक है, मैं छात्रों पर नहीं बोलता हूँ. (श्री कैलाश विजयवर्गीय जी के खड़े होने पर)

          अध्यक्ष महोदय – कैलाश जी बोलने के लिए नहीं कहीं जाने के लिए खड़े हुए हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय – अध्यक्ष महोदय, वैसे भी मैं पुराने गीतों का, पुराने संगीत का बड़ा शौकीन आदमी हूँ पर वह इतना भी पुराना न हो कि उससे नींद आने लगे. इसलिए मैं टहलकर वापस आना चाहता था.

          श्री भंवर सिंह शेखावत -- अध्‍यक्ष महोदय, हम लोग इसको थोड़ा गंभीरता से लें. किसान की अगर रीढ़ की हड्डी टूट जाएगी तो हमारी अर्थव्‍यवस्‍था खत्‍म हो जाएगी, गांव का स्‍ट्रक्‍चर बदल जाएगा. गांव हमारा आधार है. यह शहरों की दुकान गांव के आधार पर चलती है. अगर हमारा गांव आर्थिक रूप से कमजोर हुआ, उसकी आर्थिक स्थिति टूटी तो मान के चलिए कि शहरों का सारा धंधा भी चौपट हो जाएगा. हमको इन सब पर ध्‍यान देना पड़ेगा. आज जो विषय आपने दिया है मैंने दो-तीन पॉइंट बता दिए हैं कि सरकार तो असहयोग कर ही रही है और अभी प्रकृति का असहयोग भी उसको है इसके कारण खाद, बीज उसको जितना मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा है. पानी देर से आने की वजह से जो नुकसान होगा सरकार सचेत हो जाए किसानों को तकलीफ होने वाली है और इन सब जिन मुद्दों पर मैंने बात की है पुरानी कैसेट यह कैसेट दोबारा यहां पर चलाना ना पड़े, इस कैसेट को दोबारा चलाना ना पड़े कैलाश विजयवर्गीय साहब. तमाशा मत बनाओ. यह किसान है जो  हमारा माई बाप है. इसके साथ जो हमने खेल खेला और जब इसने खेल खेला तो वहां से यहां आ जाओगे. धन्‍यवाद.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, पुरानी कैसेट कई बार रुक जाती है ना तो ऐसे मुझे तुमसे प्‍यार है.......प्‍यार है..... प्‍यार है.....प्‍यार है..........ऐसे हो जाती है..(हंसी).. 

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री आशीष शर्मा जी. मेरा एक तो प्रतिपक्ष के मित्रों से अनुरोध है कि पक्ष की तरफ से चार लोग ही बोलने वाले हैं, प्रतिपक्ष की संख्‍या ज्‍यादा है तो थोड़ा उसको सीमा में बांधें तो अच्‍छा होगा. पहले वक्‍ता पक्ष, विपक्ष के और उसके बाद नेता प्रतिपक्ष और मंत्री जी चार लोग हैं, स्‍वाभाविक रूप से विषय इनको पूरा रखना है लेकिन फिर बाकी लोग अपना संक्षिप्‍त में विचार प्रकट करें. इसका सब लोग ध्‍यान रखेंगे ऐसी मेरी अपेक्षा है.

          श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा (खातेगांव) -- अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश में कृषि विकास का आधार है और लगातार वर्षों की मेहनत का परिणाम अब किसानों की समृद्धि के रूप में सामने आ रहा है. मध्‍यप्रदेश की लगातार भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किसानों की खेती के लिए जो आवश्‍यक इंतजामात किए उसके कारण उनके लिए न केवल खेती करना पहले से आसान हुआ बल्कि पिछले 20 से 25 वर्षों में जो मध्‍यप्रदेश का सकल उत्‍पादन हुआ करता था वह लगभग दुगुना हुआ है. खेती के लिए जमीन, सिंचाई के लिए पानी, बिजली, खाद, बीज और समय पर उस फसल का उत्‍पादन होने पर उसका उचित मूल्‍य, इतनी सारी व्‍यवस्‍थाएं जब समुचित रूप से चलती हैं तब किसी एक वर्ग के विकास को गति मिलती है. मैं ऐसा मानता हूं कि हमारी पूर्ववर्ती भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने वर्ष 2013-14 से किसान भाइयों को साहूकारों के चंगुल से मुक्‍त किया. कई सारे उदाहरण हमारे सामने इस मध्‍यप्रदेश में हैं जिस पर इस देश में कई फिल्‍में भी बनीं हैं. तब थोड़े से कर्जे के लिए किसान अपनी जमीन किसी साहूकार के पास गिरवी रखी और उसका बेटा चाहकर भी उस जमीन को छुड़ा नहीं पाया. यह सिर्फ फिल्‍मी घटनाएं नहीं थीं, कहानियां नहीं थीं बल्कि भारत के ग्रामीण परिदृश्‍य में इस तरह के नजारे हमको देखने के लिए मिलते थे लेकिन 18 परसेंट के पश्‍चात् शून्‍य प्रतिशत ब्‍याज पर जब किसानों को मध्‍यप्रदेश की लगभग 4,600 से अधिक प्राथमिक कृषि सहकारी साख समितियों के माध्‍यम से ऋण मिलना प्रारंभ हुआ तो उनकी निजी क्षेत्रों पर निर्भरता न सिर्फ कम हुई बल्कि उन्‍हें इस बात का भी विश्‍वास होने लगा कि सरकार किसानों को शून्‍य प्रतिशत ब्‍याज पर ऋण देना चाहती है मतलब कृषि हमारी सरकार की सर्वोच्‍च प्राथमिकताओं में शामिल है.

3.34 बजे             {सभापति महोदय (श्री अजय विश्‍नोई) पीठासीन हुए}

             सभापति महोदय, सिंचाई जो कि मध्‍यप्रदेश में बहुत कम सिंचाई की सुविधाएं उपलब्‍ध थीं इक्‍का-दुक्‍का बड़े-बड़े बांध बंधे थे लेकिन हमारी सरकार ने किसानों के खेत तक सिंचाई का पानी उपलब्‍ध कराने के लिए सिंचाई सुविधाओं का विकास किया. मेरे ख्‍याल से मध्‍यप्रदेश में ऐसा कोई विधान सभा क्षेत्र नहीं होगा जहां मिनी बैराज डेम से लेकर लघु या मध्‍यम सिंचाई परियोजनाएं वर्तमान में संचालित नहीं हो रहीं या निर्माण कार्य नहीं चल रहा. मेरे खुद के विधान सभा क्षेत्र में लगभग 229 गांवों  तक हम नर्मदा जी की 3 सिंचाई परियोजनाओं के माध्‍यम से पानी पहुंचा रहे हैं. जिस विधान सभा में वर्ष 2013 में केवल एक सिंचाई परियोजना थी आज 4 परियोजनाओं के माध्‍यम से लगभग 2 से 3 विधान सभाओं को हम सिंचित करने का काम कर रहे हैं. किसान को जब पानी मिलने लगा तो उसके सामने सबसे बड़ी समस्या थी बिजली की ,जो कि उसको पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलती थी, ट्रांसफार्मर के लिये उसको लाईन लगाना पड़ता था लेकिन एक दूरगामी दृष्टिकोण अपनाते हुये सरकार ने एक फीडर सेपरेशन (Feeder Separation) किया घर की लाईट को अलग किया, कृषि के पंपों की लाईट को अलग किया, और अब परिणाम स्वरूप सबसीडी सहित 10 घंटे बिजली किसान भाईयों को देने का काम कर रही है जिसके कारण उनके कुंए से, उनके ट्यूववेल से, उनके पास की नदी से नाले से वह पानी लेकर के अपने यहां पर रवि की फसल का उत्पादन अच्छे से कर पा रहे हैं.

             सभापति महोदय,  वर्तमान में ग्रीष्मकालीन तीसरी फसल भी मध्यप्रदेश के कई हिस्सो में ली जाने लगी है इस कारण से न सिर्फ मध्य प्रदेश का फसल का उत्पादन दुगुना हुआ है बल्कि हमारी कृषि विकास दर भी 8 प्रतिशत के आसपास है बल्कि इससे अधिक है जबकि पूरे देश की कृषि विकास की दर 4 या सवाचार प्रतिशत के आसपास है , जो यह बताता है कि मध्यप्रदेश बहुत तेजी से कृषि आधारित विकास दर हासिल करने वाला एक प्रदेश है. चूंकि किसानों की आधारित एक ग्रामीण अर्थ व्यवस्था होती है उसे अपने रोजमर्रा के लिये मंडी भी जाना पड़ता है बाजार की तरफ रुख भी करना होता है इसलिये हमारी सरकार ने कृषि में केवल फसल उत्पादन या अनाज उत्पादन को ही प्राथमिकता नहीं दी है, उद्यानिकी विभाग के माध्यम से आज अलग अलग पिक्चर मध्यप्रदेश में देखने को मिल रही है. हमारे यहां का  गुलाब का फूल हो, हमारे यहां के गैंदे के फूल हों, हमारे यहां का सिंघाड़ा हो, हमारे यहां का मखाना है, हमारे यहां का टमाटर हो, हमारे यहां के आलू हों, हमारे मालवा निमाड़ का प्याज हो, यह प्याज विभिन्न देशों की मंडियों तक पहुंच रहा है क्योंकि उद्यानिकी फसल के लिये सरकार ने किसानों को फसल के लिये न केवल प्रशिक्षित किया बल्कि उसमें उपयोग में आने वाली तकनीकें किसानों को सिखाई जो यंत्र उस उद्यानिकी की फसलों के लिये चाहे मल्चिंग (Mulching) और सीड-ड्रिल (Seed Drill) इस तरह की चीजें जब उपलब्ध कराई, जिसे वैज्ञानिकों ने व्यापक अनुसंधान के बाद में तैयार किया तो उससे किसानों का उद्यानिकी की और जो छोटे किसान हैं 2 से 3 एकड़ जिनके पास में जमीन हैं  उनको इसका लाभ हो रहा है. सभापति जी हमने एक प्रजेन्टेशन मध्यप्रदेश का देखा था, आज खरगौन और बड़वानी की तरफ के किसान नर्सरी में पौधों का उत्पादन कर रहे हैं और उनको बहुत अच्छी आमदनी हो रही है, जो यह बताता है कि मध्यप्रदेश में कृषि पर आधारित जितनी भी संभावना हैं उन्हें सरकार पूरा करने का काम कर रही है.

             माननीय सभापति महोदय, हमारी जो प्राथमिक सहकारी साख समितियां हैं यह न सिर्फ अब ऋण देने वाला संस्थान बचे हैं बल्कि अब यह किसानों को और भी अपनी जरूरत की वस्तुयें देने के लिये तैयार किये जा रहे हैं. अब हमारी जो प्राथमिक सहकारी साख समितियां हैं इनसे अन्य वस्तुयें भी किसान भाई क्रय कर सकते हैं. अब यह केवल खाद, बीज लेने का एक संस्थान नहीं बचे है, बल्कि कई सारी प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) में भी कई किसानों की लाभप्रद वस्तुयें, रोजमर्रा की उपयोग की सामग्री अब सरकार दे रही है, जिसके कारण किसानों का इन समितियों से बराबर का लेन देन बना हुआ है. आर्थिक संव्यवहार बना हुआ है.

             सभापति महोदय, आज मैं यह कह सकता हूं कि हमारे प्रदेश में वर्ष 2025-26 में किसानों को 23 हजार 955 करोड़ से अधिक का फसल ऋण इन समितियों के माध्यम से वितरित किया गया, किसान क्रेडिट कार्ड हमारे किसान भाईयों के बने हैं और लगभग 80 प्रतिशत किसान क्रेडिट कार्ड इन पैक्स (PACS) समितियों के माध्यम से बने  हैं, निजी बैंकों में भी किसान इस किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से वर्ष भर में जो ऋण लेने की व्यवस्था थी उसको माननीय मुख्यमंत्री जी ने संशोधित किया है, किसान के हित को ध्यान में रखते हुये. सभापति महोदय, कई बार हम जनप्रतिनिधियों से किसान भाई कहते थे कि हमारी 31 मार्च की तारीख निकल गई है, हमारी सितम्बर की तारीख निकल गई है क्योंकि उन्हें वर्ष भर में दो बार अपने ऋण की अदायगी करने के लिये उस पैक्स (PACS) में जाना पड़ता था, अब किसान भाईयो को वर्ष में एक बार ही 12 महिने में एक बार करने की छूट सरकार के द्वारा दी गई है और मैं ऐसा मानता हूं कि ऐसा करके सरकार की संवेदनशीलता है जिन्होंने किसानों की इस समस्या को ध्यान में रखते हुये इन नियमों में संशोधन किया.

             सभापति महोदय, साथ ही साथ मैं ऐसा मानता हूं कि जब कृषि से जुड़े हुये हमारे मध्यप्रदेश के लघु और सीमांत कृषक लगभग 85 लाख के आसपास किसान हैं, इन  किसान भाईयों को जहां पूरे भारत वर्ष में 6 हजार रूपये किसान सम्मान निधि मिलती है लेकिन मध्यप्रदेश की सरकार 12 हजार रूपये किसान सम्मान निधि इन किसान भाईयों को प्रदान करती है जिसके कारण इनके जीवन में एक आर्थिक आत्मनिर्भरता देखने को मिलती है.

          माननीय सभापति महोदय, चूंकि किसान हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और मध्यप्रदेश मे सहकारी आंदोलन पूरे देश में अपने आपमें उल्लेखनीय कार्य करने के लिये जाना जाता है और इसीलिये मैं यह कहना चाहता हूं कि जो वर्ष भर में किसानों के लिये सहकारी समितियों के माध्यम से सरकार जो मदद करती है उसके कारण उनके जीवन में एक आर्थिक आत्मनिर्भरता और सुरक्षा का भाव आया है.आज उसे फसल से संबंधित काम के लिये खेती के रोजमर्रा के काम के लिये साहूकारों पर या निजी क्षेत्रों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है. हमारी जो पैक्स(PACS)  हैं  वह पूरी तरह उनके डॉटा का डिजिटलाइजेशन किया गया है और डिजिटल गवर्नेंस पर काम हमारी प्राथमिक साख सहकारी समितियों में हो रहा है.  देखिए, आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए आज किसान भाई अपने खाद की बुकिंग भी ई टोकन के माध्यम से कर रहा है. आज अपनी फसल  के लिए स्लाट बुकिंग भी उसी एंड्राइड फोन के माध्यम से कर रहा है और आज अपने रबी और खरीफ फसल के ऋणों के लिए भी उसी फोन के माध्यम से आन-लाइन वह अपना आवेदन प्रस्तुत कर रहा है, उसे बार-बार बैंकों का चक्कर लगाने की  आवश्यकता नहीं है. चूंकि कृषि एक बहुत व्यापक विषय है. इस पर घंटों तक बोला जा सकता है लेकिन हम जो कृषि कर रहे हैं, हमें जिस तरह की खेती मध्यप्रदेश में करना चाहिए क्योंकि जो अनाज का उत्पादन  होता है वह लोगों के भोजन का हिस्सा बनता है, इसलिए जो अनाज हम उत्पादित कर रहे हैं  वह अनाज न सिर्फ जैविक होना चाहिए, बल्कि उसमें रासायनिक पदार्थों का , रासायनिक उर्वरकों का कम से कम प्रयोग होना चाहिए. पिछले एक महीने पहले बड़े समाचार पत्र में  एक समाचार छपा था कि मध्यप्रदेश में 11 जिले ऐसे हैं जहां पर पूरे भारत में सर्वाधिक रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किसान भाई कर रहे हैं. एक एकड़ में जितना खाद उपयोग किया जाना चाहिए उसका 3 से 4 गुना खाद किसान भाई खेतों में डाल रहे हैं. कई जगह उनको पता नहीं है कि इससे जमीन की उर्वरता कितनी प्रभावित हो रही है. हमारी सरकार ने मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं खोली हैं जिनके माध्यम से किसान भाई अपनी मिट्टी के पोषक तत्वों में कौन-कौन से तत्व हैं, नाइट्रोजन कितना है, फास्फोरस कितना है, इसका पता लगा सकते हैं, लेकिन जब यह सर्वे किया गया, तब यह पाया गया कि हमारे मालवा निमाड़ के सबसे ज्यादा देवास, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम्, राजगढ़, जबलपुर, ग्वालियर, धार इन जिलों में सर्वाधिक मिट्टी में कीटनाशकों का प्रयोग पाया गया और इन कीटनाशकों के प्रयोग के कारण मिट्टी पूरी तरह से दूषित हो चुकी है, जिसको स्वच्छ होने में बरसों लगेंगे क्योंकि मिट्टी को तुरन्त स्वच्छ करने की कोई प्रक्रिया नहीं है. बरसों के एक प्राकृतिक चक्र के बाद मिट्टी का निर्माण होता है, इसलिए मिट्टी की उर्वरकता बनाए रखना, उसको शुद्ध बनाए रखना हम सबकी और खास कर सरकार की जिम्मेदारी है. सरकार को अगर किसानों के हित को देखना है तो मानवीय दृष्टिकोण को भी देखना है. हम लोग जो भोजन कर रहे हैं, हम जो दालें खा रहे हैं, हम जो गेहूं खा रहे हैं हम जो अनाज खा रहे हैं . अगर उसमें उर्वरक और रसायन हमारे पेट में जाएगा तो हमारी  आने वाली संतति क्या जैनेटिक और डीएनए तो खराब होगा ही होगा बल्कि हमारे स्वास्थ्य पर भी विपरित असर पड़ेगा.

लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री (श्री राजेन्द्र शुक्ल) – माननीय श्री भंवर सिंह शेखावत जी, जो आप कह रहे थे कि बीमारी क्यों बढ़ रही है, अस्पतालों में भीड़ क्यों बढ़ रही है, श्री आशीष जी जो कह रहे हैं कि यह जो रासायनिक खादों का जो अंधाधुंध उपयोग हो रहा है, वह बीमारी का बहुत बड़ा कारण है, इसलिए  आप चूंकि बहुत अच्छे स्पीकर हैं  तो प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए भी यदि आप अपना समय निकालेंगे जिसमें जीवामृत, बीजामृत, जगपावनी, नीमास्त्र, ब्रह्मास्त्र, इस प्रकार के जो प्रोडक्ट बनते हैं, यह गोबर और गौमूत्र से बनते हैं इसका उपयोग होगा तो जो श्री आशीष जी कह रहे हैं बीमारी को रोकने में हम लोग काफी हद तक सफल होंगे.

सभापति महोदय – नियम 139 की चर्चा में सबसे सार्थक उद्बोधन आया है, बहुत संक्षेप में, मैं समझता हूं कि पूरा सदन इससे सहमत होगा.

श्री भंवर सिंह शेखावत – श्री आशीष जी जो कह रहे हैं वह बिल्कुल सही है, आपने भी जो फरमाया है कि फर्टिलाइजर्स और पेस्टिसाइट्स, यह अनाज में जाकर आदमी के शरीर में भी जाता है तो सरकार में 25 साल से श्रीमान् आप ही हैं आप कुछ करिए. हम यही तो रिक्वेस्ट कर रहे हैं.

श्री महेश परमार – सभापति महोदय, फसलों के दाम भी 4 गुना कर दीजिए, जैविक खेती करेंगे. श्री आशीष भैया बहुत अच्छा बोल रहे हैं लेकिन गेहूं के दाम भी 7000 रुपये करिए, सोयाबीन के दाम भी 14000 रुपये करिए. आपने शुरुआत में रासायनिक खाद का उत्पादन बढ़ा दिया, अब दाम भी नहीं दे रहे हैं और न ही खाद दे रहे हैं तो फसलों के दाम भी 4 गुना कर दीजिए.

सभापति महोदय – कृपया बीच में नहीं टोकें. श्री आशीष जी को अपनी बात पूरी करने दीजिए. श्री शेखावत जी को धन्यवाद है कि वह बहुत जल्दी सहमत हो गये.

श्री राजेन्द्र शुक्ल – सभापति महोदय, अभी रीवा में प्राकृतिक खेती का एक बहुत बड़ा सम्मेलन हुआ,  जिसमें माननीय गृह मंत्री जी, माननीय मुख्यमंत्री जी गये थे और  प्रधानमंत्री जी तो लगभग हर जगह जहां किसान सम्मेलन होता है, वहां पर प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए अपील कर रहे हैं आह्वान कर रहे हैं. उसके प्रोडक्ट किस प्रकार से बनाये जा सकते हैं इसके प्रशिक्षण केन्द्र चल रहे हैं इसमें रिसर्च हो रहा है तो इस चीज को हाउस में सारे लोग अपने अपने क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती आखिर करें तो कैसे करें, मास्टर ट्रेनर्स को बुलाएं, किसान मास्टर ट्रेनर बनें और धीरे धीरे करके अपनी पूरी खेती के रकबे का 10 परसेंट भी जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत, जगपावनी, इस प्रकार के प्रोडक्ट की जितनी हम चर्चा करेंगे लोग धीरे धीरे उसको अपनाएंगे और उसके कारण जो विदेशी मुद्रा खाद को आयात करने में खर्च हो रही है वह भी बचेगी, जमीन भी बचेगी, उससे जो प्रोडक्ट होंगे वह विष मुक्त भी होंगे और आपकी जो चिंता है वह भी दूर होगी.

          श्री आशीष गोविन्द शर्मा (खातेगांव) – सभापति महोदय, मैं ऐसा मानता हूँ कि जिस तरह इस रिपोर्ट में नर्मदापुरम् जिले की जमीन में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस का स्तर अत्यधिक पाया गया है, साथ ही साथ विदिशा और उज्जैन जिले में जिंक और आयरन की कमी मिट्टी के अंदर पायी गई है तो यह गंभीर संकेत है और जब मैंने कई लोगों से चर्चा की, जो जैविक खेती की ओर मुडे़ हैं, उन्हें एक से दो वर्ष तक, एक या दो फसल तक अपने खेत में जैविक खेती अपनाने में दिक्कत आती है. इससे थोड़ा-सा उत्पादन प्रभावित होता है लेकिन जैविक खेती बहुत सस्ती है और जब एक बार जैविक खेती का उत्पादन प्रचुरता से होने लगता है तो वह रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के खर्च की सीमा को भी कम करता है और कहीं न कहीं एक अच्छी फसल, एक स्वस्थ रखने वाली फसल हमको मिलती है. इसलिए मैं ऐसा मानता हूँ कि कोई भी सरकार किसी वर्ग के बीच में कभी अलोकप्रिय होना नहीं चाहती. लेकिन जनता के कल्याण के लिए कई बार कडे़ फैसले लेना पड़ते हैं और जब सवाल भविष्य का हो, सवाल हमारे स्वास्थ्य से जुड़ा हो, जिस पर अरबों-खरबों रूपए का बजट हर सरकार को हर साल खर्च करना पड़ता है और गंभीर मरीजों की हम जान नहीं बचा पाते. कैंसर जैसी बीमारी में कई लोग अपनों से असमय बिछड़ जाते हैं, तब सरकार को कठोर निर्णय लेना ही चाहिए और मैं ऐसा मानता हूँ कि रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग कम से कम हो, इसके लिए किसानों को सरकार ने प्रेरित भी करना चाहिए. जिस तरह नरवाई जलाने से सूक्ष्म जीवों का नुकसान होता है, प्रकृति में कई बेजान जीव जो कि फसलों की सुरक्षा के लिए प्रकृति ने हमको दिये हैं उस आग में जलकर नष्ट हो जाते हैं. मेड़ पर रहने वाला बटेर पक्षी का घोंसला उसमें जल जाता है, तो किसान भाइयों को भी सोचना चाहिए और सरकार को इस दिशा में प्रयास करना चाहिए.

सभापति महोदय, मैं ऐसा मानता हूँ कि रासायनिक उर्वरकों का कम से कम प्रयोग हो, इसके लिए हमारी डॉ.मोहन यादव जी की सरकार प्रतिबद्ध है और इसलिए जगह-जगह पर जैविक खेती को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार काम कर रही है. इसके बाद इतना सब करने के बाद भी जब प्राकृतिक आपदाएं आती हैं, और फसलें नष्ट हो जाती हैं, उस परिस्थिति में भी सरकार हमारे किसान भाइयों के साथ खड़ी है.

सभापति महोदय, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को पहले से अधिक कारगर और प्रभावी बनाया गया है और अभी माननीय मुख्यमंत्री जी ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत परसों ही पूरे प्रदेश में किसानों के खातों में खरीफ 2025 की राशि डाली है और मेरे जिले में लगभग 161 करोड़ रूपए की राशि किसान भाइयों के खातों में पहुंची है. यह राहत है, यह मदद है जो बताती है कि सरकार आपके नुकसान के प्रति बेहद संवेदनशील है.

          माननीय सभापति महोदय, कहने के लिए बहुत कुछ है लेकिन मैं ऐसा मानता हूँ कि सरकार लगातार कृषि संबंधी सुधार प्रदेश के अंदर लागू करने जा रही है. चाहे वह भूमि स्वामित्व कानून हो, जिसके अंतर्गत गांवों में रहने वाले किसान भाइयों को भी अपने मकान का स्वामित्व मिला है. आज उसका रिकार्ड भी राजस्व अभिलेखों में दर्ज है जो कभी चरनोई भूमि के रूप में, कभी आबादी के रूप में दर्ज होता था. आज उसके मकान का भी स्क्वेयर फीट में नक्शा और उसका वेल्यूएशन तहसील कार्यालय से उसको प्राप्त हो सकता है. ऐसे कई सारे नवाचार करके सरकार किसानों के जीवन को ऊंचा उठाने का प्रयास कर रही है.

सभापति महोदय, चाहे प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना हो, चाहे किसानों के लिए खाद की ई-टोकन की व्यवस्था हो, यह बहुत अच्छी व्यवस्था है. शुरूआती दौर में हर व्यवस्था को लागू करने में परेशानी आती है लेकिन किसान को जितना खाद प्रति एकड़ उसकी जमीन के लिए आवश्यक है, उतना सरकार दे रही है. उतना सोसायटी मुहैया करा रही है और निर्धारित राशि में उसको खाद की बोरी मिल रही है. इससे मैं मानता हूँ कि कालाबाजारी भी रूकेगी. सोसायटियों में जो अनावश्यक भीड़ जमा होती है, लाइन लगती है, ऐसे दृश्य उपस्थित होते हैं, जिससे हमको लगता है कि यह दृश्य मध्यप्रदेश की धरती पर नहीं होना चाहिए. उसके लिए बहुत अच्छी व्यवस्था सरकार ने लागू की है. मैं ऐसा मानता हूँ कि जब तक अच्छा नेतृत्व और किसानों के हित की सोचने वाला नेतृत्व प्रदेश में है, तब तक किसानों को चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. हमने मध्यप्रदेश में गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन इस बार किसान भाइयों से किया है जो अब तक का सबसे बड़ा उपार्जन है और मैं ऐसा मानता हूँ कि मेरे मध्यप्रदेश को इस बात का भी गौरव हासिल है कि हम सर्वाधिक किसानों की फसलों का उपार्जन कर रहे हैं. अगर वह काला तिल, राम तिल भी उत्पादित करता है, तो सरकार उसका उपार्जन करती है. यह बताता है कि सरकार छोटे-छोटे किसानों की भी चिंता करती है.

सभापति महोदय, मैं विपक्ष से भी यही आग्रह करना चाहता हूँ कि किसान वह वर्ग है जो सबके लिए अनाज पैदा करता है, जिसके कारण सबके यहां समृद्धि है और इसलिए उसकी मांग सबको उठाना ही चाहिए. सभी लोग उनका विषय उठाते भी हैं और सरकार उनके लिए अगर कोई अच्छा काम करती है, तो उसकी सराहना भी सामूहिक रूप से होना चाहिए.

सभापति महोदय, आज किसान को अपने खेत पर जनरेटर नहीं रखना पड़ता. उसको बिजली मिल रही है. आज ट्रांसफॉर्मर के लिए उसको भटकना नहीं पड़ता. आज उसको समय पर बीज अपनी सोसायटियों से उपलब्ध हो रहा है और जो नई तकनीक है उसके लिए भी केन्द्रीय कृषि मंत्री, मान्यवर श्री शिवराज सिंह चौहान जी के माध्यम से कृषि वैज्ञानिकों का दल मध्यप्रदेश के हर ब्लॉक में किसानों के खेतों तक पहुंचा और वहां पर उन्होंने कार्यशाला आयोजित करके खेती की जो आधुनिक तकनीक है, जिसमें नये-नये आविष्कार हमारे कृषि वानिकी विभाग के वैज्ञानिकों ने किया है कि एक ही पौधे पर आप दो-तीन तरह के फल उगा सकते हैं. किस तरह से आप कम समय की फसल में से अधिक उत्पादन ले सकते हैं, यह तकनीक हमारे वैज्ञानिक हमें प्रदान कर रहे हैं. इसलिए मेरी आशा है और मेरा विश्वास है कि मध्यप्रदेश कृषि आधारित एक जो राज्य है यह अपनी समृद्धि के उच्चतम मुकाम को छुएगा और इन किसानों की मेहनत के दम पर हम बहुत बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनेंगे और विकसित भारत में अपने हिस्से का योगदान देंगे, आपने बोलने का अवसर दिया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.

          सभापति महोदय – धन्यवाद आशीष जी. मैं अगले वक्ता को इस अनुरोध के साथ में बुला रहा हूँ कि प्रतिपक्ष के वक्ताओं की काफी लंबी लिस्ट है. कृपया, वक्ता अपनी बात सीमित समय में रखेंगे, तो सबको मौका मिल पाएगा. नेता प्रतिपक्ष जी से अनुरोध है कि वे संख्या कम कर लें, ताकि समय-सीमा में इस चर्चा को समाप्त कर पाएं.

 

श्री यादवेन्द्र सिंह (टीकमगढ़)—माननीय सभापति महोदय, बहुत ही महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो रही है. माननीय आशीष जी ने बता दिया है कि हम कैसे आगे बढ़ेंगे तथा कैसे हम आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं ? लेकिन आप हकीकत में जब आप गांवों के ऊपर जायेंगे तो आप देखेंगे कि फर्टीलाईजर देने की जो व्यवस्था है. आप 25 साल से सरकार में हैं 25 साल में आपने यह व्यवस्था नहीं की किस इलाके में कितने किसान हैं और कितने फर्टीलाईजर की आवश्यकता है. जब फर्टीलाईजर की व्यवस्था होती है तो आप उस समय अगल बगल झांकना शुरू कर देते हैं और यह पता करते हैं कि कहां पर कितने फर्टीलाईजर की आवश्यकता है. अभी आपने टोकन की व्यवस्था की है. माननीय जी कह रहे थे कि हमने ई टोकन देना शुरू कर दिया है. ई टोकन की व्यवस्था में क्या है माननीय सभापति महोदय आपको भी मालूम होगा. बाकी सब माननीय सदस्यगण बैठे हैं उनको भी मालूम होगा कि टीकमगढ़ का किसान है तो उसको जतारा का टोकन दे रहे हैं, कम से कम 40 किलोमीटर की दूरी का, निवाड़ी का टोकन दे रहे हैं, खरगापुर का टोकन दे रहे हैं. जब आपकी सरकार को यह नहीं मालूम कि कहां का टोकन देना है. वह एक बोरी के लिये आप एक एकड़ पर एक बोरी दे रहे हैं. जैसा कि माननीय भंवरसिंह जी कह रहे थे कि उसमें एन.के.पी.वाली खाद देंगे. अगर यूरिया मांगेगा तो आप यूरिया नहीं देंगे, डीएपी मांगेगा तो आप डीएपी नहीं देंगे. जो आपकी मंशा है वह खाद आप देते हैं जो कि किसान को नहीं चाहिये इसलिये किसान भटक रहा है तथा किसान बोवनी नहीं कर पाया है. दूसरा बात यह है कि बुंदेलखंड में अवर्षा की स्थिति है. एक बार किसानों ने अपनी फसल बो दी, वह मर गई. दूसरा बार बोने की कोशिश कर रहे हैं वह लोग वह कहीं से बीज जुगाड़ कर रहे हैं कहीं से कुछ कर रहे हैं तो सरकार कह रही है कि आप पहले खाद ले गये इसलिये आपको खाद नहीं मिलेगी इसलिये हम फर्टीलाईजर नहीं देंगे. इसी तरीके से किसान पर प्रतिबंध लगाएंगे तो वह कभी अपनी खेती नहीं कर पायेगा. आप वहां की स्थिति, वहां की भौगोलिक आधार है उसके ऊपर आप जायेंगे तभी हम किसान को समृद्ध बना सकते हैं. केवल बातों से कुछ नहीं होता है कि हम यह कर रहे हैं. आप बात कर रहे हैं कि अकेले गेहूं बोने से, अकेले सोयाबीन बोने से, दलहन बोने से फसलों में बीमारियां आ रही हैं. सब्जियों में इंजेक्शन लगाकर के सब्जियों को बड़ा कर रहे हैं, यह भी बीमारी का मेन कारण है, जो कि मुख्य रूप से है. आप उसकी तरफ ध्यान ही नहीं दे रहे हैं. आप कह रहे हैं यह सब सरकार की उपलब्धि है और सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है. लेकिन आप 25 साल में यह डिसाईड नहीं कर पाये आपकी सरकार है कि किस इलाके में कितने किसान हैं और वहां पर कितनी आवश्यकता है. आप बता दें कि सब माननीय सदस्यगण यहां पर बैठे हैं आप बता दीजिये कि किस जिले में पर्याप्त फर्टीलाईजर है. आप जब इस फसल में फर्टीलाईजर नहीं दे पा रहे हैं तो जब अगली रबी की फसल आयेगी उस समय इतना हा-हाकार मच जायेगा इतनी परेशानी आ जायेगी उस संबंध में आपकी कोई भी तैयारी नहीं है. हमारा निवेदन यह है कि इतने सालों से जब आप कृषि पर आधारित अपने मध्यप्रदेश को बताते हैं. सब जगहों पर आप कहते हैं कि किसान हमारे अन्नदाता हैं, हमारे मालिक हैं. अब आप मालिक के ऊपर ध्यान नहीं दे रहे हैं, मालिक कैसे खेती कर रहा है, इसके ऊपर आप ध्यान नहीं दे रहे हैं. आप दुनिया भर की बातें करके बरगलाना चाहते हैं कि हमने यह व्यवस्था कर दी. व्यवस्था करना सरकार का कर्तव्य है. आप आसान शर्तों के ऊपर किसान को ऋण दीजिये, आप किसान को आसान तरीके से फर्टीलाईजर उपलब्ध करवा दीजिये. किसान को कितनी खाद डालना है उसके ऊपर भी प्रतिबंध लगाएंगे. ऊपर से तकाजा यह करेंगे कि आप जैविक खेती करिये. माननीय राजेन्द्र शुक्ला जी का सुझाव बहुत अच्छा है, लेकिन राजेन्द्र शुक्ला जी यह बता दें कि अभी कितनी जैविक फर्टीलाईजर की व्यवस्था हो गई है, कितने किसानों को जैविक फर्टीलाईजर दे सकते हैं. जब आप उपलब्‍ध नहीं करवा सकते, कोशिश कीजिए मोटिवेट कीजिए कि किसान जैविक खेती की तरफ जाए, देसी फर्टिलाइजर्स की कन्‍जप्‍शन ज्‍यादा करें, लेकिन आप केवल यह भाषण देते हैं कि वह उस तरफ जाना चाहिए. आज जब आग लगी है तब आप कहेंगे कि पहले कुंआ खोद रहे हैं, फिर पानी देंगे, तब आग बुझाएंगे, तब तक किसान क्‍या करेगा. इसलिए आपसे निवेदन है कि आज हालत यह है कि आप भंडारण की बात करते हैं, 80 हजार मेट्रिक टन गेहूं, सागर जिले से गोल हो गया, कौन जिम्‍मेदार है, हमें नहीं पता. आप एक भी वेयरहाउस का पैसा नहीं दे पा रहे हैं जो स्‍टॉक कर रहे हैं, आपके वेयर हाउस है, उनका भी पैसा नहीं मिल रहा है सरकार की तरफ से किसानों का करोड़ों रुपए बकाया है, तो आप कैसे बाकी सब बातें कर रहे हैं कि हम आसान किस्‍तों पर ऋण दे रहे हैं, आसान किस्‍तों पर काम कर रहे हैं आखिर कहीं न कहीं से किसान की आमदनी से जुड़े हुए मसले हैं ये तत्‍काल इस पर ध्‍यान दीजिए और फर्टीलाइजर की व्‍यवस्‍था कीजिए और आगामी रबी फसल के लिए भी तैयारी कीजिए अगर आज से आप तैयारी नहीं कर पाएंगे तो उस समय आप गांवों में जा नहीं पाएंगे यह स्थिति बन जाएगी, आपने हमें बोलने का समय दिया इसके लिए धन्‍यवाद जय हिन्‍द.

          सभापति महोदय - मैं आदरणीय ओमकार सिंह जी को समय दूंगा लेकिन समय वही है, जैसे यादवेन्‍द्र सिंह जी ने बात कही कि हमारे भंवर सिंह जी ने विस्‍तार से बात रखी है, आप भी उसका अनुसरण करेंगे, तब हम नामों की लिस्‍ट पूरी कर पाएंगे.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम( डिण्‍डोरी ) - सभापति महोदय जी, बहुत महत्‍वपूर्ण विषय है और इसमें जितनी चर्चा की जाए, उतना आत्‍मचिंतन भी किया जाए और वास्‍तविक विषय को हम स्‍वीकार नहीं करेंगे, तो अनेक इसके दुष्‍परिणाम हमारे सामने है और वह समाज को निरंतर कमजोर करते हुए एक दिन बहुत बड़ा संकट पैदा करेगा. एक किसान के विषय में, मैं अपनी अभिव्‍यक्ति दूं, मैं कृषक हूं और अपनी कृषि का उदाहरण के रूप में आपको एक प्रमाण दे रहा हूं. जब मैं कुछ दिनों के लिए मंत्री था, तब भी मैं खेती करता था और उस समय एक ऐसा विषय आया कि खेती करते समय फोन आ गया और उसी बीच में मेढ पर पत्‍थर जमा रहा था जो आप जैविक खेती कर रहे हैं मैं आपको बता दूं, मैं प्राकृतिक खेती करता हूं, न जैविक न उसमें रासायनिक, उस समय ये जो मेरी बीच की उंगली आप  देख रहे हैं वह पत्‍थर के चपेट में आई और वहीं कृषि करते हुए यह उंगली कट गई, उस समय मैं मंत्री था, तो मुझे वास्‍तविकता पता है कि जो कृषि है उसकी क्‍या स्थिति है. मैं यह कह सकता हूं कि मैं किसान हूं मुझ पर राजनीति बहुत हो रही है और मेरा दर्द और बढ़ा रही है और मैं यह कहना चाहूंगा कि अगर खाद, बीज और उचित दाम की बात करना अब अपराध हो गया है, हमारी इस पवित्र भूमि में कौन अहंकारी सरकार बन गई है. अगर हम मांग करते हैं तो उसमें अपराध पंजीबद्ध हो जाता है और यह प्रमाणित है.

          सभापति जी, कृषि का दर्द अगर आपको समझना है तो मैं आपको बताना चाहता हूं कि सबसे पहले हम खुर्रा जुताई करते हैं, इसके बाद हम फसल की तैयारी करते है फिर हम फसल की तैयारी करते हैं फिर जब हम बीज के लिए जाते हैं तो मैं आज सरकार को बताना चाहता हूं कि आज 90 से 95 प्रतिशत किसान दुकान से बीज खरीदता है, उसको जो बीज रखने की ताकत थी जो सोने के भारत की परिकल्‍पना थी वह किधर जा रही है वह हमको समझना है किसी भी जिले में आप चले जाए. 95 प्रतिशत बीज हमको दुकान से खरीदना पड़ता है जिस किसान के द्वारा बीच का संधारण होता था, आज वह वहां खड़ा है. इसके आगे बीज के बाद हमारी जो स्थिति निर्मित कर दी गई है, 20 रुपए दिन भी किसानों को नहीं पड़ पाता. अगर आप समय देंगे तो केलकुलेशन के साथ आपको बता सकता हूं. एक छोटे और मध्‍यम किसान की हालत यह है कि 20 रुपए दिन क्‍योंकि चार से पांच सदस्‍य उनके प्रति दिन वहां कृषि कार्य में लगे रहते हैं और अगर आप इसका आंकलन करेंगे तो समय बहुत हो जायेगा.

          सभापति महोदय – श्री ओमकार सिंह मरकाम जी, हम यह गणित अलग से बैठकर समझ लेंगे, अभी तो आप समय सीमा में आप अपनी बात समाप्‍त करें.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम – सभापति महोदय, आज स्थिति यह है कि हमारे यहां बातें तो बहुत हो रही है, उत्‍तम खेती मध्‍यम व्‍यापार, अधम नौकरी, भीख निदान यह हमारे भारत का नारा होता था, पर आज क्‍या नारा हो गया है? उत्‍तम नौकरी, मध्‍यम व्‍यापार, अधम खेती, भीख निदान. ऐसी स्थिति में हमारा किसान संघर्ष कर रहा है और आज इस बात को कहने में आप हम जब बात करेंगे तो एक राजनीतिक बात आ जायेगी कि मेरी सरकार, हमने इतना दिया, हमने उतना दिया, हम इस तरह से बात करेंगे. सभापति महोदय, मैं तो यह देख रहा हूं कि आलोचना का भी जो दौर आ गया है और पता नहीं किस स्‍तर पर जाने लगा है. वास्‍तविकता से लोग कोसों दूर जा रहे हैं, खेती का विषय जो है, वह किसान का विषय है. आज मैं सरकार से अनुरोध के साथ पूछना चाहता हूं कि अगर एक नौजवान पढ़ा लिखा है, वह खेती करना चाहता है, उसके पास पांच एकड़ कृषि भूमि है, आप आज जरा अपनी स्‍कीम बतायें कि क्‍या उसकी जमीन सुधारने के लिये आपके पास कोई कार्य योजना है? क्‍या उस जमीन में फैंसिंग करने के लिये आपकी की कोई कार्ययोजना है? क्‍या उस जमीन में सिंचाई के साधन देने के लिये आपके पास कोई कार्य योजना है? सभापति महोदय जी कोई स्‍वरोजगार योजना में लोन लेने तक की प्रोसेस में नहीं है  कि अगर मैं पांच एकड़ में कृषि करना चाहूं, भूमि सुधार के साथ फैंसिंग करके उसमें अगर मैं अच्‍छे किस्‍म की फसल पैदा करना चाहूं तो वह लोन में भी कवर नहीं है, यह आज मैं आपको बताना चाहता हूं.

सभापति महोदय – विषय को जरा जल्‍दी से समाप्‍त कीजिये, मैंने आप सभी से अनुरोध किया है कि वक्‍ताओं की लंबी लिस्‍ट पूरी करना है, तो आपको ही थोड़ा सा ध्‍यान रखना पड़ेगा. आपके दल के अन्‍य जो वक्‍ता हैं, उनको भी समय देना है, तो आप अपना समय थोड़ा सा सीमित करिये.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम—सभापति महोदय, आपको अगर मेरी बातों में कोई राजनीति समझ में आये तो आप बोलें.

सभापति महोदय – हम यहां चर्चा करने बैठे हैं. कृपया जल्‍दी सीमित करें.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम— सभापति महोदय, हम अगर कह रहे हैं और किसानों के लिये हम बात कर रहे हैं, तो मुझे इस बात पर गर्व है कि किसान के लिये एक मदद एक योजना से हुआ था, मनरेगा, मेढ़ बंधान से प्रदेश के लाखों किसानों को भूमि सुधारने के लिये 25 हजार रूपये, 30-40-50-60 हजार रूपये रकबे के हिसाब से मिलता था, पर दुर्भाग्‍य इस बात का है कि हमारे जिम्‍मेदार जो प्रदेश ही नहीं देश के जिम्‍मेदार हैं, उनका जब बयान आया था कि कांग्रेस ने गड्ढा खुदवाकर लोगों को बर्बाद कर दिया, आपको क्‍या पता महोदय, अगर आप धान पैदा कर लेते, आपने धान पैदा नहीं किया है, इसलिए गड्ढे की इज्‍जत आपको पता नहीं है, उसी गड्ढे में धान पैदा होता है और मुझे गर्व है कि मनरेगा के तहत लाखों किसानों को मेढ़ बंधान की एक सहायता मिली थी, अब दूसरी बात किसान आज तकनीकी माध्‍यम से खेत तक जाता है, उसके खेत तक जाने के लिये सड़क नहीं हो पाती है और उस सड़क के अभाव में वह लड़ता है, मामले पंजीबद्ध होते हैं, आज पहले उस योजना में खेत सड़क चलता था, किसानों के खेत तक ट्रेक्‍टर पहुंच जाये इसके लिये मनरेगा से योजना चलती थी, वह भी आज कहीं पर दिखाई नहीं दे रही है. स्थिति यह हो गई है कि आज हमारा जो किसान है, आखिर किसके पास जाये, विपक्ष के पास जाये या सत्‍ता के पक्ष में जाये, इन हालातों में आज हमारा किसान आत्‍म चिंतन कर रहा है और वह देख रहा है कि जो सबको अनाज देने वाला है,उसको बड़ी दादागिरी से कहते हैं कि मैं छ: हजार दे रहा हूं, एक सरकार कहती है कि हम अन्‍नदाता को छ: हजार दे रहे हैं. अन्‍नदाता को आज यह कहने के लिये लोग तैयार हो गये हैं कि मैं आपको दे रहा हूं, मुझे इस बात पर दुख हो रहा है कि मैं किसान हूं, मेरे दर्द पर अगर आपने थोड़ा सा सहयोग करने की कोशिश की है, तो क्‍या यह आपके लिये यह बहुत बड़ा प्रचार का रास्‍ता हो गया है , आप मेरे दर्द को तो समझ लीजिये कि मैं किसान हूं. सभापति महोदय, आज मैं अपने जिले के किसानों की स्थिति पर बात करूंगा.

          सभापति महोदय – कृपया समाप्‍त करें, बहुत लंबी लिस्‍ट है.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम— सभापति महोदय, आप जब प्रभारी मंत्री थे, तो मैं आपका चेहरा देखकर समझ जाता था कि आपका चेहरा किधर है और आप क्‍या कहना चाहते हैं.

          सभापति महोदय – आपको धन्‍यवाद कि आपने अभी तक याद रखा है और आप समझते हो. आप मेरे भाव को, विचार को स‍मझिये और अपने अन्‍य वक्‍ताओं के लिये समझ छोड़ दीजिये.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम— सभापति महोदय, मैं अपने जिले की बात कर लूं.

          सभापति महोदय – चलिये आप एक मिनिट के अंदर अपनी बात खत्‍म करें.

            श्री ओमकार सिंह मरकाम --  डिंडोरी जिले में किसानों के रजिस्‍ट्रेशन धान बिक्री के लिये हुये. सिलाट बुकिंग की तारीख थी 13 और 9 तारीख से आपके सर्वर डाउन हो गये जानबूझकर कि किसानों का धान न खरीदना पड़े, इसलिये आपका सर्बर डाउन हो गया और इसलिये आपने किसानों का धान नहीं खरीदा नंबर एक. नंबर दो डिंडोरी जिले में सोयाबीन की फसल का नुकसान हो गया. मैंने बार-बार अनुरोध किया, सदन के अंदर भी अनुरोध किया पर सोयाबीन की फसल का आपने वास्‍तविक आंकलन नहीं कराया, किसानों को आपने लाभ नहीं दिया. नंबर तीन किसानों के खेत में पानी पहुंचने के लिये छोटे-छोटे बांधों की संरचना है, मैं गिड़गिड़ाया, ईएनसी के पास गया, प्रमुख सचिव के पास गया और एक हमारे मंत्री जी कहां चले गये, आपसे बड़ा कोई आश्‍वासन देने वाला मैंने नहीं देखा, अगर ऐसा ही आश्‍वासन देंगे तो विश्‍वास टूट जायेगा, कोई कभी किसी के ऊपर विश्‍वास नहीं करेगा. एक नहर का पानी खेत तक नहीं पहुंचा पाये माननीय सभापति महोदय जी, इस‍के साथ हालत यह है हमारे डिंडोरी जिले का जो किसान है, हमारे किसान को वहां पर जरूरत है डीएपी की, आपने वहां पर डीएपी का भंडारण ही नहीं किया, आप दे रहे हैं एनपीके का डीएपी 1350 में मिलता है. डिंडोरी का किसान डीएपी डालना चाहता है, आप दे रहे हैं 2400 का क्‍योंकि आपको जो एनपीके कंपनी है उसकी खाद बेचना है. अगर हम मांग कर रहे हैं तो आप हमको डीएपी क्‍यों नहीं दे रहे हैं. सभापति महोदय जी, मैं विनम्रता के साथ आपके बीच में यह बात रखना चाहता हूं, भारतीय जनता पार्टी के नेता कार्यक्रमों में कहते हैं और चुनो कांग्रेस के विधायक, यह रिकार्ड में है, क्‍या यही हमारे लोकतंत्र की परिभाषा है, हम अगर विपक्ष में हैं तो क्‍या हमारी जनता को आप परेशान करेंगे.

          माननीय सभापति महोदय जी, मैं आपके माध्‍यम से सरकार से अनुरोध करना चाहता हूं, इतनी भी संकीर्णता अच्‍छी नहीं है, अन्‍यथा आप डॉक्‍टर के पास जाओगे तो यही आपकी बीमारी का कारण बन जायेगा, इसलिये संकीर्णता से ऊपर आओ और सही दिशा में काम करने का प्रयास करो. मेरा अनुरोध है हमारे सभी सम्‍मानीय साथियों से और हम तो कहना चाहेंगे हमारे प्रभारी मंत्री जी बैठे हैं, प्रभारी मंत्री जी इस बात को जानते हैं, प्रभारी मंत्री जी कह रहे थे कि कांग्रेस का एक भी इतिहास बता देना, मैं प्रभारी मंत्री जी को बता रहा हूं यह सदन का जो भवन बना है यह भी कांग्रेस ने बनाया है, जरा इसका इतिहास भी देख लीजिये. माननीय सभापति महोदय जी, आपने बोलने का समय दिया इसके लिये इस बात के साथ धन्‍यवाद करूंगा कि सरकार के जो मंत्री जी हैं इसमें कुछ आत्‍मीय चिंतन कर लें, आप सोच लें, हमारे पास थे तब तो बहुत कूद रहे थे माननीय मंत्री जी, ऐसा कूद रहे थे नारा लगा रहे थे, हम जानते है. नारा लगाते थे, एक दल बना था जीएफडी उसका फार्मूला मुझे पता है. अब उधर जाने के बाद क्‍या हो गया, इतनी दुर्दशा होगी ऐसा मुझे पता नहीं था, आप थोड़ा पॉवर में आयें, इधर थे तो लड़ते थे उधर से भी कुछ कर जायें, ऐसा मेरा अनुरोध है, वैसे करोगे नहीं. सभापति महोदय, आपने बोलने का समय दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस (बुरहानपुर)--  माननीय सभापति महोदय, मैं सबसे पहले तो धन्‍यवाद देती हूं कि आपने इस महत्‍व के विषय को चर्चा के लिये अनुमति देकर हम सबको बात करने का अवसर दिया. भारतीय किसान बोवनी करते समय इस प्रकार से प्रार्थना करता है कि हे जश देने वाली धरती माता भरपूर अन्‍न उत्‍पन्‍न करना, बहन और बुआ के हिस्‍से का भी देना, न हो भूमि जिनके पास उसके लिये भी देना, चिडि़या और अन्‍य प्राणियों के लिये भी देना, राजा का खजाना भी भर देना, चोर, चकोर भी ले जा सके सबके हिस्‍से का देने के बाद तेरे भंडार में कुछ बचे

तो मेरे बच्चों के लिये भी देना. किसान इस भाव से हमारे यहां युगों से खेती करता रहा और युग प्रवर्तक वैज्ञानिक अलबर्ट आईंस्टीन ने तत्कालीन भारतीय वैज्ञानिक डाक्टर अमरनाथ झा के माध्यम से हमें और हमारे किसानों को एक संदेश भेजा था उन्होंने भारतीय किसानों से कहा था कि भारत के पास वह  तकनीक है वह शास्त्र है कि आप पीढ़ी दर पीढ़ी उसी जमीन को जोतते आ रहे हो उसी जमीन पर खेती कर रहे हो. हमारे पास आपका वैज्ञानिक तरीका खेती करने का नहीं है. हमने जिस प्रकार से खेती की हमने अपनी जमीन को 300-350 साल में बंजर कर दिया है.आज भी अमेरिका में रोड साईड ट्रेवल करेंगे तो एक-एक हजार एकड़ के खेतों पर बोर्ड लगे हुए हैं अबेंडेंड.किसान कुछ वर्ष खेती करता है  पर जिसको वैज्ञानिक खेती कहता है वह करने का प्रकार होता है कि 10-15 साल करने के बाद वह अपनी खेती को छोड़कर अन्य जगह पर खेती करना प्रारंभ करता है. अलबर्ट आईंस्टीन की दी हुई सलाह को हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आज के युग की दृष्टि से उसे रेखांकित कर रहे हैं और बार-बार हमें चेता रहे हैं कि हम प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें. हमारे विधायक साथी ठीक कह रहे थे कि हम किसान को किसी बात के लिये जोर जबर्दस्ती नहीं कर सकते. हम जनजागरण कर सकते हैं. हम विषय की और पक्ष की तरफ उनका ध्यान आकर्षित कर सकते हैं. मैं इस विषय में बहुत विस्तार से न जाते हुए केवल दो बात कहना चाहूंगी कि आजादी से पहले भारत में कम्पोज्ड इंस्पेक्टर्स होते थे. जिस फसल को हम अपने खेत में लेते थे माननीय सभापति महोदय, इस समय हमारी पोलिटिकल लीडरशिप और पालिसी मेकिंग ब्यूरोक्रेट्स से भी यह कहना चाहती हूं कि प्राकृतिक खेती पर बात करना बहुत आसान है और प्राकृतिक खेती को इम्प्लीमेंटेशन तक लाने के लिये हमें अपनी पालिसियों को उस दिशा में बढ़ाना पड़ेगा. हमें किसानों को जो फसल,जो न्यूट्रीशन,जमीन से मिट्टी से लेती है उस फसल का कम्पोज्ड ही पलट कर वह न्यूट्रीशियन मिट्टी को देता है तो कम्पोस्टिंग की तरफ योजना पूर्वक अग्रेसिवली हमें आगे बढ़ना होगा और यूरिया,डीएपी को लेकर हमने पता नहीं क्या कि हमने अपनी आत्मनिर्भरता खेती पर पूरी तरह खत्म कर दी. जिस यूरिया के लिये हम इतने परेशान हो रहे हैं.हवा में ही 72 परसेंट नाईट्रोजन है. हमारे बायोमास में जिसको हम ह्यूमस कहते हैं उसमें आटोमेटिकली  नाईट्रोजन एब्जार्व करने की क्षमता है अगर हमारी खेती की पद्धति उपयुक्त न हो तो सरकार क्राप न्यूट्रिशयन की तरफ भी जोर देती है और आज के समय निश्चित तौर पर सरकार ने इरीगेशन में,पानी की उपलब्धता में अभिवृद्धि की है उससे हर प्रकार की खेती का चाहे वह एग्रीकल्चर क्राप्स हों चाहे वह हार्टीकल्चर क्राप्स हो उसका रकबा बड़ी संख्या में बढ़ा है और मैं इस बात के लिये डाक्टर मोहन यादव जी की सरकार को बधाई देना चाहूंगी कि 16 प्रतिशत वर्षा कम हुई है और 16 प्रतिशत वर्षा कम होने के बाद भी 31 जिलों में सामान्य वर्षा हुई है. 19 जिलों में कम वर्षा हुई है. 2 जिलों में अल्प वर्षा हुई है जिसमें आपका रीवा भी शामिल है और16 प्रतिशत कम वर्षा के बावजूद किसान के हित में किसान को सपोर्ट करने के लिये सरकार की तैयारी कैसी रही होगी.कितनी तत्परता से हमारी व्यवस्था ने माननीय मुख्यमंत्री जी ने और हमारे सारे सिस्टम ने किस प्रकार से तैयारी की होगी कि आज वर्षा कम होने के बावजूद भी हमारी बोवनी लगभग-लगभग प्रत्येक फसल की पिछले साल से कहीं अधिक हुई और कहीं बराबर हुई. इसका मतलब है कि बीज भी उपलब्ध था. सरकार ने प्रामाणिक बीज उपलब्ध कराए हैं. फर्टिलाइजर भी उपलब्ध था. पानी भी उपलब्ध था. बिजली भी उपलब्ध थी. तभी देरी से वर्षा होने के बावजूद भी हमारे जो आंकड़े हैं, पिछले वर्ष की तुलना में 99.63 प्रतिशत हमने इस वर्ष बोवाई की है. धान की 79 प्रतिशत, ज्वार और मक्के की 104 प्रतिशत, बाजरे की 203 प्रतिशत, इसी प्रकार तुवर की 65 प्रतिशत, उड़द की 114 प्रतिशत. आपको जानकर खुशी होगी कि संपूर्ण दलहन की 233 प्रतिशत और तिलहन की 103 प्रतिशत फसल की बोवनी हुई है. हमने अगर इस प्रकार बोवनी की है तो हमारी सरकार और सरकार की सारी व्यवस्था बधाई की पात्र है कि वर्षा कम होने का भी असर हमारी बोवनी पर नहीं पड़ा है. अगर सरकार तैयार नहीं होती, हमारी व्यवस्थाएं अगर चाक-चौबंद नहीं होतीं तो यह परिस्थिति निश्चित तौर पर बन नहीं सकती थी.

          माननीय सभापति महोदय, मैं जिस जिले से आती हूँ, उस जिले में अभी आंधी-तूफान से किसानों का बहुत नुकसान हुआ. मैं आपके माध्यम से सदन में दो बातें रखना चाहूँगी. प्रथम तो मैं सरकार को धन्यवाद देती हूँ कि केले की फसल का मुआवजा सरकार ने आरबीसी 6(4) के अंतर्गत प्रति हेक्टेयर 2 लाख रुपये रखा है और कैप को बढ़ाकर 6 लाख रुपये प्रति किसान तक कर दिया है. माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर आंकलन हमारे जमीनी कर्मचारियों ने अच्छा किया और करीब-करीब सौ करोड़ रुपये का मुआवजा बुरहानपुर के केले के किसानों को मिलने जा रहा है.

          माननीय सभापति महोदय, इसमें एक और विषय है, जिसमें राजस्व के हमारे अधिकारियों को हमें आपके माध्यम से कन्वे करना पड़ेगा. कई बार किसान, जिनके पास जमीन नहीं हैं, वे किराए की जमीन लेकर खेती करते हैं. पर ये सारी बातें मुंह जबानी होती हैं. कागज पर एग्रीमेंट नहीं होता. अगर कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए और उसकी क्षतिपूर्ति की राशि जो मिलती है, तो जो जमीन का मालिक किसान है, उसके खाते में क्षतिपूर्ति की राशि आती है. जबकि किराए पर, अधिया, बंटाई पर, मुनाफे पर खेती करने वाला जो हमारा किसान साथी है, जिसकी अपनी खुद की जमीन नहीं है और दूसरे की जमीन पर खेती करता है, हमें व्यवस्था ऐसी बनानी होगी कि पंचनामा बनाकर या कोई स्थानीय व्यवस्था बनाकर हमें जो किसान जमीन पर खेती कर रहा है, उसके खाते में आरबीसी 6(4) के अंतर्गत मिलने वाली क्षतिपूर्ति की राशि जाए. इस दृष्टि से हमें अपनी पॉलिसी में या व्यवस्था में जो भी परिवर्तन करना है, उस दिशा में आगे बढ़ना होगा. ऐसा मैं आपके माध्यम से आग्रहपूर्वक सरकार से निवेदन करना चाहती हूँ कि कुछ व्यवस्था बनाने के लिए, सिस्टम बनाने के लिए सरकार आगे बढ़े.

          माननीय सभापति महोदय, समय का अभाव है. इस समय के अभाव को देखते हुए मैं एक बात फिर भी कहना चाहूँगी कि जब हम प्राकृतिक खेती की बात करते हैं तो हम स्वावलंबी खेती की बात करते हैं. अभी हमारे एक मित्र कह रहे थे और वह बात सही है कि ये अच्छी स्थिति नहीं है कि अब जो हम बीज लगा रहे हैं, हम उससे अन्न उत्पन्न कर रहे हैं पर हम बीज उत्पन्न नहीं कर रहे हैं. शासन की पॉलिसीज़ के माध्यम से हमें बीज की दृष्टि से भी किसान को स्वावलंबी बनाने की ओर बढ़ना पड़ेगा. आज जिस खाद को लेकर हम बात कर रहे हैं, उसमें हम भारत से नहीं, विदेशों से, रूस से, चीन से और पेट्रोलियम प्रोड्यूसिंग कन्ट्रीज़ से हम अपना खाद लेते हैं. हमारा जो सारा यूरिया का विषय है, वह सेकण्ड वर्ल्ड वॉर के बाद से खड़ा हुआ है. जब सेकण्ड वर्ल्ड वॉर खत्म हुआ और झगड़े के लिए हमने जो नाइट्रोजन इकट्ठा किया हुआ था, उसको खपाने के लिए भारत के किसानों को यूरिया डालने की आदत हमने जबरन में डाली. अब हमें फिर से बेक टू बेसिक्स आना पड़ेगा. जो चीजें साइंटिफिकली हेल्थ की दृष्टि से हमारे स्वास्थ्य मंत्री जी कह रहे थे, एप्रोप्रिएट हैं, उस तरफ आगे बढ़ना पड़ेगा. पैसा महत्‍वपूर्ण है पर हमें पैसा किस कीमत पर चाहिए. हमें क्‍या खोकर पैसा लेना है ? आज हम किस प्रकार के पेस्टिसाइड यूज कर रहे हैं. हमारे बच्‍चों की फर्टिलिटी तक खत्‍म हो रही है, मानसिक रोगों से हम पीडि़त हो रहे हैं, हम एक प्रकार से विक्षिप्‍त जनरेशन को उत्‍पन्‍न कर रहे हैं और यहां तक की हम जो पॉइजन यूज कर रहे हैं, पहले हम कांट्रेक्‍ट पॉइजन डालते थे. इसका मतलब इल्‍ली पॉइजन को खाकर मरती है, अब हम सिस्‍टेमिक पॉइजन डाल रहे हैं, वह कैसे रुकेगा. इस पर कुछ दिमाग लगाइये, कानून है, उसका इम्पिलिमेंटेशन करवाइये. हेल्‍थ डिपार्टमेंट के साथ आपको कुछ को-ऑर्डिनेशन करके इसको करना पड़ेगा. अब सिस्‍टेमिक पॉइजन डालने से 500 मि.ली. की शीशी दो हजार रुपये में आती है और इसे किसान यूज करता है. सिस्‍टेमिक पॉइजन अर्थात् यह हुआ है कि पूरे प्‍लांट बॉडी में अब पॉइजन आ गया है. इसका मतलब यह है कि कीड़े को पॉइजन नहीं खाना है, वह पौधे की पत्‍ती खाकर पौधे को काटकर एक बाईट भी ले लेता है, तो वह इल्‍ली मरती है. हम जिस  सब्‍जी को पहले समझते थे कि भिंडी में इल्‍ली है, हम इसे छोड़ दें. अब मेरे घर से सब्‍जी लेने जो मार्केट जाता है, मैं उसको कहकर भेजती हूँ कि भिंडी वह लेकर आना, जिसमें इल्‍ली हों, जिसको खाकर इल्‍ली नहीं मर रही हैं, उस भिंडी को खाकर मेरे बच्‍चे भी स्‍वस्‍थ रहें. हमें अपने कॉन्‍सेप्‍ट को ठीक करना पड़ेगा. हम मार्केट ड्रिवेन खेती कर रहे हैं. हम किस दिशा में जा रहे हैं, हम सांइटिफिक खेती नहीं कर रहे हैं, हम बाजार से प्रेरित होकर अपनी पॉलिसीस भी एप्रोप्रियेट बनायें और कानून को पेस्टिसाईड की दृष्टि से सही तरह से लागू करने की तरफ हम सब मिलकर आगे बढ़ें.

सभापति महोदय – अर्चना जी,आप सीमित करें.

श्रीमती अर्चना चिटनिस – सभापति जी,मैं अपनी बात को कनक्‍लूड करते हुए केवल आधा मिनट का समय लूँगी. मैं आज इस सदन में सर अल्‍बर्ट हॉवर्ड का एन एग्रीकल्‍चर टेस्‍टामेंट को याद करूँगी, जिन्‍होंने भारत से सीखकर इन्‍दौर का नाम पूरी दुनिया में कर प्राकृतिक एवं जैविक खेती की तरफ बढ़ाने की दिशा में, दुनिया के अन्‍धकार को दूर करने वाले देश हम हो सकते हैं और अन्‍त में, मैं यही कहूँगी कि पानी बिजली की उपलब्‍धता के साथ सही समझ परम्‍परागत ज्ञान और आज का आधुनिक विज्ञान सबका समायोजन करके मध्‍यप्रदेश में अपार संभावनाएं हैं और उन संभावनाओं को उस पोटेन्शियल का एप्रोप्रियेट दोहन करें. लेकिन हम कृषि प्रधान देश कभी नहीं थे,हम औद्योगिक देश भी थे, हम अच्‍छा कपड़ा बनाने वाले देश भी थे और हमें कृषि प्रधान देश बनाया अंग्रेजों ने जिन्‍होंने हमारे उद्योग पूरे समाप्‍त कर दिये. मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री का कृषि के साथ-साथ उद्योग पर भी अटेंशन है, जब तक उद्योग,सर्विस इं‍डस्‍ट्रीज सब कुछ एक साथ आगे नहीं बढ़ेगा,तब तक हमें अपनी समस्‍याओं का समाधान नहीं मिलेगा. आपने मुझे समय दिया,उसके लिये धन्‍यवाद.

सभापति महोदय – धन्‍यवाद, अर्चना जी. श्री मधु भगत जी. मेरा निवेदन यही है कि आप 2-4 मिनट में अपनी बात समाप्‍त करें.     

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह – माननीय सभापति महोदय,मैं अर्चना जी का भाषण बड़ी गौर से सुन रहा था. उन्‍होंने तमाम विदेशी साइंटिस्‍ट का उदाहरण दिया है और डॉ. एम.एस.स्‍वामीनाथन के ग्रीन रेवोल्‍यूशन को आप भूल गईं.

श्रीमती अर्चना चिटनिस – माननीय सभापति महोदय, मैं ग्रीन रेवोल्‍यूशन को याद करके जरूर कहूँगी कि ग्रीन रेवोल्‍यूशन पर आप सदन में 139 पर एक बार चर्चा कराइये.

सभापति महोदय – कराएंगे. अभी यह दूसरा विषय है.

श्रीमती अर्चना चिटनिस – सभापति महोदय,आप जरूर करवाइये,ताकि मैं आपकी बात का जवाब विस्‍तार से दे सकूँ कि ग्रीन रेवोल्‍यूशन में हमने क्‍या खोया और क्‍या पाया?

सभापति महोदय – डॉ. स्‍वामीनाथन जी के साथ सत्‍संग का अवसर मुझको भी मिला है. चर्चा में जब भाग लेंगे, तब बात करेंगे. अभी मधु भगत जी अपनी बात रखेंगे,आप 2-4 मिनट में अपनी बात समाप्‍त करें.

श्री मधु भगत (परसवाड़ा) – माननीय सभापति महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद. आपने 139 में खाद पर चर्चा में, मैं अपने बालाघाट जिले की ओर ही सीधे ध्‍यानआकर्षित कराना चाहता हूँ. क्‍योंकि आंकड़ों की सारी जानकारियां एक-दूसरे को आदान-प्रदान हो चुकी हैं. मैं सिर्फ किसान के उस दर्द को महसूस कराना चाहता हूँ,क्‍योंकि मैं एक ऐसी विधान सभा से आता हूँ,जिसमें 99 प्रतिशत वहां पर किसान ही रहते हैं.जिसमें सभी जाति-वर्ग के लोग हैं,आदिवासी बाहुल्‍य क्षेत्र हैं और पठार एरिया होने के कारण वहां पानी की घोर समस्‍या होती है,जिसकी वजह सेहमें नहरों के ऊपर जो आज हम किसी तरह से बहुत पिछड़े हुए हैं,जिसमें किसानों को समय पर पानी नहीं मिलता है. लेकिन सबसे बड़ी समस्‍या यहां पर कुछ और है. हमारा किसान सरकारी वादों के घेरे में आकर आज ठगा हुआ महसूस कर रहा है. हम जैसे किसान को अपना परिवार मानते हैं, मैं समझता हूं कि हम आय दोगुनी करने की बात करते हैं तो उनको हम झूठा दिलासा क्‍यों देते हैं ? कौन सा दावा है, जिससे उनकी आय दोगुनी हो चुकी है, ये साक्ष्‍य भी सरकार द्वारा यहां प्रस्‍तुत किये जाते तो हमें अच्‍छा लगता. लेकिन यहां सिर्फ कागज में सिमटकर आय दोगुनी के आंकड़े प्रस्‍तुत होते हैं.

          सभापति महोदय, किसान वर्तमान में सरकार की नीतियों से परेशान और दुखी है. प्रदेश का किसान धूप, बारिश, ठंड में मेहनत करके धरती का सीना चीरकर फसल उगाता है परंतु किसान को उचित दाम नहीं मिल पाता है. सरकार ने वादा किया था कि धान का समर्थन मूल्‍य रुपये 3100 होगा. निश्चित ही किसान को वे वादे झूठे समझ आ रहे हैं और किसान अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहा है. इस मंहगाई में जब हम स्‍वयं महसूस करते हैं कि हम कैसे अपना महीना चलायें, गुजारा करें, वहां किसान को पूरा साल फसल पर निर्भर होना पड़ता है. यह किसान की बहुत बड़ी परेशानी है. रुपये 3100 के साथ-साथ, आय दोगुनी के साथ-साथ, मैं यह कहना चाहता हूं कि जिन तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री जी ने यह घोषणा की थी, मैं उनके लिए थोड़ा बोलना चाहूंगा क्‍योंकि वे स्‍वयं को किसान पुत्र कहते हैं. चूंकि मैं भी बहुत छोटा किसान हूं. मैं भी ढ़ाई एकड़ का किसान हूं, बालाघाट जिले का किसान हूं और मेरी आय केवल किसानी से और विधान सभा से जो आय होती है, वह दर्शायी जाती है, यह एकदम स्‍पष्‍ट है. मैं कहना चाहता हूं कि उनकी आय कितनी हो गई है ? अगर किसान की आय दुगुनी नहीं हुई, तो उनकी आय दुगुनी, तीगुनी, चौगुनी कैसे हो गई ? इस बात के ऊपर भी माननीय शिवराज सिंह चौहान, तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री जी के ऊपर संज्ञान लेना चाहिए ताकि ये महसूस हो, हम यहां बैठकर सिर्फ किसानों की बात करते हैं लेकिन किसान के हक में जो उसे MSP मिलनी चाहिए, उसके ऊपर हम पूरी बात नहीं करते हैं.

          सभापति महोदय, मैं, कहना चाहता हूं कि 2 वर्ष पूर्व खाद की बोरी जो कि रुपये 1300 की थी, जो कि रुपये 1300 से बढ़कर केवल 2 वर्षों में ही अब खाद का रेट, रुपये 2400 हो गया है. इन 2 वर्षों में ऐसी कौन सी मंहगाई आई है, किस प्रकार की हमारी विदेश नीति है, किस प्रकार हम आयात करते हैं. किस प्रकार हम रासायनिक उर्वरकों का आयात करते हैं, कहीं न कहीं ये हमारी विदेशी नीति की कमजोरी है ,जिसके कारण आज मिडिल ईस्‍ट में युद्ध हो रहा है तो उसका भुगतान हमें करना पड़ रहा है, इसके कारण आज किसान को इसे भुगतना पड़ रहा है. आज किसान को खाद महंगी मिल रही है तो सरकार उसे सब्सिडी क्‍यों नहीं दे रही है ? ये प्रश्‍न खड़ा होता है और सरकार को यह सोचना आवश्‍यक है, अगर मंहगाई युद्ध के कारण है तो उसमें किसान की गलती नहीं होती है. किसान हमारा अन्‍नदाता है, हमारा भगवान है और बार-बार इस सदन से किसान को हम ये दे रहे हैं, वो दे रहे हैं, ये बोलना आप बंद कर दें. किसान हमारा पेट भर रहा है, हम सांस उनकी वजह से ले रहे हैं, इस बात पर हमें अपना ध्‍यान केंद्रित करना होगा क्‍योंकि अगर किसान नहीं तो कोई इंसान नहीं. अगर अन्‍न नहीं तो हमारा शरीर नहीं.

          सभापति महोदय-  कृपया समाप्‍त करें.

          श्री मधु भगतमैं थोड़ा सा और बोलना चाहता हूं.

          सभापति महोदय-  समय की सीमा है.

          श्री मधु भगतसभापति महोदय, मैं समय सीमा में ही बोलूंगा. अभी मेरे से पूर्व सत्‍तापक्ष जब बोल रहा था तो शायद केवल एक बार ही आपने उन्‍हें कहा कि समय हो गया है.

          सभापति महोदय-  उनके केवल 4 वक्‍ता है लेकिन आपके वक्‍ताओं की सूची में 17 नाम हैं. आप ही बता दीजिये कि समय कैसे बांटें ?

          श्री मधु भगतसभापति महोदय, धन्‍यवाद. मैं, अपना समय कम कर लेता हूं. लेकिन अब मैं आपको दूसरी व्‍यथित कथा बताना चाहूंगा. बालाघाट वाकई मे सोने की चिडि़या है, वहां धान होता है और वहां के ग्राम 10-10 किलोमीटर की दूरी पर हैं. बालाघाट इतना धनाढ्य नहीं है. वहां तो बड़े लोगों ने खनिज में, मायनिंग में अपने आपको बड़ा साबित कर लिया है और सबसे बड़ा राजस्‍व इस देश को बालाघाट ही देता है लेकिन किसान को क्‍या मिलता है. आज उसको डीजल और पेट्रोल लेने के लिए 25 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है और जब वह वहां जाता है तो उसको बोला जाता है कि हम आपको डब्‍बे में पेट्रोल नहीं देंगे तो यह जो पेट्रोल और डीजल की जो तंगी है यह किस की कमी है. यह सरकार की कमी है. इस बात को भी हमको ध्‍यान में रखना चाहिए. मैं कहना तो बहुत कुछ चाह रहा था, लेकिन आपकी मुस्‍कुराहट ने मुझे रोक लिया.

          सभापति महोदय—ध्‍यान रखिये आपके साथ आप ही के पक्ष के और भी वक्‍ता हैं. उनका भी ख्‍याल रखें. 

          श्री मधु भगत—सभापति महोदय, हम वस्‍त्र जरूर सफेद पहन लेते हैं लेकिन जो किसान हैं उनके वस्‍त्र महीनों से धुले हुए नहीं होते हैं. वह बेचारा खेतों में रहता है, तड़पता है, परेशान होता है और वह यह उम्‍मीद करता है कि हमारा जनप्रतिनिधी सदन में जाकर हमारी बात करेगा, लेकिन क्‍या करें बड़ी व्‍यवस्‍था है.

          सभापति महोदय, मैं 22, 25 साल से राज कर रहे राजनेताओं से, मंत्रियों से कहना चाहूंगा कि आप लोग आंकड़े जरूर बताते हैं और आंकड़ों के ऊपर ही सब जादूगरी होती है, लेकिन कभी किसी गांव में बरसात में एक बार एक कृषि मंत्री एक महीना रहकर देख लें और उसकी फसल की जो तैयारी है, जो बुवाई है, जो रुपाई है, उसके बाद खाद की कमी है, बिजली का संकट है, फिर रात हो रही है तो उसको बिजली नहीं मिल रही है क्‍योंकि आपकी बिजली की लाइन बार-बार कट जा रही है, कई प्रकार की समस्‍याएं हैं जिनसे कहीं न कहीं बहुत ज्‍यादा परेशानी हो रही है. अपने छोटे से वक्‍तव्‍य में आपने मुझे किसानों के विषय को लेकर बोलने का अवसर दिया इसके लिए मैं आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूं.

          सभापति महोदय—सचिन जी सदन को पता है कि आप कृषि मंत्री रह चुके हैं. बहुत बोल सकते हैं. लेकिन यहां आप अपनी बात को सीमित समय में रखेंगे धन्‍यवाद.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह—सभापति महोदय, मेडम अर्चना जी तो चली गईं परंतु मैं सदन की जानकारी के लिए बता दूं कि वह डॉ. एम एस स्‍वामीनाथन जी का योगदान भारत की कृषि के लिए कम आंक रही थीं. उन्‍हें पदमश्री मिला, पद्म भूषण मिला और पद्म विभूषण मिला और मोदी जी की सरकार ने वर्ष 2024 में भारत रत्‍न भी दिया है.

          सभापति महोदय—मैंने आपसे कहा कि मुझे उनका सत्‍संग प्राप्‍त हुआ है मैं उनके बारे में काफी जानता हूं. उन्‍होंने जो दिया है वह अपने आपमें असीमित है.

          श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव (कसरावद)—सभापति महोदय, मैं कोई भी ऐसी बात जो पहले इस सदन में आ चुकी है दोहराना नहीं चाहूंगा, लेकिन कुछ सुझाव अपनी तरफ से सरकार को देना चाहता हूं. आज हम एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण विषय पर चर्चा करने के लिए यहां पर बैठे हुए हैं.  मुझे लगता है कि जिस प्रकार से सरकार का जो रवैया है यह विषय लगातार आता रहेगा आज हम खरीफ की फसल के ऊपर चर्चा कर रहे हैं और मैं दावे के साथ कह रहा हूं कि जब हम रबी की फसल के ऊपर आएंगे तो हम पुन: इन्‍हीं विषयों के ऊपर अभी सामने से यह बात आ रही थी जब आदरणीय शेखावत जी अपनी बात रख रहे थे कि वही पुरानी घिसी पिटी बात कर रहे हो, पुरानी केसेट चला रहे हो. चलानी पड़ रही है क्‍यों चलानी पड़ रही है कि पिछले 22 साल से भारतीय जनता पार्टी की सरकार आज इस मध्‍यप्रदेश में है और इन  22 सालों में जो प्रमुख समस्‍याएं हैं खाद की उपलब्‍धता समय पर होना, बीज की समस्‍या होना या बिजली मिलना समय पर एमएसपी से खरीदा होना उपज का सही मूल्‍य मिलना यह प्रमुख समस्‍याओं का सामना हमारे किसान साथी को करना पड़ता है. और इस दिशा में मैं समझता हूं कि बहुत गंभीरता से कोई ठोस कदम सरकार की तरफ से उठाएंगे. जब हम खाद की बात करते हैं तो खाद का जो विषय है उसमे दो समस्‍याएं हैं एक खाद की उपलब्‍धता और एक खाद का वितरण और हमें यह देखने को मिला है कि या तो उपलब्‍धता समय पर हो जाती है अगर उपलब्‍धता हो जाती है तो वितरण नहीं होता है. यह जो विसंगति है, यह जो उपलब्‍धता और वितरण के बीच के बीच में जो एक सामंजस्‍य होना चाहिए उसके कारण हमारे किसानों को समस्या का सामना करना पड़ता है. मैं कृषि मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं कि आने वाले समय में हमारी चेक लिस्ट में कुछ विषय ऐसे हैं जिनको हम काटते जाएं. खाद के वितरण की समस्या का एक पूर्ण समाधान निकाला जा सकता है. मध्यप्रदेश में सहकारिता का जाल बिछा हुआ है इसमें लगभग साढ़े चार हजार सोसायटी हैं. इन सोसाइटियों का हम सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं. इस पर हम ध्यान दें इसमें जो कमियां सामने आ रही हैं उनको ठीक किया जाए. 17-18 जिला बैंक डिपाल्ट हो चुके हैं. बड़े पैमाने पर सोसाइटियां डिपाल्ट हो चुकी हैं. इनको कैसे रुटीन में लाएं अगर यह एक बार रुटीन में आ जाएंगी तो हमारे खाद के वितरण की समस्या से हम बड़े पैमाने पर निजात पा सकते हैं.

सभापति महोदय, मुख्यमंत्री जी आज सदन में नहीं हैं मैं आपके माध्यम से उनसे निवेदन करना चाहता हूँ कि कृषि पर एक सर्वदलीय दल का गठन करने का काम किया जाए. उस दल में प्रदेश के कृषि मंत्री हों, माननीय गोपाल भार्गव जी यहां पर बैठे हुए हैं जिन्होंने सहकारिता विभाग को बड़े अच्छे से चलाने का काम किया था. हमारे बीच में बालकृष्ण पाटीदार जी हैं जो अभी सदन में बैठे हुए थे. ऐसे कृषि से जुड़े हुए लोग हैं जिनके पास कृषि की समस्या के निदान के लिए बहुत सारे अच्छे सुझाव होंगे. मेरा अनुरोध है कि इन लोगों के साथ एक सर्वदलीय दल का गठन किया जाए. उस दल के माध्यम से जो कमियां हैं उनको दूर करने का काम किया जाए.

सभापति महोदय, अभी स्वास्थ्य मंत्री जी ने कृषि को लेकर चिंता व्यक्त की है. आज जिस प्रकार से रासायनिक खादों का इस्तेमाल हो रहा है, यह चिंता का विषय है. मैं जब कृषि मंत्री था हम लोग उस समय इस दिशा में प्रयास कर रहे थे. हमने ऐसे कई कीटनाशक और चारामार हैं उनको हमने चिह्नित करने का काम किया था. यह कीटनाशक अमेरिका में, यूरोप में, यूके में प्रतिबंधित हैं, लेकिन न जाने क्या कारण है कि वही कीटनाशक हमारे देश में इस्तेमाल हो रहा है. इसके लिए हमें एक प्रस्ताव बनाकर केन्द्र सरकार को भेजना चाहिए. हमारा सौभाग्य है कि हमारे सहयोग के लिए केन्द्र सरकार में हमारे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री जो आज केन्द्रीय कृषि मंत्री की भूमिका निभाने का काम कर रहे हैं उनके साथ बैठकर हम बात करेंगे. उनसे बात करके ऐसी प्रतिबंधित दवाओं को पूर्ण रुप से बंद करने का काम करेंगे.

सभापति महोदय, आज जैविक खेती के ऊपर बहुत सारी चर्चा हुई है. जैविक खेती को यदि हम वाकई में बढ़ावा देना चाहते हैं तो इस जैविक खेती से जो उत्पादन होगा उसके उपार्जन के लिए हमको एक अलग से सिस्टम डेवलप करना होगा. जो जैविक उत्पाद आएगा उसके लिए मंडियों में अलग से खरीदने की प्रक्रिया को विकसित करने का काम करना होगा. जो जैविक उत्पाद हैं उसकी कीमत को भी हमें बढ़ाना होगा तब ही हमारा किसान जैविक खेती की तरफ आकर्षित हो पाएगा. कहना बहुत आसान है कि किसान जैविक खेती क्यों नहीं करता है, क्यों इतने बड़े पैमाने पर रासायनिक खादों का इस्तेमाल कर रहा है. किसान का खेती में लगातार लागत मूल्य बढ़ रहा है उसी लालच में लागत मूल्‍य को कम करने के लिए और उत्‍पादन बढ़ाने के लिए हमारा किसान लगातार संघर्ष कर रहा है और यही कारण है कि लगातार रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग हमारे देश और प्रदेश में बढ़ता जा रहा है. मैं एक सुझाव देना चाहूंगा कि कई वर्षों से हम सुन रहे हैं कि हमारी निराश्रित गौ-माताओं से हमारे पूरे प्रदेश में सरकार और आम नागरिकों सभी के लिए एक ऐसी स्थिति निर्मित हो चुकी है जहां पर निराश्रित गौ-माताओं के लिए हमको निश्चित रूप से कोई बहुत ही ठोस कदम उठाना पड़ेगा, कोई कार्ययोजना बनानी पड़ेगी, तो इसको हमको जैविक खेती से जोड़ना पड़ेगा. अगर हम गौ आधारित खेती करेंगे और गौ आधारित खेती तभी हो पाएगी जब हम पशुपालकों को कोई न कोई प्रोत्‍साहन देने का काम करेंगे. अगर वह गौ पालन कर रहा है तो गौ पालन पर प्रति गौ-माता के हिसाब से उसको हम कितनी राशि दे सकते हैं, अगर सर्वदलीय दल का गठन होगा तो हम सब बैठकर यह तय कर सकते हैं. अगर वाकई सरकार गंभीर हो तो इन सारे विषयों को उस पर लाने का काम करें. फिर बैठकर चर्चा हो, चर्चा के बाद इन सब चीजों का निराकरण होगा तो इससे निश्चित रूप से जैविक खेती को भी बढ़ावा होगा.

          सभापति महोदय -- सचिन जी, 10 मिनट हो गए हैं.   

          श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव --  सभापति महोदय, बस हो गया. जो जैविक खेती की हम चर्चा कर रहे हैं, जो रासायनिक खाद का इस्‍तेमाल कम करने की बातें कर रहे हैं, हमारे देश में जो हम खाद आयात कर रहे हैं उसका बोझ हमारे ऊपर पड़ रहा है, तो इस जैविक खेती से भी हमको बहुत सारी समस्‍याओं का निराकरण मिल जाएगा. ऐसी बहुत सारी चीजें हैं जो की जा सकती हैं.

सभापति महोदय, आज ब्लिंकिट का युग है. आज हम लोग घर बैठे-बैठे 5-7 मिनट में जो भी चीज चाहिए ब्लिंकिट के माध्‍यम से, जेप्‍टो के माध्‍यम से बुला सकते हैं, तो क्‍यों नहीं यह सारी तकनीक हम कृषि और किसानों के लिए इस्‍तेमाल कर सकते हैं. खाद को छिड़कने के लिए आज ड्रोन का इस्‍तेमाल हो रहा है. विदेशों में तो हवाई जहाजों का इस्‍तेमाल होता है, तो यह सारी चीजें हैं जिनके ऊपर हमको गौर करना चाहिए और अगर हम गौर करेंगे और हम वाकई गंभीर हैं तो हम लोग इस दिशा में कदम बढ़ाएं और अगर हमको सिर्फ टाइम पास करना है कि हमने अपनी बात रख दी, हमने आपको आईना दिखाने की बात कर दी और आपने कहा कि आपने जवाब दे दिया, तो फिर इस समस्‍या का निराकरण नहीं होगा. सभापति महोदय, आपने बोलने का अवसर दिया इसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद और इन्‍हीं बातों के साथ जो मैंने सुझाव दिए हैं और सबसे पहले अगर वाकई कृषि मंत्री जी गंभीर हैं, अपने विभाग को लेकर, किसानों को लेकर, तो एक सर्वदलीय दल का गठन हो, जिसमें माननीय गोपाल भार्गव जी जैसे अनुभवी लोग हों ताकि इस पूरी समस्‍या का एक परमानेंट समाधान निकाला जा सके. धन्‍यवाद.

          श्री फुंदेलाल सिंह मार्को (पुष्‍पराजगढ़) -- सभापति महोदय, भगवान राम की भूमि में असुरों की प्रवृ‍त्ति बढ़ती जा रही है. इस देश में, इस प्रदेश में भगवान राम के राज की कल्‍पना की गई थी कि भारतीय जनता पार्टी सरकार में आएगी और सारे लोग प्रसन्‍नता से जीवन यापन करेंगे, लेकिन आज ऐसा लग रहा है कि यह आसुरी प्रवृ‍त्ति सरकार की है कि आज ऋषि, मुनि, महात्‍मा, संत, साधु सारे लोग परेशान तो हैं ही, इसके साथ ही किसान भी उससे अछूता नहीं है. आज जिस तरीके से प्रदेश का किसान अपने आपको ठगा सा महसूस कर रहा है, उनकी वार्षिक आमदनी और जिस तरीके से आज खाद के लिए, बीज के लिए वह परेशान है, फार्मर आईडी बनाया और उसके लिए वह इधर से उधर घूमता रहता है और उस फार्मर आईडी से यदि वह यदि वह किसान भोपाल का है तो यह निश्चित नहीं है कि उसको भोपाल में खाद मिल जायेगा, उसका नाम कहीं पोर्टल में कटनी में शो कर देगा तो वह कटनी खाद लेने के लिये जायेगा, और जब वह कटनी में जायेगा तो पता चलेगा कि कटनी में खाद तो उपलब्ध ही नहीं है. यह सरकार की व्यवस्था चल रही है.

          सभापति महोदय, मैं मंत्री जी कहना चाहता हूं कि अभी कृषि विभाग के द्वारा किसानों को जो खाद और बीज उपलब्ध कराया गया है ,डीएपी आप उपलब्ध करवा नहीं सके  डीएपी कही मिल नहीं रहा है, लेकिन यही डीएपी खाद बाजार में खुले आम आप ले सकते हैं. जहां पर यह खाद 1350 रूपये का मिलता था, आज आप 2000 रूपये दीजिये और जितनी आप चाहें उतना आप डीएपी खुले बाजार से ले जा सकते हैं. कोई देखने सुनने वाला नहीं है. आपने एनपीके (NPK 12:32:16) को पिछले वर्ष अर्थात 2025 में 1450 रूपये की बोरी सरकार के दिरा जाता था किंतु पता नहीं उस बोरी में आपने ऐसी कौन सी चीज मिला दी है कि आप वह एनपीके 2100 रूपये की 50 किलो की बोरी सरकार द्वारा किसानों को जो दी जा रही है उसमें सीधे सीधे 750  रूपये की वृद्धि आपने मात्र 50 किलो की बोरी में कर दी है. मैं सरकार को याद दिलाना चाहता हूं कि सरकार ने 2023 में यह वायदा किया था कि किसानों का धान 3100 रूपये क्विंटल में सरकार खरीदेगी .क्या सरकार ने इस राशि में किसानों के धान को खरीदा जिस तरह से इस सरकार ने खाद पर मूल्य वृद्धि 750 रूपये की एक वर्ष में कर दी तो आपने जो किसान से जो वायदा किया था कि हम 3100 रूपये क्विंटल में खरीदेंगे वह सरकार ने क्यों नहीं खरीदा.यह आप अपने उत्तर में जरूर बतावें.माननीय सभापति महोदय, यह सरकार किसानों को राहत दे रही है या किसानों का शोषण करने में लगी है. पता ही नहीं चल रहा है. क्या सरकार यह नहीं चाहती है कि प्रदेश के किसान का विकास हो.

          सभापति महोदय- फुन्देलाल जी 1 मिनिट बचा है. कृपया समय सीमा का ध्यान रखें.

          श्री फुन्देलाल सिंह मार्को—माननीय सभापति महोदय, अभी तो मैंने बोलना ही शुरू किया है महोदय, अभी तक तो जब समाज में अहंकार, अत्याचार, स्वार्थ, और अनैतिकता बढ़ती है, तो इसे धर्म और मर्यादा के विपरीत माना जाता है। मैं राम की धरती पर इस प्रवृत्ति की बात कर रहा हूं.

          सभापति महोदय- आप जो बात कह रहे हैं वह आपके दल के लोग कह चुके हैं.

          श्री फुन्देलाल सिंह मार्को- सभापति महोदय, जिस विषय पर मैं बोल रहा हूं उस पर कोई नहीं बोला है, मैं अलग से बोल रहा हूं. तो मेरा आपसे अनुरोध है कि यदि  एक ही मिनिट बोलने का बचा हो तो मैं बैठ जाऊं.

          सभापति महोदय—आप विषय पर आ जायेंगे तो उचित रहेगा.

          श्री फुन्देलाल सिंह मार्को- माननीय सभापति महोदय, मैं खाद पर ही बोल रहा हूं. विषय से विषयान्तर मैं नहीं होता, यह गुण मैंने आपसे ही सीखा है.

          सभापति महोदय- इसके लिये धन्यवाद.

          श्री फुन्देलाल सिंह मार्को- सभापति महोदय, यह 750 रूपये प्रति बोरी पर मूल्यवृद्धि इस सरकार के द्वारा की गई है, इससे किसानों को हानि और सीधे सीधे व्यापारियों को सरकार के द्वारा लाभ पहुंचाया गया है, इसमें कमीशन कितना मिला है इसका उत्तर आप सदन में जरूत बतायें.

          सभापति महोदय, आज जिस तरीके से खाद पर कालाबाजारी हो रही है चाहे वह डीएमके 102626 हो, एनपीके 10:26:26 (NPK 10:26:26) यूरिया हो, जिंक सल्फेट हो आप नये नये खाद किसानों को दे रहे हैं जिसके कारण किसानों का कृषि का उत्पादन घट रहा है. माननीय मंत्री जी आपने पंजाब राज्य की स्थिति भी देखी है. पंजाब राज्य एक समय में सर्वाधिक उत्पादन करने वाला था, गेहूं का कटोरा उसको कहा जाता था आज वहां क्या स्थिति है, यही उर्वरा के उपयोग से , आप क्या मध्यप्रदेश को भी पंजाब बनाना चाहते हैं,  सभापति जी हमारे किसान तो खाद का उपयोग ही नहीं करते थे, कृषि को लाभ का धंधा बनाने की बात भारतीय जनता पार्टी ने की थी इसके पहले हमारे प्रदेश के किसान गाय, बैल, भैंस का गोबर गढ्ढे में रखा करते थे जब गर्मी के दिन में खाद् की जरूरत पड़ती थी तो उसको गढ्ढे से निकाल कर के अपने खेत में डालकर के फसल की पैदावार किया करते थे, यह किसानों की आदत तो आपके बिगाड़ी है. आज जब जान रहे हैं कि आने वाला समय ठीक नहीं है सरकार फिर से लोटकर के जैविक खाद पर आ गई है. मेरी मंत्री जी से विनती है जैविक खाद के नाम पर जो किसानों के साथ में यह सरकार छलावा कर रही है उसको बंद करें.

          सभापति महोदय, एक अनुरोध आपके माध्यम से मैं मंत्री जी से करना चाहता हूं कि यह जो मृदा परीक्षण है, इसकी प्रयोगशाला प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में सरकार को स्थापित करना चाहिये . जिस तरीके से हम उर्वरा का उपयोग कर रहे हैं उससे खेत की मिट्टी क्षारीय  होती जा रही है, किसान यह नहीं समझ पा रहा है कि कौन सी मिट्टी में कौन सी फसल को बोया जाये, उसमें हमको क्या पैदावार मिलेगी, इसकी जानकारी किसानों को समय समय पर मृदा परीक्षण प्रयोगशाला से मिलना चाहिये. इसमें मेरा सुझाव है कि मनरेगा योजना का आपने नाम सरकार ने परिवर्तित कर दिया, ठीक है उसमें महात्मा गांधी जी का नाम आ रहा था उससे सरकार को कष्ट हो रहा था, आप व्यथित थे, दुखी थे इसलिये सरकार ने इस योजना का नाम बदलकर के VB-G RAM G कर दिया . सरकार यदि वास्तव में इस योजना के माध्यम से किसान की आय में वृद्धि करना चाहती है, किसान का भला करना चाहते हैं. किसान का आप भला करना चाहते हैं तो इसको कृषि से आप जोड़ दीजिए. आज हमारी सबसे बड़ी परेशानी मजदूरी से है. आप मजदूरी को, निदाई को, गुड़ाई को, कटाई को, बुवाई को जी राम जी को जोड़िए और हमारे किसानों के पास खाद का पैसा नहीं होता है, निदाई का, गुड़ाई का, कटाई का, बुवाई का पैसा नहीं होता है. जीराम जी से जोड़कर उसकी राशि आप वहां दीजिए. मेरा ऐसा मानना है कि इससे प्रदेश के कृषि में विकास भी होगा और हमारे किसान सबल भी होंगे, ऐसा मैं मानता हूं.

सभापति महोदय, खाद और बीज के जो वितरण केन्द्र हैं उसको सीमित करते गये हैं.  हर विधान सभा में कम से कम दूरी के आधार पर इसको किया जाय. कृषि मंत्री महोदय जी, मेरा पुष्पराजगढ़ विधान सभा क्षेत्र है, वह पहाड़ी क्षेत्र है, वहां आपने 4 जगह बना दी है. 40 कि.मी. खाद लेने पुष्पराजगढ़ से अनूपपुर जाऊं या 100 कि.मी. राजेन्द्र ग्राम मुख्यालय लेने जायं. यह कैसी आपकी व्यवस्था है तो दूरी के आधार पर क्षेत्रफल की दृष्टि से आप खाद और बीज का वितरण केन्द्र स्थापित करें ताकि कृषक को सरलता से, सहजता से उसकी मांग के अनुसार उसको खाद और बीज मिलता रहे. मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि पूरे मध्यप्रदेश में किसान की मांग और पूर्ति करने में हमारी सरकार असफल है, बिल्कुल असफल है. आप चाहें कुछ भी कहें. आप भ्रष्टाचार को नहीं रोक पा रहे हैं, कालाबाजारी नहीं रोक पा रहे हैं. इस पर अंकुश लगाना चाहिए. सभापति महोदय, आपने बोलने का मौका दिया, बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री गौरव सिंह पारधी ( कटंगी ) – सभापति महोदय, यह बड़ा गंभीर विषय है और मुझे ऐसा लग रहा है  कि लगातार हम सब विषय से विषयांतर्गत होते गये. माननीय नेता प्रतिपक्ष जी ने विषय दिया कि खरीफ फसल हेतु खाद/बीज नहीं मिलने और अवर्षा की जो स्थिति है उस पर चर्चा होनी थी, सारी चर्चाएं होती जा रही हैं.

सभापति महोदय, हम सब जानते हैं कि यह बहुत ही अलग साल है. निश्चित ही इस साल अल-नीनो की जो स्थिति पैदा हुई है, हम सब देख रहे हैं कि वर्षा ऋतु असामान्य हो गई है और इसको लगातार अल-नीनो ही नहीं, सुपर अल-नीनो तक लेकर जाया जा रहा है और मैं समझता हूं कि 150 वर्ष के इतिहास में रेनफाल का जो इस साल मौसम बन रहा है, वह सबसे कम रहने वाला है. इन परिस्थितियों में हमें काम करना है और सरकार काम कर रही है. बहुत सारी चर्चाएं हुई. मैं ज्यादा विषय से न भटकते हुए एक विषय लूंगा. विशेष तौर पर ई विकास प्रणाली, ई टोकन जिसे हम जानते हैं और जिसको लेकर बड़ी चर्चाएं हुई कि लम्बी लम्बी कतारें थीं, हमारे वरिष्ठ सदस्य लोग जा रहे हैं मेरी बात को सुन नहीं रहे हैं. ये सारी कतारों को दूर करने के लिए इस प्रणाली का हम सबने इस्तेमाल किया है और इसमें एग्रीस्टैक जिसमें फार्मर आईडी को हम सब जानते हैं, भू-अभिलेख, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research) में जो soil base nutrients as per crop requirement निकाली है, उसके आधार से सबको मिश्रित करते हुए प्रणाली बनाई गई है तो मैं समझता हूं कि यह अपने आप में अभूतपूर्व प्रणाली रही है. इस प्रणाली के आने से उर्वरकों का संतुलित पारदर्शी और आवश्यकता आधारित वितरण जो है, यह पूर्ण होगा. निश्चित ही यह प्रशासनिक चुनौती रही है. हर वर्ष इस पर हमने चर्चाएं की हैं.  लेकिन सभापति महोदय, इसके बारे में मैं आपको डिटेल में बताऊंगा कि हम पाएंगे कि इस साल से  चीजें बदलेंगी. इस ई प्रणाली की शुरुआत जो है 1 अक्टूबर, 2025 में  एक पायलट स्टडी किया गया, फिर उसके बाद 11 जनवरी, 2026 से एक हाइब्रिड मोड में इसको लाया गया और 1 अप्रैल, 2026 से इसको पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया है.

सभापति महोदय, यह सिर्फ डिजिटाइजेशन नहीं है, इसमें जैसा मैंने पहले बताया कि  क्राप रिक्वायरमेंट सॉइल कंडीशन और फार्मा स्टेट्स को ध्यान में रखते हुए इसको सामने लाया जा रहा है. सभापति महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि इसके पहले जो प्रणाली थी उसमें यह था कि  कोई भी किसान एक आधार कार्ड के आधार पर 50 बैग खाद ले सकता था. फर्टिलाइजर ले सकता था, इसलिए हम जो देखते आ रहे थे कि पहले जो आर्टिफिश्यल शार्टेज होती थी.

            कभी भी कमी हो जाती थी, उसका कारण यह होता था कि जो सक्षम लोग हैं, वे इकट्ठा कर लेते थे और होडिंग कर लेते थे. बाद में किसानों को लगातार लाइनें लगानी पड़ती थीं और सबसे ज्यादा सफर हमारा छोटा कृषक करता था. इस परिस्थति से बाहर निकलने के लिए योजना आयी है और मैं दो-तीन बातें बताना चाहूंगा कि जो योजना है वह किस तरीके से आगे बढ़ रही है. इसमें ई-टोकन  की व्यवस्था की गई है और यह बहुत ही सिस्टमेटिक है. जब फॉर्मर अपना रजिस्ट्रेशन कराता है, तो टोकन जनरेट होता है. अभी चर्चा हो रही थी कि भोपाल का किसान है और उसे कटनी में खाद मिल रहा है, यह बिल्कुल गलत है. हो सकता है कि सॉफ्टवेयर में कहीं कुछ कमियां हों, तो बिल्कुल वह देखा जा सकता है. लेकिन यह कहना गलत है कि भोपाल के किसान को कटनी में खाद मिल रहा है. यह सिर्फ बातें बनाने वाली बात है. किसान वहां पर खुद आइडेंटिफाई करता है. 

          श्री फुन्देलाल सिंह मार्को – सभापति महोदय जी,….

          सभापति महोदय – मार्को जी, बीच में बोलने की जरूरत नहीं है.

          श्री गौरव सिंह पारधी – आप उदाहरण लाइएगा, हम उस पर चर्चा करेंगे.

          श्री फुन्देलाल सिंह मार्को – सभापति महोदय, हमारा शिकायतकर्ता चश्मदीद है.

          सभापति महोदय – यादवेन्द्र सिंह जी जिले के अंदर कितना दे रहे थे. आपने तो भोपाल से कटनी तक पहुंचा दिया, इसलिए तो वक्ता को प्रतिवाद करना पड़ा.

          श्री फुन्देलाल सिंह मार्को – (XXX)

          सभापति महोदय – माननीय फुन्देलाल सिंह मार्को जी जो बोल रहे हैं, वह नहीं लिखा जाएगा. पारधी जी, आप अपनी बात जारी रखें.

          श्री गौरव सिंह पारधी – माननीय सभापति महोदय, फॉर्मर जो है, वह खुद चूज कर सकता है कि मुझे कहां से खाद उठानी है. यह भी विकल्प है. निश्चित है. नई प्रणाली है. समय लग रहा है और सबको सीखने में समय लगेगा. उसके लिए विभाग एसएमएस के माध्यम से और लगभग 500 से ज्यादा प्रशिक्षण भी आयोजित किए गए हैं और आने वाले समय में हम पाएंगे कि एक ऐसी प्रणाली है, जिससे लगातार जो लीकेज होते थे, जो ब्लैक मॉर्केटिंग होती थी, इन सबसे हमको निजात मिलने वाली है. अभी सीखना पडे़गा. किसान भी धीरे-धीरे सीख रहा है. अगले साल तक हम पाएंगे कि हमारा किसान जो कि होनहार है जो इस देश की भूख को मिटाता है, इस विश्व की भूख को मिटाता है. क्योंकि इंडिया का जो ग्रेन है, वह एक्सपोर्ट भी होता है, तो हमारा किसान इसमें पूर्ण रूप से इसमें अंदर आ जाएगा. इसमें प्रमुख तौर से हमारी जो प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसायटियां होती हैं जिसको हम पैक्स सोसायटी कहते हैं, उसका मैं भी सदस्य हूँ. मैं भी खेती करता हूँ. मैं बताना चाहूंगा कि विधानसभा आने के पहले मैं खेत देखने गया था कि क्या स्थिति है. हमने भी उठाव किया. पैक्स के माध्यम से लगभग 35 प्रतिशत फर्टिलाइजर हमारे प्रदेश में हम पैक्स के माध्यम से दे रहे हैं. लगभग 35 प्रतिशत फर्टिलाइजर हम मॉर्कफेड के माध्यम से दे रहे हैं और लगभग 30 प्रतिशत जो है वह हम प्राइवेट रिटेलर्स के माध्यम से जा रहा है.

सभापति महोदय, अब मैं इस विषय को ध्यान में लाना चाहूंगा कि जब तक यह ई-टोकन प्रणाली नहीं थी, तब तक यह स्थिति बनती थी कि कई बार प्राइवेट रिटेलर्स जो हैं वह मिसयूज कर लेते थे. हमने हमारे बालाघाट में भी देखा है और अन्य जगहों पर भी देखा है कि अमोनियम नाइट्रेट जो है वह एक्सक्लूसिव बनाने के लिए भी यूज किया जा सकता है, तो इस तरीके से वह डॉयवर्ट हो जाता था और अन्य स्ट्रेट विरोधी गतिविधियों के लिए उसका प्रयोग किया जाता था, तो इन सब चीजों को इस चीज से कंट्रोल होना है तो निश्चित ही मैं समझता हूँ कि यह बहुत ही अच्छी प्रणाली आयी है.

सभापति महोदय, एक बात और बताना चाहूंगा कि एक चर्चा आ रही थी कि पूरा खाद नहीं मिल रहा है. मैं अपने अनुभव से बताना चाहूंगा कि एक बैग यूरिया और दो बैग कॉम्प्लेक्स प्रति एकड़ मिल रहा है और इसके फायदे हैं कि जितनी रिक्वॉयरमेंट है वह तो फुलफिल हो ही रही है. लेकिन जो लगातार यह चर्चा हो रही थी कि सॉइल खराब हो रही है तो उसमें एक तरीके से हमको सीखने मिल रहा है और यह मिश्रण कहां पर कितना लगेगा, यह सांइटिफिक आधार पर डिसाइड किया गया है. उसमें मेरी मर्जी नहीं है किसी की मर्जी नहीं है. सिर्फ साइंटिफिक आधार पर डिसाइड किया हुआ है और अगर किसी किसान को एक्स्ट्रा जरूरत है, तो उसको दोबारा भी मिलेगा.

सभापति महोदय, एक बात और मैं आपके माध्यम से सदन के ध्यान में लाना चाहूंगा कि यह जो ई-टोकन है इसमें वे लोग भी कवर किये जाएंगे, जो कि रजिस्टर्ड नहीं हैं. जैसे कि कई बार हमारे यहां पर बंटाईदार होते हैं या फिर मंदिर धार्मिक ट्रस्ट की भूमि होती है, राजस्व पट्टाधारी किसान होते हैं. एफआरए के माध्यम से वन अधिकार पट्टाधारी किसान इनकी सेपरेट रजिस्ट्री नहीं है. लेकिन यह जब अपनी रिक्वेस्ट वहां पर लॉग इन करेंगे, तो यह उस क्षेत्र के तहसीलदार, और एसडीएम के पास जाएगी और वहां से जब एक्सेप्टेंस आएगी, ताकि किसी प्रकार का लीकेज न हो, तो फिर उन लोगों को भी खाद का वितरण हो सकेगा. साथ ही साथ मृत भूमिस्वामी, जहां पर नामांतरण नहीं हो पाया है, हैंडिकेप्ड लोग जो सार्वजनिक रूप से असक्षम हैं और जो हमारे एग्रीकल्चर फॉर्म हैं, चाहे वह कृषि के फॉर्म हों, प्लांटेशन कार्य में जुटी हुईं संस्थाएं हों, इनको भी ऑफ्टर एप्रूअल पूर्ण रूप से फर्टिलाइजर की उपलब्धता कराई जाएगी. मैं समझता हूँ कि ई-विकास पोर्टल के माध्यम से यह जो सत्यापन के उपरांत जिस तरीके से फर्टिलाइजर उपलब्ध कराया जा रहा है निश्चित ही यह सबके हित में है. केमिकल फर्टीलाईजर का उपयोग लगातार हम सबके लिये चिन्ता का विषय है. मैं अपने विधान सभा क्षेत्र की बताऊंगा कि लगभग 50 से 70 केन्सर के केस हमारे पास में आ रहे हैं. किडनी की भी बीमारियां आ रही हैं. अगर किसी तरीके से साईंफिक बेसिस पर हमें फर्टीलाईजर मिल रहा है.

          5.01 बजे (माननीय सभापति {डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय} पीठासीन हुए)

          सभापति महोदय जी उसका विरोध करना अच्छी बात बिल्कुल नहीं है. वर्तमान में प्रदेश में खाद की पूर्ण उपलब्धता है. लगातार आंकड़े हैं, आने वाले समय में हमारी सरकार ने हमारे मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में हमारे कृषि मंत्री जी ने तैयारियां की हैं. तो मुझे नहीं लगता है कि किसी भी प्रकार से उर्वरता की स्थिति खराब रहेगी. बहुत विपरीत परिस्थिति है. हम सब जानते हैं कि ईरान-अमेरिका युद्ध गल्फ स्टेट ऑफ हार्मोंस बंद रहा है. हमारा जो फर्टीलाईजर इम्पोर्ट है मेक्सिमम 70 से 80 प्रतिशत वहीं से आता है. हम यह भी जानते हैं कि हम अपना पोटास-फासफोरस लगभग 70 से 80 प्रतिशत इम्पोर्ट करते हैं. इन सब परिस्थितियों के बावजूद निश्चित ही भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार ने बहुत अच्छी तैयारियां करते हुए इसको व्यवस्थित किया है. जो एक्सेज यूज ऑफ फर्टीलाईजर हो रहा था. वह ऑलरेडी कम होना शुरू हो गया है. लगभग यूरिया में 15 प्रतिशत रिडक्शन डीएपी, एन.पी. के. 13 प्रतिशत रिडक्शन, एस.एस.पी.जो अपने आप में स्पेसिफिक फासफोरस हो जाता था. तो उसके भी यूज में 25 प्रतिशत की कमी देखी जा रही है. उसका मुख्य कारण है कि साईंफिक आधार में फर्टीलाईजर की उपलब्धता हो रही है. चार बातें आपके ध्यान में लाते हुए इस ई प्रणाली से पारदर्शिता, जवाबदेही, प्रभावशीलता, बदलाव हम सबके बीच में देखनों को आ रहा है. कुछ बातें जरूर आपके ध्यान में लाना चाहूंगा स्वामीनाथन रिपोर्ट की चर्चा चल रही थी मैं बताना चाहता हूं कि 2004 से 2006 के बीच में स्वामीनाथन कमीशन आया उन्होंने रिकमडेशन दिया था कि लागत का डेढ़ गुना जो है एम.एस.पी. में आना चाहिये. स्वामीनाथन कमीशन जरूर आपकी विपक्ष की सरकार ने लाया लेकिन रिकमडेशन को लागू नहीं किया. 2018-2019 में माननीय मोदी जी की सरकार ने डेढ़ गुना लागत का लेते हुए एम.एस.पी.को बढ़ाया मैं आपको बताना चाहूंगा कि हम सब धान के किसान हैं तो लगभग 24 प्रतिशत एम.एस.पी. के भाव उस समय बढ़े थे. यह सब हमारे सबके देखने में आया है. कुछ बात और ध्याना में लाते हुए प्रदेश सरकार ने एक फोर्सफुल टेगिंग होती थी. कई बार देखने में आता था कि सबसिडाईज फर्टीलाईजर के साथ नॉन सबसाईड फर्टीलाईजर भी दे दिया जाता था जिसका किसानों में काफी रोष होता था. मई 2026 में सरकार ने उस प्रेक्टिस को रेस्टिक किया है तो आने वाले समय में कई बार जो बातें आती थीं वह सब हमारे ध्यान में नहीं आयेंगी. एक बात और कहूंगा जो यूरिया और डीएपी है उसके भाव में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. मैं अपनी बात यह कहकर समाप्त करूंगा कि सोना उगलती है मिट्टी किसान के पसीने से यूरिया और खाद बस श्रृंघार है इसका मध्यप्रदेश का किसान अभी परेशान है, लेकिन हारा नहीं है ईश्वर से प्रार्थना है कि इस बार अच्छी वर्षा हो एलनीनो का इफेक्ट थोड़ा कम हो. हमारा किसान और हम सब समृद्ध रहें. मध्यप्रदेश की सरकार को बधाई देते हुए बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्री नितेन्द्र, बृजेन्द्र सिंह राठौर(पृथ्वीपुर)—माननीय सभापति महोदय आज मैं किसानों की समस्या सदन में उठाने के लिये उस किसान की ओर से खड़ा हूं. जिसके हाथों की लकीरों से इस प्रदेश की खुशहाली लिखी जाती है. लेकिन जिसकी अपनी किस्मत आज सरकार की नीतियों ने धुंधली कर दीं. चन्द पंक्तियों में अपनी बात कहना चाहता हूं कि महलों में बैठे लोग मौसम का हाल लिखते रहे, खेतों में किसान अपनी तकदीर आंसुओं में सींचते रहे. सत्ता कहती रही कि सब अच्छा है और गांव का किसान हर रोज दर्द पीता रहा. सरकार कहती है कि किसान समृद्ध है. मैं पूछना चाहता हूं कि अगर किसान समृद्ध है तो खाद की लाइन में कौन खड़ा है. एमएसपी के लिए कौन भटक रहा है. अगर सब कुछ ठीक है तो मुआवजों की आस में तहसीलों के चक्‍कर कौन काट रहा है. सरकार के पास विज्ञापन तो है, लेकिन किसान के पास जवाब नहीं है, जब प्रश्‍न लगाए जाते, पत्र लिखे जाते हैं तो जवाब आता है कि खाद बीज पर्याप्‍त मात्रा में उपलब्‍ध है, तो फिर ये समस्‍या किसानों को लगातार क्‍यों होती है, बोवनी के समय पर किसानों को खाद नहीं मिलता, किसान खेत छोड़े या खाद की लाइन में खड़ा रहे. आखिर सरकार बताए कि किसान खेती करें या व्‍यवस्‍था की नाकामी का बोझ उठाए.

          सभापति महोदय, मैं एमएसपी की अगर बात करूं तो यह केवल घोषणा बनकर रह गई है. किसान की फसलों का मूल्‍य बाजार तय कर रहा है, सरकार नहीं, लागत बढ़ती जा रही है, लेकिन किसान की आमदनी घटती जा रही है. कभी अतिवृष्टि, कभी सूखे ने, हजारों किसानों की फसल बर्बाद कर दी है. आज भी किसान इंतजार कर रहा है. क्‍या सरकार का सर्वे किसानों के आंसू सूखने के बाद पूरा होगा. फसल बीमा योजना का सच भी हर किसान जानता है, जब प्रीमियम लेना होता है तो व्‍यवस्‍था तेज दौड़ती है, लेकिन जब मुआवजा देना होता है तो फाइलें रेंगने लगती है. सभापति जी मंडियों पर समय पर तुलाई नहीं होती, किसान अपनी उपज लेकर दिन रात बैठा रहता है, बारिश आए या धूप पड़े, किसान का नुकसान होता है आखिर हर बार किसान का ही नुकसान क्‍यों और बिजली बिलों ने खेती को घाटे का सौदा बना दिया, सिंचाई महंगी, डीलज, खाद, बीज महंगे और सरकार पूछती है कि किसान परेशान क्‍यों है. मैं ज्‍यादा बात न करते हुए संक्षिप्‍त में अपनी बात रखना चाहता हूं. मैं चाहता हूं और सरकार से मांग करता हूं कि किसानों को तत्‍काल पर्याप्‍त खाद उपलब्‍ध कराई जाए, सभी फसलों को एमएसपी पर प्रभावी खरीद सुनिश्चित की जाए. अतिवृष्टि और सूखा से प्रभावित किसानों को तत्‍काल और उचित मुआवजा दिया जाए. फसल बीमा का भुगतान समय पर और पारदर्शी हो, मंडियों में समय पर तुलाई की जाए, किसानों को बिजली बिलों पर राहत दी जाए, क्‍योंकि किसानों की आहों पर सत्‍ता के महल ज्‍यादा दिन नहीं टिकते, इतिहास गवाह है, जब अन्‍नदाता उठ खड़ा होता है तो सबसे मजबूत सिंहासन भी हिल जाता है. सभापति जी आपने बेालने का अवसर दिया, इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद, जय हिन्‍द जय भारत.

          सभापति महोदय - मेरा सभी सदस्‍यों से निवेदन है कि जैसे नितेन्‍द्र जी ने बहुत सारगर्भित वक्‍तव्‍य व्‍यक्‍त किया, ऐसे ही सभी सदस्‍य समय की मर्यादा रखेंगे. श्री महेश परमार जी.

          श्री महेश परमार(तराना) - धन्‍यवाद सभापति महोदय, आपने मुझे मध्‍यप्रदेश के किसानों को खरीब की फसल हेतु खाद बीज नहीं मिलने और अवर्षा से उत्‍पन्‍न स्थिति के संबंध में बोलने के लिए समय दिया, इसके लिए बहुत बहुत धन्‍यवाद. सभापति महोदय और यहां उपस्थित सभी साथी और मंत्री जी एक बार जोरदार हम सभी लोग जिनके कारण यहां बैठे हैं एक बार जोरदार नारा लगाएंगे, जय जवान .. जय किसान.. (उपस्थित सदस्‍यों द्वारा नारा लगाया गया..)

          आदरणीय सभापति महोदय, मध्‍यप्रदेश की इस सरकार में जो नारा जय जवान और जय किसान, जो हमारी शान, पहचान और आर्थिक रीढ़ की हड्डी है. अगर आज मध्‍यप्रदेश और देश में सबसे ज्‍यादा परेशान है, धोखा हो रहा है, शोषण हो रहा है, तो वह हमारे किसानों का और जवानों का हो रहा है. ये स्थिति इस सरकार की है. बातें बड़ी बड़ी, जैविक खेती की बातें करेंगे. किसानों की आमदनी दोगुनी करने की बात करेंगे, किसानों के नाम पर अवार्ड ले लेंगे, जब किसानों को दो बोरी खाद देने की बात आती है तो ये टोकन व्‍यवस्‍था लागू कर देते हैं. मेरी विधान सभा ताराना, उज्‍जैन, जिला जवारा वहां के उन्‍नत किसान सर्दी, गर्मी, ठंड, बारिश ओला, पाला हर परिस्थिति में 140 करोड़ देशवासियों के लिए हमारा अन्‍नदाता काम करता है और सरहद पर हमारा जवान काम करता है, हमारी देश की रक्षा के लिए, लेकिन यह सरकार और सरकार में बैठे यह लोग सिर्फ किसानों के नाम पर छलावा करते हैं, जब सरकार बनाने की बात होती है तो समर्थन मूल्‍य और एमएसपी की बात करते हैं और वोट लेने के बाद हमारा किसान भाई ठोकरें खाता है, इनकी कथनी और करनी में अंतर है. अगर किसानों को मुख्‍य धारा में लाना है, लाभ पहुंचाना है, तो सबसे पहले समर्थन मूल्‍य की गारंटी देनी होगी, अगर जिस दिन एम.एस.पी. लागू हो जायेगी, समर्थन मूल्‍य लागू हो जायेगा, तो किसान भाई को अपनी फसल को कम दाम पर नहीं बेचना पड़ेगा, यह सरकार आज तय करे. आदरणीय कृषि मंत्री जी यहां पर विराजमान हैं, कृषि मंत्री जी का वक्‍तव्‍य हमने सुना उन्‍होंने कहा कि पानी नहीं गिर रहा है, तो हम क्‍या करेंगे? इन्‍हीं किसानों ने आपको सरकार में बैठाया है, इन्‍हीं किसानों ने आपको मंत्री बनाया है और आज आपकी यह स्थिति है. अगर अवर्षा हो रही है तो आप नीति बनाइये.यदि प्रकृति में जलवायु परिवर्तन हो रहा है, तो आप नीति बनाईये. बीस साल तक मध्‍यप्रदेश में राज करने वाले आज देश के कृषि मंत्री जी, वह कहते थे कि किसान मेरा भगवान है, किसान की मिट्टी भी में पांच हजार रूपये प्रति क्विंटल तोलूंगा, आज वह कहां हैं? मैं श्री शिवराज सिंह चौहान जी से आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि आज किसान कर्ज के बोझ में डूबा हुआ है, लागत चार गुना हो गई है, किसानों की आमदनी आधी रह गई है, यह स्थिति आज है. अगर वहां के किसानों को लाभ पहुंचाना है, तो वहां के किसान भाईयों की ऋण माफी करना पड़ेगी, किसान भाईयों को समय पर फसल बीमा देना पड़ेगा, छोटे किसान भाईयों को पेंशन देना पड़ेगी, अच्‍छे बीज देना पड़ेगा,समय पर खाद देना पड़ेगा, सिंचाई की अच्‍छी व्‍यवस्‍था करना पड़ेगी और किसान के खेत पर पानी पहुंचे, यह व्‍यवस्‍था करना होगी. आज मशीनीकरण के अभाव में किसान ढंग से उपज पैदा नहीं कर पाता है, हमको भंडारण की व्‍यवस्‍था करना पडे़गी, आधुनिक तकनीक की जो कमी है, उसका भी प्रशिक्षण आपको देना पड़ेगा, फसल का सही दाम देना पड़ेगा और जो बिचौलिये  किसानों के बीच में दाम खा जाते हैं, उन बिचौलियों को भी दूर करना पड़ेगा.

सभापति महोदय, मंहगी खेती और संसाधनों की कमी के कारण बीच खाद, डीजल, कीटनाशक इनके मूल्‍य में चार-चार गुना वृद्धि हुई है. गेहूं में, सोयाबीन में,धान के दाम में अन्‍य फसलों के लागत दाम में वृद्धि हुई है, तो आप सोचिये कि 2013-14 में जो खाद की बोरी 400-500 रूपये की थी, वह बोरी आज 23 सौ, 24सौ की मिल रही है और हमारे गेहूं के, हमारे सोयाबीन के मूल्‍य नहीं बढ़े हैं, तो इस सरकार की कथनी और करनी में अंतर है. बिजली दस घंटे देने की बात करते हैं.

सभापति महोदय, किसानों के बिजली की व्‍यवस्‍था आप देख लीजिये, केवल तार टूटे हैं, ट्रांसफार्मर नहीं है, पोल लटक रहे हैं, किसान भाई दुर्घटना में बिजली के कारण मर रहे हैं, यह स्थिति अघोषित बिजली कटौती होने के कारण हो रही है. किसान हमारे अन्‍नदाता है, हमारे देश की शान है, अगर समय रहते किसानों की सुद नहीं ली गई तो आने वाला समय और संकट का होगा,यह मेरा आपके माध्‍यम से सरकार से, आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी से और आदरणीय सत्‍ता में बैठे सभी साथियों से निवेदन है. अभी हमारे एक साथी बोल रहे थे कि यह जैविक वह जैविक, जब जैविक और रासायनिक खाद में उत्‍पादन कम ज्‍यादा आता है, तो आपको यह भी तय करना पड़ेगा कि आपको गेहूं की फसल के दाम भी छ: हजार रूपये प्रति क्विंटल करना पड़ेगा, सोयाबीन के भाव आपको दस हजार रूपये प्रति क्विंटल करना पड़ेगा, आपको दूध के दाम बढ़ानें पड़ेंगे, आपको फल, फूल सब्जियों के दाम बढ़ाने पड़ेंगे और जब मध्‍यप्रदेश में किसानों की फसल की बंपर पैदावार होती है, देश में बंपर पैदावार होती है, तो आपके देश की सरकार की रीति नीति इतनी गलत है कि आप आयात कर लेते है तो हमारे मध्‍यप्रदेश और देश के किसानों की फसल के दाम कम हो जाते हैं. आज हमारा अन्‍नदाता ठगा हुआ महसूस कर रहा है, मेरी मांग है कि  दलगत राजनीति से ऊपर उठकर किसानों को मुख्‍य धारा में लाना होगा, उनकी फसलों के दाम देने होंगे, उनको समय पर बिजली बीमा देना होगा. आज सहकारिता की स्थिति देख लीजिये.

सभापति महोदय – श्री महेश परमार जी, अभी काफी नाम शेष हैं, बार बार रिपीट हो रहा है. लगभग सभी बिंदु रिपीट हो रहे हैं, इसलिए आपसे आग्रह है कि समय की मर्यादा है, अन्‍य सदस्‍यों को भी बोलना है. समय कम है.

          श्री महेश परमार – सभापति महोदय, हम सब किसानों के कारण ही आये हैं. हम मालवा के लोग हैं. मेरा तो यही निवेदन है कि आप अभी उज्‍जैन जिले में जब मुआवजा मिला था, हमने कलेक्‍टर कार्यालय का घेराव किया था, सोयाबीन का बीमा कम क्‍यों मिला था, माननीय मंत्री जी आप अपने वक्‍तव्‍य में बताना, अभी इस बीमें में भी इस तरह की लूट चल रही है कि वह बीमा कंपनी के लोग जो किसान उनको रिश्‍वत देते हैं, उनको बढ़ाकर बीमा दे देते हैं, वह भी दो तीन प्रतिशत किसान हैं, 80 से 90 प्रतिशत किसानों को बीमा नहीं मिल रहा है, यह हमारे उज्‍जैन की स्थिति है और खाद की स्थिति तो आप देख लीजिये कि टोकन के नाम पर किसानों के साथ सीधे लूट और ठगी चल रही है, तो मेरा तो यही निवेदन है कि किसानों को लाभ मिले, आपके सहयोग से लाभ मिले. माननीय मंत्री जी आप यह भगवान से प्रार्थना करें कि पानी गिरे, अगर पानी नहीं गिरा और अवर्षा होगी, तो कम से कम आप ऐसी नीति बनायें कि किसानों को आने वाले समय में लाभ दे सकें. हम यहां अच्‍छा भाषण दे सकते हैं, बहुत सारे हमारे साथी अच्‍छा बोलते हैं, लेकिन कम से कम उनके लिये अच्‍छी नीति बने और एक चीज यह है कि मंडी चुनाव हो, क्‍योंकि किसानों का प्रतिनिधित्‍व मंडी में होता है और मंडी में चुनाव नहीं हो रहे हैं, तो कम से कम यह सरकार मंडियों में किसान भाईयों के प्रतिनिधित्‍व के लिये चुनाव करायें, यही मेरी मांगे हैं, जय जवान, जय किसान.

            श्रीमती झूमा डॉ.ध्‍यान सिंह सोलंकी (भीकनगांव)—माननीय सभापति महोदय, मैं मेरी बात को बहुत ही सीमि‍त समय में पूरा करूंगी. प्रदेश में किसानों को खरीफ फसल हेतु खाद बीज नहीं मिलने और अवर्षा से उत्‍पन्‍न स्थिति के संबंध में बहुत ही महत्‍वपूर्ण विषय से संबंधित आज चर्चा लाई गई, मैं अध्‍यक्ष महोदय को बहुत धन्‍यवाद करूंगी कि प्रतिपक्ष नेता जी के इस विषय को उन्‍होंने शामिल किया. सभापति महोदय, सरकार किसान समृद्धि कल्‍याण के दावे करती है लेकिन प्रदेश के किसान एमएसपी की खरीदी और खाद की उपलब्‍धता और उसके बाद नुकसानी में मुआवजा हासिल करना और कर्ज के संकट से जूझ रहा है, इससे इंकार नहीं कर सकते कि किसान खुलहाली का जीवन जी रहा है. बढ़ती लागत और घटती आय से खेती की जितनी फसलें हैं वह सब घाटे की ओर जा रही हैं और किसान और नीचे की ओर धकेला जा रहा है और उसकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है. अभी खाद की बात करें, टोकन व्‍यवस्‍था ई फार्मर आईडी, ई फार्मर आईडी बनाने के लिये किसानों ने जो पसीना बहाया है, शायद खेतों में नहीं बहाया होगा इतना उसको इस ई फार्मर आईडी में बहाना पड़ा, वह भी उसकी मियाद दो दिन या तीन दिन, चूंकि हमारा खरगोन जिला ग्रामीण है और वन ग्राम भी है तो वनग्राम होने की वजह से वन विभाग से भी उनको अनुमति लेना पड़ी तो आप सोच सकते हैं वन‍ विभाग की अनुमति, फिर पटवारी के पास जाइये, फिर तहसीलदार के पास जाइये हमने तो यहां तक किया कि केम्‍प लगाया और केम्‍प में उनको एक तरह से ट्रेनिंग देकर उनको प्रशिक्षित किया कि इस तरह से आपको घूमना होगा तो उनका कहना यही था कि हफ्ते भर जो महत्‍वपूर्ण समय बुवाई के पहले बुवाई के बाद फसलों की देखरेख करें या खाद के लिये इस तरह से चक्‍कर लगायें तो यह व्‍यवस्‍था का सरलीकरण होना चाहिये ताकि उनको आसानी से खाद उपलब्‍ध हो जाये.

माननीय सभापति महोदय, किसानों को खाद जो मिल रहा है वह बहुत कम मात्रा में यूरिया, डीएपी, पोटास खाद की उपलब्‍धता की कमी बहुत ज्‍यादा रही और खरगोन जिले के अंतर्गत बात करें तो जितनी मांग थी उसकी तुलना में आप देख लीजिये, मेरा प्रश्‍न भी लगा है, आज ही की तारीख में लगा है तारांकित प्रश्‍न उसके जवाब जो कृषि विभाग वालों ने दिया कि खरगोन जिले के अंतर्गत तहसील भीकनगांव जो मेरी विधान सभा है यूरिया की मांग मीट्रिक टन के हिसाब से 10 हजार मीट्रिक टन है और उपलब्‍धता 792 तो आप दोनों की तुलना कीजिये कि कितनी आवश्‍यकता है और कितनी पूर्ति हो रही है और डीएपी 1871 और पूर्ति हो रही 201 मीट्रिक टन और पोटास 869 की आवश्‍यकता है और पूर्ति हो रही है 70 मीट्रिक टन तो इतनी कम उपलब्‍धता है तो मिलेगा कहां से. सभापति महोदय, यह सच्‍चाई है इससे किसी को भी इंकार नहीं करना चाहिये तो दोनों में काफी अंतर है. इसकी उपलब्‍धता सही हो और दूसरा मूंग की खरीदी, मूंग चूंकि गर्मी में किसान ज्‍यादा उत्‍पादन कर रहा है और उसकी भी खरीदी के लिये मध्‍यप्रदेश में लगभग 18 लाख मीट्रिक टन मूंग का उत्‍पादन हो रहा है यह सरकार का कहना है और खरीदी देखी जाये तो 85 किलो प्रति एकड़ के हिसाब से तो यह तो बहुत कम है. हर किसान मूंग की अच्‍छी खेती कर रहा है उसमें 5 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ की उसकी उत्‍पादन क्षमता है और खरीदी इतनी कम हो रही है तो किसान जितना उत्‍पादन करता है उतनी खरीदी जाये, ऐसा मैं कहना चाह रही हूं.

 

5.19 बजे             (अध्‍यक्ष महोदय, श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर पीठासीन हुये)

 

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब अवर्षा की स्थिति आती है तो किसान सिंचाई परियोजना की ओर देखता है कि यदि यह पूर्ण होती हैं तो निश्चित ही हमारी फसलों की पूर्ति हो जायेगी, किंतु उत्‍पादन बढ़ाने के लिये सिंचाई परियोजना का समय पर पूर्ण नहीं होना यह भी एक बहुत बड़ा दुखदायी है. मेरे ही क्षेत्र में बिंजनवाड़ा योजना वर्ष 2021 से चालू है, आज वर्ष 2026 हो गया और वर्ष 2027 आने वाला है, आज भी किसान राह देख रहा है कि हमको सिंचाई का पानी कब मिलेगा तो इन योजनाओं पर भी हम सबको मिलकर ध्‍यान देना होगा कि जो समय सीमा निर्धारित है उस समय सीमा में वह पूरी हो और क्षेत्र में कृषि विभाग की जितनी भी योजनायें हैं उसकी पूर्ति किस तरह से, अध्‍यक्ष महोदय मैं आपको बताना चाह रही हूं कि मेरी तहसील में परंपरागत कृषि विकास योजना 600 का लक्ष्य हैं किन्तु हकीकत में उसकी पूर्ति जीरो है.प्राकृतिक रूप से खेती करने के लिये भी कोशिश तो विभाग से की जा रही है.536 ऐसी मांगें हैं जो पूर्ति होनी चाहिये पर उसकी पूर्ति जीरो है.इसी तरह आत्मनिर्भर दलहन मिशन यह भी एक योजना है कृषि विभाग की जो 8022 है किन्तु लक्ष्य तो इतना है किन्तु उसकी पूर्ति जीरो है. नलकूप खनन भी है किन्तु लक्ष्य जितना है किसान को उसकी जीरो उपलब्धता है. आत्मा परियोजना में भी किसानों की योजनाएं हैं. 40 के लगभग लक्ष्य है तो उसकी पूर्ति जीरो है. अध्यक्ष महोदय, आप भी कृषि विभाग के मंत्री रहे हैं अच्छे से आपने देश को समझा है कि किसानों की अच्छी हालत करने के लिये क्या-क्या करना चाहिये. मैं अपनी ओर से दो-तीन सुझाव देना चाहूंगी. खरगोन जिले में मिर्ची मंडी जो एशिया में सबसे बड़ी मंडी मानी जाती है और मिर्ची का उत्पादन काफी बड़ा होता है.उत्पादन के साथ-साथ इसको फसल में लिया जाए. मसालों में लेने के कारण इसका फायदा उनको नहीं मिल रहा है. बीमे की बात करें जो अभी इस बार राशि बढ़ा दी है. प्रति एकड़ 1400 रुपये किसान के पास एक भी रूपया देने को अभी नहीं है और फसल का बीमा कब करवाएगा इसीलिये इस राशि को कम किया जाये ताकि उनको राहत मिले और किसानों की राहत के लिये चूंकि पहले माननीयों ने कह दिया है कि बिजली बिल माफ हो. मैं अपनी ओर से कहती हूं कि कर्ज माफी भी होनी चाहिये. वह एक बहुत बड़ी राहत मिलती है. माननीय कमलनाथ जी ने बहुत हिम्मत और क्षमता के साथ उन्होंने पूरे प्रदेश के किसानों के कर्ज माफ किये हैं और उनकी फसलों के सही दाम मिलें.चूंकि सचिन यादव जी ने बता दिया.दल निश्चित हों. कृषि वैज्ञानिक भी इसमें शामिल हों. किसान भी हों अधिकारी भी हों और सभी हमारे जनप्रतिनिधि हों और उनकी जितनी भी फसलें हैं उनकी जो लागत है कितना खर्चा आ रहा है और उसकी आमदनी को कैसे बढ़ाया जाये इसके लिये लागत के मूल्य का निर्धारण यह दल द्वारा किया जायेगा तो निश्चित ही हमारे देश का किसान जो अन्नदाता है तो देश को सोने की चिड़िया बनाने का स्वप्न जो हम देखते हैं तो किसानों की अहम् भूमिका उसमें रहेगी तो उनको समृद्ध बनाने के लिये उनको अधिकार देना चाहिये और मैं यह भी कहती हूं कि यह सदन जो चल रहा है यह  3 घंटे का या 5 घंटे का समय नहीं यह तो 5 या एक हफ्ते भर का सदन एक बार सिर्फ किसानों के लिये ही सत्र घोषित करें ताकि सारी बातों पर चर्चा हो सके. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया इसके लिये बहुत-बहुत धन्यवाद.

          नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) - माननीय अध्यक्ष महोदय,एक सुझाव जो बहन हमारी सदस्या ने दिया है कि जब किसान वर्ष हो सकता है तो किसान का एक सत्र भी तो हो सकता है तो इस पर आप थोड़ा ध्यान दें.

          अध्यक्ष महोदय - अच्छा सुझाव है.

          संसदीय कार्य मंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय) - सुझाव अच्छा है इसके ऊपर क्रियान्वयन हो उसके पहले सुधार कर लीजिये.इसको थोड़ा जरा समय को कम कर दीजिये क्योंकि तब हमें दिन भर का समय मिलेगा जब हम करेंगे तो उस समय विस्तार से चर्चा कर लेंगे. अभी जरा कम कर दीजिये.

          अध्यक्ष महोदय - सुरेश राजे जी. नेता प्रतिपक्ष को ठीक 6 बजे बोलना है और सब आप लोग ही बोलने वाले हो. इसीलिये सभी सदस्यों से मेरा अनुरोध है 2-2 मिनट में अपनी बात पूरी करें.

          श्री सुरेश राजे(डबरा) - जी अध्यक्ष महोदय,इस महत्वपूर्ण चर्चा में मुझे आपने बोलने का अवसर दिया इसके लिये धन्यवाद. वैसे इस महत्वपूर्ण विषय को लेकर काफी चर्चा हो चुकी है लेकिन महत्वपूर्ण विषय तो दो-तीन ही हैं. सबसे पहले कि जब सरकार ने ई टोकन व्यवस्था लागू की तो पहले इसकी तैयारी करनी चाहिये थी. बगैर तैयारी के यह व्यवस्था लागू कर दी. बिना तैयारी के यह व्यवस्था लागू कर दी.उसके दुष्परिणाम यह हैं कि डबरा के किसान को खाद की जो उपलब्धता दिखाई जा रही है कि वह घाटीगांव लेने जाए दूसरी तरफ डबरा  के किसान को दिखाई जा रही है कि मुरार क्षेत्र में लेने जाएं तो यह व्यवस्था इस कारण हुई कि पहले इन्होंने इसको व्यवस्थित नहीं किया सीधे लागू कर दिया अब जो हो गया है कम से कम जो किसान दर-दर भटक रहे हैं. अब तो उसमें सुधार किया जा सकता है. आने वाले समय में हम इस व्यवस्था को इतना दुरुस्त करें कि कितने हमारे किसान कहां-कहां किस-किस कारण से परेशान हुए, इस सबकी जानकारी लेकर व्यवस्था में सुधार करें.

          अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से दूसरा मेरा अनुरोध यह है कि टोकन व्यवस्था आपने लागू कर दी, कोई बात नहीं, सरकार का कहना है और हमारे तमाम बंधुओं ने भी कहा कि  आने वाले समय में अच्छी व्यवस्था लागू हो सकती है. अभी क्या-क्या कमियां रही हैं, क्या हम उन्हें दूर करेंगे. क्या सरकार उस पर विचार करेगी, मुझे लगता है कि करना चाहिए. तीसरा, यूरिया, जब किसान को यूरिया की जरूरत है तो यूरिया की जगह उससे कहा जाता है कि ये बोतल भी ले लो, ये पोटाश का पैकेट भी ले लो, अध्यक्ष महोदय, उसको जरूरत है यूरिया की, उसके पास इतना पैसा ही नहीं है, वह टोकन लेकर दुकान पर पहुँचता भी है, या जिस जगह उसे भेजा जा रहा है, तो उसके पास पैसे नहीं हैं, वह लौट कर आ रहा है और जैसे ही वह लौट कर दूसरे दिन जाता है तो उससे कह दिया जाता है कि तुम्हारा समय निकल गया. अब अगला समय जब आएगा, तब देखना. इस व्यवस्था पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना ही चाहिए क्योंकि यह अन्नदाता से संबंधित विषय है. इधर हम कह रहे हैं कि अन्नदाता की आय दुगुनी करेंगे तो वह आय दुगुनी होगी कैसे. समय पर उसको खाद नहीं मिलेगा, समय पर उसको बिजली नहीं मिलेगी, समय पर उसको पानी नहीं मिलेगा, समय पर उसको कीटनाशक दवाएं, जो उपलब्ध होनी चाहिए, वह मार्केट में नहीं मिलेगी तो उनकी आय कैसे दुगुनी होगी. यह बहुत गंभीर विषय है. मेरा ऐसा मानना है कि सरकार को इस पर गहन चिंतन करना चाहिए.

          अध्यक्ष महोदय, दूसरा विषय बिजली का है. बगैर बिजली के अब खेती संभव नहीं है. बिजली के खंबे टेढ़े हैं, झुके हुए हैं, बरसों पुराने तार हैं. 25 साल तो इस सरकार को ही होने जा रहे हैं. 25 साल पहले के जो तार हैं, वे झूम रहे हैं, लटक रहे हैं या खंबे झुके हुए हैं. इस ओर भी मुझे लगता है कि सरकार को ध्यान देना चाहिए.

          अध्यक्ष महोदय, अंतिम बात, मैं आपका इशारा समझ गया. मैं बस क्षेत्र की बात जरूर रख दूँ. कृषि मंत्री महोदय भी बैठे हुए हैं. मैं समझता हूँ कि डबरा, ग्वालियर, मुरैना, आपके भी दिल के उतने ही करीब है, जितने हमारे करीब है. कृषि उपज मण्डी की स्थिति किसी से छिपी नहीं है. सब कुछ है, संसाधन है, कृषि उपज मण्डी के पास पैसा है. कृषि विभाग के पास भी पैसा है, लेकिन अध्यक्ष महोदय, सन् 2000 से लेकर आज तक उस मण्डी का पूरी तरह से पक्कीकरण नहीं किया गया है. इस कारण जगह है, जगह की उपलब्धता है, लेकिन वह पक्की न होने के कारण ट्रैक्टर ट्रालियां व्यवस्थित लगती नहीं हैं और वहां पर जाम की स्थिति बनती है. मैं अंतिम बात कहकर अपनी वाणी को विराम दूंगा कि बगल में कृषि उपज मण्डी से लगा हुआ हमारा महाविद्यालय है. जब-जब जाम की स्थिति बनती है तो हमारे महाविद्यालय की बाउण्ड्री को तोड़ दिया जाता है. तोड़ता कौन है, कृषि उपज मण्डी तोड़ती है. जो नौनिहाल हैं, जिनका खेलने का ट्रैक है, वह पूरा का पूरा हर बार चौपट कर दिया जाता है. यह बहुत बड़ी समस्या वहां पर है. हमारे बच्चे जो ट्रैक पर प्रैक्टिस करते हैं, वे बड़ी दिक्कत में हैं. मैंने पिछले सत्र के दौरान भी आपके माध्यम से सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया था कि महाविद्यालय की भूमि और कृषि उपज मण्डी की भूमि, अगर पुरानी कृषि उपज मण्डी में उस महाविद्यालय को ले जाया जाए और ये पूरी भूमि जो महाविद्यालय की है, अगर एक कैम्पस बना दिया जाए तो जीवन भर के लिए वह समस्या खत्म हो जाएगी. जाम से भी निजात मिल जाएगा. इतना ही मेरा निवेदन है. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया. इसके लिए धन्यवाद.

 

05.30 बजे                       सदन के समय में वृद्धि विषयक

          अध्यक्ष महोदय नियम 139 के अधीन चर्चा पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाए, मैं समझता हूँ सदन इससे सहमत है.

(सदन द्वारा सहमति दी गई).

          श्री भैरो सिंह (बापू) (सुसनेर) --  माननीय अध्यक्ष महोदय, किसान और कृषि के ऊपर खाद से लेकर, बीज से लेकर, दवाई से लेकर, बीमा से लेकर और मुआवजे तक की बात आज इस सदन के अंदर सभी साथियों ने की. लेकिन मैं आपके माध्यम से सरकार से यह निवेदन करना चाहूँगा कि किसान को सरकार की भीख नहीं चाहिए. न बीमा चाहिए. न मुआवजा चाहिए. न विद्युत पर सब्सिडी चाहिए. अगर हमारे मध्‍यप्रदेश के किसान की स्थिति ठीक करने के लिए आज आवश्‍यकता है कि किसानों के खेतों को सिर्फ खेती करने के लिए न माना जाकर उनको ऊर्जा फैक्‍ट्री के रूप में स्‍वीकार किया जाना चाहिए. यदि सरकार किसानों को देश का ऊर्जादाता स्‍वीकार कर लेती है, तो किसान की आय दोगुनी करने की जो सोच है, वह बहुत जल्‍द पूरी हो जायेगी. यदि सरकार किसानों के खेत को सोलर पैनल से जोड़ दे और उनसे बिजली खरीद का कांट्रेक्‍ट कर ले और हर खेत बिजली उत्‍पादनकर्ता हो जायेगा.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दुर्भाग्‍य की बात है कि देश में वह लोग बिजली उत्‍पादन कर रहे हैं, जिनके पास न जमीन है, न जिनके पास मैनपॉवर है, न ही खुद की पूंजी है. वह किसान जिनके पास जमीन भी हैं और मैनपॉवर भी है, वह गरीबी की दलदल में गिरता चला जा रहा है. अदाणी किराये की जमीन लेकर बाजार से पैसा उधार लेकर किराये के आदमी लगाकर यदि सौर ऊर्जा से पैसा कमा सकता है, तो फिर एक साधारण किसान बिना दूसरे की जमीन किराये पर लिये अपनी जमीन इस्‍तेमाल कर, बिना किसी दूसरे व्‍यक्ति की सहायता के अपने स्‍वयं के श्रम से बिजली उत्‍पादन का लाभ क्‍यों नहीं उठा सकता ? यह एक बहुत ही सोचनीय प्रश्‍न है. मेरा सुझाव है कि यदि सरकार शुरुआती चरण में बड़े शहरों के आसपास के गांवों में और सौर ऊर्जा का प्‍लान किसानों को दे और उनके साथ शत-प्रतिशत बिजली खरीदी का एग्रीमेंट कर ले, तो शहर के आसपास वाले गांव अपने आप ही ऊर्जादाता हो जायेंगे. इसलिए सरकार को सस्‍ती दरों पर बैंकों से लोन की व्‍यवस्‍था करनी पड़ेगी, जैसे वह अन्‍य उद्योगों के लिए करती है. अपना पैसा सुरक्षित करने के लिए सरकार किसान के खेत को मॉरगेज भी कर सकती है, जैसे किसान क्रेडिट कार्ड में किया जाता है. इसके अन्‍य लाभ भी होंगे, जैसे बिजली बचेगी, इससे बड़ी बात यह है कि ग्रीन एनर्जी की तरफ हमारा एक बहुत बड़ा कदम होगा. उससे भी बड़ी बात बैंकों का पैसा शत-प्रतिशत सुरक्षित रहेगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार की एक पीएम कुसुम योजना है, लेकिन उसकी प्रक्रिया बहुत जटिल है. एक आम किसान कुसुम योजना का लाभ नहीं ले पा रहा है. ऐसी योजना को अगर किसानों तक सरकार सुगम तरीके से पहुँचाये तो शायद किसानों की आय तीन गुना हो सकती है. एक पॉपुलर नाम का पेड़ आता है, उससे ऑक्‍सीजन भरपूर मात्रा में पैदा होती है. हरियाणा, पंजाब, उत्‍तराखंड हर जगह पॉपुलर अपनी ऊपजाऊ खेती के लिए किसान लगाता है. अगर मध्‍यप्रदेश सरकार, चाहे तो वन विभाग के माध्‍यम से, चाहे किसी अन्‍य डिपार्टमेंट के द्वारा अगर पॉपुलर के पौधों की खेती मध्‍यप्रदेश में की जाये, तो जो किसान आज एक लाख रुपये कमाता है, उसकी आय डायरेक्‍ट तीन गुना होगी. एक बीघा में 200 पौधे लगते हैं. मैंने स्‍वयं ने हरियाणा राज्‍य में सर्वे किया है और देखा है. एक बीघा में 200 पौधे लगते हैं, 7 वर्ष के अन्‍दर. एक पौधा कम से कम 35 हजार रुपये में बिकता है. एक बीघा में 200 पौधे लगे, तो किसान की एक बीघा की अगर 7 वर्ष की आय को जोड़ें, तो 7 लाख रुपये हो गई. नहीं तो किसान कितनी ही मेहनत कर ले, 7 वर्ष के अन्‍दर एक बीघा जमीन से 2 लाख रुपये से ज्‍यादा नहीं कमा सकता है. अगर उसको ओलावृष्टि हो गई, तो सरकार के माथे आ गया, सरकार को मुआवजा देना पड़ेगा, बीमा देना पड़ेगा, आपको न तो उसमें खाद देना है, न ही बिजली देनी है. जहां-जहां पर्याप्‍त पानी है, हमारे मालवा में इसको सफेद पीपल बोलते हैं. मैं आपके माध्‍यम से, सरकार से यह मांग करूँगा कि किसानों को पॉपुलर की खेती की तरफ आकर्षित करें,ताकि किसान समृद्ध बनें और यही मैं आपसे निवेदन करना चाहूँगा. अगर हम किसानों की आमदनी बढ़ाना चाहते हैं, तो किसानों के लिए आपको यह करना पड़ेगा. आप चाहें सोलर की तरफ ले जायें तथा पॉपुलर की तरफ ले जाएं. जहां-जहां पानी है, वहां पर पॉपुलर की खेती होती है,पॉपुलर पौधे की 50 तरह की किस्‍म होती है. मैं सर्वे करके आया हूँ, आप मुझे आदेश देंगे, तो मैं जाऊँगा. अगर यह हुआ तो इससे ऑक्‍सीजन भरपूर मात्रा में हमारे क्षेत्र के अन्‍दर होगी. धन्‍यवाद.          

          श्रीमती सेना महेश पटेल (जोबट)-  अध्‍यक्ष महोदय, आज किसान, अन्‍नदाता के बारे में बोलने का अवसर मिला है, मिट्टी को सोना बनाने वाला आज खुद कर्जदार है जो पूरे देश का पेट भरता है, वही आज सबसे ज्‍यादा भूखा है. सरकार कहती है किसान खुशहाल है, लेकिन खेत कुछ और ही कहानी कहता है, अन्‍नदाता के आंसू अब प्रदेश की सियासत से सवाल करते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, आज इस सदन में केवल जोबट विधान सभा, अलीराजपुर जिले की नहीं, अपितु पूरे प्रदेश के करोड़ों किसानों की आवाज उठाने के लिए खड़ी हूं. जिसके दम पर प्रदेश की अर्थव्‍यवस्‍था चलती है. जिसके पसीने से खेती होती है, जिनकी मेहनत से देश का पेट भरता है लेकिन दुर्भाग्‍य है कि आज वही किसान सबसे अधिक परेशान है, सबसे अधिक कर्जदार है और उपेक्षित है.

          अध्‍यक्ष महोदय, सरकार कृषि विकास दर के आंकड़े बताती है. रिकॉर्ड उत्‍पादन की बात करती है, किसान सम्‍मान निधि का प्रचार करती है लेकिन मैं पूछना चाहती हूं कि यदि किसान इतना ही खुशहाल है तो वह खाद की लाईन में क्‍यों खड़ा है ? टोकन के लिए दर-दर क्‍यों भटक रहा है ? फसल के उचित मूल्‍य के लिए संघर्ष क्‍यों कर रहा है और कर्ज के बोझ में दबकर आत्‍महत्‍या क्‍यों कर रहा है ? किसान चारों तरफ से स्‍वयं को असहज महसूस कर रहा है. किसान को खाद और बीज का संकट है, बारिश और सूखे का संकट है, उपज के उचित मूल्‍य का संकट किसान है. वह कर्ज और आर्थिक बर्बादी का बोझ झेल रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय, इस समय प्रदेश का किसान खाद के लिए परेशान है. किसान द्वारा DAP की मांग की जाती है, पर वह उपलब्‍ध नहीं है, यूरिया की मांग की जाती है लेकिन पर्याप्‍त मात्रा में नहीं है. कई जगह किसानों को उनकी आवश्‍यकता की खाद देने के बजाए, सिंगल सुपर फॉस्‍फेट (SSP) और अन्‍य खाद जबरन दिया जाता है.

          अध्‍यक्ष महोदय, किसान कह रहा है कि मुझे DAP चाहिए लेकिन व्‍यवस्‍था कहती है कि पहले यह खाद लो, फिर वह खाद मिलेगी. मैं पूछना चाहती हूं क्‍या कृषि वैज्ञानिक की सलाह से खेती होगी या अधिकारी की मनमानी से ? क्‍या सरकार बतायेगी कि किसानों को खाद उपलब्‍ध करवाने में बाधा क्‍यों आ रही है ? खाद की कालाबाजारी और किसानों के शोषण की शिकायत प्रदेश के कई हिस्‍सों से आती है जबकि बिचौलिये और निजी खाद विक्रेताओं के पास खाद का पर्याप्‍त स्‍टॉक होता है. किसान सुबह 4 बजे लाईन में लगता है, पूरे दिन के बाद शाम को जवाब मिलता है कि स्‍टॉक समाप्‍त हो गया है, उस समय किसान की पीड़ा वही जानता है. क्‍या यही किसान का सम्‍मान है ? टोकन व्‍यवस्‍था भी किसान की समस्‍या है. जब किसी तरह किसान फसल तैयार कर लेता है तो उसकी नई परीक्षा शुरू होती है. उसे अपनी उपज बेचने के लिए टोकन चाहिए, टोकन नहीं तो खरीदी नहीं, खरीदी नहीं तो भुगतान नहीं और भुगतान नहीं तो अगली फसल नहीं.

          अध्‍यक्ष महोदय, किसान कई दिनों तक टोकन का इंतजार करता है और सर्वर बंद रहता, पोर्टल बंद रहता, स्‍लॉट समाप्‍त हो जाता है, ये शब्‍द आज किसानों के जीवन का हिस्‍सा बन गए हैं.

          अध्‍यक्ष महोदयकृपया समाप्‍त करें.

          श्रीमती सेना महेश पटेलअध्‍यक्ष महोदय, आज किसान खेती करे या कंप्‍यूटर ऑपरेटर और पोर्टल के चक्‍कर लगाये. गेहूं खरीदी में भ्रष्‍टाचार हुआ है. अभी तक पता नहीं चला इसलिए इसकी SIT से जांच होनी चाहिए. एक तरफ असली किसान टोकन पंजीयन के लिए परेशान है, दूसरी ओर फर्जी खरीदी, फर्जी भुगतान, फर्जी रकबा के मामले सामने आते हैं. अगर सरकारी व्‍यवस्‍था इतनी पारदर्शी है तो बार-बार उपार्जन के घोटाले क्‍यों सामने आ रहे हैं ? किसान को न्‍याय मिलना चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय, किसानों को समय पर बिजली नहीं मिलती है. खरीफ हो या रबी की फसल हो किसान को रात को 12 बजे, 2 बजे  बिजली दी जाती है. हम सभी जब आराम करते हैं, तब किसान खेत में काम करता है.

          अध्‍यक्ष महोदय, हमारे क्षेत्र में ट्रांसफार्मर की बहुत जरूरत है. खंबे नहीं है. बिजली नहीं है, ट्रांसफार्मर नहीं है, खेती लाभ का धंधा कैसे बनेगी. मोटरें चल नहीं पाती हैं, सिंचाई प्रभावित होती है और सरकार कहती है कि किसान खुशहाल है. मेरी सरकार से मांग है. मैं इस सदन के माध्‍यम से मांग करती हूं कि अलीराजपुर सहित कम वर्षा वाले सभी जिलों का तत्‍काल सर्वे करवाया जाए. प्रभावित क्षेत्रों में तत्‍काल सूखाग्रस्‍त घोषित किया जाए. किसानों को प्रति हेक्‍टेयर पर्याप्‍त मुआवजा दिया जाए. कृषि ऋण की वसूली पर तत्‍काल रोक लगाई जाए. किसानों के ब्‍याज माफ किये जाएं. डीएपी और यूरिया की पर्याप्‍त उपलब्‍धता सुनिश्चित की जाए. किसानों पर जबरदस्‍ती खाद थोपना बंद किया जाए. खाद की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाए. टोकन व्‍यवस्‍था का सरलीकरण किया जाये. आपने बोलने का समय दिया धन्‍यवाद.

          श्री साहब सिंह गुर्जर (ग्‍वालियर)माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से प्रदेश के अन्‍नदाता किसानों की पीड़ा इस सदन के सामने रखना चाहता हूं. जय जवान जय किसान कहते हुए मैं कहूंगा कि खरीफ की फसल का सीजन चल रहा है. खेत तैयार हैं, किसान तैयार हैं, लेकिन सरकार तैयार नहीं है. प्रदेश के किसान खाद और बीज के लिए घंटों नहीं बल्कि कई-कई दिनों तक भटक रहे हैं. सहकारी समितियों के बाहर लंबी कतारे लगी हैं, लेकिन किसानों के हाथ खाली हैं. सरकार बड़े-बड़े विज्ञापन देकर किसानों की चिंता करने का दावा करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान खाद और बीज के लिए परेशान है. कई स्‍थानों पर कालाबाजारी की शिकायतें हैं. किसानों को अधिक कीमत पर खाद खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है. इस अव्‍यवस्‍था की जिम्‍मेदारी कौन लेगा. जब बुवाई का समय निकल जाएगा तब सरकार की घोषणाएं किसानों के किसी काम नहीं आएंगीं. किसान को भाषण नहीं खाद और बीज चाहिए. खेत में फसल तभी लहलहाएगी जब सरकार व्‍यवस्‍था को लहलहाने देगी. मिट्टी में पसीना मिलाकर जो रोटी पैदा करते हैं वही किसान आज व्‍यवस्‍था से सवाल करते हैं. अध्‍यक्ष महोदय, मैं सरकार से मांग करता हूं कि सभी जिलों के खाद और बीज की पर्याप्‍त उपलब्‍धता सुनिश्चित की जाए.

          श्री कैलाश विजयवर्गीयमेरा अनुरोध है कि जो लिखा हुआ भाषण पढ़ रहे हैं उनका भाषण आप पटल पर रखवा लीजिए उससे समय की बचत होगी.

          अध्‍यक्ष महोदयगुर्जर जी आप शीघ्रता कीजिए.

          श्री साहब सिंह गुर्जरजब विजयवर्गीय जी ने बोल ही दिया है तो उनके लिए मैं कह देता हूं कि मैं समय लूंगा. आदरणीय विजयवर्गीय जी अपनी कला से सदन को उलझा देते हैं और आदरणीय पटेल साहब अपनी कला से सदन को सुलझा देते हैं, हमारे नेता प्रतिपक्ष जी सदन का श्रृंगार कर देते हैं और माननीय मुख्‍यमंत्री जी अपनी मुस्‍कुराहट से सदन को महका देते हैं. सभी जिलों में खाद और बीज की पर्याप्‍त उपलब्‍धता, कालाबाजारी और जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्‍त कार्यवाही की जाए. सहकारी समितियों और वितरण केन्‍द्रों पर पारदर्शी व्‍यवस्‍था लागू की जाए. किसानों को समय पर खाद बीज उपलब्‍ध कराया जाए. प्रदेश का किसान परेशान है किसान को केवल दावे नहीं बल्कि जमीन पर व्‍यवस्‍था सुधारने के लिए तत्‍काल कदम उठाने चाहिए. सीने पर धूप, पैरों तले तपती रेत रखता है फिर भी किसान पूरे देश का पेट भरता है. धरती माता का सीना चीरकर फसल ऊगाने का काम किसान करता है देश की सीम पर प्राणों की न्‍योछावर देता है वह कोई ओर नहीं वह किसान का बेटा है जिसे हम जवान कहते हैं इसलिए हम जय जवान, जय किसान का नारा देते हैं. आपने बोलने का मौका दिया धन्‍यवाद.

          श्री दिनेश जैन (बोस) (महिदपुर)माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे किसान जैसे विषय पर बोलने का मौका दिया उसके लिए धन्‍यवाद. इस वर्ष किसान कल्‍याण वर्ष मनाया गया. मुझे ज्‍यादा नहीं बोलना है केवल विषय पर बोलना है और तार्किक बोलना है क्‍योंकि बार-बार हमें टोक दिया जाता है तो आज यह विषय बहुत बड़ा है कि कल्‍याण किसका हुआ. मैंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बोर्ड से कुछ आंकड़े लिये तो मुझे तो ऐसा लगा कि किसान का नहीं बीमा कंपनियों का कल्‍याण हो गया. मध्‍यप्रदेश में टोटल 22 लाख 9 हजार 534 किसानों ने बीमा किया. किसानों की प्रीमियम 273 करोड़ रुपये किसानों ने अपने 2 प्रतिशत के हिसाब से जमा की थी और भारत सरकार ने 4 प्रतिशत के हिसाब से 356.61 करोड़ रुपए जमा किए. मध्यप्रदेश सरकार ने दिया 356 करोड़ रुपए. इस प्रकार कुल 985.70 लाख रुपए हो गया. यह प्रीमियम बीमा कम्पनी को मिला. किसानों को दिया गया केवल 97.92 लाख रुपए. करीब 90 करोड़ रुपए के आसपास बीमा कम्पनी फायदे में है. हम किसान कल्याण मना रहे हैं. मेरे हिसाब से तो यह बीमा कम्पनी कल्याण होना चाहिए. किसान का कल्याण नहीं हुआ है, यह आंकड़े आपके ही हैं. यह आंकड़े मैंने प्रधानमंत्री फसल बीमा बोर्ड से लिए हैं. 2 प्रतिशत किसान, 4 प्रतिशत भारत सरकार और 4 प्रतिशत प्रदेश सरकार भरती है. उज्जैन जिले में इफको-टोकियो नाम की बीमा कम्पनी है वह हर छह महीने में 250 करोड़ रुपए कमाती है. मैं बार-बार इसके बारे में विधान सभा में प्रश्न उठाता हूँ. यह कम्पनी आंकड़ों के साथ यह पैसा कमाती है. यहां किसानों का कल्याण कहां हो रहा है. यह तो बीमा कम्पनी का कल्याण हो रहा है. बीमा मिलता कैसे है. आप राहत राशि देते हैं, सर्वे होता है. फसल खराब हुई तो आपने किसान को राहत राशि दी. अभी किसानों एक हेक्टेयर पर 5 हजार रुपये आपदा प्रबंधन कोष से राहत राशि दी गई तो फिर उसे बीमा क्यों नहीं दिया. केवल 97 करोड़ रुपए का बीमा बांटा और 985 करोड़ रुपए बीमा कम्पनी ने वसूल लिए. इस बीमा कम्पनी से क्या सांठगांठ है. यह इतना पैसा कमा लेती है, कोई इस बारे में नहीं बोलता है. जब सर्वे हुआ है और आपदा प्रबंधन कोष से एक हेक्टेयर पर 5 हजार रुपए मिले हैं. अगर किसान को राहत राशि मिली है तो किसान को बीमे की राशि भी मिलना चाहिए यह उसका अधिकार है.

          श्री भंवरसिंह शेखावत कैलाश जी सुन लीजिए आप पुरानी कैसेट कह रहे थे. कितना पैसा बीमा कम्पनियां लूट कर चली गई हैं और किसान को लूट लिया है. हमारे विधायक महोदय क्या बोल रहे हैं जरा सुन लीजिए फिर बोलोगे पुरानी कैसेट चलती है. क्या करें पुरानी कैसेट नहीं चलाएं तो.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) नहीं, यह तो नई वाली कैसेट है वह तो मैंने आपके लिए बोला था. (हंसी)

          श्री दिनेश जैन अध्यक्ष महोदय, मैं तार्किक और आंकड़ों के साथ बोल रहा हूँ. अब मैं एमएसपी पर बोलना चाहता हूँ. एमएसपी पर सरकार तारीख पर तारीख देती है. तारीख के पहले जो अनाज कम भाव पर बिक जाता है उस पर सरकार का क्या कोई लेना देना नहीं है. अभी 2000, 1800 और 1700 रुपए में गेहूं बिक गया और तारीख पर तारीख मिलती रही. एमएसपी के लिए कानून तो नहीं बना है लेकिन आपकी एमएसपी पर जवाबदारी है कि सरकारी एजेंसियों से अनाज तुलवाएं, लेकिन उनको खुला छोड़ दिया जाता है. व्यापारी उनको लूट लेते हैं. इस प्रकार व्यापारियों का कल्याण हो रहा है. किसान का कल्याण नहीं हुआ है. इसी तरीके से अभी बापू बता रहे थे कि KUSUM ABC. K for किसान, U for उर्जा, S for सुरक्षा, U for उत्थान M for महाअभियान. किसान ऊर्जा सुरक्षा उत्थान महाअभियान. लेकिन मैं ग्यारंटी के साथ कहता हूँ कि कुसम ए, कुसम बी और कुसुम सी तीनों में केवल एक प्रतिशत किसानों की भागीदारी है. 1500 मेगावॉट दिलीप बिल्डकॉन ले गए, 150 मेगावॉट विक्रम एसोसिएट ले गए. एक भी किसान ने उसमें भाग नहीं लिया है. जबकि कुसम ए, कुसम बी और कुसुम सी सरकार की योजना है. किसानों के लिए बनी है, किसानों के उत्थान के लिए बनी है. किसानों की सुरक्षा के लिए बनी हुई है. यदि 4 से 8 बीघा किसान की बंजर जमीन है तो 0.5 से 2 मेगावॉट तक की वो बिजली डाल सकता है. लेकिन उज्जैन जिले में एक या दो किसानों को छोड़कर किसी भी किसान को इस योजना का लाभ नहीं मिला है. महाराष्ट्र में सरकार एमएसपी पर तौलती है. भावांतर क्या है, यह लॉलीपॉप है. किसानों का एमएसपी पर अनाज नहीं तौलना और भावांतर देना लॉलीपॉप है. यह किसानों के साथ न्याय नहीं है. यह किसानों के साथ अन्याय है. यह किसानों का उत्थान नहीं है, यह किसानों का कल्याण नहीं है. यह केवल उद्योगपतियों का कल्याण है. व्यापारियों का कल्याण है. यह भ्रष्टाचार की एक पूरी श्रृंखला चल रही है. मुझे आपने बोलने का मौका दिया उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.                                                  

श्री बाला बच्‍चन -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं इस संबंध में बोलने के लिए आधा मिनट का समय चाहता हूं. 

अध्‍यक्ष महोदय -- आधे मिनट के लिए तो है.

श्री बाला बच्‍चन -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने विधान सभा में प्रश्‍न लगाया था और सरकार से पूछा था कि वर्ष 2021 से 2025 तक किसानों को बीमा कंपनियों ने कितना दिया और लिया कितना, तो किसानों की जो प्रीमियम की राशि राज्‍य सरकार का हिस्‍सा, केन्‍द्र सरकार का हिस्‍सा कंपनियों ने 5 साल में 15 हजार करोड़ लिए और दिया कितना, तो बोले 5 हजार करोड़ दिया. 5 साल में 10 हजार करोड़ रुपये कंपनियों ने कमाए. यह विधान सभा का मेरे प्रश्‍न का उत्‍तर है इसलिए मैं इसको रिलेवेंट करते हुए आपको बता रहा हूं. इस पर विचार करना चाहिए और व्‍यवस्‍था में परिवर्तन होना चाहिए जिससे किसानों का फायदा हो यह हमारा आग्रह है. 10 हजार करोड़ रुपये बीमा कंपनी ने 5 साल में कमाए हैं ?

श्री हरिशंकर खटीक (जतारा) -- अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया इसके बहुत-बहुत धन्‍यवाद. हमारी सरकार को मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि प्रदेश के किसानों को खरीफ की फसल हेतु, प्रदेश में मानसून की स्थिति, किसानों के खाद, बीज और किसानों के हितों की सुरक्षा हेतु राज्‍य सरकार काम कर रही है. यह वर्ष किसानों के कल्‍याण के लिए कृषि वर्ष के रूप में हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार पूरे मध्‍यप्रदेश में मना रही है. हमारी सरकार का लक्ष्‍य है कि किसानों की आय में वृद्धि हो. समृद्ध किसान और समृद्ध प्रदेश के रूप में हमारा प्रदेश काम कर रहा है. हमारी सरकार अत्‍यंत सजगता, संवेदनशीलता और तत्‍परता के साथ किसान के हितों में काम कर रही है. किसान प्रदेश की अर्थव्‍यवस्‍था में रीढ़ की हड्डी के रूप में काम करते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय, 19 जुलाई, 2026 की स्थिति में अगर बात करें तो पूरे प्रदेश में 261.4 मिली मीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि 311.8 मि.मी. वर्षा का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया था. यानि 16 प्रतिशत कम वर्षा पूरे प्रदेश में हुई है. प्रदेश के सामान्‍य वर्षा वाले जिले 31 हैं. 19 जिले कम वर्षा वाले जिले हैं. 3 जिले अलीराजपुर, रीवा और मैहर अल्‍प वर्षा वाले जिले हैं. इसके साथ-साथ 21 जिलों में वर्षा की कमी की स्थिति आज भी है, लेकिन उम्‍मीद है कि मौसम विभाग के माध्‍यम से हम कह सकते हैं कि रीवा, छतरपुर और मैहर में भारी वर्षा की चेतावनी 20 जुलाई से 23 जुलाई, 2026 की जानकारी दी जा रही है. हमारी सरकार ने खरीफ की फसलों की बुवाई 17 जुलाई, 2026 की स्थिति में गत वर्ष 116.20 लाख हेक्‍टेयर की तुलना में 99.63 लाख हेक्‍टेयर इस वर्ष हुई है जो कि 16 प्रतिशत की कमी है. कुछ क्षेत्रों में अधिक और कुछ क्षेत्रों में कम बुवाई हुई है जो हमारे पास जानकारी आई है कि सोयाबीन जो प्रदेश की प्रमुख खरीफ फसल है उसमें 60.18 लाख हेक्‍टेयर सामान्‍य क्षेत्र के विरुद्ध  51.3 लाख हेक्‍टेयर में बुवाई हो चुकी है.

अध्‍यक्ष महोदय, धान की बुवाई की अगर बात करें तो 68.9 लाख हेक्‍टेयर के विरुद्ध 15.71 लाख हेक्‍टेयर यानि 41.25 प्रतिशत क्षेत्र में हुई है और रोपाई की प्रक्रिया जल उपलब्‍धता पर निर्भर होने के कारण अपेक्षाकृत कम है. मक्‍का की बुवाई की अगर बात करें तो 157 प्रतिशत मक्‍का की बुवाई हुई है. जबकि कपास की बुवाई 96.75 प्रतिशत हुई है. दलहन की बात करें तो 91.24 प्रतिशत से 91.83 हुई है. मूंग की अगर बात करें तो 89.27 प्रतिशत रही है. कई क्षेत्रों में अगर हम बात करें तो हमारी सरकार ने जो तैयारियां की हैं कि कम वर्षा वाले क्षेत्र कौन-कौन से हैं, उन स्‍थानों को चिह्नित किया है और विभागों की एक समिति हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने 2 जुलाई, 2026 बनाई है. भविष्‍य की चुनौतियों का सामना करने के लिए जो तैयारी मध्‍यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने की है वह हम आपके बीच में बताना चाहते हैं कि सूखे की संभावित स्थिति से निपटने हेतु पूर्व तैयारियों के संबंध में जो गहन समीक्षा बैठक की गई उसमें किसान कल्याण विभाग, जल संसाधन विभाग, राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय प्रशासन विभाग, मौसम विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, पशु पालन और डेयरी विभाग, उर्जा और सहकारिता विभाग की संयुक्त बैठक का आयोजन किया गया. इसके लिये अलग अलग विभागों को दिशा निर्देश भी सरकार की तरफ से जारी किये गये हैं.प्रतिदिन की मानीटरिंग भी विभाग द्वारा की जा रही है और 7 दिन की रिपोर्ट भी प्रदेश कार्यालय के माध्यम से दी जा रही है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मूंग, उड़द और तुवर और मौटे अनाज की फसलों को प्रोत्साहन देने के लिये भी सरकार ने नीति बनाई है. कोदो और कुटकी जहां पर कम वर्षा हुई है वहां पर कोदो और कुटकी की खेती हो उसके लिये भी सरकार ने निर्देश दिये हैं कि कोदो और कुटकी और उड़ृद की फसलों में , जहां कम वर्षा हुई है वहां पर इस तरह की फसल बोने का काम किया जाये. माननीय अध्यक्ष महोदय,  राजस्व विभाग के माध्यम से जिला तहसील स्तर पर फसल की स्थिति पर प्रतिदिन मानीटरिंग की जा रही है. सूखे और अतिवृष्टि से निपटने के लिये भी सरकार ने आपदा प्रबंधन की व्यवस्था और पूरी तैयारी की है. इसके साथ साथ प्रति सप्ताह बैठक का आयोजन किया जा रहा है उसमें पेयजल, विद्युत , जल संरक्षण, बीज एवं खाद तथा पशुओं एवं भूसा-चारे की पर्याप्त उपलब्धता व व्यवस्था सुनिश्चित की गई है. जहां तक फसल बीमा की बात करें तो पात्र किसानों को समय पर फसलों का बीमा और दावों का भुगतान किया जाये ऐसी सरकार ने चिंता की है और इसके निर्देश माननीय मुख्यमंत्री जी के द्वारा कृषि विभाग के माध्यम से दिये गये हैं. समय कम है इसलिये पाईंटेड बोल रहा हूं.

          अध्यक्ष महोदय, सरकार के पास में पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं .पूर्व से ही सारी व्यवस्थायें सरकार के द्वारा सुनिश्चित की गई हैं. यदि अल्प वर्षा या सूखे जैसी स्थिति निर्मित होती है तो उससे निपटने के लिये सरकार के पास में पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध हैं. आगे की रणनीति में जो 19 जिले जो कि कम वर्षा वाले हैं जिन दो जिलों अलीराजपुर और रीवा में कम वर्षा हुई है, उसकी तैयारी भी सरकार ने पूर्ण रूप से की है. हमारी सरकार का लक्ष्य है कि  जो 16 प्रतिशत कम वर्षा हुई है, वैसे तो वर्षा लगभग बराबरी की स्थिति में है लेकिन 99.63 प्रतिशत की जो गति के रूप में फसल बोने का काम हुआ है फिर भी सरकार उसके बाद में चिंता कर रही है कि ज्यादा से ज्यादा बुवाई हो, ज्यादा से ज्यादा किसान खेती कर सके और फसल के लिये खाद और बीज किसानों को समय पर मिल सके इसके लिये सरकार पूर्ण रूप से चिंता कर रही है.

          अध्यक्ष महोदय, हमारी सरकार ने चिंता की है कि जो भावांतर योजना है, हमारे विरोध दल के मित्र भी यहां पर बैठे हुये हैं, उनसे अनुरोध है कि भावांतर योजना के माध्यम से भी हमारी सरकार किसानों को समय पर इस योजना का लाभ प्रदान कर रही है. कितनी राशि का लाभ मिल रहा है उसके बारे में भी हमारे प्रतिपक्ष के साथियों को सारी जानकारी है लेकिन उसके बारे में सदन में यह  चर्चा नहीं करते हैं, अन्य कोदो और कुटकी जो जनजातीय क्षेत्र हैं वहां पर इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिये, प्रोत्साहन देने के लिये योजना सरकार ने बनाई है ,उसका लाभ भी बराबर दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के माध्यम से भी लाभ मिल रहा है लेकिन उसमें प्रतिपक्ष के सदस्यों के द्वारा चीना-नुक्ती की जा रही है कि ऐसा गलत हुआ है. जो अच्छा हुआ है वह बताते नहीं है, लेकिन एकाध जगह, पहली बात तो गलती हुई नहीं है लेकिन आपका काम सिर्फ आरोप लगाने का है. पराली प्रबंधन की बात करें तो 46 हजार 800 से अधिक नरवाई प्रबंधन की व्यवस्था कृषि यंत्र के माध्यम से पूरे प्रदेश में की गई है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय मध्यप्रदेश में 265 नवीन मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालायें भी प्रदेश में संचालित की जा रही हैं. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना की बात करे, तो केन्द्र सरकार और प्रदेश सरकार के द्वारा प्रत्येक किसान को चाहे वह छोटा किसान हो, चाहे वह बड़ा किसान हो, एक साल में 3 बार 2000-2000 रूपये कुल 6 हजार रूपये केन्द्र सरकार के माध्यम से और 6 हजार रूपये किसानों के सम्मान में राज्य सरकार के द्वारा यह राशि किसानों को प्रदाय की जा रही है. हम सौभाग्यशाली हैं कि मध्यप्रदेश के किसानों को समय पर खाद बीज मिल रहा है, और खाद बीज के साथ साथ जो सोसायटी के माध्यम से किसानों को ऋण मिलता है , खाद बीज लेकर के जाते हैं और वह किसान यदि समय पर राशि जमा कर देते हैं तो पहले कांग्रेस के जमाने में 18 प्रतिशत ब्याज की दर पर किसानों को कर्जा मिलता था लेकिन आज हम सौभाग्यशाली हैं, हमारे भंवर सिंह शेखावत साहब भी यहां बैठे हुये हैं हमारे बड़े भाई हैं उनको भी जानकारी है क्योंकि पहले वह हमारे साथ में बैठे थे लेकिन आज वह बोल भी नहीं सकते कि अब  मध्यप्रदेश के किसानों को जीरो प्रतिशत की ब्याज की दर पर हमारे किसानों को कर्जा देने का काम जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है तब से किया जा रहा है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय,  सरकार पूरी चिंता कर रही है कि जहां पर सूखे की स्थिति है वहां पर कैसे निपटा जाये. हर प्रकार से सरकार निर्देश दे रही है, प्रतिदिन सरकार मानीटरिंग भी कर रही है, इसके बाद भी हमारे विरोधी मित्र आरोप लगा रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, हमारा विनम्र अनुरोध है और हमारी विनम्र प्रार्थना है कि जो विषय आपने लिया  है उसके लिये आपको धन्यवाद देते हैं और आपने मुझे इस गंभीर विषय पर अपने विचार व्यक्त करने के लिये जो समय दिया उसको लिये आपको बहुत बहुत धन्यवाद.

अध्यक्ष महोदय हमने भी बहुत कोशिश की कि 6 बजे नेता प्रतिपक्ष बोल लें और नेता प्रतिपक्ष ने भी काफी सहयोग किया, लेकिन फिर भी एक वक्ता रह गये हैं श्री सोहनलाल बाल्मीक जी.

श्री सोहनलाल बाल्मीक (परासिया) अध्यक्ष महोदय, आपका बहुत बहुत धन्यवाद. आपने नियम 139 पर चर्चा करने के लिए काफी समय दिया है और सभी लोगों ने अपनी-अपनी बात रखी है और निश्चित रूप से सकारात्मक बातें हुई हैं, मगर मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि शुरुआत में जिस तरीके से बातें आई हैं किसानों को लेकर फर्टिलाइजर से चालू हुई और जैविक खेती पर आकर कई लोगों ने अपनी बात रखी है.

6.01 बजे                                अध्यक्षीय घोषणा

सदन में लॉबी में चाय की व्यवस्था संबधी

अध्यक्ष महोदय -  लॉबी में चाय की व्यवस्था की गई है तो कृपया माननीय सदस्य अपनी सुविधानुसार चाय ग्रहण कर सकते हैं.

श्री सोहनलाल बाल्मीक अध्यक्ष महोदय, जैविक खेती के विषय में चर्चा हुई है और निश्चित रूप से जैविक खेती आज के इस दौर में इसके परिवेश में  सब आना बहुत जरूरी है और उसको अपनाना भी जरूरी है. परन्तु व्यावहारिक कठिनाइयां जो किसान को होती है क्योंकि यह कॉम्पीटिशन का जमाना है, यदि मान लीजिए एक किसान जैविक खेती करेगा और दूसरा किसान उर्वरक से खेती करता है तो उसमें प्रोडक्शन में बहुत अंतर आ जाता है, इसलिए कहीं न कहीं किसान डरता है कि मेरे उत्पादन में कमी आएगी और मुझे नुकसान होगा तो वह सारे लोग कहीं न कहीं फर्टिलाइजर वाली जो खेती है, उसको ज्यादा अपनाने की कोशिश करते हैं, मगर यह जरूरी है कि आने वाले समय के लिए हम सबको यदि अपने देश और प्रदेश को यदि स्वस्थ रखना है तो निश्चित रूप से जैविक खेती को अपनाने की जरूरत है. मगर उसमें सरकार कैसे काम कर सकती है, यह आवश्यक है क्योंकि सरकार जिस तरीके से प्रेरित करेगी और आने वाले समय में कई बार प्रेरित करने के बाद में कई चीजों में हमें रोक भी लगानी पड़ेगी, चाहे अपना थोड़ा सा वीटो भी लगाए तो लोग धीरे धीरे उसको अपनाएंगे तो सारे लोग अपना लेंगे तो आगे आने वाले समय में कहीं न कहीं जैविक खेती की ओर लोगों का किसानों का रुझान बढ़ेगा.

अध्यक्ष महोदय,  मगर यह जरूर कहना चाहूंगा भारतीय जनता पार्टी को 22-23 वर्ष हो गये हैं. इन 22-23 वर्षों में यदि उस समय से काम चालू होता तो आज बहुत हद तक काफी चीजें उसमें समावेश हो जाती, समाहित हो जाती और हम लोग उस जैविक खेती के अंदर काफी आगे बढ़ सकते थे परन्तु यह नहीं हो पाया. इसकी शुरुआत आगे चलकर हमको कहीं न कहीं करने की जरूरत है क्योंकि आज भी हम देख रहे हैं कि मार्केट में किसानों को नकली बीज मिल जाते हैं, नकली खाद मिल जाती है. मिट्टी परीक्षण की कई बिल्डिंग बनी हुई है, कई लैब बने हुए हैं परन्तु मिट्टी परीक्षण का काम नहीं होता है. मगर आज भी हम लोगों को साइंटिफिक तरीके से बहुत ज्यादा काम करने की जरूरत है. साइंटिफिक तरीके से खेती करने की जरूरत है उस ओर आगे बढ़ने की जरूरत है क्योंकि अभी भी बहुत सारी जगहों में  जिस तरीके से परम्परागत खेती चलती है, आज भी किसान यह कर रहा है और मगर जो उत्पादन और लाभ मिलना चाहिए, वह लाभ उसको नहीं मिल पा रहा है. अभी हाल ही में सरकार ने जिस तरीके से खाद वितरण की प्रणाली को अपनाया है. हमारे बहुत सारे लोगों ने बहुत सारी बातें बोली हैं. सरकार में जो नुमाइंदे बैठे हैं या जवाबदार जो मंत्री हैं उनको यह बात समझना चाहिए कि किसानों के लिए हम सुविधा कैसे दे सकते हैं तो किसानों को इस बार खाद के लिए सुविधा नहीं मिल पाई और किसान यहां वहां भटकता रहा, अब यह जो सिस्टम बनाया है ओटीपी या टोकन वाला, अब उसको 40-50 कि.मी. दूरी पर दो बोरी खाद के लिए जाना पड़ता है, अब यूरिया लेना है तो उसको एनपीके कंप्लसरी कर दिया, डीपीए कंप्लसरी कर दिया, उसमें किसान की लागत बहुत अधिक बढ़ी है, आने वाले समय में सरकार को इस पर विचार करना चाहिए कि उनकी लागत कैसे कम हो और लोगों को सुविधा कैसे मिल सके.

अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं माननीय मंत्री जी को ध्यान दिलाना चाहूंगा कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में कोई डैम, बैराज नहीं है और खेती का काफी बड़ा एरिया है, मगर इसके कारण जो उत्पादन होना चाहिए, जो किसानों को फसल का लाभ मिलना चाहिए, वह नहीं मिल पाता है. मैंने माननीय मंत्री जी को भी कई बार बोला है, इस मौके पर वह तो नहीं हैं मगर मैं ध्यान दिलाना चाहता हूं कि कभी ऐसा मौका लगेगा तो जो मेरे प्रस्ताव डैम और बैराज के आए हैं, यदि वह स्वीकृत होंगे तो निश्चित रूप से मेरे विधान सभा क्षेत्र के किसानों को इसका लाभ मिलेगा.

एक बात मैं जरूर बोलना चाहूंगा कि वर्ष 2008 से हम इस बात को सुनते आ रहे हैं भारतीय जनता पार्टी की सरकार से कि खेती को किसान के लिए लाभ का व्यवसाय बनाएंगे, मगर वह लाभ का व्यवसाय तो नहीं बन पाया, उसकी लागत बढ़ गई है, उसकी हानि बढ़ गई है. वर्ष 2014 में मोदी ने बोला था कि वर्ष 2022 में दोगुनी आय करेंगे, मगर दोगुनी आय नहीं हो पाई. आय किसानों की धीरे-धीरे घटती गई और यह इस बात का दुर्भाग्य है कि मैं आपको छोटा-सा एक उदाहरण देना चाहूंगा कि एक फैक्ट्री का मालिक किसी जगह यदि फैक्ट्री लगता है और उसकी फैक्ट्री में कोई उत्पादन होता है तो वह फैक्ट्री मालिक उसमें उत्पादन जिस चीज का भी करता हो, उस चीज का भाव वह तय करता है और मॉर्केट में जब वह सामान जाता है जो मालिक भाव तय करता है, उस रेट में वह सामान मॉर्केट में बिकता है. मगर किसान के लिए दुर्भाग्य से यह कहना पड़ रहा है कि किसान रात-दिन मेहनत करता है, अपने खून-पसीने की कमाई लगाता है. रात में खेत में खड़ा होता है. वहां पर वह ठंडी, बारिश और गर्मी में पूरी मेहनत करता है और जब उसकी फसल का उत्पादन होता है और जब उसकी फसल मंडी या बाजार में जाती है तो वह मूकदर्शक बनकर खड़ा रहता है. दलाल और व्यापारी उसके माल का भाव तय करते हैं, यह हमारे लिए बडे़ ही खेद का विषय है. फिर यह क्यों तय नहीं हो पाता कि जो किसान उत्पादन कर रहा है और जो फसल उसने उगाई है, उसका भाव किसान क्यों नहीं तय कर पा रहा है. एक फैक्ट्री का मालिक अपनी फैक्ट्री की हर चीज का भाव तय कर लेता है लेकिन हमारा किसान भाई अपनी फसल का, उसकी अपनी लागत का भाव क्यों तय नहीं कर पाता. उसकी फसल का भाव मॉर्केट में, मंडी में दलाल और व्यापारी तय करते हैं. यह एक सोचने वाली बात है.

          अध्यक्ष महोदय, ऐसे बहुत सारे विषय हैं लेकिन मैं यह जरूर कहना चाहूंगा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए और किसानों के लिए आने वाले समय में कहीं न कहीं हम लोगों को बहुत ज्यादा विचार करने की जरूरत है और सुविधा देने की जरूरत है पक्ष के हमारे बहुत सारे भाइयों ने अलग-अलग योजनाओं के बारे में, अलग-अलग चीजों के बारे में बताया है, मगर निश्चित रूप से हम वास्तविकता देखें, तो किसान को जो सुविधा प्राप्त होनी चाहिए, वह नहीं मिल पा रही है, उसकी आय नहीं बढ़ पा रही है. आज भी किसान धीरे-धीरे कर्जे में डूबता चला जा रहा है और आर्थिक रूप से उसका काफी नुकसान हो रहा है. आपने मुझे बोलने का मौका दिया, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदय धन्यवाद. माननीय नेता प्रतिपक्ष जी.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) माननीय अध्यक्ष महोदय, एक महत्वपूर्ण चर्चा हो रही है कि जब मध्यप्रदेश का एक किसान सरकार की तरफ देखता है कि उसे अपनी फसल का मुआवजा, बीमा और समर्थन मूल्य मिलेगा. मैं माननीय मंत्री जी का जवाब पढ़ रहा था. आपने कहा कि 2 जुलाई से आपने बीमा का काम शुरू कर दिया है. यह कैसे होगा ? क्या यह सेटेलाइट से होगा, क्या राजस्व अधिकारी करेंगे. यह स्पष्ट होना चाहिए और कई बार बीमा राशि को लेकर विसंगतियां देखी हैं. सर्वे में भी इस प्रकार की स्थितियां बनती हैं कि एक ही गांव के अंदर एक व्यक्ति को बीमे की राशि मिल जाती है और दूसरे व्यक्ति को नहीं मिलती है. बीमा कंपनियां लाखों बीमा करती हैं लेकिन मात्र प्रदेश के अंदर लगभग 1 लाख या 90 हजार लोगों को ही बीमे की राशि मिल पाती है.

अध्यक्ष महोदय, मैं हमारे साथी विधायक माननीय श्री आशीष गोविन्द शर्मा जी का वक्तव्य सुन रहा था. आपने कहा कि मिट्टी परीक्षण से सभी किसानों को सुविधाएं मिल रही हैं. प्रदेश के सभी जिलों को मिलाकर के 313 ब्लॉक में 265 लैब बनायी गईं. प्रधानमंत्री मिट्टी परीक्षण योजना को लेकर जो योजना थी, उसमें 130 करोड़ रूपए खर्च हुए. लेकिन मैं आपको बताना चाहता  हूँ कि आज सब लैब बंद पड़ी हैं और 265 लैब में से करीब 213 लैब बंद पड़ी हैं और उन लैब के अंदर गोबर रखा जा रहा है. कृषि अधिकारी ने अपना घर बना लिया या कृषि का उपकरण रखा जाता है. यह मैं आपकी जानकारी में ला रहा हूँ. यदि आपको इसका प्रमाण चाहिए, तो मैं इसका प्रमाण भी दे दूंगा.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश के अदंर गौमाता को लेकर कई बातें हो रही हैं. लेकिन हम किसान को भूल जाते हैं. सरकार ने 600 करोड़ रूपए गौमाता के लिए किए. आप 1 हजार करोड़ रूपए कर दीजिए, हम आपका स्वागत करते हैं. लेकिन किसान को जब पैसा देना हो, किसान की फसल खरीदना हो, तो सरकार के पास पैसा नहीं है, यह बड़े आश्चर्य की बात है. मैं समझता हूँ कि जहां किसान कर्ज में डूबा है, उस किसान को राहत नहीं है. ऐसी स्थिति में क्या हमारी किसान के साथ वास्तव में संवेदनाएं हैं, यह महत्वपूर्ण है, इस विषय पर भी सोचना चाहिये. निश्चित तौर से 70 प्रतिशत लोग की आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है और वह कृषि पर निर्भर है मध्यप्रदेश में. बार बार सरकार कहती है तथा सरकार के आंकड़े बताते हैं कि हमारे पास एक्ट्रा खाद है, यूरिया, डीएपी सभी भी एम.पी.में आती हैं. लेकिन क्या कारण है कि सरकार उनको खाद उपलब्ध नहीं करा पाती है, बीज उपलब्ध नहीं करा पाती है. आई सी आर के अनुसार एक सूचना एडवाईजरी जारी हुई थी कि अगर आपके पास में खाद उपलब्ध नहीं है तो 15 से 25 प्रतिशत कम उत्पादन हो सकता है, ऐसा मध्यप्रदेश के बारे में आईसीआर ने कहा. मतलब कि आईसीआर अगर कह रहा है इसका मतलब यह है कि मध्यप्रदेश में खाद नहीं है. अगर आपके आंकड़ों में खाद है तो फिर किसान को खाद क्यों नहीं उपलब्ध हो पा रही है. निश्चित तौर से बारिश लेट हुई है. 10 से 15 दिन का समय लगा. आज भी स्थिति ऐसी है कि क्या फसल पूरी पक पाएगी. सोयाबीन की फसल में 10 से 30 प्रतिशत की गिरावट आयेगी, ऐसा मैं मानता हूं उत्पादन के अंदर. निश्चित तौर से अल्प वर्षा और जैसी कि संभावना व्यक्त की गई है अलनीनो के कारण कि इस साल देश के अंदर सूखा पड़ सकता है. सामान्य वर्षा से कम वर्षा दर्ज हो सकती है. कम वर्षा से खेत किसान का पूरा ग्रामीण जीवन प्रभावित होने वाला है. यदि वर्षा कम होगी तो दोबारा बुवाई करनी पड़ेगी. मैं होशंगाबाद गया तो मालूम पड़ा धान की खेती में कई लोगों ने वापस से चौपाई करनी पड़ी. किसान को बीज का खर्च उठाना पड़ेगा, डीजल और बिजली पर अतिरिक्त खर्चा आयेगा, तालाब सूखेंगे, रबी की फसल को पानी कम होगा, पशुओं के लिये चारे का संकट होगा, दूध उत्पादन घटेगा, खेतिहर मजदूर को रोजगार कम मिलेगा. मैं समझता हूं कि आने वाले समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संकट आने वाला है. सरकार बीमा कराती है किसान से क्या किसान बीमा के हकदार होंगे यह आने वाले समय में पता चलेगा कि सरकार की कथनी और करनी में क्या फर्क है. किसान कल्याण वर्ष को लेकर यूरिया की आवश्यकता थी 39 लाख मीट्रिक टन आपको मिली 42 मीट्रिक टन आपने उपलब्धता बताई है आंकड़ों में. डी.ए.पी. बताई 15 लाख 50 हजार
उसकी उपलब्धता हुई 12 लाख 35 हजार मतलब डीएपी के अंदर 2 लाख 15 हजार की कमी हुई यह लोकसभा के तारांकित प्रश्न 234413 पर 2026 को जानकारी दी गई. तो निश्चित तौर से अगर आपके पास में यूरिया है तो किसान लाईन में क्यों खड़ा है ? सवाल यह उठता है, क्यों किसानों की लंबी लंबी लाईने लग रही हैं सासाइटियों के बाहर, सवाल यह उठता 

है  ? मैं समझता हूं कि कागजों में खाद है, लेकिन किसान के हाथ में खाद नहीं है, जमीन पर खाद नहीं है. अभी कई मामले हुए गुना में 28 नवम्बर, 2025 को भी जिस प्रकार की घटना घटी आदिवासी महिला भूरीबाई खाद को लेकर दो दिन लाईन में खड़ी रहीं, लेकिन उनको खाद नहीं मिल पा रहा है. लंबे इंतजार करने के बाद तबीयत बिगड़ गई, लेकिन सरकार असंवेदशील है, ऐसा नहीं कि उसके घर पर खाद पहुंचा दें. अध्‍यक्ष जी, झगड़ा दो नेताओं का है. इसलिए किसान पिस रहा है. एक तरफ केन्‍द्रीय मंत्री शिवराज सिंह जी और एक तरफ मोहन यादव हमारे प्रदेश के मुख्‍यमंत्री. कई बार फाइलों पर ही बात चलती है. हम यहां से मांग करते हैं, वहां से आवंटन कम हो जाता है. क्‍योंकि यहां तो प्रदेश सरकार के पास पैसा है नहीं कि खरीदी हो सके. केन्‍द्र की तरफ डबल इंजन की बात करते हैं, डबल इंजन क्‍या मालूम कहां रह जाता है. सिंगल इंजन ऐसे ही ओवरलोड चल रहा है कर्ज से.

          अध्‍यक्ष जी, अभी आपके सिस्‍टम ने ई-टोकन व्‍यवस्‍था चालू किया, खाद को लेकर डिजीटल इंडिया की बात हो रही है. ओटीपी पर किसान को खाद दिया जा रहा है. मैं समझता हूं कि कई किसान निरक्षर है, गांवों में बिजली नहीं रहती, समय पर उनको ओटीपी नहीं मिलता, समय पर टोकन नहीं मिलता. आजकल तो एक नया सिस्‍टम चालू हो गया सरकार में, अगर नहीं देना तो सर्वर डाउन बता दो, या उसकी केवायसी उड़ा दो, पूरी लिस्‍ट उड़ा दो, मालूम पड़ता है कि इसकी केवायसी नहीं है इस कारण नहीं हो रहा है. यह हर योजना में हो रहा है, लाड़ली बहना से लेकर किसानों के लिए और तमाम योजनाओं में ऐसा हो रहा है. ये सिस्‍टम अगर हम आईटी का बनाना चाहते हैं तो किसानों और आम व्‍यक्तियों के लिए या जो बड़े व्‍यापारी है, जो कालाबाजारी कर रहे हैं उनके लिए सिस्‍टम है.

          अध्‍यक्ष जी, किसान को खाद नहीं मिलता, लेकिन ओटीपी जरूर मिलता है ओ यानि ओ जीरो.. किसान भटकता रहता है. हमारे कृषि मंत्री जी ने कई बार कहा था, जब मैंने किसानों और खाद की बात की तो वेट कीजिए, किसानों से वेट करवा रहे प्रदेश की सरकार, अगर मंत्री जी वेट करवा रहे हैं तो क्‍या स्थिति है, मैं समझ सकता हूं कि आपकी भावना क्‍या है. लेकिन क्‍या करें, आपके माननीय मुख्‍यमंत्री जी आपकी भावनाओ को नहीं समझ पाते.

          अध्‍यक्ष जी, ये डिजीटल युग है ये अगर प्रदेश में सर्वे कराया जाएगा, किसानों से पूछा जाएगा तो वे कहेंगे कि ये ओटीपी और ये आपका सिस्‍टम हमारे काम का नहीं है, हमको खाद चाहिए, कब सर्वर डाउन हो, फसल इंतजार करेगी सर्वर का, किसान को पहले खाद चाहिए. स्थिति बिगड़ती जा रही है, मौसम के कारण. मैंने पहले भी कहा था, इस व्‍यवस्‍था को कई बार आपके सहकारिता मंत्री जी के नॉलेज में भी लाया था कि क्‍यों नहीं आप सीधे पंचायत को खाद देना चाहते हैं. अगर पंचायत के अंदर जितने किसान है, वहीं रजिस्‍ट्रेशन हो जाए, वहीं खाद पहुंच जाए, तो मैं समझता हूं कि किसी किसान को कालाबाजारी जो होती है, शहरों और बड़ी जगह में होती है, यदि पंचायत के अंदर खाद पहुंच जाए तो मैं समझता हूं कि इस पर हम कंट्रोल कर पाएंगे. कई व्‍यवस्‍था है चाहे तो आप कर सकते हैं, लेकिन नहीं करना चाहते वह अलग बात है. मध्‍यप्रदेश में बीज की स्थिति वर्ष  2025 में 13 प्रतिशत बीज कम थी. केन्‍द्र सरकार द्वारा खरीफ के लिए मध्‍यप्रदेश के लिए आवश्‍यक बीज को 13 प्रतिशत बीज कम उपलब्‍ध कराया गया. 64 हजार 335 क्विंटल बीज की मांग के विरूद्ध आपको 55 हजार 964 क्विंटल बीज मिला, तो क्‍यों क्‍या शिवराज जी आपके मध्‍यप्रदेश के नहीं है. क्‍या आप किसानों के हितैषी नहीं हो, माननीय अध्‍यक्ष महोदय यह जानकारी भी लोकसभा के तारांकित प्रश्‍न क्रमांक-25, 22 जुलाई 2025 में उपलब्‍ध करवाई गई थी, यह भी मैं आपके संज्ञान में ला रहा हूं. मेरे सरकार से कुछ सुझाव बीज की व्‍यवस्‍था को लेकर है. प्रमुख सरकारी एजेंसी राज्‍य बीज निगम है, आवश्‍यकता पड़ने पर आप एन.एच.सी, एच.आई.एल. और नेफ्ट से बीज प्राप्‍त करते हैं. केंद्रीय एजेंसियों पर आप निर्भरता क्‍यों रखना चाहते हैं? जब आपके पास साधन है, फर्म हैं, निगम हैं तो फिर आप क्‍यों केंद्र पर डिपेंड होना चाहते हो, क्‍या आप आपके साधन नहीं बढ़ाना चाहते हो, क्‍या आप यहां पर खुद बीज उत्‍पादन को लेकर किसानों को प्रेरित नहीं करना चाहते हो, क्‍यों आप किसानों से बीज नहीं ले सकते हो? मैं समझता हूं कि इस पर अगर जवाबदेही तय की जायेगी तो हर जिले के अंदर आप एक बीज को लेकर नई योजना चालू कर सकते हैं और किसानों को जोड़ सकते हैं, मैं ऐसा समझता हूं.

           अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश सरकार की सप्‍लाई चेन मैनेजमेंट मूल कारण है जिसके कारण किसान को समय पर खाद नहीं मिल पाती है. प्रदेश में 17 हजार से ज्‍यादा उर्वरक केंद्र रजिस्‍टर्ड हैं, मार्कफेड, एम.पी.एग्रो और निजी विक्रेताओं के माध्‍यम से आप खाद देते हैं, लेकिन मैं समझता हूं कि आपकी जो सप्‍लाई चेन है, आप कागज पर दिखाते हो कि अतिशेष है, हमारे पास एक्‍सट्रा है, लेकिन आपके वहां पर खाद नहीं है. रियल टाईम स्‍टॉक मानिटरिंग सिस्‍टम आपके पास नहीं है. अगर आपके पास रियल टाईम स्‍टॉक मानिटरिंग सिस्‍टम होगा, तो मैं समझता हूं कि आपको हर जिले में हर सोसाइटी में वहां पर आप मालूम कर सकते हो कि कितनी खाद है, एक तरफ आप डिजिटल की बात करते हो, एक तरफ आप कागज पर बात करते हो, कागज में तो फाइलें चलती रहती हैं, कब भोपाल आयेगी, कब प्रस्‍ताव आयेगा? उसके बजाय मैं समझता हूं कि ऑनलाइन पूरा सिस्‍टम होना चाहिए. अगर रियल टाईम स्‍टॉक मानिटरिंग सिस्‍टम आपके आईटी वाले नहीं चला पा रहे हैं, तो आप किसी से कंसलटेंसी लीजिये कोई इतनी बड़ी बात नहीं है, इसको तत्‍काल किया जा सकता है. रियल टाईम से ही आपको स्‍पष्‍ट होगा कि किस गांव के अंदर किस सोसाइटी के अंदर कितनी डिमांड है, क्‍या फोरकॉस्‍ट है? वह आपको स्‍पष्‍ट रहेगी और आप उसके हिसाब से आपकी पूरी सप्‍लाई चेन सिस्‍टम को रियल टाईम स्‍टॉक मानिटरिंग सिस्‍टम से कर सकते हो. लेकिन आप कागज पर यह पोर्टल बना लो लेकिन उसकी मानिटरिंग कैसे होगी, क्‍या उसकी लाईव मानिटरिंग के लिये व्‍यवस्‍था है, क्‍या किसान को या आम व्‍यक्ति को मालूम पड़ सकता है कि हमारे गांव के अंदर हमारी सोसाइटी में कितनी खाद है, क्‍या आप इतने सारे मोबाइल एप बनाते हैं, तो आप इसके लिये प्रयास क्‍यों नहीं करते हो? हर किसान को आप ओ.टी.पी. दे सकते हो, तो किसान को यह भी मालूम होना चाहिए कि मेरे सोसाइटी में, मेरे क्षेत्र में, मेरे नाम की खाद कितनी है?  वह ऑनलाईन देख सके, यह भी एक व्‍यवस्‍था अगर आप चाहें तो कर सकते हैं. अध्‍यक्ष महोदय, लॉजिस्टिक्‍स को लेकर जिस प्रकार से बड़े घोटाले होते हैं, परिवहन घोटाले , इसकी भी आपकी एक लाईव ट्रेकिंग होना चाहिए, आजकल तो सब जी.पी.एस. सिस्‍टम आ गये हैं कि कहां ट्रक जा रहे हैं? जिस प्रकार से अभी हाल में चावल के , गेहूं के ट्रक गायब हो गये, कई हजार ट्रक गायब हो गये हैं, तो मैं समझता हूं कि अगर यह सब सिस्‍टम रहेंगे तो इसमें करप्‍शन को रोका जायेगा और कालाबाजारी को रोक सकते हैं. मैं यह भी जानना चाहता हूं कि सरकार ने कालाबाजारी को लेकर कितनी बार कार्यवाही की है और किस जिले में कार्यवाही की है, अगर आप कार्यवाही नहीं करेंगे तो डर कैसे होगातो जो लोग खाद और बीज की कालाबाजारी कर रहे हैं, तो निश्चित तौर पर उनको लाभ पहुंचाने के लिये इस सिस्‍टम के अंदर ऐसे लोग बैठे हैं, जो समय पर कार्यवाही नहीं होने देते हैं. मेरी आपके माध्‍यम से कृषि मंत्री जी से, सरकार से मांग है कि बुवाई के समय पर्याप्‍त खाद कैसे मिले यह तत्‍काल व्‍यवस्‍था होना चाहिये. सरकारी मूल्‍य पर किस प्रकार से खाद मिले, इसका आपका एक सिस्‍टम होना चाहिये, किसान ब्‍लेक में क्‍यों खरीदे, क्‍यों किसान परेशान हो, क्‍यों ज्‍यादा कीमत में खरीदे, जब आप सीएम ऑनलाइन चला सकते हो जब कोई कालाबाजारी कर रहा है, ज्‍यादा कीमत में बेच रहा है, उस पर तत्‍काल कार्यवाही होना चाहिये, यह मेरी मांग है. इससे भी जमाखोरों और बिचौलियों पर रोक लगेगी और ई टोकन व्‍यवस्‍था समाप्‍त कर किसानों के लिये अनुकूल वितरण प्रणाली कैसे हो, मैं समझता हूं इस पर विचार होना चाहिये.

2.26 बजे             (सभापति महोदय, डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय पीठासीन हुये)

          माननीय सभापति महोदय, और पार‍दर्शिता और जवाबदेही अधिकारियों की इसके अंदर स्‍पष्‍ट होना चाहिये क्‍योंकि जवाबदेही तय नहीं हो पाती और हम तो इतने सालों से देख रहे हैं कि साथी विधायक जब जांच की बात करते हैं तो जांच का कभी परिणाम नहीं आता और जब परिणाम नहीं आयेगा तो कैसे सिस्‍टम चलेगा. जवाबदेही तय जरूर होना चाहिये क्‍योंकि इस विधान सभा के प्रति मध्‍यप्रदेश के हर अधिकारी की जवाबदारी है, सिस्‍टम की जवाबदारी है. हमारे जो प्रश्‍न रहते हैं उन प्रश्‍नों के सवालों के जवाब सरकार को देना है और यह हमारे प्रश्‍न नहीं हैं, जनता के प्रश्‍न हैं, जनता का दर्द है. माननीय सभापति महोदय, मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि क्‍या हम दोनों मिलकर उन किसानों के आंसू नहीं पोंछ सकते, क्‍या हम सकारात्‍मक पहल नहीं कर सकते, क्‍यों हम आरोप प्रत्‍यारोप में रखते हैं, क्‍यों हम कांग्रेस, बीजपी में लगे रहते हैं. किसान हमारा है, यह मध्‍यप्रदेश हमारा है मैं समझता हूं माननीय सभापति महोदय कई सवाल हैं चाहे सोयाबीन को लेकर किस प्रकार से एमएसपी में खरीदी नहीं की गई. मूंग के किसान पूरे नर्मदापुरम से लेकर, हरदा से लेकर पूरे मध्‍यप्रदेश में कई लोग परेशान है. 17 से 18 लाख टन मूंग का उत्‍पादन हुआ, लेकिन सरकार साढ़े चार लाख टन से ज्‍यादा खरीदी अभी तक नहीं कर पाई. क्‍या सरकार मूंग का एक-एक दाना खरीदेगी, यह भी चाहूंगा मंत्री जी बतायें, क्‍योंकि मैं समझता हूं कि गेहूं में भी आपने तारीख बढ़ाई, तारीख पर तारीख चलती रही, लेकिन गेहूं की भी स्थिति ऐसी ही रही, यह सब अव्‍यवस्‍थायें हैं. हम किसान का वोट लेना चाहते हैं, लेकिन किसान के आंसू नहीं पोंछना चाहते. माननीय सभपति महोदय, एक सकारात्‍मक पहल होना चाहिये, एक सकारात्‍मक बहस के साथ निर्णय होना चाहिये, अगर सिर्फ भाषण देना है तो मैं समझता हूं कि किसानों के हम कभी आंसू नहीं पोंछ पायेंगे. इन शब्‍दों के साथ मैं समझता हूं कि इन समस्‍याओं का निराकरण हो, तभी हम किसानों के आंसू पोंछ पायेंगे यही कहना चाहता हूं. धन्‍यवाद.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय--  माननीय सभापति महोदय, चूंकि यह दो-तीन मंत्रियों का विषय था. पहले कंसाना जी बोलेंगे, उसके बाद विश्‍वास सारंग जी अपनी बात रखेंगे.

          सभापति महोदय—ठीक है.

          किसान कल्‍याण एवं कृषि विकास मंत्री (श्री एदल सिंह कंसाना)--  माननीय सभापति महोदय, नियम 139 के तहत माननीय नेता प्रतिपक्ष जी द्वारा अविलंबनीय लोक महत्‍व के विषय पर चर्चा के लिये उठाये गये सूचना पर पूर्णत: असहमत होते हुये वक्‍तव्‍य प्रस्‍तुत कर रहा हूं. प्रदेश में खरीफ की फसलों हेतु 14.05 लाख मीट्रिक टन यूरिया की कुल उपलब्‍धता थी, जिसमें से 8.62 लाख मीट्रिक टन का विक्रय किसानों को किया गया है. 5.439 लाख मीट्रिक टन शेष है. 9.48 लाख मीट्रिक टन डीएपी,एनपीके की कुल उपलब्धता है जिसमें 5.54 लाख मीट्रिक टन विक्रय किसानों को किया गया है. 3.94 लाख मीट्रिक टन शेष है.6.12 लाख मीट्रिक टन सुपर फास्फेट की कुल उपलब्धता है जिसमें से 2.79 लाख मीट्रिक टन विक्रय किसानों को किया गया है. मैंने आंकड़ों का उल्लेख इसीलिये किया है कि हमारे विपक्ष के साथियों की हरेक की जबान पर एक ही बात थी कि किसानों को खाद नहीं मिल रही उनका यह कथन बिल्कुल असत्य है.निराधार है. मैंने यह आंकड़े सहित आपको बताया कि  प्रदेश में कितना हम खाद,यूरिया हमारे पास स्टाक में है कितना हम दे चुके और कितना हमारे पास वर्तमान में उपलब्ध है.

          श्री उमंग सिंघार - माननीय सभापति महोदय, यह तो मैंने पहले ही अपने उद्बोधन में कह दिया है कि आपके पास कागजों पर खाद है. कागजों पर आपके पास डीएपी,यूरिया सब है आपके पास एक्स्ट्रा है लेकिन प्रदेश के किसानों के पास खाद क्यों नहीं पहुंची. किसान क्यों लाईन में लग रहा है सवाल यह है.आंकड़े तो आप गिना देंगे.

          सभापति महोदय - शुरुआत की है मंत्री जी ने जानकारी दे रहे हैं.

          श्री एदल सिंह कंषाना - माननीय सभापति महोदय, जैसा आप कह रहे हैं कि किसानों केपास खाद नहीं पहुंची अगर आप चाहें तो मैं जिलेवार आपको जानकारी दे रहा हूं कि किस जिले में कितना खाद वितरित ई टोकन द्वारा किया गया. हां ई टोकन द्वारा एक बात जरूर हुई है. पहले लाईन लगती थी आज वह लाईन नहीं है उस लाईन में हमारे सामने बैठे मित्र कुछ लोगों को बीच में घुसा देते थे और उनको पत्थर देते थे कि कहते थे कि देख लो लाठी चार्ज हो गया वह चीज जरूर ई टोकन द्वारा बंद हुई है इसीलिये पीड़ा है हमारे सामने वाले मित्रों को. ई टोकन द्वारा  किसी भी जिले में किसी भी प्रकार की कोई परेशानी नहीं है और रहा सवाल खाद का चाहे उसका नामांतरण नहीं,बटाकंन नहीं,सीमांकन नहीं उसके बावजूद हम उनको खाद दे रहे हैं. एक भी जिले में कहीं कोई शिकायत हो तो आप हमें बता दें वहां हम खाद की व्यवस्था कराएंगे. यह किसानों का मुद्दा है. किसानों के हित की बात करनी चाहिये. यह मध्यप्रदेश का पवित्र मंदिर है. इस पवित्र मंदिर में असत्य जानकारी नहीं देना चाहिये.असत्य नहीं बोलना चाहिये ऐसा मेरा मानना है. हमारे मित्र जो-जो बोल रहे हैं सिर्फ एक ही बात कह रहे हैं खाद नहीं मिल रहा बीज नहीं मिल रहा पानी नहीं मिल रहा. मैं सामने बैठे मित्रों से कहना चाहता हूं कि खाद नहीं मिल रहा,बीज नहीं मिल रहा,बिजली नहीं मिल रही.सिंचाई का रकबा बढ़ा नहीं तो मध्यप्रदेश को सात-सात बार कृषि अवार्ड कैसे मिल गया.मैं आपसे पूछना चाहता हूं. हां किसानों के हित में हमारे कोई एकाध मित्र ने कहा. आदरणीय सचिन जी ने कहा कि इसकी एक समिति बननी चाहिये. मैं इसके पक्ष में हूं. माननीय मुख्यमंत्री जी से हम इस विषय में चर्चा करेंगे. एक सार्वजनिक समिति बने सर्वदलीय समिति बने उसके लिये हम सहमत हैं. हमारे प्रधानमंत्री जी की भी इच्छा है सबका साथ,सबका विकास और सबका विश्वास मैं आपके प्रस्ताव का समर्थन करता हूं. माननीय सचिन जी आपने सही और किसान हित की बात कही लेकिन अन्य हमारे साथियों ने किसानों के हित की बात नहीं कही. इस सदन में इस मध्यप्रदेश के पवित्र मंदिर में असत्य जानकारी दी. किसी भी जिले में अगर खाद नहीं मिल रहा होता तो आज तो हाहाकार मच जाता. बताओ मुझे प्रदेश के किसी कोने से, कहीं कोई आवाज आ रही है. कोई आवाज नहीं आ रही है.

          श्री महेश परमार तराना से आ रही है.

          श्री एदल सिंह कंषाना तराना से आ रही है, मुझे बता दें. तराना की आवाज को 10 मिनट में बंद कर देंगे. (हंसी). खाद पहुँच जाएगा. दस मिनट में खाद पहुँचेगा.

          श्री महेश परमार सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी ने कहा कि आवाज कहां से आ रही है तो मैंने कहा कि आवाज तराना से आ रही है. उज्जैन से आ रही है. मंदसौर से आ रही है. सागर से आ रही है. नीमच से आ रही है. रतलाम से आ रही है. जबलपुर से आ रही है. छिंदवाड़ा से आ रही है. बालाघाट से आ रही है. स्वयं माननीय मंत्री के मुरैना से आ रही है. आप नीचे जाकर किसानों को देखिए तो माननीय. निवेदन है आपसे.

          सभापति महोदय जिलेवार जानकारी देने के लिए वे तैयार हैं. माननीय मंत्री जी, आप अपना भाषण जारी रखें.

          श्री एदल सिंह कंषाना माननीय सभापति महोदय, आज जो बारिश नहीं हो रही है, उसका कारण मेरी समझ में आ रहा है. आप सब लोग चाहते हैं कि बारिश हो. चाहते हैं तो हाथ उठाओ. (हंसी). सदन में असत्य बोलना बंद कर दो, बारिश होगी. (हंसी).

          श्री महेश परमार माननीय सभापति महोदय, यह विलोपित किया जाए. यह चाहते नहीं हैं. हम तो सत्य बोलते हैं.

          सभापति महोदय माननीय मंत्री जी का भाव यह है कि जो सद्भाव से, सद्भावना से प्रार्थना होती है, वह पूरी होती है. सभी लोग बैठिए, प्लीज.

          श्री महेश परमार माननीय कृषि मंत्री जी, भगवान से डरिए, किसानों से डरिए.

          सभापति महोदय कृपया बैठिए, माननीय नेता प्रतिपक्ष जी खड़े हैं.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) सभापति महोदय, ये ऐसी भविष्यवाणी कर रहे हैं, लगता है भारत सरकार का जो मौसम विभाग है, उसको बंद करना पड़ेगा. (हंसी).

          सभापति महोदय अपना-अपना अनुभव है. वैसे माननीय नेता प्रतिपक्ष जी, आपको धन्यवाद देना चाहिए. सचिन भाई की एक बात का उन्होंने समर्थन किया है. सहमति भी दी है. उस सुझाव का स्वागत भी किया है. कम से कम आपकी तरफ से भी स्वागत, धन्यवाद होना चाहिए. आपका सुझाव माना गया है. एक पक्षीय चर्चा नहीं होनी चाहिए.

          श्री उमंग सिंघार सभापति महोदय, ये भरपूर बारिश करा दें तो मैं धन्यवाद भी दे दूंगा, इनकी आरती भी कर लूंगा. अगर अंतर्यामी हो रहे हैं तो बारिश करा दें.

          श्री एदल सिंह कंषाना माननीय, आपने तो हाथ ही नहीं उठाया. (हंसी).

          सभापति महोदय मंत्री जी, आप अपनी बात जारी रखें.

          श्री शैलेन्द्र कुमार जैन मंत्री जी, मौसम के विज्ञानी हैं, उन्होंने मौसम को अच्छे से समझा है.

          श्री एदल सिंह कंषाना माननीय सभापति महोदय, जैसे कि हमारे महेश परमार जी तराना की बात कर रहे हैं. हमारे विधायक साथी तराना के हमारे पास में बैठे हुए हैं, मालवीय जी, मालवीय जी को पूछ लें कि तराना में खाद की दिक्कत है क्या.

          श्री महेश परमार तराना के कौन विधायक आपके पास बैठे हैं. तराना का विधायक तो मैं हूँ माननीय.

          श्री एदल सिंह कंषाना श्री सतीश मालवीय जी बैठे हुए हैं यहां पर.

          श्री महेश परमार ये घट्टिया के विधायक हैं. तराना के नहीं हैं.

          श्री एदल सिंह कंषाना आपके उज्जैन जिले के तो हैं.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) ये घट्टिया विधान सभा के बढ़िया विधायक हैं. (हंसी).

          श्री महेश परमार माननीय सभापति महोदय, इनका कहना है कि...

          सभापति महोदय बैठिए महेश जी, अभी माननीय मंत्री जी ने कहा है, आप बताएं, वे तत्काल खाद की आपूर्ति करवा देंगे.

          श्री एदल सिंह कंषाना माननीय सभापति महोदय, जैसा कि खाद की, बीज की और पानी, बिजली की बात कर रहे हैं. देश आजाद हुए करीब 80-85 साल हो गए. इन्होंने देश पर 50 साल राज किया और उसके बाद में आपके सिंचाई का रकबा क्या था. 7 लाख हेक्टेयर था. आज सिंचाई का रकबा बढ़कर 55 लाख हेक्टेयर हो गया है. (मेजों की थपथपाहट). और माननीय सभापति महोदय, ये रकबा यहीं तक नहीं रुकेगा. ये रकबा बढ़कर सौ लाख हेक्टेयर तक जाएगा. आदरणीय हमारे भंवर सिंह शेखावत जी अभी कह रहे थे. बड़े वरिष्ठ सदस्य हैं. मैं उनका बड़ा सम्मान करता हूँ. वे कह रहे थे कि किसानों की हालत बड़ी दयनीय है, किसान परेशान है. किसान दु:खी है. आदरणीय भंवर सिंह जी...

          श्री कैलाश विजयवर्गीय सीरियस मत लो, वे पुरानी कैसेट हैं. (हंसी).

          श्री एदल सिंह कंषाना नई बता रहे थे वे तो अभी. अच्छा, पुरानी कैसेट हैं. 20 साल पुरानी है. आदरणीय भंवर सिंह जी, यह हमारा वह किसान है, जो मध्‍यप्रदेश की साढ़े 8 करोड़ आबादी का पालन-पोषण करता है.(मेजों की थपथपाहट) हमारा प्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है. इस किसान का आप अपमान करोगे, तो मैं गारंटी के साथ कहता हूँ कि वहां से निकलकर इधर कभी नहीं आ पाओगे, आप वहीं पर बैठे रहोगे, इधर आने की उम्‍मीद भी मत कर लेना. जो व्‍यक्ति किसान का अपमान करे, जो व्‍यक्ति नौजवान का अपमान करे, जो व्‍यक्ति हमारी सेना का अपमान करे ……

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) – सभापति महोदय, इसीलिये उधर आने की हम उम्‍मीद नहीं कर रहे हैं.

श्री एदल सिंह कंषाना – सभापति महोदय, आप वहीं रहो, आप बहुत अच्‍छे हो. आप वहीं पर रहना.

श्री महेश परमार – माननीय सभापति महोदय, मंत्री जी को कौन से अधिकारी ने स्क्रिप्‍ट लिखकर दी है ? माननीय मंत्री जी को किसने लिखकर दिया है कि क्‍या बोलना है? …….(..व्‍यवधान...)

सभापति महोदय – (विपक्ष के कई माननीय सदस्‍यों के एक साथ उठकर खड़े होकर बोलने पर) श्री रजनीश जी, श्री फुन्‍देलाल मार्को जी, श्री दिनेश जैन (बोस) जी एवं श्री सुरेश राजे जी आप लोग बैठ जाएं. आप चर्चा जारी रहने दीजिये.

श्री भंवर सिंह शेखावत – सभापति महोदय, मेरे भाई एदल सिंह जी, आपकी बात सुनकर तो मुझे ऐसा लग रहा है कि माननीय कैलाश जी कहीं बहुत ज्‍यादा दिमाग का यहां पर उतार-चढ़ाव हो जाये, तो यहां पर जांच की भी व्‍यवस्‍था रखा कीजिये. ऐसा पैरामीटर ऊपर-नीचे जा रहा है कि पता नहीं कहां का खेत, कहां का सैनिक ? आपको उससे क्‍या लेना-देना है. आप तो नदियों के व्‍यापारी हैं और यह जो आप इधर से उधर की बात कर रहे हो, यह महिमा तो आप ही ने डाली है. जब आप उधर चले गए, तो मैं इधर आ गया. (हंसी) अब आने-जाने का सिलसिला तो अपना पुराना है. यह आपने ही तो चालू किया था. अब यह जो आप दुकान चला रहे हो कि सेना का अपमान और फलांने का अपमान. आपने किसान का तो सत्‍यनाश करके रख दिया है.

श्री एदल सिंह कंषाना – माननीय सभापति महोदय, आप बैठ तो जाएं, पूरी बात तो सुन लें.

श्री भंवर सिंह शेखावत – हम पूरी बात सुन लेते हैं, लेकिन कैलाश जी, इलाज की व्‍यवस्‍था आप कर देना.

सभापति महोदय -  मंत्री जी,आप अपनी बात जारी रखें.

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) – माननीय सभापति महोदय, मैंने आपका वह वाला भाषण सुना था. मैं सदन में ऑन रिकॉर्ड बोल रहा हूँ कि जब सरदार सरोवर बांध बन रहा था और किसान सम्‍मेलन था, तो शेखावत जी हमारे युवा नेता थे, अभी भी वह युवा नेता है. इन्‍होंने भाषण दिया कि किसान भाइयों, यह नर्मदा का पानी बांध में जायेगा, वहां पर बिजली बनेगी, पूरी बिजली पानी से निकल जायेगी और यह पानी अब हमारे कोई काम नहीं आयेगा. (हंसी)

सभापति महोदय – माननीय मंत्री जी,आप अपनी बात जारी रखिये. (हंसी)

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह - सभापति महोदय, तब यह भारतीय जनता पार्टी में थे, जब कह रहे थे.

सभापति महोदय – मैं सभी सदस्‍यों से आग्रह करता हूँ कि आप चर्चा पूर्ण होने दें. माननी मंत्री जी,आप जारी रखिये. 

श्री एदल सिंह कंषाना – माननीय सभापति महोदय,फिर वही खाद की बात आ गई. मध्‍यप्रदेश के किसानों को अभी तक पांच लाख पचास हजार मीट्रिक टन की डीएपी एवं एनपीके दिया गया है. अभी स्‍टॉक में लगभग 4 लाख मीट्रिक टन शेष है. आप कह रहे हैं कि खाद नहीं है,तो यह आंकड़े कहां से आ गए. यह आंकड़े में सदन में दे रहा हूँ. आप हाउस के बाद जब मेरे से आंकड़े मांगें, तो मैं आपके यहां आ जाऊँगा. आपके यहां चाय पीयूँगा और आंकड़े आपको दे दूँगा. फिर आप जांच करा लाना, चाहे जैसी. माननीय सभापति महोदय, जैसे 139 के तहत हमारे मित्रों ने किसानों की मांग को लेकर किसान हितैषी बनकर इस हाउस में किसानों को असत्‍य जानकारी दी, असत्‍य जानकारी देने का काम किया, मैंने इसका विरोध किया. इस मौके पर, मैं इतना ही कहना चाहता हूँ कि यह मध्‍यप्रदेश की सरकार, डॉ. मोहन यादव की सरकार किसान हितैषी सरकार है. आपने मुझे बोलने का मौका दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

सभापति महोदय – माननीय मंत्री कंषाना जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. माननीय मंत्री सारंग जी.   

          सहकारिता मंत्री (श्री विश्‍वास सारंग)-  सभापति महोदय, आज हमारे कांग्रेस के विधायक दल द्वारा नियम 139 के तहत चर्चा की मांग की गई. जिस पर सुबह से चर्चा हुई. यह बात सही है कि सदन में इस तरफ के या उस तरफ के सदस्‍यों का लक्ष्‍य है कि प्रदेश के किसान संपन्‍न हों.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीकसभापति महोदय, कृषि मंत्री जी के बोलने के बाद में कुछ बोलने को रह नहीं गया है. अब कोई विषय बाकी नहीं है. चर्चा पूर्ण हो चुकी है, नेता प्रतिपक्ष बोल चुके हैं, कृषि मंत्री जी जवाब दे चुके हैं. अब इनके बोलने का कोई औचित्‍य नहीं है.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-  कुछ-कुछ विषय इसमें सहकारिता के भी हैं. यह विषय 3 मंत्रियों से जुड़ा हुआ है इसलिए तीनों मंत्री जवाब देंगे लेकिन हम केवल 2 से ही आपको संतुष्‍ट कर देंगे.

          सभापति महोदय-  अलग-अलग विभागों के विषय हैं.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीकमंत्री जी आंकड़े न बताते हुए व्‍यवस्‍था बता दें कि व्‍यवस्‍था क्‍या है ?

          श्री विश्‍वास सारंग-  अच्‍छी बात है, अब आप जो बोलेंगे मैं वही करूंगा. आप इतने महान हैं. आप ज़रा बैठिये. आप सदन का संचालन न करें.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीकसदन के संचालन की बात नहीं है, मेरा सदन के अंदर बोलने का अधिकार है और आपको मुझे बैठाने का अधिकार नहीं है.

          सभापति महोदयमैंने इसलिए कहा भिन्‍न-भिन्‍न विषय होने के कारण, अलग-अलग विभागों के मंत्री जवाब दे रहे हैं. 

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीकसभापति जी, आप मुझे कहेंगे तो मैं आपकी बात मान लूंगा लेकिन ये मुझे सीधे बैठने को कहेंगे तो ये हैं कौन ? ये मुझे कहेंगे तो मैं बैठ थोड़ी जाऊंगा ?   

          श्री कैलाश विजयवर्गीयसभापति महोदय, जब मंत्री जी ने जवाब प्रारंभ किया था तो मैंने पहले ही कहा था, आसंदी ने अनुमति दी है कि पहले कृषि मंत्री, फिर सारंग जी बोलेंगे.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीकसभापति महोदय, मैंने यही पूछा है, जब संसदीय कार्य मंत्री जी ने बताया तो मैंने मान लिया. मेरा कहना है कि वे सुझाव दे दें, बात कर लें और इसे समाप्‍त करें. मगर इस तरह का व्‍यवहार ठीक नहीं है.

          सभापति महोदय-  चर्चा में अधिक विषय आने के कारण, इस विषय में संसदीय कार्य मंत्री जी ने आग्रह किया था, सूचित किया था.

          श्री रामेश्‍वर शर्मापहले इनको पता होना चाहिए कि खाद कौन सा विभाग बांटता है.

          सभापति महोदय-  मंत्री जी आप अपनी बात पूरी करें.

          श्री विश्‍वास सारंगबाल्‍मीक जी, सरकार इस विषय पर गंभीर है इसलिए मुझे भी बोलने दीजिये, इसमें क्‍या दिक्‍कत है. यह बात सही है कि सत्‍तापक्ष और विपक्ष के विधायकों की चिंता है कि प्रदेश का किसान हर तरह से अपनी खेती ठीक से कर सके. क्‍योंकि हमारा मध्‍यप्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है, यदि प्रदेश की अर्थव्‍यवस्‍था की बात करें तो प्रदेश की 43 प्रतिशत अर्थव्‍यवस्‍था में कृषि का योगदान है. इसी लक्ष्‍य को लेकर देश के प्रधानमंत्री जी ने देश में उन्‍नत कृषि और किसानों के हित के लिए प्रयास किया है और हमारे मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में भी कृषि का विकास हो रहा है, इसी का परिणाम है कि लगभग 16 विभागों को मिलाकर, इस वर्ष को कृषि कल्‍याण वर्ष के रूप में प्रदेश की सरकार मना रही है. जिसके परिणाम हमें देखने को भी मिल रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट)

          सभापति महोदय, जैसा मैंने कहा, यह बात सही है ,आपकी चिंता है, परंतु हमारे कृषि मंत्री जी ने जैसा कहा, यदि हम सदन में ईमानदारी से बात रखना चाहते हैं, किसानों के हित की बात करना चाहते हैं तो हमें राजनीति को इस सदन के बाहर छोड़कर आना होगा. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि यह सदन जो मध्‍यप्रदेश में लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंदिर है. यहां हम असत्‍य आंकड़े न रखें, न हम रखें, न आप रखें. आप यदि किसानों के हित की बात करते हैं तो यह सरकार खुले मन के साथ सुनने और उसके निदान को तैयार है. पिछले सत्र में नेता प्रतिपक्ष जी ने सुझाव दिया था, हमने उसे स्‍वीकार किया था. अभी कृषि मंत्री जी ने कहा यदि सचिन यादव जी ने कोई अच्‍छी बात कही है, तो उसको स्‍वीकार किया जायेगा. हम खुले मन से बात करना चाहते हैं. पर आश्‍चर्य होता है कि बातें हो रही थीं कि कृषि मंत्री जी को किसने क्‍या लिखकर दे दिया.

          सभापति महोदय, नियम 139 पर विपक्ष की जो विषय वस्‍तु थी, उसी में गलती थी. मैं सदन में उसे पढ़कर बताना चाहूंगा. मध्‍यप्रदेश के किसानों को खरीफ फसल हेतु खाद बीज उपलब्‍ध नहीं हो पा रहा है. जिससे कृषक परेशान हैं, खाद बीज की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था नहीं किये जाने से किसानों में रोष का वातावरण निर्मित हो गया है. अवर्षा के कारण, सभापति महोदय भगवान की कृपा है कि मध्‍यप्रदेश में अवर्षा की स्थिति नहीं है, केवल अल्‍पवर्षा की स्थिति है. क्‍या हम इस सदन के माध्‍यम से किसानों में पैनिक उत्‍पन्‍न करना चाहते हैं ? क्‍या हम एक सनसनीखेज़ समाचार बनाना चाहते हैं.

          सभापति महोदय, यदि प्रदेश में अवर्षा नहीं है और मैं अल्‍पवर्षा की बात कर रहा हूं तो मेरे पास मौसम विभाग के आंकड़े हैं. 19 जुलाई 2026 तक मध्‍यप्रदेश में लगभग 261.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई. यदि हम औसत देखें तो उसमें 311.8 मिलीमीटर वर्षा होनी थी जिसमें लगभग 16 प्रतिशत की कमी है. इसमें ज्‍यादा पैनिक होने की बात नहीं है. भगवान की यह कृपा है कि पूरे प्रदेश के अलग-अलग हिस्‍सों में अलग-अलग वर्षा की स्थिति है. यदि हम सामान्‍य से अधिक वर्षा की बात करें तो इसमें तीन जिले हैं जिसमें इंदौर, देवास, बुराहनपुर आता है. सामान्‍य वर्षा की बात करें तो उसमें 31 जिले हैं. कम वर्षा की बात करें तो 19 जिले हैं और अल्‍प वर्षा या 60 प्रतिशत से कम वर्षा वाला केवल एक जिला है वह अलीराजपुर है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीयमाननीय सभापति महोदय, चार साल में केवल एक बार अधिकमास का महीना आता है. यह मेरे घर के पंडित जी ने बताया है. उन्‍होंने बताया कि बारिश लेट होगी, दीपावली तक होगी, लेकिन बारिश पूरी होगी. चाहे आपके वैज्ञानिक कुछ भी बोलते रहे. इसलिए मध्‍यप्रदेश के किसानों को घबराने की कोई जरूरत नहीं है यह हमारा भारतीय कैलेण्‍डर बोलता है.

          श्री विश्‍वास सारंगमाननीय सभापति महोदय, मैं विभाग को बधाई दूंगा. मध्‍यप्रदेश सरकार को, डॉ. मोहन यादव जी को बधाई दूंगा. यदि अल्‍पवर्षा की स्थिति बन रही थी तो हमारी सरकार ने त्‍वरित कार्यवाही की है. जिस बैठक में मैं स्‍वयं उपस्थित था. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने लगभग दो बार इस संबंध में बैठक ली. यदि हम बात करें अल्‍पवर्षा की स्थिति बन रही थी तो विशेष ग्राम सभा का आयोजन किया गया. पूरे किसानों को इकट्ठा किया गया. एसएमएस के माध्‍यम से उनको उसकी जानकारी दी गई. वॉट्सप के माध्‍यम से जानकारी दी गई. किस तरह से हम कम पानी की आवश्‍यकता वाली फसल की तकनीक बता सकते हैं इसके बारे में जनजागरण किया गया. यह सुनिश्चित किया गया कि हम एक्‍स्‍ट्रा केसीसी सेचुरेशन पर जाएं. यदि किन्‍हीं किसानों का केसीसी नहीं है तो उनको बनाने का विशेष अभियान चलाया. जो हमारे नॉन लोनी फॉर्मर हैं. उनको भी हमने खाद देने का प्रयास किया और उसमें सफलता भी अर्जित की है. अब तराना से आवाज आ रही है. प्रदेश में खाद को लेकर हाहाकार मचा हुआ है. मैं नेता प्रतिपक्ष जी को बहुत धन्‍यवाद और बधाई देता हूं.

          श्री महेश परमारमाननीय सभापति महोदय, सहकारिता की क्‍या स्थिति है. यह आकर देख लें. मेरे साथ चलकर देख लें कि किसानों की सोयाबीन की फसल लटक रही है. आपका और हमारा संभाग एक ही है. आप शहर में रहते हैं. गांव के किसानों की स्थिति देखिये. किसान परेशान हैं, दुखी हैं, उस किसान के कारण हम यहां हैं. मैंने आपका ध्‍यानकर्षित किया है न कि आपको नीचा दिखाने की बात की है. आप यह बताएं कि खाद कब मिलेगा.

          श्री विश्‍वास सारंगमाननीय सभापति महोदय, सभी ने सदन में बातें की कि खाद नहीं है, मैं नेता प्रतिपक्ष जी को धन्‍यवाद दूंगा कि इस सदन में कांग्रेस के विधायकों ने जो अपना वक्‍तव्‍य रखा लगभग मध्‍यप्रदेश के हर एक जिले का प्रतिनिधित्‍व उन्‍होंने किया. हमारे कृषि मंत्री जी ने यूरिया कितना है, डीएपी कितना है इसका आंकड़ा दिया मैं उस पर जाना नहीं चाहता हूं. मैं सदन को बताना चाहता हूं कि आज की तारीख में मध्‍यप्रदेश में हमारे पास 5.48 मेट्रिक टन यूरिया रखा हुआ है. कहीं कोई कमी नहीं है. डीएपी की बता करें तो लगभग 0.68 मेट्रिक टन रखा है. एनपीके की बात करें तो लगभग  3 लाख 11 हजार मेट्रिक टन हमारे स्‍टॉक में है. कॉम्‍प्‍लेक्‍स की बात करें तो लगभग 3.79 लाख मेट्रिक टन है. आप कहोगे यह पेपर पर है.

          श्री उमंग सिंघारमाननीय सभापति महोदय, कृषि मंत्री जी ने भी यही बात‍कही कि हमारे यहां रखा है, गोडाउन में रखा है, किसान को क्यों नहीं मिल रहा है. मैं तो आप दोनों मंत्रियों को कहना चाहता हूँ कि एक संयुक्त कमेटी बना लो. पक्ष के सदस्य और विपक्ष के सदस्य दोनों उस समिति में हों. उसके बाद जिलेवार दौरा कर लेतें हैं और किसानों से सीधे मिल लेते हैं. अगर किसान बोलेगा कि हमको खाद मिल रहा है तो आपकी जय. अगर नहीं मिल रहा है तो उसको कैसे खाद मिलेगा इस व्यवस्था पर बात की जाए. बात यह है कि व्यवस्था कैसे सुधरे.

          श्री विश्वास सारंग सभापति महोदय, मैं पूरी जिम्मेदारी से कहना चाहता हूँ हमने जो आंकड़े दिए हैं वह चाहे कृषि मंत्री ने दिए हों या मैं दे रहा हूँ. वे पूरी तरह प्रामाणिक हैं. पोर्टल में अभी जाकर देख लीजिए, रिफलेक्ट होगा, दिखेगा. सभापति महोदय, तराना से आवाज आ रही है महेश परमार जी के गांव की सोसाइटी है जैथल वहां पर यूरिया का विक्रय हुआ है 6 मेट्रिक टन और बैलेंस है 22 मेट्रिक टन. अभी है. काम्पलेक्स का वितरण हुआ है 36 मेट्रिक टन और अभी बैलेंस है 26 मेट्रिक टन. (व्यवधान)

          सभापति महोदय महेश जी आपस में चर्चा न करें. मंत्री जी आपके ही प्रश्नों का उत्तर दे रहे हैं. बैठिए आप.(व्यवधान)

          श्री विश्वास  सारंग माननीय सभापति महोदय, उमंग सिंघार जी आपके यहां गंगवानी में शेष यूरिया है 66 मेट्रिक टन, आज रखा है. काम्पलेक्स 75 मेट्रिक टन है. सुपर फास्फेट है 63 मेट्रिक टन. आप कह रहे हैं कि कम है.

          श्री उमंग सिंघार सभापति महोदय, मैं तो कह रहा हूँ कि दौरा कर लें. दोनों मंत्री दौरा कर लें मैं साथ में चलने को तैयार हूँ. हम पूरे प्रदेश के किसानों से मिलने को तैयार है. यहां पर आंकड़े गिनाने से क्या होता है, वहां पर खाद नहीं मिल रहा है. हमारे यहां पर उपलब्धता नहीं है. (व्यवधान)

          सभापति महोदय पर्टिकुलर तराना की बात आई थी उन्होंने उसका जवाब दिया है. (व्यवधान)

          श्री उमंग सिंघार यह परेशानी है. विषय यह नहीं है कि आपके पास कितना रखा है. क्या किसान को खाद मिल रहा है वो महत्वपूर्ण है. खाद मिल रहा है कि नहीं, बीज मिल रहा है कि नहीं वो महत्वपूर्ण है. (व्यवधान)

          श्री विश्वास  सारंग माननीय सभापति महोदय, मैं इसका जवाब दूंगा. (व्यवधान)

          श्री महेश परमार किसान दर-दर की ठोकरें खा रहा है, वहां चलकर देखो. माननीय मंत्री जी भ्रमित कर रहे हैं, असत्य जानकारी दे रहे हैं. मेरी सोसायटी की बात कर रहे हैं. मेरे साथ चलिए वहां पर दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. माननीय मंत्री जी यह किसान है इसके साथ ऐसा मत कीजिए, अन्नदाता है, किसान हमारा भगवान है. सदन को असत्य जानकारी दे रहे हैं.(व्यवधान)   

          सभापति महोदय माननीय नेता प्रतिपक्ष जी खड़े हैं महेश जी आप बैठ जाइए. माननीय मंत्री जी का बात पूरी होने दें, प्लीज. (व्यवधान)

          श्री विश्वास सारंग माननीय सभापति महोदय, यदि खाद नहीं मिलता तो क्या मध्यप्रदेश का किसान बुआई कर पाता. माननीय सभापति मैं आपको बता रहा हूँ. यदि खाद बीज नहीं मिलता तो बोवनी कैसे होती. आप जवाब दीजिए आप कह रहे हैं कि मिला नहीं है. आप कह रहे हो कि केवल पेपर पर है. 99 प्रतिशत बोवनी हो गई है. (व्यवधान)

          श्री महेश परमार एक एक बोरी के लिए किसान परेशान है (व्यवधान)

          श्री भंवरसिंह शेखावत यह मुझे बोल रहे हैं, किसान परेशान हो रहा है. (व्यवधान)

          सभापति महोदय भंवरसिंह जी कृपया बैठिए. सारे सदस्य एक साथ बोलेंगे तो बात नहीं आ पाएगी. इतनी शांतिपूर्वक चर्चा हुई.  (व्यवधान)

          श्री विश्वास सारंग भंवरसिंह जी आपके यहां भी रखा हुआ है जाकर देख लो. (व्यवधान)

          श्री भंवरसिंह शेखावत किसानों को खाद क्यों नहीं मिल रहा है. यह क्या व्यवस्था है. कुछ भी जवाब दोगे सदन में. (व्यवधान)

          सभापति महोदय माननीय मंत्री जी जानकारी दे रहे हैं. (व्यवधान)

          श्री विश्वास सारंग जो मामला उठाया है वह मैं बता रहा हूँ (व्यवधान)

          श्री भंवरसिंह शेखावत आप चलिए कौन सी सोसायटी काम कर रही है (व्यवधान)

          सभापति महोदय मंत्री जी आप की ही बात का जवाब दे रहे हैं. जवाब तो पूरा आने दीजिए.

          श्री विश्वास सारंग सभापति महोदय, यह असत्य बोलेंगे तो सब ठीक है, जनता को गुमराह करेंगे तो सब ठीक है. कांग्रेस के जितने विधायकों ने बोला उनके आंकड़े मेरे पास हैं.

          सभापति महोदय संसदीय कार्य मंत्री जी कुछ कहना चाह रहे हैं. कृपया सुन लें.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) सभापति महोदय, हमने तीन घंटे...

          श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव माननीय सभापति महोदय, एक मिनट. हमारी सिर्फ इतनी मांग है. माननीय मंत्री जी जो आंकड़े बता रहे हैं उसमें हमें किसी प्रकार की कुशंका नही है.

          श्री विश्वास सारंग तो फिर कोई कमी है ही नहीं.

          श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव मेरी बात तो सुन लीजिए. आप बहुत ही ऊर्जावान मंत्री हैं. बहुत निष्ठावान मंत्री हैं. बहुत अच्छा कार्य कर रहे हैं. इसमें कोई दो राय नहीं है. आज हम सब लोग यहां इसलिए बैठे हुए हैं. माननीय सभापति महोदय, यदि माननीय मंत्री जी बुरा न मानें तो पिछली बार सदन में जब यही विषय आया था. इस विषय में माननीय मंत्री जी का जो भाषण था वह भाषण उठा लें और आज जो भाषण हो रहा है उसमें और आज के भाषण में बहुत ज्यादा अंदर नहीं होगा. मैं उस विषय में नहीं जाना चाहता हूँ. हम सब यहां समाधान के लिए बैठे हैं. पहले भी जो हमारे सदस्‍यों के जो भाषण हुए हैं सबने यही कहा है कि हम सबकी चिंता किसानों के प्रति है. उपलब्‍धता एक विषय हो सकता है लेकिन वितरण एक अलग विषय है तो यहां पर अगर वितरण में किसी प्रकार की कोई कमी है तो उस कमी को कैसे हम दूर कर सकते हैं. यह चूंकि माननीय सहकारिता मंत्री हैं, साढ़े चार हजार सोसायटियां इनके अण्‍डर में आती हैं, अगर एक ऐसी व्‍यवस्‍था बन जाए जहां पर सोसायटियों के माध्‍यम से किसानों को व्‍यवस्थित खाद मिलने लग जाए तो न आपके लिए कोई समस्‍या होगी और न हम लोगों के लिए कोई समस्‍या होगी. हम यही चाहते हैं.

          सभापति महोदय -- अभी सुझाव आया है. माननीय मंत्री जी ने कहा भी था जो स्‍वागत योग्‍य है, उसे चर्चा में भी लिया है.

          श्री विश्‍वास कैलाश सारंग -- सभापति महोदय, सचिन जी जो बोल रहे हैं हम उस पर पहले ही काम कर चुके हैं. ई-विकास पोर्टल के माध्‍यम से किसान को कितनी खाद चाहिए, किसान को कौन सी खाद चाहिए, किसान का रकबा कितना है, कौन सी खेती उसको ठीक रहेगी, उसके खेत की सॉइल कंडीशन क्‍या है, यह सब दर्ज है और उसी का परिणाम है कि लगातार खाद की जो उपलब्‍धता है वह तो सुनिश्चित है, परंतु उसकी आपूर्ति में जो लोग खरीद रहे हैं उसमें कमी आ रही है, क्‍योंकि अब लोग जागरूक हो रहे हैं. किसान अब जागरूक हो रहे हैं. हमारे नेता प्रतिपक्ष जी ने पिछली बार हमें सुझाव दिया था. उसमें हम एक कदम आगे बढ़े हैं. हमने ई-विकास पोर्टल के माध्‍यम से व्‍यवस्‍था को पारदर्शी किया है. अभी बात हो रही थी, उमंग भाई कह रहे थे कि कालाबाजारी हो रही है, तो अब कालाबाजारी नहीं है. कालाबाजारी होती तो यूरिया और इनमें 16-16 प्रतिशत की विक्रय में जो कमी आई है वह नहीं आती. काला बाजारी अब कहीं नहीं है, क्‍योंकि अब ई-विकास पोर्टल के माध्‍यम से व्‍यवस्‍था सुचारू की है. चूंकि यह पहला साल था, मैं पूरी ताकत के साथ कहना चाहता हूं कि आगे आने वाले समय में मध्‍यप्रदेश मॉडल बनेगा. देश में ई-विकास को स्‍वीकार किया है और इसके माध्‍यम से हम एक नई क्रांन्ति लाने वाले हैं. यदि आपने कालाबाजारी की बात की उमंग भाई, उस पर भी काम किया है. उस पर भी सख्‍त कार्यवाही हुई है. यदि हम खाद की बात करें तो लगभग 5 हजार हमने सैंपल लिए और जहां गड़बड़ मिली वहां 10 लाइसेंस निरस्‍त किए हैं और 16 पर एफआईआर की है. हम यदि कीटनाशक की बात करें तो लगभग 100 सैंपल लिए हैं, 1 का लाइसेंस का निरस्‍त किया है और 4 पर एफआईआर की है. बीज में भी हमने इसी तरह काम किया है. एफआईआर भी दर्ज की है और लाइसेंस भी निरस्‍त किया है. एक बात यह भी आई, कुछ-कुछ हमारे माननीय विधायकों ने यहां पर कुछ मुद्दे उठाए हैं. मुझे लगता है कि हमें उस बात का जवाब देने का अधिकार है सरकार के नाते.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- सभापति महोदय, उमंग भाई ने जो बात काला बाजारी के बारे में कही.

          सभापति महोदय -- सोहन भैया, काफी समय हो गया है. बार-बार व्‍यवधान होगा तो चर्चा पूरी नहीं हो पाएगी. कृपया मंत्री जी अपनी बात जारी रखें. चर्चा पूरी होने दें.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- सभापति महोदय, कालाबाजारी के बारे में जो बोला तो आपने कहा हमने एफआईआर की है, लाइसेंस भी जप्‍त किया है, तो ब्‍लैक में बिक रही है तभी तो एफआईआर हुई है. यही बात तो उन्‍होंने कहा कि ब्‍लैक में बिक रहा है. उसका कहीं न कहीं दुरुपयोग हो रहा था तब आपने एफआईआर कीं, लाइसेंस जप्‍त किया, तो क्‍या गलत बोला ?

          श्री विश्‍वास कैलाश सारंग --  बाल्‍मीकी जी, वही तो कार्यवाही की है ना. हमने कब गलत बोला ?

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- आपने बोला कि आप गलत बात बोल रहे हो.

          श्री विश्‍वास कैलाश सारंग -- हमने कब गलत बोला. आप जानकारी भी नहीं देने दे रहे हैं.

          सभापति महोदय -- शासन ने जो कार्यवाही की है उससे अवगत करा रहे हैं. कृपया आप बैठिए.

श्री विश्‍वास कैलाश सारंग -- सभापति महोदय, हमारे कांग्रेस के कुछ विधायकों ने यहां पर कुछ मामले उठाए हैं, सरकार के नाते, मंत्री के नाते यह मेरा अधिकार है कि मैं उनका इस सदन में जवाब दूं. हमारे युवा विधायक नितेन्‍द्र राठौर जी ने कहा कि मण्‍डी में खरीददारी नहीं हो रही है. मैं इस सदन को बताना चाहता हूं कि अभी तक मण्‍डी में लगभग 520 लाख टन अनाज की आवक हुई है और यह अभी तक का रिकार्ड है कि पिछले वर्ष से लगभग 15 प्रतिशत ज्‍यादा की आवक हुई है. आप कह रहे हैं कि मण्‍डी में काम ही नहीं हो रहा है. हमारे उमंग भाई ने जो बातें बोली हैं उसमें आपने एक सुझाव दिया था बीज को लेकर, तो मैं आपको बताना चाहता हूं कि सहकारी क्षेत्र में हमने बीज संघ का गठन किया है. आपका सुझाव हम स्‍वीकार कर रहे हैं. अभी तक बीज निगम वितरण करता था और अब बीज संघ के माध्‍यम से हमने बीज के उत्‍पादन और उसके वितरण की एक व्‍यवस्‍था बनाई है और दो-तीन साल में हम उसको बहुत सुचारू करेंगे. हमारे उमंग भाई ने कुछ सॉइल टेस्टिंग लैब को लेकर बात की थी, मैं बताना चाहता हूं कि उसमें लगभग 16 लाख नमूनों की जांच हुई और 315 सॉइल टेस्टिंग लैब सब चल रहे हैं. मैं यह पूरी अथॉरिटी से बोल रहा हूं. महेश परमार जी ने बीमा की बात की. सभापति महोदय, सदन में किसानों के बीमा की बात की अभी महेश परमार जी फिर से खडे हो जायेंगे. इन्होंने कहा कि बीमा नहीं मिल रहा है किसानों को बीमा मिला है.

..व्यवधान...

श्री फुन्देलाल सिंह मार्कों सभापति महोदय, मेरा अनुरोध है कि मंत्री जी सहकारिता विभाग के मंत्री है  तो यह सिर्फ अपने विभाग की बात करें. कृषि विभाग इनके पास कब और कैसे आ गया, मिट्टी की जांच (Soil Test) की आप बात करेंगे, फिर कहेंगे कि सहकारिता विभाग है मेरे पास अभी आप मंडी की बात कर रहे हैं, मंडी किस विभाग में आता है, किसान कल्याण में बोल आप रहे हैं इसलिये आप सहकारिता की बात करें.

..व्यवधान...

श्री विश्वास सारंगसदन में संयुक्त जिम्मेदारी होती है, इसीलिये मैं बोल रहा हूं.

श्री फुन्देलाल सिंह मार्कोअरे आप कृषि मंत्री जी को बोल लेने दीजिये.यहां पर भाषण सुनने के लिये बैठे हैं क्या.

..व्यवधान...

सभापति महोदय- फुन्देलाल जी आप बैठें. आपकी बात आ गई.

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को- जो आपके 17 जिले सहकारिता के हैं आप उस पर बात करें .

श्री विश्वास सारंग- सभापति महोदय, श्री महेश परमार जी ने बीमा की राशि नहीं मिलने की बात की, 2025 में 10 लाख 54 हजार किसांन को लगभग 10460 करोड़ की किसान बीमा की राशि मिली है. यह रिकार्ड है.

श्री महेश परमार- दीर्घा में अधिकारी बैठे हैं पर्ची बनाकर के दे रहे हैं.माननीय कितना बीमा मिला 10 लाख किसानों को यह बतायें. बीमा किसानों का अधिकार है, बीमा की प्रीमियम किसान जमा करता है,

..व्यवधान...

सभापति महोदय- महेश परमार जी कृपया बैठे मंत्री जी को बोलने दें.

श्री विश्वास सारंग-बिना जानकारी के नहीं बोल रहे हैं, अथेंटिंक बात कह रहे हैं.

सभापति महोदय- सदन में जानकारी आ रही है तो आप जानकारी तो सुनें.

श्री सुरेश राजे- मंत्री जी से वही तो पूछ रहे हैं कि अभी तक चंबल क्षेत्र में कितने किसानों को बीमा की राशि मिली.

सभापति महोदयआप बैठें.

श्री दिनेश जैन बोसकितना बीमा किसानों ने भरा, असत्य जानकारी दे रहे हैं, जितना किसानों ने प्रीमियम भरा है उतना किसानों को बीमा भी नहीं मिला है.

श्री विश्वास सारंग- सभापति महोदय, बिना फार्मर आईटी के किसानों को खाद नहीं मिल रहा है,  मैं बहुत ही जिम्मेदारी के साथ में सदन में कहना चाहता हूं जैसा कृषि मंत्री ने बोला कोई भी किसान हो चाहे उसकी जमीन की रजिष्ट्री हो या न हो, उसका नामांतरण हो या न हो, हमारी कटिबद्धता है कि हम किसानों को खाद उपलब्ध करायेंगे. कहीं कोई गेप नहीं है.

श्री सोहनलाल बाल्मीक- कृषि मंत्री को भाषण इसलिये नहीं देने दिया गया कि सहकारिता मंत्री जी को सब कुछ बोलना है. कृषि मंत्री  ने पूरा जवाब नहीं दिया, सहकारिता मंत्री जी बोल रहे हैं. यह क्या व्यवस्था है. जिसका विभाग है वह पूरी बात अपने विभाग की रखे.

मंत्री, लोक निर्माण विभाग(श्री राकेश सिंह) सभापति महोदय, सदन में विपक्ष अपनी भूमिका निभाता है और उस समय आप कोई बंधन में नहीं होते हो, आप अपने प्रश्न पूछते हो, अपनी बात रखते हो, जब सरकार की तरफ से उत्तर आता है तो वह आसंदी की अनुमति से आता है यह विभाग का बंटवारा नहीं होता है कि आप उस विभाग के बारे में नहीं कह सकते, सरकार की कलेक्टिव रिस्पांसिबिलिटी (सामूहिक उत्तरदायित्व) है और अगर यह तय हुआ है कि दोनों विभाग के मंत्री अपनी बात रखेंगे तो यह नहीं हो सकता कि वह उनके विभाग की अच्छी बातें नहीं बतायेंगे औऱ वो उस विभाग की अच्छी बातें नहीं बतायेंगे, केवल एक ही उसका उद्धेश्य है कि सदन के पास में सारे आंकड़े आयें, सारी जानकारी आये और वही कौशिश सरकार की है. मेरा मानना है कि बहुत अच्छी चर्चा हुई है, बहुत सार्थक चर्चा हुई है अब जब समापन हो रहा है उत्तर आ रहा है तो हम लोग एक बार उत्तर को गंभीरता से सुन लें और उसके बाद कोई विषय आपका है तो चर्चा हो सकती है.

सभापति महोदय- सोहनलाल जी जो आपकी तरफ से विषय आया और जब चर्चा में एकाध विषय आ गये, इसके पूर्व माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी ने अवगत कराया गया है कि आसंदी से इसकी अनुमति दी गई है. आसंदी के अनुमति के माध्यम से बोल रहे हैं.

श्री उमंग सिंघार माननीय सभापति महोदय, सवाल और सवालों के जवाब चलते रहेंगे लेकिन किसानों को क्या खाद समय पर मिलेगी इसके बारे में जब मैंने कहा कि  पूरे जिलों में कमी है जिलों में धरने प्रदर्शन हो रहे हैं, , कई जगह मांग है आप कहें तो मैं इसकी पूरी जानकारी आपको दे सकता हूं लेकिन यहां पर मैं यह कहना चाहता हूं कि मैंने एक सुझाव भी दिया है कि जेपीसी बन जाये, जिले का का दौरा कर लेते हैं पता चल जायेगा कि किसान खुश है या नाराज है, इसमें क्या परेशानी है. बतायें, अगर समिति का गठन करने को तैयार हैं तो बता दें. जो बात हैं उस पर तैयार हैं तो ठीक है, हम यहां पर किसानों के हित की बात कर रहे हैं. अगर किसानों के पास हम नहीं जायेंगे तो फिर चर्चा का मतलब क्या है जो बात है जेपीसी की, अगर उस पर तैयार हैं तो ठीक है.

               (व्यवधान)

श्री विश्वास सारंग यह प्रश्न उत्तर नहीं है. अगर आप अलाऊ करेंगे तो मैं उत्तर दे दूंगा.

श्री उमंग सिंघार हम किसानों की बात कर रहे हैं, अगर उनके पास नहीं जाएंगे तो फिर मतलब क्या है. किसान जिसकी हम बात कर रहे हैं जिस किसान प्रदेश की बात कर रहे हैं, अगर किसान का दर्द, उसकी हम मांगें समझने के लिए ज्वाइंट्ली जाने के लिए तैयार हैं दोनों पार्टी के लोग, इसमें विधान सभा की कमेटी बनाने में क्या परेशानी है? जिलेवार दौरा कर लेते हैं. आपके सदस्य हो जायं, हमारे सदस्य हो जायं. दौरा कर लेते हैं, मालूम पड़ जाएगा वास्तविकता क्या है.

संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) श्री सोहनलाल जी बहिर्गमन करने के लिए भूमिका मत बनाइए.

श्री उमंग सिंघार इसमें सरकार से आप आश्वासन दिला दें. संसदीय कार्यमंत्री जी आश्वासन देते हैं आप आश्वासन दे दें.

श्री कैलाश विजयवर्गीय बहिर्गमन करने के लिए भूमिका मत बनाइए.

श्री उमंग सिंघार बहिर्गमन नहीं, हम मांग कर रहे हैं. यह हंसने-मजाक वाली बात नहीं है. किसानों की बात है. आप भी चलिए. यह हंसने-मजाक वाली बात नहीं है, किसानों की बात हो रही है, गंभीर बात हो रही है. बहिर्गमन करना है तो वह हम कर लेंगे, लेकिन क्या किसानों को हक मिलेगा, किसान के लिए आप तैयार हैं. यह हमारी मांग है.

श्री विश्वास सारंग सभापति महोदय, बीज को लेकर बहुत सारी बातें हुईं. मैं बताना चाहता हूं कि वर्ष 2026 में लगभग 150 लाख हैक्टेयर  लक्ष्य के विरुद्ध 116 लाख हैक्टेयर में बौनी हो चुकी है. यदि हम इसमें बीज का आंकड़ा देखें तो लगभग इसके लिए 25.61 लाख क्विंटल बीज की आवश्यकता है. सभापति महोदय, आज जबकि 99 प्रतिशत बौनी हो चुकी है तो भी आज हमारे पास 27 लाख  10 हजार मीट्रिक टन बीज उपलब्ध है, लगभग डेढ़ लाख ज्यादा है. कहीं कोई दिक्कत नहीं है. यह पेनिक करने की जरूरत नहीं है.

सभापति महोदय, मैं पूरी ताकत के साथ कहना चाहता हूं कि यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में, हम कटिबद्ध हैं किसानों के हित के लिए, हम कटिबद्ध हैं मध्यप्रदेश के किसानों की एक-एक समस्या के निदान के लिए, परन्तु मुझे आश्चर्य होता है हमने इतना जो किया, उसको लेकर यहां कोई बात नहीं हुई. आज यदि हम खाद्यान्न उत्पादन की बात करें तो यह डॉ. मोहन यादव जी का नेतृत्व है, जिसमें खाद्यान्न में हम देश में नंबर दो पर हैं, यदि हम अन्न उत्पादन की बात करें तो हम अग्रणी हैं. फूलों की खेती की बात करें.

(व्यवधान)

श्री उमंग सिंघार सभापति महोदय, आंकड़ें नहीं सुनना है, अधिकार चाहिए, किसान को खाद चाहिए, उसकी बात हो रही है, क्या आप फील्ड में जाने के लिए तैयार हैं, किसानों के पास मिलने के लिए इनके मंत्री क्यों तैयार नहीं हैं? हम जाने के लिए तैयार है, आप क्यों तैयार नहीं है?

(व्यवधान)

सभापति महोदय यह न्यायोचित नहीं है, आप बार बार विरोध कर रहे हैं. मेरा आपसे आग्रह है. यह बार बार व्यवधान हो रहा है. आप पूरा जवाब नहीं देने दे रहे हैं. माननीय मंत्री जी की बात पूरी होने दें.

(व्यवधान)

श्री उमंग सिंघार इसका समाधान क्या है, आप समाधान बताएं. सरकार समाधान बताना नहीं चाह रही है.

सभापति महोदय आप बैठिए, माननीय मंत्री जी बात पूरी होने दीजिए.

श्री उमंग सिंघार सभापति महोदय, इतने देर से सुन रहे हैं, आंकड़ें सुन रहे हैं. किसान को खाद चाहिए, बीज चाहिए.

सभापति महोदय पर्याप्त है, वह बता रहे हैं. माननीय मंत्री जी आंकड़ें बता रहे हैं.

श्री उमंग सिंघार आपने बोल दिया हमारे पास है. लेकिन किसान के पास नहीं है, प्रदेश के किसान के पास नहीं है.

सभापति महोदय आप उधर चर्चा कर रहे थे, सुन नहीं पाए. एक बार और माननीय मंत्री जी दोहरा दीजिए. खाद का आंकड़ा एक बार और दोहरा दीजिए.

श्री उमंग सिंघार सभापति महोदय, मेरा आपसे अनुरोध है कि हम किसानों के लिए एक सकारात्मक बात कर रहे हैं, उनके संवेदनशील विषय पर बात कर रह हैं, क्या किसानों को लेकर हम यहां जेपीसी बनाएंगे. क्या किसानों के पास जाएंगे. क्या जिले में हम जाएंगे और किसानों की बात करेंगे. आपके सामने सुझाव आएँगे और हमारे सामने भी सुझाव आएँगे, उस पर काम करें. आप ऐसा क्यों नही चाहते, सच्चाई जमीन पर क्यों नहीं देखना चाहते हैं. अधिकारियों ने आपको आंकड़े दे दिये और आपने आंकड़े सुना दिये.

श्री सोहनलाल बाल्मीक किसानों को खाद नहीं मिल रही है.

श्री विश्वास सारंग सभापति महोदय, किसान कल्याण वर्ष में जैसा मैंने कहा कि पूरी तत्परता के साथ पूरी कटिबद्धता के साथ किसान की हर समस्या का हल कर रहे हैं. आप आंकड़ों की बात कर रहे हैं. आंकड़ें भी गिनाएं. जब मैंने उसके उत्तर में आंकड़े दिये तो आपको दिक्कत हो रही है. यदि बीज और खाद की कमी होती तो 99 प्रतिशत बौनी नहीं हो जाती. आप यदि बात कर रहे हैं किसी कमेटी को बनाने की तो सरकार सक्षम है और सरकार कटिबद्ध है. मैं सदन में बड़ी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं. हम किसानों को कोई दिक्कत नहीं आने देंगे.

श्री उमंग सिंघार आप अभी कमेटी बनाएं, आप घोषणा करें. (व्यवधान) आप क्यों नहीं बनाना चाहते हैं, अभी कमेटी बनाएं, चलो दौरा करें, कल से दौरा बनाएं, क्यों कमेटी नहीं बना रहे हैं. किसानों के हित की बात है. किसानों के पास जाने में आपको क्या परेशानी है? उनको खाद मिल रही है कि नहीं, समर्थन मूल्य मिल रहा है कि नहीं, गेहूं का भाव मिला कि नहीं, सोयाबीन का भाव मिला कि नहीं, बिजली मिली की नहीं, खाद मिला कि नहीं. हम किसान के पास जाकर उनकी बात करना चाहते हैं. मैं आपके माध्यम से दोनों माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि क्या आप सहमत हैं?

...(व्यवधान)...

          सभापति महोदय एक मिनट रूकिए आप, माननीय सचिन जी एक मिनट रूकिए....(व्यवधान)....

श्री उमंग सिंघार सभापति महोदय, किसानों को खाद मिल रही है कि नहीं, बिजली मिल रही है कि नहीं. किसानों की बात करना चाहते हैं...(व्यवधान)..

          सभापति महोदय सभी माननीय सदस्यों से मेरा निवेदन है.. ...(व्यवधान)..  

          श्री उमंग सिंघार माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से दोनों मंत्रियों से पूछना चाहता हूँ. यह मना कर रहे हैं. केवल आंकड़ों से काम नहीं होगा..(व्यवधान)..   

          सभापति महोदय एक मिनट रूक जाइए. नेता प्रतिपक्ष जी, देखिए ऐसा है कि (श्री सचिव सुभाषचंद्र यादव जी के अपने आसन से खडे़ होकर कुछ कहने पर) आप एक मिनट रूक जाइए. विपक्ष की तरफ से अधिकतम नाम थे, सभी नामों को इसमें सम्मिलित किया गया. लगभग-लगभग पर्याप्त संतोषजनक, बगैर व्यवधान के लगातार लंबे समय से अपनी चर्चा हो रही है. अब यह शासन पक्ष का जवाब देने का समय आया है, जवाब के समय बार-बार व्यवधान कर रहे हैं, जिससे पूरा जवाब नहीं आ पा रहा है. हम सब अनुभवी हैं, आप लोग एक बात बताइए, यह जो जिले में दौरों की बात हो रही है, स्थल पर जाने की बात हो रही है यह सदन के द्वारा ही समिति बनी हुई है. समिति इसका निर्धारण करे. प्रदेश भर में दौरा करे. सदन ने ही  समिति बनायी है. कृषि समिति बनी हुई है. कृषि समिति जाकर के प्रदेश में दौरा कर सकती है, तो वह व्यवस्था तो सदन के द्वारा है. माननीय मंत्री जी, आप अपनी बात पूरी करिए. ...(व्यवधान)..

          श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव सभापति महोदय... ...(व्यवधान)..

          श्री विश्वास सारंग माननीय सभापति महोदय, चाहे किसान की बात हो, चाहे सिंचाई की बात हो...(व्यवधान)..

          सभापति महोदय सचिन जी, उसमें दोनों पार्टी के सदस्य हैं. ...(व्यवधान)..

श्री विश्वास सारंग सभापति महोदय, अभी हमारे कृषि मंत्री जी ने कहा. ...(व्यवधान)..

          श्री उमंग सिंघार सभापति महोदय, समाधान नहीं आ पा रहा है. विषय यह है. जो खाद, बीज को लेकर उनकी जो परेशानी है, वह बात नहीं आ पा रही है. आपके आंकड़ों से हमें कोई परेशानी नहीं है. आपने कह दिया, हमारे पास लाखों टन यूरिया, डीएपी है. लेकिन क्या किसान को मिली ? यह महत्वपूर्ण है. ...(व्यवधान)..

          श्री विश्वास सारंग अरे, मिली है मिली है. ...(व्यवधान)..

          श्री उमंग सिंघार सभापति महोदय, फिर क्यों कालाबाजारी हो रही है. फिर आप क्यों केस बना रहे हो. फिर क्यों किसान को नहीं मिल पा रही है ? खाद को लेकर, टोकन व्यवस्था को लेकर, आपके सर्वर को लेकर, किसान अगर परेशान है तो यह किसान ही बताएगा, हमने किसानों की बात की है. यह उमंग सिंघार की बात नहीं है, यह विधायक की बात नहीं है, यह उन खेतिहर किसानों की बात है, जो मध्यप्रदेश में संघर्ष कर रहे हैं, इस टोकन व्यवस्था को लेकर परेशान हैं. ...(व्यवधान)..

          सभापति महोदय माननीय मंत्री जी.

7.17 बजे             { अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए. }

          श्री विश्वास सारंग माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं जिम्मेदारी से कहना चाहता हूँ कि  मध्यप्रदेश में कहीं भी, किसी भी तरह से न खाद की कमी है, न बीज की कमी है. अल्पवर्षा की स्थिति में भी सरकार पूरी तरह से मुस्तैदी के साथ खड़ी है. कहीं कोई दिक्कत नहीं है. माननीय उमंग सिंघार भाई, सच मानिए हुजूर, चेहरे पर धूल है... ..(व्यवधान)..    

          श्री उमंग सिंघार चलिए, चलिए. किसानों के पास धूल खाएंगे. वहां चलो तो सही. वहां सड़क पर धूल समझ में आएगी..किसान की खाट में, किसान की झोपड़ी में बैठकर बात करें, तो पता चलेगा कि खाद मिल रही है या नहीं. अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है कि हम किसान की बात कर रहे हैं लेकिन आप आंकडे़ गिना रहे हैं कि सब व्यवस्था है लेकिन किसान कुछ और कह रहा है. हम उस बात को लेकर क्यों नहीं एक जांच कमेटी बनाना चाहते? ...(व्यवधान)..

          अध्यक्ष महोदय पहले माननीय मंत्री जी का जवाब तो पूरा हो जाने दीजिए. ...(व्यवधान)..

          श्री विश्वास सारंग माननीय अध्यक्ष महोदय, कहीं किसी भी तरह की दिक्कत नहीं है.

          अध्यक्ष महोदय आप पूरी जिम्मेदारी से बोलिए, लेकिन थोड़ा धीरे-धीरे बोलिए.

          श्री विश्वास सारंग जी माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं पूरी जिम्मेदारी से कह रहा हूँ कि कहीं भी किसी भी तरह की खाद की, बीज की दिक्कत नहीं है और मैं यही कहूंगा कि सच मानिए हुजूर, चेहरे पर धूल है, ....(व्यवधान)...

          श्री सोहनलाल बाल्मीक सभापति महोदय, यह गलत बात है हम इसका बहिष्कार करते हैं.... (व्यवधान)...

7.18 बजे                                         बहिर्गमन

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन.

          श्री उमंग सिंघार माननीय अध्यक्ष महोदय, हम माननीय मंत्री जी के जवाब से असंतुष्ट होकर बहिर्गमन करते हैं. सरकार किसानों की बात नहीं करना चाहती और न ही समाधान करना चाहती है. हम बहिर्गमन करते हैं...(.व्यवधान)...

          (श्री उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया.)

                                      ....(व्यवधान)...

          अध्यक्ष महोदय विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार, दिनांक 21 जुलाई, 2026 को प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्थगित.

          अपराह्न 7.19 बजे विधान सभा की कार्यवाही मंगलवार, दिनांक 21 जुलाई, 2026 (आषाढ़ 30, 1948) को पूर्वाह्न 11.00 बजे तक के लिए स्थगित की गई.

 

भोपाल.                                                                                       अरविन्द शर्मा,

दिनांक : 20 जुलाई, 2026                                                                  प्रमुख सचिव,

                                                                                            मध्यप्रदेश विधान सभा