मध्यप्रदेश विधान सभा
की
कार्यवाही
(अधिकृत विवरण)
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पंचदश विधान सभा चतुर्दश सत्र
फरवरी-मार्च, 2023 सत्र
सोमवार, दिनांक 20 मार्च, 2023
( 29 फाल्गुन, शक संवत् 1944 )
[ खण्ड- 14 ] [ अंक- 11 ]
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मध्यप्रदेश विधान सभा
सोमवार, दिनांक 20 मार्च, 2023
( 29 फाल्गुन, शक संवत् 1944 )
विधान सभा पूर्वाह्न 11.01 बजे समवेत हुई.
{ अध्यक्ष महोदय (श्री गिरीश गौतम) पीठासीन हुए.}
11.01 बजे प्रश्नकाल में मौखिक उल्लेख
अध्यक्ष महोदय - प्रश्न क्रमांक 1, श्री विजयराघवेन्द्र सिंह.
श्री पी.सी.शर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने एक स्थगन दिया है. पेपर लीक हो रहे हैं. पहले 10वीं का अंग्रेजी का पेपर लीक हुआ, उसके बाद 12 वीं के भी हुए. लगातार पेपर लीक हो रहे हैं और यह कहा गया है कि...
अध्यक्ष महोदय -- प्रश्नकाल हो जाने दीजिए.
श्री पी.सी.शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, हमने उस पर स्थगन दिया है. उसमें लिया जाए.
अध्यक्ष महोदय -- प्रश्नकाल हो जाने दीजिए न. प्रश्नकाल के बाद हम सुन लेंगे. प्रश्न क्रमांक 1, श्री विजयराघवेन्द्र सिंह जी.
प्रश्न क्रमांक - 1 श्री विजयराघवेन्द्र सिंह (अनुपस्थित)
अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न क्रमांक - 2 श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन जी.
11.02 बजे तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर
प्रबंध संचालक के पद एवं कार्यों की जांच
[पशुपालन एवं डेयरी]
2. ( *क्र. 1114 ) श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के वर्तमान में पदस्थ प्रबंध संचालक मूलतः किस विभाग के अधिकारी हैं? उनका मूल पद क्या है? वे मूल विभाग से पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम में कब से प्रतिनियुक्ति पर हैं? (ख) शासन द्वारा किसी व्यक्ति को अधिकतम कितने वर्ष के लिए प्रतिनियुक्ति दी जा सकती है? नियमावली सहित बताएं। (ग) उक्त विभाग में प्रबंध संचालक पद की स्वीकृति कब प्रदान की गई एवं क्या केबिनेट से उक्त पद की मंजूरी ली गई है? यदि हाँ, तो विस्तृत जानकारी देवें? यदि नहीं, तो उक्त पदस्थापना कैसे की गई? (घ) पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के प्रबंध संचालक हेतु क्या-क्या सेवा शर्तें हैं? वर्तमान में पदस्थ प्रबंध संचालक के विरुद्ध 5 वर्षों में कितनी शिकायतें विभाग को प्राप्त हुईं? कितनों की जांचें की गई एवं किन-किन अधिकारियों के द्वारा जांच की गई? समस्त शिकायतों एवं जांच के निष्कर्ष का विवरण देवें।
पशुपालन मंत्री ( श्री प्रेमसिंह पटेल ) : (क) पशुपालन एवं डेयरी विभाग के आदेश दिनांक 23 अगस्त, 2012 के द्वारा डॉ. एच.बी.एस. भदौरिया, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष पशु उत्पादन एवं प्रबंध आर.ए.के. कृषि महाविद्यालय सीहोर, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय की सेवाएं प्रतिनियुक्ति पर लेकर प्रबंध संचालक, म.प्र. राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम के पद पर पदस्थ किया गया है। (ख) सामान्य प्रशासन विभाग के परिपत्र दिनांक 29 फरवरी, 2008 के अनुसार लोक सेवक की सेवाएं कम से कम दो वर्ष के लिए प्रतिनियुक्ति पर ली जानी चाहिए। कंडिका 2 के प्रावधान अनुसार ''प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ाने हेतु जिस विभाग में अधिकारी/कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर है, जिस विभाग से सेवाएं ली गई हैं, उन दोनों विभागों की सहमति होने पर विभाग स्तर पर निर्णय लिया जाने का प्रावधान है। (ग) मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) दिनांक 30 अक्टूबर, 1982 में प्रकाशित मध्यप्रदेश प्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम अधिनियम 1982 (क्र. 37 सन् 1982) सहपठित (संशोधित) अधिनियम 1984 की धारा 10 अंतर्गत है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''अ'' एवं 'ब' अनुसार है।
श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन -- अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के उत्तर में माननीय मंत्री जी ने क, ख, ग तथा घ तक जो जानकारी दी है, वह एक सामान्य जानकारी है. मेरा जो मूल प्रश्न है कि इनके खिलाफ 4 और दूसरी 7 शिकायतें हैं. सभी शिकायतों की जो मुझे प्रविष्ठियां दी गईं, उसमें बताया गया है कि सक्षम अधिकारी द्वारा उल्लेखित बिन्दुओं के परीक्षणोपरांत नस्तीबद्ध की गईं. दूसरे में भी, तीसरे में भी, चौथे में भी बताया गया है. डॉक्टर उमेश शर्मा की शिकायत पर प्रारम्भिक स्तर पर अवलोकन करने के पश्चात् नस्तीबद्ध कर दिया गया. जांच ही नहीं हुई और पेपर को देखकर नस्तीबद्ध कर दिया गया. तीनों में ही यह लिखा है. प्रारम्भिक स्तर पर अवलोकन करने के पश्चात् नस्तीबद्ध कर दिया गया. फिर कह रहे हैं कि प्रारम्भिक स्तर पर अवलोकन करने के पश्चात् नस्तीबद्ध कर दिया गया. इसके बाद जो चौथी, पांचवीं, छठवीं और सातवीं शिकायतों में भी इन्हीं बातों का उल्लेख है.
अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहूंगा. ऐसा कभी नहीं होता कि जांच में तथ्यात्मक प्रमाण के साथ में कोई शिकायत हो और बगैर जांच किये इसको नस्तीबद्ध कर दिया जाए तो मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह आग्रह करना चाहता हॅूं और उनसे प्रश्न करना चाहता हॅूं कि क्या आप इन सभी 11 शिकायतों की माननीय विधायकों की समिति बनाकर, भले ही उस समिति में प्रमुख सचिव उन्हीं के विभाग के रहें, हमें कोई आपत्ति नहीं, उसमें गौरीशंकर बिसेन का रहना आवश्यक नहीं है. उसमें कोई भी 2 सदस्य, 3 सदस्य, 4 सदस्यों की समिति बनाकर इनकी पुन: जांच करवाएंगे ?
श्री प्रेमसिंह पटेल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जांच तो करवा ली गई है, अब जरूरत क्या है. जांच तो पूरी अधिकारियों के द्वारा ही किया गया है.
अध्यक्ष महोदय -- नहीं, नहीं. वह जो आपने उत्तर लिखा है, उस उत्तर के लिए वह कह रहे हैं कि आपने लिखा है कि, सब देखकर के कर लिया है. उसमें जांच में वह आया नहीं है. उत्तर में कहां है ?
श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन -- अध्यक्ष महोदय, जांच नहीं की गई है, अधिकारी की जांच को आप कह रहे हैं. अधिकारियों ने बिना देखे ही नस्तीबद्ध कर दिया. तो मैं माननीय मंत्री महोदय से और इस सरकार से जानना चाहता हूँ क्या आप मध्यप्रदेश विधान सभा के कोई दो सदस्य, कोई तीन सदस्यों की, समिति, जिसमें सचिव, पशुधन विभाग भी रहें, हमें कोई आपत्ति नहीं और उस जाँच को चाहें मंत्री जी अपने समक्ष करा लें. क्या पुनः सारे 7 बिन्दुओं पर और 4, 11 बिन्दुओं पर जाँच कराएँगे?
श्री प्रेमसिंह पटेल-- माननीय अध्यक्ष जी, अगर इस प्रकार से माननीय सदस्य क्योंकि वरिष्ठ भी हैं और मंत्री भी रह चुके हैं, अगर मतलब इस प्रकार से होगा तो जाँच करवा लेंगे.
श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन-- क्या माननीय अध्यक्ष महोदय....
अध्यक्ष महोदय-- कमेटी वाला नहीं...
श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन-- नहीं, नहीं, अध्यक्ष महोदय, आप हमारे संरक्षक हैं. आप यदि हमें संरक्षण नहीं देंगे तो हम किससे प्राप्त करेंगे?
अध्यक्ष महोदय-- मैं कह रहा हूँ ना जाँच, वो खुद कह रहे हैं, स्वीकार कर रहे हैं कि हम जाँच करा लेंगे.
श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन-- नहीं, मैं चाहता हूँ कि माननीय विधायकों की समिति बनाकर....
अध्यक्ष महोदय-- नहीं लगता इसमें समिति की आवश्यकता...
श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन-- क्यों नहीं बनाएँगे...
अध्यक्ष महोदय-- मैंने सिर्फ कहा जरूरी नहीं...
श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन-- क्यों नहीं बनना चाहिए?
अध्यक्ष महोदय-- आप जाँच होने दीजिए.
श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन-- मैंने अपना नाम नहीं लिया.
श्री लक्ष्मण सिंह-- अध्यक्ष महोदय, यह बहुत गंभीर मामला है, बहुत सारे भ्रष्टाचार के आरोप उस व्यक्ति के ऊपर हैं.
श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन-- मैं कहता हूँ उस समिति में सिर्फ मेरा नाम नहीं चाहिए. मेरा यह कहना है यदि 11 शिकायतें प्रथम दृष्टया में बिना जाँच के नस्तीबद्ध की जाती हैं इसका मतलब है बहुत बड़ी अनियमितताएँ हैं और इससे सरकार को इन्कार नहीं करना चाहिए. यदि सरकार चाहे दूध का दूध, पानी का पानी करे ना. मैं कहना चाहता हूँ किसी भी दल का कोई भी माननीय विधायक, आप समिति तय कर दें, माननीय मंत्री जी तय कर दें. समिति की आज घोषणा कर दें. मैंने इस 4 साल में पहला प्रश्न किया है और बड़ी मुश्किल से प्रश्न आया है, मुझे पता है कैसे आया है और इसलिए मैं चाहता हूँ कि इसकी जाँच हो.
अध्यक्ष महोदय-- ऊपर वाले की कृपा से आया है क्योंकि लॉटरी है...(व्यवधान)..नहीं ऊपर वाले की कृपा से आया है.माननीय मंत्री जी...
श्री लाखन सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, काफी सीनियर मंत्री हैं, मैं चाहता हूँ यदि वे आग्रह कर रहे हैं तो फिर समिति बनाकर जाँच करा ली जाए.
अध्यक्ष महोदय-- नहीं, नहीं, आप बैठ जाइये.
श्री लाखन सिंह यादव-- चलो, हम लोगों की नहीं होती है, तो उधर वालों की तो हो जाए अध्यक्ष महोदय, जाँच.
अध्यक्ष महोदय-- बैठ जाइये. एक प्रवृत्ति यह आई है कि प्रत्येक विषय में जो विधायक जाँच की मांग करता है तो विधायक कमेटी की ही मांग कर रहा है. उसका परिणाम यह निकलेगा कि हमारे जितने विधायक हैं सबको किसी न किसी कमेटी में फिट करके रखना पड़ेगा, दूसरा काम वे कर ही नहीं पाएँगे इसलिए कृपया जाँच हो जाए, ऐसा करके करें. नेता प्रतिपक्ष जी कुछ कहना चाह रहे हैं.
नेता प्रतिपक्ष(डॉ.गोविन्द सिंह)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जब सरकार की नौकरशाही पूरी तरह से एकतरफा कार्रवाई कर रही हो. विधान सभा और शासन के नियम, प्रक्रियाओं की धज्जियाँ उड़ा रही हो. इन परिस्थितियों में अगर सच्चाई से न्याय, अगर कोई विधायक मांग करता है इसमे कौनसा अपराध है? (मेजों की थपथपाहट) अगर सच्चाई है, साफ-सुथरा काम, आप चाहते हैं कि सच्चाई उजागर हो, तो उसमें विधायक को रखने में कोई दिक्कत नहीं है. दिल्ली में भी जेपीसी (ज्वाईंट पार्लियामेंट्री कमेटी) बनाई जाती है, तो हम भी यहाँ देख रहे हैं लेकिन आज तक, पता नहीं क्यों, मैं भी कुछ दिन, ज्यादा दिन तो नहीं रहा, सरकार में रहा दो बार, हमने अपने आप, नहीं चाहा, बिना मांग के भी हमने कहा कि सदस्य को रखो ताकि भ्रष्टाचार का स्पष्ट हो जाएगा. फिर माननीय गौरीशंकर बिसेन जी शायद इस सदन में अभी बैठे हैं वर्तमान में, इनमें सबसे, लोकसभा और विधान सभा मिलाकर, सबसे वरिष्ठ सदस्य हैं और सभी का सम्मान करते हैं. ये पक्ष विपक्ष से ऊपर उठकर हैं, तो अगर इन्होंने कोई मांग की है तो हमारी आप से विनम्र प्रार्थना है कि उनका सम्मान करते हुए और नहीं है तो कम से कम अधिकारी हैं उनके जो प्रतिनिधि हैं उनको रख लें या उन्हें रख लें, इसमें कोई आपत्ति नहीं होना चाहिए.
श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन-- अध्यक्ष महोदय, मैं नहीं रहना चाहता जाँच में. जाँच समिति किसी भी सदस्य की हो.
अध्यक्ष महोदय-- बिसेन साहब, एक मिनट, संसदीय कार्य मंत्री जी, चूँकि नेता प्रतिपक्ष बोले हैं.
संसदीय कार्य मंत्री (डॉ.नरोत्तम मिश्र)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सम्मानित नेता प्रतिपक्ष ने दो बातें कहीं, जो मेरी समझ से परे थी, यह कि यहाँ पर नियम, कानून की, धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं. मेरे ख्याल से वह विषय अलग है और संदर्भित विषय है, सम्मानित सदस्य गौरीशंकर बिसेन जी सबके सम्माननीय हैं, पूरे सदन के सम्माननीय हैं, वे वरिष्ठ हैं और वे अगर जाँच की मांग कर रहे हैं तो जाँच करने में कोई दिक्कत नहीं है, पर जैसा आप स्वयं आसन्दी से बता चुके हैं कि सम्मानित सदस्य फिर इस मांग को उठाते रहेंगे और हरेक कोई न कोई सदस्य रहेगा, भाऊ, जो अधिकारी कहेंगे, जिस अधिकारी से कहेंगे, जैसी कहेंगे, वैसी भाऊ की जाँच करा दी जाएगी.
श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन-- मैं मंत्री था कई सदस्यों की समिति बनाकर जाँच करवाई मैंने आप भी मंत्री हैं, आपने भी सदस्यों का सोचा. मैं कहना चाहता हूँ हमारे यशपाल जी को रख दीजिए, अकेले सदस्य को, किसी भी सदस्य को रख दीजिए, मुझे समिति में नहीं रहना है, यशपाल सिंह जी को रख दीजिए, माननीय शर्मा जी जांच कर लें.
डॉ. नरोत्तम मिश्र -- ठीक है, यशपाल सिंह जी को रख दीजिए.
श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन -- और सचिव रहें.
अध्यक्ष महोदय -- ठीक है. माननीय मंत्री जी जांच समिति बनाइए, सहमति हो गई है यशपाल सिंह सिसौदिया जी को जांच समिति में रखिए.
श्री प्रेम सिंह पटेल -- ठीक है.
अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न क्रमांक 3 श्रीमती कृष्णा गौर जी. (अनुपस्थित)
डॉ. हिरालाल अलावा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, कुक्कुट विकास निगम से संबंधित मेरा इसमें प्रश्न था.
अध्यक्ष महोदय -- आप किस प्रश्न के संबंध में बोल रहे हैं.
डॉ. हिरालाल अलावा -- श्रीमती कृष्णा गौर के प्रश्न पर बोल रहा हूँ यह कुक्कुट विकास निगम से संबंधित है.
अध्यक्ष महोदय -- कृष्णा गौर जी आई नहीं हैं और उन्होंने आपको अधिकृत भी नहीं किया है. मूल सदस्य ही नहीं है बाद के सदस्य का प्रश्न नहीं होगा.
श्री विश्वास सारंग -- माननीय अध्यक्ष महोदय, कांग्रेस के विधायकों का एकाध बार प्रबोधन कार्यक्रम करवा दीजिए. नेता प्रतिपक्ष जी करवाते नहीं हैं.
डॉ. गोविन्द सिंह -- संबोधन के प्रमुख वक्ता आप ही रहना. (हंसी)
अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न क्रमांक 4 श्री धर्मेन्द्र भावसिंह लोधी (अनुपस्थित)
छात्रवृत्ति वितरण में की गई अनियमितताएं
[जनजातीय कार्य]
5. ( *क्र. 3220 ) श्री हर्ष यादव : क्या जनजातीय कार्य मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) विभाग अंतर्गत संचालित संस्थाओं के ऑडिट के संबंध में महालेखाकार ग्वालियर से ऑडिट कराये जाने के क्या प्रावधान हैं? विस्तृत विवरण देवें। प्रदेश में ऐसे कितने जिले हैं, जिनके द्वारा अनुसूचित जाति जनजातीय कार्य विभाग में वर्ष 2017-18 से 2019-20 तक महालेखाकार ग्वालियर द्वारा ऑडिट नहीं कराई गई है? जिलेवार बतावें। पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में राशि संबंधी अनियमितता की गई? छात्र, छात्रा, संस्था, जिला अनुसार जानकारी देवें। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार विभाग द्वारा कराए गए ऑडिट में पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में अनियमितता संबंधी गड़बड़ियां पाई गईं हैं? विस्तृत विवरण देवें। संस्थावार/जिलावार जानकारी दें। (ग) क्या प्रश्नांश (ख) अनुसार अधिकांश जिलों में करोड़ों की अनियमितता, गबन फर्जी खाता, फर्जी छात्र प्रश्न दिनांक तक पाए गए हैं? जिलेवार/खातावार/छात्र-छात्रावार/संस्थावार विस्तृत विवरण देवें। (घ) क्या प्रश्नकर्ता द्वारा पत्र क्र. 995, दिनांक 01.12.2022 के माध्यम से विभाग में हुई अनियमितताओं के संबंध में लेख किया गया था? यदि हाँ, तो विभाग द्वारा उपरोक्त के संबंध में क्या कार्यवाही की गई है? विस्तृत विवरण देवें? यदि नहीं, तो विभाग इस संबंध में कब तक कोई कार्यवाही करेगा?
श्री हर्ष यादव -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहता हूँ.
अध्यक्ष महोदय -- क्या संशोधित उत्तर मिल गया है.
श्री हर्ष यादव -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे अभी-अभी मिला है. यह जवाब जो भेजा गया है कि जानकारी संकलित की जा रही है. जब मैं सदन में आया हूँ तब जवाब मिल रहा है. दूसरा कहा जा रहा है कि जानकारी पुस्तकालय में रखी गई है. विधान सभा का औचित्य है, विधान सभा प्रश्न लगाने का विधायकों का हक है. इस तरह की जानकारी यदि यहां पर रखी जाएगी, पुस्तकालय में जानकारी मिलेगी नहीं तो इसका औचित्य क्या रहेगा. सबसे बड़ा प्रश्न यह है. इस तरह का व्यवहार हो रहा है.
अध्यक्ष महोदय -- सबसे पहले सचिवालय पर जो प्रश्न चिह्न लगा है उसका स्पष्टीकरण ले लें.
श्री हर्ष यादव -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उसी का तो मैं कह रहा हूँ.
अध्यक्ष महोदय -- आपने अभी कहा कि पुस्तकालय में नहीं रखा है. जबकि परिशिष्ट रखा हुआ है.
श्री हर्ष यादव -- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें प्रश्नोत्तरी आई है इसमें लिखा है कि जानकारी संकलित की जा रही है. आज सुबह तक मेरे पास यही जानकारी थी. जब मैं सदन में आया तब यह जानकारी प्राप्त हो रही है. माननीय अध्यक्ष जी बड़ा घोटाला है. यह गंभीर मामला है.
अध्यक्ष महोदय -- यह प्रश्नोत्तरी संशोधित होकर के परिशिष्ट के साथ आपको रखी हुई मिली या नहीं मिली.
श्री हर्ष यादव -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यहां मिली है, जब हाउस में आया हूँ तब मिली है. यह गंभीर मामला है. सवाल यह उठता है कि इतना बड़ा भ्रष्टाचार, छात्रवृत्ति घोटाला है. पहले भी सागर जिले में 113 करोड़ रुपए का घोटाला हो चुका है. अभी भी छात्रवृत्ति घोटाले का मामला मैंने जो उठाया था. मैंने एक पत्र लिखा खा मुख्य सचिव महोदय को 955 के माध्यम से दिनांक 1.12.2022 को उसकी जांच अभी तक नहीं हुई है. कोई जानकारी नहीं आई है. ऐसे छात्र जो अध्ययनरत् नहीं हैं उनके खाते में पैसा डाला जा रहा है. जिले का पूरा विभाग उसमें संलिप्त है. क्या इसकी जांच करवाएंगे, मेरा मूल प्रश्न यह है.
सुश्री मीना सिंह माण्डवे -- माननीय अध्यक्ष महोदय, विभाग के द्वारा पहले जाँच करवा ली गई है. जो व्यक्ति इसमें संलिप्त पाए गए थे, जाँच के दौरान लगा कि हाँ इन्होंने गलती की है तो उन पर कार्यवाही हुई है. एक व्यक्ति को नौकरी से पृथक भी किया गया है. बचे हुए लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई है.
नेता प्रतिपक्ष (डॉ. गोविन्द सिंह) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी 5 दिन पूर्व भिण्ड जिले में भी करीब 200 छात्रों को 20 करोड़ रुपए के लगभग,अनुसूचित जाति, जनजाति विभाग ने छात्रों को डबल पेमेंट दिखाकर आधी राशि उड़ा दी. घोटाला कर दिया. माननीय मंत्री जी आप इसकी थोड़ी समीक्षा करें अधिकांश जिलों में यह हो रहा है. मैंने आपको बताया भी था कि अनुसूचित जाति, जनजाति विभाग को जो राशि है विकास कार्य के लिए दी जाती है उस राशि में भी, शायद अध्यक्ष जी आपके यहां पहुंच जाती होगी. पहले परम्परा रही है आबादी के हिसाब से वितरण होता था लेकिन अब यह परम्परा लगभग 2-3 सालों से बंद हो गई है. भिण्ड जिले में आज तक पूछा नहीं गया पूरी की पूरी राशि अधिकारी सीधे एजेंसी को बुलाकर भुगतान कर रहे हैं. मैंने आपको चर्चा के दौरान अवगत भी कराया था. हमारा अनुरोध है कि आप सागर और जहां-जहां भी इस तरह के घोटाले आए हैं उनको एफआईआर दर्ज करवाकर गिरफ्तार करके जेल भेजें. अभी केवल जांच का नोटिस दे देते हैं और नोटिस के बाद केवल जांच चलती है.
अध्यक्ष महोदय-- इसमें इनका कहना है कि उनको बर्खास्त कर दिया है. विधायक जो इस प्रकरण को उठा रहे हैं उसमें एक को बर्खास्त कर दिया है और बाकी लोगों के खिलाफ एफआईआर हो गई है.
श्री हर्ष यादव-- अध्यक्ष महोदय, सागर जिलें में जो 36 लाख रुपए का छात्रवृत्ति घोटाला हुआ है वहां उन छात्रों के नाम पर पैसा डाला गया है जो छात्र हैं ही नहीं. वह छात्र, छात्राएं वहां अध्यनरत हैं ही नहीं. वह संस्थाएं रजिस्टर्ड हैं ही नहीं. फिर आनन-फानन में आप जो जांच की बात कर रहे हैं वह जांच हुई तो विभाग के अधिकारी, कर्मचारियों के द्वारा वह पैसा वापस किया गया है. जो अधिकारी, कर्मचारी इसमें संलिप्त हैं जिनके द्वारा पैसा वापस किया गया है उनमें से एक अधिकारी, कर्मचारी के द्वारा साढ़े आठ लाख रुपए वापस किया गया है, एक बाबू के द्वारा भी पैसा वापस किया गया है जो कि वहां लंबे समय से पदस्थ हैं. एक शहडोल का जो व्याख्याता है वह मूल अधीक्षक के पद पर पदस्थ होना चाहिए. जो छात्रावास अधीक्षक है वह कार्यालय में बैठकर सागर में घोटाला कर रहा है. क्या मंत्री महोदया ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही करेंगी?
सुश्री मीना सिंह माण्डवे -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो भी व्यक्ति छात्रवृत्ति से संबंधित अनियमितता में पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी और हम उनकी जांच भी करा लेंगे.
श्री हर्ष यादव-- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि मैंने मुख्य सचिव महोदय को 1 दिसम्बर 2022 को पत्र लिखा था. उसकी जांच अभी तक नहीं हो पाई है. मेरा मूल प्रश्न यह है कि जो कर्मचारी उसमें पदस्थ हैं क्या आप उनके खिलाफ एफआईआर करेंगी? क्या उन्हें बर्खास्त करेंगी?
अध्यक्ष महोदय-- एफआईआर तो हो गई है.
सुश्री मीना सिंह माण्डवे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, अगर वह अधिकारी, कर्मचारी जांच के दौरान दोषी पाए जाएंगे तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.
श्री हर्ष यादव-- यह साक्ष्य है कि उन्होंने विभाग को अपने खाते से छात्रवृत्ति का साढ़े आठ लाख रुपए ट्रांसफर किया है तो वह तो प्रथम दृष्ट्या दोषी हैं. क्या आप उसकी जांच करवाएंगे और कब तक जांच होती रहेगी? पहले भी सागर जिले में 13 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ है, भ्रष्टाचार हुआ है. अब यह नया घोटाला सामने आया है. यह बहुत ही गंभीर मामला है. यह एससी, एसटी छात्रवृत्ति का मामला है.
अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी विधायक जी का यह कहना है कि उन अधिकारियों ने स्वयं स्वीकार करके पैसा लौटाया है आपको वापस किया है इसका अर्थ यह है कि उनके पास पैसा निकला है. उसके संबंध में क्या कार्यवाही है.
श्री हर्ष यादव-- जो अधिकारी इसमें संलिप्त हैं उन्होंने अपने खाते से पैसा वापस किया है.
सुश्री मीना सिंह माण्डवे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके निर्देशानुसार उन पर कार्यवाही की जाएगी.
श्री हर्ष यादव-- क्या उनको सस्पेंड करके एफआईआर की जाएगी.
सुश्री मीना सिंह माण्डवे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, ठीक है.
श्री हर्ष यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, क्या ठीक है?
सुश्री मीना सिंह माण्डवे-- आपने जो कहा उस बात को लेकर मैंने माननीय अध्यक्ष महोदय की अनुमति लेकर हां कहा.
अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री महोदया ठीक है.
निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में NRI कोटे में अनियमितता
[चिकित्सा शिक्षा]
6. ( *क्र. 3210 ) श्री महेश परमार : क्या चिकित्सा शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वर्ष 2017 में NRI कोटे से प्रवेशित 114 छात्रों में से 107 छात्रों के प्रवेश अमान्य किये गए थे? यदि हाँ, तो उक्त मामले से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराएं एवं 107 छात्रों को अवैध रूप से प्रवेश देने वाली संस्थाओं के नाम, पते की सूची उपलब्ध कराएं। (ख) क्या अपात्र 107 छात्रों को प्रवेश देने वाली संस्थाओं के विरुद्ध संचालनालय द्वारा कार्यवाही की गयी है? यदि हाँ, तो प्रति उपलब्ध करावें और यदि नहीं, तो कारण स्पष्ट करें। (ग) माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में wp/14826/2017 में पारित आदेश के अंतर्गत क्या विनियामक समिति को जांच कर अंतिम आदेश जारी करने हेतु निर्देशित किया गया था? यदि हाँ, तो मान. न्यायालय के निर्देश पर उक्त समिति द्वारा की गई जांच का प्रतिवेदन व अंतिम आदेश की प्रति उपलब्ध कराएं। (घ) उक्त प्रकरण में स्थगन आदेश को खाली कराने के लिए विभाग ने क्या क्या कार्यवाहियां की हैं? उनकी प्रतियाँ देवें। NRI कोटे से फर्जीवाड़े को रोकने के लिए विभाग द्वारा प्रदेश के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में कब कब जांच की गयी? क्या कमियां पायी गयी? जांच के मापदंड, नियम उपनियम की प्रतियां देते हुए जांच प्रतिवेदन सहित प्रस्तुत करें।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री ( श्री विश्वास सारंग ) : (क) जी हाँ। कार्यालय द्वारा की गई जांच का जांच प्रतिवेदन एवं एन.आर.आई. कोटा में प्रवेशित अभ्यर्थियों के प्रवेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाने के संबंध में जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1 अनुसार है। (ख) एन.आर.आई. कोटा में प्रवेशित अभ्यर्थियों के प्रवेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाने के संबंध में जारी पत्र क्रमांक 3307/4/प्रवेश/संचिशि/17 दिनांक 28.11.2017 की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 2 अनुसार है। (ग) जी हाँ। माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में दायर डब्ल्यू.पी. 14826/2017 में पारित आदेश दिनांक 18.05.2018 में दिये गये निर्देशानुसार वर्ष 2017 में निजी चिकित्सा महाविद्यालयों में एन.आर.आई. कोटे में प्रवेशित 107 अभ्यर्थियों की जांच प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति द्वारा की गई। जांच प्रतिवेदन एवं अंतिम आदेश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 3 अनुसार है। 1. प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति सचिवालय का आदेश क्रमांक 09, दिनांक 02.01.2019 में 96 वैद्य छात्रों से संबंधित है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 4 अनुसार है। 2. प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति सचिवालय का आदेश क्रमांक 288, दिनांक 06.03.2019 जो 02 वैध छात्रों से संबंधित है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 5 अनुसार है। 3. माननीय अपीलीय प्राधिकारी का अपीलीय आदेश क्रमांक 20 से 28 तक दिनांक 12.03.2019 जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 6 अनुसार है, जो 07 वैध छात्रों से संबंधित है। इस प्रकार वैध छात्रों की संख्या 105 होती है। (घ) माननीय न्यायालय में दायर डब्ल्यू.पी.14826/2017, दिनांक 18.05.2018 को डिस्पोज्ड की जा चुकी है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 3 अनुसार है।
श्री महेश परमार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न था कि एनआरआई कोटे में किन-किन छात्रों को पूरे मध्यप्रदेश में प्रवेश दिया गया. माननीय चिकित्सा शिक्षा मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि इसमें मैंने जो जानकारी चाही थी उस जानकारी से भिन्न जानकारी दी गई है. वर्ष 2017 से लेकर अभी तक जो निजी चिकित्सा महाविद्यालय हैं उन महाविद्यालयों में किन-किन छात्रों का एडमीशन हुआ, वह अप्रवासी भारतीय थे या उनका क्या नियम है. माननीय मंत्री जी इसका जवाब दें.
श्री विश्वास सारंग-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने यह कहा कि जो प्रश्न पूछा गया था उसका जवाब नहीं दिया गया. इन्होंने अपने प्रश्न में ही वर्ष 2017 का पूछा था कि वर्ष 2017 में एनआरआई कोटे से प्रवेशित 114 छात्रों में से 107 छात्रों के प्रवेश अमान्य किये गये थे. इन्होंने स्पेसिफिक पूछा हमने स्पेसिफिक जवाब दिया. यह बात सही है कि कि 107 छात्रों के जो प्रवेश थे वह हमारे विभाग द्वारा अमान्य किये गये थे. हमने जांच कमेटी बनाई थी और उन 107 के जो एडमीशन थे वह कैंसिंल किये. माननीय अध्यक्ष महोदय फिर एक रिट माननीय उच्च न्यायालय में लगी और वहां से आदेश हुआ कि FRC इस पूरे मामले की जांच करे. FRC ने जांच की और FRC ने 107 में से, 105 एडमिशन को मान्य माना और 2 छात्र उपस्थित नहीं हुए. इसलिए माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर उन 105 छात्रों को पुन: एडमिशन दिया गया. रिट पिटीशन, माननीय उच्च न्यायालय में निरस्त हो गई. ये पूरी जानकारी हमने उत्तर में दी है, बिल्कुल क्रिस्टल क्लियर है, कहीं कोई दिक्कत नहीं है.
श्री महेश परमार- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि माननीय उच्च न्यायालय ने जांच कमेटी बनाई थी, उस कमेटी ने क्या जांच की ? वर्ष 2017 से लेकर अभी तक, किस नियम के तहत उज्जैन के आरडी गर्दी मेडिकल कॉलेज और पूरे मध्यप्रदेश में किस आधार पर जांच हुई, किन-किन लोगों का एडमिशन हुआ, किस आधार पर हुआ ?
अध्यक्ष महोदय- माननीय उच्च न्यायालय में रिट हुई, इसे तो आप भी मानते हैं न ?
श्री महेश परमार- जी, अध्यक्ष महोदय.
अध्यक्ष महोदय- माननीय उच्च न्यायालय, द्वारा जो कमेटी, FRC बनाई गई, उससे जांच करवाई गई. जांच के आधार पर 105 छात्रों को वैध पाया गया. माननीय उच्च न्यायालय में इसकी रिपोर्ट गई होगी, इसलिए वह रिट वहां से निरस्त हुई.
श्री महेश परमार- अध्यक्ष महोदय, इसमें मेरा निवेदन यह है कि माननीय उच्च न्यायालय ने जो निर्देश दिया, कमेटी ने क्या निर्णय लिया, वर्ष 2017 से लेकर आज तक NRI कोटे के तहत किन-किन छात्रों का इन महाविद्यालयों में एडमिशन हुआ, वह सूची मुझे चाहिए और उसकी जांच होनी चाहिए कि किस आधार पर उनका एडमिशन हुआ. अध्यक्ष महोदय, करोड़ो रुपये की फीस कौन भर रहा है ? यहां गरीब छात्रों की 2 हजार रुपये की फीस नहीं भरी जा रही है. माननीय मंत्री जी बताने का कष्ट करें.
श्री विश्वास सारंग- अध्यक्ष महोदय, इन्होंने वर्ष 2017 के 114 छात्रों के बारे में पूछा. उनमें से 107 छात्रों को हमने अमान्य किया था. FRC (प्रवेश एवं शुल्क विनियामक समिति) के निर्णय के बाद, माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद, उनको एडमिशन दिया गया. यदि इसके बाद इन्हें कुछ और पूछना है, तो अगले सत्र में प्रश्न लगायें. अभी ये बात समझ नहीं रहे हैं. महेश भईया आप पुन: प्रश्न लगा दीजियेगा. अभी जो आप पूछ रहे हैं, वह इसमें उद्भुत नहीं होता है.
श्री महेश परमार- अध्यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से हाथ जोड़कर निवेदन है कि निजी स्कूल-कॉलेज की, छात्र 2 हजार रुपये फीस नहीं भर पा रहे हैं. ये कौन छात्र हैं, जो इतनी फीस भर रहे हैं, किस आधार पर इनका एडमिशन हुआ.
अध्यक्ष महोदय- विधायक जी आपका प्रश्न केवल वर्ष 2017 का है.
श्री महेश परमार- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि प्रश्न वर्ष 2017 का है. माननीय उच्च न्यायालय के निर्देश पर छात्र वापस हुए. इनके ही विभाग ने पहले उनको गंभीरता से अमान्य किया कि वे पात्र नहीं हैं. फिर वे किस आधार पर पात्र हुए. मेरा निवेदन है कि उन लोगों के दस्तावेज उपलब्ध करवा दें, जांच करवा दें, मुझे और सदन को बता दें.
अध्यक्ष महोदय- माननीय उच्च न्यायालय की जांच हो गई है, अब कौन सी जांच शेष रह गई.
श्री महेश परमार- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि NRI का 15 % कोटा होता है. ये कौन हैं, उनकी सूची उपलब्ध करवाने में मंत्री जी और विभाग को क्या परेशानी है, ये निवेदन है.
श्री विश्वास सारंग- अध्यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि महेश भाई ने पढ़ा नहीं है. उत्तर के परिशिष्ट में सारी जानकारी है. FRC की जांच रिपोर्ट, माननीय उच्च न्यायालय का निर्णय, 107 छात्रों की सूची और जो 2 छात्र उपस्थित नहीं हुए, वह जानकारी भी है. अब ये पढ़ना ही नहीं चाहते हैं तो मैं, क्या कर सकता हूं.
श्री महेश परमार- अध्यक्ष महोदय, मैंने पूरा उत्तर पढ़ा है. मेरे क्षेत्र में बहुत ओलावृष्टि हुई है. किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं लेकिन मेरा निवेदन है कि यह बहुत गंभीर प्रश्न है. NRI कोटे में बहुत भ्रष्टाचार हो रहा है.
श्री विश्वास सारंग- अध्यक्ष महोदय, इसका ओले से क्या लेना-देना है ?
अध्यक्ष महोदय- प्रश्न गंभीर है, हमने मान लिया है. लेकिन माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय के बाद हम प्रश्न कैसे खड़ा कर सकते हैं ?
श्री महेश परमार- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि इसमें मेरा एक और प्रश्न है कि आप वर्ष 2017 से लेकर आज तक निजी मेडिकल कॉलेजों में, जिनका प्रवेश हुआ, वह सूची क्यों नहीं उपलब्ध करवा रहे हैं, इसमें क्या दिक्कत है.
श्री विश्वास सारंग- अध्यक्ष महोदय, ये अगले सत्र में प्रश्न लगा दें.
श्री महेश परमार- अध्यक्ष महोदय, हमने कोरोना जैसी गंभीर महामारी देखी है और इस तरह के डॉक्टर, जो पीछे के दरवाजे से आते हैं, उससे भोली-भाली जनता की जान जाती है. सूची उपलब्ध करवाने में इनको क्या दिक्कत है.
(मेजों की थपथपाहट)
श्री सुनील सराफ- अध्यक्ष महोदय, ये पहली बार के विधायक हैं. यदि माननीय सदस्य की कोई मांग है तो मंत्री जी को उसे पूरा करना चाहिए.
अध्यक्ष महोदय- आप सभी बैठ जायें. महेश जी आप इस बात को समझ लें. आपने कोई प्रश्न लगाया, प्रश्न का उत्तर आ गया. अब यहां आकर, आप दूसरा कुछ पूछने लगेंगे, तो ऐसे नहीं चलेगा. यदि आपका प्रश्न लगा हो तो आप बतायें, हम आपको उत्तर दिलवाते हैं. प्रश्न वर्ष 2017 का लगा है और आप अब वर्ष 2020-21 का पूछने लगे हैं.
श्री महेश परमार- अध्यक्ष महोदय, मैंने प्रश्न के अनुसार ही पूछा है. पहले आपके विभाग ने ही उन्हें अपात्र किया फिर वे पात्र कैसे हो गए ?
श्री विश्वास सारंग:- नेता प्रतिपक्ष जी, आप इनको समझाओं तो कुछ. आप हर चीज में बोलते है, इसमें तो बोल दो आप.
श्री महेश परमार:- माननीय अध्यक्ष महोदय, चिकित्सा शिक्षा में जो भ्रष्टाचार हुआ है. एनआरआई कोटे से, इसकी सूक्षमता से जांच होना चाहिये.गरीब भोले भाले परिवार के लोग मर रहे हैं. ऐसे डॉक्टरों के कारण उनकी सूची उपलब्ध होनी चाहिये.
श्री विश्वास सारंग:- माननीय अध्यक्ष महोदय, महेश परमार का तो मामला है. महेश परमार का तो यही मामला है कि मेरा टेसू यहीं हलाल, खाने को मांगे दहीवड़ा, आप टेसू को मत हलाओ, समझो तो बात को आप प्रश्न पूछ लो.
श्री महेश परमार :- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी बात को..
श्री विश्वास सारंग:- पढ़-लिखकर आया करो.
श्री महेश परमार:- मैं पढ़-लिखकर आया हूं. माननी मंत्री जी जो कह रहे हैं. माननीय मेरा आपसे निवेदन है कि ..
नेता प्रतिपक्ष( डॉ. गोविन्द सिंह):- माननीय अध्यक्ष अभी मंत्री जी ने कहा कि हमसे इशारा करके हर चीज में पूछते हो, इसमें क्यो नहीं पूछ रहे ? वैसे यह प्रश्न उद्भूत होता है.
श्री विश्वास सारंग:- क्या होता है ?
डॉ. गोविन्द सिंह:- क्यों नहीं होता. अगर उसमें कौन-कौन से लोग आये थे, अगर आपके पास सूची नहीं है तो आप..
अध्यक्ष महोदय:- नहीं, दिया हुआ है. वह दिया हुआ है. सारी सूची दी गयी है.
डॉ. गोविन्द सिंह:- आप बाद में दो, क्या दिक्कत है?
श्री विश्वास सारंग:-पूरी जानकारी परिशिष्ट में दी हुई. पूरी जानकारी इसमें दी गयी है.
डॉ. गोविन्द सिंह:- अगर आ गयी है तो ठीक है.
श्री विश्वास सारंग:- वह पढ़ ही नहीं रहे हैं. वह कह रहे हैं कि ओला पड़ा था इसलिये मैं नहीं पढ़ पाया.
अध्यक्ष महोदय:- सारी चीज आ गयी है.
श्री विश्वास सारंग:- यहां आकर यह बोलेंगे, बताओ आप. आप परिशिष्ट देख लो ना. मैं तो आपसे निवेदन कर रहा हूं.
श्री महेश परमार:- माननीय मंत्री जी, मेरा आपसे निवेदन यह है कि सब लोग समझ रहे हैं. सीधा सा प्रश्न है कि 2017 से लेकर कि किस की सिफारिश से किन-किन परिवार के लोग..
अध्यक्ष महोदय:- नहीं, आप बैठ जाइये.
श्री महेश परमार:- यह कौन लोग हैं, मध्य प्रदेश के लोगों का जो प्रवेश होना चाहिये, वह नहीं हो रहा है. बड़ा लेन-देन करके वहां एडमिशन हो रहा है.(व्यवधान)
श्री यशपाल सिंह सिसौदिया:- महेश भाई...(व्यवधान)
श्री महेश परमार:- आप बहुत वरिष्ठ हैं..
श्री विश्वास सारंग:- बहुत अच्छा, हाथ जोड़ो,हाथ जोड़ो. मैं तो यह कह रहा हूं कि आप तो यह बता दो कि ओला नहीं गिरता तो पढ़कर आते क्या ? भैया आप पढ़ लो नहीं नहीं समझ में आये तो लक्ष्मण सिंह जी से समझ लें. यह भाई साहब बहुत वरिष्ठ हैं.क
अध्यक्ष महोदय:- नहीं, अब बहुत हो गया.
श्री लक्ष्मण सिंह:- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे एक अनुसूचित जाति सदस्य का आप अपमान कर रहे हैं. मजाक उड़ा रहे हैं, ऐसा मत करिये.
श्री विश्वास सारंग:- अच्छा आपका नाम लिया तो अपमान हो गया. वाह भाई साहब.
प्रश्न क्रमांक-7:- अनुपस्थित.
अन्य पिछडा वर्ग के अंतर्गत सम्मिलित जाति कुर्मी/कुरमी तथा कुडमी
[पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण]
8. ( *क्र. 2451 ) श्री संजय शाह (मकड़ाई) : क्या राज्यमंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत सम्मिलित जाति कुर्मी/कुरमी तथा कुड़मी एक ही जातियां हैं, जिनकी सामाजिक स्थिति, रीति रिवाज, रहन सहन, बोलचाल समान है? (ख) क्या कुर्मी/कुरमी शब्द के अपभ्रंश रूपी शब्द कुड़मी तथा कुर्मी दोनों ही शब्द मूल रूप से एक ही हैं एवं राजस्व विभाग में कई जिलों में कुड़मी दर्ज हो जाने से एक ही जाति-समाज के लोग कहीं कुर्मी/कुरमी व कहीं कुड़मी जाति के सदस्य के रूप में जाति प्रमाण पत्र प्राप्त कर रहे हैं? (ग) क्या उक्त विषय के संबंध में बुन्देलखंडीय कुर्मी/कुरमी क्षत्रीय गौर समाज संगठन जिला हरदा के द्वारा राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग को दिनांक 11 मई, 2016 को कुड़मी जाति सूची क्रमांक 76 को विलोपित कर राज्य शासन की सूची के क्रमांक 39 में सम्मिलित करने की मांग करते हुए ज्ञापन पत्र दिया गया था? यदि हाँ, तो उक्त पत्र के संबंध में की गई समस्त कार्यवाही से अवगत कराएं। (घ) क्या शासन कुर्मी/कुरमी समाज में सम्मिलित उपजातियों को आ रही परेशानियों को दृष्टिगत रखते हुए अन्य पिछड़ा वर्ग की सूची में दर्ज जाति कुर्मी/कुरमी तथा कुड़मी में आवश्यक विलोपन व सम्मिलन की कार्यवाही करेगा? यदि हाँ, तो कब? यदि नहीं, तो क्यों?
राज्यमंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण ( श्री रामखेलावन पटेल ) : (क) जी नहीं। (ख) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी हाँ। म.प्र. राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा उक्त पत्र पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। (घ) किसी भी जाति को पिछड़ा वर्ग की सूची में जोड़ने अथवा विलोपित करने की कार्यवाही के निर्धारित मापदण्ड हैं। पूर्ण जानकारी प्राप्त कर जाति के पिछड़ेपन का निर्धारण करने हेतु म.प्र. राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग विचार करता है।
श्री संजय शाह:- अनुसूचित जनजाति के एक सज्जन का प्रश्न भी चल रहा है, इसको भी सुन लें.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न में विभाग ने जो जानकारी उपलब्ध करायी. उसमें सभी में जी नहीं, जी नहीं करके आया है. मेरा उसमें सिर्फ इतना ही कहना था कि कुर्मी समाज और कुड़मी समाज का जो अंतर आया है, हमारे हरदा जिले में और ऐेसे तीन-चार जिले और भी हैं. होशंगाबाद, रायसेन और संभवत: भोपाल जिला भी है.
अध्यक्ष महोदय, इसमें कई युवाओं को नौकरी से वंचित भी होना पड़ रहा है. क्योंकि उनका पिछड़ा वर्ग का सर्टिफिकेट नहीं बन पा रहा है और 1984-85 में जब होशंगाबाद हमारा नर्मदापुरम था,उस पीरियड में कुर्मी समाज ओबीसी का सर्टिफिकेट दिया जा रहा था. लेकिन वर्ष 1999 में जब हमारा हरदा जिला बना तो उसके बाद जो है उसमें कुड़मी शब्द लिखा हुआ आ रहा है और उस वजह से सर्टिफिकेट नहीं बन पा रहा है और केन्द्र में उसको मान्यता नहीं मिल रही है. इसलिये जब केन्द्र की नौकरी के लिये कोइ एप्लाई करता है तो उसको उसका फायदा नहीं मिल पा रहा है तो इस कुड़मी शब्द को हटाकर कुर्मी शब्द किया जाये. मेरी आपसे ऐसी विनती है.
श्री रामखेलावन पटेल:- माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्य प्रदेश में पिछड़े वर्ग के 27 प्रतिशत के आरक्षण में, मध्य प्रदेश में जो 53 जातियां शामिल हैं उनका भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया था और 21 जातियां शामिल कर ली गयी हैं. 32 जातियों के सर्वे का काम चल रहा है. माननीय विधायक जी ने जो प्रश्न उठाया है कि 76 में जो कुर्मी जाति है उसको 39 में दर्ज कर लिया जाये तो आने वाले समय में उसको 39 में दर्ज करा देंगे.
अध्यक्ष महोदय:- उनका दूसरा कहना है कि उनके जो पुराने राजस्व रिकार्ड हैं, उसमें जैसे किसी का नाम हरिशंकर कुर्मी लिखा हुआ है. फिर उसकी मृत्यु हो गयी, बाद में आपके राजस्व विभाग के कागजात आये, उसी में कुर्मी लिख दिया गया और आपका जवाब है कि कुड़मी पिछड़े वर्ग में नहीं है. तो कुर्मी को मिलता हुआ पिछड़े वर्ग का प्रमाण पत्र आरक्षण वह खत्म हो शायद उनका यह कहना है. आप खसरे में सुधार करवा दीजिये,क्यों ऐसा आया. किसके कहने से वह आदेश हो गया. भाई कुर्मी लिखा जा रहा है खसरे में कई वर्षों से.
श्री रामखेलावन पटेल:- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो 76 में कुड़मी दर्ज है, उनका सामाजिक और शैक्षणिक स्तर एक है और जो 39 में दर्ज है उनका भी सामाजिक और शैक्षणिक स्तर एक है. तो जो 76 में दर्ज है, दर्ज है उसको हम 39परिवर्तन में दर्ज करा देंगे. 39 में दर्ज करा देंगे. बाद में भारत सरकार को प्रस्ताव भेज देंगे तो भारत सरकार में भी उसका सुधार हो जायेगा.
टीकमगढ़ जिले में मेडिकल कॉलेज खोले जाना
[चिकित्सा शिक्षा]
9. ( *क्र. 3402 ) श्री हरिशंकर खटीक : क्या चिकित्सा शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्तमान में मध्यप्रदेश में प्रश्न दिनांक तक कहां-कहां के कौन-कौन से मेडिकल कॉलेज कितने-कितने सीटर कब से संचालित हैं? उनके नाम बताते हुए यह भी बताएं कि उसमें कौन-कौन से कर्मचारी/अधिकारी एवं अन्य कौन-कौन, कब से पदस्थ हैं? प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों की वर्तमान की अद्यतन स्थिति की जानकारी से अवगत कराएं। (ख) प्रश्नांश (क) के आधार पर बताएं कि प्रश्न दिनांक तक वर्तमान में जो मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं, वह क्या-क्या पात्रता की श्रेणी में आते हैं? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के आधार पर कृपया सम्पूर्ण जानकारी देते हुए यह भी बताएं कि वर्तमान में टीकमगढ़ जिले की वर्षों की मांग को स्वीकारते हुए शासन कब तक मेडिकल कॉलेज खोल देगा? निश्चित समय-सीमा सहित बताएं।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री ( श्री विश्वास सारंग ) : (क) प्रदेश में संचालित मेडिकल कॉलेजों एवं सीटों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1 अनुसार है। चिकित्सा महाविद्यालयों में पदस्थ अधिकारी/कर्मचारियों की सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 2 अनुसार है। (ख) जी हाँ। (ग) आगामी चरणों में शासन द्वारा समय-समय पर लिए गये नीतिगत निर्णय अनुसार विभाग द्वारा कार्यवाही की जाएगी। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
श्री हरिशंकर खटीक--अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं कि लगातार 4 वर्ष में कई बार विधान सभा में प्रश्न लगाये लेकिन बहस में नहीं आये. इस बार प्रश्न बहस में आया है. टीकमगढ़ जिले में मेडिकल खोलने के बात आपके बीच में रखना चाहता हूं कि यह खोला जाये. मैंने मंत्री जी से पूछा था कि जो नये मेडिकल कालेज खोले जा रहे हैं सरकार ने उसके लिये क्या क्या मापदण्ड बनाये हैं. मापदण्ड के साथ-साथ मेडिकल कालेज खोलने के लिये क्या क्या अहर्ताएं हैं यह मंत्री जी से पूछा था. मैं फिर से पूछना चाहता हूं उसमें जवाब आया है कि जी हां. मैं पूछना चाहता हूं कि क्या क्या अहर्ताएं हैं कैसे मेडिकल कालेज खोले जाते हैं उसमें कितनी जनसंख्या होनी चाहिये, कितनी दूरी होनी चाहिये ?
अध्यक्ष महोदय--यह तो मंत्री जी ने जवाब दिया है. अब आप प्रश्न करिये ना.
श्री हरिशंकर खटीक--अध्यक्ष महोदय, उसमें अकेला जी हां आया हूं. दूसरा प्रश्न मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि टीकमगढ़ जिले में जिला चिकित्सालय है, वह बरसों पुराना चिकित्सालय है. वहां के जिला चिकित्सालय में 24 लाख 89 हजार 715 जो हमारे टीकमगढ़ जिले की जनसंख्या है. प्रतिपुर, निवाड़ी, बड़ामिला, छतरपुर, मेहरोनी ललितपुर, मड़ावरा ललितपुर, एवं बालविकास खण्ड ललितपुर यहां के लोग भी जिला चिकित्सालय टीकमगढ़ में अपना इलाज कराने के लिये आते हैं. लेकिन हमारे यहां के जो मरीज हैं हमारे टीकमगढ़ में इतनी अधिक सुविधाएं न होने के कारण वह अपना इलाज कराने के लिये लोग झांसी जाते हैं, साथ ही ग्वालियर, दतिया भी जाते हैं और सागर भी जाते हैं. सागर के साथ साथ छतरपुर एवं सिवनी में भी जाते हैं. मेरा अनुरोध है कि छतरपुर की दूरी डेढ़ सौ किलोमीटर है, सागर की दूरी भी 200 किलोमीटर है, दतिया की दूरी 140 किलोमीटर से अधिक है, एवं ग्वालियर की दूरी भी 200 किलोमीटर से अधिक है. मैं आपके माध्यम से प्रार्थना करना चाहता हूं कि हमारे टीकमगढ़ जिले में मेडिकल कालेज खोला जाये.
विश्वास सारंग श्री --अध्यक्ष महोदय, माननीय श्री हरिशंकर जी हमारे सीनियर सदस्य हैं पूर्व में मंत्री भी रहे हैं. यह बात उचित है कि वह अपने क्षेत्र एवं जिले की पूरी चिन्ता कर रहे हैं मैं उनको बहुत साधुवाद दूंगा. मेडिकल कालेज खोलने की एक प्रक्रिया है. मैं यह बात जरूर उल्लेखित करना चाहता हूं कि पहले मध्यप्रदेश में केवल पांच मेडिकल कालेज थे. मैं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी चौहान को बहुत बधाई दूंगा कि उनके प्रयास से मध्यप्रदेश में 24 मेडिकल कालेज हो गये हैं. मैं इस बात को यहां पर रखना चाहूंगा कि हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने एक क्रांतिकारी निर्णय लिया है और जिस प्रकार से केन्द्र सरकार लगातार हर बजट में मेडिकल कालेज की प्रक्रिया को बहुत सुगमता के साथ आगे बढ़ रही है.
डॉ.विजय लक्ष्मी साधो--माननीय अध्यक्ष महोदय,
अध्यक्ष महोदय--आपका प्रश्न आने वाला है. आप हर प्रश्न पर खोड़ी हो जाती हैं.
डॉ.विजय लक्ष्मी साधो--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात ठीक नहीं है.
विश्वास सारंग श्री --अध्यक्ष महोदय, माननीय प्रधानमंत्री जी का विशेष साधुवाद के कारण पूरे देश में मेडिकल कालेज खुल रहे हैं. मैं बधाई दूंगा भारतीय जनता पार्टी की सरकार को माननीय नरेन्द्र मोदी जी को एवं शिवराज सिंह चौहान जी को.
डॉ.गोविन्द सिंह-- अध्यक्ष महोदय, आप तो प्रश्न का जवाब दीजिये जो खटीक जी ने पूछा है उसका जवाब दीजिये आप तो भाषण देने लग गये.
डॉ.विजय लक्ष्मी साधो--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह तो पहले से ही प्रक्रिया चल रही थी.
डॉ.गोविन्द सिंह-- अध्यक्ष महोदय, आप तो प्रश्न का जवाब दीजिये.
विश्वास सारंग श्री --अध्यक्ष महोदय, इनको बीच में बोलने मत देना. मैं तो बोल ही रहा हूं. अध्यक्ष महोदय, हमने लगातार प्रयास किया है कि मेडिकल कालेज हमारे प्रदेश में खुलें. माननीय खटीक जी ने बोला है निश्चित रूप से इस प्रस्ताव को केन्द्र सरकार को एक हफ्ते के अंदर भिजवा देंगे.
श्री हरिशंकर खटीक--अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी को इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद. लेकिन एक पूरक प्रश्न और पूछना चाहता हूं कि टीकमगढ़ जिले हमारा अनुसूचित बाहुल्य जिला है. जहां पर सांसद भी अनुसूचित जाति के हैं और हम लोग भी अनुसूचित जाति के हैं इसके साथ साथ पिछड़ा वर्ग के गरीब लोग भी रहते हैं सामान्य वर्ग के निर्धन लोग भी रहते हैं. वे भी अपना इलाज करवाने के लिए बाहर जाते हैं, उनका उपचार सही ढंग से नहीं हो पाता. हमारी विनम्र प्रार्थना है कि अभी टीकमगढ़ जिले में भी एक हस्ताक्षर अभियान पूरे जिले में चल रहा है. हस्ताक्षर अभियान के साथ साथ एक प्रार्थना है कि निश्चित समय सीमा हो जाए, जैसे कि वहां से आप प्रस्ताव बनाकर भेज देंगे, अनुशंसा सहित भेजना.
अध्यक्ष महोदय - 10 दिन में भेज रहे हैं, न.
श्री विश्वास सारंग- अध्यक्ष जी, मैं एक हफ्ते में भिजवा दूंगा.
श्री हरिशंकर खटीक - अनुशंसा सहित भेजना.
श्री विश्वास सारंग- अनुशंसा सहित ही होता है, खटीक जी आप जो जो बोलेंगे वह लिख देंगे.
अध्यक्ष महोदय - हरिशंकर जी, 10 दिन के अंदर भेज रहे हैं, बात खत्म.
श्री विश्वास सारंग- नरेन्द्र मोदी जी को और शिवराज सिंह चौहान जी को धन्यवाद तो दे दो जरा अच्छा से.
श्री हरिशंकर खटीक - बहुत बहुत धन्यवाद. आप भी बोल दीजिए कि टीकमगढ़ जिले में मेडिकल कॉलेज खुलेगा.
अध्यक्ष महोदय - नहीं, नहीं वे तो प्रस्ताव भेज सकते हैं.
श्री हरिशंकर खटीक - अध्यक्ष महोदय, जब सम्माननीय डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ जी मंत्री थीं, आपसे भी विनम्र प्रार्थना की थी, आपने हमारी प्रार्थना सुनी नहीं थी. लेकिन हम धन्यवाद देना चाहते हैं हमारे मंत्री जी को और भारतीय जनता पार्टी की सरकार को. मंत्री जी आप एक बार फिर से खड़े होकर कह दीजिए कि टीकमगढ़ जिले में मेडिकल कालेज खुलेगा(..व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय - बैठ जाइए. डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ जी आपका प्रश्न है, प्रश्न क्रमांक 10.
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - अध्यक्ष जी, मेरे नाम का उल्लेख किया है, मुझे बोलने तो दीजिए.
अध्यक्ष महोदय - नहीं, नहीं, विजय लक्ष्मी जी, आप एक बात समझ लीजिए, आप दूसरे के प्रश्न में हर बार खड़ी होती हों, आपके प्रश्न में कोई खड़ा हो जाए तो कैसा लगेगा?
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - कौन.
अध्यक्ष महोदय - कोई भी खड़ा हो जाए. इसलिए मेरा विनम्र आग्रह है कि अपना प्रश्न करिए प्रश्न क्रमांक 10 आपका है, आपका नाम पुकार रहा हूं.
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - माननीय अध्यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहिए, आपने जो ये शब्द आसंदी से बोला है कि हर बार खड़ी हो जाती हैं, ये मेरा अधिकार है.
अध्यक्ष महोदय - है न आपका अधिकार, क्या दूसरे का अधिकार नहीं है. दूसरे का भी अधिकार उसी तरह का है. इस तरह से अधिकारों का प्रयोग होता रहेगा तो विधान सभा चलेगी क्या?
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - माननीय अध्यक्ष महोदय, अगर सरकार की तरफ से कोई असत्य कथन कहा जाएगा तो मैं अपनी बात को रखूंगी.
अध्यक्ष महोदय - मैं दूसरी बात कह रहा हूं. नेता प्रतिपक्ष से आग्रह करता हूं कि इसको विनम्रतापूर्वक सुने. यदि इस तरह के अधिकारों का प्रयोग होगा कि हमारा अधिकार है, किसी के प्रश्न में हम खड़े हो जाएंगे, तो सारे इसी तरह के अधिकार का प्रयोग करेंगे तो विधान सभा चलेगी कैसे?(..मेजों की थपथपाहट) सवाल ये है.
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं व्यवस्था चाहती हूं.
अध्यक्ष महोदय - आप प्रश्न करें, प्रश्न क्रमांक 10.
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने आपसे निवेदन किया था कि मैं तभी उठती हूं, जब मेरे नाम का उल्लेख किया जाता है.
डॉ. विश्वास सारंग - प्रश्नकाल में व्यवस्था का प्रश्न नहीं होता, आप बहुत वरिष्ठ हो.
अध्यक्ष महोदय - प्रश्नकाल में व्यवस्था का प्रश्न नहीं उठाया जाता.
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - इनको अधिकार दिया है, मैं तभी उठती हूं जब मेरे नाम का उल्लेख किया जाता है.
अध्यक्ष महोदय - प्रश्नकाल में व्यवस्था का प्रश्न नहीं उठाया जाता. प्रश्न क्रमांक 10 विजय लक्ष्मी साधौ जी.
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - हम आपसे ही सीखेंगे, (XXX) आपने हमको प्रमाण पत्र दे दिया, महेश परमार को भी आपने ऐसे ही बोला कि आप पिछले दरवाजे से आए हो. मुझे भी बोल रहे हो.
श्री हरिशंकर खटीक - हमारे मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहिए कि उन्होंने बोला तो है और वे करके भी दिखाएंगे, आपको धन्यवाद देना चाहिए. (...व्यवधान)
श्री संजय शाह - अध्यक्ष महोदय, मुझे इस बात से आपत्ति है कि (XXX) इसे विलोपित किया जाए.
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - आपकी मानसिकता में जो घुसा हुआ है, वही आपके मुंह से निकला है कि एससी, एसटी के लोग पिछले दरवाजे से आते हैं.
अध्यक्ष महोदय - प्रश्न क्रमांक 10, विजय लक्ष्मी जी आपसे आग्रह है कि आप प्रश्न करें.
श्री हरिशंकर खटीक - माननीय अध्यक्ष महोदय, एससी, एसटी के लोग यूपीएससी में निकल रहे हैं (XXX) उसको विलोपित कराए.
अध्यक्ष महोदय - अपना प्रश्न करें.
आदिवासी विकास हेतु आवंटित राशि
[जनजातीय कार्य]
10. ( *क्र. 1922 ) डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ : क्या जनजातीय कार्य मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) वर्ष 2019-20 से प्रश्न दिनांक तक आदिवासी विकास के लिए केन्द्र सरकार एवं राज्य सरकार से खरगोन जिले को कितनी राशि आवंटित हुई है, उसमें से महेश्वर विधानसभा क्षेत्र को कितनी राशि प्राप्त हुई? (ख) उक्त राशि किन-किन मदों-योजनाओं के लिए आवंटित की गई थी? यदि हाँ, तो उसमें से कितनी खर्च हुई है तथा कितनी राशि शेष है? वर्षवार, योजनावार पृथक-पृथक ब्यौरा देवें।
जनजातीय कार्य मंत्री ( सुश्री मीना सिंह माण्डवे ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र 'एक' एवं 'दो'अनुसार है।
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न के उत्तर में माननीय मंत्री जी ने जो यहां जवाब दिया है, अध्यक्ष महोदय आपकी इजाजत हो तो मैं बोलूं.
अध्यक्ष महोदय - आपका नाम पुकारा है, प्रश्न क्रमांक 10
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - आपकी इजाजत से बोल रही हूं. माननीय अध्यक्ष महोदय, जो माननीय मंत्री जी ने मेरे प्रश्न के उत्तर में जो जवाब दिए हैं. आदरणीय विश्वास सारंग जी के अनुसार मैं इसको समझ नहीं पा रही हूं, तो मैं उम्मीद करती हूं कि शायद माननीय मंत्री.
अध्यक्ष महोदय - नहीं, नहीं, ये विश्वास सारंग जी के जवाब नहीं हैं इसमें.
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - उन्होंने जो आक्षेप आरोप लगाया है, उस पर मैं एक उद्धहरण दे रही हूं.
अध्यक्ष महोदय - नहीं, नहीं अपने प्रश्न पर आइए, नेता प्रतिपक्ष जी ये शायद ठीक नहीं है.
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - ये जो जवाब आया है, इसमें जो हार्डकॉपी खरगौन ट्रेजरी से निकालकर ये दी गई है. मैंने मांगा था कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार से कितना एलॉटमेंट, किस किस योजना में, किस किस मद में आया है, उसका उत्तर नहीं आते हुए, सिर्फ खरगौन ट्रेजरी का ये हार्ड कॉपी निकालकर मुझे दे दी गई है. मैं तो समझ नहीं पाई हूं कि मेरी बुद्धि बहुत छोटी हैं. माननीय मंत्री जी अगर समझ पा रही हों तो कम से कम मुझे इसको समझा दें ताकि मेरी बुद्धि में कुछ घुस जाए.
अध्यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी. जवाब दो दिया है, इसमें आया है.
सुश्री मीना सिंह माण्डवे - माननीय अध्यक्ष जी, माननीय सदस्या जी का प्रश्न ही मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि वह पूछना क्या चाह रही हैं ?
डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ - बहुत बढि़या. (हंसी)
श्री एन.पी. प्रजापति - अध्यक्ष महोदय, आप देखिये, ये दोनों समझदार हैं. (हंसी)
डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ - यह भी इस बात का द्योतक है कि विश्वास सारंग जी की बात बिल्कुल सटीक बैठ गई है. आप एसटी से हैं, मैं एससी से हूँ, तो आपने जो बोला कि पिछले दरवाजे से आते हैं.
चिकित्सा शिक्षा मंत्री (श्री विश्वास सारंग) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपको बहुत धन्यवाद दूँगा कि आप हर दो सेंटेंस के बाद मेरा नाम ले रही हैं. बहुत धन्यवाद बहन आपको.
अध्यक्ष महोदय - आज विश्वास सारंग जी के प्रति उनका स्नेह है.
श्री विश्वास सारंग - वैसे वह बहुत स्नेह करती हैं. बहन करती हो न. अध्यक्ष जी, हमारा खास मामला है, बड़ी बहन, छोटा भाई.
डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ - दो-दो पीढि़यों का वास्ता है न.
डॉ. सीतासरन शर्मा - उसी कॉलेज से वह भी पढ़ी हैं. अब वह यदि कह रहे हैं कि मैं अंगूठा छाप हूँ, तो यह बात तो गलत है. हम भी उसी कॉलेज से पढ़े हैं, अध्यक्ष महोदय. (हंसी) वहीं से वह भी पढ़े हैं, उनके साथ-साथ हमारी भी वही हालत होगी.
संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) - माननीय अध्यक्ष महोदय, जिन्होंने उन्हें पढ़ाया है, उन गुरुओं का अभिनन्दन करने दोनों को जाना चाहिए.
अध्यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी.
सुश्री मीना सिंह माण्डवे - माननीय अध्यक्ष जी, परिशिष्ट के माध्यम से पुस्तकालय में जानकारी दे दी गई है और माननीय सदस्या का यह कहना है कि यह राशि कब-कब केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की राशि खरगोन जिले में और महेश्वर विधान सभा में दी गई है, तो मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्या को कहना चाहती हूँ कि जो राज्य सरकार का 80 प्रतिशत जो बजट है, वह जिले में सीधे भेज दिया जाता है और उसके बाद जिले में जो प्रभारी मंत्री की अध्यक्षता में समिति होती है, उसके द्वारा वह पैसा खर्च किया जाता है. जहां केन्द्र सरकार का सवाल है, तो केन्द्र सरकार का अगर कोई पैसा होता है तो वह सीधे पहुँचाया जाता है.
डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ - मेरा आपसे निवेदन है कि परिशिष्ट- ''दो'' में जो आपने बताया है, इसमें जो बजट हेड दिए हैं, इसमें एक्सपेंडिचर का, अलॉटमेंट का और कितनी शेष राशि है, इसका बताया है. ये जो हेड वास्तविकता में हैं, मैंने इसकी योजनाओं के नाम भी मांगे थे. इसमें योजनाओं के नाम नहीं आए हैं.
सुश्री मीना सिंह माण्डवे - माननीय अध्यक्ष जी, माननीय विधायिका जी खुद सदस्य हैं, अगर जो राज्य सरकार की राशि है, उसमें आप खुद मेम्बर हैं और मेम्बर खुद तय करते हैं कि किस विधान सभा में किस विधायक को कितनी राशि दी जाये ? यह मैं तय नहीं करती. जो वहां के विधायक रहते हैं, वह तय करते हैं, माननीय अध्यक्ष जी.
डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ - माननीय अध्यक्ष महोदय, मीटिंग हो तभी तो तय करें न. जब मीटिंग होगी, तभी तो तय करेंगे. अब मीटिंग ही नहीं होती है तो कहां से तय करें ? इसलिए मैं आपसे निवेदन करना चाहती हूँ कि आपने जो भी यहां बजट के हेड दिखाए हैं, जो यहां पर लिखा है. मैं इसमें चाहती हूँ कि इसमें योजनाएं कौन-कौन सी हैं ? हेड तो आपने दिखा दिया. लेकिन कौन-कौन सी योजनाओं में यह पैसा आया है, मुझे उसकी जानकारी चाहिए. मेरा यह स्पष्ट प्रश्न है, उसका उत्तर आ जाये, माननीय अध्यक्ष महोदय.
अध्यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी. पर इसमें है, योजना हेड के साथ.
सुश्री मीना सिंह माण्डवे - माननीय अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से योजनानुसार माननीय सदस्या जी को उपलब्ध करा दूँगी.
डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ - बहुत-बहुत धन्यवाद और राशि का भी बता देना कि कैसी-कैसी राशि दी प्लीज. धन्यवाद.
नेता प्रतिपक्ष (डॉ. गोविन्द सिंह) - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी, आपने दो बातें कही हैं. एक तो आपने कहा है कि प्रभारी मंत्री जी की अध्यक्षता में बैठक होती है, अभी तक पिछले 10 वर्षों में एक भी बैठक भिण्ड जिले में प्रभारी मंत्री ने अनुसूचित जाति विभाग की नहीं ली. दूसरा प्रश्न यह है कि आपने कहा है कि विधायक को रखा जाता है, जब पूछा ही नहीं जाता है. मैंने आपसे विनम्र प्रार्थना की है कि कम से कम एक तो सरप्लस सबको दिलवा दें. दूसरा, जब जानकारी जाये तो प्रत्येक विधायक के क्षेत्र में उनको जानकारी मिल जाये कि आपको इतनी-इतनी मिली है. जब जानकारी ही नहीं है, तो आपके अधिकारी सांठ-गांठ करके डायरेक्ट बांट देते हैं, हो सकता है कि जहां तक जानकारी प्रभारी मंत्री के नॉलेज में ही न हो, कई जिलों में ही निकल आएंगी.
सुश्री मीना सिंह माण्डवे - माननीय अध्यक्ष जी, जो अनुसूचित जाति, जनजाति के जो विधायक होते हैं, उनको ही समिति में रखा जाता है.
डॉ. गोविन्द सिंह - नहीं हुई मीटिंग, नहीं रखा गया. पूरे 10 वर्षों से. मैं 10 वर्षों का कह रहा हूँ कि भिण्ड जिले में नहीं रखी गई.
अध्यक्ष महोदय - डॉ. अशोक मर्सकोले जी.
श्री मेवाराम जाटव - माननीय अध्यक्ष जी, माननीय मंत्री जी उसमें मैं भी सदस्य हूँ, भिण्ड जिले से. अभी पैसा बंटा था, बस्ती विकास योजना का. हमारे साईन नहीं कराए हैं और पैसा बांट दिया गया.
श्री एन.पी.प्रजापति (एन.पी.) - डॉक्टर साहब एक मिनट. आदरणीय अध्यक्ष महोदय, मैं बड़ा स्पष्ट कह रहा हूँ कि नरसिंहपुर जिले में एससी के नाम पर उस समिति में, मैं हूँ. पिछले 4 वर्ष से एक भी मीटिंग नहीं हुई है और अभी जब प्रस्ताव आए, तो माननीय प्रभारी मंत्री ने अपनी तरफ से दूसरी विधान सभाओं में पैसे पहुँचा दिये, लेकिन अनुसूचित जाति क्षेत्र जो गोटेगांव है, वहां पर एक धेला नहीं दिया. मेरा अनुरोध है कि माननीय मंत्री जी कृपया 25 तारीख के पहले क्योंकि मार्च जा रहा है, कृपया सभी जिलों में निर्देश दे दें, जो जिस जिले का विधायक अनुसूचित जाति, जनजाति का आता है, उसकी विधिवत मीटिंग हो और माननीय प्रभारी मंत्रीगण कम से कम जिस क्षेत्र में अनुसूचित जाति और जनजाति रिजर्व है, उसके प्रस्ताव जरूर शासन तक पहुंचायें. अध्यक्ष महोदय यह मेरा निवेदन है.
संसदीय कार्यमंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र) -- अध्यक्ष महोदय, एक बात मैं कह दूं कि जो सम्मानित पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जी और नेता प्रतिपक्ष जी ने कहा है कि पिछले चार साल में कोई बैठक नहीं हुई यह दोनों को ध्यान में रखना चाहिये कि चार साल में पंद्रह महीने आपके हैं, आप मंत्री थे, लेकिन इसके बावजूद भी जैसा माननीय श्री एन.पी.प्रजापति जी ने कहा कि मंत्री जी को निर्देश दे देना चाहिये, तो वह जरूर देंगे.
खसरा पंजी एवं पटवारी मानचित्र में दर्ज भूमि
[जनजातीय कार्य]
11. ( *क्र. 3231 ) डॉ. अशोक मर्सकोले : क्या जनजातीय कार्य मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) जनवरी 2008 से लागू वन अधिकार कानून 2006 के तहत मण्डला जिले के कितने राजस्व ग्रामों की खसरा पंजी एवं पटवारी मानचित्र में दर्ज भूमियों के कितने दावे मान्य एवं अमान्य किए गए? (ख) मण्डला जिले में मान्य किए गए दावों से संबंधित प्रविष्टि प्रश्नांकित दिनांक तक भी पटवारी मानचित्र एवं खसरा पंजी में दर्ज नहीं किए जाने का क्या-क्या कारण रहा है? मान्य दावों के प्रकरण जिला राजस्व अभिलेखागार या तहसील राजस्व अभिलेखागार में जमा नहीं करवाए जाने का क्या-क्या कारण रहा है? पृथक-पृथक बतावें। (ग) मण्डला जिले में पटवारी मानचित्र एवं खसरा पंजी तथा पटवारी मानचित्र में दर्ज करने प्रकरण राजस्व अभिलेखागार में जमा करवाए जाने के आदेश निर्देश अभिसूचना प्रश्नांकित दिनांक तक भी जारी नहीं किए जाने का क्या-क्या कारण रहा है? (घ) मण्डला जिले में पटवारी मानचित्र एवं खसरा पंजी में प्रविष्टि दर्ज कर प्रकरण राजस्व अभिलेखागार में जमा करवाए जाने के संबंध में क्या कार्यवाही की जा रही है? कब तक की जावेगी?
जनजातीय कार्य मंत्री ( सुश्री मीना सिंह माण्डवे ) : (क) पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार मण्डला जिले के राजस्व ग्रामों में 1974 दावे मान्य एवं 1337 दावे अमान्य किये गये हैं।(ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग जिला मण्डला के पत्र क्रमांक 10534, दिनांक 05.11.2020 के द्वारा जिले के समस्त अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को वन अधिकार पत्र राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने के निर्देश दिये गये हैं। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्य विभाग जिला मण्डला के पत्र क्रमांक 10534, दिनांक 05.11.2020 के द्वारा जिले के समस्त अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को वन अधिकार पत्र राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करने के निर्देश दिये गये हैं। (घ) उत्तरांश 'ख' एवं 'ग'अनुसार।
डॉ.अशोक मर्सकोले -- अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न में यह है कि मण्डला जिले के कितने राजस्व ग्रामों की खसरा पंजी एवं पटवारी मानचित्र में दर्ज भूमियों के कितने दावे मान्य और अमान्य किये गये हैं? इस जानकारी के उत्तर में यह है कि जो मान्य दावें हैं 1974 और 1337दावें अमान्य किये गये हैं.
अध्यक्ष महोदय, मेरा सदन के माध्यम से यह निवेदन है कि उनकी संख्या बहुत अधिक है और इनका पुन: परीक्षण कराया जाये, एक तो यह बात है, दूसरे प्रश्न ''ख'' के संदर्भ में यह उत्तर आया है कि जनजाति कार्य विभाग ने पत्र क्रमांक-10534, दिनांक-05/11/2020 के द्वारा अनुविभागीय अधिकारी राजस्व को यह पत्र लिखा गया है और वर्ष 2020 से यह पत्र लिखा गया है कि यह खसरा पंजी में इनको दर्ज किया जाये. यह वर्ष 2020 से अभी तक जहां 2006 की बात कर रहे हैं लेकिन वर्ष 2020 से पत्र लिखा गया है, उसमें उत्तर यह दिया गया है कि अभी दर्ज की जा रही है, निर्देश जारी किये गये हैं, यह क्या है?
सुश्री मीना सिंह माण्डवे -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न पहले भी आ चुका है, माननीय सदस्य को यह लगता है कि जो दावे आपत्ति लोगों के द्वारा किये गये थे और उसमें जब पाये जाते हैं तो उनको मान्य किया जाता है और अगर ऐसा लगता है कि अभी भी कुछ बचे हुए हैं तो उसका परीक्षण हम माननीय अध्यक्ष महोदय, जी विधिवत आपके निर्देशानुसार करा लेंगे और जो पात्र होंगे उनको दिया जायेगा.
अध्यक्ष महोदय -- उनका यह कहना है कि अमान्य 1137 हैं, यह एक बड़ी संख्या है और जो दावे आपने मान्य किया है वह 1974 है, इस प्रकार से जो दावे अमान्य किये हैं, वह 1337 हैं, तो अमान्य के इतने बड़े कारण हो सकते हैं कि 1337 खारिज किये हैं, तो उसका परीक्षण करा लें, वह यह कह रहे हैं.
सुश्री मीना सिंह माण्डवे -- माननीय अध्यक्ष महोदय, करा लेंगे और जो पात्र होंगे उनको दे दिया जायेगा.
अध्यक्ष महोदय -- ठीक है.
डॉ. अशोक मर्सकोले -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न है कि वर्ष 2020 से जो खसरा पंजी और पटवारी मानचित्र में जो दर्ज होने चाहिये थे, यह अभी तक नहीं हो पाये हैं, न राजस्व रिकार्ड में, न तहसील विभाग में यह वर्ष 2020 से होना था और जानकारी यह है कि निर्देश जारी किये गये हैं, दर्ज की कार्यवाही की जा रही है, यही मेरा मूल प्रश्न है कि यह इतनी लेट लतीफी क्यों हो रही है, एक भी अभी तक क्यों नहीं किये हैं?
अध्यक्ष महोदय -- आपने निर्देश तो दे दिये हैं?
सुश्री मीना सिंह माण्डवे -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जी दर्ज करा लिये जायेंगे.
अध्यक्ष महोदय -- अगर अमल नहीं हो रहा है तो थोड़ी तीव्रता से हो जायें. सुश्री मीना सिंह माण्डवे -- जी, माननीय अध्यक्ष महोदय.
डॉ. अशोक मर्सकोले -- अध्यक्ष महोदय, यह तो आ गया है कि दर्ज करा लिये जायेंगे. मेरा प्रश्न यह है कि वर्ष 2020 से आपने क्या कार्यवाही की है और क्यों नहीं कार्यवाही की है? यह आप मुझे बताने का कष्ट करें.
अध्यक्ष महोदय -- वह कह रहीं हैं कि हम कार्यवाही करा रहे हैं.
डॉ. अशोक मर्सकोले -- अध्यक्ष महोदय यह तो इसमें लिख दिया है न.
अध्यक्ष महोदय -- हां, तो ठीक तो है न.
डॉ. अशोक मर्सकोले -- नहीं, फिर यह प्रश्न तो नहीं आना चाहिये. क्यों यह लेट लतीफी वर्ष 2020 से हो रही है ?(व्यवधान..)
अध्यक्ष महोदय -- निर्देश भी जारी हो गये हैं. (व्यवधान..)
सुश्री मीना सिंह माण्डवे -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह निरंतर प्रक्रिया में है और निरंतर चलता रहता है. चूंकि यह लाखों लोगों का मामला है कोई ऐसे दो चार का मामला नहीं है.हमने तो 2 लाख 74 हजार वनाधिकार पत्र दे दिये हैं, इनने तो कानून बना थे दिये पर किसी राज्य में इनने वनाधिकार पट्टे भी नहीं दिये थे, अगर वनाधिकार पट्टे देने का काम हुआ है तो वह मध्यप्रदेश में सबसे पहले जनवरी 2008 से हुआ है, जबकि किसी भी राज्य में वनाधिकार पट्टे, इनकी जहां सरकार है, वहां तक नहीं हुआ है. (मेजों की थपथपाहट) (व्यवधान..)
डॉ. अशोक मर्सकोले -- माननीय अध्यक्ष महोदय, तो वह प्रक्रिया क्या है, (व्यवधान..) मंत्री जी मैंने संख्या पूछी थी, लाखों का मामला है तो कितने दावे दर्ज किये हैं, यही तो पूछ रहा हूं, (व्यवधान..) अध्यक्ष महोदय, मंत्री लाखों की कह रही हैं, लाखों के प्रकरण हैं (व्यवधान..) अध्यक्ष महोदय, मैंने मंडला का स्पेसिफिक पूछा है कि अगर यह मान्य दावे 1974 हैं तो 1974 में क्या एक भी अभी तक पंजीकृत नहीं किये गये हैं, दर्ज नहीं किये गये हैं? आपने कोई कार्यवाही की ही नहीं है? आप स्वीकार कर लें कि आपने कोई कार्यवाही नहीं की हैं और अगर नहीं की है तो क्यों नहीं की है और कब करेंगे?
(व्यवधान..)
सुश्री मीना सिंह माण्डवे-- माननीय अध्यक्ष जी, कार्यवाही हुई है तभी इतने लोगों को पट्टे दे दिये गये. अब आप अगर सुनना चाहते हैं तो माननीय अध्यक्ष जी के माध्यम से मैं पढ़कर सुना दूंगी ...(व्यवधान)... ऐसे गलत आरोप लगा रहे हैं. ...(व्यवधान)... अध्यक्ष जी, जो यह कह रहे हैं तो क्या हम सही मानेंगे. ...(व्यवधान)...
अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जाइये अशोक मर्सकोले जी. माननीय मंत्री जी, आप अपनी बात कहें.
सुश्री मीना सिंह माण्डवे-- माननीय अध्यक्ष जी, अभी तक वर्ष 2006 के बाद से चूंकि वर्ष 2006 में भारत सरकार से कानून बना और उसके बाद वर्ष 2008 जनवरी में यह लागू हुआ वन अधिकार पत्र देने का. अभी तक जो लोगों की तरफ से 5 लाख आवेदन आये थे उसमें से 2 लाख 74 हजार पट्टे दिये जा चुके हैं और उसके बाद सामूदायिक पट्टे भी दिये गये हैं, 27429 कुछ ऐसा करके दिया गया है. मेरा यह कहना है कि लगातार छानबीन हो रही है और अभी जो लगातार आवेदन मिलते जा रहे हैं उनको भी पट्टे देने का काम हो रहा है, यह वनाधिकार पत्र देने का काम बंद तो हुआ नहीं है, प्रचलन में है, जांच चल रही है और कई प्रक्रियायें हैं माननीय अध्यक्ष जी, एक तो ब्लॉक स्तर की जो समिति होती है वहां से जांच होती है और उसके बाद अगर किसी को वहां से नहीं मिला तो उसके बाद जिला की कमेटी है उसमें एसडीएम और 5-6 अधिकारियों की समिति बनाई जाती है तो फिर वहां परीक्षण के लिये जाता है, उसके बाद वन अधिकार पट्टा दिया जाता है. इसका नियम भी है कि अगर कोई भी व्यक्ति वर्ष 2005 से पहले काबिज है 13 दिसम्बर 2005 से पहले और उनका जीवन यापन वन भूमि के तहत ही हो रहा है, यह पात्रता है और अगर यह भी नहीं मिल रहा है तो कोई 73 या 75 साल का व्यक्ति यह कह दे कि हां मैं इतने साल का व्यक्ति हूं और यह व्यक्ति बहुत दिनों से काबिज है, इनको दिया जाये, गांव का ही कोई बुजुर्ग प्रमाणित कर देता है तो वन अधिकार पट्टा दिया जाता है. माननीय अध्यक्ष जी, इसके सारे मापदण्ड हैं और मापदण्ड के अनुसार हमारी सरकार लगातार काम कर रही है और इतने सारे पट्टे दे दिये गये हैं तो जिन लोगों के निरस्त का भाई साहब कह रहे हैं तो उसकी भी हम जांच करा लेंगे और माननीय अध्यक्ष जी, पात्र होंगे तो निश्चित रूप से हमारी सरकार देगी.
डॉ. अशोक मर्सकोले-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने मंडला का स्पेशिफिक प्रश्न किया, इन्होंने मंडला की एक बात नहीं कहीं है. ...(व्यवधान)...
अध्यक्ष महोदय-- आपका पूरा उत्तर आ गया, आप बैठ जाइये.
डॉ. अशोक मर्सकोले-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे मंडला का जवाब चाहिये. क्या हम मान लें कि आपने कुछ नहीं किया है. अध्यक्ष महोदय, मैं संरक्षण चाहूंगा.
अध्यक्ष महोदय-- आपका आ गया, पूरा आ गया, पूरा डिटेल आया है. (श्री जयवर्द्धन सिंह जी के बैठे-बैठे कुछ कहने पर) जयवर्द्धन सिंह जी इनका पूरा डिटेल में आ गया. 2 लाख 74 हजार आ गया, अब कितना बतायें वह.
डॉ. अशोक मर्सकोले-- खसरा पंजी राजस्व रिकार्ड में दर्ज नहीं किया है, यही बात तो पूछ रहा हूं.
अध्यक्ष महोदय-- दर्ज करने का राजस्व अनुविभागीय अधिकारी को आदेश जारी कर दिये गये हैं, इसी उत्तर में है. ...(व्यवधान)...
सुश्री मीना सिंह माण्डवे-- माननीय अध्यक्ष जी, यह सब बता दिया गया है उसके बाद भी माननीय सदस्य वही-वही पूछ रहे हैं. माननीय अध्यक्ष जी, यह दूसरी, तीसरी बार लगाया है सदन के माध्यम से, बात वही है.
डॉ. अशोक मर्सकोले-- अगर आप काम नहीं करेंगे तो 50 बार लगायेंगे.
प्रश्न संख्या-12 (अनुपस्थित)
संस्था सदस्यों को भूखण्ड का आधिपत्य नहीं दिया जाना
[सहकारिता]
13. ( *क्र. 3366 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या सहकारिता मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जय हिन्द गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्या. इन्दौर 185, टेलीफोन नगर इन्दौर द्वारा (सियागंज गुमास्ता नगर) आवासीय भूखण्ड क्रमांक 185 आकार 30 X 50 वर्गफीट 1500 श्री राजेन्द्र कुमार व्यास पुत्र श्री बृजकिशोर व्यास निवासी सी 3-4 रूप रचना-अपार्टमेंट गोयल नगर इन्दौर को दिनांक 29 मई, 1998 को ड्रॉ पद्धति से आवंटित किया गया था? (ख) यदि हाँ, तो क्या उक्त भू-खण्ड का पंजीयन विक्रेता संस्था जय हिन्द गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्या. द्वारा क्रेता श्री राजेन्द्र कुमार व्यास पुत्र श्री बृजकिशोर व्यास को राशि रूपये 18000/- में विक्रय कर दिनांक 04.01.1999 को क्रेता के पक्ष में रजिस्ट्री कराई गई थी? (ग) क्या जयहिन्द गृह निर्माण सहकारी संस्था इन्दौर द्वारा दिनांक 08.10.1998 को क्रेता श्री राजेन्द्र कुमार व्यास पुत्र श्री बृजकिशोर व्यास से व्यवस्था शुल्क एवं विकास व्यय के रूप में राशि रूपये 22650 रूपये रसीद क्रमांक 1571 से प्राप्त किए गए थे? (घ) यदि हाँ, तो क्रेता का भू-खण्ड का पूरा मूल्य अदा करने के उपरांत क्रेता के पक्ष में विक्रय पत्र निष्पादित होने एवं विक्रेता संस्था द्वारा व्यवस्था शुल्क एवं विकास व्यय की राशि लिए जाने के बाद भी संस्था के सदस्य एवं क्रेता श्री राजेन्द्र कुमार व्यास पुत्र श्री बृजकिशोर व्यास को अभी तक भू-खण्ड का आधिपत्य नहीं दिये जाने के क्या कारण हैं? (ड.) क्या उपरोक्त प्रश्नांश के परिप्रेक्ष्य में जांच कराई जाकर गृह निर्माण सहकारी संस्था के पदाधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी एवं क्रेता पक्ष को भू-खण्ड का आधिपत्य दिलाया जाएगा?
सहकारिता मंत्री ( डॉ. अरविंद सिंह भदौरिया ) : (क) जय हिन्द गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित इंदौर में वर्तमान में प्रशासक नियुक्त है। उपायुक्त सहकारिता, जिला-इन्दौर की जानकारी अनुसार संस्था की सियागंज गुमास्ता नगर कॉलोनी में आवासीय भूखण्ड क्रमांक 185 आकार 30 X 50 कुल 1500 वर्गफीट का आवंटन श्री राजेन्द्र कुमार व्यास पुत्र श्री बृजकिशोर व्यास को ड्रॉ पद्धति से करने संबंधी आवंटन पत्र तत्कालीन संचालक मण्डल से बहिर्गामी कमेटी को प्रदत्त अभिलेखों में उपलब्ध नहीं होने से जानकारी दी जाना संभव नहीं है। (ख) जी हाँ, रजिस्ट्री की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 01 अनुसार है। (ग) प्रशासक को प्राप्त अभिलेखों में बहिर्गामी संचालक मण्डल को तत्कालीन संचालक मण्डल से प्राप्त अभिलेखों में संस्था द्वारा दिनांक 08.10.1998 को जारी रसीद क्रमांक 1571 की प्रति उपलब्ध नहीं होने से श्री राजेन्द्र कुमार व्यास पुत्र श्री बृजकिशोर व्यास से व्यवस्था शुल्क एवं विकास व्यय के रुप में राशि रुपये 22,650/- प्राप्त करने संबंधी जानकारी दी जाना संभव नहीं है। (घ) जयहिन्द गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित इंदौर की स्वामित्व एवं आधिपत्य की ग्राम देवगुराडिया स्थित भूमि पर भवन निर्माण की अनुमति संबंधी प्रकरण में कलेक्टर जिला इंदौर के पत्र क्रमांक/46/अकरी-2/2016, दिनांक 27.04.2016 के द्वारा संस्था को समस्त विकास कार्य पूर्ण कराये जाने के निर्देश दिये गये थे, पत्र की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 02 अनुसार है, जिसके अनुपालन में संस्था की आमसभा दिनांक 04.09.2016 में कॉलोनी के विकास हेतु संचालक मण्डल को टेण्डर/कोटेशन हेतु अधिकृत किया गया, आमसभा का कार्यवाही विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 03 अनुसार है। संचालक मण्डल द्वारा डेव्हलपमेंट एजेन्सी को अधिकृत किया गया। संस्था द्वारा सदस्यों से कॉलोनी के पुनर्विकास राशि की मॉंग की गई। श्री राजेन्द्र कुमार व्यास पुत्र श्री बृजकिशोर व्यास के द्वारा पुनर्विकास राशि जमा नहीं करने के कारण संस्था द्वारा म.प्र. सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1960 की धारा 64 के अंतर्गत उनके विरुद्व न्यायालय उप रजिस्ट्रार सहकारी संस्थाएं, जिला इंदौर के समक्ष विवाद प्रकरण क्रमांक/ई/डी.आर.डी./आई.एन.डी./64/2019/895 प्रस्तुत किया गया। प्रकरण में माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 12.03.2021 को आदेश जारी कर श्री राजेन्द्र कुमार व्यास पुत्र श्री बृजकिशोर व्यास को कुल राशि रुपये 6,51,360.00 की डिक्री एवं उस पर दिनांक 01.04.2016 से भुगतान तिथि तक 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर सहित राशि एकमुश्त भुगतान आदेश दिनांक से तीन माह में करने के आदेश दिये गये, आदेश की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 04 अनुसार है। न्यायालयीन आदेश उपरांत भी श्री बृजकिशोर व्यास द्वारा संस्था को वांछित राशि का भुगतान नहीं किया गया है। उक्त डिक्री की बजावरी हेतु संस्था द्वारा माननीय सिविल न्यायालय इंदौर के समक्ष बजावरी प्रकरण दिनांक 07.05.2022 को प्रस्तुत किया गया है, प्रस्तुत प्रकरण की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 05 अनुसार है, इस कारण संस्था द्वारा भूखण्ड आधिपत्य नहीं दिया गया है। (ड.) उत्तरांश (घ) में उल्लेख अनुसार म.प्र. सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1960 की धारा 64 के अंतर्गत सक्षम न्यायालय के द्वारा आदेश जारी होने से शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है।
डॉ. गोविन्द सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारा जवाब आ गया और माननीय मंत्री जी ने उत्तर भी दे दिया कृपया कर इतना बता दें कि जय हिन्द गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्या. इंदौर, राजेन्द्र कुमार व्यास पुत्र बृजकिशोर व्यास को जो प्लाट आवंटित हुआ था वह कब तक दे देंगे.
औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री (श्री राजवर्धन सिंह प्रेमसिंह दत्तीगांव)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें वैसे डिटेल जवाब दे रखा है. आप एग्जेक्ट चाह रहे हैं कि कब तक प्लॉट मिल जायेगा.
डॉ. गोविन्द सिंह-- अब ऐसा है कि आप जवाब नहीं दे पा रहे हैं तो मैं ही दे देता हूं. प्लॉट तो हम दिलवा देंगे, आपको धन्यवाद, आप जल्दी बैठ जाइये. अब कृपा कर सिसोदिया जी को मौका दे रहे हैं ताकि गृह मंत्री जी ज्यादा न बोल पायें, अब आप पूछिये सिसोदिया जी.
श्री विश्वास सारंग-- अध्यक्ष महोदय, विधान सभा गोविन्द सिंह जी चलायेंगे क्या, अध्यक्ष जी से चलवाओ साहब ऐसा मत करो.
डॉ. गोविन्द सिंह-- आप बैठ जाईये, प्लॉट तो हमें मिल जायेगा, हमें आश्वासन मिल गया है.
श्री राजवर्धन सिंह प्रेमसिंह दत्तीगांव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, अब डॉक्टर साहब खुद ही संतुष्ट हैं तो धन्यवाद.
प्रदेश में बढ़ते सायबर अपराध
[गृह]
14. ( *क्र. 3300 ) श्री यशपाल सिंह सिसौदिया : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या परिक्षेत्रीय सायबर थानों पर 'बेसिक फोरेंसिक लैब' एवं सायबर मुख्यालय पर 'एडवांस्ड डिजिटल सायबर फोरेंसिक लैब' की स्थापना की जा रही है? क्या सायबर मुख्यालय भोपाल पर तकनीकी रूप से जटिल विवेचनाओं में सहयोग हेतु 'सायबर एक्सपर्ट' की नियुक्ति की जा रही है? यदि हाँ, तो 'सायबर एक्सपर्ट' किस योग्यता के रहेंगे? क्या पूर्ण रूप से जानकार IT एक्सपर्ट इंजीनियरों की नवीन नियुक्ति की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक? (ख) प्रश्नकर्ता के प्रश्न क्रमांक 44, दिनांक 29 जुलाई के उत्तर में बताया गया की प्रतिवर्ष सायबर अपराध/ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में औसतन 33 % की वृद्धि हो रही है, विभाग द्वारा लगातार प्रयास के बावजूद सायबर अपराध में अपेक्षा से अधिक वृद्धि का मुख्य कारण क्या है? (ग) दिनांक 01 जनवरी, 2018 से प्रश्न दिनांक तक प्रतिवर्ष ऑनलाइन ट्रांजेक्शन सायबर अपराध के कुल कितने प्रकरण, कितनी राशि के सामने आये? कितने प्रकरणों का निराकरण किया गया? वर्ष अनुसार जानकारी देवें।
गृह मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) परिक्षेत्रीय स्तर पर सायबर फोरेंसिक यूनिट एवं सायबर मुख्यालय पर डिजिटल सायबर फोरेंसिक लैब की स्थापना की गई है। कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (ख) आम जनता द्वारा आम जीवन में बढ़ते सायबर तकनीकी का उपयोग, अपराधियों द्वारा सायबर तकनीकी का दुरुपयोग एवं आम जनता में सायबर अपराधों के प्रति जागरुकता का अभाव सायबर अपराधों को बढ़ने के मुख्य कारण है, सायबर अपराध की सूचना प्राप्त होने पर तत्काल विधिसम्मत कार्यवाही की जाती है। सायबर अपराधों की रोकथाम एवं बचाव हेतु प्रदेश की जनता हेतु लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं, विगत वर्षों में लगभग 1071994 लोगों को जागरूक किया गया है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।
श्री यशपाल सिंह सिसौदिया - माननीय अध्यक्ष महोदय,मेरे प्रश्न के जवाब में आदरणीय मंत्री जी ने जो बात स्वीकार की है और जो प्रयास किये हैं उसके लिये मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं. आपने सायबर क्राईम के बढ़ते अपराध को लेकर,ठगी को लेकर 10 लाख 71 हजार 994 लोगों को जागरूक किया लेकिन माननीय अध्यक्ष जी, 60 थाना क्षेत्रों में 1 जनवरी,2018 से प्रश्न दिनांक 17 फरवरी,2023 तक माननीय मंत्री महोदय, कुल 1643 प्रकरण ठगी को लेकर दर्ज हुए हैं,सायबर क्राईम को लेकर और उसके अंतर्गत जो ठगी हुई है वह राशि है 71 करोड़ 7 लाख 17498 रुपये. अध्यक्ष महोदय,मैं आपका संरक्षण चाहता हूं. इसमें सबसे ज्यादा ठगी हुई है 1 जनवरी,2021 से 31 दिसम्बर,2021 तक. जब कोविड का समय था और कोविड के कार्यकाल में 29 करोड़ 1 लाख 60 हजार 800 रुपये की सायबर ठगी हुई है. कुल 444 प्रकरण उस एक साल में दर्ज हुए हैं. माननीय मंत्री जी, आपके विभाग में सायबर फारेंसिंक यूनिट एवं सायबर मुख्यालय पर डिजिटल सायबर फारेंसिंक लैब की स्थापना की गई है उसके लिये मैं पुन: आपको धन्यवाद देना चाहता हूं लेकिन माननीय मंत्री महोदय, सायबर एक्सपर्ट की नियक्ति का जो मेरा प्रश्न था. आपके विभाग से, आपके माध्यम से उत्तर मिला कि कार्यवाही प्रक्रियाधीन है. अब माननीय मंत्री जी, इतने बड़े सिस्टम में, इतनी बड़ी व्यवस्था में अगर सायबर एक्सपर्ट ही नहीं है तो माननीय अध्यक्ष जी, कैसे काम चलेगा. मैं माननीय मंत्री जी से सिर्फ यह निवेदन करूंगा छोटे से प्रश्न के माध्यम से कि आप कब तक सायबर एक्सपर्ट की नियुक्तियां कर देंगे. प्रक्रिया तो प्रचलन में है. मैं स्वीकार करता हूं. आपने भी स्वीकार किया. आम जनता द्वारा आम जीवन में बढ़ते हुए सायबर तकनीकों का उपयोग, अपराधियों द्वारा सायबर तकनीक के दुरुपयोग, आम जनता में सायबर अपराधों के प्रति जागरूकता का अभाव आदि-आदि को लेकर मुझे विभाग से जानकारी मिली है. मैं तो आपके माध्यम से सिर्फ यह जानना चाहूंगा कि यह ठगी कैसे रुकेगी, किस प्रकार से अपराध कम होंगे और आप कब सायबर एक्सपर्ट की नियुक्तियां कर देंगे ?
डॉ.नरोत्तम मिश्र - माननीय अध्यक्ष महोदय, सामयिक और गंभीर विषय है. बदली हुई परिस्थितियों में सायबर क्राईम तेजी से बढ़ रहा है. सम्मानित सदस्य समय-समय पर इस विषय पर ध्यान आकर्षित करते रहे हैं. इसके पूर्व में भी सम्मानित सदस्य ने इस विषय पर प्रश्न उठाया. जहां तक सम्मानित सदस्य का जो मूल प्रश्न है कि एक्सपर्ट की नियुक्ति कब तक हो जायेगी तो अगले तीन महीने में मैं एक्सपर्ट की नियुक्ति कर दूंगा.
श्री यशपाल सिंह सिसौदिया - माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद.
विद्यालय में अनियमितता करने वालों के विरूद्ध कार्यवाही
[अनुसूचित जाति कल्याण]
15. ( *क्र. 3381 ) श्री अजब सिंह कुशवाह : क्या जनजातीय कार्य मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) शासकीय ज्ञानोदय विद्यालय महाराजपुर मुरैना को पत्र क्रमांक 153, दिनांक 30.5.2022 को अवगत कराया गया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में शासकीय अवकाश एवं कोविड-19 आपदा के दौरान छात्रावास बन्द होकर कोविड-19 सेंटर के रूप में उपयोग हेतु संचालित किया गया था? यदि हाँ, तो उक्त अवधि के दौरान शिष्यवृत्ति की राशि का आहरण किया गया था? किन्तु व्यय से ज्यादा राशि आहरण की गई थी? वर्ष 2021-22 में विद्यालय/छात्रावास 190 कार्य दिवस की राशि रूपये 2064128/- आहरण किया जाना था, जबकि 243 कार्य दिवस की राशि 2541718/- आहरण की गई? जो कि व्यय से ज्यादा 53 कार्य दिवस का आहरण किया गया, जिसमें आपके खाते में स्टेटमेंट एवं केशबुक की राशि में भिन्नता पाई गई? (ख) क्या दोषियों के विरूद्ध कोई कार्यवाही की गई? नहीं की गई तो कब तक कर दी जावेगी?
जनजातीय कार्य मंत्री ( सुश्री मीना सिंह माण्डवे ) : (क) जी हाँ। उक्त अवधि में शिष्यवृत्ति की राशि का आहरण किया गया है। वर्ष 2021-22 में विद्यालय उपस्थित पत्रक अनुसार 190 कार्य दिवस एवं छात्रावास पंजी अनुसार 243 कार्य दिवस में भिन्नता शासकीय अवकाश एवं स्थानीय अवकाश होने से रही है, उक्त अवकाश अवधि में विद्यार्थी छात्रावास में नियमित रूप से रहते हैं। इस कारण छात्रावास 243 दिन कार्य दिवस की राशि 25,41,718/- आहरण की गई है। (ख) प्रश्नांश (क) के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
श्री अजब सिंह कुशवाह - अध्यक्ष महोदय, क्या जनजातीय कार्य मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगे कि जो मेरा प्रश्न क है उसके अंतर्गत जब कोविड,2019 में वही विद्यालय में कोविड सेंटर बनाया गया. वहां छात्र नहीं रहे फिर भी आप व्यय राशि जो यहां से आप उपलब्ध कराते हैं. वह राशि वहां खर्च की गई है. जब बच्चे ही नहीं है तो वह राशि किस पर खर्च की गई है ?
सुश्री मीना सिंह माण्डवे - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह कोरोना काल के समय का माननीय सदस्य पूछ रहे हैं कि बच्चे छात्रावास में नहीं थे और उनकी राशि निकाल ली गई. जो दर्ज संख्या होती थी उसके आधी संख्या में बच्चों को वहां सोशल डिस्टेंसिंग के साथ पढ़ने के लिये रखा जाता था. तो ऐसी कोई अनियमितता नहीं हुई है. जो बच्चे छात्रावास में थे उनको भोजन दिया गया तो उनकी छात्रवृत्ति निकलेगी. बाद में शासन का आदेश हुआ कि आधी संख्या में बच्चों को छात्रावास में रखा जा सकता है. तो उस समय बच्चे छात्रावास में आए और वहां रहते भी थे.
श्री अजब सिंह कुशवाह - अध्यक्ष महोदय, मैंने एक पत्र लिखा है विद्यालय को 30 मई,2022 को, उस पत्र के माध्यम से विद्यालय ने खुद स्वीकार किया है कि कोविड,2019 की वजह से कोई छात्र-छात्राएं नहीं हैं.
अध्यक्ष महोदय - प्रश्नकाल समाप्त.
(प्रश्नकाल समाप्त)
..(व्यवधान)..
12.00 बजे नियम 267-क के अधीन विषय
अध्यक्ष महोदय --
12.01 बजे शून्यकाल में मौखिक उल्लेख
श्री कुणाल चौधरी-- अध्यक्ष महोदय, शून्यकाल में एक महत्वपूर्ण विषय है ओलावृष्टि,अतिवृष्टि का.
अध्यक्ष महोदय-- हो गया. ध्यानाकर्षण की सूचनाएं. (व्यवधान).. यह कोई प्रश्नकाल थोड़ी है, जबरदस्ती थोड़ी है. ..(व्यवधान).. कृपया बैठ जायें. ..(व्यवधान).. क्या है ये. पहले आप लोग बैठ तो जायें. ..(व्यवधान).. ऐसे नहीं लिया जा सकता है. पहले बैठ तो जायें सब. ..(व्यवधान).. कृपया बैठ जाइये. ..(व्यवधान).. कृपया बैठ जाइये, ध्यानाकर्षण आने दीजिये. ध्यानाकर्षण की सूचना. ..(व्यवधान)..
12.03 बजे बहिर्गमन
इण्डियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा सदन से बहिर्गमन.
नेता प्रतिपक्ष (डॉ. गोविन्द सिंह)-- अध्यक्ष महोदय, पिछले दो दिनों से लगातार 10वीं और 12वीं की कक्षा के पेपर आउट हो रहे हैं. लगातार कुछ लोगों को पकड़ा गया, अभी कई जिलों में और तीसरे विषय का भी पेपर लीक हो गया गणित और विज्ञान के अलावा. प्रदेश के 20 लाख छात्रों के जीवन के साथ खिलवाड़ हो रहा है. हमारा शासन से अनुरोध है कि इस प्रक्रिया को रोकें और जो बच्चों की फीस ली गई है, दोबारा फीस उनसे न ली जाये और इसके साथ ही साथ पूरे प्रदेश में भारी पैमाने पर 13-14 जिलों में ओले पड़े हैं. दतिया में भी पड़े हैं और कई जिलों में तो आपने भी देखा होगा, समाचार पत्रों में, टी.वी. पर पूरी तरह से किसान बर्बाद हो गया है. वहां पर शासन की तरफ से अभी तक न तो सर्वेक्षण प्रारम्भ हुआ है और न ही जो अधिकारी, राजस्व अधिकारी हैं, उनकी हड़ताल रोकने की कार्यवाही की गई है. आज नायब तहसीलदार, तहसीलदार सभी हड़ताल पर हैं. प्रदेश में सरकार नाम की कोई व्यवस्था बची नहीं है. किसानों में हा-हाकर मचा हुआ है. सरकार की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया गया है. इसलिये प्रतिपक्षी दल कांग्रेस पार्टी दोनों मुद्दों के लेकर सदन से बहिर्गमन करती है.
(डॉ. गोविन्द सिंह, नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में इण्डियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा 10वीं और 12वीं की परीक्षा के पेपर लीक होने और प्रदेश के कई जिलों में ओले गिरने से सरकार द्वारा सर्वेक्षण की कार्यवाही प्रारम्भ नहीं किये जाने के विरोध में सदन से बहिर्गमन किया गया.)
संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)-- अध्यक्ष महोदय, यह भी तरीका अच्छा नहीं है कि जवाब सुने बिना चले जायें. यह बहिर्गमन करना इनका अधिकार है. यह इनका एक नेता नहीं गया. न कमलनाथ, न दिग्विजय सिंह जी एक नेता नहीं गया ओला पीड़ितों के बीच में. इनके नेता दिग्विजय सिंह जी ओला पीड़ित क्षेत्र दतिया में थे, लेकिन ओला पीड़ित स्थान पर नहीं गये. (XXX) यह किस तरह का तरीका है. आरोप लगाना और जवाब नहीं सुनना और चले जाना. हमारे मुख्यमंत्री जी अभी भी ओला पीड़ित की बैठक मुख्यमंत्री जी इस वक्त ले रहे हैं और यह इस तरह से बहिर्गमन करते हैं. अध्यक्ष महोदय, इनके दोनों नेता श्री कमलनाथ जी और श्री दिग्विजय सिंह जी, अभी तक एक ओला पीड़ित के बीच में नहीं गये हैं, (XXX) यह पॉलिटिकल फोरम के लिए सदन का दुरुपयोग करते हैं, इस कांग्रेस को जनता के हितों से कोई मतलब नहीं है.
12.06 बजे ध्यान आकर्षण
(1) सिवनी जिले के पेंच नेशनल पार्क के कोर एरिया क्षेत्र में व्यवसाय करने हेतु लगे प्रतिबंध को हटाया जाना
श्री अर्जुन सिंह काकोड़िया (बरघाट), श्री संजय सत्येन्द्र पाठक, श्री नारायण सिंह पट्टा - अध्यक्ष महोदय,
डॉ. कुंवर विजय शाह - अध्यक्ष महोदय,
अध्यक्ष महोदय – माननीय विधायक जी, एक प्रश्न पूछेंगे.
श्री अर्जुन सिंह काकोडि़या – अध्यक्ष महोदय, जो स्थानीय लोग हैं, जिनकी भूमि कोर एरिया से लगी हुई है वहां पर वे लोग कृषि कार्य भी नहीं कर सकते हैं, किसी काम की नहीं है. अगर कृषि करते हैं तो पूरे जंगली जानवर उजाड़ देते हैं. अगर वहां पर यह लोग काम नहीं करेंगे, किसी तरीके से रोजगार धंधा नहीं करेंगे तो वह तो भूखे मरेंगे. कहां जाएंगे यह लोग ? यहां पर स्पष्ट बता भी रहे हैं कि किसी तरीके से कोई आदेश नहीं है, लेकिन उसके बावजूद भी प्रतिबंध है. अगर माननीय उच्चतम न्यायालय के इस तरीके के निर्देश हैं तो स्थानीय परिस्थितियों को देखकर सरकार और हमारे माननीय मंत्री जी हमारे आदिवासी वर्ग से ही आते हैं और बड़े दयालु भी हैं, बहुत अच्छे हैं राजा साहब हैं, तो हम चाहते हैं कि वह स्थानीय लोगों को कहां जाएंगे वह लोग, अन्य कहीं कुछ कर नहीं सकते, उनकी जमीन है, तो उनको मानवता के आधार पर और स्थानीय लोगों का किस तरीके से जीवन चले क्योंकि वह बाहर जा रहे हैं और बाहर के लोग यहां काम कर रहे हैं, यहां वह लोग करोड़पति हो रहे हैं और स्थानीय लोग बाहर जा रहे हैं, तो यह मेरा निवेदन है कि इसे मानवता की दृष्टि से स्थानीय लोगों को कैसे रोजगार मिले, अगर सर्वोच्च न्यायालय ने पक्के निर्माण की बात की है तो आप अस्थाई करवा सकते हैं और यहां की जो आर्थिक स्थितियां हैं, हमारे आदिवासी क्षेत्र की क्योंकि यह सिर्फ पेंच का मामला नहीं है यह तमाम पूरे नेशनल पार्कों का है.
अध्यक्ष महोदय – हो गया, और दो लोग पूछने वाले हैं.
श्री अर्जुन सिंह काकोडि़या – अध्यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी और पूरी सरकार से निवेदन है कि गरीब आदिवासियों के हितों का ध्यान रखा जाए.
कुँवर विजय शाह – अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं इस पूरे सदन को, माननीय सदस्य को और पूरे प्रदेश के जनजातीय बंधु जो तमाम नेशनल पार्क के आसपास रहकर अपना रोजगार, व्यवसाय कर रहे हैं, उनको आश्वस्त कर देना चाहता हूं कि उनके मन में किसी प्रकार का भय और शंका ना रहे. उनको किसी तरीके से वंचित नहीं किया जाएगा. उनको पूरा संरक्षण दिया जाएगा. उनके रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे. स्थाई कंस्ट्रक्शन पर रोक है. जैसा कि आपने कहा अस्थाई कंस्ट्रक्शन पर कोई रोक नहीं है और भविष्य में न्यायालय में हमने जनता की तरफ से, आपकी तरफ से हमारा पक्ष रखा हुआ है और पूरी तरीके से जब सर्वोच्च न्यायालय में मौका आएगा तो आपकी भावनाओं के अनुरूप राज्य शासन का पक्ष रखेंगे.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक – अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने अपने जवाब में लिखा है कि यह सही नहीं है कि सिवनी जिले में नेशनल पार्क के एरिया से एक किलोमीटर की परिधि में व्यापार, व्यवसाय किये जाने पर किसी भी प्रकार की रोक का कोई प्रस्ताव है. साथ में इन्होंने यह भी लिखा है कि यह सही नहीं है कि किराने की दुकान, बिजली के सामान, चाय नाश्ते की दुकान, लॉज होटल और अन्य आजीविका के साधन में रोक लगाने का कोई प्रस्ताव है. इसका मतलब हम इस जवाब से यह मानें कि किसी प्रकार की कोई रोक वहां पर नहीं है क्योंकि माननीय मंत्री जी ने स्पष्ट लिखा है.
अध्यक्ष महोदय – नहीं-नहीं, उन्होंने यह कहा है कि कोई सलाहकार समिति का प्रस्ताव नहीं है, बाकी सेंट्रल का अलग से आया है. उस आर्डर को, आप दोनों को एक साथ पढि़ये ना. एक साथ दोनों को पढि़ये.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक – सलाहकार समिति का कोई प्रस्ताव..
अध्यक्ष महोदय – सलाहकार समिति का जो आपने पूछा है कि सलाहकार समिति का निर्णय है, उन्होंने कहा है सलाहकार समिति का ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, परंतु जो सेंट्रल का आदेश है वह पढ़ा है उन्होंने आगे. उसको आप पढ़ ही नहीं रहे हैं.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक – जी, उसमें केन्द्र सरकार से क्योंकि इन्होंने यह लिखा है कि सलाहकार समिति में, इसमें दो प्रश्न हैं अध्यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से क्योंकि इससे क्या हो रहा है बांधवगढ़ सहित, यह सिर्फ पेंच का मुद्दा नहीं है, यह आपके रीवा में भी नेशनल पार्क है, बांधवगढ़ है, कान्हाकिसली है, संजय गांधी है, पन्ना है, सभी जगह यह हो रहा है कि ईको सेंसिटिव जोन बना दिया गया है और उसमें कहीं पर एक किलोमीटर रखा है, कहीं दो किलोमीटर की परिधि है, कहीं चार किलोमीटर की, कहीं सौ मीटर की है, कहीं पचास मीटर की भी है, एक तो पहली बात जो ईको सेंसिटिव जोन बनाया गया है इसमें कोई एकरूपता नहीं है. हर नेशनल पार्क के उन्होंने अलग-अलग नियम बना लिये हैं. अपनी सुविधा के अनुसार बना लिये हैं. जहां कहते हैं कि यह शहरी क्षेत्र से लगा है तो उसको सौ मीटर कर दिया. जब ईको सेंसिटिव जोन है तो वह सभी जगह यूनिफॉर्म होना चाहिये, एक जैसा होना चाहिये. यह गलत है. अध्यक्ष महोदय, इसमें क्या एल.ए.सी. फाइनल अथॉरिर्टी है ? मैं आपके माध्यम से जवाब चाहूंगा. दूसरा, इन्होंने जो लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय दिनांक 3 जून, 2022 के अनुसार ईको सेंसिटिव जोन के भीतर किसी भी उद्देश्य से कोई भी नया निर्माण नहीं किया जाएगा.
अध्यक्ष महोदय – स्थाई निर्माण.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक – जी हां, स्थाई निर्माण नहीं किया जाएगा, तो किसी भी उद्देश्य से अगर कोई परिवार वहां बसा हुआ है एक किलोमीटर की परिधि के अंदर, उसका घर बना हुआ है, एक नया कमरा भी अगर वह चाहे कि अगर नई बहू आ रही है, एक नया कमरा बना लेंगे, तो वह एक नया कमरा भी नहीं बना सकता. तो यह तो सर्वथा अनुचित है. अध्यक्ष महोदय, इसमें मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से जानना चाहूँगा कि ...
अध्यक्ष महोदय -- संजय जी, मंत्री जी का स्पष्ट उत्तर आया है. उन्होंने कहा है कि आप सबकी भावनाओं को उच्चतम न्यायालय में जब वे पैरवी कर रहे हैं तो उसको रखेंगे. आपके पक्ष की ही तो बात वे कर रहे हैं.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह तो केवल पेंच नेशनल पार्क की सीमा से लगे लोगों के व्यवसाय को लेकर था..
अध्यक्ष महोदय -- वे सारी जगहों का कह रहे हैं.
डॉ. कुँवर विजय शाह -- अध्यक्ष महोदय, पूरे मध्यप्रदेश के नेशनल पार्कों की बात कह रहा हूँ.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- अध्यक्ष महोदय, केवल व्यवसाय को लेकर मैं बात कर रहा हूँ. अध्यक्ष महोदय, वे तो खुद के मकान में भी एक कमरा नहीं बना सकते. अपने घर के अंदर एक कमरा नहीं बना सकते.
अध्यक्ष महोदय -- यही तो वे कह रहे हैं, यही पक्ष तो वे सुप्रीम कोर्ट के सामने रखेंगे कि यह अनुमति हमको दी जाए. यही तो वे आपके पक्ष में रखने जा रहे हैं.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, फिर मंत्री जी से सिर्फ इतना ही मेरा प्रश्न है कि क्या अस्थाई निर्माण करके क्षेत्रीय लोग, चाहे बांधवगढ़ हो या अन्य कोई भी नेशनल पार्क हो, पन्ना हो या कोई भी हो, अस्थाई निर्माण करके अपना रोजगार या व्यवसाय वे चला सकते हैं ?
डॉ. कुँवर विजय शाह -- माननीय अध्यक्ष जी, रोजगार पहले भी चल रहे थे, अभी भी चल रहे हैं. किसी प्रकार की कोई रोक नहीं है, केवल नए स्थाई निर्माण की रोक लगी है और उसमें भी हम लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है. जैसा कि मैंने पहले ही निवेदन किया था कि सारे मुद्दों को लेकर के सुप्रीम कोर्ट में हम लोग गए हैं. अब सुप्रीम कोर्ट को हम यह नहीं कह सकते कि जल्दी सुनवाई करे.
खनिज साधन मंत्री (श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह) -- अध्यक्ष महोदय, इसमें एक आग्रह यह है कि जैसे प्रधानमंत्री आवास आ रहे हैं, प्रधानमंत्री आवास यदि वहीं पर अपने घर गिराकर भी बना रहे हैं तो नहीं बनने दिए जा रहे हैं. जहां पर ऑलरेडी मकान बना हुआ है, कच्चा है, यदि वह पक्का मकान बनाने का काम कर रहा है तो इको सेंसेटिव जोन के कारण वे बनने नहीं दे रहे हैं. इसमें थोड़ी सी रोक लगाई जाए, जहां पर ऑलरेडी मकान था, उसी जगह पर यदि बना रहे हैं तो क्या दिक्कत हो रही है.
अध्यक्ष महोदय -- यही सब पक्ष तो सुप्रीम कोर्ट में रखेंगे. करना तो सुप्रीम कोर्ट को ही है. हो गया संजय जी ?
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा उत्तर नहीं आया. मैंने सिर्फ इतना निवेदन किया था कि क्या इको सेंसेटिव जोन के अंदर अस्थाई निर्माण करके लोग अपना व्यवसाय कर सकते हैं, चाहे वह होटल हो, रिजॉर्ट हो, लॉज हो, किराने की दुकान हो, बिजली के सामान की दुकान हो, कपड़े की दुकान हो, किसी भी प्रकार का व्यवसाय हो, क्या अस्थाई निर्माण करके वे व्यवसाय कर सकते हैं या नहीं ?
अध्यक्ष महोदय -- आ तो गया उनका उत्तर.
डॉ. कुँवर विजय शाह -- माननीय अध्यक्ष जी, चूँकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, माननीय मुख्यमंत्री जी और सभी लोगों से बैठ कर के चर्चा करके, निर्णय करके, इस मुद्दे को, जो माननीय सदस्य ने शामिल किया है, उस पर निर्णय करेंगे.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि इन्हीं के जवाब में लिखा है कि स्थाई निर्माण नहीं कर सकते तो मैं कह रहा हूँ कि ठीक है, गांव के लोग स्थाई निर्माण नहीं करना चाहते, अस्थाई निर्माण, घपरा, घरिया के मकान बनाकर के अगर कोई निर्माण करके वे व्यवसाय करना चाहते हैं तो उसका जवाब देवें, जो लिखा है इन्होंने अपने जवाब में कि स्थाई नहीं कर सकते तो क्या अस्थाई में कर सकते हैं या नहीं, माननीय अध्यक्ष महोदय, इतना बता दें ?
अध्यक्ष महोदय -- सुप्रीम कोर्ट में मामला है, इसलिए वे सीधे कुछ नहीं कह सकते.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला इसमें है कि स्थाई निर्माण नहीं कर सकते और सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट लिखा है कि...
अध्यक्ष महोदय -- वे बैठकर के सरकार से चर्चा करेंगे.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- अध्यक्ष महोदय, मेरा इतना सा निवेदन है कि ....
श्री कांतिलाल भूरिया -- आदिवासियों के साथ अत्याचार हो रहा है, जिसका मकान गिर गया है, उसकी वह जुड़ाई नहीं कर सकता, उसके ऊपर भी प्रतिबंध...
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- भूरिया जी, आपके यहां नेशनल पार्क नहीं है, बैठ जाओ ना भाई..
श्री कांतिलाल भूरिया -- गरीब आदमी को थोड़ी राहत मिलनी चाहिए...
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- दादा, मेरा आग्रह है..
अध्यक्ष महोदय -- भूरिया जी, संजय जी, विजय शाह जी ऐसे मंत्री हैं कि कुछ भी कह सकते हैं कि हम ये करेंगे, इसमें नहीं कह रहे हैं तो कुछ समझ लो ना प्रॉब्लम सुप्रीम कोर्ट वाली.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति मेरे पास भी है, माननीय मंत्री जी के पास भी है. माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कहीं पर यह नहीं लिखा कि अस्थाई, उन्होंने स्पष्ट लिखा है स्थाई निर्माण नहीं किया जा सकेगा तो मेरा स्पष्ट प्रश्न अस्थाई निर्माण के बारे में है.
अध्यक्ष महोदय -- उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री जी से चर्चा करेंगे, आपकी बातों को रखेंगे और निर्णय करेंगे.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो नियम है, उसमें भी मुख्यमंत्री जी से चर्चा करेंगे...
अध्यक्ष महोदय -- करनी चाहिए, क्यों नहीं करनी चाहिए.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- नहीं, वह तो नियम है, इनके हाथ में है.
अध्यक्ष महोदय -- चर्चा करनी चाहिए. श्री नारायण सिंह पट्टा जी, सीधा प्रश्न करें.
श्री नारायण सिंह पट्टा (बिछिया) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सीधा ही प्रश्न करूंगा. हम तीनों माननीय सदस्यों की एक ही मंशा है और सरकार उसका दो लाइन में जवाब दे दे. सवाल है कि समूचे मध्यप्रदेश में जितने भी नेशनल पार्क हैं...
अध्यक्ष महोदय -- सरकार आपकी मंशा के साथ है. माननीय वन मंत्री जी ने सीधे कहा है कि मैं आपकी सारी मंशा के साथ हूँ.
श्री नारायण सिंह पट्टा -- अध्यक्ष महोदय, हमारी भी वही मंशा है. पूरे मध्यप्रदेश में जितने भी नेशनल पार्क हैं, इन नेशनल पार्कों में सबसे ज्यादा अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग निवास करते हैं...
अध्यक्ष महोदय -- आ गया, उनका भी कहना है कि 80 प्रतिशत से ज्यादा है..
श्री नारायण सिंह पट्टा -- अध्यक्ष महोदय, पहले आदिवासियों को विस्थापित किया जाता है, उनको घर बनाने के लिए, रोजगार करने के लिए मुआवजा दिया जाता है. फिर इस तरह से यदि प्रतिबंधित या सेंसेटिव एरिया घोषित करके और उनको अगर अस्थाई मकान हों या होम स्टे हों या टेंट हाउस हों, अगर इनकी अनुमति इस तरह की न दी जाए, तो यह तो बेरोजगार होंगे तो मंत्री जी से हमारा यह आग्रह है और वे इतने काबिल मंत्री हैं, आप भी आसंदी से उनकी प्रशंसा कर चुके हैं और हम लोग भी प्रशंसा कर चुके हैं. मेरा भी प्रश्न 3 तारीख को था, आपका संरक्षण था. मैंने तो प्रमाण देने के लिये, नाम देने तक के लिये बात कही थी. बाहर के लोग आकर के पक्के स्थायी लॉज, रिसॉर्ट बना रहे हैं. मैंने उस दिन भी कहा था कि उनके खिलाफ एफआईआर कब करेंगे. जब पक्के रिसॉर्ट निर्माण कराए जा रहे हैं तो मंत्री जी यह जवाब दे दें कि भई, वहां के जनजाति वर्ग के अलावा सभी वर्गों के जो अस्थायी निवासी हैं, उनको आप सदन से अनुमति दे दें. मैं अपने कान्हा नेशनल पॉर्क की बात बता रहा हॅूं कि जो केन्द्र का हवाला दिया जा रहा है कि वहां के अनुसूचित जनजाति के लोगों को कान्हा प्रबंधन के लोग डरा-धमका कर 1 किलोमीटर की बजाय, 2 किलोमीटर से बाहर करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में वहां के अनुसूचित जाति, जनजाति और सभी वर्गों के लोग कहां जाएंगे, यह आदेश माननीय मंत्री महोदय जी से करवा दीजिए.
डॉ. कुंवर विजय शाह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, पहली बात तो, जो माननीय विधायक जी ने कहा है कि किसी को हटाया जा रहा है, किसी को धमकाया जा रहा है, 2 किलोमीटर से बाहर भगाया जा रहा है. माननीय विधायक जी, मैं 26 तारीख को चलूंगा, आप मेरे साथ में चलिएगा.
अध्यक्ष महोदय -- हां, बस ठीक है.
श्री नारायण सिंह पट्टा -- अध्यक्ष महोदय, एक और मेरा निवेदन है. मजदूरों से जुड़ा हुआ विषय है,
श्री दिव्यराज सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मुझे भी इस विषय पर कुछ कहना है.
श्री नारायण सिंह पट्टा-- अध्यक्ष महोदय, गाइडों से जुड़ा हुआ विषय है. सिर्फ नेशनल पॉर्क का विषय है.
अध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी तो आपके साथ जा ही रहे हैं.
श्री नारायण सिंह पट्टा -- जी अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देता हूँ. मैं उनके साथ रहूंगा ही, मैं तो उनका वेलकम करूंगा.
अध्यक्ष महोदय -- श्री शरदेन्दु तिवारी जी.
श्री नारायण सिंह पट्टा -- अध्यक्ष महोदय, एक प्वाइंट है.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- अध्यक्ष महोदय, एक लाईन की बात है..
अध्यक्ष महोदय -- नहीं, नहीं. मैंने इसको विशेष तौर पर....
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, एक लाईन की बात सुन लीजिए. हजारों परिवारों और हजारों लोगों के विश्वास की बात है....
अध्यक्ष महोदय -- नहीं, नहीं. मैंने मान लिया..
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- अध्यक्ष महोदय, एक लाईन की बात है. मेरा निवेदन है कि आप सुन लीजिए. गरीब लोगों की तरफ से एक निवेदन है, एक लाईन की बात है.
अध्यक्ष महोदय -- वे तो उनके पक्ष में बोल रहे हैं न.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- अध्यक्ष महोदय, छोटी-सी बात बोल रहा हॅूं, सुन लीजिए. पहले लोगों को कोर एरिया से निकाल कर पूरे गांव सहित उनकी जमीन, खेत, मकान सब लेकर बाहर विस्थापित किया गया. अब जब वे बाहर विस्थापित हो गए, उन्होंने बाहर आकर मकान, जमीन ले लिया, तो अब बाहर भी कह रहे हैं कि अब 2 किलोमीटर और बाहर जाओ तो कितनी बार गरीबों को भगाया जाएगा ? कब तक उनको काम नहीं करने दिया जाएगा ? रोजगार करने नहीं दिया जाएगा, व्यवसाय नहीं करने दिया जाएगा ? माननीय मंत्री जी ने बोला कि मुख्यमंत्री जी से चर्चा करके बता देंगे, तो उसकी कोई समय-सीमा तय कर लें.
अध्यक्ष महोदय -- अभी तो आपके साथ में जा रहे हैं तो पहले वहां दिखा दो, उसके बाद वे चर्चा करेंगे.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- जी अध्यक्ष महोदय, लेकिन एक समय-सीमा तय करवा दें, मेरा निवेदन है.
अध्यक्ष महोदय -- अभी तो माननीय मंत्री जी ने कहा कि हम 26 तारीख को जा रहे हैं तो 26 तारीख को ठीक से और भी व्यवस्था कर लेना.
श्री सुखदेव पांसे -- उसके बाद तुम्हारे रिसॉर्ट ले जाना.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- अध्यक्ष महोदय, नारायण पट्टा जी तो मंत्री जी के साथ जा रहे हैं.
श्री नारायण सिंह पट्टा -- संजय भैया, आप भी हमारे साथ सादर आमंत्रित हैं.
अध्यक्ष महोदय -- नहीं, हो गया, हो गया.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- अध्यक्ष महोदय, आप बोलेंगे, तो वे तत्काल समय-सीमा बता देंगे.
अध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी, आप संजय पाठक जी को अपनी तरफ से आमंत्रित कर लीजिए. चलने में बढ़िया हो जाएगा.
डॉ. कुंवर विजय शाह -- जी माननीय अध्यक्ष महोदय.
श्री विश्वास कैलाश सारंग -- अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी संजय जी को लेकर जाएंगे, तो फायदे में ही रहेंगे.
अध्यक्ष महोदय -- हां, बढ़िया रहेगा.
श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- साहब, आपको टाइगर बोलते हैं, चीता बोलते हैं, तो कुछ समय-सीमा तो बता दीजिए.
डॉ. कुंवर विजय शाह -- माननीय अध्यक्ष जी, वास्तव में संजय जी तो अपनी जगह ठीक हैं लेकिन जो हमारे जनजाति बंधु, माननीय काकोडि़या जी और नारायण सिंह पट्टा जी ने, जो वहां के माननीय सदस्य हैं, विधायक हैं और उन्होंने जो चिन्ता व्यक्त की. यह गरीब लोगों के पेट का सवाल है. संजय जी, पेट का आपसे कोई लेना-देना नहीं है...(हंसी)
श्री दिव्यराज सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, एक बात मैं भी बोलना चाहता हॅूं.
श्री नारायण सिंह पट्टा -- अध्यक्ष महोदय,...
अध्यक्ष महोदय -- उनको उत्तर तो देने दीजिए. वे उत्तर तो दे ही रहे हैं न. भई, आपका प्रश्न है, उनका उत्तर भी दे देंगे. अरे, आपने प्रश्न कर लिया, वे उत्तर देने के लिए खडे़ हैं न.
श्री नारायण सिंह पट्टा -- अध्यक्ष महोदय, मैं सलाहकार समिति का सदस्य हॅूं. वहां के गाइडों का बार-बार सवाल उठता है, मंत्री जी को भी अवगत करा चुके हैं. किसी को 600 रूपए मिलते हैं, किसी को 500 रूपए मिलते हैं किसी को 450 रूपए मिलते हैं, तो यह समस्त नेशनल पॉर्कों का विषय है...
अध्यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, एक मिनट दिव्यराज सिंह जी का भी सवाल सुन लीजिए, फिर उत्तर दीजिए.
श्री दिव्यराज सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें केवल एक समस्या बार-बार आती है कि सुप्रीम कोर्ट से ऐसे आदेश आ जाते हैं क्योंकि उसमें समस्या यह है कि हमारी तरफ से कोई ढंग के नियम नहीं बनाए गए हैं. अगर सदन से इसके नियमों की गाइडलाईंस बन जाएंगीं, तो सुप्रीम कोर्ट इस तरह के आदेश नहीं कर पाएगा क्योंकि हमारी तरफ से कोई आदेश नहीं हैं. हमारी तरफ से वेगनेस है. हमारे यहां के कोई नियम-कानून सही ढंग से बने नहीं हैं इसलिए सुप्रीम कोर्ट इसमें तरह-तरह के आदेश कर देता है. इसलिए मैं माननीय मंत्री जी चाहता हॅूं कि इसकी प्रॉपर गाइड लाइन बनाई जाए. जिससे सुप्रीम कोर्ट इसमें बार बार ऐसे आदेश न कर पाए.
अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, सारे लोगों का एक साथ जवाब आ जाए.
श्री संजय पाठक-- अध्यक्ष महोदय, इसमें यह और बता देंगे कि क्या अस्थायी निर्माण में कोई रोक तो नहीं है, बस इतना और बता दीजिए.
कुँवर विजय शाह-- अध्यक्ष महोदय, आप अपना घर बनाइये, कोई उस पर रोक नहीं है, अस्थायी निर्माण में और जहाँ तक आपने व्यावसायिक की बात की माननीय मुख्यमंत्री जी से चर्चा करके और सुप्रीम कोर्ट में आपकी भावनाओं का पक्ष रखा जाएगा, नंबर एक, नंबर दो, जो माननीय सदस्य ने कहा है कि वहाँ स्थायी समस्या है, हटा रहे हैं, 6 तारीख नहीं, मैं 26 तारीख को चल रहा हूँ. 26 तारीख को जाकर के, ऐसी कोई बात...
श्री दिव्यराज सिंह-- अध्यक्ष महोदय, इसको प्लीज़ बता दें कि माननीय मंत्री जी इसमें कब एक कोई गाइड लाइन बना लेंगे, सदन से एक गाइड लाइन बना लें तब जाकर के हमारे सॉल्यूशन निकल कर आएँगे. वरना सुप्रीम कोर्ट रोज कुछ भी आदेश कर देता है.
कुँवर विजय शाह-- माननीय अध्यक्ष जी, सुप्रीम कोर्ट को न तो मैं चैलेंज कर सकता हूँ....
अध्यक्ष महोदय-- नहीं, कुछ नहीं कर सकते.
कुँवर विजय शाह-- न मैं सुप्रीम कोर्ट को लिख कर दे सकता हूँ.
श्री दिव्यराज सिंह-- अध्यक्ष महोदय, नियम कानून हमारे सदन से बनाए जाते हैं, उसी को सुप्रीम कोर्ट को फॉलो करना चाहिए.....(व्यवधान)..
कुँवर विजय शाह-- अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश की विधान सभा से कोई ऐसे कानून नहीं बनते कि सुप्रीम कोर्ट उसका पालन करे.
श्री नारायण सिंह पट्टा-- अध्यक्ष महोदय....(व्यवधान)..
अध्यक्ष महोदय-- ठीक है. हो गया. यह कोई सवाल नहीं है. एक तो हमने 6 ले लिये उस पर भी आप दो घंटे लगाएँगे तो कैसे करेंगे. नहीं, आप बैठ जाइये, आपके सारे प्रश्न आ गए, आपके गाइड के भी आ गए, उनके मानदेय के आ गए, सब आ गया. माननीय मंत्री जी, उत्तर दें.
श्री लक्ष्मण सिंह-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी, इसमें विशेषज्ञों की भी राय अवश्य लें.
कुँवर विजय शाह-- बिल्कुल. माननीय अध्यक्ष जी, ईको सेंसेटिव झोन का जो मैटर आपने बताया है उसके लिए हमारा जो पर्यावरण विभाग है, टूरिज्म विभाग है, बहुत दिनों से उसमें एक काम कर रहे हैं. लेकिन 2-3 महीने के अन्दर सारे पार्कों का मास्टर प्लान हम लोग सुप्रीम कोर्ट में जमा करवा रहे हैं.
12.27 बजे
स्वागत उल्लेख
छत्तीसगढ़ के सांसद, पूर्व मंत्री, श्री रामविचार नेताम का स्वागत उल्लेख.
अध्यक्ष महोदय-- आज सदन की दीर्घा में छत्तीसगढ़ के सांसद, पूर्व मंत्री श्री रामविचार नेताम जी उपस्थित हैं और यह हम सबका सौभाग्य है कि मध्यप्रदेश विधान सभा के भी वे सदस्य रहे हैं. सदन की ओर से उनका स्वागत है.
(मेजों की थपथपाहट)
अध्यक्ष महोदय-- अब यह दूसरा ध्यानाकर्षण है सर्वश्री शरदेन्दु तिवारी जी, पंचूलाल प्रजापति जी, कुँवर सिंह टेकाम जी, शरदेन्दु तिवारी जी अपने ध्यानाकर्षण की सूचना पढ़ें.
12.27 बजे
(2) श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा के डीन द्वारा पद का दुरपयोग किया जाना.
श्री शरदेन्दु तिवारी (चुरहट) {श्री पंचूलाल प्रजापति,कुँवर सिंह टेकाम}-- धन्यवाद माननीय अध्यक्ष महोदय.
अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यानाकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है—
12.31 बजे {सभापति महोदय (श्री हरिशंकर खटीक) पीठासीन हुए.}
चिकित्सा
शिक्षा
मंत्री (श्री
विश्वास सांरग)
-- माननीय
सभापति महोदय,
श्री शरदेन्दु तिवारी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने बहुत लम्बा जवाब दिया है. बहुत सारा काम पहले कर भी दिया है. श्रीमती अनीता तिवारी के प्रकरण में जांच की है इसके लिए उनका बहुत-बहुत धन्यवाद. इसके पहले एक प्रकरण आया था जिसमें लाइट न होने के कारण ऑक्सीजन आपूर्ति की कमी थी और एक मरीज की मृत्यु हो गई थी. काफी पहले इसी सदन में मैंने वह प्रश्न उठाया था. यहां पर महत्वपूर्ण मामला यह है कि कैंसर जैसे गंभीर रोग में जहां हमारे मुख्यमंत्री जी..
12.35 बजे {अध्यक्ष महोदय (श्री गिरीश गौतम) पीठासीन हुए.}
श्री शरदेन्दु तिवारी -- ...हम लोगों के जाने पर, सभी विधायकों के जाने पर स्वेच्छानुदान देने को भी तैयार होते हैं. दिसम्बर 2020 को विभाग के द्वारा तीन लाख रुपए का आवेदन किया गया कि हमको इस अस्पताल में इलाज कराना है. हमारी प्रक्रिया लेट होती चली गई. हम 20 तारीख को आवेदन करते हैं और 22 को आवेदन पहुंच जाता है. उसके बाद उसमें कोई कार्यवाही नहीं होती है. मामला चल रहा होता है. कैंसर का पेशेंट है. वह पहले जाकर दवाई करवाकर आ जाते हैं उसके बाद वह कार्योत्तर स्वीकृति के लिए आवेदन लगाते हैं. आज हम 20 तारीख को यहां सदन में बैठे हुए हैं अभी तक उसमें कोई कार्यवाही नहीं हुई है. जांच चल रही है, पैसा नहीं आ रहा है. आपको मालूम है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी पर पूरा घर परेशान होता रहता है और आर्थिक बोझ भी छोटे कर्मचारी के ही ऊपर आता है. सुदामा प्रसाद पांडे जी के ऊपर भी आया. मुझे एक पत्र मिला है कि इस विषय पर माननीय अध्यक्ष्ा महोदय ने भी स्वयं संज्ञान लेते हुए इस पर डीन को एक पत्र लिखा था और इस लापरवाही के बारे में आपने उनका ध्यान खींचा था कि इस पर तुरंत कार्यवाही करें, लेकिन इस पर अभी तक कार्यवाही नहीं हुई है. सबसे पहली बात तो यह है कि इनका जो कैंसर के इलाज में खर्चा लगा है इसमें इनको इनका पैसा कब तक दे दिया जाएगा और दूसरी बात यह है कि यह जो गंभीर अव्यवस्था का विषय है लगातार सदन में गंभीर अव्यवस्था का विषय संजय गांधी मेडिकल कॉलेज, श्यामशाह मेडिकल कॉलेज के लिए आ रहा है. उस पर माननीय मंत्री जी पूरी की पूरी कार्यवाही जिस पर हम यह कहें कि वास्तव में यह कार्यवाही हो गई है या जांच चल रही है ऐसा न हो. माननीय मंत्री महोदय, इसमें यह बताने का कष्ट करें कि पूरी कार्यवाही कब तक हो जाएगी?
श्री विश्वास सारंग-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय विधायक जी ने अपने वक्तव्य के शुरुआत में ही कहा कि जब भी इस सदन में कोई प्रकरण आया है हमने तुरंत कार्यवाही की है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपको भी धन्यवाद दूंगा कि आपने आसंदी से मेरी तारीफ की हमने तुरंत कार्यवाही भी की. जहां तक सुदामा प्रसाद पांडे जी का प्रकरण है मैंने पूरा जवाब विस्तृत रूप से दे दिया है. यह एक प्रक्रिया है जिसके तहत यदि कोई सरकारी कर्मचारी राज्य के बाहर या राज्य के अंदर निजी अस्पताल में इलाज कराता है तो वह अस्पताल सूचीबद्ध होना चाहिए. सुदामा प्रसाद पांडे जी ने नागपुर के जिस संस्थान में अपना इलाज कराया वह राज्य सरकार की जो सूची है उसमें सूचीबद्ध नहीं है. परंतु ऐसे प्रकरण होते हैं कि बहुत बार बीमारी के कारण ऐसी स्थिति बनती है कि सूचीबद्ध जो अस्पताल हैं उसके बाहर भी इलाज करवाना पड़ता है तो शासन ने हर विषय पर विचार करके प्रक्रिया बनाई है. उस हिसाब से रीवा मेडिकल कॉलेज में यह प्रकरण गया क्योंकि वह अस्पताल सूचीबद्ध नहीं था इसलिए वह रिजेक्ट हो गया. दूसरी बार उन्होंने फिर से आवेदन प्रस्तुत किया. जो अस्थी रोग के विभागाध्यक्ष थे उनकी अध्यक्षता में एक समिति बनी. उन्होंने उनसे फिर से पूरी जानकारी मांगी और उसका औचित्य क्या था इस पर विचार करके उन्होंने रिकमण्ड किया. परंतु महाविद्यालय स्तर पर उस पर निर्णय नहीं लिया जा सकता इसलिए जो उनका संबंधित विभाग है उसको वह प्रकरण भेजा गया है. संबंधित विभाग वह राज्य शासन को भेजेगा और क्योंकि आपने भी लिखा है तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि वह जैसे ही विभाग में आएगा क्योंकि यह कर्मचारी सिंचाई विभाग से संबंधित कर्मचारी है तो सिंचाई विभाग का प्रकरण जैसे ही आएगा हम उस पर विचार करके जो भी निर्णय होगा जरूर करेंगे.
श्री पंचूलाल प्रजापति (मनगवां)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो रीवा मेडिकल कॉलेज की बात है, जो वहां के डीन साहब हैं वह डीन साहब जो प्राईवेट अस्पताल के लिए काम किया करते हैं इस तरह से इनका अस्पताल है और वहां इनका शुल्क भी लिखा है कि इनका परामर्श शुल्क 400 रुपए है और तत्काल शुल्क 600 रुपए है. इनका इतना अधिक रेट चल रहा है और इन्होंने बहुत बड़ी बिल्डिंग बनाई है. नीचे इनका अस्पताल है और ऊपर रिहायशी है. यह अस्पताल में ओपीडी में कभी नहीं बैठते हैं और जो जूनियर डॉक्टर बैठते हैं तो वह सीधे कहते हैं कि आप वहां चले जाइए और जब मरीज वहां जाते हैं तो मरीजों की लुटाई करते हैं. हमारा इस संबंध में आपसे यह निवेदन है कि इनको उस पद से हटा दिया जाए और उनके ऊपर शीघ्र से शीघ्र कार्यवाही की जाए.
अध्यक्ष महोदय-- कुंवर सिंह टेकाम जी की बात भी आ जाए.
श्री कुँवर सिंह टेकाम (धौहनी)- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे क्षेत्र में 4-5 जिलों में, यह एकमात्र शासकीय महाविद्यालय है, जहां स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध होती है. वहां अव्यवस्थाओं का इतना अंबार लग गया है कि उन्हें ठीक करने की आवश्यकता है. जैसा कि अभी तिवारी जी और पंचूलाल जी ने कहा कि रीवा में एकमात्र चिकित्सा महाविद्यालय है. वहां पर जो अव्यवस्थायें हैं, उन्हें ठीक किया जाये. वहां से मरीजों को, जो प्राइवेट अस्पतालों में रिफर किया जाता है, यह गंभीर विषय है. क्या वहां सुविधायें नहीं हैं या वह लुटाई का अड्डा बन गया है. इस पर आपका ध्यान चाहूंगा.
श्री संजय यादव- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, बार-बार यही कह रहा हूं कि पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है. 108 एम्बुलेंस वाले, प्राइवेट अस्पताल में भेज देते हैं.
अध्यक्ष महोदय- आप बैठ जायें. अभी रीवा का चल रहा है. रीवा संभाग के 3-3 विधायक लगे हुए हैं, मंत्री जी थोड़ा-सा सुनेंगे.
इसमें गंभीरता इसलिए है कि उनको अधिकारिता है या नहीं, यह प्रश्न अब गौण हो गया है. प्रश्न यह है, जब उनका पत्र 20-12-2022 को, कार्यपालन यंत्री के यहां से पत्र गया, 3 लाख रुपये के एस्टीमेट के साथ कि आप इन्हें स्वीकृति दें. उन्होंने स्वीकृति नहीं दी. आगे किस कमेटी को भेजा, कहां भेजा, उसको कोई जानकारी नहीं है. उनसे जाकर कैंसर का इलाज करवा लिया तो कार्योत्तर स्वीकृति का आपका एक नियम है, उस नियम के तहत फिर भेजा. जब मैंने, 16 तारीख को आपको पत्र भेजा, यदि आपने मेरा पत्र देखा होगा तो उसमें मैंने स्पष्ट लिखा है कि इसी तरह से कई घटनायें हुई हैं. 3 लाख रुपये की स्वीकृति भेजी गई थी परंतु अभी तक न तो स्वीकृत किया गया, न ही निरस्ती की कोई सूचना दी गई है. यदि आपने निरस्त किया है तो सूचना कर देना चाहिए था.
उल्टा यह हुआ, आप देखियेगा सामान्य प्रशासन विभाग का एक आदेश है, जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि समय-समय पर माननीय संसद सदस्यों, विधायकों के पत्रों की पावती देने, उनके पत्रों पर कार्यवाही का निर्धारित अवधि में उत्तर देने, शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा सौहार्दपूर्ण व्यवहार करने, उन्हें सार्वजनिक समारोह कार्यक्रमों में आमंत्रित करने, उनसे प्राप्त पत्रों के लिए पृथक पंजी संधारित करने, निर्देश पालन करने, संबंधी निर्देश जारी किय गए हैं.
आगे यह मार्क किया गया है सुविधा समिति की बैठक 11-10-2021 को, माननीय अध्यक्ष द्वारा, माननीय सदस्यों के पत्रों के निराकरण होने में विलंब होने पर, विभाग द्वारा, जारी निर्देश का उल्लंघन करने पर, अप्रसन्नता व्यक्त की गई है. उक्त स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए पुन: निर्देशित किया जाता है, शासन द्वारा जारी निर्देशों को अपने अधीन, जिला कार्यालयों, अधिकारियों के ध्यान में लाया जाये और उनका कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाये. इससे यह तय होगा कि हमारा सामान्य विधायक, सांसद पत्र लिखता है, 15 दिनों के भीतर आपने क्या कार्यवाही की, उसकी जानकारी देना है.
उल्टा उन्होंने क्या किया, उन्होंने प्रेस को बुलाकर वार्ता की. प्रेस-वार्ता लेते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रकरण कार्यालय में 2 फरवरी को प्राप्त हुआ. अगले दिन उसकी मार्किंग की गई, ऐसे प्रकरणों की स्वीकृति के लिए, एक कमेटी बनी हुई है. कमेटी द्वारा ऐसे प्रकरणों में निर्णय लिया जाता है. ऐसे किसी भी प्रकरण में कोई हीला-हवाली नहीं की जाती, प्रकरण प्रक्रिया में है. ये नेता की तरह अपना बयान दे रहे हैं और वह भी असत्य कथन कह रहे हैं. वे कह रहे हैं कि हमें 2 फरवरी को पत्र प्राप्त हुआ. तो यह जो रसीद है, आपने शायद रसीद देखी होगी. इसमें 22-12 को आपके डीन कार्यालय की पावती है. 22-12 को आपने पावती दी कि वह पत्र आपको मिल गया. 22-12 से 2 फरवरी तक क्या हुआ ? हमने तो यह नहीं लिखा, हमने तो केवल यह लिखा कि आप निर्णय कर दो, स्वीकृत हुआ या जो कुछ करना है कर दो.
मेरा आग्रह है कि उनके विरूद्ध तमाम् शिकायतें हैं. इसके पूर्व भी अनीता मिश्रा के प्रकरण में, मैंने आपको धन्यवाद इसलिए दिया कि आपने त्वरित कार्यवाही की. इसमें मेरा आग्रह है, मैं, आसंदी से कह रहा हूं आप इसे आग्रह समझ लें या निर्देश समझ लें. आप उस डीन को वहां से हटा लो, आप सरकार की क्यों बदनामी करवा रहे हैं ? मेरा केवल इतना कहना है. (मेजों की थपथपाहट)
श्री विश्वास सारंग- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने यहां आसंदी से जो निर्देश या आग्रह, जो भी आप कहें किया है, हम उस पर विचार करेंगे.
अध्यक्ष महोदय- ठीक है.
12.44 बजे
(3) पांचवीं एवं आठवीं की परीक्षा को बोर्ड पैटर्न से मुक्त रखा जाना
श्री शैलेन्द्र जैन (सागर)- अनुपस्थित
12.44 बजे
(4) वर्ष 2006 से 2008 तक जन्म लेने वाली बालिकाओं को लाड़ली लक्ष्मी योजना का लाभ न मिलना
सुश्री हिना लिखीराम कावरे (लांजी)- माननीय अध्यक्ष महोदय,
राज्यमंत्री, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण (श्री भारत सिंह कुशवाह):- माननीय अध्यक्ष महोदय,
सुश्री हिना लिखीराम कावरे:-माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा ध्यानाकर्षण लगाने का उद्देश्य ही यह था कि जिनको संशोधन आपने करवा लिया. बहुत अच्छी बात है कि विभाग ने 2006 में योजना प्रारंभ करी और उसके बाद जैसे ही समझ में आया कि परिवार नियोजन, चूंकि हमारी संस्कृति है कि हमारे पहली बालिका होती है तो परिवार नियोजन नहीं अपनाया जाता है. आपने इसको बहुत जल्दी स्वीकार कर लिया और वर्ष 2008 में संशोधन भी आप लेकर आ गये लेकिन उन बच्चियों का क्या जो लाड़ली लक्ष्मी योजना की जब शुरूआत हुई थी तब से लेकर जो प्रथम बालिका है, जिसने परिवार नियोजन नहीं अपनाया वह बालिकाएं अभी भी इस योजना के लाभ से वंचित हैं. मैं, माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं मंत्री जी से जानना चाहती हूं कि ऐसी कितनी बच्चियां हैं, जिनके परिवार ने परिवार नियोजन नहीं अपनाया है, वह प्रथम बालिकाएं उनकी संख्या क्या माननीय मंत्री जी आप मुझ बतायेंगे ? और क्या आप उनको इस योजना का लाभ देंगे, यह भी बतायेंगे.
अध्यक्ष महोदय:- आपने क्या यह पूछा था कि कितनी संख्या है ?
सुश्री हिना लिखीराम कावरे:- हां, माननीय अध्यक्ष पूछा था कि कितनी संख्या है.
अध्यक्ष महोदय:- अभी पूछा ना.
सुश्री हिना लिखीराम कावरे:- मैंने संख्या पूछी है.
अध्यक्ष महोदय:- संख्या है ?
श्री भारत सिंह कुशवाह:- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य का यह कहना बिल्कुल गलत है. योजना के प्रारंभ में वित्तीय वर्ष 2007-2008 में 40 हजार, 854 बालिकाओं को लाभांवित किया गया है, उस समय भी.
अध्यक्ष महोदय:- वह यह पूछ रही हैं कि प्रथम बालिका जिनको अपात्र किया गया है, वह कितनी हैं ? उनकी संख्या आपके पास है.
श्री भारत सिंह कुशवाह:- अध्यक्ष महोदय, जिनको लाभांवित किया गया है, उनकी संख्या मेरे पास नहीं है.
अध्यक्ष महोदय:- उनका प्रश्न यह नहीं है. उनका प्रश्न यह है कि नियम यह बना कि संशोधन किया कि प्रथम बालिका को ही दिया जायेगा, एक बालिका पर यदि वह फेमिली प्लानिंग सर्टिफिकेट है तो दिया जायेगा. यह वर्ष 2008 तक चला आया. वर्ष 2008 में एक नियम आपने पास किया कि वह प्रथम बालिका हो उसमें फेमिली प्लानिंग की आवश्यकता शायद नहीं है और वह बीच वाले लोग वंचित हो गये.
सुश्री हिना लिखीराम कावरे:- जी, माननीय अध्यक्ष महोदय, जो आप पूछ रहे हैं, वही है.
अध्यक्ष महोदय:- यदि एक ही बालिका है तो परिवार नियोजन की आवश्यकता नहीं पड़ी तब भी एक बालिका है, वह रह गयी. उसकी संख्या जानना चाहती हैं, क्या उनको भी किस तरह से फायदा पहुंचाया जायेगा ?
श्री भारत सिंह कुशवाह:- माननीय अध्यक्ष महोदय, एक तो मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगा कि जैसा माननीय सदस्या कह रही हैं कि प्रथम संतान बालिका पर परिवार नियोजन की बाध्यता थी, ऐसा कुछ नहीं था. यदि प्रथम संतान बालिका है तो द्वितीय संतान के जन्म के एक वर्ष के अंदर, परिवार योजना का,कर योजना का लाभ ले सकती थी, उस समय भी. इसलिये थोड़ी भ्रांति हुई, जिसका हमने वर्ष 2008 में सरलीकरण किया. व्यापक एक सुधार करते हुए 2008 में प्रथम बालिका के जन्म पर योजना का लाभ परिवार नियोजन के बिना दिये जाने का स्पष्ट उल्लेख किया गया है.
सुश्री हिना लिखीराम कावरे--अध्यक्ष महोदय, यही बात तो मैं आपसे कह रही हूं कि जिस दिन से आपने यह योजना शुरू की. आपने इसमें संशोधन लाये ही इसलिये कि क्योंकि आपको समझ में आ गया कि परिवार नियोजन की बाध्यता को खत्म करना पड़ेगा. तो उस बीच जो बच्चियां छूट गई हैं. मैं उनकी संख्या को जानना चाह रही हूं. क्या उन बच्चियों को लाभ देंगे क्या वह आंकड़ा आपके पास है.
श्री भारत सिंह कुशवाह-- अध्यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहूंगा कि योजना को विस्तार देने के लिये हमें जो आवश्यकता लगी 2008 में इस योजना को विस्तार देना चाहिये और अगर 2008 के हम पहले जायेंगे. आज 17 वर्ष हो गये हैं इस योजना को प्रारंभ हुए. तो 2008 में जाने का कोई प्रश्न ही नहीं है. हमें आगे बढ़ना है और प्रदेश को आगे बढ़ाना है.
सुश्री हिना लिखीराम कावरे-- अध्यक्ष महोदय, यह जो योजना है जिसका आप जिक्र कर रहे हैं, यह योजना मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री आदरणीय श्री शिवराज सिंह चौहान जी इस योजना के नाम से मामा शब्द की उनको पदवी मिली है. यह योजना जिस दिन से शुरू हुई है न केवल मध्यप्रदेश में बल्कि पूरे देश में शिवराज सिंह चौहान को मामा के रूप में बोला जाता है. मैं आपको पीछे जाने के लिये नहीं कह रही हूं. मैं आपसे यही कह रही हूं कि जो बच्चियां छूट गई हैं. आपने संशोधन लाया क्यों ? लाया तो जब से आपने योजना शुरू की है उस संशोधन के पहले जितनी बच्चियां छूटी हैं केवल उन्हीं को लाभ देने के लिये कह रहे हैं. मंत्री जी अगर आप कोई सकारात्मक उत्तर नहीं दे सकते हैं तो मैं आपसे दूसरा प्रश्न कर लूं. क्योंकि मैं जानती हूं कि माननीय मुख्यमंत्री जी के संज्ञान में यह बात आ गई तो यह मेरा विश्वास है कि निश्चित रूप से शिवराज सिंह चौहान जी यह बच्चियां जो अभी वंचित रह गई हैं, निश्चित रूप से उनको लाभ दिलवाएंगे ? आज एक ऐसा इत्तफाक है कि माननीय मुख्यमंत्री जी मेरी विधान सभा में गये हैं. लांजी विधान सभा में उनका आगमन है. पर चूंकि यह ध्यानाकर्षण लगा हुआ था इसलिये आज मुझे इस सदन में उपस्थित होना पड़ा. लेकिन मैं आपके माध्यम से कहना चाहती हूं कि क्या उनके संज्ञान में यह बात लायेंगे ? और यदि लायेंगे तो निश्चित रूप से इसमें जो बच्चियां छूट गई हैं उनको लाभ देंगे. क्योंकि इनकी संख्या भी कम नहीं है 60 हजार के लगभग है.
अध्यक्ष महोदय--उनकी यह मांग नहीं है कि उनको क्या देना है ? यह जानकारी उनकी भावना हैं कि माननीय मुख्यमंत्री जी संज्ञान में ले जायें, यह कह रही हैं.
श्री भारत सिंह कुशवाह-- अध्यक्ष महोदय, बिल्कुल ले जायेंगे ?
सुश्री हिना लिखीराम कावरे--इस योजना का लाभ इनको देंगे क्या ?
अध्यक्ष महोदय--आपका कहना है कि उनके संज्ञान में लाना है. आप यह बात खुद कह रही हैं ना. आप कह रही हैं कि माननीय शिवराज सिंह जी के संज्ञान में आ जाये, वह खुद करेंगे, तो वह संज्ञान में ला देंगे.
सुश्री हिना लिखीराम कावरे-- अध्यक्ष महोदय, सकारात्मक रूप से लेकर के जायें.
अध्यक्ष महोदय--सकारात्मक रूप से लेकर के जायें.
श्री भारत सिंह कुशवाह--सकारात्मक मंत्री हूं. इसी रूप में ही ले जाऊंगा.
सुश्री हिना लिखीराम कावरे-- अध्यक्ष महोदय, जितना भी उत्तर माननीय मंत्री जी ने दिया है एक का भी कार्यान्यन जमीनी स्तर पर नहीं है.
अध्यक्ष महोदय--आप हमारे मुख्यमंत्री जी पर भरोसा कर रही हैं उसको मानिये ना भरोसा कर रही हैं तो हो ही जायेगा. उस भरोसे को आप तो कायम रखिये. मंत्री जी आप उनके सामने ले जाईये.
(5) बैतूल जिले के मुलताई-हतनापुर रेल्वे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज का निर्माण कार्य प्रारंभ न किये जाना
श्री सुखदेव पांसे (मुलताई)--अध्यक्ष महोदय,
लोक निर्माण मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) :- माननीय अध्यक्ष महोदय,
श्री सुखदेव पांसे - अध्यक्ष महोदय, ये रेलवे ट्रेक हिन्दुस्तान का मुख्य ट्रेक है और यहां से हर 10-15 मिनट में सुपर फास्ट ट्रेन गुजरती हैं, मालगाडि़या गुजरती हैं, जब हर 10-15 मिनट में ट्रेन गुजरती हैं तो वह गेट कंटीन्युटी खुलता ही नहीं और ये जिले का मुख्य सड़क हैं. बैतूल, मुलताई, छिन्दवाड़ा मुख्य मार्ग है, इस पर 100-200 गांवों का आवागमन है. एक तरफ ये बीच शहर में है, ये मुख्य सड़क है, इसके अलावा कोई सड़क ही नहीं है. एक तरफ हास्पिटल है, एक तरफ कॉलेज है. कभी कभी वह गेट घंटों नहीं खुलता है, क्योंकि हिन्दुस्तान के मुख्य ट्रेक पर यह गेट है. इसके कारण कई परीक्षार्थी कॉलेज में परीक्षा नहीं दे पाते, वहां पर एंबुलेंस रुकी रहती है, वह गेट घंटों नहीं खुल पाता, लोग इलाज के लिए हास्पिटल नहीं जा पाते, ये जिले का मुख्य सड़क हैं. अध्यक्ष जी, आपके माध्यम से अनुरोध है, माननीय मंत्री जी ने मुझे 2 साल पहले एक पत्र भेजा, आपका बड़ा सुन्दर और गरिमामय पत्र होता है, प्रिय सुखदेव जी, आपका हमने ये ओवरब्रिज बजट में शामिल कर लिया. मेरा आपसे अनुरोध है कि बजट की कुछ तो गरिमा होती होगी और आपके पत्र की भी गरिमा होती होगी. मैंने क्षेत्र में वह पत्र दिखाया कि भार्गव जी ने बड़ा अच्छा पत्र भेजा है कि इसमें ओवरब्रिज सेंक्शन हो गया, आपके नाम से जनता खुश हुई, तो कम से कम आपके पत्र की गरिमा, बजट की गरिमा, दो साल पहले ही यह बजट में आ चुका है. कब तक कितना इंतजार करेंगे, इससे विश्वसनीयता घटती है, जनहित का मामला है, सर्वहित का मामला है, सब लोगों का मामला है. मेरा आपसे करबद्ध निवेदन है कि आज आप यहां सदन में आश्वस्त करें कि उस ओवरब्रिज की कब से आप शुरुवात करेंगे, टेण्डर कब लगाएंगे और कब से उसके निर्माण का कार्य शुरू करेंगे.
अध्यक्ष महोदय - आपको भूमिपूजन के लिए आग्रह करना चाहिए. अब कर रहे हैं, दो साल पहले करना चाहिए था.
श्री सुखदेव पांसे - मैं पुन: आपसे निवेदन करता हूं कि मां ताप्ती का उद्गम स्थल हैं. आप एक बार दर्शन करने आइए. मध्यप्रदेश सरकार ने उसको पवित्र नगरी घोषित किया है, इसलिए आप दर्शन करने आइए और पुण्यप्रताप पाइए, भूमि पूजन भी करने आइए. मैं आपका स्वागत करुंगा.
श्री गोपाल भार्गव - मां ताप्ती नदी में स्नान भी करेंगे.
श्री सुखदेव पांसे - जरुर.
श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्यक्ष जी, मुझे सदन को और माननीय सदस्य पांसे जी को अवगत कराते हुए खुशी हो रही है कि मध्यप्रदेश राज्य का जब गठन हुआ, जब से लेकर आज तक 105 आरओबी पहली बार, पहले साल में एक बनता था, तो लोग वाहवाह करते थे. हमने 105 आरओबी स्वीकृत किया. कुछ वित्तीय सीमाएं होती हैं जो विभाग के सूचकांक होते हैं, इसके कारण से ये आरओबी एक साथ नहीं लिए जा सकते. 15 आरओबी की एसएफसी हो गई है, प्रशासकीय स्वीकृति हो गई है. 36 प्रक्रियाधीन है. मैं यह कहना चाहता हूं कि आपकी जो ध्यानाकर्षण सूचना है, जो प्रस्ताव है, आपकी जो अपेक्षा है इस पर हम शीघ्र अतिशीघ्र निर्णय करवाकर और आपके निर्माण के कार्य के लिए हम आगामी जैसे ही वित्तीय स्वीकृति मिल जाएगी, हम इसको करवा देंगे.
श्री सुखदेव पांसे - अध्यक्ष महोदय, मैं करबद्ध प्रार्थना करता हूं कि कब तक आप इसका काम शुरु करवा देंगे. एक समय सीमा निर्धारित कर दीजिए, ताकि आश्वस्त हो जाएं क्योंकि आपने ही हमें स्वीकृति का पत्र भेजा है. बजट में सन् 2020-21 में यह आपने स्वीकृति दी है, आपने प्रायोरिटी पर ध्यानाकर्षण लिया है तो आप केवल इतना आश्वस्त कर दीजिये कि कब तक इसका काम शुरू करवा देंगे ? यह मेरा निवेदन है.
श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष जी, जैसी माननीय सदस्य की अपेक्षा है, तो मैं फिर यह कहना चाहता हूँ कि पहली बार ऐसा हुआ कि पूरे मध्यप्रदेश में 105 आरओबी एक साथ लिये गये, क्रमश: जैसे-जैसे बजट में प्रिन्ट छपना, बजट में आना इसका अर्थ यह है कि काम होगा. अध्यक्ष महोदय, सिर्फ इसमें दिक्कत यह आ रही है कि पहले 4 प्रतिशत जो हमारे विभाग का सूचकांक था, जिसे बढ़ाकर अब हमारी सरकार ने, भारत सरकार ने भी अनुमति दे दी उसमें, अब इसके लिए 4.25 प्रतिशत कर दिया गया है और मुझे विश्वास है कि जल्दी से जल्दी इस दायरे में आ जायेगा, उसके लिए हम कर रहे हैं.
श्री सुखदेव पांसे - इस विधान सभा चुनाव के पहले उसका भूमिपूजन कर देंगे कि नहीं. क्या आप बस वाहवाही लूटते रहते हैं कि हमने इतने कर दिये, उतने कर दिये. कम से कम, यह सन् 2020-21 के बजट में है तो विधान सभा चुनाव के पहले आप इसका भूमिपूजन कर देंगे कि नहीं ?
श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यथासंभव कोशिश करूँगा. मैं आपको अलग से बता दूँगा, थोड़ी सी समस्या है, वह आपको बता दूँगा.
अध्यक्ष महोदय - ध्यानाकर्षण सूचना. श्री रमेश मेन्दोला.
(6) श्री रमेश मेन्दोला - (अनुपस्थित).
1.12 बजे आवेदनों की प्रस्तुति
अध्यक्ष महोदय - आज की कार्य सूची में सम्मिलित सभी आवेदन प्रस्तुत किये गए माने जाएंगे.
नेता प्रतिपक्ष (डॉ. गोविन्द सिंह) - माननीय अध्यक्ष जी, एक प्रार्थना है. माननीय डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ जी, एक मिनट में अपनी बात कहना चाहती हैं.
अध्यक्ष जहोदय - नहीं. कल शून्यकाल में करवा लीजिये.
डॉ. गोविन्द सिंह - अध्यक्ष जी, सिर्फ आधा मिनट की बात है. इनके क्षेत्र की कोई समस्या है, उसके बारे में कहना चाह रही हैं.
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ (महेश्वर) - माननीय अध्यक्ष महोदय, बजट का महत्वपूर्ण सत्र चल रहा है. मैं आपके संज्ञान में यह लाना चाहती हूँ कि लॉ एण्ड ऑर्डर की स्थिति जो बन रही है, मैंने मेरे अपने क्षेत्र की घटना के बारे में मामला उठाया था. (XXX)
चिकित्सा शिक्षा मंत्री (श्री विश्वास सारंग) - अध्यक्ष महोदय, यह ठीक नहीं है. व्यवस्था का प्रश्न है, माननीय अध्यक्ष महोदय.
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - (XXX) (..व्यवधान..)
श्री विश्वास सारंग - माननीय अध्यक्ष महोदय, इसको विलोपित करवाइये. यह ठीक नहीं है. ..(..व्यवधान..) यह लिखा नहीं जाये, माननीय अध्यक्ष महोदय.
डॉ. हिरालाल अलावा - माननीय अध्यक्ष महोदय, ..(..व्यवधान..)
डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ - (XXX)
अध्यक्ष महोदय - मैंने आपको अनुमति नहीं दी है. यह नहीं लिखा जायेगा. (..व्यवधान..) अब किसी का कुछ नहीं लिखा जायेगा.
डॉ. हिरालाल अलावा - (XXX)
सुश्री हिना लिखीराम कावरे - (XXX)
श्री ओमकार सिंह मरकाम - (XXX)
श्री जयवर्द्धन सिंह - (XXX)
श्री सुनील सराफ - (XXX)
श्री हर्ष यादव - (XXX)
..(..व्यवधान..)
अध्यक्ष महोदय - आप व्यवस्था सुन लीजिये. आप लोग बैठ जाइये. हर्ष यादव जी, बैठ जाइये. आप भी बैठ जाइये. हल्ला करने से कोई मतलब नहीं निकलता है. आप लोग बैठ जाइये. .(..व्यवधान..)
एक माननीय सदस्य - इनकी एक भी बात दर्ज न की जाये, अध्यक्ष महोदय. ये सारी बातें विलोपित की जायें.
..(..व्यवधान..)
श्री ओमकार सिंह मरकाम -- अध्यक्ष महोदय (व्यवधान..)
अध्यक्ष महोदय --(एक साथ कई माननीय सदस्यों द्वारा आपने आसन पर खड़े होने पर)आप सभी बैठ जायें, नहीं आवाज नहीं आ रही है. (व्यवधान..) अभी नेताप्रतिपक्ष जी ने भी मुझसे कहा, इसलिये यह प्रावधान नहीं है, यह आप सब जानते हैं कि ध्यानाकर्षण के बाद इस तरह के अवसर मिलते नहीं है. (एक माननीय सदस्य द्वारा आपने आसन पर खड़े होने पर) आप बैठ जायें, सुन तो लीजिये. हर बार खड़ा होना है तो फिर मैं क्यों खड़ा हूं. हर बार, हर शब्द में खड़ा हो जाना, इसलिये नेता प्रतिपक्ष जी ने कहा तो मैंने तो विषय पूछा तो यह कोई दूसरा है, अब वह जिस विषय को आपने पटाक्षेप कर दिया. आप यहां से निकलकर चली गईं, जो दृश्य बनना था बन चुका, उसको फिर खड़ा करने की अनुमति कैसे दे दूं. कल कोई विषय आयेगा, तो आप शून्यकाल में उसे उठाना. (व्यवधान..)
श्री ओमकार सिंह मरकाम -- अध्यक्ष महोदय, उसके बाद भी सरकार गंभीर नहीं है, कल झुकर गांव में विदिशा जिले में (व्यवधान..)
अध्यक्ष महोदय -- नहीं हो गया, श्री दिलीप सिंह परिहार जी. (व्यवधान..)
श्री ओमकार सिंह मरकाम -- एक घटना के बाद, दूसरी घटना के बाद लगातार घटना घट रही है. (व्यवधान..) मारपीट किये और उन्हीं के ऊपर मुकदमा दर्ज करने का काम किया जा रहा है. यह पूरी तरह से आदिवासियों को डराने का काम किया जा रहा है. मेरा अनुरोध है (व्यवधान..)
डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ -- माननीय अध्यक्ष महोदय, घटना होने के बाद पुनरावृत्ति हुई है, (व्यवधान..)
अध्यक्ष महोदय -- श्री राम दांगोरे जी आप बोलें, बाकी किसी का नहीं लिखा जायेगा. (व्यवधान.)
श्री संजय पाठक ------[XXX]
श्री ओमकार सिंह मरकाम ----[XXX]
श्री सुनील सर्राफ -- --[XXX]
डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ----[XXX]
श्री हर्ष यादव --[XXX]
अध्यक्ष महोदय --(श्री ओमकार सिंह मरकाम, सदस्य द्वारा आपने आसन पर खड़े होने पर) आपकी बात आ गई है, आप सभी बैठ जायें. श्री राम दांगोरे जी आप बोलें. (व्यवधान..)
1.07 बजे वर्ष 2023-2024 की अनुदानों की मांगों पर मतदान ..... (क्रमश:)
(1) |
मांग संख्या – 1 |
सामान्य प्रशासन |
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मांग संख्या – 2 |
विमानन |
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मांग संख्या – 20 |
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी |
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मांग संख्या – 32 |
जनसम्पर्क |
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मांग संख्या – 41 |
प्रवासी भारतीय |
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मांग संख्या – 45 |
लोक परिसम्पत्ति प्रबंधन |
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मांग संख्या – 48 |
नर्मदा घाटी विकास |
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मांग संख्या – 55 |
महिला एवं बाल विकास |
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मांग संख्या – 57 |
आनंद.
|
श्री राम दांगोरे (पंधाना) -- अध्यक्ष महोदय, स्वेच्छानुदान अंतर्गत कुल 1 अरब 80 करोड़ 10 लाख 57 हजार 730 रूपये की अस्पतालों में गरीबों के इलाज के लिये बच्चों की फीस के लिये स्वेच्छानुदान से इतनी राशि स्वीकृत की है और स्वतंत्रता की लड़ाई में भाग लेने वाले सेनानियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा दिया है और उनको 25 हजार रूपये प्रति माह पेंशन भी स्वीकृत की है, साथ ही 5 हजार 273 पदों पर मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग में वेंकेंसियां निकालने का भी काम किया है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, साथ ही कुल 4857 लोकायुक्त को शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें 4608 प्रकरणों का निराकरण भी हो चुका है, कुल 17 छापों में 11 करोड़ 15 लाख 22 हजार रूपये की राशि मिली और 210 चालान पेश भी हो गये हैं साथ ही विशेष न्यायालय के द्वारा कुल 110 प्रकरणों में दण्ड भी दिया गया है और मैं मांग करता हूं कि पंधाना का राजस्व है, दो एस.डी.एम. कार्यालय हमें लगते हैं, एक पंधाना जिसमें पूरी विधानसभा का 30 प्रतिशत हिस्सा आता है और एक खण्डवा उसमें 70 प्रतिशत राजस्व के कार्य के लिये हमको खण्डवा जाना पड़ता है, जिससे जनता को कई सारी समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है और पंधाना क्षेत्र के कामों के लिये खण्डवा जाना पड़ता है.
1.09 बजे { सभापति महोदय (श्री दिव्यराज सिंह) पीठासीन हुए }
सभापति महोदय, इसलिये इसका अनुभाग एक किया जाना चाहिये, साथ ही जी.आर.एस. और सचिवों के लिये भी कोई त्वरित निर्णय लिया जाना चाहिये ताकि उनको भी कोई न कोई फायदा मिल सके, उनको भी स्थायित्व नौकरी में मिल सके और सिंचाई परियोजनाओं में मध्यप्रदेश में यह जो बोलते हैं कि ऐसा नहीं हो रहा है वैसा नहीं हो रहा है, किसान परेशान है, हैरान है, तो जब आपकी सरकार थी, आपकी सरकार में सिंचाई के लिये मात्र 7 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित थी पूरे मध्यप्रदेश में और आज हमारी सरकार में 47 लाख हेक्टेयर जमीन किसानों के लिये सिंचित की जा चुकी है और इसको बढ़ाकर हम 65, 67 लाख तक ले जाने के लिये लगातार युद्धस्तर पर प्रयास कर रहे हैं और वर्ष 2005 में राष्ट्र गौरव अटल जी नदी से नदी को जोड़ने की परियोजनाओं के ऊपर उन्होंने अपना प्रस्ताव रखा था तो केन वेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड में है उसको स्वीकृत कर दिया गया है इसमें, 10 जिलों को पानी मिलेगा और 8 लाख 11 हजार हेक्टेयर जमीन इसमें सिंचित होगी और साथ ही 41 लाख लोगों को पीने का पानी भी दिया जायेगा. साथ ही हम नर्मदा क्षेत्र से आते हैं नर्मदा क्षिप्रा बहुद्देशीय परियोजना जिसमें उज्जैन शाजापुर के 30 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित होना है. छीपानेर सिंचाई परियोजना, सीहोर, नसरूल्लागंज, देवास, खातेगांव 35 हजार हेक्टेयर जमीन सिंचित हुई है. बिस्टॉन उद्वहन माइक्रो परियोज