
मध्यप्रदेश विधान सभा
की
कार्यवाही
(अधिकृत विवरण)
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षोडश विधान सभा नवम् सत्र
फरवरी-मार्च, 2026 सत्र
शुक्रवार, दिनांक 20 फरवरी, 2026
(1 फाल्गुन, शक संवत् 1947)
[खण्ड- 9] [अंक-5]
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मध्यप्रदेश विधान सभा
शुक्रवार, दिनांक 20 फरवरी, 2026
(1 फाल्गुन, शक संवत् 1947)
विधान सभा पूर्वाह्न 11.01 बजे समवेत हुई.
{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}
बधाई
श्री जयंत मलैया एवं श्री केदार चिड़ाभाई डाबर, माननीय सदस्य को जन्मदिन की बधाई
अध्यक्ष महोदय - आज माननीय सदस्य श्री जयंत मलैया जी (दमोह) और माननीय सदस्य श्री केदार चिड़ाभाई डाबर जी (भगवानपुरा) का जन्मदिन है. सदन की ओर से हमारे दोनों सदस्यों को बहुत बहुत शुभकामनाएं. (मेजों की थपथपाहट)..
11.02 बजे तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर
निर्माण
कार्यों की
जानकारी
[ऊर्जा]
1. ( *क्र. 1287 ) श्री उमाकांत शर्मा : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विकाखण्ड सिरोंज एवं लटेरी में दिनांक 01 अप्रैल, 2018 से प्रश्नांकित दिनांक तक कौन-कौन से निर्माण कार्य स्वीकृत हुए? कार्य का नाम, लागत, कार्य प्रारंभ दिनांक, कार्य पूर्णता दिनांक सहित जानकारी उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में विकाखण्ड सिरोंज लटेरी में कहां-कहां विद्युत उपकेन्द्र स्वीकृत किये गये हैं? प्रशासकीय स्वीकृति आदेश की छायाप्रति उपलब्ध करावें। उक्त उपकेन्द्रों से कृषि फीडर एवं घरेलू फीडर की लाईन विस्तार कर कौन-कौन से ग्रामों में विद्युत लाईन विस्तार के कार्य स्वीकृत हुए थे, कितने लाईन विस्तार के कार्य शेष हैं? कब तक कार्य पूर्ण कर दिये जावेंगे? समय-सीमा बतावें एवं विद्युत उपकेन्द्र, सौजना का कार्य कब तक पूर्ण कर दिया जावेगा? समय-सीमा बतावें। (ग) आर.डी.एस.एस. केन्द्र प्रायोजित योजना से लटेरी से ताजपुरा तक घरेलू विद्युत लाईन विस्तार का कार्य कितनी लागत से स्वीकृत हुआ था, बतावें। उक्त कार्य कब तक पूर्ण कर दिया जावेगा? समय-सीमा बतावें। यदि नहीं, तो क्यों। (घ) सिरोंज लटेरी विकासखण्ड में कौन-कौन से विद्युत उपकेन्द्रों से विद्युत आपूर्ति की जा रही है, बतावें तथा इन विद्युत उपकेन्द्रों से कृषि सिंचाई फीडर एवं घरेलू विद्युत लाईन का विस्तार किन-किन ग्रामों में किया जा रहा है? विद्युत उपकेन्द्रवार जानकारी उपलब्ध करावें।
ऊर्जा मंत्री ( श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ) : (क) म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी एवं म.प्र. पावर ट्रांसमिशन कंपनी अंतर्गत सिरोंज एवं लटेरी विकासखण्डों में दिनांक 01 अप्रैल, 2018 से प्रश्न दिनांक तक की अवधि में विभिन्न योजनाओं के तहत स्वीकृत कार्यों के नाम, लागत, कार्य प्रारंभ किये जाने की दिनांक एवं कार्य पूर्णता की दिनांक सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अ' अनुसार है। (ख) उत्तरांश (क) के संदर्भ में विकासखण्ड सिरोंज एवं लटेरी में प्रश्नाधीन अवधि में स्वीकृत नवीन 33/11 के.व्ही. विद्युत उपकेन्द्रों एवं उक्त उपकेन्द्रों से निर्गमित 11 के.व्ही. कृषि फीडर एवं 11 के.व्ही. घरेलू फीडर के कार्यों की पूर्णता/अपूर्णता की ग्रामों के नाम सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब' अनुसार है। संबंधित प्रशासकीय स्वीकृति आदेश की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'स' अनुसार है। 33/11 के.व्ही. विद्युत उपकेन्द्र सौजना का कार्य दिनांक 31.03.2026 तक पूर्ण किया जाना प्रस्तावित है। (ग) आर.डी.एस.एस. योजना अंतर्गत लटेरी से ताजपुरा होते हुए चंदेरी फतेहपुर घरेलू 11 के.व्ही. फीडर लाईन विस्तार का कार्य लागत राशि रूपये 1.09 करोड़ से स्वीकृत हुआ है, उक्त कार्य दिनांक 31 मार्च, 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है। (घ) सिरोंज एवं लटेरी विकासखण्ड में 33/11 के.व्ही. के 24 विद्युत उपकेन्द्रों से विद्युत आपूर्ति की जा रही है तथा इन विद्युत उपकेन्द्रों से निर्गमित कृषि फीडरों एवं घरेलू फीडरों के विस्तार से संबंधित ग्रामों की विद्युत उपकेन्द्रवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'द' अनुसार है।
श्री उमाकांत शर्मा - अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 1287 है.
श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर - अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा गया है.
श्री उमाकांत शर्मा - अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र के अनुसूचित जाति, जनजाति बाहुल्य ग्रामों की 11 के.व्ही. लाईन मकसुदनगढ़ जिला गुना से थी. जनजाति समाज के बंधुओं को समय पर विद्युत उपलब्ध नहीं होती थी. उक्त मेरे विधान सभा क्षेत्र के ग्रामों को विद्युत वितरण केन्द्र लटेरी से जोड़ने का प्रस्ताव दिया था. माननीय मंत्री महोदय को धन्यवाद देते हुए कहता हूं. माननीय मंत्री महोदय ने घरेलू 11 के.व्ही. लाईन फीडर स्वीकृत कराया था, आरडीएसएस योजनान्तर्गत लटेरी से ताजपुरा होते हुए चंदेरी, फतेहपुर घरेलू 11 के.व्ही. फीडर लाईन विस्तार का कार्य सन् 2023 में स्वीकृत हुआ था. परन्तु ठेकेदार द्वारा अभी तक वह कार्य पूर्ण नहीं हुआ है और एनएच 752 भी लटेरी मकसुदनगढ़ मार्ग के शोल्डर (भुजाओं) पर खम्भे खड़े कर दिये गये हैं. इसके कारण दुर्घटनाएं हो रही हैं. यातायात प्रभावित हो रहा है. अभी तक उक्त विद्युत पोलों में तार नहीं डाले गये हैं. दिनांक 31 मार्च 2026 को कार्य पूर्णता की दिनांक है लेकिन अभी तक 80 प्रतिशत कार्य अधूरा है, मात्र 20 प्रतिशत कार्य ही पूरा है. मेरा श्रीमान् से आपके माध्यम से निवेदन है कि यह कब तक कार्य पूर्ण कर दिया जाएगा और यह गलत एनएच की सड़क के ऊपर खम्भे गाढ़े गये हैं, इसके लिए कौन-कौन अधिकारी, कर्मचारी ठेकेदार दोषी हैं, उन पर क्या कार्यवाही की गई?
श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर - अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से सम्मानीय सदस्य को अवगत करना चाहूंगा कि सौजना उपकेन्द्र का कार्य वर्ष 2023 में स्वीकृत हुआ था. वर्ष 2024 में उसके कार्यादेश जारी हुए हैं. कार्य विलंब के लिए एजेंसी के खिलाफ कार्यवाही का नोटिस दिया गया है. वर्तमान में सौजना उपकेन्द्र का कार्य 90 प्रतिशत पूरा हो गया है. शेष कार्य 31 मार्च 2026 तक पूर्ण करा दिया जाएगा और आपके हाथ से जल्दी से उसका लोकार्पण कराया जाएगा.
दूसरी बात आपने लाईन के बारे में पूछा है. लाईन स्वीकृति वर्ष 2022 था, कार्यादेश वर्ष 2023 को हुआ, राष्ट्रीय राजमार्ग और वन परिक्षेत्र आने के कारण आरओडब्ल्यू की समस्या उत्पन्न हुई है, उसके लिए हमने अनुमति के लिए आवेदन किया है और आवेदन पर अनुमति मिलने के तुरन्त 3 माह के अंदर कार्य भी करा देंगे, यह सम्मानीय सदस्य को बताना चाहेंगे.
श्री उमाकांत शर्मा - अध्यक्ष महोदय, इसमें जिन अधिकारी, कर्मचारी की लापरवाही रही और ठेकेदार ने एनएच की भुजाओं पर खम्भे गाढ़ दिये और खम्भे खड़े हैं, तार नहीं डले हैं, न उसमें प्राण आए, न बिजली आई. इसके लिए दोषी कौन है?
श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर—माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपको बताना चाहता हूं कि निश्चित रूप से कार्य में विलंब हुआ है. विलंब का कारण भी आपको मैंने बताया है, फिर भी अगर फोल्डर रोड़ के किनारे खंभे नजदीक लगे हैं उसको हम दिखवा लेंगे. उसके सम्मुख ही अधिकारी चले जायेंगे, उसका निरीक्षण कर लेंगे. अगर कुछ गलत होगा तो उसको ठीक किया जायेगा जो उसमें दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी.
श्री उमाकांत शर्मा—अध्यक्ष महोदय, बहुत बहुत धन्यवाद. एक निवेदन मैंने प्रत्यक्ष मिलकर के मौखिक भी किया था. मेरे विधान सभा क्षेत्र में भगवनपुर, संतोषपुर तहसील सिरोंज और ईसरवास मुसकरा में नवीन विद्युत उपकेन्द्रों की स्वीकृति प्रदान करने का आश्वासन देने की कृपा करें. मेरी आपसे हाथ जोड़कर बिनती है.
श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर—माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा सम्मानीय सदस्य से आग्रह है कि अभी उसका निरीक्षण करवाया था वह साध्य नहीं पाये गये. पर पुनः माननीय सदस्य ने कहा है हम एक बार पुनः उसका निरीक्षण करके उस पर कार्यवाही करने की कोशिश करेंगे.
श्री उमाकांत शर्मा—अध्यक्ष महोदय,मैं हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी का, माननीय ऊर्जा मंत्री जी का बहुत बहुत अभिनन्दन करता हूं, धन्यवाद देता हूं. पिछले कार्यकाल में आपने 7 सब स्टेशन हमें दिये, अन्य विद्युत कार्य के दिये यह हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार बेहतर काम कर रही है उसके लिये उसका अभिनन्दन करता हूं.
श्री दिलीप सिंह परिहार—अध्यक्ष महोदय, तारांकित प्रश्न क्र.1359 है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय—माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.
लीज अंतरण एवं नामांतरण में अनियमितता
[नगरीय विकास एवं आवास]
2. ( *क्र. 1359 ) श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या नगर पालिका, नीमच के स्वामित्व वाली संपत्ति क्रमांक 07, तरण पुष्कर परिसर स्थित 10 कमरे एवं हॉल (होटल सरोवर) की लीज दिनांक 01.05.1986 को केवल 03 वर्षों के लिये प्रदान की गई थी? क्या लीजधारी द्वारा मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1961 एवं अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करते हुए किराया बकाया रखा गया तथा लीज से अतिरिक्त भूमि पर अनाधिकृत कब्जा किया गया? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में क्या नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों की प्रत्यक्ष संलिप्तता एवं कर्तव्यहीनता के कारण उक्त लीज का अवैधानिक अंतरण एवं नामांतरण अन्य व्यक्ति के नाम किया गया तथा दिनांक 19.01.2012 को बिना सक्षम अधिकार एवं वैधानिक प्रक्रिया के इसे स्वीकृत किया गया? यदि हाँ, तो किस नियम के तहत? नियम की प्रतिलिपि दें। (ग) क्या दिनांक 17.05.2025 को मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा परिषद की अनिवार्य स्वीकृति प्राप्त किये बिना 30 वर्षों के लिये नवीन लीज आवंटन आदेश जारी किये गये? यदि हाँ, तो किस नियम के तहत, उस नियम की प्रतिलिपि दें। (घ) प्रश्नांश (ख) एवं (ग) का उत्तर यदि हाँ, है, तो क्या उक्त पट्टा आवंटन एवं नवीनीकरण को निरस्त करने तथा प्रकरण में संलिप्त दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही किये जाने का प्रस्ताव शासन के विचाराधीन है? यदि नहीं, तो कारण स्पष्ट करें।
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) प्रश्नांश में उल्लेखित संपत्ति दिनांक 01.05.1986 से नहीं वरन दिनांक 06.07.1988 से 03 वर्षों के लिये लीज पर दी गई थी। जी हाँ। जी नहीं। लीज अनुबंध के संलग्न मानचित्रानुसार अतिरिक्त भूमि पर कब्जा नहीं किया गया है। (ख) जी हाँ। विषयाधीन संपत्ति की लीज, अंतरण के संबंध में पारित संकल्प क्र. 34, दिनांक 19.01.2012 का आधार वैधानिक न होने से उक्त संकल्प त्रुटिपूर्ण व निकाय के हित में नहीं पाया गया है। जानकारी पुस्तकालय रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अ' अनुसार है। (ग) जी हाँ। दिनांक 17.05.2025 को मुख्य नगरपालिका अधिकारी के द्वारा जारी आदेश म.प्र. नगर पालिका अधिनियम (अचल संपत्ति का अंतरण) नियम 2016 के नियम 3-क के विपरीत पाया गया है। जानकारी पुस्तकालय रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब' अनुसार है। (घ) जी हाँ। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
श्री दिलीप सिंह परिहार—अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि नीमच नगर-पालिका के अंतर्गत शासन की सम्पत्ति का दुरूपयोग एवं शासन को राजस्व की हानि संबंधी गंभीर प्रश्न है. इस गंभीर प्रश्न पर आपका संरक्षण चाहते हुए माननीय मंत्री जी को अवगत कराना चाहता हूं कि नीमच शहर के बीचों बीच नगर पालिका द्वारा संचालित जो तरूणताल है, स्वमिंग पूल है वहां पर होटल ने नाम पर लीज पर अधिकारियों द्वारा गंभीर अनियमितताएं की गई हैं और दी गई है. लगभग 6.7.1988 को तीन वर्ष के लिये लीज धारण के 10 कमरे होटल संचालन के लिये दिये गये थे. प्रथम लीजधारक ने द्वितीय लीजधारक को 19.1.2012 को द्वितीय लीजधारक को आयोजन के विपरीत अधिकारियों ने मिल-जुलकर बगैर शासन की अनुमति के लीज करवा दी है. द्वितीय लीजधारक ने तरूणताल के होटल पर जहां पर हमारे बेटे बेटी स्वमिंग करते हैं, तैराकी प्रतियोगिता करते हैं वहां पर शराब की दुकान तथा होटल खोल दी है. मैं आपको अवगत कराना चाहता हूं कि तरूणताल पर लगभग 200 बेटा-बेटी पास में मंदिर है, वहां पर स्वमिंग की तैयारी करते हैं वहां पर बिना अनुमति के कैसे काम हुआ है. मैं आपके माध्यम से दो प्रश्न करना चाहता हूं. मेरा पहला प्रश्न है मेरे प्रश्न क्रमांक (ख) के विभाग ने स्पष्ट रूप से माना है कि सम्पत्ति के लीज एवं अंतरण संबंधी अधिकारियों ने नगर पालिका द्वारा शासन के नियमों का पूर्ण रूप से अनदेखा कर शासन की गैर कानूनी धंधे करने वाले व्यक्तियों को शासन के राजस्व हानि के साथ 30 वर्ष के लिये लीज करवा दी है. जबकि यह जमीन 5 करोड़ की है. जिन्होंने यह लीज कराई है इसको निरस्त करना है. जो लोग वहां पर यह चला रहे हैं जमीन वापस अधिग्रहण करके नगर पालिका को हैंडओव्हर करें.
श्री कैलाश विजयवर्गीय—माननीय अध्यक्ष महोदय,माननीय विधायक जी को मैं धन्यवाद देना चाहता हूं कि यह बड़ा अच्छा प्रश्न है. प्रश्न के माध्यम से बहुत सारी अनियमितताएं भी ध्यान में आयी हैं. यह बात बिल्कुल सही है जैसा कि माननीय विधायक जी ने कहा है कि नगर सुधार न्यास ने तीन साल के लिये इसको लीज पर तथा किरायेदारी पर दिया था. उसके बाद यह सारी सम्पत्ति नगर-पालिका में समाहित हो गई. जब इनकी लीज तीन वर्ष की थी तो अपने आप रिन्यू करना थी. इन्होंने लीज रिन्यू तो नहीं की किन्तु एक अन्य व्यक्ति को ट्रांसफर कर दी. यह अधिकार भी सीएमओ को नहीं है लीज ट्रांसफार करने के इसमें उनको परिषद् से अनुमति लेनी थी. परिषद् में भी नहीं लाये वो और सीधा सीएमओ ने लीज ट्रांसफर कर दी है. यह बहुत ही जबरदस्त अनियमितता है. जब हमने उसकी पूरी जानकारी निकाली तो वह सीएमओ भी रिटायर हो गये हैं हमने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिये हैं. और फिर गिरफ्तारी निश्चित रूप से हम करवाएंगे, ये शासन की जो संपत्ति है, उसको बिना नियम के, किसी को हस्तांतरित करना, ये अपराध की श्रेणी में आता है. अध्यक्ष जी, दूसरी बात आपने यह भी सही कही है कि वहां शराब भी परोसी जाती थी, उस होटल के अंदर, हमने एक्साइज विभाग से कहा है, अभी तो हमने कलेक्टर से बोलकर वहां पर शराब बिकवाना बंद कर दी थी. पर हम एक्साइज विभाग से कहेंगे कि उनको जो लाइसेस दिया है, उसको निरस्त कर दें. ये बहुत गंभीर अनियमितता है और वहां पर जिस तरह से उन्होंने इस पूरी प्रापर्टी को हस्तांतरित किया है, ये एक गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. हमने इसको ऐसा मानकर एफआईआर के निर्देश भी दिए हैं, उनकी लीजडीड कैंसिल भी कर रहे हैं और इसकी लीगल ओपिनियन भी हम ले रहे हैं और साथ में यह भी कहा है कि जब हम लीजडीड कैंसिल करेंगे तो वैसे ही केबिएट भी लगा दें, जिससे कि वह व्यक्ति स्टे लेकर नहीं आ सके. ये हमने उसमें पूरी सावधानी बरती है.
श्री दिलीप सिंह परिहार – माननीय अध्यक्ष जी, मैं मंत्री जी को बहुत धन्यवाद दूंगा कि वे बहुत संवेदनशील हैं. इसमें तत्कालीन उस समय के जो मुख्य नगर पालिका अधिकार थे, वह जमनालाल पाटीदार और तत्कालीन सहायक राजस्व अधिकारी राकेश जाजू और वशिष्ठ जो मुख्य नगर पालिका अधिकारी थे, उसके अलावा ये जो स्वीमिंग पूल है, ये मान्यवर वीरेन्द्र कुमार सखलेचा जी ने नीमच की जनता को समर्पित किया था. वहां जब दारू वितरित की जा रही थी, तो ये मुद्दा मैंने योजना समिति में भी उठाया और अन्य बैठकों में भी उठाया, प्रभारी मंत्री जी को भी कहा, मगर वह ऐसा भू माफिया है, ऐसा शराब माफिया है, उससे सभी लोग भयभीत है, तो मैं यह चाहता हूं कि जिसने इस लीज को अवैध तरीके से करवाया, अशोक अरोरा उसके खिलाफ भी कार्यवाही हो, या जिनके नाम पर अभी भी ये जो जमीन चल रही है जो 5-7 करोड़ रुपए की जमीन है, इसके खिलाफ भी कुछ न कुछ कार्यवाही होना चाहिए, या एफआईआर दर्ज होनी चाहिए. अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से, मंत्री जी से हाथ जोड़कर निवेदन करूंगा कि ये जो प्रजातंत्र के मंदिर में प्रश्न आ गया, मैं पांच साल पहले से इस बात को उठा रहा हूं, मगर वहां पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है. मैं आपको और इस सदन को धन्यवाद दूंगा कि इस सदन के माध्यम से दूध का दूध और पानी का पानी होता है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय – अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य के इस प्रश्न के लगाने के बाद ही हमारे संज्ञान में ये प्रश्न आया है और जैसे ही संज्ञान में आया, हमने कार्यवाही की और इसको हमने गंभीरता से भी लिया है जैसा कि हमने प्रथम दृष्टया उस वक्त के कोई सीएमओ वशिष्ठ हैं, उनका नाम था और आपने जो पाटीदार और जाजू का नाम बताया है, उनकी भूमिका इसमें क्या थी, वह भी हम देख लेंगे यदि वे भी इसमें दोषी पाए जाएंगे, तो उनके खिलाफ भी हम एफआईआर करवाएंगे.
श्री दिलीप सिंह परिहार – माननीय अध्यक्ष जी, मैं माननीय मंत्री जी को दिल की गहराईयों से धन्यवाद देता हूं कि आपने नीमच की सौम्य जनता की, समाज की सौम्य शक्ति की, आपने रक्षा की है, जहां खेल होता है, जहां हमारी बेटियां पदक प्राप्त करती हैं, उन बेटियों की आपने सुरक्षा की है, इसके लिए मैं आपको बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं.
श्री भंवर सिंह शेखावत – माननीय अध्यक्ष महोदय, सदस्य ने ये जो बताया, मंत्री जी के संज्ञान में आ गया. ये घोर अपराध है, जो पांच साल से हो रहा था, विधायक पांच साल से बता रहे थे, आपकी नाक के नीचे क्या चल रहा है, मंत्री जी जरा थोड़ा सा ध्यान दीजिए, इस तरह के बहुत सारे प्रकरण हैं, मनमानियां चल रही हैं और जनता प्रताडि़त हो रही है. पांच-पांच, दस-दस साल बाद अगर एक्शन होगा तो फिर कैसे काम चलेगा, लोग इसलिए तो रिटायर हो जाते हैं, हम एक्शन लेते नहीं है और वे रिटायर हो जाते हैं.
अध्यक्ष महोदय – भंवर सिंह जी, आज तो तारीफ कर दो कम से कम. (..हंसी)
श्री भंवर सिंह शेखावत – अभी आयेगा मुद्दा. (..हंसी)
श्री कैलाश विजयवर्गीय – अध्यक्ष जी, हमारे संज्ञान में ही अभी आया जैसे ही हमारे संज्ञान में आया दिलीप जी ने प्रश्न पूछा हमने उसकी पूरी जानकारी ली और तत्काल कार्यवाही की. अभी वे बता रहे हैं कि लोकल स्तर पर उन्होंने कुछ किया होगा, तो उसको हम दिखवा लेंगे, अगर लोकल स्तर पर शिकायत की और उस पर कार्यवाही नहीं हुई तो, वह भी दिखवा लेंगे. मैं विधायक जी को धन्यवाद देना चाहता हूं और सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इस प्रकार के आपराधिक कार्य करने वाले, चाहे कोई भी हो उसको मोहन जी की सरकार बक्शेगी नहीं, इतना मैं वादा करता हूं. (...मेजों की थपथपाहट)
श्री दिलीप सिंह परिहार – मुख्यमंत्री जी और मंत्री जी आपको बहुत बहुत धन्यवाद.
डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान – अध्यक्ष जी, मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान इसी से संबंधित एक विषय की तरफ ले जाना चाहता हूं. खाचरोद नगरपालिका में आज से 8-9 वर्ष पूर्व स्वीमिंग पूल बनना प्रारंभ हुआ था, लेकिन वह अभी तक बनकर तैयार नहीं हुआ है. संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के कारण और नागदा नगर पालिका में, पिछले सिंहस्थ में बस स्टैण्ड बनकर तैयार हुआ था, आज तक उस भवन का उपयोग नहीं किया जा रहा है.
अध्यक्ष महोदय – ये पूरक प्रश्न उद्भूत तो नहीं हो रहा है. मंत्री जी कुछ कहना चाहेंगे.
श्री कैलाश विजयवर्गीय – अभी आपने मेरे संज्ञान में लाया है, मैं इसको दिखवा लूंगा.
बैराज निर्माण कार्य के क्रियान्वयन में हुई अनियमितता
[नगरीय विकास एवं आवास]
3. ( *क्र. 1140 ) श्री मोहन शर्मा : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या नरसिंहगढ़ नगर में निर्मित बैराज के निर्माण में करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितताएं पाई गई थी, जिसकी जांच शासन स्तर पर कराई गई थी? यदि हाँ, तो जांच में कुल कितनी राशि की अनियमितता प्रमाणित हुई? (ख) क्या जांच के उपरांत संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध राशि वसूली (रिकवरी) एवं ब्लैक लिस्ट किये जाने के आदेश शासन द्वारा जारी किये गये थे? यदि हाँ, तो उक्त आदेश किस दिनांक को जारी किये गये? (ग) क्या कारण है कि शासन के स्पष्ट आदेशों के बावजूद आज दिनांक तक न तो ठेकेदार से कोई राशि वसूल की गई है और न ही ब्लैक लिस्टिंग की कार्यवाही प्रभावी रूप से लागू की गई है? (घ) क्या शासन द्वारा ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट किये जाने के आदेश के बावजूद नगर पालिका नरसिंहगढ़ द्वारा नियमों के विपरीत पी.आई.सी. की बैठक में ठेकेदार के पक्ष में प्रस्ताव पारित कर शासन को गुमराह किया गया? यदि हाँ, तो क्या ₹ 5 करोड़ से अधिक राशि के कार्यों में परिषद की बैठक में प्रस्ताव पारित किया जाना अनिवार्य नहीं है? (ड.) क्या शासन दोषी ठेकेदार एवं सभी जिम्मेदारों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही कर शासन को हुई वित्तीय क्षति की शीघ्र वसूली कराएगा? यदि हाँ, तो कब तक?
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास मध्यप्रदेश भोपाल के आदेश क्रमांक/यां.प्र./07.2020/11689, दिनांक 19.12.2020 से नगरपालिका परिषद नरसिंहगढ़ में मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजनान्तर्गत स्वीकृत बैराज निर्माण कार्य के क्रियान्वयन में हुई अनियमितता एवं गुणवत्ता की जांच हेतु जांच समिति गठित कर जांच कराई गई थी। उक्त जांच प्रतिवेदन के अनुसार वित्तीय अनियमित्ताओं की राशि प्रमाणित नहीं है। (ख) जी हाँ। दिनांक 05.01.2026 को आदेश जारी किये गये थे। (ग) उत्तरांश "ख" के परिप्रेक्ष्य में शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) जी हाँ। (ड.) जी हाँ। उत्तरदायी पाये गये तत्कालीन मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नगरपालिका परिषद, नरसिंहगढ़ को संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, मध्यप्रदेश भोपाल के पत्र क्रमांक/शि/06/2025/21315, भोपाल दिनांक 10.10.2025 से एवं तत्कालीन उपयंत्री, नगरपालिका परिषद नरसिंहगढ़ को संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास, मध्यप्रदेश भोपाल के पत्र क्रमांक/शि/06/2025/21317, भोपाल दिनांक 10.10.2025 से आरोप पत्र जारी किये गये हैं। संविदाकार को काली सूची में दर्ज करने हेतु संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास भोपाल के आदेश क्रमांक/यां.प्र./07/2026/74, भोपाल दिनांक 05.01.2026 जारी किया गया है। निकाय प्रेसीडेन्ट-इन-काउंसिल के द्वारा प्रस्ताव क्रमांक 227, दिनांक 06.10.2025 के द्वारा संविदाकार की जमा राशि को राजसात करने का निर्णय पारित किया गया है। उत्तरांश के परिप्रेक्ष्य में शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
श्री मोहन शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक-1140 है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रख दिया गया है.
श्री मोहन शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, नरसिंहगढ़ नगर की जनहितैषी लोक कल्याणकारी और 50 हजार की जनता के कंठ की प्यास बुझाने के लिये एक बहुत महत्वपूर्ण योजना पार्वती बैराज के नाम से स्वीकृत हुई थी, उसके टेंडर हो गये हैं, सारी प्रक्रिया होने के बावजूद उसमें इतनी अनियमितताएं हैं कि आज तक उसका पानी नरसिंहगढ़ नगर को नहीं मिला है, तो जो अनियमितताएं हैं, उसमें पहले भी मैं सक्षम अधिकारियों को शिकायत के तौर पर पत्र दे चुका हूं, परंतु अभी तक उसमें कोई कार्यवाही नहीं हुई है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, मैंने अपने उत्तर में माननीय सदस्य को बताया है कि उसमें कार्यवाही हुई है, उसमें जांच कमेटी बनाई थी, जांच कमेटी ने सब स्टैंडर्ड काम पाया था, तो उसमें तत्कालीन इंजीनियर वगैरह के खिलाफ कार्यवाही भी हुई और इसके अलावा उसमें सुधार के काम भी कर दिये हैं, ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट कर दिया है और पूरा काम करवाने के बाद अभी बैराज के संबंध में मैंने कल रात को ही एक फोन किया था, तो वहां से फोटो भी आ गया है, आप चाहेंगे तो देख सकते हैं (श्री कैलाश विजयवर्गीय,नगरीय विकास एवं आवास मंत्री द्वारा सदन में फोटो दिखाया गया)उसमें बढि़या सारी रिपयेरिंग हो गई है और सारा काम हो गया है, परंतु हमने ठेकेदार के खिलाफ भी कार्यवाही की है और इंजीनियर्स के खिलाफ भी कार्यवाही की है और जो भी सदस्य ओर भी चाहेंगे और उनके पास जो भी जानकारी होगी, हम क्वॉलिटी से कॉम्प्रोमाइज नहीं करेंगे और अगर ठेकेदार गड़बड़ करेगा, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही करेंगे.
श्री मोहन शर्मा -- नगर पालिका नरसिंहगढ़ में फाइल ही गायब है, अभी वर्तमान सी.एम.ओ. के खिलाफ रिपोर्ट भी डलवाई है, दो साल से फाइल का पता नहीं है और जिस स्तर पर निर्माण होना चाहिए था, उसमें 8 फिट ऊंचाई होना चाहिए था परंतु 5 फिट उसकी ऊंचाई है , 14 मीटर चौड़ाई होना चाहिए परंतु 13 मीटर है, दोनों साईड की जो मजबूती होना चाहिए थी, वह नहीं है. माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से आपके माध्यम से आग्रह करना चाहता हूं कि वहां पर आप इसकी निष्पक्ष जांच करवायें, क्योंकि जब सी.एम.ओ. निलंबित हुआ, उपयंत्री निलंबित हुआ, तो फिर ठेकेदार के ऊपर कार्यवाही क्यों नहीं हुई है और ठेकेदार जिसने कि वहां पर मात्र डेढ़, दो करोड़ रूपये की लिमिट में खर्च किये हैं, बाकी के सात करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत हुई थी, उसकी जांच होना अनिवार्य है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, इसकी जांच करा ली है और जांच कराने के बाद संबंधित इंजीनियर्स के खिलाफ कार्यवाही हुई है और सी.एम.ओ. के खिलाफ कार्यवाही हुई है, ठेकेदार को ब्लैक लिस्टेड किया है, ठेकेदार से जो काम में कमी थी, उसको ठीक भी करवाया है और जिस प्रकार से टेंडर की शर्तें थीं, उस अनुरूप काम हुआ है, उसके बाद भी अगर सदस्य चाहेंगे, तो मैं यहां से एक इंजीनियर भेज दूंगा, इनके साथ खड़े रहकर जांच करवा देंगे, उसमें मुझे कोई आपत्ति नहीं है.
श्री मोहन शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, वह जो फाइल गायब हुई है, उस समय जो अधिकारी थे, उनके खिलाफ भी कार्यवाही होना चाहिए था. सी.एम.ओ. के खिलाफ कार्यवाही हो गई, उपयंत्री के खिलाफ कार्यवाही हो गई है, तो ठेकेदार के खिलाफ भी मुकदमा कायम होना चाहिए, क्योंकि इतनी घोर अनियमितताएं उसने की है, क्योंकि मेरे पास पूरी की पूरी जानकारी है, जो बैराज में गेट चूड़ीदार लगना चाहिए था, वहां पर सिंपल लगा दिया गया है. बैराज के निर्माण के जो मापदंड हैं, उन मापदंडों के अनुसार निर्माण नहीं हुआ है. बैराज की जो ऊंचाई डी.पी.आर. के अनुसार होना चाहिए, वह ऊंचाई नहीं है, दोनों गेटों में, सिर्फ पेंट से पोत दिया गया है, रंग रोगन कर दिया गया है, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए था. बैराज की चौड़ाई 14 मीटर होना चाहिए, जबकि वह 13 मीटर हो गई, एक मीटर उसमें कम हो गई. बैराज के पुल के दोनों किनारों पर जो मजूबती होना चाहिए थी, वह 6 मीटर होना चाहिए, उसको 5 मीटर रख दी है. डेम की 8 मीटर ऊंचाई हाईट जो 5.90 ही रह गई है, इस प्रकार से यह सारी अनियमिततायें घोर अनियमिततायें हैं. पूरी नरसिंहगढ़ की जनता इसको लेकर पहले भी शिकायतें कर चुकी है. अध्यक्ष महोदय, इसकी निष्पक्ष जांच हो और स्वतंत्र एजेंसी से जांच हो, मैं यह चाहता हूं.
अध्यक्ष महोदय-- माननीय सदस्य, मैं अनुरोध करना चाहता हूं. मंत्री जी ने पहले ही यह बात कही है कि जांच करवाई गई है, ठेकेदार को ब्लेकलिस्ट किया गया है और आगे भी वह कार्यवाही करेंगे तो मुझे लगता है इसके बाद क्या बचता है, आपको कुछ लगता है क्या ?
श्री मोहन शर्मा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो फाइलें गायब हुईं, एक नहीं अनेकों फाइलें गायब हुईं नगर पालिका नरसिंहगढ़ से, उस समय जो बिलो राशि जमा होती थी, उसमें अंतर रहता था, वह राशि पहले ही निकाल ली गई, काम पूरा ही नहीं हुआ.
अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, कुछ कहना चाहेंगे.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, फाइल तो फिर से री-एक्टिव हो जायेगी इसमें कोई प्रोबलम नहीं है. फाइल गायब होना कई बार फाइल नष्ट भी हो जाती है, गायब नहीं होती तो हम वापस, हमारे पास सारा रिकार्ड रहता है, हम उसको री-एक्टिव कर लेंगे. मैं केवल इतना बताना चाह रहा था कि ठेकेदार की जो एफडी थी वह भी हमने राजसात कर ली है, उसको ब्लेकलिस्ट भी कर दिया है. जो-जो इंजीनियर दोषी थे उनके खिलाफ भी कार्यवाही की है, उसके बाद भी अगर माननीय सदस्य चाहते हैं कि फिर से एक बार जांच हो जाये तो हम भोपाल से एक इंजीनियर भेज देंगे, इनके साथ खड़े रहकर जांच करवा देंगे, हमें इसमें कोई आपत्ति नहीं है.
अध्यक्ष महोदय-- मोहन जी एक शब्द बार-बार बोल रहे हैं कि स्पष्ट जांच, तो मैं भी नहीं समझ पा रहा कि स्पष्ट जांच से आपका आग्रह क्या है. ..(हंसी)..
श्री मोहन शर्मा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, स्पष्ट नहीं निष्पक्ष जांच का बोल रहा हूं.
अध्यक्ष महोदय-- मैं समझता हूं मंत्री जी ने उत्तर दे दिया है, जो पर्याप्त है.
श्री मोहन शर्मा-- धन्यवाद माननीय मंत्री जी.
बस स्टैंड एवं यात्री प्रतीक्षालय
[नगरीय विकास एवं आवास]
4. ( *क्र. 1418 ) श्री अमर सिंह यादव : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या राजगढ़ जिला मुख्यालय पर बस के स्टैंड हेतु नगर पालिका द्वारा बस स्टैंड का निर्माण कराया गया था? यदि हाँ, तो कब तथा किस मद से कितनी राशि से किस एजेंसी द्वारा कराया गया था, बतावें? (ख) क्या शासन द्वारा इस हेतु कोई शासकीय भूमि नगरपालिका को आवंटित की गई थी? यदि हाँ, तो शासन द्वारा कब तथा कितनी भूमि आवंटित की गई थी? खसरा नंबर, रकबा सहित बतावें। (ग) क्या उक्त बनाए गये बस स्टैंड पर बसे खड़ी न होकर अन्य स्थानों पर खड़ी होती हैं, जिससे बसों के रुकने एवं यात्री के बैठने उतरने में परेशानी आती है? (घ) यदि हाँ, तो क्या उक्त बस स्टैंड पर बसों का ठहराव एवं यात्री के लिये बने हुये यात्री प्रतीक्षालय का उपयोग यात्रियों के लिये करवाया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) जी हाँ, नगर पालिका राजगढ़ द्वारा वर्ष 1998-1999 में आई.डी.एस.एम.टी. योजना अन्तर्गत बस स्टैण्ड निर्माण कार्य राशि रूपये 1.00 करोड़ से दिलीप बिल्डकॉन कम्पनी भोपाल द्वारा कराया गया था। (ख) जी हाँ, कार्यालय कलेक्टर, जिला-राजगढ़ के आदेश क्रमांक 39/26/नजूल/98 राजगढ़, दिनांक 03.01.1998 द्वारा सर्वे क्रमांक 791, रकबा 1.223 हे. में से 8789 वर्ग मीटर भूमि वर्ष 1997-98 में आवंटित की गई थी। (ग) जी नहीं, बस स्टेण्ड पर ही बसें खड़ी होती है। बसों के रूकने एवं यात्री के बैठने उतरने में कोई परेशानी नहीं है। (घ) उत्तरांश "ग" के परिप्रेक्ष्य में शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। यात्री प्रतिक्षालय का उपयोग यात्रियों द्वारा किया जाता है।
श्री अमर सिंह यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 1418 है.
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.
श्री अमर सिंह यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न मेरी विधान सभा जिला मुख्यालय राजगढ़ के बस स्टेंड को लेकर है. बस स्टेंड का निर्माण आई.डी.एस.एम.टी. योजना के अंतर्गत 28 वर्ष पूर्व हुआ था. अब उस बस स्टेंड पर आवागमन बहुत अधिक हो गया है. एन.एच. 12 पर जिला मुख्यालय पर स्थित है. यात्री प्रतीक्षालय में यात्रियों के बैठने का जो बनाया था वह पूर्ण सुविधायुक्त था, परंतु महिलाओं का जो चेम्बर था उसमें नगर पालिका द्वारा 3 दुकानें मनमाने तरीके से एक परिषद का संकल्प कर और माननीय जिलाध्यक्ष महोदय से अनुमति लेकर नीलाम कर दी गईं. उनका आवंटन गलत तरीके से किया गया है. मेरा माननीय मंत्री महोदय से यह निवेदन है कि बस स्टेंड बहुत पुराना है और वहां पर जगह बहुत कम होने के कारण यात्री परेशान होते हैं, बसें अंदर नहीं लग रहीं हैं, अतिक्रमण हो गया है. मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करूंगा कि जो तीनों दुकानें आवंटित की गई हैं उनको निरस्त किया जाये और मैं एक और निवेदन करना चाहता हूं कि हमें वह जगह अब पर्याप्त नहीं है जिला मुख्यालय के लिये तो हमें कोई जमीन नया बस स्टेंड बनाने का हमने माननीय मंत्री जी को प्रस्ताव भी दिया है, माननीय कलेक्टर महोदय को भी दिया है तो हमें एक नई जगह स्थान मिल जाये और वह जगह का आवेदन हमने हमारा जो नया दशहरा मैदान है उसी जगह पर हमनें एलाट करने का लिखा है. मैं माननीय मंत्री महोदय से यही निवेदन करना चाहता हूं कि चूंकि जिस प्रकार से नये बस स्टेंड की हमें आवश्यकता है वह मिल जाये और जिस गलत तरीके से इन्होंने जो दुकानों का अलाटमेंट किया है उसको निरस्त किया जाये.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, साधारणतया नगर पालिकायें अपनी आय बढ़ाने के लिये थोड़ा सा कामर्शियल पार्ट बना लेती हैं रखरखाव के लिये भी और यह तत्कालीन माननीय जिलाधीश से अनुमति प्राप्त करके इन्होंने दुकानें बनाईं और विधिवत रूप से इसकी ऑनलाइन टेंडरिंग हुई और मैंने इसकी भी जांच करवा ली है, इसमें चार-चार ठेकेदार आये थे और उस प्रकार वह गई है इसमें कहीं कोई अनियमितता नहीं है. उसके बाद भी अगर माननीय सदस्य चाहते हैं तो उनका दूसरा प्रश्न यह है कि यह बात सही है कि राजगढ़ जिला अब जिला केन्द्र हो गया है और अब राजगढ़ में थोड़ी आर्थिक गतिविधि भी बढ़ गई हैं क्योंकि हमारी सरकार आने के बाद वहां नहरों का जाल बिछ गया है. थोड़ी आर्थिक सम्पन्नता आ गई है. मैं मूलत: अध्यक्ष महोदय, राजगढ़ का ही रहने वाला हूं और इसीलिये मुझे राजगढ़ की स्थिति का पूरा अंदाज है. पहले वहां पानी के लिये भी बहुत दूर दूर तक जाना पड़ता था और नेवई नदी में नहाते थे अपने ताऊ जी के यहां रहते थे जब नहाने के लिये
अध्यक्ष महोदय - आज प्रश्न भी उसी पट्टी के हैं.
श्री कैलाश विजवर्गीय - एक ही पट्टी के हैं तो वहां पानी की बड़ी परेशानी थी. बोरिंग तो हजार फिट तक नहीं होते थे. हमारी सरकार आने के बाद वहां सिंचाई काफी ठीक हो गई है आर्थिक सम्पन्नता धीरे-धीरे बढ़ गई है. यह बात सही है कि बस स्टैंड छोटा पड़ रहा है जैसा माननीय सदस्य ने कहा है कि वहां दशहरा मैदान के पास एक सरकारी जमीन है हम नगर पालिका से कहेंगे कि वह कलेक्टर से बसस्टैंड के लिये मांगे. हम पर्सनल कलेक्टर साहब से निवेदन करेंगे और माननीय मुख्यमंत्री जी से भी निवेदन करेंगे कि एक बड़ा बस स्टैंड लगभग चारएकड़ में जिले का बन जाए और लोकेशन भी इन्होंने अच्छी बताई है मैंने कल अधिकारियों को भिजवाकर पुछवाया है एक तरफ हमारा राजगढ़ का बायपास आ रहा है उसके बीच में यह जमीन है इसलिये यह जमीन बस स्टैंड के लिये बहुत उपयोगी है तो हम इसे नगर पालिका को दिलवाकर,यह जो वर्तमान में बस स्टैंड है वह शहर के बीच है. इसमें कोई मार्केट डेवलप करके इससे इतनी आमदनी हो सकती है कि नया बस स्टैंड बन सकता है और अगर जरूरत पड़ेगी तो राज्य शासन भी उसमें पैसा लगा देगा और यह बस स्टैंड अपने आप में बाजार के बीच में कामर्शियल बड़ा उपयोगी है. तो दोनों काम हो सकते हैं इस बसस्टैंड को अच्छे मार्केट में तब्दील किया जा सकता है और इससे होने वाली आमदनी से नगर पालिका द्वारा अच्छा बस स्टैंड बनाया जा सकता है और वहां पर भी हम पीपीपी माडल से बना सकते हैं और अगर कुछराशि की जरूरत पड़ेगी तो राज्य सरकार राशि भी प्रदान करेगी क्योंकि वह जिले का मुख्य केन्द्र है यहां बस स्टैंड अच्छा होना चाहिये. जैसा माननीय विधायक जी चाहते हैं वैसा हम करने की कोशिश करेंगे.
अध्यक्ष महोदय - अमर जी, दूसरा पूरक प्रश्न वैसे पर्याप्त उत्तर दिया मंत्री जी ने.
श्री अमर सिंह यादव - धन्यवाद दे दूं.मैं मंत्री महोदय को धन्यवाद देता हूं.
श्री गौतम टेटवाल,राज्यमंत्री, - अध्यक्ष महोदय, पूरे राजगढ़ जिले की ओर से मंत्री जी का बहुत-बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय - सदस्य धन्यवाद तो देते हैं लेकिन वह सदस्य पार्टली धन्यवाद देते हैं. धन्यवाद के तत्काल बाद लेकिन लगाते हैं. धन्यवाद दो तो मन से दो फिर लेकिन का क्या मतलब.
श्री अमर सिंह यादव - मैं एक आग्रह और करना चाहता हूं मेरे शहर खुजनेर में माननीय मंत्री महोदय द्वारा 3 करोड़ 50 लाख का सिटी पोर्शन का रोड सेंग्शन किया है उसमें राशि स्वीकृत की है मैं उसके लिये धन्यवाद दूंगा परन्तु मेरा आग्रह है कि जैसे कि हमें मोहनपुरा से पानी लाना पड़ता है और बिजली का बिल अधिक आता है तो हमें सौर ऊर्जा के माध्यम से ऐसा कोई प्लांट स्वीकृत किया जाये क्योंकि बिजली का बिल अभी नगर पालिका में परेशानी आ रही है कि जो टेक्स है वह समय पर नहीं मिलता है और कर्मचारियों की तनख्वाह दो-तीन महिने हो जाती है.जिला मुख्यालय है और वहां पर सौर ऊर्जा का प्लांट अपनी सरकार की तरफ से भी लगाये जा रहे हैं तो ऐसा सौर ऊर्जा का प्लांट सरकार की तरफ से शासन की तरफ से मिल जाये कि हमारी बिजली की पूर्ति सौर ऊर्जा के माध्यम से मिल सके उससे हमें नगर पालिका चलाने में सहूलियत होगी और मैं पुन: मंत्री महोदय को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने बस स्टैंड के लिये राशि स्वीकृत और बस स्टैंड की स्वीकृति की जो सहमति दी है लेकिन मैं एक बात और कहूंगा कि जो दुकानों की नीलामी हुई है वह गलत तरीके से हुई है. अंदर शहर के अंदर 25-25 लाख में दुकानें जा रही हैं.
अध्यक्ष महोदय - अमर सिंह जी अब विस्तार से बात आ गई है.
श्री अमर सिंह यादव - धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय- माननीय मंत्री जी कुछ बोलना चाहेंगे परन्तुक बहुत हैं अमर सिंह जी के.
श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष जी, यह बात बिल्कुल सही है और मैं अमर सिंह जी के प्रश्न के माध्यम से, माननीय सभी विधायकों से निवेदन करूँगा कि अपनी-अपनी नगरपालिका, नगर निगम के अन्दर यदि सोलर पावर का अगर उपयोग करना चाहें, तो उसका प्लान बनाइये. हम इसमें गाइडेंस भी करेंगे, लोन भी दिलवायेंगे क्योंकि नगरपालिका, नगर निगम को आत्म निर्भर होना बहुत जरूरी है, इसमें सबसे बड़ा खर्चा बिजली का है और यदि बिजली अगर वह स्वयं की उत्पादन करने लग जायेंगे तो एक बहुत बड़ा खर्चा उनका बचेगा और शहर में विकास भी होगा. इसलिए आप चाहें तो हमारे विभाग में आकर गाइडेंस प्राप्त कर सकते हैं या हम एक काम करेंगे कि एक वर्कशॉप लगा लेंगे. यह ज्यादा अच्छा है कि हम सारे सीएमओ और सारे अध्यक्षों को बुलाकर एक वर्कशॉप सिर्फ इसी विषय के ऊपर आयोजित करेंगे कि आप अपनी बिजली का खर्च बचाने के लिए, यदि आप आपके यहां कोई सोलर पावर स्टेशन यदि बनाना चाहेंगे, तो आप बनाएं. वैसे अध्यक्ष महोदय मध्यप्रदेश ने एक फ्लोटिंग सोलर पावर स्टेशन नगरपालिकाओं की आवश्यकता के अनुसार बनाया है, पर वह इतना पर्याप्त नहीं है कि सारे प्रदेश के लिए हम दे सकें, पर अगर व्यक्तिगत भी लगाना चाहें तो हम उनकी मदद करें.
श्री ओमप्रकाश सखलेचा - माननीय अध्यक्ष महोदय, एक मिनट दीजिये.
अध्यक्ष महोदय - ओमप्रकाश जी, आप बजट पर बोलियेगा.
श्री ओमप्रकाश सखलेचा - माननीय मंत्री जी, जिन नगरपालिका के सोलर प्रोजेक्ट हैं, उन्हें तो आप आज स्वीकृत कर दें. उसकी तो घोषणा कर दें. जो सातों नगर पंचायत के लिये एक-एक करोड़ रुपये मांगे हैं, बाकि हम वहां से अपने आप कर रहे हैं. आप उसकी घोषणा कर दें.
श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष महोदय, मैं दिखवा लूँगा.
श्री ओमप्रकाश सखलेचा - माननीय अध्यक्ष महोदय, भाई साहब, आप खुद बोल रहे हैं. हम छ: महीने, एक वर्ष से आपके पीछे लगे हुए हैं. हमने आप ही की बात को रखा है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष महोदय, उसमें एक करोड़ रुपये लगेगा कि नहीं लगेगा. यह तो देखना पडे़गा.
श्री ओमप्रकाश सखलेचा - अध्यक्ष महोदय, उससे ज्यादा लगेंगे.
श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष महोदय, मैं इनके लोन की व्यवस्था कर दूँगा.
अध्यक्ष महोदय - ओमप्रकाश जी, आप अचानक बोलेंगे तो वह दिखवा ही पाएंगे. (हंसी)
श्री ओमप्रकाश सखलेचा - माननीय अध्यक्ष महोदय, दो बार चर्चा हो चुकी है, कागज दिये हुए हैं. मैं अचानक नहीं बोल रहा हूँ. आपके ध्यान में है और उसी बात को आपने बढ़ाया है. मैं उसके लिए माननीय मंत्री जी का धन्यवाद भी करता हूँ.
श्री अजय विश्नोई - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी का ध्यान भोपाल नगर निगम के प्रोजेक्ट की ओर दिलाना चाहता हूँ. भोपाल नगर निगम ने एक प्रोजेक्ट लगवाया है, जिसमें उन्होंने 10 मेगावाट के पावर का एक एग्रीमेंट प्रायवेट व्यक्ति से किया है, जो आगे आने वाले 35 वर्ष तक 3 रुपये या साढ़े 3 रुपये के रेट पर बिजली देगा, इस प्रकार के एग्रीमेंट चाहें तो हर एक नगर निगम, नगरपालिका कर सकती है, पर छोटी-छोटी नगरपालिकाओं के लिए कर पाना संभव नहीं होगा. इसलिए मेरा माननीय मंत्री जी से यह अनुरोध है कि सभी नगरपालिकाओं के लिए ऐसा एक संयुक्त प्रोजेक्ट बना लें और एक टेण्डर निकाल देंगे, तो इस प्रकार की सस्ती बिजली का एश्योरेंस सभी नगरपालिकाओं के लिए मिल सकेगा.
श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष महोदय, इसमें हमने एक फ्लोटिंग सोलर पावर का एक प्रोजेक्ट पहले ही स्वीकृत कर दिया है और वह सभी नगरपालिकाओं के लिए है, पर हमें मालूम है कि पावर की डिमाण्ड बढ़ती ही जानी है और इसलिए हम तो करेंगे ही, बाकि भी अगर नगरपालिकाएं कर सकती हों, तो करें. हम उनको सहयोग प्रदान करेंगे.
गुणवत्ताविहीन कार्य किये जाने के संबंध में
[ऊर्जा]
5. ( *क्र. 1157 ) श्री भैरो सिंह बापू : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा प्रश्न क्रमांक 669, दिनांक 05.12.2025 के संबंध में दिनांक 01.11.2025 से दिनांक 26.01.2026 तक कुल कितने ट्रांसफार्मर वरीयता सूची अनुसार बढ़ाए गये? क्या कोई ऐसा ट्रासंफार्मर भी है, जिसे वरीयता सूची से पूर्व बढ़ा दिया गया है? यदि हाँ, तो क्यों? (ख) क्या विभाग द्वारा योजना में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है? किसी भी योजना में ट्रांसफार्मर, लाईन एवं अन्य समस्त स्थापना हेतु क्या-क्या मानक हैं? क्या उन मानकों का पालन हो रहा है? क्या पोल में सीमेन्ट डालना अनिवार्य है? यदि हाँ, तो जिन ठेकेदारों द्वारा यह कार्य नहीं किया जा रहा है, उनके खिलाफ क्या कार्यवाही की गई? (ग) योजना में बदली गई ग्राम बड़ागांव की केबल को फिर से क्यों बदलना पड़ा? क्या ठेकेदार द्वारा निम्न गुणवत्ता की केबल का उपयोग किया गया था? यदि नहीं, तो केबल बदलने का कारण स्पष्ट करें। केबल बदलने के लिये ठेकेदार के कितने के बिल पास किये गये? (घ) जिले में दिनांक 01.01.2020 से कुल कितने स्थानों पर कुल केबल किस-किस योजना में कब-कब लगाई गई? ट्रांसफार्मरवार जानकारी उपलब्ध करायें। लगाई गई केबल में से कितनी केबल चालू हैं? खराब केबल में विभाग द्वारा ठेकेदार पर क्या कार्यवाही की गई? यदि कार्यवाही नहीं की तो जनता का पैसा भ्रष्टाचार में उड़ाने के लिये कौन-कौन जिम्मेदार है?
ऊर्जा मंत्री ( श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ) : (क) विधानसभा प्रश्न क्रमांक 669, दिनांक 05.12.2025 के संबंध में दिनांक 01.11.2025 से दिनांक 26.01.2026 तक वरीयता सूची अनुसार कुल 11 वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि (क्षमता बढ़ाई गई) की गई है। जी नहीं। (ख) जी नहीं, संचा./संधा. वृत्त आगर अंतर्गत संचालित योजनाओं में गुणवत्तापूर्ण सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। किसी भी योजना में स्थापित किये जाने वाले ट्रांसफार्मर, लाईन एवं अन्य समस्त उपकरणों/स्थापना हेतु मानकों का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अ' अनुसार है। जी हाँ, संचा./संधा. वृत्त आगर अंतर्गत उक्त निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है। निर्धारित मानकों के अनुसार पोलों की स्थापना के समय सीमेंट डालने का प्रावधान है। संचा./संधा. वृत्त आगर अंतर्गत ठेकेदारों द्वारा पोल स्थापना के समय मानक अनुसार सीमेंट डाला जा रहा है, अत: शेष प्रश्न नहीं उठता है। (ग) ग्राम बड़ागांव में वर्तमान में उपभोक्ताओं की संख्या में वृद्धि एवं उपभोक्ताओं द्वारा उपयोग किये जा रहे बिजली उपकरणों का भार बढ़ने से, पूर्व से स्थापित केबल जलने/खराब होने की समस्या उत्पन्न हुई थी, जिसके निराकरण हेतु आर.डी.एस.एस. योजना में केबल बदला/क्षमतावृद्धि की जा रही है। जी नहीं, ठेकेदार द्वारा निम्न गुणवत्ता की केबल का प्रयोग नहीं किया गया था। वर्तमान में आर.डी.एस.एस. योजना अन्तर्गत केबल की क्षमतावृद्धि हेतु पुरानी केबल को बदला जा रहा है। वर्तमान में उक्त कार्य हेतु कोई भी बिल प्राप्त नहीं हुआ है। (घ) जिले में दिनांक 01.01.2020 से प्रश्न दिनांक तक की स्थिति में विभिन्न स्थानों पर बदली गयी केबल की स्थान, योजना एवं ट्रांसफार्मर संबंधी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब' अनुसार है। लगायी गयी केबल में से सभी केबल वर्तमान में चालू अवस्था में है। केबल का कार्य स्वीकृत प्राक्कलन/निर्धारित मानक अनुसार किया गया है, अत: शेष प्रश्न नहीं उठता है।
श्री भैरो सिंह बापू - मेरा प्रश्न क्रमांक 1157 है.
श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर - अध्यक्ष जी, उत्तर पटल पर रखा गया है.
अध्यक्ष महोदय - भैरो सिंह जी, आप पूरक प्रश्न करें.
श्री भैरो सिंह बापू - माननीय अध्यक्ष जी, जो जवाब आया है, मैं उससे पूर्ण असंतुष्ट हूँ कि मेरी विधान सभा में हुए किसी भी नये काम चाहे वह सरकारी हों या निजी हों, ठेकेदार ने किसी भी मानक का उपयोग नहीं किया है. अधिकारी बाबूओं के कारण नई लाईन एक बारिश में ही खराब हो जाती है, मेरे पास ऐसे अनेक साक्ष्य हैं, जिससे स्पष्ट दिखता है कि किसी भी खंभे में न तो सीमेन्ट लगी है, न खंभे पर स्टे तार हैं, कई जगह पर तो जितने बड़े खंभे की जरूरत होती है, छोटे खंभे पर डंडे बांधकर काम चलाया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में आये दिन दुर्घटनाएं होती हैं, जनहानि हुई हैं, अभी थोड़ी दिन पहले ही एक आमला के अन्दर जनहानि हुई है और लोग मरते दिख रहे हैं, मेरे पास अनेक साक्ष्य हैं, जानवरों के करंट लगता है, अधिकांश स्थानों पर केबल लाईन इतनी पास से गुजर रही है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है. जिम्मेदार केवल भ्रष्टाचार करने में मस्त हैं. मैं आपके माध्यम से, माननीय मंत्री महोदय जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि इनकी जांच कराएं, ग्राम बड़ागांव में एक छोटा नगर है, जिसकी आबादी में एकदम से कोई बड़ा बदलाव दो वर्ष के अन्दर आ सकता है, ऐसा अधिकारियों ने जवाब में दिया है. बड़ागांव में जनसंख्या बढ़ने से केबल जल गई है, माननीय मंत्री जी, आप यह बताने का कष्ट करेंगे कि बड़ागांव में जनसंख्या एक दो वर्ष में कितनी बढ़ गई. या दिल्ली-मुंबई की तरह लोग बड़ागांव में रोजगार हेतु तो नहीं आते होंगे ? बिजली विभाग अपनी कमजोरी छुपाने के लिए बेतुके तर्क दे रहा है, वहां इतनी कितनी कमजोर केबल डाली गई थी, जो कुछ दिन ही नहीं चल पाई. मेरे पास हल्की केबल की, बड़ागांव के अनेक लोगों की शिकायतें आई हैं, जिसकी सी.एम.हेल्पलाईन पर भी शिकायत की गई है लेकिन विभाग द्वारा कुछ भी जवाब देकर, शिकायतकर्ता पर दबाव डालकर, शिकायत बंद करवा दी जाती है. जब ठेकेदार ने निम्न गुणवत्ता का सामान उपयोग नहीं किया है तो केबल इतनी जल्दी कैसे जल गई ?
अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहूंगा कि दिनांक 01.01.2020 से मेरे विधान सभा में 63 ट्रांसफार्मरों पर ही केबल लगाई गई है अर्थात् प्रतिवर्ष विभाग द्वारा केवल 10 ट्रांसफार्मरों पर केबल लगाया गया है, उस केबल की हालात से मंत्री जी को अवगत करवाना चाहूंगा कि वे, मेरे विधान सभा में एक भी ऐसा गांव बता दें, जिसमें सौ प्रतिशत केबल लगी हो और शत-प्रतिशत चालू हो. मेरे यहां ऐसा कोई गांव नहीं है, जहां पर शत-प्रतिशत केबल चल रही है, वहां लगभग 90 प्रतिशत से अधिक गांव ऐसे हैं, जिनमें अपने घर पर बिजली लाने का काम भी आम जनता द्वारा अपने तारख् डी.पी. से लाकर किया जा रहा है. विभाग के अधिकारी-कर्मचारी गांव के तार तक खा गए. बड़ागांव, मलान्वासा, आमला, लटूरी, उमठ, गुराडिया खाती, टीकोंन, जमुनिया, मैना, जाख, ताखला, कुण्डलिया आदि के अलावा आज नलखेड़ा और सुसनेर नगर भी केबल से वंचित हैं. खुले तार रोज मौत को दावत दे रहे हैं, मौत की जलती चिताओं पर विभाग के अधिकारियों और सालों से एक ही जगह पर टिके कई लाईनमैन अपनी रोटियां सेक रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय- आप प्रश्न तो करें. अपने तो पूरा प्रश्न ही पढ़ दिया.
श्री भैरो सिंह (बापू)- अध्यक्ष महोदय, मैं, मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि जिस तरीके से बिजली के तार झूल रहे हैं, आये दिन दुर्घटनायें होती हैं, खुले में ट्रांसफार्मर हैं, जिनके ऊपर खुले तार हैं, 2 माह पूर्व भी एक दुर्घटना हुई थी. तो क्या इनकी व्यवस्था होगी या जो नई केबल मंत्री जी द्वारा 4 सौ किलोमीटर की, मेरे यहां स्वीकृत हुई थी, इसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने मेरे क्षेत्र को केबल दी लेकिन ठेकेदार द्वारा आज तक गुणवत्ता वाली केबल वहां नहीं लगाई गई है और न ही 2 सौ किलोमीटर की केबल को पूर्ण किया गया है. आपसे निवेदन है कि अधिकारियों की क्लास लेकर, ठेकेदार की क्लास लेकर, जल्द से जल्द केबल सही की जाये, जिससे दुर्घटनाओं से जनता मुक्त हो सके.
श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर- अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से माननीय सदस्य को बताना चाहूंगा कि उन्होंने बड़ागांव की केबल की बात कही है, वर्ष 2013-14 में 50 स्क्वायर मीटर की केबल लगाई गई थी, उसमें उपभोक्ता 500 थे, अब उस केबल में 1000 उपभोक्ता हो गए हैं, आज वर्ष 2025-26 है और लोड बढ़ गया है, इसलिए वहां केबल बदली गई है.
अध्यक्ष महोदय, साथ ही माननीय सदस्य ने कहा है कि तार वहां नीचे झूल रहे हैं, ऐसे जितने भी स्थान आप चिह्नित करके सदन के बाद मुझे देंगे, निश्चित रूप से तत्काल मैं और मेरी सरकार उन केबलों को ऊंचा करवायेगी और उनको सही करवायेगी, यह भरोसा मैं आपको देता हूं.
अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने काम की गुणवत्ता की बात की, मैं अपने स्तर पर जो आपने कहा है, उसको भी एक बार अधिकारियों की टीम बनाकर दिखवा लेंगे.
अध्यक्ष महोदय- भैरो सिंह जी दूसरा कोई पूरक प्रश्न है ? आपका पहला प्रश्न ही बहुत बड़ा था.
श्री भैरो सिंह (बापू)- अध्यक्ष महोदय, मैं, मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं और मेरा पूरक प्रश्न यह है कि झूलते तार और केबल और जगह-जगह खंभे झुके हुए हैं, कई मकानों के ऊपर 33 और 11 किलोवॉट के तार गुजर रहें हैं, क्या उनके लिए ऐसी कोई योजना है, जिससे वे तार वहां से हट सकें, चाहे उसके लिए मंत्री महोदय के विभाग द्वारा या मुझे आदेश दें कि आपकी राशि से अगर इसे करवाया जाये, जिससे आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं से हमें मुक्ति मिले और होने वाली जनहानि से मुक्ति मिले.
अध्यक्ष महोदय- माननीय मंत्री जी.
श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सम्माननीय सदस्य से कहना चाहूंगा कि विभाग में ऐसा कोई नियम कानून नहीं है कि वह जो तार, केबल मकानों के ऊपर से गये हैं उनको बदलें, परंतु अगर आपको लगता है कि कोई जनहानि या कोई और बात है तो उसके लिए स्वयं अपनी विधायक निधि का उपयोग कर सकते हैं. परंतु आपने जहां कहा है कि केबलें नीची हैं तो जितना स्थान आप बताएंगे उनको दिखवाकर हम उस पर कार्यवाही कर लेंगे.
श्री भैरो सिंह बापू-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि विभाग में कोई ऐसा कानून बने कि अभी-अभी तीन एक्सीडेंट हुए हैं एक किसी का हाथ कट गया है. ऊपर तार हैं या तो उन्होंने जिस समय मकान बनाया उस समय ध्यान नहीं रखा. विभाग की तरफ से ऐसा कोई नियम बना होना चाहिए कि यदि कोई भी तार के नीचे मकान बनाता है तो उनको उसी समय उनको रोक दिया जाए. आज वह जनहानि से जूझ रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी ने जो अपनी परिस्थिति है वह बताई है और आप विधायक निधि का उपयोग कर सकते हैं यह भी उन्होंने कहा है. मैं उसके तकनीकी पक्ष को नहीं जानाता हूं. आम तौर पर यह समस्या है, लेकिन अधिकांश स्थान ऐसे हैं जहां पहले हाईटेंशन लाइन डली है और बस्ती का निर्माण बाद में हुआ है. अब यह एक ऐसा पक्ष है कि किसे दोषी ठहराया जाए. जिसने अवैध कॉलोनी काटी है वह दोषी है या खरीदने वाला दोषी है, या एमपीईबी दोषी है. यह एक विचार का विषय है, लेकिन मेरा माननीय मंत्री जी को एक सुझाव जरूर होगा कि इससे घटनाएं तो बहुत होती हैं और छोटी-छोटी बस्तियों के लोग परेशान हैं तो सामान्य तौर पर जो भी तकनीकी पक्ष हो उसको दृष्टिगत रखते हुए जहां हम बदलाव कर सकते हैं तो उसकी प्रक्रिया को सरल कर देना चाहिए. अगर आम आदमी भी उससे परेशान है और पैसे का प्रबंध हो सकता है, तकनीकी दृष्टि से उसका बदलाव किया जा सकता है तो फिर वह आसानी से हो जाए वह किसी के लिए भी बहुत कठिन है. सारी चीजें होने के बाद, पैसा होने के बाद, सारा इंतजाम होने के बाद भी उस प्रक्रिया को करना बहुत कठिन है तो इस पर मुझे लगता है कि विद्युत विभाग विचार करेगा तो अच्छा होगा.
प्रश्न क्र. 6 श्री अजय अर्जुन सिंह (अनुपस्थित)
शासकीय संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने वालों पर कार्यवाही
[नगरीय विकास एवं आवास]
7. ( *क्र. 1101 ) डॉ. हिरालाल अलावा : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या उपसंचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, भोपाल द्वारा निकाय की संपत्ति को खुर्द-बुर्द करने वाले संबंधित के विरूद्ध नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज करवाने का आदेश मुख्य नगरपालिका अधिकारी, मनावर को दिया गया था? उक्त निकाय की भूमि को खुर्द-बुर्द करने में संलिप्त समस्त तत्कालीन अध्यक्ष के नाम, तत्कालीन सी.एम.ओ. के नाम एवं तत्कालीन संबंधित कर्मचारी के नाम पदनाम सहित बतावें। (ख) क्या वार्ड क्रमांक-5 स्थित नगरपालिका के स्वामित्व की भूमि को तत्कालीन अध्यक्ष सी.एम.ओ. एवं अधिकारी कर्मचारी लोकसेवक होने के नाते संरक्षित रखने के लिये विधि द्वारा आबद्ध थे? (ग) प्रश्नांश (ख) अनुसार यदि विधि द्वारा निकाय का हित सुरक्षित रखने के लिये आबद्ध थे तो फिर उनके विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज क्यों नहीं की गई। मनावर नगरपालिका परिषद द्वारा विशेष सम्मेलन दिनांक 12.06.2023 प्रस्ताव क्रमांक-21 लीज नवीनीकरण का अनुरोध शासन से किया है। शासन द्वारा पुलिस थाना मनावर को प्राथमिकी दर्ज करने से रोका गया हो ऐसे आदेश की प्रति उपलब्ध करावें। यदि शासन द्वारा प्राथमिकी को स्थगित नहीं किया गया है तो फिर दोषी अध्यक्ष, सी.एम.ओ. एवं कर्मचारियों पर प्राथमिकी दर्ज करने में देरी क्यों की जा रही है? (घ) संबंधित दोषी अध्यक्ष सी.एम.ओ. एवं कर्मचारी पर आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं कर क्या उन्हें संरक्षित किया जा रहा है और उनके अवैध कार्य को प्रोत्साहन दिया जा रहा है?
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) जी हाँ। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी हाँ। (ग) जी नहीं। मुख्य नगर पालिका अधिकारी, मनावर द्वारा पत्र क्र. 521, दिनांक 20.02.2023 से संबंधितों के विरूद्ध नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज करने हेतु पुलिस थाना मनावर में आवेदन प्रस्तुत किया गया है। प्राथमिकी के संबंध में नगर पालिका परिषद मनावर द्वारा परिषद का विशेष सम्मेलन आहूत कर संकल्प क्रमांक 21, दिनांक 12.06.2023 पारित किया गया, जिसमें लीज़धारियों को निर्धारित शुल्क जमा कर नवीनीकरण की स्वीकृति एवं राज्य शासन के अंतिम निर्णय तक प्राथमिकी दर्ज कराने के आदेश को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है, तत्संबंध में निकाय के पत्र क्रमांक 2145, दिनांक 20.07.2023 से संभागीय कार्यालय, इंदौर एवं पृष्ठांकन क्रमांक 2146 से संचालनालय भोपाल को प्रेषित किया गया है। प्रकरण में जाँच उपरान्त उत्तरदायी पाये गये पदाधिकारियों/अधिकारियों/कर्मचरियों के विरूद्ध कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (घ) जी नहीं।
डॉ. हिरालाल अलावा-- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमाक 1101 है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखता हूं.
डॉ. हिरालाल अलावा-- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मनावर विधान सभा क्षेत्र के नगरपालिका परिषद मनावर में भ्रष्टाचार का एक गंभीर मुद्दा प्रश्न के माध्यम से अवगत कराना चाह रहा हूं. नगर पालिका परिषद की निजी स्वामित्व की भूमि थी अवैध तरीके से हस्तांतरित किये जाने के संबंध में पिछले तीन, चार सालों से हम लगातार संघर्ष कर रहे हैं और जब अवैध तरीके से लीज की जमीन हस्तांतरित हुई, उसकी जांच हुई और उसमें तत्कालीन सीएमओ कर्मचारी और तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष दोषी भी रहे हैं. उस संबंध में मध्यप्रदेश सरकार के माध्यम से संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास मध्यप्रदेश उप संचालक नगरीय प्रशासन के माध्यम से पत्र क्रमांक/ शाखा 2/2022/20975 के तहत अवैध रूप से लीज की जमीन को क्रय, विक्रय करने वालों के खिलाफ एफआईआर करने के लिए आदेश जारी किया गया था. आदेश जारी होने के साथ में ही यह निर्देशित किया गया था कि नगर पालिका अधिनियम 1961 की धाराओं के अंतर्गत उल्लेखित पदाधिकारियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध संचालनालय कार्यवाही कर संचालनालय को अवगत कराया जाए, लेकिन 5 दिसम्बर 2022 से आज दिनांक तक नगर पालिका की जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा करने वालों के खिलाफ अभी तक कार्यवाही क्यों नहीं की गई यह मेरा माननीय मंत्री जी से सवाल है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, यह समस्या मनावर सहित झाबुआ और कुक्षी में भी है. पहले यहां पर व्यापार व्यवसाय नहीं होता था तो बाहर से व्यापारियों को बुला बुलाकर एक रुपए में लीज पर तत्कालीन नगर पालिका ने सरकार के निर्देश पर कुछ जमीनें दी थीं. यह बात सही है कि यह जमीनें 30 साल के लिए दी थीं उसके बाद लीज का रिनुवल नहीं हुआ है. आज वहां पर दूसरी क्या तीसरी पीढ़ी रह रही है. उस समय लीज की शर्तें क्या थीं उसके कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं. वहां पर दुकानें बन गई हैं. 40-40, 50-50 साल से रह रहे लोगों को वहां से हटाने में व्यावहारिक रुप से कठिनाई आ रही है. हम चाहेंगे कि नगर पालिका की इंकम भी हो. हम कोई बीच का रास्ता निकालेंगे. वहां पर एक भाई को जमीन दी थी उसके दो भाई हो गए, उन्होंने बिना किसी की अनुमति से प्लाट का विभाजन कर लिया. प्लाट विभाजित हो गया अब उसकी लीज रिनुवल के लिए जा रहे हैं, लीज रिनुवल नहीं हो सकती है. वहां के नागरिकों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाए और नगर पालिका की इंकम भी बढ़े. इसको ध्यान में रखते हुए हम एक पॉलिसी बनाएंगे. यह सिर्फ मनावर की स्थिति नहीं है. यह कुक्षी और झाबुआ की समस्या भी है. यही समस्या बहुत सारे पुराने शहरों की भी है. आगे अभिलाष जी का भी एक प्रश्न आने वाला है उसमें भी इस प्रकार की समस्या है. जो पुरानी बसाहट है और पुरानी लीज की शर्तें हैं उसके आधार पर लीज रिनुवल करना बड़ा मुश्किल है. अगर लीज रिनुवल करते हैं तो फिर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो जाता है, जैसा कि इस केस में भी हुआ है. हम चाहते हैं कि किसी का भी नुकसान न हो. रहवासी का नुकसान भी न हो और नगर पालिका की इंकम बढ़े इसको ध्यान में रखते हुए हम पॉलिसी बनाएंगे. मेरी माननीय विधायक जी से व्यक्तिगत रुप से भी चर्चा हुई है. जिससे यह डिस्टर्ब भी न हों और नगर पालिका की आय भी बढ़े. यदि इसमें कहीं कोई दोषी व्यक्ति है तो उसके खिलाफ कार्यवाही भी करेंगे, कार्यवाही करने में हम पीछे नहीं हटेंगे. परन्तु वहां पर व्यावहारिक कठिनाई है. विधायक जी उसको गंभीरता से लें, हम भी उसको गंभीरता से लेंगे.
डॉ. हिरालाल अलावा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने सही कहा है. अवैध तरीके से क्रय हुआ है और आज की तारीख में लीज की जमीन को दूसरे, तीसरे, चौथे और पांचवे व्यक्ति तक बेचा गया है. सवाल यह है कि तत्कालीन सीएमओ, अध्यक्ष और कर्मचारियों ने गलत परम्परा की शुरुआत की है जो कि सही नहीं है. इस प्रकार से सरकार के स्वामित्व की जमीनों का अवैध हस्तांतरण होता जाएगा और हम उनको रिलेक्सेशन देते जाएंगे तो हमारे प्रदेश में भ्रष्टाचार की एक नई परम्परा शुरु हो जाएगी. मेरा अनुरोध है कि यह परम्परा न चले और नियमानुसार इन पर कार्यवाही हो.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, इस बात को मैंने प्रारंभ में भी कह दिया है कि अभी अगर कोई लीज हस्तांतरित करता है तो निश्चित रुप से वह नियम में नहीं है. अगर हुई है तो गलत हुआ है हमने उस पर कार्यवाही भी की है. परन्तु यह व्यावहारिक नहीं है. 60-70 साल से वहां पर तीसरी पीढ़ी रह रही है उसको हम हटाएं उसकी लीज का रिनुवल नहीं करें. इससे अच्छा है कि वहां पर वर्तमान रेट के हिसाब से उनसे पैसा लिया जाए, इससे नगर पालिका की आय भी बढ़ेगी और जो 60-70 साल से वहां लोग रह रहे हैं वे विस्थापित भी नहीं होंगे. इसमें थोड़ा व्यावहारिक दृष्टिकोण रखना पड़ेगा.
डॉ. हिरालाल अलावा -- माननीय अध्यक्ष महोदय और माननीय मंत्री जी धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय -- यह धन्यवाद बिना "लेकिन" के हुआ है. (हंसी)
मोक्षधाम में सौन्दर्यीकरण उन्नयन कार्य की स्वीकृति
[नगरीय विकास एवं आवास]
8. ( *क्र. 1472 ) श्री सोहनलाल बाल्मीक : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) परासिया विधानसभा क्षेत्र के नगर चांदामेटा में नगरवासियों की सुविधा के लिये वार्ड क्र. 07 स्थित मोक्षधाम में सौन्दर्यीकरण व उन्नयन कार्य हेतु 50 लाख रूपये की राशि स्वीकृत किये जाने के संबंध में प्रश्नकर्ता द्वारा दिसम्बर 2025 विधानसभा सत्र में तारांकित प्रश्न (क्र. 1218) लगाया गया था, जिसके उत्तर के संबंध में सदन में चर्चा के दौरान मान. विभागीय मंत्री द्वारा शीघ्र ही नगर चांदामेटा मोक्षधाम में सौन्दर्यीकरण, उन्नयन कार्य हेतु 50 लाख रूपये की राशि की स्वीकृति हेतु आश्वस्त किया था, परन्तु उपरोक्त कार्य के लिये प्रश्न दिनांक तक राशि स्वीकृत नहीं की गई है, स्वीकृति प्रदान कर राशि प्रदान करने में विलम्ब का क्या कारण है?(ख) प्रश्नांश ''क'' में वर्णित आश्वासन के परिप्रेक्ष्य में प्रश्नकर्ता द्वारा पुनः मान. मंत्री जी को अनुस्मरण कराते हुये दिनांक 24.12.2025 को पत्र क्र.वि.स./परासिया/127/2025/739 प्रेषित किया गया था, जिस पर अभी तक क्या कार्यवाही की गई है? मोक्षधाम में सौन्दर्यीकरण, उन्नयन कार्य हेतु 50 लाख रूपये की राशि कब तक प्रदान कर दी जायेगी?
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) नगर परिषद चांदामेटा से प्रस्ताव प्राप्त होने पर विशेष निधि से राशि रूपये 25.00 लाख की स्वीकृति प्रदान की गई है। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) विषय के संबंध में नगर परिषद चांदामेटा से प्रस्ताव प्राप्त कर उत्तरांश 'क' के अनुसार राशि स्वीकृत की गई है। उत्तरांश के परिप्रेक्ष्य में शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 1472 है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.
श्री सोहनलाल बाल्कीक -- माननीय अध्यक्ष जी मेरा चांदामेटा नगर पंचायत वार्ड नंबर 7 में मोक्षधाम की राशि के लिए था. इसमें 25 लाख रुपए की राशि स्वीकृत हुई है बाकी 25 लाख रुपए की राशि कब दे दी जाएगी. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहूँगा. श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, अगली बार प्रश्न पूछेंगे तब दे देंगे. .(हंसी)..
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- अध्यक्ष महोदय, इसी बार पूछ लेता हूं कि अगली राशि कब देंगे.
अध्यक्ष महोदय -- अध्यक्ष महोदय, आज वैसे कैलाश जी बड़े सकारात्मक जवाब दे रहे हैं.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, अगला बजट आएगा उसके बाद हम दे देंगे.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- अध्यक्ष महोदय, अगला बजट मतलब इसी बजट में ना. काम अधूरा रह जाएगा. मेरा आपसे निवेदन है कि आपने इतना बड़ा दिल किया उसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं मगर थोड़ा सा और बड़ा दिल करके यदि आप कर देंगे तो वह काम पूर्ण हो जाएगा. पिछली बार भी आपने मुझे आश्वस्त किया था कि 50 लाख रुपये की राशि देंगे तो वैसी कार्य योजना बनी है, नहीं तो फिर काम अधूरा रह जाएगा. मेरा आपसे निवेदन है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, आप कार्य प्रारंभ तो करवाइये और उसके बाद जितनी आवश्यकता होगी हम दे देंगे आप चिंता मत करिये.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.
श्री भंवरसिंह शेखावत -- अध्यक्ष महोदय, आज तो कैलाश जी बदले-बदले नजर आ रहे हैं. ‘’बदले-बदले मेरे सरकार नजर आते हैं लगता है किसी की बर्बादी के आसार नज़र आते हैं’’..(हंसी)..
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, मैं कभी बद्दुआ नहीं देता मैं हमेशा दुआ देता हूं. किसी की भी बर्बादी के आसार नहीं हैं सब मस्त रहें. होली आ रही है सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं और सब हमेशा मुस्कुराते रहें. हंसते रहें.
अध्यक्ष महोदय -- होली में इंदौर में मूर्ख सम्मेल भी होगा ना. .(हंसी)..
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, इंदौर और उज्जैन में होता है. हम लोग मूर्ख सम्मेलन करते हैं.
अध्यक्ष महोदय -- क्या उसमें भंवरसिंह जी की भूमिका नहीं रहती ?
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, नहीं जो पहले से ही हैं उनको नहीं बुलाते.
श्री भंवरसिंह शेखावत -- अध्यक्ष महोदय, इंदौर में एक ऐतिहासिक बजरबट्टू सम्मेलन होता है और कैलाश जी हर साल नया बजरबट्टू बनकर उसमें आते हैं और यह दूसरे किसी को वहां बजरबट्टू बनने नहीं देते हैं. ..(हंसी)..
लीज होल्ड भूमि का परिवर्तन
[नगरीय विकास एवं आवास]
9. ( *क्र. 1411 ) डॉ. अभिलाष पाण्डेय : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विधानसभा में दिनांक 24 मार्च, 2025 को ध्यानाकर्षण के माध्यम से सरकार ने जबलपुर उत्तर मध्य के चार वार्डों की लीज होल्ड भूमि को फ्री-होल्ड करने का आश्वासन दिया था? यदि हाँ, तो नगर निगम जबलपुर की घोर लापरवाही के कारण प्रश्न क्रमांक 1657, दिनांक 31.07.2025 के उत्तर में जानकारी "निरंक" क्यों है? उक्त लंबित प्रकरणों की वर्तमान स्थिति क्या है? (ख) प्रश्न क्रमांक 1657, दिनांक 31.07.2025 के उत्तर में स्वीकार किये गये 171 लंबित प्रकरणों में से विगत महीनों में कितनों का निराकरण हुआ है? यदि नहीं, तो क्या नगर निगम के अधिकारियों पर क्या दंडात्मक कार्यवाही की जायेगी? (ग) क्या नगर निगम, जबलपुर द्वारा जागरूकता शिविरों के आयोजन अनिवार्य करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? समय-सीमा निर्धारित करें। (घ) आश्वासन के एक वर्ष बाद भी नगर निगम जबलपुर द्वारा 171 परिवारों को प्रताड़ित करने का क्या कारण है? क्या विभाग इस विफलता हेतु उत्तरदायी अधिकारियों की जवाबदेही तय कर निराकरण के लिये कोई अंतिम समय-सीमा (Deadline) निर्धारित करेगा?
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) जबलपुर उत्तर मध्य विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सुभद्रा कुमारी चौहान वार्ड, भवानी प्रसाद वार्ड, दयानंद सरस्वती वार्ड की लीज होल्ड भूमि को फ्री-होल्ड में परिवर्तित किये जाने के संबंध में नगर निगम जबलपुर के स्तर पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (ख) कार्यवाही प्रक्रियाधीन होने से शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) शिविर आयोजन के संबंध में नगर निगम जबलपुर द्वारा निर्णय लिया जायेगा। (घ) कार्यवाही प्रक्रियाधीन होने से शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
डॉ. अभिलाष पाण्डेय -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 1411 है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखता हूं.
डॉ. अभिलाष पाण्डेय -- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह आग्रह करता हूं कि जबलपुर उत्तर-मध्य विधान सभा के अंतर्गत सुभद्रा कुमारी चौहान वार्ड, दयानंद सरस्वती वार्ड, भवानी प्रसाद वार्ड और राममनोहर लोहिया वार्ड, इन वार्डों के अंतर्गत लगभग 5,000 से ज्यादा ऐसे परिवार हैं जो नगर निगम की फ्री लीज होल्ड के लिए अभी तक लंबित हैं. उस समय मैंने माननीय मंत्री जी से एक ध्यानाकर्षण के माध्यम से बात की थी तो 24 मार्च, 2025 को माननीय मंत्री जी ने बहुत सकारात्मक रवैया अपनाते हुए संबंधित अधिकारी को भी निलंबित करने का काम किया था. उसके लिए मैं मंत्रीजी के प्रति आभार भी व्यक्त करता हूं लेकिन मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से एक करबद्ध निवेदन है कि 5,000 परिवार ऐसे हैं जो बड़े आशान्वित होकर हमारी तरफ देखते हैं और चूंकि मंत्रीजी से उनकी अपेक्षाएं भी जबलपुर संस्कारधानी की चूंकि आदरणीय कैलाश विजयवर्गीय जी उनके मंत्री हैं, तो मैं यह करबद्ध निवेदन करता हूं माननीय मंत्रीजी कि आपके आदेश के बाद भी अभी जो उत्तर प्राप्त हुआ है उसमें निरंक एक भी फ्री लीज होल्ड नहीं किया गया है तो मैं इस उत्तर से पूर्णत: असंतुष्ट भी हूं और व्यथित भी हूं. मैं यह निवेदन करता हूं कि कम से कम इस प्रकार की कार्यवाही करते हुए इसमें तत्काल फ्री लीज होल्ड पर अहम कदम उठाए जाएं. माननीय मंत्री जी से मेरा यह करबद्ध निवेदन है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, अचल संपत्ति अंतरण नियम 216 के अंतर्गत फ्री होल्ड के अधिकार कमिश्नर को स्पष्ट रूप से दिए गए हैं. उसके बाद वर्ष 2021 में नियमों में संशोधन करके और यह भी कहा है कि उसमें आप नगर निगम की स्थिति के अनुसार और कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार 2 परसेंट को भी बढ़ा सकते हैं. अभी 2 परसेंट जिनको लीज लेने का अधिकार है वह भी बढ़ा सकते हैं. इंदौर नगर निगम ने उसको 5 परसेंट कर दिया है और फ्री होल्ड की कार्यवाही वहां पर जारी है. बाकी कमिश्नर नहीं कर पा रहे हैं. मैं आज ही एसीएस महोदय को निर्देशित करूंगा कि वह सारे कमिश्नर को बुलाएं क्योंकि यह सिर्फ जबलपुर की समस्या नहीं है यह समस्या इंदौर, भोपाल, ग्वालियर की भी है और सभी जगहों की है जो पुरानी लीज दी गई है.
अध्यक्ष महोदय, जो हीरालाल जी ने प्रश्न उठाया था इसी से थोड़ा सा जुड़ा हुआ यह प्रश्न है. वह नगर पालिका का है और यह नगर निगम का है इसीलिये इसको नियम के अनुसार क्योंकि वहां पर भी तीन तीन पीढ़ी से लोग रह रहे हैं. न उनको मकान की परमीशन मिल रही है न उनका लीज का रिन्यूवल हो रहा है, जबकि हमारे नियम के अंदर प्रावधान है. पर नगर निगम क्यों नहीं कर पा रही है और यह सारे अधिकार हमने सारे कमिश्नर को दे दिये हैं. तो मै अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग को निर्देश दूंगा कि आप सारे कमिश्नर की मीटिंग बुलायें और उनको क्या तकलीफ आ रही है इसको समझे और तत्काल यह तीन महीने के अंदर हम बैठक बुलाकर और इसमें यदि कोई परेशानी कमिश्नर को आ रही है, किसी प्रकार कोई नियम को बदलना है तो हम वह भी बदल देंगे वैसे तो यह तीन महीने बहुत ज्यादा समय है पर यह इसीलिये कि सारे नगर निगम के कमिश्नर को भी बुलाना चाहता हूं क्योंकि सिर्फ जबलपुर का मामला अब नहीं है, सारे कमिश्नर को बुलाकर के हम इसका कैसे सरलीकरण कर सकें जिससे जो लोग परेशान हो रहे हैं उनकी परेशानी दूर हो, यह हमारी इच्छा है अध्यक्ष महोदय.
डॉ.अभिलाष पाण्डेय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को इस बात के लिये धन्यवाद भी देता हूं. लेकिन माननीय मंत्री जी मेरा आपसे यह आग्रह है कि आपने एक बहुत अहम् कदम मेरे ध्यानाकर्षण जिसमें मैंने फ्री लीज होल्ड का था जिसको लेकर नगर निगम कई वर्षों से इस बात के लिये लोगों को बार बार नगर निगम में आना जाना पड़ता था जिसमें एक आर्डिनेंस था जिसके अंदर आपने परिवर्तन किया था, जिसमें आर्डिनेंस के 12 नंबर के कॉलम में हिन्दी और इंग्लिश को लेकर के एक कन्ट्राडक्शन की स्थिति बनी हुई थी लेकिन आपने उस विषय को भी ठीक करने का काम किया था लेकिन जिस तरह से नगर निगम के अधिकारी आज भी लगातार लोगों को बार बार लोग आते हैं, आध्यक्ष महोदय,इसी से जुड़ी हुई एक बड़ी समस्या और है मैं आपके माध्यम से मंत्री जी के ध्यान में लाना चाहता हूं कि जैसे कोई एक बड़ा भू-खण्ड नगर निगम का है उसमें कोई अपार्टमेंट बन गया है, उस अपार्टमेंट पर यदि लोग अपने फ्री लीज होल्ड के लिये जाते हैं तो जितने स्क्वायर फिट में वह अपार्टमेंट बना हुआ है उसके खुद के लेंड यूज के हिसाब से जितने स्क्वायर फिट में मकान बना हुआ है, उसकी जगह वह पूरे अपार्टमेंट का कंपाउन्डेवल जिस तरह का चार्जेस उनसे लेते हैं तो जहां पर 1 लाख रूपये उनसे लगना होता है वहां पर पांच पांच लाख रूपये वहां से लिये जाते हैं तो जनता इससे परेशान भी होती है, जनता लगातार यह परेशानी हम सब लोगों को बताती है. मैं माननीय मंत्री जी आपको इस बात के लिये धन्यवाद देता हूं कि आपने जो 3 माह का समय दिया है और इस विश्वास के साथ कि इस तीन महीने में जबलपुर उत्तर मध्य विधानसभा के हमारे जो 5 हजार से ज्यादा ऐसे नागरिक बंधु हैं उनको इस बात का लाभ मिलेगा. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं एक बार पुन: आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करता हूं.
श्री भगवानदास सबनानी(भोपाल दक्षिण-पश्चिम) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसी विषय पर मेरा एक निवेदन है. मैं भी अपने विधानसभा के विषय को लेकर चिंतित हूं क्योंकि फ्री-होल्ड वाला जो विषय है. इसमें लीज में भी बड़ी विसंगतियां हैं, नगर निगम के स्तर पर . माननीय अध्यक्ष महोदय, कहीं पर तीन साल और कहीं पर तीस साल. मेरी विधानसभा के न्यू मार्केट जैसे क्षेत्र में बाहर जो नजूल की दुकानें हैं उसमें तो लीज का तीस साल का रिन्यूवल हो रहा है और अंदर की जो दुकाने हैं उसमें तीन साल का हो रहा है क्योंकि वह नगर निगम की हैं. यह भी विसंगति है. एक शहर , एक शहर के एक मार्केट में ही दो कानून हैं. कई बार मैंने आयुक्त महोदय से भी कहा है कि इस विसंगति को दूर करें और जहां पर लगातार दो बार लीज का रिन्यूवल हुआ है उनको फ्री होल्ड किया जाये. तो यह जो विषय आया है इसमें मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि इस विषय को भी जोड़कर के माननीय मंत्री जी निर्णय करेगे तो बेहतर होगा.
श्री राकेश शुक्ला(गोलू)(इंदौर-तीन) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसी से संबंधित मेरा भी प्रश्न हैं.
अध्यक्ष महोदय- मुझे लगता है कि मंत्री जी ने सारी चीजों को जोड़कर के ही कहा है, प्रश्न नगर निगम का था लेकिन मंत्री जी अगर कुछ कहना चाहें तो.
श्री राकेश शुक्ला (गोलू) --माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा भी इसी से जुड़ा हुआ प्रश्न है इंदौर के लिये. इंदौर की हजारों की संपत्ति ऐसी है जिनके मकान बने हुये हैं और लीज जो है फ्री होल्ड के लिये शासन कई साल पहले निर्देश दे चुका है लेकिन इंदौर के अंदर लीज रिन्यूवल नहीं होने के कारण हजारों लोग परेशान हैं, अच्छा वहां पर तो कोई विवाद भी नहीं है. लीज रिन्यूवल फ्री होल्ड के लिये शासन का यह मकसद था कि नगर निगमों की आय बढ़े. निश्चित है कि माननीय कैलाश जी ने आज निर्देश दिये हैं और तीन महीने के अंदर यदि यह हो जाता है तो इंदौर नगर निगम को भी एक बड़ी आय होगी, मैं इसके लिये माननीय कैलाश जी को बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं.
अध्यक्ष महोदय- प्रश्नकाल समाप्त.
प्रश्नकाल समाप्त.
अध्यक्ष महोदय- मैं समझता हूं कि प्रश्नकाल समाप्त हो गया है. लोग प्रश्नों के लोभ में रहे मंत्री जी का उत्तर लिया नहीं, यह उनका भाग्य है. आज तो अधिकतम प्रश्न कैलाश विजयवर्गीय जी के ही थे. और बहुत ही सरलता से गरिमापूर्ण ढंग से आप उत्तर दिये हैं. धन्यवाद.
श्री पंकज उपाध्याय—अध्यक्ष जी, मेरी एक समस्या है कि यह मेरे प्रश्नों को बिना जानकारी के आज भी पटल पर रखा नहीं गया है.
12.01 नियम 267-क के अधीन विषय
अध्यक्ष महोदय— निम्नलिखित माननीय सदस्यों द्वारा शून्यकाल की सूचनाएं क्रमशः सदन में पढ़ी हुई मानी जायेंगी –

12.02 शून्यकाल में मौखिक उल्लेख
प्रदेश में विगत दिनों से हो रही वर्षा से फसलों को क्षति
श्री भंवरसिंह शेखावत(बाबुजी) (बदनावर) -- अध्यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश के अन्दर अप्रत्याशित रुप से कल और परसों के अंदर बारिश हुई है और बारिश के कारण किसानों की फसलों का भारी नुकसान हुआ है. तेज हवा के साथ में जो गेहूं की फसल है, वह ज्यादा प्रभावित हुई है. इसलिये मेरा सरकार से निवेदन है कि जब यह गेहूं का जो कलर है, वह समाप्त हो जायेगा और ऐसा हो गया है. पूरे प्रदेश के किसान परेशान हैं और यह जो गेहूं अब खरीदेगी सरकार, उस तरीके के जो मानक आपने तय किये हैं उप मुख्यमंत्री जी, उसके मुताबिक वह गेहूं रहेगा ही नहीं और आप खरीदेंगे नहीं. किसान और परेशानी में आ जायेगा. मैं शासन से यह मांग करना चाहता हूं कि तुरन्त अपने अमले को लगायें, पटवारियों को भेजें, तहसीलदारों को भेजें, उनका आंकलन करें. जितना नुकसान किसानों का हुआ है, उसकी भरपाई की व्यवस्था करें. सारी फसलें जो हैं, बहुत ज्यादा तादाद में खराब हुई हैं पिछले दो दिन के अन्दर.
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)— अध्यक्ष महोदय, मेरी जानकारी के अनुसार कल ही मुख्यमंत्री जी ने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिये हैं कि जो वर्षा हुई है, उसकी पूरी जानकारी लें, उससे किसी प्रकार की भी कोई नुकसानी हुई है, तो उसकी जानकारी भेजें. मुख्यमंत्री जी बहुत इस मामले में संवेदनशील हैं. हमारी सरकार संवेदनशील है और इसलिये कल रात को ही उन्होंने सारे कलेक्टर्स को निर्देश दिये हैं, मेरी जानकारी के अनुसार. इसलिये कोई भी किसान को चिंता करने की जरुरत नहीं है, यह भाजपा की सरकार है, किसानों की सरकार है और यह किसान वर्ष है. इसलिये किसानों को कहीं पर भी नुकसान नहीं होगा, यह मैं आपसे वादा करता हूं.
श्री भंवर सिंह शेखावत(बाबुजी)—अध्यक्ष महोदय, यह किसानों की चिंता कर रहे हैं, कैलाश जी, किसानों की जितनी दुर्गति हो रही है न आपके राज में, उतनी तो पिछले 50 साल में कभी हुई ही नहीं.
12.03 बजे अध्यक्षीय घोषणा
भोजनावकाश न होने विषयक
अध्यक्ष महोदय—आज बजट पर चर्चा होगी. भोजन अवकाश नहीं होगा. भोजन की व्यवस्था सदन की लॉबी में उपलब्ध रहेगी. कृपया सभी सदस्य अपनी सुविधा से भोजन ग्रहण कर सकते हैं.
12.04 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना.
(क)
(i) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का नगर तथा ग्राम निवेश के प्रबंधन पर प्रतिवेदन मध्यप्रदेश शासन 2025 का प्रतिवेदन संख्या-5 (निष्पादन लेखापरीक्षा-सिविल),
(ii) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का आर्थिक एवं राजस्व क्षेत्रों पर अनुपालन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन 31 मार्च, 2023 को समाप्त वर्ष के लिए मध्यप्रदेश शासन 2025 का प्रतिवेदन संख्या-6 (अनुपालन लेखापरीक्षा-सिविल),
(iii) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का मध्यप्रदेश लोक निर्माण विभाग द्वारा मध्यप्रदेश में सड़कों के विकास पर 31 मार्च, 2023 को समाप्त वर्ष के लिए मध्यप्रदेश शासन 2025 का प्रतिवेदन संख्या-7 (निष्पादन लेखापरीक्षा-सिविल),
(iv) भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का वस्तु एवं सेवा कर पर लेखापरीक्षा प्रतिवेदन 31 मार्च, 2023 को समाप्त वर्ष के लिए मध्यप्रदेश शासन 2025 का प्रतिवेदन संख्या-8 (सिविल) एवं
(v) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का प्रतिवेदन मार्च, 2023 को समाप्त अवधि हेतु मध्यप्रदेश शासन 2025 का प्रतिवेदन संख्या-9 (खंड-I) एवं प्रतिवेदन संख्या-10 (खंड-II) .
(ख) त्रि-स्तरीय पंचायतराज संस्थाओं पर संचालक स्थानीय निधि संपरीक्षा का वार्षिक समेकित संपरीक्षा प्रतिवेदन वर्ष 2021-2022,

ग. मध्यप्रदेश वित्त निगम का 50 वां प्रतिवेदन वर्ष 2025-26
घ. वाणिज्यिक कर विभाग की निम्नलिखित अधिसूचनाएं-

12.07 बजे
2. मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर

12.08
स्थगन प्रस्ताव
इंदौर शहर के भागीरथपुरा एवं आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल पीने से लोगों की
मृत्य होने संबंधी
.
अध्यक्षीय व्यवस्था
अध्यक्ष्ा महोदय- सामान्य तौर पर बजट के दौरान स्थगन प्रस्ताव नहीं लिये जाते हैं, यह परम्परा रही है. चूंकि यह मामला माननीय न्यायालय के समक्ष विचाराधीन भी है, अर्थात सबज्युडिज़ है. सामान्यत: ऐसे विषय स्थगन प्रस्ताव में नियमानुसार ग्राह्य नहीं किये जाते हैं. विषय वस्तु की गंभीरता एवं माननीय नेता प्रतिपक्ष एवं सदस्यों की भावना को देखते हुए, माननीय सदन के नेता मुख्यमंत्री जी की सहमति से, इस विषयवस्तु को प्रस्तुत करने की अनुमति दी है.
शासन इस पर अपना पक्ष रखना चाहता है.
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)- अध्यक्ष महोदय, जब आपने इस पर चर्चा की है तो मुझे पक्ष तो रखना ही पड़ेगा. अध्यक्ष महोदय, निश्चित रूप से यह घटना बहुत ही गंभीर है. बहुत ही आत्मग्लानि वाली है और हम सबके लिए एक तरीके से चिंता की बात भी है.
अध्यक्ष महोदय, यह बात बिल्कुल सही है. जैसा कि स्थगन में है कि वहां के नागरिकों ने शिकायत की थी. यह बात सही है. मैं इसे स्वीकार करता हूं. वहां के नागरिकों ने शिकायत की. वहां के पार्षद महोदय ने भी उस शिकायत को जहां पहुंचाना चाहिए था, वहां पहुंचाई. महापौर जी ने टेण्डर बुलाए, टेण्डर बुलाने के बाद कुछ विलम्ब हुआ है. टेण्डर आने के बाद भी काम प्रारंभ नहीं हुआ, उसे लेकर माननीय मुख्यमंत्री जी ने एक कमेटी बनाई थी और कमेटी में कुछ अधिकारी उसमें दोषी पाये गये थे, उनके खिलाफ कार्यवाही भी हुई है. परन्तु निश्चित रूप से यह इंदौर के लिए एक कलंक है. जो इंदौर लगातार स्वच्छता के लिए पूरे देश के अंदर अपनी छाप छोड़ रहा है. हमने स्वच्छता को, स्वच्छता नहीं संस्कार में परिवर्तित किया है और इंदौर ने स्वच्छता को संस्कार में परिवर्तित करके माननीय प्रधानमंत्री जी का जो स्वच्छ भारत मिशन है, उसको सफल करने में सबसे पहला योगदान किसी शहर का था तो वह हमारे शहर का था. (मेजों की थपथपाहट)..परन्तु यह बात सही है.
अध्यक्ष महोदय, यह घटना हुई है और बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. मेरे लिए तो बहुत आसान था. मैं यह कह देता कि हमने पैसा दे दिया नगर निगम को, नगर निगम काम करे. प्रभारी मंत्री, मुख्यमंत्री जी हैं, वह इसकी समीक्षा करें. मुझे क्या करना, परन्तु अध्यक्ष महोदय, इंदौर की जनता ने मुझ पर प्यार लुटाया है. मैं एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, चार नहीं, नौ चुनाव इंदौर में लड़ा हूं और नौ के नौ चुनाव भारी वोटों से जीता हूं. (मेजों की थपथपाहट)..यह इंदौर की जनता का मेरे प्रति स्नेह है और इसलिए कर्तव्यबोध के कारण, मैं 29 तारीख से 2 तारीख तक के लिए बाहर था, मैं दिल्ली पहुंचा, दिल्ली के मथुरा जा रहा था, रास्ते में फोन आया कि इस प्रकार की घटना हो गई है. मैंने तत्काल, परिवार भी मेरा साथ में था, मैंने सोचा कि क्या करना चाहिए, इतने में फिर से पार्षद, महापौर महोदय सबका फोन आया. मैंने गाड़ी पलटाई और मैंने कहा कि चलो, एयरपोर्ट चलो. शाम को एयरपोर्ट आया, टिकिट किसी में भी नहीं थे. मैंने बहुत रिक्वेस्ट किया तो एक टिकिट मुझे 29 तारीख को मिली और मैं सीधा इंदौर पहुंचा. परिवार के लोग दिल्ली में ही रह गये. हम सब सीधे, उसके पहले मैंने संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े जी को फोन कर दिया था कि ऐसी ऐसी प्राब्लम है. आप जरा देख लीजिए, जब मैं गया तो वहां स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, महापौर जी, कमिश्नर साहब, और पार्षद, काफी टीम खड़ी हुई थी. पूरा वर्मा हॉस्पिटल मरीजों से भरा पड़ा था. सारे बिस्तर फुल थे. टेबल पर भी लोग लेटे हुए थे, जहां वेटिंग रूम है उसमें लोग लेटे हुए थे. हमने तत्काल जितने भी आसपास के हॉस्पिटल हैं, सबसे प्रयास किये और रात भर में 200-250 लोगों को प्राइवेट हास्पिटल में भर्ती कराया. हर हॉस्पिटल के अंदर हमने एक-एक पार्षद और एक-एक कार्यकर्ता की ड्यूटी लगाई. हमारे नगर अध्यक्ष आ गये. मैंने उनसे भी कहा कि एक-एक पदाधिकारी को सब हॉस्पिटल में भेज दीजिए. रात भर हम सब वहां पर बैठे रहे. कुछ हॉस्पिटल मान नहीं रहे थे. हमने कहा कि आप चिंता मत करो, पेमेंट हम करेंगे. इतनी देर में मुख्यमंत्री जी का संदेश आ गया कि सरकार इनका इलाज कराएगी. लगभग 24-25 हॉस्पिटल में एक ही रात में सब हॉस्पिटल में मरीजों को भर्ती कराया. रात भर हम सब हॉस्पिटल में घूमते रहे. सुबह उसी दिन 4-5 लोगों की दुखद मृत्यु हो गई थी. बस्ती में गये. बस्ती बहुत पुरानी है. 80-90 साल पुरानी है और एक तरीके से मुम्बई की जो धारावी है, उसका छोटा स्वरूप है.
हर दृष्टि से वहां थोड़ा से ऐसे अशिक्षित लोग रहते हैं जहां पर नगर निगम को थोड़ा सा काम करना मुश्किल होता है नगर निगम के कर्मचारियों को भी. इसलिये नगर निगम के कर्मचारी प्रापर ठीक तरीके से वहां पर काम नहीं कर पाते थे. मुझे यह कहते हुए गर्व है कि इस घटना के बाद माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर हमारे मंत्रालय के सारे अधिकारी, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, सबने मिलकर वहां पर संयुक्त प्रयास किये. मैं एक बात की और तारीफ करूंगा कि इतनी बड़ी घटना हुई वहां के स्थानीय कांग्रेस के जो लोग थे वहां का कांग्रेस का उम्मीदवार था वह स्वयं भी हमारे साथ में खड़े होकर लोगों की तीन चार दिन तक सेवा करते रहे. मैं भी वहां पर कुर्सी लगाकर के बैठा रहा रात भर और दिन भर. चार पांच एम्बलेंस लगाई जो बीमार हो रहा था उनको हम हॉस्पीटल में भर्ती कर रहे थे, उनका इलाज करवा रहे थे. दो ट्रक नारियल का पानी मंगवाया था सब हॉस्पीटलों में हमने बंटवाये क्योंकि हॉस्पीटल में इतनी सारी सुविधाएं थी नहीं. अचानक सारे हॉस्पीटल भर गये. जिसको जो हॉस्पीटल को जरूरत थी वह भी हमने पूरी की. इलाज अच्छे से अच्छा हो इसकी कोशिश की. फिर भी हम 22 लोगों की जान बचाने से नहीं रोक पाये. यह विवाद का विषय है. 35 की मृत्यु हुई है या 22 की इसमें आयोग का चूंकि आपने बता ही दिया. आयोग की ट्रम्स एंड कंडीशन में मरने वालों की संख्या एवं मरने वालों के कारण पूछे इसलिये उस पर मैं विस्तार से नहीं जाऊंगा. मुझे भी आयोग की ट्रम्स एंड कंडीशन है उस पर बंध के भाषण देना है इसलिये मैं कुछ बातें जरूर बोलना चाहूंगा. मेरे लिये पीड़ा की बात यह है कि मैं अपने विधान सभा क्षेत्र के लोगों को बेहद प्यार करता हूं. इसमें जिन लोगों की मृत्यु हुई है आधे से ज्यादा हमारे कार्यकर्ताओं के परिवार हैं. निश्चित रूप से हमारे लिये तो बहुत दर्द की बात थी. हम चार पांच दिन तक सेवा भी कर रहे थे. इसमें अचानक से राजनीति का प्रवेश हुआ, वह सकारात्मक स्वरूप से हुआ. जो भी राजनेता आये वहां पर उसमें माननीय नेता प्रतिपक्ष भी आ रहे हैं इसकी मुझको सूचना मिली. मैंने उनसे फोन पर बात की. मैंने कहा कि आप आ रहे हैं बोले हां. पहले कुछ लोग वहां पर राजनीति करना चाहते थे. डॉक्टर्स को डिस्ट्रब किया वह कुछ बाहर के लोग थे. महिला कांग्रेस से आये कोई डॉक्टर को कह रहे हैं कि तुम पानी दे रहे हो, मरीजों को मार रहे हो. डॉक्टर घबरा गये मैंने कहा कि आप चिन्ता मत करिये वहां पर महिला पुलिस लगाई हमने जैसे तैसे सर्विस चलती रही. लगभग डेढ़ सौ सामाजिक कार्यकर्ता, डेढ़ सौ डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टॉफ एक एक घर जाकर के सर्वे कर रहा था. कोई राजनीति नहीं चार दिन 2 तारीख तक. आदरणीय नेता प्रतिपक्ष जी आये आप भी आईये वहां पर आप भीड़ लेकर के मत आना वहां पर बहुत सारी टीम काम कर रही है. घर घर सर्वे हो रहा है. वह आये चार पांच लोगों के साथ घर घर लोगों के आये और मिलकर के आये उसके बाद लगातार मुझे समझ में नहीं आया कि जब इतनी बड़ी घटना जहां पर हुई है, जहां पर इतने लोग मर रहे हैं. वहां राजनीतिक दल के लोग प्रदर्शन करने आ रहे हैं. जिनको मरहम की जरूरत है वहां राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं, थोड़ा सा मुझे बुरा लगा. किसी को भी बुरा लगेगा जहां जहां पर 20 लोगों की मौत हो गई वहां पर हम जिन्दाबाद-मुर्दाबाद करें तो जरूर अशोभनीय था. हमने बोला भी यह ठीक नहीं है. आप आकर के सहयोग करिये. अगर आपको प्रदर्शन करना है तो जाकर के कलेक्टर-कमिश्नर पर करिये, धरना दीजिये, जो करना है वह करिये. भागीरथपुरा घटना स्थल पर आकर धरना प्रदर्शन करना मेरे ख्याल से यह उचित नहीं लगा. यह शायद अच्छा काम नहीं था इसकी हमने निन्दा भी की और उसको लेकर के हमारी हॉट टॉक भी हुई है. वहीं से थोड़ी सी कड़वाहट हुई. मैं मानकर चलता हूं कि मैंने उस दिन भी कहा था और आज भी कह रहा हूं जब हम कहते हैं कि डबल इंजन की सरकार है, राज्य सरकार हमारी है, केन्द्र सरकार हमारी है. यदि हमारे अधिकारियों की भी गलती है तो जिम्मेदारी हमारी है, हम उस जिम्मेदारी को वहन करते हैं. जिन्होंने लापरवाही की है मुख्यमंत्री जी ने तत्काल उनके खिलाफ कार्यवाही की है. कमिश्नर को हटाया है, अतिरिक्त कमिश्नर को निलंबित किया, पीएचई के सीनियर अधिकारियों को निलंबित किया, वहां के जोनल अधिकारी को निलंबित किया. दो चार लोगों को नौकरी से हटा दिया. यह सब कार्य हमने तत्काल किये, जो दोषी थे उनके खिलाफ कार्यवाही की.
अध्यक्ष महोदय, इंदौर मेरी रग-रग में बसा है. मैं इसको इंदौर शहर नहीं मानता हूं. मैं अपनी मां के समान उस शहर को प्यार करता हूं. जब कोई इंदौर की बदनामी करता है, तो अंदर तक चोट पहुंचती हैं. ये आरोप लगाया गया कि इंदौर ने जो प्रथम स्थान प्राप्त किया है, सफाई में वह गलत सर्टिफिकेट देकर प्रमाण पत्र किया है. ये कैलाश विजयवर्गीय, या भारतीय जनता पार्टी की बदनामी नहीं है अध्यक्ष महोदय. हम रात को जब सोते हैं, तो हमारी सफाईकर्मी महिलाएं रात को 2 बजे झाड़ू लेकर निकलती है, जब सारी दुनिया सोती है, तब इंदौर का सफाईकर्मी इंदौर शहर को साफ करता है. सुबह 7 बजे हर घर पर कचरे की गाड़ी पहुंचती है, गाना बजाते हुए कि मेरा स्वच्छ शहर हमें इस पर अभिमान है, ऐसा गाना बजता है. हर घर की महिला, घर के अंदर इंदौर पहला शहर है, जहां पर हर घर के अंदर गार्बेज को सेपरेट करने की व्यवस्था है. हर घर में लोग करते हैं, गीला कचरा अलग, सूखा कचरा अलग.
अध्यक्ष महोदय – संसदीय कार्यमंत्री जी, मेरा अनुरोध होगा, कुल मिलाकर कि अभी ग्राह्य किया जाए या नहीं किया जाए, इस पर ही बात हो तो शासन की मंशा क्या है, उस तक ही हम इसको सीमित रहे.
श्री कैलाश विजयवर्गीय – अध्यक्ष महोदय, इसकी पृष्ठभूमि बताना बहुत ज्यादा जरूरी है. क्योंकि इस पर इतनी चर्चा हुई कि कहीं न कहीं शहर की प्रतिष्ठा पर ठेस लगी है और मैं इस बात को लेकर अंदर से द्रवित हूं, क्योंकि शहर को बनाने में हमने बहुत खून पसीना लगाया है, ये सब साक्षी है. पर इस शहर के ऊपर जो दाग लगा है, उससे हम दुखी है और लोगों ने जानबूझकर लगाने की कोशिश की है. जिन सफाईकर्मियों के ऊपर आरोप लगाया वे रात को 2 बजे निकलते हैं, वे महिलाएं जो घर के अंदर कचरा सेपरेट करके, गार्बेज सेपरेट करके रोज सुबह 8-9 बजे डालती है ये शहर वैसे ही स्वचछ नहीं है कि नगर निगम के कारण है, या सरकार के कारण है, ये शहर अगर नंबर वन है तो इंदौर की जनता के कारण है, क्योंकि वह स्वच्छता को संस्कार मानती है.
श्री भंवर सिंह शेखावत – माननीय अध्यक्ष जी, माननीय मंत्री जी इतनी तारीफों के पुल बांध रहे हैं, जैसे इंदौर शहर तो सोने का शहर है, फिर लोगों का मौत हो कैसे गई और आप तो वहीं हो बरसों से, 20 साल से आप वहीं हो.
श्री कैलाश विजयवर्गीय – मैं आता हूं वहां पर, आप भी हो, आप मेरे साथ डिप्टी मेयर थे, जब मैं स्थायी समिति का अध्यक्ष था.
श्री भंवर सिंह शेखावत – थे न, मैं डिप्टी मेयर था, आपके साथ में, लेकिन क्या ये तारीफ करने के लिए सदन का सत्र बुलाया क्या.
श्री कैलाश विजयवर्गीय – फिर क्या गाली देने के लिए है क्या.
श्री भंवर सिंह शेखावत – गाली तो सुनना पड़ेगी प्यारे, गाली भी सुनना पड़ेगी जनता की.
अध्यक्ष महोदय – भंवर सिंह जी बैठिए.
श्री कैलाश विजयवर्गीय – अध्यक्ष महोदय, मैं यह कह रहा था कि सियासत करना बुरी बात नहीं है. पर सियासत कहां करना चाहिए, ये जरूर तय करना चाहिए. हम भी सियासत करते हैं, जिंदगी हो गई सियायत करते करते, पर कहां सियासत करना चाहिए और कहां मल्हम की जरूरत है. भागीरथपुरा को सहानुभूति की जरूरत थी, भागीरथपुरा को मल्हम की जरूरत थी. मुझे कहते हुए गर्व है कि हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी ने, 28 तारीख को ध्यान में आया और 31 तारीख को वे स्वयं आए और आने के बाद कह दिया जिस प्रकार की, जिसको जो चिकित्सा सुविधा देना है, हमने बॉम्बे हॉस्पिटल, जो अच्छे से अच्छे हास्पिटल थे, हमने वहां पर सभी का इलाज करवाया.
श्री महेश परमार – भागीरथपुरा गए थे क्या मुख्यमंत्री जी?
श्री कैलाश विजयवर्गीय – अब इनको पता ही नहीं मैं वहां से हटा ही नहीं. मैं उनका प्रतिनिधि हूं, मैं वहीं बैठा रहा रात दिन, मैं तीन रात तक सोया ही नहीं, वहीं था मैं, कुर्सी लगाकर बैठा रहा वहां पर.
अध्यक्ष महोदय – बैठ जाइए.
श्री कैलाश विजयवर्गीय – अध्यक्ष जी, मैं निवेदन करना चाहता था कि घटना हुई है, हम उसको स्वीकार करते हैं, घटना लापरवाही के कारण हुई है, ये भी हम स्वीकार करते हैं. जिन्होंने लापरवाही की है, मुख्यमंत्री जी ने उनको दंडित किया और इससे हमने सबक भी लिया है. हम सिर्फ भागीरथपुरा ही नहीं, पूरा इंदौर ही नहीं, पूरे मध्यप्रदेश में जो पानी दूषित है, उसके लिए हमने कार्ययोजना बनाई है. भागीरथपुरा में जो हुआ है, वह मैं पहले ही बता चुका हूं, वहां हमने कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही कि है और एनजीटी उसमें भी प्रकरण लगा है और रशीद नूर और उसमें भी हमें कुछ मार्गदर्शन मिला है, हम उस मार्गदर्शन के अनुसार ही काम कर रहे हैं. अध्यक्ष जी, माननीय नेता प्रतिपक्ष ने उसमें लिखा है कि मौत किस कारण से हुई, कारण तो डायरिया है और इस कारण 22 लोगों की उसमें मृत्यु हुई है और उनको 44 लाख रुपए का मुआवजा भी दे दिया है. माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि और हम मुआवजा बढ़ाएंगे. यह पहले ही उन्होंने कह दिया था और घोषणा कर दी थी, जो मुख्यमंत्री चाहेंगे वह मुआवजा बढ़ायेंगे, उसके अलावा जनता ने भी वहां पर मदद की है, मुझे कहते हुए गर्व है कि हमारे पार्टी के अध्यक्ष श्री अमित मिश्रा जी और सबने मिलकर अग्रवाल समाज में प्रत्येक छ: हजार घर के अंदर आटा वितरण किया, दाल वितरण किया, शक्कर वितरित की और भी अन्य सामग्रियां हर घर में दी है, क्योंकि वहां पर व्यापार और व्यवसाय सबके बंद हो गये थे और इसलिए बहुत जरूरी था, क्योंकि वहां रोज खाने और कमाने वाले लोग थे, सबने कहा कि हम उनकी मदद करेंगे.
अध्यक्ष महोदय, आज भी वहां पर हमारे कार्यकर्ता उनकी सेवा कर रहे हैं. यह बात सही है कि हमारे पास संसाधन थे, हमारे पास पैसा था, राज्य शासन ने पैसा नगर निगम को दिया और समय पर काम नहीं हुआ, उसके कारण यह घटना घटी थी, मैं इसको स्वीकार करता हूं और इसीलिये अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही भी हमने सुनिश्चित की है.
अध्यक्ष महोदय, अब चूंकि इस पर पांच रिट लगी थी, उसमें नगर निगम की भूमिका नहीं है, राज्य सरकार की भूमिका नहीं है, जनता के लोगों ने रिट लगाई थी, हाईकोर्ट की डबल बैंच ने उस पर न्यायाधिकरण को जिम्मेदारी दी है और उसकी टर्म एंड कंडीशंस भी तय की हैं, इसलिए मैं मर्यादा में यह बात बोल रहा हूं, उनकी टर्म एंड कंडीशन का भी ध्यान रखते हुए, मैं ऐसी कोई बात नहीं बोलूंगा कि जिसमें न्यायपालिका के जो निर्देश हों, उसका उल्लंघन हो, पर मैं सिर्फ इतना बताना चाहूंता हूं कि हमने उसके बाद इंदौर नगर की जितनी भी टंकियां हैं, उनको साफ करवाया है, जितने भी लीकेज हैं, उन सभी को सुधारने का काम किया है और पूरे मध्यप्रदेश के अंदर माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देश पर एक कंट्रोल रूम बनाया है और पूरे प्रदेश में जहां से भी गंदे पानी की शिकायत आ रही है, उस पर तत्काल कार्यवाही हो इसके लिये हम लोगों ने कार्य योजना बनाई है.
अध्यक्ष महोदय, हमने वर्तमान में जो काम किया है, अमृत वन और अमृत टू के माध्यम से उसमें हम लगभग 2 हजार 261 करोड़ के काम कर रहे हैं. हमने अभी 13 किलोमीटर की लाईन भागीरथपुरा में बिछा दी है, 16 किलोमीटर की ओर बिछा रहे हैं, जो गलती हो गई है, उसकी पुनर्रावृत्ति न हो, इसकी हम चिंता कर रहे हैं, अभी वहां पर पानी नहीं पहुंच रहा है, 55 टेंकर लगा रखे हैं, नर्मदा का पानी हम शुद्ध पहुंचा रहे हैं और अभी भी हमारी स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके घर-घर जाकर उनके स्वास्थ्य की चिंता कर रही है, प्रतिदिन पानी चैक हो रहा है, जो लोग बीमार हुए थे, उनका भी परीक्षण अभी भी लगातार जारी है. अध्यक्ष महोदय, वहां हमारी संजीवनी क्लीनिक है, वहां पर 24 X 7 डॉक्टर्स की टीम काम कर रही हैं और घर-घर जाकर वहां पर उनका परीक्षण भी किया जा रहा है.
अध्यक्ष महोदय, मैं सदन को यह भी बताना चाहता हूं कि सिर्फ भागीरथपुरा नहीं इंदौर में भी हम लगभग पूरी ही जल व्यवस्था अमृत वन और अमृत टू के माध्यम से लगभग 6 हजार करोड़ रूपये की हमारी पाईप लाईन है, वह हम सब दूर बिछा रहे है और बिछाकर नर्मदा का चौथा चरण आयेगा और चौथा चरण जब आयेगा तो हमारे आने वाले बीस साल की पानी की समस्या का भी निराकरण होगा. अध्यक्ष महोदय, हम इंदौर वासी हैं, हम स्वाभिमानी है और हमें कैसे गिरकर उठा जाता है, यह आता है. हम गिरकर उठना जानते हैं, मैं इतना कहना चाहता हूं कि निश्चित रूप से यह हमारे शहर के ऊपर एक दाग लगा है और इस दाग से हम अंदर तक आहत हैं और हम यह कोशिश करेंगे कि हम इस दाग से उभरे और फिर से इंदौर को नंबर वन बनाये. इंदौर नंबर वन था, इंदौर नंबर वन है और इंदौर नंबर वन रहेगा, अध्यक्ष महोदय, यह मैं आपको जरूर आश्वास्त कराना चाहूंगा.
(मेजों की थपथपाहट)
अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि आज माननीय नेताप्रतिपक्ष जी ने जो स्थगन लगाया है, मैं आश्वास्त करना चाहता हूं उनको और पूरे सदन को कि यह हमारे लिये एक लेसन है, यह हमारे लिये एक सबक है, हम हमारे जख्म को सहन कर रहे हैं, हम जख्मों की नुमाईश नहीं कर रहे हैं, हम उस घाव को भरने की कोशिश कर रहे हैं और हमें यह विश्वास कि यह जो घटना हुई है, जो एक दाग इंदौर के ऊपर लगा है हम उसको धो डालेंगे. इंदौर फिर से एक बार उठकर उभरेगा और फिर इंदौर कहेगा कि हां हम इंदौरी हैं, हमें अपने शहर पर गर्व है अध्यक्ष महोदय, इतना मैं जरूर आपको आश्वस्त करना चाहता हूं. अध्यक्ष महोदय, त्रासदी कभी भी हो सकती है, कहीं भी हो सकती है पर हल्की राजनीति से बचना चाहिये. मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि राजनीति करने के बहुत सारे स्थान होते हैं, वहां राजनीति करें, पर कम से कम ऐसे समय जहां पर मैं कांग्रेस के मित्रों की इस बात की भी प्रशंसा करना चाहता हूं वहां पर उन्होंने जो मृतक परिवार हैं उनकी आर्थिक सहायता की है, हम भी कर रहे हैं, आगे और भी करेंगे यहां तक तो ठीक है पर जो वहां पर काम करने मे डिस्टर्ब हुआ, वह नहीं करना चाहिये था, इतना ही मैं कहना चाहता हूं. अध्यक्ष महोदय, सरकार सजग है, इंदौर सजग है, इंदौर के नागरिक सजग हैं, इंदौर की जनता सजग हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं फिर इसको रिपीट कर रहा हूं ''हमें गिरकर उठना आता है'' हम सीना चौड़ा करके चलेंगे और इंदौर को फिर से नंबर वन बनायेंगे इतना ही मैं निवेदन करते हुये आपसे आग्रह करना चाहता हूं अध्यक्ष महोदय कि इस स्थगन को ग्राह्ता की कोई आवश्यकता नहीं है.
अध्यक्ष महोदय-- श्री उमंग सिंघार जी.
डॉ. सीतासरन शर्मा-- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्वाइंट ऑफ ऑर्डर है. अध्यक्ष महोदय, सचमुच यह एक त्रासदी थी इसलिये शासन इसकी चिंता कर रहा है, दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी. अध्यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष के साथियों की चिंता भी वाजिब है, परंतु कुछ विषयों की ओर आपका ध्यान दिलाना चाहता हूं. सवाल सिर्फ नियमों का नहीं है, सवाल व्यवस्था का भी है. अध्यक्ष महोदय, आपने कल भी और आज भी इस बात को प्वाइंट आउट किया कि यह मामला सब ज्यूडिश है.
श्री भंवर सिंह शेखावत-- कोई सबज्यूडिश नहीं है, जब सरकार जांच नहीं कर रही थी ..(व्यवधान).. जब सरकार जांच नहीं कर रही थी तब न्यायालय जांच ..(व्यवधान).. कोई मामला सबज्यूडिश नहीं है. ..(व्यवधान)..
अध्यक्ष महोदय-- भंवर सिंह जी, जब आपका नंबर आये तब आप बताना क्यों ग्राहा किया जाये.
डॉ. सीतासरण शर्मा-- अध्यक्ष महोदय, रिट पिटीशन पर संज्ञान लिया है. ..(व्यवधान)..
श्री विश्वास सारंग-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कम से कम प्वाइंट ऑफ ऑर्डर के बीच में तो मत बोलिये, उनको प्वाइंट ऑफ ऑर्डर तो पूरा रखने दीजिये.
श्री भंवर सिंह शेखावत-- अच्छा भैया अच्छा, यह सीखना पड़ेगा तुमसे.
डॉ. सीतासरण शर्मा-- अध्यक्ष महोदय, रिट पिटीशन 5 दाखिल हुई हैं और उन पर संज्ञान लेकर कुछ आर्डर्स किये हैं, उन पर अभी बाद में आऊंगा. पहले नियम की बात फिर इसके परिणाम की बात. अध्यक्ष महोदय, आपने भी प्वाइंट आउट किया था. हमारे नियमों में स्पष्ट लिखा है, नियम 55(7) कि जो मामला, अच्छा उसमें अर्द्धन्यायिक भी लिखा है, सिर्फ न्यायिक ही नहीं, उसमें अर्द्धन्यायिक भी है.
श्री भंवर सिंह शेखावत-- क्यों जनता की आवाज दबा रहे हो.
डॉ. सीतासरण शर्मा-- मुझे बोल लेने दो आप. जनता के लिये ही बात कर रहे हैं, मैं आपको आखिरी में बताऊंगा. साधारणतया किसी ऐसे स्थगन प्रस्ताव को प्रस्तुत करने की अनुज्ञा नहीं दी जाती जो किसी ऐसे विषय पर चर्चा उठाने के लिये हो जो न्यायिक या अर्द्धन्यायिक कृत्य करने वाले सिर्फ इस पर ही नहीं है. कॉल एण्ड शखधर ने भी इसको प्वाइंट आउट किया है. साधारणतया किसी ऐसे स्थगन प्रस्ताव को प्रस्तुत करने की अनुज्ञा नहीं दी जाती जो किसी ऐसे विषय पर चर्चा उठाने के लिये हो जो न्यायिक या अर्द्धन्यायिक कृत्य करने वाले किसी संविधिक न्यायाधिकरण या....
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे-- आप नियम की बात करें. कृपया बतायें, हम उस प्वाइंट ऑफ ऑर्डर का रिफरेंस लेना चाहेंगे. आप कृपया नियम बता दें फिर आप अपनी बात कहिये. प्वाइंट ऑफ आर्डर कहां से है. अध्यक्ष महोदय, प्वाइंट ऑफ आर्डर कहां से है.
अध्यक्ष महोदय-- मैंने उनको अनुमति दी है.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे-- उत्पन्न कहां से हो रहा है, यह तो बताना ही पड़ेगा नहीं तो प्वाइंट ऑफ ऑर्डर कहां से है.
डॉ. सीतासरण शर्मा-- प्वाइंट ऑफ ऑर्डर का नियम पढ़ लो पहले आप. ..(व्यवधान)..
श्री भंवर सिंह शेखावत-- माननीय पंडित जी, जब कैलाश विजयवर्गीय जी बोलने खड़े हुये थे ..(व्यवधान).. जब मंत्री जी जवाब दे रहे थे तब तो नहीं उठाया इन्होंने. अध्यक्ष महोदय, आपने जैसे ही प्रतिपक्ष के नेता को बोलने का मौका दिया तो प्वाइंट ऑफ आर्डर आ गया. ..(व्यवधान)..
(..व्यवधान..)
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - प्वाइंट आफ आर्डर कहां से है.
(..व्यवधान..)
श्री विश्वास सारंग - आप अध्यक्ष की व्यवस्था का पालन करेंगे या नहीं करोगे.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - नहीं करेंगे.
श्री विश्वास सारंग - क्यों नहीं करोगे.माननीय अध्यक्ष महोदय, क्या बोल रहे हैं ये.अध्यक्षीय व्यवस्था का पालन नहीं करेंगे.
अध्यक्ष महोदय - हेमन्त जी.
(..व्यवधान..)
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - अध्यक्षीय व्यवस्था का पालन 100 परसेंट करेंगे. आपका नहीं करेंगे. प्वाइंट आफ आर्डर कहां से है.
डॉ.सीतासरन शर्मा - बताता हूं. सुनो तो.
श्री राजेन्द्र कुमार सिंह - एक निवेदन है प्वाइंट आफ आर्डर इन्होंने उठाया. कौल शकधर का उद्धरण दिया. उसमें स्पष्ट लिखा है कि सामान्यत: नहीं उठाया जाता. अनिवार्यता नहीं है. सामान्यत: शब्द देखिये आप.
डॉ.सीतासरन शर्मा - हमारे नियमों में भी है तथापि शब्द है हमारे नियमों में भी तथापि शब्द है इसीलिये माननीय अध्यक्ष महोदय ने अनुमति दी. मुझे बोलने तो दीजिये. पहले उनकी बात का जवाब दे दें. प्वाइंट आफ आर्डर क्या होता है. नियम 267 कृपा करके पढ़ लें या मैं पढ़कर सुना दूं.
अध्यक्ष महोदय - सीतासरन जी आप जल्दी करो.
डॉ.सीतासरन शर्मा - अध्यक्ष महोदय, बोलने नहीं देते मेरे को. बहुत गंभीर विषय पर चर्चा की बात है. अब न्यायिक विषय सब ज्युडिश है मामला. एक और विषय इसमें आज और नया जुड़ा है. स्थगन प्रस्ताव 55 का नियम 5 अभी 7 की बात की थी मैंने उसमें तथापि लिखा था. साधारणत: लिखा था इसीलिये वरिष्ठ सदस्य राजेन्द्र सिंह जी ने उसको प्वाइंट आउट किया. इसमें कोई परन्तुक नहीं है. प्रस्ताव में उस विषय पर फिर चर्चा नहीं की जायेगी जिस पर उस सत्र में चर्चा की जा चुकी हो. कल चर्चा हुई. प्रश्न पर हुई. अध्यक्ष जी ने कमेंट करने के बाद अलाउ किया विशेष परिस्थितियों में,इसके बाद मैं पूर्व उदाहरण पर आता हूं. अध्यक्ष महोदय, पहले तो मैं टर्म आफ रिफ्रेंश पर आता हूं और यह इसलिये जरूरी है. एक्स्क्लूजिव टर्म्स आफ रिफ्रेंश हैं इसमें. जस्टिस गुप्ता के वन मैन कमीशन में माननीय उच्च न्यायालय ने यह निर्देश दिये हैं. अब टर्म्स आफ कंडीशन में माननीय प्रतिपक्ष के नेता ने एक विषय उठा दिया था कंपनसेशन को लेकर माननीय स्थानीय शासन मंत्री जी ने भी उस पर बात की. देखिये,कितना इंटरफरेंस हो जाता है इन विषयों से- क्र.8 में है To identify and fix responsibility upon the officers,9 में है. Suggest guidelines for compensation to affected residents,particularly vulnerable sections.गाईड लाईन की भी बात की है. यदि हम यही बात कर लेते तो गाईड लाइन कहां जाती.यह स्थायी व्यवस्था कर रही है हाई कोर्ट हम उसको अस्थायी व्यवस्था में टेम्परेरी बदलना चाहते हैं. ईश्यूज जब फ्रेम किये उन्होंने तब भी उन्होंने लिखा जब प्राथमिक रूप से सरकार से कहा कि तुम तत्काल कुछ करो जो कि सरकार ने किया भी सरकार की बात पर नहीं जाऊंगा. Compensation of victims. यह शुरू में ईश्यूज दिये तब,पर जब वन मेन कमीशन बनाया तब उसमें उन्होंने लिखा कि Suggest guidelines for compensation इसको सिर्फ तत्काल कंपनसेशन तक नहीं रखा उसके आगे बढ़ाया और इसीलिये इन विषयों में दखल नहीं देना चाहिये.
अध्यक्ष महोदय - डाक्टर साहब मेरा आग्रह होगा कि अभी स्थगन पर चर्चा नहीं हो रही है. स्थगन ग्राह्य किया जाये या नहीं किया जाये इस पर चर्चा हो रही है तो उतना ही विषय रखें हम. भाषण तो पूरा जब ग्राह्य हो जायेगा उसके बाद भाषण होगा.
डॉ.सीतासरन शर्मा - अध्यक्ष महोदय, ग्राह्य क्यों नहीं करना चाहिये. टर्म्स आफ कंडीशन जो हैं यह एक्स्क्लूजिव हैं.
श्री सोहनलाल बाल्मीक - अध्यक्ष महोदय, जब आपने व्यवस्था एक बाद दे दी है तो ग्राह्य के बारे में दो शब्दों में बोल दें हां या नहीं कोर्ट कचहरी और परंपरा के अनुरूप जो बहुत सारे उदाहरण हमारे पास हैं वह सारे उल्लेख नेता प्रतिपक्ष ने भी पढ़ा है.
डॉ.सीतासरन शर्मा - अध्यक्ष महोदय, मैं टर्म्स आफ कंडीशन नहीं पढ़ता चूंकि कंपनसेशन की बात आई थी इसीलिये मैंने कंपनसेशन वाला प्वाइंट पढ़ा.
श्री सोहनलाल बाल्मीक - हमारे नेता प्रतिपक्ष ने बोला था. 2 लाख आप दे रहे थे जहां 4 लाख का प्रावधान है. सांप काटने में भी 4 लाख देते हैं.
डॉ.सीतासरन शर्मा - डॉ.राजेन्द्र शुक्ल जी 1985 में किसी काल में अध्यक्ष रहे हैं उसका मैं उल्लेख करना चाहता हूं उसको पढ़कर सुनाना चाहता हूं.
श्री सोहनलाल बाल्मीक - आप ग्राह्य के बारे में बोलें. जो बात है समय खराब इस सदन का न करें.
डॉ. सीतासरन शर्मा - क्या स्थगन प्रस्ताव को लिया जा सकता है ? इन सब बातों पर बारीकी से सोचने-विचारने पर, मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूँ कि मध्यप्रदेश विधान सभा प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम 55 के उपखंड (7) में यह प्रतिबंध है कि स्थगन प्रस्ताव ऐसे किसी विषय के संबंध में जो किसी जांच आयोग के विचाराधीन हो. यहां भी जांच आयोग है. यदि जांच आयोग के अधीन विचाराधीन हो, सभा में नहीं लाया जा सकता. स्थगन प्रस्ताव को किसी जांच आयेाग के पास विचाराधीन हो, उस पर सभा में नहीं लाया जा सकता.
श्री लखन घनघोरिया - आपने जांच आयोग कहां बनाया है ? जांच आयोग कहां बना है ?
श्री कैलाश विजयवर्गीय - आदरणीय लखन भाई, आयोग बन गया है, उसका काम चालू हो गया है, उन्होंने बुलाना भी चालू कर दिया है. आयोग चल रहा है.
अध्यक्ष महोदय - आयोग बन भी गया है, आयोग का कार्यालय भी बन गया है, आयोग का काम भी शुरू हो गया है.
डॉ. सीतासरन शर्मा - अध्यक्ष महोदय, इस लाईन पर मैं आपका ध्यान दिलाना चाहता हूँ. मेरे पास टर्म्स एण्ड कंडीशंस की सूची है. यह तत्कालीन अध्यक्ष जी द्वारा प्वाईंट आऊट किया गया था, टर्म्स एण्ड कंडीशंस की सूची है. अत: इस पर विचार करने के बाद यह जो स्थगन प्रस्ताव आया है, उसको मैं प्रस्तुत करने हेतु अपनी अनुमति नहीं देता हूँ. अध्यक्ष महोदय, मेरा सबमिशन है कि इन बातों को ध्यान में रखते हुए किसी प्रकार से न्यायिक प्रक्रिया में कोई इंटरफेरेंस न हो. मैं आखिरी बात और कहना चाहता हूँ. जो भी बातें यहां पर होती हैं. स्वाभाविक है, वह प्रेस में जाती हैं. यह नियम हमारे पुराने लोगों ने क्यों बनाया है ? यह नियम इसीलिये बनाया है. अभी भोपाल में सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत जी आए थे. जस्टिस श्री डी.वाई. चंद्रचूड़ जी ने बार-बार मीडिया ट्रायल्स पर न्यायिक प्रक्रियाओं में मीडिया ट्रायल्स पर चिन्ता व्यक्त की है. यह विषय भी मीडिया में जायेगा और एक तरह का मीडिया ट्रायल बन जायेगा, इसलिए इस स्थगन प्रस्ताव को अग्राह्य किया जाना चाहिए.
अध्यक्ष महोदय - श्री उमंग सिंघार जी.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - अध्यक्ष महोदय, मेरा प्वाइंट ऑफ ऑर्डर है.
अध्यक्ष महोदय - प्लीज, आप उमंग सिंघार जी को बोलने दीजिये.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - अध्यक्ष जी, मैं उमंग सिंघार जी से ही पूछ लेता हूँ कि बोल लूँ कि नहीं बोलूं.
अध्यक्ष महोदय - नेता प्रतिपक्ष जी बोल रहे हैं.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - अध्यक्ष महोदय, प्वाइंट ऑफ ऑर्डर पर तो बोलने दिया जाता है. यह नई व्यवस्था है, अब आपका आदेश मानना पड़ेगा.
अध्यक्ष महोदय - प्लीज आप बैठिये. समय की सीमा भी है. श्री उमंग सिंघार जी.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) - माननीय अध्यक्ष महोदय, गलती किसकी है, किसकी नहीं है, क्या हुआ ? उस बात पर बात नहीं हो रही है. सदन में बात हो या न हो, इस गंभीर विषय को लेकर पूरा सत्ता पक्ष लगा हुआ है कि इस पर चर्चा न हो. (शेम-शेम की आवाज) जिन परिवारों में उनके सदस्य नहीं रहे, जिनकी मृत्यु हो गई. उन परिवारों से जाकर पूछो कि चर्चा करना चाहते हैं कि नहीं. अगर उनके परिवार वाले मना कर दें, तो हम चर्चा नहीं करेंगे. (शेम-शेम की आवाज)
माननीय अध्यक्ष महोदय, 55 (क) के अन्दर स्पष्ट लिखा है कि अगर अध्यक्ष चाहे तो अगर न्याय कोई विचाराधीन है, तो उस पर भी चर्चा करा सकते हैं.
अध्यक्ष महोदय - आप तो विषय पर आएं. ग्राह्य क्यों किया जाये ? इस पर आएं.
श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय संसदीय मंत्री जी ने बात कही. आज बड़े गंभीर दिख रहे है, हमेशा गंभीर रहते हैं. उन्होंने सिस्टम की गलती स्वीकारी कि हां, हमारी गलती है, इस सिस्टम के कारण गलती हुई. आपने खुद ही स्वीकारा है कि टेण्डर लेट हुआ, इसलिए नहीं हुआ. आप अमृत योजना की बात कर रहे थे. तीन वर्षों में 2 हजार 156 करोड़ रुपये स्वीकृत किये गये, लेकिन उसका एक पैसा भी अभी तक इन्दौर के लिये खर्च नहीं हुआ. 27 करोड़ रुपये ठेकेदार को एडवांस में दे दिये गए. यह आपने दिनांक 20 फरवरी के मेरे प्रश्न के में जवाब दिया है. योजनाएं आपकी बन रही हैं, लेकिन दो-दो, तीन-तीन वर्ष, पांच वर्ष के बाद, इसलिए मुझे यह यहां पर बोलना जरूरी था. कि सरकार और सरकार के अधिकारी किस प्रकार से फाइल को सांप की तरह धीरे-धीरे रेंगकर चलाते हैं. पेपर प्लस वेट, जब तक फाइल पर वजन नहीं आयेगा, तब तक फाइल चलती नहीं है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, निश्चित तौर से मैं इस बात को मानता हूं कि इन विषयों पर राजनीति नहीं करनी चाहिए. हमारे कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ विधायक, मंत्री सज्जन भाई, महेश भाई, प्रताप जी वहां गए थे. उन्हें रोकने का प्रयास किया गया, हम लोग वहां झगड़ा करने नहीं गए थे, उन परिवारों का दु:ख दर्द पूछने गए थे कि आपको न्याय मिल रहा है कि नहीं, हम उन्हें भड़काने नहीं गए थे, हम केवल संवेदना प्रकट करने गए थे, इसमें कौन सी राजनीति है ?
माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात सच है कि कैलाश जी ने कहा कि मैं इंदौर का हूं, मुझे गर्व है, भाई साहब मुझे जानते ही हैं कि इंदौर में मेरा भी स्कूल, कॉलेज रहा है, मैं वहां कई साल रहा हूं, आज भी वहां घर है. मेरा इंदौर से उतना ही नाता, रिश्ता, प्यार है, जितना आपका है. लेकिन बात आती है कि इंदौर के अंदर इतने घोटाले क्यों हो रहे हैं ? मेरी एक RTI में नगर निगम ने जवाब दिया, मैंने उनसे पूछा था कि कितनी सीवरेज लाइनें डलीं, कितने करोड़ खर्च हुए, एक रात के अंदर 5 किलोमीटर की सीवरेज लाईन कागजों में डल गई, रुपये 1.5 करोड़ निकल जाते हैं फर्जी बिल के नाम पर. मीडिया ने भी इस बात को उठाया था. आंकड़ों को सरकार छुपाना चाहती है और इस बात पर माननीय उच्च न्यायालय ने भी संज्ञान लिया. माननीय उच्च न्यायालय, इंदौर ने टिप्पणी की आई वॉश (दिखावा). इनकी आंकड़ों की कलाबाजियां चल रही हैं, सिर्फ आई वॉश करो, यह माननीय उच्च न्यायालय की टिप्पणी है, माननीय उच्च न्यायालय ने ही टिप्पणी की है कि हेल्थ इमरजेंसी हो गई है, इंदौर के साथ, भागीरथपुरा के साथ, पूरे मध्यप्रदेश की यही स्थिति है.
अध्यक्ष महोदय क्यों हुई यह स्थिति कि माननीय उच्च न्यायालय को इसमें इंटरफेयर (हस्तक्षेप) करना पड़ रहा है, क्या सरकार सक्षम नहीं है ? क्या सरकार शुद्ध पेयजल नहीं दे सकती ? क्या यह सरकार का संवैधानिक दायित्व नहीं है ?
अध्यक्ष महोदय, मैं, समझता हूं कि यह मेरी आवाज़ नहीं, उन घरों की खामोशी है और यह भी आपको बताना चाहता हूं आप माननीय सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय की बात कर रहे थे, संविधान के अनुच्छेद 21 के अंदर स्पष्ट लिखा है कि हर नागरिक को जीवन का अधिकार है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सुभाष कुमार बनाम बिहार राज 1991, आंध्रप्रदेश पॉल्यूशन बोर्ड बनाम एम.वी.नायडू 1999 में स्पष्ट कहा है कि स्वच्छ पानी का अधिकार, जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है. माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कह दिया, आदेश कर दिये, रूलिंग दे दी तो आप पानी देकर कोई कृपा नहीं कर रहे हैं, यह आपका संवैधानिक दायित्व है.
अध्यक्ष महोदय, मैं, समझता हूं कि भागीरथपुरा की घटना एक हादसा नहीं है, यह उस भरोसे की मौत है जो जनता सरकार पर और प्रशासन पर भरोसा करती थी कि नल खोला, पानी भरा, बच्चों को, बुजुर्गों को दिया और वे दुबारा पानी ही नहीं पी पाये.
अध्यक्ष महोदय, मास्टर अव्यान साहू का जन्म उसके माता-पिता की 10 वर्षों की मन्नत के बाद हुआ था और उस बच्चे की मृत्यु हो गई. हम कैसे थाली में खाना खा सकते हैं इतनी सारी मौतें हो गईं और सरकार उसको हत्या नहीं मानती है कि यह हत्याएं सिस्टम के कारण हुई हैं. कैसे हम मंत्री पद पर सुशोभित रह सकते हैं. कैसे अधिकारी कुर्सियों पर सुशोभित रह सकते हैं. ट्रांसफर हो जाते हैं. कुछ अधिकारियों को आपने सस्पेंड किया. (XX) दूसरे अधिकारी, दूसरे वर्ग के थे तो उनका प्रमोशन कर दिया. यह आपकी सरकार का न्याय है. अधिकारियों में यह भेदभाव हो रहा है. जो अन्य वर्ग के थे, (XX) तो उनको उपकृत कर दिया गया.
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह थोड़ा आपत्तिजनक है. मुख्यमंत्री जी ने अधिकारी भेजकर जो जांच करवाई और अधिकारियों ने जो रिपोर्ट दी. वहां उनको हटाया गया. अधिकारी कोई जाति देखकर नहीं हटाये जाते हैं. मैं फिर यह गंभीरता से कहना चाहता हूं कि नेता प्रतिपक्ष का पद बहुत बड़ा पद होता है, संवैधानिक पद होता है, आप इस प्रकार की बात मत कीजिए, जो जबावदार व्यक्ति था उसको हटाया है, अब कौन जबावदार है उसकी जाति थोड़ी देखी जाती है इसलिए बिलकुल निष्पक्षता से अधिकारियों ने जो नाम दिये हैं उनके खिलाफ ही कार्यवाही हुई है.
अध्यक्ष महोदय-- ठीक है.
श्री उमंग सिंघार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हटाया न? अधिकारियों को हटाया, किसी को सस्पेंड किया. लेकिन सरकार ने, मुख्यमंत्री जी ने, न जबावदारी ली और न ही नगरीय प्रशासन मंत्री जी को हटाया.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं तो जबावदारी ले रहा हूं.
श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय, जब यह जबावदारी ले रहे हैं तो इस्तीफा देना चाहिए. आप समझते हो कि आपके हिसाब से आंकड़ा 20 है, लेकिन मीडिया के हिसाब से भागीरथपुरा के अंदर 35 लोगों की मृत्यु हुई.
अध्यक्ष महोदय-- वहीं तक सीमित रहें, स्थगन क्यों ग्राह्य किया गया है.
श्री उमंग सिंघार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह इसलिए भी आवश्यक है कि मैं समझता हूं कि भगवान की खातिर आप गिनती भले ही मत कीजिए, लेकिन आप लोग गिल्टी तो फील कीजिए. गिल्टी भी फील नहीं होती. जबावदारी तय नहीं होती.
अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि भागीरथपुरा के अलावा पूरे इंदौर के अंदर पानी की यही स्थिति है. जब मैं भागीरथपुरा गया दूसरे दिन मैंने इंदौर के अंदर वॉटर ऑडिट किया कई जगह गया. आप अमृत योजना की इंदौर की बात कर रहे हैं और यह स्थिति पूरे प्रदेश के अंदर है. खजराना में विधान सभा 5 में गया माइक्रोबियल टेस्ट की रिपोर्ट मैंने करवाई. (सदन में कागज दिखाते हुए).
अध्यक्ष महोदय, पहले तो मैं इस सदन को एक ओर जानकारी देना चाहता हूं कि यह रिपोर्ट टेस्ट करवाने में मुझे बड़ी मशक्कत करनी पड़ी. सरकार ने इनडायरेक्ट आदेश दे दिये कि कोई भी पानी के टेस्ट की रिपोर्ट नहीं होना चाहिए. इतनी घबराई हुई सरकार थी. क्यों घबराई? क्या आप मध्यप्रदेश की जनता को दूषित पानी पिलाना चाहते हैं. यह खजराना की रिपोर्ट है. (रिपोर्ट दिखाते हुए.) आप बोलेंगे तो मैं पटल पर रख दूंगा इसके अंदर अनगिनत बैक्टीरिया पाये गये. अब आदमी नहीं मरेगा तो क्या होगा? परिवार नहीं मरेगा तो क्या होगा? यही स्थिति राऊ, बूढ़ी टेकरी के अंदर, वार्ड क्रमांक 76 के अंदर तो यह स्थिति थी कि 2 हजार लोग मल्टी में रहते हैं. 2 हजार लोगों के लिए पानी की व्यवस्था नहीं है. वहीं सो रहे हैं और वहीं पर सीवेज का पानी आ रहा है. चौथी मंजिल पर पानी चढ़ाने के लिए कनेक्शन नहीं है. बाल्टियों से पानी ले जा रहे हैं. उन गरीबों परिवारों के बारे में आप सोचों और जब मैं गया तो उसके बाद नगर निगम ने वहां चार दिन के बाद पूरी सफाई करवाई तो 35 ट्रक कचारा उस कॉलोनी से उस बिल्डिंग के अंदर से निकला.
अध्यक्ष महोदय, यह वहां की रिपोर्ट है. विधान सभा क्रमांक 5 की, वार्ड क्रमांक 53 में भी यह स्थिति है वहां भी बेक्टीरिया मिले. विधान सभा 2 बर्फानी धाम वहां भी यही स्थिति है. आपकी पूर्व विधान सभा नगरीय प्रशासन मंत्री जी की कृष्ण बाग विधान सभा (2) वहां भी यही स्थिति है. क्या पूरे इंदौर को दूषित पानी पिलाया जा रहा है. क्या इंदौर में नया भागीरथपुरा बनेगा. यह प्रमाण हैं (कागज दिखाते हुए) वर्ष 2019 में पाल्यूशन कन्ट्रोल बोर्ड ने इंदौर से 60 सेंपल लिए थे. जिसमें से 59 सेंपल फेल हुए थे. सरकार ने वर्ष 2019 से आज तक संज्ञान नहीं लिया. जब आपको पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड चेतावनी दे रहा है तो आपने संज्ञान क्यों नहीं लिया. उसके बाद भी आप इंदौर की जनता को दूषित पानी पिला रहे हैं. हाई अलर्ट पर इंदौर को चेतावनी दी गई थी. वर्ष 2019 की बात है आज 5 साल होने को आए हैं. इसी कारण भागीरथपुरा की यह घटना घटी है. अगर सरकार पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट पर जागती तो यह घटना नहीं होती. यही बात हाईकोर्ट के अन्दर पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने कही है. राइट टू लाइफ राइट टू वाटर. यह अधिकार है. यदि हम इस पर सदन में स्थगन पर चर्चा नहीं करेंगे तो यह 230 विधायकों के लिए बड़ी लज्जा की बात होगी. हम गलती स्वीकार रहे हैं लेकिन लीपापोती करना चाहते हैं. चर्चा करेंगे तो इतिहास के पुराने पन्ने पलटेंगे. यदि आप भविष्य का इतिहास बनाना चाहते हैं तो आज बनाओ. गड़े हुए मुर्दे उखाड़कर राजनीति करना चाहते हैं तो अलग बात है. मैं समझता हूँ कि यह राज्य का एक प्रायोजित अपराध है. जवाबदार व्यक्तियों और अधिकारियों पर अभी तक आईपीसी की धारा के तहत कार्यवाही क्यों नहीं की गई. उनका सिर्फ ट्रांसफर कर दिया. छोटे लोगों को निलंबित करके बड़े अधिकारी बच जाते हैं. क्या विभाग के एसीएस की जवाबदारी नहीं है, क्या नगरीय प्रशासन विभाग के मंत्री की जवाबदारी नहीं है. क्या आप लोग मॉनिटरिंग नहीं करते हैं. टेंडर लेट हो रहे हैं इसकी जवाबदारी किसकी है. क्या सिर्फ महापौर की जवाबदारी है, कमिश्नर की जवाबदारी नहीं है. इंदौर के स्वच्छ कर्मियों की बात कर रहे थे. वे स्वच्छ कर्मी जो सुबह से उठकर शहर को स्वच्छ बनाते हैं. मैं मानता हूँ उनकी मेहनत को वे रात-दिन मेहनत करते हैं. लेकिन उनको दिशा-निर्देश देने वाले कौन हैं. वे स्वच्छ कर्मी फाइलों पर साइन नहीं करते हैं वे टेंडर पास नहीं करते हैं. वो तो इंदौर को साफ कर रहे हैं, इंदौर को अच्छा बना रहे हैं. लेकिन जो टेंडर मंजूर कर रहे हैं उनको आप स्वच्छ कर्मियों से जोड़ रहे हैं. स्वच्छ कर्मियों की गलती नहीं है.
अध्यक्ष महोदय, मौतों का आंकड़ा सरकार हर बार छुपा रही है. मेरे क्षेत्र धार का एक व्यक्ति भागीरथपुरा से अपने रिश्तेदार के यहां से वापिस धार आया और धार में उसकी मृत्यु हो गई. उसने वहां पर पानी पिया था. उसका नाम उन्होंने लिस्ट से उड़ा दिया. ऐसे कई लोग हैं जो भागीरथपुरा में रिश्तेदारी में आए थे और वापिस बाहर चले गए जिनकी बाद में मृत्यु हो गई वे आज रिकार्ड में नहीं हैं. क्या उनको लेकर सरकार गंभीर है. इन सब बातों को लेकर सरकार को सोचना चाहिए. मुख्यमंत्री जी क्लीन वॉटर अभियान चला रहे हैं. कहां चला रहे हैं, क्या योजना बनी है. हर कार्य योजना, प्लानिंग या एमओयू पोर्टल पर क्यों नहीं देना चाहते हैं. जांच रिपोर्ट आप पोर्टल पर क्यों नहीं देना चाहते हैं. सरकार क्यों डरती है. कुपोषण की कोई रिपोर्ट है तो पोर्टल पर आना चाहिए. अगर आपने एमओयू साइन किये हैं तो पोर्टल पर आना चाहिए. आपने कार्य योजना बनाई है तो पोर्टल पर आना चाहिए. योजना जनता के लिए बनी है. (XX) के लिए तो नहीं बनी है. अगर मोहन सरकार पारदर्शिता की बात करती है तो आप पोर्टल और वेबसाइट पर क्यों नहीं डालते हो.
माननीय अध्यक्ष महोदय, एक बात और कहना चाहता हूँ इनकी एक वार्ड क्रमांक 11 की पार्षद वाघेला भागीरथपुरा को लेकर उन्होंने दिनांक 29.02.2024 को लेटर लिखा था कि भागीरथपुरा टोपीलाल की दुकान, मुख्य चौहारा, शिव मंदिर में नर्मदा जल की लाईन बदलने को लेकर एक साल पहले लेटर लिखा कि एक बच्ची की मृत्यु हो गई. यह ऑफीशियल रिकॉर्ड है. नगर निगम का लेटर आपकी बीजेपी का पार्षद अगर वह बात उठा रहा है, वह कह रहा है कि यहां पर बच्ची मर गई है, उसके बावजूद सरकार नहीं जागी तो यह एक साल तक नहीं जागी तो क्या यह गंभीर विषय नहीं है. क्या जवाबदारी नहीं बनती. प्रभारी मंत्री मुख्यमंत्री की जवाबदारी नहीं बनती, नगरीय प्रशासन मंत्री की जवाबदारी नहीं बनती, क्या वहां के अधिकारियों की नहीं बनती, क्या इस पर चर्चा नहीं होना चाहिए, क्या दोबारा दूसरा भागीरथपुरा बनने का इंतजार होगा ? मैं समझता हूं कि इस पर सरकार को गंभीरता के साथ चर्चा करना चाहिए और यह हर व्यक्ति के न्याय की बात है. इंदौर के साथ जबलपुर में भी इसी प्रकार की बात है. जबलपुर में भी पानी की रिपोर्ट्स आई हैं. ग्वालियर में आपके चंबल में उस क्षेत्र में यह स्थिति है और अभी उज्जैन में होने वाला है. उज्जैन सबसे ज्यादा हाई अलर्ट पर है. आपको चाहिए तो मैं उज्जैन की रिपोर्ट दे दूंगा. 13 हजार करोड़ आपने बताया बजट में सिंहस्थ के लिए दिया है. अस्वच्छ पानी में साधु संतों से डुबकियां लगवाएंगे कि अच्छे पानी में, सरकार को पहले तय करना पड़ेगा. ऐसा नहीं है कि उसके नाम से पैसे का करप्शन हो जाए पहले भी सिंहस्थ में कई बार हो चुका है लेकिन मैं चाहता हूं कि हिन्दुओं के इतने बड़े सिंहस्थ पर्व पर हिन्दुओं के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए. शुद्ध पानी मिलना चाहिए. इस पर मैं समझता हूं कि इसकी ग्राह्यता पर चर्चा होना चाहिए.
अध्यक्ष महोदय -- अब एक-एक मिनट ग्राह्यता पर इतने में ही सीमित रखें. एक घण्टा पूरा हो गया है.
श्री लखन घनघोरिया (जबलपुर पूर्व) -- अध्यक्ष महोदय, विषय बेहद गंभीर है. भागीरथपुरा पर बड़े विस्तार से नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जी बोले हैं और संवेदनशीलता की जहां आम जनमानस अपेक्षा करता था वहां संवेदनशून्यता दिखी. माननीय मंत्रीजी अभी अपने कथन में कह रहे थे कि आरोप प्रत्यारोप की बात नहीं है. राजनीति, समाज सेवा के क्षेत्र में जब हम उतरते हैं तो यदि हम विपक्ष के लोग आईना नहीं दिखाएंगे तो कौन दिखाएगा. यदि अव्यवस्था है तो कौन बताएगा. जनता की आवाज है. जब जनता एकदम त्राहिमाम त्राहिमाम कर रही है तब यदि पत्रकारों को भी जवाब गलत दिया जाए तब विपक्ष का दायित्व क्या बनता है. संवेदनशून्यता भी समझ में आती है लेकिन निष्ठुरता नहीं. निष्ठुरता का स्थान कहीं नहीं होना चाहिए मानव समाज में और जानबूझकर यदि कोई निष्ठुरता की जा रही हो तब तो गलत है. हम सो रहे हों और कोई जगाए तो जाग जाएंगे लेकिन सोने का नाटक कर रहे हैं तब नहीं जाग सकते. अकेले भागीरथपुरा नहीं, जबलपुर के सारे सैंपल हैं आपको जबलपुर की स्थिति बता दें. नरसिंह वार्ड जहां हमारे महापौर का निवास है वहां का भी सैंपल हम आपको दे दें. यह सारे सैंपल हम साथ में लाए हैं (शीशियां दिखाते हुए) यह 13 जगह के सैंपल हैं जिसमें एच 2 एस वायल पोर्टेबल वाटर टेस्टिंग किट के साथ हमने यह लिए हैं. आपको यह बताना चाहता हूं कि यह वह किट है और जहां स्वच्छ पानी है इस किट को यदि जिस जगह से आप इसका सैंपल लें उसी जगह 24 घण्टे धूप में रख दें तो धूप के कारण यदि दूषित पानी है तो वह काला पड़ जाता है और पानी यदि दूषित नहीं है तो वह सफेद रहता है. मैं आपको पूरे सेम्पल की बाटलें दिखा सकता हूं. यह हर वार्ड की हैं. 13 वार्ड की यह बाटले हैं, 13 बाटल हैं और अध्यक्ष महोदय क्यों इस स्थगन प्रस्ताव को ग्राह्य करना चाहिये इसलिये यह ग्राह्य होना चाहिये क्योंकि यह पूरे प्रदेश की जनता के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ प्रश्न है.
माननीय अध्यक्ष महोदय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें जो जिम्मेदार लोग हैं, चाहे वह महापौर हो, चाहे माननीय मंत्री जी उनके विधानसभा क्षेत्र के यह पूरे के पूरे 13 सेंपल हैं और मैं जहां के सेंपल हैं उन वार्डं के नाम भी पढ़कर के बता दे रहा हूं. सेंपल यदि आप कहेंगे तो मैं पटल पर भी रख सकता हूं. अभी मैं वार्डों के नाम पढ़ रहा हूं. स्थिति यह है कि माननीय महापौर का वार्ड नरसिंह वार्ड, पश्चिम विधानसभा, पंसारी मोहल्ला जोगी मोहल्ला, पश्चिम विधानसभा, देवपुरी वार्ड पश्चिम विधानसभा, हाउसिंग कालोनी, पश्चिम विधानसभा, ..
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा इसमें व्यवस्था का प्रश्न है. अभी स्थगन पर भागीरथपुरा पर चर्चा है, जबलपुर का बता रहे हैं यदि जबलपुर पर चर्चा अलग से कर सकते हैं.
श्री लखन घनघोरिया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह दूषित पानी पूरे प्रदेश का विषय है . यह पूरे प्रदेश का आईना है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, अभी तो इस विषय को ग्राह्य करना है या नही करना है इस विषय पर चर्चा करें.
श्री उमंग सिंघार -- आप प्रदेश के मंत्री हो, आप सिर्फ भागीरथपुरा के मंत्री नहीं हो.आप पूरे प्रदेश के मंत्री हो. पूरे प्रदेश की बात हो रही है. काला पानी की सजा तो सुनी थी लेकिन काला पानी पिलाया जा रहा है.
अध्यक्ष महोदय-- लखन जी ईशारे में बात कह सकते हैं कि जो विषय है उसको ग्राह्य किया जाये या नहीं किया जाये यह मैंने पहले भी आग्रह किया है.आप साथ में कह सकते हैं कि यहां भी दिक्कत है. वह तो समझ में आता है.
श्री लखन घनघोरिया -- माननीय अध्यक्ष महोदय,विषय की गंभीरता है.मैं बता रहा हूं कि पूरे जबलपुर का बता रहा हूं और इंदौर की बात है जिस इंदौर ने पूरे देश ने स्वच्छ शहर माना है. वहां की यह स्थिति है.
अध्यक्ष महोदय- लखन जी स्थगन भागीरथपुरा पर है. उसी पर बोलें.
श्री लखन घनघोरिया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, भागीरथपुरा की स्थिति यह है तो क्या पूरे प्रदेश के लिये यह गंभीर विषय नहीं है. क्यों इसका ग्राह्य नहीं करना चाहिये, इस पर क्यों चर्चा नहीं करना चाहिये. यह पूरे प्रदेश और देश के लिये एक गंभीर विषय है और सरकार इससे क्यों बचना चाहती है और क्यों अपना जवाब गोल मोल देना चाहती है. हमारा सीधा सा अनुरोध है. दो लाईन में कहूंगा.
क़ातिल ने किस सफ़ाई से धोई है आस्तीन, उसको ख़बर नहीं कि लहू बोलता भी है।"
माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश की पब्लिक देख रही है. लहू बोल रहा है इसीलिये मेरा आपसे आग्रह है कि यह बहुत गंभीर विषय है. यह आपके पास में पूरी चीजें सामने हैं यदि आप बोलें तो मैं इन सैंम्पल को पटल पर रख दूं.
अध्यक्ष महोदय-- नहीं, रहने दीजिये. ठीक है धन्यवाद . जयवर्द्धन सिंह जी.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा पाईंट आफ आर्डर है. इसी विषय की ग्राहयता को लेकर के मैं एक मिनट का समय चाहूंगा.
अध्यक्ष महोदय- अभी जो बात हुई है, जो नाम मेरे सामने हैं, जयवर्द्धन जी का नाम मैंने पुकार लिया है, उनकी बात आ जाये.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे-- अध्यक्ष महोदय, पाईंट आफ आर्डर बीच में रेस किया जा सकता है यही नियम कहता है.
अध्यक्ष महोदय- एक मिनट, अभी जयवर्द्धन सिंह जी की बात पूरी हो जाने दो.
अध्यक्ष महोदय- मैं, इसके बाद मे आपका पाईंट आफ आर्डर सुन लूंगा.
श्री जयवर्द्धन सिंह (राघोगढ़)-- धन्यवाद माननीय अध्यक्ष महोदय. आपने मुझे बहुत ही संवेदनशील मामले में बोलने का मौका दिया है. माननीय अध्यक्ष महोदय, इस विषय को लेकर जो शुरूवात माननीय मंत्री जी ने की थी और उन्होंने अपने संबोधन में इस बात का वर्ग भी किया कि लगातार पूरे देश में इंदौर को 8 बार लगातार सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला है और यह हम सबके लिये बहुत गर्व की बात है. लेकिन यह बात भी सही है कि भागीरथपुरा कांड के बाद पूरे इंदौर का नाम कहीं न कहीं कलंकित भी हुआ है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, अगर हम इस बात पर विचार करें कि हर बार जब सबसे स्वच्छ शहर के पुरस्कार के लिये अधिकारी के साथ में इंदौर के महापौर और विभाग के मंत्री भी दिल्ली पहुंचते हैं तो फिर जब भागीरथपुरा कांड हुआ तो फिर वही महापौर पर कार्यवाही क्यों नहीं हुई. उन्होने इस्तीफा क्यों नहीं दिया. माननीय मंत्री जी ने स्वयं क्यों नहीं इसमें जिम्मेदारी ली.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- एक बार तो आप भी पुरस्कार लेने के लिये गये थे. यह बात शायद नैतिकता की है कि जब कोई पुरस्कार की बात होती है, तो नेता लोग सामने आते हैं, लेकिन जब बात जिम्मेदारी की होती है, तो अधिकारी को सामने किया जाता है. मंत्री या महापौर उनके पीछे छुप जाता है. स्थगन को क्यों ग्राह्य किया जाना चाहिये. मैं इसमें आपको एक बात आज ही कहना चाहूंगा कि मेरे आज के ही प्रश्न क्र. 1625 में मैंने मंत्री जी से पूछा कि इस पूरे भागीरथपुरा कांड में अभी तक कितनी मृत्यु हुई है. उत्तर के प्रथम पन्ने पर 20 का आंकड़ा दिया है और कहा है कि शेष जानकारी परिशिष्ट में है और परिशिष्ट में दिया गया है कि 32 मृत्यु हुई हैं. मेरे पास यही परिशिष्ट है आज के उत्तर का. यही त्रुटि कल भी हुई स्वास्थ्य मंत्री जी के द्वारा, जब उन्होंने उमंग जी के उत्तर में भी 20 का आंकड़ा दिया. जब आपके ही इसी उत्तर के परिशिष्ट में आप ही आंकड़ा दे रहे हो कि 6 फरवरी,2026 तक 20 मृत्यु हो चुकी हैं, लेकिन आप वही गलत उत्तर दे रहे हैं प्रमुख पेज पर. तो इस पर भी कहीं चर्चा होनी चाहिये कि आखिर यह त्रुटि क्यों हो रही है, क्यों सरकार सही आंकड़ा नहीं दे पा रही है. अभी तक सिर्फ 20 को ही मुआवजा मिला है. जो शेष मृत्यु हुई है, उनको कब तक उसमें सहायता दी जायेगी उन परिवारों को. जैसा सीएम साहब ने घोषणा की थी कि 4 लाख या 5 लाख की सहायता मिलनी चाहिये. वह सरकार कब तक देगी. यह सब बातों की घोषणा और इनकी तारीख तय करने के लिये यह बहुत अनिवार्य है कि इस पर चर्चा होनी चाहिये. इसके साथ साथ जैसा मंत्री जी ने कहा कि मैं भी लगभग 15 महीने के लिये इस विबाग का मंत्री था. आज आपने भी अपने भाषण में इस बात का उल्लेख किया था कि आने वाले समय के लिये काफी अधिक राशि अमृत योजना के माध्यम से पेयजल के लिये खर्च की जायेगी. लेकिन प्रश्न यह नहीं है कि हादसे के बाद हम क्या करेंगे. प्रश्न यह है कि हादसे के पहले हमसे क्या गलती हुई, जिसके कारण ऐसी घटना हुई. इस विषय को लेकर के मैंने कुछ अध्ययन किया था और जो मेरा अनुभव भी था, जब मैं इस विभाग का मंत्री था कि 2014 और 2026 के बीच में जो काम अमृत योजना का हुआ था, जिस पर खर्चे लगभग अकेले मल व्यवस्था के लिये, मल निष्पादन के लिये और सीवेज के लिये लगभग 2 हजार करोड़ रुपये खर्च किये गये सीवेज के लिये अकेले इन्दौर में और इस भागीरथपुरा के पूरे हादसे में भी मल का पानी ही घुसा है नर्मदा पाइप लाइन के अंदर. इन्दौर नगर निगम की प्रति वर्ष की बजट जल आपूर्ति को लेकर और पाइप लाइन सुधार को लेकर एक साल की बजट म.प्र. के सबसे सम्पन्न नगर निगम की 1 हजार करोड़ की होती है. तो मेरा इसमें मंत्री जी से यही प्रश्न रहेगा कि आखिर जो अमृत योजना के माध्यम से जो भ्रष्टाचार हुआ है, पूरे काम जो प्रदेश में, इन्दौर की बात नहीं है. आखिर अगर आज लखन जी जबलपुर का पानी दिखा रहें हैं.
अध्यक्ष महोदय-- अभी एक ही प्रश्न सामने है कि यह स्थगन ग्राह्य किया जाये या नहीं किया जाये.
श्री जयवर्द्धन सिंह -- अध्यक्ष महोदय, तो यह स्थगन इसलिये ग्राह्य किया जाना चाहिये,क्योंकि अमृत योजना के माध्यम से पूरे हर नगर निगम में अमृत योजना का काम सीवेज का उन शहरों के लिये हुआ था, जहां जनसंख्या 1 लाख से ऊपर थी और यही स्थिति जबलपुर में है. एनजीटी ने कहा है कि चाहे खरगोन हो, चाहे खण्डवा हो, चाहे इन्दौर हो, इन सब जगह इसी प्रकार की समस्या आई है. तो मंत्री जी से यही मेरा निवेदन है कि पिछले 10 साल में जो भी काम सीवेज का हुआ है, उसकी जांच होनी चाहिये. अध्यक्ष महोदय, मैं अंत में कहना चाहूंगा कि भागरथपुरा के पास में एक पोस्टर मिला था, जिस पर लिखा था कि प्रत्येक घर पहुंचायेगा स्वच्छ जल, जब खिलेगा कमल. न स्वच्छ जल पहुंच पाया, उल्टा पूरे नल सूख गये. कहीं न कहीं इसकी पूरी लापरवाही भाजपा सरकार की है. धन्यवाद.
श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव(कसरावद) – अध्यक्ष महोदय, आज हम सभी भागीरथपुरा में जो घटना घटी, उसका जो स्थगन प्रस्ताव हमने प्रस्तुत किया है, उसको ग्राह्य और अग्राह्य करने को लेकर के आज यहां पर सदन में चर्चा हो रही है. मेरा यह मत है कि निश्चित रुप से इस बहुत ही संवेदनशील विषय पर जो स्थगन हमने दिया है उसको ग्राह्य किया जाना चाहिये और उस पर विस्तार से चर्चा होना चाहिए और उन कारणों का पता करना चाहिये, जिसके कारण्ं यह त्रासदी हुई है. हम सबको मिलकर के यह भी तय करना चाहिये कि ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति न हो. यह हम सब की जिम्मदारी है और हम सबका कर्तव्य है. यहां पर हम जो 230 सदस्य चुनकर आये हैं तो हमारे क्षेत्र और प्रदेश की जनता, हम सबसे यह अपेक्षा रखती है कि हम उनके पक्ष को, उनकी आवाज को इस सदन के अंदर रखें और आज इस विषय पर चर्चा को ग्राह्य करना इसलिये भी अनिवार्य हो गया है, चूंकि इस भागीरथपुरा की घटना के कारण आप प्रदेश में एक संवैधानिक संकट पैदा हो गया है और मैं संवैधानिक इसलिये कह रहा हूं कि जैसे की पूर्व में भी नेता प्रतिपक्ष जी ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत भारत क हरेक नागरिक को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पीने का अधिकार है. कोई भी सरकार हो उसकी यह नैतिक जवाबदारी है, यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह प्रदेश और देश के नागरिकों को साफ और सुरक्षित जल उपलब्ध भी कराये और जो जल स्त्रोत हों, उन जल स्त्रोंतो को प्रदूषण से बचाने का काम भी करें.
अध्यक्ष महोदय- घटना के बारे में माननीय नेता प्रतिपक्ष जी ने विस्तार से बताया और घटना के पश्चात माननीय मंत्री जी ने कहा कि हम वह सारे कदम उठा रहे हैं, जो अनिवार्य है. मैं जो कार्ययोजना आपने बनायी है उसके बारे में अपनी बात रखना चाहूंगा. आपने पूरे प्रदेश में वार्डों में वाटर आडिट टीमें बनाने और भेजने का काम किया और किस गंभीरता से वहां वाटर आडिट हो रहा है, उसका एक छोटा सा उदाहरण देना चाहूंगा. सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया में और लोगों के बीच में एक वार्ड का व्यक्ति नाले का पानी बोतल में भरकर के जहां पर पानी का निरीक्षण हो रहा था, जहां पर वाटर सेम्पलों की जांच हो रही थी, वह वहां पर जाकर सेम्पल देता है और उस सेम्पल की जांच होती है और जांच के उपरांत यह कहा जाता है कि यह पानी पीने योग्य है. उसके बाद जब वही पानी, दूसरे अन्य वार्डों में जहां जांच चल रही है, जहां जांच टीमें बैठी हुई हैं, वहां पर भी जब वह सेम्पल लेकर जाता है तो उस सेम्पल को पास कर दिया जाता है. इतनी बड़ी त्रासदी होती है और जहां पर 35 से अधिक मौतें होती हैं और 3200 से अधिक लोग बीमार होते हैं और अस्पतालों में भर्ती होते हैं, उसके बाद भी इस तरह का काम होता है और जिम्मेदारी के नाम पर कोई कार्यवाही नहीं होती है, कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता है. जब इस तरह की घटना होती है तो छोटे-छोटे अधिकारियों के ऊपर सारा दोष मढ़ दिया जाता है और सारे बड़े लोग इतिश्री करने का काम और अपनी जिम्मेदारी से भागने का काम करते हैं.
अध्यक्ष महोदय, मेरा एक छोटा सा अनुरोध है. चूंकि प्रभारी मंत्री जो इस विभाग के मंत्री हैं और उस विधान सभा के विधायक भी हैं. जब महापौर ने यह शिकायत करी तो मैं समझता हूं कि यह इंदौर का दुर्भाग्य है कि इतना असहाय महापौर इंदौर के शहरवासियों को मिला. महापौर कह रहे हैं कि अधिकारियों को फोन लगाते हैं तो अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं. मैं क्या 100-100 बार अधिकारियों को फोन लगाऊंगा, यह महापौर का वक्तव्य है. अगर इस तरह के वक्तव्य हैं तो महापौर को अपनी कुर्सी पर रहने का कोई अधिकार नहीं है.
अध्यक्ष महोदय, मैं दोबारा उस बात पर आना चाहता हूं कि जहां पर 7 महीने हो जाते टेण्डर जारी किये हुए. 6 महीने तक अधिकारी उस टेण्डर के ऊपर बैठे रहते हैं. वह टेण्डर जारी नहीं होता है, उसका वर्क आर्डर जारी नहीं होता है. चूंकि मंत्री जी की खुद की विधान सभा थी. सात महीने हो गये फिर भी उस टेण्डर के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं होती है. मंत्री जी वहां के विधायक भी हैं तो क्या महापौर ने मंत्री जी से शिकायत करी ? अगर शिकायत करी तो क्या मंत्री जी ने उस पर कोई कार्यवाही करी अगर कार्यवाही नहीं करी तो उसके लिये कौन जिम्मेदार हैं. आज हम सबको बैठकर के जिम्मेदारी तय करनी पड़ेगी, नहीं तो इस तरह पुनरावृत्ति बार-बार होती रहेगी. आदरणीय लखन जी ने बताया कि आज पूरा प्रदेश के ज्वालामुखी पर बैठा हुआ है. अगर भागीरथपुरा की घटना से यदि हम अभी भी नहीं जागे तो यह भागीरथपुरा की घटना पूरे प्रदेश में होने वाली है. हमारे लिये शर्म की बात है कि यह हमारे लिए दुख की बात है कि इंदौर जैसा बड़ा जो शहर है, जो हमारे प्रदेश की नाक है, हमारे प्रदेश की शान है, हमारे प्रदेश की आर्थिक राजधानी है, जब इंदौर जैसे शहर में इस तरह की घटना हो सकती है तो आप कल्पना कीजिए कि दूर-दराज के जो हमारे आदिवासी भाई हैं, उन आदिवासी अंचलों में पेयजल की क्या स्थिति होगी? मेरा यह कहना है और इसलिए आपसे यह अनुरोध है कि इन सारे तथ्यों को ध्यान में रखकर आप इसको ग्राह्य करने की स्वीकृति प्रदान करें. धन्यवाद.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे (अटेर) - अध्यक्ष महोदय, मुझे एक व्यवस्था का प्रश्न उठाना है. मैं आदरणीय डॉ. सीतासरन शर्मा जी को सुन रहा था.
अध्यक्ष महोदय - अब सदन तो प्रतिपक्ष को सुन ही रहा है. इस समय पाइंट आफ आर्डर की जरूरत क्या है?
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - नहीं, इसे ग्राह्यता के लिए आना आवश्यक है क्योंकि आपका निर्णय तभी आ पाएगा, जब पाइंट आफ आर्डर के साथ आपको पता हो पूर्व की व्यवस्थाएं क्या लागू हुई हैं? मैं आपका ही एक निर्णय बता देता हूं, जब आप उस आसंदी पर विराजमान थे. दिनांक 2 जुलाई, 2014 पर आपने व्यवस्था दी थी. अध्यक्ष रहते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान साहब मुख्यमंत्री थे, शायद भूल गये हों या याद भी होगा तो आप बताएगा. दिनांक 2 जुलाई, 2014 को आपने स्वयं आसंदी पर बैठकर व्यवस्था दी. अब आसंदी पर नहीं हैं तो आप उससे मुकर नहीं सकते हैं क्योंकि किताब में तो छप गई. आपने यह व्यवस्था दी कि प्रकरण सबज्युडिज़ था, उसके बाद भी उसको ग्राह्य किया गया स्थगन के रूप में और आपने यह व्यवस्था दी और जो बात आप कह रहे थे कि उसकी चर्चा पूर्व में हो जाय तो स्वीकार नहीं किया जाता है. इसमें उल्लेखित है. मैं आपको बता भी दूं कि कहां पर है. यह पेज 35 खोल लीजिएगा, यह किताब जो जनवरी, 2014 से लेकर जून, 2018 तक की सारी व्यवस्थाएं आसंदी के द्वारा दी गई हैं और स्वयं आपने दी और उसमें कहा है, पेज 35 में उल्लेखित है कि पूर्व में इस विषय पर चर्चा एक बार हुई प्रश्न के माध्यम से, फिर अन्य माध्यम से भी दो बार चर्चा हुई और तीन बार चर्चा होने के उपरांत मैटर सबज्युडिज़ होने के उपरांत सदस्यों की भावनाओं का ख्याल रखते हुए इसका स्थगन स्वीकार किया गया और स्वयं आपने स्वीकार किया तो यह दोहरे मापदंड की राजनीति नहीं होनी चाहिए और यह आपने ही किया. आप कह दीजिए कि नहीं किया?
डॉ. सीतासरन शर्मा - अध्यक्ष महोदय, मेरा नाम लिया है, इसलिए बोलना जरूरी है. हर समय की परिस्थिति अलग-अलग होती है. तब किसी ने टर्म्स एंड कंडिशन सामने नहीं रखी. मैं आज टर्म्स एंड कंडिशन सामने रख रहा हूं. एक्सक्लूज़िव है, जो बात कहना है वह आयोग के सामने बोलें. वह स्वीकार नहीं है. न्यायालय पर भरोसा नहीं है.
अध्यक्ष महोदय - (कई माननीय सदस्यों के एक साथ खड़े होने पर) सदन का समय जाया न करें.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - अध्यक्ष महोदय, मेरा पाइंट आफ आर्डर चल रहा है. मुझे पाइंट आफ आर्डर को प्लीज़ रेज़ करने दीजिए.
श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघेल - अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है कि माननीय विधायक महोदय यह बता दें कि वह परिस्थिति गंभीर थी कि यह परिस्थिति गंभीर है?
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - अध्यक्ष महोदय, मेरा पाइंट आफ आर्डर पूरा हो जाय. अध्यक्ष महोदय, परिस्थिति की बात कही तो मैं समझ सकता हूं, उस समय (XX) बैठकर इशारा कर रहे होंगे. शायद वही परिस्थिति रही होगी. लेकिन सदन परिस्थिति से नहीं चलता, सदन नियम से चलता है और नियम क्या कहता है वह यह है और नियम से ऊपर न आप हैं, न मैं हूं, (XX) मेरा कहना है कि नियम से सदन से चलेगा, परिस्थिति से नहीं चलेगा एक बात. दूसरी बात, मैं आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं.
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) - अध्यक्ष महोदय, संसदीय प्रणाली की अपनी एक गरिमा है, उस प्रणाली में माननीय अध्यक्ष का जो स्थान है. आम तौर पर उसको चुनौती नहीं दी जाती है. न ही यह कहा जाता है कि उनसे ऊपर कोई नहीं है. नियम यह भी है कि आवश्यकता पड़े तो सभी नियमों को शिथिल करते हुए अध्यक्ष अपनी व्यवस्था दे सकते हैं तो मुझे लगता है कि सभी को उसका पालन करना चाहिए.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - अध्यक्ष महोदय, यही व्यवस्था दी थी. मैं उसी की बात कर रहा था फिर भी मेरे कोई शब्द ऐसे हों, मैं अध्यक्ष जी का सम्मान, मैं आपको कहना चाहता हूं, अपनी अंतर्रात्मा से कहना चाहता हूं. मैं अध्यक्ष जी का सम्मान अपनी अंतर्रात्मा से, मेरा पूरा परिवार, मेरे क्षेत्र की जनता अध्यक्ष जी, मुझे बहुत खुशी हुई थी, जब आपने यह आसंदी ग्रहण की थी और जीवन पर्यंन्त करूंगा, जिससे मुझे कहना होता है, माननीय मंत्री जी मैं यह भी बता दूं, मैं उसके सामने उसके मुंह पर कहने की हिम्मत रखता हूं और जब कहने की बारी आएगी तो भविष्य में कहूंगा भी. मैं आपका सदैव सम्मान करता हूं. यदि कोई शब्द, छोटा हूं मैं, निश्चित ही भूल-चूक हो सकती है, लेकिन आपके सम्मान में कभी जीवन में कसर नहीं रहेगी, मैं आपसे यह पैर छूकर सदन के अंदर पुनः इसको कहना चाहूंगा. यदि कोई शब्द निकल गया हो तो भी मैं उसको वापस ले सकता हूं.
अध्यक्ष महोदय - यह तो मैंने कहा ही नहीं है. श्री राकेश जी ने विषय दूसरा उठाया था.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - नहीं तो मंत्री जी को किस शब्द पर आपत्ति है मुझे नहीं मालूम? 90 डिग्री पुल पर तो मंत्री जी ने नहीं बोला.
अध्यक्ष महोदय - नहीं, शब्द पर आपत्ति नहीं है.
श्री राकेश सिंह - आपने यह कहा कि उस व्यवस्था के ऊपर आप भी नहीं है.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे -मुझे लगता है कि संविधान सबसे ऊपर है, परन्तु आपको लगता नहीं है तो कोई बात नहीं. मुझे तो पीछे बाबा साहब की प्रतिमा भी दिख रही है. निश्चित ही संविधान सबसे ऊपर है, ऐसा मैंने पढ़ा, ऐसा मैंने सीखा इसको मैं मानता हूं और मानता रहूंगा, परन्तु आप संविधान को नहीं मानते तो इसमें मुझे आपत्ति नहीं है, क्योंकि आप तो संविधान को निपटाने में लगे ही रहते हैं.
अध्यक्ष महोदय—हेमंत जी आप पूरा करें. मेरा प्वाइंट ऑफ आर्डर ही पूरा नहीं हो रहा है.
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह)—सदन का समय बर्बाद करना जो विषय है उस पर उस पर अपनी बात रखिये.
श्री हेमंत सत्यदेव कटारे—अध्यक्ष महोदय,मैं विषय पर ही आ रहा हूं. आप मंत्री जी को रोक ही नहीं रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय—इसके बाद आपका ही ध्यानाकर्षण है.
श्री हेमंत सत्यदेव कटारे—अध्यक्ष महोदय,मंत्री जी को अलग से समय दे दीजिये. माननीय मंत्रियों को वैसे ही समय ज्यादा मिलता है.
अध्यक्ष महोदय—आपकी बात पूरी हो गई.
श्री हेमंत सत्यदेव कटारे—अध्यक्ष महोदय,अंतिम बात मैं कह रहा हूं कि यह जो एक ओर बुक है जिससे पूरी मध्यप्रदेश विधान सभा संचालित होती है रूल्स प्रोसीजर सारी चीज मैं बिल्कुल शार्ट में कह देता हूं. इसका पेज नंबर 28 नियम 55 में आपको पूरे अधिकार दिये हैं आप उनका प्रयोग करके, क्योंकि यह विषय ऐसा है कि भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति नहीं हो. लखन भईया जी ने जो बोटल दिखाई है उन बोटलों का रंग देखकर अगर किसी का हृदय नहीं कांपा है तो कांपना चाहिये. क्योंकि वास्तविकता में यह कह देना ठीक है कि भागीरथपुरा पर चर्चा करो. लेकिन क्या हर विधान सभा में हर पार्षद् के मौहल्ले में, हर वार्ड में, हर ग्राम पंचायत में मौत होगी फिर चर्चा होगी. मौतों को रोकने के लिये चर्चा नहीं होगी अध्यक्ष महोदय. क्या हम सदन में सदस्य बनकर के आये जनता के भरोसे पर आये अब मैं इंतजार करूं कि नहीं मेरे भिण्ड में लोग मरेंगे फिर मैं चर्चा करूंगा. उनको मरने से बचाऊं कि नहीं बचाऊं, बताईये आप. यह कहानी का आप रंग देखिये ना.
अध्यक्ष महोदय—हेमंत जी आप बोलने के लिये कह सकते थे आप पाइंट ऑफ आर्डर को यूज करने की क्या जरूरत है.
श्री हेमंत सत्यदेव कटारे—अध्यक्ष महोदय,तो इसको ग्राह्य किया जाये.
अध्यक्ष महोदय—हेमंत जी भागीरथपुरा की जो घटना है. उसमें जो न्यायालय का विषय है. बाकी विषयों से यह विषय थोड़ा भिन्न है. अनेक दुर्घटनाएं होती हैं, घटनाएं होती हैं. उन पर सरकार न्यायिक जांच बिठाती है. भागीरथपुरा का मामला ऐसा है कि इसमें न्यायालय ने स्वयं संज्ञान लिया है, स्वयं आयोग बनाया है. आयोग को सिविल कोर्ट के अधिकार दिये हैं और आयोग ने अपना काम दफ्तर बनाकर के सुनवाई शुरू कर दी है. सभी पक्ष थोड़े अलग अलग हैं, यह हमारे ध्यान में रहना चाहिये. स्थगन प्रस्ताव के संबंध माननीय सदस्यों ने जो प्रश्न उठाये हैं उसमें बहुत ही गंभीरता से और बहुत ही सूक्ष्मता से विपक्ष के माननीय सदस्यों द्वारा ग्राह्यता और अग्राह्ता के संबंध में मेरा ध्यानाकर्षित किया है. घटना के सिलसिले में मैं अपने जज्बातों से अलग होकर केवल इस बात पर विचार करना है कि क्या स्थगन प्रस्ताव के तहत जो बातें उठाई गई हैं उन बातों पर चर्चा की जा सकती है ? क्या स्थगन प्रस्ताव को चर्चा के लिये लिया जा सकता है ? इन बातों पर बारीकी से सोचने और विचारने पर मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि विधान सभा की नियमावली के नियम 55 के उपखंड 5 के अनुसार स्थगन प्रस्ताव में उस विषय की चर्चा नहीं होगी जिस पर उस सत्र में चर्चा की जा चुकी है. यहां यह उल्लेखनीय है कि 19 फरवरी 2026 को माननीय नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जी का प्रश्न चर्चा में था. जिस पर स्वास्थ्य मंत्री और सदन के नेता स्वयं मुख्यमंत्री जी प्रश्न का उत्तर दिया गया. दिनांक 20 फरवरी, 2026 को तारांकित प्रश्न बाला बच्चन जी, एवं परिवर्तित तारांकित प्रश्न श्री महेश परमार जी, श्री सचिन यादव जी, श्री प्रताप ग्रेवाल जी के दो प्रश्न. श्री राजेन्द्र मंडलोई जी, श्री जयवर्द्धन सिंह जी, के अतारांकित प्रश्न, श्री महेश परमार जी के आज की प्रश्नोत्तरी में मुद्रित होकर पटल पर हैं जिन पर सरकार ने अपनी ओर से विस्तृत उत्तर दिया है और उपखण्ड 7 के अनुसार उस विषय पर चर्चा नहीं की जायेगी. स्थगन प्रस्ताव में ऐसे किसी विषय के संबंध में जो किसी न्यायालय या न्याय निर्णय के अंतर्गत हो तथा जांच आयोग के विचाराधीन हो, उसको सभा में नहीं लिया जा सकता. इस संबंध में जो ट्रम एंड रिफ्रेंस बताये गये हैं उनको देखने से और उन पर विचार करने से स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि स्थगन प्रस्ताव के अंतर्गत उठाये गये विषय किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं. स्थगन प्रस्ताव का जो विषय किसी जांच आयोग के पास विचाराधीन है, उसे सभा में नहीं लिया जा सकता. अतः इस पर विचार करने के बाद यह जो स्थगन प्रस्ताव आया है. उसको मैं प्रस्तुत करने की अनुमति प्रदान नहीं करता हूं.
01:30 बजे ध्यान आकर्षण

नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) – माननीय अध्यक्ष महोदय, चूंकि आपने व्यवस्था दी है, लेकिन संबंधित नियम है, आप खुद विद्वान है कि उसी नियम में 55(क) में है कि चर्चा की जा सकती है, अध्यक्ष चाहे तो, ये अध्यक्ष के विवेक पर है, चाहे मामला कोर्ट में हो, ये स्पष्ट है. आप क्यों नहीं चाहते मुझे समझ नहीं आता. चार लाख, पांच लाख रुपए कब देंगे, अगर हमारे जयवर्द्धन सिंह जी ने बात उठाई है तो इस पर भी चर्चा होनी चाहिए, मुझे नहीं लगता इसमें कोर्ट की आवश्यकता हो. जब 20 से 32 मृत्यु हुई है. आज ही 1625 के प्रश्न पर आई है ये बात इस पर भी चर्चा हो सकती है, ये भी कोर्ट से मतलब नहीं है और 2019 की पाल्युशन कंट्रोल बोर्ड रिपोर्ट अलर्ट आया था, उस पर भी चर्चा हो सकती है, उस मृत्यु से कुछ नहीं है. मैं समझता हूं विषय बहुत सारे है, क्या संविधान के अनुच्छेद 21 के हिसाब से जब संवैधानिक अधिकार है, क्या इस पर हम चर्चा नहीं कर सकते, क्या हम मध्यप्रदेश के अंदर स्वच्छ पानी पिलाने की बात पर चर्चा नहीं कर सकते. मैं समझता हूं कि आपने जो व्यवस्था दी है अलग बात है, लेकिन इसमें मैं समझता हूं कि सरकार इस पर क्यों बैकफुट पर जा रही है, सरकार क्या स्वच्छ पानी नहीं पिलाना चाहती, काला पानी पिलाना चाहती है, नगर निगम को प्रिंस इंग्लैंड से थोड़ी चला रहे हैं, नगरीय प्रशासन विभाग चला रहा है. अध्यक्ष महोदय ये विषय स्वीकार होकर, चर्चा होनी चाहिए.
अध्यक्ष महोदय – उमंग सिंघार जी, ये विषय समाप्त हो गया है. (..व्यवधान)
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, ये स्वीकार होकर चर्चा होना चाहिए(विपक्ष के बहुत सारे सदस्यगण एक साथ बोले) (..व्यवधान)
श्री सोहनलाल बाल्मीक – अध्यक्ष जी, इसको स्वीकार करना चाहिए.
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, सरकार क्यों भागना चाहती है, पूरे प्रदेश के दूषित पानी का मामला है. (..व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय – कार्यवाही आगे बढ़ चुकी है. ध्यानाकर्षण पर चर्चा होगी, मेरा नेता प्रतिपक्ष से अनुरोध है. सरकार भाग नहीं रही है. (..व्यवधान)
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष महोदय, इतना महत्वपूर्ण विषय है, पानी से लोग मर रहे हैं, पूरे प्रदेश में. (..व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय – सरकार ने उत्तर दिया है और सारे प्रश्नों के उत्तर दिए हैं. (..व्यवधान)
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष जी, उत्तर कहां आया. (..व्यवधान) जवाबदारी तय होना चाहिए, विभाग की जवाबदारी तय होना चाहिए, क्या नगरीय विकास मंत्री की जवाबदारी तय नहीं होना चाहिए, क्या विभाग के प्रमुख लोगों की जवाबदारी तय नहीं होना चाहिए. (..व्यवधान)
श्री सोहनलाल बाल्मीक – इस पर चर्चा होकर फैसला होना चाहिए. (..व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय – मेरा नेता प्रतिपक्ष से अनुरोध है कि कृपया बैठ जाए, कार्यवाही आगे बढ़ गई है (..व्यवधान) अब ध्यानाकर्षण पर चर्चा होगी और बजट पर (..व्यवधान)
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष जी, करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार हो रहा है इंदौर में, दूषित पानी मिल रहा है. क्या इस पर चर्चा नहीं होगी (..व्यवधान)
श्री कैलाश विजयवर्गीय – अध्यक्ष महोदय, एक बार व्यवस्था आने के बाद नेता प्रतिपक्ष का इस प्रकार का उद्बोधन उचित नहीं है, यह रिकार्ड से निकालना चाहिए. (..व्यवधान)
श्री सोहनलाल बाल्मीक – क्या आदमी मारा जाएगा, इसी तरह से (..व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय – उमंग सिंघार जी, मैंने आप सब लोगों को सुनने के बाद व्यवस्था दे दी है. आप सभी से कल भी विभिन्न समय पर, विभिन्न प्रकार की चर्चाएं हुई. आप सबकी चर्चा के आधार पर इस सारी चीज को सुना गया, सरकार ने भी अपना पक्ष प्रस्तुत किया है. मैंने विषय को ग्राहृय नहीं किया है, कार्यवाही आगे बढ़ गई है. मेरा अनुरोध है कि श्री सोहनलाल बाल्मीक जी को ध्यानाकर्षण पढ़ने दो. (..व्यवधान)
श्री उमंग सिंघार – सरकार का जवाब तो आया ही नहीं है, सरकार का कौन सा जवाब आया. कोई जवाब नहीं आया. (..व्यवधान) ये व्यवस्था का प्रश्न है माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश के अंदर शुद्ध पानी नहीं मिलना चाहिए? मुख्यमंत्री क्लीन वाटर की बात करते हैं, प्रदेश के लोगों को पानी नहीं मिलना चाहिए? क्या भागीरथपुरा के साथ पूरे प्रदेश का भी मामला है, आप भागीरथपुरा में 20 मौतें बता रहे हैं 26 मौतें (..व्यवधान) हुई हैं इनके कार्ड (..व्यवधान) में लिखा है उसके बाद भी क्यों नहीं दिखाया जा रहा (..व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय – उमंग जी, आपके स्थगन प्रस्ताव के बाद कैलाश जी ने अपना जो मत रखा है, वह मध्यप्रदेश शासन का मत है . (..व्यवधान)
श्री उमंग सिंघार – अध्यक्ष जी, आपको बिन्दु गिनवा दिए, इससे सरकार क्यों भागना चाहती है, क्यों सरकार बात नहीं करना चाहती, बात करें चर्चा करें, क्या भय है(..व्यवधान), हम चर्चा करना चाहते हैं, पानी अच्छा मिले(..व्यवधान) चर्चा करें आप, चर्चा करने से क्यों भाग रहे हैं. (..भारी व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय – सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित की जाती है.
(1:35 बजे से सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित)
01.53 बजे विधान सभा पुन: समवेत हुई
सभापति महोदया (श्रीमती अर्चना चिटनिस) पीठासीन हुईं.
अध्यक्षीय व्यवस्था
सभापति महोदया -- आज की कार्यसूची में सम्मिलित अशासकीय कार्य आय व्ययक पर सामान्य चर्चा के बाद माननीय उप मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री जी के भाषण के पश्चात् लिये जायेंगे. मैं समझती हूं कि सदन इससे सहमत है.
(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई)
सभापति महोदया -- ध्यानाकर्षण सूचना, श्री सोहनलाल बाल्मीक.
श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव(कसरावद) -- सभापति महोदया, मेरा एक अनुरोध है कि हमने स्थगन प्रस्ताव दिया था और स्थगन प्रस्ताव पर हमें आंसदी से यह आश्वासन मिला था कि इसके ऊपर चर्चा कराई जायेगी, परंतु चर्चा के लिये हमें कोई समय नहीं दिया गया है. मेरा आपसे आग्रह है कि जो इतना महत्वपूर्ण भागीरथपुरा का विषय है, उस भागीरथपुरा के विषय पर विस्तार से चर्चा होना चाहिए और यह विषय सिर्फ भागीरथपुरा तक सीमित नहीं है, यह स्थिति पूरे प्रदेश में है. हमारे प्रदेश के जितने भी चाहे हम नगरीय निकाय ले लें, चाहे हम ग्राम पंचायतें ले लें, बहुत दयनीय स्थिति में हैं और आने वाले दिनों में यह एक विस्फोटक स्थिति बन जायेगी, जो भी कदम उठाये जा रहे हैं, वह कदम पर्याप्त नहीं है.
श्री भंवर सिंह शेखावत-- माननीय सभापति महोदय, माननीय अध्यक्ष जी से चर्चा के विषय में यह स्पष्ट हो चुका था कि भागीरथपुरा पर वह चर्चा करायेंगे. उन्होंने चर्चा तो कराई नहीं, जो वचन दिया था वह पूरा हुआ नहीं. भागीरथपुरा की जनता अभी भी इंतजार कर रही है कि उनके विषय में कोई चर्चा होगी. ...(व्यवधान)... उसको अधूरा छोड़ दिया. मंत्री जी का पूरा वक्तव्य करवा दिया. मैंने नारियल पानी बाटा ...(व्यवधान)... मेरी जनता को मैंने खूब ...(व्यवधान)... मैंने दो बार चुनाव जीता. चाहे जैसी बातें करके वह चले गये. चर्चा कहां हुई. ...(व्यवधान)... आप तो उस विषय से आगे निकल गये. मंत्री जी का वक्तव्य किस आधार पर करवा दिया गया. मंत्री जी ने अपना भाषण एक घंटे का दे दिया. बड़ा नारियल का पानी पिला रहे, उन्होंने भागीरथपुरा की चर्चा की. मेरा यह निवेदन है कि माननीय अध्यक्ष जी ने हमें आश्वस्त किया था कि भागीरथपुरा के मामले में चर्चा करायेंगे. अग्राहता पर चर्चा करा ली, ग्राहता पर चर्चा करा ली और खत्म करवा दिया मामला और मंत्री जी से भाषण दिलवा दिया. यह कोई तरीका थोड़ी होता है.
सभापति महोदया-- मैंने आपकी बात ध्यान से सुनी और आपकी, माननीय नेता प्रतिपक्ष जी की, माननीय सदस्य की सबकी भावनाओं का आदर करते हुये, सम्मान करते हुये मैं इस पर अंडरलाइन करना चाहती हूं कि माननीय सदस्य ने इस विषय को ग्राह्य किया जाये या अग्राह्य इस पर चर्चा कराई. विस्तार से दोनों पक्षों के लोगों ने अपनी-अपनी बात कही और माननीय अध्यक्ष जी उस पर अपनी व्यवस्था दे चुके हैं. आप ही ने स्वयं ने कहा है कि अब आगे बढ़ गये हैं और उस पर जब हम आगे बढ़ गये हैं और जिस सदस्य ने अपनी ध्यानाकर्षण सूचना जनहित में लगाई उनका नाम आसंदी से पुकारा जा चुका है. मैं समझती हूं कि माननीय सदस्य को अपनी ध्यानाकर्षण सूचना करने का अधिकार भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
श्री उमंग सिंघार-- माननीय सभापति महोदया, यह पूरे जनहित का मामला है, पूरे प्रदेश का मामला है. क्या दूसरा भागीरथपुरा मध्यप्रदेश में बनाना चाहती है सरकार. चर्चा नहीं कराई, चर्चा से क्यों भागना चाहती है सरकार. माननीय सभापति महोदया, इस पर चर्चा होना चाहिये. मैं यह कहना चाहता हूं. ...(व्यवधान)...
सभापति महोदया-- आसंदी से व्यवस्था आ चुकी है तथा सदन की कार्यवाही आगे बढ़ चुकी है. ...(व्यवधान)... मैं श्री बाल्मीक जी से ध्यानाकर्षण सूचना पढ़ने के लिये आग्रह करती हूं. ...(व्यवधान)...
1.57 बजे बहिर्गमन
इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण का भागीरथपुरा की घटना पर चर्चा न कराये जाने के विरोध में सदन से बहिर्गमन.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-- ...(व्यवधान)... स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा न कराये जाने के विरोध में हम सदन से बहिर्गमन करते हैं.
(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण का भागीरथपुरा की घटना पर चर्चा न कराये जाने के विरोध में सदन से बहिर्गमन किया).
श्री सोहनलाल बाल्मीक-- माननीय सभापति महोदया, सबसे पहले मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि मेरा ध्यानाकर्षण नगरीय प्रशासन पर है और नगरीय प्रशासन मंत्री जी अभी नहीं हैं.
सभापति महोदया-- मंत्रिमंडल की सामूहिक जवाबदारी होती है. इनमें से कौन माननीय मंत्री जी आपकी बात का अनुवाद करेंगे इसको हम देखते हैं और मेरा आग्रह है कि जो भी वरिष्ठ मंत्रिमंडल के सदस्य यहां पर उपस्थित हैं वह यह सुनिश्चित करें.
लोक स्वास्थ एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री (श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल)-- मैं इस ध्यानाकर्षण का जवाब दूंगा.
सभापति महोदया-- ठीक है.
1.58 बजे नियम 138 (1) के अधीन ध्यान आकर्षण
(1) छिंदवाड़ा जिले के ग्राम अम्बाड़ा निवासी गुमशुदा नाबालिग बच्चियों की तलाश हेतु विशेष पुलिस दल का गठन कर उच्च स्तरीय जांच कराया जाना.
श्री सोहन लाल बाल्मीक (परासिया)-- माननीय सभापति महोदया,

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल,राज्यमंत्री,लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा- अध्यक्ष महोदय,

श्री सोहनलाल बाल्मीक - माननीय सभापति महोदया,इस मामले में पुलिस पहले से गंभीरता के साथ कार्यवाही करती तो निश्चित रूप से आसपास के जिलों में ढूंढकर उन्हें कहीं न कहीं से प्राप्त किया जा सकता था परन्तु मैंने पत्र माननीय एस.पी.साहब को भी लिखा था कि इसमें विशेष दल अविलंब गठित किया जाये और गठित करकर जहां होसकता है हम लोगों को प्रयास करने की आवश्यक्ता है. वह जो उसमें थोड़ी सी चूक हुई, लापरवाही है, जिसके चलते आज 6 महीने से ज्यादा हो गए हैं. नाबालिगों का कहीं अता-पता नहीं है और दिनांक 16/2/2026 को विशेष दल का गठन किया गया है, शायद यह पहले हो जाता तो निश्चित रूप से कहीं न कहीं इसमें कार्यवाही हो सकती थी और कोई जानकारी मिल सकती थी. परन्तु इस तरीके की लापरवाही के कारण आज दोनों बच्चियां, आज तक उनके परिवार को नहीं मिल पाई हैं. यह बात सिर्फ इन दोनों बच्चियों की नहीं है.
माननीय सभापति महोदया, मेरे विधान सभा में भी इस तरह की घटना हुई है और पूरे छिन्दवाड़ा जिले में लगभग 933 बच्चियों का आज तक पता नहीं चल पाया है. पांढुर्ना जिले से 66 बच्चियां चली गईं, आज तक पता नहीं चला. अमरवाड़ा विधान सभा में 128 बच्चियां, दमुआ में 58 बच्चियां है और मेरी विधान सभा क्षेत्र के उमरेठ में 54 बच्चियां आज तक लापता हैं, जो नहीं मिल पाई हैं. यह दो बच्चियों का तो अभी का मामला है, मगर इस तरीके का जो घटनाक्रम हो रहा है, यह हम लोगों के लिए खेद और दुर्भाग्य का विषय है कि हम इन बच्चियों को संभाल नहीं पा रहे हैं और न ही पुलिस विभाग इनका पता लगा पा रही है. आप पूरे मध्यप्रदेश का रिकॉर्ड उठाकर देख लेंगे तो 2 लाख 74 हजार 311 महिलाएं एवं बालिकाएं की, आज तक किसी की शिनाख्त नहीं हो पाई, पता नहीं कर पाये हैं कि गुमशुदा कहां पर है, किस तरीके से है ? जिस तरीके की यह चूक हुई है और जो कहीं न कहीं विभाग के माध्यम से गलतियां हो रही हैं, जिसको गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. यह निश्चित रूप से हम सबके लिए और हमारे परिवार की जो बच्चियां हैं, महिलाएं हैं, जिस तरीके से गुमशुदा हो रही हैं, पता नहीं चल पा रही हैं. इसमें मध्यप्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन को विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए. यह एक गंभीर विषय है, इसमें कोई न कोई व्यवस्था सरकार और विभाग को बनानी चाहिए कि जो बच्चियां और महिलाएं जिस तरीके से अनावश्यक रूप से इधर-उधर हो रही हैं और उनका पता नहीं कर पा रहे हैं, तो उनकी सरकार क्या योजना बना रही है और आप क्या करेंगे ? यह 2 लाख 74 हजार 311 महिलाएं एवं बालिकाएं गुम हो गई हैं, क्या इसमें सरकार कुछ कार्यवाही कर रही है ? या भविष्य में इस तरीके की नाबालिग के साथ या महिलाएं गुमशुदा न हों, उनके साथ कोई गलत काम न हो, क्या सरकार की कोई योजना है ? और जिस तरीके से ग्राम अम्बाड़ा के अन्दर, जो दो बच्चियां आज तक नहीं मिल पाई हैं. शुरुआत से ही पुलिस की कहीं न कहीं चूक और लापरवाही का परिणाम है, जिसके चलते आज यह नहीं मिल पा रही हैं, तो मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि मेरे विधान सभा के अलावा, जो छिन्दवाड़ा जिले में 933 बच्चियां एवं बालिकाएं गुम हैं, क्या उनकी कोई जानकारी आपको है ? मेरी विधान सभा क्षेत्र के उमरेठ में 54 बच्चियां जो आज तक नहीं मिल पाई हैं, क्या आपको उनकी जानकारी है ? क्या आप पता कर सकते हैं ? मैं पूछना चाहता हूँ कि सरकार इसमें क्या योजना बना रही है और कार्यवाही कर रही है ?
श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल - माननीय सभापति महोदया, निश्चित रूप से हमारे सदन के वरिष्ठ सदस्य जी ने जो विषय उठाया है, वह बहुत गंभीर है और बहुत संवेदनशीलता के साथ में उन्होंने विषय को रखा है. मैं उनकी संवेदनशीलता को, पूरे सदन की ओर से उनका अभिनन्दन करता हूँ, क्योंकि यह समस्या केवल उनके क्षेत्र की नहीं है, सारे मानव समाज की है, सारे मध्यप्रदेश की है. लेकिन मुझे इस बात का संतोष है कि इस प्रकरण में दिनांक 18 जुलाई को ही 9 सदस्यीय विशेष दल का गठन कर दिया गया था, 4 दिन बाद ही गठन कर दिया गया था, क्योंकि गंभीर विषय था. कोई भी सूचना नहीं मिल रही थी, कोई भी क्लू नहीं मिल रहा था, केवल एक विषय था कि बच्चियां अपने मन से घर छोड़कर गई हैं, चूंकि स्कूल का कहकर निकली थीं, लेकिन स्कूल न जाकर वह मर्जी से ऑटो रिक्शा से बैठकर कहीं गई हैं, उसके कारण यह भी प्रमाणित होता है. चूंकि उस परिवार के घर में चार बच्चे हैं और यह दो जुड़वा बच्चियां थीं, जो उनकी डायरी मिली है, उनके होमवर्क और अन्य कॉपियों में जो उनके लेख मिले हैं, दोनों बच्चियों के, वह बड़े चिन्ताजनक लेख हैं, वह निश्चित रूप से हमारी पूरी पैरेंटिंग के ऊपर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करते हैं, हमारी शिक्षा व्यवस्था के ऊपर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करते हैं, क्योंकि उन बच्चियों के पत्रों को मैंने पढ़ा है, उसमें उन बच्चियों ने जो उन पर अंग्रेजी सीखने का दबाव था, वह उनके पत्रों में दिखता है.
माननीय सभापति महोदया, मैं हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी का बहुत अभिनन्दन करता हूँ, आभार व्यक्त करता हूँ कि उन्होंने नई शिक्षा नीति में उसका परिवर्तन किया है और विदेशी भाषा के बजाय अपनी मातृभाषा को प्रोत्साहित करने का काम किया है, निश्चित रूप से यह विषय उन बच्चियों के पत्रों से प्रदर्शित होता है, चूंकि उन्होंने अपने माता-पिता के प्रति भी अच्छा भाव लिखा है, परन्तु अच्छे भाव के साथ में उन्होंने यह शब्द भी लिखे हैं कि हमें उन दो बच्चियों को ऐसा लगता है कि हम इस परिवार के सदस्य नहीं हैं, हम शायद इस परिवार में एक्स्ट्रा आ गए हैं. ऐसा उनके पत्रों में लिखा हुआ है जो कि उनकी माताजी ने ही उपलब्ध करवाये हैं. निश्चित रूप से चूंकि उनकी एक बड़ी बेटी है और बाद में एक छोटा बेटा भी हो गया, ये दोनों बेटियां बीच में, जुड़वा बच्चियां थीं, तो निश्चित रूप से ये एक विषय, मैं, सदन के माध्यम से, समाज में भी पहुंचे इसलिए मैंने यह बात सदन में रखी है. हमारे माननीय सदस्य ने चिंता व्यक्त की है. हमारे पुलिस विभाग ने निरंतर इस प्रकरण में भी लगातार कार्रवाई की है, जैसा कि मैंने पूर्व में आपको बताया कि 4 दिन बाद ही एक विशेष दल गठित कर दिया गया था और उसकी पूरी टाइम लाइन मेरे पास है, आप कहें तो पढ़कर सुना सकता हूं, अन्यथा मैं सदस्य को उपलब्ध करवा दूंगा.
सभापति महोदया, उन्होंने जो बिंदु उठाये हैं, उन पर बताना चाहता हूं कि उन्होंने गुमशुदा बच्चियों की संख्या के लिए कहा, कुछ स्वयं मन से चली जाती हैं, कुछ दूसरे कारणों से जाती हैं. उसमें पिछले 2 वर्षों के आंकड़े रखना चाहूंगा, जिले का विगत 2 वर्षों का आंकड़ा, वर्ष 2024 में 244 गुमशुदा बच्चियों की सूचना प्राप्त हुई थी, जिसमें से 235 बच्चियों को दस्तयाब हमारी पुलिस ने करवा दिया है. वर्ष 2025 में 294 गुमशुदा बच्चियों की सूचना थी और 328 बच्चियों को दस्तयाब किया गया. कुल संख्या गुमशुदा बच्चियों की 538 थी लेकिन इन वर्षों में खोजी गई बच्चियों की संख्या 563 है, जिसमें पूर्व के वर्षों में गुमशुदा हुई बच्चियां भी शामिल हैं. 25 संख्या अधिक है, जिनको खोजा गया. साथ ही पूरे प्रदेश के विगत 2 वर्षों के आंकड़े मैं आपके सामने रखना चाहता हूं, वर्ष 2024 में कुल पंजीबद्ध प्रकरण 11900 थे उसके विरूद्ध 11670 बच्चियों को ढूंढ लिया गया और वर्ष 2025 में 13146 मामले थे, जिनके विरूद्ध 14520 बच्चियों को खोजा गया. विगत 2 वर्षों के कुल आंकड़ें देखेंगे तो 25553 उसके विरूद्ध 26190 बच्चियों को खोजा गया है, जिसमें 1137 पूर्व में गुम हुई बच्चियों को ढूंढा गया. निश्चित रूप से हमारी पुलिस बहुत बेहतर काम कर रही है. लगातार इस दिशा में प्रयास कर रही है. हमारी पुलिस विशेष अभियान इस विषय में चलाती है, अभी "मुस्कान" नाम से अभियान चलाया गया, उसके परिणाम मैंने आपके सामने तथ्यात्मक रूप से रखे हैं. इस प्रकरण में पुलिस मुख्यालय में, महिला सुरक्षा शाखा, निरंतर इस विषय की विशेष रूप से मॉनिटरिंग कर रही है, धन्यवाद.
श्री सोहनलाल बाल्मीक- सभापति महोदया, मंत्री जी ने अपनी पूरी बात आंकड़ों के साथ बता दी है, मगर मैं यह कहना चाहता हूं कि जो बातें गुमशुदा बच्चियों की हो रही है, कुछ को पुलिस ने ढूंढकर निकाला है और उनके परिवार को सौंपा है. मैं विभाग को धन्यवाद और बधाई देता हूं कि आपने प्रयास करके, कुछ परिवारों को संतुष्टि दी है, उन बच्चियों और महिलाओं को परिवारों तक पहुंचाया है. मगर ऐसे बहुत सारे प्रकरण लगातार बढ़ते चले जा रहे हैं, सरकार को इस बात पर चिंता करनी चाहिए. हर जिले में कोई न कोई ऐसी टास्क-फोर्स हो, जिससे तत्काल कार्रवाई हो और समय नष्ट न हो क्योंकि कोई बच्ची 2 दिनों से गायब है या महिला नहीं है तो उसमें 24 घंटे से ज्यादा हों तो उसमें तत्काल कार्रवाई हो क्योंकि कहीं न कहीं ऐसे प्ररकणों में चूक हो जाती है, लापरवाही हो जाती है, जिसके चलते गुमशुदगी के जैसे-जैसे दिन बढ़ते हैं, उन गुमशुदा लोगों का पता नहीं चल पाता है. सरकार को कोई ऐसी योजना बनानी चाहिए, ताकि इस तरीके से जो लगातार महिलायें, बच्चियां गुमशुदा हो रही हैं, उनको रोकने का प्रयास, हम सभी मिलकर करने की कोशिश करें.
सभापति महोदया- माननीय मंत्री जी ने बताया, जो व्यवस्था उनके पास है. उसके अलावा यदि आपका कोई सुझाव हो, तो दे सकते हैं.
श्री सोहनलाल बाल्मीक- सभापति महोदया, मिशन मुस्कान में कार्रवाई हो रही है लेकिन उसके बाद भी गुमशुदा की संख्या लगातार बढ़ रही है. जैसा कि मैंने देखा था कि वर्ष 2026 में मध्यप्रदेश के अंदर 1000 महिलायें और बालिकायें लापता हो गईं. यह संख्या तो बढ़ते जा रही है, इसमें कहीं न कहीं कुछ प्रयास करने होंगे. सरकार को कोई अलग से टास्क-फोर्स बनाकर, पुलिस के साथ मिलकर, इसे रोकने का काम करना चाहिए. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि जिन दो बच्चियों का मामला है, दिनांक 16.02.2026 को विशेष दल गठित किया, उसके बाद इसमें क्या-क्या और कहां-कहां तक, इसमें प्रयास किया जा रहा है, थोड़ा उससे हमें अवगत करवाने का कष्ट करेंगे.
श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल- सभापति महोदया, निश्चित रूप से इस प्रकरण में भी मैंने जैसा पूर्व में बताया, विशेष दल का गठन पहले ही किया गया था और माननीय सदस्य द्वारा तारांकित प्रश्न में भी यह विषय लगाया गया था. सोहनलाल बाल्मीक जी ने ही लगाया था. उस समय भी जब यह मेरे पास आया था तो मैंने स्वयं इसमें व्यक्तिगत रुचि लेकर जानकारियां एकत्रित की थीं और इसके बाद में लगातार पुलिस कार्यवाही कर रही है. चूंकि यह प्रकरण भी नाबालिग बच्चियों का था और नाबालिग बच्चियों के प्रकरण में तत्काल ही प्रकरण दर्ज किया जाता है और तत्काल रूप से कार्यवाही प्रारंभ कर दी जाती है और हमारा पुलिस मुख्यालय भी महिला पुलिस शाखा के माध्यम से ऐसे प्रकरण की मॉनीटरिंग करता है और विशेष अभियानों के अलावा भी निरंतर हमारे इस तरह के कार्यक्रम चलते रहते हैं, अभियान चलते रहते हैं और जैसा कि सम्माननीय सदस्य का सुझाव है कि ऐसे प्रकरण में और ज्यादा तत्काल कार्यवाही हो तो निश्चित रूप से उस पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी.
श्री सोहनलाल बाल्मीक-- सभापति महोदया, अंत में मेरा एक बिंदु का प्रश्न है कि विशेष दल के द्वारा जो भी कार्यवाही हो रही है या जहां-जहां कार्यवाही की है तो बोल दें कि समय पर स्थानीय पुलिस मुझे जानकारी देती रहे.
सभापति महोदया-- मंत्री महोदय, आप इस व्यवस्था को सुनिश्चित करें.
श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेज-- जी सभापति महोदया, बिलकुल निश्चित रूप से जिस संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ हमारे सम्माननीय सदस्य चिंता कर रहे हैं हम स्थानीय पुलिस अधिकारियों को यह निर्देश दे देंगे कि वह निरंतर माननीय विधायक जी के संपर्क में रहें और उनको सूचनाओं से अवगत कराते रहें.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे-- माननीय सभापति महोदया, माननीय मंत्री जी के लिए एक छोटा सा सुझाव था यूं तो वह इस विभाग के मंत्री नहीं हैं, उन्हें अधिकृत किया गया है, परंतु उन्होंने एक बात रिकार्ड में कही कि जो लेटर इसमें थे जो उन बच्चियों ने लिखे उसको उन्होंने पढ़ा और उसमें क्या पढ़ा वह भी बताया तो मेरा सिर्फ सुझाव है अगर लेना चाहें तो चूंकि एफआईआर होने के बाद उस घटना से संबंधित हर डॉक्यूमेंट केस डायरी का अंश बन जाता है और सुप्रीमकोर्ट की अनेक रूलिंग यह कहती हैं कि केसा डायरी जब तक जांच पूर्ण न हो जाये तब तक उसके किसी भी अंश को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए तो आपने उसके कुछ अंदर के तथ्य के दो, चार शब्द सार्वजनिक किये. मुझे ऐसा लगता है कि भविष्य के लिए भी बेहतर होगा. आपने वह पत्र पढ़ा है, निश्चित ही उनके माता पिता ने आपको वह दिया. आप गये उनको मदद् के आश्वासन के रूप में दिया, परंतु आपने रिकार्ड में यह बात कही कि मैंने पढ़ा और क्या पढ़ा यह बताया. हो सकता है कि वह जांच को किसी रूप में प्रभावित कर दे. यह मेरा माननीय मंत्री जी के लिए एक सुझाव है.
सभापति महोदया-- माननीय मंत्री जी ने केवल पत्र पढ़ा यह बताया और वह उसकी बहुत डिटेल में नहीं गये हैं. जो आप कह रहे हैं उस समझ को रखते हुए ही उन्होंने अपनी बात को किस सीमा में करना है उसका उन्होंने पूरा ध्यान रखा है.
(2) ग्वालियर जिले के अंतर्गत राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं की जांच कर प्रक्रिया निरस्त किया जाना
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाहा (भिण्ड) (सर्वश्री बृजेन्द्र सिंह यादव, साहब सिंह गुर्जर)--माननीय सभापति महोदया,

किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री (श्री एदल सिंह कंषाना) -- माननीय सभापति महोदया,


श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- सभापति महोदया, माननीय मंत्री जी बहुत वरिष्ठ मंत्री हैं और हमारे संभाग से आते हैं लेकिन वह पढ़ रहे हैं जिन अधिकारियों ने गड़बड़ की है, एक चीज मुझे बताइये 22 तारीख को विज्ञप्ति निकली, 4 साल बाद आपने भर्ती क्यों की आपने शासन की अनुमति दोबारा क्यों नहीं ली ? मैं भी सदस्य हूं. 3 लोगों ने उसमें आपत्ति दर्ज की है. जिस विश्वविद्यालय की आप बात कर रहे हैं श्रीमंत राजमाता सिंधिया विश्वविद्यालय मैं भी उसका सदस्य हूं. जब यह बैठक हुई थी तब हम लोगों ने आपत्ति लगाई थी कि आज 22 तारीख है 4 साल हो गए हैं, शासन की अनुमति ली जाए, हम लोग उसमें क्यों फंसें. उसका जवाब बताइये. फिर हमें एक चीज बताइये इंटरव्यू चला, 12 तारीख को इंटरव्यू 10 बजे से लेकर 6 बजे तक चला और 13 तारीख को नियुक्ति पत्र दे दिया और जॉइनिंग हो गई. यह भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है. एक दिन में नियुक्ति पत्र दे दिया. 10 बजे से लेकर 6 बजे तक इंटरव्यू हुआ और 13 तारीख को उसको नियुक्ति पत्र मिल गया, चयन हो गया और 13 तारीख को 10 बजे जॉइनिंग हो गई. 22 पद आपने भरे हैं. एक दिन में सब हो गया.
सभापति महोदया -- आपका विषय आ गया है. आपने विषय बहुत स्पष्टता से बताया है. माननीय मंत्रीजी उस पर क्या कहना चाहते हैं ?
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- सभापति महोदया, हम 3-3 सदस्य बोल रहे हैं. उस विश्वविद्यालय के हम चयनित सदस्य हैं. हम लोगों ने आपत्ति की थी कि 22 तारीख का यह मामला है तो हम इस पर क्यों फंसें, दोबारा इसकी पूरी जानकारी देना चाहिए. आपने 26 पद भर लिए. जिन लोगों को भर्ती करना था 2 दिन पहले वह पहुंच गए और जाकर जॉइन हो गए. जिन लोगों की भर्ती हुई है मैं उनके टिकट भी बता सकता हूं. दो दिन पहले ही पहुंच गए थे और पहुंचने के बाद जॉइन हो गए. दो दिन में पूरा काम हो गया. कमेटी के सामने निर्णय नहीं आया. सभापति महोदया, हमारा निवेदन है कि मंत्रीजी को आप निर्देशित करें कि पूरी भर्ती प्रक्रिया कैंसिल की जाए.
सभापति महोदया -- माननीय मंत्री जी, अपनी बात में आप क्या कहना चाहते हैं. आपने जिन बातों की ओर ध्यानाकर्षित किया है, आपने जो ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पूरा दिया था उससे आगे जाकर भी कोई बात बता रहे हैं माननीय मंत्रीजी अपना पक्ष रख लें.
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- मंत्री जी को तो पर्चा दे दिया जाता है, उसी को बोल देते हैं, मंत्री जी क्या करें.
सभापति महोदय- माननीय कुशवाह जी ,आपको मंत्री जी को सुनना तो होगा न.
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह- हां.
श्री एदल सिंह कंषाना-- माननीय सभापति महोदय, माननीय सदस्य का कहना है कि भर्ती में अनियमिततायें हुई है. मैं कहना चाहता हूं कि भर्ती नियम से हुई हैं. कोई अनियमितता नहीं हुई है. दूसरी बात जो आपने भर्ती के विज्ञापन की बात कही है , माननीय सदस्य का कहना है कि विज्ञापन में कोई अनियमितता की है.
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह- मेरा कहना है कि विज्ञापन 2022 में निकला, 4 साल हो गये, 4 साल में क्या भर्ती की प्रक्रिया हेतु शासन की परमीशन लेना चाहिये कि नहीं, क्यों परमीशन नहीं ली गई, या तो तत्काल आप 2022 में ही भर्ती कर देते.
श्री एदल सिंह कंषाना-- माननीय सभापति महोदय, बाकायदा भर्तियो के लिये विज्ञापन दिया गया,
सभापति महोदय- मंत्री जी माननीय सदस्य जानना चाह रहे हैं कि शासन से इसकी अनुमति ली गई थी क्या.
श्री एदल सिंह कंषाना- सभापति महोदय, विज्ञापन दिया, उस समय किसी की भर्ती नहीं की गई.
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- 2022 में आपने विज्ञापन दिया, और भर्ती कर रहे हैं 2026 में और वह भी 12 जनवरी, 2026 को 10 बजे से 6 बजे तक आपने इन्टरव्यू लिया और 13 तारीख को आपने उनको नियुक्ति पत्र दे दिया. 13 तारीख को ही 10 बजे उनकी ज्वाइनिंग हो गई.
सभापति महोदय- मेरा माननीय सदस्य नरेन्द्र सिंह जी से आग्रह है कि मंत्री जी की पूरी बात सुन लें फिर जो प्रश्न होगा उसको आगे बढायेंगे.
खाद, नागरिक एवं आपूर्ति मंत्री (श्री गोविंद सिंह राजपूत) -- माननीय सभापति महोदय, प्रश्नकर्ता विधायक भिंड के हैं, उत्तर देने वाले मंत्री जी मुरैना के हैं यह मामला जरा गरम गरम हैं सम्हालना पड़ेगा आपको. यह भिंड और मुरैना का मामला है.
सभापति महोदय- मेरा मानना है कि जो भी माननीय सदस्य ध्यानाकर्षण लाते हैं वह गंभीर होते हैं, उनके उत्तर भी मंत्री जी गंभीरता से देते हैं.
श्री एदल सिंह कंषाना- माननीय सभापति महोदय, माननीय सदस्य जी का कहना है कि शासन से कोई अनुमति नहीं ली गई, मै कह रहा हूं कि शासन से अनुमति ली गई. अनुमति के उपरांत ही भर्ती की गई. विज्ञापन में देरी नहीं हुई, भर्ती प्रक्रिया जारी थी.
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह- माननीय सभापति महोदय, यह कैसे संभव है कि एक दिन में भर्ती हो गई और दूसरे दिन सुबह ही उनकी ज्वाइनिंग हो गई. और लिफाफा भी मिल गया. सवाल इस बात का है कि 12 तारीख को आपने भर्ती की, 13 को ज्वाईन हो गये. यह गड़बड़ नहीं है तो और क्या है. 26 लोगों की आपने भर्ती कर दी.
सभापति महोदय- माननीय सदस्य, माननीय मंत्री जी को पूरी बात तो कर लेने दें.
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह- सभापति महोदय, मंत्री जी को मैं आग्रह कर रहा हूं कि मंत्री जी इस भर्ती को निरस्त करें. एक ही दिन में सारा काम हो गया.
2.33 बजे { अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिह तोमर) पीठासीन हुए}
श्री गोविंद सिंह राजपूत -- अब अध्यक्ष महोदय आ गये हैं, मामले का हल हो जायेगा.(हंसी)
अध्यक्ष महोदय- मंत्री जी जवाब दे रहे हैं, उनका पूरा जवाब तो सुनो. फिर प्रश्न करना, क्या बोल रहे हैं मंत्री जी.
श्री एदल सिंह कंषाना-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय वरिष्ठ सदस्य कुशवाह जी कह रहे हैं कि भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई शासन से अनुमति नहीं ली. तो मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को बताना चाहता हूं कि शासन से अनुमति ली गई है, तभी भर्ती की गई है.
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, शासन से कोई अनुमति नहीं ली है. भर्ती प्रक्रिया का सरक्यूलर मेरे पास मे है. मैं यह पूछना चाहता हूं कि 12 तारीख को आपने इन्टरव्यू लिया 26 लोगों का, और 13 तारीख को उनको नियुक्ति पत्र दे दिया और उसी दिन ज्वाईनिंग भी हो गई. इसका क्या जवाब है. सारा काम एक दिन में कर दिया. और मैं उन लोगों के टिकिट भी दिखा सकता हूं, दो दिन पहले से वह लोग यहां पर आ गये थे, जहां उनकी ज्वाइनिंग होनी थी, और माननीय मंत्री जी न्यायालय की बात कर रहे हैं, वहां पर एक कैस है और मैं उसकी चर्चा नहीं करना चाहता हूं.
अध्यक्ष महोदय-- नरेन्द्र सिंह जी, आप तो प्रश्न करो. तब समाधान तक पहुंचते हैं.
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह-- अध्यक्ष महोदय, सही जवाब नहीं आ रहा है.लीपा पोती हो रही है, लोगों को कई माह तक पढ़ाई करनी होती है, इन्टरव्यू देना पड़ता है और यह यूनिवर्सिटी में एक दिन में पूरा काम हो गया. मैं उस यूनिवर्सिटी की सदस्य हूं. इसलिये निवेदन कर रहा हूं.
श्री एदल सिंह कंषाना -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य जो कह रहे हैं कि शासन से अनुमति नहीं ली गई. दिनांक 2.6.2025 को शासन से अनुमति ली गयी. यह तो आपकी तारीख का उत्तर है. दूसरा आप कह रहे हैं कि साक्षात्कार और नियुक्तियां जारी, किन्तु ज्वाइनिंग नहीं की गई. साक्षात्कार हुए पश्चात् उसी दिन नियुक्ति पत्र जारी किये, किन्तु ज्वाइनिंग साक्षात्कार के दिन नहीं की गई.
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय, मेरे पास प्रमाण है हर चीज के.
अध्यक्ष महोदय—आप ऐसा करो, आपके पास जो प्रमाण हों, आप मंत्री जी को दे दो.
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय, निवेदन है कि बहुत बड़ी गड़बड़ी हुई है. यूनिवर्सिटी के हम लोग 3-3 सदस्य हैं और तीनों सदस्यों ने यह मामला उठाया है. माननीय बृजेन्द्र सिंह जी ने, साहब सिंह जी ने, तीनों सदस्य उठा रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय— नरेन्द्र सिंह जी, आपके प्रश्न आ गये हैं. बृजेंद्र सिंह जी हैं क्या.
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय, जवाब नहीं आया है. मंत्री जी को भी मालूम है कि इसमें गड़बड़ी बहुत बड़ी मात्रा में हुई है और अगर गड़बड़ी हुई है, तो उच्च अधिकारियों से जांच करा ली जाये,इसमें क्या जा रहा है.
अध्यक्ष महोदय— साहब सिंह जी हैं. तो मंत्री जी आप विधायक जी से मिलकर कागज ले लीजिये. क्या विषय है देख लें आप.
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय, हमारा निवेदन यह है कि इसकी उच्च अधिकारियों से जांच करा ली जाये और इन नियुक्तियों को निरस्त किया जाये.
श्री एदल सिंह कंषाना-- अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्य की भावना है, मैं आपके माध्यम से उनको आश्वस्त करता हूं कि मैं उनके साथ बैठकर और उस विषय पर हम चर्चा कर लेंगे और अगर ऐसी कोई बात है, वे मुझे कागज दे दें, हम इसकी वरिष्ठ अधिकारी से जांच करा लेंगे.
अध्यक्ष महोदय— ठीक है.
श्री पंकज उपाध्याय – अध्यक्ष जी, मैं इसी विषय में दो बार प्रश्न लगा चुका हूं और मैं सहमत हूं विधायक जी से कि यह लगातार अनियमितता चल रही है. मैंने भी इसकी दो बार शिकायत की है. दो बार प्रश्न भी लगाया है इसका, लेकिन आज तक इसमें कोई कार्यवाही नहीं की गई है.
अध्यक्ष महोदय—आप भी मंत्री जी से मिलकर बता दें जो भी कागज हों. मंत्री जी ने कह दिया है कि जांच करा लेंगे.
श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय, नियुक्ति जो हुई हैं, उनको निरस्त करके जांच कराई जाये.
अध्यक्ष महोदय— नरेन्द्र सिंह जी, जांच करेंगे, उसी के बाद कार्यवाही होगी ना. पहले थोड़ी होगी भाई. पहले वह जांच करेंगे, जब उन्होंने कह दिया है. आप अपना कागज दे दें मंत्री जी को.

2.37 बजे प्रतिवेदन की प्रस्तुति
कृषि विकास समिति का द्वितीय प्रतिवेदन.
श्री दिलीप सिंह परिहार(सभापति) – अध्यक्ष महोदय, मैं, कृषि विकास समिति का द्वितीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.
2.38 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति
अध्यक्ष महोदय-- आज की कार्य सूची में उल्लेखित याचिकाएं 1 से लेकर 74 तक सदन में प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.
2.39 वर्ष 2026-2027 के आय-व्ययक पर सामान्य चर्चा.
अध्यक्ष महोदय – अब वर्ष 2026-2027 के आय-व्ययक पर सामान्य चर्चा प्रारम्भ होगी.
श्री जयंत मलैया (दमोह)—अध्यक्ष महोदय, सर्वप्रथम मैं आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं कि आपने बजट पर सामान्य चर्चा के समर्थन में बोलने का अवसर दिया. मैं आज यहां स्पष्ट करना चाहता हूं कि भाजपा की सरकार का यह बजट मात्र आंकड़ों का लेखा जोखा नहीं, बल्कि म.प्र. को विकसित राज्यों की श्रेणी में सशक्त योगदान का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है. अक्सर बात जीएसडीपी और पर कैपिटा इनकम की होती है. निवेदन है कि म.प्र. के सकल राज्य घरेलू उत्पाद में वर्ष 2011-12 से वर्ष 2025-26 में औसतन 12.73 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. प्रचलित दर पर पुनरीक्षित अनुमान के अनुसार वर्ष 2025-26 में राज्य सकल घरेलू उत्पाद रुपया 16 लाख 69 हजार 750 करोड़ रुपया होने का अनुमान है. इसके परिणाम स्वरुप राज्य में प्रति व्यक्ति आय विगत् वर्ष से बढ़ी है. जो 1 लाख 54 हजार 124 रूपये थी, वह वर्ष 2025-26 में बढ़कर 1 लाख 69 हजार 50 रूपये हो गयी है. यह निश्चित तौर से यह राज्य की आर्थिक प्रगति एवं आय में निरंतर वृद्धि से ही संभव हुआ है.
अध्यक्ष महोदय, इस बजट की सबसे बड़ी यूएसपी पूंजीगत परिव्यय है, जो वर्ष 2025-26 में पुनरीक्षित अनुमान अनुसार 74 हजार 662 करोड़ अनुमानित है. पूंजीगत परिव्यय वर्ष 2026-27 में 80 हजार 266 करोड़ रूपये अनुमानित है. किंतु आंतरिक बजटीय संसाधन एवं पूंजीगत संपत्तियों हेतु सहायक अनुदान के साथ, प्रभावी पूंजीगत परिव्यय यह 6 लाख करोड़ रूपये होने का अनुमान है. इसका सीधा परिणाम राज्य में बेहतर सड़कें, सिंचाई, स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूल कालेज की बिल्डिंग, जल जीवन मिशन की योजनाएं, गरीबों के लिये आवास बनाने के लिये काम आती है.
अध्यक्ष महोदय, यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि हमारी सरकार ने अधोसंरचना विकास के लिये क्या कार्य किये हैं. उसका भी आगे हम यहां पर जिक्र करने जा रहे हैं. अक्सर लोग बात करते हैं कि फिजिकल डेफिसेट की, राजकोषीय घाटा वर्ष 2024-25 और 2025-26 में 4.45 प्रतिशत अनुमानित है. किन्तु यहां वास्तविक राजकोषीय घाटा 3 प्रतिशत की निर्धारित सीमा में ही है. क्योंकि पूंजी निवेश हेतु केन्द्र से प्राप्त विशेष पूंजीगत सहायता योजना अंतर्गत सकल घरेलू उत्पाद का 0.81 ऋण एवं वर्ष 2021-22 से लेकर वर्ष 2024-25 तक अनुपयोगी ऋण सीमा जो सकल घरेलू उत्पाद का 0.04 प्रतिशत है. अथात् इनका 1.45 प्रतिशत कम करने पर राजकोषीय घाटा एफआरबीएम की निर्धारित सीमा 3 प्रतिशत के भीतर ही रहेगा. यहां यह उल्लेखनीय है कि यह दोनों मद एफआरबीएम सीमा से केन्द्रीय वित्त आयोग ने पृथक अलग रखे हैं. अत: यह राज्य के बेहतर वित्तीय प्रबंधन का उदाहरण है.
अध्यक्ष महोदय- अक्सर हमारे मित्र लोग आरोप लगाते रहते हैं कि हमारी सरकार कर्ज लेती है. हर प्रदेश की सरकार कर्ज लेती है. हमने जितना भी पैसा लिया है. यह एफआरबीएम एक्ट के प्रावधान के तहत प्रत्येक राज्य की प्रत्येक वर्ष, सीमा तय की जाती है और उसके हिसाब से हम ऋण लेते हैं और यह सकल घरेलू उत्पाद के आधार पर तय किया जाता है. ऋण लेना प्रत्येक राज्य की अधोसंरचना विकास के लिये अति आवश्यक है.
अध्यक्ष महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि प्रत्येक वर्ष निर्धारित ऋण प्रावधान से मध्यप्रदेश राज्य ने कम ऋण ही लिया है. पिछले अनेक वर्षों में हमारी राज्य हेतु स्वीकृत ऋण सीमा से हमने 5 प्रतिशत से लेकर 15 प्रतिशत तक कम ऋण लिया है. इसका कारण यह है कि हमारे राजस्व आय में निरंतर वृद्धि हो रही थी. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि हम इस ऋण का उपयोग पूंजीगत कार्यों के लिये करते हैं. बजट अनुमान केवल इस वित्त वर्ष का है. परंतु सकल ऋण कई वर्षों के लिये ऋण का परिणाम है.
अगर आप जानना चाहें तो मेरे पास आंकड़े हैं कि हमारे देश के किस प्रदेश ने जिनकी आउटस्टेडिंग लायबिलिटीज़ जीडीपी के निर्धारित मापदण्डों से अधिक है. आपके प्रदेश हैं कई, पंजाब में तो सबसे ज्यादा है, 46 प्रतिशत है, तेलंगाना और ऐसे बहुत से राज्य हैं. उन सबकी जानकारी मेरे पास है और अलग-अलग इस प्रकार से देशों के भी हैं. बड़े-बड़े जो सम्पन्न देश हैं उनकी भी जो लायबिलिटीज़ हैं, वह उनकी जीडीपी से ज्यादा है, जो एक सीमा होती है, उससे अधिक है. राज्य सरकार ने सकल घरेलू उत्पाद को वर्ष 2028-29 में 27.2 लाख करोड़ रुपये एवं वर्ष 2047 में जैसा कल माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा और उसके पहले हमारे माननीय वित्त मंत्री जी ने कहा कि वर्ष 2047 में जैसा कि आदरणीय प्रधानमंत्री जी चाहते हैं उसके हिसाब से 250 लाख करोड़ रुपया करने का महती लक्ष्य रखा है, यह उल्लेखनीय है. हमारी सरकार ने लगातार राजस्व आधिक्य का बजट पेश किया है, उसके लिए मैं माननीय वित्त मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं. वह प्रशंसा के पात्र हैं. पिछले वर्ष जीरो बेस्ड बजट था और इस वर्ष नवाचार के साथ 3 वर्षों का रोलिंग बजट एक नवीन वित्तीय परिकल्पना लेकर आया है. हम इसमें सफल होंगे. वर्ष 2025 को हमने उद्योग वर्ष के रूप में मनाया है और वर्ष 2026 को हम किसान कल्याण के लिए समर्पित कर रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट)..कुछ इस बजट के खास बिन्दु हैं जिनका मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं. सबसे पहले मैं इरिगेशन की बात करना चाहता हूं. सिंचाई विभाग में 6-7 साल मुझे भी इस विभाग में सेवा करने का अवसर मिला.
संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - आपने कौन-सा विभाग नहीं संभाला है, यह बताइए? सबसे सीनियर हैं, वित्त, इरिगेशन इन्होंने संभाला, आवास एवं पर्यावरण विभाग इन्होंने संभाला. नगरीय प्रशासन विभाग भी इन्होंने संभाला. पता नहीं कौन-कौन से विभाग के मंत्री रहे. आप बहुत अनुभवी हैं. आबकारी, वाणिज्यिक कर विभाग इनके पास में था.
श्री जयंत मलैया - धन्यवाद श्री कैलाश जी. सिंचाई विभाग में कहना चाहता हूं कि 50 लाख हैक्टेयर में सिंचाई हो रही है. इस सिंचित रकबे को वर्ष 2029 तक बढ़ाकर जैसा बताया गया कि हम 100 लाख हैक्टेयर करने वाले हैं और यह होगा. वर्तमान में हमारी 40 वृहद, 60 मध्यम और 273 लघु सिंचाई परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं.
अध्यक्ष महोदय, मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि सिंचाई क्षेत्र में वृद्धि होने से हमारे किसानों के द्वारा एक ही जगह पर हम 3 फसलें ले रहे हैं और इससे उनकी उल्लेखनीय लाभ हो रहा है, उसमें बहुत वृद्धि हो रही है और हमारी ग्रामीण व्यवस्था में भी आमूल-चूल परिवर्तन हो रहा है. हमारे सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि हो रही है. कभी मेरे साथ हमारे मित्र लोग चले, किसी भी गांव में चले और पूछ लें उनसे कि 15 साल पहले क्या स्थिति थी, क्या सड़कें थीं, बिजली थी, घर थे? कितनी सिंचाई होती थी? और आज आप चलकर देख लें. आपको फर्क समझ में आ जाएगा. आदरणीय अध्यक्ष महोदय, पहले हम जाते थे गांव में, जाड़ों में, ठंड में, आदमी नंगे पैर खिसट के चलता था, फटी करधनियां, हमारे बुन्देलखण्ड में बोलते हैं और सब फटा पहनता था. आज आप चलो मेरे साथ किसी भी गांव में, अगर जूते नहीं होंगे तो चप्पल जरूर होगी.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - आपकी अनुमति हो तो कुछ गांव में जाना चाहूंगा, अभी यहीं पर गांव भी बता सकता हूं और आप चलिएगा. कुर्ते, पजामे फटे अगर तो उनकी जिम्मेदारी है, उसका दोष मेरे ऊपर न आए.
खाद्य मंत्री (श्री गोविन्द सिंह राजपूत) - हर किसान के आंगन में गाड़ी खड़ी हुई है, फोर व्हीलर खड़ा हुआ है. आप कहां लगे हो, मध्यप्रदेश पंजाब हो रहा है.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - वह तो सिर्फ सौरभ शर्मा के यहां खड़ी मिली, उसमें अंदर भी बहुत कुछ था.
श्री जयंत मलैया - अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश ने पूरे देश में सिंचाई में पृथक पहचान बनाई है. सिंचाई परियोजनाओं के सुधार हेतु और इनके निर्माण हेतु 14742 करोड़ रुपये का हमने प्रावधान किया है, जो उपयुक्त है. महिला सशक्तीकरण की हमेशा बात होती रहती है और इसको हमने बजट में बहुत प्रमुख रूप से लिया है. आप इसी से समझ सकते हैं कि हमने इसके लिए वर्ष 2026-27 में 127555 करोड़ रुपये की राशि नारी कल्याण के लिए रखी हुई है, जो इसमें लाड़ली लक्ष्मी योजना है, लाड़ली बहना योजना है और इसके साथ साथ बच्चों के लिए योजना है. यह बहुत अच्छी योजना है. यशोदा योजना इसमें हम बच्चों के लिए दूध देंगे. इसके लिए इस बजट में 7 सौ करोड़ रूपए का प्रस्ताव रखा गया है. (मेजो की थपथपाहट) महिलाओं की स्वयं की भागीदारी की चर्चा की गई है. 19 हजार आंगनवाड़ी में महिलाओं की भर्ती की गई है. उज्जवला योजना के तहत हमने 2 साल में 6 करोड़ 28 लाख 23 हजार गैस सिलेंडर रिफिल किया है. जैसे हम अभी फॉर्मर्स वेलफेयर के लिए चर्चा कर रहे थे, निवेदन कर रहे थे, जैसा कि कल भी यह बात आयी थी तो माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा था कि किसानों को 6 हजार रूपए प्रधानमंत्री जी देते हैं और 6 हजार रूपए हम देते हैं, कुल मिलाकर किसानों को 12 हजार रूपए मिलते हैं. उनके खाते में हर महीने यह राशि डाली जाती है और यह बहुत बड़ी बात है. क्योंकि यह 6 हजार रूपए हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी राज्य सरकार के खजाने से देते हैं.
अध्यक्ष महोदय, प्रधानमंत्री कृषक सूर्य मित्र योजना में 3 हजार करोड़ की लागत के 1 लाख सोलर सिंचाई पंप लगने जा रहे हैं. जैविक एवं प्राकृतिक खेती में नेशनल मिशन फॉर नेचुरल फार्मिंग अंतर्गत 1 लाख 89 हजार किसानों द्वारा 75 हजार 650 हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती का लक्ष्य रखा गया है. 9 लाख से ऊपर किसानों को 77.74 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जन कर 20 हजार 213 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है और इसके साथ-साथ 1360 करोड़ रूपए बोनस के रूप में दिया गया है. खरीफ के लिए 11 हजार 744 करोड़ रूपए का भुगतान किया गया है. उद्यानिकी उत्पादों में 16 लाख मीट्रिक टन, फलों और सब्जियों का 559 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन विशेष उल्लेखनीय है.
अध्यक्ष महोदय, कृषक कल्याण और संबंधित क्षेत्रों के लिए हमने 88 हजार 910 करोड़ की राशि का प्रावधान किया है. इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट की बात चल रही थी. मध्यप्रदेश में पिछली सरकार ने सभी क्षेत्रों में समुचित विकास के संकल्प किये. पिछले 2 वर्षों में 33 लाख करोड़ रूपए के निवेश के प्रस्ताव प्राप्त हुए थे. यह बड़ी बात है कि इसमें से 8.63 लाख करोड़ रूपए के प्रस्तावों के ऊपर अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य प्रारम्भ हो गए हैं.
अध्यक्ष महोदय, हमारी सरकार ने 19 हजार 300 एकड़ में 48 नवीन औद्योगिक पार्क जिनमें 5 आईटीआई पार्क, प्लग एंड प्ले पार्क एवं फ्लैटलेट इंडस्ट्रिज विकसित किये जाने का लक्ष्य रखा है. इससे मध्यप्रदेश के विकास को एक नई गति मिलेगी और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे. निवेश प्रोत्साहन और औद्योगिकरण हेतु हमने राशि 5 हजार 957 करोड़ रूपए का इस बजट में प्रावधान किया है.
अध्यक्ष महोदय, मैं यह भी उल्लेख करना चाहूंगा कि अनुसूचित जनजाति उपयोजना में जनजाति बाहुल्य क्षेत्र के 11 हजार 377 गांवों के कायाकल्प हेतु वर्ष 2025-26 में 793 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है. जिससे लगभग 94 लाख आदिवासी लाभान्वित होंगे. (मेजो की थपथपाहट) पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण हेतु परम्परागत व्यवसायों में प्रशिक्षण से आदर्श छात्रावास के विकास एवं छात्रवृत्ति हेतु 7 लाख 50 लाख विद्यार्थी लाभान्वित होंगे. मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, मुख्यमंत्री निकाय योजना, माता-पिता भरण-पोषण, दिव्यांग आदि को सहायता मद में 2 हजार 558 करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान किया गया है.
अध्यक्ष महोदय, जब कभी इंफ्रॉस्ट्रक्चर की बात होती है तो हमें याद आता है कि एक जमाना था कि हम लोग दमोह से भोपाल के लिए निकलते थे, तो यह सोचते थे कि हम सड़कों में सड़कें देख रहे हैं कि गड्डों में सड़कें दिख रही है. अध्यक्ष महोदय, केन्द्र सरकार के द्वारा पूंजीगत परिव्यय हेतु हमें ब्याज बिना विशेष सहायता भारत सरकार से मिली इससे हमने यह काम किया. इस साल भी हमें उम्मीद है कि 13 हजार 500 करोड़ रूपये की राशि हमें विकास के लिये भारत सरकार से मिलेगी. अधोसंरचना के चहुंमुखी विकास हेतु संकल्प के अनुसार 1 लाख 85 हजार किलोमीटर सड़कें 54 लाख, 54 लाख हेक्टेयर में सिंचाई, 25514 मेगावाट विद्युत उत्पादन उल्लेखनीय है और इस वर्ष में ही 2025-26 में अब 2 हजार 190 किलोमीटर सड़कों का निर्माण एवं उन्नयन किया है. 292 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण किया है. आगामी वर्ष में 30 रेल्वे ओव्हर ब्रिज और पुलों का निर्माण किया जाना है. वर्तमान में 111 रेल्वे ब्रिज एवं एलीवेटेड कॉरीडोर का निर्माण हो रहा है. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 1500 किलोमीटर की सड़कें निर्मित होकर 7 हजार किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण होने जा रहा है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहरों में हमने साढ़े आठ लाख मकान बनाये हैं और आगामी पांच वर्षों में हम 10 लाख और शहरों में मकान बनाने हम जा रहे हैं. मैं अंत में यही कहना चाहूंगा कि हमारी सरकार ने पिछले वर्ष की तुलना में विनियोग राशि 2026-27 के लिये 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रूपये का विकासपरक बजट प्रस्तुत किया है जिसमें समाज के समस्त वर्गों का मध्यप्रदेश के आर्थिक विकास में उनका ध्यान रखा गया है. मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद मैं पुनः दोहरा रहा हूं 2011-12 से लेकर 2025-26 के बीच में औसतन 12.73 प्रतिशत रहा है. हमारा पूंजीगत परिव्यय राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 4.90 प्रतिशत होना हमारी सरकार की बेहतर वित्तीय प्रबंधन और कुशल नेतृत्व का परिणाम है. हमारी सरकार का निरंतर राजस्व आधिक्य का बजट है इसलिये मैं इन बजट प्रस्तावों का पूर्ण समर्थन करता हूं जयहिन्द, जय भारत.
2.58 बजे {सभापति महोदय (श्री लखन घनघोरिया) पीठासीन हुए}
डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह(अमरपाटन)—सभापति महोदय, मैं माननीय वित्तमंत्री जी द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 पर कांग्रेस दल की ओर से बोलने के लिये सदन में खड़ा हुआ हूं. आपने तथा कांग्रेस दल की ओर से बोलने के लिये आपको तथा अपने दल का अभिनन्दन करता हूं. लोकतंत्र में सरकारें खूब दावा करती हैं, लेकिन उनका असली परीक्षण सदन में होता है तथा प्रदेश की जनता करती है. इस विश्वास के साथ सरकारें बनती हैं, उनका जीवन स्तर सुधरेगा विकास की रोशनी उनके दरवाजे तक पहुंचेगी, लेकिन मुझे बड़ा खेद है कि माननीय मोहन यादव जी कार्यकाल में इन दो वर्षों में जनता घोर निराशा व्याप्त हो रही है.
सितारे से आगे, अभी और आसमां भी है..
मगर जमीन को न भूल, क्योंकि ठिकाना यही है..
आज, जो अर्श पर बैठे हैं, वो कल, फर्श पर होंगे...
माननीय सभापति महोदय, पहले मैं आम बजट के आकार पर कुछ अपनी बातें कहना चाहूंगा. वित्तीय वर्ष 2025-26 से, इस वर्ष का आकार मैं मानता हूं कि लगभग 9 फीसदी बढ़ा है और इस कालखंड में, लगभग सभी प्रदेशों के जो बजट हैं पेश होते हैं, उनकी ग्रोथ की रफ्तार यही होती है. इस साल बढ़कर 4 लाख 38 हजार 292 करोड़ रुपए का आपका बजट है. पूंजीगत व्यय जैसे कि आदरणीय मलैया जी ने बताया 88 हजार था या जितना था, उसके बाद और ग्रांट्स को लेकर 1 लाख 6 हजार 156 करोड़ रुपए हो गया है और राजस्व व्यय, जो है वह 3 लाख 32 हजार 161 करोड़ रुपए रखा गया है. यह विषय चिन्ता का है कि राजस्व व्यय इस प्रदेश में जो अधिकतम व्यय वाले प्रदेश है, अपने देश में, उसमें आ गया है. इनका राजस्व व्यय लगभग मेरा अनुमान है 78 फीसदी है और पूंजीगत व्यय जो कि बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है, जिससे निर्माण कार्य संपादित होते हैं, विकास को गति मिलती है, वह मात्र 22 या 23 फीसदी है, ये किसी भी मायने में अच्छा वित्तीय प्रबंधन तो नहीं है, मैं नहीं मानता इसको. कर्ज लेने में जयंत भाई ने कर्ज का विस्तार से उल्लेख किया, मैं सहमत हूं, कर्ज लिए जाते हैं, सभी सरकारें लेती हैं, लेकिन जो एफआरबीएम एक्ट बना है, तीन प्रतिशत तक का कर्ज आप जीएसडीपी का लेते हैं, केन्द्र सरकार की अनुमति से विशेष परिस्थिति अगर बनी है तो, साढ़े तीन फीसदी जाती है और अगर कोई त्रासदी आ जाए, जैसे कोविड काल में, मैं समझता हूं उस वर्ष 4 फीसदी तक कर्ज लिया गया है, लेकिन ये पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी और माननीय मोहन यादव जी कर्ज लेने में इनमें होड़ लगी है और अब कर्जा माननीय वित्त मंत्री जी बताएंगे. इस अगले वित्तीय वर्ष के समापन में साढ़े पांच लाख करोड़ रुपए से कम तो नहीं होगा और संभावना यही है. अत्यधिक व्यय जो निर्माण नहीं करता उसके कारण राजस्व प्राप्तियों के बाद वित्त पोषण के लिए 1.2 से 1.4 लाख करोड़ की आवश्यकता आपको और पड़ेगी, ये बजट पढ़ने से स्पष्ट होता है. एफआरबीएम के बारे में मैंने आपको बताया, उसकी सीमा कैसे निर्धारित होती है. आप तो अपने दस्तावेजों में हमेशा यही बताया करते हैं, फ्लोर में भी जब नेताओं के भाषण होते हैं, तो बेहतर वित्तीय प्रबंधन है, तय सीमा के अंदर ही हम कर्ज लेते हैं, लेकिन मेरा ऐसा मानना है कि ये आंकड़े कहीं न कहीं इसमें कुछ घालमेल होता है. मध्यप्रदेश का जो सकल घरेलू उत्पादन है, उसमें कृषि का जो हिस्सा है, वह बहुत बड़ा हिस्सा है. जो लगभग 7-8 फीसदी है, राष्ट्रीय औसत साढ़े तीन चार फीसदी आता है, बहरहाल बजट भाषण में माननीय वित्तमंत्री जी ने मैं तो नहीं बोलना चाहता था, लेकिन सात, आठ बार आपने माननीय प्रधानमंत्री जी का भी नाम लिया, इस संबंध में भी बोला कि उनके नेतृत्व में केंद्र सरकार जहां तक मैं मानता हूं एक आप्टिक्स और परसेप्श्न क्रियेट करके जो भारत की मीडिया, अब जो भी नाम आप उस मीडिया को दे दें, उसके माध्यम से एक ऐसा कुहासा फैलाती है कि सही और गलत में लोग फर्क नहीं कर पाते हैं, जब वर्ष 2014 में माननीय मोदी जी आये थे, तो नारा था हर-हर मोदी, घर-घर मोदी, इसमें तो आपत्ति नहीं होना चाहिए थी, यह नारा था और सार्वजनिक रूप से छपता था, भाषण आप लोग देते थे, वर्ष 2019 में वह तब्दील होकर घर-घर मोदी हो गया और अब वर्ष 2025 के बाद स्थितियां बहुत बदली हैं, मुझे थोड़ा कहने में संकोच हो रहा है, पर अब वह नारा थर-थर मोदी हो गया है, क्यों हो रहा है, यह आप लोगों को विदित है, क्या अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियां बन गई हैं, वह जो भारत जिसकी एक आवाज थी, एक ताकत थी, जब दो ध्रुवीय विश्व होता था, एक कम्युनिस्ट ब्लॉक और दूसरा नाटो का ब्लॉक पंडित जवाहर लाल नेहरू ने और उनके साथियों मार्शल टीटो, सुकर्णो इन लोगों ने मिलकर एक नॉन एलायेंड मूवमेंट चलाया था और तब ये यू.एस.ए के प्रधानमंत्री से आंख में आंख डालकर देखते थे, जब वहां जवाहरलाल जी जाते थे, तो केनेडी हवाई जहाज में चढ़ गये लेने के लिये और आज हमारी क्या स्थिति है कि फॉरेन डिपार्टमेंट का एक अदना सा कर्मचारी आ जाता है हमारे राष्ट्र के मुखिया को लेने के लिये तो ऐसी परिस्थितियां देश में क्यों बन रही है? यह चिंताजनक है. आज बहुत सी जो विरासतें हैं, उनको मिटाये जाने का भी काम हो रहा है और गांधी जी के ऊपर फिर एक हमला, मनरेगा जो यू.पी.ए. सरकार में एक कानून बना था, उसमें महात्मा गांधी जी का नाम था, अब उनका नाम हटाने की जरूरत क्या थी इस बात की, अब उसको कर दिया है जी राम जी, (XX) अरे माननीय जयंत जी आप कह रहे थे कि गड्ढों में सड़क है, सड़क में गड्ढें, रोडें नहीं थी, तो हमारे आदरणीय राम जी प्रभू काहे पर चलते थे, सीमेंट रोड पर चलते थे कि गड्ढे में चलते थे.
डॉ.सीतासरन शर्मा -- सभापति महोदय, यह जो शब्द है, इसको विलोपित करवायें.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह -- क्यों माननीय मैं आपसे सहमत नहीं हूं, क्यों विलोपित होगा, कौन सी मैंने असंसदीय बात कह दी है.
डॉ.सीतासरन शर्मा -- यह संसदीय भाषा नहीं है, (XX) आप वरिष्ठ नेता है, सभापति महोदय निर्णय कर लें.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह --नहीं सीतासरन जी मैं सहमत नहीं हूं, इसमें मैंने कौन सी आपत्तिजनक बात कह दी है.
डॉ.सीतासरन शर्मा -- सभापति महोदय, आप निर्णय कर लें.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह -- अरे राम जी के जितने आप भक्त हैं, उतना मैं भी भक्त हूं. हमने कितने मंदिर बनवाये होंगे, आपको पता ही नहीं है. सभापति महोदय, आपने निकाल दिया क्या, क्यों निकाला ?
सभापति महोदय -- नहीं, नहीं कहां निकाला है.
श्री अभय मिश्रा -- आप बार बार कहते हैं कि कहां घुस आये, तो यह एक जनरल बोल चाल की भाषा है कि कहां घुस आये.
सभापति महोदय -- जी राम जी बोलने में क्या आपत्ति है, उन्होंने योजना का नाम लिया है.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह -- जी राम जी, राम नाम तो दिल्ली से ही आया है.
डॉ.सीतासरन शर्मा -- योजना के नाम में जरा भी एतराज नहीं है, एतराज जरा उसको पढ़ लीजिये कि उसमें क्या लिखा है.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह -- राम जी अगर सड़क पर चलते थे, पथ पर चलते थे, तो उनके पथ को तो हम राम गमन पथ के नाम से मना रहे हैं. यह डॉ. सीतासरन जी इतना भयग्रस्त क्यों हैं, राम आपके भी हैं, राम हमारे भी हैं.
सभापति महोदय-- ऐसा कोई शब्द बोला नहीं गया जिसमें...
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- गांधी जी का नाम कहां से आप हटाओगे. अरे मंदिर तोड़ भी दोगे आप तो क्या लोग उसमें जो स्टेच्यू होती है, प्रतिमा होती है उसको भूल जायेंगे, क्या उसकी पूजा नहीं करेंगे, ये आप सबको समझना चाहिये. राष्ट्रीय अध्यक्ष आते हैं बाहर से, सबसे पहले हमारी सरकार उनको कहां ले जाती है या वह कहते हैं कि हमें वहां जाना है, राजघाट पर जाते हैं, बापू की समाधि पर...
श्री नागेन्द्र सिंह-- आप बजट पर भाषण दे रहे हैं न कि पॉलिटिकल भाषण दे रहे हैं.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- अब आप भी मुझे टोकने लगे. इसमें कौन सी बात है, क्या अंतर है.
डॉ. सीतासरन शर्मा-- मेरा आपसे अनुरोध है कि आप भारत सरकार से थोड़ा मध्यप्रदेश सरकार पर आ जायें.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- आप लोग भयग्रस्त क्यों होते हैं.
श्री प्रीतम लोधी-- माननीय सभापति महोदय...
सभापति महोदय-- प्रीतम सिंह जी, जब आपका नंबर आये बोल लेना.
श्री प्रीतम लोधी-- जो हमारे वरिष्ठ नेता जी कह रहे हैं उनकी बात को सुनो न जरा. क्या बोल रहे हैं. (XX) राम जी हमारे आराध्य हैं.
सभापति महोदय-- सबके आराध्य हैं भैया. उनके सम्मान में कोई ऐसी बात नहीं कही गई. ...(व्यवधान)...
श्री प्रीतम लोधी-- आप इसको विलोपित करें.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- सभापति महोदय, यह विलोपित करवा रहे हैं.
श्री प्रीतम लोधी-- बिलकुल करवायेंगे. ...(व्यवधान)...
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- अरे जनता विलोपित कर देगी आपको अगर राम को विलोपित करवाओगे. ...(व्यवधान)...
श्री प्रीतम लोधी-- आपने गलत शब्द बोला है. ...(व्यवधान)...
श्री अभय मिश्रा-- सभापति महोदय, शासकीय योजनाओं का नाम भगवान से मिलाजुला रख लेंगे और उस पर चर्चा भी नहीं करने देंगे. ...(व्यवधान)...
एक माननीय सदस्य-- विधायक जी, भगवान राम की माता जी का नाम बता दें आप तो. ...(व्यवधान)...
श्री प्रीतम लोधी-- अरे हम इतने पढ़े लिखे नहीं हैं ...(व्यवधान)...
श्री अभिजीत शाह-- देखिये भगवान श्रीराम जी की माता जी का नाम नहीं पता इनको. ...(व्यवधान)...
सभापति महोदय-- मेरा सभी से आग्रह है कि सभी बैठ जायें. ...(व्यवधान)...
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- सीतासरन जी आप सब जानते हुये भी गलत बोल रहे हो. ...(व्यवधान)...
डॉ. सीतासरन शर्मा-- मैंने कोई गलत बात नहीं बोला. सभापति जी पढ़ लें, उनको उचित लगता है तो रहने दें, नहीं लगता है तो हटा दें, इसमें क्या गलत है. ...(व्यवधान)... अपनी बात तो हम रख सकते हैं न.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- अरे आप इतने वरिष्ठ सदस्य हैं, इतने ज्ञानी हैं आप, वकील हैं, सब कुछ हैं, आप अध्यक्ष रहे हैं, सब समझते हैं फिर भी आप ऐसा कह रहे हैं.
श्री प्रीतम लोधी-- अरे ज्ञानी हैं, वकील हैं और उनकी बात को आप तबज्जों नहीं दे रहे हैं, उनकी बात को तो आप समझ नहीं रहे.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- अरे आप बैठ जाओ. ...(व्यवधान)...
श्री प्रीतम लोधी-- सभापति महोदय, पहले आप इसको हटाइये.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- क्या सदन नहीं चलने देंगे क्या.
श्री प्रीतम लोधी-- नहीं चलने देंगे, आप इसको हटाइये.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- नहीं हटेगा. ...(व्यवधान)... गांधी जी का नाम लेते ही इनको आग लग जाती है. ...(व्यवधान)...
श्री प्रीतम लोधी-- सभापति महोदय, आप विलोपित करिये इसे.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- आप आसंदी को आदेश दे सकते हैं क्या. ...(व्यवधान)...
श्री प्रीतम लोधी-- हम आदेश नहीं दे रहे निवेदन कर रहे हैं. ...(व्यवधान)...
सभापति महोदय-- अरे बैठ जाओ मंत्री जी बोल रहे हैं. ...(व्यवधान)...
(..व्यवधान..)
श्री राकेश सिंह,लोक निर्माण मंत्री - माननीय सभापति महोदय, मेरा केवल इतना ही विनम्र आग्रह है कि एक तो यह सच है कि आसंदी को कोई भी चुनौती दे सकता है न आदेश दे सकता है दूसरी बात है कि अगर कहीं कोई बात आई है तो आसंदी उचित समझे तो यह व्यवस्था दी जा सकती है कि उसका अध्ययन करके उसको ग्राह्य करना है या अग्राह्य करना है वह तय कर लें. मेरा इतना ही निवेदन है.
सभापति महोदय - उसको देख लेते हैं पढ़ लेते हैं.
डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह - माननीय सभापति महोदय, गांधी का नाम तो यह समाप्त नहीं कर पाएंगे. 80 देशों में स्टेच्यू लगे हैं रोडें बनी हैं खैर उनका अपना अंदाज है उनकी अपनी सोच है गांधी जी की विरासत के बारे में कह दूं. समुद्र हूं, हजारों नदियां मिलती हैं मुझमें लेकिन अपनी हद में रहता हूं वरना बारिश में तो नदी,नाले भी सीना चौड़ा कर लेते हैं. गांधी जी का क्या बिगाड़ोगे. यह स्वर्णिम मध्यप्रदेश की बात करते हैं. तेजी से विकसित होने वाला प्रदेश मध्यप्रदेश हिन्दुस्तान में,अरे लेकिन हम खड़े हुए कहां हैं. अपने पैरों के नीचे की जमीन आपने नापी है देखी है मैं आपको आंकड़े दिये देता हूं. हमारा नंबर विकास के सूचकांक जिसमें प्रति व्यक्ति आय महत्वपूर्ण है. जीएसडीपी अपनी जगह है प्रति व्यक्ति आय महत्वपूर्ण है. इसमें 12 राज्य जो बड़े-बड़े राज्य हैं देश के,उत्तर प्रदेश और बिहार को छोड़ दें उसके बाद हमारा नंबर आता है दसवां नंबर. पिछले 21-22 सालों से आपकी सरकार है. आप रोना रोते हो कि कांग्रेस की 70 साल सरकार रही अरे गणित तो आप लोग लगा लिया करो कम से कम. 1956 में मध्यप्रदेश बना. 56 के बाद आज तक कितने वर्ष हुए 68-69,उसमें आपने भी करीब-करीब 20 साल सरकारें चलाईं तो कुछ तो दोष अपने ऊपर भी ले लिया करिये पूरा दोष कांग्रेस की तरफ ही क्यों अगर गलत हुआ है तो आप भी भागीदार हो उसमें. अब आपको हम प्रति व्यक्ति आय बता देते हैं कि हमारा जो आम आदमी है वह कितना सम्पन्न है या कितना विपन्न है देश की तुलना में अन्य राज्यों की तुलना में. तेलंगाना आबादी 3.8 करोड़,जीएसडीपी 17.93 लाख करोड़ और प्रति व्यक्ति आय 3 लाख 90 हजार रुपये,तमिलनाडु की है 3 लाख 50 हजार.मैं तुलनात्मक अध्ययन बता रहा हूं हम मध्यप्रदेश वाले कितने अमीर हैं.आंध्र प्रदेश 3 लाख 35 हजार,कर्नाटक 3 लाख 31 हजार प्रति व्यक्ति आय वर्ष में,गुजरात 3 लाख रुपये,महाराष्ट्र 2 लाख 89 हजार,छत्तीसगढ़ जो हमसे अलग होकर बना जो एक जमाने में बहुत पिछड़ा होता था. छत्तीसगढ़ की प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 97 हजार है माननीय वित्त मंत्री जी.मलैया जी चले गये.करार हमारा था कि सुनकर जाएंगे शायद ट्रेन पकड़नी होगी चले गये. पश्चिम बंगाल हमसे ज्यादा है, 1 लाख 88 हजार, झारखण्ड हमसे ज्यादा है, 1 लाख 75 हजार है. फिर हम मध्यप्रदेश वाले आते हैं, जिनकी प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 69 हजार है और हमसे गरीब उत्तरप्रदेश, बिहार है, आप यह छोड़ दीजिये. अब उद्योगों की बात कर लेते हैं. बहुत सारी इन्वेस्टर्स मीट हुईं, शिवराज जी बहुत दावे किया करते थे, मुझे स्मरण है और माननीय डॉ. मोहन यादव जी ने भी वही राह पकड़ ली है. दावोस की कहानी तो कल श्री हेमन्त ने सुनाई थी, वह बड़ी मजेदार कहानी थी, हम और हमारे दो. कमलनाथ जी का कल कोई जिक्र कर रहा था कि वह भी जाते हैं. कमलनाथ जी तो पिछले 20-25 वर्ष से जाते थे, वह राजनेता एवं उद्योगपति दोनों हैं, वह वाली बात तो सामने आई है. अब भारतीय जनता पार्टी जुमले गढ़ने में बहुत निपुण हो गई है, अच्छे-अच्छे जुमले गढ़ती है, इसके कई नाम दे दिए हैं. इन्वेस्टर्स मीट, ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट, रीजनल कॉनक्लेव, माइनिंग कॉनक्लेव, सेक्टोरियल मीट और दावोस करार कहा जाता है, जो पब्लिश हुआ है, हम लोगों के संज्ञान में है. 31 से 33 लाख करोड़ रुपये इतना अगर पूंजी निवेश हो जायेगा तो लगभग 15 लाख रोजगार के अवसर मिलेंगे, यह मैंने पढ़ा है. मध्यप्रदेश इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार 1 हजार 28 इकाइयों को जमीन आवंटित हुई है और 1.07 लाख रोजगार पैदा होने की संभावना है. अभी तो जमीन अलॉट हुई है. यह मैंने इकोनॉमिक सर्वे में पढ़ा है और आप गिनती बढ़ाते हो, इन्फ्लेट करते हो, तीन आदमी भी कोई दर्जी की दुकान खोल लेता है और उसने रजिस्टर कर लिया तथा उसके पास चार कर्मचारी हैं, तो आपने उसकी गिनती उद्योग में कर ली. इस तरह से आपके आंकड़े बनते हैं, अगर हम इतना ही मान लें कि 1.17 लाख करोड़ रुपये इस वर्ष आप लोग अगर लाये हैं, तो आप लोग अगले 2 वर्षों में कितना लायेंगे ? 3.50 लाख करोड़ रुपये लायेंगे. आपकी बातें बड़ी-बड़ी हैं. 32 लाख, 33 लाख, 34 लाख करोड़ और आप लोग कहां पर हैं ? अर्श की बातें फर्श पर हैं.
माननीय सभापति महोदय, वर्ष 2020 से वर्ष 2025 तक इन पांच वर्षों में प्रदेश में लगभग 5 हजार 96 एमएसएमई सेक्टर की इकाइयां बन्द हो गई हैं. अक्सर आपकी सरकार का फोकस बड़े उद्योगों में होता है, रोजगार छोटे उद्योग पैदा करते हैं, लेकिन यह बन्द होते चले जा रहे हैं. आप इतनी बड़ी आबादी का क्या करेंगे ? लोग बेरोजगार घूम रहे हैं. जो हमारे श्रमिक हैं, स्किल डेवलपमेंट की भी आपकी योजनाएं हैं, सब निष्फल हैं, सब निष्प्रभावी हैं, केन्द्र सरकार वाली भी हैं, लोग ट्रेनिंग लेने नहीं जाते हैं, जो लोग ट्रेनिंग में जाते हैं, वह थोड़े दिनों में वापिस चले आते हैं. उसका स्वरूप आपको ठीक करना पड़ेगा और जो अवसरों की भाषा है, वह डाउटेलिंग कह देते हैं. यह लोग बहुत होशियार लोग हैं. यह तरह-तरह के कॉइन अ फ्रेज़ करते हैं और हम सोचते ही रह जाते हैं कि कोई बहुत बढि़या चीज होगी, जो समझ नहीं पाता है, वह कहता है कि बहुत बढि़या है. ऐसे-ऐसे कॉइन अ फ्रेज़ बना देते हैं. इसमें चिन्ताजनक यह है कि पिछले वर्ष पूरे देश में 26 लाख 60 हजार करोड़ रुपये का पूंजी निवेश आया है और माननीय वित्त मंत्री महोदय, हम मध्यप्रदेश वाले कहां पर खड़े हुए हैं.
माननीय सभापति महोदय, हमारे यहां 3.02 प्रतिशत इन्वेस्टमेंट आया है. यहां बातें बड़ी-बड़ी होती हैं, यदि हमारी आबादी के आकार से लेंगे, तो यह 8 फीसदी है, 7 फीसदी है, क्षेत्रफल से लेंगे तो यह 9 प्रतिशत है. हमारे यहां इन्वेस्टमेंट 3.02 प्रतिशत आ रहा है. ''तू इधर-उधर की न बात कर ये बता कि काफिला क्यूँ लुटा, मुझे रहज़नों से गिला नहीं तिरी रहबरी का सवाल है.'' हम अब रोजगार के बारे में बात कर लें. अब हम शासकीय विभाग की बात कर लेते हैं, निजी छोड़ देते हैं, एक बानगी है जैसे घर में पुराने समय में चावल पका है कि नहीं, केवल 2-4 दानों को निकालकर अंदाजा लगा लिया जाता था, लोग जान जाते थे कि स्थिति क्या है. हम PSC (Public Service Commission) की बात कर लें, जिसमें चयन होना गए प्रतिष्ठा की बात मानी जाती है, बहुत से नौजवान इसके लिए लालायित रहते हैं, कोशिश करते हैं लेकिन वहां भी उनका मोहभंग होने लगा है. हम आपको आंकड़े दे देते हैं, वर्ष 2019 में जब कमल नाथ जी की सरकार थी, 3 लाख 66 हजार आवेदन, 571 पदों के विरूद्ध. अब डॉ. मोहन यादव जी की सरकार की बात कर लेते हैं, शिवराज जी को छोड़ देते हैं, वर्ष 2024 में 1.84 लाख आवेदन आये, 110 पदों के लिए, वर्ष 2025 में 1.18 लाख आवेदन आये, 158 पद, वर्ष 2026 में 1.30 आवेदन, 155 पद, ये पद सिकुड़ते जा रहे हैं अर्थात् नौजवानों को इससे मोहभंग हो गया है. यहां तक कि पूर्व में रोजगार कार्यालय में एक परंपरा, व्यवस्था होती थी कि वहां बेरोजगार पंजीयन करवाते थे, आज आप आंकड़े देख लीजिये, वहां नौजवान जाता नहीं क्योंकि उसे मालूम है वहां जाना निरर्थक है, व्यर्थ है, नौकरी लगनी नहीं है, यह प्रदेश की हालत है. मैं आपको आईना दिखा रहा हूं, विपक्ष में हूं, यह मेरा काम है और धूल भी मैंने साफ कर ली है, माननीय वित्त मंत्री जी आप इसे अच्छी तरह से देखें.
सभापति महोदय, रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए केवल उद्योग ही नहीं होते हैं. पर्यटन बहुत बड़ा रोजगार का साधन है. हमारी ऐतिहासिक धरोहरें हैं, धार्मिक पर्यटन, राष्ट्रीय उद्यान, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में होटल आदि हैं, मेडिकल पर्यटन भी आजकल है, बहुत से लोग केरल आयुर्वेद के लिए जाते हैं चूंकि भारत में विदेशों की तुलना में इलाज सस्ता है इसलिए वहां इलाज करवाने आते हैं.
सभापति महोदय, हमारे अंचल में एक सरसी आइलैण्ड बाणसागर बांध में बना है. वह रास्ता बंद हो गया, चूंकि वहां बांध बन गया, जो रास्ता था, जो सतना-उमरिया-शहडोल-अमरकंटक जाता था, वह पुल डूब गया, मैंने माननीय लोक निर्माण मंत्री जी से अनुरोध किया था कि वह एक ऐतिहासिक स्थल है, ऋषि मार्कण्डेय जी की तपोभूमि है, आप लोग ऐसी चीजों को बहुत महत्व देते हैं, इसे बनवायें, हां, उसमें खर्च कुछ ज्यादा है लेकिन विंध्य के लिए यह बहुत बड़ी सौगात होगी. पर्यटन के दरवाजे खुल जायेंगे, पर्यटन उद्योग सर्वाधिक रोजगार के अवसर पैदा करता है. वहां व्हाइट टाइगर सफारी है, हमारे राजेन्द्र जी ने विशेष प्रयास किया था, बाणसागर बांध, सरसी है, बांधवगढ़ नेशनल पार्क भी है.
उपमुख्यमंत्री (श्री राजेन्द्र शुक्ल)- माननीय, छुहिया घाटी टनल बनाने के लिए, जैसे रीवा से चुरहट के बीच में एक टनल बनी हुई है, वैसी ही सिक्सलेन टनल छुहिया घाटी में बन जाये और आप अमरपाटन क्षेत्र से रीवा आसानी से आ-जा सकें, उसके लिए DPR बनाने के लिए, रुपये 5 करोड़ का प्रावधान वित्त मंत्री जी ने किया है. (मेजों की थपथपाहट)
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह- धन्यवाद मंत्री जी. आप विकास के लिए चिंतित रहते हैं, काश यही कुछ भाव, ख्याल हमारे राकेश जी के ह्दय में आ जाते क्योंकि हमने इनसे पुल के लिए निवेदन किया था.
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह)- सभापति महोदय, वे इतने प्रेम और प्यार से मेरा नाम ले रहे हैं तो मुझे कहना ही पड़ेगा, भाव जरूर आते हैं, वे इतने कुशल राजनेता हैं, डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह जी कि वे मांग करते नहीं हैं और बगैर मांग के मांग पूरी हो, ये समझना बड़ा कठिन है. मैंने आज भी उनसे कहा, पहले भी उनसे कहा कि कम से कम कुछ प्रेम-पत्र ही सही, आप हमें सौंप दें तो उस पर विचार करके विकास की वर्षा वहां भी हो, यह हम जरूर सोचेंगे, पिछले 6 माह से वे एक पुल की मांग मुझसे कर रहे थे. डॉ. राजेन्द्र जी मैं सदन में बता दूं, आप नाराज तो नहीं होंगे ?
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह--होंगे भी तो क्या फर्क पड़ेगा.
श्री राकेश सिंह-- आप हमारे प्रिय हैं, हमको फर्क पड़ेगा. हर सत्र में वह मुझसे उस पुल की बात करते थे. मैं हर बार कहता था कि कम से कम मुझे पत्र तो दे दीजिए. मैं उसका परीक्षण करा लूं. चार सत्र के बाद पांचवे सत्र में जब वह फिर मेरे पास बैठे थे तो अंतत: वह पत्र मेरे हाथ में आया. पत्र भी ऐसा है सीधा-सीधा 500 करोड़ रुपए का जो सीधे बाणसागर को एक पार से दूसरे पार लेकर जाएगा तो अब या तो वह मांग करते नहीं हैं और करते हैं तो ऐसी करते हैं कि विभाग भी परेशानी में आ जाए, लेकिन आपका स्थान हमारे दिल में है.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- मेरे क्षेत्र की जनता के नजरिये से वह काफी नहीं है. मैं बहुत आभारी हूं कि मुझे आपके ह्दय में स्थान मिला, लेकिन यह थोड़ा सा असत्य है. आपने मुझसे सदन के बाहर कहा था कि आपका पत्र प्राप्त हुआ, लेकिन खर्च बहुत है. आप भूल रहे हैं.
श्री राकेश सिंह-- सभापति महोदय, मैं असत्य वाचन भी नहीं करता हूं, बोलता भी नहीं हूं और मैंने आपकी अनुमति से सत्य बोला है नहीं तो मैं नहीं कहता क्योंकि मुझे मालूम था कि आपसे पूछकर ही कहना ठीक होगा. वह मैंने सदन के बाहर ही कहा लेकिन वह 500 करोड़ रुपए का था यह सच है.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- सभापति महोदय, जब उसकी एक प्रोफाइल बनी तो वह 350 करोड़ रुपए था. मंत्री जी अब आपके अधिकारियों ने उसको और बढ़ा दिया तो यह तो महारथ हांसिल है. हनुमान जी की पूछ जैसा ही बजट बढ़ाते हैं. थोड़ा सा परीक्षण कर लीजिए, चूंकि विंध्य की मांग है. राजेन्द्र जी आप इस पर समर्थन करें. हम आपकी चीज का समर्थन करते हैं. आपको भी समर्थन करना चाहिए. आप हमारे क्षेत्र के नेता हैं.
श्री राजेन्द्र शुक्ल-- कुछ काम ऐसे होते हैं जो अकेला एक काम सौ काम के बराबर होता है तो इसलिए आपकी जो मांग है उस पर विचार किया जा सकता है.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- सभापति महोदय, उस स्थान को जहां की मैं बात कर रहा हूं. आपने उसको डेवलप भी किया है. वहां लाईट ले गये हैं. वहां बढि़या फॉरेस्ट का रेस्टहाउस है. कभी आकर रुकिये. इतना विहंगम दृश्य दिखता है, पूरा समुद्र दिखता है. कम से कम थोड़ा पसीज जाइये या यहां न हो तो गडकरी जी को प्रेम पत्र लिखिए कुछ भी कीजिए, लेकिन बन जाए. राजेन्द्र जी ने भी समर्थन किया है. दो राजेन्द्र हैं.
श्री राकेश सिंह-- राजेन्द्र जी ने कहा है कि कई काम सौ काम पर भरी होते हैं. उन्होंने समर्थन कर दिया मैं उनसे कहूंगा कि उनके हमेशा सौ काम होते हैं उन सौ काम के बदले में वह एक काम जरूर भारी होगा अगर वह सहमत होंगे तो.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- सभापति महोदय, स्थान के पन्नों में नाम दर्ज हो जाएगा. वह इतना महत्वपूर्ण है. आपने देख लिया राजेन्द्र जी सहमत हैं. दूसरी बात यह है कि इनकी प्रगति की बड़ी लंबी तस्वीर है. इस चीज में नंबर 1, उस चीज में नंबर 1, बहुत सी ऐसी चीजें हैं जहां नंबर एक का दर्जा यह कहते हैं और कभी-कभी ऐसा भी तो होता है न कि एक बालक दौड़ा, रेस में गया और जब घर पहुंचा तो बताया कि पापा, पापा आज रेस थी. पिताजी ने पूछा बेटा आज कौन सा स्थान मिला तो वह बोला मैं प्रथम आया, तो पापा ने पूछा कि द्वितीय कौन आया तो वह बोला हम अकेले ही तो दौड़े थे तो इस तरह के तो आपके क्लेम्स हैं. आप जबलपुर के हैं. अगर अनुमति हो तो हम आपको छोटा सा किस्सा बता दें. माननीय शरद यादव जी को कौन नहीं जानता है. वह भी इंजीनियर थे, लेकिन बीएससी इंजीनियरिंग का कोर्स था उस जमाने में. मेरे पिताजी जबलपुर में पोस्टेड थे तो वह हमसे कहा करते थे. जब शरद जी पढ़कर निकल गये थे, दिल्ली चले गये थे सन् 1975 में सांसद बन गये थे. हाँ मैं कॉलेज में ही था. सन् 1975 की बात है तो वे हमसे कहा करते थे कि देखो तुम पढ़ते नहीं हो शरद को देखो. मेरे पिताजी उस समय डीआईजी थे. शरद को देखो कितना होशियार है गोल्ड मेडलिस्ट है. हमको उसमें कुछ झोल लगा. मुझे लगा कुछ न कुछ गड़बड़ी है. मैं वहां के कॉलेज चला गया और एक पुराने प्रोफेसर से पूछा कि सर क्या ये गोल्ड मेडलिस्ट हैं. वे बोले हैं तो, लेकिन वो कहानी अलग है. मैंने कहा बताइए. बोले वो 10 साल से पढ़ रहे थे. एटीकेटी सिस्टम था. हमारे दल में भी एक नेता थे 10 साल वाले अब आपके दल में आ गए हैं. 10 साल वाले सब उधर ही जा रहे हैं.
सभापति महोदय -- आप अपनी बात जारी रखें. कृपया विषय पर बोलें.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह ‑‑आप जबलपुर के हैं मैं कोई गलत तो नहीं बोल रहा हूँ. बहरहाल सभी प्रोफेसर्स और प्रिंसीपल चाहते थे कि शरद जी यहां से जाएं. बड़ी राजनीति कर रहे हैं.
सभापति महोदय -- शरद जी बड़े सम्माननीय नेता रहे हैं.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह ‑‑ मैं उनके सम्मान के विरुद्ध नहीं बोलूंगा. वे हमारे खुद बहुत अच्छे परिचित थे. हमारे पिताजी के प्रशंसक थे. हमारे पिताजी के पास आते जाते थे. हमारे पिताजी उनका उदाहरण देते थे. हमने जब पता लगाया तो पता चला कि बीएससी कोर्स इंजीनियरिंग का खत्म हो गया था सिर्फ एक विद्यार्थी बचा था. उनके लिए परीक्षा कराई गई. यह इनफरमेशन मुझे देना थी.
सभापति महोदय -- बजट पर बोलें.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह ‑‑ सभापति महोदय, क्षमा करें. यह जो सुनहरी तस्वीर ये पेंट करते हैं उसका दूसरा पक्ष मैं बताना चाहता हूँ. कहां खड़े हैं. आज इंदौर में दूषित जल से 24 लोगों की मौत के बारे में बहुत चर्चा हो चुकी है उसका उल्लेख करने का कोई मतलब नहीं है. गौशालाओं को 270 करोड़ रुपए बांटने के बाद भी 8.5 लाख गौवंश बाहर घूमता है. कितने खेद की बात है कि भोपाल में सरकार की नाक के नीचे, नगर निगम के स्लाटर हाउस में, माननीय वित्त मंत्री जी ध्यान दीजिए. 250 गौवंश काट दिए जाते हैं. उनका माँस मिला. उसका परीक्षण किया गया. इसके लिए कौन उत्तरदायी है. गौ-माता की जय का नारा पंडित जी लगाएंगे, लेकिन गौवंश कट रहे हैं. सरकार की नाक के नीचे. सबनानी जी आप के लिए नहीं, हम सभी के लिए लज्जा की बात है. हम सभी गौमाता का बहुत आदर करते हैं.
3.37 बजे {सभापति महोदया (श्रीमती अर्चना चिटनीस) पीठासीन हुईं}
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह ‑‑ सभापति महोदया, छिंदवाड़ा में कफ सीरप पीने से 24 लोगों की मृत्यु हो गई. दिव्यांगजनों और बुजुर्गों को मात्र 600 रुपए पेंशन मिलती है. क्या 600 रुपए में बुजुर्गों का गुजारा चल सकता है, वह भी 4-4, 5-5 महीने से नहीं मिल रही है. रबी सीजन में खाद की कमी के कारण किसानों को भारी परेशानी, राज्य सहकारी संघ में बिना टेंडर के चहेती एजेंसियों को श्रमिक के ठेके दिए गए. सहकारी गृह निर्माण संस्थाओं में 80 फीसदी में विवाद. 21 साल में 4 जांचें फिर भी भ्रष्टाचारियों पर कोई कार्यवाही नहीं की गई. न पीड़ितों को न्याय दिलाया गया. 7.44 लाख छोटे बच्चे नौनिहाल सरकारी स्कूलों को छोड़ रहे हैं. पीएससी परीक्षा का मैंने आपको तानाबाना बता ही दिया है. महिला यौन अपराधों में मध्यप्रदेश अग्रणी है. अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ों को अधिकारों से वंचित करने में मध्यप्रदेश अग्रणी है. छोटे-छोटे बच्चे बच्चियों के गुमने में मध्यप्रदेश प्रथम 2-3 में आता है. मध्यप्रदेश में गांव-गांव में मादक पदार्थ बिक रहे हैं. केमिकल ड्रग्स, अवैध शराब घर-घर पहुंचाई जाती है. विन्ध्य में खासकर जो कोरेक्स सिरप आता है यह बहुत ही खतरनाक है. इससे खतरनाक कोई नशा नहीं होता है. बच्चों का दिमाग खोखला हो जाता है. बिना दिमाग के वे चलते फिरते रोबोट बन जाते हैं. यह पर्याप्त मात्रा में सप्लाई होता है, घर-घर बिक रहा है. मुझे कहते हुए खेद है कि इसमें अधिकारी और पुलिस के लोग मिले हुए हैं. अन्यथा यह रोका जा सकता है. प्रदेश के 5 हजार स्कूल बंद होने की कगार पर हैं. एमएसएमई की कितनी इकाइयां बंद हुईं यह मैंने बता ही दिया है. मक्का का सही दाम न मिलने से किसानों में नाराजगी है. एमएसपी 2400 रुपए है और इस साल मिले हैं 1200 रुपए. यह अभय मिश्रा जी बताएंगे ये बहुत मक्का खरीदते हैं. स्कूलों में शौचालय सुविधा नहीं है. मैंने बजट में 10,940 करोड़ खर्च निकाला, लेकिन आज तक सुविधा पूरी नहीं है. बिजली दरों में लगातार वृद्धि, किसान खुशहाल होगा अरे बिजली की दर आप महंगी करेंगे 10.99 प्रतिशत वृद्धि की अब तैयारी हो रही है, सुनवाई शुरू हो गई है सब कंपनियां घाटे में चल रही हैं अभी बड़ी वाहवाही लूटी गई कि वहां पर एक फ्लोटिंग सोलर प्लांट नर्मदा पर खोला गया है और यह दावा किया गया है कि सबसे सस्ती बिजली खरीदी जा रही है यानि 2 रुपये 25 पैसे या 30 पैसे में सरकार बिजली खरीद रही है. जब आपको बिजली 2 रुपये 25-30 पैसे में ही मिल रही है तो आप क्यों उसको 8 रुपये, 9 रुपये, 10 रुपये यूनिट में उपभोक्ताओं को बेचते हैं ? अंत्योदय वाली श्रेणी छोड़ दीजिए उसके बाद जितने हमारे बिजली के उपभोक्ता हैं बहुत हालाकान हैं इस पर आपको जरूर गौर करना चाहिए कि इतने रेट न बढ़ें.
सभापति महोदया, सिंगरौली में सोने की खदान को लेकर होने वाली जन सुनवाई का विज्ञापन स्थानीय अखबारों में नहीं हुआ सैकड़ों किलोमीटर दूर अखबारों में दिया गया. सिंगरौली में अडानी कोल ब्लॉक के लिए 6 लाख पेड़ों को काटा जाना है. मुझे स्मरण है वित्तमंत्री जी के भाषण में आपने कहा था कि पेड़ हमारे पिता हैं. छाया वह दूसरों के लिए देता है, फल वह दूसरों के लिए देता है, तो क्या अपने पिता तुल्य पेड़ों का इस तरह से कत्लेआम करवाएंगे, इतने सारे पेड़ काटे जाएंगे. कोई और व्यवस्था नहीं हो सकती है ? प्रदेश के पर्यावरण पर उसका दुष्प्रभाव नहीं पड़ेगा. अगर यह एक अंचल में पड़ना शुरू हुआ तो यह सर्वव्यापी है धीरे धीरे यह परेशानी सब जगह आने वाली है. प्रदेश की नदियों में नर्मदा, सोन, चंबल, केन, बेतवा आदि में अवैध उत्खनन जोरों पर है. माफिया यहां पर राज कर रहा है. प्रदेश के स्कूलों में छोटे बच्चों के साथ शिक्षकों, वार्डन, स्कूल ड्राइवर, अन्य स्टाफ द्वारा मारपीट करने की घटनाएं हो रही हैं. प्रदेश के स्कूल भवन जर्जर हैं. प्रदेश के विभिन्न जिलों में 17 स्कूल ऐसे हैं जिनका वर्तमान शिक्षा सत्र में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के निरीक्षकों द्वारा कभी निरीक्षण नहीं किया गया है. क्या करते हैं किस बात की यह तनख्वाह लेते हैं. आपकी एजुकेशन हब बनाने की नीति है. विदेशी कैम्पस दूसरे प्रान्तों में खुल रहे हैं. हमारे मध्यप्रदेश में किसी एक युनिवर्सिटी में विदेशी कैम्पस क्यों नहीं खुला है इस पर विचार करना चाहिए. दिसम्बर 2025 में पन्ना टाइगर रिजर्व में सारे नियमों को तोड़ते हुए दो हाथियों को लगाकर टाइगर शो किया गया विशिष्ट व्यक्तियों को उनको बाघ दिखाना था, शेर दिखाना था. क्या सबको दिखाया जा सकता है. अगर सबको दिखाया जा सकता है तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है परंतु विशिष्ट क्यों और मोदी जी ने बहुत सारी विशिष्टता की चीजें खत्म कर दी हैं. यह भी कर दिया वह भी कर दिया, पहले हम राज्यपाल को महामहिम कहा करते थे अब वह भी सब चला गया, बहुत सारे परिवर्तन हो गए तो यह क्यों हो रहा है.
सभापति महोदया, प्रदूषण बोर्ड की अनुमति के बिना प्रदेश में 5,961 उद्योग चल रहे हैं. प्रदेश में स्टील, सुपारी, गुटखा क्षेत्र के उद्योगों में, प्रतिष्ठानों में लगभग वित्तमंत्री जी मेरे पास आंकड़े हैं 700 करोड़ रुपये की जीएसटी की कर चोरी हो रही है आप कृपया इसपर ध्यान दें. आयुष्मान योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपये की जो राशि है गंभीर बीमारियों के लिए पर्याप्त नहीं है. मध्यप्रदेश में चेक पोस्ट तो आपने बंद कर दिए हैं लेकिन जो फ्लाइंग स्क्वॉड हैं जो दलाल हैं भरपूर वसूली कर रहे हैं यह आप शायद जानते होंगे. स्लीपर बसों का मामला है. कमजोर आदिवासी समूह पीवीटीजी जिसको कहते हैं सहरिया, बैगा, भारिया उनकी हालत अच्छी नहीं हैं. आप बताते हैं कि हम बजट में इतनी राशि दे रहे हैं परंतु उनकी हालत सुधर क्यों नहीं रही है. उनका शैक्षणिक स्तर क्यों नहीं बढ़ रहा है. आज भी आप उन इलाकों में जाइये शिक्षा का प्रचार प्रसार नहीं है.
माननीय सभापति जी, मध्यप्रदेश प्रधानमंत्री पोषण योजनान्तर्गत प्रतिदिन मात्र 5 रूपये 14 पैसे की ही राशि दी जाती, वित्त मंत्री जी शायद इस बजट में आपने इसको बढाया होगा, यह तो बहुत कम राशि है, काहे में अग्रणी हैं हम लोग. एक मुद्दा सामने आया नहीं है. हां भ्रष्टाचार में अग्रणी होते जा रहे हैं. अब बताईये जिस प्रदेश का मुख्य सचिव कलेक्टरों को कान्फ्रेन्स में लेकर के कहे कि मुख्यमंत्री जी की तरफ से शिकायत आई है कि कलेक्टर्स पैसे ले रहे हैं, बिना पैसे के काम नहीं हो रहा है, शर्म से सिर झुक जाता है.यह लीड सर्विसेस हैं.
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- माननीय सभापति महोदया,यह मिसलीड किया गया था, समाचार पत्र के द्वारा और माननीय मुख्य सचिव महोदय ने उसमे स्पष्टीकरण भी दूसरे दिन दिया था. उन्होंने ऐसा नहीं कहा था. अखबारों ने छाप दिया उसको बाद में फिर दूसरे लोगों ने भी उसको उठा दिया.अगले ही दिन मुख्य सचिव जी ने स्पष्टीकरण भी दिया है उसमें, ऐसा बोला है उनके पास में ऐसा कोई सबूत नहीं था.
डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह -- माननीय सभापति महोदय, मुझे यह ज्ञात है गाहे वगाहे अखबार पढ़ लेता हूं, कभी कभी न्यूज चैनल भी देख लिया करता हूं. लेकिन उन्होंने मुख्यमंत्री का हवाला देते हुये कहा था खुद नहीं कहा उन्होंने पर हवाला दिया था, इससे आप नहीं मुकर सकते , उन्होंने उनका हवाला दिया था, मैं मुख्य सचिव को नहीं कह रहा हूं कि उन्होंने यह कहा, हवाला दिया फिर मध्यप्रदेश में आप आंगनवाड़ियों का हाल देख लीजिये, कुपोषण है. 8 रूपये आप कुपोषित बच्चे को देते हो, इसकी राशि बढ़ाई जानी चाहिये.
सभापति महोदया, प्रदेश में वर्ष 2004 से 2025 की अवधि में जांच आयोग अधिनियम 52 की धारा 60 और धारा (3) के अंतर्गत गठित विभिन्न जांच आयोग की रिपोर्ट धूल खा रही हैं. रिपोर्ट प्राप्त हो जाने के बाद भी शासन की तरफ से उसको विधानसभा के सभा पटल पर नहीं रखा जा रहा है.
माननीय कैलाश जी आप पुराना समय याद कर लीजिये जब आप विपक्ष में थे तो जांच आयोग की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जाती थीं. लोकायुक्त, सीएजी की रिपोर्ट पर क्या आपके कार्यकाल में कभी सदन में चर्चा हुई है, भ्रष्टाचार पर अंकुश कैसे लगेगा. आपके पास राज्य आर्थिक अन्वेंषण ब्यूरो, लोकायुक्त संगठन ने प्रॉसिक्यूशन (अभियोजन) की मंजूरी के लिये भेजा हुआ है, आप अनुमति नहीं दे रहे हैं, उन सबको रखकर के आप लोग बैठे हुये हो. लगभग 400 से 500 अधिकारी के प्रकरण अभियोजन‑ की स्वीकृति के लिये शासन स्तर पर लंबित हैं, मैं समझता हूं कि यह भ्रष्टाचार को ओर आमंत्रित करता है.
सभापति महोदया, स्वास्थ्य के बारे में कहना चाहूंगा हमारे राजेन्द्र जी उप मुख्यमंत्री हैं और मेरा प्रत्यक्ष अनुभव है ,यह सब रिफरेंस सेन्टर बनते चले जा रहे हैं. यह थोड़ा सा आपको ध्यान देना है, थोड़ा कठिन कार्य है, दुष्कर कार्य है यह मै मानता हूं. इन डॉक्टरों से काम लेना बड़ा कठिन है, ज्यादा कुछ कहा तो उन्होंने हाल इस्तीफा दिया और जो पैसा आप जमा कराते हो जमा किया और घर चले फिर खाली हो गया आपका अस्पताल.
सभापति महोदय, यह कुछ ऐसी चीजें हैं जो मैं बताना चाह रहा था.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- सभापति महोदय, मैं आपका ध्यान आकर्षित कराना चाह रहा हूं. कांग्रेस पक्ष के पास में 1 घंटा है और लगभग 55 मिनट माननीय सदस्य को हो चुके हैं और कोई सदस्य बोलने वाला नहीं है तो आप कन्टीन्यू करें मुझे कोई आपत्ति नहीं है.
डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह -- माननीय सभापति महोदय, कैलाश जी थे नहीं, हमारी बात सुनना नहीं चाहते हैं, मैं भागीरथपुरा पर तो बोल ही नहीं रहा हूं. आज आपकी भाव भंगिमा में बड़ा अंतर है, कल तो आप बड़े असहज थे, मुझे लग ही नही रहा था कि यह कैलाश जी है. कल जो विश्नोई जी तरफ आपके जो तेवर थे ऐसा कभी हुआ नहीं है. आज आप अच्छे लग रहे हो, थोड़ा देर से जरूर आये हो, थोड़ा 5 मिनिट और बोलेंगे हम.
सभापति महोदय, मैहर जिले में खेरवाकला एक गांव है उसके पास में एनएच-30 मे जो आरओबी बन रही है, माननीय लोक निर्माण मंत्री यहां बैठे हुये हैं वे ध्यान देंगे, खेरवाकलां के पास नेश्नल हाईवे 30 मे मैहर के आगे जो आरओबी बन रही है बिल्कुल गलत बन रही है. आप खुद बुलाकर के डॉक्यूमेंट देख लीजिये वहां पर लोगों ने प्रतिष्ठा का विषय बना लिया है, वहां का जो एसडीओ है , सब इंजीनियर है उसको ईई भी सपोर्ट करेगा, वहां एसई भी करेगा और आपके जो सीई यहां पर बैठे हुये हैं धन्य हैं ऐसे अधिकारी, मैंने कभी देखे नहीं है. मेरे पास में पीड़ित आया मैंने उनको कहा कि जाईये मिल लीजिये , मैंने फोन किया कि जाईये मिल लीजिये क्या बात कहना चाहते हैं तो आप समझ लीजिये उनको सीई ने उन्होने बहुत डॉटा और कहा कि नेताओं से फोन कराते हो. मैंने फोन किया कि मिल लीजिये क्या बात कहना चाहते हैं, समझ लीजिये. तो उनको उन्होंने बहुत डांटा कि सिफारिश कराते हो नेताओं से. नेता किस लिए होते हैं राकेश सिंह जी. यह बड़ा गलत शब्द है. जब आप लोग इसमें मौन रहोगे फिर व्यवस्था चलने वाली नहीं है और यही कारण है कि विधायकों की चिट्ठी का जवाब कोई कलेक्टर नहीं देता है.कलेक्टर फोन नहीं उठाते हैं. क्या आप पत्र जारी करवायेंगे. आपकी सरकार करेगी. संसदीय कार्य मंत्री जी, यह परम्परा रही है पहले. यह कोई प्रोटोकाल नहीं है. विधायक होता क्या है. ढाई लाख, तीन लाख लोगों का प्रतिनिधि होता है, ढाई तीन लाख लोग यहां नहीं बैठ सकते, तो एक आदमी बैठता है उनकी आवाज उठाता है और ये अधिकारी, ये ज्यादा दिन नहीं चलेगी व्यवस्था. एक काम मोदी जी ने अच्छा किया, वह किया है उन्होंने कि जो लेटरल एंट्री शुरु कर दी है केंद्र में कि जो दूसरे विशेषज्ञ हैं, उनको भी इस कैडर में ला रहे हैं, ताकि थोड़ी सी जो कोयले की गर्मी है, वह राख में तब्दील हो, थोड़ी ठण्डी हो. इस पर नियंत्रण आप लोग लगाइये. अधिकारियों की यह मानसिकता है. मैं समझता हूं कि यह उचित नहीं है. मैहर जिले में हमारा क्षेत्र है अमरपाटन. बड़ा भेदभाव हो रहा है. दो ही विधान सभा क्षेत्र हैं. कलेक्ट्रेट बन रही है, तो मैहर के आगे 10 किलोमीटर कटनी की तऱफ. हमको मैहर जाना पड़ेगा फिर. हमको अलग कर दीजिये. हमको पुनः सतना में कर दीजिये. हम अनशन पर बैठने वाले हैं. मैं आमरण अनशन पर बैठूंगा. यह बहुत गलत हो रहा है. दो विधान सभा क्षेत्र हैं, आप न्याय नहीं कर पा रहे हैं. सारी चीज वहीं खुल रही हैं. क्या हम लोग सिर्फ ताली बजाने के लिये हैं. जिला बन गया. हमारी क्षेत्र की जनता को उससे क्या लाभ है. यह बड़ा सोचनीय विषय है. इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है. मैं 3-4 मिनट और लूंगा. मैं एक चीज कहना चाहूंगा और यह सच्चाई भी है. अध्ययन करने का थोड़ा सा अवसर मिलता है. मैंने यह देखा है कि जिस रष्ट्र में कट्टरता बहुत बढ़ जाती है, हम कट्टरता शब्द का ही इस्तेमाल करेंगे. वहां पर अगर अग्रणी सीट ले लेती है, तो वहां पर विज्ञान और टेक्नालाजी पीछे चले जाते हैं और विकास अवरुद्ध हो जाता है, धीरे पड़ जाता है. सभापति जी, यह थॉमस अल्वा एडिसन नहीं होता, तो यह बल्ब जलती होती. स्टीफन हॉकिंग ने बताया है कि अंतरिक्ष में क्या है, अंतरिक्ष का पूरा वह खोला है. आइंस्टीन ने थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी दी है. आर्किमिडीज आये, तो उनके उस प्रयोग से वह जहाज चलने लगे. Weight of the water is the volume of the water displaced. ऐसा कुछ है. यानि समय समय पर जब वैज्ञानिक आते हैं, यूरोप में इतना क्यों विकास हुआ है. मध्ययुगीन काल में, चूंकि तमाम आविष्कार हुए है. हमारे यहां एक दो लोगों को छोड़कर कहीं कोई आविष्कारक नहीं हैं. हमारे कालेज के, यूनिवर्सिटीज के पाठ्यक्रम में कहीं आरएनडी नहीं होती है. आप देख लीजिये यूनाइटेड स्टेट ऑफ अमेरिका में माननीय राकेश सिंह जी यह गंभीर मामला है. वहां पर आरएनडी कहां होती है. वहां की यूनिवर्सिटीज करती हैं और वह चीज फिर आती है, फिर हमको बहुत सारे सौगात दे जाती है. आज एआई, रोबोट टेक, तमाम सारी चीजें आ गई है. सभापति जी, आपकी सरकार ने राम गमन पथ शुरु किया है, स्वागत है. हम लोग सब उसका स्वागत करते हैं. कृष्ण पाथेय की चर्चा हमारे मुख्यमंत्री जी करते हैं. बहुत अच्छा है. महाकाल लोक का आपने विकास किया. अच्छा किया. सिंहस्थ के लिये 3 हजार 63 करोड़ क्षिप्रा को अविरल बनाने के लिये, कान्ह नदी की कफाई के लिये यह राशि आपने दी है, मैं इसका समर्थन करता हूं. आगे जब आयोजन होगा सिंहस्थ के लिये उसके लिये आपने लगभग 13 हजार करोड़ रुपये, वित्त मंत्री जी भी चले गये. 13 हजार करोड़ रुपये आवंटित किया है. लेकिन प्रश्न यह खड़ा होता है, मैं यह पूछना चाहता हूं, मैं जानना चाह रहा था वित्त मंत्री जी से, वह चले गये. राकेश सिंह जी शायद बतायें, दो चार मंत्री जी हैं, राजेंद्र सिंह जी हैं, कैलाश जी हैं. मंत्री राजेन्द्र जी हैं, कैलाश जी हैं. अब विश्वविद्यालय में कुल गुरू की उपाधि दी थी ना, तो कोई गुरू है तो गुरू घण्टाल भी होना चाहिये. गुरू अकेले थोड़ा ही होता है. उसका भी एक सुपीरियर होता है. आप हैं तो यह सारी कमियां दूर हो जाती हैं. प्रश्न यह खड़ा होता है कि वर्ष 2003 के बाद ..
संसदीय कार्य मंत्री( श्री कैलाश विजयवर्गीय)- इस सदन के गुरू घण्टाल आप ही हैं.( हंसी)
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह- महाराज यह रिकार्ड में आ जायेगा, क्या कह रहे हो आप.
श्री कैलाश विजयवर्गीय- एक घण्टा बोलने वाला व्यक्ति घण्टाल हुआ की नहीं, बताइये.(हंसी)
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह- अब यह बताइये, डॉ. मोहन यादव जी ने कल ढाई घण्टे बोला या नहीं, सबने सुना है उन्होंने ढाई घण्टा बोला. खैर मैं खत्म कर रहा हूं, ज्यादा नहीं बोलने वाला हूं. आप क्षिप्रा को अविरल बनाने के लिये, उसकी सफाई के लिये करोड़ों रूपये. उमा जी आयीं, मुख्यमंत्री बनी उन्होंने यही प्रयास किया. श्री बाबूलाल गौर जी आये, शिवराज जी आये तब से हम लोग यही सुनते आये हैं. अब मोहन भैया आये हैं उनका नगर है. फिर वही प्रयास हो रहा है. पिछले 22 सालों में यह काम क्यों नहीं हुआ ? क्यों गंदे-गंदे नाले क्षिप्रा नदी में मिल रहे हैं. क्यों उसका प्रवाह बंद हो जाता है. यह विचारणीय बिन्दु है. माननीय सभापति महोदया, मैं समझता हूं कि आखिरी बात कहकर अपनी बात समाप्त करूंगा, क्योंकि बहुत समय हो गया है. कैलाश जी भी नाराज हो रहे हैं और पंडित जी तो लगातार आज मेरे पीछे पड़े हैं. डॉ. सीतासरन जी आज चुप हैं, मैं उनके प्रति कृतज्ञ हूं. एक बात मैं कह दूं, पंडित जी-
''काजल धोया दूध से, निकला इतना सार
काजल उजला हुआ नहीं, दूध हुआ बेकार''
सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, उसके लिये धन्यवाद.
डॉ. सीतासरन शर्मा- सभापति महोदय,
'' जिन्दगी भर मैं भूल यह करता रहा,
धूल चेहरे पर थी, आईना साफ करता रहा.''
सभापति महोदया- मैं माननीय सदस्यों से एक बात के लिये आग्रह करना चाहती हूं कि करीब सवा दो घण्टे से अधिक का समय हुआ है और हमारे 28 सदस्यों को और चर्चा में भाग लेना है तो थोड़ा सा समय का ध्यान रखकर बजट पर ही चर्चा हो ताकि चर्चा सार्थक हो सके.
श्री ओमकार सिंह मरकाम ( डिडौंरी ) - माननीय सभापति महोदया, माननीय वित्त मंत्री जी ने जो बजट पेश किया है उसमें कुल व्यय 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रूपये का कुल बजट प्रस्तावित है. आय का जो निर्धारण है 1 लाख 17 हजार 669 करोड़ राज्य के कर से, 1 लाख 12 हजार 137 करोड़ केन्द्रीय कर से, 24 हजार 394 करोड़ रूपये राज्य के कलेक्टिव कर से और 54 हजार 504 करोड़ केन्द्र के अनुदान से. इस तरह से कुल 3 लाख 8 हजार 704 करोड़ की प्राप्तियां हैं और व्यय 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ है. अगर इसमें हम जो प्राप्ति हैं और जो खर्च है, अगर उसमें हम घाटा करेंगे तो 1 लाख 29 हजार 614 करोड़ रूपये की राशि हमारे पास नहीं है.
माननीय सभापति महोदया जी, राजकोषीय घाटा 74 हजार 323 करोड़ रूपये माननीय वित्त मंत्री जी ने पुस्तक में ही कहा है. माननीय मंत्री जी वित्त विभाग का आपका जो रिकार्ड है जिसमें लिखा है. आप सिर्फ कर्जा पटा रहे हैं 33 हजार 375 करोड़ रूपये. सभापति महोदया, एक तरफ सरकार कहती है कि वर्ष 2027 तक हम 250 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य को प्राप्त करेंगे, यह सब वर्ष 2024-25 के बजट में भी था, यह सब वर्ष 2025-26 के बजट में भी था और जो वर्ष 2025-26 का बजट है, उस बजट में 1 लाख 42 हजार रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष आय के बारे में आपने कहा था और आपने कहा है कि 22 लाख 35 हजार रुपये प्रति व्यक्ति आय वर्ष 2047 में होगी, हम स्वागत करते हैं. आपने कहा था वर्ष 2025 में, वर्ष 2025 में 22 को जोड़ेंगे तो 2047 हुआ तो 22 वर्ष का आपने लक्ष्य दिया था पिछले वर्ष, 22 वर्ष के लक्ष्य में आपका 22 लाख रुपये आय होना थी, इस आधार पर आपको वर्ष 2026 में हिसाब देना चाहिए कि उस 22 लाख रुपये प्रति व्यक्ति आय की प्राप्ति को आपने टच करने का प्रयास किया. अगर आप यह करेंगे तो आज प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 42 हजार रुपये में, 1 लाख रुपये और जोड़ेंगे तो यह 2 लाख 42 हजार रुपये हो जाएगी, जो आपकी प्रति व्यक्ति आय है. आपने कितना प्राप्त किया.
सभापति महोदया, आज की तारीख में यह सिर्फ लोगों को गुमराह करने की बात है. वित्त अधिकारी बैठे हैं. वर्तमान में सरकार के जिम्मेदार लोग बैठे हैं. माननीय मंत्री जी बैठे हैं. आपके माध्यम से इस बात को सुनिश्चित करने का अनुरोध करूंगा कि आप जो वर्ष 2047 में 22 लाख रुपये प्रति व्यक्ति आय का जो सपना माननीय प्रधानमंत्री जी दिखा रहे हैं उसमें एक वर्ष में जीरो प्रतिशत आपकी उपलब्धि है, आप पर कैसे विश्वास किया जाय. आप देश की जनता को माननीय प्रधानमंत्री जी के नाम से संबोधित कर रहे हैं. हमें भी विश्वास होता है कि प्रधानमंत्री जी का नाम आता है तो दलगत नीति अपनी जगह हो सकती है, परन्तु देश का प्रधानमंत्री ऐसे ही नहीं मिला है. जब करोड़ों लोगों ने आजादी की लड़ाई में संघर्ष किया और लाखों लोगों ने अपना जीवन दिया, जलियांवाला बाग हत्याकांड में जैसा मानवता को कुचलने का काम अंग्रेजों ने किया, उसके बाद हमको प्रधानमंत्री मिला है, यह ऐसा पद नहीं है जो कह दे और हो न. आज मैं कहना चाहता हूं कि आपका जो वित्तीय प्रबंधन है, इस वित्तीय प्रबंधन में आप 33 हजार करोड़ रुपये तो सिर्फ ब्याज में दे रहे हैं वहां पर जहां पर आपके अपने नागरिक श्रम करते हैं, उसके बाद 4 महीने से आप उनको मजदूरी नहीं दे रहे हैं. उदाहरण के लिए डिंडौरी जिले में 54 करोड़ रुपये के आसपास की मजदूरी 4 महीने से शेष है. वहीं पर छात्रवृत्ति आप नहीं दे रहे हैं. छात्रवृत्ति के लिए बच्चे बच्चियां अपना प्रयास करते हैं परन्तु आप उन्हें छात्रवृत्ति नहीं दे पा रहे हैं. आप मिनिमम आय की बात कर रहे हैं, आपके अधिकारियों के बीच में जो आउटसोर्स से कर्मचारी काम करते हैं, उनको आप कहीं 4 हजार रुपये, कहीं 5 हजार रुपये दे रहे हैं. आपके जो अंशकालिक कर्मचारी हैं, 6 महीने से उनको पैसा नहीं दे रहे हैं, उनको मात्र 5 हजार रुपया दे रहे हैं. आप गणना कीजिए कि प्रतिदिन कितना रुपया पड़ेगा. वहीं पर मोबलाइजर को आप 4 हजार रुपये दे रहे हैं, रसोइया को 4 हजार रुपया दे रहे हैं . आप गणना करिए कि कितना आपका पैसा जा रहा है. आप सिर्फ गुमराह करने के लिए जो इस तरह से भ्रामक जानकारी दे रहे हैं यह जानकारी हमारे आने वाले भविष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी और सबसे बड़ा खतरा होगा.
सभापति महोदया, आज बातें की गई कि हम प्रदेश के विकसित स्वरूप को आगे बढ़ा रहे हैं. मैं आपसे कहना चाहूंगा कि माननीय उप मुख्यमंत्री जी बैठे हैं माननीय श्री कैलाश विजयवर्गीय जी बैठे हैं और आदरणीय श्री राकेश सिंह जी जबलपुर से बैठे हैं आप आइए हमारे डिंडौरी जिले में, आपको खूबसूरत नर्मदा के किनारे, नर्मदा चुनरी दिखाएंगे, जिसमें 6 करोड़ वृक्ष लगाए थे, अरे 7 साल हो गया, अब तो फलने लगा होगा. आप लोगों को फल मिलने लगा होगा. 6 साल हो गये अब वृक्ष तो दिख सकते हैं, फल लग सकते हैं, आप जरा दिखा दीजिए. आप बताइए इसी तरह से बजट में नर्मदा परिक्रमावासियों के लिए परिक्रमा मार्ग की घोषणा की गई थी. नर्मदा परिक्रमा करने वाले भक्तों के लिए परिक्रमा मार्ग की घोषणा की गई थी और नर्मदा परिक्रमा करने वाले भक्तों के लिये नर्मदा एक्सप्रेस-वे की बात की गई थी. आप बता दीजिए कि एक्सप्रेस-वे कहां पर है ? कहां पर परिक्रमा पथ बना है ? वहीं पर विद्यार्थियों के लिए उत्कृष्ट विद्यालय की बात की गई थी. उत्कृष्ट विद्यालय में संसाधनों की कमी है. आप अब बदनाम हो गए, तो आप आ गए, सीएम राइज में. अब सीएम राइज में भी बदनाम हो गए, तो अब आ गए सांदीपनि में, अब कुछ न कुछ और आ जाएगा. जब माननीय कैलाश जी मुख्यमंत्री बन जायेंगे, तो कैलाश विद्यालय हो जाएगा. यह प्रक्रिया चालू हो जाएगी, पर बनेंगे वहां कुछ नहीं. यह बड़ी स्थिति बनती जा रही है.
माननीय सभापति महोदया जी, मैं सरकार से यह पूछना चाहता हॅूं कि ठीक है, आज आप वहां हैं हम यहां हैं पर हम हैं तो इंसान. इतना ज्यादा अगर उधर जाकर आप-हम करने लगेंगे, तो भविष्य का क्या होगा और मैं तो हमारे अधिकारियों से भी कहना चाहता हॅूं कि आप यदि उच्च अधिकारी बन जायेंगे, तो क्या आप 200 साल जियेंगे. आप मुख्यमंत्री बन जायेंगे, तो क्या 300 साल जियेंगे. क्या आप प्रधानमंत्री बन गए, तो क्या आप 500 साल जियेंगे. आपको भी उतना ही है और हमको भी उतना ही है, तो हम अपने भविष्य को खतरे में क्यों डाल रहे हैं. आपको पता होना चाहिए कि वर्ष 1990 में चाइना की जीडीपी के साथ हमारी बराबरी थी और हम कहां खडे़ हैं. भारत की 376 लाख करोड़ की जीडीपी के लिए प्रधानमंत्री ढिंढोरा पीट रहे हैं. आपके बजट में 50 बार इस बात का उल्लेख होता है.
सभापति महोदया, मेरा एक अनुरोध है कि आज स्कूलों की हालत आप देख लीजिए. मेरे ख्याल से आपके क्षेत्र में भी आप अपनी अंतरात्मा से स्वीकार करेंगे कि सभी विद्यालय भवनों में पीने का पानी नहीं है, उपयुक्त भवन नहीं हैं , वहां पर खेल मैदान की कमी है, वहां पर बच्चों की तमाम तरह की जो आवश्यकताएं हैं उसकी कमी है. उसके लिए आप प्रबंधन दे नहीं पा रहे हैं.
सभापति महोदया, आज हमारे किसान मदद मांगते हैं. हमारे किसानों के हालात यह हैं कि आप किसानों के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं. इस साल धान विक्रय के लिए जो स्लॉट बुकिंग होनी थी, उस बुकिंग में 9 तारीख से 13 तारीख के बीच सर्वर ही डाउन हो गया. आप इसमें पूरी तरह से किसानों को न्याय नहीं दे पा रहे हैं. आज आप बात कर रहे हैं जिस तरह से आज आपके बजट में हमें जो सपना दिखाया गया है, हम आपसे पूछना चाहते हैं जैसा कि कल माननीय मुख्यमंत्री जी कह रहे थे कि नर्मदा जी के किनारे 5 किलोमीटर के दायरे में कहीं भी शराब नहीं बिकती. मैं आपको बता रहा हॅूं कि 15 तारीख के दिन महाशिवरात्रि का मेला था. 16 तारीख को मैं नर्मदा जी में गया. नर्मदा जी में शराबियों ने कांच की बोतलों को फेक दिया था, तोड़ दिया था. मैं साफ कर रहा था, तो मेरे दाहिने पांव में कांच चुभ गया.
सभापति महोदया, मुझे तो भगवान राम का एक वाक्य याद आता है जो उन्होंने सीता जी से कहा था कि ऐसा कलयुग आयेगा और ऐसे बेइेमानी करने वाले, सपने दिखाएंगे, राम के नाम पर बात कर जायेंगे और राम के आदर्श पर चलेंगे नहीं. भगवान राम की मान्यता को मानेंगे नहीं और बातें कर जायेंगे. आज वही हो रहा है. मेरा आपसे दोनों हाथ जोड़कर आपसे अनुरोध है कि गारंटी रोजगार, आजीविका मिशन के अंदर यह परिभाषा है. मैं मांग करता हॅूं कि अगर भाजपा में हिम्मत है तो रोजगार गारंटी आजीविका को हटाओ और सिर्फ सियाराम नाम लेकर के आओ, हम समर्थन करते हैं. आप क्यों भगवान राम की परिभाषा में कहीं आजीविका, कहीं रोजगार, कहीं मिशन की बात कर रहे हैं. रोजगार आपको चाहिए, मिशन आपको चाहिए, गारंटी आपको चाहिए सरकार बनाने के लिए. भगवान के नाम को इस तरह से परिभाषित करने की आप जो हिम्मत कर रहे हैं, इसका पाप लगेगा और जब पाप लगेगा, तो पहली बार महाकालेश्वर में आग लग गई थी. तो उसकी जिम्मेदार अगर कोई है तो यह वर्तमान की सरकार है जिसके कारण महाकालेश्वर में पिछले समय में आग लगी थी उसकी जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिये कि आपकी वजह से ऐसी वहां पर परिस्थिति बनी. आज हमारी सरकार के मंत्रियों के पास हम जायें. हम स्वास्थ्य मंत्री जी के पास में जाकर कि माननीय मंत्री जी आप हमारे ग्रामीण क्षेत्र में जहां प्रसुति की व्यवस्था होती है, वहां पर आप लाईट दे दीजिये, वहां पर आप मशीन दे दीजिये आफ्टर डिलेवरी जो बच्चों के सपोर्ट के लिये रखा जाये, उसके लिये आपके पास में पैसा नहीं है. आप आज एक कार्ड दे देतो हो उस कार्ड में प्रायवेट हॉस्पीटल में जाना है. कार्ड से नागपुर जायेंगे, जबलपुर जायेंगे, उप मुख्यमंत्री जी आप स्वास्थ्य मंत्री भी है. मैं गारंटी से कहता हूं आप रीवा में सर्वे करा लें अगर उसके पास में पास है तो वह वहां पर इलाज नहीं करा चाहेगा. वह इलाज कराने के लिये बाहर जायेगा. मध्यप्रदेश में एक भी स्थान ऐसा नहीं है जैसे मुम्बई, नागपुर और आपकी दिल्ली का मुकाबिला कर सके. हमारे लोग मजबूरी में आपके यहां पर इलाज कराते हैं इसके लिये आपके पास में पैसा नहीं है.
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री (श्री राजेन्द्र शुक्ल)—सभापति महोदया, ओमकार जी रीवा में बायपास सर्जरी हो रही है, किडनी का ट्रांसप्लांट हो रहा है, आपने रीवा की बात उठाई है तो सुन लें वहां पर एंजोप्लास्टी हो रही है. 90 प्रतिशत आयुष्मान कार्डधारक गरीबों का हरिजन आदिवासी जो हमारे सुदूर ग्रामीण अंचल के लोग हैं वह वहां पर इलाज ले रहे हैं जिसके लिये नागपुर, मुम्बई एवं दिल्ली जाया करते थे.
श्री ओमकार सिंह मरकाम—सभापति महोदया, मजबूरी में कराते हैं.
श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल—मरकाम जी मजबूरी में जा रहे हैं उनका इलाज तो अच्छा हो रहा है ना जिसके पास में ज्यादा पैसा उछल रहा है. वह बाहर जाये तो उसका क्या इलाज है ?
श्री ओमकार सिंह मरकाम—सभापति महोदया,आज हालात यह है कि यह तो स्वास्थ्य विभाग की बात हो गई. आप ग्रामीण विकास में आ जायें. उस विभाग में एक योजना आपने चालू की उस योजना का नाम चुम्बक योजना उसको कहते हैं आप प्रधानमंत्री आवास उस योजना में 267 इसक्वायर फिट का मकान बनाने के लिये आवास दिया जाता है. अगर 1 हजार रूपये के हिसाब से आप केलक्यूलेशन करेंगे तो 2 लाख 67 हजार रूपये उसकी कास्ट आती है. पर आप दे रहे हैं 1 लाख 30 हजार रूपये उसमें आप चुम्बक लगा लिये उनसे पैस निकलवा लिये मैं जिम्मेदारी से कहता हूं कि 2008 में हम इंदिरा आवास देते थे उसमें 25 हजार था, उसको बढ़ाकर 2009 में 35 हजार हुआ और 2010 में 48 हजार हुआ, 2011 में 48 हजार 500 हुआ, 2013 में 75 हजार रूपये हुआ. जब कांग्रेस की सरकार थी तब हर साल पैसा बढ़ता था. जब मोदी जी सरकार आयी तो उसमें 1 लाख 30 हजार रूपये था अब उसमें 1 लाख 20 हजार रूपये हो गया है. 11 सालों में एक रूपया नहीं बढ़ा है चुम्बक लगा दिये गरीब का पैसा निकाल रहे हो, क्योंकि सीमेंट फैक्टरी भाजपाईयों की, लोहा फैक्टरी भाजपाईयों की, रेत खदान भाजपाईयों की. माल बिके आपका पैसा लगे गरीब का.
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)—सभापति महोदया, इंदिरा आवास योजना टोटल कांग्रेस कार्यकाल की जोड़ लीजिये आप मुश्किल से पूरे मध्यप्रदेश में 15 हजार आवास 20 वर्षों में बने हैं. हमारे यहां पर 10 साल के अंदर 8 लाख मकान शहरी क्षेत्र में बने हैं और 10 लाख ग्रामीण क्षेत्र में बने हैं, इतना अंतर है.
श्री ओमकार सिंह मरकाम—सभापति महोदया जी मैं आपको एक जानकारी दे दूं यह जिस तरह से बात करते हैं. कल भी माननीय मुख्यमंत्री जी बात कर रहे थे 1947 की बात कर गये थे. कांग्रेस ने गलती की इसलिये देश 1047 में आजाद हो गया. ठीक है हमने गलती ही की ना आजादी लेने के लिये, पर देश को आजाद किये. आप इस बात को सुने कि एक आम का पेड़ लगायें तो दूसरे दिन फल देगा क्या नहीं फलता. जो पेड़ लगाने वाला है उसकी देख-रेख करता है कि कहीं पाल न पड़ जाये, कहीं बकरी न खा जाये. जब धीरे धीरे पेड़ बड़ा होता है जब फल लगता है तो पेड़ लगाने वाला दूर हो गया. जो बेकार बैठे रहते थे वह बन गये मालिक अब वह कहते हैं कि देखें हमारे टाईम में लबलबा के फल हुए. अगर पेड़ लगाते नहीं तो फल कहां से पाते भाई. उस समय कुछ किए नहीं, आजादी की लड़ाई में, कोई काम किए क्या? कोई काम नहीं और आज मालिक बनकर के कहते हैं.
सभापति महोदया – कृपया बजट पर चर्चा कीजिए.
श्री कैलाश विजयवर्गीय – सभापति महोदय, अगर ये इस विषय पर चर्चा करना चाहते हैं, तो अलग से आप समय दे दीजिए, इस पर भी चर्चा करेंगे. आज बजट पर चर्चा कीजिए और सही तथ्य सामने लाइए.
श्री ओमकार सिंह मरकार – आप ही तो बोलते हो कि कांग्रेस के समय में ऐसा था, विजयवर्गीय जी आप पचास साल पहले छोटे थे, अब बड़े हो गए, तो उस बचपन को गाली मत बको, अगर वह बचपना नहीं होता, तो आप यहां न होते, कांग्रेस नींव है, कांग्रेस ने ये विधान सभा बनाया. बजट पेश करते हो, तो बार बार कहते हो, कांग्रेस ने ये नहीं किया, कांग्रेस ने वह नहीं किया. लोकतंत्र दे दिया, इसलिए कुसी पर बैठ गए, नहीं तो अभी मुश्किल में पड़े रहते, ख्याल रखना.
श्री कैलाश विजयवर्गीय – सभापति जी, इस सदन के अंदर मैंने भाषण दिया, और सारे कांग्रेस के जो मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने अच्छे काम किए, उनकी मैंने तारीफ की हूं. मध्यप्रदेश के रिकार्ड में शायद मेरे अकेले का ऐसा भाषण होगा, जिसने कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों के ऊपर भाषण दिया, रविशंकर जी को तो मैंने देखा तक नहीं, मैंने उनकी प्रशंसा की.
श्री ओमकार सिंह मरकाम – नहीं, नहीं कुछ मंत्रियों का सहयोग भी था, हमें पता है, आपको धन्यवाद. सभापति महोदया, मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगा, कि ये जो बजट पेश हुआ है, ये बात अलग है कि आप पक्ष की बात रखेंगे, मैं विपक्ष की, ये नेतागिरी की सीमा हो गई. पर बात आनी चाहिए सच्चाई की, भविष्य की, निर्माण की. बात आनी चाहिए आने वाले हजारों साल ये अखंड भारत की संप्रभुता बनी रहे. उसमें मध्यप्रदेश का सर्वोच्च स्थान बना रहे, संस्कृति सुरक्षित रहे, विरासत सुरक्षित रहे, हमारे प्रदेश के नौजवान का भविष्य सुरक्षित रहे, ये निर्माण की बात भी होनी चाहिए. मैं अफसोस के साथ कह रहा हूं कि गली गली में जो नशे का प्रकोप बढ़ गया है, आप भी इस बात को महसूस करते होंगे, कोई दलगत सीमा तक सीमित नहीं है….
श्री उमाकांत शर्मा – मरकाम जी आप बिल्कुल सही फरमा रहे हो, कल ही कांग्रेस का नेता मेरे सीहोर में पकड़ाया ड्रग्स में. (..शेम शेम)
श्री ओमकार सिह मरकाम – पंडित जी, ऐसे ही आप सक्रिय बने रहो, हो सकता है आपको मंत्री बना दें.
सभापति महोदया, मैं कहना चाहूंगा कि आज राजनीतिक नेताओं के जो विचार है, शक्तियां हैं, उस पर हम ये जरूर कहना चाहेंगे कि कौन कौन मंत्रियों के यहां से क्या क्या हो रहा है, ये हमें पता है, हम मर्यादा में रहना चाहते हैं. हम बोलेंगे नहीं, लेकिन यह कहना चाहूंगा कि नशा के प्रयोग के लिए, हमको नशा को रोकने के लिए, संयुक्त प्रयास करने की जरूरत है. आज गांजा में कौन पकड़ाया है, ये बात भी सर्वविदित है, हमारा सर शर्म से झुकता है.. पंडित जी (श्री उमांकात शर्मा) आप बताइए किसके यहां गांजा पकड़ाया. मैं आपको कहना चाहूंगा हमारे डिण्डौरी जिले में ...
श्री उमाकांत शर्मा – आपके वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह जी, पूर्व मुख्यमंत्री जी का चहेता, राजीव जैन, सिरोंज (..व्यवधान) बाजार.
श्री आरिफ मसूद – गांजे में जो पकड़ाया था, पहले उसका तो नाम आ जाए, अगर दिग्विजय सिंह जी का नाम ले रहे हैं, तो गांजे में जो पकड़ाया उनका भी नाम आना चाहिए फिर.
श्री ओमकार सिंह मरकाम – हमारे मंत्री जी के भाई के यहां गांजा पकड़ाया, आप इस बात को अगर संज्ञान में लेंगे. सभापति महोदया, डिण्डौरी जिले में दस क्विंटल गांजा जमीन के नीचे पाया गया और उसमें मैं आपको बताना चाहूंगा, पुलिस विभाग ने नहीं पकड़ा, वन विभाग ने जाकर पकड़ा, हमने कहा कि पुलिस तो काम नहीं आ रही है, वन विभाग जाए, वन विभाग ने जमीन के अंदर से दस क्विंटल गांजा निकाला. मैं कहना चाहूंगा कि ये नशे का किस तरह से हालात बनते जा रहे हैं. अगर नशे के हालात इस तरह से बन गये तो हमारा भविष्य किधर जाएगा. इस बात के लिए हमारे माननीय सरकार के माननीयों को सोचना की जरूरत है.
सभापति महोदय, मैं एक हमारे क्षेत्र के विषय को लेकर अनुरोध करना चाहूंगा. मेरा क्षेत्र मां नर्मदा के तट से जुड़ा हुआ है, उत्तर तट और दक्षिण तट पूरी तरह से मां नर्मदा का किनारा है, नर्मदा भक्त परिक्रमा करते हैं, मैंने नर्मदा जी के किनारे नर्मदा भक्तों के रूकने के लिये नर्मदा परिक्रमावासियों को प्रति दिन नर्मदा का दर्शन हो जाये, इसके लिये मैंने दोनों हाथ जोड़कर अनुरोध किया है, पर इस पर अभी भी कोई काम नहीं हो रहा है, मां नर्मदा की अविरल धारा डिण्डौरी में आचमन योग्य नहीं बच पा रहा है, इसके लिये हम लगातार अनुरोध कर रहे हैं, पर उस पर काम नहीं हो पा रही है, नर्मदा जी के जो असंख्य भक्त महाराष्ट्र से, गुजरात से और अन्य जगह से आते हैं, उसके लिये हमने अनुरोध किया था, मेरा अनुरोध है कि इस बात को लेकर जरूर काम करें.
सभापति महोदय, दूसरा एक अनुरोध माननीय राकेश सिंह भईया जी से है, मैं आपसे कहूंगा कि जबलपुर अमरकंटक जो मार्ग बन रहा है, इस मार्ग के लिये जो आपका डी.पी.आर. बना था, वह डी.पी.आर. गलत साबित हो गया है और आपने उसे पनिश्ड भी किया है. ऐसे ठेकेदार जिसने डी.पी.आर. बनाया था, उसकी वजह से हमारे महत्वपूर्ण मार्ग का निर्माण बाधित है, मेरा अनुरोध है कि जिसने गलत किया था, उस पर तो आप कार्यवाही करेंगे या नहीं करेंगे, वह तो आपका विशेषाधिकार है, पर समय पर नर्मदा जी का पुल बन जाये, इसके लिये आप प्रयास करेंगे तो, जो नर्मदा भक्त विदेशों से आते हैं, वह एयरपोर्ट से सीधे उतरकर अमरकंटक तक पहुंच जाये, इस बात के लिये हमने आपसे अनुरोध किया था. एक अनुरोध और है कि हमारे यहां जो प्रायमरी स्कूल हैं, मिडिल स्कूल हैं, आश्रम शालाएं हैं.
लोक निर्माण मंत्री(श्री राकेश सिंह) -- आपने जो डी.पी.आर. की बात कही है और वह रिकार्ड में आयी है, तो मुझे इतना कहना पड़ेगा कि डी.पी.आर. गलत बना है, ऐसा नहीं है. डी.पी.आर. जब बनता है, उसमें बाद में काम प्रारंभ होने के बाद, समय -समय पर आवश्यकतानुसार कुछ संशोधन की जरूरत होती है और वह संशोधन उसमें किये जाते हैं, कई बार वह बाद में ध्यान में आते हैं, ऐसे संशोधन जरूर हुए हैं, होते हैं और होते जायेंगे, लेकिन डी.पी.आर. गलत बना ऐसा नहीं है, वह सड़क जब मैं सांसद था, तब मैंने ही तय कराई थी, जबलपुर से डिण्डौरी होते हुए अमरकंटक और वहां से होकर बिलासपुर तक (श्री ओमकार सिंह मरकाम, सदस्य द्वारा आसन से कहने पर) मैं केवल उसी बात का उत्तर दे रहा हूं, बाकी मुझे कोई आरोप प्रत्यारोप नहीं करना है, तो वह सड़क अच्छी बने, गुणवत्तायुक्त बने, यह हमारी कोशिश है और इसीलिए समय-समय पर उसका परीक्षण भी करते हैं, फिर भी आपके ध्यान में भी यदि कोई विषय उसकी गुणवत्ता को लेकर आयेगा, तो आप जानकारी दीजियेगा, हम उसको ठीक करेंगे.
श्री ओमकार सिंह मरकाम -- सभापति महोदया, मैं माननीय मंत्री जी से एक ही अनुरोध करूंगा कि आपके चीफ इंजीनियर ने लिखा है कि डी.पी.आर. और ड्राइंग बनाने वाली जो कंपनी थी, उसने गलत किया है, इसलिए आपने किया है, आपके संज्ञान में वह है और हम वह पत्र भी आपको सुलभ करवा देंगे.
सभापति महोदया, मेरा एक अनुरोध है कि हमारे यहां प्रायमरी, मिडिल स्कूल, आंगनवाड़ी भवन यह बिल्कुल नहीं हैं और डिण्डौरी जिले के संबंध में एक मिनिट में अनुरोध करके अपनी बात को समाप्त करूंगा कि हमारे यहां की भौगोलिक स्थिति अलग है. अभी हमारे दो भारत के लिये मंत्री बने हुए हैं, एक शहर का मंत्री और एक गांव का मंत्री इसके आगे भी एक भारत है, जो टोला में बसा है, जिसको हम सुदूर भारत कहते हैं, इसके आगे भी एक भारत है, जो दूर-दूर घरों में बसे हैं, वह हमारा दुर्गम भारत है. इस प्रकार से हमारा दुर्गम भारत, हमारा सुदूर भारत अभी भी विकास के लिये इंतजार कर रहे हैं, इनके विकास के लिये हमें कार्ययोजना बनाना पड़ेगा कि दुर्गम भारत के लोगों को भी न्याय मिले और सुदूर भारत के लोगों को भी न्याय मिले, इस पर कार्ययोजना बने, क्योंकि डिण्डौरी जिले के लिये यह भौगोलिक स्थिति के आधार पर बहुत आवश्यक है. माननीय सभापति महोदया, आपने बोलने का समय दिया, आपका बहुत बहुत धन्यवाद और उम्मीद करता हूं माननीय कैलाश भईया से कि नर्मदा के किनारे पेड़ फलने लगे हैं, जो आप लोगों ने लगाया था, अरे आप हमें न दो, परंतु आप ही लोग तोड़कर उनका उपयोग कर लें. मेरा यह कहना है कि आप देखने जरूर आयें तो आपको सच्चाई का पता चलेगा, यही कहते हुए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्री गौरव सिंह पारधी (कटंगी)-- माननीय सभापति महोदया, आज वर्ष 2026-27 के बजट की सामान्य चर्चा पर मुझे बोलने का सौभाग्य मिला. 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ का बजट है जो यह अपेक्षा करता है कि हमारे प्रदेश का जीएसडीपी आने वाले वर्ष में 18 लाख 38 हजार 274 करोड़ रहेगा. यह बहुत ही स्पेशल बजट है माननीय सभापति महोदया क्योंकि यह बजट इस परिस्थिति में आया कि 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट आई और 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में कहीं न कहीं एक नई परिभाषा दी गई, राज्यों के आकार के आधार पर मिलने वाली जो राशि थी जो 15 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई और भी कुछ बदलाव किये गये जिससे मध्यप्रदेश को अगर राज्यों के आधार पर मिलने वाले कर को देखेंगे तो हम 7.85 से 7.35 पर आ गये हैं और बावजूद इसके इन परिस्थितियों में मैं बधाई देना चाहूंगा माननीय वित्तमंत्री जी को हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में और पूरे वित्त विभाग को कि आपने एक बहुत ही मजबूत बजट यहां पर पेश किया है जो इस प्रदेश की जनता को आने वाले समय में एक नया आयाम देगा और जैसा कि माननीय वित्तमंत्री जी ने कहा था कि यह ज्ञानी बजट है. ज्ञानी 'ग' से गरीब जिसमें मैं बताऊंगा कि इस बार बहुआयामी गरीबी सूचकांक को लिया गया. 'वाय' से युवा, युवा के लिये माननीय सभापति महोदया शिक्षा और रोजगार दोनों ही जरूरी हैं. शिक्षा में माननीय सभापति महोदया लगभग 51 हजार 462 करोड़ रोजगार को मिलाकर प्रावधान किया गया है, मैं इसके लिये बधाई देना चाहूंगा और शिक्षा के क्षेत्र में ही लगभग 13 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की गई है, मैं इसके लिये बहुत बधाई देना चाहूंगा और जहां रोजगार की बात आती है तो हमारे पहले के माननीय सदस्य बोल रहे थे कि कुछ नहीं हो रहा है, कुछ नहीं हो रहा है, लेकिन मैं बताना चाहूंगा कि यह वही मध्यप्रदेश है जिसके आप निवासी हैं, जिसमें पिछले साल में 22 नये पेटेंट यहां के लोगों ने दाखिल किये हैं. यहां पर इनक्यूबेशन सेंटर जो हैं वह उच्च स्तरीय कार्य कर रहे हैं, मैं बधाई देना चाहूंगा. 'अ' से अन्नदाता जब किसान की बात आती है तो दो शब्दों के साथ मैं पेश करूंगा-
सिर पर पगड़ी, कमर में धोती, हल कंधे रख चला किसान,
बैल चल रहे आगे-आगे, लगते बिलकुल सीधे साधे,
धरती मां की किसमत जागे, खेती करते चला किसान,
हल कंधे पर रखा किसान.
माननीय सभापति महोदया, यह वर्ष किसान कल्याण वर्ष के रूप में वर्ष 2026 का और अगर पूरे समुचित बजट को देखा जाये तो किसान को सहयोग करने के लिये लगभग 1 लाख 15 हजार 13 करोड़ का प्रावधान किया गया है. अगर आप हर दृष्टिकोण से देखेंगे इसमें 8 हजार करोड़ रूपये लगभग उपज का बेहतर मूल्य मिले जिसमें भावांतर बोनस और मुझे पूर्ण विश्वास है कि हम धान के उत्पादक किसानों का भी माननीय वित्तमंत्री जी ध्यान रखेंगे. साथ ही साथ सुरक्षा चक्र के लिये जिसमें फसल बीमा और कल्याण योजनायें शामिल हैं उनके लिये 13769 करोड़ और इसमें जो पूरा पूंजीगत परिव्यय है जो कि किसान को एक बेहतर आयाम प्रदान करेगा, उसके लिये 1 लाख करोड़ से ज्यादा का प्रावधान है.
माननीय सभापति महोदया, मैं एक बात और बताना चाहूंगा कि कृषि क्षेत्र जो है उसने राज्य के उत्पादन में एक अलग प्रकार से सहयोग किया है एक नई जैसे हम जीएसडीवी की बात हम करते हैं चूंकि हम सप्लाई साइड की बात करना चाहेंगे तो मैं उससे इंट्रेस्ट और टेस्ट कम्पोनेंट को हटाकर अगर मैं चर्चा करूं जो कि सही रूप में सप्लाई साइड को रेखांकित करती है तो हमने यह देखा कि हमारा प्राइमरी सेंटर जो है वह पिछले एक साल में उसकी पूरी हमारी इकोनॉमी में 44 प्रतिशत से वह 43 प्रतिशत हुआ जिसके लिये बहुत बधाई का हकदार हैं क्योंकि इस बात का सूचक है कि हमारा प्रदेश प्रगति कर रहा है. जब कोई राज्य या देश प्रगति करता है तो वह प्राइमरी सेक्टर से सेकेंडरी और टर्चरी सेक्टर की तरफ बढ़ता है और यह इस बात का सूचकांक है. हमारा टर्चरी सेक्टर 2 प्रतिशत बढ़ा जिसके लिये मैं माननीय वित्तमंत्री जी और माननीय मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन को बहुत सारी बधाईयां देता हूं. साथ ही साथ पुन: मैं कृषि पर आते हुये 2 बातों को जरूर उल्लेखित करूंगा कि मुख्यमंत्री कृषक उन्नति योजना जो कि सहायक फसलों को सामने लायेगी, यह हमारे प्रदेश हमारे देश की आने वाले समय की जरूरत है. मैं समझता हूं इस दिशा में ध्यान देकर माननीय कृषि मंत्री जी ने और माननीय वित्तमंत्री जी ने एक सराहनीय कदम उठाया है. कुल मिलाकर कृषि के क्षेत्र में एक नया आयाम पैदा करने वाला यह बजट रहा है. साथ ही साथ मैं अगर आगे बढ़ूं तो नारी यानी न में नारी अगर जेंडर बजट की बात करें तो 1 लाख 27 हजार 555 करोड़ रूपये का जेंडर बजट है. मैं समझता हूं कि एक बार जोरदार मेजे थपथपाकर हमारे पक्ष के लोगों को हमारी सरकार को बधाई देना चाहिये कि हमारी नारी शक्ति के लिये आपने एक सराहनीय कदम उठाया है.
एक चीज बताना भूल गया था कि इस बार का बजट जो रोलिंग बजट के प्रावधानों के माध्यम से बनाया गया यह दूरदर्शिता को दिखाता है न सिर्फ 2047 के समृद्ध मध्यप्रदेश की दूरदर्शिता को दिखाता है बल्कि आने वाले तीन वर्षों में मध्यप्रदेश किस दिशा में, किस तरीके से किस गति से आगे बढ़ेगा उसका भी पूरा रोड मैप तैयार करके दिया है तो मैं माननीय वित्त मंत्री जी और माननीय मुख्यमंत्री जी को इसके लिये बधाई देता हूं. ए.आई.पर आ गये तो आई से इंफ्रास्ट्रक्चर,80266 करोड़ के केपिटल आउटले के साथ यह बजट पेश हो रहा है और अगर मैं ईवीआर,जो गैर बजटीय प्रावधानों को ले लूंगा तो वह एक लाख के ऊपर चला जायेगा तो इसके लिये भी आप बहुत बहुत बधाई के पात्र हैं. कुछ नयी योजनाएं सामने आई हैं जैसे द्वारका सागर योजना और यशोदा योजना का अगर मैं नाम न लूं तो बहुत गलत होगा. हमारे नौनिहालों को,हमारे छोटे बच्चों को उनके लिये जो विशेष प्रावधान किया गया है इसके लिये निश्चित ही यह सराहनीय कदम है और जो लोग इस पर प्रश्न चिह्न उठाते हैं तो मैं समझता हूं कि वह हमारे भविष्य को मजबूत होता नहीं देखना चाहते इसलिये वह इस तरीके की बातें करते हैं. सामाजिक क्षेत्र की बात करें तो स्वास्थ्य और महिला बाल विकास मिलाकर लगभग 56 हजार करोड़ और साथ ही साथ ग्रामीण और नगरीय के लिये जो ग्रोथ हुई है बजट में लगभग 39 प्रतिशत की नगरीय विकास में ग्रोथ की गई है तो मैं समझता हूं कैलाश जी भाई साहब तो बहुत खुश होंगे ही होंगे लेकिन ग्रामीण विकास के लिये भी 68 प्रतिशत की जो ग्रोथ दर्ज की गई है बजट के प्रावधान में उसके लिये भी आप बहुत बहुत बधाई के हकदार हैं यह दोनों मिलाकर 61 हजार करोड़ जिसमें से 6 हजार करोड़ 16वें वित्त आयोग की अनुशंसा के अनुसार नगरीय निकायों को सहयोग के लिये है तो वह भी निश्चित ही बधाई के पात्र हैं. कुछ आंकड़े मैं आपके सामने जरूर रखना चाहूंगा और कुछ बातें भी आपको जरूर बताना चाहूंगा क्योंकि सम्माननीय सदस्यों ने विषय रखा था. माननीय राजेन्द्र कुमार सिंह जी ने कहा था कि राजस्व की स्थिति बहुत खराब है मैं उनको बताना चाहूंगा कि राजस्व प्राप्तियों को और खर्चों को दो हिस्सों में अगर बांटेंगे तो एक होता है कम्युटेड एक्सपेंडीचर जिसमें वेतन,पेंशन,ब्याज भुगतान आते हैं वर्तमान में हमारे राजस्व प्राप्तियों का 45 प्रतिशत जो है कम्यूटेड एक्सपेंडीचर में यूज करते हैं और मैं पुन: दो हजार की चर्चा करना ही पड़ेगा नहीं करूंगा तो बात पूरी नहीं होगी तो मैं बताना चाहूंगा कि सन् 2001-02 के आसपास में लगभग 85 प्रतिशत राजस्व प्राप्तियां हमारी इन्हीं तीनों के कम्यूटेड एक्सपेंडीचर में जाती थीं तो हमारे पास बाकी चीजों के लिये 15 प्रतिशत राजस्व बचता था. आज हमारे पास राजस्व बचता है इसीलिये तो आज हम अपने बच्चों को दूध पिलाने के लिये भी तैयार हैं ऐसी योजनाएं सामने आ रही हैं.एक बात और कही गई कि मध्यप्रदेश पिछड़ता जा रहा है तो मध्यप्रदेश की पर केपिटा इनकम अगर नेशनल एवरेज से देखा जाए तो यह 2002-03 के आसपास 60-65 परसेंट के आजू बाजू में लटर रही थी और वर्तमान में 2024-25 के आसपास हम 80 प्रतिशत के आसपास हैं तो निश्चित तौर पर मध्यप्रदेश ने पूरे देश में विकास किया है और मैं हमारे मुख्यमंत्री और लगभग 15-20 साल से हमारी मध्यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार को बधाई देना चाहूंगा. आप सब इसके लिये बधाई के हकदार हैं.एक चीज के लिये और बधाई है कि हमारी राजस्व प्राप्तियां एज ए परसेंटेज आफ एसजीडीपी 17 परसेंट पर पहुंच गई हैं यह अच्छे वित्तीय प्रबंधन का संकेत है साथ ही साथ कंपनी रजिस्ट्रेशन जो कि किसी भी प्रदेश की प्रगति का भी एक सूचक होता है वह 13.6 प्रतिशत का ग्रोथ लिया जो कि राष्ट्रीय सूचकांक 10 परसेंट का है तो मैं समझता हूं यह भी एक अच्छा संकेत है. एक एक्सपोर्ट प्रिकोरनेट इंडेक्स बना था उसमें मध्यप्रदेश को जो रैंकिंग मिली है जबकि जीडीपी में हमारा कांट्रीब्यूशन 10 है लेकिन हम 9वीं रैंक पर हैं तो यह इस बात का सूचक है कि मध्यप्रदेश एक एक्सपोर्ट हब के रूप में भी धीरे-धीरे उभर रहा है इसके लिये भी आप बधाई के पात्र हैं. हमारा बजट पिछले चार साल में डबल हो गया है. 2022-23 में यह बजट 2 लाख 46 हजार 693 करोड़ था जो इस साल 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ है. मुझे याद है कि माननीय वित्त मंत्री जी ने एक बात कही थी कि हम 5 वर्ष में बजट को दोगुना करेंगे, तो मैं माननीय वित्त मंत्री जी को बधाई देना चाहॅूगा कि आपने 5 वर्ष नहीं, बल्कि आपने 4 वर्ष में ही अपने बजट का आकार दोगुना कर दिया है, इसके लिए आप निश्चित तौर पर बधाई के पात्र है. साथ ही, फिर कर्जे की बातों को इसलिए बता रहा हूँ कि बाद में फिर कोई यह बातें करके चला जायेगा, तो पुन: याद दिलाना चाहूँगा कि वर्ष 2002-03 का दौर था, जब इन्ट्रेस्ट पेमेन्ट टू रेवेन्यू रिसीप्ट 19 प्रतिशत होता था, आज हम लगभग 10 प्रतिशत के आसपास में है. यह इस बात का भी सूचक है कि हम सही दिशा में आगे बढ़ते जा रहे हैं. मैं एक बात और बताना चाहूँगा कि कितना लोन एसजीडीपी लेना है ? इसका जो रोडमैप है, वह वित्त कमीशन डिसाइड करता है और मध्यप्रदेश का इतिहास रहा है कि हम रोडमैप से डगमग नहीं होते हैं. पिछली बार यह रोडमैप था कि 33.7 प्रतिशत तक यह रेशो जा सकता है, लेकिन हम 31 प्रतिशत पर ही रुक गए, लेकिन पिछले 6-7 वर्ष में एक वर्ष ऐसा था, जब हमने इस रोडमैप को क्रॉस किया था और वह वर्ष 2019-2020 था, जब वित्त आयोग ने बोला था कि आपको यह रेशो 25 प्रतिशत पर रखना है, तो हम 25.5 प्रतिशत पर पहुँच गए थे. मुझे यह बताने में कोई एतराज नहीं है कि उस समय 15 महीने के लिए हमारे कांग्रेस के मित्रों की सरकार थी, तो अगर किसी ने रोडमैप को कभी छोड़ा है, तो वह विपक्ष की सरकारों ने छोड़ा है. भारतीय जनता पार्टी की जो सरकार है, वह हमेशा रोडमैप पर ही काम करती है.
माननीय सभापति महोदया, मैं दो आंकड़े और बताना चाहूँगा. हम ग्रामीण विकास में जो खर्चा करते हैं, बजट के हिस्से का तो लगभग 6 प्रतिशत हमने खर्चा किया है और जो नेशनल एवरेज है, वह 5 प्रतिशत है. उसी प्रकार कृषि में भी जो हमने खर्चे के प्रावधान किया है, वह 6.1 प्रतिशत है, जबकि नेशनल एवरेज 5.7 प्रतिशत है, जो इस बात का सूचक है कि भारतीय जनता पार्टी की डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व वाली सरकार गरीबों के लिए, प्रदेश के युवाओं के लिए कितनी सचेत है ? और इसी आशा और विश्वास के साथ यह सरकार अपनी सारी ऊंचाइयों को पायेगी. अब, मैं इन दो पंक्तियों के साथ अपनी बात को समाप्त करूंगा.
''परिंदों को मंजिल मिलेगी यकीनन, यह फैले हुए उनके पर बोलते हैं, अक्सर वह लोग खामोश रहते हैं, जमाने में जिनके हुनर बोलते हैं''. सभापति महोदया, बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्री नीरज सिंह ठाकुर (बरगी) - माननीय सभापति महोदया, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, उसके लिए मैं आपको हृदय की गहराइयों से धन्यवाद देता हूँ. हमारे वित्त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा जी द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 के लिए प्रस्तुत किया गया वह दस्तावेज है, जो यह बतायेगा कि हम वर्ष 2026-27 में किन योजनाओं पर, किन विभागों के माध्यम से हम कितना खर्च करेंगे ? जब मैं बजट 2026-27 की बात करता हूँ, तो यह बजट की विशेषताएं भी रही हैं, उनको रेखांकित करना भी बहुत आवश्यक है.
माननीय सभापति महोदया, इस वर्ष के लिये यह रोलिंग बजट प्रस्तुत करने से जहां हम बजट का बेहतर वित्तीय नियंत्रण कर पाएंगे. इसके साथ ही बदलती हुई परिस्थितियों में हम समय अनुसार संशोधन भी कर पायेंगे. यह तीन वर्ष का रोलिंग बजट है, यह वर्ष 2026-27, वर्ष 2027-28 और वर्ष 2028-29 के लिये दिया गया है. जो बजट हमें माननीय वित्त मंत्री जी के द्वारा टैबलेट पर दिया गया, उसमें तीनों वर्षों के आंकड़े दिये गये हैं. यह बजट इसलिए भी याद रखा जायेगा कि इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है और इस प्रदेश की तरक्की का इस प्रदेश की उन्नति का आधार कृषि रही है और यह वर्ष हमारी सरकार किसान कल्याण वर्ष के रूप में जब मना रही है, तो हमने ओवरऑल बजट में ऐसे प्रावधान किये हैं, जिससे किसानों का बेहतर कल्याण हो सकेगा, यह बजट मल्टी डायमेंशनल पावर्टी इंडेक्स (बहुआयामी गरीबी सूचकांक) को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है, जब मैं बहुआयामी गरीबी सूचकांक पर आधारित बजट की बात करता हूं तो इसमें हमें समझना होगा कि इसमें हम केवल आर्थिक तरक्की की बात नहीं करते हैं, इसमें हम स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर से जुड़े हुए बहुत से आयामों को ध्यान में रखते हुए Multidimensional Poverty Index कैलकुलेट करते हैं और इसमें यदि देखें तो बच्चों की स्कूल में उपस्थिति की बात हो या शौचालय, स्वच्छ जल, बिजली, आवास आदि को संपत्ति में जोड़ते हुए एक Multidimensional Poverty Index कैलकुलेट करते हैं और मुझे प्रसन्नता है कि मध्यप्रदेश में बड़ी संख्या में लोग बहु आयामी गरीबी से बाहर निकले हैं और वह संख्या लगभग सवा करोड़ के आसपास है और नीति आयोग की रिपोर्ट के आधार पर भी मध्यप्रदेश में बहु आयामी गरीबी सूचकांक दर में उल्लेखनीय काम हुआ है. कुल मिलाकर MPI आधारित बजट, यह OUT COME BASE बजट है.
सभापति महोदया, हमारा यह वर्ष 2026-27 का बजट GYANII पर आधारित है, हम सभी इसे जानते हैं, मेरे साथी गौरव इस विषय पर चर्चा कर चुके हैं. गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित, इंडस्ट्री बेसड हमारा बजट है क्योंकि हमारे मध्यप्रदेश में गरीब, युवा, अन्नदाता, मातृशक्ति को यदि प्रगति करनी है तो हमें हमारे इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट को बढ़ाने की जरूरत है क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर जो किसी भी प्रदेश के विकास का आधार होता है, या यूं कहूं तो यही हमारे प्रदेश की प्रगति का इंजन भी है और इससे कहीं न कहीं लॉगटर्म में इकोनॉमिक स्टेबलिटी भी मिलती है. इसलिए अधोसंरचना पर हम रुपये 80 हजार 266 करोड़ से ज्यादा खर्च करने वाले हैं, इसके अलावा इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट की बात करूं तो लगभग 2 वर्षों में ही रुपये 11 लाख करोड़ का निवेश हो चुका है, और काफी हद तक इसमें रोजगार भी पैदा हुआ है, लगभग 5-6 लाख से अधिक रोजगार उत्पन्न हुआ है. इसी को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकार आगे काम करेगी, हमने बजट के जो लक्ष्य रखें हैं, वे कोई कठिन नहीं हैं, शायद ये लक्ष्य विपक्ष को कठिन लग सकते हैं, मगर मैं यह बात कहना चाहता हूं कि-
मंजिलें उनको मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है,
पंखों से कुछ नहीं होता, हौंसलों से उड़ान होती है.
(मेजों की थपथपाहट)
सभापति महोदया, हमारी सरकार के हौंसले हमेशा से बुलंद रहे हैं और हम चाहते हैं हमारा प्रदेश प्रगति के पथ पर निरंतर तेजी के साथ आगे बढ़ता रहे. बहुत सारी नई योजनायें भी इस बजट में शामिल हैं, सबसे महत्वपूर्ण योजना "स्वामित्व योजना" के तहत 46 लाख 63 हजार परिवारों को रुपये 50 हजार करोड़ की आबादी भूमि पर मालिकाना हक दिया जा चुका है. भूमि के रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए रुपये 3 हजार 800 करोड़ का प्रावधान किया गया है, यह बहुत प्रशंसनीय कार्य है. हमारे प्रदेश, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले रहवासियों हेतु, वित्तीय लेन-देन में यह सहायक योजना है क्योंकि बैंक यह देखता है कि क्या आपके पास रजिस्ट्रर्ड लैण्ड डॉक्यूमेंट हैं ?
सभापति महोदया, "द्वारका नगर योजना" में अगले 3 वर्ष में हम बड़ी मात्रा में लगभग रुपये 5 हजार करोड़ खर्च करेंगे. "यशोदा योजना" के तहत कक्षा आठवीं तक के बच्चों को अगले 5 वर्ष में रुपये 66 सौ करोड़ का टेट्रा पैक दूध दिया जायेगा, इस वर्ष, इस योजना के लिए रुपये 7 सौ करोड़ का प्रावधान किया है. विकसित भारत G-RAM-G के लिए रुपये 10 हजार 428 करोड़ का प्रावधान किया है. वर्ष 2026-27 में यह उल्लेखनीय है कि पहली बार हमारा पूंजीगत निवेश रुपये 1 लाख करोड़ से ज्यादा का है, इसमें मेरे साथी गौरव ने बताया कि अतिरिक्त बजट संसाधन, जिसके माध्यम से हम लगभग रुपये 17 हजार करोड़ और खर्च करेंगे, जो हमारे निगम, कार्पोरेशन हैं, वे भी पूंजीगत निवेश करें, उसके लिए अतिरिक्त बजट संसाधन के माध्यम से राशि जुटा कर वे काम कर सकते हैं.
सभापति महोदया, अब मैं कुछ आंकड़े हमारे वरिष्ठ विधायक डॉ.राजेन्द्र सिंह जी ने यहां रखे. मैं बताना चाहूंगा कि किसी भी बजट को समझने के लिए उसके आकार को देखना पड़ता है और बजट से भी पहले मैं बात करूं तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी नजर डालने की जरूरत है कि हमारी अर्थव्यवस्था कितनी बढ़ी है. मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में अर्थव्यवस्था जो जीएसडीपी से मेजर होती है वह लगभग 18 लाख 48 हजार करोड़ रुपए की है और यदि मैं इसकी तुलना हमारे केन्द्र की जीएसडीपी से करूं जो लगभग आज 400 लाख करोड़ रुपए के आसपास है. एक और पैरामीटर जो विनियोग को दर्शाता है या सरकार कितना खर्च करने वाली है या यू कहूं तो हमारे बजट का आकार क्या है तो, मध्यप्रदेश के इस वर्ष का बजट का आकार लगभग 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपए का है. जो पुनरीक्षित अनुमान वर्ष 2025-2026 में तीन लाख 95 हजार 21 रुपए का था उससे 11 प्रतिशत ज्यादा है इसके लिए मैं हमारे वित्त मंत्री जी को बहुत बहुत बधाई भी देना चाहता हूं. साथ में एक और महत्वपूर्ण संकेतक जो हमारी बजट के बारे में अक्सर विपक्ष बोलता है. हम केपिटल एक्सपेंडिचर की बात करते हैं. मुझे बताते हुए हर्ष हो रहा है कि हमारा वर्ष 2026-27 का प्रोजेक्टेड केपिटल एक्सपेंडिचर 80 लाख 266 करोड़ रुपए होगा जो पुनरीक्षित अनुमान वर्ष 2025-26 74 हजार 662 करोड़ रुपए से ज्यादा है. जब मैं इसकी तुलना हमारे केन्द्र के एक्सपेंडीचर से करता हूं तो हमारा केन्द्र सरकार का केपिटल एक्सपेंडिचर 12 लाख 21 हजार 821 करोड़ रुपए का है. इसकी अक्सर बात होती है कि कुल देय ऋण जीडीपी का कितना प्रतिशत है तो जहां हमारे केन्द्र का 56 प्रतिशत है हमारे मध्यप्रदेश का आज भी 30 प्रतिशत के आसपास है. जो एफआरबीएम एक्ट है उसके अधीन ही है. उसने जो सीमायें तय की हैं उसके अंदर है. जब हम पंजाब जैसे राज्यों से तुलना करते हैं जहां पर यह रेश्यो 40 प्रतिशत से ज्यादा है तो यह बहुत ही चिंताजनक स्थिति है. मैं जब आपसे अभी जीडीपी की बात कर रहा था तो एक बात और समझने की है कि जीएसडीपी यह तो नहीं बताता है कि हमारी सरकार उतना ही खर्च करेगी जितनी हमारी जीडीपी है. यहा उपस्थित जन इस बात को जानते होंगे कि अर्थव्यवस्था का बड़ा होना कोई बजट का पैमाना नहीं होता है. महाराष्ट्र का बजट लगभग 40 लाख करोड़ रुपए के आसपास का है और उनका बजट 6 लाख करोड़ रुपए है. उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी लगभग 26 लाख करोड़ रुपए है. उनका बजट 7.3 लाख करोड़ रुपए का बजट है. हर राज्य तब आर्थिक तरक्की की और देखता है तो गुजरात को देखता है. गुजरात का आर्थिक उत्पादन हमेशा से ही ज्यादा रहा है. उनकी जीएसडीपी हमेशा से ही ज्यादा रही है मगर उनका बजट मध्यप्रदेश के आकार का है तो यहां यह बहुत समझने की बात है, बहुत महत्वपूर्ण बात थी.
सभापति महोदया, मैंने हमारे विपक्ष के साथियों को भी प्रतिव्यक्ति कैपेक्स की भी बात करते सुना है. वह हमेशा यह बात कहते हैं कि हमारे मध्यप्रदेश में 10 हजार से 11 हजार के आसपास प्रतिव्यक्ति कैपेक्स है. गुजरात महाराष्ट्र और कर्नाटक की बात करूं तो उससे कम जरूर है लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि हम बहुत से राज्यों से ऊपर हैं और यह स्पष्ट रूप से यह भी बताता है कि हम हमारे राज्य में कितना सड़क, पुल, सिंचाई परियोजना, मेट्रो एक्सप्रेस-वे, हाईवे, स्कूल, कॉलेज निर्माण, अस्पताल निर्माण, छात्रावास निर्माण पर खर्च कर रहे हैं. यदि इसको समझना है तो हमें केपिटल एक्सपेंडिचर को समझने की जरूरत है. जब केपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ता है तो रोजगार के अवसर भी आते हैं, निजी निवेश भी आकर्षित होता है और जीएसडीपी में भी वृद्धि की संभावना बनी रहती है. आज जब मैं केपिटल एक्सपेंडिचर से और आगे डेट टू जीडीपी रेश्यो की बात कर रहा था तो मुझे बताते हुए यह खुशी होती है कि हमारा डेट टू जीडीपी रेश्यो स्वीकार्य सीमा के भीतर तो है ही मगर बहुत से राज्यों से बेहतर है. आज हमारा डेट टू जीडीपी रेश्यो मध्यप्रदेश में लगभग 30 प्रतिशत है. पंजाब, वेस्ट बंगाल, यूपी में यह 40 प्रतिशत के आसपास भी जा रहा है. हां गुजरात, महाराष्ट्र जो आज भी 16-18-20 प्रतिशत के आसपास हैं. मध्यप्रदेश इस रेशियो को प्राप्त करने की ओर बढ़ रहा है. फिसकल डेफिसिट भी एक महत्वपूर्ण क्रायटेरिया है जिसे राजकोषीय घाटा कहते हैं. यह हमारी वित्तीय सेहत का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है. सरकार अपने खर्च चलाने के लिए कितना कर्ज ले रही है इसको हम इससे समझ सकते हैं. मेरे साथी इस पर अपनी बात रख चुके हैं. गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों से जब हम तुलना करते हैं उनकी जो 3 प्रतिशत के अन्दर लिमिट है जीएसडीपी उसके अंदर है. हम भी एफआरबीएम ने जो सीमा तय की है उसके अन्दर ही हैं. Per capita date की जब मैं बात करता हूँ तो इस पर भी विपक्ष बीच बीच में सवाल खड़े करता है. मध्यप्रदेश में आज की तारीख में लगभग 48 से 52 हजार रुपए के आसपास प्रति व्यक्ति कर्ज है. जब हम दूसरे राज्यों से तुलना करते हैं जिनको हम समृद्ध राज्य मानते हैं. ऐसा प्रांत मानते हैं जो आर्थिक तरक्की कर रहे हैं. महाराष्ट्र में 65 हजार रुपए के आसपास प्रति व्यक्ति कर्ज है. कर्नाटक में 74 हजार रुपए के आसपास है. केपिटल एक्सपेंडीचर की बात कर रहा हूँ तो आपको मुझे यह बताते हुए खुशी होती है कि लोक निर्माण विभाग, जल संसाधन विभाग और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में 77 प्रतिशत केपिटल एक्सपेंडीचर होने वाला है. नगरीय प्रशासन में हम 65 प्रतिशत केपिटल एक्सपेंडीचर करने वाले हैं. ग्रामीण विकास में 43 प्रतिशत केपिटल एक्सपेंडीचर होगा. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में 90 प्रतिशत केपिटल एक्सपेंडीचर करेंगे. ऊर्जा 71 प्रतिशत केपिटल एक्सपेंडीचर होगा. कुछ बातें अक्सर विपक्ष के साथी कहते हैं "गरीबी हटाओ" का नारा इनके द्वारा दिया गया. मुझे गर्व होता है कि भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार है जो गरीबी हटाने के लिए काम कर रही है और देश में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आ चुके हैं. आज जवान की जय यदि हो रही है तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार में हो रही है. अब, मैं अपनी बात समाप्त कर रहा हूँ. धन्यवाद.
श्री अभय मिश्रा (सेमरिया) -- माननीय सभापति महोदया, मध्यप्रदेश का संसदीय इतिहास काफी गौरवशाली रहा है. यहां पंडित द्वारिका प्रसाद मिश्र जी, अर्जुन सिंह जी और सुंदरलाल पटवा जी तक की जो छवि बनी हुई है. उसके कारण आज भी प्रदेश की जनता के मन में यह विश्वास है कि सदन में जो हो रहा है विधायक जाएंगे हमारी बात रखेंगे अगर बात सदन में आ जाएगी तो उस पर अमल हो जाएगा. अगर कोई चीज छूट गई है तो जुड़ जाएगी. कोई गलत चीज हो रही है तो रुक जाएगी. आम जनता के मन में ऐसा प्रतिबिंब है. यहां की वास्तविकता समय और परिस्थितियों के साथ कितनी बदल गई है उससे हम गुजर रहे हैं. परन्तु जनता को यह लगता है इसलिए हमें यहां पर बहस में हिस्सा लेना होता है और हमें बोलना चाहिए. जबकि हम इस सत्य को भी जानते हैं. यह हमारा लोकतंत्र का मंदिर है. मध्यप्रदेश की साढ़े आठ करोड़ आबादी की यह अंतिम उम्मीद है. हम चाहते हैं कि हम जो यहां कर रहे हैं उसको हमारी जनता देखे. बजट में इस बात की व्यवस्था हो कि हमारा सीधा प्रसारण हो. कई बार हम यहां मनमर्जी से बोलते हैं, कई बार हम संसदीय भाषा से हटकर भी बात कर लेते हैं. कई बार ऐसी चीजें आती हैं तो हमारे मन में यह रहता है कि हम आपस में बात कर लेते हैं और जब जनता को हम पिक्चर दिखाते हैं तो उतनी कैसेट दिखाते हैं जितना हम दिखाना चाहते हैं. जो अच्छा है वह दिखाना चाहते हैं. कुल मिलाकर हमारा उत्तरदायित्व जनता के प्रति है तो यह बात तो सुनिश्चित होना चाहिए जनता विधान सभा में हमारे कामों को देखे. इसके लिए ई-विधान लागू हो और सीधा प्रसारण हो. कुल मिलाकर हम यह चाहते हैं लाइकिंग, डिसलाइकिंग वाली कोई चीज न रहे. कोई अपना पराया न हो. कुछ समतामूलक व्यवस्था हो और उस पर काम हो. सृष्टि परिवर्तनशील है. विकास एक निरंतर प्रक्रिया है और यह चीजें होंगी. बजट भी बढ़ेगा. वर्ष 2003 में क्या था आज क्या है. आज 4 लाख करोड़ से ज्यादा का बजट है. मेरा यह कहना है कि यह एक प्रक्रिया है. जैसे किसी के मकान की नाप करा दीजिए तो वह रात को सपने में भी फीता लिए नापता है. हम इस काम का गणित निकाल लेंगे तो हम कर क्या लेंगे. हमारे ज्ञान बांट देने से, यहां भाषण देने से क्या कुछ बदलने वाला है. क्या हमारी अच्छी चीज के बाद भी किसी चीज में क्या कोई परिवर्तन होना है. आपको आय बढ़ानी नहीं है, कर्ज लेना है, संपत्ति बेचना है. भविष्य की संभावनाएं खत्म हो रही हैं. खैर हमको इन सब चीजों से क्या लेना देना. आप खूब कर्ज लो, खूब घी पिओ. सत्ता में तो आप ही हैं. कोई व्यक्ति पुराने जन्मों के प्रारब्ध से एकदम बड़ा बन जाता है. उसको बड़े-बडे पद मिल जाते हैं. प्रारब्ध होता है. पद मिल जाना अलग बात है खुद को बड़ा बना पाना अलग बात है. मानसिकता बड़ी नहीं बनती है. वह अपने पराये से ऊपर उठकर यह नहीं देख पाता कि अब मैं इस क्षेत्र का विधायक नहीं हूं मैं पूरे प्रदेश का मंत्री हूं, मुख्यमंत्री हूं. पूरे क्षेत्र की जनता का बोझ हमारे ऊपर है. समतामूलक विकास की जिम्मेदारी हमारे ऊपर है.
4.56 बजे {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}
अध्यक्ष महोदय, हम ऐसा देखते हैं कि अभी भी याद दिलाना पड़ता है अभी भी यह भाव रहता है कि मेरा यह क्षेत्र, मेरा वह क्षेत्र. कहीं न कहीं बंटा हुआ होता है. दूसरा, अभी मैंने इसमें एक और बड़ी कमी देखी. अभी मैं बजट का अध्ययन कर रहा था. कुछ विभागों का अध्ययन कर रहा था. पंचायत विभाग देखा, सिंचाई विभाग देखा, स्वास्थ्य विभाग देखा, पीडब्ल्यूडी विभाग देखा. उसमें मुझे एक नई चीज दिखी कि जो सत्ता के केन्द्र में बैठे हुए 10-12-15 लोग हैं वह मूलत: एकदूसरे को ऑबलाईज कर देते हैं. जो बजट आ रहा है उस बजट में से हम अपनी बात नहीं कर रहे हम तो विपक्ष में हैं हमें तो मिल जाए तो भगवान का भला है, न मिले तो हम तो सोचकर ही आए हैं कि हम तो विपक्ष में हैं, परंतु इनको आपस में ही हम देखते हैं कि जो 12-15 लोग हैं वह आपस में स्वास्थ्य वाले ने पीडब्ल्यूडी को दे दिया, पीडब्ल्यूडी वाले ने सिंचाई को दे दिया, सिंचाई ने उसमें दे दिया. इस तरह कर दिया है. इसके बाद जो बचा तो दल के अंदर तुष्टिकरण है चलो कुछ तो करना पड़ेगा. एक इस परम्परा का विकास हो गया है. हमने अभी जो पीडब्ल्यूडी का बजट देखा इसमें 50 जिलों में से 22-23 जिलों को रोडों की सौगात मिली है. इसमें जो विधानसभाएं हैं वह हमने छांटी हैं, वह 40-50 हैं. 220 में से 50-55 विधानसभा हैं. हमारा समतामूलक विकास कैसे हो पाएगा. यही हालत बाकी जगहों की भी हमने देखी है. उसमें हमने यह पाया है. सदन इसके लिए नहीं है कि हम मियां मिट्ठू बनें सिर्फ अपनी पीठ थपथपाएं. जो हम कर रहे हैं, जो आप कर रहे हैं वह तो आप करेंगे ही सदन इस बात के लिए है, विपक्ष इस बात के लिए है कि हम आएं और आपको जहां-जहां कमी बताएं आप उस पर पुनर्विचार करें और अगर उसमें कुछ अच्छा है प्रदेश के हित में है तो आप उसको आगे बढ़ाएं. आपको विज्ञापन की क्या जरूरत है. हमें आपको लगता है कि जनता कुछ नहीं जानती. जनता सब समझती है. जनता के सामने दिक्कत यह है कि जनता को ऑब्शन नहीं है, तब तक आप अच्छे हैं.
अध्यक्ष महोदय, हम यह चाहते हैं कि यहां से सीधा प्रसारण हो तो जनता हमारे कामों को देखे. मैं पुन: अध्यक्ष जी से इस बात के लिए निवेदन कर रहा हूं. हमारे प्रदेश की मुख्य समस्या क्या है सत्ता का केन्द्रीकरण, भ्रष्टाचार और अधिकारी राज. यह मूल वजह है जो मनीफ्लो मुद्रा प्रसार बिजनेस साइकिल यह तो एक रुटीन प्रक्रिया है यह तो होगा ही. बजट आएगा, पैसा घूमेगा ही. हर साल हम करोड़ों दे रहे हैं, बीसों साल से दे रहे हैं. कितने करोड़ हो गए होंगे. आखिर यह पैसा तो बाजार में ही है. कई बार कोई कहता है कि क्यों परेशान होते हो देश का पैसा तो देश में ही है. यह भी बात तो सही है कि भ्रष्टाचार भी होगा तो देश का पैसा देश में ही है. पकड़ा भी जाता है.
अध्यक्ष महोदय -- अभय जी, समाप्त करें.
श्री अभय मिश्रा -- अध्यक्ष महोदय, एक और थोड़ा सा. जब आप आ जाते हैं तो मुझे वैसे ही डर लगता है.
अध्यक्ष महोदय- मिश्रा जी दरअसल क्या है कि इस पर 4 घंटे का समय तय है और तीन घंटे हो गये हैं, अभी भी बोलने वाले सदस्य हैं..कृपया दो मिनट में आप अपनी बात को समाप्त करें.
श्री अभय मिश्रा -- अध्यक्ष महोदय, अभी तो मुझे तीन मिनट ही हुये हैं.
अध्यक्ष महोदय- आपको 10 मिनट हो गये हैं.
श्री अभय मिश्रा - मुझे 3 मिनट ही हुये हैं साहब.
अध्यक्ष महोदय- अरे 10 मिनट हो गये हैं यहा लिखा हुआ है.
श्री अभय मिश्रा -- नहीं, नहीं, नीरज सिंह बोलते रह गये, मुझे तो 3 मिनट हुये हैं.
अध्यक्ष महोदय- ऐसी कौन सी घड़ी बांधे हो. अभय जी यहां पर लिखा रहता है जैसे ही आप बोलना शुरू करते हो, तब से आपका समय शुरू हो जाता है.
श्री अभय मिश्रा- 2008-10 में भी मैंने देखे, 2013-14 में भी मैंने देखा, अभी भी देख रहा हूं. कई बार मैं सदन में ही मंत्री महोदय के पास में जाता हूं. दो बार मैं राकेश सिंह के यहां घर गया बाकी मैं आज तक किसी मंत्री के बंगले पर नहीं गया.मैं अपना स्वाभिमान अपने पास में रखता हूं. मैंने कई बार निवेदन किया , मैं कही किसी विभाग का नाम नहीं लूंगा, काम नहीं हुआ. हमारे यहां के कुछ बच्चे कहीं पर खाना बनाते हैं, कोई किसी का पीए है, कोई किसी का ड्रायवर है फिर वह कहता है कि मैं करा दूं तो मुझे लगता है कि अरे क्या ये करा देगा, फिर वह काम करा लाता है. जब वह करा लाता है और बजट में जब वह छपता है तब हम क्या करें तब हम कहते हैं कि मैंने करवा दिया. क्या करें, इज्जत अपनी रखनी पड़ती है.सत्य बात तो कह नहीं सकते. हमसे ज्यादा अच्छा वो पीए है, ड्रायवर है, खाना बनाने वाला है क्योंकि सत्ता का केन्द्रीयकरण है, एक बार किसी के हाथ में सत्ता आ गई तो उसकी मनमर्जी.
माननीय अध्यक्ष महोदय, अब हम सीधे सीधे मुद्दों की बात पर आ रहे हैं. अभी जो हम बोल रहे थे वह इसलिये बोल रहे थे कि कोई ..
अध्यक्ष महोदय- अभी जो आप बोल रहे थे, क्या बोल रहे थे, मुद्दे नहीं थे अभी.
श्री अभय मिश्रा-अध्यक्ष महोदय, हमारे क्षेत्र में हमारे यहां अल्ट्रा ट्रेक सीमेंट है, उस उद्योग के विषय मे काम हो रहा है. मुख्यमंत्री जी प्रयास कर रहे हैं, अगर सफल हो गये तो अच्छी सोच है. उसमें हमारे यहां सीएसआर मद का कोई काम नहीं हो रहा है, डेबिट मद से कोई काम नहीं हो रहा है, लोगों को स्थानीय रोजगार नहीं मिल रहा है, जीएसटी की चोरी हो रही है, बालू में सरकार गोरखनाथ की कंपनी ने अब तो नहीं है, सीधी में टेंडर लिया ,राशि को जमा करना था नहीं जमा किया, हाईकोर्ट से स्टे लिया था क्योंकि उसकी मोनोपॉली टूट जाती , आज तक एक रूपया जमा नहीं किया है, आपने उसका कुछ नहीं किया, सरकार ने उसका कुछ नहीं किया. वहीं गरीब की लाईसेंस फीस, स्टाम्प फीस छोटी छोटी चीजों को बढ़ाते जा रहे हैं, मतलब इतना सब कुछ करने के बाद, कर्ज लेने के बाद, जमीनें बेचने के बाद भी पूज नहीं पा रहा है. एक एक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक एक स्टेडियम कोई तो एक ऐसा फारमेट होना चाहिये कि चलो कोई पक्ष का हो , कोई विपक्ष का हो, कोई अपना है हम उसको ज्यादा ओब्लाइज करेंगे , पर एक न्यूनतम फारमेट जैसे इंटीग्रेटेड प्लान कि एक विधानसभा में हम एक स्टेडियम देंगे, एक सीएम राइज स्कूल देंगे, हम औषधालय देंगे, इस तरह से करके उसका इम्प्लीमेंट अभी भी नहीं हो रहा है. अभी भी ग्रामों में ग्राम पंचायतें 20 से 23 वर्ष हो गये हैं ग्राम पंचायतों के भवन तक नहीं बन पाये हैं. पंचों को हम उनका अधिकार नहीं दे पा रहे हैं, विधायक हैं, अपनी निधि से आप लोगों को लगता होगा.
अध्यक्ष महोदय आप खुद सोचिये आप हमारे नेता है आपको स्वेच्छानुदान में ढाई करोड़ रूपये मिलता है, कैसे पूजता होगा और हम लोग कैसे पुजाते होंगे, माननीय मुख्यमंत्री जी को 135 करोड़ रूपये मिलते हैं, स्वेच्छानुदान उनका और राज्य बीमारी सहायता, पहले हम लोगों को मिल जाता था पहले जब हम अपने यहां से प्रकरण भेजते थे कि जाओ 10 लाख 20 लाख लिखेंगे तो कम से कम एक से दो लाख रूपये तो मिल ही जायेगा, 50 हजार तो मिल जाता था लेकिन आज एक रूपया भी नहीं मिल पा रहा है. तो यह तो एक तरह से पूरे प्रदेश का इसमें भला होना चाहिये, मैं विधायकों को बताना चाह रहा हूं, कई बार हम लोग क्षेत्र में देखते हैं न, बडा भारी कार्यक्रम, बड़ी भारी सजावट, बड़ा होडिंग, बड़ा पैसा यह कहां से आ रहा है यह संस्कृत विभाग का पैसा है.
अध्यक्ष महोदय- अभय जी कृपया समाप्त करें.
श्री अभय मिश्रा - अध्यक्ष जी, प्लीज थोड़ा बोलने दीजिये. अध्यक्ष महोदय, आप खुद समझ सकते हैं. मैं सिंचाई के विषय में थोडी सी बात कर लूं. हमारे यहां पर मैं स्वास्थ्य के बार में बात कर दूं. ऐसा नहीं है कि रीवा में स्वास्थ्य विभाग में काम नहीं हो रहा है, हो रहा है, हमारे यहां के स्थानीय मंत्री जी हैं जो उनसे हो सका है बेहतर किया है. परंतु जो पुराना कल्चर है, यह विभाग ही ऐसा है, आप इसका 10 से 16 साल का इतिहास उठाकर के देख लीजिये यह विभाग हमेशा विवाद मे रहा है. आज भी 50 प्रतिशत से अधिक पद इस विभाग में खाली हैं. जब तक आप पद नहीं भरेंगे हम बिल्डिंगों को बनाकर के करेंगे क्या. हमारे रीवा के सिमरिया में भी यही हालत है, हमारे यहां पद नहीं है, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हू कि प्रदेश तो ठीक है कम से कम अपने रीवा का जो सिमरिया है वहां लोकल स्टाफ की भर्ती हो जाये, इतनी कृपा करें. और वहां पर अस्पताल बन गया है उसको चालू करा दें.
अध्यक्ष महोदय-- अभय जी, 15 मिनट हो गये हैं, प्लीज समाप्त करें.
श्री अभय मिश्रा -- अध्यक्ष महोदय, एक समस्या और है हमारे यहां नकली दवायें , मैं जब दिल्ली जाता हूं और दवाई खरीद कर के लाकर के खाता हूं तो मुझे फायदा करती हैं और जब मैं मध्यप्रदेश में दवाई खरीद लेता हूं और खाता हूं तो वही दवाई फायदा नहीं करती फिर जब मैं दुबारा दिल्ली जाता हूं दवाई खाता हूं तो वह फायदा करना लगती है..
अध्यक्ष महोदय- अभय जी, अब आप समाप्त करिये.
श्री अभय मिश्रा-- अध्यक्ष महोदय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास में रोजगार गारंटी की स्थिति में बात करना बहुत आवश्यक है. 1 करोड़ 93 लाख रजिस्टर्ड मजदूर हैं. जिनमें से मात्र 20 लाख लोगों को 100 दिन का रोजगार है.
अध्यक्ष महोदय—कृपया समाप्त करें. श्रीमती रीती पाठक, आप बोलिये. अब अभय जी का रिकार्ड में नहीं आयेगा.
श्री अभय मिश्रा – (xxx)
श्रीमती रीती पाठक (सीधी) -- अध्यक्ष महोदय, मैं आपका हृदय से धन्यवाद करती हूं कि आपने बोलने का अवसर दिया है. मैं संसदीय कार्य मंत्री जी का भी धन्यवाद करती हूं और उप मुख्यमंत्री जी और हमारे माननीय वित्त मंत्री जी, श्री जगदीश देवड़ा जी के द्वारा हमारी विधान सभा में रखे गये वर्ष 2026-27..
अध्यक्ष महोदय—एक मिनट रीती जी. मेरा संसदीय कार्य मंत्री जी और नेता प्रतिपक्ष दोनों से अनुरोध है कि थोड़ा सा हम सभी अपने अपने पक्ष के सदस्यों को यह बतायें कि जब हम बजट पर बोल रहे हैं, तो उनको एक दो विषय निश्चित करना चाहिये, तो बात भी ठीक से आ जाये. ए से लेकर जेड तक बोलने की कोशिश करते हैं, तो उन्हीं बातों का दोहराव होता है. बात भी कोई ठीक से नहीं आ पाती है. नेता प्रतिपक्ष सब जगह बोलें, मुख्यमंत्री जी बोलें. बजट है तो वित्त मंत्री जी बोलें, तो समझ में आता है. बाकी सबको तो एक सीमित समय में करना चाहिये. बजट पर चार घण्टे का समय तय है और तीन घण्टा हो गया है, तो अगर समय का हम लोग ध्यान नहीं रखेंगे, तो फिर आगे कैसे बात बढ़ेगी. इसका सभी पक्ष और विपक्ष दोनों के सदस्य ध्यान रखें और इसकी चिंता करें. श्रीमती रीती पाठक.
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- अध्यक्ष महोदय, हमारा करबद्ध आसंदी से भी निवेदन है कि हमारी एक मर्यादा है और आपके निर्देश का सब पालन करते हैं. हम भी करते हैं और बाकी सदस्य भी पालन करते हैं. आप यदि समय पर घंटी बजा देंगे, तो आधी समस्या का निराकरण हो जायेगा.
अध्यक्ष महोदय—मैंने घंटी बजाना शुरु किया नहीं है. अब अगर घंटी बजेगी तो दिक्कत हो जायेगी. ..(हंसी)..
श्री भंवर सिंह शेखावत-- कैलाश जी यह आपके लिये कहा गया है. वैसे घंटा तो कैलाश जी बजाते हैं. ..(हंसी)..
अध्यक्ष महोदय—कैलाश जी बोले ही इसलिये थे कि आप यह बोलो. ..(हंसी).. रीती जी, आप संक्षिप्त करिये. वित्त मंत्री जी का जवाब भी कराना है और अशासकीय काम भी आज पूरा कराना है. आप 5 मिनट बोलिये.
श्रीमती रीती पाठक-- अध्यक्ष महोदय, मैं कृपया 10 मिनट बोलूंगी. अध्यक्ष महोदय, मैं आपका हृदय से धन्यवाद करती हूं और आपके माध्यम से संसदीय कार्य मंत्री जी का भी धन्यवाद करती हूं कि उन्होंने मुझे हमारे उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री आदरणीय जगदीश देवड़ा जी के द्वारा विधान सभा में रखे गये बजट 2026-27 पर बोलने का अवसर प्रदान किया. इस बजट पर विस्तार से तो मैं नहीं बोलूंगी. इसका एक विषय मैं लूंगी, एक भाग लूंगी, जो सहकारिता से संबंध रखता है. लेकिन बजट के शुरुआत में जरुर यह कहना चाहती हूं कि हमारे यह प्रदेश का बजट, यह बजट म.प्र. को समृद्ध करने वाला बजट है. यह सम्पन्न म.प्र. को हमारे समक्ष रखने वाला बजट है. सुखद म.प्र. की यह परिकल्पना करता है और सांस्कृतिक म.प्र. की स्थिति निर्मित करता है और इन सब विषयों के सपनों को साकार करने वाला बजट है, वही हमारे म.प्र. का बजट है. मैं यह कहना चाहती हूं कि साथ साथ जब सहकारी म.प्र. के निर्माण की दिशा में अच्छे प्रयासों का आरम्भ करने की बात आती है, तो निश्चित रुप से इस बजट के माध्यम से हमें मजबूती मिलती है. ज्ञानी का विषय तो मुझसे पहले बहुत सारे वक्ताओं ने रखा है. लेकिन जी गरीब कल्याण, वाय युवा शक्ति, ए अन्नदाता, एन नारी शक्ति, आई इन्फ्रास्ट्रक्चर और आई इंडस्ट्री को उल्लेखित करना मुझे बहुत गर्व की अनुमति महसूस करा रहा है. हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री, आदरणीय नरेन्द्र भाई मोदी जी यह कहते हैं कि सहकारिता भारत के लिये बहुत प्राचीन व्यवस्था है और हमारे शास्त्रों में भी यह कहा गया है कि अल्पानामपि वस्तूनां संहतिः कार्यसाधिका. अर्थात् छोटी छोटी वस्तुएं थोड़े थोड़े संसाधन भी जब साथ जोड़ दिये जाते हैं, तो उनसे बड़े बड़े कार्य सिद्ध हो जाते हैं और किसी एक प्रसिद्ध पिक्चर के एक गीत की बात अगर मैं कहूं, जिसमें 3-4 लाइनें हैं, लेकिन बहुत प्रभावी हैं. हम सब के लिये बहुत प्रभावी हैं. टूट गयी जो, उंगली उट्ठी पाँचों मिली तो, बन गये मुट्ठी. एका बढ़ता ही जाये, चले चलो, चले चलो. यही हमारा सहकारिता का मंत्र है. हम सब जानते हैं कि सहकारिता समाज के लिये एकता के सूत्र को पिराने का माध्यम भी है. हम सब जानते है कि एक और एक ग्यारह होता है और यह एडिशन है यह भी जानते हैं, लेकिन सहकारिता का विषय मल्टीप्लीकेशन से होता है, जब हम मल्टीप्लाई करते हैं तो कई गुना हमारी आगे बढ़ती है और यही हमारा सहकारिता का उद्देश्य भी है, लक्ष्य भी है और साकार करता हुआ यह विषय भी है.
अध्यक्ष महोदय, एक छोटे से विषय से अपनी बात को शुरू करना चाहती हूं और फिर मध्यप्रदेश में आना चाहती हूं. उदाहरण बहुत छोटा है लेकिन बहुत प्रभावी है. गुजरात के आणंद जिले में डॉ. वर्गीस कुरियन के नेतृत्व में जो समुदाय बनाया बनाया गया है. मैं उसकी बात करना चाहती हूं. गुजरात के आणंद जिले में त्रिभुवन सहकारी इन्वेस्टिंग जिसमें प्रशिक्षित युवा आगे आते हैं और एक विशाल समूह सहकारिता के रूप में प्रस्तुत करते हैं, यह हम सबके लिये एक बहुत बड़ा उदाहरण है.
अध्यक्ष महोदय, सहकारिता बजट की अगर मैं बात करूं तो निश्चित रूप से 1 हजार 679 करोड़ रूपये का प्रावधान हमारी सरकार के माध्यम से, हमारे सहकारिता विभाग के लिये किया गया है. इसके लिये मैं मध्यप्रदेश के आदरणीय मुखिया डॉ. मोहन यादव जी को हृदय से धन्यवाद करती हूं और बहुत ही ऊर्जावान मंत्री आदरणीय विश्वास सारंग जी को मैं धन्यवाद करती हूं कि उन्होंने सहकारिता के क्षेत्र में इस राशि को प्रावधानित करवाया है.
अध्यक्ष महोदय, सहकार से समृद्धि जो मध्यप्रदेश का मूलमंत्र है. वह हमारा राष्ट्रीय मंत्र भी है. हमारे देश के लोगों में यह भावना वैसे भी मजबूत है और मध्यप्रदेश की सरकार से और व्यवस्थित रूप देने का उसे प्रयास कर रही है, जो डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में हो रहा है. भारत ने विश्व में जब दूध के उत्पादन में पहला स्थान बनाया था तो निश्चित ही उसे व्हाईट रेग्यूलेशन के नाम से हम सब जानते हैं. श्वेत क्रांति को कौन नहीं जानता और आज हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य श्वेत क्रांति 2.0 के नाम से है. यानि श्वेत क्रांति अब से दूसरे चरण में हमारे देश के माध्यम से लिया जा रहा है और अगर में मध्यप्रदेश में आकर इस विषय को जोड़ती हूं तो निश्चित रूप से हमारे केन्द्रीय मंत्री आदरणीय अमित शाह जी के माध्यम से इस पर एक विशेष रूचि और एक विशेष व्यवस्था के साथ इस उद्देश्य के साथ इसको लिया गया है. सहकारिता को खेती, बागवानी, पशुपालन, मछली पालन और दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में बहुत बड़े पैमाने पर आगे लेकर जाना हमारे मध्यप्रदेश का लक्ष्य हो गया है. इस विशेष जोर के साथ गाम पंचायतों को सहकारिता के आंदोलन से जोड़ने का प्रयास हमारे मध्यप्रदेश की सरकार के माध्यम से किया जा रहा है.
अध्यक्ष महोदय, सहकारिता के माध्यम से यह नीतिगत निर्णय लिया गया है कि हमारे देश की प्रत्येक ग्राम पंचायत या तो पैक्स संस्था या डेरी या मत्स्य सहकारी सोसायटी होगी और यह भी तय किया गया है वह बहुउद्देश्यीय हों. जहां पर एक ही छत के नीचे सभी सुविधाएं जन सामान्य को उपलब्ध हो जायें, इसकी व्यवस्था की गयी है. यह हमारा मुख्य उद्देश्य है.
अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में और हमारे सहकारिता विभाग के माननीय मंत्री जी के मार्गदर्शन में जो प्रथम चरण सहकारिता के लिये लिया गया है उसमें समितियों के कवरेज के लिये 600 से अधिक नयी पैक्स समितियों को गठित करने का संकल्प लिया गया है और इसके विरूद्ध 664 एम पैक्स समितियों का गठन हो भी चुका है और टैक्स के सशक्तीकरण के लिये 4 हजार 536 पैक्स संस्थाओं को कम्प्यूटरीकरण की सहमति हमारी सरकार के माध्यम से और इसका उद्देश्य सिर्फ इतना ही है कि इसमें पारदर्शिता भी हो और इसमें जवाबदेही सुनिश्चित हो. माननीय मुख्यमंत्री जी और सहकारिता मंत्री जी के माध्यम से जो नवाचार कि अगर मैं बात कहूं तो वर्ष 2024-25 की तिथि में एक बड़ा ग्लोबल इन्वेस्टर समिट का आयोजन किया गया और जिसका उद्देश्य था कि को-आपरेटिव पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप को मजबूती प्रदान करना और इसमें 19 एमओयू के माध्यम से 2305 करोड़ रुपये की राशि इसमें समाहित की गई जो निश्चित रूप से सहकारिता के विषय को और चरण को मजबूती प्रदान करेगा.
आदरणीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में वर्ष 2012-13 की बात मैं अगर करूं तो पेक्स के माध्यम से शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित रहा है, यह हम सब जानते हैं और राज्य शासन के माध्यम से कम से कम 3 लाख रुपये तक का ऋण हमारे किसानों को बिना ब्याज के दिया जा रहा है, वर्ष 2024-25 में अगर मैं किसानों के फसल ऋण की बात करूं तो 21493 करोड़ रुपये का वितरण हमारी सरकार के माध्यम से वर्ष 2025 में किया गया है और वर्ष 2025-26 की अगर मैं किसानों के फसल ऋण की बात करूं तो 21752 करोड़ रुपये का वितरण हमारी सरकार के माध्यम से, आदरणीय डॉ. मोहन यादव जी के माध्यम से और सहकारिता मंत्री श्री विश्वास सारंग जी के माध्यम से करवा दिया गया है, जिसमें 41 लाख से अधिक केसीसी किसान क्रेडिट कार्ड जो हमारे किसानों के लिए बेहद सुविधाजनक एक उपाय है, इसमें जारी किये गये हैं. केन्द्रीय सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह की अगर मैं संवेदनाओं की बात करूं और उनके उद्देश्य की बात करूं तो उन्होंने इस प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए कर्मचारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए कार्यसंचालन में दक्षता लाने के लिए तथा जानकारियों की सुगमता उपलब्ध होने हेतु कम्प्यूटरीकरण के साथ 60 प्रतिशत की राशि भारत सरकार के माध्यम से हमारे देश में सुनिश्चित की है और इस विषय को और मजबूती प्रदान करने के लिए हमारे प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी और सहकारिता मंत्री आदरणीय श्री विश्वास सारंग जी के माध्यम से 40 प्रतिशत की राशि इस विभाग के लिए सुनिश्चित की गई है.
अध्यक्ष महोदय, 4536 पेक्स को अब हमारी सरकार ने ई-पेक्स घोषित कर दिया है, बना दिया है. हम सब जानते हैं कि वर्ष 2025 को संयुक्त राष्ट्र ने सहकारिता वर्ष घोषित किया था और इसमें मध्यप्रदेश की भूमिका बहुत ही अग्रणी रही और बहुत ही उत्साहजनक रही. पूरे देश में हमारे मध्यप्रदेश के माध्यम से सहकारी संस्थाओं के द्वारा सुदृढ़ ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसान सशक्तीकरण, महिला सहभागिता और साझा समृद्धि के लिए बहुत ही उत्साह के साथ सहभागिता निभाई गई. हमारे आदरणीय मुख्यमंत्री जी और हमारे विभागीय मंत्री जी के माध्यम से, यह वर्ष सहकारिता आन्दोलन के लिए एक मील का पत्थर रहा.
अध्यक्ष महोदय - रीती जी, आपके हिसाब से भी समय पूरा हो गया है. जितना समय आपने मांगा था वह भी पूरा हो गया है.
श्रीमती रीती पाठक - अध्यक्ष महोदय, यह खत्म हो गया है. अंतिम बिन्दु पढ़कर समाप्त करती हूं. सतत् एवं जनकेन्द्रित विकास को नई दिशा देना, हमारी सहकारिता का प्रमुख उद्देश्य है, जिसमें माननीय मंत्री श्री विश्वास सारंग जी के द्वारा कुछ आयोजित गतिविधियां थी, उनका मैं उल्लेख करना जरूर चाहती हूं इनमें आईवाईसी का उपयोग सुनिश्चित करने का एक कार्यक्रम करवाया गया क्योंकि इन कार्यक्रमों के प्रभाव स्थानीय रूप से बहुत ज्यादा पड़े. मैं इस विषय को रखना चाहती हूं.
श्री सोहनलाल बाल्मीक- सहकारिता के चुनाव होते तो बात कुछ और होती.
संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)- अध्यक्ष महोदय, इस बात के लिए मेज थपथपाकर बहन जी का स्वागत करना चाहिए कि आपने निर्देश दिया कि एक विषय पर बोले, वह सहकारिता से इधर भी नहीं हुई हैं, उधर भी नहीं हुई हैं, इसलिए आपके निर्देश का एक सेकण्ड में पालन हुआ.
अध्यक्ष महोदय - इसलिए मैंने उनकी पूरी 10 मिनट की बात मान ली.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) - अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय संसदीय कार्यमंत्री जी ने कहा कि वह बहन न इधर हुई, न उधर हुई. रीती पाठक जी बिल्कुल सहकारिता की लाईन पर चलती रहीं. जिन्होंने भी सरकार ने इनको भाषण बनाकर दिया, सहकारिता वर्ष को लेकर बात की, लेकिन सहकारिता के चुनाव कब होंगे? किसानों को यह लाभ कब मिलेगा? कम्प्यूटर लग जाएंगे, क्या किसानों को फायदा नहीं मिलेगा?
अध्यक्ष महोदय - वित्तमंत्री जी ने नोट किया.
श्रीमती रीती पाठक - थोड़ा-सा धैर्य रख लें. हमारी सरकार उसकी भी चिंता कर रही है. सीपीपी के अंतर्गत निजी निवेशकों को आमंत्रण देने का कार्यक्रम और माननीय मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में सहकारी युवा संवाद जैसे बहुत प्रभावशाली कार्यक्रम और एक पेड़ मॉ के नाम जैसा अभियान, जिसमें समस्त समितियों का विभागीय परिसर में छायादार और फलदार वृक्ष लगाने का कार्यक्रम है. यह सब ऐसे प्रभावी कार्यक्रम हैं जो निश्चित रूप से हम सबको साथ लेकर चलने का आह्वान करते हैं और यही सहकारिता का प्रमुख उद्देश्य है. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय -- बहुत-बहुत धन्यवाद. श्री फूल सिंह बरैया जी.
श्री फूलसिंह बरैया (भाण्डेर) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं बजट के ऊपर अपनी बात रखना चाहता हॅूं कि जब भारत आजाद हो रहा था, तब बजट के बारे में, डेमोक्रेसी के बारे में डिस्कशन चल रहा था कि बजट होना कैसा चाहिए. बजट किन बिन्दुओं को लेकर के लाया जाना चाहिए. उसमें चित्र भी था, भौगोलिक स्थिति के बारे में भी था, उसके आर्थिक पहलू देखे गए, अति पिछड़ापन देखा गया. आखिर में इस बात पर फैसला हुआ कि प्रतिनिधि और उनके क्षेत्र को ध्यान में रखकर बजट बनना चाहिए. यह जो बजट है जो माननीय वित्त मंत्री महोदय जी ने पढ़ा, बाद में हम लोगों ने भी पढ़ा है, इसमें क्षेत्र और प्रतिनिधि दोनों अलग-अलग हैं. कांग्रेस पक्ष के प्रतिनिधियों के लिए इस बजट में कुछ भी नहीं है. कांग्रेस के लोग जिस क्षेत्र से जीतकर आते हैं, उस क्षेत्र के लिए भी कोई बात नहीं है. एक प्रकार से इस बजट को पक्षपाती बजट कहा जा सकता है.
अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री पूरे राज्य के हुआ करते हैं. चुनाव के पहले पार्टियां रहती हैं. जीतने के बाद मुख्यमंत्री राज्य के होते हैं. राज्य का विकास करना मुख्यमंत्री का काम है और माननीय वित्त मंत्री महोदय ने जो बजट पढ़ा है, मैं उसके दो उदाहरण बताना चाह रहा हॅूं कि प्रतिनिधि के तौर पर भी यह बजट खरा नहीं उतरा. मुख्यमंत्री जी ने कहा था कि हमने साढे़ आठ करोड़ जनता के लिए पूरा पिटारा खोल दिया है. हालांकि कल बजट नहीं था, लेकिन उनका वह भाषण बजट जैसा ही था. सुनने में लग भी रहा था कि बहुत कुछ है. हो सकता है हो भी. अब कोई चीज हमारे पास नहीं है, तो हम ऐसा क्यों मानें कि नहीं होगी. साढे़ आठ करोड़ जनता के लिए पिटारा खोला हुआ था. मैं सवा चार करोड़ जनता के बारे में कहना चाहता हॅूं और वह हैं पिछडे़ वर्ग के लोग. इन पिछडे़ वर्ग के लोगों के लिए इस बजट में जो प्रावधान किया है, वह 8 सौ 96 करोड़ रूपए है. संवैधानिक परिप्रेक्ष्य में अगर इसको हम देखें, तो सिर्फ पिछडे़ वर्गों के विकास के लिए 2 लाख 19 हजार करोड़ रूपए का बजट होना चाहिए था, जो आपने 8 सौ 96 करोड़ रूपए का बजट दिया है यह न के बराबर है. अगर इनके लिए समृद्धि लानी है, विकास लाना है, तो हमें इनको बजट से जोड़ना ही पडे़गा. लेकिन यह बजट से जुड़ता हुआ नजर नहीं आ रहा है. वैसे भी बजट के बारे में यह कहा गया था कि कौन-कौन सी जातियां वर्ग पिछड़ गए हैं.
5.24 बजे अध्यक्षीय घोषणा
स्वल्पाहार की व्यवस्था विषयक
अध्यक्ष महोदय -- सभी सदस्यों के लिए चाय की व्यवस्था लॉबी में की गई है. कृपया, आप सभी अपनी सुविधा से चाय ग्रहण कर सकते हैं.
डॉ.योगेश पण्डाग्रे (आमला) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, बजट में एक राजस्व बजट भी होता है जो सरकारी योजनाओं के लिए सैलेरी में, पेंशन में जाता है. कुछ राजस्व बजट इंफ्रॉस्ट्रक्चर के लिए होता है और उसके बाद जन-कल्याणकारी योजनाओं के लिए होता है, तो उसमें से आधा बजट आप कैसे देंगे ? आप थोड़ा-सा तथ्यों को जरा देखेंगे, तो मुझे लगता है कि ज्यादा अच्छा रहेगा.
अध्यक्ष महोदय—बरैया जी को अपनी बात पूरी करने दो.
श्री फूलसिंह बरैया—अध्यक्ष महोदय, मैं तो बीच में बात कह रहा हूं देना है कि नहीं देना है, यह मेरे हाथ में थोड़े ही है. कान में कह देना, यह तो वैसे भी नहीं दे रहे हैं. अध्यक्ष महोदय जो वर्ग पिछड़ गये हैं.
5.26 बजे {सभापति महोदया(श्रीमती अर्चना चिटनीस) पीठासीन हुईं}
सभापति महोदया, उन वर्गों को आगे लाने के लिये बजट के ऊपर विशेष प्रावधान होने चाहिये, ऐसा इसमें कहा गया था. लेकिन ऐसी कोई चीज नजर नहीं आयी. तो इस वर्ग के पास कैसे पहुंचेगा पैसा इधर नौकरियों की अलग हालत है. माननीय कमलनाथ जी जब कांग्रेस के मुख्यमंत्री जी थे उन्होंने पिछड़े वर्गों के लिये 27 प्रतिशत आरक्षण दिया था. 27 प्रतिशत आरक्षण भी अगर मिल गया होता आज उनके घरों में खुशहाली की चर्चा तो होने लगती, लेकिन कुछ हमारे ही साथी राजनीति के मित्र कोर्ट में जाकर के उसको रोककर के आ गये. 13 परसेंट होल्ड है. इधर बजट भी नहीं है. देश की आधी आबादी कहां जायेगी. कल मोहन यादव जी भाषण कर रहे थे. आधी आबादी के पास में बजट का क्या दर्शन है ? आधी आबादी कहां जायेगी ? तो कह देते, पहले ही कह देते कि हमारा बजट आधी आबादी को छोड़कर के है, तो हमें कोई तकलीफ नहीं थी. वह खुद कह रहे थे कि यह साढ़े आठ करोड़ के लिये है. तो पिछड़ा वर्ग सवा चार करोड़ है उसके लिये क्या है ? 13 परसेंट होल्ड के कहा था कि इसको हटाईये, पिछड़े वर्गों के लिये दरवाजे खोलिये. 13 परसेंट कोर्ट में जो होल्ड लगा हुआ है कोर्ट से जब हट जायेगा तो उनके बच्चे तहसीलदार, कलेक्टर, एस.पी., डॉक्टर, इंजीनियर बनना शुरू हो जायेंगे. एक लाख नौकरियां होल्ड हैं, लेकिन उन्होंने पहले तो कहा नहीं एक दिन कहा भी यादव साहब ने एक दिन कहा भी ठीक है हम तो यह होल्ड हटवाएंगे. मुंह से शब्द निकला तो एक बाबा साहब पीछे पड़े गये. यह मुख्यमंत्री यादव है कि कौन है यह तो हमारे सनातन के ऊपर कलंक है. मैंने कहा कि इनके लिये लड़ते हो तब तो हम बन जाते हैं हिन्दू जैसे ही हम अधिकार की बात करते हैं तो कलंक बन जाते हैं. मोदी साहब मेहनत करके इनको आगे ले गये. मोदी साहब मसीहा हैं. मोदी साहब ने थोड़ा सा यूजीसी के लिये कोई बात कह दी, अध्यादेश लेकर के आ गये. दूसरे दिन (xx) हो गये. सभापति महोदया यह बजट उस वर्गवाद से प्रेरित है. इस बजट का विकास से ज्यादा संबंध नहीं है. जब जब विकास की चर्चा होगी.
डॉ.सीतासरन शर्मा—सभापति महोदया (xx) शब्द को कार्यवाही से हटवा दें, यह शब्द अच्छा नहीं लगता.
सभापति महोदया—(xx) शब्द विलोपित
श्री फूल सिंह बरैया—(xx) उन्होंने कहा है. (xx) जाति है. उसमें कोई बात ही नहीं है. मैं तो यह कह रहा हूं कि अगर हमें गले लगाना है तो परमानेंट लगा लो. दो दिन तीन दिन गले लगाते हो बाकी तुम भगाते फिरते हो. थोड़ा सा हो गया मोदी साहब के द्वारा यूजीसी लाया गया पिछड़े वर्ग के बच्चों को पढ़ाने के नजरिये से तो (xx) हो गये. एक बार नहीं कह रहा हूं मैं तो बहुत छोटी सी बात कह रहा हूं कि आप शोशल मीडिया पर देखेंगे तो धमईया मचा है. आप बहुत बढ़िया आदमी हैं आपको सत्ता में यहां तक लाये कहा कि अब कुछ नहीं होगा. मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि सवा चार करोड़ जनता के लिये भी बजट की व्यवस्था करना चाहिये.
सभापति महोदया, आपके माध्यम से वित्त मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि अगली बार आप बजट बनाएं, तो सवा चार करोड़ जनता का ख्याल आपको थोड़ा रखना चाहिए, इसको भी अपना भाई मानकर के, इसको भी गले लगाकर के, इसके लिए भी दरवाजे खोलना चाहिए. चर्चा में एससी, एसटी का खूब ढिंढोरा पीटा गया, लेकिन उसमें भी आपने कुछ ज्यादा नहीं किया. कहने में ज्यादा है, अल्पसंख्यक के लिए भी उतना ही है, जो संवैधानिक बजट होना चाहिए, उसमें कोई भी ऐसा स्थान नहीं है कि उनको ऐसा कहा जाए कि वे कहे कि हमारा बजट है. हम भी इस भवन से, इस सदन से बाहर निकले तो हम भी कह सके कि ये हमारा मध्यप्रदेश का और हमारी सरकार का बजट है. यहां तक तो कहने दो, आप तो बस आवाज मुंह से निकली, उसके बाद हम तो कहने लायक ही नहीं रहते उसमें.
सभापति महोदया, इसमें एक बात कही गई है. ज्ञानी, बजट का नाम दिया है, ज्ञानी. गरीब, युवा, अन्नदाता, नारीशक्ति, औद्योगिकीकरण, आधारभूत संरचना, ये छह चीजें हैं, इसमें आपसे कहना चाहता हूं कि गरीब, फिर आप ये कहेंगे कि कांग्रेस के समय में भी गरीब थे, गरीब वहां थे. गरीब की गरीबी कैसे दूर हो, इसके लिए हम सब बैठकर के इसके ऊपर एक योजना बनाए, कानून बनाए, अन्यथा हर सरकार में गरीब आते ही जाएंगे, तब से देख रहे हैं, गरीब के घर में नेता बड़े जाते हैं और गरीब के घर में खाना खाएंगे. गरीबी ही हटा दो, गरीब के घर में खाना खाने की बात कहां से आती है. युवाशक्ति, नौजवान नौकरियों के लिए भटक रहा है, डिग्रियां लेकर के घूम रहा है. वे कह रहे थे कि हमने इतना ज्यादा रोजगार दे दिया है कि हमारा बेरोजगार बिल्कुल सुखी है, वह बिल्कुल खुश है, तो वह डिग्रियां लेकर के पढ़ा लिखा नौजवान जो घूम रहा है, उस नौजवान को नौकरियां मिल सके और हमने जो नौकरियों का तानाबाना बुन दिया है, ऑउटसोर्स, ठेके की प्रथा, आपके माध्यम से सरकार से कहना चाहता हूं कि आउटसोर्स और ये ठेके की प्रथा इसको खत्म करना चाहिए. ये ठेके की प्रथा बर्बाद कर देगी, राज्य की थ्यौरी मिटा देगी, ठेके की प्रथा इस देश को बचने नहीं देगी, इसको खत्म कराने के बारे में सोचिए और बच्चों के हाथों में डिग्रियां हैं, इनको नौकरी भी देने का काम शुरू करवाइए.
सभापति महोदया, अन्नदाता है, सही बात है कि हम अन्नदाता के बिना कुछ नहीं है, लेकिन सदन में लगा कि अन्नदाता बिल्कुल ऐसा है कि मोहन यादव साहब अगर न हो तो अन्नदाता अधूरा है. यही मोहन यादव साहब की नाक के नीचे पूरे मध्यप्रदेश में यूरिया की बोरी 300 रुपए की, 500 रुपए में ब्लैक में बेची गई पुलिस के सामने. हम अगर बहुत होशियार है, इंटेलिजेंट है, ब्रिलिएंट है तो कहां चला गया हमारा वह विजन की 300 रुपए की बोरी 500 में बेची गई और 1300 रुपए की डीएपी की बोरी पुलिस के सामने 2100 में बेची गई ब्लैक में.
5:33 बजे {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}
अध्यक्ष महोदय – नारी शक्ति के बारे में बता देना चाहता हूं. नारी शक्ति, लाड़ली बहना कहने में बहुत अच्छा लगता है. पिछले दो वर्षों में एक लाख 98 हजार 414 महिलाएं बच्चीयां लापता है, कौन ढूंढेगा इनको? ये अगर लापता बनी रहेगी और हम नारी शक्ति का नारा बोलते रहेंगे, इनके बारे में कौन क्या कहेगा? तीन वर्ष में 11 हजार दुष्कर्म हुए. सात वर्ष में 71 हजार बच्चे, जिसमें बच्चीयां ज्यादा गायब है. 14 वर्षों में आपकी सरकार के समय में 46 लाख बच्चे स्कूलों से गायब है, अभी भी मालूम नहीं है, इसकी रिपोर्ट नहीं है. अध्यक्ष महोदय प्रतिदिन सात बलात्कार होते हैं, इस मध्यप्रदेश में. कौन सी लाड़ली लक्ष्मी की हम चर्चा कर रहे हैं. यहीं नहीं स्कूलों के बारे में ऐसा लग रहा था कि यहां के स्कूल तो इतने बढि़या हैं कि ऐसे स्कूल कहीं के हो ही नहीं सकते हैं, 5 हजार 600 स्कूल भवन जर्जर पड़े हुए हैं. 67 हजार स्कूलों में फर्नीचर नहीं है. 15 हजार स्कूलों में बिजली नहीं है, 2700 स्कूलों में बालिका शौचालय नहीं है, 98 हजार स्कूलों में बालिका शौचालय बंद पडे़ हैं, 11 हजार 390 स्कूलों में बाउंड्री वॉल नहीं है.
अध्यक्ष महोदय, मैं अपने क्षेत्र की बता देना चाहता हूं, मैंने निवेदन किया था कि मैं भाण्डेर से आता हूं, भाण्डेर विधानसभा है, बजट में आप मेरी विधानसभा को मत जोडि़ये, आप आगे पीछे तो कर सकते हैं, क्योंकि बजट में जोड़ेंगे तो आपकी पार्टी के लोग नाराज हो जायेंगे, यह ऐसा क्षेत्र है, जहां तथागत भगवान बुद्ध एक कार्यक्रम चलाया करते थे, उपदेश देने के लिये जाते थे, तो चार महीना जो होते हैं, चौमासे की वर्षा होती है, वह जिस गांव में रूक गये, उसी गांव में चार महीने रहते थे,उसको कहते थे चातुर्मास, वर्षा काल को त्यौहार के रूप में मनाते हैं. भाण्डेर में आज भी वर्षा वास मनाया जा सकता है, एक गांव में अगर घुस गया, दूसरे गांव में उसने नदियां ऐसी काटी हैं, दूसरे गांव में जा नहीं सकता है, न रोड है, न पुल है, न पुलिया है, 25 स्कूल ऐसे हैं, कोई तीन महीना, कोई दो महीना, कोई चार महीना कम से कम एक-एक मीटर पानी भरा रहा है, चार महीना तक भरा रहता है, मैंने बताया था और जांच भी होकर आ गई है और जांच में भी पाया गया है कि पानी भरा हुआ है. मैंने प्रश्न लगाया था, उसमें भी आया है कि हां उसमें पानी भरा रहता है, तो कहां के लिये बजट बन रहा है, यह बजट है तो बजट में इतनी भिन्नता नहीं रखना चाहिए, बजट जनता के लिये है, जनता हम भी है. बजट को प्रतिनिधि क्षेत्र में देख रेख में खर्च करायेगा, बजट क्षेत्र में क्षेत्र भाण्डेर भी आप ही का है, फूल सिंह बरैया भी विधायक है, तो यह कहा जायेगा कि मध्यप्रदेश की सरकार है, वहां डॉ. मोहन यादव है, वहां एक विधायक फूल सिंह बरैया है, इतनी अंदर की इतनी रिफ्ट, हृदय में इतनी रिफ्ट क्यों पैदा कर रहे हैं? इतनी रिफ्ट पैदा नहीं करना चाहिए और रही बात इसकी कि इसमें क्या हो जायेगा कि विधायक निधि अगर पांच करोड़ कर दी जाये तो विपक्ष के जिस विधायक को कुछ नहीं मिल पाता है, अगर विधायक निधि को पांच करोड़ कर देंगे, तो उसे मिल जायेगा, तो दो करोड़ रूपये से तो आजकल के समय में एक छोटी सी रोड ही दे पाते हैं, उसी में लग जाता है. अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.
5.36 बजे
अध्यक्षीय घोषणा
सदन के समय में वृद्धि विषयक
अध्यक्ष महोदय -- आज की कार्य सूची में सम्मिलित विषयों के पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाए. मैं समझता हूं कि सदन इससे सहमत है.
(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई)
श्री ओमप्रकाश सखलेचा(जावद) -- अध्यक्ष महोदय,धन्यवाद. वास्तव मैं काफी देर से कई लोगों के वक्तव्य सुन रहा था, सरकार की योजनाएं, सरकार की कमी और इन सबके माध्यम से जो हमारा बजट ''ज्ञानी'' शब्द पर आधारित करके जो चर्चा हुई है कि हर वर्ड को कैसे किया जाये, मैं वास्तव में अभिनंदन करना चाहूंगा माननीय वित्तमंत्री जी का जिन्होंने लगातार एक श्रृंखला से बजट में हर वर्ष दस प्रतिशत से ज्यादा ग्रोथ देकर एक लाख करोड़ से भी ज्यादा आपके इंफ्रास्ट्रक्चर में प्रोवीजन किया है. प्रोवीजन का उपयोग कैसे हो? सबसे महत्वपूर्ण चर्चा वहां से शुरू होती है.
अध्यक्ष महोदय, हम शुरू करें तो कल मैं बात कर रहा था, गवर्नर साहब के भाषण पर तब मैंने थोड़ा बहुत उद्योग के बारे में बात की थी. आज मैं सोचता हूं कि क्यों न हम कृषि और शिक्षा के बारे में चर्चा कर लें, जैसा आपका निर्देश था. अंतर सिर्फ इतना सा है कि सांदिपनि विद्यालय जो बने हैं, उसी के अंतर्गत मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूल को भी आई.एस.ओ. सर्टिफिकेशन हो सकता है. सबसे पहले जावद के स्कूल का आई.एस.ओ. सर्टिफिकेशन हुआ, और वह सर्टिफिकेशन एक नहीं दूसरे स्कूल का भी अभी हमारा इसी साल हो जायेगा, यह अपने आप में महत्वपूर्ण बात है लेकिन केवल आई.एस.ओ. सर्टिफिकेशन ही नहीं, वहां पर नवीं, दसवीं के बच्चों को अभी हमने पंद्रह सौ बच्चों को ए.आई. सिखाने का व्यक्तिगत रूप से अलग से कोर्स चलाकर काम शुरू करा है कि ए.आई. के माध्यम से कैसे फार्मिंग में आउट पुट अपना 25 से 30 प्रतिशत बढ़ाया जाये, यह मध्यप्रदेश सरकार की नीति और केंद्र सरकार के डायरेक्शन में अगर कोई आदमी प्रयोग करना चाहे तो वह हो सकता है. आज जावद में हम मार्च में एक सम्मेलन कर रहे हैं और सम्मेलन में वह 1500 बच्चे जो एआई सीख रहे हैं उसमें से 1 हजार बच्चे कृषि पर कैसे उसकी टेक्नोलॉजी का उपयोग करके आउटपुट बढ़ायें क्योंकि सरप्लस वाटर भी उतना ही नुकसान देता है जितना पानी जरूरत से ज्यादा आ जाये तो हमने उन सब पर एक्सरसाइज की, वह संभव तभी हुआ जब यह सरकार के बजट के फंड अवेलेवल हुये, अलग-अलग फंड में कैसे मेनेज करना. मुझे बड़ी खुशी होती है कि थोड़ा सा उनके कोर्स में परिवर्तन के माध्यम से अभी मेरे यहां 11वीं क्लास के सरकारी स्कूल के बच्चे 40 बच्चे शाम को 1 से 2 घंटे पार्ट टाइम पर काम करके 8 से 10 हजार रूपये महीना कमाने लगे क्योंकि हमने यह कह दिया कि अब हमें केवल वह शिक्षा या वह तरीका नहीं रखना जहां केवल फॉलो द इंस्ट्रक्शन की पढ़ाई हो फॉलो द इंस्ट्रक्शन के साथ एप्लाई द माइंड अगर डायअप है तो वह इंटरप्रेन्योर के बजाय केवल नौकर बनने के लिये बात करता है. आज जावद के किसी भी स्कूल में आप जाकर के बात करेंगे कोई बच्चा सरकारी स्कूल का एक भी बच्चा यह नहीं कहेगा कि मैं नौकरी के लिये अच्छे नंबर लाकर अच्छी नौकरी मिले वह इंटरप्रेन्योर बनने की सोचता है सिर्फ मंथन यह है कि केन्द्र सरकार राज्य सरकार की मंशा को नीचे उतारने वाला कितनी गहराई से नीचे उतारता है. मैं कुछ विषयों पर आपका अगर मैं कृषि में ध्यान दिलाना चाहूं तो कृषि में मैं अभी कुछ और भी प्राकृतिक खेती के माध्यम से कुछ एक्सरसाइज करने की जहां जरूरत है. यही वह सरकार है जिसने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिये पशुपालन पर गौवंश बढ़ाने को कहा. गौवंश बढ़ेगा तो गोबर बढ़ेगा, गोबर बढ़ेगा, गौमूत्र होगा तो पेस्टिसाइड कम लगेगा. लांग टर्म विजन कंवर्जन एक दिन में नहीं होगा, लेकिन उसकी नींव लग गई है, इस सरकार ने नींव लगाई, केवल दूध ही दूध की बात नहीं उस गौवंश के कारण खाद और पेस्टिसाइड के डेवलपमेंट के बारे में भी बात कर रहा हूं. जब हम बच्चों को एआई टेक्नोलॉजी से अपडेट करेंगे तो वहीं इंटरप्रेन्योर बनकर उस एक्सरसाइज से काम करेंगे. मैं अगर बात करूं हमारे शास्त्रों की तो ऋग्वेद में भी यह लिखा है कि कृषि विवरण मुख्य रूप से अन्न, जल, भूमि, पूजा के संदर्भ में उदाहरण अन्न समृद्धि और इसका उसी से उत्पादन और यह सब तभी संभव होगा जब यह चारों चीजें एक साथ चलेंगी. मैं अभी कुछ और गणित में देख रहा था बजट में कि इसमें बड़ी गंभीरता से कि धीरे-धीरे आज हम 1 लाख 69 हजार पर केपिटा इनकम पर आ गये हैं, लेकिन हमारा टारगेट जैसे कल माननीय मुख्यमंत्री जी ने भी बोला था और अगर मैं प्रधान मंत्री जी का वह वाक्य भी ध्यान से सुनू विकसित भारत 2047 तक बनाना. विकसित देश की घोषणा मिनिमम आज की तारीख में प्रति व्यक्ति 12 लाख रूपया पर एनम आमदनी होगी तब जाकर घोषित होगा और अगर देश में मोदी जी ने और हमारे मुख्यमंत्री जी ने कंफर्म कर दिया तो हम उस गति से बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और वह बहुत जल्दी हम पूरा कर पायेंगे क्योंकि हमने फोकस कहां किया शिक्षा पर फोकस किया, कृषि पर फोकस किया, उद्योग पर फोकस किया, बिजली पर फोकस किया, इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस किया यह सब जब हमारा तेजी से काम होगा यही तो एक मूल अंतर है कि जितना पूरे मध्यप्रदेश के विकास का बजट वर्ष 2003 में होता था उससे ज्यादा तो एक जिले में उतना बजट आज की तारीख में है और यह मैं गंभीरता से कह रहा हूं कि नीमच जिले में एक साल में हम पूरे मध्यप्रदेश के साल के बजट के बराबर पैसा हमें मिला है. तभी जाकर यह सारे काम पूरे हुए हैं मैं वास्तव में तहे दिल से अभिनंदन करना चाहता हूं और इस बात पर भी बड़ी गंभीरता के साथ कहना चाह रहा हूं हम केवल इतनी ही बात नहीं कर रहे सबस्कीम मैं अगर देखूं अनुसूचित जाति औऱ जनजाति का भी बजट दोनों का बजट मिला लें तो 70 हजार करोड़ का बजट इन वर्ग में अलग अलग तरीके से पूंजीगत व्यय में इस वर्ग पर लगा रहे हैं केवल दिल से दिखाने के लिये दो दिन के लिये जोड़ने घटाने के लिये काम नहीं करना चाहते हैं हम वह काम करना चाहते हैं यह परिभाषा है कांस्टीट्यूशन में लिखा है सब रिजर्वेशन सब वर्किंग, 5 साल,5 साल एक्सटेंडेबल था लेकिन चूंकि उस समय की सरकारों ने परफार्म नहीं किया इस कारण बार-बार बढ़ाकर हम यह कोशिश कर रहे हैं कि हम जल्दी से जल्दी सबको बराबर लाकर इस विषय की पूर्ति करें. जब कांस्टीट्यूशन बना था तो मेग्जिमम इस काम की सभी पिछड़े वर्ग को बराबरी लाने में मेग्जिमम दस वर्ष लगेंगे लेकिन किसी ने उस बात पर ध्यान नहीं दिया और आज हम उस विषय पर बहुत नजदीक आ गये कि बहुत जल्दी हमारी पर केपिटा इनकम बढ़ जायेगी सब शिक्षित हो जायेंगे. मैं एक बात और आपके ध्यान में डालना चाहता हूं. मैं विधायक बना तो कुछ एरिये में 10-10 कि.मी. तक प्राथमिक स्कूल नहीं था. जबकि वह आदिवासी बेल्ट था स्कूल खोला दस साल में सरकारी स्कूल जिले का सबसे बेस्ट परफार्मर स्कूल बना और उसने अवार्ड लिया तो हम बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रापर डिस्ट्रीब्यूशन,प्रापर वर्किंग हो जाये और वहां का लोकल जनप्रतिनिधि ध्यान दे तो हर चीज संभव है और वह करने की क्षमता चाहिये. प्रति व्यक्ति आय के साथ हमने इन सब विषयों के साथ हम टेक्नालाजी का सपोर्ट लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं हमको उसको और आगे शिक्षा मंत्री नहीं हैं दोनों उपमुख्यमंत्री बैठे हैं. सांदीपनी विद्यालय हमारे दो और बिल्डिंग का वादा किया वह जल्दी मिल जाये तो हमारी यह संख्या पूर्ण हो. मैंने एक और आग्रह किया था सांदीपनी विद्यालय में 35-40 करोड़ खर्च हुए उसे डबल शिफ्ट चलाने की पिछली बार बात की थी ताकि हम 1500 की जगह वहां 3-3 हजार बच्चे वहां पढ़ लें क्योंकि इँफ्रास्ट्रक्चर तो वही है केवल अतिरिक्त दो शिफ्ट में शिक्षकों को लगाना पड़ेगा तो ज्यादा बच्चों को उसमें अवसर मिलेगा और वह ज्यादा बेहतर हो पाएगा.
अध्यक्ष महोदय - दो मिनट में कन्क्लूड करें प्लीज.
श्री कैलाश विजयवर्गीय - बोलने दीजिये अध्यक्ष जी कितनी ज्ञान की बात कर रहे हैं.
श्री ओमप्रकाश सखलेचा - अध्यक्ष महोदय,आपकी बात सर आंखों पर. अध्यक्ष जी अगली बार अवसर देंगे मैं तब बात कर लूंगा. आज सबको जाना है. मैं ज्यादा लंबी बात न करते हुए मेग्जिमम एक मिनट में अपनी बात को समाप्त करने की कोशिश करता हूं. हम अगर थोड़ा सा किसान के साथ हमने जो खाद आपूर्ति में काम किया था सरकार ने मुझे बहुत अच्छे तरीके से याद है आज से पांच साल दस साल पहले गांव में जाते थे सबसे ज्यादा शिकायत आती थी कि अनाज पूरा नहीं मिलता. जब हम जाते हैं दुकानदार राशन पूरा नहीं जाता खत्म हो गया बोलता है अब पिछले चार साल से एक व्यक्ति नहीं बोलता है उसका कारण सिर्फ टेक्नालाजी है. हमें यह समझना पड़ेगा कि राशन कोई भी कहीं से ले ले यह टेक्नालाजी का अंतर मैं सिर्फ उदाहरण के लिये बता रहा हूं तो उससे दबाव यह हुआ कि उस दुकान को यह डर बैठ गया कि मेरे ग्राहक अगर दूसरी दुकानों से लेनेलगेंगे तो मेरा लाइसेंस केंसिल हो जाये. बिना किसी विवाद के कैसे सिस्टम को करेक्ट किया. सिस्टम करेक्शन का तरीका टेक्नालाजी और इच्छा शक्ति का मिश्रण कैसे परिवर्तन लाता है. मैं ज्यादा लंबी बात न करते हुए सिर्फ यह कहूंगा कि इससे बेहतर बजट नहीं हो सकता था. मैं बहुत दिल से अभिनंदन करते हुए अपनी वाणी को विराम दूंगा बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्री नारायण सिंह पट्टा (बिछिया) - माननीय अध्यक्ष महोदय, इस सदन में जो बजट प्रस्तुत किया गया है, यह प्रदेश के विकास का दस्तावेज नहीं बल्कि आंकड़ों की चमक-दमक से सजा हुआ भ्रम का पुलिंदा है. सरकार ने लगभग 4 लाख 38 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया है और इसे ऐतिहासिक बताया जा रहा है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इस बजट से जनता का इतिहास बदलेगा ? या सिर्फ भाषणों का इतिहास लिखा जायेगा. यह बजट कहता है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार पर फोकस है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सरकार कर्ज लेकर योजनाएं चला रही है और सरकार 5 हजार 600 करोड़ रुपये ऋण लेने को तैयार खुद इसकी वित्तीय स्थिति की पोल खोलती है.
अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश के इतिहास में यह पहला बजट होगा, जहां बजट से ज्यादा सरकार पर कर्ज है. हमारा बजट 4 लाख 38 हजार करोड़ रुपये का है, लेकिन हम पर कर्ज 4 लाख 85 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है. माननीय मुख्यमंत्री जी कल कह रहे थे कि यह पूरा कर्ज हमारा नहीं है, इसमें पुरानी कांग्रेस सरकार का भी कर्ज शामिल है. मैं बताना चाहता हूँ कि वर्ष 1956 से लेकर वर्ष 2003 तक 47 वर्षों में मध्यप्रदेश पर कुल कर्ज मात्र लगभग 23 हजार करोड़ रुपये था, लेकिन वर्ष 2003 से वर्ष 2026 तक 23 वर्षों में हम पर 4 लाख 85 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है. इसका मतलब यह है कि केवल 23 वर्ष में इस सरकार ने 4 लाख 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज लिया है. शायद हमारे प्रदेश के कर्जे को देखकर ही 'कर्ज लेकर घी पीने' की यह कहावत बनी है. माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार किसानों के नाम पर घोषणाएं कर रही है, लेकिन आज प्रदेश में किसानों की जो स्थिति है, वह सबके सामने है, सरकार ने वादा किया था कि 3 हजार 100 रुपये प्रति क्विंटल धान का समर्थन मूल्य, 2 हजार 700 रुपये प्रति क्विंटल गेहूँ के समर्थन मूल्य का, लेकिन क्या वह समर्थन मूल्य किसानों को दिया जा रहा है ? क्या उसकी बात की जा रही है ? सोयाबीन, मक्का एवं दाल के समर्थन मूल्य पर तो सरकार बात भी नहीं करना चाहती है. किसान कंगाल होता जा रहा है, किसान खाद के लिए रात-रात पर लाईन लगाता है और सुबह उसे खाद के बदले पुलिस की लाठियां मिलती हैं. बजट में दर्जनों बार किसानों का नाम लिया गया, लेकिन क्या बजट में वाकई किसान की चिन्ता दिखी ? किसान कर्ज के बोझ तले दबता चला जा रहा है. लेकिन किसानों के कर्ज माफी पर कोई बात नहीं होती. बजट में जोर-जोर से चिल्लाकर किसान का नाम लेना प्राथमिकता का संतुलन नहीं बल्कि राजनीति का झुकाव है, बजट का इवेंट है. कल माननीय मुख्यमंत्री जी कह रहे थे कि हमारा यह वर्ष 2026 कृषि कल्याण वर्ष है.
अध्यक्ष महोदय, शिक्षा के नाम पर आवंटन है, स्वास्थ्य के नाम पर आवंटन है, लेकिन युवा पूछ रहा है कि रोजगार कहां है ? अगर हम शिक्षा की बात करें तो आज स्कूलों के क्या हालात हैं ? कहीं बच्चों को तिरपाल के नीचे पढ़ाया जा रहा है, तो कहीं पेड़ के नीचे पढ़ाया जा रहा है, कहीं किसी रंगमंच में. मैं अपनी विधान सभा की बात करूँ, तो वहां 779 प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय हैं, जिनमें से 226 विद्यालय जर्जर और जीर्ण-शीर्ण हैं. 21 विद्यालयों के भवन इस हालत में हैं कि यहां तो पढ़ाया ही नहीं जा सकता. इसलिए कहीं किराये का कमरा लिया गया है, तो कहीं पेड़ के नीचे पढ़ा रहे हैं. हम बच्चों को पढ़ाने के लिए भवन नहीं दे पायेंगे तो क्या केवल टेट्रा पैक का दूध पिलाकर हम उनका भविष्य बना लेंगे. इसी तरह हाई स्कूलों की बात करें तो 37 हाई स्कूलों में से, 4 हाई स्कूलों के लिए भवन ही नहीं है. शिक्षकों की कमी की बात महत्वपूर्ण है क्योंकि जब शिक्षक ही नहीं होंगे तो हम भवन बनाकर भी क्या कर लेंगे ? वर्ष 2022-23 से लेकर वर्ग-2 और 3 के शिक्षकों की परीक्षायें हो गईं, वैरिफिकेशन हो गया लेकिन आज भी हजारों शिक्षकों को नियुक्ति नहीं दी जा सकी है. मेरे विधान सभा क्षेत्र में ही 1000 शिक्षकों की कमी है, हम अपने गांव-देहात के बच्चों को कैसा भविष्य दे रहे हैं ?
अध्यक्ष महोदय, स्वास्थ्य व्यवस्था की बात करें तो अस्पतालों में डॉक्टर नहीं हैं, दवाइयां नहीं हैं, मरीजों के पलंग नहीं हैं, एम्बुलेंस नहीं हैं, जांच की मशीन नहीं हैं, मेरे क्षेत्र में, मैं, वर्षों से मांग कर रहा हूं कि बिछिया को सौ बिस्तरीय सिविल अस्पताल के साथ, ट्रामा सेंटर बनाया जाये. सलवाह में 10 बिस्तरीय अस्पताल खोला जाये, अंजनी, सुरहली, मोतीनाला और मोचा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन किया जाये लेकिन कुछ नहीं किया जा रहा है.
अध्यक्ष महोदय, सरकार पुलिस में भर्ती की घोषणा करती है लेकिन उद्योग, स्थाई रोजगार और आर्थिक अवसर पर स्पष्ट रोडमैप नहीं देती है. युवा बेरोजगारी के चरम से गुजर रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों से लाखों की संख्या में युवाओं का पलायन दूसरे राज्यों में हो रहा है. आऊट सोर्सिंग के नाम पर युवाओं को छला जा रहा है. इसके ठेकेदार माला-माल हो रहे हैं लेकिन युवा मजबूरी में रुपये 15 हजार की नौकरी रुपये 7 हजार में कर रहा है. जिन पदों को सरकार को नियमित सेवा के रूप में भरा जाना चाहिए, उनमें आऊट सोर्सिंग की व्यवस्था लागू की गई. युवाओं से उनके सपने छिने जा रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय, महिलाओं के नाम पर योजनाओं की बात होती है, लाड़ली बहना योजना में रुपये 23 हजार 882 करोड़ खर्च हो रहे हैं लेकिन क्या महिलाओं की सुरक्षा, रोजगार, स्वावलंबन पर उतनी गंभीरता दिखाई गई है. लाड़ली बहनों को चुनाव पूर्व रुपये 3 हजार का सपना दिखाया गया लेकिन आज भी वह केवल सपना ही है. 18 से अधिक उम्र की महिलाओं का अब इसमें पंजीयन बंद कर दिया गया है.
अध्यक्ष महोदय, शहरों के लिए हजारों करोड़, मेट्रो, ई-बस, आवास योजनायें लेकिन गांव आज भी सड़क, पानी, शिक्षा और अस्पताल के तरस रहे हैं. गांव में सड़कों की हालत ऐसी है कि बारिश में एक मुहल्ले से दूसरे मुहल्ले में जाना हो तो ग्रामीणों को पैदल चलने के उपाय सोचने पड़ते हैं. आज भी कई गांव के लोग मरीजों को खटिया में लादकर मुख्य सड़क तक लाते हैं क्योंकि उनके गांव में एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती है.
अध्यक्ष महोदय- नारायण जी, कृपया संक्षिप्त करें, आपका समय हो गया है.
श्री नारायण सिंह पट्टा- अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा की एक सड़क ऐसी है कि जहां पैदल चलने के लिए कई बार सोचना पड़ता है. मालूमझोला से मगरवाड़ा टटमा तक, चलनी से टिकरा चलनी तक, पद्दीकोना से टिकरा पद्दीकोनात तक, चुरिया से कैदोंटोला तक, कठईढ़ीह से पटनीपानी तक, चुरिया चीता पखना तक ऐसी सड़कें हैं, जहां पैदल चलना भी दूभर है लेकिन हम नेशनल पार्कों को एक-दूसरे से जोड़ने के लिए सड़क बना रहे हैं क्योंकि हमारे लिए हमारे राज्य के नागरिकों से ज्यादा दूसरे राज्यों के नागरिक महत्वपूर्ण हैं. वहां के नागरिक हमारे लिए अतिथि और महत्वपूर्ण हैं लेकिन क्या हम अपने नागरिकों को बेहतर सड़क की सुविधा दे पा रहे हैं. पिछले साल मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना की खूब वाह-वाही हुई लेकिन क्या आज तक कोई एक सड़क इस योजना से बनी, अभी तक हम केवल प्रस्ताव-प्रस्ताव खेल रहे हैं, योजना तो आपने बना दी लेकिन उसे धरातल उतारना भूल गए. मैं फिर वही लाईन दोहराता हूं, हम बजट केवल इवेंट और प्रचार के लिए पेश कर रहे हैं, सरकार वर्ष 2047 तक 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और लाखों की प्रति व्यक्ति आय का सपना दिखाती है लेकिन आज की मंहगाई, बेरोजगारी और किसानों की लागत का जवाब नहीं देती, यह बजट विज़न का नहीं, भ्रम का दस्तावेज है, यह विकास का नहीं, प्रचार का दस्तावेज है, यह जनता की राहत का नहीं, सरकार की छवि बचाने का दस्तावेज है. पिछले साल धरती आभा योजना के लिए बड़े-बड़े कार्यक्रम कराए गये, लेकिन आज भी बजट अप्राप्त है. कोई भी योजनाएं चालू नहीं हो सकी हैं. अध्यक्ष महोदय, आपके आदेश का पालन करते हुए आपने बोलने का मौका दिया बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्री पंकज उपाध्याय (जौरा)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं चाहता हूं कि मुझे कम से कम पंद्रह मिनट का समय मिले. मैं एक घंटे की तैयारी करके आया था.
अध्यक्ष महोदय-- पंकज जी कृपया कर आप अपना भाषण पांच मिनट में ही समाप्त करें. आप तो विद्वान हो. गागर में सागर भरो.
श्री पंकज उपाध्याय-- माननीय अध्यक्ष महोदय, पिछले बजट में 4 लाख 21 हजार करोड़ रुपए आए और खर्च हुआ कुल तीन लाख 75 हजार करोड़ रुपए. लगभग 46 हजार करोड़ रुपया कम खर्च हुआ. इसका मतलब है कि आपने यहां पर बातें बड़ी-बड़ी कीं, लेकिन आपने इंफ्रास्ट्रक्चर पर कम खर्चा किया. आपने किसानों के लिए कम खर्चा किया. जो किसान लाइन में लगे थे उन्हें खाद इसलिए नहीं मिली कि आपने जो प्रावधान किया था उसके लिए पूरा खर्चा नहीं किया. हमारे स्कूल लगातार बंद होते जा रहे हैं. 7 हजार स्कूल जो पिछले पांच साल में बंद हुए हैं. आपने यहां पर वादे बड़े-बड़े किये, सपने बहुत बड़े-बड़े दिखाए, लेकिन आपने धरातल पर 46 हजार करोड़ रुपए की कमी कर दी. हम 5 लाख 31 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले चुके हैं.
माननीय मुख्यमंत्री जी बता रहे थे कि चैट जीपीटी पर जाइये देखिये. भाषण भी चैट जीपीटी से तैयार करके लेकर आए थे, लेकिन 5 लाख 31 हजार करोड़ रुपए यह चैट जीपीटी ने बताया. मैंने तीन से चार जगह ढ़ूंढा, लेकिन उसने भी इतना ही बताया. हम लगातार बातें करते आ रहे हैं कि स्वास्थ्य में हमने बहुत खर्चा किया. भागीरथपुरा की बात करेंगे तो अभी कैलाश जी खड़े हो जाएंगे, बीच में बोलने लग जाएंगे कि मैं नौ बार जीता हूं और जनता ने बहुत दिया, लेकिन अगर आप नौ बार जीते हैं तो आपसे ही पूछा जाएगा कि 34 लोग मरे जो आप 22 बताते हैं. आप विभाग के मंत्री हैं. मुख्यमंत्री जी उसके प्रभारी हैं.
अध्यक्ष महोदय-- वह विषय समाप्त हो गया है. दूसरे बहुत सारे विषय हैं.
श्री पंकज उपाध्याय-- माननीय अध्यक्ष महोदय, विषय है कि आपने स्वास्थ्य में इतना पैसा दिया, लेकिन एमवाय अस्पताल में चूहे बच्चों को कुतर गये. अब यह बात किससे पूछने जाएं यह भी विषय के बाहर आएगा. यहां गौवंश कट रहा है और हम चुप बैठे हैं यह भी विषय पर आएगा लेकिन कैलाश जी बैठे हुए हैं. मॉं अहिल्या जी ने पूरे भारत में कई घाट बनाएं, कई मंदिर बनाएं. इस सदन में मणिकर्णिका घाट की चर्चा नहीं हो पाई. मेरा अनुरोध है कि उसके बारे में चर्चा कर लें और थोड़ा सा प्रावधान उस घाट के लिए भी कर दें. मां अहिल्या ने बहुत सुंदर घाट बनवाया था, उसको तोड़ दिया गया है. उसके लिए भी इस बजट में कुछ प्रावधान करें.
अध्यक्ष महोदय-- पंकज जी यह उत्तर प्रदेश का विषय है. उत्तर प्रदेश सरकार बना रही है और बहुत अच्छा बना रही है.
श्री पंकज उपाध्याय-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मां अहिल्या हमारे इंदौर की थीं, हमारे प्रदेश की थीं. यह हमारा दायित्व बनता है. कृषि की बात हुई. माननीय मोदी जी का नाम कई बार आया....
श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)-- अध्यक्ष महोदय, मणिकर्णिका घाट के अंदर मां अहिल्या का इतना अपमान हुआ. इंदौर के एक भी व्यक्ति ने उनके लिए एक शब्द नहीं बोला. यह मां अहिल्या के नाम से व्यापार चलाते रहते हैं. हमारी महारानी का इतना बड़ा अपमान हुआ.
श्री पंकज उपाध्याय-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सीएस साहब ने कहा कि कलेक्टर बिना पैसे लिए काम नहीं करते हैं. हमने इतनी बड़ी योजनाएं बनाकर दी हैं, लेकिन अधिकारी बिना पैसे लिए काम नहीं करेंगे. यह भी एक चिंता का विषय है. मैं इस पर बहुत बोलना चाहता था, लेकिन आपने समय सीमा बांध रखी है. आपने पुरानी पेंशन के बारे में कुछ नहीं कहा. कई बार, कई लोगों ने कहा कि हमारे वजूद की बात आएगी तो हम सड़कों पर उतरेंगे और कई बातें करेंगे. लेकिन पुरानी पेंशन के बारे में किसी ने कोई बात नहीं की है इसके लिए आपको प्रावधान करना चाहिए था. शिक्षा के बारे में बात करूं तो सात हजार स्कूल बंद हो गये हैं. लगभग साढ़े पांच हजार स्कूलों में एक भी प्रवेश नहीं हुआ. इतनी विश्वसनीयता शिक्षा विभाग की क्यों बढ़ती जा रही है. वर्ष 2010-11 में इस विभाग का बजट 6 हजार 874 करोड़ रुपए का था. अब हम 36 हजार करोड़ रुपए बता रहे हैं. लेकिन स्कूल लगातार बंद होते जा रहे हैं तो इसकी जवाबदारी किसकी है. इस बजट में आपको इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है. मेरे क्षेत्र का देसी शक्कर कारखाना, इसके लिए मैंने लगातार दो बार प्रश्न लगाया दोनों बार उसको निरस्त कर दिया गया. अध्यक्ष महोदय, मैंने आपको भी पत्र दिया है और उनको भी दिया है. इस प्रश्न में ऐसा क्या है जिसके कारण बार बार इसको हटा दिया जाता है. माननीय मुख्यमंत्री जी ने मुरैना में आकर घोषणा की थी कि मुरैना में कारखाना चालू करेंगे. कृषि मंत्री जी ने बोला था कि हम एक करोड़ रुपए देंगे और एक-एक लाख रुपए के 100 किसान देखेंगे जो गन्ना उगाएंगे. लेकिन आज तक धरातल पर कोई कार्य नहीं हुआ है. किसी को एक रुपया नहीं दिया गया है, न ही कोई मीटिंग हुई. हमने व्यक्तिगत जाकर करीब 500 किसानों से एफिडेफिड लिए हैं और कृषि मंत्री जी और मुख्यमंत्री जी को पहुंचाए हैं. इस बारे में कुछ करने की आवश्यकता है.
अध्यक्ष महोदय, हमारे क्षेत्र में अटल एक्सप्रेस-वे बन रहा है. उस पर सरकार बहुत व्यय करना चाहती है. हमारा विकास के मामले में कोई विरोधाभाष नहीं है. मगर आप पुराने अलायमेंट से जाएंगे तो हम सहर्ष आपको सहयोग देंगे. मेरा स्वयं का गांव उसमें आता है. मेरी उसमें 16 बीघा जमीन जा रही है. लेकिन आप उसको ऊंचा बनाएंगे तो हम उसका विरोध करेंगे. जो चंबल कोटा की बैराज है, नहर है उसके दोनों तरफ आप उसको चौड़ा बनाइए. झुण्डपुरा से सबलगढ़ के बीच में बहुत चौड़ी रोड बन गई है. इसके दोनों तरफ बन जाएगी तो जो जमीन आप लेने के लिए प्रयास कर रहे हैं वह जमीन नहीं लेनी पड़ेगी और बहुत शानदार विकास होगा और कोई भी किसान आपका विरोध नहीं करेगा. चंबल एक्सप्रेस-वे को बनाने की बहुत आवश्यकता है.
अध्यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र में एक सोलर प्लांट की भी बात की गई है. हम सोलर प्लांट का पुरजोर तरीके से विरोध कर रहे हैं. वहां पर 30 हजार बीघा गोचर भूमि अगर आप लेंगे तो वहां के किसान आपको लेने नहीं देंगे. हमारे सगोरिया की 3 हजार बीघा जमीन जा रही है. वहां पर गांव में जमीन ही नहीं बच रही है. पिपरोनिया की 2 हजार बीघा जमीन ली जा रही है. टेलरी, फलौदा, डमेचर, किसरौली, अर्रार, देवरी, पुनियारी, कौड़ा, पचेखा, शहदपुर, भूरि, धोधा, कनार, देवरा यह तो बर्बाद ही हो जाएंगे. उस सोलर प्लांट से बहुत गर्मी पैदा होगी. वह अभी भी पूरा मरु क्षेत्र है, पहाड़ी क्षेत्र है वहां पर पानी नहीं है. पानी की बात करें तो हमारे धोधा, पनार, बैकोली, जडेरू, मरार, रकेरा, आरेटी यहां पर पीने का पानी नहीं है. आपने दो साल पहले प्रावधान किया था कि हम पानी की व्यवस्था करेंगे. आज तक वहां पर कोई मीटिंग नहीं हुई है. कोई काम नहीं हुआ है. नल-जल योजना की बात करें तो किसी टोंटी में से पानी नहीं आ रहा है. 110 पंचायतें हैं मेरे क्षेत्र में. मैं स्पोर्ट्स काम्पलेक्स की मांग लगातार कर रहा हूँ. अध्यक्ष महोदय, मेडिकल कॉलेज की घोषणा आपका और हमारा दोनों का सपना है, लेकिन आज तक वो धरातल पर नहीं उतरा है. इस सपने को धरातल पर लेकर आने की आवश्यकता है. एक एमएस रोड की बहुत बड़ी समस्या आ रही है. इस रोड की चौड़ाई मात्र 22-23 फिट है यहां पर औसत एक एक्सीडेंट रोज होता है. रोज किसी न किसी परिवार का एक व्यक्ति छिन जाता है. इस रोड की चौड़ाई बढ़ाई जाए. जौरा-कैलारस के जैसे बायपास बन रहे हैं वैसे बन जाएंगे तो कृपा होगी. अस्पतालों की स्थिति बहुत खराब हो चुकी है. जौरा-कैलारस में तो डॉक्टर ही नहीं है. डायलेसिस की मांग हम लगातार कर रहे हैं. इसके लिए कोई आगरा जाता है कोई ग्वालियर जाता है. डायलेसिस की व्यवस्था करने की कृपा करें.
अध्यक्ष महोदय, भिण्ड मुरैना का जरुरी प्रश्न है. पुलिस, पटवारी और शिक्षकों की जो भर्ती हो रही है. यह इंदौर, जबलपुर, भोपाल और सागर में होती है. इसको इंदौर, भिण्ड और ग्वालियर में कराने की कृपा करें. आपने बोलने का समय दिया, धन्यवाद.
श्री दिनेश जैन (महिदपुर) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने पूरा बजट भाषण सुना था. सरकार ने वर्ष 2026 को किसान कल्याण के रुप में मनाने की बात की है. लेकिन बजट के अन्दर किसानों का जो प्रधानमंत्री फसल बीमा है उसे 2001 करोड़ रुपए को घटाकर 1299 करोड़ रुपए कर दिया है. मैं केवल बीमा पर ही बोलूंगा. किसान की मुख्य मांग यही होती है कि उसको राहत राशि, मुआवजा, बीमा यह मिल जाए. मेरे विधान सभा क्षेत्र में इफ्को-टोकियो कम्पनी ने पूरे उज्जैन जिले का बीमा किया था. मैंने वर्ष 2020 से 2024 तक के आंकड़े पूछे तो उन्होंने बताया कि 12 लाख 600 किसानों ने बीमा करवाया. 2 हजार 565 करोड़ रुपए प्राप्त हुए. यह राशि रबी और खरीफ की फसल में 6-6 महीने के अन्दर 4 साल में 8 बार में प्राप्त हुई. 2600 करोड़ रुपए के आसपास उसको प्रीमियम मिला और उस बीमा कंपनी ने केवल 962 करोड़ रुपये बांटे. एक-एक बीमा कंपनी जिले में 500 करोड़ से ज्यादा कमाती है. दूसरा, अभी वित्तमंत्री जी का भाषण मैंने सुना. आपने बोला कि प्राकृतिक प्रकोप से हम फसल बीमा देते हैं लेकिन मैं बोलता हूं कि आप गलत बोल रहे हैं. अभी आरबीसी 6(4) के तहत मेरे यहां किसानों को राहत राशि दी गई. अगर राहत राशि दी गई है तो वह प्राकृतिक प्रकोप के कारण ही दी गई है लेकिन उनको बीमा अभी तक नहीं मिला है, तो मैं वित्तमंत्री जी के भाषण से सहमत होऊं या बीमा कंपनी से सहमत होऊं. बीमा कंपनी से जब मैंने पूछा तो राहत राशि एक अलग बात है और बीमा देना एक अलग बात है तो मैं मेरे यहां के किसानों को कैसे संतुष्ट करूं. सदन में जो मैंने सुना वह बात बोलूं या बीमा कंपनी ने जो बात बोली वह बात बोलूं.
अध्यक्ष महोदय, अभी आज रात को ही हमारे यहां स्नोफॉल हुआ है. काफी फसलें खराब हो गई हैं. इसके 10 दिन पहले भी फसल खराब हुई हैं लेकिन बीमा कंपनी वाले वहां नहीं आते हैं. वह तो केवल यह बोलते हैं कि 72 घण्टे के अंदर हमको खबर कर दो. एक टोल फ्री नंबर दे रखा है वह बंद रहता है. मैं खुद सर्वे करने गया. एसडीएम तहसीलदार मेरे साथ थे. हमने उस टोल फ्री नंबर को 15 बार लगाया लेकिन नहीं लगा वीडियो मेरे पास है तो 72 घण्टे के अंदर हमको खबर करना है. अगर खबर नहीं हुई तो बीमा नहीं मिलता है और बीमा कंपनियां 500 करोड़, हजार करोड़, 2 हजार करोड़ रुपये कमाती हैं. सरकार का उनके ऊपर कोई अंकुश नहीं है और किसान रोता रहता है तो यह बहुत बड़ा घोटाला है. इसका सीधा-सीधा पैसा 2 परसेंट हम भी देते हैं. 4,700 रुपये की प्रीमियम है. उसका 940 रुपये हम कृषकों से ले लेते हैं, 4 परसेंट स्टेट गवर्नमेंट देती है और 4 परसेंट सेंट्रल गवर्नमेंट दे देती है. वह 4,700 रुपये एक हेक्टेयर जमीन पर लेता है और हमको कुछ भी नहीं देता है और आज की तारीख में भी अभी फसल खराब हुई है सुबह मुझे फोन आए हैं लेकिन कोई अधिकारी वहां नहीं गया है. बीमा कंपनी वाले तो आते ही नहीं हैं तो बीमा कंपनी वाले को क्या आपने पैसा कमाने की छूट दे रखी है. उनका टोल फ्री नंबर बंद है. बैंक में पैसा ऑटोमैटिक कट जाता है, प्रीमियम ऑटोमैटिक कट जाता है. किसानों से पूछा भी नहीं जाता है. किसानों को यह भी नहीं मालूम कि हमें वह बीमा कैसे मिलेगा. फ्लड, लैंडस्लाइड यह प्राकृतिक आपदा हैं. हमारे यहां केवल दो प्राकृतिक आपदा हैं कभी-कभी हैवी रेन फॉल होता है बहुत तेज बारिश होती है, कभी स्नोफॉल होता है लेकिन हमें बीमा मिलता नहीं है, तो किसानों की सबसे बड़ी समस्या बीमे की है. अगर उसको बीमा मिलेगा तो उसकी आमदनी भी बढ़ेगी और वह आत्महत्या करने से भी बचेगा.
अध्यक्ष महोदय, योजनाएं किसानों के लिए बनती हैं. किसानों के नाम से बजट आता है लेकिन उस योजना का फायदा किसान को होता है या नहीं होता है. अभी नवकरणीय ऊर्जा के बारे में बहुत बातें हुईं. छोटे-छोटे पम्प में आप सब्सिडी दे रहे हैं बहुत अच्छी बात है लेकिन कुसुम ए योजना, कुसुम बी और कुसुम सी में क्लियर लिखा हुआ है कि जिस किसान की 4 बीघा से 8 बीघा जमीन बंजर है, अनुपजाऊ है उसके ऊपर .5 मेगावॉट से 2 मेगावॉट बिजली वह लगा सकता है लेकिन एक भी किसान उसमें पार्टिसिपेट नहीं कर पाता है न उनको मिलती है. बड़ी-बड़ी कम्पनीज को आप दे देते हैं. दिलीप बिल्डकॉन को 1,500 मेगावॉट का दे दिया. रिजान सूरत की एक कम्पनी है उसको 1,100 मेगावॉट का दे दिया लेकिन किसानों को नहीं मिलता है. योजनाएं किसानों के नाम से बनती हैं लेकिन उनके पास जाती नहीं हैं.
अध्यक्ष महोदय, एमएसएमई में आपने बोला है कि लोन पास होता है लेकिन लोन के लिए जब आदमी जाता है तो योजनाएं कागज में पास तो हो जाती हैं लेकिन वह बैंक के चक्कर लगा लगाकर थक जाता है, उन युवाओं को बैंक का लोन नहीं मिलता है. मैं यही चाहूंगा कि एक तो मेरे क्षेत्र में आज जो स्नोफॉल हुआ है तो अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं चाहता हूं कि मेरे यहां सर्वे हो, बीमा कंपनी वहां सर्वे करे. ओलावृष्टि हुई है और काफी फसल खराब हुई है. मेरे क्षेत्र में अभी वहां पर आंदोलन भी है. मैं चाहूंगा कि कि मेरे क्षेत्र में जो प्राकृतिक आपदा आई है उससे मेरे क्षेत्र के लोगों को बीमा मिले. आपने मुझे समय दिया बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्री लखन घनघोरिया (जबलपुर-पूर्व) -- आदरणीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश सरकार का आम बजट 2026-27 के लिए ₹ 4,38,317 करोड़ का है. माननीय अध्यक्ष महोदय, 2003 में मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी. 2003 में जो बच्चा पैदा हुआ होगा वह इस समय 23 साल का हो गया होगा क्योंकि 15 महीन में बीच की सरकार को छोड़ दें तो तो वह फुल वयस्क और अपने अधिकारों को जानने और समझने वाला हो गया होगा. कुछ ग्रेजुएट हो गये होंगे कुछ अच्छे पढ़ने लिखने वाले होंगे वह पोस्ट ग्रेजुएट हो गये होंगे. कुछ ने पीएचडी भी कर ली होगी.
माननीय अध्यक्ष महोदय, वह बच्चा आज रोजगार से जुड़ पाया अथवा नहीं जुड़ पाया लेकिन इस बजट से जिसके कारण हम यह मानकर के चलें कि अनुमानित कर्जा हमारे ऊपर लगभग 6 लाख करोड़ का होगा, मतलब प्रति व्यक्ति 60 हजार रूपये. वह बच्चा आज की स्थिति में 60 हजार रूपये का कर्जदार तो हो ही गया, उसको रोजगार मिले या न मिले. यह बड़ी विचित्र दशा है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे सारे विद्वान साथी कह रहे थे यह विकास का जाल है. विकास का जाल है कि कर्जे का जंजाल है, भ्रष्टाचार का जाल है कर्जे का जंजाल है. कर्जा इस कदर बढ़ रहा है, इतनी रफ्तार से बढ़ रहा है कि बुलेट ट्रेन तो नहीं चल पाई लेकिन कर्जे की रफ्तार बुलेट ट्रेन से ज्यादा चल रही है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, 6 लाख करोड़ का अनुमानित होगा, 33 बार मतलब 26 माह में जब से माननीय मोहन यादव जी की सरकार बनी है, 33 बार 169 लाख करोड़ का कर्ज लिया गया है, मतलब हर दिन 216 करोड़ रूपये का कर्ज हर दिन 216 करोड़ रूपये का कर्ज. कर्ज की स्थिति यह है और उसके बाद में ब्याज की स्थिति क्या होगी.
अध्यक्ष महोदय, बहुत स्पष्ट है कि 16 प्रतिशत सालाना ब्याज चुकाना पड़ेगा. 33 हजार 734 करोड रूपया. इस पर हमारे विद्वान साथियों ने कभी चर्चा नहीं की. हमारे माननीय वित्त मंत्री जी बैठे हैं इनसे कहना चाहता हू कि -
तुमने सदन में पढ़ा करोड़ा का बजट
तुमने उदास लोगों के चेहरे नहीं पढे.
अध्यक्ष महोदय, बेरोजगार नोजवानों के चेहरे पढ़ लेते , कम से कम 25 लाख नोजवान रोजगार से वंचित हैं, यह आपकी ही सरकार के आंकड़े बता रहा हूं. जिनका रजि्ट्रेशन है. और स्थिति यह है कि वह नोजवान जो रोजगार के लिये भटक रहा है उसको यह सरकार नशे की तरफ झोंक रही है. (स्वदेश पेपर आसंदी की तरफ दिखाते हुये) अध्यक्ष जी यह स्वदेश पेपर है, जिसने प्रदेश में नशे की स्थिति बता दी. स्वदेश पेपर किस विचारधारा का पेपर है यह बताने की जरूरत नहीं है.
अध्यक्ष महोदय, इंदौर में एमडी ड्रग्स,(मेथिलीनडाइऑक्सी-एन-मेथैम्फेटामाइन, या एमडीएमए) जबलपुर में सालान 400 करोड़ का गांजा बिक रहा है, नाइट्रावेट टैबलेट, फोर्टविन (Fortwin) इंजेक्शन, एविल (Avil) इंजेक्शन और स्मैक, चरस , गांजा यह आम बात हो गई है और विंध्य की तरफ आप चले जायें, तो कोरेक्स. विंध्य की तरफ आप जायें. नौजवान को हम रोजगार तो दे नहीं पा रहे हैं. वह कर्जदार होता जा रहा है और हम यह उनको नशे में थोपते जा रहे हैं. यह स्वदेश पेपर का है और यह किस विचार धारा का है, यह बोलने की जरुरत नहीं है. आप कहें, तो पटल पर रख देंगे. सब जिलों के बिन्दुवार पूरे आंकड़े हैं. अध्यक्ष महोदय, इसके अलावा कमाई का सबसे बड़ा हिस्सा जो कर्ज में 16 प्रतिशत जायेगा, वह कर्जा चुकाने में जायेगा. कृषि और ग्रामीण क्षेत्र में हम असत्य कृषक कल्याण वर्ष मनाने की बात कर रहे हैं. बड़ी विचित्र दशा है कि घोषित तो किया है हमने कृषक कल्याण वर्ष. लेकिन हम उसमें कटौती कितनी कर रहे हैं. आपने पूरे आवंटन में पीएम फसल योजना में कटौती कर दी. जल जीवन मिशन में कटौती कर दी. 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित किया गया, लेकिन बजट में सुरक्षा कम कर दी गई. अब गुड़ की खेती कैसे होगी. यह चिंता का विषय है कि गुड़ की खेती कैसे होगी. अब खलघाट जैसे आंदोलन नहीं होंगे, तो क्या होंगे. आपने कृषि पर बजट कम कर दिया और आप बड़ी कृषि की बात करते हैं. माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी अभी बैठे थे. उन्होंने अपने बजट में सिर्फ 4.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है. 128 करोड़ का बजट स्वास्थ्य शिक्षा में और यह नाकाफी है. इसलिये नाकाफी है कि आप कालेज दर कालेज की घोषणा कर रहे हैं. हमारे स्वास्थ्य मंत्री जी ने कहा था कि 3800 डॉक्टर्स की स्वीकृति हो गई. चिकित्सकों के पद भरे जायेंगे. इतना ही पैरा मेडिकल स्टाफ का बता रहे थे कि 64 हजार की कमी थी, कितने भरेंगे, स्वीकृति हो गई. क्या इतने से बजट में जहां पर आप और मेडिकल कालेज खोलने की बात कर रहे हैं. कल मुख्यमंत्री जी भी बोल रहे थे. मुख्यमंत्री जी ने बोला, थोड़ा गलत लिखकर दे दिया होगा, जिसने भी दिया हो. वह बता रहे थे कि 40 मेडिकल कालेज खुल गये. 19 शासकीय, 14 प्रायवेट, पढ़ गये वह 40 खुल गये. हमको बड़ा अजीब लगा कि जो भी यदि भाषण लिख रहा है तो कम से कम गणना तो सही करके बता देते कि इतने हुए. गणना तो सही करके बताते. उसके अलावा कई बातें बड़ी अलग हैं लीनियर एक्सेलेरेटर मशीन कैंसर की. ब्रेकीथेरेपी मशीन कैंसर की. कैंसर अस्पतालों में लग तो गई हैं, लेकिन टेक्निशियन कहीं नहीं हैं. बंद पड़ी हैं. स्वास्थ्य मंत्री जी, स्वास्थ्य शिक्षा विभाग भी देखते हैं. बहुत सी ऐसी स्थितियां हैं, 2003 का हमारे कई विद्वान साथी कह रहे थे कि सिर्फ 3 मेडिकल कालेज रहे. हम जानना चाहते हैं कि उज्जैन का आरडी गार्डी मेडिकल कालेज कब बना और 25 साल से क्यों नहीं कोई शासकीय मेडिकल कालेज खुल गया उज्जैन में. बीएएमएस का आयुर्वेदिक का कालेज क्यों खोल रहे हैं. आरडी गार्डी मेडिकल कालेज कब बना. अरविन्दो कब बना. पीपुल्स कब बना. चिरायु कब बना. इन्डेक्स मेडिकल कालेज कब बना. यह बता दें. छिंदवाड़ा में इनका योगदान क्या था. खण्डवा में योगदान क्या था. चाहे कैसे आंकड़े और बहुत जिम्मेदार व्यक्ति आंकड़े दे रहे थे. हवा हवाई, सब जनता देख रही है.
''आसमां अपनी बुलंदी पर इतराता है,
भूल जाता है, जमीं से नजर आता है.''
अध्यक्ष महोदय, जनता देख रही है, जमीन से सब दिख रहा है, कुछ भी कहें. यहां तक कह दिया कि जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री, जिसका प्रदेश सरकार से कोई लेना देना नहीं है. वह फैक्ट्री केन्द्र सरकार की बनी हुई है. बजट के भाषण में लोक निर्माण विभाग के बजट में दिया, हालांकि वह बहस का विषय हो जायेगा. गडकरी जी ने उद्घाटन पर ही बोल दिया था कि जबलपुर का एलिवेटेड कॉरिडोर की सच्चाई क्या है, उसी उद्घाटन के मंच पर ही बोल दिया था. खैर, 1056 निर्माण के कार्यों कि लोक निर्माण विभाग की मंजूरी आयी, लेकिन गजब है कि जबलपुर के बाकि के किसी फ्लाई ओव्हर ब्रिज का जिक्र नहीं है. यदि हम बात करेंगे तो माननीय अध्यक्ष महोदय आपने आसंदी से व्यवस्था दी थी कि आप और मंत्री जी एक ही जिले के हो. आप लोग बैठकर सहमति बना लो. इसी आसंदी से माननीय अजय विश्नोई जी ने भी सहमति बताने का प्रयास किया. इसी आसंदी से दिया और उनको साथ में बैठाया भी. लेकिन आज तक जन-उपयोगी, जहां स्थिति यह है कि वास्तव में शहर के सब फ्लाई ओव्हर जरूरी होंगे शहर के, यातायात की व्यवस्था सब जगह चौपट है. लेकिन जो अति-आवश्यक है उसमें मैं, माननीय मंत्री जी से बार-बार आग्रह कर रहा हूं, निवेदन कर रहा हूं कि उसी जनता ने आपको चार बार सांसद बनाया और यह सबकी जरूरत है. हमारे यहां से शुरू होगा, उत्तर से शुरू होगा और पनागर तथा केंट की विधान सभा में खत्म होगा, लेकिन उपभोग सब करेंगे, सबके लिये समानता का रहेगा. आप विशाल हृदय रखकर हमारी इस बात को स्वीकार करें, यह आपसे निवेदन है. इसमें समाहित करें, यह हमारी आपसे मांग है. माननीय राकेश जी आप शहर के एकमात्र बड़े लीडर हैं, इसलिये आपसे यह आग्रह सविनय कर रहा हूं कि इसमें हमारे क्षेत्र की भी जनता की सुविधा को देखते हुए, वह चारों विधान सभा का है, वह कोई एक विधान सभा का नहीं है. इसलिये आपसे आग्रह है, बार-बार आग्रह है और जितनी बार आप नहीं करोगे- ''तेरा पीछा ना छोड़ूंगा सोणिये, भेज दे चाहे जेल में, प्यार के इस खेल में. '' (हंसी)
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह)- आग्रह तक तो ठीक था. लखन जी हमारे अच्छे मित्र हैं. पोलिटिकल पंच भी दिये हैं. दरअसल में वह दो विधान सभाओं के लिये है. चार विधान सभाओं के लिये नहीं है. कोई भी विकास का कार्य हमेशा महत्वपूर्ण ही होता है. प्राथमिकता का क्रम आगे-पीछे हो सकता है. लखन जी आप चूक गये. जब सरकार आपकी थी, आप सवा साल तक मंत्री थे, आप इसको कर सकते थे. लेकिन आपने कोशिश की होगी. मैं ऐसा नहीं कहता कि नहीं कि होगी.
अध्यक्ष महोदय- वह उन्होंने आपके लिये छोड़ा था.
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह)- लेकिन उन्होंने स्वीकृति के लिये अपनी ओर से प्रस्ताव तो बनाया, लेकिन उस प्रस्ताव को वह आगे नहीं बढ़ा पाये हैं, कारण मुझे नहीं मालूम है. परंतु सारे रिकार्ड यह कहते हैं कि वह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ा, वह प्रस्ताव तक ही सीमित रह गया और जब उन्होंने कल्पना की थी तो वह केवल एक ही विधान सभा का था. दो विधान सभा तक पहुंचे, यह विस्तार तो उसको बाद में दिया गया है और कभी भी उसके लिये मनाही नहीं हुई है. लेकिन यह भी तय नहीं हुआ है कि वह अभी बनेगा. क्योंकि स्वाभाविक है कि जब कोई बड़ा कार्य होता है तो बड़े बजट की आवश्यकता होती है. वह निर्धारण भी उसी क्रम में होता है. उसका अभी भी कुछ सर्वे बाकी है, वह अभी होना है लेकिन मैंने फिर कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि हम कोई सहमति दे रहे हैं आने वाले समय पर उस पर चर्चा और होगी, फिर उसके बारे में विस्तार से बात करेंगे.
श्री कैलाश विजयवर्गीय - राकेश जी, उन्होंने प्रस्ताव बनवाया, मतलब हल्दी लगा ली है. दूल्हे बन गये, अब उनको घोड़ी पर बैठा दीजिए, बस इतनी सी बात है.
श्री लखन घनघोरिया - अध्यक्ष महोदय, यह प्रस्ताव दिनांक 11.12.2019 का है. पहला इसका सर्वे हुआ, डीपीआर बनी और यहां से यह दिनांक 26.6.2022 में ईएनसी आफिस से आपके यहां आकर पड़ा है. वर्ष 2022 में स्वाभाविक है कि हमारी सरकार नहीं थी, जो भी कारण हों उसमें जाना नहीं चाहते. लेकिन यह बकायदा सारे पत्र हैं और सारी जानकारी है, इसलिए आपसे यह आग्रह है कि सबसे पहले पहल हुई थी और सच्चाई तो यह है चाहे तब हो, चाहे अब हो, पश्चिम बहुत भारी पड़ा है. चाहे तब हो, चाहे अब हो. अध्यक्ष महोदय, मेरा एक बार पुनः श्री राकेश जी से निवेदन है.
श्री राकेश सिंह - लखन जी हमारे बहुत अच्छे मित्र हैं, कॉलेज के साथी हैं. पश्चिम भारी तब पड़ा, अभी तो पश्चिम जबलपुर के लिए लाभदायक है.
श्री लखन घनघोरिया - अध्यक्ष महोदय, जो पुल बनाया है वह पूरे शहर का सब कुछ ट्रैफिक निकलकर गोहलपुर पुलिया के यहां पर जब उतरता है, वह पुलिया को पुल नहीं बनाया गया और उसमें 3 घंटे का जाम जो होता है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष जी, दोनों को बोल दीजिए, जबलपुर में बैठकर बात कर लेंगे.
श्री लखन घनघोरिया - अध्यक्ष महोदय, उस पुलिया को बढ़वा दें.
अध्यक्ष महोदय - लखन जी, अब समय हो रहा है.
श्री लखन घनघोरिया - अध्यक्ष महोदय, स्कूल शिक्षा में सुधार के लिए 200 करोड़ रुपये, 2 लाख अतिथि शिक्षकों के लिए 333 करोड़ रुपये मानदेय जो नाकाफी है, इसीलिए कि आप 1 परसेंट रोजगार के लिए दे रहे हैं और संस्कृति पर 5 परसेंट दे रहे हैं. संस्कृति पर यदि 5 परसेंट दे रहे हैं तो हमारे माननीय श्री कैलाश जी से यह आग्रह करना चाहता हूं कि महारानी अहिल्याबाई हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं और जो मणिकर्णिका घाट में हुआ, विस्तार से उस दिन मैंने बोल दिया था, लेकिन (फोटो दिखाते हुए) यह है उसकी स्थिति, मणिकर्णिका घाट में हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बचाए रखने के लिए तो कुछ करें. यह हमारे लिये बड़े गौरव की बात थी कि महारानी ने मणिकर्णिका घाट बनाया. जहां भगवान शिव, जहां भगवान विष्णु और जहां मातेश्वरी सती के कर्ण गिरे हों, और जहां से सीधे मोक्ष मिलता हो, जहां कभी श्मशान खाली न रहता हो, 300 से 400, वह घाट को जो हमारे मध्यप्रदेश की धरोहर से जुड़ा है, इसमें कुछ तो करें. यह मेरा आपसे आग्रह है.
अध्यक्ष महोदय, यह श्री कैलाश जी से ही संबंधित है. 21 हजार करोड़ रुपया शहरी विकास में रखा है. इसमें से 40 परसेंट तो सिंहस्थ में चला गया. 13 हजार करोड़ रुपये बचा. यह भागीरथपुरा जैसी घटनाएं नहीं होंगी तो क्या होगा? हमारे यहां सारी पाईप लाईनें नालों के अंदर गई हैं, जितने यहां पर सदस्य बैठे हैं, सबके यहां पेयजल के लिए जो भी सप्लाई लाईन है, वह नाले के अंदर से गई है. सप्लाई लाईन क्या, राइजनिंग लाईन तक नाले के अंदर से गई हैं तो यह हमारा श्री कैलाश भैया जी से आग्रह है कि हम खूब बढ़िया सारे अवार्ड लें, लेकिन सच्चाई भी देखें. दूसरा, ऊर्जा में 2-5 मिनट कहना चाहता हूं. हम बिजली के दाम बढ़ा रहे हैं. बिजली के दाम बढ़ते हैं, लेकिन सब्सिडी हम कम करते जा रहे हैं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, स्थिति क्या बनती है. स्मार्ट मीटर एक स्मार्ट तरीका हो गया है. टीसी कनेक्शन यानि टेम्परेरी कनेक्शन. जिसका नियम है कि सिर्फ 6 महीने से ज्यादा टेम्परेरी कनेक्शन नहीं होना चाहिए लेकिन टीसी कनेक्शन 20-20 साल से चल रहे हैं. उसमें 5-10 गुना ज्यादा बिजली का बिल आता है. आप न तो आर्मर्ड केबल लगा रहे हैं और न ट्रांसफॉर्मर दे रहे हैं और न ही खंबे लगा रहे हैं. आप उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए कुछ तो करें. आप कुछ नहीं कर रहे हैं सिर्फ बिजली कटौती हो रही है. लेकिन बिजली बिल भरपूर वसूला जायेगा. हम अपनी सरप्लस बिजली को दूसरे प्रदेशों को दे रहे हैं लेकिन आप अपने यहां सब्सिडी में कटौती कर रहे हैं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, "जी राम जी" (मनरेगा) आर्टिकल 21 जो रोजगार के अधिकार की गारंटी था. आर्टिकल मतलब कानून बन गया था. अब आपने उसको "जी राम जी" करके योजना में तब्दील कर दिया. वह भी आपकी मंशा के ऊपर है. इसमें प्रदेश की भागीदारी पहले 10 परसेंट रहती थी और 90 परसेंट केन्द्र सरकार देती थी लेकिन अब 40 परसेंट स्टेट गवर्नमेंट देगी. जब स्टेट गवर्नमेंट 10 परसेंट नहीं दे पा रही थी, तो 40 परसेंट कहां से देगी. आपके पास यदि इतना बजट है तो कम से कम यह स्थिति तो रखें. हमें नहीं लगता कि यह स्थिति आगे बढ़ पाएगी. मैं यह कहना चाहता हॅूं कि मजूदरों को केवल अपनी आबादी के मुताबिक औसतन 49 दिन का काम मिला है, 100 दिन का नहीं. वर्ष 2022-24 के बीच 44 .64 लाख मजदूरों के नाम मजदूरों की सूची से हटाए गए.
अध्यक्ष महोदय, अब यह निवेश का भ्रम है. इसके लिए वादे किए गए कि 33 लाख करोड़ रूपए का निवेश आएगा. लेकिन इसमें बजट कितना रखा गया. 448 करोड़ रूपए का बजट रखा गया. बजट में कटौती की गई. 6 इनवेस्टर्स समिट हो चुकी हैं. लेकिन धरातल पर क्या आया, कितना परसेंट आया, कितने एमओयू साइन हुए. मुश्किल से 10 से 15 परसेंट है, जो इसकी हकीकत है. लेकिन सरकारी आंकडे़ यह कहते हैं कि 20 परसेंट एमओयू साइन हुए. इसमें जब आप बजट ही कम कर देंगे, आवंटन कम कर देंगे, तो अधोसंरचना के लिए आपके पास रहेगा क्या ? कौन आएगा. निवेश कैसे आएगा, जब आप उनको सुविधाएं नहीं देंगे.
माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बजट आम आदमी का बजट तो नहीं है. यह खास बजट है. अब हम नाम नहीं ले सकते. क्योंकि कल विवाद हो गया था. आज फिर हम लोग विवाद नहीं करना चाहते. चेयरमेन साहब को उपकृत करने के लिए....(हंसी)...
अध्यक्ष महोदय -- आप पूरा कीजिए...(हंसी)..
श्री लखन घनघोरिया -- अध्यक्ष महोदय, हम पूरा बोल दें. मतलब हम नाम बोल दें...(हंसी)..
अध्यक्ष महोदय -- आप पूरा कीजिए. कृपया, आप समाप्त करें.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- (XXX) चेयरमेन की बात कर रहे थे.
श्री लखन घनघोरिया -- अध्यक्ष महोदय, इसके अलावा आम नागरिक बहुत सीधा-सा होता है. उसका व्यक्तिगत कर्ज 60 हजार हो जाएगा. बहुत खराब सड़कें हैं. महंगा इलाज है. पानी दूषित है, दवा, हवा सब हवा-हवाई है. माननीय मुख्यमंत्री जी ने कल जितनी बातें कहीं, हमें लगा कि हम लोग जमीन के ऊपर नहीं बैठते. मैं कहना चाहता हॅूं कि -
"तुम्हारा काम है, वादा खिलाफी खेलते रहना,
तुम्हारा काम है, वादा खिलाफी खेलते रहना,
हमारा काम है, वादों की बारिश झेलते रहना. "
आपने मुझे बोलने का अवसर दिया. बहुत-बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय -- वाह, क्या बात है लखन जी.
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)—
दुनिया का जर्रा जर्रा वैसा ही दिखता जैसा होता
पर सिर्फ एक इंसान है जो होता कुछ और है,
दिखता कुछ और है. (हंसी)
श्री लखन घनघोरिया—
हमने देखे वो लोग जो मर्द बने रहते थे.
क्या हो गये दरबार की पहरेदारी के लिये.
(हंसी)
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह)—अध्यक्ष महोदय, इनको भी बोलिये कहीं और बैठ लें. (हंसी)
श्री कैलाश विजयवर्गीय—
जख्म, नमक, मरहम और दर्द
मित्र जख्म मैं ले रहा हूं, दर्द मैं ले रहा हूं.
सब तुझे दिये जो तुझे करना है कर.
(हंसी)
श्री लखन घनघोरिया—
आप पूछकर देखना
जो हंस रहा है,
वह जख्मों से चूर निकलेगा.
(हंसी)
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)—अध्यक्ष महोदय, जो शेरो शायरी चल रही है, ऐसा लगता है कि वित्तमंत्री जी के बजट के आंकड़े किसी को समझ में ही नहीं आ रहे हैं. (हंसी)
अध्यक्ष महोदय—एक्च्युअल में आशु कवि बनने की प्रक्रिया में सब (हंसी)
अध्यक्ष महोदय—माननीय वित्तमंत्री जी.
श्री ओमकार सिंह मरकाम—अध्यक्ष महोदय, हमारे यहां पर जितने भी पीडब्ल्यूडी के कर्मचारी हैं व अन्य कर्मचारी ड्यूटी में लगे रहते हैं साढ़े सात बज गये हैं. इनको ओव्हर टाईम नहीं देते और परेशानी रहती है. मेरा वित्तमंत्री जी से अनुरोध है कि आप अपने भाषण में उनके ओव्हर टाईम के लिये बोल दें. वित्तमंत्री जी कुछ तो कंजूसी खत्म करा दो आप उनके खाने के लिये बजट में थोड़ा सा रखवा दिया करें. अपार कंजूस हैं माननीय वित्तमंत्री जी.
अध्यक्ष महोदय—आप बजट पर बोल चुके हैं. इनका रिकार्ड में नहीं आ रहा है. इनका माईक क्यों नहीं बंद हुआ. (हंसी)
उप मुख्यमंत्री वित्त (श्री जगदीश देवड़ा)—अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2026-27—
भैरोसिंह शेखावत—आपका माईक खराब है. आप माननीय कैलाश जी के माईक पर आ जायें.
श्री कैलाश विजयवर्गीय—अध्यक्ष महोदय, आज मौसम बड़ा बईमान है, इसलिये इनका गला खराब है. (हंसी)
श्री जगदीश देवड़ा—अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार और सरकार के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्व में वर्ष 2026-27 का बजट विधान सभा में प्रस्तुत हुआ. उस बजट पर हमारे सभी माननीय सदस्य पूर्व वित्तमंत्री हमारे वरिष्ठ सदस्य माननीय जयंत मलैया जी, माननीय डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह, माननीय ओमकार सिंह मरकाम जी, माननीय गौरव सिंह पारधि जी, माननीय नीरज सिंह ठाकुर, माननीय अभय मिश्रा जी, माननीया श्रीमती रीति पाठक, माननीय फूलसिंह बरैया जी, माननीय ओमप्रकाश सखलेचा जी, माननीय नारायण सिंह पट्टा जी, माननीय लखन सिंह घनघोरिया जी, मैं आभारी हूं कि आपने वर्ष 2026-27 के इस बजट पर बहुत ही महत्वपूर्ण सुझाव और कमियों को अवगत करवाया. और बजट के विषय में बहुत सारी बातें आपने यहां पर रखी. अध्यक्ष महोदय, बजट के बारे में यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने ज्ञान के बारे में बताया. गरीब, युवा, किसान, नारी और हमारे मुख्यमंत्री जी ने उसको आगे बढ़ाते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री के बारे में भी बजट पर फोकस किया. विपक्षी साथियों का धर्म है कि जो बजट आया है, उसके बारे में कमी बताए, आलोचना करें, लेकिन पीछे इतिहास को भी ध्यान में रखकर के बात करें. गांव, गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं, युवा सभी वर्गों का समावेश, इस बजट में हुआ है. मैं सभी माननीय सदस्यों ने निवेदन करुंगा कि ‘मेरा बजट’ करके वर्ष 2026-27 ये वित्त विभाग की ओर से पुस्तक निकाली है, सभी माननीय सदस्यों को उपलब्ध करवाईए. मैं निवेदन करुंगा कि एक बार इसको जरूर देखिए. आई है, आपके पास (नेता प्रतिपक्ष जी को किताब दिखाकर पूछा) नहीं तो उपलब्ध करवा दूंगा. है आपके सभी के खानों में गई है, सभी पूरी विधान सभा के सदन के सभी सदस्यों के पास पहुंची है. पारदर्शिता से पूरे सदन में जनता के सामने ‘’तेरा तुझको अर्पण’’ इस भावना को समर्पित करते हुए बजट प्रस्तुत किया है.
जनता का पैसा, जनता के लिए और जनता का बजट, जनता के लिए, जनता को समर्पित, सारी बातें इसमें विस्तार से हमने बताई है. अध्यक्ष महोदय, यह बजट अन्नदाता, नारी शक्ति, इंफ्रास्ट्रक्चर, इंडस्ट्री पर आधारित है. समृद्ध मध्यप्रदेश, संपन्न मध्यप्रदेश, सुखद मध्यप्रदेश, सांस्कृतिक मध्यप्रदेश की दिशा में बनाया गया मजबूत कदम है. अध्यक्ष महोदय, मैं अपनी बात रखूंगा, उसके पहले हमारे वरिष्ठ नेता राजेन्द्र सिंह जी ने भी कुछ कहा था राजस्व व्यय होने के तथ्य के संबंध में. मैं यह बताना चाहूंगा कि हमारी सरकारें निरंतर राजस्व आधिक्य में रही है. वर्ष 2026-27 के अंत में भी राजस्व आधिक्य रहना अनुमानित है. बजट का 20 से 22 प्रतिशत, पूंजीगत मद में प्रावधान, आर्थिक संकटों में बहुत अच्छा माना जाता है. प्रति व्यक्ति आय में वर्ष 2024-25 से, वर्ष 2025-26 में 11 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है. इस बार बजट साहित्य में बहुआयामी गरीबी सूचकांक की भी जानकारी सभी माननीय सदस्यों के खानों में रखी है. आप इसको देखना चाहे तो मेरी प्रार्थना है कि आप देखें. अध्यक्ष जी, ओमकार सिंह जी ने भी कि वी-बी जी-राम-जी योजना में 100 के स्थान पर 125 दिन का रोजगार मिलेगा. इस योजना के लिये 10 हजार 8 सौ करोड़ रूपये का प्रावधान रखा है. माननीय फूलसिंह बरैया जी ने पिछड़ा वर्ग के बारे में चर्चा रखी है, मैं उनकी उस बात से सहमत हूं कि उन्होंने उनके विधानसभा क्षेत्र की जो समस्या रखी है, वह मानवीय दृष्टि से वास्तव में महत्वपूर्ण है, उसको हम गंभीरता से लेंगे और मैं उस विषय में जरूर बात करूंगा, लेकिन क्या आपने पिछड़ा वर्ग विभाग की बजट की राशि को पढ़ा है? लेकिन पिछड़ा वर्ग की जो बाकी योजनाएं हैं, उसमें भी पिछड़ा वर्ग आता है, चाहे वह लाड़ली बहना योजना हो, लाड़ली लक्ष्मी योजना हो, किसान समृद्धि योजना हो, आयुष्मान कार्ड की बात हो, सामूहिक पेंशन की बात हो, तो इनका लाभ भी तो पिछड़ा वर्ग के हमारे सभी साथियों को मिल रहा है, कोई अलग से नहीं है, पिछड़ा वर्ग के लिये भी व्यवस्था की है, लेकिन इन योजनाओं का लाभ सभी वर्गों को मिल रहा है (मेजों की थपथपाहट) मैं कहना चाहूंगा कि किसान सम्मान निधि, आयुष्मान कार्ड, लाड़ली बहना कोई जाति के हिसाब से नहीं है, इनका सभी वर्गों को लाभ मिल रहा है, चाहे वह किसी भी वर्ग के हों, चाहे वह हिंदू, मुस्लमान, सिक्ख, ईसाई, किसी भी वर्ग के हों, उनको लाभ मिल रहा है और सरकार ने कोई भेदभाव नहीं किया है, सभी वर्गों को इनका लाभ पूरा मिल रहा है. (मेजों की थपथपाहट) अध्यक्ष महोदय, श्री नारायण सिंह पट्टा जी ने रोजगार की बात की, बजट भाषण में उल्लेख था, लगभग 15 हजार शिक्षक और लगभग 3 हजार 850 चिकित्सक, लगभग 25 हजार 500 पुलिसकर्मियों की नियुक्तियां प्रक्रियाधीन हैं, चल रही हैं, नियुक्तियां कर रहे हैं, जहां कमियां हैं, उनको पूरा करने का काम सरकार कर रही है, ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों के लिये आपने कहा तो 21 हजार 630 करोड़ रूपये की मजरा टोला सड़क योजना को हमारी सरकार ने स्वीकृति दी है,जहां पर कमी है, उसको पूरा करेंगे. (मेजों की थपथपाहट)
अध्यक्ष महोदय, अभी विकास की बात हुई, विकास तभी होगा, जब पूंजीगत व्यय की राशि हम अधिक रखेंगे और मैं यह कहना चाहूंगा और यह खुशी की बात है कि मध्यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार कभी भी रेवेन्यू माईनस में नहीं रही है, रेवेन्यू हमेशा सरप्लस में रही है और अभी भी मैं कह रहा हूं वर्ष 2026-27 में भी रेवेन्यू सरप्लस रहेगा (मेजों की थपथपाहट).
अध्यक्ष महोदय, मैं वापस पहले की बात नहीं करना चाहता हूं, लेकिन वर्ष 1993-94 से लेकर वर्ष 2002 से 03 की अवधि मैं पूरी नहीं पढ़ रहा हूं, लेकिन वर्ष 1993-94 में कितना बजट था? पूंजीगत व्यय कितना था और प्रतिशत कितना था ? मैं आपको केवल वर्ष 1993-94 से वर्ष 2002-03 का ही बता रहा हूं कि 17 हजार 495 का कुल बजट आपका था और 2 हजार 454 करोड़ केवल आपका पूंजीगत व्यय था, यह 14.2 प्रतिशत था और अभी वित्तीय वर्ष 2026-27 में कुल व्यय 20.63 प्रतिशत है, यह पूंजीगत व्यय है.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- अध्यक्ष महोदय, वित्तमंत्री जी हमेशा बीस, पच्चीस साल पीछे चले जाते हैं.
श्री जगदीश देवड़ा -- उमंग जी मैं यह नहीं कह रहा हूं.
श्री उमंग सिंघार -- माननीय वित्त मंत्री जी मैं भी आपके वर्तमान के आंकड़े बता रहा हूं, आप पच्चीस साल पुरानी बात कर रहे हो. आज प्रदेश जहां खड़ा है, आपकी रिपोर्ट में आया है. आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट वर्ष 2025-26 में आया है.1 लाख 69 हजार प्रति व्यक्ति आय होगी, इसका मतलब हर महीने अगर 1 लाख 69 हजार रूपये को भागित करोगे, तो आपकी चौदह से साढ़े चौदह हजार प्रति व्यक्ति आय हो गई है, क्या प्रदेश में चौदह हजार रूपये हर व्यक्ति कमा रहा है? वित्तमंत्री जी आप किसी आम व्यक्ति के पास जायें और पूछें कि 14 हजार रूपये महीना उसे मिल रहा है, यह आप मुझे बता दीजिये, यह आज की बात है, आप 20 साल 25 साल का, आप मुझे यह प्रमाण दे दीजिये कि हर व्यक्ति को 14-15 हजार रूपये मिल रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, कैसे आय हो रही है व्यक्ति इतना परेशान हो रहा है, उसकी रोजी रोटी कैसे चल रही है, संघर्ष कर रहा है, मजदूरों का पलायन हो रहा है, 14-15 हजार रूपये महीना बता रहे हैं.
उप मुख्यमंत्री (श्री राजेन्द्र शुक्ल)-- अभी तो माननीय राजेन्द्र सिंह जी ने खुद ही कहा कि मध्यप्रदेश में प्रति व्यक्ति आय 1 लाख 70 हजार...
श्री उमंग सिंघार-- आप बताओ न यह मिल रहा है. उपमुख्यमंत्री जी आप बता दीजिये कि 15 हजार रूपये प्रदेश के हर व्यक्ति को मिल रहा है. आप आपके रीवा में जाकर मालूम कर लीजिये, गली मोहल्ले में जाकर अगर वह बोल दे कि 15 हजार रूपया मिल रहे हैं.
श्री राजेन्द्र शुक्ल-- माननीय राजेन्द्र सिंह जी ने खुद ही कहा. ..(व्यवधान)..
अध्यक्ष महोदय-- वित्तमंत्री जी उत्तर दे रहे हैं, मुझे लगता है उन्होंने सभी सदस्यों को सुना है और सब लोगों को पूरा-पूरा अवसर मिला है. माननीय राजेन्द्र कुमार सिंह जी आपने सबसे ज्यादा बोला है.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- माननीय अध्यक्ष जी, वित्तमंत्री जी ने मुझे इंगित किया है इसलिये मैं खड़ा हो गया हूं. मैं यह जानना चाहता था आपके पास सारे आंकड़े हैं. वर्ष 1978-79 में क्या पूंजीगत व्यय था, बजट का आकार क्या था, यह भी बता दीजिये, माननीय पटवा जी मुख्यमंत्री थे. दूसरा आपने कहा प्रति व्यक्ति आय 11 प्रतिशत बढ़ी है. इसमें कोई संदेह नहीं, लेकिन अभी भी हम 12 राज्यों में 10वें नंबर पर क्यों हैं. ये दो चीजें में जानना चाहता हूं.
अध्यक्ष महोदय-- कैलाश जी आप कुछ कहना चाहते हैं.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, मैं यही कह रहा था कि मध्यप्रदेश पहले कहां था और आज कहां हैं इसके ऊपर हमें विचार करना चाहिये. पहले बीमारू राज्य था, अब बीमारू राज्य नहीं है, अब विकासशील प्रदेश है और आने वाले समय में अगर इसी प्रकार प्रगति होती रही तो अध्यक्ष महोदय यह प्रदेश विकसित प्रदेश होगा.
श्री जगदीश देवड़ा-- अध्यक्ष महोदय, अगर लंबे समय तक मैं यह नहीं कह रहा हूं, कोई आलोचना की दृष्टि से नहीं कह रहा हूं, लेकिन आप अगर विकास की बात कर रहे हो तो आपने पूंजीगत कार्यों के लिये पूंजीगत व्यय के लिये तो कभी नहीं रखा और आप कर्जे की बात कर रहे हो, बार-बार इस बात को हमेशा सदन में आप रखते हो. बजट के आकार से कर्जे की तुलना मुझे नहीं लगता यह कौन सा गणित है, मुझे तो यही समझ में नहीं आता. आप कह रहे हो कि कर्जा लेकर के घी पी रहे हो. मध्यप्रदेश की जनता से पूछ लो कि कर्जा लेकर के ये सारे मध्यप्रदेश में सड़कों का जाल जो दिख रहा है, यह सारे लोग बोल रहे थे, आपके ही सदस्यों से पूछ लो जो दमोह से आते थे आदरणीय मलैया जी ने कहा था उस समय सभी लोग आ रहे हैं, रीवा से आ रहे हैं, सत्य को स्वीकार करो, अरे भाई सड़कें आपके टाइम पर कहां थीं, आप कर्जे की बात कर रहे हो, कर्जा समय पर चुका रहे हैं और रेवेन्यू सरप्लस है और जो सरप्लस है उसी से हम ब्याज चुका रहे हैं और जो उससे बचता है उसको भी पूंजीगत कार्यों में खर्च कर रहे हैं. राजेन्द्र कुमार जी आप तो मुझसे ज्यादा...
श्री उमंग सिंघार-- वित्तमंत्री मंत्री जी ब्याज चुका रहे हैं यह बोल रहे हैं, लेकिन किसानों का प्याज नहीं खरीद पा रहे.
श्री जगदीश देवड़ा-- यह उस समय का आंकड़ा पूरे कार्यकाल का, उस समय वेतन भत्तों में कर्जा लेकर के आपकी सरकार वेतन, भत्ते, पेंशन देती थी, सड़कें नहीं बनाती थी, मेरे पास रिकार्ड है, आपको मैं दे दूंगा. उस समय आपने पूंजीगत कार्यों में खर्च नहीं किया. कर्जा लेकर के वेतन भत्तों में देने का काम किया है. कहां से विकास होता, आंकड़े कोई छिपा थोड़ी रहे हैं. यह बुक है, इस बुक में भी लिखा है, यह छापे हैं अभी विभाग ने. मैं तो यह निवेदन करूंगा कि इसका एक-एक अक्षर आप पढ़ लें, मैं प्रमाणिकता से कह रहा हूं, कोई छिपा हुआ नहीं है. पहले पन्ने से आखिरी पन्ने तक आप देखेंगे उस समय का भी बताया है और आगे का भी बताया है. अध्यक्ष महोदय, अब पूंजीगत कार्यों में मैं बांकी राज्यों का भी 2-4 बता देता हूं कि अन्य राज्यों से पूंजीगत व्यय जीएसडीपी के प्रतिशत के रूप में तुलना कर्नाटक 2.20 प्रतिशत,तेलंगाना 2.00 प्रतिशत,पश्चिम बंगाल 1.90 प्रतिशत,हिमाचल प्रदेश 1.50 प्रतिशत,केरल 1.20 प्रतिशत,पंजाब 1.20 प्रतिशत,मध्यप्रदेश 4.90 प्रतिशत यह आंकड़ा बता रहा हूं. काम किये हैं. सरकार की इच्छा शक्ति,नीति,नियत,दोनों काम करने की है और जबसे बनी मैं हमेशा सदन में कहता हूं सबके साथ 90 से मैं भी विधायक बनकर आया कब काम हुए हमने तो नहीं देखा विकास जब जब भाजपा की सरकारें बनीं तब तब काम हुए.सिंचाई का आंकड़ा साढ़े सात लाख हेक्टेयर और आज कहां पर है. ईमानदारी से अपने मन से बोलिये अपने दिल पर हाथ रखकर कि सिंचाई योजनाएं इस मध्यप्रदेश में कितनी बनीं. 60 लाख हेक्टेयर से आगे का लक्ष्य रखा हमने 100 लाख हेक्टेयर यह आपको अन्य राज्यों की तुलना में बकाये देनदारी जी.एस.टी. का, सबसे कम देनदारी मध्यप्रदेश की है बाकी सब प्रदेशों की देनदारी 35 प्रतिशत,कहीं पर 38 प्रतिशत,42 प्रतिशत,46 प्रतिशत है. यहां पर मध्यप्रदेश की 31.30 प्रतिशत है. यह देनदारी है. राजस्व प्राप्तियों से ब्याज भुगतान का प्रतिशत अन्य राज्यों की तुलना में अब बाकी राज्यों का भी हमने तुलनात्मक दृष्टि से देखा है तो सबसे कम 9.80 प्रतिशत है. बाकी कर्नाटक,पंजाब,तेलंगाना,हिमाचल,केरल उन सबसे कम प्रतिशत है. अध्यक्ष महोदय, अब कर्ज की बात करेंगे फिर आप कहेंगे कि उस टाईम की बात कर रहा हूं.
अध्यक्ष महोदय - नहीं पुरानी बात मत करो तकलीफ होती है.
डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह - माननीय वित्त मंत्री महोदय, आपकी बात पर हम मोहर लगाये देते हैं.
अध्यक्ष महोदय - राजेन्द्र कुमार सिंह जी पुराने आदमी हैं.
डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह - मैं उनका समर्थन कर रहा हूं. यूनाईटेड स्टेट्स आफ अमेरिका ट्रंप अंकल वाला उनका जो कर्जा है उनकी जीडीपी से ज्यादा है आपका तो 55 परसेंट है.
श्री जगदीश देवड़ा - अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश की सरकार ने जो बजट के प्रावधान किये हैं. कोई विभाग,कोई वर्ग हमने वंचित नहीं रखा. यह समय-समय पर जैसी आवश्यक्ताएं होती हैं उस प्रकार से हम बजट आवंटित करते हैं प्रावधान करते हैं. पहले जीरो बजट पेश किया था. पहले जब बजट बनते थे तो विभाग अपनी डिमांड रखता था कि हमको इतनी राशि चाहिये. यह मध्यप्रदेश की सरकार ने किया. यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्व में जीरो बजट हमने पूरा आकलन किया सारी जानकारियां लीं कि जो बजट हमने दिया था वह बजट योजनाओं में खर्च हुआ कि नहीं इसके बाद उनको बजट का प्रावधान उन्होंने जो डिमांड की उसके अनुसार हमने बजट रखा. अब रोलिंग बजट आने वाले 2025-26,2027-28,2028-29 को अनुमानित करके हमने आगे का विचार करके हमने यह बजट बनाया और बजट बनाया आम जनता से सुझाव आमंत्रित किये. समाचारपत्रों में दिया. पब्लिश किया. समाचारपत्रों की कटिंगें आपको उमंग जी मैं दे दूंगा. समाचारपत्रों में आम जनता से और बड़ी संख्या में सुझाव आये. हमने विषय विशेषज्ञों को बुलाया. विषय विशेषज्ञों से बजट पूर्व संवाद किया और प्रबुद्ध जनों को हमने बुलाया. दिन भर हमने संवाद किया. बड़ी संख्या में लोग आये. सुझाव दिये. इस बजट में आम जनता की भावना का सम्मान हमने पूरा किया. सभी वर्गों का समावेश इसमें किया है. किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया. आप एक भी ऐसी योजना बता दीजिये. हमने पर्यावरण में 78 प्रतिशत, संस्कृति में 74 प्रतिशत, पर्यटन में 47 प्रतिशत, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में 47 प्रतिशत, धार्मिक न्यास में 44 प्रतिशत, राजस्व में 43 प्रतिशत, उद्यानिकी में 43 प्रतिशत, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति में 40 प्रतिशत, परिवहन में 31 प्रतिशत, ग्रामीण विकास में 37 प्रतिशत (मेजों की थपथपाहट) श्रम विभाग में 28 प्रतिशत, तकनीकी शिक्षा में 27 प्रतिशत, महिला एवं बाल विकास में 26 प्रतिशत, जेल में 21 प्रतिशत, मछुआ कल्याण में 21 प्रतिशत, वन विभाग में 20 प्रतिशत, उच्च शिक्षा में 20 प्रतिशत, कृषि में 4 प्रतिशत, स्वास्थ्य में 15 प्रतिशत, शिक्षा में 13 प्रतिशत, सामाजिक न्याय में 3 प्रतिशत, नगरीय विकास में 22 प्रतिशत एवं संस्कृति में 63 प्रतिशत की वृद्धि की है. (मेजों की थपथपाहट)
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) - माननीय अध्यक्ष महोदय, आप यह वर्ष कृषि कल्याण का मना रहे हैं. आप स्वयं ही कह रहे हैं कि हमने इसमें 4 प्रतिशत की वृद्धि की है. आप एससी, एसटी और ओबीसी को तो भूल ही गए. आप यह भी बता दीजिये.
श्री जगदीश देवड़ा - माननीय अध्यक्ष महोदय, कृषि कल्याण में टोटल बजट में हमने पूरी वृद्धि की है और हमने पिछला वर्ष उद्योग वर्ष के रूप में रखा था और यहां पर निवेश आए. उद्योगपति आए, मध्यप्रदेश में उद्योग लगे, रोजगार मिला. इस वर्ष सरकार ने किसान कल्याण वर्ष घोषित किया. निश्चित रूप से किसानों के बारे में गंभीरता से बजट में प्रावधान किया.
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - माननीय अध्यक्ष महोदय, वाकई में बजट बहुत शानदार है. वित्त मंत्री जी ने जब बोलना चालू किया था, तब उनका गला बैठा हुआ था, अब एकदम पूरा खुल गया है. (हंसी)
श्री जगदीश देवड़ा - माननीय अध्यक्ष महोदय, जो लाड़ली बहना योजना है, उसमें 23 हजार 883 करोड़ रुपये, अटल कृषि ज्योति योजना में 13 हजार 914 करोड़ रुपये. मैं इसलिए फिर से कह रहा हूँ, चूंकि मैं बजट भाषण में यह सब बोल चुका हूँ और हमारे माननीय सदस्यों ने भी इस बात को बहुत विस्तार से रखा है.
अध्यक्ष महोदय - आप तो बताओ. वह तो इशारा समझते हैं, सब लोग बहुत विद्वान है, ऐसा थोडे़ ही है. सभी लोग काफी विद्वान लोग हैं. आप तो संकेत करते चलो, यह समझते चलेंगे. (हंसी)
श्री जगदीश देवड़ा - अध्यक्ष महोदय, मैं सदन के अन्दर यह जरूर कहना चाहूँगा कि मध्यप्रदेश की सरकार यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व और यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन में, जो उन्होंने वर्ष 2047 का विकसित भारत का संकल्प लिया है. उस विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में मध्यप्रदेश सरकार की भी अहम् भूमिका है और इस बजट में उसका पूरा समावेश किया है. निश्चित रूप से, बजट सर्वस्पर्शी, सभी वर्गों को छूता हुआ और विकास की ओर बढ़ता हुआ एक सशक्त कदम है. मैं सदन से यह अनुरोध करूँगा कि मेरे द्वारा सदन में प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित करें. (मेजों की थपथपाहट)
07.10 बजे
अशासकीय संकल्प
अध्यक्ष महोदय- अब अशासकीय संकल्प लिये जायेंगे. कुल 3 अशासकीय संकल्प हैं, डॉ. सीतासरन शर्मा, डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह और श्रीमती अर्चना चिटनीस. तीनों संकल्पों का प्रकार भी एक है और जवाब देने का विभाग भी एक है, मुझे लगता है कि पहले तीनों माननीय सदस्य संकल्प प्रस्तुत करें और उसके पक्ष में अपनी बात भी कह दें और उसके बाद मंत्री जी एक साथ उसका जवाब दे देंगे. मंत्री जी कहां हैं ?
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)- अभी यहीं थे, बहुत समय से बैठे थे मैं लिख रहा हूं.
07.11 बजे
{सभापति महोदय (श्री लखन घनघोरिया) पीठासीन हुए.}
(1) इटारसी-भोपाल के मध्य मेमो ट्रेन प्रारंभ किया जाना
डॉ. सीतासरन शर्मा (होशंगाबाद)- सभापति महोदय, मैं, संकल्प प्रस्तुत करता हूं कि-
“यह सदन केन्द्र शासन से अनुरोध करता है कि "इटारसी-भोपाल के मध्य मेमो ट्रेन प्रारंभ की जाये.”.
सभापति महोदय- संकल्प प्रस्तुत हुआ.
कोई माननीय सदस्य इस पर कुछ कहना चाहें, तो कह सकते हैं.
डॉ. सीतासरन शर्मा- सभापति महोदय, प्रतिदिन 5 हजार से अधिक लोग और छात्र इटारसी से भोपाल तक यात्रा करते हैं और ट्रेन में लगातार स्लीपर बोगी की संख्या बढ़ रही है और जनरल बोगी की संख्या कम हो रही है. इन यात्रियों से स्लीपर बोगी के यात्रियों को भी परेशानी होती है और लोकल अप-डाउन करने वालों को भी दिक्कत होती है, इसलिए मेरा अनुरोध है कि इस संकल्प को सर्वसम्मति से पारित कर केंद्र शासन को भिजवाने की कृपा करें.
श्री कैलाश विजयवर्गीय- सभापति महोदय, वैसे मेट्रो की अगली योजना होशंगाबाद और इटारसी तक जाने की है, फिर भी माननीय सदस्य का आग्रह है तो इस प्रस्ताव को हम केंद्र सरकार को भिजवा देंगे, यदि इस पर सर्वानुमति हो तो बहुत अच्छा होगा.
सभापति महोदय- प्रश्न यह है कि-
“यह सदन केन्द्र शासन से अनुरोध करता है कि "इटारसी-भोपाल के मध्य मेमो ट्रेन प्रारंभ की जाये.”.
श्री उमंग सिंघार- जी माननीय, सर्वसम्मति से किया जाये.
संकल्प सर्वानुमति से स्वीकृत हुआ.
डॉ. सीतासरन शर्मा- धन्यवाद.
(2) रीवा से अमरपाटन होते हुये मैहर एवं कटनी से रामनगर, जिला मैहर को जोड़ते हुए सीधी, सिंगरौली तक नई रेल्वे लाईन का निर्माण किया जाना
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह (अमरपाटन)- सभापति महोदय, मैं, संकल्प प्रस्तुत करता हूं कि-
“यह सदन केन्द्र शासन से अनुरोध करता है कि "रीवा से अमरपाटन होते हुये मैहर एवं कटनी से रामनगर, जिला मैहर को जोड़ते हुए सीधी, सिंगरौली तक नई रेल्वे लाईन का निर्माण किया जाये.”.
सभापति महोदय- संकल्प प्रस्तुत हुआ.
कोई माननीय सदस्य इस पर कुछ कहना चाहें तो कह सकते हैं.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह- सभापति महोदय, विकास का और रेल्वे का सीधा संबंध है, जिन इलाकों में रेल की बहुतायत होती है, वहां विकास तेजी से होता है. हमारा दुर्भाग्य कहें कि विंध्य और बुंदेलखण्ड मे रेल लाइनों की कमी है, रीवा से कुछ ट्रेनें चलती है लेकिन वे कम हैं, मध्यप्रदेश का भी यही हाल है. यह तो संयोग है कि मध्यप्रदेश देश के बीच में है इसलिए उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम जाने वाली ट्रेनें हमारे यहां से गुजरती हैं और ट्रेन सर्विसेज़ कम होने के कारण ही मध्यप्रदेश पिछड़ा है, माननीय वित्त मंत्री जी भी ध्यान देंगे. हमारे अंचल में जिसकी मैं बात कर रहा हूं, जहां से मैं प्रतिनिधित्व करता हूं, वहां काफी सीमेंट उद्योग, चूना पत्थर खदान, बॉक्साइड की खदानें हैं और सतना जो पुराना जिला है, अब उससे मैहर अलग हो गया. मैं पुराने जिले की बात कर रहा हूं, वहां 8 विकासखण्ड हैं, उनमें से 6 में तो कहीं न कहीं से ट्रेन लाईन आती-जाती है लेकिन मेरी विधान सभा अमरपाटन, रामनगर ब्लॉक रेल्वे लाईन विहीन हैं. मैं यह प्रस्ताव करता हूं और सदन से अनुरोध करूंगा कि इसे सर्वसम्मति से पास कर भारत सरकार को भेजा जाए.
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह)-- माननीय सभापति महोदय, माननीय सदस्य ने जो प्रस्ताव रखा है राज्य शासन को उस पर कोई आपत्ति नहीं है. उसमें एक मामूली सा संशोधन था जिसके बारे में मैंने कहा था. वैसे आपत्ति नहीं है, लेकिन जो उसका रूट बनाकर दिया है वह रूट व्यावहारिक हो तो उनके क्षेत्र के लिए ज्यादा उपयुक्त होगा. हमारा आग्रह यह है कि सिद्धांत: सरकार को कोई आपत्ति नहीं है परंतु अगर वह संशोधित प्रारूप प्रस्तुत कर देंगे तो उनके लिए और उनकी मांग के लिए, दोनों के लिए कहीं ज्यादा व्यावहारिक होगा. जो रूट बनाकर दिया गया है अभी वह केवल एक ही मार्ग के रूप में दिया गया है, लेकिन जो मेरी चर्चा हुई थी उसमें उन्होंने मुझे दो मार्ग बताए थे. मैंने उनसे कहा है कि अगर संशोधित प्रारूप में प्रस्तुत कर देंगे तो उनके लिए कहीं ज्यादा बेहतर होगा. सरकार को उसमें आपत्ति नहीं है.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- माननीय सभापति महोदय, मुझे तो आम खाने से मतलब है. गुठली क्यूं गिनूं? लेकिन माननीय मंत्री जी कह रहे हैं और अनुभवी हैं, दिल्ली से ही आए हैं तो वह ज्यादा जानते हैं कि किस तरह से सब काम होते हैं.
माननीय मंत्री जी इसमें दोनों अलग-अलग हैं. आप कृपा करके उसको ठीक से पढ़ लें. लगता है आपने इसके बीच में एवं नहीं पढ़ा है. आप इसको पढ़ लें. इसमें लिखा हुआ है कि यह सदन केन्द्र शासन से अनुरोध करता है कि रीवा से अमरपाटन होते हुए मैहर एवं दूसरी लाईन कटनी से रामनगर, जिला मैहर को जोड़ते हुए जिला सीधी, सिंगरौली तक जाए. यह अलग लाईन है.
श्री राकेश सिंह-- माननीय सभापति महोदय, आपने उसका संशोधित स्वरूप पढ़ा है तो मैंने पहले ही कहा है कि हमें आपत्ति नहीं है. पहले में भी आपत्ति नहीं है. पहले वाला आपके लिए उतना व्यावहारिक नहीं होता. आपने उसको संशोधित कर लिया है. इस रूप में अगर आप सहमत हैं कि वह संशोधन व्यावहारिक है तो सरकार को आपत्ति नहीं है. हम इसको स्वीकार करते हैं.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- माननीय सभापति महोदय, मैं विवाद नहीं करना चाहता, लेकिन मेरा किया-धरा कुछ नहीं है. सचिवालय से आपके यहां भी गया है और मेरे यहां भी सचिवालय से आया है.
श्री राकेश सिंह-- हमने कहा कि हमें आपत्ति नहीं है.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- आप इसे ठीक से पढ़ तो लो. आपने सरसरी नजर डाली है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- माननीय सभापति महोदय, हम भले ही प्रस्ताव भेजें परंतु रेलवे भी अपना सर्वे करेगा और वह सर्वे करने के बाद यदि ऐसा लगता है कि क्योंकि हम रेलवे प्रस्ताव भेज दें और वह बनाता नहीं है. उनकी बनाने की एक प्रक्रिया है. वह सर्वे करते हैं वह फुटफा़ल देखते हैं उसके बाद फिर योजना बनाते हैं तो हम तो प्रस्ताव भेज देते हैं. हमें कोई आपत्ति नहीं है.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- यह आप कौन सी नयी बात कर रहे हैं. ऐसा कहीं होता है. आपको ही हम अब प्रस्ताव देंगे. मान लीजिए यह तो राज्य सरकार की बात है. आपके पास विभाग है. आपको भी प्रस्ताव देंगे. आप उसका सर्वेक्षण कराएंगे, अध्ययन करेंगे.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- मैं तो आपके समर्थन में बोल रहा हूं.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- उसके लिए धन्यवाद, लेकिन आप जो इंदौर वाली गोल-गोल जलेबी बना रहे थे. अब आपको जलेबी याद आ रही है जल्दी जाना है.
श्री राकेश सिंह-- आपकी बात को मैं आपके हित में पढ़ देता हूं. यह सदन केन्द्र शासन से अनुरोध करता है कि रीवा से अमरपाटन होते हुए मैहर एवं कटनी से रामनगर घूम गये आप वापस और फिर उसके बाद मैहर, अमरपाटन होते हुए मैहर और फिर उसके बाद कटनी से रामनगर जिला मैहर को जोड़ते हुए सीधी, सिंगरौली तक हमें उसमें आपत्ति नहीं है व्यावहारिक मान से हमारी उसमें स्वीकृति है. सीधे-सीधे हम इसको स्वीकार करके और जो प्रक्रिया है उसके तहत रेलवे को भेजेंगे.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह--हम से बेहतर तो आप जानते नहीं हैं आप मध्यप्रदेश जानते हो, लेकिन मैं अपना क्षेत्र जानता हूं.
सभापति महोदय:-- यह सदन केन्द्र शासन से अनुरोध करता है कि ''रीवा से अमरपाटन होते हुए मैहर एवं कटनी से रामनगर, जिला मैहर को जोड़ते हुए सीधी, सिंगरौली तक नई रेलवे लाईन का निर्माण किया जाये''.
संकल्प सर्वसम्मति से स्वीकृत हुआ.
(3) भोपाल से भुसावल के मध्य नई ट्रेन अथवा मेमू ट्रेन प्रारंभ की जाना
श्रीमती अर्चना चिटनीस -- माननीय सभापति महोदय, मैं यह संकल्प प्रस्तुत करती हूँ कि --
यह सदन केन्द्र शासन से अनुरोध करता है कि "भोपाल से भुसावल के मध्य नई ट्रेन अथवा मेमू ट्रेन प्रारंभ की जाये."
सभापति महोदय -- संकल्प प्रस्तुत हुआ.
श्रीमती अर्चना चिटनीस -- माननीय सभापति महोदय, भुसावल और भोपाल के बीच में लंबी दूरी की बहुत सी ट्रेन चलती हैं लेकिन आजकल सामान्य श्रेणी के डिब्बे कम होने से और आरक्षण के बिना लोगों को यात्रा करने में छोटी दूरी पर व्यावहारिक तौर पर बहुत सी कठिनाइयां आती हैं. भोपाल, बुरहानपुर, हरदा, खण्डवा, टिमरनी, खिड़किया एवं इटारसी, इन शहरों के यात्रियों को अत्यधिक असुविधा का सामना करना पड़ता है. जैसा माननीय सीतासरन शर्मा जी ने भी कहा कि भोपाल आने के बहुत सारे कारण इस रुट पर होते हैं. भोपाल हमारी राजधानी है, शैक्षणिक कारणों से, मेडिकल कारणों से भी यहां आना होता है. पूर्व में वर्ष 1975-80 में एक ट्रेन संचालित होती थी जो बाद में ट्रेफिक नहीं होने के कारण बंद कर दी गई. जैसा माननीय कैलाश जी कह रहे थे कि फुट-फाल नहीं होने के कारण बंद कर दी गई. अब यात्रियों की संख्या में अत्यधिक वृद्धि हो गई है. यही मेरा सुझाव और आग्रह है. अगर इसमें नई ट्रेन स्वीकृत न भी की जाए तो ट्रेन संख्या 11115 (डाउन) यह इटारसी तक आती है. इसी प्रकार ट्रेन संख्या 11116 (अप) यह इटारसी आने के बाद 17 घंटे यार्ड में खड़ी रहती है. इस ट्रेन को यदि भोपाल तक बढ़ा दिया जाए तो यह जो ट्रेन जितने समय खड़ी रहती है उतने समय में यह ट्रेन भोपाल आकर वापिस इटारसी आ जाएगी और वर्तमान में खण्डवा से बुरहानपुर रात में 1.00 बजे ट्रेन जाती है तो रात में उसको पैसेंजर कहां मिलेंगे खण्डवा से बुरहानपुर जाने के लिए यही ट्रेन यदि भोपाल तक एक्टेंड होकर पलटकर जाएगी तो सुबह-सुबह 5.00 बजे हमें खण्डवा से ट्रेन मिलेगी. रास्ते के बहुत से छोटे-छोटे ग्रामीण क्षेत्र के स्टेशनों को लाभ होगा. इस प्रकार से बुरहानपुर, भुसावल व भोपाल ट्रेन से आपस में कनेक्ट हो सकेंगे. मेरा कहना है या तो नई ट्रेन प्रारंभ हो या इसी ट्रेन को भोपाल तक एक्सटेंड कर दिया जाए. ऐसा प्रस्ताव सदन पारित करे. मेरा सदन से यही आग्रह है.
लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) -- सभापति महोदय, पर्याप्त अध्ययन के साथ माननीया अर्चना जी ने इस प्रस्ताव को रखा है. ऐसा लगता है कि इससे निश्चित रुप से उस पूरे क्षेत्र को लाभ मिलने वाला है. साथ ही किसी को आपत्ति भी नहीं होगी. इसमें सरकार की तरफ से स्वीकृति है. इस प्रस्ताव को हम विधि अनुसार केन्द्र सरकार को निश्चित रुप से भेजेंगे.
सभापति महोदय -- यह सदन केन्द्र शासन से अनुरोध करता है कि "भोपाल से भुसावल के मध्य नई ट्रेन अथवा मेमू ट्रेन प्रारंभ की जाये."
संकल्प सर्वसम्मति से स्वीकृति हुआ.
सभापति महोदय -- विधान सभा की कार्यवाही सोमवार, दिनांक 23 फरवरी, 2026 को प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्थगित.
रात्रि 7.24 बजे विधान सभा की कार्यवाही सोमवार, दिनांक 23 फरवरी, 2026 (4 फाल्गुन, शक संवत् 1947) के पूर्वाह्न 11.00 बजे तक के लिये स्थगित की गयी.
भोपाल अरविन्द शर्मा
दिनांक - 20 फरवरी, 2026 प्रमुख सचिव,
मध्यप्रदेश विधान सभा