मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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षोडश विधान सभा                                                                  नवम् सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2026 सत्र

 

गुरूवार, दिनांक 19 फरवरी, 2026

 

(30 माघ, शक संवत्‌ 1947)

 

 

[खण्ड- 9]                                                                                  [अंक- 4]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरूवार, दिनांक 19 फरवरी, 2026

 

(30 माघ, शक संवत्‌ 1947)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.00 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

11.00 बजे                   तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

बेचिराग राजस्व ग्रामों में बसने का अधिकार

[राजस्व]

1. ( *क्र. 2 ) श्री मुकेश मल्होत्रा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                     (क) क्या श्योपुर जिले में बेचिराग राजस्व ग्राम ऊकाल, ग्राम सोहनदेह, ग्राम श्यामपुरा खैरोना, ग्राम अजनई ग्राम पिपरकक्ष, ग्राम बैराही बागदा, ग्राम सारसिली, ग्राम बरौनियां, ग्राम झंकापुर, ग्राम, खूंटका, ग्राम सुखदेला, ग्राम रहिका, आदि बेचिराग राजस्व ग्रामों में आदिवासियों को रहने बसने का अधिकार दिया जायेगा? (ख) क्या सरकार बेचिराग राजस्व ग्राम जैसे-उकाल, सोनदेह, श्यापुरा, खैरोना, बाँस ई, पिपरकच्छ, अजनोई, सारसिल्ली, बैराई बागदा, सुखदेला, रही का सहराना, जार की तलैया सहराना, खूटका बरोनिया आदि बेचिराग ग्रामों में बसाहट की जायेगी? (ग) वर्तमान में बेचिराग राजस्व ग्रामों में आदिवासियों को बसाने के लिये क्या कार्यवाही की जा रही है? जानकारी दें। (घ) प्रश्‍नांश (क), (ख) एवं (ग) के परिप्रेक्ष्‍य में इन बेचिराग राजस्व ग्रामों में भूमिहीन आदिवासियों को कब तक भू-अधिकार पट्टे स्वीकृत कर बसाया जायेगा? समय-सीमा बतावें। यदि नहीं, तो क्यों नहीं? कारण बतावें।

राजस्व मंत्री ( श्री करण सिंह वर्मा ) : (क) श्योपुर जिले में ऊकाल ग्राम सोहनदेह, ग्राम अजनई, ग्राम बैराही बागदा, बेचिराग ग्राम हैं, इन ग्रामों में कोई आदिवासी निवास नहीं करता केवल उनके द्वारा खेती की जाती है। ग्राम श्यामपुरा, खैरोना बेचिराग ग्राम हैं, ग्राम सारसिली आबाद राजस्व ग्राम है। ग्राम पिपरकक्ष ग्राम, रहिका, ग्राम सुखदेला, ग्राम झंकापुर, ग्राम, खूंटका राजस्व ग्राम नहीं है। मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 यथा संशोधित 2018 की धारा 237 में निस्तार अधिकारों के प्रयोग के लिए ग्राम की कुल कृषि भूमि के न्यूनतम 2 प्रतिशत तक सुरक्षित रखने के पश्चात् आबादी मद में भूमि व्यपवर्तित करने का प्रावधान है तथा मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता (दखल रहित भूमि, आबादी तथा वाजिब उल अर्ज) नियम, 2020 में आबादी के लिए भूमि का आरक्षण, अर्जन, निर्वर्तन संबंधी नियम हैं, जिसमें जिला कलेक्टर को कार्यवाही का अधिकार है। (ख) एवं (ग) मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 यथा संशोधित 2018 की धारा 237 में निस्तार अधिकारों के प्रयोग के लिए ग्राम की कुल कृषि भूमि के न्यूनतम 2 प्रतिशत तक सुरक्षित रखने के पश्चात् आबादी मद में भूमि व्यपवर्तित करने का प्रावधान है तथा मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता (दखल रहित भूमि, आबादी तथा वाजिब उल अर्ज) नियम, 2020 में आबादी के लिए भूमि का आरक्षण, अर्जन, निर्वर्तन संबंधी नियम है, जिसमें जिला कलेक्टर को कार्यवाही का अधिकार है। (घ) उत्तरांश (ख) अनुसार मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 यथा संशोधित 2018 की धारा 237 की कार्यवाही नहीं होने से प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता।

          श्री मुकेश मल्‍होत्रा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्र-2 है.

          श्री करण सिंह वर्मा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर रखा है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- मुकेश जी पूरक प्रश्‍न करें.

          श्री मुकेश मल्‍होत्रा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने प्रश्‍न के माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछा था कि जिला श्‍योपुर में जो बेचिराग राजस्‍व ग्राम हैं जैसे ग्राम ऊकाल, सोहनदेह, अजनई, बैराही, बागदा, श्‍यामपुरा, खैरोना आदि  बेचिराग ग्राम हैं. इन ग्रामों में आदिवासियों के पूर्वज निवास करते थे. वहां आदिवासियों के कुल देवी, देवता हैं. वह वहां आज भी पूजा पाठ करते हैं, वहां उनकी संस्‍कृति, परम्‍परा विद्यमान है, वहां उनके आस्‍था के केन्‍द्र हैं. आदिवासियों के खंडहर घर एवं झोपडियों के प्रमाण मौजूद हैं. उक्‍त बेचिराग ग्रामों में आदिवासियों द्वारा खेती की जा रही है. मैं मंत्री जी के उत्‍तर से सहमत हूं, परंतु वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी आदिवासी समाज व अन्‍य समाज के भाई, बहनों को उक्‍त बेचिराग राजस्‍व ग्राम आबाद ग्रामों में खेती करने, बसने और रहने से रोका जा रहा है जबकि इन बेचिराग ग्रामों में राजस्‍व विभाग की भूमि है और ऑनलाईन दर्ज है. खसरा, खतौनी भू-अधिकारलेख श्‍योपुर भू-अभिलेख शाखा में मौजूद है. सैकड़ों लोगों के पास 1980 के पूर्व के भूदान एक्‍ट बोर्ड के पट्टे भी हैं, इसके बावजूद भी वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी वहां खेती करने और बसने से रोक रहे हैं. आदिवासी भाई-बहनों पर तीतर, बटेर, खरगोश के शिकार के झूठे मुकदमें दर्ज कर जेल भेजने की कार्यवाही कर रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय-- मुकेश जी आप पूछना क्‍या चाहते हो?

          श्री मुकेश मल्‍होत्रा-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाहता हूं कि यह रोक कब लगेगी और उनको वहां पर बसने का अधिकार कब दिया जाएगा. वह खेती तो कर रहे हैं , लेकिन वन विभाग वाले उन पर झूठे मुकदमें दर्ज कर रहे हैं.

          श्री करण सिंह वर्मा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने प्रश्‍न के उत्‍तर में साफ बता दिया है कि यह बेचिराग जो कि वीरान ग्राम होते हैं. जिनमें पहले कभी लोग बसते होंगे, परंतु यह ऐसे ग्राम हैं जिनमें कोई भी व्‍यक्ति निवास नहीं करता है. उकाल, सोहनदेह, अजनोई, बरौनियां यह ऐसे वीरान राजस्‍व ग्राम हैं जिसमें पूर्व से ही आबादी मद की भूमि हैं किंतु इसमें कोई व्‍यक्ति निवास नहीं करता है. वर्तमान मौके पर यह जंगल है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- मुकेश जी आप दूसरा प्रश्‍न करें.

          श्री मुकेश मल्‍होत्रा-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी के उत्‍तर से सहमत नहीं हूं जैसा कि इन्‍होंने बताया है कि ग्राम सारसिल्‍ली आबाद राजस्‍व ग्राम है फिर भी वन विभाग वहां आदिवासियों को बसने और खेती करने से रोक रहा है और ग्राम पिपरकच्‍छ, रहिका, सहराना  सुखदेला, झंकापुर, खूंटका राजस्‍व ग्राम नहीं हैं तो वन अधिकार अधि‍नियम वर्ष 2006 के तहत वहां निवासरत् आदिवासियों को वन अधिकार के पट्टे क्‍यों स्‍वीकृत नहीं किये गये हैं?

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से विनम्रतापूर्वक निवेदन करना चाहता हूं कि प्रश्‍न में वर्णित बेचिराग ग्रामों और आबाद राजस्‍व ग्रामों में आदिवासियों को खेती करने एवं वहां रहने-बसने का अधिकार देने के लिए जिला कलेक्‍टर श्‍योपुर एवं वन मण्‍डल अधिकारी श्‍योपुर को निर्देश जारी करें. साथ ही आदिवासियों पर झूठे मुकदमे दर्ज करने वाले वन कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्यवाही करने का कष्‍ट करें.

          श्री करण सिंह वर्मा-- अध्‍यक्ष महोदय, बैराही, श्‍यामपुरा, खैरोना यह भी वीरान राजस्‍व ग्राम हैं जिनका सम्‍पूर्ण रकबा शासकीय वन के रूप में दर्ज है और मौके पर वन विभाग द्वारा दोबारा इन ग्रामों में फैंसिग कर दी गई है. वन भूमि होने के कारण इसमें आबादी की बसाहट नहीं की जा सकती है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- मुकेश जी आप माननीय मंत्री जी से और कुछ पूछना चाहते हैं.

            श्री मुकेश मल्होत्रा -- अध्यक्ष महोदय, इसके लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दें क्योंकि आदिवासियों पर वन विभाग लगातार अत्याचार कर रहा है. मैं इतना ही कहना चाहूंगा, आपने बोलने का अवसर दिया उसके लिए धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदय -- बेचिराग गांव की जो परिस्थिति है वह एक अलग पक्ष है. लेकिन सहरिया आदिवासियों को परेशान न किया जाए इस मामले में आप कलेक्टर को थोड़ा निर्देशित करें. (मेजों की थपथपाहट) दूसरा,  कराल ब्लाक में लगभग 14 गांव ऐसे हैं जिनको राजस्व ग्राम घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है. कई बार उसकी घोषणाएं भी हुई हैं. मैं समझता हूँ कि उसको देखते हुए उसे निराकरण तक पहुंचाना चाहिए.

          2. ( *क्र. 429 ) श्री ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि         (क) क्या विधानसभा सत्र जुलाई 2025 में प्रश्‍नकर्ता द्वारा ध्यानाकर्षण के माध्यम से वन एवं राजस्व सीमा विवाद निराकरण के संबंध में डिप्टी कलेक्टर (वन व्यवस्थापन अधिकारी) नियुक्त करने की मांग की गई थी? जिस पर माननीय राजस्व मंत्री जी द्वारा भी व्यक्तिगत रूप से आश्‍वासन दिया गया था एवं कलेक्टर पन्ना द्वारा पत्र क्रमांक 1678, दिनांक 01.08.2025 के माध्यम से प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग भोपाल को पन्ना विधानसभा हेतु डिप्टी कलेक्टर (वन व्यवस्थापन अधिकारी) नियुक्त करने हेतु मांग की गई थी? (ख) क्या पन्ना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत वन राजस्व सीमा विवाद के निराकरण हेतु पृथक डिप्टी कलेक्टर (वन व्यवस्थापन अधिकारी) विभाग द्वारा शीघ्र नियुक्त किया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों?

राजस्व मंत्री ( श्री करण सिंह वर्मा ) : (क) जी हाँ, कार्यालयीन पत्र क्रमांक 1678/भू-अभि/स.अ./2025 पन्‍ना, दिनांक 01.08.2025 के माध्यम से प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग, भोपाल को जिले में केवल वन व्‍यवस्‍थापन के प्रकरणों के निराकरण हेतु 01 राज्‍य प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति किये जाने हेतु लेख किया गया था। (ख) शासन द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) को पदेन वन व्‍यवस्‍थापन अधिकारी घोषित किया गया है, अत: उक्‍त अनुक्रम में पृथक से डिप्‍टी कलेक्‍टर नियुक्‍त किये जाने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

          श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- मैं प्रश्न क्रमांक 429 पटल पर रखता हूँ.

          श्री करण सिंह वर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.

          श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं लगातार इस चीज को उठा रहा हूँ कि यह पन्ना जिले का बड़ा ज्वलंत मुद्दा है. मैंने इसमें ध्यानाकर्षण भी लगाया है और दो-दो प्रश्न सामान्य प्रशासन विभाग के लगाए हैं, लेकिन उनको एक बार वन विभाग को ट्रांसफर कर दिया और एक बार अभी राजस्व विभाग को ट्र
ट्रांसफर कर दिया गया है. उस समय पर भी मैंने यह बात कही थी. माननीय संसदीय कार्यमंत्री जी ने भी इसके लिए उनके अधिकारियों से बात की थी और मुझे इस बात के लिए आश्वस्त किया गया था कि एक अलग से फारेस्ट का सेटलमेंट ऑफिसर पन्ना में पदस्थ कर दिया जाएगा. इसके लिए यह कहा गया था कि कलेक्टर महोदय के माध्यम से कोई डिमांड आ जाए. दिनांक 1.8.2025 को डिमांड भी आ गई लेकिन उसके बाद भी आज तक फारेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर वहां पर पदस्थ न होने के कारण वहां के विकास कार्य रुक रहे हैं. वहां जो पट्टेधारी हैं उनको बेदखल किया जा रहा है.

          अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री सक्षम मंत्री हैं. वहां पर फारेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर के ऑलरेडी तीन पद खाली हैं, जिले के कलेक्टर ने भी अनुरोध किया है.  मेरा सीधा प्रश्न यह है कि क्या मंत्री जी वहां पर फारेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर को पदस्थ करेंगे.

          श्री करण सिंह वर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने जो बात कही है वह सही है कि कलेक्टर पन्ना द्वारा पत्र क्रमांक 1600, दिनांक 1.8.2025 को प्रमुख सचिव, राजस्व विभाग को लिखा गया है. जिसमें जिले में केवल वन व्यवस्थापन के प्रकरणों के निराकरण हेतु एक राज्य प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति किए जाने का अनुरोध किया गया था. शासन द्वारा वर्ष 1988 में समस्त अनुभागीय अधिकारियों को पदेन वन व्यवस्थापन अधिकारी बनाया गया है, इसलिए पृथक से वन व्यवस्थापन हेतु डिप्टी कलेक्टर नियुक्त किए जाने की आवश्यकता नहीं है.

          श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यह है कि आप सूचना की इकाई किसको मानते हैं. यदि वहां का कलेक्टर लिखकर दे रहा है, अनुरोध कर रहा है कि हमें फारेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर की जरुरत है. हमारे यहां तीन पद रिक्त हैं जिससे कि हम जिले के प्रकरणों का निराकरण कर पाएं या उस विधान सभा क्षेत्र के प्रकरणों का निराकरण कर पाएं. मैं वहां का विधायक होने के नाते सदन के अन्दर बार बार इस बात को ला रहा हूँ. ध्यानाकर्षण और दो-दो प्रश्न लगाने के बाद, सामान्य प्रशासन विभाग को भेजने के बाद बार-बार इनके पास राजस्व विभाग में ट्रांसफर हो जाते हैं. आज तक एक फारेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर जो कि एक ज्वलंत मुद्दा है पन्ना विधान सभा क्षेत्र का जिसके कारण हमारे क्षेत्र के विकास कार्य रुके हुए हैं. कोई भी कांट्रेक्टर जाता है तो उसके पीओआर कट जाते हैं. जब सीमांकन होता है तो मेडिकल कॉलेज की भी आपत्ति लगाकर जगह बदल दी जाती है. सड़कों का निर्माण बन्द कर दिया जाता है. दीवारें गिरा दी जाती हैं. बाद में पता चलता है कि यह राजस्व की जमीन है. इसके लिए मैं व्यवस्था मांग रहा हूँ. मैं चाह रहा हूँ कि आसंदी से इसके लिए व्यवस्था आ जाए. एक फारेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर डिमार्केशन के लिए पदस्थ कर दिया जाए जिससे हजारों किसानों का उद्धार हो जाएगा. साथ ही विकास के काम होने लगेंगे. एक फारेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर, प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त कर दिया जाए. कलेक्टर अनुरोध कर रहा है, हम भी अनुरोध कर रहे हैं. यदि नीचे की बात न सुनकर ऊपर से ही बात रख दी जाएगी और वही बात बोल दी जाएगी तो ऐसे में वहां के लोगों को न्याय कैसे मिलेगा.

          श्री करण सिंह वर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक वरिष्ठ मंत्री भी रहे हैं. उनकी जानकारी में है कि एसडीएम, राजस्व को पदस्थ करने का अधिकार सामान्य प्रशासन विभाग को है.

          श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं वही बोल रहा हूं कि मैं सामान्‍य प्रशासन विभाग को लगाता हूं तो वह बार-बार राजस्‍व को आ जाता है. मैं कितनी बार प्रश्‍न लगाऊं या ध्‍यानाकर्षण उठाऊं, क्‍या अब मेरी गलती है कि प्रश्‍न राजस्‍व विभाग को ट्रांसफर कर दिया गया ? सामान्‍य प्रशासन को ही इसमें नियुक्ति करनी है. मेरा तो यह कहना है कि इसमें आसंदी से आदेश हो जाए.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, आप आसंदी से ही इस पर निर्देश कर दीजिए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, पिछली बार भी यह बात आई थी और सदस्‍य को आश्‍वस्‍त भी किया गया था कि हम नियुक्ति कर देंगे, फिर इसमें तकलीफ क्‍या आ रही है,  सामान्‍य प्रशासन विभाग को भी करना है तो क्‍या आपने उनको लिखा है ?

          श्री करण सिंह वर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले भी आपसे निवेदन किया है कि पदेन राजस्‍व का अधिकारी एसडीएम पदस्‍थ होता है वही इसका निराकरण करता है. हमारे नियम में भी है और यदि माननीय विधायक जी चाहें तो मेरे संज्ञान में ला दें, जितने प्रकरण हैं मैं तत्‍काल निपटाने की कार्यवाही करूंगा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- जिस अधिकारी को अधिकार दिए गए हैं क्‍या आपको ऐसा लगता है कि वह पूरी तरह काम नहीं कर पाएगा ?

          श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, बिल्‍कुल यह कलेक्‍टर महोदय ने लिखकर भेजा है कि उसका वर्कलोड इतना ज्‍यादा है, वहां के जो प्रशासनिक काम हैं क्‍योंकि वन विभाग वाले भी उनको सहयोग नहीं कर पा रहे हैं तो इसलिए उस पर वर्कलोड है. यह कलेक्‍टर का पत्र दिनांक 01.08.2025 का है जो पीएस रेवेन्‍यू को लिखा गया है कि इसमें हमें एक अधिकारी दे दिया जाए जिससे मैं इसका निराकरण कर लूँ और उसमें अनुरोध किया है, वही अनुरोध सदन के अंदर मैं कर रहा हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मैं समझता हूं कि मंत्री जी आप समान्‍य प्रशासन विभाग को लिखिए कि विधान सभा में पिछली बार भी चर्चा आई यह आश्‍वासन दिया गया, आज भी यह चर्चा आई, इतने दिन तक इसका निराकरण नहीं होना यह चिंताजनक है इसलिए इसकी नियुक्ति तत्‍काल की जानी चाहिए.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- अध्‍यक्ष महोदय, सेम इसी तरह की परिस्थिति जावद में भी है 5,000 किसानों के 20 साल से मामले पेंडिंग पड़े हैं. पिछली बार 10-11 साल पहले एक बार एक रिटायर्ड एसडीएम की नियुक्ति हुई थी. 6 महीने का उसमें समय दिया था. उसमें फुल टाईम बैठने के बाद तकरीबन 200-300 मामले निपटे, तो इसमें कम से कम एक साल की नियुक्ति पुन: किसी रिटायर्ड एसडीएम की जावद में भी करने का निर्देश दे दें, क्‍योंकि 5,000 किसानों का मामला पेंडिंग है. मेरा आपसे निवेदन है कि इतना और आप अपने आदेश में जुड़वा दें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- इसको भी गंभीरता से ले लें मंत्री जी दोनों एक ही प्रकार के प्रकरण हैं.

          श्री करण सिंह वर्मा -- जी अध्‍यक्ष महोदय.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- धन्‍यवाद अध्‍यक्ष महोदय.

          सिंघाडे़ की खेती को प्राकृति‍क आपदा से नुकसान की क्षतिपूर्ति

[राजस्व]

3. ( *क्र. 545 ) श्री श्रीकान्त चतुर्वेदी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                  (क) नगठित जिला मैहर सहित समूचे म.प्र. में परम्‍परागत सिंगरहा समाज के लोगों द्वारा सिंघाड़े की खेती किये जाने पर उनकी फसल अतिवृष्टि एवं अन्‍य प्राकृतिक प्रकोपों से तथा जलभराव आद‍ि से क्षतिग्रस्‍त हो जाने की स्थिति में क्षतिपूर्ति हेतु शासन द्वारा क्‍या कोई प्रावधान किये गये हैं? यदि हाँ, तो जानकारी दी जावे। (ख) प्रश्‍नांश (क) के संबंध में यदि नहीं, तो क्‍या निकट भविष्‍य में सिंघाड़े की खेती करने वाले किसानों की क्षतिपूर्ति के लिये शासन स्‍तर से R.B.C. (राजस्‍व पुस्‍तक परिपत्र) में इस फसल के हेतु प्राकृतिक आपदाओं की फसलों की सूची में सम्मिलित कर ऐसे क्षतिपूर्ति के पात्र किसानों की वित्‍तीय सहायता राशि उपलब्‍ध कराये जाने की क्‍या कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) प्रश्‍नांश (क) अनुसार फसल की क्षतिपूर्ति हेतु क्‍या वर्ष 2022 से 2025 तक शासन स्‍तर में वित्‍तीय सहायता के लिये मैहर जिला अंतर्गत मांग पत्र दिये गये हैं? यदि हाँ, तो ऐसे मांग पत्रों पर अभी तक क्‍या कार्यवाही की गयी है? जानकारी उपलब्‍ध करायी जावे।

राजस्व मंत्री ( श्री करण सिंह वर्मा ) : (क) नवगठित जिला मैहर सहित समूचे म.प्र. में सिंघाड़े की खेती किये जाने पर उनकी फसल अतिवृष्टि एवं अन्‍य प्राकृतिक प्रकोपों से क्षतिग्रस्‍त हो जाने की स्थिति में राजस्‍व पुस्‍तक परिपत्र 6-4 के पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-1 के पद (एक) की कंडिका-क अनुसार फसल क्षति हेतु आर्थिक अनुदान सहायता के लिए मानदण्‍ड निर्धारित है। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में शेष प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है। (ग) जी नहीं, अत: प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है।

          श्री श्रीकान्‍त चतुर्वेदी -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 545 है.

          श्री करण सिंह वर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर रखा है.

          श्री श्रीकान्‍त चतुर्वेदी -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यह है कि सिंघाड़े की खेती करने वाले सिंगरहा समाज के लोगों को अतिवृष्टि से या किसी भी तरह का रोग लगने से उनकी फसल को जो नुकसान होता है उनकी क्षति का भुगतान किया जाए और उसके आगे की भी व्‍यवस्‍था की जाए.

          श्री करण सिंह वर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, हमारे प्रदेश के लोकप्रिय मुख्‍यमंत्री जी ने सिंघाड़े को भी आरबीसी 6(4) में सम्मिलित कर दिया है. वहां कुछ तालाबों में लगी सिंघाड़े की फसलों का नुकसान हुआ है तो आरबीसी 6(4) के अंतर्गत उनको भुगतान कर दिया जाएगा.

          श्री श्रीकान्‍त चतुर्वेदी -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के जवाब से संतुष्‍ट हूं लेकिन मेरा कहना यह है कि जो वर्ष 2024 में मेरी विधान सभा क्षेत्र के 22 किसानों जिन्‍होंने आवेदन दिया था उसमें माननीय मंत्री जी का भी लेटर लगा हुआ है लेकिन उनका अभी तक भुगतान नहीं हुआ तो मैं मंत्रीजी से निवेदन करना चाहता हूं कि उनको भुगतान कराने का आश्‍वासन दें.

          श्री करण सिंह वर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पूर्व में ही कहा है कि भुगतान कर दिया जाएगा.

          अध्‍यक्ष महोदय --  चतुर्वेदी जी, अब धन्‍यवाद तो दे दीजिए.

          श्री श्रीकान्‍त चतुर्वेदी -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्रीजी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहता हूं.    

शालाओं के भवनों का संधारण

[स्कूल शिक्षा]

4. ( *क्र. 1021 ) श्री दिनेश राय मुनमुन : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिवनी विधान सभा क्षेत्र के किन-किन ग्रामों में कितनी प्राथमिक, माध्‍यमिक, उच्‍चतर माध्‍य. शालाएं संचालित की जा रही हैं? (ख) प्रश्‍नांश '''' वर्णित कितनी इमारतें जर्जर अवस्‍था में हैं? शासन से कब-कब इन भवनों की मरम्‍मत की मांग की गई अथवा अतिरिक्‍त कक्ष की मांग की गई एवं किस स्‍तर में वर्तमान में लंबित है या इनकी मरम्‍मत हेतु कोई योजना शासन द्वारा बनाई जा रही है? (ग) प्रश्‍नांश '''' वर्णित कितने विद्यालयों को अतिरिक्‍त कक्ष की आवश्‍यकता है, कितने विद्यालयों में बाउंड्री की आवश्‍यकता है? इन्‍हें कब तक बनवाया जाना प्रस्‍तावित है एवं कितने विद्यालय की छत से पानी रिसता है, क्‍या इसकी कोई सूची शासन या विभाग के पास उपलब्‍ध है? यदि हाँ, तो उपलब्‍ध करायें। यदि नहीं, तो क्‍या टीम गठित कर जांच करवाई जाकर सत्‍यापित एवं फिटनेस सर्टिफिकेट की प्रति प्रश्‍नकर्ता को उपलब्‍ध कराई जायेगी?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री उदय प्रताप सिंह ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र  'एक' अनुसार है। (ख) सिवनी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत 44 जीर्ण-शीर्ण प्राथमिक/माध्यमिक शालाओं में से 05 नवीन भवन स्वीकृत किये गये हैं। शेष शाला भवनों के प्रस्‍ताव वार्षिक कार्ययोजना में सम्मिलित है, जिनके निर्माण के लिए स्वीकृति, बजट की उपलब्धता पर निर्भर करेगी। कोई भी शासकीय हाई/हायर सेकेण्डरी स्कूल भवन की इमारत जर्जर अवस्था में नहीं है। शालाओं की अधोसंरचना के अनुरक्षण हेतु जिले को राशि ₹25.00 लाख जारी किया गया है। अतः शेषांश उद्भूत  नहीं होता है। विद्यार्थी नामांकन के अनुसार अतिरिक्त आवश्यकता होने पर उपलब्ध बजट अनुसार अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण कार्य किया जाता है। अधोसंरचना सुदृढ़ीकरण कार्य बजट की उपलब्धता तथा सक्षम समिति की स्वीकृति पर निर्भर करता है। अतः शेषांश उद्भूत नहीं होता। (ग) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार विधानसभा क्षेत्र सिवनी अंतर्गत 25 प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओं में 32 अतिरिक्त कक्ष, 203 शालाओं में बाउण्ड्रीवॉल, 193 शालाओं में मरम्मत कार्यों का चिन्हांकन किया गया है। शासकीय हाईस्कूल एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'दो' अनुसार है। अतिरिक्त कक्ष, बाउण्ड्रीवॉल सहित अन्य अधोसंरचना निर्माण मांग/प्रस्‍ताव एवं बजट की उपलब्धता पर निर्भर करता है। अतः समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं, मरम्‍मत योग्‍य कार्यों में छत की मरम्‍मत का कार्य सम्मिलित होता है। अतः शेषांश उद्भूत नहीं होता है।

श्री दिनेश राय मुनमुन -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 1021 है.

          श्री उदय प्रताप सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर सभा पटल पर रखा है.

          श्री दिनेश राय मुनमुन -- अध्‍यक्ष महोदय, इसमें मैं आपका संरक्षण चाहूंगा क्‍योंकि मैंने माननीय मंत्री जी के विभाग से जो जानकारी मांगी वह अपूर्ण है और अशुद्ध भी है, क्‍योंकि यह नौनिहाल बच्‍चों का सवाल है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, जब हम लोग स्कूलो में जाते हैं तो बच्चे हम लोगों के लिये इंतजार में कलश लेकर घंटों खड़े रहते हैं कि विधायक आ रहे हैं तो हमारी समस्या को सुनेंगे. जब हम कोई भाषण देते हैं तो भारत माता की जय बोलते हैं तो वही बच्चे बहुत तेज आवाज से जय बोलते हैं. शिक्षकों को भी इस बात की उम्मीद रहती है कि बच्चों के माध्यम से हम अपने जनप्रतिनिधि से कुछ मांग रख लें.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, जब हम स्कूल में जाते हैं और उन स्कूलों की वह छत हमको दिखाते हैं , ऐसी छतें टूटी हुई हैं (टूटी छत की फोटो दिखाते हुये), यहां तक कि हमारे यहां पर स्कूल की छत गिर गई बच्चों को नागपुर में एडमिट करना पड़ा और हम वाउन्ड्रीवाल की मांग करते हैं ,उसकी जानकारी जिन्होंने भी हमारे मंत्री जी को दी है, इस जानकारी में, हमने मंत्री जी से जानकारी चाही थी कि कितने स्कूल में छत खराब है उसकी हमें सूची दे दें, उसमें से वाउन्ड्री वाल जहां पर नहीं है वहां के कुछ हायर सेकेन्डरी और हाई स्कूल का जबाव दिया है. लेकिन हमें प्राथमिक शाला और माध्यमिक शाला का जवाब नहीं दिया है.

          अध्यक्ष महोदय, जवाब देखकर के, मैं इस बात से अचंभित हूं कि 357 नंबर का 23440144402 यह एमएस पिररियाजाम यह है कहां, मुझे नहीं पता और 358 में सुश्री स्कूल का नाम बता रहे हैं धनोटिया मावडी यह भी महोदय हमें पता नहीं है कि यह हमारे यहां पर कहां पर है. मेरा कहना है कि जिन भी अधिकारियों ने यह जानकारी दी है, सील लगाई है, मैं नाम किसी का नहीं लेना चाहूंगा , वह शुद्ध जानकारी नहीं दे रहे हैं तो हमारे बच्चों के साथ होगा क्या. अधोसंरचना की राशि से करना चाहते हैं, वाउन्ड्रीवाल नहीं है, इसलिये मैने जो अतिरिक्त कक्ष की मांग की है वह भी देखने में आया है कि कई अतिरिक्त कक्ष हैं जहां पर क्लास नहीं लग रही है, हमने करोड़ों रूपये दिये हैं उन स्कूलों में..

          अध्यक्ष महोदय- दिनेश जी, आप प्रश्न तो करें, मंत्री जी से आप जानना क्या चाहते हैं.

          श्री दिनेश राय मुनमुन -- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि एक तो जानकारी शुद्ध नहीं दे रहे हैं, मेरे प्रश्न पर जो अशुद्ध जानकारी आई है क्या मंत्री जी उन अधिकारियों पर कार्यवाही करेंगे. दूसरा प्रश्न यह है कि जिन स्कूलों की छतें टपक रही हैं , आपने हमको जो सूची दी है 476 की, चलिये मैं मान लूं कि इनकी छतें टपक रही हैं, जिन स्कूलों में वाउन्ड्रीवाल नहीं है, इनका स्पष्टीकरण आ जाये फिर आगे मैं प्रश्न करूं.

          श्री उदय प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को बताना चाहता हूं कि सूची कौन सी दी है और नाम मे हो सकता है कि कोई टायपिंग मिस्टेक है, क्या है वह तो जानकारी का विषय है लेकिन माननीय सदस्य की विधानसभा क्षेत्र में 44 प्राथमिक और माध्यमिक शालायें हैं जो जीर्णशीर्ण अवस्था में हैं, उनमें से हमने 5 नये भवन आपको अभी दिये हैं, सिवनी के महावीर वार्ड में,  प्राथमिक शाला बोरिया, बरहोलिया, सिमरिया, बरसला और महोलपाली और  सिवनी विधानसभा के जो शेष मतलब 32 अतिरिक्त कक्ष 203 शालाओॆं में वाउन्ड्रीवाल और 193 शाला में मरम्मत चिन्हांकित की गई हैं. इसको हम लोगों ने वार्षिक कार्य योजना जो वर्ष 2026-27 की बनी उसमें हमने शामिल करने की कार्यवाही की है. और नियमानुसार हम इसमें आगे बढ़ रहे हैं. भविष्य में आपकी इसमें मदद भी करेंगे.

          माननीय अध्यक्ष जी, आपके माध्यम से मैं माननीय सदस्य को बताना चाहता हूं कि जहां तक जीर्णशीर्ण शालाओं की बात है, हम लोगों ने पूरे प्रदेश में 1816 शालाओं को जीर्णशीर्ण अवस्था में माना है, यह वर्ष 2025-26 में स्वीकृति हेतु राज्य वित्तीय निगम (SFC) की स्वीकृति हेतु भेजा गया है, भवन मरम्मत का भी हम लोगों ने प्लान तैयार किया है. 30 हजार के आसपास भवन हैं जहां पर मरम्मत की आवश्यकता है. हम लोगों ने वर्ष 2025-26 में लगभग साढ़े पांच हजार भवन को मरम्मत हेतु लिया है, भवन विहीन शालायें 375 हैं जिनमें से 230 शालाओं को वर्ष 2025-26 में शामिल किया है और आगामी समय में जो 145 का गेप है उसको वर्ष 2026-27 में पूर्ण करने का हमने लक्ष्य रखा है.

          माननीय अध्यक्ष जी, इसी तरह से शौचालय हैं उनके बारे में बताना चाहूंगा कि बालक शौचालय में ज्यादा गेप है 2700 का है अभी हमने 332 स्वीकृत किये हैं , लेकिन आपके माध्यम से माननीय सदस्य को बताना चाहता हूं कि बालिका शौचालय जो हैं उनको हमने 100 फीसदी 2721 की आवश्यकता थी, 2721 हमने बालिका शौचालय स्वीकृत किये हैं और इसी तरह से विद्युतिकरण का है.

          माननीय अध्यक्ष जी, आपके माध्यम से मैं माननीय सदस्य को यह भी बताना चाहता हूं कि यह महत्वपूर्ण प्रश्न है शिक्षा बच्चों और अगली पीढ़ी से जुड़ा हुआ मामला है. माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में हम लोग कौशिश कर रहे हैं, बीच का समय एक ऐसा आया था जहां पर सांदिपनि विद्यालयों के निर्माण के कारण उन्नयन, नये भवन, प्राथमिक शाला के भवन इन सबको एक शिथिलता प्रदान की गई थी. लेकिन फिर से सरकार ने इसको टेकअप किया है और आगामी समय में जीर्णशीर्ण हैं, नये भवन की स्वीकृति हैं,और खासकर के प्राथमिक शालाओं में चूंकि भारत सरकार का सीधा इसमें समग्र शिक्षा के माध्यम से दखल रहता है तो हम लोग प्रस्ताव बनाकर  भेजते हैं और नियमानुसार उनकी पूर्ति करने का हम काम भी करेंगे और एक चीज मैं माननीय सदस्य को बताना चाहता हूं कि  हमारा हाय स्कूल और हायर सेंकेंडरी लेवल पर हम लोगों का कोई भी भवन जीर्ण क्षीर्ण  नहीं है. इसमें हमको जो आगामी समय  में  2900 हायस्कूल, हायर सेकेंड्री के लिये  15 हजार के आस पास  अतिरिक्त कक्षों की आवश्यकता है,  कम्प्यूटर  और  प्रयोग शाला कक्षों की.   इसमें 3 हजार करोड़ रुपये की  इस प्रदेश में हमको आवश्यकता महसूस  हो रही है.  हम  लोगों ने 4187   अतिरिक्त कक्ष प्रयोग शाला, कम्प्यूटर कक्ष  इनकी स्वीकृति प्रदान की  है  और लगभग 1200 करोड़  की राशि  जारी कर दी गई है पूरे प्रदेश के अंदर, जो कि आज तक के अभी वर्तमान  के  समय   में  सर्वाधिक पैसा है,  जो कि विभाग द्वारा अतिरिक्त कक्षों  के लिये  यहां पर दिया गया है.  शेष जो 10990 के  आस पास हैं,  उनको   हम लोगों ने आगामी 3  वर्षों में  वर्ष 2026-27 में   5 हजार, 2027-28 में  4 हजार और  शेष जो 1800 बचेंगे, 2028-29  में उनको  हम पूरा करेंगे और हमारा  लक्ष्य है कि 2028-29  के वित्तीय वर्ष  तक कोई भी हायर सेकेंड्री, हायस्कूल  जो भवन  हैं,  उसमें किसी भी किस्म   के कक्ष की या भवन  की  आवश्यकता बच्चों  की  जो एनरोलमेंट है,  उसके हिसाब  से  नहीं रहेगी.  एक और जैसा  विधायक जी आपने कहा है कि   कहीं पर भवन की आवश्यकता है या  मरम्मत आदि की  जरुरत है. तो हम लोग नामांकन को ध्यान में रख करके   अतिरिक्त  कक्षों की व्यवस्था भी कर रहे हैं.  विभाग प्राथमिकता के आधार पर  अतिरिक्त कक्ष उपलब्ध करा रहा है. एक और आपकी जानकारी के लिये हम लोग  इसमें परिवर्तन कर रहे हैं.  अभी  दर्ज संख्या के हिसाब से, विभागीय  सूचना के आधार पर  हम लोग यहां पर अपना  विभाग जो है,  वह प्राथमिकता तय करता है. लेकिन अब हम हमने निर्देशित  किया है  और मुख्यमंत्री जी की ऐसी मंशा थी कि हर  जिले में जिला विकास समिति बन गई.  आगामी समय में नये भवन स्वीकृत करना है, अतिरिक्त  कक्ष का  निर्माण होना है,  मरम्मत आदि का पैसा देना है,  चूंकि माननीय विधायक  उस महत्वपूर्ण समिति के सदस्य हैं.  उस समिति के विधायकों के द्वारा   प्राप्त प्रस्ताव के आधार पर  यहां पर विभाग उसका  निराकरण करेगा  और   कार्यवाही करेगा.  इससे सीधा विकास में  या आगमी समय  में  जो स्वीकृतियां होंगी,  उसमें  आपका दखल हो जायेगा, आपकी सहभागिता हो जायेगी.

          श्री दिनेश राय मुनमुनअध्यक्ष महोदय,  मंत्री जी से कोई शिकायत नहीं है.  मंत्री जी हमारे बड़े सीधे, सरल  और कम से कम 10 फीट   के दूर  का भी  बहुत अच्छे से देखते हैं,  दूर तक देखते हैं,  ऐसे  मंत्री जी हैं.  लेकिन जो जानकारी विभाग से मांगी जा रही है नामजद..

            अध्यक्ष महोदयदिनेश जी,  आप फीट में क्यों नाप रहे हो. ..(हंसी)..

          श्री दिनेश राय मुनमुन अध्यक्ष महोदय, वह मैंने दिया है.  मेरा मंत्री जी से  कहना है कि  आपको वह  पुनः जानकारी  दे दी है. जैसे  कन्या उ.मा. विद्यालय सिवनी, मठ मंदिरवाड़ा  जहां मैं खुद गयामैंने करोड़ों रुपये  दिये.  पूरी जर्जर बिल्डिंग है  और वह कहते हैं कि ऐसी कोई जर्जर  बिल्डिंग नहीं  है.  तो एक तय कर दें कि  आपका डीईओ,एसई,बीआरसी, कम से कम वे  जायें  और  टीप लिखकर वह जानकारी  दें. वह जाते  हैं नहींकोई स्थल में  हमें कभी मिलते नहीं हैं.  वह आप उसमें थोड़ा  सा कर दें कि  वह जा जाकर निरीक्षण करें.  दूसरी बात, जब आप स्कूल बना रहे हैं  तो पहले तय कर लें कि बाउंड्रीवॉल   भी उसमें बनें.  उसमें महिला और बच्चियों के शौचालय  बनें. अभी हम  जब जाते  हैं  कई स्कूलों में  हमारे  गांव का क्षेत्र पड़ता हैतो स्कूल के बाउंड्रीवाल के अंदर रात में लोग शराब के पौवे फेंकते हैं, तो हम लोग  जब पहुंचते हैं, तो वह  बाउंड्रीवाल के  अंदर फिके हुए मिलते हैं. तो  उसके लिये  उनकी ऊंची दीवाल  हो.  इसी प्रकार से आपने जो उन्नय की बात की है.  तो मैं  चाहता हूं कि  जब आप सहृदयता  से करना चाहते हैं तो मैं चार- पांच नाम पढ़ देता हूं, तो आप उनके उन्नयन की घोषणा कर दें.अध्यक्ष जी,मैं इसमें आपका संरक्षण चाहूंगा. जैसे हाई स्कूलजैतपुरकला,मारबोड़ी,करकोटी,झीलपिपरिया,बांकी,भोगाखेड़ा,बलारपुर,कलारबांकी,बोरदई,चांवड़ी,गोरखपुर,लाठगांव,केकड़ा,देवरीकलां को हायर सेकेंड्री  में  उन्नयन किया जाये. मैं आपको लिस्ट दे दूंगा.  इनको आप नोट करके  कर दें. इसी प्रकार  हायस्कूल में उन्नयन का भी है.पहाड़ीटोला,केवलारी,सिहोरा,कमकासुर,कोहकाकंडीपार  एवं सुकरी.  आपके माध्यम से   अब  इनका उन्नयन  बहुत दिनों से  रुका  है. इनका कृपया  उन्नयन करें. अध्यक्ष महोदयहम लोग जाते हैं.  कई हमारे ट्राइबल क्षेत्र की बच्चियों  ने स्कूल छोड़ दिया. एक गोरखपुर  है, जो अमरवाड़ा  से लगा हुआ है छिंदवाड़ा जिले से.

                   अध्यक्ष महोदयदिनेश जी,  बस प्रश्न आ गया आपका.  उदय प्रताप जी एक मिनट.  राजेंद्र पाण्डेय जी प्रश्न करें.

          डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय--  अध्यक्ष महोदय, मैं एक छोटा सा  सुझाव रखना चाहता हूं.  वैसे अत्यन्त आवश्यक रहती है  छोटी चीजें.  जैसे स्कूलों में बिजली, पानी, बाउंड्रीवॉल की व्यवस्था या मरम्मत मूलक  कार्यों की  व्यवस्था आवश्यक रहती है. मरम्‍मत मूलक कार्यों में विधायक निधि दी जा सके, अगर इसकी व्‍यवस्‍था सुनिश्चित कर दी जायेगी तो एक लाख, डेढ़ लाख या 2 लाख रूपये की बहुत राशि लगती है उसके माध्‍यम से अनेक कार्य स्‍कूलों में किये जा सकते हैं. वह निश्चित रूप से किया जाना चाहिये, ऐसा मेरा सुझाव है.      

(व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय- कृपया बैठे-बैठे मत बोलिये, कैलाश जी अभी आपका नंबर आयेग, तब बोलियेगा.

          श्री उदय प्रताप सिंह- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं आपके माध्‍यम से सदस्‍य को बताना चाहता हूं कि जीर्ण-शीर्ण भवनों की जानकारी चाही है. जैसा कि मैंने अपने प्रश्‍न के उत्‍तर में कहा कि 44 जीर्ण-शीर्ण शालाएं, आपके सिवनी विधान सभा क्षेत्र में हैं.  हायर सेकेण्‍डरी, हाई स्‍कूल कोई जीर्ण-शीर्ण नहीं है, 5 के लिये आपको राशि जारी कर दी गयी है और जो बाकि विधान सभा क्षेत्र में मतलब 232 अतिरिक्‍त कक्ष, 3 शालाओं में बाउंड्री और 193 शालाओं में मरम्‍मत कार्यों का चिन्‍हांकन किया गया है और वर्ष 2026-27 में हमारा प्रयास होगा कि उनको हम इसमें शामिल करने की कोशिश करें और दूसरा, जो प्रदेश के अंदर जीर्ण-शीर्ण भवन हैं, उन 1816 भवनों के लिये हमने यहां से राशि उनकी स्‍वीकृति जारी की गयी है. निर्माण स्‍थानीय स्‍तर पर हो, जिला विकास समिति है, मानिटरिंग समिति है, आपका एक सूचना का तंत्र है तो मुझे लगता है कि उनके जीर्ण-शीर्ण भवनों की मरम्‍मत हो जाये, इसकी चिंता करेंगे. जहां तक आपने उन्‍नयन का कहा है तो यह बात सही है कि पिछले कई वर्षों से उन्‍नयन का काम सांदीपनि विद्यालय का कांसेप्‍ट आने के कारण रोक दिया गया था. लेकिन अब हम लोगों ने पुन: क्‍योंकि उस स्‍तर के इतनी संख्‍या में विद्यालय एक साथ नहीं बन सकते हैं और बच्‍चों को उन विद्यालयों  के इंतजार में अपना स्‍थानीय स्‍तर पर हाई स्‍कूल और हायर सेकेण्‍डरी पढ़ने के लिये दूरस्‍थ के क्षेत्र में जाना पड़े, इस बात को सरकार ने संज्ञान में लिया है, विभाग ने संज्ञान में लिया है और हम लोग मापदण्‍ड अनुसार सांदीपनि का केचमेंट एरिया छोड़कर जो मापदण्‍ड पूरे करते हैं, जहां दर संख्‍या प्रापर है वहां हाई स्‍कूल बनाना और हाई स्‍कूल से हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल बनाना, उसकी तैयारी विभाग ने कर ली है और आपके यदि कोई प्रस्‍ताव होंगे और मापदण्‍डों को पूरा कर रहे होंगे तो मैं आपको आश्‍वस्‍त करता हूं कि उनको शामिल किया जायेगा.

          श्री दिनेश राय 'मुनमुन' - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सांदीपनि स्‍कूल हमारे सिवनी...

          अध्‍यक्ष महोदय- दिनेश जी, अब काफी हो गया है. आपने ही कहा कि मंत्री जी दूरदृष्टि वाले हैं तो उनकी दृष्टि दूर तक जा रही है तो कुछ फिर कुछ बचेगा नहीं.

          श्री दिनेश राय 'मुनमुन' - अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी जांच करा लें और आप भवनों का उन्‍नयन कब तक कर देंगे. अभी विभाग ने जो गलत जानकारी दी है, बस उसके लिये निवेदन है.

 

12.28 बजे

स्‍वागत उल्‍लेख

श्री कांतिलाल भूरिया,पूर्व केन्‍द्रीय मंत्री

          संसदीय कार्य मंत्री( श्री कैलाश विजयवर्गीय) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूर्व केन्‍द्रीय मंत्री श्री कांतिलाल भूरिया जी दर्शक दीर्घा में उपस्थित हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय- पूर्व केन्‍द्रीय मंत्री श्री कांतिलाल भूरिया जी दीर्घा में उपस्थित हैं. सदन की ओर से उनका स्‍वागत.

उप स्वास्थ्य केन्द्रों के भवनों का निर्माण

[लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा]

5. ( *क्र. 1000 ) श्री मोहन सिंह राठौर : क्या उप मुख्‍यमंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मध्यप्रदेश द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में उप स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन निर्माण हेतु प्रशासकीय स्वीकृतियां जारी की गई थी? यदि हाँ, तो ग्वालियर जिले में कितने भवनों की प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी की गई? आदेशों की प्रति उपलब्ध करायें। (ख) प्रश्‍नांश '''' में उल्लेखित उप स्वास्थ्य केन्द्र के लिए जारी प्रशासकीय स्वीकृति‍ अनुसार भितरवार विधानसभा क्षेत्र में कितने-कितने उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र स्‍वीकृत किये गये? कितनों का निर्माण कार्य प्रारम्‍भ कराया गया है? भवनों की अद्यतन स्थिति क्‍या है? भवनवार जानकारी दें। (ग) प्रश्‍नांश '''' में स्वीकृत भवनों के निर्माण के टेण्डर प्रदेश मुख्यालय से कराये गये हैं? यदि हाँ, तो क्यों? जिला स्तर पर यदि बजट दिया गया है तो टेंण्डर प्रक्रिया जिला स्तर से क्यों नहीं की गई? स्‍पष्‍ट करें। (घ) क्या भितरवार विधानसभा क्षेत्र में निर्माणाधीन भवनों में उपयोग किया जा रहे मटेरियल की गुणवत्ता निम्न स्तर की है? क्या भवनों में लग रहे मटेरियल की गुणवत्ता की जांच की गई है एवं किसके द्वारा? यदि हाँ, तो भवनवार जानकारी दें। यदि नहीं, तो क्यों? क्या सभी निर्माणाधीन भवनों की तकनीकी जांच कराई जायेगी?

उप मुख्‍यमंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। ग्वालियर जिले में 35 उप स्वास्थ्य केन्द्रों भवन के निर्माण हेतु जारी प्रशासकीय स्वीकृतियों की आदेश प्रति की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) प्रश्‍नांश '' में उल्लेखित भितरवार विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत 17 उप स्वास्थ्य केन्द्र भवन स्वीकृत किये गये हैं, जिसमें से 10 उप स्वास्थ्य केन्द्र भवनों का कार्य प्रारंभ होकर 05 भवन पूर्ण हो चुके हैं, 05 भवन प्रगतिरत हैं, 04 भवनों का कार्य अप्रारंभ है एवं शेष 03 भवनों की प्रशासकीय स्वीकृति निरस्त की गई। भवनवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जी नहीं। जिला स्तर पर जिला स्वास्थ्य समिति निर्माण कार्यों हेतु अधिकृत नहीं होने के कारण प्रक्रिया संभागीय कार्यपालन यंत्री द्वारा की गई। (घ) जी नहीं। जी हाँ, भवनों में लगे मटेरियल की जाँच निर्धारित प्रक्रिया अनुसार शासकीय लैब एवं शासन से मान्यता प्राप्त एन.ए.बी.एल. लैब से कराई गई है। मटेरियल की गुणवत्ता की जाँच की भवनवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार। जी नहीं।

          श्री मोहन सिंह राठौर- प्रश्‍न क्रमांक 1000 है.

           श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल- उत्‍तर पटल पर रखा है.

          अध्‍यक्ष महोदय- माननीय सदस्य पूरक प्रश्‍न करें.

          श्री मोहन सिंह राठौर- अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं अपनी ओर से और क्षेत्र की जनता की ओर से प्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी, उप मुख्‍यमंत्री माननीय राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी को धन्‍यवाद देता हूं कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में 17 उप-स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों को भवन निर्माण की स्‍वीकृति देकर, क्षेत्र की स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में विस्‍तार किया गया. भारतीय जनता पार्टी की सरकार स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में अनुकरणीय पहल का कार्य कर रही है. इसके लिये मैं धन्‍यवाद देता हूं और अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि जिन चार उप-स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र मोहना, मोहना-2,मोहना-3 और बरई कि जो प्रशासकीय स्‍वीकृति निरस्‍त कर दी गयी है उनके स्‍थान पर उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र देवरीकला, भरतरी, मेहगांव की स्‍वीकृति जारी की जाये. इसके साथ ही जिन भवनों का कार्य अभी वर्तमान में प्रारंभ नहीं हुआ है, उन्‍हें कब तक प्रारंभ किया जायेगा, अपूर्ण भवन गड़ाजर, मैना, पुरी, चैत और लखनपुरा में कब तक कार्य पूर्ण किये जायेंगे. मेरे विधान सभा क्षेत्र के स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र मोहना की बाउंड्रीवाल के लिये 28 लाख 16 हजार रूपये और स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र भीतरवार की बाउंड्रीवाल के लिये 18 लाख सोलह हजार रूपये के प्रस्‍ताव संचाचनायल में लंबित हैं, उन्‍हें कब तक स्‍वीकृत किया जायेगा.

                                                                                             

श्री राजेन्द्र शुक्ल - अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय विधायक जी को इस बात के लिए बधाई देता हूं कि एक जो अड़चन थी तिलजियापुरा में फारेस्ट लैंड की एनओसी नहीं थी, दो दिन पहले उसकी एनओसी प्राप्त हो गई है तो उसका भूमि पूजन विधायक जी जल्दी से जल्दी डेट तय करके कर देंगे तो वह काम शुरू हो जाएगा और जाखौदा में भी भूमि पूजन का इंतजार हो रहा है. माननीय विधायक जी उसका भूमि पूजन कर दें. तत्काल वह काम भी शुरू हो जाएगा. जो काम प्रगतिरत् हैं, वह कोई फरवरी में, अप्रैल में, मार्च में और कोई मई में, ये जो 5 काम प्रगतिरत् हैं, वह पूरे हो जाएंगे, उसका लोकार्पण विधायक जी से कराया जाएगा, बाकी 5 काम पूरे हो गये हैं और जो काम निरस्त हुए हैं उसकी जगह जो स्वीकृत करने के लिए उन्होंने नये प्रस्ताव दिये हैं उन पर विचार करके गुणदोष के आधार पर उनकी स्वीकृति की कार्यवाही की जाएगी.

श्री मोहन सिंह राठौर - अध्यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र की कुछ महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं. पूरक प्रश्न के माध्यम से आपका संरक्षण चाहता हूं. मोहना स्वास्थ्य केन्द्र में महिला डॉक्टर का पद काफी लम्बे समय से रिक्त है. 70 कि.मी. दूर ग्वालियर इलाज के लिए जाना पड़ता है. महिला डॉक्टर की वहां पर पदस्थापना की जाय.  मेरे विधान सभा क्षेत्र के मोहना सीएचसी को सिविल हास्पिटल, भितरवार सीएचसी को सिविल हास्पिटल, बरई पीएचसी को सीएचसी में, आंतरी पीएचसी को सीएचसी में, करैया एसएससी को पीएचसी में, ईंटमा एसएससी को पीएचसी में, घाटीगांव एसएससी को पीएचसी में तथा भितरवार विधान सभा क्षेत्र के स्वास्थ्य केन्द्र में जो आउटसोर्स से कर्मचारी नियुक्त किये गये हैं. उन्हें आउटसोर्स की एजेंसी द्वारा बिना मापदंड के मनमाने आर्थिक लाभ लेकर भ्रष्ट तरीके से नियुक्ति दी जा रही है. संरक्षण देने वाले सीएमएचओ के खिलाफ क्या कार्यवाही करेंगे और कोई मापदंड निर्धारित करेंगे, जिससे सहरिया समाज के या गरीब, शोषित, पीड़ित, उपेक्षित वर्गों के जो युवा पढ़े-लिखे हैं उनको भी अवसर मिले और स्थानीय के बजाय बाहर के लोगों को जो नियुक्तियां दी जा रही हैं, उन पर प्रतिबंध लगे.

श्री राजेन्द्र शुक्ल - अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी के साथ बैठना पड़ेगा क्योंकि बहुत लम्बी सूची है और यदि मापदंडों का कहीं उल्लंघन हुआ है तो उस पर चर्चा करके और जो जरूरी कार्यवाही होगी, वह भी कर देंगे.

श्री मोहन सिंह राठौर - अध्यक्ष महोदय, माननीय उप मुख्यमंत्री जी ने मेरे क्षेत्र में स्वास्थ्य के क्षेत्र में विकास के बहुत काम किये हैं. मैं उन्हें बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं और माननीय मंत्री जी से जब मुझे समय मिलेगा, मैं चर्चा करूंगा.

संविलियन संबंधी कार्यवाही

[स्कूल शिक्षा]

6. ( *क्र. 1264 ) श्री कुँवर सिंह टेकाम : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या श्री शिवनारायण सिंह सेवा निवृत्त प्राचार्य, शासनाधीन संस्था बहुउद्देशीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रामपुर नैकिन, जिला-सीधी (म.प्र.) की प्रथम नियुक्ति दिनांक 01.07.1998 को हुई थी? परन्तु उनका संविलियन आज दिनांक तक क्यों नहीं किया गया? जानकारी उपलब्ध करायें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में श्री शिवनारायण सिंह के संविलियन के संबंध में अभी तक कार्यवाही विभाग में प्रचलित है? यदि संविलियन की कार्यवाही की जायेगी तो कब तक? संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करायें। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में श्री शिवनारायण सिंह के संविलियन के प्रकरण में मध्यप्रदेश शासन व विभागीय मंत्री का भी अनुमोदन हो चुका है, परन्तु अभी तक इनके प्रकरण में कोई उचित कार्यवाही नहीं की गई है? यदि नहीं, तो क्यों जानकारी उपलब्ध करायें। (घ) प्रश्‍नांश (ग) के संदर्भ में क्‍या श्री शिवनारायण सिंह, सेवानिवृत्त प्राचार्य की फाइल शिक्षा विभाग के अधीन मंत्रालय में लम्बित है, जबकि इनके साथी समस्त कर्मचारियों का संविलियन किया जा चुका है? यदि हाँ, तो जानकारी उपलब्ध करायें।

स्कूल शिक्षा मंत्री ( श्री उदय प्रताप सिंह ) : (क) जी हाँ, दिनांक 01.07.1998 को शिवनारायण सिंह की नियुक्ति अशासकीय विद्यालय बहुउद्देशीय कन्या उ.मा.वि. रामपुर नैकिन, जिला-सीधी में संस्था द्वारा की गई थी। (ख) से (घ) उत्तरांश (क) के प्रकाश में नियमानुसार कार्यवाही प्रचलित है।

 

 

श्री कुँवर सिंह टेकाम - अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 1264 है.

श्री उदय प्रताप सिंह - अध्यक्ष महोदय, उत्तर सभा पटल पर रखा है.

श्री कुँवर सिंह टेकाम - अध्यक्ष महोदय, श्री शिवनारायण सिंह सेवानिवृत्त प्राचार्य हैं, इनकी संविलियन की कार्यवाही के लिए प्रकरण यहां विभाग में लंबित है. माननीय मंत्री जी ने बताया है कि नियमानुसार कार्यवाही प्रचलित है. मैं यह जानना चाहता हूं कि कब तक इनके संविलियन की कार्यवाही की जाएगी? इसकी समय-सीमा बता दें.

श्री उदय प्रताप सिंह - अध्यक्ष महोदय, यह अशासकीय संस्था बहुउद्देशीय कन्या उ.मा.वि. रामपुर जिला सीधी की है. वर्ष 2000 में इसे शासनाधीन किया गया था. इस विद्यालय में प्राचार्य सहित 21 पद स्वीकृत किये गये थे और श्री शिवनारायण सिंह तत्समय प्राचार्य के रूप में कार्यरत् थे. परन्तु बीएड की योग्यता धारित नहीं करते थे, इस कारण उन्हें अस्थायी प्राचार्य के रूप में उस समय तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी सीधी ने उनको काम करने के लिए आदेशित कर दिया था. संबंधित के द्वारा वर्ष 2012 में बीएड की गई. बीएड करने के पश्चात् वर्ष 2019 में नियमितीकरण का प्रस्ताव संचालनालय को प्रेषित किया गया है. चूंकि श्री शिवनारायण सिंह वर्ष 2000 से योग्यता न होने के कारण अस्थायी प्राचार्य के रूप में कार्य कर रहे थे, इसलिए उस अवधि के निराकरण के लिए प्रकरण विचाराधीन है और मुझे लगता है कि जैसे ही सामान्य प्रशासन विभाग से उसका कुछ निराकरण होगा तो तत्संबंध में माननीय सदस्य को हम जानकारी उपलब्ध करा देंगे.

अध्यक्ष महोदय - कुंवर सिंह जी और कुछ पूछना चाहते हैं.

श्री कुँवर सिंह टेकाम - अध्यक्ष महोदय, बहुत बहुत धन्यवाद, लेकिन इसमें केवल इतना ही है कि जब से उन्होंने योग्यता प्राप्त कर ली है तो उस समय से उनके संविलियन की कार्यवाही पूर्ण की जानी चाहिए, इसको कब तक पूरा कर दिया जाएगा?

श्री उदय प्रताप सिंह - अध्यक्ष महोदय, चूंकि यह संविलियन से जुड़ा हुआ मामला है और दो विभागों को इसमें निर्णय करना है शिक्षा विभाग और साथ ही में इस तरह की प्रक्रिया में  सामान्य प्रशासन विभाग का भी इनवॉल्वमेंट रहता है तो माननीय सदस्य को इसकी व्यवस्थित जानकारी देंगे और संबंधित के विरुद्ध किसी तरह का कोई अन्याय नहीं होगा. इस बात को विभाग जरूर ध्यान में रखेगा और शीघ्र प्रकरण का निराकरण हो, इस बात की चिंता हम करेंगे.

            श्री अजय अर्जुन सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि यह मेरे क्षेत्र का मामला है. वर्ष 2019 में यह पात्र हो गए थे. वर्ष 2019 से 2026 हो गए, अभी भी दो विभागों के बीच में यदि संविलियन की कार्रवाई नहीं हो पायी, तो इसमें भी ध्‍यान रखा जाना चाहिए. मेरा आपके माध्‍यम से अनुरोध है कि माननीय मंत्री महोदय थोड़ा इस पर त्‍वरित कार्रवाई कराएं और उस व्‍यक्‍ति को रिटायर होने के पहले से कम से कम वह काम हो जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, क्‍या आप कुछ कहना चाहेंगे ?

          श्री उदय प्रताप सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने पूर्व में भी कहा है. इसको प्राथमिकता के आधार पर इसका निराकरण करेंगे.

         

11.36 बजे                                       अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

       

     न्‍यायालय के समक्ष विचाराधीन विषय के संबंध में प्रश्‍न न करने विषयक.

 

 

          अध्‍यक्ष महोदय -- मध्‍यप्रदेश विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन संबंधी नियमावली के नियम 36 (19)  के अंतर्गत "उसमें साधारणतया ऐसे विषयों के बारे में नहीं पूछा जाएगा, जो न्‍यायायिक या अर्द्धन्‍यायायिक कृत्‍य करने वाले किसी सांविधिक न्‍यायाधिकरण या सांविधिक प्राधिकारी के या किसी विषय की जांच या अनुसंधान करने के लिये नियुक्‍ति किसी आयोग या जांच न्‍यायालय के सामने विचाराधीन हो". इस सबके बावजूद भी मैंने चर्चा के लिए सदन में आश्‍वासन दिया है और मैं उसको कराऊंगा.

          मेरा अनुरोध है कि न्‍यायालय और आयोग की स्‍थिति को दृष्‍टिगत रखते हुए संक्षिप्‍त में प्रश्‍न करें और अनुपूरक प्रस्‍तावना के रूप में अनुपूरक प्रश्‍न को प्रस्‍तावना के रूप में नहीं होना चाहिए, न ही उसके द्वारा कोई निवेदन करना चाहिए अथवा सुझाव देना चाहिए. अनुपूरक प्रश्‍नों द्वारा जो जानकारी चाहिए, वह पूछना चाहिए, न की स्‍वयं शासन को कोई जानकारी देना चाहिए. इसमें कोशिश यह करनी चाहिए कि प्रश्‍नकर्ता की ओर से भी ऐसा कोई विषय न आए, जिससे न्‍यायालय के सामने जो विषय विचाराधीन है, वह प्रभावित हो और सरकार की तरफ से भी उत्‍तर में ऐसी बात नहीं आना चाहिए, जिससे जांच प्रभावित हो.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन संबंधी नियमावली के नियम 55 (7) में इसका उल्‍लेख भी है और इसके पहले 3 मामले ऐसे आए हैं जब प्रश्‍न भी लगे हैं या किसी सदस्‍य ने उठाया है, तो आसंदी ने बाकायदा रूलिंग दी है. पूर्व विधानसभा अध्‍यक्ष, माननीय राजेन्‍द्र प्रसाद शुक्‍ल जी ने पहली बार रूलिंग दी थी, जब यूनियन कार्बाइड का मामला आया था. उसके बाद इंदौर के मामले में यह बात आयी थी. दमोह की एक माननीय सदस्‍या थीं, उनके पति के बारे में बात आयी थी, तो वह भी ज्‍यूडिशियल मामला था, तो मुझे लगता है कि जब कभी इंक्‍वायरी हो, तो मध्‍यप्रदेश विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य-संचालन संबंधी नियमावली के नियम 55 (7) के तहत यह बहुत क्‍लियर है कि अगर कोई बात पटल पर आयेगी, तो कोई जवाब देने के लिए फिर वह बात आयेगी, तो कहीं न कहीं क्‍लेश होगा. इस पर मुझे लगता है कि पिछली परम्‍पराएं ऐसी हैं कि जहां पर स्‍पष्‍ट रोका गया था कि इस पर आगे न बढे़ं, जो इस सदन की परम्‍परा है क्‍योंकि मैंने इसे परसों पढ़ा था. मध्‍यप्रदेश विधानसभा के प्रक्रिया तथा कार्य- संचालन संबंधी नियमावली के नियम 52 के तहत भी और नियम 55 (7) के तहत भी पढ़ा है. अगर माननीय सदस्‍य हैं तो आपसे मिलकर, माननीय मंत्री जी के साथ बैठ लें, यह ज्‍यादा बेहतर परम्‍परा होगी, ऐसा मुझे लगता है. आपसे मेरा यही निवेदन है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- कुछ मामलों में मैंने नियमों को और परम्‍पराओं को देखा है. माननीय डॉ. सीतासरन जी आप कुछ कहना चाहते हैं ?

          डॉ.सीतासरन शर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं उस पर आपका ध्‍यान दिलाना चाहता हॅूं कि इसमें माननीय नेता प्रतिपक्ष जी ने जो प्रश्‍न पूछे हैं वह माननीय उच्‍च न्‍यायालय के टर्म्‍स ऑफ रिफरेंस में हैं. यदि उन पर कोई सवाल-जवाब होगा, तो निश्‍चित ही उन टर्म्‍स ऑफ रिफरेंस पर भी असर पडे़गा. इसलिए माननीय प्रहलाद सिंह पटेल जी ने जो कहा है यद्यपि आपने अनुमति दी है और उसमें नियम में भी एक तथापि अध्‍यक्ष दे सकते हैं. किन्‍तु मेरा अनुरोध है क्‍योंकि टर्म्‍स ऑफ रिफरेंस और उनके क्‍वेश्‍चंस के सारे विषय एक से हैं, तो ऐसा न हो, कि उसका कोई प्रतिकूल प्रभाव पडे़, यह मेरा आपसे अनुरोध है इसलिए अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, नहीं. आपकी बात ठीक है, मैंने नियमों को भी देखा है, पुराने दृष्‍टान्‍तों को भी देखा है,  परम्‍पराओं को भी देखा है और उसके बाद भी हम सब लोगों को यह निश्‍चित रूप से चिंता करनी चाहिए कि जो माननीय न्‍यायालय की मर्यादा है, वह हमारे किसी भी वक्‍तव्‍य से प्रभावित न हो. सत्‍ता पक्ष भी, प्रतिपक्ष भी और माननीय सदस्‍य भी इस बात का ध्‍यान रखें.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदन होता ही इसलिए है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक बात है.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बाकी लोकहित की बातों में कोई विरोध नहीं है. न सरकार का है और न ही हम लोगों का कोई विरोध है. मुझे लगता है कि लोकहित की बातें आनी चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न क्रमांक 7, श्री उमंग सिंघार जी.

 

11.39 बजे                       तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर (क्रमश:)

 

          इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में जलजनित बीमारी से प्रकोप की घटना

         [लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा]

7. ( *क्र. 1145 ) श्री उमंग सिंघार : क्या उप मुख्‍यमंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विभाग को इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में जलजनित बीमारी के प्रकोप की जानकारी थी? यदि हाँ, तो विभाग को इस घटना की पहली सूचना किस तिथि को और किस माध्यम से प्राप्त हुई? (ख) दिनांक 21 दिसम्बर, 2025 से प्रश्‍न दिनांक तक उक्त प्रकोप में कुल कितनी मृत्यु हुई है? कुल कितने व्यक्ति अस्पताल में भर्ती किये गये तथा वर्तमान में कितने मरीज अब भी उपचाराधीन है? (ग) क्या उक्त अवधि में हो रही मौतों एवं बीमारियों के कारणों का पता लगाने के लिए प्रयोगशाला जांच करायी गई थी? यदि हाँ, तो जांच में कौन-कौन से जलजनित रोगों जैसे हैजा, कॉलेरा, टाइफॉयड एवं डायरिया आदि की पुष्टि या अस्वीकृति हुई? (घ) क्या विभाग द्वारा इस प्रकरण के संबंध में इंदौर नगर निगम से घटना के कारणों, परिस्थितियों एवं क्रम पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी? यदि हाँ, तो रिपोर्ट कब मांगी गई एवं कब प्राप्त हुई तथा उसके मुख्य निष्कर्ष क्या है?

उप मुख्‍यमंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) स्वास्थ्य विभाग, इंदौर को भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई जलजनित बीमारी के आउटब्रेक की जानकारी दिनांक 29.12.2025 को U.P.H.C. भागीरथपुरा के चिकित्सा अधिकारी के माध्यम से आई.डी.एस.पी. शाखा को प्राप्त हुई। (ख) दिनांक 21.12.2025 से उत्तर दिनांक तक उक्त एक्‍यूट डायरियल डिजीज के कारण कुल 20 मृत्यु की अधिकारिक पुष्टि हुई है एवं कुल 459 व्यक्ति अस्पताल में भर्ती किये गये तथा वर्तमान में उत्तर दिनांक तक 04 मरीज उपचाराधीन हैं। (ग) हाँ। उक्त अवधि में हो रही बीमारियों एवं मृत्यु के संभावित कारणों की पुष्टि हेतु NIRBI-Kolkata, MGM Microbiology Lab & DPHL- Indore प्रयोगशाला इंदौर द्वारा जल नमूनों एवं रोगियों के Stool नमूनों की प्रयोगशाला में जाँच कराई गई थी। प्रयोगशाला से प्राप्त जाँच निष्कर्षों के अनुसार कॉलेरा एवं E.coli की रिपोर्ट प्राप्त हुई है।(घ) प्रश्‍न अनुसार माननीय म.प्र. उच्‍च न्‍यायालय खंडपीठ, इंदौर द्वारा जनहित याचिका में पारित आदेश अनुसार सेवानिवृत्‍त उच्‍च न्‍यायालय के न्‍यायाधीश द्वारा प्रकरण की जांच की जाना है। अत: तत्‍संबंध में कोई जानकारी नगर निगम से अपेक्षित नहीं है।

            श्री उमंग सिंघारमाननीय अध्यक्ष महोदय, 47 मिनट श्वान की चर्चा में हो गये. इंसान अगर शांत हो गये हैं उनके ऊपर कोई बात नहीं करना चाहता, यह बड़ा आश्चर्य हो रहा है.

          अध्यक्ष महोदयनहीं उमंग जी ऐसा मत करिये. माननीय प्रहलाद जी ने कहा है कि विषय से कोई विरोध नहीं है. उन्होंने अपनी बात रखी है और नियमों के तहत रखी है.

          श्री उमंग सिंघारमाननीय अध्यक्ष महोदय, अब चूंकि माननीय शर्मा जी बड़े ही विद्वान हैं उन्होंने भी कहा है कि जो कोर्ट में चल रहे हैं वो ही प्रश्न हैं. कोर्ट में क्या अलग से केस चलेगा. वही रहेगा जो यहां पर चर्चा होगी, वही चलेगा. सामान्य कई बातें हैं मैं तो आपको लिस्ट दे दूंगा. व्यापम पर भी चर्चा हुई थी, ज्यूडिशियली इंक्वायरी भी हुई थी, फिर भी हुई थी. मंदसौर गोलीकाण्ड में भी हुई थी, फिर भी चर्चा हुई थी. आप देख लीजिये. मेरा आपसे कहना है कि मैं माननीय मंत्री जी से सीधे प्रश्न करना चाहता हूं कि किस तारीख से मृत्यु होने की शुरूआत हुई. पहला सवाल और उन्हें कितनी राशि आर्थिक सहायता दी गई ?

            श्री राजेन्द्र शुक्लमाननीय अध्यक्ष महोदय, 29.12.25 को सबसे पहले जो अर्बन पीएसी होती है भागीरथपुरा की वहां पर जब अचानक डायरिया के मरीजों की संख्या में एक अपेक्षा से ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई तो आईडीएफसी पर सबसे पहले रिपोर्टिंग हुई एंट्रीग्रेटेड डिसीजज सर्वलंग्स प्रोग्राम जो हमारा होता है स्टेट लेवल पर कि कहीं न कहीं कुछ न कुछ ज्यादा एक प्रकार की बीमारी की रिपोर्ट्स आ रही हैं. तो 21.12.25 से 29.12.25 के बीच में आम तौर पर जो भर्ती हुए, डायरिया जो एक ऐसी बीमारी है जो बिना महामारी के भी आम तौर पर लोगों में हो जाती है. लेकिन 29.12.25 को अचानक जब संख्या बढ़ी तब यह संज्ञान में आया उसमें सारी मशीनरी सक्रिय हुई फिर सारे सेम्पल कलेक्शन से लेकर सारी चीजें हुई हैं जो आपका सवाल है कि पहली डेथ कब हुई है. 21 से 29 के बीच में पहली डेथ हुई है. 29 के बाद में जब संख्या बढ़ी है तो फिर आवश्यक जो कार्यवाही है. एक समन्वित टीम बनाकर सारे प्रिकाशनरी मेजर्स लेने के बाद शुरू हुए.

          श्री उमंग सिंघारमाननीय अध्यक्ष महोदय,दूसरा सवाल था कि आर्थिक सहायता कितनी दी गई और उसमें कितने लोगों की मृत्यु हुई ?

          श्री राजेन्द्र शुक्लमाननीय अध्यक्ष महोदय,जब यह प्रश्न किया गया था तब 20 लोगों की मृत्यु हुई थी, लेकिन 2 लोगों की मृत्यु और हुई है अब उसकी संख्या 22 हो गई है. 2 लाख रूपये प्रति मृत्यु के हिसाब से 44 लाख रूपये जो अधिकारिक आंकड़े हैं मैं उसकी बात कर रहा हूं कि 22 को 2 लाख रूपये प्रति मृत्यु के हिसाब से 44 लाख रूपये मुआवजा राहत दी गई है.

          श्री उमंग सिंघारमाननीय अध्यक्ष महोदय,सरकार का नियम है कि अगर कोई सांप काटता है या बिजली आपदा घटती है तो 4 लाख रूपये मुआवजा दिया जाता है, यह सरकार का नियम है. हम मृत्यु के अंदर उनको 2 लाख रूपये दे रहे हैं. वह भी सरकार की गैर जवाबदारी के कारण वहां पर मृत्यु हुई है. एक तो मैं समझता हूं कि 2 लाख रूपये देना न्यायोचित नहीं है. दूसरा हम लोगों ने हमारी तरफ से 50-50 हजार रूपये रूपये दिये हैं. क्या उनको 4 लाख रूपये देंगे ? आप मृत्यु 22 बता रहे हैं पूरी भागीरथपुरा को पता है, पूरे इन्दौर को पता है कि 35 से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो चुकी है. क्या सरकार सबको मुआवजा 4 लाख रूपये के हिसाब से देगी, यह बतायें ?

          डॉ. मोहन यादवमाननीय अध्यक्ष महोदय, यह ऐसा विषय है जिस विषय पर नेता प्रतिपक्ष जी जैसे माननीय प्रहलाद जी ने तथा माननीय सीतासरन जी ने बताया है कि वैसे तो इस विषय पर चर्चा नहीं करायी जानी थी, लेकिन यह बात भी सही है कि हमने तत्परतापूर्वक एक ऐसे विषय पर जिस विषय के बारे में प्रश्न आया है. हमने हर तरह से जो प्रशासनिक दृष्टि से हो सकता है संवेदनशील तरीके से उसका समाधान करने का भी प्रयास किया है. चूंकि यह ऐसा घटनाक्रम था जिस घटनाक्रम में पी.एम. पर भी प्रश्न होता था कि पी.एम.किसका करायें ? इतनी बड़ी आबादी में रोज नार्मल डेथ हो रही थी उस नार्मल डेथ के मसले पर भी जिस ढंग का विषय आया तो उस विषय के कारण से घटना के बारे में तो प्रशासनिक दृष्टि से आईएएस अधिकारी को निलंबित किया है. हमारी तो संवेदनशीलता है ही. ऐसे में आपने कहा कि मुआवजा 2 की जगह पर 4 लाख रूपये दो, तो हम चार क्या 5 लाख रूपये देने को तैयार हैं, इसमें पैसा का सवाल नहीं है. हमारी संवेदनशीलता यह है कि ऐसे मसले पर हमारे साथ पक्ष-विपक्ष न होते हुए सीधे सीधे काम की बात हो तो ज्यादा अच्छा रहेगा, मुझे ऐसा लगता है.

श्री उमंग सिंघार मुख्‍यमंत्री जी, आप दो दें या चार दें या पांच दें लेकिन संवेदनशीलता के साथ बोलना चाहिए कि ठीक है हम आपके प्रस्‍ताव स्‍वीकृत करते हैं. कोई मेरे घर में तो पैसे नहीं जा रहे हैं, उन पीडि़त परिवार के यहां जा रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय मुख्‍यमंत्री जी, ने आपकी भावना व्‍यक्‍त कर दी है.

श्री उमंग सिंघार ठीक है, मैं उनकी बात का सम्‍मान करता हूं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अधिकारियों को सस्‍पेंड करने के अलावा क्‍या मंत्री की जवाबदारी नहीं है, इसके अंदर, क्‍या मुख्‍यमंत्री जी वहां के प्रभारी हैं, तो उनकी जवाबदारी नहीं है. क्‍या वहां पर महापौर की जवाबदारी नहीं है. नैतिकता के आधार पर सरकार ने इन लोगों से इस्‍तीफे क्‍यों नहीं मांगें. मैं समझता हूं कि इस पर सीधे-सीधे जवाबदारी एक मंत्री की है, उस मंत्री से इस्‍तीफा ही नहीं मांगा.

अध्‍यक्ष महोदय बैठिए.

श्री उमंग सिंघार क्‍या, सरकार सिर्फ अधिकारियों पर कार्यवाही करेगी, जो सरकार चला रहे हैं, उनकी जवाबदारी नहीं है, मंत्रियों और मुख्‍यमंत्री की, वे क्‍या करेंगे यह बताए सरकार?

अध्‍यक्ष महोदय मंत्री जी, कुछ कहना चाहते हैं.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब इस तरह के सवालों के जवाब देना तो मैं उचित नहीं समझता हूं. क्‍योंकि जिम्‍मेदार सरकार पर बैठे हुए लोगों की यह जिम्‍मेदारी है कि इस प्रकार की यदि घटना होती है तो, तत्‍काल राहत, बचाव और सुरक्षा के वे सारे काम करें न कि इस प्रकार से मांगों को पूरा करें. और आपने देखा होगा कि जब से यह घटना हुई है, ,तत्‍काल मुख्‍यमंत्री जी वहां पहुंचे. हमारे जो वहां के वरिष्‍ठ मंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री आदरणीय कैलाश विजय वर्गीय जी 20 गलियों में लगातार सुबह से शाम तक जो वाटर सप्‍लाई हो रही थी, उसको डिस्‍कनेक्‍ट करना, उस समय तक रिपोर्ट नहीं आई थी, लेकिन इस प्रकार की महामारी फैल रही है, इस प्रकार के लक्षण है, उसको ध्‍यान में रखते हुए सुबह से लेकर रात तक, लोगों को राहत देना, 459 लोगों को और वहीं पर तीन दिन रहना और अपनी जिम्‍मेदारी को जिस प्रकार से निर्वहन किया उन्‍होंने उस पर आपको तो नैतिक रूप से ...

श्री उमंग सिंघार माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 29 तारीख को सरकार जाग रही, 21 तारीख से मृत्‍यु हुई, आपने खुद ने स्‍वीकार किया. आठ दिन के बाद वहां पर आप कार सेवा कर रहे.

अध्‍यक्ष महोदय मुझे लगता है कि प्रश्‍न की मर्यादा पूरी हो गई है. (..व्‍यवधान)

श्री उमंग सिंघार माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन जवाबदारी किसकी है, क्‍या सिर्फ अधिकारियों की जवाबदारी है, क्‍या नैतिकता के आधार पर मंत्रियों की जवाबदारी नहीं है, पहले भी कफ सीरप का हो चुका, 25 बच्‍चे मर गए छिंदवाड़ा में 35 यहां मर गए(..व्‍यवधान) नैतिकता की जवाबदारी नहीं है इन लोगों की. (..व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय कृपया बैठ जाइए. श्री राजेन्‍द्र भारती जी.

11.47 बजे                                    गर्भगृह में प्रवेश   

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा गर्भगृह में प्रवेश एवं नारेबाजी)

 

इंदौर के भागीरथपुरा में हुई घटना को लेकर मंत्रियों के इस्‍तीफे की मांग करते हुए इंडियन नेशनल कांग्रेस के अनेक सदस्‍य गण गर्भगृह में आए और नारेबाजी करते रहे.

 

          श्री उमंग सिंघार माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनकी जवाबदारी है, मंत्री कैलाश विजय वर्गीय की जवाबदारी है, माननीय राजेन्‍द्र शुक्‍ला जी की जवाबदारी है कफ सीरप में(..व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय बैठ जाइए, प्रहलाद पटेल जी कुछ कह रहे हैं. (..व्‍यवधान)

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद पटेल) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस बात की आशंका थी, वही बातें सदन के भीतर आ रही है और दूसरी बात नैतिकता की बात है तो यूनियन कार्बाइड को भी स्‍मरण करें. ये बहस में, मैं नहीं पड़ना चाहता, लेकिन यह जो तरीका है..... यही बात जिस बात को करना चाहते थे .... (..व्‍यवधान)

          श्री जगदीश देवड़ा यूनियन काबाईड का मामला भी था, अरे यूनियन काबाईड का मामला भी था,उसमें नैतिकता कहां चली गई थी.

          श्री उमंग सिंघार इस्‍तीफा होना चाहिए (..व्‍यवधान) मंत्रियों के इस्‍तीफा क्‍यों नहीं हो रहे, अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या इनकी नैतिकता नहीं बनती, अधिकारियों पर डाल दी जाती है हर बात  (..व्‍यवधान)

          श्री जगदीश देवड़ा यूनियन काबाईड के समय कहां चले गये थे, यूनियन काबाईड का मामला था.

          अध्‍यक्ष महोदय कृपया अपने स्‍थान पर बैठ जाइए.. (..व्‍यवधान)

          प्रश्‍न संख्‍या 8- (अनुपस्थित)

          श्री जगदीश देवड़ा - नैतिकता की बात कर रहे हैं, यूनियन काबाईड का मामला था, उस समय नैतिकता कहां गई थी.

          श्री रामेश्‍वर शर्मा माननीय अध्‍यक्ष महोदयअगर नैतिकता की बात है तो मेरे नैतिकता के चार प्रश्‍न कांग्रेस से है, कांग्रेस जवाब दे नैतिकता के मामले में, कांग्रेस जवाब दें. महाकाल के मंदिर में कांग्रेस के समय 34 लोग मारे गये, क्‍या आपके लोगों ने नैतिकता के आधार पर इस्‍तीफा दिया, बताईये? (..व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय कृपया अपने स्‍थान पर बैठ जाइए.. (..व्‍यवधान)

                (इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगणों द्वारा गर्भगृह में आकर नारे लगाये जाते रहे)

        श्री उमंग सिंघार -- प्रदेश में बड़ी-बड़ी घटनाएं हो गई हैं. ..(भारी व्‍यवधान)..

        अध्‍यक्ष महोदय-- (श्री उमंग सिंघार,नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा गर्भगृह में आकर नारे लगाये जाने पर) मेरा प्रतिपक्ष के सदस्‍यों से अनुरोध है, मेरा नेता प्रतिपक्ष से भी अनुरोध है कि प्रश्‍नकाल चल रहा है, वह प्रतिपक्ष के सदस्‍यों को अपने-अपने स्‍थान पर बैठने के लिये कहें..  ...(भारी व्‍यवधान)..

          श्री सचिन सुभाष चंद्र यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यहां इतने बड़े ...

(भारी व्‍यवधान).. उसके लिये कोई जिम्‍मेदारी तय नहीं होगी..(भारी व्‍यवधान)..

          श्री रामेश्‍वर शर्मा-- सिक्‍खों को जिंदा जला दिया गया, वह कौन सी नैतिकता थी...(भारी व्‍यवधान)..

          उपमुख्‍यमंत्री,वित्‍त(श्री जगदीश देवड़ा) -- अध्‍यक्ष महोदय, यूनियन काबाईड का मामला...(भारी व्‍यवधान)..

          श्री सचिन सुभाष चंद्र यादव -- निर्दोष लोगों की हत्‍या करने का काम किया गया है. ...(भारी व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय -- (इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर गर्भगृह में आकर नारे लगाये जाने पर)मेरा सभी से अनुरोध है कि प्रश्‍नकाल चल रहा है, प्रश्‍नकाल बहुत महत्‍वपूर्ण होता है और बहुत सारे महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न सदस्‍यों के होते हैं, वे महत्‍वपूर्ण विषय हैं. प्रश्‍नकाल को प्रभावित नहीं करना चाहिए, उक्‍त विषय के संबंध में नेता प्रतिपक्ष का प्रश्‍न था, उन्‍होंने अपने दो प्रश्‍न किये और सरकार ने उनका जवाब दिया है. प्रश्‍नकाल की मर्यादा का हम सभी पालन करें. मेरा प्रतिपक्ष के सदस्‍यों से अनुरोध है कि वह अपने-अपने स्‍थान पर पहुंच जाये....(व्‍यवधान)..

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम सरकार के जवाब से असंतुष्‍ट हैं, नैतिकता के आधार पर इस्‍तीफा होना चाहिए...(व्‍यवधान)..नगरीय प्रशासन मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय ...( भारी व्‍यवधान)..

          राज्‍यमंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा(श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) --हजारों सिक्‍खों का नरसंहार किया था. ...(व्‍यवधान)..यूनियन काबाईड के अपराधियों को भगाने का काम किया था, तब किसी भी कांग्रेस के नेता ने एक इस्‍तीफा नहीं दिया था. ...(भारी व्‍यवधान)..

          श्री सचिन सुभाष चंद्र यादव -- अध्‍यक्ष महोदय, इनकी गैर जिम्‍मेदारना हरकतों से, क्‍या भागीरथपुरा की जनता ...( भारी व्‍यवधान)..... क्‍या इनकी कोई जिम्‍मेदारी नहीं है, कोई नैतिकता नहीं है? इतना क्‍या कुर्सी का इनको मोह है.   .......( भारी व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को, प्रश्‍न करिये.

अनूपपुर में फर्जी पट्टे की जांच एवं कार्यवाही

[राजस्व]

9. ( *क्र. 1251 ) श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सभापति, स्वास्थ्य एवं महिला बाल विकास, जिला पंचायत, अनूपपुर द्वारा दिनांक 16.12.2025 को शिकायती पत्र जिला कलेक्टर, अनूपपुर को दिया गया था, जिसमें तहसील जैतहरी के ग्राम झांईताल के आराजी खसरा नंबर 1266, रकबा 6.66 हेक्टेयर, खसरा नंबर 88, रकबा 4 हेक्टेयर, खसरा नंबर 83/2, रकबा 4.69 एकड़ जो वर्ष 1958-59 में वन भूमि दर्ज है एवं ग्राम गोबरी के आराजी खसरा नंबर 146 एवं 163 के फर्जी पट्टे की जांच संबंधी था? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में शिकायती पत्र व तथ्य अनुसार भू-अधिकार संहिता (पट्टाधारक) के द्वारा वन भूमि पर किस आधार व पात्रतानुसार सक्षम अधिकारी द्वारा विधि व प्रक्रिया का पालन करते हुये पट्टा जारी किया गया? विवरण उपलब्ध करावें। (ग) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में पट्टाधारक द्वारा सेन्ट्रल बैंक, जैतहरी से ऋण व शासन से ऋण प्राप्त किया गया है? यदि हाँ, तो ऋण में उपयोगी दस्तावेजों की प्रमाणित छायाप्रति उपलब्ध करावें? (घ) प्रश्‍नांश (क) से संदर्भित शिकायत के आधार पर समस्त प्रकरणों की उच्च स्तरीय जांच करवा कर शासकीय आराजी से अतिक्रमण को मुक्त करा कर शासकीय दस्तावेज में कूटरचना करने वालों के विरूद्ध विभाग द्वारा नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? जांच उपरांत अतिक्रमण मुक्त हुई भूमि के दस्तावेज उपलब्ध करावें।

राजस्व मंत्री ( श्री करण सिंह वर्मा ) : (क) जी हाँ। (ख) शिकायती पत्र में उल्लेखित तथ्यों पर जांच की कार्यवाही अनुविभागीय अधिकारी जैतहरी स्तर पर प्रचलित है। (ग) जी नहीं। सेन्‍ट्रल बैंक, जैतहरी शाखा से ऋण प्राप्त नहीं किया गया है। (घ) संदर्भित शिकायत के संबंध में जांच हेतु अनुविभागीय अधिकारी जैतहरी एवं तहसीलदार जैतहरी को निर्देशित किया गया है। जांच की कार्यवाही प्रचलित है। तथ्यात्मक जांच प्रतिवेदन प्राप्त होने उपरांत गुण-दोषों के आधार पर नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी।

          श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो उत्‍तर दिया है, उससे हम संतुष्‍ट नहीं है. चूंकि इस तरीके से मध्‍यप्रदेश में खसरा और सभी ..(भारी व्‍यवधान)..... कोई भी व्‍यक्ति कहीं  से भी अपना खसरा निकालकर देख सकता है. ..(भारी व्‍यवधान)....

          श्री उमंग सिंघार -- मुख्‍यमंत्री जी नैतिकता के आधार पर इस्‍तीफा होना चाहिए. ..(भारी व्‍यवधान)....दोनों मंत्रियों का इस्‍तीफा, आप सरकार चलाने में सक्षम हो..(भारी व्‍यवधान)...

               (सत्‍ता पक्ष के सदस्‍यगण द्वारा भी गर्भ गृह में आकर नारेबाजी की जाने लगी)

          अध्‍यक्ष महोदय -- सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिये स्‍थगित की जाती है.

                         (11.52 बजे से 10 मिनट तक सदन की कार्यवाही स्‍थगित)

                                               

12.07 बजे                   विधान सभा की कार्यवाही पुन: समवेत हुई.

                                अध्‍यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुये.

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के अनेक माननीय सदस्‍यगण गर्भगृह में बैठकर नारे लगाते रहे).

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मृत्‍यु नहीं हत्‍या है और सिस्‍टम के कारण भागीरथपुरा के अंदर 35 लोगों की हत्‍या हुई हैं. यह सिस्‍टम के कारण हत्‍या हुई हैं. ..(व्‍यवधान).. इस पर नैतिकता के आधार पर सरकार के मंत्रियों को इस्‍तीफा देना चाहिये. ..(व्‍यवधान).. कफ सिरप में भी यह घटना घटी थी. ..(व्‍यवधान).. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह गंभीर मामला है. ..(व्‍यवधान).. यह हत्‍या है, नैतिकता के आधार पर मंत्रियों को इस्‍तीफा देना चाहिये.

..(व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय--  मेरा प्रतिपक्ष के सदस्‍यों से अनुरोध है कि प्रश्‍नकाल की मर्यादा को हमें समझना चाहिये. प्रश्‍नकाल में नेता प्रतिपक्ष का प्रश्‍न था, उन्‍होंने सप्‍लीमेंट्री किया, मंत्री जी ने जवाब दिया, मुख्‍यमंत्री जी ने इंटरवेनिंग किया. प्रश्‍नकाल की मर्यादा वहां पूर्ण होनी चाहिये थी. ..(व्‍यवधान)..

          दूसरा आज सदन में शून्‍यकाल की सूचनायें हैं, जनहित के ध्‍यानाकर्षण हैं, राज्‍यपाल जी के अभिभाषण पर चर्चा होना है. अनेक विषय जो सदस्‍यों के हैं और मध्‍यप्रदेश की जनता के जन कल्‍याण से संबंधित हैं, तो मेरा सभी से आग्रह है कि प्रतिपक्ष के मित्रों को जिद छोड़कर सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ने देना चाहिये और मर्यादाओं का पालन करना चाहिये. प्रश्‍नकाल के प्रति हम सब लोग सजग हैं और हमारी कोशिश यह होती है कि प्रश्‍नकाल कैसे भी प्रभावित न हो. इसलिये मेरा प्रतिपक्ष के सदस्‍यों से अनुरोध है कि सदन की कार्यवाही आगे बढ़ने दी जाये. ..(व्‍यवधान)..

          श्री उमंग सिंघार--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिस्‍टम के कारण हत्‍यायें हो गईं और मंत्री चुपचाप बैठे हैं ..(व्‍यवधान).. नैतिकता के आधार पर मंत्रियों को इस्‍तीफा देना चाहिये. ..(व्‍यवधान).. यह बार-बार हो रहा है और मंत्री जबावदारी नहीं लेना चाहते, अधिकारियों पर डाल देते हैं. ..(व्‍यवधान)..

          श्री रामेश्‍वर शर्मा--  अरे कम से कम कमलनाथ जी का तो ध्‍यान रखो, भारत सरकार में संसदीय मंत्री रहे हैं, उनका भी ख्‍याल नहीं किया जा रहा और गदर कर रहे हैं. पीछे बैठ जाओ भैया. ..(व्‍यवधान).. कम से कम कमलनाथ जी का तो ध्‍यान रखो, संसदीय परंपरा उनसे तो सीख लो थोड़ी सी. ..(व्‍यवधान)..

          श्री उमंग सिंघार--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदस्‍यों के माइक बार-बार बंद किये जाते हैं. ..(व्‍यवधान)..

 

12.09 बजे                                    शून्‍यकाल की सूचनायें

          अध्‍यक्ष महोदय--  निम्‍नलिखित माननीय सदस्‍यों द्वारा शून्‍यकाल की सूचनाएं क्रमश: सदन में पढ़ी हुई मानी जायेंगी:-

1.       इंजी. प्रदीप लारिया

2.       डॉ. सीतासरन शर्मा

3.       श्री राजन मण्‍डलोई

4.       श्री मोहन सिंह राठौर

5.       डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान

6.       श्री सुरेश राजे

7.       श्री विजयपाल सिंह

8.       श्री अभिजीत शाह

9.       श्री विवेक (विक्‍की) पटेल

10.     श्री अजय विश्‍नोई

          अध्‍यक्ष महोदय--  विधान सभा की कार्यवाही अपराह्न 2.00 बजे तक स्‍थगित की जाती है.

          (अपराह्न 12.10 बजे विधान सभा की कार्यवाही अपराह्न 2.00 बजे तक स्‍थगित की गई).

 

समय

2.01 बजे                   अध्यक्ष महोदय ( श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.

 

          अध्यक्ष महोदय - श्री जगदीश देवड़ा जी.

          श्री भंवर सिंह शेखावत - अध्यक्ष महोदय, हम लोगों ने स्थगन दिया है.

          नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) - अध्यक्ष जी, कोई सदस्य बोले तो उसका माईक तो चालू रहना चाहिये.माइक ही बंद हैं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत - स्थगन दिया है महत्वपूर्ण विषय है.

          अध्यक्ष महोदय - आपका चालू है.भंवर सिंह जी का चालू है. सोहनलाल बाल्मीक का चालू है. सबके चालू हैं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत - कभी चालू होते हैं कभी बंद हो जाते हैं. उस पर व्यवस्था हो जाए भागीरथपुरा के ऊपर कोई व्यवस्था दे दें.इतने गंभीर प्रकरण है. इस पर सदन में चर्चा होनी चाहिये.हमने स्थगन दिया है.

          (..व्यवधान..)

                                                    

 

 

 

 

पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1)मध्‍यप्रदेश राजकोषीय उत्‍तरदायित्‍व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम, 2005 (क्रमांक 18 सन् 2005) के अंतर्गत बनाये गये नियम, 2006 के नियम 9 के अंतर्गत अनुपालन एवं पुनर्विलोकन रिपोर्ट वित्‍तीय वर्ष 2021-2022 एवं 2022-2023

 

          श्री जगदीश देवड़ा, उप मुख्‍यमंत्री (वित्‍त)-  अध्यक्ष महोदय,मैं,मध्‍यप्रदेश राजकोषीय उत्‍तरदायित्‍व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम, 2005 (क्रमांक 18 सन् 2005) के अंतर्गत बनाये गये नियम, 2006 के नियम 9 के अंतर्गत अनुपालन एवं पुनर्विलोकन रिपोर्ट वित्‍तीय वर्ष 2021-2022 एवं 2022-2023 पटल पर रखता हूं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत - आपने व्यवस्था भी दी है कि हम चर्चा कराएंगे तो चर्चा करने का समय बता दिया जाये. आप चर्चा कराना चाहते हैं तो आप समय दे दें हमको.

          अध्यक्ष महोदय - श्री प्रहलाद सिंह पटेल जी.

          श्री उमंग सिंघार - गंभीर मामला है. सिस्टम के कारण हत्याएं हो गई हैं और दो-दो मंत्री दोषी हैं.(..व्यवधान..)स्थगन पर चर्चा होनी चाहिये. यह बड़ा मामला है.(..व्यवधान..) बच्चे मर गये.

          श्री भंवर सिंह शेखावत - आप समय हमको दे दीजिये.भागीरथपुरा जैसे गंभीर विषय पर चर्चा होनी चाहिये.

          (..व्यवधान..)

          श्री महेश परमार - अध्यक्ष महोदय, 35 लोगों की मौत  हो गई. आप उसमें व्यवस्था दीजिये. न्याय कीजिये उन लोगों के साथ.

          (..व्यवधान..)

(2) मध्यप्रदेश भवन एवं अन्‍य संनिर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1996  की धारा 27 की उपधारा (5) के अधीन बनाये गये सहपठित मध्‍यप्रदेश नियम, 2002 के नियम 270 की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश भवन एवं अन्‍य संनिर्माण कर्मकार कल्‍याण मण्‍डल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025

        श्री प्रहलाद सिंह पटेल, श्रम मंत्री,- अध्यक्ष महोदय, मैं,मध्यप्रदेश भवन एवं अन्‍य संनिर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा शर्तों का विनियमन) अधिनियम, 1996  की धारा 27 की उपधारा (5) के अधीन बनाये गये सहपठित मध्‍यप्रदेश नियम, 2002 के नियम 270 की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश भवन एवं अन्‍य संनिर्माण कर्मकार कल्‍याण मण्‍डल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025 पटल पर रखता हूं.

          श्री महेश परमार - माननीय अध्यक्ष महोदय, 35 लोगों की मौत हो गई. आप इसमें व्यव्स्था दीजिये.(..व्यवधान..) मेरा अनुरोध है कि 35 लोगों की मौत हो गई दूषित पीने से. इसमें आप व्यवस्था दीजिये. इसमें जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिये.मेरी प्रार्थना है आपसे कि इसमें गंभीरतापूर्वक भागीरथपुरा में जो दोषी लोग हैं उनसे तत्काल इस्तीफा लें.

          (..व्यवधान..)

          अध्यक्ष महोदय - मेरा प्रतिपक्ष के सदस्यों से अनुरोध है कृपया अपनी बैंच पर जाएं सदन की कार्यवाही को चलने दें. इस विषय पर काफी चर्चा हो चुकी है.

          श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्यक्ष महोदय, स्थगन पर चर्चा होनी चाहिये.भागीरथपुरा में 35 लोग मर गये.कुत्तों पर चर्चा हो जाती है इंसान मरे हैं. उन पर बात नहीं हो रही.यह हत्या है अध्यक्ष महोदय.

 

2.03 बजे                                    गर्भगृह में प्रवेश

        (स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कराने की मांग को लेकर श्री फूल सिंह बरैया, श्री महेश परमार,श्री सोहनलाल बाल्मीक सहित इंडियन नेशनल कांग्रेस के कई सदस्यगण गर्भगृह में आए)

          (..व्यवधान..)

 

 (3)कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश जल निगम मर्यादित का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

         श्रीमती संपत्तिया उइके, लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री,- अध्यक्ष महोदय, मैं,कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश जल निगम मर्यादित का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023 पटल पर रखती हूं.

            (..व्यवधान..)

(4)(क) कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 394 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार मैगनीज ओर इंडिया लिमिटेड (मॉयल) की 63वीं वार्षिक रिपोर्ट वर्ष 2024-2025, तथा

    (ख) खनिज प्रतिष्‍ठान नियम, 2016 के नियम 18 (3) की अपेक्षानुसार जिला खनिज प्रतिष्‍ठान, जिला-मुरैना, बालाघाट, सीहोर एवं बड़वानी का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023 एवं जिला शाजापुर, छतरपुर, भोपाल, नर्मदापुरम, धार, इंदौर एवं शहडोल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2023-2024

 

          श्री चेतन्‍य कुमार काश्‍यप, खनिज साधन मंत्री (डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री द्वारा अधिकृत), - अध्यक्ष महोदय, मैं,

(क) कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 394 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार मैगनीज ओर इंडिया लिमिटेड (मॉयल) की 63वीं वार्षिक रिपोर्ट वर्ष 2024-2025, तथा

(ख) खनिज प्रतिष्‍ठान नियम, 2016 के नियम 18 (3) की अपेक्षानुसार जिला खनिज प्रतिष्‍ठान, जिला-मुरैना, बालाघाट, सीहोर एवं बड़वानी का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023 एवं जिला शाजापुर, छतरपुर, भोपाल, नर्मदापुरम, धार, इंदौर एवं शहडोल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2023-2024

पटल पर रखता हूं.

            (..व्यवधान..)

            अध्यक्ष महोदय - आप लोगों के भी ध्यानाकर्षण हैं.अभी याचिकाओं की प्रस्तुति भी होना है.सब जनहित के विषय हैं.कृपया सदन की कार्यवाही चलने दें तो सबको अवसर मिलेगा.श्री इन्दर सिंह परमार.

          श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्यक्ष महोदय, स्थगन पर चर्चा होना चाहिये.

 

 

 


 

   (5) महर्षि महेश योगी वैदिक विश्‍वविद्यालय का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025       

..(व्‍यवधान)..

          श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने स्‍थगन प्रस्‍ताव दे रखा है. आपसे अनुरोध है कि इस पर आप व्‍यवस्‍था दे दीजिए. सदन के अंदर चर्चा करा लीजिए.

 ..(व्‍यवधान)..

 

(6) (क) मध्‍यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड, जबलपुर का 23वां वार्षिक              प्रतिवेदन वित्तीय वर्ष 2024-2025, तथा

(ख) मध्‍यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड, जबलपुर का 23 वां वार्षिक                                    प्रतिवेदन वित्तीय वर्ष 2024-2025

..(व्‍यवधान)..

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा गर्भगृह में नारेबाजी की जाने लगी)

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- अध्‍यक्ष महोदय, सिस्‍टम के कारण हत्‍याएं हुई हैं और मंत्री जी मस्‍त बैठे हुए हैं. इनके इस्‍तीफे होना चाहिए. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- वित्‍तीय विषय आ रहे हैं. ध्‍यानाकर्षण सूचनाओं पर चर्चा होगी. मेरा प्रतिपक्ष के सदस्‍यों से अनुरोध है कि कृपया अपने आसन पर जाएं. ..(व्‍यवधान)..

श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍थगन पर चर्चा होना चाहिए. आपने आश्‍वासन दिया है. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- यह सदन विचार विमर्श के लिए है. आप सबने अपने विचार प्रश्‍नकाल में रखे हैं. इसलिए मेरा आप सबसे अनुरोध है कि सदन की कार्यवाही आगे बढ़ने दें. अपने-अपने आसन पर जाएं. ..(व्‍यवधान)..

श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव -- आप समय निर्धारित कर दीजिए. ..(व्‍यवधान)..

श्री भंवर सिंह शेखावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप चर्चा के लिए समय निर्धारित कर दीजिए. आदरणीय, आसंदी से हमको आदेश दीजिए. ..(व्‍यवधान)..

श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव -- समय निर्धारित कर दीजिए माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यही तो हम मांग कर रहे हैं. ..(व्‍यवधान)..

श्री भंवर सिंह शेखावत -- अध्‍यक्ष महोदय, बहुत गंभीर विषय है. इसको कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है. ..(व्‍यवधान)..

श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इतनी बड़ी त्रासदी हुई है. ..(व्‍यवधान)..

श्री भंवर सिंह शेखावत -- प्रदेश की इतनी बड़ी त्रासदी को ऐसे ही टाल दिया जाएगा. ..(व्‍यवधान)..

श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव -- हजारों लोग प्रभावित हुए हैं. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्‍थगित की जाती है.

 

 

(अपराह्न 02.07 बजे सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्‍थगित की गई.)


 

2.38 बजे                     विधान सभा पुन: समवेत हुई.

सभापति महोदय (श्री अजय विश्‍नोई) पीठासीन हुए.

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के माननीय सदस्‍यगण द्वारा गर्भगृह में खड़े होकर नारेबाजी

की जाती रही.)

          सभापति महोदय - आप चर्चा करो. आप लोग सदन में जिस हेतु आए हैं. चर्चाओं के इतने बिन्‍दु हैं, ध्‍यानाकर्षण आपका भी पैंडिंग है. ....(..व्‍यवधान..)... 

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) - माननीय सभापति महोदय, आपको स्‍थगन .... ....(..व्‍यवधान..)...

(...व्‍यवधान...)

          सभापति महोदय - अभी आपको राज्‍यपाल के अभिभाषण पर बोलने का अवसर है.   ....(..व्‍यवधान..)...आप अपना विषय उस विषय में भी रख सकते हैं. ....(..व्‍यवधान..)... राज्‍यपाल के अभिभाषण में भी आप अपनी चर्चा रख सकते हैं. ....(..व्‍यवधान..)...

          श्री उमंग सिंघार - माननीय सभापति महोदय, अध्‍यक्ष जी ने व्‍यवस्‍था दी है.

(...व्‍यवधान...)

          सभापति महोदय - हठ से काम नहीं चलेगा. आपसी सहमति बनानी पड़ेगी.

          श्री उमंग सिंघार - सभापति महोदय, यह गंभीर विषय है. ....(..व्‍यवधान..)... पूरे प्रदेश में इस प्रकार का दूषित पानी पिलाया जा रहा है. भागीरथपुरा एक उदाहरण है, यह मृत्‍यु नहीं है, हत्‍या है. माननीय सभापति महोदय, हत्‍याएं है ....(..व्‍यवधान..)...

          सभापति महोदय - स्‍थगन की चर्चा तब आयेगी, जब स्‍थगन प्रस्‍तुत होगा. ....(..व्‍यवधान..)... अभी तो जो विषय ऑलरेडी .....(..व्‍यवधान..)...

(...व्‍यवधान...)

          श्री उमंग सिंघार - माननीय सभापति महोदय, इसमें ....(..व्‍यवधान..)... 

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक - माननीय सभापति महोदय, इसमें अध्‍यक्ष जी का आश्‍वासन है. और स्‍थगन पर चर्चा होनी चाहिए. यह अध्‍यक्ष जी का आश्‍वासन है.

          सभापति महोदय - इस कार्य सूची में ....(..व्‍यवधान..)... मेरा आप सबसे अनुरोध है कि....(..व्‍यवधान..)...

(...व्‍यवधान...)

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक - अगर चर्चा नहीं होती है, तो मंत्री इस्‍तीफा दे दें.

....(..व्‍यवधान..)...

          सभापति महोदय - सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्‍थगित. 

(2.40 बजे सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्‍थगित की गई.)

           

02.58 बजे

विधान सभा पुन: समवेत हुई.

{अध्‍यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने आपसे पूर्व में अनुरोध किया था कि भागीरथपुरा की घटना पर स्‍थगन को लेकर, आपने आसंदी से आश्‍वासन भी दिया था. मैं, आपसे पुन: कांग्रेस विधायक दल की ओर से अनुरोध करता हूं कि इस पर चर्चा होनी चाहिए, आप कृपया इस पर व्‍यवस्‍था प्रदान करने का कष्‍ट करें.    

          अध्‍यक्ष महोदय-  माननीय नेता प्रतिपक्ष जी एवं सदन के सभी सदस्‍यगण, मैंने सदन में कहा था कि इस पर चर्चा का अवसर दूंगा, तो आपको आसंदी पर भरोसा रखना चाहिए. इतनी अफरा-तफरी नहीं होती तो कोई सवाल उठता ही नहीं. इतना समय बर्बाद हुआ और उसका निश्चित रूप से सदन को और बाकी विषयों पर नुकसान तो हुआ ही है लेकिन मैं अपनी बात पर कायम हूं, कल आपको अवसर दूंगा.

          श्री उमंग सिंघार-  धन्‍यवाद अध्‍यक्ष जी.

 

 

 

 

 

02.59 बजे

ध्‍यानाकर्षण

(1) जबलपुर जिलान्तर्गत नगरीय निकायों द्वारा घर-घर नर्मदा जल पहुँचाने की नवीन योजना के कार्यों में व्याप्त अव्यवस्थाओं का होना

 

        श्री अजय विश्‍नोई (पाटन) [श्री नीरज सिंह ठाकुर]-  अध्‍यक्ष महोदय,  


 

          नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

           श्री अजय विश्नोई -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यदि माननीय मंत्री जी के वक्तव्य को स्वीकार कर लें और उसी के आंकड़ों को पढ़ लें तो यह देखेंगे कि पुरानी योजना के 184 नलकूपों में से सिर्फ 25 प्रतिशत नलकूप यानि 47 अभी तक बंद हुए हैं. तीन चौथाई नलकूप अभी भी चल रहे हैं. उनका बिजली का भार यथावत पुराने सिस्टम के तहत नगरीय निकायों पर ही है. गहराई से आंकड़ों को देखें तो पनागर में 35 नलकूपों में से 33 चल रहे हैं दो ही बंद हो पाए हैं. सिहोरा में 61 नलकूपों में से 61 के 61 चल रहे हैं. एक भी पुराना बंद नहीं हो पाया है. मझौली में 23 नलकूप चल रहे थे 23 के 23 यथावत चल रहे हैं एक भी बंद नहीं हो पाया है. फिर भी यदि हम कह रहे हैं कि योजना पूरी हो गई है तो फिर हम अपने आपको भी धोखा दे रहे हैं और क्षेत्र की जनता को भी धोखा दे रहे हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी के संज्ञान में मैं एक पत्र लाना चाहता हूँ. जो कि एमपीयूडीसी ने दिनांक 30.9.2022 को लिखा था. उसमें लिखा था कि पुरानी योजना को बंद करके यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि नई योजना से हर घर तक नल से जल पहुंच रहा है. जल प्रदाय सुनिश्चित कर लिया जाए. इसके बाद काम तो हुआ नहीं, वर्ष 2024 में चूंकि एशियन रेडिफ की तरफ से दबाव आ रहा था उनके पैसे की फंडिंग का टाइम आ गया था. इसलिए वहां के दबाव के तहत अधिकारियों ने सीएमओस् पर दबाव डाला. सीएमओस् से वर्ष 2024 में लिखवा लिया गया कि हमारी योजना कम्पलीट हो गई है. सीएमओस् की ताकत नहीं थी कि वे प्रदेश के अधिकारियों के सामने मना कर पाते. आधी-अधूरी योजना को स्वीकृति में लेकर लिखकर पूरा कर दिया. अब योजना के संचालन के लिए आप देखिए जनवरी 2025 से लेकर दिसंबर, 2025 तक एक एक निकाय से कितने रुपये की वसूली हुई है. साथ में प्रत्येक निकाय के संचालन के लिए उन्होंने अपने खुद के कर्मचारी रख लिए थे. पहले से जो पुराने कर्मचारी हैं उनकी तनख्वाह हम दे रहे हैं, पुराना संचालन का जो मेंटेनेंस करना पड़ता है वह भी दे रहे हैं. पुराना बिजली का बिल देना पड़ता है वो भी दे रहे हैं. इन्होंने अपने नए कर्मचारी रख लिए जिन पर निकायों का कोई नियंत्रण नहीं है. सिहोरा में 36 नए कर्मचारी रखे गए. यदि ज्यादा जरुरत थी तो हमको बोल देते तो हम ही कर्मचारी बढ़ा लेते. आपके द्वारा रखे गए 36 कर्मचारी काम पर आते भी हैं या नहीं आते हैं इसकी कोई गारंटी नहीं है. काम करते हैं या नहीं करते हैं कुछ पता नहीं होता है. उनका नियंत्रण हम लोगों के हाथ में नहीं है. पनागर में 21 कर्मचारी, पाटन में 18 कर्मचारी, कटंगी में 15 कर्मचारी, मझौली में 14 कर्मचारी इतने कर्मचारियों को उन्होंने रख लिया. जिनका नियंत्रण निकायों के पास नहीं है और हमारा काम नहीं हो रहा है.

          अध्यक्ष महोदय, मैं सीधे प्रश्न पर आना चाहूंगा. मैं एक और चीज बताना चाहता हूँ. मैं इस विषय को कई बार अधिकारियों की जानकारी में ला चुका हूँ. पाटन से तेंदूखेड़ा भी दमोह जिले के अन्दर पानी जाता है. सम्पवेल बना है पाटन में, स्वाभाविक रुप से जो पम्प लगा है वह पाटन में लगा है. पानी जा रहा है तेंदूखेड़ा को पाटन के पम्प की बिजली का खर्चा पाटन से वसूल रहे हैं तेंदूखेड़ा से नहीं वसूल रहे हैं. ऐसी छोटी-छोटी चीजें भी थीं.

          अध्यक्ष महोदय, मेरा सवाल माननीय मंत्री जी से है कि क्या पुरानी योजना बंद करके नई योजना से प्रत्येक घर तक जल प्रदाय वे कब तक सुनिश्चित कर लेंगे. पुरानी पूरी तरह से बंद होना चाहिए, सारे नलकूप बंद होना चाहिए. हमको टंकी न भरना पड़े, हमको बिजली का बिल न देना पड़े. दूसरी चीज जो वर्ष 2025 में आपने हमसे और हरेक निकाय से वसूली की है, क्या उसको शासन वापस करेगा. क्या अगली वसूली तब तक स्थगित रखेगा जब तक घर-घर नल से जल नई योजना के तहत जल नहीं पहुंच जाता है. यह दो मूल मेरे प्रश्न हैं. तीसरा संचालन के लिए ठेकेदारों के कर्मचारी रखने के बजाए नगर परिषद को ही मौका दिया जाए. उसको 36 कर्मचारी रखना है या 6 रखना है वो अपने हिसाब से रखेंगे तो उन पर उतना भार कम आएगा.

          अध्यक्ष महोदय -- मुझे लगता है 3 प्रश्न हो गए हैं, काफी हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य का पहला प्रश्न यह था कि जितने भी नलकूप हैं क्या उनको बंद किया जा सकता है. हां बंद किया जा सकता है. बंद करने में वहां पर पब्लिक का काफी विरोध है. इसलिए यदि आप सहयोग प्रदान करेंगे.

          श्री अजय विश्नोई -- पानी नहीं मिलेगा तो विरोध होगा. पानी देने की गारंटी आपने ली नहीं है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- मेरा उत्तर सुन लीजिए, इतनी जल्दबाजी क्यों कर रहे हैं आप. अध्यक्ष महोदय, वहां पर पब्लिक का विरोध बहुत ज्यादा है. यदि माननीय विधायक जी थोड़ा सा उनको समझा दें तो हम सप्ताह भर के अन्दर पूरे नलकूप बंद करके उनके घर तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी ले सकते हैं. वहां पर वहां के पार्षद, वहां के जनप्रतिनिधि, आपके भी प्रतिनिधि उसका विरोध करते हैं. आप यदि थोड़ी सी कसावट ला देंगे तो हो जाएगा. दूसरा, आपने कहा है कि कर्मचारी ठेकेदार के हैं. कोई जरूरी नहीं है आप अगर खुद संचालन कर सकते हैं तो करिए हम कह देंगे कि ठेकेदार के कर्मचारियों की कोई आवश्यकता नहीं है, परंतु आपके कर्मचारी अगर कुशलता से उसका संचालन कर सकते हैं इसकी जवाबदारी आप लेते हों तो हमें कोई आपत्ति नहीं है. कौन संचालन करे इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता परंतु संचालन होना चाहिए, ठेकेदार के व्‍यक्ति करें या नगर पालिका के व्‍यक्ति करें. आप डिसाइड कर लीजिए हमें कोई आपत्ति नहीं है. तीसरा आपने बिजली के बिल के बारे में बताया,यह बात सही है मैंने भी देखा है क्‍योंकि पाटन थोड़ा सा नीचे है और तेंदूखेड़ा थोड़ा सा ऊपर है और पाटन से ऊपर चढ़ाना पड़ता है इसलिए यह बात सही कि पानी लिफ्ट करने में बिजली का बिल ज्‍यादा आ रहा है. वह हम पाटन,तेंदूखेड़ा और बाकी में इस स्‍कीम में सब लोगों के बीच में बांट देंगे जिससे पाटन पर यह भार नहीं आएगा, वह आज हमारे संज्ञान में आ गया है हमने निर्देश जारी कर दिए हैं.

          श्री अजय विश्‍नोई -- अध्‍यक्ष महोदय, थोड़ा सा गंभीरता से कम लिया है माननीय मंत्री जी ने इसलिए कुछ आंकड़े मैं आपको और दिखाता हूं. सिहोरा नगर परिषद् पुराना सिस्‍टम चलाने पर 3 करोड़ 78 लाख रुपये खर्च करती है और नए सिस्‍टम में आप उससे 2 करोड़ 29 लाख और वसूलते हैं. पनागर में पुराने सिस्‍टम पर जो खर्च हो रहा है उसके अलावा 166 लाख आप और वसूलना शुरू कर चुके हैं. पाटन में हम 70 लाख पहले से खर्च कर रहे हैं, अब 70 लाख नए आपने वसूलने शुरू कर दिए हैं. कटंगी में 64 लाख हम पहले से खर्च कर रहे है आज भी हम 64 लाख और दे रहे हैं. मझौली में 54 लाख रुपये हम पहले से खर्च कर रहे हैं आज 50 लाख रुपये की वसूली और हो गई है. यह डबल-डबल भार कहां है. आप जानते हैं कि नगरीय निकायों को खासतौर से नगर परिषदों को इतनी कम राशि दी जा रही है उसमें वह अपना विकास कर ही नहीं पा रहे हैं एक तो हम राशि भी कम दे रहे हैं और यह लूट का एक रास्‍ता भी वहां पर खुल गया है इसके कारण नगरों में वास्‍तव में विकास बाधित हो गया है. आप पुराने सिस्‍टम को बंद कर दीजिए हमें कोई दिक्‍कत नहीं है परंतु यह गारण्‍टी तो आपको लेनी पड़ेगी, आपके विभाग को लेनी पड़ेगी, एमपीयूडीसी को लेनी पड़ेगी कि नए सिस्‍टम में हरेक घर तक नल से जल पहुंच जाएगा. जल प्रदाय की जवाबदारी हमने ली हुई है, हमारी सरकार ने ली हुई है तो आपको वह गारण्‍टी लेनी होगी. आप तय कीजिए कि एक हफ्ते में पूरा करेंगे, दो हफ्ते में पूरा करेंगे कि एक महीने में पूरा करेंगे. हम सहयोग करने के लिए साथ में तैयार हैं. आप क्रमश: बंद करते चलिए और क्रमश: बढ़ाते चलिए. इस तरीके से काम कर सकते हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले ही कहा है माननीय सदस्‍य से कि यदि वह सहयोग प्रदान करेंगे तो हम ज्‍यादा से ज्‍यादा अधिकतम एक महीने के अंदर सारे नलों को बंद कर देंगे और कोशिश करेंगे कि सब जगह हो जाए. नल वहीं का बंद करेंगे जहां पानी पहुंच रहा होगा क्‍योंकि वहां डबल सिस्‍टम से लोग पानी ले रहे हैं. हमारी शर्तों के अनुसार हमें सिर्फ प्रति व्‍यक्ति के अनुसार 16.54 एमएलडी पानी उपलब्‍ध कराना था हम पहले ही 21.11 एमएलडी पानी दे रहे हैं मतलब 28 प्रतिशत ज्‍यादा पानी वहां दे रहे हैं. इसका मतलब पानी वहां पर्याप्‍त है. वहां तकलीफ यह है कि वहां के जनप्रतिनिधि, वहां के पार्षद, वहां के माननीय विधायक जी के प्रतिनिधि भी हैं वह यह चाहते हैं कि नलकूप भी चले और नल भी चले और बिजली का बिल नहीं दें यह तो संभव नहीं है. यदि नलकूप बंद करवाने में आप सहयोग प्रदान करेंगे तो अधिकतम मैं एक महीने का समय आपसे मांगता हूं आप वहां पर खड़े होकर नलकूप बंद करा दीजिए, जहां-जहां पानी पहुंचेगा हम वहां-वहां के नलकूप बंद करते जाएंगे.

          श्री अजय विश्‍नोई -- अध्‍यक्ष महोदय, बंद कराने की जवाबदारी हमारी नहीं है. पानी प्रेशर से नहीं पहुंच रहा है हर मोहल्‍ले तक पानी नहीं पहुंच रहा है. जिस-जिस मोहल्‍ले तक आप पानी पहुंचाते जाएंगे उतना पानी हम बंद करते जाएंगे. जनता को प्‍यासा नहीं मारा जा सकता है जनता को पानी देना पड़ेगा. गर्मी भी आ रही है. मेरी गारंटी नहीं आपकी गारंटी, सरकार की गारंटी होनी चाहिए कि इतने दिन में हम इसको बढ़ा देंगे हम उतना बंद कर देंगे. आप ही बढ़ाइये, आप ही बंद करवाइये हम सहयोग करने के लिए साथ खड़े हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, वह तो मैं पहले ही बोल रहा हूं. मैं पहले ही कह चुका हूं कि पानी पहुंचेगा उसके बाद हम नलकूप बंद करेंगे. आप मेरे उत्‍तर को सुन ही नहीं रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी ने तो पहले ही यह बात कही है कि जहां-जहां तक पानी पहुंचेगा वहां के ट्यूबवेल बंद करते जाएंगे.

          श्री कैलाश विजयर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, जिस बात को मैं कह रहा हूं आप उसको दोहरा रहे हैं. आप इतने सीनियर सदस्‍य हैं. जब मैं कह रहा हूं कि वहां पानी पहुंचेगा तो हम नलकूप बंद करेंगे.

          श्री अजय विश्‍नोई -- आपका धन्‍यवाद. 

          श्री नीरज सिंह ठाकुर (बरगी) -- अध्‍यक्ष महोदय, भेड़ाघाट नगर पंचायत का भी यह विषय है ध्‍यानाकर्षण उससे भी संबंधित है. मेरे दो प्रश्‍न हैं जो मैं पूछना चाहता हूं कि भेड़ाघाट नगर पंचायत का क्षेत्रफल 4 गांवों से मिलकर बनता है. समूह पेयजल योजना जिसकी एजेंसी एमपीयूडीसी है और जो 7 नगर पंचायतों को पेयजल प्रदान कर रही है. वाटर ट्रीटमेंट प्‍लांट लमेहटा घाट में लगा हुआ है. वर्तमान में एक ही विद्युत लाईन से गांव की लाईट और जो विद्युत पम्‍प कनेक्‍शन है वह वॉटर ट्रीटमेंट प्‍लांट के लिए एक ही लाईन से है. जो विद्युत पंप कनेक्शन है वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट (WTP) के लिये वह एक ही लाईन से है. एक में भी यदि फाल्ट हो जाता है तो गांव की विद्युत आपूर्ति बंद हो जाती है. अथवा गांव या नगर पंचायत में पानी की सप्लाई बंद हो जाती है, चूंकि 10 वर्ष तक योजना का आपरेशन मेंटनेंस, मेन पॉवर मैनेजमेंट, बिजली का बिल आदि एमपीयूडीसी द्वारा अधिकृत ठेकेदार को करना है तो क्या गांव की लाइट और पंप के विद्युत कनेक्शन के लिये अलग अलग 33 केव्ही की लाईन नहीं होना चाहिये.

          अध्यक्ष महोदय- नीरज सिंह जी आप प्रश्न करिये.

          श्री नीरज सिंह ठाकुर- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने प्रश्न ही किया है कि क्या गांव की लाइट और पंप के विद्युत कनेक्शन के लिये अलग अलग 33 केव्ही की लाईन नहीं होना चाहिये. मैं अपने स्तर पर सभी अधिकारियो को यह चीज लिखित में दे चुका हूं, मौखिक रूप से भी बता चुका हूं. आश्वासन मिलता है कि पाइप लाईन में है, कृपया बता दें कि यह कब तक हो पायेगा.

          अध्यक्ष महोदय- ठीक है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, मैं खुद ऊर्जा विभाग में बात करूंगा, आपकी समस्या बिल्कुल ठीक है और हम इसकी अलग से लाइन डल जावे इस संबंध में हम ऊर्जा विभाग से बात करके, अपने यहां से पत्र भी भेज देंगे और व्यक्तिगत रूप से मैं खुद भी प्रयास करूंगा.

          श्री नीरज सिंह ठाकुर-- बहुत बहुत धन्यवाद माननीय मंत्री जी, एक छोटा सा विषय और है कि ऑक्ट्रॉय कंपनसेशन जो नगर पंचायतों को मिलता है.

          अध्यक्ष महोदय- नीरज सिंह जी विषय पूरा हो गया है.

          श्री नीरज सिंह ठाकुर- अध्यक्ष जी, एक छोटा सा प्रश्न है कि विद्युत भार तो ऑक्ट्रॉय कंपनसेशन से डाय़रेक्ट भोपाल स्तर पर विभाग स्तर पर काटा जा रहा है लेकिन विभाग उसको बिल में से एडजेस्ट नहीं कर रहा है तो एमपीईबी जो बिल जनरेट कर रहा है उसमें आज भी वह राशि दिखती प्रतीत हो रही है वह राशि रिफलेक्ट होती है जब कि नगर पंचायत, भेड़ाघाट सारा बिजली का बिल दे चुका है लेकिन बिजली विभाग के द्वारा फिर से उनको उसी का बिल दिया जा रहा है , तो मैं चाहता हूं कि यह जो डिडक्शन है उसको बिजली के बिल में से माइनस कर दिया जाये.

          अध्यक्ष महोदय- बैठिये.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3.17 बजे.

प्रतिवेदन की प्रस्तुति एवं स्वीकृति

कार्यमंत्रणा समिति का प्रतिवेदन

 

 

समिति द्वारा यह सिफारिश भी की गई है कि ;-

          दिनांक 23 फरवरी से 27 फरवरी तथा 5 मार्च, 2026 तक सभी की बैठकों में भोजनावकाश न रखा जाए.

 

 

           

 

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे एक निवेदन करना चाहता हूं . कार्य मंत्रणा समिति में एक सुधार करने की आवश्कता है. इसमें हां की जीत हुई, यह होना नहीं चाहिये क्योंकि कार्य मंत्रणा समिति में सर्वदलीय लोग होते हैं और वह समिति यह तय करती है तो इस प्रक्रिया को सुधारना चाहिये कि सदन इससे सहमत है क्या ? और सदन इससे सहमत है ऐसा करके आगे बढ़ाना चाहिये, यह हां की जीत इसमें नहीं होना चाहिये. यह मेरा एक सुझाव है इस पर विचार करियेगा.

          अध्यक्ष महोदय-- ठीक है.

 

 

 

 

 

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई).

 

 


 

3.20   बजे                          ध्यानाकर्षण (क्रमशः)

(2)      जिला अनूपपुर के शासकीय स्नातक महाविद्यालय, पुष्पराजगढ़ के तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य द्वारा छात्र-छात्राओं से ली गई शुल्क राशि का निजी उपयोग किया जाना.

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को (पुष्पराजगढ़) {श्री जयवर्द्धन सिंह}—अध्यक्ष महोदय,

                    उच्च शिक्षा  मंत्री (श्री इन्दर सिंह परमार) अध्यक्ष महोदय,

          श्री फुन्देलाल सिंह मार्कोअध्यक्ष महोदय,   यह मेरे क्षेत्र के  और एक आदिवासी क्षेत्र  में संचालित विद्यालय  जो  4 वर्ष से  आदिवासी  छात्रा-छात्राओं के   ऑफ लाइन शुल्क  और  तत्कालीन प्राचार्य ने  अपने स्व हित में  खर्च  किया.  जांच हो गयी. जांच में  प्रमाणित पाया गया.  मैं उच्च शिक्षा मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि  सारी जांच हो गई है,  अब जांच में कोई बकाया नहीं है.  अब तो मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि  आप डॉ. डी.पी. शार्मे को  तत्काल निलंबित करें. और उस पर एफ.आई.आर करें. तथा यह भी तय किया जाये कि दोबारा उस महाविद्यालय में उनकी पदस्‍थापना न की जाये.

        श्री इंदर सिंह परमार- अध्‍यक्ष महोदय, डॉ. डी.पी शार्मे, तत्‍कालीन प्रभारी प्राचार्य को निलंबित कर दिया गया है. श्री जितेन्‍द्र कुमार चौधरी, सहायक ग्रेड-2 को भी निलंबित किया जा चुका है. प्रभारी प्राचार्या डॉ. झारिया एवं संगीता मसीह को वसूली का आदेश विलंब से जारी करने के कारण, कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है.

          रीवा संभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्‍त संचालक, डॉ. आर.पी सिंह को भी कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया जा चुका है.

          श्री फून्‍देलाल सिंह मार्को- माननीय मंत्री महोदय जी, आप संवेदनशील हैं, मैं जानता हूं. जिन्‍होंने वित्‍तीय अनियमितता की और बच्‍चों के पैसों को खा गये. क्‍या उनके ऊपर इतना दण्‍ड काफी है. आपने निलंबन कर दिया, इसके लिये आपको बधाई, धन्‍यवाद देते हैं.

          लेकिन क्‍या उनके ऊपर एफ.आई.आर और वसूली की कार्यवाही तत्‍काल की जायेगी. क्‍योंकि 50 लाख रूपये की बात है, वह बच्‍चों की फीस है. मैं आपसे यह चाहता हूं कि इसकी एफ.आई.आर भी करायी जाये और विद्यालय में तत्‍काल बच्‍चों का पैसा वापस किया जाये.

          श्री इंदर सिंह परमार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि वसूली के लिये जो आदेश प्राचार्य के द्वारा विलंब से दिया गया है. यदि उन्‍होंने समयावधि में पैसा वापस जमा नहीं किया तो उनके खिलाफ आगे एफ.आई.आर की कार्यवाही भी हम कर सकते हैं.

          श्री जयवर्द्धन सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय फून्‍देलाल सिंह मार्को जी ने बहुत ही गंभीर विषय पर सदन का ध्‍यान आकर्षित किया है और जैसा माननीय मंत्री जी ने कहा कि इस ध्‍यानाकर्षण के बाद निलंबन की कार्यवाही भी आरोपी पर की जायेगी.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं इस पर सदन का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूंगा कि शासकीय महाविद्यालय, पुष्‍पराजगढ़ के प्राचार्य महोदय के 5 मई, 2025 के पत्र के संबंध में जैसा विधायक जी ने कहा कि डेली वसूली शुल्‍क जो आ रहा था डी.एफ.सी के द्वारा, प्रतिदिन जो नगदी पैसा छात्र/छात्राएं ऑफ लाइन जमा कर रहे थे तो उस पैसे के साथ तो इन्‍होंने लगभग 60 लाख रूपये की धोखाधड़ी की है. लेकिन उसके साथ इस पत्र के माध्‍यम से प्राचार्य महोदय ने यह गंभीर आरोप भी लगाये हैं कि छात्रों के साथ मारपीट भी की जाती थी, इस व्‍यक्ति द्वारा. अगर निलंबन किया गया है तो उसके बाद भी उक्‍त व्‍यक्ति वहीं रहेगा. इसी पत्र में प्राचार्य महोदय यह भी मांग करते हैं कि इनका स्‍थानांतरण जिले के बाहर किया जाये.

          माननीय मंत्री जी, हमारा आपसे इतना निेवेदन है कि हमारे प्रदेश के जो विश्‍वविद्यालय हैं, वह विद्या और शिक्षा के मंदिर हैं. अगर कोई भी व्‍यक्ति ऐसे पद पर बैठकर बच्‍चों की रेगिंग कर रहा है, उनके साथ मारपीट कर रहा है. आदिवासी बच्‍चे जो शुल्‍क जमा कर रहे हैं, पढ़ाई करने के लिये उनकी नगदी रकम लगभग 60 लाख रूपये का गबन करके खुद ऐश कर रहा है और आपने स्‍वयं स्‍वीकारा है कि उसके ऊपर आप वसूली की कार्यवाही करोगे, क्‍या यह उचित नहीं है कि इनका हम जिले से बाहर ट्रांसफर करें ? वह व्‍यक्ति वर्ष 2002 से वहीं पदस्‍थ है. इस पर आप थोड़ा ध्‍यान दें, यही मेरी आपसे प्रार्थना है.

          श्री इंदर सिंह परमार- अध्‍यक्ष महोदय, निलंबन की अवधि में उस महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य वहां पर नहीं रहेंगे, उनको हमारा जो क्षेत्रीय कार्यालय है, वहां पर अटैच किया जा रहा है और निलंबन की बाकी कार्यवाही, क्‍योंकि उनके खिलाफ विभागीय जांच भी संस्‍थित की जा रही है. मुझे लगता है कि उनको काफी पर्याप्‍त उसमें दण्‍ड हो जायेगा.

          श्री फून्‍देलाल सिंह मार्को- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह चाहूंगा कि ऐसा न हो कि जब वह निलंबन से बहाल हो और पुन: उसी महाविद्यालय में पहुंच जाये. आप इतनी कृपा करें कि वह दोबारा उसी महाविद्यालय में पदस्‍थ न हो.

          श्री इंदर सिंह परमार- अध्‍यक्ष महोदय, ऐसी शंका करने का कोई कारण नहीं है, जब होगा तब देखेंगे.

                                                                                                         

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3.30 बजे                             प्रतिवेदनों की प्रस्तुति एवं स्वीकृति

                      (1) गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा संकल्पों संबंधी

                                         समिति का सप्तम् प्रतिवेदन

 

 

 

 

डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह (अमरपाटन) - अध्यक्ष महोदय, मैं बस कुछ सेकण्ड लूंगा. मैं भी इस समिति का सदस्य हूं. इस समिति की बैठकें हुईं. इस समिति के कार्य का दायरा सिर्फ इतना है कि समय कितना दिया जाय. क्या आएगा, क्या नहीं आएगा, आप तय करके वहां से भेज देते हैं. इसमें कोई काम नहीं है. आधा घंटा आना है, 20 मिनट लगना है, 15 मिनट लगना है. यह कार्य मंत्रणा समिति ही क्यों तय नहीं कर देती, इस समिति का कोई औचित्य ही नहीं है. यह तो मात्र चाय, समोसा और मावा बाटी वाली कमेटी है, उसमें निर्णय कुछ खास होते नहीं है.

अध्यक्ष महोदय - नहीं, नहीं. आप गंभीरता से विमर्श करो, कोई दिक्कत नहीं है.

(2) पटल पर रखे गये पत्रों का परीक्षण करने संबंधी

समिति का कार्यान्वयन से संबंधित नवम् प्रतिवेदन

 

 अध्यक्ष महोदय - आज की कार्य सूची में उल्लेखित याचिकाएं 1 से लेकर 80 तक प्रस्तुत की हुई मानी जाएंगी.

अब, श्री जगदीश दवेड़ा, उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर  आबकारी नीति वर्ष 2026-2027 के संबंध में वक्तव्य देंगे.

 

 

 

3.32 बजे                                    वक्तव्य

आबकारी नीति वर्ष 2026-2027 के संबंध में

उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर का वक्तव्य

 

उप मुख्यमंत्री, वाणिज्यिक कर  (श्री जगदीश देवड़ा) - अध्यक्ष महोदय,

 

अध्यक्ष महोदय - अब राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर कृतज्ञता प्रस्ताव पर चर्चा का पुनर्ग्रहण होगा. सभी लोग 5-5 मिनट में अपनी बात पूरी करें. नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री जी को इस विषय पर बोलना है.

 

 

3.34 बजे       राज्यपाल के अभिभाषण पर श्री अजय विश्नोई, सदस्य द्वारा प्रस्तुत कृतज्ञता प्रस्ताव पर चर्चा का पुनर्ग्रहण (क्रमशः)

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को (पुष्पराजगढ़) - अध्यक्ष महोदय, हमारे नेता प्रतिपक्ष जी को मैं पहले धन्यवाद दूंगा कि अपने दल की ओर से मुझे बोलने का अवसर दिया गया है. अध्यक्ष महोदय, सामान्य प्रशासन विभाग, मंत्रालय का एक पत्र जारी हुआ दिनांक 27 जुलाई 2017 को, उसमें 5वें बिन्दु में शासन के ध्यान में यह तथ्य लाया गया है कि अगस्त 1996 के पूर्व जिन्हें जाति प्रमाण पत्र जारी हुए हैं उन्हें अनावश्यक परेशान किया जा रहा है. ऐसे लोगों के जाति प्रमाण पत्र कलेक्टरों को पुष्टि हेतु भेजने पर इनका रिकार्ड कलेक्टर के पास न होने से इनकी पुष्टि नहीं हो पाने के कारण जाति प्रमाण पत्र धारक को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. अत: स्‍पष्‍ट किया जाता है कि अगस्‍त 1996 के पूर्व सामान्‍य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देश के अंतर्गत जो जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं वे आज भी मान्‍य हैं. इन प्रमाण पत्रों को केवल इस आधार पर फर्जी नहीं माना जा सकता कि कलेक्‍टर के पास उसका कोई रिकॉर्ड नहीं है. यदि जांच की स्‍थिति निर्मित होती है तो कलेक्‍टर को इसकी विस्‍तृत जांच करने के पश्‍चात ही प्रतिवेदन प्रेषित करना होगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम एक तरफ फर्जी जाति प्रमाण पत्रों की तमाम जांचों के लिए जनजाति कार्य विभाग और सामान्‍य प्रशासन विभाग को आवेदन-निवेदन करते हैं. सामान्‍य प्रशासन विभाग के पत्र के उपयोग से माननीय न्‍यायालयों में, माननीय उच्‍च न्‍यायालय में इसका उपयोग करके, जो अपराधी हैं जो फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाते हैं उनको संरक्षण मिलता है और कई प्रश्‍नों के जवाब में ऐसे उत्‍तर आए हैं कि यदि सामान्‍य प्रशासन विभाग इस आदेश को वापस करता है या कोई दिशा-निर्देश दिया जाता है, तो वर्ष 1996 के पूर्व जो जाति प्रमाण पत्र फर्जी बनाए गए हैं, उन पर कार्रवाई की जाएगी. मैं सदन के माध्‍यम से निवेदन करता हॅूं कि ऐेसे पत्रों पर सामान्‍य प्रशासन विभाग पुनर्विचार करे और यह निर्देश दे कि यदि कोई फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनाया गया है और उसकी प्रमाणिकता है, तो उस पर कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि इसकी पुनरावृत्‍ति करने का हौसला दूसरे व्‍यक्‍तियों में न हो.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश में बड़ी दर्द-विदारक घटनाएं घटी हैं और लॉ एंड ऑर्डर की जो स्‍थितियां हैं, यह अच्‍छी नहीं हैं. प्रदेश में न कोई डर, न कोई भय है. कोई मिट्टी है, गिट्टी है,  गांजा है, चरस है, भांग है जिसको जो मिलता है धड़ल्‍ले से लेकर भागता है. अपराधियों में किसी प्रकार का कोई खौफ नहीं है, कोई डर नहीं है. जिस तरीके से अभी घटनाएं हो रही हैं, चाहे वह घटना इंदौर की हो, छिंदवाड़ा में कफ सिरप वाली घटना हो या आदिवासी समाज में जो घटनाएं घट रही हैं वह किसी से छिपी नहीं हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी 13 तारीख को मेरे क्षेत्र में एक घटना घटी है. वहां मदिरा दुकान चलाने वाले व्‍यक्‍ति को मुख्‍यालय राजेन्‍द्र ग्राम में मदिरा दुकान के संचालन का आदेश मिला. एक बच्‍ची जो बाहर पढ़ने गई थी और डेढ़ बजे रात में जब वह वापस आती है तो रात का लाभ उठाकर उस व्‍यक्‍ति ने उस बच्‍ची के साथ छेड़छाड़ किया. उस व्‍यक्‍ति पर एफआईआर भी हुई है. मैं चाहता हॅूं कि उस मदिरा दुकान को किसी भी तरीके से, जिस जगह के लिए वह दुकान स्‍वीकृत है, वह दुकान वहीं संचालित हो और लीलाटोला में मदिरा दुकान संचालित करने की जो अनुमति दी गई है, उसे तत्‍काल रोका जाए. ऐसा मेरा निवेदन है.

 

3.38 बजे                    {सभापति महोदय (श्री अजय विश्‍नोई) पीठासीन हुए. }

 

        सभापति महोदय, दूसरा उदाहरण मैं इस मध्‍यप्रदेश का बताना चाहूंगा. मेरे पास यह पत्र भी है. हमारे यहां एक मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी हैं. उनका नाम दिनेश पांडे है. वे पुष्‍पराजगढ़ जनपद पंचायत में पदस्‍थ हैं. उनके स्‍थानांतरण के लिए हमारे जिले के प्रभारी मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) माननीय श्री दिलीप जायसवाल जी ने भी पत्र लिखा है कि यह व्‍यक्‍ति ठीक नहीं है. उक्‍त अधिकारी ने विवाह कार्यक्रमों में भ्रष्‍टाचार किया है. इस संबंध में सांसद महोदय ने भी पत्र लिखा. भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्‍यक्ष ने भी पत्र लिखा. उसमें प्रभारी मंत्री जी ने भी अनुशंसा की है. लेकिन वह व्‍यक्‍ति इतना शक्‍तिशाली है कि मंत्री जी के आदेश, सांसद महोदय, भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्‍यक्ष और प्रभारी मंत्री की अनुशंसा के बाद भी वह व्‍यक्‍ति वहां से स्‍थानांतरित नहीं हुआ है.

          सभापति महोदय -- मार्को जी, आप विषयान्‍तर कर रहे हैं. आपका समय 5 मिनट है. आप विषय पर बोल लीजिए, तो ज्‍यादा अच्‍छा होगा.

          श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- सभापति महोदय, मेरा आपसे अनुरोध यह है कि इस तरीके से जो लॉ एंड ऑर्डर प्रदेश में चल रहे हैं, यह हमारे निर्वाचित जनप्रतिनिधियों द्वारा पत्र लिखने के बाद भी, यदि उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो उससे अधिकारियों को भ्रष्‍टाचार करने का अवसर मिलता है और मैं चाहता हॅूं कि इन पर कार्रवाई करनी चाहिए.

          सभापति महोदय -- मार्को जी, कृपया, आप समाप्‍त कीजिए. आप समय से ज्‍यादा बोल चुके हैं. जो समय तय हुआ था, वह 5-5 मिनट के लिए तय हुआ था. कृपया, आप समाप्‍त करें.

          श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- सभापति महोदय, आपने बोलने का मौका दिया, मैं आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हॅूं.

          सभापति महोदय -- धन्‍यवाद. श्री सुजीत मेरसिंह चौधरी.

 


 

            श्री सुजीत मेरसिंह चौधरी (अनुपस्थित)

          श्री ओमकार सिंह मरकाम(डिण्डौरी)माननीय सभापति महोदय, महामहिम राज्यपाल जी का जब अभिभाषण होता है. तो पूरे प्रदेश को न्याय की उम्मीद पूरे प्रदेश की जनता करती है. न्याय की उम्मीद पर महामहिम जी का अभिभाषण असत्य साबित होता है तो सीधे प्रश्न लगता है लोकतंत्र के पवित्र मंदिर पर और सीधे प्रश्न लगता है सरकार की नीयत पर और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर. माननीय राज्यपाल जी के अभिभाषण में मेरी सरकार गरीबों की हितैषी है, बात सुनने में अच्छी लगी. नवम्बर माह से डिण्डौरी जिले में 44 करोड़ से ऊपर की राशि मजदूरों की बाकी है. आप चार महीने से मजदूरी नहीं दे पा रहे हैं महामहिम जी कहते हैं कि मेरी सरकार गरीबों की हितैषी है, कैसे हितैषी हो गई ? वहां पर मजदूरी की मांग को लेकर के जनप्रतिनिधि एवं हम सब लोग सरकार से अनुरोध किये और एक रूपया महाशिवरात्रि जैसे पावन पर्व पर नहीं मिला. मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि चार महीने से मजदूरी का भुगतान नहीं होना क्या उचित है ? इस बात को आपको बताना चाहिये. दूसरा अनुरोध यह है कि एक तरफ हम कह रहे हैं कि मजदूरों को हम काम दे रहे हैं. 1 लाख 94 हजार 24 जॉब कार्ड में से मात्र 2 हजार 300 लोगों को ही सौ दिन का काम मिला है. 1 लाख 91 हजार लोगों को सौ दिन का काम नहीं मिला. आप कह रहे हैं कि हम गरीबों का हित कर रहे हैं. इसमें आपसे पूछना चाहूंगा कि कम से कम महामहिम जी इस सदन में आकर के असत्य बात कर जायें. अगर महामहिम जी असत्य बात करेंगे तो आप पर और हम पर विश्वास कौन करेगा ? यह बहुत बड़ा प्रश्न आज खड़ा हो गया है. शिक्षा की व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है, अच्छी शिक्षा नहीं मिल रही है. प्रदेश के अंदर करेक्स मिल रहा है, ड्रग्स मिल रहा है इससे नौजवानों का भविष्य बर्बाद हो रहा है. आज यह सरकार करेक्स बिकाने में और ड्रग्स बिकाने में है. नौजवानों को अच्छी शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं. वहीं पर स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत यह है कि हमारी बच्चियां जिनका हम चरणवंदन करते हैं छिन्दवाड़ा में हमारी बच्चियों को सीरप देने के कारण उनकी मृत्यु हो जाती है. मैं तो कहना चाहता हूं कि ऐसे में महामहिम जी को सरकार को राजधर्म बताना चाहिये और गैर अरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिये, क्योंकि उनके माध्यम से दवाएं दी गई हैं जिनके कारण उन बच्चियों की मौत हो गई. आज मैं आपको बताना चाहता हूं कि अतिथि शिक्षकों को 6-6 महीने से पैसा नहीं मिल रहा है, बच्चियों को वहां पर शिक्षावृत्ति नहीं मिल रही है. सरकार कह रही है कि बहुत पैसा है. सभापति महोदय सिंचाई के लिये हमने जाकर के हमने स्वयं ईएनसी से बात की, पीएस से बात की, माननीय मंत्री जी से बात की उसके बाद भी एक नहर का सुधार नहीं हो पाया. आज भी फसल को पानी मिल जाये तो हम उस फसल को तैयार कर सकते हैं. एक अनाज पैदा होता है तो इस राष्ट्र का उत्पादन होता है. पर महामहिम जी कहते हैं कि मेरी सरकार किसानों के हित में है. आपको हम प्रमाण दे रहे हैं आप प्रमाण को तो स्वीकार करें. सभापति जी किसानों को 9.1.2026 से सरवर बंद. स्‍लॉट बुकिंग नहीं हुआ. हजार किसानों का स्‍लॉट बुकिंग नहीं होने से धान की बिक्री नहीं हो पाई. सर्वर आपका कर्मचारी अधिकारी आपका, सरकार आपकी 13 तारीख को मैं आकर के प्रमुख सचिव को ज्ञापन दिया पर उसमें कोई संज्ञान नहीं लिया गया. सभापति जी क्‍य यही सरकार है, क्‍या यही रामराज है क्‍या भगवान राम के राज्‍य में ऐसे ही होता था. भगवान राम के राज्‍य में जो विशाल हृदय कृतित्‍व है उसको आप लोग अपने नाम पर कलंकित मत करिए. भगवान राम के नाम पर योजना तो बना लिए हो, लेकिन मजदूरों के लिए आपके पास पैसा नहीं है यह आपको समझना पड़ेगा.

          सभापति महोदय जी, आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि जिस तरह से शराब की बिक्री बढ़ी है, नर्मदा किनारे, नर्मदा किनारे बैठकर के छोटे छोटे बच्‍चे शराब पीते हैं. मैं अपनी व्‍यथा बता दूं. 16 तारीख को हम नर्मदा किनारे गए शराबियों ने कांच की शीशी को वहीं तोड़ दिया मैं कांच को बीन रहा था और चलते हुए मुझे समझ नहीं आया और दाहिया पांव में वहीं कांच की शीशी का टुकड़ा गड़ गया और हम नर्मदा जी की सफाई कर रहे हैं. आप बात करते हैं सनातन धर्म की सुरक्षा की हम भी सनातन को मानते हैं, पर आप बताईए नर्मदा किनारे बैठकर लोग शराब पीते हैं और आप बात करते हैं इस देश के भविष्‍य की, ..(xxx) ये असत्‍य बात को महामहिम राज्‍यपाल महोदय जी ने भी आकर के अपने संबोधन में कहते हैं कि मेरी सरकार बहुत बढि़या, मेरी सरकार बहुत बढि़या कहां की बढि़या गली गली में शराब बिक रही है, ..(xxx)  कोई सुनने के लिए तैयार नहीं है.

          सभापति महोदय कृपया समाप्‍त करिए.

श्री ओमकार सिंह मरकाम सभापति जी, एक अनुरोध के साथ आपकी बात

मैं मानूंगा अभी हम तो वैसे ही प्रसन्‍न थे, जब इंदौर वाले मंत्री जी से आप लड़ रहे थे

तो हमारा दिल चौड़ा हो गया था कि हमारा जबलपुर का टाइगर भी इंदौर के टाइगर से सवाल जवाब कर रहा कोई कमी नहीं है और हमें प्रसन्‍नता थी.

          मैं एक बात करना चाहता हूं मुझे सनातन धर्म पर पूरी तरह से जो मुझे जानकारी है. मां गंगा को भागीरथ जी ने पृथ्‍वी पर इसलिए लाया कि पापियों के पाप तर जाएं, पर ये मध्‍यप्रदेश सरकार पापी वही भागीरथपुरा में इतना पाप किया है कि गंगा मैय भी कह रही है कि ऐसे पापियों को हम नहीं तार सकते.

          सभापति महोदय मरकाम जी ने महामहिम के बारे में कुछ शब्‍द बोले थे उसको विलोपित कर दीजिए.

          श्री अनिरद्ध(माधन)मारू मरकाम जी  यूनियन कार्बाइड के पास धुल गए क्‍या आपके 15 हजार मरे थे, वह भी याद कर लो, कौन सा इस्‍तीफा दे दिया था आपने कौन आया था कांग्रेस की तरफ से इस्‍तीफा देने. आप छोड़ने गए थे एंडरसन को.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम सभापति जी, जबलपुर से अमरकंटक मार्ग का डीपीआर बना हम समय समय पर अनुरोध किये कि हमारी सहमति ली जाए, कहीं सहमति नहीं ली गई. डिण्‍डौरी में मां नर्मदा का पुल और बायपास के लिए वह गलत डीपीआर के कारण निर्माण शुरू नहीं हुआ और आज जो मूल डीपीआर थी, 50 करोड़ रुपए के अतिरिक्‍त उसमें प्रावधान करके नई डीपीआर बनाई गई तो मेरा कहना है जो एलएन मालवीय ने डीपीआर बनाया था, उस डीपीआर को किस अधिकारी ने स्‍वीकृत किया, उसकी गलती के कारण आज 50 करोड़ का अतिरिक्‍त उसमें धन राशि की मांग की जा रही है, जो दिल्‍ली तक जाएगी और नर्मदा जी में पुल नहीं बनने से डिण्‍डौरी अमरकंटक का पूरा मार्ग बाधित हो जाएगा. सभापति जी इसमें आपका  भी सहयोग चाहिए, सरकार इसमें संज्ञान लें. और एक अंतिम अनुरोध के साथ मैं यह कहना चाहता हूं कि हमारी संस्‍कारधानी जबलपुर है. हमारे संस्‍कारधानी के विकास की कार्ययोजना, हम देख रहे हैं इंदौर और उज्‍जैन की कार्ययोजना बना रहे हैं हम स्‍वागत करते हैं, पर हमारे संस्‍कारधानी जबलपुर की कार्ययोजना भी बननी चाहिए हमारी संस्‍कारधानी देश का हृदय स्‍थल है, उन्‍होंने हमें विरासत में तमाम पूंजी दी है. सभापति जी आपने बोलने का समय दिया इसके लिए आपको धन्‍यवाद करता हूं और प्रार्थना करता हूं कि एक मंत्री जी इस्‍तीफा दे दें तो आप बन जाओ स्‍वास्‍थ्‍यमंत्री तो जबलपुर का कल्‍याण हो जाए. यही कहते हुए आपको धन्‍यवाद देता हूं.

           श्री ओमप्रकाश सखलेचा(जावद) -- माननीय सभापति महोदय, राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर कृतज्ञता प्रकट करने के लिये आपके बीच में बोलने का आपने जो अवसर मुझे दिया है, उसके लिये मैं आपका धन्‍यवाद करता हूं. मुझे औ‍द्योगिक नीति और औद्योगिकरण के विषय पर ध्‍यान दिलाने के लिये पार्टी की तरफ से निर्देश हुआ है, इसलिए मैं अपनी ज्‍यादातर बात उसी विषय को केंद्रित करके करना चाहूंगा.

          सभापति महोदय, किसी भी राज्‍य का औद्योगिक विकास, व्‍यापार और उद्योग जब तक सुदृढ़ न हो राज्‍य की प्रगति, राज्‍य का स्‍थायित्‍व नहीं आ सकता है और मैं यहां पर कुछ तथ्‍यों से ही बात करना चाहूंगा. मैं देख रहा था वर्ष 2003 में प्रति व्‍यक्ति आय मात्र 11 हजार रूपये सालाना होती थी, जो आज बढ़कर 1 लाख 69 हजार 85 हो गई है, कितने गुना पंद्रह गुना से ज्‍यादा इन तथ्‍यों पर, फेक्‍ट्स पर आर्थिक सर्वे का आंकड़ा है, इकोनॉमी का आंकड़ा बढ़ा और उससे भी आप केलकुलेट कर लो पंद्रह गुना नहीं बढ़ा होगा, उससे भी आप समझ लें, लेकिन यह जो तरक्‍की है यह कहीं न कहीं बहुत तेजी से औद्योगिक नीतियों में परिवर्तन होने के कारण हुआ है, जबकि यह कड़वा सच भी कहने में मुझे कोई झिझक नहीं है कि जब वर्ष 2003 में मध्‍यप्रदेश में भाजपा की सरकार आई, तब बिजली नाम की कोई चीज नहीं थी, उद्योग सब बंद हो चुके थे, क्‍योंकि बिजली ही नहीं थी, हमें बारह साल लगे हमने बिजली का प्रोडेक्‍शन बढ़ाया, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर खड़ा किया, उसके बाद इंडस्ट्रियल एक्टिविटी शुरू हुई, डाटा उठाकर कर पढ़ लीजियेगा कि जैसे जैसे हम इंडस्‍ट्री में बढ़ते गये, वैसे-वैसे हमारे प्रदेश की नेट ग्रोथ में अंतर आया. मैं यहां बहुत ज्‍यादा पुराने उस पर भी बात करूं कि भईया हमारे शास्‍त्रों को अगर हम देखें, तो कोटिल्‍य अर्थशास्‍त्र में जो चेपटर वन में लिखा है कि ''राजस्‍य स्‍वथेय, वाणिज्‍येन कशेय, अन्‍न संपन्‍न धातुना'' अर्थ है कि राज्‍य की स्थिरता, व्‍यापार , कृषि संस्‍थानों पर रहती है, हमारी सरकार उसका पूरा पालन अक्षरश: करने की कोशिश कर रही है. मै यहां पर बहुत अच्‍छे तरीके से स्‍पष्‍ट करना चाहता हूं कि कोई भी शायद ऐसा डिस्‍ट्रिक्‍ट न बचा हो, जहां कुछ उद्योग अभी पिछले चार पांच सालों में शुरू नहीं हुए हैं. चूंकि मैं खुद भी पिछले कार्यकाल में उद्योगमंत्री रहा, मेरे पास एम.एस.एम.ई. डिपार्टमेंट था, मैंने खुद भी गहराई से देखा, लेकिन अभी नई सरकार में माननीय डॉ.मोहन यादव जी ने बहुत गंभीरता से बाइनरी मॉडल का डिसीजन किया, (मेजों की थपथपाहट) रीजनल इंडस्‍ट्री कॉनक्‍लवे किये, कॉन्‍क्‍लेव का अर्थ यह हुआ कि केवल बड़े और केवल बड़े-बड़े स्‍थान पर एक जगह की कॉन्‍क्‍लवे से जब कमिशनरी लेबल पर हुआ तो जागरूकता बढ़ी, यह कड़वा सच है कि जागरूकता लाना और इंडस्‍ट्री बढ़ाना और लगाना, इसके संबंध में कोई एक मिनिट में डिसीजन नहीं ले सकता, उसके लिये पहले वातावरण बनता है, इंडस्‍ट्रलिस्‍ट अपना सर्वे करता है, उसके बाद पूरे मार्केट का सर्वे असेसमेंट करता है, लेकिन आज पूरे भारत में मध्‍यप्रदेश की इंडस्‍ट्री के लिये बहुत गंभीरता से सोच विचार का समय है और लोग अच्‍छी तरह से सोच रहे हैं और उसी के प्रतिफल में कई डिस्ट्रिक्‍ट में कई इंडस्‍ट्रीज आई हैं. मैं अगर उदाहरण के तौर पर कहूं कि नीमच में जब हमने सौ इंडस्‍ट्री पिछले कार्यकाल में सेंक्‍शन की, उसमें से 50 आ गईं, मतलब मुझे खुद ताजुब्‍ब होता है कि एक सीमेंट इंडस्‍ट्री को हमने एलॉटमेंट किया और उसके ढाई साल में 4 हजार करोड़ रूपये का पूरा इंवेस्‍टमेंट करके इस साल वह पूरा प्रोडक्‍शन में आ जायेगी और कम से कम आठ से दस हजार आदमियों का डायरेक्‍ट रोजगार मिलेगा, यह मैं एक उदाहरण बता रहा हूं, ऐसी कम से कम बीस इंडस्‍ट्रीज आईं हैं. लेकिन यहां पर हमें साथ में यह भी ध्‍यान रखना पड़ेगा, बहुत गंभीरता से मैं बात कर रहा हूं कि कुछ जगह पहली बार कुछ निगेटिव वातावरण भी पैदा करते हैं और राजनीतिक उद्देश्‍य से कुछ लोग उनका विरोध का जो नाटक करते हैं उससे भी बहुत नुकसान होता है क्‍योंकि जब तब इंडस्‍ट्री और कृषि दोनों पेरलर नहीं चलेंगे प्रदेश की इकोनॉमी स्थिर नहीं हो सकती है क्‍योंकि एक पांव से आदमी लंबा नहीं चल सकता वैसे ही उद्योग और कृषि मैं वास्‍तव में अभिनंदन करना चाहूंगा. पिछला वर्ष उद्योग का वर्ष मनाया, इस वर्ष वापस हम कृषि पर लाये हैं. हम अगर देखें तो यह वर्ष 2022 से पहली बार ऐसा हुआ और अभी मैंने कल हमारी एडवाइजरी कमेटी की बैठक थी तो यह स्थिति है कि हम 6 महीने पुराने तक जितनी भी किसी की ग्रांट और सब्सिडी ड्यू थी वह 6 महीने के अंदर पूरा हुआ, वह पूरे देश में शायद केवल मध्‍यप्रदेश ही होगा. मुझे इस बात की और इस बात की स्‍टडी और आंकलन करके आने वाले समय लोगों को बहुत गंभीरता से देखना चाहिये. हमने 10 गुना उद्योग का बजट बनाया, हमने रीजनल इंडस्‍ट्री स्किल एम्‍प्‍लायमेंट कान्‍क्‍लेव भी किये, वह भी बहुत महत्‍वपूर्ण थे, लेकिन इसी के साथ हमने जो 5 संभाग में इसका विकेन्‍द्रीकरण किया, चाहे वह उज्‍जैन, सागर, शहडोल, नर्मदापुरम और  चंबल जैसे 5 अलग-अलग जोन बनाकर हमने इसमें कलेक्‍टर कार्यालय में निवेश प्रोत्‍साहन केन्‍द्र की शुरूवात और की. हम थोड़ा सा और गंभीरता से देखें....

          श्री ओमकार सिंह मरकाम-- सभापति महोदय जी, दर्शक दीर्घा में अधिकारी नहीं हैं, माननीय मंत्री जी बैठे हैं, कम से कम आपके पीएस ही बैठ जायें आपके सम्‍मान में, हमारा सम्‍मान न करें, कम से कम आपका सम्‍मान तो करें.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा--  माननीय सभापति महोदय, मैं इस विषय पर पहली बार जो हमारी ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स समिट का आयोजन भोपाल में हुआ तो 65 देशों के प्रतिनिधि आये. 25 हजार से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया यह अपने आप में मध्‍यप्रदेश के रिकार्ड में शायद पहली बार ऐसा हुआ होगा.....

          श्री यादवेन्‍द्र सिंह--  माननीय सभापति महोदय, मरकाम जी ने कोई प्रश्‍न आपके सामने रखा तो कम से कम आपकी ओर से, आसंदी की ओर से निर्देश तो होना चाहिये. राज्‍यपाल के अभिभाषण पर चर्चा हो रही है, अधिकारी इसमें मौजूद रहें.

          सभापति महोदय--  माननीय मंत्री जी, अधिकारियों को निर्देशित कर दें, अधिकारी दीर्घा में उनकी उपस्थित रहे.

          श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव--  माननीय सभापति महोदय, यह तो उनका कर्तव्‍य है, यहां उपस्थित होना चाहिये विधान सभा के अंदर, सभापति महोदय, यह आपत्तिजनक है. कल भी माननीय अध्‍यक्ष जी ने व्‍यवस्‍था स्‍थापित करने के लिये बोला था.

          सभापति महोदय-- बात आ गई है. माननीय सदस्‍यों की चर्चा आगे बढ़ाई जाये.

          श्री अभय मिश्रा--  माननीय सभापति महोदय विधान सभा की गरिमा को इतना हल्‍का बना दिया गया है ...

          श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव--  माननीय सभापति महोदय, अब क्‍या मंत्री जी सबको बुलाने जायेंगे, यही काम रह गया है मंत्रियों का, यह आपत्तिजनक है.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा--  माननीय सभापति महोदय, पहली बार हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने कई अंतर्राष्‍ट्रीय रोड शो भी किये हैं चाहे यूके, जर्मनी जापन, स्‍पेन, यूएई, दावोस और इन सबके माध्‍यम से हम बड़े उद्योगों को आकर्षित कर रहे हैं और कमिशनरीवाइज जो बैठकें कीं उसके माध्‍यम से हम रीजनल हमारे मध्‍यप्रदेश के लोकल इंटरप्रेनर को उसमें आगे बढ़ाने के लिये हम प्रयास कर रहे हैं. 18 नई निवेश की नीतियां पहली बार बनाई गईं और उन सब नवीन नीतियों में जैसे सनराइज सेक्‍टर बनाया, एआई सेक्‍टर के बारे में चर्चायें करके उसके लिये अलग डिवीजन बनाया और एआई का प्रभाव तो आज आप खुद भी देख रहे हैं कि प्रधानमंत्री जी भी उसके ऊपर पूरा फोकस करके देश के डेवलपमेंट में सबसे बड़ा योगदान इस विषय पर है. यहां पर सेमीकंडक्‍टर के बारे में चर्चा हुई, नवीनीकरण ऊर्जा में आज प्रदेश में सबसे आगे शुरू हुआ और मुझे तो इस बात की भी बड़ी...

          सभापति महोदय--  कृपया दो मिनट में समाप्‍त करने की कृपा करें.

 

          श्री उमंग सिंघार - माननीय सभापति महोदय, मुख्यमंत्री नहीं हैं दोनों उपमुख्यमंत्री नहीं,संसदीय मंत्री नहीं कोई वरिष्ठ अधिकारी नहीं तो क्या रामभरोसे विधान सभा चला रहे हैं यह. इनको प्रदेश की जनता की चिंता नहीं है.ऐसी सरकार है गूंगी बहरी क्या भागीरथपुरा का पानी पीने तो नहीं गये. आप आसंदी से निर्देशित करें.

          सभापति महोदय -  जानकारी दी गई है वहां से अधिकारी चलेंगे तो आयेंगे.

          श्री उमंग सिंघार - कोई आपकी बात पर आ नहीं रहा. आपकी बात का असम्मान हो रहा है आप निर्देश दे रहे हैं.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक - इसका पहले भी ध्यान दिलाया गया है.

          श्री उमंग सिंघार - सरकार इतनी संवेदनशील है. मुख्यमंत्री नहीं सदन के अंदर न दोनों उप मुख्यमंत्री नहीं. सभी मंत्री नहीं.

          सभापति महोदय -आपकी बात आ गई है. 10-15 मिनट दीजिये तो एग्जीक्यूट होने में चीजों को ओमप्रकाश जी को अपनी बात पूरी करने दें. आप जब तक बोलना शुरू करेंगे तब तक यहां लोग आ चुके होंगे.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा - माननीय सभापति महोदय, मैं नयी नीतियों केकारण हमारे यहां  बहुत तेजी से टेक्सटाईल,रेडीमेड गारमेंट,फुटवेयर,ट्वायस, फर्नीचर, ट्रेन, एयरोस्पेस एवं रक्षा उत्पादन,फार्मास्युटिकल्स,नवकरणीय ऊर्जा, उपकरण,बायोटेक्नालाजी पार्क,मेडिकल डिवाइस,ई.बी.विनिर्माण एवं हाई वेल्यु एडेड सेक्टर को शामिल करके हमने बहुत तेजी से इस विषय में बात की. प्रदेश में एक नयी नीति और बनाई जिसमें प्रदेश में रोजगार देने पर वृहद इकाईयों को डेढ़ गुना पिछड़े क्षेत्रों में और 1.3 गुना अतिरिक्त निवेश प्रोत्साहन की राशि देने का भी संकल्प किया गया. मुझे बहुत अच्छे से याद है कि यह नीतियां बीस साल पहले होती  थीं कि बेकवर्ड डिस्ट्रिक में जब कोई इंडस्ट्री आये तो उसे अतिरिक्त सपोर्ट दिया जाए और वह वास्तव में वह नियम के अनुरूप थीं मैं ज्यादा लंबी चर्चा नहीं करना चाहता हूं लेकिन अधोसंरचना के विकास के लिये 5 से 10 करोड़ रुपये इंडस्ट्रियल ग्रीन फील्ड बनाने के लिये अतिरिक्त अनुदान भी दे रहे हैं. मैं अगर बात करूं कि मध्यप्रदेश सबसे बड़ा लाजिस्टिक हब बन सकता है क्योंकि यह वह जोन है कि जहां से देश की 70 प्रतिशत आबादी तक ओवर नाईट कोई भी डिलेवरी और डिलेवरी का काम कर सकते हैं उस चीज को ध्यान में रखते हुए  पहली बार हम बहुत तेजी से लाजिस्टिक पालिसी भी लाये और उस पर हम बहुत तेजी से इसमें काम कर रहे हैं और उसके कारण हमें बहुत सारी इंडस्ट्री और वेयर हाऊसिंग और ट्रांसपोर्टेशन का इंप्लायमेंट भी मिलेगा. एक्सपोर्ट प्रमोशन की नई पालिसी बनाई मैं उसकी डिटेल में नहीं जाऊंगा मैं थोड़ा पीएम टेक्सटाईल पार्क धार,यह मध्यप्रदेश को सबसे बड़ा पार्क अवार्ड किया गया केन्द्र सरकार द्वारा और इसमें 46 इकाईयों को लगभग 1150 एकड़ जमीन आवंटित की जिसमें21500 करोड़ से अधिक का निवेश और 55 हजार से अधिक लोगों का उसी एक पार्क में एम्पालयमेंट जनरेट होगा. हमें यह समझना होगा कि इसका विकेन्द्रीकरण जो कर रहे हैं धीरे-धीरे जो बेकवर्ड डिस्ट्रिक में भी इंडस्ट्री में ले जाने का जो प्रयास कर रहे हैं उसके कारण एम्पलायमेंट डिफरेंट डिस्ट्रिक में जाता है जो हमारा अर्बन एरिया में.

          श्री लखन घनघोरिया -  इतनी गंभीर चर्चा है राज्यपाल के अभिभाषण पर और नेता प्रतिपक्ष को बोलना है. कोई सीनियर मंत्री नहीं कोई अधिकारी दीर्घा में नहीं है और सदन की स्थिति यह है ऐसे में क्या नेता प्रतिपक्ष बोल पाएंगे. बोलना न्याय संगत होगा.मेरा आपसे आग्रह है कि राज्यपाल के अभिभाषण की गंभीरता को क्या सरकार नहीं ले रही है.

          सभापति महोदय - लखन भाई, मैंने कहा कि उमंग सिंघार जी बोलें उसके पहले उपस्थिति हो जायेगी.

            श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- माननीय सभापति महोदय, एक ही बात को छठी बार बोलना... ..(व्‍यवधान)..

          सभापति महोदय -- ओमप्रकाश जी के समय में कटौती हो जाएगी. ..(व्‍यवधान)..

          डॉ. सीतासरन शर्मा -- आपके दल के कितने सदस्‍य बैठे हुए हैं. यह भी तो देख लें. ..(व्‍यवधान)..

          श्री लखन घनघोरिया -- आपको कौन सी गंभीरता से वे लोग लेते हैं दादा. आप बैठ जाओ. ..(व्‍यवधान)..

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- सभापति महोदय, मेरा प्‍वॉइन्‍ट ऑफ ऑर्डर है.

          सभापति महोदय -- प्‍वॉइन्‍ट ऑफ आर्डर अभी कहां से आ जाएगा.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- प्‍वॉइन्‍ट ऑफ इर्न्‍फमेशन है. क्‍या बिना कोरम के सदन की कार्यवाही चल सकती है. क्‍या वर्तमान में कोरम पूरा है ?

          सभापति महोदय -- कोरम पूरा है.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- कोरम पूरा है तो उसका एक मतदान करवा दीजिए. मुझे तो नहीं लगता कि कोरम पूरा है. मैं सहमत नहीं हूँ. ..(व्‍यवधान)..

          सभापति महोदय -- कोरम पूरा है. माननीय सदस्‍यों की संख्‍या भरपूर है. कृपया ओमप्रकाश जी को अपनी बात कह लेने दीजिए.

          श्री लखन घनघोरिया -- माननीय सभापति महोदय, यह संदेश गलत जाएगा कि राज्‍यपाल जी के अभिभाषण को, महामहिम के अभिभाषण को कितने हल्‍के में सरकार ले रही है. या तो यह स्‍पष्‍ट हो गया कि अधिकारी ही भाषण बनाते हैं और वही भाषण पढ़ा जाता है. इसलिए अधिकारी उस बात को तवज्‍जो नहीं दे रहे हैं.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- माननीय सभापति महोदय, राज्‍य में बहुत तेजी से नवकरणीय ऊर्जा, चाहे इसमें पॉवर रिन्‍यूएबल के मैन्‍यूफेक्‍चरिंग जोन बनाकर भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा मोहासा, बाबई जिला नर्मदापुरम में स्‍थापित करने का काम किया और इसी में अगर मैं आंकलन लूं तो राज्‍य सरकार द्वारा 1600 एकड़ जमीन पर विद्युत नवीनीकरण उपकरण विनिर्माण हेतु पार्क की स्‍थापना की गई. 31 इकाइयों को उसमें भूमि आवंटित की जा चुकी है. जिसमें लगभग 56,360 करोड़ रुपये का निवेश एवं 36,000 से ज्‍यादा लोगों को रोजगार की संभावना है. मुझे बहुत अच्‍छी तरीके से याद है कि वर्ष 2012 में जब हमने सोलर की शुरुआत की थी तो सबसे पहले नीमच जिले के जावद में एशिया का सबसे बड़ा सोलर प्रोजेक्‍ट लगा था. वर्ष 2014 में माननीय मोदी जी और माननीय शिवराज जी द्वारा उसका लोकार्पण किया गया था. उसके बाद जिस तेज गति से मध्‍यप्रदेश में सोलर का डेव्‍हलपमेंट हो रहा है, उसके कारण बहुत फायदा हो रहा है. लेकिन मैं यहां पर एक छोटी सी बात का पुन: आग्रह करूंगा. सभापति महोदय, आपने भी रिन्‍यूएबल डिपार्टमेंट संभाला था कि अगर किसानों के सोलर पंप के लिए माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने 1 लाख किसानों के लिए घोषणा की, लेकिन इसमें कुछ और फ्रीडम देकर इसको कुछ और भी बढ़ा दिया जाए क्‍योंकि जो भी सोलर पंप लगाएगा, हमारी विद्युत सब्‍सिडी जो हम देते हैं, पॉवर में, वह 2 साल में उसके पूरे पम्‍प की कॉस्‍ट निकल जाती है. उसको बढ़ाकर उसको फ्री हैण्‍ड दे देंगे तो उसमें ...

          सभापति महोदय -- धन्‍यवाद ओमप्रकाश जी, आपका महत्‍वपूर्ण सुझाव आ गया. अब कृपया समाप्‍त करें.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- माननीय सभापति जी, बस, एक-दो विषय और हैं. दिल्‍ली बॉम्‍बे एक्‍सप्रेस वे पर निवेश का जो 4 हजार एकड़ जमीन और चिन्‍ह्ति करके उसको रतलाम में बहुत बड़ा क्‍लस्‍टर, मेगा लेदर फुटवेयर क्‍लस्‍टर मुरैना में 161 एकड़ में विकसित किया जा रहा है. ऐसे ही बुंदेलखण्‍ड क्षेत्र में भी औद्योगिक विकास के लिए बहुत तेजी से नया पैकेज स्‍वीकृत किया है. जिसमें 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और 29 हजार से ज्‍यादा लोगों को रोजगार मिलेगा. अब आप ये देखिए कि पहली बार रचना हुई है कि कमिश्‍नरी वाइज रोजगार भी दें ताकि अर्बन पर जो प्रेशर पड़ता है और गांव से शहर की तरफ जो बहुत तेजी से लोगों की शिफ्टिंग हो रही थी, जिसके कारण परिवार टूट रहे थे. उस पर भी ध्‍यान दिया जा रहा है.

          सभापति महोदय, टेलिकॉम मैन्‍यूफेक्‍चरिंग जोन, जो ग्‍वालियर संभाग में बन रहा है, उसमें 170 एकड़ करके उसमें 8,500 करोड़ रुपये का निवेश हो रहा है और 12 हजार लोगों को वहां पर रोजगार भी मिलेगा. मैं वर्किंग विमेन होस्‍टल को भी अगले उसमें ले लूँ. लेकिन...

          सभापति महोदय -- अब कृपया समाप्‍त कर दें. समय बहुत हो गया.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- ज्‍यादा समय तो विपक्ष ने एक ही वाक्‍य बोलने के लिए ले लिया. 8 बार 8 लोगों ने खड़े होकर के डिस्‍टर्ब करने का प्रयास किया. पर मैं ज्‍यादा लंबी बात नहीं करूंगा. (विपक्ष के सदस्‍यों द्वारा बैठे-बैठे कुछ कहने पर) स्‍थितियां तो...

          सभापति महोदय -- ओमप्रकाश जी, आप बोलिए, सारा कुछ रिकार्ड में जा रहा है.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा -- माननीय सभापति महोदय, जी हां. पीएम पॉवर रिन्‍युएबल एनर्जी में जो मेजर एक्‍सरसाइज है. वह मैंने अभी आपको मेंशन किया है. अब भू आवंटन 31 इकाइयों को रुपये 56,000 करोड़ के निवेश एवं 36 हजार लोगों को रोजगार, सिर्फ 3 बार कैबिनेट की बैठक हुई और उसमें निर्णय किया गया. पहले एक भी जमीन के एलोकेशन के लिए बहुत समय लगाता था, ऐसे ही मैं अगर बात करूँ कुछ पार्कों की विशेषता की, तो पीएम मित्रा पार्क यह सबसे पहला और सबसे फार्स्‍ट ...

            सभापति महोदय - ओमप्रकाश जी, आप कृपया संक्षिप्‍त कीजिये.

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा - सभापति महोदय, मैं सिर्फ इतना ही कहूँगा कि इण्‍डस्‍ट्री का विकास और कृषि दोनों साथ-साथ पूरी गति से चलें. मैं अगली बार जब  बजट पर बात करूँगा, तो बाकि बातें कवर करूँगा. आपने मुझे समय दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद एवं बहुत-बहुत आभार.

          सभापति महोदय - धन्‍यवाद. माननीय हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे जी.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे (अटेर) - माननीय सभापति महोदय, पिछले तीनों वर्ष के डॉ. मोहन यादव जी की सरकार के अभिभाषण हैं और तीनों अभिभाषणों को मैंने एक-एक पृष्‍ठ पलटकर, एक निगाह से देखा.  माननीय महामहिम जी जब अपना वक्‍तव्‍य दे रहे थे तो बार-बार कह रहे थे, मेरी सरकार, मेरी सरकार और दुख की बात तो यह है कि तीनों अभिभाषणों में एक भी जगह हमारे मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी का नाम तक नहीं है. यह तीनों अभिभाषण हैं और प्रधानमंत्री जी का कम से कम 100 बार नाम है, तो इस पर प्रश्‍न तो हो नहीं सकता है, लेकिन मेरी चिन्‍ता यह है कि प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव जी का नाम नहीं होना, यह क्‍या दर्शाता है कि मध्‍यप्रदेश के विकास में उनकी भूमिका नहीं है ? या फिर मध्‍यप्रदेश एक केन्‍द्रशासित राज्‍य हो गया है और नरेन्‍द्र मोदी जी का ही गुणगान करके हम आगे बढ़ेंगे, क्‍योंकि मेरी सरकार में मुख्‍यमंत्री जी का नाम ही नहीं है, उसमें नरेन्‍द्र मोदी जी कहां से आ गए ? तो यदि मेरी बात यदि माननीय मुख्‍यमंत्री जी तक पहुँचे, तो यह जो भी छपवा रहा है, जहां भी छपवा रहा है, यह काफी असत्‍य है, उस पर मैं अभी आगे आ रहा हूँ. परन्‍तु उनका ध्‍यान जाना चाहिए कि यह कौन अधिकारी या कौन मंत्री इसमें चालाकी करके उनका ही नाम गायब कर रहा है ? माननीय सभापति महोदय, आपने अभिभाषण पर मुझे बोलने का अवसर दिया, उसके लिए मैं आपका धन्‍यवाद कहते हुए, अपनी बात को शुरू करूँगा.

          सभापति महोदय, माननीय महामहिम जी के अभिभाषण के प्रथम पृष्‍ठ से ही मैं अपनी बात शुरू करूँगा, यह लगभग 47 पृष्‍ठों का वक्‍तव्‍य है. मैं इस पूरे अभिभाषण का बिन्‍दुवार विरोध करता हूँ, समर्थन नहीं करता हूँ. सिर्फ दो बिन्‍दुओं का समर्थन करता हूँ. पहला और दूसरा बिन्‍दु, पहले बिन्‍दु में माननीय महामहिम जी कह रहे हैं कि वह सदन के सभी सम्‍माननीय सदस्‍यों का स्‍वागत करते हैं, मैं इस बिन्‍दु का समर्थन करता हूँ और दूसरे बिन्‍दु में वह कह रहे हैं कि वह हमको संबोधित करते हुए गौरवान्वित महसूस करते हैं, मैं इस बिन्‍दु का भी समर्थन करता हूँ. मैं इसके बाद हर बिन्‍दु का नीतिगत रूप से विरोध करता हूँ. आप कहेंगे, तो मैं हर बिन्‍दु का कटाक्ष दे सकता हूँ, परन्‍तु इतना समय मुझे नहीं लगता है कि मिलेगा.

          सभापति महोदय - आपके पास सीमित समय है, उसके बीच में अपनी बात रखने का प्रयास करें.  जो गागर में सागर भर दे, वही वक्‍ता है.    

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे - माननीय सभापति महोदय, जी हां, बिल्‍कुल. मेरा पूरा प्रयास रहेगा. मैं प्रथम पृष्‍ठ से ही शुरू करता हूँ, क्‍योंकि एक लाईन में ही पूरी बात समा गई है. पीएम नरेन्‍द्र मोदी जी के अमृतकाल का जिक्र पहले ही पृष्‍ठ पर है, तो अमृतकाल से शुरू करते हैं. मध्‍यप्रदेश में निश्चित ही अमृतकाल है, क्‍योंकि ऐसा अमृतकाल है, जहां पर इन्‍दौर में पानी पीने से मौतें हो रही हैं. यह हमारे मध्‍यप्रदेश का अमृतकाल है और इसको लिखने में भी  किसी को लज्‍जा महसूस नहीं हुई. यह कैसा अमृतकाल है ? जो जल जीवन देता है, वह जल हमारे मध्‍यप्रदेश की फायनेन्शियल कैपिटल इन्‍दौर में जाकर प्राण ले रहा है और यह दुर्भाग्‍य की बात है. भागीरथपुरा में जो घटना हुई, चलिए ठीक है, मैं अभी शुरुआत में किसी पर दोषारोपण नहीं करता. लेकिन मेरा कहना यह है कि यदि सर्पदंश से भी किसी की मौत होती है, तो उसको 4 लाख रुपये का मुआवजा मिलता है. बिजली गिरने से मौत होती है या नदी में डूबने से मौत होती है, तो उसको 4 लाख रुपये बिना मांगे सरकार देती है. यहां सांप की जगह, सरकार ने डसकर मारा. और आप रुपये 2 लाख देकर छाती पीट रहे हैं, भाजपा की सरकार लोगों की मौत पर राजनीति कर रही है, इन्‍हें लज्‍जा आनी चाहिए. सांप डसता है तो रुपये 4 लाख मिलते हैं, नहीं मिलते हों तो बतायें ये लोग ?  आप यहां रुपये 2 लाख दे रहे हैं और उस पर छाती ठोक रहे हो, मौत पर राजनीति कर रहे हो, ये दिन आ गए हैं.

          सभापति महोदय, आगे अमृतकाल की बात करूंगा, मध्‍यप्रदेश में पानी ज़हरीला-जानलेवा, हवा ज़हरीली, हम नेता प्रतिपक्ष जी एवं प्रदेश अध्‍यक्ष जी के नेतृत्‍व में सिंगरौली गए थे, हवा ज़हरीली वहां लोग सांस लेकर मर रहे हैं. अयोध्‍या नगर में अभी 10 हजार पेड़ कट गए, वहां 6 लाख पेड़ काटे जा रहे हैं मध्‍यप्रदेश को (XX) बनाया जा रहा है. हवा ज़हरीली और दुर्भाग्‍य की बात है, दवा भी ज़हरीली है, ये मध्‍यप्रदेश है कि हवा, दवा और पानी तीनों ज़हरीले मिल रहे हैं.

(शेम-शेम की आवाज)

          सभापति महोदय, मैं, आपसे कहना चाहता हूं कि आप एक कल्‍पना कीजिये, एक मां की जिसका नवजात शिशु है और वह उसे दवा पिला रही है, क्‍या सोचकर कि इस दवा से, कफ सिरप से उसका शिशु स्‍वस्‍थ होकर खड़ा हो जायेगा. आप एक बार एक मां के मन की कल्‍पना कीजिये और उसी मां के हाथ से सरकार ने ज़हर पिलवा दिया और अपने ही बेटे की हत्‍या करवा दी. क्‍या वह मां अपना शेष जीवन मुस्‍कुराहट के साथ कभी-भी जी पायेगी ? उस मां ने ज़हर पिलाया और वह ज़हर कहां से परोसा गया,  कहां थे आपके ड्रग्‍स इंस्‍पेक्‍टर ? और सारे वे अधिकारी जो हेल्‍थ, फूड, ड्रग्‍स विभाग देखते हैं, वे सारे कहां थे ? मां के हाथों ज़हर परोसवाया गया, ये मध्‍यप्रदेश में हो रहा है. अमृतकाल में, भोपाल में रुपये 18.5 सौ करोड़ की ड्रग्‍स खुलेआम मिल रही है, सागर में पुलिस स्‍वयं थाने से ड्रग्‍स बेच रही है क्‍योंकि अमृतकाल है लेकिन मैं महामहिम जी की प्रशंसा करना चाहूंगा कि उन्‍होंने 81 वर्ष की उम्र में भी सूझ-बूझ के साथ वे यहां आये और उन्‍होंने ये सारी बातें सदन में अपने वक्‍तव्‍य में बोली ही नहीं और सारे पन्‍ने पलटकर धीरे से निकल गए, उन्‍होंने भी समझ लिया कि ये असत्‍य कथन मैं नहीं करूंगा. सभापति महोदय उस दिन आप भी सदन में मौजूद थे, आप उधर बैठे हुए थे, महामहिम जी ने एक भी असत्‍य बात नहीं कही, उन्‍होंने केवल उतना ही कहा, जो सत्‍य था और मैं उनकी ईमानदारी की और उनकी इस बात की दाद देता हूं कि महामहिम जी ने इसे पढ़ना उचित नहीं समझा.

          सभापति महोदय, शुद्ध पेयजल का भी जिक्र इसमें पृष्‍ठ 20 पर है, शुद्ध पेयजल मिल रहा है, अमृतकाल का जिक्र है तो ये लिखने से पहले एक बार इंदौर की तरफ देख लेते.

          सभापति महोदय, ये सनातनियों की ट्रिपल इंजन की सरकार है, ट्रिपल इंजन इसलिए क्‍योंकि मेयर भी आपके, मुख्‍यमंत्री, प्रधानमंत्री आपके.

          सभापति महोदय, मैं, आपसे पूछना चाहता हूं वैसे तो हमारी परंपरायें दूसरी थीं, क्‍या जो अपमान शंकराचार्य जी का उत्‍तरप्रदेश में हुआ क्‍योंकि वह नरसिंहपुर से जुड़ा हुआ मामला है, वह गद्दी, वह पीठ नरसिंहपुर की थी, क्‍या सरकार शंकराचार्य जी से, जो संतों के भी संत हैं, संतों के भी गुरू हैं क्‍या उनसे प्रमाण सरकार मांगेगी ? शंकराचार्य जी से प्रमाण और वह कौन सी सरकार मांग रही है, ये मैं आपको बताता हूं सरकार वह है, (XX) और (XX) ले रही है, आपका भाजपा का कार्यकर्ता है (XX). मथुरा की लैबोरेटरी रिपोर्ट में आया है और चंदा देता है, आपके यहां के (XX).  सभापति महोदय-  कटारे जी, विषयांतर हो रहा है, मध्‍यप्रदेश के राज्‍यपाल के अभिभाषण पर बोलें, तो अच्‍छा रहेगा.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारेमाननीय, गौसेवा की बात है, इसमें आप कहें तो मैं बताऊं अभिभाषण में ही है, मैं उसी से इस बात को जोड़ रहा हूं, इसमें गौसेवा की बात है, गौसेवा का ही बता रहा हूं, जो गौसेवा भोपाल में हो रही है, नगर निगम का स्‍लॉटर हाउस PPP मोड पर है, इसमें नगर निगम की शेयरिंग है, स्‍टॉक होल्डिंग है और (XX) रामेश्‍वर शर्मा जी अभी नहीं हैं, बड़ा आनंद आता है, उन्‍हें इन विषयों पर, जरा इस पर उत्‍तर दें, कौन-कौन चंदा ले रहा है, नाम दूं ? (XX) के खातों में पैसे गए ? (XX) उनके किस-किस व्‍यक्ति के पास पैसे गए, दूं आंकड़ा ? अगर हों तो डिबेट करिये, आईये बैठिये सामने, मैं बताऊंगा (XX) जो आपके भाजपा का कार्यकर्ता है, वह गौमांस बेचकर, आप जिस गौ की राजनीति करते हैं, वोट की, वह गौमांस बेचकर आप लोगों के सामने आपकी मां को काट रहा है लज्‍जा की बात है.

          सभापति महोदय, मैं, मांग करता हूं मुख्‍यमंत्री जी का वह बुलडोज़र कहां है जो गरीबों का घर तोड़ता है, बार-बार जाकर सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना करते हुए अगर उस बुलडोज़र में ज़रा सा भी दम है और मुख्‍यमंत्री जी जो रोज गौसेवा अपने निवास पर करते हैं, अगर वास्‍तविकता में उनके अंदर गौमाता का भाव है, तो मेयर, मंत्री, कमिश्‍नर जितने लोग हैं, सभी के ऊपर एफ.आई.आर. दर्ज होनी चाहिए, तब गौसेवा का भाव उत्‍पन्‍न होगा, वरना ये दिखावा करना बंद करना चाहिए.

          सभापति महोदय-  कृपया समाप्‍त करें, आपका समय हो गया है.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारेसभापति महोदय, अभी मैं थोड़ा और समय चाहूंगा, अभी थोड़ा बाकी है. शायद आप सभी को ये किताब याद होगी (माननीय सदस्‍य द्वारा सदन में किताब प्रदर्शित करते हुए.) इसमें चाचा, मामा और भाई साहब हैं, सभी लोग छपे हुए हैं, क्‍या भाई साहब आपको ये किताब याद है ? ये आपका चुनावी संकल्‍प पत्र है और इसमें लिखा हुआ है नरेंद्र मोदी की गारंटी और भाजपा का भरोसा. एक ही बिंदु से पता लग जायेगा, इसके पृष्‍ठ क्रमांक 26 पर लिखा हुआ है कि गेहूं का MSP रुपये 2700 देंगे, ये आपकी गीता या भागवत, ऐसा कुछ आपने बताया था कि उसके समान है. इस भरोसे और गारंटी की पोल तब खुलती है जब एमएसपी वर्ष 2024-25 में 2425 रुपए और उसके बाद अगले ही वर्ष में 2528 रुपए यह एमएसपी आप दे रहे हो और यह आपका भरोसा है. क्‍या यह धोखाधड़ी नहीं है? आप चुनाव जीतने से पहले और चुनाव के बाद कह कुछ और रहे हैं और आप आपका चुनावी संकल्‍प पत्र पढि़ये. अगर आपने फेक दिया हो टोकरी में तो मैं एक कॉपी सभी को भिजवा सकता हूं. माननीय राज्‍यपाल जी ने अपने अभिभाषण में एक लाइन पढ़ी. उन्‍होंने कहा कि मेरी सरकार ने वर्ष 2025 उद्योग रोजगार वर्ष के रूप में मनाया. पर क्‍यों? न उद्योग आया, न रोजगार आया और पर्व मना लिया. किस बात का पर्व? रोजगार की बात करते हैं.

          सभापति महोदय-- हेमन्‍त जी आपको बोलते हुए 10 मिनट हो गये हैं. कृपया समाप्‍त करें.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे-- सभापति महोदय, मैं आपका और नेता प्रतिपक्ष जी का संरक्षण चाहूंगा.

          सभापति महोदय-- नेता प्रतिपक्ष जी कम बोलने वाले हों तो, आप ज्‍यादा बोल लीजिए.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे-- सभापति महोदय, वह पांच मिनट कम कर लेंगे. मैं आपका संरक्षण चाहते हुए यह कहूंगा कि मेरी सरकार ने वर्ष 2025 उद्योग रोजगार वर्ष के रूप में मनाया लेकिन क्‍यों मनाया? यह मैं पूछना चाहता हूं क्‍योंकि ऐसी कोई पर्व लायक बात तो हुई ही नहीं. मैं रोजगार की बात करता हूं. एक उदाहरण से रोजगार की पोल खुल जाएगी. यह भास्‍कर की कटिंग है. इसमें मैं वित्‍त मंत्री जी और उप मुख्‍यमंत्री जी का भी ध्‍यानाकर्षित करूंगा क्‍योंकि उनका इससे थोड़ा जुड़ाव है. माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी कृपया इस छोटी सी बात पर ध्‍यान दीजिएगा. टीसीएस कंपनी भोपाल में कई वर्षों से स्‍थापित थी. टीसीएस कंपनी भोपाल छोड़कर पलायन कर चुकी है. यदि कोई देखना चाहे तो यह अधिकृत पेपर कटिंग है. (सदन में पेपर कटिंग दिखाते हुए). टीसीएस जैसी बड़ी कंपनी, ग्‍लोबल कंपनी मध्‍यप्रदेश की राजधानी भोपाल को छोड़कर भाग चुकी है और माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी ने पत्र लिखा और वह पत्र लिखकर बोल रहे हैं कि बंद मत कीजिए, लेकिन टीसीएस कंपनी ने बोला किे आप लोगों के बस का नहीं है हमें संभालना और वह निकल गये. उसका रिजल्‍ट क्‍या निकला. राजस्‍व हानि तो हुई यह एक चीज है, लेकिन आप रोजगार देने की बात कर रहे हैं. रोजगार नहीं दे पाये कोई बात नहीं. आपने कम से कम एक हजार से ज्‍यादा लोगों का रोजगार छीन लिया और आप देने की बात कर रहे हैं? और जब बेरोजगारी का शब्‍द बहुत ज्‍यादा भारी लगने लगा तो उसको आकांक्षी कर दिया. अब मध्‍यप्रदेश में बेरोजगारी समाप्‍त ही हो गयी क्‍योंकि अब तो वह आकांक्षी कहलाएंगे. क्‍या टीसीएस कंपनी का जाना चिंतनीय विषय नहीं है और आप छोटी-छोटी इंडस्‍ट्रीज के सेटअप का बखान कर रहे हैं. अभी मैं आपके इंडस्‍ट्रियल सेटअप पर आता हूं. इसकी भी बात करते हैं जो आपने इंडस्‍ट्रीज सेट की है उसको बता देते हैं.

          सभापति महोदय, पहले तो मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि रोजगार मिला होगा उनका नियुक्ति पत्र होगा वह हमको दीजिए. वह आईटीआर फाइल करते होंगे, इनकम टेक्‍स रिटर्न भरते होंगे दीजिए, पे-स्लिप होगी दीजिए. जरा आंकड़ा तो मिले उनके नाम नंबर दीजिए. हम पते पर जाएंगे, पूछेंगे. आपने रोजगार छीना ज्‍यादा है, दिया कम है. मैं आपको इस बात को चेलेंज के साथ कह सकता हूं. इस पर आप जब चाहे बहस कर लीजिएगा. एक बेकडोर एंट्री का मामला है.

          सभापति महोदय, रोजगार जिसको मिला यह बताता हूं. किसको मिला यह भी मैं आपको प्रमाण बताउंगा कि किसको रोजगार मिला है. बेकडोर एंट्री के थ्रू. यह कागज हैं. एमएसएमई मंत्री, स्‍कूल शिक्षा मंत्री अभी तो दोनों ही नहीं हैं मैं दोनों को ही पहुंचाऊंगा. एक रोजगार मिला है. 74 वर्ष के एस.एन. चौरसिया जी को. यह पत्र है अगर कोई इसको चेलेंज करना चाहे. एक रोजगार मिला है 70 वर्ष के श्रीवास्‍तव जी को, एक 70 वर्ष के जेपीएस अरोरा जी को, एक 68 वर्ष के श्री मजहर खान जी को, 67 वर्ष के किशोर कुमार, 66 वर्ष के रामराज जी और ऐसे बहुत सारे हैं. यह बेकडोर एंट्री से हैं. अब बेकडोर एंट्री में क्‍या हो रहा है कि विभाग लिखकर कह देता है कि हमको तो यही अधिकारी चाहिए. यही हमारी दुकान चला रहे थे और वह बेकडोर से आ जाते हैं और इस तरीके से भारतीय जनता पार्टी आरक्षण पर चोट कर रही है, क्‍योंकि बेकडोर एंट्री में आरक्षण लागू नहीं होता. बाबा साहब की प्रतिमा तो बड़ी अच्‍छी लगाई है लेकिन बाबा साहब के आरक्षण को आप ही लोग.... राहुल गांधी जी ने कहा था कि बेकडोर एंट्री के थ्रू आप लोग आरक्षण व्‍यवस्‍था को ध्‍वस्‍त कर रहे हैं और इसको ध्‍वस्‍त करने का मेरे पास साक्षात प्रमाण है. आप इंडस्‍ट्रीज की बात कर रहे थे बड़े सारे समिट हुए हैं. जीआईएस हुआ, इनवेस्‍टर समिट हुआ देश में हुए विदेश में हुए. लाखों करोड़ों रूपए प्रचार, प्रसार में खर्च हो गया. रोजगार नहीं आया, इंडस्‍ट्रीज नहीं आई. उसकी जो रद्दी है यदि रद्दी को भी बेच देंगे तो कई लाख लोगों को रोजगार मिलेगा. इतने कागज बंडल आ चुके हैं. प्रचार, प्रसार में जो खर्च हुआ यदि वह खर्च नहीं किया जाता तो कई लाखों लोगों को इसमें रोजगार मिल सकता था.

          सभापति महोदय-- हेमन्‍त जी कृपया समाप्‍त करें. विषय आ गया है. देखिये शर्मा जी भी आ गये आप उनको याद ही कर रहे थे.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे-- मैं याद ही कर रहा था.

          सभापति महोदय-- वह आ गये हैं उनको बोल लेने दीजिए. आप बैठ जाइये. धन्‍यवाद.

            श्री रामेश्वर शर्मा -- सभापति महोदय, मुझे जानकारी मिली है,  मैं इस सदन को शपथपूर्वक..

          सभापति महोदय -- रामेश्वर जी मेरा आपसे कहना है कि आप कही सुनी हुई बातों पर विश्वास मत करिए यहां बैठकर सुनें उसके बाद ही कुछ एड करिए.

          श्री हेमंत सत्यदेव कटारे -- आप बाहर चाय पी रहे हो और सदन में...

          श्री रामेश्वर शर्मा --  हेमंत कटारे जी तब ही व्यक्तिगत कोई भी आरोप लगाएं जब आप पर प्रमाण हों.

          श्री हेमंत सत्यदेव कटारे -- मैंने आप पर कोई आरोप लगाया ही नहीं है. बिलकुल नहीं लगाया है. मैं सदन में कह रहा हूँ कि आप पर नहीं लगाया है. आपके भोपाल के मंत्री पर लगाया है जो हट जाएगा तो आप ही मंत्री बनोगे.

          श्री रामेश्वर शर्मा -- यह लालीपॉप भी मत दीजिए. यह लालीपॉप मत बांटिए.

          श्री हेमंत सत्यदेव कटारे -- आप धन्यवाद दीजिए मुझे. नंबर इन्हीं का आ रहा है. अगला मंत्री आपको ही बनना है भाईसाहब. आप हमारे अगले मंत्री हैं.

          श्री रामेश्वर शर्मा -- मेरी पार्टी तय करेगी तुम क्या तय करोगे. यह बात अलग है.

          सभापति महोदय -- मैं अगले सदस्य को आवाज दे रहा हूँ. श्री आशीष गोविन्द शर्मा जी.

          श्री हेमंत सत्यदेव कटारे -- माननीय सभापति महोदय, मेरा दो मिनट का भाषण बचा है.

          सभापति महोदय -- आप समाप्त करें. 15 मिनट से ज्यादा हो गए हैं.

          श्री हेमंत सत्यदेव कटारे -- सभापति महोदय, मैं जी आई समिट की बात कर रहा था. जी आई इंडस्ट्रीलाइजेशन की बात की गई थी. एक उदाहरण दे देता हूँ कैसे हमारा अन्तर्राष्ट्रीय चुटकुला बना और मध्यप्रदेश की हंसी उड़ी. दावोस में अभी मुख्यमंत्री जी गए थे. मजेदार बात देखिए. वहां जाकर मीटिंग की इन्वेस्टर्स समिट हुआ. किससे मीटिंग की यह महत्वपूर्ण है. एक कम्पनी थी डीपी वर्ल्ड. यह कम्पनी मध्यप्रदेश के होशंगाबाद में स्थापित है. डीपी वर्ल्ड से दावोस में मिल रहे हैं. मुख्यमंत्री निवास पर भोपाल में उन्हें बुला लेते इतना खर्चा किया वहां जाकर वो तो यहीं मिल सकते थे. दावोस में हो रहा था दिखावा. दूसरी कम्पनी थी जिओ हॉट स्टार, इसका मुंबई में हेड ऑफिस है. भोपाल से फ्लाइट गई मुंबई. मुंबई से दोनों बैठे दावोस बात करने गए. मुंबई में बात कर लेते. यह ग्लोबल दिखावा चल रहा है. 25 से 30 लोगों ने वहां पर टिकट कैंसिल करवाई कि अब हम दावोस घूमेंगे. दावोस घूमने का एक वो था. प्रशांत भूषण जैसे अधिवक्ता, प्रभु चावला जैसे पत्रकारों ने बड़े चुटकुले बनाए कि भोपाल और मुंबई को लोग दावोस में जाकर इंडस्ट्रीज पर, यह राष्ट्रीय चुटकुला बना. मेरा सिर्फ यह कहना है कि यह जितनी भी इंडस्ट्रीज मीट और ग्लोबल समिट हो रहे हैं.

          श्री गोविन्द सिंह राजपूत -- (बैठे-बैठे) कमलनाथ जी भी गए थे, वे क्या करने गए थे यह तो बताओ.

          श्री हेमंत सत्यदेव कटारे -- आप हमारी सरकार में थे यह मत भूलो.

          सभापति महोदय -- हेमन्त जी आपकी बात का जवाब गोविन्द राजपूत जी ने दे दिया है. अब आप बैठ जाएं.

          श्री हेमंत सत्यदेव कटारे -- सभापति महोदय, आपने बोलने का समय दिया इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्री आशीष गोविन्द शर्मा ( खातेगांव ) -- सभापति महोदय, मैं राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापित करता हूँ. सरकारें हर 5 वर्षों में चुनी जाती हैं. मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार काम कर रही है. हमारी पूर्ववर्ती सरकार के कामों को बेहतर से बेहतरीन करने का काम वर्तमान सरकार के जिम्मे है. इसलिए मैं राज्यपाल महोदय के अभिभाषण में उल्लेखित जो विषय उन्होंने दिखाए उन पर धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ. मध्यप्रदेश बहुत संभावनाओं वाला प्रदेश है. इसकी एक ऐतिहासिक, सांस्कृतिक विरासत है. पूरे भारत का मध्य हमारा मध्यप्रदेश माना जाता है. विभिन्न भाषाओं और संस्कृतियों को धारण करने वाली जातियां, जनजातियां इस प्रदेश में निवास करती हैं. मां नर्मदा, कालीसिंध जैसी कई नदियां जो प्रकृति द्वारा हमें प्रदत्त की गई हैं जो कि हमारी धरती का पोषण करती हैं.

          सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि मध्यप्रदेश में निश्चित ही उल्लेखनीय कार्य विभिन्न क्षेत्रों में हो रहा है. माननीय मुख्यमंत्री जी जो कि स्वयं पर्यटन, वन, प्रकृति और पर्यावरण पर विशेष रुचि रखते हैं. हम आज गर्व के साथ कह सकते हैं कि चीता जो विलुप्त हो चुका था उसे मध्यप्रदेश में अपना प्राकृतिक आवास मिला है. न सिर्फ निवास मिला है बल्कि विभाग की देखरेख के कारण आज उनका कुनबा बढ़ रहा है परिवार बढ़ रहा है. चूंकि हम मनुष्य हैं और मनुष्य होने के नाते प्रकृति और जीव जन्तुओं का संरक्षण करना हमारी जिम्मेदारी है और सरकार की भी जिम्मेदारी है. क्योंकि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ पर्यावरण देना चाहते हैं. अच्छी प्राकृतिक व्यवस्थाएं देना चाहते हैं. इसलिए सरकार ने इस दिशा में बहुत बेहतर काम किया है. बांस जो कि आज लकड़ी का बहुत बढ़िया विकल्प है, खासकर फर्नीचर के क्षेत्र में देखा जा रहा है. बांस आधारित उद्योग मध्यप्रदेश में लगे हैं. हमारे देवास जिले में भी बांस आधारित उद्योग काम कर रहा है. जो इमारती और सागौन की कीमती लकड़ी होती है जिसका फर्नीचर में उपयोग किया जाता है. बांस उसके विकल्प के रुप में आ गया है. सरकार बांस मिशन को बढ़ावा दे रही है. लगभग 25 लाख पौधे मध्‍यप्रदेश में बांस के रोपे गए हैं. संस्‍कृति, पर्यटन, धर्म, कई बार धर्म के बारे में, संस्‍कृति के बारे में, हमारी धार्मिक मान्‍यताओं के बारे में बहुत संकुचित दृष्टिकोण अपना लिया जाता है, लेकिन हमारी संस्‍कृति, हमारे प्राचीन मंदिर, हमारे देव स्‍थान इस प्रदेश की एक धरोहर हैं और उन धरोहरों का विकास करना हमारी सरकार की जिम्‍मेदारी है. मुझे इस बात का गर्व है कि हमारे भगोरिया जनजातीय नृत्‍य को, गोंड़ चित्रकला को, नर्मदा परिक्रमा पथ को राष्‍ट्रीय अमूर्त सांस्‍कृतिक धरोहर में शामिल किया गया है. इसके लिए प्रत्‍येक मध्‍यप्रदेश वासी को गर्व होना चाहिए. महाकाल महालोक हो, श्रीराम राजा लोक ओरछा हो, श्रीराम वनवासी लोक चित्रकूट हो, देवी लोक सलकनपुर हो, हनुमान लोक पांढुर्णा हो या सांदीपनि आश्रम हो, आने वाले समय में भारत के हमारे जिन्‍हें हम आदर्श मानते हैं, जिनके नाम से इस देश को जाना जाता है, ऐसे भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्‍ण के राम वन गमन पथ और श्रीकृष्‍ण पाथेय का विकास भी हमारी सरकार करने जा रही है. भगवान जिस धरती पर जन्‍मे उनके चिह्न मौजूद हैं, हमारी आने वाली पीढि़यों को उनका दर्शन होना ही चाहिए क्‍योंकि भगवान का स्‍मरण सभी को प्रेरणा देता है.

          सभापति महोदय, वर्ष 2025-26 में मध्‍यप्रदेश सरकार ने शासन संधारित मंदिरों के लिए लगभग 21 करोड़, 80 लाख रुपये का आवंटन किया है. यह मंदिर जिनको हमारे पूर्वजों ने बनाया है, जिनका बहुत अच्‍छा स्‍थापत्‍य है बहुत सुंदर यह मंदिर हैं उनके रखरखाव की भी आवश्‍यकता है और इसलिए सरकार ने इसके लिए धनराशि दी है. यह वाकई में एक बहुत अच्‍छा कदम है क्‍योंकि इन स्‍थानों में प्रतिवर्ष लाखों की संख्‍या में श्रद्धालु आते हैं. मध्‍यप्रदेश के यह जो देव स्‍थान हैं यहां पर देश, विदेश, दुनिया भर से श्रद्धालु आते हैं और एक तरह से धार्मिक पर्यटन हमारे प्रदेश में इन स्‍थानों के विकास से हो सकेगा. मध्‍यप्रदेश में विभिन्‍न स्‍थानों पर किसी देवता की स्‍मृति में, किसी संत-महात्‍मा की स्‍मृति में विभिन्‍न मेले लगाए जाते हैं. अभी गर्मी का समय शुरू होने वाला है खेतों में फसल कटने के बाद अनेकों विधानसभा क्षेत्रों में छोटे-छोटे मेले लगाए जाते हैं, इन मेलों को चिह्नत किया गया है और लगभग 1,600 से अधिक मेलों का पंजीयन किया गया है और 111 तीर्थों का पंजीकरण मेला प्राधिकरण के अंतर्गत किया गया है.

सभापति महोदय, सरकार तक जब कोई बात नहीं पहुंच पाती तो उसके लिए पारदर्शी व्‍यवस्‍था बनाने हेतु सीएम हेल्‍पलाइन मध्‍यप्रदेश में प्रारंभ की गई है. मुझे इस बात की खुशी है कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने विशेष इंटरेस्‍ट लेते हुए लगभग 99 प्रतिशत शिकायतों का निराकरण किया है. एक टोलफ्री नंबर के माध्‍यम से कोई भी मध्‍यप्रदेश का आम व्‍यक्ति उस पर शिकायत दर्ज करा सकता है और निश्चित ही सरकार के पास शिकायत भी तत्‍परता से पहुंचती है और फिर उसके बाद उन शिकायतों का निराकरण एक पूरा तंत्र बना हुआ है उस तंत्र के माध्‍यम से होता है. मैं यह मानता हूं कि यह भी इस सरकार की जनता के प्रति एक संवेदनशीलता है.

सभापति महोदय, आज हमारे मध्‍यप्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्‍यम से जल गंगा संवर्द्धन अभियान चलाया गया है. हम आने वाली पीढि़यों को जल का सुरक्षित स्‍त्रोत देकर जाएं इसके लिए आवश्‍यक है कि हमारी जो नदियां हैं जो मध्‍यप्रदेश में बहती हैं अन्‍य प्रदेशों तक भी जाती हैं उनपर हमने बांध तो बना दिए, सिंचाई की व्‍यवस्‍था भी की, पेयजल भी हम उनसे ले रहे हैं लेकिन वह निर्मल हों, वह स्‍वच्‍छ हों, जो प्राचीन कुंए, बावडि़यां हैं, जिनको समय के साथ विकास की अवधारणा ने नेस्‍तोनाबूद कर दिया है पुराने बनाए हुए उन स्‍थानों को गंदा कर दिया है, उनको सजाने संवारने का, उनका शुद्धिकरण करने का काम कुंआ और बावड़ी सफाई अभियान के अंतर्गत किया और लगभग 40 लाख लोग इस जल गंगा संवर्द्धन अभियान में शामिल हुए. माननीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल जी, माननीय मुख्‍यमंत्री जी खंडवा में और अन्‍य स्‍थानों पर उन नदी के उद्गम स्‍थलों तक पहुंचे जहां से वह नदियां प्रवाहित होकर नर्मदा जी में मिलती हैं और मैं मानता हूं कि इससे समाज में भी एक जागरूकता आएगी. आने वाली पीढि़यों को और हमारे युवाओं, महिलाओं को भी लगेगा कि इन नदियों को बचाना कितना आवश्‍यक है.

            सभापति महोदय, मध्‍यप्रदेश हमारा एक स्‍पोर्ट्स का बहुत बड़ा हब बनता जा रहा है. हमारी जो अकादमियां हैं उनसे वह खिलाड़ी निकलकर आ रहे हैं जो कभी अकादमियों तक नहीं पहुंच पाते थे, जिनकी प्रतिभा गांव के प्राइमरी और मिडिल स्‍कूल में ही दम तोड़ देती थी या गांव के मैदानों के बाहर वह दौड़ नहीं पाते थे, आज क्रांति गौड़ जैसी खिलाड़ी और कई सारे अनुसूचित जाति जनजाति के ऐसे खिलाड़ी जो तीरंदाजी, कुश्‍ती, दौड़ इन सबमें मध्‍यप्रदेश का नाम गौरवान्वित कर रहे हैं. निश्चित ही आने वाले समय में मध्‍यप्रदेश खेलों में और आगे बढ़ेगा. सरकार ने इसका बजट भी बढ़ाया है और जर्मनी के प्रतिष्ठित फुटबॉल क्‍लब द्वारा हमारे शहडोल के बच्‍चों को विचारपुर में फुटबॉल की ट्रेनिंग दी जा रही है.          

                  

4.35 बजे                 {अध्यक्ष महोदय(श्री नरेन्द्र सिंह तोमर)पीठासीन हुए}

 

          श्री आशीष गोविंद शर्मा--माननीय अध्यक्ष महोदय, इससे हमारे खेलों के विकास में और ज्यादा मदद मिलेगी.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, चिकित्सा के क्षेत्र में आज मध्यप्रदेश गर्व के साथ में कहते हैं कि  हमारे पास में 5550 एमबीबीएस की सीटें  हैं, सरकार ओर मेडिकल कालेज खोलने जा रही है.एसएस और एमडी की लगभग 2800 से अधिक सीटें हैं और सुपर स्पेशलिस्ट की भी लगभग 100 सीटे हैं. इतने डॉक्टर हैं, एक समय में मध्यप्रदेश में डॉक्टर मिलते नहीं थे,  आज हमारे पास में निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों में बहुत कुशल चिकित्सक है और निश्चित ही मुझे इस बात का भी गर्व है कि हमारे प्रदेश में बाहर के राज्यों से भी इलाज कराने के लिये मरीज आते हैं, यह मध्यप्रदेश की एक विश्वसनीयता चिकित्सा के क्षेत्र मे उपस्थित हो रही है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, आर्युवेद के बारे में, हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी का स्वयं का योग और आयुर्वेद पर विशेष विश्वास है. आपमें से हम सब ने कई लोगों ने उनके विभिन्न योग की कठिन मुद्राएं करते हुये देखा और उन्होने स्वयं भी स्वीकार किया कि बीमारी की अवस्था में वे आयुर्वेद की चिकित्सा पद्धति पर विश्वास करते हैं, जब बड़े लोग किसी चिकित्सा पद्धति या किसी सिस्टम पर भरोसा जताते हैं तो नीचे के लोगों पर भी विश्वास जमता है इसलिेये माननीय अध्यक्ष महोदय मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश सरकार आने वाले समय में 3 आयुर्वेदिक कालेज खोलने जा रही है और वेलनेस सेन्टरों के माध्यम से, जैसा कि पूर्व में भी वक्ताओं ने उल्लेखित किया कि चाहे केरला हो, भारत के कई सारे राज्य जहां पर वेलनेस सेन्टर और इस तरह की प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति लेने के लिये लोग दूर दूर से जाते हैं. मध्यप्रदेश भी आने वाले समय में उसमें अपना स्थाना बनायेगा और कहने के लिये बहुत सारा है लेकिन बजट के समय में उस पर विस्तार से चर्चा करूंगा.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, आज मध्यप्रदेश की प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता बढ़ी है . 770 एमएल दूध ,भारत का जो एक पैमाना है दूध उससे अधिक मध्यप्रदेश में उपलब्धता की ओर हम बढ़ रहे हैं.पशु पालन के लिये गो पालन के लिये किसानों को सबसीड़ी देने का काम मध्यप्रदेश की सरकार कर रही है. निश्चित ही कृषि आधारित हमारी जो अर्थ व्यवस्था है किसानों को भावांतर देने से किसान का विश्वास इस सरकार के प्रति बढ़ा है.और मैं विश्वास के साथ में कह सकता हूं कि मध्यप्रदेश के लाखों किसानों के खेतों में सोलर पंप से सिंचाई की व्यवस्था होने लगेगी, जब किसान के खेत पर कुसुम योजना के अंतर्गत सोलर प्लांट लगकर के उसे एमपीईबी को बिजली बेचने से जो पैसा मिलेगा उससे उसकी आमदनी बढेगी तब एक नया मध्यप्रदेश नवकरणीय ऊर्जा के माध्यम से हम लोग खड़ा कर पायेंगे.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर अपने विचार रखने का समय दिया उसके लिये आपको बहुत बहुत धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदय- बहुत धन्यवाद आशीष जी.

          श्री कमलेश्वर डोडियार(सैलाना) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, राज्यपाल महोदय ने जो अपना अभिभाषण दिया मैं उस पर अपनी असहमति व्यक्त करता हूं. अध्यक्ष महोदय, राज्यपाल महोदय ने अपने अभिभाषण में कहा जनजातीय वर्ग के उत्थान के लिये कई प्रकार के प्रयास किये जा रहे हैं. मगर अध्यक्ष जी मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि मैं पश्चिम मध्यप्रदेश से आता हूं , जहां पर आज भी आदिवासी लोगों के पूरे के पूरे गांव , कृषि का काम खतम होने के बाद में यहां से पलायन करते हुये बाहर मजदूरी के लिये चले जाते हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, विगत दो वर्ष की स्थिति यदि हम देखे, किसी भी प्रकार का कोई सुधार नहीं आया है. आदिवासी इलाके में स्टूडेंट पढ़ाई बहुत करते हैं लेकिन वेकेंसी समय पर आती नहीं है, हम लगातार सरकार से मांग करते हैं कि सरकार आदिवासी इलाके में वेकेंसी बढ़ाये, जो रिक्तियां हैं बैकलाग की यदि सरकार उन्हीं पर नियुक्ति करना चालू कर दे तो कम से कम बहुत से लोगों को राहत मिल सकती है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, आदिवासी इलाके में पेसा एक्ट बना हुआ है, यह एक्ट शासन और प्रशासन की व्यवस्था के लिये बना है. 2022 में यह पेसा एक्ट प्रदेश में बना है उसका क्रियान्वयन करने के लिये मोबेलाइजर्स की भर्ती कर रखी है. मोबेलाईजर्स को 5 से 6 माह से वेतन ही नहीं दिया जा रहा है, जब काम करने वालों को वेतन ही नहीं दिया जायेगा, तो वह कैसे पेसा एक्ट  पर काम करते होंगे, इसका अंदाज लगाया जा सकता है. माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जनसेवा मित्र हैं , राज्य सरकार की जो योजनायें संचालित होती हैं उसका प्रचार प्रसार करते हैं, इन जनसेवा मित्रों को न ही स्थायी किया जा रहा है और न ही वेतन दिया जा रहा है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं जिस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता हूं वहां पर भील जनजाति बाहुल्य है, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुरा और धार जिला यहां पर भील जाति बहुत ज्यादा पिछड़ती जा रही है. यहां पर भी बैगा,सहारिया और भारिया जाति जैसी स्थिति निर्मित होती चली जा रही है. मेरा अध्यक्ष जी आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि आदिवासी इलाके में कुपोषण, बेरोजगारी, पलायन और विस्थापन जैसी समस्या का समाधान करने के लिये सहरिया, बैगा, भारिया विकास प्राधिकरण की तरह भील आदिवासी विकास प्राधिकरण की स्थापना की जानी चाहिये.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अभी पूर्वी मध्यप्रदेश के दौरे पर गया था, वहां पर मैने देखा है . डिण्डोरी, मण्डला, शहडोल और अनूपपुर इन जिलों में डेम बनाने की परियोजनायें क्रियान्वित होने की तैयारी चल रही है. माननीय अध्यक्ष महोदय, अपर नर्मदा परियोजना के नाम से बसानिया,ओढ़ारी,राघोपुर,मरवारी, शोभापुर और बुढ़ेर   इन जगहों पर बांध   बनाने की  तैयारी चल रही है.   अगर यह बांध बनते हैं, तो   सैकड़ों  गावों के हजारों परिवारों के लाखों लोग   बाधित होंगे, ये लोग विस्थापित होंगे.   मेरा आपसे अनुरोध है कि  यह  जो  परियोजनाएं हैं  बांध बनाने की,  इनको निरस्त किया जाये  और यह आदिवासी इलाका है,  अनसूचित इलाका है.  यहां पर अगर बांध बनाना है या तालाब  बनाना है,  तो वहां के लोगों के बीच में जाकर  वहां की ग्राम सभाओं   के बीच में ही प्रस्ताव पारित  किये  जाने चाहिये. अगर लोग तैयार हैं, लोग अगर सहमति देते हैं अपने गांव के विकास के लिये,  अपनी खेती बाड़ी में बड़े बांध  बनाने के लिये तो ही ये बांध   बनने चाहिये.  अब तक मुझे जानकारी है कि   वहां बहुत लोग विस्थापित  होंगे,  इसलिये ये बांध निरस्त किये जाने चाहिये.  आदिवासी इलाके में  चिकित्सा की व्यवस्था ठीक नहीं है, प्राथमिक अस्पतालों के अंदर   डॉक्टर्स उपलब्ध नहीं होते हैं. ज्यादातर  जो अस्पताल हैं,  वहां पर दवाइयां भी समय पर   नहीं मिल पाती हैं. समय पर इलाज नहीं मिल पाता है.   मेरा आपसे अनुरोध है कि  आदिवासी इलाके में जो स्वास्थ्य की  व्यवस्था है, उसको ठीक किया जाये.   ये आदिवासी लोग पलायन पर बाहर मजदूरी  करने के लिये जाते  हैं,  ये वहां सुरक्षित नहीं होते हैं. यहां तक कि जो कालेज  में   प्रोफेशनल कालेज में पढ़ने  वाले जो स्टूडेंट होते हैं,  वह भी सुरक्षित नहीं हैं, तो  मजदूरी करने के लिये आदिवासी  जब बाहर जाते हैं,  वह कैसे  सुरक्षित  होंगे.  उनका शारीरिक शोषण भी होता है और मानसिक शोषण भी होता है.  अभी रिसेंटली   करीब 3-4 दिन पहले  भोपाल के अन्दर एक आदिवासी  मेडिकल स्टूडेंट की मौत  हुई है.  इस प्रकार से लगातार कालेज के अन्दर पढ़ने  वाले   आदिवासी स्टूडेंट्स के साथ  अन्याय और अत्याचार होता है.  मेरा आपसे अनुरोध है कि  आदिवासी स्टूडेंट  की सुरक्षा के लिये कोई विशेष व्यवस्था  की जाये.  अब रिसेंटली यूजीसी  ने एक नियम बनाया था, जिसमें एससी,एसटी एवं ओबीसी के स्टूडेंट  की सूरक्षा की बातें हुई थीं.  मगर तमाम लोगों ने  उसका  विरोध करके उस नियम  को वापस कर लिया.  मेरा आपसे आग्रह है कि  जो कालेज में पढ़ने वाले स्टूडेंट  लोग होते हैं, उनकी सुरक्षा  की व्यवस्था ठीक से की जाये.  अध्यक्ष महोदय, आपने बोलने के लिये मौका दिया,  बहुत बहुत धन्यवाद.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)--  अध्यक्ष महोदय, सदन के नेता नहीं हैं,  अब आप बोल देंगे उप मुख्यमंत्री   जी हैं.  जब सदन  के नेता  राज्यपाल जी के अभिभाषण में  मेरी सरकार को लेकर के प्रदेश की चिंता नहीं है,मनन नहीं करना चाहते हैं,  आप सोच सकते हैं कि  इससे प्रदेश की क्या स्थिति है.  राम भरोसे है.

          अध्यक्ष महोदय--  सरकार बैठी है,  डिप्टी चीफ मिनिस्टर बैठे हैं.  बाकी कई मंत्री बैठे हुए हैं.

          श्री उमंग सिंघार--  अध्यक्ष महोदय,आप जानते हैं कि क्या स्थिति है,  अब मैं बोलना नहीं चाहता हूं.

          खाद्य मंत्री (श्री गोविन्द सिंह राजपूत)अध्यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष  जो बोलेंगे,  वह हम लोग  सुनेंगे.   हमारा आग्रह है कि जब  हमारे  नेता बोलें, तो आप  लोग  भी अच्छे से सुनना.

          श्री उमंग सिंघार--  अध्यक्ष महोदय,  राज्यपाल जी का भाषण सुना 16 तारीख का,  वित्त मंत्री जी का 18 तारीख को लुना. 17  तारीख को  दिसम्बर,2025 के अन्दर  मुख्यमंत्री जी का सुना. लगता है कि तीनों भाषण   एक हैं, कहानी एक है.  मैं सिर्फ   कह सकता हूं कि किसी साफ्टवेयर  से  जैसे कि  चैट  जीपीटी आता है. क्विलबॉट  आता है माइक्रो साफ्ट  का.  फ्रेजिंग चेंज कर दी गई बस.  आज कल बच्चे चैट जीपीटी चलाते हैं, लगता है  कि सरकार के अधिकारी भी  चैट जीपीटी के अन्दर  भाषण बनाकर दे  रहे हैं  मुख्यमंत्री जी  और वित्त मंत्री जी को.  इससे पता चलता है कि  कितनी गंभीरता है आप लोगों के इसमें.  मुख्यमंत्री जी तो नहीं हैं, लेकिन  मुख्यमंत्री जी ने  एक घण्टे का भाषण भी दिया था 17 तारीख को और वही सपने दिखाये थे   2047 के.  वही सपने वित्त मंत्री जी ने  दिखाये, वही सपने  राज्यपाल जी ने दिखाये मेरी सरकार. मैं समझता हूं  कि  कई ऐसे मामले हैं,  जिसमें सरकार अपने भाषणों तक ही रह गयी है, जमीनी हकीकत और कुछ है. मुख्‍यमंत्री जी ने दावा किया, वादा किया कि हम दो साल के हमने दूरगामी निर्णय लिये हैं. क्‍या निर्णय लिये क्‍या युवा को फायदा हुआ, क्‍या रोजगार मिलने लगा.

          कल हमारे माननीय सदस्‍य श्री हेमंत खंडेलवाल जी कह रहे थे कि प्रदेश सबसे ज्‍यादा युवाओं को नौकरी देने वाला प्रदेश बनेगा, पूरे देश का. अभी जो 22 लाख युवा हैं, जो रोजगार पोर्टल में हैं उन्‍हें तो आप नौकरी दे दो. फिर आप देश के बड़े प्रदेश बनना.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2047 का बार-बार ख्‍वाब दिया जा रहा है, ख्‍याली पुलाव, ऐसी थाली जिसके अंदर खाना नहीं है, फिर भी आदमी सोच रहा है कि हां ख्‍याली पुलाव खा लो. आप किसानों का वर्ष बना रहे हैं कि हम किसान को मजबूत करेंगे, सक्ष्‍ाम करेंगे. एक तरफ किसान की सम्‍मान निधि काटी जा रही है. किसान को एम.एस.पी की गारंटी नहीं दी गयी. किसानों द्वारा प्‍याज सड़कों पर फेंकी जा रही है. मूंग के किसान संघर्ष कर रहे हैं, आज भी उनको एम.एस.पी नहीं मिला, मक्‍का आदिवासी क्षेत्र के अंदर या अन्‍य समाज के लोग जो मक्‍का लगाते हैं वह लोग 800-1000 रूपये में बेचने को मजबूर हो गये हैं, उनको एम.एस.पी नहीं मिली.

          आपने कहा कि मेरी सरकार किसान वर्ष मना रही है, यह राज्‍यपाल महोदय कह रहे हैं. यह कैसी सरकार है जो किसानों की बात नहीं करना चाहती है, यह कैसी सरकार जो युवाओं की बात नहीं करना चाहती है, आपने एक लाख युवाओं को नौकरी की बात कह दी. अब युवा बैठकर नौकरी के ख्‍याली पुलाव पकायेगा कि मुझे नौकरी मिलेगी.

          माननीय वित्‍त मंत्री जी ने कल कह दिया कि हम नियमित नौकरी नहीं देंगे, हम सिर्फ संविदा नियुक्ति पर रखेंगे. यह सरकार ने मान लिया. फिर बड़े विज्ञापन क्‍यों ? जो बच्‍चे पीएससी की तैयारी कर रहे हैं, कोई टीआई और पटवारी की तैयारी कर रहा है. अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि स्थिति स्‍पष्‍ट होना चाहिये. सबसे बड़ा उदाहरण है कि सरकार की नौकरी देने की नीयत ही नहीं है और सबसे बड़ा उदाहरण है कि आपने 13 प्रतिशत ओबीसी का आरक्षण रोक लिया, कई विभाग के अंदर आप 27 प्रतिशत आरक्षण दे रहे हो, क्‍यों 13 प्रतिशत होल्‍ड है ? मुख्‍यमंत्री जी ओबीसी की बात करते हैं, मुख्‍यमंत्री जी खुद ओबीसी हैं, श्री शिवराज जी ओबीसी वर्ग से हैं और सदन के अंदर कई ओबीसी मंत्री बैठे हैं. क्‍या आप लोग अपने समाज से आंख मिला सकते हो, क्‍या आप समाज के मंच पर जाकर बात कर सकते हो कि हम 13 प्रतिशत की रोक हटायेंगे. नीयत साफ होना चाहिये, माननीय सुप्रीम कोर्ट का बहाना नहीं. अगर आज सरकार चाह ले तो 24 घण्‍टे के अंदर यह वापस निर्णय ले सकते हैं कि 13 प्रतिशत ओबीसी को आरक्षण मिलना है. लेकिन नीयत नहीं है, कथनी और करनी में फर्क है फिर भी वर्ष 2047 के सबने, 21 साल के बाद के सपने दिखाये जा रहे हैं, जो पीढ़ी आयी नहीं उनके बारे में बात हो रही है. वर्ष 2026 की जो पीढ़ी है, जो वर्तमान है जिनकी परेशानी है, समस्‍याएं हैं. अधिकारी/कर्मचारी न भत्‍ते, न युवा, दिव्‍यांग उनकी बात नहीं हो रही है. गरीब, बेसहारों को नौकरियों में आरक्षण नहीं मिलता है, उनके नाम पर दूसरे दिव्‍यांग भर्ती हो जाते हैं. यह कैसा न्‍याय है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नक्‍सलवाद समाप्‍त करने की खण्‍डेलवाल जी ने बात कही थी, मुख्‍यमंत्री जी ने भी कहा कि नक्‍सलवाद खत्‍म हो गया. आप बालाघाट जाकर देखो कि कैसे फर्जी एनकाउंटर हो रहे हैं. एक नक्‍सली मर गया तो पूरा नक्‍सलवाद खत्‍म हो गया, उसकी आड़ में दूसरे गरीब आदिवासियों को मारा जा रहा है. यह हमारी विधायक अनुभा मुंजारे, यह हमारे संजय उइके जी कई बार शिकायत कर चुके हैं कि इस नक्‍सलवाद की आड़ के अंदर गरीब आदिवासियों को मारा जा रहा है. तो अध्यक्ष महोदय, इस बारे में भी विचार होना चाहिए. मुख्यमंत्री जी ने दावा किया था कि हमने एनईपी, नेशनल एजुकेशन पॉलिसी लागू की है. वित्तमंत्री जी और मुख्यमंत्री जी ने बड़ी बड़ी बात की कि सांदीपनि विद्यालय नये खोल दिये. 369 सीएम राइज आपने खोले, उसके नाम बदल दिये. सांदीपनि कर दिये, कौन से नये विद्यालय खोले, कौन-सी नयी योजना बनाई? लेकिन सांदीपनि के नाम से आप कर रहे हैं. आप बताएं 369 सीएम राइज के अलावा सांदीपनि कौन से नये स्कूल खोले गये? सिर्फ नाम बदलकर वाही-वाही! पैसा है नहीं, गुल्लक खाली, तिजोरी खाली, कर्ज लिया जा रहा है. कर्ज लेकर ये सब लोग (XXX) बन गये, यहां पर जितने बैठे हैं यह (XXX) हैं और पैसा कौन भर रहा है.  इस प्रदेश की जनता भर रही है. प्रदेश की जनता की गाढ़ी कमाई, उनका टैक्स, कहां पैसा जा रहा है, हमने श्वेत पत्र दिया, उस पर सरकार बात नहीं करना चाहती है, जनता का पैसा है इस सरकार को उसका एक एक पाई का हिसाब देना पड़ेगा. श्वेत पत्र पर चर्चा होना चाहिए क्योंकि सरकार घबरा रही है, कर्जा आप लो और किस्त आम जनता भरे प्रदेश की, यह कैसा न्याय है?

अध्यक्ष महोदय, प्रदेश में आप कहते हो कि हम दिल्ली में बिजली फ्री दे रहे हैं हम दूसरे राज्यों को बिजली दे रहे हैं इतने सक्षम हो गये, फिर क्यों 8 रुपये, 9 रुपये में प्रदेश के लोगों को बिजली मिल रही है. आम उपभोक्ता परेशान हैं बिजली के बिलों से, जब नवीकरणीय ऊर्जा में 2.80 पैसे के अंदर बिजली बन रही है, आप खरीद रहे हो, प्रदेश के अंदर क्या 4 रुपये में आम उपभोक्ता को बिजली नहीं मिलना चाहिए? क्यों आप 8 रुपये, 9 रुपये में बिजली देना चाहते हो, 400 यूनिट के ऊपर आप 9 रुपये ले रहे हो, सबसे महंगी बिजली अपने प्रदेश की है, अन्य राज्यों के मुकाबले, मैं यह जानना चाहता हूं कि प्रदेश की जनता क्या सिर्फ पैसे भरते रहे? सिर्फ बिजली के बिल भरते रहे, उनकी गाढ़ी कमाई से सरकार अपनी वाह-वाही करते रहे, उनको अधिकार कब मिलेगा? आम उपभोक्ताओं को बिजली कब सस्तीमिलेगी?

अध्यक्ष महोदय, (XXX) का प्रदेश होने वाला है यह, बिजली एग्रीमेंट ऐसे हुए हैं कि आने वाले 20 साल 25 साल तक (XXX) को 1.25 लाख करोड़ रुपये सरकार देगी. ऐसे  एग्रीमेंट कर लिये. यह प्रदेश की जनता का क्या मुफ्त का पैसा है? अगर कोई प्लांट डालता है तो उसको सरकार ने गारंटी दे दी 1.25 लाख करोड़ रुपये की अगले 25 साल की. प्लांट चले, नहीं चले, क्या हो रहा है, क्या नहीं, लेकिन सरकार को 1.25 लाख करोड़ रुपये देना है. (XXX). अब अलग बात है कि दिल्ली से डबल इंजन का आदेश आ गया होगा तो यहां के इंजन को भी साथ में रखना पड़ा होगा.

श्री विश्वास सारंग - अध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है. आम तौर पर यह परम्परा है कि कोई यदि सदन का सदस्य नहीं है तो उसका नाम इस तरह से नहीं आना चाहिए. मुझे लगता है यह आपत्तिजनक है और इस तरह से उसको डिलीट करवाना चाहिए. (व्यवधान)..यदि वह यहां आकर अपनी सफाई नहीं दे सकता है तो उसका नाम नहीं लिया जाता है, यही परम्परा है.

अध्यक्ष महोदय - (अध्यक्ष महोदय द्वारा रिकॉर्ड न किये जाने का संकेत किया गया.)  आपकी बात आ गई है.

श्री उमंग सिंघार - सिंगरौली में (XXX) खदान नहीं दी क्या? अब आरोप है क्या, दी है. बोलो, दी है. नहीं दी? दी कि नहीं दी?

श्री विश्वास सारंग - अध्यक्ष महोदय, आपकी व्यवस्था आनी चाहिए. यह आपत्तिजनक है.

श्री उमंग सिंघार - सरकार ने आदेश किये, क्या सिंगरौली के अंदर खदान दी कि नहीं दी?

अध्यक्ष महोदय - एक मिनट उमंग जी, हमेशा यह सदन में जो व्यक्ति सफाई नहीं देने आ सकता है, उस व्यक्ति का नाम कोट नहीं किया जा सकता है, यह मान्य परम्परा है. आप वरिष्ठ सदस्य हो तो हमको अपनी परिधि में बोलना चाहिए.

 

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी बात से सहमत हॅूं. लेकिन सरकार ने एग्रीमेंट किए हैं. मैं सरकार की बात कर रहा हॅूं. किसी कंपनी को आरोप नहीं लगा रहा हॅूं. उस कंपनी को सरकार ने दिया. (XX) कंपनी को सवा लाख करोड़ रूपए अगले 25 साल में बिजली के नाम से देने वाले, बगैर बिजली खरीदे, न खरीदो, लेकिन आप सवा लाख करोड़ रूपए देंगे, यह एग्रीमेंट है. इसमें आरोप की क्‍या बात है ? आपने क्‍यों एग्रीमेंट किया ? क्‍या जनता का पैसा फ्री का पैसा है ?  सरकार से इसका जवाब आना चाहिए. सिंगरौली की खदानें दीं. वहां के आदिवासियों को बाहर निकाला जा रहा है. जंगल से बाहर निकाला जा रहा है. क्‍या उनको न्‍याय मिल रहा है, क्‍या उनको हक मिल रहा है ? (XX) के आफिस के अंदर बैठकर, आप कहेंगे तो मैं वीडियो दे दूंगा, पटल पर रख दूंगा. सरकारी जितनी भी फाइलें है वन विभाग की, वहां पर बन रही हैं. कहां पर किसको पैसा देना है कागज देना है, आप चाहेंगे, तो मैं पटल पर रख दूंगा....(व्‍यवधान)...

..(व्‍यवधान)...

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह आपत्‍तिजनक है.

......(व्‍यवधान)....

          सहकारिता मंत्री (श्री विश्‍वास सारंग) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  इस तरह की बातें ठीक नहीं हैं. आप की व्‍यवस्‍था देने के बाद यदि इस तरह की बातें हो रही हैं तो यह उचित नहीं है....(व्‍यवधान)....

          श्री उमंग सिंघार -- मैं (XX) की बात नहीं कर रहा हॅूं. चॉर्टर प्‍लेन मिल रहे हैं तो ठीक है..(व्‍यवधान)...

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, सवाल (XX) का नहीं है. सवाल किसी का भी नहीं है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- सवाल किसी के नाम का नहीं है कुल मिलाकर के जो सदन की परम्‍परा है, उसका विषय है. सामान्‍य तौर पर जो व्‍यक्‍ति सदन में आकर अपनी बात नहीं कह सकता, उसके नाम का उपयोग सदन में नहीं होता. इसका हमें ध्‍यान रखना चाहिए.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक निवेदन यह है कि नेता प्रतिपक्ष बहुत जवाबदारी वाला पद होता है और एकदम से फेक आरोप लगा देना कि इसके आफिस में सरकारी फाइलें तैयार हो रही हैं उसके आफिस में सरकारी फाइलें तैयार हो रही हैं, यह ठीक नहीं है...(व्‍यवधान)...

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, जो बात बोलता हॅूं प्रमाण के साथ बोलता हॅूं. अगर संसदीय कार्य मंत्री जी चाहेंगे, तो मैं प्रमाण रख दूंगा..(व्‍यवधान)..

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- हां, तो रखो न...(व्‍यवधान)..

          श्री उमंग सिंघार -- प्रमाण देने के बाद करोगे इस्‍तीफा ?....(व्‍यवधान)..

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- तो रखो न भईया, तो रखो न...(व्‍यवधान)..

          श्री उमंग सिंघार -- रखोगे इस्‍तीफा ?..(व्‍यवधान)...    

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- पहले प्रमाण....पहले प्रमाण रखो..(व्‍यवधान)..

          श्री उमंग सिंघार -- यह लो प्रमाण, यह लो प्रमाण....(व्‍यवधान)...

(श्री उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष द्वारा कुछ कागज फेंके गये.)

        श्री कैलाश विजयवर्गीय -- पहले आप प्रमाण रखो, उसके बाद आरोप लगाओ. पहले आप संसदीय ज्ञान प्राप्‍त करो....(व्‍यवधान).. अध्‍यक्ष महोदय, संसदीय ज्ञान क्‍या होता है पहले समझें. ऐेसे फेक आरोप लगाएंगे...(व्‍यवधान)..

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, असत्‍य आरोप की बात कर रहे हैं...(व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- नेता प्रतिपक्ष महोदय, संसदीय कार्य मंत्री जी जब अपनी बात रख रहे हैं, तो हमें उनकी बात सुनना चाहिए. आपकी बात भी लोग सुन रहे हैं.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, वे कैसे बोल रहे हैं कि असत्‍य प्रमाण हैं. मैं प्रमाण देने के लिए तैयार हॅूं. इसकी जांच करवायी जाए. जांच करवाएं...(व्‍यवधान)...

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- ...(व्‍यवधान)...अध्‍यक्ष महोदय, संसदीय ज्ञान होना चाहिए..(व्‍यवधान)..

......(व्‍यवधान)...

          उप मुख्‍यमंत्री, वित्‍त (श्री जगदीश देवड़ा ) -- यह कोई तरीका है...(व्‍यवधान)..

          ......(व्‍यवधान)...

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, जांच करवाओ, जांच करवाओ. ..(व्‍यवधान)..

....(व्‍यवधान)...

          श्री विश्‍वास सारंग -- अध्‍यक्ष महोदय,.....(व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया, आप सभी बैठिए...(सत्‍ता पक्ष और प्रतिपक्ष के माननीय सदस्‍यों के एक साथ अपने आसन से खडे़ होकर बोलने पर).....(व्‍यवधान)...मैं व्‍यवस्‍था दे रहा हॅूं. कृपया, बैठिए. सभी लोग कृपा करके बैठिए...(व्‍यवधान)...

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- (XX)(व्‍यवधान)...

          श्री उमंग सिंघार -- (XX)(व्‍यवधान).....

          श्री जगदीश देवड़ा -- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या नेता प्रतिपक्ष ऐसी भाषा बोलेंगे...(व्‍यवधान)...

....(व्‍यवधान)....

          अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया, सभी लोग अपने स्‍थान पर बैठें....(व्‍यवधान)...सभी लोग अपने स्‍थान पर बैठें....(व्‍यवधान)...

.....(व्‍यवधान)....

 

 

4.59 बजे                                    गर्भगृह में प्रवेश

(सत्‍ता पक्ष और इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण अपनी-अपनी बात कहते हुए  गर्भगृह में आकर नारेबाजी करने लगे.)

 

.....(व्‍यवधान).....

 

          अध्‍यक्ष महोदय -- सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्‍थगित की जाती है.   

                           (अपराह्न 5.00 बजे सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्‍थगित)

 

 

         

 

         

 

 

 

 

 

5.13 बजे        विधान सभा पुनः समवेत हुई.

 

                                   {सभापति महोदय (श्री अजय विश्नोई)पीठासीन हुए}

 

          सभापति महोदयमाननीय नेता प्रतिपक्ष जी आप अपनी बात जारी रखें. (व्यवधान)

          श्री सोहनलाल बाल्मीकआपके संसदीय कार्य मंत्री जी माफी मांगे. यह अखाड़ा है क्या ? (व्यवधान)

          सभापति महोदयकृपया सब लोग बैठें. माननीय नेता प्रतिपक्ष जी आप अपनी बात रखें. (व्यवधान)

          श्री सोहनलाल बाल्मीकसंसदीय कार्य मंत्री अपनी परम्परा को भंग करेंगे तथा यहां की व्यवस्था को बिगाड़ेंगे तो कैसे काम चलेगा ? संसदीय कार्य मंत्री जी का इस तरह का व्यवहार कोई बर्दाश्त नहीं करेगा. संसदीय कार्य मंत्री सदन में माफी मांगे.   (व्यवधान)

            सभापति महोदयसदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिये स्थगित.

          (5.14 पर सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिये स्थगित की गई)

                                                                                                                                      

5.27 बजे         

विधानसभा पुन: समवेत हुई.

{सभापति महोदय (श्री अजय विश्‍नोई) पीठासीन हुए}

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक सभापति महोदय, ये अपमान हुआ है.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे सभापति जी, ये सिर्फ नेता प्रतिपक्ष का नहीं, पूरे देश के आदिवासियों का अपमान है. हमारे सदन के नेता का अपमान है. (...व्‍यवधान)

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक सभापति महोदय, ये पूरे प्रदेश के ढाई करोड़ लोगों का अपमान है. (...व्‍यवधान)

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे सभापति जी, ये आदिवासियों का भी अपमान है और अगर औकात की बात है, तो आ जाइए, औकात पर डिबेट कर लो,(XX). (...व्‍यवधान)

          सभापति महोदय सदन में बात चीत में.... (...व्‍यवधान)

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(XX) आदेशानुसार विलोपित

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे संसदीय कार्य मंत्री, जब असंसदीय शब्‍द बोल रहे हैं, तो उनको  अधिकार क्‍या है, संसदीय मंत्री रहने का. दूसरों को पाठ पढ़ाना चाहिए संसदीय ज्ञान ही नहीं है उन्‍हें. (...व्‍यवधान)

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक नेता  प्रतिपक्ष को मारने की कोशिश की जा रही है. ये ढाई करोड़ आदिवासियों का अपमान है. प्रदेश का हर एक आदिवासी का अपमान है और सदन का अपमान है, ये गलत बात है. (...व्‍यवधान)

          श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को संसदीय कार्य मंत्री, जब तक सदन में माफी नहीं मांगते हैं ... (...व्‍यवधान)   

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक नेता  प्रतिपक्ष पर हमला करना चाह रहे हैं. सदन में हमला होगा, नेता प्रतिपक्ष पर हमला किया जाएगा. आदिवासियों पर हमला किया जाएगा. ... (...व्‍यवधान)

 

 

05:28 बजे                                        अध्‍यक्षीय घोषणा

         सदन के समय में वृद्धि विषयक

 

          सभापति महोदय एक व्‍यवस्‍था मुझे देनी है, कृपया शांत हो जाइए, साढ़े पांच बजने को है. एक व्‍यवस्‍था दे रहा हूं. राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर प्रस्‍तुत कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्‍ताव पर चर्चा पूर्ण होने तक सदन के समय में वृ‍द्धि की जाए. मैं समझता हूं सदन इससे सहमत है.

          (सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.)

सभापति महोदय -  सदन 15 मिनट के लिए स्‍थगित किया जाता है.

(5:29 बजे सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्‍थगित की गई)

 

           06.11 बजे                           विधान सभा पुन: समवेत हुई

                                 {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय सदस्‍यगण आज पता नहीं दिन कुछ गरम-गरम सा है. हम सभी मध्‍यप्रदेश विधान सभा के सम्‍माननीय सदस्‍य हैं.

          श्री अजय विश्‍नोई -- अध्‍यक्ष महोदय, बाहर बारिश हो रही है और बादल यहां घुमड़ रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- हम सभी अपने-अपने क्षेत्रों से जीतकर जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिये यहां पर आये हैं और विभिन्‍न नियमों के माध्‍यम से यही कोशिश होती है कि सदन का अधिकाधिक उपयोग जनहित में हो. हम सभी इस बात को जानते हैं कि किसी भी सदन के संचालन और उसको पूर्णता तक पहुंचाने के लिये नियम प्रक्रिया बनाई गई हैं और उसी के अनुसार निश्चित रूप से हम सबको चलना होता है, तभी संचालन की सारी गतिविधियां ठीक प्रकार से पूर्ण हो पाती है. आज दुर्भाग्‍य से थोड़ी असहज स्थिति बन गई. मध्‍यप्रदेश विधानसभा की बहुत ही गौरवशाली पंरपरा हमेशा रही है, दोनों पक्षों ने सभी परिस्थितियों को समझा है और सदन का गौरव निरंतर बढ़ता रहे, इस बात का प्रयत्‍न सभी पक्षों की ओर से सभी सदस्‍यों की ओर से हमेशा होता रहा है और पिछले दिनों भी हम सभी लोग अनेक बार परिस्थितियां आईं, लेकिन सभी ने समझ से रास्‍ता बनाया और हम आगे बढ़े हैं. आज जो असहज स्थिति बनी, मुझे पटवा जी का एक वाक्‍य याद आता है, पटवा जी हमेशा कहा करते थे कि सदन में बात रखते समय गुस्‍सा दिखना चाहिए, लेकिन गुस्‍सा आना नहीं चाहिए, गुस्‍सा दिखना आवश्‍यक है, लेकिन अगर गुस्‍सा आयेगा तो बात भी बिगड़ जायेगी और बात रखने का तरीका भी बिगड़ जायेगा और सदन की मर्यादा भी भंग होगी, तो मैं समझता हूं कि गुस्‍सा आना नहीं चाहिए, लेकिन आज दोनों पक्षों की तरफ से गुस्‍सा आ गया और उसके कारण यह असहज स्थिति आज बनी है, इसका निश्चित रूप से मुझे भी बहुत रंज है और सभी माननीय सदस्‍यों को रंज होगा. सत्‍ता पक्ष हो या विपक्ष हो, लोकतंत्र के दोनों मजबूत पहिये हैं एक अकेला साथ चले तो नहीं चल सकते हैं, इसलिए जो भी परिस्थिति बनी, मैं समझता हूं कि पक्ष भी उसके लिये जिम्‍मेवार है और प्रतिपक्ष भी उसके लिये जिम्‍मेवार है. हमारे नेता प्रतिपक्ष भी बहुत ही वरिष्‍ठ और माननीय सदस्‍य हैं, संसदीय कार्य मंत्री जी भी बहुत अनुभवी हैं और अनुभवों से एक तौर से लदे हुए हैं, लेकिन फिर भी आज सीमा कैसे टूट गई है, यह हम सब लोगों के लिये चिंता का विषय है, इसलिए मैं सभी सदस्‍यों से पक्ष और विपक्ष सबसे यह आग्रह करूंगा कि इस विषय का हम लोग यहीं पटाक्षेप करें और दोनों लोग अपनी-अपनी जिम्‍मेवारी को समझकर अपना वक्‍तव्‍य दें और सदन की कार्यवाही को आगे बढ़ायें.                                      

                                                                                     

          संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)--  अध्‍यक्ष महोदय, मेरा लगभग 36-37 साल का संसदीय अनुभव है और मेरे जितने सीनियर यहां पर 5-7 ही सदस्‍य हैं, हम लोग ज्‍यादा से ज्‍यादा 8-10 होंगे. हम सबकी जवाबदारी है कि सदन बहुत ही मर्यादित तरीके से चले, संसद की परंपरा के अनुसार चले. मैंने भी हमेशा कोशिश की है और मुझे याद नहीं कि मेरे 36 साल के संसदीय राजनीतिक जीवन में मुझे इतना गुस्‍सा आया. अध्‍यक्ष महोदय, आज मैं खुद ही अपने व्‍यवहार से प्रसन्‍न नहीं हूं अध्‍यक्ष महोदय, मैं हमेशा जो जवाबदार पद पर बैठा हुआ व्‍यक्ति है, चाहे आप हों, चाहे मुख्‍यमंत्री जी हों, चाहे नेता प्रतिपक्ष जी हों उनसे हमेशा अपेक्षा यह करूंगा कि वे संसदीय मर्यादाओं का पालन करें. अगर ये 4-5 लोग संसदीय मर्यादा का पालन नहीं करेंगे तो संसद का कोई भी सदस्‍य नहीं करेगा और इसलिये बहुत जरूरी है कि हम सब लोग मेरे सहित सबकी जवाबदारी है कि हम संसदीय मर्यादाओं के अनुरूप अपनी बात को रखें, अध्‍यक्ष महोदय, यह मेरा हमेशा प्रयास रहता है और मैं हमेशा चाहता हूं कि सदन में कई बार उत्‍तेजना के क्षण आये और मैंने हमेशा लाइट किया, मैं कभी नहीं चाहता हूं कि संसद के अंदर उत्‍तेजना फैले और मुझे कभी संसद के अंदर गुस्‍सा नहीं आता, पहली बार मुझे विधान सभा में गुस्‍सा आया पूरे 37 साल के जीवन में, मतलब जब मैं चुनाव लड़ता था तो नेता प्रतिपक्ष विद्यार्थी थे और हमारे परिवार के लोगों के साथ इन्‍होंने काम किया है, हमारे बहुत पारिवारिक संबंध रहे हैं, मैं उन्‍हें उसी दृष्टि से देखता हूं कि मेरे पारिवारिक भतीजे हैं, मेरे बेटे हैं और मैं उनको इतना प्‍यार भी करता हूं, ऐसा नहीं है कि नेता प्रतिपक्ष हैं या विरोधी पार्टी के हैं. अध्‍यक्ष महोदय, मैं धार का प्रभारी मंत्री हूं, मैं तो सब जानता हूं वहां पर आपका, और मैं तो उनकी मर्यादा का हमेशा धार में भी ध्‍यान रखता हूं कि नेता प्रतिपक्ष हैं, अधिकारियों को भी बोलता हूं कि वह नेता प्रतिपक्ष हैं उनकी बात भी मान लिया करो. हमेशा नेता प्रतिपक्ष की गरिमा का मैं ध्‍यान रखने की कोशिश करता हूं. अभी पिछले दिनों ही जब आप भागीरथपुरा आ रहे थे, मैंने फोन लगाया. एक दिन पहले वहां कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता गये, लोगों ने काले झंडे दिखाये तो मैंने बोला उमंग जी आप आ रहे हैं क्‍या, तो बोले हां. मैंने वहां के लोगों को समझाया कि देखना भाई नेता प्रतिपक्ष आ रहे हैं उनकी मर्यादा का ध्‍यान रखना. मैं हमेशा राजनीति के अंदर जो सम्‍मानीय पद  पर बैठे हुये लोग हैं उनकी मर्यादा का ध्‍यान रखने की हमेशा कोशिश करता हूं. आज पता नहीं कैसे हो गया, उन्‍होंने भी मेरी तरफ हाथ करके ऐसा किया. अध्‍यक्ष महोदय, एक तो शब्‍दों की भाषा होती है और एक बॉडी लेंग्‍वेज होती है. आज पता नहीं उमंग जी की बॉडी लेंग्‍वेज भी थोड़ी सी, मैं इनसे ऐसी अपेक्षा नहीं करता हूं क्‍योंकि मैं उनको बहुत प्‍यार करता हूं. इसलिये मुझे नहीं लगा था कि वह मुझसे इस बॉडी लेंग्‍वेज में बात करेंगे. ठीक है, मैं भी उत्‍तेजित हो गया. अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा कि हम दोनों के जो भी वार्तालाप हैं वह इस सदन के अंदर न आयें और इसकी पुनरावृत्ति न हो, अध्‍यक्ष महोदय, कभी सदन में हम सब मिलकर इसकी चिंता करेंगे और अध्‍यक्ष महोदय, आज की घटना से मैं खुद भी दुखी हूं.

          उप नेता प्रतिपक्ष (श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे)-- अध्‍यक्ष महोदय, खेद व्‍यक्‍त करने का आपने आश्‍वास दिया था, खेद व्‍यक्‍त कर देते और वह बात आगे बढ़ जाती.

          अध्‍यक्ष महोदय--  किया न उन्‍होंने.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे-- अध्‍यक्ष महोदय, उन्‍होंने खेद व्‍यक्‍त नहीं किया. उन्‍होंने कहा कि वह दुखी हैं.

          एक माननीय सदस्‍य-- अरे हो तो गया.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे-- नहीं, अभी नहीं हुआ है. सिर्फ खेद व्‍यक्‍त करना चाहिये था, उन्‍होंने दुखी मन से, निश्चित ही उन्‍होंने जो बात कही वह पूरे सम्‍मान से और बहुत गंभीरता से कही.

          श्री लखन घनघोरिया-- आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, इंटेंशन इनका भी नहीं था, न संसदीय कार्यमंत्री जी का था, न नेता प्रतिपक्ष जी का था. सदन की मर्यादा की चिंता दोनों पक्षों को थी. हम, आप, सबके प्रयास होते हैं कि यह मर्यादायें भंग न हों और बड़प्‍पन जो बड़ा है स्‍वाभाविक है कैलाश भैया के बहुत अपने अनुभव हैं और जीवनभर के अनुभव हैं और उन्‍होंने इस बात को स्‍वीकार किया कि 38 वर्ष के राजनीतिक जीवन में पहली बार उनको सदन के अंदर गुस्‍सा आया, शब्‍द वही हैं. मेरा आग्रह यह था कि चाहे कैलाश भैया हों और चाहे उमंग सिंघार जी हों यदि उनके शब्‍दों से किसी को ठेस पहुंची हो, वह उसको स्‍वीकार कर लें या इनके आव भाव से किसी को ठेस पहुंची हो तो यह स्‍वीकार कर लें. कम से कम शब्‍दों का यह समावेश इसलिये जरूरी है कि कम से कम बाकी सदस्यों को किसी भी दल का हो किसी भी पक्ष का हो उनको यह महसूस न हो कि  हमारे आत्मसम्मान या स्वाभिमान के ऊपर कोई ठेस आई या सदन की मर्यादाओं के ऊपर ठेस आई. मेरा इतना सा आग्रह है आपसे कि आप कम से कम ऐसी व्यवस्थाएं करें.

          श्री राजेन्द्र शुक्ल,उपमुख्यमंत्री - माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस तरह से माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी जो संसदीय कार्य मंत्री भी हैं उन्होंने स्पष्ट रूप से यह कहा है कि नेता प्रतिपक्ष को वह कितना प्यार करते हैं और उन्होंने यह भी कहा कि उनकी बाडी के लहजे से जो उनको ऐसा लगा तो उन्होंने उस पर दुख व्यक्त किया है तो अब शब्दों को पकड़कर और जैसी आपकी मंशा है और आपकी मंशा है कि गौरवशाली परंपरा जो इस सदन की वह कायम भी रहे और आगे विधान सभा की कार्यवाही भी ठीक प्रकार से चले तो उन्होंने दुख व्यक्त किया है  मुझे लगता है कि यह पर्याप्त है.

          अध्यक्ष महोदय -  वैसे मैं समझता हूं कि संसदीय कार्य मंत्री जी ने कहा कि मैं खुद ही अपने व्यवहार से तकलीफ महसूस कर रहा हूं. यह बड़ा शब्द है.

          डॉ.मोहन यादव,मुख्यमंत्री - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इतना ही बोलना चाहूंगा कि शब्दों के साथ मन के अंदर के भाव भी होना चाहिये तो भाव से हम सब इस बात को महसूस करें कि हमसे जाने-अनजाने में, मैं सबकी तरफ से माफी मांग लेता हूं. हमारा सदन उस भाव से चले. मैं यह भाव लेकर चलता हूं. मैं उम्मीद करता हूं कि नेता प्रतिपक्ष भी अपने भाव व्यक्त कर दें.

          श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्यक्ष महोदय,निश्चित तौर पर कुछ पल पहले जो आपसी विवाद हुआ. निश्चित तौर से मैं हमेशा संसदीय भाषा बोलने का प्रयास करता हूं. असंसदीय भाषा मेरे को लगता है,मैं चौथी बार का विधायक हूं. कभी असंसदीय भाषा का प्रयोग नहीं किया आज तक.निश्चित तौर से मेरे हाव भाव से किसी को दुख हुआ या किसी को गलत लगा. आपने खेद व्यक्त नहीं किया लेकिन मैं खेद व्यक्त करता हूं. माननीय मुख्यमंत्री जी ने जो बड़ा दिल दिखाया मैं आपकी भावनाओं का भी सम्मान करता हूं और माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि हमेशा मैं सकारात्मक सोच रखता हूं चाहे बंद कमरे में आपसे भी बात हो चार के सामने भी बात हो कभी मैं निगेटिव सोच नहीं रखता हूं. माननीय सदस्यों से मैं यह व्यवहार क्लियर कर दूं. निश्चित तौर से कभी-कभी बातें आती हैं ईगो पर आती हैं. ईगो के कारण आदमी को गुस्सा आता है. गुस्सा होने के कारण अपने शब्दों को कुछ बोल देता है. हावभाव रह जाते हैं लेकिन मैं समझता हूं कि जब प्रदेश हित की बात होती है इस विधान सभा के अंदर वहां उमंग सिंघार का कभी अहम नहीं आता न मेरे विधायकों का आता है. हम सदैव इस मध्यप्रदेश के लिये आपके साथ सकारात्मक सोच के साथ इस मध्यप्रदेश के विकास के लिये हमेशा तत्पर हैं यही कहना चाहता हूं. धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदय - मैं समझता हूं कि दोनों पक्षों की बात आ गई और दोनों पक्षों ने सदन की गरिमा बनी रहे और सदन का गौरव और बढ़े यही भाव व्यक्त किया है. मैं पक्ष और प्रतिपक्ष दोनों के प्रति आभार प्रकट करता हूं और नेता प्रतिपक्ष से आग्रह करता हूं कि वह अपना वक्तव्य पूरा करें.

          श्री उमंग सिंघार -  माननीय अध्यक्ष महोदय, चर्चा की शुरुआत हुई. चर्चा कहां से कहां चली गई.निश्चित तौर से जो राज्यपाल जी का भाषण था. आंकड़ों की एक ऊंची इमारत थी. सच्चाई को ढांकने की कोशिश की गई. अभिभाषण को सुनकर लग रहा था कि मध्यप्रदेश का नहीं किसी स्विटजरलैण्ड की प्रगति की रिपोर्ट पढ़ी जा रही है.11 लाख 90 हजार करोड़ के निवेश के प्रस्‍ताव आए हैं. वर्ष 2047 के लिए दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था की बात की गई है. 1 करोड़ 25 लाख लोगों को रोजगार देने की बात की गई है. मैं फिर दोहराना चाहता हूँ. माननीय मुख्‍यमंत्री जी और पूरी सरकार से कहना चाहता हूँ कि 1 करोड़ 25 लाख लोगों को तो आप रोजगार कब देंगे, यह अलग बात है, लेकिन जो 22 लाख लोगों को पोर्टल पर आकांक्षी रोजगार के नाम से कर दिया है, उन्‍हें रोजगार कब मिलेगा, इसकी समय सीमा तय होनी चाहिए क्‍योंकि मैं समझता हूँ कि प्रदेश का युवा खयाली पुलाव नहीं खाना चाहता. वह हकीकत चाहता है. नौकरी चाहता है. अधिकार चाहता है. वह कैसे अपना घर चलाता है, कैसे संघर्ष कर रहा है. आप देख रहे हैं कि जोमेटो पर आज कई पढ़े-लिखे बच्‍चे मोटर साइकिल पर घर-घर जाकर खाना पहुँचाते हैं, पार्सल पहुँचाते हैं. जब मैं उनसे बात करता हूँ. मैंने पूछा कि कहां तक पढ़े हो तो बोला कि ग्रेजुएशन किया है. मैंने पूछा कि नौकरी क्‍यों नहीं करते हो तो बोला कि सरकार आवेदन बुलाती है, पोर्टल ओपन करती है, लेकिन भर्तियां नहीं होतीं. मैं समझता हूँ कि एक छोटे से छोटा व्‍यक्‍ति जो मोटर साइकिल पर व्‍यवसाय कर रहा है, उस युवा के बारे में भी हमें सोचना चाहिए.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कई बातें हैं. राज्‍यपाल के अभिभाषण के 47 पन्‍नों में ''मेरी सरकार'' शब्‍द का उपयोग 70 बार किया गया है. लेकिन एक बार भी राज्‍यपाल महोदय ने ''मेरी सरकार'' की जवाबदारी का उल्‍लेख नहीं किया. अध्‍यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि राज्‍यपाल महोदय अभिभाषण से संतुष्‍ट नहीं थे.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विजन डॉक्‍युमेंट की बात काफी समय से हो रही है. लेकिन मध्‍यप्रदेश की अर्थव्‍यवस्‍था के रिविजन को लेकर कब बात होगी. क्‍या हम सिर्फ सपने दिखाते रहेंगे. अर्थव्‍यवस्‍था का रिविजन हम कब और कैसे करेंगे. अर्थव्‍यवस्‍था कैसे बेहतर होगी, कैसे आय के स्रोत बढ़ेंगे. हमारी जो टैक्‍स से आय है, वह कैसी बढे़गी, वह कम क्‍यों होती जा रही है. अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूँ कि इस बारे में सरकार को सोचना चाहिए. सरकार रोडमैप तो बनाती है, लेकिन वह धरातल पर कैसे उतरे, इसकी बात नहीं होती.

          अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍यपाल के अभिभाषण के पेज नंबर 2 पर ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स समिट की बात की गई है कि वर्ष 2019 से वर्ष 2025 के बीच में 22 लाख करोड़ एफडीआई आया. इसमें मध्‍यप्रदेश की हिस्‍सेदारी क्‍या थी. सिर्फ 4,653 करोड़. 0.21 प्रतिशत. अध्‍यक्ष महोदय, जब दूसरे राज्‍य ज्‍यादा हिस्‍सेदारी ले जा रहे हैं तो हमारे मध्‍यप्रदेश में यह क्‍यों नहीं हो पा रहा है. एकल खिड़की की बात होती है, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की बात होती है, सब बातें होती हैं. कोई न कोई कारण तो है कि उद्योगपति यहां पर नहीं आना चाहते. क्‍या कारण है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी वर्ल्‍ड इकॉनॉमिक फोरम पर दावोस गए. 26 बैठकें हुईं और मिला क्‍या. एक एमओयू. वह एमओयू भी किसका, डीपी वर्ल्‍ड का. जो वर्ष 2011 से पावरखेड़ा प्रोजेक्‍ट के अंदर पंजीकृत है. वह वर्ष 2025 में रेल सेवा शुरू कर चुकी है. उस डीपी वर्ल्‍ड के साथ. उसी को हम यहां बता रहे हैं कि हम एमओयू करके आए. उसके जो चेयरमैन थे. फिर आप बोलेंगे कि नाम लिया.

          अध्‍यक्ष महोदय -- चेयरमैन बोलो. (हंसी).

          श्री उमंग सिंघार -- चेयरमैन बोल देते हैं, डीपी वर्ल्‍ड के, अभी एपस्‍टिन फाइल के अंदर उनका नाम आया है. हमारी सरकार एपस्‍टिन फाइल के लोगों के साथ एमओयू करके आ रही है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी उनको चेयरमैन पद से इस्‍तीफा देना पड़ा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऐसे ही राज्‍यपाल के अभिभाषण में प्रदेश के अंदर रीजनल इंडस्‍ट्री कान्‍क्‍लेव की बात हुई. वर्ष 2025 के हिसाब से 11.09 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए है, यह राज्‍यपाल के अभिभाषण के पृष्‍ठ नं.2 में है. एक प्रश्‍न लगाया था, प्रश्‍न क्रमांक 844 निवेश दौरों पर, तो आपने यह तो बता दिया कि इतना पैसा आ रहा है, लेकिन पैसा तो आया ही नहीं है, लेकिन निवेश के दौरों पर जाने में जरूर खर्च हुआ है. वर्ष 2024 से लेकर सितम्‍बर, 2025 के बीच दूसरे प्रदेशों में कुल 20 इंडस्‍ट्री कॉन्‍क्‍लेव हुए, जिन पर सरकार ने 200 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, लेकिन 200 करोड़ रुपये विधायकों को देने के लिए तैयार नहीं हैं. (शेम-शेम की आवाज)  जो अपने क्षेत्र में विकास का काम करते हैं. सिर्फ ब्रांडिंग करने के लिए सरकार ने लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च कर दिये. ग्‍लोबल इन्‍वेस्‍टर्स मीट पर अलग से 87 करोड़ रुपये सिर्फ आने-जाने में खर्च हो गए. नवम्‍बर, 2024 से जुलाई, 2025 तक सरकार यूके, जर्मनी, जापान, यूएई और स्‍पेन गई, तीन विदेशी दौरे अलग से हुए. इस पर सरकार के 34 करोड़ रुपये खर्च हुए. मैं समझता हूँ कि माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार दावे करती है कि हमने 11.09 लाख करोड़ रुपये के एमओयू किये, इतनी कम्‍पनियां आ रही हैं, इतनी फैक्ट्रियां आने वाली हैं, इतने उद्योगपति आने वाले हैं. आप इसे पोर्टल पर क्‍यों नहीं डालते हैं ? क्‍यों नहीं यह पूरे प्रदेश को पता चले कि 11.09  लाख करोड़ रुपये की यह कम्‍पनियां हैं और यहां पर काम करने वाली हैं, लेकिन आज तक पोर्टल पर नहीं डाला गया है. क्‍या प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार नहीं है ? क्‍या दोनों पक्ष के विधायकों को यह जानने का अधिकार नहीं है ? मैं समझता हूँ कि सरकार सिर्फ जनसम्‍पर्क से ही नहीं चले. अगर आप पोर्टल पर डालेंगे, तो आम व्‍यक्ति देखेगा कि यह प्रदेश कैसे आगे बढ़ रहा है ?

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍यपाल के अभिभाषण में बुनकरों की बात हुई. चंदेरी एवं महेश्‍वरी साडि़यां, ड्रेस मटेरियल, बेडशीट तथा शासकीय उपयोग के वस्‍त्रों का उत्‍पादन किया जा रहा है, जिससे लगभग 34 हजार 222 बुनकरों को आपने काम दिया. आपने क्‍या काम दिया ? क्‍या आपने उनको बुनकर की नई योजनाएं बनाकर दीं ? आपने कुछ नहीं किया, यह तो उनकी मेहनत है. क्‍या आपने उनको स्‍टायपेंड दिया ? (शेम-शेम की आवाज)  मैं समझता हूँ कि सरकार को इस पर ठोस आर्थिक सहायता की रणनीति बनानी चाहिए, इस पर विश्‍वास होना चाहिए और अगर वह लोग प्रोडक्‍शन कर रहे हैं, तो उनको प्रोत्‍साहन राशि के रूप में इन्‍सेन्टिव मिलना चाहिए. इस पर राज्‍यपाल के अभिभाषण में कुछ नहीं दिया गया है. मैं समझता हूँ कि दूसरों की मेहनत पर हमें दीवाली नहीं मनानी चाहिए, यह उनके घर की मेहनत से वह खुद दीवाली मनाते हैं, वह बुनकर हैं. अगर हम उन्‍हें देंगे, तो हम मानेंगे कि सरकार की दीवाली है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, साइबर सेल को लेकर काफी बड़ी बातें हो रही हैं. साइबर क्राइम के बारे में पुलिस विभाग हमारे प्रदेश के अन्‍दर काफी जनजागरूक कर रहा है. वर्ष 2021 से लेकर वर्ष 2025 तक एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की ठगी हो गई है, ऑनलाइन पैसे निकाले गए हैं और मात्र सिर्फ एक करोड़ 94 लाख रुपये बरामद हुए. (शेम-शेम की आवाज)  क्‍या पुलिस इतनी अक्षम है ? क्‍या डीजीपी इतने अक्षम हैं ?  मैं इस पर आपसे कहना चाहता हूँ कि पूर्व जस्टिस मलिनाथम जी के स्‍टेनो के 14 लाख रुपये निकल गए, एक डिस्ट्रिक्‍ट जज हैं, उनके ढाई करोड़ रुपये निकल गए, पुलिस कश्‍मीर से पकड़ कर लाई, लेकिन आज तक पैसे नहीं दिलवा पा रही है और एक महिला जज पुलिस विभाग में कितनी बार गई ? कितनी बार आपके यहां दरख्‍वास्‍त लगाई ? जब एक जज को न्‍याय नहीं मिल रहा है, तो आम व्‍यक्ति को न्‍याय कैसे मिलेगा ? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूँ कि इस पर सरकार के असत्‍य दावे राज्‍यपाल के अभिभाषण में साइबर को लेकर है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍यपाल के अभिभाषण में समृद्ध किसान, समृद्ध प्रदेश की बात कही गई, प्रदेश के किसान से पूछो कि क्‍या वह समृद्ध हुआ ? क्‍या प्रदेश के किसानों की आय दोगुनी हुई ? उसके बारे में आपने कोई बात नहीं की. किसान को प्‍याज सड़कों पर फेंकना पड़ रहा है, किसान को सोयाबीन के भाव नहीं मिल रहे हैं. मक्‍का की हालात क्‍या है, क्‍या सरकार ने इसके बारे में सोचा ?  आप विज़न की बात करते हैं, वर्ष 2047 की बात करते हैं, आप वर्ष 2047 में खरीदोगे कि वर्ष 2026 में खरीदोगे, आज किसान मर रहा है. खाद की स्थिति क्‍या है, डिजिटल की बात की आपके प्रदेश के भाजपा अध्‍यक्ष ने, कहा कि डिजिटल रूप से खाद देंगे, अब डिजिटल खाद आयेगी, क्‍या मोबाईल में खाद आयेगी, इसकी जानकारी सभी को होना चाहिए, अच्‍छी बात है यदि खाद डिजिटल मिले तो, लेकिन मुझे नहीं लगता कि डिजिटल खाद मिलेगी, पता नहीं कैसी योजना है, मैं चाहूंगा कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी ये जरूर बतायें. 

          अध्‍यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश में 52 लाख से ज्‍यादा कृषि ऋण के खाते हैं लेकिन किसानों पर कर्ज है, रुपये 1 लाख 69 हजार करोड़, क्‍या सरकार इन किसानों का कर्ज माफ करेगी, इसके बारे में बतायें, वर्ष 2047 में जरूर करेगी वर्ष 2026 में नहीं करेगी किसानों का कर्ज माफ. (शेम-शेम की आवाज)

          अध्‍यक्ष महोदय, यही स्थिति मक्‍का को लेकर आदिवासी क्षेत्रों में है, वे परेशान हैं, सरकार ने आज तक उसकी MSP को लेकर कोई बात नहीं की है. मैं समझता हूं कि एक समय था, जब सोयाबीन में हमारा प्रदेश पहले नंबर पर था, आज सोयाबनी का रकबा कम होता जा रहा है, महाराष्‍ट्र पहले नंबर पर हो गया, हम दूसरे नंबर पर हो गए हैं, कैसा समृद्ध मध्‍यप्रदेश, कैसे समृद्ध किसान, क्‍या हम उनको सुविधायें नहीं दे पा रहे हैं, इस पर बात होनी चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय, दूध की राजधानी बनाने की बात चल रही है. कई साथियों ने कहा दूध की राजधानी बनायेंगे, टेट्रा पैक दूध हम आठवीं तक के बच्‍चों को देंगे, पता नहीं कौन सी कंपनी है, किसको जायेगा, कहां जायेगा अलग बात है, ठीक है बच्‍चे स्‍वस्‍थ हों लेकिन कुपोषण से बच्‍चों को बाहर तो निकालो, शुद्ध पानी दे नहीं पा रहे हैं अब दूध दे रहे हैं. दूध उत्‍पादन के लिए बड़े-बड़े दावे किये जा रहे हैं लेकिन मैं समझना चाहता हूं कि National Dairy Development Board से जो MOU हुआ था, उसे एक साल हो गया, सरकार ने आज तक नहीं बताया कि उसका क्‍या हुआ, हम अमूल डेयरी को लेकर क्‍या बात कर रहे हैं, हमारे यहां सांची ब्राण्‍ड है, हम सांची ब्राण्‍ड को नेशनल ब्राण्‍ड क्‍यों नहीं बना सकते, इस पर सरकार का कोई विज़न नहीं है, इस पर बात होनी चाहिए. उत्‍तरप्रदेश में 3 लाख 88 हजार करोड़ लीटर, राजस्‍थान में 3 लाख 47 हजार करोड़ लीटर और मध्‍यप्रदेश 2 लाख 13 हजार करोड़ लीटर दूध का उत्‍पादन  हो रहा है, हम अभी इसमें बहुत पीछे हैं, ये दूध की राजधानी बनायेंगे ?

(शेम-शेम की आवाज)

          अध्‍यक्ष महोदय, विकसित भारत G-RAM-G प्रदेश के अंदर 1 करोड़ मनरेगा में पंजीकृत मजदूर हैं, जिनको काम की आवश्‍यकता है. सरकार ने बजट रुपये 10 हजार करोड़ का रखा है, 125 दिनों के रोजगार गारण्‍टी की बात कर रहे हैं, 125 दिनों के लिए यदि आप उस मजदूर को रुपये 300 भी देंगे तो रुपये 37 हजार करोड़ सरकार के पास कहां है ? आपने रुपये 10 हजार करोड़ रखें हैं, आप कहते हैं हर व्‍यक्ति को मजदूरी मिलेगी, G-RAM-G में योजना बदल दी, नाम बदल दिया, लेकिन उस मजदूर के बारे में आपकी सरकार ने नहीं सोचा, केंद्र सरकार ने नहीं सोचा. मैं समझता हूं कि मजदूर अगर खुश है, मध्‍यप्रदेश से पलायन नहीं करे तो फिर G-RAM-G योजना का नाम आपने ठीक किया, नहीं तो ये बेईमानी है, आपने केवल नाम बदला है.

          अध्‍यक्ष महोदय, शुद्ध पेयजल को लेकर राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण में आपने कहा है कि 24 हजार 411 ग्रामों को "हर घर जल" घोषित किया जा चुका है. आपका नारा था, भाजपा का नारा था, "घर-घर मोदी, घर-घर जल". मोदी जी तो आपने घर-घर पहुंचा दिये लेकिन पानी नहीं पहुंचा. नल था लेकिन नल खाली था, उसमें पानी नहीं था, कई बार इस बारे में मुख्‍यमंत्री जी ने कहा, संसदीय कार्य मंत्री जी ने पूर्व में कहा है कि हम जिले में जांच करवायेंगे, हर जगह विधायकों के साथ मिलकर एक साल हो गया इस आश्‍वासन को लेकर आज तक एक जि‍ले में जांच नहीं हुई है और जांच हुई तो सदन के अंदर उसकी रिपोर्ट क्‍यों नहीं आई. 24411 गांव हैं. मुख्‍यमंत्री जी अगर आप वास्‍तव में प्रदेश की जनता को पानी पिलाना चाहते हो, शुद्ध जल पिलाना चाहते हो तो आप उसको क्‍यों नहीं लाना चाहते हो, क्‍यों दे रहे हो. क्‍या आप फिर आंकड़े गिनाएंगे? हम आंकड़े गिन लेंगे, आपकी बात सुन लेंगे, लेकिन आपका, आपकी सरकार का प्रयास क्‍या है. घर के नल जो बंद पड़े हैं, सूखे हो गये उसमें पानी कब आएगा? मैं चाहूंगा कि मुख्‍यमंत्री जी इस बारे में कुछ कहें.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक ओर बात बताना चाहता हूं कि प्रदेश के अंदर आपने 42 लाख कनेक्‍शन की बात की है. इसमें फंग्‍शनरी असिसमेंट ऑफ हाउस होल्‍ड टेप कनेक्‍शन रिपोर्ट वर्ष 2024 भारत सरकार की है. सरकार ने माना है कि इस मध्‍यप्रदेश में 37 प्रतिशत लोग 30 लाख लोग दूषित पानी पी रहे हैं. भागीरथपुरा तो अपनी जगह छोटी बात है, लेकिन 30 लाख लोग प्रदेश के अंदर पी रहे हैं. आपने कल ग्‍वालियर की बात की थी. यही स्थिति है. मुख्‍यमंत्री जी क्‍लीन वॉटर कैंपेन चलाते हैं. हम आरो वॉटर पी सकते हैं, आप आरो वॉटर पी सकते हैं. हम बड़े लोग घर में बैठे आरो मशीन लगा सकते हैं, लेकिन जो छोटे क्‍लास का है, जो मध्‍यम क्‍लास का है. छोटा आदमी है, गरीब आदमी है वह कहां से पानी पियेगा? क्‍या वह आरो की मशीन खरीद सकता है? क्‍या इंसानियत के नाते हमें इस पर विचार नहीं करना चाहिए? उसकी किडनी खराब हो रही है] वह इलाज करा रहा है] किसी को कैंसर हो रहा है. डॉक्‍टर कहता है कि आप साफ पानी पियो लेकिन वह अपने घर में कहां से आरो की मशीन लगाएगा. क्‍या इस पर सरकार विचार नहीं करेगी. मैं समझता हूं कि बार-बार मुद्दा उठता है. मुख्‍यमंत्री जी ने क्‍लीन वॉटर की बात की है इस पर समीक्षा होनी चाहिए. इस पर काम होना चाहिए नहीं तो यह बेईमानी होगी कि हम वर्ष 2047 के सपने दिखाते हैं और शुद्ध जल नहीं पिला पा रहे हैं यह इस मध्‍यप्रदेश के लिए बड़ी लज्‍जा की बात है.

           माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जनजातीय वर्ग की बात, आदिवासियों की बात निश्चित तौर से सरकार ने बैगा, भारिया, सहरिया को कुपोषण से बचने के लिए डेढ़ हजार रुपए देने का प्रावधान किया. मैं मुख्‍यमंत्री जी से कहना चहता हूं कि मध्‍यप्रदेश में केवल तीन जनजातियां हैं क्‍या गौड़, भील, कोरकू, कौल, भिलाला, सहरिया अन्‍य जातियां नहीं हैं. उनके लिए आपने क्‍या सोचा है. उनके लिए कोई योजना नहीं है. इससे स्‍पष्‍ट है कि सरकार की योजना आदिवासियों को कैसे उपजातियों में विभाजित करना लाभ के बजाय विभाजित करने की रणनीति चल रही है. न्‍याय होना चाहिए सबके साथ होना चाहिए. सामाजिक न्‍याय की बात, 27 प्रतिशत आरक्षण की बात कुछ विभाग में आप 27 प्रतिशत आरक्षण दे रहे हैं और कुछ में नहीं देना चाहते हैं.13 प्रतिशत होल्‍ड कर रखा है. बार-बार हम सुप्रीमकोर्ट कहते हैं. सुप्रीमकोर्ट में हमारे सरकारी अधिवक्‍ता वहीं कहेंगे जो सरकार चाहती है. ऐसे कौन लोग हैं जो ओ.बी.सी. को प्रदेश के अंदर रोकना चाहते हैं. जो ओबीसी की आबादी 50 प्रतिशत से ज्‍यादा है उनको आरक्षण नहीं देना चाहते हैं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी से कहूंगा कि राज्‍यपाल जी के अभिभाषण में आपको इस बात का भी ध्‍यान रखना चाहिए. दावे की बात कर रहे हैं. सामाजिक कल्‍याण की बात कर रहे हैं, ओबीसी की बात कर रहे हैं, लेकिन हमको न उनको पैसे देना है न उनको आरक्षण देना है. आऊटसोर्स के अंदर भी आरक्षण लागू होना चाहिए. ओबीसी को उसके अंदर 50 प्रतिशत आरक्षण होना चाहिए. आऊटसोर्स के अंदर कोई आरक्षण नहीं है किसकी भर्तियां हो रही हैं कोई आरक्षण नीति का पालन नहीं किया जा रहा है. इसके अंदर भी विचार होना चाहिए. लाडली बहना को लेकर कई बार बाते हुईं तीन हजार की बात. इंदौर हाईकोई में सरकार के उपमहाधिवक्‍ता ने नए पंजीयन को लेकर विरोध कर दिया है, 18 साल वाले जो हैं उनके पंजीयन नहीं होंगे. यह सरकार की कैसी नीति है आप हर लाड़ली बहना को 3 हजार रुपए देना चाहते हो. हर लाड़ली बहना को लखपति बनाना चाहते हो लेकिन आप उनका पंजीयन नहीं करना चाहते हैं. पिछले दो साल से पंजीयन नहीं हुआ है. क्यों नहीं हुआ, इसका मतलब कि नई लाड़ली बहनाओं को आप नहीं देखना चाहते हैं. इस पर भी विचार होना चाहिए.

          अध्यक्ष महोदय, कुल मिलाकर मैं यही कहना चाहता हूँ कि राज्यपाल महोदय का अभिभाषण, मुख्यमंत्री जी का 17 दिसंबर का भाषण और वित्त मंत्री जी का कल का भाषण. जो मैंने शुरुआत में कहा कि किस प्रकार से किल बोर्ड का माइक्रोसॉफ्ट के साफ्टवेयर का फ्रेसिंग चेंज करके री-फ्रेसिंग करके एक ही भाषण को तीन अलग-अलग कहानियों में दिया जा रहा है. खाना एक है लेकिन तीन अलग-अलग थालियों में परोसा जा रहा है. लेकिन वो थालियां खाली हैं, वो सपनों की थालियां थीं. हर बेरोजगार युवा, किसान, पिछड़ा वर्ग, दलित, आदिवासी सरकार की तरफ देखता है कि मुझे कुछ मिलेगा. मुझे अधिकार मिलेगा, मेरी सरकार है. लेकिन ख्याली पुलाव चल रहे हैं. सरकार को कागजों और हकीकत को समझना चाहिए. 47 पन्ने और 11 हजार शब्द वाला यह अभिभाषण था. मैंने प्रदेश के एक आम नागरिक को यह सुनाया, वो मुस्कुराकर बोला साहब कहानी तो बहुत अच्छी थी लेकिन यह किस देश की कहानी थी. मैं तो मध्यप्रदेश में रहता हूँ यहां पर तो ऐसा नहीं है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने बोलने का मौका दिया, उसके लिए धन्यवाद.

          मुख्यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) -- माननीय अध्यक्ष जी, माननीय महामहिम राज्यपाल के अभिभाषण की चर्चा में भाग लेने वाले इस सदन के प्रतिपक्ष के नेता माननीय उमंग सिंघार जी. मैं दोनों पक्षों के सदस्यों के नाम लेना चाहूंगा और विस्तार से अपनी बात कहूंगा. माननीय उमंग सिंघार जी, जिन्होंने अभी अभी अपनी बात कही, श्रीमान हेमंत कटारे जी, श्रीमान ओमप्रकाश मरकाम जी, श्री सुदेश राजे जी, श्री फुन्देलाल मार्को जी, श्री यादवेन्द्र सिंह जी, श्री सुरजीत सिंह जी, श्री राजन मण्डलोई जी, श्री कमलेश्वर डोडियार जी, श्री फूल सिंह बरैया जी, श्री सोहनलाल बाल्मीकी जी, श्री सिद्धार्थ कुशवाह जी, श्री अभय मिश्रा जी,  डॉ. हिरालाल अलावा जी, श्री महेश परमार जी, श्री दिनेश जैन जी, श्री मधु भगत जी, श्री विजय चौरे जी, श्री लखन घनघोरिया जी. हमारे पक्ष के माननीय विधायक श्री मोहन सिंह राठौर जी, माननीय ओमप्रकाश धुर्वे जी, माननीय ओमप्रकाश सखलेचा जी, माननीय आशीष गोविन्द शर्मा जी, माननीय अजय विश्नोई जी, श्रीमती अर्चना चिटनीस जी, माननीय हेमन्त खण्डेलवाल जी, डॉ. सीतासरन शर्मा जी, श्रीमान रामेश्वर शर्मा जी, श्रीमान शैलेन्द्र जैन जी, श्रीमान अनिल माधव मारु जी, श्रीमान गिरीश गौतम जी, डॉ. प्रभुराम चौधरी जी, श्रीमती रीति पाठक जी, श्रीमती मालिनी गौड़ जी, श्रीमान दिलीप सिंह परिहार जी. आप सभी ने राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर अपने विचार व्यक्त किए. संसदीय परम्पराओं में विचारों की अभिव्यक्ति बड़ी महत्वपूर्ण होती है. पक्ष के सदस्यों ने पक्ष की बात कही, विपक्ष ने अपनी बात कही. हमारे लोकतंत्र की खूबसूरती यही है. मैं मध्यप्रदेश की  साढ़े आठ करोड़ जनता की आशा और अपेक्षा के लोकतंत्र के केन्द्र, लोकतंत्र के देवालय को प्रणाम करता हूँ. अभिनन्दन करता हूँ.

इस गरिमामय सदन की ओर से माननीय राज्‍यपाल जी का मैं हृदय से अभिनंदन और आभार व्‍यक्‍त करता हूं. आपने अपने अभिभाषण के माध्‍यम से प्रदेश सरकार की नीति, नियत, दूरदर्शी विजन को अत्‍यंत प्रभावी रूप से प्रस्‍तुत किया जिसमें वर्तमान की उपलब्धियों के साथ भविष्‍य के समृद्ध, आत्‍मनिर्भर और विकसित मध्‍यप्रदेश की झलक दिखाई देती है. हम सब उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं. थोड़ा अच्‍छा होता जब महामहिम राज्‍यपाल अपनी बात कह रहे थे तो नेता प्रतिपक्ष अपने दल के सदस्‍यों से भी कहते कि कम से कम राज्‍यपाल महोदय का तो सम्‍मान करना चाहिए. यह गणतंत्र की, लोकतंत्र की हमारी सबसे बड़ी सर्वोच्‍च संस्‍था होती है लेकिन मन में बड़ा अटपटा भी लगता है और कभी-कभी लगता है कि कोई बात नहीं ‘’जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी.’’ आप यही करते रहें और यही कारण है कि लंबे समय तक आपको इस प्रदेश की जनता सामने ही बैठाती है और आप 20 साल आगे तक ऐसे ही बैठे रहें. (मेजों की थपथपाहट)

अध्‍यक्ष महोदय, मैं अपनी ओर से केवल आपके सामने समय की सीमा भी है लेकिन बात थोड़ी सी विस्‍तार से भी करना चाहता हूं. हमारे पक्ष ने सारी बात बहुत अच्‍छे से और ध्‍यान से सुनी भी, समझी भी. एक बात जरूर लगी कि यह इतने गरिमामयी हॉल, इतने गरिमामयी सदन में नेता प्रतिपक्ष और मैं तो छोटे भाई उप नेता प्रतिपक्ष को भी बोलना चाहूंगा कि पता नहीं कौन से डीपी वर्ल्‍ड से यह मिल लिए, यह रतलाम वाले से मिल आए कहां से मिल आए डीपी वर्ल्‍ड जिसके लिए बात निकली जिसके आधार पर दावोस में हम गए. वह तो सीईओ सुल्‍तान दुबई के हैं जिनका नाम हैं सुल्‍तान अहमद बिन सुल्‍तान. यह उनकी बात कर रहे हैं कि पता नहीं उनके कर्मचारी से मिल आए, चपरासी से मिल आए, भगवान जाने किससे मिलकर आए.

          श्री उमंग सिंघार --  माननीय, आप गए थे. हम दावोस नहीं गए थे.

          डॉ. मोहन यादव -- अध्‍यक्ष महोदय, नहीं-नहीं आपने बात उठाई ना. जो बात कह रहे हैं कि वह तो डीपी वर्ल्‍ड यहां है वहां है. ऐसा हो गया जैसे गूगल वालों का हम यहां अगर मोबाइल में उपयोग कर रहे हैं तो गूगल वाले की कोई दुकान पर जाकर बात कर रहे हैं कि हम उनके मालिक से ही बात कर रहे हैं. अब वह मालिक है कि कर्मचारी है यह तो समझना पड़ेगा कि मिल किससे रहे हैं, आप बात किससे कर रहे हैं. दावोस में जाकर अगर पवांरखेड़ा के अंदर हम लॉजिस्टिक पार्क के लिए मुझे गर्व है कि यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्‍व में हमारी सरकार जो कहती है वह करके दिखाती है उसका प्रमाण है. आपने इंडस्‍ट्री देखने की बात कही. आप देखिए. इंडस्‍ट्री कहां चाहिए. नेता प्रतिपक्ष आपके दाएं तरफ, आपके बाएं तरफ पीथमपुर में जगह नहीं मिल रही एक प्‍लॉट खाली नहीं है इंडस्ट्रियों का इतने प्रकार से एक सेक्‍टर, दो सेक्‍टर, तीन सेक्‍टर, चार सेक्‍टर, सारे सेक्‍टर भर गए और धन्‍यवाद देना चाहिए हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी को जिन्‍होंने जन्‍मदिन भी आपके जिले में मनाकर एक नया 3 लाख लोगों के रोजगार का बड़ा पीएम मित्र पार्क देने का प्रयास किया है. यह हमारी सरकार के काम करने का तरीका है. मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी का कितना उदार मन और हम सब गौरवान्वित हैं कि विश्‍व के सबसे बड़े गणतंत्र के नायक, विश्‍व के सबसे बड़े नेता आज हमारे बीच आकर जन्‍मदिन मनाते हैं और आदिवासी अंचल में कपास के उत्‍पादक 6 लाख से ज्‍यादा लोगों के लिए इतना बड़ा पीएम मित्र पार्क देते हैं यह हमारे लिए सौभाग्‍य की बात है. (मेजों की थपथपाहट)

अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह इस दल के साथ कांग्रेस के प्रतिपक्ष के नेताओं से भी कहना चाहूंगा कि कांग्रेस की कुनीतियों के कारण ही वर्ष 1947 में देश आजाद हुआ उसके पहले इंदौर, उज्‍जैन, रतलाम पूरे प्रदेश के अंदर कॉटन की जिनिंग प्रेस की और इतनी सारी इंडस्ट्रियां होती थीं, आपकी नजरंदाजी के कारण आपकी सरकारों की 1947 के बाद 1956 में मध्‍यप्रदेश बना इंडस्ट्रियां बैठती गईं, बंद होती गईं, कॉटन के भाव गिरते गए, किसान की कठिनाई बढ़ती गई, लेकिन आपका मन नहीं पसीजा. सरकार पर सरकार और सरकार पर सरकार बनाते रहे, गरीब के नाम पर सरकार बनाते रहे गरीब, गरीब होता गया लेकिन आपको दया नहीं आई. इंडस्ट्रियों पर ताले लग गए. लोग पलायन पर मजबूर हो गए. यह मध्‍यप्रदेश के हालात आपने किए थे.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे इस बात को बताते हुये प्रसन्नता है कि आज के दौर मे अब हमारा यहां से कपास कोयंबटूर नहीं जायेगा, हमारा ही कपास, धागा, धागे से कपड़ा, कपड़े से रेडीमेड गारमेन्ट्स करते हुये यहां से निर्यात करते हुये 86 हजार करोड़ का निर्यात हमारे राज्य से हो रहा है , यह हमारी सरकार कर रही है. एक के बाद एक सारे इन्ड्रस्ट्रीयल बेल्ट के अंदर, क्या नर्मदापुरम, अभी जरा समय मिले तो नेता प्रतिपक्ष जी अपने मित्रों के साथ अच्छा होगा आप भी चलो, हम भी चलें यह बगल में तवा-नर्मदा का बहुत अद्भुत संगम मां नर्मदा की कृपा, अभी मैं किसान की बात तो बाद में करूंगा लेकिन अभी मैं केवल इन्ड्रस्टीज की बात करता हूं. सदन में डॉक्टर सीतासरन शर्मा जी मौजूद हैं , आपके क्षेत्र के अंदर इटारसी, सोहागपुर, यह हमारे नर्मदापुरम के क्षेत्र में पहले 200 एकड़ का हमारा बेटरी स्टोरेज का, सोलर पंप का प्लांट डालने वाले हैं, प्लान आते ही 200 वहां डिमांड बढ़ी 400 एकड़ कर दी, 400 एकड़ की और डिमांड बढ़ी तो 800 एकड़ कर दी, 800 की 1,000 एकड़ कर दी, 1000 एकड़ का जिस दिन भूमि पूजन करने गये एक प्लाट बाकी नहीं है, वापस 1000 एकड़ का एक नया प्लान लाना पड़ा यह हमारे मुहासा-बाबई का यही पास का  इन्ड्रस्ट्रीयल क्षेत्र है उसको आप देखो. और इतना ही नही आज की स्थिति में जितनी तेज गति से वहां निर्माण चल रहा है, अध्यक्ष महोदय, अभी तो हमारा इन्ड्रस्ट्रीयल बेल्ट का बराबरी से डेवलेपमेंट होना बाकी है. माननीय नेता प्रतिपक्ष जी यही स्थिति आपके खुद के बदनावर विधानसभा के अंदर पीएम मित्र पार्क के अंदर , एक प्रदेश के अंदर इतना बड़ा यूनिट एक साथ खड़ा हो रहा है जो काटन के भविष्य की दृष्टि से न केवल प्लाट के आधार पर बल्कि उसकी साईज के आधार पर भी हमारे सभी प्रकार के रोजगार के अवसर उपलब्ध कराते हैं. समान रूप से दो साल के अंदर इन्ड्रस्ट्रीयल बेल्ट भी तैयार होगा और समान रूप से जब वहां पर इनके यूनिट खड़े हो जायेंगे तो इन्ड्रस्ट्रियां भी समान रूप से बन रही हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, भारत सरकार के मंत्री गिरिराज जी देश भर में इस बात का उदाहरण दे रहे हैं इस बात का कि बाकई में यह गजब हो रहा है कि 7 पीएम मित्र पार्क बनने थे , मुझे गर्व है कि सबसे पहले मध्यप्रदेश ने इसका भूमि पूजन किया और समान रूप से प्लाट का आवंटन भी कर दिया और यह रोजगार का बड़ा केन्द्र भी बनेगा. जो भविष्य की दृष्टि से किसानों  की समृद्धि का काम करेगा.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे इस बात की भी प्रसन्नता है जब मैं यहां पर आपसे बात कर रहा हूं तो कुछ आंकड़े भी देख रहा हूं. वैसे तो यह कहा जाता है और रामधारी सिंह दिनकर जी ने लिखा भी है कि :

          मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है.

        माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि समय के साथ में जिस प्रकार से  हमारी नदियों के ऊपर एक के बाद एक सिंचाई का रकवा बढ़ाने की बात  रही है, आंकड़े का मिलान कर लेना, गलत लगे तो माफ करना, कांग्रेस की सरकार में 1956 में मध्यप्रदेश बना, लेकिन किसान-किसान करते करते कई बार आपने प्रदेश में सरकार बनाई, लेकिन किसानों की खेती के रकवे की तरफ ध्यान नहीं दिया. साढ़े साल लाख हेक्टेयर सिंचाई का रकवा 1956 से लेकर के 2003 तक कांग्रेस की सरकार थी , यह आंकड़ा आपके पास में था. मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि हमने जब सरकार बनाई तब 44 लाख हेक्टेयर अकेला मध्यप्रदेश का हमारी सरकार के समय का रकवा था और जितना आपने 56 साल में नहीं किया उतना हमने एक साल के अंदर इतना सिंचाई का रकवा आज मध्यप्रदेश में बढ़ा दिया है, यह हमारी सरकार की संकल्प शक्ति और काम करने का तरीका है. और इससे आगे बताते हैं , अभी तो हम आगे बढ़े हैं, केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंघ और ताप्ती मैया की कृपा से यह सरकार के साथ समय की सीमा के अंदर 100 लाख हेक्टेयर तक सिंचाई का रकवा हम ले जाने वाले हैं, हम अपनी इस भावना के आधार पर  कि जब हम किसानों की सेवा करने के लिये आगे बढ़ रहे हैं तो किसानों के मामले में हम तो उम्मीद करते हैं, हमारे द्वारा, पक्ष के द्वारा , विभागों के द्वारा और प्रतिपक्ष के मित्रों के साथ किसानों की सेवा में तो हम और आप मिलकर के काम करें, जब सिंचाई का रकवा बढ़ेगा तो प्रदेश समृद्ध होगा, प्रदेश समृद्ध होगा तो देश मे मध्यप्रदेश का स्थान बढेगा, मुझे इस बात का गर्व है कि आज पांच बड़े राज्यों में से मध्यप्रदेश का स्थान है लेकिन सिंचाई के बलबूते पर जिस ढंग से ग्रोत हुई है , मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि आप पार्टी वाले पंजाब, कर्नाटक और आंध्रप्रदेश को भी हमने पीछे छोड़ा है यह हमारे मध्यप्रदेश की सरकार और उसका काम करने का तरीका है. एक एक करके सारे सेक्टर के अंदर मुझे तो अच्छा लगता है कि जब हम अपने बीच में कोई काम की बात करें तो काम की बात में से कोई सकारात्मक सुझाव प्रतिपक्ष से भी आये. तो हम तो उसका बहुत  अभिनन्दन करेंगे.  कितना दुख होता है,  अभी मित्र बोलते बोलते  क्या  बोल रहे हैं,  कुछ याद  तो करो.  हमारे इसी राज्य   के अंदर  बालाघाट,मंडला,डिंडोरी कांग्रेस की कुनीतियों के कारण से लाल सलाम वालों का  पंजा  फैलता गया.  पूरा प्रदेश त्राहिमाम- त्राहिमाम  करता गया.  बड़े दुर्भाग्य के साथ कहना  पड़ेगा कि  आपके मुंह से शब्द  कैसे  निकल रहा है.   आप कभी  दिल   के अंदर झांक कर देख लो. कांग्रेस की सरकार थी, कांग्रेस के मंत्री  की सरेआम हत्या  बालाघाट के अंदर हुई है,  यह इतिहास सबके सामने है. सरकार किसी की भी हो.  चुनी हुई सरकार,  सरकार  किस की थी, मध्यप्रदेश की  सरकार  थी.  लेकिन लिखीराम कावरे जी को  घर से निकाल करके सरे  चौराहे पर लाकर  के कुल्हाड़ी से काट काट  करके  उनकी  हत्या की,  यह  उनकी हत्या नहीं थी,  यह इस तमाम  इस गणतांत्रिक प्रदेश  के अंदर  सबके मन पर चोट थी. मुझे  दुर्भाग्य के साथ   कहना पड़ेगा कि  उनके हत्यारों को, तमाम प्रकार के नक्सलाइट्स  को  बाद की कांग्रेस की सरकार ने  भी और सपोर्ट देते देते चुनाव में लाभ लेने का सोचा.  मुझे इस बात का संतोष है कि हमारी सरकार ने लाल सलाम  को  आखिरी सलाम  करके  आपके समय में हुए गलत अपराध का भी बदला लेने का काम  किया है. यह हमारे काम  करने का तरीका है.  हम पक्ष विपक्ष नहीं देख रहे हैं.  वह हजारों लोग  जो  उस नक्लवादी मूव्हमेंट के  आधार पर किसी का  हाथ,पैर काट दिया.  कोई मां बच्चे से बिछड़ गई, क्या क्या नहीं बीता उन पर.  कोई विकास का काम  नहीं हो रहा है. तमाम  प्रकार की व्यवस्थाओं में अव्यवस्था  फैला करके  जिस प्रकार से नक्सलाइट   व्यवस्था में दुराव्यवस्था  हुई.  मुझे संतोष है यशस्वी  प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में  माननीय गृह  मंत्री  ने टाइम लाइन के अंदर डिसाइड  किया कि  मार्च,2026  के पहले लाल सलाम को आखिरी सलाम करेंगे.  पूरे देश में मध्यप्रदेश वह राज्य है,  जिसने जनवरी के पहले  वह टारगेट पूरा किया है.  (सत्ता पक्ष की तरफ से सदस्यगण द्वारा बैठ बैठे भारत माता की जय के नारे लगाये गये.)  और केवल ऐसे ही नहीं हुआ पूरा. जब हम इस दिशा में आगे बढ़  रहे थे,  हमारे लिये तो भौगोलिक एरिया  भी बहुत  बड़ा था. हम उस  पूरे   क्षेत्र में पकड़ने के लिये, कार्यवाही करने के लिये  कई प्रकार की चुनौती से  जूझ रहे थे, लेकिन  हमारे 32 वीर  पुलिस  जवान  और सभी प्रकार के सिविल सेवा  और   बाकी लोगों ने मिलकर जिस प्रकार से भूमिका  अदा  की है,  उसका परिणाम है कि  हमने 2025  में  10 खूंखार नक्सलवादियों को ढेर किया और बाकी  ने सरेंडर किया.  यह हमारे काम करने का तरीका है,  जिसमें  13 नक्सलियों ने आत्म समर्पण करके  इस  पूरे वातावरण में  सरकार के साथ खड़े होकर के हथियार को जमीन पर रखा. यह हथियार को जमीन पर   रखना  यह सच्चे अर्थों में भाजपा  की सरकार तो गर्व से  सीना अपना 56 इंच का करेगी. यह आपके समय का भी बदला  लेने  का काम किया है.  मुझे  इस बात का संतोष  है  और इस अवसर पर हम   और आप सब मिलकर के  इस पूरे अभियान  में   वह अमर शहीद, जिन्होंने अपनी  भूमिका  अदा की है अलग अलग प्रकार  से,  अपने अपने तरह से,  हम उनको भी विनम्र  श्रद्धांजलि  अर्पित करें. वाकई  उनके बलिदान  के  बलबूते पर हमने अपने संकल्प से  सिद्धि प्राप्त की है.  मुझे इस बात की भी प्रसन्नता है कि  जब हम आपसे बात  कर रहे हैं कि  मेडिकल कालेज, अब मेडिकल कालेजों को लेकर के  चिकित्सा विभाग  हमारा जितने प्रकार से  राजेन्द्र जी की प्रशंसा करुंगा,वह  कम है,  हमारे स्वास्थ्य  मंत्री जी की.  आप बताइये कि  केवल 5  मेडिकल कालेज थे  हमारे यहां पर  और 700 से कम एमबीबीएस  की सीट्स थीं.  यह केवल बच्चों के लिये नहीं, हमारे राज्य के लिये  भी  बहुत कष्टकारी   मामला था.  1956 में म.प्र.  बना. कहां कर्नाटक  42 कालेज, तमिलनाडु  47 कालेज,  महाराष्ट्र 40  कालेज और  उनके बराबर का राज्य म.प्र. 5 कालेज.  मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि  आज 40 कालेज हमारे राज्य में चल रहे हैं. यह है हमारे काम करने का तरीका और उससे आगे बढ़कर के हमारे ही राज्य के अन्दर   आज की स्थिति में 700 सीट्स से  बढ़कर के  5200 सीट हमारे बच्चों के लिये  हुई हैं. यह हमारे काम करने  का तरीका है.  एक नहीं अब पीपीपी मॉडल  पर तो और नया  प्रयोग हुआ है. हमने तो पूरे देश के अंदर  घूम घूमकर यह बात कही है कि  बच्चों के लिये खास करके  आदिवासी अंचल, हमारा भौगोलिक  क्षेत्र  बहुत बड़ा है.  ऐसे बड़े क्षेत्र में   आने जाने के लिये  कई कठिनाइयां भी हैं. लेकिन अगर वहीं के बच्‍चे डॉक्‍टर बन जायेंगे तो उनको कोई कठिनाई नहीं होगी. इसलिये सरकार ने ओर आगे बढ़कर निर्णय लिया कि सरकारी मेडिकल कॉलेज में तो बच्‍चें जायेंगे, पढ़ेंगे अच्‍छी बात है, लेकिन प्रायवेट मेडिकल कॉलेज में भी बच्‍चे पढ़ने जायें और नीट क्लियर कर लें तो उनका पूरा पैसा लोन के माध्‍यम से हम सरकार के माध्‍यम से देंगे. लेकिन डॉक्‍टर मानेंगे यह हमारी सरकार का निर्णय है और यह ऑप्‍शन देंगे कि आपके ऊपर लोन दे रहे हैं डॉक्‍टर बनाने के लिये. जब आप डॉक्‍टर बन जाओ तो 2-5-7 साल आपकी इच्‍छा हो तो आप हमारे राज्‍य में सेवा कर देना. बाद में भले आपकी मर्जी जहां जाना है जायें. लेकिन हमारे यहां डॉक्‍टर तो बन जायेंगे. तो डॉक्‍टर सभी प्रकार के सेक्‍टर के लिये, खासकर के एलोपैथिक और आयुर्वेदिक, आयुर्वेद के अंदर भी. अभी धार में आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की बात कही. बालाघाट, मंडला, डिंडौरी जो हमारा वनांचल का बहुत समृद्ध इलाका है. यहां पर बहुत प्रकार की वन औषधियां भी बहुत प्रकार की मिलती है. ऐसे में आयुर्वेक को प्रोत्‍साहन देने के लिये हमारी सरकार ने 13-13 मेडिकल कॉलेज की बात कही और मुझे इस बात का संतोष है कि 8 मेडिकल कॉलेज हमारी सरकार के समय प्रारंभ हो रहे हैं. यह हमारी सरकार का काम करने का तरीका है और वेलनेस के माध्‍यम से, हम केरल, कर्नाटक क्‍यों जायें. अपने राज्‍य में आयें, पर्यटन की दृष्टि से आयें, ईलाज कराने आयें. हमारे यहां तो यही उज्‍जैन जहां धनवंतरी प्रकट हुए. यहां आयुर्वेद की बात नहीं होगी तो कहां होगी. मुझे तो इस बात की प्रसन्‍नता है कि बीते समय यशस्‍वी प्रधान मंत्री के माध्‍यम से आयुर्वेद का एम्‍स भी मध्‍यप्रदेश को मिल रहा है, यह हमारे लिये माननीय प्रधान मंत्री का आशीर्वाद.

          अध्‍यक्ष महोदय, गेहूं कि ऊपर बोनस, आप अंदाज लगा लो तो चैट जीपीटी से मालूम पड़ जायेगा. 1956 में 100 रूपये के अंदर जो गेहूं मिलता था, अब आप बताओ आपके 55 साल में केवल 500 रूपये बढ़े. मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि पिछले साल हमने 2600 रूपये क्विंटल गेहूं खरीदा, यह हमारी सरकार का काम करने का तरीका है. सोयाबीन की भावांतर योजना, क्‍या कांग्रेसी छाती पीट रहे थे. अरे आप समझो तो सही कि बात क्‍या है. कोई समझने को तैयार नहीं था. नादानी में आवाज लगाये जा रहे थे कि गलत हो गया, भारी गलत हो गया, अरे क्‍या गलत हो गया भावांतर योजना के माध्‍यम से एमएसपी पर किसानों के लिये हमारी सरकार ने 2300 करोड़ रूपये खर्च किये. यह हमारी सरकार का काम है. किसान अपनी फसल बेचे, मण्‍डी भी आबाद, अपनी व्‍यवस्‍था सुव्‍यवस्‍था में बदले और आराम से लोगों ने भावांतर का लाभ लिया. यह हमारी सरकार के काम करने का तरीका है. मैं आज आपसे बात कर रहा हूं तो सीधे हजारों करोड़ की राशि सोयाबीन के माध्‍यम से हमने अंतरित करके, यह एक तरह से पूरे देश के अंदर एक आदर्श मॉडल खड़ा किया कि हां हमारी मण्डियों में समृद्धता के आधार पर किसान शांतिपूर्वक तरीके से भावांतर योजना का लाभ ले सकता है. मुझे इस बात की भी प्रसन्‍नता है कि जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो हमारी पिछली उपलब्धियों और संकल्‍प के आधार पर कई सारे सेक्‍टर में हम आगे बढ़े एक के बाद एक. बोलने के लिये तो बहुत सारी चीजें हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, अर्थव्‍यवस्‍था की बात जरूर करना चाहूंगा. अभी यह बात निकली, वह नेता प्रतिपक्ष और कई लोगों ने बात की. मैं आपको याद दिलाना चाहूं‍गा कि एक दिन के विशेष सत्र में आप भी थे, हम भी थे. हमने मिलकर के निर्णय किया है कि राज्‍य का, हमारा उम्र का एक दायरा हो सकता है, लेकिन राज्‍य तो लम्‍बे समय तक, यह तो अपनी सामान्‍य गति के साथ ईश्‍वरीय आशीर्वाद से चलता रहेगा. ऐसे समय मेरी और आपकी आयु जोड़ने के बजाय भविष्‍य की दृष्टि से हमारे प्रत्‍येक काम को देखा जाना चाहिये. इसलिये अगर प्रतिव्‍यक्ति आय आपके शासनकाल में, वर्ष 1956 से बना मध्‍यप्रदेश और केवल वर्ष 2003 तक केवल 10000 रूपये प्रतिव्‍यक्ति आय थी तो यह गलती आपकी थी. हमारे समय यह प्रतिव्‍यक्ति 1 लाख 69 हजार हुई, यह हमारे काम करने का तरीका है. ( मेजों की थपथपाहट) यह आर्थिक रूप से कोई छिपी हुई बात नहीं है. जब हम सत्‍ता में आये तो 1 लाख 41 हजार रूपये थी. अब आप बताओ कि यह क्‍यों हुआ, इतना बड़ा अंतर आया. लेकिन आपके समय क्‍या हुआ था. यह अपने सोचने और समझने की बात है. इसी आधार पर हम कह रहे हैं कि यह तो पांच साल का है. इसीलिये बजट को भी हमने रोलिंग बजट कहा है. बजट आने वाले तीन साल का एक आकार बनाकर दे. मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि पूरे देश में हमारा मध्‍यप्रदेश एक मात्र राज्‍य है जो इस प्रकार से आगे बढ़ रहा है. यह भी हमारे लिये बड़ी बात है, यह उपलब्धि की बात है.( मेजों की थपथपाहट) और आप देखो, कई चुनौतियों के बीच भी हमने हमारे राज्य के बजट का आकार लगातार बढ़ाया है. हर सेक्टर को बराबर से धनराशि की व्यवस्था की है. कोई सेक्टर छोड़ा नहीं है, उसी का परिणाम है कि हमने अपने यहां 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट प्रस्तुत किया, यह हमारे काम करने का तरीका है. (मेजों की थपथपाहट).. और इससे आगे बढ़कर एक रुपया टैक्स नहीं लगाया, पिछले साल भी नहीं लगाया और उसके बीते साल में भी नहीं लगाया और कोई योजना बंद नहीं की, यह हमारे काम करने का तरीका है.

अध्यक्ष महोदय, माननीय श्री जगदीश देवड़ा जी को बधाई देना चाहूंगा, यह हमारे उप मुख्यमंत्री जी के काम करने का तरीका है. यह हमारी सरकारों के काम करने के तरीके हैं. मुझे इस बात की प्रसन्नता है . जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो आज आप केवल राज्य सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2026-27 की ग्रोथ देखें 10.69%, और इस आधार पर 18 लाख 48 हजार 274 करोड़ रुपये के अनुमान के आधार पर हम पहुंचने वाले हैं. मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि यह हमारी सही दिशा में बढ़ने की आर्थिक प्रगति, हमारी सही आर्थिक नीतियों का आधार है. मुझे इस बात की भी प्रसन्नता है, राज्य के प्रति व्यक्ति आय में भी निरंतर वृद्धि हो रही है और यह कागजों में नहीं है.

          अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्यों को बताना चाहूंगा कि यह धरातल पर आने वाला काम है, जिसका आकार सबके सामने बनता जा रहा है. माननीय प्रधानमंत्री जी के माध्यम से ज्ञान, गरीब, युवा, नारी, किसान, जिसको हमने इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़कर ज्ञान से ज्ञानी के मार्ग पर ले जा रहे हैं क्योंकि इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर, इसके लिए हमने पर्याप्त धनराशि दी है. किसी क्षेत्र को नहीं छोड़ा है. एक तरफ अन्नदाता किसानों के लिए किसान कल्याण वर्ष मनाने की घोषणा की. मुझे इस बात की प्रसन्नता भी है और मैं आपके माध्यम से नेता प्रतिपक्ष और उनके मित्रों से भी कहना चाहता हूं कि किसानों के कल्याण के लिए पूरा वर्ष हम किसान कल्याण वर्ष के नाते से मनाना चाहते हैं. ऐसे में किसानों के लिए आपके मन में भी कोई सुझाव हों, किसानों की आय कैसे कैसे बढ़ सकती है, राज्य के अंदर किसानों की बेहतरी कैसे कर सकते हैं, खेती में, फलोद्यान में, अलग प्रकार से मछली, दूध, फल, फूल जिस भी क्षेत्र में किसानों की और बेहतरी हो सकती है. सहकारिता, 17-17 विभाग मिलाकर हमने समग्र प्लान बनाया है. कृषि पर आधारित कैबिनेट भी करने वाले हैं. हमारा पूरे भौगोलिक दृष्टि से विविधता वाला मध्यप्रदेश है. ऐसे विविधता वाले मध्यप्रदेश में हमारा विन्ध्य अलग प्रकार के कृषि और अलग प्रकार के अपने आगे बढ़ने के अवसर लेता है तो चंबल का आनन्द अलग आता है. बुन्देलखण्ड के अंदर भी केन-बेतवा के माध्यम से एक अलग प्रकार का समय आएगा तो आपसे उम्मीद करेंगे, इसमें आपके माध्यम से भी इसी को जोड़कर हम और आगे बढ़ सकते हैं.

          अध्यक्ष महोदय, जब मैं कृषि किसान कल्याण की बात कर रहा हूं. लगातार आगे बढ़ते बढ़ते जिस प्रकार का समय चल रहा है, कुछ और बातें भी आपकी तरफ लाना चाहूंगा. हमारे यहां पर खास कर आंकड़ा देखना. आर्थिक दृष्टि से सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाले प्रदेश की अर्थव्यवस्था कोई है, मुझे प्रसन्नता है वह मध्यप्रदेश है. (मेजों की थपथपाहट).. आपका अपना प्रदेश है. आपको भी गर्व होना चाहिए. जिस प्रकार से सकल घरेलू उत्पाद, 16 लाख 69 हजार 750 करोड़ रुपये का और राज्य का वर्ष 2026-27 का घरेलू उत्पाद 18 लाख 48 हजार 274 करोड़ रुपये का अनुमानित किया है और यह ग्रोथ 10.69% से अधिक है. मध्यप्रदेश की प्रति व्यक्ति आय आप कभी कल्पना करें वर्ष 2025-26 में यह जो 9% की थी और इस आधार पर हमारा 1 लाख 69 हजार रुपये का आंकड़ा रहा है और इसी प्रकार से जो हमने कहा है कि यह हमारी स्पीड रहेगी तो वर्ष 2047 तक यह 22 लाख 50 रुपया प्रति व्यक्ति आय  होने वाली है. हम इस प्रकार से काम करते जा रहे हैं और तब हमारी मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था 250 लाख करोड़ रुपये तक होने की संभावना है.

          अध्यक्ष महोदय, हमारे लिए विकसित मध्यप्रदेश का जो स्वप्न रुपी अपना जो आकार प्रकार बनेगा, वह उसी प्रकार से बनेगा, जैसा वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए है, अभी 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपये का बजट है. मुझे इस बात का संतोष है, इसी प्रकार से लगातार हम अपने रोलिंग बजट के बलबूते पर इसी प्रकार से चलते गये  तो सभी प्रकार के अलग अलग क्षेत्रों में अभी थोड़ा समय कम है, तो थोड़ा कम भी करता जाऊंगा. आज पता नहीं नेता प्रतिपक्ष और हमारे मित्र किस मूड में थे. हमें तो लगा कि 4 बजे बोलेंगे, तो अच्‍छे से बोलेंगे.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- माननीय मुख्‍यमंत्री जी, देश में विधायक निधि में नंबर एक बना दीजिए, हम यही आपसे चाह रहे हैं. अभी आप बोल दीजिए. आप दे रहे हैं, आप बोल दीजिए. विधायक निधि में देश में नंबर एक. हम आपका सम्‍मान करेंगे...(हंसी)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- मरकाम जी, प्‍लीज.

          डॉ.मोहन यादव -- बस यहीं आकर आपका और हमारा अंतर हो जाता है. कांग्रेस केवल अपने लिए सोचते-सोचते वहां बैठी है. हम पूरे राज्‍य के लिए सोच रहे हैं. यह हमारे काम करने का तरीका है. आप सबसे निवेदन है. देखिए, हमने आप सबकी बात सुनी.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मुख्‍यमंत्री जी, एक मिनट. ओमकार जी, प्‍लीज. मुख्‍यमंत्री जी बोल रहे हैं, तो हमें पूरा सुनना चाहिए. ठीक है.

          डॉ.मोहन यादव -- परम्‍परा मत तोड़िए...(हंसी)..

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- अध्‍यक्ष महोदय.....

          अध्‍यक्ष महोदय -- आपने इंट्रप्‍शन कर दिया न. आप ज्‍यादा देर तक बोलेंगे, तो वे बोल थोड़े ही देंगे....(हंसी)..

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- अध्‍यक्ष महोदय, हम हाथ जोड़ रहे हैं...(हंसी)..

          अध्‍यक्ष महोदय -- ओमकार जी, प्‍लीज, प्‍लीज.

          डॉ.मोहन यादव -- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं यह कहना चाहता हॅूं कि हमारे राज्‍य की वित्‍तीय स्‍थिति में लगातार सुधार हो रहा है.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी, मुझे माफ कीजिएगा. यह बात सही है कि ओमकार जी ने सरेआम बोल दिया. हमारे विधायक कान में बोलकर जाते हैं...(हंसी)..

          डॉ.मोहन यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे आप लोगों का रोल ही समझ नहीं आता कि थोड़ी देर पहले तो आप लोग वेल में क्‍या कर रहे थे और फिर अब ताली बजा रहे हैं. (विपक्ष के सदस्‍यों की ओर देखकर)..(हंसी)...जरा अपने आप में देखिए. "बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रूपैया"..(हंसी)..

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्‍लीज, सभी लोग शांत रहेंगे.

          डॉ.मोहन यादव -- अध्‍यक्ष महोदय, हमारे राज्‍य की लगातार मजबूत होती वित्‍तीय स्‍थिति के बारे में बताना चाहूंगा कि वर्ष 2021-22 में राजस्‍व प्राप्‍ति राज्‍य के सकल घरेलू उत्‍पाद का 15.90 प्रतिशत थी, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 17.16 प्रतिशत होने का अनुमान है. इस गति से हमारी सरकार आगे बढ़ रही है. (मेजों की थपथपाहट) पिछले कर राजस्‍व में पिछले वर्ष की तुलना में 13.57 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित है और एक बात बताना चाहता हॅूं और बड़े दुर्भाग्‍य से कहना चाहता हॅूं कि जरा कोई वित्‍त के जानकारों को बुलाकर के बात कर लीजिए, जो घाटे-घाटे का भूत सबके दिमाग में भरा है, उसको निकाल देते हैं. आप अंदाज लगा लीजिए कि पिछले साल भी हमारा बजट 4 लाख 21 हजार करोड़ रूपए का था और 4 लाख 21 हजार करोड़ रूपए में से हमने केवल 72 हजार करोड़ रूपए अपने पास लिया है. वह भी इसलिए, कि हमारे बैलेंस सीट के आधार पर रखा है. अब आप बताइए कि सबसे ज्‍यादा अगर हम राजस्‍व संग्रहण नहीं करते, जीएसटी का पैसा नहीं आता, तो जो यह 4 लाख करोड़ रूपए में से आप 72 हजार करोड़ रूपए को पकड़ कर बैठे हैं, मैं अगर अपने घर के अंदर भी बिजनेस करूं, तो वहां मैं बैंक की मदद लेकर के अगर लोन लेता हॅूं, तो बैंक तो तब लोन देगी, जब मेरी इतनी अपने आप की गहराई होगी. यह हमारी तरलता होगी. (मेजों की थपथपाहट) यह आर्थिक रूप से समृद्धि होगी. ऐसे समय में जब हम 4 लाख 21 हजार करोड़ रूपए से बढ़कर 4 लाख 38 हजार करोड़ रूपए से ऊपर जा रहे हैं, तो हम यह मानकर चलें कि यह जो आप कर्जा बता रहे हैं मैं जरा आईना बताना चाहता हॅूं कि जबसे मध्‍यप्रदेश बना, तब से आज तक का कर्जा मेरे माथे मत जोड़िए. यह पाप भी आपके माथे है, हमारे माथे पर नहीं है. जब से मध्‍यप्रदेश बना है, यह तब का कर्जा है. हम तो ब्‍याज और मूलधन भर-भरकार परेशान हैं. अब हम करें क्‍या.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)  -- अध्‍यक्ष महोदय जी, डॉ.मोहन यादव जी बडे़ अच्‍छे अर्थशास्‍त्री हैं...(हंसी)..

          डॉ.मोहन यादव -- अध्‍यक्ष महोदय, अब मैं क्‍या करूं...(हंसी)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- नेता प्रतिपक्ष जी, आपके यहां जाकर उन्‍होंने पीएम मित्र पार्क खोला, तो अब आप यह समझ ही सकते हैं न...(हंसी).. आर्थिक स्‍वावलंबन कहां बढ़ाना है. यह मुख्‍यमंत्री जी के ध्‍यान में है....(हंसी)...

          डॉ.मोहन यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब बजट पर कोई बात हो रही है या अभिभाषण पर कोई बात हो रही है, तो मुझे तो इस बात की प्रसन्‍नता होना चाहिए कि वर्ष 2002-03 तक राज्‍य के अंदर कांग्रेस के शासन काल में बजट की जो लिमिट थी, जो बजट प्रस्‍तुत करते थे, वह बजट केवल 20-22 हजार करोड़ रूपए का होता था. अकेले हमारे भाई साहब संसदीय कार्य मंत्री तब पीडब्ल्यूडी मंत्री थे पहली बार उमा जी की सरकार में 1600 करोड़ किया पहले 800 करोड़ पीडब्ल्यू का बजट रहता था इन्होंने बढ़ाया उसमें सबके वेतन भी आ गये, किराया भी आ गया, गाड़ी घोड़े के खर्चे भी आ गये. तो बाकी क्या होता था नीचे ठनठनपाल मदनगोपाल कुछ था ही नहीं. मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि आज के समय में हमारी सरकार के रहते जिस प्रकार का यह समय चला है. 1 लाख करोड़ के हमने पूंजीगत व्यय का इसी बजट में अनुमान किया है. यह हमारी सरकार का काम करने का तरीका है. मैं आज के इस अवसर पर निवेश और रोजगार के आधार पर जिस प्रकार से बीमारू राज्य मध्यप्रदेश को कहा जाता था मुझे इस बात के लिये कष्ट भी होता था. न तो निवेश आता था न ही उद्योग ही टिक पाते थे. मुझे लगता है कि आज जब आप लोग जो बात कर रहे हैं शायद आप सपने में वह बात कर रहे हैं. अपने शासनकाल की याद कर रहे हैं. हमारे शासनकाल में ऐसा नहीं है. हमारे शासनकाल में तो आप कहीं पर भी इंडस्ट्रीज के काम करो. अभी तो पूरा साल पड़ा है. आप कोई भी संभाग में आ जाओ, कोई भी जिले में आ जाओ. और तो और आप किसी राज्य के कोने में चले जाओ. चाहे बैंगलूरू, आन्ध्र, तमिलनाडु या देश के बाहर के हिस्से में भी चले जायें. मुझे गर्व है कि आज मध्यप्रदेश को सर्वाधिक इज्जत के साथ और सर्वाधिक निवेश कराने वाले राज्य के नाते से मध्यप्रदेश को जाना जा रहा है. अध्यक्ष जी मैं कल ही मुम्बई से लोटा हूं. मुम्बई के अंदर नवकरणीय ऊर्जा का हमारे राज्य के अंदर जो प्रयोग हो रहा है, वाकई वह अद्भुत प्रयोग है. आजकल सोलर से बिजली बजाय दिन दिन के हमने अपनी नीतियों के बलबूते पर मैं अधिकारियों को भी इसमें धन्यवाद देना चाहूंगा तथा हमारे सारे मित्रों को धन्यवाद देना चाहूंगा कि पम्प स्टोरेज के आधार पर, बैट्री स्टोरेज के आधार पर हमने अपने राज्य के अंदर नवकरणीय ऊर्जा का जबरदस्त रूप से ग्रोथ की है. संभवतया इसी साल किसान कल्याण वर्ष में मैं बताना चाहूंगा संभवतया इसी बरसात के बाद जब किसान अपनी खेती करने जायेंगे पूरे राज्य में हमारा प्रयास रहेगा कि दिन दिन में बिजली दें, रात में उनको जरूरत ही नहीं पड़ेगी इतनी बिजली हमारे पास में आधिक्य में आयेगी. ताकि हमारे राज्य के किसानों को रात में कोई सांप काट ले, रात में ठंड में परेशान हों, गीले हों, इन सारे संकटों से मुक्ति करायेंगे. यह प्रयास हमारा सबका है, यह हम और आप हम सब मिलकर करेंगे, क्योंकि किसान कल्याण वर्ष का है. एक नहीं ऐसे कई प्रकार के काम हम कर रहे हैं. मजरे-टोले के अंदर इस साल के बजट में मैं तो धन्यवाद देना चाहूंगा कि एक लाख सोलर पम्प के लिये हमारी सरकार ने प्रबंधन किये हैं, यह हमारे काम करने का तरीका है. मैं आज के इस अवसर पर निवेश संवर्धन ऐसे कई प्रकार के कामों के लिये ग्लोबल इनवेस्टर समिट, क्षेत्रीय उद्योग कान्क्लेव राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शो के माध्यम से जितने भी प्रकार से मध्यप्रदेश का सम्मान बढ़ा सकते हैं और निवेश की नई पहचान बना सकते हैं. हमारी सरकार लगातार काम कर रही है. आपने कहा कि सड़क पर तो दिखाओ, मैदान में तो दिखाओ, इंडस्ट्रीज तो दिखाओ, आप बतायें कि आप कहां पर देखना चाहते हो, आपको जहां चाहिये आप बताओ तो सही किधर चाहिये ?

          श्री हेमंत सत्यदेव कटारेटीसीएस भोपाल से निकल गई है.

          डॉ.मोहन यादवअध्यक्ष महोदय, आम तौर पर राज्य के अंदर जीआईएस में जितना निवेश बताते हैं एमओयू के बाद 10 प्रतिशत मैदान में उत्तर जायें तो बहुत मानते है. मुझे गर्व है कि 30 प्रतिशत से ज्यादा निवेश हमारे मध्यप्रदेश में धरातल पर उतरा है. यह सबसे तेज गति से काम करने वाला हमारा प्रदेश है. 6 हजार एकड़ से ज्यादा भूमि हमने अपने उद्योगपतियों के माध्यम से राज्य की समृद्धि के लिये दी है जिससे 2 लाख से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिलेगा, अभी तो शुरूआत है. अभी इसके आधार पर धीरे धीरे राज्य की गति क्या होगी इन सबके लिये व्यापार व्यवसाय की सरलता के लिये लगभग 25 प्रकार की पॉलिसी बनाकर के हमने बिजनेस को सरल से सरल तरीके से करने के लिये कई समय के पुराने बकाया एमसेमी के एक ही साल में साढ़े पांच हजार करोड़ रूपये के बकाया डीबीटी के माध्यम से संबंधित निवेशकों को लोटा है. यह हमारे काम करने का तरीका है, यह हमारी अपनी प्रतिबद्धता है. मध्यप्रदेश के अंदर निवेश और रोजगार क्रांति वर्ष बनकर के उभरे हैं. मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि विपक्ष चाहे जितने भ्रम फैला लें. लेकिन जनता सब जानती है. आप चैट जीपीटी के माध्‍यम से देख लें, एक मात्र प्रदेश, मध्‍यप्रदेश है, जितना बड़ा इसका राज्‍य का आकार है, आज इसके अंदर सर्वाधिक कम बेरोजगारों की दर वाला राज्‍य अगर कोई है, तो मध्‍यप्रदेश है. हमें इस बात की प्रसन्‍नता है, जिसके अंदर बेरोजगार की दस एक से सवा प्रतिशत, ये हमारे काम करने का तरीका है. कई प्रकार के, कई सारे राज्‍यों के लोग अब हमारी इंडस्ट्रियों में काम करने आ रहे हैं. कई प्रकार के लोग अपने खेतों के अंदर, चाहे निमाड़ हो, चंबल हो, भिण्‍ड हो, मुरैना हो, हर क्षेत्र में आपके बुरहानपुर में भी और बाकी राज्‍य के लोग खेती करने के लिए, साझा एग्रीमेंट के आधार पर खेती करने के लिए आ रहे हैं, ये अपना काम करने का तरीका है. मध्‍यप्रदेश अब केवल उस दौर में नहीं रहा, जिसके आधार पर बहुत सारी बातें होती थी. अकेले देश के अंदर हमारा एक मात्र राज्‍य, जिसमें लगभग लगभग जीडीपी का 30 प्रतिशत से ज्‍यादा और कुल निर्यात में 45 प्रतिशत, ये 6 करोड़ से अधिक एमएसएमई जो कार्यरत जहां हैं, इसके आंकड़े पर तो थोड़ा सा मुझे भी लगता है कि जब स्‍वरोजगार की बात हो, रोजगार सृजन की बात, स्‍टार्टअप, बड़ी औद्योगिक इकाईयों की बात हो, तो केवल एमएसएमई ही नहीं हैवी इंडस्‍ट्री, लघु कुटीर उद्योग और जिस प्रकार से आपने हथकरघे की बात कही और चंदेरी और हमारे लिए महेश्‍वरी साड़ी की बात, अब तो इस बात का आनंद है कि महेश्‍वरी चंदेरी तो हर जगह आनंद के साथ जा ही रही है, बल्कि और कई जगह भी है. आपके यहां भी हो अगर आप चाहे तो. हमारे राज्‍य में घर घर भी लोग लूम के काम करें, कपड़े उद्योग में काम करें, एक इंडस्‍टी में काम करना चाहिए, कोई नीचे  तक कैसे काम करें एक एक सेक्‍टर को पकड़कर हम लगातार काम कर रहे हैं. प्रधानमंत्री के नेतृत्‍व में जब अपने इसी प्रकार से काम करने का आधार देखते हैं, तो बहुत सारे प्रकार से आगे बढ़ने की संभावना दिखती है. आज हमारे राज्‍य में 23 लाख से अधिक एमएसएमई इकाईयां काम कर रही है. 1 करोड़ 25 लाख से ज्‍यादा, यहां रोजगार पा रहे हैं. अगर लाड़ली लक्ष्‍मी बहनें भी हमारी रोजगार आधारित इंडस्‍ट्री में काम करेगी तो उनको भी पांच हजार रुपया महीना सरकार के माध्‍यम से 10 साल तक देने के कई जगह हमने करार किए हैं और ये करार केवल लाड़ली लक्ष्‍मी नहीं, रोजगार आधारित जो जो उद्योग लगें हैं उन उद्योगों के लिए पूरे देश और प्रदेश में हम पुकार लगा रहे हैं. (....मेजों की थपथपाहट)

          आओ हमारे साथ जुड़ों, अपनी क्षमता और योग्‍यता का साथ दो और प्रदेश को भी आगे बढ़ाओ. देश में भी अपना नाम कमाओ ऐसे में, Farm to Fiber, Fiber to Factory, Factory to Fashion, Fashion to Foreign समुची वैल्‍यू चैन पर हमारी सरकार काम कर रही है और ऐसी बहुत सारी बातें में बता सकता हूं. लेकिन समय की कमी भी करते जा रहा हूं. अकेले प्रदेश के अंदर 17 हजार 806 कार्यशील करघे, जिसके माध्‍यम से चंदेरी और माहेश्‍वरी सहित विभिन्‍न उत्‍पादों का निर्माण हो रहा है और 34 हजार 222 बुनकारों को, प्रत्‍यक्ष रोजगार हमारी सरकार के माध्‍यम से दे रहे हैं. एक जिला एक उत्‍पाद, सीधी की दरी, अशोकनगर-चंदेरी की साड़ी, भोपाल की जरीदोजी भी महाकाल का इतना बढि़या फोटो बना रही है, आपको आनंद आ जाएगा, कभी आपको भी भेंट करेंगे आप देखना तो सही, हमारे द्वारा सरकार के माध्‍यम से लोगों को काम दिलाने के लिए बड़ा मन करके, धार का बाघ प्रिंट, कितना बढि़या प्राकृतिक रंग वाला ठप्‍पा लगाते हैं. हम तो हर  महीने कहीं न कहीं कार्यक्रम करवाते हैं, तो वहां पर ऐसे ही रोजगार आधारित सारी प्रदर्शनियों के स्‍टॉल लगाते हैं, ताकि लोगों को प्रोत्‍साहन मिले. सीहोर के लकड़ी के खिलौने, उज्‍जैन की बटिक प्रिंट, एक बढ़कर एक आयटम, प्रदेश के अंदर 6,700 से अधिक स्‍टार्टअप सक्रिया है, 47 प्रतिशत से अधिक महिला उद्यमियों की भागीदारी है. एग्रीटेक, हेल्‍थटेक, ग्रीन टेक्‍नोलॉजी, डिजिटल सॉल्‍युशन, टैक्‍सटाइल्‍स वैल्‍यु एडिशन ऐसे प्रत्‍येक क्षेत्र में हमारी सरकार काम कर रही है.

कृषक कल्‍याण वर्ष की बात मैंने विस्‍तार से कर दी है, लेकिन फिर भी बताना चाहूंगा कि यह केवल कागजी घोषणा नहीं है, ठोस कार्य योजना हमने बनाई है. खेत से खलिहान तक बदलाव लाने का संकल्‍प हमने लिया है. कृषि एलाइड सेक्‍टर में 88 हजार 910 करोड़ का प्रावधान हमारी सरकार के माध्‍यम से हुआ(..मेजों की थपथपाहट)

          कृषि को आधुनिक तकनीक, नवाचार कृषि आधारित उद्योगों को जोड़कर  व्‍यापक रूप से हमारे इस प्रमुख क्षेत्र में लोगों को लाभ मिले, प्राकृतिक खेती बढ़े, कृषि, पर्यटन और एलाइड सेक्‍टर  को मजबूत बनाने के लिए हमारी सरकार इसमें ठोस काम कर रही है. 11 जनवरी, 2026 से शुरू हुआ यह मिशन अपने उद्देश्‍य की प्राप्ति करेगा, इस अपेक्षा के साथ कि हम सब इसमें सहयोग करेंगे. अध्‍यक्ष महोदय, भावांतर की बात मैंने पहले कर दी है और इस प्रकार से हम एक बार फिर यशस्‍वी प्रधानमंत्री को धन्‍यवाद दें. हमारे लिये गेहूं के आधार पर प्रत्‍येक फसल पर एम.एस.पी को बढ़ावा देकर एम.एस.पी. पर हमारा गेहूं पिछले साल 2400/- रूपये प्रति क्विंटल था, इस साल 2585/- रूपये प्रति क्विंटल है, हां हमने कहा और संकल्‍प पत्र में भी था कि हम वर्ष 2028 के चुनाव के पहले पहले 2700 /- रूपये प्रति क्विंटल तक का भाव देंगे, 2600/- रूपये प्रति क्विंटल का तो हमने पिछले साल ही दे दिया, (मेजों की थपथपाहट), अभी दो साल, तीन साल बाकी है, आप चिंता मत करो  जो-जो कहा है हम पूरा करेंगे. 2700/- रूपये प्रति क्विंटल की हमारे संकल्‍प पत्र में घोषणा थी, 2600/- रूपये प्रति क्विंटल में आपने गेहूं बेचा था, हमने आपका तोला हुआ देखा हुआ है, उम्‍मीद करेंगे अपने किसानों के लिये हम यह पूरा करेंगे. (श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे, सदस्‍य द्वारा अपने आसन से कहने पर) आप थोड़े ही करोगे, आप तो किसान हो ही नहीं, वह तो मैं आपके बहाने अपने आपको कह रहा हूं, हमारा गेहूं बिका है. यह तो सारे बहाने है, कभी-कभी बोलने के लिये कथानक ढूंढना पड़ता है और कथानक से कहानी आगे बढ़ानी पड़ती है, कहानी में आदमी का कथानक सही निकल जाये तो भाग्‍य नहीं तो मेरा नहीं उसका दुर्भाग्‍य है, जिस पर मैं बात कर रहा हूं. (हंसी)       ..(श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे, सदस्‍य द्वारा अपने आसन से कहने पर) अब क्‍या बतायें सास बहू बात करती हैं, तो सीधे बात नहीं होती है, तो छोटे बच्‍चे को कभी थोड़ा डांटना भी पड़ता है, तो छोटे बच्‍चों को छापड़ मारते हैं कि साले तू बदमाश है, फलाना है, तो बच्‍चे को थोड़ी वह मार रही है, वह तो सुना वहां रही है, मेरे को क्‍या करना है(हंसी)..(श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे, सदस्‍य द्वारा अपने आसन से कहने पर) ऐसी बातें सबके बीच में नहीं करते हैं, जरा आप शांति से बैठे रहें. (हंसी)..

          अध्‍यक्ष महोदय,  दूध के मामले में एक निवेदन करना चाहूंगा, आप और हम मिलकर सच में किसान की आमदनी बढ़ाने के लिये, गौ माता के लिये जितने प्रकार से हमारी सरकार काम कर रही है, मुझे इस बात का मन से संतोष है, हमारी तो इस भावना के साथ कि राज्‍य इतना बड़ा है और बड़े पैमाने पर वनांचल के अंदर खेती की जमीन भी नहीं है, कई हमारे आदिवासी भाई, बहन भी अगर वहां गांव में रहते हैं, तो पशुओं को चारा तो मिल जायेगा, लेकिन खेती का रकबा बड़ा  कठिन जाता है, ऐसे में दूध उत्‍पादन को बढ़ावा देने के लिये हमारी सरकार ने 9 प्रतिशत से 20 प्रतिशत का लक्ष्‍य लिया है. मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि एन.डी.डी.बी. के माध्‍यम से आपने परसों ही आर्थिक सर्वेक्षण पढ़ा होगा कि हमारे राज्‍य के अंदर दूध का उत्‍पादन पूरे देश में सबसे तेज गति से हुआ है, तो वह मध्‍यप्रदेश में हुआ है, यह अलग बात है कि अंडे का उत्‍पादन कम हुआ है और दूध का उत्‍पादन बढ़ रहा है, तो यह हमारे लिये तो आनंद की बात है, हम यह नहीं कहते है कि मुर्गी पालन कम होना चाहिए, लेकिन दूध का उत्‍पादन तो बढ़ना ही चाहिए, उसमें क्‍या तकलीफ है और जब दूध की बात कर रहे हैं, तो टेट्रापेक की बात भी आ गई, अरे कितना अच्‍छा लगता है, जब कुपोषण कुपोषण की बात करें तो बड़ा खराब लगता है, लेकिन अगर हम बच्‍चों को दूध दे दें, तो दूध में तो भगवान कृष्‍ण की वो सामर्थ छिपी थी, जिसमें कंश को घर से निकालकर मुक्‍के से मार दिया था, यह दूध की ताकत तो थी,  यही तो सौभाग्‍य की बात है (मेजों की थपथपाहट)इसलिए हमने हमारे इसी भाव के आधार पर प्रत्‍येक सरकारी स्‍कूल में प्रायमरी से लेकर आठवी तक की कक्षा में साढ़े तीन हजार करोड़ के आधार पर सारे बच्‍चों के लिये दूध पिलाने का यह संकल्‍प जिसे मां यशोदा के नाम पर समर्पित किया है (मेजों की थपथपाहट). यह मां यशोदा के नाम पर योजना है.

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय कौन से मामा की बात कर रहे थे.

          डॉ.मोहन यादव -- मैंने तो कंश बोला, अब आप कौन सा बोल रहे हैं, मुझे नहीं मालूम है(हंसी) मैं तो कंश को ही जानता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय, डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, मुख्‍यमंत्री डेयरी प्‍लस योजना, हिरण्‍यगर्भ अभियान, छीर धारा ग्राम योजना, स्‍वावलंबी गोशालाएं कामधेनु योजना, प्रत्‍येक क्षेत्र में दूध के आधार पर और दूध का भी जब से हमारा यह प्रयोग हुआ है, एक बात जरूर साफ कर देना चाहूंगा हमने सांची ब्रांड के मामले में कोई कॉम्‍प्रोमाइज नहीं किया है. सांची ब्रांड को ही आगे बढ़ायेंगे, पूरे प्रदेश के अंदर हमारा यह सहकारिता का क्षेत्र बढा़ते हैं जहां हम एक तरफ 7 लाख लीटर दूध का संग्रह करते थे 2 साल पहले, मुझे खुशी है आज की स्थिति में 12 लाख लीटर प्रतिदिन का हमारा संग्रहण हुआ है और दूध उत्‍पादक किसानों से पूछ लेना प्रति 7 दिन, 9 दिन जो निर्धारित अवधि है, गये जमाने जब 2-2, 3-3, 4-4 महीने तक पेमेंट नहीं होता था, रेग्‍यूलर पेमेंट होते हुये प्रति लीटर 5 से 7 रूपया भाव बढ़ाया है, यह हमारे काम करने का तरीका है और स्‍वाबलंवी गौशाला वर्ष 2025 की नीति, लखन पटेल जी होंगे, वास्‍तव में आपको बधाई देना चाहूंगा, हमने अपने राज्‍य के अंदर खिड़द को बंद ही कर दिया, नगर निगम के माध्‍यम से नगरीय निकायों के आधार पर गौशाला बनाते हुये, गौशाला के अंदर भी नगर निगम को भी प्रति गौमाता 20 रूपये प्रति गौमता के खर्च को 40 रूपये प्रति गौमाता देते हुये जगह-जगह गौशाला बनाने के लिये प्रोत्‍साहन देने का काम हमारी सरकार के माध्‍यम से हो रहा है. जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो सच में बहुत सारे प्रकार से बात कर सकता हूं, लेकिन अभी तक 26 हजार गांवों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ने का बड़ा संकल्‍प हमने लिया है और गौशाला में भी सीएनजी प्‍लांट, हर ब्‍लॉक में वृंदावन गांव यह बनाने का निर्णय हमारी सरकार के दूरगामी सोच का परिणाम है. पशुपालन और दूध उत्‍पादन को लगातार बढ़ावा देकर के हमारी सरकार ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है.

          माननीय अध्‍यक्ष जी, हम अन्‍नदाता को ऊर्जादाता भी बनाना चाहते हैं. प्रधान मंत्री कृषि सूर्य मित्र योजना के माध्‍यम से 3 हजार करोड़ की लागत से 1 लाख सोलर पम्‍प हम अपने राज्‍य के किसानों को देना चाहते हैं और तुम अगर साथ देने का वादा करो तो एक नया मार्ग चुनकर हम आगे बढ़ने का इरादा बताते हैं. हमारी सरकार के माध्‍यम से किसानों के लिये जो फल फूल सब्‍जी जिनके अंदर वह शेड में अपना उत्‍पादन करते हैं तो इस आधार पर उनको बिजली का उत्‍पादन ऊपर करते हुये नीचे किसान अपना काम करते हैं तो सोलर के माध्‍यम से कई बार जो जमीन ज्‍यादा बिगड़ती है उसका मल्‍टीपर्पज उपयोग हो जाये. माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहूंगा हम और आप मिलकर के नवकरणीय ऊर्जा में बहुत सारे सेक्‍टर में काम कर सकते हैं ताकि हमारे किसान समृद्ध भी हों, बिजली का उत्‍पादन भी हो और कृषि सेक्‍टर में हम तेज गति से आगे बढ़ें, ऐसे कई प्रयोग लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं. मैंने नाम का, अब क्‍या बोलूं बहुत सारे नाम लिये हैं, लेकिन अब छोड़ो इनके नाम तो सब एक साथ ही बोल दिये, अब इनके नहीं बोलना. मैं दो-तीन के बोल दूंगा तो बाकी लोग नाराज हो जायेंगे कि हमारा नहीं बोला तो जवाब देने में मैंने एक साथ सबके नाम बोल दिये, इतने में ही रखना ठीक है, लेकिन जब हम अपने किसानों के आधार पर आगे बढ़कर बात कर रहे हैं तो भविष्‍य की दृष्टि से आपने सोयाबीन की बात कही, लेकिन कई बार किसान एक जैसी फसल करते, करते सोयाबीन, सोयाबीन, गेहूं, सोयाबीन तो ज्‍यादा केमिकल युक्‍त खाद के उपयोग से उनका प्रोडक्‍शन भी घट रहा है और बीमारी भी बढ़ रही है तो बहूफसलीय पद्धति लगाते हुये हम और आप अगर कृषि कल्‍याण वर्ष में एक ज्‍वाइंट सेशन करके इस दिशा में आगे बढ़ें तो हम कैसे प्रोत्‍साहन दे सकें जैसे मूंग की वजाय उड़द पर बोनस चालू करा सकते हैं. उड़द का हमारे यहां रकवा बढ़ाने की आवश्‍यकता है. मसूर भी हमको विदेश से आयात करना पड़ती है, हमारे किसानों को मसूर भी बढ़ाना चाहिये तो दाल उत्‍पादन में दलहन में यद्धपि हम नंबर 1 पर हैं, तिलहन में भी हैं, लेकिन और आगे बढ़ने की आवश्‍यकता है, बड़ी संभावना का क्षेत्र है इस पर विस्‍तार से हम बैठकर बात कर सकते हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं आज माता-बहनों की बात करता हूं तो मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि नारी सशक्तिकरण को लेकर खासकर हमारी सरकार महिलाओं की शिक्षा, स्‍वास्‍थ, सुरक्षा, स्‍वावलंबन को सर्वोच्‍च प्राथमिकता देते हुये मिशन मोड़ में काम कर रही है. अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश की महिलायें केवल सहभागी नहीं हैं, विकास की अग्रदूत बन चुकी हैं. कौशल विकास स्‍टार्टअप उद्यमिता में प्रदेश की 47 प्रतिशत महिलाओं द्वारा स्‍टार्टअप चलाये जा रहे हैं. मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है यह हमारे काम करने का तरीका है और जैसे मैंने रेडीमेड गारमेंट्स और बाकी बातें कही हैं, लेकिन अब तो हमने बहनों को इंडस्‍ट्री के पास होस्‍टल देकर उनके रूकने के प्रबंधन भी किये हैं. इसमें विक्रम उद्योगपुरी पीथमपुर, मालनपुर घिरोंगी, मंडीदीप ऐसे कई जगह और वूमेन होस्‍टल सखी बनाने का और उनको चलाने का भारत सरकार ने भी मदद की है और खासकर के बहनों को 35 प्रतिशत का आरक्षण शासकीय नौकरियों में भी हम दे रहे हैं. अभी मेरे मित्र नेता प्रतिपक्ष कह रहे थे रोजगार कहां देंगे, कैसे देंगे,अरे आप आंकड़े तो उठाकर देखो. हमारे 2025 के एक साल के अंदर बीते तीन साल की पीएससी पेंडिंग थी. तीनों साल की करके उसको रेगुलर तरीके से करने का काम हमारी सरकार ने किया. यह हमारे काम करने का तरीका है. लगभग 50 हजार सरकारी पद इसी समय में हमने भरकर अपने उस कमेटमेंट को निभाया. लगभग 40 हजार पद वापस हम विज्ञापित कर रहे हैं. इसमें अकेले साढ़े सात हजार पद पुलिस के लिये पद,तीन साल में साढ़े बाईस हजार पद हमारी सरकार भरने जा रही है. पुलिस के अंदर सालों से इंस्पेक्टर नहीं भरे जा रहे थे.ऐसे बड़े बड़े कई कष्ट थे लेकिन सारी चीजों का निराकरण करते हुए हमने इस दिशा में सभी प्रकार के पदों के लिये और पदों की भी क्या संख्या है. 50 हजार बिजली विभाग के पद मंजूर किये. यह हमारी सरकार के काम करने का तरीका है. माननीय राजेन्द्र शुक्ला जी के यहां 42 हजार स्वास्थ्य क्षेत्र में पद मंजूर करने का साहस हमारी सरकार के माध्यम से हुआ है. एक नहीं ऐसे बहुत सारे सेक्टर मैं बता सकता हूं. लाड़ली लक्ष्मी योजना, 52 लाख 22 हजार से अधिक बेटियों के प्रति हमने जो कमेटमेंट किया है उसको भी हम निभा रहे हैं और इसी प्रकार से मातृ शिशु स्वास्थ्य मिशन के लिये अलग से हमने जो-जो योजनाएं वात्सल्य,मातृ वंदना,अनमोल-2,यह नयी योजना है नये प्रकार से काम कर रही है और इसी के परिणाम स्वरूप नवजात शिशु की मृत्यु दर और प्रसव दरम्यान महिलाओं की मृत्यु दर हमारे काम करने के कारण से उल्लेखनीय रूप से इसका आंकड़ा कम हुआ है. बच्चों के स्कूल का ड्रापआउट हमारी प्रायमरी में जीरो पर लाने का काम हमारी सरकार ने किया यह हमारे काम करने का तरीका है. एक-एक सेक्टर को चुनौती के रूप में मानते हैं. हरेक सेक्टर में समान रूप से काम करते हैं. मैं अपने सारे मित्रों के माध्यम से जिस प्रकार से हमारी सरकार काम कर रही है. हम लगातार विजन आधारित काम के बलबूते पर जब अभी बात निकली तो बड़ा अटपटा लगा कैसे कह रहे थे कि सांदीपनी विद्यालय,भगवान जाने भगवान राम और कृष्ण से कांग्रेस  का क्या दुश्मनी का नाता है पता ही नहीं चलता इन योजनाओं के नाम हम रखते हैं उल्टी बात कर देते हैं. यह अंग्रेजों से क्यों दोस्ती रखते हैं मुझे मालुम नहीं. सी.एम.राईज,सी.एम.राईज,हमने सांदीपनी का नाम रखा तो यह कितना अच्छा लगता है. हम भगवान राम कृष्ण के काल को जीवंत करने वाले हैं. भगवान राम कृष्ण के प्रति सहजता दिखाते हैं.

          श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्यक्ष महोदय, न राम का विरोध करते हैं न सांदीपनी का विरोध करते हैं लेकिन सीएम राईज के अलावा जो नयी बिल्डिंगें बनती हैं उसका सांदीपनी नाम रखते. तो कब बनेंगे नये सांदीपनी नाम ही बदलना है तो अलग बात है.

          अध्यक्ष महोदय - आगे कितने बन रहे हैं वह पूछना चाहते हैं.

          डॉ.मोहन यादव - अभी आपको बता देता हूं. नाई नाई बाल कितने, ठहर अभी सामने आते हैं. जल्दी क्यों कर रहे हैं. 200 नये सांदीपनी विद्यालय हमारे इस राज्य में बनकर तैयार हो गये हैं. पहले के काम के अलावा और आपको देखकर अच्छा लगेगा इन्दौर उज्जैन के रास्ते में है आ जाना. अपने उज्जैन के अंदर दाउदखेड़ी के अंदर भव्य सांदीपनी भवन बना है उस भव्य सांदीपनी भवन के तीनों तल के अलग-अलग हिस्सों में इतना अद्भुत भवन बना. एक प्रयोग हुआ उसमें आगे बाकी सांदीपनी विद्यालय में करा सकते हैं. अगर भोजन शाला है तो मां अन्नपूर्णा का बहुत अच्छा चित्र वहां दिखाई देगा. जहां हमारे खिलाड़ी हैं तो अर्जुन समान पाण़्डव वाला आश्रम का दृश्य दिखाई देगा और बल अगर अर्जित करना है तो जहां जिम बना है तो वहां बजरंग बली भी दिखाई देंगे. यह हमारी सरकार के अंदर कई चित्रों का प्रदर्शन कराते हैं. वाकई वह ऐसा लगेगा कि कितना बढ़िया भवन है. आज सांदीपनी विद्यालयों के उस भवन की भव्यता,दिव्यता,के बलबूते पर प्रायवेट स्कूलों से  बच्चे निकल-निकलकर सांदीपनी विद्यालय में आ रहे हैं यह हमारे काम करने का तरीका है. गाड़ी लेने जाते हैं. बस से बच्चे,बच्चियों को लाना स्कूल में,कालेज में कभी सोच नहीं सकते थे. अध्यक्ष जी, आप टीचर भी हैं. टीचर की भर्ती भी हम कर रहे हैं यह हमारा भरोसा है कि सरकार के पास लोग आकर सब प्रकार से काम कर रहे हैं यह कांग्रेस का जमाना नहीं कि टीचर को  तनख्वाह नहीं मिलती थी और बाय-बाय करके नमस्ते कर लेते थे. कर्मी, शिक्षाकर्मी, पता नहीं क्‍या-क्‍या लाते थे.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस -- अध्‍यक्ष महोदय, जीरो बजट स्‍कूल थे.

          डॉ. मोहन यादव -- जीरो बजट स्‍कूल थे. देखो, दीदी ने बताया, वह पहले शिक्षा मंत्री भी रही हैं. अभी बाद में क्‍लास उनसे ले लेना, वे समझा देंगी क्‍या-क्‍या है. दीदी हमारी बहुत अच्‍छी ज्ञानी हैं, सब समझा देंगी.

          अध्‍यक्ष महोदय, जब मैं आपसे बात कर रहा हूँ तो स्‍वास्‍थ्‍य और पोषण क्षेत्र की भी बात करूंगा. माननीय नेता प्रतिपक्ष जी, पता नहीं क्‍या करते हैं आप, कभी-कभी थोड़ा बड़ा मन करके भी सोचो आप, हम तो आपको बहुत अच्‍छा मानते हैं कि आप सभी वर्गों का ध्‍यान रखते हैं. बैगा, भारिया, सहरिया समाज से आपकी क्‍या दुश्‍मनी है, मैं नहीं समझ पा रहा हूँ. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बैगा, भारिया, सहरिया समाज को हम अगर पर्याप्‍त बजट दे रहे हैं...

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विरोध तो किया नहीं है. इनके अलावा भी दूसरी जनजातियां हैं. उनके बारे में भी सोचना चाहिए. मैंने विरोध तो किया नहीं है. बाकी जनजातियों के बारे में क्‍या है, ये बताएं.

          डॉ. मोहन यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आर्थिक सर्वेक्षण के अंदर अगर इन तीन विशेष प्रकार की हमारी आदिवासी जनजातियों के लिए कष्‍ट है तो यह यशस्‍वी प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश सरकार सदैव उनके साथ खड़ी है. यह हमारी प्रतिबद्धता है. (मेजों की थपथपाहट). हमारा सब वर्गों के साथ नाता है, लेकिन जो पीछे रह गया है, उससे ज्‍यादा नाता है. यही दीनदयाल जी की अंत्‍योदय की भावना है. अंतिम पंक्‍ति के गरीब से गरीब आदमी के जीवन में कष्‍ट है, यह दीनदयाल जी का दर्शन है. इसलिए हम प्रकृति के साथ संस्‍कृति के आधार पर, सनातन संस्‍कृति के बलबूते पर 'जीओ और जीने दो' की भावना से चलते हैं. उसी आधार पर हमने आपसे भी अपेक्षा की. और भी कोई बचा है, आप बता देना, उनकी भी मदद करेंगे. लेकिन बैगा, भारिया, सहरिया, अगर हम करते हैं तो पर्याप्‍त रूप से उनका भी ध्‍यान रखते रहेंगे. हमें इस बात की प्रसन्‍नता है और इस ओर हम आगे बढ़ रहे हैं. इसलिए बैगा, भारिया, सहरिया समाज की बहनों के परवारों को भी हम डेढ़ हजार रुपये की सीधी आर्थिक सहायता देने का निर्णय करके उनको भी जोड़ के रख रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट).

          अध्‍यक्ष महोदय, जनजातीय ग्राम उत्‍कर्ष अभियानों के माध्‍यम से लाखों परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से जोड़कर के उनके वनाधिकार कानूनों के तहत लाखों दावों को मान्‍यता दे करके सभी जनजातीय भाइयों के साथ हमारी प्रतिबद्धता भी दिखा रहे हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग के कल्‍याण के लिए भी हमारी सरकार प्रतिबद्ध है. सामान्‍य श्रेणी के गरीब वर्ग के लिए भी हमारी सरकार ठोस काम करते हुए सभी को लेकर चलना जानती है. इसीलिए अलग-अलग प्रकार की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी समान अवसर दे रही है. धार्मिक सम्‍मान की भावना को भी सुदृढ़ करते हुए, यहां तक कि हम तो जैन समाज के लिए भी ''जैन कल्‍याण बोर्ड'' का गठन करके हम सभी वर्गों के कल्‍याण के लिए प्रतिबद्ध हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, अल्‍पसंख्‍यक वर्ग की शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और अधोसरंचना को मजबूत करने के लिए भी हमारी सरकार काम कर रही है. यह हमारी डबल इंजन की सरकार है. मध्‍यप्रदेश की जनजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, ऐसे सभी वर्गों के साथ विकसित मध्‍यप्रदेश के निर्माण में वर्ष 2047 तक हम सबको लेकर चलना जानते हैं. हम उनके साथ चलने की भावना रखते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, हमने परसों क्‍या कमाल का कार्टून देखा. आपने भी देखा होगा. कार्टून पेपर में छपता है. चैट जीपीटी पर तो मांगने पर मिलता है. पाकिस्‍तान किसी काम में नंबर वन आए कि नहीं आए, बॉयकॉट में नंबर वन आएगा. कितना अच्‍छा कार्टून बनाया था. पहले ना-ना करते-करते क्रिकेट में बात करते-करते बड़ी मुश्‍किल से आया और क्‍या धूल चटा कर उसको पहुँचाया, यह हमारे खेल का वर्तमान का समय है. कभी वह सोचेगा कि आया ही क्‍यों, आकर गलती कर दी. कम से कम बॉयकॉट में बात जम जाती. यह उनकी भावना है. लेकिन यशस्‍वी प्रधानमंत्री के नेतृत्‍व में पूरे देश के खेल का परिदृश्‍य बदल रहा है. हर ओलंपिक में, एशियार्ड में, कॉमन-वेल्‍थ में, हर प्रकार के खेल के खिलाड़ियों को प्रोत्‍साहन देने के लिए जब हम आगे बढ़ते दिख रहे हैं, ऐसे में मध्‍यप्रदेश पीछे कैसे रह सकता है. मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि अंतर्राष्‍ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी हमारे राज्‍य में पदकों की झड़ी लगी. कई-कई प्रकार से. हमारे माननीय खेल मंत्री जी मौजूद हैं, विश्‍वास सारंग जी, दो साल में मध्‍यप्रदेश की खेल अकादमियों ने अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर के 74, राष्‍ट्रीय स्‍तर के 438, आंकड़े बड़े-बड़े हैं. (मेजों की थपथपाहट). प्रदेश में जिस प्रकार से खिलाड़ियों का योगदान हुआ है. हमें गर्व होना चाहिए, हमारे बच्‍चे ये कीर्तिमान स्‍थापित कर रहे हैं. ऐसे में मध्‍यप्रदेश के युवा जब मैदान में उतरें.उन्‍हें श्रेष्‍ठतम आधुनिक सुविधाएं मिलें, श्रेष्‍ठ उपकरण मिलें, सरकार पर्याप्‍त प्रोत्‍साहन देकर  इस दिशा में आगे बढ़ रही है, इसका परिणाम आप देखें. हम विदेश जाते हैं, तो विदेश में भी हमारे शहडोल के आदिवासी बच्‍चे फुटबॉल में नाम कमा रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट) उनके लिए भी एक अकादमी में जाकर मौका लेकर आते हैं और हमने बाद में बच्‍चों को भी विदेश में भेजकर, उनको उस माहौल से परिचित कराने का प्रयास किया है, यह हमारे काम करने का तरीका है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है  कि युवा, श्रमिक एवं हर वर्ग को रोजगार और आत्‍मनिर्भर बनाने के लिए हमारी सरकार सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है. लोक स्‍वास्‍थ्‍य संवर्ग में 3 हजार 850 नवीन पदों की भर्ती की प्रक्रिया भी प्रारंभ की है, मैं आपको बधाई देना चाहूँगा. (मेजों की थपथपाहट) नर्सिंग ऑफिसर्स, लैब टेक्‍नीशियन, रेडियोग्राफर एवं एएनएम जैसे पदों पर चरणबद्ध भर्तियां की जा रही हैं और विशेष भर्ती अभियान के माध्‍यम से 2 हजार 589 दिव्‍यांगजनों को भी आपने विभिन्‍न विभागों में नौकरी देकर उनको सम्‍मानजनक जीवन जीने का मौका दिया है (मेजों की थपथपाहट) यह हमारे लिये सौभाग्‍य की बात है. औद्योगिक निवेश में भी बड़े पैमाने पर 11.09 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के अवसर हमने खड़े किए हैं और हजारों रोजगार के अवसर सृजित किए हैं. ऊर्जा क्षेत्र में बड़े निवेश से रोजगार के नये आयाम बने हैं. प्रदेश में बहुत बड़े पैमाने पर इन सारी इकाइयों को जोड़कर हम लगातार आगे बढ़ रहे हैं. हम रोजगार मेले एवं कैरियर मार्गदर्शन के माध्‍यम से युवाओं को लगातार प्रोत्‍साहन का काम दे रहे हैं. सन्‍त रविदास, डॉ. भीमराव अम्‍बेडकर एवं स्‍वरोजगार योजनाओं के माध्‍यम से युवाओं के स्‍वालम्‍बन की दिशा में हमारी सरकार ठोस काम कर रही है. मध्‍यप्रदेश की सेहत हमारा सबसे बड़ा मिशन है. साढ़े आठ करोड़ नागरिकों को स्‍वास्‍थ्‍य में यह केवल बोलने वाली बात नहीं है, लेकिन केन्‍द्र के दूरदर्शी नेतृत्‍व और राज्‍य की दृढ़ इच्‍छाशक्ति के प्रयास से, डबल इंजन के माध्‍यम से जनकल्‍याण के नये आयाम हम स्‍थापित कर रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैंने मेडिकल कॉलेजों की बात प्रारंभ में कर दी, तो मैं दोबारा दोहराना चाहूँगा. 19 शासकीय मेडिकल कॉलेज और 14 निजी मेडिकल कॉलेज, सब मिलाकर लगभग 33 मेडिकल कॉलेज हो गए हैं. (मेजों की थपथपाहट) मैं संख्‍या पहले बता चुका हूँ, अब रिपीट नहीं करूँगा. मैं उम्‍मीद करता हूँ कि आने वाले समय में आप अंदाजा लगा लें और कभी सोच भी नहीं सकते थे कि पूरे देश में एकमात्र राज्‍य मध्‍यप्रदेश है, जो एयर एम्‍बुलेंस चला रहा है और लगातार दूसरे वर्ष में सफलता के साथ आगे बढ़ रहा है. (मेजों की थपथपाहट) जहां हवाई जहाज उड़ सकता है, वहां हवाई जहाज से हम एयर एम्‍बुलेंस का काम ले रहे हैं और जहां पर हेलीकॉप्‍टर पहुँचाना पड़े, तो वहां हेलीकॉप्‍टर पहुँचाकर कोई भी गरीब आदमी को, जिसका आयुष्‍मान कार्ड है. डॉक्‍टर और कलेक्‍टर, दोनों डिसाइड करें कि इसको बड़े अस्‍पताल में पहुँचाने की जरूरत है, इसको दूर अस्‍पताल में पहुँचाने की जरूरत है. एयर एम्‍बुलेंस के माध्‍यम से हमारी सरकार कई लोगों की जान बचाने का काम कर रही है, यह हमारे काम करने का तरीका है. (मेजों की थपथपाहट) अभी तक 109 गंभीर रोगियों को एयर लिफ्ट करके, उनको सुरक्षित जीवन में मदद करने का काम हमारी सरकार के द्वारा किया गया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए एक ही वर्ष में 3 आयुर्वेद महाविद्यालय देने का काम हमारी सरकार के द्वारा किया गया है. मैं प्रतिपक्ष के मित्रों से कहना चाहूँगा कि वह हमारी सरकार के किये गये कामों का अध्‍ययन कर ले, थोड़ा लायब्रेरी में जाये, थोड़ा आंकड़े जुटा लें, यूँ खाली बोलने से हमको भी दुख होता है कि हमारा इतना गरिमापूर्ण सदन है और आप लोग हवा में बातें करते हैं, तो हमको भी लज्‍जा आती है. आपको जो बोलना है, वह आप बोल जाते हो, हमको यह लगता है कि हमारे साथ वाला कम से कम सही बोलने वाला तो हो, गंभीरता वाला तो हो, जानकारी वाला तो हो, आपसे कभी कोई अन्‍य राज्‍य के लोग बोलें, तो आपकी बात में वजन होना चाहिए, यह हमारा निवेदन है, तो हम उम्‍मीद करेंगे कि अगली बार जब आप बात करने आएंगे तो यह सारी जानकारी जुटाकर बात करेंगे, बिना बात के लड़ना-झगड़ना ठीक नहीं लगता है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि हमारे राज्‍य के अन्‍दर 55 लाख बच्‍चों को गणवेश की राशि, बच्‍चों को साइकिलें, छात्रवृत्ति, लेपटॉप तथा स्‍कूटी यह केवल सहायता नहीं है, यह बच्‍चों के लिए मध्‍यप्रदेश के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य की एफडी है. (मेजों की थपथपाहट) हमह बच्‍चों के साथ, हमारी अगली पीढ़ी को सशक्‍त कर रहे हैं, ताकि राज्‍य तेज गति से आगे बढ़े य‍ही कारण है कि हमारे राज्‍य में हाई स्‍कूल का परीक्षा परिणाम 76.22 % रहा, इसके लिए राव उदय प्रताप जी को बधाई देना चाहूंगा. साथ ही हायर सेकण्‍डरी का परीक्षा परिणाम 74.48% रहा, ये विगत 15 वर्षों में सर्वश्रेष्‍ठ परिणाम है, हमें इस पर गर्व है, अपने शिक्षा मंत्रालय, स्‍कूल शिक्षा विभाग के ऊपर गर्व है. मैं आपको एक आंकड़ा बताना चाहूंगा, कभी मौका मिले तो नेता प्रतिपक्ष जी, आपके और हमारे पक्ष के भी सदस्‍य, हमने एक-दो नहीं, कई स्‍कूल देखें हैं, एक स्‍कूल उज्‍जैन जिले में है, हाई स्‍कूल है, वहां बच्‍चे किसी भी स्‍कूल से आयें, नवीं कक्षा में प्रवेश लें, वे बच्‍चे चाहे पहले सप्‍लीमेंट्री हों, थर्ड क्‍लास पास हों, उस सरकारी स्‍कूल के स्‍टॉफ के मन में अपने विद्यालय को आगे बढ़ाने का इतना अच्‍छा संकल्‍प है कि वे सभी बच्‍चों को नवीं से दसवीं कक्षा तक ले जाते, जाते सौ प्रतिशत रिजल्‍ट और वह भी बोर्ड की परीक्षा में और तो और सौ प्रतिशत, फर्स्‍ट क्‍लास पास, कोई सेकण्‍ड क्‍लास नहीं, उस पूरे सरकारी स्‍कूल का वर्तमान में जो माहौल है, वास्‍तव में पूरे देश के लिए आदर्श है. वहां शिक्षकों के बीच भी ऐसी स्‍वस्‍थ प्रतिस्‍पर्धा है कि कोई शिक्षक अगर छुट्टी ले, पहली बात तो वे रविवार को भी स्‍कूल आते हैं, छुट्टी लेते ही नहीं है लेकिन किसी कारण से यदि छुट्टी लेनी भी पड़ी, तो उस शिक्षक का कालखण्‍ड अतिरिक्‍त रूप से पढ़ाने के लिए आपस में शिक्षकों में लड़ाई हो जाती है. मतलब अपने काम को करने की प्रतिबद्धता वाकई में अद्भुत है, यह वातावरण वहां क्‍यों बना, क्‍योंकि प्रदेश में भाजपा की सरकार है, मुझे इस बात का गर्व है. यह हमारे काम करने का तरीका है. ऐसे अच्‍छे माहौल को बनाये रखने के लिए, हमारी सरकार जब नेक इरादे से आगे बढ़ती है, नीयत साफ रखती है, तो संकल्‍प अटूट बनता है और अटूट संकल्‍प से सिद्धी होती है. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, आज के इस अवसर पर हम लगातार ऐसे बहुत सारे कामों की चर्चा कर सकते हैं लेकिन थोड़ा समय कम पड़ रहा है, फिर भी मैं कुछ बातें जोड़ना चाहता हूं. इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में भी हमारी सरकार जिस प्रकार से काम कर रही है, वास्‍तव में आज के समय में हमने तो भविष्‍य का सबसे बड़ा निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर को ही माना है. अधोसंरचना में विकास की विभिन्‍न परियोजनायें मध्‍यप्रदेश की तकदीर और तस्‍वीर बदल रही है, प्रदेश में सड़क, रेल, हवाई नेटवर्क का विस्‍तार जिस प्रकार से हो रहा है, जिससे हम यातायात को सुगम बना रहे हैं, जिससे समृद्धि, विकास की नई संभावनाओं के द्वारा खोल रहे हैं, मुझे प्रसन्‍नता है कि बजट में रुपये 1 लाख करोड़ से अधिक, अधोसंरचना के लिए राशि रखी गई है, यह हमारे काम करने का तरीका है.

(मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, नगरीय निकायों में माननीय संसदीय मंत्री जी को बधाई, रुपये 5 हजार करोड़ की अपनी योजना के बल पर "द्वारका योजना" ला रहे हैं, यह हमारे काम करने का तरीका है. द्वारका जैसे ही कहा जाता है, भगवान कृष्‍ण की वह अद्भुत द्वारका, देश के पश्चिम में, समुद्र तट पर जिसे देवता भी देखने के लिए तरसते हैं, काश हमारे सभी प्रकार के भावों में भगवान का आशीर्वाद रहे, धीर-धीरे सभी नगरीय निकाए ऐसी अच्‍छी योजनाओं पर कार्य करके, सभी प्रकार से सुविधा संपन्‍न होकर, उन व्‍यवस्‍थाओं को करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय, जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो यहां पर अकेला हमारा प्रदेश है, जहां हाई स्‍पीड कॉरिडोर बना रहा है, ग्रीन फील्‍ड, फोरलेन, सिक्‍सलेन, एलिवेटेड कॉरिडोर, ओवरब्रिज, टनल निर्माण में हमारे प्रदेश में एक नए प्रकार की क्रांति आई है, मुझे इस बात का गर्व है, इसके लिए हमारे पूरे सदन को भी बधाई देना चाहता हूं. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, किफायती लोक परिवहन, आपके समय में परिवहन की सुविधाओं पर ताले लगे थे, हमारी सरकार ने संकल्‍प लिया है, इसी वर्ष परिवहन खासकर बसों की सुविधा होगी, जब सड़कें अच्‍छी बन गईं, गांव-गांव तक संपर्क हो गया, ऐसे में हमने गरीब आदमी का भी विचार किया, उसके लिए बस की सुविधा होनी चाहिए, संपन्‍न लोग तो अपनी मोटरसाइकिल से, गाडि़यों से चले जाते हैं लेकिन आम आदमी और विशेषकर अप-डाउन करने वाले लोगों का अनावश्‍यक खर्च होता है. मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि लोक परिवहन की किफायती व्‍यवस्‍था "मुख्‍यमंत्री सुगम परिवहन सेवा" के माध्‍यम से नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में हमारी सरकार करने जा रही है. जिसमें सभी प्रकार के उपयोगी मार्गों के लिए बसों की संख्‍या और आवृत्ति सुविधाजनक तरीके से तय की जायेगी. प्रदेश में बस की बात कर रहे हैं तो विमान की बात कैसे छोड़ सकते हैं. विमान सेवाओं के लिए तेज गति से कार्य हो रहा है. अब तो एविएशन मिनिस्‍टर भी मध्‍यप्रदेश की तारीफ़, देश के बाकी राज्‍यों में भी करते हैं. एक मात्र हमारा मध्‍यप्रदेश राज्‍य है जो अपने यहां पर अपने एयरपोर्ट पर, अपने हेलीपेड पर इन सभी प्रकार की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए बी.जी.एफ. देकर के कुछ यात्री वहन करें, कुछ राज्‍य सरकार वहन करे और यह विमान की सेवाएं बढ़ें उसका परिणाम है रीवा से इंदौर, रीवा से दिल्‍ली, रीवा में बड़े-बड़े नेता रहे हैं लेकिन किसी ने भी चिंता नही की और केवल वहां ही नहीं हमारे राज्‍य के अंदर भी ओेंकारेश्‍वर अपने ही क्षेत्र में आता है. ओंकारेश्‍वर, महाकालेश्‍वर, इंदौर हेली सर्विसेज. हेलीकॉप्‍टर से  केवल उत्‍तराखण्‍ड में ही क्‍यों होना चाहिए. हमारे राज्‍य में भी होना चाहिए. जबलपुर राज्‍य के आसपास के सभी टाईगर रिजर्व हैं आने जाने के लिए और केवल इतना ही नहीं हमारा राम राजा सरकार का ओरछा, दतिया, पीताम्‍बरा पीठ, कटनी ऐसे सभी सेक्‍टरों में अलग-अलग हेलीकॉप्‍टर की सुविधा दे रहे हैं. हेलीकॉप्‍टर वालों से भी हम अपना एग्रीमेंट कर रहे हैं कि लगातार जो पर्यटक आते हैं वो राज्‍य की समृद्धि के लिए होते हैं. उनकी सभी प्रकार की व्‍यवस्‍थाओं का ध्‍यान रखते हुए मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि सबसे ज्‍यादा सफलता के साथ अगर कोई बढ़ रहा है तो हमारा राज्‍य बढ़ रहा है. बीते वर्ष में ही हमारे विमानतलों की संख्‍या पांच से बढ़कर आठ हुई और नौवां शिवपुरी का भी अनुबंध हो गया है. दसवां उज्‍जैन का भी अनुबंध हो गया. आने वाले समय में विमानतल भी बढ़ते जाएंगे. यह आजकल आवश्‍यकता भी है. जब भौगोलिक रूप से हमारा इतना बड़ा राज्‍य है तो इसकी चिंता करने का काम हमारा है इसलिए हमने एवीएशन पॉलिसी भी बनाई और संकल्‍प भी लिया कि हर 200 किलोमीटर में एक हवाईअड्डा और हर 150 किलोमीटर में हवाईपट्टी  बने ताकि आने जाने के लिए हवाई सेवाओं के साथ धार्मिक और पर्यटन के क्षेत्रों को भी जोड़ा जा सके.

          अध्‍यक्ष महोदय, जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो बहुत सारी बातों के साथ और भी बात कर सकता हूं लेकिन आज जब सुशासन की बात, पर्यटन की बात और सिंहस्‍थ की बात कर रहा हूं तो मुझे लगता है कि मुझे बोलने के लिए आपको एक घंटे का समय और देना होगा.

          श्री उमंग सिंघार-- मुख्‍यमंत्री जी के भाषण से कुछ हो न हो लेकिन प्रदेश का कर्ज जरूर कम हो जाएगा.

          डॉ. मोहन यादव-- प्रदेश का कर्ज कम हो जाएगा? प्रदेश में कर्ज  तो आपने छोड़ा हम क्‍या करें. हम तो कर्ज चुकाने वाले हैं. आपने तो हमारे राज्‍य को डुबाया है हम तो यह बार-बार बोलते हैं.

          श्री उमंग सिंघार-- ब्‍याज पर ब्‍याज दे रहे हैं सभी को पता है.

          डॉ. मोहन यादव--हमारे पास ब्‍याज चुकाने के लिए कमाई तो हो रही है आप तो ब्‍याज भी नहीं दे पा रहे थे. जीरो बजट पर स्‍कूल चलाते थे. अभी हमारी अर्चना बहन जी बता रहीं थीं. जब बात निकालोगे तो दूर तक जाएगी.

          अध्‍यक्ष महोदय, हमारे प्रतिपक्ष के नेताओं ने प्रदेश में नशामुक्ति के लिए बात कही मैं बताना चाहता हूं कि हमारी सरकार ने हमारे सभी धार्मिक नगरों को शराबबंदी करके हमारे संकल्‍प की पूर्ति की है कि हम नशामुक्ति के खिलाफ ठोस कदम उठाने वाले हैं और पांच किलोमीटर के दायरे में मां नर्मदा से भी दूर सभी प्रकार के प्रबंधन करेंगे और अभी जो लगातर कार्यवाही कर रहे हैं. लगातार यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी ने पहले नक्‍सलवादी मूवमेंट के लिए एक बड़ा संकल्‍प लिया और पूरे देश में नक्‍सलवादी मूवमेंट को चाहे कांग्रेस की सरकार हो, चाहे बीजेपी की सरकार हो हर राज्‍य में कठोर कार्यवाही करने के लिए कदम बढ़ाएं हैं. उसी प्रकार से सभी प्रकार के ड्रग के खिलाफ, नशों के खिलाफ राज्‍य सरकार भी भारत सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर हर जगह हर जिले में, हर संभाग में ठोस कार्यवाही कर रही है. आपने सायबर अपराध की बात भी कही हमारी सरकार ने पर्याप्‍त रूप से वह प्रबंधन किये हैं जिसमें इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके और हम ठोस काम कर रहे हैं. पर्यटन के क्षेत्र में भी जिस प्रकार से राज्‍य का बजट बढ़ा है वेसे प्रदेश में प्राकृतिक, ऐतिहासिक, सांस्‍कृतिक और आध्‍यात्‍मिक विरासत के कारण से अकेला एकमात्र राज्‍य है जहां पर 13 करोड़ से ज्‍यादा  पर्यटक हमारे राज्‍य में आये हैं. यह हमारे लिए सौभाग्‍य की बात‍ है. यह हमारी वैश्विक पहचान को भी बढ़ाता है, आर्थिक समृद्धि को भी बढ़ाता है और इसलिए हमने विभाग के बजट में भी 47.4 प्रतिशत की वृद्धि की है. मैं पर्यटन विभाग के माध्‍यम से वर्ष 2026-2027 में ही जब आंकडें की बात देखता हूं तो सच में वित्‍त मंत्री जी को धन्‍यवाद दूंगा और टूरिज्म मिनिस्टर कहां है धर्मेंन्द्र भाई आपको बधाई देना चाहूंगा. 566 करोड़ रुपए का बजट टूरिज्म में रखा था. जहां कांग्रेस के शासनकाल में 5 करोड़ रुपए का बजट नहीं मिलता था. पहले होटल बेचने की नौबत आ गई थी होटल बेचकर काम चलाते थे. हमने सारी होटल चलाईं और व्यवस्था भी चला रहे हैं. वर्ष 2025 में हमने फिल्म पर्यटन नीति लागू की. अब साउथ वाले और मुंबई वाले आकर इस नीति का लाभ लेना चाहते हैं. हमारे पर्यटन केन्द्रों को भी हम सभी के बीच में ले जाना चाहते हैं. मध्यप्रदेश की गौरवशाली धरोहर महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग, ओमकारेश्वर, ग्वालियर का किला, भोजपुर का शिव मंदिर विश्व पर्यटन में यह हमें गौरवान्वित करते हैं. आध्यात्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयां देता है. इसी के साथ साथ प्राकृतिक और विश्व धरोहर कूनो राष्ट्रीय उद्यान, भीमबैठका का शैल आश्रय, खजुराहो समूह का स्मारक, वैश्विक पर्यटन के गंतव्य के रुप में स्थापित हो रहे हैं. पर्यावरणीय और सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करने का मौका दे रहे हैं. हमने गांव गांव में छोटे छोटे लोगों की आमदनी को बढ़ाने के लिए होम स्टे को बढ़ावा दिया. अब आपको कश्मीर जाने की जरुरत नहीं है अब शिकारा हम अपने भोपाल के बड़े तालाब में ले आए हैं. यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है. आपको अलग-अलग प्रकार की सब्जियां, कपड़े आदि की खरीददारी का आनंद यहां मिलता है. यह तो केस स्टडी है. हमने जो राशि लगाई थी ढाई महीने के व्यापार में सब नगद हो गया. बीते समय में भूतल परिवहन मंत्री माननीय नितिन गडकरी जी आए थे. हम विदिशा में कार्यक्रम करने गए थे. उन्होंने कहा कि मैं मेरी बेटी और परिवार को भी लाया हूँ. मैंने कहा वे कहां हैं वो बोले वो शिकारा में बैठने आई हैं. हमारे यहां इतने अच्छे शिकारा चल रहे हैं कि अब हमको कश्मीर जाने की जरुरत नहीं है. धार्मिक पर्यटन को लेकर भी हमारी सरकार सभी प्रकार के देवस्थान के लिए, हमारे लिए सौभाग्य की बात है. यह भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली, भगवान श्रीराम की तपस्थली, महाकाल महाराज की ध्यान स्थली, गुरु शंकराचार्य जी की ज्ञान स्थली यह सारी आध्यात्मिक विरासत मध्यप्रदेश की धरती पर अद्वितीय है. यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक चेतना का जो नव जागरण हुआ है यह वाकई अद्भुत है. मध्यप्रदेश उसका साक्षी बन रहा है. एक तरफ हम श्रीराम वन गमन की बात कर रहे हैं. साथ ही चित्रकूट को भी अद्भुत धाम बनाने जा रहे हैं. ऐसे ही महाकाल की नगरी उज्जैन में भी भगवान कृष्ण ने अगर शिक्षा ग्रहण की तो सांदिपनी आश्रम को भी भव्य बना रहे हैं. जहां-जहां उनकी लीलाएं हुई हैं ऐसे प्रत्येक स्थान को तीर्थ बनाकर उसका विकास करने के लिए संरक्षण और संवर्द्धन को प्रोत्साहन दे रहे हैं. इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बजट में 2 हजार 69 करोड़ रुपए की राशि हमारी सरकार  दे रही है, हमने करीब 74.1 प्रतिशत की वृद्धि की है. हम धार्मिक पर्यटन को लेकर प्रतिबद्ध हैं. जब हम महाकाल और ओमकारेश्वर की बात करते हैं तो पशुपतिनाथ का लोकार्पण मैं करके आया हूँ. जैसा नेपाल में पशुपतिनाथ हैं वैसा ही देवस्थान मंदसौर में बनने जा रहा है. माननीय वित्त मंत्री जी वहां पर मौजूद थे. जैसा अयोध्या का आनंद है राजा रामलोक का आनंद भी हम ले सकते हैं. बीते समय वहां का लोकार्पण भी किया है. कभी आपको समय मिले तो चलिएगा बहुत अद्भुत स्थान है. अब ओरछा को यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में भी स्थान प्राप्त हुआ है. मैं माननीय मोदी जी को आपके माध्यम से बधाई देता हूँ जो लगातार हमारी धरोहर के प्रोत्साहन का काम कर रहे हैं. हम प्रत्येक विकासखण्ड में वृन्दावन ग्राम की बात कर रहे हैं. नगरीय क्षेत्र में गीता भवन की बात कर रहे हैं. जबलपुर और इंदौर में गीता भवन प्रारंभ भी हो गए हैं. आप साथ आएं तो मार्च के महीने में 1200 सीटर उज्जैन का गीता भवन भी आनंद से प्रारंभ कराएंगे. आप भी आएं सारे मित्र आएं महाकाल के दर्शन भी करें कुछ साधु संतों को बुलाएंगे तो गीता का प्रवचन सुनेंगे. तो कर्मवाद की शिक्षा का कुछ लाभ भी मिलेगा हमारा और आपका जीवन धन्‍य होगा. जब मैं आपसे बात कर रहा हूं ऐसे कई प्रकार के गौरवशाली अतीत को सम्राट विक्रमादित्‍य, राजा भोज ऐसे कई महान शासकों के लिए हमारी राजधानी के सभी मार्गों पर द्वार बनाने के लिए पर्याप्‍त धनराशि हमारी सरकार के द्वारा दी गई है जिसमें संरचनाओं को बढ़ावा देकर ऐतिहासिक स्‍वाभिमान को सुदृढ़ करते हुए हमने प्रयास किया है. हम  गौरवशाली अतीत से भी जुड़ें और गौरवशाली घटनाओं के बलबूते पर प्राचीन ज्ञान पर भी गर्व करें इसलिए वैदिक घड़ी टावर भी हमने बनाया है और वैदिक घड़ी को विश्‍वस्‍तर पर स्‍थापित करने के लिए यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी के माध्‍यम से उसका लोकार्पण भी कराया.

          अध्‍यक्ष महोदय, हमारे राज्‍य के अंदर 499 राज्‍य संरक्षित स्‍मारक, 45 संग्रहालय हमारी गौरवशाली धरोहर को संभालने के लिए काम कर रहे हैं और संग्रहालयों के उन्‍नयन और आधुनिकीकरण के लिए भी हमारे माध्‍यम से इतिहास, संस्‍कृति और परम्‍पराओं को नई पीढ़ी को संजोकर देने का काम हमारी सरकार के माध्‍यम से हो रहा है. यह देवस्‍थान की बात आती है, मंदिरों, धर्मस्‍थल केवल हमारी आस्‍था के केन्‍द्र नहीं हैं यह हमारी समृद्धि और सामाजिक सशक्तिकरण के भी केन्‍द्र हैं. हम उम्‍मीद कर रहे हैं कि जिस प्रकार से एक देवस्‍थान का धाम जगमगाता है जो कई प्रकार के लोगों को रोजगार देता है, फूल वाले, होटल वाले, चाय वाले, ऑटो वाले कई प्रकार के रोजगार का अवसर इस कारण से मिलता है, श्रद्धालु भी आते हैं और सब प्रकार के संस्‍थान से आर्थिक गतिविधि को भी बढ़ाते हैं. विक्रान्‍त भूरिया जी आपके लिए भी मैं कह रहा हूं. मैं आपको भी देख रहा हूं कि हमारे साथ जब विकास की बात कर रहे हैं तो हम अपने झाबुआ को कैसे भूल सकते हैं. हम आ रहे हैं भगोरिया का आनंद लेने के लिए. हमने भगोरिया को भी राष्‍ट्रीय पर्व का महत्‍व देकर अपने उस गौरवशाली अतीत को भी याद रखा है. आपके साथ भी मना सकते हैं. बड़वानी भी जाएंगे, धार भी जाएंगे. उम्‍मीद करेंगे कि हमारे सभी ऐसे गौरवशाली महत्‍व के पर्वों को भी स्‍मरण करना चाहिए और धार्मिक पर्यटन से हमारी अर्थव्‍यवस्‍था भी मजबूत होती है इसीलिए सिंहस्‍थ का आयोजन यह हमारे प्रदेश के लिए ही नहीं, उज्‍जैन के लिए नहीं, देश के लिए नहीं, यह विश्‍व का सबसे बड़ा मेला है और विश्‍व का सबसे बड़ा मेला सनातन संस्‍कृति का सबसे बड़ा कायक्रम यह सबके लिए गौरव की बात है. जब विश्‍व के लोग आएंगे, देश के लोग आएंगे उनका प्रबंधन करना हमारा काम है. इसलिए बाबा महाकाल की नगरी उज्‍जैन को भी वैश्विक आध्‍यात्मिक पर्यटन का केन्‍द्र बनाने के लिए हमारी सरकार ने सभी प्रबंधन किए हैं. सिंहस्‍थ 2028 को सफल बनाने के लिए तैयारियां युद्धस्‍तर पर कर रहे हैं. जहां हम सनातन परम्‍परा, सांस्‍कृतिक शक्ति, वैश्विक आध्‍यात्मिक नेतृत्‍व को विराट बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं सिंहस्‍थ को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में यूनेस्‍को की सूची में भी शामिल करने का गौरव हमारी सरकार के माध्‍यम से प्राप्‍त हुआ और इस पूरे आयोजन के लिए मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है और थोड़ा बताना चाहूंगा कि कांग्रेस के शासन काल में सिंहस्‍थ पहली बात तो कांग्रेस को मौका ही नहीं मिला लेकिन कांग्रेस ने एकाध साल पहले, दो साल पहले सरकार छोड़ी तो भी आपने एक रुपया नहीं दिया, लेकिन हमारी सरकार ने 13 हजार करोड़ तो खर्च किए और 3,060 करोड़ रुपये फिर रखे हैं. यह हमारी सरकार के माध्‍यम से मोक्षदायिनी क्षिप्रा के लिए भी नदी से नदी जोड़ो अभियान तो हमने देखा है लेकिन नदी से नदी जोड़ो अभियान वास्‍तव में आप भी चलकर देखना नेता प्रतिपक्ष जी और हम सब देखेंगे कि ऊपर खेती हो रही है और नीचे नदी की धारा दूसरी तरफ जा रही है. माननीय तुलसीराम सिलावट जी को मैं बधाई देना चाहूंगा यह खान नदी का इंदौर का आने वाला गंदा पानी भविष्‍य में रामघाट तक नहीं आ सकेगा. लोग आचमन करते हैं, स्‍नान करते हैं, शुद्ध जल की अपेक्षा करते हैं ऐसे में शुद्ध जल से स्‍नान करते हुए गंदा पानी गंभीर के नीचे डाउन स्‍ट्रीम में बहाकर किसानों को खेती का पानी देकर यह आने वाले समय में भविष्‍य की दृष्टि से ऐतिहासिक काम हमारी सरकार के माध्‍यम से हो रहा है. 30 किलोमीटर के घाट कभी कल्‍पना ही नहीं की थी पूरे देश तो क्‍या दुनिया में भी इतने लंबे घाट नहीं हैं लेकिन स्‍नान करने के लिए 24 घण्‍टे में 5 करोड़ से ज्‍यादा यात्री स्‍नान कर सकेंगे यह प्रबंध हमारी सरकार द्वारा किया जा रहा है. तमाम प्रकार की सुविधाओं के बलबूते पर मेडिकल टूरिज्‍म को भी बढ़ावा देते हुए मे‍डीसिटी और बहुत सारे काम हमारी सरकार कर रही है. श्रद्धालुओं के लिए भी व्‍यवस्‍था कर रहे हैं और उसी के साथ-साथ आपसे जब मैं बात कर रहा हूं तो विरासत से विकास के लिए भी और जिनको भुला‍ दिया हमारी सरकार उनको स्‍मरण कराने का काम करती है. वीरांगना रानी दुर्गावती की 500 वीं जयंती पर दमोह में कैबिनेट करते हुए हमारे धर्मेन्‍द्र जी के विधान सभा क्षेत्र संग्रामपुर में विधानसभा क्षेत्र में संग्रामपुर में हमने रानी दुर्गावती जी का स्मरण किया, जबलपुर में फिर जो रानी दुर्गावती की मूल राजधानी पर अजय विश्नोई जी, राकेश सिंह अभिलाष पाण्डेय सबके साथ हमने अपने उस भाव को प्रगट किया, जो पूर्वजों के प्रति होना चाहिये और ऐसे महान पूर्वज को स्मरण करना हमारा, राजनैतिक और सांस्कृतिक नमन भी है और स्मरण भी है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, इसी प्रकार से लोक माता अहिल्या माता की 300वीं जयंती पर न केवल राजवाड़ा में कैबिनेट करके बल्कि प्रधान मंत्री जी की मौजूदगी में हमने विशाल महिला सम्मेलन महिलाओं के साथ में भोपाल में करके अहिल्या माता की जयंती को मनाने का काम भी किया है और 300 रूपये का डाक टिकिट जारी करके उनके सुशासन को वैश्विक पहचान दिलाने का काम हमारी सरकार ने किया है.

          अध्यक्ष महोदय, जब हम आदिवासी भाई बहनों की बात करते हैं तो बिरसा मुंडा जी को कैसे भूल सकते हैं, बिरसा मुंडा जी की 150 वीं जयंती पर हमने प्रदेश में उनके जन्मउत्सव को पूरे उत्सव के रूप में मनाया. मृगनयनी, विंध्यवैली ऐसे हमारे स्थानीय ब्रांड को भी विस्तार जिला स्तर तक दे सके और हमारे शिल्पकारों को सही मूल्य मिल सके, उनकी मेहनत का प्रारप सम्मान हो इस दिशा में भी हमने काफी काम किया है.

          अध्यक्ष महोदय, हमारे प्रदेश के हुनर को अब दुनियां पहचान रही है. खजुराहो का स्टोन क्राप, छतरपुर के फर्नीचर,बैतूल के भरेवा मेटल क्राफ्ट ,ग्वालियर के पेपर मेसे क्राफ्ट को जीआई टेग दिलाकर के हमने स्थानीय कलाकारों को भी वैश्विक बाजार से जोड़ने का काम किया है. उज्जैन के डोंगला में अत्याधुनिक वेदशाला जो समयगणना का एक अद्भुद केन्द्र बनेगा, इस दिशा में भी हमारी सरकार काम कर रही है. और साइंस सिटी जो वर्तमान में उज्जैन केवल धार्मिक नहीं केवल व्यापारिक नहीं प्राचीन ज्ञान विज्ञान का भी केन्द्र है इसलिये मध्यप्रदेश को सम्मान दिलाते हुये पहली बार बजाय ग्रीनरीज के उज्जैन से समय का निर्धारण हो, बजाए और कोई काम करने के जिस प्रकार इसरो है, इसलिये स्पेसटेक पालिसी भी हमारे राज्य में लाकर के यहां के वैज्ञानिकों को मौका दिलाकर के प्राचीन  ज्ञान पर भी गर्व हो सके ऐसे कई काम हम हमारी सरकार के माध्यम से कर रहे हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रमुख 111 तीर्थों पर 1629 मेलों को पंजीकृत करते हुये भविष्य में सभी प्रकार के मेलों में सुव्यवस्था के बलबूते पर सभी प्रकार की गतिविधियों का सुचारू रूप से संचालन हो और राज्य का गौरव बढे, राज्य मे आर्थिक समृद्धि आये और कई प्रकार के विकास के कामों को हमारी सरकार के माध्यम से प्रोत्साहन दिया जा सके. इसी प्रकार से आगे बढ़ते हैं तो हमारे यशस्वी प्रधान मंत्री के माध्यम से लोकल से ग्लोबल की यात्रा जब हम देखते हैं तो मध्यप्रदेश में बडी संभावनायें दिखती हैं. मेक-इन मध्यप्रदेश की इस यात्रा में हम  अपने राज्य के आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में बढ़ते कदम में प्रदेश भी कदम से कदम बढ़ाकर मिलाकर के चलने के लिये तैयार है, इसलिये पिछले वर्ष हमने भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड का यही पर पास में भूमि पूजन किया जिसमें प्रदेश में मेट्रो कोच, वंदे भारत ,रोलिंग स्टार इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट का निर्माण करने का संकल्प पूरा हुआ. आपको समय मिले तो जरूर देखने चलना. यह भोपाल के पास में ही बड़ा यूनिट बन रहा है. और डिफेंस एयरोस्पेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर भी हमारे प्रदेश में कई प्रकार की संभावना लेकर के आगे बढ़ रहा है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, जबलपुर की आर्डिनेस फेक्ट्री में व्हीकल फेक्ट्री ग्रे आयरन फाउन्ड्री, गन कैरेज फैक्ट्री, ऐसी ताकत सेना को देने का प्रदेश में प्रयास हमारी सरकार के माध्यम से भी यथा योग्य हो ही रही है. जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो ऐसे में 2047 में मध्यप्रदेश की जो भूमिका होगी वह 2 ट्रिलियन डालर की  इकानामी बनाने का लक्ष्य रखा है.यह सच में बड़ा लक्ष्य है लेकिन जिस प्रकार से हम ग्रोत लेकर चल रहे हैं चाहे आपकी राजी हो चाहे नाराजी हो लेकिन आपका समर्थन तो जरूरी है, प्रेम भाव से हम और आप मिलकर के राज्य को 2047 तक 25 साल तक मजबूत करें तो यह दृष्टिपत्र पर जो काम कर रहे हैं, इसी आधार पर मैने कहा है कि तब प्रति व्यक्ति 22 लाख 50 हजार रूपया प्रति व्यक्ति आय होगी तो हमको भी संतोष होगा और आपको भी आनंद आयेगा, कृषक कल्याण वर्ग के लिये मैने बात कही, इसी प्रकार से दूध संकलन से लेकर शासकीय नियुक्तियों की भर्ती तक 3 वर्षों में 2 लाख से ज्यादा पद पर भर्ती हमारी सरकार करने जा रही है यह शासकीय सेक्टर में, उर्जा सेक्टर में 70 हजार करोड़ के नये निवेश 4 हजार मेगावाट नई परियोजना में मध्यप्रदेश को उद्योगों के लिये पावर हब बनाने का काम हमारी सरकार के माध्यम से हो रहा है. 2047 तक हमारा लक्ष्य है कि पर्यटन आईटी, हैल्थ सेवा क्षेत्र , ऐसे प्रत्येक क्षेत्र में सकल  राज्य मूल संवर्द्धन  योगदान  36 प्रतिशत से बढ़ करके  49 से लेकर के  53 प्रतिशत तक बढ़े. हमारा लक्ष्य है कि राज्य का सेवा  खास करके  जिस प्रकार से गति बढ़ रही है,  मैं उम्मीद करता हूं कि  म.प्र. की हिस्सेदारी  0.15  से बढ़ करके  3 प्रतिशत  तक सेवा निर्यात  में हम पहुंचें. इस लक्ष्य  के  आधार पर आगे बढ़ रहे हैं. म.प्र. टेक्नालाजी, डूरिज्म,  टेलेंट इस त्रिवेणी का  संगम हो चुका है. ऐसे में  साढ़े 8 करोड़ से ज्यादा  लोगों की आशा, अपेक्षा का केंद्र हमारा राज्य  है.  सुशासन को लेकर भी  हमारी सरकार मिनिमम  गवर्नमेंट  मैक्सिमम  गवर्नेंस  के मूल   मंत्र  के  आधार पर आगे बढ़ रही है. राजस्व सुशासन  में भी हमारी सरकार..

          श्री ओमकार सिंह मरकाम--  अध्यक्ष जी,  आपका भाषण सुनकर  मुंगेरीलाल और  शर्म  दोनों की मृत्यु हो गई है. वह  हकबका गये हैं कि अब क्या करें.

          श्री  तुलसीराम सिलावट--  आप विकास की बात नहीं सुनना चाह रहे हैं.

          श्री उमाकांत शर्मा अध्यक्ष महोदय, इस बात को विलोपित करना चाहिये.

          अध्यक्ष महोदयउमाकांत जी, बैठिये.

          श्री उमंग सिंघार--  अध्यक्ष जी,  वित्त मंत्री जी ने एक एक टेबलेट  दिये बजट के.  एक टेबलेट और   अगली बार  मुख्यमंत्री  जी के भाषण का मिल जाये,  घर जाकर हम पढ़ लेंगे.   

          श्री कैलाश विजयवर्गीयटेबलेट कौन सी चाहिये उज्जैन वाली   चाहिये क्या.  ..(हंसी)..

          श्री उमंग सिंघारउज्जैन, इन्दौर   वाले मालूम है कौन  सी गोली लेते हैं. ..(हंसी)..

          डॉ. मोहन यादवअब हमको समझ में आया  कि हम  फालतू में, फोकट झंझट में पड़ रहे थे. दोनों की  इतनी बढ़िया दोस्ती है, पता ही नहीं चला.  गोली वाली, बोली वाली दोनों का आनन्द आ रहा है.  ..(हंसी)..   मैं अपनी ओर से  एक बार फिर उच्च शिक्षा  के अन्दर भी   आपने प्रश्न उठाया था कि सहायक प्राध्यापक  2022 के आधार पर  33 विषयों में  म.प्र. लोक सेवा आयोग  के द्वारा चयन सूचियां जारी की गईं और चयन सूचियों के आधार पर 1504  अभ्यर्थी चयनित हुए.  कुल 28 विषय के  983 अभ्यर्थियों  को  नियुक्ति प्रदान की गई है. 2023-24 में,2024-25 में  सहायक प्राध्यापकों के 1930 पद,  ग्रंथपाल के 80, क्रीड़ा अधिकारियों  के  187  इस प्रकार से 2197 पदों की पूर्ति के लिये  विज्ञापन जारी कर दिये गये हैं. म.प्र. लोक सेवा आयोग द्वारा चयन की प्रक्रिया  पूरी की जा रही है.  2025-26 में   19 विषयों में सहायक प्राध्यापकों के 1237  पदों की पूर्ति  विज्ञापन द्वारा की जा रही है.  मैं उम्मीद करता हूं कि  आज के इस अवसर पर   आपके साथ हरेक क्षेत्र में  जितना हो सकता है,  हमारी सरकार  लगातार काम कर रही है और  अब तो साइबर तहसील के   आधार पर  हमने अपने और  नये प्रकार के कदम   बढ़ाये हैं. अभी  75 अलग अलग सेवाओं के लिये  55 जिलों में ये  किसी को प्राधिकरण से रजिस्ट्री  कराना हो,  किसी को हाउसिंग  बोर्ड से कराना हो, कोई लोन लेना हो,  कोई एफिडेविट  बनाना हो, कहीं आने जाने की जरुरत नहीं है.  सब अपनी अपनी जगह पर रहेंगे और ऑनलाइन   आपस में डिजिटली   पूरा काम साइबर  तहसील  के माध्यम से होगा.  इससे समय की बचत भी होगी और यह नवाचार देश  में पहली बार  हुआ है.  ऐसी अच्छी व्यवस्था  के बलबूते पर हरेक क्षेत्र में डिजिटल क्रांति  में हमारा राजस्व विभाग  नये नये प्रकार से कदम  बढ़ा रहा है.  साइबर पंजीयन  के साथ साथ म.प्र. के अंदर  उम्मीद कर रहे हैं ऐसे और  भी  नये काम बहुत सारे लगातार चल  रहे हैं. पोर्टल टू के माध्यम से  भी यह  एक करोड़ से ज्यादा प्रकरणों का निराकरण  किया गया है.  उम्मीद करते हैं आज के  इस  अवसर पर चूंकि समय ज्यादा हुआ है,  फिर भी मुझे आधा घण्टा और लगेगा.  ..(हंसी)..

          श्री उमंग सिंघार--  अध्यक्ष जी,  मैं  समझता हूं कि आपको  व्यवस्था देना चाहिये कि  मुख्यमंत्री जी का भाषण पढ़ा हुआ माना गया  पटल  पर. ..(हंसी)..

          अध्यक्ष महोदयये लोग कह रहे हैं कि  अब  कभी आरोप नहीं लगायेंगे. ..(हंसी)..

          श्री अभय मिश्रा--  अब हमारे सेमरिया के 59 किसानों का   1 करोड़ 28 लाख का भुगतान करा दीजिये, बाकी सब अच्छा है.

          अध्यक्ष महोदयचलो, आप शीघ्रता से पूर्ण करें.

 

            डॉ. मोहन यादव- अध्‍यक्ष महोदय, मैं सबकी भावनाओं को समझते हुए एक बार फिर हमारे अधोसंरचना विकास, निवेश, रोजगार सृजन, उद्योग, ग्रामीण उद्योग के विस्‍तार, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य के सुदृढ़ीकरण, जल और ऊर्जा संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन संरक्षण और जनकल्‍याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्‍वयन करने का व्‍यापक रोडमैप माननीय राज्‍यपाल महोदय के माध्‍यम से हमने रखने का प्रयास. महामहिम के माध्‍यम से अभिभाषण के आधार पर हमारा राज्‍य समृद्ध बने, सशक्‍त बने, सर्वसमावेशी मध्‍यप्रदेश का निर्माण करें और विकसित भारत के निर्माण में जो मील का पत्‍थर साबित हो.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं विपक्ष से केवल इतना ही कहना चाहूंगा कि हमारा साझा संकल्‍प मध्‍यप्रदेश की प्रगति के लिये है. मध्‍यप्रदेश वासियों का कल्‍याण, हम और आप के साथ करने से है. आलोचना भी होना चाहिये, सकारात्‍मक आलोचना के लिये सदैव हमारी सरकार खुलेमन से आपके साथ काम करने के लिये तैयार है. लेकिन परिवर्तन के इस दौर में हम और आप लगातार सतत चरैवेति- चरैवेति के सिद्धांत को लेकर चलते रहे और मध्‍यप्रदेश लगातार आगे बढ़ता रहे. इसी भावना के प्रति पुन: मैं आपके प्रति कृतज्ञता ज्ञ‍ापित करते हुए अपनी बात को विराम देता हूं. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय- मुख्‍यमंत्री जी के पास अभी काफी मटेरियल था. यह तो आप सबकी भावनाओं का आदर करते हुए उन्‍होंने अपना भाषण समाप्‍त कर दिया है.

          नेता प्रतिपक्ष( श्री उमंग सिंघार)- बोलो सत्‍यनारायण भगवान की जय.

          अध्‍यक्ष महोदय- मैं समझता हूं कि राज्‍यपाल जी के अभिभाषण के उत्‍तर में प्रस्‍तुत कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्‍ताव में जितने संशोधन प्रस्‍तुत हुए हैं. उन पर एक साथ ही मत ले लया जाये.

          अध्‍यक्ष महोदय- प्रश्‍न यह है कि-

          जो माननीय सदस्‍य संशोधनों के पक्ष में हों वे कृपया ''हां'' कहें,

          जो माननीय सदस्‍य संशोधनों के विपक्ष में हों वे कृपया ''ना'' कहें,

                                                          समस्‍त संशोधन अस्‍वीकृत हुए

          अध्‍यक्ष महोदय- प्रश्‍न यह है कि -

          '' राज्‍यपाल ने जो अभिभाषण दिया, उसके लिये मध्‍यप्रदेश की विधान सभा के इस सत्र में समवेत सदस्‍यगण अत्‍यन्‍त कृतज्ञ हैं.''

                                                          प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ

          अध्‍यक्ष महोदय- आप सबको धन्‍यवाद. आज की कार्यवाही में नोंकझोंक के दौरान कहीं भी कोई आपत्तिजनक शब्‍द आये होंगे तो मैं कार्यवाही का अवलोकन करूंगा और उसके बाद जो अनुकूल नहीं होगा, उसको विलोपित कर दूंगा.

          विधान सभा की कार्यवाही शुक्रवार, दिनांक 20 फरवरी, 2026 को प्रात: 11.00 बजे तक के लिये स्‍थगित.

          रात्रि 08.28 बजे विधान सभा की कार्यवाही शुक्रवार दिनांक 20 फरवरी, 2026 ( 1 फाल्‍गुन, शक संवत् 1947) के पूर्वाह्न 11.00 बजे तके के लिये स्‍थगित की गयी.

 

 

भोपाल                                                                                         अरविन्द शर्मा

दिनांक -19 फरवरी, 2026                                                                 प्रमुख सचिव

                                                                                             मध्‍यप्रदेश विधान सभा