मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण) 

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षोडश विधान सभा                                                                                                     पंचम सत्र

मार्च, 2025 सत्र

मंगलवार, दिनांक 18 मार्च, 2025

(27 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1946)

 

[खण्ड- 5]                                                                                                                         [अंक- 6]

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मध्यप्रदेश विधान सभा

मंगलवार, दिनांक 18 मार्च, 2025

(27 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1946 )

विधान सभा पूर्वाह्न 11.01 बजे समवेत् हुई.

{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

 

1. निधन का उल्लेख

(1)     श्री विष्णु राजोरिया, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य,

(2)       डॉ. देवचरण सिंह मधुकर, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य एवं

(3)     श्री सुरेन्द्रनाथ सिंह, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य

 

 

अध्यक्ष महोदय - मुझे सदन को यह सूचित करते हुए अत्यन्त दुख हो रहा है कि मध्यप्रदेश विधान सभा के भूतपूर्व सदस्यगण, श्री विष्णु राजोरिया का दिनांक 11 मार्च, डॉ. देवचरण सिंह मधुकर का दिनांक 12 फरवरी एवं श्री सुरेन्द्रनाथ सिंह का दिनांक 11 मार्च, 2025 को निधन हो गया है.


 

            उप मुख्‍यमंत्री (श्री जगदीश देवड़ा)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री विष्‍णु राजोरिया जी का जन्‍म दिनांक 27 मार्च, 1941 को हरदा में हुआ था. आप वर्ष 1962 से 1970 तक जिला युवक कांग्रेस के महामंत्री, मध्‍य प्रदेश युवक कांग्रेस के वरिष्‍ठ उपाध्‍यक्ष एवं वर्ष 1982 से 1985 तक मध्‍य प्रदेश राज्‍य उद्योग निगम के अध्‍यक्ष रहे. श्री राजोरिया जी,  सातवीं एवं आठवीं विधान सभा में कांग्रेस की ओर से हरदा से सदस्‍य निर्वाचित हुए तथा आठवीं विधान सभा अवधि में राज्‍य मंत्री, स्‍थानीय शासन, शहरी विकास, आवास एवं पर्यावरण विभाग रहे.

          आपके निधन से प्रदेश ने एक वरिष्‍ठ एवं लोकप्रिय नेता, शिक्षाविद, समाजसेवी, लेखक, पत्रकार तथा कुशल प्रशासक खो दिया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, डॉ. देवचरण सिंह मधुकर, का जन्‍म दिनांक 23 मार्च, 1938 को पचपेड़ी, जिला बिलासपुर में हुआ था. श्री मधुकर जी, संचालक अन्‍तव्‍यावसायी विकास निगम एवं राज्‍य नागरिक अधिकार समिति के सदस्‍य तथा राज्‍य कृषि उपज मंडी बोर्ड के संचालक रहे. श्री मधुकर ने प्रदेश की आठवीं एवं दसवीं विधान सभा में भारती राष्‍ट्रीय कांग्रेस की और से क्रमश: मालखरौदा एवं मस्‍तूरी क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व किया. आपके निधन से प्रदेश को एक लोकप्रिय एवं समाजसेवी नेता की अपूरणीय क्षति हुई है.

          अध्‍यक्ष महोदय, श्री सुरेन्‍द्र नाथ सिंह जी, का जन्‍म दिनांक 01 जनवरी, 1963 को हुआ था. आप 1994 से 2004 में पार्षद तथा वर्ष 2007 से 2014 तक भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्‍यक्ष रहे. आप प्रदेश की चौदहवीं विधान सभा में भारतीय जनता पार्टी की ओर से भोपाल मध्‍य क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व किया.

          मुझे ज्ञात है कि आप कार्यकताओं एवं मित्रों से रोजाना मिलने हेतु शाम को समता चौ, टी.टी. नगर पर भेंट हेतु आते थे. आपको भोपाल में ''सुरेन्‍द्र मम्‍मा'' के नाम से जाना जाता था. आपके निधन से प्रदेश ने एक लोकप्रिय नेता और समाजसेवी को खो दिया है.

          मैं सदन की ओर से दिवंगतों को श्रद्धा सुमन अर्पित कर, शोकाकुल परिवारों के पति संवेदनाएं प्रकट करता हूं.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह (अमरपाटन)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने और माननीय उप मुख्‍य मंत्री जी ने विष्‍णु राजोरिया जी, डॉ. देवचरण मधुकर जी और श्री सुरेन्‍द्र नाथ जी के निधन का उल्‍लेख किया है.

          मैं भी अपनी तरफ से और कांग्रेस दल की तरफ से इन दिवंगत आत्‍माओं के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और इनके शोक संतप्‍त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं भी हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष जी, श्री विष्‍णु राजोरिया जी से हमारे निकट के संबंध रहे और करीब से मैंने उन्‍हें देखा भी है. उनके जीवन की शुरूआत शिक्षा के पश्‍चात एक पत्रकार के रूप में हुई है. जहां तक मुझे स्‍मरण है कि शिखर वार्ता एक पत्रिका थी, जिसका वह संपादन करते थे और बड़ी ही निर्भीक, निडर और सम-सामयिक विषयों से वह भरी होती थी, ओतप्रोत रहती थी.         

          श्री राजोरिया जी के व्‍यक्तित्‍व के बहुआयामी, आयाम थे. उसके बाद पत्रकारिता के साथ-साथ उन्‍होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी कदम आगे बढ़ाये और उस जमाने में जब प्रायवेट कॉलेजेस बिरले ही होते थे तो उन्‍होंने केरियर इंस्‍टीट्यूट की स्‍थापना की थी और उसके तहत आज अनेकों कॉलेज और शैक्षणिक संस्‍थाएं अपने क्षेत्र में काम कर रही हैं. वे राजनेता तो थे ही, युवक कांग्रेस की राजनीति से उन्‍होंने अपने राजनैतिक जीवन की शुरूआत की और निरन्‍तर आगे बढ़े तथा राज्‍य उद्योग निगम के अध्‍यक्ष रहे. तत्‍पश्‍चात् वे राज्‍य मंत्री,मध्‍य प्रदेश सरकार में रहे, उद्योग और पर्यावरण विभागों का उन्‍होंने संचालन किया वे समाजसेवी थे उनके निधन से जो रिक्‍तता पैदा हुई है, वह भरा जाना जल्‍दी, शीघ्र संभव नहीं है. श्री सुरेन्द्रनाथ सिंह जी,इसे कहते हैं एक फकीर. वास्तव में  एक जमीन से जुड़े नेता थे और फकीरी ही उनका एक  व्यक्तित्व का  अहम अंग था.  कोई भी जाकर उनसे मिल ले.  3 कपड़े  पहने हैं, दो कपड़े पहने हैं,  एक कपड़े पहनने से   उनको फर्क  नहीं  पड़ता था. शाम को घूमते हुए समता चौक  पर  ये चाय की दुकान   में  दरबार सजाये हुए मिल जाते थे और जो चाहता था, उनसे  मिलता था.  वास्तव में एक पहिचान थे इस नये भोपाल की और  जैसा हमारे उप मुख्यमंत्री जी ने कहा कि  मम्मा के नाम से वे   प्रसिद्ध थे. मेरा भी सौभाग्य था उनसे सम्पर्क का.  मैं उनके प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं और उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं.  डॉ. देवचरण सिंह मधुकर के प्रति  भी मेरी श्रद्धांजलि है.  वे वरिष्ठ नेता थे,   बड़े  समर्पित   समाज सेवी जिसे कहते हैं, मधुकर जी थे.  मुझे भी सौभाग्य मिला था, उनके साथ काम करने का सदन में, उनके प्रति  भी मेरी  उनको श्रद्धांजलि है और  उनके परिवार के प्रति  हार्दिक संवेदनाएं हैं.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)--  अध्यक्ष महोदय,  जैसा कि  राजेन्द्र सिंह जी ने कहा कि  श्री विष्णु राजोरिया जी, डॉ. देवचरण सिंह मधुकर जी एवं श्री सुरेन्द्रनाथ सिंह जी,  मैं विष्णु राजोरिया जी से  सम्पर्क  में आया, पर  देवचरण जी से  कभी सम्पर्क  होने का  मुझे सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ.  विष्णु राजोरिया जी पत्रकार भी थे और  बहुत ही एक खुले विचार  के,   खुले दिल के व्यक्ति थे.  मुझे  याद आता है,  जब वे एलयूएन के अध्यश्र  हुआ करते थे, तो मैं  भी उस वक्त  थोड़ा सा सप्लाई  की लाइन में था. तो मैंने कहा कि जाकर   मिलना चाहिये उनसे. तो मैं उनसे मिलने गया.  मैंने कहा कि मैं युवा मोर्चे का  प्रदेश का मंत्री हूं और  बोले कि हां हां मैं जानता हूं आपको.  तो मैंने कहा कि मैं आपके यहां काम करता हूं.  तो उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं है, आप किसी भी पार्टी के हों,  मैं आपकी मदद करुंगा.  उनकी यह एक  विशेषता थी. अध्यक्ष महोदय, जैसा की सुरेन्द्र नाथ सिंह जी के बारे में बोला,  फकीर, फक्कड़.  मैंने अपनी जिंदगी में ऐसा नेता  नहीं देखा.  आप तो साक्षी हैं उसके.  हम लोग दिल्ली से चलते थे कि कल आंदोलन करना है, कल मुख्यमंत्री जी का घेराव करना है, तो हम दो व्यक्तियों को फोन करते थे.  एक सुरेन्द्र नाथ सिंह जी और  एक भगवानदास जी को.  उनसे कहते थे कि कल मुख्यमंत्री  जी का  घेराव करना है  और   हम ट्रेन से आते थे,  तो ये 100-200 लोग  तो हमें  लेने आते थे और वहीं से हम  फिर मुख्यमंत्री  जी  का घेराव करने चले जाते थे.  लाठी चार्ज वगैरह जो होता था,  फिर हम शिवराज सिंह जी  उस समय हॉस्पिटलाइज भी हुए थे. मतलब रात भर में  खाली सूचना कर दी,  500-600 लोगों को इकट्ठा  करना  और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करना,  ये दोनों ही इकट्ठे करते थे.  मुझे याद है कि जब कभी हम भोपाल आते थे,   भाई साहब, आप भोपाल में हो, मैंने कहा कि हां,  आप समता चौराहे आइये ना, आज  हमारे 8 मित्रों  के केक कटेंगे. रोज जिसका जन्म दिन  होता था,  उसके समता चौराहे पर  केक काटे जाते थे.  ऐसा एक दिन भी नहीं जाता था कि 8-10  केक  सुरेन्द्र सिंह मम्मा ने  नहीं काटे हों.  मैं बताऊं आपको कि  अगर उसकी गिनती हो जाये ना तो विश्व के अन्दर सबसे  ज्यादा केक काटने वाले  अगर कोई  व्यक्ति  थे, तो वह सुरेन्द्रनाथ सिंह मम्मा  थे, जो रोज केक काटते थे. किसी न किसी  का जन्मदिन होता ही था.  कभी 7 लोगों का केक काट रहे हैं,  कभी 4 लोगों का केक काट रहे हैं, केक वालों को बिलकुल आर्डर  होता था कि भाई  हमारा  आदमी आयेगा, केक दे देना.  मतलब एक नये प्रकार की राजनीति   वह करते थे. अच्छा उसका भी  ऐसा था कि  जब समता चौराहे  मैं वे बैठ जाते थे,  चाय आ रही है, यह आ रही है,  उसको सारे दुकानदार    उधार देते थे.  जेब में वह पैसे रखते नहीं थे, आपको भी मालूम है और फिर कहीं से भी जुगाड़  करके  सबका पैसा देते थे. मतलब होटल वाले  भी इतना विश्वास करते थे कि  मम्मा को सब उधार देते  थे.  मम्मा, मम्मा सरीखा  राजनेता मैंने जिंदगी  में नहीं देखा.  दुर्भाग्य से वे 3-4 साल से  संघर्ष कर रहे थे बीमारी से और वे हमारे बीच में नहीं रहे और  ऐसा कार्यकर्ता, नेता जो  सिर्फ जनता के लिये  जिये और  जनता के लिये अपना जीवन दे और  कार्यकर्ताओं के लिये जिये, मैंने अपनी जिंदगी  में नहीं देखा.  मैं तीनों ही संवेदना व्यक्त करता हूं और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि उनके परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति प्रदान करे. ओम शांति.

          श्री भगवानदास सबनानी(भोपाल दक्षिण पश्चिम)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, निश्चित रूप से आज का दिन हम सबके लिये दु:खद है ,क्योंकि आज सदन में निधन का उल्लेख है. अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि जिस कालेज में मैंने छात्रसंघ का चुनाव लड़ा , अध्यक्ष बना वह केरियर कालेज आदरणीय श्री विष्णु राजोरिया जी का था, उनसे मेरा संपर्क आया , बहुत स्नेह करते थे. हम विद्यार्थी परिषद के और वह कांग्रेस के नेता थे, लेकिन उनके भाव में कभी अंतर नहीं देखा. छात्रसंघ में कभी सहयोग की आवश्यकता पड़ी तो उसमें आगे बढ़ चढ़कर के वे सहयोग करते थे यह उनकी विशेषता थी, वे आज हमारे बीच में नहीं है, पूर्व मे वह मंत्री भी रहे हैं, मैं उनके प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं.

          अध्यक्ष महोदय, श्री सुरेन्द्रनाथ सिंह जी के बारे में निश्चित रूप से उप मुख्यमंत्री जी ने, डॉ.राजेन्द्र सिंह जी ने और माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी ने जो बात कही है, सही है. हम लोगों ने साथ में संघर्ष प्रारंभ किया, 1985 से 1990 के बीच का वह दौर था जब संघर्ष ही हमारे सामने था, संघर्ष करना, विद्यार्थी परिषद में कालेज का चुनाव लड़ना और लोगों के बीच में जाकर के सरकार के विरोध में आंदोलन करना, सुरेन्द्रनाथ सिंह जी इन सबमें अग्रिम पंक्ति में रहते थे, वे पोलिटेक्निक कॉलेज में पढ़ते थे और वहां से छात्रनेताओं का समूह हमीदिया कॉलेज पहले हुआ करता था आज वहां पर एमएलबी कॉलेज हो गया है, वहां से छात्रों को लेना और सरकार के विरूद्ध में उस दौर में, और मैं आज यहां पर उल्लेख करना चाहूंगा कि बोफोर्स का मामला हुआ, उस समय राजीव जी को भोपाल में पहली बार काले झंडे दिखाने का एक अभियान चलाया था उसका नेतृत्व भी भाई सुरेन्द्र नाथ सिंह जी ने किया था. जिस तरह से उनका व्यवहार था सबके साथ सरल, सबके साथ सब जैसे होकर के रहना, वे युवा मोर्चे के जिलाध्यक्ष रहे, युवा मोर्चे के प्रदेश के कार्यालय मंत्री रहे, पार्टी के जिलाध्यक्ष रहे. हम लोगों ने साथ में राजनैतिक सफर आरंभ किया , दोनों बार हम नगर निगम में पार्षद रहे, वे भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे, भारतीय जनता पार्टी के तीन बार जिलाध्यक्ष भी रहे, विधायक के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी का निर्वहन किया लेकिन जो उनकी विशेषता थी कि आंदोलन के दौरान कितने मुकदमे लगेंगे उसकी परवाह नहीं करते थे, लड़ना है, संघर्ष करना है, गरीबों के लिये काम करना है, संघर्ष के साथ गरीबों की मदद कराना यह भाव सुरेन्द्र नाथ सिंह जी में रहता था. रोज मिलते थे, वास्तव में हम सब जो उस दौर के उनके साथी रहे हैं उनके लिये बहुत कष्टप्रद है उनका इस दुनियां से इतनी जल्दी चले जाना. वास्तव में, जैसा कैलाश जी ने भी कहा है सुरेन्द्र नाथ सिंह जी जैसा कोई दूसरा व्यक्ति राजनीति के क्षेत्र में हमने भी आज तक नहीं देखा है कि जिस सरलता के साथ में वह लोगों से मिलते थे और गरीबों के लिये संघर्ष करके गरीबों को उनका हक दिलाना उनकी प्राथमिकता रहती थी. अध्यक्ष महोदय, प्रदेश में पटवा जी की सरकार थी, सरकार भारतीय जनता पार्टी की थी लेकिन लोगों की लड़ाई लड़ना, यह भूलकर के कि सरकार बीजेपी की है, और मैं बीजेपी का कार्यकर्ता हूं लेकिन गरीबों के हक के लिये लड़ना, मंत्रियों से जाकर के लड़ना कि हमको इन गरीबों की मदद करना है, इस भाव में भाई सुरेन्द्रनाथ सिंह जी काम करते थे, आज मैं कह सकता हूं कि अध्यक्ष जी आपके साथ, माननीय शिवराज सिंह जी के साथ, माननीय प्रहलाद सिंह जी के साथ,माननीय कैलाश जी के साथ सबके साथ उन्होंने काम किया है. आज उनकी कमी खलती है निश्चित रूप से इतनी जल्दी उनका जाना हम सबको कष्ट दे गया. मैं उनके श्रीचरणों में श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

          अध्यक्ष महोदय- अब सदन की ओर से शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं. अब सदन दो मिनट मौन रहकर दिवंगतों को श्रद्धांजलि अर्पित करेगा.

(सदन द्वारा दो मिनट खड़े रह कर दिवंगतों के  प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई)

          अध्यक्ष महोदय- ओम शांति, शांति, शांति. दिवंगतों के सम्मान में सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिये स्थगित.

                 (11.20 बजे से 10 मिनट के लिये सदन की कार्यवाही स्थगित हुई.)

 

11.30 बजे           {अध्‍यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

     तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

          अध्‍यक्ष महोदय  -- कृपया अब सभी लोग अपना स्‍थान ग्रहण कर लें. अब प्रश्‍न काल होगा. प्रश्‍न क्रमांक 1 श्रीमती उमादेवी जी खटीक.

          वन परिक्षेत्र सगोनी, हटा एवं दमोह में कराये गये कार्य

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1. ( *क्र. 677 ) श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक : क्या राज्‍य मंत्री, वन महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दमोह जिले की विधानसभा क्षेत्र हटा 57 अंतर्गत वन परिक्षेत्र सगोनी, हटा एवं दमोह में माह अप्रैल 2022 से जनवरी 2025 तक वृक्षारोपण, भू-जल संवर्धन, भूजल संरक्षण एवं वन्यजीवों को पेयजल की उपलब्धता के उद्देश्‍य से कितने निर्माण कार्य किस मद एवं योजना से स्वीकृत किये गये हैं एवं कितने कार्य पूर्ण किये गये हैं? सभी की वर्षवार कार्यवार सूची उपलब्ध करायें।(ख) इन कार्यों में कितनी राशि व्यय की गयी एवं कितनी राशि शेष है? कार्यवार विस्तृत जानकारी उपलब्ध करायें। (ग) क्या भुगतान से पहले इन कार्यों का भौतिक सत्यापन करवाया गया है? यदि हाँ, तो भौतिक सत्यापन का विस्तृत विवरण उपलब्ध करायें? यदि नहीं, तो कारण बतायें।  

राज्‍य मंत्री, वन ( श्री दिलीप अहिरवार ) : (क) स्वीकृत 37 कार्यों में से 10 कार्य पूर्ण हैं, शेष प्रश्‍नाधीन जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) व्यय की गयी राशि रुपये 3,95,30,913/- एवं शेष राशि 2,03,03,710/- है, प्रश्‍नांश की शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) जी हाँ। प्रश्‍नांश की शेष जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट              अनुसार है।

          श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 677 है.

          श्री दिलीप अहिरवार --  अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर प्रस्‍तुत है.

          श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से कहना चाहती हूं कि मेरी विधान सभा क्षेत्र हटा, 57 अंतर्गत् वन परिक्षेत्र सगोनी, हटा एवं दमोह में विभाग द्वारा कार्य स्‍वीकृत 2022-23, 2023-24 एवं 2024-25 के 37 कार्यों में से 10 कार्य पूर्ण कराना बताये गये हैं, इसमें किसी प्रकार की गुणवत्‍ता नहीं है और न ही कार्य जमीन पर दिखाई दे रहे हैं. माननीय मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि मेरी उपस्थिति में इन कार्यों का भौतिक सत्‍यापन कराया जावे एवं जो 27 कार्य शेष बचे हैं उन्‍हें जल्‍द से जल्‍द पूर्ण कराया जाए.

          श्री दिलीप अहिरवार -- अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍या को बता दूं कि जो भी काम विभाग के द्वारा होते हैं, उनका पूर्ण सत्‍यापन हमारे अधिकारियों के द्वारा किया जाता है तभी वह काम पूर्ण होते हैं और आपने जो बताया कि कुछ काम शेष हैं, तो मैं आपको बता दूं कि अलग-अलग 37 कार्यों की जानकारी आपने बताई है, 10 काम पूर्ण हो चुके हैं और शेष काम अभी जो बाकी हैं तो कुछ कारणों से हमारे जो विभिन्‍न प्रकार के वृक्षारोपण, भू-जल संरक्षण कार्य वन विभाग के कैम्‍पा मद से, चिल्‍ड्रन पार्क निर्माण लाभांश की राशि से तथा अमृत सरोवर तालाब निर्माण एवं मझगवां बांस वृक्षारोपण इस योजना से किये गये हैं और वृक्षारोपण कार्य अंतर्गत् पौधारोपण प्रचलित परिक्षेत्र दमोह में मनरेगा योजना अंतर्गत तालाब निर्मित किये जाएंगे. केन-बेतवा लिंक दोनों डेम परियोजना अंतर्गत् वृक्षारोपण क्षेत्र तैयारी कार्य की संपूर्ण राशि वित्‍तीय वर्ष 2024-25 में प्राप्‍त होने के कारण तथा मनरेगा मद से कराये जा रहे कार्य हेतु जॉबधारित मजदूरी नहीं मिलने के कारण कार्य अपूर्ण है तथा शीघ्रता के साथ हम यह पूरे कार्य पूर्ण कराएंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय  --  उमादेवी जी, दूसरा कोई पूरक प्रश्‍न.

          श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक -- अध्‍यक्ष महोदय, गर्मी का मौसम शुरू होने जा रहा है, कम से कम वन्‍य जीवों को पेयजल की उपलब्‍धता अनिवार्य है. मंत्री जी, जांच कराना भी अति आवश्‍यक है. क्‍या माननीय मंत्री जी जांच कराएंगे ?

          श्री दिलीप अहिरवार --  अध्‍यक्ष महोदय, वन जीवों की चिंता निरंतर हम करते हैं. वनजीवों के लिये हमारे वन विभाग के पूरे कैम्‍पसों में तालाब, तलैया में पानी की भरपूर मात्रा है. मैं विश्‍वास से इस सदन में कह सकता हूं कि वन जीवों के संरक्षण के लिये हमारा पूरा विभाग माननीय मुख्‍यमंत्री जी के मार्गदर्शन में बहुत अच्‍छे तरीके से कार्य कर रहा है और लगता है कि कहीं ऐसी समस्‍या आती है तो अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय सदस्‍या को मैं व्‍यक्तिगत मिलकर जहां पर वह बताएंगी, उसकी भी व्‍यवस्‍था करा देंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आज प्रश्‍नकाल महिलाओं के लिये है और जो पहली बार जीते हैं, उन सदस्‍यों के लिये है.

          संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्‍यक्ष महोदय, पहले 7 प्रश्‍न महिलाओं के हैं.

          श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक प्रश्‍न और है कि हमारी ग्राम पंचायत मडि़यादौह में पन्‍ना टाइगर रिजर्व का एक टाइगर सफारी का गेट बनाया जावे. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करती हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय  -- मंत्री जी, कुछ कहना चाहेंगे ?

          श्री दिलीप अहिरवार --  अध्‍यक्ष महोदय, बिल्‍कुल, मैं माननीय विधायक जी से मिल लूंगा और जहां भी, जो संभव होगा उनकी मदद करने का हम काम करेंगे.

          लघु वनोपज संघ द्वारा नलकूप खनन

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2. ( *क्र. 1723 ) श्रीमती अनुभा मुंजारे : क्या राज्‍य मंत्री, वन महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जिला लघु वनोपज संघ उत्‍तर बालाघाट में सप्‍लाई एवं नलकूप खनन आमंत्रित निविदा वर्ष 2020-21, 2021-22, 2022-23, 2023-24 एवं 2024-25 में संस्था/कंपनी को बगैर निविदा बुलाए, पुरानी दर से ही सामग्री प्रदान किये जाने का ठेका दिया गया? संपूर्ण सामग्री विवरण, दर सहित जानकारी दें। (ख) क्‍या वित्‍तीय वर्ष 2023-24 में जिला लघु वनोपज संघ उत्‍तर बालाघाट में नलकूप खनन में भ्रष्‍टाचार हुआ है? यदि हाँ, तो किन-किन अधि./कर्मचारियों के द्वारा भ्रष्‍टाचार किया गया? उनके नाम, पदनाम का विवरण दें। विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की जायेगी एवं दोषियों को कब तक निलंबित किया जायेगा? (ग) क्‍या वर्ष 2023-24 में जेम पोर्टल में बिड टेंडर 31 लाख रूपये था, किन्‍तु 1 करोड़ 87 लाख 89 हजार रूपये में निर्माण कार्यों के लिये ठेकेदार से सामग्री क्रय करना दिखाया गया, जो शासन के नियम विरूद्ध है? जिन अधि./कर्मचारियों द्वारा जो क्षति राज्‍य शासन को पहुंची है, उसकी भरपाई कोई करेगा? (घ) प्रश्‍न (क) से (ग) की जाँच हुई है तो जाँच प्रतिवेदन व संपूर्ण जानकारी देवें।

राज्‍य मंत्री, वन ( श्री दिलीप अहिरवार ) : (क) बालाघाट अंतर्गत जिला लघु वनोपज संघ उत्तर बालाघाट में वर्ष 2020-21, 2021-22, 2022-23, 2023-24 एवं 2024-25 में मटेरियल सप्लाई एवं नलकूप खनन हेतु कोई निविदा नहीं बुलाई गई है। विभागीय कार्यों हेतु उत्तर सामान्य वनमण्डल द्वारा आमंत्रित निविदा वर्ष 2020-21 के सफल L-1 निविदाकारों/सप्लायर्स से ही जिला लघु वनोपज संघ के निर्माण कार्यों के लिये सामग्री क्रय की गई है तथा वित्तीय वर्ष 2021-22 एवं 2022-23 में भी वर्ष 2020-21 की निविदा दर पर ही सामग्री संबंधित L-1 निविदाकारों/सप्लायर्स से प्राप्त की गई है। वर्ष 2023-24 में केम्पा मद के स्वीकृत विभागीय भवन निर्माण कार्य हेतु विभागीय आमंत्रित निविदा के सफल L-1 निविदाकारों/सप्लायर्स से ही जिला यूनियन के कार्यों की सामग्री प्राप्त की गई है। सामग्री का विवरण दर सहित पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1 एवं 2 अनुसार है। (ख) वित्तीय वर्ष 2023-24 में जिला लघु वनोपज संघ उत्तर बालाघाट में नलकूप खनन की प्रक्रिया में हुई वित्तीय अनियमितता के संबंध में वन मण्डलाधिकारी एवं पदेन प्रबंधक संचालक, जिला लघु वनोपज सहकारी यूनियन मर्यादित उत्तर बालाघाट के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रक्रिया में है। (ग) जी हाँ। उत्‍तरांश (ख) अनुसार। (घ) मुख्य वन संरक्षक एवं पदेन महाप्रबंधक, बालाघाट से प्राप्त जांच प्रतिवेदन पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 3 अनुसार है।

          श्रीमती अनुभा मुंजारे  --  अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न क्रमांक 1723 है.

            श्री दिलीप अहिरवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.

          श्रीमती अनुभा मुंजारे -- अध्यक्ष महोदय, विभाग ने स्वयं अपने उत्तर में स्वीकार किया है कि वर्ष 2020-21 के सफल एल-1 निविदाकारों से ही जिला लघु वनोपज संघ बालाघाट के निर्माण कार्यों के लिए सामग्री क्रय की गई है. किसी प्रकार की आगामी वर्षों में निविदा नहीं बुलाकर वर्ष 2020-21 से 2024-25 तक  एल-1 को ही किस आधार पर मटेरियल सप्लाई एवं नलकूप खनन का आदेश दिया गया है. जेम पोर्टल में बिड टेंडर 31 लाख रुपए था, किन्तु 1 करोड़ 87 लाख 89 हजार रुपये में निर्माण कार्यों के लिए ठेकेदार से सामग्री क्रय करना दिखाया गया है. इस संबंध में हुई वित्तीय अनियमितता में वन मण्डलाधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रक्रिया में होना बताया है. जिससे शासन को भारी आर्थिक हानि हुई है. इसके लिए कौन-कौन दोषी हैं. आज दिनांक तक उक्त अधिकारी पर क्या कार्यवाही की गई है, क्या उनका स्थानान्तरण अन्य स्थान पर कर दिया गया है. यदि हां तो कहां.

          श्री दिलीप अहिरवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से माननीय सदस्या को बताना चाहता हूँ कि बालाघाट अन्तर्गत जिला लघु वनोपज संघ उत्तर बालाघाट में वर्ष 2020-21,2021-22, 2022-23, 2023-24 एवं 2024-25 में मटेरियल सप्लाई एवं नलकूप खनन को लेकर जो विषय माननीय सदस्या ने रखा है. निश्चित रुप से यह बात सही है, मैं स्वीकार करता हूँ कि अनियमितताएं पाई गई हैं. उसकी जांच भी हुई है. हम शीघ्र ही उस पर कार्यवाही कराने का पूरा प्रयास कर रहे हैं.

          श्रीमती अनुभा मुंजारे -- अध्यक्ष महोदय, जिस अधिकारी पर वित्तीय अनियमतता के कारण अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रक्रिया में है उनका उसी स्थान पर पदस्थ होना यह बताता है कि विभाग स्वयं भ्रष्टाचार के विरुद्ध कठोर कार्यवाही नहीं करना चाहता है. क्या इस बात से इंकार किया जा सकता है कि वह अधिकारी जांच प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेंगे. मेरा मंत्री जी से विशेष अनुरोध है कि उक्त अधिकारी का शीघ्रातिशीघ्र अन्यत्र जिले में स्थानान्तरण किया जाए.

          श्री दिलीप अहिरवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारा विभाग माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में काम करता है. कहीं भी अनियमितताएं पाई जाती हैं तो किसी भी अधिकारी को हम किसी भी प्रकार से नहीं बख्शेंगे. आपको बताना चाहूंगा कि अनियमितताएं पाई गईं. अक्टूबर के पूर्व जाँच शुरु हुई है, दोषी भी पाया गया है. एक कमेटी  सीसीएफ के द्वारा अक्टूबर में  बनाई गई थी जिसमें महिला अधिकारी संध्या जी, डीएफओ थीं. निश्चित रुप से जो वहां के स्थानीय डीएफओ हैं अभिनव पल्लव उनके खिलाफ विभाग के द्वारा जांच हो रही है. शीघ्र हम कार्यवाही करने का काम करेंगे.

          श्रीमती अनुभा मुंजारे -- अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

राजस्‍व ग्रामों के अभिलेखों में सुधार

[वन]

3. ( *क्र. 933 ) श्रीमती मनीषा सिंह : क्या राज्‍य मंत्री, वन महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शहडोल संभाग के अंतर्गत किस-किस जिले में कितने-कितने राजस्‍व ग्रामों के राजस्‍व अभिलेखों को पटवारी मानचित्र में वर्ष 1980, 2000 एवं 2020 में कितनी-कितनी गैरखाते की दखल रहित जमीन दर्ज की है तथा यह जमीन किस-किस सार्वजनिक एवं निस्‍तारी प्रयोजनों के लिये किस-किस वन विभाग एवं गैर वन विभाग की जमीन के अंतर्गत है? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार पटवारी मानचित्र एवं राजस्‍व अभिलेखों में दर्ज कितनी-कितनी दखल रहित भूमि किस वनमण्‍डल के वर्किंग प्‍लान में शामिल कर वन विभाग के कब्‍जे में की गई है तथा इनमें से कितनी भूमियों की किस अनुविभागीय अधिकारी के समक्ष भा.व.अ. 1927 की धारा 5 से 19 तक जांच की गई है और कितने की जांच अभी तक लंबित है? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) अनुसार गैर खाते की दखल रहित जमीनों को वर्किंग प्‍लान में दर्ज करने, संरक्षित वन प्रतिवेदित करने, कब्‍जा करने की अनुमति कलेक्‍टर एवं आयुक्‍त ने किस-किस दिनांक को भू-राजस्‍व संहिता 1959 की किस धारा के अनुसार प्रदान की है? आदेश की छायाप्रति उपलब्‍ध करावें। (घ) प्रश्‍नांश (ग) अनुसार कलेक्‍टर शहडोल, उमरिया एवं अनूपपुर कब तक गैर खाते की वर्किंग प्‍लान में दर्ज भूमि वन विभाग को आवंटित करने का आदेश जारी करेंगे?

राज्‍य मंत्री, वन ( श्री दिलीप अहिरवार ) : -- (ख) शहडोल वृत्‍त की समस्‍त दखल रहित भूमियां रीवा राजदरबार की अधिसूचना दिनांक 08.02.1937 से संरक्षित वनभूमि है। प्रश्‍नांश की शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1 एवं 2 अनुसार है। (ग) समस्‍त दखल रहित भूमियां भू-राजस्‍व संहिता 1959 के प्रभावशील होने के पूर्व से रीवा राजदरबार की अधिसूचना दिनांक 08.02.1937 से संरक्षित वन है। भू-राजस्‍व संहिता धारा-1 (2) अनुसार राजस्‍व उगाही से संबंधित मामलों को छोड़कर शेष उपबंध संरक्षित/आरक्षित वन भूमि पर लागू नहीं होते हैं। (घ) उत्‍तरांग '' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

          श्रीमती मनीषा सिंह -- प्रश्न क्रमांक 933

          श्री दिलीप अहिरवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रखा है.

          श्रीमती मनीषा सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूँ कि शहडोल संभाग की किन जमीनों को राजपत्र में किस दिनांक को संरक्षित वन कानून की किस धारा के तहत अधिसूचित किया गया है. उत्तर में माननीय मंत्री जी का जवाब है कि रीवा राजदरबार की अधिसूचना दिनांक 08.02.1937 का हवाला दिया गया है. जबकि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 29 में संरक्षित वन की राजपत्र में अधिसूचना का प्रकाशन किए जाने का प्रावधान है. भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 20 (अ) के अनुसार आज तक प्रक्रिया ही निर्धारित नहीं हुई है. इसलिए अध्यक्ष महोदय, रीवा राज दरबार के 1937 के आदेश और धारा 29 के अनुसार अधिसूचना की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए. शहडोल संभाग के लिए राजपत्र में वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 34 (अ) के अनुसार राज्‍य पत्र में अधिसूचना प्रकाशित हुई मेरे पास अधिसूचनाओं का जो ब्‍योरा है उसमें 32 ऐसी अधिसूचनाओं का ब्‍योरा है लेकिन माननीय मंत्री जी की ओर से जो सूचना मुझे दी गई है उसमें सिर्फ तीन अधिसूचनाओं का ही उल्‍लेख किया गया है. पहला सवाल तो यह है कि धारा 34 (अ) की कितनी अधिसूचनाओं में कितनी जमीन डीनोटिफाइड की गई है. इसी से जुड़ा सवाल है कि डीनोटिफाइड जमीनों को वन विभाग ने अपने किस अभिलेख से संशोधित किया है. डीनोटिफाइड की गई इन जमीनों को वन विभाग वर्तमान में न्‍यायालय द्वारा आदेशित वन भूमि मान रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- मनीषा जी आप अपना प्रश्‍न करें आप पूरा पढ़ेंगी तो इसका कोई समुचित उत्‍तर नहीं आएगा.

          श्रीमती मनीषा सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, शहडोल संभाग की किन जमीनों को राजपत्र में किस दिनांक को कानून की किस धारा के अनुसार अधिसूचित किया गया है एवं निजी भूमि को वन खण्‍ड एवं वर्किंग प्‍लांट से पृथक करने बावत् वर्ष 2008 से राज्‍य मंत्रालय ने 6 आदेश जारी किये, लेकिन कितने ग्रामों में, कितने किसानों की इन निजी भूमियों को वन भूमि कैसे बताया जा रहा है. मेरा यह पूरक सवाल है.

          श्री दिलीप अहिरवार-- अध्‍यक्ष महोदय, हमारी माननीय सदस्‍या ने जो प्रश्‍न किया है उसका उत्‍तर भी उनके पास है. फिर भी मैं आपके माध्‍यम से बता दूं कि शहडोल संभाग के अंतर्गत राजपत्र में रीवा राजदरबार के अंतर्गत अधिसूचित आदेश जमीनों को सन् 1927 की धारा 29 के अनुसार अधिसूचित नहीं किये जाने का क्‍या कारण रहा है. सन् 1927 की धारा 20 (अ) में दिये गये प्रावधानों के अनुसार पूर्व के राजा महराजाओं के समय में संवेदित आदेशों को मान्‍य किये जाने का प्रावधान है अत: प्रत्‍यक्ष से धारा 29 की आवश्‍यकता नहीं है. उस समय के कालखण्‍ड की जो व्‍यवस्‍था थी उस हिसाब से हमने किया है. राजदरबार का जो आदेश है उस समय जब जंगल हुआ करते थे तो जो जंगल की भूमि थी वह हमारे वन विभाग में आई और जो हमारी खाली भूमि थी उस समय पर हमने वह छोड़ दी थी.

          अध्‍यक्ष महोदय-- मनीषा जी आप दूसरा प्रश्‍न करिये. आप पूरा लंबा बोलेंगी तो आपका प्रश्‍न नहीं आ पायेगा.

          श्रीमती मनीषा सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, इसमें वन भूमि में कितने ग्राम आ रहे हैं और राजस्‍व भूमि में कितने ग्राम आ रहे हैं इसका सीमांकन होना चाहिए और जितने भी किसान अभी वन भूमि में काबिज हैं उन्‍हें कोई आदेश भी नहीं है कि वह कहां जाएं. अगर उनको बेदखल कर दिया जाएगा तो उनके पास कोई भूमि ही नहीं रहेगी. यह सीमांकन होना चाहिए. चूंकि वहां आदिवासी और कई वर्ग के लोग काबिज हैं.

          श्री दिलीप अहिरवार-- बिलकुल आपने जो कहा है निश्चित रूप से व्‍यवस्‍थापन यह  वह प्रक्रिया है जो हम विभाग के द्वारा कर रहे हैं. शीघ्र राजस्‍व विभाग और हम बैठकर इसे करेंगे. निश्चित रूप से किसान को व्‍यवस्थित करने का काम करेंगे.

          श्रीमती मनीषा सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, उस अधिनियम के तहत हमारे शहडोल संभाग को वर्किंग प्‍लान में क्‍यों नहीं लिया गया, अधि‍सूचना क्‍यों जारी नहीं की गई? राजा महराजाओं द्वारा जो चिह्नित किया गया उसी के आधार पर अभी तक चल रहा है ज‍बकि वन अधिनियम के आधार पर इसे भी वहां लागू करना चाहिए था. यह कब तक होगा. यह लोगों के अधिकार का मामला है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- वैसे तो मंत्री जी ने उत्‍तर दे दिया है. मंत्री जी आप कुछ कहना चाहेंगे.

          श्री दिलीप अहिरवार-- अध्‍यक्ष महोदय,  मैंने पूर्व में भी कहा है और मैं फिर बताना चाहता हूं कि रीवा राजदरबार का आदेश भारतीय वन अधिनियम के अंतर्गत ही है. अत: पुन: अधिसूचन जारी करेंगे.

          श्रीमती मनीषा सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहती हूं कि इसमें एक कमेटी बनाई जाए.

         

एक जिला एक उत्पाद योजना

[उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण]

4. ( *क्र. 585 ) श्रीमती छाया गोविन्‍द मोरे : क्या उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खण्डवा जिले में एक जिला एक उत्पाद में शामिल प्याज की फसल पंधाना विधानसभा में भारी मात्रा में होने के कारण, क्षेत्र में प्याज भंडारण गृह निर्माण योजना से किसानों को लाभ पहुँचाने की क्या कार्य योजना है? (ख) क्‍या आदिवासी बाहुल्य विधानसभा क्षेत्र में प्याज प्रोसेसिंग कर उत्पाद बनाने के उद्योग लगाने की कोई कार्य योजना है? (ग) छैगांव माखन स्थित उप मण्डी में प्याज की खरीदी बिक्री कब से चालू करेंगे?

उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री ( श्री नारायण सिंह कुशवाह ) : (क) एकीकृत बागवानी मिशन योजनांतर्गत प्‍याज भण्‍डार गृह निर्माण हेतु ऑनलाईन आवेदन प्राप्‍त होने पर लॉटरी उपरान्‍त कृषकों को लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम राशि रूपये 1.75 लाख अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। (ख) जी हाँ। (ग) लाइसेंसधारी व्‍यापारियों की उपलब्‍धता होने पर उप मण्‍डी प्रांगण छैगांव माखन में प्‍याज की खरीदी बिक्री चालू हो सकेगी। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

          श्रीमती छाया गोविंद मोरे-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रणाम. सदन को जय श्री राम होली और रंगपंचमी की बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं मेरा प्रश्‍न क्रमांक 585 है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय सदस्‍या पूरक प्रश्‍न करें.

           श्रीमती छाया गोविंद मोरे-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो उत्‍तर पटल पर रखा है उसमें मैं (क) और (ख) से संतुष्‍ट हूं परंतु बिंदु क्रमांक (ग) का जवाब सही नहीं है और मैं उससे संतुष्‍ट भी नहीं हूं. इस संबंध में, मैं, बताना चाहूंगी कि छैगांव माखन स्थित उप मण्‍डी का निर्माण वर्ष 2013 में 10 एकड़ की भूमि पर करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा और लापरवाही के कारण मेरे क्षेत्र के किसानों को मण्‍डी की सुविधा का लाभ नहीं मिलने से उन्‍हें 20-25 किलोमीटर दूर खण्‍डवा, 60-70 किलोमीटर दूर बुरहानपुर या 100 किलोमीटर दूर इंदौर तक अपनी उपज को बेचने जाना पड़ता है. अत: मेरा निवेदन है कि इसमें दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही की जाये और उप मण्‍डी को शीघ्र प्रारंभ किया जाये, जिससे मेरे क्षेत्र के किसानों को वाजि़ब दाम पर, पास में ही अपनी उपज बेचने का अवसर मिल सके.

          श्री नारायण सिंह कुशवाह-  अध्‍यक्ष महोदय, इस उप मण्‍डी का निर्माण हुआ है और मेरी एम.डी. मण्‍डी और जिला कलेक्‍टर से खण्‍डवा में बात हुई है, मण्‍डी में कुछ काम अधूरे हैं परंतु खण्‍डवा में मण्‍डी संचालित है और इस मण्‍डी में काम करने के लिए प्रशासन ने एक-दो बार प्रयास किये लेकिन व्‍यापारी वहां आने को अभी तैयार नहीं है. परंतु मेरे द्वारा जो बात हुई है, उस पर मैंने निर्देश दिये हैं क्‍योंकि यह प्रश्‍न कृषि विभाग और उद्यानिकी विभाग का मिला-जुला है. कृषि विभाग के अंतर्गत ये सभी मण्डियां संचालित होती हैं. मैंने प्रयास किये हैं और निर्देश भी दिये हैं कि अतिशीघ्र व्‍यापरियों और किसानों को समझाकर उप मण्‍डी में क्रय-विक्रय का कार्य प्रारंभ किया जाये, ऐसी मेरे द्वारा कार्यवाही की गई है.

          श्रीमती छाया गोविंद मोरे-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी से कहना चाहूंगी कि पंधाना विधान सभा क्षेत्र में प्‍याज की खेती और सब्‍जी-भाजी की खेती बहुत अधिक होती है. किसानों को इनके विक्रय में दिक्‍कतों का सामना करना पड़ता है. मैं चाहती हूं कि हमारे छैगांव माखन की उप मण्‍डी को शीघ्र प्रारंभ किया जाये क्‍योंकि अधिकारियों द्वारा केवल गुमराह किया जा रहा है कि मण्‍डी में काम अधूरा है जबकि वहां कोई काम अधूरा नहीं है. मंत्री महोदय, आप इसे पुन: दिखवायें, मेरा ऐसा आपसे निवेदन है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं, पहली बार की विधान सभा सदस्‍य हूं, आपने मुझे सदन में बोलने का अवसर दिया, इसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री नारायण सिंह कुशवाह-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं कृषि मंत्री जी के साथ चर्चा करके जल्‍दी से जल्‍दी उस उप मण्‍डी को चालू करने का प्रयास करूंगा. वास्‍तव में वहां छोटे-छोटे किसान हैं, थोड़ी-थोड़ी सब्जियां बेचने के लिए उन्‍हें खण्‍डवा या अन्‍य स्‍थानों पर जाना पड़ता है, उनकी सुविधा के हिसाब से इस उप मण्‍डी का निर्माण किया गया है, उप मण्‍डी व्‍यवस्थित रूप से शीघ्र प्रारंभ हो, इसके लिए हम पूरा प्रयास करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय-  मैं, समझता हूं कि जब उप मण्‍डी का निर्माण हो चुका है, सरकार का पैसा लग गया है तो उसका उपयोग होना चाहिए. माननीय कृषि मंत्री एवं उद्यानिकी मंत्री जी संयुक्‍त रूप से इसमें ध्‍यान देंगे.

 

केला फसल बीमा का लाभ

[उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण]

        5. ( *क्र. 222 ) सुश्री मंजू राजेन्‍द्र दादू : क्या उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला बुरहानपुर में वर्ष 2018 में किसानों को केला फसल बीमा का लाभ मिल रहा था, जो वर्तमान में प्राप्त नहीं हो रहा है? किसानों को केला फसल बीमा का लाभ प्राप्त होने संबंधी शासन/विभाग की क्या विस्‍तृत कार्य योजना है? (ख) प्रदेश सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में कितने प्रस्ताव केला फसल बीमा का लाभ किसानों को देने हेतु भारत सरकार को भेजे गये हैं? जिला बुरहानपुर के ऐसे किसानों के नाम, ग्राम का नाम, कुल प्रभावित फसल एवं भेजे गये प्रस्ताव की सूची उपलब्ध करायें। (ग) क्या पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र की तरह म.प्र. में भी केला फसल बीमा योजना लागू की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक एवं इसके क्या मापदंड होंगे? (घ) क्या राज्य सरकार ने केला फसल बीमा लागू किये जाने हेतु कोई टेंडर जारी किये गये हैं? यदि हाँ, तो विस्तृत जानकारी देवें।

        उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण मंत्री ( श्री नारायण सिंह कुशवाह ) : (क) जी हाँ। भारत सरकार के नवीन दिशा-निर्देशानुसार Weather Information and Data Network System (WINDS) Manual 2023 योजना के अंतर्गत कृषि विभाग द्वारा तहसील स्तर पर Automatic Weather Station (A.W.S.) एवं ग्राम पंचायत स्तर पर Automatic Rain Guage (A.R.G.) स्थापित करने के संबंध में कार्यवाही प्रचलन में है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) जी नहीं। शेषांश का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता। (ग) मध्यप्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पूर्व से लागू है। पृथक से फसल बीमा योजना बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। (घ) खरीफ वर्ष 2020 से रबी 2022-23 के लिये 6 बार टेण्डर जारी किये गये, परन्तु बीमा दरें अधिक आने के कारण योजना का क्रियान्वयन नहीं किया जा सका। टेण्‍डर की प्रति/जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। रबी 2022-23 से रबी 2023-24 के लिये निविदा आमंत्रित की गई, परन्तु एक ही निविदा प्राप्त होने के कारण निविदा नहीं खोली गई। निविदा की प्रति/जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। खरीफ 2023-24 से रबी 2025-26 के लिये निविदा आमंत्रित की गई, किन्तु भारत सरकार के परिपत्र क्रमांक F.No.11019/04/2019-Credit-II, दिनांक 30.06.2023 के अनुक्रम में कार्यवाही प्रचलन में है। परिपत्र/जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

          सुश्री मंजू राजेन्‍द्र दादू-  धन्‍यवाद अध्‍यक्ष महोदय. जय मठुआ. मेरा प्रश्‍न क्रमांक 222 है.

          श्री नारायण सिंह कुशवाह-  अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर सदन के पटल पर प्रस्‍तुत है.

          सुश्री मंजू राजेन्‍द्र दादू-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, सर्वप्रथम मध्‍यप्रदेश सरकार को धन्‍यवाद देना चाहूंगी कि उन्‍होंने हमेशा किसानों के लिए सोचा है और हमेशा किसान हितैषी सरकार रही है.

          अध्‍यक्ष महोदय, ,मैं मंत्री जी से यह पूछना चाहती हूं कि मध्‍यप्रदेश सरकार ने इस वित्‍तीय वर्ष में कितने प्रस्‍ताव, केला फसल बीमा का लाभ किसानों को देने हेतु भारत सरकार को भेजे गए हैं. उसमें जिला बुरहानपुर में से कितने किसानों के नाम हैं, मेरे द्वारा ग्रामवार जानकारी मांगी गई थी, जिसका उत्‍तर मुझे अप्राप्‍त है. इससे पूर्व लोकसभा सांसद खण्‍डवा, द्वारा लोकसभा में यह प्रश्‍न उठाया गया था तो आदरणीय पूर्व मुख्‍यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी जो वर्तमान में केन्‍द्रीय कृषि मंत्री हैं, तो उनका उत्‍तर यह था कि मध्‍यप्रदेश सरकार द्वारा प्रस्‍ताव भारत सरकार को भेजा जाये, उसके बाद ही हम आगे की प्रोसेस करेंगे. मैं मंत्री महोदय जी से यह पूछना चाहूँगी कि हम लोग वर्ष 2018 से परेशान हैं, क्‍योंकि हर बार टेण्‍डर होता है और कोई टेण्‍डर नहीं लेता है, जिसके कारण किसानों को बहुत नुकसान होता है.

          अध्‍यक्ष महोदय - मंजू जी, आप बैठिये. मंत्री जी को जवाब आ जाने दीजिये, आपका प्रश्‍न आ गया है.

          श्री नारायण सिंह कुशवाह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विभाग की जानकारी के अनुसार केन्‍द्र सरकार को किसानों के जो प्रस्‍ताव बताए गए हैं, यह भेजना नहीं बताया गया है, क्‍योंकि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रकरणों की जानकारी केन्‍द्र सरकार को नहीं भेजी गई है. इसमें मैं यह बता दूँ कि एक बड़ी अच्‍छी कार्यवाही हुई है, केन्‍द्र सरकार के निर्देश से टेण्‍डर की प्रक्रिया 6 बार हुई और उन टेण्‍डरों की दरें अधिक होने के कारण वह पास नहीं हो पाए, पर कृषि विभाग के अंतर्गत एक समिति का दिनांक 21.8.2024 को गठन हुआ है और यह समिति काम कर रही है, इसकी बैठक भी अतिशीघ्र होने वाली है, यह बिड लगायेगी और इसके संबंध में टेण्‍डर की प्रक्रिया चल रही है और आगे चलेगी भी.

          सुश्री मंजू राजेन्‍द्र दादू - माननीय अध्‍यक्ष जी, इसके लिए धन्‍यवाद. मैं बस इतना ही कहना चाहूँगी कि टेण्‍डर के प्रोसेस जल्‍द से जल्‍द हों और अगर टेण्‍डर नहीं निकल पा रहा है तो उसमें कोई संशोधन करके या कुछ नियम में परिवर्तन किये जायें. आपका बहुत धन्‍यवाद कि 'एक जिला, एक उत्‍पाद' में 'केला' को बुरहानपुर जिले में लिया गया और ऐसी फसल जिसको हम 50 रुपये से 100 रुपये तक बड़ा करने में लगाते हैं, ऐसी फसल का नुकसान होता है, तो किसानों की जिन्‍दगी में मायूसी छा जाती है, तो टेण्‍डर प्रोसेस और कमेटी का गठन किया गया है, उसके लिए आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय - श्रीमती अर्चना चिटनीस जी. माननीय मंत्री जी, आप दोनों सदस्‍यों के प्रश्‍नों का एक साथ ही उत्‍तर दे देना. 

          श्रीमती अर्चना चिटनीस - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछली बार मैंने भी इस पर प्रश्‍न किया था एवं ध्‍यानाकर्षण भी लगाया था. मंत्री जी, आप समय-सीमा बता दें कि किस समय-सीमा में भारत सरकार को आप प्रस्‍ताव भेज देंगे, क्‍योंकि हमारे पूर्व मुख्‍यमंत्री इस समय केन्‍द्रीय कृषि मंत्री हैं. यदि हमारी तरफ से प्रस्‍ताव जायेगा, तो भारत सरकार की ओर से उसमें अनुकूल निर्णय होगा. 7 वर्षों से उद्यानिकी फसलों का बीमा नहीं हुआ है, टेण्‍डर वगैरह करके भी, वह तो दो वर्ष पुरानी कहानी है, जो आप टेण्‍डर की बता रहे हैं. टेण्‍डर जल्‍दी हों, प्रस्‍ताव भारत सरकार को जल्‍दी जायें. पूरे प्रदेश में उद्यानिकी फसलें इतनी व्‍यापक तरीके से, तेज गति से आगे बढ़ रही हैं और माननीय प्रधानमंत्री जी की महत्‍वाकांक्षी योजना मध्‍यप्रदेश में उद्यानिकी फसलों के बीमा की हम क्रियान्वित कर सकें. मंत्री जी, आप कृपा कर उसकी समय-सीमा बताने का कष्‍ट करें.

          श्री नारायण सिंह कुशवाह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसानों की फसलों की क्षति अगर होती है और हुई है, तो मध्‍यप्रदेश सरकार ने धारा 6 (4) के अंतर्गत उनकी मदद करने का काम किया है. मेरी आज सुबह ही चर्चा हुई है, तो टेण्‍डर की प्रक्रिया के संबंध में इसकी बैठक अप्रैल के महीने में हो जायेगी और मैं ऐसा समझता हूँ कि केन्‍द्र सरकार को भी उस प्रक्रिया के बारे में अप्रैल माह में ही यह प्रस्‍ताव चला जायेगा. 

          अध्‍यक्ष महोदय - मैं समझता हूँ कि अब मंत्री जी ने समय-सीमा बता दी है. लेकिन प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मामले में संबंधित विभागों को बहुत ही गंभीरता से हमको विचार करना चाहिए, क्‍योंकि यह एक बड़ा सुरक्षा कवच है. भगवान न करे, कि कभी ऐसी आपदा आये और किसान को नुकसान हो. लेकिन अगर कभी नुकसान होता है तो यह हमारे हाथ में नहीं है, इसलिए यह एक बड़ा सुरक्षा कवच है. यहां पर श्री तुलसी सिलावट जी और श्री कैलाश विजयवर्गीय जी बैठे हुए हैं. मुझे ध्‍यान है कि 2-3 वर्ष पहले हम लोग इन्‍दौर-देवास के बॉर्डर पर एक कार्यक्रम में गए थे, उससे पहले मध्‍यप्रदेश में ओला पड़ा था. और आपके इंदौर संभाग में ही लगभग 7 हजार करोड़ रुपये का मुआवजा एक दिन में वितरित किया गया था. मतलब एक तरह से इतनी बड़ी राशि जो किसानों को मिल सकती है तो इस मामले में थोड़ी त्‍वरित कार्यवाही हमें करनी चाहिए.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्‍यक्ष जी, आपके सुझाव से मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को अवगत भी करा दूंगा.

          दिव्यांगजनों को मिलने वाली पेंशन व उपकरण

            [सामाजिक न्याय एवं दिव्‍यांगजन कल्‍याण]

6. ( *क्र. 2184 ) श्रीमती सेना महेश पटेल : क्या सामाजिक न्‍याय एवं दिव्‍यांगजन कल्‍याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अलीराजपुर जिले में वर्ष 2021 से प्रश्‍न दिनांक तक कितने दिव्यांगजन हैं? क्या दिव्यागंजन उपकरण प्रदाय किये गये हैं? यदि हाँ, तो वर्षवार, विकास खण्डवार संख्या एवं किस-किस प्रकार के उपकरण दिये गये हैं? सूची उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्‍न (क) अनुसार कितने दिव्यागंजनों को उपकरण उपलब्ध नहीं करवाये गये हैं? विकास खण्ड वार संख्या एवं सूची उपलब्ध करावें। (ग) क्या विगत वर्षों में एलिम्को जबलपुर द्वारा जिले में लगाये गये शिविरों में शत-प्रतिशत दिव्यांगजनों को परीक्षण कर उपकरण उपलब्ध कराये गये थे? यदि हाँ, तो वर्ष 2025 में पुनः एलिम्को उज्जैन द्वारा लगाये जाने वाले शिविर में क्या नवीन दिव्यागजंन के प्रमाण पत्र जारी कर चिन्हित किया गया है? यदि हाँ, तो सूची उपलब्ध करावें। (घ) दिव्यांगजनों को मिलने वाली पेंशन 600 रूपये से उनका गुजारा संभव नहीं है, क्या पेंशन को बढ़ाने का कोई प्रावधान सरकार की तरफ से किया गया है? यदि हाँ, तो कब तक? अवधि बतावें नहीं तो कब तक किया जावेगा?  

सामाजिक न्‍याय एवं दिव्‍यांगजन कल्‍याण मंत्री ( श्री नारायण सिंह कुशवाह ) :                                       (क) 6568 दिव्यांगजन है। जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) 6017 दिव्‍यांगजनों को। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।                       (ग) भारत सरकार के उपक्रम भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्‍को) द्वारा पात्रतानुसार दिव्‍यांगजनों का चिन्‍हांकन किया जाकर कृत्रिम अंग/सहायक उपकरण वितरण किये जाते हैं, यह निरंतर प्रक्रिया है। वर्ष 2025 में एलिम्‍को संस्‍थान द्वारा लगाये शिविर में नवीन दिव्‍यांगजनों के प्रमाण-पत्र/यू.डी.आई.डी. जारी किये गये हैंजानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) दिव्‍यांगजनों को प्रदाय की जाने वाली पेंशन राशि रूपये 600/- में वृद्धि का प्रस्‍ताव है, वर्तमान परिप्रेक्ष्‍य में पेंशन राशि में वृद्धि वित्‍त विभाग स्‍तर पर स्‍थगित रखा गया है, सामाजिक न्‍याय एवं दिव्‍यांगजन सशक्तिकरण विभाग स्‍तर से समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

          श्रीमती सेना महेश पटेल -- धन्‍यवाद अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न क्रमांक 2184 है.

          श्री नारायण सिंह कुशवाह -- अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर पटल पर रखा है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आज नारायण सिंह कुशवाह जी के विभाग के ज्‍यादा प्रश्‍न लगे हैं.

          श्रीमती सेना महेश पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, अलीराजपुर जिले में दिव्‍यांगजनों को उपकरण वितरण हेतु एडिप वयोश्री योजना के अंतर्गत शिविर लगाए जाते हैं. किंतु क्षेत्र में व्‍यापक प्रचार-प्रसार नहीं होने के कारण कई बार दिव्‍यांगजनों को जानकारी नहीं होने पर प्रशिक्षण नहीं हो पाता है, जिससे वे उपकरण लेने के लिए उपस्‍थित नहीं हो पाते और योजना के लाभ से वंचित रह जाते हैं.

          श्री नारायण सिंह कुशवाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रक्रिया सरकार की निरंतर प्रक्रिया है. अभी वर्ष 2024 में ही ब्‍लॉक स्‍तर पर ये शिविर लगाए गए और दिव्‍यांगजनों को चिह्नांकित भी किया गया है तथा जिनको जिस यंत्र की आवश्‍यकता है, उनको यंत्र वितरण करने का काम किया गया है. अलीराजपुर में कहीं अगर कोई छूट गया है तो फिर से दोबारा अप्रैल के ही माह में सभी विकासखण्‍डों में इसके शिविर लगाकर के और जितने दिव्‍यांगजन वंचित रह गए हैं, उन सभी को चिह्नांकित करवाकर एलिम्‍को कंपनी से यंत्रों का वितरण शत प्रतिशत करवा दिया जाएगा.

          श्रीमती सेना महेश पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, अलीराजपुर जिले के विधान सभा क्षेत्र जोबट के अंतर्गत मूकबधिर बच्‍चों की संख्‍या भी काफी है. मूकबधिर बच्‍चे अपने जीवन में बहुत ज्‍यादा पीड़ा उठा रहे हैं. मैं सरकार से यह मांग करती हूँ कि उनके लिए भी कोई विशेष प्रावधान किए जाएं ताकि उन मूकबधिर बच्‍चों को भी जीवन जीने का अवसर मिले और वे बहुत अच्‍छे से मूवमेंट करके पढ़ाई करते हैं तो उनके लिए कोई विशेष प्रावधान किए जाएं.

          श्री नारायण सिंह कुशवाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने जो बात बताई है तो मैं अधिकारियों को निर्देश दूंगा. वैसे तो मूकबधिर, अस्‍थिबाधित, दृष्‍टिबाधित दिव्‍यांगजनों के लिए सारी चीजें हैं, पर उन्‍हें कहीं श्रवणयंत्र या दूसरे और तरह की उनके शिक्षा के लिए किसी भी तरह की आवश्‍यकता होगी, उनकी प्रतिपूर्ति हम पूरी तरह से कराएंगे. जिले में जो अधिकारी हैं, मैं उन्‍हें निर्देश भी दूंगा कि वे आपसे संपर्क करें और कहां ऐसे दिव्‍यांगजन हैं, जिन्‍हें सुविधा मिलनी है, उन्‍हें पूरी तरह से सुविधा दिलवाएंगे.

          अनु.जाति कन्‍या उत्‍कृष्‍ट छात्रावास

         [अनुसूचित जाति कल्याण]

7. ( *क्र. 1425 ) श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर : क्या अनुसूचित जाति कल्‍याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या अनु.जाति कन्‍या उत्‍कृष्‍ट छात्रावास जतारा एवं सीनियर अनु. जाति कन्‍या छात्रावास जतारा एवं बालक छात्रावास डूड़ा में अधीक्षकों के पदों पर नियुक्‍त अधीक्षक शिक्षा विभाग के कर्मचारी तैनात हैं? यदि हाँ, तो इनकी पदस्‍थापना किस सन् में की गई? यदि नहीं, है तो इनका संविलि‍यन शिक्षा विभाग से अनु.जाति कल्‍याण विभाग में किस नियम या किस पात्रता के अनुसार हुआ है? समस्‍त आदेशों सहित जानकारी उपलब्‍ध करायें। (ख) क्‍या टीकमगढ़ जिले में मात्र एक ही परिवार के तीनों कर्मचारी शासन के नियमों में उचित पाये गये और अनु.जाति विभाग में शिक्षा विभाग से संविलि‍यन किया गया? क्‍या शिक्षा विभाग द्वारा या अनु.जाति विभाग द्वारा कोई पात्रता परीक्षा आयोजित की गई थी? किस आधार पर एक ही परिवार के तीनों व्‍यक्तियों को अनु. जाति विभाग के छात्रावासों में अधीक्षक बनाया गया? (ग) क्‍या अनु. जाति कन्‍या उत्‍कृष्‍ट छात्रावास जतारा में एवं सीनियर अनु. जाति कन्‍या छात्रावास जतारा में इन अधीक्षकों के द्वारा छात्रावासों में बाहरी व्‍यक्तियों को प्रवेश देकर अनैतिक कार्यों को संचालित किया जाता है? इनकी जांच करायेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) इन तीनों छात्रावासों को शासन की ओर से वर्ष 2018 से प्रश्‍न दिनांक तक कितनी राशि छात्रों के हित एवं सुविधाओं हेतु जारी की गई है? मदवार जानकारी देवें तथा व्‍यय की राशि के बिल, वाउचरों सहित पदावली उपलब्‍ध कराते हुये, इन तीनों छात्रावासों की गहन जांच हेतु क्षेत्रीय विधायक को शामिल करते हुये जांच करायेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

अनुसूचित जाति कल्‍याण मंत्री ( श्री नागर सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) जी नहीं। शिकायत प्राप्‍त होने पर कार्यवाही की जाती है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। प्रश्‍नांश जांच संबंधी कोई कार्यवाही प्रक्रियाधीन नहीं है।

          अध्‍यक्ष महोदय -- एकदम प्रश्‍न करना, सटीक पूछना, एक ही मिनट बचा है.

          श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर -- अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न क्रमांक 1425 है.

          श्री नागर सिंह चौहान -- उत्‍तर पटल पर रखता हूँ.

          श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न है कि सीनियर छात्रावास, जतारा में अधीक्षक के पद पर भारती वर्मा ने दिनांक 24.09.2021 को प्रभार लिया था. इनके द्वारा जून, जुलाई, अगस्‍त, सितंबर के महीनों के बिल फर्जी बनाकर राशि आहरण कर फर्जीवाड़ा किया गया है. इनके विरुद्ध कार्यवाही क्‍यों नहीं हुई एवं नारायण दास वंशकार को शिक्षा विभाग से प्रतिनियुक्‍ति पर दिनांक 24.08.2019 को भेजा गया था. प्रतिनियुक्‍ति दो वर्ष के लिए होती है. फिर भी इन्‍होंने राजनेताओं का सहारा लेकर विभाग से गोलमाल आदेश कराकर दो वर्ष की अवधि बढ़ा ली, समय पूरा हो जाने के बाद भी इन्‍हें मूल विभाग में क्‍यों नहीं भेजा गया है ?

            अध्‍यक्ष महोदय -- बस, बस, कृपया बैठिए, मंत्री जी कुछ बोलना चाहेंगे.

          श्री नागर सिंह चौहान -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍या जी ने जो प्रश्‍न किया है कि वहां पर छात्रावास के जो बच्‍चे हैं, उनकी खरीदी में कहीं लापरवाही हुई है, अध्‍यक्ष महोदय, वहां पर कोई भी ऐसी लिखित शिकायत नहीं हुई है. अगर वहां पर लिखित शिकायत आएगी तो मैं समझता हूँ कि उसकी जांच करेंगे और जांच में अगर दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कार्यवाही करेंगे.

          श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर --अध्‍यक्ष महोदय, आपकी व्‍यवस्‍था..

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

 

12.00 बजे                                  नियम 267-क के अधीन विषय

          अध्यक्ष महोदय - निम्नलिखित माननीय सदस्यों की शून्यकाल की सूचनाएं सदन

में पढ़ी हुई मानी जायेंगी :-

            क्रमांक                     सदस्य का नाम

          1.                          श्री प्रताप ग्रेवाल

          2.                          श्री राजेन्द्र भारती

          3.                          श्री प्रदीप अग्रवाल

          4.                          श्री बाला बच्चन

          5.                          श्री दिनेश गुर्जर

          6.                          डॉ.रामकिशोर दोगने

          7.                          श्री माधव सिंह(मधु गहलोत)

          8.                          श्री मोहन सिंह राठौर

          9.                          श्री भैरों सिंह "बापू"

            10.                        श्री यादवेन्द्र सिंह

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.01 बजे                             पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) मध्यप्रदेश असंगठित शहरी एवं ग्रामीण कर्मकार कल्याण मण्डल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2023-2024

(2)  मध्यप्रदेश राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे वित्तीय वर्ष 2020-2021 एवं 2021-2022

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(3) मध्यप्रदेश वेअरहाउसिंग एण्ड लॉजिस्टिक्स कार्पोरेशन का 20 वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं हिसाब-पत्रक वित्तीय वर्ष 2022-2023 एवं मध्यप्रदेश राज्य खाद्य आयोग,  भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2023-2024

 

(4) मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, भोपाल का 22वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2023-2024

 

 

 

 

 

(5 ) अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा (म.प्र.) का 56 वां वार्षिक प्रगति प्रतिवेदन वर्ष 2023-2024

               

(6) मध्यप्रदेश राज्य जैवविविधता बोर्ड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2023-2024

           

                  

         

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.04 बजे


 

          अध्‍यक्ष महोदय-- अब, इसके संबंध में श्री कैलाश विजयवर्गीय, संसदीय कार्य मंत्री, प्रस्‍ताव करेंगे.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय, संसदीय कार्य मंत्री--  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, प्रस्‍ताव करता हूं कि-

          अभी अध्‍यक्ष महोदय ने शासकीय विधेयक एवं वर्ष 2025-26 के आय-व्‍ययक में सम्मिलित मंत्रियों की विभिन्‍न मांग समूहों पर चर्चा के लिये समय निर्धारण करने के संबंध में कार्य मंत्रणा समिति की जो सिफारिशें पढ़कर सुनाईं, उन्‍हें सदन स्‍वीकृति देता है.

          अध्‍यक्ष महोदय--  प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ, प्रश्‍न यह है कि-

          जिन शासकीय विधेयक एवं वर्ष 2025-26 के आय-व्‍ययक में सम्मिलित मंत्रियों की विभिन्‍न मांग समूहों पर चर्चा के लिये समय निर्धारण करने के संबंध में कार्य मंत्रणा समिति की जो सिफारिशें पढ़कर सुनाईं उन्‍हें सदन स्‍वीकृति देता है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय--  अध्‍यक्ष महोदय, इसमें तो सर्वानुमति, नेता प्रतिपक्ष भी साथ में रहते हैं.

          प्रस्‍ताव सर्वानुमति से स्‍वीकृत हुआ.

12.08 बजे                           ध्‍यानाकर्षण

1.     भिण्‍ड में पदस्‍थ मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के महाप्रबंधक की लापरवाही से विद्युत क‍टौती होने विषयक.

          श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह (भिण्‍ड)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

            ऊर्जा मंत्री( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

                                                                                     


 

 


                                                                                           

अध्‍यक्ष महोदय माननीय सदस्‍य पूरक प्रश्‍न करें.

श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह अध्‍यक्ष जी, माननीय मंत्री जी ने जो जानकारी दी है, इनके खिलाफ हम कार्यवाही चाह रहे हैं, वह इतना भ्रष्‍ट अधिकारी है, उसकी 23 डीपी मैंने पकड़ी थी, पेपर देखिए दैनिक भास्‍कर में. भिण्‍ड में डीपी नहीं है, डीपी 30 किलोमीटर दूर गांव में डीपी पकड़कर जनता को डीपी सौंपी गई थी और ऐसे भ्रष्‍ट अधिकारी को आप बचा रहे हो, उसने जो लिखकर दे दिया वह वाच रहे हो आप, जो ट्रांसफार्मर थे वह वर्ष 2023 में योजना मंजूर हुई थी.

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) कुशवाह जी, उर्जा का प्रश्‍न है ज्‍यादा ऊर्जा लगाने की जरुरत  नहीं धीरे...(..हंसी)

अध्‍यक्ष महोदय माननीय सदस्‍य आपका प्रश्‍न क्‍या है.

श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह अध्‍यक्ष जी, मेरा निवेदन है कि ये भ्रष्‍टाचार का मामला है. इतने बड़े भ्रष्‍ट अधिकारी को आप बार बार बचाते क्‍यों हो, निवेदन है कि उस अधिकारी को सस्‍पेंड करके जांच करवाई जाए. उसने एक एक लाख की 20 करोड़ की फाइलें बनाई हैं, आप जांच नहीं कर रहे, वही जवाब पहले आया और वही जवाब आज आ गया. आप कार्यवाही करे. सस्‍पेंड करके जांच करवा लो.

अध्‍यक्ष महोदय आपका प्रश्‍न आ गया है, माननीय मंत्री जी को उत्‍तर देने दीजिए.

          श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर अध्‍यक्ष जी के माध्‍यम से मैं माननीय सदस्‍य की भावनाओं को ध्‍यान में रखते हुए यह आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं कि जो आपने कमियां बताई है, उसकी हम विधिवत अच्‍छी और प्रदेश लेवल की कमेटी से जांच भी करवाएंगे, ये आश्‍वस्‍त मैं करता हूं और यह भी आश्‍वस्‍त करता हूं कि 31 मार्च को हमारा जो वसूली का जो अभियान चल रहा है, इसके बाद उसको हटाकर के हम जांच करवा देंगे.

        श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह अध्‍यक्ष जी, मेरा निवेदन है कि उसका ट्रांसफर कर दो, सस्‍पेंड नहीं कर रहे हैं तो, कुछ तो करो. भ्रष्‍ट अधिकारी को क्‍यों बचा रहे हो. मैं यह कह रहा हूं कि 20 करोड़ का ..अध्‍यक्ष जी आपका संरक्षण चाहता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय नरेन्‍द्र सिंह जी, मंत्री जी ने कहा है कि वरिष्‍ठ अधिकारियों से जांच करवा लेंगे और दूसरा वसूली अभियान चल रहा है, 31 मार्च के बाद उसको हटा देंगे. मैं समझता हूं कि उत्‍तर उपयुक्‍त है.

          श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह अध्‍यक्ष जी, आज हटाओ न, आज क्‍या जा रहा है. मंत्री महोदय खुश हो तो बता दें.

          श्री भंवर सिंह शेखावत अध्‍यक्ष जी, एक करोड़ रुपए  विधायक ने दिया मंत्री जी कह रहे हैं कि विधायक निधि से काम हुआ नहीं, तो वह रुपया गया कहां. इतने भ्रष्‍ट आदमी को बचाने के लिए हमारे कैलाश जी खड़े हो जाते हैं और सदस्‍य को कह रहे हैं कि आप ऊर्जा मत बताओ, ऊर्जा क्‍या बताएं बेचारा वह तो लुट गया. (...हंसी)

          श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह अध्‍यक्ष जी, ये बहुत भ्रष्‍ट अधिकारी है. मंत्री महोदय, हमारे पास एक नहीं इसके अनेक प्रमाण है. आप बार बार बचा रहे हो उसको क्‍यों बचा रहे हो. अभी घोषणा कर दो हिम्‍मत के साथ .

          अध्‍यक्ष महोदय सदस्‍य महोदय बैठ जाइए, मंत्री जी कुछ कहना चाहते हैं?

          श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर अध्‍यक्ष जी, मैं आपके माध्‍यम से सम्‍माननीय सदस्‍य की भावना को लेकर फिर ये कह रहा हूं कि मैं जांच भी कराऊंगा उच्च स्तरीय कमेटी से जांच से आपको अवगत भी कराऊंगा यह भी विश्वास दे रहा हूं. दोषी होगा तो उनके ऊपर कड़ी कार्यवाही करूंगा, यह भी आश्वस्त कर रहा हूं. दूसरा यह भी आश्वस्त कर रहा हूं कि 31 मार्च को आज माननीय 18 तारीख हो गई है. आपको आश्वस्त कर रहा हूं कि 31 तारीख को हटा देंगे.

          श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाहअध्यक्ष महोदय, मैंने एक शिकायत की थी सीएमडी से 26 तारीख को, दूसरी शिकायत की थी भिण्ड के प्रभारी मंत्री आदरणीय प्रहलाद पटेल जी से, तीसरी शिकायत की थी मुरैना में संभागीय समीक्षा बैठक में सचिव जी से, चौथी शिकायत की थी माननीय मंत्री जी से. मैं इनकी चार बार शिकायत कर चुका हूं. तब भी आपने इनकी जांच नहीं कराई. आज आप उनको निलंबित करें. अभी घोषणा कर दीजिये, कुछ भी नहीं बिगड़ने वाला है.

          डॉ.तेजबहादुर सिंह चौहानअध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी का ध्यानाकर्षित करना चाह रहा हूं कि मध्यप्रदेश विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों के द्वारा इस तरीके की असत्य जानकारी लगातार दी जा रही है. मेरा भी कल प्रश्न था. मैं जानना चाहता था कि खाचरोद-नागदा में कितने गांव को ब्रेक आऊट किया. उन्होंने जानकारी दी है कि एक भी गांव को नहीं किया है. जब कि 25 गांवों को इन्होंने ब्रेक आऊट किया है. असत्य जानकारी, गुमराह करते हैं. गांव में लगातार व्यावसायिक प्रकरण बनाये जा रहे हैं किसानों को परेशान किया जा रहा है. जबकि गांव में किसी ने पानी, बीड़ी, सिगरेट की दुकान लगा ली है, वह घर पर ही रहता है परचूनी का छोटा सा व्यापार कर रहा है. उन पर कौन से व्यावसायिक प्रकरण बनने चाहिये. लेकिन लगातार एम.पी.ई.बी. इस तरीके के काम कर रही है.

          अध्यक्ष महोदयकृपया बैठिये. नरेन्द्र सिंह जी आपकी बात पूरी आ गई है. मंत्री जी इसमें कुछ कहना चाहेंगे.

          श्री प्रद्युम्नसिंह तोमर अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से माननीय सदस्य की भावनाओं को

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)अध्यक्ष महोदय, सत्तापक्ष के विधायक हैं, माननीय मंत्री हैं. आप हमारी तो बात नहीं मानते, लेकिन उनकी बात पर ही आप उनको निलंबित कर दें, इतनी सी बात में क्या परेशानी है.

          श्री नरेन्द्र सिंह कुशवाहअध्यक्ष महोदय, मेरे पास उनके पूरे प्रमाण हैं.

          अध्यक्ष महोदयकुशवाह जी आपके पूरे प्रश्न आ गये हैं. अब मंत्री जी जो जवाब देना चाहेंगे, वह देंगे.

          श्री प्रद्युम्नसिंह तोमर अध्यक्ष महोदय, मैं स्पष्ट रूप से फिर दृढ़ता के साथ कह रहा हूं कि आपकी भावनाओं का सम्मान होगा.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)अध्यक्ष महोदय, उनके निलंबन की बात हो रही है. आपके सत्तापक्ष के विधायक हैं. आप उनकी भी बात नहीं सुन रहे हैं. मंत्री जी यह क्या है? वह स्पष्ट प्रमाण के साथ जानकारी दे रहे हैं फिर भी आप निलंबित नहीं कर पा रहे हैं.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)अध्यक्ष महोदय, मेरा ख्याल है कि माननीय मंत्री जी ने उसका उत्तर दे दिया है. जिसमें इस ध्यानाकर्षण को यहीं पर समाप्त किया जाये.

          अध्यक्ष महोदयध्यानाकर्षण दूसरा डॉ. विक्रांत भूरिया जी अपनी ध्यानाकर्षण सूचना को पढ़िये.

                                                                                               

12.25 बजे

 

(2)           मंडला जिले में निर्दोष आदिवासी की हत्‍या किया जाना.

 

        डॉ. विक्रांत भूरिया, (झाबुआ) (सर्वश्री नारायण सिंह पट्टा, ओमकार सिंह मरकाम)  -- अध्‍यक्ष महोदय,

 

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाइए, आपकी सूचना पूरी हो गई. माननीय मंत्री जी.

 

 

 

 

          राज्‍यमंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) -- अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

अध्यक्ष महोदय - डॉ. विक्रांत जी 2 पूरक प्रश्न करेंगे और साथ में श्री नारायण सिंह पट्टा जी और श्री ओमकार सिंह मरकाम जी, इस ध्यानाकर्षण में एक-एक प्रश्न करेंगे. प्रश्न की मर्यादा रखें.

श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - अध्यक्ष महोदय, मैंने भी सूचना दी है.

डॉ. विक्रांत भूरिया - अध्यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से यह सवाल है. यह आईजी का बयान आया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि जो मारा गया है, नक्सली है और उसके बाद पुलिस का यह वापस से बयान आया है कि वह नक्सली समर्थक है तो ये दोनों बयानों में अंतर कैसे आ गया? क्या आदिवासियों की जान इस देश में इतनी सस्ती है? क्या मध्यप्रदेश एनसीआरबी के डेटा में सबसे ज्यादा आदिवासियों पर अत्याचार करने वाला राज्य नहीं है? इस चीज को हम नहीं झुठला सकते हैं. उनको न्याय मिलना चाहिए और एक मजिस्ट्रियल जांच से काम नहीं चलेगा. रिटायर जज को नियुक्त करना चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो, नहीं तो यह असत्य बोला जा रहा है कि 315 की राइफल उसके पास में मिली है. वह सिर्फ एक कुल्हाड़ी और पानी की बोतल लेकर गया. हमारी भी फेक्ट फाइंडिंग कमेटी वहां पर गई थी. उन्होंने सबके बयान लिये हैं, वह स्थल पर गये हैं और सारे गांव वालों से बात करने के बाद यह साफ हुआ है कि पूरी तरह से यह इनकाउंटर फर्जी है और सरकार दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है. मैं सचेत करना चाहूंगा माननीय मंत्री जी को  कि देखिए, आदिवासी नक्सली नहीं है. हम नक्सली नहीं है. हम आदिवासी हैं इस देश के मूल निवासी हैं और हम अपनी जल, जंगल, जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देने वाले हैं.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल - अध्यक्ष महोदय, कांग्रेस के साथी आज आदिवासी प्रेमी बन रहे हैं.

डॉ. विक्रांत भूरिया - आदिवासी प्रेमी नहीं, सबसे पुराने लोग हैं, आप हत्या पर राजनीति कैसे कर रहे हैं?

अध्यक्ष महोदय - विक्रांत जी जवाब आने दीजिए.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल -श्रीमान् जी सुन लीजिए. लेकिन इतने दशकों तक देश पर राज करने के बाद भी उनकी दशा में सुधार नहीं कर पाए. यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का धन्यवाद करूंगा कि उन्होंने प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय..

डॉ. विक्रांत भूरिया - आप हत्या के लिए किसका धन्यवाद करेंगे ?

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल - आप सुन लीजिए.

(व्यवधान)..

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) - भाषण दे रहे हैं कि जवाब दे रहे हैं?

श्री आरिफ मसूद - इनकाउंटर पर जवाब दो भाई. चर्चा तो इनकाउंटर पर हो रही है.

(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय - मेरा प्रतिपक्ष के सदस्यों से आग्रह है. विक्रांत भूरिया जी की सूचना है, उन्होंने प्रश्न किया है, मंत्री जी का जवाब आने दीजिए. कृपया बैठिए, मंत्री जी का जवाब आने दीजिए. उनको दूसरा प्रश्न करने की जरूरत पड़ेगी तो करेंगे.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल -आपने जो विषय कहा था, उसी विषय पर बोल रहा हूं. आपने आदिवासियों के लिए कुछ नहीं किया, इसलिए आपको तकलीफ हो रही है. आज प्रधानमंत्री जी कर रहे हैं. आज डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बैगा, भारिया, सहरिया सबकी चिंता हो रही है.

श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव - आपको आदिवासियों की हत्या करने का अधिकार नहीं  दिया है, 20 साल से आपकी सरकार मध्यप्रदेश में है.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल - आपको बता रहे हैं, आप सुन तो लो. आप सुनने का माद्दा रखो, प्रश्न किया है तो सुनने का माद्दा रखो.

            संसदीय कार्य मंत्री( श्री कैलाश विजयवर्गीय)- अध्‍यक्ष मेरा निवेदन है कि यह बड़ा संवेदनशील मुद्दा है. इस पर राजनीति नहीं होना चाहिये. विक्रांत जी मेरे भाई हैं. वह प्रश्‍न सीधा-साधा पूछें और सीधा-साधा जवाब मिल जायेगा. यदि आप भाषण देंगे तो मंत्री जी को भी भाषण देना पड़ेगा. ( श्री ओमकार सिंह मरकाम जी के खड़े होने पर) ओमकार सिंह जी मैं अभी बैठा नहीं हूं. मैं आपसे बोल रहा हूं ना कि मैं अभी बैठा नहीं हूं. मैं बैठ जाऊं उसके बाद आप बोलियेगा. आप थोड़ा संसदीय परम्‍परा को समझियेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि सीधा प्रश्‍न पूछें. ठीक है, आज कांतिलाल भूरिया जी यहां पर हैं. आपमें आज तेज जरा ज्‍यादा है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज कांतिलाल भूरिया जी सदन में यहां पर बैठे हैं  और मैं चाहता हूं कि उनका स्‍वागत भी हो जाये. विक्रांत जी आप सीधा प्रश्‍न पूछिये. आप भाषण मत दीजिये और मंत्री जी से भी निवेदन करूंगा क्‍योंकि यह बहुत संवेदनशील मुद्दा है. छत्‍तीसगढ़ में जिस प्रकार से नक्‍सलियों पर दबाव बढ़ा है, वह मध्‍य प्रदेश में घुस रहे हैं और यह आई.बी. की रिपोर्ट भी है. इसलिये पुलिस को बहुत सतर्कता से काम करना पड़ रहा है. यह बहुत संवेदनशील मुद्दा है. इस पर बिल्कुल राजनीति नहीं होना चाहिेये. माननीय सदस्‍य प्रश्‍न पूछेंगे और जवाब मंत्री जी ओर से आयेगा.

          श्री विक्रांत भूरिया- अध्‍यक्ष महोदय, महोदय मेरा सीधा प्रश्‍न है..

          श्री भंवर सिंह शेखावत- राजनीति कर कौन रहा है. आपके मंत्री जी के भाषण में ही सबसे पहले उन्‍होंने कहा कि आप कांग्रेसी, आदिवासी. यह आदिवासी, बीजेपी क्‍या होता है और जब उसकी हत्‍या हुई और उस पर बहस चल रही है तो आप आदरणीय नरेन्‍द्र मोदी जी को बीच में ले आये. अब इस हत्‍या का नरेन्‍द्र मोदी जी से क्‍या मामला है. नरेन्‍द्र मोदी जी वहां बैठे हैं आप उनका नाम यहां ले रहे हैं, यह राजनीति नहीं कर रहे हैं तो क्‍या कर रहे हो. यह गंभीर मुद्दा है.

          अध्‍यक्ष महोदय- भंवर सिंह जी, मुझे लगता है कि विक्रांत भूरिया नये सदस्‍य हैं और उन्‍होंने प्रश्‍न पूछा है उसका उत्‍तर आने दीजिये. एक मिनिट विक्रांत जी आप बैठें. मंत्री जी आप बोलिये.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा केवल यह निवेदन था कि यदि वामपंथी उग्रवाद है तो उसको किसी समाज से जोड़ने की आवश्‍यकता नहीं है. चूंकि यह समाज की चिंता कर रहे थे और माननीय सदस्‍य ने भी चिंता व्‍य‍क्‍त की थी तो मैं उसका उत्‍तर दे रहा था. लेकिन उन्‍होंने अभी एक बात कही कि टारगेट पूरा करने के लिये, मैं बड़ी विनम्रतापूर्वक कहना चाहता हूं कि टारगेट वामपंथी उग्रवाद को खत्‍म करने के लिये तय किया गया है और नरेन्‍द्र मोदी जी के नेतृत्‍व में 31 मार्च, 2026 तक देश से वामपंथी उग्रवाद को खत्‍म करने का लक्ष्‍य तय किया गया है. उस दिशा में सरकार काम कर रही है, लेकिन इस तरह का कोई टारगेट नहीं होता कि एनकाउंटर के लिये टारगेट है या व्‍यक्ति के लिये टारगेट है. एक तो मैं उनकी बात का समाधान करना चाहता हूं. दूसरा, अभी माननीय सदस्‍य ने कहा कि आदिवासियों पर अत्‍याचार बढ़ रहे हैं. मैं विनम्रतापूर्वक बताना चाहूंगा कि मध्‍य प्रदेश में आदिवासियों पर जो अत्‍याचार या अपराध हुए हैं. वह देश में बहुत कम हैं. केरल जैसे राज्‍य भी मध्‍य प्रदेश से ऊपर हैं. मैं एक निवेदन करना चाहता हूं कि यह जिस घटना की बात हो रही है. सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ में उसकी जांच करा रही है. हमारे यशस्‍वी मुख्‍य मंत्री जी ने भी 10 लाख रूपये उस परिवार की चिंता करते हुए, स्‍वेच्‍छानुदान से देने के लिये कहा है और उसकी मजिस्ट्रियल जांच हो रही है और 11 बिन्‍दु तय किये गये हैं, उन बिन्‍दुओं के आधार पर जांच होगी और राष्‍ट्रीय मानव अधिकार आयोग भी, प्रत्‍येक एनकाउंटर पर चिंता करता है तो इसके विषय में पूरी हमारी जो नेशनल एजेंसी हो, चाहे स्‍टेट की एजेंसी हो वह जांच कर रही है.

          श्री विक्रांत भूरिया- मेरा प्रश्‍न मंत्री जी सीधा-सीधा है कि यह लोग अगर आदिवासियों को यह समझ रहे हैं कि जो जल, जंगल और जमीन के लिये लड़ रहा है तो वह नक्‍सली है तो बिल्‍कुल ऐसा नहीं है. आप एक चीज़ समझिये की नक्सलियों को खत्‍म करना, जरूरत है देश की. यह चीज हम समझते हैं. पर जो निर्दोष लोग इसकी बलि चढ़ रहे हैं. हम उस चीज़ के विरोध में हैं और हम यह साफ कर देना चाहते हैं कि आप उच्‍च स्‍तरीय जांच करायें. इसमें मजिस्ट्रियल जांच से काम नहीं चलेगा. इसमें विधायकों का एक जांच दल गठित किया जाये, जो जाकर वहां जांच करे, क्‍योंकि यह मुद्दा सिर्फ मण्‍डला का नहीं है. यह मध्‍य प्रदेश के हर एक आदिवासी का मुद्दा है तो आप यह सुनिश्चित कीजिये और क्‍या विधायकों की एक जांच समिति बनाकर वहां भेजी जायेगी या नहीं भेजी जायेगी ?

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैंने पहले भी बताया कि राष्‍ट्रीय मानव अधिकार आयोग के स्‍टेंडिंग आर्डर के आधार पर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश हो गये हैं और नक्‍सली अपराधों में, जैसी हमारी केन्‍द्र में एन.आई.ए. है. वैसे ही मध्‍यप्रदेश में भी एस.आई.ए है, जो अभी इसकी जांच कर रही है. इसमें जो भी दोषी पाये जायेंगे तो उनको कठोर दंड दिया जायेगा. अन्‍यथा इस जांच के बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा.                                                                    श्री नारायण सिंह पट्टा (बिछिया)अध्यक्ष महोदय, यह बहुत ही संवेदनशील  मामला है,  आपका संरक्षण चाहिये और  साथ ही..

          अध्यक्ष महोदयनारायण सिंह जी, कृपया आप प्रश्न करें.  आधे घण्टे का समय ध्यानाकर्षण के लिये होता है.

          श्री नारायण सिंह पट्टा --  अध्यक्ष महोदय,  यह मेरे विधान सभा  से जुड़ा हुआ मामला है.  हम  आदिवासी हैं, हम बैगा हैं,  तो क्या यह हमारा जुर्म है. हमें या हमारे लोगों को नक्सली  समझ करके  कभी भी, कहीं भी गोली  मार  दी जायेगी या हमारा एनकाउंटर  कर दिया जायेगा. यह  9 मार्च,2025  पुलिस और हॉक फोर्स ने नक्सली गतिविधियों या   मूवमेंट की सूचना पर  अपना अभियान चलाया और  चलाना भी चाहिये.  लेकिन उस  अभियान में मंत्री  जी का  वक्तव्य आया  कि  उसमें  3 महिला और एक पुरुष थे, जबकि  आईजी की  प्रेस वार्ता होती है,  उसमें 15 से 20  नक्सली होने का दावा किया जाता है और  जिसमें एक  नक्सली मारे जाने की बात  कही जाती है. बाद  में उसको समर्थक कह दिया जाता है.  जिसको नक्सली समझकर  या   समर्थक कहकर मारा  गया,  वह एक हमारा बहुत  ही  संरक्षित  बैगा परिवार का  हीरन  सिंह बैगा उसका  नाम था. वह अपने  परिवार और अपनी जीविका  चलाने के लिये  जंगल पर निर्भर था  और हमेशा ही जंगल जाया करता था.  कभी वह जंगल से  से  शहद लाता, तो कभी  दवाई, जड़ी बूटी लाता था.  उसके परिवार वाले..

          अध्यक्ष महोदय नारायण सिंह जी,  यह सूचना आप मत पढ़ो.  आप प्रश्न करेंगे, तो उसका जवाब आ जायेगा.   अभी बाकी लोगों को भी बोलना है.

          श्री नारायण सिंह पट्टा -- अध्यक्ष महोदय,  जी. वह जंगल ही गया था,  उसके पास  सिर्फ एक कुल्हाड़ी  और पानी की बोतल थी.  जंगल में उसके साथ  क्या हुआ, किसी को  मालूम नहीं.  सिर्फ मैं प्रश्न यह करना चाहता हूं कि  अगर पुलिस को  यह स्पष्ट  नहीं था, तो  मारा गया व्यक्ति कौन है.  बिना जांच पड़ताल के गोली क्यों चलाई गई.  हीरन सिंह के पास  315 एसएस  बोर की  बंदूक थी  और जबकि  पीड़ित परिवार जैसा  कि  मैं पहले उसका उल्लेख कर चुका कि   सिर्फ वह घर से   सुबह 10.00 बजे निकला और कुल्हाड़ी  एवं एक बॉटल  लेकर के निकला.

          अध्यक्ष महोदय  मंत्री जी, नरारायण सिंह जी, आपका प्रश्न आ गया, मंत्री जी से जवाब  दिलवा देते हैं.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेलअध्यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले सदस्य जी का धन्यवाद करता हूं कि  उन्होंने इस बात को माना कि  हॉक  टीम को कार्यवाहियां  करनी  चाहिये, लगातार लगे रहना चाहिये.  उन्होंने  अपने  शब्दों में कहा था, उसके लिये  मैं धन्यवाद देता हूं.  दूसरा उन्होंने कहा कि  जो  3  महिला, एक पुरुष और  बाद में 15-16  की बात की गई.  उसमें विनम्रतापूर्वक कहना चाहूंगा कि  जो  पहले बात कही गई है, वह वॉचर से जो लोग मिले थे,  उसके लिये कही गई है और बाद में जब  एनकाउंटर हुआ है, वहां पर  जो लुक छिपकर   फायरिंग हुई है, उसके आधार पर ही, चूंकि  वहां से लगभग डेढ़ सौ  राउंड के  आस पास  फायरिंग हुई  है सामने से.  तो इससे अंदाज लगता  है कि  15-16 आदमी कम से कम  होना  चाहिये. यह दोनों  अलग अलग  विषय हैं.

          अध्यक्ष महोदय श्री ओमकार सिंह मरकाम जी. (श्री नारायण सिंह पट्टा, सदस्य के खड़े होने पर) नहीं, नहीं.  अभी कृपया एक ही प्रश्न करना है.  आप नियम से चलो.  ध्यानाकर्षण की मर्यादा की रक्षा भी करना है.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम( डिण्डौरी) अध्यक्ष महोदय,  मैं चाहता हूं कि आपके संरक्षण में एक मानवीय मूल  के लिये  थोड़ा समय भी मिलेगा और  सारगर्भित चर्चा भी हो.  मैं  थोड़ा सा आपसे यही  निवेदन करते हुए प्रश्न करता हूं कि सूचना कब मिली, किस दिनांक को मिली, किस अधिकारी  को  सूचना दिया गया,  किस अधिकारी द्वारा  उसके ऑपरेशन का प्लान  किया गया.   जो  वॉचर थे,  उनसे पहले  आप जाकर के  क्यों नहीं मिल सके.  उसके कारण  क्या थे.  जब नक्सली  सामान लेने के लिये आये थे,  तब जवान  और नक्सलियों के  बीच  में दूरी कितनी थी.  क्या गतिविधियां उस समय  जवान के लोग  कर रहे थे. क्या उनको जिंदा पकड़ने का भी  प्रयास  नहीं हो सका.  एक   बोरा जो चावल था,  उसका कितना वजन है. कितने  वजन के साथ  कौन सा  धान का का चावल था.  बैग में क्या क्या रखे हुए थे.  खाद्य सामग्री में  कौन कौन सी सामग्री  आपके पास है, जो आपने बरामद  की है.  क्या सामग्री वाचरों ने किससे ली ? किस दुकान से ली ? इसकी जांच तो हो गई होगी, टीम कितने समय रवाना हुई ? वाचरों से कितने समय उनकी मुलाकात हुई ? कुल कितने राउंड गोली चली ? किस किस जवान ने कितने कितने राउंड गोली चलाई ? तीन नक्सली किस रास्ते से आये ? जब जवान थे तो वह आ रहे थे तो किस रास्ते से आ रहे थे ? उस समय आपके जवान का मूवमेंट क्या था ? जवान किस एक्शन में थे ? वह किधर से आ रहे थे ? स्थानीय विधायक जब पीड़ित महिला से मिलने के लिये गये तो उनको क्यों रोका गया ? क्यों नहीं मिलने दिया गया ? एंबुश में  कितने जवान थे ?

          अध्यक्ष महोदय- ओमकार सिंह जी, आप प्रश्न तो करें.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम- अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न ही हैं, सारे ही प्रश्न हैं. आप बोले हैं तो एक ही बार में सारे प्रश्न कर रहा हूं. हम भी आपके इशारे को समझ रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय- यह तो जांच के बिंदू आप बता रहे हैं.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम - अध्यक्ष जी, यह मेरे प्रश्न ही हैं. मंत्री जी बतायेंगे. और हिरण सिंह क्या करता था ? उसका इतिहास क्या था ? इसके साथ नक्सल को आपने किस परिभाषा में लिया है ? नक्सलाइट की वजह क्या है ? नक्सलाइट क्या कर रहे हैं ? क्या वजह है ? मध्यप्रदेश सरकार की नक्सलवाद के विषय में क्या स्पष्ट नीति है ? और सरकार क्या कर रही है ? क्योंकि मृतक एसएसटी हैं स्पेशल शेड्यूल ट्राइब्स, क्योंकि नियम है कि अगर ऐसे परिवार के मुखिया का, जैसे एट्रोसिटी एक्ट में कोई घटना घटित होती है तो उसके परिजन को तत्काल में राहत सरकार के द्वारा दी जाती है उसके अलग अलग प्रकार हैं, क्या इस घटना में जो मृतक है वह बैगा समाज का है, क्या सरकार उसको आज ही उस मृतक के परिजन को स्थायी नौकरी देने के साथ उसके जो पांच बच्चे हैं उनकी देखरेख के लिये, उनको माता पिता के लिये कम से कम दो करोड़ रूपये की राशि देकर के दुख की घड़ी में उस परिवार के साथ में सरकार खडे होकर के निष्पक्ष जांच कराने के लिये तैयार है, अगर आपकी सभी जांच चल रही है, तो क्या विधानसभा के सदस्यों की एक समिति बनाकर के उसको जांच करने का अधिकार नहीं है क्या ? अगर है तो दोनों दल के विधायकों की एक समिति बनाकर के जांच करवायेंगे तो मैं समझता हूं कि यह सभी प्रश्न के उत्तर देते हुये पिछले इन्काउन्टरों का आप बतायेंगे कि किस तरह के एनकाउंटर के साथ आप नक्सल को रोकने के लिये प्रयासरत हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि बिंदुवार इसमें मंत्री जी जानकारी देंगे तो जनता को यह लगेगा कि मंत्री जी पढ़कर के आये हैं, उनके संज्ञान में यह है और जानकारी दे रहे हैं.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे सदन के क्रांतिकारी सदस्य हैं आदरणीय श्री ओमकार सिंह जी मरकाम.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम- वह तो हमेशा से रहे हैं, शंकरशाह-रघुनाथ शाह शहीद हो गये झुके नहीं, आपके लोग तो कंधार में छोड़ आते हैं. हमारे लोग नहीं जाते हैं.

          अध्यक्ष महोदय- ओमकार सिंह जी मंत्री जी को जवाब तो देने दीजिये.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल--अध्यक्ष महोदय, इन्होंने जिस तरह से प्रश्न जो किये हैं निश्चित रूप से वह बहुत प्रशंसनीय हैं, जांच आयोग के लिये. यह प्रश्न जांच आयोग के लिये रहेंगे तो मैं समझता हूं कि अच्छा रहेगा. मैंने पहले भी निवेदन किया था कि 11 बिंदु पर मजिस्ट्रियल जांच चल रही है, माननीय सदस्य ने जो बिंदु उठाये हैं वह शामिल हैं. पुलिस पार्टी को सूचना का स्त्रोत क्या था ? क्या दी गई सूचना पूर्ण रूप से सही पाई गई थी ? क्या मृतक चिह्नित नक्सली था ? क्या पुलिस के जवानों ने उन्हें चेतावनी दी थी ? यह इस तरह के 11 बिंदु हैं जिस पर मजिस्ट्रियल जांच चल रही है और एंबुश पर बैठे जवानों ने हमेशा से ही यह नीति रही है कि पहले आत्मसमर्पण के लिये ही उनको बोला गया था उन्होंने जब आत्म समर्पण नहीं किया बल्कि फायरिंग की उसके बाद जवानों ने आत्मरक्षार्थ गोली बारी की है और समर्पण नीति हमारे यहां पर पहले से ही लागू है और जो भी ऐसे वामपंथी उग्रवाद में शामिल हैं. जो भी ऐसे वामपंथी उग्रवादी में शामिल हैं उनके लिये मध्‍यप्रदेश नक्‍सली आत्‍म- समर्पण पुनर्वास से राहत नीति, 2023 लागू है. जिसके तहत आत्‍म समर्पणकर्ता से आशय उस नक्‍सली, नक्‍सलवादी से है जिसके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज है या ऐसे आपराधिक प्रतिबंधित संगठनों के महत्‍वपूर्ण पदाधिकारी या कैडर का सदस्‍य हो. जो हथियार या बिना हथियार के स्‍वेच्‍छा से आत्‍मसमर्पण करना चाहते हैं उनके लिये तमाम तरह की सुविधाएं सरकार उपलब्‍ध कराती है, लेकिन इन लोगों ने आत्‍मसमर्पण करने की बजाय पुलिस पार्टी पर फायरिंग की और उसकी जवाबी कार्यवाही हुई है. शेष जो प्रश्‍न हैं चूंकि वह जांच में हैं और कुछ विषय ऐसे हैं जो मुखबिर इत्‍यादि की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बाकी के जो प्रश्‍न हैं वह जांच में हैं.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम --  अध्‍यक्ष महोदय, आप मंत्री हैं, आपकी पुलिस है, आप समय नहीं बता सकते. नैतिकता के आधार पर इस्‍तीफा दे दो नहीं संभाल पा रहे हैं. स्‍पष्‍ट है. पुलिस को सूचना कब मिली. इसमें जांच की आप बात कर रहे हैं. अरे ! हम भी चाहते हैं कि मंत्रियों की गरिमा बनी रहे. आप बताएं कि आपको सूचना कब मिली थी. छोटी सी जानकारी में मंत्री जी, ऐसे में आपकी पदोन्‍नति कैबिनेट मंत्री में नहीं होगी ध्‍यान रखिये.

          अध्‍यक्ष महोदय -- ओमकार सिंह जी बैठिये. इसमें स्‍वाभाविक रूप से विषय काफी संवेदनशील है और सदस्‍यों ने भी चिंता व्‍यक्‍त की है. माननीय मंत्री जी ने भी जवाब दिया है और मैं समझता हूं इस संवेदनशीलता को दृष्टिगत रखते हुये हम सब लोगों को चर्चा की गरिमा को पूरा बनाये रखना चाहिये और बहुत सारे लोगों ने अपने नाम दिये हैं. इसमें इच्‍छा व्‍यक्‍त भी की है और प्रकरण में जांच हो भी रही है तो जिन लोगों ने अपने नाम प्रश्‍न के लिये दिये हैं मैं उन सभी सदस्‍यों से क्षमा चाहते हुये हमारे नेता प्रतिपक्ष को आग्रह करूंगा कि वह बाकी सभी सदस्‍यों का प्रतिनिधित्‍व करते हुये अपनी बात कहेंगे.

 

12.52 बजे                                          अध्‍यक्षीय घोषणा

           भोजनावकाश नहीं होने संबंधी

          अध्‍यक्ष महोदय  -- आज भी भोजनावकाश नहीं होगा. भोजन की व्‍यवस्‍था सदन की लॉबी में है. सदस्‍यों से अनुरोध है कि वह अपनी सुविधानुसार भोजन ग्रहण कर सकते हैं.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से सदस्‍यों की जो भावना है, घटना हुई, कैसे हुई, क्‍या हुई यह तो जांच का विषय है. इसके पहले भी एक देवगांव, बालाघाट में इस प्रकार की घटना घटी थी और वहां पर जाम सिंह की मृत्‍यु हुई. चूंकि बॉर्डर पर था, तो छत्‍तीसगढ़ और मध्‍यप्रदेश की सरकार दोनों ने बड़े बेटे और छोटे बेटे को नौकरी दी, तो हमारी आपके माध्‍यम से सीधी मांग है कि क्‍या उनके परिवार के 5 बच्‍चों में से किसी को आप नौकरी देंगे और दूसरा जैसा हमारे ओमकार सिंह मरकार जी ने कहा है कि क्‍या 2 करोड़ रुपये आप उनको सहायता राशि देंग ? इतनी सी बात है. अभी पुलिस का कल वहां पर जवान शहीद हुआ, उसको 1 करोड़ रुपये दे दिया. अब यहां एक आदिवासी हो रहा है जो नक्‍सलाइट नहीं है आप उसको भी 1 करोड़ रुपये नहीं दे रहे हैं. 10 लाख के अंदर ? अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से यह हमारी दो मांगें हैं.

          श्री नारायण सिंह पट्टा --  अध्‍यक्ष महोदय, यह राष्‍ट्रीय मानवता की श्रेणी में आ रहा है. सरकार का कहना है कि 10 लाख रुपये दिया है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- नारायण सिंह जी, प्‍लीज़ आपने अपनी बात रख ली है. बहुत सारे लोगों ने बात अपनी रख ली थी भाई. प्‍लीज़..प्‍लीज़.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल --  अध्‍यक्ष महोदय, मैं आदरणीय नेता प्रतिपक्ष जी की बात से यह निवेदन करना चाहता हूं कि भले ही वह नक्‍सली थे या नहीं थे यह जांच का विषय है, लेकिन उनके परिवार की चिंता करना समाज और सरकार का दायित्‍व है उसके नाते ही माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने संवेदनशीलता प्रदर्शित करते हुये 10 लाख रुपये की राशि प्रदान की है और जो भी सुविधाएं हैं, शासकीय योजनाएं हैं, उनके परिवार को पूरी दी जाएंगी और निश्‍चित रूप से मैं समझता हूं कि समाज भी उनकी चिंता करेगा, तो इतना पर्याप्‍त है. मैं एक निवेदन और करना चाहूंगा कि पुलिस..

          डॉ. हिरालाल अलावा -- अध्‍यक्ष महोदय, जान की कीमत इतनी सस्‍ती लगाएंगे माननीय मंत्री जी ?

          श्री नारायण सिंह पट्टा -- अध्‍यक्ष महोदय, 10 लाख रुपया पर्याप्‍त. आदिवासियों की कीमत इस तरह ?

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, सरकार एक करोड़ रुपये नहीं दे सकती.

          श्री कमलेश्‍वर डोडियार -- माननीय मंत्री जी, आदिवासी की कीमत 10 लाख कैसे आंक रहे हैं ? 

श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, सरकार नौकरी नहीं दे सकती. पहले भी घटनाएं घटी हैं. पहले भी नौकरी दी है. इस पर अध्‍यक्ष महोदय, संवेदनशील मुद्दा है इस पर मैं समझता हूं कि आप आसंदी से व्‍यवस्‍था दें.

            अध्यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी.

          श्री कमलेश्वर डोडियार-- आदिवासी को 10 लाख रुपए और पुलिसकर्मी को 1 करोड़ रुपए.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल -- अध्यक्ष महोदय, सामान्य तौर पर जो घटनाएं, दुर्घटनाएं होती हैं उसमें कोई भी नागरिक हों, किसी भी वर्ग के हों उनको ऐसी घटनाओं में 2 से 4 लाख रुपए ही देते हैं. शहीद पुलिसकर्मी की तुलना नागरिकों से...(व्यवधान) मेरा पूरा उत्तर तो सुन लीजिए. (व्यवधान)

          श्री उमंग सिंघार -- नौकरी तो मिले, पहले भी हुआ है, पहले भी नौकरी दी गई है. माननीय मंत्री जी नौकरी का तो आप कह सकते हैं. (व्यवधान)

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल --  मैं आपकी बात से सहमत हूँ, मेरा पूरा उत्तर तो सुन लीजिए मैं उसी पर बोल रहा हूँ. मेरा यह निवेदन है कि जांच में यदि ..

          अध्यक्ष महोदय -- एक मिनट मंत्री जी, बाला बच्चन जी कुछ बोल रहे हैं.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल -- अध्यक्ष महोदय, मेरा उत्तर आ जाएगा तो हो सकता है इनका भी उसमें उत्तर आ जाएगा. मैं यह निवेदन कर रहा था यदि..

          श्री बाला बच्चन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि निर्दोष आदिवासी की हत्या हुई है. एक तो तत्काल जांच होना चाहिए, दोषी व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही होना चाहिए, निर्दोष परिवार को न्याय मिलना चाहिए, कम से कम एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता मिलना चाहिए और परिवार के सदस्य को शासकीय नौकरी मिलना चाहिए. यह हम सभी कांग्रेस पार्टी के विधायकों की मांग है. प्रदेश के आदिवासियों के साथ इस तरह की घटनाएं न हों, इस तरह की पुनरावृत्ति न हो, यह हमारा निवेदन है. अध्यक्ष महोदय, आपके होते हुए हमें उम्मीद है कि इस आदिवासी परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता राशि मिलेगी और शासकीय नौकरी भी मिलेगी. माननीय अध्यक्ष महोदय, आप सरकार से यह कार्यवाही करवाएं, न्याय दिलवाएं.

          अध्यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी.

          श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल -- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य सदन के बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं, माननीय नेता प्रतिपक्ष जी ने भी जो बात कही है. मैं सभी सदस्यों की भावना को ध्यान में रखते हुए सरकार की ओर से अवगत कराना चाहूंगा कि जाँच की रिपोर्ट आ जाए. जाँच के परिणाम में यदि यह व्यक्ति नक्सली समर्थक नहीं पाया जाता है तो उसके परिवार के एक वयस्क सदस्य को शासकीय नौकरी और आवश्यकता पड़ेगी तो एक करोड़ रुपए भी देंगे. (मेजों की थपथपाहट)

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आप इसकी जाँच हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज से करवा लें. (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय -- संसदीय कार्य मंत्री जी कुछ बोल रहे हैं.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने कहा है कि यदि जाँच में नक्सली संबंध नहीं पाए गए तो उनके परिवार के सदस्य को नौकरी दी जाएगी. यह हम सदन में घोषणा कर रहे हैं. मैं समझता हूँ कि माननीय सदस्यों की बात से..(व्यवधान)

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री ने 10 लाख रुपए की सहायता कर दी और आपके गृह मंत्री कह रहे हैं कि नक्सली है...(व्यवधान)

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- वह भी कर देंगे. माननीय मंत्री जी ने कहा है कि नक्सली कनेक्शन नहीं निकला तो नौकरी भी  दे देंगे और एक करोड़ रुपए भी दे देंगे.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्यक्ष महोदय, पहले तो आप यह बता दें कि आपने निर्दोष आदिवासी को सहायता राशि दी है या आपने नक्सलाइट को सहायता राशि दी है. वह निर्दोष आदमी है, आप जांच में घुमाना चाह रहे हैं, जांच में आएगा कि...

          अध्यक्ष महोदय -- आप कृपया एक मिनट आप बैठिए. मंत्री जी ने बहुत ही स्पष्टता से उत्तर दिया है. हम सब जानते हैं कि घटना हो गई है. घटना की मजिस्ट्रियल इंक्वायरी चल रही है. तात्कालिक रुप से संवेदनशीलता दिखाते हुए सरकार ने 10 लाख रुपए की सहायता की घोषणा भी कर दी है. उनके प्रति पूरी संवेदनशीलता है और साथ ही मंत्री जी ने यह भी कह दिया है कि, संसदीय कार्य मंत्री जी ने भी कह दिया है कि यदि उनका नक्सली कनेक्शन नहीं पाया जाएगा तो एक करोड़ रुपए की सहायता भी दी जाएगी और उनके परिवार के सदस्य को नौकरी भी दी जाएगी. ध्यानाकर्षण समाप्त. सुश्री ऊषा ठाकुर.

          अध्‍यक्ष महोदय-- सुश्री उषा ठाकुर का ही रिकार्ड में आएगा. (व्‍यवधान)

          श्री उमंग सिंघार-- (XXX)

1.00 बजे                             गर्भगृह में प्रवेश एवं धरना

        (इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा मृतक आदिवासी के परिवार के सदस्‍य को शासकीय नौकरी व एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता की मांग करते हुए गर्भगृह में प्रवेश एवं धरना दिया गया)

 

1.01 बजे                              प्रतिवेदनों की प्रस्‍तुति

(1) सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति का प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ प्रतिवेदन

 

(2) शासकीय आश्‍वासनों संबंधी समिति का चतुर्थ, पंचम्, षष्‍टम्, सप्‍तम् एवं अष्‍टम् प्रतिवेदन

       

 

 

 

 

 

1.02 बजे                             याचिकाओं की प्रस्‍तुति

          अध्‍यक्ष महोदय-- आज की कार्यसूची में सम्मिलित समस्‍त याचिकाएं प्रस्‍तुत की हुई मानी जाएंगी. (व्‍यवधान)

 

1.02 बजे                             गर्भगृह से बहिर्गमन

(नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार के नेतृत्‍व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा द्वारा मृतक आदिवासी के परिवार के सदस्‍य को शासकीय नौकरी व एक करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता की मांग पूरी न किये जाने के विरोध में नारेबाजी करते हुए सदन से बहिर्गमन किया गया)

 

1.03 बजे   वर्ष 2025.2026 के आय व्‍ययक पर सामान्‍य चर्चा का पुनर्ग्रहण क्रमश:

 

        डॉ. योगेश पण्‍डाग्रे (आमला)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद जो आपने मुझे वित्‍तमंत्री जी के भाषण पर बोलने का मौका दिया. मोदी सरकार के नेतृत्‍व में देश लगातार आगे बढ़ते हुए एक आर्थिक म‍हाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है और भारतीय जनता पार्टी पर इस प्रदेश के साथ-साथ पूरे देश की जनता ने बड़ा भारी विश्‍वास दिखाया और अभी हमने दिल्‍ली, हरियाणा और महराष्‍ट्र के चुनाव में भी देखा जिसमें भारतीय जनता पार्टी ने बड़े भारी बहुमत से विजय हासिल की और सरकार की कार्यशैली और कार्यप्रणाली हमने अभी ऐतिहासिक म‍हाकुंभ में भी देखा जिसमें लगभग 66 करोड़ लोगों ने अपनी आस्‍था प्रदर्शित की और हम सभी इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी भी बने. इस विकास और परिवर्तन की पुरवाई में मध्‍यप्रदेश भी लगातार सहभागिता प्रदर्शित कर रहा है. एक सफल ग्‍लोबल इनवेस्‍टर्स समिट जिसका आयोजन हमारे मुख्‍यमंत्री मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में हुआ. जिसमें प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी शिरकत की लगभग 26 लाख करोड़ रुपए के एमओयू साईन हुए और लगभग 21 लाख रोजगार सृजित होने की संभावना है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं अभी न्‍यूज पेपर में देख रहा था कि इस प्रदेश का बजट लगभग 4 लाख करोड़ क्रॉस करने वाला है लेकिन यह एक संभावना लगती और एक सपना ही लगता था, लेकिन यह मोहन यादव जी का विजन और हमारे वित्‍त मंत्री जगदीश देवड़ा जी का हौसला ही था जिन्‍होंने इस प्रदेश के बजट को 4 लाख 21 हजार करोड़ रुपए के पार ले जाने का काम किया है. आगे आने वाले मध्‍यप्रदेश की अधोसंरचना कैसी हो और जो मुख्‍यमंत्री जी का विकसित मध्‍यप्रदेश विजन 2047 है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- कृपया समाप्‍त करें क्‍योंकि वित्‍त मंत्री जी को जवाब देना है.

          डॉ. योगेश पण्‍डाग्रे-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, केवल अपने यहां की कुछ बातों की ओर ध्‍यान आकर्षित कर देता हूं. सरकार बहुत अच्‍छा काम कर रही है और विकास सतत् जारी रहने वाली प्रक्रिया है. चूंकि मेरा क्षेत्र सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित है, वहां पानी की कमी हमेशा बनी रहती है, जिले की सारी बड़ी नदियां वहां से निकलती हैं लेकिन पानी के तेज बहाव के कारण, वहां पानी उपलब्‍ध नहीं होता है. मेरे क्षेत्र में बड़े बांध बनाना संभव नहीं है इसलिए कृपया वहां छोटे-छोटे बैराज बन जायें.

          अध्‍यक्ष महोदय, मेरा क्षेत्र सागौन और बांस की उपलब्‍धता से परिपूर्ण है. "एक जिला एक उत्‍पाद" के अंतर्गत वुडन क्‍लस्‍टर पर कार्य वहां हो रहा है, उसे जल्‍दी पूरा किया जाये, जिससे मेरे क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल सके. मेरा जिला तीन बड़े शहरों भोपाल-इंदौर-नागपुर के बीच में स्थित है, जिसके चलते वह एक इंडस्ट्रियल हब और लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित हो सकता है, इस पर भी एक कार्य योजना बने, पर्यटन के क्षेत्र में चूंकि मेरा जिला सतपुड़ा रिजर्व फॉरेस्‍ट से लगा हुआ है.

           अध्‍यक्ष महोदय-  कृपया पूरा करें, आपको 5 मिनट से अधिक समय हो गया है.

          डॉ. योगेश पण्‍डाग्रे-  अध्‍यक्ष महोदय, आपने कहा था बजट पर चर्चा में आंकड़ों में नहीं जाना है, केवल आत्‍मा पर केंद्रित रहना है इसलिए मैंने कोशिश की है कि मैं केवल आत्‍मा पर ही केंद्रित रहूं और इस बजट की आत्‍मा को देखकर लगता है वित्‍त मंत्री जी ने इसमें जान फूंकने का काम किया है. निश्चित रूप से इस बजट की आत्‍मा जन कल्‍याण पर केंद्रित है. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय-  गोपाल सिंह जी कृपया अपनी बात 3 मिनट में पूरी करें.

          श्री इंजीनियर गोपाल सिंह (आष्‍टा)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, आपको धन्‍यवाद देता हूं. हमारे यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव एवं वित्‍त मंत्री आदरणीय देवड़ा जी द्वारा वर्ष 2025-26 का 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपये का बजट प्रस्‍तुत किया गया है, मैं, उसका समर्थन करता हूं.  

 

 

 

1.07 बजे

{सभापति महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय (राजु भैया) पीठासीन हुए.)}

 

          सभापति महोदय, यह बजट न केवल विकास के लिए है, यह समृद्धि और जनकल्‍याण हेतु भी एक ऐतिहासिक बजट है. यह सर्वस्‍पर्शी, सर्वसमाज के हित के लिए बजट होने के साथ-साथ वर्तमान की समस्‍याओं की आवश्‍यकताओं की पूर्ति भी करता है. विकसित भारत में विकसित मध्‍यप्रदेश की परिकल्‍पना को साकार करने की दिशा में यह बजट बहुत महत्‍वपूर्ण कदम है. मैं, आज कहना चाहता हूं कि यह बजट सर्वहारी वर्ग के लिए बहुत अच्‍छा है. हमारे मध्‍यप्रदेश की अनुसूचित जाति, जनजाति, सभी वर्गों के हित के लिए यह बजट है.

          सभापति महोदय, मैं, बताना चाहता हूं कि अनुसूचित जाति वर्ग के युवाओं के रोजगार के हित के लिए "संत रविदास स्‍वरोजगार योजना" "डॉ.भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्‍याण योजना" तथा "सावित्री बाई फुले स्‍वसहायता योजना" संचालित की जा रही है. इससे अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को आवास सहायता में 2 सौ करोड़ रुपये, छात्रावास योजना में 193 करोड़ रुपये, छात्रवृत्ति हेतु 1 हजार 19 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्‍तावित है. इस‍के अतिरिक्‍त अत्‍याचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत 180 करोड़ रुपये का प्रावधान है. हमारी संवेदनशील सरकार ने अनुसूचित जाति वर्ग के विकास के लिए अनुसूचित जाति उपयोजना अंतर्गत 32 हजार 6 सौ 63 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, यह वर्ष 2024-25 से 4 हजार 7 सौ 33 करोड़ अधिक है.

          सभापति महोदय, मैं, यह बताना चाहता हूं कि हमारी पार्वती सिंध चंबल योजना जो कि 72 हजार करोड़ रुपये की योजना है, जिसमें हमारे सिहारे जिले के भी 110 गांव लाभान्वित होंगे, हमारे सिहोर जिले में करीब 48 हजार हेक्‍टेयर में पानी मिलेगा, इसके लिए मैं, हमारी सरकार और माननीय नरेंद्र मोदी जी को बहुत धन्‍यवाद देता हूं (मेजों की थपथपाहट) क्‍योंकि यह हमारे पूर्व प्रधानमंत्री जी की परिकल्‍पना थी, उन्‍होंने इस योजना को नदी जोड़ो अभियान के तहत किया था. मैं यह कहना चाहता हूँ कि जो पार्वती नदी है, मेरी विधान सभा क्षेत्र आष्‍टा के गोविन्‍दपुरा में उसका उद्गम स्‍थल है. मैं चाहता हूँ कि हमारे जिले में 21 और बैराज बनेंगे तो उससे 110 गांव लाभान्वित होंगे. मैं एक निवेदन करना चाहता हूँ कि एक बैराज मेरी आष्‍टा विधान सभा में दलपतपुरा एक जगह है, वहां पर भी बनाया जाये.

          माननीय सभापति महोदय, मेरी विधान सभा में 4,000 करोड़ रुपये की पार्वती लिंक परियोजना योजना चल रही है, जिससे 202 गांवों को लाभ होगा एवं 76,000 हेक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई होगी. मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि उसको जल्‍दी चालू किया जाये, जिससे किसानों को फायदा होगा. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूँ कि कि उन्‍होंने मेरी आष्‍टा विधान सभा में नये 2 सीएम राइज स्‍कूल की सौगात दी है और दो पहले से ही अण्‍डर कन्‍स्‍ट्रक्‍शन में हैं, हालांकि वह पिछले वर्ष में था, जिसमें आष्‍टा में 65 करोड़ रुपये एवं कोटरी में 35 करोड़ रुपये की लागत से अण्‍डर कन्‍स्‍ट्रक्‍शन में हैं. शिक्षा के क्षेत्र में हों, चाहे गरीबों के लिए सारी चीजें हों, आज हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने, मुख्‍यमंत्री जनकल्‍याण अभियान चलाया था, उसके माध्‍यम से, मैंने पूरे आष्‍टा विधान सभा के 144 ग्राम पंचायतों में जाकर,  केन्‍द्र सरकार और राज्‍य सरकार की 45 प्रकार की योजनाएं और 60 प्रकार की जो सेवाएं हैं, जो हमारे हितग्राही थे, हमने उनको शत-प्रतिशत लाभ दिलवाया.

          माननीय सभापति महोदय, मैं यह बताना चाहता हूँ कि हमारे आष्‍टा में पीएम आवास के 33,000 लाभार्थी हैं. हमारे जिले में 1 लाख 2 हजार लाभार्थी हैं.

          सभापति महोदय - गोपाल जी, आप जल्‍दी समाप्‍त करें.

          श्री गोपाल सिंह इंजीनियर - पांच मिनट दीजिये.

          सभापति महोदय - आपके पांच मिनट पूरे हो गए हैं. आप जल्‍दी समाप्‍त करें.

          श्री गोपाल सिंह इंजीनियर - माननीय सभापति महोदय, हमारे स्‍व-सहायता समूह, महिला सशक्तिकरण के लिए हमारी सरकार बहुत अधिक कार्य कर रही है, उसमें 250 के करीब हमारे यहां अभी नये स्‍व-सहायता समूह बनाए गए हैं और पिछले स्‍व-सहायता समूह मिलाकर 2,520 स्‍व-सहायता समूहों ने कार्य किया है. मेरी विधान सभा में 28,502 शौचालय बनाए गए हैं, जो हमारी बहनें, माताएं बाहर शौच के लिए जाती थीं, इससे उनको निजात मिला है. आयुष्‍मान भारत योजना जो कि महत्‍वपूर्ण योजना है. यह संजीवनी बूटी है. भगवान श्री राम जी के प्राण जिसने बचाए, ऐसी आयुष्‍मान योजना का यह कार्ड है, जो हमारे प्रधानमंत्री जी ने सबको दिया है. यह एक संजीवनी बूटी जैसा ही है, यह कार्ड हमारी जेब में हमेशा रहता है और लोगों को कभी भी बीमार होने पर किसी भी प्रायवेट अस्‍पताल में तुरन्‍त जाकर भर्ती हों और 5 लाख रुपये का इलाज फ्री में लें. हमारे यशस्‍वी प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्‍द्र मोदी जी ने एक और सौगात देश के लोगों को दी है. जो हमारे 70 प्‍लस आयु वर्ग के जो वृद्ध लोग हैं, उनके भी आयुष्‍मान कार्ड बनाये जा रहे हैं, इसमें भी उनको 5 लाख रुपये का इलाज फ्री में होगा.

          माननीय सभापति महोदय, प्रदेश में पहले बच्चियां अभिशाप हुआ करती थीं, आज बच्चियां वरदान के रूप में होती हैं. आज बच्चियां जन्‍म लेते ही लखपति बनती हैं, हमारी सरकार ने बच्चियां जैसे ही 6 वर्ष की होती हैं और कक्षा छटवीं कक्षा में जाती हैं, तो उसको 2,000 रुपये मिलते हैं, कक्षा नवमीं और कक्षा दसवीं में उसको चार-चार हजार रुपये मिलते हैं, कक्षा ग्‍यारहवीं, बारहवीं में जैसे ही जाती हैं तो उनको 6 - 6,000 रुपये मिलते हैं और जब वह 18 वर्ष की होती हैं, तो 1 लाख रुपये हमारी सरकार उन्‍हें देती है. आज मेरी विधान सभा में 25,518 लाड़ली लक्ष्‍मी योजना में हमारी बच्चियों ने लाभ लिया है. आज लाड़ली बहना जैसी योजना जिसमें कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए प्रदेश में बहुत बड़ा कार्य हुआ है. मेरी विधान सभा में 71,800 लाड़ली बहनें रजिस्‍टर्ड हैं, जिनको कि हर महीने 1250 रुपये मिल रहे हैं.

          सभापति महोदय -- गोपाल जी, थोड़ा संक्षेप करें. अपने क्षेत्र की कोई प्रमुख मांग हो तो वह आप रख दें.

           श्री गोपाल सिंह 'इंजीनियर' -- जी हां, सभापति महोदय. हमारे विधान सभा क्षेत्र में राजस्‍व के जो पट्टे दिए गए हैं, पहले गांवों में आबादी के पास स्‍वामित्‍व के कोई भी दस्‍तावेज नहीं हुआ करते थे. आज 63,882 भू-राजस्‍व के पट्टे दिए गए हैं. गरीब के कल्‍याण के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है. हमारे माननीय प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी और हमारे प्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी, इनका कहना है कि कोई भी गरीब भूखा नहीं सोएगा. इस चीज को लेकर आज प्रधानमंत्री जी के द्वारा पूरे देश में 82 करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री अन्‍नपूर्णा योजना के तहत नि:शुल्‍क अन्‍न दिया जा रहा है. हमारी विधान सभा में भी 66,323 लोगों को नि:शुल्‍क अनाज दिया जा दिया है. बहनों के लिए उज्‍ज्‍वला गैस कनेक्‍शन के तहत 45,523 के करीब कनेक्‍शन मेरी विधान सभा में दिए गए हैं.

          आदरणीय सभापति महोदय, मैं आपसे यही निवेदन करना चाहता हूँ कि आष्‍टा विधान सभा, जिसमें कि 12 वन ग्राम हैं, हमारी सरकार ने 12 वन ग्रामों को राजस्‍व ग्राम में परिवर्तित करने की पूरी प्रक्रिया चालू की है. इसके लिए मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देता हूँ क्‍योंकि ये जो 12 वन ग्राम थे, उनको राजस्‍व ग्राम की सुविधा नहीं मिलती थी, वह सब सुविधाएं अब उनको मिलेंगी. मैं यह भी बताना चाहता हूँ कि हमारी सरकार ने अनुसूचित जाति के जो बाहुल्‍य क्षेत्र हैं, जो हमारी 32 आदर्श ग्राम पंचायतें हैं, उनमें 26 ग्राम पंचायतों में 25-25 लाख रुपये के आम्‍बेडर मांगलिक भवन हमारी सरकार ने दिए हैं.

          सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह मांग करता हूँ कि हमारी आष्‍टा विधान सभा इंदौर भोपाल हाईवे पर है. आए दिन वहां पर दुर्घटनाएं होती रहती हैं तो मैं वहां पर एक ट्रामा सेन्‍टर की स्‍थापना की मांग करता हूँ. ट्रामा सेंटर वहां बनाया जाए, यह मैं आपसे मांग करता हूँ. हमारे यहां पर युवाओं के लिए, बच्‍चों के लिए एक पॉलिटेक्‍निक कॉलेज की भी स्‍थापना की जाए, यह भी मैं मांग करता हूँ. एक कन्‍या महाविद्यालय की भी मैं मांग करता हूँ क्‍योंकि हमारे ग्रामीण क्षेत्र की जो हमारी बच्‍चियां हैं, वे बाहर पढ़ने नहीं जा सकतीं. हमारे यहां कन्‍या महाविद्यालय नहीं है तो उसकी भी मैं मांग करता हूँ. आखरी में मैं आपके माध्‍यम से एक आयुर्वेदिक महाविद्यालय मेरे विधान सभा क्षेत्र में खोला जाए, इसकी  भी मैं आपसे मांग करता हूँ. आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया.

          सभापति महोदय -- बहुत-बहुत धन्‍यवाद गोपाल जी. श्री महेश परमार जी.

          श्री महेश परमार (तराना) -- धन्‍यवाद आदरणीय सभापति महोदय, मुझे आपका सरंक्षण और आशीर्वाद मिलेगा, आप हमारे संभाग के वरिष्‍ठ विधायक हैं और विद्वान हैं, यह मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ.

          सभापति महोदय -- समय का ध्‍यान रखें महेश जी, सभी के लिए समय समान है.

          श्री महेश परमार -- सभापति महोदय, जो पूर्व में सदस्‍य बोले हैं, कम से कम उतना ही समय मिल जाए. मैं आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी के जिले उज्‍जैन से आता हूँ तो वहां क्‍या हो रहा है, सदन के सामने यह बात रखना जरूरी है. इसलिए आपका सरंक्षण और आशीर्वाद चाहिए.

          सभापति महोदय -- चलिए, शीघ्र प्रारंभ करें.

          श्री महेश परमार -- माननीय सभापति महोदय, जब हमारे माननीय विद्वान उप मुख्‍यमंत्री जी, वित्‍त मंत्री जी बजट भाषण पढ़ रहे थे, अधिकारियों ने जो तैयार किया, निश्‍चित रूप से मुझे लगा कि माननीय वित्‍त मंत्री जी, मध्‍यप्रदेश का भला होगा. मैंने इसमें पहले पेज पर पढ़ा कि सर्वस्‍पर्शी चार मिशन माननीय वित्‍त मंत्री जी ने और सरकार ने यह तय किया, गरीब कल्‍याण, युवा कल्‍याण, किसान कल्‍याण, नारी कल्‍याण, माननीय सभापति महोदय, निश्‍चित रूप से किताब में जब छपा तो अच्‍छा लगा, लेकिन आज मध्‍यप्रदेश के गरीब की क्‍या स्‍थिति है, माननीय वित्‍त मंत्री जी, सत्‍ता पक्ष के हमारे साथी उस तरफ बैठे हैं, वे हर बात पर मेज थपथपाते हैं, लेकिन जब अपने उस क्षेत्र से जीतकर आते हैं तो सबसे ज्‍यादा संकट में मध्‍यप्रदेश का गरीब है. गरीब और गरीब होता जा रहा है. गरीब के लिये सरकार की कोई जनकल्याणकारी योजना नहीं है. सिर्फ 5 किलो अनाज देकर मेंजें थपथपाना,वाहवाही लूटना,जब वह गरीब परिवार का मुखिया अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिये, अपने बच्चों की फीस  भरने के लिये अपने परिवार का बुजुर्ग माता-पिता का सम्मान बढ़़ाने के लिये उनकी सेवा करने के लिये जब सरकार की तरफ देखता है तो सरकार के पास गरीब के लिये कोई योजना नहीं है. मैं विरोध करता हूं ऐसे बजट का, गरीब कल्याण, कौन से गरीब का कल्याण हो रहा है यह मध्यप्रदेश की जनता जानती है,मध्यप्रदेश का गरीब जानता है. एक बात आई युवा कल्याण, किस बात का युवा कल्याण, 2003 से आज तक मध्यप्रदेश के कितने युवा भाई बहनों को आपने रोजगार दिया कितनी भर्तियां आपने निकालीं अगर आज पूरे देश में सबसे ज्यादा कोई ठगा हुआ महसूस कर रहा है तो वह मध्यप्रदेश का युवा,मध्यप्रदेश की युवा बहनें, सरकार की कोई जनकल्याणकारी योजना उनके लिये नहीं है. वह रोजगार के लिये दर-दर की ठोकरें खा रहा है. भटक रहा है. जब पढ़-लिखकर,उच्च शिक्षित होकर जब अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिये रोजगार लेने जाता है तो मध्यप्रदेश की सरकार की कोई जनकल्याणकारी योजना जितने भी शासकीय विभाग हैं वहां हर विभाग में 60-70 प्रतिशत पद खाली पड़े हुए हैं लेकिन माननीय वित्त मंत्री जी और सरकार का ध्यान इस तरफ नहीं है. बात किसान की, किसान कल्याण की बात हो रही थी. सभापति महोदय, आप उज्जैन संभाग से आते हैं. उज्जैन संभाग में सोयाबीन के लिये पूरे देश में हमारा संभाग मेरा विधान सभा क्षेत्र तराना,सब जगह पूरे देश में सोयाबीन उत्पादन में हम सबसे आगे हैं लेकिन मैं पूछना चाहता हूं आदरणीय कृषि मंत्री जी से,इस सरकार से कि 2013-14 में मनमोहन सिंह जी के समय सोयाबीन के भाव क्या थे,गेहूं के भाव क्या थे और अन्य उपज के क्या भाव थे और आज उपज के क्या भाव हैं. किसान की लागत चार गुना हो चुकी है और किसान जब गेहूं,सोयाबीन और अन्य उपज मंडियों में लेकर जाता है तो उसके दाम नहीं मिलते हैं. किस बात का किसान कल्याण मिशन. मैं विरोध करता हूं इस बजट का और आदरणीय वित्त मंत्री जी ने कहा नारी कल्याण मिशन मैं कहना चाहता हूं पूरे देश में हमारी माता बहनों पर अपराध में मध्यप्रदेश नंबर वन,किस बात का नारी सम्मान,क्या 2003 से लेकर आज तक मध्यप्रदेश में आपकी सरकार है कितनी बहनों को आपने रोजगार दिया कितनी ब हनों की आपने शासकीय सेवाओं में सीधी भर्ती की. क्या नारी सम्मान के माध्यम से कितनी बहनों को बैंकों के माध्यम से,सरकार के माध्यम से कितना ऋण दिया. बड़ी वाहवाही लूटते हैं. मेजें थपथपाते हैं हमारे उस तरफ के साथी,आंकड़ों की जादूगरी, गरीब कल्याण, ऐसा गरीब कल्याण,गरीब दिन प्रति दिन गरीब हो रहा है. युवा कल्याण, युवा रोजगार के लिये दर-दर की ठोकरें खा रहा है.भटक रहा है,किसान कल्याण. किसान आज सबसे ज्यादा संकट में है उसे खाद,बिजली नहीं मिलती है वह अपने परिवार का पालन पोषण नहीं कर पाता है. डीजल के भाव,अन्य खादों के भाव,कृषि उपकरण के भाव में चार-चार गुना मूल्यों में वृद्धि हुई है अगर किसी बात का मूल्य नहीं बढ़ा तो किसान की उपज का,सोयाबीन का,धान का,गेहूं का,अन्य उपज वह अपने खेत में उगाता है और नारी कल्याण की बात तो इस सरकार को करना ही नहीं चाहिये.सबसे ज्यादा अपराध हमारी माताओं,बहनों पर मध्यप्रदेश में हो रहा है अगर इनको वाकई में मध्यप्रदेश का कल्याण करना है तो सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि किसान आज जिस चीज से परेशान है तो वह रोजड़ा से परेशान है,जंगली सुअरों से,जंगली जानवरों से, मेरा आदरणीय वित्त मंत्री जी और इस सरकार से निवेदन है कि 100 प्रतिशत अनुदान पर किसानों को तार फेंसिंग,मेड़ फेंसिंग की सुविधा देनी चाहिये अगर इनको वाकई में किसानों का भला करना है तो मेरी यह मांग है. निश्चित रूप से मैं आपको बताना चाहता हूं. धर्म की बात करते हैं.सनातन की बात करते हैं. मैं उज्जैन से,बाबा महाकाल की नगरी से आता हूं. जब आदरणीय मोहन यादव जी मुख्यमंत्री बने तो उज्जैन हो या मालवा हो,पूरे मध्यप्रदेश को लगा कि अच्छा विकास होगा. मैं इस ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं हमारे उस तरफ बैठे सभी आदरणीय वरिष्ठ जनों से,हमारे साथियों से, कि भगवान महाकाल पूरे विश्व में मध्यप्रदेश की हमारे देश की पहचान है तो महाकाल के कारण है. पूरे विश्व के लोग,पूरे देश के लोग वहां जब दर्शन करने आते हैं तो बाबा की एक झलक देखकर उनकी सब मनोकामनाएं पूरी होती हैं लेकिन मैं बताना चाहता हूं कि दान में मिली हुई भगवान महाकाल की 45 बीघा जमीन उस पर यूडीए के माध्‍यम से कार्य योजना बना दी गई, किन उद्योगपतियों को, किन भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिये, मुझे लगता है कि यह जानकारी मुख्‍यमंत्री जी को नहीं होगी, अगर आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी महाकाल के भक्‍त हैं, अगर उनको जानकारी होती तो यह कृत्‍य वह अधिकारी नहीं कर सकते, अगर मुख्‍यमंत्री जी को इस बात की जानकारी है तो यह घोर अपराध और पाप उन अधिकारी कर्मचारियों ने मुख्‍यमंत्री जी से किया है. सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से निवेदन करना चाहता हूं सरकार से कि भगवान महाकाल की जिस 45 बीघा जमीन पर जो कार्य योजना बनाई है उसको मुक्‍त किया जाये और भगवान महाकाल के भक्‍तों को न्‍याय दिलाया जाये. मेरा यह निवेदन है कि उस जमीन पर पीछे बड़े-बड़े भूमाफियाओं की जमीन हैं, उन जमीनों की कीमत बढ़ाने के लिये भगवान महाकाल की जमीन बेच दी गई है. सभापति महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन है और मुख्‍यमंत्री जी से भी निवेदन है कि उस जमीन को मुक्‍त किया जाये. मैं उस तरफ के हमारे साथियों से पूछना चाहता हूं कि आज की मांग यह होगी कि भगवान महाकाल की दान में मिली हुई जमीन को नीलाम न किया जाये. सभापति महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी जब मुख्‍यमंत्री नहीं थे जब वह विकास प्राधिकरण के अध्‍यक्ष थे जब वह मंत्री थे तो मां क्षिप्रा की परिक्रमा करते थे, निश्चित रूप से हम लोगों को भी अच्‍छा लगता था और आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी से ज्‍यादा अच्‍छे से यह कौन जानता है कि क्षिप्रा मां में कौन से गंदे नाले मिल रहे हैं. आदरणीय सभापति महोदय, मेरा आपसे निवेदन है कि आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी आपको मध्‍यप्रदेश की जवाबदारी मिली है, लेकिन जिस क्षिप्रा मां की परिक्रमा करने से आपको आशिर्वाद मिला है, आपसे ज्‍यादा कौन जानता है. सभापति महोदय, मां क्षिप्रा में गंदे नाले मिल रहे हैं, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मुख्‍यमंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी फिर एक बार क्षिप्रा परिक्रमा करें और जिस क्षिप्रा मां के आशिर्वाद से आप मुख्‍यमंत्री बने हैं उस क्षिप्रा मां में गंदे नाले न मिलें, यह मेरी मांग इस सरकार से है.

          आदरणीय सभापति महोदय, हमारे यहां सिंहस्‍थ जैसा महापर्व होना है और हमने सुना लेंड कूलिंग के माध्‍यम से हमारे उत्‍तर के साथी विधायक यहां पर उपस्थित हैं. आदरणीय सभापति महोदय, लगभग 1800 किसान, 1800 परिवार से लेंड कूलिंग के माध्‍यम से जमीन क्‍यों लेना चाहती है, मुझे यह समझ से परे है. आदरणीय सभापति महोदय, जब भाषण होते हैं, लच्‍छेदार बातें की जाती हैं कि किसानों की आय दोगुनी करना, किसानों को मुख्‍य धारा में लाना तो सिंहस्‍थ क्षेत्र में माननीय उच्‍च न्‍यायालय का निर्देश है और भारत सरकार और मध्‍यप्रदेश सरकार के नियमों में यह है कि सिंहस्‍थ क्षेत्र में कहीं भी पक्‍के निर्माण नहीं होना है तो फिर लेण्‍ड कूलिंग के माध्‍यम से मुझे लगता है कौन से वह विद्वान अधिकारी हैं जो आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी को इस तरह के ऊलजुलूल सुझाव दे रहे हैं. किसानों की जमीन अधिग्रहण करना प्रयाग में हमने देखा कुंभ हुआ लेकिन किस तरह की भगदड़ मची और पक्‍के निर्माण करके उन किसानों की जमीन अधिग्रहण न करें, वह किसान आपके हैं, उन किसानों का आशिर्वाद आपको मिला, कोई आपके साथी हैं, कोई आपके पिता तुल्‍य हैं, कोई आपके भाई हैं उन किसानों की जमीन अधिग्रहण न करें यह मेरा निवेदन है. विक्रम उद्योग ने किसानों की जमीन अधिग्रहण की वहां की गाइड लाइन 3 लाख रूपये की है, बाजार मूल्‍य 1 करोड़ रूपये का है वहां भी किसानों से 1 हजार हेक्‍टेयर भूमि अधिग्रहण कर ली गई. आदरणीय सभापति महोदय, सिलारखेड़ी बांध के नाम पर भूमि अधिग्रहण कर ली गई. आदरणीय सभापति महोदय, सिंहस्‍थ जैसा महापर्व होना है, प्रयागराज में हमने देखा कि किस तरह की भीड़ दो-दो सौ, तीन-तीन सौ, किलोमीटर का जाम लगा. मेरी विधान सभा तराना राजस्‍थान से मध्‍यप्रदेश को जोड़ने वाला मुख्‍य मार्ग झालाबाड़ उज्‍जैन ए.बी रोड ग्‍वालियर से इंदौर को जोड़ने वाला मेरा आदरणीय सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से सरकार को सुझाव देना चाहता हूं कि आपने देखा रीवा तक प्रयागराज की भीड़ 3-3, 4-4, 5-5 दिन जाम लगा और वही क्राउड वही श्रद्धालु दर्शनार्थी...

          सभापति महोदय-- महेश जी, सहयोग करें, काफी सदस्‍य हैं, समाप्‍त कीजिये.

          श्री महेश परमार--  आदरणीय सभापति महोदय, दो मिनट मैं सुझाव दे रहा हूं. सिंहस्‍थ जैसा महापर्व होना है और मेरा विशेष निवेदन है आपसे प्रार्थना है कि मेरे विधान सभा तराना की 40 किलोमीटर की दूरी है तो जो एबी रोड से आने वाले ग्‍वालियर से लेकर उस तरफ से तो उनके लिये तराना में बस स्‍टेंड, तिल भांडेश्‍वर महादेव मंदिर अति प्राचीन मंदिर है, माता अहिल्‍या के समय से वहां श्रद्धा‍लुओं को रूकने के लिये वहां के मंदिर का निर्माण हो, यह मेरी मांग है. मागरोन हमारे एक और रोड को जोड़ने वाला है, बड़ा कस्‍वा है वहां भी निर्माण हो वहां श्रद्धालु रूक सकें. आदरणीय सभापति महोदय, मेरा एक और निवेदन है वहां राजस्‍थान से मध्‍यप्रदेश को जोड़ने वाला उस तरफ से राजस्‍थान से पूरे देश के लोग आयेंगे तो वहां भी पाट में बड़ा बस स्‍टेण्‍ड बने और वहां श्रद्धालु और दर्शनार्थियों को रूकने की व्‍यवस्‍था हो. एक और हमारा स्‍थान है आदरणीय सभापति महोदय, करेड़ी कनकेश्‍वरी देवी, करण की आराध्‍य देवी..

1.30बजे                       {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए}

 

            श्री महेश परमार....वह भी शाजापुर से ए.बी.रोड को जोडऩे वाला क्षेत्र है, तो वहां का भी विकास हो और वहां भी हजारों लोग रूक सकें, ऐसी व्‍यवस्‍था हो. एक और हमारा स्‍थान परी का देव स्‍थान है, वह भी ए.बी.रोड को जोड़ने वाला स्‍थान है, तो वहां देव स्‍थान का विकास हो, वहां बड़ी-बड़ी धर्मशाला और सभा मण्‍डप बनें, तो श्रद्धालु रूक सकें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री महेश जी आपका समय पूरा हो गया, ज्‍यादा समय हो गया है, आप समाप्‍त करें.

          श्री महेश परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक क्षेत्र कायथा है, मक्‍सी रोड यह भी ए.बी.रोड को जोड़ने वाला मुख्‍य मार्ग है, तो सिंहस्‍थ को दृष्टिगत रखते हुए वहां भी बस स्‍टैण्‍ड बने, वहां निर्माण हो. आदरणीय सभापति महोदय, आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी से बहुत ज्‍यादा आशा उम्‍मीद थी, मेरे क्षेत्र में एक सड़क भी नहीं दी है. मेरा एक विशेष निवेदन है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जायें. श्री राजेश कुमार वर्मा जी आप बोलें, श्री महेश परमार जी की कोई बात रिकार्ड में नहीं आयेगी.

          श्री महेश परमार -- XXX

          अध्‍यक्ष महोदय -- राजेश जी आप बोलें, महेश जी कृपया समाप्‍त करें, आपको 15 मिनिट हो गये हैं. सिर्फ राजेश जी का ही रिकार्ड में आयेगा.

          श्री महेश परमार -- XXX

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री महेश परमार जी, आपको सदन की मर्यादाओं का पालन करना चाहिए, आप घड़ी देखो. श्री राजेश जी का ही रिकार्ड में आयेगा और किसी का रिकार्ड में नहीं आयेगा.

          श्री महेश परमार -- XXX

          अध्‍यक्ष महोदय -- श्री राजेश कुमार वर्मा जी, आपको पूरे तीन मि‍नट में समाप्‍त करना है, आप अपना माइंड मेकअप कर लो कि आप कैसे पूरा करेंगे.

          श्री राजेश कुमार वर्मा(गुन्‍नौर) -- अध्‍यक्ष महोदय, आज जो बजट सरकार का  पेश हुआ, वह किसान, व्‍यापारी, उद्योग, युवा गरीब, धार्मिक, बेटा,बेटी, के लिये   कल्‍याणकारी बजट पेश हुआ है, जिसमें सड़कों के लिये मैं माननीय वित्‍तमंत्री जी, राकेश सिंह जी और माननीय मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि सदन में चर्चा हो रही है और बार-बार कांग्रेस के साथी एक ही बात करते हैं, गरीब-गरीब मुझे यह समझ में नहीं आ रहा है कि किसकी बात कर रहे हैं, क्‍योंकि मध्‍यप्रदेश में जो सड़कें भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने दी है और रोडों का जाल जो भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने मोहन सरकार के नेतृत्‍व में एक गांव से मुख्‍य मार्ग को जोड़ने का काम किया है. अध्‍यक्ष महोदय, पहले यह स्थितियां होती थीं कि हम लोग पन्‍ना जिले से आते हैं, पन्‍ना से जब सतना जाया करते थे, आज से बीस साल पहले तो यह स्थितियां निर्मित होती थी कि कार में डंडा रखकर चला करते थे, बारिश का समय होता था, बारिश के समय में अगर कार में कोई गढ्ढा पड़ गया तो डंडा डालकर देखा करते थे कि कहीं टायर न पंचर हो जाये, लेकिन आज डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में माननीय मोदी जी के नेतृत्‍व में जो रोडें बनी हैं, हम जब पन्‍ना से चलते हैं तो आंख हमारी भोपाल में खुलती है. पन्‍ना से अगर हम दिल्‍ली के लिये जाते हैं, तो हमारी आंख दिल्‍ली में खुलती है, ऐसी सड़कें मध्‍यप्रदेश में पूरे देश के अंदर रोडों का जाल, माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्‍व में पूरे मध्‍यप्रदेश में स्‍वीकृत हुई हैं. आज गांव में बैठा किसान उस समय यह स्थितियां हुआ करती थी, जब यह विपक्ष के साथी सरकार में हुआ करते थे कि गांव में बैठा-बैठा किसान बार-बार सोचता था कि रेट तो मंडी में अच्‍छे है, लेकिन मंडी तक अनाज पहुंचे कैसे, उसके लिये माननीय हमारी सरकार ने आज गांव में बैठा किसान अगर रेट अच्‍छे मिलते हैं, तो तुरंत ट्राली में लादता है और मंडी तक पहुंच जाता है. ऐसी सड़कों का जाल माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में, पूरे मध्‍यप्रदेश में है और आज मैं माननीय मोहन यादव जी को, माननीय राकेश सिंह जी को और वित्‍तमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि चार ऐसी सड़के मेरे विधानसभा क्षेत्र में स्‍वीकृत हुई हैं, जहां पर आज भी यह स्थिति थी कि धूल उड़ रही थी, लेकिन आज वह रोडें स्‍वीकृत होने से क्षेत्र में उत्‍साह का वातावरण है, लोग काफी खुश हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, आज बेटियों की बात हमारे विपक्ष के साथी कर रहे थे, बार बार एक ही बात हो रही थी कि क्‍या दिया, क्‍या दिया लेकिन आज पूरे मध्‍यप्रदेश में अगर बेटियों को सम्‍मान देने की बात करें, तो वह भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है, अगर घर में बेटी पैदा हो रही है तो अगल बगल के लोग कुछ साल पहले यह चर्चाएं किया करते थे, सास और नंदों से पूछा करते थे कि क्‍या हुआ, माताएं कहती थीं परमेश्‍वरी बिटियां हुई है, बधाई हो, लेकिन जब यह बात होती थी तो वह कहते थे कि काहे की बधाई परमेश्‍वरी दो पहले से थी, तीसरी ओर आ गई, लेकिन आज मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में 1250 रूपये की राशि उनके खातों में जा रही है, बार-बार विपक्ष के साथी चर्चा कर रहे है, गरीब-गरीब की बात कर रहें हैं, मध्‍यप्रदेश में कोई भी ऐसा गरीब नहीं है और सबसे अच्‍छी तो बधाई की बात हम तो मोहन यादव जी को यह दे रहे हैं, मोदी जी को यह दे रहे हैं. विपक्ष के साथियों के भी आवास बन गए, हम जब कांग्रेसी साथियों के घर में जाते हैं तो वे भी कहते हैं कि मोदी की कृपा से आज हमारे सिर पर छत आ गई. ये कहीं न कहीं भाजपा की देन है आज जो आवास आए हैं, लेकिन शहरी क्षेत्र में कैलाश जी से एक निवेदन करना चाहता हूं, माननीय मंत्री जी से आज थोड़ा जमीन का इश्‍यू आ रहा है शहरी क्षेत्रों में, नगर पंचायतों में पीएम आवास योजना अंतर्गत जो लोग 50 साल से काबिज हैं वे जमीन के पट्टे मांग रहे हैं, अगर उसमें थोड़ी सी कृपा हो जाए इसमें उसको समाहित कर लिया जाए, तो उन लोगों के भी आवास बन जाएंगे. आज सिंचाई के क्षेत्र में बुन्‍देलखंड सूखा है. बुन्‍देलखंड की स्थिति यह है कि अगर अच्‍छी धूप पड़ गई तो मिट्टी कट जाती है, टूट जाती है. लेकिन आज केन-बेतवा लिंक परियोजना, जो अटल जी का सपना था, माननीय मुख्‍यमंत्री मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में उसका भूमि पूजन हो गया है, उसके कारण हमारा पूरा क्षेत्र उसमें सिंचित हो रहा है और आज बरगी की जो नहर आ रही है, चूंकि शासन स्‍तर पर प्रस्‍तावित है, जल संसाधन मंत्री जी से आग्रह करुंगा कि अगर वह भी स्‍वीकृत हो जाए तो मेरा जो क्षेत्र छूट गया है, वह क्षेत्र भी हमारा इसमें शामिल हो जाएगा.        

          अध्‍यक्ष जी, कुछ बैराज मेरे क्षेत्र में है देवगांव बैराज, घटारी बैराज, हिनौता बेड, बंधौरा बैराज, बिल्‍हा कंगाली बैराज, मोहगर बैराज, सिमरहा बैराज अगर ये बैराज स्‍वीकृत हो जाए तो बड़ी कृपा हो जाएगी. मेरे क्षेत्र की कुछ 11 सड़कें मैंने दी थी, उसमें से हमें चार सड़कें मिल गईं, उसमें कुछ सड़कें छूट गईं जिसमें बम्‍होरी से राजपूत मडैयन, कठवरिया से कुश्‍वाहा मडैयन, हरद्वाही से गुदौरा, नचनौरा मोड से कचनारा, पन्‍ना से कटनी मार्ग जो एमपीआरडीससी का है, ये सिंगल रोड है. इसमें जे.के. सीमेंट फैक्‍ट्री के डंपर चलते हैं, जिससे अभी तक 25 मौतें हो गईं हैं, अगर ये बजट में शामिल कर लिया जाए तो बड़ी कृपा आपकी होगी. आज कहीं न  कहीं पूरे क्षेत्र में खुशहाली का वातावरण है. सरकार की जो योजना है, कृष्‍ण पाथेय इतनी अच्‍छी योजना है कि इसके लिए माननीय मुख्‍यमंत्री जी को हम धन्‍यवाद देना चाहते हैं. हमारे यहां पर द्वारी में एक बहुत अच्‍छा राधा कृष्‍ण जी का मंदिर है.

अध्‍यक्ष महोदय राजेश जी, कृपया समाप्‍त करें.

श्री राजेश कुमार वर्मा  - अध्‍यक्ष जी, आपकी बड़ी कृपा होगी. आपसे हम लोग सीखें हैं. आप ही के आशीर्वाद से हमें मौका मिला है.

अध्‍यक्ष महोदय आप बहुत अच्‍छा बोल रहे हैं, मैं भी सुनना चाहता हूं लेकिन समय की सीमा है.

श्री राजेश कुमार वर्मा अध्‍यक्ष जी, बस ए‍क मिनट, राम वन गमन पथ मार्ग में एक मरहा का, बड़ागांव का, एक तीर्थ स्‍थल है, अगर इसको इसमें समाहित कर लिया जाए. माननीय धमेन्‍द्र सिंह जी को मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि सिद्धनाथ जी का हमारा मंदिर है, माननीय मंत्री जी की कृपा से हमारा यह क्षेत्र बहुत अच्‍छा हो गया है. सरकार की एक से बढ़कर एक योजना है, लेकिन इतनी बड़ी वटवृक्ष कांग्रेस इतने छोटे गमले में आकर सज गई. मैं चार पांच दिन से देख रहा हूं, उसके बाद माननीय हमारे साथ मानने को तैयार नहीं है, ये अपने गरीबों के नाम बता दें कौन से हैं, हम ढूंढकर वह नाम बता देंगे उनको भी हमने आवास योजना से लाभान्वित किया है. माननीय अध्‍यक्ष जी बहुत बहुत धन्‍यवाद.

श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर (पृथ्‍वीपुर) अध्‍यक्ष महोदय, सर्वप्रथम आपका संरक्षण चाहूंगा. मध्‍यप्रदेश बजट 2025-26 पेश हुआ, 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ का बजट और ज्ञान की बात जो भारतीय जनता पार्टी कल से मैं सुन रहा हूं इसमें जी से गरीब, वाय से युवा, ए से अन्‍नदाता और एन से नारी शक्ति, पर दुर्भाग्‍य है, सभी को इस बजट से निराशा हुई और मैं इस बजट का विरोध करता हूं. चन्‍द पंक्तियों से मैं अपनी बात शुरू करना चाहता हूं,

          तुम्‍हारी फाइलों में, यहां का मौसम गुलाबी है,

        मगर, ये आंकड़ें झूठे हैं, यह दावा किताबी है.

अध्‍यक्ष महोदय, 20 साल से हर बजट प्रदेश को बदलने वाला बजट बोला जाता है, ऐसा सरकार कहती है, सही कहती है, प्रदेश बदल रहा है, कर्ज पर कर्ज लिया जा रहा है. प्रदेश पर 4 लाख 62 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है, यानि प्रति व्‍यक्ति पर 50 हजार रुपए से ज्‍यादा कर्ज हो गया और इस कर्ज का बोझ प्रदेश के नागरिकों से सरकार कैसे उतारेगी, इस पर  भी सरकार को प्रकाश डालना चाहिए. अभी तो बजट पेश किए हुए 6 दिन ही हुए हैं और फिर सरकार कर्ज लेने जा रही है; स्‍कूलों से साल दर साल शिक्षक गायब होते जा रहे है. ग्रामीण अंचल के कई स्‍कूलों में आज भी शौचालय नहीं है, रखरखाव नहीं है, शिक्षा व्‍यवस्‍था चौपट है. अस्‍पतालों में डाक्‍टर गायब है, स्‍वास्‍थ्‍य व्‍यवस्‍था चौपट है. सब इंस्‍पेक्‍टर की भर्ती 8 वर्षों से नहीं हुई है इस कारण थानों से इंस्पेक्टर गायब हैं. जगह जगह पर चैकिंग से लोग परेशान हैं, कानून व्यवस्था चोपट है. भाषणों में विज्ञापनों में लाखों नौकरियां हर वर्ष निकल रही हैं, लेकिन हकीकत किसी से छुपी नहीं है. मैं बुंदेलखण्ड से आता हूं वहां पर पलायन सबसे बड़ी समस्या है, क्योंकि वहां के नौजवानों को नौकरी नहीं मिलती है. भाजपा ने वायदा किया था कि लाडली बहना को 3 हजार रूपये प्रति माह देने का, लेकिन चुनाव के बाद तीन रूपये भी नहीं बढ़े, बल्कि इनके बजट में और भी कटौती हो गई. किसानों से वायदा किया था कि 27 रूपये प्रतिक्विंटल गेहूं, 31 रूपये प्रतिक्विंटल धान का देंगे, वह भी पूरा नहीं हुआ. मेरे बुंदेलखण्ड में किसान खाद के लिये बहुत परेशान हुए. वहां पर जगह जगह पर चक्का-जाम किसानों ने किया उनको भी राहत नहीं मिली. उत्तरप्रदेश-मध्यप्रदेश दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार है, फिर भी मध्यप्रदेश में डीजल पेट्रोल उत्तरप्रदेश से काफी महंगा है. क्योंकि मध्यप्रदेश की सरकार इस पर ज्यादा वेट ले रही है. मेरा जिला उत्तरप्रदेश से घिरा हुआ है इसका सबसे ज्यादा असर मेरे जिले में पड़ता है. यह मध्यप्रदेश के बुंदेलखण्ड के लोगों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है. मेरा पृथ्वीपुर विधान सभा इस बजट में उपेक्षित है. मैंने माननीय मुख्यमंत्री जी से भी मांग की थी कि राम राजा की विश्व प्रसिद्ध पर्यटक नगरी ओरछा जहां पर हजारों विदेशी पर्यटक आते हैं जो प्रदेश का अपकमिंग वेडिंग डेस्टीनेशन बनता जा रहा है, जहां पर निरंतर बड़ी बड़ी शादियां हो रही हैं. उससे जोड़कर अछड़ू माता का मंदिर, वीरसागर का राधाकृष्ण मंदिर, मोहनगढ़ का प्राचीन किला, मढ़खेड़ा का ऐतिहासिक सूर्य मंदिर और नदनवारा का खूबसूरत तालाब इसको जोड़कर पर्यटन का एक सर्किट बनाया जाना चाहिये, जिससे सरकार का भी रेवेन्यू जनरेट हो तथा हमारे नौजवान साथियों को भी रोजगार मिल सके,  लेकिन यह इसमें नहीं आया. पृथ्वीपुर विधान सभा के जेर औद्योगिक केन्द्र में एक बड़ा फूड प्रोसेसिंग यूनिट खोले जाने की मांग मैंने की थी. जिसमें वहां पर किसान जो अपनी पैदावार करता है जैसे लहसुन, अदरक, हल्दी हमारे क्षेत्र में करता है. वह किसान अपनी पैदावार को बेच सकें तथा उस जगह पर युवाओं को भी रोजगार मिल सके, यह भी इसमें नहीं आया. पृथ्वीपुर विधान सभा के दिगोड़ा क्षेत्र के पास हमारे अन्नदाता साथी बड़ी मात्रा में प्याज का उत्पादन करते हैं. इसके लिये मैंने एक गोदाम की मांग की थी, किन्तु वह भी नहीं आया. केन-बेतवा लिंक परियोजना जो कि महत्वपूर्ण परियोजना है. इसमें पृथ्वीपुर विधान सभा के जीरोंथ, सिमरा, चर्रा, मोहनगढ़, बंदाग एवं दिगोड़ा क्षेत्र के कई गांव इसमें नहीं जोड़े गये हैं. इनको भी इन महत्वपूर्ण योजना से जोड़ा जाये इसकी मांग मैंने की थी. मध्यप्रदेश में सरकारी नौकरी की जगह सरकार संविदा एवं आऊटसोर्स कर्मचारियों से काम चला रही है. या तो आऊटसोर्स, संविदा बंद होनी चाहिये. यदि आप इनको बंदी नहीं कर सकते तो संविदा कर्मियों को सुरक्षा दी जाये और आऊटसोर्स कर्मचारियों के लिये उत्तरप्रदेश की तर्ज पर किसी निजी एजेंसी को हटाकर सीधे आऊटसोर्स करें, यह मेरा एक तरह से सुझाव है. अंत में इतना ही कहना चाहूंगा कि अभी कई हमारे कांग्रेस के विधायक मांग करते हैं कि विकास कार्य विधान सभाओं में अति आवश्यक है. 15-15 करोड़ की राशि जो भाजपा के माननीय विधायकों को विकास कार्यों हेतु दी गई है. मेरा विनम्र अनुरोध माननीय मुख्यमंत्री जी से आपके माध्यम से है कि इस राशि को विकास कार्यों हेतु कांग्रेस के विधायकों को भी देना चाहिये. ताकि हम सभी अपने क्षेत्रों के विकास के कार्य कर सकें. क्योंकि मुख्यमंत्री जी पूरे प्रदेश के हैं इसलिये सभी माननीय सदस्यों को समान भाव से देखें और सबके ऊपर अपनी कृपा करें. ताकि हम सबको इसका फायदा मिले, क्षेत्र को फायदा मिले. आपने समय दिया धन्यवाद.

          श्री घनश्याम चन्द्रवंशी (कालापीपल)अध्यक्ष महोदय, बजट पर पक्ष रखने का अवसर दिया है. बजट ज्ञान का मंत्र है, यह बजट उसकी आत्मा है. आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी ने जो मंत्र दिया था उस मंत्र को ध्यान में रखते हुए हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी ने तथा माननीय वित्तमंत्री श्री देवड़ा जी ने इस बजट का प्रावधान किया.

          श्री भंवर सिंह शेखावतअध्यक्ष महोदय, एक ही सीट पर पूरी सरकार है. वित्तमंत्री जी को दो कदावर लोगों ने दबा रखा है.

          अध्यक्ष महोदयपूरी सरकार को एक ही सीट पर नहीं बैठना चाहिये.

          श्री घनश्याम चन्द्रवंशीअध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश ने पहली बार पिछले बजट से इस बार का जो बजट पेश हुआ है 15 प्रतिशत अधिक का बजट पेश हुआ है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीयहमको प्यार मौहब्बत से बात करने दो भाई उसमें क्या फर्क पड़ता है. आपसे देखा नहीं जा रहा है.  (हंसी)

            श्री भंवर सिंह शेखावत -- अध्‍यक्ष महोदय, कैलाश जी तो शोले के ठाकुर हैं. माननीय डॉ.मोहन यादव जी आपने इनके हाथ बांध रखे हैं. इनके हाथ खोल दीजिए फिर इस ठाकुर का तमाशा देखना. (हंसी)

          मुख्‍यमंत्री (डॉ.मोहन यादव) -- वह शोले के ठाकुर हैं कि नहीं, मुझे मालूम नहीं, लेकिन आप अमिताथ बच्‍चन से कम नहीं हैं.(हंसी)

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय जी, आप सिर्फ इन्‍हें अमिताभ बच्‍चन वाली एक विग दिलवा दीजिए. (हंसी)

          श्री घनश्‍याम चन्‍द्रवंशी (कालापीपल) -- अध्‍यक्ष महोदय, यह बजट युवाओं को दिशा देने वाला, ऊर्जा देने वाला है. महिलाओं को आत्‍मनिर्भर बनाने वाला, किसानों के चेहरे पर खुशी लाने वाला, गरीबों के सपने पूरे करने वाला बजट है. उद्योगपतियों को भरोसा दिलाने वाला बजट है. इस बजट में इस ज्ञान के मंत्र के अलावा भी प्रकृति, वन्‍य जीवों की चिंता की गई है. इससे प्रतीत होता है कि हमारे मुख्‍यमंत्री जी कितने संवदेनशील हैं. क्‍योंकि प्रकृति से हटकर हमारा जीवन शून्‍य है.

          अध्‍यक्ष महोदय, अभी हम सबने कोरोना के समय देखा कि किस प्रकार से भयावह बीमारी ने पूरे विश्‍व को अपनी गिरफ्त में लिया था. उसके बाद से प्रकृति का संरक्षण करना हमारी जिम्‍मेदारी बनती है. इस विकास के दौर में हम प्रकृति की चिन्‍ता भी करें. इस बजट में प्रकृति की चिन्‍ता की गई है. वन्‍य जीवों की भी चिन्‍ता की गई है. हम सब जब छोटे थे, उस समय हम सबने पुस्‍तक में पढ़ा है, देखा है कि उसमें किस प्रकार से एक चित्र बना था. उसमें चूहा है, सांप है, उसके बाद मोर है, इसके बाद वनस्‍पति है फिर सूर्य है, शेर है, गाय है, मनुष्‍य है. यह एक चक्र है. यह सब एक-दूसरे के पूरक थे लेकिन धीरे-धीरे करके मनुष्‍य अपनी आवश्‍यकता की पूर्ति के लिए प्रकृति को पीछे छोड़ता जा रहा है.

          अध्‍यक्ष महोदय, हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी ने भी पिछली बार "मन की बात" में कहा था कि पूरे विश्‍व में हमारे भारत देश के लोगों की जो औसतन आयु है, वह 65 वर्ष हो गई है, तो इसको ध्‍यान में रखते हुए आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी ने प्रकृति की चिन्‍ता की. जब वे मुख्‍यमंत्री बने थे, उस समय सबसे पहले उन्‍होंने नदी, तालाब, वन्‍य जीवों की चिन्‍ता की. इसके अलावा कुएं, बावड़ी की भी चिन्‍ता की. और हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी ने "एक पेड़ मां के नाम" से जो अभियान चलाया, उससे प्रतीत होता है कि हम प्रकृति प्रेमी हैं. प्रकृति की चिन्‍ता करते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, माननीय वित्‍त मंत्री श्री जगदीश देवड़ा जी और माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने इस बजट में प्रकृति की चिन्‍ता करते हुए "नदी जोड़ो अभियान" जो पूर्व प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी का सपना था कि किसानों की आय दोगुनी होगी. इसके साथ-साथ जमीन का जल स्‍तर बढे़गा. मैं यह कहना चाहता हॅूं कि यह बहुत प्रभावी बजट है. इस बजट को आपने प्रभावी ढंग से पेश किया, मैं आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद ज्ञापित करता हॅूं.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हॅूं कि धर्म आधारित कर्म ही पूजा है, यह हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी ने करके दिखाया है कि धर्म भी इस बजट में पीछे नहीं रहेगा. इसमें कृष्‍ण पाथेय गमन और राम पथ गमन का जो विवरण है, जो प्रावधान किया गया है उसमें हम देखेंगे कि जहां-जहां राम जी गये, जहां-जहां कृष्‍ण जी गये, वहां उन स्‍थानों को उन्‍होंने इसमें जगह दी है और उनका कैसे विकास हो, इसकी भी चिन्‍ता की है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं आप सभी माननीय सदस्‍यों से यह विनती करूंगा और कांग्रेस के सदस्‍यों से भी विनती करूंगा कि हमारे आदरणीय नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार जी ने किसानों के लिए एक बात कही थी कि जो उन्‍हें किसान सम्‍मान निधि मिल रही है, वह भीख के रूप में दी जा रही है. मैं कहना चाहता हॅूं कि वह किसान सम्‍मान निधि है, वह उनका अधिकार है. अभी तक कांग्रेस की सरकार ने किसानों को कोई सम्‍मान दिया था क्‍या. यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, जिसने किसानों को सम्‍मान दिया है. मैं कांग्रेस के मित्रों से कहना चाहता हॅूं कि अगर यह भाजपा की सरकार जितनी भी योजनाएं चला रही हैं, इसे आप अपने नजरिए से देखेंगे, तो लाड़ली बहना योजना भी आपके लिए भीख लगेगी. किसान सम्‍मान निधि भी आपको भीख लगेगी. इसलिए इस प्रकार के शब्‍दों का उपयोग नहीं करें. यह सम्‍मान निधि है और किसानों का सम्‍मान भारतीय जनता पार्टी की सरकार करती है. मैं आप सब से इतना ही निवेदन करना चाहता हॅूं कि हमारे मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी ने जो यह बजट पेश किया है, यह बहुत ही सर्वस्‍पर्शी बजट है. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

चौधरी सुजीत मेर सिंह (चौरई) - अध्यक्ष महोदय, मैं मध्यप्रदेश बजट वर्ष 2025-26 के विपक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. मध्यप्रदेश विधान सभा में इस वर्ष जो बजट पेश किया गया है, वह बहुत ही निराशाजनक है. इस बजट का जब मैंने अध्ययन किया तो इस बजट में बेरोजगार युवकों के लिए, किसानों के लिए, आदिवासियों के लिए सकारात्मक प्रावधानों का अभाव देखने के लिए मिला. शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में कोई ठोस वृद्धि पिछले साल की तुलना में इसमें नहीं की गई है.

शिक्षा पर जो आवंटित बजट है, उसको हम केवल इतना भर बोल सकते हैं कि इतने हजार करोड़ रुपये का बजट है. परन्तु राज्य की आबादी से हम तुलना करते हैं तो निश्चित रूप से इसमें बहुत कम दिया गया है. ग्रामीण क्षेत्रों में जो सरकारी स्कूल की स्थिति है, भलीभांति सब लोग उससे वाकिफ हैं और इसी के कारण से जो प्राइवेट स्कूल हैं, कांवेंट स्कूल हैं, ये फल-फूल रहे हैं. कोई भी, हमारे मजदूर भी सरकारी स्कूल में एडमिशन नहीं कराना चाहते हैं. प्राइवेट, कांवेंट स्कूल की तरफ उनका झुकाव हो रहा है.

अध्यक्ष महोदय, स्वास्थ्य के क्षेत्र में, अस्पताल और चिकित्सा सुविधाओं के लिए आवंटित बजट, स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक जरूरतों के हिसाब से भी बहुत कम है, जो सीएससी, पीएससी हैं या तो वह ग्रामीण क्षेत्रों में बंद पड़ी हुई हैं या अस्पताल में डॉक्टर नहीं हैं, नर्सिंग स्टाफ नहीं हैं, उपकरण नहीं हैं, दवाइयां नहीं मिलती हैं. मैं केवल एक उदाहरण देना चाहता हूं. माननीय मुख्यमंत्री जी उस समय उच्च शिक्षा मंत्री थे, जब मेरे क्षेत्र चांद में आप गये थे. जो एक नगर परिषद है. विगत कई वर्षों से वहां पर आज भी डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं. वैसी की वैसी स्थिति वहां की बनी हुई है. मध्यप्रदेश में बहुत बड़ी बड़ी बातें बेरोजगारी के संबंध में की गई, पिछले बजट में भी कहा गया कि हमने इतने रोजगार के अवसर के लिए इतना बजट रखा हुआ है. परन्तु पिछले साल जो वर्ष 2024-25 की बेरोजगारी की दर है, वह 7.5 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत दर से बहुत अधिक है. इस बार भी बजट में इस प्रकार का कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया कि हम बेरोजगार युवकों के लिए रोजगार के कोई अवसर प्रदान कर सकें.

अध्यक्ष महोदय, राज्य में इनफ्रास्ट्रक्चर और डेवलपमेंट के लिए भी बहुत पर्याप्त राशि नहीं दी गई है. बजट का इसमें भी अभाव है. मध्यप्रदेश की सरकार लगातार कर्ज ले रहे है, इस पर बात बहुत हो चुकी है. हम यदि वर्ष 2026 तक इसी गति से कर्ज लेते रहे तो लगभग 5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हमारी मध्यप्रदेश पर हो जावेगा. जो आबादी के हिसाब से लगभग 8-9 करोड़ की आबादी के हिसाब से प्रति व्यक्ति 55 हजार रुपये हो जावेगा. इस कर्ज का उपयोग हम केवल विकासात्मक योजनाओं में करें तो निश्चित रूप से यह ठोस कदम होगा. परन्तु इस कर्ज का उपयोग हम पेंशन के लिए भी कर रहे हैं, वेतन के लिए भी कर रहे हैं, जो कर्ज हम ले रहे हैं उसके ब्याज के भुगतान के लिए भी इस राशि का उपयोग कर रहे हैं. भविष्य में गंभीर वित्तीय संकट की स्थिति हमारे मध्यप्रदेश में उत्पन्न हो सकती है.

पेट्रोल, डीजल की बात अभी आई थी. पेट्रोल, डीजल पर मध्यप्रदेश की सरकार वैट और सेस के रूप में दो प्रकार का टैक्स ले रही है. निश्चित रूप से इसका खामियाजा हमारी आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. किसानों को भी जो डीजल अधिक मूल्य में खरीदना पड़ता है तो उनकी भी लागत बहुत अधिक आती है. हमारे वित्तमंत्री जी जब बजट पेश कर रहे थे तो उन्होंने कहा है कि हम नया कर बिल्कुल नहीं लगा रहे हैं. निश्चित रूप से स्वागत योग्य है. हमारे सत्तापक्ष के लोगों ने मेज थपथपाई,  परन्तु मैं यह कहना चाहता हूं कि पेट्रोल, डीजल पर टैक्स यदि आप कम कर देते तो हमारे पक्ष के लोग भी इसमें मेज थपथपाते, जो आम जनता के लिए एक बहुत अच्छा संदेश जाता. जो मध्यप्रदेश के कर्मचारी हैं, कोई 20 साल, 25 साल, 30 साल, 40 साल सेवा करता है, उनके लिए आप नयी पेंशन योजना लागू किये हुए हैं. निश्चित रूप से उनका बुढ़ापे में इससे पूर्ति नहीं होना है. मेरा आपसे अनुरोध है कि इनके बुढ़ापे की पूर्ति के लिए आप ओल्ड पेंशन स्कीम की ही योजना उनके लिए लागू रहने दें और उसके लिए भी बजट में कोई प्रावधान करें. एक बहुत अच्छी योजना है कि 5 रुपये में स्थाई कनेक्शन दे रहे हैं, निश्चित रूप से यह स्वागत योग्य है. वह आप स्थाई कनेक्शन उनको दे भी देंगे परन्तु बिजली विभाग का कर्मचारी जाएगा और जो 3 एचपी की विद्युत मोटर किसानों ने लगाई है, वह मीटर से चेक करके उसको 4 एचपी बता देगा और आप बहुत अधिक बिल उससे वसूल करेंगे. इसी प्रकार की स्थिति निर्मित होगी कि जिओ की सिम आपको दे दी गई और बाद में पूरी शादी जो 6 महीने चली उसका खर्चा पूरा हमसे ही वसूल कर लिया गया. यह स्थिति होगी.

अध्यक्ष महोदय, मैं अपने क्षेत्र की 2-3 समस्याओं को आपके सामने रखना चाहता हूं. छिंदवाड़ा जिले में माननीय कमलनाथ जी की सरकार ने मेडिकल कॉलेज की स्थापना की थी, उस मेडिकल कॉलेज में बजट बहुत कम कर दिया गया. कैंसर यूनिट को उसमें से हटा दिया गया. कार्डियक और न्यूरो यूनिट में भी बहुत कम बजट कर दिया गया. केवल छिंदवाड़ा जिले की जनता ही नहीं, इससे 2-3 जिलों की जनता को महंगा इलाज मिलेगा, जबकि सस्ते इलाज के लिए योजना बनी थी. वर्ष 2019 में छिंदवाड़ा यूनिवर्सिटी खुल गयी. केवल एक छोटे से कमरे में, लायब्रेरी में उस यूनिवर्सिटी का संचालन हो रहा है. उसके लिये बजट में न तो बिल्डिंग का और ही जमीन के आवंटन का कोई प्रावधान इस बजट में नहीं किया गया है, जो कि बहुत जरूरी है. हार्टिकल्‍चर कालेज पांच वर्षों से केवल दो कमरों में संचालित हो रहा है. इसके लिये भी बजट में इसका प्रावधान करना था, ताकि हमारे जिले के और आसपास के क्षेत्रों को भी उसका फायदा मिल सके. मेरे क्ष्‍ोत्र की एक और मुख्‍य मांग है कि मेरे चौरई विधान सभा क्षेत्र में पेंच नदी पर जो पुल बना था उसका पूर्व मुख्‍य मंत्री माननीय शिवराज सिंह जी ने लोकार्पण किया था. वह दो साल में ही बहकर ही गिर गया है. आज बजट में उसका प्रावधान हो गया है परंतु राशि नहीं डालने के कारण उसका टेण्‍डर नहीं हो पाया है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि उसकी राशि डालकर के उसको पूर्ण करायें. आपने बोलने का मौका दिया, आपका बहुत धन्‍यवाद.

          श्री हरदीप सिंह डंग- अनुपस्थित.

          डॉ. अभिलाष पाण्‍डेय- धन्‍यवाद, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश का जो बजट आया है वह निश्चित तौर पर विकास का बजट है और जिस तरह से देश के यशस्‍वी प्रधान मंत्री आदरणीय नरेन्‍द्र मोदी जी की कल्‍पना है कि चार स्‍तंभों पर खड़ा हुआ यह बजट है, जो ज्ञान पर आधारित है, जिसमें गरीब, युवा, अन्‍नदाता और नारी शक्ति को समाहित किया गया है. मुझे याद आता है वर्ष 2003 के पहले का वह समय जब वर्ष 2003 के पहले मध्‍य प्रदेश का नौजवान इस बात को कहने के लिये मजबूर हो गया था और मध्‍य प्रदेश के नौजवानों के साथ छल और छलावा होता था. मुझे ध्‍यान है उस समय हम व्‍यक्तित्‍व विकास की पाठशाला अखिल भारतीय विकास परिषद में काम किया करते थे.

          अध्‍यक्ष महोदय, उस समय नौजवान यह बात कहता था और नौजवान ने इस बात को तय किया था कि जब-जब युवा बोला है, राज सिंहासन डोला है. उस समय युवा की परिभाषा वायु के समान हो गयी थी, जिस युवा ने कांग्रेस शासित उस समय के तत्‍कालीन समय पर नौजवानों ने युवाओं की भूमिका युवा के समान, जिस तरह से वायु के वेग के साथ चलती है. वैसे ही कांग्रेस को उखाड़कर मध्‍य प्रदेश से बाहर कर दिया था. लेकिन आज के समय में माननीय वित्‍त मंत्री और माननीय मुख्‍य मंत्री जी के मार्गदर्शन में, जिस तरह का जो बजट आया है वह बजट 12 मार्च के दिन आना इस बात को सिद्ध करता है कि 12 मार्च को दांडी यात्रा हमारे महात्‍मा गांधी जी ने की थी और वह इतिहास के पन्‍नों पर दर्ज हो गया था. उसी तरह से विकास के माडल का यह बजट, जो विकास आधारित बजट है, जिसमें पूंजीगत खर्च में विकास कार्य के लिये 31 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है जो कुल बजट का 22 प्रतिशत हिस्‍सा है. मैं यह मानता हूं कि मध्‍य प्रदेश के एतिहासिक विकास के लिये यह बजट एक समय मील का पत्‍थर साबित होगा और मध्‍य प्रदेश के इतिहास में यह बजट निश्चित तौर पर शामिल होगा. वर्ष 2003 के समय युवा वायु के वेग के साथ बह रहा था. लेकिन आज के समय में मध्‍य प्रदेश के जननायक मुख्‍य मंत्री डॉ. मोहन यादव जी के मार्गदर्शन में युवा युगवाहक बनकर खड़ा हुआ है और यह पूरा बजट युवाओं के विकास पर केन्द्रित बजट है. इसीलिये मैं आदरणीय मुख्‍य मंत्री जी का और आदरणीय वित्‍त मंत्री जी को बहुत बहुत आभार और धन्‍यवाद देना चाहता हूं.

          आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, औद्योगिक विकास इसमें शामिल है. 29 नये उद्योग खोले जा रहे हैं. मैं यह मानता हूं कि यह वर्ष औद्योगिक विकास की दृष्टि से आने वाले भविष्‍य में मील का पत्‍थर शामिल होने वाला यह वर्ष है. जिसमें औद्योगिक क्रांति लाकर आदरणीय मुख्‍य मंत्री जी युवाओं के रोजगार के सृजन के लिये काम कर रहे हैं. कृषि कल्‍याण के साथ साथ शिक्षा, शिक्षा के साथ-साथ उच्‍च शिक्षा, फिर पशुपालन, सहकारिता चूंकि मुझे पता है कि समय कम है  और इसीलिये मैं इसकी ज्‍यादा डिटेलिंग पर नहीं जा रहा हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय- आप देर तक बोल सकते हैं लेकिन समय की सीमा है, आपका बस एक मिनिट बचा है.

          डॉ. अभिलाष पाण्‍डेय- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण और आर्शीवाद चाहूंगा.

          अध्‍यक्ष महोदय-  आपको संरक्षण की कमी है क्‍योंकि वित्‍त मंत्री जी को रिप्‍लाई करना है.

          डॉ. अभिलाष पाण्‍डेय- जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. इसी तरह से खेल कल्‍याण के विषय पर भी और साथ में जो हर एक विधान सभा में स्‍टेडियम बनाने की बात की है,  मैं निश्चित तौर पर खेल की दृष्टि से भी मध्‍य प्रदेश सरकार जो काम कर रही है. इस बात के लिये मैं आदरणीय मुख्‍य मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय, अभी नक्‍सलवाद की बात हो रही थी. नक्‍सलवाद एक समय पर रिएक्‍शन था, लेकिन वह रेव्‍यूलेशन बनने तक आजादी के बाद से लेकर अभी तक किनकी सरकारें रही हैं. आजादी के बाद से अभी तक किन की सरकारें रही हैं और किन ने नक्सलवाद को रेवोल्यूशन  बनने  के लिये आगे बढ़ाया है.  आज  के इस सदन के माध्यम से देश के गृह  मंत्री, आदरणीय अमित शाह जी  को  इस बात  के लिये धन्यवाद देता हूं कि आपने   इस बात को तय  किया है कि  2026 तक  इस देश से नक्सलवाद  समाप्त होगा,  जिसमें मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव  की  सरकार पुलिस व्यवस्थाओं को बढ़ाकर   उसमें अपना सहयोग प्रदान कर रही है,  इसके लिये भी मैं केंद की सरकार को  बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं  और डॉ. मोहन यादव जी के प्रति आभार  व्यक्त करता हूं.  जिस तरह से गौशाला, स्किल डेवलपमेंट, जीआईएस  के माध्यम से लाखों लोगों को रोजगार देना, इसी तरह  से जो क्षेत्रीय स्तर पर चाहे मालवा, बुन्देलखण्ड हो, हमारे यहां  पर महाकौशल हो, अलग अलग  स्थानों पर छोटी छोटी इन्वेस्टर्स समिट करके  उन  क्षेत्रों के विकास के मॉडल को तैयार करने का जो काम किया है, उसके  लिये मैं आपके प्रति  धन्यवाद देता हूं.  हम सब यह कहते हैं कि जिस तरह से  राम गमन पथ बना है और जिस तरह से कृष्ण पाथेय बन रहा है, हम कहते हैं कि कृष्णम  वंदे जगत गुरु.  कृष्ण भगवान हम सब लोगों को डिप्लोमेसी, मित्र,समानता का  भी संदेश  देते हैं और गुरु, न्याय  एवं राजा का संदेश  भी देते हैं.  मैं यह मानता हूं कि  आने वाली पीढ़ी के लिये कृष्ण पाथेय  आने वाले समय के लिये  बहुत  बड़ा एक दिग्दर्शक  भी बनने वाला है,  उसके लिये भी आभार व्यक्त करता  हूं.  मैं बहुत सारी बातें न करते हुए  अपने क्षेत्र की बात करता हूं कि अभी हमारे यहां   हमारी छोटी सी विधान सभा है.  मैं मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं कि  हमारे यहां विकास के मॉडल  के लिये  अहिंसा चौक से लेकर के कचनार  सिटी तक  का जो एक बड़ा रोड  हमको दिया है, वह ढाई करोड़ की लागत  का, उसके  लिये आपके प्रति  आभार है.  इसी तरह से हम अहिंसा चौक  से  दीनदयाल चौक  तक  की लिंक रोड  भी  बना रहे हैं, उसके लिये भी  आपके प्रति आभार है.  माढ़ोताल तालाब  से ग्रीन  सिटी तक की नई रोड आपने दी है,  उसके लिये भी मैं आपके प्रति आभार व्यक्त करता हूं.  साथ ही हमारे यहां  1 करोड़ 84  लाख  रुपये  की  एक नई लायब्रेरी बना रहे हैं, जिसमें 70 हजार  किताबें रख कर के हम नौजवानों के लिये  और  वहां पर एक वाचनालय खोलकर  उनकी शिक्षा की व्यवस्था भी कर रहे हैं. इसके साथ साथ गीता भवन  बनाकर जो  वाचनालय पूरे मध्यप्रदेश के  अंदर बनाये जा रहे हैं, उसके लिये  भी  धन्यवाद देना चाहता हूं. संत रविदास जी को हम सब मानते हैं.  हम सब यह कहते हैं, संत रविदास जी ने कहा था कि  ऐसा चाहूं राज मैं, जहां मिलै सबन को अन्न। छोट-बड़ों सब सम बसै, रैदास रहै प्रसन्न॥ यह भावना  यदि किसी ने दिखाई है, तो  मध्यप्रदेश की सरकार डॉ. मोहन यादव  जी  की सरकार ने दिखाई है.  इसके साथ साथ मैं एक निवेदन और करना चाहता हूं कि  आईटीआई से दीनदयाल  तक  का एक बड़ा ओव्हर ब्रिज हमारे यहां बनाया जा रहा है.  मैं धन्यवाद देना चाहता हूं कि  अनुपूरक बजट में उसका उल्लेख  हुआ है. 441  करोड़ रुपये की लागत का वह ओव्हर ब्रिज  हमको  मिल रहा है, उसके लिये भी मैं  मुख्यमंत्री जी एवं  उप मुख्यमंत्री जी,वित्त का  धन्यवाद देता हूं.  एक कछपुरा ब्रिज हमको मिला है,  जिससे हमारे यहां  विधान सभा का  एक द्वार खुला है, उसके लिये लोक निर्माण मंत्री जी  सहित पूरी सरकार के प्रति  आभार.  जो  आपने स्टेडियम बनाने की बात की है,  मेरी विधान सभा में फूटा  ताल का एक बड़ा  ग्राउंड है. मैं चाहता हूं कि वहां पर बच्चों के खेलने के लिये  एक स्टेडियम बने, इस दृष्टि से  भी मैं आपके प्रति धन्यवाद  देते हुए  ट्रैफिक मैनेजमेंट का एक निवेदन   है.  इस  समय बहुत तेजी से ट्रैफिक  बढ़ रहा है.  मैं चाहता हूं कि सरकार ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान  की तरफ  भी बहुत गंभीरता से विचार करे.  आपने मुझे बोलने का समय दिया है,  उसके प्रति धन्यवाद देते हुए  और जिस तरह की विनम्रता मुख्यमंत्री जी  की है,  उसके लिये भी मैं धन्यवाद देना चाहता हूं.

          श्री मुकेश मल्होत्रा (विजयपुर)--  अध्यक्ष महोदय,  मैं सबसे पहले  आपको बहुत बहुत धन्यवाद  देता हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर  प्रदान किया तथा  अपने दल के  नेतृत्व का  आभार व्यक्त करता हूं.  मैं पहली बार का विधायक हूं  और दो तीन महीने अभी मुझे  हुए हैं.   जहां मैं जिला श्योपुर  में  निवास करता हूं, वहां पर  अनुसूचित जाति, जनजाति एवं  अन्य पिछड़ा वर्ग तथा   सहरिया समुदाय अधिकांश संख्या में निवास  करता है.  वित्त  जी ने अपना बजट भाषण  देते हुए कहा कि - न त्वहं कामये राज्यम्, न स्वर्गं न पुनर्भवम् । कामये दुःख तप्तानां प्राणिनामार्तिनाशनम् ॥

          माननीय अध्यक्ष महोदय, इसका अर्थ होता है कि  मैं राज्य की कामना नहीं करता मुझे स्वर्ग और मौक्ष नहीं चाहिये, दुख से पीडित प्राणियों के दुख को मैं दूर करत सकूं यही कामना है. मैं माननीय वित्त मंत्री महोदय से आदरपूर्वक कहना चाहता हूं कि स्वर्ग और मोक्ष का तो मुझे पता नहीं है लेकिन यह पक्का है कि इस बजट से  दुखी प्राणियों के दुख दूर नहीं होंगे.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बजट आम जनता, किसानों, बेरोजगारों को, मजदूरों को, गरीब अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को सिर्फ सपने दिखाने का काम करेगा. उनके जीवन में कोई बदलाव होना इस बजट से संभव नहीं है. माननीय वित्त मंत्री जी ने बताया कि विकसित मध्यप्रदेश 2047 का विजन डाक्यूमेंट तैयार किया गया है जिसमें 2047 तक मध्यप्रदेश राज्य के सकल घरेलू उत्पाद को बढ़ाकर टू-ट्रिपल डालर अर्थात 250 लाख करोड़ करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन मैं आदरपूर्वक कहना चाहता हूं कि कोई भी राज्य तभी विकसित होता है जब वहां का आम आदमी विकसित होता है,जब वहां का किसान विकसित होता है, वहां के युवाओं के पास में रोजगार के पर्याप्त अवसर होते हैं लेकिन हमारे यहां तो किसानों को खाद के लिये भी रात रात भर लाईन में लगना पड़ता है, रात में जगना पड़ता है और पुलिस की लाठी-डंडे भी पीठ पर झेलना पड़ते हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश का नवयुवक बेरोजगार आज भी अच्छे दिन का इंतजार कर रहा है कि सरकार कब अपने कहे अनुसार लाखों लोगों को नौकरियां देगी. मार्च 2024 में इस सरकार के ऊपर 3 करोड़ 61 लाख रूपये का कर्जा था माननीय वित्त मंत्री जी  मार्च 2025 की स्थिति में कुल 4 लाख 21 करोड़ रूपये का कर्जा हो गया है और जिस तरह से सरकार कर्ज पर कर्ज ले रही है कोई आश्चर्य नहीं होगा कि मार्च 2026 तक 5 लाख करोड़ रूपये की राशि कर्जा पार कर जाये. हर बार कर्ज लेना यही बताता है कि सरकार के पास में आय के स्त्रोत कम हैं तथा खर्चा ज्यादा है, इस बजट में भी ऐसा कोई उपाय नजर नहीं आ रहा है जिससे कि सरकार की आय बढ़ सके तथा वह आत्मनिर्भरता की ओर बढ सके.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं माननीय वित्त मंत्री जी का ध्यान इस तथ्य की ओर भी दिलाना चाहता हूं कि इस सरकार ने न सिर्फ किसानों को और बेरोजगारों को असत्य सपने दिखाये हैं बल्कि प्रदेश की मां और बहनों के साथ में भी असत्य वादे किये हैं.  इस बजट में लाड़ली बहनों को मिलने वाली धन राशि बढ़ाने के संबंध में कुछ नहीं कहा गया है, धन राशि बढ़ाना तो दूर की बात है हर साल ...

          अध्यक्ष महोदय- मुकेश जी अब आपको समाप्त करना होगा, समयसीमा का ध्यान रखें.

          श्री मुकेश मल्होत्रा-- माननीय मुझे समय सीमा का ध्यान है. थोड़ा आपका संरक्षण चाहता हूं.

          अध्यक्ष महोदय- आज आप संरक्षण मत लो फिर कभी ले लेना.

          श्री मुकेश मल्होत्रा-माननीय अध्यक्ष महोदय, लाड़ली लक्ष्मी की राशि बढ़ाना तो दूर उल्टे लाड़ली बहनों की संख्या कम की जा रही है. सरकार को शीघ्र ही नवीन लाड़ली बहनों को जोड़ने के लिये पंजीयन प्रक्रिया शुरू करना चाहिये क्योंकि लाखों बहनें अभी इस बात का इंतजार कर रही हैं कि दुबारा से पंजीयन की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाये तो उनको भी इस योजना का लाभ मिल सके.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, श्योपुर जिले में लगभग 50-60 वन ग्राम हैं वहां के निवासियों को मूलभूत सुविधायें सरकार की नहीं मिल रही है कई सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उनको नहीं मिल पा रहा है इसलिये आपके माध्यम से मैं मांग करता हूं कि श्योपुर के वन ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित किया जाये जिससे कि वहां के लोगों को सरकार की योजनाओं का लाभ मिल सके.

          अध्यक्ष महोदय, अंत में एक निवेदन आपके माध्यम से और करना चाहता हूं कि हमारे क्षेत्र में भील, भिलाला, पटेलिया अनुसूचित जनजाति के लोग निवास करते हैं, काफी समय से वहां निवास कर रही है इन लोगों के अनुसूचित जनजाति के होने के प्रमाण पत्र नहीं बन रहे हैं, इसके लिये वे कई बार ज्ञापन देकर के जाति प्रमाण पत्र बनाये जाने की मांग कर चुके हैं.माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने और अध्यक्ष महोदय आपने भी कहा है कि जाति प्रमाण पत्र श्योपुर से जारी होंगे, जिससे उनके बच्चों को जो परेशानी का सामना करना प़ड़ रहा है उससे उनको निजात मिले इसके लिये सरकार वहां पर जाति प्रमाण पत्र जारी करे, माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे अपनी बात को रखने का अवसर प्रदान किया इसके लिये आपको बहुत बहुत धन्यवाद.

 

अध्‍यक्ष महोदय  -- हरदीप सिंह डंग जी, तीन मिनट में अपनी बात पूरी करना है.

श्री हरदीप सिंह डंग (सुवासरा) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी और माननीय वित्‍तमंत्री श्री जगदीश देवड़ा जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि उन्‍होंने किसान, महिला, युवा, गरीब सभी को ध्‍यान में रखते हुये जो चहुंमुखी बजट दिया है उसके लिये धन्‍यवाद देता हूं और उन्‍होंने जो कानून व्‍यवस्‍था में सख्‍त कदम उठाये हैं और बजट में जो नरमी करके सबके भले की जो कामना की है इसके लिये दो शब्‍द बोल रहा हूं कि इतिहास में उन्‍हीं का नाम दर्ज होता है जो अच्‍छे काम करते हैं. मोहन यादव जी के लिये मैं दो शब्‍द और बोल रहा हूं कि ‘’रेत पर हम नाम नहीं लिखते क्‍योंकि रेत पर नाम नहीं टिकते, लोग हमें पत्‍थर दिल समझ बैठे उन्‍हें क्‍या पता कि पत्‍थर पर लिखे नाम कभी नहीं मिटते.’’  इतिहास में उनका नाम हमेशा एक अच्‍छे काम के लिये जो लगातार काम कर रहे हैं इस‍के लिये मैं सभी विधायकों की तरफ से और पूरी जनता की तरफ से धन्‍यवाद देता हूं. अध्‍यक्ष जी, आपने तीन मिनट दिये हैं. अगर मैंने आंकड़े बोले कि इतने परसेंट इसमें बढ़ाया, इतना करोड़ इसमें किया, तो ज्‍यादा समय उसमें चला जाएगा. इसमें लोक स्‍वास्‍थ्‍य है, जल संसाधन है, लोक निर्माण है, नर्मदा घाटी है, किसान कल्‍याण है, पशु पालन है. करीब 27 परसेंट जल संसाधन विभाग में बढ़ा है, तो लोक निर्माण में 34 परसेंट बढ़ा है, नर्मदा घाटी में 37 परसेंट बढ़ा है, पशुपालन में 15 परसेंट बढ़ा है, मछुआ कल्‍याण में 44 परसेंट बढ़ा है. ऐसे जो हमारा प्रावधान है, पूरे आंकड़े हैं, तो आंकड़े बोलने में पूरा टाइम चला जाएगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप तो अपने क्षेत्र पर आ जाएं.

श्री हरदीप सिंह डंग -- अध्‍यक्ष महोदय, इसलिये मेरा निवेदन है कि मैं वह विधायक हूं, अभी साढ़े ग्‍यारह साल मेरी विधायकी हो गई. मैं कमलनाथ जी की 15 महीने की सरकार में भी कांग्रेस का विधायक रहा हूं. मैंने वह समय भी देखा है जब 15 महीने की कांग्रेस की सरकार थी और उससे पहले जब शिवराज सिंह चौहान जी की सरकार थी तब भी एक विधायक के रूप में था. उस समय उन्‍होंने क्‍या काम किया, कमलनाथ जी की 15 महीने की सरकार में क्‍या काम हुआ. उसके बाद अभी डॉ. मोहन यादव जी की सरकार में, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्‍व में क्‍या काम हो रहा है. अगर यह कांग्रेस के विधायक, मैं अभी वर्ष 2013 से विधायक हूं, अभी यह अपने क्षेत्र में देख लें कि शिवराज सिंह जी के टाइम पर और डॉ. मोहन यादव जी के टाइम पर और कमलनाथ जी के टाइम पर क्‍या काम हुआ है. कमलनाथ जी के टाइम पर मात्र उनका काम होता था जो 2-4-5 मंत्री थे. वह उनके पीछे सब चक्‍कर काटते थे. खाली कुछ सीमित इलाका तय कर लिया था कि वहां पर ही काम होगा. आज जो कांग्रेस वाले विधायक बैठे हैं, मैं उन मंत्रियों को याद करना चाहता हूं. अगर उन्‍होंने विकास किया होता तो आज (xx).

अध्‍यक्ष महोदय --  हरदीप सिंह जी, नाम नहीं लें. कृपया नाम नहीं लेंगे.

श्री दिनेश गुर्जर -- अध्‍यक्ष महोदय, जीत हार तो लगी रहती है. कमलनाथ जी ने कर्जे माफ किये थे.

श्री भैरो सिंह बापू -- अध्‍यक्ष महोदय, 5 साल से पुलिया नहीं है आपके विभाग में.

श्री हरदीप सिंह डंग -- अध्‍यक्ष महोदय, अगर विकास की बात होती तो 15 महीने में जो काम इनको मौका मिला था

श्री महेश परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, आप खुद कहां पर हो. डंग जी आप स्‍वयं कहां पर हो. पहले अपना स्‍थान आप तय कर लो आप खुद कहां हो.

श्री हरदीप सिंह डंग -- अध्‍यक्ष महोदयय, यह 15 महीनों में..

श्री भैरो सिंह बापू -- अध्‍यक्ष महोदय, अपने यहां चंबल की पुलिया बनवा लो. चंबल पर पुलिया नहीं है. पूरे मंदसौर झालावाड़ का विकास रुका हुआ है.

..(व्‍यवधान)..

श्री महेश परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस ने आपको मान सम्‍मान दिया.

अध्‍यक्ष महोदय -- संसदीय कार्य मंत्री जी अपनी बात कहें. संसदीय कार्य मंत्री जी कुछ बोलना चाहते हैं. हरदीप जी, कृपया बैठ जाइये. संसदीय कार्य मंत्री जी खड़े हैं.

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्‍यक्ष महोदय, हमारे डंग साहब चारों धाम की यात्रा करके आये हैं इसलिये अनुभव तो आपको सुनना पड़ेगा. अगर वह परिक्रमा करके आये हैं और उन्‍होंने जो महसूस किया है, नाम भले ही आप किसी का भी मत लीजिये, परंतु जो उन्‍होंने महसूस किया वह तो वह बताएंगे. अनुभव तो अपना बताएंगे, तो सुनना पड़ेगा.

श्री हरदीप सिंह डंग --  अध्‍यक्ष महोदय, मैं धन्‍यवाद दूंगा भारतीय जनता पार्टी की सरकार, हमारे डॉ. मोहन यादव जी को कि

श्री बाला बच्‍चन -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने माननीय राज्‍यपाल जी के अभिभाषण के समय हम लोगों की तरफ इशारा करते हुये एक बात कही थी कि (xx) उन्‍होंने (xx) का इधर इशारा किया था तो हमको भी लगा कि कहां हैं. (xx) वह तो इधर हैं ही नहीं. कमलनाथ जी की सरकार की बात कर रहे हैं. 27 लाख किसानों का साढ़े 11 हजार करोड़ का कर्जा माफ किया है. आप देख लेना आप भी कमलनाथ जी की सरकार में थे. ..(व्‍यवधान)..

श्री हरदीप सिंह डंग --  अध्‍यक्ष महोदय, आज भी उन बेचारों के कर्जें हैं. आज भी उनके कर्जे देने बाकी हैं. बाला बच्‍चन जी, उनका ब्‍याज आज भी बाकी है. उनका ब्‍याज आज भी पड़ा हुआ है.

अध्‍यक्ष महोदय -- हरदीप जी, आपने 5 मिनट पूरे कर दिये इसी बहस में. आप अपने क्षेत्र की बात बोलिये.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय,  यह शब्‍द विलोपित कर दीजिये.

अध्‍यक्ष महोदय  --  यह शब्‍द विलोपित किया जाय.

श्री महेश परमार --  अध्‍यक्ष महोदय, आप कितना भी कर लें अगली बार आपको मंत्री नहीं बनाएंगे. हो गया पूरा जो बनना था, हो गया अब नहीं बनेंगे.

श्री कैलाश विजयर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, इतना जरूर है कि कोई अगर (xx)

श्री दिनेश गुर्जर -- अध्‍यक्ष महोदय, (xx) देश को आजादी कांग्रेस के नेताओं ने दिलाई थी.

अध्‍यक्ष महोदय --  यह विलोपित किया जाय.

            श्री दिनेश गुर्जर -- (XXX)

          अध्यक्ष महोदय -- दिनेश जी आपकी बात रिकार्ड में नहीं आ रही है. हरदीप जी कृपया अपने क्षेत्र की बात करें.

          श्री हरदीप सिंह डंग -- मैं मेरे क्षेत्र की बात करना चाहूंगा मैं डॉ. मोहन यादव जी, कैलाश जी और देवड़ा जी की सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा. मेरी विधान सभा में 2 लाख हेक्टयर की सिंचाई योजना चालू हो चुकी है और वहां पर पानी जा रहा ह. वहां पर कॉलेज है, सड़कें हैं, पुल-पुलियाएं हैं. मुख्यमंत्री जी बैठे हैं उनसे मैं निवेदन करना चाहूंगा. मैं दोनों तरफ की जानता हूँ इधर की भी और उधर की भी. मैं अच्छी तरह से जानता हूँ कि 15 महीने में क्या-क्या किया था तुमने.

          अध्यक्ष महोदय -- सरदार जी को जितना ज्यादा छेड़ोगे उतनी दिक्कत होने वाली है.

          डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, एक सरदार सब पर असरदार.

          श्री हरदीप सिंह डंग -- मुझे गर्व है कि जब मैं उधर था तो 370 का समर्थन हरदीप सिंह डंग ने उधर रहकर किया था. उस समय भी मैं मोदी जी को पसंद करता था. जो काम करता है उसकी वाहवाही करना चाहिए. अभी कांग्रेस वाले क्या कह रहे हैं कि यह नहीं हुआ वह नहीं हुआ. बाद में क्या कहते हैं कि यह कर दो साहब. जब नहीं हो रहा है तो मांग क्यों रहे हो.

          श्री दिनेश गुर्जर -- (XXX)

          श्री हरदीप सिंह डंग -- जब काम नहीं होता है मांगना नहीं चाहिए. या तो बोलो कि काम हो रहा है. आपके विधान सभा क्षेत्र में काम हो रहा है कि नहीं हो रहा है. (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय -- कृपया समाप्त करें. मैं दूसरा नाम पुकार रहा हूँ. वित्त मंत्री जी को जवाब देना है. (व्यवधान)

          श्री हरदीप सिंह डंग -- माननीय मुख्यमंत्री जी, अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से कह रहा हूँ मेरे यहां चौमेला की पुलिया चंबल पुलिया उसका टेंडर हो चुका है 19 करोड़ रुपए का है 5 बार टेंडर लग चुके हैं. टेंडर हो गया है परन्तु ठेकेदार काम चालू नहीं कर रहा है उसका काम प्रारंभ हो जाए तो जनता को राहत मिलेगी. चौमेला धतुरिया पुलिया प्रारंभ की जाए. धन्यवाद.  (व्यवधान)

          श्री भैरो सिंह (बापू) -- विधायक जी आपने पुलिया मांगी है, मैं आपको धन्यवाद देता हूँ. (व्यवधान)

          श्री फूलसिंह बरैया (भाण्डेर) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2025-2026 का जो बजट है इस बजट में कहा जा रहा है कि काफी लोग खुश हैं और कुछ नाखुश भी होंगे. इसमें सबसे ज्यादा दुर्गति पिछड़े वर्गों की की गई है. 4 लाख 21 हजार 32 करोड़ रुपए के बजट में इस वर्ग को 357 करोड़ रुपए ही दिए गए हैं. अनुसूचित जाति, जनजाति और अल्पसंख्यक सभी को मिलाकर 80 हजार 642 करोड़ रुपए दिए गए हैं. जो कि बजट के 20 प्रतिशत से भी कम है. यह दुर्गति है और इसको दूसरा नाम दूं तो यह भारतीय संविधान की जो भावना है यह बजट उसका अनुसरण नहीं करता है. बाबा साहेब अंबेडकर ने अपनी कलम से लिखा था, संविधान कहता है कि जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी. उसके अनुसार यह बजट नहीं है. इसलिए मैं इस बजट का विरोध करता हूँ. मैं इस बजट के ऊपर अगर कोई कहे कि यह बात सही नहीं है तो आंकड़े तो आपके ही  द्वारा दिए गए हैं. कई ऐसे बिंदु हैं जो अनुसूचित जाति और जनजाति का जो बजट है. इस बजट में यह मालूम नहीं है यह बजट खाली कहां हो जाता है. अभी तो कहने के लिए यह बजट थोड़ा बहुत दे भी दिया गया है. लेकिन जब खर्च किया गया था तब यह बजट कहीं लाड़ली लक्ष्मी योजना के नाम से चला गया तो कहीं यह बजट यहां कोई क्रिकेट मैच होने वाला हो.

और कहीं यह बजट जहां कोई क्रिकेट मेच होने वाला हो वहां भी इसी बजट में से खर्च किया जाता है. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति का यह बजट एक प्रकार से उनकी मेहमानी के लिए यूज होता है. इतनी बुरी स्थिति है तो न सिर्फ यह बजट असंवैधानिक है यह बजट मानवता के खिलाफ भी है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे कहना चाहूंगा कि बहुत ही बुरी बात है जब अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के किसी व्‍यक्ति या महिला की हत्‍या हो जाती है या कोई गलत काम हो जाता है तो उसमें आप ही ने कानून बनाकर यह बताया है कि एफआईआर पोस्‍टमार्टम पर चार लाख पच्‍चीस हजार रुपए दे दिये जाते हैं, लेकिन चालान पर 4 लाख रुपए और देने का वादा होता है तो आपकी सरकार चालान पेश ही नहीं करती है. जो पैसा उसे तीन माह के अंदर पूरा मिल जाना चाहिए वह उसे सात-सात, आठ-आठ साल तक नहीं मिलता है जो सरकार की इच्‍छा है कि न मिले तो चालान में बहुत देरी हो जाती है और उसे पैसा मिलता ही नहीं है. इसके अलावा आज तक मैंने जगह-जगह जाकर पूछा कि तीन माह के अंदर उसे 10 हजार रुपए माह पेंशन भत्‍ता मिलना चाहिए, अनुकम्‍पा नियुक्ति होनी चाहिए. कृषि भूमि का पट्टा मिलना चाहिए, तुरंत घर मिल जाना चाहिए. नहीं है तो जल्‍दी बनवाया जाए या खरीदा जाए. यह सरकार की नीति है कि पीडि़त के बच्‍चों को स्‍नातक शिक्षा भरण पोषण पूरी तरह से उसका पालन करने का लिखा गया है. बच्‍चों को आवासीय स्‍कूलों में दाखिला कराना यह भी लिखा है. बर्तनों, चावल गेहूं दाल, दलहन यह उपलब्‍ध कराना चाहिए और फरियादी को कोर्ट में जाने के लिए किराया और उसके गवाह को भी 100 रुपए का भत्‍ता देना चाहिए. 

          अध्‍यक्ष महोदय, तमाम ऐसी योजनाएं हैं जैसे तमाम एससीएसटी उद्योगों के प्‍लाट भूखण्‍ड इसमें कोई आरक्षण नहीं है. यह ऐसा बजट है जिसमें प्रावधान करना चाहिए. पहले 33 प्रतिशत आरक्षण था वह भी खत्‍म कर दिया गया है. अभी समिट में तीस लाख करोड़ रुपए की घोषणा की है और तीस लाख करोड़ रुपए की घोषणा जब हुई है तो इस घोषणा से अगर यह तीस लाख करोड़ रुपए लगाए जाते हैं तो 21 लाख नौकरियां इसमें पैदा होंगी. 21 लाख नौकरियां जब पैदा होंगी तो इसमें आरक्षण की व्‍यवस्‍था नहीं की गई इसमें आरक्षण की व्‍यवस्‍था होती तो हम इस बजट को सही कहते. यही नहीं सरकार के द्वारा चलाई जाने वाली जो योजना है उन योजनाओं में अन्‍नदान बंद कर दिया है, योजना भी बंद कर दी है. इस बार बाढ़ में चार-पांच पुल, पुलिया टूट गये. एक माह तक लोग अपने गांव में बंदी बने रहे. मैंने सभी जगह आवेदन दिया लेकिन इस बजट में न रोड और पुल पुलियाओं को शामिल नहीं किया गया. मैं समझता हूं कि यह सबसे पिछड़ा क्षेत्र है और इस पिछड़े क्षेत्र के लिए एक पैसे का इस बजट में कहीं भी प्रावधान नहीं है. मुझे अभी पूरी जानकारी नहीं है. हांलाकि मैं अभी दावे के साथ कह सकता हूं कि इस क्षेत्र में कुछ भी नहीं लगाया गया है. मैं यह बात आपके बीच में रखते हुए अपनी बात को यहीं समाप्‍त करता हूं. धन्‍यवाद, जय भीम, जय संविधान, जय भारत.

          डॉ. चिन्‍तामणि मालवीय (आलोट)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे इस महत्‍वपूर्ण बजट पर बोलने का अवसर दिया और मुझे लगता है कि 4 लाख 21 हजार करोड़ रुपए का बजट पहली बार आया है और यह बजट अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को समर्पित है और कोई भी वित्‍त व्‍यवस्‍था होती है तो लोकतंत्र का उद्देश्‍य जनकल्‍याण होता है और बजट या अर्थप्रबंधन उस जनकल्‍याण का आधार है. माननीय वित्‍त मंत्री जी द्वारा प्रस्‍तुत यह बजट मध्‍यप्रदेश को सुनियोजित विकास की ओर ले जायेगा. इस सुनियोजित विकास और विकसित मध्‍यप्रदेश का सपना बगैर किसानों, विद्यार्थियों, महिलाओं और अनुसूचित जाति-जनजाति के कल्‍याण के बिना नहीं हो सकता है.

          अध्‍यक्ष महोदय, इस बजट में कमजोर वर्ग की उन्‍नति और प्रगति के लिए प्रावधान रखे गए हैं, वहीं अधोसंरचना के लिए भी बड़े सपने और बड़ी योजनायें रखी गई है. "अंत्‍योदय" यह केवल शब्‍द नहीं है, हमारी सरकारों का, हमारे दल का उद्देश्‍य है और इसे कार्यरूप में परिणित करने का काम, इस बजट में किया गया है. किसी भी क्षेत्र को लें, आपने मुझे बहुत कम समय, केवल 3 मिनट का समय दिया है इसलिए मैं संक्षेप में कहूंगा. मैं, अनेक विषयों पर अपनी बात रखना चाहता था.

          अध्‍यक्ष महोदय, अनुसूचित जाति-जनजाति, गरीब कल्‍याण हेतु "मुख्‍यमंत्री समृद्ध परिवार योजना" जैसा मुझे लगता है, बहुत ही सार्थक नवाचार सरकार ने किया है कि एक पूरा पैकेज देकर व्‍यक्ति को गरीबी रेखा से बाहर निकाला जाये. फिर विश्‍व की सबसे बड़ी योजना "संबल योजना" है और संबल योजना में 7 सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, पहले 3 सौ करोड़ रुपये का प्रावधान था, उसे 4 सौ करोड़ रुपये से बढ़ाकर दिया गया है. मुझे लगता है कि यह योजना गरीब के लिए सीधी मदद पहुंचाने का काम करती है.

          अध्‍यक्ष महोदय, स्‍कूल शिक्षा में बहुत ही क्रांतिकारी परिवर्तन किए गए हैं सी.एम.राईस स्‍कूल, एक परिवर्तनकारी अवधारणा है, यह निश्चित रूप से गरीब बच्‍चों में आत्‍मविश्‍वास भरेगी कि हम भी बड़े स्‍कूल में पढ़ सकते हैं. 22 हजार शिक्षकों की भर्ती की जानी है. हम सभी को पता है कि एक सरकार थी, जिसने शिक्षाकर्मी कल्‍चर चलाया था और शिक्षाकर्मी कल्‍चर में शिक्षक पढ़ा रहे थे, उन्‍हें केवल 500 रुपये मिलते थे, कक्षा में एक बार स्‍कूल इंस्‍पेक्‍टर ने देखा कि शिक्षक पढ़ा रहे हैं कि गंगा अमरकंटक से निकलती है जबकि बच्‍चों को भी पता है कि गंगा गंगोत्री से निकलती है. स्‍कूल इंस्‍पेक्‍टर के कहने पर शिक्षाकर्मी ने कहा कि 500 रुपये में तो गंगा केवल अमरकंटक से ही निकल पायेगी, गंगोत्री से नहीं. ऐसी तो शिक्षा की व्‍यवस्‍था थी लेकिन आज 22 हजार शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया सरकार ने शुरू की है.

          अध्‍यक्ष महोदय, औद्योगिकीकरण की योजना में भी, कुशल कामगार देने के लिए IIT की स्‍थापना, प्रादेशिक IIT की स्‍थापना, मुझे लगता है कि यह नया विचार माननीय मुख्‍यमंत्री एवं वित्‍त मंत्री जी ने किया है कि प्रदेश स्‍तर पर IIT हो क्‍योंकि IIT के छात्रों  का स्‍तर न बिगड़े. ऐसे बड़े IIT कुछ ही हो सकते हैं, उनमें बहुत संसाधन लगते हैं. इसलिए प्रदेश स्‍तर पर, प्रदेश सरकार के प्रयासों से IIT की स्‍थापना की जाये, यह बहुत बड़ा प्रयास है क्‍योंकि जब औद्योगिकीकरण होगा तो ये IIT वाले और ITI के छात्र, "ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस" "स्‍टार्ट-अप" "स्‍टैंड-अप" योजनाओं को बल प्रदान करेंगे. मुझे लगता है कि सरकार ने जो 10 हजार स्‍टार्ट-अप की स्‍थापना का विचार किया है, उसमें ये IIT वाले बहुत सहयोग करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय, उच्‍च शिक्षा के लिए प्रदेश में पहले कभी केवल 7 विश्‍वविद्यालय थे, आज 70 विश्‍वविद्यालय हैं. एक नेशनल डिफ़ेंस यूनिवर्सिटी का रीज़नल कैंपस् भी आने वाला है, उसकी स्‍वीकृति हो गई है. शिक्षा के क्षेत्र में सरकार ने बड़े परिवर्तन किये हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, चूंकि आपने मुझे केवल 3 मिनट दिये हैं इसलिए मैं अब उज्‍जैन की बात करूंगा. सबसे पहले मैं, मुख्‍यमंत्री जी का धन्‍यवाद करता हूं कि उन्‍होंने 2 हजार करोड़ रुपये उज्‍जैन सिंहस्‍थ के लिए रखे हैं, उज्‍जैन उन पर अभिमान करता है. उज्‍जैन उनको अपना नेता मानता है, उज्‍जैन को गर्व है कि मध्‍यप्रदेश का मुख्‍यमंत्री उज्‍जैन से है. लेकिन आज उज्‍जैन का किसान बहुत डरा हुआ है, परेशान है क्‍योंकि सिंहस्‍थ के नाम पर उसकी ज़मीन पहले केवल 3-6 महीनों के लिए अधिग्रहित की जाती थी लेकिन आज उन्‍हें स्‍थाई अधिग्रहण का नोटिस दिया गया है. पता नहीं किस अधिकारी ने यह विचार रखा है कि स्पिरिचुअल सिटी (अध्‍यात्मिक नगरी) बनायेंगे. मैं बताना चाहता हूं कि स्पिरिचुअलिटी किसी सिटी में नहीं रहती है. वह तो त्‍याग करने वाले लोगों से होती है, हम क्रांकीट के भवन बनाकर स्पिरिचुअल सिटी नहीं बना सकते और सिंहस्‍थ का मुख्‍य विचार ही तंबू में है. क्‍या हम 4 हजार हेक्‍टेयर भूमि में क्रांकीट के भवन बनायेंगे ? जिन्‍होंने सब कुछ त्‍याग दिया है, संयास ग्रहण कर लिया है, घर-परिवार-पैसा-संपत्ति त्‍याग दी, उनको आप भवनों में बिठाने का काम कर रहे हैं, मुझे लगता है कि यह बहुत गलत हो जायेगा.

          श्री महेश परमार-  अध्‍यक्ष जी, मैंने भी यही निवेदन किया था और मेरा आपसे विशेष अनुरोध है कि किसानों की ज़मीन बचाई जाये, आप देश के कृषि मंत्री रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय-  चिंतामणि जी, अब आप समाप्‍त करें. 

          श्री महेश परमार - धन्‍यवाद डॉ. चिन्‍तामणि मालवीय जी और मेरे दोनों साथी सतीश जी और अनिल जैन साहब, मैं आपसे भी निवेदन करना चाहता हूँ कि उज्‍जैन के किसानों को बचाने के लिए हम सब मिलकर मुख्‍यमंत्री जी से निवेदन करें.

          डॉ. चिन्‍तामणि मालवीय - अध्‍यक्ष जी, इसके पीछे उज्‍जैन के किसानों को आशंका है कि कॉलोनाइजर्स और भू-माफियाओं का यह षड्यंत्र है, जिन्‍होंने एक बहुत प्‍यारा सा शब्‍द दे दिया है. लेकिन पैसा प्रतिभा से कमाया जाता है और जो जितना प्रतिभाशाली होता है, उतना ही धनवान भी होता है, ऐसा माना भी जाता है. कोई व्‍यक्ति एक हजार करोड़ रुपये, दो हजार करोड़ रुपये, पांच हजार करोड़ रुपये, दस हजार हजार करोड़ रुपये एवं बीस हजार करोड़ रुपये कमा ले. लेकिन अध्‍यक्ष जी, कफन में जेब नहीं होती, क्‍योंकि हमारा जीवन बहुत छोटा है. हम तो पानी के बुलबुले हैं, भोर के सितारे हैं, लेकिन सिंहस्‍थ पांच हजार वर्षों तक चलेगा. जब तक इस देश में हिन्‍दू है और विश्‍व में कहीं भी हिन्‍दू हैं, सिंहस्‍थ चलेगा. हम सिंहस्‍थ की जमीन का इस तरह प्रयोग नहीं कर सकते कि उससे बड़ा नुकसान हो जाये. अध्‍यक्ष जी, मुझे एक बहुत अच्‍छा शेर याद आता है कि ''ये जब्र भी देखा है, तारीख की नज़रों ने, लम्‍हों ने ख़ता की थी सदियों ने सज़ा पाई'' कहीं यह न हो कि हम सिंहस्‍थ की जमीन को हमेशा-हमेशा के लिए खो दें. यह उन अधिकारियों के लिए भी है, जो इस तरह की सलाह देते हैं. इसका कोई औचित्‍य नहीं है, जिन्‍होंने जमीन नहीं देखी है. सिंहस्‍थ तंबुओं में होता है, वह बिल्डिंग्‍स बनाना चाह रहे हैं. कॉलोनाइजर्स को लाभ देना चाहते हैं.      

          अध्‍यक्ष महोदय - आप समाप्‍त करें. अब आप समाप्‍त करें.

          डॉ. चिन्‍तामणि मालवीय - अध्‍यक्ष जी, एक विषय और है. कई बार यह कहा जाता है कि समीक्षकों ने, चिन्‍तकों ने, जो रिसर्च करके आये हैं, उन्‍होंने यह कहा है कि जो इतना बड़ा समिट हुआ, इस समिट में अपना काला धन लगाने की भी बात की और इसलिए सारी चीजें धरातल में उतरने में देरी हो रही है. मैं तो यह कहता हूँ कि काला धन तो फिर भी सफेद हो जायेगा. लेकिन यहां यह जो नुकसान होगा, इसकी कभी भरपाई नहीं हो सकेगी. मैं चाहता हूँ कि इसमें मेरा साथ पूरा सदन भी दे. मैं केवल दो लाईन कहूँगा. ''समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्‍याध, जो तटस्‍थ है, समय लिखेगा उनके भी अपराध''  अध्‍यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. 

          श्री महेश परमार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं टोक रहा हूँ लेकिन किसानों का  मामला इतना संवेदनशील है. यह मेरी विशेष प्रार्थना है आपसे. सिंहस्‍थ के नाम पर जो किसान .....

          अध्‍यक्ष महोदय - देखिये, दरअसल आपने अपनी बात बहुत अच्‍छे से रख दी है, दूसरे सदस्‍य रह जाएंगे. आप उनको बोलने का मौका दीजिये.

          श्री राजन मण्‍डलोई (बड़वानी) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बजट के विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ. मध्‍यप्रदेश में एसटी की जनसंख्‍या 22 प्रतिशत के लगभग है. वर्ष 1974-75 में पांचवीं पंचवर्षीय योजना के माध्‍यम से आदिवासियों की आर्थिक, सामाजिक, अन्‍तर को पाटने और उन्‍हें मुख्‍य धारा में लाने के उद्देश्‍य से बजट में ट्रायबल सबप्‍लान की पृथक से व्‍यवस्‍था दी है. इसका उद्देश्‍य एसटी बाहुल्‍य ग्राम मजरे, टोले, फाल्‍ये में मूलभूत सुविधा शिक्षा, पेयजल, आवास, स्‍वास्‍थ्‍य, पोषण आहार एवं ग्रामों को मुख्‍य सड़कों से जोड़ना, अस्‍पृश्‍यता निवारण व संवैधानिक नागरिक अधिकारों का संरक्षण करना और शासन शोषण से मुक्ति प्रदान कर समाज की मुख्‍य धारा से जोड़ने का उद्देश्‍य है. अब अनुसूचित जनजाति उपयोजना का अलग से बजट खण्‍ड में दिया गया है, तो मध्‍यप्रदेश सरकार ने 47,295 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है. मैंने इसे समझने की कोशिश की, तो यह लगा कि ''हाथी के दांत दिखाने के और, खाने के और'' क्‍योंकि अनुसूचित जनजाति का भला जनजातीय कार्य विभाग के माध्‍यम से ज्‍यादा किया जाता है, तो उसका बजट जब 47,295 करोड़ रुपये ट्रायबल सबप्‍लान में रखा है, तो जो जनजातीय विभाग है, उसको मात्र 5,000 करोड़ रुपये ही  बजट में प्रोविजन किया है, जो जनजातीय उपयोजना का केवल 10 प्रतिशत है. 47,295 करोड़ रुपये का केवल 10 प्रतिशत ही है.

          अध्‍यक्ष महोदय, अब इस बजट का उपयोग अन्‍य विभाग में किया है, जैसे संस्‍कृति विभाग, पर्यटन विभाग, लोक निर्माण विभाग, विमानन विभाग, विज्ञान एवं प्रोद्योगिकी विभाग, ऐसे अन्‍य कई विभागों में यानी लगभग सभी विभागों में ट्रायबल सबप्‍लान पैसों का उपयोग हो रहा है. अब ट्रायबल सबप्‍लान का उपयोग इन चीजों में हो रहा है, तो इसमें कहते हैं कि अप्रत्‍यक्ष रूप से जनजातीय के लोग भी इसका लाभ लेते हैं. ट्रायबल की हालत इतनी खराब है और ट्रायबल का जो बजट है, उसका उपयोग आप मेट्रो में, विमानों में ऐसी जगह खर्च करेंगे तो हम क्‍या उम्‍मीद करेंगे कि हम आदिवासियों का विकास कर पाएंगे. जो माननीय वित्‍त मंत्री जी ने गरीब कल्‍याण मिशन, युवा मिशन, किसान कल्‍याण मिशन, नारी कल्‍न्‍याण मिशन रखा है तो इसमें आदिवासी एससी और एसटी के विकास का भी मापदण्‍ड रखना चाहिए. आज हम गरीब आदिवासियों की स्‍थिति की बात कर रहे हैं तो वे मूलभूत सुविधाओं से भी दूर हैं. रोजी, रोटी, कपड़ा और मकान के लिए भी उनके पास पर्याप्‍त धन नहीं है. मैं जिस क्षेत्र से आता हूँ, वह बड़वानी विधान सभा क्षेत्र है. वहां पर कुछ क्षेत्र नर्मदा नदी के किनारे पर है, जहां उपजाऊ जमीन है और अधिकांश हिस्‍सा सतपुड़ा के पहाड़ी अंचल पर है. उन पहाड़ी अंचलों पर यह स्‍थिति है कि साहब, केवल बरसाती फसल लोग ले पाते हैं और बरसाती फसल लेने के बाद वे बेरोजगार हो जाते हैं. उनके पास कोई रोजगार के साधन नहीं हैं. महात्‍मा गांधी रोजगार गारंटी जैसी स्‍कीम बंद है. कानूनी रूप से उसका प्रावधान है, लेकिन बंद इसलिए है कि यदि उस योजना में कोई काम कर ले तो महीनों क्‍या, सालों तक उनकी मजदूरी का भुगतान नहीं होता है. सरपंच, सचिव या अधिकारी उस योजना में काम कराने की इच्‍छा नहीं रखते. उनको मालूम है कि यदि काम दे दिया तो लोग मजदूरी के लिए हमारे घर पहुँच जाएंगे. हमारे कार्यालयों का घेराव करेंगे और घेराव हुआ भी है. जिला पंचायत का घेराव हुआ तो उन आदिवासियों के खिलाफ मुकदमे दायर कर दिए. मेरे खिलाफ भी बना क्‍योंकि मैं वहां पर बात सुनने के लिए गया था. वहां पर 22-24 आदिवासियों के खिलाफ प्रकरण बना और मेरे लिए कोर्ट इंदौर है तो मेरे साथ मजबूरी में उन लोगों को भी आना पड़ता है. जिनके पास 5 किलोमीटर की यात्रा करने के लिए पैसे नहीं हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मण्‍डलोई जी, कृपया समाप्‍त करें.

          श्री राजन मण्‍डलोई -- सर, दो मिनट में बात करना चाहता हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया समाप्‍त करें.

          श्री राजन मण्‍डलोई -- साहब, पलायन हमारे यहां बहुत हो रहा है. पलायन की बहुत भारी समस्‍या हमारे यहां पर है. मजदूरी के अभाव में हमारे लोग भेड़-बकरियों की तरह बसों में बैठकर गुजरात और महाराष्‍ट्र मजदूरी करने के लिए जाते हैं. अभी 14 तारीख को बड़वानी से सेंधवा के बीच में एक बस दुर्घटना हुई. यह बस अवैध रूप से संचालित थी और वह मजदूरों को गुजरात ले जा रही थी. मजदूर को कोई समझ नहीं कि कहां जा रहे हैं, क्‍यों जा रहे हैं. आगे एक और बात मैं करना चाहूँगा कि हमारे क्षेत्र में शिक्षा की स्‍थिति बहुत खराब है. आप सरकारी रिकॉर्ड में ढूंढवा लीजिए, वहां पर मिल जाएगा कि 13 प्राथमिक स्‍कूल झोपड़े के अंदर संचालित हो रहे हैं. तीन दिन पहले भास्‍कर पेपर में भी खबर छपी थी कि पानसेमल विधान सभा में भी स्‍कूल झोपड़े में संचालित हो रहे हैं. क्‍या हम उम्‍मीद करें कि हमारे वहां के अनुसूचित जनजाति के बच्‍चों को शिक्षा मिल पाएगी. झोपड़ों में स्‍कूल संचालित हो रहे हैं. उसके बाद हम बात करें कि...

          अध्‍यक्ष महोदय -- राजन जी, कृपया समाप्‍त करें.

          श्री राजन मण्‍डलोई -- सर, मेरे यहां नर्मदा बचाओ आंदोलन काम करता है..

          अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया समाप्‍त करें.

          श्री राजन मण्‍डलोई -- साहब, सरदार सरोवर परियोजना की बात करना बहुत जरूरी है. सरदार सरोवर परियोजना में डूब प्रभावित लोगों को मुआवजा नहीं मिला है. आज भी जो गरीब लोग हैं, जो नर्मदा के किनारे मछली मारकर अपनी रोजी, रोटी कमाते थे, उनको अभी तक मुआवजा नहीं मिला है. उनका पुनर्वास नहीं हो पाया.

          अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया समाप्‍त करें. श्री अनिल जैन कालूहेड़ा जी..

          श्री राजन मण्‍डलोई -- साहब, हमारे यहां मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज और एग्रीकल्‍चर कॉलेज की मांग बरसों पुरानी है. मेरी विधान सभा में इस बार भी बजट में कहीं से कहीं तक एक भी सड़क स्‍वीकृत नहीं हुई है. मैं माननीय ग्रामीण विकास मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूँ कि उन्‍होंने हमारे यहां पर चार...

          अध्‍यक्ष महोदय -- अब अनिल जैन जी जो बोलेंगे, वही रिकॉर्ड में आएगा. अनिल जी, समय का ध्‍यान रखिएगा.

          श्री अनिल जैन कालूहेड़ा (उज्‍जैन-उत्‍तर) -- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद ज्ञापित करना चाहता हूँ कि मध्‍यप्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में आदरणीय वित्‍त मंत्री जगदीश देवड़ा जी ने जो 4 लाख 21 हजार करोड़ रुपये का बजट प्रस्‍तुत किया है. वह समाज की, देश की और प्रदेश की सबमें कहीं न कहीं सहभागिता निश्‍चित करता है. इस प्रदेश की दशा और दिशा बदलने के साथ-साथ यह बजट इस प्रदेश को सभी क्षेत्रों में उन्‍नति के शिखर पर ले जाएगा. इसी के साथ-साथ गरीब कल्‍याण के लिए माननीय अध्‍यक्ष जी, हमारी संस्‍कृति और हमारे सनातन के विचारों को सारे विश्‍व में उच्‍च शिखर पर, उच्‍च मानदण्‍डों पर स्‍थापित करने वाला यह बजट है. इसी क्रम में श्रीकृष्‍ण पाथे योजना और राम पथ गमन योजना इस कड़ी का हिस्‍सा है. श्रीकृष्‍ण पाथे योजना, भगवान श्रीकृष्‍ण उज्‍जैन में जिस विधान सभा से मैं आता हूँ, उसी विधान सभा में श्रीकृष्‍ण भगवान का सांदीपनी आश्रम है, वहां आश्रम में रहकर के उन्‍होंने 64 दिनों तक 64 कलाओं का अध्‍ययन किया और 64 लीलाएं कीं. उसके साथ-साथ उन्‍हें जाना पड़ा, धार के अंदर अमजेरा और उज्‍जैन के पास ही नारायणा, ऐसे चार स्‍थानों पर बड़े धार्मिक स्‍थल बनाने का जो सरकार ने निर्णय किया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी का बहुत-बहुत धन्‍यवाद ज्ञापित करता हूँ.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इतना ही नहीं, श्रीराम पथ गमन को लेकर हमारी सरकार कार्य कर रही है. भले ही पूर्व की कांग्रेस सरकार ने भगवान श्रीराम के अस्‍तित्‍व को ही नकारने का प्रयास करते हुए माननीय न्‍यायालय में हलफनामा यह दिया कि भगवान राम काल्‍पनिक हैं. लेकिन ऊपर वालों के यहां देर नहीं है.. ..(व्‍यवधान)..

          कुँवर अभिजीत शाह -- यह सरासर असत्‍य है, कांग्रेस ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था. इसको विलोपित किया जाए. ..(व्‍यवधान)..

          श्री अनिल जैन कालूहेड़ा -  अब अंधेर नहीं है जिन्होंने काल्पनिक बताया अब वह कुछ दिनों बाद इतिहास के पन्नों में सिमट जाएंगे.

          कुंवर अभिजीत शाह - यह कमलनाथ जी की राम वन गमन पथ योजना थी. आप विधान सभा में असत्य न बोलिये.यह गलत बात है.

            श्री महेश परमार - जिन किसानों ने विधायक बनाया उन किसानों के लिये बोल दीजिये जैन साहब.

          श्री अनिल जैन कालूहेड़ा - आप इतिहास के पन्नों में सिमट कर रहने वाले हो. आपने भगवान राम को काल्पनिक बताया.

          श्री महेश परमार - उन किसानों के बारे में भी बोल दो.

          श्री अनिल जैन कालूहेड़ा - माननीय अध्यक्ष महोदय,हमारी सरकार ने अन्य धार्मिक चेतना स्थलों को श्री देव महालोक सल्कनपुर,संतश्री रविदास महालोक सागर,श्री रामराजा महालोक ओरछा और ओंकारेश्वर महालोक के निर्माण के साथ-साथ ओंकारेश्वर में आचार्य शंकर अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत संस्थान को विकसित करने जा रही है. इस प्रकार हमारी सरकार संस्कृति और सनातन विचारों को भारत को विश्व के उच्च शिखर पर  पहुंचाने का काम कर रही है. अभी मेरे पूर्व के वक्ताओं ने सिंहस्थ के बारे में बहुत बड़ी-बड़ी बातें कही हैं. अरे,सिंहस्थ मेरे विधान सभा क्षेत्र में आता है. आप क्यों परेशान हो रहे हो. मेरे यहां विकास हो रहा है.

          श्री महेश परमार - और किसानों की जमीनों को देने का समर्थन करते हो आप. आप बोल दीजिये समर्थन करते हैं. उनके वोटों से विधायक बने हो आप.

          श्री अनिल जैन कालूहेड़ा -  उज्जैन में 2016 में तूफान आया,बाढ़ आ गई, आग लग गई उस समय उन पंडालों के अंदर न फायर ब्रिगेड पहुंच पाई न एंबुलेंस पहुंच पाई.

          श्री महेश परमार - माननीय अध्यक्ष महोदय,

          अध्यक्ष महोदय - महेश जी, उनकी बात उनको कहने दीजिये. आप अपनी बात कह चुके हो.

          श्री अनिल जैन कालूहेड़ा - उज्जैन  में 2016 में त्राहिमाम हो गया था. बाढ़,आंधी,तूफान,आग लगना,पूरी उज्जैन की जनता,पंडालों में जाकर सेवा कार्य करना चाहती थी.पंडालों के लोगों को भोजन मिले, पंडालों में नहाने की व्यवस्था हो, उनके कपड़े गीले हो गये, उनको कपड़े देने के लिये पूरा उज्जैन का समाज अग्रसर था लेकिन पहुंच नहीं पा रहा था क्योंकि अत्यधिक बारिश के कारण,कच्ची सड़क होने के कारण वहां किसी प्रकार के वाहन की सुविधा नहीं थी इसीलिये हमारी सरकार ने एप्रोच रोड सभी पंडालों तक बने इस बात का निर्णय लिया है और इसी के साथ-साथ क्षिप्रा मैया पर बात हो रही थी अरे जो लोग क्षिप्रा मैया की बात कर रहे थे 65 साल तक क्या किया.अरे हमारी सरकार ने क्षिप्रा मैया शुद्ध रहे,क्षिप्रा मैया निर्मल बहती रहे.क्षिप्रा मैया कल-कल बहती रहे. वहां साधु संतों का स्नान,आचमन ठीक प्रकार से हो जाए इस प्रकार हमारी सरकार और हमारी सरकार के मुखिया इन्दौर से आने वाली कान नदी को  कान डक्ट परियोजना के माध्यम से अन्य स्थान पर उसका पानी ले जाने का प्रयास हो रहा है. वह पानी ऐसे नहीं जायेगा 8 स्थानों पर बैराज बन रहे हैं. सिंचाई मंत्री जी भी मौजूद हैं उन बैराजों पर उच्च स्तरीय प्रयोगशाला होगी.ट्रीटमेंट प्लांट होंगे. उस पानी का शुद्धिकरण होगा. पानी की पीएच वैल्यू,पानी की सीओडी,बीओडी,पानी की हार्डनेस सबकी चेकिंग होकर वह पानी दूसरे स्थानों पर छोड़ा जायेगा और कान नदी को परिवर्तित करने के बाद क्षिप्रा मैया हमारी स्वच्छ बहेगी. इसके साथ-साथ हमारी क्षिप्रा मैया सदैव बहती रहे इसके लिये हमारी सरकार ने सेवरखेड़ी क्षिप्रा डेम परियोजना के माध्यम से अब सेवरखेड़ी में एक बहुत बड़ा डेम बनाकर सदैव क्षिप्रा मैया के पानी को छोड़ा जायेगा. बारिश के दिनों में क्षिप्रा मैया के पूरे पानी को डेम में लिफ्ट कर लिया जायेगा और क्षिप्रा को प्रवाहमान बनाने का काम डाक्टर मोहन यादव जी की सरकार कर रही है. अरे,इनके जमाने में तो एक बड़ा पुल और एक छोटा पुल होता था हमारे जमाने में पिछले सिंहस्थ 2016 में हमने 13 ब्रिज बनाये और इस बार 13 ब्रिज और बनने वाले हैं. इस प्रकार से 26 ब्रिज के माध्यम से हम सिंहस्थ के क्षेत्र में पहुंच पाएंगे. अनेकों रोडों का विकास हो रहा है. उज्जैन के आउटर रिंग रोड का विकास हो रहा है. उज्जैन में चारों तरफ विकास के काम हो रहे हैं क्योंकि सिंहस्थ हम सबका है. पूरे मध्यप्रदेश की गौरवशाली परंपरा का है. हम सबका है इसीलिये माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को और माननीय वित्त मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने सिंहस्थ की सभी प्रकार से चिंता की. अध्यक्ष महोदय,बहुत-बहुत धन्यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय-- सुनील भाई 3 मिनट में अपनी बात पूरी करना है.     

          श्री सुनील उईके (जुन्‍नारदेव)-- अध्‍यक्ष जी, मैं देख रहा था कि आप सबको 3 मिनट बोलकर 6 मिनट देते हैं. मैं देख ही रहा था क्‍योंकि मेरी बारी आ रही थी.        

          अध्‍यक्ष महोदय--  मैं तीन मिनट का आग्रह आपसे कर रहा हूं. तीन मिनट में अपनी बात पूरी कीजिये.

          श्री सुनील उईके--  जी धन्‍यवाद अध्‍यक्ष जी, मैं बजट के विरोध में खड़ा नहीं होऊंगा, बजट में क्‍या सुधार हो उस पर मैं बोलने के लिये खड़ा हूं, क्‍योंकि अगर मैं बजट का विरोध भी करूंगा तो मुझे मालूम है कि हां की जीत और हां की जीत होगी तो बजट तो पास होगा. मुझे बड़ा सौभाग्‍य प्राप्‍त हुआ कुछ दिन पहले मुख्‍यमंत्री जी से मिलने का आदरणीय उमंग सिंघार जी विपक्ष के नेता के नेतृत्‍व में हम पूरे विधायक वहां पर पहुंचे और जब हम लोग मुख्‍यमंत्री जी से मिले तो उनकी बात सुनकर उनसे मिलने के बाद मुझे अहसास हुआ कि मुख्‍यमंत्री जी बड़े संवेदनशील हैं और प्रदेश और प्रदेश की जनता के बारे में बड़ा सोचते हैं. उन्‍होंने हमें एक पाठ पढ़ाया कि आप लोग जो 15 करोड़ की मांग कर रहे हो, यह जो भी मांग आप कर रहे हो, मैं चाहता हूं कि आप लोग एक मॉडल विधान सभा बनाने के लिये एक सुझाव दें, एक विजन डाक्‍यूमेंट तैयार करें, जब आप मुझे देंगे तो हम उसके हिसाब से काम कर सकें. जब मैंने सुना और भी कई बातें हुईं लेकिन मुझे लगा कि जब बजट आयेगा तो वह विजन हमको दिखेगा जो मुख्‍यमंत्री जी का विजन है क्‍योंकि मोहन यादव जी उनका नाम है तो हमको लगा कि मन मोहने वाला बजट आयेगा, लेकिन मुझे कहते हुये बड़ा दुख है कि यह मन मोहने वाला बजट नहीं, यह छल और कपट करने वाला बजट है. मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं कि नर और नारायण से कपट करने वाला यह बजट है. यह बजट उस प्रदेश का बजट है जहां के वरिष्‍ठ मंत्री जिनको देखकर हम सीखते हैं, जिनको सुनकर चाहे वह किसी भी दल के हों हमें लगता है कि इनसे हमें मार्गदर्शन मिलेगा, लेकिन वह वरिष्‍ठ मंत्री जब प्रदेश की जनता को भिखारी कहता है और वित्‍त मंत्री उनकी बातों को अमल करते हुये इस बजट में जनता को भिखारी समझकर यह बजट पेश करते हैं, उसमें हमें दुख होता है और बड़े शर्म की बात यह है, बड़े दुख की बात यह है कि जो और भी हमारे वक्‍ताओं ने कहा कि यहां पर वित्‍त मंत्री जी ने जो बजट पेश किया, बच्‍चा पैदा होते ही 50 हजार के कर्ज में चला जाता है तो मैं ऐसा समझता हूं कि जो आदरणीय वरिष्‍ठ मंत्री प्रहलाद पटेल जी ने जो बात कही थी वह उन्‍होंने बहुत सोच समझकर कही थी कि जनता, आज जो बजट आया है वह बहुत सोच समझकर आया है और बहुत सोच समझकर उन्‍होंने यह बात कही थी. मुझे अत्‍यंत आश्‍चर्य होता है कि प्रदेश में हमारे जो उधर के मित्र हैं वह कह रहे हैं कि इससे बड़ा बजट कभी नहीं आया, बात सही है और इसको स्‍वीकार भी करना चाहिये कि इससे बड़ा बजट कभी नहीं आया, लेकिन बजट इतना बड़ा क्‍यों आया क्‍योंकि जितना बड़ा कर्जा उतना बड़ा बजट. अगर मान लो बजट को बड़ा नहीं करेंगे तो कर्जा ज्‍यादा दिखेगा तो इसलिये बजट को बड़ा करना हमारी मजबूरी थी इसलिये इतना बड़ा बजट इस प्रदेश में आने का काम किया. मुझे यह बात कहने में बड़ा दुख भी होता है कि आज बात हो रही है राम वन गमन पथ की यह जो बात हो रही थी हम इसका स्‍वागत करते हैं और हम सब भी  चाहते हैं कि विकास होना चाहिये और यह राम वन गमन पथ बनना चाहिये.

2.49 बजे                 सभापति महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय) पीठासीन हुये.

          श्री सुनील उईके--  हम सब चाहते हैं, इस सदन में बैठे सभी लोग यह चाहते हैं लेकिन मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि वर्ष 2007 में आपने राम वन गमन पथ के विकास की घोषणा की थी. वर्ष 2007 में आपने रामजी के वनवास तमाम स्‍थल जहां-जहां से राम जी गुजरे थे उन क्षेत्रों के विकास करने की बात कही थी और उसके लिये एक प्रारूप न्‍यास बनाया था. आज 18 साल हो गये, 14 साल में तो राम जी का वनवास भी खत्‍म हो गया था, लेकिन 18 साल में आपके वह पथ और जो विकास की बात थी वह नहीं हुई, यह बड़े दुर्भाग्‍य की बात है. जो बजट आपने बनबाया है उसका सही उपयोग कैसे हो सके वह सुनिश्चित करना भी हमारे लिये बहुत जरूरी है. मैं एक और बात कहना चाहता हूं इस बजट के लिये कि आज बजट पढ़ने पर मेरा ध्‍यान जब गया. जिस लाड़ली बहना के नाम की हम चर्चा कर रहे थे और हमारे मित्र कह रहे थे कि इतनी बड़ी योजना है, बात सही है, लाड़ली बहना योजना एक बड़ी योजना है, लेकिन बड़ा दुर्भाग्‍य है कि आज 14-15 महीने की सरकार है और इन 15 महीनों की सरकार में एक भी लाड़ली बहना बढ़ी नहीं है. यह कितना दुर्भाग्‍य है कि एक भी लाड़ली बहना नहीं बढ़ी है और यह मैं नहीं कह रहा हूं, यह हमारे पंकज उपाध्‍याय जी और खण्‍डवा के मित्र अभिजीत जी ने जो प्रश्‍न लगाया, उसमें मंत्री जी ने जवाब दिया है कि एक भी लाड़ली बहना इन 17 महीनों में नहीं बढ़ी है, तो आपकी नीति और नियत दिखाती है कि आप सिर्फ सरकार बनाने के लिये और वोट पाने के लिये यह सब काम करते हैं, तो यह कोई नई बात नहीं है, भारतीय जनता पार्टी का यह चाल और चरित्र रहा है.

          सभापति महोदय, मैं इसमें एक बात और कहना चाहता हूं कि आपने महिलाओं की बात कही है, आपने ध्‍यान दिया होगा, सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिये चलाई गई जो निर्भया योजना थी, उसमें पूरा बजट काटकर सिर्फ 9 हजार रूपये कर दिया है, आपने सिर्फ 9 हजार रूपये टोकन बजट दिया है, महिलाओं के सशक्‍तीकरण की बात होती है, महिलाओं के विकास की बात होती है, लेकिन बोलने में अच्‍छा लगता है, लेकिन जब हम बजट में देखते हैं तो 9 हजार रूपये आपने दिया है, जहां मदरसों में अच्‍छी शिक्षा के लिये 25 करोड़ रूपये का प्रावधान था, वहां पर आपने 3 हजार रूपये का प्रावधान किया है, तो यह देखकर हमें बड़ा दुख होता है कि बजट में यह सब चीजें जो आप कर रहे हैं, यह कहीं न कहीं इस प्रदेश की जनता के साथ, हमारे दबे कुचले लोगों के साथ एक अन्‍याय है.

          सभापति महोदय, अंत में मैं एक बात कहना चाहता हूं और दो तीन चार सुझाव देना चाहता हूं. मेरे तीन-चार सुझाव हैं, जैसे की कल बात हुई थी. मैं वित्‍तमंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित कराना चाहता हूं कि कल जो एक चर्चा हुई थी, जल जीवन मिशन पर, बड़ी बड़ी बातें तो हुईं और बात सही भी है कि बड़ी अच्‍छी योजना है और प्रधानमंत्री जी ने बड़ी सोच समझकर यह योजना बनाईं है, लेकिन जो उधर के सदस्‍य हों, चाहे इधर के सदस्‍य हों, इस योजना के बारे में सभी जानते हैं कि पाईप डालकर और पैसा निकालने का काम ठेकेदार कर रहे हैं, हां या ना और सिर्फ पाईप डालकर तो उस पर इम्‍प्‍लीमेंट कैसे हो सकेगा, मैं बताना चाहता हूं कि एक पॉलिसी बनी हुई है कि आपने पंचायत में पाईप डाला और 60 से 70 प्रतिशत पैसे आपके रिलीज हो जायेंगे, जब तक सोर्स जनरेट नहीं होगा, पाईप डालने का फायदा क्‍या है, पहले आपको यह प्रावधान करना चाहिए और उस पर वित्‍तमंत्री जी  एक मॉनिटरिंग होना चाहिए कि पहले सोर्स जनरेट हो और जब सोर्स जनरेट हो जाये उसके बाद पाईप लाईन डले, तब उसका भुगतान होना चाहिए, लेकिन पाईप लाईन में 60-70 का भुगतान होता है तो ठेकेदार उसके बाद पलटकर नहीं देखता है कि बोर हुआ कि नहीं हुआ, पानी निकला या नहीं, बिजली लगी या नहीं, लेकिन वह तो कंप्‍लीशन करके 60-70 प्रतिशत पैसे में अपना काम कर लेता है.

          सभापति महोदय, यह जो लाड़ली बहना के लिये एक जनसेवा मित्र चुनाव के पहले बनाये गये थे. 9 हजार 3 सौ लोगों की भर्ती की गई थी, जिनकी तनख्‍वाह 7 से 8 हजार रूपये थी और जिनके बारे में वित्‍तमंत्री जी पूर्व मुख्‍यमंत्री आदरणीय शिवराज जी ने कहा था कि आने वाले समय में हम इनको रेगुलर करेंगे, हम इनको अलग नहीं होने देंगे, लेकिन बड़े दुर्भाग्‍य के साथ कहना पड़ रहा है कि पिछले छ: महीने से वह सरकार के चक्‍कर काट रहे हैं, मंत्री और विधायकों के चक्‍कर काट रहे हैं और आज बेरोजगार होकर अपने घर पर बैठे हुए हैं, इस प्रकार से आपने उन जनसेवा मित्रों से विश्‍वासघात करने का काम भी किया है, अंत में आपने मुझे जो बोलने का मौका दिया, उसके लिये सभापति महोदय, मैं आपको धन्‍यवाद प्रेषित करता हूं.

            पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री प्रहलाद सिंह पटेल) -- सभापति महोदय, सुनील जी ने मेरे नाम का उल्‍लेख बजट में किया है,मुझे समझ नहीं आया है कि क्‍यों किया है? लेकिन उल्‍लेख किया है तो मुझे जवाब तो देना पड़ेगा. जिस संदर्भ में मैंने वह भाषण किया है, वह पब्लिक डोमेन में है, जिन लोगों ने उसे अनर्थ लिया है, उसमें सुनील जी भी एक नाम जुड़ गया है. अभी तक तो होलिका का बड़ा उपयुक्‍त समय था और कांग्रेस ने बड़ा सही समय चुना है, प्रहलाद को जलाने की कोशिश तो युगों से हो रही है, मैं बोला नहीं था, लेकिन समय इतना परफेक्‍ट चुना था, पुतले जल गये, बाकी सब हो गया, इनने जिंदगी भर लोगों को भिखारी बनाने की सलाह दी है और भिखारी बनाया है, तो मुझे लगता है कि इन बातों को बजट में लाने की जरूरत नहीं है. कुछ अच्‍छा किया है, सोचा है तो जरूर कहना चाहिए, बजट में प्रहलाद पटेल का उल्‍लेख करने की आवश्‍यकता थी नहीं, तो शायद मैं बोलता नहीं, मुझे लगता है कि पहले वह भाषण श्री सुनील जी पढ़ लेंगे, सुन लेंगे तो जिंदगी में वह भाषण कुछ काम आयेगा.

          श्री सुनील उईके-- भईया धन्‍यवाद, मंत्री जी मैंने बड़े धैर्य से उस भाषण को सुना है.

          सभापति महोदय -- सुनील जी आप बैठैं, वैसे भी विषयवार चर्चा होना चाहिए, विषय वस्‍तु से संबंधित बात ही आना चाहिए, क्‍योंकि विषय से संबंधित रहने पर ही सारगर्भित रहता है.

श्री माधव सिंह(मधु गेहलोत) (आगर) माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, उसके लिए मैं आप‍का आभारी हूं. हमारी सरकार ने 4 लाख 21 हजार करोड़ का जो बजट पेश किया है, यह हर वर्ग के लिए गर्व की बात है. हम शिक्षा की बात कर लें तो भरपूर बजट दिया गया है, स्‍वास्‍थ्‍य की बात कर लें तो भरपूर बजट दिया गया है, महिलाओं की बात कर लें तो भरपूर बजट दिया गया है. क्षेत्र के अंदर एक नई क्रांति आने वाली है, सरकार ने जो कदम उठाया है. हम सिंहस्‍थ की बात कर लें तो नंबर 1 की पोजिशन पर आने वाले 2028 में सिंहस्‍थ होगा और जो प्रयागराज में सिंहस्‍थ हुआ है वहां पर 65 करोड़ लोगों ने स्‍नान किया है, उज्‍जैन में इससे भी अधिक लोगों के आने की संभावना है. ऐसी चाक चौबंद व्‍यवस्‍था भाजपा की सरकार और डॉ. मोहन यादव की सरकार करने जा रही है. मेरा आपसे निवेदन है मेरा क्षेत्र भी उज्‍जैन से लगा हुआ है, वहां पर एक सड़क बनाने का काम किया है ,उसे घोसला के बाद ही टू-लेन में परिवर्तित कर दिया है, उज्‍जैन तक 4-लेन आता है और उसके बाद मेरे यहां से सड़क सिंगल लेन हो जाता है, उस रोड को बनाने का काम करें ताकि आने वाले समय में क्षेत्र के लोग जब सिंहस्‍थ में आए तो वहां पर जाम न लगे. अभी हमने प्रयागराज में देखा है कि लोग एक-दो दिन लाइन में जाम में फंसे थे, लोग परेशान हुए थे, इसलिए मेरी विधान सभा में सुसनेर से लेकर के बड़ौद तक रोड को जोड़ना है. पानी के डेमों की बात कर लें तो मेरा क्षेत्र राजस्‍थान की सीमा से लगा है, उसमें एक हड़ई और सिरकोई, खंदवास का डेम बनाना अनिवार्य है, और बनौटी के अंदर एक बैराज बन जाता है, जैसे मुख्‍यमंत्री जी ने बोला नदी जोड़ो अभियान के तहत नदियों को जोड़ने का काम हो रहा है. एक इंदौक डेम बना हुआ है, वहां पर दो नदियों का संगम हुआ है. यदि वहां एक बैराज बनता है तो मेरे क्षेत्र को 75 प्रतिशत पानी मिलने की संभावना है. मेरा निवेदन है कि बैजनाथ लोक लगभग 18 करोड़ रुपए की लागत से बन रहा है, उसमें और भी चाक-चौबंद व्‍यवस्‍था हो, ताकि राजस्‍थान से आने वाले लोग वहां पर रुक सकें और उन्‍हें सारी व्‍यवस्‍था मुहैया कराया जा सके. आने वाले समय में मेरे क्षेत्र के अंदर उद्योगों की कमियां है, जमीन आवंटित हो चुकी है, लाइट आ गई है, रोड बन गई, बताना चाहता हूं कि उस जमीन को उद्योगपतियों को आवंटित कर दें, ताकि आने वाले समय में मेरे क्षेत्र में रोजगार की कमियां पूरी हो सके. मेरे क्षेत्र का नाम इसलिए ज्‍यादा चलता है क्‍योंकि वहां पर सबसे ज्‍यादा सोलर का, विंड का काम चलता है वहां पर बड़े बड़े उद्योगपति आ रहे हैं तो वहां पर एक हैलीपैड बनाने का भी काम आप करवाएं, ताकि आने वाले समय में उद्योगपति आसानी से आ सके और वहां पर लैंड कर लें और जल्‍द से जल्‍द वहां से काम निपटाकर चले जाए. मेरे क्षेत्र के अंदर मेरी विधान सभा से लगभग 300 करोड़ रुपए का रेवेन्‍यु मेरी सरकार को मिलने वाला है तो वहां पर जल्‍द से जल्‍द काम करें, ताकि मेरा जिला सरकार पर बोझ न बने. हम और हमारी सरकार, आने वाले उद्योगपति, व्‍यापारी इन सभी लोगों को अच्‍छी से अच्‍छी व्‍यवस्‍था करवाकर देंगे, पूरी ताकत और ईमानदारी के साथ उनके साथ खड़े रहेंगे. माननीय डॉ मोहन यादव जी ने बोला है कि उद्योगपतियों के लिए सिंगल विंडों का काम हम चालू करने वाले हैं तो वहां पर जो भी लोग आएंगे माननीय मुख्‍यमंत्री जी और हमारे मंत्रीगण ये व्‍यवस्‍था कराएं, ताकि वहां पर लोगों को भटकना न पड़े. शिक्षा की बात करें तो हमारे यहां कॉलेज तो आ ही गए हैं, मेडिकल कॉलेज भी आप देने का काम करें, क्‍योंकि 65 किलोमीटर मेरा विधान सभा क्षेत्र है. हमारे यहां के बच्‍चे अगर किसी को डाक्‍टर बनना है तो वे या तो इंदौर जाएंगे या भोपाल जाना पड़ेगा और मेरा क्षेत्र इतना सक्षम नहीं है यह मेरा आपसे निवेदन है आपने मुझे बोलने का अवसर दिया मैं आपका आभारी हूं, जय हिन्‍द.

सभापति महोदय बहुत बहुत धन्‍यवाद श्री माधव सिंह जी.

डॉ.रामकिशोर दोगने ( हरदा )सभापति महोदय, आज बजट की चर्चा हो रही है. मैं सरकार के बजट के विपक्ष में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. सरकार का बजट 4 लाख 21 हजार करोड़ का है. इसकी देनदारी भी 4 लाख 21 हजार करोड़ रूपये है. हम घर का बजट बनाते हैं उसमें कुछ बचाते हैं, बचाकर उसको रखते हैं. यह तो जितना आया उतना खर्चा कर रहे हैं और उतना ही लोन ले लिया है, तो यह किस तरह से प्रदेश चलेगा इसमें यह उल्लेखित हो रहा है. मेरा अनुरोध है कि बजट देखिये 4 लाख 21 हजार करोड़ का साल का उसका ब्याज भी 42 हजार 1 सौ करोड़ रूपये होता है. हमारे 55 जिले हैं जिसमें 765 करोड़ रूपये का भार प्रत्येक जिले पर आ रहा है. यह भार कैसे पटेगा इसके ऊपर सरकारों को सोचना चाहिये. क्योंकि जैसे घर हमारा चलता है उसी तरह से प्रदेश को चलाने के लिये यहां पर बैठे हैं. हमारा प्रदेश अच्छा चले हमारी भी वही मंशा है. प्रदेश में लोगों का विकास हो, लोगों के काम हों, पर काम तो नहीं हो रहे हैं लोन लिया जा रहा है, तो इस पर ध्यान देने की जरूरत है. लोगों ने बाकी बातें कर दी हैं. मैं इस बात की तरफ आपका ध्यानाकर्षित करना चाहता हूं. हमारा मध्यप्रदेश कृषि प्रधान प्रदेश है किसान को खेत तक जाने के लिये रास्ते नहीं हैं. मनरेगा बंद हो गई है, ग्राम सड़क योजना बंद हो गई है. कोई भी पैसा जनपद-पंचायत में नहीं आ रहा है, उसको चालू किया जाये. आज हम देखें कि हारवेस्टर या ट्रेक्टर या गाड़ी किसान के खेत तक जाने लायक नहीं है. किसान परेशान हैं तो उनकी व्यवस्था की जाये, तो ज्यादा अच्छा है. इसमें उनकी व्यवस्था का कोई प्रावधान नहीं किया गया है, उसकी व्यवस्था की जानी चाहिये. किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी होना चाहिये. आज हम देखें कि मक्का का समर्थन मूल्य घोषित जरूर किया है, पर खरीदी नहीं हो रही है. मक्का की समर्थन मूल्य पर खरीदी होनी चाहिये. गेहूं की खरीदी पर 2700 रूपये देने की बात कही थी, वह भी होना चाहिये. हमारे सोयाबीन पर 6 हजार रूपये देने की बात हुई थी, वह भी होना चाहिये. इसके साथ ही धान की 31 सौ रूपये देने की बात हुई थी, वह भी नहीं हो रहा है. जब तक हमारे किसानों को इसका लाभ नहीं मिलेगा तो प्रदेश का विकास नहीं होगा. क्योंकि हमारा पूरा प्रदेश कृषि आधारित है. प्रदेश की पूरी अर्थ व्यवस्था किसानों के ऊपर चलती है. हम देखते हैं उद्योग धंधे लगते हैं, उनको सुविधा दी जाती है. पर किसानों को कोई भी सुविधा नहीं दी जा रही है. आज वर्तमान में देखें उद्योग धंधों को सबसिडी दी जा रही है. पर किसानों की सबसिडी खत्म कर दी गई है. किसानों को जरूर आगे बढ़ायें तो निश्चित रूप से प्रदेश आगे बढ़ेगा. किसान उपभोक्ता भी है. आज जितने उद्योग धंधे अगर किसी चीज का उत्पादन करते हैं तो उसका उपभोक्ता किसान ही है, पर उनके लिये कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है. उद्योग धंधों को लाभ दिया जा रहा है, यह नहीं होना चाहिये. किसानों के लिये काम होना चाहिये. इसके साथ ही हम बिजली का देखें. आज किसानों के पास बिजली की मोटरें हैं. मोटर लगाने के बाद बिजली का कनेक्शन ले रहा है. कनेक्शन लेने के बाद बिजली विभाग वाले बहुत ज्यादा बिजली का बिल बना देते हैं तथा ना भरने की स्थिति में उनके ऊपर बहुत सारी पैनल्टी लगा देते हैं. पैनल्टी लगाने का एक नया तरीका निकाला है कि उन्होंने कहा कि आपकी मोटर घिस गई है. तो आपको बिजली की खपत ज्यादा हो रही है. इसलिये आपके ऊपर 50 हजार से 1 लाख रूपये तक की पैनल्टी लगा दी है. अब किसान परेशान हो रहे हैं भागता फिर रहा है सब दूर अधिकारियों के पास पर उनकी कोई सुनने वाला नहीं है. उनको इतना पॉवर दे दिया है बिजली विभाग को वह किसी की भी नहीं सुन रहे हैं, किसान परेशान हो रहे हैं. इसी तरह से गांव में गरीब आदमी जिसकी झोपड़ी 1 लाख रूपये तक की नहीं है उनके ऊपर एक लाख रूपये का बिजली का बिल दे रहे हैं. यह सोचने की बात है कि बिजली विभाग इस तरह से अन्याय कर रहा है. इसको रोका जाना चाहिये. सभापति महोदय आऊट सोर्स के कर्मचारी हैं, आज भर्तियां नहीं हो रही हैं. आऊट सोर्स पर कर्मचारियों को रखे हुए हैं. आऊट सोर्स पर कम्पनी कमा रही है. कर्मचारियों को कुछ भी नहीं मिल रहा है. अगर उनको 16 हजार रूपये सरकार से मिल रहे हैं तो कम्पनी 12 हजार रूपये कर्मचारी को देते हैं बाकी 4 हजार रूपये बीच में खा जाते हैं, यह नहीं होना चाहिये. डायरेक्ट आप आऊट सोर्स से कर्मचारियों की भर्ती कीजिये तो ज्यादा अच्छा रहेगा. ताकि लोगों को रोजगार मिलेगा उसका फायदा भी मिलेगा. मेरा निवेदन है कि प्रत्येक गांव, प्रत्येक जिले, तहसील में हर गांव में बड़े बड़े सरकारी तालाब हैं . अगर हमारी अर्थ व्यवस्था को सुधारना है वहां पर पानी की व्यवस्था करना है तो उनके तालाब में जो अतिक्रमण हैं उनको हटा दिया जाये तथा हमारे तालाबों का सौन्द्रयीकरण किया जाये. उसकी बराबर कटिंग करके खुदाई कर दी जाये तो गांव में पानी की भी व्यवस्था हो जायेगी तथा सिंचाई की व्यवस्था भी हो जायेगी तथा वॉटर लेवल भी बना रहेगा. सबके लिये सुविधा हो जायेगी. मेरा अनुरोध है कि हरदा जिले में हरदा से आशापुर रोड है, उसके बीच में टेन्डर निकले थे तो उस रोड को बनवाया जाये. अभी बजट में डिक्‍लेयर किया गया है. होशंगाबाद से टिमरनी तक और टिमरनी के आगे खंडवा तक जाने के लिए रोड खराब है तो उसकी व्‍यवस्‍था की जाये. पीडब्‍ल्‍यूडी के रोड हमने दिये हैं. मैंने 43 रोड के लिए सरकार को दे रखे हैं. भोपाल लेवल पर यहां भिजवाए हैं. मैं नाम अभी अंदर लिखवा दूंगा. क्‍योंकि सब नाम बोलने में बहुत समय लगेगा. इसलिए मैं नाम नोट करवा दूंगा. इसमें कुछ रोड के नाम हैं. सोनपुरा से मकतापुर, कोकरावद से रनई, अफगांवकला से भैरवपुर, होते हुए गुन्‍नासपुर, रूनझुन से सांगरामाल करोडा राघव दीपगांव तक सड़क मार्ग  सारंगपुर से कोड़ावाइ मार्ग और प्रतापपुरा टेमलावाड़ी से रूनझुन तक मार्ग और सुकराह से खारपा मार्ग इस तरह से 43 रोड हैं.

          सभापति महोदय, इसके साथ ही मेरे जिले में 28 पंचायतें हैं. इन पंचायतों के भवन नहीं हैं. पंचायतविहीन भवन हैं, तो पंचायतविहीन भवन को पंचायत में दे दिया जाएगा, तो ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा. इसके साथ ही मेरा एक निवेदन है कि पूरे मध्‍यप्रदेश में आवेरब्रिज बन रहे हैं, लेकिन हरदा जिले में जिले लेवल पर आज भी रेलवे का ओवरब्रिज नहीं है. 1-1, 2-2 घंटे ट्रेन के लिए खडे़ रहना पड़ता है और हमारा बाम्‍बे से दिल्‍ली वाला मेन रोड है. जहां 15 मिनट में गाड़ियां निकलती हैं तो वह ओवरब्रिज आज तक नहीं बना है, तो उसको बनवा दिया जाए.

          सभापति महोदय, इसके साथ ही हमारा जिला कृषि प्रधान जिला है. कृषि महाविद्यालय की कई बार घोषणा हो चुकी है. इसके लिए तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री जी ने भी घोषणा की है. पुराने नेताओं ने भी घोषणा की है लेकिन इसके बाद भी आज तक नहीं बना है, तो कृषि महाविद्यालय का वहां निर्माण किया जाये, तो ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा. हरदा में उद्योग-धंधे नहीं हैं तो उद्योग-धंधों के लिए भी व्‍यवस्‍था की जाये. महाविद्यालय के लिए बार-बार जगह चिन्‍हित की जा रही है. हम लोगों ने जगह भी बतायी है और इसके लिए हमने उद्योग विभाग को जानकारी भी दी है लेकिन जगह निश्‍चित नहीं हो रही है, तो उद्योग-धंधे लगा दिए जाएंगे, तो निश्‍चित ही लोगों को काम और रोजगार मिलेगा.

          सभापति महोदय, इसके साथ ही मेरा एक और निवेदन है कि हमारे यहां 250 बेड का अस्‍पताल है. 50 बेड और बढ़ाया जाये. इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज जिला लेवल पर देने की योजना है, तो वह देंगे तो बहुत अच्‍छा रहेगा. मैं आपका आभारी हॅूं. मैं कहना चाहता हॅूं कि सरकार विकास के लिए काम करे, केवल ब्‍याज भरने के लिए काम नहीं हो, तो ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा. बहुत-बहुत धन्‍यवाद. जय हिन्‍द, जय भारत.

          सभापति महोदय -- बहुत-बहुत धन्‍यवाद. अब उप मुख्‍यमंत्री लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा, स्‍वशासी चिकित्‍सा महाविद्यालयों में कार्यरत चिकित्‍सकों को पूर्व सेवा का लाभ एवं उनके वेतन संरक्षण के प्रोटेक्‍शन का लाभ दिये जाने के संबंध में वक्‍तव्‍य देंगे.

 

3.03 बजे                                   शासकीय वक्‍तव्‍य

स्‍वशासी चिकित्‍सा महाविद्यालयों में कार्यरत चिकित्‍सकों को पूर्व सेवा का लाभ एवं उनके वेतन संरक्षण के प्रोटेक्‍शन का लाभ दिया जाना.

 

          उपमुख्‍यमंत्री, चिकित्‍सा शिक्षा (श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल) -- माननीय सभापति महोदय, विषय लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा विभाग अंतर्गत स्‍वशासी चिकित्‍सा महाविद्यालयों में कार्यरत चिकित्‍सकों को पूर्व सेवा का लाभ एवं उनके वेतन संरक्षण का लाभ दिये जाने बाबत् हमारी सरकार द्वारा नवीन शासकीय चिकित्‍सा महाविद्यालयों के सुचारू संचालन तथा प्रदेश के आम जन को बेहतर चिकित्‍सा सुविधा उपलब्‍ध कराने के लिए प्रदेश में योग्‍य एवं अनुभवी चिकित्‍सकों की उपलब्‍धता सुनिश्‍चित किेये जाने हेतु स्‍वशासी चिकित्‍सा महाविद्यालयों में पदस्‍थ चिकित्‍सकों का शासकीय चिकित्‍सा महाविद्यालयों में चयन होने पर नवीन नियुक्‍ति में मूल वेतन का संरक्षण दिये जाने के नीतिगत निम्‍नानुसार निर्णय लिये गये हैं : -

1.       स्‍वशासी संस्‍था में यदि चिकित्‍सकों को नवीन पद के निर्धारित लेवल में न्‍यूनतम लेवल से अधिक वेतन प्राप्‍त है, तो राज्‍य शासन अंतर्गत सेवा में उपस्‍थित होने पर उनके मूलवेतन मात्र का संरक्षण किया जायेगा. यह स्‍पष्‍ट किया जाता है कि वेतनमान ग्रेड वेतन मैट्रिक्‍स लेवल का संरक्षण नहीं होगा.

2.       चिकित्‍सकों की शासकीय सेवा में पदस्‍थापना होने पर वेतनमान मैट्रिक्‍स लेवल संबंधित नवीन पद के अनुसार ही होगा.

3.       नये पद पर नियुक्‍ति के फलस्‍वरूप पुराने पद के मूल वेतन के बराबर के प्रक्रम में नये पद के वेतनमान मैट्रिक्‍स लेवल में वेतन प्राप्‍त होगा. यदि पूर्व में आहरित वेतन का प्रक्रम नवीन वेतनमान मैट्रिक्‍स लेवल में नहीं है तो यह नवीन वेतनमान मैट्रिक्‍स लेवल में समकक्ष वेतन के ठीक निचले प्रक्रम पर वेतन निर्धारित कर अंतर की राशि व्‍यक्‍तिगत वेतन के रूप में देय होगी, जो कि आगामी वेतन वृद्धि में समायोजित होगी. नये पद पर नियुक्‍ति के फलस्‍वरूप पुराने पद में प्राप्‍त मूल वेतन यदि नये पद के वेतनमान मैट्रिक्‍स लेवल में अधिकतम से भी अधिक है तो नये पद हेतु निर्धारित वेतनमान मैट्रिक्‍स लेवल के अधिकतम पर ही वेतन का निर्धारण होगा. अर्थात् अंतर की राशि व्‍यक्‍तिगत वेतन के रूप में देय नहीं होगी. वेतन वृद्धि की पात्रता नवीन पदस्‍थापना के पद पर उपस्‍थित दिनांक के पश्‍चात् की गई सेवा अवधि के आधार पर निर्धारित होगी.

          कार्मिकों के स्‍वाशासी संस्‍थाओं में संबद्ध होने के कारण वित्‍त विभाग का परिपत्र दिनांक 26 सितम्‍बर 1972 प्रभावशाली मान्‍य नहीं होगा. एनपीएस के अभिदाता को वर्तमान नियोजन में आवंटित प्रॉन नवीन पद पर भी निरंतर रहेगा. स्‍वशासी संस्‍था में की गई सेवा की गणना नवीन सेवा के साथ नहीं की जायेगी. उक्‍त सेवा की गणना पेंशनरी दायित्‍व एवं समयमान चयन वेतनमान पदोन्‍नति अवकाश की पात्रता आदि की गणना में मान्‍य नहीं होगी.

            सभापति महोदय - श्रीमती गंगा उईके (अनुपस्थित), श्री उमाकांत शर्मा (अनुपस्थित).

          श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा (सतना)- सभापति महोदय, बहुत बहुत धन्यवाद. जो बजट पेश हुआ है उसके संदर्भ में बोलने के लिए मौका मिला है, उसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं. यहां पर तमाम बुद्धिजीवी लोग बैठे हैं. बहुत सारे अनुभवी लोग हैं, बहुत सारे बड़े अफसर हैं, बड़े जिम्मेदार लोग हैं. अभी जिस तरह की बातें हो रही थी, जिस तरह की बहस हो रही थी, उस पर मैं थोड़ा सा लोगों का ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूं कि जो सदन की गरिमा है, जो सदन की व्यवस्था है, जो हमारे देश का संविधान है. हम क्यों उसको हर बार नजरअंदाज कर देते हैं? 20 साल के विकास की गाथा होती है. अच्छा है विकास तो हुआ है, होना भी चाहिए. हम भी 20 साल पहले स्कूल में थे और यहां पहुंच गये तो इसमें सरकार का योगदान है क्या? अगर प्रदेश में निजीकरण न हो, प्राइवेट विद्यालय न हों तो क्या हमारे स्कूल, हमारे कॉलेज प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था संभालने में सक्षम हैं. अगर हमारे प्रदेश में प्राइवेट अस्पताल न हों तो क्या सरकारी अस्पताल हमारे यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था संभालने में सक्षम हैं, शायद नहीं.

3.13 बजे                 {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

अध्यक्ष महोदय, अगर प्राइवेट बसें न हों तो क्या हमारी परिवहन व्यवस्था सरकारी संस्था संभाल सकती हैं, बिल्कुल नहीं. क्या इस पर ध्यान दिया गया है? आदरणीय वित्तमंत्री जी आपने जो बजट बनाया है, जिस बजट को आपने पढ़ा है, जिस बजट पर आपने दस्तखत किया है, यह बजट आपने नहीं बनाया है. यह बजट उन अफसरों ने बनाया है, जिन्होंने हमें और आपको आपस में लड़ाया है. उन अफसरों ने बनाया है. अभी थोड़ी देर पहले हम लोग बात कर रहे थे. जब हमारे विधायक साथियों ने ध्यानाकर्षण लगाया था कि जिसे हम आतंकवादी कह रहे हैं, नक्सली कह रहे हैं उसे हम सहायता भी दे रहे हैं, जांच की भी बात कर रहे हैं, नौकरी की भी बात कर रहे  हैं क्योंकि हमें घटना नहीं मालूम होती है. हमें अफसर जो लिखकर देते हैं वह हम बोलने लगते हैं. यह लोकतंत्र का मंदिर है. यहां लोकतंत्र की चल कहां रही है? यहां चल तो रही है अफसरों की. ग्राम पंचायत का सरपंच, पंचायत नहीं चला पा रहा है, चलाता है गांव का सचिव. सही बात है कि नहीं. (मेजों की थपथपाहट) और यह सरकार कह रही है कि हम चला रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, यह सरकार का धोखा है. 4 लाख 20 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश कर रहे हैं लेकिन मध्यप्रदेश की यातायात व्यवस्था कैसे सुधरेगी, मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था कैसे सुधरेगी, कैसे मध्यप्रदेश के बच्चों को रोजगार मिलेगा? आज जितना भी हम यह देख रहे हैं लगातार कि उद्योग, रोजगार लगाने के लिए बहुत ज्यादा व्यापारी लोग आए हैं. मध्यप्रदेश के नौजवानों को मौका क्यों नहीं मिल रहा? सरकार उनको संरक्षण क्यों नहीं दे रही है. हजारों करोड़, 18 हजार एकड़ जमीन हम बाहर के उद्योगपतियों को दे रहे हैं. और मध्‍यप्रदेश के नौजवान को एक एकड़ नहीं दे पा रहे हैं. यदि वह एक एकड़ की लीज़ मांगे तो उसको एक एकड़ जमीन सरकार की तरफ से नहीं मिलती, लेकिन 18 हजार एकड़ उद्योगपतियों को हम दे रहे हैं. इसी तरह से नौजवानों को अगर हम प्रोत्‍साहन दे दें. यदि उन्‍हें राइस मिल लगाना हो, क्रेशर लगाना हो, छोटी सी फैक्‍ट्री लगाना हो यदि उनको अनुदान चाहिये तो उसे हजारों-लाखों रूपये घूंसे देना पड़ती है. अभी आपने बजट में एक चीज़ पढ़ी..

          अध्‍यक्ष महोदय- सिद्धार्थ जी पूरा करना पड़ेगा.

          श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा- सर, दो-तीन विधायक नहीं थे उनका समय भी दे दीजिये. मैं ज्‍यादा समय नहीं लूंगा. मैं 6 साल में पहली बार बोल रहा हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय- आप अपनी बात पूरी करो, आज समय की सीमा है.

          श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा- अध्‍यक्ष महोदय, एलीवेटेड रोड की बात माननीय वित्‍त मंत्री जी ने अपने भाषण में कही थी और उसमें उन्‍होंने बोला कि एलीवेटेड कॉरीडोर जैसी अनेक परियोजनाओं के साथ मध्‍य प्रदेश में अधोसंचना विकास में तेजी से आगे बढ़ रहा है. भोपाल में, देवास में, ग्‍वालियर में, जबलपुर में और सतना में, चूंकि मैं सतना का निवासी हूं, मुझे आज तक नहीं दिखा की कहीं निर्माण चल रहा हो. सतना का नगर निगम भ्रष्‍टाचार का वह अखाड़ा बन गया कि आज सीवर लाइन के नाम पर पूरा शहर खोद दिया गया है. सीवर लाइन के नाम पर इतना भ्रष्‍टाचार हुआ है कि चार-चार ठेकेदार आकर चले गये, जो अभी एक हमारे साथी ने कहा कि पाइप डाला और पैसे निकालकर चले गये. काम को पूरा कौन करेगा ? यह मैं वित्‍त मंत्री महोदय, आपसे पूछना चाहता हूं कि अधिकारियों की क्‍या नैतिक जिम्‍मेदारी है. आपका ध्‍यान भी आकर्षित कराना चाहता हूं कि तमाम निर्माण एजेंसियां हैं और भारी-भरकम बजट हैं, लेकिन सबके एस.ओ.आर. अलग क्‍यों हैं. नगर निगम का अलग एस.ओ.आर, लोक निर्माण विभाग का अलग एस.ओ.आर, ग्राम पंचायत का अलग एस.ओ.आर यहां तक कि जो प्रधान मंत्री आवास योजना है उसमें शहर के हितग्राही को ज्‍यादा पैसा मिलता है और ग्राम के हितग्राही को कम पैसा मिलता है. यह भेदभाव क्‍यों है. कोई भी आदमी जब गांव में सामान लेकर जाता है तो उसे ज्‍यादा भाड़ा भी देना पड़ता है. आपको इस पर भी तो ध्‍यान देना चाहिये.

          अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह आउट सोर्स की बात है. हमारे मध्‍य प्रदेश में लाखों पद खाली हैं, सरकार स्‍वीकारती है. लाखों लोगों को आउट सोर्स में रखा जाता है यह भी सरकार स्‍वीकारती है तो उन आउट सोर्स कर्मचारियों को परमानेंट क्‍यों नहीं किया जाता है. आज 40 साल का आदमी संविदा में नौकरी करके अपनी फैमिली प्‍लानिंग नहीं कर पा रहा है. वह यह तय नहीं कर पा रहा है कि मैं घर कैसे बनाऊं, वह तय नहीं कर पा रहा है कि मैं अपने बच्‍चों को कहां पढ़ाऊं, वह ना एल.आई.सी. करा पा रहा है ना घर बना पा रहा है, कहां जाये. वह 40 साल का हो गया है, अगर कल उसकी घटना-दुर्घटना में मौत हो जाये तो उसके परिवार की तरफ ध्‍यान देने वाला कोई नहीं है.

          अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह मेरा अपना सतना विधान सभा जो इस बजट की उपेक्षा का शिकार हुआ है, इस बार नहीं बार-बार. सतना उन शहरों में से है जो सबसे ज्‍यादा राजस्‍व देने वाले जिलों में से है. वहां माइनिंग के लगातार उद्योग लगाये गये हैं और काम चालू हैं, लेकिन वहां पर डी.एम.एफ. का पैसा खर्च नहीं होता है. डी.एम.एफ. का पैसा भोपाल में खर्च होता है. डी.एम.एफ. का पैसा कलेक्‍टर तय करता है, वह अपनी मर्जी से खर्च करता है. कलेक्‍टर को किसी से पूछने की जरूरत नहीं है. मेरा आपसे अनुरोध है कि इसकी बैठकें समय पर हों, इसका भी नियम हो और उसके भी पैसे की देखरेख होनी चाहिये.

          अध्‍यक्ष महोदय,  हमारे यहां अस्‍पताल में, मेडिकल कॉलेज में 6 महीने से आउट सोर्स के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है. आदरणीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी चले गये. वह होते तो और अच्‍छा लगता कहने में कि 6 महीने से आउट सोर्स के कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है. हमारे यहां आज भी जिला अस्‍पताल में कार्डियो और न्‍यूरों की कोई यूनिट नहीं है. जिला अस्‍पताल है वहां पर अगल-बगल के कई जिलों के लोग वहां पर आते हैं. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि मेडिकल कालेज के कर्मचारियों का वेतन और हमारे अस्‍पताल में सभी व्‍यवस्‍था की जाये. धन्‍यवाद. जय हिंद.

            श्री दिनेश राय मुनमुन (सिवनी)अध्यक्ष महोदय, हमारी सरकार ने,उप मुख्यमंत्री जी  ने जो  बजट पेश किया है,  इसके समर्थन में मैं खड़ा हुआ हूं. प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश  के शहरी एवं ग्रामीण अंचलों में  बेहतर सुलभ आवागमन  की  सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए सरकार द्वारा 1 लाख किलोमीटर सड़कों  को बनाने का लक्ष्य रखा गया है.  गरीबों को अनाज के लिये 7132 करोड़ रुपये का प्रावधान  किया गया है.  खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिये  प्रत्येक विधान सभा में  एक स्टेडियम का निर्माण  कराये जाने का प्रावधान रखा है. किसान भाइयों के लिये  धान की फसल में बोनस के लिये  850 करोड़ रुपये का प्रावधान  किया गया है.  इसके अतिरिक्त किसान प्रोत्साहन  योजना मद में  5230 करोड़  रुपये  का प्रावधान किया है.  इसके साथ ही  किसान भाइयों को  शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण लगातार दिया जायेगा.  हमारी सरकार द्वारा ग्रामीण   क्षेत्रों में  शुद्ध पेयजल की आपूर्ति  सुनिश्चित करने के लिये   17135  करोड़ रुपये का प्रावधान रखा है. प्रदेश में महिला सशक्तिकरण   एवं नारी  उत्थान  के लिये संचालित विभिन्न योजनाओं के लिये 26797 करोड़ रुपये  का प्रावधान किया गया है. हमारे प्रदेश के  संवेदनशील जन नायक  यशस्वी मुख्यमंत्री जी  द्वारा प्रदेश के विकास एवं जन जन के लिये  जन हितैषी कल्याणकारी  सभी योजनाओं के लिये  आवश्यकतानुसार राशि का   प्रावधान रखा है.  प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश  में औद्योगिक एवं  विकास योजनाओं  को रोजगार  उपलब्ध कराने की दृष्टि से  इन्वेस्टर्स समिट का सफल आयोजन किया,  जिसके  फलस्वरुप  प्रदेश में  निवेश के लिये हजारों करोड़ रुपये का  प्रस्ताव प्राप्त हुआ है,  जिसके सुखद परिणाम आगामी समय में देखने को मिलेंगे.  प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों  के विकास के लिये 18715 करोड़  रुपये का  प्रावधान रखा है. प्रदेश में  वंचित वर्गों को  सुलभ उपचार उपलब्ध हो सके,  इस हेतु  2039 करोड़ रुपये का  प्रावधान रखा है. ग्रामीण क्षेत्रों में सुलभ,  सुगम एवं सस्ता  परिवहन उपलब्ध  कराने  के लिये मुख्यमंत्री  सुगम परिवहन  सेवा प्रारम्भ  की जायेगी, जिसके लिये बजट में प्रावधान किया गया है.  मध्यप्रदेश सरकार का यह बजट  देश के यशस्वी प्रधानमंत्री,  नरेन्द्र मोदी जी के विकास संकल्पों,  समाज के अंतिम  छोर के व्यक्ति  के  अन्त्योदय की अवधारणा,  सबका साथ, सबका विकास  की परिकल्पना को साकार  करने  वाला है.  जन कल्याणकारी,  विकासोमुखी, सभी  वर्गों के हितों की  पूर्ति करने वाला है.  अभी हमारे  साथियों ने लाडली  बहना  को लेकर कई बार बात की.  इस बार हमारी सरकार ने  कई  केंद्र की योजनाओं से  जोड़ा है. लाडली बहना को  अटल पेंशन योजना से जोड़ा है.  मैं विपक्ष के नेताओं को बताना चाहता हूं कि जो बहनें हमारी  21 साल की लाडली बहना है और वह 120 रुपये   प्रतिमाह इस  अटल   पेंशन में अपनी राशि  जमा करेंगी, तो  ठीक 60 साल के बाद  उनको 6 हजार रुपये  प्रति  माह पेंशन मिलेगी.  मेरी विधान सभा में 25  हजार लाडली बहनाओं को  स्वतः इस पेंशन से जोड़  दिया गया. इसी प्रकार  पीएम  बीमा योजना से  अगर इन बहनों को जोड़ेंगे, हम सब अपने प्रयास करके,  तो मैं समझता हूं कि  उनको 3 हजार से भी ज्यादा   आने वाले समय में पेंशन मिलेगी.  इस योजना का यह  सबसे बड़ा काम  किया है हमारी सरकार ने. 3 लाख  नई नौकरियों के लिये  प्रावधान रखा गया है.  महाकाल की तर्ज पर बनेगा  ओंकारेश्वर  लोक.  40 रुपये प्रति नग  हमारे गौवंश को मिलेगा. पहले 20 रुपये मिलता था,  आज 40 रुपये उनको  सबको देंगे और  5 रुपये लीटर का  दूध जो खरीदी करेंगे, उसमें बोनस  हमारी सरकार देने जा रही है.  1 अप्रैल से मिलेगा   सातवां वेतनमान का   लाभ. श्री कृष्ण  पाथेय  योजना के लिये  10 करोड़ रुपये के श्री  कृष्ण  धार्मिक स्थलों का विकास  किया जायेगा.  चित्रकूट शहर के विकास के लिये  30 करोड़ रुपये, कामकाजी  महिलाओं के लिये  भी इस बार स्पेशल है.  हमारी महिलाओं के लिये भी  छात्रावास जैसी व्यवस्था  की जा रही है, जो  काम  करने वाली महिलाएं आती हैं,  उनको भी रहने की व्यवस्था  हमारी सरकार देने जा रही  है.  गरीबी रेखा के नीचे  जीवन यापन करने वालों  के लिये भी विशेष पैकेज सरकार दे रही है.  सीएम राइज स्कूल के लिये  बजट 1017  करोड़ रुपये का प्रावधान है. हर विधान सभा  में  हमारे स्टेडियम बनने जा रहे हैं.  हम देखते हैं कि गांव  में  गौठान, श्मशानघाट  और ग्राउंड की जगह  खत्म है, लेकिन सरकार ने बड़ी संवेदना  दिखाते हुए हर विधान सभा में  एक ग्राउंड दिया है, जो हमारे युवाओं के लिये  काफी कारगार होगा.  आज विधान सभा के   50 ऐसे  छात्र जो विदेशों में पढ़ाई करने के लिये हमारी सरकार पहुंचाने वाली है. प्रदेश में  डिजिटल यूनिवर्सिटी  खुलेगी. इसके अलावा  राष्ट्रीय रक्षा  विद्यालय भी होगा.  अध्यक्ष महोदय,  आपने बोलने के लिये समय दिया, बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्री आरिफ मसूद (भोपाल-मध्य)--  अध्यक्ष महोदय, एक मिनट का समय दे दें.  भोपाल का मास्टर प्लान नहीं आया है.  यहा बार बार विकास की बात चली है, इसलिये मैं बोल रहा हूं कि विकास  का मास्टर प्लान ही नहीं है.  आज तक न जाने कितने साल  से भोपाल का मास्टर प्लान  नहीं आया है और हम विकास की बात  कर  रहे हैं और बजट की बात कर रहे हैं.  तो  मैं चाहूंगा कि कभी भी  सदन को इसलिये अवगत करायें कि  मास्टर प्लान लागू हो जाये, तो कम से कम विकास  की गति बढ़ जायेगी, धन्यवाद.

 


 

            श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे(अटेर)--माननीय अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद जो आपने मुझे अपनी बात को रखने का अवसर दिया. अध्यक्ष जी, मैंने माननीय उप मुख्यमंत्री जी का बजट भाषण ध्यानपूर्वक सुना और पढ़ा . ऐसा कहा कहा गया था कि मध्यप्रदेश में पहली बार जीरो बेस बजट लाया जायेगा. तो जीरो बेस बजट इसलिये यह नहीं है क्योंकि जीरो बेस बजट का मतलब यह होता है कि जब भी कोई बजट लायेगा तो उसकी पूर्व के बजट से तुलना नहीं की जायेगा, लेकिन जब माननीय उप मुख्यमंत्री जी अपना भाषण दे रहे थे तब उन्होंने अनेकों बार पूर्व के बजट से तुलना की है कि पहले इतना था और इतने प्रतिशत की वृद्धि हुई है. जीरो बेस बजट का औचित्य ही खतम हो जाता है जब वह तुलनात्मक हो गया तो वह नार्मल बजट की तरह उसको पेश करना चाहिये इसलिये मैं चाहता हूं कि इस बजट को जीरो बेस बजट न कहा जाये. इस बजट में कोई प्लानिंग नहीं है. अध्यक्ष जी इस बजट पर मैं जो बातें कहूंगा हर चीज के तथ्य और आंकड़े भी देने का प्रयास करूंगा और मैं चाहूंगा कि उप मुख्यमंत्री जी जब अंत में संबोधन करें तो शायद उन बातों का उत्तर मुझे मिले.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इसलिये कह रहा हूं कि बजट में प्लानिंग नहीं है क्योंकि टोटल बजट 3 लाख 75 हजार 337 करोड़ रूपये का और इसमें रेवेन्यू हेड में लिया गया है 77 प्रतिशत पूरा. रेवेन्यू हेड होता है जिसमें नॉन प्रोडेक्टिव काम होते हैं, सेलरी हो गई, इंट्रेस्ट हो गया, जहां विकास के कार्य नहीं होते हैं, जो एक्चुल में विकास कार्य के लिये जो बजट एलोकेशन है कैपिटल हेड में जो कि है 23 प्रतिशत, तो मात्र 23 प्रतिशत विकास कार्यों के लिये ही उपयोग होगा मध्यप्रदेश की जनता के लिये इसलिये मुझे लगता है कि यह कोई प्लान्ड बजट नहीं है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, इस बजट में जिंदा लोगों के साथ में तो धोखा हुआ ही है, परंतु मैं आपको आंकड़ों से स्पष्ट करूंगा कि जो लोग स्वर्गवासी हो चुके हैं उनके साथ मे भी धोखाधड़ी हुई है. जिंदा लोगों के साथ में कैसे धोखा हुआ है पहले मैं यह बताना चाहूंगा. अध्यक्ष जी इस बजट को रेवेन्यू सरप्लस बजट दिखाने की कौशिश की गई है आंकड़ों के फर्जी खेल के द्वारा, जो पुस्तक हमें प्राप्त हुई है वित्त सचिव का स्मृति पत्र, इसके पेज 1 के बिंदू 19 को मैं, रेफर कर रहा हूं और यह कहना चाहता हूं कि सिर्फ बजट को रेवेन्यू सरप्लस दिखाने के लिये आंकड़े के साथ में छेड़ छाड़ की गई है, ज्यादा नहीं जाना पड़ेगा सिर्फ इसके एक कंपोनेंट पर ही मैं डिस्कस करके बताऊं स्टेट टेक्स की बात करें सिर्फ एक कंपोनेंट से ही यह साबित हो जायेगा कि इसमें आंकड़ों के साथ में हेरफेर की गई है, सिर्फ रेवेन्यू सरप्लस दिखाने के लिये लेकिन वास्तव में जब सरकार का राजस्व व्यय, उसकी राजस्व प्राप्तियों से अधिक हो जाता है तो उसे राजस्व घाटा रेवेन्यू डेफिसिट बजट कहते है. स्टेट टेक्स्ट कंपोनेंट में आयेंगे जब वैट की  बात करेंगे तो वैट में 2024-25 में 7 प्रतिशत की एक्सपेक्टेड ग्रोथ थी अब वर्ष 2025-26 की बात की जावे तो इसमें अचानक से वृद्धि कर दी है 15 प्रतिशत की. जबकि सामान्य तौर पर दुगने से ज्यादा की वृद्धि नहीं की जा सकती है, 1 प्रतिशत बढ़ सकता है, 2 प्रतिशत बढ़ सकता है लेकिन सीधे सीधे 7 प्रतिशत का 15 प्रतिशत कर दिया . इस प्रतिशत को यदि अमाउंट में केल्कुलेट करेंगे तो 7 प्रतिशत एमांउट में केलकुलेट करने के बाद हो जाता है 1276 करोड़ रूपये तो अभी रेवेन्यू सरप्लस बजट दिखाया है 617 करोड़ का यदि 7 प्रतिशत कम कर दिया जायेगा तो यह माइनस 617 करोड़ हो जायेगा. सिर्फ सरप्लस दिखाने के लिये इसमें वृद्धि करके 7 प्रतिशत से 15 प्रतिशत दिखाया है नहीं तो वास्तव में यह रेवेन्यू डेफिसिट का बजट है यह माननीय उप मुख्यमंत्री जी को मैं बताना चाहता हूं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, जो लोग स्वर्गवासी हो चुके हैं उनके साथ में कैसे धोखाधड़ी हो रही है. मेरे पास में कैग की रिपोर्ट है जो कि पटल पर प्रस्तुत की गई है. मैं इस कैग की रिपोर्ट को रेफर करके कह रहा हूं इसके पेज क्रमांक 12 पर स्पष्ट रूप से दिया गया है जो लेबर डिपार्टमेंट की संबल अंत्येष्ठी योजना है उसमें 2.47 करोड़ रूपये फर्जी तरीके से अपात्र लोगों को दिये गये. तो जो लोग स्वर्गवासी हो चुके हैं जिन पैसों पर उनका अधिकार था यह पैसा उनको न मिलकर के यह पैसा मिल रहा है अपात्र लोगों को और अधिकारी अपने रिश्तेदारों को दे रहे हैं और ऐसे ऐसे लोगों के पास में जा रहा है जो इसके पात्रधारी नही हैं, जिनके पास में लेबर कार्ड नहीं है, जो लेबरकार्ड होल्डर नहीं हैं उन लोगों को यह पैसा मिल रहा है, तो यह मरे हुये लोगों के साथ में भी धोखा हो रहा है. और अध्यक्ष जी मैं कहना चाह रहा हूं कि यह निरंतर चला आ रहा है, ऐसा नहीं है कि यह एक वर्ष की रिपोर्ट में आ गया यह हर साल हो रहा है और दुख की बात है इस पर मैं माननीय उप मुख्यमंत्री जी का ध्यानाकर्षित करते हुये कहूंगा कि इसमें एक जिले का नाम आया है मंदसौर जहां का प्रतिनिधित्व माननीय उप मुख्यमंत्री जी करते हैं. आपके जिले में भी मरे हुये लोगों के साथ, स्‍वर्गवासी लोगों के साथ इस प्रकार की धोखाधड़ी हो रही है. मैं एक और उदाहरण देना चाहूंगा मंडला का, जो मंडला में एक एनकाउंटर हुआ, उसमें आज माननीय मंत्री, नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल जी ने 10 लाख रुपये की घोषणा की. मैं समझता हूं कि मध्‍यप्रदेश का आदिवासी पैसे का नहीं सम्‍मान का भूखा है. उसकी एक बार नहीं दो बार हत्‍या हुई. पहली हत्‍या हुई गोली मारकर और जब गोली मार दी गई उसके बाद उसकी दोहरी हत्‍या, चारित्रिक हत्‍या की गई, उसका नक्‍सली और नक्‍सलियों से संबंध बताकर. मैं समझता हूं इसकी जितनी निंदा की जाए उतनी कम है. यह मैं आपसे मांग करूंगा. देखिये जब कोई असत्‍य बोलता है तो कैसे मॉं सरस्‍वती स्‍वयं ही विराजमान हो जाती हैं. जब माननीय मंत्री जी अपना वक्‍तव्‍य दे रहे थे तो वह एक शब्‍द बोल रहे थे पुलिस की कार्यप्रणाली और बोलते-बोलते स्लिप ऑफ टंग हुआ, उसमें निकला पुलिस की कायर प्रणाली. आप नोट कीजिएगा. उन्‍होंने बोला तो कायर प्रणाली निकला. तो यह मॉं सरस्‍वती हैं.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करूंगा कि मेरे विभाग में कानों के जांच की अच्‍छी व्‍यवस्‍था है, कानों की जांच करा लें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मैं डॉक्‍टर को कहूंगा आप दोनों लोग चेक करा लें. (हंसी) चलिये हेमंत जी, पूर्ण करिये. नेता प्रतिपक्ष जी को अपना वक्‍तव्‍य देना है.

          श्री हेमंत सत्‍यदेव कटारे -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसको जल्‍दी ही समाप्‍त कर रहा हूं. बस दो-चार बिंदु हैं जो अभी तक नहीं आये हैं. बस उन्‍हीं बिंदुओं पर बोलूंगा. जो आ चुके हैं उन पर बात नहीं करूंगा, तो मैं इस पर कह रहा था कि यह जो फर्जी एनकाउंटर हुआ है, इसमें एक करोड़ रुपये का प्रावधान कम से कम किया जाना चाहिये और शासकीय नौकरी दी जानी चाहिये, क्‍योंकि उनकी अब सिर्फ पत्‍नी बची हैं और 5 बच्‍चे हैं. ऐसी स्थिति में उनकी तरफ हमको सिम्‍पैथेटिक नज़रों से देखना चाहिये. किसानों के साथ भी इस बजट में धोखाधड़ी हुई है. विश्‍वासघात हुआ है. जो प्राकृतिक आपदा में किसानों के लिये पैसा आता है वह इस कैग की रिपोर्ट में आया है. इस कैग की रिपोर्ट में स्‍पष्‍ट रूप से आया है कि जो पैसा प्राकृतिक आपदा के माध्‍यम से मिलना चाहिये था, 23.81 करोड़ रुपये किसानों को जाना था, लेकिन यह भ्रष्‍ट अधिकारी और उनके रिश्‍तेदारों के पास पहुंच गया. 2.67 करोड़ रुपये उनके रिश्‍तेदार चाट गये और 21.14 करोड़ अपात्र लोगों के पास पहुंच गया. मैं इसमें आपको यह बताना चाहूंगा, आप देखिये इसमें कितना बड़ा भर्जीवाड़ा हुआ है. इसके पेज क्रमांक 27 पर एक एसडीएम के नाम से पैसा निकाला गया है और दो हस्‍ताक्षर बनाये हैं. एक असली हस्‍ताक्षर है और एक फर्जी हस्‍ताक्षर है. फर्जी हस्‍ताक्षर करके पैसा किसानों के हित का निकाल लिया और ऐसे लोगों को दे दिया जो उसके पात्रधारी थे ही नहीं. यह किसानों के साथ ही विश्‍वासघात का बजट है और इसे कूटरचना कहते हैं. ईओडब्‍ल्‍यू फर्जी मुकदमे तो लगा देती है. जहां असली में कूटरचना होती है वहां उनकी हिम्‍मत मुकदमा कायम करने की नहीं होती है. अगर ईओडब्‍ल्‍यू के अधिकारी हों तो सुन लें नहीं तो बाद में रिकॉर्डिंग उन तक पहुंच जाएगी.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे कहना चाहता हूं कि एक विषय है जो हमारे क्षेत्र से जुड़ा हुआ है. इसमें मैं आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना भी करूंगा कि इसको आप भी अपने संज्ञान में लीजिएगा. हालांकि यह विषय केन्‍द्र का है. इसलिये उसे मैं अशासकीय संकल्‍प के माध्‍यम से पिछली बार भी लाया था. उसके पिछली बार भी लाया था. इस बार भी भेजा है. एनएच 917 जो हमारा ग्‍वालियर से भिण्‍ड और भिण्‍ड से इटावा का हाइवे है. इस हाइवे को लोकल में मौत का हाइवे नाम दिया जाने लगा है, क्‍योंकि वहां आये दिन 8-10 लोगों की मृत्‍यु किसी ने किसी घटना के माध्‍यम से हो जाती है. अभी मैं होली मनाने अपने क्षेत्र में गया. मैं एक तरफ खुशी से अपने परिवार के साथ होली मना रहा था लेकिन दूसरी ओर इन गलियों में मातम पसरा हुआ था. एक ही परिवार के 7 लोगों की मौत हो गई. उनका क्‍या कसूर था. उनका कसूर यह था कि वह बस एक जगह खड़े हुये थे, एक गाड़ी आई और उनको टक्‍कर मार दी जिससे 7 लोगों की मौत हो गई. उनका कसूर था कि वह एक तरफ खड़े हुये थे. मैं एक गली में गया जहां पूरे मोहल्‍ले में मातम पसरा हुआ था. ऐसी स्थिति में कोई कैसे वहां पर होली मना पाया होगा. एक घटना दिड़ी में हुई जिसमें यह 7 लोग खत्‍म हुये. एक घटना दीकनपुरा में हुई जिसमें एक ही परिवार के 3 लोग खत्‍म हुये. एक भवनपुरा में हुई जिसमें एक व्‍यक्ति गया. मेहगांव में हुई. यह मैं एक ही महीने की घटना बता रहा हूं. मेहगांव के राठौर समाज के 3 लोग एक ही दिन में खत्‍म हुये एक ही घटना में. शर्म की बात है कि वहां के साधु-संत धरना देने वाले हैं. सारे बड़े-बड़े साधु संत इकट्ठे होकर कि इसको सिक्‍स लेन में तब्‍दील किया जाय. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं कि इसमें राजनीति से ऊपर उठकर हमको सदन के माध्‍यम से केन्‍द्र को प्रस्‍ताव भेजना चाहिये. केन्‍द्र सरकार से सबको मिलकर आग्रह करना चाहिये. चाहे भाजपा से मंत्री राकेश शुक्‍ला जी हों, चाहे केसर देसाई जी कांग्रेस से हों, चाहे नरेन्‍द्र कुशवाहा जी भाजपा से हों, चाहे अमरीश शर्मा जी भाजपा से हों, हम सब इसमें एक होकर एक प्रस्‍ताव भेजें और पूरे सदन की ओर से प्रस्‍ताव जाय कि इस मौत के हाइवे को अब रोक दिया जाए, इसको सिक्स लेन में तब्दील किया जाए. इसकी घोषणा माननीय गडकरी जी द्वारा कई बार की जा चुकी है लेकिन उस घोषणा का परिपालन अभी तक नहीं हुआ है. मैं अंतिम बिंदु कहूंगा जब माननीय उप मुख्यमंत्री जी अपना भाषण दे रहे थे तब उन्होंने एक बात कही जिस पर सभी माननीय सदस्यों ने खासतौर पर भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने मेजों को थपथपाकर अभिवादन किया था. वह बात थी श्रीकृष्ण पाथेय योजना के लिए 10 करोड़ रुपया दिया है और रामवनगमन पथ योजना के लिए 30 करोड़ रुपए दिया गया है. मैं समझता हूं हम सब भी इस पर ताली बजाना चाहते हैं लेकिन भगवान राम और कृष्ण के नाम पर इतनी कंजूसी. सिर्फ 30 करोड़ और 10 करोड़ रुपए.  इसको कम से कम 300 करोड़ रुपए किया जाना चाहिए और भगवान कृष्ण के नाम पर 10 करोड़ रुपए किया जाना चाहिए. जिनके नाम पर आप सरकारें बनाते हैं उनको पैसा तो दे दो उनके लिए तो कंजूसी नहीं होना चाहिए. मेरा इसमें आपसे आग्रह है कि इसमें प्रावधान होना चाहिए. इस बजट को कम से कम 10 से 20 गुना बढ़ाया जाना चाहिए. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, बहुत बहुत धन्यवाद.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2025-2026 के इस बजट में प्रदेश की जनता को कई सपने दिखाए गए. लगता है इसमें आम जनता की उपेक्षा की गई है. बड़े-बड़े दावे किए गए. अव्यावहारिक लक्ष्यों से इसे भरा जाएगा. इस प्रकार से इस सरकार ने किया है. वित्त मंत्री जी ने आखिरी में कहा था कि आंकड़े नहीं विश्वास लिखा है, हमने अब आकाश लिखा है. इसका मतलब आप प्रदेश की जनता को कह रहे हो कि आप आकाश में देखो, नौकरी वहां मिलेगी, किसान को बोल रहे हो कि खाद वहां मिलेगा. यह सपने दिखाने का आपका बजट है. मैं इसका विरोध करता हूँ. माननीय मुख्यमंत्री जी कहीं कह रहे थे, शायद उज्जैन में कि कांग्रेस ने नाग का प्रदर्शन किया है बेरोजगारी को लेकर, जबकि यही लोग डस रहे हैं. प्रदेश के अन्दर युवा बेरोजगार है सरकार अगर उनको नौकरी नहीं दे पा रही है तो वह सांप के जहर की तरह वह युवाओं को डस रही है, न कि कांग्रेस पार्टी डस रही है. मैं समझता हूं प्रदेश में युवाओं के साथ राजनीति नहीं होना चाहिए उनके रोजगार की बात होना चाहिए. आपने इस वर्ष को रोजगार वर्ष के रुप में घोषित किया है. देखते हैं आप साल भर के अन्दर कितनी नौकरियां दे पाते हैं. मैं समझता हूँ कि आपका 2 लाख नौकरियां देने का जो वादा है वह पूरा होगा. मुख्यमंत्री जी ने जीएसडीपी का दावा किया है. राज्य की जीडीपी 71 हजार 504 करोड़ रुपए जो कि कांग्रेस के समय थी वह अब 15 लाख 395 करोड़ रुपए के समथिंग हो गई है. यह आपके आर्थिक सर्वे की रिपोर्ट में है. मैं नहीं कह रहा हूँ. लेकिन मुख्यमंत्री जी एक बात भूल गए कि चालू कीमतों पर जो जीडीपी जिसमें महंगाई भी होती है वह महंगाई शब्द भूल गए. एक बार कहीं उल्लेख नहीं किया. जीडीपी में वास्तविक बढ़ोत्तरी दर को नजरअंदाज किया गया है. यदि जीएसडीपी की कांस्टेंट प्राइस (Gross domestic product)  को अगर देखें तो यह वर्ष 2016-17 में थी 12.40 प्रतिशत, 2021-22 में हुई 8.05 प्रतिशत और 2024-25 में हुई 6.05 प्रतिशत.   सरकार आंकड़ों का भ्रम फैला रही है. महंगाई बढ़ती जा रही है लेकिन सच्चाई से दूर हैं. यह कैसी आपकी परसेंटजेज की रिपोर्ट है. माननीय अध्यक्ष महोदय, एक और दावा किया कि प्रति केपिटल इनकम बढ़ गई. व्‍यंग्‍य किया गया कि जब आपकी सरकार थी तो 11 हजार थे आज डेढ़ लाख रुपए प्रति व्‍यक्ति हो गई है. आापकी सर्वेक्षण रिपोर्ट में भी यही है, लेकिन मैं बताना चाहता हूं कि वर्ष 2016-2017 में प्रति व्‍यक्ति आय 11.47 प्रतिशत और वर्ष 2021-2022 में 7.28 प्रतिशत और अब वर्ष 2024-2025 में 6.01 हो गई है. मैं यह समझना चाहता हूं कि जब आय कम होती जा रही है, प्रतिशत कम होता जा रहा है तो व्‍यक्ति कैसे आर्थिक स्‍वाबलंबी होता जा रहा है. निश्चित तौर से प्रदेश के अंदर जो भुखमरी की स्थिति है मैंने पहले भी कहा था कि बिहार के बाद हमारा हंगर स्‍टेट में दूसरा नंबर आ रहा है और हम यहां आर्थिक रूप से...

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन-- क्षमा कीजिए मैं इंटरप्‍ट करना नहीं चाह रहा था लेकिन यह शब्‍दावली तो ठीक नहीं है. प्रदेश में भुखमरी हमें दिखाई नहीं दे रही है. 

          अध्‍यक्ष महोदय--मुझे ऐसा लगता है कि भुखमरी शब्‍द हमें उपयोग नहीं करना चाहिए.

          श्री उमंग सिंघार-- कुपोषण बोल दूं, लेकिन मैंने तो आपको प्रमाण के साथ पूरी रिपोर्ट भी दी थी. उस समय अवगत भी कराया था. जैन साहब आपको चाहिए तो मैं आपको इसकी पूरे देश की रिपोर्ट भी दे दूंगा. दोनों रिपोर्ट दे दूंगा.

          अध्‍यक्ष महोदय-- (श्री शैलेन्‍द्र जैन द्वारा बैठे-बैठै अपने आसन से बोलने पर) शैलेन्‍द्र जी कृपया नेता प्रतिपक्ष जी बोल रहे हैं तो हम लोगों को इंटरप्‍ट नहीं करना चाहिए.

          श्री उमंग सिंघार--अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश की सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है. मैं आपके माध्‍यम से बताना चाहूंगा कि वित्‍त मंत्रालय की रिपोर्ट आई थी जिसमें जीएसडीपी के आकार में दसवें स्‍थान पर मध्‍यप्रदेश है. निर्यात क्षमता में एक्‍सपोर्ट प्रियन्‍सन इन्‍डेक्‍स के अंदर हम दसवें स्‍थान पर हैं. क्रिसिल जो वर्ष 2022 की रिपोर्ट है उसमें सातवें स्‍थान पर हैं. इंडिया टुडे रिपोर्ट में मध्‍यप्रदेश बारहवें स्‍थान पर है तो कैसे हमारी प्रदेश की अर्थव्‍यवस्‍था नंबर एक पर है? असत्‍य आंकड़े, न्‍यूज पेपर पर दिखा दिये जाते हैं लेकिन सच्‍चाई कुछ और ही रहती है.

          अध्‍यक्ष महोदय, निश्वित तौर से मैं यह भी कहना चाहूंगा कि आपने कहा कि वर्ष 2003 में राज्‍य का कुल बजट 23 हजार 161 करोड़ रुपए था आज 4 लाख 21 हजार करोड़ रुपए हो गया है, लेकिन वर्ष 2003 में व्‍यक्ति की आमदनी 10 हजार रुपए थी उसमें से 8 हजार रुपए खर्चा होता था और आज की वर्तमान स्थिति में जब 50 हजार आमदनी है उसका 40 हजार रुपए खर्चा होता है. लेकिन उस समय 10 से 12 रुपए लीटर दूध था और दाल 15 से 20 रुपए किलो आती थी लेकिन आज अगर महंगाई के हिसाब से देखें तो दूध 60 रुपए लीटर हो गया है और दाल 150 रुपए किलो हो गई है. महंगाई हो गई है तो स्‍वाभाविक है कि बजट बढ़ेगा और देश का बजट बढ़ेगा तो प्रदेश का बजट बढ़ेगा तो कहां किसी व्‍यक्ति की आय बढ़ी है. महंगाई बढ़ी है. महंगाई नाम का शब्‍द इस पूरे बजट के अंदर गायब रहा, लेकिन माननीय वित्‍त मंत्री जी ने प्रदेश की जनता के टैक्‍स में कमी नहीं की है. आपने टेक्‍स नहीं बढ़ाया यह अच्‍छी बात है लेकिन जो टैक्‍स है उसे कम तो करते, लेकिन कम क्‍यों नहीं किया? मैं आम व्‍यक्ति की बात कर रहा हूं स्‍कूल ड्रैस 5 प्रतिशत एक हजार से कम में और 1 हजार रुपए से ऊपर की है तो उस पर 13 प्रतिशत टैक्‍स है. आप बच्‍चों के स्‍कूल की ड्रैस का ध्‍यान तो रखते. अर्थी जाती है तो कफन पर 12 प्रतिशत का टैक्‍स है. साइकिल पर 5 प्रतिशत और 50 हजार रुपये से अधिक की साइकिल पर 12 प्रतिशत का टैक्‍स है. दवाइयां, हर व्‍यक्ति की रोजमर्रा की आवश्‍यकता है. आज आम व्‍यक्ति अस्‍पताल में इलाज नहीं करवा पाता है. दवाओं में कहीं 5, 12, 18 प्रतिशत का टैक्‍स स्‍लैब है. कहीं न कहीं आप आम व्‍यक्ति को कोई रियासत तो देते. खाने के आटे पर 5 प्रतिशत टैक्‍स, पाम ऑयल कच्‍चे तेल पर 5 प्रतिशत, रिफाइंड ऑयल पर 12 प्रतिशत टैक्‍स है. कोचिंग सेंटरों में बच्‍चे पढ़ने जाते हैं, उन्‍हें भी 18 प्रतिशत टैक्‍स देना पड़ता है कॉपी-किताबों पर 5 प्रतिशत टैक्‍स है. आप कोई रियायत आम व्‍यक्ति को नहीं दे रहे हैं. मैं, समझता हूं कि आप कर्ज लेकर सरकार चला रहे हैं, घी पी रहे हैं, यह अलग बात है लेकिन आपको जनता की सुविधाओं का ध्‍यान रखना चाहिए था.

          अध्‍यक्ष महोदय, आपने कहा है कि वर्ष 2047 तक अर्थव्‍यवस्‍था को 2 ट्रिलियन के आस-पास ले जायेंगे, आय को दुगुना करेंगे, आपने यह संकल्‍प लिया है लेकिन आज प्रदेश 4 लाख 21 करोड़ रुपये का बजट के अंदर 4.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है. आपने ये नहीं बताया कि वर्ष 2047 में 2 ट्रिलियन की अर्थव्‍यवस्‍था बनायेंगे तो कर्ज कितना लेंगे क्‍या ये 4.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज 25 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो जायेगा प्रदेश की जनता पर कर्ज करके सरकार चल रही है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय कई बातें आई एक ओर कहा गया कि हमने 55 वर्ष में कुछ नहीं किया लेकिन आपने 15-20 सालों में कई काम कर दिये. नर्सिंग घोटाला हो गया परिवहन का घोटाला हुआ गर्मी आ रही है उसमें नल-जल का घोटाला है. आपने अभी 147 योजनाओं को मंजूर किया है. जल जीवन मिशन के घोटाले का पार्ट-2 आने वाला है. इसमें अभी तक आपकी जांच पूरी नहीं हुई है. माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी ने जवाब दिया था कि मैं जांच करवाऊंगा. एक कलेक्‍टर ने किसी विधायक को नहीं बुलाया कि हमारे यहां नल-जल योजना खराब है इसकी समीक्षा के लिए. चाहे पक्ष के हों या विपक्ष के विधायक हों. किसी से कोई समीक्षा नहीं हुई. मैं समझना चाहता हूं कि क्‍या सरकार केवल आश्‍वासन देती है वह भी आम जनता को जिसे पानी की आवश्‍यकता है. जिनके घर में आज तक नल नहीं लगे टोंटियां नहीं लगीं. CAG ने भी इस बात को उठाया 31.03.2022 को यही स्थिति अस्‍पतालों की हैं. वहां मशीनें आईं चली नहीं खराब हो गईं. दवाइयां आईं उपयोग हुई नहीं खराब हो गईं इसका भी CAG की रिपोर्ट में स्‍पष्‍ट उल्‍लेख है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय सहकारिता को लेकर सरदार वल्‍लभ भाई पटेल जी की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं. इस बजट के अंदर सहकारिता में कुल बजट का 0.50 प्रतिशत रखा है आप प्रदेश के अंदर 0.50 प्रतिशत रख रहे हैं तो क्‍या सहकारिता चलायेंगे यह बड़ी लज्‍जा की बात है. निश्चित तौर से गौशालाओं की बात हुई 10-10 हजार नई गौशालायें बनाई जायेंगी ऐसा माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने कहा. ग्‍वालियर न्‍यायालय की खण्‍डपीठ ने कहा हर रोज सड़क पर 200 से ज्‍यादा दुर्घटनायें आवारा पशुओं के कारण हो रही हैं. न्‍यायालय तब संज्ञान लेता है जब सरकार कानून बनाती है. या फिर कोई VIP व्‍यक्ति सड़क पर मरेगा तो जन आंदोलन होंगे तो नियम बदलेंगे. हम स्‍वयं आम व्‍यक्ति की समस्‍याओं को लेकर कार्य क्‍यों नहीं करते यह सोचने की बात है. निश्चित तौर से अभी हमारे जैन साहब कुपोषण को लेकर बात कर रहे थे. मिशन वात्‍सल्‍य, पोषण आहार योजना 2, में 12 लाख 51 हजार बच्‍चों को कुपोषण से बाहर निकाला गया है, ऐसा मुख्‍यमंत्री जी ने कहा है. लेकिन मैं कहना चाहता हूँ कि नेशनल फैमिली हेल्‍थ सर्वे-5 (एनएफएचएस-5) के अनुसार मध्‍यप्रदेश टॉप पर है, यह सबसे ज्‍यादा कुपोषित राज्‍यों में माना गया है. यह रिपोर्ट है. इसमें आपने वर्ष 2025-26 में कुल बजट का सिर्फ एक प्रतिशत पैसा रखा है. यह बड़े शर्म की बात है. (शेम-शेम)  प्रदेश पांच राज्‍यों में सबसे आगे कुपोषण में हो रहा है, उसके अन्‍दर कुल बजट का एक प्रतिशत पैसा रखा गया है. (शेम-शेम) तो ऐसी स्थिति है. 

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राजकोषीय घाटा जो वर्ष 2020-21 में 49,870 करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2025-26 में बढ़कर 78,902 करोड़ रुपये हो गया. इसमें सीधे-सीधे 58 प्रतिशत की वृद्धि हो गई. यह राजकोषीय घाटा है, इसके बारे में सरकार नहीं बोलेगी और उधारी के बारे में कहीं कोई जिक्र नहीं किया गया है. वर्ष 2020-21 में 65,171 करोड़ रुपये था, अब वर्ष 2025-26 में 1,08,750 करोड़ रुपये की संभावना हो गई, सीधे पांच वर्षों में आपकी उधारी में 67 प्रतिशत की वृद्धि हो गई, इसका कोई जिक्र नहीं है. ब्‍याज भुगतान वर्ष 2021-22 में 15,918 करोड़ रुपये था, वर्ष 2025-26 में 28,643 करोड़ रुपये हो गया है, पांच वर्षों में यह 80 प्रतिशत से भी ज्‍यादा है, मतलब लोन ले रहे हो, कर्ज ले रहे हो, उस पर 28,643 करोड़ रुपये का ब्‍याज भर रहे हो.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा सरकार को यह सुझाव है कि सरकार राज्‍य विकास ऋण और राज्‍य विकास सुरक्षा पर क्‍यों नहीं प्रयास करती ? मैं समझता हूँ कि कर जुटाने के लिए बॉन्‍ड जारी कर सकती है, इस पर स्‍टेट डेवलपमेंट सिक्‍योरिटी को लेकर विचार किया जाना चाहिए. मैं माननीय वित्‍त मंत्री जी से कहूँगा और भी कई बॉन्‍ड हो सकते हैं, म्‍युनिसिपल बॉन्‍ड हो सकते हैं, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर एण्‍ड इन्‍वेस्‍टमेंट बॉन्‍ड, पब्लिक प्रायवेट पार्टनरशिप वाला बहुपक्षीय ऋण भी किया जा सकता है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कुछ उदाहरण के रूप में बताना चाहूँगा कि क्‍योंकि मैं समझता हूँ कि प्रदेश शिक्षा के विकास से, रिसर्च से ही आगे बढ़ सकता है. जब हमारी कांग्रेस की सरकार थी, उस समय हमने शिक्षा में सबसे ज्‍यादा 15.8 प्रतिशत बजट का प्रतिशत हमने दिया था. लेकिन उसके बाद से जो वर्ष 2020-21, वर्ष 2022-23 में 15 प्रतिशत, 16 प्रतिशत से नीचे आ गया है, 14 प्रतिशत, 12 प्रतिशत, 13 प्रतिशत पर आ गया. जिसमें बिहार सरीखे राज्‍य में कुल बजट का 19.5 प्रतिशत खर्च किया जाता है, राजस्‍थान में कुल बजट का 17.5 प्रतिशत खर्च किया जाता है. इससे आप समझ सकते हैं, जब हम स्‍कूल के लिए, शिक्षा के लिए, नये युवाओं के लिए पैसा खर्च नहीं करेंगे तो इस प्रदेश का विकास कैसे होगा ? इस पर सोचना चाहिए.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उच्‍च शिक्षा में कुल बजट का 1.03 प्रतिशत खर्च हो रहा है. तकनीकी शिक्षा, कौशल और रोजगार, स्किल डेवलपमेंट की अभी काफी बात हो रही थी कि हम इतने युवाओं को रोजगार देंगे, नौकरियां देंगे, उन्‍हें सिखाएंगे. लेकिन उसमें आप कुल बजट का 0.65 प्रतिशत खर्च कर रहे हैं. जब आप पैसे ही खर्च नहीं करेंगे तो नौकरियां और स्‍किल डेवलपमेंट कहां से होगा. 'एक जिला, एक उत्‍पाद' की बात की गई, आपने हस्‍तशिल्‍प और ग्रामोद्योग की बात की, लेकिन बजट के अंदर आपने सिर्फ डेढ़ सौ करोड़ रुपये का प्रावधान किया, मतलब पूरे बजट का 0.04 प्रतिशत पैसा आपने रखा है. क्‍यों आप असत्‍य बोल रहे हैं, जब आपने बजट में पैसे ही नहीं रखे हैं तो कैसे हर जिले में उत्‍पाद बढ़ाएंगे, वहां के लोगों को कैसे स्‍वावलंबी बनाएंगे, कैसे आर्थिक रूप से उन्‍हें जोड़ेंगे, कैसे उनको आजीविका देंगे. यह बिल्‍कुल आपकी असत्‍य बात है. आदरणीय, मैं प्रमाण के साथ बता रहा हूँ.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा बजट की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल है. उच्‍च शिक्षा पर हम 1.03 प्रतिशत खर्च कर रहे हैं. औद्योगिक विकास, रोजगार और तकनीकी शिक्षा पर हम 0.70 प्रतिशत खर्च कर रहे हैं. अनुसूचित जाति कल्‍याण के लिए सिर्फ 0.60 प्रतिशत खर्च कर रहे हैं. ओबीसी के लिए आपने 0.30 प्रतिशत प्रावधान किया है, मतलब जितनी आबादी उनको उतना हिस्‍सा भी नहीं. न आपने अनुसूचित जातियों के लिए, न आदिवासियों के लिए, न ओबीसी के लिए, न किसानों के लिए प्रावधान किया है, इनके लिए परसेंटेज कितना कम है. किसी में कुल बजट का 0.1 प्रतिशत, किसी में 1 प्रतिशत, किसी में 0.70 प्रतिशत है. माननीय, मैं समझता हूँ कि यह एक बड़ी विडम्‍बना है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक बात और हो रही है कि पिछड़ा वर्ग हो, चाहे एसटी, एससी के विभाग हों, उनका बजट दूसरे विभागों में दे दिया जाता है. फिर हम कहते हैं कि हम अनुसूचित जाति के लिए काम कर रहे हैं, आदिवासियों के लिए काम कर रहे हैं और पिछड़ा वर्ग के लिए भी काम कर रहे हैं. लेकिन सच्‍चाई मैं आपको बताना चाहता हूँ कि एसटी के लिए कुल बजट का 3.5 प्रतिशत रखा गया और एससी के लिए 0.60 राशि आपने रखी है. बड़ी लज्‍जा की बात है. मैं समझता हूँ कि सरकार की इसमें स्‍पष्‍ट नीति होनी चाहिए और जिस विभाग के लिए, जिस वर्ग के लिए आपने बजट दिया है, उस विभाग पर, उस वर्ग पर ही उनका बजट खर्च किया जाना चाहिए.

          अध्‍यक्ष महोदय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन टेक्‍नॉलॉजी, कई बातें हो रही थीं. इस बजट के अंदर इसके लिए 0.15 प्रतिशत आपने राशि रखी है. मतलब सिर्फ 497 करोड़ यानि 500 करोड़ रुपये रखे हैं. विज्ञान और तकनीकी की बात करते हैं, जब हमारे पास रिसर्च के लिए पैसे नहीं हैं. हम दूसरे राज्‍यों पर उनसे योजनाएं लेने में, स्‍कीम लेने में, तकनीक लेने में डिपेंड होते हैं, हम हमारे मध्‍यप्रदेश को तकनीकी रूप से विकसित नहीं करना चाहते. जब आप पैसे ही नहीं देंगे तो कैसे काम होगा. यहां के युवा दूसरी जगह पढ़ने जाते हैं. सरकार को भी तकनीक लेने बाहर जाना पड़ता है. क्‍यों नहीं हम हमारे मध्‍यप्रदेश को हब बनाना चाहते. लेकिन उसके लिए आपकी इच्‍छा दिल से होनी चाहिए, जो मैं समझता हूँ कि इस बजट के अंदर नहीं दिख रहा है. माननीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 19 दिसम्‍बर, 2024 को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी कि मध्‍यप्रदेश में अनुसंधान के अंतर्गत सबसे कम राशि खर्च की जा रही है. सिर्फ 8 करोड़ रुपये खर्च किए गए. कृषि अनुसंधान के लिए, जिसमें कि मैं समझता हूँ कि उद्योगों के लिए, शिक्षा अनुसंधान के लिए, स्‍वास्‍थ्‍य के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए, पर्यावरण अनुसंधान के लिए, बुनियादी ढांचे के अनुसंधान के लिए अगर आपके पास बजट नहीं रहेगा तो हम इन सब क्षेत्रों में पिछड़ते जाएंगे. अध्‍यक्ष महोदय, निश्‍चित तौर से विषय बहुत सारे हैं, लेकिन मैं इतना ही कहना चाहूँगा कि जिस प्रकार से दलित,आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे हैं. इसमें भी प्रदेश तीसरे नंबर पर  हो गया है. जैन साहब, यह भी मैं आपकी जानकारी में ला रहा हूं तो मैं समझता हूं कि अत्याचार कम नहीं हो रहे.रोज अत्याचार हो रहे.मण्डला की घटना हुई.जवाब आया आपने सुन लिया कि वे अगर नक्सल नहीं हैं तो पैसे देंगे. पहले पैसे दे दिये निर्दोष कह दिया. 10 लाख दे दिये अब कह रहे हैं कि जांच कराएंगे.  बड़े लज्जा की बात है सरकार की दोमुंही बातों पर आश्चर्य की बात है. चिकित्सा सेवा 108 एंबुलेंस बहुत चल रही हैं छत्तीसगढ़ की और उसकी कुछ जानकारी मैंने आरटीआई के माध्यम से निकलवाई तो उस एंबुलेंस के अंदर पेशेंट ही नहीं लेकिन एंट्रियां हो रही हैं और मई 2022 से लेकर 2024 तक 915 करोड़ रुपये और दिसम्बर,24 तक लगभग 1 हजार का भुगतान कर दिया गया मतलब सरकार कागज पर ही भुगतान किये जा रही है. पेशेंट आ रहे हैं कि नहीं एंबुलेंस में बैठरहे हैं कि नहीं. अस्पताल जा रहे हैं कि नहीं कोई एंट्री नहीं. ऐसे ही मैंने विदिशा,शहडोल,डिंडौरी के बारे में 108 की जानकारी निकलवाई.डिंडौरी कलेक्टर ने भी जांच के बारे में लिखा था लेकिन सरकार ने इस बारे में अभी तक संज्ञान नहीं लिया. हमारे स्वास्थ्य मंत्री जी, लगता है कहीं और ध्यान है. तो यह स्थिति है कि आप इतनी गंभीर बात पेशेंटों की हो रही है और माननीय मंत्री जी का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहूंगा. मैं यह बोल चुका हूं. आप रिकार्ड से ले लेना लेकिन मैं यही कहना चाहता हूं कि 108 पर जो हजारों करोड़ के घोटाले हो रहे हैं. फर्जी बिल हो रहे हैं. इस पर आप संज्ञान लें. इस पर आपको जांच कराना चाहिये. आपको कागज चाहिये मैं आपको 5-6 जिलों के प्रमाण दे दूंगा. माननीय अध्यक्ष महोदय, एक और बात आई महानगर क्षेत्र इन्दौर,उज्जैन,देवास,धार को मिलाकर एक नया क्षेत्र बनाया जाएगा,महानगर, 20 साल हो गये भारतीय जनता पार्टी की सरकार को लेकिन 20 साल में आपको क्यों नहीं याद आई और इसकी क्या प्रशासनिक और वित्तीय चुनौतियां हैं यह आपने स्पष्ट नहीं किया. क्या इसका प्लान रहेगा. क्या व्यवहारिकता रहेगी.क्या पीपीपी मॉडल रहेगा. क्या राज्य की निधि से होगा यह भी स्पष्ट नहीं है तो मैं चाहूंगा कि महानगर प्राधिकरण जो है इसको आप किस प्रकार से करेंगे. जयपुर के हिसाब से करना चाहेंगे. ठाणे के हिसाब से करना चाहेंगे. मैं चाहूंगा कि इसमें भी स्पष्ट करें. एक और महत्वपूर्ण विषय है मध्यप्रदेश पुलिस स्टेट भी हो गया और इसीलिये कि 2014 से लेकर 2023 तक सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश के अंदर 151 की धारा एन.एस.ए. और जिला बदर की 107,116 की कार्यवाही की गई.आज कोई भी आंदोलन करे. धरना दे. प्रदर्शन करे.सीधे कार्यवाही 151,116 और पूरे प्रदेश के आंकड़े मैं आपको बताऊंगा तो आपको बड़ा आश्चर्य होगा कि 2014 से लेकर 2023 तक के 56लाख7हजार 727 लोगों पर कार्यवाही हो गई है.आप समझ सकते हैं कि प्रदेश की एक आबादी का कितना बड़ा हिस्सा जो न्याय की बात करता है धरना देता है युवा है किसान है कांग्रेस पार्टी के लोग हैं. 56 लाख लोगों पर 151 की कार्यवाही और हर तीन महिने के अंदर यह आदेश कर दिये जाते हैं कि 144 बढ़ाई जाए. यह कैसा न्‍याय, क्‍या व्‍यक्ति अपने फ्रीडम के लिये, अपनी बात रखने के लिये धरना नहीं दे, संवैधानिक अधिकार है उसको धरना नहीं दे सकता. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस पर भी सरकार को चिंतन करना चाहिये कि लोकतंत्र को अगर बचाना है तो उसमें सबकी आवाज को सुनना पड़ेगा. अब मैं यही कहना चाहूंगा जल जीवन मिशन पर वापस आऊं कि कैलाश जी ने विधान सभा के प्रश्‍न में स्‍पष्‍ट तो कह ही दिया है, माननीय बहन हमारी मंत्री म‍होदया भी बैठी हैं तो इसमें न जांच हुई, न विधायकों को बुलाया, न कलेक्‍टर ने कुछ किया, लेकिन कब होगा, नल में कब पानी मिलेगा, कब टोंटी में पानी आयेगा, यह आप देखिये क्‍योंकि आपके प्रधानमंत्री जी, देश के प्रधानमंत्री जी उनकी महत्‍वपूर्ण योजना थी तो मैं समझता हूं इस पर आप विशेष ध्‍यान देंगे.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नर्सिंग कॉलेज की बात करूं, छात्रवृत्ति मिल नहीं रही और अब तो सचिवालय से नर्सिंग कालेज की नस्‍ती ही गायब हो गई, युवाओं को नर्सिंग की छात्रवृत्ति नहीं मिल रही, विधान सभा के मेरे प्रश्‍न में कहा कि नर्सिंग कॉलेज की पूरी नस्‍ती गायब हो गई और हमने इसकी एफआईआर करा दी. यह प्रदेश का भविष्‍य, जो छात्रों के साथ घोटाले हो रहे हैं उनकी पूरी नस्‍ती गायब कराई जा रही है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भ्रष्‍टाचार को सरकार किस प्रकार दबाना चाहती है, इससे बड़ा उदाहरण नहीं है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पशु संजीवनी एम्‍बूलेंस रोजगार इसके लिये विधान सभा चुनाव से ठीक पहले 65 करोड़ रूपये स्‍वीकृत किये गये थे, 406 एम्‍बूलेंस खरीदी गईं थीं, अटाले में पड़ी हैं, पैसा बर्बाद, और आप गौधन की बात करते हैं,  गौशाला की बात करते हैं, यह आपकी स्थिति है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धान खरीदी को लेकर ईओडब्‍ल्‍यू में जांच चल रही है, कई हजार क्विंटल धान की जगह भूसा मिला, लेकिन फिर भी हम वेयर हाउस वालों को पैसे दे रहे हैं, लेकिन क्‍या भूसा भरकर हम उसका किराया दे रहे हैं कि धान का या गेहूं का पैसा दे रहे हैं, अभी तक 22 हजार करोड़ रूपये दे दिया है. तो यह पैसा कहां जा रह है, किसके पास जा रहा है. मैं समझता हूं कि सरकार को इस पर भी विशेष रूप से जांच कराना चाहिये और ऐसी कई कंपनियां हैं जिनसे बिजली खरीदी के एग्रीमेंट तो किये गये लेकिन बिजली आज भी पिछले 5 साल में, 10 साल में उनसे एक यूनिट बिजली नहीं खरीदी गई. उदाहरण के लिये एक टोरण्‍ट कंपनी उसको साढ़े पांच सौ करोड़ रूपये  से ज्‍यादा की बिलिंग हो गई है, एक यूनिट बिजली नहीं खरीदी और आपने 500 करोड़ रूपये दे दिये. ऐसी 4 कंपनियां हैं माननीय वित्‍त मंत्री जी, अगर ऐसे ही जनता का पैसा, लोगों को 8 घंटे बिजली नहीं मिल रही, एक बत्‍ती कनेक्‍शन नहीं मिल रहे और बड़ी-बड़ी कंपनियों को 5-5 सौ करोड़ रूपये बगैर बिजली खरीदे उनको दिये जा रहे हो, ये किस प्रकार से फिजूलखर्ची की जा रही है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस पर भी मैं माननीय वित्‍तमंत्री जी का ध्‍यान चाहूंगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि हमारे विधान सभा के जो अधिकारी कर्मचारी 35 वर्ष की सेवा उपरांत चतुर्थ समयमान वेतनमान जो दिनांक 01.07.2023 को लागू किया, मैं चाहता हूं इस बारे में भी माननीय वित्‍त मंत्री जी आप देखें क्‍योंकि यह विधान सभा के कर्मचारी, अधिकारी जो रात दिन हमारी, सबकी और जनता की सेवा में रहते हैं, इनके वेतनमान पर भी आपको विचार करना चाहिये.

          अंत में मैं यही कहना चाहूंगा कि-

                   हवा में उड़ने वालों को यह खबर नहीं,

                कि जमीन की हकीकत क्‍या है, यह असर नहीं.

                आसमान लिखने से हालात नहीं बदलते, जरा नीचे उतरो,

                यहां खड़े होने की जगह नहीं.

 

          धन्‍यवाद अध्‍यक्ष जी.

          अध्‍यक्ष महोदय--  माननीय वित्‍त मंत्री जी आपके शेर तो पहले से ही स्‍थापित हैं. 

          उपमुख्‍यमंत्री,वित्‍त(श्री जगदीश देवड़ा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वित्‍तीय वर्ष 2025-26 का बजट जो 12 मार्च को रखा था, उसकी सामान्‍य चर्चा में माननीय सदस्‍यों ने भाग लिया है, जिसकी बहुत लंबी सूची है, लेकिन मैं नाम जरूर पढूंगा, माननीय गोपाल भार्गव जी, माननीय बाला बच्‍चन जी, माननीय जयंत मलैया जी, माननीय राजेन्‍द्र सिंह जी, श्री शैलेन्‍द्र जैन जी, श्री लखन घनघोरिया जी, श्री दिलीप सिंह परिहार जी, श्री ओमकार सिंह मरकाम जी, श्री राजेन्‍द्र पाण्‍डेय जी, श्री कैलाश कुशवाह जी, श्री अनुरूद्ध माधव मारू जी, श्री संजय उईके जी, श्रीमती रीति पाठक, श्री आतिफ आरिफ अकील जी, श्री कमलेश्‍वर डोडियार जी, श्री सोहनलाल बाल्‍मीक जी, श्री गौरव सिंह पारधी जी, श्री भंवर सिंह शेखावत, श्री योगेश पंडाग्रे जी, इंजी.गोपाल सिंह जी, श्री महेश परमार जी, श्री राजेश कुमार वर्मा जी, माननीय नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र राठौर जी, माननीय घनश्‍याम चंद्रवंशी जी, माननीय चौधरी सुजीत सिंह जी, माननीय अभिलाष पाण्‍डे जी, माननीय मुकेश मन्‍होत्रा जी, माननीय हरदीप सिंह ढंग जी, माननीय फूलसिंह बरैया जी, माननीय डॉक्‍टर चिंतामणि जी, माननीय राजेन्‍द्र मण्‍डलोई जी, माननीय अनिल कालूहेड़ा जी, श्री सुनील उईके जी, श्री माधव सिंह जी, डॉक्‍टर रामकिशोर दोगने जी, माननीय सिद्धार्थ कुशवाहा जी, माननीय दिनेश राय मुनमुन जी, माननीय हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे जी एवं माननीय उमंग सिंघार जी. मैं सभी माननीय सदस्‍यों का बहुत हृदय से धन्‍यवाद कर रहा हूं, अध्‍यक्ष महोदय, पक्ष के भी और विपक्ष के भी हमारे सभी साथियों ने बजट पर क्षेत्र की समस्‍याओं को भी रखा और प्रदेश की महत्‍वपूर्ण विषय पर ध्‍यानाकर्षित भी किया है. माननीय उमंग सिंघार जी ने भी बहुत महत्‍वपूर्ण बिंदुओं पर विषय रखा है. मैं सभी माननीय सदस्‍यों का बहुत हृदय से आभारी हूं, मैं धन्‍यवाद करता हूं और उनके द्वारा जो बातें रखी गईं हैं, वह सारी विधानसभा के रिकार्ड पर हैं, निश्चित रूप से मैं यह कोशिश करूंगा कि उन सारी बातों को विधानसभा के रिकार्ड से निकलवाकर, जो महत्‍वपूर्ण बातें अगर ऐसी हैं, जिनका सरकार के माध्‍यम से कोई समाधान हो सकता है, तो वह हम जरूर करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय, बजट विकास का बजट, जनता का बजट, जनता के लिये बजट, बहुत विश्‍वास के साथ जनता सरकार बनाती है, चाहे पक्ष की बने, चाहे विपक्ष की बने, लेकिन सरकार बहुत विश्‍वास से बनाती है और सरकार का भी दायित्‍व है कि वह सरकार अपने कर्तव्‍य का निर्वहन करे, अपने राजधर्म का पालन करे. अध्‍यक्ष्‍ा महोदय, बजट में निश्चित रूप से सभी वर्गों का समावेश हो, सर्वस्‍पर्शी हो और विकास हो, यह बजट बनाते समय इसकी पूरी चिंता हमने की है और पारदर्शिता हो.

          अध्‍यक्ष महोदय, मुझे कहते हुए खुशी है कि हमने एक बजट की पुस्‍तक भी निकाली है, मेरा बजट, इसमें बजट का पूरा लेखा जोखा दिया हुआ है, कुल बजट कितना है, राजस्‍व व्‍यय कितना है, पूंजीगत व्‍यय कितना है और कौन-कौन से विभाग में कितनी राशि का प्रावधान किया है, इसमें पूरा लेखा जोखा है और क्‍यू.आर. कोड भी दिया है.                                                    

          सारे माननीय विधायकों को यह पुस्‍तक दी है और आम आदमी भी चाहे तो इस पूरे मध्‍यप्रदेश के बजट को देख सकता है. यह सही बात है कि सरकार के खजाने में जनता का ही पैसा आता है, इसलिए हमने इसमें ये पंक्ति लिखी है कि ‘’तेरा तुझको अर्पण, क्‍या लागे मेरा’’. ये जनता का पैसा है, ये वास्‍तव में ईमानदारी से लगना चाहिए, यह हमारी कोशिश रही है इस बजट में.

          अध्‍यक्ष महोदय, माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी ने ज्ञान की बात कही. देश में 4 जातियों के बारे में उन्‍होंने कहा कि गरीब वह चाहे किसी भी वर्ग का हो, युवा, महिला और किसान, पूरा बजट हमने इस पर फोकस किया. इसमें कोई जाति बंधन नहीं, किसी भी जाति का, किसी भी वर्ग का हो, लेकिन ये चार जातियों पर हमने फोकस किया कि सभी वर्गों का समावेश इसके करके हम बजट को करें. हमने जनता के सुझाव इसमें आंमत्रित किए, हमने विषय विशेषज्ञों को बुलाकर के संवाद किया, उनके सुझाव हमने लिए और कोशिश की कि बजट में हम इन सबका समावेश करें और हमने किया भी.

          अध्‍यक्ष महोदय, जीरो बजट की बात हुई हमेशा. चाहे उस पक्ष की सरकार रही हो, चाहे इधर की हो, लेकिन विभागों से जब प्रस्‍ताव मंगाये जाते हैं कि भाई पिछली बार बजट इतना था, तो इतना बजट दे दिया जाए, लेकिन यह कोशिश है कोई भी काम को सही करने के लिए प्रयास किया जाए तो मुझे लगता है कोई दिक्‍कत नहीं है. हमने कोशिश की है कि अब, जब बजट दिया था तो उस समय बजट में कितनी राशि खर्च हो पाई, कितना काम हुआ, इन सबका आंकलन करके हम बजट में प्रावधान करें, ऐसी हमारी कोशिश रही है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है, नया काम हमने शुरू किया कि हमारा जितना बजट है, उस बजट का सही प्रावधान हो सही विभागों में जाए, काम हो रहा है या नहीं हो रहा है, इसकी भी चिंता की जाए तो हमने इस बात का प्रयास किया.

          अध्‍यक्ष महोदय, पहले हमारे माननीय सदस्‍यों ने जो कहा था, उसके बारे में मैं बता देता हूं, सुरजीत सिंह जी ने कहा है कि हमने कर्ज का उपयोग वेतन, पेंशन के भुगतान के लिए किया. मैं अवगत कराना चाहता हूं कि लगभग 2 वर्षों में हमारा बजट राजस्‍व आधिक्‍य का बजट रहा, केवल कोविड को छोड़कर के राजस्‍व का घाटा नहीं रहा. हां वर्ष 2002-03 में राजस्‍व का घाटा रहता था, उस समय में कर्ज का उपयोग राजस्‍व व्‍यय के लिए किया गया था, जब आप बैठे थे.

          अध्‍यक्ष महोदय, आरक्षित नीधियों में राशि की कमी के बारे में बताया. बाला बच्‍चन जी ने कहा था अध्‍यक्ष महोदय मैं सदस्‍य को बताना चाहता हूं कि आरक्षित नीधियों में जमा राशियां राज्‍य के ऊपर दायित्‍व होता है, जितनी अधिक राशि निधियों में प्रदर्शित होगी, उतनी अधिक राशि का दायित्‍व सरकार पर होता है. राज्‍य शासन द्वारा इन दायित्‍वों का भुगतान किया जा रहा है, जिसके कारण बजट अनुमान में इनमें कमी प्रदर्शित हो रही है. यह कमी लगभग 15 हजार करोड़ होगी, अर्थात् हम रुपए 15 हजार करोड़ से अधिक दायित्‍वों का भुगतान वर्ष 2025-26 में करेंगे, जैसे राहत निधि या और जीपीएफ बगैरह.

          श्री बाला बच्‍चन अध्‍यक्ष महोदय, पिछले विगत वर्षों से निरंतर कमी बढ़ती जा रही है, बहुत ज्‍यादा कमियां हो गई हैं, हमारी जो जमा पूंजी थी, हमारी जो निधियां थीं, सरकार उसको खर्च करने लग गई है, यह ठीक नहीं है. आपकी जीएसडीपी 16 लाख करोड़ हो गई है, तो यह नहीं होना चाहिए, यह हमारा आग्रह है.

          श्री जगदीश देवड़ा अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहूंगा कि सारी चीजें रिकार्ड में आ रही है, अगर कोई बात करना भी है तो बाद में भी आप पूछ सकते हैं, हम बता सकते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय आप कन्‍टीन्‍यू करिए.

            श्री जगदीश देवड़ा    अध्यक्ष महोदय, एक और आपको राशि भुगतान का बताया कि ब्याज के भुगतान में बड़ी राशि का भुगतान किया जा रहा है. आपको याद दिलाना चाहूंगा कि 2001-02 में कुल राजस्व प्राप्तियों का 20 प्रतिशत ब्याज के भुगतान में जाता था. वर्ष 2002-03 में 19 प्रतिशत ब्याज के भुगतान में गया. हमारी सरकार ने लगातार ऋणों को अधिकाधिक उपयोगी बनाने एवं उसके ब्याज के भुगतान के प्रबंधन पर कुशलतापूर्वक कार्य किया. बेहतर वित्तीय प्रबंधन का नतीजा है कि वर्ष 2025-26 में हम अपनी राजस्व प्राप्तियों का केवल 10 प्रतिशत से कम ही ब्याज के भुगतान पर व्यय कर रहे हैं. हमारी सरकार ब्याज भुगतान की राशि के प्रतिशत को और कम करने पर कार्य कर रही है. यह उस समय का वर्ष 2001-02 में 20 प्रतिशत, वर्ष 2002-03 में 19 प्रतिशत.  अभी भाजपा की सरकार में वर्ष 2025-26 में 10 प्रतिशत. अभी बात आयी थी वित्त विभाग की कि बजट साहित्य के वित्त सचिव के स्मृति पत्र में पृष्ठ एक पर किया गया. मैंने अपने बजट भाषण के बिन्दु क्रमांक 186 में स्पष्ट किया है. माननीय सदस्यों के संज्ञान में पुनः उल्लेख कर रहा हूं राजकोषीय घाटा में सामान्य ऋण सीमा 3 प्रतिशत एफआरबीएम के प्रावधान के अनुसार जो भारत सरकार के द्वारा निर्धारित सीमा में है. इसके अलावा भारत सरकार की विशेष पूंजीगत योजना में 0.65 प्रतिशत रखा गया है. जो 50 वर्षीय ब्याज रहित ऋण है. वर्ष 2021-22 में तथा वर्ष 2022 से 2023-24 में उपयोग नहीं की गई ऋण सीमा में बची हुई राशि के लिये 1.01 प्रतिशत प्रावधान है. यह प्रावधान भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार रखा गया है. ऋण की यह दोनों अतिरिक्त सीमाएं एफआरबीएम की निर्धारित सीमा से अलग है. मेरे बजट भाषण की कंडिका क्रमांक 186 में एक बार नहीं उसको आप बार बार पढ़े तब आपको समझ में आयेगा कि वास्तविक रूप से वर्ष 2025-26 के लिये राजकोषीय घाटे की सीमा एफआरबीएम के प्रावधानों के अंतर्गत ही है. अभी हमारे सभी साथियों ने प्रदेश के विकास के लिये बहुत सारी बातें कहीं निश्चित रूप से विपक्ष का होना भी बहुत आवश्यक है. मैं तो कह रहा हूं कि वह तो सारे हमारे ही मित्र हैं इसलिये कहा है कि निन्दक नियरे राखिये, आंगनकुटी छबाय, बिन पानी साबुन बिना निर्मल करे सुवाय. अगर हम सरकार में काम कर रहे हैं उनको लगता है कि कुछ ठीक करना है तो जरूर आपका सहयोग लेंगे. मैं याद दिलाना चाहूंगा कि एक तो हमारे इस बजट में जैसा कहा है कि पिछली बार के बजट में कोई नया कर नहीं रखा, ना ही इस बार हमने उसको बढ़ाया इसको. अगले पांच सालों में हमने अर्थ व्यवस्था को दो गुना करने का कहा अब हमारे सभी विपक्ष के साथियों ने, मैं भी वर्ष 1990 से इस विधान सभा में आ रहा हूं. मैंने 10 साल की सरकार भी देखी है. उस समय सड़क का, बिजली का, पानी का, सिंचाई का क्या हाल था यह सबको पता है मुझे इसको विस्तार से बताने की आवश्यकता नहीं है.

          श्री सोहनलाल बाल्मिकआपको पूर्व में जाने की आवश्यकता नहीं है.

          अध्यक्ष महोदयसोहनलाल जी आप बैठिये. अब माननीय जी पीछे चले जाते हैं.

          उपमुख्‍यमंत्री (वित्‍त) (श्री जगदीश देवड़ा) --अध्‍यक्ष महोदय, जितने 4-5 बजट मैंने प्रस्‍तुत किए, हमेशा एक विषय तो परमानेंट है कि कर्जा लिया, कर्जा लिया. हां, कर्जा लिया भई. कर्जा लिया, लेकिन उसके लिए उसमें सड़कें बनायीं, तालाब बनाए, स्‍टॉप डेम बनाए, स्‍कूल बनाए, विकास के काम किए. कर्जा लेकर के घी नहीं पीया. आप यह हमारे लिए कह रहे हैं लेकिन घी पीने का काम आपने किया. यह आपका रिकार्ड है. वर्ष 2001-02 में आपके बजट का आकार...

          श्री राजेन्‍द्र मेश्राम -- अध्‍यक्ष महोदय, जब बीच में कांग्रेस की 15 महीने की सरकार थी, मेरे विधानसभा क्षेत्र में ....

          अध्‍यक्ष महोदय -- एक मिनट, आप बीच में मत टोकिए. वित्‍त मंत्री जी को बोलने दीजिए. प्‍लीज.

          श्री राजेन्‍द्र मेश्राम -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक मिनट के लिए निवेदन है..

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्‍लीज, विषयान्‍तर होता है. समय लगता है. वित्‍त मंत्री जी को बोलने दीजिए.

          श्री जगदीश देवड़ा -- अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2001-02 में बजट का आकार 20 हजार 11 करोड़ था और कर्ज 27 हजार124 करोड़ था और फिर वर्ष 2002-03 में बजट का आकार 23 हजार 61 करोड़ था. कर्ज की राशि 27 हजार 182 करोड़ थी.       श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप अभी का कर्जा बता दीजिए. आप वर्ष 2001-02 की बात  कर रहे हैं. आप तो अभी का कर्जा बता दीजिए. यह बजट वर्ष 2001-02, 2002-03 का नहीं है. माननीय वित्‍त मंत्री जी आप उस समय के वित्‍त मंत्री तो नहीं हो. आप अभी का बताइए. आप इसी वित्‍तीय वर्ष का बताइए...(व्‍यवधान)..

          श्री जगदीश देवड़ा -- यह मेरे पास आंकड़ा है.

          डॉ.योगेश पंडाग्रे -- बाला बच्‍चन जी, आप अभी उनको बोलने तो दीजिए. अभी आपको परसेंटेज में भी बताएंगे कि तब कितना परसेंट था और अब कितना परसेंट है...(व्‍यवधान)..

          श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह गलत बात है. बजट अनुमान 2025-26 का है आप इस पर जवाब दीजिए...(व्‍यवधान)..

          श्री जगदीश देवड़ा -- जवाब तो आपको भी देना पडे़गा. यह आपका रिकार्ड है.

          डॉ.अभिलाष पाण्‍डेय -- अध्‍यक्ष जी, यह डिफरेंसिएट तो करना ही पडे़गा कि आपके समय में क्‍या थे और हम क्‍या हैं. यह डिफरेंसिएट जरूरी है...(व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप बात तो पूरी होने दीजिए. वित्‍त मंत्री जी को वक्‍तव्‍य तो पूरा करने दीजिए.

          श्री जगदीश देवड़ा - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब बाला बच्‍चन जी और सभी सदस्‍य बोले, तब हमने बीच में खड़े होकर कुछ भी नहीं कहा. मैंने यह कहा कि रिकार्ड है.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2002-03 का बजट सुनने नहीं बैठे है. वर्ष 2002-03 का बजट नहीं सुनेंगे...(व्‍यवधान)..

          श्री जगदीश देवड़ा -- अरे, आपको तो सुनना पडे़गा. आप जब वर्ष 2025-26 के बारे में बोल रहे हैं, तो मैं आपका भी बता रहा हॅूं. यह तो देखिए कि आप कहां थे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- सोहनलाल बाल्‍मीक जी, जब नेता प्रतिपक्ष जी बोल रहे थे, तब मैंने सबको मना किया था. किसी ने भी इंटरेप्‍शन नहीं किया. प्‍लीज.         

          श्री जगदीश देवड़ा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वह यात्रा तो बतानी ही पडे़गी. उस समय आपकी पूंजीगत मद केवल 9 प्रतिशत रहती थी और हम 21 प्रतिशत पर हैं. उस समय कहां सड़कें बनीं, कहां बिजली मिली, कहां तालाब बने, कहां स्‍टॉपडेम बने. उस समय कुछ नहीं बना.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- आप कांग्रेस के ही स्‍कूल में पढे़ हैं. उसी स्‍कूल में पढे़ हैं...(व्‍यवधान)..

          श्री जगदीश देवड़ा -- ओमकार जी, उसी स्‍कूल में पढे़ हैं लेकिन कुछ नहीं था. यह मेरे हाथ में जो रिकार्ड है यह बता रहा है.

          उपमुख्‍यमंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण (श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय वित्‍त मंत्री जी यह बता रहे हैं कि हम लाएं हैं तूफान से कश्‍ती निकालकर. (हंसी)

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- पंडित जी, आपकी जुगाड़ जोरदार है. कांग्रेस से गये, उधर डिप्‍टी सीएम बन गये. वाह, बधाई.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- अध्‍यक्ष महोदय, हम 6 चुनाव लडे़ हैं और 6 चुनाव भाजपा से ही लडे़ हैं.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मरकाम जी से निवेदन करूंगा कि अपनी दायीं ओर देख लें, माननीय अभय जी बैठे हैं. बायीं ओर देख लें, माननीय भंवर सिंह शेखावत जी बैठे हैं. पीछे माननीय फूलसिंह बरैया जी बैठे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय -- प्‍लीज, बैठ जाइए.

          श्री जगदीश देवड़ा -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे नहीं लगता कि हिन्‍दुस्‍तान में कोई सरकारें कर्जा नहीं लेती होंगी. कर्जा लेती हैं और भारत सरकार की सीमा है एफआरबीएम का नियम है और जीएसडीपी का 3 प्रतिशत हम उसके अंदर ही ले रहे हैं. हमने ऊपर नहीं लिया. इसीलिए मैंने मेरे बजट भाषण में कहा था कि आरबीआई ने हमें राजस्‍व प्राप्‍ति एवं राजस्‍व व्‍यय में निष्‍पक्षता के लिए ए-श्रेणी में रखा है. यह आरबीआई की ही रिपोर्ट है और प्रदेश की गुणवत्‍तापूर्ण और व्‍यय की सराहना नीति आयोग द्वारा 18 प्रदेशों में हमारा राज्‍य पहला प्रदेश है. नीति आयोग ने भी कहा है.(मेजों की थपथपाहट)...

अध्यक्ष महोदय - वैसे आप ज्यादा जोर लगा रहे हो, मुझे लगा प्रतिपक्ष बहुत समझदार है, थोड़ा आप आराम से लो.

उपमुख्यमंत्री, वित्त (श्री जगदीश देवड़ा) - हां, वह तो है ही.

श्री बाला बच्चन - इसीलिए हम जानना चाहते हैं. हमने अथेंटिक बजट की बुक्स से हमने सारी चीजें रखी है. आप उस पर बिल्कुल भी बयान नहीं कर रहे हैं.

श्री जगदीश देवड़ा - अध्यक्ष महोदय, मैंने पूंजीगत का बताया, आपका 9 प्रतिशत रहा, अभी 21 प्रतिशत है.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटैल) - अध्यक्ष महोदय,  मैं आसंदी से प्रार्थना करता हूं कि वित्तमंत्री जी के बोलते वक्त इनको पूरक पूछने का अधिकार है, लेकिन भाषण के बाद. इंटरप्ट करने का तो नहीं है. इतने सीनियर विद्वान सदस्य हैं.

श्री ओमकार सिंह मरकाम - माननीय आप बहुत विद्वान हो, परन्तु दिल्ली से इधर भेज दिये हैं तो क्या करेंगे, आप बैठ जाइए.

श्री प्रहलाद सिंह पटैल - आपकी विद्वत्ता के सामने तो घुटने टेके.

श्री जगदीश देवड़ा - अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2024-25 की तुलना में पूंजीगत व्यय में 31 प्रतिशत की वृद्धि की है. हमारे कोई साथी ने पेट्रोल, डीजल की बात भी की. मैं बताना चाहूंगा कि उस समय कांग्रेस की सरकार भी रही, सरकार किसानों और जनता के प्रति कितनी संवेदनशील रही, जब भाजपा की सरकार थी, उस समय की मैं तारीख बता रहा हूं. हमने दिनांक 5.10.2008 को वैट में डीजल पर 4 रुपये की कमी की और पेट्रोल पर 2.5 रुपये की प्रति लीटर टैक्स कम किया था. यह दिनांक 6.10.2008 की बात बता रहा हूं. हमने कम किया. फिर आपकी सरकार बैठी, जैसे ही कांग्रेस आई, दिनांक 6.7.2019 को डीजल और पेट्रोल पर  2-2 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त बढ़ा दिया, एक बार यह 6 को बढ़ाया, दूसरी बार फिर बढ़ाया, यह पेट्रोल, डीजल की बात कर रहे थे. दिनांक 21.9.2019 को केवल दो महीने बाद ही फिर से डीजल और पेट्रोल पर 5 प्रतिशत वैट बढ़ा दिया. अध्यक्ष महोदय, राजस्व घाटे की एक-दो लाईन बताता हूं. इन वर्षों में राजस्व खर्चे जैसे वेतन भत्ते के लिए इन्होंने ऋण लिया. इनके समय वेतन भत्तों के लिए इन्होंने ऋण लिया. वर्ष 2001-02 की बात है, फिर कहेंगे कि वर्ष 2001-02 का क्यों बता रहे हैं? अरे, आपने सारा यह किया इसीलिए तो उसके बाद जब हम बैठे तभी तो विकास हुआ, उस समय क्यों नहीं हुआ? उस समय बीमारू राज्य था, आज विकसित राज्य बना और यह सब आप भी देख रहे हो. (मेजों की थपथपाहट)

अध्यक्ष महोदय, यह भाजपा आते ही वर्ष 2004-05 में राजस्व आधिक्य रुपये 1716 करोड़ रुपया हो गया. यह मैं आंकड़ा बता रहा हूं. सड़क के लिए हमारा संकल्प है कि अगले 5 साल में 1 लाख कि.मी. सड़क का निर्माण करेंगे. वर्ष 1990 से मैं भी विधायक हूं और इसमें बहुत सारे हमारे साथी हैं जो साथ में आते जाते थे. मंदसौर से 12 घंटे लगते थे, जब रोडवेज की बस में बैठकर आते थे तो 12 घंटे में भोपाल पहुंचते थे. आज सुबह 6 बजे भोपाल से बैठो तो 4.30 घंटे में हम मंदसौर पहुंच रहे हैं.

श्री ओमकार सिंह मरकाम - बचपने को ज्यादा मत कोसो, उससे ही जवानी मिली है. यह मत भूलो. यदि बचपने की नींव मजबूत नहीं होती तो आप कहां खड़े होते?

श्री जगदीश देवड़ा - आप सत्य को स्वीकार करो. कुछ नहीं था, गड्ढे ही गड्ढे थे, यह सब हैं, श्री भंवर सिंह शेखावत जी भी जानते हैं यहां बैठे सब लोग जानते हैं कि उस समय सड़कों का क्या हाल था? पूरे मध्यप्रदेश में जब बाहर के लोग आते थे तो वह कहते थे कि यह मध्यप्रदेश है? किसी राज्य के विकास के लिए सड़क आवागमन का रास्ता, कनेक्टिविटी बहुत महत्व रखती है. आपका यह हाल था. हमने तो बहुत कुछ चाहे वह टू लेन हो, फोर लेन हो, एट लेन हो और मैं श्री गडकरी जी को धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने सोलह लेन का भी काम किया है. (मेजों की थपथपाहट) यह किया है. अरे, यह भी बोलते हैं.

श्री ओमकार सिंह मरकाम - सोलह लेन कहां पर है यह बता दो, हम घूमने जाएंगे? आप कृपा करके अनुमति दिला दो, हम घूमने जाएंगे.

श्री उमंग सिंघार - अध्यक्ष जी, सोलह लेन कहां है?

श्री सोहनलाल बाल्मीक - आप सोलह लेन कहां है, यह बता दीजिए.

अध्यक्ष महोदय - श्री मरकाम जी, श्री सोहनलाल जी, कृपया बोलने दीजिए. कृपया आपस में बात मत करें.

श्री हरीशंकर खटीक - अनुसूचित जाति का एक भाई बोल रहा है तो कम से कम आपको सुनना चाहिए, इतना अच्छा बजट भाषण आप सुन नहीं पा रहे हैं, आपको सुनना चाहिए.

          कुंवर अभिजीत शाह- यह तो वही बात हो गयी कि 50 हैक्‍टेश में खेती करते हैं. 25 हैक्‍टेयर रबी की , 25 हैक्‍टेयर खरीफ की. वैसे ही जो 16 लेन की बात कर रहे हैं वह 8 जाने की और 8 आने की होगी.

          श्री जगदीश देवड़ा- अध्‍यक्ष महोदय, यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार..

          श्री महेश परमार- वित्‍त मंत्री जी, हमें 16 लेन सड़क का सभी विधायकों को दौरा करा दीजिये तो हमको भी देखने को मिलेगा की 16 लेन की रोड कहां है.

          श्री जगदीश देवड़ा - अरे, बतायेंगे कि 16 लेन की रोड कहां है. बतायेंगे आपका.

          अध्‍यक्ष महोदय- वित्‍त मंत्री जी आप अपनी बात को पूरा करो.

          श्री अभय मिश्रा- आपके पास आबकारी विभाग भी है. किसी ने होली के समय गलत जानकारी तो नहीं दे दी.

          श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल- यही है, अभय जी को इसकी जरूरत है.

          अध्‍यक्ष महोदय- वित्‍त मंत्री जी आप अपनी बात को जारी रखें.

          श्री जगदीश देवड़ा- अध्‍यक्ष महोदय, यह विचलित हो रहे हैं.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक- आप अभय जी की बात का जवाब दे दीजिये.

          श्री मनोज नारायण सिंह चौधरी- नेता प्रतिपक्ष जी बोल रहे थे तो किसी ने नहीं टोका. आप कम से कम हमारे नेता का सम्‍मान रखो.

          श्री विजयपाल सिंह- अभय जी, आप वहीं से होकर आ रहे हैं क्‍या ?

          श्री महेश परमार- नेता प्रतिपक्ष जी ने 4 लेन, 6 लेन बताया. 16 लेन नहीं बताया. नेता प्रतिपक्ष जी ने जो सही है वह ही बताया.

          श्री जगदीश देवड़ा- अध्‍यक्ष महोदय, यह इसलिये विचलित हो रहे हैं कि सारे काम इनके समय तो हुए नहीं. वह सब काम अभी हुए हैं. इसलिये वह विचलित हो रहे हैं, भड़ास निकाल रहे हैं. यह उसको बहादुरी समझ रहे हैं. ..     

          अध्‍यक्ष महोदय- यह ठीक नहीं है. आप लोग कृपया बैठ जाइये. आप लोग आपस में बात नहीं करें.

          श्री उमंग सिंघार- क्‍या मध्‍य प्रदेश में है क्‍या.

          श्री जगदीश देवड़ा- अध्‍यक्ष महोदय, मैं बता रहा हूं. देश में ही है. हम भी तो इसी देश के हैं. तो क्‍या हो गया किसने बनाया.

          श्री उमंग सिंघार- प्रदेश की बात हो रही है.

          अध्‍यक्ष महोदय- आप सभी बैठ जायें.

          श्री जगदीश देवड़ा- अध्‍यक्ष महोदय, अब देश अलग हो गया क्‍या आपसे और यह जो सारी योजनाएं हैं, आयुष्‍मान कार्ड बने, चाहे प्रधान मंत्री आवास बने तो इसमें मध्‍य प्रदेश के बजट में उसका हिस्‍सा नहीं है.

          अध्‍यक्ष महोदय, यह इतने वरिष्‍ठ लोग हैं और जिम्‍मेदार लोग हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय- वह जिम्‍मेदार हैं और वह इसलिये जोर दे रहे हैं कि वह 16 लेन जानना चाहते हैं.

          श्री जगदीश देवड़ा- अध्‍यक्ष महोदय, द्वारका एक्‍सप्रेस वे16 लेन का है, दिल्‍ली से गुरूग्राम वाला है. मैंने भी इनका पूरा भाषण सुना है. उसमें कितनी सत्‍यता बोल रहे थे, यह भी सबको पता है. रिकार्ड है वह निकाल लेंगे. जब कोई कर रहे हैं तो आप भी सुनो ना. बिजली का यही हाल था मध्‍य प्रदेश की बात कर रहा हूं. वर्ष 2023 में बिजली की उत्‍पादन क्षमता 2951 मेगावाट थी. जो 2024 में  बढ़कर  के 23788 मेगावाट हो गई.  अब यह इतना असत्य बोल रहे हैं कि  बिजली नहीं मिल रही है.  उस समय  फिर कहेंगे बारबार, बारबार तो कहना पड़ेगा, उस कार्यकाल को  तो याद करना पड़ेगा कि  जब लोग अगर कहते थे गांव में   कि बिजली का तार  पकड़ लो, तो उसमें करंट   ही  नहीं आता है. बिजली ही नहीं मिलती थी उस समय.  उस समय बिजली के पते नहीं थे.  पूरे मध्यप्रदेश में तबाही थी.  सिंचाई की बात करें, तो  सिंचाई योजनाएं उस समय कहां बनीं.  2003 में सिंचाई का कुल रकबा  केवल  7 लाख हेक्टेयर था. जो  अब बढ़कर के  40-50 लाख हेक्टेयर  हो गया.  जितनी सिंचाई योजनाएं,  चाहे वह नदी जोड़ो  योजना हो, फिर चाहे ये  मध्यप्रदेश की सिंचाई  योजनाएं हों.  यह केन बेतवा है,  पार्वती  काली सिंध है,  ताप्ती बेसिन  मेगा है और यह सिंचाई योजनाएं हैं.  अपर नर्मदा परियोजना,  अपर बुधनेर सिंचाई योजना, रोडिया  उद्वहन सिंचाई योजना, अब यह अलीराजपुर  उद्वहन  सिंचाई परियोजना,  आईएसपी  काली सिंध  उद्वहन  माइक्रो  सिंचाई योजना,  इंदिरा  सागर  सीएडी प्लान, ओंकारेश्वर  परियोजना,  काली सिंध लिंक परियोजना, किल्लोद  उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना, कुक्षी  उद्वहन माइक्रो सिंचाई परियोजना, कोदवार  उद्वहन  माइक्रो सिंचाई परियोजना, खण्डवा  उद्वहन माइक्रो सिंचाई  योजना,  खालवा  उद्वहन  माइक्रो योजना,  चिंकी  बोरास संयुक्त बहुद्देशीय  माइक्रो सिंचाई योजना.  ये सारी सिंचाई योजनाएं   भाजपा की सरकार ने बनाई हैं और काम चल रहा है.  मैं यह कहना चाहूंगा कि  यह जितना गांधी सागर  से पानी उठाकर के  खेतों में देने का काम  भाजपा  की सरकार ने किया है.  यह सरकार पहले कहीं तालाब, स्टापडेम ,  सिंचाई योजनाएं  गांधी सागर तो पहले से बना है, पर  उसका पानी उठाकर के  कभी खेतों में लाने का   प्रयास  नहीं हुआ.  मैं यहां पर यह गर्व के साथ कह सकता हूं कि किसान के खेत में पानी जायेगा, तो   दो फसल नहीं, तीन फसल  किसान लेगा.

          डॉ. रामकिशोर दोगने अध्यक्ष महोदय,तवा डेम है, पुनासा डेम है,  चम्बल डेम  है, यह  किसने  बनाये  हैं.  यह जो बड़े बड़े डेम बने हैं,    जिससे पूरा प्रदेश सिंचित हुआ है और  आज जो  अर्थ व्यवस्था प्रदेश  की सुधरी  है, वह कांग्रेस की देन  है  और   उसी से किसान की अर्थ व्यवस्था सुधरी है.

          श्री महेश परमार--  वित्त उप मुख्यमंत्री जी, उन डेमों से पानी आप दे रहे हैं  और बनाये किसने हैं, वह भी बोल लें.

          श्री जगदीश देवड़ाअध्यक्ष महोदय, अब ये जल जीवन  मिशन के बारे में भी बहुत कुछ कहा.  लेकिन याद करें, वह समय.  कभी केंद्र सरकार में बैठे  आपके प्रधानमंत्री  जितने  बैठे हैं, आपने तो कभी रोड मेप नहीं बनाया. देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी  ने रोड मेप बनाया  और उन्होंने संकल्प लिया.  आप कह रहे थे कि 2047,  तो उन्होंने 2047 का संकल्प लिया कि  2047 में पूरे   विश्व में  भारत  विकास  की श्रेणी में नम्बर वन पर आयेगा  और मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री, डॉ. मोहन यादव जी  ने कहा है कि  2047 में हम भी  विकसित  मध्यप्रदेश करेंगे. रोड मेप बनाया नरेन्द्र  मोदी जी ने, वहां बैठ करके  कि हिन्दुस्तान के एक एक परिवार में  शुद्ध  पीने का पानी मिले. आपने रोड मेप नहीं बनाया.  आजादी के बाद  जब भी बैठे हैं,  आपने कभी संकल्प नहीं लिया कि हिन्दुस्तान की  जनता  को गांव के लोगों को, हर  परिवार  को शुद्ध पीने का पानी मिले.  आपने नहीं लिया, इन्होंने कोई  रोड मेप  नहीं बनाया.  आपने  हिन्दुस्तान में  गरीब लोगों  के लिये आवास बनाने के बारे में  आपने कभी विचार नहीं किया.

...व्यवधान...

            नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, अब रोड मैप की बात कर रहे हैं तो पानी आया क्या, मोदी जी ने पानी पहुंचाया क्या, गांव के अंदर पानी आया क्या, नीले पाईप बाहर खुले में पड़े हैं.

          श्री जगदीश देवड़ा- अध्यक्ष महोदय, इन्होंने तो कल्पना भी नहीं की जो काम देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने किया, उन्होंने मकान बनाने का संकल्प लिया .

          श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव- माननीय अध्यक्ष महोदय, वित्त मंत्री जी सही कह रहे हैं हमने कल्पना नहीं की थी इन्होंने कल्पना को साकार किया है और 40 प्रतिशत कमीशन नल जल मिशन में लग रहा है.

          डॉ.योगेश पण्डाग्रे- आपके पूर्व प्रधान मंत्री जी कहते थे कि एक रूपये भेजता हूं तो 15 पैसे पहुंचते हैं.

          डॉ.अभिलाष पाण्डेय - अध्यक्ष महोदय, ये घोषणा पत्र बनाते थे और हम संकल्प पत्र बनाते हैं.

          श्री जगदीश देवड़ा-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इनका संकल्प भी था उस समय इन्होंने तो नहीं कहा कभी कि हमारे देश के गरीब लोगों की छत का प्रबंध हो जाये. पीने का शुद्ध पानी मिल जाये, शोचालय हो जाये, हर घर में गैस के चूल्हे के कनेक्शन चले जायें, इन्होंने तो नहीं कहा .क्या कभी इन्होंने संकल्प लिया रोडमेप बनाया, हां उस समय यह काम जरूर इन्होंने किया कि 1975 में इमरजेंसी लगा दी थी लोगों को जेलों में डाल दिया था,यह रोडमेप बनवाया उस समय बड़े बड़े घोटाले करने का रोडमेप बनाया..

          श्री सोहनलाल बाल्मीक-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है कि जो विषय में है, बजट पर माननीय मंत्री जी बोलें यदि बार बार हम लोगों को कोट करेंगे तो फिर बात आयेगी, इसलिये विषय पर बोलें.

          श्री जगदीश देवड़ा-- अध्यक्ष महोदय, यह प्रधान मंत्री आवास मध्यप्रदेश में नहीं बन रहे हैं क्या. अध्यक्ष महोदय, इसके लिये हमने बजट में प्रावधान किया है.

          अध्यक्ष महोदय-- माननीय वित्त मंत्री जी, पूरा करें.

          श्री जगदीश देवड़ा--अध्यक्ष महोदय, प्रधान मंत्री आवास में 4 हजार 400 करोड़ का प्रावधान है, अर्बन में 1 हजार करोड़ का प्रावधान है अब यह बजट की बात नहीं है तो कहां की बात है. यह किसने संकल्प लिया ..

          श्री दिनेश गुर्जर -- डॉ. मनमोहन सिंह जी ने यह संकल्प लिया था. 2011 के सर्वे के नाम पर बन रहे हैं सिर्फ नाम बदलकर के.

...व्यवधान...

          श्री जगदीश देवड़ा- अध्यक्ष महोदय, आयुष्यमान कार्ड बन रहे हैं, आयुष्यमान कार्ड पूरे देश में बन रहे हैं, इलाज की गारंटी थी, 5 मेडिकल कॉलेज थे ? आज 30 मेडिकल कॉलेज हो गये.

...व्यवधान...

          श्री ओमकार सिंह मरकाम - कांग्रेस के समय लोग बीमार नहीं पड़ते थे अब आप लोगों को नकली खिला खिलाकर बीमार पड़वा रहे हो.

          श्री हरिशंकर खटीक -- अध्यक्ष महोदय, हमारा भाई खाना बंद कर दे. सब काम पूरा हो जायेगा.

          अध्यक्ष महोदय- मरकाम साहब को डबल कार्ड की जरूरत है.लग रहा है(हंसी)

          श्री जगदीश देवड़ा- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमने कोई भेदभाव नहीं किया है. चाहे वह संबल योजना हो, किसान सम्मान निधि की राशि हो. माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे विपक्ष के साथी बहुत बात करते हैं अनुसूचित जाति की,अनुसूचित जनजाति की . आपने कितनी चिंता की जरा बता दें. बाबा भीमराव अंबेडकर जी के बारे में आपने क्या चिंता की. महू में उनका जन्म हुआ, आपने क्या किया, आपने उनके स्थान को...

...व्यवधान...

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- बाबा साहब ने संविधान बनाया, जिसका परिणाम है कि आप और हम सब हैं, कांग्रेस ने ही संविधान बनाया..

          श्री राजेन्द्र मेश्राम-- लेकिन कांग्रेस ने बाबा साहब का जितना अपमान किया...हमेशा बाबा साहब के साथ में भेदभाव करने का काम कांग्रेस ने किया है. धारा 370 उनके विरोध के बावजूद कांग्रेस ने लगाने का काम किया, कश्मीर में दलित भाइयों के अधिकार पर अतिक्रमण करने का काम कांग्रेस ने किया..

...व्यवधान...

          अध्यक्ष महोदय- कृपया सब बैठ जाईये.

          श्री फूलसिंह बरैया -- अगर आप बाबा साहब अंबेडकर जी के बारे में चर्चा करेंगे तो आप नहीं जीत सकते, आप बाबा साहब के बारे में चर्चा नहीं करें नहीं तो हम भी तैयार हैं.

..व्यवधान..

          अध्यक्ष महोदय- कृपया बैठ जायें. सभी लोग बैठ जायें.

...व्यवधान...

          एक माननीय सदस्य- बाबा साहब जब भण्डारा से चुनाव लड़े थे तो किसने हराया था....

..व्यवधान..

          अध्यक्ष महोदय- बरैया जी, कृपया बैठ जायें.

...व्यवधान....

          अध्‍यक्ष महोदय -- बरैया जी, कृपया विषयांतर मत कीजिये. सब लोग बैठ जाइये. अभिलाष जी, गौतम जी, बैठ जाइये. विषयांतर मत करिये भाई. बाबा साहब का नाम सबको जपना चाहिये.

          श्री जगदीश देवड़ा -- अध्‍यक्ष महोदय, सरकार ने एयर एम्‍बुलेंस के बारे में चिंता की. पंचतीर्थ के बारे में चिंता की. संत शिरोमणि रविदास जी के मंदिर के लिये 100 करोड़ दिये. मेट्रो रेल के लिये 850 करोड़ का प्रावधान किया. अनुसूचित जाति हेतु 32,633 करोड़ का प्रावधान. जनजाति के लिये 47,296 करोड़ का प्रावधान. अब आपकी भी सरकार उस समय थी, लेकिन अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग के बच्‍चों को विदेश पढ़ाई के लिये भेजा. यह योजना 2003-04 से शुरू हुई है और अनुसूचित जनजाति के 70 विद्यार्थी जो विदेश पढ़ने के लिये गये उनके लिये 21 करोड़ का प्रावधान भी किया है. 21 करोड़ की राशि भी उसमें खर्च की और जनजाति के लिये 166 विद्यार्थियों के लिये 97 करोड़, 25 लाख की राशि उसमें खर्च हुई. आप पहले सरकार में थे, बताओ एकाध कोई भेजा हो कभी तो बताओ.

          श्री दिनेश गुर्जर -- अध्‍यक्ष महोदय, आपने मध्‍यप्रदेश में गरीब किसान, अनुसूचित जाति को कोई पट्टे नहीं दिये. अगर अनुसूचित जाति का सम्‍मान बढ़ाया, अधिकार दिये तो कांग्रेस पार्टी ने दिये. एक पट्टा दिया हो तो बता दो आप अनुसूचित जाति के व्‍यक्ति को खेती करने के लिये. बताओ एक भी.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, अब वह इधर पूछेंगे तो क्‍या उनको बताएंगे नहीं, तो यह न पूछें हमसे.

          अध्‍यक्ष महोदय --  आप बैठ जाएं. अब नहीं पूछेंगे. अब इनसे आप मत पूछो.

          श्री जगदीश देवड़ा --  अध्‍यक्ष महोदय, इनसे हम नहीं पूछ रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय --  बाला जी, अभी उन्‍होंने पूछा नहीं है.

          श्री बाला बच्‍चन  -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आधा मिनट का निवेदन यह है कि आगे अनुदान मांगों पर चर्चा आ रही है. संबंधित विभाग के मंत्रीगण इस पर जवाब देंगे. माननीय वित्‍तमंत्री जी को वित्‍तीय व्‍यवस्‍थाओं पर जवाब देना चाहिये. सब मंत्रियों को अनुदान मांगों पर अलग-अलग जवाब देना है. आप अपने बजट पर और वित्‍तीय व्‍यवस्‍थाओं पर बोलिये.

          श्री जगदीश देवड़ा -- अध्‍यक्ष महोदय, बाला बच्‍चन जी, आपने जो कहा वह मैंने यहां सब बताया है और आदरणीय जयंत मलैया जी जब बोले थे उन्‍होंने भी सारा विषय यहां पर रखा था. मैंने पूरा सुना है. आपकी सारी बातों का जवाब यहां भी दिया है और उन्‍होंने भी दिया था.

          अध्‍यक्ष महोदय --  मंत्री जी, आप तो मेरी तरफ देखो. (हंसी)

          श्री जगदीश देवड़ा -- अध्‍यक्ष महोदय, हमारा यह जो बजट है यह किसान भाइयों को आर्थिक रूप से मजबूती देगा. बहनों को यह खुशी देगा. युवाओं को यह हौसला देगा और आम जनता के जीवनयापन को यह सहज बनाएगा. इसमें हमको जो-जो प्रावधान करना थे, सारे विभागों में सभी वर्गों के लिये हमने हर संभव प्रयास किया है और मध्‍यप्रदेश की सरकार, डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में निश्चित रूप से जो संकल्‍प हमने लिया है, जो रोडमैप हमने बनाया है कि 2047 तक हम इसको विकसित प्रदेश की श्रेणी में लाएंगे, यही आज इस बजट पर मैं कहना चाहूंगा और सदन के सभी माननीय सदस्‍यों से मैं प्रार्थना करूंगा कि सर्वसम्‍मति से इन प्रस्‍तावों का समर्थन करें. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय -- बहुत धन्‍यवाद वित्‍त मंत्री जी. मैं समझता हूं कि काफी विस्‍तार से चर्चा हुई है.         

          श्री उमंग सिंघार  --  अध्‍यक्ष महोदय, आपके लहजे में भाषण अच्‍छा था. सबने सुना.

          अध्‍यक्ष महोदय -- बजट पर लगभग 40 लोगों ने चर्चा की और विस्‍तार से सभी लोगों ने अपनी बात रखी है. अब अनुदान मांगों पर प्रस्‍ताव श्री प्रहलाद सिंह पटेल जी प्रस्‍तुत करेंगे.

 

 

 

 

4.54 बजे             वर्ष 2025-2026 की अनुदानों की मांगों पर मतदान

मांग संख्‍या 18        श्रम

मांग संख्‍या 30        ग्रामीण विकास,

मांग संख्‍या 40        पंचायत.

 

 

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं राज्‍यपाल महोदय की सिफारिश के अनुसार प्रस्‍ताव करता हूं कि 31 मार्च, 2026 को समाप्‍त होने वाले वर्ष में राज्‍य की संचित निधि में से प्रस्‍तावित व्‍यय के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को -  

अनुदान संख्‍या -  018            श्रम के लिए एक हजार एक सौ आठ करोड़, छब्‍बीस लाख, छियासी हजार रुपये,

अनुदान संख्‍या -  030  ग्रामीण विकास के लिए उन्‍नीस हजार पचास

                                      करोड़, सत्‍ताइस लाख, अठहत्‍तर हजार रुपये, एवं

अनुदान संख्‍या -  040            पंचायत के लिए तेरह हजार दो सौ अठहत्‍तर करोड़, उनहत्‍तर लाख, तिरानवे हजार रुपये,

 

                                      तक की राशि दी जाय.

अध्‍यक्ष महोदय --  प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ.         

            अध्यक्ष महोदय -- अब, इन मांगों पर कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत होंगे. कटौती प्रस्तावों की सूची पृथकत: वितरित की जा चुकी है. प्रस्तावक सदस्य का नाम पुकारे जाने पर जो माननीय सदस्य हाथ उठाकर कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाने हेतु सहमति देंगे, उनके कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए मान जाएंगे.

          मांग संख्या - 018                                                              श्रम

                                                                                              क्रमांक

 श्री बाला बच्चन                                                                             02

 

          मांग संख्या 030                                                          ग्रामीण विकास

                                                                                               क्रमांक

श्री रजनीश हरवंश सिंह                                                                   01

श्री उमंग सिंघार                                                                            02

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को                                                                   05

डॉ. हिरालाल अलावा                                                                      08

श्री बाला बच्चन                                                                               10

श्री मोन्टू सोलंकी                                                                            11

श्रीमती चन्दा सुरेन्द्र सिंह गौर                                                               12

श्री नारायण सिंह पट्टा                                                                        13

श्री अभय मिश्रा                                                                                14

श्री राजन मण्डलोई                                                                         15

 

          मांग संख्या - 040                                                              पंचायत

                                                                                                क्रमांक

श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव                                                              02

श्री चैन सिंह वरकड़े                                                                        03

श्रीमती अनुभा मुंजारे                                                                      04

श्री मोन्टू सोलंकी                                                                            05

श्री बाला बच्चन                                                                               06

कुंवर अभिजीत शाह (अंकित बाबा)                                                      08

श्रीमती चन्दा सुरेन्द्र सिंह गौर                                                              09

श्री कैलाश कुशवाह                                                                         10

श्री फूलसिंह बरैया                                                                          11

डॉ. रामकिशोर दोगने                                                                      12

श्री राजन मण्डलोई                                                                         13

श्री अभय मिश्रा                                                                                14

          उपस्थित सदस्यों के कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए.

          अब मांगो और कटौती प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

          क्या माननीय मंत्री जी प्रस्तावना में कुछ बोलना चाहते हैं.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा आपका निर्देश होगा. पहले भी बोल सकते हैं.

          अध्यक्ष महोदय -- जवाब में बोल सकते हैं.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल --  उस समय बोलेंगे तो ज्यादा ठीक होगा.

          अध्यक्ष महोदय -- श्री ओमकार सिंह मरकाम जी.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम (डिण्डौरी) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मांग संख्या 18, 30, 40 का मैं विरोध करता हूँ. कटौती प्रस्ताव का मैं समर्थन करता हूँ. इसकी मुख्य वजह यह है कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण विभाग हैं. मांग संख्या 18 में श्रम है. मांग संख्या 30 में ग्रामीण विकास है. मांग संख्या 40 में पंचायत है. मांग संख्या 18 में श्रम विभाग में 1 हजार 108 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. मांग संख्या 30, ग्रामीण विकास विभाग में 19 हजार 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. मांग संख्या 40, पंचायत में 13 हजार 278 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है.

          अध्यक्ष महोदय, यह बात सत्य है कि लोकतंत्र के इस पवित्र खूबसूरत मंदिर में आप और हम बैठे हैं. जब हम सिर ऊंचा करके ऊपर देखते हैं तो यह जो ऊंचाई दिखती है यह ऊंचाई हमें बहुत खूबसूरत लगती है और हमें गौरवान्वित करती है. इस ऊंचाई में अगर किसी का श्रम है तो वह मजदूर का श्रम है. वह मजदूर जिसने मेहनत करके इसका निर्माण किया है जिसके बिना इस देश और समाज का विकास आगे नहीं बढ़ सकता है. आज उस मजदूर के लिए हमारी आज की सरकार बिलकुल गंभीर नहीं है. खासकर मध्यप्रदेश के हमारे मजदूर आपको अन्य प्रदेशों में मजदूरी करते हुए मिलेंगे. आप जाकर के किसी भी सीमावर्ती प्रदेश में चले जाएं झाबुआ से लेकर अलीराजपुर की तरफ जाएंगे तो हमारे मजदूर गुजरात की तरफ जाते हैं. हमारे सभी जनप्रतिनिधि इस बात को मानते हैं कि चुनाव के समय उन्हें सूचित किया जाता है कि मतदान के समय वे आ जाएं. वे मजदूरी करने के लिए चले जाते हैं. वो मजदूरी करने के लिए चले जाते हैं वहीं मण्‍डला डिण्‍डौरी बालाघाट की तरफ हम देखेंगे तो महाराष्‍ट्र, केरल, कर्नाटक जिस क्षेत्र में देखोगे वहां पर मजदूरी करने के लिए हमारे यहां के मजदूर जाते है आखिर वजह क्‍या है? हमारे मुख्‍यमंत्री जी के क्षेत्र से लगा हुआ नीमच, मंदसौर का जो क्षेत्र है अगर आप देखेंगे तो राजस्‍थान की तरफ हमारे मजदूर काम करने के लिए जाते हैं तो स्थिति यह है कि वह श्रम तो करते हैं लेकिन उनकी सुरक्षा की तरफ कोई ध्‍यान नहीं होता है और मुझे इस बात को आपके सामने लाने में कोई दिक्‍कत नहीं है. ए‍क दिन की घटना है हमारे यहां मोहाडी गांव के मजदूर मजदूरी करने के लिए इलाहबाद की तरफ गये थे रेलवे में काम करते वक्‍त वहीं पर घटना घटित हुई और एक महिला मजदूर की वहीं पर मृत्‍यु हो गई. मेरे ख्‍याल से हमारे जिले से ही जो आपके दल के विधायक हैं उन्‍होंने भी उनके लिए मदद भेजी, हमने भी मदद भेजी कि उनकी डेडबॉडी को हम कैसे लाएं.

5.02 बजे {सभापति महोदया(श्रीमती झूमा डॉ. ध्‍यान सिंह सोलंकी) पीठासीन हुईं}

          श्री ओमकार सिंह मरकाम-- सभापति महोदया, मजदूर के जीवन की सुरक्षा के लिए आज आपने यह जो 1108 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है. हम आपकी भावना की कद्र करते हैं परंतु दिल से काम करना पड़ेगा. राजनीति में परिस्थितियां बहुत बदलती हैं, लेकिन कुछ ऐसा निर्णय भी लिया जाता है जो समाज हित में होता है. आज मजदूरों के लिए इस विषय में कोई प्रावधान नहीं है. मैं आपको बताना चाहूंगा कि यह भारत सरकार की गजट नोटिफिकेशन है जिसमें मजदूरी में हमारे मध्‍यप्रदेश में वर्ष 2024-2025 का मनरेगा का 242 रुपए है वहीं पर महाराष्‍ट्र में 297 रुपए है. इतना अंतर क्‍यों है यह समझने की बात है. कुछ प्रदेशों में 356 रुपए की मजदूरी दर है. कुछ जगह में 374 रुपए की मजदूरी दर है. हमारा जो मध्‍यप्रदेश है वह 243 रुपए है. आप समझ सकते हैं कि आखिर मजदूर और एक तरफ माननीय मंत्री जी ने स्‍पष्‍ट किया कि प्रति व्‍यक्ति एक लाख 42 हजार की आय सरकार मान रही है. आप कैसे तय करेंगे यदि आप 100 दिन का काम देते हैं तो आपका 24 से 25 हजार रुपए बनता है. इस साल अगर मनरेगा में सरप्‍लस करोगे 20 से 25 बढ़ाओगे तो भी 260 ही होगा तो 100‍ दिन के काम में 26 हजार रुपए ही बनेगा. अगर आप 365 दिन का काम भी दे दोगे तो भी आपका 1 लाख 4 हजार रुपए ही होता है. जो कुल मजदूरी है उसकी आपने प्रति व्‍यक्ति गणना भी करके बता दी. मैंने एक संकल्‍प भी लिया है कि हम सच्‍चाई की चर्चा करेंगे कि क्‍या हमारी आय प्रति व्‍यक्ति इतनी है और अगर है तो हम सरकार का स्‍वागत करेंगे. परंतु आज भी मजदूर के विषय में एक तथ्‍यात्‍मक बात होना चाहिए किसी जिले में काम नहीं है और अगर काम की तलाश में बाहर जा रहे हैं तो कम से कम उनकी सुरक्षा का तो ध्‍यान हो जाए कि कहां जा रहे हैं, कौन ले जा रहा है, क्‍या काम कराएगा अगर वहां कोई दिक्‍कत होती है तो हम उसकी मदद कैसे कर पाएंगे? इसमें कोई प्रावधान नहीं है. आपने 1108 करोड़ रुपए की मांग रखी है. मैं माननीय मंत्री जी को अनुरोध करूंगा कि जहां निर्माण कार्य होते हैं. आप दिखवाइए जो डीपीआर बनता है उस डीपीआर में उनकी निर्धारित दर कितनी है, कितना उनको मिलना चाहिए और साइड में कितना मिल रहा है. कहीं पर 200 कहीं पर 150 कहीं पर 250 और अगर कोई जनप्रतिनिधि बात भी करेंगे तो कोई ऐसा प्रावधान भी नहीं है, लेबर इंस्‍पेक्‍टर को बोलेंगे तो वह जाएगा पर उसका कोई निराकरण नहीं कर पाता है. आज मैं, मजदूरों की स्थिति पर केवल इतना कहना चाहूंगा कि अगर आप कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी का संकल्‍प है, अंतिम व्‍यक्ति तक मदद पहुंचाई जाये तो मजदूरों की दशा पर आपको प्‍लान करने की जरूरत है. मजदूरों को भी जीवन जीने का हक है, वे भी इंसान हैं. आज शहरों में जो सफाई करते हैं, एक वर्ग विशेष को ही यह कहा जाता है कि आप इसकी सफाई करिये, हम कह सकते हैं कि मजदूर हैं, मजदूरी कर रहे हैं, पर इससे पहले वह भी इंसान है, इंसान की तरह हमें उनके लिए भी सोचना पड़ेगा. वे मजदूर आज नगरपालिका में श्रम कर रहे हैं, नालियों की सफाई से लेकर सारी जिम्‍मेदारी निभाते हैं. मैं, उनके परिवार के बीच में जाकर, इस बात को समझने का प्रयास करता हूं कि इनके जीवन में कैसे सुधार लाया जाये. मेरे छोटे से डिण्‍डौरी क्षेत्र  में ही उनको बसाने के लिए हमें बहुत चुनौतियों का सामना करना पड़ा. हम चाहते हैं कि उनके बच्‍चे भी इंसान के बच्‍चे हैं, उनको बेहतर शिक्षा मिले, उन्‍हें बेहतर मजदूरी के साथ जीवन जीने का हक मिले परंतु सिर्फ बातें होती हैं. आपके अनुसार 1 लाख 42 हजार प्रति व्‍यक्ति आय है, बच्‍चे से लेकर सभी की आप गणना कर रहे हैं, इसे यथार्थ में भी लाना पड़ेगा.

          सभापति महोदया, मजदूरों के लिए मैं चाहूंगा कि हमारे मंत्री जी मजदूरों को कम से कम मजदूरी समय पर मिल जाये, इस बात को सुनिश्चित करें, क्‍योंकि यह भी नहीं हो पा रहा है. एक बैंक है, उसकी भुगतान करने की क्षमता कितनी है और भुगतान प्राप्‍त करने के लिए वहां पर मजदूर 2000 खड़े हैं. मैं, बताना चाहूंगा कि एक बार मैं छत्‍तीसगढ़ जा रहा था तो बाजार से रात को 3 बजे गुजरा तो लाईन से वहां लोग सोये थे, मैंने पूछा यह कौन सा आंदोलन है, मैंने उनसे पूछा तो पता चला कि कल बैंक से भुगतान होना है इसलिए लाईन लगाने के लिए मजदूर वहीं सो गए हैं. आप समझें कि बैंकों की संख्‍या कितनी है और मजदूरों की संख्‍या कितनी है. भुगतान के लिए आपने क्‍या निर्धारित किया है ? आज भी कियोस्‍क और अन्‍य बैंकिग प्रणाली के माध्‍यम से मजदूरों को उनकी पासबुक की सत्‍यप्रतिलिपि नहीं मिली है. एक आई.डी. कार्ड जैसा उनको दे दिया गया है, सारे विधायक अपने क्षेत्र में मजदूरों से पूछें. जिस प्रकार विधायकों का आई.डी.कार्ड है, ऐसा उनको दिया गया जिसमें उसके खाता नंबर आदि का उल्‍लेख होता है. मजदूरों के पास इस बात का प्रमाण भी नहीं होता कि कितना पैसा आया और कितना निकाला गया है. अधिकारी कहते हैं कि मोबाईल में मैसेज आ जाता है, मजदूर बहुत अर्लट है. मजदूरों के एक परिवार में केवल एक ही मोबाईल रहता है जो कि बच्‍चों के पास होता है. मजदूरों के पास ठीक से मैसेज आ जाये और वे उसे समझ पायें. यहां तो मंत्री नहीं समझ पा रहे हैं अधिकारियों के भ्रमजाल को, तो मजदूर क्‍या समझ पायेंगे. कौन सी जगह दस्‍तखत करवा लेते हैं, पता ही नहीं चलता है. मैंने देखा है कि बहुत ही कम मंत्री सदन में अपने स्‍वविवेक से उत्‍तर देते हैं, वरना उधर से पर्ची आती है, वही सदन में बताते हैं.

          सभापति महोदया, हमारे मजदूर आज बड़े संकट से गुजर रहे हैं. मेरा अनुरोध है कि मजदूरों के लिए दिल से सोचने की जरूरत है कि हम कैसे उन्‍हें बेहतर जीवन जीने का अवसर प्रदान कर सकें. हमारे मंत्री जी बड़े गंभीर हैं, आपकी विद्वता पर हमें कोई शक नहीं है परंतु हम उम्‍मीद करेंगे कि कुशल, अकुशल, अर्द्धकुशल मजदूरों के बीच में जो मजदूरी का अंतर है, इसका जब आप उत्‍तर दें तो आप इस बात के लिए मध्‍यप्रदेश का सिर गौरवान्वित करें कि भारत देश के जितने भी राज्‍य हैं, सबसे अच्‍छी मजदूरी की दर अगर किसी प्रदेश में है तो मध्‍यप्रदेश में है.

          सभापति महोदया, मैं, मंत्री महोदय से उम्‍मीद करूंगा और दलगत नीति से ऊपर उठकर आपका सम्‍मान करूंगा कि आप यह कहिये कि मजदूरी की दर देशभर में सबसे ज्‍यादा, मध्‍यप्रदेश के मजदूरों को मिल रही है, तब हमें लगेगा कि हमारा प्रदेश बेहतर दिशा की ओर आगे बढ़ रहा है. माननीय सभापति महोदया जी, इस पूल में हमारी मांग संख्‍या 30 एवं 40 भी है. ग्रामीण विकास की बात आई तो मैंने विवेक अनुसार अपने देश की परिभाषा बनाई है. हमारे देश और प्रदेश में दो ही मंत्री होते हैं, एक शहरी विकास मंत्री और एक ग्रामीण विकास मंत्री और लगता है हमारा सम्‍पूर्ण भारत इतने में ही व्‍यवस्थित हो जायेगा. मैं इसके आगे का भारत भी आपको बताना चाहूँगा. एक शहर भारत है, तो दूसरा ग्रामीण भारत है, तीसरा है सुदूर भारत, जो मोहल्‍ले दूर-दूर बसे हुए हैं और इसके आगे भी एक भारत है, जो बहुत दूर-दूर घर होते हैं, वह दुर्गम भारत है. एक शहरी भारत, दूसरा ग्रामीण भारत, तीसरा सुदूर भारत और चौथा दुर्गम भारत.

          माननीय सभापति महोदया, जब एक विधायक दुर्गम भारत के घर में जाता है, तो उसकी आरती करके, उसे टीका लगाते हैं और कहते हैं कि आइये, हम आपका सम्‍मान करते हैं, पर आप हमारे जीवन में सुधार करने के लिए सोचिये. यहां ग्रामीण विकास में, न सुदूर भारत का ध्‍यान रखा गया है, न ही दुर्गम भारत का ध्‍यान रखा गया है. यहां बातें बहुत हैं, पर सच्‍चाई कुछ और ही है. मैं माननीय मंत्री जी से जब चाहूँगा कि आप जवाब देंगे, अगर आप सुदूर भारत के लिए कहेंगे तो आप जरूर इस बात का कहेंगे कि अगर विधायक कोई सुदूर भारत की सूची दे, चाहे सत्‍ता पक्ष का दे या विपक्ष का दे, तो आप उसकी स्‍वीकृति की जरा हमें जानकारी दे देंगे कि विधायक जी ने दिया है, मंत्री जी ने स्‍वीकृत कर दिया है. हम आपका सम्‍मान करेंगे, पर आपसे हम मिलकर जाते हैं और आप कहते हैं कि जनपद में जाओ, तो जनपद वाले कहते हैं कि यह तो हमारा अधिकार क्षेत्र है. हम भी वोट लेकर आए हैं, आप कम से कम हमारे मंत्री जी हैं, अगर आप चाहते हैं, अगर वह विधिसंगत न हो तो आप उसका परीक्षण करवा लें. अगर विधिसंगत है, तो सुदूर भारत और ग्रामीण भारत के लिए भी आपका ध्‍यान होना चाहिए.

          सभापति महोदया - मरकाम जी, 15 मिनट का समय है.          

          श्री ओमकार सिंह मरकाम - यहां ग्रामीण भारत 90 प्रतिशत है. शहर वाले तो थोड़ा रहते हैं, हम चाहेंगे कि इसमें आपकी अनुमति मिल जाये. एक बहुत बड़ी बात हमारे आवास की है. माननीय मंत्री जी, मैं आपको बताना चाहूँगा कि आलोचना, प्रति-आलोचनाओं पर नहीं. जब प्रधानमंत्री आवास से पहले, इंदिरा आवास था. मैं जब वर्ष 2008 में विधायक बना था, उस समय 25,000 रुपये था, वर्ष 2009 में 35,000 रुपये हुआ, वर्ष 2010 में 45,000 रुपये हुआ, वर्ष 2011 में 48,500 रुपये हुआ, वर्ष 2012 एवं वर्ष 2013 में 75,000 रुपये हुआ, वह निरन्‍तर बढ़ा है. वर्ष 2015-16 में इंदिरा आवास का नाम बदला और प्रधानमंत्री आवास हुआ. वर्ष 2012-2013 तक लगातार बढ़ा. वर्ष 2014-15 में जैसे ही मोदी जी आए, इसके बाद उसका नाम बदला और नाम बदलने के बाद 1.30 लाख रुपये, 12,000 शौचालय का, 18,000 मनरेगा का इस तरह से एक स्‍केल आया 1.60 लाख, दूसरा 1.20 लाख और 12,000 शौचालय और 18,000 मनरेगा एवं 1.50 लाख एवं 1.60 लाख दो स्‍केल आए. वर्ष 2015-16, वर्ष 2016-17, वर्ष 2017-18, वर्ष 2018-19, वर्ष 2019-20, वर्ष 2020-21, वर्ष 2021-22, वर्ष 2022-23, वर्ष 2023-24 में 1.30 लाख रुपये की जगह 1.20 लाख रुपये हो गया. क्‍या वजह है ? क्‍या नाराजगी है ? आप जरा बताएं. मैं ईमानदारी से कहना चाहता हूँ, मैंने इसीलिए सच्‍चाई की लड़ाई की शुरूआत करने की घोषणा की है. मैं इसलिए नहीं कर रहा हूँ कि मुझे कोई राजनीतिक लाभ मिले, मैं इसलिए कर रहा हूँ कि मानवता के मूल्‍य में राजनीतिक व्‍यक्तियों की कद्र भी होनी चाहिए. यह नहीं होना चाहिए कि जाकर सिर्फ घण्‍टों भाषण देते हैं, असर कुछ नहीं होता है. यह नहीं होना चाहिए. इसलिए मैंने सच्‍चाई की लड़ाई का अनुरोध भी किया है. आज आप 1.20 लाख रुपये दे रहे हैं. और वहीं पर उनकी भौगोलिक स्थिति को आपने देखा, कई ऐसे घर हैं, जहां ट्रॉली में ईंट ले जाना बड़ा कठिन होता है, उसे शिफ्ट करके भेजना पड़ता है. कई जगह ऐसी हैं, जहां ट्रक नहीं जा सकता, कन्‍जस्‍टेड एरिया है, बाद में उसको व्‍यवस्‍थित ले जाना पड़ता है. आज आप इस वित्‍तीय वर्ष में 1 लाख 20 हजार रुपये दे रहे हैं. मैं 1 लाख 20 हजार रुपये बोल रहा हूँ, मंत्री जी, आप अपने उत्‍तर में बताइयेगा, अगर इसमें कोई गड़बड़ी हो. आप बताना कि आप कितना दे रहे हैं.

          माननीय सभापति महोदया, वहीं पर त्रि-स्‍तरीय पंचायती राज व्‍यवस्‍था के हमारे सरपंच अपने जनहित के मांगों को लेकर आंदोलन किए, पर मंत्री जी और मुख्‍यमंत्री जी को समय नहीं है कि उनसे जाकर चर्चा कर लें. अरे भई, चर्चा करें, आपके निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं. उनसे जाकर आप चर्चा तक नहीं करते कि उनसे बात कर लें. सभी सरपंच हैं, वे कोई दल आधार पर बात नहीं कर रहे हैं, कोई किसी दल की मानसिकता रखता होगा, कोई किसी दल की, पर आपको वहां जाकर बात करने की फुर्सत नहीं है. इतने हमारे मेंबर हैं. मेंबर निर्वाचित होते हैं. सभापति महोदया, अगर इस देश में सबसे कोई कठिन चुनाव है  तो वह मेंबर का है क्‍योंकि गिनती के वोटर होते हैं. पता ही नहीं चलता कि किसका वोट कहां पड़ा और मेम्‍बरों को आप देखना, न उनके कहीं मानदेय का प्रबंध है, थोड़ा बहुत ऐसे ही मजाक टाइप व्‍यवस्‍था है. न किसी कार्य में उनको अनुशंसा करने का प्रबंध है कि कोई मेंबर अगर रिकमण्‍ड कर दें कि उसके वार्ड में यह आवश्‍यकता है तो उसके ये काम स्‍वीकृत हो जाएंगे. जो हमारे पंचायतों के मेंबर हैं, उनके भी मान-सम्‍मान का अगर थोड़ा बहुत ध्‍यान रख लेते तो बहुत अच्‍छा होता.

          माननीय सभापति महोदया, ग्रामीण विकास में मध्‍याह्न भोजन आता है. आप मध्‍याह्न भोजन में रसोइयाओं को कितना दे रहे हैं, जरा आप ये भी बताएंगे. आप जो 4 हजार रुपये दे रहे हैं, क्‍या ये उचित है. एक तरफ आप 1 लाख 42 हजार कह रहे हैं, जिसमें 11,833 रुपये प्रतिमाह का आपका रिकार्ड कह रहा है, जिसको माननीय वित्‍त मंत्री जी प्रस्‍तुत किए हैं. वहीं पर आप अपने रसोइयाओं को 4 हजार रुपये दे रहे हैं. वहीं पर पेसा मोबिलाइजर ग्रामीण विकास से ही भर्ती किए गए थे, उनको आप कितना..

          सभापति महोदया -- मरकाम जी, आपका समय 3 मिनट ओवर हो गया है.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- माननीय सभापति महोदया, यह गरीबों की आवाज मैं बोल रहा हूँ.

          सभापति महोदया -- गरीबों की आवाज ठीक है, लेकिन समय सीमा का भी ध्‍यान रखें.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- माननीय सभापति महोदया, आज आपके बीच में मैं तो सिर्फ यह कहना चाहूँगा कि जो गरीबों की बात है, इस पर चर्चा बहुत आवश्‍यक हो गई है. आज संबल में आप जिनको पात्र बता रहे हैं, समय पर उन्‍हें क्‍यों मदद नहीं दी जाती. कितने दिनों के बाद उन्‍हें मदद मिल पाती है. अंत्‍येष्‍टि की राशि उनको नहीं मिलती. आज पंचायत विकास के लिए पूरी तरह से जो वहां पर निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं, पंच, सरपंच, जनपद सदस्‍य और जिला सदस्‍य, वे चाहते हैं कि उनके विकास कार्य में, मनरेगा जैसे में, मंत्री जी, मैं दोनों हाथ जोड़कर निवेदन करता हूँ और इस प्रदेश के पंच, सरपंचों की तरफ से मैं आपके पैर भी पड़ता हूँ, पर आप उनका अधिकार मत छीनें. मेरी प्रार्थना है कि उनका अधिकार आप मत छीनें. उनको आपने मनरेगा में बंदिश करके रखा है. मनरेगा में अधिकारियों को आपने पॉवरफुल बना दिया. अधिकारी सर्वेन्‍ट हैं, नॉट किंग, और वे निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, उनकी दशा आप मजदूरों की तरह मत कीजिए, यह मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूँ. वे  जनप्रतिनिधि एक अधिकारी के पीछे-पीछे भटकते हैं कि साहब, टीएस कर दें, साहब, टीएस कर दें. क्‍या दशा बनाकर रखी है और सब डरते हैं. सब आपसे डरते हैं. मुख्‍यमंत्री जी भी डरते हैं, आप सीनियर हैं, ज्‍यादा कहेंगे तो भी लफड़ा है. इस समय तो हम लोग बड़े परेशान हैं. हमारे अध्‍यक्ष जी भी पॉवरफुल हैं. वहां कैलाश विजयवर्गीय जी भी पॉवरफुल. एक शहर का मंत्री और एक गांव का मंत्री, दोनों पॉवरफुल, अब मुख्‍यमंत्री जी से भी बोलें तो बड़ा तंग रहते हैं. ये सीनियर हैं. अब सदन में मर्यादा ठीक है. पर बात तो यह है कि कैसे कहेंगे, एक शहर का मंत्री और एक गांव का मंत्री तो आप तो दिलेरी दिखा दें साहब, हम देहात वाले हैं, हमारे इधर शहर उतना ज्‍यादा नहीं है. आप तो दिलेरी दिखा दें कि मनरेगा की स्‍वीकृति हमारे पक्ष और विपक्ष के विधायक अगर लिखकर देंगे तो आप समझना कि ये मंत्री की तरफ से ऐसा पॉवर दे दें. आप भी विधायक हैं. अगर हम लिख दें कि इस रोड की जरूरत है, वह रोड बन जाए, ऐसी पॉवर दे दें. ताकि हमारा भी कुछ वहां पर जनता के बीच मान-सम्‍मान रहे.

          आपने अभी एक बहुत बढ़िया काम किया कि पंचायतों के लिये राशि स्वीकृत करने का निर्णय लिया लेकिन आपने हमारे विधायकों से पूछा ही नहीं. सत्ता पक्ष के विधायकों से पूछे होंगे, डराते होंगे कि कहीं अविश्वास करके दिक्कत न कर दें लेकिन हम लोगों से भी पूछ लेते तो  क्या दिक्कत होती. आज मैं आपको बताना चाहूंगा. 2-3 काम मैं बताना चाहता हूं. एक बिलाईखार गांव है जहां बरसात के दिनों में आवागमन अवरूद्ध हो जाता है जो वहां नदी है वहां बाढ़ आ जाती है. बच्चों का आना-जाना बंद रहता है. मनरेगा से प्राक्कलन बन चुका था उसका कार्य नहीं हो पाया.आप चाहोगे तो बड़ी कृपा होगी. आप आ जाना उद्घाटन करवाएंगे आपके लिये बड़ा भव्य कार्यक्रम करवा दूंगा. दूसरा वहां ऊपड़किवाड़ से तितराही के बीच बहुत बड़ा नाला है कई लोग बह जाते हैं. वहीं से आगे जाएंगे तो बुड़नेर में दो लोग बह गये और दोनों लोग समाप्त हो गये बहने के कारण अगर आप वहां पुल बना दोगे तो बड़ी कृपा हो जायेगी.हमारे यहां सीताराम महाराज जी हैं जिनकी उम्र 125-130 साल है. वह जहां निवासरत् हैं वहां से आगे एक भीमकुण्डी गांव है कहते हैं कि विधायक जी यह सड़क बनवा दो. सुदूर सड़क है एक गांव से दूसरे गांव तक स्कूल तक जाता है उसको आप अगर जोड़ देंगे. आप अगर चाहेंगे तो मैं आपको सूची दे दूंगा.क्षेत्र की बहुत समस्याएं हैं. जन मांग हैं. उनको आप अगर स्वीकृत कर देंगे वहां जनहित की बात हो जायेगी. मंत्री जी जब बन जाते हैं तो कौन सा ऐसा गुण आ जाता है कि इधर की सुनते ही नहीं. मैं भी कुछ दिन के लिये बैठा था. मैं नहीं सुनता था अधिकारियों की मैं अपने लोगों की बात सुनता था. उसका प्रमाण है कि टी.ए.सी. की जो बैठक थी वह 11 घंटे चली थी. उस समय माननीय मुख्यमंत्री कमलनाथ जी थे  उन्होंने तीन बार फोन किया कि इतनी लंबी बैठक क्यों चल रही है तो मैंने बोला कि समस्या है तो बैठक चलेगी ही. हमारे माननीय मंत्री जी मैं अपनी इस बात के साथ धन्यवाद के साथ अपनी बात समाप्त करूंगा. मैं गांव के  एक सयाने व्यक्ति के पास गया तो वे बोले कि बेटा,मेरी शायरी सुन लो. मैंने कहा कि शायरी, तो बोला कि सदन में बहुत शायरी चलता है हम वहां बोल नहीं सकते हम आप ही को सुना दें तो मैंने कहा ठीक है दादा सुनाओ तो उन्होंने कहा कि इसमें गुस्सा नहीं करना.बहुत रहस्य है तो हमने कहा ठीक है दादा. तो उन्होंने शायरी सुनाई कि "चूसता है खून गरीबों का उसे शैतान कहते हैं करता है मदद गरीबों की उसे इंसान कहते हैं." तो बोले बेटा,इंसान बने रहना.गरीबों का काम करना तो मैं सरकार से कहना चाहूंगा यह मेरी जबान नहीं है वृद्ध ईमानदार व्यक्ति की जबान है और मैंने भी सीख लिया कि हम जितनी भी मदद हो सकती है हम मदद करें तो यह हम मदद कर रहे हैं. वैसे हमारी प्रवृत्ति पता नहीं क्यों बिगड़ती जा रही है. नेता,नेता मतलब एक दूसरे के दुश्मन,अरे,सही काम में एक हो जाओ काहे के लिये दुश्मनी पाल रहे हो विकास कार्य में एक हो जाओ चुनाव लड़ते समय जरूर प्रयास कर लेना लेकिन कौन सा ऐसा गुण आ गया है कि कांच में पारा लगाओ तो आईना बन जाता है और किसी को आईना दिखाओ तो पारा चढ़ जाता है. इस समय मंत्री लोगों का पारा चढ़ जाता है. बड़ी मुश्किल हो जाती है क्या करें लेकिन हम तो अपना कर्तव्य करेंगे. आईये हम सब मिलकर बेहतर मध्यप्रदेश बनाने के लिये प्रयास करें और सिर्फ बातों में यह नारा न रहे हकीकत में रहे. मैं अंतिम अनुरोध के साथ आप सबसे कहूंगा कि 1 लाख 42 हजार प्रति व्यक्ति की आय का जो आंकड़ा आप लोगों ने दिया है उसकी सच्चाई के लिये हम आपके पास भी आएंगे और जानना चाहेंगे कि 1 लाख 42 हजार प्रति व्यक्ति की हमारी आय है तो हम आपका सम्मान करेंगे और नहीं है तो सुधार के लिये अनुरोध करेंगे. मंत्री जी से मैं उम्मीद करूंगा कि मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने के लिये प्रधानमंत्री आवास के लिये जितनी लागत लगती है उतनी राशि बढ़ाने के लिये आप अपने वक्तव्य में जरूर-जरूर कहेंगे. आपका बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री हरिशंकर खटीक (जतारा)--  माननीय सभापति महोदया, मैं मांग संख्‍या 18, 30, 40 के समर्थन में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. माननीय सभापति महोदया, हमारे देश के तत्‍कालीन प्रधान मंत्री जी माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी जिनका एक सपना था कि गांव का विकास हम कैसे करें, उसके लिये हमें गांव से गांव जोड़ने के लिये उसकी कनेक्टिविटी के लिये सड़कों का निर्माण कार्य कराया जाना अति आवश्‍यक है, उस समय तत्‍कालीन प्रधान मंत्री माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्‍यम से कार्य की शुरूआत की थी उस समय अगर हमारे सम्‍मानीय  सदस्‍य ओमकार जी भी होते तो उनको भी लग रहा होता और ताली बजा रहे होते कि कम से कम देश के प्रधान मंत्री माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने कुछ काम किया है. आज उनकी जो सड़कें हैं, यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार की उपलब्धि है. माननीय सभापति महोदया, उस समय वर्ष 2003 के पहले अगर इतिहास उठाकर देखा जाये तो गांव में न तो हमारे कांग्रेस के मित्र हमारे साथी भाई वहां पर स्‍कूल ढंग से दे पाये, न वहां पर बिजली ढंग से दे पाये, सड़क भी नहीं पहुंची, शिक्षा के क्षेत्र में भी कोई सुधार नहीं हुआ, न आंगनबाड़ी केन्‍द्र थे, लेकिन आज हमारी सरकार ने ग्रामीणों के पास जो आवास नहीं होते थे वह  देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी, मध्‍यप्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी,  मध्‍यप्रदेश के पंचायत राज मंत्री, सम्‍माननीय प्रहलाद पटेल जी, सम्‍मानीय राज्‍यमंत्री महोदया यह सब मिलकर के अगर खेत में भी मजरा  टोला है वहां के लिये भी प्रधानमंत्री आवास के माध्‍यम से आवास बनवाने का काम कर रहे हैं. माननीय सभापति महोदया, पंचायत विभाग का जो वर्ष 2025-26 का बजट है वह 19 हजार 50 करोड़ का प्रावधान इसमें किया गया है. माननीय सभापति महोदया, महत्‍वपूर्ण बात यह है कि हमारी माताओं बहनों को हम किस प्रकार से रोजगार दे सकें, ऐसी माताओं बहनों को रोजगार हेतु स्‍व सहायता समूह के माध्‍यम से, ऑनलाइन पोर्टल के माध्‍यम से बैंक ऋण स्‍वीकृत कराने का काम अगर किसी ने किया है तो वह भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया और आज हम हिन्‍दुस्‍तान में अगर बात करें तो मध्‍यप्रदेश देश का एक ऐसा राज्‍य है जो प्रथम स्‍थान पर पाया जाता है जहां पर सबसे ज्‍यादा माता बहनों को स्‍वसहायता समूह के माध्‍यम से उनको रोजगार देने का काम किया जा रहा है. हमारी सरकार ने जो पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का बजट है उसमें मुख्‍यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना भी प्रारंभ की है और  इस बार से जो शुरूआत हो रही है उसके परिणाम भी एक साल के अंदर हमारे मित्र देखेंगे, इसके लिये 100 करोड़ रूपये का प्रावधान इसमें किया गया है. माननीय सभापति महोदया, पंचायतों के सर्वांगीण विकास के लिये हमारी सरकार ने काम जारी कर दिया है, जो 2 हजार 507 करोड़ रूपये का बजट था इस बार और बजट बढ़ाकर के 6 हजार सात करोड़ रूपये का प्रावधान इसमें पंचायतों के सर्वांगीण विकास में किया गया है. इसके साथ-साथ कोई भी व्‍यक्ति खुले आसमान तले निवास न करे, कांग्रेस की सोच तो यह थी, हमारे सत्‍ता पक्ष के अभी हमारे साथी  भाई बोल रहे थे और हमारे विपक्ष के मित्र भी जानते हैं कि पहले देश के प्रधानमंत्री स्‍व. राजीव गांधी जी कहा करते थे कि हम वहां से 1 लाख रूपया आवास के लिये भेजते हैं तो मात्र 5 हजार या 10 हजार रूपये उस श्रमिक तक पहुंच पाता है और पूरा पैसा न जाने कहां चला जाता है. हम कांग्रेस के अपने मित्रों से पूछना चाहते हैं, वह अपनी आत्‍मा में, अपनी गलेवान में झांककर के देख सकते हैं और सोच सकते हैं कि पहले भी प्रधानमंत्री आवास योजना स्‍वीकृत थी, उसमें जो राशि मिलती थी, उसमें एक ग्राम पंचायत में एक आवास मिलता था. आज हम गर्व से और छाती ठोंककर कह सकते हैं कि एक-एक ग्राम पंचायत में पचासों, सौ-सौ, दो-दो सौ प्रधानमंत्री आवास स्‍वीकृत हो रहे हैं(मेजों की थपथपाहट) यह हमारी सरकार की उपलब्धि है और इसमें खुले आसमान के तले कोई भ्रष्‍टाचार नहीं, सीधे डायरेक्‍ट उनके खातों में राशि डालने का काम कोई सरकार कर रही है, तो यह हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार कर रही है. (मेजों की थपथपाहट)

          सभापति महोदय, हम सौभाग्‍यशाली हैं कि 27 लाख आवास का सर्वे हुआ था, मात्र 27 लाख जो आवास का सर्वे हुआ था, उसमें लगभग पूरे बन चुके हैं, मात्र 8 लाख प्रधानमंत्री आवास बनना शेष हैं और जैसे ही हमको भारत सरकार से राशि मिलती है, तो उस लक्ष्‍य को भी एक साल के अंदर-अंदर पूरा करने का काम हमारी सरकार, हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार, मोहन यादव जी की सरकार पूरा करने के लिये जा रही है.

          सभापति महोदय, अगर हम सड़कों की बात करें, पहले हमारी सड़कों को 12 मासी सड़कें बोलते थे, तो बारह मासी सड़कें एक साल में पंद्रह -पंद्रह दिन भी बंद रहती थीं, उनको हम बारह मासी सड़कें बोलते थे, इसके बाद हमारी सरकार ने प्रयास किया और सड़कें बनवाने का काम किया, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्‍यम से उसमें 72 घण्‍टे अगर सड़क बंद होती है, तो बारह मासी सड़कें कही जाती थीं, लेकिन आज हम कह सकते हैं कि अगर 48 घण्‍टे भी एक साल में सड़क बंद हुई है, तो उसको हम बारह मासी सड़कें अब कहेंगे. एक साल में मात्र 48 घण्‍टे.

          सभापति महोदय, हमारी सरकार ने यह दृढ़संकल्‍प लिया है कि जहां ऐसे मजरे टोला गांव जहां पर सामान्‍य क्षेत्र की आबादी अगर 500 की आबादी है, तो उस सड़क को हम मजरा टोला से जोड़कर और वहां पर भी पक्‍की सड़क देने का काम हमारी सरकार करेगी, इसके साथ-साथ आदिवासी क्षेत्रों में जहां 250 की भी आबादी है, उस 250 की आबादी पर भी हम पक्‍की सड़क बनाने के लिये इस बार जा रहे हैं.

          सभापति महोदय, दूसरा एक ओर खुशी की बात है कि सरकार ने फैसला किया है कि नक्‍सलवादी क्षेत्र जहां पर अति पिछड़ी जाति के लोग रहते हैं, जैसे बैगा, भारिया, सहरिया, समुदाय के लोग जहां रहते हैं, अगर वहां दस घर भी हैं, तो उन मजरे टोले के दस घरों को भी पक्‍की सड़कों से जोड़ने का काम हमारी सरकार इसी साल करने के लिये जा रही है. (मेजों की थपथपाहट) इससे बड़ी ओर खुशी और क्‍या हो सकती है कि जहां दस घर हैं, वहां भी हम पक्‍की सड़क देने का काम करेंगे.सभापति महोदय, हमारी सरकार का लक्ष्‍य है और हमारी सरकार ने यह दृढ़ फैसला किया है और सरकार की कोशिश है और 662 किलोमीटर की सड़क, 191 पुल बनकर हमारे तैयार भी हुए हैं. सभापति महोदय, दूसरा हम आपसे अनुरोध करना चाहते हैं कि हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने जनजातीय गौरव दिवस पर भगवान बिरसा मुण्‍डा की जयंती पर एक दृढ़संकल्‍प लिया है, प्रधानमंत्री जन मन आवास और प्रधानमंत्री जन मन सड़कों के लिये पर्याप्‍त हम राशि देंगे, उसका भी पूरे मध्‍यप्रदेश में सर्वे हो रहा है, पूरे देश में सर्वे हुआ है और आज उसके लिये जो हमारी डॉ. मोहन यादव जी की सरकार ने, वित्‍तमंत्री जी ने, सम्‍माननीय पंचायत मंत्री जी ने प्रधानमंत्री जन मन आवास के लिये 1 हजार सौ करोड़ रूपये का प्रावधान इसमें किया है. प्रधानमंत्री जन मन सड़कों के निर्माण के लिये भी 1 हजार 56 करोड़ का प्रावधान इसमें किया है.

          सभापति महोदय, एक ओर खुशी की बात इस बजट में अच्‍छी लगी है, यह सबसे अच्‍छा बजट अभी तक का आया है, जिसमें ऐसी ग्राम पंचायतें जिनके पास स्‍वंय के बैठने के लिये स्‍थान नहीं है, ऐसी ग्राम पंचायतें जो जर्जर हो गई हैं, जो कभी भी धराशायी हो सकती हैं, ऐसे पूरे मध्‍यप्रदेश की पंचायतों का सर्वे हुआ है, अभी हमारे ओमकार सिंह भाई चले गये, हम उनको बताना चाहते थे कि ऐसी ग्राम पंचायत जहां पंचायत भवन नहीं है, वहां हम दो वर्ष के अंदर कोई भी ऐसी मध्‍यप्रदेश की ग्राम पंचायत नहीं होगी, जिसमें स्‍वंय का पंचायत भवन न हो (मेजों की थपथपाहट) यह हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार का फैसला है, इसमें 37 लाख 50 हजार रूपये की राशि पंचायतों के पंचायत भवन बनाने के लिये शासन के द्वारा स्‍वीकृत की जा रही है, इसलिए माननीय मंत्री जी को भी हम बहुत-बहुत धन्‍यवाद देते हैं कि यह ऐतिहासिक फैसला, ऐतिहासिक कदम आपने लिया है और जहां पर क्‍लस्‍टर ग्राम पंचायतों का है,वहां पंचायत भवन बनने के लिये 48 लाख रूपये एक मुश्‍त स्‍वीकृत किये जा रहे हैं.

          सभापति महोदय, अभी हमारे भाई संबल योजना के बारे में, मजदूरों के बारे में बोल रहे थे, उसके लिये भी हम आपके बीच में बताना चाहते हैं कि हमारा श्रम विभाग है, हमारे श्रमिक मजूदरी करते हैं, वह मजदूरी करने जाते हैं, लेकिन उनके मन के अंदर भी आत्‍माएं रहती हैं, वह सोचते हैं कि क्‍या हम अपने बेटे को पटवारी बना पायेंगे, क्‍या हम शिक्षक बना पायेंगे, क्‍या हम अपने बेटे को इंजीनियर डॉक्‍टर बना पायेंगे? उनके भी अरमान होते हैं, उनके भी दिल की भी इच्‍छा होती है कि हम भी अपने बेटे को पढ़ा लिखाकर आगे करें, चाहे वह अनुसूचित जाति का हो, या जनजाति वर्ग का हो, पिछड़ा वर्ग का हो, चाहे सामान्‍य वर्ग का हो, कोई भी गरीब वर्ग का व्‍यक्ति है तो उसके पिता के अंदर भी अरमान होते हैं कि वह अपने बेटा-बेटी को पढ़ा सके. हम मध्‍यप्रदेश सरकार को धन्‍यवाद देना चाहते हैं कि हमारी सरकार ने फैसला किया कि आप भी अपने बेटा बेटी को पटवारी से लेकर पीएससी से एसडीएम बना सकते हो, मेहनत आपका बेटा करेगा, हम अच्‍छे से अच्‍छे विद्यालय की व्‍यवस्‍था करेंगे. आपका बेटा यूपीएससी पास हो, उसके लिए भी सरकार चिंता करेगी. देश की आजादी के बाद पूरे मध्‍यप्रदेश में मात्र 4 आवासीय समुदाय विद्यालय थे, इसमें भोपाल, इंदौर, ग्‍वालियर और जबलपुर हुआ करता था. सरकार ने फैसला किया पूरे सदन की ओर से मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहते हैं कि उन्‍होंने 5 नवीन आवासीय विद्यालय मप्र में स्‍वीकृत किए हैं, जिनमें सागर, उज्‍जैन, शहडोल, सिंगरौली और बालाघाट में स्‍वीकृत करने का फैसला किया है. ये आवासीय भवन 310 करोड़ की लागत से बनेंगे, इसी साल उनका काम प्रारंभ हो जाएगा, इस बजट में इसका प्रावधान भी किया गया है(...मेजों की थपथपाहट) प्रतिवर्ष कुल संचालन में बच्‍चों के भोजन और ठहरने की व्‍यवस्‍था पर भी खर्च होंगे उसके लिए भी बजट में प्रावधधन किया गया है. अभी हमारे भाई बोल रहे थे कि संबल योजना से कुछ नहीं मिला, किसी को कुछ मिलता ही नहीं है तो आज हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि अभी तक 6 लाख 26 हजार हितग्राहियों को जिनकी मृत्‍यु हो गई हैं, उनके परिजनों को 5 हजार 852 करोड़ रुपए हमारी सरकार श्रमिकों के ऊपर खर्च कर चुकी है, उनके खातों में राशि सीधे पहुंच जाती है इस बार भी अत्‍येष्टि सहायता की बात हो, या अनुग्रह सहायता की बात हो, दिसम्‍बर 2024 तक 10236 हितग्राहियों के खाते में 225 करोड़ रुपए हमारी सरकार उनके खातों में भेज चुकी है.

          हमारे विरोधी मित्रों को प्रसन्‍नता होनी चाहिए, उनके मन के अंदर यह होना चाहिए कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार भी अच्‍छा काम कर रही है, लेकिन पहले इनकी सरकार ने क्‍यों काम नहीं किया, पहले इन्‍होंने क्‍यों नहीं सोचा कि ये-ये योजनाएं बननी चाहिए, पहले पैसा कहा जाता था. आज हमारी सरकार प्रत्‍येक हितग्रा‍हियों के खातों में राशि देने का काम कर रही है, लगातार सरकार का प्रयास है. हमारे कांग्रेस के मित्र हैं, उनको लगता है कि हमारी सरकार कैसे काम कर रही है. हम एक ही अनुरोध करना चाहते हैं विरोधी मित्रों से, अभी तो बहुत कम कांग्रेस में बचे हुए भाई यहां पर बैठे हुए हैं. आने वाले समय में इनकी सरकार तो आनी नहीं है, हमेशा भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनना है तो इनकी आत्‍मा किलप रही है. अभी इतने बैठे हुए हैं आगे और सिमटकर रहे जाएंगे और जनता इनको ढूंढती रह जाएगी, उसी के आधार पर इनकी सरकार चल रही है. सभापति महोदया आपने समय दिया, इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्‍यवाद, भारत माता की जय.

          सभापति महोदय बहुत बहुत धन्‍यवाद, अभय मिश्रा जी.

          श्री अभय मिश्रा(सेमरिया) माननीय सभापति महोदया, मैं मांग संख्‍या 30 और 40 पर बात करने के लिए खड़ा हुआ हूं. अभी हम मांग संख्‍या 30 पर बात कर रहे हैं, वैसे तो जो आपको करना है, वही करना है..  क्‍योंकि वक्‍त का हर शय गुलाम, वक्‍त का हर शय पे राज और वक्‍त है आप..

          सभापति महोदया अभय जी, ये जो मांग संख्‍या 18, 30, 40 है, इसमें एक घंटा निर्धारित है, प्रारंभ में ही दोनों तरफ से 15 मिनट से अधिक का समय हो गया है.

          श्री अभय मिश्रा‍ - यहां कुछ संचालन एवं प्रक्रिया नियम है क्‍या, ऐसा कुछ तय है कि फलां फलां चेहरों को 20-20 मिनट, फलां फलां चेहरों को 5-5 मिनट.

          सभापति महोदया नहीं, जो शुरूवात करता है उसको दोनों तरफ से अधिक समय देते हैं,.

          श्री अभय मिश्रा उसमें भी आरक्षण हो तो हम लोग उसका पालन करेंगे.

          सभापति महोदया नहीं, नहीं इसमें नहीं है और अभी जो समय बचा है, वह प्रति सदस् को 3 मिनट है, आप निर्धारित कर लीजिए कि क्या क्या प्रमुख चीज है वह बताइए

          श्री अभय मिश्रा मैं काफी दिनों के अनुभव के बाद मैं यह बात बोल रहा हूं, कोई इतना जरुरी मुझे नहीं लगता, अगर आपको आपत्ति हो तो मैं बैठ भी जाउंगा.

          सभापति महोदया 3 मिनट है सभी को.

          श्री अभय मिश्रा अच्‍छा, माननीय मंत्री जी यहां पर बैठे हुए हैं, हम उनको ध्‍यान में रखकर बात कर रहे हैं. दो चीजों को हम बार बार कहा करते हैं एक तो लीकेज को रोके, अपव्‍यय को रोके और दूसरा हम सार्थक व्‍यय करें. ये जो केन्‍द्रीय रिवाइड बगैरह है, यह मुझे समझ में नहीं आती लेकिन परम्‍परागत तरीका सही है बजट में आ जाता है. मंत्री जी आप ध्‍यान दीजिएगा ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा में आपने 265 करोड़ रुपए दिया है इसमें एक करोड़ अगर  इसको भाग दे दे तो एक वर्ष में एक करोड़ रुपए प्रति विधान सभा नहीं आ रही है और आपने उस दिन जब एक अनुपात को लेकर गड़बड़ी हो गई है. शहरी क्षेत्रों में ज्यादा पक्के काम हो गये हैं, अनुपात बिगड़ गया है. तब आपने घोषणा की थी उसका यह पत्र भी आया है कि एक करोड़ रूपये प्रत्येक विधान सभा में सुदूर सड़क के काम करा दिये जायेंगे. जब बजट में है ही नहीं इसमें सुदूर सड़क इसी से करानी है, इसमें 1 करोड़ रूपये नहीं पहुंच पा रहा है. तीसरी बात आ जाईये आपने दिया है मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क 100 करोड़ रूपये इसको भाग दे देते हैं हमारे यहां पर 25 हजार से 27 हजार के बीच में पंचायतें हैं. उसमें भी 30 हजार रूपये प्रति पंचायत आ रहा है. अब आप ही बताईये कि इसमें क्या होगा ? आपका पूरा का पूरा पैसा है रोजगार गारंटी में 4 हजार 50 करोड़ रूपये आपका इसमें पत्र है 19.11.2024 इसी में यह सब काम होने हैं, जैसे कि आपने आंगनवाड़ी की बात की, आपने पंचायत भवन की बात की. आपने जो भी घोषणाएं की हैं इस पत्र के आधार पर 4 हजार 50 करोड़ रूपये से रोजगार गारंटी के पैसे से काम होने हैं. 2013 की सरकार में, 2018 की सरकार में पहुंचा दूंगा. आपकी सरकार की तरफ से एक बार ऐसी एक और घोषणा हुई थी कि कोई पंचायते, कोई आंगनवाड़ी कोई खाली नहीं रहेगी, कोई भूखा नहीं रहेगा उस समय तो खैर बहुत ज्यादा ही रहता था. अब आपकी नीयत हम जानते हैं, हम आपको व्यक्तिगत तरीके से भी जानते हैं आपके इरादे को, मुझे मालूम है कि होगा, पर अभी तक इसमें कोई काम शुरू नहीं हुआ है. कम से कम एक करोड़ रूपये जो सुदूर सड़क के लिये दिये थे, वह काम हो जाता. दूसरी सबसे बड़ी दिक्कत है क्योंकि इसके बाद आपसे बात करने का मौका ही नहीं मिलेगा सदन में. पंचायतों के जो विवाद हैं 25 प्रतिशत पंचायतें विवादित हैं. आपसे मेरा अनुरोध है कि आप वहां से ऐसी पंचायतों की सूची मंगा लें जिनके खातों में पैसे पड़े हुए हैं ज्यादातर अनुसूचित जाति-जनजाति के सरपंच हैं. संवर्ण वहां पर जीआर सेकेट्री हैं. एक गलती यह हो गई है कि जीआर उसी गांव का है उसका स्थानातंरण भी नहीं कर रहे हैं. वहां पर उन्हीं की दादागिरी चल रही है और वही अपने मन का करते हैं. जो नहीं कर पा रहे हैं वहां का काम बंद है. इस ओर आपका ध्यानाकर्षित करूंगा. हमारे यहां का एक लेटर है. मैंने ध्यानाकर्षण भी लगाया है. मैं एक उदाहरण के रूप में पेश कर रहा हूं, कमिश्नर का यह एक लेटर है कि ग्राम पंचायत सखनी लिख लीजिये जनपद पंचायत सिरमौर का जो रोजगार सहायक है उसको तुरंत पद से हटा दिया है. वहां पर आदिवासी सरपंच के साथ क्या क्या किया है आज तक कोई कार्यवाही नहीं. ऐसी स्थिति में हम पंचायतों का कैसे मान पायेंगे कि हम आगे बढ़ पायेंगे. एक ही इंजीनियर 15-15 वर्ष से है. हमारे यहां पर मरावी करके इंजीनियर है, वह मंडला का है. वह बेचारा इतना सीधा है कि उससे जो चाहे हाथ पकड़कर दस्तखत करा लें उसको लोग हटने नहीं दे रहे हैं, क्योंकि सब गलत मूल्यांकन करके उनसे दस्तखत करा लेते हैं. कम से कम यह नियम हो कि आप जब तक कोई पॉलिसी मेटर नहीं बनायेंगे. एक एक चीज हम आपकी रोज लेंगे, आप कहां तक किसकी सुनेंगे ? आप रिसर्च एवं एनालिसिस पूरे बजट के लिये कहता हूं कि डॉ.मोहन यादव नये मुख्यमंत्री बने हैं काफी दिनों के बाद नया चेहरा और नया शासक आया है तो कुछ नया होना चाहिये. आप किसी एजेंसी को देकर सही प्लानिंग में अगर काम हो जाता तो ज्यादा अच्छा होता. अब मैं पंचायत के पंच की बात कह रहा हूं इसमें आपने पैसे दिये हैं 69 करोड़ रूपये मात्र जो मानदेय दिये हैं पंचायत पदाधिकारियों को आपने हमारे प्रश्न के उत्तर में कहा था कि पंचों को बराबर मिल रहा है. उसके बाद एक पत्र हम लाये थे जिसमें 50 रूपये आपने दिये थे और अधिनियम में 100 रूपये जब 1993 में दिल्ली में जब अधिनियम बना 100 रूपये उसका अधिकार लेख है. सरपंच, जनपद सदस्य जिला इनका कुछ भी उल्लेख नहीं था. धीरे धीरे एक परम्परा बनी इनको मिलने लगा. 100 रूपये उनका अधिकार है. अगर हम 100 रूपये देते हैं तो उनको कम से कम 68 करोड़ रूपये चाहिये तो आपने उनको कुल 69 करोड़ रूपये दे रखा है उसमें आपके और उसमें जनपद भी है, सरपंच भी है, जिला भी है सब है, तो यह कैसा भ्रमजाल है. मैं दो बातें कहूंगा. मेरा पंचायती राज से उद्भव हुआ है. मैं जनपद अध्‍यक्ष था, मैं जिला पंचायत अध्‍यक्ष था. मैंने पंचायती राज में देखा है. आपको लगता होगा कि यह जिला पंचायत, जनपद पंचायत अध्‍यक्ष किसी काम का नहीं. मैं आपको सही बता रहा हॅूं. मैं तो खुद ही जनपद अध्‍यक्ष रहा हॅूं. जनपद अध्‍यक्ष और जिला पंचायत अध्‍यक्ष जैसे ही वह बन जाता है तो वह टिकट ढूंढने लगता है. सरपंच जैसे ही बन जाता है वैसे ही वह वेंडर हो जाता है. उसका भी 5 साल के लिए कॉन्‍ट्रेक्‍ट हो गया. एक ही आदमी है जिसके पास 50 वोट हैं और वह है पंच. पंचों की समितियां हर ग्राम पंचायत में हैं. उन समितियों के माध्‍यम से हम काम नहीं कर रहे हैं. पंचों को कुछ नहीं दे रहे हैं. जब तक हम पंचों को नहीं पकडे़गें, उनको मजबूत नहीं करेंगे जो आप चाह रहे हैं कि चीजें लाइनअप हो जाए, वह लाइनअप नहीं हो पाएंगी.

          सभापति महोदय, यह जो कटौती प्रस्‍ताव है इसमें मैं यह मानकर चलता हॅूं कि यह बुक जो आपने दी है, इसके अनुसार निश्‍चित रूप से कुछ पालन होगा जिससे हम लोगों के काम होंगे. हमने बकायदा मेहनत करके एक-एक कटौती प्रस्‍ताव लिखा है. पंचायत विभाग में हमने लिखा है कि विधानसभा क्षेत्र सेमरिया अंतर्गत 30 ग्राम पंचायतें, जो जनजाति बाहुल्‍य हैं उनमें पेयजल, रोड, नाली  के निर्माण के लिए मांग संख्‍या 033 में कुछ भी नहीं दिया गया. इसमें मैं कहना चाहता हॅूं कि इसके लिए कुछ राशि स्‍वीकृत कर दीजिए. दूसरा मैंने कटौती प्रस्‍ताव में दिया है कि सेमरिया  विधानसभा के ग्राम पंचायत में 50 किलोमीटर में कम से कम 6 सड़क योजना पूरे विधानसभा को मिलाकर किसी ग्राम पंचायत में आधा किलोमीटर, किसी ग्राम पंचायत में एक किलोमीटर  कुछ करके हमको सुदूर सड़क योजना हमको मिल जाती.

          सभापति महोदय, तीसरी बात मैं यह कहना चाहता हॅूं कि पीडब्‍ल्‍यूडी से संबंधित तो बजट में है, केवल मैं आपसे पंचायत से संबंधित बात कर रहा हॅूं. स्‍कूलों के लिए भी है और जल संसाधन भी है.

          सभापति महोदया, रीवा जिले के विधानसभा क्षेत्र में संचालित शासकीय उचित मूल्‍य की दुकानें हैं जो भवनविहीन हैं. उसमें आप दो चीजें टारगेट कर रहे हैं. आंगनवाड़ी को टारगेट कर रहे हैं. पंचायत भवन को टारगेट कर रहे हैं. शासकीय उचित मूल्‍य की दुकानों को भी आप टारगेट कर रहे हैं.

          सभापति महोदया, एक और समस्‍या है हालांकि वह आपका विभाग नहीं है. नि:शक्‍तजन से संबंधित है. मेरा आपसे निवेदन है कि हम हर विधानसभा में ट्राइसाईकिल देना चाहते हैं. हम कानपुर जाते हैं जो हम सप्‍लाई से देते हैं उससे ज्‍यादा अच्‍छी साईकिल 18 हजार रूपए में मिल रही है और अगर हम अपने योजना मंडल से देते हैं जो 55 हजार, 60 हजार रूपए की है, तो लोग कहते हैं कि चले जाओ लेंगपुर से दिलवा लो, तो वह कहता है कि  65 हजार रूपए की है.  मतलब ढूंढते रह जाएंगे. मतलब यदि व्‍यक्‍ति इमानदारी से करना चाहे कि हमें कम कीमत की अच्‍छी चीजें मिल रही हैं तो हमारे पास यह व्‍यवस्‍था नहीं है कि हम उसको सीधे दे सकें.

          सभापति महोदय, मैं जनसंपर्क के संबंध में कहना चाहता हॅूं कि जब आपका काम इतना अच्‍छा है, तो 6 सौ करोड़ हर वर्ष देने का क्‍या मतलब है. जनता वैसे ही आपकी वाह-वाह कर रही है. अच्‍छा, 6 सौ करोड़ में से 3 सौ करोड़ ले लीजिए, 3 सौ करोड़ बचा लीजिए. 3 सौ करोड़ में आप लाख-दो लाख रूपए विधायकों की तनख्‍वाह बढ़ा दीजिए और दो लाख कम से कम एक करोड़ रूपए भी आप सालाना निधि बढ़ा दीजिए, तो कुल 3 सौ करोड़ में वह विधायक लोकप्रिय हो जाएगा. यह छोटा-छोटा काम है. मनोवैज्ञानिक तो है. कोई भी नेता आज तक किसी का परिवार चला पाया है क्‍या. व्‍यक्‍ति अपनी मजदूरी से पलता है लेकिन मनोवैज्ञानिक रूप से हर व्‍यक्‍ति को लगता है कि इसने मेरी मदद की. एक तरफ यह बड़ी सड़कें हैं और उनका जो महत्‍व है, उससे ज्‍यादा बड़ा महत्‍व यह है कि हम किसी के घर जाएं या कोई हमारे घर आए, तो हम उसको छोटी-छोटी चीजें देकर उपकृत कर सकें, तो इसकी कुछ योजना आप अपने बजट में शामिल कर लीजिए. इसके बाद मैं अपनी बात समाप्‍त करता हॅूं. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय -- धन्‍यवाद.

          श्री हजारी लाल दांगी जी (अनुपस्‍थित)

सभापति महोदया - श्री हजारीलाल दांगी जी (अनुपस्थित).

श्री रामनिवास शाह (सिंगरौली) - सभापति महोदया, पंचायत एवं ग्रामीण विकास की मांगों के समर्थन में खड़ा हूं, जिन बातों की चर्चा बजट में की गई है, जनमानस के लिए आवश्यक भी है और आवश्यकता से पूर्ति कर समाज के उत्थान के लिए सरकार लगातार काम कर रही है. इसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री जी को बहुत बहुत बधाई देना चाहता हूं. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की ओर से वर्ष 2025-26 में 19050 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. चर्चा के दौरान कटौती पर चर्चा करते हुए कांग्रेस के मित्र कुछ बातें कह रहे हैं लेकिन अधोसंरचना और सुदूर ग्राम सड़कों की हम बात करें तो पुराने समय में एक ऐसा हम सबके पास में उदाहरण है कि किसी जमाने में बरसात के पहले पहुंच-विहीन क्षेत्र हो जाता था और 3 महीने पहले खाद्यान्न वहां पर छोड़ा जाता था. आज हम उन क्षेत्रों को अगर इससे कटौती करते हैं तो किस तरह से वहां की सड़क बन पाएगी, वहां की पुलिया बन पाएगी, बल्कि हम इस बजट को पूरा करते हुए वहां की सड़कों के माध्यम से जो बनी हुई समस्या है उस समस्या से निदान पाकर हम समाज को अग्रसर कर सकेंगे. स्व-सहायता समूह के माध्यम से पोर्टल के माध्यम से ऐसा आपने कभी नहीं देखा रहा होगा, जो कि ऑन लाइन पोर्टल के माध्यम से हमें ऋण स्वीकृत हो जाय और हम अपने काम को सरलता से कर सकें.

5.52 बजे                 {सभापति महोदय (डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय) पीठासीन हुए.}

 

सभापति महोदय, मध्यप्रदेश सरकार के इस ओर बढ़ते हुए कदम यह सराहनीय कदम हैं. आने वाले समय में पशुपालन के क्षेत्र में जब हम पशुओं की समस्या को लेकर सदन में चर्चा करते हैं कि सड़कों पर हमारे पशु हैं तो वृंदावन ग्राम योजना जब हमारी प्रारंभ हो रही है तो हमको लगता है कि इसके अंतर्गत हम पशुपालन को बढ़वा देंगे और पशु जो सड़कों पर रहते हैं उससे बाहर ले आएंगे. मछली पालन और खाद्य प्रसंस्करण को भी बढ़ावा देकर विकसित भारत संकल्पना को लेकर ग्रामीण इलाके को हम शहरों के साथ जोड़ने का काम करेंगे. इसी तरह से प्रधानमंत्री आवास, दूरांचल, वनांचल क्षेत्रों में जिस प्रकार से देश की सरकार और प्रदेश की सरकार ग्रामीण विकास कर रही है, उस दिशा में बहुत बड़ी पहल है. पहले वर्ष 2001-02 में पहली बार जनपद पंचायत का उपाध्यक्ष बना था तो हम लोगों को एक पंचायत नहीं, बल्कि पूरे 104 पंचायत में 10-15 इंदिरा आवास आया करते थे. उसमें लड़ाइयां हो जाती थी कि कैसे होगा? आज तो पोर्टल के आधार पर देश और प्रदेश की सरकार प्रधानमंत्री आवास जिन बंधुओं को आवश्यक है, उन परिवारों को देने का काम हमारी सरकार कर रही है. यह भी आवश्यक है कि यह विकसित भारत की संकल्पना है. महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी के माध्यम से 450 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है. रोजगार गांरटी योजना के माध्यम से उन गरीब परिवारों को हम काम दे सकते हैं, जो काम खोजने के लिए बाहर नहीं जाना पड़ता बल्कि वहीं पर उनको कार्य मिल जाता है और वह काम करते हैं. इसी तरह से प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से उन दूरांचल, वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी परिवारों को चलने के लिए सड़क, उनको क्षेत्र में बिजली के लिए तार खम्भे और प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से आवास भी देने का काम हो रहा है. इसी तरह से हम पंचायत भवन, सामूदायिक भवन और शौचालय निर्माण करके गांवों को इस विकास की ओर ले जा रहे हैं. ग्रामीण विकास जो लगातार बढ़ रहा है. माननीय पंचायत मंत्री जी के माध्यम से हमारे क्षेत्रों में हर क्षेत्र में अब सामर्थ्यता बनाने के लिए ग्राम स्वराज अभियान भी चालू किया जा रहा है. इस निमित्त हम सब जानते हैं कि स्वच्छता अभियान को लेकर शौचालय पर कितना बड़ा काम हुआ. कभी शौचालयों की सोच नहीं आई थी. शौचालय के बारे में कभी किसी ने सोचा भी नहीं था. समझ में नहीं था कि शौचालय किस चीज को कहते हैं लेकिन देश के यशस्वी प्रधानंत्री जी ने जब स्वच्छता अभियान चलाया तो उसको लेकर मध्यप्रदेश की सरकार, डॉ. मोहन यादव जी की सरकार आज पूरे क्षेत्र में शौचालय निर्माण कराकर स्वच्छता अभियान के साथ साथ पंचायतों का स्वच्छता अभियान, पंचायतों का सौंदर्यीकरण अच्छे पंचायत भवन, अच्छे सामूदायिक भवन, कम्युनिटी हाल ऐसे निर्माण कराकर हम ग्रामीण विकास की ओर जा रहे हैं. इसके लिए मध्यप्रदेश सरकार का यह बजट बहुत ही सराहनीय है. आने वाले समय में और भी अच्छा होगा, इसके लिए बहुत बहुत बधाई. बहुत बहुत शुभकामनाएं. (मेजों की थपथपाहट) स्‍वच्‍छ मिशन भारत निरंतरता पर शौचालय का जिस प्रकार से काम किया है. हम सब जानते हैं कि ग्रामों में ओ.डी.एफ प्‍लस माडल घोषित किया जा रहा है. मल जल प्रबंधन के लिये भी कई क्षेत्रों में काम हो रहा है. इसी निरंतरता के साथ पंचायतों का विकास, पंचायतों की स्‍वच्‍छता बनाये रखना, हमारे लिये अति आवश्‍यक है. इसी तरह ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्‍यम से हमारे सिंगरौली में तो महिलाओं ने, महिलाओं के समूह ने कोदो और कुटकी का प्‍लांट लगाया है. वहां ही नहीं बल्कि पूरे मार्केटों में, शहरों में कोदो कुटकी को लेने के शुगर के मरीज उनको खोजते हैं, लेकिन मिलती नहीं है. लेकिन आज समूहों के माध्‍यम से हमारे यहां सिलाई, बुनाई और कढ़ाई  का काम भी हो रहा है, आजीविका मिशन से कोदो, कुटकी के पैकेट बनाकर के बाहर भेज रहे हैं. इस दिशा में ग्रामीण विकास की ओर काम प्रारंभ हुआ है. हम इसक बजट का समर्थन करते हुए माननीय मंत्री जी को माननीय मुख्‍यमंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं कि दूरांचल और वनांचल क्षेत्रों को संवारने और बनाने में आपकी भूमिका अच्‍छी रही है. पहली सरकारों से हम आगे बढ़ते हुए दिख रहे हैं. जो वर्ष 2003 के पहले हम दूरांचल और वनांचल क्षेत्रों में पुल पुलिया न होने के कारण पहुंच विहीन क्षेत्र मानकर के वहां खाद्यान्‍न तक नहीं पहुंचा पाते थे. आज सब जगह पुल, पुलिया बन रही हैं. इस निरंतरता को बनाने के लिये पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का बजट बहुत ही सराहनीय है. आपको बहुत-बहुत बधाई और धन्‍यवाद.

           श्री विवेक विक्‍की पटेल( बारासिवनी)- माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 30 और 40 पर अपनी बात रखना चाहता हूं. ग्रामीण विकास विभाग का सर्वाधिक बजट मनरेगा के माध्‍यम से जब माननीय मनमोहन सिंह जी थे, तब आया करता था. पांच साल में सरपंच का कार्यकाल खत्‍म हो जाता था, पर राशि खत्‍म नहीं होती थी. अब परिस्थिति बदल गयी है. मनरेगा योजना में वर्तमान में जारी हुए आदेश क्रमांक- 5191, दिनांक 19.11.24 में लगभग 35 प्रकार के कार्यों की सूची जारी की गई है, जबकि पूर्व में 262 प्रकार के कार्यों को अनुमत्‍य कार्यों की श्रेणी में रख गया था. कार्यों की सूची इतनी कम होने से ग्राम पंचायत स्‍तर पर काम करने में परेशानी सामने आ रही है. इन्‍हें पूर्व की भांति 262 काकर्यों को पुन: अनुमत्‍य कार्यों में शामिल किया जाए, ताकि मनरेगा का पंचायत स्‍तर पर क्रियान्‍वयन सही तरीके से हो सके. मनरेगा पूर्ववत सुचारू चले. पक्‍के कार्य ग्रामों के लिये स्‍वीकृत किये जायें. बालाघाट जिले की दो माह की मनरेगा मजदूरी का भुगतान तत्‍काल जारी हो. वर्तमान में जारी हुए आदेश ग्रेवल सड़क, खेत सड़क के लिये NRM कार्यों में 60 प्रतिशत व्‍यय करने का प्रावधान किया गया है, परन्‍तु मनरेगा का संचालन वर्ष 2006 से हो रहा है, जिसे आज लगभग 18 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं. ऐसी स्थिति में कार्यों की जगह सीमित होने से 60 प्रतिशत व्‍यय कर पाना संभव नहीं है. अत: इसे NRM की 60 प्रतिशत राशि को व्‍यय सीमा से मुक्‍त रखा जावे. ग्रेवल सड़क की निर्धारित सीमा 1 करोड़ रूपये को शिथिल किया जाये तथा आवश्‍यकता अनुरूप प्रत्‍येक ग्राम पंचायत में 1-1 ग्रेवल सड़क, खेत सड़क की स्‍वीकृति दी जाये. पुलिया निर्माण कार्य सामग्री का अंश अन्‍य मद कर्न्‍वेजयस के निर्देश जारी हुए हैं. चूंकि पंचायत में सीमित राशि उपलब्‍ध होती है, जिससे ग्राम पंचायत के छोटे-छोटे कार्यों में ही राशि पर्याप्‍त नहीं हो पाती है अत: इसे पूर्व की भांति ही मनरेगा से ही सामग्री का भुगतान किया जाए. सिक्‍योर पोर्टल में पर्कोलेशन टैंक की जागत दो लाख रूपये निर्धारित की गई है. इसे स्‍थल की आवश्‍यकता अनुरूप लागत हेतु निर्धारित किया जाए. कििसी भी कार्यों की मानव लागत एवं मानव प्राक्‍कलन अनुसार कार्यों को कराने की बाध्‍यता न किया जाकर स्‍थल अनुरूप प्राक्‍कलन की लागत अनुसार कार्यों को कराने के आदेश जारी किए जाएं.

          सभापति महोदय, प्रत्‍येक ग्राम पंचायतों में एक-एक सामुदायिक भवनों का निर्माण किया जाये, ताकि सार्वजनिक प्रयोजनों में जनता- जनार्दन को सुविधा हो. प्रत्‍येक ग्राम पंचयत में सचिव एवं रोजगार सहायक की नियुक्ति या पदस्‍थापना नहीं है. कई ग्राम पंचायतें सचिव एवं रोजगार सहायक विहीन हैं.

          सभापति महोदय, आवास योजना में वर्ष 2022 तक सभी को पक्‍के मकान दिये जाने का प्रावधान था. अब तक 50 प्रतिशत आवास टारगेट के अनुरूप प्रदाय किये गये हैं. कृषकों को 24 घण्‍टे बिजली प्रदान नहीं की जा रही है. अघोषित बिजली कटौती के कारण कृषकों को 24 घण्‍टे बिजली प्रदाय नहीं की जा रही है. इसलिये बिजली की कटौती के कारण कृषकों को नुकसान हो रहा है. प्रत्‍येक किसानों को पांच हार्स पावर तक बिजली शासन के द्वारा मुक्‍त प्रदाय किये जाने का प्रावधान किया जाना चाहिये. धन्‍यवाद.

            श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर (खरगापुर) --  सभापति महोदय,  मैं मांग संख्या 8 राजस्व,  मांग संख्या 27 स्कूल शिक्षा  एवं  मांग संख्या 18 श्रम, मांग संख्या 30  ग्रामीण विकास एवं  मांग संख्या 40  पंचायत  विभाग के विरोध में   बोलने के लिये खड़ी हुई हूं और अपने प्रदेश एवं  विधान सभा क्षेत्र  के विषयों पर कुछ सुझाव,  कुछ कमियों को दूर किये जाने के लिये कहना चाहती हूं. राजस्व विभाग की सबसे  बड़ी  एक समस्या है कि जमीन खरीदने वाले  किसानों तथा  मृत्यु के बाद जमीनों के नामांतरणों को किये जाने हेतु  हमारे टीकमगढ़ जिले सहित  पूरी  खरगापुर विधान सभा की तहसील बल्देवगढ़,खरगापुर,पलेरा  के तहसीलदारों के द्वारा  संवत् 2015 की नकल  मांगी जाती है, जबकि सरकार द्वारा कोई आदेश जारी नहीं  किये गये हैं और  इस परेशानी के कारण हजारों फाइलें  निरस्त हो गई हैं.  ऐसा 27 जनवरी के नवभारत समाचार पत्र में  लेख छापा गया है और  पूर्व मंत्री, माननीय हरीशंकर खटीक जी  का बयान   भी छपा हुआ है.  मैं हरीशंकर  खटीक जी का नाम इसलिये ले रही हूं कि  आप लोग कहीं यह न समझें कि  मैं असत्य बोल रही हूं. इसलिये  हमारे क्षेत्र के किसान  इस  2015  की नकल के चक्कर में तहसीलों  के कार्यालय भरे रहते हैं.  इसलिये  इस नियम 2015 की  की नकल  के प्रावधान को  समाप्त करें.

          सभापति महोदयचंदा जी, यह विषयानुकूल नहीं है.  (श्री हरीशंकर खटीक, सदस्य के खड़े होने पर) खटीक जी आप बैठें.  चंदा जी, आप विषय पर बात रखें.  यह इस विबाग पर चर्चा नहीं  हो रही है.

          श्रीमती चंदा   सुरेन्द्र सिंह गौरजी. हमारा पंचायत का भी है, स्कूल का भी है.

          सभापति महोदयआप पंचायत का बिलकुल रखें.

          श्री हरीशंकर खटीकआप पंचायत का बोल लीजिये.

          श्रीमती चंदा   सुरेन्द्र सिंह गौरसभापति महोदय,  पंचायत एवं ग्रामीण विकास का हाल तो पूरे  प्रदेश में  ऐसा है कि उसका  बखान करना तो बहुत मुश्किल है.   खरगापुर  विधान सभा सहित टीकमगढ़ जिले  में पंचायत  ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों के द्वारा ऐसा  माहौल बनाया जा रहा है कि  कुछ कहा नहीं जा सकता. हमारे जिले के जिला पंचायत सीईओ के द्वारा ऐसे  खेल किये जा रहे हैं कि  छिदारी ग्राम पंचायत  में धरातल पर  कोई  निर्माण कार्य  ही नहीं हुआ, लगभग 2 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार  किया गया है, जिस पर सीईओ जिला पंचायत  मेहरबान  होकर कार्यवाही नहीं कर रहे हैं तथा  करमासन  ग्राम पंचायत  में फर्जी बिल उपयंत्री के हस्ताक्षरों  से भुगतान कराया गया है, जबकि  उपयंत्री का  ट्रांसफर भिण्ड हो गया है. साथ में ग्राम पंचायत  सिजौरा  के सचिव द्वारा ग्राम  पंचायत की महिला सदस्य के फर्जी हस्ताक्षर  बनाकर  कार्यवाही का कोरम पूरा किया. सचिव को निलंबित किया और  10 दिन में बहाल करके  उसी ग्राम पंचायत में  पदस्थ कर दिया तथा भेलसी ग्राम पंचायत  सचिव  द्वारा शासन की राशि का गबन किया गया,  उसको निलंबित किया गया  और  10  दिन में उसको भी बहाल करके  उसी ग्राम पंचायत में तैनात  कर   इनाम दिया गया. अभी हाल  ही में  सोशल मीडिया के द्वारा पता चला है कि खजरी ग्राम पंचायत के  सरपंच ने कांगजों  में  खेत तालाब बनाकर राशि निकाल ली है.  किसानों को कोई पता  नहीं है.  जिला पंचायत सीईओ कोई भी कार्यवाही करने को तैयार नहीं है.  आखिरी  में मैं केवल एक ही बात  कहना चाहती हूं कि हम जैसे विधायक तो केवल प्रभु श्री राम  जी के भरोसे पर कार्य कर रहे हैं.  सरकार का कोई सहयोग नहीं है.  इसलिये कहना चाहती हूं कि राम भरोसे  जो  रहे सो पर्वत पे  हू हरयांय, तुलसी  बिरवा  बाग में  सींचत  ही  मुरझाये.  सभापति महोदय,  बोलने का अवसर दिया,  बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्री दिनेश गुर्जर (मुरैना) सभापति महोदय,  आपने मुझे  बोलने का अवसर दिया,  इसके लिये बहुत बहुत हृदय की गहराइयों  से धन्यवाद.  मैं  यह आग्रह करता हूं, पहले मैं पंचायत मंत्री जी को  धन्यवाद देता हूं कि पहली बार एक साल के अनुभव में हमको पहली बार ऐसा देखने को मिला कि कांग्रेस के विधायकों को  भी  चाहे सामुदायिक भवन हों. पहली बार देखने को मिला कि कांग्रेस के विधायकों को भी चाहे सामुदायिक भवन हों, या पंचायत भवन हों हम लोगों के क्षेत्रों में भी सामुदायिक भवन और पंचायत भवन माननीय पंचायत मंत्री जी ने दिये हैं. इसके लिये मैं धन्यवाद देता हू और प्रार्थना करता हूं कि सभी मध्यप्रदेश की सरकार के मंत्रियों से  कि जिस हृदय से पंचायत मंत्री जी कांग्रेस विधायकों को थोड़ा बहुत सहयोग कर रहे हैं, उसी हृदय के साथ में सारे मंत्रियों को भी बगैर भेदभाव के साथ हर विधायक का काम करना चाहिये यह मेरी प्रार्थना है.

          श्री भंवर सिंह शेखावत- जो अकल मिली है इनको सब मंत्रियों में कहां है भैया.

          श्री दिनेश गुर्जर -- नहीं महोदय, पंचायत मंत्री जी ने दिये हैं मैं असत्य बात नहीं कह रहा हूं.

          श्री ओमप्रकाश सकलेचा- तारीफ करना है तो पूरी करो न थोड़ी बहुत क्यों. आपको पूरे भवन दिये हैं तो पूरी तारीफ करो.

          श्री दिनेश गुर्जर -- माननीय सभापति महोदय, मैं पंचायत मंत्री  जी से  प्रार्थना करना चाहता हूं जो मनरेगा की बात आई थी, मनरेगा पूरी तरह से आरंभ की जाये क्योंकि उसके कारण से पंचायतों में विकास के काम रुक रहे हैं. दूसरी बात मैं कहना चाहता हूं कि मनरेगा की जो मजदूरी है उसको बढ़ाया जाये, महिलाओं का प्रशिक्षण मध्यप्रदेश की सरकार के द्वारा बंद कर दिया गया है जिससे महिलायें प्रशिक्षित होकर के रोजगार प्राप्त नहीं कर पा रही हैं, तो मेरी पंचायत मंत्री जी से प्रार्थना है कि महिलाओं का प्रशिक्षण करके उनको रोजगार की व्यवस्था कराई जावे. नल जल योजना में जो काम है, देखने में आया है कि नल जल योजना को बाद में उसके रख रखाव के लिये पंचायत के हवाले कर दिया जाता है, जब हम पंचायत के सरपंच से या सचिव से बात करते हैं कि मोटर खराब हो गई है, या ट्रांसफार्मर खराब हो गया है तो मैं पूछना चाहता हूं कि उसकी जवाबदारी किसकी है, पीएचई विभाग उसकी मरम्मत का काम करेगा या पंचायत करेगी. पंचायत यदि करेगी तो क्या पंचायत को कोई ऐसा बजट दिया गया है जो नल जल योजनाओं को पंचाय़तों में सुचारू रूप से चला सके,  अगर कहीं पर पाइप लाइन टूट गई है, या ट्रांसफार्मर जल गया है, या मोटर जल गई है तो उसके लिये मेरी सरकार से मांग है कि इस पर स्पष्ट आदेश होना चाहिये , क्योंकि देखने में आया है कि जहां पर नल जल योजनायें चालू हैं वहां पर मोटर खराब हो जाती है या जल जाती हैं, 6-6 माह तक जली पड़ी हैं वहां लोग आपस में चंदा करके मोटर को सुधरवाते हैं, सरपंच के पास में इसके लिये जाते हैं तो वह कहते हैं कि हमारे पास में इसके लिये कोई राशि नहीं है इसलिये नल जल योजना जो भी चालू हो रही हैं इसके रख रखाव के लिये पृथक से एक राशि का प्रावधान किया जाये जिससे इनका मेटनेंस हो सके.

          माननीय सभापति महोदय, मेरा मानना है कि हर गांव की परिस्थितियां अलग अलग हैं. मेरे गांव के सरपंच कई जगह ऐसे ताकतवर हैं कि गांव के लोग उनसे बोलने में संकोच करते हैं और वह कह देते हैं कि मोटर या ट्रांसफारर्मर जला पड़ा है वो नहीं सुधरवा सकते हैं, इसलिये मेरी प्रार्थना है कि पीएचई विभाग इसके मेंटनेंस का भी कार्य ले ले, भविष्य में अगर कोई मोटर जलती है या ट्रांसफार्मर जलते हैं नल जल योजना के तो उनको विभाग सुधार सके उसके लिये अलग से फंड की व्यवस्था की जावे.

          माननीय सभापति महोदय, मेरे क्षेत्र के अंदर जो अनुदान प्राप्त शालायें थीं, इन ऐडेड शालाओं के शिक्षक रिटायर हो गये, एडेड शालायें लगभग एक एक, दो-दो साल से बंद पड़ी हैं, छात्र-छात्राओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है.तो मैं आपके माध्यम से यह मांग करता हूं कि मुरैना विधानसभा क्षेत्र के अंदर जो एडेड शालायें बंद हैं वहां अगर भवन नहीं बनते हैं तो जो एडेड शालाओं के छोटे भवन हैं उनकी मरम्मत करवाकर वहां पर शिक्षक की व्यवस्था शीघ्र की जाये जिससे कि बच्चों का भविष्य बर्बाद होने से बच जाये. वह लोग भी शिक्षा प्राप्त कर सकें.

          माननीय सभापति महोदय, चूंकि मुझे ज्यादा बोलने का अवसर नहीं मिल पाया है इसलिये मैं अपने क्षेत्र की बात करना चाहूंगा कि मेरे क्षेत्र में एक रिठौरा कला में मार्केटिंग फेडरेशन से जो गोदाम बना है, 2 वर्ष से कंपलीट बना हुआ है, सरकार एक तरफ कहती है कि हम खाद की व्यवस्था ओर अच्छी तरह से करेंगे, अगर वह गोदाम जो 2 वर्ष से बंद बड़ा है , कंपलीट बनकर के तैयार है, उसका जल्दी उद्घाटन होना चाहिये, जल्दी खुलना चाहिये जिससे कि खाद रिठौरा कला से ही क्षेत्र के आसपास के क्षेत्रों में वितरण होने की सुविधा होगी. ग्राम पंचायत ऐंठी के अंतर्गत इतने वर्षों मे आज तक सड़क नहीं है नाऊपुरा में, मेरी मध्यप्रदेश की सरकार से मांग है कि लगभग 2 किलोमीटर की सड़क जो कि ऐंठी पंचायत में आती है नाऊपुरा की उस सड़क का निर्माण कार्य कराया जावे.

          माननीय सभापति महोदय, कई लोग से मैं यह सुनता हूं कि कांग्रेस की सरकारें थीं तब कुछ नहीं हुआ मैं मानवीय आधार पर पूछना चाहता हूं कि उस समय कि व्यवस्थायें क्या थी, उस समय न तो इतना टैक्स मिलता था, लेकिन आज जो टैक्स वसूली हो रही है जो प्रदेश की जनता को लूटा और ठगा जा रहा है टैक्स का बोझ डाला जा रहा है. टैक्‍स का बोझ डाला जा रहा है. पहले 2-3 रुपये डीजल हुआ करता था और आज डीजल 100 रुपये से ऊपर है, तो यह तुलनात्‍मक रूप से देखें. बात तो यह हुई कि अगर कोई बेटा पिता से पूछे कि पिता जी आपने मुझे अच्‍छे स्‍कूल में क्‍यों नहीं पढ़ाया, फलाने का लड़का पुणे में पढ़ने गया है. अब उस पिता की उस समय स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह अपने बेटे को भी और दूसरे मजबूत किसान की तरह वहां पर पढ़ा सकता था. वही हालात उस समय कांग्रेस की सरकार की थी, तो उस समय इतना टैक्‍स नहीं आता था. आमदनी मध्‍यप्रदेश की सरकार की नहीं थी. उसके बावजूद भी मैं यह विश्‍वास दिलाता हूं कि उस समय भी स्‍कूल थे, अस्‍पताल थे, सड़कें थीं, बिजली थी और उसी से पढ़-लिखकर हम सब आज इस सदन में बैठे हैं.

          सभापति महोदय --  दिनेश जी, अब आप समाप्‍त करें.

          श्री दिनेश गुर्जर --  सभापति महोदय, एकतरफा यह कह देना उचित नहीं है. मेरी मांग है मध्‍यप्रदेश की सरकार से कि विधायकों की जो स्‍वेच्‍छा निधि है वह एक करोड़ रुपये की जाए, क्‍योंकि क्षेत्र बड़े हो गये हैं और रोज आये दिन दुर्घटनाएं या कोई भी हारी बीमारी के समय पर हम लोग पूर्ण रूप से उनका सहयोग नहीं कर पाते हैं. राशि बढ़ेगी तो निश्चित तौर पर जनता का भला होगा. विकास निधि जो अभी हम लोगों को दी जाती है क्षेत्र बड़े-बड़े हैं, समस्‍याएं बहुत हैं, मेरी सरकार से मांग है कि 5 करोड़ रुपये वि‍कास निधि होनी चाहिये जिससे हम क्षेत्र में अच्‍छे से काम कर सकें.

          सभापति महोदय --  बहुत-बहुत धन्‍यवाद दिनेश जी. थोड़ा शीघ्रता कर लें.

          श्री दिनेश गुर्जर --  सभापति महोदय, बस एक मिनट. मैं एक प्रार्थना और करना चाहता हूं कि शौचालय की बात आई थी. मैं यह पूछना चाहता हूं कि दिन भर में एक व्‍यक्ति को शौचालय जाने-आने में कितना पानी लगता है. क्‍या आपने उतने पानी की व्‍यवस्‍था मध्‍यप्रदेश के किसी भी शौचालय पर की है. जब आपने शौचालय में पानी का कोई प्रबंध नहीं किया, शौचालय पर पानी की टंकी नहीं रखी, गांव का आदमी एक-एक किलोमीटर दूर से पानी लाकर पानी पी रहा है, वह शौचालय में 5 बाल्‍टी पानी कैसे डालेगा. यह असत्‍य बात है. जो शौचालय बने हैं वह दो-दो फिट के गड्ढे करके सीट लगा दी गईं और स्‍वच्‍छता अभियान के नाम पर डंका पूरे प्रदेश में पीटा गया. आप मध्‍यप्रदेश की कोई भी एक पंचायत चुन लें जो आप शौचालय की बात कर रहे हैं उसमें हम चलने को तैयार हैं. अगर हर घर में शौचालय आपने बनाया है और सुचारू रूप से चल रहा है तो आप जो सजा देंगे हम भुगतने को तैयार हैं, परंतु मध्‍यप्रदेश में असत्‍य घोषणाएं करके जनता को गुमराह कर रहे हैं. धन्‍यवाद सभापति महोदय.

          सभापति महोदय --  दिनेश जी, आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री विजयपाल सिंह -- दिनेश भैया, चलो मेरे साथ. मेरे साथ मेरी विधान सभा क्षेत्र में चलो देखने. दिखाता हूं बढि़या, शानदार. कल चलो, आज चलो.

          श्री दिनेश गुर्जर -- 21 तारीख को चलते हैं. 

          सभापति महोदय -- दिनेश जी, विजयपाल जी, बैठें प्‍लीज़. बस-बस आपस में चर्चा न करें, बैठिये.

          श्री राजेन्‍द्र मेश्राम (देवसर) -- सभापति महोदय, आपने बोलने का अवसर दिया, मैं हृदय की गहराई से आपको धन्‍यवाद करता हूं. सारे सदन के विद्वान लोगों की चर्चा, सीनियर लोगों के माध्‍यम से भी मैं सुन रहा था. सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 18, 30 और 40 के समर्थन में अपनी बात रखने के लिये खड़ा हुआ हूं. मैं मांग संख्‍या 18, श्रम विभाग की कुछ जानकारी देना चाहता हूं. वर्ष 2003 के पूर्व में भी असंगठित कामगार या मजदूर हुआ करते थे, लेकिन उनकी चिंता करने वाला कोई व्‍यक्ति नहीं था. जब 2003 में राष्‍ट्रवादी विचारों की पार्टी की सरकार, राष्‍ट्रवादी विचारों से पल्‍लवित और पोषित कार्यकर्ता जब उस कुर्सी पर पहुंचता है तो गांव के उस अंतिम पंक्ति में खड़े हुये व्‍यक्ति की कैसी चिंता करता है, उसका परिणाम है यह मध्‍यप्रदेश में या देश में जब देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री, विश्‍व के सर्वमान्‍य नेता नरेन्‍द्र भाई मोदी जी को मैं हृदय की गहराई से धन्‍यवाद देना चाहता हूं. प्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को और उनकी सरकार को हृदय की गहराई से धन्‍यवाद देना चाहता हूं. आज हम जिनके विभागों के ऊपर अपनी बात रखने के लिये खड़े हुये हैं ऐसे पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री सम्‍माननीय श्रीमान् प्रहलाद पटेल जी को मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं जिन्‍होंने अपने कुशल नेतृत्‍व से इस बजट में अपनी जो अलग-अलग हमारे ग्रामीण अंचल में रहने वाले, दूरांचल में रहने वाले उन बंधुओं की, उन श्रमिकों की चिंता करके आपने जो नित नये आयाम प्रस्‍तुत किये हैं, जिन्‍होंने बजट के माध्‍यम से उनके रोजमर्रा के जीवन में उनको विकास कैसे मिले इसलिए मैं इनको धन्यवाद देना चाहता हूँ. श्रमिक पहले भी थे उनकी संतानें भी हुआ करती थीं. लेकिन श्रमिकों और उनकी संतानों की चिंता कभी पूर्व की सरकारों ने नहीं की वह कोई सरकार है तो वह राष्ट्रवादी विचारों से पल्लवित और पोषित सरकार, भारतीय जनता पार्टी की मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव की सरकार है. आज हमारे श्रमिक काम करने जाते हैं उनके बच्चों की शिक्षा की कोई चिंता नहीं करता था उनके बच्चों की शिक्षा की चिंता यदि किसी ने की है तो वह प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री और प्रदेश के विद्वान मंत्री श्रीमान प्रहलाद पटेल जी के विभाग ने की है. मैं हृदय की गहराई से उनको धन्यवाद देना चाहता हूँ. माननीय सभापति महोदय, हमने श्रमिकों के बच्चों को पढ़ाने के लिए इन बच्चों को कैसे ज्ञान मिले, इनका कैसे सर्वांगीण विकास हो. इसलिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर में श्रमोदय विद्यालयों की स्थापना की. मैं हृदय की गहराई से उनको धन्यवाद देना चाहता हूँ. मुझे बताते हुए खुशी हो रही है इसके अतिरिक्त 5 श्रमोदय विद्यालय इस बजट में रखे गए हैं. जिसमें सिंगरौली का भी नाम है. मैं हृदय की गहराई से माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ. सिंगरौली भोपाल से 750 किलोमीटर दूरांचल में है. मेरा विधान सभा क्षेत्र 4 राज्यों से घिरा हुआ है. मैं जहां का प्रतिनिधित्व करता हूँ. इसके पूर्व मैं वहां पर मुख्य भैषेजक के पद पर कोल इंडिया की सिस्टम कन्सर्न NCL में कार्यरत् था. भारतीय जनता पार्टी ने मुझ पर विश्वास जताकर वर्ष 2013 में पार्टी से टिकट दिया था. मैं जब देवसर विधान सभा से पहली बार विधायक हुआ था. मैं जब वहां नौकरी करता था तो वहां पर 4 किलोमीटर शहर में जाने के लिए रास्ते नहीं हुआ करते थे. मैं शहर की बात बता रहा हूं. देवसर विधान सभा सुदूर, दूरांचल, वनांचल का स्थान है. मुझे गर्व होता है भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर जिसकी सोच दूरदर्शितापूर्ण है. देश में दो सोच काम करती हैं. राष्ट्रवादी विचारों से पल्लवित और पोषित सरकार, भारतीय जनता पार्टी की मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव की सरकार है. यह सरकार उस दूर, दूरांचल में रहने वाले व्यक्ति की चिंता करती है. गांव के प्रत्येक व्यक्ति की चिंता करती है. दूसरे तरह के लोग जब बनते हैं तो वे अपने आसपास के लोगों का विकास करते हैं. यह अन्तर है भारतीय जनता पार्टी और अन्य दलों में. सभापति महोदय, संबल योजना पहले कभी नहीं हुआ करती थी. एक्सीडेंट पूर्व में भी हुआ करते थे. वर्ष 2003 के पहले भी हुआ करते थे. सिंगरौली में तो बहुत ज्यादा हुआ करते थे. सिंगरौली एक ऐसा जिला है मुझे कहते हुए गर्व होता है. आज हम सबसे ज्यादा रायल्टी मध्यप्रदेश को सिंगरौली जिले से देते हैं. एक्सीडेंट बहुत होते हैं क्योंकि औद्योगीकरण बहुत हुआ है. इसमें हमारे जनजाति भाई बंधु भी रहते हैं, अनुसूचित जाति के भाई बंधु भी रहते हैं. पिछड़ा वर्ग के भा्ई बंधु भी रहते हैं. एक्सीडेंट किसी का वर्ग देखकर नहीं होता है. एक्सीडेंट में जिस घर का व्यक्ति मरता है उनकी पीड़ा बहुत ज्यादा होती है. सभापति महोदय, आप भी संवेदनशील व्यक्ति हैं, अपने क्षेत्र में आप भी दौरा करते हैं. उनके एक्सीडेंट पर कोई राहत राशि नहीं मिला करती थी. यह मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव की सरकार है हम लोग उन्हें 2 लाख रुपए, 4 लाख रुपए देते हैं.

          सभापति महोदय, मैं आपको एक घटना बताना चाहता हूँ. अभी विद्वान आदरणीय अभय मिश्रा जी कह रहे थे. मैं बताना चाह रहा हूँ कि वर्ष 2013 से 2018 के कालखण्ड में जब मैं जनप्रतिनिधि था. मेरे क्षेत्र में जालपानी गौढ़ परियोजना 903 करोड़ रुपए की लागत से हमने प्रारंभ करवाई थी. यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार में शुरु हुई थी. कालान्तर में जब कांग्रेस की सरकार आई. 15 महीने के कालखण्ड में उसको पलीता लग गया. मैं प्रामाणिकता के साथ हाउस में बता रहा हूँ कांग्रेस की श्रीमान कमलनाथ की सरकार ने बगैर काम के 243 करोड़ रुपया निकाल लिया था यह वही कांग्रेस की सरकार थी. मैं प्रामाणिकता के साथ बताना चाह रहा हूं. जहां एक बांध बनना था वहां यह लोग आठ-आठ बांध की रचना किये थे. इनके नेता हमारे जनजातीय बंधुओं के सामने जाकर बनावटी आंसू बहाते थे, कहां गये वह लोग. एक कहावत है कि सूपा हंसे तो हंसे छलनी भी हंसती है.

          श्री अभय मिश्रा-- मेश्राम जी मैं आ गया हूं प्‍लीज एक बार फिर बोल दो.

          श्री राजेन्‍द्र मेश्राम-- मैंने बताया है. मैं वही बताना चाह रहा था.

          सभापति महोदय-- मेश्राम जी आपकी बात आ गई हो तो थोड़ा जल्‍दी समाप्‍त करें.

          श्री अभय मिश्रा-- विद्वान और बहादुर आदमी पीठ पीछे नहीं बोलते वे सामने बोलते हैं. अब आप बोलिये

          श्री राजेन्‍द्र मेश्राम-- माननीय अभय जी मेरे बहुत ही प्‍यारे मित्र हैं.

          श्री अभय मिश्रा-- मैं कह रहा था कि अब पक्‍के मित्र हो जाएंगे आप बोलिये तो.

          श्री राजेन्‍द्र मेश्राम-- सुनिये मैं यह कह रहा था कि सूपा हंसे तो हंसे छलनी भी हंस रही है. 

          श्री अभय मिश्रा-- मैं आपको चुनौती देता हूं और हमारे इतने बड़े-बड़े विरोधी नेता हैं उनको चुनौती देता हूं अगर हमारे में छेद होता न कि अभी तक पता नहीं क्‍या बिगाड़ लेते. आपने माननीय उपमुख्‍यमंत्री जी से घोषणा करवाई थी कि टोल बंद करवा दूंगा. है दम, बंद करा लोगे. एग्रीमेंट मेरा करवाकर दिखा दो सरकार तुम्‍हारी है. मुझे मालूम है कि आप हमारा कहां बिगाड़ लोगे कहां नहीं बिगाड़ लोगे. इसलिए इस तरह की फालतू की बाते मत करो और न चमकाना हमको.

          सभापति महोदय-- लगता है दोनों में बहुत ज्‍यादा मित्रता है. मेश्राम जी आप शीघ्र पूरा करें.

          श्री राजेन्‍द्र मेश्राम-- यह हमारी मित्रता है. मैं सरकार को धन्‍यवाद देना चाहता हूं. उन बच्‍चों के मां बाप मजदूरी करने जाते थे तो उनको घर में कभी बच्‍चों की पढ़ाई की चिंता नहीं हुआ करती थी. आज उनके लिए हमारी डॉ. मोहन यादव की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने और प्रदेश के हमारे विभागीय मंत्री जी ने योजना बनाकर वहां पर आईटीआई खोला है जिसमें 224 बच्‍चे आठ ट्रेडों में प्रशिक्षण ले रहे हैं. मेरा कहना है कि जिनकी नीयत साफ होती है नीतियां बनाने में कठिनाई नहीं होती. आरोप और प्रत्‍यारोप तो चलते रहते हैं. अभी देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री ने जब गावं के किसानों की चर्चा की थी तो उन्‍होंने किसानों के लिए कहा कि खेती लाभ का धंधा कैसे बने तो उन्‍होंने वैज्ञानिकों से परीक्षण करवाया और परीक्षण के दौरान पाया कि हम किसानों को कैसे लाभ का धंधा दे सकते हैं तो जो मिलट आप भी जानते हैं और हम भी जानते हैं 20 साल पहले जब हम छोटे थे तो कोदो कुटकी को जो समाज खाता था तो लोग कहते थे कि यह गरीब है, लेकिन मुझे कहते हुए प्रसन्‍नता हो रही है कि आज उसको बड़े बड़े धन्‍न सेठ खा रहे हैं.

          सभापति महोदय-- मेश्राम जी आप अच्‍छा बोले अब कृपया आप समाप्‍त करें

          श्री राजेन्‍द्र मेश्राम--माननीय सभापति महोदय, मैं आपके आदेश का सम्‍मान करूंगा. आपने मुझे बालने का मौका दिया इसके लिए बहुत- बहुत धन्‍यवाद.

          श्री फूलसिंह बरैया (भाण्‍डेर)-- माननीय सभापति महोदय, मैं मांग संख्‍या 30, 40, के खिलाफ बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. हालांकि मैं पंचायती राज का ही विरोधी हूं. ऐसा मत मानिए कि मैं विपक्ष में होकर बोल रहा हूं. मैं अगर पक्ष में भी होता तो भी पंचायती राज का विरोध ही करता. क्‍यों करता क्‍योंकि मैं बाबा साहब अम्‍बेडकर का अनुयायी हूं और बाबा साहब अम्‍बेडकर के तीन गुरु थे. बुद्ध, कबीर और महात्‍मा फुले तो पंचायती राज का हम विरोध क्‍यों करते हैं. बाबा साहब अम्‍बेडकर ने कहा था कि तब तक पंचायती राज को मजबूत नहीं करना जब तक जातीय व्‍यवस्‍था खत्‍म न हो जाए और जातीय व्‍यवस्‍था खत्‍म नहीं होगी इधर पंचायती राज मजबूत करेंगे तो उसका परिणाम क्‍या होगा ? जैसे उदाहरण के लिए पंचायत मंत्री जी का निश्चित रूप से अच्‍छा व्‍यवहार है. यदि ये यहां से किसी पंचायत में 50 करोड़ रुपये भेज दें, आज की तारीख में भी एक शक्तिशाली व्‍यक्ति के सामने से एक कमजोर व्‍यक्ति, कमजोर जाति का व्‍यक्ति, जब जुते-चप्‍पल पहनकर नहीं निकल सकता, उसके सामने खड़ा नहीं हो सकता, उसके सामने पूरी धोती नहीं पहन सकता तो क्‍या उस व्‍यक्ति को 50 करोड़ रुपये में से कुछ मिल सकता है ? क्‍या पूरे 50 के 50 करोड़ रुपये, वह शक्तिशाली व्‍यक्ति नहीं ले लेगा और शक्तिशाली व्‍यक्ति यदि 50 करोड़ रुपये लेता है तो शोषण और ज्‍यादा बढ़ेगा. यदि जाति व्‍यवस्‍था समाप्‍त हो जाये तो उस 50 करोड़ रुपये में से कमजोर व्‍यक्ति को भी कुछ मिलेगा और शक्तिशाली को भी मिलेगा तो फिर धीरे-धीरे समाज समान हो जायेगा, उस दिन से हम पंचायती राज व्‍यवस्‍था को  मजबूत करेंगे, यह बाबा साहब अंबेडकर ने कहा था.

          सभापति महोदय, मैं, कहना चाहूंगा कि आज भी हमारे गांव से लोग पलायन क्‍यों करते हैं, गांव में मजदूरी करने को तैयार नहीं है क्‍योंकि गांव में मजदूरी ही नहीं है इसलिए वह व्‍यक्ति दिल्‍ली, अहमदाबाद में मजदूरी करने जाता है, घर में ताला लगा जाता है, यह आज की बात है. कई ऐसे गांव हैं जिनमें 80 प्रतिशत घरों में ताले लगे हुए हैं, वे मजदूरी के लिए बाहर जाते हैं. हम कहें कि पंचायती राज व्‍यवस्‍था को मजबूत करो लेकिन किसी पंचायत में आज भी सरपंच, यदि अनुसूचित जाति-जनजाति, अन्‍य पिछड़ा वर्ग की कोई कमजोर महिला बन जाये तो उनके सामने वह कुर्सी पर नहीं बैठ सकती, यदि कभी गलती से बैठ भी गई तो उस दिन गांव में बवाल हो जायेगा कि यह आज कुर्सी पर बैठी तो कैसे बैठी ? इसलिए ऐसे पंचायती राज का हम विरोध करते हैं. यही नहीं महिला क्‍या, अनुसूचित जाति-जनजाति का पुरूष भी कुर्सी पर बैठ जाये, मैं दावे से कह सकता हूं कि 50 प्रतिशत अनुसूचित जाति-जनजाति के सरपंच आज भी नहीं बैठ सकते, जब वे कुर्सी पर नहीं बैठ सकते हैं इसलिए मेरा कहना यह है कि पंचायती राज व्‍यवस्‍था में उनकी बंधुवा मजदूरी बन जाती है.

          श्री विजयपाल सिंह-  सभापति महोदय, ये गलत बात कर रहे हैं.

          श्री महेन्‍द्र नागेशसभापति महोदय, मैं, जिस गांव से आता हूं, गोटेगांव के पास मेरा गांव है. मैं, वहां वर्ष 2000 में सरपंच था, मैंने वहां झण्‍डा भी फहराया है, ये असत्‍य बोल रहे हैं.

          सभापति महोदयआप सभी बैठ जायें. बरैया जी आप अपनी बात जारी रखें, थोड़ा संक्षिप्‍त कर दें.

          श्री फूलसिंह बरैया-  सभापति महोदय, सरपंच अपनी जेब में सील डालकर घूमता है, उससे साईन करवाने जाते हैं तो वह उसी के यहां नौकरी कर रहा होता है. जिस गांव में आरक्षित सीट हो जाये और वहां कोई आरक्षित वर्ग का व्‍यक्ति न मिले तो वहां नौकरी करवाने के लिए बाहर से लाते हैं, वहां उसका वोट बढ़ा देते हैं और उसी को सरपंच बना देते हैं. ऐसे सरपंच, ऐसे पंचायती राज का मैं इसलिए विरोध कर रहा हूं, यह हमारी वैचारिक पृष्‍ठभूमि है.   

          सभापति महोदय, मैं, कहना चाहूंगा कि इस मौके पर फिर भी हमारे साथियों ने काफी सुना, बहुत कुछ कहा कि हमने बराबर बजट दिया है. पिछले 3 लाख 65 हजार करोड़ रुपये के बजट में से अनुसूचित जाति-जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग और अल्‍पसंख्‍यक वर्ग को केवल 16 हजार करोड़ रुपये मिला है. आज भी जो बजट दिया गया है, वह बजट का केवल 20 प्रतिशत दिया गया है जबकि इनको 90 प्रतिशत बजट मिलना चाहिए. मेरे कहने का तात्‍पर्य यह है कि "राजा है चोरी करे तो न्‍याय कहां पर जाये." इसलिए मैं आपके सामने कहना चाहूंगा कि यह बात निश्चित है कि इस पंचायत विभाग के जो मुखिया हैं, मंत्री जी हैं, वे इस मामले में बहुत अच्‍छे हैं, मैं पुन: खुली बात कर रहा हूं.

          सभापति महोदय, फिर भी मैं कहूंगा कि वहां पर इतनी परिस्थिति खराब है कि वहां थाने में अगर कोई कमजोर व्‍यक्ति रिपोर्ट लिखवाने जायेगा तो थानेदार पहले सरपंच के घर पर जायेगा, यह कहां का कानून है क्‍योंकि जब तक पंचायती राज समाप्‍त नहीं होगा. शक्तिशाली जो समाज बना दिया है, वह कमजोर होगा, तो थानेदार उसी के घर में पानी पियेगा, चाय पियेगा. मैं समझता हूँ कि वह मजबूर हो जायेगा, तो कमजोर व्‍यक्ति के ऊपर फरियादी होते हुए भी, वह उल्‍टी कार्यवाही करेगा. यह खुली हुई बात है. माननीय मंत्री जी यहां पर मौजूद हैं, मैं उनसे कहना चाहूँगा कि मैं जिस क्षेत्र से आता हूँ, वह दतिया जिले की भाण्‍डेर विधान सभा है. मैं सरकार से और वहां पर एक छोटी सरकार और चलती है. उन दोनों का ही पीडि़त व्‍यक्ति हूँ. वहां पर वर्षा हुई, वर्षाकाल में एक महीने तक पुल-पुलिया टूट गईं, रोडें बह गईं. मैंने कलेक्‍टर, एसडीएम दोनों को भेजा था, वे मान नहीं रहे थे. एक महीने में भी वहां पर निकलने का रास्‍ता नहीं था, तो हम लोगों ने तो बाहर से तैराक बुलवाये थे और वह सामान लेकर उनके बीच में गए. फिर कलेक्‍टर ने कहा कि नहीं, यह बात सही है. मैंने कहा कि इस पुलिया को ऊँचा करवा दें. ये रोडें टूट गई हैं, उसको बनवा दो, तो पिछला बजट तो निकल ही गया, तो इस बजट में भी मुझे नहीं लगता है कि एक पैसा भी दिया गया हो.

          सभापति महोदय - बरैया जी, आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री फूलसिंह बरैया - सभापति महोदय, मैं एक मांग कर लूँ. मंत्री जी, बैठे हुए हैं.  

          सभापति महोदय - कृपया शीघ्रता कर लें.

          श्री फूलसिंह बरैया - सभापति महोदय, यह जरूरी है. एक, ग्राम बैसोरा से जौरी होते हुए आलमपुर तक मार्ग लम्‍बाई पांच किलोमीटर है, यह बनवा दें. दूसरा, ग्राम कुरैठा से देगुवां चमर तक मार्ग लम्‍बाई तीन किलोमीटर है. यह अगर बन जायेंगी तो वहां कम से कम उस एरिये के 20 से 25,000 व्‍यक्तियों का आगमन सुगम हो जायेगा. धन्‍यवाद. जय भीम, जय संविधान, जय भारत.

          सभापति महोदय - आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक - आदरणीय सभापति जी, आपने मंत्री जी की इतनी तारीफ की है, तो मंत्री जी आखिरी में इनकी मांग को ध्‍यान में रख लीजियेगा. 

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) - माननीय सभापति जी, श्रम, ग्रामीण विकास एवं पंचायत तीनों की अनुदान मांगों के और कटौती प्रस्‍ताव दोनों को लेकर सदन ने गंभीर चर्चा की है. मैं इस चर्चा को प्रारंभ कराने वाले माननीय  श्री ओमकार सिंह जी मरकाम, श्री हरिशंकर जी खटीक, श्री अभय जी मिश्रा, श्री रामनिवास जी शाह, श्री विवेक विक्‍की पटेल जी, श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर जी, श्री दिनेश गुर्जर जी, श्री राजेन्‍द्र मेश्राम जी और श्री फूलसिंह बरैया जी, सभी का हृदय से आभारी हूँ.

          माननीय सभापति जी, चर्चा श्रम मंत्रालय से शुरू हुई थी. इसलिए मैं कुछ बातें श्रम मंत्रालय की कहूँगा. मैं कोई विवाद में नहीं बल्कि जो हमारा बजट है, जो हमारे काम करने के बारे में हम सोचते हैं, वह सदन के माध्‍यम से राज्‍य की जनता को पता चलना चाहिए. हम आखिर सरकार से पैसा विभाग के लिए क्‍यों मांग रहे हैं ? लेकिन हम अगर चीजों में परिवर्तन नहीं करेंगे तो समय के साथ, मुझे लगता है कि हम पीछे छूटेंगे. हम जिन पुरानी बातों में उलझ जाते हैं या जो हम कह रहे हैं, मुझे लगता है कि वह कई बार सम-सामयिक नहीं होती हैं और हम उसी गतिरोध को कभी तोड़ भी नहीं पाते हैं. मैं श्रम मंत्रालय में जब मुझे जिम्‍मेदारी दी गई थी, क्‍योंकि मैंने अपने जीवन के 4 वर्ष इस देश में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए लगाये और जो चुनौतियां उस समय सामने आई थीं. मुझे कभी यह अंदाजा नहीं था कि मुझे कभी श्रम मंत्रालय का काम मिलेगा. हम भावनात्‍मक होकर जो चीजें बोलते हैं तो कहीं न कहीं हमारे दिमाग में हम अपनी विधान सभा को एड्रेस करने के बारे में पहले सोचते हैं, मजदूर के बारे में हम बाद में सोचते हैं. अगर ऐसा नहीं होता तो हम जिन बातों को कह रहे हैं, उदाहरण के लिए संबल योजना को लेते हैं. सरकार आपकी भी आई थी. आपने संबल योजना बंद क्‍यों की ? हम जवाब नहीं दे पाएंगे. इसलिए इस बहस में पड़ना नहीं चाहिए. मुझे लगता है कि किसी भी गरीब आदमी के लिए, चाहे वह किसी भी जाति का हो. एक तरफ हम जाति को मिटाने की बात करते हैं और दूसरी तरफ हम जाति की ही बात करते हैं. इनको क्‍या मिला ? इनको क्‍या मिला ? मुझे लगता है कि भारतीय जनता पार्टी का जो विचार है, उसमें जाति है ही नहीं. अभी प्रधानमंत्री जी ने जब कहा और बजट में भी इस बात को कहा गया, क्‍या हम अपनी प्राथमिकताओं फिर से नहीं परिभाषित कर सकते. मैं बदलने की बात नहीं कर रहा. ठीक है, जिसकी जो निष्‍ठा हो. अगर हम गरीब की बात करते हैं तो फिर गरीब पर बात करिए, गरीब तो फिर किसी जाति का नहीं होगा. हां, समाज की जिन बातों को लेकर हम आगे चलते हैं कि भई, वह तो बड़ा भेदभाव हुआ है, इसलिए वह गरीब है. अब ऐसा नहीं है, जो लोग पढ़-लिख गए हैं, जो ओहदों पर पहुँच गए हैं, उनके बच्‍चे और आपके बच्‍चे भी, जो मजदूर का बेटा है, अब वह इतना नासमझ नहीं रहा कि सारी चीजों का उसको पता नहीं होता है. जो कहा जाता है कि मोबाइल नहीं है, मैं दावे से कहता हूँ कि हम शायद उतने सचेत नहीं हैं, जितना हमारा मजदूर मोबाइल के बारे में सचेत है. देश के प्रधानमंत्री जी ने जब सबसे पहले खाते खोलने की बात कही थी, तब उनका मजाक उड़ाया गया था, तकनीक की बात कही थी, तब भी यह कहा गया था कि वे अनपढ़ हैं, लेकिन दुनिया में सर्वाधिक...(व्‍यवधान)...

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- आप डिण्‍डोरी आ जाइये, मैं आपको दिखा दूंगा...(व्‍यवधान)...

          सभापति महोदय -- मरकाम जी, कृपया व्‍यवधान न करें. ...(व्‍यवधान)...

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- आ जाऊंगा. मैं टोकता नहीं हूँ तो फिर मुझे मत टोका करें. ...(व्‍यवधान)...

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- आपके आंकड़े ...(व्‍यवधान)...

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- आप बाद में मुझसे पूछना, मैं तैयार हूँ. ...(व्‍यवधान)...

          सभापति महोदय -- मरकाम जी, आपको पर्याप्‍त समय मिला है. ...(व्‍यवधान)...

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- मुझे कोई दिक्‍कत नहीं है. ...(व्‍यवधान)... अगर मैं नहीं बैठा तो फिर आपको बैठ जाना चाहिए. नहीं तो मैं आपकी बात सुनुंगा तो मैं सम्‍मान से बैठ जाऊँगा, आप विश्‍वास करिए. मैं बहस करने के लिए नहीं हूँ. अगर मुझे लगेगा कि आपकी बात सही है तो मैं बैठ जाऊँगा, आप बिल्‍कुल मुझसे प्रश्‍न पूछना. पर मैं अगर नहीं बैठ रहा हूँ तो फिर मुझे लगता है कि आपको भी नहीं करना चाहिए ...(व्‍यवधान)....

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- माननीय सभापति जी, माननीय मंत्री जी अगर सच्‍चाई की बात कर रहे हैं तो हम कहना चाहते हैं तो आप आइये...(व्‍यवधान)...

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- नहीं, गलत बात है. ...(व्‍यवधान)...

          सभापति महोदय -- यह गलत है. ...(व्‍यवधान)...

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- अगर मजदूरी.. ...(व्‍यवधान)...

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- मैं नहीं बैठ रहा, मैं आपकी बात को नहीं सुन रहा हूँ. ...(व्‍यवधान)...

          सभापति महोदय -- यह रिकार्ड में नहीं आएगा, मरकाम जी आप बैठें. ...(व्‍यवधान)...

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- (XXX)

          सभापति महोदय -- आप जिद न करें, आपको पर्याप्‍त समय मिला. रिकार्ड में न लें.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- मैं उसी पर आ रहा है. सभापति जी, हमें शायद इस प्रवृत्‍ति से भी बाहर आना होगा. प्रधानमंत्री ने जब तकनीक की बात की थी और डायरेक्‍ट बेनेफिट ट्रांसफर की बात की थी, उनका समर्थन नहीं हुआ था. उनका मजाक उड़ाया गया था और  उसका सबसे बड़ा उदाहरण कोरोना की आपदा थी. ये भाषण देने वाले लोग, संवेदनाओं की बात करने वाले लोग कोई हों, किसी पक्ष के हों, अगर खाते नहीं होते, उस गरीब आदमी के पास पैसे नहीं पहुँच सकते थे. इसलिए यह मत कहिए कि गरीब की चिंता कौन करता है. अगर मैं यहीं से गिनाना शुरू करूंगा, मेरे पास प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण विकास मंत्रालय के पास है. मैं पूछता हूँ कि किसके साथ भेदभाव हुआ है. जब पहली बार प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना शुरू हुई, उसके बाद सभापति महोदय, लोगों ने कहा कि हमें तो मिलना चाहिए, हमको तो मिला नहीं, ताकतवर आदमी को मिल गया. जब उसकी सूची आई तो सूची थोड़ी-बहुत नहीं थी मध्‍यप्रदेश में, 27 लाख 28 हजार लोग बचे थे. कौन जिम्‍मेदार है. लेकिन उसके बाद भी वह आवास प्‍लस की सूची जब पहला सर्वे हुआ, लेकिन आप प्रधानमंत्री हों या मध्‍यप्रदेश की सरकार के मुखिया हों, उन्‍होंने जब अभी दूसरा सर्वे शुरू किया, कि उसके बाद भी अगर कोई छूट गया हो तो उसे हमें सूची में शामिल करना चाहिए. मैं पूछता हूँ कि क्‍या यह गरीब का काम नहीं है. इसमें कोई जाति भेद है क्‍या, मैं समझता हूँ कि जितनी योजनाएं वर्ष 2014 के बाद इस देश में लागू हुईं, आप ईमानदार मूल्‍यांकन तो करें, आप आलोचना कैसे करेंगे. अगर हां, किसी जाति और धर्म के आधार पर उसमें भेद हुआ है तो आपको उंगली उठाने का अधिकार है और हम सिर झुकाकर आपकी बात को स्‍वीकार करेंगे. इसमें नीचा दिखाने जैसी बात नहीं है. प्रधानमंत्री सड़क योजना, अगर इस देश में अटल बिहारी वाजपेई जी प्रधानमंत्री न होते तो गांव की ये तस्‍वीर होती, जिसकी हम बात कर रहे हैं. अटल बिहारी वाजपेई जी का यह शताब्‍दी वर्ष है. मेरे जैसे लोगों को गर्व है, मुझे उनके साथ में काम करने का मौका मिला है. मैं आपको एक उदाहरण दे रहा हूँ. आज पटल पर कह रहा हूँ. सभापति महोदय, जब पहला चरण आया, तो 2 हजार की आबादी जुड़नी थी, फिर 1 हजार की आबादी जुड़नी थी. आप रिकार्ड उठाकर देखना, जब प्रधानमंत्री सड़क योजना वर्ष 2003 में शुरू हुई, उस समय सबसे ज्‍यादा पैसा तमिलनाडु को मिला था. हर कार्यकर्ता के मन में आएगा, आपके मन में आएगा, मेरे मन में भी आया था, यह हल्‍की बात है जो मैं रिकार्ड पर कह रहा हूँ, मैंने उनसे कहा, वहां तो हमारा कोई एमएलए नहीं है, कोई हमारा एमपी नहीं है, इतना पैसा क्‍यों दिया, उस समय मध्‍यप्रदेश में भाजपा की सरकार थी. मध्‍यप्रदेश को ज्‍यादा पैसा नहीं मिला था. तमिलनाडु को मिला था. यह बातें सहज रूप से कार्यकर्ता के नाते आपके मन में भी आती होंगी जब मैंने उनसे कहा कि जहां हमारा एक भी एमपी,एमएलए नहीं है वहां आपने ज्यादा पैसा दिया. उनका जो जवाब था कि 2 हजार की आबादी के गांव आपके प्रदेश में कम हैं. जब आपकी जनसंख्या के अनुपात में मिलेगा तो मिल जायेगा लेकिन दूसरी बात उन्होंने कही कि मैं नेता भारतीय जनता पार्टी का हूं लेकिन प्रधानमंत्री देश का हूं. जो नीति हमने बनाई है 2 हजार की आबादी की संख्या की उसमें गांव तमिलनाडु में ज्यादा हैं. हम सबको कहीं तो स्थिर होना पड़ेगा.तीसरी बात मैं करता हूं जल जीवन मिशन की,जल जीवन मिशन की आलोचना की जा सकती है गति को लेकर,गुणवत्ता को लेकर मैं देश का जल शक्ति मंत्री रहा हूं. जल जीवन मिशन मेरे पास था. मैं भी आया हूं राज्य में, मेरी ही राज्य की सरकार थी तो गुणवत्ता के बारे में मुझे मत कहिये लेकिन मैं अपने जिले दमोह का उदाहरण देता हूं. 13 प्रतिशत परिवारों के पास नलजल का पानी था आज 72 प्रतिशत से ज्यादा है तो ऐसा नहीं है अगर हम सजग होते हैं जनप्रतिनिधि होने के नाते, और ऐसा मत मानिये मैं मंत्री था इसलिये था हमने एक जनप्रतिनिधि होने के नाते कैसे काम करना चाहिये हमने सिर्फ उतना ही किया हमने अपने अधिकारों का दुरुपयोग नहीं किया मैं उन मंत्रियों में से नहीं गिना जाऊंगा कि मैंने अपनी कांस्टीट्यूएंसी में रख लिया. क्षमा करिये मैं बोलना नहीं चाहता और इसलिये मुझे लगता है कि इस पावर पालिटिक्स से बाहर आना चाहिये और इसलिये  जितनी भी योजनाएं हैं जब हम बजट पर बात कररहे हैं वित्तीय प्रबंधन पर बात कर रहे हैं तो हमारे मशविरे ऐसे होने चाहिये कि अगर यह सुधार हो जाए तो हम आगे बढ़ सकते हैं अगर प्रतिपक्ष के नेता बोल रहे हैं तो हमें क्यों टिप्पणी करनी चाहिये. हमें सुनना चाहिये. कमियां सामने आएंगी तो आप ठीक करेंगे. विरोध का कोई विधायक बोले तो खराब ही बोलेगा ऐसा मैं मानने को तैयार नहीं हूं. अटल जी ने दूसरी बात कही थी उनका जन्म शताब्दी वर्ष है इसलिये मैं उनको बार-बार कोड कर रहा हूं. उन्होंने कहा कि सदन में बोलने का मौका मिले न मिले सुनने के लिये बैठो. जो यहां विधायक चुनकर आये हैं वह भी  उतने ही वोट के बीच से चुनकर आए हैं और इसलिये हमारा दिमाग खराब नहीं है. हमारा दिमाग बिल्कुल ठीक है इसलिये मुझे लगता है कि इंट्रप्ट क्यो करिये. आपको अगर लगता है चुटकी लेने का मौका मिले तो बिल्कुल नहीं छोड़ना चाहिये लेकिन व्यवधान पैदा करना यह लोकतंत्र के लिये ठीक नहीं होगा. इसलिये मजदूरों के बारे में मैं 2-3 बातें मैं कहूंगा. संभल योजना के बारे में जो बजट आया है और जो विलंब है और वह भी आप समझ लीजिये जिस समय कांग्रेस की सरकार थी उस समय संभल बंद किया गया लेकिन पोर्टल बंद नहीं हुआ और उसके बाद जो बेकलाग बना वह बेकलाग अभी भी बरकरार है. यह पहली सरकार है. मैं डॉ.मोहन यादव जी को इस सदन में बधाई देता हूं उनका धन्यवाद  करता हूं श्रम मंत्री होने के नाते कि उन्होंने अभी फिर से मुझे तीसरी बार 800 करोड़ दिये हैं तब कहीं जाकर हम सितम्बर के आसपास पहुंच पाएंगे. अगले छह महिने बाद हम उस बेकलाग को खत्म कर पाएंगे और उसके बाद हम सदन में खड़े होकर कह पाएंगे कि जैसे ही दुर्घटना घटेगी हम उसको पैसा दे पाएंगे लेकिन उसके बाद भी हमने उतना कुशन छोड़ा है कोई आपातकालिक परिस्थिति आ जाती है जैसे कोई दुर्घटना हो जाती है अचानक हमें कोई क्रम तोड़कर उसे पैसा देना है ऐसी परिस्थिति के लिये हमने उसमें अवसर दिया है अन्यथा पहले आए पहले पाए वाले नियम पर हम कायम हैं उसमें कोई हमारी गल्ती नहीं निकाल सकता और जहां पर बात आई है कहा गया था भाषण में कि मरे हुए आदमी तक पर राजनीति हो गई यह सच्चाई है कि जिंदा लोगों को पैसा दिया गया. यह स्वीकार करने में मुझे कोई हिचक नहीं है. बाकी लोगों ने क्या किया मुझे नहीं पता लेकिन जब मैंने यह पूछा यह पैसे कैसे पहुंच गया जब आधार से जुड़ा हुआ है तो पता चला कि केवाईसी उसके साथ लिंक नहीं था. हमने तीन महिने सारे पैसे रोके और उसके बाद  जब पूरा सिस्टम आ गया और उसके बाद हमने सिंगल क्लिक से पैसा दिया उस दिन के बाद से अगर कोई गल्ती होगी सभापति महोदय,श्रम मंत्री होने के नाते मैं सदन में खड़े होकर माफी मांगूंगा. मैं आपसे कहता हूं. किसी मजदूर के साथ कैसे अन्याय हो सकता है. यदि आप सतर्क हैं,सजग हैं तो आप कमियां देखिये कि कमियां कैसे दूर करेंगे. हमने की हैं इसलिये मैं दावे से कहूंगा कि हां हमने इसलिये उनको रोका और यह तीन महिने का बेकलाग उसके कारण बढ़ा लेकिन हमारी बदनियति नहीं थी हमारी नियत यह थी कि सही लोगों के पास पैसा पहुंचे और इसलिये मुझे लगता है कि अगर हम कम्पेयर करते हैं तो उसको करना चाहिये. आपने मुझसे पूछा था कि केटेगिरी क्या है.हां केटेगिरी है कुशल के लिये 454 रुपये का रेट है. अर्द्धकुशल के लिये 492 रुपये का है. कुशल के लिये 558 रुपये का है और उच्च कुशल के लिये 621 रुपये है और जो कृषि मजदूर है उसके लिये 317 रुपये है. आपने कहा कि मनरेगा की मजदूरी हमारे यहां क्‍यों नहीं बढ़ रही, यह राज्‍य के वित्‍तीय आधार पर भारत सरकार तय करती है, हम और आप तय नहीं करते, लेकिन मैं श्रम मंत्री होने के नाते इस सरकार ने कुल 2 ही बार वेतन वृद्धि की है, वर्ष 2014 में जब भाजपा की सरकार थी और दूसरी बार हमने अभी की है जिसमें 25 प्रतिशत हमने मजदूरों का बेस बढ़ाया है.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक--  माननीय सभापति महोदय, मजदूर के संबंध में ही थोड़ा सा बोलना है.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल--  सोहनलाल जी, आप बाद में मुझसे पूछ लेना, मैं बैठूंगा, आप पूछेंगे तो मैं जवाब देने के बाद ही बाहर जाऊंगा. मुझे लगता है कि इतनी ही बातें इनमें आई हैं और जो 20 से ज्‍यादा कोई अगर मजदूर रखता है, पहले जब भी कोई मजदूर बाहर जाता था वर्ष 2011, 2012 और 2010 की बात कर रहा हूं तो वह एसडीएम से उसको परमिट लेना पड़ता था, कोई एसडीएम से परमिट नहीं लेता था और ठेकेदार  लेकर जाता था, दुर्घटना घटती थी और उसे कुछ नहीं मिलता था, लेकिन जितने भी कंस्‍ट्रक्‍शन वर्कर हैं उनका विधान तो अटल जी के समय बन गया था, लेकिन उसका इम्‍प्‍लीमेंटेशन नहीं हुआ इस सच्‍चाई को आपको स्‍वीकार करना पड़ेगा. मैं उन लोगों में से था जब मैंने वर्ष 2011 में कहा था कि दिल्‍ली जैसे महानगर में 27 हजार करोड़ रूपया अनक्‍लेम्‍ड पीएफ का मजदूर का पड़ा हुआ था, इसको कोई मांगने वाला नहीं था, उस पैसे का उपयोग आज गरीबों के आवास के लिये हो रहा है. वर्ष 2011 और वर्ष 2024-25 मुझे लगता है कुछ जानकारी हमको लेनी भी चाहिये कि हम कानून बनाते हैं,  कानून के साथ में उसका इम्‍प्‍लीमेंटेशन हो रहा है कि नहीं हो रहा, इनकी बातें भी हमें करना चाहिये तो मुझे लगता है ठीक होगा. अभी जो सरकार ने बजट दिया सभापति महोदय, मैंने आपके माध्‍यम से सदन से आग्रह किया है कि वह पैसा हमें मिलना चाहिये और इसलिये कि हम और भी बेहतर  काम करना चाहते हैं. हमारे यहां पर जो भी श्रमोदय आवासीय विद्यालय हैं, तमाम महानुभावों से कहूंगा आपके ही यहां के लोग पढ़ते हैं. मैं इंदौर गया था, वहां धार, झाबुआ, अलीराजपुर, खंडवा के बच्‍चे वहां पर पढ़ते हैं एक बार जाकर तो देखिये कि उनकी हालत क्‍या है, उनके परिवारों का सहयोग कितना है. एक तरफ हम कहते हैं कि अभिभावकों को मौका नहीं मिलता और दूसरी तरफ वहां परिस्थियां क्‍या हैं. मैं चाहता हूं कि अगर दर्द हमारे मन में है तो एक बार उन आवासीय विद्यालयों में जाकर देखना चाहिये कि गलती किसकी है, क्‍या इन गलतियों में हम सहयोग कर सकते हैं उस गरीब आदमी का, चाहे वह किसी भी जाति का हो. पहली आईटीआई है भोपाल में श्रमोदय आईटीआई, यह तो भोपाल में ही है, एक बार जाकर देखिये, हंडरेड परसेंट बच्‍चे, बच्चियों का प्‍लेसमेंट हुआ है जो पूरे मध्‍यप्रदेश की आईटीआई है उन सबमें जो पहले 25 हैं उसमें पहले 18 उस श्रमोदय आईटीआई के, आपको तो गर्व करना चाहिये, यह तो भोपाल के पास है, यहां जाइये, आप बताकर जाइये, मैं आपका स्‍वागत करूंगा, आप जाकर देखिये. मुझे लगता है कि कुछ चीजें हैं जो हमें आगे बढ़ानी होंगी, उसके लिये हम सबको मिलजुलकर, कुछ बेहतर सलाह देकर आगे बढ़ेंगे तो बेहतर होगा. श्रम मंत्रालय की इतनी ही बातें इसमें आईं थीं तो मैंने उसको अपनी बातों में कहा है.

          सभापति महोदय, दूसरी बात है पंचायती राज की. जैसे ही मैं मंत्री बना था तो मैंने तीन दिन की वर्कशाप यहां पर लगाई थी जिसमें जिला पंचायत अध्‍यक्ष, जिला पंचायत सीईओ, महानगर के आसपास के जनपद अध्‍यक्ष, जनपद सीईओ कारण भी बड़ा साफ  था, हमने 4 विषय रखे थे कि इसमें भी अगर आप उठाकर देखेंगे कि ग्रामीण विकास में और पंचायत में पैसा कहां से आता है या तो आपकी केन्‍द्र पोषित योजनायें हैं, उससे धन आता है. अभी कोई कह रहा था कि इतना तो बचेगा ही नहीं, यहां कैसे पहुंच जायेगा. मुझे लगता है कि हम केन्‍द्र की योजनाओं को क्‍यों भूलते हैं. एक तरफ प्रधान मंत्री आवास में अगर एक रूपया लेते हो तो 50 पैसा केन्‍द्र का है और 50 आपका है. अगर आप जनमन के आवास योजना की बात करते हो भले वह 2 लाख है लेकिन उसमें 60 प्रतिशत भारत सरकार देती है 40 प्रतिशत हम देते हैं. मुझे लगता है कि हम यह भूल जाते हैं  कि हमारी जो केन्‍द्रीय योजनायें हैं जो हमको सीधे मदद कर रही हैं वह पैसा भी इसमें शामिल है और इसलिये मुझे लगता है कि हम क्‍यों नहीं उसे काउंट करते कि यह गरीबों के लिये, प्रधान मंत्री सड़क हो, प्रधानमंत्री आवास हो, जल जीवन मिशन हो, जनमन आवास योजना हो, जनमन सड़क योजना हो जब हमने अति पिछड़ी जनजातियों के लिये भारत सरकार ने घोषणा की और मध्‍यप्रदेश का पहला मकान 23 दिन के भीतर शिवपुरी में बना, क्‍या हमें गर्व नहीं करना चाहिये. वहां पर कालोनी बनी जो कभी टोलों में, मजरों में रहने वाले लोग वह आज कालोनी में रह रहे हैं और जितना लक्ष्‍य हमें मिला था वर्ष 2024 में वह योजना शुरू हुई थी. अभी तक हम 46 हजार मकान बनाकर कम्‍प्‍लीट कर चुके हैं, हम देश में नंबर वन पर हैं, किसके लिये ? वह बैगा, भारिया वह सहरिया वह कौन लोग हैं? वह आदिवासी नहीं हैं और इसलिए मुझे लगता है सड़क, मेरे नरसिंहपुर जिले में जो आईडेंटीफाई नहीं है, उसमें प्रदेश की सबसे महंगी सड़क 8 करोड़ 90 लाख रूपये की बनी है, जहां पर जिस सहरिया गांव की आबादी कुल 452 है, उस नरसिंहपुर जिले के गांव में लोग छिंदवाड़ा से जाते थे, तो मुझे लगता है कि मैं यह सफलता नहीं गिना रहा हूं कि मेरे मंत्री बनने के बाद ऐसा हुआ, मेरे मंत्री बनने के बाद में वह बनी, वह अलग बात है, लेकिन हम इन बातों को चि‍न्हित करें कि भाई आखिर पैसा कहां से आयेगा? 15 वां वित्‍त अभी चल रहा है, 16 वे वित्‍त के लिये आयोग आकर चला गया, हमारे पास यही मद है, जिनसे हम पैसा देंगे, लेकिन राज्‍य के भी हैं, राज्‍य के वित्‍त का पैसा है, उसके बाद में आपका स्‍टांप ड्यूटी का पैसा है और उसके बाद में आपके पास में खान, खनिज की रॉयल्‍टी का पैसा है. यही पैसा है जो ग्रामीण विकास में राज्‍य की तरफ से लगेगा,इसलिए उस समय मैंने डिस्‍कशन में यह कहा था कि हम केंद्र की योजनाओं को किस दृष्टिकोण से देखते हैं. मनरेगा पर बहुत लोग बात करते हैं, हां मैंने मनरेगा में सख्‍ती की थी, उसमें पौने आठ लाख काम चालू थे, जो पूरे नहीं हुए हैं. सभापति महोदय, जब मैंने वह सख्‍त कदम उठाया, मुझे पता था कि मेरी आलोचना होगी, मेरे अधिकारियों ने मुझसे कहा था कि इतना कड़ा फैसला मत लीजिये, लेकिन वह फैसला मैंने कोई जुनून में नहीं लिया था, मैंने सोच समझकर लिया था. मैं सदन में शायद जितने लोग हैं, मैं साल में एक महीने गांव पैदल जाता था और एक महीने बाद घर वापस आने वाला मैं वो कार्यकर्ता हूं. आप मुझे मंत्री, नेता मत मानिये, उस आधार पर मैंने वह कठोर फैसला किया था और आज मैं यह गर्व के साथ कह रहा हूं कि पौने आठ लाख अधूरे कामों में से साढ़े पांच लाख काम पूरे हो गये हैं(मेजों की थपथपाहट) हमें कहीं न कहीं पलटकर तो जाना पड़ेगा. आप हमसे सड़क मांगों, कोई पैसा बंद नहीं हुआ है, कोई सुदूर सड़क,खेत सड़क बंद नहीं हुई है, बल्कि मैंने तो यह कहा है कि जहां आप खेत सड़क बनाते हो, उन किसानों को आप खेत तालाब दे दो, वह तो खोदकर डाल सकते हैं, उस मिट्टी को इसमें डाल दो, हमने रास्‍ते दिये हैं, हमने बंद नहीं किया है और जो पैसा आया है वह पैसा रहेगा और इसलिए जब हम पर आरोप लगाते हैं और जब हम सेचोरेशन पर जाने की सोचते हैं कि हर परिवार को मकान मिल जाये, हर घर को पानी मिल जाये, हर घर को बिजली मिल जाये, आप कैसे भेदभाव का आरोप लगा सकते हो? जब मैंने कहा कि हर पंचायत में भवन में होंगे और अभी आप तीस साल पुराने पंचायत भवन देखिये ढाई कमरे के हैं, ढाई कमरे का भवन ई-पंचायत के लायक है क्‍या ? आपने क्‍लस्‍टर बनाये हैं, आप कहते हो कि सब इंजीनियर दस्‍तखत नहीं करता है, लोग उसकी आलोचना करते हैं, आपने तय ही नहीं किया है कि उसका मुख्‍यालय क्‍या होगा ? आपने यह तय नहीं किया है कि आधे दिन क्‍या करेगा? आधे दिन नहीं करेगा, बैठेगा कहां? हमने उसका प्रावधान उसी के नाम पर डेजीनेटेड किया है. आपका कोई भी ग्रामीण भवन, ऐसे एक नाम बताईये, जो दो मंजिला और तीन मंजिला हो, आपकी प्‍लंथ लेवल नहीं है, आपने डिजाईन नहीं बदली है, जो पंचायत भवन अटल जी के नाम पर बन रहे हैं वह आने वाले समय में तीन मंजिल तक जा सकते हैं,पहला मंजिल यह है और जरूरत पड़ेगी तो आप तीन मंजिल तक जा सकते हैं. (मेजों की थपथपाहट) आप कभी इस पर भी विचार करिये की 25 साल बाद आपके पास गांव में जगह बचेगी? जिस प्रकार से, जिस रास्‍ते पर हम चल रहे हैं, कम से कम इस पर तो विचार करो कि आने वाले समय में भी तो लोगों को जमीन चाहिए, आपके बच्‍चे होंगे, कहां खेलेंगे, कहां बैठेंगे? पंचायत भवन को कम से कम इस लायक तो बनाओ, इतने परिवर्तन के लिये तो तैयार रहिये, किसी मित्र ने कहा शायद विक्‍की ने कहा सचिव और जी.आर.एस. के पद खाली हैं, मैं स्‍वीकार करता हूं, लेकिन मैं आपको यह भी कहता हूं कि पद स्‍वीकृत हैं, लेकिन एक बात जरूर है कि ई-पंचायत को ध्‍यान में रखकर और शहरों के पास की जो पंचायतें हैं, उन पंचायतों में विकास का पैमाना बदलना पड़ेगा, वह सेमी अर्बन कांसेप्‍ट के बगैर नहीं हो सकती है,  क्‍या आपका सचिव उतना कांपीटेंट है? क्‍या उसको कम्‍प्‍यूटर नहीं आना चाहिए? मैंने प्रस्‍ताव दिया है, मैंने कहा है अभी सरकार और प्रशासन को कि आप क्‍या नायब तहसीलदार को उस पंचायत में बैठा सकते हैं? वहां कॉलोनियां बन रही हैं, वहां मजदूरों का सेस कटना है, क्‍या आपका सचिव इतना कांपीटेंट है ?क्‍या नये सिरे से आपको  पंचायत के सचिव की योग्‍यताओं के बारे में विचार नहीं करना चाहिए? मैं वह व्‍यक्ति हूं तीन साल का अधिकार था, जो सचिव दुर्भाग्‍य से अपना जीवन समाप्‍त कर गये, अपनी सेवाओं के बीच में, उनको अनुकंपा नियुक्ति का अवसर तीन साल का था, जब उनको जिले का कैडर दिया गया, तो जी.ए.डी. से मैंने बात की तो जी.ए.डी. में सात वर्ष का है. मैंने उनसे बिना विज्ञापन लिए उनको सात साल का अधिकार दिया है मरकाम जी, आप जरा पलटकर देखा. ऐसा नहीं है कि हमे चिन्‍ता नहीं है, लेकिन योग्‍यता के बारे में तो देखना पड़ेगा. पहले जब पंचायतें बनी थीं, तब पंचायतों में पैसा नहीं था, आज पंचायतों के पास में पैसा है. हमारे एक सदस्‍य हेमंत जी हैं, उन्‍होंने पिछले सत्र में प्रश्‍न लगाया था कि मेरे जिले में कितनी पंचायतें हैं कि जिनके पास में बीस लाख से ज्‍यादा रुपये पड़ा है. मैं उनको लिखित उत्‍तर दिया था 254 पंचायतें सिर्फ बैतूल जिले में है, जिनके खाते में बीस लाख रुपए से ज्‍यादा है, उन्‍होंने खर्च ही नहीं किया. आप एक तरफ पूछते हो कि नल जल योजना के बिजली का बिल कहां से आएगा, दूसरी तरफ आफ टाइप्‍ड और अनटाइप्‍ड का विरोध कर रहे हैं कि नहीं होना चाहिए. मैं भारत सरकार का मंत्री था, तब कहा था कि हर घर में पानी होगा. 50 लीटर पानी एक व्‍यक्ति को सरकार दे रही है एक घर में 5 आदमी है तो 250 लीटर पानी आएगा, पानी सुबह मिलेगा 24 घंटे बाद वह ग्रे या ब्‍लैक वाटर बनेगा, क्‍योंकि अलग अलग तो है नहीं कहीं तो जाएगा 5 हजार की आबादी की पंचायत हैं तो गुणा कर लीजिए हर दिन आपके पास लाखों लीटर गंदा पानी आएगा. आप उसको कैसे ठीक करेंगे, आप उसको रिसाईकिल नहीं कर सकते, लेकिन रि-यूज तो कर सकते हैं. लेकिन उसके लिए 15 वें वित्‍त से आप उसका पेमेन्‍ट कर सकते हैं 5 वें वित्‍त से उसका पेमेन्‍ट कर सकते हैं, आपके पास पैसा पड़ा है और आप कह रहे हैं कि आपके पास पैसा नहीं हैं. कई बार सदस्‍यगण कहते हैं कि हमको पता होना चाहिए एक तरफ आप कहते हैं कि सरपंचों को अधिकार नहीं है, दूसरी तरफ आप चाहते हों कि सब कुछ विधायको के कहने पर हो, तो सच क्‍या है, ये फैसला आपको बैठकर करना होगा. मुझे आपत्ति नहीं हैं लेकिन कोई मैकेनिज्‍म बनाना पड़ेगा. मैं नेता प्रतिपक्ष जी से भी प्रार्थना करता हूं कि हम एक बार बैठकर सोचें कि हम पंचायती राज में अधिकार तो देने के लिए तैयार है, इसी सदन में इसी बार कहा था कि हम एसीआर में जिला पंचायत अध्‍यक्ष की भागीदारी करेंगे लेकिन हम उसके पांच कम्‍पोनेंट बना रहे हैं कि वित्‍तीय मामलो में उसकी क्‍या भागदारी है नहीं तो वह कुछ भी होगा और यह साल में एक बार नहीं मागूंगा, मैंने कहा तीन या चार महीने में एक बार मांगेंगे. अभी मार्च खत्‍म होगा, हम पहली बार उनसे राय मांगेगे कि आपका जिला पंचायत सीईओ वित्‍तीय मामले में आपसे राय मश्‍वरा करता है या नहीं, फिर वह दौरे पर जाता है या नहीं जाता, आपसे उसके पर्सनल संबंध कैसे है मीटिंग में उसका व्‍यवहार क्‍या है, उसके बारे में क्‍या सोचता है, यह जो छोटी छोटी चीजें जो हैं हम उन सबको एक बार में ही ठीक करना चाहते हैं, लेकिन हमें शुरू करना होगा, लेकिन आपकी भी मदद चाहिए इसमें, यह मत मानिए कि हम किसी के दुश्‍मन हैं. बैठे हैं लोग दस साल, बीस साल से उसी गांव में पैदा हुए थे, उन्‍हीं गांव के सरपंच के रिश्‍तेदार हैं, सचिव हैं, जीआरएस है. यह कड़वा सच है लेकिन ये करने वाले हम नहीं है सर, हम जाएंगे पीछे तो फिर आपको आपत्ति होगी, लेकिन हां अभी पॉलिसी बनानी पड़ेगी. यदि हम चाहते हैं कि जो सार्वजनिक पैसा हमारे करों से हमें मिलता है उसके बारे में हम कैसे बेहतर कर सके. ग्रामीण विकास हो, या बाकी चीजें हो, इतनी सारी चीजें को लेकर मैंने कुछ चीजें की थी. एक सामान्‍य जानकारी के लिए जो मित्र हमसे कह रहे थे, लगभग  9800 सिंगल विलेज स्‍कीम्‍स हैं, जिनको पंचायत के हैंडओवर कर दिया है उनको बिल देने के लिए 15 वे वित्‍त का अगला 16 वें वित्‍त होगा. यदि केन्‍द्रीय वित्‍त, राज्‍य वित्‍त और जो टैक्‍स वह लेते हैं तीन तरीके हैं जिससे वह अपना पैसा दे सकते हैं और मेंटेनेंस का काम वह टाइप्‍ड फंड से कर सकते हैं जो पैसा उनके पास पड़ा हुआ है. मैं आंकड़ों की बहुत बात नहीं करता हूं लेकिन इसमें आंकड़ों की बात इसलिए कर रहा हूं कि हमें जानकारी होना चाहिए कि हम पैसा कैसे खर्च करना चाहते हैं. ग्रामीण विकास का इस बार का 2024-25 का बजट था 18 हजार 746.12, वर्ष 2025-26 में हुआ है 19 हजार 50.34 इसमें ज्‍यादा वृद्धि नहीं है 1.6 प्रतिशत की व़द्धि है लगभग 304 करोड़ की वृद्धि है. पंचायती राज में 9123.15 करोड़, और अब है 13278.7 करोड़(..व्‍यवधान)

          श्री दिनेश जैन बोस माननीय सभापति महोदय, मैं सिर्फ एक प्रश्‍न पूछना चाहता हूं आपसे कि जो आप 5 वें और 15 वें वित्‍त आयोग में जो आप पैसा देते हैं सरपंचों को वह एक से ढेड़ लाख रुपए होता है और उसमें वह उतना काम नहीं कर पाते तो मैं चाहता हूं कि बजट में 5 वें और 15 वें वित्‍त आयोग में पैसा बढ़े.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल ये आंकड़े आपके सही नहीं है. पंचायती राज में 45.54 करोड़ तो ये प्रतिशत बढ़ा है, इसमें चार हजार करोड़ पंचायती राज में इस बार बढ़ा है और इसके उपयोग करने के जो तरीके होंगे उसमें अगर आपकी भी कोई सलाह होगी तो मैं उसके लिये तैयार हूं, लेकिन मेरी प्राथमिकता है कि प्रत्येक पंचायत में एक भवन दे दें. जहां नहीं हैं, पहले वहां पर दें. उसके बाद कोई 30 साल पुराना कोई भवन है उसमें बकायदा जिले के स्तर पर 3 सदस्यीय डिस्मेंटल करने की कमेटी बनती है, वह बनायी है. क्योंकि अधिकारी इसमें हाथ डालता नहीं है, उसके बाद भी वह रहते हैं. डिस्मेंटल की सूची में जो भी सूची आयेगी हम उसमें जल्दी पैसा देंगे. वही ठेकेदार उसको डिस्मेंटल करें और वहीं पर पंचायत भवन बनाये. ताकि उसमें विलंब न हो. एक पंचायत में कम से कम एक सामुदायिक भवन होना, उसके साथ में स्वच्छता परिषद् जो 25-30 लाख का होगा लोग उसकी डिजाइन बदलना चाहेंगे तो बदल सकते हैं. लेकिन मेरा मानना है कि कम से कम उसको कमर्शियल सिस्टम से पंचायतों को चलाना चाहिये. वह जिस भी प्रकार से उसको करे ताकि पूरा कम्पोनेन्ट उसके साथ में हो जो कि मेरी पहली प्राथमिकता है. इसलिये मैंने बाकी कामों को प्राथमिकता नहीं दी है. मैंने कहा शायद आप लोगों के भी ध्यान में आया होगा. मैंने कहा कि सी.सी., नाली, बाऊंड्रीवाल, स्टापडेम, आप स्टापडेम की संख्या उठाकर के दिखिये इस राज्य के हर 50 मीटर पर एक स्टापडेम बन जाता इतनी संख्या है. लेकिन हम उसका क्या उपयोग कर पा रहे हैं ? यह मैंने किया है जब मैं दमोह में था हमारे यहां पर चार विभाग स्टापडेम बनाते हैं. जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग, ग्रामीण विकास, पंचायत भी बना देती है. कोई ददीदोरी नहीं. मैंने एक बार कलेक्टर जी से कहा कि अपन बैठकर तय करें किसी मद से इनके फाटक लगवा दें, पंचायत को फाटक दे दें. पंचनामा बनाकर उसको पंचनामा दे दो. उसके परिणाम आये. ऐसा नहीं है कि कोई रास्ता नहीं निकल सकता है. हम कोई रास्ता निकालना चाहें तो रास्ता निकल सकता है. लेकिन जहां सेचोरेशन पर हों और उसके परिणाम नहीं आयें वहां पर पैसे देने की बजाय जो जरूरत है उस प्राथमिकता को अपने ध्यान में रखेंगे, मेरा सदन से केवल इतना ही निवेदन है. ऐसे कुल-मिलाकर जो हमारा विभागीय बजट है इसमें 16 फीसदी की बढ़ोतरी है. प्रधानमंत्री जनमन पिछली बार 800 करोड़ रूपये था इस बार 1150 करोड़ रूपये है इसमें मुझे लगता है कि अच्छा काम भी हो रहा है. आप भी जायेंगे तो इसमें गांव और जिले जुड़ते जा रहे हैं. पहले एस.टी.आयोगी की जो सूची थी उसमें केवल 17 थे अब यह संख्या बढ़कर 22 जिले हो गये है. अभी भी कुछ जिलों में यह जाति मिल रही हैं यह अति पिछड़ी जातियां हैं, उसको भी सरकार बाकायदा जोड़ रही है. प्रधानमंत्री जनमन सड़क में पहले 150 करोड़ रूपये था अब 1 हजार 56 करोड़ रूपये है. क्योंकि जैसा मैंने बताया कि आबादी उनकी सघन नहीं है. लेकिन इसमें दूरिया बहुत हैं इसलिये पैसा ज्यादा है. मुख्यमंत्री अवसंरचना में 500 करोड़ रूपये था इस बार इसमें 800 करोड़ रूपये है. मनरेगा में पिछली बार 3500 करोड़ रूपये था. अब इसमें 4 हजार 50 करोड़ रूपये है. अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी की मैंने बात की थी जिसमें विकास की गुंजाइश है. कोई सदस्य महोदय कह रहे थे कि 1 करोड़ रूपये भी नहीं होगा. इसमें 900 करोड़ रूपये थे. अब इसमें 2 हजार करोड़ रूपये हैं विभाग के पास में. राज्य वित्त की जो मूल पंचायत का अनुदान है, वह 1400 के बजाय 6 हजार करोड़ रूपये है. यह 428 प्रतिशत ज्यादा हुआ है. ऐसा नहीं है कि चीजे पिछली बार की अपेक्षा सेफ हो जायें. उसके बाद हम तेज गति के साथ काम करेंगे. अगला वर्ष करने का वर्ष होगा जिसमें हम और आप बहुत तेजी के साथ काम करें. कोई भेदभाव जैसी बातें दिमाग में नहीं रखनी चाहिये. जब हम सेचोरेशन पर जायेंगे तो कौन बचेगा. इसलिये प्राथमिकता में जिसको होगा उसको निश्चित रूप से मिलेगा. लेकिन थोड़ा एक दो साल मुझे लगता है कि हमें जल्दी नहीं करनी चाहिये कि हमें पहले दे दो. मुझे लगता है कि एक बार करेंगे तो इसमें समय बहुत ज्यादा नहीं लगेगा दो साल में हम इस लक्ष्य को हम प्राप्त कर सकते हैं. माननीय मुख्यमंत्री जी की वृंदावन ग्राम योजना है इस बार उसमें 400 करोड़ रूपये का प्रावधान है. पी.एम.जे.ए.वाय जिसमें सभी माननीय सदस्यों को समझना चाहिये जो चौथा चरण है. मैं पहले चरण में भारत सरकार में था, मैंने दूसरा चरण भी देखा है, तीसरा भी देखा है और चौथे चरण में यहां पर राज्य में मुझे क्रियान्वयन का मौका मिला है. इसमें टोले-मजरे भी जोड़ना है. मुख्यमंत्री जी ने अलग से घोषणा की है. उन्होंने कहा है कि पंचायत मुख्यालय से जो गांव हैं उनको जोड़ने का मुख्यमंत्री जी से करेंगे. लेकिन पांच सौ की आबादी की सामान्य दशा में एक माननीय सदस्य कह रहे हैं कि मेरे यहां पर पांच सौ की आबादी वाले गांव हैं, छूट गये हैं. मैंने उनसे कहा कि आप लिखकर के दे दीजिये. 2011 के सेंसस में कोई भी पांच सौ की आबादी का गांव, किसी का भी छूटा हो. आप लिखकर दीजिये हमारी जिम्मेदारी है. हम लड़कर उस काम को पूरा करेंगे. अगर आदिवासी जनजाति क्षेत्रों का गांव है तो ढाई सौ की आबादी होगी तब भी उसको वहां पर रोड़ मिलेगा. अगर नक्सलवादी क्षेत्र है या अति पिछड़ी जनजातियां हैं. तो 100 की आबादी पर भी उसको प्रधानमंत्री सड़क मिलेगी और इसलिए मुझे लगता है कि इस चौथे चरण का उपयोग और अभी तक जो हमारा सर्वे है उस सर्वे में हमने 3 हजार 112 मजरों का अभी तक सर्वे पूर्ण हुआ है, जिसमें 1424 मजरों को आइडेंटिफाई कर लिया कि इनको 100 परसेंट रोड पहुंचेगा, तो कई बार टोले-मजरे ऐसे भी होंगे, 100 परसेंट ऐसे भी होंगे लेकिन आपको लिंक भी देखनी पडे़गी कि वे कौन-से मुख्‍यालय से जुड़ेंगे या कोई सीधे जुडे़गें, तो जैसा मैंने उदाहरण के लिए आपको आंकड़ा दिया कि 3 हजार 112 मजरों का सर्वे पूर्ण हो गया. लेकिन इसमें जो आइडेंटिफाई हुए हैं वह 1424 मजरे हैं और इनमें तो सड़क जुड़ना तय है तो ऐसे कोई मामले आते हैं तो मुझे लगता है कि आपको भी देना चाहिए और इसलिए मैं इस बात को लंबी न करते हुए यही पर समाप्‍त कर रहा हॅूं. बाकी अगर मैं बातें करूंगा तो आपको लगेगा कि मैं कटाक्ष कर रहा हॅूं तो मैं कटाक्ष करना नहीं चाहता. मैं आप सबसे यह प्रार्थना...

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- प्रधानमंत्री आवास की राशि बहुत ही कम है. आप स्‍वयं इस बात को समझ रहे हैं. 1 लाख 20 हजार में नहीं हो पा रहा है. वहीं पर जन-मन योजना में 2 लाख दे रहे हैं. प्रधानमंत्री आवास में लोगों में मतभेद पैदा हो रहा है कि यह कैसी स्‍थिति है तो उसमें आप थोड़ी राशि बढ़ा दीजिए.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- मैंने आपकी बात का उत्‍तर दे दिया. जन-मन के लिए तो अति पिछड़ी जनजातियां हैं. किसी को आपत्‍ति भी हो, तो भी सरकार मानने के लिए तैयार नहीं है. क्‍योंकि हम जनजातियों के लिए समर्पित लोग हैं. दूसरी बात जो आपने कही है...    

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- 10-20 हजार कुछ तो बढ़ाइए.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- अभी तक जिनको हम डेढ़ लाख टोटल मिलाकर दे रहे हैं. अभी हम 6 महीने बाद किसी को फिर से बढ़ा दें, तो वह 6 महीने पहले वाला क्‍या बोलने वाला है वह वही बोलेगा, जो आप बोल रहे हैं और इसलिए मुझे लगता है कि जो आवास प्‍लस की 27 लाख की सूची है. उसमें कुल 8 लाख 29 हजार बचे हुए हैं और वह अप्रैल के बाद में भारत सरकार हमको देने वाली है. आवास प्‍लस की सूची समाप्‍त होगी और जो सर्वेक्षण होगा, जो चल रहा है उतने ही बचेंगे.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- सभापति महोदय, 10 साल से एक रूपए नहीं बढ़ा.

          सभापति महोदय -- माननीय मंत्री जी ने जवाब रख दिया है.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- आप पर हमें पूरा भरोसा है.

          श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- सभापति महोदय जी, मैं आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हॅूं.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- माननीय मंत्री जी, थोड़ी राशि बढ़ा दीजिए.

          सभापति महोदय -- ओमकार जी, माननीय मंत्री की बात रखिए.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय सभापति महोदय, एक मिनट का समय मैं पहले भी मांग रहा था क्‍योंकि श्रम से जुड़ा हुआ मामला है. जब श्रम विभाग के बारे में बोल रहे थे तो मैं निवेदन कर रहा था कि आप केन्‍द्र सरकार में कोल इंडिया मिनिस्‍टर थे. मेरा विधानसभा क्षेत्र परासिया है. उसमें कोल की काफी खदानें हैं और आपका दौरा काफी समय चलता था. मध्‍यप्रदेश सरकार से जब राजपत्र जारी होता है मजदूरों के लिए, अर्द्धकुशल और कुशल के संबंध में तो उसमें मेरे विधानसभा क्षेत्र में बहुत सी माइन प्राइवेट सेक्‍टर में आ रही हैं. डालमिया चला रहा है, बिड़ला चला रहा है लेकिन उनका वेतन निर्धारित नहीं हो रहा है.

          सभापति महोदय -- बाल्‍मीक जी, आप माननीय मंत्री जी से मिल लीजिएगा.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

7.09 बजे

 बधाई

          सभापति महोदय -- माननीय सभी सदस्‍यों को रंगपंचमी पर्व की बहुत-बहुत शुभकामनाएं.

          विधान सभा की कार्यवाही गुरूवार, 20 मार्च, 2025 को प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्‍थगित.

          अपराह्न 7.10 बजे विधान सभा की कार्यवाही गुरूवार, 20 मार्च, 2025 (29 फाल्‍गुन, शक संवत् 1946) को प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्‍थगित की गई.

 

भोपाल                                                                                    ए.पी.सिंह,

दिनांक : 18 मार्च 2025                                                             प्रमुख सचिव,

                                                                                     मध्‍यप्रदेश विधानसभा