
मध्यप्रदेश विधान सभा
की
कार्यवाही
(अधिकृत विवरण)
__________________________________________________________
षोडश विधान सभा नवम् सत्र
फरवरी-मार्च, 2026 सत्र
मंगलवार, दिनांक 17 फरवरी, 2026
(28 माघ, शक संवत् 1947)
[खण्ड- 9 ] [अंक- 2 ]
__________________________________________________________
मध्यप्रदेश विधान सभा
मंगलवार, दिनांक 17 फरवरी, 2026
(28 माघ, शक संवत् 1947)
विधान सभा पूर्वाह्न 11.00 बजे समवेत हुई.
{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}
निधन का उल्लेख
(1) श्री अजित पवार, उप मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र शासन,
(2) श्री सुरेश कलमाडी, भूतपूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री,
(3) श्री कन्हू चरण लेंका, भूतपूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री,
(4) दिनांक 31 दिसम्बर, 2025 को असम में हुए हादसे में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल के शहीद जवान तथा
(5) दिनांक 22 जनवरी, 2026 को जम्मू संभाग में सैन्य वाहन के खाई में गिरने से सेना के शहीद जवान एवं अनेक हताहत जवान.


मुख्यमंत्री (डॉ. मोहन यादव)- माननीय अध्यक्ष जी, मुझे सदन को, जैसा कि आपने उल्लेख किया है कि महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री माननीय श्री अजित पवार जी का दिनांक 28 जनवरी, 2026 और भूतपूर्व केन्द्रीय राज्य मंत्री श्री सुरेश कलमाडी जी, भूतपूर्व राज्य मंत्री श्री कन्हू चरण लेंका जी का निधन 13 फरवरी, 2026 को हुआ है.
अध्यक्ष महोदय, श्री अजित पवार जी का जैसा कि आपने उल्लेख किया है, वह मेरे भी व्यक्तिगत परिचित थे. वह बहुत अलग प्रकार के व्यक्ति थे. वह अभी हमारे दल के साथ तो उप मुख्यमंत्री के रूप में सरकार में शामिल भी थे. विकास के प्रति, किसानों के प्रति और कई-कई कारणों से उनकी अपनी एक अलग शख्शियत थी और वर्ष 1991 की लोक सभा के बाद लगातार विधान सभा के वह न केवल माननीय सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए, बल्कि उप मुख्यमंत्री बनकर भी उन्होंने बड़ी विनम्रता के साथ सभी लोगों, वर्गों की सेवा के लिये लगातार काम किया. दिनांक 28 जनवरी, 2026 को बारामती एयरपोर्ट पर लेंडिग के समय जो दुखद हादसा हुआ उसमें स्व. श्री अजित पवार जी का निधन हुआ, यह अत्यंत कष्टकारी है. तथा उनके साथ ही सुरक्षा कर्मी, पायलेट, सह पायलेट तथा क्रू मेंबर का भी निधन हुआ, जिसमें हमारे प्रदेश की शांभवी पाठक, जो मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले की ही रहने वाली हैं.
मैं भी सदन के साथ श्री अजित पवार और उनके सभी साथी जो इस दुखद घटना के शिकार हुए उन सबके लिये श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.
श्री सुरेश कलमाडी जी के बारे में, जैसा आपने बताया है कि उनका जन्म 01 मई, 1944 मद्रास, तमिलनाडु में आपका जन्म हुआ, उन्होंने कांग्रेस के बहुत सारे अलग-अलग दायित्वों का निर्वहन किया है. ओलंपिक संघ के समय भी हमने उनको देखा और खासकर के एथेलेटिक्स के प्रति उनकी रूचि भी अत्यंत अलग प्रकार की रहती थी. आप राज्य सभा में वर्ष 1982, 1988, 1994, 1998 में लगातार सदस्य रहे और उसके बाद ग्यारहवीं, चौदहवीं, पंद्रहवीं लोक सभा में लगातार सदस्य निर्वाचित हुए. हम सब के लिये उनका जाना भी कष्टकारी है. हमने एक वरिष्ठ नेता और कुशल प्रशासक खोया है.
श्री कन्हू चरण लेंका का दिनांक 2 मार्च, 1939 को ग्राम अरडा, जिला कटक, उड़ीसा के आप रहने वाले थे. आपने कांग्रेस के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया है. आपके निधन ने भी एक वरिष्ठ नेता और कुशल प्रशासक खोया है.
दिनांक 31 दिसम्बर, 2025 को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में तैनात कांस्टेबल श्री सुनील कुमार एक हादसे के शिकार हुए. श्री सुनील कुमार भिण्ड जिले के हमारे अपने राज्य के ग्राम खरौली के निवासी थे. यह सदन शहीद सुनील कुमार जी को श्रद्धांजली अर्पित करता है.
जम्मू- कश्मीर के डोडा भद्रवाह, चंबा में एक सैन्य वाहन खाई में गिरने से श्री शैलेन्द्र सिंह भदौरिया, भारतीय सैना के अन्य जवानों के साथ शहीद हुए, अनेक जवान घायल हुए. मूलत: श्री भदोरिया जी हमारे प्रदेश के भिण्ड जिले के निवासी थे. यह सदन दुखद हादसे में शहीद श्री शैलेन्द्र सिंह भदौरिया को भी श्रद्धांजली अर्पित करता है.
मैं अपनी ओर से, राज्य सरकार की ओर सभी दिवंगतों को श्रद्धांजली अर्पित करता हूं.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंघ सिंघार) - माननीय अध्यक्ष महोदय, निश्चित तौर से कोई लोकप्रिय जन नेता, कुशल प्रशासक, सैनिक या आम व्यक्ति, जो जन सेवा में लगे हैं और असामयिक उनकी मृत्यु हो जाती है, तो निश्चित तौर से समाज को, इस राष्ट्र को, इस प्रदेश को एक क्षति होती है, जो अपूरणीय होती है. दिनांक 22 जुलाई, 1959 में श्री अजित पवार जी का जन्म हुआ. जिन्हें महाराष्ट्र के अंदर अजित दादा के नाम से जाना जाता था और बारामती से उनका विशेष प्यार था. जैसा उनके बारे में बताया जाता था कि वह सुबह 6-7 बजे तैयार होकर आम जनता से मिलने के लिये बैठ जाते थे और जब तक रहते थे, जब तक आखिरी व्यक्ति से नहीं मिल लें. वह आठवें उप मुख्यमंत्री रहे. लेकिन उन्हें नहीं पता था कि मैं जिस विधान सभा, जिस क्षेत्र से आता हूं कि यह यात्रा मेरी अंतिम यात्रा होगी. ईश्वर को ही हम कह सकते हैं कि उनको पता रहता है कि नियति में क्या है. अध्यक्ष महोदय, मैं समझ सकता हूं कि उस समय हृदय विदारक स्थिति क्या रही होगी. हमारे मध्यप्रदेश की, ग्वालियर की सह-पायलट कैप्टन बहन शांभवी पाठक, वह भी उसमें थीं, अन्य साथी भी थे. सुरक्षाकर्मी भी थे. मैं कह सकता हूं कि महाराष्ट्र की राजनीति के अंदर ऐसे अध्याय को विराम लग गया, जो निश्चित तौर से आने वाले समय में प्रदेश के मुख्यमंत्री होते. लेकिन अंत में यही कहना चाहता हूं कि नियति में हमेशा जो तय रहता है. मैं श्री अजीत पवार जी को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं.
श्री सुरेश कलमाडी जी, जो भारतीय एथलेटिक्स संघ के अध्यक्ष थे, जिन्होंने देश के अंदर खेलों को लेकर एक जागरूकता, ओलम्पिक, एथलेटिक्स को बढ़ावा देने को लेकर हमेशा काम किया. मैं समझता हूं कि खेलों में उनकी विशेष रुचि थी. उनके परिवार के प्रति भी मैं संवेदना प्रकट करता हूं. ईश्वर उनके परिवार को इस शोकाकुल स्थिति में शक्ति दे.
श्री कन्हू चरण लेंका जी एवं श्री सुनील कुमार जी जो भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में कांस्टेबल थे, साथ ही श्री शैलेन्द्र सिंह भदौरिया जी, चंबा में सैन्य वाहन के खाई में गिरने से उनकी मृत्यु हो गई. ये असामयिक मृत्यु हुईं. इन सभी परिवारों के प्रति मैं अपनी ओर से एवं अपने दल की ओर से शोक संवेदना व्यक्त करता हूं.
साथ में भागीरथपुरा के 35 परिवार, उन परिवारों के प्रति भी मैं अपनी ओर से एवं मेरे दल की ओर से संवेदना प्रकट करता हूं, श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं क्योंकि पानी पिलाना सरकार की जवाबदारी थी, लेकिन उनको शुद्ध जल नहीं पिला पाई. उनसे टैक्स के पैसे जरूर ले लिये. ऐसे समय में अगर उनको इन दो पन्नों के अंदर श्रद्धांजलि नहीं दे सकते तो यह बड़े दुःख की बात है. मैं चाहता हूं कि सामूहिक रूप से उनको भी श्रद्धांजलि होना चाहिए, उन परिवारों के प्रति भी संवेदना प्रकट होनी चाहिए.
अंत में, मैं उन शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं, दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.
अध्यक्ष महोदय - मैं सदन की ओर से शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं. अब सदन कुछ समय मौन रहकर दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करेगा.
(सदन द्वारा कुछ समय मौन रहकर दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई.)
दिवंगतों के सम्मान में सदन की कार्यवाही 10 मिनट तक के लिए स्थगित.
(11.14 बजे सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित की गई.)
11.23 बजे
{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}
अध्यक्ष महोदय -- आज का दिन बहन विधायकों के लिए समर्पित है. श्रीमती सेना महेश पटेल जी.
11.23 बजे
तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर
प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत प्रदान राशि
[पंचायत एवं ग्रामीण विकास]
1. ( *क्र. 161 ) श्रीमती सेना महेश पटेल : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वित्तीय वर्ष 2024-25 से प्रश्न दिनांक तक अलीराजपुर जिले की जनपद एवं जिला पंचायतों द्वारा मनरेगा योजना के तहत पुल, पुलिया, स्टाप डेम (पक्के निर्माण कार्य), सुदूर सड़क निर्माण कार्यों के लिए कितने कार्य स्वीकृत किए गए हैं? सूची बताएं। अगर नहीं किए गए तो क्यों? कब तक स्वीकृत किए जाएंगे? अवधि की जानकारी दें। (ख) प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत वर्ष 2024-25 से प्रश्न दिनांक तक अलीराजपुर जिले की पंचायतों को प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत कितनी राशि प्रदान की गई है? सूची दें। यदि प्रदान नहीं की गयी तो क्यों? (ग) क्या प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना की राशि अन्य जिलों को दी गई है, लेकिन अलीराजपुर को नहीं? यदि हाँ, तो जिले की पंचायतों को राशि कब तक उपलब्ध कराई जायेगी? अवधि की जानकारी दें।
पंचायत मंत्री ( श्री प्रहलाद सिंह पटैल ) : (क) अलीराजपुर जिला अंतर्गत जनपद व जिला स्तर से मनरेगा योजना अंतर्गत वर्ष 2024-25 से प्रश्न दिनांक तक कुल 63 कार्य स्वीकृत किए गये हैं, जो- निम्नानुसार है :- पुल/पुलिया-54 कार्य, स्टॉपडेम-09 कार्य, सुदूर सड़क-00 कार्य, उक्तानुसार कुल 63 कार्य नियमानुसार स्वीकृत किये गये हैं। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। जिला एवं जनपद पंचायतों का 60 : 40 का अनुपात संधारण नहीं होने के कारण वर्ष 2024-25 में सुदूर सड़क की नवीन स्वीकृति नहीं की गई। भारत सरकार ग्रामीण विकास मंत्रालय के अर्द्धशासकीय पत्र क्रमांक J-11017/01/2025-RE-VII, दिनांक 20 मई, 2025 द्वारा महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत ग्रामीण संयोजकता के कार्य हेतु मार्गदर्शिका दिशा-निर्देश जारी किये जा रहे हैं। उक्त निर्देशों के परिपालन में आयुक्त म.प्र. राज्य रोजगार गांरटी परिषद के पत्र क्रमांक 844, दिनांक 27.05.2025 के माध्यम से आगामी आदेश तक खेत सड़क/सुदूर सड़क के नवीन कार्य नहीं लिये जाने के निर्देश जारी किये गये हैं। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ख) प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के अंतर्गत जिले को प्रश्न दिनांक तक राशि प्राप्त नहीं हुई है। शेष प्रश्न विभाग से संबधित नहीं है। (ग) विभाग से संबधित नहीं है। परिशिष्ट - "एक"
श्रीमती सेना महेश पटेल -- धन्यवाद अध्यक्ष महोदय.
अध्यक्ष महोदय -- आप अपना प्रश्न क्रमांक बोलिए.
श्रीमती सेना महेश पटेल -- मेरा प्रश्न 1 (क्र. 161) है.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रख दिया गया है.
अध्यक्ष महोदय -- माननीय सदस्या, अपना पूरक प्रश्न करें.
श्रीमती सेना महेश पटेल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, वित्तीय वर्ष 2024-25 से प्रश्न दिनांक तक अलीराजपुर जिले के जनपद और जिला पंचायतों द्वारा मनरेगा योजना के तहत पुल-पुलिया, स्टॉप डेम, पक्के निर्माण कार्य, सुदूर सड़क निर्माण कार्य के लिए कितने कार्य स्वीकृत किए गए हैं, कृपया इसकी सूची बताइए.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल—माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे द्वारा उत्तर में माननीय सदस्य महोदया को जो सूचना दी थी उसमें बड़ा स्पष्ट किया था कि अलीराजपुर में मजदूरी एवं मटेरियल का जो रेशो था वह वहां पर सही नहीं होने के कारण यह बाकी काम नहीं हुए हैं लेकिन ऐसा नहीं है कि वहां पर काम नहीं हुए हैं. अलीराजपुर में 23 हजार काम कुल स्वीकृत हुए हैं जिसमें से 17 हजार काम अभी चल रहे हैं उसमें से 6 हजार 247 काम पूरे हो गये हैं. अगर मैं धनराशि की बात करूंगा तो 2023-24 में 69 करोड़ 15 लाख रूपये खर्च हुए. 2024-25 में 151 करोड़ रूपया वहां पर खर्च हुए हैं. 2025-26 वर्तमान में वित्तीय वर्ष में उसमें 99.5 करोड़ रूपये खर्च हुए हैं. इसलिये वहां पर कार्यों की कोई कमी नहीं है. लेकिन खेत-सड़क या सुदूर सड़क वह जहां पर रेश्यो ठीक नहीं था. मैंने यह बात पिछली बार सत्र में कही भी थी फिर भी मैंने उन जनपदों को एक करोड़ रूपये दिया था. बाकी जहां पर रेश्यो ठीक था उन जनपदों को 3-3 करोड़ रूपये दिये गये थे इसलिये कामों की संख्या पर्याप्त है जो कि वहां पर चल रहे हैं.
श्रीमती सेना महेश पटेल—अध्यक्ष महोदय, मैं अपने प्रश्न के उत्तर से पुनः गंभीर असंतोष व्यक्त करते हुए सरकार का ध्यान जमीनी वास्तविकता की ओर आकर्षित करना चाहती हूं. माननीय मंत्री जी ने वर्ष 2024-25 में मनरेगा के अंतर्गत 63 कार्यों की स्वीकृति बतायी है. 54 पुल-पुलिया, 9 स्टॉफ डेम और सुदूर सड़क जीरो यह अत्यंत चिन्ताजनक है. पूरे आदिवासी अंचल में एक भी सड़क निर्माण कार्य स्वीकृत नहीं हुआ. मैं सदन को स्पष्ट करना चाहती हूं कि यह जो स्वीकृति 1.7.2024 से पहले की है. इसके बाद बीते लगभग 17 महीने में जिले के 6 विकासखण्ड की 288 पंचायतें और 552 ग्रामों में 500 से अधिक प्रस्ताव लंबित है. पर कोई नया पक्का निर्माण कार्य स्वीकृत नहीं हुआ है. मंत्री जी 60/40 अनुपात और 20 मई 2025 के निर्देश का हवाला दिया गया है. यदि अनुपात संतुलित नहीं था तो इसे संतुलित करने के लिये क्या कदम उठाये गये हैं ? क्या किसी अधिकारी की जवाबदारी तय की गई है ? प्रशासनिक त्रुटियों का भार ग्रामीण एवं आदिवासी जनता पर क्यों डाला जा रहा है ? जमीनी हकीकत यह है कि सड़कें जर्जर हैं, पुल-पुलिया क्षतिग्रस्त हैं या अधूरे हैं. वर्षा ऋतु में कई गांवों का सम्पर्क आपस में कट जाता है जिसके कारण जैसे गर्भवती महिलाएं अस्पताल में नहीं पहुंच पाती हैं. बच्चों की पढ़ाई स्कूल न पहुंचने के कारण बाधित होती है और किसानों को अपनी रोज की समस्याएं हैं उनका समाधान नहीं कर पाते हैं. अतः मैं सरकार से स्पष्ट और समयबद्ध मांग करती हूं कि लंबित पुल-पुलिया या सुदूर सड़कों का निर्माण कब तक किया जाये ? मनरेगा अंतर्गत प्रस्तावित कार्य की स्वीकृति के लिये निश्चित समय सीमा बताई जाये ? अलीराजपुर जैसे आदिवासी जिलों के लिये विशेष निर्माण पैकेज की घोषणा की जाये. लंबित मजदूरी और ग्रामीण बिलों का भुगतान तुरंत किया जाये. अंत में मैं मांग करती हूं कि जिस प्रकार से प्रस्तावित सूची इस पटल पर रखती हूं. मेरी यह भी मांग रहेगी कि जिस प्रकार से पंचायती राज लागू हुआ करता था. पंचायती राज पुनः लागू किया जाये और सरपंचों को अधिकार दिये जायें.
अध्यक्ष महोदय—मेरा माननीय सदस्यों से यह अनुरोध है कि जब हम प्रश्न लगाते हैं तो उत्तर अपने पास में आ जाता है. उसमें से सप्लीमेन्ट्री प्रश्न क्या पूछने हैं वह स्पेसिफिक लिखकर के रखेंगे. दो प्रश्न हम पूछ सकते हैं. आप लोग कोशिश करके अध्ययन करके चार पूरक प्रश्न लिखकर के रखें चार प्रश्नों में से जो आपके क्षेत्र के लिये प्रश्न ज्यादा उपयोगी हो. ऐसे दो प्रश्न आप पूछें. आप प्रश्न इस तरह पूछेंगे तो उसका उत्तर सीधा आ जायेगा. हम लोग उत्तर और प्रश्न को ही पढ़ते रहते हैं इसमें थोड़ा समय भी जाता है. माननीय मंत्री जी.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल – माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपको धन्यवाद देता हूं. मनरेगा से संबंधित आगे के भी जो प्रश्न है, मैं आपके माध्यम से सदन को दो तीन जानकारी देना चाहता हूं. 192 जनपदें ऐसी थीं, जहां पर रेश्यो ठीक था, वहां पर खेत और सुदूर सड़क बनी हैं, ये इसका उदाहरण है. इसलिए यह मत कहो कि किसी जिले के साथ भेदभाव हुआ है. 192 जनपद है, जहां पर खेत सड़क और सुदूर सड़क बनी है, लेकिन अलीराजपुर और झाबुआ जैसे जो जिले हैं, वहां पर जो पहले चरण में सड़कें बननी थी, क्योंकि वह तो ट्रायबल जिले थे, अब जिन भी कारणों से वह चीज रही हो, लेकिन प्रधानमंत्री योजना का जो चौथा चरण है, उसमें 500 की आबादी वाले गांव स्वाभाविक जुड़ रहे हैं, खासकर के जो फाल्या वहां पर है और उनकी आबादी कम है, तो बकायदा मैपिंग में भी ऐसी कोशिश की गई है कि जब भी वह जुड़े तो बाकी गांव भी उसमें जुड़ते जाएं और जो गांव उसमें रह जाएंगे, तो माननीय मुख्यमंत्री जी ने उसमें योजना दी है, मुख्यमंत्री सड़क योजना. अभी तक बसाहट को लेकर यह तय नहीं था कि हम किसे बसाहट मानंगे. इसलिए मैं सदन को बताना चाहता हूं कि हम कई बार आवेदन मिलता है और एक प्रश्न इसमें लगा भी है, जिसमें न तो 20 मकान है, न 100 की आबादी है, न 6000 वर्गमीटर की आबादी का क्षेत्र है. अब बकायदा सरकार ने बसाहट की परिभाषा तयकर दी है, इसमें या तो 20 मकान हो या 100 की आबादी हो या 6000 वर्गमीटर में कोई आवासीय व्यवस्था हो, तो सरकार उसको जोड़ेगी और अभी तक मध्यप्रदेश ने सेटेलाइट्स से 20 हजार 600 बसाहटों को चिन्हित किया है जिसमें जनजाति क्षेत्रों के जो जिले है, जैसे झाबुआ, धार, डिण्डोरी, मंडला, अलीराजपुर हो सामान्यत: दूरियां यहीं पर थी, उसमें अधिकांश कवर हो रहे हैं और हमने तीनों में लिखा है टोला, मजरा और फाल्या ताकि यह कन्फयूजन न हो कि क्योंकि झाबुआ और अलीराजुपर को फाल्या कहते हैं तो बिल्कुल साफ परिभाषा है, इसलिए मुझे नहीं लगता कि किसी माननीय विधायक को इसमें प्रश्न लगाना पड़ेगा इसके बाद की इतर कनेक्टिविटी होती है तो सोचना चाहिए. दूसरा ड्यूल कनेक्टिविटी भारत सरकार नहीं करती है, प्रधानमंत्री सड़क योजना की 500 की आबादी की सड़क जुड़ भी जाएगी तो भी ड्यूल कनेक्टिविटी भारत सरकार नहीं करती है. इसलिए जी-राम-जी में हमने इस बात का प्रावधान किया है तो मुझे लगता है कि सदन इससे सहमत होगा कि दो सड़कों के बीच का जो गैप है, उसको पहले कर दिया जाए. क्योंकि जो भारत सरकार की गाइड लाइंस है, उसमें एक पंचायत को सड़क के लिए 20 लाख रुपए देंगे अगर हम 16 लाख रुपए में एक किलोमीटर सड़क बनाते हैं और दूसरी पंचायत से अगर बनता है तो हम उस कनेक्टिविटी को पूरा कर लेंगे, तो शायद हम बेहतर काम कर पाएंगे बजाए छोटी सड़कों के, बाकी जो पैसा आपके पास है, उससे हम छोटी सड़को को जोड़ सकते हैं.
श्री अभय मिश्रा – अध्यक्ष जी, सवाल रोजगार गारंटी का है, उसमें भी उत्तर पीएम योजना का जोड़ दिया.
अध्यक्ष महोदय – आज महिलाओं का दिन है, श्रीमती अनुभा मुंजारे जी.
श्रीमती सेना महेश पटेल – सर, सड़कें कब तक बनेगी, मेरा जवाब.
अनियमितताओं पर अनुशासनात्मक कार्यवाही
[पंचायत एवं ग्रामीण विकास]
2. ( *क्र. 143 ) श्रीमती अनुभा मुंजारे : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या म.प्र. शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मंत्रालय, वल्लभ भवन, भोपाल द्वारा ग्राम पंचायत सचिवों के संलग्नीकरण नहीं किए जाने के संबंध में आदेश क्रमांक/58/उ.स./वि-5/स्था./2024, भोपाल दिनांक 04.05.2024 जारी किया गया है? यदि हाँ, तो आदेश की प्रमाणित छायाप्रति उपलब्ध कराएं? क्या मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत बालाघाट द्वारा जिले की समस्त 10 जनपद पंचायतों में उक्त आदेश के जारी होने के पश्चात भी ग्राम पंचायत सचिवों का अन्य कार्यालय (जनपद पंचायतों) में संलग्नीकरण के आदेश जारी किए गए हैं? यदि हाँ, तो कब कब, किन-किन ग्राम पंचायत सचिवों के संलग्नीकरण आदेश जारी किए गए? आदेशों की प्रमाणित छायाप्रति सहित सूची उपलब्ध कराएं। (ख) क्या प्रश्नांश (क) में वर्णित आदेश में संलग्नीकरण का जारी किया गया आदेश नियम के विरुद्ध माना गया है तथा मान. उच्च न्यायालय द्वारा राज्य स्तर से इस तरह की त्रुटिपूर्ण कार्यवाही के संबंध में शपथ पत्र प्रस्तुत करने के आदेश दिए गए हैं एवं भविष्य में इस तरह की स्थिति विभाग के संज्ञान में आने पर संबंधित आदेश जारीकर्ता अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी? (ग) क्या प्रश्नांश (क) में वर्णित आदेश के परिपालन में राज्य स्तर से मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बालाघाट से शपथ पत्र लिया गया है? यदि हाँ, तो शपथ पत्र की प्रमाणित छायाप्रति उपलब्ध कराएं?
पंचायत मंत्री ( श्री प्रहलाद सिंह पटैल ) : (क) जी हाँ। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) जी हाँ। (ग) जी नहीं। प्रश्नांश ''क'' के उत्तर के अनुक्रम में आवश्यक भी नहीं।
श्रीमती अनुभा मुंजारे – माननीय अध्यक्ष जी, मेरा प्रश्न क्रमांक 143 है.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल – अध्यक्ष जी, उत्तर सभा पटल पर रख दिया गया है.
अध्यक्ष महोदय – अनुभा जी, पूरक प्रश्न करें.
श्रीमती अनुभा मुंजारे – अध्यक्ष जी, आज मंगलवार का दिन है. सभी मातृशक्तियों को प्रणाम करती हूं और सभी आदरणीय भाईयों को भी नमन करती हूं. माननीय मंत्री जी विभाग द्वारा मेरे प्रश्न के संबंध में जो जानकारी सदन में प्रस्तुत की गई है, इससे मैं पूर्णत: संतुष्ट नहीं हूं. मंत्री जी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, भोपाल के द्वारा, पत्र क्रमाक 58, दिनांक 4.5.2024 को जारी किया गया है, इसके आधार पर ग्रामीण स्तर पर पदस्थ सचिवों को मूल पदस्थापना से पृथक कर अन्य कार्यालय में संलग्न किए जाने पर संबंधित अधिकारी के ऊपर अनुशासनात्मक कार्यवाही किए जाने के स्पष्ट निर्देश हैं. लेकिन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत बालाघाट, श्री अभिषेक सराफ के द्वारा तारांकित प्रश्न में सचिवों के संलग्नीकरण की जानकारी असत्य एवं भ्रामक दी जाकर सदन को गुमराह किया गया है, उनके स्वयं के द्वारा कार्यालय जिला पंचायत बालाघाट के पत्र क्रमांक 6273, दिनांक 29.08.2025, पत्र क्रमांक 6422, दिनांक 06.09.2025, पत्र क्रमांक 7836, दिनांक 14.11.2025, नियम विरूद्ध जारी किए गए हैं. इसी प्रकार बालाघाट जिले के अन्य जनपद पंचायतों में, सचिवों को मूल पद स्थापना से जनपद कार्यालय में कार्य करने हेतु आदेशित किया गया है, जो राज्य शासन के आदेश का खुलेआम उल्लंघन है.
11.35 बजे स्वागत उल्लेख
डॉ.गौरीशंकर शेजवार, सरकार के पूर्व मंत्री और पूर्व नेता प्रतिपक्ष का सदन में स्वागत.
अध्यक्ष महोदय -- आज हम सबके लिये प्रसन्नता की बात है कि राज्य सरकार के पूर्व मंत्री और इस सदन में पूर्व नेता प्रतिपक्ष के रूप में भी जिन्होंने अपने दायित्व का निर्वहन किया है, ऐसे डॉ.गौरीशंकर शेजवार जी, दीर्घा में उपस्थित है. सदन में उनका सम्मान है, स्वागत है.
11.36 तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर....क्रमश:
श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- अध्यक्ष महोदय, जिन पत्रों का उल्लेख माननीय सदस्या ने किया है, यह सच है कि दिनांक-04/05/2024 को एक सकुर्लर निकला था कि निलंबन के अलावा कभी भी कोई अन्यान्य जगह पर सचिव को अटैच नहीं किया जा सकता है, अगर ऐसी कोई जानकारी जो सदन में दी गई है, तो हम इसकी जांच करायेंगे और कार्यवाही करेंगे.
श्रीमती अनुभा मुंजारे -- प्रश्नांक ''ख'' व ''ग'' में श्री अभिषेक सराफ, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत बालाघाट के द्वारा पटल पर असत्य व भ्रामक जानकारी प्रस्तुत की गई है और सदन को गुमराह किया गया है, ऐसे अधिकारी पर कठोर अनुशानात्मक कार्यवाही की जाना चाहिए ताकि भविष्य में जनप्रतिधियों के द्वारा लगाये गये प्रश्नों के उत्तर सदन में सही एवं तथ्यात्मक रूप से अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किये जाये. आदरणीय मंत्री महोदय, आपने जो जवाब दिया है, मैं उससे संतुष्ट हूं और मैं धन्यवाद देती हूं कि आपने कार्यवाही करने की यहां सदन में घोषणा की है, मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं, जय हिन्द, जय भारत.
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का क्रियान्वयन
[पंचायत एवं ग्रामीण विकास]
3. ( *क्र. 409 ) श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या दमोह जिला अन्तर्गत शासन द्वारा केन्द्र/राज्य परिवर्तित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, वाटर शेड विकास का विगत वर्षों से क्रियान्वयन किया जा रहा है? (ख) प्रश्नांश (क) यदि हाँ, तो जिला अंतर्गत वर्ष 2023 से प्रश्न दिनांक तक विकासखण्डवार किन-किन ग्राम पंचायतों के ग्रामों में उक्त योजना को स्वीकृति दी जाकर कार्य किये गये और कितने पूर्ण एवं कितने अपूर्ण रहे? स्वीकृत योजनानुसार बतावें। (ग) उपरोक्त उल्लेखित वर्षों में स्वीकृत योजनानुसार कितना-कितना बजट स्वीकृत होकर कितना-कितना व्यय किस-किस प्रकार के कार्यों पर किन-किन स्थानों पर किया गया? योजनानुसार, ग्रामवार, कार्यवार व्यय अनुसार बतावें। (घ) योजना क्रियान्वयन का कार्यादेश अवधि में किस-किस सक्षम अधिकारी द्वारा समय-समय पर स्थल निरीक्षण कर कार्यों की जांच एवं कार्यों की पूर्णता के संबंध में कब-कब कार्यवाही की? स्थल निरीक्षण की जांच एवं कार्यवाही की वर्षवार जानकारी दें।
पंचायत मंत्री ( श्री प्रहलाद सिंह पटेल ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र–अ अनुसार है। (ग) भारत शासन द्वारा परियोजनाओं की स्वीकृति के समय ही केवल एकजाई लागत स्वीकृत की जाती है। वर्षवार बजट की स्वीकृति नहीं दी जाती है। वर्षवार व्यय की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र–अ अनुसार है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-स अनुसार है।
श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक-409 है.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रख दिया गया है.
श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक -- अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी के द्वारा जो जानकारी उपलब्ध करवाई गई है, मैं उससे पूर्ण रूप से संतुष्ट हूं लेकिन जन कल्याण को देखते हुए अपूर्ण कार्यों को जितनी जल्दी हो सके, पूर्ण कर लिया जावे.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या बहुत वरिष्ठ विधायक हैं, मैं उस जिले से परिचित भी हूं, मैं उनको धन्यवाद भी करता हूं. लेकिन मैं उनसे भी आग्रह करता हूं कि एक सूची मैं उनको उपलब्ध करवा दूंगा, इसमें एक जानकारी के लिये जो सदन के लिये भी है कि वॉटर शेड दमोह में दो जगह पर है तेंदूखेड़ा और पटेरा जो माननीय विधायक महोदया का ब्लॉक है, उसमें वॉटर शेड विकास मद के लिये 67 स्थानों पर काम हो रहे हैं, उत्पादन प्रणाली का जो मद है, उसमें तेंदूखेड़ा में 232 और पटेरा में 176 जो सूची मैं माननीय विधायक महोदया को उपलब्ध करवा दूंगा और आजीविका मिशन के लिये 55, इस प्रकार से कुल मिलाकर तीन मद होते हैं और तीनों मदों में जो अपूर्ण कार्य होंगे, उसकी मॉनिटरिंग बकायदा जो जिला परियोजना अधिकारी है, उसको प्रति माह करने का है कि उसको प्रति माह करना होगा और जो जिला पंचायत सी.ई.ओ. हैं, उनको तीन माह में एक बार करना पड़ेगा, मैंने बकायदा पूरी सूची मांगी है कि कब-कब, कौन-कौन गया है और वह सूची अगर वह चाहेंगी तो मैं उपलब्ध भी करवा दूंगा और उसके संबंध में व्यक्तिगत तौर पर उनसे बात करके मैं कहूंगा कि क्या और हम कर सकते हैं.
अध्यक्ष महोदय -- श्रीमती उमादेवी अब तो कोई प्रश्न नहीं है, आप पूरी तरह संतुष्ट हैं.
श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक -- अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहती हूं कि जो विभाग द्वारा जिला स्तरीय जांच हुई है, मैं उसमें बिल्कुल संतुष्ट नहीं हूं, प्रदेश स्तर से टीम भेजकर जांच कराई जाये और मेरे समक्ष वह जांच हो(मेजों की थपथपाहट) मैं ऐसा चाहती हूं.
अध्यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी आप इस संबंध में कुछ कहना चाहेंगे.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- अध्यक्ष महोदय, एक बार जांच हो गई है और इसलिए मुझे लगता है कि अगर उनकी ऐसी इच्छा है तो मैं उनसे बात कर लूंगा, लेकिन दोबारा उसी काम की जांच कराना क्योंकि वह जांच कलेक्टर और जिला पंचायत सी.ई.ओ. के लेवल पर हुई है, कोई तकनीकी अधिकारी भी उसमें था, लेकिन अगर उनकी इच्छा होगी तो उस पर विचार कर लेंगे.
अध्यक्ष महोदय -- श्रीमती उमादेवी जी आप माननीय मंत्री जी से मिलकर जो अतिरिक्त कोई प्रश्न आपके मन हो, तो आप अवगत करा देना.
श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक -- जी अध्यक्ष महोदय, आपका बहुत- बहुत धन्यवाद.
एन.एफ.एस.एम. के तहत बीजों का प्रदाय
[किसान कल्याण एवं कृषि विकास]
4. ( *क्र. 472 ) श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर : क्या किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विकासखण्ड बल्देवगढ़ एवं पलेरा में एन.एफ.एस.एम. योजना के तहत प्रर्दशन गेहूं, चना, सरसों, मसूर किन-किन किसानों को प्रदाय किया गया? किसान का नाम, पता, प्रदाय दिनांक सहित जानकारी उपलब्ध करायें। (ख) कृषि विभाग बल्देवगढ़ और पलेरा द्वारा ऑनलाईन आवेदन कर या ऑफलाईन से कितने-कितने किसानों को वर्ष 2018 से प्रश्न दिनांक तक गेहूँ, चना, सरसों, मसूर के बीज दिये गये हैं? संपूर्ण किसानों की सूची, नाम, पता, ग्रामवार एवं हस्ताक्षर सहित उपलब्ध करायें। (ग) ग्रीष्मकालीन समय में बल्देवगढ़ एवं पलेरा क्षेत्र के कितने किसानों को खाद (रासायनिक खाद) एवं बीज वर्ष 2018 से प्रश्न दिनांक तक उपलब्ध कराया गया? संपूर्ण सूची ग्रामवार, किसान का नाम, पिता का नाम, प्राप्ति के हस्ताक्षर, सहित उपलब्ध करायें। (घ) क्या यदि वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी बल्देवगढ़ एवं पलेरा द्वारा फर्जीवाड़ा किया गया है तो इसकी जांच कराकर कार्यवाही करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? कारण स्पष्ट करें।
किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री ( श्री एदल सिंह कंषाना ) :

श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक- 472 है.
श्री एदल सिंह कंषाना -- अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रख दिया गया है.
श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर -- अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के उत्तर में संशोधित सूचना माननीय मंत्री जी द्वारा जो दी गई है, मैं उसको स्वीकार करती हूं. और जो प्रश्न उत्तरी की पुस्तिका में लिखा गया है कि जानकारी एकत्रित की जा रही है मैं उसको भी स्वीकार करती हूं, लेकिन विभाग के जिन अधिकारियों द्वारा माननीय मंत्री जी को एवं मुझे जो असत्य जानकारी दी है उसका जिक्र करना चाहती हूं कि जमना तनय, कामता सामान्य जाति का ग्राम सुजानपुरा का कोई भी किसान नहीं है. दूसरा आलम तनय, नारायण सिंह, सुभम तनय, नारायण सिंह ठाकुर ग्राम देवपुर में भी नहीं है इसलिये माननीय अध्यक्ष महोदय मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करती हूं कि इस प्रकार की असत्य जानकारी देने वाले अधिकारी की जांच कराई जाये और मुझे किसानों के हस्ताक्षर, अंगूठा निशानी पावती सहित जानकारी उपलब्ध कराई जाये.
श्री ऐदल सिंह कंषाना-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने कहा है कि हमें अंगूठा निशानी या सदस्यों के नाम बतायें. माननीय सदस्य को मैं आश्वासन देता हूं कि इसकी हम किसी वरिष्ठ अधिकारी से जांच करा लेंगे और अगर कोई ऐसा दोषी है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जायेगी.
श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को आपके माध्यम से बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं.
खेल मैदान एवं खेल सामग्री की उपलब्धता
[पंचायत एवं ग्रामीण विकास]
5. ( *क्र. 30 ) श्री घनश्याम चन्द्रवंशी : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शासन द्वारा प्रत्येक ग्राम में खेल मैदान बनाये जाने की योजना प्रस्तावित थी? वर्तमान में कालापीपल विधानसभा के कितने ग्रामों में खेल मैदान बनाये गए हैं? (ख) क्या विभाग द्वारा ग्रामीण खेलों को बढ़ावा देने के लिए कबड्डी मेट तथा अन्य खेल सामग्री ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराई जाती है? (ग) यदि हाँ, तो कालापीपल विधानसभा के कितने ग्रामों में कबड्डी मेट उपलब्ध कराई गई, शेष बचे ग्रामों के लिए भी क्या कोई योजना विभाग के पास है?
पंचायत मंत्री ( श्री प्रहलाद सिंह पटैल ) : (क) मनरेगा योजनांतर्गत प्रत्येक ग्राम में खेल मैदान बनाये जाने की योजना है। वर्तमान में कालापीपल विधानसभा के 97 ग्रामों में खेल मैदान बनाए गए हैं, जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) मनरेगा योजनांतर्गत ग्रामीण खेलों को बढ़ावा देने के लिए कबड्डी मेट तथा अन्य खेल सामग्री उपलब्ध कराये जाने का प्रावधान नहीं है। (ग) प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
श्री घनश्याम चन्द्रवंशी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 30 है.
श्री प्रहलाद सिंह पटैल-- माननीय अध्यक्ष जी, उत्तर सभा पटल पर रख दिया गया है.
श्री घनश्याम चन्द्रवंशी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न था कि कालापीपल विधान सभा में कितने खेल मैदान हैं. माननीय मंत्री जी के माध्यम से जो जवाब आया है कि 97 खेल मैदान विधान सभा में हैं, चूंकि मैं विधान सभा में घूमता हूं मुझे जानकारी है कि राजस्व द्वारा और पंचायत द्वारा कोई भी, सिर्फ दो खेल मैदान ऐसे मेरी विधान सभा क्षेत्र में हैं कि जिनको जमीन आवंटित है, बाकी जो मंत्री जी ने कहा है कि मनरेगा के माध्यम से बाकी के मैदान डेवलप किये गये हैं, लेकिन वह जगह जो है शायद शासकीय स्कूलों की है, यह जवाब मुझे मिला है. मेरा यह पूछना है कि इसमें पंचायत के द्वारा राजस्व से मांग करके कितने खेल मैदान डेवलप किये गये यह माननीय मंत्री जी से मेरा प्रश्न था, शायद इस प्रश्न को विभाग समझ नहीं पाया.
श्री प्रहलाद सिंह पटैल-- माननीय अध्यक्ष जी, प्रश्न राजस्व का नहीं लिखा था कुल मैदान, मैदान और स्टेडियम दो अलग-अलग व्यवस्थायें हैं. ग्रामीण क्षेत्र में स्टेडियम भी बने हैं, स्टाम्प ड्यूटी से या बाकी से बने हैं, लेकिन बने हैं, उसकी भी संख्या बुलवाई थी और जो मैदान हैं वह वर्ष 2025-26 में 557 बने हैं, उससे पहले वाले वर्ष में 1897 हैं. जहां तक सवाल मनरेगा से काम कराने का अध्यक्ष जी अगर कोई पंचायत किसी स्कूल के मैदान के समतलीकरण में अगर मनरेगा का पैसा लगाती है तो इसमें कोई रोक नहीं है. इसलिये मनरेगा का काम जहां पर हुआ है उन्हीं स्थानों की गिनती पंचायत के हिसाब से विभाग ने दी है अगर कोई अन्य जैसा उन्होंने कहा है कि राजस्व की जमीन पर आवंटित जगह पर काम कराना है तो अगर वह कहेंगे और अगर बैकअप की जरूरत पड़ेगी तो वह बैकअप भी मैं उन्हें भिजवा दूंगा क्योंकि वह पंचायत तय करती है कि इसका कहां पर समतलीकरण करना है, यह विभाग तय नहीं करता.
श्री घनश्याम चन्द्रवंशी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि विकसित भारत-जी राम जी के तहत क्या खेल मैदान बनाने की अनुमति मिल जायेगी. इसी के साथ क्या जगह आवंटित करने के लिये पंचायत आवेदन करके राजस्व से जगह खेल मैदान के नाम से आवंटित करवायेगी, क्योंकि पंचायत के अंदर पानी की व्यवस्था, स्वास्थ की व्यवस्था, साफ सफाई की व्यवस्था क्योंकि स्वायत्त इकाई है तो खेल मैदान की व्यवस्था भी पंचायत करे, इसलिये पंचायत की तरफ से राजस्व को, कलेक्टर को आवेदन जाये और सभी पंचायतों को.....
अध्यक्ष महोदय-- घनश्याम जी, प्रश्न तक सीमित रहें, आप एक प्रश्न कर लो.
श्री घनश्याम चन्द्रवंशी-- अध्यक्ष जी, मैं पूरक प्रश्न ही पूछ रहा हूं कि क्या पंचायत अपनी तरफ से आवेदन करके प्रत्येक पंचायत में एक खेल मैदान माननीय प्रधान मंत्री जी का जो सपना है कि खेलो इंडिया टेलेंट सर्च के माध्यम से जो गांव के बच्चे हैं उनके अंदर प्रतिभा है वह निकलकर आये तो पंचायत क्या आवेदन लगाकर जगह आवंटित कराएगी दूसरा पूरक प्रश्न यह है कि खेल सामग्री चूंकि यहां मुख्यमंत्री जी भी बैठे हैं.माननीय मंत्री जी भी हैं और खेल मंत्री यहां उपस्थित नहीं हैं लेकिन कबड्डी की मेट लगभग ढाई लाख रुपये की आती है हमारे यहां कोई भी ऐसा दानदाता नहीं है कि ढाई लाख की कबड्डी की मेट दे सके. लगभग 35 गांव ऐसे हैं.
अध्यक्ष महोदय - आप एक पूरक प्रश्न करो कि क्या जी रामजी योजना में खेल के मैदान को विकसित करने का काम लिया जा सकता है क्या. तो मंत्री जी आपको हां,ना में उत्तर देंगे.
श्री घनश्याम चन्द्रवंशी- यह प्रश्न मैं कर चुका हूं दूसरा एक और जोड़ना चाह रहा हूं.
अध्यक्ष महोदय - जोड़ना नहीं चाह रहे आप बहुत सारी चीजें जोड़ रहे हो अब बेट,बल्ला कौन लाकर देगा.मेरा कहना है कि जो आप ग्रामीण विकास मंत्री जी से पूछना चाहते हैं उसमें आपने योजना का जिक्र किया तो उसमें स्पेसिफिक पूछो तो हां,ना में जवाब मिलेगा.
श्री घनश्याम चन्द्रवंशी - वह भी प्रश्न किया है मैंने ख में कि क्या जी रामजी से खेल मैदान पंचायत आवंटित करवाकर उसका डेवलपमेंट कर सकती है क्या.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल - माननीय अध्यक्ष जी, इसमें भी खेल मंत्रालय का प्रश्न हमसे पूछा गया कि मेट देंगे कि नहीं यह तो ग्रामीण विकास मंत्रालय नहीं करता पर जी रामजी से खेल मैदान बन सकते हैं और उसके लिये जरूरी है कि अगर पंचायत अभी से पोर्टल पर डालेगी तो निश्चित रूप से उसमें कहीं संदेह नहीं है. मैंने उनको यह भी कहा है एक बात जरूर स्पष्ट कर देना चाहता हूं खेल मैदान पंचायत के स्वामित्व में होता है लेकिन अगर स्टेडियम है तो उसका स्वामित्व जनपद के पास है यह माननीय सदस्यों कोपता होना चाहिये इसीलिये प्रश्न लगाते समय उनने कबड्डी की मेट भी ग्रामीण विकास मंत्रालय से पूछी है अच्छा होता वह खेल मंत्रालय से पूछते तो ज्यादा बेहतर होता या वह विधायक निधि से दे सकते हैं लेकिन जी रामजी से मैदान बन सकते हैं.
अध्यक्ष महोदय - मैंने इसीलिये घनश्याम जी को सुधार करने की कोशिश की.
स्वागत उल्लेख
श्रीमती भारती पारधी, सांसद बालाघाट की सदन में उपस्थिति पर स्वागत
अध्यक्ष महोदय - श्रीमती भारती पारधी जी,माननीय सांसद बालाघाट,दीर्घा में उपस्थित हैं सदन की ओर से उनका स्वागत है.
न्यायालय आदेश के बाद भी तिलहन संघ सेवायुक्तों को वेतनमान न मिलना
[सहकारिता]
6. ( *क्र. 562 ) श्री केशव देसाई : क्या सहकारिता मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या म.प्र. राज्य तिलहन संघ के वे सेवायुक्त जो शासन के विभिन्न विभागों में पदस्थ हैं, को पांचवां वेतनमान लाभ प्रदान किये जाने संबंधी निर्णय दिनांक 30.11.1998 एवं दिनांक 19.05.2016 को (न्यायालयीन आदेशों के पालन में) आयोजित वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक में लिया गया था? कार्यवाही विवरण देंगे? (ख) यदि हाँ, तो उक्त निर्णयों के पालन में प्रशासकीय आदेश कब जारी किये गये? यदि जारी नहीं किये तो इसका क्या कारण है? (ग) क्या शासन स्वीकार करता है कि प्रशा. आदेश जारी न होने के कारण सेवायुक्तों को वित्तीय क्षति हुई है? यदि हाँ, तो क्या कार्यवाही प्रस्तावित है? (घ) क्या प्रमुख सचिव, सहकारिता विभाग द्वारा अप्रैल 2015 को विधिवत उच्च. न्यायालय जबलपुर में शपथ पत्र जमा कर दिया गया था कि तिलहन संघ सेवायुक्तों को शासन में संविलियन कर उन्हें नियमानुसार वेतनमान लाभ दिया जावेगा? शपथ पत्र की छायाप्रति देवें। (ड.) क्या न्यायालयीन आदेशों का पालन 10 वर्ष तक समय-सीमा में भी न किया जाना अवमानना की श्रेणी में आता है? पांचवां वेतनमान लाभ देने की समय-सीमा बतायेंगे? यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
सहकारिता मंत्री ( श्री विश्वास कैलाश सारंग ) : (क) अपर मुख्य सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग की अध्यक्षता में दिनांक 30.11.1998 को एवं मुख्य सचिव की अध्यक्षता में दिनांक 19.05.2016 को आयोजित बैठक का कार्यवाही विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 01 एवं 02 अनुसार है। (ख) शासन के विभिन्न विभागों में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ तिलहन संघ के कर्मचारियों के वेतनमान के निर्धारण के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग/वित्त विभाग द्वारा निर्देश जारी किये गये हैं। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। (ग) जानकारी उत्तरांश 'ख' अनुसार। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। (घ) जी नहीं, शपथ पत्र में तिलहन संघ के कर्मचारियों की स्थिति की जानकारी प्रस्तुत की गई थी। शपथ पत्र की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 03 अनुसार है। (ड.) म.प्र. राज्य सहकारी तिलहन संघ के शासन के विभिन्न विभागों में संविलियत कर्मचारियों को पांचवां एवं छठवां वेतनमान का लाभ प्रदाय किये जाने के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय में विभिन्न याचिकाएं/रिट अपील एवं अवमानना प्रकरण लंबित है। माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय उपरांत नियमानुसार कार्यवाही की जा सकेगी। प्रकरण न्यायालयीन प्रक्रिया में होने के कारण समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।
श्री केशव देसाई - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेर प्रश्न क्र.562
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - अध्यक्ष महोदय,उत्तर पटल पर रखा दिया गया है.
श्री केशव देसाई - अध्यक्ष महोदय,मेरे प्रश्न क और घ में उत्तर में शपथपत्र के बारे में जानकारी बताई है कि नहीं जबकि दिनांक 16.7.2024 को मेरे प्रश्न क्र. 3401 की जानकारी में बताया गया है कि शपथपत्र जमा किया है और दो साल पहले विभाग ने शपथपत्र जमा करवाया परन्तु आज विभाग बोल रहा है कि नहीं किया गया है दोनों जानकारियों में विभाग अपनी मनमर्जी से जवाब दे रहा है. घ में यह जानना चाहता हूं कि तत्कालीन प्रमुख सचिव,सहकारिता श्री अजीत केसरी द्वारा 2015 में माननीय उच्च न्यायालयजबलपुर में शपथपत्र दिया था तो उनके अनुरूप 10 वर्ष बीत जाने के बाद भी तिलहन संघ के शेष कर्मचारियों को पांचवां वेतनमान का लाभ क्यों नहीं दिया गया.
श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष महोदय, जितने भी तिलहन संघ के कर्मचारियों का लगभग 25 विभागों में संविलियन किया गया था उसमें अलग-अलग विभागों में यह सारे कर्मचारी कोर्ट में गये हैं और यह कोर्ट में लंबित है जैसे ही कोर्ट के निर्णय आते जा रहे हैं हम उनका निराकरण करते जा रहे हैं.
श्री केशव देसाई - अध्यक्ष महोदय, कोर्ट ने ही शपथ पत्र मांगे थेशपथ पत्र हमारे पास मौजूद हैं और देने के बाद ही आदेश हुआ तो 10 वर्ष में आज महंगाई कहां से कहां पहुंच गई है. मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि इन कर्मचारियों को पांचवां वेतनमान का लाभ कब तक दे दिया जायेगा. घ में बताया है उत्तर में कि 374 कर्मचारियों को पांचवां वेतनमान का लाभ दिया गया है.जबकि शेष 716 कर्मचारियों को विभागों में संविलियन कर लाभ दे दिया जाएगा. महिला एवं बाल विकास विभाग, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, नर्मदा घाटी विकास, राजस्व विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग...
अध्यक्ष महोदय -- केशव जी, आप प्रश्न तो करें. आप ऐसे प्रश्न ही पढ़ते रहेंगे तो फिर कैसे काम चलेगा. आप पूरक प्रश्न करें कि आप क्या चाहते हैं ?
श्री केशव देसाई -- अध्यक्ष महोदय, हम यह चाहते हैं कि पांचवां वेतनमान रिटायर्ड कर्मचारियों को मिलना चाहिए.
अध्यक्ष महोदय -- आप बैठिए. माननीय मंत्री जी, कुछ कहना चाहेंगे.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, 374 कर्मचारियों को पांचवें और छठे वेतनमान का लाभ दिया गया है. 716 कर्मचारियों को लाभ दिया जाना था, वह भी दे दिया गया है. 26 कर्मचारी ऐसे थे, जिनका संविलियन नहीं हुआ था, उनका सिर्फ शेष है.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- अध्यक्ष महोदय, इसमें जो बाकी कर्मचारी हैं, जिनको इसका लाभ मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल पाया है. 16 जुलाई, 2024 को विधान सभा में यह जवाब भी मिला है कि बाकी जो कर्मचारी हैं, उनको पांचवें वेतनमान के एरियर्स का भुगतान किया जाएगा. परंतु जिनका अभी तक नहीं हुआ है, जो कि पात्रता रखते हैं, जो अधिकार रखते हैं, उनको अभी तक लाभ नहीं मिल पाया है. उनको एरियर्स सहित वेतन भुगतान कब तक कर देंगे, यह माननीय मंत्री जी बता दें.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, मैं पहले ही निवेदन कर चुका हूँ कि जितने भी कर्मचारियों को वेतनमान दिए गए हैं, कोर्ट के निर्देश पर दिए गए हैं. कोर्ट के जैसे-जैसे निर्देश आए, हमने उसका पालन किया है. जिनके लिए भी कोर्ट के आदेश आए हैं, उन सबको वेतनमान का लाभ दे दिया गया है.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- माननीय अध्यक्ष जी, जो बाकी हैं, उनका कब तक कर देंगे, यह माननीय मंत्री जी बता दें.
अध्यक्ष महोदय -- श्री मुकेश मल्होत्रा जी.
श्री मुकेश मल्होत्रा -- अध्यक्ष जी, धन्यवाद.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- अध्यक्ष जी, जो बाकी हैं..
अध्यक्ष महोदय -- सोहन जी, प्लीज, अब आगे बढ़ चुके हैं.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- अध्यक्ष जी, जिनकी राशि रुकी हुई है, उनके लिए प्रश्न था कि उनको कब तक लाभ दिया जाएगा.
अध्यक्ष महोदय -- सोहन जी, प्लीज.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे निवेदन है कि बाकी कर्मचारी जो बचे हैं, उनको कब लाभ मिलेगा, यह तो बता दें.
अध्यक्ष महोदय -- उन्होंने बताया ना.
श्री उमंग सिंघार -- नहीं बताया.
अध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी, कुछ कहना चाहते हैं.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष जी, मैंने बताया है कि सबके प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं. उच्च न्यायालय का जैसे ही आदेश आएगा और जो आदेश होगा, वैसा कर दिया जाएगा.
श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जिनके आदेश आ गए हैं.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- जिनके आदेश आ गए हैं, उनका भुगतान कर दिया गया है.
श्री उमंग सिंघार -- माननीय, जो बाकी हैं.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- उनका प्रकरण उच्च न्यायालय में विचाराधीन है.
श्री उमंग सिंघार -- अध्यक्ष महोदय, नहीं है. जिनके आदेश आ गए हैं, उन्हें कब देंगे, बात यह है. एक बार परीक्षण करा लें.
अध्यक्ष महोदय -- जिनके आदेश आ गए हैं, मंत्री जी ने बताया है अभी.
श्री उमंग सिंघार -- माननीय, जिनके आदेश कोर्ट से आ गए हैं, जिनको नहीं दिया गया है, उनका परीक्षण करा के दे दें.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारी सरकार उच्च न्यायालय के निर्णय का परिपालन करती है और इसलिए उनके निर्देशानुसार परिपालन हो चुका है.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- अध्यक्ष महोदय, हम अलग से हटकर कुछ बात नहीं कर रहे हैं.
श्री उमंग सिंघार -- अध्यक्ष महोदय, सरकार तो कुछ नहीं पा रही है.
अध्यक्ष महोदय -- चलिए, कृपया बैठिए. श्री मुकेश मल्होत्रा जी अपना प्रश्न करें.
आदिवासी परिवारों के पलयान पर रोक
[पंचायत एवं ग्रामीण विकास]
7. ( *क्र. 14 ) श्री मुकेश मल्होत्रा : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या श्योपुर जिले में 50 प्रतिशत से अधिक सहरिया आदिवासी परिवार राजस्थान, गुजरात, हरियाणा एवं पंजाब राज्यों में रोजगार के लिए पलायन क्यों कर रहे हैं? (ख) यदि हाँ, तो क्या पलायन करने का कारण स्थानीय स्तर पर रोजगार की अनुपलब्धता है? (ग) क्या श्योपुर जिले में शासन-प्रशासन द्वारा स्थानीय स्तर पर पलायन कर रहे आदिवासियों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए कोई योजना या श्योपुर में कोई उद्योग खोलने की योजना विचाराधीन है, जिससे लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके जानकारी दें?
पंचायत मंत्री ( श्री प्रहलाद सिंह पटैल ) : (क) जी नहीं। (ख) प्रश्नांश (क) के उत्तर अनुसार प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) भारत सरकार के वार्षिक मास्टर परिपत्र की कंडिका 4.2.2 अनुसार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत अकुशल श्रम करने के इच्छुक जॉब कार्डधारी परिवारों को काम की मांग करने पर एक वित्तीय वर्ष में 100 दिन (वनाधिकार पत्र धारकों को अतिरिक्त 50 दिवस) के रोजगार का प्रावधान किया गया है। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्योपुर के पत्र क्रमांक 977, दिनांक 02.02.2026 पर जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। श्योपुर जिले में कोई उद्योग स्थापना हेतु प्रक्रियाधीन नहीं है।
श्री मुकेश मल्होत्रा -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न क्रमांक 14 है.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- अध्यक्ष महोदय, उत्तर पटल पर रख दिया गया है.
अध्यक्ष महोदय -- मुकेश जी, पूरक प्रश्न करें.
श्री मुकेश मल्होत्रा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी और विभाग ने जो जानकारी दी है, वह असत्य है. मैं इस जानकारी से सहमत नहीं हूँ. विभाग और माननीय मंत्री जी ने मेरे प्रश्न के उत्तर में बताया कि श्योपुर जिले में कोई पलायन नहीं हो रहा है. जबकि हकीकत यह है कि श्योपुर जिले में 50 प्रतिशत से भी अधिक सहरिया आदिवासी भाई-बहन राजस्थान, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र आदि प्रदेशों में स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं मिलने के कारण पलायन कर गए हैं. आदिवासी अंचलों में पूरे गांव के गांव खाली हो गए हैं. घरों में ताले लगे हुए हैं. स्थानीय स्तर पर विभाग व सरकार ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने में पूरी तरह से विफल हो चुकी है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी और विभाग ने उत्तर दिया है कि महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना से एक परिवार के एक व्यक्ति को 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान है और वनाधिकार पट्टेधारियों को 50 दिवस का अतिरिक्त रोजगार देने का प्रावधान है. यह सिर्फ कागजों तक ही सीमित है. किसी भी वर्ग के मजदूर को ग्राम पंचायत स्तर पर रोजगार नहीं मिल रहा है. इसकी पुष्टि कई समाचार-पत्रों ने भी की है, जिसकी प्रति भी मेरे पास मौजूद है. लोग पलायन कर रहे हैं, आज भी गांव खाली पड़े हैं. इसलिए अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से विभाग व सरकार एवं मंत्री जी से मांग करता हूँ कि ग्रामीण अंचलों में स्थानीय स्तर पर जी राम जी योजना मनरेगा की दर वर्तमान 261 से बढ़ाकर 561 की जावे और श्योपुर जिले के आदिवासी विकासखण्ड कराहल में कोई बड़ी परियोजना, उद्योग कारखाना या जड़ी-बूटी उद्योग स्वीकृत करवाने की कृपा करें, जिससे क्षेत्र का विकास भी होगा और स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों को रोजगार भी मिलेगा.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, आंकड़े जो हैं, वह तो सामने ही रहते हैं. मनरेगा में वर्ष 2025-26 में इस विधान सभा में कुल जॉब कार्डधारी 49,621 हैं, जिसमें आदिवासी जॉब कार्डधारी 20,960 हैं यानि लगभग आधे हैं और उसमें जो जनजाति श्रमिक हैं, उनमें 28,154 लोगों ने इस पर काम किया है और जो कार्यदिवस सृजित हुए हैं, वह 9 लाख 16 हजार 968 हैं. माननीय विधायक जी कराहल की बात कर रहे हैं, तो मैं उनसे विनम्रतापूर्वक कहूँगा कि सबसे ज्यादा अगर कहीं पर मनरेगा का कार्य हुआ है, तो वह कराहल ब्लॉक में ही हुआ है. अगर मैं वर्ष 2025-26 की बात करता हूँ, तो जॉब कार्डधारियों की संख्या 26,350 कराहल ब्लॉक में है, उसमें जॉब कार्डधारियों का जिनमें रोजगार उपलब्ध हुआ है 11,598 और उसमें भी अनुसूचित जनजाति के जो रोजगार प्राप्त श्रमिक हैं, वह 15,735 हैं और जनजातीय जो कार्यदिवस हैं, वह कुल मिलाकर 4 लाख 89 हजार 953 यानि लगभग सबसे ज्यादा पिछले तीन वर्षों में अगर कहीं जॉब कार्ड का उपयोग हुआ है, तो जनजातीय क्षेत्र के श्रमिकों को काम मिला है, तो वह कराहल ब्लॉक में ही मिला है. अगर वह चाहें तो मैं उनको आंकड़े उपलब्ध कराने के लिए तैयार हूँ.
माननीय अध्यक्ष महादेय, दूसरा, आपने जो प्रश्न पूछा था कि उसमें रोजगार के क्या अवसर हैं ? तो सरकार ने वहां पर 10,000 हेक्टेयर जमीन उद्योग के लिए आरक्षित की है, यह अपने आप में बहुत आश्चर्यजनक है और मुझे लगता है कि जो रोजगार की बात जी राम जी में हो रही है कि हम मनरेगा पर आश्रित रहते हैं, अभी जो नये नियम आए हैं, उसमें बड़ा स्पष्ट है कि अगर आपके पास हुनर है, स्किल है, तो फिर आपको स्थायी रोजगार की तरफ जाना चाहिए. जिनके पास हुनर नहीं हैं, वह लोग मनरेगा में मजदूरी का काम कर सकते हैं, तो जो वह रोजगार की चिन्ता जता रहे हैं, उस पर बकायदा जी राम जी में प्रावधान हैं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, तीसरी बात, चूंकि उन्होंने सहरिया शब्द का उपयोग किया है तो मैं उनसे बड़ी विनम्रता से कहूँगा कि वर्ष 2023 में भारत सरकार ने जो योजना बनाई है, उसमें सहरिया, बैगा और भारिया, उनके लिए आवास योजना में मध्यप्रदेश नम्बर एक पर है (मेजों की थपथपाहट), रोड में भी काफी जगह 500 का नियम है, जनजाति क्षेत्रों में 250 का नियम है, लेकिन जहां पर प्रश्न नक्सलवादी क्षेत्रों का है या सहरिया, भारिया और बैगा अति पिछड़ी जनजातियों की आबादी है, तो 100 की जनसंख्या में भी वहां सड़कें जुड़ रही हैं (मेजों की थपथपाहट) और हम उसमें भी देश में नम्बर एक पर हैं. (मेजों की थपथपाहट). इसमें मैं एक और सूचना देना चाहता हूँ कि पहले जनजातीय कार्य विभाग ने जो हमको सूचना थी, उसमें 16 ही जिले थे, लेकिन बाद में जितने जिले बढ़े, उन सबको भी उसमें जोड़ा गया है. अगर कोई ऐसा स्थान रह जाता है, हालांकि मुझे लगता है कि जितनी बारीकी से हम लोगों ने सर्वेक्षण करके, जो सूचनाएं आई हैं, उन जिलों को उसमें जोड़ा गया है, ताकि अति पिछड़ी जनजातियों को उसका लाभ मिल सके और इससे रोजगार के लिए जो स्कीम्स चलती हैं, उसमें इन जनजातियों के लिए प्राथमिकता है, ट्रेनिंग के प्रावधान भी हैं.
अध्यक्ष महोदय - मुकेश जी, दूसरा पूरक प्रश्न कीजिये.
श्री मुकेश मल्होत्रा - माननीय अध्यक्ष महोदय, जो आंकड़े मंत्री महोदय द्वारा दिए गए हैं. वह सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं, लेकिन वास्तविक हकीकत कुछ और है. आप वहां का सर्वे करा सकते हैं. गांव पूरी तरह से खाली हैं, स्थानीय स्तर पर रोजगार नहीं मिल रहा है. आप उस क्षेत्र से लगातार सांसद भी रहे हैं. आप पूरे क्षेत्र की वास्तविक स्थिति से अवगत हैं, तो आप इस पर कोई ऐसी योजना बनाएं, जिससे लोगों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध हो सके. धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय - मंत्री जी आप कुछ कहना चाहेंगे, वैसे आपका उत्तर विस्तार से आ गया है.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, बकायदा राज्य सरकार की जो स्कीम्स चलती हैं, उसका लाभ लेना शुरू करेंगे तो ....
अध्यक्ष महोदय - (श्री सोहनलाल बाल्मीक के खड़े होकर बन्द माइक से बोलने पर) ऐसा नहीं होगा. सिर्फ पंकज जी बोलेंगे. मैंने सिर्फ पंकज उपाध्याय जी को अनुमति दी है.
श्री सोहनलाल बाल्मीक - (XXX)
श्री पंकज उपाध्याय- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे साथी मुकेश जी ने बड़ा गंभीर प्रश्न उठाया है, मंत्री जी ने जवाब दिया कि वहां कोई विस्थापन नहीं हो रहा है चूंकि जौरा और विजयपुर का बहुत बड़ा क्षेत्र मेरी विधान सभा से लगा हुआ है, मैं विश्वास से कह रहा हूं कि मंत्री जी द्वारा दिया गया जवाब असत्य है. हमारे यहां गांव के गांव खाली हो रहे हैं, आधे-आधे गांव के मकानों में ताले लगे हुए हैं, बेरोजगार आदिवासी घूम रहे हैं, उन्हें काम नहीं मिल रहा है. मेरा आग्रह है कि यह राजनीति का विषय नहीं है, यह बहुत बड़ा मानवता का विषय है, गंभीर विषय है.
अध्यक्ष महोदय- पंकज जी, आपका प्रश्न क्या है ? प्रश्न काल में भाषण नहीं चलेगा.
श्री पंकज उपाध्याय- महोदय, प्रश्न यह है कि मंत्री जी द्वारा दिया गया जवाब गलत है, वहां पलायन हो रहा है, मंत्री जी ने तो मना ही कर दिया कि पलायन नहीं हो रहा है और यदि पलायन हो रहा है तो यह पलायन कब रूकेगा और उसके लिए आप क्या कर रहे हैं ?
श्री प्रहलाद सिंह पटेल- अध्यक्ष महोदय, कुछ सीमावर्ती जिले होते हैं, मैं बालाघाट का सांसद रहा हूं. एक बार यह बात आई थी कि हम पलायन किसे मानते हैं, जो स्वेच्छा से रोजगार के लिए बाहर जायें, क्या आप उसे पलायन मानते हैं ? यदि उनके क्षेत्र में रोजगार नहीं है तो इसे पलायन माना जायेगा. इसलिए मुझे लगता है यदि किसी जॉबकार्डधारी ने ऐसा कहा हो, मैंने पिछली बार भी यह बात सदन में बड़ी विनम्रता से कही थी कि जॉबकार्ड वाला कहे कि मुझे रोजगार नहीं मिला.
अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में यदि किसी के पास जॉबकार्ड है और वह कहता है कि मेरे पास जॉबकार्ड है और मुझे काम नहीं मिला तो मैं बिल्कुल सदन में माफी मांगने के लिए तैयार हूं. (मेजों की थपथपाहट)
अध्यक्ष महोदय, आप ऐसे ही नहीं कह सकते कि पलायन हो रहा है, पलायन की परिभाषा क्या है, सीमावर्ती जिलों में लोग दूसरे जिले में काम करने के लिए अपनी मर्जी से जाते हैं, यहां पर काम नहीं मिल रहा और बाहर जा रहे हैं तो इसे पलायन कहेंगे लेकिन मुझे ऐसा लगता नहीं. कोई जॉबकार्डधारी जब यह कह नहीं रहा कि मुझे काम नहीं मिला तो मुझे लगता है, ऐसे आरोप लगाना केवल राजनैतिक भाषा है, इसमें सच्चाई नहीं है, इसे झुठलाने के लिए ही मैंने सदन में आंकड़े दिए हैं. मनरेगा का काम कोई यहां से बैठकर नहीं होता है, सरपंच द्वारा ही किया जाता है, वे हमारे-आपके बीच के लोग ही हैं.
श्री पंकज उपाध्याय- अध्यक्ष महोदय, इन्होंने पलायन की पूरी परिभाषा ही बदल दी.
अध्यक्ष महोदय- प्रश्नकाल समाप्त हुआ.
(प्रश्नकाल समाप्त)
12.01 बजे
नियम 267-क के अधीन विषय
अध्यक्ष महोदय- नियम 267-क के अधीन लंबित सूचनाओं में से 15 सूचनायें नियम 267-क को शिथिल कर आज सदन में लिये जाने की अनुज्ञा मैंने प्रदान की है. ये सूचनायें संबंधित सदस्यों द्वारा पढ़ी हुई मानी जायेंगी. इस सभी सूचनाओं को उत्तर के लिए संबंधित विभागों को भेजा जायेगा.
मैं समझता हूं कि सदन इससे सहमत है. अब मैं सूचना देने वाले सदस्यों के नाम पुकारूंगा.
1. श्री अभय मिश्रा
2. श्री यादवेन्द्र सिंह
3. श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे
4. डॉ. सीतासरन शर्मा
5. डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह
6. श्री विपीन जैन
7. श्री राजेन्द्र भारती
8. इंजीनियर प्रदीप लारिया
9. श्री राजेश कुमार शुक्ला
10. श्री शैलेन्द्र कुमार जैन
11. श्री प्रताप ग्रेवाल
12. श्री महेश परमार
13. श्री मधु भगत
14. श्री दिलीप सिंह परिहार
15. श्री सोहनलाल बाल्मीक
(...व्यवधान...)
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)- अध्यक्ष महोदय, हमारा स्थगन लगा हुआ है. भागीरथपुरा के विषय में सरकार सुनना नहीं चाहती है, बात नहीं करना चाहती है, वहां लोग गंदा पानी पीने से मर गए हैं. आप हमारे स्थगन पर व्यवस्था दीजिये.
अध्यक्ष महोदय- नेता प्रतिपक्ष और सभी सदस्यों से अनुरोध है कि वे अपने स्थान पर बैठ जायें. इस विषय पर कल भी बहुत बात हुई है. कुल मिलाकर हम सभी इस बात को जानते हैं कि बजट सत्र में जब राज्यपाल महोदय का अभिभाषण होता है, तो यह ऐसा महत्वपूर्ण समय होता है, जिस समय सदन की कार्यवाही रोका जाना संभव नहीं है. मैंने आपसे कल भी कहा था और आज भी कह रहा हूं कि आपको चर्चा का अवसर दूंगा.
श्री उमंग सिंघार- धन्यवाद, अध्यक्ष महोदय.
12.03 बजे
पत्रों का पटल पर रखा जाना
1. मध्यप्रदेश वित्त निगम के 31 मार्च 2024 को समाप्त हुए वर्ष के लेखों का प्रतिवेदन

2. मध्यप्रदेश असंगठित शहरी एवं ग्रामीण कर्मकार कल्याण मण्डल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-25

3. मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अंकेक्षित लेखे वर्ष 2024-25

(4) (क) एन.एच.डी.सी. लिमिटेड का 25 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025, एवं
(ख) नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट्स कंपनी लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

(5) मध्यप्रदेश राज्य जैवविविधता बोर्ड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2024-2025

12.06 बजे
फरवरी, 2024 से दिसम्बर, 2025 सत्र तक के प्रश्नों के अपूर्ण उत्तरों के पूर्ण उत्तरों का संकलन खण्ड-6 पटल पर रखा जाना

12.07 बजे
नियम 267-क के अधीन दिसम्बर, 2025 सत्र में पढ़ी गई सूचनाओं तथा उनके उत्तरों का संकलन पटल पर रखा जाना

12.08 बजे
राष्ट्रपति/राज्यपाल की अनुमति प्राप्त विधेयकों की सूचना

12.09 बजे प्रतिवेदनों की प्रस्तुति एवं स्वीकृति
कार्य मंत्रणा समिति का प्रतिवेदन

श्री कैलाश विजयवर्गीय-- इसमें तो सर्वानुमति होना चाहिए. न की तो कोई बात ही नहीं होती है. कार्यमंत्रणा समिति में सभी माननीय सदस्य रहते हैं.
अध्यक्ष महोदय-- थोड़ा धीरे से बोला है किसी ने सुना नहीं. (हंसी)
12.10 बजे
ध्यानाकर्षण
1. राजधानी भोपाल में आवारा कुत्तों की निरन्तर बढ़ती जनसंख्या पर अंकुश नहीं लगाया जाना.
नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्यक्ष महोदय, इस ध्यानाकर्षण में कुत्तों के स्थान पर "श्वान" शब्द का उपयोग होता तो उचित होता.
श्री आतिफ आरिफ अकील -- बहुत सारे लोग इस शब्द को समझ नहीं पाएंगे.
अध्यक्ष महोदय -- आप तो ध्यानाकर्षण पढ़ें यह तो चलता रहेगा, यह सभी वरिष्ठ सदस्य हैं.
श्री आतिफ आरिफ अकील (भोपाल उत्तर) एवं (श्री राजन मण्डलोई) -- माननीय अध्यक्ष महोदय,

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, मैंने तो "श्वान" शब्द के उपयोग के लिए इसलिए कहा क्योंकि यह इस सत्र का पहला ध्यानाकर्षण और वह भी .....(हंसी).
श्री भंवर सिंह शेखावत -- वह भी कुत्तों पर और जवाब भी कैलाश विजयवर्गीय जी दे रहे हैं.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- सारे कुत्तों से मुझे निपटना पड़ता है. (हंसी)
श्री आतिफ आरिफ अकील -- नसबंदी पर भी पैसा खा रहे हैं. इस पर भी सरकार को लज्जा आना चाहिए. नसबंदी को भी नहीं छोड़ रहे हैं. दो करोड़ रुपए साल के मिलते हैं उसे भी नहीं छोड़ रहे हैं. धरातल पर जाकर देखिए तब समझ में आएगा.
मुख्यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) -- अध्यक्ष महोदय, नसबंदी की बात आएगी तो (XX) तक जाएगी, सुनने वाले ध्यान रख लें.
श्री अजय अर्जुन सिंह -- माननीय इस तरह की बात, कुत्तों की नसबंदी की बात हो रही है और आप 40 साल पुरानी बात कर रहे हैं.
डॉ. मोहन यादव -- अध्यक्ष महोदय, आपके सामने सदस्य ने बोला अभी बोला इसके बाद अगर आप (XX) वाली बात आई तो मैं क्या करूं.
श्री अजय अर्जुन सिंह -- यह सरकार की विफलता है नसबंदी के लिए 2 करोड़ रुपये मिलता है.
नगरीय
विकास एवं
आवास मंत्री (श्री
कैलाश
विजयवर्गीय) --
अध्यक्ष
महोदय, 

श्री आतिक आरिफ अकील -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं प्रश्न करूं इसके पहले एक शेर मेरे पास में है, उसको कहने की अनुमति चाहता हूं.
कुत्तों की नसबंदी का ढोल बजाया गया
हर गली में अभियान चलाया गया.
कागजों में शहर हुआ बिल्कुल साफ,
हकीकत में पैसा कहीं और लगाया गया.
माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार आवारा कुत्तों का झुंड सड़क पर दिखे तो नगर निगम को जुर्माना भरना पड़ेगा. भोपाल में पिछले 6 माह के अंदर लगभग 10 हजार के अंदर कुत्ते के काटने की Dog Bite हुई है, कहीं न कहीं यह बात मजाक लग रही है. लेकिन जिस घर के छोटे छोटे मासूम बच्चे जो खत्म हो गये आप उनसे पूछिये कि उनका क्या दर्द है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, बब्बू राणा एक बच्चा है 7 माह का, और 7 माह का बच्चा कितना छोटा होता है, उसकी मृत्यु हो गई. 2026 में ही 4 साल के मासूम बच्चा सीमोन इसकी मृत्यु हो गई, 4 साल का बच्चा सुलेमान उसकी कुत्ते के काटने से मृत्यु हो गई, अध्यक्ष जी हम देखें तो वैक्सीन भी लग गई लेकिन उसका असर नहीं होना यह बताता है कि उस पर कहीं न कहीं भ्रष्टाचार होता जा रहा है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, वर्तमान मे आवार कुत्तों का मुख्य अड्डा श्मशान घाट, कब्रिस्तान जहां पर 50-50 के झुंड में कुत्ते आम आदमी पर अटैक करते है. राजधानी भोपाल में कुत्तों के लिये सरकार द्वारा 5 शेल्टर होम (आश्रय स्थल) बनाये जाने के लिये कहा गया था लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई. नगर निगम, भोपाल के पास में आवारा कुत्तों का नियंत्रण करने के लिये कोई पर्याप्त उपाय नहीं होने के कारण साल दर साल कुत्तों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है. नगर निगम, भोपाल द्वारा कुत्तों पर नसबंदी की प्रक्रिया सिर्फ कागजों पर पूरी कर दी जाती है. भ्रष्टाचार है. अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे अनुरोध है..
अध्यक्ष महोदय- अकील साहब, पूरक प्रश्न तो आप करो कि आप क्या पूछना चाहते हो वह पूछो, तो उसका समाधान होगा.
श्री आतिक आरिफ अकील --अध्यक्ष महोदय, मैंने जो 3-4 घटना का उल्लेख किया इन बच्चों की डेथ हुई है कि नहीं हुई है.
अध्यक्ष महोदय--आपने ध्यानाकर्षण पूरा पढ़ा, मंत्री जी ने उसका उत्तर पूरा पढ़ा. अब अगर आप समाधान तक पहुंचना चाहते हैं तो प्रश्न पूछिये.
श्री भंवरसिंह शेखावत-माननीय अध्यक्ष जी, माननीय सदस्य का कहना बहुत साफ है. आज प्रदेश को पहली बार मालूम पड़ रहा है कि (XX) भी आदरणीय कैलाश जी हैं (हंसी) कुत्तों का कुनबा तो बढ़ रहा है. यह भी बताया जा रहा है और कुत्ते काटने से दवाई के अभाव में बच्चे मर रहे हैं यह भी सदस्य ने उल्लेख किया है.
अध्यक्ष महोदय- श्री आतिक आरिफ अकील जी नये सदस्य हैं, उनको भी मौका दीजिये, प्रश्न पूछने का.
श्री भंवरसिंह शेखावत- उनको तो मौका दें लेकिन सुन कहां रहे हैं, (XX), (XX) मंत्री जी सुनते कहां हैं. वह तो कहते हैं कि कुत्तों पर चर्चा ही मत करो.
अध्यक्ष महोदय- श्री आतिक आरिफ अकील जी पूरक प्रश्न करें.
श्री उमाकांत शर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मनुष्य आतंकवादी होते थे यह तो सुना था पर पहली बार मैंने सुना कि कुत्ते आतंकवादी बताये जा रहे हैं. यह गंभीर बात है.
अध्यक्ष महोदय-- उमाकांत जी, प्लीज बैठें श्री आतिक आरिफ अकील जी को पूरक प्रश्न करने दें. अकील साहब पूछें, आपके बाद में राजन मण्डलोई जी को भी दो प्रश्न पूछना है.
श्री आतिफ आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय, जब इतनी वेक्सीनेशन हो रही है, तो इनकी आबादी क्यों बढ़ती जा रही है और ये जो अटेकिंग कर रहे हैं, यह 10 हजार लोगों की बाइटिंग हो रही है, तो उसके लिये भी कहीं न कहीं असत्य तो जवाब है ना. इसकी कहीं न कहीं जांच होनी चाहिये.
अध्यक्ष महोदय—ठीक है. मंत्री जी, बतायें.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, माननीय शेखावत जी ने कहा कि मैं प्रभारी हूं... (हंसी)..
श्री भंवर सिंह शेखावत – आप प्रभारी नहीं हैं महाराज, आप कुत्तों पर महा भारी हैं. ..(हंसी)..
श्री सोहनलाल बाल्मीक-- अध्यक्ष महोदय, यह बहुत गंभीर विषय है. छोटे छोटे मासूम बच्चे, बुजुर्ग इनको जिस तरीके से कुत्ते काटकर उनकी हत्या कर रहे हैं, यह कहीं न कहीं हम सबके लिये चिंता का विषय बना हुआ है. यह कोई मजाक का विषय नहीं है, इस पर गंभीरता से सरकार को जवाब देना चाहिये और कार्यवाही करनी चाहिये.
अध्यक्ष महोदय—कृपया जवाब आने दीजिये.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, इसमें चार विभाग सम्मिलित हैं, नगरीय निकाय, पशुपालन एवं डेयरी, स्वास्थ्य विभाग तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग. इन चारों विभागों में यह श्वान की परेशानी से कहीं न कहीं हम सब लोग मिलकर संयुक्त रुप से प्रयास करते हैं और हमारे एसीएस ने अभी पिछले दिनों सभी विभाग के अधिकारियों और सभी कलेक्टर्स के साथ चर्चा भी की है. निश्चित रुप से यह बहुत गंभीर मसला है, पर माननीय सदस्य ने जो कहा है, मेरे पास स्वास्थ्य विभाग की जो रिपोर्ट आई है, उसमें है कि इस वर्ष में ऐसी कोई सूचना नहीं है, जिसमें कि श्वान के काटने से किसी की मौत हुई हो. यदि ऐसा हुआ है, तो आप बता दीजियेगा, जो भी सरकार की ओर से सहायता होगी, हम जरुर करेंगे. जहां तक यह बात सही है कि इनकी प्रजनन क्षमता बहुत है. उस हिसाब से हमारी जो नसबंदी करने की क्षमता है, हमें उसे बढ़ाना पड़ेगी, क्योंकि एक समस्या जरुर है दूसरी भी कि इसके जो एक्सपर्ट्स होते हैं नसबंदी करने के डाक्टर्स की, उसकी संख्या भी प्रदेश में बहुत कम है और सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन भी इतनी जबरदस्त है उसमें कि आप जहां से उसको पकड़ें, वहीं जाकर उसको छोड़ें, क्योंकि वो लोकलाइज रहता है, वहीं पर उसको जीने का अधिकार है. अध्यक्ष महोदय, डॉग लवर्स भी यहां पर इतने सारे हैं..
श्री आतिफ आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय, नसबंदी का जो बजट आता है ना, मंत्री जी को और बजट चाहिये, ताकि (XX) उसके अंदर और नहीं हो तो जांच करा लीजिये.
अध्यक्ष महोदय— अकील जी, कृपया बैठिये.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय,यह इस प्रकार के हल्के कमेंट्स करना, यह उचित नहीं है.
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) – अध्यक्ष महोदय, नहीं नहीं, ऐसी टिप्पणी आप यहां नहीं कर सकते. यह घोर आपत्तिजनक है और इसको डिलीट भी करना चाहिये.
श्री आतिफ आरिफ अकील—यह मैं धरातल की बात कर रहा हूं, जमीनी बात कर रहा हूं. आप इसकी जांच करा लें.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल – अगर आपको ऐसी बहस करनी है, तो यह आम सभा नहीं है जनाब. यह विधान सभा है.
अध्यक्ष महोदय—(श्री आतिफ आरिफ अकील, सदस्य के खड़े होने पर) अकील जी, आपका प्रश्न है, मंत्री जी उसका जवाब दे रहे हैं. तो बीच में आप टिप्पणी मत करिये. आप कृपया बैठ जाइये. मंत्री जी जवाब दे रहे हैं, विषय की गंभीरता को समझते हुए हम लोगों को चर्चा करना चाहिये.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, जो उन्होंने आपत्तिजनक बात की है, पहले तो आप उसको कृपया विलोपित कराइये.
अध्यक्ष महोदय—हां, मैं वह दिखवा लूंगा.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, इस प्रकार लाइट टिप्पणी नहीं की जी सकती, अगर गंभीर विषय है तो और यदि आपके पास कोई प्रमाण हो, तो यहां पर आपके पास पेपर के साथ सबूत के साथ रखिये. इस प्रकार से कुछ भी हवाई आरोप सदन में नहीं लगाये जा सकते. यह सदन है, कोई राजवाड़ा नहीं है कि कहीं पर कुछ भी बोला जा सके.
श्री आतिफ आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय, क्लीयर है, फिर इनकी आबादी क्यों बढ़ रही है. इनकी आबादी कैस बढ़ रही है. तीन गुना इनकी आबादी कैसे बढ़ गई 2003 से फिर.
अध्यक्ष महोदय—अकील जी, आप सदन के सदस्य हैं, आप जानते हैं कि ध्यानाकर्षण पर कैसे चर्चा होती है. आपने अपना विषय पूरा रख दिया, मंत्री जी का पूरा जवाब आ गया. आप सप्लीमेंट्री कर रहे हैं, मंत्री जी जवाब दे रहे हैं.
श्री प्रहलाद सिंह पटेल –यह भी कह सकते हैं कि आबादी तो बहुत लोगों की बढ़ रही है. फिर अच्छा लगेगा. यह क्या बात होती है.
..(व्यवधान)..
श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव-- अध्यक्ष महोदय, इतना गंभीर विषय चल रहा है, बच्चों की मौत हुई है और यहां पर हंसी ठिठोली चल रही है.क्या वह आपत्तिजनक नहीं है.
श्री आतिफ आरिफ अकील-- बजट के अंदर जो प्रावधान है, उसी की तो बात हो रही है और किसी की नसबंदी का कोई बजट में प्रावधान है क्या.
श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव-- अध्यक्ष महोदय, इतना दो करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा है नसबंदी पर, उसके बाद भी उनकी संख्या बढ़ रही है.
श्री आतिफ आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय, इस पर दो करोड़ रुपये खर्च किया जा रहा है, जनता की गाढ़ी मकाई का पैसा खर्च किया जा रहा है और लोगों की जान जा रही है.
..(व्यवधान)..
श्री प्रहलाद सिंह पटेल—पहले समझ में नहीं आया था कि सदस्य क्या बोल रहे हैं.
..(व्यवधान)..
अध्यक्ष महोदय-- आप लोग कृपया बैठें. पहले सरकार का जवाब तो आने दीजिये.
..(व्यवधान)..
श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव-- अध्यक्ष महोदय, लोगों की मौतों पर हंसोगे आप. और अध्यक्ष महोदय यह गलत है. ( व्यवधान)
श्री भंवर सिंह शेखावत- यह गलत है.
श्री विश्वास सारंग- तो इसमें आपत्तिजनक क्या है, कांग्रेस को दर्द क्यों हो रहा है. कांग्रेस की संख्या तो घट रही है. ( व्यवधान)
डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय- अध्यक्ष महोदय...(व्यवधान)
श्री सुरेश राजे- कौन कहता है कि घट रही है.
अध्यक्ष महोदय- सचिन जी, कृपया आप बैठ जायें. डॉ. राजेन्द्र जी आप भी कृपया बैठ जायें. मैं खड़ा हूं, कृपया बैठ जाइये.
अध्यक्ष महोदय- देखिये, जब ध्यानाकर्षण आता है और गंभीर विषय है तो सदन को भी उसमें गंभीर रहना चाहिये. मैंने पर्याप्त अवसर दिया, ध्यानार्षण को मंजूरी दी. ध्यानाकर्षण पढ़ा गया. उस पर सरकार का विस्तार से जवाब आया. अब सप्लीमेंट्री में हमको समाधान तक पहुंचना है. अगर विधान सभा समाधान तक नहीं पहुंचती है तो यह हमारी सफलता नहीं है. मंत्री जवाब दे रहे हैं, उसके बाद एक सप्लीमेंट्री प्रश्न करने का आपको अवसर मिलेगा, उसके बावजूद भी कुछ बचेगा तो राजेन्द्र मण्डलोई जी हैं, वह दो पूरक प्रश्न कर सकते हैं. हमारी कोशिश यह होनी चाहिये की ध्यानाकर्षण के माध्यम से हम समाधान तक पहुंचें और चर्चा की गंभीरता को बनाये रखें.
श्री आरिफ मसूद- अध्यक्ष महोदय, इस मामले में एक बात कहना चाहता हूं, सिर्फ एक शब्द कह रहा था....
अध्यक्ष महोदय- प्लीज आप बैठ जायें. पहले मंत्री जी का उत्तर आ जाने दीजिये.
श्री कैलाश विजयवर्गीय- अध्यक्ष महोदय, जैसे की मैंने पहले ही अपने उत्तर में कहा है कि हम सिर्फ भोपाल ही नहीं, सभी नगर निगम और नगर पालिकाओं में श्वान के नसबंदी केन्द्रों की संख्या हम बढ़ा रहे हैं और माननीय सुप्रीम कोर्ट की जो गाइड लाईन है, उसके अनुसार एन.जी.ओ., वेटनरी डॉक्टर्स इनकी आवश्यकता पड़ती है, अभी उनकी संख्या कम है. पर हम कैसे भी संख्या बढ़ाकर इसको नियंत्रण करने की कोशिश करेंगे. यह हमारी जिम्मेदारी है, पर इसके साथ में एक बात कहना चाहता हूं कि हमारी एक परम्परा थी कि हम पहली रोटी गाय को देते थे और अंतिम रोटी कुत्ते को देते थे. कुत्ता भड़कता जब है, जब वह भूखा रहता है. मैं इस बहुत ही महत्वपूर्ण और गंभीर मंच का उपयोग करते हुए पूरे प्रदेश की जनता से कहना चाहता हूं कि सदियों से श्वान हमारा मित्र रहा है, हमने खुद ने अपनी लापरवाही से उसको उत्तेजित किया है. आज भी कई मोहल्लों के अंदर श्वान परिवार की तरह रहते हैं. मैं अपना उदाहरण देता हूं, मेरे मोहल्ले में 30-40 श्वान हैं, वह कभी किसी को नहीं कोटते हैं. हमने घर में बैठकर सबसे कहा है कि एक-एक रोटी सबको डालिये. जब मैं घर के बाहर निकलता हूं तो वहां पर 10-20 आवारा श्वान आ जाते हैं. वह कभी नहीं काटते हैं. हम एक समिति बनाकर श्वान की भी चिंता करें. क्योंकि यदि श्वान उत्तेजित होगा तो काटेगा. इसलिये हमारे यहां कि जो एक सामाजिक परम्परा है थी कि पहली रोटी गाय को और दूसरी अंतिम रोटी कुत्ते को और बचा हुआ आटा चिंटी को. इसके बारे में हमको विचार करना चाहिये.
अध्यक्ष महोदय- श्री अकील जी दूसरा प्रश्न तो नहीं पूछ रहे हैं. श्री आरिफ मसूद जी.
श्री आरिफ मसूद - अध्यक्ष महोदय गंभीर चर्चा है और जो बात मंत्री जी कह रहे हैं, वह ठीक है. सुप्रीम कोर्ट भी इसमें बहुत गंभीर है और डाग लवर्स की वजह से कुछ निर्णय आते-आते सुप्रीम कोर्ट में रूक गये. लेकिन प्रहलाद भाई आप बहुत वरिष्ठ हैं. हम लोग आपकी बहुत इज्जत करते हैं उसने एक बात कह दी थी. आपने कह दिया कि आपने विलोपित कर दिया, तब बात समाप्त हो जाना चाहिये थी. इस बात को ऐसे आगे नहीं बढ़ाना चाहिये. सच्चाई यह है कि कुत्तों के आतंक से बहुत लोग परेशान हैं और बहुत जगह बच्चे मारे जा रहे हैं, इसमें कोई शक नहीं है. होना यह चाहिये था कि हम सबको एक सामूहिक निर्णय लेना चाहिये, क्योंकि यह विर्षय सुप्रीम कोर्ट में है. अध्यक्ष महोदय, आपके जरिये हमारी यह मांग है कि सरकार यह निर्णय ले कि मध्यप्रदेश सरकार अपना पक्ष रखने के लिये सुप्रीम कोर्ट जायेगी और इसका हल निकालने का प्रयास करेगी ताकि बच्चों और इंसानों की जान बचायी जा सके. यह मेरा अनुरोध है.
डॉ. सीतासरन शर्मा- अध्यक्ष महोदय...
अध्यक्ष महोदय- श्री राजन मण्डलोई जी, ध्यानाकर्षण में उनका नाम है. आप लोगों का नाम नहीं है.
डॉ. सीतासरन शर्मा- अध्यक्ष महोदय, मेरा भी ध्यानाकर्षण इसी विषय पर लगा है.
अध्यक्ष महोदय- लेकिन आपका नाम नहीं है.
डॉ. सीतासरन शर्मा- मुझे एक प्रश्न पूछने की अनुमति दे दी जाये.
अध्यक्ष महोदय- पहले ध्यानाकर्षण में जिनके नाम हैं उनको तो प्रश्न करने दें. राजेन्द्र जी एक प्रश्न करें.
श्री राजन मण्डलोई- अध्यक्ष महोदय, यह बता रहे हैं कि जनसंख्या वृद्धि नहीं हो रही है. पिछले वर्ष 2022 से 2025 तक साढ़े तीन लाख कैसेस डाग बाईट्स के आये हैं. दूसरी बात अभी मंत्री ने कहा है कि कुत्ते के काटने से कोई मृत्यु नहीं हुई है. माननीय आपके ही जिले ग्वालियर में दिनांक 10.02.26 के समाचार पत्र में छपा है कि तीन डोज रेबीज इन्जेशन लगने के बाद भी मौत हुई है और सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है, उन गाइडलाइन्स का पालन हो नहीं रहा है. सिर्फ कागजों पर करोड़ों रुपया खर्च करके नसबंदी की जा रही है, लेकिन यह सिर्फ कागजों पर नसबंदी है. नसबंदी अगर इतनी होती तो इनकी जो संख्या तेजी से बढ़ रही है वह इतनी तेजी से नहीं बढ़ती.
दूसरी बात मेरे बड़वानी में भी दो केसेज़ आए हैं, मासूम बच्चों को कुत्तों के झुंड ने पूरा खींच कर उनका शरीर तहस-नहस कर दिया तो ऐसे कई केस हो रहे हैं. आप मोटर साईकिल से जाएं, पैदल जाएं तो कुत्ते पीछे दौड़ते हैं और खासकर मोटर साईकिल पर जाने से जब पीछे लपकते हैं तो दुर्घटनाएं भी होती हैं और कई डॉग बाईट्स भी होती है. इसके अलावा जो इंजेक्शन आ रहे हैं इसकी भी जांच होना चाहिए कि रैबीज इंजेक्शन जो शासकीय अस्पताल में मिल रहे हैं, ग्वालियर में जो घटना हुई कि तीन डोज़ लगने के बाद भी मृत्यु हुई तो कहीं यह इंजेक्शन नकली न हो. मेरा प्रश्न है कि डॉग बाईट्स की घटना के बाद जो लोग, बच्चे मरे हैं, उन मृतक के परिवारों को अभी तक कितना मुआवजा दिया गया है, इसका स्पष्ट जवाब आना चाहिए?
श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष महोदय, मैंने अपने उत्तर में बता ही दिया है कि नसबंदी के प्रयास हमारे जारी हैं, परन्तु यह बात सही है कि उनकी प्रजनन क्षमता ज्यादा है. जो एक लैडी श्वान होती है वह वर्ष में दो बार प्रजनन करती है. एक बार में 8-10 बच्चे देती है. हम मानते हैं कि एक साल में उसके जीवित बच्चे लगभग 10 रहते हैं. यदि दो-तीन साल वह प्रजनन करती है तो एक ही लैडी श्वान के कम से कम 20-30 बच्चे हो जाते हैं तो यह बात सही है कि जिस रेश्यो से श्वान की संख्या बढ़ रही है, उससे रेश्यो से उनकी नसबंदी की संख्या कम है. हम इसको बढ़ाने की कोशिश करेंगे, परन्तु उसमें मैंने पहले भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन है कि नसबंदी करने के लिए कौन-कौन लोग चाहिए, उन डॉक्टरों, उन एनजीओज़ की संख्या हमारे प्रदेश में कम है. हम कोशिश करेंगे कि बाहर से लोगों को बुलाकर नसबंदी केन्द्र बढ़ाए जाएं और सदन की चिंता बिल्कुल वाजिब है. इससे हम कोई असहमति नहीं जता रहे हैं. हां, इसके लिए और ज्यादा प्रयास किये जाएंगे. परन्तु मैंने जो बात कही है उस पर पूरे समाज को ध्यान देने की आवश्यकता है कि श्वान हमेशा हमारा सहयोगी रहा है, कभी हमारा दुश्मन नहीं रहा.
डॉ. सीतासरन शर्मा (होशंगाबाद)- अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने बहुत समाधानकारक जवाब दिया है. परन्तु समस्या पालतू डॉग के कारण नहीं है. समस्या स्ट्रीट डॉग के कारण है. दूसरी बात यह है कि जो डॉग लवर्स हैं, वह अपने आप में बहुत प्राब्लम क्रिएट कर रहे हैं, जिन मोहल्लों में यह रहते हैं, उन मोहल्लों में लोग डॉग लवर्स के कारण परेशान हैं. इस पर भी कोई कार्यवाही होना चाहिए. डिप्टी सीएम साहब बैठे हुए हैं. डॉग बाइट के लिए एंडी-रैबिज वैक्सीन की भी व्यवस्था अस्पतालों में हो. यह भी आवश्यक है. मैं सोचता हूं कि शासन इस पर भी ध्यान दे.
डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय (जावरा)- अध्यक्ष महोदय, यह बात निश्चित रूप से सही है कि न जाने किन कारणों से कुत्ते बहुत भड़क रहे हैं. मेरे यहां जावरा नगर में भी डॉग लवर्स को लेकर और कुत्तों के काटने के कारण थाने तक बात गई है. हमने उस छोटे से शहर में यह जानने की कोशिश की. मैं थोड़ा निवेदनपूर्वक कहना चाहता हूं, अन्यथा विषय नहीं है. यह जो खुले में मांस विक्रय होता है, यह खुले में जो अंडे बेचे जाते हैं या अंडा संग्रहण या मांस संग्रहण, भिन्न भिन्न स्थानों पर किये जाते हैं कुछ अनुमति लेकर, कुछ बिना अनुमति के भी, ये जो खाये जाते हैं, पकाकर या वैसे ही, वह इधर-उधर जैसे झूठन फैंकी जाती है, वह फैंक दिये जाते हैं. कुत्ते उनको खाकर वीभत्स होते हैं. दूसरा कारण यह है कि जब उनको वह मिलता नहीं है तो फिर वह काटने के लिए दौड़ता है तो क्या ऐसा किया जा सकता है कि मांस संग्रहण, अंडा संग्रहण, अंडा विक्रय, मांस विक्रय, शहर से थोड़ी दूर कोई स्थान चिह्नित करके वहां पर उसे विक्रय की अनुमति दी जाय, ऐसा मेरा सुझाव है.
अध्यक्ष महोदय -- ठीक है. माननीय श्री शैलेन्द्र कुमार जैन जी.
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन (सागर) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद. मैं आपके माध्यम से सदन का ध्यान आकर्षित करना चाहता हॅूं कि यह विषय कोई एक स्थान विशेष का नहीं है, यह विषय कोई भोपाल का या रतलाम का नहीं है. यह विषय पूरे प्रदेश का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का है और इस विषय पर बहुत गंभीरता से माननीय सर्वोच्च न्यायालय में बड़ी बहस चली. मैं दो विषय आपके समक्ष रखना चाहता हॅूं. एक तो यह विषय बिल्कुल सही है कि श्वान की संख्या बहुत बढ़ गई है और डॉग बाइट के जो केसेस हैं, वह काफी ज्यादा हो रहे हैं. ऐसे समय में प्रिकाशनरी जो चीजें हम कर सकते हैं जैसा कि माननीय राजेन्द्र पाण्डेय जी ने जो विषय रखा, वह विषय मेरे संज्ञान में था. जो श्वान विषाक्त भोजन कर रहे हैं, जिस तरह का मांस जो सड़ा हुआ है, गला हुआ है, उसको खाने से वे श्वान और भी विकृत अवस्था में जा रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय -- आपके वाले तो ठीक हैं न..(हंसी)..
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उनकी निरंतर निगरानी की जाती है...(हंसी)..
श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, शुद्ध, सात्विक भोजन कर रहे हैं...(हंसी)..
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, वह भी एक बड़ा कारण है. एंटी रेबीज इंजेक्शन जो हर जगह उपलब्ध होने चाहिए, उसकी कमी है. उसके लिए माननीय मंत्री महोदय से निवेदन है कि वे इस पर ध्यान दें.
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्यक्ष महोदय, यह मेडिकली प्रूफ है कि डॉग को यदि उत्तेजित करना हो, तो उसको आप निरामिष भोजन कराइए, आप उसको मांस दीजिए, आप उसको अंडा दीजिए. वह ज्यादा उत्तेजित होगा.
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय मंत्री महोदय ने यह विषय रखा, हम आपसे निवेदन करेंगे.
अध्यक्ष महोदय -- मैंने माननीय शैलेन्द जी को बोलने की अनुमति दी है, वे जो बोलेंगे, केवल वही लिखा जाएगा. (श्री भंवरसिंह शेखावत, सदस्य के अपने आसन से खडे़ होकर कुछ कहने पर).
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- अध्यक्ष महोदय, हम आपसे निवेदन करेंगे कि पहली रोटी गाय को और अंतिम रोटी श्वान को देने का संकल्प भी सदन के माध्यम से हो जाए. बहुत-बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय -- माननीय गोपाल भार्गव जी, आप बैठ जाइए. (श्री गोपाल भार्गव, सदस्य के अपने आसन से खडे़ होने पर). माननीय अजय विश्नोई जी ने बोलने के लिए दो-तीन बार हाथ खड़ा किया है. माननीय अजय जी वेटरनरी के डॉक्टर भी हैं, तो इस पर उनका कुछ अच्छा सुझाव आ सकता है.
श्री अजय विश्नोई (पाटन) -- माननीय अध्यक्ष महोदय जी, मैं वेटरनरी विभाग का मंत्री भी रहा हॅूं और हमने श्वान के बर्थ कंट्रोल करने के लिए उस समय एक बहुत महत्वपूर्ण कार्यक्रम हाथ में लिया था. हमारी बहन कृष्णा गौर जी यहां बैठीं हैं. उस समय वे यहां पर महापौर हुआ करती थीं. हमारा संयुक्त प्रयास था. एक सबसे बड़ी समस्या यह रहती है कि श्वान को पकड़ना मुश्किल है. श्वान को पकड़कर लाना और यदि उसकी ओपन सर्जरी करके उसकी नसबंदी की गई, तो उसको कम से कम 5 दिन पास में रखना पड़ता है, जब तक उसके टांके खुल न जाएं. नहीं, तो वह अपने मुंह से ही नोंचकर उन टांकों को खोल देता है, तो उसके कारण रोटेशन कम हो जाता है. हम लोगों ने उस समय लेप्रोस्कोपी सर्जरी से नसबंदी करने की शुरूआत की थी. उसके कारण क्या होता था कि उस श्वान को दूसरे या तीसरे दिन छोड़ देते थे, तो वह राउंड सर्कुलेशन बढ़ जाया करता था. उस समय मैंने यह निवेदन तकरीबन सभी नगर निगमों से किया था कि वे अपने यहां इस तरीके की व्यवस्थाएं लागू करें. जैसे कि भोपाल नगर निगम में लागू की गई है, पर कालांतर में उस पर ध्यान नहीं दिया गया है. अभी भी यह महत्वपूर्ण विषय जब पूरे देश और दुनिया के सामने आया हुआ है, खासतौर से मध्यप्रदेश की विधानसभा में इतनी गंभीर चर्चा उसके ऊपर हुई है, तो यहां कहीं न कहीं सरकार को ध्यान देकर इस चीज के लिये निर्देशित करना चाहिए कि जो वेटरनरी सर्जन हैं, यदि उनको लेप्रोस्कोपिक सर्जरी आती है तो उनको सर्जरी करना चाहिए और यदि सर्जरी नहीं आती है, तो उन्हें सिखा दिया जाए. जो सर्जन गांव-देहात में पोस्टेड हैं उनको शहर में लाकर पोस्ट किया जाए. नगर निगम और उनका कॉर्डिनेशन बनाकर श्वानों की नसबंदी करवाकर इन श्वानों के बर्थ पर कंट्रोल किया जाये. नहीं, तो यह वास्तव में सबके लिए खतरनाक हैं.
अध्यक्ष महोदय -- माननीय गोपाल भार्गव जी.
श्री गोपाल भार्गव (रहली) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे बहुत से साथियों ने इस समस्या के ऊपर चर्चा की. एक ऐसे देश में जिसमें 80 करोड़ लोगों के लिए सरकार खाने के लिए, पेट भरने के लिए मुफ्त में राशन दे रही है. मैं मानकर चलता हॅूं कि चाहे वह पालतू श्वान हों अथवा आवारा श्वान हों, श्वान की आवश्यकता ही क्या है ? मैं पूछना चाहता हॅूं कि आज भी हमारे इस देश में लोग क्या इतने संपन्न हो गए हैं. मैंने सुना है. मैं तो शाकाहारी हॅूं, यह मैं बताना चाहता हॅूं. लेकिन यह बताया गया कि लोग दो-दो, चार-चार हजार रूपए की खुराक रोजाना इन श्वानों के ऊपर खर्च करते हैं. जो इन श्वानों की अलग-अलग नस्लें हैं उनकी एक-एक लाख रूपए कीमत है. मैं यह कहना चाहता हूं कि सुप्रीम कोर्ट में भी इस पर बहस चल रही है, कई हाईकोर्ट में भी बहस चल रही है. संसद में भी एक बार प्रश्न उठा है. राज्य के विधान मंडल में अभी आधे घंटे से भी ज्यादा चर्चा हो रही है. क्या आवश्यकता है श्वानों की जब तक हिन्दुस्तान के हर आदमी को भरपेट खाना नहीं मिल जाता, तब तक हम क्यों इनकी चर्चा करें और इसकी क्या आवश्यकता है ? श्वान पालने की भी क्या आवश्यकता है चाहे वह पालतू हों या आवारा हों. मेरा सुझाव है कि इनकी नस्ल खत्म की जाये, इनको खत्म किया जाये.
श्री रामेश्वर शर्मा—अध्यक्ष महोदय, आज सदन में जितनी चर्चा श्वान पर हो रही है, उतनी चर्चा विकास के ऊपर भी नहीं चली है, यह बड़े आश्चर्य की बात है.
श्री राजेन्द्र शुक्ल—माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि एन्टी रेबीज जो वेक्सीन है न तो उसकी अस्पतालों में कमी है और न ही उसकी क्वालिटी पर सवाल है ? यह जो तीन चार मौतों के बारे में बातें आ रही हैं. आम तौर पर लोग डॉग बाईट के बाद तुरंत अस्पताल में जाते ही नहीं हैं. जब हाईड्रो फोबिया के लक्ष्ण आ जाते हैं उसके बाद चाहे उसके आप जितना भी वेक्सीनेशन करवा लें उस व्यक्ति को बचाना संभव नहीं होता है. इसलिये बहुत जरूरी है कि डॉग बाईट जैसे ही होती है अस्पताल में जाकर 03714 जो प्रोटोकॉल है जो चार डोज लगते हैं वह तुरंत लगाने में कोई फेल हो जायेगा तो फिर बाद में हम लोग आरोप लगाते रहेंगे कि वेक्सीन नहीं हैं, या नकली वेक्सीन है, लेकिन फिर उस व्यक्ति का बचाना संभव नहीं हो पायेगा. इसलिये इस बात को हम लोग सारे लोग जागरूक हों चूंकि हम लोग पूरे प्रदेश के जनप्रतिनिधि हैं यहां पर उपस्थित भी हैं. हम लोग इस बात को भी संज्ञान में रखें.
श्री कैलाश विजयवर्गीय—अध्यक्ष महोदय, सभी के सुझाव मेरे द्वारा नोट कर लिये हैं इसमें जितने भी करने लायक होंगे उस पर जरूर चिन्ता से सरकार उसको पूरा करेगी.
अध्यक्ष महोदय—मैं समझता हूं कि जब ध्यानाकर्षण लगा था तब सब लोग इसको हल्के में ले रहे थे. लेकिन मैं समझता हूं कि यह विषय काफी गंभीर है. इस पर गंभीरता से चर्चा भी हुई हैं. इस पर बहुत सारे सदस्यों ने इस पर विचार व्यक्त किये हैं. मैं समझता हूं कि सरकार इसको पूरी गंभीरता से लेगी इसमें सुप्रीम कोर्ट के जो निर्देश हैं उसके अनुसार जो जो कार्यवाहियां अपेक्षित हैं वह समय रहते करें जिससे इस समस्या से निजात मिल सके. यह ध्यानाकर्षण पूर्ण हुआ. श्री जयंत मलैया जी अपने ध्यानाकर्षण की सूचना पढ़ें.
श्री जयंत मलैया—अध्यक्ष महोदय,

अध्यक्षीय व्यवस्था
भोजनावकाश न होने विषयक
अध्यक्ष महोदय—आज राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा ध्यानाकर्षण के पश्चात् प्रारंभ होगी जिसके कारण भोजनावकाश नहीं होगा. भोजन सदन की गैलरी में उपलब्ध है. हम सब लोग अपनी सुविधानुसार भोजन ग्रहण कर सकते हैं.
अध्यक्ष महोदय – माननीय मंत्री जी.
जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसीराम सिलावट, मंत्री) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा वक्तव्य निम्नानुसार है -
1. यह कहना सही नहीं है कि दमोह जिले के अंतर्गत वर्ष 2018 में सीतानगर मध्यम सिंचाई परियोजना राशि रू. 518.09 करोड़ स्वीकृत हुई थी, जिसमें पथरिया तहसील के 22 ग्राम, दमोह तहसील के 62 ग्राम कुल 84 ग्राम में 16200 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रेशराईस्ड पाइप नहर प्रणाली के माध्यम से सिंचाई होना प्रस्तावित की गई थी।
मुख्य अभियंता कार्यालय द्वारा प्रेषित डीपीआर अनुसार वर्ष 2018 में प्रशासकीय स्वीकृति हेतु विधानसभा पथरिया एवं दमोह के कुल 57 ग्रामों की 16200 हेक्टेयर सिंचाई किये जाने हेतु रू. 518.09 करोड़ का प्रस्ताव प्रशासकीय स्वीकृति हेतु प्रस्तुत किया गया था । प्रस्तुत डीपीआर अनुसार 14.06.2018 को शासन द्वारा 16200 हेक्टेयर की सिंचाई हेतु स्वीकृति प्रदान की गई थी, जिसमें विधानसभावार सिंचाई क्षेत्र उल्लेखित नहीं किया गया था.
मूल डीपीआर में प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है तथा स्वीकृति अनुसार 16200 हेक्टेयर के सिंचाई क्षेत्र हेतु कार्य संपादित कराया गया है।
2. मूल डीपीआर में प्रस्तावित सिंचाई क्षेत्र में कोई परिवर्तन नहीं होने से शेष प्रश्नांश का प्रश्न ही नहीं उठता ।
दमोह विधानसभा के 33 ग्रामों की सिंचाई हेतु एक अन्य परियोजना, सीतानगर अतिरिक्त सूक्ष्म सिंचाई परियोजना बॉदकपुर सेमरखो बी. आर. के नाम से तैयार किया जा रहा है, जिसमें 12000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जाना प्रस्तावित है ।
परियोजना तकनीकी एवं वित्तीय रूप से साध्य पाये जाने पर अग्रिम कार्यवाही संभव है। क्षेत्र में कोई आक्रोश नहीं है।
अध्यक्ष महोदय – माननीय जयंत जी, पूरक प्रश्न करें.
श्री जयंत मलैया – अध्यक्ष महोदय, अभी हाल ही में दिनांक 13 फरवरी को माननीय मुख्यमंत्री जी दमोह आए थे और इस दौरे पर उन्होंने 33 गांव और इसके अलावा अन्य गांव को पानी देने की घोषणा की थी, इसके अलावा मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद करना चाहता हूं. घोषणा में 600 करोड़ रुपए से पानी ब्यामरा नदी से लिफ्ट करके सेमरकोट तालाब भरेंगे और पानी सिंचाई के लिए देंगे. केन्द्र सरकार की ये केन-बेतवा-परियोजना है, इसमें ब्यामरा नदी पर कार्य होना है. यह योजना लगभग 12 हजार करोड़ रुपए की है. मेरा सुझाव है और मैंने पत्र भी लिखा है, मंत्री जी इस केन-बेतवा-परियोजना से ब्यारमा नदी से, दमोह ब्लाक के 36 और 66 गांवों को और जोड़कर 99 गांवों को जोड़ा जा सकता है, इसका परीक्षण कराना उचित रहेगा और इस कार्य को प्रारंभ शुरू करवाने की कृपा करें.
श्री तुलसीराम सिलावट – माननीय अध्यक्ष महोदय, सम्माननीय सदस्य बहुत वरिष्ठ है. इस विभाग के मंत्री भी रहे हैं. मैं उनको विश्वास दिलाता हूं कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा जो घोषणा की गई है, जो नई योजना हम प्रस्तावित कर रहे हैं, उसमें जो मुख्यमंत्री का भाव है और आपकी जो भावना है उन 33 ग्रामों को इसमें जोड़ा जाएगा इसमें कोई शंका की आवश्यकता नहीं है.
श्री जयंत मलैया – धन्यवाद अध्यक्ष महोदय.
श्री सूर्यप्रकाश मीना(शमशाबाद) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा क्षेत्र में मद्यम सिंचाई परियोजना सगढ़ और संजय सागर यह ओपन केनाल सिस्टम से बनी हुई हैं और दोषपूर्ण होने की वजह से कई बार नहरे फूट जाती हैं और पानी खराब होता है और किसानों को सिंचाई नहीं मिल पाती है, मेरा माननीय मंत्री जी से यह आग्रह और प्रश्न भी है कि क्या इन दोनों प्रोजेक्ट को हम प्रेशराईज्ड पाईप के माध्यम से कंवर्ट कर सकते हैं. हमने परीक्षण करवाया था यदि प्रेशराईज्ड पाईप के माध्यम से इन दोनों परियोजनाओं को यदि हम कंवर्ट करते हैं तो लगभग 17 हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा का विस्तार हो सकेगा. माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि इसका परीक्षण एक बार करवा लें.
श्री तुलसीराम सिलावट -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सम्माननीय सदस्य को अवगत कराना चाहता हूं कि वर्ष 2013 के बाद खुली केनाल, खुली नहरों को पूरा हमने परिवर्तित करके टोटल पाईप के माध्यम से सिंचाई परियोजना प्रारंभ की है. हमारे सम्माननीय सदस्य ने जो भाव व्यक्त किये हैं, इसका परीक्षण करा लिया जायेगा.
12.56 बजे अनुपस्थिति की अनुज्ञा
निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 188-राजपुर (अ.ज.जा.) से निर्वाचित सदस्य, श्री बाला बच्चन को विधान सभा के फरवरी-मार्च, 2026 सत्र में बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुज्ञा.

12.57 बजे प्रतिवेदनों की प्रस्तुति
(1) याचिका एवं अभ्यावेदन समिति का याचिकाओं से संबंधित दशम् एवं एकादश प्रतिवेदन
सभापति(श्री हरदीप सिंह डंग)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, याचिका एवं अभ्यावेदन समिति का याचिकाओं से संबंधित दशम् एवं एकादश प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.
(2) पिछड़े वर्गों के कल्याण संबंधी समिति का सप्तम्, अष्टम् एवं कार्यान्वयन से संबंधित प्रथम प्रतिवेदन
सभापति(श्री महेन्द्र हार्डिया) -- अध्यक्ष महोदय, मैं, पिछड़े वर्गों के कल्याण संबंधी समिति का सप्तम्, अष्टम् एवं कार्यान्वयन से संबंधित प्रथम प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.
12.58 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति
अध्यक्ष महोदय -- आज की कार्यसूची में सम्मिलित क्रमांक-1 से क्रमांक-19 तक की याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.
12.59बजे
लोक लेखा, प्राक्कलन, सरकारी उपक्रमों संबंधी तथा स्थानीय निकाय एवं
पंचायतीराज लेखा समितियों के लिए सदस्यों का निर्वाचन

1.00 बजे निर्वाचन का कार्यक्रम

1.02 बजे वर्ष 2025-2026 के तृतीय अनुपूरक अनुमान का उपस्थापन

1.03 बजे राज्यपाल के अभिभाषण पर श्री अजय विश्नोई, सदस्य द्वारा दिनांक
16 फरवरी, 2026 को प्रस्तुत प्रस्ताव पर चर्चा.
श्री अजय विश्नोई (पाटन, जबलपुर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह अवसर राज्यपाल के अभिभाषण के धन्यवाद की अभिव्यक्ति है. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मानता हूं यह सदन लोकतंत्र की सजीव अभिव्यक्ति है. यहां प्रदेश की जनता की आकांक्षायें और अपेक्षाओं को स्वर मिलता है और जब हम राज्यपाल के अभिभाषण को गंभीरता के साथ विस्तार से पढ़ते हैं तो यह स्पष्ट होता है कि जनता की आशायें और अपेक्षायें और आकांक्षाओं की पूर्ति के लिये सरकार ने जो कदम उठाये हैं उसको राज्यपाल के अभिभाषण में रेखांकित किया गया है और यह राज्यपाल का अभिभाषण मात्र सरकार के पिछले दो साल के....
1.04 बजे अध्यक्षीय निर्देश
राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के समय अधिकारी दीर्घा में विभागीय अधिकारियों की अनुपस्थिति विषयक.
अध्यक्ष महोदय-- अजय जी, एक मिनट. माननीय वित्तमंत्री जी ध्यान देंगे. राज्यपाल जी के अभिभाषण पर चर्चा हो रही है. इस समय संबंधित अधिकारी दीर्घा में रहें, यह निर्देश देने का कष्ट करें.
श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, इसमें संबंधित क्या, इसमें तो सभी को उपस्थित रहना चाहिये. सभी विषयों पर अभिभाषण है.
अध्यक्ष महोदय-- ठीक बात है.
श्री अजय विश्नोई-- माननीय अध्यक्ष महोदय, राज्यपाल जी का अभिभाषण सरकार के पिछले दो साल का लेखा जोखा नहीं है परंतु आने वाले 3 साल का रोडमेप भी उसके माध्यम से स्पष्ट हुआ है. मान्यवर, हम सब इस पर सामान्य रूप से सोचें तो जनता की आशायें और अपेक्षायें क्या हैं. शहर का विकास हो जाये, गांव का इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ जाये, निवेश आ जाये, उद्योग आ जायें, रोजगार मिल जाये, अच्छी शिक्षा मिल जाये, कृषि अच्छी हो जाये, किसान समृद्ध हो जाये, प्रदेश समृद्ध हो जाये, गरीब को छत मिल जाये, पानी मिल जाये खेत को, पानी मिल जाये घर को और पानी मिल जाये उद्योग को. लॉ एण्ड आर्डर बना रहे, सबका साथ और सबका विकास, सामाजिक न्याय हो, पिछडे़ वर्ग के साथ भी, गरीब के साथ भी, अनुसूचित जाति के साथ भी. माननीय अध्यक्ष महोदय, अगर प्रदेश का विकास करना है तो निवेश लाना होगा और निवेश लाना है तो निवेश करने के पहले हमको यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारे प्रदेश में बिजली है कि नहीं, पानी है कि नहीं, भूमि है कि नहीं, कनेक्टिविटी है कि नहीं है, उद्योग के लिये वातावरण समुचित है कि नहीं है. निवेश चाहिये उद्योग के क्षेत्र में, निवेश चाहिये हमको शिक्षा के क्षेत्र में, निवेश चाहिये हमको स्वास्थ के क्षेत्र में, निवेश चाहिये हमको पर्यटन के क्षेत्र में. औद्योगिक विकास जिस तेज गति के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी की सरकार के कार्यकाल में हुआ है उस सबमें प्रदेश की जनता को यह विश्वास दिलाया है कि हमारा प्रदेश बहुत जल्दी देश के अग्रणी प्रदेशों में शामिल होने वाला है. एक के बाद एक कदम उठाये गये.
ग्लोबल इंवेस्टर्स मीट हुई 30 लाख करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव आये. साढ़े इक्कीस लाख लोगों को रोजगार मिलने की आशाएं हमारी जगी हैं. दुबई और स्पेन तक जाकर विदेश में विकास का संवाद किया गया वहां से भी 11 हजार करोड़ के प्रस्ताव लेकर माननीय मुख्यमंत्री जी आये हैं वहां पर भी 14 हजार लोगों को रोजगार मिलने की गुंजाईश बनी हुई है. मध्यप्रदेश ग्रोथ कान्क्लेव हुआ. 30 हजार करोड़ के प्रस्ताव वहां भी हम सबको प्राप्त हुए हैं. कृषि उद्योग समागम मंदसौर और नरसिंहपुर में एक नयी कल्पना के साथ में माननीय मुख्यमंत्री जी ने प्रयास किये. इन्दौर में आई.टी.कान्क्लेव हुआ. रतलाम में आर.ई.एस. कान्क्लेव हुआ. लुधियाना में जाकर इंटरेक्टिव सेशन किया. 15 हजार करोड़ के प्रस्ताव प्राप्त हुए. 20 हजार रोजगार का रास्ता खुला है. माननीय मुख्यमंत्री जी,उद्योगों के लिये जिस तरीके से मैंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर की जरुरत है तो प्रदेश सरकार उसके लिये विशेष रूप से ध्यान दे रही है. अभी 3368 कि.मी. के 5 एक्सप्रेस हाईवे बन रहे हैं प्रदेश के अलग-अलग कोनों को कवर करते हुए. 2 हजार कि.मी. से ज्यादा की सड़कें बन रही हैं. 1 हजार पुरानी सड़कों का नवीनीकरण किया गया है. 111 आरओबी बन रहे हैं. भोपाल में एलीवेटेड कारीडोर बन रहा है. ग्वालियर में एलीवेटेड कारीडोर बन रहा है. जहां जरूरत है उनके ऊपर बड़े पुल बन रहे हैं. चंबल के ऊपर भी बड़ा पुल बन रहा है. आपकी जानकारी में होगा. उद्योगों के लिये दूसरी जरूरत होती है बिजली, तो बिजली के मामले में मध्यप्रदेश इस समय विद्युत सरप्लस है. आज की तारीख में 25574 मेगावाट की क्षमता हमारे पास स्थापित है. नये अनुबंध 4 हजार मेगावाट के हमारी सरकार ने किये हैं जिससे 60 हजार करोड़ का निवेश भी आयेगा और 12 हजार रोजगार मिलेंगे और बिजली भी ज्यादा और मिलेगी. 660 मेगावाट के सारणी और सिंगरौली में दो-दो यूनिट अलग से लगाई जा रही हैं जिससे हमारी विद्युत की क्षमता और बढ़ जायेगी. विद्युत क्षमता में नुकसान होता है पारेषण हानि के कारण. पिछले दिनों में सरकार ने पारेषण हानि पर भी कंट्रोल पाया है और अब मात्र 2.6 प्रतिशत पारेषण मध्यप्रदेश में रहा है जिसके कारण विद्युत की समस्या अच्छी बनी हुई है. मान्यवर हमारे घरों को चौबीस घंटे मिल रही है शहर हो या देहात निर्बाध 24 घंटे बिजली उपलब्ध है. खेती को 10 घंटे बिजली मिल रही है.नवकरणीय ऊर्जा में भी हमने बहुत बढ़िया रिकार्ड स्थापित किया है. जहां 2012 में सिर्फ 491 मेगावाट नवकरणीय ऊर्जा उपलब्ध थी. आज की तारीख में 9500 मेगावाट ऊर्जा हमको उपलब्ध है. अभी कुसुम-सी,किसानों के साथ में जोड़कर किसानों के खेत में जो हमको उद्योग लगाने थे 2-2 मेगावाट के सोलर के उसमें 4 हजार मेगावाट के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और हमारे सभी शासकीय भवनों पर तेजी के साथ में सोलर पावर फिट होता जा रहा है. हमने और भी सोलर पावर के क्षेत्र में फ्लोटिंग सोलर पावर,पंप ऊर्जा,ऊर्जा भण्डारण,नये-नये तरीके से प्रयास करके हमारा प्रयास रहा है कि बिजली का उत्पादन बढ़े,बिजली की उपलब्धता बढ़े. उसके कारण उद्योगों को सहजता,सरलता हो उसमें हम सफल दिखते हैं. डॉ.मोहन यादव जी का प्रयास निश्चित रूप से उद्योगों को निश्चित रूप से आकर्षित कर पाने में सफल हो पा रहा है. पानी चाहिये. हमने 1 करोड़ हेक्टेयर तक की सिंचाई का लक्ष्य रखा हुआ है. हम उस दिशा में बहुत तेजी के साथ आगे बढ़ रहे हैं. एक बड़ी कल्पना थी केन और बेतवा के लिंक को बनाने की, अटल जी का सपना था और इसीलिये इसकी शुरुआत मध्यप्रदेश में अटल जी जन्म दिन 25 दिसम्बर,2025 को प्रारंभ हुई.
श्री भंवर सिंह शेखावत - माननीय अध्यक्ष जी, एक महत्वपूर्ण विषय के ऊपर चर्चा चल रही है. आपने भी स्पष्ट निर्देश दिये गये हैं. अधिकारियों की दीर्घा में कोई अधिकारी ही उपलब्ध नहीं है. आपके कहने के बाद में भी नहीं आये हैं. ऐसा लगता है कि लोकतंत्र से इन अधिकारियों का भरोसा उठ गया है आपके निर्देश के बाद नहीं आ रहे.इतना महत्वपूर्ण विषय चल रहा है.
अध्यक्ष महोदय - वित्त मंत्री जी गये हुए हैं. संसदीय कार्य मंत्री जी जरा देखिये.
1.09 बजे सभापति महोदय( डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय) पीठासीन हुए.
श्री अजय विश्नोई - वैसे तो कार्य सूची में तय था कि राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी और इसकी जानकारी कार्यसूची के अधिकारियों के पास भी होना चाहिये और अधिकारियों का दायित्व बनता है कि वह इस दायित्व के साथ में समय पर यहां उपस्थित होते यदि नहीं हुए हैं तो अध्यक्ष महोदय के निर्देश भी होने चाहिये और माननीय मुख्यमंत्री जी को भी निर्देशित करना चाहिये कि अधिकारियों के खिलाफ इस संदर्भ में निश्चित रूप से कड़े से कड़े कदम उठाये जाएं.
माननीय सभापति महोदय, केन-बेतवा नदी जोड़ो अटल जी का सपना था और इसीलिए माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने हमारे मध्यप्रदेश में आकर और बांध का शिलान्यास रखा. 25 दिसम्बर, 2025 को रखा. यह केन-बेतवा योजना सामान्य योजना नहीं है. इसमें 8 लाख हेक्टेयर से ज्यादा भूमि को सिंचाई उपलब्ध होगी. 10 जिलों के 41 लाख से ज्यादा परिवारों को इसमें पेयजल उपलब्ध होगा. 103 मेगावॉट विद्युत का उत्पादन भी इसके माध्यम से होगा. एक महत्वपूर्ण चीज की ओर और इसमें ध्यान दिया गया है कि हमारा जो बुंदेलखण्ड वाला इलाका है, यह चूँकि पानी के कारण काफी तकलीफ में रहा है, यहां पुराने तालाब बने हुए हैं, ऐतिहासिक तालाब हैं, 2-2 सौ, 4-4 सौ, 5 सौ साल पुराने तालाब हैं. उनके साथ इतिहास जुड़ा हुआ है. इस केन-बेतवा नदी जोड़ो योजना के साथ में उन ऐतिहासिक 42 तालाबों का पुनरुद्धार करने का भी उन्होंने प्रयत्न किया है और उसमें कोशिश की है.
माननीय सभापति महोदय, हम किसानों के माध्यम से भी प्रदेश को समृद्ध करने के मार्ग में प्रयत्नशील हैं. किसान समृद्ध होगा तो प्रदेश भी समृद्ध होगा और प्रदेश समृद्ध होगा तो देश भी समृद्ध होगा. इस नारे के साथ में हमारी सरकार काम कर रही है. माननीय राज्यपाल जी के अभिभाषण में इस चीज का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है. किसान समृद्ध हुआ है, इसको हम सिर्फ आपको आंकड़ों में दिखाना चाहते हैं तो अपने आप बात सरलता से समझ में आती है. गेहूँ उपार्जन देखिए, 9 लाख किसानों से 77 लाख टन गेहूँ खरीदकर 20 हजार करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है और 307 करोड़ रुपये का बोनस भी दिया गया है. यह सारा पैसा किसानों के पास ही गया है. किसानों को उसने समृद्ध किया है. धान का उपार्जन हुआ, 7 लाख 62 हजार किसानों से 52 लाख टन धान का उपार्जन किया गया और 11,744 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों के पास गया है. ग्रीष्म काल की 7.72 लाख टन मूंग खरीदी गई, गर्मी की फसल की मूंग खरीदी गई. इस हेतु 6,706 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया गया है. चना खरीदा गया, मसूर खरीदी गई, सरसों खरीदी गई, 3.62 लाख टन खरीदी गई और 2,282 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया गया है. सोयाबीन की भावांतर योजना, भावांतर योजना के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जी ने सोयाबीन के 6.86 लाख किसानों को 1,454 करोड़ रुपये का भुगतान करके यह सुनिश्चित किया है कि वास्तव में भावांतर योजना के माध्यम से वे किसानों का भला करना चाहते हैं और भला करने में सफल रहे हैं.
सभापति महोदय, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. 4 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान की चिंता और व्यवस्था सरकार ने प्राकृतिक खेती करने वालों के लिए की है. श्रीअन्न का उत्पादन करने वाले किसानों को भी 1,000 रुपये प्रति हेक्टेयर प्रति क्विंटल अनुदान सरकार ने उनको उपलब्ध कराया है. दलहन के उत्पादन में हम आज की तारीख में देश में सबसे आगे हैं. तिलहन के उत्पादन में हमारे प्रदेश का रकबा देश में सबसे ज्यादा है. सोयाबीन के मामले में हम देश में अग्रणी राज्य के रूप में जाने जाते हैं. जो मुख्य अनाज हैं, गेहूँ और धान, उनमें भी हम आज की तारीख में देश में द्वितीय नंबर पर हैं.
माननीय सभापति महोदय, राजस्व की सेवाएं भी अपने आप में अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं और वह इतने सारे कागजों के पुलिंदों के अंदर दबी रहती थी कि आम आदमी परेशान होता था. किसान भी परेशान होता था. उद्योगपति जो आता था, वह भी परेशान होता था. माननीय मोहन सरकार ने इसको पेपरलेस कराने की व्यवस्था राजस्व के अभिकरण के माध्यम से की है. इनका डिजिटलीकरण किया है. जो पुराने-पुराने रिकार्ड थे, उनको डिजिटल करके बिल्कुल इतनी अच्छी व्यवस्था से रखा गया है और सदन को मुझे यह बताते हुए प्रसन्न्ता हो रही है कि इसकी शुरुआत जबलपुर से हुई है. आज की तारीख में जबलपुर में कोई खसरा, कोई रिकार्ड कहीं देखना हो तो किसी फाइल की धूल नहीं झाड़नी पड़ती है. एयर-कंडिशन कमरे में जाइये, बटन दबाइये और आपका रिकार्ड आपके हाथ में आया हुआ होता है. पूरे प्रदेश में इस तरीके की व्यवस्था की गई है, इसके कारण भी लोगों के लिए सरलता बनी है. आधार आधारित पहचान बनाई गई है. सीमांकन, जो किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है, उसके लिए सीआरएम करके एक तकनीक को एडॉप्ट किया गया है. सरल पोर्टल बनाया गया है. किसान का ई-कृषि अनुदान पोर्टल बनाया गया है. भू-अभिलेख का पोर्टल अलग बना है. खाद का वितरण ई-टोकन के माध्यम से हो रहा है. यूनिक फॉर्मर आईडी क्रिएट की गई है.
माननीय सभापति महोदय, देश की आंकाक्षा और अपेक्षाओं में स्वास्थ्य भी अपने आप में एक महत्वपूर्ण चीज है कि हम स्वस्थ रहेंगे, तभी देश स्वस्थ रहेगा, प्रदेश स्वस्थ रहेगा और हम अपना योगदान प्रदेश में दे पायेंगे, तो इसलिए स्वास्थ्य के दृष्टिकोण और स्वास्थ्य के लिये भी हमारी सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है. मैं बात को लम्बा नहीं खींचना चाहता हूँ, इसलिए आंकड़ों में ही चीजों को बता रहा हूँ, ताकि हमारे और मित्रों को भी बोलने का अवसर मिलेगा और उनको विषय को दोहराने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आज हम स्वास्थ्य के बारे में बात करें तो हमारे यहां 19 शासकीय मेडिकल कॉलेज हैं, 14 निजी मेडिकल कॉलेज हैं और पीजी की सीटें 5 हजार 550 उपलब्ध हो गई हैं. 5 हजार 550 डॉक्टर हर वर्ष पास होकर मध्यप्रदेश की सेवा में आ रहे हैं.
श्री लखन घनघोरिया - माननीय अध्यक्ष महोदय, वह एमबीबीएस की सीटें हैं, पीजी की नहीं.
श्री अजय विश्नोई - अध्यक्ष महोदय, हां, एमबीबीएस की सीटें हैं. सॉरी. लखन भाई, धन्यवाद. हमारे यहां एमबीबीएस की कुल 5 हजार 550 सीटें हैं, पीजी (एमडी/एमएस) की 2 हजार 862 सीटें हैं और सुपर स्पेशलिटी की 93 सीटें उपलब्ध हैं. जो यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य की दिशा में हमारी मध्यप्रदेश सरकार ने तेज गति से कार्य किया है. मेडिकल कॉलेज आज की तारीख में हम पीपीपी अनुबंध के माध्यम से भी, जो प्रदेश में जिले के हमारे अस्पताल हैं, उनको साथ में जोड़ते हुए और पीपीपी मोड पर भी नये मेडिकल कॉलेज खोल रहे हैं. अभी धार, कटनी, बैतूल एवं पन्ना इन चार मेडिकल कॉलेजों का अनुबन्ध हो गया है और इन पर कार्य प्रारंभ हो गया है. इसी प्रकार से पीपीपी मोड पर भिण्ड, मुरैना, खरगोन, अशोक नगर, गुना, बालाघाट, टीकमगढ़, सीधी एवं शाजापुर जिलों में भी हम नये मेडिकल कॉलेज प्रारंभ करने की दिशा में आगे कदम बढ़ा रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय, नये अस्पताल बन रहे हैं, अभी 50 बिस्तर के 12 नये अस्पताल, तीस बिस्तर का एक नया अस्पताल स्वीकृत किया गया है. आयुर्वेदिक दिशा में भी हमारी सरकार ने ध्यान दिया है. आयुर्वेदिक के अनुसंधान केन्द्र की स्थापना का कार्य प्रगति पर है. आयुर्वेदिक महाविद्यालय के भवन बनाये जा रहे हैं. हेल्थ एडं वेलनेस के नाम से भी हम टूरिज्म के सेन्टर स्थापित करने की दिशा में सफल हुए है और ऐसे 12 आयुष सेन्टर आज की तारीख में उपलब्ध हो गए हैं. स्वास्थ्य के लिए जिले के स्तर पर जो नई सुविधाएं आज की तारीख में सरकार के कारण उपलब्ध होती चली जा रही है, उसमें 108 एम्बुलेंस तो भले ही पुरानी हो गई हो, पर पीएम श्री एयर एम्बुलेंस आम गरीब आदमी को एयर लिफ्ट करके देश के किसी भी अस्पताल तक पहुँचाने की एक अद्भुत मिसाल, एक अद्भुत व्यवस्था डॉ. मोहन यादव जी की सरकार ने की है, इस बात की आम जनता सराहना करती हुई दिखती है. जो अस्पताल में मृत हो जाता है, उसको घर तक पहुँचाने की व्यवस्था नहीं थी, तो शव परिवहन की व्यवस्था भी इस सरकार ने की है. टेलीमेडिसिन की सेवा दूर देहात में बैठा हुआ व्यक्ति भी अपने विशेषज्ञ डॉक्टर से सम्पर्क करके, बातचीत करके, सलाह करके दवा और इलाज पा सकता है. ऐसी व्यवस्था डॉ. मोहन यादव की सरकार के कारण दूरदराज के गांवों में उपलब्ध हो गई है. ब्रेकीथेरेपी, जो एक बहुत महत्वपूर्ण इलाज की आवश्यकता थी, उसके लिए हमने उसकी व्यवस्थाएं यहां पर की हैं. ड्यूल एनर्जी लीनियर एक्सेलेरेटर, कैंसर के इलाज के लिए जरूरी मशीन है, उनको नया खरीदा गया है, बोन मैरो ट्रांसप्लांट की व्यवस्थाएं मध्यप्रदेश सरकार ने की है, सिकल सेल उन्मूलन की व्यवस्थाएं भी इस सरकार ने की है, आयुष्मान के कार्ड बहुत तेजी से बने हैं और उसका लाभ आम आदमी को मिल रहा है. तम्बाकू उन्मूलन का कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग ने अपने हाथ में लिया है, अंग प्रत्यारोपण के भी काम नई दिशा में सरकार ने अलग-अलग मेडिकल कॉलेजों में अलग-अलग व्यवस्थाएं कर उपलब्ध कराई हैं.
मान्यवर, हमने शिक्षा पर भी ध्यान दिया है, क्योंकि शिक्षा का स्तर सुधरेगा तभी हमारे यहां पर जो आने वाले लोग हैं, उनको अच्छे अधिकारी एवं कर्मचारी मिल पायेंगे. इसके लिए उच्च शिक्षा को भारतीय ज्ञान परम्परा से जोड़ने के लिए भी भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ बनाया गया है और विश्व बैंक के सहयोग से 247 महाविद्यालयों में आधुनिक शैक्षणिक अधोसंरचना का विकास भी इस सरकार ने किया है.
मान्यवर, स्कूल शिक्षा बेसिक शिक्षा की तरफ इस समय मध्यप्रदेश सरकार का ज्यादा ध्यान है. शानदार सांदीपनि विद्यालय बने हैं. आपने भी देखे होंगे, हमारे माननीय सदस्यों के क्षेत्रों में कहीं न कहीं एक न एक सांदीपनि विद्यालन बन गया है, जिस तरीके की विद्यालय की बिल्डिंग बनी है, जिस तरह का फर्नीचर उपलब्ध हुआ है और जिस तरीके के प्रशिक्षित शिक्षकों को वहां उपलब्ध कराया गया है एवं जो वातावरण आज की तारीख में सांदीपनि विद्यालय में बना है, उसके कारण निश्चित रूप से मध्यप्रदेश का शैक्षणिक स्तर बहुत तेजी के साथ ऊंचाइयों की तरफ बढ़ रहा है. हमारे यहां पीएम श्री विद्यालय बने हैं, प्रदेश में 799 पीएम श्री विद्यालय बना दिए गए हैं. इस पीएम श्री विद्यालय में आज की जो वर्तमान की आवश्यकता है, अनुभवात्मक अधिगम, कौशल विकास की दिशा में हमने प्रयत्न करना प्रारंभ किया है और डिजिटल शिक्षा भी हम जो बच्चों को पढ़ा पा रहे हैं, वह इस पीएम श्री विद्यालय में दे पा रहे हैं. वित्तीय वर्ष 2025-26 में 94 हजार 300 छात्रों को लैपटॉप दिए गए हैं, आप और हमारे यहां बैठे हुआ एक भी सदस्य ऐसा नहीं होगा, जिनके क्षेत्र के किसी न किसी छात्र को लैपटॉप न प्राप्त हुआ हो या किसी न किसी छात्र को स्कूटी न प्राप्त हुई हो 7890 छात्रों को स्कूटी प्रदान की गई है, यह उनको प्रोत्साहन है ताकि वे भविष्य में और अच्छे से पढ़ाई करें. शेष छात्रों को 4.5 लाख साइकिलें बांटी गई हैं.
सभापति महोदय, स्वामी विवेकानंद जी के नाम से एक करियर हेतु मार्गदर्शन करने की योजना सरकार ने बनाई है. आज 79 लाख लोगों ने इससे लाभ लिया है और 12 हजार लोग इससे रोजगार पाने में सफल हुए हैं. सरकार का ध्यान सभी की ओर है, "सबका साथ, सबका विकास" केवल एक नारा नहीं है, यह धरातल पर भी है. हमारे कदम यह बताते हैं कि हम सभी के विकास की दिशा में बढ़ रहे हैं.
सभापति महोदय, अनुसूचित जनजाति क्षेत्र में 94 सांदीपनि विद्यालय काम कर रहें हैं, वहां 63 एकड़ में आवासीय विद्यालय तैयार हो गए हैं, जिसमें 25 हजार छात्र अध्ययन कर रहे हैं. माता शबरी आवासीय परिसर, उन क्षेत्रों में तेज गति के साथ बन रहे हैं. वहां जो बच्चे मेधावी हैं, उनको NEET, IIT की परीक्षा की कोचिंग नि:शुल्क सरकार करवा रही है. बैगा, भारिया और सहरिया महिलाओं को प्रतिमाह रुपये 1500 जा रहे हैं, यह हम सभी जानते हैं. एक महत्वपूर्ण कदम सरकार ने अनुसूचित जनजाति हेतु उठाया है कि उन्हें वन अधिकार अधिनियम तो दे दिया गया परंतु उनके दावे-आपत्तिओं का निराकरण बहुत आवश्यक था, मुझे यह कहते हुए प्रसन्नता है कि सरकार ने 3.62 लाख दावों का परीक्षण किया और उनमें से 2.70 लाख दावों को मान्यता प्रदान कर दी है. 24 जिलों में PM जनमन योजना के माध्यम से विकास के कार्य बहुत तेजी के साथ हो रहे हैं.
सभापति महोदय, अनुसूचित जाति के विकास की दिशा में भी सरकार ने बहुत प्रयत्न किये हैं, आज की तारीक्ष में 1913 छात्रावासों में, 95 हजार सीट अनुसूचित जाति के बच्चों के लिए उपलब्ध है. 1 लाख छात्रों को आवास सहायता प्रदान की जा रही है अर्थात् वे छात्र शहर के किसी न किसी किराये के मकान में रह रहे हैं और उनका किराया देने का कार्य सरकार कर रही है. आज 49 लाख छात्रों को, रुपये 2 हजार 2 सौ 83 करोड़ की छात्रवृत्ति बांटी गई है. इन बच्चों के लिए 12 छात्रावास भवन तैयार हो गए हैं, 9 छात्रावास निर्माणाधीन हैं. रुपये 120 करोड़ की लागत से 24 बालक छात्रावास बन रहे हैं और रुपये 120 करोड़ की लागत से 24 बालिका छात्रावासों का निर्माण भी हो रहा है.
सभापति महोदय, अन्य पिछड़ा वर्ग के युवकों के लिए एक प्रशिक्षण अकादमी बनाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें वहां के प्रतिभाशाली बच्चों को विशेष कोचिंग देकर, उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया जायेगा. हम सभी जानते हैं कि हमारी सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग के जो छात्र विदेश में जाकर पढ़ना चाहते हैं लेकिन आर्थिक तंगी के कारण नहीं जा पा रहे हैं, उन्हें सरकार छात्रवृत्ति देकर विदेश पढ़ने के लिए भेजती है, आज के समय में हमारे प्रदेश 41 छात्र विदेशों में अध्ययनरत् हैं. जिन बच्चों ने PSC की परीक्षा में विशेष उपलब्धि हासिल की हैं, ऐसे 826 अन्य पिछड़ा वर्ग के बच्चों को प्रोत्साहन दिया गया है.
सभापति महोदय, कुल-मिलाकर राज्यपाल महोदय के अभिभाषण को जब हम गहराई से देखते हैं और आप सभी भी देखेंगे तो आप पायेंगे कि उसकी एक-एक लाईन, एक-एक शब्द सरकार की गंभीरता को प्रदर्शित करता है और गंभीरता के साथ किये गए प्रयत्नों को बताता है. सरकार द्वारा इस प्रदेश को तेज गति के साथ अग्रणी प्रदेशों की सूची में शामिल करने की गति को बताता है और इसलिए मैं, राज्यपाल महोदय के अभिभाषण का समर्थन करता हूं और सभी सदस्यों पर विश्वास करता हूं कि वे सभी भी इसे स्वीकार करेंगे और समर्थन करेंगे, धन्यवाद. (मेजों की थपथपाहट)
सभापति महोदय- राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव में मेरे पास माननीय सदस्यों के संशोधनों की 1093 सूचनायें प्राप्त हुई हैं. उनमें से जो संशोधन नियमानुसार नहीं थे, उन्हें अग्राह्य किया गया है.
संशोधन बहुत विस्तृत स्वरूप के हैं इसलिए पूरे संशोधनों को न पढ़कर केवल उनके प्रस्तावकों के नाम और संशोधन क्रमांक ही पढूंगा. जो माननीय सदस्य सदन में उपस्थित होंगे, उनके संशोधन प्रस्तुत हुए माने जायेंगे.
सदस्य का नाम संशोधन क्रमांक
श्री सोहनलाल बाल्मीक 3
श्रीमती झूमा डॉ. ध्यानसिंह सोलंकी 6
श्री नितेन्द्र बृजेन्द्र सिंह राठौर 8
डॉ. हिरालाल अलावा 10
श्री फुन्देलाल सिंह मार्को 12
श्रीमती अनुभा मुंजारे 14
श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर 16
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे 18
श्री राजन मण्डलोई 20
श्री अभय मिश्रा 21
राज्यपाल के अभिभाषण पर श्री अजय विश्नोई, सदस्य द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव और संशोधनों पर एक साथ चर्चा होगी.
श्रीमती अर्चना चिटनीस (बुरहानपुर)-- माननीय सभापति महोदय, कल का दिन हम सभी के लिए माननीय राज्यपाल महोदय के अभिभाषण के समय एक अद्भुत अनुभूति देने वाला था और उसके समर्थन में मैं अपनी बात करने के लिए खड़ी हुई हूं. मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को माननीय विधान सभा अध्यक्ष जी को और इस सदन के प्रत्येक सदस्य को बधाई देना चाहती हूं कि कल के दिन माननीय प्रधानमंत्री जी के वंदे मातरम के 150 वर्ष होने के पश्चात् जो गूंज हमने पार्लियामेंट में सुनी थी और जो हमारे गृह मंत्री जी ने नोटिफिकेशन किया वंदे मातरम् के अखण्ड गान करने के हम सभी सदस्य साक्षी हुए कि आजादी के बाद पहली बार इस सदन ने खंडित नहीं बल्कि अखण्ड वंदे मातरम् का गान किया है और उसका साक्षी होना हम सभी के लिए एक सौभाग्य है. आजादी के बाद का पहला अवसर था कि संपूर्ण वंदे मातरम् जो हम सभी के लिए वेद मंत्रों से कम वंदनीय नहीं है. मातृभूमि की मुक्तता का अपने आपमें वह एक यज्ञ की अनुभूति कराने वाला है.
सभापति महोदय, संपूर्ण वंदे मातरम् गाने की जो अनुभूति हम सभी को हुई उसके लिए मैं बधाई देते हुए यह बात कहना चाहूंगी कि कल माननीय राज्यपाल जी का जो अभिभाषण था उसको सुनकर और शब्दश: पढ़कर दो बातें ध्यान में आती हैं. हमारे यहां कहा गया है कि आदेव मातृका कृषि, वर्षा कैसी भी हो अच्छी हो, ज्यादा हो, मध्यम हो या कम हो पर फसल अच्छी आनी चाहिए. राज्यपाल जी के अभिभाषण से यह ध्यान में आया कि मध्यप्रदेश आदेव मातृका कृषि की ओर बढ रहा है. न हम केवल जल संसाधन की चिंता कर रहे हैं बल्कि इस वर्ष को कृषि वर्ष की तरह मनाने की माननीय मख्यमंत्री जी की घोषणा अपने आपमें अभिनंदन का विषय है. हम सबके अपने- अपने पार्टिसिपेशन को भी हमें सुनिश्चित करना चाहिए, उसका संकल्प लेना चाहिए. आदेव मातृका कृषि के साथ-साथ जो उद्घोष राज्यपाल जी का अभिभाषण करता है वह अगर आज के दिन से गिनती करें तो 797 दिन में क्या हुआ उसका लेखा जोखा है. 797 दिनों का लेखा-जोखा जो हो चुका है उसका विवरण है. जो होने जा रहा है उसके बारे में तो सदन में आगे विषय आने वाला है तो आदेव मातृका कृषि के साथ-साथ माननीय राज्यपाल महोदय का जो अभिभाषण है अर्थात् औद्योगिक उत्पादन, औद्योगिक खपत और उत्पाद का वितरण इसमें संतुलन हो इस दिशा में मध्यप्रदेश की सरकार माननीय प्रधानमंत्री जी के विजन के अनुसार शनै: शनै: रोज-रोज आगे बढ़ रही है. जिसे हम कहते हैं अधिकाधिक उत्पादन, समान वितरण और उपभोग में संतुलन यही है आर्थिक संस्कृति. इस दिशा में देश आगे बढ़ रहा है उसी दिशा में मध्यप्रदेश आगे बढ़ रहा है.
माननीय सभापति महोदय, हम कई बार बातचीत में कहते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है. भारत के उद्योगों को अंग्रेजों ने नेस्तनाबूद कर दिया था. केवल कृषि को ही हमारी आजीविका के साधन के तौर पर छोड़ा था. आजादी के बाद भारत ने इस दिशा में काम करना प्रारंभ किया. विगत दिनों हमने देखा वर्ष 2004 के बाद जैसा कि माननीय अजय विश्नोई जी कह रहे थे कि निरन्तर हमारा इन्फ्रास्ट्रक्चर इम्प्रूव हुआ है. अगर बिजली नहीं होती तो उद्योग की बात कैसे होती. अगर सड़कें न होतीं तो उद्योग की बात कैसे होती. अगर आईटी की पर्याप्त व्यवस्था न होती तो उद्योग की बात किस प्रकार करते. आज हम प्राचीन भारत की स्थिति की बात करें तो हमारा कृषि के साथ माइनिंग अच्छा रहा, हमारी शिपिंग अच्छी रही. हमारी टेक्सटाइल उस उत्कर्ष स्थिति पर थी न केवल जीवित बल्कि जो डेड बॉडी होती थी उसको भी भारतीय टेक्सटाइल में, भारतीय कपड़ों में लपेटकर युगों-युगों तक रखा जाता था. आज जिस स्थिति में देश आगे बढ़ रहा है उसी स्थिति में मध्यप्रदेश को पहुंचाने के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी ने जो काम किया है वह काम निश्चित तौर पर प्रशंसनीय है. मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना जिसने मध्यप्रदेश जनविश्वास अधिनियम 2024 पारित किया. मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बना जिसने लेबर केस मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया है. वन डिस्ट्रिक्ट वन क्राप में मेरे जिले में अद्भुत काम हो रहा है. अन्य जिलों में भी यह काम हो रहा है. कहीं हल्दी पर हो रहा है, कहीं सुपारी पर हो रहा है. हम सब जानते हैं कि केवल महानगरों में नहीं बल्कि रीजनल कान्क्लेव इंडस्ट्री की जिस दिशा में मध्यप्रदेश बढ़ा है उसकी तो माननीय केन्द्रीय गृह मंत्री जी ने भी प्रशंसा की है.
माननीय सभापति महोदय, उद्योग नीति निवेश प्रोत्साहन, साथ ही साथ उद्योग संवर्द्धन नीति, मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक नीति, मध्यप्रदेश एक्सपोर्ट संवर्द्धन नीति. अर्थात् हम उत्पाद भी करें और उसके साथ हम उसको एक्सपोर्ट भी करें. इस दिशा में मध्यप्रदेश बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. 33 औद्योगिक क्षेत्रों के उन्नयनीकरण के लिए स्वीकृति दी जा चुकी है. महिला होने के नाते से मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि 4 औद्योगिक क्षेत्रों में वर्किंग वूमन होस्टल के निर्माण की सैद्धांतिक स्वीकृति देकर उसे आगे बढ़ाया गया है.
माननीय सभापति महोदय, मैं जो बात अब कहने जा रही हूँ वह अपने आप में बहुत ही प्रशंसनीय विषय है कि उद्योग पर ध्यान देते हुए इस वर्ष को माननीय मुख्यमंत्री जी ने कृषि वर्ष के तौर पर घोषित किया है. इसका रोड मैप मेरे पास रखा है उसको कल मैंने बहुत ध्यान से पढ़ा. जब ईश्वर साथ होता है तब ही व्यक्ति को सही सूझबूझ आती है और सही समय पर सही निर्णय किए जाते हैं. यह योगायोग का विषय है. यह मात्र सुयोग नहीं बल्कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की को-ऑर्डिनेटर प्लानिंग को दर्शाता है कि इधर मध्यप्रदेश कृषि वर्ष मना रहा है और उधर राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भर मिशन माननीय प्रधानमंत्री जी ने प्रारंभ किया है. मेरे पूर्व वक्ता ने इतने अच्छे से उसके बारे में बताया कि मध्यप्रदेश दलहन में देश में प्रथम है और जैसा मध्यप्रदेश है वैसा हर राज्य हो इसकी कार्ययोजना माननीय प्रधानमंत्री जी राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भर भारत मिशन के द्वारा कर रहे हैं. इन दोनों में हम सामंजस्य बनाकर कृषि वर्ष में आगे बढ़ेंगे. दिल्ली में एआई समिट चल रही है, यहां हमारी सरकार डिजीटल एग्रीकल्चर मिशन पर काम कर रही है. इस पर काम करने से पारदर्शिता बढ़ेगी, टेक्नॉलॉजी आम आदमी तक अबेलेबल होगी और मैं एक बात आपके माध्यम से सरकार तक, माननीय मुख्यमंत्री जी तक पहुंचाना चाहती हूं कि ऑर्गेनिक कार्बन को बढ़ाने की बहुत आवश्यकता है. कई जिलों में ऑर्गेनिक कार्बन 5 प्रतिशत् से कम हुआ है और पराली को जलाने पर रोक लगाने के लिए सरकार अपनी तरफ से कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है. क्रॉप रेसिड्यू मैनेजमेंट निश्चित तौर पर बहुत महत्वपूर्ण है.
सभापति महोदय, जिसे हम मृदा कहते हैं वह सजीव है और एक हेक्टेयर में 15 टन से अधिक माइक्रोब्स सूक्ष्म जीवाणु होने चाहिए. मैं आपके माध्यम से जो कहना चाहती हूं निश्चित तौर पर मुख्यमंत्री जी उसका संज्ञान लेंगे कि हमने प्रधानमंत्री जी से प्रेरणा लेकर सॉइल टेस्टिंग तो प्रारंभ की और सॉइल टेस्टिंग हर तीन साल में पुन: रिपीट करने की भी मध्यप्रदेश सरकार ने कार्ययोजना बनाई है. उससे हम एनपीके का आंकलन करते हैं. मैं जो कहने जा रही हूं कि मिट्टी के माइक्रोबियल प्लानिंग की मध्यप्रदेश को आवश्यकता है. पूरे स्टेट की अगर माइक्रोबियल मैपिंग हमने की तो हम यह समझ पाएंगे कि हमारे प्रदेश की मिट्टी अब जीवित है या नहीं है, क्योंकि मध्यप्रदेश में गंगा जी और जमुना जी की तरह हिमालय से टनों में मिट्टी हर वर्ष नहीं आती है. मध्यप्रदेश की एक इंच मिट्टी बनने में 500 से 1,000 साल का समय लगता है और कितना भी फर्टिलाजर डाल दें अगर जीवाणु नहीं हैं तो जिस रूप में हमारा पौधा फर्टिलाइजर्स को ग्रहण करता है उस रूप में कन्वर्ट करने के लिए मिट्टी की क्षमता नहीं होगी तो हम आने वाले समय में बहुत कठिनाई की तरफ बढ़ जाएंगे. इसलिए मेरा सभी सदस्यों से भी कहना है कि हम इस दिशा में अपने-अपने क्षेत्र में एक जनजागरण के तौर पर इस विषय को आगे लेकर जाएं. बेटी बचाओ की तरह हमारे प्रधानमंत्री जी मिट्टी बचाओ के लिए भी बहुत संवेदनशील हैं. एक तरफ बेटी कह रही है मुझे बचाओ और दूसरी तरफ मिट्टी अर्थात् हमारी मॉं हमें कह रही है कि मुझे जिंदा रहने दो, मुझमें सक्ष्म जीवाणु रहने दो, मुझसे केंचुए रहने दो और गौ माता के बिना कृषि संभव नहीं है इसलिए पशुपालन के क्षेत्र में माननीय मुख्यमंत्री जी ने हमारे दुधारू पशुओं की भी चिंता की है और उसके साथ-साथ वह वाइबल यूनिट रहे, एक पशु नहीं रहे कम से कम एक व्यक्ति के पास 10 पशु रहें, भीमराव अंबेडकर जी के नाम से यह योजना प्रारंभ हुई. वह निश्चित तौर पर अनुकरणीय है. ‘’मिट्टी हूं मैं.’’ कौन हूं मैं, यह मिट्टी, मिट्टी से बीज, बीज से पौधा, पौधे से पेड़, पेड़ से फूल, फूल से फल, फल से अन्न, अन्न से रक्त, रक्त से मांस, मांस से पेशी, पेशी से मज्जा, मज्जा से अस्थि, अस्थि से देह और देह से मिट्टी. मिट्टी हूं मैं. जिस प्रकार हम जल संवर्द्धन की बात करते हैं, अब मिट्टी संवर्द्धन के विषय को भी कृषि वर्ष में माननीय मुख्यमंत्री जी अपने हाथ में लेंगे ऐसा मेरा पूरा-पूरा विश्वास है, क्योंकि वही जीवन का मूल है.
सभापति महोदय, मैं हर विषय पर या हर विभाग पर बात कहूं समय हमें इसकी अनुमति नहीं देता, परंतु हमारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की 15,887 नियुक्तियां हुई हैं और इन नियुक्तियों में जिस प्रकार की पारदर्शिता को अपनाया गया है, जिस प्रकार से टेक्नालॉजी का उपयोग किया गया है वह निश्चित तौर पर प्रशंसनीय है और साथ में कर्मचारी चयन की दृष्टि से देखें तो 560 पर्यवेक्षकों में से 420 पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए गए हैं जो इस विभाग की पोषण के प्रति इस सरकार की सेंसिटिविटी को ही दर्शाता है. भारत सरकार की सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण योजना 2 के अंतर्गत फेसियल रिकग्निशन सिस्टम एफआरएस को मध्यप्रदेश में इतनी अच्छी तरह लागू किया गया है एक अनिवार्य प्रावधान की तरह, मध्यप्रदेश में 4,23,241 गर्भवती महिलाओं के विरुद्ध 4,22,488 गर्भवती महिलाओ का एफआरएस अर्थात् आधार फेस मैचिंग की गई. जो कि हमारी धात्री महिलायें, हमारी गर्भवती बहनें उन सबकी पोषण की स्थिति उनके पास तक टेक होम राशन का वितरण इसकी पारदर्शिता और टेक्नालाजी के 'एप्रोप्रियेट' उपयोग को दर्शाता है. माननीय सभापति महोदय, इस अवसर का सदुपयोग करते हुये मैं लाडली बहनों की तरफ से माननीय मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देना आवश्यक समझती हूं., मैं समझती हूं कि आज से 4-3 दिन पहले ही माननीय मुख्यमंत्री जी ने 33वीं किश्त का भुगतान किया है, पंधाना से हमारी विधायक यहां बैठी हैं उनके सामने हम सबने देखा कि जिस योजना पर लोगों को विश्वास नहीं था कि यह योजना चलेगी कैसे वह योजना सिर्फ चल ही नहीं रही है वह योजना आगे बढ़ भी रही है और उससे इकानामी में ओवर आल फर्क पड़ रहा है. जब महिला के हाथ में पैसा होता है, तो वह जरूरत की चीजें, बच्चों की आवश्यकता की चीजें, घर ग्रहस्थी की आवश्यकता की चीजें लेती है और एक दो नहीं 52 हजार 305 करोड़ रूपये से अधिक की राशि महिलाओं के खाते में अंतरित करी गई है, और सवा करोड़ महिलायें से अधिक संख्या की हमारी बहनें इससे लाभान्वित हो रही हैं.
माननीय सभापति महोदय, मैंने बताया कि शासकीय सखी निवास पर सरकार बहुत तेज गति से काम कर रही है और इसके साथ साथ एचईडब्ल्यू (Hub for Empowerment of Women - HEW) द्वारा मध्यप्रदेश महिला सशक्तिकरण की दिशा में विभिन्न गतिविधियों को निरंतर आयोजित कर रहा है.
वन के क्षेत्र में यह तो हम जानते हैं कि यह सबसे अधिक शेरों की संख्या वाला प्रदेश है. हम यह भी जानते हैं कि चीता का प्रोजेक्ट अगर देने के लिये प्रधानमंत्री जी ने किसी प्रदेश को योग्य समझा तो उन्होंने मध्यप्रदेश को योग्य समझा और उस जवाबदारी को म.प्र. की सरकार ने म.प्र. के वन विभाग ने बहुत शिद्दत के साथ में निभाया. मैं इस बात के लिये मुख्यमंत्री जी का आभार मानती हूं कि पहली बार म.प्र. में ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व का गठन किया गया है और हम अब तक ताप्ती मेगा रीचार्ज की बात करते थे और ताप्ती नदी का कंजर्वेशन हो, इस दिशा में वन विभाग काम कर रहा है. साथ ही में हमारे केम्पा के अंतर्गत 1390.59 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई, जिससे कि 3 लाख 47 हजार 98 हेक्टेयर जमीन पर नवीन रोपण किया जायेगा. मैं इस बात के लिये भी हमारे ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले लोगों की तरफ से धन्यवाद करना चाहूंगी कि हमने वर्ष 2024 में जो तेंदूपत्ते का संग्रहण 3 हजार रुपये प्रति मानक बोरा से बढ़ाकर 4 हजार रुपया, एक हजार रुपये की वृद्धि कम नहीं होती है तेंदूपत्ता के संग्राहक के लिये. उस दिशा में हमने काम किया है. मैं इस बात के लिये सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगी कि हम गरीब कल्याण की सिर्फ बात नहीं कर रहे हैं. वर्षों से लंबित जो विषय थे, जैसे कि हुकुमचंद मिल, सज्जन मिल, ग्वालियर की मिल और बहुत सी ऐसी हमारी 3-4 मिल जिनके श्रमिक वर्षों से चाहते थे कि उनकी देनदारियां, उनका अंतिम वेतन, उनका ले-ऑफ उन्हें दिया जाये और निर्णय किया और उसी प्रकार से हमारे बुरहानपुर की बहादरपुर मिल के लिये भी मुख्यमंत्री जी ने निर्णय किया है. चाहे खेल, रोजगार की बात की जाये, चाहे नदी जोड़ो के बारे में मेरे पूर्व के वक्ता ने उल्लेख किया है और अब म.प्र. दूध का केपिटल बनने जा रहा है, उस दिशा में भी मैंने अपनी बात शुरुआत में की थी और सिकल सेल की दिशा में तो राज्यपाल जी का भी मैं आभार मानती हूं कि उन्होंने जो दिशा म.प्र. को दिखाई है, उस दिशा में आगे बढ़ते हुए हम अपने आदिवासी भाइयों के लिये जो सेवा का काम कर रहे हैं, सिकल सेल उन्मूलन को लेकर, वह निश्चित रुप से पीढ़ियों को असर दिखाने वाला है और पीढ़ियों पर हमारी संवेदना, कारर्यशेली को इंगित करता है. हम कई बार बात करते हैं कि प्रोग्रेस की गति क्या है. सिर्फ आगे बढ़ना पर्याप्त नहीं है. पर्यटन के क्षेत्र में हमने जो काम किया है, वह मैं इंगित करते हुए अपनी बात को लगभग पूर्णता की ओर ले जाऊंगी. पर्यटकों की संख्या में 526 प्रतिशत की वृद्धि पिछले दो वर्षों में हुई है. पिछले वर्ष, मात्र एक वर्ष में 13 करोड़ 41 लाख से अधिक पर्यटक म.प्र. में आये, जो अपने आप में छोटी बात नहीं है. 13 करोड़ 41 लाख से अधिक पर्यटक हमारे प्रदेश में आना. ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये 121 गांवों में होम स्टे की बहुत अच्छी व्यवस्था बनाई गई है. अब जिस दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं, उस दिशा में हम सबकी जिम्मेदारी है कि जिस स्थिति में हम आज हैं, उससे बेहतर स्थिति में कल हों और उससे बेहतर स्थिति में परसों हों, ताकि म.प्र. जब भारत 2047 में विकसित राष्ट्र बने , तब म.प्र. विकसित राज्य की दिशा में आगे बढ़े. इसी प्रकार चहुं तरफ हम आगे बढ़ते हुए अपनी सफलता की ऊंचाइयों को छूते हुए हम इस ओर इस भाव के साथ काम करें कि हिन्दवः सोदरा सर्वे, हम सबने एक मां से, उसकी कोख से जन्म लिया है. हम सब भारत माता की संतान हैं, उस भाव से हम एक रहकर अपने आपको सबसे जोड़ते हुए हम इस दिशा में काम करें. संगच्छध्वं संवदध्वं. हम साथ साथ चलें, साथ साथ पुरुषार्थ करें. किसी एक के पुरुषार्थ से मात्र सरकार के प्रयास से कुछ नहीं होगा. हम सबको उस दिशा में काम करना होगा. राष्ट्रम् रक्षति रक्षितः हम राष्ट्र की रक्षा करें. राष्ट्र हमारी रक्षा करेगा. आओ सब मिलकर देश का यश बढ़ायें, अपना अपना जीवन सार्थक करें. धन्यवाद.
श्री फूल सिंह बरैया( भाण्डेर)- माननीय सभापति जी, कल जो भाषण राज्यपाल महोदय का हुआ था उसकी उम्मीद मध्यप्रदेश की जनता एक वर्ष से लगाकर बैठी थी. मध्यप्रदेश विधान सभा करोड़ों लोगों की आवाज है. करोड़ों लोग अपना हित देखते हैं और राज्यपाल महोदय के भाषण में अपना जीवन सुरक्षित देखते हैं. कल जो भाषण हुआ था जिस भाषण में सिर्फ और सिर्फ भाषणबाजी थी. धरातल पर उसमें कुछ भी नहीं था. यह हो सकता है. क्योंकि यह भारत देश का एक राज्य है मध्यप्रदेश. यह भी जातियों में बंटा हुआ राज्य है. यह तो हो सकता है कि कुछ लोगों के विकास हो रहा हो और कुछ लोगों के लिये विकास नहीं हो रहा हो, तो जिनको विकास नहीं दिख रहा है, उनको हो नहीं रहा है और जिनको दिख रहा है उनका हो रहा है. मैं सबसे पहले उन छात्रों की चर्चा करता हूं जो आंकड़ों में दिखायी गयी. छात्र होस्टल में रहते हैं और होस्टल में वही छात्र रहता है, जिसकी कोई व्यवस्था नहीं होती है. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के जो प्री-मैट्रिक छात्रावास हैं, वह बहुत ज्यादा खाली पड़े हैं. सिर्फ यहीं नहीं है कि खाली पड़े हैं, इनकी जो शिष्यवृत्ति है, इनका खाने-पीने का सामान और सामान जो खरीदा जाता है तो इस शिष्यवृत्ति में भी विभाग के अधिकारी का कमीशन लगता है. सभापति महोदय तो मैं यह कहना चाहूंगा कि शिक्षा को कमीशन से दूर किया जाये, क्योंकि शिक्षा वह अनमोल चीज है जो इंसान को इंसान तो बनाती है और महान भी बनाती है. लेकिन ऐसा हो रहा है और महामहिम राज्यपाल जी ने अपने भाषण में कहा कि शिक्षा को निरंतर बनाये रखने के लिये यह व्यवस्था हम लोग कर रहे हैं. यदि आप लगातार शिक्षा का स्तर बनाये रखना चाहते हैं तो छात्रावास होना जरूरी है.
सभापति महोदय, कुछ तो ऐसी जगह है, एक छात्रावास तो मैंने देखा भी और उसकी जांच के लिये सरकार से कहा भी और वह जांच करने गये और उन्होंने जांच भी की. अनुसूचित जनजाति की बच्चियों के कन्या आश्रम में और कन्या आश्रम में एक भी कन्या नहीं. मैंने पहले ही लिखकर दे दिया था. मैं वहां दौरा करने गया था और मैंने वहां देखा की एक भी कन्या नहीं है, वहां पूछा तो उन्होंने बताया कि साहब आती ही नहीं हैं तो मैंने जांच के लिये दिया और अधिकरी जांच करके आये, शायद अधिकारियों ने भी यही जांच की कि वह तो कन्याओं से भरा पड़ा है. वह छात्रावास तो कन्याओं से पूर्ण है. मैंने कहा कि कहीं इन लोगों ने व्यवस्था कर दी होगी, क्योंकि सरकार तो बड़ी होशियार होती है. मैं फिर दोबारा देखने गया तो वहां एक भी कन्या नहीं थी. सभापति महोदय, अब बताइये, यह लोग सरकार से कैसे लड़ सकते हैं, कैसे लड़ेंगे. वह असत्य नहीं बोल रहे हैं, वह गलत कर रहे है. असत्य में तो कुछ ज्यादा बिगड़ता भी नहीं है. वह कह रहे हैं कि वहां कन्याएं हैं, अभी सीट खाली नहीं हैं. गजब, अगर इसी समय आपके पास कोई शक्ति हो तो इसी वहां पर छापा डलवा दीजिये, अगर एक भी कन्या निकल जाये. मुझे पता नहीं, पहले से कलेक्टर को बता दें, वह अलग बात है कि वहां एकाध दो पहुंचा दें, लेकिन रिकार्ड में तो होना चाहिए तो ऐसा दरअसल हो क्यों रहा है? महामहिम राज्यपाल महोदय सपना दिखा रहे थे कि इतनी बढ़िया व्यवस्था है तो फिर मैंने ही खुद देखा कि मैंने कहा कि बच्चियां हैं क्यों नहीं, तो आदिवासी बच्चियां वहां क्यों नहीं है? उसका अधीक्षक..
सभापति महोदय - आप कहां का प्रसंग बता रहे हैं?
श्री विजयपाल सिंह - आप बता तो दें कि कहां के छात्रावास की बात कर रहे हैं?
श्री फूलसिंह बरैया - हम बता देंगे तो आप चले जाएंगे क्या?
सभापति महोदय - बरैया जी आप अभिभाषण पर ही रहें.
श्रीमती अर्चना चिटनीस - हम निश्चित तौर पर जाएंगे. आप बताएं, हम देखने जाएंगे.
श्री विजयपाल सिंह - आप बताइए, हम देखेंगे. आपके साथ हम भी चलेंगे.
श्री फूलसिंह बरैया - बड़ौनी कन्या आश्रम जिला दतिया.
श्रीमती रीती पाठक - सभापति महोदय, जितनी चिंता आप कन्याओं की कर रहे हैं, सम्मान भी उनको उतना मन से होना चाहिए, भाव से होना चाहिए, आपके शब्द और भाषा पर थोड़ा ध्यान आकर्षण किया जाय, किस तरह की भाषा महिलाओं के लिए, बच्चियों के लिए आप प्रयोग करते हैं, इस पर भी थोड़ा चिंता करने की जरूरत है.
सभापति महोदय - आप अभिभाषण पर ही रहें, बरैया जी.
श्री फूलसिंह बरैया - मैं सभ्यता की बात कर नहीं रहा था. मैं सभ्यता की बात आज से 15 दिन पहले कर चुका हूं. इनके ग्रंथों में क्या लिखा है हमारी महिलाओं के लिए? . (XX)
सभापति महोदय - कृपया आप संदर्भित रहें.
श्री फूलसिंह बरैया - संदर्भित नहीं, अभी इन्होंने आरोप लगाया.
सभापति महोदय - अन्य कुछ न लिखा जाय. आप अभिभाषण पर ही चर्चा रखें.
एक माननीय सदस्य - ग्रंथों की बात नहीं करें, ग्रंथ तो सनातन हैं.
श्री फूलसिंह बरैया - सभापति महोदय, आरोप लगाया है.
श्रीमती रीती पाठक - आरोप नहीं है, यह प्रत्यक्ष प्रमाण है.
(व्यवधान)..
एक माननीय सदस्य - यह गलत बात कर रहे हैं, महिलाओं के प्रति गलत बात करते हैं. इनकी मानसिकता देखिए.
श्री फूलसिंह बरैया - एक भी आरोप अगर यह सही साबित कर दें तो मैं सभापति महोदय, इनके सारे आरोप सही कर दूंगा.
सभापति महोदय - विषय से असंदर्भित बातें विलोपित की जाय, यह न लिखी जायं.
(व्यवधान)..
श्रीमती रीती पाठक - मैं सदन में बड़े प्रमाण के साथ बात करती हूं. (व्यवधान)..
सभापति महोदय - आप अन्य संदर्भ में न जायं, आप विषय पर रहें.
श्री फूलसिंह बरैया - इनकी (XX) ऐसी बात करने की.
सभापति महोदय - यह शब्द विलोपित किया जाय.
श्रीमती रीती पाठक - इनकी जिस तरह की भाषा शैली है, इनकी चाल में, चरित्र में है. ये पहले अपने बयान पर सदन में माफी मांगे.
सभापति महोदय - सभी सदस्यों का समान सम्मान है.
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन - क्या माननीय सदस्य को उनके दल का समर्थन प्राप्त है?
श्री रामेश्वर शर्मा - क्या श्री भवंर सिंह शेखावत जी यह बर्दाश्त करेंगे? आप बताइए, अन्यथा सदस्य से माफी मंगवाइए.
श्री आरिफ मसूद - काहे कि माफी मंगवाए?
सभापति महोदय - कृपया व्यवधान न करें.
श्रीमती रीती पाठक - ये पहले अपने बयान पर सदन में माफी मांगे.
सभापति महोदय - माननीय राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर ही अपना पक्ष रखें. आप अन्य संदर्भों को इस तरह से न ले जायं.
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - सभापति महोदय, आप माननीय सदस्यों पर इतना अंकुश तो लगाएं कि माननीय सदस्य अपने बात कह सकें.
सभापति महोदय - आप हेमन्त जी कृपया बैठ जाइए. आप शांति रखें.
श्री रामेश्वर शर्मा - सभापति महोदय, मेरी प्रार्थना कांग्रेसी मित्रों से है बरैया जी जो बोल रहे हैं, यह हेमन्त कटारे जी, भवंर सिंह जी और जितने लोग हैं क्या ग्रंथों का अपमान आप बर्दाश्त करेंगे?
(व्यवधान)..
श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - यहां गौमांस बेचा जा रहा है (XX), भोपाल के नगर निगम में गौमांस बेच रहे हैं, नाम बताऊं. आपके मंत्री, (XX) अभी नहीं है, (XX), यहां के (XX) आप लोग गौमांस बेच रहे हो. यह अभिभाषण है, इसमें आप गौ माता की बात कर रहे हो.
सभापति महोदय - हेमन्त जी आपका नाम चर्चा में है. आप कृपया बैठ जाइए. बरैया जी आप बात जारी रखें.
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन - आप इनकी बात का समर्थन कर रहे हैं क्या?
सभापति महोदय - आपके सदस्य बोल रहे हैं और आप ही व्यवधान कर रहे हैं. श्री शैलेन्द्र जी, श्री रामेश्वर जी, श्रीमती रीता जी आप कृपया बैठें. श्री हेमन्त जी आपका चर्चा में नाम है.
श्री रामेश्वर शर्मा - क्या ग्रंथों का अपमान आप बर्दाश्त करेंगे क्या?
सभापति महोदय - आप नाम भी चर्चा में है, आप कृपया बैठिए.
(व्यवधान)..
........व्यवधान....
सभापति महोदय -- कृपया आप सभी बैठें. माननीय बरैया जी, आप अपनी चर्चा जारी रखें. माननीय हेमंत जी आप बैठिए. आपका भी नाम है. माननीय सोहनलाल जी का भी नाम है. आप सभी का नाम चर्चा में है, कृपया शांति बनाएं रखें....(व्यवधान)....
श्रीमती रीती पाठक -- हेमन्त जी, मुंह में राम बगल में छुरी नहीं चलेगा. अगर आपको शौक हो, कि ग्रंथों का अपमान हो, बहन-बेटियों का अपमान हो, तो आप यहां सदन में एफिडेविड लिखकर दीजिए...(व्यवधान)..
सभापति महोदय -- कृपया, आप सभी बैठ जाइए...(व्यवधान)...
श्री अभय मिश्रा -- माननीय सभापति महोदय, क्या यह मछली बाजार है ? हम अपना स्तर कहां गिरा रहे हैं, यह क्या हो रहा है ? हम दोनों पक्षों के लिए कह रहे हैं. इससे हमारी गरिमा गिर रही है और यह अच्छा नहीं लग रहा है....(व्यवधान)....
सभापति महोदय -- माननीय बरैया जी, कृपया, अपनी बात रखें.. ..(व्यवधान)...
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- माननीय अभय जी, माननीय बरैया जी ने जो कहा, क्या आप उससे सहमत हैं ? क्या आप सहमत हैं. मैंने आपसे नहीं बोला (श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे, सदस्य के अपने आसन से खडे़ होकर कुछ कहने पर) मैंने यह माननीय अभय जी से पूछा है. माननीय अभय जी, क्या आप इस बात से सहमत हैं, जो माननीय बरैया जी ने बोला है. क्या सदन में उनको इस प्रकार की बातें कहनी चाहिए ?
श्री अभय मिश्रा -- माननीय सभापति महोदय, ऐसी बातें होनी ही नहीं चाहिए. अगर यहां सदन का प्रसारण हो रहा होता और प्रदेश की जनता देखती, तो हमारे बारे में क्या सोचती ? इस तरह की बातें कहीं पर भी नहीं होनी चाहिए. ऐसी बातें दोनों ओर से भी नहीं होनी चाहिए....(व्यवधान)..
सभापति महोदय -- ...(व्यवधान)...आप सभी माननीय राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर चर्चा में भाग ले रहे हैं, तो इस तरह की असंदर्भित बातें नहीं करना चाहिए....(व्यवधान)..
श्री अभय मिश्रा -- सभापति महोदय, हमें अच्छा नहीं लग रहा है, ऐसी बातें नहीं होनी चाहिए...(व्यवधान)...
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- माननीय सभापति महोदय, मर्यादा होना चाहिए. आप बोल रहे हैं कि इनके धर्म में यह लिखा है, किनका धर्म है ? क्या इस प्रकार बोलना चाहिए. इनके शास्त्रों में यह लिखा है. इस प्रकार वे बोल रहे हैं और आप वहां बैठे-बैठे सुन रहे हैं. (श्री अभय मिश्रा, सदस्य की ओर देखकर) आपको लज्जा आनी चाहिए.....(व्यवधान)...
सभापति महोदय -- माननीय बरैया जी, आपसे आग्रह है कि माननीय राज्यपाल महोदय के बजट अभिभाषण के संदर्भित चर्चा की जाए, चर्चा असंदर्भित न जाए और ऐसे आक्षेपित न करें. ऐसे आक्षेपित करके उद्वेलित न करें. आप अपनी बात निरंतर करें. आप अपनी बात जारी रखिए.
श्री फूल सिंह बरैया -- सभापति महोदय, जिस जिले में छात्रावास की बिल्डिंग नहीं है.
सभापति महोदय -- आपकी बात आ गई है. आपकी पूरी बात आ गई है. आप आगे बढे़ं.
श्री फूल सिंह बरैया -- सभापति महोदय, अभी मेरी पूरी बात नहीं आयी है. विभाग की बीटीआई बिल्डिंग में छात्रावास लगाते हैं. उसमें कोई सुविधाएं नहीं हैं. मेरा आपके माध्यम से निवेदन है और मैं सरकार से कहना चाहता हॅूं कि उनके अधीक्षक उन्हीं के वर्ग के रखे जाएं. शेड्यूल ट्राइब्स का छात्रावास है तो वहां शेड्यूल ट्रॉइब्स का अधीक्षक हो. शेड्यूल कॉस्ट का छात्रावास है तो वहां शेड्यूल कॉस्ट का ही अधीक्षक हो. कर्मचारी भी उन्हीं के हों. क्योंकि देश में जातिवाद है और स्कूल की जहां तक बात है, लगभग 80 हजार स्कूल बंद होने की कगार पर हैं.
सभापति महोदय -- यह विषय आ चुका है और इस तरह की कोई असंवैधानिक स्थिति न आए, यह अन्य असंदर्भित बातें सारी विलोपित रखी जाएं, आप कृपया, बजट अभिभाषण के अंतर्गत ही चर्चा करें. वह विषय आ चुका है. आप थोड़ा आगे बढे़.
श्री फूल सिंह बरैया -- जी, सभापति महोदय. मैं आगे बढ़ रहा हॅूं. .....(व्यवधान)....
सभापति महोदय -- मैं बार-बार आपसे कह रहा हॅूं, निवेदन कर रहा हॅूं कि बजट अभिभाषण के अंतर्गत आप संदर्भित रहें, असंदर्भित जाने से विषय फिर विषयांतरगत हो जाता है. आप किसी को आक्षेपित न करें...(व्यवधान)..
श्री तेज बहादुर सिंह चौहान -- आप यहां पर औकात की बात करते हैं क्या यहां पर सबकी औकात अलग-अलग है. यहां पर सभी सदन के माननीय सदस्य हैं. आप हमेशा मर्यादित शब्दों में बात करें...(व्यवधान)...
सभापति महोदय -- कृपया, आप बैठ जाइए. यह सभी विलोपित कर दिया है.
श्री फूल सिंह बरैया -- माननीय सभापति महोदय, शेड्यूल कॉस्ट का जो एरिया है, वहां के लिए बजट जाता है. वहां का स्पेशल सर्वे कराया जाता है कि वह शेड्यूल कॉस्ट बाहुल्य एरिया है. जिले में बजट जाता है. पूरे जिले में जहां-जहां शेड्यूल कॉस्ट ज्यादा हैं वहां के लिए बजट जाएगा. लेकिन बजट सिर्फ वहां के लिए जाता है जहां पर बीजेपी जीतेगी. उस क्षेत्र में बजट नहीं जाता, जहां पर कांग्रेस का क्षेत्र है या कोई शेड्यूल कॉस्ट के कमजोर लोग हैं. वहां बजट नहीं जाता, तो मैं यह निवेदन करूंगा कि राज्यपाल महोदय जी का जो अभिभाषण है वह भाषण सिर्फ आंकडे़ पर ही खरा है. स्वरोजगार योजना को प्रोत्साहन देने के लिए उन्होंने बात की कि शेड्यूल कॉस्ट, शेड्यूल ट्राइब्स के बेरोजगार लोगों को स्वरोजगार के लिए उन्होंने पहली बार, इसके पहले उन्होंने कहा था कि जो योजना है जिनसे लोन मिलता है वह योजनाएं सारी चालू हैं कोई बंद नहीं हैं. कल के भाषण में उन्होंने यह नहीं कहा कि बंद हो गई हैं. उन्होंने नाम भी नहीं लिया. सिर्फ उसमें दो योजनाओं का नाम है. डॉ.भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण, संत रविदास स्वरोजगार योजना इसके अलावा कोई जिक्र नहीं किया गया है. इस योजना में पहले 30 से 40 प्रतिशत सबसिडी मिलती थी जब कोई धन्धा करता था. अब यह सबसिडी बंद कर दी गई है. जब सबसिडी बंद कर दी है तो 4 प्रतिशत ब्याज की रिलेक्शेशन देते हैं वह भी कब जब सही समय पर ऋण की किश्त जमा करेगा तब उसको 4 प्रतिशत सबसिडी मिलेगी, नहीं तो वह भी नहीं मिलेगी जिसके कारण अब लोन कोई नहीं ले रहा है. रानी दुर्गावती योजना, पवनपुत्र योजना यह बंद हैं. मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना अभी बंद है. जनधन योजना यह ट्राईब के लिये है. यह बंद इसलिये भी है कि वहां पर तो पेड़ो की कटाई चल रही है. पांचवी अनुसूची से आदिवासियों को हटा भी दिया है, इस पर बहस हो भी चुकी है. भगवान बिरसामुण्डा योजना, टंट्यामामा आर्थिक कल्याण योजना यह सारी योजनाएं बंद हैं. अब यहां कैसे स्वरोजगार के लिये किस तरीके से उनको यह पैसा मिलेगा. सरकार कहती है कि बैंक लोन देगी, पहले डायरेक्ट लोन मिलता था. विभाग लोन डायरेक्ट देता था. अब बैंक लोन देगी. बैंक से क्या लिखा-पढ़ी हुई है, क्या टाईअप हुआ है ? यह तो बताया तो जाता ही नहीं है. लेकिन बैंक वाले देख लेते हैं कि यह कौन आया उसको बाहर से ही भगा देते हैं. क्या यह बैंक का पैसा है? सरकार का यह पैसा है. बैंक यह स्पष्ट क्यों नहीं करती है कि हम इतना लोन देंगे इसके बाद लोन नहीं देंगे ? तो फिर क्यों लाईन लगेगी ? लोगों को बेइज्जत करके भगाती है लोगों से कमीशन अलग से लेती है. बैंक में कमीशनबाजी इसी पाईंट पर होती है बाकी ज्यादा वहां नहीं होती है. इस तरह से अगर यह योजनाएं बंद होती चली गईं. तो यह एसटी, एससी ओबीसी हैं इनका बुरा हाल हो ही चुका है और आगे बिल्कुल बुरा हाल हो जायेगा. महामहिम राज्यपाल महोदय जी का जो भाषण था उसमें कहीं यह जिक्र नहीं है कि हम नौकरियों के लिये नयी भर्ती कर ही नहीं पा रहे हैं. हम आऊटसोर्स से काम चला रहे हैं हम यहां पर ठेकेदारी चला रहे हैं. जब जरूरत हुई तो ठेकेदार को बुला लिया जरूरत नहीं है तो उसको हटा दिया. जब तक नयी भर्ती नहीं है तो क्या हो रहा है. एक एज्यूकेटिव इंजीनियर को ईएनसी का चार्ज देने की चर्चा चल रही है. एक असिस्टेंट इंजीनियर को चीफ इंजीनियर का चार्ज दे रहे हैं. जहां पर थाने के बाहर चौकी पर एक थानेदार बैठता था अब वहां पर एक सिपाही बैठता है. क्योंकि कर्मचारी ही नहीं हैं. कर्मचारी न होने के कारण सरकार की जो परफार्मेंस है वह जनता के बीच में घटी है. जनता ऐसा महसूस कर रही है कि सरकार तो है लेकिन हमारी सरकार नहीं हैं. मैं तो स्पष्ट कहता हूं कि कुछ जातियों को फायदा हो रहा होगा वह तो कहेंगे. जिनको नहीं हो रहा है फायदा वह नहीं कहेंगे. सभापति जी बात आयी अल्पसंख्यकों के संबंध में बहुत अच्छा उसमें बताया गया है. मेरी विधान सभा भाण्डेर में मदरसे बंद हो रहे हैं, वहां पर कब्रिस्तानों पर कब्जे हो रहे हैं. हम कलेक्टर से बात करते हैं, हम एसडीएम, एसडीओपी, एसपी से बात करते हैं वह ऐसे चर्चा करते हैं जैसे यह बड़ा अपराध नहीं है. वहां पर सौ से डेढ़ सौ साल पुरानी कब्र निकल रही हैं आप वहां पर कब्जा कर रहे हैं आप अपने कार्यकर्ताओं को कॉलोनी बनाने के लिये कह रहे हैं सभापति महोदय.
सभापति महोदय – बरैया जी फिर आप असंदर्भित जा रहे हैं. कृपया बजट भाषण के अंतर्गत रहे और इस तरह की आक्षेपित और अतथ्यात्मक बातें सदन में न रखें.
श्री फूलसिंह बरैया – सभापति महोदय, छोडि़ए आप नहीं सुनना चाहेंगे, उस विषय को, आपको ऐसा लगता होगा कि मैंने असंदर्भित बातें कहीं.
सभापति महोदय – अभिभाषण पर चर्चा है.
श्री फूलसिंह बरैया – सभापति महोदय, किसानों के बारे में कहा गया है कि समर्थन मूल्य पर गेहूं-धान की फसलों में, पिछले पांच वर्षों में निरंतर वृद्धि हुई है. सुनने में बहुत अच्छा लग रहा है. हम भी किसान के बेटे हैं, किसानों के संबंध में यदि आप देखें, जैसे खाद, यहां तो ऐसा लगता है कि जैसे ही बाहर निकलेंगे, खाद ही खाद मिल जाएगी. सभापति महोदय खाद की यह हालत हुई, इसको कालाबाजारी भी नहीं कह सकते हैं, इसको चरम भ्रष्टाचारी कह सकते हैं. 300 रुपए की यूरिया की बोरी 500 रुपए में बेची गई. किसान अन्नदाता है, किसान कमाकर हमको देता है, हमारा पेट भरता है और हम भ्रष्टाचार में उसको तकलीफ दे रहे हैं. डीएपी की 1300 की बोरी 2100 तक में बिकी. सभापति महोदय, ये सारी चीज है और यही नहीं है, ये सबके रिकार्ड में भी है, सब जानते भी हैं, लेकिन यहां कहने वाली बात अलग है. बीज कृषकों को दिया जाता है. अपनी परफॉरमेंस बढ़ाने के लिए अच्छे कृषक को दिया जाता है, नि:शुल्क भी दिया जाता है. हमने देखा है कि अपने अपने संबंधी, रिश्तेदारों और दोस्तों को बीज देते हैं, जो जरूरतमंद है, जो अच्छा परफॉरमेंस दिखा सकते हैं, किसान उसको बीज नहीं देते हैं. हम लोग बहुत समय से समर्थन मूल्य की मांग कर रहे हैं, तो समर्थन मूल्य, उसके दो रूप है. जब किसान की फसल आने वाली हो और उस किसान ने कर्जा लेकर रखा है, तत्काल बेचकर के वह पैसा चुकाना है, तब समर्थन मूल्य का कोई अता-पता नहीं, तब उसने धान को 1600-1700 में बेचा. वही धान 1600-1700 में बेचा, जब किसान का धान बिक गया, उसके बाद रेट बढ़ी और 2200 से 2300 रुपए हो गया, फिर समर्थन मूल्य आ गया 2500, समर्थन मूल्य उसको फिर मिला, लेकिन किसान का जब धान खाली हो गया, उसके बाद उसको समर्थन मूल्य मिला. गेहूं के साथ भी यही हुआ.
सभापति महोदय, मनरेगा का जी-राम-जी नाम रख दिया है, ठीक है. मनरेगा में गरीब को जो फायदा था, जो उसके पेट की व्यवस्था होती थी, वह जी-राम-जी से भी होनी चाहिए. हम और आपको मालूम है कि जी-राम-जी में राम नाम लिख दिया है, लेकिन इस नाम से कोई उसका संबंध नहीं है, लेकिन भावनाओं को किस तरह से एक्सप्लोइड करते हैं कि केवल ये सही है, यह राम के नाम की योजना और यही नहीं इसमें यह भी कहा गया कि अंतिम छोर के जो व्यक्ति हैं, जिनके पास खाने तक को कुछ नहीं है. एक संबल योजना है, इस योजना में जो कभी घटना होती है, इसमें 2 लाख, 4 लाख रुपए मिलते हैं, जो कम से कम 15 दिन, 1 महीने या ज्यादा से ज्यादा दो महीने में मिलनी चाहिए, लेकिन एक-एक साल, दो-दो साल लग जाते हैं, उस संबल योजना का कोई अर्थ नहीं है, ये भी उसमें है. सभापति महोदय राज्यपाल महोदय ने जो बिन्दु रखें है, सिर्फ वह बिन्दु नहीं है, वह पूरे राज्य के करोड़ों लोगों की बात रखी है और उसमें ऐसे भी विषय है कि ये विषय आज तक मध्यप्रदेश की सरकार ने इसको स्वीकार नहीं किया है.
सभापति महोदय -- बरैया जी थोड़ा संक्षिप्त करें, पर्याप्त समय हो गया है.
श्री फूलसिंह बरैया -- सभापति महोदय, थोड़ा सा पढ़कर समाप्त करता हूं. एस.सी.एस.टी. के साथ कोई घटना घटती है और उसका कत्ल हो जाता है, फिर उसके जो वारिश हैं, जो पीडि़त हैं, उनके लिये कुछ नियम सरकार ने बनाये हैं. 8 लाख 25 हजार रूपये मिलता है, उसके लिये दो डेट हैं, एक तारीख है एफ.आई.आर के दिन या पोस्टमार्टम के दिन, या तो एफ.आई.आर. की डेट ले लीजिये या पोस्टमार्टम की डेट ले लीजिये. दूसरी तारीख है चालान पेश होता है, तब यह पैसा तीन-तीन साल तक नहीं मिलता है, बजट निकल जाता है क्या सरकार को मालूम नहीं है कि इसका टाईम क्या है? बहुत स्मूथ गर्वनमेंट चल रही है तो इसका टाईम क्या है? तो इनके लिये टाईम स्मूथ है. सभापति महोदय, इसके अलावा उसकी वारिश अगर पत्नी है, पढ़ी लिखी है तो नौकरी, पढ़ी लिखी नहीं है तो रोजगार और रोजगार के नाम से कम से कम चार एकड़ जमीन जो उसे मिलना चाहिए, 10 हजार रूपये पर मंथ छ: महीने के लिये था, अब वह काटकर तीन कर दिया गया है, लेकिन मिला किसी को नहीं और उसमें संशोधन हो गया. सभापति महोदय, पेंशन भत्ता उसमें दिया है, घर उसका अगर तोड़ दिया गया है, अगर उसके पास घर नहीं है तो सरकार उसको घर खरीदकर दे, यही नहीं पीडि़त बच्चों को स्नातक स्तर की पूरी लागत, उसकी शिक्षा, उसके भरण पोषण की सरकार की गारंटी, यह उसमें है. बच्चों को सरकार द्वारा आवासीय स्कूल में दाखिला कराया जाये, बर्तन, चावल, गेहूं, दाल, दलहन उनको तीन महीने के लिये दिये जायें, कलेक्टर तत्काल उनके घर में हैंडपंप लगवाये, बच्ची को बालिग होने तक पढ़ाये और फिर पच्चीस हजार रूपये देकर शादी करे और वह कोर्ट में जाये तो कोर्ट का भत्ता, कोर्ट के पैसे भी दिये जायें. सभापति महोदय, मैं बस यह चाहता हूं कि आप सरकार को एक आदेश करें कि क्या जिले के कलेक्टर को यह नहीं मालूम है? वह तो यू.पी.एस.सी. करके आया है, वह कोई मजदूरी करके नहीं बैठा है. कलेक्टर, एस.पी. और डी.ई.ओ. तीनों इसकी समिति के सदस्य हैं और तीनों को यह नहीं मालूम है तो क्या हम यह समझे कि यह मालूम नहीं होगा? सभापति महोदय, मालूम होगा लेकिन इन वर्गों के लिये उसे मालूम है कि देना नहीं है और न ही वह कभी करता है, मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं. धन्यवाद, जय भीम, जय भारत.
श्री हेमन्त विजय खण्डेलवाल(बैतूल) -- माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से राज्यपाल महोदय के द्वारा हमारी सरकार की नीति और कार्यक्रमों का जो उनके अभिभाषण में जिक्र है, उसके लिये उनको धन्यवाद देना चाहता हूं. सबसे पहले मैं हमारे गृह विभाग, पुलिस विभाग को उनकी सफलता के लिये बधाई देना चाहता हूं, एक ऐसी समस्या जिससे न सिर्फ सत्ता पक्ष बल्कि विपक्ष भी जूझ रहा था, पिछले तीस-पैंतीस सालों से हमारे प्रदेश में नक्सलवाद की एक बड़ी समस्या थी, मैं मुख्यमंत्री जी को इस बात के लिये धन्यवाद देना चाहूंगा कि श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में उन्होंने जो निर्धारित डेट 31/05 थी, उससे पहले ही 25 दिसंबर को इस प्रदेश से समस्त नक्सलवाद का सफाया किया, मैं पूरे सदन की तरफ से सरकार का धन्यवाद करता हूं. 10 उग्रवादियों को मुठभेड़ में और 13 को समर्पण करवाकर सरकार ने एक ऐसा काम किया है, जिसकी बाट इस प्रदेश के नागरिक कई सालों से जोह रहे थे, हमारा बालाघाट जिला अब विकास के पैमाने पर आगे बढ़ेगा और यह प्रदेश देश में नक्सलवाद मुक्त राज्य कहलायेगा, उसके लिये जितनी भी प्रशंसा राज्य सरकार की जाये वह कम है. मैं समझता हूं उसके लिये सरकार धन्यवाद की पात्र है और विपक्ष के सदस्यों को भी मैं अनुरोध करूंगा कि इस बात के लिये कम से कम 1 बार वे धन्यवाद कर दें, हमारा प्रदेश नक्सलवाद से मुक्त हुआ.
माननीय सभापति महोदय, संगठित अपराध, माफिया गतिविधि, गंभीर अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस की सरकार की नीति है. इसके बारे में मैं जिक्र करना चाहूंगा. माननीय सभापति महोदय, एक समय था जब अपराधियों को किसी कारण से अगर जमानत मिल जाती थी तो समाज में वह जमानत के बल पर बाहर घूमते थे और उनका खौफ रहता था. पहली बार सरकार ने अपराधी जो जघन्य अपराधी हैं उनकी जमानत निरस्त हो, इसका पूरा का पूरा अभियान चलाया और प्रदेश में ऐसे सारे अपराधी जो किसी कारण से जमानत पर बाहर हुये उनकी जमानत निरस्त करने का काम सरकार ने किया. आज प्रदेश में उन अपराधियों का जो खौफ है वह खत्म हुआ, इसके लिये मैं सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा. एक और बात मैं आपको बताना चाहूंगा, बात बहुत छोटी है जैसा अभी सदन में जो डॉग की बात चल रही थी, बात छोटी लग रही थी, लेकिन बात बहुत बड़ी होकर निकली ऐसे ही एक समय था जब चालान 90 दिन के बाद प्रस्तुत होते थे कई अपराधों में बड़े-बड़े अपराधी छूट जाते थे 90 दिन में चालान न होने के बाद उनको जमानत आसानी से मिल जाती थी, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार ने सात दिन में चालान पेश हो इसकी मुहिम चलाई है और पूरे देश के बड़े राज्यों में मध्यप्रदेश चालान जल्दी प्रस्तुत हो इसमें मध्यप्रदेश का पूरे देश में दूसरे नंबर का स्थान है, मैं इसके लिये सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं. माननीय सभापति महोदय, धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर दूसरे समाज का आम लोगों के जीवन में कहीं न कहीं दखल दे रहे थे, सामाजिक सौहार्द रहे, कोई भी धार्मिक कार्यक्रम हो, सामाजिक कार्यक्रम हो, लेकिन दूसरे व्यक्ति को, दूसरे समाज को बाधा न पहुंचे इसके लिये सरकार ने संवाद के माध्यम से सरकार ने अनुरोध के माध्यम से नीति अपनाई और इसे नियंत्रित करने का काम किया. सरकार ने महिला और बच्चों की सुरक्षा के लिये आपरेशन मस्कान, महिला फीडबैक प्रणाली और अभिमन्यु जागरूकता अभियान चलाया और हमारी हजारों बेटियां वापस घरों में आई हैं इसके लिये मैं सरकार को उसकी नीति और योजना के लिये धन्यवाद देना चाहूंगा.
माननीय सभापति महोदय, डायल 112 की योजना जो अगस्त से शुरू की गई इसके पहले स्वास्थ के लिये हमें फायर ब्रिगेड बुलाना हो, हमें पुलिस बुलाना हो, सायबर अपराध हो हर चीज के लिये हमें अलग-अलग नंबर पर डायल करना पड़ता था. पहली बार सरकार ने डॉयल 112 शुरू करके हर व्यक्ति को एक सुविधा दी कि एक ही नंबर से वह डॉयल करे और हर तकलीफ का निदान उसे मिल जाये. मैं समझता हूं एक ऐसा काम सरकार ने किया है जिससे हर व्यक्ति की राह आसान होगी. माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से हमारे गृह मंत्रालय को तो धन्यवाद देना ही चाहूंगा लेकिन उसके साथ-साथ हमारा जो सरकार का जो विजन है 2047 उसके लिये मैं सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा कि वर्ष 2047 में भारत मध्यप्रदेश की इकोनामी 2 ट्रिलियन डॉलर तक हो इसका संकल्प सरकार ने लिया है. मैं समझता हूं कि अगर आप सपने नहीं देखोगे, टारगेट तय नहीं करोगे तो उस मुकाम पर नहीं पहुंच पाओगे. आज से 10 साल पहले जितनी भारत की इकोनामी थी उतनी इकोनामी का संकल्प मोहन यादव जी की सरकार ने लिया है कि वर्ष 2014 में जो पूरे भारत की इकोनामी थी, वर्ष 2047 में पूरे मध्यप्रदेश की इकॉनामी भी उससे ऊपर होगी, मध्यप्रदेश हर मामले में आगे होगा. मैं आपको बताना चाहता हूं, चाहे उद्योगों की बात करें, भारी निवेश की बात करें लगभग 11 लाख करोड़ के निवेश लाने का काम सरकार ने किया. ईज ऑफ डुइंग बिजनेस की 4 श्रेणियों में टॉप अचीवर का पुरस्कार 4 श्रेणियों में सबसे ज्यादा सराहना अगर किसी की हुई है तो उसका नाम मध्यप्रदेश की सरकार है. मैं आपको बताना चाहूंगा कि 48 नये औद्योगिक पार्क बनाने का काम अगर कोई सरकार कर रही है तो मध्यप्रदेश की सरकार कर रही है. कृषि के क्षेत्र में भी समृद्ध किसान समृद्ध प्रदेश की थीम में हमारा 2026 मनाया जा रहा है. खाद के क्षेत्र में हम जितने परेशान थे उससे ज्यादा खाद वितरण प्रणाली को लेकर थे. अब सरकार डिजिटल खाद वितरण ई प्रणाली और ई टोकन से उर्वरक वितरण का काम कर रही है जिससे कालाबाजारी रुकेगी. प्राकृतिक खेती में लगभग हमारे दो लाख किसान जुड़े और उन्हें 4 हजार प्रति एकड़ की सहायता दे रहे हैं. भावांतर योजना में भी सरकार ने 1292 करोड़ रुपये देने का काम किसानों को देने काम सीधे किया. मैं सरकार को डेयरी के मामले में भी इस बात के लिये धन्यवाद देना चाहूंगा. हमारी अर्चना चिटनीस जी ने भी बताया हम 2014 से लेकर 2024 तक डेयरी में प्रति दिन दूध के कलेक्शन में 7 से 8 लाख लीटर पर ही थे. हम दस सालों में उसे आगे नहीं बढ़ा पाए थे. एनडीडीबी से एग्रीमेंट के बाद हमारा सांची उत्पाद अब 12 लाख लीटर पर पहुंच गया है. 50 परसेंट की उछाल दूध के कलेक्शन में आई है और यही गति जारी रही तो 50 लाख लीटर का लक्ष्य मध्यप्रदेश का आयेगा और गुजरात के बाद दूसरा कोई प्रदेश अग्रणी होगा तो उसका नाम मध्यप्रदेश होगा. माननीय सभापति महोदय, मैं बताना चाहूंगा आपके माध्यम से कि रानी दुर्गावती अन्न उत्पादन योजना में कोदो कुटकी और हमारी सभी मिलेट्स के उत्पादन में सरकार प्रोत्साहन का काम कर रही है. पन्ने के हीरे को जी.आई. टेकिंग,चंदेरी,महेश्वरी बाघ प्रिंट को एक जिला एक उत्पादन की पहचान दिलाने का काम कर रही है. रोजगार सृजन 23 लाख एमएसएमई इकाईयों से सवा करोड़ लोगों को रोजगार देने का काम यह सरकार कर रही है. महिला उद्यमियों को 6670 स्टार्टअप में 47 परसेंट जो महिलाओं के द्वारा संचालित हैं इसे सपोर्ट करने का काम सरकार कर रही है. एक और चीज में सरकार ने बड़ा अचीवमेंट किया. खनन के मामले में राज्य सरकार का पूरे देश में पहला नंबर है. पारदर्शिता से 121 खनिज ब्लाकों को नीलाम करने में पूरे देश में मध्यप्रदेश सबसे आगे हैं. मैं आपके माध्यम से सरकार को उसकी इन नीतियों के कारण और अंत में स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार के लिये सरकार का धन्यवाद करना चाहूंगा. एक समय था हमारे यहां 7 मेडिकल कालेज थे आज 19 शासकीय,6 केन्द्र की मद से बन रहे हैं,14 निजी मेडिकल हैं और 13 पीपीपी मोड पर बन रहे हैं. 52 मेडिकल कालेज कुल प्रदेश में बन जायेंगे. अभी हमारे यहां 5500 सीट हैं आने वाले समय में 10 हजार सीट हो जायेंगी और डाक्टरों की जो कमी प्रदेश में है हालांकि देश में हम आगे हैं. देश में 1400 लोगों पर एक डाक्टर है मध्यप्रदेश में 900 लोगों पर है लेकिन जब 10 हजार डाक्टर बनेंगे तो प्रदेश यूरोप और अमेरिका की तरह 200-250 लोगों पर एक डाक्टर की उपलब्धता रहेगी मैं समझता हूं कि यह बड़ा अचीवमेंट मध्यप्रदेश का रहेगा और आने वाले 4-5 साल बाद स्वास्थ्य सुविधाओं में कोई प्रदेश सबसे आगे रहेगा तो उन प्रदेशों में एक नाम मध्यप्रदेश का भी रहेगा. हर क्षेत्र में सरकार ने अच्छा काम किया. रोजगार,उद्योग,स्वास्थ्य,कृषि,कानून व्यवस्था में लेकिन आने वाले समय में इस प्रदेश की पहचान युवा बनेंगे. इस प्रदेश की नीतियों के कारण आने वाले समय में इस प्रदेश का युवा रोजगार सृजन करने वाला नहीं. रोजगार लेने वाला नहीं बल्कि रोजगार देने वाला बनेगा और सशक्त युवा ही आने वाले समय में इस प्रदेश की पहचान बनेगा. मैं आपके माध्यम से पूरे सदन की तरफ से प्रदेश सरकार को धन्यवाद देना चाहूंगा कि आने वाले समय में 20-30 साल बाद जब आज की युवा पीढ़ी पर इस शासन पर गुमान होगा कि उन्होंने हमें सशक्त बनाने का काम किया. हमें रोजगार लेने वाला नहीं रोजगार देने वाला बनाने का काम किया. आने वाले समय में हर क्षेत्र में अगर मध्यप्रदेश आगे होगा तो आने वाला समय हमारा खुशहाल होगा. मैं अपनी बात समाप्त करने की इजाजत चाहूंगा और उम्मीद करूंगा कि सरकार की हर योजना का,हर नीति का लाभ नीचे तक जाये इसकी जिम्मेदारी सदन के हर सदस्य की है. मैं अपनी बात सरकार को धन्यवाद देते हुए समाप्त करूंगा धन्यवाद.
2.30 बजे {सभापति महोदय (श्री अजय विश्नोई) पीठासीन हुए.}
श्री सोहनलाल बाल्मीक (परासिया) -- माननीय सभापति जी, माननीय राज्यपाल जी के अभिभाषण पर मैं अपनी कुछ बातें रखना चाहता हूँ. माननीय राज्यपाल जी का अभिभाषण हमारे सदन की एक संवैधानिक प्रक्रिया है. राज्यपाल जी भी संविधान के उच्च पद पर विराजमान हैं. बजट सत्र के दौरान जब प्रथम दिन राज्यपाल जी का अभिभाषण होता है तो हम सभी 230 सदस्यों को बहुत सारी उम्मीदें होती हैं कि राज्यपाल जी अपने अभिभाषण में कुछ ऐसी बातें बताएंगे कि सरकार ने जो उनके लिए लेख किया है, उस पर अपनी बात रखेंगे और सरकार ने राज्यपाल जी के अभिभाषण में जितनी बातों का उल्लेख किया है, चाहे उनके जो काम हो गए हैं या आने वाले समय में भविष्य में जो संरचना सरकार को करनी है, उन सभी बातों का उल्लेख उसके अंदर में होता है. माननीय सभापति जी, परंतु दु:ख और खेद के साथ यह बात कहनी पड़ रही है कि माननीय राज्यपाल जी के द्वारा जो अभिभाषण की जानकारी उनको दी जाती है या पुस्तक दी जाती है, राज्यपाल जी अभिभाषण को पढ़ते नहीं हैं. अब क्यों नहीं पढ़ते, यह हम लोग कभी सदन में या उनसे कभी अलग से माननीय अध्यक्ष जी या माननीय मुख्यमंत्री जी बात करें.
सभापति महोदय -- उन्होंने नहीं पढ़ा, पर उस पर भी चर्चा करने का अवसर आपको और हमको मिल रहा है. आप उस पर चर्चा आगे बढ़ाइये.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- माननीय सभापति जी, मैं इसलिए बोल रहा हूँ कि ऐसा लगता है कि सरकार का अपमान है और 230 लोग जो यहां पर बैठे हैं, उनका भी अपमान है. (XX) करते हैं.
सभापति महोदय -- आप तो चर्चा आगे बढ़ाइये.
जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसीराम सिलावट) -- यह आप न बोलें कि सदन का अपमान है, राज्यपाल महोदय की यह परंपरा निरंतर चली आ रही है. जितना पढ़ते हैं, उतना पढ़ते हैं, बाकी शेष पढ़ा हुआ माना जाता है.
डॉ. सीतासरन शर्मा -- सभापति महोदय, कार्यवाही से यह (XX) शब्द निकालें.
सभापति महोदय -- यह विलोपित कर दीजिए.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- माननीय सभापति जी, यह आपको लगता होगा, मगर हम लोगों को ऐसा नहीं लगता. हम लोगों को लगता है कि यदि राज्यपाल गरिमामयी पद पर हैं तो इस सदन की भी गरिमा है और जो माननीय सदस्य इस सदन के अंदर बैठे हैं, 230 सदस्य, उनकी भी गरिमा है.
सभापति महोदय -- माननीय सदस्य से अनुरोध है कि माननीय राज्यपाल पर चर्चा बंद करके राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर चर्चा शुरू करिए.
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- माननीय सभापति महोदय, अध्यक्ष जी के क्रियाकलापों पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती है. कृपा करके आगे बढ़िए भाई साहब.
सभापति महोदय -- शैलेन्द्र जी, वह बात हो गई है. सोहनलाल जी वरिष्ठ सदस्य हैं, वह समझ गए हैं, वह अपनी बात आगे बढ़ा रहे हैं.
श्री रामेश्वर शर्मा – (XX) के काल से ऐसी व्यवस्था बनी है साहब.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- बहुत बढ़िया, यही, इसके अलावा कुछ नहीं है.
श्री रामेश्वर शर्मा -- राज्यपाल और राष्ट्रपति जी का प्रथम दृष्टि में जो तय हुआ, आज दिनांक तक कोई संशोधन ही नहीं हुआ, ज्यों का त्यों है.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- जहां कोई जवाब नहीं है, वहां नेहरू जी ही जवाब हैं तुम्हारे लिए भैया. और कोई नहीं है. कोई चांस ही नहीं है आपके.
सभापति महोदय -- बीच में टोका-टोकी न करें, सदस्य को बात करने का मौका दें.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- नहीं, बीच-बीच में आ जाते हैं. रामेश्वर शर्मा जी को जब समय मिलता है तो सदन में आ जाते हैं.
सभापति महोदय -- आप तो अपनी बात करें.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- माननीय सभापति जी, मेरा कहने का मतलब यह है कि अभिभाषण को पढ़ना था. मैं उनकी आलोचना नहीं कर रहा हूं, मगर कहीं न कहीं हम लोगों को उम्मीद रहती है कि सरकार बहुत सारी चीजों का उल्लेख करती है कि आने वाले समय में, भविष्य में क्या निर्धारित होगा. किस तरीके का मध्यमप्रदेश होगा. इन सारी बातों का उल्लेख होता है. माननीय राज्यपाल जी को इस बात की गरिमा को बनाकर रखना चाहिए कि सदन में जिस काम के लिए आए हैं, उस काम को पूर्ण करके जाएं तो आने वाले समय में हम आप लोगों से यही उम्मीद करेंगे माननीय सभापति जी, आप सबसे, सत्ता पक्ष से और खास तौर से माननीय मुख्यमंत्री जी से कि वे चर्चा करें और आने वाले समय में जब बजट सत्र हो तो उस पूरे अभिभाषण को पढ़ा जाए. उस अभिभाषण का सम्मान रखा जाए.
माननीय सभापति महोदय, दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूँ कि माननीय राज्यपाल जी के अभिभाषण में वर्ष 2047 का उल्लेख हुआ है और अमृतकाल का भी उल्लेख हुआ है. इस अमृतकाल में जिस तरीके की जो अमृतकाल की बात होती है, इस अमृतकाल में लोगों को जहर पिलाकर मारा जा रहा है. इस बात का भी कोई उल्लेख नहीं होता. सरकार अपनी उपलब्धियों का बखान करती जरूर है, मगर इस बात का भी बखान होना चाहिए कि जो प्रदेश के अंदर में जितनी अराजकता हो रही है या गड़बड़ काम हो रहे हैं, क्या सरकार की अपनी जवाबदारी नहीं है या सब अच्छे-अच्छे कामों को लेकर ही सरकार अपनी जवाबदारी निभा देगी, मगर सरकार के अंदर में जितनी गलतियां हो रही हैं, कमियां हो रही हैं, भ्रष्टाचारी हो रही है, अराजकता फैल रही है. मेरे विधान सभा क्षेत्र में 15 बच्चों को जहर दे दिया गया, सिरप के नाम से, उसमें कार्यवाही हुई है, मगर मुख्य रूप से जिन पर कार्यवाही होनी चाहिए थी, उन पर कार्यवाही नहीं की गई है.स्वास्थ्य के विषय में यहां पर उल्लेख किया गया, स्वास्थ्य की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है. यहां बड़ी-बड़ी बातें कही गईं, आप ने स्वास्थ्य के बारे में कहा. मेडिकल कॉलेज की बात करें. मगर उन स्वास्थ्य केन्द्रों की क्या हालत है ? बड़ी-बड़ी बिल्डिंग बनी हुई हैं, पर वहां पर डॉक्टर्स नीं हैं, न ही वहां पर पैरामेडिकल स्टॉफ है, वहां पर कोई नहीं है. बहुत बुरी हालत में है. हम स्वास्थ्य के बारे में बहुत बड़ी बातें करेंगे कि इतने-इतने करोड़ रुपये खर्च कर दिए हैं. वह सब दिखाने के लिए है. मगर वास्तविकता तो यह है कि जो मूल रूप से सरकार के माध्यम से आम नागरिकों को सुविधाएं मिलनी चाहिए, पिछले 22-23 वर्षों में सरकार इस काम में विफल रही है. स्वास्थ्य सेवाएं हम लोगों को नहीं मिल पा रही हैं, आमजन परेशान रहता है. आप शिक्षा के क्षेत्र में देख लें, भले ही आप आंकड़े कितने ही बताते रहें ? लेपटॉप की बात करें, स्कूटी वितरण की बात करें, पर वास्तविकता यह है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम दर्ज होती चली जा रही है. लोग सरकारी स्कूल में पढ़ना नहीं चाह रहे हैं, क्योंकि उतनी व्यवस्था नहीं है. आज प्रायमरी स्कूल की बिल्डिंग की हालत आप देख लें कि जहां बिल्डिंग बनी है, वह क्षतिग्रस्त हो गई है, बच्चे बाहर जाकर या दूसरे किराये के मकानों में अध्ययन कर रहे हैं.
माननीय सभापति जी, यह सारी चीजें कहीं न कहीं इस बात को भी ध्यान में रखकर राज्यपाल जी के अभिभाषण में सरकार को उल्लेख करना चाहिए कि जहां पर कमियां हैं, उन कमियों के बारे में कहीं न कहीं इस बात को सोंचे और समझें कि हम लोग कहां खड़े हैं ? आप 2 ट्रिलियन डॉलर की बात करते हैं. आप वर्ष 2047 की बात करते हैं. वर्ष 2047 को एक सपने की तरह हम लोगों को दिखाया जा रहा है. सम्मोहन करने की आदत, इस देश के अन्दर चाहे वह केन्द्र सरकार हो या राज्य सरकार लोगों के बीच में पहुँचा रहा है कि आप 2047 बोलते रहो. 2047 के लिये, जो आपकी कार्ययोजना है, वह आम जनता को एवं इस सदन के अन्दर नहीं बताई जाती है कि 2047 तक आप क्या करोगे ? आप विश्व गुरु बनने की बात कर रहे हो. आप अर्थव्यवस्था में देश को तीसरी या दूसरी शक्ति में पहुँचाने की बात कर रहे हो. 2047 के बारे में आप यह नहीं बता रहे हो कि आप यह कहां पर करोगे और मध्यप्रदेश में 2 ट्रिलियन डॉलर लाने की बात कर रहे हो, तो 2 ट्रिलियन डॉलर कहां से आएगा ? आप कैसे 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुँच पाओगे. उसकी भी कार्ययोजना सदन को बताना चाहिए, हम तक पहुँचाना चाहिए कि हमारा इस वर्ष यह कार्य होगा, चार वर्ष बाद यह काम होगा, पांच वर्ष बाद वह काम होगा, इतनी हमारी इनकम बढ़ेगी, तब हम जाकर 2 ट्रिलियन डॉलर में पहुँचेंगे. हम तो अभी 5 लाख करोड़ रुपये के घाटे में चले जा रहे हैं. अभी जो बजट पेश होगा, उसमें आप देख लीजियेगा कि क्या हालत होगी ? हम कर्जे पर कर्जे लेकर प्रदेश को चलाये जा रहे हैं और अभिभाषण में बड़े-बड़े आंकड़े बताकर 2 ट्रिलियन डॉलर का मध्यप्रदेश की जनता को सपना दिखा रहे हैं, तो यह जो परिस्थितियां बन रही हैं, हम अपने आपमें अपनी पीठ थपथपा लें. माननीय सिलावट जी, उससे काम नहीं चलेगा न.
श्री तुलसीराम सिलावट - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह कार्य माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में होगा.
श्री सोहनलाल बाल्मीक - अध्यक्ष महोदय, मैं यही तो कह रहा हूँ कि यही तो आप लोग सम्मोहन कर रहे हो. एक सम्मोहन जैसा होता है न, आप उस प्रक्रिया को अपना रहे हो. 2047 ट्रिलियन डॉलर.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) - माननीय सभापति महोदय, अमेरिका से तो बाहर आ नहीं पा रहे हो. किसानों को आप, उनको गिरवी रखने की तैयारी में हैं. 2047 का सपना दिखा रहे हो, विकसित भारत का.
सभापति महोदय - सोहनलाल जी ने स्वीकार किया है कि आम आदमी सम्मोहित हो रहा है और जिस चीज से सम्मोहित हो रहा है, उस चीज को आगे बढ़ाना चाहिए और पूरा करना चाहिए.
श्री उमंग सिंघार - सभापति महोदय, सम्मोहित हो रहा है तो कैसे हो रहा है, क्या भूखा रहकर सम्मोहित होगा ?
श्री सोहनलाल बाल्मीक - सभापति महोदय, सम्मोहन होगा, जब वह जागेगा. जब जागेगा, उसके हाथ में कुछ नहीं बचेगा. सम्मोहन आप कुछ वर्षों के लिए कर लो, कुछ दिनों के लिए कर लो. मगर जब वह जागेगा, तब उसके हाथ में कुछ प्राप्त नहीं होगा.
सभापति महोदय - चलिए, सम्मोहन से आगे बढ़ें.
श्री सोहनलाल बाल्मीक - माननीय सभापति जी, प्रधानमंत्री जी, ट्रम्प को जवाब नहीं दे पा रहे हैं. ट्रम्प को जवाब क्यों नहीं देते हैं ? किसानों के लिए जिस तरीके की व्यवस्था ट्रेड डील में हो रही है, क्या हम लोग इस सदन में इस बात पर चिन्ता व्यक्त नहीं कर सकते कि मध्यप्रदेश के किसानों की जो हालत है, आप 2,700 रुपये में गेहूँ नहीं खरीद पा रहे हो और 2 ट्रिलियन डॉलर और विश्व गुरु, सबका साथ सबका विश्वास, 2047 जिस तरीके से, जो आप लोगों को सपना दिखाकर उनके साथ धोखा करने का काम कर रहे हैं. आप हम लोगों को पुस्तक में लिखकर ढेर सारी चीजें दे देते हो, हम लोग पढ़-पढ़कर इसको देखते रहते हैं, मगर समझ में नहीं आता है कि बात क्या है ?
श्री भंवरसिंह शेखावत - सभापति जी, एक मोतिया बिन्द की बीमारी होती है, मोतिया बिन्द जिनको हो जाता है, उनका तो इलाज डॉक्टर के पास है, (xx) और रामेश्वर जी, यह मोदिया बिन्द जिसको हो गया न, इनके मोदिया बिन्द की कोई हिन्दुस्तान में दवाई नहीं है. यही जो आप लोग कर रहे हो, इसके सिवाय कुछ बचा ही नहीं है.
श्री रामेश्वर शर्मा - (xx), सभापति महोदय, अगर समय पर मोतिया बिन्द का इलाज हो गया होता, तो आज भंवरसिंह जी हमारे बॉस यहीं पर होते. लेकिन परेशानी यह है कि मोतिया बिन्द का ही समय पर इलाज नहीं हुआ.
श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)- मोतियाबिंद और मोदियाबिंद में अंतर है.
सभापति महोदय- आपके कहने का अर्थ यह है कि देश की जनता, देश को मोदी जी की ही नज़र से देख रही है, अच्छी बात है.
श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)- जनता देश को मोदी जी की नज़र से नहीं देख रही है, यह एक बीमारी हो गई है. जिन-जिन को यह बीमारी हो गई है, उनको उसके अलावा कुछ दिखता ही नहीं है.
सभापति महोदय- अभी तो हम राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर बात आगे बढ़ायें.
श्री सोहनलाल बाल्मीक- सभापति महोदय, आपने रामेश्वर जी की बात पर ध्यान नहीं दिया.
सभापति महोदय- नहीं दिया.
श्री सोहनलाल बाल्मीक- उन्होंने आसंदी के लिए क्या कहा, (xxx).
इसे विलोपित करवाया जाये.
सभापति महोदय- जी हां. व्यक्तिगत संबोधन विलोपित किये जायें.
श्री रामेश्वर शर्मा- सभापति महोदय जो कुछ भी माननीय सोहनलाल जी कहें, वह सब कुछ हटा दीजिये. (हंसी)
सभापति महोदय- जी हां, आपको छोड़कर. (हंसी)
श्री सोहनलाल बाल्मीक- सभापति महोदय, खाद वितरण के संबंध में अभी ई-कार्यप्रणाली की बात आई है, मेरा कहना है कि माननीय खंडेलवाल जी अभी उसकी तारीफ करके गए हैं लेकिन वास्तविकता यह है खाद वितरण की जो ई-कार्यप्रणाली प्रदेश में लागू की गई है, उसमें बहुत सारी कमियां हैं, उसमें सुधार की आवश्यकता है. मेरे ट्राइबल क्षेत्र में किसानों के पास एंड्राइड फोन नहीं है, वे नहीं जानते कि ओ.टी.पी. क्या होता है, वे अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पाते हैं. मेरा सरकार से आग्रह है कि जब तक पूरी तरह से, हर चीज़ को अपडेट न कर दिया जाये, जब तक लोगों को पूरी जानकारी न मिल जाये, तब तक इस व्यवस्था को रोका जाये. क्योंकि हमारे किसान इससे परेशान हैं. एम.पी.ऑनलाईन वाले जो इस प्रकार के कार्य को करते हैं, वे रजिस्ट्रेशन के लिए किसानों से रुपये 50-100 ले लेते हैं और इसमें किसानों का एक अलग से खर्च होने लगा है इसलिए इस व्यवस्था को देखा जाये.
सभापति महोदय, मेरा आग्रह है कि राज्यपाल जी के अभिभाषण में सरकार द्वारा कई बातों को उल्लेख किया गया है लेकिन सरकार इस बात का भी ध्यान रखे कि क्या-क्या कमियां हैं. अभी हमारे नेता प्रतिपक्ष जी बोलेंगे जिस तरह से इंदौर में जो काण्ड हुआ, 35 लोग मरे, हमारा उस पर स्थगन भी लगा है, माननीय अध्यक्ष जी ने उस पर व्यवस्था देने की बात भी कही है. उसमें हम इसकी चर्चा करेंगे. निश्चित रूप से राज्यपाल महोदय का जो अभिभाषण हुआ है, उसमें और भी कई बातों का उल्लेख होना चाहिए था.
सभापति महोदय, साथ ही साथ मैं यह भी कहना चाहूंगा कि जब यह कार्य योजना बनती है, जब अभिभाषण तैयार होता है तो आप उसमें भविष्य की कार्य योजना के बारे में बताते हैं लेकिन भविष्य में विधायकों को कितनी विधायक निधि मिलेगी, इस बात का भी उल्लेख होना चाहिए था. अभिभाषण में आप बताते हैं कि हमने यह कार्य किया, भविष्य में यह कार्य करेंगे, वर्ष 2047 की बात कही, 2 ट्रिलियन डॉलर की बात की, लेकिन आपने यह नहीं बताया कि विधायकों की विधायक निधि कितनी बढ़ेगी ? इसमें उसका भी उल्लेख कर देते. 230 विधायकों का विषय है, इसमें बहुत ज्यादा खर्च नहीं होता है, आप कह देते कि सभी को रुपये 5 करोड़ देंगे, रुपये 1 करोड़ अनुदान राशि देंगे ताकि विधायकों को भी लगता कि हमारे लिए भी कुछ न कुछ व्यवस्था बन रही है. माननीय वित्त मंत्री जी और मुख्यमंत्री जी हमारी चिंता कर रहे हैं. इस बारे में सिलावट जी, रामेश्वर जी आपको बोलना चाहिए, उधर जितने सदस्य बैठे हैं, मेरा सभी से निवेदन है कि आप यह बात बोलें, क्योंकि आपको तो रुपये 15 करोड़ मिल जाते हैं, हमें क्या मिलता है ? कुछ नहीं मिल रहा है. इस बार कम से कम इस प्रकार का भेदभाव नहीं हो चाहिए. मेरा वित्त मंत्री जी से अंत में आग्रह है कि प्रभु ख्याल रख लेना, धन्यवाद.
श्री उमंग सिंघार- सभापति महोदय, जब करोड़ों की बात हो रही है, ट्रिलियन की बात हो रही है और ये विधायकों को रुपये 5 करोड़ नहीं दे सकते, यह बड़ी लज्जा की बात है. वह भी विकास निधि है, विधायक अपने लिए नहीं मांग रहा है. आपके पास विकास के लिए पैसा है तो केवल कागज़ों में है, आपके पास विधायकों को विकास निधि देने के लिए पैसा नहीं है.
सभापति महोदय- आप वित्त मंत्री जी के भाषण का इंतजार तो कीजिये.
श्री उमंग सिंघार- खाली लिफाफा निकलेगा, जब वे भाषण देंगे.
डॉ. सीतासरन शर्मा (होशंगाबाद)- सभापति महोदय, राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव के पक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. सभी बातें लगभग आ चुकी हैं, इसलिए बहुत लंबी बात नहीं करूंगा. बहुत वर्षों पहले एक बात आती थी लेकिन अब वह बात सुनने में नहीं आती है और तब वह बात इसलिए सुनने में आती थी क्योंकि ये बैठे थे सत्ता में, रोटी-कपड़ा और मकान की बात. हमारे समय में एक फिल्म बन गई थी रोटी-कपड़ा और मकान. अब नहीं चल रही, क्योंकि रोटी दे रहे हैं. 5 करोड़ 25 लाख लाभार्थियों को 66 लाख 25 हजार मेट्रिक टन राशन के वितरण के माध्यम से 22 हजार 800 करोड़ रुपए का लाभ मिला है. अध्यक्ष महोदय, नि:शुल्क राशन की व्यवस्था सरकार ने की है. रोटी दे रहे हैं.
सभापति जी, आपको शायद ध्यान होगा. आप भी उस समय इनके कार्यकाल में सदन के सदस्य थे. दो क्षेत्र ऐसे थे जहां भूख से मृत्यु हुई थी. यह किस मुह से बात करेंगे. हमारे नर्मदापुरम जिले में बाबई ब्लॉक में हुई थी, गुना में हुई थी और आपकी सरकार के कार्यकाल में हुई थी. हम लोग स्थगन प्रस्ताव लाए थे. स्थगन प्रस्ताव निकलवाकर देख लीजिए. (व्यवधान)..
श्री सोहनलाल बाल्मीक-- शर्मा जी वर्ष 2047 की बात करो (व्यवधान)..
डॉ. सीतासरन शर्मा-- 20, 22 साल हो गये हमारी सरकार को. (व्यवधान)..
सभापति महोदय-- ऐसी कोई गंभीर बात नहीं हो गई कि सदन उत्तेजित हो जाए. आप सभी बैठ जाएं और डॉ. साहब को बात करने दीजिए. (व्यवधान)..
डॉ. सीतासरन शर्मा-- सभापति जी सही बात सुनने की ताकत नहीं है. (व्यवधान)..
श्री फुन्देलाल सिंह मार्को-- आप कोई खैरात नहीं दे रहे हैं. यह कानूनी अधिकार है इसलिए आप यह राश्न दे रहे हैं. हम 35 किलो दे रहे थे, आप 5 किलो दे रहे हैं और आप तो 5 किलो भी दे नहीं पा रहे हैं. (व्यवधान)..
सभापति महोदय-- वह पांच किलो प्रति व्यक्ति है. (व्यवधान)..
डॉ. सीतासरन शर्मा-- सभापति महोदय, अंत्योदय और प्राथमिक श्रेणी के परिवारों को कम से कम 35 किलो राशन प्रति परिवार, 5 किलो प्रति सदस्य दिया जा रहा है.
श्री सोहनलाल बाल्मीक-- सभापति महोदय, आज निधन के उल्लेख में जो हुआ जिनकी मृत्यु हुई उन 35 लोगों के नाम भी नहीं ले पाए श्रद्धांजलि अर्पित नहीं कर पाए.
सभापति महोदय-- अभी कई सदस्यों को बोलना बाकी है. समय सीमित है. मेरा अनुरोध है कि टोका-टाकी करके समय व्यर्थ न करें. माननीय सदस्य को अपनी बात रखने दें.
डॉ. सीतासरन शर्मा-- सभापति महोदय, रोटी की व्यवस्था इस सरकार ने की और मकान प्रधानमंत्री आवास योजना. सभापति जी 50, 60 साल की सरकार ने नहीं सोचा कि हम पक्के मकान दे दें, पक्की छत दे दें. मकान की व्यवस्था भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने की, मोदी जी की सरकार ने की, अब यह कहते हैं कि मोदियबिंद हो गया. अरे हो जाएगा, देशभर को हो गया. तीन-तीन बार से विपक्ष में बैठे हो. हमें ही नहीं हुआ है, देश की 140 करोड़ जनता को हुआ है. यह 25, 50 को छोड़ दो जो यहां बैठे हैं.
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन-- डॉ. साहब यह ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी हैं. यह वहां डेप्यूटेशन पर हैं. वह किसी मिशन मोड में गये हुए हैं. आप निश्चिंत रहिए. आएंगे वापिस आएंगे.
श्री रामेश्वर शर्मा-- हम चेले तो सब इधर ही बैठे हैं.
डॉ. सीतासरन शर्मा-- वह हम सभी के नेता हैं. हमने उनसे बहुत कुछ सीखा है और अभी भी सीख रहे हैं.
श्री सुरेश राजे-- कुछ इधर के भी उधर चले गये इस कारण बैठे हो.
श्री तुलसीराम सिलावट--इसीलिए तुम उधर बैठे हो. (हंसी)
डॉ. सीतासरन शर्मा-- रोटी कपड़ा और मकान. कपड़ा आता है उद्योग से. किसान कपास उगाता है और उद्योग कपड़ा बनाता है. मगर यहां सड़कें ही नहीं थीं. यहां बिजली नहीं थी तो उद्योग कहां से डलते, पानी नहीं था. सच्ची बात नहीं सुन सकते हैं. और नहीं सुन सकते हो तो रूई लगाकर बैठ जाओ या नहीं पढ़ सकते तो आंख में पट्टी बांधकर बैठ जाओ. करें क्या? हम काम करके बता रहे हैं. आपके पास है क्या न सड़क थी न बिजली. उद्योग कहां से आते, कपड़ा कहां से मिलता. इसलिए आज रोटी कपड़ा मकान की बात नहीं होती. परंतु हमारी सांस्कृतिक विरासत में सिर्फ रोटी, कपड़ा और मकान को अंतिम लक्ष्य नहीं माना गया है. हम लोगों ने मनुष्य के सर्वांगींण विकास की बात की और इसलिए हम सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित कर रहे हैं. सभापति महोदय, इसलिए हम बात करते हैं विरासत के साथ विकास की, अकेले विकास की बात नहीं करते हैं. विरासत के बिना विकास किसी काम का नहीं रहेगा. बिना फल का वृक्ष हो जाएगा.
श्री लखन घनघोरिया -- 1947 विरासत है, नींव के पत्थर को याद रखिए.
डॉ. सीतासरन शर्मा -- यही तो आपकी गड़बड़ी है कि आप पंडित नेहरू के आगे सोच ही नहीं पा रहे हैं. हमारी विरासत है वैदिक संस्कृति की, लखन जी हमारी सांस्कृतिक विरासत हजारों साल पुरानी है, न कि 80 साल पुरानी, भाई 80 साल की सोच रहे हैं. सोच ही नहीं है, करें क्या इसलिए 150-275 से 50-60 पर आ गए हैं. 6 पर रह जाएंगे जैसे बिहार में रह गए. संस्कृति का ज्ञान नहीं है. अब मैं सिर्फ एक विषय पर बात करूंगा अन्य सदस्यों को भी बोलना है. यह तो अभी मैंने ऐसे ही बात कर दी क्योंकि इनको कुछ याद दिलाना पड़ता है.
सभापति महोदय -- अब तो आपका जो विषय रह गया है उस पर बोलिए.
डॉ. सीतासरन शर्मा -- वैसे तो बहुत सारे विषय हैं पर मैं भावान्तर योजना पर और थोड़ी बात कृषि पर करुंगा. 40-50 साल में इन्होंने 7 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र विकसित किया था.
श्री सुरेश राजे -- कब तक याद वही बात दोहराओगे.
डॉ. सीतासरन शर्मा -- अरे जीवन भर, जब तक 6 बचोगे तब तक, 6 बचने देंगे तब तक आपके पापों की याद दिलाएंगे. ऐसे नहीं, नहीं तो जनता भूल जाएगी.
श्री लखन घनघोरिया -- आप कुछ भी कह लो यहीं बैठोगे. कैसे कैसे थे, ऐसे वैसे हो गए और ऐसे वैसे, कैसे-कैसे हो गए (हंसी)
डॉ. सीतासरन शर्मा -- ऐसे कैसे ऐसे वैसे हो गए और कैसे कैसे ऐसे वैसे हो गए. 25 साल से ऐसे वैसे ही पड़े हैं. (हंसी)
सभापति महोदय, हमने 2 साल में 7 लाख हेक्यर में सिंचाई कर दी. क्योंकि अनाज तो यहीं आएगा. पीएल 480 से नहीं लाना पड़ेगा. हमारे देश की जनता को याद दिलाना पड़ेगा इस कांग्रेस सरकार ने लाल गेहूं खिलाया था. नई पीढ़ी को मालूम नहीं है इसलिए उनके ही गाने गाने लगते हैं. मैं एक बात और कहना चाहता हूँ विषय से थोड़ी अलग बात तो है. मैं विषय पर बोल रहा हूँ. एक मुन्ना हैं, एक ऐसी किताब लेकर आ गए जो छपी ही नहीं थी.
सभापति महोदय -- डॉक्टर साहब जरा मैं भी टोकूंगा, इस विषय पर आप चर्चा न करें.
डॉ. सीतासरन शर्मा -- मैं सिर्फ यह समझा रहा हूँ कि मैं विषय पर बोलता हूँ. यह कैसे बोलते हैं. हम छपी हुई किताब पर बोल रहे हैं. वो मचल गए. हेड मास्साब ने कहा कि यह सिलेबस में नहीं है तो कहने लगे हम तो इसी को पढ़ेंगे.
सभापति महोदय -- डॉक्टर साहब आप राज्यपाल के अभिभाषण पर आ जाएं.
डॉ. सीतासरन शर्मा -- सभापति महोदय, यह वही किताब पढ़ रहे हैं. यह उन्हीं की किताब पढ़ रहे हैं, करें क्या. अरे इसको पढ़ो, तब समझ में आएगा कि इस प्रदेश में क्या हुआ है. (व्यवधान)
श्री सुरेश राजे -- एपस्टीन फाइल कहां चली गई (व्यवधान)
सभापति महोदय -- डॉक्टर साहब आपका विषय पूरा हो गया क्या. (व्यवधान)
श्री महेश परमार -- डॉक्टर साहब, आपके पास बताने के लिए कुछ नहीं है, 56 इंच के सीने का भाषण नहीं दे पाए, महामहिम राष्ट्रपति जी के उस पर..(व्यवधान)
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- डॉक्टर साहब आप नाम सही लीजिए, जो नाम है वही लीजिए, आप गलती कर रहे हैं.
डॉ. सीतासरन शर्मा -- मैंने मुन्ना कहा क्योंकि मुन्ना किताब लेकर आ गया और कहने लगा इसी में से पढूंगा. (व्यवधान)
श्री अभय मिश्रा -- आप पीछे क्यों पड़े हैं, जब देखो तब रीवा की चर्चा करते हैं. (व्यवधान)
सभापति महोदय -- डॉक्टर साहब अब आप कृपया समाप्त कीजिए. (व्यवधान)
डॉ. सीतासरन शर्मा -- सभापति महोदय, बस एक मिनट. यह लोग मेरा सारा समय ले लेते हैं मैं करुं क्या. किसानों को सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखती है. क्योंकि अनाज वहीं से आएगा तब ही हम दे पाएंगे. यह हमेशा समर्थन मूल्य की बात करते हैं. हमने हमेशा समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा. वर्ष 2024 में सोयाबीन भी खरीदा और फिर भावांतर योजना लाए. भावांतर योजना का इन्होंने बड़ा विरोध किया. बहुत हल्ला मचाया. मैं आपको जल्दी से जल्दी 2-4 जानकारियां देकर अपनी बात समाप्त करूंगा. वर्ष 2025 में यह योजना लाई गई और इससे लाभ यह हुआ कि वस्तुओं का भाव बाजार तय करने लगा और सरकार उस डिफरेंस को किसान के खाते में डालने लगी. बाजार अपना भाव तय करता है. कई बार ऊपर जाता है. इस बार भी सोयाबीन का भाव कई बार ऊपर गया. इस तरह से शासन और किसान दोनों को लाभ होता है. उसको समर्थन मूल्य का पैसा डिफरेंस में मिल जाता है और बाजार में पहले जब सरकार सोयाबीन एमएसपी पर खरीदती थी और जब उसको सेल करती थी तो 5-10 बड़े व्यापारी उस पर भाग लेते थे, अभी 60 हजार पंजीकृत व्यापारी हैं इस बार अधिकांश व्यापारियों ने इस पर भाग लिया. इस तरह से किसानों को उस कॉम्पिटिशन की बिडिंग में ज्यादा भाव मिला और यदि कहीं कम मिला तो डिफरेंस का पैसा सरकार ने दिया. कुल 9.36 लाख किसानों का पंजीयन किया गया और 22,79,000 हेक्टेयर सोयाबीन रकबे का पंजीयन हुआ. 220 मंडियों और 86 उप मंडियों में यह खरीदी की गई है. वर्ष 2024 में एमएसपी पर खरीदी की गई थी, 2 लाख किसानों द्वारा कुल माल बेचा गया था, साढ़े छ: लाख मैट्रिक टन का उपार्जन हुआ था और अब इस बार 7 लाख से अधिक किसानों ने जहां एमएसपी में 2 लाख किसान थे अब 7 लाख किसान भावांतर में हो गए हैं और 17 लाख मैट्रिक टन साढ़े छ: लाख की बजाय यह भावांतर योजना में किसानों से लिया गया और उनके खाते में पैसे डाले गए. सभापति महोदय, मुझे यह कहते हुए अफसोस है कि हमारे विपक्ष के साथियों ने इस योजना का बहुत विरोध किया था. यह देश भर में पहली योजना है जो हमारे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने सफलता पूर्वक संचालित की और आज लाखों किसानों को इसका फायदा हुआ.
सभापति महोदय, आप बार-बार मुझे निर्देशित कर रहे हैं कि मैं बैठ जाऊं तो मैं अपनी बात समाप्त करता हूं. बहुत सी बातें रह गई हैं. आप लोग बोलने नहीं देते क्योंकि सही बात सुनते नहीं हैं. आपने समय दिया इसके लिए आपका आभार.
सभापति महोदय -- आपका धन्यवाद. सभी माननीय सदस्यों से एक विशेष अनुरोध है कि हमने चर्चा के लिए 6 घण्टे का समय तय किया था और दोनों पक्षों के कुल मिलाकर 34 वक्ता हैं, अभी तक 2 घण्टे में सिर्फ 6 वक्ताओं का वक्तव्य हो पाया है, हमने बातचीत में कम और टोंकाटाकी में ज्यादा समय लगाया है. मेरा अनुरोध है कि बाकी वक्ताओं को भी बोलने का समय मिले और हम समय पर अपना काम पूरा कर पाएं इसलिए कृपया टोंकाटाकी नहीं करेंगे और अपनी बात सीमित समय में सीमित शब्दों में रखेंगे.
श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा (सतना) -- सभापति महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद. राज्यपाल जी के अभिभाषण पर बोलने का अवसर मिला इसके लिए मैं सदन का और अपने दल का धन्यवाद करता हूं. जिस प्रदेश में बजट के बराबर कर्ज हो उस प्रदेश में किस चीज की वाहवाही हो और किस चीज का विरोध हो यह सोचना पड़ रहा है. लगातार संसदीय परम्पराओं की बात होती है, संसदीय परम्परा आपके सामने थी, जिसके मन में जो आया वह बोला. कोई अतीत में जा रहा है , अगर किसी को अतीत में जाना है तो पूरा अतीत में जाये. किसी को अगर यह काल स्वर्णिम काल लग रहा है तो पूरी तरह से स्वर्णिम काल लगना चाहिये. जितना अच्छा ड्राफ्ट अभिभाषण का किया गया है इसको देखकर के तो ऐसा लगता है कि कई विभाग इस सरकार को बंद कर देना चाहिये. एक तो पुलिस विभाग बंद कर दीजिये, जेल विभाग बंद कर दीजिये. यह जो छापेमारी होती है, दुनियाभर की जो चौकियां हैं यह सब विभाग आप बंद कर दीजिये क्योंकि इस अभिभाषण में तो सिर्फ अच्छा ही अच्छा लिखा है. कमी तो कहीं कुछ दिखी ही नहीं. अब हम लोग अगर कमी की बात करते हैं तो बात आती है कांग्रेस के शासन काल की तो भाई कांग्रेस ने तो लोकतंत्र बनाया, आजादी दी, यह हाउस बना दिया.(XX)
सभापति महोदय- यह विलोपित .
श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा -- ऐसा करो कि आप लिखकर के दे दो हम वही बोल देते हैं. (अभी राज्यपाल जी को आपने लिखकर के दिया था उन्होंने बोल दिया अब आप हमें भी दे दें.)
सभापति महोदय- कृपया विषय पर बोले.
श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा-- ठीक है ,सभापति महोदय. उद्योग की बात होती है. प्रदेश में बाहर से उद्योगपतियों को बुलाया जाता है, ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट होती है, बड़े बड़े इवेंट होते हैं, करोड़ों रूपये सरकार के खर्च भी हो जाते हैं. लेकिन जो मध्यप्रदेश का युवा है ,उसको अगर रोजगार या अपना उद्योग खड़ा करना हो तो उसको शासन जमीन नहीं दे पा रहा है. आज की स्थिति में उस जमीन का रेट क्या है 500 रूपये फुट, 1000 रूपये फुट अगर उसे 5 हजार या 10 हजार फुट जमीन चाहिये तो जो उद्योग विभाग की जमीन हैं, जो औद्योगिक पार्क बने हुये हैं वहां पर वह जमीन नहीं ले पा रहे हैं, क्या इस विषय पर सरकार ने कुछ सोचा है. क्या सरकार ने उन युवाओं के बारे में सोचा है. सोचा है तो बतायें.
माननीय सभापति महोदय, निवेश और रोजगार की बात कर रहा हूं. मैं सतना जिले से हूं, सतना में बहुत सारी सीमेन्ट इन्ड्रस्ट्रीज हैं. परमानेंट भर्तियां जीरो हैं. जो लोग कल तक काम कर रहे थे वे लोग आज उन्हीं कंपनियों में ठेका श्रमिक बन कर के काम कर रहे हैं, इनके लिये सरकार क्या कर रही है. ऐसे ऐसे प्लान्ट आये जिन्होंने सरकार की सबसीडी ली, जमीनें लीं, खदानें ली और बेचकर के चले गये और वहां के जो स्थानीय लोग थे जिन लोगों ने उद्योगों को जमीन दी, उनको जमीन के बदले में नौकरी मिलना थी, वह आज भी इंतजार करते बैठे हैं कि उनको नौकरी मिल जाये, उनको रोजगार मिल जाये. उस पर सरकार का कोई ध्यान नहीं है, सरकार ने कोई मापदंड नहीं बनाया है. सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिये.
सभापति महोदय, आर्थिक विकास और खनिज की बात पर कहना चाहता हूं कि खनिज संपदा का जो बंदरबांट इस मध्यप्रदेश में हो रहा है, जितना अवैध खनन इस प्रदेश में हो रहा है, वह किसी से छुपा नहीं है. चाहे वह रेत की बात हो, चाहे वह मैग्नीज की बात है, चाहे वह लेटराइट और बॉक्साइट की बात हो, लाइम स्टोन, सब कुछ अंधाधुंध तरीके से अवैध तरीके से खोदा जा रहा है , उसका दौहन हो रहा है और विभाग और सरकार- प्रशासन शांति से बैठा हुआ है. और वह कह रहा है कि स्वर्णिम काल चल रहा है.
माननीय सभापति महोदय, सुरक्षा की बात होती है. अभी कुछ दिन पहले की घटना मेरे अपने क्षेत्र और सतना जिले की है, मैं बताना चाहूंगा कि कुछ लोग मेरे पास में आये, सरपंच थे, दलित वर्ग से आते थे, दलित परिवार के थे, उनके बच्चे को पुलिस ले जाती है, उसके साथ में मार-पीट करती है. वह अस्पताल पहुंचा दिये जाते हैं इलाज के लिये, इलाज के बाद वह आया और एक माह के बाद में उसने जाकर के एसपी के यहां पर शिकायत कर दी कि इन इन लोगों ने मेरे साथ में मार पीट की है.मैं पुलिस की व्यवस्था पर इस घटना को यहां पर कह रहा हूं. पुलिस के पास में जब यह सूचना गई जो वहां का थानेदार था चूंकि वह आईपीएस अधिकारी था और वहां पर वह ट्रेनिंग में था तो उसको वहां के जो छोटे कर्मचारी थे वह चला रहे थे, और जब समझौते की बात आई तो जानते हैं कि क्या कहा गया, कि तुमको दारू बेचना है तो दारू बेचो, गांजा बेचना हो तो गांजा बेच दो परंतु यह शिकायत वापस ले लो. यह व्यवस्था है पुलिस की, कमजोर लोगों को मार मार के डराया जाता है, धमकाया जाता है और गलत काम करने के लिये उकसाया भी जाता है. आज पूरे प्रदेश में खासकर के सतना, रीवा , सीधी तरफ जो मैं देख पा रहा हूं अवैध शराब और कफ सिरफ , जो कफ सिरफ है, जितना चाहिये, जहां भी चाहिये, जिसे भी चाहिये और जितने बजे चाहिये, वहां उपलब्ध है. इसकी होम डिलेवरी भी होने लगी है, इसको कौन रोकेगा. इस पर कभी कोई बात नहीं हुई. इस पर पुलिक के ऊपर कभी कोई चिंता जाहिर नहीं की. 181 पर अगर कोई शिकायत कर दे, किसी पुलिस वाले की, किसी भी सरकारी कर्मचारी की, तो शिकायत का निराकरण नहीं होता. उसके ऊपर दबाव बनाया जाता है कि शिकायत वापस करो. अगर नगर निगम वाले की शिकायत की, तो नगर निगम का बुल्डोजर पहुंच जाता है. अगर पुलिस विभाग की शिकायत की, तो पुलिस विभाग का थानेदार पहुंच जाता है कि शिकायत वापस लो, नहीं तो चलो तुमको देख लेंगे, यह लगातार हो रहा है. यह आपकी सुरक्षा व्यवस्था है इस प्रदेश की. इस पर कभी कोई चर्चा नहीं होती. सारे थाने, सारे जिले ठेके पर दिये गये हैं. कई सरकारी कर्मचारी, बड़े अधिकारी उन जिलों में लगातार 20-20,30-30 साल से उनकी पोस्टिंग है, उनकी मोनोपॉली है. चाहे वह जहां चाहे बेरियर लगा दें, जहां चाहे वह जांच खड़ी कर दें, जहां चाहे जो कर दें, कोई लेना देना नहीं है. जब भी कोई बात आयेगी, कोई बात करता है, तो कहेंगे कि आप सरकार का विरोध कर रहे हैं. तो अगर कोई न्याय की बात करता है, तो क्या वह सरकार का विरोध है, तो ठीक है, हम सब विरोधी हैं. आज पूरे प्रदेश में लगातार आंदोलन हो रहे हैं. आप देखेंगे कि पहले जातिगत जन गणना की बात हो रही थी, तब भी सरकार उसके खिलाफ थी. लेकिन बाद में मान गई. अभी यूजीसी बिल आया, उस पर भी पूरे प्रदेश एवं देश में लोगों के अंदर जो जातिवाद समाप्त हो रहा था, फिर उसको उकसा दिया. कोई यूजीसी के पक्ष में है, कोई विपक्ष में है. क्या सरकार के निर्णय समाज को बांटने के लिये हैं. क्या सरकार के निर्णय इस व्यवस्था में घी डालने के लिये हैं कि और तेज आग जले. सरकार चाहती क्या है, इस पर कोई टिप्पणी होनी चाहिये. जब किसानों की बात आती है, तो किसानों की भी समस्या सबके सामने है. बिजली उन्हें मिल नहीं पा रही है. किसान को सिंचाई के लिये बिजली दी जाती है रात को. उसका परिवार नहीं है क्या. उसका जीवन नहीं है क्या. क्या सरकार उन्हें दिन में लाइट नहीं दे सकती. अगर रात को किसान अंधेरे में खेत में जाता है पम्प चालू करने के लिये, तो क्या उसके साथ घटना नहीं हो सकती. क्या खेत में सांप, बिच्छू नहीं होंगे. क्या किसानों की चिंता नहीं है. क्या इस पर सरकार को नहीं सोचना चाहिये कि अगर हम सबको दिन में लाइट दे रहे हैं, तो किसानों को भी दिन में लाइट दे दें. समय पर लाइट दे दें. लेकिन उनको रात में लाइट दी जाती है. कब रात में 2.00 बजे. आप पता कर लीजियेगा कि किसान इस चीज से कितना परेशान है, उनका परिवार उस चीज से कितना परेशान है और कितनी घटनायें घटी हैं. फिर महंगी बिजली. किसानों को भी महंगी बिजली लेनी पड़ रही है, जबकि म.प्र. से दिल्ली सरकार बिजली खरीदती है और दिल्ली में यहां से सस्ती बिजली देती है. दिल्ली जैसे प्रदेश में म.प्र. से सस्ती बिजली उपलब्ध है. यहां म.प्र. के लोगों को, म.प्र. के किसानों को महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है. फिर रही बात डेयरी उद्योग की. लाखों लीटर दूध की व्यवस्था की बात हो रही है. लेकिन आये दिन अखबारों में छपता है कि यहां मिलावट है. आज ये पकड़े गये. नकली खोया, नकली मेवा. अगर इतना सही में दूध हो रहा है और सही में आपकी सरकार इतनी चौकन्नी है, तो नकली मेवा, नकली दूध, नकली खोया आता कहां से है. यह कौन पैदा कर रहा है. इस पर क्या कार्यवाही हुई. इस पर कोई चर्चा नहीं हुई अभी तक. इसमें एक लाइन मत्स्य पालन को लेकर भी है. सरकार पूरी की पूरी मांस मछली की दुकानें शहर से बाहर, तो फिर यह मत्स्य पालन उद्योग क्यों बढ़ा रहे हैं. यह दोहरी नीति क्यों है. एक तरफ धर्म के नाम पर आप मांस मछली को बुरा बता रहे हैं, दूसरी तरफ जब रोजगार और व्यापार की बात आती है तो आप मत्स्य विभाग 218 करोड़ का मत्स्य बीज उपलब्ध करा रहा है. यह दोहरा चरित्र क्यों है सरकार का. फिर आगे बढ़ते हैं सहकारिता. सरकारिता ठप्प पड़ी हुई है. प्रदेश में सहकारिता के चुनाव कब से नहीं हुए. सहकारिता की रीढ़ टूटी हुई है. सहकारिता पूरा डूबा हुआ है. पूरा बैंक डूबा हुआ है. उस पर कोई बात नहीं हो रही है. मनरेगा, मनरेगा का मकसद था कि पलायन रुके. जो गांव में भूमिहीन लोग हैं, उनको वहीं पर रोजगार मिले. बहुत अच्छा है आपने बदल दिया. जी रामजी के नाम से आपने योजना दे दी. तो यह 60 और 40 का रेशो कहां से आया. 60 और 40 का रेश्यो कहां से आया. प्रदेश सरकार जो पहले से कर्जे में है, वह केन्द्र सरकार को 40 प्रतिशत कहां से देगी. मतलब 40 प्रतिशत नहीं देगी तो यहां के मजदूरों को रोजगार नहीं मिलेगा, पलायन तय है. सरकार का यहीं मकसद है. सरकार को इसके बारे में भी सोचना चाहिये.
सभापति महोदय- सिद्धार्थ जी आपको बोलते हुए 10 मिनिट हो गये हैं. कृपया जल्दी समाप्त करें.
श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा- सभापति महोदय, फिर भागीरथपुरा, इंदौर की घटना, जिसने पूरे देश में और पूरी दुनिया में मध्यप्रदेश का सर नीचा किया है जो शहर साफ-सफाई में एक नंबर का शहर था वहां पानी पीने से इतनी मौतें हो गयी. उस पर न तो हमारे राज्यपाल जी बोल रहे हैं, ना ही हमारे मुख्यमंत्री जी बोल रहे हैं ना ही उस पर हमारी सदन में चर्चा हो रही है. इतने बौद्धिक लोग यहां पर हैं, क्या उनके ऊपर इंसानियत नहीं है, कोई मानवता नहीं है कि उस पर भी कोई बोले, कोई जिम्मेदारी ले और उसमें भी सुधार करें. अकेले इंदौर में ऐसा नहीं है. हमारे खुद के नगर निगम, सतना में गंदे पानी की रोज खबर आ रही है, कोई व्यवस्था नहीं है. अगर कोई कम्प्लेंट करता है तो नगर निगम का अमला उनका घर नापने पहुंच जाता है, अतिक्रमण की बात करता है और उनका घर गिराने बुल्डोजर और जे.सी.बी पहुंच जाती है. प्रदेश में इस तरह से दबाया जा रहा है. फिर जो प्रदेश में आंदोलन हो रहे हैं, वह आंदोलन क्यों हो रहे हैं ? अगर इतना स्वर्णिम युग है, सरकार की इतनी अच्छी व्यवस्था है, इतना राम राज्य है तो फिर यह आंदोलन क्यों हो रहे हैं. एक तरफ किसान आंदोलन कर रहे हैं, एक तरफ किसान आंदोलन कर रहे हैं और मजदूर आंदोलन कर रहे हैं, एक तरफ बेरोजगार आंदोलन कर रहे हैं, उद्योगपति आंदोलन कर रहे हैं, अगड़ा कर रहा है, पिछड़ा कर रहा है, दलित कर रहा है और आदिवासी आंदोलन कर रहा है, सब लोग तो आंदोलन कर रहे हैं. अगर सब कुछ अच्छा है तो आंदोलन हो क्यों रहे हैं ? मेरा यह सवाल है अभिभाषण पर.
सभापति महोदय, वन विभाग के कुछ प्लांटेशन के काम हो रहे हैं. पर्यावरण को लेकर तमाम बातें हो रही हैं. लेकिन पूर्व में सरकार के द्वारा किसानों को पट्टे दिये गये थे, पूर्व में सरकार के द्वारा खेती के लिये जो वन ग्राम थे, फारेस्ट से लगी हुई जमीनें जिनके पट्टे खेती के लिये दिये गये थे, आज उन पट्टों की अवमानना हो रही है और जबरदस्ती उन पट्टेधारी किसानों को वहां से हटाया जा रहा है और जबरदस्ती उन पर प्लांटेशन के नाम पर उन जमीनों पर कब्जा किया जा रहा है. वह भी विभाग के द्वारा किया जा रहा है.
सभापति महोदय, दूसरा जब बात विरासत की हो और विरासत के साथ विकास की जब बात हो तो यह आज बेइमानी सा लगने लगा है. भाई, हमारी विरासत क्या थी, हम किसके लिये जाने जाते थे, आज उनको सबको बदलना है. कुछ दिन पहले खजुराहो में एक केबिनेट मीटिंग हुई थी. उसी खजुराहो में एक होटल में जहरीला खाना खाने से कई लोगों की मौत हुई.
सभापति महोदय- कृपया समाप्त करें. अभी कई और लोगों को बोलना है.
श्री सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा- बिल्कुल. लेकिन यह बात सदन में आना जरूरी है. मैं इसलिये यह बोल रहा हूं कि मेरे खजुराहो के जिन लोगों की मौत हुई उन लोगों को मुआवजे की व्यवस्था भी होनी चाहिये. क्या मध्यप्रदेश के लोगों की जान की कीमत मात्र एक लाख रूपये या चार लाख रूपये, क्यों न इसको भी बढ़ाया जाये, क्यों न लोगों की सुरक्षा पेंशन बढ़ायी जाये, क्यों न लोगों के हितों को देखा जाये और नगर निगम तथा अन्य विभागों में जो भ्रष्टाचार है. जिन भ्रष्टाचारों पर हम परदा डाल रहे हैं. अपनी वाहवाही के लिये उसको नजरअंदाज कर रहे हैं, उन भ्रष्टाचारों को हमें सामने लाना पड़ेगा, उस पर कार्यवाही करनी पड़ेगी यह मेरी इस सदन से प्रार्थना है. धन्यवाद.
श्री रामेश्वर शर्मा (हुजूर)- माननीय सभापति महोदय, महामहिम राज्यपाल जी के अभिभाषण में, आपने जिसकी शुरूआत की थी और माननीया अर्चना जी ने, हमारे प्रदेश अध्यक्ष खण्डेलवाल जी ने, डॉ. सीतासरन शर्मा जी ने और कांग्रेस के भी अनेक मित्रों ने उस पर अपनी बात कही है.
सभापति महोदय, कुल मिलाकर मध्यप्रदेश या देश, इसका अपना एक इतिहास होता है और जो विरासत है उससे विकास को सीख भी मिलती है और उसी आधार पर विकास आगे भी बढ़ता है तो विरासत भी है, विकास भी है और सपना भी इसलिये संजोना पड़ता है कि एक जमाने में सरकार थी जो पांच वर्ष के लिये योजना बनाती थी. उस सरकार का नारा था पंचवर्षीय योजना. आज की जो सरकार है भारत की सरकार या प्रदेश की सरकार है, इसकी सोच है कि कम से कम 25 वर्ष की ऐसी व्यापक योजना बनायी जाये, जिससे भारत का जो विकसित मध्यप्रदेश का आईना है, वह सबसे ठीक दिखे. हम 5 वर्ष के लिए आज कोई सड़क भी नहीं बना सकते हैं. 5 वर्ष में आबादी का अनुपात जो उस सड़क पर बनता है, हमें उस सड़क में उसको डबल करना पड़ता है तो इसलिए सरकार को सारे पहलुओं पर गंभीरता से विचार करके योजना बनानी होती है. मैं आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि आज सरकारी विद्यालयों की जो हालत है. लोग कह रहे हैं वहां विद्यालय नहीं है. संदीपनि विद्यालय में आप जाइए, एडमिशन की इतनी भरमार है. मेरे यहां खुद एक संदीपनि विद्यालय है जहां पर 2200 आवेदन आए, जबकि हमारे वहां बच्चों की कैपिसिटी 1800 की है तो आज सरकारी विद्यालयों में बच्चे नहीं आ रहे हैं ऐसा नहीं है. एक्सीलेंस स्कूल हैं उनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी एडमिशन ले रहे हैं और मध्यप्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता के साथ साथ छात्रों के उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए भी सरकार भी वचनबद्ध है और कई ऐसे जनप्रतिनिधि कांग्रेस में हैं जो अपने क्षेत्र में भी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कोई न कोई कोचिंग, कोई न कोई सेंटर चलाते हैं. क्योंकि हम सब लोग मध्यप्रदेश के जवाबदार नागरिक हैं. सभापति महोदय, आज हम यह कह सकते हैं कि मध्यप्रदेश में जो नागरिक पैदा हुआ है, यही वह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है जिसने यह संकल्प के साथ दोहराया है कि मध्यप्रदेश का प्रत्येक नागरिक जो मध्यप्रदेश में पैदा हुआ है, जब उसको आवास की जरूरत होगी तो मध्यप्रदेश सरकार उसे आवास का या तो पट्टा देगी, या प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान देगी या शहरी क्षेत्रों में बहुमंजिला इमारत बनाएंगे, उसमें मकान देंगे. आज चारों तरफ शहर में अमृत 2.0 के आधार पर जिन शहरों में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं थी, आज वहां पानी व्यवस्था बढ़ रही है, जिन शहरों में सीवेज सड़कों पर बह रहा था, आज वहां सीवेज की लाइनें डल रही हैं, सड़कें चोड़ी हो रही हैं, पावर सेंटर डेवलप हो रहे हैं और इतना ही नहीं, आज शहर की गुणवत्ता के विकास के लिए चारों तरफ, और यह भी नहीं, अकेले भारतीय जनता पार्टी के सदस्य, ऐसा नहीं है, पूरे मध्यप्रदेश में जहां भी नगर पंचायत लेवल तक का भी है, वहां भी हमारा नगरीय विकास मंत्रालय इस दिशा में काम कर रहा है.
आज मध्यप्रदेश के दो शहर मेट्रो शहर के रूप में जानने लगे हैं. यहां पर मेट्रो की गतिविधियां और तेज हो रही हैं उनका निर्माण तेज गति से हो रहा है. दूसरे शहरों को भी उस कनेक्टिविटी में जोड़ने का काम हमारी मध्यप्रदेश की सरकार कर रही है. अगर आप विचार करें तो शहरी क्षेत्रों के विकास के साथ साथ जो शहरी क्षेत्र से लगे हुए गांव हैं वहां के लोग भी लगातार शहर की तरफ आ रहे हैं उनको रोकने के लिए वहां भी उनको समूचे आवास और सुविधा उपलब्ध कराई जाय, इस दिशा में भी हमारी सरकार प्लान कर रही है और इसलिए पहले की सरकार पांच साल के लिए सोचती थी, लेकिन डॉ. मोहन यादव जी की सरकार आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार यह 25 साल का सोच रखकर आगे विकसित मध्यप्रदेश और विकसित हिन्दुस्तान के लिए काम कर रही है. अब विकास की जहां तक बात है, आप इस पर स्वयं विचार करिए कि मध्यप्रदेश में जो विकास की स्थिति है वह क्या है. आज हमारे यहां शहर में विकास, गांव में चले जाइए सड़कें हैं. अभी जब माननीय श्री प्रहलाद सिंह पटेल जी का प्रश्न चल रहा था और कांग्रेस की बहनों ने जो सवाल खड़े किये और उसका मंत्री जी ने जो जवाब दिया. बहनों ने जो जवाब से संतुष्ट होकर मंत्री जी को धन्यवाद दिया. इसका मतलब है कि डॉ. मोहन यादव जी की सरकार प्रत्येक ग्राम पंचायत को एक आइने से देखकर उसकी भी विकास की योजना बना रही है, यह हमारी सरकार का सोच है. यह हमारी सरकार के काम करने का तरीका है. यहां पर काम करने को लेकर कोई भेदभाव नहीं है. गरीब, अमीर में कोई भेदभाव नहीं है. किसी भी जाति का हो, हमें वोट देता हो कि नहीं देता हो, आज आप चले जाइए, सबको गेहूं मिल रहा है, सबको चावल मिल रहा है, सबके गरीबी की रेखा के कार्ड बन रहे हैं. सबके आयुष्मान कार्ड बन रहे हैं सबको उज्जवला गैस से जोड़ा जा रहा है. किसी को छोड़ा तो नहीं जा रहा है.
सभापति महोदय, लोग हम पर आरोप लगाते हैं कि मुसलमान, मुसलमानों के सबसे ज्यादा आयुष्मान कार्ड भोपाल में बने हैं तो हमारा दृष्टिकोण यह नहीं है. हमारा दृष्टिकोण यह है जो हिन्दुस्तान की धरती पर पैदा हुआ है, जो भारत के प्रति वंदे मातरम् गाता है, जो भारत का वफादार है, वह भाजपा को वोट देता है कि नहीं देता है, परन्तु भाजपा की सरकार उसके सुख-दुख की चिंता करेगी, उसको समुचित सुविधा देने का काम करेगी.
श्री महेश परमार - आप छह छंदों में वंदे मातरम् सुना दीजिए. हम समर्थन करेंगे.
श्री रामेश्वर शर्मा - आपके पुरखों ने दो ही छंद दिये थे.
श्री महेश परमार - आप पुरखों के कारण ही हो.
श्री रामेश्वर शर्मा -- आपके पुरखों ने दो ही छंद दिये थे. वह दो छंद हमने रख लिए थे. अब हमारे माननीय नरेंद्र मोदी जी ने 6 छंद दिये हैं. आज भी सभी ने सदन में गाया है. आज नहीं, तो कल पूरा हिन्दुस्तान गायेगा और आप भी गाओ और इसलिए आप कम से कम होंठ तो हिलाओ. आपके यहां तो ऐसे-ऐसे जनप्रतिनिधि हैं जो खुलेआम कहते हैं कि मैं वंदेमातरम् नहीं गाऊंगा. आपके यहां तो ऐसे-ऐसे जनप्रतिनिधि हैं जो वेदों की बुराई करते हैं और आपका नाम महेश है. आप धन्य हैं महेश जी. आप उनका भी विरोध नहीं कर पाते, जो वेदों का विरोध कर रहे हैं. आप कैसे महेश हैं. आप महाकाल के कैसे भक्त हैं ?
श्री महेश परमार -- जय महाकाल. हम पूरा विरोध करते हैं. ताकत के साथ विरोध करते हैं. हम महाकाल को आपसे ज्यादा मानते हैं. हम दिखावा नहीं करते हैं और इसके लिए आपके प्रमाण पत्र की जरूरत भी नहीं है.
सभापति महोदय -- माननीय सदस्य, आप अपनी बात कन्टीन्यू रखिए. आप विषय पर बोलिए.
श्री अभय मिश्रा -- आप वंदे मातरम् की दो लाईनें सुना दीजिए. क्योंकि आप चेहरा हैं. मात्र दो लाईनें सुना दीजिए.
सभापति महोदय -- अभय जी, अभी उसका समय नहीं है.
श्री रामेश्वर शर्मा -- सभापति महोदय, मैं आपको दो लाईनें सुना देता हॅूं. आप मुझे आज्ञा दें. पूरा सदन खड़ा हो जाए. मैं दो लाइन सुना देता हॅूं और आप उधर से इधर आ जाएं.
सभापति महोदय -- कृपया, आप विषय पर आगे बढ़िए.
श्री रामेश्वर शर्मा -- आप आ जाइए. मेरे भाई, मेरे नेता तुम्हें यही नहीं पता कि राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत किस परिस्थिति में गाया जायेगा. इसलिए तो कांग्रेस का दुर्भाग्य रहा कि कांग्रेस ने अगर सड़क दी, लेकिन राम का विरोध किया, इसलिए कांग्रेस राम को नहीं समझ पायी. कांग्रेस ने अगर बिजली दी, लेकिन आम नागरिकों को सुविधा देने के लिए रामराज्य के लिए कल्पना पूरी नहीं कर पायी. महात्मा गांधी ने रामराज्य की कल्पना दी थी. उस रामराज्य को भी आपने ताक पर रख दिया और आज मैं डॉ.मोहन यादव जी की सरकार में डंके की चोट पर कह सकता हॅूं कि यह वह सरकार है जो गरीब का पक्का मकान बना रही है, गांव में पीने का पानी भी दे रही है, सड़क भी दे रही है नौजवानों के लिए उद्योग भी लगा रही है, बिजली भी दे रही है और अयोध्या में रामलला का मंदिर और ओरछा का रामलला धाम भी तैयार कर रही है. यह हमारी सरकार है जो भगवान बिरसा मुंडा को भगवान के रूप में पूजती है. संत रविदास जी का इतना बड़ा विशाल मंदिर है, आप देखकर आइए. यह हमारी ही सरकार है जो सागर के अंदर विशाल मंदिर तैयार करती है. यह हमारी सरकार है जो देवी अहिल्या बाई का धाम महेश्वर में तैयार करती है. यह हमारी ही सरकार है जो भामा शाह और रघुनाथ शाह के मंदिर तैयार करती है. यह हमारी सरकार है जो देवी अवंतीबाई की पूजा करती है. आपकी सरकार क्या करती है ? लाल गेहॅूं (XX) से बुलाती है और पूरे हिन्दुस्तान को खिलाती है जिससे दस्त लग जाते हैं. इसलिए मेरे भाईयों, केवल आपसे इतनी रिक्वेस्ट है कि जो अच्छा हो रहा है, उसके लिए माननीय नरेंद्र मोदी जी को और डॉ.मोहन यादव जी को ताली बजाकर धन्यवाद दीजिए. हां, अगर आपकी कोई थोड़ी बहुत बात है तो माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी बैठे हैं, इनसे मिलना है. यह समस्या को हल करेंगे. यह कुछ न कुछ आपको दिलवा देंगे और आपको मिल भी रहा है और इसलिए आपके जो सदस्य माननीय मुख्यमंत्री जी से मिलते हैं आप पूछिए कि माननीय मुख्यमंत्री जी उनका काम करते हैं या नहीं करते हैं. आप पूछिए, हां या ना. आप बताइए महेश जी. हां या ना. मैं अंदर की बात बाहर नहीं कर रहा, पर मेरा यह मानना है कि हमारे मुखिया के बारे में, डॉ.मोहन यादव जी के बारे में हम डंके की चोट पर कह सकते हैं कि 230 जनप्रतिनिधियों के बारे में वह भेद नहीं करते. उनके पास जो भी समस्या लेकर जाता है, वे उसका समाधान करते हैं. उसका वह समाधान देखते हैं.
श्री सुनील उइके -- 15 करोड़, 15 करोड़.
श्री रामेश्वर शर्मा -- क्या करोगे. अरे काम तो बताइए. आप करोगे क्या.
सभापति महोदय -- माननीय रामेश्वर जी, क्या आपकी बात पूरी हो गई ?
श्री रामेश्वर शर्मा -- 15 करोड़ का आप क्या करोगे. काम का ही तो पता नहीं है. 15 करोड़, 15 करोड़, क्या आप ब्याज पर देंगे. क्या करोगे. आप काम तो बताइए. लिखकर दीजिए, प्लान दीजिए. नेता प्रतिपक्ष जी जिस काम के लिए बोलते हैं माननीय मुख्यमंत्री जी वह काम करते हैं या नहीं करते हैं ? और इसलिए गरीबों की हर समस्या का समाधान हमारी सरकार करती है.
सभापति महोदय -- धन्यवाद रामेश्वर जी. अब मैं अगले वक्ता को बुला रहा हॅूं. श्री अभय मिश्रा जी.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय सभापति महोदय, यह इतने विकास की बात कर रहे हैं, तो मैं इनसे यही कहना चाहता हॅूं कि मुख्यमंत्री जी ने विकास निधि के लिए 5-5 करोड़ किया है, 15 करोड़ की तो बात ही नहीं कर रहे हैं.
सभापति महोदय -- वह बात माननीय वित्त मंत्री जी करेंगे.
श्री उमंग सिंघार -- सभापति महोदय, अगर आपके मुख्यमंत्री जी बात मानते, तो रोड से लेकर हाईवे, बायपास सब है, आपको पता ही है.
श्री अभय मिश्रा (सेमरिया) माननीय सभापति महोदय राज्यपाल महोदय जी के अभिभाषण पर चर्चा हो रही है. अभी एक दिवसीय विशेष सत्र बुलवाया गया था जब जागो तब सवेरा 2003 से अभी तक का जो भी 20 से 22 साल बीत गये जैसा भी चला और उसके पहले भी चलता था उस पर टिप्पणी करने का कोई मतलब नहीं है. समय की गति है 2001 के बाद मोबाइल युग आया पूरी दुनिया तेजी से दौड़ी, हम भी दौड़े, सब कुछ हुआ. अब यह नयी उम्मीद थी कि नई सरकार है नई दिशा में 2047 तक का प्लान भी बताया गया. हमेशा कहा जाता है कि हम 25 वर्षों के प्लान में काम करेंगे उसके लिये एक दिन का विशेष सत्र भी बुलाया गया. तो यह लगा था कि राज्यपाल जी के अभिभाषण में एक नई दिशा में चर्चा होगी एक नया एन्ट्रीग्रेटेड प्लान मध्यप्रदेश का दिया जायेगा जिसमें यह बात होगी कि हम एक साथ सब चीजें नहीं करेंगे. किसी ने दबाव बनाया तो अंदर की रोड़ फोर लाईन हो गई. बीच का मुख्य रोड़ बचा है जहां पर जिसका जैसा राजनीतिक हैसियत है उस प्रकार का कार्य न होकर मध्यप्रदेश के समतामूलक विकास को लेकर के काम होगा. लेकिन राज्यपाल जी के अभिभाषण को जब पढ़ा गया तो उसमें वह चीजें दिखाई नहीं दीं. वह एन्ट्रीग्रेटेड प्लान की तो बात ही नहीं रही. अभी तक हम 20 वर्षों का जो राज्यपाल महोदय जी का जो जो अभिभाषण हुए हैं अगर इनको हम एकजाई कर दें और उसकी एक पुस्तक बना दें और उस पर हम सदन में चर्चा करें तो शायद हम आश्चर्यचकित हो जायेंगे. हमें शायद खुद को शर्म में आना पड़ेगा कि हम कर क्या रहे हैं ? हम जब दूसरे को धोखा देते हैं तो सबसे पहले हम स्वयं को धोखा देते हैं. हमने मामा भांजा का युग देखा, लक्ष्मी लाड़ली का युग देखा, बहनों का युग देखा. जैविक का देखा जो बीच की जलेबी है यह शब्दों का जलपान यह बड़ा ही प्रभावी है. इसका असर भी देखा. सत्ता पाने का वह भी देखा. वहां से आज हम उद्योग उद्योग खेल रहे हैं. हम 2047 का सपना दिखा रहे हैं. किसी ठोस चीज पर काम नहीं कर रहे हैं. कभी हम ऋण कम करने की बात नहीं कर रहे हैं, कभी हम आय बढ़ाने की बात नहीं कर रहे हैं. हम बार बार अपने काल की बात कर रहे हैं. किसका अमृतकाल उद्योगपतियों का या किसान का या उस गरीब का या उस मजदूर का. 11 लाख करोड़ के प्रस्ताव की हम बात कर रहे हैं. कब तक हम अपने आप को टहलाएंगे. हम एमओयू की बात नहीं कर रहे हैं, हमने कितने साईन कर लिये हैं. हम तो यह कहते हैं कि माननीय मुख्यमंत्री जी इस सदन में घोषणा कर दें कि हम अगले चुनाव से पहले हम तीन उद्योग को मात्र धरातल पर उतार देंगे यह11 लाख करोड़ में से कोई तीन जब हम वोट मांगने निकलेंगे उसके पहले हम तीन उद्योग चालू कर देंगे. हम समय जाया कर देंगे, पॉलिसी से हम आये हैं. स्टेट की जीएसटी को जब तक उसको कम नहीं करेंगे हम ईवेंट करेंगे और लोगों को समोसा खिला देंगे. उद्योगपति दबाव में रहता है वह आ जायेगा. हम भी बात करेंगे और वह भी लच्छेदार बात करके चला जायेगा. वह तो हमारी पॉलिसी से आयेगा उसको तो हम जब सुविधा देंगे बिजली के टेरिफ में या जीएसटी में बहुत सारी चीजों में तो फिर हमको किसी को ढूंढने के लिये नहीं जाना पड़ेगा, वह हमको खुद ही ढूंढ लेगा. इस दिशा में काम करने का है. लघु अथवा मध्यम उद्योग आपको पता है कि मध्यप्रदेश हमारा किसानों का देश है. किसानों से जुड़ी हमारी संरचना हमारी अर्थ व्यवस्था किसान आधारित है. एग्रीकल्चर बेस्ट है. जब तक इसके वेल्यू एडीशन की बात नहीं करेंगे. किसानों को वेल्यू एडीशन करके उनकी आय नहीं बढ़ाएंगे. अपने यहां मध्यप्रदेश में प्याज क्या भाव है हमें लगता है कि 6 से 7 रूपये किलो होगी. हमारे यहां पर इलाहाबाद में 28 रूपये किलो है. एक किलो आलू 10 रूपये किलो है और एक चिप्स का पैकेट 12 रूपये का है. हम किसानों को जब तक छोटी छोटी इंडस्ट्रीज लगवाकर कार्य नहीं करवाएंगे और हम इस दिशा में सरकार की प्रशंसा हम कर रहे हैं. अभी सरकार ने इस दो साल के बीच में थोड़ा सा इसमें प्रयास किया है. लेकिन जो 2021 की पॉलिसी है, 2024 की पॉलिसी है जिसमें मुख्यमंत्री जी ने बार बार घोषणा की है. पिछली बार हमने विधान सभा में प्रश्न लगाया था कि मंडी टैक्स में आप छूट कब तक देंगे उसका उत्तर आया कि प्रक्रियाधीन है. अभी वही प्रश्न कल फिर से लगा हुआ है तारांकित प्रश्न 10 वें नंबर पर आप उसका उत्तर सुन लीजियेगा. अगर हमारी नीयत अच्छी है तो हम बजट में प्रावधान क्यों नहीं करते ? हम लोगों को लाभ क्यों नहीं दे रहे हैं. एक बार आपकी गाड़ी अच्छी चल भी गई तो आप उसको सपोर्ट नहीं कर रहे हैं. इसी तरह की चीजें हैं. दूसरी तरफ आप देखें किसान की स्थिति किसान खाद लेने के लिये कितनी लाठियां नहीं खाया. अभी हमारे यहां 59 किसान है, उन्हें 1 करोड़ 28 लाख का भुगतान होना है. इन किसानों ने अपना उपार्जन केन्द्रों में बेचा हुआ है, ये अपना मूल भुगतान चाह रहे हैं कि हमारा मूल भुगतान कर दो, जो हमने लाठियां खाकर बेचा है, सरकार नहीं दे पा रही. पिछली विधान सभा में उत्तर दिया कि हां हम दे रहे हैं, उसमें गबन हो गया. हमारे उपार्जन नीति में जो हमारे लैकुना है, इसका लाभ उठाकर दलाली पृथा से जुड़े लोगों ने इसकी लूटपाट कर ली, पैसा डाल दिया और जो असली किसान थे उसको पैसा नहीं मिल पा रहा है. अब हम बार बार आश्वासन दे रहे हैं और अभी फिर एक नया उत्तर में आया है देने में असमर्थता, ये कितना बड़ा अत्याचार है कि कुल 1 करोड़ 28 लाख की राशि, कुल 59 किसान है, किसी का 60 हजार होगा, किसी का 30 हजार होगा, पर इससे हमारी नीयत दिखाई देती है. अब मनरेगा मनरेगा का अनुपात सबके सामने है, जो लोग सत्ता में प्रभावी हैं, वे कांक्रीट के काम अपने शहरों और शहरों के अगल-बगल करवा लिए और जो और विधायक हैं, चाहे वह सत्ता पक्ष के हो, या विपक्ष के, वे ग्रामीण क्षेत्रों में आज उनके काम इसलिए नहीं हो पा रहे, क्योंकि वहां अनुपात बिगड़ चुका है. अब वहां अनुपात को ठीक करवाने का इंतजार कर रहे हैं, आधा प्रतिशत से कम रोजगार दे रहे हैं 1 करोड़ 93 लाख रजिस्टर्ड मजदूर है, जिसमें से 30 हजार मात्र ऐसे लोग हैं जिनको आपने 100 दिन का रोजगार दिया है, 30 हजार का मतलब आधा प्रतिशत से भी कम. आप देखिए बालू खदानों में है आप लोगों का कभी ध्यान नहीं जाता होगा, वहां भी रेट सीलिंग नहीं है, बालू का मनमानी रेट है, आप मकान बनाने के लिए जो राशि मंजूर करते हैं 1 लाख, मान लो तो उसमें बालू की एक गाड़ी ही 40-50 हजार की हो जाती है, जब बालू में रेट सीलिंग नहीं होगी, तो वह कितने ही दर पर उसमें से आधा पैसा तो बालू के नाम पर ही चला जाता है. सीधी में आपने खदान की नीलामी की उसको एक ग्लोबल कंपनी ने लिया, उसने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया बाकी जगह की ताकि उसमें कोई तीसरा न घुस पाए, उसने किया वकील खड़ा किया. आज भी 82 करोड़ रुपए जमा नहीं हुए, उसका कुछ नहीं हुआ. इस तरह से सीमेंट की ओलिगोपॉली भी देखिए. सरकार ने जीएसटी पर स्लैब कम किया 18 प्रतिशत से 12 प्रतिशत किया क्या सोचकर किया कि आम आदमी को इससे राहत मिलेगी, सीधे जो सीमेंट 290 रुपए बैग बिक रही थी, वह 240 रुपए बैग पर आ गई और पूर्व की भांति जैसे ये लोग हमेशा करते थे अभी अभी दो तीन महीने में ये ओलिगोपॉली यानि सीमेंट निर्माता कंपनी ने आपसी गुटबंधी करके फिर से 290 रुपए और 300 रुपए बैग पर पहुंचा दिया. क्या इनको कमाने के लिए जीएसटी कम किया था कि ये उसका लाभ उठाए आज आप देखिए, न डॉक्टर है, न मास्टर है, न प्रोफेसर है और ऑउटसोर्स और संविदा से हम काम कर रहे हैं. जब माननीय मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि हमने चैकपोस्ट को बंद कर दिया, तो बड़ा सुखद लगा था, लेकिन धरातल पर आप देखिए इनकी स्थिति क्या है. सबसे बुरी स्थिति तो ये जो सदस्य शब्द है, बड़ा खराब है, चाहे वह ग्राम पंचायत का पंच हो, चाहे जनपद का सदस्य हो, चाहे जिला का सदस्य हो, चाहे विधान सभा का सदस्य हो, चाहे लोक सभा का सदस्य हो. ये सत्ता निर्माण मुख्यमंत्री के निर्माण और प्रधानमंत्री के निर्माण के बाद इसकी कोई भूमिका वास्तव में रह नहीं जाती, कहीं कोई ऐसी पॉलिसी नहीं है, जहां इसकी भूमिका हो, कोई ऐसा काम नहीं जहां विधायक के बिना वह काम हो जाए, चुनाव तो इनका होता है क्योंकि बाबा साहेब अंबेडकर ने एक व्यवस्था बनाई थी कि प्रत्यक्ष प्रणाली से इनका चुनाव होगा, लेकिन इसके बाद जिन अधिकारियों को नियंत्रित करने के लिए और कानून बनाने के लिए, चीजों के लिए होता है, वह सत्ता के हिस्सेदार हो जाते हैं और हम दया के पात्र हो जाते हैं. आप देखिए एसजीएम की बैठक आपने ही नियम बनाए थे कि तीन तीन महीने में एक एसजीएम की बैठक करेंगे कितने विधायक है हम सत्तापक्ष के साथियों से पूछना चाहते हैं कि आपने कितने एसजीएम की बैठक की, आप परामर्शदात्री समिति में है, आपकी कभी चर्चा हुई क्या. विधायक असुरक्षित है, हमारे यहां मऊगंज के विधायक मूसा गैंग से असुरक्षित है और इसमें झूठ नहीं है लोग हंसी मजाक करते होंगे, लेकिन यह वास्तविकता है कि वहां जो कोरेक्स और नशे का व्यापार है, उसका विरोध करने के कारण हमारे सत्ताधारी दल का विधायक असुरक्षित है और वे एक भी झूठ नहीं बोले हैं, उनको अपनी सुरक्षा के लिए सही में सजग रहना पड़ रहा है, कुछ लोग राजनीति का चोला ओढ़े हैं और ये गलत चीजों में व्याप्त है, इससे जब हमारे विधायक लोग सुरक्षित नहीं रहेंगे तो हम आम लोगों की कैसी सुरक्षा करेंगे.
सभापति महोदय -- श्री अभय मिश्रा जी अब आप समाप्त करें, आपके दस मिनिट हो चुके हैं.
श्री अभय मिश्रा -- सभापति महोदय, माननीय विधायक जी श्री हेमन्त खण्डेलवाल साहब ने कितनी अच्छी बात की थी कि हम अपराधी जो जमानत पर खुले घूम रहे हैं, उनकी बात करें. आप कोर्ट में दिखवा लें कितने ऐसे हैं, जो अपील लगा चुके हैं, हाईकोर्ट में सजायाफ्ता हैं, जिनको आजीवन कारावास की सजा है, वह अपील के नाम पर जमानत पर हैं और इनकी पुलिस ने बकायदा लिस्टें लगाकर जमानत खारिज करने का आवेदन हाईकोर्ट में लगवाया है, लेकिन आज तक वह सुनवाई में नहीं लिये गये हैं. हमारे जो पुलिस प्रॉसिक्यूटर हैं, जो अभियोजक हैं, जो हमारे सरकारी वकील हैं, इनसे इस संबंध में प्रश्न कभी न कभी होना चाहिए.
सभापति महोदय, शिक्षा व्यवस्था में आप देखें तो भवन नहीं है, शिक्षक नहीं है, हजारों स्कूल में शिक्षक नहीं है, उच्च शिक्षा में पद रिक्त हैं, सरकारी कार्यालय आउटसोर्स से चल रहे हैं, अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी है,ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा ठप्प है, निजी अस्पतालों का सहारा है, बिजली विभाग और स्वास्थ विभाग आज से नहीं आप दस वर्षों और पंद्रह वर्षों का इतिहास देखिये, तो कहीं न कहीं हम इसमें फैल रहे हैं. हम आज की वर्तमान की बात नहीं कर रहे हैं, यह हमारी एक कमी थी जिसको हमें ठीक करना होगा. हमें नये माइल स्टोन को लक्ष्य करना होगा. हम जब जागेंगे तभी सवेरा होगा.
सभापति महोदय, हम यह चाहते हैं कि हमारे यहां किसानों का मूल रूप से भुगतान हो जाये और सरकार किसानों के हित की बात करती है. हमारा ध्यानाकर्षण सूचना क्रमांक-443 आप चेक करवा लीजियेगा. हम उसमें आपका समय नहीं खराब करेंगे, आप मनरेगा की मजूदरी के संबंध में चेक करवा लें, हमने ध्यानाकर्षण लगाया था, आप उसको चेक करवा लीजियेगा. आपने इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी का प्रावधान रखा है कि जो नर्इ इंडस्ट्री है, वह चाहे तो इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी ले सकती है लेकिन आपने उसका रेट इतना मंहगा किया है कि जब कोई नई इंडस्ट्री लगायेगा, तो वह एक सिपाही को 80 हजार रूपये कैसे देगा? प्रायवेट गार्ड और ऐसी कई चीजे हैं, इस प्रकार से आपकी पता नहीं कितनी ऐसे योजनाएं हैं, जो सिर्फ खानापूर्ति की हैं, जिनको आप बंद करके आप अपनी आय बढ़ा सकते हैं और वेस्टेज ऑफ मनी को रोक सकते हैं और ठोस दिशा में काम कर सकते हैं.
सभापति महोदय, आज मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा अगर कोई हमारे यहां खून करने का काम कर रहा था, तो वह हमारी इंटीग्रेटेड पॉलिसी का न होना और दूसरी तरफ हमारा भ्रष्टाचार भी है. कलेक्टर कई जगहों पर तीन -तीन, चार-चार वर्षों से पदस्थ हैं, उनके पिछले रिकार्ड भी हैं, हमारे मुख्य सचिव महोदय ने भी अलग से खुद ही बयान दिया था, इस बात को हम प्रत्यक्ष जानते भी हैं और देखते भी हैं, लेकिन कुछ कर नहीं सकते हैं, ठीक है, हमारा यह समय है, दौर है, चलेगा हम सत्ता में हैं लेकिन हमारी जवाबदेही, हम सबकी मिलकर कहीं न कहीं सुशासन की ओर बनती है कि हम एक अच्छे मध्यप्रदेश का निर्माण करें.
सभापति महोदय, जो एक दिवसीय सत्र था, उसका कोई मतलब नहीं निकला है, अगर हम सही में इंटीग्रेटेड प्लान पर बात करते, हम अच्छी योजना बनाकर काम करते, हम नये दिशा से एक बार मध्यप्रदेश की तैयारी करते तो हमें लगता है कि बहुत अच्छा होता.
सभापति महोदय-- श्री अभय मिश्रा जी, कृपया अब आप समाप्त करें.
श्री अभय मिश्रा -- सभापति महोदय, बेरोजगारी और युवा मोर्चा, परीक्षाओं में देरी ऐसी बहुत सी चीजें हैं, जिस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए. सभापति महोदय, मैं अनुरोध करता हूं कि आज हम सब लोग विचार करके, सब लोग मिलकर कुछ अच्छी दिशा में अग्रसर हो सकें, धन्यवाद.
श्री गिरीश गौतम(देवतालाब) -- माननीय सभापति महोदय, महामहिम के अभिभाषण पर आपके द्वारा प्रस्तुत कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर मैं समर्थन करने के लिये खड़ा हूं और जब आप बोल रहे थे, उस समय आपने यह कहा था कि न केवल हमारे पिछले जो हमने साल भर कार्य किये हैं, उनको हम चित्रित करते हैं, बल्कि आगे वर्षों के लिये भी विचार करते हैं.
3.39 बजे
(सभापति महोदया (श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकी) पीठासीन हुईं)
सभापति महोदया, उसमें अगला हमारा रोड मेप क्या होगा, हमको क्या करना है और क्या हमारी सरकार करेगी? इस संबंध में हमारे महामाहिम द्वारा अभिभाषण प्रस्तुत किया गया है. मैं खासतौर पर चाहता हूं कि पंचायत ग्रामीण विकास विभाग की बात करूं. सबसे पहले प्रधानमंत्री आवास योजना यह वर्ष 2016 से स्कीम शुरू हुई और लगातार यह चलती चली आई, बीच में जब आपका भी कार्यकाल आया, तब भी यह प्रधानमंत्री आवास योजना चलती रही, अब वह बात अलग है कि आपके द्वारा जो कोटा चाहिए था, वह नहीं दिया गया है, जिससे वह थोड़ा सा कम हो गया है, परंतु अभी मैं वर्ष 2025-26 की बात करता हूं तो 8 हजार 400 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें से हमने 4 हजार 913 करोड़ 42 लाख रूपये के मकानों का निर्माण कर दिया है. और यह कोई एक दिन में नहीं कई वर्षों के भीतर हमने इस बात का प्रयास किया कि कुलमिलाकर हमारे प्रदेश के भीतर वर्ष 2025-2026 तक 54 लाख 94 हजार लक्ष्य प्राप्त हुआ था और उसमें से हमने 41 लाख 53 हजार को निर्मित कर दिया है, बाकी की प्रक्रिया हमारी चालू है और उसको हम करने का प्रयास कर रहे हैं कि लगातार हम उसको करें. पूरे प्रदेशवाइज हम देंखेंगे, पूरे भारतवर्ष के आंकड़े के हिसाब से तो मध्यप्रदेश नंबर एक पर है. मैं बिहार, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा का आंकड़ा मेरे पास है. कुलमिलाकर के भारत के अंदर 3 करोड़ 88 लाख 16 हजार स्वीकृत हुये जिसमें पूर्ण हुये 2 करोड़ 95 लाख 92 हजार. हमारे मध्यप्रदेश में 41 लाख 55 हजार मकानों को हमने पूर्ण कर दिया. इस तरह से सबसे ज्यादा इस मध्यप्रदेश के अंदर प्रगति की है प्रधानमंत्री आवास बनाने में और इसी तरह से पीएम जनमन के भीतर से हमारे सहरिया भाई, भारिया, बैगा इनके लिये भी पीपीटीई योजना से समूह के हितग्राहियों को प्रति आवास निर्माण 2 लाख रूपये, बाकी को डेढ़ लाख रूपये देने का है, इनको 2 लाख देने का सरकार ने निर्णय लिया जिसके हिसाब से इनको दिया जा रहा है. इसमें से 1 लाख 87 हजार 519 वितरित हुये, जिसमें से हमने निर्माण कर दिया 1,35,631 का. इस तरह से जो हमारी प्राप्त स्वीकृति थी 72.23 का हमने निर्माण पूरा किया. मैं यह इसलिये बताना चाहता हूं कि सरकार गंभीरता से इस दिशा में काम कर रही है. यह पंचायत ग्रामीण विकास विभाग काफी तेजी से इसमें काम कर रहा है और जिसके कारण हम इसको करने में सफल हो रहे हैं. इसी तरह से इसको भी मैं आपके सामने रखना चाहता हूं. पीएम जनमन के भीतर से पूरे देश का डाटा भी हमारे पास है और इसके हिसाब से मध्यप्रदेश नंबर एक पर है. सबसे ज्यादा हमने इस बात का प्रयास किया है कि लोगों को इसका फायदा मिल सके. दूसरा जो भविष्य में हम करने जा रहे हैं, हमारी प्रतीक्षा सूची में शामिल बहुत सारे लोग आवास से वंचित हो गये थे, हमने उनका सर्वे कराया, सर्वे में प्रदेश में 61 लाख 98 हजार आवेदक दर्ज किये गये जिसमें सत्यापन कार्य चालू है, कुछ पूरे हो गये हैं, कुछ बकाया हैं और भारत सरकार का जो निर्धारित मापदंड है उसकी प्रक्रिया अनुसार प्रतीक्षा सूची लगभग-लगभग तैयार हो गई है और इसके आधार पर आवास योजना के अंतर्गत हम उनको मकान देने का काम करेंगे. वर्ष 2025-26 में जो अभी है इसमें मैंने बताया कि हमारा इस तरह का यह आंकड़ा है. इसमें कुछ नवाचार भी सरकार कर रही है. नवाचार में हम कार्बन फुटप्रिंट है इसको कम करने के लिये क्योंकि इससे जलवायु में परिवर्तन होता है और प्रदूषण होता है. ग्रीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने, जलवायु पर्यावरण अनुकूल आवास निर्माण के उद्देश्य से आवास निर्माण में ईंट भट्टों को हटाया जाये, इस बात का सरकार प्रयास कर रही है और इसीलिये सीएसपी के भीतर उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है. महात्मा गांधी राजीव ग्रामीण विकास प्रशिक्षण संस्थान में क्षेत्रीय ग्रामीण विकास प्रशिक्षण केन्द्र में ब्लॉक निर्माण के संबंध में एक हजार से अधिक स्थानों पर इस तरह के ट्रेनिंग के प्रोग्राम चलाये गये और ट्रेनिंग देकर के इसी के आधार पर जो काम हुये हैं उज्जैन में, ग्वालियर में और जबलपुर में भी इस तरह के काम शुरू हो रहे हैं. अपना प्रयास यह है कि इसको ठीक से जो ईंट भट्टों से नुकसान होता है वह नहीं हो इसलिये इस दिशा में बढ़ने का काम सरकार ने किया है. इस हेतु स्कूल ऑफ प्लानिंग एण्ड आर्किटेक्चर भोपाल के भीतर कुछ लोगों को ट्रेनिंग देने का काम किया जा रहा है कि कुछ लोग ट्रेनिंग प्राप्त करें. स्वच्छ भारत मिशन के भीतर भी व्यक्तिगत पारिवारिक शौचालय बने हुये हैं. करीब 4 लाख 70 हजार सामुदायिक स्वच्छता परिसर बने हैं, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन ग्राम तैयार किये गये हैं, तरल अपशिष्ट प्रबंधन ग्राम तैयार किये गये हैं, ओडिया प्लस मॉडल ग्राम तैयार किये गये हैं, प्लॉस्टिक कचरा प्रबंधन के लिये तैयारी की गई है और गोबर्धन योजना के भीतर भी तमाम सारे काम किये जा रहे हैं. इस क्षेत्र में जो नवाचार हो रहा है स्वच्छ भारत अभियान के भीतर घरेलू और संस्थागत संबंधित शौचालयों को पूर्ण साफ सफाई हेतु 1 नवम्बर 2025 से स्वच्छता साथी भील की सेवा शुरू की गई है. इस सेवा के माध्यम से 52 जिलों में 1084 स्वच्छता वास आन व्हील करके चल रहे हैं और इसमें अभी तक 34898 घरेलू एवं सामुदायिक शौचालयों की साफ सफाई की गई है.इसमें जो थोड़ा सा शुल्क लिया जाता है अब तक की जो रिपोर्ट है उसमें करीब 55 लाख रुपये एकत्रित हो चुके हैं.राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन चलाया जा रहा है. 2025-26 में 2 लाख 14 हजार स्वसहायता समूहों को 4300 करोड़ के लक्ष्य के एवज में 1लाख 20 हजार समूहों को 2362 करोड़ का बैंक ऋण दिलाया गया. रोजगार स्वरोजगार कार्यक्रम अंतर्गत चलाये जा रहे 70 हजार ग्रामीण युवकों को स्वरोजगार संबंधित प्रशिक्षण रोजगार उपलब्ध कराये जाने का प्रयास किया गया है बहुत सारे उसमें पूरे हो गये हैं. महिला स्वसहायता समूह से जुड़ी हमारी जो 4 लाख महिलाओं के परिवार हैं उनका वार्षिक लक्ष्य 18 हजार परिवारों को पशुपालन में उनको वहां पर जोड़ा गया है. महिला स्वसहायता समूह से जुड़े और इस तरह के काम किये जा रहे हैं. भारत सरकार की एक बड़ी योजना है जो मध्यप्रदेश में काफी तरीके से उसको लागू किया गया है. भारत सरकार की लखपति दीदी इनिशियेटिव कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 11 लाख 63 हजार स्वसहायता समूहों के परिवारों को 2 या अधिक आजीविका से जोड़कर उनके परिवारों को शुद्ध वार्षिक आय एक लाख से ऊपर पहुंचाई गई है इसमें हम नवाचार जो कर रहे हैं.रूरल कंसलटेंसी सेंटर खोल रहे हैं. आजीविका पुस्तकालय ग्रामीण क्षेत्रों में नौजवानों को पढ़ने का या वह कांपटीशन में जाते हैं उसके लिये पुस्तकालय के माध्यम से उनको यह सुविधा देने का काम किया जा रहा है. इसी तरह से जेंडर कार्यक्रम अंतर्गत नवाचार जो हो रहे हैं उसमें हौसलों की उड़ान योजना है जिसमें महिला सशक्तीकरण,आजीविका संवर्धन,स्वास्थ्य जागरूकता हेतु विशेष गतिविधियों का आयोजन किया जाता है. लखपति दीदी 55 जिलों में 53711 प्रतिभागियों की सहभागिता से 28204 लखपति दीदी को आजीविका प्रदान की गई है. पतंग महोत्सव,तिल गुड़,सामाजिक काम पंचायत विभाग द्वारा किया जा रहा है उसी तरह स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया. जो हमारी साक्षर हैं और जो निरक्षर टाईप की हैं उनको भी साक्षर बनाने का काम किया जा रहा है. महात्मा गांधी राज्य रोजगार गारंटी परिषद् से 11 फरवरी तक 2026 में भारत सरकार द्वारा अनुमोदित कुल वार्षिक लेबर बजट 20 करोड़ मानव दिवस के विरुद्ध हमने 16 करोड़ 92 लाख मानव दिवस सृजित किये. इसी वर्ष में 38.5 लाख परिवारों के 55 लाख 66 मजदूरों को रोजगार दिया गया. जिसमें हमारे एससी के भाईयों को 13.96,एसटी को 31.11 परसेंट मानव दिवस जिसमें से महिलाओं का कुल मिलाकर हिस्सा 42.71 परसेंट रहा है. 2026 में 49275 निशक्तजनों को मनरेगा से रोजगार उपलब्ध कराया गया है. कुल 5 लाख 73 हजार कार्य पूर्ण किये गये हैं.इसमें कुल व्यय राशि 5495 करोड़ रुपये है. एक बगिया मां के नाम मां नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रम स्थलों पर पौधारोपण करना,बगिया का निर्माण करना,प्रधानमंत्री सिंचाई योजना से हमारा लक्ष्य था 1500 जल संवर्धन या भूमि चार्ज संरचनाओं का निर्माण करना जिसमें हमने काफी सफलता प्राप्त की है और इस तरह से हम यह कह सकते हैं कि सरकार ने पूरी ताकत लगाकर इन सारे कामों को करने का प्रयास किया है जिसमें काफी सफलता प्राप्त हुई है और लोगों को रोजगार भी मिला है उनका काम भी हुआ है. स्वास्थ्य परीक्षण भी हुआ है. गांव के अंदर हम जब पुस्तकालय खोलते हैं उससे फायदा यह होता है कि हमारे जो प्रतिभागी विद्यार्थियों को पढ़ने का अवसर मिलता है एक वातावरण मिलता है पुस्तकालय के भीतर से जिससे वह कांपटीशन में जाकर सफलता प्राप्त कर सकें. प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण है. इसमें जो हमने नयी योजना हमने जोड़ी है वह है यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना और इसमें हमारे 3 से 6 वर्ष तक के बच्चे हैं सभी को अतिरिक्त पोषण योजना से लाभान्वित किया गया है. कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों को अतिरिक्त पोषण प्रदान किया जा रहा है और पैक दूध उनको दिया जा रहा है. इस योजना को और बढ़ाने का काम किया जाना है और एक बात और मैं कहना चाहता हूं
सभापति महोदया - कृपया समाप्त करें. 24 सदस्यों को बोलना है और 3 घंटे का समय निर्धारित है.
श्री गिरीश गौतम - वृंदावन ग्राम योजना का सृजन किया गया है और सबको मालुम है हमने बहुत ज्यादा गांवों का चयन किया है इसलिये मैं समर्थन के लिये खड़ा हुआ हूं कि सरकार ने बढ़िया काम किया है. मैं समय की सीमा को समझता हूं इसीलिये मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं धन्यवाद.
डॉ. हिरालाल अलावा (मनावर) -- माननीय सभापति महोदया, बहुत-बहुत धन्यवाद. मैं राज्यपाल महोदय के अभिभाषण के कृतज्ञता प्रस्ताव पर अपनी बात रखने के लिए खड़ा हुआ हूँ. सभापति महोदया, राज्यपाल महोदय के अभिभाषण के पूरे पन्ने हमने पलटाए. अभिभाषण के माध्यम से हमें उम्मीद थी कि इस प्रदेश के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों का ध्यान रखा जाएगा, उनकी सुरक्षा और उनको संरक्षण मिलेगा और उनके अधिकारों की बात की जाएगी. ऐसे हमारे माननीय महामहिम राज्यपाल महोदय प्रदेश के हमारे 2 करोड़ आदिवासियों के संवैधानिक संरक्षक भी हैं. लेकिन आदिवासियों को अधिकार देने की बात का जिक्र अगर हम इस अभिभाषण में देखें तो न तो पांचवीं अनुसूची का जिक्र है, न पेसा एक्ट का जिक्र है और न ही वन अधिकार कानून का जिक्र है. यह कहीं न कहीं प्रदेश के 2 करोड़ आदिवासियों के साथ धोखा है. विकसित भारत के नाम पर, समृद्ध मध्यप्रदेश के नाम पर, विकसित मध्यप्रदेश के नाम पर तथा विभिन्न परियोजनाओं के नाम पर वन संरक्षण और वन्य जीव अभ्यारण्य के नाम पर आज हमारे आदिवासी गांवों को विस्थापित करने का कहीं न कहीं षड्यंत्र किया जा रहा है. हाल ही में जो हमारे पश्चिमी मध्यप्रदेश का बड़वानी, खरगोन, धार जिले का बड़ा जो एरिया है कि यावल वाइल्ड लाइफ प्रोजेक्ट सेंक्चुअरी के नाम पर कम से कम सौ आदिवासी गांवों को विस्थापित करने का कहीं न कहीं षड्यंत्र चल रहा है. आज सरकार आदिवासियों को बसाने के लिए उनके अधिकारों की रक्षा करने के लिए कहीं न कहीं पूरी तरह से नाकामयाब है. सेंक्युअरियों के नाम पर हमारे आदिवासी भाइयों को जंगल से उजाड़ने का काम कर रही है.
सभापति महोदया, जो 200 सालों के अंग्रेजों के शासनकाल में हमारे इन आदिवासियों के ऊपर अंग्रेजों ने अत्याचार नहीं किया, वह आज इस देश की सरकारें कर रही हैं. आज पूरे देश में और प्रदेश में सरकार इस बात का ढिंढोरा पिटती है कि हम बेटी बचा रहे हैं. नारा दिया गया कि ''बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ'', लेकिन जो आंकड़े हैं, केन्द्र सरकार ने जारी किए थे कि वर्ष 2019 से लेकर वर्ष 2021 तक लगभग-लगभग 3 लाख लड़कियां और महिलाएं गायब हुई हैं. जनवरी, 2024 से जून, 2025 तक 83,129 लड़कियां गायब हुई हैं. हर दिन 23 लड़कियां गायब हो जा रही हैं. माननीय सभापति महोदया, यह गंभीर चिंता का विषय है कि क्या यह सदन, क्या यह लोकतंत्र बेटियों को सुरक्षित करने में पूरी तरह नाकामयाब है. क्या यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार सिर्फ नारा देने वाली सरकार है, बेटियों को सुरक्षा नहीं दे पा रही है. आज बेटियों की सुरक्षा पर सवाल खड़ा हो रहा है. अमेरिका में एपस्टिन फाइल जारी हुई है और पूरे विश्व में तहलका मचा हुआ है कि किस प्रकार वहां के शैतानों ने बेटियों के साथ बर्बरता की. आपके माध्यम से मैं बताना चाहता हूँ कि एपस्टिन फाइल में बड़े-बड़े उद्योगपति, बड़े-बड़े राजनेता, बड़े-बड़े धनाढ्य लोग हैं और उन्होंने बर्बरता की हदें इस कदर पार कीं माननीय सभापति महोदया कि बेटियों के साथ बलात्कार करते, बेटियों को मारते, उनका खून पीते और जवान बने रहने के लिए वे लोग एडिनो क्रोम बनाते थे तो क्या इस मध्यप्रदेश में जो देश में सबसे ज्यादा बेटियां गायब हो रही हैं, इनके साथ भी कोई एपस्टिन जैसे दरिंदे हमारे प्रदेश में बैठे हुए हैं. इसकी जांच होनी चाहिए कि ये बेटियां कहां गई हैं. आज मध्यप्रदेश में बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, यह हमारे लिए लज्जा का विषय है. आज मध्यप्रदेश में कुपोषण के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं. हाल ही में जो आंकड़े जारी हुए हैं और सरकार ने जारी किए हैं, जिसके अनुसार श्योपुर, खण्डवा और शिवपुरी जिले नाटेपन के मामले में आगे हैं. श्योपुर में 52 प्रतिशत बच्चे नाटे पाए गए हैं. दमोह, धार और खरगोन में दुबलेपन के मामले में सबसे ज्यादा बच्चे पाये गये हैं. सरकार कुपोषण दूर करने के लिए योजना तो बना रही है, लेकिन यह बौनापन, नाटापन और पतलापन क्या विकसित भारत 2047 का सपना पूरा करने में सहायक है ? सरकार को अपनी योजनाओं के बारे में समीक्षा करनी चाहिए, सरकार योजनाओं के लिए जो हजारों करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, उनकी समीक्षा होनी चाहिए, अगर वह योजनाएं सफल कारगर नहीं हो पा रही हैं तो उनको बदलकर नई योजनाएं शुरू करनी चाहिए. यह मेरा माननीय सभापति महोदया आपके माध्यम से सरकार को सुझाव है.
सभापति महोदया, आज मध्यप्रदेश में साइबर ठगी के कई मामले सामने आ रहे हैं. वर्ष 2025 में ही 26,099 लोग ऑनलाइन साइबर ठगी के शिकार हुए हैं. क्या हमारा इंटेलीजेंस, हमारा साइबर सेल, हमारा गृह मंत्रालय इन ठगने वाले लुटेरों को पकड़ने में पूरी तरह नाकामयाब रहा है. आज प्रदेश में हजारों की संख्या में यह घटनाएं हो रही है. एक और महत्वपूर्ण मुद्दा यह है कि आज हमारे मध्यप्रदेश में ड्रग्स का के बहुत बड़े कारखाने चल रहे हैं. हाल ही में महू में, नीमच में, भोपाल में हजारों करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी जा रही है, तो क्या पुलिस प्रशासन पूरी तरह इन ड्रग्स माफियाओं के ऊपर कार्यवाही करने में नाकामयाब है. सरकार अगर चाहे तो 24 घण्टे के अन्दर मध्यप्रदेश में सारी ड्रग्स फैक्ट्रियां बन्द हो सकती हैं. पिछले दिनों जब हमारे इन्दौर में ड्रग्स और शराब को लेकर हमारे माननीय मंत्री जी के समक्ष महिलाएं गईं, तब माननीय मंत्री जी ने निर्देश दिया कि ड्रग्स माफियाओं के उफपर कार्यवाही की जाये, 24 घण्टे के अन्दर सारे ड्रग्स माफियाओं को पकड़ा गया, तो क्या ऐसी कार्यवाही पूरे मध्यप्रदेश में सरकार नहीं कर सकती. लेकिन सरकार का, प्रशासन का कहीं न कहीं ड्रग्स माफियाओं के ऊपर संरक्षण है, इसीलिए पूरी तरह कार्यवाही नहीं हो पा रही है. हम मध्यप्रदेश में उच्च शिक्षा की बात करते हैं. प्रदेश का एक भी कॉलेज या प्रदेश और देश की एक भी यूनिवर्सिटी विश्व की टॉप 100 यूनिवर्सिटीज में हमारी कोई यूनिवर्सिटी नहीं है. प्रदेश में जो उच्च शिक्षा विभाग है, जिसके अन्तर्गत 569 कॉलेज संचालित हैं एवं कुल 12,389 पद स्वीकृत हैं, उसमें केवल 5,566 पद ही भरे गए हैं. कॉलेजों में ज्यादातर कॉलेज अतिथि विद्वानों के भरोसे चल रहे हैं, या फिर कई जगह कॉलेज में प्राचार्य ही नहीं हैं. यह भी एक गंभीर मुद्दा है क्योंकि विकसित मध्यप्रदेश बनाना है, तो हमारी शिक्षा व्यवस्था हमें अच्छी करनी होगी. शिक्षा व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए पारदर्शी नियम और नियमित भर्ती सरकार को करनी चाहिए.
सभापति महोदया - माननीय सदस्य आपको 5 से 7 मिनट हो गए हैं. आप जल्दी समाप्त कीजिये. सदस्यों की लम्बी सूची है. सभी को समय पर पूरा करना है.
डॉ. हिरालाल अलावा - माननीय सभापति महोदया, मैं आपका संरक्षण चाहता हूँ. मैं सदन में कई गंभीर मुद्दों को लाना चाहता हूँ. स्वास्थ्य के मामले में, अभी हमारे सत्ता पक्ष के कई विधायक साथियों ने कहा है कि हमने नये 19 शासकीय मेडिकल कॉलेज खोले हैं और एमबीबीएस और पीजी की सीटें बढ़ाने का कहा. जो डब्ल्यूएचओ के मानक हैं, जो यह कहता है कि 1,000 जनसंख्या पर एक डॉक्टर होना चाहिए और 1,000 जनसंख्या पर पांच बैड होने चाहिए. मध्यप्रदेश की स्थिति अगर देखें तो 14,800 जनसंख्या पर एक डॉक्टर है और 1,000 जनसंख्या पर 0.65 प्रतिशत बैड उपलब्ध है. कहीं न कहीं यह जो स्वास्थ्य सेवाएं हैं, जो आंकड़े हैं, यह मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल रहा है. इन्दौर में भागीरथपुरा काण्ड में अब तक 35 लोगों की मृत्यु हो गई है, लेकिन सरकार मृत्यु के कारणों की स्पष्ट जानकारी आज दिनांक तक नहीं दे पाई है. यहां की लैब काम नहीं कर रही हैं. हजारों करोड़ों रुपये की मशीनें सारी बन्द पड़ी हुई हैं, तो सरकार कहीं न कहीं असल कारणों को खोजने की बजाय, कहीं न कहीं अपनी जवाबदेही से दूर भागने का काम कर रही है.
सभापति महोदया - आप अपनी आखिरी बात कह दें. अब आप समाप्त करें.
डॉ. हिरालाल अलावा - माननीय सभापति महोदया, मैं दो-तीन मुद्दे आपके नॉलेज में लाना चाह रहा हूँ. हमारे आदिवासी इलाकों में बिजली बिल का गंभीर मुद्दा है, जो स्मार्ट मीटर लग रहे हैं, उनके बिल तीन से चार गुना आ रहे हैं. पहले जिनके बिल 200 रुपये, 300 रुपये आते थे, आज दो हजार से तीन हजार रुपये बिजली के बिल आ रहे हैं और इन पर जो मीटर लग रहे हैं, उनकी जांच होनी चाहिए. साथ ही एक और गंभीर विषय है कि आदिवासी इलाकों में पेसा कानून को लागू करने के लिए मोबिलाइज़र की नियुक्ति हुई थी, सरकार ने वादा किया था कि उनका वेतन रुपये 4 हजार से बढ़ाकर, रुपये 8 हजार किया जायेगा, लेकिन उनको अभी रुपये 4 हजार भी, विगत 6-8 माह से सरकार नहीं दे सकी है. सरकार द्वारा आदिवासी इलाकों में पेसा को लागू करने के लिए, जिन्हें नियुक्त किया गया था, उन्हें सरकार वेतन नहीं दे रही है. जनसेवा मित्र लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं और कई बार आंदोलन कर चुके हैं. सरकार ने चुनाव में उनका इस्तेमाल किया और आज 9300 मोबिलाइज़र को निकाल दिया.
सभापति महोदया, मध्यप्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में विगत 4-5 वर्षों में देखने में आ रहा है कि आदिवासी बेटियां सुरक्षित नहीं है हाल ही में गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल में अलीराजपुर की बेटी जो प्रथम वर्ष की छात्रा थी, रोशनी कलेश उसकी संदिग्ध मौत हो गई है और आज दिनांक तक प्रशासन, कॉलेज प्रशासन और सरकार उसकी मौत के कारणों की स्पष्ट जांच नहीं करवा पाई है. पिछले दिनों मनावर विधान सभा की बेटी सागर मेडिकल कॉलेज में मृत पाई गई. हमारी आदिवासी बेटियां मेडिकल कॉलेजों में सुरक्षित नहीं है और न ही हमारे बेटे सुरक्षित हैं. यह गंभीर विषय है. मैं, आपके माध्यम से मांग करता हूं कि प्रदेश में बेटियों को न्याय मिले, ऐसे सख्त कानून बने, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, धन्यवाद.
सभापति महोदया- अभी लगभग 24 सदस्यों को और बोलना है, निर्धारित समय 6 घंटों में से, 3 घंटों का समय हो चुका है. सभी सदस्यों को अपनी-अपनी बात रखनी है इसलिए मेरा आप सभी से अनुरोध है कि केवल 5 मिनट में अपनी बात करें ताकि सभी को अवसर मिल सके.
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन (सागर)- सभापति महोदया, धन्यवाद कि आपने मुझे राज्यपाल महोदय के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी बात रखने का अवसर दिया है. राज्यपाल महोदय के कुल भाषण को अगर हम देखें तो मुझे लगता है कि महाकवि तुलसीदास जी ने जो कहा है कि-
"बरषत
हरषत लोग सब, करषत
लखै न कोइ।
तुलसी
प्रजा-सुभाग
तें, भूप
भानु सो
होइ।।"
अर्थात् जब जलाशयों से जल वाष्प के रूप में सूर्य भगवान के माध्यम अवशोषित होता है तो जलाशयों को उसका एहसास नहीं होना चाहिए. ऐसी ही देश की कर-प्रणाली होनी चाहिए. चाणक्य जी ने इस विषय में लिखा है कि देश की कर-प्रणाली इस प्रकार होनी चाहिए, जिस प्रकार जलाशयों से जल निकाल जाता है और जलाशय को कोई परेशानी नहीं होती, उसी प्रकार कर-प्रणाली से जनता को कोई परेशानी न हो और कर का संकलन भी हो जाये, यह व्यवस्था होनी चाहिए.
सभापति महोदया, तुलसीदास जी ने कहा है कि राजा कैसा होना चाहिए तो उसे सूर्य के समान होना चाहिए. आज मैं हमारे यशस्वी नेता, इस सदन के नेता माननीय मुख्यमंत्री महोदय डॉ.मोहन यादव जी को बधाई देना चाहता हूं कि यह अभिभाषण उनके 2 वर्षों के कार्यकाल का आंकलन और निचोड़ है, उस निचोड़ के रूप में ये अभिभाषण यहां आया है.
सभापति महोदया, मुझे विशेष रूप से जल संसाधन पर बोलने का आदेश हुआ है. जल संसाधन किसी भी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण तत्व होता है लेकिन आपने, हमने, सभी ने वर्षों तक देखा कि जल संसाधन को हमने कभी-भी महत्व नहीं दिया, उसी का परिणाम है कि आज हम वर्तमान में बोतलबंद पानी पी रहे हैं और रुपये 15-20 से अपनी प्यास बुझा रहे हैं. जल संसाधन हमारे अस्तित्व हेतु अत्यंत आवश्यक है, उसके नाते जल संसाधन का मैनेजमैंट निश्चित रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है. माननीय मुख्यमंत्री जी एवं जल संसाधन विभाग के मंत्री महोदय अभी यहां बैठे हुए थे. उन्होंने इसका बहुत अच्छी तरह से प्रयोग किया है, बहुत अच्छी तरह से उपयोग किया है. मैं उस समय के फिगर की बात करूंगा तो साथी आपत्ति लेंगे. मैं बहुत ही पिछड़े हुए क्षेत्र बुंदेलखण्ड से आता हूं, मैं वहां से प्रतिनिधित्व करता हूं. मुझे यह स्मरण है कि आज से 20 से 25 वर्ष पहले हमारे बुंदेलखण्ड में शादियां कम होती थीं. वहां पीने के पानी की भी दिक्कत होती थी. सिंचाई के संसाधन तो थे ही नहीं. ऐसे में पूरे देश का सबसे कम सिंचाई का रकबा अगर कहीं था तो वह बुंदेलखण्ड में था. शनै:-शनै: मैं अभी देख रहा था कि विगत 10 वर्षों में वर्ष 2025-26 के पहले दस वर्षों में क्या स्थितियां बनीं तो सागर जिले में 27560 हेक्टेयर सिंचाई का रकबा था जो बढ़कर 69 हजार 838 हेक्टेयर हो गया. यह एक छोटा सा उदाहरण है. दमोह में भी ऐसा ही है. दमोह में लगभग 35 हजार हेक्टेयर का सिंचित रकबा था वह वर्तमान में 73 हजार हेक्टेयर होने का अनुमान है. छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, सारी जगह के जब हम फिगर देखते हैं तो हम यही फिगर प्राप्त करते हैं.
सभापति महोदया, आपको स्मरण होगा वर्ष 2003 के आसपास का जो कालखंड रहा होगा जितने भी सिंचाई के संसाधन थे अंग्रेजों के समय के, मुगलों के समय के, डायरेक्ट, इनडायरेक्ट सब मिलाकर भी बहुत ही नेग्लेजिबल संख्या होती थी आज वर्तमान में लगभग 55 लाख हेक्टेयर में हमने सिंचाई का आश्चर्यजनक आंकड़ा छू लिया है जो जादुई आंकड़ा दिखाई देता था. वर्ष 2028-29 तक यह आंकड़ा एक करोड़ के आसपास पहुंचने का अनुमान है. यह हमारा संकल्प भी है और यह हमारा अनुमान भी है. मुझे लगता है कि जिस दृढ़इच्छाशक्ति के साथ यह सरकार चल रही है हम उसे निश्चित रूप से प्राप्त करेंगे.
माइक्रो सिंचाई में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य है. सबसे ज्यादा माइक्रो इरीगेशन यदि देश में कहीं हो रहा है तो मध्यप्रदेश में हो रहा है. जल संसाधन मंत्री महोदय ने अपनी उपस्थिति यहां दे दी है, आमद दर्ज करा दी है. मैं, उनको बधाई देना चाहता हूं कि जिस तरह से उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से काम करना शुरू किया है और Per drop more crop कैसे होना चाहिए. हम ज्यादा से ज्यादा उत्पादन कैसे प्राप्त कर सकते हैं. सिंचाई के साधन ऐसे होने चाहिए कि पानी का जो डिस्ट्रीब्यूशन लॉसेज़ हैं वह मिनिमम होने चाहिए. अब केनाल के माध्यम से और अन्य माध्यम से जो पानी जाता था उसके फिगर हमारे पास हैं.
सभापति महोदय, 1 मिलियन घन मीटर जल से औसतन 170 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो जाती है वहीं पर सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली से हम सिंचाई करते हैं तो 350 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है. आप समझ सकती हैं कि हमारी वर्तमान सरकार में पानी का कितनी बेहतर तरीके से उपयोग हो रहा है. माननीय मुख्यमंत्री महोदय का, माननीय जल संसाधन विभाग के मंत्री महोदय का धन्यवाद करना चाहता हूं. मैं केवल दो, तीन मिनट में अपनी बात को समाप्त करूंगा.
सभापति महोदया-- आप अपनी बात समाप्त करें. आठ मिनट हो चुके हैं.
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन-- सभापति महोदया, मैं दो, तीन मिनट में अपनी बात समाप्त करूंगा.
सभापति महोदया-- बाकी माननीय सदस्यों को भी अवसर मिले.
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- माननीय सभापति महोदया, एक बहुत बड़ी योजना जिसके बारे में मेरे पूर्व वक्ता ने कहा, केन-बेतवा लिंक परियोजना. यह योजना बुंदेलखण्ड के लिए एक मील का पत्थर साबित होने वाली है. 44 हजार 605 करोड़ रुपए की इस परियोजना से छतरपुर, पन्ना, दमोह, सागर, टीकमगढ़, निवाड़ी, रायसेन, शिवपुरी, दतिया और विदिशा, कुल दस जिले लाभान्वित होंगे अपितु इससे उत्तर प्रदेश का एक बहुत बड़ा हिस्सा भी लाभान्वित होने वाला है. माननीय प्रधानमंत्री जी के करकमलों से 25 तारीख यानि श्रद्धेय अटल बिहारी बाजपेई जी के जन्म दिवस के अवसर पर इसकी आधारशिला रखी गई है. इसके बहुत जल्दी वांछित परिणाम आएंगे. ऐसी ही एक बहुत बड़ी परियोजना जो कि 35 हजार करोड़ रुपए की है. नदी जोड़ो अभियान के अन्तर्गत पार्वती-कालीसिंध-चंबल. आप कल्पना कीजिए मालवा के निवासियों को चंबल का पानी ले जाकर पिलाने का काम किया जा रहा है. इससे बड़ा दुरूह कार्य हो नहीं सकता है. सरकार को इस महत्वपूर्ण योजना के लिए मैं बधाई देता हूँ. इसके माध्यम से 13 जिले उज्जैन, गुना, शिवपुरी, श्योपुर, भिंड, मुरैना, सीहोर, शाजापुर, देवास, राजगढ़, मंदसौर, आगरमालवा, इंदौर और उज्जैन लाभान्वित होंगे. ऐसी ही एक और योजना है अटल भूजल योजना. इस योजना का मुख्य उद्देश्य अंडर ग्राउंड वाटर को बेहतर बनाना है. इस दिशा में बुंदेलखंड में बहुत अच्छा काम हुआ है. बुंदेलखंड के 6 जिलों में यह योजना अभी चालू है. लगभग 9 विकासखण्डों के 678 गांवों में 314 करोड़ रुपए की लागत से भूजल के स्तर को बेहतर करने की दिशा में अच्छे परिणाम प्राप्त किए हैं. सभापति महोदया, मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को और मंत्री महोदय को इन उपलब्धियों के लिए बधाई देता हूँ. गालिब का एक शेर है उसे कहकर अपनी बात समाप्त करुंगा.
हैं और भी दुनिया में सुखन्वर बहुत अच्छे,
कहते हैं कि गालिब का है अंदाज-ए-बयां और
सभापति महोदया, आपने मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.
श्री महेश परमार (तराना) -- सभापति महोदया, मैं राज्यपाल महोदय के अभिभाषण के विरोध में अपनी बात रखना चाहूंगा. महामहिम राज्यपाल जी से पढ़वाया गया कि उत्कृष्ट संसदीय परम्पराओं का पालन करते हुए. अमृतकाल, बहुत अच्छा लगा. समृद्ध मध्यप्रदेश 2047 दृष्टिपत्र विजन की तैयारी. गौ-गंगा-गीता और समृद्ध मध्यप्रदेश की बात करने वाले हमारे उस तरफ बैठे परिवार के सभी परिवारजन. महामहिम राज्यपाल जी हम सभी के आदरणीय हैं और सबके सम्माननीय हैं. उनसे यह सब चीजें पढ़वाई गईं. मेरा उस तरफ जितने भी विराजमान परिवार के लोग हैं. विराजमान परिवार के लोग हैं. महामहिम राज्यपाल जी से एक चीज यह भी पढ़वानी थी कि भोपाल गौ मांस काण्ड, 26 टन गौ मांस जप्ती, यह भोपाल में गौ मांस कहां से आया ? मैं आपके माध्यम से यह पूछना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश के भोपाल में गौ मांस पकड़ाया कि नहीं पकड़ाया यह सरकार जवाब दे. यह जिम्मेदार लोग जवाब दें. 26 जनवरी, 2026 को पुष्टि हुई. नगर निगम का 35 करोड़ का अत्याधुनिक स्लाटर हाऊस इसका उद्घाटन किसने किया इसकी अनुमति किसने दी ? यह भी महामहिम राज्यपाल जी से आपको पढ़वाना था. आपका अमृतकाल, आपका 2047 का विजन, पहले 2026 तो आप सुधार लीजिए. लज्जा आती है कि गौ, गंगा, गीता की बात करने वाली सरकार और गौ हत्या राजधानी में माननीय मुख्यमंत्री, महामहिम राज्यपाल जी, पूरी सरकार, नगर निगम इनकी, सांसद जी इनके, ट्रिपल इंजन, चार इंजन की सरकार, अभी तक क्या कार्यवाही हुई इस बात का जवाब दें. लज्जा आती है. पाखंड, प्रशासनिक मिली भगत, कानून व्यवस्था कहां गई वह जिम्मेदार कौन लोग थे यह भी महामहिम राज्यपाल जी की इस पुस्तक में अगर आप इतने ही जिम्मेदार हैं तो इसमें उल्लेख करना था. महामहिम राज्यपाल जी से एक चीज और पढ़वानी थी कि हमारे मध्यप्रदेश के मासूम बच्चों की जहरीली कफ सिरप पीने से 24-25 बच्चों की मौत हुई पांढुर्णा, बैतूल, छिन्दवाड़ा यह लापरवाही किसके कारण हुई ? माननीय स्वास्थ्य मंत्री उप मुख्यमंत्री जी कहां चले गए इस बात का जवाब यह भी दें. यह भी महामहिम राज्यपाल जी से इनको पढ़वाना था. यह अमृतकाल है. यह स्वर्णिम मध्यप्रदेश की बात करते हैं. यह 2047 के विजन की बात करते हैं. इस बात का भी जवाब आपको देना है. यह मध्यप्रदेश के हमारे, आपके बच्चे हैं. यह हमारी भावी पीढ़ी है. कौन लोग जिम्मेदार हैं जो हमारे छोटे मासूम बच्चों को जहर पिला रहे थे ?
सभापति महोदया, तीसरा मेरा बिंदु है इस पुस्तक में पूरे देश में स्वच्छ शहर का तमगा लेने वाले, 35 परिवार के लोग हमारे, इनके, सबके मध्यप्रदेश के हमारे बुजुर्ग, हमारे परिवार के, हमारी बहनें दूषित मल, मूत्र का पानी पीने से उनकी मौत हो गई यह भी महामहिम राज्यपाल जी से पढ़वाना था. यह मेरा निवेदन है कि इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं, मैं पूछना चाहता हूं उस तरफ बैठे हुए सभी परिवार के लोगों से आपके माध्यम से कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है ? पूरे विश्व में हमको कलंकित किया. बड़ी-बड़ी बातें करने वाले, बड़े-बड़े आंकड़े दिखाने वाले माननीय मुख्यमंत्री जी वहां के प्रभारी मंत्री जी हैं, माननीय तुलसी सिलावट जी बैठे हैं वहां से मंत्री हैं, सांसद जी, महापौर जी, सभी 9 के 9 विधायक, सभी पार्षद उसके बाद जिम्मेदारी कौन लेगा ? जनता ने पूर्ण बहुमत दिया. जनता ने विश्वास किया था कि सेवा करेंगे, यह रक्षक बनेंगे, लेकिन सबसे बड़े भक्षक भागीरथपुरा में यह बने. महामहिम की पुस्तक में इसका भी जवाब इनको देना था.
सभापति महोदया, हमारे देश की बेटी कर्नल सोफिया माननीय सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगनी पड़ी, मुंह छिपा रहे हैं मंत्री जी, इस पुस्तक में माननीय मंत्री जी की इस बात का उल्लेख होना था कि नहीं होना था. मैं पूछना चाहता हूं उस तरफ बैठे जितने भी परिवार के हमारे लोग हैं होना था कि नहीं होना था. लज्जा आती है. हमारे देश की बहादुर बेटी, देश की सेना का अपमान करते हैं और 6-7 बार के विधायक, कैबिनेट मंत्री, यह भी महामहिम राज्यपाल जी से आपको पढ़वाना था तो आपकी शान बढ़ती. मुख्य सचिव कलेक्टर, एसपी की कॉन्फ्रेंस में कहते हैं कि मुख्यमंत्री जी को शिकायत हो रही है कि कलेक्टर, एसपी बिना लेन देन किए कोई काम नहीं करते हैं, यह भी इस पुस्तक में महामहिम राज्यपाल जी से पढ़वाना था. अगर मेरी बात असत्य हो तो हमारे जितने भी समाचार पत्र हैं, इलेक्ट्रानिक मीडि़या, प्रिंट मीडिया में आदरणीय मुख्य सचिव जी का यह उल्लेख सब जगह आपने देखा. राज्य की खराब स्थिति और बढ़ता कर्ज, फरवरी 2026 राज्य का कुल कर्ज 5.31 लाख करोड़ मार्च 2026 अनुमान, जबकि 2025-26 का बजट 4.21 लाख करोड़ और वर्ष 2026-27 का प्रस्तावित बजट 4.85 लाख करोड़ बजट से ज्यादा कर्ज. पहली बार आरबीआई रिपोर्ट में पेश कि देश के कुल कर्ज का 5 प्रतिशत कर्ज मध्यप्रदेश के ऊपर है. कई बार पांच हजार करोड़ रूपये का कर्ज लिया गया, विपक्ष जब इस बात को उठाता है तो कहते हैं कि यह प्रदेश और जनता के विरोधी हैं. यह सब राज्यपाल महोदय के अभिभाषण में उल्लेख होना था क्यों नहीं कराया गया.
सभापति महोदय, प्रदेश का किसान आज सबसे ज्यादा मजबूर समझ रहा है, किसान इनकी नीतियों के कारण आत्महत्या कर रहा है, इनके कलेक्टर कहते हैं कि कोई पानी नहीं गिरा, मै, मेरी विधानसभा की बात कर रहा हूं वहां पर किसान ने एक दिन पहले आत्महत्या की, एक दिन पहले उसने सोशल मीडिया पर यह बात डाली कि मेरी फसल पूरी तरफ बर्बाद हो गई है, वहां किसान ने आत्महत्या की, बीज किसानों को नहीं मिल रहा है, दो दो बोरी खाद के लिये किसानों को डंडे खाने पड़ रहे हैं., प्रधानमंत्री फसल बीमा के बारे में बतायें कि पिछले दो साल में सरकार ने कितना बीमा किसानों को दिया, प्रीमियम चार गुना उसका आधा बीमा भी किसानों को नहीं दिया गया है, भावान्तर की बात करते हैं क्यों आप सोयाबीन का भावांतर मूल्य नहीं दे रहे हैं, मक्का का, धान का समर्थन मूल्य नहीं देते हैं, सिर्फ किसानों को भावांतर के भंवर में उलझाकर के किसानों के साथ में धोखा कर रहे हैं. सिर्फ किसानों से झूठा वायदा करके सत्ता में आ जाते हैं. आलू, प्याज, लहसुन का एमएसपी, इसको प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से बाहर कर दिया गया, यह सब राज्यपाल महोदय के अभिभाषण में उल्लेख होना था. महामहिम से इसका वाचन करवाना था.
माननीय सभापति महोदया, बिजली की स्थिति आपके सामने है, पोल है तो करंट नहीं है, तार नही है, केवल नहीं है, डीपी नहीं है, 5 रूपये में मुख्यमंत्री जी ने कहा था कि हम बिजली का कनेक्शन देंगे मैं पूछना चाहता हूं कि सत्ता पक्ष मे बैठे हमारे परिवार के जितने भी सदस्य हैं क्या पांच रूपये में हमारे किसान भाई को कनेक्शन दिया. बतायें जवाब दें इसका उल्लेख राज्यपाल महोदय के अभिभाषण में होना था.
आदरणीय सभापति महोदया, जल जीवन मिशन, पूरे देश में सबसे बड़ा भ्रष्टाचार, सबसे बड़ा घोटाला जल जीवन मिशन के माध्यम से हुआ है.मै अपने जिले उज्जैन की बात करूं एक कछरी गांव में जाकर के आप देख लीजिये नल से पानी नहीं आ रहा है, जहां तहां सड़कें खुदी हुई हैं. टंकी फूटी है, लीक है, उसमें से पानी टपक रहा है, टंकी भरा नहीं रही है, यह जल जीवन की स्थिति हमारे यहां पर है. यह सब राज्यपाल महोदय के अभिभाषण में उल्लेख होना था कि पूरे देश में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार जल जीवन मिशन मे है. मध्यप्रदेश में हुआ है.
आदरणीय सभापति महोदय, स्कूल शिक्षा की बात करें, प्राथमिक विद्यालय, हाइस्कूल, हायर सेकेन्डरी स्कूल एक शांदीपनी स्कूल का ढिंढोंरा पीटने वाले लोग क्यों वहां पर एडमीशन नहीं हो रहे हैं, एक विधानसभा में 15 से 20 हजार बच्चे हैं और उस स्कूल में बैठने की क्षमता 1000 से 1500 है तो क्या सरकार को इस बात का उल्लेख राज्यपाल महोदय के अभिभाषण में नहीं कराना था, कि हम उस गांव की अंतिम पंक्ति के प्राथमिक विद्यालय को बंद कर रहे हैं, उस विद्यालय में न पीने के पानी की व्यवस्था है, न शौचालय की व्यवस्था है ,न ढंग से बैठने की व्यवस्था है तो इस बात का उल्लेख भी आपको राज्यपाल महोदय के अभिभाषण में करवाना था.
आदरणीय सभापति महोदया, महिला एवं बाल विकास विभाग की बात करें, आंगनवाड़ी की स्थिति आप देख लो, हमारे छोटे छोटे बच्चे बेटे बेटियों के बैठने की वहां पर व्यवस्था नहीं है, आंगनवाड़ी भवन नहीं हैं, यह सब राज्यपाल महोदय के अभिभाषण में उल्लेख होना था.
आदरणीय सभापति महोदय, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की बात करें तो पंचायत की स्थिति आप देख लीजिये, मनरेगा जैसी योजना का नाम बदल दिया गया, आज पंचायतों के सरपंचों से अगर आप पूछेंगे तो सबसे ज्यादा दुखी सरपंच, जनपद पंचायत के सदस्य हैं, जिला पंचायत के सदस्य है, जनपद अध्यक्ष हैं, जिला पंचायत के अध्यक्ष हैं, सिर्फ नाम के लिये इन लोगों ने चुनाव करवाये हैं उनको कोई अधिकार नहीं दिये हैं, वह गांव में एक हैंडपंप तक नहीं लगा सकते हैं, यह स्थिति है इस स्थिति का उल्लेख भी राज्यपाल महोदय के अभिभाषण में करना था.
सभापति महोदय- कृपया समाप्त करें.
श्री महेश परमार -- आदरणीय सभापति महोदया, स्वास्थ्य विभाग की स्थिति देख लीजिये गांव में डॉक्टर नहीं हैं, नर्सें नहीं हैं, बहुत बुरी स्थिति है .खान नदी 300 करोड रूपये पिछले दो वर्ष में खर्च हो चुके हैं, 200 से 300 करोड़ रूपये फिर 900 करोड़ रूपये की योजना बनाई पहले आप उन 300 करोड़ रूपये का हिसाब दें. उज्जैन में. हमारे जल संसाधन मंत्री सदन में आ गये हैं, वह 300 करोड़ रूपये कहां गये बतायें, फिर आपने 900 करोड़ रूपये की नई योजना क्यों बनाई आपने. पहले 300 करोड़ का हिसाब दें तो यह सब बातें भी आप लोगों को राज्यपाल महोदय के अभिभाषण लिखवाना था.
सभापति महोदया, नागदा-खाचरोद से हमारे साथी, नागदा-खाचरोद और नागदा से उज्जैन टू लेन के स्थान पर फोर लेन करने के लिये आ रहे थे लेकिन उनको रोक दिया गया, उनको गिरफ्तार कर लिया गया यह सरकार की स्थिति है. अगर हम गृह विभाग की बात करें तो अगर सरकार के किसी मंत्री को उनकी पहचान छुपाकर के भेज दीजिये तो इनको भी अपराधी बना देंगे. आज अपराधी फरियादी है और फरियादी अपराधी है, सबसे ज्यादा अगर कहीं पर अपराध हो रहे हैं तो मध्यप्रदेश में हमारी बेटियों के साथ हो रहे हैं, बेटियों के सम्मान को लूटा जा रहा है, हमारे बुजुर्गों का अपमान हो रहा है, यह स्थिति है इस सरकार की.
सभापति महोदय-- परमार जी प्लीज आपका समय हो चुका है कृपया समाप्त करें. अन्य वक्ता भी बोलने के लिये अभी बाकी हैं.
श्री महेश परमार -- आदरणीय सभापति महोदय, उद्योगों की बात करें कि सरकार बताये कि कितना इन्वेस्ट आया, बड़ी बड़ी इन्वेस्टर समिट हुई, विदेश में कौन गया था उन सबका भी इस पुस्तक में उल्लेख होना चाहिये था कि कितने करोड़ का इन्वेस्ट किन लोगों के द्वारा किया गया.
सभापति महोदय- परमार जी, मेरे पास में लंबी सूची है और अन्य माननीय सदस्यों को भी अपनी बात कहना है, इसलिये कृपया आप समाप्त करें.
श्री तुलसी सिलावट -- परमार जी आरोप लगाने से कुछ नहीं होता है आप मेरे साथ में चलना में वहां दिखाऊंगा कि क्या विकास हुआ है.
श्री महेश परमार-- मैं अभी भी कह रहा हूं कि अगर मंत्री जी 300 करोड़ रूपये का हिसाब दे देंगे तो अगर वह सही हिसाब दे देंगे तो मैं कभी भी सदन में पांव तक नहीं रखूगा. पहले 300 करोड़ का हिसाब दें फिर 900 करोड़ की योजना , सिर्फ भ्रष्टाचार. भ्रष्टाचार करने के लिये नई नई योजना बन रही है.
आदरणीय सभापति महोदया, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के छात्र छात्राओं के छात्रावासों की स्थिति देख लो उनको छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है यह स्थिति है इस सरकार की. दिव्यांग भाई इस सरकार की ओर बड़ी आशा भरी उम्मीद से देख रहा है, उनको 600 रुपये पेंशन मिल रही है. वह भी उनकी तरफ देखें, कम से कम 5 हजार रुपये उनको पेंशन मिलना चाहिये, यह हमारी मांग है. आज पूरे म.प्र. में हाहाकार मचा हुआ है. ये जितने भी मैंने आंकड़े बताये हैं, यह सब सत्य हैं. मंत्री जी, अपन तो पास में हैं, इन्दौर और उज्जैन में कितनी दूरी है. मैं आपका स्वागत करुंगा, अभिनन्दन करुंगा. अगर 300 करोड़ रुपये का हिसाब दे दोगे, तो जोरदार तरीके से मुख्यमंत्री जी और आप दोनों का स्वागत और अभिनंदन करुंगा. सभापति जी, बहुत बहुत धन्यवाद.
श्री अनिरुद्ध (माधव) मारु (मनासा)—सभापति महोदया, धन्यवाद कि आपने मुझे बोलने के लिये अवसर दिया. मैं राज्यपाल जी के अभिभाषण के समर्थन में चर्चा करने के लिये खड़ा हुआ हूं. प्रधानमंत्री जी द्वारा अमृत काल में म.प्र. के समग्र विकास 2047 का दृष्टि पत्र जो तैयार किया है मुख्यमंत्री जी ने, उसका उल्लेख है इस पूरे अभिभाषण में. 2047 का भारत कैसा होगा, इसकी पूरी परिकल्पना है कि भारत कैसा हो. एक आत्मनिर्भर भारत, शक्तिशाली भारत, जो फिर से विश्व गुरु बने, उस लक्ष्य को लेकर आज सारी योजनाएं बनाने का काम भाजपा की सरकार केंद्र और राज्य में कर रही है, क्योंकि हमारा विजन है 2047, जब आजादी को 100 साल पूरे हो जायेंगे, लेकिन शुरुआत अगर हम आज करेंगे, तो तब हम विश्व गुरु की पदवी तक फिर पहुंचेंगे. इन्होंने 60 साल तक राज किया, जिन्होंने कुछ नहीं किया, वह हमारी हर बात पर सवाल उठाते हैं, हर बात में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हैं. विकास तो दिखता ही नहीं है. अभी सपनों की बात कर रहे थे हमारे प्रतिपक्ष के नेता कि यह सपने दिखा रहे हैं जनता को. प्रधानमंत्री, अटल बिहारी वाजपेयी जी ने सपना देखा था कि पूरे देश के गांव सड़कों से जोड़े जायें. क्या वह सपना आज सच नहीं हुआ. वह तब सपना देखा था उन्होंने, तब यही कांग्रेस मजाक उड़ा रही थी कि क्या गांवों को जोड़ेंगे, मेन रोड तो बन नहीं रहे हैं. तब उन्होंने सपना देखा था कि हर किसान को क्रेडिट कार्ड दे दिया जाये. आज किसान की जमीन बिकना बंद हो गई है. इन्होंने कभी सपने नहीं देखे. इन्होंने तात्कालिक लाभ देखा कि योजनाओं में हमारा सीधा लाभ कैसे हो सकता है. हम अपना पेट कैसे भर सकते हैं, हम अपना घर कैसे भर सकते हैं. इन्होंने सिर्फ यह सोचा कि जनता के लाभ के लिये, जनता के हितों के लिये इन्होंने कोई सपना नहीं देखा. मोदी जी ने एक सपना देखा कि इस देश में लोगों का स्वास्थ्य ठीक होना चाहिये, उनके पास इलाज की सुविधा नहीं होती है,तो उन्होंने आयुष्मान कार्ड दिया. क्या यह सपना सच नहीं हुआ. उन्होंने सपना दिया लोगों को कि मैं आवास दूंगा. आज देश में करोड़ों आवास बन रहे हैं. आपकी 15 महीने की सरकार थी, तब साढ़े 3 लाख आवास आये थे, आपने रिजेक्ट कर दिये कि हमारे लोगों को आवास की आवश्यकता नहीं है. यही कहा था न आपने. आप करते कुछ नहीं हो, आप हर बात में खाली आरोप लगाते हो. आज उद्योगों को लेकर म.प्र. में एक इतना बड़ा काम खड़ा किया गया है. उद्योग और निवेश पर विकास, रोजगार के लिये जो काम म.प्र. में हुआ है, वह निश्चित रुप से उल्लेखनीय है. जिसमें वर्ष 2025 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, 2025 में रीजनल कॉन्क्लेव और राष्ट्रीय रोड शो एवं अन्तर्राष्ट्रीय रोड शो किये गये. 11.9 लाख करोड़ के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं निवेश के और नये रोजगार के अवसर मिलेंगे. आपने कभी सपना नहीं देखा, क्योंकि आपको सपना आता ही नहीं है. आपको तो हाजिर में खाना आता है. सपना देखिये और उसको सच करना सीखिये, तभी जाकर विकास होगा. हम योजना बनाते हैं, तो भविष्य को ध्यान में रख कर, भारत को फिर से विश्व गुरु बनाना है. तो उसकी आज व्यवस्था करना पड़ेगी.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह -- आप भी एक सपना देखिये ना, भले ही मुंगेरी लाल का ही हो.
श्री अनिरुद्ध (माधव) मारु-- हम ऐसे सपने नहीं देखते हैं. हम हकीकत पर विश्वास करते हैं. मन में सोचते हैं, एक सपना तैयार करते हैं, एक विजन तैयार करते है और उसको इम्प्लीमेंट करते हैं, यह हमारी भाजापा का सबसे बड़ा गुण है. सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास और इसी के लिये सब काम करते हैं. स्थानीय उद्योगों को, शिल्प उद्योगों को
श्री भंवर सिंह शेखावत- मारू जी, अभी आपने विश्व गुरू का उल्लेख किया है. विश्व गुरू तो वह होता है कि जिसके कोई चेले हों. अभी तो यह जो विश्व गुरू दिल्ली में बैठा है, आश्रम खोलकर बैठा है, चेला तो एक भी नहीं है.
श्री अनिरूद्ध माधव मारू- पूरी दुनिया उनकी चेला बन गयी है. पूरी दुनिया के प्रधान मंत्री, राष्ट्रपति इनके पीछे -पीछे चलते हैं और गुरू कैसे बनते हैं, जिस गुरू के पीछे सब चलें, वही तो गुरू है.
श्री भंवर सिंह शेखावत- अभी जब पाकिस्तान से अपना झगड़ा हुआ और हमने पूरे विश्व के अंदर मुड़कर के देखा तो एक भी आदमी, एक भी छोटा से छोटा देश भारत के साथ नहीं था. भारत के पीछे कोई देश नहीं श्रीलंका, भूटान और नेपाल भी नहीं था. ऐसा कौन सा विश्व गुरू है, जो गुरू तो बनना चाहता है, लेकिन आश्रम में अकेले बैठा हुआ है.
श्री अनिरूद्ध माधव मारू- उनको पता था कि भारत स्वयं इतना शक्तिशाली है, इनको किसी के सपोर्ट की जरूरत नहीं है. हमने बिना किसी सपोर्ट के अपने दम पर उस युद्ध को लड़ा है और एक घण्टे में हमने उस युद्ध को समाप्त कर दिया. सबकी अक्ल ठिकाने आ गयी थी. वह दिन पूरी दुनिया ने देखा है.
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन - हम सक्षम हैं, समर्थ हैं. हमको नेपाल, भूटान की आवश्यकता नहीं है.
श्री अनिरूद्ध माधव मारू- हमको किसी के सपोर्ट की आवश्यकता नहीं है, यही तो भारत है. हम टेके वाले लोग नहीं हैं. हम दूसरे की तरफ झांकने वाले लोग नहीं हैं. (XX) दुनिया में लेकर घूमने वाले लोग नहीं हैं. एक शक्तिशाली और विकसित भारत की छवि पूरा दुनिया में बनायी है, हमारे मान्यवर मोदी जी ने. इसीलिये मैं अपनी बात कह रहा था कि स्थानीय शुल्क और उद्योग को बढ़ावा देने के लिये.
कुंवर अभिजीत शाह- बांग्लादेश में हिन्दुओं को दौड़ा-दौड़ा कर मारा गया है. सरकार तो आप ही की थी. आजादी के बाद यह इतिहास में पहली बार हुआ है कि हमारे पड़ोसी मुल्क की इतनी हिम्मत हो गयी है कि हिन्दुओं को दौड़ा-दौड़ा कर मार रहे हैं. आप बता दीजिये कि कैसे मार दिया.
श्री अनिरूद्ध माधव मारू- तो आप यहां चाहते हैं कि हम भी शुरू करें, वैसा ही काम.
कुंवर अभिजीत शाह- नहीं, कर दीजिये ना कोई दिक्कत नहीं है. हम जवाब देंगे ना.
श्री अनिरूद्ध माधव मारू- आप चाहते हो कि हम भी शुरू करें.
कुंवर अभिजीत शाह- आपके पास जवाब नहीं है तो आप पलट रहे हो.
श्री अनिरूद्ध माधव मारू- नहीं तो और क्या है.
कुंवर अभिजीत शाह- अभी तो आपने कहा कि विश्व गुरू है, पता नहीं कि क्या-क्या है.
श्री अनिरूद्ध माधव मारू- सबको ठीक करेंगे, आप चिंता नहीं करें.
कुंवर अभिजीत शाह- आप बांग्लादेश के ऊपर बोल दीजिये ना.
श्री अनिरूद्ध माधव मारू- आप ने जैसा बोया है ना, हम उसको उखाड़ने का काम करेंगे.
कुंवर अभिजीत शाह- हमने तो अच्छा बोया है पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दिये थे. बंग्लादेश हमने ही बनाया था.
श्री अनिरूद्ध माधव मारू- किन शर्तों पर ..
कुंवर अभिजीत शाह- (XX) देश के दो टुकड़े स्वीकृत करवा लिये थे महात्मा गांधी जी से. उनको एक भी वोट नहीं मिला था तो वोट चोर कौन हुआ, उस समय में (XX), उस समय में. जब उनको एक भी वोट नहीं मिला उनकी सभा में. ( व्यवधान)
श्री दिलीप सिंह परिहार- जब आपका समय आयेगा तो उस समय बोलना. अभी तो आप उनको बोलने दो.
श्री अनिरूद्ध माधव मारू- सरदार पटेल जी को सर्वाधिक वोट मिले थे, आपको इतिहास पता होना चाहिये. वोट चोरी तो आप लोगों ने की. (XX) को एक भी वोट नहीं मिला था, फिर भी प्रधान मंत्री बनाया गया था, नहीं तो देश की दुर्गति नहीं होती.
सभापति महोदया- आप लोग बैठ जाइये. उनको बोलने दें. आप लोग बीच में टोका-टाकी नहीं करें.
श्री अनिरूद्ध माधव मारू- जब धर्म के आधार पर बंटवारा हो गया था तो उनको क्यों रोक लिया. किसने रोका था, आप ही लोग थे रोकने वाले. यह सच्चाई सुन नहीं सकते हैं, एकदम उत्तेजित हो जाते हैं. सही बात बोलो तो आपको (XX) क्यों लग जाती है. क्यों आपको ऐसा लगता है.
सभापति महोदया, मेरी एक सलाह भी थी जैसे हमने 6 उत्पादों पर जीआई टैग प्राप्त किया है. मध्यप्रदेश में ऐसे बहुत से उत्पाद हैं तो सिर्फ मध्यप्रदेश में पैदा होते हैं, उनको चिन्ह्ति करके उन सब पर जीआई टैग लेना चाहिये, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में हमारे किसान अधिक से अधिक पैसा प्राप्त कर सकें. मेरे क्षेत्र में सबसे ज्यादा अश्वगंधा हम दुनिया की पैदा करते हैं. दुनिया का 70 प्रतिशत ई सबगोल हम पैदा करते हैं. दुनिया की सबसे अच्छी अकल खोरा हम पैदा करते हैं. ऐसी अनेक औषधिया हम पैदा करते हैं, लेकिन उनका जीआई टैग और कोई ले गया. इनकी चिंता करके यदि इनको जीआई टैग दिलवायेंगे तो हमारा किसान पूरी दुनिया में स्थापित होगा. उसको पूरी दुनिया में इसका पैसा मिलेगा, इसीलिये इन बातों की भी हम चिंता करेंगे. मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से की इनकी भी चिंता करें;
प्रदेश की कानून व्यवस्था में भी निश्चित रूप से अभूतपूर्व परिवर्तन हुआ है, अभूतपूर्व विकास हुआ है. आप पुलिस को काम करने में आसानी हुई है. केस ज्यादा अच्छी तरह से पकड़ पा रहे हैं, डिजिटलाइजेशन होने की वजह से. हम अपराधियों को जल्दी पकड़ पा रहे हैं और जिन बेटियों की बात कर रहे हैं तो मेरा निवेदन है माननीय मंख्यमंत्री जी से कि एक बार पूरा डाटा निकालकर इनके सामने प्रस्तुत करें कि कितनी बेटियों ने घर से अलग होकर शादी कर ली. कितनी बेटियां दस्तियाब कर ली गयी. यह रोज हल्ला करते हैं ना कि रोज 23 बेटियां जा रही हैं. आप तलाश करिये कि कितनी बेटियों ने अलग घर बसा लिया. किसी का अपहरण हुआ तो यह शिकायत कर सकते हैं कि इनका अपहरण हुआ है. वह बात आप लाकर रखिये. बिटिया गयी है तो उसकी चिंता हमारी सरकार तो कर ही रही है, पर परिवार तो निकलना चाहिये वह किसी दूसरे लड़के साथ गयी तो. यह चिंता करने की बात है यह सामाजिक जनजाग्रति की बात है और इसीलिये इनको एक बार आंकड़ा दे देना चाहिये कि कितनी बेटियों ने अपना परिवार बसा लिया. कितनी दस्तयाब कर ली गई तो इनको समझ में आएगी, यह बार-बार रोज का हल्ला बंद होगा. इनको पता है कि पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था में बहुत बड़ा परिवर्तन हुआ है. बहुत समृद्ध और विकसित मध्यप्रदेश का संकल्प लेकर मुख्यमंत्री जी ने वर्ष 2026 में किसान कल्याण वर्ष की घोषणा की. कृषि के क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार हुआ है. अभूतपूर्व हमारी सरकार ने काम किया है. जहां किसान एक एक बूंद पानी को तरसता था, उस प्रदेश में आज 55 लाख हैक्टेयर जमीन सिंचित हो रही है, कितना उत्पादन बढ़ा है. पहले मंडिया खाली पड़ी रहती थी. आज ऐसी कोई मंडी नहीं है प्रदेश की जिसमें लाइन नहीं लगी हो. हमने 10 घंटें बिजली दी.
सभापति महोदया, क्या प्रदेश की मंडियों में माल नहीं बढ़ा है, क्या प्रदेश की मंडियों में भीड़ नहीं बढ़ी है, क्या उत्पादन नहीं बढ़ा है? हमने 10 घंटे बिजली दी है.
श्री अभिजीत शाह - क्या आपने सोयाबीन खरीद ली है, क्या आपने मक्का खरीदा है.
श्री अनिरुद्ध माधव मारू - सभापति महोदया, प्रदेश में उत्पादन निश्चित रूप से बढ़ा है और किसानों को भी समय समय पर खाद की उपलब्धता हो जाय उसका डिजिटाइजेशन किया है. ई-कार्ड के माध्यम से उनको टोकन मिल जाएंगे और लाइन लगना बंद हो जाएगी. प्राकृतिक खेती में भी बहुत प्रभावशाली काम हुआ है.
सभापति महोदया, हमारे मुख्यमंत्री जी बहुत संवेदनशील हैं. समय समय पर जैसे ही किसान के खेत में नुकसान हुआ. वह तुरन्त सर्वे करने के लिए दूसरे दिन टीम भेज देते हैं, अभी जब हमारे यहां ओलावृष्टि हुई. शाम को साढ़े छह बजे ओलावृष्टि हुई और सवेरे पूरी टीम प्रशासन की मैदान पर थी, उन्होंने सर्वे करके तुरन्त रिपोर्ट भेजी. पिछली बार भी सोयाबीन हुआ, जब नुकसान हुआ आप सब इस बात के गवाह हैं कि तुरन्त मुख्यमंत्री जी ने दूसरे दिन टीम भेजी, उसके बाद मुआवजे का पैसा खातों में आ गया, फिर भावान्तर का पैसा आ गया. किसान का बीमा भी आ जाएगा. आप हिसाब लगाएंगे तो जितनी फसल होती है, उससे ज्यादा पैसा किसान के पास वापस जा रहा है. ऐसे हमारे संवेदनशील मुख्यमंत्री और हमारी सरकार को धन्यवाद देता हूं. महामहिम राज्यपाल महोदय ने जो यहां अभिभाषण दिया है उसका मैं समर्थन करता हूं. निश्चित रूप से मध्यप्रदेश की सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है. लगातार एक विजन के साथ काम कर रही है. हम जो सपने हमारे जनता के हैं उनको पूरा करने के लिए जी जान से काम कर रहे हैं, जी जान से काम करेंगे. यही भारतीय जनता पार्टी की सरकार का वायदा है. सभापति महोदया, आपका बहुत बहुत धन्यवाद.
श्री दिनेश जैन (बोस) (महिदपुर) - सभापति महोदया, मुझे राज्यपाल महोदय के अभिभाषण के विरोध में बोलने का मौका मिला है. मैंने राज्यपाल महोदय के अभिभाषण को सुना भी और पढ़ा भी है. प्रदेश में निवेश संवर्धन के लिए वर्ष 2025 में ग्लोबल इनवेस्टमेंट समिट, वर्ष 2025 में रीजनल इंडस्ट्रीज़ कॉनक्लेव, राष्ट्रीय रोड शो और अंतरार्ष्ट्रीय रोड शो आयोजित किये गये, जिनमें 11.09 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए. इसमें लिखा है कि निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, निवेश प्रस्ताव प्राप्त होना ही सफलता की निशानी है? यह धरातल पर कितने आए, कितने उद्योग स्थापित हुए, यह 15वीं सदी का भारत नहीं है, यह 21वीं सदी का भारत है, युवाओं को कैसे समझाएँगे कि केवल निवेश प्राप्त होना सफलता की निशानी हो गई, उद्योग खुल गये, रोजगार सृजन हो गया? अरे, रोजगार की क्या हालत है. आपको पता ही है. आउटसोर्सेस कर्मचारी जो काम कर रहे हैं. मैं 4-5 एजेंसीज का नाम ले रहा हॅूं. जबकि आप बोल रहे हैं कि लाखों युवाओं को रोजगार सृजन मिल गया. यश गोविन्द चिकित्सा विभाग में आउटसोर्सेस कंपनी कर्मचारियों को और टेक्नीकल लोगों को भेजती है. एक आरबी एसोसियेट ग्लोबल लिमिटेड एजेंसी है, यह भी कृषि विभाग में आउटसोर्सेस से कर्मचारियों को भेजती है. क्विस कॉर्पोरेट लिमिटेड एजेंसी है, यह भी विद्युत विभाग में आउटसोर्सेस से कर्मचारियों को भेजती है. हकीकत यह है कि कंपनी वालों को 18 हजार रूपए मिलते हैं. मैंने एक प्रश्न लगाया था, उसके जवाब में मुझे बताया गया कि 19 हजार 8 सौ रूपए उनको कंपनी देती है. 2 हजार रूपए उनका पीएफ कट जाता है और जो कर्मचारी है उसको 16 हजार-14 हजार रूपए ही मिलते हैं. 4 हजार रूपए कहां गायब हो जाते हैं. यह युवाओं की हालत है. युवा बेरोजगार हैं, आत्महत्या कर रहे हैं. आप कहते हैं कि हमें 11.09 लाख करोड़ के प्रस्ताव मिल गए और आप वाहवाही लूट रहे हैं. यह युवाओं के साथ किस तरीके का न्याय हो रहा है.
सभापति महोदया, अभी आपने एमएसएमई के बारे में कहा कि आपने उनको ऑनलाइन 1 हजार भूखण्ड दिये. आपने भूखण्ड तो दे दिया, लेकिन क्या आपको पता है कि जब वह युवा भूखण्ड ले लेता है लेकिन वह बैंक के चक्कर लगा-लगाकर थक जाता है. वह बैंक के चक्कर लगाता रहता है लेकिन उसको लोन नहीं मिलता और अगर उसे लोन मिलता भी है तो उसको मॉडगेज करना पड़ता है तो कहां से युवा सक्सेस होगा ? युवा आत्महत्या की ओर बढ़ रहा है. वह युवा 10-12 हजार रूपए में काम कर रहा है. चलिए, यह तो गवर्नमेंट की बात हो गई.
सभापति महोदया, आप सोसायटी में जायेंगे, तो युवा 200-400 रूपए में बाऊचर पर काम कर रहा है. आप यदि प्राइवेट सेक्टर में जायें, तो चाय की दुकान में वह 6 हजार रूपए में काम कर रहा है. पेट्रोल पंप पर 7 हजार रूपए में काम कर रहा है. यह हिन्दुस्तान में कैसा मध्यप्रदेश है, जो केवल निवेश को, निवेश के प्रस्ताव को रोजगार सृजन मानता है और युवा आत्महत्या कर रहे हैं.
सभापति महोदय, इसके बाद जितनी भी नौकरियां मिल रही हैं जो भी कॉम्पिटेटिव एक्जाम हो रहे हैं उसमें बाहरी स्टेट के लोग ज्यादा आ रहे हैं. मुझे अभी 2-3 लोगों ने बताया कि जो भी परीक्षाएं यहां हो रही हैं, उसमें बाहरी स्टेट के लोग ज्यादा आ रहे हैं और हमारे स्टेट के लोग बाहर जा ही नहीं सकते. क्या इस पर कोई नीति नहीं बनना चाहिए? कि सबसे पहले मध्यप्रदेश के युवाओं को जो कॉम्पिटेटिव एक्जाम में पास होते हैं उनको अवसर मिले.
सभापति महोदया, दूसरी बात यह है कि अभी माननीय सीतासरन शर्मा जी किसानों के बारे में बात कर रहे थे, किसान कल्याण के ऊपर बात कर रहे थे. अरे, किसान कल्याण कहां हो रहा है. मध्यप्रदेश के अंदर, हर तहसील के अंदर 50 से 100 किसान अपनी रजिस्ट्री करवा रहे हैं. अपनी जमीनों को बेच रहे हैं और जमीन के खरीदार कौन हैं. बडे़-बडे़ उद्योगपति हैं. बडे़-बडे़ अफसर हैं. पैसे वाले लोग हैं और जमीनों के भाव कितने हैं. 35-40 लाख रूपए बीघा है. किसान के लिए आप बोलते हैं कि हम 2700 रूपए में गेहूं तौल लेंगे. वह भी आप नहीं तौलते हैं.
सभापति महोदय, सोयाबीन आप 5 हजार 328 रूपए में ले लेंगे. वह भी आप नहीं लेते हैं और आप भावांतर को लेकर एक नई बात लेकर आ गए. अरे, आपकी जवाबदारी है, नीति है कि अगर वेट बहुत आगे-पीछे हो, तो एमएसपी की मूल्य नीति आयोग यह निर्देश देते हैं, यह बात लिखते हैं और मैंने यह पढ़ा है कि ऐसी स्थिति में यह सरकार की जवाबदारी होती है कि सरकार ही उन एजेंसियों से भावांतर नहीं, मॉडल रेट नहीं, जो भी मिनिमम सर्पोट प्राइस है उसमें वह 5 हजार 328 रूपए में तोले. आपने 4 हजार रूपए में तोल ली. आपने 26 तारीख के पहले ही तोल ली और 26 तारीख के बाद केलकुलेशन करने के बाद 10 दिन बाद आपने भावांतर डिसाइड किया. आपने 5 हजार 328 रूपए न देकर किसानों का गला घोंटा है. मेरे क्षेत्र महिदपुर में 4 किसानों ने आत्महत्या कर ली. उनको दो दो लाख रूपये दे दिया गया. किसानों की आत्महत्याएं तब रूकेंगी जब उसकी मेडिसिन खेती उसका लहसुन, प्याज, अदरक, कमरकस, सफेद मूसली, अश्वगंधा, के भाव जब 25 से 30 हजार रूपये क्विंटल अगर लहसुन का भाव हो जाये तो फिर बाद में उनका भाव कम क्यों हो जाता है. एक साल होता है फिर तीन साल उनको फिर चार पांच हजार रूपये आ जाता है. क्या मध्यप्रदेश तथा केन्द्र की सरकार 29 में से 29 सीटें लेकर वहां पर बैठे हैं और यहां पर भी तीन तिहाई बहुमत लेकर के बैठे हैं. अगर किसान की आय दोगुनी करना है, किसानों को आत्महत्याएं करने से रोकना है तो किसान के इस भाव को स्थिर रखना होगा. आप पांच से छः हजार रूपये का भाव सोयाबीन का भाव देंगे तो उससे कुछ नहीं होना है. उसकी जमीन बिकना ही है. तीन हजार रूपये गेहूं का भाव भी दे दिये तो कुछ नहीं होना है. अगर किसान को आत्महत्या से बचाना है तो उनकी मेडिसिन खेती लहसुन, प्याज अदरक के भावों को स्थिर रखना होगा 20 से 25 हजार रूपये क्विंटल ताकि वह अपनी जमीन खरीद सके अपनी जमीन बेचे नहीं. अगर इसी तरीके से जमीन बिकती रही तो मध्यप्रदेश का किसान, किसान नहीं रहेगा वह मजदूर बन जायेगा. आज की तारीख में आप सर्वे करवा लें चार बीगा, आठ बीगा और एक हैक्टेयर और दो हैक्टेयर से ज्यादा का मालिक किसान नहीं बचा है. यह हमारे किसानों की स्थिति है, यह हकीकत है. दूसरा सरकार की कोई भी योजना आती है. चाहे जल संवर्धन में बड़े बड़े रिजर्ववार बनाने की हो, चाहे बड़े बड़े रोड़ बनाने की हो, उनकी जमीनों के गाईड लाईन से दो गुना पैसा दे दिया जाता है. गाईड लाईन कितनी है 1 लाख 90 हजार रूपया उसको 3 लाख 80 हजार रूपये मिला तो उसकी दो बीगा जमीन गई.
सभापति महोदया—कृपया दिनेश जी समाप्त करें.
श्री दिनेश जैन (बोस)—सभापति महोदया यहां पर श्वान के ऊपर आधे पौने घंटे की चर्चा हो रही है और किसानों की चर्चा के लिये आप तीन मिनट नहीं दे रहे हैं. यह कैसा सदन है.
सभापति महोदया---आपको आठ मिनट हो गये हैं.
श्री दिनेश जैन (बोस)—सभापति महोदया, जब श्वान के ऊपर एक घंटे की चर्चा हो सकती है तो किसानों के लिये कम से कम 10 घंटे की चर्चा होनी चाहिये. आपको सदन का समय चार घंटे बढ़ा देने चाहिये. किसानों के ऊपर चर्चा के लिये बोलने देना चाहिये.
जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसीराम सिलावट)-- दिनेश जी आप भावान्तर पर बोल रहे हैं आप पूरी जानकारी के साथ बोलें. आपके लाखों किसानों को 866 करोड़ रूपया हमने भावान्तर योजना में डाला है. यह आपके संज्ञान के लिये है आप किसान की बात कर रहे हैं.
श्री दिनेश जैन (बोस)—सभापति महोदया, मैं पूरी जानकारी के साथ बोल रहा हूं कि मूल्य आयोग की नीति यह है कि 5 हजार 328 रूपये का मिनिमम सपोर्ट प्राईज हो गया है. तो यह सरकार की जवाबदारी है कि वह वर्किंग कमेटी सरकार की एजेंसी है.
श्री सोहनलाल बाल्मीक—सभापति महोदय, क्या पूरे किसानों के लिये पैसा डाला है क्या ?
श्री दिनेश जैन (बोस)—सभापति महोदया,मैं पूरी जानकारी के साथ बोल रहा हूं. आंकड़ों के साथ बोल रहा हूं. गाईड लाईन 1 लाख 90 हजार रूपये मेरी तहसील में है. अभी वहां पर बहुत बड़ा जलाशय जिसमें 4 हजार हैक्टेयर जमीन किसानों की ली जायेगी.
4.49 बजे अध्यक्षीय घोषणा
स्वल्पहार की व्यवस्था किये जाने विषयक
सभापति महोदया--सदन की लॉबी में स्वल्पहार की व्यवस्था की गई है. मेरा माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि आप अपनी सुविधानुसार स्वल्पाहार ग्रहण करने की कृपा करें.
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- सभापति महोदया, यह बड़ा ही आपत्तिजनक है कि एक बार श्वान के बारे में बोला तो मैंने कुछ नहीं बोला. यह सदन आसंदी के निर्देश पर चलता है. आसंदी ने अगर उस पर चर्चा करवाई है तो क्या आप आसंदी पर इस प्रकार का आरोप लगा सकते हैं क्या ? यह आसंदी के ऊपर आरोप है. पहली बार उन्होंने मजाक में बोला तो मैंने कुछ नहीं बोला. इस प्रकार के कमेंट्स किसी भी सदस्य को करने का अधिकार नहीं है सभापति जी आप उनको निर्देश दीजिये तथा उनकी कही हुई बात रिकार्ड से हटवाईये.
सभापति महोदया—दिनेश जी आप एक मिनट में अपनी बात को समाप्त करें.
श्री दिनेश जैन (बोस)—सभापति महोदया,अगर इस बात को किसी को गलत लगा है तथा सदन को लगत लगा है तो मेरी बात को हटा सकते हैं. लेकिन किसानों की बातों के लिये आप समय नहीं देते हैं तो इसका मैं विरोध करूंगा. मैं किसानों की बात करना चाहता था आपने कम समय दिया लेकिन अंत में मैं उतना ही बोलता हूं कि उनको दो गुना मुआवजे की जगह चार गुना मुआवजा दिया जाये.
राज्यमंत्री लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल)—सभापति महोदया आप इस बारे में पार्टी से बात करें. आपकी पार्टी को समय मिला हुआ है उसमें फिर जितना बोलना है उतना बोलें.
श्री दिनेश जैन (बोस)—सभापति महोदय, मैं दो गुने मुआवजे के स्थान पर चार गुना मुआवजे की बात करता हूं और अपना स्थान ग्रहण करता हूं.
सभापति महोदया—धन्यवाद.
श्री ओमप्रकाश धुर्वे - अनुपस्थित.
श्री मोहन सिंह राठौर - अनुपस्थित.
सभापति महोदया – डॉ. प्रभुराम चौधरी जी.
डॉ. प्रभुराम चौधरी(सांची) – माननीय सभापति महोदया, महामहिम राज्यपाल जी के कृतज्ञता ज्ञापन पर मुझे बोलने का अवसर दिया गया है. मैं कृतज्ञता ज्ञापन के पक्ष में अपनी बात रख रहा हूं. आज मध्यप्रदेश की सरकार देश में अग्रणी राज्य स्थापित करने के लिए लगातार सर्वांगीण विकास कर रही है. हर क्षेत्र में आज मुझे गर्व का अनुभव हो रहा है कि सबका साथ सबका विकास, के मंत्र पर आत्मसात करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी विकास के कार्य कर रहे हैं. जहां आज प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति को हर घर पानी, प्रदेश के हर व्यक्ति को जो आयुष्मान कार्ड के माध्यम से पांच लाख तक का इलाज मिल रहा है. आज प्रत्येक किसान को किसान सम्मान निधि दी जा रही है. आज मुझे स्वास्थ्य के संबंध में बात करने के लिए कहा गया है, तो पहला सुख निरोगी काया. आज देश में डबल इंजन की सरकार है. देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी और मध्यप्रदेश में डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार विकास के काम और प्रगति चल रही है, तो आज हम कह सकते हैं कि भारत आज दुनिया में मेडिकल हब बनने जा रहा है. आज प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में भारत ही नहीं, दुनिया के अनेक देशों के मरीज भारत के अंदर इलाज करवाने आ रहे हैं और उन्हें 30 प्रतिशत कम लागत में इलाज मिल रहा है. अभी हमारे पूर्व वक्ताओं ने कई बातें रखी. आज मेडिकल कॉलेजों की संख्या एमबीबीएस की शीट की संख्या प्रदेश में बढ़ी है. आज पोस्ट ग्रेज्युएशन के लिए 2800 से ज्यादा शीट हुई है, सुपर स्पेश्यिलिटी के लिए 93 से ज्यादा शीट मेडिकल कालेज में बढ़ी है, जहां डाक्टर बनकर तैयार होंगे और वे डाक्टर देश और दुनिया में अपनी स्वास्थ्य की सेवाएं उपलब्ध करवाएंगे. जहां मेडिकल कालेज की स्थापना हो रही है, वहीं नर्सिंग कॉलेज, आयुर्वेदिक कालेज की स्थापना हो रही है वहीं ग्रामीण अंचल के एक एक सब-सेंटर पर स्वास्थ्य की सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही है. आज हम कह सकते हैं कि मध्यप्रदेश के दस हजार से ज्यादा उप-स्वास्थ्य केन्द्रों में जो 2 हजार से 3 हजार की पाप्यूलेशन पर एक सब-सेंटर स्थापित है, वहां एक सब-सेंटर पर दो तीन गांव के बीच में एक सब-सेंटर पर 11 प्रकार की जांचें हो रही हैं. 126 प्रकार की दवाईयां हैं, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की पोस्टिंग की जा रही है. डेली वहां पर 25 से 30 मरीज इलाज करवाने आते हैं, वहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं और ब्लड की जांच की जा रही है. एनसीडी की वहां पर परीक्षण किया जा रहा है, जिससे जो बड़ी बीमारी बनती है किसी की किडनी या हार्ट खराब होता है, तो उससे पहले ही ये हमारे मध्यप्रदेश सरकार की अवधारणा है कि Prevention is better than cure. कोई बीमारी हो उसके पहले ही हम रोक दें. यदि हम गांव और उपस्वास्थ्य केन्द्र लेबल पर ही उसकी जांच हो जाएं, वहीं पर बीपी और डायबिटीज की जांच हो और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी की स्थापना हो.
श्री सोहनलाल बाल्मीक(परासिया) -- भागीरथ में मल मूत्र का पानी पिलाकर 35 लोगों की जान ले ली.
डॉ.प्रभुराम चौधरी -- यह दुर्घटनाएं हैं, उस पर बात मत करिये.
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- वाह दुर्घटना हो गई. असमय 35 मासूम गरीब लोगों की जान चली गई.
डॉ.प्रभुराम चौधरी -- आज जो मध्यप्रदेश की सरकार स्वास्थ्य की सुविधाओं के लिये काम कर रही है. (व्यवधान)...
संसदीय कार्य मंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- भोपाल गैस कांड में 35 हजार लोग मारे गये थे. . (व्यवधान)...
नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) -- ये प्रिवेंशन की बात कर रहे हैं, स्वास्थ्य की बात कर रहे हैं, ये खुलेआम (व्यवधान)...
श्री कैलाश विजवर्गीय -- सभापति महोदय, भोपाल गैस कांड में 35 हजार लोग मारे गये थे, सरकार इनकी थी, नेता इनके थे और एंडरसन को भगाने का काम इन लोगों ने किया था और आज तक उन लोगों को न्याय नहीं मिला है. (व्यवधान)...
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- आपको इतना बुरा क्यों लग रहा है (व्यवधान)...
श्री उमंग सिंघार -- अगर आप जवाबदारी लेते हो तो आप इस्तीफा दे दो. (व्यवधान)...
श्री कैलाश विजवर्गीय -- आज तक उन लोगों को न्याय नहीं मिला है. (व्यवधान)...
श्री उमंग सिंघार -- आप जवाबदारी लेते हो, आप खुद मंत्री हो, आप इस्तीफा दो. (व्यवधान)...
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- आज तक भोपाल के लोगों को न्याय नहीं मिला है, इसीलिए कि एंडरसन को इन्होंने भगाया था, 35 हजार लोगों की जान गई थी और लाखों जीव जंतु भी मारे गये थे. (व्यवधान)...
श्री उमंग सिंघार -- सभापति अगर यह जवाबदारी सरकार नहीं लेती है, यह जवाबदारी मंत्री नहीं लेते हैं, यह जवाबदारी लें और दें इस्तीफा, आप इस्तीफा क्यों नहीं देना चाहते हैं?
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- हमारे अधिकारी तमिलनाडू से उसको गिरफतार करके लाये और उसको छुड़वाने का काम इनके नेताओं ने किया था, इतना बड़ा पाप इनके नेताओं ने किया था. (व्यवधान)...
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- आप आज की बात करो. (व्यवधान)...
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- सभापति महोदया, आप बतायें 35 हजार कितनी बड़ी संख्या होती है, 35 हजार लोग मारे गये थे. एक लाख से ज्यादा प्राणी मारे गये थे, प्राणी सड़कों पर पड़े रहे, चार-चार, पांच-पांच दिन तक लाश नहीं उठा पाये, यह उस पार्टी के लोग हैं.
श्री उमंग सिंघार -- आज की बात करो 35 लोगों की मृत्यु हो गई है (व्यवधान)..... और यह प्रिेवेंशन की बात कर रहे हैं, कुत्तों की बात पर हंस रहे हैं, इंसान मर रहे हैं, उनकी बात नहीं हो रही है, कुत्तों की बात हो रही है, भागीरथपुरा में इंसान मर रहे हैं, उस पर बात नहीं हो रही है. (व्यवधान).....
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- मध्यप्रदेश के लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है. मासूम लोग मर रहे हैं, आपको कोई मतलब नहीं है, आप कोई जवाबदारी नहीं लेना चाहते है. (व्यवधान).....
डॉ. प्रभुराम चौधरी -- माननीय सभापति महोदया. (व्यवधान)....
सभापति महोदया -- आप अपनी बात जारी रखिये.
डॉ.योगेश पंडाग्रे -- एंडरसन को छोड़ने जाते हैं, यह पाप आप लोगों ने किया था, इस ओर भी आप लोगों को ध्यान देना चाहिए. (व्यवधान).....
सभापति महोदय -- माननीय सदस्य आप अपनी बात रखिये. (व्यवधान).....
डॉ.योगेश पंडाग्रे -- (व्यवधान).....हत्यारे को दिल्ली से फोन आने पर अगर मुख्यमंत्री उसको एयरपोर्ट छोड़ने जाते हैं, तो आप उस पर ध्यान दो. (व्यवधान)....
सभापति महोदया -- माननीय सदस्य आप बोलें.
डॉ. प्रभुराम चौधरी -- माननीय सभापति महोदय, मैं स्वास्थ्य की बात कर रहा हूं, आप सुनने की क्षमता रखिये और भारतीय जनता पार्टी की सरकार जो काम कर रही है, उससे कुछ सीखिये. आप भी जन प्रतिनिधि हो, तो आप भी इस बात को समझे और अपने क्षेत्र में जो स्वास्थ्य की सुविधाएं मध्यप्रदेश की सरकार उपलब्ध करवा रही है, उनका लोगों को इलाज मिल सके और लोग स्वस्थ रहे. पहला सुख निरोगी काया, हर एक व्यक्ति को पहले स्वस्थ रहना है और स्वास्थ्य के लिये अगर सरकार लगातार काम कर रही है, जहां एयर एंबुलेंस जैसी सुविधाएं ग्रामीण अंचल के पेशेंटों के लिये उपलब्ध करायी जा रही है, वहां भी हर वर्ग के लिये हर जिला अस्पताल में सुविधाएं उपलब्ध करवायी जा रही है.
श्री सोहनाल बाल्मीक -- मध्यप्रदेश में दवाईयों की टेस्टिंग करने की लेब नहीं है. मेरे विधानसभा में 15 बच्चों की मौत हुई है. वहां पर 26 बच्चे मरे हैं, इसका कोई जवाब आपके पास है, क्या इसका कोई जवाब है?
डॉ. प्रभुराम चौधरी -- जहां तक आप लेबों की बात करना चाहते हैं तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार के अंतर्गत आज 50 जिला अस्पतालों में कम से कम सिटी स्केन मशीन वहां जांच के लिये उपलब्ध करवाई गई हैं, जितने हमारे संभागीय अस्पताल हैं, वहां एम.आर.आई. की सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही है. हर डिस्ट्रिक्ट अस्पताल में लगभग 123 प्रकार की जांचे की जा रही हैं और हमारे चिन्हि्त सिविल जो अस्पताल हैं, वहां पर जांचे की जा रही हैं, हब एंड स्कोप के अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 80 प्रकार की जांचे की जा रही हैं, हर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेवल पर आज जांचें उपलब्ध करवाई जा रही हैं, इतनी दवाईयों की उपलब्धता ग्रामीण अंचल में लोगों को की जा रही है, इस प्रकार से आज मध्यप्रदेश के अंदर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं. (व्यवधान)...
श्री सोहनलाल बाल्मीक -- कोल्ड सिरप की जांच क्यों नहीं हुई? यह अमानक दवाई मध्यप्रदेश के अंदर कैसे आई? क्या 26 बच्चों की मौत की जवाबदार सरकार नहीं है? (व्यवधान)...
डॉ.प्रभुराम चौधरी -- सभापति महोदया, मध्यप्रदेश की सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में जिस प्रकार का काम कर रही है, वह आप सुनिये और क्षेत्र में जो सुविधायें लोगों के लिये उपलब्ध हो रही हैं, आप अपने क्षेत्र में भी लोगों का सहयोग वहां पर करें. (व्यवधान..)
श्री अभय मिश्रा -- (व्यवधान..) भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है.
डॉ.प्रभुराम चौधरी -- मध्यप्रदेश में अनमोल टू योजना का वर्ष 2025 में शुभारंभ किया गया था. (व्यवधान..) नवजात शिशुओं को टेग करके सुरक्षा योजना और प्रसूति सहायता के अंतर्गत भी समग्र आई.डी से जोड़ा जाता है. मातृ शिशु संजीवनी मिशन के माध्यम से जिसका दिनांक- 07 अप्रेल, 2025 को शुभारंभ किया गया था, जो मातृ और शिशु दर को कम करने का प्रयास मध्यप्रदेश की सरकार लगातार आज कर रही है. आज जहां स्वस्थ नारी और सशक्त परिवार अभियान का शुभारंभ मध्यप्रदेश में किया गया था इसके लिये काम किया जा रह है. 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक 4 लाख 29 हजार 574 स्क्रीनिंग करके आज देश में मध्यप्रदेश प्रथम स्थान पर पहुंच चुका है. क्षय रोगी जो हमारे टीवी के रोगी हैं उन लोगों के मित्र बनाये जा रहे हैं, शिविर लगाये जा रहे हैं इसमें भी देश में मध्यप्रदेश आज अग्रणी हो रहा है और अच्छी तरह से काम कर रहा है. राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया महामहिम राज्यपाल महोदय का भी इसमें विशेष योगदान है मैं उनको धन्यवाद देना चाहता हूं. जो हमारे आज आदिवासी क्षेत्र हैं, जो हमारे 89 ब्लॉक हैं वहां पर स्क्रीनिंग की जा रही है और हमारे सिकल सेल के जो भी पेशेंट मिले हैं उनका इलाज किया जा रह है, उनकी टेकिंग की जा रही है. इसमें भी मध्यप्रदेश का स्वास्थ विभाग लगातार काम कर रहा है. मैंने आपसे कहा 50 जिला अस्पतालों में स्वास्थ की सेवाओं में चाहे हमारे सीटी स्केन की हम बात करें चाहे हमारे जांचों की हम बात करें, लगातार विकास के काम किये जा रहे हैं और वहां पर जहां अस्पताल के अंतर्गत हमारे महत्वपूर्ण नवाचार करते हुये सरकार ने जहां अंगदान और देहदान करने वाले व्यक्तियों के लिये गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जा रह है और मध्यप्रदेश सरकार ने ऐसे 38 देहदान दाताओं को गार्ड ऑफ ऑनर दिया जा चुका है, यह मध्यप्रदेश की सरकार मोहन यादव जी के नेतृत्व में आज प्रदेश में काम कर रही है. वर्ष 2025 से चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल और रीवा में नवीन कैथलेब साढ़े आठ करोड़ की मशीनें खरीदकर वहां पर स्थापना की जा रही है. हम रेडियोथैरेपी की सुविधाओं के विस्तार की अगर बात करें तो चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, रीवा में थैरेपी मशीनें 7-7 करोड़ की खरीदकर लोगों के इलाज के लिये अस्पतालों में स्थापित की जा रही हैं.
माननीय सभापति महोदय, इसके अतिरिक्त चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल, इंदौर, रीवा में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट, जबलपुर एवं केयर सेंटर ग्वालियर में ड्यूल एनर्जी एक्सीलेटर मशीनें 50 करोड़ प्रति मशीन के हिसाब से खरीदकर वर्ष 2026 में स्थापित की जायेंगी. रेडियोथेरेपी के उपचार की सुविधाओं का विस्तार लगातार प्रदेश के अस्पतालों में आज किया जा रहा है.
माननीय सभापति महोदय, आज हम चाहे बोन मैरो ट्रांसप्लांट सेवाओं की हम बात करें मेडिकल कॉलेज में चाहे जबलपुर में किडनी एवं हार्ट आर्गन हार्वेस्टिंग प्रारंभ करने की हम बात करें, चिकित्सा शिक्षा के विस्तार हेतु आमजन को सुपर स्पेस्लिटी उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से भोपाल मेडिकल कॉलेज में एण्डोक्रिनोलॉजी, न्यूट्रोलॉजी, पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक न्यूरोलॉजी विभाग भी स्थापित किये जा रहे हैं. माननीय सभापति महोदय, आज मध्यप्रदेश आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत देश के प्रधानमंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी ने जो हमारे देश के नागरिकों के लिये प्रतिवर्ष 5 लाख रूपये तक का इलाज गरीबों के लिये आयुष्मान योजना में किया जाता है उसके अंतर्गत मध्यप्रदेश में अग्रणी काम किया है और 4 करोड़ 43 लाख के आयुष्मान कार्ड आज तक मध्यप्रदेश में बन चुके हैं और उल्लेखनीय कार्य करते हुये 83 लाख 47 हजार पात्र हितग्राहियों के कार्ड बनाकर उनको सेवायें दी जा रही हैं जिससे गरीबों को आज इलाज मिल रहा है. माननीय सभापति महोदय, मैं धन्यवाद देना चाहता हूं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव जी को, हमारे स्वास्थ के उपमुख्यमंत्री जी को जिनके नेतृत्व में मध्यप्रदेश में स्वास्थ सेवाओं का विस्तार हो रहा है और नागरिकों को इलाज मिल रहा है और डॉक्टरों की संख्या और मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है. 3850 डॉक्टरों की भर्ती हेतु पीएससी के लिये आज विभाग ने लिखा है और जल्दी ही डॉक्टरों की जो कमी है उनकी भी पूर्ति होगी, नर्सों की भी पूर्ति होगी, रेडियोग्राफर की भी पूर्ति होगी जिससे स्वास्थ सेवाओं में और लगातार विस्तार यहां पर किया जायेगा. जिस तरह से देश आज दुनिया में मेडिकल हब बनने जा रहा है मध्यप्रदेश उसमें उल्लेखनीय कार्य कर रहा है. माननीय सभापति महोदय आपने बोलने का समय दिया बहुत-बहुत धन्यवाद.
सभापति महोदया - माननीय सदस्यों से मेरा अनुरोध है कि माननीय जितने भी सदस्य हैं. अभी कम से कम 14 सदस्य और बोलने के लिये हैं और सभी 7 से 8 मिनट में अपनी बात को रखें. सभी 10-12 मिनट में रख रहे हैं. सबको अपनी बात रखना है तो सभी को बाकी लोगों का भी म्मान करना होगा. 7 से 8 मिनट भी काफी होते हैं.
श्री मधु भगत(परसवाड़ा) - माननीय सभापति महोदया, मैं राज्यपाल के अभिभाषण का विरोध करते हुए मैं अपनी बात रखता हूं और इस प्रकार से उद्योग नीति के ऊपर मैं अपनी बात रखना चाहता हूं. मध्यप्रदेश सरकार द्वारा औद्योगिक ..
5.06 बजे अध्यक्ष महोदय ( श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ) पीठासीन हुए.
..विकास निवेशकों के लिये बड़े-बड़े दावे कर रही है परन्तु स्थिति धरातल पर शून्य है. मैं बताना चाहता हूं कि प्रदेश के अंदर और मेरी विधान सभा के अंतर्गत किरनापुर के ग्राम पंचायत बोड़ुंदाकला में अगस्त 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान जी द्वारा 320 एकड़ जमीन उद्योग नीति के तहत् भूमि का आवंटन किया गया था जिसमें मैगनीज टेरो अलाय क्लस्टर के प्लांट का उद्योग लगाया जाना प्रस्तावित था परन्तु आज दिनांक तक उद्योग प्रारंभ नहीं किया गया. सरकार की लचर व्यवस्था के कारण उक्त उद्योग तक पहुंचने के लिये सड़कों का निर्माण नहीं किया गया और उद्योग प्रारंभ करने के लिये न तो विद्युत मण्डल द्वारा पावर स्टेशन स्थापित किये गये जबकि पावर स्टेशन हेतु भूमि आवंटित नहीं की गई जिसके कारण उद्योग प्रारंभ नहीं हुआ. मैं अपनी विधान सभा के अंदर जो समस्याएं हैं जो बजट में कटौती होनी चाहिये जो अभिभाषण में जिनका जिक्र होना चाहिये. हमारे संज्ञान में है कि किस जिले के अंदर कौन से उद्योग को हमने कब किस तरीके से लांच किया और उस पर क्या कार्यवाही हुई. यह 2020 की स्थिति है. मध्यप्रदेश सरकार किसानों की आय दुगनी करने की बात करती है. खेती को बढ़ावा देने की दिशा में अनेकों योजनाएं ला रही हैं परन्तु किसानों को जब तक उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिलेगा तब तक किसान की आय कैसे बढ़ेगी. मध्यप्रदेश सरकार ने रबी की फसलों के उपार्जन में प्राथमिकता दी है. बालाघाट जिले में धान,गेहूं,चना की फसल बालाघाट के किसानों के द्वारा लगाई गई है लेकिन सरकार रबी की फसल धान की फसल किस समर्थन मूल्य पर खरीदेगी इसको स्पष्ट नहीं किया है इसे भी राज्यपाल महोदय को स्पष्ट करना चाहिये था एवं सरकार सिंचाई के लिये कृषकों को 10 घंटे बिजली देने का वायदा कर रही है लेकिन धरातल पर 4 घंटे का प्रावधान रखा गया है वह भी रात के 12 बजे के बाद 4 घंटे का प्रावधान रखा गया है. राज्यपाल के अभिभाषण में किसान को 12 घंटे बिजली देने का प्रावधान होना चाहिये. मुश्किल से 4 घंटे बिजली मिल रही है. प्रदेश के अंदर बालाघाट जिले के अंदर बिल इतने ज्यादा 5,8,12 हजार का बिल आ रहा है यह भी सही दृष्टि को नहीं दिखाता. इसी प्रकार अटल कृषि योजना के तहत अनुसूचित जाति,जनजाति के छोटे किसानों को निशुल्क विद्युत प्रदान किया जा रहा है यह सरकार बोल रही है लेकिन मेरे जिले और बालाघाट की परसवाड़ा विधान सभा में किसी भी वर्ग को निशुल्क विद्युत प्रदाय नहीं किया गया है.जबकि मेरा विधान सभा क्षेत्र अनुसूचित जाति,जनजाति वर्ग के किसानों का सर्वे कराकर कृषि हेतु निशुल्क बिजली प्रदाय की जाये यह भाषण में होना चाहिये था जिसका मैं विरोध करता हूं. मध्यप्रदेश सरकार सिंचाई हेतु कई परियोजनाओं को बढ़ावा दे रही है परन्तु मेरे जिले में विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत सापतारी जलाशय योजना जो 1984 से बन रही है. 1984 में उसका काफी काम हो चुका था वह करोड़ों रुपये की राशि से स्वीकृत की गई है. 60 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है. वन विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र अभी तक जारी नहीं हुआ है.किसानों को हम किस प्रकार से सिंचाई की व्यवस्था दे रहे हैं इसकी व्यवस्था राज्यपाल महोदय के भाषण में कि जो हमारे सिंचाई के संसाधन हैं उनको कैसे मजबूत करना चाहिये इस पर विचार कर मार्गदर्शन देना चाहिये. मेरा सरकार से आग्रह है कि जल्द से जल्द शेष प्रक्रिया पूरी की जावे, जिससे लाखों किसानों को उसका लाभ मिल सके. उसी प्रकार अगर हम किसान की सिंचाई की बात करते हैं तो किसान को सिर्फ जल मिल जाए और उसको सही खाद, बीज मिल जाए तो निश्चित तौर से किसान समृद्ध होगा और वह किसान मजबूत होगा तो भारत की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा. इसी प्रकार अगर हम मेरी परसवाड़ा विधान सभा की बात करें तो एक बगलीपाट सिंचाई परियोजना है. उस परियोजना को डेढ़ साल पहले सारी स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकी हैं.
अध्यक्ष महोदय -- मधु भाई, कृपया समाप्त करें.
श्री मधु भगत -- अध्यक्ष महोदय, केवल दो मिनट और, मैंने अभी तीन मिनट ही लिए हैं.
अध्यक्ष महोदय -- आपको साढ़े पांच मिनट हो चुके हैं. एक मिनट में आप कन्क्लूड करें.
श्री मधु भगत -- अध्यक्ष महोदय, जी हां. मैं बहुत सारी चीजें प्वॉइन्ट आऊट करके ही बोल रहा हूँ. मैं भाषण नहीं दे रहा हूँ. अध्यक्ष महोदय, वह योजना एक वर्ष पूर्व स्वीकृत होनी थी, उसका कार्य लगभग संपन्न हो चुका था, लगातार इसके पीछे मैं पड़ा रहा. मैं मंत्रालय भी गया. मुख्यमंत्री जी से मिला. एसीएस से मिला. सबसे मिला. सबने आश्वासन दिया है और मैं पूरा आश्वस्त हूँ कि इस बार मेरी बगलीपाट सिंचाई परियोजना, जो टेंडर प्रक्रिया में है, वह लगभग-लगभग फरवरी या मार्च में स्वीकृत हो जाएगी. वह परियोजना स्वीकृत हो जाएगी, ऐसी संभावना है. मैं चाहता हूँ कि यह स्वीकृत हो जाए तो बहुत अच्छा हो जाएगा.
अध्यक्ष महोदय, लाडली बहनाओं को पक्के आवास नहीं प्रदान किए गए हैं. साथ ही संपूर्ण प्रदेश के अंदर कई ऐसे परिवार हैं, जिनके पास आवास नहीं हैं. शासन के द्वारा कोई ठोस प्रयास नहीं किया जा रहा है. यह प्रस्ताव बजट में नहीं है. संपूर्ण मध्यप्रदेश में सड़कों की हालत जर्जर हो चुकी है. मैं बताना चाहता हूँ कि बालाघाट से नैनपुर मार्ग, यहां पर पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर बैठे हुए हैं, उन्होंने कहा था कि मोहन सरकार में ऐसी सड़कें नहीं हैं कि जिसमें मौत होने लगे, मेरा क्वेश्चन लगा है, लेकिन मैं कहना चाहता हूँ कि मैं प्रूफ के साथ आया हूँ कि वहां मौत हो चुकी है. उसका नाम भी मेरे पास है. इसके अलावा जो परसवाड़ा से बैहर रोड है, 31 किलोमीटर का जो चेंज ऑफ स्कोप में लगाया है, लेकिन उसके ऊपर भी कोई प्रावधान नहीं है. बजट के अंदर सड़कों के निर्माण का प्रावधान होना चाहिए, जो जिले के अनुसार हो. जो सड़कें प्रदेश के अंदर नेशनल हाईवे से जोड़ती हैं, उनको हमेशा मजबूत रखनी चाहिए. उसका कोई प्रावधान नहीं है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार पर्यावरण को बचाने हेतु बड़े-बड़े वादे करती है. ''एक पेड़ मां के नाम'' अभियान के तहत लाखों पेड़ लगाने का दिखावा कर रही है. मैं सरकार से पूछना चाहता हूँ कि मध्यप्रदेश के बैहर एवं सिंगरौली में हजारों एकड़ में पेड़ वनांचल को भूमि से उद्योगपतियों को लीज पर दे दी गई. उन वनांचलों में हजारों, लाखों पेड़ की कटाई की जा रही है. यह हाल मेरे परसवाड़ा में भी है. बालाघाट में भी करीब-करीब साढ़े 6 हजार पेड़ काटे गए. हम लोगों ने जा करके विरोध प्रदर्शन किया था, तब जा करके उसके ऊपर में कार्यवाही रोकी गई. लेकिन यह भी एक प्रकार से गलत है. हम एक तरफ एक पेड़ मां के नाम लगाने की बात करते हैं और उद्योगपतियों को...
अध्यक्ष महोदय -- मधु भाई, कृपया समाप्त करें.
श्री मधु भगत -- अध्यक्ष महोदय, एक लाइन है.
अध्यक्ष महोदय -- राज्यपाल जी के अभिभाषण पर चर्चा चल रही है, आप बार-बार बजट प्रावधान का उल्लेख कर रहे हैं. इसको भी सुधारो.
श्री मधु भगत -- अध्यक्ष महोदय, मैं इसको इसलिए ला दे रहा हूँ कि मैं बाद में लाता, पहले भूमिका बनाता, लेकिन मुझे 5 मिनट का ही समय दिया गया है तो मैंने कहा कि सीधे मैं अपनी बात ही करूं. राज्यपाल महोदय के अभिभाषण में जितनी बातें की गई हैं, उस अभिभाषण के अनुसार अगर प्रदेश के अंदर की स्थिति देखी जाए तो सिवाय उसके अंदर कमियों के और कुछ नहीं है. उस अभिभाषण में कुछ भी नया नहीं है. सिर्फ वर्ष 2047 का आपका विजन है और वर्ष 2047 का विजन, मैं सिर्फ यह बताना चाह रहा हूँ कि जो वर्ष 2020 का कार्य था, उसको आप अभी वर्ष 2026 तक पूरा नहीं कर पाए. नैनपुर-बालाघाट सड़क वर्ष 2014 की थी, आप अभी वर्ष 2026 तक उसको नहीं कर पाए. ये विजन्स कैसे कम्प्लीट होंगे. माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने बोलने का अवसर दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्री विजय रेवनाथ चौरे (सौंसर) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, कल माननीय राज्यपाल जी ने अपने अभिभाषण में कहा था कि वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है. मैं सरकार से पूछना चाहता हूँ कि किसानों को कपास, मक्का, सोयाबीन, गेहूँ, सभी फसलों का समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है. सरकार किस बात का किसान कल्याण वर्ष मना रही है. किसानों को अपने खेत में जाने के लिए खेत सड़क, सुदृढ़ सड़क और कोई दूसरी जरूरतें पूरी नहीं हो रही है. सरकार किस बात के लिए किसान वर्ष मना रही है ? किसानों को खेत में जंगली सूअर, नीलगाय तथा आवारा पशु, फसलों को नुकसान पहुँचा रहे हैं और सरकार किसान वर्ष मनाकर खुश हो रही है. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सरकार से पूछना चाहता हूँ कि आज किसान बदहाल है, कर्ज में डूबा है. हमारे मध्यप्रदेश में लगभग 1 लाख रुपये एक किसान के ऊपर कर्ज है, आप ऐसा कोई किसान मध्यप्रदेश का बता दीजिये कि जिसके ऊपर कोई कर्ज न हो. सरकार सोलह लाख करोड़ रुपये के कर्जे उद्योगपतियों के माफ करती है, पर किसानों के कर्ज माफ करने के लिए उसके पास पैसे नहीं है. यह स्थिति पूरे प्रदेश की है. मैं एक और बात कहना चाहता हूँ कि किसानों की बहुत दुर्दशा है, किसान पीडि़त हैं, यह सब आप जानते हैं, पर थोड़ी सी दया किसानों पर भी कीजिये कि आप उनकी भावनाओं को समझते हुए किसान कल्याण वर्ष मनाएं, तो अच्छा होगा.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मनरेगा की बात करना चाहता हूँ कि योजनाओं का नाम बदलने में केन्द्र सरकार बड़ी माहिर है. कोई भी योजना का नाम बदलना उसको बहुत अच्छे से आता है. जी राम जी नाम रख दिया, कोई बात नहीं है, बहुत अच्छी बात है. प्रभु श्री राम का नाम रखा, पर जी राम जी तो पहली बार सुन रहे हैं. राम जी, कृष्ण जी और शिव जी सुनते थे, लेकिन राम के आगे जी कहां से लगा दिया ? किसी भी व्यक्ति के नाम के आगे जी लगता है, तो इनका बस चले तो यह कुछ भी करें. भगवान श्री राम के नाम के साथ भी छेड़छाड़ करेंगे. आपने गांधी जी के नाम के साथ जो धोखाधड़ी की है, मैं यह कहना चाहता हूँ कि गोड़से के पुजारी, सत्य और अहिंसा के पुजारी को नहीं समझ सकते हैं. गांधी जी, जिनकी 80 देशों में पूजा होती है. वह बड़े महान् व्यक्ति थे, जिन्होंने देश की आजादी में अपनी भूमिका निभाई है, आज उनके नाम के साथ छलावा हो रहा है. दूसरा, माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूँ कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना कांग्रेस की थी. इसमें आपने नाम तो बदल दिया, पर साथ ही साथ केन्द्र सरकार जो 90 प्रतिशत राशि देती थी, अब केन्द्र सरकार केवल 60 प्रतिशत राशि देगी. 40 प्रतिशत मध्यप्रदेश की सरकार देगी, एक तो प्रदेश पहले ही कर्ज में डूबा हुआ है, उस पर पांच लाख करोड़ रुपये का कर्ज है और अनुमानित बजट आने वाले समय में चार लाख 65 हजार करोड़ रुपये, मतलब 70 वर्ष के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है. कर्ज ज्यादा है और मध्यप्रदेश की सरकार की साढ़े आठ करोड़ जनता पूछना चाहती है कि उनके सपनों को चूर-चूर करने का मध्यप्रदेश की सरकार जो सपना देख रही है, यह उनका अधिकार है कि आप जो कर्ज ले रहे हैं, तो यह आपका पैसा कहां जा रहा है ? आप कर्ज ले रहे हैं, तो आज मध्यप्रदेश में दवाखानों की स्थिति क्या है ? आज स्कूलों की क्या स्थिति है ? आज हम पूछना चाह रहे है कि 23 हजार करोड़ रुपये का बजट स्वास्थ्य विभाग का है और 900 करोड़ रुपये का बजट केवल एंबुलेंस का है. सागर में एक घटना हुई, जिसमें एक गरीब व्यक्ति को एंबुलेंस न मिलने के कारण, उसकी पत्नी को हाथगाड़ी से अस्पताल ले जाते समय उसकी पत्नी ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया, यह मध्यप्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति है. स्वास्थ्य मंत्री जी, आपकी बीमार स्वास्थ्य व्यवस्था के मुंह पर यह (XX) है, आपको लज्जा आनी चाहिए. इस विभाग के मंत्रियों और इस सरकार को. आज प्रदेश में क्या बदहाल स्थिति है ? और बड़े-बड़े दावे करते हैं. मैं कहना चाहता हूँ कि मेडिकल कॉलेज की बड़ी-बड़ी बातें हो रही थीं, अगर मेडिकल कॉलेज अच्छे होते, तो आज प्रायवेट अस्पताल हजारों की संख्या में नहीं खुलते, आप गनीमत समझिये कि झोलाछाप डॉक्टर्स गांव में इलाज करते हैं, तो इलाज हो जाता है. इसका मतलब परिस्थितियां समझिये कि आपके पास न डॉक्टर्स हैं, न ही पैरामेडिकल स्टॉफ है, न आपके पास दवाइयां हैं, न ही आपके पास इक्विपमेंट हैं और आप अपने स्वास्थ्य व्यवस्था की पीठ थपथपा रहे हैं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, शिक्षा व्यवस्था की भी वही हालत है. वर्ष 2007 में जब शिक्षा का बजट 8 हजार करोड़ रुपये होता था, तब उस समय सरकारी स्कूलों में पढ़ने वालों की संख्या डेढ़ करोड़ होती थी.
अध्यक्ष महोदय - विजय जी, अब आप समाप्त करें.
श्री विजय रेवनाथ चौरे - माननीय अध्यक्ष महोदय, सबने 12-12 मिनट लिये हैं. मैं केवल 3 मिनट से बोल रहा हूँ. अध्यक्ष महोदय, मुझे आपका संरक्षण चाहिए.
अध्यक्ष महोदय - मैंने सामने लिखकर रखा हुआ है.
श्री विजय रेवनाथ चौरे - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं एक चीज कहना चाह रहा हूँ कि मध्यप्रदेश सरकार का वर्ष 2007 में बजट था, 8 हजार करोड़ रुपये और आज बजट 32 हजार करोड़ रुपये का है. स्कूल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या एक करोड़ है. डेढ़ करोड़ बच्चे वर्ष 2007 में सरकारी स्कूलों में पढ़ते थे और आज उनकी संख्या 1 करोड़ हो गई है. यदि सरकारी स्कूलों, कॉलेजों की स्थिति अच्छी होती तो आज गाजरघास की तरह निजी स्कूल और कॉलेज प्रदेश में नहीं खुलते. आज माता-पिता अपने बच्चों को सरकारी नहीं, निजी स्कूलों में पढ़ने भेज रहे हैं, यह इसलिए क्योंकि सरकारी स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं, व्यवस्थायें नहीं हैं, संसाधन नहीं हैं, इसके लिए मध्यप्रदेश की सरकार अपनी पीठ थपथपाती है कि हमने यह किया, वह किया. (शेम-शेम)
डॉ. प्रभुराम चौधरी- अध्यक्ष महोदय, रुपये 40 करोड़ की लागत से एक सांदीपनि विद्यालय बन रहा है, जो बड़े स्तर के हैं. माननीय सदस्य कभी वहां पर जाकर देखें. पूरे देश में केवल मध्यप्रदेश की सरकार है, जिसने सांदीपनि विद्यालय बनाये हैं, जहां 15 किलोमीटर से छात्रों को बसों से लाया जा रहा है, जहां संगीत एवं अन्य विषयों का ज्ञान छात्रों को दिया जा रहा है और ये कह रहे हैं कि स्कूलों में व्यवस्था नहीं है.
अध्यक्ष महोदय- विजय जी, आप अपनी बात पूरी करें.
श्री विजय रेवनाथ चौरे- अध्यक्ष महोदय, आप सांदीपनि विद्यालय खोल रहे हैं तो उसके बदले आप 15 स्कूल बंद करने जा रहे हैं इस बात का ध्यान रखें. मैं अपने विधान सभा क्षेत्र सौंसर की बात कह रहा हूं कि वहां बस के टेण्डर के लिए लोग नहीं मिल रहे हैं, सौंसर में जो सांदीपनि विद्यालय संचालित हो रहा है वहां 25 गांव से माता-पिता स्वयं के व्यय से, बच्चों को बसों से स्कूल भेज रहे हैं. आप बेकार की बातें करते हो, गुमराह कर रहे हो. आज परिस्थिति जो है सरकार चाहे जितनी अपनी पीठ थपथपा ले, आज लाड़ली बहना योजना की क्या स्थिति है ? आपने रुपये 3 हजार की बात कही थी लेकिन आज आप कितने दे रहे हैं ?
अध्यक्ष महोदय- कृपया शीघ्र अपनी बात समाप्त करें.
श्री विजय रेवनाथ चौरे- अध्यक्ष महोदय, मेरा एक और अनुरोध है कि विधवा माता-बहनों और दिव्यांगों को प्रतिमाह रुपये 5 हजार पेंशन के मिलने चाहिए. यदि उन्हें रुपये 5 हजार पेंशन मिलेगी तो वे आपको दुआ देंगे. यदि सरकार ने इसे लागू कर दिया तो मैं सर्वप्रथम माला लेकर आपके गले में पहनाऊंगा. पूरे प्रदेश में परिस्थिति किसान, बेरोजगार सभी के लिए खराब है.
अध्यक्ष महोदय, अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण की बात कहूंगा, 27% का आरक्षण माननीय कमलनाथ जी ने लागू किया था, इसी सदन में बिल पास हुआ था, तब मैं भी विधायक था और कमलनाथ जी की सरकार थी. मैं पूछना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश की भाजपा की सरकार उस आरक्षण को लागू क्यों नहीं कर रही है ?
अध्यक्ष महोदय, 10 हजार परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी, वे ओवर एज हो गए हैं लेकिन उस परीक्षा का परिणाम आज तक नहीं आया है, यह भाजपा की सरकार इसके लिए अपनी पीठ थपथपाती है, आज प्रदेश में 1 लाख अन्य पिछड़ा वर्ग के पद रिक्त हैं और उन्हें नहीं भरा जा रहा है, यह भाजपा की सरकार का अन्य पिछड़ा वर्ग विरोधी चेहरा है, यह सरकार दिखा रही है कि 7 वर्ष होने के बाद भी, आपने अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों को आरक्षण नहीं दिया, इसका पाप आपको भुगतना पड़ेगा. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, धन्यवाद.
श्रीमती रीती पाठक (सीधी)- अध्यक्ष महोदय, माननीय राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर कृतज्ञता प्रस्ताव पर आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, इसके लिए आपका ह्दय से धन्यवाद और आपके माध्यम से मैं, संसदीय मंत्री जी का भी धन्यवाद करती हूं. आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का वर्ष 2047 के विकसित भारत का जो विज़न है, उसमें खेल का विषय बहुत प्राथमिकता से लिया जा रहा है. खेलों भारत की नीति के तहत खेल को राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के निर्माण के माध्यम के रूप में मान्यता दी गई है. विकसित भारत के निर्माण के लिए, विकसित मध्यप्रदेश की निर्माण की यात्रा आज प्रगति पर है और इसलिए मध्यप्रदेश के विकास की यात्रा में खेलकूद में शामिल होनहार युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका हमें दिख रही है.
अध्यक्ष महोदय, मैं, धन्यवाद करती हूं प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव जी का, जिनके मार्गदर्शन में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के माध्यम से मंत्री विश्वास सारंग जी के द्वारा खेल को सशक्त बनाने के बेहतर प्रयास किए गए हैं. विश्व स्तर पर खेल महाशक्ति के रूप में उभरता हुआ भारत, मध्यप्रदेश के युवा और ऊर्जावान खिलाडि़यों के साथ कीर्तिमान स्थापित करने के लिए आगे बढ़ रहा है यह हम सब देख रहे हैं. विकसित भारत@ 2047 की बात अगर में मध्यप्रदेश की तरफ से कहूं हमारे खेल मंत्रालय की ओर से इस उद्येश्य को लेकर आगे बढ़ने का प्रयास किया गया है तो हमारे जो उद्येश्य हैं उन उद्येश्य में से पहला उद्येश्य वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को भारत का प्रमुख स्पोर्टस हब बनाना है. खेल सुविधाओं का निर्माण करना है. एक मजबूत खेल पर्यटन मण्डल बनाकर आर्थिक, खेल दोनों क्षेत्र मजबूत हों इसमें ऐसा उद्येश्य स्थापित करना है. डिजिटल तकनीक का उपयोग करते हुए वर्चुअल ट्रेनिंग और डेटा एनालिटिक को बढ़ावा देना है. यह हमारे खेल मंत्रालय का प्रमुख उद्येश्य है.
अध्यक्ष महोदय, खेल और युवा कल्याण विभाग के द्वारा खेलों के विकास और खिलाडि़यों के प्रोत्साहन की अगर बात करूं तो इसमें 18 खेलों की 11 खेल अकादमियां स्थापित हैं. मुझे बेहद खुशी हो रही है कि देश और प्रदेश की बात करने के लिए हमें आपके माध्यम से यह अवसर प्राप्त हो रहा है. मैं विगत दो वर्षों की बात करूं तो संचालित खेल अकादमियों में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हमारे देश को 19 स्वर्ण पदक, 19 रजत पदक, 26 कांस्य और कुल 74 पदक 21 खिलाडि़यों द्वारा प्रतिनिधित्व करके देश और प्रदेश का नाम गौरवान्वित किया गया है. राष्ट्रीय स्तर पर बात करूं तो विगत दो वर्षों में 121 रजत पदक, 118 कांस्य पदक कुल 438 पदक और 189 स्वर्ण पदक अर्जित करके हमारे प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया गया है. प्रमुख उपलब्धियों की बात करना कौन नहीं चाहता है. निश्चित रूप से हमारी सरकार बेहतर कर रही है, अच्छा कर रही है.
अध्यक्ष महोदय, खेल के स्तर को बढ़ावा देना हमारे केन्द्र सरकार का भी उद्येश्य है और हमारी प्रदेश सरकार का भी उद्येश्य है. डॉ. मोहन यादव जी के माध्यम से बहुत सारी चीजें ऐसी हैं जो मैं आपकी अनुमति से सदन में उल्लेखित करना चाहती हूं. 16 वीं एशियन शूटिंग चैम्पियनशिप की बात करूं जिसमें 17 पदक अर्जित किये गये हैं. इसमें 12 स्वर्ण, 3 रजत, 2 कांस्य और इवेंट में 4 स्वर्ण, 1 रजत, 2 कांस्य, पिस्टल इवेंट में 4 स्वर्ण और 1 रजत सम्मिलित हैं. यह मैं सिर्फ में कागज के माध्यम से उल्लेखित नहीं कर रही हूं. यह पूरे मध्यप्रदेश के लिए एक गौरव का विषय है जहां पर इतने प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं.
श्री कैलाश विजयवर्गीय-- इस पर तो सभी माननीय सदस्यों को मेज थपथपाकर खिलाडि़यों का सम्मान करना चाहिए. क्योंकि यह बहुत ही बड़ी उपलब्धि लगातार पिछले 10 वर्षों के अंदर आई है. पहले कभी इतने पदक नहीं आते थे. (मेजों की थपथपाहट)
अध्यक्ष महोदय-- आप यह हमेशा ध्यान दिलाते रहा करिये. (हंसी)
श्रीमती रीती पाठक-- अध्यक्ष महोदय, अभी रविवार के दिन आई.सी.सी मेन्स टी 20 वर्ल्डकप में सूर्य कुमार यादव जी की जो कप्तानी हुई है उसमें हमारे युवा खिलाडियों का शानदार प्रदर्शन रहा.
अध्यक्ष महोदय-- जब आप बोलती हैं तो भंवर सिंह जी ताली जरूर बजाते हैं.
श्रीमती रीती पाठक-- अध्यक्ष महोदय, मैं ह्दय से धन्यवाद करती हूं और आपकी मुस्कुराहट भी लगातार बनी रहती है जो मुझे उत्साह देती है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने अपनी मन की बात में एक विषय का उल्लेख किया था. यह बहुत बड़ा विषय है शहडोल के विचारपुर गांव में जिसको मिनी ब्राजील कहा जाता है. इसमें जर्मनी के एक प्रतिष्ठित क्लब के द्वारा जो प्रशिक्षण दिये जाने का काम हो रहा है इसमें मध्यप्रदेश की विशेष भूमिका रही है. मध्यप्रदेश शासन के द्वारा हमारे खिलाडि़यों एवं प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण देने के लिए, पांच खिलाड़ी और एक प्रशिक्षक को जर्मनी भेजा गया यह हमारे लिए बेहद गौरव का विषय है.
अध्यक्ष महोदय, अगर मैं हॉकी की बात करूं तो एशिया कप 2025 में राजगीर बिहार में विवेक प्रसाद, सागर के द्वारा हॉकी दल के सदस्य रहते हुए स्वर्ण पदक अर्जित किया गया है जो हमारे देश के लिए गौरवान्वित कर देने वाला विषय है. खेलो इंडिया में वॉटर स्पोर्ट्स फेस्टिवल जो श्रीनगर में हुआ था इसमें प्रथम स्थान हमारे खिलाड़ियों ने प्राप्त किया है. इसमें 10 स्वर्ण, 3 रजत, 5 कांस्य इस प्रकार कुल 18 पदक हमने अर्जित किए हैं. एशियन केनोसालम चेम्पियनशिप जिआजीगुईझूं चीन में दिनांक 14 से 17 तारीख तक वर्ष 2025 में आयोजित की गई थी. इसमें काफी सारे रजत पदक मध्यप्रदेश के खिलाड़ियों ने अर्जित किए थे. बिरसामुंडा जी की जयंती पर 15 नवंबर, 2025 के अवसर पर वर्ल्डकप 2025 की विजेता भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सदस्य सुश्री क्रांति गौड़ ने जिन्हें हम सभी ने बधाई दी थी. मध्यप्रदेश की सरकार की तरफ से उन्हें एक करोड़ रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है. इनका उल्लेख करना अतिआवश्यक है. हम राजनीतिक विषय पर चर्चा करते हैं उस दौरान हम यह भूल जाते हैं कि हमारी कुछ उपलब्धियां भी हैं. हमारे देश, प्रदेश के विकास में जिसने भी अपनी भूमिका का निर्वहन किया हो चाहे वह किसी भी दल का क्यों न हो हमें उसका धन्यवाद करना चाहिए. हमेशा उन्हें याद भी रखना चाहिए. रजत पाटीदार जी जो हमारे प्रदेश के खिलाड़ी हैं. आईपीएल 2025 में रॉयल चैलेंजर्स, बैंगलोर टीम का उन्हें कप्तान बनाया गया था. मैं मध्यप्रदेश के धार जिले की ज्योति चौहान का नाम लेना चाहूंगी. इन्होंने कमाल ही कर दिया. वर्ष 2023 में यूरोप में फुटबाल का लीग मैच चल रहा था उसमें हेट्रिक बनाने वाली यह पहली महिला खिलाड़ी हुईं. फायनल में ज्योति चौहान के द्वारा गोल करके टीम को जिताने का काम किया गया, जो हमें गौरवान्वित करता है. मध्यप्रदेश की राज्य महिला अकादमी में ग्वालियर की चार खिलाड़ी, मध्यप्रदेश की राज्य पुरुष अकादमी में..
अध्यक्ष महोदय -- आप विषय अच्छा रख रही हैं लेकिन समय की सीमा है.
श्रीमती रीति पाठक -- अध्यक्ष महोदय, थोड़ा सा समय दे दें. खेलो एमपी यूथ का प्रमुख उद्देश्य है ब्लॉक, जिला, संभाग एवं राज्य स्तर पर खिलाड़ियों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना. इसमें मेरे जिले के 18 खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा दिखाई है. वे वहां से मेडल लेकर आए हैं. यहां बैठे प्रत्येक जनप्रतिनिधि के जिले से प्रतिभावान खिलाड़ी निकलकर आते हैं. वर्ष 2025-26 में खेल विभाग को जो बजट मिला था उसमें 687.88 करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित हुआ था जिसमें से 662.88 करोड़ रुपए का आवंटन हमें मिला था और 3 फरवरी, 2026 तक 366.50 करोड़ रुपए खेल की व्यवस्था और प्रोत्साहन के लिए उपयोग हो चुका है. खेलो इंडिया गेम की अगर मैं बात करुं तो इसमें 3 स्वर्ण, 1 रजत, 1 कांस्य पदक हमने अर्जित किया है. खेलो इंडिया के बीच में सेपक टकरा (Sepak Takraw) गेम का आयोजन किया गया जिसमें टॉप 8 टीमों में स्थान प्राप्त करके मध्यप्रदेश का नाम सबसे ऊपर था.
अध्यक्ष महोदय, यहां खेल अधोसंरचना की बात आई है. मध्यप्रदेश में अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के खेल अधोसंरचना के निर्माण में हमारा मध्यप्रदेश आज अग्रणी राज्य बन चुका है. मैं इसके लिए डॉ. मोहन यादव जी, उनकी पूरी टीम, आपके मार्गदर्शन और खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग जी को धन्यवाद देती हूं.
अध्यक्ष महोदय, खेल सिर्फ खेल ही नहीं है. खेल में शारीरिक प्रतिभा का प्रदर्शन तो होता है लेकिन आगे आने वाला समय किस तरह से उनके भविष्य को सुरक्षित कर सके इस पर सरकार की पूरी चिंता है. मध्यप्रदेश पुलिस में स्पोर्ट कोटा निर्धारित किया गया है. जिसके अन्तर्गत प्रतिवर्ष 10 सब इंस्पेक्टर व 50 कांस्टेबल की नियुक्तियां इसी विभाग के माध्यम से की जाएंगी. प्रत्येक विधान सभा क्षेत्र में चरणबद्ध तरीके से खेल अधोसंरचना के अंतर्गत इन डोर हॉल के निर्माण हेतु हमारे मुख्यमंत्री जी ने मुख्यमंत्री खेल अधोसंरचना विकास योजना प्रस्तावित की है जो हम सबके लिए एक अच्छी बात है. प्रदेश के खिलाडि़यों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षण हेतु विदेश भेजा जा रहा है और विदेशी प्रशिक्षकों को भी आमंत्रित किया जा रहा है. प्रदेश में खेल अधोसंरचना का निर्माण जन निजी भागीदारी यानि पीपीपी योजना के अंतर्गत खेल प्रतियोगिताओं व खेल गतिविधियों का क्रियान्वयन, प्रोत्साहन, सीएसआर से किया जाना प्रस्तावित है. यह सारी प्रक्रियाएं हैं जिनमें खेल को प्रोत्साहन देना, खिलाडि़यों को और क्षमतावान बनाकर उनके प्रदर्शन को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना यह हमारे प्रदेश का और हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी का मुख्य उद्देश्य है. अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया धन्यवाद. जय हिन्द.
5.37 बजे अध्यक्षीय घोषणा
सदन के समय में एक घण्टे की वृद्धि की जाना
अध्यक्ष महोदय -- सदन के समय में एक घण्टे की वृद्धि की जाए मैं समझता हूं कि सदन इससे सहमत है.
श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, फिर एक ही घण्टा होना चाहिए ज्यादा नहीं हो. .(हंसी)..
श्री उमंग सिंघार -- अध्यक्ष महोदय, माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी सहमत हैं तो मेरे हिसाब से 6 बजे तक ठीक रहता है.
अध्यक्ष महोदय -- चलिए देख लेते हैं. आधे घण्टे में कुछ फर्क नहीं पड़ता है.
श्री उमंग सिंघार -- अध्यक्ष महोदय, अगर आप बैठाएंगे तो रात भर में फर्क नहीं पड़ेगा ..(हंसी)..
श्री भैरो सिंह (बापू) (सुसनेर) -- अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद आपने बोलने का मौका दिया. मैं बात करता हूं प्रदेश की बहुमूल्य कृषि एवं शासकीय जमीनें जो बड़े-बड़े उद्योगपति और ऊर्जा प्लांटों के नाम पर आवंटित की जा रही हैं, स्थानीय किसान, भूमिहीन परिवार, ग्रामीण युवा अपने अधिकारों से वंचित हो रहा है. जिन जमीनों पर पहले खेती होती थी, जिनसे हजारों परिवारों का पालन पोषण होता था उनको कॉर्पोरेट घरानों को दे दिया गया. क्या सरकार बताएगी कि कितनी जमीन, किस कंपनी को, कितने वर्षों के लिए और किस दर पर दी गई है ? जब चुनाव का समय आता है तो गौमाता के नाम पर हम सब वोट मांगते हैं लेकिन हकीकत यह है कि प्रदेश की सड़कों पर गायें भूख और दुर्घटनाओं से मर रही हैं. नेशनल हाइवे हो या ग्रामीण सड़कें आये दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं. जनता घायल हो रही है. वहीं हम देखते हैं कि सड़कों के ऊपर बुजुर्गों को कई सांड उठाकर फेंके देते हैं. आज पशु मर रहे हैं. अगर सरकार वास्तव में गौसेवा के प्रति गंभीर है तो फिर आवारा पशुओं की समस्या का स्थाई समाधान क्यों नहीं हो रहा. आज गौशालाओं की स्थिति कागजों पर यह है कि कई स्थानों पर गौशालाओं की घोषणा हुई, बजट स्वीकृत हुआ लेकिन जमीन पर व्यवस्था नहीं दिखती है. जो गौशालाएं संचालित हो रही हैं वहां चारा, पानी एवं चिकित्सा की भारी कमी है. कई गौशालाएं फण्ड के अभाव में बंद होने की कगार पर हैं. सरकार बताए कि कुल कितनी गौशालाएं कार्यरत् हैं, उनमें कितने पशु और प्रति पशु कितना बजट दिया जा रहा है ? आज कहने को तो हम डबल इंजन की सरकार बोलते हैं. प्रदेश और केन्द्र दोनों जगह इस दल की सरकार है जिसे डबल इंजन कहा जाता है. जब दोनों इंजन एक ही दिशा में हैं तो फिर समस्या कम क्यों नहीं हो रही है ? किसानों की आय नहीं बढ़ी. बेरोजगारी कम नहीं हुई और गौ संरक्षण की स्थिति बदतर है. जनता को सिर्फ नारे मिल रहे हैं समाधान नहीं.
अध्यक्ष महोदय, जब कमलनाथ जी की 18 महीने की सरकार थी तब लगभग 1,000 गौशालाएं स्वीकृत की गई थीं और वह बनी भी हैं. आज उन गौशालाओं में भी विद्युत की व्यवस्था नहीं है, पानी की व्यवस्था नहीं है. कम समय में भी योजनाओं को उन्होंने जमीन पर उतारा था. यह दिखाता है कि अगर नीयत साफ हो तो कम समय में भी काम हो सकते हैं. आवारा पशुओं के संरक्षण के लिए राज्य स्तर पर ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना लाई जाए. हर विकासखण्ड में आधुनिक, सुसज्जित और पारदर्शी गौशालाएं स्थापित की जाएं. उद्योगपतियों को दी गई जमीनों की शर्तें और समझौते सदन में सार्वजनिक किए जाएं. प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा और स्थानीय युवाओं को रोजगार सुनिश्चित किए जाएं. सड़कों पर पशु दुर्घटनाओं को रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए और बजट का प्रावधान किया जाए. आज मुंह में राम और बगल में छुरी वाली नीति से प्रदेश नहीं चलेगा. अगर गौमाता के नाम पर वोट लिया गया है तो उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभानी होगी. प्रदेश की जमीन, किसानों को अधिकार और गौ संरक्षण यह राजनीति का नहीं संवेदनशील शासन का विषय है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अपने जिले की बात कहना चाहता हूं. पहले लोग कहते थे कि उड़ता पंजाब, आज हम मीडिया के अंदर देखते हैं, सुबह अखबार पढ़ते हैं तो क्षेत्र में दिखता है कि उड़ता आगर. अध्यक्ष महोदय, हमारा जिला पूरा नशे की गिरफ्त मे है, यहां पर युवाओ का भविष्य खतरे मे हैं, परिवार टूट रहे हैं, अपराध बढ़ रहे हैं, अगर समय रहते कड़ी कार्यवाही नहीं हुई, सरकार द्वारा नशे पर अंकुश नहीं लगाया गया तो स्थिति भयावह हो सकती है. क्या जिला प्रशासन और पुलिस को इस बात की जानकारी नहीं है. बाहरी एजेंसियां आकर के कार्यवाही करती हैं और यह स्थानीय पुलिस पर सवाल है कि नारकोटिक्स ब्यूरो की टुकडी आकर के जिला आगर में ड्रग्स पकड़ती है, राजस्थान राज्य की पुलिस आकर के मध्यप्रदेश के जिला आगर में ड्रग्स को पकड़ना क्या दर्शाता है. क्या स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी नहीं थी, क्या यह स्थानीय स्तर पर खुफिया तंत्र की विफलता नहीं दर्शाता .
अध्यक्ष महोदय, हमारे यहां निगरानी नहीं होती है, राजस्थान राज्य से बताया जाता है तब जानकारी मिलती है कि राजस्थान की ओर से नशे की खेप जिले में प्रवेश कर रही है. अगर ऐसा है तो सीमा पर चेकिंग और निगरानी व्यवस्था क्यों मजबूत नहीं है. क्या दोनों राज्यों की पुलिस के बीच में समन्वय नहीं है या फिर कोई और समस्या है. अध्यक्ष महोदय, बड़े लोगों पर कार्यवाही नहीं होती है सिर्फ छोटे लोगों पर कार्यवाही कर दी जाती है, जब ऊपर से दवाब आता है तो देखा गया है कि निर्दोष छोटे लोगों पर कार्यवाही करके पुलिस अपनी इतिश्री कर लेती है.और बड़े बड़े जो मगरमच्छ हैं वह बच जाते हैं. आज तक जितनी भी रेड हुई हैं, छापे पडे हैं उन बड़े लोगों का आज तक नाम नहीं आया है, ऊपर के ऊपर उनके नाम उड़ जाते हैं. क्या हमारी पुलिस बड़े नेटवर्क तक पहुंचने में असफल है या फिर कार्यवाही करने से बच रही है,या पुलिस की अपराधियों से संलिप्तता है. आज युवाओं का भविष्य दांव पर है, नशे के कारण अपराध, चोरी, हिंसा की घटनायें बढ़ रही हैं, कई परिवार बर्बाद हो रहे हैं, माता पिता चिंतित हैं, यह सिर्फ कानून और व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, एक सामाजिक संकट हैं. इसलिये अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सरकार से यह मांग करता हूं कि आगर जिले में एक विशेष एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित की जावे. राजस्थान सीमा पर एक स्थायी चेक पोस्ट बनाकर के सघन निगरानी की जाये, पिछले पांच वर्षो में ड्रग्स की जब्ती और कार्यवाही का श्वेत पत्र सदन में रखा जाये, निर्दोष लोगों को न फंसाये, इनकी निष्पक्ष जांच होना चाहिये और स्कूल और कालेज स्तर पर नशामुक्ति अभियान चलाया जावे.
अध्यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने कहा है कि आगर जिला उड़ता आगर कहलाने लगा है. यह सिर्फ एक शब्द नहीं है, चेतावनी है. पुलिस की निष्क्रियता हो या तंत्र की कमजोरी इसकी जिम्मेदारी तय होना चाहिये.
माननीय अध्यक्ष महोदय, हम राजस्व विभाग की बात करना चाहते हैं. राजस्व विभाग प्रदेश में पूरी तरह से चरमराया हुआ है. आम नागरिक के नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, नक्शा, खसरा या ऋण पुस्तिका की साधारण प्रति के लिये महिनों भटकना पड़ता है. सरकार की तरफ से आन लाइन व्यवस्था का दावा किया जाता है लेकिन जमीनी स्तर पर लाखों प्रकरण अभी भी पेंडिंग पड़े हुये हैं. माननीय मंत्री जी राजस्व विभाग अभी सदन में नहीं है लेकिन उनके पास में हमारे पूरे जिले के लोग आ चुके हैं, राजस्व विभाग की स्थिति यह है कि मोनाकरजू क्षेत्र के अंदर किसान आज रो रहा है, मंत्री जी को कई बार पत्र दे चुके हैं, आज उनकी भूमि पूरी तरह से छिन्न भिन्न कर दी गई है. राम सिंह की भूमि कालू सिंह के नाम पर और कालू सिंह की भूमि बाबूलाल के नाम पर कर दी गई है दो साल हो गये हैं निरंतर मांग कर रहे हैं लेकिन उसका निराकरण आज तक नहीं हो पाया है.
अध्यक्ष महोदय- भैंरो सिंह जी आपका समय पूरा हो रहा है.
श्री भैरो सिंह बापू-- माननीय अध्यक्ष महोदय, बस समाप्त ही कर रहा हूं. अध्यक्ष महोदय, शिक्षा की हम बात करें तो आज प्रदेश में शिक्षा पालकों के लिये सबसे बड़ा आर्थिक बौझ बन चुकी है. मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग के लोग अपने बच्चों को पढ़ाने के लिये कर्ज लेने को मजबूर हैं. आज फीस ,एडमीशन हर जगह पर मनमानी वसूली हो रही है, कई परिवार अपनी आमदनी का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ स्कूल फीस में दे रहे हैं और बाकी जरूरतों के लिये संघर्ष कर रहे हैं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मेरे क्षेत्र की बात करना चाहता हूं. आज वहां पर स्कूल की स्थिति दयनीय है. सीएम राइज स्कूल की बात कहना चाहता हूं कि सीएम राइस वास्तव में अच्छे स्कूल खुले हैं लेकिन आज 8 किलोमीटर के दूर की रेंज के बच्चे को सीएम राइज स्कूल में एडमीशन नहीं दिया जाता है. हमारे यहां पर एक नगर से दूसरे नगर की दूरी 30 किलोमीटर है. हमारे यहां नलखेड़ा से सुसनेर और सुसनेर से सोयत की दूरी 30 किलोमीटर है तो बीच में जो निवास करते हैं तो उनके बच्चे कहां पर पढ़ने जायेगें.
अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सरकार से यह मांग करना चाहता हूं कि कम से कम 15 किलोमीटर की दूरी हो तो बीच में रहने वाले बच्चों को भी अच्छी शिक्षा मिल सके.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने पूर्व में भी मांग की थी और आज भी इस बात की मांग कृषि मंत्री जी से करता हूं कि बडेरा डेम से शिक्षण योजना की जो पाईप लाईन है, मैंने माननीय मंत्री जी से दो तीन बार निवेदन किया है, हर विधानसभा सत्र में मैंने निवेदन किया है कि परिसीमन क्षेत्र कृषि से वंचित है इसको आज बड़ागांव करजू मोना क्षेत्र है जहां पर आज सिंचाई की व्यवस्था नहीं है. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से कहना चाहूंगा कि आज उस क्षेत्र को जोड़ा जाये चाहे पड़पड़ा पट्टी हो या श्वेत परपट्टी हो यह भी वंचित है मैंने पहले भी लिखित में दिया है. माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे गांव में एक सूजरखेड़ी हायर सेकेन्डरी स्कूल है 9वी से 12वीं का जिसमें 200 बच्चे हैं और एक भी शिक्षक नहीं है, यह कितने दुर्भाग्य की बात है और एक तोला खेड़ी का स्कूल है जहां पर पहली से आठवीं तक की बात करता हूं मैं तोला खेड़ी नलखेड़ा के अंदर जिसमें 15 बच्चे आन लाइन दिखाये जाते हैं एक भी बच्चा नहीं है और 5 अध्यापक वहां पर रहता हैं, 5 अध्यापक की वहां पर ड्यूटी लगी हुई है यह कितना बड़ा शिक्षा के नाम पर खिलवाड़ है. यह कितना बड़ा शिक्षा के क्षेत्र के साथ खिलवाड़ है. आज एट लाइन की बात करें हम. एक महत्वाकांक्षी योजना मुम्बई-दिल्ली गडकरी जी ने दी. उन्होंने यह दिया, पर उसमें जो मध्यप्रदेश का हिस्सा है भानपुरा से लेकर पूरा जावरा तक. पहले भी गरोठ के जो पूर्व विधायक थे धाकड़ जी, उन्होंने ध्यानाकर्षण लगाया था, मैंने भी लगाया था. उसके रोड के दोनों तरफ किसानों की यह स्थिति है कि उनको पानी निकासी की जगह नहीं है एट लाइन के साइड में. इससे आज किसान की फसलें बर्बाद हो रही हैं और न ही वहां किसान को खेती पर जाने की व्यवस्था है. मेरा आपसे निवेदन है कि आज चम्बल केचमेंट की स्थिति देखें आप कि चम्बल के आस पास में जो 50 साल पहले डेम बना था, सारे आस पास की जो सुवासरा, शामगढ़ क्षेत्र की स्थिति है, वहां खेत कट चुके हैं और किसान आज खून के आसूं रो रहा है.
अध्यक्ष महोदय—भैरो सिंह जी, कृपया समाप्त करें.
श्रीमती मालिनी लक्ष्मणसिंह गौड़ (इन्दौर-4)—अध्यक्ष महोदय, माननीय राज्यपाल जी के अभिभाषण पर धन्यवाद ज्ञापित करने का मुझे अवसर आपने और सदन ने दिया है, मैं सभी का धन्यवाद करती हूं. प्रदेश के मुख्यमंत्री, डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार विजन 2047 का समृद्ध म.प्र. को लेकर हर क्षेत्र में कार्य कर रही है. शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री, डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदेश में 100 प्रतिशत साक्षरता एवं पहली से बारहवीं तक 100 प्रतिशत नामांकन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसको लेकर प्रदेश सरकार के प्रयासों से प्रदेश भर के शासकीय विद्यालयों में हर वर्ष प्रारम्भ होने पर प्रवेश उत्सव कार्यक्रम मनाया जाता है, जिससे नये विद्यार्थियों की संख्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है. साथ ही उल्लेखनीय है कि विद्यालय छोड़कर जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी कम होती जा रही है. आज के दौर में निजी स्कूलों में बच्चों को शिक्षा दिलवाना कठिन कार्य है. मुख्यमंत्री, डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व वाली सरकार में बच्चों को पढ़ने के लिये किताबों की व्यवस्था करवाई जा रही है, जिससे बच्चों के माता पिता पर पढ़ाई से होने वाले खर्चे में बहुत कमी आई है. हर वर्ष शासकीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अच्छे नम्बरों से पास होने वाले बच्चों को सरकार की ओर से प्रोत्साहन के रुप में लेपटाप, स्कूटी, साइकिल का वितरण किया जा रहा है. विगत् वर्ष में 94300 विद्यार्थियों को लेपटाप का वितरण किया गया. 7890 विद्यार्थियों को स्कूटी का वितरण किया गया और अब तक लगभग 4 लाख 85 हजार साइकिल का वितरण किया जा चुका है. बच्चों को मिल रहे प्रोत्साहन से शासकीय विद्यालयों में पढ़ने को लेकर एक सकारात्मक परिवर्तन दिखाई दे रहा है, जिसका एक उदाहरण मेरी विधान सभा क्षेत्र में लक्ष्मणसिंह गौड़ विद्यालय, अत्री देवी स्कूल, मालव कन्या सांदीपनि विद्यालय में देखने को मिलता है. इन सभी स्कूलों में एडमिशन के लिये वेटिंग होती है. मेरी विधान सभा क्षेत्र के यह तीनों शासकीय विद्यालय किसी निजी विद्यालय से कम नहीं है. यहां स्मार्ट क्लास बनी हैं, जिनमें बड़ी संख्या में मिडिल एवं हायस्कूल के बच्चे आधुनिक पद्धति से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और बच्चों की शिक्षा के प्रति रुचि दिन पर दिन बढ़ती जा रही है और विद्यालयों में मूलभूत सुविधायें जैसे पेयजल, पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब, प्ले ग्राउण्ड और स्मार्ट क्लासेस बनी हुई हैं, जिससे छात्रों के साथ ही शिक्षकों की सुविधा में भी बढ़ोतरी हो रही है. शासकीय स्कूलों की शिक्षा भी गुणवत्ता वाली शिक्षा हो गई है. आज हमारे प्रदेश में 799 पीएम श्री विद्यालय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रमुख घटकों का क्रियान्वयन किया जा रहा है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, अच्छी शिक्षा जब भी मिलेगी, जब शिक्षक अच्छा होगा. इस बात को ध्यान में रखते हुए हमारे प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत शिक्षकों को नयी पद्धति से पढ़ने का प्रशिक्षण प्राप्त हो रहा है. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश भर में डेढ़ लाख से अधिक शिक्ष्ाकों ने प्रशिक्षण लिया है, जिसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिल रहा है. शिक्षकों की उपस्थिति की मानिटरिंग के लिये हमारे शिक्षक नाम का एप बनाया गया है, जिससे शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज की जाती है. साथ ही स्कूल शिक्षा के साथ-साथ प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी तेजी से प्रगति की है. प्रदेश के लगभग 5 लाख 72 हजार विद्यार्थियों का प्रवेश अपार आईडी के माध्यम से किया गया है. तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में ऑन लाइन काउंसिलिंग के माध्यम से 1 लाख 91 हजार 130 विद्यार्थियों ने प्रदेश के शासकीय कालेजों में प्रवेश लिया. स्वयं पोर्टल के माध्यम से 4 लाख 50 हजार विद्यार्थियों ने पंजीयन किया है. प्रदेश भर के विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में स्मार्ट क्लास, लेब, हॉस्टल एवं अत्याधुनिक भवन निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश में भारतीय ज्ञान परम्परा प्रकोष्ठ स्थापित किया गया है, जिससे विद्यार्थियों के साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं वैचारिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहित किया जाये. प्रदेश के 550 महाविद्यालयों में यहां कार्य चल रहा है. उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश में गुणवत्ता की शिक्षा देने का कार्य किया है. वर्तमान में 9 विश्वविद्यालय, 163 महाविद्यालय, 52 निजी विश्वविद्यालय और एक मान्यता प्राप्त है. इंदौर का देवी अहिल्या विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षा उत्कृष्ट संस्थान भोपाल में अपनी छाप राष्ट्रीय स्तर पर छोड़ी है और प्रदेश को गौरान्वित किया है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश में नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से स्मार्ट सिटी इन्क्यूबेशन सेंटर के माध्यम से रोजगार हेतु एमओयू साइन कर संयुक्त कार्य चल रहा है. स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन योजना के अंतर्गत 78 हजार 948 विद्यार्थी लाभान्वित हुए हैं और 12 हजार से अधिक विद्यार्थियों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं. अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया उसके लिये मैं आपको धन्यवाद देती हूं.
श्री लखन घनघोरिया ( जबलपुर पूर्व ) - अध्यक्ष महोदय, महामहिम राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर सरकार की, प्रदेश की समृद्धि और विकास की अवधारणा जो रहती है उसको इंगित करता है. जैसा सरकार पढ़वाना चाहती है वैसा राज्यपाल जी पढ़ देते हैं. सरकार का भी अपना सिस्टम है कि अधिकारी पूरा अभिभाषण बनाते हैं तो शब्द यदि देखें तो अंग्रेजी के वर्ड पूरे अभिभाषण में आपको मिलेंगे. आप बातें बड़ी बड़ी करते हैं लेकिन लेंग्वेज पूरी अधिकारियों की होती है. किसी ने लिखा है कि -
"तख्त के साएं का जब भी ईमान मरता है,
गरीबों के हिस्से के लिए जारी बयान मरता है
चैन से सोता है भर पेट, बड़ा आदमी,
क्या करिश्मा है कि भूखा मजदूर और किसान मरता है."
किसानों की स्थिति मजदूर की स्थिति आपने अभिभाषण में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए ऑपरेशन मुस्कान की बात की है. अभिभाषण में बड़े उससे हाईलाइट किया गया कि महिलाओं की स्थिति क्या है. गुमशुदा महिलाओं की 5 साल में प्रदेश में 54803 बालिकाएं लापता हैं. सिर्फ एक साल का आंकड़ा है 13146 एफआईआर हुई हैं. यह आपके अभिभाषण का दूसरा पहलू है, जिसका आप कहीं उल्लेख नहीं करते हैं. सरकार किसानों की बात करती है और किसानों के मामले में आप अपनी बात पर भी कायम नहीं होते हैं. समर्थन मूल्य की स्थिति क्या है, आपके घोषणा पत्र हो, संकल्प पत्र हों जो भी हो, 2700 और 3100 की स्थिति कहां आती है. आप चुनाव के समय घोषणा कर देते हैं और तो और एक डील हो गई अमरीका से, कुल मिलाकर हम विश्व गुरू बनने की बात करते हैं लेकिन (XX) होते हैं उसके बाद हम बड़ी बड़ी बात करते हैं, सही कह रहे थे शेखावत जी कि कैसे गुरू, चेला तो एक भी नहीं है? लेकिन हम गुरू का आश्रम खोले हैं बस. हम (XX) होते हैं लेकिन विश्व गुरू बनते हैं. स्थितियां बिल्कुल साफ हैं. किसान परेशान है चाहे बिजली की बात ले लो. रात में बिजली दी जाती है. खाद, बीज जो कह रहे हों, क्या मुरैना से लेकर पूरे चंबल एरिया में आपके एरिया में क्या किसानों पर लाठियां नहीं चली हैं. इन सब चीजों का कहां उल्लेख है?
अध्यक्ष महोदय, सरकार ने बड़ी बड़ी बात अपने तरीके से अभिभाषण में रखी है. उसमें विशेष रूप से गौ शालाओं के लिए कामधेनू निवास जैसी योजना की बात की है. इसी भोपाल के अंदर 600 गौ माताओं की दुर्गति क्या हुई है. 26 टन सरकार की निगरानी में, सरकार की आंख के नीचे इसका कहां उल्लेख है. हम उसके लिए कर क्या रहे हैं? गौ वंश की बात हम बड़ी बडी करते हैं, स्थिति क्या है, आप हाई-वे में चले जाइए. नेशनल हाई-वे में जाइए, आपका मन द्रवित हो जाएगा. रास्ते में एक्सीडेंट में गौ माता का बिखरा हुआ जब शरीर देखेंगे, चिथड़े देखेंगे तो आपका मन द्रवित होता है और उस दिन फिर आपका मन कहीं नहीं लगता है, यह हालत आपके गौ वंश की हैं.
अध्यक्ष महोदय, श्री हेमंत खंडेलवाल जी पुलिस की बड़ी सराहना कर रहे थे. गृह मंत्रालय की बड़ी तारीफ कर रहे थे कि सबसे पहले मैं धन्यवाद देना चाहता हूं. चालान, चालान एक प्रक्रिया है. विवेचना में जो कुछ खामियां होती हैं महीने के अंदर चालान पेश करो. आपने 2 महीने कर दिया. आपने 2 महीने कर दिया. उससे कोई अपराध रूक नहीं गए. उससे कोई अपराध तो रूके नहीं, लेकिन चालान शब्द का अब कितना उसका दुरूपयोग हो रहा है. हर शहर में यातायात की स्थितियां क्या हैं. आप किसी भी बडे़ शहर में चले जाइए, आप एक नंबर का अवॉर्ड ले लीजिए. इंदौर शहर में भी यातायात की क्या स्थिति है. इंदौर बहुत स्वच्छ शहर है. आप किसी बडे़ शहर में चले जाइए, छोटे शहर में चले जाइए, लेकिन क्या अब पुलिस सब चीजें छोड़कर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालान करने बैठ जाएगी ? यदि पति-पत्नी शादी में कहीं जा रहे हैं तो पहले तो वे 500 रूपए की चढ़ोत्तरी चढ़ाकर जाएंगे. आप मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 का दुरूपयोग देखिए.
अध्यक्ष महोदय, यह बड़ा विचित्र है कि आप शराब की दुकानें खुलवाते हैं, अहाता बंद करवाते हैं और जो वाहन चालक हैं जो शराब के नशे में चलता है उसके लिए धारा बनी है. जब कोई धारा बनती है, जब हम कोई कानून बनाते हैं तो इस बात का चिंतन क्यों नहीं करते हैं ? हम शराब की दुकानों में अहाता बंद कर रहे हैं, शराब बिकवा रहे हैं और उसके बाद यदि कोई बाइक से जा रहा है तो मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत कार्यवाही करते हैं. थानों को टॉरगेट दिया जाता है. 10-12 हजार रूपए उसका जुर्माना है. 3 हजार रूपए एक वकील लेता है. एक गरीब व्यक्ति जो वाहन फायनेंस कराता है. उसको कितना पड़ता होगा ? 15 हजार रूपए उसको चालान का जुर्माना भरना पड़ता है. अब वह पैसा कहां जाता है. वह पैसा कोर्ट के माध्यम से कोषालय में जमा होता है. उसका दूसरा दुरूपयोग यह है कि सिपाही रोककर बोलता है कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 लगाएंगे, तो आप 5-7 हजार रूपए में समझौता कर लो. जब वह पैसा देता है तो वह सिपाही जेब में रख लेता है और उनको जाने देता है. लेकिन 10 हजार रूपए जुर्माना तो भरना ही पड़ता है. मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत 10 थानों में टॉरगेट दिया जाता है और कम से कम 5 सौ के चालान 25 से 30 थानों में भरवाए जाते हैं. आप पूरे प्रदेश के हर थाने में पूछ लीजिए, यहां जितने माननीय बैठे हैं, यह बतायेंगे. बड़ी लूट मची है. सरकारें कुछ नहीं कर रही हैं. इसका उल्लेख कहां है ? गरीब मर रहा है. कार वालों के कभी चालान नहीं होते. शराब पीकर कार वाले नहीं चलते. बाइक वाले पकड़ में आ जाते हैं, तो गृह मंत्रालय की यह स्थिति है कि कहीं भी आपको चौराहे में ट्रैफिक के लिए यातायात के सिपाहियों की ड्यूटी लगी है, तो बैठकर मोबाइल चलाते रहेंगे. यातायात व्यवस्थित नहीं करेंगे. इसमें सुधार होना चाहिए. यातायात पुलिस बल नहीं है तो आप यातायात पुलिस बल को बढ़ाइए. हर जिले में, हर थाने में बल नहीं हैं. वास्तविकता से हम लोग भी सहमत हैं. हम बल बढ़ाने के लिए प्रयास कहां कर रहे हैं ? बल का दुरूपयोग कर रहे हैं. दूसरी जगह यातायात पुलिस बल को लगाकर चालान की प्रक्रिया में कानून व्यवस्था बिगड़ी पड़ी है. अब मूसा गैंग पैदा नहीं होगी, तो कौनसी गैंग पैदा होगी. जब पुलिस का कोई प्रभाव ही नहीं है. मूसा गैंग के बारे में आपके ही विधायक कह रहे हैं कि वे मूसा गैंग से परेशान हैं. माननीय अभय मिश्रा जी भी कह रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय -- अभय मिश्रा जी को अनुभव ज्यादा है..(हंसी)..
श्री लखन घनघोरिया -- अध्यक्ष महोदय, हमारे यहां जबलपुर में अभी अवैध जहरीली शराब के चलते 16 लोगों की मौत हुई थी. बाकायदा नाम सहित है. बड़ा बवाल मचा. आंदोलन हुआ. हमने उससे पूछा, जिसकी सरकारी दुकान थी. हमने पूछा यह कैसे हुआ, तो वह बोला कि हमारे यहां की शराब तो सही है. नगरनिगम का जो पानी आ रहा है, वह खराब है. नगर निगम का पानी खराब है. लोग शराब से नहीं मरे हैं. पानी से मरे हैं. यह जबलपुर में भी है. इंदौर की बात तो सामने आ गई. कल आप बताएं, तो हम लैब की पूरी रिपोर्ट लाकर रख दें. इंदौर के भागीरथपुरा की घटना सामने है. यह दिख गई. पूरे प्रदेश की तो दिख ही नहीं रही है. नाले के अंदर से पाईपें गई हैं. नालों से पाईप गये हैं. आपकी पाईप लाईन पूरी दूषित हैं वहां पर दूषित पानी आयेगा ही. हमारे यहां पर घनी बस्तियों में यह स्थिति होती है कि जब कभी जल संकट रहता है तो उस समय लोग क्या करते हैं कि जब पानी का फोरस नहीं हो तो पाईप लाईन में छेद करके पानी लेते हैं. कुल मिलाकर के पाईप को बांसुरी बना लेते हैं. जब बांसुरी बनती है तो उसमें प्रदूषित पानी उसके अंदर आ जाता है. यह सब जगहों पर है. जबलपुर में भी है आप कहेंगे तो पूरा रिकार्ड उठाकर के आपको दे देंगे, लेब का टेस्ट भी दे देंगे. यह स्थिति आपकी जल वितरण की है. पहले यह सुना था कि लोग प्यास से मर गये, अब तो लोग पानी पीकर के मर रहे हैं, यह बड़ी विचित्र दशा है, यह प्रदेश की स्थिति है. दूसरा नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा छः नवीन उद्वहन माईक्रो सिंचाई परियोजना सहित उन परियोजनाओं पर लगभग 10 हजार 818 करोड़ रूपये की लागत से 3 लाख 22 हजार हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित की गई. हमारे जबलपुर में बरगी बांध में दाईं तट नहर फूट गई उससे कम से कम 100 किसानों के खेतों में पानी भर गया. आज तक उसकी किसी ने सुध नहीं ली कि कोई उसका मुआवजा कर लें, उनका कोई दुखः दर्द पूछ लें. हम किसानों की बात कर रहे हैं आपके हर विभाग की स्थिति यही है. एससी विभाग में बातें बड़ी बड़ी होती हैं बरैया जी ने सही कहा था पहले यह होता था एससी वर्ग का कोई विधायक है तो एससी वर्ग के विकास मद का जो पैसा रहता था जिले में उसकी नगरानी कमेटी बनती थी सलाहकार निगरानी समिति में उसको विधायक को अध्यक्ष बनाया जाता था. अब क्या हो रहा है कि हम लोगों को पता ही नहीं है एससी का जो 20 प्रतिशत फंड आया वह कहां चली जाती है. एससी के विधान सभा क्षेत्रों में नहीं आती. हमारे शहर में आठ विधान सभाएं हैं पता चला कि मंत्री जी की विधान सभा में चली गईं. भूल भटके आठवां हिस्सा भी आ जाये तो हम लोगों को संतोष हो, बिल्कुल नहीं आ रहा है. क्योंकि अब तो कलेक्टर आवंटन तय करते हैं. छात्रवृत्ति की स्थिति क्या है ? आपने छात्रवृत्ति का बता दिया कि पिछले वर्षों में 49 लाख से अधिक विद्यार्थियों को 2 लाख 883 करोड़ रूपये से अधिक की छात्रवृत्ति प्रदान की गई. आप उसकी जमीनी हकीकत को समझ लें. चाहे पोस्टमेट्रिक छात्रवृत्ति हो, विदेश में जो बच्चे पढ़ने जाते हैं उनके लिये आपने सारी योजनाएं बंद कर दीं. स्थिति पूरी एससी वर्ग की बाकी दूसरी योजनाओं में दूसरे विभाग में एससी का पैसा जा रहा है. लेकिन एससी वर्ग का जो पैसे का उपभोग है एससी एसटी वर्ग के लिये जो पैसा मिलना चाहिये था, वह उनको नहीं मिल रहा है. इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं की बात में माननीय हेमंत खंडेलवाल जी ने भी बोला हमारे माननीय अजय विश्नोई जी भी अच्छे से पढ़े तथा वह बता रहे थे कि कितने मेडिकल कॉलेज सरकारी और कितने प्रायवेट और कितने खुलने हैं बताया कि 52 और खुलना है. मेडिकल की सीट्स 55 सौ हैं बस एमबीबीएस की पीजी की आपके पास कितनी है 35 सौ इसमें गलत छपा है. वही अधिकारी भाषण बनाते हैं. 35 सौ आपकी पीजी की सीटे हैं. आपके पास में सीट्स नहीं हैं. आप तो मेडिकल, मेडिकल कॉलेज बनाये जा रहे हैं उसके अलावा पैरा मेडिकल स्टॉफ 65 हजार पद रिक्त हैं.
श्री लखन घनघोरिया – आपने पीएसी 1400 बनी दी, वहां 800 में डाक्टर नहीं है, न पैरामेडिकल स्टाफ है, संजीवनी क्लिनिक बंद पड़ी है. बिल्डिंग बना दी और बंद पड़ी है. आप उसका उल्लेख करते हैं, लेकिन हकीकत क्या है.
डॉ. योगेश पंडाग्रे – आपकी सरकार ने नहीं खोले हैं, केवल पांच ही मेडिकल कॉलेज थे, अब हम 52 मेडिकल कॉलेज करने जा रहे हैं और हर संजीवनी क्लिनिक में डाक्टर मिलेगा. हर अस्पताल में डाक्टर मिलेगा.
श्री लखन घनघोरिया – पहले सुन लें, ये आइना हम दिखा रहे हैं आइना देखने की हिम्मत होनी चाहिए. डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ नहीं हैं, आप डाक्टर है, कब करेंगे
अध्यक्ष महोदय – लखन जी, उधर मत देखो, मुझे देखो.
श्री लखन घनघोरिया – हमारे पास लिखित जवाब है कि आपके कितने पीएसी में डाक्टर नहीं है.
डॉ. योगेश पंडाग्रे – किसके कार्यकाल में मेडिकल कॉलेज नहीं खुले, तीन मेडिकल कॉलेज आप खोले. आज ये सरकार 30 मेडिकल कॉलेज संचालित कर रही है और हम 52 मेडिकल कॉलेज तक जाने वाले हैं.
श्री लखन घनघोरिया – आप तो ये कह देंगे कि ये देश ही जब आप आए, तब पैदा हुआ, इसके पहले तो था ही नहीं, वर्ष 1947 को देखो, वर्ष 2047 की बात कर रहे हो.
अध्यक्ष महोदय – लखन जी, आप हमारी तरफ मुखातिब हो, सीधे बात मत करिए.
श्री लखन घनघोरिया – अध्यक्ष जी, छिंदवाड़ा के परासिया में कफ सीरप से 15 बच्चों की मौत होती है, आपके पास हर जिले में ड्रग इंस्पेक्टर नहीं है, कहां से पकड़ोगे आप कफ सीरप. ड्रग इंस्पेक्टर नहीं है, जबलपुर जैसे महानगर में एक ड्रग इंस्पेक्टर है, तीन पोस्ट है.
श्री उमंग सिंघार – भागीरथपुरा के पानी ने सुला दिया कैलाश जी को (..हंसी)
अध्यक्ष महोदय – वे कई बार ध्यान करते रहते हैं. (..हंसी)
श्री कैलाश विजय वर्गीय – जब लखन बोलते हैं तो राम को ध्यान में चला जाना चाहिए. (..हंसी)
अध्यक्ष महोदय – जब ध्यान में रहो तो ग्राहृयता पूरी हो जाती है.
श्री लखन घनघोरिया – अध्यक्ष महोदय, विरासत से विकास तक एक आग्रह जरूर करना चाहता हूं. हम बहुत बात करते हैं, महारानी अहिल्या बाई की, विरासत भी है विकास भी है. महारानी अहिल्या बाई हमारी विरासत है, सब मानते हैं, लेकिन मणिकर्णिका घाट में हमारी उस महारानी की मूर्ति तोड़ दी जाती है, फेंक दी जाती है, तब हम विरासत के संरक्षण की बात नहीं करते, तब हम संस्कृति और धर्म की बात नहीं करते, भले ही उत्तरप्रदेश का हो, लेकिन महारानी तो हमारी यहां की थी तो कहां है, हम कहां विरासत की बात कर रहे. ये सब होने के बाद उसके बाद हमारी अंतरात्मा न जागे.
अध्यक्ष महोदय – लखन जी, अब एक शेर बोलकर अपनी बात पूरी करें.
श्री लखन घनघोरिया – अध्यक्ष जी, महारानी अहिल्या बाई का बनाया हुआ घाट, मणिकर्णिका घाट, काशी बनारस में जिसकी पौराणिक गाथा है और जिसका स्कंद पुराण के काशी खंड में उल्लेख है, अध्याय 26, श्लोक 119 और 122 में आप जाकर देखें, कैसे बना, क्या बना, पौराणिक गाथाएं क्या है, जहां मत्स्य अवतार में भगवान विष्णु रहे हैं और जहां सती की कर्णिका गिरी हो, उस कुंड को महारानी ने अच्छे से बनवाया था.
अध्यक्ष महोदय – कैलाश जी, आप लखन जी को ठीक से पहचान नहीं पा रहे हैं.
श्री लखन घनघोरिया – ये पौराणिक इतिहास कहता है .
श्री तुलसीराम सिलावट – कैलाश जी पूरे स्वभाव में है.
मैं तुलसी तेरे आंगन की (हंसी)... घर के आंगन की तुलसी.
अध्यक्ष महोदय -- श्री लखन जी, प्लीज आप पूरा करें.
श्री लखन घनघोरिया -- अध्यक्ष महोदय, हम अपनी उस विरासत के लिये कर क्या रहे हैं? एक ऑब्जेक्शन नहीं, हम बड़ी-बड़ी बात इंदौर में करते हैं कि महारानी अहिल्या बाई ने यह दिया, वह दिया, इतना बड़ा हादसा हो गया और सरकार की तरफ से कहीं कोई आपत्ति तो दर्ज होना चाहिए था, कुछ तो होना था, लेकिन नहीं, उसके बाद हम यह बड़ी गाथाएं लेकर बैठ जाते हैं. कैलाश भईया ''समुंदर तेरी खामोशी कुछ ओर कहती है,
साहिल पर टूटी हुई कश्तियां कुछ ओर कहती हैं,
हमने देखे है,जो मंजर अपनी आंखों से,
अखबार की सुर्खियां कुछ ओर कहती हैं'' यह पूरे अभिभाषण की स्थिति है.
संसदीय कार्यमंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय) --
''घायल यहां हर परिंदा है,
घायल यहां पर परिंदा है,
पर जिसमें दम है, वह जिंदा है.....(हंसी).
श्री लखन घनघोरिया -- हां, यह बात तो सही है, जिसमें दम है वह जिंदा है, हम भी इस बात को मानते हैं.
अध्यक्ष महोदय -- अब लखन भाई प्लीज पूरा करो.
श्री लखन घनघोरिया -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह तमाम चीजें ऐसी हैं, यह वास्तव में एक आईना है, जितना असत्य का पुलिंदा पढ़वाया गया है और जो वहां बैठे लोगों ने बनाया है, इसको चेक तो कर लिया करें महाराज, इतने अग्रेंजी के शब्द हैं. अब वह हमारे सागर में एक पुल बन गया है, उसको हम शैलेन्द्र भाई क्या कहते हैं? ऐलीवेटर, अपन को पुल कहने में तकलीफ होती है(हंसी)
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- ऐलीवेटर नहीं दादा, ऐलीवेटेड कॉरीडोर (हंसी)
श्री लखन घनघोरिया -- हमने देखा आप जल संरक्षण की बात कर रहे थे.
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- जी, बिल्कुल.
श्री लखन घनघोरिया -- जल संसाधन पर आप बोल रहे थे, यह गोविन्द भाई यहां पर बैठे हैं, तालाब की स्थिति इन्होंने भी बचपन से देखी है, आपने भी देखी है, हमने भी देखी है.
श्री शैलेन्द्र कुमार जैन -- आप क्या बात कर रहे हैं, मैं आपको आचमन करवाऊंगा.
अध्यक्ष महोदय -- लखन जी, प्लीज आप पूरा करें.
श्री लखन घनघोरिया -- अध्यक्ष महोदय, यह तमाम ऐसी चीजें है, जिनके लिये यदि हम बात करें, तो बात कभी खत्म नहीं होगी, लेकिन मेरा आपसे आग्रह यह है कि जब अवधारणा किसी चीज की बनती है, हम वर्ष 2047 में जाने की अवधारणा बना रहे हैं. हम सौ साल का रोड मेप लेकर चले हैं. आप कहते हो तो वर्ष 2047 में ऐसे ही पहुंच जाओगे, उसके पहले वर्ष 2026 में नहीं पहुंचोगे,
वर्ष 2027 में नहीं पहुंचोगे, वर्ष 2028 में नहीं पहुंचोगे, सीधे वर्ष 2047 में पहुंच जाओगे. अध्यक्ष महोदय, उसके पहले वक्ताओं के द्वारा कम से कम यह भी ध्यान रखा जाये, जितने वक्ता हैं, उनकी विचारधाराएं अलग हो सकती हैं, लेकिन सन् 1947 भी याद भईया रखें, सन् 1946,1947 कैसे देश था, क्या था, क्या हुआ, क्या नहीं, यह भी ध्यान रखे? अवधारणा अच्छी चीज है, जो सरकार में रहता है, उसका दायित्व होता है और यह तो सच बात है कि जिम्मेदारियों के कांधे बदलते हैं, यह भी बदल जायेंगे कभी(मेजों की थपथपाहट) यह कोई बड़ी बात नहीं है, यह दौर है और दौर में इतराया नहीं जाता है और न कभी इस चीज से घबराया जाता है, संघर्ष हम लोगों की तासीर में है और हम संघर्ष कर रहे हैं और एक दिन आयेगा कि आप सामने देखोगे, जब हम अंग्रेजों से लड़ें हैं, तो आप कहां (हंसी). अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.
श्री दिलीप सिंह परिहार(नीमच) -- अध्यक्ष महोदय, मैं महामहिम राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर धन्यवाद देने के लिये खड़ा हुआ हूं. आज मध्यप्रदेश आत्मनिर्भर बनने की ओर जा रहा है, तो देश भी आत्मनिर्भर बनने की ओर जा रहा है, वहीं अन्न उत्पादन में हमारी सरकार ने लगातार सुविधा उत्पन्न की है और इस वर्ष को कृषि कल्याण वर्ष के रूप में हमने लिया है, हमारी सरकार ने ''समृद्ध किसान समृद्ध प्रदेश'' के समावेशी मॉडल पर वर्ष 2026 को किसान कल्याण के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है. कृषि मद में किसान रोजगार सजग किसानों में वृद्धि की जा रही है, उच्च गुणवत्ता के खाद, बीज, पानी, बिजली, सड़क सब की व्यवस्था मध्यप्रदेश की सरकार कर रही है. 22 जनवरी 2026 के संबंध में विभाग द्वारा किसान संगठनों की अनुसंधान राउंड टेबल पर कांफ्रेंस आयोजित की गई है. सरकार द्वारा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में अनेकों काम किये जा रहे हैं. भावांतर जैसी योजना लागू की गई है. किसानों को पीली मोजेक का भी पैसा दिया गया है. वहीं अभी हमारे मित्र बोल रहे थे पशुधन को विशेष रूप से प्राथमिकता दी गई है, पशुपालन जीवन निर्भर साधन नहीं है बल्कि एक आर्थिक समृद्धि का स्थान है तो पशुपालन के लिये मध्यप्रदेश की सरकार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री गौपालक मुख्यमंत्री लगातार योजनायें बना रहे हैं. जो गौशालायें आज समृद्ध बनी हैं दूध उत्पादन को दोगुना करने के लिये लगातार मध्यप्रदेश की सरकार लगी हुई है इस योजना का आरंभ किया गया है. डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के नाम से जो योजना चली है उस योजना के उत्पादन में पशु पालकों की आय में वृद्धि होगी और पशुपालक आय में वृद्धि के साथ-साथ इस योजना में एक हितग्राही को 25 से 200 दुधारू पशु रखने के लिये इकाई स्थापित की जा रही है तो उसका भी लाभ होगा. 6 लाख 50 हजार पशु पालकों को किसान क्रेडिट कार्ड मध्यप्रदेश की सरकार ने लगातार उपलब्ध कराये हैं. कृषि को प्राकृतिक खेती और कृषि में आत्मनिर्भर बनाने के लिये लगातार किसान समय-समय पर सारी योजनाओं का लाभ दे रही है. सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास और आत्मनिर्भर खेती बनाने के लिये भारत सरकार ने मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की नदी जोड़ो योजना जो अभी हम देख रहे हैं राष्ट्रीय स्तर पर केन बेतवा योजना जो लागू हुई है उस केन वेतवा योजना से जहां कई जिलों को लाभ होने वाला है वहीं नदी जोड़ो परियोजना में केन, वेतवा, पार्वती, कालीसिंध और चम्बल जो हमारे क्षेत्र में आती हैं. चंबल का पानी पहले कोटा, झालावाड़ उधर जाता था अब वह पानी नीमच और मंदसौर जिलों की खेप में आयेगा और किसान तीन फसलें लेगा और तीन फसल लेगा तो जो आत्मनिर्भर बनने की ओर भारत जा रहा है तो जब तीन फसल आयेगी तो किसान पुन: वह गीत गा सकेगा कि ''जहां डाल-डाल पर सोने की चिडि़यां करती हैं बसेरा वो भारत देश है मेरा'' इस भारत देश को आत्मनिर्भर बनाते हुये 'सुजलाम सुफलाम मलयज शीतलाम' बनाते हुये हम हर किसान को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं. औषधि मूलक फसलें ले रहे हैं. आज हम देखते हैं नीमच मंदसौर जिले में 90-90 प्रकार की औषधि मूलक फसलें पैदा हो रही हैं तो हम पूरे मध्यप्रदेश में यदि किसान को पानी मिल रहा है, बिजली मिल रही है, खाद मिल रही है, सड़क मिल रही है तो किसान कहीं न कहीं आत्मनिर्भर बन रहा है. यह देश कृषि प्रधान देश है, पूज्य महात्मा गांधी जी ने भी कहा है और मान्यवर नरेन्द्र मोदी जी भी कह रहे हैं कि इस देश के प्राण बसते हैं तो गांवों में बसते हैं इसलिये ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा छोटे-छोटे कुटीर उद्योग गांवों में खोले जा रहे हैं. जो किसान जिस प्रकार की फसल पैदा करता है टमाटर से केचप बनाना, लहसुन के केप्सूल बनाना, ऐसे अनेक प्रकार की, ईशबगोल का उत्पादन करना, धौली मूसली का उत्पादन करना, उसको बाहर बेचना जिससे किसान की आय लगातार बढ़ती जायेगी. अब हम लिंक परियोजना के साथ-साथ अभी छोटे-छोटे तालाब बनाने की योजना भी किसानों को समृद्ध बनाने के लिये कर रहे हैं. बिजली स्व ऊर्जा के प्लांट लगाकर बिजली के क्षेत्र में भी मध्यप्रदेश आत्मनिर्भर बन रहा है. मेरी सरकार लगातार समृद्ध किसान समावेशी उच्च उत्पादन बीजों का वितरण प्राकृतिक जैविक लेने के लिये काम कर रही है. वहीं सरकार अनेक प्रकार की योजनायें बना रही है, जैसे गरीबों के लिये संबल योजना बनाई उसी प्रकार किसान जो हमारे वरिष्ठ नागरिक हैं उन वरिष्ठ नागरिकों को सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वहन हमारी सरकार ने किया है. मुख्यमंत्री तीर्थदर्शन योजना जो गरीब और मध्यम वर्गीय व्यक्तियों के लिये बहुत लाभकारी सिद्ध हुई है. वर्ष 2025-26 में मध्यप्रदेश में 44 जिलों के 24 विशेष ट्रेनों के माध्यम से गरीबों को तीर्थदर्शन योजनाओं का लाभ दिलाया है जिससे प्रदेश में 19 हजार 200 वरिष्ठ नागरिकों को देश के प्रतिष्ठित तीर्थ स्थलों पर सुगम दर्शन कराने का काम मध्यप्रदेश की सरकार ने किया है. यह योजना ऐसी योजना है जिसमें यदि व्यक्ति किसी भी कोने में किसी भी जाति का घूमकर आता है तो वह लगातार सरकार को दुआयें देता है. आज हम देख रहे हैं प्रधानमंत्री आवास योजना जहां आज गरीब के पास रहने के लिये छत नहीं थी उनको प्रधानमंत्री आवास देने का काम किया है. वहीं शहरी क्षेत्र में भी अभी नीमच में भी जो बहुमंजिला मकान बने हैं. ऐसे ही मध्यप्रदेश में अब तक 77 हजार आवास पूर्ण हो चुके हैं और अगले पांच वर्षों में दस लाख नये आवास निर्मित किये जाने वाले हैं तब हम यह कह सकेंगे कि प्रधानमंत्री ने सपना देखा है और मुख्यमंत्री जी ने जो सपना देखा है कि सबके सिर पर छत हो वह छत की व्यवस्था भी हमारी सरकार कर रही है निश्चित ही इस अभिभाषण में वह मूल मंत्र लिये गये हैं जो छोटे-छोटे गरीब के लिये कहीं न कहीं हितकारी है. गरीब के स्वास्थ्य की चिंता की गई है. गरीब की थाली रहे न खाली इसले लिये 5 करोड़ लोगों के अन्न की व्यवस्था मध्यप्रदेश की सरकार ने की है वहीं हमने मां,बहन,बेटी का सम्मान किया है. बेटी के पांव पूजे,बेटी को आने दो. पहले बेटी की संख्या कम होने लगी थी. आज बेटी की संख्या बढ़ रही है. बेटियां आ रही हैं तो बेटियां पढ़ाना,लिखाना,आगे बढ़ाना,मध्यप्रदेश की सरकार समय-समय पर वह सारी व्यवस्थाएं कर रही है.बेटी की आंगनवाड़ी में उसकी व्यवस्था है. अभी आंगनवाड़ी में 1578 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की पारदर्शिता के आधार पर नियुक्तियां हुई हैं इसके लिये भी मैं सरकार को बहुत धन्यवाद देता हूं क्योंकि यह नियुक्तियां बिना भेदभाव के पारदर्शी आधार से हुई है तो सरकार की जितनी प्रशंसा करें उतनी कम है. मुख्यमंत्री लाड़ली बहना, अभी हमने देखा है कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना जो कांग्रेस के बंधु कहते थे कि बंद हो जायेगी नहीं चलेगी. मध्यप्रदेश की सरकार और सरकार के मुखिया ने लगातार इस योजना को चलाया है और यह योजना चल रही है और अब 1500 रुपये मिल रहे हैं तो आपके पेट में क्यों दुख रहा है. आप तो कह रहे थे कि नहीं मिलेंगे.
श्री पंकज उपाध्याय- आप तो रटा रटाया बोले जाओ. तीन हजार बोले थे.
अध्यक्ष महोदय - पंकज जी कृपया बैठें.
श्री दिलीप सिंह परिहार - तीन हजार रुपये तक मिलेंगे अब आपको विश्वास नहीं होता है.
श्री पंकज उपाध्याय - कब मिलेंगे. उसी समय बोला था आपने.रटा रटाया पहाड़ा आप पढ़ कर आ गये.
(..व्यवधान..)
अध्यक्ष महोदय - पंकज जी बात रिकार्ड में नहीं आएगी.
श्री दिलीप सिंह परिहार - किसान के खेत में पानी जा रहा है. हमने लाड़ली बहना बनाई है. आज बहना जब हमें आशीर्वाद देती है तो आपको कहीं न कहीं जलन होती है और गरीब कल्याण के काम जो भी करता है उनकी हमेशा प्रशंसा होती है.
अध्यक्ष महोदय - दिलीप जी कृपया समाप्त करें.
श्री दिलीप सिंह परिहार - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं तो यह कहूंगा कि इनने कुछ किया नहीं है अब कुछ हो रहा है तो इनके पेट में मरोड़ लगते हैं इनको बर्दाश्त नहीं होता है. (XXX)
श्री उमंग सिंघार - अध्यक्ष महोदय, इस पर घोर आपत्ति है. इसको विलोपित किया जाये.
अध्यक्ष महोदय - इसे रिकार्ड नहीं किया जाये.
(..व्यवधान..)
श्री महेश परमार - माननीय सदस्य, यह असत्य बोल रहे हैं. दिलीप जी आपको सदन में सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिये.
(..व्यवधान..)
श्री दिलीप सिंह परिहार - हमारे गौ पालक मुख्यमंत्री जी ने मध्यप्रदेश में औषधि मूलक फसलें बोते हैं. अनेक प्रकार की फसलें बो रहे हैं. किसान समृद्ध हो रहा है. मध्यप्रदेश आत्म निर्भर बन रहा है. तो आपको प्रसन्न होना चाहिये.
(..व्यवधान..)
अध्यक्ष महोदय - कृतज्ञता प्रस्ताव पर चर्चा जारी रहेगी. सदन की कार्यवाही 18 फरवरी को प्रात: 11.00 बजे तक के लिये स्थगित.
अपराह्न 6.28 बजे विधान सभा की कार्यवाही बुधवार दिनांक 18 फरवरी,2026(29 माघ,शक संवत् 1947) के प्रात: 11.00 बजे तक के लिये स्थगित की गई.
भोपाल अरविन्द शर्मा
दिनांक 17 फरवरी,2026 प्रमुख सचिव
मध्यप्रदेश विधान सभा