मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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पंचदश विधान सभा                                                                         एकादश सत्र

 

 

मार्च, 2022 सत्र

 

मंगलवार, दिनांक 15 मार्च, 2022

 

( 24 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1943 )

 

 

[खण्ड- 11]                                                                                        [अंक- 7 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

मंगलवार, दिनांक 15 मार्च, 2022

 

( 24 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1943 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.01 बजे समवेत हुई.

 

{ अध्यक्ष महोदय (श्री गिरीश गौतम) पीठासीन हुए.}

         

          संसदीय कार्य मंत्री(डॉ. नरोत्‍तम मिश्र):- अध्‍यक्ष जी, न नेता प्रतिपक्ष हैं, न प्रभारी नेता प्रतिपक्ष हैं, न सहायक नेता प्रतिपक्ष हैं और न उप सहायक नेता प्रतिपक्ष हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय:- गोविन्‍द सिंह जी तो थे, कहां चले गये.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र:- हुआ क्‍या है,अध्‍यक्ष जी.

          श्री सज्‍जन सिंह वर्मा:- स्‍पीकर साहब ने बुला लिया हमारे स‍चेतक जी को.

सिहोरा में आई.टी.आई. की स्वीकृति

[तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोज़गार]

1. ( *क्र. 968 ) श्रीमती नंदनी मरावी : क्या खेल एवं युवा कल्याण मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि सिहोरा विधानसभा क्षेत्रांतर्गत विकास खण्‍ड सिहोरा मुख्यालय में शासकीय आई.टी.आई. खोले जाने की मांग लम्बे समय से युवाओं द्वारा की जा रही है? अभी तक शासकीय आई.टी.आई. न खोले जाने से जो बच्चे निजी आई.टी.आई. का खर्चा उठाने में सक्षम नहीं हैं, वे अपनी इच्छा अनुसार ट्रेड का प्रशिक्षण प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं? सिहोरा मुख्यालय में कब तक शासकीय आई.टी.आई. प्रारंभ कर दी जावेगी?

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री ( श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ) : जी हाँ। विकासखण्‍ड सिहोरा मुख्‍यालय से 20 कि.मी. दूरी पर शासकीय आई.टी.आई. मझौली स्‍थापित है। विकासखण्‍ड सिहोरा में प्रायवेट आई.टी.आई. संचालित है। विभाग की नीति प्रत्‍येक विकासखण्‍ड में एक आई.टी.आई. खोलने की है। अत: वर्तमान में सिहोरा मुख्‍यालय में नवीन आई.टी.आई. प्रस्‍तावित नहीं है।

          श्रीमती नंदनी मरावी:- मेरे विधान सभा में हरघड़ औद्योगिक क्षेत्र है, परन्‍तु वहां पर आज तक आई.टी.आई. नहीं खुला है. मैं 2008 से सतत प्रश्‍न भी लगा रही हूं और सतत प्रयास भी कर रही हूं. परन्‍तु आज तक आई.टी.आई. नहीं खोला गया है तो मेरा माननीय मंत्री महोदय से निवेदन है कि सिहोरा में आई.टी.आई. खोलेंगे क्‍या?

            डॉ. नरोत्‍तम मिश्र:- जी, अध्‍यक्ष जी.

          श्रीमती नंदनी मरावी:- धन्‍यवाद, मंत्री जी.

          प्रश्‍न क्रमांक 2:- XX

उद्यानिकी बीज, दवा, खाद तथा उपकरण की खरीदी

[उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण]

3. ( *क्र. 2502 ) कुमारी हिना लिखीराम कावरे : क्या राज्य मंत्री, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विभाग द्वारा फलों, फूलों तथा सब्जियों के बीज, दवा, खाद तथा उपकरण जो सब्सिडी पर किसानों को उपलब्‍ध कराने होते हैं, उनकी खरीदी M.P. State Agro Industries Development Corp. Ltd. के माध्‍यम से खरीदने की बाध्‍यता है? क्‍या यह भी सही है कि सब्जियों के आधुनिक किस्‍म बीज, दवा तथा उपकरण के रेट M.P. State Agro Industries Development Corp. Ltd. में अनुमोदित नहीं होने के कारण विभाग किसानों को सब्सिडी पर उपलब्‍ध नहीं करा पाता, जिससे किसानों को शासन की योजना का लाभ नहीं मिल पाता तथा किसानों को मजबूरी में बाजार से पूरी कीमत देकर बीज, खाद, दवा तथा उपरकरण खरीदने पड़ते हैं? (ख) क्‍या M.P. State Agro Industries Development Corp. Ltd. विषयांकित सभी सामग्री बाजार मूल्‍य से ज्‍यादा मूल्‍य पर विभाग को उपलब्‍ध कराता है तथा समस्‍त सामग्री की गुणवत्‍ता भी बाजार के मुकाबले कम होती है? (ग) क्‍या M.P. State Agro Industries Development Corp. Ltd. के माध्‍यम से विषयांकित सामग्री खरीदने की बाध्‍यता समाप्‍त करने का मामला केबिनेट में रखा जाएगा?

राज्य मंत्री, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण ( श्री भारत सिंह कुशवाह ) : (क) जी हाँ। मध्‍यप्रदेश शासन उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्‍करण विभाग, मंत्रालय भोपाल का पत्र क्रमांक एफ 6-1/2018/58, दिनांक 25.06.2019 के माध्‍यम एम.पी. स्‍टेट एग्रो इंडस्‍ट्रीज डेव्‍लपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड से सामग्री क्रय किये जाने हेतु नोडल एजेंसी नियुक्‍त किया गया है। जी नहीं। निगम द्वारा रेट कॉन्‍ट्रेक्‍ट के माध्‍यम से दरों का अनुबंध किया जाता है। प्रदायकर्ता सभी सामग्रियों की दरें प्रस्‍तुत करते हैं, सभी सामग्रियां आधुनिक होती हैं। (ख) जी नहीं। निगम द्वारा जारी रेट कॉन्‍ट्रेक्‍ट ऑफर में यह प्रावधान किया गया है कि जो दरें निगम को प्रस्‍तुत की गई हैं, प्रदायकर्ता द्वारा उनसे कम दर पर वह सामग्री बेची नहीं जा सकती है। यदि निगम की जानकारी में अनुमोदित दर से कम दर पर सामग्री विक्रय की जानकारी आती है, तो तत्‍काल प्रभाव से उस सामग्री पर वह कम दर ही लागू कर दी जाती है तथा प्रदायक के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाती है। (ग) प्रस्‍ताव लंबित नहीं है। अत: प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।  

            कुमारी हिना लिखीराम कावरे:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न करने का उद्देश्‍य बिल्‍कुल स्‍पष्‍ट है कि एम.पी.एग्रो की जो बाध्‍यता है उसको समाप्‍त करने पर मेरा फोकस है. इस प्रश्‍न को करने का उद्देश्‍य ही यह है. क्‍योंकि माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एम.पी.एग्रो की बाध्‍यता के चलते किसानों को न बीज मिल पाता है, न खाद मिल पाता है, न कृषि के उपकरण मिल पाते हैं और इसके चलते क्‍योंकि वैसे भी एम.पी.एग्रो जो भी खरीदी करता है, जब एम.पी.एग्रो से विभाग खरीदी करता है तो जो मार्केट रेट होता है उससे ज्‍यादा ही, जैसे  अगर कोई 100 रूपये की चीज मार्केट में उपलब्‍ध है तो वह एम.पी.एग्रो के माध्‍यम से 110 रूपये की ही मिलती है. मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, विभाग को ज्‍यादा पैसा देना है, दे लेकिन इसके चलते किसानों को भुगतना पड़ता है. तो मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यही कहना चाहती हूं कि क्‍या वह इस बाध्‍यता को खत्‍म करेंगे ?

            श्री भारत सिंह कुशवाह:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 25.6 2019 के पहले सरकार की जो व्‍यवस्‍था थी, मैं माननीय सदस्‍या को यह बताना चाहूंगा कि 2019 में आपकी सरकार थी और आपने ही एम.पी.एग्रो को नोडल एजेंसी बनाया, आपने ही उसमें वेंडरों को मान्‍यता दी. हमारी जो पूर्व में सरकार थी, उसमें जिस तरह से किसानों को जो आजादी थी सब्‍जी, बीज खरीदने की. चूंकि यह प्रथा आपकी सरकार में लागू हुई है और हमारी सरकार किसानों को कोई परेशानी न हो, हमेशा सरकार के माध्‍यम से ऐसे निर्णय रहे हैं कि किसानों को आसानी से सरकार की योजनाओं का लाभ मिले. मैं आपको यह बताना चाहूंगा कि जिस तरह से वर्ष 2019 में पूर्व सरकार के आदेश को आपकी सरकार ने पलटा, एक तो फल, फूल, सब्जियों में. दूसरी, एक बात और ध्‍यान दिलाना चाहूंगा कि ठेकेदारी प्रथा को अगर किसी ने बढ़ाया तो 2019 की सरकार ने बढ़ाया. पोषण आहार की जो व्‍यवस्‍था थी.

                                                                                               

          श्री सज्‍जन सिंह वर्मा-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी, भाषण दे रहे हैं, उत्‍तर नहीं दे रहे हैं. 

          कुमारी हिना लिखीराम कावरे-  मुझे केवल अपने प्रश्‍न का उत्‍तर चाहिए.

          श्री भारत सिंह कुशवाह-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, उसी पर आ रहा हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय-  मंत्री जी, आप उत्‍तर दीजिये.  

          डॉ. अशोक मर्सकोले-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है, इस पर सीधे-सीधे उत्‍तर देना चाहिए. मंत्री जी, घुमा-फिराकर उत्‍तर दें, ये बिलकुल ठीक नहीं है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  आप बैठ जाईये.

          कुमारी हिना लिखीराम कावरे-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने बिलकुल प्‍वाईंटेड प्रश्‍न किया है, मंत्री जी, को सीधे-सीधे उत्‍तर देना चाहिए.

          श्री भारत सिंह कुशवाह-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, आपका ध्‍यान इस ओर आकर्षित करना चाहूंगा कि केवल यही नहीं, जिस तरह से पोषण आहार में जो व्‍यवस्‍था थी, उसमें भी वर्ष 2019 में, आपकी सरकार ने ठेकेदारी प्रथा लागू की.

          कुमारी हिना लिखीराम कावरे-  मंत्री जी, क्‍या आप इस आदेश को निरस्‍त करवायेंगे, केवल इतना ही उत्‍तर देना है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  मंत्री जी, आप इसमें बतायें.

          श्री भारत सिंह कुशवाह-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, इसी पर बात कर रहा हूं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने पोषण आहार के आदेश को पलटकर, सीधे ठेकेदारी प्रथा को बंद कर, इस काम को स्‍व-सहायता महिला समूहों को दिया है.

          इसी प्रकार, से अगर ऐसी कोई दिक्‍कत है और आप इस बात को प्रमाणित कर दें कि वेंडरों द्वारा, जिस दर पर किसानों को बीज उपलब्‍ध करवाये जाते हैं, उससे सस्‍ती दर पर, यदि बाजार में कहीं मिल रहा है, ऐसा आपके पास कोई प्रमाण हो तो निश्चित रूप से, मैं, उस पर जांच करवाऊंगा और रही बात वर्ष 2019 के आदेश की, तो आपके द्वारा जिन बिंदुओं पर प्रश्‍न किया गया है, फल, फूल, सब्जियों पर हम डी.बी.टी. (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्‍यम से किसानों को सीधा डी.बी.टी. का लाभ देंगे. वेंडरों की प्रथा पूरी तरह से समाप्‍त करेंगे.

          कुमारी हिना लिखीराम कावरे-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने वर्ष 2019 में आपकी सरकार कहकर, मुझे, संबोधित किया था लेकिन अब हमारी सरकार भी उधर ही है. मैं, केवल इतना बताना चाहती हूं कि आप बहुत अच्‍छे से काम कर रहे हैं, आप समय पर किसानों को खाद, बीज उपलब्‍ध करवा रहे हैं. दिसंबर 2021 में आपके विभाग ने बालाघाट जिले में राष्‍ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत संकर सब्‍जी क्षेत्र विस्‍तार योजना में M.P. State Agro से अनुमोदित किस्‍मों की मांग की गई थी, आज दिनांक तक भी, वह किसानों को उपलब्‍ध नहीं करवाई गई है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब आप बता दें कि आप किस तरह से अच्‍छा काम कर रहें हैं, मैं, यह भी कहना चाहती हूं कि ऐसा नहीं है कि आपने बीज उपलब्‍ध नहीं करवाये तो किसानों ने फल, फूल, सब्‍जी लगाई ही नहीं. हमारे बैहर क्षेत्र में बहुत अच्‍छी किस्‍म के फल उग रहे हैं, आप कभी हमारे क्षेत्र में दौरे पर आयें तो देखें कि वहां शानदार सब्जियां और फल उगाये जा रहे हैं लेकिन आपकी सरकार की किसी भी योजना का लाभ, किसानों को नहीं मिल पा रहा है और यह केवल इस वजह से है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसलिए मेरा निवेदन है कि आप काम कर रहे हैं, अच्‍छा कर रहे हैं, लेकिन आप इस सरकार, उस सरकार को दोषी ठहराते हैं, आप तो केवल इतना बतायें, वर्तमान में आप सरकार में हैं, आपके मंत्री रहते हुए, आपके विभाग में समय पर कई जगहों पर समय बीज उपलब्‍ध नहीं हो रहा है, मंत्री जी, आप इस पर ध्‍यान दें.

          अध्‍यक्ष महोदय-  यह तो हो गया, अब आगे बढ़े ?

          कुमारी हिना लिखीराम कावरे-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी, स्‍पष्‍ट कर दें कि क्‍या वे इस आदेश को निरस्‍त करेंगे ? (XXX) यहां ऐसा कोई विधायक नहीं है जो M.P. State Agro के नाम पर रोता न हो. आप तो केवल आदेश समाप्‍त करें.

          अध्‍यक्ष महोदय-  उन्‍होंने कहा कि आदेश निरस्‍त करेंगे.

          कुमारी हिना लिखीराम कावरे-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उन्‍होंने केवल जांच करवाने की बात कही है, सीधे-सीधे आदेश निरस्‍त करने की बात नहीं कही है.

          डॉ. सीतासरन शर्मा-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसे विलोपित किया जाये.

          अध्‍यक्ष महोदय-  इसे विलोपित किया जाये.

          कुमारी हिना लिखीराम कावरे-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सारे सदस्‍य जानते हैं कि M.P. State Agro की स्थिति कैसी है, यदि आपको M.P. State Agro के नाम पर इतना ही दर्द है तो आप उसे अलग से अनुदान दें, सरकार का पैसा लगाकर, किसानों का नुकसान क्‍यों करवाया जा रहा हैआपके विभाग का ही ज्‍यादा पैसा लगता है. मंत्री जी, यदि आपको उनको पैसा देना है तो हमें उससे कोई लेना-देना नहीं है परंतु किसानों को समय पर बीज उपलब्‍ध करवाये जायें.

          श्री भारत सिंह कुशवाह-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, यह कहना चाहूंगा कि मुख्‍यमंत्री जी की स्‍पष्‍ट मंशा, पूर्व से रही है और आज भी है, जिन गड़बडि़यां का उल्‍लेख माननीय सदस्‍या ने यहां किया है, वे सभी आपकी सरकार के आदेश की वजह से हुई हैं, आप इसे तो स्‍वीकार करेंगे ?

          अध्‍यक्ष महोदय-  उसको निरस्‍त कर रहे हैं न ?

          श्री भारत सिंह कुशवाह-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके अतिरिक्‍त मैं, यह कहना चाहूंगा कि किसान हित में सब्‍जी, फूल, फलों के बीज पर आपने जो बात रखी है, हम M.P. State Agro की उस बाध्‍यता को वित्‍तीय वर्ष से समाप्‍त करेंगे.

          कुमारी हिना लिखीराम कावरे-  मंत्री जी, धन्‍यवाद.

 

 

कम दूरी की सड़कों का निर्माण

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

        4. ( *क्र. 1324 ) श्रीमती लीना संजय जैन : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जिला विदिशा में विकासखण्‍ड बासोदा एवं ग्‍यारसपुर अंतर्गत एक ग्राम को दूसरे ग्राम से जोड़ने हेतु एकल मार्ग से जोड़े गये हैं, लेकिन इन मार्गों की दूरी अधिक होने के कारण ग्रामीणों को भारी कठिनाई जाती है? यदि हाँ, तो ऐसे ग्रामों के नाम विकासखण्‍डवार अलग-अलग बतावें। (ख) क्‍या विभाग द्वारा प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर में वर्णित ग्रामों की दूरी कम करने के लिये कोई दूसरे मार्ग का निर्माण कराया जावेगा? यदि नहीं, तो कारण बतावें। (ग) क्‍या शासन उपरोक्‍त ग्रामों को मुख्‍यमंत्री सड़क योजना अंतर्गत शामिल कर ग्रामों की दूरी कम करने हेतु सड़कों का निर्माण जनहित में करवा कर ग्रामीण जनता को लाभान्वित करवायेगा? यदि नहीं, तो स्‍पष्‍ट कारण बतावें।

            पंचायत मंत्री ( श्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया ) : (क) जी नहीं। प्रश्‍नांकित विकासखण्‍डों में एकल सम्‍पर्क विहीन राजस्‍व ग्रामों को मुख्‍यमंत्री/प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजनान्‍तर्गत बारहमासी मार्ग से सम्‍पर्कता प्रदान की गई है। योजनान्‍तर्गत एक ग्राम को दूसरे ग्राम से (दोहरी सम्‍पर्कता) जोड़ने का प्रावधान नहीं है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) एवं (ग) उत्‍तरांश '' के संदर्भ में शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

            श्रीमती लीना संजय जैन-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सर्वप्रथम अपनी केंद्र और राज्‍य सरकार को बहुत-बहुत बधाई देती हूं,  जिस प्रकार से पक्‍की सड़कों का जाल पूरे मध्‍यप्रदेश में फैल चुका है. हमारे पूर्व प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का लाभ सभी गांवों को मिल चुका है और सभी ग्राम पक्‍की सड़कों से जुड़ गए हैं, और मुख्‍य सड़क से जुड़ गए हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न है कि मैंने गांवों में द्वितीय कनेक्टिविटी के लिए प्रश्‍न लगाया था, माननीय मंत्री जी ने उसमें ना का उत्‍तर दिया है. अध्‍यक्ष महोदय, मेरे कई ग्राम आस्‍था के केन्‍द्र से जुड़े हुए हैं और उन ग्रामों की पक्‍की सड़क की दूरी अगर माने तो 15 से 20 किलोमीटर होती है, लेकिन अगर हम उन दो गांवों को जोड़ देते हैं तो उनकी दूरी मात्र 5 किलोमीटर की रह जाती है. मेरे क्षेत्र में ऐसे कई गांव पड़ रहे हैं और वह आस्‍था से जुड़े हैं तो लाखों श्रद्धालुओं को उनका लाभ भी मिलेगा अगर माननीय मंत्री जी सेकेण्‍ड कनेक्टिविटी के लिए प्रावधान करते हैं तो मेरे ग्रामवासियों को उसका लाभ मिलेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, माननीय सदस्‍या का यह कहना है कि आपने सड़कें बनाईं हैं लेकिन बीच में जो कनेक्टिविटी नहीं है वह उसकी मांग कर रही हैं उसको समझ लें.

          राज्‍यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री रामखेलावन पटेल)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भारत सरकार की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की गाइडलाईन है कि जो गांव एक बार उससे जुड़ गया उसको दोबारा उससे नहीं जोड़ा जाएगा और यदि वह प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से जुड़ गया है तो मुख्‍यमंत्री सड़क योजना से भी नहीं जोड़ा जाएगा. अगर कोई नई गाइडलाईन आ जाएगी तो हम उसे जोड़ने का काम करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय-- उन्‍होंने एक दो सड़क की ही मांग की है आप इस पर किसी भी तरह से विचार कर लीजिए.

          श्री रामखेलावन पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍या से बैठकर चर्चा कर लूंगा.

          श्रीमती लीना संजय जैन-- जी, धन्‍यवाद मंत्री जी.

मण्‍डी बोर्ड द्वारा निर्मित सड़कों की जानकारी

[किसान कल्याण एवं कृषि विकास]

5. ( *क्र. 2252 ) श्रीमती रामबाई गोविंद सिंह : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) तहसील पथरिया एवं तहसील बरियागढ़ जिला दमोह में किसान सड़क निधि एवं रा.कृ.वि. बोर्ड से पूर्व में निर्मित की गई सड़कों की मरम्‍मत एवं विस्‍तार की क्‍या योजना बनाई गई है? (ख) यदि योजना नहीं बनाई गई है तो इन सड़कों की मरम्‍मत एवं विस्‍तार कैसे संभव होगा? (ग) यदि योजना बनाई गई है तो वह कब प्रारंभ होगी, जिससे आम ग्रामीण को आवागमन में सुविधा मिल सके?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री कमल पटेल ) : (क) मध्‍यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार मण्‍डी बोर्ड द्वारा मण्‍डी प्रांगण के बाहर अन्‍य कोई निर्माण कार्य नहीं किया जावेगा। अत: शेष कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ख) उत्‍तरांश (क) अनुसार प्रश्‍नांश (क) की पूर्व निर्मित सडकों के मरम्‍मत एवं विस्‍तार संबंधी कार्यवाही मण्‍डी बोर्ड से संभव नहीं है। (ग) उत्‍तरांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

          श्रीमती रामबाई गोविन्‍द सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने आज मुझे सदन में बोलने का मौका दिया मैं इसके लिए आपका धन्‍यवाद करती हूं साथ ही मेरी विधान सभा क्षेत्र के इस महत्‍वपूर्ण विषय के लिए विपक्ष का साथ एवं सत्‍ता पक्ष का आशीर्वाद चाहती हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय-- आप प्रश्‍न करें.

          श्रीमती रामबाई गोविन्‍द सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने मंत्री महोदय के समक्ष एक विषय रखा था जिसमें मेरे विधान सभा क्षेत्र में लगभग 65 सड़कें हैं जो मण्‍डी बोर्ड द्वारा निर्मित की गईं थीं उनके रखरखाव और विस्‍तार की क्‍या योजना है इस संबंध में जानकारी चाही गई थी, लेकिन मंत्री महोदय का जो उत्‍तर मुझे प्राप्‍त हुआ है उसकी भाषा देखने से ऐसा लगता है कि यह बात मंत्री महोदय द्वारा नहीं बल्कि किसी अन्‍य के द्वारा लिखी गई है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- आप सीध प्रश्‍न पूछें कि आप मंत्री जी से क्‍या चाहती हैं.

          श्रीमती रामबाई गोविन्‍द सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहती हूं कि जो मण्‍डी बोर्ड से रोड बनाए गए हैं और मण्‍डी बोर्ड के जो 65 रोड हैं वह जर्जर स्थिति में है और स्थिति ऐसी है कि उस पर से इंसान तो क्‍या जानवर भी नहीं निकल पाते हैं. 

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से यह निवेदन करना चाहती हूं कि जो मण्‍डी बोर्ड में पैसा है वह अन्‍य विभागों को तो दिया जाता है बिजली के बिल चुकाये जाते हैं, नहरों के लिए पैसा दिया जाता है लेकिन जो (XXX) जो खुद का काम किया है मण्‍डी बोर्ड से उसका कोई काम ही नहीं होता है, कोई निर्माण ही नहीं होता है. 

          अध्‍यक्ष महोदय-- आप चाहती क्‍या हैं यह प्रश्‍न तो आप पूछ ही नहीं रही हैं.     

            कुंवर विजय शाह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस शब्‍द को हटा दिया जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय-- इस शब्‍द को विलोपित किया जाए.

          श्रीमती रामबाई गोविन्‍द सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं चाहती हूं कि इन सड़कों का निर्माण हो.

          अध्‍यक्ष महोदय-- क्‍या आप सड़कों की मरम्‍मत चाहती हैं.

          श्रीमती रामबाई गोविन्‍द सिंह-- जी हां.

          अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, माननीय सदस्‍या बनी हुई सड़कों की मरम्‍मत चाहती हैं.

           श्री कमल पटेल-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बहन रामबाई को यह आश्‍वस्‍त करता हूं कि मैंने इसकी पूरी जांच करा ली है. आपके पथरिया में 74 ग्रामीण सड़कें 60 करोड़ 83 लाख की बनाई गईं थीं. पथरिया में 48 और बटियागढ़ में 26 बनाई गई थीं. मरम्‍मत योग्‍य जो सड़कें हैं वह 64 सड़कें हैं. चूंकि शासन का एक आदेश निकला था कि मण्‍डी बोर्ड मण्‍डी के अंदर प्रांगण में ही निर्माण कार्य करा सकता है बाहर नहीं करा सकता है उसके कारण यह मरम्‍मत नहीं हो पाई, लेकिन मैंने माननीय मुख्‍यमंत्री जी से चर्चा की है और उन्‍होंने सहमति दी है. मैंने उन्‍हें कल ही पत्र लिखा है मुझे अनुमति मिल जाएगी तो प्राथमि‍कता के आधार पर वित्‍तीय स्थिति को देखते हुए सड़कों की मरम्‍मत कराई जाएगी. मैं आपको आश्‍वस्‍त करता हूं कि हम आपकी सड़कें सुधारेंगे.

          श्रीमती रामबाई गोविन्‍द सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी इसकी समय सीमा निर्धारित कर दें क्‍योंकि सड़कों की स्थिति बहुत खराब है. मैं कमल पटेल भाई से आपके माध्‍यम से एक निवेदन करना चाहती हूं कि सड़कों की स्थिति बहुत ही जर्जर है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- आपका प्रश्‍न आ गया है माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि वह करा देंगे.

          श्रीमती रामबाई गोविन्‍द सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी इसकी समय सीमा निर्धारित कर दें.

          श्री कमल पटेल-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसे शीघ्र से शीघ्र करा दूंगा.

          श्रीमती रामबाई गोविन्‍द सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय और माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

         

11.15 बजे                                 अध्यक्षीय घोषणा

महिला विधायकों एवं प्रथम बार के विधायकों के ही प्रश्न प्रश्काल में लिए जाना

            अध्यक्ष महोदय -- मुझे आपको अवगत कराते हुए प्रसन्नता हो रही है कि आज के प्रश्नकाल में महिला सदस्यों द्वारा लगाए गए प्रश्नों को लाटरी में नहीं रखा गया जितनी भी माननीय महिला सदस्यों के प्रश्न थे उनको बिना लाटरी के ले लिया गया है. इस तरह से सात प्रश्न आए हैं. प्रथम बार के विधायकों की लाटरी निकाली गई है.

 

 

11.16 बजे

                                        तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर (क्रमश:)

          राजस्व ग्रामों को पक्‍की सड़क से जोड़ा जाना

          [पंचायत और ग्रामीण विकास]

6. ( *क्र. 2537 ) श्रीमती झूमा डॉ. ध्यानसिंह सोलंकी : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि भीकनगांव विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत कुल कितने राजस्व ग्राम शेष हैं, जो प्रश्‍न दिनांक तक पक्की सड़क से नहीं जुड़ पाये हैं तथा नहीं जुड़ने का क्या कारण है? कारण सहित ग्रामों की सूची उपलब्ध करावें तथा यह भी बतायें की कब तक उपरोक्त ग्रामों को पक्की सड़क से जोड़ दिया जायेगा? क्या क्षेत्रीय विधायक द्वारा मार्ग निर्माण करने हेतु विभाग को पत्र प्राप्त हुआ है? यदि हाँ, तो वर्तमान तक क्या कार्यवाही की गई है? कृपया मार्गवार जानकारी उपलब्ध करावें। क्या दिये गये पत्रों में से कोई मार्ग स्वीकृत हुआ है या स्वीकृति हेतु कार्यवाही चल रही है? यदि नहीं, तो क्या कारण हैं?

पंचायत मंत्री ( श्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया ) : भीकनगांव विधानसभा क्षेत्रांतर्गत पक्की सड़क से नहीं जुड़े शेष राजस्व ग्रामों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। क्षेत्रीय विधायक द्वारा मार्ग निर्माण करने हेतु विभाग को प्रेषित किये गये पत्रों के संबंध में जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे (अधिकृत) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह झूमा सोलंकी जी का प्रश्न था.  काफी ऐसे राजस्व गांव हैं जो अभी भी सम्पर्क विहीन हैं उऩकी सड़कों को लेकर उन्होंने प्रश्न किया था. माननीय मंत्री जी ने जो जवाब दिया है उसमें कहा गया है कि इन गांवों की आबादी 250 से कम है. यह आंकड़ें वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़े के अनुसार बताया गया होगा. जनगणना वर्ष 2021 में होना था जो अभी तक नहीं हुई है और कब होगी यह पता नहीं है. वर्तमान स्थिति को ध्यान में रखते हुए क्या इन सड़कों को बनाया जाएगा. सीएमजीएसवाय में सामान्य क्षेत्र में जनसंख्या 500 चाहिए लेकिन अनुसूचित जनजाति क्षेत्र के लिए 250 की आबादी में आपको सड़कें बनाना है. आज की स्थिति में इन गांवों की आबादी 250 से अधिक है. क्या इन सड़कों का निर्माण कार्य वर्तमान जनसंख्या के आधार पर करवाएंगे.

          राज्यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास (श्री रामखेलावन पटेल) -- माननीय ने जो प्रश्न किया था उसके जवाब में लिखा था कि खराड़ी, लालपुरा, नीमखेड़ी यह वीरान गांव हैं. पोखर, झिरन्ना में निजी भूमि होने के कारण वह सड़क से नहीं जुड़ सका. महुफुटा, खमीदा, बेघन्ना यहां जमीन डूब में आ गई है. इसलिए उनको नहीं जोड़ा गया है. लोहरिया, फाल्या यहां पर जनगणना के आधार पर सम्मिलित न होने के कारण नवीन राजस्व ग्राम नहीं बना है इसलिए नहीं जुड़ पाया है. पीएमजीवायएस 2001 की जनगणना में संख्या लेते हैं और सीएमजीएसवाय में जनसंख्या यहां पर पर्याप्त नहीं है इसलिए यह गांव नहीं जुड़े हैं.  भीकनगांव विधान सभा क्षेत्र में जुड़े गांव गैर जुड़े गांवों की संख्या निम्न है. कुल पात्र गांव 211 हैं, जोड़े गये गांव 203 हैं, शेष गांव 8 हैं प्रदेश में  1550 ऐसे राजस्व गांव हैं जो जुड़ने योग्य हैं. जिन्हें शीघ्र ही जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. जैसे ही बजट उपलब्ध हो जाएगा यह गांव जुड़े जाएंगे.

          अध्यक्ष महोदय -- आपने पूरे प्रदेश का बता दिया है. इनके जो गांव हैं क्या वे इसमें जुड़ने वाले हैं.

          श्री रामखेलावन पटेल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, इनके जो गांव नहीं जुड़े हैं वे खराड़ी, लालपुरा, नीमखेड़ी है यह वीरान गांव हैं इसलिए नहीं जुड़े हैं. पोखर, झिरन्ना में  246 जनसंख्या तो है लेकिन निजी भूमि होने के कारण वह सड़क से नहीं जुड़ सके. निजी भूमि को अद्यतन करा देते हैं तो हम जोड़ देंगे. महुफुटा में 188 जनसंख्या है डीपीआर की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है. मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना से उसको जोड़ने का प्रस्ताव आ गया है. खमीदा, बेघन्ना में भी अपरवदा बांध के डूब में आ जाने के कारण इनको नहीं जोड़ा गया है. यह वहां की स्थिति है.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जिन सड़कों का और जिन गांवों का यहां पर जिक्र हुआ है. मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से यह चाहती हूँ कि इन सड़कों को शीघ्र से शीघ्र बना दिया जाए और इनके न जुड़ने के कारण बताए हैं वे कारण तो आपको भी पता है कि क्या हैं और आप बता भी रहे हैं कि आपने प्रोसेस में करके रखा है तो कृपया इसकी समय सीमा बता दें और इसी प्रश्न में विधायक जी ने आपको काफी सारी सड़कें भी जो हैं वह दी हुई हैं, सब में अलग अलग नॉर्म्स आपने दे दिए हैं. विधायक जी का प्रश्न करने का सीधा उद्देश्य यही था कि यह सड़कें कब तक बन जाएँगी? क्योंकि आदिवासी इलाका है और काफी समय से सड़कें बहुत खराब हैं. आप कहते हैं आपकी सरकार बहुत आदिवासियों के लिए सौहार्द्रपूर्ण तरीके से काम करती है तो बस यह है कि ये सड़कें कब तक बन जाएँगी?

            श्री रामखेलावन पटेल--  माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी जो भारत सरकार की गाइड लाइन है उसके आधार पर जोड़ने में नहीं आ रहे हैं. नई गाइड लाइन कोई आएगी तो हम शीघ्रता के साथ जोड़ने का काम करेंगे.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे--  माननीय अध्यक्ष महोदय, सीएमजीएसवाय में बनवा दीजिए आप क्यों केन्द्र सरकार की योजना का रास्ता देख रहे हैं. सीएमजीएसवाय में तो वैसे भी आबादी को ही इश्यु बनाया गया है. वैसे भी अनुसूचित जनजाति के लिए 250 की संख्या रखी गई है और ये आपके नॉर्म्स में आ रहे हैं. यह जो आप बता रहे हैं यह जनगणना 2001 के आधार पर आप आँकड़े दे रहे हैं 246, तो अध्यक्ष महोदय, वैसे तो 2021 में जनगणना हो जानी चाहिए. 2011 में भी हुई होगी, 2021 में भी हो ही जानी थी. तब तो इनकी संख्या अलरेडी आपके नॉर्म्स में आ जाएगी और अगर यदि नॉर्म्स में आ रहे हैं तो फिर आप पीएमजीएसवाय का रास्ता क्यों देख रहे हैं, इसको सीएमजीएसवाय में करवाइये.

          श्री रामखेलावन पटेल--  अध्यक्ष महोदय, 1550 ऐसे राजस्व ग्राम हैं जिनको मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में जोड़ना है. जैसे ही बजट की उपलब्धता होगी उनको जोड़ने का काम होगा.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे--  अध्यक्ष महोदय, तो क्या ये गाँव शामिल होंगे?

            श्री रामखेलावन पटेल--  मैं क्या कह रहा हूँ,  जैसे ही बजट का प्रावधान हो जाएगा तो जोड़ने की कार्रवाई की जाएगी.

          अध्यक्ष महोदय--  ठीक है.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे--  धन्यवाद.

मनरेगा अंतर्गत दिया गया रोजगार

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

7. ( *क्र. 1320 ) श्रीमती कल्पना वर्मा : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सतना जिले में वित्‍तीय वर्ष 2021-22 में 28 फरवरी, 2022 तक कितने जॉबकार्डधारी परिवारों द्वारा मनरेगा में कार्य की मांग की गई? जनपदवार संख्‍यात्‍मक जानकारी देवें। (ख) उपरोक्‍त अवधि में कितने जॉबकार्डधारी परिवारों को मनरेगा में काम मिला और कितनों को नहीं मिला(ग) मनरेगा में जॉबकार्डधारी परिवारों द्वारा कार्य की मांग करने के बावजूद उन्‍हें काम न दिए जाने का क्‍या कारण है? (घ) क्‍या सरकार भविष्‍य में मनरेगा में जॉबकार्डधारी परिवारों को काम दिया जाना सुनिश्चित करेगी? यदि हाँ, तो कब तक, नहीं तो क्‍यों?

पंचायत मंत्री ( श्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया ) : (क) सतना जिले में वित्तीय वर्ष 2021-22 में 28 फरवरी, 2022 तक 126726 जॉबकार्डधारी परिवारों द्वारा मनरेगा में कार्य की मांग की गई। जनपदवार संख्‍यात्‍मक विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) उत्‍तरांश '''' की अवधि में 123704 जॉबकार्डधारी परिवार कार्य स्‍थल पर उपस्थित हुये हैं, जिन्‍हें मनरेगा में काम दिया गया है। शेष जॉबकार्डधारी कार्यस्‍थल पर उपस्थित नहीं हुये, इस कारण काम नहीं देने का प्रश्‍न ही नहीं उठता। (ग) उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता। (घ) महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 का उद्देश्‍य ऐसे प्रत्‍येक ग्रामीण परिवार जिनके वयस्‍क सदस्‍य अकुशल शारीरिक श्रम कार्य करना चाहते हैं, को एक वित्‍त वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीयुक्‍त मजदूरी रोजगार उपलब्‍ध कराना है। मनरेगा में मजदूरी रोजगार को कानूनी गारंटी दी गई है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - "एक"

          श्रीमती कल्पना वर्मा--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सर्वप्रथम आपको प्रणाम करती हूँ एवं यहाँ पर उपस्थित सभी सम्मानित सदस्यगणों को भी प्रणाम करती हूँ. चूँकि मैं  पहली बार सदन में बात रख रही हूँ. अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न मनरेगा से संबंधित था और उसमें जो उत्तर आया है उसमें मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूँ कि कम से कम उन्होंने बोला है कि 100 दिन में गारंटीयुक्त रोजगार दिया जाएगा, तो मैं उनसे पूछना चाहती हूँ कि 100 दिन में कितने लोगों को रोजगार दिया जाएगा. इनकी मुझे सूची उपलब्ध कराई जाए और बताया जाए कि कितने लोगों को रोजगार दिया गया और कब तक दिया गया, वर्ष 2021 से 2022 तक की सूची उपलब्ध कराई जाए.

          श्री रामखेलावन पटेल--  माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या ने जो प्रश्न किया है उसमें....

          अध्यक्ष महोदय--  मंत्री जी, माननीय सदस्या यह जानना चाहती हैं कि 1 लाख 26 हजार 726 आपके कार्डधारी हैं, जिनको मनरेगा में मजदूरी प्राप्त करने की पात्रता है. आपने 1 लाख 23 हजार 704 को काम दिया है. माननीय विधायिका यह जानना चाहती हैं कि जिनको आपने काम दिया, 1 लाख 23 हजार 704 को इसमें से 100 दिन किसने प्राप्त किया, वह संख्या जानना चाहती हैं.

          श्री रामखेलावन पटेल--  अध्यक्ष महोदय, जितने लोगों का सूची में नाम रहता है हंड्रेड परसेंट सबको काम दिया जाता है. कोई बीमारी के कारण, कोई और दूसरे कारण से, काम में नहीं आ पाता. इस कारण वह काम से वंचित हो जाता है. मनरेगा में यह प्रावधान है कि उनका मस्टर 7 दिन में, 15 दिन में, बनता रहता है. दूसरे लोग जब मांग करेंगे, जो उसमें अनुपस्थित थे तो उनको भी आगे काम देने की व्यवस्था है. सौ परसेंट लोगों को काम दिया जाता है.

          अध्यक्ष महोदय--  नहीं, नहीं, ये नहीं, उनका प्रश्न यह है कि 1 लाख 23 हजार 704 जो आपने काम दिया, तो सौ दिन का काम है आपका, सौ दिन देना है काम, तो सौ दिन वाले कितनी संख्या आई, इसमें 1 लाख 23 हजार में, सौ दिन वाले सब हैं कि कुछ संख्या कम है, इसकी, यह जानना चाहती हैं.

          श्री रामखेलावन पटेल--  अध्यक्ष महोदय, वो लोग अगर काम में आते तो उनको भी काम दिया जाता.

          अध्यक्ष महोदय--  नहीं, आपने तो उनको काम दे ही दिया, 1 लाख 23 हजार 704 लोगों को काम आपने दे दिया. अब माननीय विधायिका जी यह जानना चाहती हैं कि कितने लोगों को 100 दिन का काम मिला? कुछ तो आधे भी होंगे ना? कुछ कम दिन के. ऐसा जानना चाहती हैं. यही प्रश्न है ना आपका?

            श्री रामखेलावन पटेल--  अध्यक्ष महोदय, यह मांग आधारित योजना है, जो काम मांगेगा उसको सबको काम दिया जाएगा. जो लोग शेष हैं जब काम मांगेंगे उनको काम दिया जाएगा.

          श्रीमती कल्पना वर्मा--  मंत्री जी, सीधा सीधा प्रश्न है कि कितने लोगों को दिया गया? मात्र उनकी संख्या जाननी है बाकी वह तो मेरे पास उत्तर है ही. (मेजों की थपथपाहट) माननीय मंत्री जी से एक छोटा सा सवाल....

          अध्यक्ष महोदय--  बैठ जाइये.

          श्री रामखेलावन पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 1 लाख 23 हजार 704 लोगों को 100 दिवस के लिए काम दिया गया था.

          अध्‍यक्ष महोदय -- बस, ठीक है.

          श्री तरूण भनोत -- अध्‍यक्ष जी, अपूर्ण उत्‍तर है. बड़ा स्‍पष्‍ट है आपने व्‍यवस्‍था भी दी कि मुझे सूची उपलब्‍ध करा दी जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, उन्‍होंने सूची नहीं मांगी.

          श्री तरूण भनोत -- उन्‍होंने सूची मांगी है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, नहीं, उन्‍होंने सूची नहीं मांगी.

          श्री तरूण भनोत -- उन्‍होंने सूची मांगी कि उन्‍हें सूची दी जाए 100 लोगों की, जिनको काम दिया गया. यह तो आप ही ने व्‍यवस्‍था दे दी कि 1 लाख 23 हजार 704 को काम दिया गया.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मैं आग्रह करना चाहता हॅूं कि...(व्‍यवधान)..

          श्रीमती कल्‍पना वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,...

          अध्‍यक्ष महोदय --  माननीय तरूण जी, आप भी बैठ जाइए. बैठ जाइए न.

          श्रीमती कल्‍पना वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,..

          अध्‍यक्ष महोदय -- अरे, मैं कह रहा हॅूं न कि आप बैठ जाइए न. अरे, आप बैठ तो जाइए. आप, बैठिए तो. एक तो मेरा आग्रह यह है कि प्रथम बार के विधायकों को मैं स्‍वत: संरक्षण दे रहा हॅूं तो कोई अगल-बगल से मदद न करें. उनको खुलने दीजिए न. उनको पूछने दीजिए. आप मत करिए मदद उनकी. उनका प्रश्‍न यह था (श्री तरूण भनोत, सदस्‍य के अपने आसन पर खडे़ होकर बोलने पर) अरे, उनको सूची मांगने दीजिए न. वह पूछ तो रही हैं उनको पूछने दीजिए न.

          श्री तरूण भनोत -- पूछ तो रही हैं, आप पूछिए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- चलिए, पूछिए. उन्‍होंने 1 लाख 23 हजार 704 लोगों को 100 दिन का काम दिया. उन्‍होंने बता दिया आपको.

          श्रीमती कल्‍पना वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपकी अनुमति से माननीय मंत्री जी से केवल वह सूची चाहती हॅूं कि वह सूची उपलब्‍ध करायी जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय -- हां, पहुंचा देंगे. दिलवा देंगे.  

          श्री रामखेलावन पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सूची भी उपलब्‍ध करा दूंगा और पोर्टल में भी उपलब्‍ध है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- चलिए, चलिए. ठीक है.

          श्रीमती कल्‍पना वर्मा -- आप कब तक उपलब्‍ध करा देंगे, उसकी समय-सीमा कुछ बता दें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- चलिए, वह दे देंगे. आपको सूची मिल जायेगी.

          श्री रामखेलावन पटेल -- शीघ्र उपलब्‍ध करा देंगे.

          श्रीमती कल्‍पना वर्मा -- शीघ्र, मतलब कब तक उपलब्‍ध करा देंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- हो गया, हो गया. आप बैठिए.

          श्री रामखेलावन पटेल -- एक महीने में करा देंगे.

          प्रश्‍न संख्‍या - 8 (अनुपस्‍थित)

मनरेगा अन्तर्गत किये गये कार्य

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

9. ( *क्र. 2360 ) श्री हर्ष विजय गेहलोत (गुड्डू) : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रतलाम जिले में विधानसभा अनुसार बतावें की वित्तीय वर्ष 2021-22 में 10 फरवरी, 22 तक कुल कितने जॉबकार्डधारियों ने मनरेगा में काम मांगा? कितने जॉबकार्डधारियों को काम मिला तथा कितने को काम नहीं मिला? काम न दिए जाने का क्या कारण है? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार बतावें कि वर्ष 2017-18 से 2021-22 तक मनरेगा में कितनी राशि का प्रावधान था, कितने जॉबकार्डधारियों को प्राप्‍त हुई, कितने जॉबकार्डधारियों ने काम मांगा तथा कितने जॉबकार्डधारियों को काम नहीं मिला? (ग) रतलाम जिले में वर्ष 2017 से 2021 तक प्रतिवर्ष किस-किस माह मे, कितनी-कितनी संख्या में पलायन हुआ है? (घ) रतलाम जिले में मनरेगा में वर्ष 2017 से 2021 तक आर्थिक अनियमितता के कितने प्रकरण पाये गये? प्रकरणवार राशि, दिनांक, प्रकार, जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारी सहित जानकारी देवें।

पंचायत मंत्री ( श्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया ) : (क) रतलाम जिले में वित्तीय वर्ष 2021-22 में 10 फरवरी, 22 तक 91853 जॉबकार्डधारियों ने मनरेगा में काम की मांग की गई। उपरोक्‍त अवधि में मांग करने के उपरांत कार्य स्‍थल पर उपस्थित 76659 जॉबकार्डधारियों को काम दिया गया। मनरेगा अंतर्गत कार्य की मांग करने वाले शेष जॉबकार्डधारी कार्यस्‍थल पर उपस्थित नहीं हुये, इस कारण काम नहीं देने का प्रश्‍न ही नहीं उठता। विधानसभावार जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) मनरेगा योजनांतर्गत जिले को राशि आवंटित करने का कोई प्रावधान नहीं है। मजदूरी का भुगतान श्रमिकों के खाते में एवं सामग्री का भुगतान सामग्री प्रदायकर्ता के खाते में FTO द्वारा नोडल खाते से PFMS के माध्‍यम से हस्‍तांतरित होता है। शेष जानकारी उत्‍तरांश '''' अनुसार है। (ग) महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजनांतर्गत जॉबकार्डधारी परिवारों के वयस्‍क सदस्‍यों द्वारा अकुशल श्रम की मांग किये जाने पर एक वित्‍तीय वर्ष में एक जॉबकार्डधारी परिवार को 100 दिवस का रोजगार दिये जाने का प्रावधान है। स्‍थाई पलायन संबंधी आंकड़े पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में संधारित नहीं किये जाते हैं। (घ) रतलाम जिले में मनरेगा योजना में वर्ष 2017 से 2021 तक आर्थिक अनियमितता की प्रकरणवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

परिशिष्ट - "दो"

        श्री हर्ष विजय गहलोत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. मुझे बोलने का मौका मिला. आपके माध्‍यम से मेरा माननीय मंत्री जी प्रश्‍न है कि हमारा जिला पूरा आदिवासी बाहुल्‍य जिला है और पलायन की बहुत ही गंभीर समस्‍या है. विभाग रोजगार की गारंटी देता है लेकिन पलायन की जानकारी संधारित नहीं की जाती है कि पलायन कितने लोगों का हुआ है, पलायन क्‍यों हुआ है लेकिन इसकी जानकारी नहीं दी जाती, जो कि एक बहुत ही गंभीर समस्‍या है. अभी से हमारे क्षेत्र के आदिवासी गुजरात, महाराष्‍ट्र, राजस्‍थान जाने को मजबूर हैं. मनरेगा में काम तो मिलता है लेकिन उसका जो पेमेन्‍ट होता है, उसमें बहुत देरी की जाती है और देरी होने की वजह से मजदूर की उसमें रूचि कम हो जाती है, जिसके कारण वह पलायन करने को मजबूर हो जाता है, ऐसा क्‍यों होता है ?

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, माननीय सदस्‍य पूछ रहे हैं कि पलायन क्‍यों होता है ?

          श्री रामखेलावन पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जितने लोगों की मांग होती है उनको, जिनका जॉब कार्ड में नाम होता रहता है, मस्‍टर रोल में जिनका नाम आ जाता है उन सबको काम देने की मनरेगा में व्‍यवस्‍था है. सबको काम दिया जाता है. इस पर कोई पलायन नहीं करते.

          अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है.

          श्री हर्ष विजय गहलोत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भारी मात्रा में पलायन होता है.

          श्री लक्ष्‍मण सिंह -- माननीय सदस्‍य रतलाम का सही कह रहे हैं. जरा, अपनी जानकारी दुरूस्‍त करिए. क्‍या बात करते हैं कि पलायन नहीं करते हैं.

          श्री रामखेलावन पटेल -- जानकारी दुरूस्‍त है. नहीं, पलायन नहीं होता है...(व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है.

          श्री लक्ष्‍मण सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोविड काल में आपकी सरकार ने हजारों मजदूरों को वापस लायी है और उसमें आपने बड़ा श्रेय लिया है, तो पलायन होता है.

          श्री रामखेलावन पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, मनरेगा में मध्‍यप्रदेश ऐसे तीन राज्‍यों में जहां सबको काम देने का काम हुआ है और आगे भी उनको काम देने का काम होगा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है विधायक जी.

          श्री हर्ष विजय गहलोत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,..

          अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, आ गया पूरा. पलायन नहीं होता, उन्‍होंने इंकार कर दिया.

          श्री हर्ष विजय गहलोत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा और भी प्रश्‍न है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- एक प्रश्‍न पूछ लीजिए, पूछ लीजिए.

          श्री हर्ष विजय गेहलोत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मनरेगा के कार्य में जो मजदूरी मिलती है, उसका प्रतिवर्ष कितना-कितना भुगतान किया गया है, मैंने यह भी पूछा है, लेकिन उसमें मुझे कोई जवाब नहीं मिला है और प्रत्‍येक जॉबकार्डधारी को औसत मजदूरी कितनी मिलती है ?

            अध्‍यक्ष महोदय -- इसमें ऐसा प्रश्‍न कहां है आपका ?

            श्री रामखेलावन पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रश्‍न में नहीं है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- यह प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता.

 

जॉबकार्ड धारियों का मनरेगा में रजिस्‍ट्रेशन

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

10. ( *क्र. 1293 ) श्री भूपेन्द्र मरावी : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि                                           (क) डिण्‍डोरी जिले में वित्‍तीय वर्ष 2021-22 में 28 फरवरी, 2022 तक कितने जॉबकार्ड धारी लोगों ने मनरेगा में रजिस्‍ट्रेशन कराया था? उपरोक्‍त अवधि में कितने जॉबकार्डधारियों को मनरेगा में काम मिला? (ख) उपरोक्‍त अवधि में कितने जॉबकार्ड धारियों को मनरेगा में काम नहीं मिला? (ग) मनरेगा में जॉबकार्ड होने के बावजूद काम मांगने पर उन्‍हें काम न दिए जाने का क्‍या कारण है? (घ) क्‍या सरकार भविष्‍य में मनरेगा में जॉबकार्ड धारियों को प्रत्‍येक व्‍यक्ति को कार्य की मांग करने पर काम दिया जाना सुनिश्चित करेगी?

पंचायत मंत्री ( श्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया ) : (क) महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत डिण्‍डौरी जिले में वित्‍तीय वर्ष 2021-22 में 28 फरवरी 2022 तक 6465 जॉबकार्डधारी परिवारों ने मनरेगा में रजिट्रेशन कराया। उक्‍त अवधि में इन 6465 जॉबकार्डधारी परिवारों के साथ-साथ 180976 जॉबकार्डधारी परिवारों को मांग के आधार पर काम/रोजगार उपलब्‍ध कराया गया। (ख) उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में जॉबकार्डधारियों को मनरेगा में काम नहीं मिलने की संख्‍या शून्‍य है। (ग) उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता। (घ) महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 का उद्देश्‍य ऐसे प्रत्‍येक ग्रामीण परिवार जिनके वयस्‍क सदस्‍य अकुशल शारीरिक श्रम कार्य करना चाहते हैं, को एक वित्‍त वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीयुक्‍त मजदूरी रोजगार उपलब्‍ध कराना है। मनरेगा में मजदूरी रोजगार को कानूनी गारंटी दी गई है।

          श्री भूपेन्‍द्र मरावी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूँ. मैं प्रथम बार का विधायक हूँ, आपने मुझे सदन में बोलने का मौका दिया, मैं सदन के सभी सम्‍माननीय सदस्‍यों को और आपको प्रणाम करता हूँ. माननीय मंत्री जी से मेरा यह सवाल है, मंत्री महोदय जी यह बताने की कृपा करेंगे कि डिण्‍डोरी जिले में वित्‍तीय वर्ष 2021-22 में 28 फरवरी, 2022 तक कितने जॉबकार्ड धारी लोगों ने मनरेगा में रजिस्‍ट्रेशन कराया था?

          अध्‍यक्ष महोदय -- यह तो आपके प्रश्‍न में है और इसका उत्‍तर आ गया है. इसका उत्‍तर लिखा हुआ है. आप पूरक प्रश्‍न पूछिए.

          श्री भूपेन्‍द्र मरावी --  अध्‍यक्ष महोदय, उपरोक्‍त अवधि में कितने जॉबकार्डधारियों को मनरेगा में काम मिला ? उपरोक्‍त अवधि में कितने जॉबकार्डधारियों को मनरेगा में काम नहीं मिला ?

            अध्‍यक्ष महोदय -- यह भी आपके प्रश्‍न में है और उत्‍तर लिखा हुआ है कि शून्‍य है. सब कुछ लिखा हुआ है. आप पूरक प्रश्‍न पूछिए ना.

          श्री भूपेन्‍द्र मरावी -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहता हूँ क्‍योंकि मैं प्रथम बार का विधायक हूँ और पहली बार बोल रहा हूँ. हमारा डिण्‍डोरी जिला आदिवासी बहुल जिला है, जब कोरोना काल चल रहा था तो हमारे डिण्‍डोरी जिले में प्रशासन के रिकॉर्ड के अनुसार 40 हजार से अधिक लोग पलायन कर रहे थे. आज डिण्‍डोरी जिले में रोजगार गारंटी योजना को किस तरीके से कुचलने का काम किया जा रहा है. अध्‍यक्ष जी, मैं माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूँ कि अभी वर्तमान में, जैसे मजदूर वर्ग, वे किसी भी वर्ग के हों, जो गांव में अपना काम करते हैं, उनको एक साथ उनकी मजदूरी नहीं मिल पाती. पहले आदिवासियों का पैसा आता है, फिर अनुसूचित जातियों का पैसा आता है और फिर अन्‍य पिछड़े वर्गों का पैसा आता है, ऐसा करते-करते लगभग 6 महीनों तक मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं हो पाता है, ऐसा क्‍यों होता है ?

            श्री रामखेलावन पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मनरेगा में समय-सीमा में मजदूरी का भुगतान कर दिया जाता है, ऐसी कहीं कोई शिकायत नहीं है. हर मजदूर जो काम करता है, उसको समय-सीमा में भुगतान हो जाता है.

          श्री भूपेन्‍द्र मरावी -- अध्‍यक्ष महोदय, बिल्‍कुल नहीं, हमारे डिण्‍डोरी जिले में अभी 6-6 महीने से, सालों से मजदूरी भुगतान बकाया है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, अब वह तो जवाब आ गया है सबको मिल जाता है.

          श्री भूपेन्‍द्र मरावी -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि आपकी सरकार बड़ी-बड़ी बातें कर रही हैं.

          श्री रामखेलावन पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, स्‍पेसिफिक किसी का भुगतान न हुआ हो तो हमें जानकारी दे देंगे, भुगतान हो जाएगा.    

          श्री भूपेन्‍द्र मरावी -- माननीय मंत्री जी से मेरा निवेदन है...

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाएं, प्रश्‍न संख्‍या 11, श्री उमाकांत शर्मा जी.

 

 

 

 मनरेगा योजनान्‍तर्गत निर्माण कार्यों की जानकारी

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

11. ( *क्र. 2828 ) श्री उमाकांत शर्मा :   

 

          श्री रामखेलावन पटेल, राज्‍य मंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग -

 

          श्री उमाकांत शर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका, सदन का और माननीय विधि, विधायी और संसदीय कार्य मंत्री महोदय का विशेष रूप से ध्‍यान आकर्षित कराना चाहता हूँ. मेरे प्रश्‍न क्रमांक 2828 में मूल प्रश्‍न को ही बदल दिया गया है. मैंने पूछा था, मेरे द्वारा मनरेगा योजना के सामुदायिक एवं हितग्राहीमूलक कार्यों की जानकारी चाही गई थी, नाम सहित, कार्य सहित और मात्र मेरे विधान सभा क्षेत्र के दो विकास-खण्‍डों की और ये वर्ष 2014 से चाही गई थी, उसमें केवल सामुदायिक कार्यों की संख्‍या लिखी गई है. पूरी जानकारी क्‍यों नहीं दी गई है ? यह प्रश्‍न किसने बदल दिया, विधान सभा के कर्मचारियों ने बदला या विभाग के कर्मचारियों ने बदला, माननीय मंत्री महोदय बताने का कष्‍ट करें ? वर्ष 2014 से जानकारी देनी थी, वह क्‍यों नहीं दी गई है, बताने का कष्‍ट करें ?

          अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, नहीं, किसी ने बदला नहीं है.

          श्री रामखेलावन पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं विद्वान सदस्‍य को बताना चाहता हूँ कि ...

          श्री उमाकांत शर्मा -- पहले आप मेरा मूल प्रश्‍न पढ़ दीजिए, मेरा मूल प्रश्‍न पढ़िए, क्‍या था और उसे किसने बदला. यह पूरे सदन के अधिकार की बात है. प्रत्‍येक सदस्‍य के सम्‍मान और अधिकार की बात है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी और माननीय शर्मा जी, आप बैठ जाइये. यह देखिये आपने जो प्रश्‍न लगाया था, इतना वृहद था. आप बैठ जाइये. हर बार खड़े होने की आवश्‍यकता नहीं है. यह विधान सभा के अध्‍यक्ष का अधिकार है कि प्रश्‍नों को किस सीमा तक लिया जाए जिससे उत्‍तर देने में सहूलियत हो. यह अधिकार की बात मत करिये कि किसको अधिकार है. अधिकार मुझे है, आसंदी को अधिकार है. इसलिये आपके प्रश्‍नों का जवाब जैसा आया है उस पर आप उनसे पूछिये, क्‍योंकि यह बहुत ज्‍यादा लंबा था.

          श्री उमाकांत शर्मा -- मैं पूछना चाहता हूं कि मैंने जब मात्र दो विकासखंड के सब कार्यों का विवरण मांगा था, तो वह उत्‍तर क्‍यों नहीं दिया गया ?

          अध्‍यक्ष महोदय -- वही तो कटौती कर दी गई थी ना, वह बहुत ज्‍यादा था.

          श्री रामखेलावन पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न संशोधित कराया गया है.

          श्री उमाकांत शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने नहीं किया है.

          श्री रामखेलावन पटेल -- प्रश्‍न के जवाब में सारी जानकारी उपलब्‍ध है.

          श्री उमाकांत शर्मा -- मैं सदन में साक्षी देकर कहता हूं कि मेरे प्रश्‍न के अनुसार जानकारी उपलब्‍ध नहीं है. संशोधन के बाद नहीं है. आप 2020 की जानकारी तो दीजिये.

          श्री रामखेलावन पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं जानकारी उपलब्‍ध कराये दे रहा हूं. विधान सभा के अंतर्गत जनपद पंचायत लटेरी और सिरोंज में अपूर्ण कार्यों की जानकारी है. सिरोंज में 2021 में 93 पंचायतों में कार्यों की संख्‍या 745 है. 2 अपूर्ण हैं.

          श्री उमाकांत शर्मा -- मैंने लटेरी में 7, सिरोंज में...

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप जवाब तो सुनिये.

          श्री रामखेलावन पटेल -- सिरोंज में 93 पंचायतों में 825 में से...

          श्री उमाकांत शर्मा -- मैंने 93 का पूछा ही नहीं है. मैंने पूछा था कि जनपद पंचायत लटेरी की 7 एवं सिरोंज की 11 ग्राम पंचायतों की जांच 7 अगस्‍त, 2020 से जारी है उस पर अभी तक जांच पूर्ण क्‍यों नहीं हुई और कार्यवाही क्‍यों नहीं हुई ?

          अध्‍यक्ष महोदय -- उमाकांत जी, आप बैठ जाइये. जवाब तो देने दीजिये.

          श्री रामखेलावन पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, आपने जो कार्यों की शिकायत की है, तीन महीने से उसमें जांच चल रही है. जांच प्रक्रियाधीन है और जैसे ही जांच पूरी हो जाएगी उसमें कार्यवाही हो जाएगी.

          श्री उमाकांत शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, सीईओ लटेरी निर्देशक शर्मा इसमें जांच में दोषी पाये जा रहे हैं इसलिये उनकी पहुंच बहुत लंबी है और इसलिये उनको बचाने के लिये इस प्रकार की कार्यवाही हो रही है.(कांग्रेस सदस्‍यों द्वारा शेम-शेम के नारे लगाये जाने पर) आप लोग प्रसन्‍न मत होइये.

          श्री कमलेश्‍वर पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय ...

          श्री उमाकांत शर्मा -- श्रीमान् मैं सक्षम हूं. मैं पूछ लूंगा. आपके सहयोग की जरूरत नहीं है. और सुन लो ( XXX ) ने विधिवत पत्र लिखकर कहा है कि इन पंचायतों की जांच ना कराई जावे. मेरे पास पत्र है. यह ( XXX ) का पत्र है. क्‍या मंत्री महोदय और विभाग के कर्मचारी ( XXX ) के अनुसार चल रहे  हैं ? मुझे लगता है कि इसमें कोई बड़ी मिली भगत है. अपराधियों को बचाने के लिये कांग्रेस का संरक्षण है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप प्रश्‍न पूछिये. प्रश्‍न में आप क्‍या चाहते हैं शर्मा जी ?

          श्री उमाकांत शर्मा -- मैं यह चाहता हूं कि एक एसआईटी की टीम बनाकर जो तीन साल से जांच नहीं हो रही है उसे समयावधि में पूर्ण कराया जावे. दोषियों को दंडित किया जावे. ( XXX ) की अनैतिक बात न मानी जावे.

          अध्‍यक्ष महोदय -- जो यहां नहीं हैं. आप उनका नाम मत लीजिये. आप नाम मत लीजिये. इसे रिकार्ड न किया जाए.

          श्री तरुण भनोत -- अध्‍यक्ष महोदय, संसदीय कार्य मंत्री जी बताइये. क्‍या आपकी सरकार ( XXX ) चला रहे हैं ?

          श्री उमाकांत शर्मा -- मैं निवेदन करना चाहता हूं कि यह लिखा है. मैं पत्र की कॉपी दे दूंगा. यह दस्‍तखत देख लो. क्‍या  प्रदेश  स्‍तर पर विशेष टीम  बनाकर  तीन महीने के अंदर जांच कराकर दूध का दूध, पानी का पानी कर दिया जाएगा ?  दोषियों को दंडित कर दिया जाएगा ?

          श्री रामखेलावन पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय ...    

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाइये. संसदीय कार्य मंत्री जी खड़े हैं.

          संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) -- अध्‍यक्ष महोदय, जो सम्‍मानित सदस्‍य ने कहा है कि तीन महीने में जांच कराकर दूध का दूध, पानी का पानी कर दिया जाएगा, तो यह कर दिया जाएगा.

          डॉ. गोविंद सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं..

          अध्‍यक्ष महोदय -- बस ठीक है. उत्‍तर आ गया. हो गया गोविंद सिंह जी, आगे मत बढ़ाइये.

डॉ. गोविन्द सिंह - अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे बड़े दुख के साथ कह रहा हूं कि यह बिल्कुल सच्चाई है कि यहां प्रश्न बदले जाते हैं और बदले गये हैं. (शेम-शेम की आवाज) हमारे खुद के, मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं कि आपको उसमें कोई जानकारी नहीं है, स्वयं का प्रश्न है, हमने बहुत छोटा प्रश्न लगाया था और उस प्रश्न में केवल एक कार्यालय की दो साल की जानकारी मांगी थी, बहुत छोटी जानकारी मांगी थी, उसमें लिख दिया कि यह विस्तृत जानकारी है और अगर वह जानकारी सही आ जाती तो जो उन्होंने लाखों रुपयों का भ्रष्टाचार किया, वह दोषी अधिकारी उसमें फंसते. अब पता नहीं कैसे आपकी जानकारी में, गैर जानकारी में यह हुआ है, हमारे प्रश्न में, सीपीए के प्रश्न में यह हुआ है. हमने प्रमुख सचिव से निवेदन किया और उन्होंने कहा कि हम इसको भेज रहे हैं. दोबारा जानकारी मंगा रहे हैं, आखिर यह क्यों हो रहा है? अगर वह चला जाता तो वास्तव में सच्चाई सामने आ जाती, इसमें हमारा निवेदन है कि भविष्य में इस पर जहां गड़बड़ी हो रही है, उसमें आप गौर करें और थोड़ा अधिकारियों को निर्देशित करें.

अध्यक्ष महोदय - आप बता दीजिएगा, उसको देख लेंगे.

श्री प्रियव्रत सिंह - अध्यक्ष महोदय, (XXX) के नाम का उल्लेख हुआ है.

अध्यक्ष महोदय - उसको हटवा दिया है.

श्री प्रियव्रत सिंह - या फिर जो आरोप उन्होंने लगाया है, वह मंत्री जी उसका जवाब दे दें कि  क्या वह (XXX) के हिसाब से काम कर रहे हैं?

अध्यक्ष महोदय - उसको हटवा दिया है. श्री निलय विनोद डागा.

 

 

 

 

 

माध्‍यमिक शिक्षकों की भर्ती

[स्कूल शिक्षा]

12. ( *क्र. 1047 ) श्री निलय विनोद डागा : क्या राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा प्रश्‍न क्रमांक 215, दिनांक 13.12.2021 द्वारा प्रदेश में माध्‍यमिक शिक्षकों के 54282 पद रिक्त होना बताया गया है, परन्तु विभाग ने केवल 5670 पदों पर ही भर्ती का आयोजन किया है? क्‍या उक्‍त पदों में वृद्वि की जावेगी? (ख) मध्यप्रदेश में माध्‍यमिक शिक्षकों के कितने पद बैकलॉग के रिक्‍त हैं? विषयवार बतावें। (ग) मुख्यमंत्री जी द्वारा जो घोषणा की गई है उसके अनुसार क्या इसी वित्‍तीय वर्ष में बैकलॉग पदों की भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की जाकर पदों की पूर्ति की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) वर्ष 2018 में शिक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण अभ्यर्थी ओवरएज हो गए हैं, इसके लिए कौन जिम्मेदार है? क्‍या ओवरएज हुए अभ्‍यर्थियों को राहत प्रदान की जावेगी?

राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा ( श्री इन्‍दर सिंह परमार ) : (क) विधान सभा प्रश्‍न क्रमांक 215, दिनांक 13.12.2021 में बताई गई रिक्तियों में सीधी भर्ती एवं पदोन्नति की रिक्तियां सम्मिलित हैं। पदपूर्ति एक सतत् प्रक्रिया है, पदों में वृद्वि सक्षम स्वीकृति पर निर्भर करेगा। (ख) माध्यमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया प्रचलित है, भर्ती प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्‍चात बैकलॉग पदों की गणना कर जानकारी दी जा सकेगी। (ग) वर्तमान नियोजन प्रक्रिया में पूर्व के बैकलॉग पदों को सम्मिलित किया गया है, प्रश्‍नांश '' के उत्‍तर के प्रकाश में समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) वर्तमान में प्रचलित उच्च माध्यमिक एवं माध्यमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में अभ्यर्थी की न्यूनतम एवं अधिकतम आयु की गणना दिनांक 01.01.2019 की स्थिति में की गई है। अतः शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री निलय विनोद डागा - अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न स्कूली शिक्षा मंत्री जी से है कि माध्यमिक शिक्षा में 54222 पद रिक्त थे, जिसमें 5670 पदों की भर्ती का आयोजन किया गया.  बाकी के पद कब तक रिक्त रहेंगे, कब तक उनको भरा जाएगा? माननीय मंत्री जी से प्रश्न है कि  बच्चों के भविष्य का अगला सेमिस्टर जो जून में चालू होने वाला है, वह क्या बगैर शिक्षकों के चलेगा? वर्ष 2018 में शिक्षक भर्ती परीक्षा का आयोजन किया गया था, जिसमें हजारों शिक्षक पात्रता परीक्षा में  उत्तीर्ण अभ्यर्थी ओवर एज हो गये हैं, इसकी जिम्मेदारी किसकी है, क्या ओवर एज अभ्यर्थियों को राहत प्रदान की जाएगी एवं  मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षकों के कितने पद बैकलॉग के रिक्त हैं, विषयानुसार एवं जाति अनुसार मुझे बताने की कृपा करें?

श्री इन्दर सिंह परमार - अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो प्रश्न पूछा है उसका उत्तर लिखित में दिया गया है, फिर भी मैं बता देता हूं कि  प्रक्रिया से बाहर होने का आयु सीमा का जो विषय आया है, दिनांक 1.1.2019 की स्थिति में गणना की गई है, इसलिए ऐसा कोई भी व्यक्ति जो उस समय यह उम्र पूरी कर रहा था, वह अपात्र नहीं हुआ है. साथ ही जो माध्यमिक शिक्षक के पदों का विषय है, उसमें 11199 सीधी भर्ती के पद रिक्त थे, उसमें से हमने 3677 लोगों की अभी भर्ती की है क्योंकि बाकी सब पद पदोन्नति वाले हैं. पदोन्नति की संख्या बड़ी है जो रिक्त है 46760, क्योंकि पदोन्नति की प्रक्रिया हुई नहीं है, इसलिए उन पदों पर हम दूसरी भर्ती कर नहीं सकते थे. वह पद खाली हैं, इसलिए रिक्तियां ज्यादा दिख रही हैं और इसीलिए उसमें भर्ती प्रक्रिया में एक भी व्यक्ति को वह नहीं किया गया है.

अध्यक्ष महोदय, पूरी प्रक्रिया में जो आगे का आपका प्रश्न बैकलॉग पदों को लेकर है. बैकलॉग पदों में शिक्षा विभाग में हम अलग उतने पद जोड़ते हैं और उसके बाद उनकी भी भर्ती करते हैं, शेष जो रहते हैं उसमें भी फिर वापस आरक्षण की प्रक्रिया का पालन करते हुए भर्ती की गई है. मैं आपको आंकड़ा भी बता देता हूं. माध्यमिक शिक्षक के लिए भर्ती में हमने अनुसूचित जाति के 160 एवं अनुसूचित जनजाति के 535 ऐसे बैकलॉग के पदों को सम्मिलित किया है और उनको हमने भर्ती प्रक्रिया में जोड़ा है, शेष को फिर से आरक्षण की प्रक्रिया में लेकर जोड़ा है लेकिन साथ में दिक्कत यह है कि कई सारे विषय में अभी भी हमारे पास में कोई प्रतिभागी आए नहीं हैं, इस कारण से वह पद फिर भी खाली रहेंगे, चूंकि अभी प्रक्रिया चल रही है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद में हम पूरे अलग-अलग विषयवार क्या-क्या कितने-कितने पद बैकलॉग के हैं, उसकी संख्या बता पाएंगे. आज की स्थिति में क्योंकि भर्ती प्रक्रिया में हमने वह जोड़े हैं तो उसकी पूरी गणना बची है, अभी भर्ती प्रक्रिया जितनी आज तक हुई है, उसका यह आंकड़ा है, अभी जो वेटिंग लिस्ट है, उसको भी आगे जाकर क्लियर करना है तो उसमें जो होंगे तो उसके बाद इसकी गणना करके हम आपको जानकारी दे पाएंगे.

                                                         

                        श्री निलय विनोद डागा -- मंत्री जी, बच्चों के भविष्य का सवाल है.  नया सेमेस्टर जून में  चालू होने वाला है  और  आज अगर 46 हजार  पद रिक्त  हैं,  तो इनको कब तक भरा जायेगा,कृपया समय सीमा बता दें, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित  हो सके. कोरोनाकाल में वैसे भी   बच्चे पढ़  नहीं पाये हैं.  आप भर्ती कर नहीं पाये हैं. इसलिये मेरा यह निवेदन है कि  बच्चों के भविष्य के साथ  खिलवाड़ न करें और  इन पदों को  नया सेमेस्टर  जून  में चालू होने के पहले  भरवाने की  कृपा करें और  कृपया इसमें आप हमें  समय सीमा  निश्चित करके  बता दें.

                   श्री इन्दर सिंह परमार-- अध्यक्ष महोदय,  जो पदोन्नति वाला प्रकरण है,  पदोन्नति के   रिक्त जो पद हैं,  उन पर हम अतिथि  शिक्षक  के माध्यम से उनकी पढ़ाई  कराते हैं, क्योंकि जब तक  प्रमोशन  के संबंध में   सुप्रीम कोर्ट और  हाई कोर्ट में  प्रकरण है, जब तक  वह  निराकरण  नहीं होता,  तब तक हम उन पर  किसी को प्रमोशन नहीं कर सकते हैं और उस कारण  वह  रिक्त हैं,  लेकिन उनकी  जगह पर हम  अतिथि शिक्षकों  की व्यवस्था  से  अभी पढ़ाई का काम  प्रभावित न हो,  इसका प्रयास कर रहे हैं. साथ  ही यह भी कि  जब अतिथि  शिक्षक पढ़ा रहे हैं,  तो पढ़ाई  कोई प्रभावित नहीं हो रही है.  लेकिन   अभी   पिछले साल की हमारी जो  भर्ती प्रक्रिया है,  वह जल्दी पूरी  हो जायेगी.  बाकी  जो सूची बची है, वह भी  करके हम  अगले साल में भी, कल भी  मुख्यमंत्री जी ने  जो राज्यपाल जी के अभिभाषण पर   चर्चा में बात कही है,  13 हजार  रिक्त पदों पर  अगले साल फिर हम   भर्ती  करने वाले हैं.  भर्ती की प्रक्रिया चल रही है और  इसी प्रकार से शायद   ग्रेड-3 के जो  संविदा  पद हैं,  उनके लिये भी हमारी  पात्रता परीक्षा  अभी चल ही रही है. प्रक्रिया में है, निरन्तर भर्ती प्रक्रिया  जारी रहेगी और  बच्चों का किसी भी प्रकार  से  जीवन बर्बाद न हो, उनकी पढ़ाई  बर्बाद  न हो,  सरकार   पूरी तरह से  उनका  ख्याल रख रही है.

                   श्री निलय विनोद डागा -- मंत्री जी, 46 हजार पद  आज भी  रिक्त हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहता हूं.

                    अध्यक्ष महोदय--  बस हो गया.  उन्होंने कह दिया कि  हम अतिथि शिक्षक रख रहे हैं.

                   श्री निलय विनोद डागा --मंत्री जी, क्या ये  पूरे संविदा  शिक्षक 46 हजार  रखेंगे आप.  एक भी बच्चे का भविष्य खराब नहीं होने देंगे.  पूरे 46 हजार संविदा शिक्षक रखेंगे. अध्यक्ष जी,  मैं आपसे यह संरक्षण चाहता हूं.

                   अध्यक्ष महोदय-- जहां जरुरत होगी,  अतिथि शिक्षक रखेंगे. अतिथि शिक्षक रखने का कह तो रहे हैं.

                   श्री निलय विनोद डागा -- अध्यक्ष महोदय, क्या पूरे 46 हजार रखेंगे,मैं  यह जानना चाहता हूं.

                   अध्यक्ष महोदय-- जितनी जरुरत होगी, उतने  रखेंगे, कह तो दिया.

          श्री निलय विनोद डागा -- अध्यक्ष महोदय, जितने रिक्त पद हैं,  उतने पूरे भरने पड़ेंगे,  क्योंकि  आज  स्कूल बंद पड़े हुए हैं.

          श्री इन्दर सिंह परमार-- अध्यक्ष महोदय, जितने पद खाली हैं, प्रमोशन के पद खाली हैं,  टोटल जितने पद स्वीकृत  हैं, उसमें  से  इतने पद हमारे प्रमोशन के हैं,  प्रमोशन के पद खाली हैं  और जहां जहां जिस  स्कूल  में  छात्रों की संख्या के मान पर  जितनी आवश्यकता पड़ती है, हमने इस साल भी अतिथि शिक्षक  रखे हैं, जरुरत पड़ेगी तो  आगे आने वाले सत्र  में भी रखेंगे. बच्चों की   किसी भी प्रकार से  पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी.  यह सरकार को पूरी चिंता है.

          श्री निलय विनोद डागा -- मंत्री जी, कृपया आप हमें सूची प्रदान कर दें कि  कितने शिक्षक  आपने संविदा पर रखें.

          अध्यक्ष महोदय--डॉ. गोविन्द सिंह जी, प्रश्न करिये.

          डॉ. गोविन्द सिंह --  अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से अनुरोध करना चाहता हूं कि  माननीय कमलनाथ जी की सरकार  ने  उस समय पदोन्नति पर  एक सामान्य प्रशासन विभाग  का  आदेश निकाला है.  जिस प्रकार आपके  आईएएस,आईपीएस, स्टेट सर्विस के  डिप्टी कलेक्टर से  जाकर कमिश्नर तक बन रहे हैं.  डीएसपी से जाकर  आईजी  तक बन रहे हैं.  उनकी पदोन्नति न होकर यह क्रमोन्नति है.  तो यह साफ आदेश  आज भी लागू है.  पदोन्नति के संबंध में जब तक   माननीय सर्वोच्च न्यायालय  का स्पष्ट आदेश नहीं आ जाता,  तब तक आप क्रमोन्नति  कर  उनको आगे पद  पर  दे सकते हैं.   क्रमोन्नति पर सुप्रीम कोर्ट से  कहीं  रोक नहीं है और यह आदेश है.  हमारा आपसे अनुरोध है कि  आपके विभाग में प्रक्रिया चली भी थी, लेकिन बाद में वह  आज कल  बंद  हो गई, तो कृपा करके  उसको दिखवा लें  और आप क्रमोन्नति कर दें.  तो आपके पद भी भर जायेंगे और समस्या का समाधान भी हो जायेगा.

          श्री इन्दर सिंह परमार-- अध्यक्ष महोदय,  जो आपने पुरानी सरकार का  उल्लेख किया है,  उस सरकार के कारण ही  भर्ती प्रक्रिया में  भी दिक्कत है,  जो आरक्षण के इशू को लेकर के   ठीक से केस नहीं लड़ा, उसके कारण से सारी दिक्कतें आई हैं और इसके बारे में क्या हो सकता है, हमारे विभाग में  इसके बारे में समीक्षा हो रही है.  जो ठीक होगा, वह करेंगे.

          डॉ. गोविन्द सिंह -- अध्यक्ष महोदय, इससे सबका भला हो जायेगा, प्रदेश  का हित होगा.

          श्री इन्दर सिंह परमार--  जी,  सबका भला करने के लिये ही  भारतीय जनता पार्टी  की सरकार है, आपकी सरकार ने भला नहीं किया.  उन सबका हम भला करने जा रहे हैं, आप निश्चित रहें.               

            डॉ.गोविन्द सिंह - आदेश देखो ना. (XXX) हम किसी को भेज देते हैं.

          अध्यक्ष महोदय - इसे विलोपित किया जाए.

          श्री इन्दर सिंह परमार - अध्यक्ष महोदय,यह गलत तरीका है. मैं इतिहास भी पढ़ा दूंगा उनको.

          डॉ.गोविन्द सिंह - अहित कर रहे हो आप.

          श्री इन्दर सिंह परमार - पूरा इतिहास पढ़ा दूंगा. आजादी से लेकर 1857 की क्रांति से लेकर 3 हजार साल पहले तक का. आप घबराईये मत. मैं बोलने वाला हूं.आपके विचार आपके कारनामे सब बता दूंगा. निश्चिंत रहिये आप.

          अध्यक्ष महोदय - कृपया बैठिये.

 

स्वीकृत सड़क का निर्माण

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

13. ( *क्र. 1984 ) श्री विजय रेवनाथ चौरे : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सौंसर विधानसभा के ग्राम घोगरी से भवानी माता मंदिर की ओर लगभग डेढ़ किलोमीटर की सड़क सन 2019 में स्वीकृत हुई थी? (ख) ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के अधीन इस सड़क का निर्माण होना था, परंतु आज 3 वर्ष बीत चुके किंतु निर्माण कार्य प्रारंभ क्यों नहीं हुआ(ग) कार्य प्रारंभ कब तक होगा? (घ) इस सड़क का निर्माण कब तक पूरा किया जाएगा, विभाग के अधिकारियों पर क्या कार्यवही होगी?

पंचायत मंत्री ( श्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया ) : (क) सन 2019 में कोपरावाडी रामूढाना रोड से घोघरी तक एक किलोमीटर सड़क स्‍वीकृत हुई थी। इसी मार्ग पर भवानी माता मंदिर स्थित है। (ख) ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के अधीन स्‍वीकृत कोपरावाडी रामूढाना रोड से घोघरी मार्ग में किसानों की निजी भूमि आने एवं किसानों द्वारा शासन पक्ष में भूमि दान देने हेतु तैयार न होने के कारण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ। (ग) किसानों द्वारा शासन पक्ष में रजिस्‍टर्ड दान पत्र देने के उपरांत ही कार्य किया जा सकेगा। (घ) उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

          श्री विजय रेवनाथ चौरे - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में सन् 2019 में कमलनाथ जी जब मुख्यमंत्री थे उस समय एक सड़क स्वीकृत हुई थी. भवानी माता मंदिर से घूघरी सड़क जो तीन साल हो गये आज दिनांक तक उसका कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है. यह आदिवासी बाहुल्य ग्राम है और महिलाओं की  डिलेवरी के समय, हमारी  बहू-बेटियों की डिलेवरी के समय बरसात के दिनों में महिलाओं को अस्पताल ले जाना पड़ता है तो बैलगाड़ियों पर लादकर  ले जाना पड़ रहा है. इसमें मुझे उत्तर यह मिला है किसानों के द्वारा भूमि दान नहीं की गई है. इसमें प्रावधान दान का जरूर है मैं मानता हूं तो क्या किसानों के द्वारा दान हीं की गई तो सड़क नहीं बनेगी. सड़क बनाने के लिये दूसरी तरफ से  भी रास्ता है वहां के अधिकारी और वहां का जो अमला है वह गु्मराह कर रहा है मंत्री जो को मैं मंत्री जी निवेदन करता हूं कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में राजस्व की जो भूमि है वहां पर एक नाला है वहां से होकर एक सड़क बनाई जाए और जिसके लिये बजट में प्रावधान किया जाए कि इसकी राशि बढ़ाई जाए. यह दुर्भाग्य है कि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में महिलाओं के साथ ऐसा हो रहा है.

          पंचायत राज्य मंत्री(श्री रामखेलावन पटेल) - माननीय अध्यक्ष महोदय, 400 मीटर निजी भूमि आ रही है उसके कारण वह रोड नहीं बन पा रही है. तहसीलदार के कार्यालय में आब्रजन की कार्यवाही की गई है. जिसकी निजी भूमि है उसने मना कर दिया है कि हम जमीन दान नहीं करेंगे इसलिये वह रोड नहीं बन पा रही है. विधायक जी जमीन दान करवा दें तुरंत रोड बन जायेगी.

          श्री विजय रेवनाथ चौरे - माननीय अध्यक्ष महोदय, दूसरी जगह से भी जहां नाला है वहां से सड़क बनाई जा सकती है. कनाडपीपला से लेकर सालीढाना एक ऐसा गांव है जहां पर नाले से होकर सड़क बनाई  जा सकती है. उसके लिये बजट में प्रावधान किया जाए. एक तरफ भारतीय जनता पार्टी की सरकार महिला हितों की बात करती है. आदिवासियों के हितों की बात करती है. अध्यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहूंगा.

          अध्यक्ष महोदय - उनका कहना है कि कोई बगल से सड़क निकलती है निकल सकती है तो उसे कर दीजिये.

          श्री रामखेलावन पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, अगर कहीं दूसरी तरफ से शासकीय जमीन उपलब्ध हो जायेगी तो रोड बनवाने में कोई दिक्कत नहीं है.

          श्री विजय रेवनाथ चौरे - माननीय अध्यक्ष महोदय, वहां सड़क बन सकती है वहां रास्ता है.

          अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जाईये. शासकीय जमीन का ही नहीं कहिये यदि और कोई जमीन भी उपलब्ध हो जाती है तो करवा दीजिये.

          श्री रामखेलावन पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, हम परीक्षण करा लेंगे. परीक्षण के बाद जमीन उपलब्ध होगी तो उस पर विचार करेंगे.

प्रश्न संख्या - 14                   अनुपस्थित

प्रश्न संख्या -  15                  अनुपस्थित

प्रश्न संख्या - 16                   अनुपस्थित

 

जॉबकार्डधारी परिवारों को मनरेगा में काम दिया जाना

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

17. ( *क्र. 755 ) श्री मुकेश रावत (पटेल) : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अलीराजपुर जिले में वित्तीय वर्ष 2021-22 में प्रश्‍न दिनांक तक कितने जॉबकार्डधारी परिवारों द्वारा मनरेगा में कार्य की मांग की गई? (ख) उक्‍त अवधि में कितने जॉबकार्डधारी परिवारों को मनरेगा में काम मिला और कितने को नहीं मिला? (ग) मनरेगा में जॉबकार्डधारी परिवारों को काम मांगने के बावजूद उन्‍हें काम न दिए जाने का क्‍या कारण है? (घ) क्या सरकार भविष्य में मनरेगा में जॉबकार्डधारी परिवारों को काम दिया जाना सुनिश्चित करेगी?

पंचायत मंत्री ( श्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया ) : (क) अलीराजपुर जिले में वित्तीय वर्ष 2021-22 में प्रश्‍न दिनांक तक 107138 जॉबकार्डधारी परिवारों द्वारा मनरेगा में कार्य की मांग की गई। (ख) उत्तरांश '''' की अवधि में कार्य स्थल पर उपस्थि‍त 83760 जॉबकार्डधारी परिवारों को मनरेगा में कार्य उपलब्ध कराया गया। शेष जॉबकार्डधारी परिवार कार्यस्थाल पर उपस्थित नहीं हुए। अत: शेष प्रश्‍नांश उत्पन्न नहीं होता। (ग) उत्तरांश '''' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्‍न उत्पन्न नहीं होता। (घ) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम 2005 का उद्देश्य ऐसे प्रत्येक ग्रामीण परिवार जिनके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम कार्य करना चाहते हैं, को एक वित्त वर्ष में कम से कम 100 दिनों का गारंटीयुक्त मजदूरी रोजगार उपलब्ध कराना है। मनरेगा में मजदूरी रोजगार को कानूनी गारंटी दी गई है।

          श्री मुकेश रावत(पटेल) - धन्यवाद अध्यक्ष महोदय, मैं पहली बार का विधायक हूं.

          अध्यक्ष महोदय - आज सभी पहली बार के हैं.

          श्री मुकेश रावत(पटेल) - धन्यवाद अध्यक्ष महोदय, मेरा यह प्रश्न था कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में जॉबकार्ड धारकों को मनरेगा योजना के अंतर्गत जो जॉबकार्ड धारकों ने मांग की है और मुझे जो मंत्री जी ने जवाब दिया 107138 जॉबकार्ड मजदूरी की मांग की गई लेकिन दूसरे प्रश्न के उत्तर में कहा है कि 83760 को काम दिया गया. बाकी परिवारों को कार्यस्थल पर उपस्थित नहीं बताया गया तो मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि  हमारा क्षेत्र आदिवासी बाहुल्य है और हमारे मजदूरों को समय पर मजदूरी नहीं मिल रही है और जो वहां पंचायत सचिव रहता है वह मजदूरों के कार्ड उनके घर पर रखता है और वहीं से उनका काम चलता है और  लोगों को मजदूरी नहीं मिलती इस तरह वहां पंचायतों में भ्रष्टाचार हो रहा है.

         

राज्‍य मंत्री (श्री रामखेलावन पटेल)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्‍य ने कहा है कि 107138 जॉब कार्डधारी थे और उनको काम करने की सूचना दी गई. 83760 लोग काम करने आये उनको काम दिया गया, जो काम में नहीं आये उनको काम देने की सरकार की और पंचायत की ऐसी कोई मंशा नहीं थी. हमने पहले भी दूसरे प्रश्‍न के जवाब में बताया कि मस्‍टर 7 दिन में, 15 दिन में बनता है. माननीय विधायक जी हमें बता देंगे कि ऐसे कौन लोग हैं, वहां के सरपंच को, सचिव को, रोजगार सहायक को बता दें कि हमको काम चाहिये, तो काम देने का काम होगा.

अध्‍यक्ष महोदय--  उनका कहना यह है कि वह जॉबकार्ड रख लेते हैं तो इसकी जांच करा लें.

श्री रामखेलावन पटेल--  कोई अगर स्‍पेसिफिक बात हो, किसी ने जॉबकार्ड रख लिया होगा तो हम उसकी जांच करा लेंगे.

 

प्रश्‍न क्रमांक 18- (अनुपस्थि‍त)

प्रश्‍न क्रमांक 19- (अनुपस्थि‍त)

 

देवास जिलांतर्गत खेल सामग्री का वितरण

[खेल एवं युवा कल्याण]

20. ( *क्र. 2404 ) श्री पहाड़सिंह कन्नौजे : क्या खेल एवं युवा कल्याण मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा देवास जिला अन्तर्गत पिछले 3 वर्षों में कहां-कहां खेल सामग्री वितरित की गई? संपूर्ण विवरण दें। कितनी राशि जिला देवास अन्तर्गत खेल विभाग द्वारा दी गई? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में क्‍या विधानसभा बागली को भी सामग्री दी गई? यदि हाँ, तो क्या सामग्री 3 वर्षों में दी गई? यदि नहीं, तो खेल सामग्री क्यों नहीं दी गई?                                                                                           (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में क्या खेलों को प्रोत्साहित करने हेतु प्रश्‍नकर्ता के क्षेत्र को भी खेल सामग्री दी जायेगी? यदि हाँ, तो क्या-क्या‍ सामग्री दी जायेगी? यदि नहीं, तो क्यों नहीं दी जायेगी?

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री ( श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ) : (क) खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा जिला देवास अंतर्गत पिछले 03 वर्षों में वितरित खेल सामग्री का तथा इस अवधि में जिला देवास को प्राप्त आवंटन की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) जी हाँ। विधानसभा क्षेत्र बागली को 03 वर्षों में दी गई सामग्री की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) विकासखण्‍ड बागली में खेलों को प्रोत्साहित करने हेतु वर्ष 2021-22 में प्रदाय खेल सामग्री की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

श्री पहाड़सिंह कन्‍नौजे--  अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न मंत्री महोदया से है कि मेरे देवास जिले में खेल सामग्री इतनी दी गई और मेरे विधान सभा में बिलकुल नहीं दी, इसकी जानकारी चाहिये.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो सामग्री की सम्‍मानित सदस्‍य ने बात की है उनके जो परिपत्र हैं उन दोनों में उनको दे दी गई है और जहां तक परिपत्र क्रमांक-ब है परिशिष्‍ट-2, उसको अगर वह पढ़ेंगे तो वह जानकारी भी उसमें है.

श्री पहाड़सिंह कन्‍नौजे--  माननीय मंत्री महोदय, ट्राइबल क्षेत्र में यदि खेल सामग्री बढ़ाकर दी जायेगी तो निश्चित ही खेल भावना से और वहां के खिलाड़ी आगे आयेंगे और आदिवासी क्षेत्र के बच्‍चों को प्रोत्‍साहन मिलेगा.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अच्‍छा सुझाव है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपके सुझाव को उन्‍होंने मान लिया.

श्री पहाड़सिंह कन्‍नौजे-- धन्‍यवाद मंत्री महोदय, मैं आपका आभारी हूं.

 

प्रश्‍न क्रमांक 21- (अनुपस्थित)

 

आर.जी.पी.वी. में की गई अनियमितताओं पर कार्यवाही

[तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोज़गार]

22. ( *क्र. 2845 ) श्री मेवाराम जाटव : क्या खेल एवं युवा कल्याण मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या आर.जी.पी.वी. में नियमों को दर किनार करते हुए लगभग 170 करोड़ रूपयों का भुगतान किये जाने के संबंध में श्री राकेश खरे एवं डॉ. एस.के. जैन की दो सदस्‍यीय जांच समिति ने जांच कर रिपोर्ट नवम्‍बर 2021 में संचालनालय को सौंपी थी? (ख) यदि हाँ, तो उक्‍त रिपोर्ट में की गई अनुशंसा एवं निष्‍कर्ष के आधार पर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही नहीं करने के क्‍या कारण हैं?

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री ( श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ) : (क) जी हाँ। (ख) श्री सुरेश सिंह कुशवाह के विरूद्ध अनुशासनात्‍मक कार्यवाही करने के लिये राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्‍वविद्यालय को नियुक्ति प्राधिकारी होने के कारण जांच प्रतिवेदन प्रेषित किया गया है।

श्री मेवाराम जाटव--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि क्‍या आर.जी.पी.वी. में नियमों को दरकिनार करते हुये लगभग 170 करोड़ रूपयों का भुगतान किये जाने के संबंध में श्री राकेश एवं डॉ. एस.के. जैन को दो सदस्‍यीय जांच...

अध्‍यक्ष महोदय--  पढि़ये नहीं, प्रश्‍न पूछिये, आप तो प्रश्‍न पढ़ रहे हैं.

श्री मेवाराम जाटव--  मेरा यही प्रश्‍न है कि जो यह जांच की जा रही है इसमें सुरेश सिंह कुशवाह के विरूद्ध अनुशासनात्‍मक कार्यवाही करने के लिये राजीव गांधी विश्‍वविद्यालय द्वारा जो जांच प्रतिवेदन प्रस्‍तुत किया गया है तो इनके विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी कि नहीं.

अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, प्रतिवेदन आया है उसमें कार्यवाही कब तक होगी.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र)--  माननीय अध्‍यक्ष जी, सम्‍मानित सदस्‍य थोड़ा दोबारा पूछ लें.

श्री मेवाराम जाटव-- मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि आर.जी.पी.वी. के नियमों को दरकिनार करते हुये जो 170 करोड़ का घोटाला किया है, उसमें जो अनुशासनात्‍मक कार्यवाही की गई है, आपके उत्‍तर में दिया है कि सुरेश सिंह कुशवाह के विरूद्ध अनुशासनात्‍मक कार्यवाही करने के लिये राजीव गांधी प्रौद्योगिक विश्‍वविद्यालय को नियुक्‍त किया गया है. जांच प्रतिवेदन आया है, उसमें कार्यवाही की जायेगी, लेकिन उन दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही कब तक की जायेगी, मैं यह पूछना चाहता हूं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र--  जो भी दोषी पाया जायेगा, 3 महीने में सभी पर कार्यवाही हो जायेगी.

 

 

 

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

 

 

 

 

12.00 बजे                             बधाई उल्‍लेख

महिला विधायकों एवं प्रथम बार के विधायकों को प्रश्‍नकाल में प्रश्‍न पूछने का मौका दिये जाने विषयक.

 

          संसदीय कार्यमंत्री(डॉ.नरोत्‍तम मिश्र) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको बधाई दे रहा हूं कि पूरे प्रश्‍न हो गये हैं. आपको यह भी बधाई की महिला सदस्‍य सम्‍मानितों को आपने पर्याप्‍त मौका दिया है, इसके लिये मैं आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं (मेजों की थपथपाहट) एक नई परंपरा जो आपके द्वारा शुरूआत की गई थी,उसका सफल संचालन हुआ है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- नेताप्रतिपक्ष जी और डॉ.गोविन्‍द सिंह जी आप.

          श्रीमती नीना विक्रम वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह से आप  हमेशा मौका देते रहें.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप सुन लीजिये, मैं उसी पर बोलने जा रहा हूं. मैं जो बोलने जा रहा हूं, वह सबकी चिंता का विषय है. मैंने प्रयास यह किया है कि पहली बार के विधायकों को एक दिन उनके लिये आरक्षित करूं और आज आरक्षण है(मेजों की थपथपाहट). मैंने महिला विधायकों के लिये यह तय किया है कि जितने प्रश्‍न लगते हैं, उनकी लॉटरी नहीं लाना है, वह सीधे नंबर एक से जितनी दूर तक आ पायें आ जायें. आज शायद सात महिला विधायकों के प्रश्‍न थे परंतु चिंता का विषय यह है कि प्रथम बार के विधायकों की प्रश्‍नों के प्रति गंभीरता क्‍या है? आपने देखा है कि आज करीब 6 या 7 सदस्‍य अनुपस्थित हैं, यह चिंता का विषय सबके लिये होना चाहये. यह दोनों पक्ष के लिये चिंता का विषय होना चाहिये.

          डॉ.गोविन्‍द सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय ,आगे से ध्‍यान रखेंगे.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.01 बजे             नियम 276-क के अधीन विषय

                   अध्‍यक्ष महोदय -- निम्‍नलिखित माननीय सदस्‍यों की शून्‍यकाल की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जायेंगी.

          1-       डॉ.सतीश सिंह सिकरवार

          2-       डॉ.सीतासरन शर्मा

          3-       श्री बहादुर सिंह चौहान

          4-       श्री कमलेश्‍वर पटेल

          5-       श्री मनोज चावला

          6-       डॉ. योगेश पंडाग्रे       

          7-       श्री प्रताप ग्रेवाल

          8-       श्री कुंवर सिंह टेकाम

          9-       श्री सुनील सर्राफ

          10-     श्री संजय सत्‍येंद्र पाठक

 

 

12.02 बजे                   शून्‍यकाल में मौखिक उल्‍लेख

 

कर्मचारियों की पुरानी पेंशन व्‍यवस्‍था बहाल करने संबंधी ध्‍यानाकर्षण को चर्चा में लिया जाना.

 

          श्री पी.सी.शर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी एक शून्‍यकाल की सूचना थी, जो आई नहीं है. (व्‍यवधान)..

          श्री सज्‍जन सिंह वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पुरानी पेंशन का मामला सारे विधायकों ने लगा रखा है. ध्‍यानाकर्षण शून्‍यकाल सब में पुरानी पेंशन के लिये राजस्‍थान सरकार और छत्‍तीसगढ़ सरकार ने जो मांग मंजूर की है (व्‍यवधान..)   

          अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, आप अलग से बात कर लेना.

          श्री सज्‍जन सिंह वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह गंभीर मुद्दा है, इसको लेना चाहिये.

          डॉ. गोविन्‍द सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसे ध्‍यानाकर्षण में लेना चाहिये.

          श्री पी.सी.शर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह लिया जाना चाहिये, यह कर्मचारियों की पेंशन का मुद्दा है इसको आप लीजिये.

          श्री सज्‍जन सिंह वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इससे लाखों परिवार इफेक्‍टेड हैं(व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय -- बैठकर बातचीत कर लेंगे. (व्‍यवधान)

          श्री कमलेश्‍वर पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें ध्‍यानाकर्षण भी लगा हुआ है. (व्‍यवधान)

          श्री पी.सी.शर्मा -- सब लगा हुआ है (व्‍यवधान)..

          श्री कमलेश्‍वर पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सबकी मंशा है कि पुरानी पेंशन बहाली मध्‍यप्रदेश में होना चाहिये (व्‍यवधान)..पुरानी पेंशन की बहाली होना चाहिये. (व्‍यवधान).. इस पर चर्चा कराने की आवश्‍यकता है. (व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय -- (एक साथ कई माननीय सदस्‍यों के अपने आसन से कुछ कहने पर) आप बैठ जायें. अब ध्‍यानाकर्षण होगा, सुश्री हिना लिखीराम कावरे जी आप आपकी सूचना पढ़े.

          श्री सज्‍जन सिंह वर्मा -- इस पर सदन में चर्चा कराया जाना चाहिये. (व्‍यवधान)..

          श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति(एन.पी.) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने ध्‍यानाकर्षण लगाये हैं, इस पर आप चर्चा कब करायेंगे? (व्‍यवधान).. अध्‍यक्ष महोदय, शून्‍यकाल में यह सूचना उठाना हमारा विधिवत अधिकार है, आप इस पर गौर करियेगा. हम लोगों ने ध्‍यानाकर्षण लगाये हैं कि पेंशन योजना लागू की जाये जैसे अन्‍य राज्‍यों ने की है. (व्‍यवधान).. आप जानकारी तो लीजिये. आप जानकारी क्‍यों नहीं दे रहे हैं? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लाखों कर्मचारियों का मामला है, हम लोगों ने ध्‍यानाकर्षण लगाये हैं. आप ध्‍यानाकर्षण पर चर्चा करवाईये. (व्‍यवधान)..

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उनकी जीवन सुरक्षा का सवाल है, उनको पुरानी पेंशन नहीं मिलेगी, तो इतने साल नौकरी करने के बाद, उनको कुछ नहीं मिल पा रहा है. 30 साल नौकरी करने के बाद वह आदमी भूखा मरेगा, बुढ़ापे में कोई साथ नहीं होगा, उसके परिवार का सहारा कोई नहीं होगा, लाखों कर्मचारी इससे प्रभावित हो रहे हैं. दूसरे राज्‍य इसको लागू कर रहे हैं, मध्‍यप्रदेश में भी इसको लागू किया जाना चाहिये, यह गंभीर मामला है. लाखों कर्मचारी इससे प्रभावित हो रहे हैं, इनके जीवन सुरक्षा की व्‍यवस्‍था होना चाहिये. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह विषय लाखों कर्मचारियों का है, उनके परिवार का सवाल है, इसको लागू किया जाये, यह बहुत आवश्‍यक है, दूसरे राज्‍य इसको लागू कर रहे हैं. (व्‍यवधान)..

         

 

 

          12.03 बजे                    बर्हिगमन

                   इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा सदन से बर्हिगमन 

          श्री सज्‍जन सिंह वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम सदन से वॉकआउट करते हैं. (व्‍यवधान)..

          श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति(एन.पी.) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारा ध्‍यानाकर्षण ग्राह्य न करने पर पूरे सदन के कांग्रेस पक्ष के सदस्‍य वॉकआउट करते हैं (व्‍यवधान).. 

          (इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली संबंधी ध्‍यानाकर्षण चर्चा में न लिये जाने से असंतुष्ट होकर नारे लगाते हुए सदन से बर्हिगमन किया गया)

                                                          (व्‍यवधान)..

 

          12.04 बजे             पत्रों का पटल पर रखा जाना.

(1) पांचवें राज्य वित्त आयोग मध्यप्रदेश का प्रतिवेदन खण्ड 1 तथा 2 (अप्रैल, 2019) तथा प्रतिवेदन

 

           वित्त मंत्री (श्री जगदीश देवड़ा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, भारत के संविधान के अनुच्छेद 243-झ के खण्ड (4) एवं अनुच्छेद 243-म के खण्ड (2) की अपेक्षानुसार पांचवें राज्य वित्त आयोग मध्यप्रदेश का प्रतिवेदन खण्ड 1 तथा 2 (अप्रैल, 2019) तथा प्रतिवेदन पर राज्य शासन द्वारा कृत कार्यवाही पटल पर रखता हूं. (व्‍यवधान)..

 

(2) जिला खनिज प्रतिष्ठान, जिला पन्ना, ग्वालियर, कटनी एवं नरसिंहपुर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021

 

 खनिज साधन मंत्री (श्री ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  मध्यप्रदेश जिला खनिज प्रतिष्ठान नियम, 2016 के नियम 18 के उपनियम (3) की अपेक्षानुसार जिला खनिज प्रतिष्ठान, जिला पन्ना, ग्वालियर, कटनी एवं नरसिंहपुर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021 पटल पर रखता हूं.    (व्‍यवधान)..

 

 

                            

                                                                            

12.05 बजे                                  ध्‍यान आकर्षण

(1) प्रदेश के स्‍कूलों में अध्‍ययनरत् छात्र-छात्राओं को साइकिल का वितरण

न किया जाना.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे (लांजी) [श्री शरद जुगलाल कोल] - अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यान आकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है:-

          वर्ष 2019-20 में प्रदेश के समस्‍त स्‍कूलों को सायकल प्रदान की गयी, किन्‍तु आजदिनांक तक उनके वितरण को लेकर कोई दिशा-निर्देश विभाग से प्राप्‍त न होने के कारण सायकिलें खराब हो रही हैं. विधान सभा क्षेत्र लांजी में कुल प्राप्‍त 403 सायकिलों में से 205 सुरक्षित हैं तथा शेष सायकिलें जंग लगने से खराब हो चुकी हैं. विकासखंड किरनापुर में कुल प्राप्‍त 431 सायकिलों में से 234 सायकिलें सुरक्षित हैं. इसी प्रकार शहडोल जिले के मऊ के छात्र-छात्राओं को उक्‍त लाभ से वंचित कर रखा है. यही स्थिति प्रदेश के सभी विकासखंडों में अनिर्णय के कारण छात्र-छात्राओं के लिए भेजी गयी सायकल उन्‍हें प्राप्‍त नहीं होने से छात्र-छात्राओं में असंतोष व्‍याप्‍त है.

          राज्‍यमंत्री स्‍कूल शिक्षा (श्री इन्‍दर सिंह परमार) - अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2019-20  में विकासखण्‍ड लांजी एवं किरनापुर में सभी पात्र छात्र-छात्राओं को सायकिल वितरित की गई. वितरण उपरांत शेष बची सायकिलों को आगामी वर्ष में समायोजित किया जाता है, किन्‍तु वर्ष 2020-21 एवं 2021-22 में कोविड-19 की परिस्थितियों को देखते हुए योजना स्‍थगित रखे जाने से सायकिलों का समायोजन नहीं किया जा सका. सभी पात्र विद्यार्थियों को वितरित करने के उपरांत शेष बची सायकिलों को सुरक्षित रख-रखाव हेतु पूर्व से निर्देश हैं. सत्र 2022-23 में सायकिल योजना का क्रियान्‍वयन किया जा रहा है. अत: पूर्व वर्ष की शेष सायकिलों को आवश्‍यक मरम्‍मत एवं सर्विसिंग उपरांत पात्र छात्र-छात्राओं को वितरित किया जावेगा. प्रदेश में वर्ष 2019-20 की स्थिति में सभी पात्र छात्र-छात्राओं को सायकिल वितरण करने के उपरांत सायकिल वितरण हेतु कोई भी पात्र विद्यार्थी शेष नहीं है. अत: छात्र-छात्राओं में असंतोष की स्थिति नहीं है.

          सायकिल वितरण के पात्रता की शर्त के अनुसार दूसरे ग्राम से आने वाले विद्यार्थियों तथा उसी गांव के ऐसे टोले मजरे जिनकी दूरी विद्यालय से 2 किलोमीटर या अधिक है, तो ऐसे मजरे टोले से विद्यालय में आने वाले विद्यार्थियों को सायकिल प्रदाय की जाती है. ब्‍यौहारी विकास खण्‍ड के सभी पात्र विद्यार्थियों को सायकिल प्रदाय की गई है. भूमि उपलब्‍धता एवं सुविधा की दृष्टि से शासकीय हायर सेकेण्‍डरी मऊ का भवन खामडाह में बना है, मऊ एवं खामडाह लगे हुये ग्राम हैं. नि:शुल्‍क सायकिल प्रदाय योजना के अंतर्गत पात्रता रखने वाले मऊ ग्राम पंचायत के 57 विद्यार्थियों को नि:शुल्‍क सायकिल प्रदाय की गई है. यह कहना सही नहीं है कि मऊ के विद्यार्थियों को सायकिल का लाभ नहीं मिल रहा है. खामडाह ग्राम पंचायत के पात्र विद्यार्थियों को भी इसका लाभ दिया गया है. अत: यह कहना सही नहीं है कि सायकिल का लाभ नहीं मिलने से क्षेत्र में आक्रोष व्‍याप्‍त है.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा का जब सत्र शुरू हो रहा था. विधान सभा के सत्र शुरू होने से पहले, मैंने विधान सभा स्‍तरीय प्रशासकीय बैठक करवाई, तो उस बैठक में जनपद अध्‍यक्ष भी उपस्थित थे. उस समय जब मीटिंग चल रही थी तो हमारे जनपद अध्‍यक्ष ने मुझसे कहा कि मैडम, हमारे जनपद के भवन में सायकिलें रखी हुई हैं और खराब भी हो रही है. यदि आप हमको कुछ ऐसा करवा दें तो जो हमारे पंच हैं, उनके पास सायकिलें नहीं हैं, तो मैं कम से कम अपने पंचों को ही सायकिलें बंटवा देता हूँ, तो मैंने पूछा कि यह स्थिति कैसे निर्मित हो गई है ? तो जो विभाग के अधिकारी वहां पर बैठे थे, उन्‍होंने मुझे बताया कि वर्ष 2019-20 सत्र से सायकिलें आई हुई हैं और जो सायकिलें बची हुई हैं, वह रखी हुई हैं और वह खराब हो रही हैं. चूँकि शासन की तरफ से कोई ऐसा निर्देश उनको प्राप्‍त नहीं है, इसलिए वह सायकिलों का कोई निर्णय नहीं कर पा रहे हैं. मैं आपके माध्‍यम से, माननीय मंत्री जी से केवल यह कहना चाहती हूँ कि आपने उत्‍तर में दिया है कि वर्ष 2022-23 के सत्र में सायकिलों का वितरण किया जायेगा.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोविड के चलते दो शैक्षणिक सत्र में सायकिल वितरण में दिक्‍कत आई, तो सायकिल वितरण नहीं हो सका. जो हमारा पिछला सत्र गया, वर्ष 2021-22 का, उसमें कक्षाएं भी आयोजित हुईं, उसमें छात्र-छात्राएं भी आए. लेकिन सायकिलों का वितरण नहीं होने से, वह बच्‍चे जो हमारे छटवीं एवं नवीं कक्षा के हैं, उनको सायकिल नहीं मिल पाई. क्‍या माननीय मंत्री जी वर्ष 2022-23 में जब आप सायकिलों का वितरण करेंगे, तो क्‍या इस सत्र के विद्यार्थियों को उसका लाभ मिलेगा, जो पास होकर सातवीं एवं दसवीं कक्षा में जाएंगे, तो क्‍या आप उन विद्यार्थियों को इसका लाभ देंगे ?

          श्री इन्‍दर सिंह परमार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 का जो हमारा सत्र था, क्‍योंकि ज्‍यादा समय कक्षाएं नहीं लगी थीं और स्‍कूल की पढ़ाई भी प्रभावित हुई थी, स्‍कूल भी प्रभावित हुआ था. बच्‍चे भी स्‍कूल नहीं आ पाए थे. जब हमने स्‍कूल खाले, तब भी सभी बच्‍चों की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो पाई थी, अभी परीक्षाएं चल रही हैं. इसलिए हमने शासन स्‍तर पर यह तय किया है कि वर्ष 2020-21 और वर्ष 2021-22 में इस योजना को स्‍थगित रखा जाये. वर्ष 2022-23 से फिर से हम सत्र प्रारंभ होते से ही सायकिलों को बच्‍चों को वितरण करने वाले हैं. मैं समझता हूँ कि उसके लिए हमारी सारी प्रक्रिया प्रचलन में है, बहुत जल्‍दी हम उस पर काम शुरू कर देंगे.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पूछा है कि इस सत्र के जो बच्‍चे स्‍कूल जा रहे हैं, एक्‍जाम दे रहे हैं. क्‍या उनको आप वर्ष 2022-23 में इसका लाभ देंगे ? चूँकि इस सत्र में तो स्‍कूल लगा हुआ है.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार - अध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि जब उस सत्र की योजना स्‍थगित है, इसलिए फिलहाल हमने उस पर अभी विचार नहीं किया है.            

         

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यही तो चाह रही हूं कि आप उस पर विचार करें, क्‍योंकि वे बच्‍चे अभी स्‍कूल जा रहे हैं, जितने दिन भी स्‍कूल लगा है, वे स्‍कूल गए हैं और रेगुलर स्‍कूल लग रहे हैं. आप अभी उन बच्‍चों के लिए क्‍या कर रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से संरक्षण चाहती हूं कि कम से कम आप उन बच्‍चों को आने वाले साल में सायकल दे दें.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने अभी न तो उस पर बजट में प्रावधान किया है और न ही उस पर विचार किया है.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पुरानी साइकिलें रखी हैं, जो उनके हिस्‍से में आनी थी, अब उनको नहीं मिल पाई तो इस सत्र में आप उनको दिलवा दें, बच्‍चे भी वही है.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार - पुरानी साइकिलें, वे वर्ष 2019-20 की हैं और 66 हजार से अधिक साइकिलें ज्‍यादा खरीदी थी. फिर मैं कहूंगा तो हमारे माननीय गोविन्‍द सिंह जी को तकलीफ होगी.        

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे - आप बोलिए न कोई तकलीफ नहीं है.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार - गोविन्‍द सिंह जी को तकलीफ होगी, इसलिए मैं वह नहीं कहना चाहता हूं ये 2019-20 की साइकिलें हैं, वास्‍तव में इतनी ज्‍यादा नहीं खरीदते हैं, लेकिन आ गई हैं तो हम उनको ठीक करके समायोजित करेंगे, और अगले सत्र 2022 और 2023 में सभी छात्रों को साइकिलें देने वाले हैं.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इन बच्‍चों को भी साइकिलें देंगे क्‍या जो इस सत्र में अध्‍ययनरत है.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार - जो दो साल के जो छात्र हैं, उसमें योजना नहीं थी, उसमें नहीं देंगे.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपसे मेरा निवेदन हैं वे बच्‍चें अभी अध्‍ययनरत हैं. कृपया करके इसमें ऐसा कुछ निर्णय करवाइए कि अभी जो बच्‍चे पढ़ रहे हैं, उनको भी अगले सत्र में साइकिलें मिले.

          अध्‍यक्ष महोदय - नहीं, मंत्री जी ने तो कह दिया कि व्‍यवस्‍था नहीं है, प्रावधान नहीं है.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन कर रही हूं. प्रावधान नहीं है, तो प्रावधान कर दीजिए अध्‍यक्ष महोदय, आप ही को तो निर्णय लेना है.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार - इस विषय पर अलग से बात कर लेंगे.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे - माननीय मंत्री जी, अलग से बात कर लेंगे, लेकिन घोषणा तो यहां कर दीजिए.

          श्री इन्‍दर सिंह परमार - नहीं, अभी तो प्रावधान नहीं है.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यही चाहती हूं कि आप इन बच्‍चों को साइकिलों से क्‍यों वंचित कर रहे हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय - आपका जवाब आ गया.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे - अध्‍यक्ष महोदय, आप एक बार बोल दीजिए, क्‍योंकि जायज प्रश्‍न है.

          अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी ने कहा न कि इस विषय पर अलग से बात कर लेंगे.

          सुश्री हिना लिखीराम कावरे - अध्‍यक्ष महोदय, ध्‍यानाकर्षण लगाने का उद्देश्‍य सफल हो जाएगा, यदि उन बच्‍चों को भी साइकिलें मिल जाएगी तो.

          अध्‍यक्ष महोदय - दिव्‍यराज सिंह जी, पंचूलाल प्रजापति जी, राजेन्‍द्र शुक्‍ल जी, प्रथम नाम दिव्‍यराज सिंह जी का है, यशपाल सिसौदिया जी मैंने आपको अनुमति दी है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.13 बजे    (2) रीवा जिले की नईगढ़ी माइक्रो सिंचाई परियोजना का कार्य पूर्ण न होना

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया(मंदसौर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है.

                  

              जल संसाधन मंत्री  ( श्री तुलसीराम सिलावट)  --अध्यक्ष महोदय,

                    

           हमारा प्रयास होगा कि इसका कार्य हम अतिशीघ्र प्रारंभ करेंगे.

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया--अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के पहले ही माननीय मंत्री जी ने जवाब दे रहे हैं इसलिये आपको धन्यवाद. माननीय मंत्री जी ने बहुत ही विस्तार से बाण सागर की इस महत्वाकांक्षी योजना का यहां पर वक्तव्य दिया है. जो कार्य-योजना हजारों हैक्टेयर सिंचाई के क्षेत्र में लाभांवित करने वाली हो. चाहे खिंचा हुआ पार्ट 2 का हो, चाहे पार्ट 1 का हो माननीय मंत्री जी ने यह भी स्वीकार किया है कि नई गढ़ी का कार्य लगभग 67-68 पूरा हो चुका है उसके लिये मैं धन्यवाद दे सकता हूं. लेकिन सवाल यह कि मेरा जो ध्यानाकर्षण है. वह बहुती कैनाल को लेकर है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऐसा कौन सा ठेकेदार जिसने ठेका तो लिया, अनुबंध भी किया और बीच में काम छोड़कर के चला गया और जब काम छोड़कर के चला गया तो इसमें री-टेण्‍डर करने को लेकर, निवादाएं आमंत्रित करने को लेकर के इतना विलंब क्‍यों हुआ, वह अभी साधिकार समिति में है, अन्‍य जगह है और उसकी छानबीन में चल रहा है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आसमान से गिरा और खजूर में अटका है. मैं समझता हूं कि यह रीवा क्षेत्र की बहुत महत्‍वपूर्ण और महत्‍वाकांक्षी सिंचाई योजना होगी, जिसको बाण सागर के साथ जोड़ा गया है और माननीय अध्‍यक्ष महोदय मैं मत्री जी से यह भी सवाल पूछना चाहूंगा कि 11.5.2020 को अनुबंध निरस्‍त किया गया है , उसके बाद वापस फिर री-टेण्‍डर हुए हैं. अब तक क्‍यों टेण्‍डर खोले गये,अब क्‍यों विलंब हो रहा है ? विलंब का कोई कारण तो होगा, क्‍या सामंजस्‍य की कोई कमी है, समन्‍वय की कमी है, ठेकेदार का कहीं दबाव, पुर्न उसको जीवित करना या उसका फिर इंतजार करना और जो नई निविदा है उसको तत्‍काल खोलकर, मैं आपका संरक्षण चाहते हुए माननीय मंत्री जी से यह भी निवेदन करूंगा कि वह आज सदन में घोषणा करें दें, आश्‍वासन दे दें या समय बता दें कि कितने दिन में निविदाएं खुल जायेंगी, टेण्‍डर खुलने में विलंब क्‍यों हो रहा है. इसकी विलंबता के बाद आप क्‍या पुन: शार्ट टेण्‍डर आन निकालेंगे ?

            श्री तुलसीराम सिलावट:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने बहुत स्‍पष्‍ट कहा है कि साधिकार समिति की बैठक फिर से होगी, निविदा आमंत्रित की जायेगी और सारी औपचारिकताएं अतिशाघ्र पूरी कर ली जायेंगी.

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो योजना इतनी महत्‍वपूर्ण है, इतनी महत्‍वाकांक्षी, टेण्‍डर हो चुका था, अनुबंध हो चुका था, काम अधूरा छोड़कर चला गया अ‍ब फिर साधिकार समिति में अटका पड़ा है. मैं सीधे-सीधे माननीय मंत्री जी, से पूछना चाहूंगा कि निविदा कब तक खुल जायेंगी, निविदा खुल जाना चाहिये थी और अगर आप री-टेण्‍डर कर रहे हैं, जैसा मंत्री जी ने कहा है कि साधिकार समिति, तो साधिकार समिति कब फैसला करेगा उसकी तिथि बता दें. माननीय मंत्री जी, री-टेण्‍डर होगा तो क्‍या शार्ट टेण्‍डर करेंगे ?

          श्री तुलसीराम सिलावट:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने जो आपत्ति ली, विलंब का कारण जो ठेकेदार उसका स्‍वर्गवास हो चुका है और हमने ठेकेदार की 19 करोड़ रूपये की राशि भी जब्‍त की है, विलंब का कारण यह है.

          अध्‍यक्ष महोदय:- माननीय मंत्री जी, वह नहीं है वह मृतक हो गया, आपने राशि जब्‍त कर ली और नया टेण्‍डर बुला लिया. नया जो टेण्‍डर आया वह 9 महीने पेंडिग रहा, उसको आपने नहीं खोला. दूसरा, इसमें यह जो नेशनल हाइवे क्रास करना था. मैं वहां स्‍वत: गया था, चूंकि मेरी स्‍वयं की विधान सभा, हमारे विधान पंचूलाल जी की विधान सभा, मऊंगज विधान सभा इससे कव्‍हर होती हैं, तो मैं स्‍वत: गया था. नेशनल हाइवे क्रासिंग की मैं स्‍वयं मंजूरी लेकर वहां से आया था, पहले तो आपकी सड़क ही क्रास नहीं हो रही थी. अब केवल यह कहना है कि यह 2014  की घोषणा है, 67 प्रतिशत और 68 प्रतिशत तो वह आप प्रतिशत में गिनती मत कराइये, आप तो यह बतायें कि नईगढ़ी को पानी कब मिल जायेगा, यह सीधा बताइये. आप तो सीधे जोरदारी से तारीख की घोषणा करो, किसी को बुलाइये और काम शुरू करिये.

          श्री तुलसीराम सिलावट:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस परियोजना के अंतर्गत आने वाले 576 ग्राम हैं, जिसमें की आपकी विधान सभा के 323 ग्राम हैं, मेरे पूरे संज्ञान में हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय:-हां सोच लीजिये.

          श्री तुलसीराम सिलावट:- मैंने आपसे अनुरोध किया है कि अतिशीघ्र मतलब अतिशीघ्र करी जायेगी, आप निश्चिंत रहें. आसंदी के आदेश का पालन किया जायेगा.

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया:-अध्‍यक्ष महोदय, अतिशीघ्र कभी समाप्‍त नहीं होता है. आप समय-सीमा बता दें कि दो महीने में टेण्‍डर हो जायेंगे.

          श्री तुलसीराम सिलावट:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने बहुत स्‍पष्‍ट कहा है कि आसंदी के एक-एक शब्‍द का पालन किया जायेगा, उसमें सारी विस्‍तृत सब समय-सीमा भी आ जायेगी. अतिशीघ्र जब तुलसी सिलावट बोल रहा है तो आप मानकर चलिये कि होगा.

          अध्‍यक्ष महोदय-  पंचूलाल जी की बात आ जाये.

          श्री पंचूलाल प्रजापति-  मानननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी से निवेदन है कि क्‍या एक माह के अंदर ये शॉर्ट टेण्‍डर करेंगे ? इसके न होने से किसानों को बहुत बड़ा नुकसान है, वहां हमारा विधान सभा क्षेत्र लग जाता है. इससे कई गांव प्रभावित हो रहे हैं ,माननीय मुख्‍यमंत्री जी और सिंचाई मंत्री जी बहुत ही उदार हैं वे किसानों को अधिक से अधिक पानी पहुंचायेंगे.

          श्री तुलसीराम सिलावट-  मानननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने कहा कि आसंदी का सम्‍मान किया जायेगा. अब हमारे विद्वान, सम्‍माननीय सदस्‍य, वरिष्‍ठतम सदस्‍य को, मैं, आपके सम्‍मुख आश्‍वस्‍त करता हूं कि रबी की वर्ष 2023 की फसल हेतु प्रयास करेंगे कि रबी की उस फसल में पानी मिले.

          श्री पंचूलाल प्रजापति-  मानननीय अध्‍यक्ष महोदय, इससे तो बहुत समय लग जायेगा, इसमें शॉर्ट टेण्‍डर करवा दें.

          श्री लक्ष्‍मण सिंह-  मानननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र से हजारों मजदूरों ने पलायन किया है, बार-बार निविदा बुलाकर, काम को लटकाया जा रहा है. 

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-  मानननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी गेहूं, चना, सरसों कट रहा है, अगली रबी की फसल में तो बहुत समय है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  मंत्री जी, मैं, आपको सर्वप्रथम धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि ये पहला ध्‍यान आकर्षण है, जो माननीय सदस्‍य ध्‍यानआकर्षण लगाते हैं कि जनता में आक्रोश है और उसके उत्‍तर में जवाब  आता है कि कोई आक्रोश नहीं है ,यह पहली बार हुआ है कि आपके जवाब में इसका जिक्र नहीं किया गया है, इस हेतु आपको धन्‍यवाद. सरकार की ओर से इसे अस्‍वीकार नहीं किया गया है.

          दूसरा आग्रह यह है कि यह मुख्‍यमंत्री जी का ड्रीम प्रोजेक्‍ट था कि रीवा जिले के सभी गांवों को पानी देना है और इसमें मैंने स्‍वत:, मैं, आप सभी को बताना चाहता हूं कि मैंने स्‍वत: 15 दिन साइकिल चलाई है, मैं, साइकिल चलाकर, मुख्‍यमंत्री जी को नईगढ़ी ले गया था, वहां उन्‍होंने घोषणा की थी, यह काम है, तो कम से कम इस परिश्रम का कुछ तो फल मिलना चाहिए. मंत्री जी, इसमें आप देखें, कुछ व्‍यवस्‍था करें कि इसमें कैसे काम हो सकता है.

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-  मानननीय अध्‍यक्ष महोदय, शीघ्र और अति‍शीघ्र के बीच में एक तिथि होती है, माह होता है, दिनांक होती है.

          श्री तुलसीराम सिलावट-  मानननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, आपकी बात से सहमत हूं, यह एक बड़ी योजना है, जिसके बांध से 2 लाख 51 हजार 620 हेक्‍टेयर में सिंचाई होगी, यह बहुत बड़ी योजना है और बड़ी योजना होती है तो कम से कम 18 माह लगते हैं इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है इसमें 300 करोड़ रुपये और लगेंगे. मैं, आसंदी के आदेश का पालन करूंगा और मैं, प्रयास करूंगा कि जितना जल्‍दी हो सकता है, उसे करके, आपको सूचना दी जायेगी.

          श्री सज्‍जन सिंह वर्मा-  निर्माण में 18 माह लगते हैं, टेण्‍डर में नहीं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.26 बजे

अनुपस्थिति की अनुज्ञा

 

निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 215 घट्टिया (अ.जा.) से निर्वाचित सदस्य, श्री रामलाल मालवीय  को विधान सभा के मार्च, 2022 सत्र की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुज्ञा

 

 

12.27 बजे

प्रतिवेदनों की प्रस्‍तुति

 

(1) शासकीय आश्वासनों संबंधी समिति का द्वितीय, तृतीय एवं चतुर्थ प्रतिवेदन

 

 

 

 

 

 

12.28 बजे

याचिकाओं की प्रस्‍तुति

 

          अध्‍यक्ष महोदय-  आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकायें प्रस्‍तुत की गई मानी जायेंगी.

 

 

 

 

 

 

 

12.29 बजे

वक्‍तव्‍य

 

दिनांक 2 मार्च, 2021 को पूछे गये अतारांकित प्रश्न संख्या 46 (क्रमांक 1683) के उत्तर में संशोधन करने के संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री का वक्तव्य

 

 

 

                राज्‍यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास (श्री रामखेलावन पटेल)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

                   

 

12.30 बजे                   शासकीय विधि विषयक कार्य       

 

(1) मध्‍यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज (संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 1 सन् 2022 का पुर:स्‍थापन

 

 

(2) मध्‍यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज ( द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2022 (क्रमांक 2 सन् 2022 का पुर:स्‍थापन

 

 

 

 

 

12.31 बजे         वर्ष 2022-2023 के आय-व्‍ययक पर सामान्‍य चर्चा

 

 

          श्री तरुण भनोत (जबलपुर-पश्चिम)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सर्वप्रथम आपसे एक विनम्र निवेदन करना चाहता हूं और आपका संरक्षण भी चाहता हूं कि आप वित्‍तमंत्री महोदय को इस बात के लिए जरूर कहेंगे कि जो बातें विपक्ष के सदस्‍यों के द्वारा, सदन के सदस्‍यों के द्वारा यहां रखी जाती हैं वह उनका बिन्‍दुवार  उत्‍तर जरूर दें क्‍योंकि पिछली बार यह देखने में आया था कि हमने अपनी बात तो रखी थी परंतु हमें उसका जवाब माननीय वित्‍तमंत्री महोदय की तरफ से सदन में नहीं मिला था. 

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वित्‍तमंत्री महोदय ने लगभग 2 लाख 80 हजार करोड़ रुपए का बजट अनुमान वर्ष 2022-2023 के लिए विधान सभा के समक्ष रखा है और इसी से निर्धारण होगा कि आने वाले इस वित्‍तीय वर्ष में मध्‍यप्रदेश में किस गति से काम होंगे, किस विभाग को कितना आवंटन किया जाएगा और जो जनता की जरूरत है उसे कैसे पूरा किया जाएगा. कल हम सदन के नेता माननीय मुख्‍यमंत्री जी का वक्‍तव्‍य सुन रहे थे और उन्‍होंने कहा कि बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी, पैसे की कमी नहीं होने दी जाएगी जो भी शासकीय योजनाएं हैं और जो भी घोषणाएं की गईं हैं हम उनको पूरा करेंगे चाहे इसके लिए हमें अतिरिक्‍त ऋण लेना पड़े.       माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने हमेशा से यह माना है और यह प्रचलित भी है कि निश्चित रूप से किसी भी सरकार के लिए ऋण लेना महत्‍वपूर्ण होता है और हम बिना ऋण के जो बहुत सारे काम प्रस्‍तावित करते हैं उन्‍हें पूरा नहीं कर सकते हैं. परंतु क्‍या यह ध्‍यान में रखना जरूरी नहीं है कि हम जो ऋण ले रहे हैं उसको किस प्रकार से उपयोग किया जा रहा है. हम व्‍यक्तिगत जीवन में भी कहीं न कहीं किसी न किसी तरह से जुड़े रहते हैं चाहे हमारे घर का बजट हो, हमारे व्‍यावसायिक काम हों निश्चित रूप से वहां भी ऋण लेने की जरूरत पड़ती है पर ऋण लेते समय हम इस बात का ध्‍यान भी सबसे पहले रखते हैं कि जब इसके ब्‍याज का भुगतान करना पड़ेगा इसको वापस करने की क्‍या तैयारी है और क्‍योंकि मैं नहीं मानता ऐसा कोई भी ऋण है जो कि बिना ब्‍याज के मिलता हो. ब्‍याज तो भरना पड़ता है तो हम उसकी तैयारी करते हैं. हर सरकार ने ऋण लिया है. कांग्रेस पार्टी के कार्यकाल की और वर्तमान सरकार के कार्यकाल की बार-बार तुलना की जाती है. मैं पूरे सदन का ध्‍यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं कि सन् 2003 तक जब मध्‍यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी उसके बाद वर्ष  2004 से भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई. आपको मैं यह जानकारी देना चाहता हूं कि सभी विद्वान सदस्‍य यहां सदन के अंदर बैठे हैं कि मध्‍यप्रदेश के ऊपर जो कुल कर्जे की राशि थी वह लगभग 26 हजार करोड़ रुपए की थी. आज‍ स्थिति यह है कि मध्‍यप्रदेश के ऊपर जितना कुल ऋण था उससे ज्‍यादा प्रतिवर्ष हम सिर्फ ब्‍याज के रूप में भर रहे हैं.

 

12.35 बजे     { सभापति महोदया (श्रीमती नन्दिनी मरावी) पीठासीन हुईं }

          श्री तरुण भनोत -- सभापति महोदया, उस राशि पर जिस राशि को ऋण के रुप में हमने लिया है. अपने-अपने तर्क हम सदन के अन्दर रख सकते हैं, तुलना कर सकते हैं कि पिछले 17-18 वर्षों में मध्यप्रदेश की तस्वीर किस क्षेत्र में कितनी बदली. उसके साथ-साथ यह भी ध्यान रखिए कि कितना पैसा मध्यप्रदेश की आम जनता से जो हम टैक्स के रुप में वसूलते हैं उसका किस प्रकार से खर्च हुआ. किसान अपने आपको संतुष्ट नहीं पाते हैं. हम में से कोई भी एक दावे के साथ यह नहीं कह सकता है कि किसानों की सारी समस्याएं दूर हो गईं हैं. किसानों की आय दोगुना हो गई है. बेरोजगारी का प्रतिशत 40 वर्ष में सर्वाधिक हो गया है. बेरोजगारी की समस्या भी सामने खड़ी है. इन्फ्रास्ट्रकचर का जिस तरह से डेवलपमेंट होना चाहिए था, जो राशि उस पर खर्च होना चाहिए थी उसमें भी हमें कमी दिखती है.

          सभापति महोदया, अगर हम मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास की बात करें उसमें भी बड़ी भारी कमी दिखती है. जिस प्रकार से जो इनवेस्टमेंट आना चाहिए था वह नहीं आया है. मैं एक आंकड़ा आपके सामने रखना चाहता हूँ वित्त विभाग का जो रिवाइज्ड इस्टीमेट है उसके अनुसार मार्च 2023 तक मध्यप्रदेश के ऊपर लगभग 3 लाख 47 हजार करोड़ रुपए का कर्ज होगा. यह बहुत बड़ी राशि है. आपने जो इस बार प्रस्तावित किया तो खर्च के साथ साथ आपने बता तो दिया, यह मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार हो रहा है स्वर्णिम अक्षरों में आपका नाम लिखा जाएगा कि जो बजट की राशि है उससे ज्यादा मध्यप्रदेश के ऊपर कर्ज है. मैंने हमेशा एक बात कही है कि कर्ज लेना गलत बात नहीं है हमारी सरकार ने भी कर्ज लिया था. वित्त मंत्री के रुप में काम करने का 15 महीने मौका मिला पर आप हमसे उसका हिसाब पूछ सकते हैं. मैं उन आकड़ों का जवाब भी दे सकता हूँ. 13 हजार करोड़ रुपए का कर्ज 15 माह  के कार्यकाल में लिया था. हम हमेशा कृषि की बात करते हैं कृषि के बारे में बात करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारी अर्थव्यवस्था का 70 प्रतिशत से अधिक भाग किसानों के ऊपर निर्भर करता है. मध्यप्रदेश की जनसंख्या का 70 प्रतिशत से ज्यादा भाग कृषि के ऊपर आधारित है. जो ऋण हमने लिया था उसमें से 60 प्रतिशत से अधिक राशि हमने किसान कर्ज माफी के तहत दी थी. 20 लाख से अधिक किसान भाइयों का 1 लाख रुपए तक का कर्ज माफ किया था. जिसको आपकी सरकार ने भी प्रश्नों के माध्यम से विधान सभा में स्वीकार किया है. एक बात और याद दिलाना चाहता हूँ. कल सदन के नेता ने कहा था कि मै उपस्थित रहूंगा. मैंने उनसे निवेदन भी किया था कि आप रहें. वे मुख्यमंत्री हैं हो सकता है कुछ ऐसे अपरिहार्य कारण हों कोई काम आ गया हो जो इस चर्चा से ज्यादा महत्वपूर्ण हो इसलिए यहां उपस्थित नहीं हैं. यह बात उन तक तो जरुर पहुंचेगी वे सदन के नेता हैं हो सकता है अपने कक्ष में बैठकर सुन भी रहे हों.

          सभापति महोदया, सामाजिक उत्थान की बात की जाती है. मध्यप्रदेश में सामाजिक सुरक्षा पेंशन जो वर्ष 2018 तक मिलती थी वह 300 रुपए प्रतिमाह मिला करती थी. हमने उसको तत्काल बढ़ाकर 300 से 600 रुपए किया था. हमने अपने घोषणा-पत्र में कहा था मैं सदन के अन्दर स्वीकार करता हूँ कि इसको हम 1000 रुपए तक करेंगे. कोई भी सरकार आती है तो उसे वित्तीय प्रबंधन करने में समय लगता है. संसाधन भी जुटाने पड़ते हैं. हमने उस वर्ग का ख्याल रखते हुए यह किया था कि 300 रुपए को बढ़ाकर 600 रुपए किया जाए. मध्यप्रदेश की बच्चियों का जो विवाह होता था उसकी राशि 25 हजार रुपए से बढ़ाकर 51 हजार रुपए की थी. ऐसे बहुत सारे कार्य थे जो हमने किये थे. इन बातों को कहने का तथ्य यह है कि..

          श्री रघुनाथ मालवीय -- भाई साहब आपने 51 हजार रुपए दिए ही नहीं थे.

          श्री तरुण भनोत -- आपको तो 51 हजार रुपए देने का प्रावधान भी नहीं था बच्चियों के विवाह के लिए प्रावधान था. सभापति महोदया, मेरा निवेदन है कि माननीय सदस्य मुझसे सीधे बात न करके आपके द्वारा बात करें.

          सभापति महोदया-- टोका-टाकी न करें.

          श्री तरुण भनोत -- करें, हमने भी की थी आप भी करें पर पॉजिटिव करें. सकारात्मक बात करें उसको स्वीकार करेंगे. हमें टोका-टाकी से डर थोड़ी लगता है. आज आप सरकार में हैं आप करिए, हमने प्रावधान किया था. नियम बनाया था, कानून बनाया था. अब आप सरकार में हैं आपका दायित्व है आप कीजिए.

          सभापति महोदया, मेरा निवेदन है कि आपने 2 लाख 80 हजार करोड़ का अनुमानित बजट रखा है. आपने जो जानकारी सदन को दी है उसके मुताबिक आपको लगभग 64 हजार करोड़ रुपया आपने लिखा है. करोड़ रुपया आपने लिखा है कि आपको सेंट्रल गवर्नमेंट से जीएसटी में आपका जो रिवेल्यूएशन शेयर है उसके तहत मिलेगा और बढ़कर जो अन्य केन्द्रीय सहायता है उसको मिलाकर लगभग 64 हजार करोड़ रुपये की राशि आपको प्राप्त होगी. उसके बाद आपने लिखा कि लगभग 72 हजार 860 करोड़ रुपया आपको राज्य का जो राजस्व है उससे आएगा. अब 64 हजार और 72 हजार को अगर हम जोड़ें तो लगभग 1 लाख 37 हजार करोड़ रुपया होता है. माननीय वित्त मंत्री महोदय, माननीय सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से यह बात सदन के सामने रखना चाहता हूँ कि आपकी प्रस्तावित आय सेंट्रल गवर्नमेंट के रिवेल्यूएशन शेयर के बाद, अन्य अनुदान प्राप्त करने के बाद, आपका टैक्स जो आपने एस्टीमेट किया है कि हमें, बजट का जो आपने यहाँ प्रावधान किया है कि हमें इतना प्राप्त होगा, इसको अगर जोड़ लिया जाए तो 1 लाख 36 हजार, 1 लाख 38 हजार करोड़ रुपया यह होता है और यह 2 लाख 80 हजार करोड़ रुपये का बजट आपने इस सदन के सामने रखा है, तो यह सदन जानना चाहता है और इस सदन के माध्यम से मध्यप्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता आपसे जानना चाहती है वित्त मंत्री महोदय कि यह बाकी रुपया कहाँ से आएगा?

          औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री(श्री राजवर्धन सिंह प्रेमसिंह दत्तीगाँव)--   

            माननीय सभापति महोदया, माफी चाहता हूँ तरुण हमारे बड़े विद्वान हमारे पूर्व वित्त मंत्री हैं. सभापति जी, अगर ये वित्त मंत्री जी का भाषण ठीक से सुन लेते, मैचिंग ग्रांट समझ लेते, जो हमें ऋण की ऊपर से परमिशन मिली है, उसको देख लेते, हमने जो परफॉर्मेंस की है, जो रिफॉर्म्स किए हैं, जो इज़ बिज़नेस बाकायदा, वह सब चीजें समझ लेते, तो शायद बजट पर इनकी समझ बेहतर होती.

          श्री तरुण भनोत--  मुझे तो आपकी समझ पर थोड़ा सा वह लग रहा है, मैं तो उस पर अभी आ रहा था. मैं यही तो पूछ रहा हूँ, यह तो आपने एस्टीमेट दिया है कि यह हमें प्राप्त होने वाला है. आपकी बहुत बेहतर परफॉर्मेंस है अभी उसकी बात भी करते. इतनी अच्छी परफॉर्मेंस है कि लगभग लगभग 60 हजार करोड़ रुपये का कर्जा आपने 18 महीने में ले लिया. कितनी बेहतर परफॉर्मेंस है. किसानों के तो कहीं आन्दोलन नहीं हो रहे, गृहणियों को तो सस्ती गैस भी मिल रही है, पेट्रोल, डीज़ल के रेट भी आपने कम कर दिए हैं, बेरोजगारी को भी आपने दूर कर दिया है, कितना अच्छा आपका परफॉर्मेंस है. आपको कर्मचारियों के हित में भी जो सारे निर्णय लेने थे, वह भी आप ले चुके हैं. माननीय, आप थोड़ा सा धैर्य रखिए, मैं उस पर भी आऊँगा. आप फिर उसी बात को कह रहे हैं, रेखांकित करना चाह रहे हैं कि हम और कर्जा ले लेंगे. मैंने शुरू में कहा कि हम कर्ज के विरोधी नहीं हैं, पर यह कर्ज जो आप ले रहे हैं, यह मेरे या आपके किसी की प्रायवेट लिमिटेड कंपनी का कर्जा नहीं है, जो हम उठाते जा रहे हैं. यह मध्यप्रदेश की जनता के ऊपर आप कर्ज का बोझ बढ़ा रहे हैं. माननीय विद्वान सदस्य ने एक बात कही, मैं आप से जानना चाहूँगा अगर आपने यह आँकड़े पढ़े हों, आप मुझे यह बताइये कि मध्यप्रदेश के प्रति व्यक्ति के ऊपर इस समय कितना कर्जा है? बताइये मुझे कितना कर्जा मध्यप्रदेश के प्रति व्यक्ति के ऊपर है? उसके काम में तो कर्जा नहीं आया, उसका विकास तो नहीं हुआ...(व्यवधान)..उसकी बेरोजगारी तो दूर नहीं हुई, उसकी मंहगाई तो कम नहीं हुई और आपने उसको कर्जे में डाल दिया.

          श्री बहादुर सिंह चौहान--  सभापति जी, प्रति व्यक्ति की आय 1 लाख 34 हजार हो गई है.

          श्री राजवर्धन सिंह प्रेमसिंह दत्तीगाँव--  सभापति जी, माननीय पूर्व वित्त मंत्री ने कहा है तो माननीय सभापति जी, आपकी अनुमति से कहना चाहता हूँ. पिछली बार काँग्रेस के बजट पर मैंने ही शुरुआत की थी, वह एक-एक आँकड़ा आज भी मुझे याद है, उस पर ज्यादा नहीं जाऊँगा लेकिन....(व्यवधान)..

          श्री तरुण भनोत--  आप जाइये, मैं आपका स्वागत करता हूँ, वह आँकड़े भी लाया हूँ. आप बात करिए.

          श्री राजवर्धन सिंह प्रेमसिंह दत्तीगाँव--  कहाँ 60 हजार करोड़ से 48 हजार करोड़ तक का कम से कम अनुमान था किसान कर्ज माफी का माननीय वित्त मंत्री जी ने मात्र 6 हजार करोड़ का उस बजट में प्रावधान किया था, आप बताइये छलावा था कि नहीं? कैसे होती 60 हजार करोड़ की कर्ज माफी, 6 हजार करोड़ के प्रावधान से?

          श्री तरुण भनोत--  सभापति जी, आपकी अनुमति अगर इनको थी तो मुझे पता नहीं. पर उस विषय पर मैं आता. पर अब दूसरे तरीके से आऊँगा. आप ही के तरीके से आऊँगा. माननीय, मैं सिर्फ यह जानना चाह रहा हूँ कि यह बाकी जो पैसा है, जो आपने प्रस्तावित किया है, जिसमें आपका विभाग भी है और आपके विभाग पर चर्चा होगी तो आप से भी हम पूछेंगे इस सदन में ही कि कितना पैसा प्रस्तावित हुआ था बजट में और कितना पैसा मिला. कितने उद्योग लगे, कितने बेरोजगारों को नौकरी मिली? आप तो हमारे कार्यकाल की बात कर रहे थे, हमने तो यह भी कानून बनाया था कि मध्यप्रदेश के 75 परसेंट युवाओं को यहाँ पर हम काम देंगे उन उद्योगों में और तमाम तरह की राहतें दी थीं. तब तो आपने सरकार का विरोध नहीं किया था. आज परिस्थितिवश आप कर रहे हैं. आपको यहाँ से कूदकर वहाँ जाना पड़ा, तो ठीक है...(व्यवधान)..

          श्री राजवर्धन सिंह प्रेमसिंह दत्तीगाँव--  माननीय मेरे भाई, मैं आपका बहुत आदर करता हूँ. मैं विरोध नहीं कर रहा हूँ मैं केवल याद दिला रहा हूँ. 

            श्री तरुण भनोत--   यहाँ विधायक के रूप में थे, वहाँ मंत्री के रूप में बैठ रहे हैं. यह आपकी उपलब्धि है, यहाँ विधायक के रूप में बैठते थे, वहाँ आप मंत्री के रूप में बैठे हैं और जिनको मंत्री के रूप में बैठना था वह बेचारे हमारे विधायक के रूप में बैठे हैं, यह आपकी उपलब्धि हो सकती है, पर यह मध्यप्रदेश की उपलब्धि नहीं है, यह आपकी व्यक्तिगत उपलब्धि हो सकती है. सभापति जी, विषयांतर न हो और मुझे ऐसा लगता है कि एक सक्षम, जो बहुत सीनियर, आप से और हम से, दोनों से है और बाकी सदन के बहुत सारे सदस्यों से भी हैं. हमारे वरिष्‍ठ नेता वित्‍त मंत्री के रूप में यहां बैठे हैं वह अपने जवाब देंगे, उनको आता है. बजट भी उन्‍होंने प्रस्‍तुत किया है और उनके ऊपर विश्‍वास और धैये रखिए आप. थोड़ा-सा धैय भी रखिए और विश्‍वास भी रखिए. माननीय, कोरोना काल के समय केन्‍द्र सरकार ने एक कार्य किया था. केन्‍द्र सरकार ने यह कहा कि सभी राज्‍यों को सिर्फ मध्‍यप्रदेश को ही नहीं, हिन्‍दुस्‍तान के सभी राज्‍यों को, क्‍योंकि रेवेन्‍यू 100 परसेंट, हम भी सरकार में होते, हमारे सामने भी चुनौतियॉं होतीं, जिन चुनौतियों का सामना आपने किया, पर आपने उसका रास्‍ता जो आसान रास्‍ता था, ढूंढ लिया जो आगे आने वाले समय में इस प्रदेश की जनता के लिए बहुत कठिन है. केन्‍द्र सरकार ने कहा कि हम आपको किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं दे रहे हैं. हम आपकी एफआरबीएम की लिमिट को बढ़ा दे रहे हैं. एफआरबीएम की लिमिट का मतलब यह होता है कि जो आपकी कर्ज लेने की सीमा है, उसको बढ़ा देते हैं और कर्ज ले लीजिए, हम आपको सहायता नहीं करेंगे. निश्‍चित तौर पर वह एक दौर था. आपको कर्ज लेने की जरूरत भी थी, हम भी होते तो हम भी लेते. आपने उस एफआरबीएम सीमा का, उस बढ़ी हुई सीमा का पूरा दोहन किया और कर्जा लिया. माननीय वित्‍त मंत्री महोदय, मैं आपसे जानना चाहता हॅूं कि कोरोना काल में क्‍या मध्‍यप्रदेश का हर वर्ग का व्‍यक्‍ति जब पीड़ित था, उसके खाते में कोई राशि डालकर उसकी मदद की गई कि उसके व्‍यक्‍तिगत खाते में 10 हजार, 15 हजार, 20 हजार रूपए की राशि डाली गई हो. उस कठिन दौर में उसका तो प्रावधान हमने कहीं नहीं देखा, न किसी को मिला. सामान्‍य परिवारों के लोगों के जो लाखों रूपए इलाज में लग गए, क्‍या उसका किसी भी प्रकार का अंश का, कोई पूरा तो छोड़िए, कोई उसका छोटा-सा अंश भी सरकार ने वापस किया ? नहीं किया, तो माननीय वित्‍त मंत्री महोदय, यह सवाल खड़ा होता है कि यह कर्ज का पैसा कहां गया. कल माननीय सदन के नेता यहां कह रहे थे कि कांग्रेस पार्टी के समय में हमने फसल बीमा का पैसा जमा नहीं कराया, मैं ऑन रिकॉर्ड आपसे कह रहा हॅूं कि यहां अधिकारी बैठे हैं, उनसे मंगवा लीजिए. आज भी वहीं अधिकारी हैं जो उस समय थे. फसल बीमा योजना का पैसा जो किसानों के अंश का था, वह हमारी तत्‍कालीन सरकार ने जारी करने के आदेश किए थे या नहीं किए थे. माननीय, यह जो लगभग-लगभग डेढ़ लाख करोड़ रूपए का अंतर है, मैं जानना चाहता हॅूं कि यह पैसा कहां से आएगा और इसको उठाने का मकसद मेरा यह नहीं है कि मैं आपको सिर्फ कटघरे में खड़ा करके आपकी आलोचना करना चाहता हॅूं. मैंने इस बात को पिछली बार भी सदन में दोहराया था और आज भी दोहराना चाहता हॅूं कि हमें अपने पैरों पर खड़ा होना सीखना पडे़गा. हमारी आय कैसे बढे़गी बिना आम जनता के ऊपर टैक्‍स लगाये, इसके लिए हमें कोई न कोई रूपरेखा बनानी पडे़गी. वह मुझे कहीं नहीं दिख रहा है कि हम एक समय में, आने वाले समय में, लंबे समय में आज आप सरकार में हैं आप एक वित्‍त मंत्री के रूप में यहां मौजूद हैं, हम यहां पर हैं सदन में हम हों या न हों, प्रदेश तो रहेगा. कोई न कोई तो सरकार चलायेगा, तो कैसा समय आयेगा कि जब हमारी ऋण लेने की सीमा भी पूरी हो जाएगी, ब्‍याज का बोझ प्रदेश के ऊपर बढ़ जाएगा और विकास भी नहीं होगा. आपने कोई भी ऐसा एक भी ठोस प्रस्‍ताव सदन के सामने इस बजट के माध्‍यम से नहीं रखा कि इस आने वाले वित्‍तीय वर्ष में हम अपने साधनों के अलावा, इस ऋण के अलावा जो सरकार से मिल रहा है, कैसे अपनी आय को बढ़ायेंगे, कैसे हमारा जो फिस्‍कल डेफिसिट बढ़ गया है उसको कम करेंगे और वहां से हमारे पूर्व के साथी विद्वान, जो उधर मंत्री बने बैठे हैं उन्‍होंने एक बात उठायी थी, एक महोदय पीछे से बोल रहे थे कि प्रति व्‍यक्‍ति आय बढ़ गई. अपने दिल पर हाथ रखकर इसी मुद्दे पर अपने क्षेत्र में घूमकर चुनाव लड़ लेना कि प्रति व्‍यक्‍ति की आय बढ़ गई, हमें वोट दे दीजिए. आप भी जानते हैं मैं भी जानता हॅूं कि क्‍या होगा. इसी को मुद्दा बना लीजिए.

          माननीय सभापति महोदया, दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हॅूं कि आज मध्‍यप्रदेश का प्रत्‍येक नागरिक, चाहे उसको सरकार की किसी योजना का लाभ मिला हो अथवा न मिला हो, चाहे उसके यहां पानी भरपूर आता हो या न आता हो, चाहे बिजली का बिल उसका बढ़ा हुआ आता हो, चाहे सड़कें खराब हों, चाहे उसके बच्‍चे बेरोजगार हों, माननीय वित्‍त मंत्री जी इस बात पर ध्‍यान दीजिएगा कि प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति को आपने जो तोहफा दिया है कि मध्‍यप्रदेश का प्रत्‍येक नागरिक 51 हजार रूपए का कर्जदार हो गया है. इसको आप अपनी उपलब्‍धि में गिनना चाहते हैं, तो गिन लीजिए. मैं बार-बार सदन के माध्‍यम से आपसे सिर्फ एक निवेदन पिछली बार भी करता रहा, आज भी कर रहा हॅूं कि जब तक हम वैकल्‍पिक आय के साधन नहीं ढूंढेगें, सिर्फ कर्ज के ऊपर निर्भर रहेंगे, तो यह कितने दिन चलने वाला है. माननीय, बात हो रही थी सदन में बहुत हमेशा चर्चा भी होती है और माननीय मुख्‍यमंत्री जी सदन के नेता का भी हमने एक वक्‍तव्‍य सुना कि हम मध्‍यप्रदेश में और राज्‍यपाल महोदय का जो अभिभाषण था, उसमें भी उसका उल्‍लेख था, रीज़नल बैलेंस करके विकास करेंगे, क्षेत्रीय संतुलन बनाएंगे. सब क्षेत्रों में सामान्‍य रूप से काम होगा.

            माननीय वित्‍त मंत्री महोदय, जब आप यह बात कहते हैं तो वह आपके बजट में परिलक्षित नहीं होती. कहीं न कहीं हमें यह दिखता है कि भेदभाव हो रहा है. आप अगर यह कहें कि 15 करोड़ रुपये तक के कार्य इस सदन के सदस्‍य, जो पक्ष के क्षेत्र से आते हैं, उनके हम स्‍वीकार करेंगे और जो दूसरे पक्ष से आते हैं, विपक्ष से आते हैं, इसी सदन के सदस्‍य हैं, वे भी मध्‍यप्रदेश की जनता का अपने-अपने क्षेत्रों से प्रतिनिधित्‍व करते हैं, उनके स्‍वीकार नहीं करेंगे तो कैसे आप इस बात का दावा कर सकते हैं कि आप क्षेत्रीय संतुलन बनाकर पूरे प्रदेश का सामान्‍य रूप से विकास करना चाहते हैं. वित्‍त मंत्री महोदय, मैं आपसे निवेदन करूंगा इस सदन के 230 सदस्‍य हैं...(व्‍यवधान)...

          श्री अनिरूद्ध माधव मारू -- आपने पहले विकास कर लिए ना, 15 महीने में, आपके क्षेत्रों के, तो बाकी के भी हो जाने दो. 15 महीनों में आपने यही तो किया है कि सारी योजनाएं अपने-अपने क्षेत्रों में ले गए हैं, कहीं पूरे प्रदेश में काम नहीं किया है आपने...(व्‍यवधान)...

          श्री तरूण भनोत -- सभापति महोदया, मैं बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहता हूँ मेरे विद्वान साथी को कि जिन्‍होंने इस सदन में कबूल किया कि हमने 15 माह में भरपूर विकास किया. आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद...(व्‍यवधान)...

          श्री अनिरूद्ध माधव मारू -- प्रदेश की सारी योजनाएं बंद करके आपने अपने-अपने क्षेत्रों में लेकर गए, सारा पैसा अपने क्षेत्रों में लगाया, केवल 2-4 जिलों में, कहीं काम नहीं  किया, पूरे प्रदेश को सूखा रख दिया आपने. ...(व्‍यवधान)...

          श्री तरूण भनोत -- हमारे क्षेत्र तो अफगानिस्‍तान की सीमा में आते हैं, पाकिस्‍तान की सीमा में आते हैं...(व्‍यवधान)...

          श्री अनिरूद्ध माधव मारू -- आप भी क्षेत्रीय संतुलन का ध्‍यान रखते तो आज ये स्‍थिति नहीं होती. क्‍या आपने क्षेत्रीय संतुलन का ध्‍यान रखा ? आपने ही सारे रास्‍ते खोले हैं...(व्‍यवधान)...

          सभापति महोदया -- बैठ जाइये.. ...(व्‍यवधान)...

            श्री तरूण भनोत -- माननीय सदस्‍य महोदय, आप अनुमति ले लें. सभापति महोदया, मैं सम्‍मानित सदस्‍य से विनम्र निवेदन करूंगा, बहुत सारे सदस्‍य आज भी उस पक्ष में बैठे हैं, जब हमने बजट प्रस्‍तुत किया था, उन्‍होंने जो हमें कार्य दिए थे, वे हमने किए हैं, मेरे पास सूची रखी है. आप मुझसे ले सकते हैं, मैं आपको दे दूंगा. जिस-जिस ने कहा था, उस-उस के काम हमने स्‍वीकृत किए थे. भेदभाव का आरोप हमारे ऊपर नहीं लग सकता, पर जब आप क्षेत्रीय संतुलन की बात करते हैं, पूरे मध्‍यप्रदेश का बराबर से विकास करने की बात करते हैं, तो ऐसा तो नहीं हो सकता कि बाजू वाले विधान सभा क्षेत्र में काम हो और उसके साथ वाले विधान सभा क्षेत्र में अगर कोई विपक्ष का सदस्‍य प्रतिनिधित्‍व कर रहा हो तो वहां काम न हो. ...(व्‍यवधान)...

          श्री दिलीप सिंह परिहार -- नीमच जिले को एक रुपये नहीं दिया था भैया.. ...(व्‍यवधान)...

          श्री तरूण भनोत -- माननीय सभापति महोदया, एक आंकड़ा और बहुत चौंकाने वाला है. माननीय वित्‍त मंत्री जी यहां बैठे हुए हैं, जो वित्‍त विभाग के भी मंत्री हैं, योजना विभाग के भी मंत्री हैं... ...(व्‍यवधान)...

          डॉ. योगेश पण्‍डाग्रे -- माननीय सभापति महोदया, इन्‍होंने थोड़ी सी अनुमति प्रदान की थी कि बीच में टोका-टोकी कर सकते हैं. मैं आपकी अनुमति से थोड़ी सी टोका-टोकी करना चाह रहा हूँ. बैतुल जिले में कुल पांच विधान सभा क्षेत्र हैं, चार विधान सभा क्षेत्रों में किसान कर्ज माफी की द्वितीय किश्‍त जारी कर दी गई थी, आमला विधान सभा क्षेत्र में चूँकि विपक्ष का विधायक था, नहीं की गई थी. ...(व्‍यवधान)...

          श्री तरूण भनोत -- पुन: आपको धन्‍यवाद कि आपने स्‍वीकार किया कि आपके जिले के पांच विधान सभा क्षेत्रों में से चार विधान सभा क्षेत्रों में ऋण माफी हुई थी...(व्‍यवधान)...

          डॉ. योगेश पण्‍डाग्रे -- मैं भेदभाव का आरोप लगा रहा हूँ. आप अगर यह बोलें कि सब जगह आप विकास कार्य कर रहे थे तो फिर आमला क्षेत्र को क्‍यों छोड़ा गया था, मैं यह जानना चाह रहा हूँ ...(व्‍यवधान)...

          श्री रामेश्‍वर शर्मा -- वे यह बोल रहे हैं कि चार विधान सभा क्षेत्रों में आपने फॉर्म बांट दिए थे, फर्जी कर्जमाफी के, उनकी विधान सभा में नहीं दिए थे. ...(व्‍यवधान)...

          सभापति महोदया  -- सभी लोग बैठ जाएं. माननीय भनोत जी, आपको 20 मिनट हो गए हैं, अभी और आप कितना समय लेंगे. आप जल्‍दी से समाप्‍त करें.

          श्री तरूण भनोत -- सभापति महोदया, समय ही समय है, समय की क्‍या कमी है.

          सभापति महोदया -- नहीं नहीं. अन्‍य सदस्‍यों को भी बोलना है, उन्‍हें भी समय देना है.

          श्री तरूण भनोत -- समय तो चाहिए, बहुत महत्‍वपूर्ण है. हमारे सदस्‍यों का समय काट लीजिए.

          सभापति महोदया -- आपके पक्ष से ही बोलने वाले सदस्‍य ज्‍यादा हैं.

          श्री तरूण भनोत -- उसमें से आप जिसको बोलेंगे, वह समय नहीं लेगा, हम लोग आपस में बात कर लेंगे.

          सभापति महोदया -- नहीं, नहीं.

          श्री सचिन यादव --  माननीय सभापति महोदया, हमारे ओपनिंग बैट्समेन हैं. इन्‍हें बोलने दीजिए.

          श्री तरूण भनोत -- माननीय सभापति महोदया, कृपया इस बात को रिकॉर्ड से निकालें, फर्जी, साढ़े 8 हजार करोड़ रुपये की राशि मेरे घर से नहीं, कमलनाथ जी के घर से नहीं, हमारे मंत्रिमण्‍डल के सदस्‍यों के घर से नहीं, मध्‍यप्रदेश के खजाने से निकलकर किसान भाइयों की कर्जमाफी में गई थी. वह फर्जी नहीं हो सकती. उसको हमारे आज के मंत्री महोदय, अभी वे यहां उपस्‍थित नहीं हैं, उन्‍होंने इसी विधान सभा में एक प्रश्‍न के माध्‍यम से स्‍वीकार भी किया कि हां, हुई थी, तो यह गलत बात है. यदि रह गई तो आप कर दीजिए. मैं आपको भी यही बात कहना चाहता हूँ, माननीय सभापति महोदया, कल मुख्‍यमंत्री जी ने ये कहा कि हम किसानों का 200 करोड़ रुपया वह माफ करने जा रहे हैं जो उनके ऊपर लोन का हो गया था, जो डिफॉल्‍टर हो गए थे. क्‍या यह सदन यह निर्णय नहीं ले सकता कि जो 15 माह के कार्यकाल में बाकी किसान भाई कर्जमाफी से बच गए थे, जिनकी कर्जमाफी नहीं हो पाई थी, आप कर दीजिए, हम आपको बधाई देंगे और कहेंगे कि आपके माध्‍यम से किसानों की कर्जमाफी हुई. आप घोषणा कीजिए. ...(व्‍यवधान)...

          डॉ. योगेश पण्‍डाग्रे -- महोदय जी, आपने 10 दिनों के अंदर कर्जमाफी की बात की थी. आपको 15 महीने मिले, हमारे ऊपर क्‍यों लाद रहे हो, यह आपने बोला था...(व्‍यवधान)...

          श्री तरूण भनोत -- हमारा वादा था, हम कर रहे थे. ...(व्‍यवधान)...

          श्री राजवर्धन सिंह प्रेमसिंह दत्‍तीगांव -- सभापति जी, राहुल गांधी जी ने मंदसौर की सभा में कहा था कि 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 दिन में कर्जा माफ हो जाएगा.

          श्री पी.सी. शर्मा -- आपने 35 करोड़ के लिये कहा था.

          श्री शशांक श्रीकृष्‍ण भार्गव -- घोषणा में आप भी जीते थे. इस घोषणा से आप भी उस समय जीते थे. 15-15 लाख आने की बात कही थी. 15 लाख आ गये क्‍या खाते में ? ..(व्‍यवधान)...

          श्री हरिशंकर खटीक -- आपने 10 दिन में कहा था.

          सभापति महोदया -- सब लोग बैठ जाइये.

          श्री रामेश्‍वर शर्मा -- माननीय सभापति जी, कांग्रेस के नेता बोलते हैं लेकिन यह पूरा नहीं करते तो हम उनके माननीय नेता की बात पूरी करते हैं कि 10 दिन में मुख्‍यमंत्री बदल दूंगा और जब कर्ज माफी नहीं हुई तो सदन ने मुख्‍यमंत्री ही बदल दिया. हमने उनकी बात पूरी की.

          डॉ. हिरालाल अलावा -- इसलिये मैं कह रहा हूं कि 15-15 लाख आ गये खाते में. किस-किस के खाते में 15 लाख आ गये ?

          श्री तरुण भनोत -- सभापति महोदया, यह समय न जोड़ा जाए. इसी को आप जोड़ देते हैं. मैं माननीय वित्‍तमंत्री महोदय, आपसे...       

          डॉ. अरविंद सिंह भदौरिया -- माननीय तरुण जी...

          श्री तरुण भनोत -- अब आप शुरू हो गये. बैठ जाइये अरविंद भाई. आपको हम कभी छेड़ते नहीं, आप चाहते हैं कि मैं आपको भी छेड़ना चालू करूं ?

          डॉ. अरविंद सिंह भदौरिया -- नहीं नहीं, आप तो हमेशा ही छेड़ते हैं. इतने प्‍यारे आदमी हैं आप. आप तो दूसरे को छेडि़ये नहीं तो मुझे छेड़ेंगे, मैं बैठ जाता हूं.

           श्री हरिशंकर खटीक -- एक भी उपलब्धि अपनी बता नहीं सकते. इन्‍होंने कुछ भी नहीं किया और इनकी सरकार चली गई. आज यह विपक्ष में बैठे हैं.

          श्री अनिरुद्ध माधव मारू -- विधान सभा में खुली धमकी.

          सभापति महोदया -- माननीय विधायक जी, बोलने दीजिये.

          श्री तरुण भनोत -- सभापति महोदया, आपको भरपूर मौका मिलेगा आप जवाब दीजियेगा और आप विश्‍वास कीजिये सीतासरन शर्मा जी के ऊपर, मेरी एक-एक बात का जवाब वह देंगे. आपके पास बहुत वरिष्‍ठ और विद्वान लोग बैठे हैं आप टोका-टाकी करते हैं.

          सभापति महोदया -- भनोत जी, अपनी बात करिये आप.

          श्री तरुण भनोत -- सभापति महोदया, दोनों विभागों के मंत्री आप हैं. बजट के एक दिन पहले आर्थिक सर्वेक्षण आया, उसमें यह बताया गया कि हमारी ग्रोथ है जीएसडीपी मध्‍यप्रदेश की वर्ष 2022-23 में 11 लाख, 69 हजार करोड़ होने वाली है. दूसरा, आपने जब बजट इस्‍टीमेट यहां पर रखे 2 लाख, 79 हजार करोड़ रुपये के, तो आपने कहा कि 10 लाख, 36 हजार करोड़ रुपये यह वित्‍त विभाग ने कहा कि हमारी जीडीपी होने वाली है. यह दोनों में से कौन सा आंकड़ा सही है ? दोनों विभाग के मंत्री आप हैं. आप एक दिन पहले यह कहते हैं कि 11 लाख, 69 हजार करोड़ हमारी जीएसडीपी होगी और आप जब बजट रखते हैं तो कहते हैं कि 10 लाख, 36 हजार करोड़ होगी. मैं आपसे इस बात का जवाब जरूर चाहूंगा माननीय. एफआरबीएम की जो सीमा केन्‍द्र सरकार ने हिन्‍दुस्‍तान के सारे राज्‍यों के लिये बढ़ाई थी उसको पुन: कम कर दिया गया है. जो पहले थी उसी को कर दिया गया है, तो यह जो आपके बजट में असंतुलन है, जो प्रस्‍ताव आपने रखे हैं और जो आपने अपनी आय दिखाई है इसमें आपने केन्‍द्र सरकार का पैसा भी शामिल किया है, उसको आप कैसे पूरा करेंगे ? इस सदन को बताइये और वह इस सदन को बताना इसलिये जरूरी है क्‍योंकि यह जो पैसा इस्‍तेमाल करेंगे या जो कर्जा आप करेंगे उसका माध्‍यम भी हमें पता होना चाहिये और उसकी ब्‍याज की राशि भी पता होना चाहिये. पता यह चल रहा है कि मध्‍यप्रदेश के विकास के लिये 20 हजार करोड़ रुपया कुल मिल रहा है सारे विभागों को खर्च करने के लिये और मध्‍यप्रदेश की सरकार 25 हजार करोड़ रुपये ब्‍याज के रूप में भर रही है. क्‍या यह स्‍वीकार है, क्‍या यह सदन स्‍वीकार करेगा ? पक्ष-विपक्ष को भूल जाइये. यह हमें तय करना पड़ेगा कि हमें अपनी जो फायनेंसियल रिस्‍पॉंसिबिल्‍टी है उसको हम कैसे पूरी करें. हमारा काम यह बस नहीं है कि हम कर्ज लें, लेते जाएं, प्रदेश की जनता को कर्ज के बोझ में डुबोते जाएं.     माननीय वित्‍तमंत्री जी, एक चीज को और आप स्‍पष्‍ट कीजियेगा, समाचार पत्रों के माध्‍यम से बजट के बाद हमारे जो समाचार पत्रों के अलावा जो विभिन्‍न इलेक्ट्रिानिक मीडिया चैनल के माध्‍यम से आपने खूब अपनी और सरकार की पीठ थपथपाई, हमारे सदस्‍यों ने भी यहां पर बैठकर खूब ताली बजाई कि इस बार मध्‍यप्रदेश देश में पहला प्रदेश बन रहा है जो चाइल्‍ड बजट लेकर आ रहा है और 57 हजार करोड़ रुपये की राशि हम प्रदेश में चाइल्‍ड बजट में खर्च करने वाले हैं.

          श्री दिलीप सिंह परिहार -- यह तारीफ की बात है ना. बच्‍चों का ध्‍यान रखना पड़ेगा. अपने ही परिवार के हैं.

          श्री तरुण भनोत -- पूरी बात तो सुन लो फिर दिल पर हाथ रखकर तारीफ कर लेना. जब बाथरुम में आइने के सामने खड़े होंगे तब भी नहीं कर पाएंगे.

          श्री दिलीप सिंह परिहार -- बजट की तारीफ तो सारे आर्थिक विशेषज्ञ कर रहे हैं. बजट की तारीफ सब लोग कर रहे हैं.

          श्री तरुण भनोत -- मैं आपको बता रहा हूं वह विशेषज्ञ कौन हैं, वह भी सब देख रहे हैं. 57 हजार करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान माननीय विद्वान वित्‍तमंत्री जी कहां पर किया गया है यह हमें बता दीजिये. मुझे एक अलग से हैड कहीं नहीं दिखा आपके बजट अनुमान में कि 57 हजार करोड़ रुपये हम चाइल्‍ड वेलफेयर के लिये उन बच्‍चों के ऊपर खर्च करने जा रहे हैं जिनकी 18 वर्ष से कम की आयु हो. कोई भी सम्‍मानित सदस्‍य मुझे निकालकर वह पन्‍ना बता दे और निकाल ले. भाषण में था, इसमें दिखा दे. आपने क्या किया है, सम्माननीय अधिकारी तो वही हैं जो हमारे समय भी थे, आपने निश्चित रूप से बोला होगा कि हमें कुछ करना है, उन्होंने कर दिया, उसमें भी कहीं न कहीं पूरा नहीं कर पाए, थोड़ी-सी चूक हो गई. 18 साल से नीचे के बच्चों की जितनी योजनाएं मध्यप्रदेश में चलती हैं और उसमें जो पैसा खर्च होता है, उसको आपने बता दिया कि हमने चाइल्ड बजट बना दिया. यह चाइल्ड बजट के लिए आप 57000 करोड़ रुपये की राशि तो छोड़िए, अगर 5000 करोड़ रुपये की राशि देते तो मैं सदन में तो संभव नहीं था, बाहर आकर आपको जरूर माला पहनाता और मध्यप्रदेश के बच्चों की ओर से धन्यवाद देता.

                                                अध्यक्षीय घोषणा

माननीय सदस्यों के लिए लॉबी में भोजन व्यवस्था विषयक

सभापति महोदया - आज भोजनावकाश नहीं होगा, माननीय सदस्यों के लिए भोजन की व्यवस्था सदन की लॉबी में की गई है. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्ट करें.

1.01  बजे            वर्ष 2022-2023 के आय-व्ययक पर सामान्य चर्चा (क्रमशः)

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री (श्री हरदीप सिंह डंग) - सभापति महोदया,  बच्चों के ऊपर जो खर्चा किया गया है, उसमें बच्चों को आंगनवाड़ी में दलिया.

श्री तरुण भनोत - यह अपने विभाग का जवाब नहीं दे पाते.

श्री हरदीप सिंह डंग - उसका उत्तर तो भेज दिया, उन्होंने जो अलग हटकर बोला था, उनको भी मालूम है. अलग हटकर भी जो पूछा था वह भी मालूम है, बच्चों के ऊपर जो खर्च किया उसका पूरा हिसाब आज जो बच्चों को साईकिलें दी जा रही हैं, आंगनवाड़ी में जो दलिया दिया जा रहा है, जो बच्चों पर खर्च किया जा रहा है, वह सब उसी में है. परन्तु बच्चों का अलग से बजट है. यह बच्चों के लिए किया है.

श्री तरुण भनोत - सभापति महोदया, सरकार के मंत्री स्वीकार कर रहे हैं सदन में कि हां, मैं सही कह रहा हूं. जो दलिया दिया जाता है, जो बाकी पैसा दिया जाता है, जो बाकी के कपड़े दिये जाते हैं. साईकिलें दी जाती हैं. आप बैठ जाओ.

श्री हरदीप सिंह डंग - बच्चों के लिए अलग से खर्च किया है, बच्चों पर जो खर्च किया जा रहा है वह बच्चों का बजट है.

श्री सुखदेव पांसे - वह बैंगलोर में खर्च हो गया.

श्री हरदीप सिंह डंग - बैंगलोर के बाद सुवासरा से 20000 वोट से जीतकर आए.

श्री सुखदेव पांसे- बच्चों का भी खा गये. शेम

श्री दिलीप सिंह परिहार - बैंगलोर के बाद तो आप कोमा में चले गये. जनता ने उनको जनादेश दिया है. जनता ने जनादेश देकर जिताया है.

श्री बहादुर सिंह चौहान - यह सरदार जी मालवा के शेर हैं.

श्री तरुण भनोत - सभापति महोदया, मैं यही कह रहा हूं कि आपने कोई चाइल्ड बजट का प्रावधान नहीं किया है कोई चाइल्ड बजट मध्यप्रदेश के लिए नहीं आया है, जो विभिन्न योजनाओं के तहत  18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पैसे से सरकार जो खर्चा करती थी, आपने उसको जोड़कर बता दिया कि हमने चाइल्ड बजट लाए हैं और 57000 करोड़ रुपये का प्रावधान उसके माध्यम से किया है.

सभापति महोदया, इसी के साथ कल सम्मान निधि की बात हो रही थी. सम्मान निधि किसानों की जमा नहीं हुई, हमने कार्यकाल में पूरी सूची नहीं भेजी थी तो बहुत सारे किसान वंचित रह गये. आप बताइए और सदन को जवाब दीजिए कितने ऐसे किसान भाई जिनको यह सम्मान निधि मिल चुकी थी उनको आपने अवैध मानकर उनके नाम काटकर उनको वसूली के नोटिस दिये, सदन में आप कुछ कहते हैं और बाहर उनको नोटिस देते हैं कि हम यह करेंगे.

सभापति महोदया, एक बात कहकर अपने बात समाप्त करूंगा, मुद्दे तो बहुत सारे हैं, हमारे साथ में बहुत सारे ऐसे वक्ता यहां पर बैठे हैं जो बातों को और बढ़िया तरीके से रखेंगे. सबसे प्रमुख बात और किसी भी सरकार की रीढ़ की हड्डी होते हैं, उसके सरकारी कर्मचारी और अधिकारी.

राज्यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास (श्री भारत सिंह कुशवाह) - नाम काटने का काम तो आपने संबल योजना में किया था.

श्री तरुण भनोत - मैं आपको चुनौती देता हूं सदन में, संबल योजना के अंदर अगर 6 माह से किसी भी एक भी आदमी को पैसा मिला होगा तो मैं सदस्यता छोड़ दूंगा.

श्री हरदीप सिंह डंग - संबल में नाम तो आपने काटे हैं. (व्यवधान)..

श्री तरुण भनोत - आप इतना असत्य बोलते हैं.

एक माननीय सदस्य - संबल का पाप आप लोगों ने किया है. (व्यवधान)..

श्री तरुण भनोत -मेरी विधान सभा की बात करो, आपकी विधान सभा पूरा मध्यप्रदेश नहीं है.

श्री दिलीप सिंह परिहार - सभापति महोदया, नया सवेरा में नहीं मिले.

डॉ. सीतासरन शर्मा - बजट में प्रावधान किया है.

श्री रामेश्वर शर्मा (हुजूर) - सभापति महोदया, आप पूर्व  मंत्री हैं, बहुत अच्छे हैं, तरुण भी हैं, थोड़ा-सा इनसे कहें कि इतना चैलेंज क्यों? आप जो बोल रहे हैं सुन तो रहे हैं, क्यों इतने गुस्से में आ रहे हो, कुछ मत करो, बने रहो भैया, मुश्किल से बनते हैं.

श्री तरुण भनोत - असत्य पर अगर क्रोध न आए तो वह खून नहीं पानी है. सभापति महोदया, मैं एक मांग आपके सामने रखना चाहता हूं और मैं आशा करता हूं कि मध्यप्रदेश की विधानसभा के सारे सदस्य इस मांग का समर्थन भी करेंगे, बिना भेदभाव के करेंगे, बिना पक्ष-विपक्ष को देखकर करेंगे कि हमारे प्रदेश के कर्मचारियों अधिकारियों की मांग बहुत लम्बे समय से चली आ रही है, ओपीएस, ओल्ड पेंशन स्कीम को लागू करने की. (मेजों की थपथपाहट).. जो राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सरकार ने कर भी दिया है. मैं उन सरकारों को भी धन्यवाद देता हूं.  मैं आप सबसे पूछना चाहता हूं कि  भाइयों और बहनों, लागू होनी चाहिये कि  नहीं होनी चाहिये.  आप सब बताइये, लागू होनी चाहिये कि नहीं होनी चाहिये.  हमारे कर्मचारी भाइयों को  ओल्ड पेंशन स्कीम  का लाभ मिलना चाहिये कि नहीं मिलना चाहिये. बोलिये भाइयों बहनों. ..(हंसी)..

                   श्री जालम सिंह पटेल -- सभापति महोदया, वह बंद किसने की थी. यह  आपकी सरकार ने किया.

..(व्यवधान)..

                   सभापति महोदया-- कृपया सब बैठ जायें.  तरुण भनोत जी, कृपया समाप्त  करें.

                   श्री तरुण भनोत --  सभापति महोदया, दो मिनट का समय दे दें, मैं दो मिनट में खत्म करुंगा. कर्मचारी, अधिकारियों के लिये हमारी  सरकार ने  यह योजना बनाई थी, कर्मचारी  एवं अधिकारियों के हित में कि हम स्वास्थ्य सेवाओं  का लाभ हम उनको देना चाहते थे.  वह भी लम्बित निर्णय पड़ा है.  वित्त मंत्री जी, मैं आपको निवेदन करना चाहूंगा कि   ओल्ड पेंशन स्कीम के साथ साथ  वह जो उनके लाभ के लिये  उपचार की योजना बनाई गई  थी, उसको भी लागू करिये और इस बात को कहकर  मैं  अपनी बात समाप्त करुंगा कि  हम सदन में सिर्फ आपका विरोध करने के लिये खड़े नहीं हुए हैं.  जो कमियां रह गई हैं,  जो प्रावधान नहीं हुए हैं.  मुख्यमंत्री जी ने कल  सारे सदस्यों के अनुरोध पर, सारे सदस्यों के दबाव में, जनता के दबाव में, जनता के अनुरोध  पर, मैं सदन के माध्यम से  उनको धन्यवाद देना चाहता हूं कि  इस बात को स्वीकार किया कि  हम बिजली के बिल जो  हमने  घोषणा की थी, जिसको हम पूरा  नहीं कर पा रहे थे, कल उन्होंने सदन में घोषणा की कि  हम करेंगे.  मैं वित्त मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूं कि  उस राशि का प्रावधान  भी इस बजट  में कर लिया जाये,  जिससे जब हम कोई भी अपने अपने  क्षेत्रों में जायें,  तो जनता परेशान न हो, उसका प्रावधान नहीं किया गया है, कर लीजिये.

                   श्री  भारत सिंह कुशवाह--   तरुण जी, आप यह भी तो बता दो कि  आपके कारण जो  लोगों ने ब्याज  भरा है,  वह भी  तो माफ किया है. यह भी तो बता दो.

                   श्री तरुण भनोत --   आप जवाब देना, जब  आपकी बारी आये. सभापति महोदया,  मैं इस बात को कहकर,  यह मेरा दायित्व भी बनता है,  मैं भी इस सदन का सदस्य हूं,  हम सब इस सदन के सदस्य हैं.  मुख्यमंत्री जी को उस बात के लिये साधूवाद कि  उन्होंने स्वैच्छानुदान की राशि  और हमारी जो विधायक निधि है,  उसको  बढ़ाने की बात की.  पर एक बात कहना चाहता हूं कि  आज से दो वर्ष पूर्व  जब आप यहां बैठे थे, आज माननीय मंत्री जी जो उस समय विपक्ष में थे.  विश्वास सारंग जी और रामेश्वरशर्मा जी ने एक बात उठाई थी कि विधायक निधि को बढ़ाया जाना चाहिये. स्वैच्छानुदान  निधि को बढ़ाया जाना चाहिये.  20 मार्च जिस दिन हमारी सरकार गिरी, उस दिन हमारा बजट आना था,  हम उसमें यह प्रावधान  करके ला रहे थे कि  विधायक निधि को बढ़ाकर हम  साढ़े 3 करोड़ रुपये  और स्वैच्छानुदान को 50 लाख रुपये  करने जा रहे थे.  आज हमारी सरकार नहीं है,  आपने ढाई  करोड़ रुपये किया. 50 लाख स्वैच्छानुदान  किया.  मैं पूरे सदन की ओर से  वित्त मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि  यह बात आप सदन के नेता तक ले जायें.  हम सबकी ओर से उनको धन्यवाद, साधूवाद भी दें और साथ में यह निवेदन भी करें कि  उसको फिर से बढ़ाकर  जब वह जवाब दें,  आप जवाब दें, तो  साढ़े 3 करोड़ रुपये विधायक निधि और 50 लाख रुपये स्वैच्छानुदान करके कुल 4 करोड़ रुपये की राशि  कर दें.   जब छत्तीसगढ़ जैसा छोटा राज्य  यह कर सकता है, तो हम तो उनके हमेशा बड़े  भाई रहे हैं.  बढ़ाकर करना चाहिये, पर बढ़ाकर न करें, तो  कम से कम उतना  तो कर दें. धन्यवाद, जय हिन्द, जय भारत.

                   श्री शैलेन्द्र जैन (सागर)-- सभापति महोदया,  मध्यप्रदेश  सरकार के  द्वारा वित्तीय वर्ष 2022-23   के आय व्ययक,  इस समय समयानुकूल  और एक  आदर्श बजट इस सदन के  नेता, मध्यप्रदेश सरकार  के यशस्वी मुख्यमंत्री, सम्मानीय   शिवराज सिंह चौहान जी के नेतृत्व  में हमारे विद्वान  वित्त मंत्री महोदय,   सम्मानीय जगदीश देवड़ा जी  के द्वारा जो बजट  पेश किया गया है,  मैं  उनको  और पूरी सरकार को  बहुत बहुत बधाई एवं साधूवाद देना चाहता  हूं.  कहते हैं कि  हे वही सूरमा  इस जग में  जो  अपनी राह बनाता है,  कुछ चलते पद चिह्नों पर, कोई पद चिह्न बनाता है.  वित्त मंत्री जी ने लीक पर चलना श्रेयस्कर नहीं  समझा और उन्होंने  इस कोविड संक्रमणकाल  के पश्चात्  परिस्थितियों को बेहतर से बेहतर  बनाने के लिये  एक ऐसा आदर्श बजट बनाया. जिसमें विशेष रूप से हमारे पूंजीगत व्यय को बढ़ाने का काम किया है. मैं आज इस बात के लिये सरकार को और वित्त मंत्री महोदय को बधाई देना चाहता हूं कि पूंजीगत व्यय जो वर्ष 2019-20 में 30228 करोड़ था कोविड की प्रथम लहर के बाद भी इस पूंजीगत व्यय को हमने कम नहीं होने दिया हमारी सरकार ने कम नहीं होने दिया और उसमें इजाफा करते हुए 2021-22 में इसको लगभग 8829 करोड़ बढ़ाकर 40115 करोड़ तक पहुंचाने का काम किया है. यह कीर्तिमान है. यह वृद्धि लगभग 28 प्रतिशत है और कोविड जैसे संक्रमण काल के बाद भी हमारी सरकार ने बगैर विचलित हुए बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के लिये और सरकार के स्थाई संपत्तियों के सृजन करने के लिये जो पूंजीगत व्यय में वृद्धि की है यह अद्वितीय है यह नया कीर्तिमान है इसके लिये मैं वित्त मंत्री जी को बधाई देता हूं. माननीय सभापति महोदया,अभी हमारे वरिष्ठ सदस्य और इस सरकार के पूर्व मंत्री सम्मानीय भनोत जी ने कुछ विषय रखे हैं. सबसे पहले तो जो बात उन्होंने कही कि प्रति व्यक्ति जो कर्ज है वह हर व्यक्ति के सिर पर 51 हजार रुपये हो गये हैं. आपके ही वरिष्ठ सदस्य लक्ष्मण सिंह जी प्रति व्यक्ति कर्ज को 30 हजार बता रहे हैं. आप लोग यह तय कर लीजिये कि आपके आंकड़े और उनके आंकड़े में क्या फर्क है.

          श्री तरुण भनोत - माननीय सभापति महोदया, मेरा नाम लिया तो मैं इनको बता दूं. उनका क्या आंकड़ा है. मेरा क्या आंकड़ा है. इसके बाद बोलने वाले सदस्य का क्या आंकड़ा है यह मायने नहीं रखता. आंकड़ा वह मायने रखता है जो सरकार के पास फिगर है. आप सम्मानित वरिष्ठ सदस्य हैं आप सही आंकड़ा बता दीजिये अगर हम गलत आंकड़ा बता रहे हैं. कितना कर्जा है बता दीजिये. आप नाम नहीं लेते तो मैं खड़ा नहीं होता. मैंने तो स्वीकार कर लिया मेरा आंकड़ा गलत है. सम्मानित सदस्य लक्ष्मण सिंह जी का आंकड़ा गलत है.

          सभापति महोदया -  आप बैठ जाईये.  

          श्री शैलेन्द्र जैन - आपने आंकड़े के बारे में कहा है. आप दोनों एक ही दल के वरिष्ठ सदस्य हैं आप लोग तय करिये ताकि उसका जवाब हमारे वित्त मंत्री जी दे सकें.

          श्री तरुण भनोत - सरकार हमें थोड़ी चलाना है. हम कैसे तय करेंगे. आप बताईये कि क्या सही है मैं उसको स्वीकार कर लूंगा अगर मैं और लक्ष्मण सिंह जी गलत हैं आप सही बता दीजिये ना.

          श्री शैलेन्द्र जैन - आप बैठिये तो.

          सभापति महोदया -  आप बैठ जाईये.

          श्री शैलेन्द्र जैन -  अब सब जवाब ही हम दे देंगे तो वित्त मंत्री महोदय क्या करेंगे.

          श्री तरुण भनोत - अंत में करना यही