मध्यप्रदेश विधान सभा
की
कार्यवाही
(अधिकृत विवरण)
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चतुर्दश विधान सभा नवम सत्र
दिसम्बर, 2015 सत्र
सोमवार, दिनांक 14 दिसम्बर, 2015
(23 अग्रहायण, शक संवत् 1937)
[खण्ड- 9 ] [अंक- 6 ]
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मध्यप्रदेश विधान सभा
सोमवार, दिनांक 14 दिसम्बर, 2015
(23 अग्रहायण, शक संवत् 1937)
विधान सभा पूर्वाह्न 10.33 बजे समवेत हुई.
{अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}
तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर
खाद्यान्न पर्ची का वितरण
1. ( *क्र. 1677 ) श्रीमती योगिता नवलसिंग बोरकर : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शासन की समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन योजना अंतर्गत गरीबों को शासकीय उचित मूल्य दुकान से खाद्यान्न पर्ची के आधार पर ही अनाज दिये जाने का प्रावधान कब से है? (ख) क्या पंधाना विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत योजना से लाभान्वित परिवारों को शत-प्रतिशत खाद्यान्न पर्ची का वितरण किया जा चुका है? (ग) यदि हाँ, तो लाभान्वित परिवारों को उचित मूल्य दुकान से प्रतिमाह अनाज क्यों नहीं उपलब्ध हो रहा है? (घ) यदि नहीं, तो क्यों? इस हेतु कौन अधिकारी जिम्मेदार है? उन पर क्या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो कब तक की जावेगी? इन परिवारों को कब तक खाद्यान्न पर्ची प्रदाय की जावेगी?पात्र परिवारों को खाद्यान्न का वितरण पात्रता पर्ची (ई-राशनकार्ड) के आधार पर प्रारम्भ किया गया है। (ख) पंधाना विधानसभा क्षेत्रांतर्गत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत सत्यापित 67,719 पात्र परिवारों को पात्रता पर्ची (ई-राशनकार्ड) का वितरण किया जा चुका है। (ग) पंधाना विधानसभा क्ष्ोत्रान्तर्गत पात्रता पर्चीधारी (ई-राशनकार्ड) परिवारों को प्रतिमाह नियमित रूप से राशन सामग्री का वितरण किया जा रहा है। (घ) प्रश्नांश (ग) के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
खाद्य मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) दिनाँक 01 मार्च, 2014 से सत्यापित पात्र परिवारों को खाद्यान्न का वितरण पात्रता पर्ची (ई-राशनकार्ड) के आधार पर प्रारम्भ किया गया है। (ख) पंधाना विधानसभा क्षेत्रांतर्गत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत सत्यापित 67,719 पात्र परिवारों को पात्रता पर्ची (ई-राशनकार्ड) का वितरण किया जा चुका है। (ग) पंधाना विधानसभा क्ष्ोत्रान्तर्गत पात्रता पर्चीधारी (ई-राशनकार्ड) परिवारों को प्रतिमाह नियमित रूप से राशन सामग्री का वितरण किया जा रहा है। (घ) प्रश्नांश (ग) के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
श्रीमती योगिता नवलसिंग बोरकर---अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न (ख) यह था कि क्या पंधाना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत योजना से लाभान्वित परिवारों को शतप्रतिशत खाद्यान्न पर्ची का वितरण किया जा चुका है? इसके उत्तर में मंत्री जी ने बताया है कि शतिप्रतिशत खाद्यान्न पर्ची का वितरण किया जा चुका है. किन्तु मेरी विधानसभा अंतर्गत ग्राम जामलीखुर्द,बाबली,विलनखेड़ा एवं भीलखेड़ी ग्राम पंचायत के अंतर्गत बडिया,सकना एवं सालई पंचायत के लगभग 30 प्रतिशत पात्र परिवारों को खाद्य पर्चियां आज दिनांक तक उपलब्ध नहीं हो पायी हैं . एक और समस्या थी , खाद्य विभाग द्वारा कुमठी और बलरामपुर के बी.पी.एल.एवं एस.सी., एस.टी की खाद्य पर्चियां ब्लाक कर दी गई हैं.
अध्य़क्ष महोदय—पहले एक प्रश्न का उत्तर ले लें फिर दूसरा पूछ लें.
कुंवर विजय शाह—माननीय अध्यक्ष जी, जैसा कि माननीय सदस्य ने जानना चाहा है 1-मार्च 2014 के बाद जो नियम बदले हैं उसके अंतर्गत जितने बी.पी.एल. और ए.वाय. थे सबको शतप्रतिशत पर्ची वितरित की जा चुकी हैं. नंबर (2), दूसरा, 1 मार्च , 2014 के पहले एपीएल के 37 हजार लोग लाभ ले रहे थे. माननीय मुख्यमंत्रीजी की सहृदयता के कारण और हमने जो प्राथमिक परिवार की सूची तय की है, इसमें मजदूर हैं, हाथ ठेला वाले, रिक्शा वाले हैं, घरों में काम करने वाली हमारी बहनें हैं, इन सबको मिलाकर, उन 37 हजार जो एपीएल का लाभ ले रहे थे, में से 29 हजार लोगों को हमने शामिल कर लिया है. जो नाम माननीय सदस्या ने अभी यहां पर दिये हैं, उनको अगर नहीं मिल रहा होगा तो उनके प्रमाण पत्र, प्रमाणित नहीं हुए होंगे इस कारण से नहीं मिल रहा होगा. जो तीन गांव के नाम बतायें हैं, मैं अधिकारी भेजकर एक बार जांच करा देता हूं.
श्रीमती योगिता नवलसिंग बोरकर—अध्यक्षजी, मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि खाद्य विभाग द्वारा ग्राम कुमठी और बलरामपुर पंचायत में बीपीएल और एसटी/एससी की खाद्य पर्चियां ब्लाक कर दी गई. मैं माननीय मंत्रीजी से निवेदन करना चाहूंगी कि वह पात्र परिवार है, उनको लिस्ट में लिया जाये.
कुंवर विजय शाह—अध्यक्ष जी, जैसा माननीय सदस्या ने जानना चाहा है. कई लोग पात्रता पर्ची 2-2,3-3 जो हमने निर्णय लिया था मजदूरी में भी इन्होंने आरक्षण करा लिया है. कहीं एससी/एसटी में आ गया है. हम दिखवा लेते हैं. ऐसी कोई जानकारी मेरे पास नहीं है कि ब्लाक कर दिया गया है, फिर भी आप कह रही हैं तो हम आपकी बात पर विश्वास करते हुए दो दिन में अधिकारी भेजकर जांच करवा लेंगे, तो निराकरण हो जायेगा.
कृषि बीज उत्पादक समितियों का पंजीयन
2. ( *क्र. 2053 ) श्री के. के. श्रीवास्तव : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कृषि बीज उत्पादक समितियों के पंजीयन करने का क्या मापदण्ड है? क्या टीकमगढ़ जिले में इन मापदण्डों का पालन किया गया है? (ख) टीकमगढ़ जिले में विगत पांच वर्षों में किन-किन वर्षों में कुल कितनी बीज उत्पादक समितियां पंजीकृत हुई हैं? विधानसभा वार, नाम, पता सहित अवगत करावें। (ग) विगत 2 वर्षों 2013-14 एवं 2014-15 में टीकमगढ़ जिले की बीज उत्पादक समितियों द्वारा रबी-खरीफ सीजन में किन-किन सेवा सहकारी समितियों को कितना-कितना बीज प्रदाय किया गया एवं सेवा समितियों द्वारा किसानों को कितना बीज वितरण किया गया? वर्षवार अलग-अलग अवगत करावें। (घ) जिले में किन-किन समितियों का बीज गुणवत्ताहीन पाया गया, जिसमें कम अंकुरण एवं अफलन की शिकायतें आईं? शासन ने उनके विरूद्ध क्या कार्यवाही की और यदि नहीं, तो कब करेंगे? इसके लिये दोषी अधिकारियों के विरूद्ध भी कोई कार्यवाही शासन करेगा?
पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) बीज उत्पादक सहकारी समितियों का पंजीयन मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 व नियम 1962 एवं समितियों की उपविधियों में वर्णित प्रावधान/मापदण्डों के अनुसार किया जाता है. इसके अतिरिक्त बीज उत्पादक सहकारी समितियों के पंजीयन हेतु प्रमुख मापदंड यह है कि प्रत्येक सदस्य के पास कम से कम 01 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि हो, जी हाँ. (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है. (ग) विगत दो वर्ष 2013-14 में टीकमगढ़ जिले की बीज उत्पादक सहकारी समितियों द्वारा रबी सीजन में कुल 18368.50 क्विंटल बीज प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को प्रदाय किया गया तथा प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों द्वारा कुल 19132.50 क्विंटल का वितरण किसानों को किया गया, जिसमें 764 क्विंटल बीज, बीज निगम का भी शामिल है. इसी प्रकार वर्ष 2013-14 में खरीफ सीजन में बीज उत्पादक सहकारी समितियों द्वारा कुल 11669.20 क्विंटल बीज प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को प्रदाय किया गया तथा प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों द्वारा 12169.20 क्विंटल बीज किसानों को वितरण किया गया, जिसमें 500.00 क्विंटल बीज, बीज निगम का शामिल है. वर्ष 2014-15 में टीकमगढ़ जिले की बीज उत्पादक सहकारी समितियों द्वारा रबी सीजन में कुल 8161.10 क्विंटल बीज प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को प्रदाय किया गया तथा प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों द्वारा कुल 9976.50 क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया गया, जिसमें 1815.40 क्विंटल बीज, बीज निगम एवं आई.एफ.एफ.डी.सी. का शामिल है. इसी प्रकार वर्ष 2014-15 में खरीफ सीजन में बीज उत्पादक सहकारी समितियों द्वारा कुल 2702.00 क्विंटल बीज प्राथमिक साख सहकारी समितियों को प्रदाय किया गया तथा प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों द्वारा 2702.00 क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया गया. जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है. (घ) किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग जिला टीकमगढ़ से प्राप्त जानकारी अनुसार जिले में किसी भी समिति का बीज गुणवत्ताहीन नहीं पाया गया और न ही अफलन की शिकायतें प्राप्त हुईं. खरीफ वर्ष 2014-15 में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति मर्या. ऐरोरा द्वारा वितरित बीज के संबंध में कृषक श्री बालगोपाल सिंह एवं अन्य के द्वारा कम अंकुरण होने की शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसकी जाँच कराई गई, जाँच में शिकायत की पुष्टि नहीं हुई, इसलिये किसी के विरूद्ध कार्यवाही का प्रश्न उदभूत नहीं होता.
श्री के के श्रीवास्तव—अध्यक्ष महोदय, मेरा जो प्रश्न है, उसका यद्यपि सहकारिता विभाग से उत्तर आया है. लेकिन वह प्रश्न कृषि विभाग से और सहकारिता विभाग से दोनों से जुड़ा हुआ है. हमने जानकारी चाही थी कि टीकमगढ़ जिले में कितनी समितियां रजिस्टर्ड हैं तो हमें केवल 5 साल की समिति की जानकारी मिली. यद्यपि 5 साल की है तो बाकी की भी मिल जायेगी लेकिन बाकी की कब तक मिल जायेगी. माननीय मंत्रीजी बतायें कि टीकमगढ़ जिले में कुल कितनी समितियां हैं और 5 वर्षों में किन किन समितियों को बीज प्रदाय हेतु लिया गया है. दो की जानकारी मिली है.
अध्यक्ष महोदय—इसका उत्तर ले लें.
श्री गोपाल भार्गव—अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्य ने प्रश्न किया है. कुल 93 बीज सहकारी संस्थाएं पंजीकृत हैं. पिछले 5 वर्षों में 72 संस्थाएं पंजीकृत हुई हैं,इसमें से जो कार्यशील हैं, वह 88 हैं और अकार्यशील 5 हैं. जैसा कि माननीय सदस्य ने प्रश्न किया है और भी समितियों के बारें में बताया है कि वह पंजीकृत नहीं हैं, उसकी हम जानकारी लेकर सदस्य को इस सप्ताह में दे देंगे.
श्री के के श्रीवास्तव—अध्यक्ष महोदय, मापदंडों के संबंध में हमने प्रश्न किया था कि मापदंडों का पालन हुआ है तो जानकारी मिली की पालन हुआ है. अध्यक्ष महोदय, किन प्रयोगशालाओं में इनकी जांच हुई है. इनके बीज प्रमाणित किये गये हैं उसकी जानकारी उपलब्ध करा दी जायेगी तो बहुत अच्छा होगा. अध्यक्षजी, कुल समितियां 93 हैं. केवल कुछ समितियां ही चहेती हैं, उन 15-20 समितियों को पूरा बीज वितरण का काम पिछले 5-7-10-12 सालों से चला आ रहा है. मेरा कहना है कि जब 80-85 समितियां हैं तो बाकी भी बीज का प्रोग्राम देती है तो उन सब समितियों को भी काम करने का अवसर मिले तो ज्यादा ठीक होगा. मैं आपके माध्यम से पूछना चाहता हूं कि माननीय मंत्रीजी बाकी को भी बीज प्रदाय करने के लिए कृषि विभाग अनुबंधित करेगा.
श्री गोपाल भार्गव—अध्यक्ष महोदय,जैसा माननीय सदस्य ने स्वयं अपने प्रश्न में इस बात को भी स्वीकार किया है कि मूल रुप से यह प्रश्न कृषि विभाग से संबंधित है और कृषि विभाग की लेबोरेटरी में भी बीज का परीक्षण किया जाता है और मानक या अमानक पाया जाना उसी में सिद्ध होता है. संयुक्त उत्तरदायित्व के कारण मैं माननीय सदस्य को अवगत कराना चाहता हूं. उन्होंने दो प्रश्न किये हैं जो अमानक पाये गये होंगे उनकी सदस्यता, पंजीयन रद्द किया जायेगा. यदि शेष समितियां जैसा उन्होंने बताया कि कुछ समितियों के लिए ही बीज प्रदाय करने का आर्डर मिल रहा है, अवसर मिल रहा है तो मैं कृषि मंत्रीजी से चर्चा करके और विभाग से चर्चा करके, यह सुनिश्चित करुंगा कि पात्रतानुसार सभी समितियों के बीज प्रदाय करने का अवसर मिले.
श्री के.के. श्रीवास्तव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, उसमें बताया कि कोई समिति में अमानक और अफलन की स्थिति ऐसी नहीं मिली, माननीय मंत्री महोदय ने कहा भी है, तो मैं चाहता हूं कि जो समितियां, केवल एक-दो समितियों की जानकारी शायद आई है कि उनका बीज अमानक मिला है, अफलन की स्थिति है, बाकी 5-7, 8 समितियां हैं, उनके खिलाफ जांचकर्ता भी वही अधिकारी होंगे तो कैसे कार्यवाही होगी, अगर उनके बारे में फिर से एक बार जांच करवा लें जो समितियां अमानक हैं, जिनकी शिकायतें हुई हैं अफलन और कम अंकुरण की. क्या माननीय अध्यक्ष महोदय उनके खिलाफ फिर से जांच कराई जायेगी.
श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय जैसा माननीय सदस्य ने जानना चाहा है तो मैंने पूर्व में कहा है कि कृषि विभाग इस काम के लिये करता है कि यह मानक है या अमानक है. मैं कृषि मंत्री जी से चर्चा करके और जो भी समितियां और उनका उत्पादक बीज अमानक पाया जायेगा, मैंने कहा कि उसको निरस्त करने का काम करेंगे और इसके अलावा माननीय सदस्य लिखकर दे दें. अभी दो समितियों के लिये फिर से हमने जांच करने के बाद रिपोर्ट मंगाई थी उसमें दो समितियां जो हैं वह अमानक बीज प्रदाय करने के लिये दोषी मानी गई हैं और प्रयोगशाला में उनका बीज अमानक पाया गया है, इसके अलावा भी अगर कोई समितियां होंगी तो उनकी भी जांच कराकर माननीय सदस्य के लिये अवगत करा दिया जायेगा, उनका पंजीयन निरस्त कर दिया जायेगा.
श्री के.के. श्रीवास्तव-- धन्यवाद, माननीय अध्यक्ष जी, धन्यवाद माननीय मंत्री जी.
स्वच्छ भारत मिशन के प्रचार-प्रसार सामग्री मुद्रण में अनियमितता
3. ( *क्र. 2717 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सतना जिले में स्वच्छ भारत मिशन के प्रचार-प्रसार सामग्री के मुद्रण में राशि रुपये 30,04,281.00 (तीस लाख चार हजार दो सौ इक्यासी रू. मात्र) की वित्तीय अनियमितता जिला पंचायत सतना द्वारा की गई है? (ख) क्या जिला पंचायत सतना द्वारा मात्र एक ही संस्था से दरें प्राप्त कर उसी संस्था को मुद्रण आदेश दिया जाकर म.प्र. भंडार क्रय नियम का उल्लंघन किया गया है? (ग) क्या म.प्र. शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग इस वित्तीय अनियमितता की उच्च स्तरीय जाँच करा चुका है? जिला पंचायत सतना के कौन-कौन अधिकारी इसके दोषी पाये गये हैं? (घ) चार माह बीत जाने पर भी इस घोटाले में दोषी पाये गये अधिकारियों पर विभाग द्वारा अनुशासनात्मक कार्यवाही क्यों नहीं की गई है? कब तक की जावेगी?
पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सतना द्वारा प्रचार सामग्री का कार्य आदेश म.प्र. राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ मर्यादित प्रेस यूनिट गोविंदपुरा भोपाल म.प्र. को जारी करने के पूर्व शासकीय मुद्रणालय से मुद्रण की दरें प्राप्त कर म.प्र. राज्य सहकारी उपभोक्ता संघ मर्यादित प्रेस यूनिट गोविंदपुरा भोपाल म.प्र. द्वारा प्रस्तुत दर से तुलनात्मक विश्लेषण नहीं किया गया। (ग) जी हाँ। जिला समन्वयक श्री ओमेश्वर सूर्यवंशी, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत श्री बी.पी. श्रीवास्तव, तत्कालीन (प्रभारी) मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री मूलचंद वर्मा प्रत्यक्षत: उत्तरदायी हैं। वित्तीय अनुशासन हेतु राज्य मुख्यालय से जारी निर्देश का पालन न करने के लिये तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती सूफिया फारूकी भी उत्तरदायी हैं। (घ) अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रचलित है।
श्री शंकर लाल तिवारी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, स्वच्छ भारत मिशन जो एक बहुत ही महत्वपूर्ण और केन्द्र सरकार की बहुआयामी योजना आम आदमी के लिये थी जिसमें शौचालयों का निर्माण होना था, उस शौचालय निर्माण की राशि में प्रचार-प्रसार के लिये यह तय था कि जो भी प्रचार-प्रसार करना है, राज्य से अनुमति लेकर ही की जायेगी, फिर उसमें भी यह था कि 6 लाख रूपये मात्र की जायेगी, जो व्यय राशि है उसका इतने प्रतिशत. सतना में एकदम कमाल कर दिया गया, 30 लाख रूपये की स्टेशनरी छपा ली गई, न कोई टेण्डर न कोई विज्ञप्ति, एक ही संस्था को...
अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न करें कृपया.
श्री शंकर लाल तिवारी-- मेरा प्रश्न यह है माननीय अध्यक्ष महोदय जो प्रत्यक्षत: दोषी पाये गये हैं, जांच हो चुकी है, यह मेरे उत्तर में स्वीकार किया है, विभाग ने, माननीय मंत्री जी ने. मैं चाहता हूं कि क्या यह दोषी पाये गये के बाद पिछले 6-8 महीने से यह चल रहा है, क्या इन तत्वों को निलंबित करेंगे, इन पर एफआईआर होगी, यह सतना से हटेंगे. एक ही बात आई है, सब ठीक, सारी जांच हो चुकी है, प्रत्यक्षत: दोषी पाये गये अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत और लेखा अधिकारी और साथ में परियोजना समन्वयक, इन चारों-पांचों लोगों के विरूद्ध क्या निलंबन की कार्यवाही माननीय मंत्री जी करेंगे.
श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, भारत सरकार के द्वारा समग्र स्वच्छता अभियान के अंतर्गत राज्य के लिये राशि दी जाती है, जिसमें प्रचार-प्रसार का मद पहले 14 प्रतिशत होता था, इसके बाद अभी 4 प्रतिशत है. इस राशि के लिये हम लोग इसकी जो बड़ी राशि है जिलों में आवंटित कर देते हैं, और जिलों में प्रचार प्रसार के मद में संबंधित अधिकारी उसके लिये व्यय करते हैं. माननीय सदस्य ने जो प्रश्न किया है, इस प्रश्न में अनियमितता सामने आई है, लेकिन पिछले वर्षों में हम लोगों ने भी प्रयास किया, जहां-जहां से भी शिकायतें आती थीं, मुझे सदन को बताते हुये खुशी है कि वर्ष 2013-14 में जहां 27 करोड़ 68 लाख रूपया प्रचार-प्रसार मद में प्रदेश में खर्च किया गया था समग्र स्वच्छता अभियान के अंतर्गत, हमने घटाकर वर्ष 2014-15 में उसे सिर्फ 9 करोड़ 7 लाख रूपये कर दिया और इस साल सख्ती के कारण वर्ष 2015-16 में कुल 2 करोड़ 25 लाख रूपये खर्च किये. हमने 27 करोड़ से घटाकर 2 करोड़ पर इसको ला दिया है. हमारी पूरी कोशिश यह है कि जिले में इस राशि का पूरा सदुपयोग हो और हमारे प्रधानमंत्री जी की और भारत सरकार की और हमारी सभी की जैसी इच्छा है कि निर्मल भारत हो, निर्मल राज्य हो और निर्मल गांव हों, इसी भावना के अंतर्गत हम यह प्रचार-प्रसार की राशि खर्च करते हैं, इसका किसी प्रकार से अपव्यय नहीं किया गया है. माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने ध्यान आकर्षित करवाया है, जो प्रश्न किया है, निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है और मैंने देखा है कि इसमें जो व्यय किया गया है, नियम विरूद्ध व्यय किया गया है जैसा कि माननीय सदस्य ने बताया है कि एक ही संस्था के लिये तो अध्यक्ष जी, मैंने प्रथम दृष्टया देखा है कि इस मामले में नियमों का पालन नहीं किया गया है, इस कारण से जिला पंचायत के सीईओ, एडिशनल सीईओ उनके विरूद्ध भी हमने विभागीय जांच प्रारंभ करने का निर्णय किया है और उनके लिये भी हम जल्दी से जल्दी वहां से हटाकर के और विभागीय जांच शुरू करवा रहे हैं.
श्री शंकरलाल तिवारी—माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मेरा कहना है कि प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव आदरणीय रघुवीर श्रीवास्तव जी, अतिरिक्त मुख्य कार्यपाल अधिकारी को बोलते हैं कि “इन्होंने जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक दिनांक 31.7.2015 के कार्यवाही विवरण में कपटपूर्ण कूटरचना कर प्रचार प्रसार सामग्री के व्यय की राशि का अनुमोदन दर्ज किया गया.” इतना जिम्मेदार शासन का अधिकारी यह जानकारी लग जाने के बाद में कि यह दोषी है कूटरचना तक कहा, मैं पुन: अपनी मांग को दोहराता हूं .नंबर एक जो दोषी तत्व हैं उन्हें सतना से हटाया जाये और इन्हें निलंबित करके विभागीय जांच कराई जाये और इनको दंडित किया जाये. इसमें स्पष्ट है.
श्री गोपाल भार्गव – माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्य ने प्रश्न किया है और इच्छा जाहिर की है, उनको वहां से हटा देंगे, विभागीय जांच शुरू कर देंगे और विभागीय जांच के बाद में जो भी निष्कर्ष आयेगा उन पर प्रशासनिक कार्य़वाही भी होगी.
श्री शंकरलाल तिवारी—अध्यक्ष महोदय, इस मामले में नियमानुसार माननीय मंत्री जी को निलंबित करना ही चाहिये पता नहीं क्यों, एक तरफ तो रघुवीर श्रीवास्तव जी उन्हें कहते हैं कि वह कूटरचना कर रहे हैं, सचिव के पद पर बैठकर के और दूसरी तरफ बीपी श्रीवास्तव को 4 महीने कूटरचना के बाद भी वही खाता वही सब देकर के बिठाये हैं, उन्हें निलंबित किया जाना चाहिये मेरा आग्रह है माननीय मंत्री जी से , मंत्री जी का उत्तर और विभाग का उत्तर एकदम सच आया है पर कार्यवाही के मामले में निश्चित रूप से दोषियों को निलंबित होना चाहिये ,मंत्री जी ने हटाने की बात कही है पर निलंबन के बाद में . अध्यक्ष महोदय, यह आदमी 15 साल से सतना में है . पहले सीईओ, जनपद रामपुर बघेलान था, अभी जो है लूप लाइन से आकर के अतिरिक्त बैठा है और सारी लूटपाट वहां पर हो रही है इसको निलंबित करें मेरी विनती है.
अध्यक्ष महोदय—वैसे मंत्री जी ने उत्तर दे दिया है फिर भी मंत्री जी कुछ कहेंगें आप इस पर.
श्री गोपाल भार्गव—माननीय अध्यक्ष महोदय, जो पूर्व प्रक्रिया होती है किसी को निलंबित करने की एक सप्ताह का नोटिस देकर और दोष उसमें जैसा है वह प्रथम दृष्टया दिख रहा है, क्योंकि बाद में फिर लोग जाते हैं और हाईकोर्ट से स्टे ले आते हैं तो मैं सोचता हूं कि शायद एक अवसर उनके लिये दिया जाये.
अध्यक्ष महोदय—ठीक है, आ गई बात. पूर्व प्रक्रिया है.
श्री गोपाल भार्गव – अध्यक्ष महोदय, मैं 7 दिन के पश्चात सदस्य को अवगत करवा दूंगा इसके बारे में.
अध्यक्ष महोदय—तिवारी जी अब तो आप धन्यवाद दे दो.
श्री रामनिवास रावत—मंत्री जी कम से कम सत्ता पक्ष के सदस्य की तो सुन लिया करो.
श्री शंकरलाल तिवारी—अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी को धन्यवाद और अभी जो उन्होंने कहा है कि आगे सस्पेंड कर देंगे उसके लिये भी धन्यवाद. (हंसी)
फसल बीमा योजना एवं नलकूप खनन
4. ( *क्र. 1669 ) श्री सचिन यादव : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) फसल बीमा के मापदण्ड क्या हैं? प्रक्रिया का उल्लेख करें। वर्तमान खरीफ वर्ष 2015 में किन जिलों में तहसील स्तर पर सूखे से प्रभावित किसानों को फसल बीमा की राशि उपलब्ध करा दी गई है, जिसमें राज्य शासन की कितनी राशि संभावित है? जिलेवार देवें। (ख) कसरावद तहसील क्षेत्रान्तर्गत खरीफ 2015 में कितनी राशि फसल बीमा हेतु राज्य सरकार द्वारा कृषकों को वितरित की गई है? (ग) प्रदेश में कुल फसल बीमा हेतु कितनी प्रीमियम राशि प्राप्त हुई? जानकारी दें तथा राज्य शासन द्वारा कुल कितनी राशि का बजट प्रावधान किया गया है? (घ) कसरावद विधान सभा क्षेत्रान्तर्गत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के कृषकों के लिये नलकूप खनन योजना एवं सामान्य वर्ग के कृषकों के लिये नलकूप खनन आर.के.व्ही.वाई. योजना भारत सरकार सहायता के तहत वर्ष 2012-13 से प्रश्न दिनाँक तक कितने हितग्राहियों को इस योजना का लाभ दिया गया है और कितने हितग्राही शेष हैं? विकासखण्डवार जानकारी दें।
किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) राष्ट्रीय कृषि बीमा योजनान्तर्गत क्षतिपूर्ति प्रक्रिया की जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-एक अनुसार है। खरीफ 2015 में योजनान्तर्गत अधिसूचित फसलों की दावा राशि के आंकलन हेतु आयुक्त भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त ग्वालियर से वास्तविक उपज के आंकड़ें प्राप्त करने की समय-सीमा 31.01.2016 निर्धारित है। तत्पश्चात वास्तविक उपज के आंकड़ों के आधार पर दावा राशि की गणना की जावेगी, तदनुसार प्रभावित कृषकों को दावा राशि का भुगतान किया जायेगा। दावा राशि गणना प्रक्रियाधीन होने के कारण राशि बताना संभव नहीं है। (ख) प्रश्नांश 'क' अनुसार दावा राशि का गणना कार्य प्रक्रियाधीन है। कृषकों को राशि वितरण का प्रश्न ही नहीं है। (ग) प्रदेश में कुल फसल बीमा हेतु दिनाँक 23.11.2015 तक रू. 2,80,48,96,358.30 प्रीमियम राशि प्राप्त हुई, जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-दो अनुसार है। वर्ष 2015-16 हेतु रू. 1898,47,00,000.00 बजट का प्रावधान किया गया है। (घ) कसरावद विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के कृषकों के लिये नलकूप खनन योजना एवं सामान्य वर्ग के कृषकों के लिये आर.के.व्ही.वाय. योजनान्तर्गत नलकूप खनन के हितग्राहियों की विकासखण्डवार जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-तीन अनुसार है।
श्री सचिन यादव – माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय कृषि मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि जिस प्रकार किसानों की फसल बीमा की जो राशि काटी जाती है उसको किसानों को किन प्रमाण पत्रों के माध्यम से किसानों को जानकारी दी जाती है.
श्री गौरीशंकर बिसेन—माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जो एग्रीकल्चर इंश्योरेंस पॉलिसी है इसमें जो किसान ऋण लेते हैं उस ऋण के ऊपर क्राप के जो रेट निर्धारित हैं उसके अनुसार पैसा काटा जाता है या संबंधित बैंकों के द्वारा पैसा जमा किया जाता है. उसमें जैसे धान है, धान के ऊपर दिये गये ऋण पर 2.50 % मतलब ढाई प्रतिशत ऋण लगता है. इसी के साथ साथ सिंचित और असिंचित दोनों के एक जैसे रेट हैं और मक्का पर 2.50% ज्वार, मूंगफली, तिल, कपास – कपास पर 13% लगता है .
श्री रामनिवास रावत—मंत्री जी आप ट्रेक पर से उतर रहे हैं. सदस्य ने प्रश्न कुछ और पूछा है.
श्री गौरीशंकर बिसेन—सदस्य ने पूछा है माननीय मैं वही बता रहा हूं. सदस्य जानना चाहते हैं कि जो पैसा लिया जाता है उसका क्या रिकार्ड रखा जाता है. तो जो प्रीमियम है, उनका प्रीमियम संबंधित बैंक में काटा जाता है और कटाने के बाद इंश्योरेंस कम्पनी के पास में पूरे प्रदेश की प्रीमियम को भेजा जाता है.
श्री सचिन यादव – अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि उनको क्या प्रमाण पत्र दिया जाता है. जिस प्रकार से हम मोटरयान का जो बीमा कराते हैं, तो उसमें मोटर मालिक को बीमे की पालिसी की कॉपी दी जाती है. तो क्या इस प्रकार से जो हमारे किसान भाई बीमा कराते हैं, उनको किसी प्रकार की रसीद या कोई प्रमाण पत्र या पालिसी दी जाती है.
श्री गौरीशंकर बिसेन – अध्यक्ष महोदय, बीमा ऋणी किसान के लिये कम्पलसिरी है और अऋणी किसान के लिये ऐच्छिक है. जो किसान हमारी कोआप्रेटिव्ह बैंक अथवा राष्ट्रीयकृत बैंकों से ऋण लेते हैं, उनसे उस अनुपात में जो उसके रेट का रेशो है, पैसा जमा किया जाता है. अभी तक जहां तक मेरी जानकारी है, कोआप्रेटिव्ह में भी इस तरह का कोई प्रमाण पत्र देने का प्रावधान नहीं है. हम इस पर विचार करेंगे.
श्री सचिन यादव – अध्यक्ष महोदय, हमारे किसान भाई परेशान होते रहते हैं, उनके बीमे की राशि काटी ली जाती है..
अध्यक्ष महोदय – आपकी लगभग बात आ गई है, फिर भी आप एक पाइंटेड प्रश्न पूछ लीजिये.
श्री सचिन यादव – अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि क्या हम ऐसा कोई प्रावधान कर रहे हैं या सरकार की तरफ से बीमा कम्पनी को ऐसा निर्देश दे सकते हैं कि किसानों की जो राशि काटी जाती है, उसमें उनको रसीद या पालिसी दी जाय. अभी हमारी जानकारी में हमारे खरगोन जिले में जो जिला सरकारी बैंक है, उस बैंक में जो किसानों की प्रीमियम की राशि थी, वह संबंधित जिला सहकारी बैंक ने बीमा कम्पनी को बीमा राशि जमा नहीं की है. तो इस प्रकार की जो चीजें हैं समय समय पर आती रहती हैं. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि ऐसा कोई भी प्रावधान या नियम अगर नहीं है, तो ऐसा नियम बनाया जाय और हमारे किसानों को रसीद या पालिसी की कॉपी दी जाय.
श्री गौरीशंकर बिसेन – अध्यक्ष महोदय, यह राष्ट्रीय कृषि फसल बीमा योजना भारत सरकार की योजना है, जिसको राज्य सरकारें संचालित करती हैं. अब यह पॉलिसी के प्रमाण पत्र देने का वर्तमान में तो कोई प्रावधान नहीं है, जैसा मैंने कहा और यह जो प्रीमियम है. वह प्रीमियम संबंधित बैंकों के द्वारा उनके ऋण के समय में ही किसान से जमा की जाती है. मैं आपके कसरावद विधान सभा क्षेत्र की जानकारी देना चाहता हूं कि खरीफ,2015 में 1 करोड़ 7 लाख से अधिक राशि जमा हुई है और 7 करोड़ से अधिक राशि खरगोन पूरे जिले से जमा हुई है.
श्री सचिन यादव – अध्यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि सरकार और बीमा कम्पनी तहसील और पटवारी हल्के को यूनिट मानती है. क्या सरकार उस खेत को यूनिट मानने का ऐसा कोई प्रस्ताव या विचार कर रही है.
श्री गौरीशंकर बिसेन – अध्यक्ष महोदय, जो अधिसूचित फसलें हैं, उसमें सौ हेक्टेर से अधिक बोने पर किसी पटवारी हल्का नंबर को अधिसूचित किया जाता है, जो नोटिफाइड क्रॉप हैं उसके लिये. अभी तक व्यक्तिगत किसान के बारे में, इस फसल बीमा योजना में इंडीवीजुअल किसान के संदर्भ में कोई नीति नहीं है.
श्री सचिन यादव – अध्यक्ष महोदय, क्या सरकार इसके लिये प्रयास कर रही है. माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा है. ..
अध्यक्ष महोदय -- नहीं, आप बैठ जायें. आपके चार प्रश्न हो गये हैं. आप कृपया सहयोग करिये. आपको बहुत समय दिया है. लगभग सारी बातें स्पष्ट आ गई हैं. अब आप यदि कहें, तो मैं आगे बढ़ जाता हूं. आपके पार्टी के नेता जी भी बोलना चाह रहे हैं और रावत जी भी. विषय महत्वपूर्ण है. इसलिये उनको मैं अनुमति दे रहा हूं. रावत जी, पाइंटेड संक्षेप में प्रश्न करें.
श्री रामनिवास रावत – अध्यक्ष महोदय, आप पाइंटेड बोलने के लिये सीमित कर रहे हैं. यह बहुत महत्वपूर्ण विषय प्रश्न है.
अध्यक्ष महोदय -- इसलिये तो हम आपको एलाऊ कर रहे हैं.
श्री रामनिवास रावत – अध्यक्ष महोदय, प्रदेश के समस्त किसानों से यह जुड़ा हुआ प्रश्न है और इसमें आप देखें.
माननीय अध्यक्ष महोदय, किसानों से ऋण देते समय, उनसे प्रीमियम की राशि केवल खरीफ की फसल पर ऋण देते समय, उन्होंने जो उत्तर दिया है, 280 करोड़ 48 लाख 96 हजार 358 हजार की, उन्होंने बीमा की राशि ले ली, मैं जहां तक समझता हूँ. माननीय मंत्री जी, मैं आपसे सीधा-सीधा पूछूँगा कि प्रश्न तो वही है. यह अभी तक पटवारी हलका है और ओले की तथा सूखे की स्थिति बड़ी विषम है. इस कारण कभी-कभी आधे क्ष्ोत्र में पड़ जाते हैं तो आधे में नहीं पड़ते हैं.
अध्यक्ष महोदय – उसका उत्तर आ गया है.
श्री रामनिवास रावत – आप उस पर विचार कीजिये. अभी है नहीं, मुझे भी मालूम है. माननीय मुख्यमंत्री जी भी कई बार इस बारे में विचारण के लिये, इसी सदन में कह चुके हैं कि इस पर गंभीरता से हम लोग अध्ययन करेंगे, विचार करेंगे. माननीय मंत्री जी आपकी खरीफ की फसल की 31 जनवरी तक जानकारी देनी होती है, इसमें कपास और तुअर की 31 मई तक जानकारी देनी होती है. खरीफ में भारी ओलावृष्टि हुई है.
अध्यक्ष महोदय – प्रश्न करें.
श्री रामनिवास रावत – जो मेरी जानकारी के अनुसार, यह बीमा राष्ट्रीय कृषि बीमा योजनान्तर्गत 20 प्रतिशत राशि किसान की रहती है और आप उत्तर में संशोधन कर देना. 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार जमा करती है और 40 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार जमा करती है तब कहीं बीमे की राशि किसानों को दी जाती है.
अध्यक्ष महोदय – कृपया आप प्रश्न करें.
श्री रामनिवास रावत – मैं प्रश्न पर ही आ रहा हूँ. माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी तक पूरे प्रदेश में क्या फसल कटाई की स्थिति की जानकारी के आंकड़े एकत्रित कर लिये गये ? और कब तक भेज दिये जायेंगे. किसानों की राशि के साथ-साथ, क्या राज्य सरकार और केन्द्र सरकार द्वारा आपने बजट प्रावधान तो बता दिया.
अध्यक्ष महोदय – आप प्रश्न पूछ लीजिये. दो माननीय सदस्य और हैं, जिनको मैंने एलाउ किया है.
श्री रामनिवास रावत – माननीय अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है. क्या राज्य सरकार द्वारा राशि किसानों के बीमे के संबंध में, जो जमा की जानी थी. वह दावे से पहले करनी पड़ती है, आपने कर दी ? और कितने दावे पूरे प्रदेश में प्रस्तुत कर दिये गये ? माननीय मंत्री जी बता दें.
अध्यक्ष महोदय – यह इससे उद्भूत कहां हो रहा है ?
श्री रामनिवास रावत – इसी से तो उद्भूत हो रहा है. कृषि बीमा से ही तो संबंधित है. माननीय अध्यक्ष महोदय, इसी के लिये तो कह रहे हैं कि किसानों को बीमा मिले.
अध्यक्ष महोदय – माननीय मंत्री जी.
श्री गौरीशंकर बिसेन – माननीय अध्यक्ष महोदय, वर्तमान में जो एग्रीकल्चर इंश्योरेन्स पॉलिसी है. इसको और अधिक सरल बनाने के लिए ही मध्यप्रदेश में हमने प्रत्येक ग्राम-पंचायत को मोटे तौर पर पटवारी हलका नम्बर किया, जिससे इकाई और छोटी हो जाये और इसमें भी प्रत्येक पटवारी हलका नम्बर के क्रॉप कटिंग एक्सपेरीमेन्ट होते हैं. जैसा कि माननीय सदस्य जी को, मैं अवगत कराना चाहता हूँ कि 31/01/2016 तक हमें आयुक्त, भू-अभिलेख के माध्यम से जानकारी देने का समय है और यह समय अभी निकला नहीं है. इसके बाद भी हम वहीं से, उन्हीं की वेबसाइट से सीधे इंश्योरेन्स कम्पनी को पैसा चला जाता है.
श्री रामनिवास रावत – खरीफ की जानकारी अभी तक एकत्रित नहीं कर पा रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय – उनसे पहले उत्तर तो सुन लें.
श्री गौरीशंकर बिसेन – दूसरा, मैं बताना चाहता हूँ कि पैसा किसका कितना जाता है. इंश्योरेन्स कम्पनी के द्वारा जितना प्रीमियम वसूल होता है, लिया जाता है, वह और जो भुगतान करने की राशि में से उतना पैसा मायनस होने के बाद, आधा राज्यांश और आधा केन्द्रांश होता है और जिसके सन्दर्भ में हमने इस साल सर्वाधिक पैसे का प्रावधान किया है. तृतीय अनुपूरक के बाद 2015 – 16 के लिये यह राशि रू.1998 करोड़ रूपये है. हम यह मानकर चलते हैं कि 4500 करोड़ रूपये से अधिक राशि के बीमे के क्लेम्स, मध्यप्रदेश के किसानों को मिलने की स्थिति बन सकती है.
अध्यक्ष महोदय – अब आप नहीं. आप सहयोग कीजिये. श्री बाला बच्चन जी.
श्री रामनिवास रावत – इतना महत्वपूर्ण प्रश्न है. अभी तक जानकारी एकत्रित नहीं कर पाये हैं. कितनी गंभीर है सरकार किसानों के लिये. किसान रोज आत्महत्या कर रहे हैं. मैं सभी सदस्यों से पूछना चाहता हूँ कि खरीफ कब समाप्त हो जाती है. खरीफ की फसल सितम्बर माह में कट जाती है. अक्टूबर एवं नवम्बर रबी की बोनी का समय होता है. अभी तक सरकार जानकारी एकत्र नहीं कर पाई है. सरकार सो रही है. माननीय मंत्री जी आप तो बहुत सक्षम हैं.
अध्यक्ष महोदय – दि. 31/01/2016 को उन्होंने कहा है.
श्री गौरीशंकर बिसेन – अध्यक्ष महोदय, रिकॉर्ड से अभी उसकी जानकारी भेजने के लिये समय है.
श्री रामनिवास रावत – मेरे प्रश्न का जवाब नहीं आया है. राज्य को कितनी राशि जमा करनी होती है और केन्द्र को कितनी राशि जमा करनी होती है ? क्या केन्द्र सरकार से राशि जमा कर दी गई और केन्द्र से मांग कर ली गई है.
श्री गौरीशंकर बिसेन – बीमा कम्पनी को दी गई प्रीमियम की राशि को मायनस करने के बाद, आधी राशि केन्द्रांश और आधी राशि राज्यांश से दी जाती है और यदि उससे कम आया तब ऐसी स्थिति में, सिर्फ बीमा कम्पनी उसका भुगतान करती है.
अध्यक्ष महोदय – बैठ जाइये. श्री बाला बच्चन जी. श्री रावत जी कृपया आप सहयोग करें.
श्री रामनिवास रावत – प्रावधान तो है, जमा कितनी कर दी है. आप प्रावधान तो हर वर्ष करते हैं.
श्री गौरीशंकर बिसेन – क्लेम्स फाईनल होने के बाद तो हम करेंगे न. फाईनल नहीं होगा तो कैसे जमा करें.
श्री रामनिवास रावत – किसानों के बीमे की राशि से बैंकें चला रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय - इससे प्रश्न उद्भूत नहीं हो रहा है ।
श्री राम निवास रावत - प्रश्न उद्भूत हो रहा है ।
अध्यक्ष महोदय - नहीं हो रहा है, आपने और सचिन यादव जी ने नियम पूछ लिया है ।
श्री रामनिवास रावत -नियम तो यह दिया हुआ है । (व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय - उन्होंने, नियम तो बता दिया है । माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि एक ही प्रश्न पर बहुत समय हो गया है, इसके बाद भी माननीय बाला बच्चन जी को और आपको अनुमति दूँगा, परन्तु उस पर कोई सप्लीमेंट्री प्रश्न नहीं होगा, किसी को अलाऊ नहीं करूंगा और आगे बढूँगा ।
श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत गंभीर प्रश्न है पूरे किसानों से संबंधित है, किसानों की राशि ले लेते हैं, कम से कम किसानों को न्याय तो मिले ,एक निवेदन करूंगा कि जो प्रश्न पूछे उसका जबाव उनसे दिलवा दें ।
अध्यक्ष महोदय - उनका जबाव आ गया है ।
श्री बाला बच्चन - माननीय अध्यक्ष महोदय, श्री सचिन यादव जी ने जो प्रश्न पूछा था, मैं समझता हूँ कि प्रश्न पूछने का जो मकसद था, वह माननीय मंत्री जी के जबाव से, वह मकसद पूरा नहीं होता है । बात यह है कि पिछले सत्र में माननीय मुख्यमंत्री जी ने कहा था कि जिन फसलों का नुकशान हुआ है, उत्पादन को हम यूनिट बनाकर,उसके अनुसार हम राशि वितरित करेंगे । माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहता हूँ कि अभी जो बंदोबस्त आयुक्त है, उन्होंने जबाव दिया है कि 31.1.16 तक कृषि उपज के आंकड़े प्राप्त किए जाएंगे, तब तक तो कितना विलम्ब हो जाएगा, जब इसी सदन में यह तय हुआ है कि उत्पादन को युनिट बनाकर मुआवजा राशि दी जाएगी तो क्या सरकार इसमें विलम्ब नहीं कर रही है और जो कृषक प्रभावित हुए हैं, उनकी फसलों का भी उत्पादन को युनिट बनाकर मुआवजा राशि समय सीमा में दी जाएगी । यह मेरा प्रश्न है ।
श्री गौरीशंकर बिसेन - माननीय अध्यक्ष महोदय, क्राफ्ट कटिंग एक्सपेरीमेंट जैसे ही फसल आती है तो जिले के कलेक्टर कराते हैं और उनकी जानकारी भू-अभिलेख ग्वालियर को भेजी जाती है,उसकी बेबसाईट पर प्रकाशित होने की तारीख 31 जनवरी है । ऐसा नहीं है कि क्राफ्ट कटिंग के एक्सपेरीमेंट नहीं हो रहे हैं, किए जा रहे हैं और सतत् हो रहें हैं इसमें अनवरत् चलने वाली प्रक्रिया है जिस क्राफ्ट का का जो डयू डेट होता है, उसके हिसाब से ही हम उसका क्राफ्ट कटिंग एक्सपेरीमेंट करेंगे ।
श्री निशंक कुमार जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से एक छोटी सी बात पर सहकारिता मंत्री और कृषि मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ ।
अध्यक्ष महोदय - आप ध्यान आकर्षित मत करिए, सीधा प्रश्न पूछिए ।
श्री निशंक कुमार जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय, क्या कृषि मंत्री जी ऐसी व्यवस्था करेंगे कि जिस सोसायटी से, जिस किसान को ऋण मिलता है, उसी समय जो उसकी बीमा की राशि काटी जाती है, तत्काल यदि सोसायटी उसको उसकी रसीद दे दे तो उसके ज्ञान में होगा कि मेरा कितना पैसा बीमा में कटा है और उसके हिसाब से मुझे कितना मुआवजा मिलेगा । यह प्रश्न मेरा कृषि मंत्री जी से है । दूसरा प्रश्न मेरा सहकारिता मंत्री जी से भी है ।
अध्यक्ष महोदय - दूसरा प्रश्न नहीं, वह प्रश्न यहां पर नहीं है ।
श्री निशंक कुमार जैन - इसी से संबंधित है । माननीय अध्यक्ष महोदय किसानों से संबंधित है, आप सहकारिता में किसानों की अंशपूजी जमा करते हैं उस अंशपूजी की कहीं कोई रसीद नहीं दी जाती है । उस बजह से मेरे ही विधानसभा क्षेत्र की एक सोसायटी त्योंदा में जमा वाली अंशपूजी का पूरा रजिस्टर की गायब कर दिया । एक कर्मचारी ने तीन करोड़ रूपए निकाल लिए जेब में रख लिए । (व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय - उत्तर लेना चाहते हैं तो, कृपया आप बैठ जाएं । यह बात आ रही है कि जो राशि काटी जाती है उसका कोई प्रमाण किसान के पास नहीं रहता है और यह बात ठीक भी है । किसान के पास में यह प्रमाण होना चाहिए कि उसकी राशि कितनी कटी है, माननीय मंत्री जी आप इस बारे में कुछ कहना चाहेंगे ।
श्री निशंक कुमार जैन - दोनों मंत्री जी ।
अध्यक्ष महोदय - आप बैठ जाइए ।
श्री गौरीशंकर बिसेन - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने यादव जी को भी कहा कि हम इस संदर्भ में व्यवस्था कर रहे हैं ।
अध्यक्ष महोदय - विचार कर रहे हैं । विचार करेंगे बोल दिया है दोनों मंत्री बैठें हैं सामूहिक जिम्मेदारी है । निशंक जी बैठ जाइए उन्होंने बोला है विचार करेंगे । जबरजस्ती नहीं कर सकते ।
श्री रामनिवास रावत - दूसरा मेरा निवेदन यह है कि जिन आंकड़ों की जानकारी 31 जनवरी और 31 मई तक जारी करते हैं और रवि की फसल में 31 जुलाई तक जारी करते हैं । मेरा निवेदन है कि फसल कटने के 15 दिन बाद ही यह जारी कर दें तो क्या बुराई है ।
अध्यक्ष महोदय—माननीय मंत्री जी कुछ कह रहे हैं आपकी बात रिकार्ड में आ गई है.
श्री गोपाल भार्गव—माननीय अध्यक्ष महोदय, सुझाव अच्छा है मैं उनको लिखकर के भेजूंगा विभाग की तरफ से जिला सहकारी बैंकों के अध्यक्षों के लिये भी तथा उनके प्रबंधकों के लिये भी ताकि वह समिति प्रबंधकों से यह कहें कि जैसे ही बीमा की राशि एवं प्रीमियम की राशि किसान से उनके खाते से वसूल की जाती है, उसके लिये रसीद वह तुरंत प्रदान करें. एक बात जरूर है कि हमारे पास जिला सहकारी बैंकों में कर्मचारियों की बड़ी कमी है एक तिहाई पद हमारे कुल भरे हुए हैं बाकी सब खाली हैं, बैंकिंग भर्ती बोर्ड से हमने आग्रह किया है वह जल्दी से जल्दी पदों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर पदों की पूर्ति करेंगे और बहुत अच्छे प्रोफेशनल्स भारत सरकार की बैंकिंग भर्ती द्वारा इसमें आने वाले हैं, लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा. रसीद की व्यवस्था हम करेंगे, उसके निर्देश आज ही जारी हो जाएंगे.
श्री निशंक कुमार जैन-- (xxx)
अध्यक्ष महोदय—किसी का भी नहीं लिखा जाएगा. कुंवर सौरभ सिंह जो बोलेंगे बस उन्हीं का लिखा जाएगा. आपके प्रश्न पर कार्यवाही हो गई है. आप बैठ जाएं.
श्री गोपाल भार्गव—पूर्व मंत्री (XXX) जी आपके यहां के मंत्री थे तब इसको लागू क्यों नहीं करवाया, लेकिन मैं इसको लागू करूंगा अंश-पूंजी के लिये भी, किसानों की प्रीमियम की राशि के लिये भी.
श्री रामनिवास रावत— वे यहां पर नहीं हैं कृपया इसको कार्यवाही से निकलवा दें अध्यक्ष महोदय.
अध्यक्ष महोदय—इसको कार्यवाही से निकाल दें.
प्रश्न क्रमांक 5
राशन कार्डों से अधिक आवंटन/वितरण
5. ( *क्र. 1562 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रश्नकर्ता सदस्य ने कटनी जिले में राशन कार्डों से अधिक आवंटन और वितरण के तथ्य शासन के सामने रखे हैं? जिसकी जाँच हेतु राशन दुकानों के द्वारा वितरण अभिलेख नहीं देने से जाँच नहीं हो सकी है? (ख) क्या शासन स्वयं अभिलेख के प्रावधान में छूट देकर जाँच में बाधा बना है? (ग) क्या शासन उक्त जाँच में विशेष सुधार करके सहायक बनेगा? यदि हाँ, तो कब? यदि नहीं, तो क्यों? (घ) विभाग द्वारा ट्रांजिट गेन से इंकार किया गया है, फिर भी मार्कफेड और म.प्र. स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन के बीच पत्र व्यवहार में ट्रांजिट गेन का उल्लेख है? यदि हाँ, तो कौन में और क्या? (ड.) प्रश्नांश (घ) के संदर्भ में सदन में गलत उत्तर हेतु कौन अधिकारी उत्तरदायी है? शासन उसके विरूद्ध क्या कार्यवाही करेगा और कब?
खाद्य मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जी हाँ। माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ जबलपुर की रिट पिटीशन क्रमांक 18112/2015 दिनाँक 05.11.2015 द्वारा राशन दुकानों की जाँच हेतु रोक लगाई गई है। (ख) प्रश्नांश (क) जी हां. माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ जबलपुर की रिट पिटीशन क्रमांक 18112/2015 दिनांक 05.11.2015, द्वारा राशन दुकानों की जांच कर अंतिम आदेश हेतु रोक लगाई गई है. (घ) प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) के संदर्भ में ट्रांजिट गेन से संबंधित कोई तथ्य विभाग द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है, शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ड.) प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
कुंवर सौरभ सिंह—माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न माननीय मंत्री जी से है कि कटनी जिले में राशन कार्डों से अधिक आवंटन के संबंध में और जो ट्रांजिट गेन था उसके संबंध में है.
अध्यक्ष महोदय—आप प्रश्न पूछिये यह तो आपका उत्तर आ गया है. आप इसमें पूरक प्रश्न पूछना चाहते हैं.
कुंवर सौरभ सिंह—पहले इसका उत्तर आ जाए, फिर पूरक प्रश्न पूछ लेंगे.
कुंवर विजय शाह—अध्यक्ष महोदय, इसका उत्तर तो मैं दे चुका हूं कुछ और पूछना चाहते हैं तो पूछिये.
अध्यक्ष महोदय—असल मैं एक ही प्रश्न में आपने दो विषय ले लिये इसीलिये यह भ्रम की स्थिति निर्मित हो रही है. आपसे तथा सभी माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि एक ही प्रश्न में एक ही विषय लें. अब इनका आपस में कोई रिलेशन नहीं है. (क) एवं (ग) का कोई रिलेशन ही नहीं है और ऐसा ही प्रश्न एक अतारांकित भी है, जो कि पेज नंबर-74 पर है, आपने उसको देखा होगा. यह दोनों ही प्रश्नों में कंफ्यूजन है उन प्रश्नों का उत्तर आ गया है, फिर भी आप कुछ पूछना चाहते हैं तो पूछिये उसका भी उत्तर हो, क्योंकि कोई जरूरी नहीं है कि इस काम्पलीकेटेड प्रश्न का उत्तर बड़ा की कान्क्रीट आएगा, फिर भी आप पूरक प्रश्न पूछना चाहते हैं उत्तर इसमें लिखा हुआ है. इसमें आप सम्पलीमेन्ट्री प्रश्न कर लीजिये (क) एवं (ख) पर. (क) तो बिल्कुल ही अलग है.
कुंवर सौरभ सिंह—माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न (क) के बारे में मेरा कहना है कि 18.12.2015 रिपीटीशन बतायी गई है 15.11.2015 के तहत इस पर मामला विचाराधीन है मेरा प्रश्न उसके पहले का था, उसमें लगभग 45 माह से उसकी जांच चल रही है और मूल प्रश्न इस विषय का था कि अभी एक फरमान जारी हुआ है शासन की तरफ से इसमें यह कहा गया है कि वितरण प्रणाली के जितने हैं वह 3 माह तक के रखे जाएंगे. सबसे ज्यादा कालाबाजारी इसी में हो रही है. अगर इसमें रिकार्ड का संधारण नहीं होगा तो आप इसकी जांच कैसे करेंगे.
कुंवर विजय शाह—माननीय अध्यक्ष महोदय, जो निर्देश दिये गये हैं वह कुछ सोच-समझकर दिये गये हैं अगर पर्टीक्यूलर किसी सोसाइटी में गड़बड़ी हुई है आप उसकी जांच कराना चाहते हैं उसको आप अलग से लिखकर के दे दें, हम उसकी जांच करवा लेंगे.
अध्यक्ष महोदय—आप कोई जांच कराना चाह रहे हैं क्या ?
कुंवर सौरभ सिंह—विषय जांच कराने का नहीं है, जांच तो उसमें चल रही है. पूरे मध्यप्रदेश में कटनी ही बस की बात नहीं है.
अध्यक्ष महोदय—आपका प्रश्न सीमित है और अपने क्षेत्र तक ही है.
कुंवर सौरभ सिंह—अध्यक्ष महोदय, आप मेरे प्रश्न का विषय तो समझिये आप उसको लेकर के पूरे प्रदेश को तीन माह के रिकार्ड
रखने के लिये बोल दिया है, न केरोसिन में न ही खाद्यान्न में कहीं पर भी रिकार्ड नहीं रखे जा रहे हैं.
प्रश्न संख्या 6 (अनुपस्थित)
मुख्यमंत्री कन्यादान योजनान्तर्गत व्यय राशि
7. ( *क्र. 1954 ) श्री चन्द्रशेखर देशमुख : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुलताई विधानसभा क्षेत्रांतर्गत विगत 2 वर्षों में कितने वर-वधु को लाभान्वित किया गया? संख्या एवं उक्त कार्यक्रम के आयोजन में शासन द्वारा कितना व्यय किया गया? (ख) क्या प्रश्नांश (क) अनुसार दी गई राशि का व्यय वित्तीय नियमों का उल्लंघन करते हुए विधानसभा क्षेत्र मुलताई के अधीनस्थ जनपद पंचायतों द्वारा किया गया है? जनपद पंचायत प्रभातपट्टन द्वारा निविदा का प्रकाशन समाचार पत्रों में प्रकाशित कर एवं जनपद पंचायत मुलताई में बिना समाचार पत्रों के प्रकाशन के किया गया है? (ग) प्रश्नांश (ख) के अनुसार दोषी अधिकारी/कर्मचारी पर उक्त अनियमितता के चलते शासन द्वारा क्या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, की गई तो कब तक की जावेगी?
पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) वर्ष 2013-14 में 114 वर-वधुओं को लाभांवित किया जाकर राशि रु.17.10 लाख का व्यय किया गया है। वर्ष 2014-15 में कोई आयोजन नहीं किया गया है। (ख) जी नहीं। जी हाँ। जनपद पंचायत मुलताई के अंतर्गत वैवाहिक कार्यक्रम हेतु ग्राम पंचायत हिवटिया एवं निरगुड़ में जनभागीदारी से कार्यक्रम संपन्न कराये जाने के कारण समाचार पत्र में प्रकाशन एवं निविदा नहीं बुलाई गई। (ग) उत्तरांश ’’ख’’ के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
श्री चन्द्रशेखर देशमुख – माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि मेरे प्रश्न दिनांक के दो वर्ष पूर्व वर्ष 2014-15 और 2015-16 की जानकारी चाही गई थी परंतु मुझे 2013-14 और 2014-15 की जानकारी दी गई है. मैं चाहूंगा कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में विकासखण्ड मुलताई में 2015-16 में हुई अनियमितताओं की जांच करा ली जायेगी ?
श्री गोपाल भार्गव –माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य जो तथ्य और विषय लिखकर देंगे. जो भी अनियमितताओं की जानकारी देंगे उनकी जांच करा लेंगे और माननीय सदस्य को अभी अवगत कराएंगे.
बदरवास विकासखण्ड अंतर्गत निर्माण कार्यों में अनियमितता
8. ( *क्र. 1031 ) श्री रामसिंह यादव : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या बदरवास विकासखण्ड की ग्राम पंचायत धामनटूक में 01/04/2010 से 30/09/2014 तक निर्माण कार्य एवं हितग्राही मूलक कार्य स्वीकृत किए गए थे? यदि हाँ, तो कौन-कौन से निर्माण कार्य एवं कौन-कौन से हितग्राही मूलक कार्य कितनी-कितनी राशि के कब-कब स्वीकृत किए गए? स्वीकृत कार्यों की तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति, क्रमांक एवं दिनाँक सहित बताएं। (ख) उक्त स्वीकृत निर्माण कार्य एवं हितग्राही मूलक किन-किन कार्यों की कितनी-कितनी राशि ग्राम पंचायत द्वारा कब-कब आहरित की गई एवं आहरित राशि से संबंधित कार्य कब-कब प्रारंभ कराए गए एवं कार्य कब पूर्ण हुए? (ग) उक्त निर्माण कार्यों एवं हितग्राही मूलक कार्यों का मूल्यांकन किन-किन के द्वारा कब-कब, कितनी-कितनी राशि का किया गया एवं मूल्यांकन का भौतिक सत्यापन किन-किन के द्वारा कब-कब किया गया? कार्यों की सी.सी. कब जारी की गई? (घ) क्या ग्राम पंचायत धामनटूक के निर्माण कार्यों एवं हितग्राही मूलक कार्यों में भ्रष्टाचार की कलेक्टर शिवपुरी द्वारा जाँच करायी गई है? यदि हाँ, तो जाँच प्रतिवेदन एवं कार्यवाही की प्रति संलग्न कर जानकारी दें कि किन-किन को नोटिस दिए गए एवं जाँच प्रतिवेदन अनुसार क्या-क्या कार्यवाही किन-किन के विरूद्ध की गई? यदि कार्यवाही नहीं की गई तो क्यों?
पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-स अनुसार। (घ) जी हाँ। ग्राम पंचायत धामनटूक के निर्माण कार्यों एवं हितग्राही मूलक कार्यों की जाँच कार्यपालन यंत्री, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग क्र. 01 द्वारा करायी गई। जाँच प्रतिवेदन अनुसार संबंधित सहायक यंत्री, उपयंत्री, सचिव एवं सरपंच को कारण बताओ नोटिस जारी किये गये, संबंधितों के विरूद्ध कार्यवाही प्रचलन में है।
श्री रामसिंह यादव - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने माननीय मंत्री महोदय से मेरे प्रश्न ख में पूछा था कि ग्राम पंचायत द्वारा राशि कब-कब आहरित की गई. उसकी दिनांक पूछी थी जो उत्तर में नहीं दी है. कार्य कब-कब पूर्ण हुए उसकी जानकारी प्रपत्र ब में नहीं दी गई है और जो जानकारी दी गई है. बीआरजीएफ ग्रांट के दस लाख रुपये पूर्व सरपंच सचिव द्वारा दो वर्ष पूर्व आहरण किये गये. उसका कार्य आज दिनांक तक प्रारंभ नहीं हुआ है. उसकी वसूली की कार्यवाही क्यों नहीं की गई. मैं तो कहना चाहता हूं मंत्री जी आपके विभाग में यह जानकारी ही नहीं आई वहां से आप उत्तर कहां से देंगे. दस लाख रुपये जिस पंचायत सचिव ने आहरण किये दो साल पहले और वह सरपंच भी आज नहीं है.
श्री गोपाल भार्गव – माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं समझ नहीं पाया. सरपंच तो नहीं हो सकता है. कार्यकाल बदल गया होगा लेकिन सचिव कहीं न कहीं स्थानांतरित हुए होंगे. मैं माननीय सदस्य को एक सप्ताह में जानकारी लेकर और अनियमितता हुई है भ्रष्टाचार हुआ है तो उसकी एक सप्ताह में जानकारी लेकर कार्यवाही सुनिश्चित कराएंगे.
श्री रामसिंह यादव - माननीय अध्यक्ष महोदय, सहायक यंत्री, जनपद बदरवास, एवं उप यंत्रियों तथा सरपंच सचिव द्वारा मिलीभगत से निर्माण कार्य कराये गये. कार्य पूर्ण बताकर राशि का आहरण किया गया है तथा पुराने निर्माण कार्यों को नया बताकर फर्जी तरीके से राशि का आहरण किया है.
अध्यक्ष महोदय – उन्होंने कह दिया कि सात दिन में जांच कराकर आपको अवगत करा देंगे.
श्री रामसिंह यादव – जांच की बात नहीं है. यह 78 लाख का घपला हुआ है और नहीं हुआ होगा तो मैं विधान सभा से इस्तीफा दे दूंगा.
अध्यक्ष महोदय - मत दीजिये आप इस्तीफा. कोई आपकी बात को चैलेंज नहीं कर रहा है.
श्री रामसिंह यादव – 78 लाख का घपला हुआ है. कलेक्टर द्वारा मैंने जांच करवाई थी. उसका प्रतिवेदन भी मुझको नहीं दिया गया है.
अध्यक्ष महोदय - उत्तर तो आप ले लें कृपया.
श्री गोपाल भार्गव – माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य का प्रश्न समझ नहीं पा रहा हूं. माननीय सदस्य ने जितनी राशि के भ्रष्टाचार,अनियमितता की बात कही है उसके बारे में बताया है वह लिखकर दे दें और जो इस्तीफे की बात आपने कही. मैं माननीय सदस्य से कहना चाहता हूं कि इस्तीफा देने की आवश्यक्ता नहीं है. जिन्होंने गड़बड़ी की होगी उनकी नौकरी लेंगे हम. आप इस्तीफा नहीं देंगे. आप चिंता न करें.
श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य स्पष्ट नहीं कर पाये. माननीय मंत्री जी एक जवाब दे दें कि प्रश्न से संबंधित जितने भी प्रकरण हैं उन सभी की जांच कराकर सात दिन में अवगत करा देंगे. प्रश्न में जब सब है तो फिर क्यों कह रहे हैं कि अलग से लिखकर दे दें.
श्री गोपाल भार्गव – माननीय अध्यक्ष महोदय, सदस्य स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं.
श्री रामनिवास रावत - सदस्य स्पष्ट कर रहा है. पहला पूरक प्रश्न था राशि का आहरण कर लिया दूसरा प्रश्न है अनियमितता का, आर.ई.एस. वगैरह ने बिना काम किये पैसे निकाल लिये.
अध्यक्ष महोदय - उन्होंने उत्तर दे दिया.
श्री गोपाल भार्गव – माननीय अध्यक्ष महोदय, देखना तो पड़ेगा. वे स्वयं कह रहे हैं कि सरपंच नहीं है, सचिव नहीं है तो अब वर्तमान में कौन है यह देखना तो पड़ेगा रिकार्ड में निकलवाकर.
लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही
9. ( *क्र. 1445 ) श्री कमलेश्वर पटेल : क्या परिवहन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अब तक कुल कितनी सेवाएं लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के अंतर्गत लाई गई हैं? (ख) अब तक कुल कितने गैर जिम्मेदार अधिकारियों पर इस अधिनियम में कार्यवाही हुई है? ऐसे अधिकारियों को दण्डित कर कितने हितग्राहियों की भरपाई की गई है?
परिवहन मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) अब तक 23 विभागों की अधिसूचित 163 सेवाएं लोक सेवा प्रदाय गारंटी अधिनियम के अंतर्गत लाई गई हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार। (ख) प्रदेश के अंतर्गत अब तक कुल 443 गैर जिम्मेदार अधिकारियों के विरूद्ध इस अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही की गई है। ऐसे अधिकारियों को दण्डित कर कुल 1085 हितग्रहियों को भरपाई की गई है।
श्री कमलेश्वर पटेल—माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न लोक सेवा गारंटी से संबंधित था. माननीय मंत्रीजी ने जो जवाब दिया है उससे तो हम संतुष्ट हैं. मैं मंत्री महोदय से आपके माध्यम से यह जानना चाहता हूँ कि एक तो आपने जानकारी दी है कि 443 गैर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अभी तक कार्यवाही हुई है, मध्यप्रदेश में अभी लोक सेवा गारंटी योजना में आपने जिस तरह से बताया है कि 23 विभागों को शामिल किया गया है मैं समझता हूँ कि इन 23 विभागों के अन्तर्गत जितनी भी योजनाएं हैं आपने सारी योजनाओं को संचालित कर दिया है. आपसे यह जानना चाहते हैं कि इनकी मॉनिटरिंग के लिए आपने किसे जिम्मेदार ठहराया है और इसकी कब समीक्षा की जाती है इसका क्या नियम है. दूसरा यह जानना चाहते हैं कि पहले किसी भी किसान को नकल लेना होती थी तो वह 10 रुपये में मिल जाती थी अधिकतम शुल्क 40 रुपए शुल्क लगता था. अब एक खसरे की नकल चाहिए तो 40 रुपए और दस चाहिये तो 240 रुपए लगते हैं. सरकार ने यह लूट सेवा गारंटी योजना शुरु कर दी है क्या सरकार इसमें वापिस पुराना शुल्क निर्धारित करेगी.
श्री भूपेन्द्र सिंह—माननीय अध्यक्ष महोदय, लोक सेवा गारंटी अधिनियम सबसे प्रभावी अधिनियम हमारे राज्य में प्रारंभ किया गया है इसके बाद देश के अनेक राज्यों ने इस अधिनियम को अपने-अपने राज्यों में लागू किया है. माननीय सदस्य ने यह कहा है कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम में बार-बार आवेदन करना पड़ता है, पैसा लगता है. जितनी भी सेवाएं लोक सेवा गारंटी अधिनियम के माध्यम से दी जा रही हैं, वर्तमान में 163 सेवाएँ लोक सेवा गारंटी अधिनियम के माध्यम से सरकार के द्वारा दी जा रही हैं और किसी भी सेवा में यह अनिवार्यता नहीं है कि आप लोक सेवा गारंटी केन्द्र में जायें. अगर आप खसरे की नकल चाहते हैं तो आप सीधे तहसीलदार के माध्यम से भी प्राप्त कर सकते हैं, सरकार ने यह सुविधा दी हुई है जिसको यह लगता है कि उसे लोक सेवा गारंटी अधिनियम के दायरे में अपनी सेवा लेना है तो वह उसके तहत ले सकता है और जिसको लगता है कि वह सीधे सेवा लेना चाहते हैं वो उसमें ले सकता है. इसमें कोई शिकायत आपकी तरफ से होती है तो इसमें पूरे जांच के प्रावधान इस अधिनियम के अन्तर्गत किए गए हैं उसके अन्तर्गत जांच कर कार्यवाही होती है.
श्री कमलेश्वर पटेल—माननीय अध्यक्ष महोदय, गरीबी रेखा में नाम जुड़वाना है तो लोक सेवा गारंटी योजना में जाइये, आय प्रमाण-पत्र चाहिये तो लोक सेवा गारंटी योजना में जाइये. जितने भी आवेदन लोक सेवा गारंटी में जाते हैं उनमें से ज्यादातर आवेदन अमान्य होकर आते हैं जो समय-सीमा निर्धारित है उस समय सीमा में कोई भी काम पूरा नहीं होता है, इसके लिए कौन जिम्मेदार है. मॉनिटरिंग की क्या सुविधा है वर्तमान में 10 रुपए और 5 रुपए के प्रश्न लगते हैं किसी भी जिला मुख्यालय में या लोक सेवा गारंटी में 20 रुपए का टिकट देना पड़ता है और बोलते हैं कि सरकार की तरफ से 10 रुपए और 5 रुपए के टिकट नहीं पहुंच रहे हैं तो क्या माननीय मंत्रीजी यह व्यवस्था तत्काल करेंगे.
श्री भूपेन्द्र सिंह —माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय कमलेश्वर पटेल जी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण बात यहां पर रखी है उन्होंने कहा है कि लोक सेवा गारंटी केन्द्रों में जो गरीबी रेखा के लिए, BPL के लिए आवेदन लोग करते हैं और वे बार-बार आवेदन करते हैं. यह बात बिलकुल सही है कि लोक सेवा गारंटी केन्द्रों में सबसे ज्यादा आवेदन गरीबी रेखा के संबंध में आते हैं यह आवेदन इसलिए आते हैं क्योंकि व्यक्ति एक बार आवेदन करता है चूंकि वह पात्र नहीं है इसलिये उसका आवेदन अमान्य हो जाता है फिर हम ही मैं से लोग कह देते हैं कि आप फिर से आवेदन कर दो और एक ही व्यक्ति बार-बार गरीबी रेखा के लिए आवेदन करता रहता है इसलिए माननीय सदस्य महोदय मैं आपकी भावनाओं से मैं पूरी तरह सहमत हूँ और मैं आपको बता दूँ कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने जब इस विभाग की समीक्षा की तो माननीय मुख्यमंत्री जी ने यह निर्देश दिए हैं कि आने वाले समय में अब जो बी पी एल के आवेदन की सुविधा अभी तक हमारे लोक सेवा गारंटी केन्द्रों में थी इस सुविधा को हम शीघ्र समाप्त कर रहे हैं और अब संबंधित आवेदक सीधा जाकर एस डी एम को या सी ई ओ जनपद पंचायत को आवेदन कर सकते हैं. यह व्यवस्था हम समाप्त कर रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 10 श्री रामनिवास रावत....
श्री कमलेश्वर पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, पूरी तरह यह लूट गारंटी योजना हो चुकी है...(व्यवधान)..सारी योजनाओं में पैसा लिया जा रहा है और कोई कार्यवाही नहीं हो रही है...(व्यवधान)..
अध्यक्ष महोदय-- रावत जी, आप अपना प्रश्न पूछिए.
श्री रामनिवास रावत-- एक महत्वपूर्ण प्रश्न है.
अध्यक्ष महोदय-- उनका नहीं, प्लीज़. अभी बाला बच्चन जी का प्रश्न है और भी सदस्यों के प्रश्न हैं.
श्री रामनिवास रावत-- एक मिनट.
अध्यक्ष महोदय-- आप समय देखिए 10 मिनट बचे हैं. नहीं प्लीज.
श्री भूपेन्द्र सिंह-- रावत जी, मैं एक एक प्रश्न का उत्तर देने के लिए तैयार हूँ लेकिन प्रश्न में भाषण न करें. प्रश्न पूछें मैं एक एक प्रश्न का उत्तर दूँगा.
श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, मैं एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ. मंत्री जी ने अपने उत्तर में कहा था कि लोक सेवा गारंटी केन्द्र की बाध्यता नहीं है, सीधे भी दे सकता है. लेकिन अधिकारी नहीं लेते इससे सभी सदस्य परिचित हैं.
अध्यक्ष महोदय-- आपकी बात रिकार्ड में आ गई. प्रश्न क्रमांक 10.
श्री रामनिवास रावत-- क्या माननीय मंत्री जी आज ही ऐसे निर्देश प्रसारित करेंगे कि अगर सीधे आता है तो अधिकारी को लेना पड़ेगा और जिनको दण्ड दिया है क्या उनकी सेवा पुस्तिका में दण्ड को दर्ज करेंगे?
अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 10 श्री रामनिवास रावत अपना प्रश्न करें.
श्री रामनिवास रावत-- जवाब तो आ जाए.
अध्यक्ष महोदय-- कुछ जवाब नहीं आएगा. आप प्रश्न करिए. 2-3 प्रश्न हो जाने दीजिए. 10 मिनट बचे हैं, प्लीज. संक्षेप में.
श्री मुरलीधर पाटीदार-- (xxx)..(व्यवधान)..
अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जाइये, अन्य सदस्यों के प्रश्न भी महत्वपूर्ण हैं आपके प्रश्न पर बहुत देर चर्चा हो गई है. श्री रामनिवास रावत अपना प्रश्न करें.
श्री मुरलीधर पाटीदार—(xxx)
अध्यक्ष महोदय-- अब कोई प्रश्न नहीं. पाटीदार जी बैठ जाइये.
श्री मुरलीधर पाटीदार-- (xxx)
अध्यक्ष महोदय-- अब कोई प्रश्न उद्भूत नहीं हो रहा है. श्री रामनिवास रावत अपना प्रश्न करें. यह कोई डिस्कसन नहीं है, प्रश्नकाल है, चर्चा का समय नहीं है. श्री रामनिवास रावत अपना प्रश्न करें.
श्री मुरलीधर पाटीदार-- (xxx)
अध्यक्ष महोदय-- यह कुछ नहीं लिखा जाएगा. श्री रामनिवास रावत जी जो 10 वाँ प्रश्न करेंगे वह लिखा जाएगा.
श्री रामनिवास रावत-- जी अध्यक्ष महोदय, आपका आदेश बिल्कुल शिरोधार्य है.
श्री मुरलीधर पाटीदार-- (xxx)
अध्यक्ष महोदय-- कोई एलाऊ नहीं. आप प्लीज बैठ जाइये.
शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों की स्थिति
10. ( *क्र. 1828 ) श्री रामनिवास रावत : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या राज्य सरकार कृषि को लाभ का धंधा बनाने के लिए कृत संकल्पित है? यदि हाँ, तो क्या प्रदेश में 48 शासकीय कृषि प्रक्षेत्र संचालित हैं? (ख) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्य में वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में प्रश्न दिनाँक तक उक्त 48 कृषि प्रक्षेत्रों के लिये कुल मिलाकर कितनी राशि व्यय की गई? (ग) क्या उक्त कृषि प्रक्षेत्रों पर किए गए व्यय की तुलना में लाभ कम हो रहा है? यदि हाँ, तो कौन-कौन से कृषि प्रक्षेत्र घाटे में चल रहे हैं? घाटे में चलने के क्या कारण हैं एवं इसके लिए कौन-कौन दोषी हैं? (घ) वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में प्रदेश सरकार द्वार आयोजित कृषि महोत्सव में कुल कितनी राशि व्यय की गई? वर्षवार जानकारी दें। उक्त कृषि महोत्सव के क्या सार्थक परिणाम प्राप्त हुए?
किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) जी हाँ, प्रदेश में कुल 48 शासकीय कृषि प्रक्षेत्र संचालित हैं। (ख) प्रदेश के 48 शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों पर वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में प्रश्न दिनाँक तक उक्त 48 कृषि प्रक्षेत्रों के लिए कुल मिलाकर राशि रूपये 1089.254 लाख व्यय की गयी। (ग) उक्त 48 प्रक्षेत्रों में से प्रक्षेत्र 1.किन्ही जिला बालाघाट 2.नांदघाट जिला जबलपुर 3.सतराठी जिला खरगौन 4.गोहद जिला भिंड 5.जौरा जिला मुरैना 6.गजौरा जिला शिवपुरी पर व्यय की तुलना में लाभ कम हो रहा है। घाटे में चलने के मुख्य कारण सिंचाई हेतु पानी की अत्यधिक कमी का होना, अल्पवर्षा, प्राकृतिक आपदा का होना है, इस कारण कोई भी दोषी नहीं है।
श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय हमारे कृषि मंत्री जी लगातार पिछले कितने वर्षों से कृषि कर्मण पुरस्कार...
अध्यक्ष महोदय-- आप संक्षेप में प्वाईंटेड पूछ लें.
श्री रामनिवास रावत-- संक्षेप में प्रश्न है. अध्यक्ष महोदय, मैंने शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों के संबंध में प्रश्न किया था, कि शासकीय कृषि प्रक्षेत्र 48 हैं जिनमें यह उन्नत खेती करने का काम करते हैं इन पर वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में कितनी राशि व्यय की गई है. माननीय मंत्री जी ने उत्तर दिया है रुपये एक सौ आठ करोड़ बानबे लाख चौवन हजार राशि व्यय की गई है. अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से केवल सीधे प्रश्न करूँगा. आपने घाटे के तो 6 कृषि प्रक्षेत्र बताए हैं उनके बारे में बाद में प्रश्न करूँगा. सभी कृषि प्रक्षेत्रों से आपको इन वर्षो में आय कितनी हुई, कितना लाभ हुआ?
श्री गौरीशंकर बिसेन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, 2013-14 में ये सभी 48 कृषि प्रक्षेत्रों में....
श्री रामनिवास रावत-- टोटल बता दें.
श्री गौरीशंकर बिसेन-- 6 करोड़ 88 लाख 80 हजार 03 व्यय हुआ 4 करोड़ 16 लाख प्वाईंट सेवन फाइव वन. 2014-15 में 489.253 यह हुई आय और खर्चा हुआ है 406.220, इस तरह से इन दो सालों में 4 करोड़ 26 लाख रुपये का मुनाफा हुआ है और 2015-16 की अभी हमारी जानकारी अपेक्षित है.
श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ठीक से नहीं बता पाए. जिस तरह से उन्होंने टोटल तीनों का व्यय बताया है कि 1089.254 लाख, एक सौ आठ करोड़ बानबे लाख चौवन हजार, मेरी समझ से, इतना व्यय हुआ है तो पूरा एकजाई बताने में आपको क्या आपत्ति है?
अध्यक्ष महोदय-- आप केल्क्युलेट कर लीजिए. उन्होंने लाभ और हानि दोनों बता दिए.
श्री रामनिवास रावत-- नहीं बताए. मेरा प्रश्न यह है कि जब जो शासकीय प्रक्षेत्र, इनमें शायद शासकीय कर्मचारियों का वेतन सम्मिलित नहीं है, क्यों माननीय मंत्री जी?
श्री गौरीशंकर बिसेन-- इसमें वेतन सम्मिलित नहीं रहता है.
श्री रामनिवास रावत-- वेतन सम्मिलित नहीं है. अगर उसको जोड़ दें तो इनका व्यय कितना हो जाएगा और जितना यह व्यय कर रहे हैं उन कृषि प्रक्षेत्रों से उतनी आय प्राप्त नहीं कर पा रहे तो किस तरह से प्रदेश में किसानों के लिए खेती को लाभ का धंधा बना रहे.जब तुम खुद ही खेती को लाभ की खेती नहीं बना पा रहे, खुद ही पैदावार नहीं ले पा रहे और खर्च करे जा रहे हो.
श्री गौरीशंकर शेजवार--- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह कृषि प्रक्षेत्र आय कमाने के लिए नहीं हैं कृषि प्रक्षेत्रों से हम अनेक प्रोग्राम किसानों के हित में लेते हैं. हमारे जो सात प्रक्षेत्र हैं वह प्राचार्यों के अधीनस्थ हैं, इसमें कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण के कार्यक्रम चलते हैं इसी के साथ साथ खेती की नई तकनीकी की जानकारी दी जाती है. मैंने सारी बातें अपने उत्तर में कही है.
श्री रामनिवास रावत—अध्यक्ष महोदय, इन्होंने 6 कृषि प्रक्षेत्र घाटे में बताये हैं एक जौरा का भी बताया है मुझे पता है कि जौरा में पानी की कमी नहीं,इन्होंने बताया है कि पानी की कमी के कारण वह घाटे में है.
अध्यक्ष महोदय--- आपका समय हो गया.
श्री गौरीशंकर बिसेन--- मैं उत्तर दे रहा हूं. जो प्रक्षेत्र घाटे में हैं, उनके हम ऑडिट करा रहे हैं, उसके कारणों पर जाएंगे और जिन कारणों वह घाटे में हैं, उसको दूर करने का हम प्रयास करेंगे.
श्री रामनिवास रावत—मैं एक बात जानना चाहूंगा कि आपने कृषि महोत्सव पर 2014-15 में 3342. 42 लाख और 2015-16 में 2853.56 लाख राशि व्यय की है, यह राशि केवल अपने और मुख्यमंत्री जी का फोटो पूरे प्रदेश के गांव गांव में घुमाने के लिए खर्च की है. इसका क्या लाभ प्रदेश को मिला जरा बता दें.
श्री गौरीशंकर बिसेन—चौथी बार कृषि कर्मण पुरस्कार प्रदेश को मिला है. लाभ मिला है प्रदेश को ..(व्यवधान)...
श्री रामनिवास रावत-- आप करोड़ों अरबों रुपये की राशि व्यय कर रहे हो अपना फोटो दिखाने के लिए ...(व्यवधान),,
अध्यक्ष महोदय—प्रश्न क्रमांक 11. ..(व्यवधान)... कृपया आप सभी बैठ जाएं, माननीय मंत्री जी बैठ जाएं. अगला प्रश्न आने दें.
श्री रामनिवास रावत-- किसान आत्महत्या कर रहे है.
श्री मधु भगत -- ‑किसानों के साथ में मजाक हो रहा है. यह सरकार मजाक कर रही है...(व्यवधान)...
श्री गौरीशंकर बिसेन--- हमने राज्य का उत्पादन बढ़ाया है 50 लाख मीट्रिक टन का उत्पादन हमने मध्यप्रदेश में बढ़ाया है....(व्यवधान)....आज हमारा राज्य अन्य राज्यों को देने की स्थिति में है.
अध्यक्ष महोदय--- माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि आप उत्तर नहीं लेना चाहते हैं, आपका ही प्रश्न है कृपया आने दीजिये ...(व्यवधान)...(लगातार कई माननीय सदस्यों के एक साथ बोलने पर ) यह सब कुछ नहीं लिखा जाएगा रिकार्ड में.
श्री गौरीशंकर बिसेन-- चौथी बार मध्यप्रदेश को कृषि कर्मण पुरस्कार केंद्र सरकार ने दिया है....(व्यवधान)...इतना अनाज उत्पादन हमारे किसान ने किया है कि हमारे पास रखने के लिए स्थान नहीं है औऱ यह काम दृढृ इच्छाशक्ति वाले मुख्यमंत्री शिवराज चौहान जी द्वारा कृषि को लाभकारी धंधा बनाने के कारण यह सब हुआ है.
अध्यक्ष महोदय--- मंत्री जी कृपया आप बैठ जाइए. बाला बच्चन जी प्रश्न करें.आप सभी बैठ जाइए आपके नेता खड़े हैं कुछ मर्यादा रखिये.
आत्मा परियोजना में अनियमितता
11. ( *क्र. 286 ) श्री बाला बच्चन : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आत्मा परियोजना के अंतर्गत बड़वानी एवं खरगौन जिलों में अनियमिततायें, भ्रष्टाचार की कितनी शिकायतें विभाग को 01 जनवरी, 2013 से प्रश्न दिनाँक तक प्राप्त हुई हैं? शिकायतों पर विभाग द्वारा की गई कार्यवाही की अद्यतन स्थिति की जानकारी देवें। (ख) आत्मा परियोजना के अंतर्गत खरगौन, बड़वानी जिलों के लिये 01 अप्रैल, 2013 से प्रश्न दिनाँक तक आवंटित की गई राशि की वर्षवार, जिलेवार जानकारी उपलब्ध करायें। प्रत्येक जिले में प्रत्येक वर्ष में आवंटित राशि से किये गये कार्यों एवं व्यय की गई राशि का विवरण देवें। (ग) आत्मा परियोजना के अंतर्गत खरगौन, बड़वानी जिलों में कौन-कौन सी स्वयंसेवी संस्थाओं (एन.जी.ओ.) को कितनी-कितनी राशि किस-किस कार्य के लिये स्वीकृत की गई? दिनाँक 01 जनवरी 2013 से प्रश्न दिनाँक तक की जानकारी वर्षवार जिलेवार उपलब्ध करावें। (घ) बड़वानी एवं खरगौन जिले में आत्मा परियोजना के अंतर्गत ऐसे कितने अधिकारी कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनके विरूद्ध शिकायत, जाँच विचाराधीन होने के बाद भी उनकी पदोन्नति कर दी गई है? ऐसे अधिकारी, कर्मचारियों के नाम, वर्तमान पद सहित बतावें।
किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) 01 जनवरी, 2013 से प्रश्न दिनाँक तक जिला खरगौन से 3 शिकायत प्राप्त हुई जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1 अनुसार है। बड़वानी जिले से कोई शिकायत प्राप्त नहीं है। (ख) आत्मा परियोजना के अन्तर्गत खरगौन, बड़वानी जिलों के लिये 01 अप्रैल, 2013 से प्रश्न दिनाँक तक आवंटित एवं व्यय की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 2 एवं 3 अनुसार है। (ग) आत्मा परियोजना के अन्तर्गत खरगौन, बड़वानी जिलों में स्वयंसेवी संस्थाओं (एन.जी.ओ.) को 01 जनवरी 2013 से प्रश्न दिनाँक तक स्वीकृत राशि की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 4 अनुसार है। (घ) बड़वानी एवं खरगोन जिलें में आत्मा परियोजना के अन्तर्गत पदस्थ किसी भी अधिकारी के विरूद्ध शिकायत, विभागीय जाँच आदि लंबित होने पर पदोन्नत कर पदस्थ नहीं किया गया है।
श्री बाला बच्चन--- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपका धन्यवाद. माननीय मंत्री जी ने मेरे प्रश्न का जो जवाब दिया है वह बिल्कुल सत्य नहीं है और मैं उस उत्तर से संतुष्ट नहीं हूं. मैंने यह पूछा है कि बड़वानी , खरगौन जिले में जो आत्मा परियोजना के अंतर्गत जो राशि दी जाती है, आत्मा परियोजना का जो संचालन किया जाता है उसके अंतर्गत जो राशि दी जाती है.
डॉ. गौरीशंकर शेजवार-
--- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात समझ में नहीं आई कि यदि उत्तर सत्य है तो संतुष्ट होना कोई जरूरी है कि नहीं है. सही उत्तर अलग विषय है और संतुष्टि और असंतुष्टि अलग विषय है. अब आपकी संतुष्टि के क्या मापदंड है , हर व्यक्ति कैसे संतुष्ट होगा इसकी मंत्री जी को जानकारी थोड़े है. अध्यक्ष महोदय, यह कोई बात थोड़ी है. यानि मंत्री ने सही उत्तर दिया, टू दी प्वाइंट उत्तर दिया , मंत्री बिल्कुल सही बोल रहे हैं.
श्री बाला बच्चन-- समय की बरबादी कर रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय--- आप वरिष्ठ मंत्री हैं. अभी उनको प्रश्न करने दें.
डॉ. गौरीशंकर शेजवार--- अध्यक्ष महोदय, मंत्री बिल्कुल सही बोल रहे हैं आप तो आपकी संतुष्टि का मापदंड बता दीजिये .प्रश्न का उत्तर गलत हो उसकी इन्हें चिंता नहीं है इन्हें चिंता इस बात की है कि मैं संतुष्ट हूं कि नहीं हूं.
श्री रामनिवास रावत--- अध्यक्ष महोदय, क्या माननीय मंत्री जी के व्यवहार की निंदा नहीं की जानी चाहिए.
अध्यक्ष महोदय--- आप बैठ जाइए उनका उत्तर आने दीजिये. आप सीधे प्रश्न कर दें.
श्री बाला बच्चन-- मेरा सीधा प्रश्न है कि मंत्री जी आपने जवाब दिया है आत्मा परियोजना बड़वानी और खरगौन के अंतर्गत जो राशि आप देते हैं, वह राशि आपने स्वयंसेवी संस्थाओं पर जो खर्च करना बताया है...(व्यवधान)...
डॉ. गौरीशंकर शेजवार --- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री ने उत्तर दिया है...
श्री बाला बच्चन----- शेजवार जी, आप जो बोल रहे हैं हम उसकी निंदा करते हैं , हमारा समय मंत्री जी फालतू में बरबाद कर रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय --- आप तो सीधे प्रश्न कर दें.
श्री बाला बच्चन—माननीय अध्यक्ष महोदय,मैं यह जानना चाहता हूँ कि आपने जो राशि बड़वानी और खरगौन में देना जो उत्तर में बताया गया है कि कृषकों को प्रशिक्षण देने के लिए,उनको प्रदर्शन कराने के लिए और उनका भ्रमण कराने के लिए जो बताया गया है, मैं यह जानना चाहता हूँ कि जिन स्वयंसेवी संस्थाओं को आपने जो राशि दी, न उनके प्रोप्राइटरों के नाम हैं, न उनके पते हैं और जिन किसानों को आपने प्रशिक्षण दिये, न उन किसानों तक वह राशि पहुंची है, न उनको भ्रमण कराया गया है और जिन स्कूलों और फर्मों को राशि देना बताया गया है, न उन स्कूलों को और फर्मों को राशि पहुंची है तो मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूँ कि यह राशि जो इस तरह से आत्म परियोजना के अंतर्गत और अन्य अपने विभाग के अंतर्गत देते हैं क्या इन फर्मों की जांच होगी, इन प्रोप्राइटर के नाम और इनके पते उपलब्ध करायेंगे, उन किसानों के नाम और पते उपलब्ध करायेंगे और भविष्य में इस प्रकार का भ्रष्टाचार और अनियमितताएँ न हों, इस पर आप किस तरह से कसावट करेंगे, इसका जवाब दें?
श्री गोपाल भार्गव—आत्मा को परमात्मा में विलीन करवा दिया है, हो गया खत्म.(हंसी)
अध्यक्ष महोदय—कृपया मंत्री जी का उत्तर ले लीजिए.
श्री गौरीशंकर बिसेन—माननीय अध्यक्ष महोदय,हमारे विभाग में 17 एनजीओ पंजीकृत हैं. इनमें से सिर्फ 3 एनजीओ हमारे बड़वानी में और 3 एनजीओ ने खरगौन में काम किया है और जिनको भी राशि दी गयी है उसका मैंने विवरण भी परिशिष्ट में दिया है. इतनी छोटी राशि है इसके बावजूद भी माननीय सदस्य की यह शंका है कि उनको दी गयी राशि का सदुपयोग हुआ है अथवा नहीं हुआ तो मैं किसी वरिष्ठ अधिकारी को भेजकर इसकी जांच करवा लूंगा.
अध्यक्ष महोदय—प्रश्नकाल समाप्त.
(प्रश्नकाल समाप्त)
अध्यक्ष महोदय—शून्यकाल की सूचनाएँ. डॉ. गोविन्द सिंह
डॉ.गोविन्द सिंह(लहार)—एक महत्वपूर्ण शून्यकाल हमने आज दिया है. एक मिनट उसको पहले बोल लें.
अध्यक्ष महोदय—नहीं आप पहले इसको पढ़ दीजिए.
डॉ.गोविन्द सिंह—इसको कल में रख दें.आज दूसरा ले लें.
अध्यक्ष महोदय—(हंसी) नहीं, दूसरा कल ले लेंगे.आज इसको पढ़ दें.
11.30 बजे नियम 267-क के अंतर्गत विषय
(1) लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग भिण्ड के केन्द्रीय भण्डारगृह की सामग्री बाजार में बेचा जाना.
डॉ.गोविन्द सिंह(लहार)—अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना इस प्रकार है--
(2) मुरैना की ग्राम पंचायत गणेशपुरा के किसानों को भूमि का सर्वे नम्बर न मिलना
श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार(सुमावली)- अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना इसप्रकार है-
(3) मुरैना जिले के ग्राम मांगरोल में श्मशान भूमि पर अतिक्रमण कर
रास्ता रोका जाना
श्री रामनिवास रावत (विजयपुर) – अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना इस प्रकार है :-
(4) श्री यादवेन्द्र सिंह (नागौद) – अनुपस्थित
(5) सिवनी नगर में बनाई जा रही मॉडल सड़कें घटिया स्तर की होना
श्री दिनेश राय (सिवनी) – अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना इस प्रकार है :-
(6) श्योपुर जिले में प्राकृतिक आपदा से नष्ट हुई फसलों का नियमानुसार मुआवजा दिया जाना
श्री दुर्गालाल विजय (श्योपर) – अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना इस प्रकार है :-
(7) श्री संजय पाठक – अनुपस्थित
(8) शासन की विभिन्न विकास योजनाओं की राशि बड़वाह में समय पर न पहुँचना
श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी (बड़वाह) – अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना इस प्रकार है :-
(9) खंडवा जिला अंतर्गत पंधाना विधान सभा क्षेत्र में ग्राम धावड़देव से ग्राम खिड़गांव तक की सड़क जर्जर होना.
श्रीमती योगिता नवलसिंह बोरकर (पंधाना) – अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना इस प्रकार है :-
श्री बाला बच्चन – माननीय अध्यक्ष महोदय, पेटलावद में लगभग 100 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है. इ समें जांच प्रतिवेदन आ गया है. जांच आयोग के कुमार सक्सेना जी ने मुख्य सचिव महोदय को रिपोर्ट भी दी है. मेंरे प्रश्न के जवाब में माननीय मंत्री जी ने भ्रामक स्थिति पैदा की है कि राजेन्द्र कांसवा फरार है 5 लाख रूपये की ईनामी राशि घोषित है. मैंने इसमें स्थगन प्रस्ताव दिया है. मैं चाहता हूं कि इस पर चर्चा करायें.
श्री राम निवास रावत – अध्यक्ष महोदय इसमें आप निर्देश दे दें कि इ सको ध्यानाकर्षण में परिवर्तित कर दें. मैं अपनी बात तो कह लूं.
अध्यक्ष महोदय -- आप उनकी सिफारिश करते.
श्री रामनिवास रावत –( X X X )
अध्यक्ष महोदय – यह रिकार्ड में नहीं आयेगा. इस विषय पर कुछ भी रिकार्ड पर नहीं आयेगा.
श्री तरूण भानोत – अध्यक्ष महोदय प्रदेश में न्यायिक आपातकाल कीस्थिति बन गई है लगातार पिछले 5 दिनों से मध्यप्रदेश के महाधिवक्ता एवं कोई भी सरकारी वकील हाई कोर्ट में उपस्थित नहीं हो रहे हैं. इ ससे लोगों के मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहाहै.
डॉ गोविन्द सिंह – ( X X X )
अध्यक्ष महोदय – न्यायिक मामले हैं उस पर यहां पर ज्यादा चर्चा नहीं की जा सकती है.
श्री बाला बच्चन – मेरे विषय पर उत्तर नहीं आया है. आप उसको ध्यानाकर्षण में ले लें.
आदेशानुसार रिकार्ड नहीं किया गया –( X X X )
अध्यक्ष महोदय – उस पर यहां उत्तर नहीं आ सकता . आप कक्ष में आकर चर्चा कर लें.
समय 12.02 बजे. पत्रों का पटल पर रखा जाना.
समय- 11.45 बजे ध्यानाकर्षण
सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.
बड़वाह के पास खलघाट पुल पर सुरक्षा प्रबंध न होना
( गृह मंत्री )श्री बाबूलाल गौर—अध्यक्ष महोदय,
श्री सुदर्शन गुप्ता—माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से प्रश्न पूछने के पहले आपके माध्यम से मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि इस घटना में मृतक 6 युवक जोकि मेरी विधान सभा के थे , घटना के बाद, मेरे अनुरोध पर उनके परिवारजनों को माननीय मुख्यमंत्री जी ने प्रत्येक को एक-एक लाख रूपये की आर्थिक मदद करने की घोषणा की और वह राशि उन परिवारों को मिल चुकी है.
मैं ध्यानाकर्षण के संबंध में माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि नर्मदा घाटी व प्रदेश के अन्य नदी के घाट, पर्यटन स्थल, धार्मिक स्थल पर आये दिन होने वाली दुर्घटनाओं में नागरिकों की मृत्यु होती है वहां पर वे सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करायेंगे क्या और साथ ही नर्मदा नदी सहित प्रदेश की अन्य नदियों में जहां जहां पर समय समय पर पानी का बहाव छोड़ा जाता है वहां पानी छोड़ने के पूर्व आपातकालीन सायरन व्यवस्था, सुरक्षा के उपाय, सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था प्रदेश सरकार के द्वारा की जाएगी क्या? और इस घटना में जिन अधिकारियों/कर्मचारियों ने लापरवाही की है उन पर कार्यवाही की जाएगी क्या?
श्री बाबूलाल गौर—अध्यक्ष महोदय, अधिकारियों ने कोई लापरवाही नहीं की है. जो स्थान विसर्जन के लिए बताया गया था वह वहां पर गये नहीं और दूसरे स्थान पर चले गये, इसके कारण यह हादसा हुआ है. जहां जहां आवश्यक होता है, वहां वहां पुलिस चौकी बनायी जाती है.
श्री सुदर्शन गुप्ता—अध्यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्रीजी से अनुरोध है कि न तो वहां पर सायरन बजाया गया और न ही वहां पर ऐसे कोई संकेतक लगे हैं कि यह खतरनाक स्थान है, यहां पर नहाना मना है, यहां पर मूर्ति विसर्जन करना मना है. मैं स्वयं स्थल पर गया था. वहां पर न तो कोई बोर्ड लगा और न ही सुरक्षा गार्ड लगी है. जिस समय पानी छोड़ा गया उस समय न ही कोई अलार्म बजाया गया.
श्री बाबूलाल गौर—जहां जहां इस प्रकार के संकेतक लगे हैं, वहां पर सुरक्षा गार्ड नहीं रहते क्योंकि हर जगह पुलिस चौकी नहीं बनायी जा सकती. जहां विसर्जन घाट के कुण्ड बनाये गये, वहां व्यवस्था रहती है. कोई अति आवश्यक होगा तो माननीय सदस्य बता दें वहां लगवा देंगे.
भोपाल स्थित कम्प्यूटर एजुकेशन इंस्टीट्यूट द्वारा छात्रों को ठगे जाने विषयक.
श्री आरिफ अकील(भोपाल उत्तर)—अध्यक्ष महोदय,
राज्यमंत्री, स्कूल शिक्षा ( श्री दीपक जोशी )—माननीय अध्यक्ष महोदय,
श्री आरिफ अकील-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि आपने जहां से अपना सियासी कैरियर शुरू किया छात्र राजनीति से और हमें याद है वह टाइम भी जब आप जरा-जरा सी अनियमितताओं के लिये आंदोलन करते थे और मुझे तो खुशी है इस बात को कहने में कि आपके ब्लड में आपको इंसाफ और ईमानदारी सिखाई गई है, आपको बताया गया है. आज हजारों छात्रों के साथ नाइंसाफी हो रही है और उनके साथ भ्रष्टाचार हो रहा है, थाने में मामला जा रहा है, आप फरमा रहे हैं कि थाने आकर कोई एफआईआर करेगा तो हम एफआईआर दर्ज करायेंगे. अध्यक्ष जी थाने में यह लोग गये, थाने वालों ने समझा दिया और कहा कि हम कोई कार्यवाही नहीं कर सकते. आपके नॉलेज में, सरकार के नॉलेज में अध्यक्ष महोदय अगर यह आ जाये कि कहीं कोई भ्रष्टाचार कर रहा है तो मेरा आपसे अनुरोध है कि आप सक्षम हैं इस बात के लिये, आपको विरासत में मिला है कि नाइंसाफी को इंसाफ में बदलो, क्या आप उनके खिलाफ एफआईआर करेंगे ?
श्री दीपक जोशी-- मैं माननीय सदस्य को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यदि पीडि़त पक्ष का कोई भी छात्र हमें शिकायत देगा, क्योंकि अभी तक कोई भी शिकायत न तो थाने को प्राप्त हुई है और न ही विभाग को प्राप्त हुई है, यदि शिकायत प्राप्त होती है और इसी शिकायत को आधार मानते हुये मैं गृह विभाग को पत्र लिख दूंगा और पत्र के माध्यम से कोशिश करूंगा कि इस शिकायत की जांच हो, लेकिन भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियों को रोकने के लिये हम तकनीकी शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और इंफार्मेशन टेक्नालॉजी विभाग के माध्यम से कोई हल निकालने का भी प्रयास करेंगे.
श्री आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को यह विज्ञापन पत्रिका में छपा है फ्रंट पेज पर, लाखों रूपये का विज्ञापन है, इस तरीके से उत्साहित करके लोगों को गुमराह कर रहे हैं और अभी मैंने भी ध्यानाकर्षण की सूचना में पढ़ा कि यह थाने में मामला गया, थाने वालों ने दोनों को समझा दिया. मैं आज विधान सभा में अध्यक्ष महोदय के माध्यम से आपसे अनुरोध कर रहा हूं कि मेरी शिकायत को नोट कर लीजिये और इस पर कार्यवाही करा दीजिये, जांच करा दीजिये और आपको लगता है तो मैं आज कल में आपके पास लिखकर पहुंचा दूंगा.
अध्यक्ष महोदय-- आप लिखकर के पहुंचा दें तो वह कार्यवाही कराने के लिये तैयार है और दूसरा इस बारे में कोई नियम भी बनाने के लिये तैयार हैं कि ऐसा आगे से न हो.
श्री दीपक जोशी-- आप लिखकर पहुंचा दें, मैं कार्यवाही करा दूंगा.
श्री आरिफ अकील-- जिन छात्रों के साथ नाइंसाफी हुई है, जिनसे पैसे लिये गये और उनका काम नहीं हुआ, उनको नौकरी नहीं दिलाई, क्या उनके पैसे दिलाने पर भी विचार करेंगे ?
श्री दीपक जोशी-- अध्यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने अपने जवाब में कहा कि उपभोक्ता संरक्षण परिषद के माध्यम से यह जा सकते हैं, इनको वहां पर संरक्षण प्राप्त हो सकता है.
3. प्रदेश में ई-पंजीयन एवं ई-स्टाम्पिंग व्यवस्था सुचारू रूप से नहीं चलने से उत्पन्न स्थिति.
श्री चेतन्य कुमार काश्यप (रतलाम सिटी)-- अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यान आकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है-
मंत्री,वित्त एवं वाणिज्यिक कर (श्री जयंत मलैया)—माननीय अध्यक्ष महोदय,
श्री चेतन्य कुमार काश्यप – माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि जो जानकारी उन्होंने उत्तर में दी है कि रतलाम की 28 समस्या हल हुई हैं उसमें एक रेखा बरगट की 2.11.2015 की समस्या है 2 लाख रूपये की वह अभी तक हल नहीं हुई है. नीलेश गांधी एवं वीरेन्द्र की 21 समस्यायें अभी तक हल नहीं हुई हैं. इस तरीके का जो साफ्टवेयर लगाया गया है सामान्यत: यह सारे साफ्टवेयर पहले टेस्ट करके लगाये जाते हैं . मंत्री जी बताने का कष्ट करें कि आगे से सेवा प्रवत्ताओं कि राशि कब तक उनके खाते में जमा हो जायेगी. अध्यक्ष महोदय, इसमें तीन तरीके की समस्यायें सामने आ रही हैं . पहली खातों से राशि कट रही है, सर्वर स्लो चलता है, फ्रिक्वेन्सी- लो है तो रजिस्ट्री में 3 से 4 घंटे लगते हैं. क्या इन सर्विस प्रोवाइडरों के ऊपर विभाग की तरफ से कोई दंड की व्यवस्था की गई है ? तथा आगे से सेवा प्रदत्ताओं को जो तकलीफ है उसके बारे में क्या माकूल व्यवस्था विभाग के द्वारा की जा रही है.
अध्यक्ष महोदय, निश्चित तौर पर यह बहुत अच्छी व्यवस्था है. इसमें विश्वास का मुद्दा है. रजिस्ट्री कराना विश्वास का द्योतक होता है और उसी के अंदर इतनी समस्या यदि 3 माह के बाद भी आयेंगी, तो पूरे प्रदेश में यह एक बड़ी समस्या है. और शिकायत निवारण की जो व्यवस्था है उसमें 2.11.15 से अभी तक समस्या का निवारण नहीं हुआ है तो क्या विभाग द्वारा इसकी कोई समय सीमा तय की गई है कि कब तक इन समस्याओं का निराकरण करेंगे ? साथ ही मैं कहना चाहता हूं कि रतलाम में ई-पंजीयन की व्यवस्था लागू है, वहां पर पहली मंजिल पर रजिस्ट्री का कार्यालय लगता है. पूर्व में यदि कोई विकलांग, अपंग या वृद्ध रजिस्ट्री के लिये आते थे तो रजिस्ट्रार नीचे आकर के उनसे हस्ताक्षर करवाते थे परंतु इस व्यवस्था में पहली मंजिल से नीचे कम्प्यूटर ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं है, न पहली या दूसरी मंजिल पर चढ़ने के लिये कोई व्यवस्था की गई है, इस तरह की समस्या पूरे प्रदेश में भी हो सकती है. मंत्री जी इनके बारे में विभाग ने क्या व्यवस्था की है कृपया बताने का कष्ट करें.
श्री जयंत मलैया – माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी को मैं बताना चाहता हूं जिनका उन्होंने अपने ध्यानाकर्षण में उल्लेख किया है . रेखा बरगट और नीलेश गांधी . रेखा बरगट की रजिस्ट्री हो गई है और जो नीलेश गांधी का सदस्य ने जिक्र किया है इनके भी 8 लाख रूपये उनके खाते में जमा हो चुके हैं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात भी सही है जैसा माननीय सदस्य ने बताया है कि कई बार सर्वर स्लो हो जाता है और खातों में पैसे आने में और निकलने में दिक्कत हो रही है. अध्यक्ष महोदय, हमने विप्रो कंपनी को इस व्यवस्था को सुधारने के लिये, इस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिये और जो पंजीकृत दस्तावेज हैं इसकी जानकारी और जो पंजीकृत दस्तावेज हैं, इसकी जानकारी राजस्व विभाग के अधिकारियों को ऑन लाइन साझा की जाये, इससे नामांतरण की कार्यवाही भी त्वरित हो जायेगी और यह इम्प्रूव्हमेंट का कार्य हमारा पूरे प्रदेश में चल रहा है. मैं समझता हूं कि आगे आने वाले समय में स्थिति और बेहतर हो जायेगी.
अध्यक्ष महोदय -- और उनका कार्यालय ऊपर दो मंजिले पर है.
श्री चेतन्य कुमार काश्यप -- मंत्री जी, कार्यालय वाला विषय है, वह आपके ध्यान में भी है.
श्री जयंत मलैया – अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है, जब मैं रतलाम गया था, तो लोगों ने इस बात की जानकारी मुझे दी थी. उसकी भी व्यवस्था करायेंगे.
श्री रामपाल सिंह (ब्यौहारी) – अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह जानना चाहूंगा कि ई-पंजीयन और ई-स्टाम्पिंग में सर्वर डाउन होने से लगातार पक्षकारों को 3-3 दिन तक परेशान होना पड़ता है और विद्युत सप्लाई बंद होने के कारण भी काफी परेशानी आती है. मैं यह जानना चाहता हूं कि ऑन लाइन के साथ साथ पहले जो पूर्ववत् में व्यवस्था थी मेनुअल की, उस व्यवस्था को भी ई-पंजीयन, ई-स्टाम्पिंग में संचालित रखेंगे क्या.
श्री जयंत मलैया – अध्यक्ष महोदय, जी नहीं. कारण यह है कि दोनों व्यवस्थाएं एक साथ चालू नहीं रह सकती हैं. वह व्यवस्था तो पहले भी लोग चाहते थे कि चालू रहे. मैं उल्लेख नहीं करना चाहूंगा उन नामों का कि कौन चाहता था और किस लिये चाह रहा था. यह पुनरावृत्ति हम नहीं करेंगे. यही हमारी जो व्यवस्था है, यही चालू रहेगी और इसके लिये जहां जहां बिजली जा रही है, वहां पर हम जनरेटर सेट भी लगाने की कोशिश कर रहे हैं. अभी तक हम लोगों ने 120 जनरेटर सेट स्थापित कर दिये हैं.
श्री ओमप्रकाश सखलेचा (जावद) – अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से यह जानकारी लेना चाहता हूं कि जब भी कोई कांट्रेक्ट अवार्ड किया जाता है, तो उसकी परफारमेंस और टेस्टिंग में अगर कमी है, तो उसके ऊपर पैनाल्टी क्लॉज भी होता है. इसमें क्या पैनाल्टी क्लॉज था कि अगर सॉफ्टवेयर इनटाइम नहीं है, ऑपरेट नहीं कर रहा है, तो जिनको कष्ट हो रहा है, उनको क्या कुछ मुआवजा या कम्पनसेशन दिलायेंगे. जिनको तीन-तीन या चार-चार दिन आना पड़ता है, वकील अलग से फीस लेता है. गांव से 50 से 100 किलोमीटर दूर चलकर आदमी आता है और वह जब दो दिन घूमता है, तो क्या सॉफ्टवेयर कम्पनी की यह जिम्मेदारी का हिस्सा नहीं होना चाहिये कि वह उनको मुआवजा दे और उसको लागू करे, ताकि वह जल्दी सॉफ्टवेयर का करेक्शन कर सके. ऐसा मेरा सुझाव है और मैं मंत्री जी से इसके बारे में राय जानना चाहूंगा.
श्री जयंत मलैया – अध्यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने पहले ही निवेदन किया था कि इसमें कुछ खामियां रह गयी थीं, उसके लिये पूरी तरह से वह कम्पनी, जिसने इंस्टालेशन किया था, उसका दोष नहीं था, और भी कारण थे. इसके कारण हमने इसको और बेहतर तरीके से करने के लिये कांट्रेक्ट अवार्ड किया है. मैं समझता हूं कि धीरे धीरे यह समस्या भी समाप्त हो जायेगी. जहां तक मुआवजा देने की बात है..
श्री ओमप्रकाश सखलेचा – मंत्री जी, अगर आप थोड़ा कम्पनसेशन लागू करेंगे, तो यह वास्तव में जो आप चाहते हैं, जो सरकार की मंशा है, वह इनटाइम पूरी हो पायेगी.
श्री जयंत मलैया -- अध्यक्ष महोदय, इसको देख लेंगे.
(4) रीवा जिले में एस.जी.आर.वाई. योजना अन्तर्गत आवंटित खाद्यान्न वितरण में अनियमितता की जाना.
श्री सुन्दरलाल तिवारी (गुढ़) – अध्यक्ष महोदय,
वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार) – अध्यक्ष महोदय, मैं आपके 2 मिनिट्स लेना चाहता हूँ. (XXX)
अध्यक्ष महोदय, यह एस.जी.आर.वाय. योजना कब चली थी ? और इतनी पुरानी योजना को ध्यानाकर्षण के माध्यम से उठाया गया. जबकि ध्यानाकर्षण तात्कालिक लोक-महत्व के विषयों पर उठाया जाता है तो इनको एकदम से ऐसी कौन-सी जागरूकता, कौन-से अखबार में पढ़ ली या किसने आकर कह दिया कि 2007, 2008 के पहले यह योजना चलती थी और उसका 2015 में ध्यानाकर्षण उठायें.
श्री सुन्दर लाल तिवारी – माननीय अध्यक्ष महोदय, इस ध्यानाकर्षण को आपने स्वीकार किया है और यह मंत्री जी के पास ज्यादा विवेक कहां से आ गया ? इस पर आमने-सामने एक बार बहस हो जाये कि कौन-से मामले ध्यानाकर्षण में आ सकते हैं. आपका क्या कहना है ? आप चेयर की ओर इंगित कर रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय – माननीय मंत्री जी.
श्री सुन्दर लाल तिवारी – मैंने तो निवेदन किया है.
डॉ. गौरीशंकर शेजवार –(XXX)
अध्यक्ष महोदय – कृपया इसे कार्यवाही से हटा दें. माननीय मंत्री जी, कृपया उत्तर दें.
पंचायत मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) – माननीय अध्यक्ष महोदय, जिला पंचायत रीवा के आदेश क्रमांक 5490/एसजीआरवाय/मनरेगा/विधानसभा/जि.पं./2013 दिनांक 22.10.2013 से अनुविभागीय अधिकारी राजस्व तहसील समस्त, जिला रीवा की अध्यक्षता में जॉच हेतु जॉचदल का गठन किया गया है. ध्यानाकर्षण सूचना के विषयवस्तु भी इसी मामले में शामिल हैं. जॉच की कार्यवाही पूर्व से ही प्रक्रियारत है. शासन के नियम/निर्देशों के प्रकाश में विधिवत् जॉच कराई जा रही है. जॉच के बिन्दु विस्तृत स्वरूप के हैं, इसलिए जॉच कार्य में समय लग रहा है. जॉच प्रतिवेदन प्राप्त होने पर विधिसंगत निर्णय लिया जावेगा. इस मामले में जनमानस में रोष व्याप्त नहीं है.
इसी विषयवस्तु पर माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में जनहित याचिका क्रमांक 5753/2012 श्री प्रेम नारायण मिश्रा विरूद्ध म.प्र. शासन एवं अन्य विचाराधीन हैं. मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत रायपुर कर्चुलियान को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया है.
श्री सुन्दर लाल तिवारी – अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि यह देखें और साथ में, शेजवार साहब को भी ध्यान दिलाना चाहता हूँ, उन्होंने सवाल उठाये हैं.
अध्यक्ष महोदय – आप सीधे प्रश्न करिये.
श्री सुन्दरलाल तिवारी – माननीय अध्यक्ष महोदय, यह 2006-07 का मामला है ।
अध्यक्ष महोदय - भाषण नहीं दें, आप सीधा प्रश्न करें ।
श्री सुन्दरलाल तिवारी- इसमें सीधा प्रश्न बनेगा ही नहीं,इसलिए ध्यानाकर्षित किया गया है,यह सीधा प्रश्न का सवाल ही नहीं है, इसमें सरकार ने और कमिश्नर ने 2011 में जांच के आदेश दिए और एक उपयंत्री बी.पी.सिंह ने इसकी जांच की, जांच में उन्होंने पाया कि यह पूरा माल गड़बड़ है और यह पूरा गोल-माल हो गया है, इसमें भ्रष्टाचार किया गया है । जनपंद पंचायतों में यह माल नहीं गया और उन्होंने एक प्रतिवेदन दिया, प्रतिवेदन पर कार्यवाही नहीं हुई, उन्होंने एफ.आई.आर. के लिए भी रेफर किया कि इसमें एफ.आई.आर. भी होना चाहिए, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई, तब प्रेमनारायण जी हाईकोर्ट गए और हाईकोर्ट ने उस पिटीशन को इस डायरेक्शन के साथ डिस्पोजआफ किया कि कलेक्टर को 6 माह के अंदर इसमें जांच कर लेना चाहिए । 2011 में हाईकोर्ट का आदेश हुआ, तब से यह मामला लंबित है, बार - बार शिकायतें की गईं । अनुविभागीय अधिकारी नए तरीके से कहां बैठाए गए । अध्यक्ष महोदय, मेरा यह मानना है ।
अध्यक्ष महोदय - मानना नहीं, आप सीधा प्रश्न करिए ।
श्री सुन्दरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, 17 जिलों में यह खाद्यान गया था,55 हजार क्विंटल का मामला है, जिला पंचायत ने कहा कि हमने जनपद पंचायतों को वितरित कर दिया है, मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने पत्र लिखकर दिया कि जिला पंचायत से जनपद पंचायत में कोई खाद्यान नहीं आया है ।
अध्यक्ष महोदय - आप सीधा प्रश्न करें ।
श्री सुन्दरलाल तिवारी - मेरा प्रश्न यह है कि क्या माननीय मंत्री जी इस 55 हजार क्विंटल गेहू का जो गबन हुआ है, इसकी जांच लोकायुक्त से कराएंगे ।
पंचायत मंत्री(श्री गोपाल भार्गव)- अध्यक्ष महोदय, अभी यह तय नहीं हुआ है कि गबन हुआ है अथवा नहीं हुआ, क्योंकि यह 7-8 साल पुराना मामला है, लगातार नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों के साथ पत्राचार हो रहा था, उत्तर वहां से नहीं आ रहे थे । एक अंतर्विभागीय समिति, जिसमें ए.सी.एस.ग्रामीण विकास हैं और ए.सी.एस.खाद्य हैं, इनकी उपस्थिति में एक समिति बनी है, 19.8.13 को बैठक की गई थी और उसमें 31.3.13 की स्थिति में लेखों के आधार पर बचे खाद्यान को ओपन मार्केट में निविदा के माध्यम से मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा विक्रय करने का निर्णय लिया गया था,तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की संचालित योजनाओं के विलय होने, या बंद होने के पश्चात् शेष बचे खाद्यान पर कार्पोरशन पर, खाद्यान के निराकरण दिनांक तक आने वाले, समस्त व्ययों को काटकर शेष राशि को मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के खाते में जमा किए जाने का निर्णय लिया गया है । पूर्व में नागरिक आपूर्ति निगम के द्वारा दस्तावेज और कागजात उपलब्ध नहीं कराए गए थे, अब वह दस्तावेज हमें प्राप्त हो चुके हैं ।
श्री सुन्दरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी .
अध्यक्ष महोदय - आप सीधा प्रश्न करिए, आपके सारे विषय आ गए हैं ।
श्री सुन्दरलाल तिवारी- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो जबाव दिया कि इसकी जांच पहले नहीं हुई, अब हो रही है । माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं पटल पर रखने के लिए तैयार हूँ । 5.9.11 को बी.पी.सिंह उपयंत्री द्वारा यह रिर्पोट दे दी गई है ।
अध्यक्ष महोदय - नहीं, वह सारे विषय आ गए, उसको दोबारा रिपीट मत करिए, आप इस पर कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं ।
श्री सुन्दरलाल तिवारी - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि 2007 का यह मामला है, 55 हजार क्विंटल अनाज का मामला है, माननीय मंत्री जी को लोकायुक्त से जांच करा लेने में क्या दिक्कत है, क्या परेशानी है, तय हो जाएगा कि भ्रष्टाचार हुआ है । सी.बी.आई. से भी जांच होगी इसका नम्बर आएगा और मैंने कहा है कि हो रही है, जांच और इसमें भी होगी ।
अध्यक्ष महोदय - अब आप समाप्त करें ।
12.20 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति
अध्यक्ष महोदय—आज की कार्य-सूची में सभी याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी. श्री सुंदरलाल तिवारी द्वारा जो भी बोला जाएगा नहीं लिखा जाएगा. तिवारी जी आप बैठ जाएं, अब आगे बढ़ गये हैं.
श्री सुंदरलाल तिवारी---(XXX)
(xxx) आदेशानुसार रिकार्ड नहीं किया गया.
12.20 बजे गर्भगृह में प्रवेश
(श्री सुंदरलाल तिवारी, सदस्य अपनी बात कहते हुए गर्भ-गृह में आये तथा कुछ समय पश्चात् वापस अपने आसन पर गये)
12.21 बजे शासकीय विधि विषयक कार्य
(1) मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद् (संशोधन) विधेयक, 2015 का पुरःस्थापन
चिकित्सा शिक्षा मंत्री (डॉ.नरोत्तम मिश्र)—अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद् (संशोधन) विधेयक, 2015 के पुरःस्थापन की अनुमति चाहता हूं.
अध्यक्ष महोदय—प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद् (संशोधन) विधेयक, 2015 के पुरःस्थापन की अनुमति दी जाए.
अनुमति प्रदान की गई.
डॉ.नरोत्तम मिश्र—अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद् (संशोधन) विधेयक, 2015 का पुरःस्थापन करता हूं.
(2) डॉ.बी.आर.अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक, 2015 का पुरःस्थापन
उच्च शिक्षा मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता)- अध्यक्ष महोदय, मैं डॉ.बी.आर.अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक, 2015 के पुरःस्थापन की अनुमति चाहता हूं.
अध्यक्ष महोदय—प्रश्न यह है कि डॉ.बी.आर.अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक, 2015 के पुरःस्थापन की अनुमति दी जाए.
अनुमति प्रदान की गई.
श्री उमाशंकर गुप्ता—अध्यक्ष महोदय, मैं, डॉ.बी.आर.अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय विधेयक, 2015 का पुरःस्थापन करता हूं.
(3) मध्यप्रदेश वेट (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2015 का पुरःस्थापन
वाणिज्यक कर मंत्री (श्री जयंत मलैया)—अध्यक्ष महोदय, मैं मध्यप्रदेश वेट (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2015 का पुरःस्थापन की अनुमति चाहता हूं.
अध्यक्ष महोदय—प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश वेट (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2015 के पुरःस्थापन की अनुमति दी जाए.
अनुमति प्रदान की गई.
श्री जयंत मलैया—अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश वेट (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2015 का पुरःस्थापन करता हूं.
(4) मध्यप्रदेश वृत्ति कर (संशोधन) विधेयक, 2015 का पुरःस्थापन
वाणिज्यक कर मंत्री (श्री जयंत मलैया)— अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश वृत्ति कर (संशोधन) विधेयक, 2015 के पुरःस्थापन की अनुमति चाहता हूं.
अध्यक्ष महोदय—प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश वृत्ति कर (संशोधन) विधेयक, 2015 के पुरःस्थापन की अनुमति दी जाए.
अनुमति प्रदान की गई.
श्री जयंत मलैया—अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश वृत्ति (संशोधन) विधेयक, 2015 का पुरःस्थापन करता हूं.
(5) भारतीय स्टाम्प (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2015 का पुरःस्थापन
वाणिज्यक कर मंत्री (श्री जयंत मलैया)— अध्यक्ष महोदय, मैं भारतीय स्टाम्प (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2015 के पुरःस्थापन की अनुमति चाहता हूं.
अध्यक्ष महोदय—प्रश्न यह है कि भारतीय स्टाम्प (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2015 के पुरःस्थापन की अनुमति दी जाए.
अनुमति प्रदान की गई.
श्री जयंत मलैया—अध्यक्ष महोदय, भारतीय स्टाम्प (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2015 का पुरःस्थापन करता हूं.
(6) मध्यप्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2015 का पुरःस्थापन
वित्त मंत्री (श्री जयंत मलैया)—अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2015 के पुरःस्थापन की अनुमति चाहता हूं.
अध्यक्ष महोदय—प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2015 के पुरःस्थापन की अनुमति दी जाए.
अनुमति प्रदान की गई.
श्री जयंत मलैया-- मध्यप्रदेश राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2015 का पुरःस्थापन करता हूं.
अध्यक्ष महोदय—सदन की कार्यवाही 2.30 बजे तक के लिये स्थगित.
(12.25 बजे से 2.30 बजे तक अंतराल)
(2.36बजे) {उपाध्यक्ष महोदय(डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह)पीठासीन हुए }
(7) मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान(संशोधन)विधेयक,2015(क्रमांक 17 सन्2015)
परिवहन मंत्री(श्री भूपेन्द्र सिंह) – माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि -
मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान(संशोधन)विधेयक,2015(क्रमांक 17 सन्2015) पर विचार किया जाय.
उपाध्यक्ष महोदय – प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि –
मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान(संशोधन)विधेयक,2015(क्रमांक 17 सन्2015) पर विचार किया जाय.
डॉ.गोविन्द सिंह(लहार) – माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय परिवहन मंत्री द्वारा प्रस्तुत मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान(संशोधन)विधेयक,2015(क्रमांक 17 सन्2015) की धारा 13,उपधारा 2 के संशोधन में जो अवैध परिवहन को लेकर राशि पहले जो दुगुनी थी उसे चार गुना करने का प्रावधान है. वास्तव में समूचे मध्यप्रदेश में परिवहन विभाग में भारी पैमाने पर जब से भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई है तब से खुली छूट दे दी गई है और काफी लंबे समय से यह मांग जनप्रतिनिधियों द्वारा और आम जनता द्वारा तथा एक-दो बार मेरे द्वारा भी सदन में मेरे द्वारा यह कहा गया है कि प्रदेश की पूरी सड़कें जगह-जगह उखड़ रही हैं. प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत् आठ टन की क्षमता से ज्यादा ट्रक में वजन नहीं होना चाहिये लेकिन तीस-चालीस टन के ट्रक भरकर जा रहे हैं और एक तरफ सड़कें बन रही हैं दूसरी तरफ उखड़ रही हैं. सड़कों का संरक्षण और अच्छी बनाने का काम लोक निर्माण विभाग का काम है लेकिन जो आय होती है तो उसमें परिहवन विभाग को भी सड़कों की क्षति में राशि देनी चाहिये लेकिन सड़कें बर्बाद हो रही हैं और आपके विभाग द्वारा कोई काम नहीं किया जा रहा है. अनेकों बार टेंडर लगने के बाद भी हमारे यहां एक सड़क जैतपुरी-मढ़ई वाली है. तीन साल बाद वह दुबारा बनी लेकिन साठ-साठ टन के वाहन उस पर चले तो वह फिर उखड़ गई. अभी परसों दो दिन पहले विधान सभा में हमारा ध्यानाकर्षण आया था. स्टेट हाईवे क्रमांक 45, इस पर सवा करोड़ रुपये एक कि.मी. बनने में लागत आई और इधर सड़क बनकर तैयार हुई और इतने भारी वाहन साठ-साठ,सत्तर-सत्तर टन के वाहन उस पर से गुजरे और बाईस-बाईस चक्के वाले वाहन भी उस पर से गुजरे. पहली बार देखा कि बाईस चक्का वाहन भी प्रदेश में चल रहे हैं. हमने पुलिस अधीक्षक,कलेक्टर से अनेकों बार बात की. लिखित में भी दिया ध्यानाकर्षण भी दिया. कलेक्टर और एस.पी. का कहना रहता है कि यह हमारा काम नहीं है. यह ट्रांसपोर्ट विभाग का काम है और ट्रांसपोर्ट विभाग के पास न स्टाफ है न जिले में खुद का आफिस है. तहसील स्तर पर, ब्लाक स्तर पर वाहन पकड़ने के लिये कोई अधिकारी,कर्मचारी नहीं हैं. आर.टी.ओ. और क्षेत्रीय अधिकारी जो जिले में बैठते हैं. एक-एक आरटीओ या इनके क्षेत्रीय अधिकारी हैं जिले में बैठते हैं कहीं एक फूल वाला कही दो फूल वाला तीन फूल वाला लगा दिया. यह लोग परिवहन विभाग में डेपूटेशन पर 30-30, 40-40 लाख रुपये रिश्वत देकर जाते हैं इन्होंने वहां पर पट्ठे नियुक्त कर दिये हैं किसी भी बेरियर पर आप चले जाओ सरकारी अधिकारी या कर्मचारी एकाध कोई सिपाही बैठा मिलेगा आरक्षक लेवल का बाकी के लठैत लोग बैठे हुए हैं वे मनमानी लूट कर रहे हैं. मुरैना के बेरियर के बारे में माननीय मंत्रीजी को भी अवगत कराया था कई राजनीतिक लोग, कई पार्टियों के लोग हम नहीं कह सकते हैं कि कौन हैं लेकिन हमें जानकारी है कि करीब करीब राजनेता अधिकारी कर्मचारी पांच ले लेकर दस लाख रुपये महीने के कमा रहे हैं जो आमदनी हो रही है उसमें से आधी तो पार्टी खर्च, सम्मेलन, चन्दा इसमें जा रही है. जब इतना पैसा आप कमा रहे हैं तो सड़कों के रखरखाव पर आरक्षक स्टाफ के लिए, आफिस बनायें और ताकि उन पर कंट्रोल हो सके. अवैध परिवहन के द्वारा सड़कें जो टूट रही हैं उनके लिए भी राशि देकर ठीक कराएं, या फिर आप कंट्रोल करें. बिल का मैं समर्थन करता हूँ क्योंकि दो गुना से चार कर रहे हैं मैं तो कहता हूँ इसे दस गुना करना चाहिये तो इससे कम से कम अवैध परिवहन वाले लोग, बसें चलाने वाले लोग 60-60, 70-70 यात्री भर लेते हैं बस की क्षमता 30 यात्रियों की है बस में ऊपर भी लोग बैठे रहते हैं. एक नई प्रथा चालू हो गई है जीप, यह जीपें ग्वालियर से सबेरे अखबार लेकर लहार आती हैं. जीप में वैसे 6 सवारी बैठ सकती हैं मैं कहूंगा तो आप उस पर विश्वास नहीं करेंगे एक-एक जीप में ऊपर नीचे मिलाकर 22-22 लोग बैठाए जाते हैं जो जीप चलाता है वह दिखाई भी नहीं देता है आखिर आप यह क्या कर रहे हो. आपकी आमदनी बढ़ रही है आपको अनाप-शनाप पैसा मिल रहा है. हमारा अनुरोध है कि यह जो पैसा पार्टी फंड में और इधर-उधर जा रहा है उसको जरा रोकें और परिवहन के विकास में लगायें. हमारी तो यह मांग है कि प्रत्येक तहसील स्तर पर यह जो बड़े कस्बे हैं सब डिवीजन ऑफिस पर एक कार्यालय आप खोलें और कहीं खोलें न खोलें लहार में जरुर खोल दें क्योंकि सिंध नदी में रेत की जितनी खदानें हैं उनकी संख्या भिंड जिले में सबसे ज्यादा हमारे क्षेत्र में है वहां से रेत चोरी हो रही है अवैध उत्खनन हो रहा है. शासकीय जमीन पड़ी है आप कार्यालय खोलेंगे तो मध्यप्रदेश विधान सभा ने हमें अधिकार दिया है विधायक निधि से कार्यालय के लिए जितनी भी राशि लगेगी हम दे देंगे. कम से कम वहां की सड़कें सुरक्षित रहें वहां रोज एक्सीडेंट होते हैं कई घायल हो जाते हैं कई की मौत हो जाती है नौजवानों की जिंदगी बचाने का काम करें.
उपाध्यक्ष महोदय, एक बात और कहना चाहता हूँ लायसेंस की व्यवस्था भी तहसील स्तर पर कराएं. अधिकारी भिंड में रहना नहीं चाहते हैं वे ग्वालियर में रहते हैं पहले तो आपका ट्रांसपोर्ट बेरियर बदलता रहता है. बेरियर आपका फूफ का मंजूर है उत्तर प्रदेश से दिन रात मिलाकर करीब 500-700 ट्रक भरकर आते हैं आपने बेरियर फूफ के आगे लगा दिया दीनपुरा जो भिंड के पास है वहां लगा दिया. उत्तरप्रदेश इटावा से वाहन आते हैं इटावा के पास नई सड़क बन गई है सड़क पहले से थी अटेर होते हुए आगरा से आए तो अटेर से मुरैना निकल गए इधर से आए तो उमरी होकर लहार और पूरे जिले में गोहद होते हुए ग्वालियर निकल जाते हैं उनकी कोई चेकिंग नहीं होती है आधी रेवेन्यू तो बेरियर गलत लगाने से वसूल नहीं होती है जब आपका फूफ में मंजूर है यदि आप फूफ के आगे लगा देंगे तो एक ही रास्ता है दूसरा कोई रास्ता ही नहीं है इससे प्रतिमाह कम से कम 25 से लेकर 30-40 लाख रुपए तक आदमनी अतिरिक्त बढ़ सकती है .यह हमारा आपसे अनुरोध है. इसी के साथ मैं इस बिल का तो समर्थन करता हूँ क्योंकि मैं तो खुद ही इस व्यवस्था को सुधारने की अनेकों बार बात करता रहा हूँ. दलाली प्रथा चल रही है उस पर आप रोक लगाएं. जब पहली बार आपके मुख्यमंत्री बने थे उस समय बोर्ड लगे थे, होर्डिंग लगे थे मध्यप्रदेश में अब कोई परिवहन विभाग में डेपूटेशन पर नहीं जाएगा.परिवहन विभाग का, शिवराज सिंह जी का, हमने यह देखा पत्रकार भवन के सामने बहुत बड़ा बोर्ड लगा था, अब परिवहन विभाग में भ्रष्टाचार समाप्त हो जाएगा, हम कोई पैसा वसूल नहीं करेंगे. लेकिन आपके तमाम अधिकारी जो कभी मिलते हैं, मित्र हैं, परिवार के परिचित हैं, वे कहते हैं पहले, जाता तो पहले भी था, मैं नहीं कह रहा कि काँग्रेस के टाइम पर नहीं जाता था, थोड़ा बहुत जाता होगा. लेकिन अब तो यह लूट हो रही है. आधे से ज्यादा रेवेन्यू आपकी पूरी जा रही है नंबर दो में और यह दफ्तर बन रहे, (XXX)
श्री बहादुर सिंह चौहान-- यह परंपरा तो आपके समय से चली आ रही है.
डॉ गोविन्द सिंह-- मैं कहाँ कह रहा हूँ थोड़ी बहुत होगी.
उपाध्यक्ष महोदय-- डॉक्टर साहब ने सम दृष्टि रखी है.
डॉ गोविन्द सिंह-- लेकिन ऐसा नहीं था. हमने 60 साल शासन किया लेकिन दफ्तर नहीं बन पाए...(व्यवधान)..
श्री विश्वास सारंग-- आपके यहाँ तो लोगों के मकान बन गए....
राज्य मंत्री, संसदीय कार्य(श्री शरद जैन)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, डॉक्टर गोविन्द सिंह जी ने जिन संस्थाओं का नाम लिया है....
डॉ गोविन्द सिंह-- आप बैठ जाएँ.
श्री शरद जैन-- हम इस बात पर आपत्ति व्यक्त करते हैं....
डॉ गोविन्द सिंह-- आप तो जानते हों नहीं....
श्री शरद जैन-- जब इनके पास कोई प्रमाण नहीं है तो इस प्रकार के असत्य तथ्य प्रस्तुत नहीं करने चाहिए.
डॉ गोविन्द सिंह-- जैन साहब बैठ जाइये पहले तो आप मंत्री हों आपको सीखना चाहिए झूठा शब्द असंसदीय है, आपको पता है? किसने बना दिया आपको मंत्री?
श्री शरद जैन-- आप वहाँ कहें ना आप हमें डायरेक्ट क्यों डाँट रहे हों?..(व्यवधान)..
श्री शंकरलाल तिवारी-- आप असत्य तो न बोलिए.
श्री शरद जैन-- डॉक्टर साहब, आपकी टिप्पणी गलत है.
डॉ गोविन्द सिंह-- अच्छा आपकी सही है.
श्री शरद जैन-- डॉक्टर साहब ने जिन संस्थाओं के नाम लिए हैं. मेरा आप से अनुरोध है कि उसको विलोपित किया जाए.
डॉ गोविन्द सिंह-- अगर विलोपित हो जाएगा तो क्या आपको ईनाम मिल जाएगा?
उपाध्यक्ष महोदय-- विलोपित.
राज्य मंत्री, विमानन(श्री लाल सिंह आर्य)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, (XXX) वे कार्यालय सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से बनते हैं.
डॉ गोविन्द सिंह-- सच बताओ कहाँ से बन गए?
श्री शरद जैन-- डॉक्टर साहब, कोई आपकी कृपा से नहीं बने.
डॉ गोविन्द सिंह-- अच्छा.
श्री लाल सिंह आर्य-- सामाजिक संस्थाएँ और समाज पैसा देता है...(व्यवधान)..जन संग्रह किया जाता है उसके माध्यम से होता है. डॉक्टर साहब, कोई शासकीय पैसे से नहीं होता है.
डॉ गोविन्द सिंह-- एक बात बताओ..(व्यवधान)..
उपाध्यक्ष महोदय-- डॉक्टर साहब को आप लोगों ने अभिमन्यु बना दिया. सब मिलकर हमला कर रहे हैं क्या है यह?
श्री रामनिवास रावत-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, सच कह दिया तो सब चिढ़ गए.
श्री शरद जैन-- आप इसको प्रमाणित करेंगे?
डॉ गोविन्द सिंह-- बैठ जाओ मैं बता रहा हूँ...(व्यवधान)..
श्री रामनिवास रावत-- यह तेन्दूपत्ता नहीं है...(व्यवधान)..कैसे तेन्दूपत्ता तोड़ा जाता है..(व्यवधान)..
श्री विश्वास सारंग- (XXX)..(व्यवधान)..
श्री रामनिवास रावत-- यह गलत तरीका है. यह आपत्तिजनक है.
श्री विश्वास सारंग-- उपाध्यक्ष महोदय, मेरी आपत्ति है यह विलोपित करवाइये, ये संगठनों के नाम विलोपित करवाइये.
श्री शरद जैन-- इसको विलोपित किया जाए.
उपाध्यक्ष महोदय-- वह विलोपित कर दिया. वह हो गया.
श्री विश्वास सारंग-- जिन संगठनों के नाम लिए है वह विलोपित करवाइये.
उपाध्यक्ष महोदय-- कर दिया है...(व्यवधान)..
श्री विश्वास सारंग-- धन्यवाद.
श्री शंकरलाल तिवारी-- जहाँ तक सच की बात है वह (XXX) वाला न्यायालय में सामने आ रहा है.
उपाध्यक्ष महोदय-- वह भी विलोपित है. उसको भी विलोपित कर दें.
श्री रामनिवास रावत-- प्रुव्ह हो गया जज हों तुम?
श्री विश्वास सारंग-- नहीं, हम नहीं आप हों.
श्री शंकरलाल तिवारी-- (XXX)
उपाध्यक्ष महोदय-- नहीं, नहीं, उसको भी विलोपित कर दें. पहली भी और यह भी दोनों चीजें विलोपित कर दें.
श्री रामनिवास रावत-- ये बार बार नाम ले रहे हैं जिस चीज की यहाँ चर्चा नहीं हो सकती, जो प्रकरण यहाँ का है ही नहीं....
उपाध्यक्ष महोदय-- एक बार विलोपित करने के लिए कह दिया, निर्देश दे दिया तो वह विलोपित ही होगा. भले ही बार बार नाम लेते रहें तो उससे क्या होगा.
डॉ गोविन्द सिंह-- तेन्दूपत्ता अगर विलोपित हो जाएगा तो बेचारे यहाँ के मजदूर क्या करेंगे?..(व्यवधान)..
श्री विश्वास सारंग-- विलोपित मत करवाओ वह लिखा रहने दो रावत जी.
डॉ गोविन्द सिंह-- मैंने आगे कुछ नहीं कहा है.
उपाध्यक्ष महोदय-- क्यों विश्वास जी, यह भोजन अवकाश के बाद लगता है खुमारी आप लोग दूर कर रहे हैं, नींद आ रही है तो. डॉक्टर साहब को बोलने दें वे खतम कर ही रहे हैं. बैठ जाएँ.
डॉ गोविन्द सिंह-- हमारी सारंग जी से बात हो गई थी उसके बाद मैंने तेन्दूपत्ता का नाम नहीं लिया. लेकिन तेन्दूपत्ता का इसलिए कह रहा हूँ कि विलोपित मत करिए क्योंकि मजदूरों की रोजी-रोटी चली जाएगी. केवल हमारा इतना अनुरोध था. खैर, जैन साहब को आपत्ति लगी आपने कार्यवाही से निकाल दिया, तो मैं तो यह कह रहा हूँ कि वास्तव में सच्चाई को स्वीकारना चाहिए जैसे मैंने किया था आप भी बड़े दिल से स्वीकार करो, करना चाहिए था, मैं संस्थाओं का नाम नहीं ले रहा, आपको बुरा लगता है. लेकिन बात यह है कि आखिर जब सरकार में नहीं थे तब तो आप कच्ची मढ़ैय्या नहीं बना पाए. अब एयर कंडीशंड महल कहाँ से बन रहे? कहाँ से बन गए सब संसाधन? ग्वालियर के शिवपुरी रोड पर दो सौ बीघा में एक बहुत बड़ा सेंटर बन गया वहाँ ट्रेनिंग हो रही है.
उपाध्यक्ष महोदय-- नाम मत लीजियेगा.
डॉ. गोविंद सिंह—नाम कहाँ लिया, वहाँ एक कार्यालय बन गया, ट्रेनिंग सेंटर बन गये. इसके लिए पैसा आखिर कहाँ से आया, तो इसलिए मैं आपसे कहना चाहता हूं .
श्री शरद जैन--- डॉ. गोविंद सिंह जी हम समझते हैं कि बहुत विद्वान आदमी हैं और यह विद्वान इसलिए हैं क्योंकि इनकी शिक्षा दीक्षा जबलपुर में हुई है. मैं मानता हूं कि जिनकी शिक्षा दीक्षा जबलपुर में होती है. वह व्यक्ति विद्वान होते हैं, मैं डॉ. साहब से आग्रह करना चाहता हूं कि जो विषय है उस विषय पर संबोधन दें . एक –एक संस्था का हिसाब किताब और कौन बिल्डिंग कैसे बनी , कौनसा कार्यालय कैसे बना. यह न कहें. यह सब समर्पित संस्थाओं के कार्यालय हैं, जो कार्यकर्ताओं के खून पसीने से बनते हैं अब यह बात डॉ. साहब के सिर से निकलेगी.
उपाध्यक्ष महोदय--- शरदजी, उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया है मैं ध्यान दे रहा हूं कि वह क्या बोल रहे हैं.
श्री कमलेश्वर पटेल--- उपाध्यक्ष महोदय, जिन्होंने भोपाल से शिक्षा ली वह क्या विद्वान नहीं हैं, क्या जबलपुर वाले ही विद्वान हैं.
उपाध्यक्ष महोदय--- जितने माननीय सदस्य बैठे हैं, सब विद्वान हैं.
डॉ. गोविंद सिंह--- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, अब जैन साहब ने कह दिया कि जबलपुर वाले बहुत विद्वान होते हैं, लेकिन यह तो नकल से पास हुए थे.
श्री विश्वास सारंग--- पर डॉ. साहब नकल तो आपने ही करवाई थी.
श्री शरद जैन—उपाध्यक्ष महोदय, एक मिनिट लेंगे. डॉ. गोविंद सिंह जी ने हमारे बारे में बोला लेकिन वह हमारे सीनियर हैं और हम उस मर्यादा का पालन करेंगे हम यह किसी को नहीं बताएंगे कि जिस कालेज में यह पढ़ते थे उस कालेज में कुल 4 स्टूडेंट थे और सामूहिक नकल का प्रकरण था.
डॉ. गोविंद सिंह—उपाध्यक्ष महोदय, हम वहाँ के छात्र नेता थे, आप जब पकड़े गये थे तब हमसे सिफारिश कराई थी.
श्री शऱद जैन--- डॉ. साहब मैं कहना नहीं चाहता था लेकिन आपने मुझे बाध्य किया मैं एक लाइन आपसे कहता हूं कि तुम मुझे नीरज कहो मैं तुझे निराला , क्यों अपन एक दूसरे की बात कहे.
डॉ. गोविंद सिंह--- अच्छा ठीक है आपको धन्यवाद. अब हम चुप हो जाएंगे आपकी कलई नहीं खोलेंगे, आप जबलपुर वाली खोवे की जलेबी लाकर सबको खिलाना. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी द्वारा जो संशोधन विधेयक प्रस्तुत हुआ है उसका मैं पूरी तरह से भरपूर स्वागत करता हूं और अपेक्षा करता हूं कि आप अवैध परिवहन जो भारी पैमाने पर हमारे जिले में हो रहा है कृपादृष्टि करके आप उसमें कुछ करें. मैंने मांग की है कि ऐसी जगह जहाँ भारी पैमाने पर अवैध परिवहन हो रहा है गाड़ियां चल रही हैं, बसें चल रही हैं, बिना परमिट की गाड़ी यूपी जाती हैं. दो –दो , तीन-तीन साल से उनके परमिट नहीं लिये गये हैं, वह पकड़ी जाती हैं तो पुलिस वालों के हर थाने में पैसे बंधे हुए हैं. इस पर आप रोक लगायें .यदि आप अपना स्टाफ बढ़़ाये तो स्थापना व्यय पर खर्च बढ़ेगा लेकिन आपकी आमदनी भी चार गुना बढ़ेगी. इस बात को कहते हुए हम संशोधन विधेयक का समर्थन करते हैं और धन्यवाद भी देते हैं.
उपाध्यक्ष महोदय--- सदन के माहौल में बड़ा परिवर्तन हैं, डॉ. साहब समर्थन कर रहे हैं.
श्री शैलेन्द्र जैन(सागर)—माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय परिवहन मंत्री द्वारा प्रस्तुत मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान संशोधन विधेयक 2015 का मैं समर्थन करता हूं. आज डॉ. गोविंद सिंह जी ने जो बात कही हैं, उसमें से कुछ बातों का मैं समर्थन करता हूं. उन्होंने कहा है कि यह शास्तियों का जो प्रतिशत है जो चार गुना किया जा रहा है, वह अगर दस गुना भी किया जाए तो भी कम है क्योंकि शासन की मंशा यही है कि नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं, नियम विरुद्ध मोटरयान चलाकर जिस तरह से यात्रियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो रहा है , वह निश्चित रूप से बंद होना चाहिए. इससे न केवल यात्रियों की सुरक्षा जु़ड़ी हुई हैं वरन् शासन को राजस्व की भी बहुत हानि हो रही है. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान अधिनियम 1991, राज्य भर में जितने भी मोटरयान चलते हैं, उन मोटरयानों को इस प्रक्रिया और विधि के माध्यम से अधिनियमित किया जाता है. समय समय पर पालन नहीं करने वालों पर,इनका टैक्स न चुकाने वालों के खिलाफ मोटरयान का अधिग्रहण करने और उसे निरुद्ध कार्यवाही करने की शक्तियां अधिनियम में दी गयी हैं. उनको यह भी अधिकार है कि वह ऐसे मोटरयान की जप्ती भी कर सकते हैं. मोटरयान जहां पर रखे जाते हैं वहां पर प्रवेश करने और जिस तरह के उनके परमिट जो दिये जाते हैं उनको भी केन्सीलेशन करने का सारा प्रावधान इसमें दिया हुआ है. ये सारी शास्तियां हैं जो मासिक हैं, त्रैमासिक हैं, वार्षिक हैं लेकिन अभी तक इनमें शास्तियों का जो प्रतिशत है वह लगभग दोगुना है और दोगुना शास्ति होने के बावजूद भी इस तरह के नियमों का उल्लंघन करने वाले जो मोटरयान मालिक हैं, मोटरयान चालक है उनके खिलाफ जो कार्यवाही होनी चाहिए,इस तरह की उनकी प्रवृत्ति को हतोत्साहित किया जाना चाहिए,वह नहीं हो पा रही है. शास्ति की रकम कम होने के कारण बिना अनुज्ञा-पत्र के या अनुज्ञा‑पत्र में दिये गये प्रावधानों के हिसाब से उसमें जो प्रावधान दिये गये थे, जिस उद्देश्य के लिए वह अनुज्ञा-पत्र दिया जाता है उसके भिन्न तरीके से अगर उसका इस्तेमाल होता है तो निश्चित रुप से यह उचित नहीं होगा. इसलिए शास्ति की जो राशि है वह दोगुना से बढ़ाकर चार गुना इस विधेयक के माध्यम से की जा रही है. मैं इस विधेयक का समर्थन करते हुए सदन से निवेदन करता हूँ कि इसको सर्वसम्मति से पारित किया जाए तो बहुत उचित होगा.
उपाध्यक्ष महोदय, युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया की माननीय परिवहन मंत्री जी ने जो शुरुआत की है उसके अच्छे परिणाम भी आना शुरु हो गये हैं. स्कूल बसों की परमिट पर प्रति सीट प्रतिवर्ष 120 रुपये लिये जाते थे उसको घटाकर 12 रुपये प्रति सीट प्रति वर्ष किया गया है इससे हमारे विद्यार्थियों को निश्चित रुप से लाभ हुआ है. मैं माननीय परिवहन मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूँ और उनका धन्यवाद करना चाहता हूँ.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, ऐसे ही ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह के यातायात की व्यवस्थाएँ सुचारु रुप से संचालित करने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण परिवहन योजना की शुरुआत की गयी है. इस योजना के तहत् भी जो मोटर मालिक बसें चलाना चाहते हैं, मोटर यान चलाना चाहते हैं, टैक्सी चलाना चाहते हैं उनके लिए भी उनके जीवनकाल की जो टैक्स की दरें थी वह 7 प्रतिशत से घटाकर एक प्रतिशत कर दी गयी हैं, यह निश्चित रुप से बहुत ही सराहनीय है और इससे ग्रामीण क्षेत्र में जहां पर यातायात के साधनों का सर्वदा अभाव होता था वहां पर लगभग 6 हजार नये परमिट परिवहन विभाग द्वारा जारी किये गये हैं, निश्चित रुप से प्रशंसनीय है.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जो वाहन कृषि कार्य में उपयोग में आते थे उन वाहनों पर भी कामर्शियल व्हीकल्स के समान, दरों पर टैक्स लिया जाता था, ऐसे कृषि कार्य में उपयोग में आने वाले जो वाहन हैं, मोटर यान हैं उन पर 6 प्रतिशत से घटाकर पंजीयन शुल्क एक प्रतिशत किया गया है. यह हमारे किसान भाइयों के लिए निश्चित रुप से बहुत रियायत देने वाला एक कार्य है.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, बहुत सारी ऐसी विसंगतियां ध्यान में आती थीं, वाहन क्रय करने के बाद भी उनका महीनों तक पंजीयन नहीं होता था. ऐसी तमाम् विसंगतियों को दूर करने के लिए डीलर प्वाइंट पर ही वाहन का ऑन लाइन पंजीयन कराने का, उनका भुगतान करने और रजिस्ट्रेशन का अलॉटमेंट करने का यह पूरा का पूरा काम किया गया है, यह भी निश्चित रुप से बहुत अच्छा है.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, एक विषय डुप्लीकेट ड्रायविंग लायसेंस का आता था. ड्रायविंग लायसेंस की डुप्लीकेसी का एक धन्धा चल निकला था.अब मैं यह नहीं करना चाहता हूँ कि यह धन्धा कब से चल रहा था, इस धन्धे में कौन लोग लिप्त थे लेकिन जो कुछ गलत था, वह गलत था उस गलती को सुधारने का काम हमारी सरकार ने किया है और बायोमैट्रिक आधारित ड्रायविंग लायसेंस जारी करने की प्रक्रिया शुरु हो गयी है.इसके परिणाम बहुत अच्छे आये हैं, डुप्लीकेसी निश्चित रुप से बंद हो गयी है और अनियमित लायसेंस जारी करने की एक जो परम्परा थी, एक पूरा रैकेट चलता था.वह रेकेट तोड़ने में हमारा शासन और माननीय परिवहन मंत्री जी निश्चित रूप से सफल हुए हैं. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, राजस्व अभिलेखों के कंप्यूटराइजेशन का कार्य परिवहन विभाग में बहुत अच्छी तरीके से हुआ है और लगभग 1 हजार 82 करोड़ रुपये का राजस्व जो अनेक वर्षों से बकाया निकल रहा था, कंप्यूटराइजेशन हो जाने के कारण और सारी जानकारियां एट हैंड मिल जाने के कारण उस राशि में से लगभग 50 प्रतिशत की राशि जो लगभग 540 करोड़ रुपये होती है उसकी वसूली संभव हो पाई है. इससे राजस्व में निश्चित रूप से इजाफा हुआ है.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, समाज के नि:शक्तजन वर्ग के वाहनों पर भी वही टैक्स लिया जाता था जो कमर्शियल टैक्स या इस तरह के वाहनों पर लिया जाता है. इसके संबंध में मैंने माननीय परिवहन मंत्री जी से निवेदन किया था उस दिशा में भी उन्होंने काम किया है और नि:शक्तजनों के उपयोग में आने वाले वाहनों के जीवनकाल का पंजीयन शुक्ल महज 360 रुपये कर दिया गया है यह भी निश्चित रूप से बहुत अच्छा काम है.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, इस समय सारा का सारा विश्व पर्यावरण पर आए संकट से जूझ रहा है. ऐसे में सीएनजी से चलने वाले वाहन और बैटरी से ऑपरेट होने वाले वाहनों को बढ़ावा देने की बहुत आवश्यकता थी और ऐसे वाहनों को बढ़ावा देने के लिए माननीय परिवहन मंत्री जी ने उनके पंजीयन शुल्क में एक से दो प्रतिशत की जो कटौती की है छूट दी है वह भी निश्चित रूप से प्रशंसनीय है, वंदनीय है.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, एक और कार्य के लिए मैं माननीय परिवहन मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ और वह है अगर कोई वाहन किसी विशेष जिले में रजिस्टर्ड है और उसकी फिटनेस वहां है अगर वही वाहन अन्य किसी जिले में जाता है और उसका फिटनेस का पिरीयड खत्म हो जाता है तो उसके फिटनेस की व्यवस्था अन्यत्र जिले में करने की भी व्यवस्था उन्होंने दी है, इससे कमर्शियल वाहनों को निश्चित रूप से लाभ होगा.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, पर्यटक यान परमिट ऑनलाइन देने की भी माननीय परिवहन मंत्री जी ने योजना लाई है, इससे मध्यप्रदेश में पर्यटकों की संख्या में निश्चित रूप से इजाफा होगा और सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा. परिवहन विभाग में निश्चित रूप से कुछ अनियमितताएं थीं और अन्य तरह की कुछ गड़बड़ियां होती थीं यह सर्वविदित है इसे नकारा नहीं जा सकता, ऐसे समय में परिवहन विभाग द्वारा दी जा रही 11 सेवाओं को लोक सेवा गारंटी योजना में शामिल किया गया है ताकि इस तरह की अनियमितताओं पर, ऐसी कार्य पद्धति पर अंकुश लगाया जा सके और जो माफिया राज चल रहा था जो रेकेट चल रहा था उसको खत्म करने की दिशा में माननीय परिवहन मंत्री जी ने जो कार्य किए हैं उनको मैं धन्यवाद देता हूँ बधाई देता हूँ और इन दो लाइनों के साथ अपनी बात समाप्त करूंगा, माननीय परिवहन मंत्री जी के लिए कि –
चले चलिए कि चलना ही दलीले कामयाबी है !
जो थककर बैठ जाते हैं वे मंजिल पा नहीं सकते !!
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे अपनी बात कहने का अवसर दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद.
उपाध्यक्ष महोदय – धन्यवाद शैलेन्द्र जी, श्री रामनिवास रावत.
श्री रामनिवास रावत (विजयपुर) – माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी द्वारा जो संशोधन प्रस्ताव मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान (संशोधन) विधेयक, 2015 लाया गया है यह केवल दोगुने को चौगुना करने के लिए लाया गया है और मैं समझता हूँ कि इसका मुख्य उद्देश्य राजस्व की बढ़ोतरी भी हो सकता है और परिवहन नियमों का पालन कराना भी हो सकता है और जो परिवहन नियमों का पालन न करें उन्हें दण्डित करना भी हो सकता है. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, राजस्व की हानि के संबंध में हमारे डॉक्टर साहब ने भी कई बार कई बातें कहीं, सबसे अधिक आवश्यकता यह है कि हम नियमों का पालन कैसे कराएं, आप दण्ड का प्रावधान दोगुने से बढ़ाकर चार गुना कर रहे हैं, करिए, जो कानून तोड़ता है उस पर ऐसा होना चाहिए लेकिन ऐसा हो क्यों रहा है. हम अन्य राज्यों से रजिस्ट्रेशन फीस की तुलना करें. मध्यप्रदेश में रजिस्ट्रेशन फीस सबसे ज्यादा ली जा रही है, अन्य राज्यों में कम है बीच बीच में भी बात आयी है आपने व्यवस्था भी की है कि अन्य राज्यों के वाहन तीन से अधिक या चार दिन से अधिक प्रदेश में नहीं रहेंगे. हरियाणा से गाड़ी पास करवा रहे हैं, लोग यूपी से गाड़ी पास करवा रहे हैं, लोग छत्तीसगढ़ से गाड़ी पास करवा रहे हैं, राजस्थान से गाड़ी पास करवा रहे हैं वह गाड़ियां प्रदेश में रहती हैं और मध्यप्रदेश में गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन की संख्या कम होती जा रही है. आपने डीलर प्वाइंट पर भी रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था रखी है. लेकिन वह काम बराबर नहीं हो रहा है. सभी डीलर रजिस्ट्रेशन नहीं करवा पा रहे हैं. हम राजस्व तब भी बढ़ा सकते हैं जब आप रजिस्ट्रेशन की संख्या को बढ़ाने के लिए जनता को प्रेरित करें कि लोग दूसरे प्रदेश में रजिस्ट्रेशन न करायें. अपने प्रदेश में गाड़ी उठाकर चलाने वाला व्यक्ति अपने ही प्रदेश में रजिस्ट्रेशन कराये. मैं समझता हूं कि इससे हम राजस्व बढ़ाने के लिए ज्यादा अग्रसर होंगे.
दूसरी बात ड्राइविंग लायसेंस के बारे में कहना चाहता हूं . मेरे तहसील मुख्यालय से आपका परिवहन कार्यालय 160 किलोमीटर दूर है आपने व्यवस्था की है कि आप स्कूलों में भी जाकर ड्राइविंग लायसेंस देना चाहते हैं. हमारे यहां पर 160 किलोमीटर दूर परिवहन कार्यालय होने के कारण कई व्यक्ति लायसेंस नहीं ले पाते हैं. नियम का वायलेशन होने की वजह से, लायसेंस न होने की वजह से रोज मोटर सायकिल वालों को जुर्माना देना होता है तो इस तरह की व्यवस्था करें कि एक केंप हर तहसील स्तर पर और स्कूलों में 15 दिन में या 7 दिन में आयोजित किया जाय जिससे लोगों को ड्राइविंग लायसेंस आसानी से मिल सके.
मैं यह भी कहना चाहता हूं कि अधिक भार वाले जो वाहन चलते हैं वे ज्यादातर अवैध उत्खनन वाले चलते हैं. इनको हाथ दें रूकने के लिए तो वे रूकते नहीं है और आदमी पर चढ़ाने में इनको कतई संकोच नहीं होता है. आ प अगर पूरे एक्सीडेंट का अनुपात निकाल लेंगे तो सर्वाधिक एक्सीडेंट अवैध उत्खनन से चलने वाले वाहनों से ही होते हैं और उनसे ही ज्यादा मौतें होती हैं. आप इन पर इस तरह से कण्ट्रोल करें कि यह जहां पर भी दिखें तो वहीं पर इनका तौल किया जाय और अधिक भार मिले तो इनके खिलाफ में कार्यवाही की जाय. इनके खिलाफ तो भले ही आप 4 गुना नहीं 10 गुना कर दें कोई आपत्ति नहीं है.
आपने जो ट्रांसपोर्ट के बैरियर की बात की है. मैं यहां पर सिकन्दरा के बैरियर के बारे में कहूंगा वहां के बैरियर के बारे में शिकायत हुई है प्रमुख सचिव ट्रांसपोर्ट के पास में पत्र भी आया है किस तरह की पीड़ा आपके स्टाफ ने, आपके सिपाहियों ने, आपकी महिला सिपाहियों ने व्यक्त की है बड़ी दर्दनाक है अगर उस महिला के शरीर पर आप चिन्ह देखेंगेतो आप खुद गुस्से में आ जायेंगे कि यह क्या किया है आपके उन लठैत धारियों ने जो कि वसूली विभाग के लोग नहीं करते हैं वह वसूली आपके लठैत लोग करते हैं. वहां पर न तो आपका आरटीआई बोल पा रहा है न ही आपका हेड कांस्टेबल बोल पा रहा है, आपका स्टाफ भी नहीं बोल पा रहा है उ स मारपीट की घटना का प्रकरण भी दर्ज किया गया है. जैसा कि डॉक्टर साहब ने कहा है कि राजस्व बढ़ाया जा सकता है तो सभी जगह पर 1 – 4 की गार्ड रख दें उनको ही वसूली के अधिकार दे दें तो क्या होगा कि कम से कम आपका स्टाफ तो नहीं पिटेगा. अगर आपके स्टाफ ने कोई बात कही है तो उसकी जांच करके उनको प्रोटेक्शन भी प्रदान करें. आपके पास पत्र पहुंच गया होगा यदि नहीं पहुंचा है तो प्रमुखसचिव महोदय से मंगवाकर उसका विवरण देखें कि आपकी महिला सिपाहियों को किस तरह से नौकरी करना पड़ी है, बड़ी दर्दनाक कहानी है उनकी .
उपाध्यक्ष महोदय यह जो दोगुने से चार गुना करने का निर्णय लिया है तो कुछ स्थितियों में मैं इसका विरोध करूंगा और अवैध उत्खनन करने वालों पर आप कितना भी दण्ड लगा दें, लेकिन जैसे कि मोटर सायकिल चला रहे हैं पर हेलमेट नहीं है तो आप चार गुना दण्ड कर देंगे इससे तो अच्छा होगा कि आप पुलिस वालों से कह दें कि चैकिंग प्वाइंट पर हेलमेट भी रख लें आप जितने का जुर्माना करते हैं उतने का हेलमेट उनको दे दें दो ज्यादा अच्छा होगा नियमों का पालन होने लगेगा. इस तरह की कई स्थितियां हैं .माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जो राजस्व बढ़ाने का मंत्री जी का उद्देश्य है इसमें कुछ मामलों में मैं विरोध करता हूं और कुछ मामलों में मैं इसका समर्थन करता हूं. आपने जो मुझे बोलने का समय दिया उसके लिए धन्यवाद.
श्री बाला बच्चन ( राजपुर )—माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान संशोधन विधेयक माननीय मंत्री जी के द्वारा इसलिए लाया गया है कि जो बिना परमिट की गाड़ियां चलती हैं उन पर दण्ड को दो-गुना के बजाय चार-गुना किया जाय. देर से ही सहीं, इतने वर्षों बाद ही सही कम से कम सरकार का ध्यान तो इस ओर गया . उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी को कुछ सुझाव देना चाहता हूं कि यह दो गुना के बजाय चार गुना से काम नहीं चलेगा, यह दस-गुना होना चाहिए. और क्यों बढ़ाना चाहिए, मैं बताना चाहता हूं कि अभी ऐसी व्यवस्थाएं अन्य विभागों में भी हैं. नगर निगम में है, मंडियों में है,सेल टैक्स विभाग में है. वहां पर कोई अगर जुर्म करता हैं तो दस गुना जुर्माना वसूला जाता है. तो मंत्री जी आपको इसको दस गुना करना चाहिए. उपाध्यक्ष महोदय, मुझे याद है, पिछले वर्ष इसी से संबंधित जब संशोधन विधेयक आया था और यह जो परिवहन माफिया है ,उनका शुल्क घटा कर आधा कर दिया था. तब हमने पूछा था तो सरकार ने कारण बताया था कि प्रतिस्पर्धाओं के कारण हम यह कर रहे हैं. और अब सरकार बोल रही है कि जो बिना परमिट की या अवैध रूप से जो गाड़ियां चल रही हैं और जिस कारण से जो कर की चोरी हो रही है उसके कारण हम यह संशोधन विधेयक लाये हैं. माननीय मंत्री जी मैं आपको यह भी बताना चाहता हूं कि वर्ष 2006 में MPSRTC की मध्यप्रदेश में बसे बन्द कर दी गई थीं. उससे प्रदेश की जनता को दिक्कत और परिशानियां तो हुई ही हैं और वे इसलिए बन्द की गईं कि प्रत्येक वर्ष लगभग एक सौ करोड़ रूपये का घाटा हो रहा था उसके कराण की गईं. लेकिन अब ये निजी परिवहन मालिक जो बिना परमिट के लगभग 60 प्रतिशत वाहन प्रदेश में चल रहे हैं. एक एक परमिट के नाम से चार चार गाड़ियां चलती हैं. इस पर भी आप रोक लगायें और जो सामान का परिवहन कराते हैं उसमें भी बड़े लेवल पर टैक्स की चोरी होती है. माननीय मंत्री जी आप इसको भी दिखवायें. इतना ही नहीं, माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जो मध्यप्रदेश में बार बार परिवहन विभाग को लेकर,व्यवस्थाओं को लेकर जो परिवर्तन सरकार करती है वह भी मैं माननीय मंत्री जी के ध्यान में लाना चाहता हूं. मेरा एक प्रश्न था कि भोपाल और इन्दौर में बी.आर.टी.एस. को लेकर आपने लगभग एक हजार करोड़ रूपये खर्च किये हैं . उसकी डी.पी.आर. बनवाने में लगभग 250 करोड़ रूपये दिये हैं और अब मेट्रों लाईन पर लगभग 40 हजार करोड़ रूपये खर्च होना हैं. तो क्या मेट्रो लाईन आने के बाद ये हमारा 1000 से 1500 करोड़ के बीच का जो काम हुआ है इसे क्या उखाड़ फेंक देंगे? ऐसे मंत्री जी मेरे सुझाव भी हैं ,दूसरा, गलत परिवहन नीतियों के कारण बस मालिकों में हिंसक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है. मुझे याद है जुलवानिया जो बड़वानी जिले में आता है , वहां पर वर्ष 2011 में बस में आग लगा कर 24 से 25 लोगों को जला कर मार दिया था. यह हिंसक प्रतिस्पर्धा का मैं उदाहरण दे रहा हूं. और माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आये दिन हम यह सुनते हैं कि जो बड़ी विद्युत लाईनें होती हैं उन लाईनों के वायरों के टच हो जाने के कारण बसों में आग लगती है और यात्री मर जाते हैं. समय की प्रतिस्पर्धोओं के कारण यात्रियों की मौत हो जाती है. आमने-सामने जो वाहनों के एक्सीडेन्ट होते हैं उसके कारण यात्रियों की मौत होती है. तो ऐसा तामाम मेरे जो सुझाव हैं मंत्री जी कि ये जो हिंसात्मक प्रतिस्पर्धाओं के कारण और निजी परिवहन मालिकों में अवैध रूप से धन कमाने के कारण होड़ लगी है , इस पर आप ध्यान दें.
उपाध्यक्ष महोदय, मैं इस बात को जानता हूं कि जब आपकी पार्टी के नेताओं की बड़ी बड़ी सभायें होती हैं तो सैकड़ों बसों का उपयोग आप करते हैं. मुझे नहीं लगता कि आप इनके खिलाफ कार्रवाई कर पायेंगे या उसको रोक पायेंगे. लेकिन फिर भी मेरा यह आग्रह है कि जो अवैध रुप से गाड़ियां चलती हैं. बिना परमिट की जो गाड़ियां चलती हैं, उस पर आप रोक लगायें और जुर्माने को 10 गुना तक बढ़ायें और परिवहन शुल्क को भी लगभग 4 गुना बढ़ाना चाहिए.
उपाध्यक्ष महोदय, यात्री बसों के किराये को और कम करना चाहिए. ये ही मेरे सुझाव है. जिस तरह से आदरणीय रावत जी ने बोला है. कुछ मामलों में मेरा समर्थन और कुछ मामलों में मेरा विरोध है. मैंने कुछ सुझाव दिये हैं. बड़वानी में NH-3 जो AB रोड़ के नाम से जाना जाता है वह प्रदेश का शायद बड़ा बैरियर है, वहां आये दिन बहुत ट्रैफिक जाम रहता है. एबी रोड़ होने के कारण सब तरह के यात्री वहां से निकलते हैं, कृपया उसको भी दिखवायें. मैंने जो सुझाव दिये जिसमें सरकार की यदि कहीं परिवहन नीति गलत हैं तो उसमें सुधार करके कम से कम मध्यप्रदेश के यात्री जो निजी बसों में यात्रा करते हैं, उनको सुविधाएं मिले. उनका किराया कम हो. मैंने जो कहा उस पर आप सख्ती से पालन करायें. धन्यवाद.
श्री मुकेश नायक(पवई)—उपाध्यक्ष महोदय, पिछले दिन ज़ी टीवी पर मध्यप्रदेश के परिवहन के संबंध में एक रिपोर्ट आयी थी. उसमें कहा गया था कि मध्यप्रदेश में 25 हजार बसें चलती हैं, जिसमें से 17 हजारे बसें बीजेपी के नेताओं की चलती हैं. अगर यह विधेयक आप अपने कार्यकर्ताओं अपने नेताओं की इनकम बढ़ाने के लिए ला रहे हैं या लीकेज़ रोकने के लिए, तब यह दुर्भाग्यपूर्ण है. मंत्रीजी अपने उत्तर में इसका खंडन कर दें. मैं कहां कह रहा हूं. मैं तो ज़ी टीवी की रिपोर्ट का जिक्र इस सदन में कर रहा हूं.
उपाध्यक्ष महोदय, मुझे नहीं मालूम है कि मैं सही कह रहा हूं या गलत कह रहा हूं. मैं केवल जी़ टीवी ने जो अपनी रिपोर्ट दी थी, उसका उल्लेख कर रहा हूं क्योंकि उसका खंडन बीजेपी के किसी नेता ने किया नहीं. इसलिए अगर यह आंकड़े ज़ी टीवी ने गलत दिये हैं तो माननीय मंत्री महोदय, उत्तर में इसका उल्लेख कर दें. नईदुनिया समाचार पत्र में भी छपा था. सब दूर प्रचार माध्यमों में इसका प्रचार हुआ था. मैं विनम्रता पूर्वक केवल इतना कहना चाहता हूं कि अगर इस अधिनियम में संशोधन के साथ आप यात्रियों के किराये में कमी की बात करते तो उचित होता. आप देखें कि जिस अनुपात में पेट्रोल और डीज़ल के दाम कम हुए हैं, उस अनुपात में आपने यात्रियों के किराये में कमी नहीं की. मैं समझता हूं कि आपकी प्राथमिकता बस में बैठने वाले यात्री होना चाहिए न कि बस मालिक आपकी प्राथमिकता में होना चाहिए. मैं विनम्रता पूर्वक मंत्रीजी से कहता हूं कि जब आप उत्तर दें तो आप यात्रियों के किराये में क्या कटौती करेंगे. उऩको क्या सुविधा देंगे. बस किस स्तर की और किस गुणवत्ता की चलायी जाये इस पर भी आप उत्तर में चर्चा करेंगे तो यह विधेयक पूर्ण होगा. अन्यथा इस तरह के विधेयक लाने का कोई औचित्य नहीं है.
डॉ योगेन्द्र निर्मल(वारासिवनी)—उपाध्यक्ष महोदय, किसी भी गाड़ी के पार्ट्स भी घिसते हैं. उसके टायर-ट्यूब भी घिसते हैं. और दुर्घटना में भी बहुत सा नुकसान होता है. अगर टायर-ट्यूब और कर्मचारियों के खर्चे को जोड़ा जाये तो आज मैं यह मानकर चल रहा हूं कि इस हिसाब मध्यप्रदेश में यात्रा काफी सस्ती है.
श्री रजनीश हरवंश सिंह (केवलारी)—उपाध्यक्ष महोदय, मैं, आपके माध्यम से माननीय परिवहन मंत्रीजी से यह निवेदन करता हूं कि हमारे सिवनी जिले में जो नैरोगेज लाईन थी उसका ब्राडगैज में परिवर्तन का कार्य प्रारंभ है. 30 नवम्बर को नैरोगज बंद हो गई और लगभग 3 साल यानि 2018 में वह ब्राडगैज का कार्य पूर्ण होगा. मेरा आपके माध्यम से मंत्रीजी से अनुग्रह है कि इन तीन सालों में उस इलाके और अंचल के यात्रियों को बहुत ज्यादा असुविधा होगी. जिस जिस लाईन से नैरोगेज ब्राडगैज में परिवर्तित हो रही है, वहां पर ...
उपाध्यक्ष महोदय—आप मोटरयान कराधान विधेयक पर बोलें अभी तो आप ट्रेन पर हैं.
श्री रजनीश सिंह (केवलारी)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, 30 नवम्बर को बंद हो गई है और इतनी ज्यादा आवाज आई है कि छिंदवाड़ा से नैनपुर, नैनपुर से जबलपुर, नैनपुर से बालाघाट, नैनपुर से मंडलाफोर्ट तक के यात्रियों को भारी असुविधा होगी और इसका किराया भी बढ़ा, ट्रेन का न्यूनतम था, अतिरिक्त यात्रियों पर बोझ भी रहेगा, मेरा निवेदन है कि अतिरिक्त बस चलाई जायें और उसी रूट पर चलाई जायें जहां-जहां ट्रेन के स्टेशन थे ताकि यात्रियों को असुविधा का सामना न करना पड़े और उसका किराया भी न्यूनतम रहे और जो परमिट परिवहन विभाग से जारी होगा उसकी राशि भी कम होना चाहिये ताकि जो बस मालिक हैं उन स्थानों पर बस चलायें और अगर परमिट की राशि ज्यादा होगी और किराया भी ज्यादा होगा तो अतिरिक्त भार यात्रियों पर पड़ेगा और कोई उस रूट पर बस नहीं चला पायेगा. माननीय उपाध्यक्ष महोदय आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से प्रार्थना है कि हमारे केवलारी विधानसभा क्षेत्र में जहां के लगभग 25 से 30 गांव इस ट्रेन के रूट में आते हैं, अतिरिक्त बसों की व्यवस्था वहां पर होनी चाहिये, यह मेरा आग्रह है. बोलने का मौका दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्री रामनिवास रावत (विजयपुर)-- मैं भी एक निवेदन कर लूं आपसे, माननीय प्रदेश के परिवहन मंत्री जी काफी सक्षम हैं, सौम्य हैं, प्रभावशाली हैं और मुख्यमंत्री जी के नजदीक भी हैं. आज मोटरयान कराधान संशोधन विधेयक लेकर आये हैं, पारित भी होगा, क्रियान्वयन भी करायेंगे. बस एक ही निवेदन करूंगा कि क्रियान्वयन कराने के लिये आप यह मत कह देना कि मुझे सी.एम. हेल्पलाइन में तो नहीं जाना पड़ेगा.
परिवहन मंत्री (श्री भूपेन्द्र सिंह)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय हमारे वरिष्ठ सदस्य और पूर्व मंत्री माननीय डॉ. गोविंद सिंह जी, हमारे सागर से विधायक आदरणीय शैलेन्द्र जैन जी, हमारे वरिष्ठ विधायक मुख्य सचेतक और पूर्व मंत्री आदरणीय राम निवास रावत जी, नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मंत्री आदरणीय बाला बच्चन जी, पूर्व मंत्री आदरणीय मुकेश नायक जी और भाई रजनीश सिंह जी आप सभी ने इस विधेयक के संबंध में यहां पर बहुत ही महत्वपूर्ण सुझाव दिये हैं, मैं उन सभी सुझावों का स्वागत करता हूं और आप सभी ने लगभग इस विधेयक का समर्थन भी किया है. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, हमारे प्रदेश के अंदर लगभग 35 हजार यात्री बसें चलती हैं और करीब-करीब 13 से 15 लाख लोग प्रत्येक दिन इन यात्री बसों में यात्रा करते हैं. माननीय उपाध्यक्ष जी, आज पूरे देश में इस बात पर बहस चल रही है कि जो प्रदूषण का पैमाना है वह प्रदूषण का पैमाना हमारे देश में बहुत तेजी से बढ़ रहा है और दिल्ली का उदाहरण आज हम सबके सामने है, सारे चेनल पर इस समय दिल्ली को लेकर ही बहस हो रही है. यह दोनों चुनौतियां हमारे सामने हैं, हमारे राज्य के अंदर एक चुनौती और है कि हमारा राज्य ऐसा राज्य है, जहां पर हमारा स्टेट ट्रांसपोर्ट नहीं है और स्टेट ट्रांसपोर्ट समाप्त होने के बाद सारी की सारी जिम्मेदारी परिवहन विभाग के उपर आ गई, इसको हमने चुनौती के रूप में स्वीकार किया और आज जो देश के समक्ष प्रदूषण की चुनौती है, इसका एक ही रास्ता है कि हमारे देश के अंदर लोक परिवहन बढ़े और लोक परिवहन बढ़े इसके लिये मैट्रो का एक सेक्टर है, हमारे राज्य के अंदर जो बसों के माध्यम से लोक परिवहन होता है यह बढे. अगर बसों से लोक परिवहन बढ़ता है तो इससे जहां हमारी यात्रा सुरक्षित और सुविधाजनक होती है वहीं दुर्घटनायें भी इसके कारण कम होती है, इसलिये जब माननीय मुख्यमंत्रीजी के द्वारा मुझे यह जिम्मेदारी दी गई तब से लेकर के आज तक मेरी यह कोशिश है कि हमारे राज्य के अंदर लोक परिवहन बहुत सुलभ हो, इसके लिये सरकार के स्तर पर जो भी हम कर सकते हैं उसको हमने करने की कोशिश की है.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आप स्वयं भी जानते हैं भोपाल से इंदौर के बीच में पिछले वर्ष तक लगभग 400 टैक्सी चलती थी जिससे प्रदूषण भी होता था और लगभग हर दिन एक दुर्घटना भी होती थी. हमने विभाग के अधिकारियों से चर्चा की कि आखिर इसका विकल्प क्या है. विकल्प यह है कि जब तक हम राज्य के मार्गों पर अच्छी बस सेवा उपलब्ध नहीं करायेंगे तब तक लोग बसों में बैठकर के नहीं जायेंगे. हमारे यहां पहले जो नीति थी उसमें जो डीलक्स गाड़ियां हैं एसी गाड़ियां हैं उन पर जो परमिट-रोड टेक्स की फीस थी ,जो यात्री शुल्क था वह प्रत्येक यात्री पर 240 रूपये लगता था प्रतिसीट. हमारे यहां पर जो स्टेट गैरेज की जो गाड़ियां थी जिनकी कंडीशन सामान्य तौर पर अच्छी नहीं होती है, उन गाड़ियों पर जो टैक्स लगता था वह 160 रूपये प्रति सीट लगता था तो हमने अधिकारियों से कहा कि जब तक हम डीलक्स-एसी गाडियों पर टैक्स कम नहीं करेंगे तब तक हमारे राज्य के नागरिकों के लिये अच्छी बस सेवा उपलब्ध नहीं करा पायेंगे. उपाध्यक्ष महोदय, हम लोगों ने 240 रूपये प्रतिसीट जो टैक्स लगता था उसको घटाकर के हमने 180 रूपये करने निर्णय लिया उसका परिणाम आज यह है कि इंदौर से भोपाल के बीच में 24 वाल्वो बस चल रही है जिनकी कीमत करीब 1 करोड़ के आसपास की है. आधे घंटे के अंदर एक वाल्वो इंदौर से भोपाल के बीच में उपलब्ध है. उपाध्यक्ष महोदय, आज की तारीख में इंदौर से भोपाल के बीच में वाल्वो चलने के कारण एक भी टेक्सी नहीं चल रही है और जो लोग टेक्सी से जाते थे वे वाल्वो बसों से जा रहे हैं. इसी तरह की बसें नीमच में भी चल रही हैं, सागर में भी चल रही हैं, ग्वालियर में भी चल रही हैं, जबलपुर में भी चल रही है. उसका परिणाम यह हुआ कि हमारे राज्य की सड़कों पर अच्छी बसों का आना प्रारंभ हो हो गया. मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि यदि आवश्यक होगा तो हम इस टैक्स को और कम करेंगे हमारी कोशिश यह होगी कि हमारे राज्य का हर यात्री कम कीमत पर हर नागरिक को यह अधिकार है कि वह भी डीलक्स बस में बैठकर जाये वह भी एसी बस में बैठकर के जाये, और हमारी कोशिश होगी कि हमारे राज्य के अंदर अच्छी परिवहन सुविधा लोक परिवहन के माध्यम से हम लोगों को देने का काम कर सकें इस दिशा में हम लोग लगातार आगे बढ़ रहे हैं.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, प्रदूषण का एक और कारण है कि हमारे राज्य के अंदर या बाकी राज्यों के अंदर जो अधिक आयु की बसे हैं वह लगातार चलती रहती हैं जिसके कारण से प्रदूषण बढ़ता है इसलिये हम इस पर विचार कर रहे हैं और निर्णय जल्दी ही आप सबके सामने आयेगा कि अब 15 वर्ष से अधिक आयु की बस को राज्य के अंदर परमिट नहीं देंगे जिससे हमारे यहां प्रदूषण भी कम हो और सुरक्षित यात्रा हमारे राज्य के अंदर लोग कर सकें.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह जो विधेयक सदन में प्रस्तुत किया गया है इसका उद्देश्य यही है कि हमारे राज्य के अंदर जो बसें चले , इसमें जहां हम यात्रियों की सुरक्षा करना चाहते हैं हम जानते हैं और माननीय सदस्यों ने भी सही कहा है कि आज भी अनेक बसें ऐसी चलती हैं जिनके परमिट नहीं है, जिनकी फिटनेस नहीं है, जिन्होंने रोड टैक्स जमा नहीं किया है, हमारे विभाग में अमले की कमी है और हमें मैदानी चैकिंग भी बढ़ानी पड़ेगी. इसके साथ साथ हमें यह भी सुनिश्चित करना पड़ेगा कि जो इस तरह की गाड़ियां हैं, इन पर हम रोक लगायें. मैं स्वयं कई बार बसों की चैकिंग करता हूं और हमने पिछले जुलाई माह में एक अभियान चलाया और उस अभियान में हमने प्रदेश में एक हजार बसों को जप्त किया, जिनकी फिटनेस नहीं थी. 353 गाड़ियां ऐसी थीं, जो बिना परमिट के चल रही थीं. कुछ गाड़ियां हमने ओव्हर लोडिंग में पाईं, जो ओव्हर लोड होकर चल रही थीं. यह सारी समस्या हमारे सामने थी. इसलिये हमें लगता है कि जब तक हम यह पैनाल्टी नहीं बढ़ायेंगे और जैसा बाला बच्चन जी ने कहा, बिलकुल सही है. जो हमने चार गुनी की है, यह भी कम है. क्योंकि जब तक बस आपरेटर में यह डर नहीं होगा कि हम बिना परमिट के चलायेंगे, बिना फिटनेस के चलायेंगे, तो हमारी गाड़ी के ऊपर कार्यवाही होगी, जुर्माना ज्यादा होगा. तब तक हम इस पर प्रभावी तरीके से रोक नहीं लगा सकते. इसलिये वह रोक लगे, उस पर रोक लगाने की दृष्टि से यह हम विधेयक लेकर आये हैं. हमारे राज्य के अन्दर एक समस्या और है. वह समस्या यह है कि अनेक बस आपरेटर ऐसे हैं, जिन्होंने एक अपना कॉकस बनाया हुआ है और वह जैसे किसी रुट पर चार गाड़ियां चलना चाहिये, तो वह परमिट तो चार गाड़ियों का ले लेंगे, पर गाड़ियां चलाते हैं दो. दो गाड़ियां घर में रखते हैं. उनका टैक्स जमा करते हैं, उनको बाकी जगह शादी-ब्याह वगैरह में चलाते रहते हैं. उसका परिणाम यह होता है कि वहां जो चार गाड़ियां चलना चाहिये, वहां पर दो गाड़ियां चलती हैं. उस कारण से ओव्हर लोडिंग होती है. जिस गाड़ी में 50,55,60,70 लोगों के बैठने की क्षमता है, वहां पर सवा सौ, डेढ़ सौ लोग भी बैठकर जाते हैं. मैंने खुद एक बस को पकड़ा, जिसमें 135 लोग बैठे थे. इसलिये हमने यह तय किया है कि अब हम हर बस में जीपीआरएस सिस्टम लगा रहे हैं और वह यह निगरानी करेगा कि अगर इस बस के चार परमिट हैं, तो यह चारों गाड़ियां आज के दिन चलीं कि नहीं चलीं. इसका पूरा काम हम एक एजेंसी को दे रहे हैं, जो मानीटरिंग करके डे टु डे रिपोर्ट हमारे अधिकारियों को करेंगे, जिससे कि यह जो मार्गों का एक तरह से परमिट लिया है, लेकिन गाड़ी नहीं चला रहे हैं, उस पर हम लोगों को रोक लगाने में कुछ हद तक सफल हो पायेंगे. मैं प्रत्येक माह विभाग की समीक्षा करता हूं. सारे आरटीओज़ को बिठालता हूं. एक-एक बिन्दू पर हम चर्चा करते हैं. एक एक बिन्दू की हम समीक्षा करते हैं. हमारे यहां कई बार परमिटों की शिकायतें होती थीं कि कोई बड़ा बस आपरेटर है, तो वह नहीं चाहता कि किसी छोटे बस आपरेटर को मिले. इसलिये मेरे स्पष्ट निर्देश हैं कि अगर कोई भी मेरे पास शिकायत आयेगी कि उसने परमिट के लिये आवेदन किया और अगर समय के अन्दर आपने परमिट नहीं दिया तो संबंधित आरटीओ के खिलाफ हम तत्काल कार्यवाही करेंगे और मैंने कार्यवाही की भी है. इसलिये हम इसको लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत लेकर आये हैं. यह जो परमिट की व्यवस्था है कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम के माध्यम से आपको 15 दिन के अस्थाई परमिट और 30 दिन के अन्दर स्थाई रुप से परमिट आपको जारी करना है. मुझे इस बात को भी कहने में कोई हर्ज नहीं है कि मेरे पास आज तक किसी की तरफ से यह शिकायत नहीं आई कि फलां पार्टी के कारण किसी को परमिट नहीं मिला या कोई कठिनाई हुई, मैं आज भी हमारे माननीय जितने कांग्रेस पार्टी के सदस्य हैं, मैं आज आपको इस सदन में यह आश्वस्त करता हूं कि मुझे अगर वे आज लिखकर दे देंगे कि उनको किसी रुट का परमिट नहीं मिला है या किसका वह देना चाहते हैं, जिसकी वे अनुशंसा करेंगे,आप आज अनुशंसा करेंगे. मैं कल सुबह उसके परमिट की कॉपी आपके पास भिजवा दूंगा. एक भी माननीय सदस्य ऐसा नहीं रहेगा, क्योंकि हम इसको इस आधार पर नहीं करना चाहते कि कौन से दल का है, किस दल का है और क्या है. मुझे नहीं पता, पर अभी तक जो भी बस आपरेटर है, किसी भी बस आपरेटर की तरफ से कभी इस प्रकार की शिकायत नहीं आई और हम यह आगे भी ध्यान रखेंगे. कई बार यह होता है, मानव स्वभाव है, हो सकता है कि कई बार उसका लाभ लोग लेते हैं, परंतु मेरी कोशिश यही रहेगी,यह मैं आश्वस्त करता हूं आदरणीय मुकेश नायक जी को कि कभी भी ऐसा नहीं होगा कि कोई भी हमारे माननीय सदस्य इसको हम राजनैतिक चश्मे से नहीं देखेंगे. हमें लोगों को अच्छी सुविधा उपलब्ध हो, यह हमारी पहली प्राथमिकता है. हमारे माननीय सदस्य, गोविन्द सिंह जी ने कुछ बिन्दू यहां पर रखे हैं. एक उन्होंने क्षमता की गाड़ियों के बारे में कहा है.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह बात बिल्कुल सही है. मैंने स्वयं ने देखा कि अभी मैं झाबुआ चुनाव में था और वहां पर एक फोर विलर थी, शायद ट्रैक्स थी तो उसमें उसको खड़ा करके, उसके यात्री गिरवाये तो उसमें 32 यात्री ट्रैक्स में बैठे हुए थे और लोग बताते हैं कि वहां पर मतलब, एक बार शर्त लगाई गई कि वहां पर 72 व्यक्ति ट्रैक्स में बैठाकर दिखा दिये तो इसका कारण है. मैंने पूछा कि क्या कारण है ? तो अब जैसे झाबुआ से लगा हुआ दाहोद है , 35 किलोमीटर है, गुजरात में. अब दाहोद के हमारे परमिटी लम्बे समय से अन्तर्राज्यीय परमिट एग्रीमेन्ट होना था, वह नहीं हो पाया और इसलिये लोग दाहोद जीपों में बैठकर जाते हैं. 35 लोग, 40 लोग एवं 50 लोग बैठकर जाते हैं. मैंने तत्काल चुनाव के बाद अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि हम गुजरात सरकार से बात करें और गुजरात सरकार से बात करके, हमारे राज्य के अन्दर ऐसे कितने मार्ग हैं ? जहां पर हमें अन्तर्राज्यीय परमिटों की आवश्यकता है. हम सब राज्यों से फिर से एग्रीमेन्ट करें. उसको फिर से हम बातचीत करके और जिन-जिन मार्गों पर परमिट की आवश्यकता है, उन-उन मार्गों पर परमिट की व्यवस्था हो. यह हमने सुनिश्चित किया है. अनेक मार्गों पर हमने परमिट दिये हैं. हमारे राज्य के अन्दर मार्गों का सूत्रीकरण करके, मैं प्रत्येक माह की बैठक में इस बात की समीक्षा करता हूँ. प्रत्येक आर.टी.ओ. से पूछता हूँ कि आपने एक माह में कितने नये मार्गों का सूत्रीकरण किया है ? क्योंकि सड़क नई-नई बन गई हैं और अवैध गाड़ी चल रही हैं क्योंकि हम मार्गों का सूत्रीकरण नहीं कर रहे हैं और इस कारण से, परमिट जारी नहीं हो रहा है. इसलिए माननीय उपाध्यक्ष जी, अभी तक जो मेरे पास जानकारी आई है. वह लगभग 15,000 नये मार्गों का हमने सूत्रीकरण, इस अवधि के अन्दर किया है. जिस पर गाडि़यों को परमिट देने का काम हमने किया है, जिससे की अवैध परिवहन रूके. हमारे राज्य का राजस्व बढ़े. जो माननीय गोविन्द सिंह जी ने कहा है, वह बिल्कुल सही है, मैं इसमें कहीं असहमत नहीं हूँ और इसलिए हमारी कोशिश लगातार इस बात की है कि इसको, गाडि़यां बढ़ाकर ही हम लोग ठीक कर सकते हैं. हमारे पास मैदानी अमला नहीं है और यह संयुक्त जिम्मेदारी होती है, ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की और दोनों मिलकर इस काम को करते हैं तब हो पाता है लेकिन वह प्रभावी नहीं हो रहा है. उसका विकल्प एक ही है कि हम नई गाडि़यां बढ़ायें, बसें हमारे राज्य में बढ़ें. यह बहुत आवश्यक है. माननीय गोविन्द सिंह जी ने चैकिंग के लिए कहा है, इसमें स्टॉफ की कमी है. यह बात सही है परन्तु मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि बीच में सरकार की तरफ से, चैकिंग के ऊपर रोक लगी हुई थी. मंत्री बनने के बाद, मैंने इस रोक को हटा दिया और अधिकारियों से आर.टी.ओ. को कहा है कि अगर सप्ताह में चार दिन आपने चैकिंग नहीं की. मैं पूछता हूँ कि चार दिन आपने कितनी गाड़ी पकड़ीं ? कितनी गाडि़यां जब्त की हैं ? कितनी चालानी कार्यवाही कीं ? कितनी बिना परमिट की पकड़ीं ? एवं एक-एक जिले की जानकारी, माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं स्वयं प्रत्येक आर.टी.ओ. से लेता हूँ एवं यह अनिवार्य है. आप सब भी देखें एवं आग्रह है कि अभी तक हमारे आर.टी.ओ. सब ऑंफिस के अन्दर बैठे रहते थे. हमने यह सुनिश्चित किया है कि आपको सप्ताह में चार दिन मैदानी चैकिंग करना है. आपको जाकर देखना है कि बस परमिट की है कि नहीं, बाकी जो चीजें हैं वह सब देखना है, यह सब व्यवस्था की गई है.
उपाध्यक्ष महोदय – मंत्री जी, उनकी गाडि़यों में भी जी.पी.आर.एस. लगवा दीजिये ताकि पता चलता रहेगा कि आपके आर.टी.ओ. कहां हैं ? घर में बैठक ऑनलाईन देखते रहेंगे.
श्री भूपेन्द्र सिंह – उपाध्यक्ष जी, आपका बहुत महत्वपूर्ण निर्देश हैं. मैं इसको लगवा देता हूँ.
श्री रामनिवास रावत – फिर आपको कहना नहीं पड़ेगा कि परिवहन अधिकारी सुनते नहीं हैं.
श्री भूपेन्द्र सिंह – यह मैंने कभी नहीं कहा.
डॉ. गोविन्द सिंह – तहसील स्तर पर भी जाकर देख लें क्योंकि सबसे ज्यादा अवैध उत्खनन का काम, हमारे क्षेत्र में है और वहां कोई वर्षों से नहीं गया. आपके विभाग की आमदनी बढ़ेगी.
श्री राजेन्द्र मेश्राम – डॉक्टर साहब, उदारता के लिये धन्यवाद भी दे दीजिये. इतनी सरलता, सहजता से आदरणीय मंत्री जी ने जवाब दिया.
डॉ. गोविन्द सिंह – हमने कहां आलोचना की है.
उपाध्यक्ष महोदय – डॉक्टर साहब, आपने तो पूरा समर्थन किया है.
डॉ. गोविन्द सिंह – वास्तव में जैसे, श्री रामनिवास जी ने कहा है कि सौम्य हैं, सरल हैं, निष्पक्ष हैं. उस पर हम भी मोहर लगा देते हैं. उपाध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.
श्री भूपेन्द्र सिंह – माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय डॉ. गोविन्द सिंह जी ने एक डेप्यूटेशन के बारे में कहा. मेरे मंत्री बनने के बाद, आज की तारीख तक एक भी डेप्यूटेशन परिवहन विभाग में नहीं हुआ है और न ही सरकार परिवहन विभाग में अब डेप्यूटेशन करेगी. जो भी हमारे विभाग के अधिकारी हैं. हम उनसे ही काम चला रहे हैं. हमारे 51 जिले हैं, कुल 12 आर.टी.ओ. हमारे पास हैं. 12 आर.टी.ओ. से हम 51 जिले कवर कर रहे हैं. अभी तक एक भी डेप्यूटेशन हमारे विभाग में नहीं हुआ है. माननीय गोविन्द सिंह जी ने लहार कार्यालय के बारे में कहा तो मैं आज ही आर.टी.ओ. को निर्देश जारी करूँगा कि सप्ताह में एक दिन जाकर लहार कार्यालय में बैठें और जो भी काम है, वह वहां पर करें.
श्री रामनिवास रावत - लहार के लिए कहा है,मेरे यहां पर,विजयपुर में भी करवा दें ।
श्री भूपेन्द्र सिंह - आपके यहां भी कर देंगे, सप्ताह में एक दिन विजयपुर में भी ।
श्री रामनिवास रावत – धन्यवाद ।
उपाध्यक्ष महोदय - आपने पूरा समर्थन नहीं किया है ।
श्री भूपेन्द्र सिंह - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, लायसेंस के बारे में भी मैंने अभियान चलाया है ,लर्निंग लायसेंस बनाने के 272 केम्प हमने लगाए हैं ।
श्री यादवेन्द्र सिह(नागौद)- माननीय उपाध्यक्ष जी, यह अच्छी बात नहीं है,हमारे डॉक्टर साहब, रावत जी, यह सब अपना –अपना काम कह रहे हैं, तो हम भी कहेंगे कि सतना से हमारे नागौद में कर दें, सब के लिए कहिए । आप बीच में अपनी- अपनी बात कर लेते हैं, यह अच्छी बात नहीं है, आप लोगों के भरोसे हम पीछे बैठे हैं ।
श्री शंकरलाल तिवारी(सतना)- यही तो खास बात है, यादवेन्द्र सिंह जी, बड़े नेता अपना काम निकाल लेते हैं ।
उपाध्यक्ष महोदय - यादवेन्द्र जी, आप अपना ही गोल मार रहे हैं और हमला उधर कर रहे हैं ।
श्री भूपेन्द्र सिंह - माननीय उपाध्यक्ष जी, सभी स्कूलों में जाकर, 272 केम्प लगाकर, 34 हजार लर्निंग लायसेंस बनाए हैं । माननीय विधायक जहां पर कहेंगे, वह मुझे लिखकर देंगे, हमारे विभाग के अधिकारियों को कहेंगे, आर.टी.ओ. को कहेंगे, तो मैं आज ही निर्देश जारी करूंगा कि जहां पर, जिस स्कूल में आप कहेंगे, वहां पर जाकर हमारा विभाग लर्निंग लायसेंस के केम्प लगाएगा और जिन भी बच्चों के लर्निंग लायसेंस बनना है, उनका लायसेंस बनाने का काम करेंगे । माननीय गोविन्द सिंह जी ने फूफ बैरियर के बारे में कहा है, मैं इसकी जांच के निर्देश दे रहा हूँ और जैसा आपने बताया, मैं आपकी बात से सहमत हूँ, हम यह निर्देश जारी करेंगे कि जो स्थान नियत है, वहीं पर बैरियर लगाया जाए । हमारे रामनिवास रावत जी ने रजिस्ट्रेशन फीस के बारे में कहा है, हमने अनेक राज्यों में पता किया है, हमारी जो रजिस्ट्रेशन फीस है, वह किसी राज्य से ज्यादा नहीं है, कई राज्यों से फीस हमारी कम है और बाकी राज्यों के बराबर है, ऐसा एक भी राज्य नही है, जहां से हमारी रजिस्ट्रेशन फीस ज्यादा है, फिर भी किसी राज्य में फीस हमसे ज्यादा होगी, तो हम उसको कम करेंगे । तहसील स्तर पर केम्प कर ही दिया है । सिकन्दरा बैरियर की शिकायत के बारे में आपने कहा है, मैंने इसकी जांच के निर्देश दिए हैं, हमारे एडिशनल ट्रांसर्पोट कमिश्नर मौके पर जाएंगे, तीन दिन के अंदर रिर्पोट देंगे और जो भी दोषी अधिकारी होगा, उसके विरूद्व कार्यवाही होगी । माननीय बाला बच्चन जी ने इसका समर्थन किया है, मैं उनका धन्यवाद करता हूँ, उन्होंने और टेक्स बढ़ाने की बात कही है, इस पर हम आगे विचार करेंगे और बी.आर.टी.एस. मेरे विभाग में नहीं आता । बसों में टायमिंग को लेकर प्रतिस्पर्धा थी, इस कारण से दुर्घटना होती है, यह बात सही है । एक तो हमारे राज्य के अंदर छोटी गाडि़यों की संख्या बहुत ज्यादा है, बीच में हम लोगों ने यह पॉलिसी बनाई थी कि जो छोटी गाडि़यां 407 होती हैं, उनको भी हम परमिट देंगे और उसके कारण हर मार्ग पर छोटी गाडि़यों की संख्या इतनी ज्यादा हो गईं कि उनके अंदर प्रतिस्पर्धा हो गई, टायमिंग कम हो गई और क्षमता से ज्यादा यात्रियों को भर- भरकर के वह ले जाने लगे , इस हेतु नोटिफिकेशन के लिए गया हुआ है, हम सदन के सामने विधेयक लेकर आएंगे, इसमें हम यह प्रावधान कर रहे हैं कि जो छोटी गाडि़यां हैं, 407 पर जो बनी हुई हैं, उन गाडि़यों को अब हम 75 किलोमीटर से अधिक का परमिट नहीं देंगे, जो बड़ी गाडि़यां हैं, उनको ही हम लम्बी दूरी का परमिट देंगे, उससे यह प्रतिस्पर्धा भी कम होगी और हमारे राज्य को अच्छी गाडि़या मिलेंगी, 12 हजार गाडि़यां हैं, उनको हटाना भी संभव नहीं है, वह एक दम बेरोजगार हो जाएंगे, परन्तु यह प्रतिस्पर्धा छोटी गाडि़यों के कारण बढ़ी है, जो दौड़ होती है, आगे पीछे दौड़ाते हैं, यह सारी जो अव्यवस्थाएं होती हैं, इसके कारण कठिनाई हुई हैं । माननीय उपाध्यक्ष महोदय, हमारे राज्य के अंदर एक समस्या और है,हमारे राज्य के बस स्टेण्डों की हालत बहुत खराब है, जो मूलभूत सुविधाएं हैं, वह भी हमारे राज्य के बस स्टेण्डों पर नहीं हैं, कई जगह तो शौचालय भी नहीं है,कठिनाई होती है, मैंने झाबुआ में देखा एक दुकानदार ने मुझसे कहा कि भैया कई बार स्थिति यह होती है कि महिलाएं हमारी दुकान के सामने आकर बैठती हैं, कोई व्यवस्था नहीं है, वहां दुकानें बन गई और स्टेण्डों पर बहुत अव्यवस्था है इसलिए हमने ट्रांसपोर्ट अथार्रिटी बनाने का निर्णय लिया है । चूंकि यह काम हम परिवहन विभाग से नहीं कर सकते थे,इसलिए हमने ट्रांसर्पोट अथार्रिटी बनाई है ।
हमारे राज्य में शासकीय स्तर पर 74 बस स्टेण्ड हैं इसमें से 34 बस स्टेण्ड हमारे परिवहन विभाग के हैं और बाकी बस स्टेण्ड नगर निगम देख रही है. प्रथम चरण में जो 34 बस स्टेण्ड हैं इन 34 बस स्टेण्डों के लिये हम विज्ञापन जारी कर रहे हैं और सभी बस स्टेण्डों को पीपी मोड में हम देने का काम कर रहे हैं, जिससे हमारे यात्रियों को बेसिक सुविधाएं मिले, अच्छा पानी मिले, वाशरूम की व्यवस्था हो इसके लिये हम प्रयास कर रहे हैं. इसकी शुरूआत हमने अभी सागर से की है. बाकी सभी जगहों की निविदाएं लगाई हुई हैं, जिससे कि हमारे राज्य के बस स्टेण्डों पर ठीक व्यवस्था हो जाए. लगभग 12309 बसों में किराया सूची लगाने का काम जो कि पूर्व में नहीं था उसको किया है. इसी तरह से हमारे राज्य के अंदर परिवहन विभाग पहले कभी यह नहीं देखता था कि लोग शराब पीकर गाड़ी चला रहे हैं अब हम कामर्शियल वाहनों के बारे में यह जानकारी भी प्रत्येक माह एस.पी.आफिस से बुलाते हैं और अभी तक शराब पीकर वाहन चलाने वाले वाहन चालकों के 332 ड्राईविंग लायसेंस हमने निलंबित किये हैं.
श्री रामनिवास रावत—यह नियम कामर्शियल वाहनों के अलावा हर वाहन के ऊपर लागू करवा दें ताकि लोग शराब पीकर वाहन न चलाएं.
श्री भूपेन्द्र सिंह—माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं इसका परीक्षण करवा लेता हूं, यह आपका बहुत अच्छा सुझाव है मैं आपकी बात से पूरी तरह से सहमत हूं इसको भी अभिमत लेकर के कर लेंगे. हमारी सरकार ने एक निर्णय और लिया है कि हमारे प्रदेश में जो ड्राईविंग का क्षेत्र है उसमें महिलाएं भी आगे आएं इसलिये हमने महिलाओं को सभी प्रकार के लायसेंस लर्निंग लायसेंस से लेकर सभी प्रकार के लायसेंस निःशुल्क देने का निर्णय हमारी सरकार ने लिया है. एक जो प्रदूषण की समस्या हमारे राज्य के अंदर थी उस प्रदूषण की समस्या के लिये हमने 3 हजार नये पीयूसी सेन्टर खोल रहे हैं इसमें लगभग 10 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा और इसकी प्रक्रिया इतनी सरल कर दी है कि पहले उसमें एक कमेटी उसमें पहले आप मशीन खरीदो फिर उसका आपको लायसेंस देंगे हमने यह सारा समाप्त कर दिया है इसमें कोई कमेटी नहीं पहले हम आपको लायसेंस देंगे उसके बाद आपको मशीन खरीदना है और इस तरह से 3 हजार नये पीयूसी सेन्टर प्रदूषण जांच केन्द्र और अब किसी भी वाहन का फिटनेस, परमिट, ट्रांसफर जो भी होगा, वह बिना पीयूसी के नहीं होगा, जब तक उसकी हमारे पास में एनओसी नहीं आ जायेगी हम उनको परमिट नहीं देंगे, यह निर्णय भी लिया है. हमारे विभाग ने पिछले वर्ष का जो राजस्व था उसमें 17.5 प्रतिशत की वृद्धि की है इस तरह से हमारी कोशिश है कि हमारे राज्य का जो लोक परिवहन है इसको हम सुविधाजनक तथा आरामदायक बनायें, दुर्घटनारहित बनायें तथा प्रदूषण मुक्त हमारा मध्यप्रदेश बने इस दिशा में माननीय शिवराज सिंह जी सरकार आगे बढ़ रही है. माननीय उपाध्यक्ष जी आपने मुझे समय दिया इसके लिये धन्यवाद. मैं आपसे आग्रह करूंगा कि हमारे सभी माननीय सदस्यों ने विधेयक का समर्थन किया है. मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि मध्यप्रदेश मोटरयान-कराधान संशोधन विधेयक 2015 पारित किया जाए.
श्री रजनीश हरवंश सिंह—माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी के ध्यान में यह बात लाना चाहता हूं हमारे क्षेत्र में रेल्वे लाईन पहले नेरोगेज थी उसको बंद कर ब्राड गेज बना रहे हैं जिसके कारण आवागमन की समस्या पैदा हो गई है.
श्री भूपेन्द्र सिंह—माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य का कहना बिल्कुल सही है नेरोगेज से ब्राडगेज में रेल्व लाईन परिवर्तित हो रही जिसके कारण से आवागमन की समस्या है आपके यहां पर जितने भी बसों के परमिट कहेंगे, उतने परमिट वहां के लिये जारी कर देंगे आप बसों के आपरेटर लाईये आपको उसी दिन परमिट जारी करवा देंगे. आपके यहां पर किसी भी प्रकार की कठिनाई हम नहीं होने देंगे.
श्री रजनीश हरवंश सिंह—माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी आपको धन्यवाद.
उपाध्यक्ष महोदय—प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान (संशोधन) विधेयक, 2015 पर विचार किया जाए.
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.
उपाध्यक्ष महोदय—अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.
प्रश्न यह है कि खण्ड 2 इस विधेयक का अंग बने.
खण्ड 2 इस विधेयक का अंग बना.
प्रश्न यह कि खण्ड 1 इस विधेयक का अंग बने.
खण्ड 1 इस विधेयक का अंग बना.
प्रश्न यह कि पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.
पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.
परिवहन मंत्री (श्री भूपेन्द्र सिंह)—उपाध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान (संशोधन) विधेयक, 2015 पारित किया जाए.
उपाध्यक्ष महोदय-- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश मोटरयान कराधान (संशोधन) विधेयक, 2015 पारित किया जाए.
प्रस्ताव स्वीकृत हुआ
विधेयक पारित हुआ
उपाध्यक्ष महोदय – सभी ने बड़ी सद्भावनापूर्वक चर्चा की. मैं आसंदी से कहना चाहूंगा बहुत दिनों बाद ऐसा दृश्य अपनी सभा में दिखा. यह गरिमा बढ़ाता है सभा की.
6.प्रतिवेदनों पर चर्चा
मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन(वित्तीय वर्ष2013-14)
श्री मुकेश नायक(पवई) - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के वार्षिक प्रतिवेदन पर चर्चा के लिये मैं खड़ा हुआ हूं. मध्यप्रदेश में विद्युत नियामक आयोग का गठन इसलिये किया गया था कि बिजली कंपनी जो बिजली सप्लाई करती हैं और उपभोक्ता जो उस बिजली का उपयोग करते हैं और बिजली कंपनी और सरकार के बीच में विद्युत नियामक आयोग सेतु का काम करेगा. इस उद्देश्य से विद्युत नियामक आयोग का मध्यप्रदेश में गठन किया गया. दो-तीन गंभीर कमियां इसमें हैं. पहली बात तो यह है कि नियामक आयोग हमारे उपभोक्ताओं के संरक्षण में सफल नहीं हुआ. उसका कारण यह है कि नियामक आयोग में जो कर्मचारी हैं वह प्रतिनियुक्ति पर रखे गये हैं और ज्यादातर कर्मचारी बिजली कंपनियों के हैं और इसलिये जब भी उपभोक्ता और बिजली कंपनी के बीच समन्वय की समस्याओं के निराकरण की बात आती है तो यह कर्मचारी बिजली कंपनियों का सपोर्ट करते हैं उपभोक्ताओं के संरक्षण की बात नहीं करते. जब भी बिजली के टेरिफ को बढ़ाने की बात होती है और बिजली कंपनियां जब बिजली की दर को बढ़ाने का प्रस्ताव देती हैं तो बड़ी रणनीति के साथ, बड़ी स्ट्रेटिजिकल अंडरस्टैंडिंग के साथ अगर सौ रुपये ज्यादा बढ़ाने का प्रस्ताव दिया जाये तो बड़ी चतुराई के साथ 5 रुपये बढ़ाने का वह प्रस्ताव मान लेते हैं मैंने यह बहुत प्रतीकात्मक उदाहरण दिया. मेरे कहने का अर्थ यह है कि बिना उपभोक्ता के बिजली
(3.54बजे) { सभापति महोदय( श्री ओमप्रकाश सखलेचा) पीठासीन हुए }
कंपनी और बिजली विभाग का औचित्य और अर्थ क्या रह जाता है सभापति महोदय. इसलिये यह आवश्यक है कि आयोग सबसे ज्यादा उपभोक्ताओं के संरक्षण,उनके संवर्धन और उनकी सुविधाओं पर ध्यान दे. बिजली खरीदने में, बिजली बेचने में संतुलन बनाए और उपभोक्ता को उसका ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले. इसके संरक्षण की बात नियामक आयोग को करनी चाहिये. दूसरी समस्या यह है सभापति महोदय कि सरकार में जिस तरह से टेंडर बुलाकर बिजली के रेट तय किये जाते हैं. विज्ञापन देकर जिस तरह से कर्मचारियों की भर्ती की जाती है इस नियामक आयोग में वह नहीं किया जाता है और उसका परिणान यह होता है कि जो प्रायवेट बिजली कंपनियां हैं उनके साथ मिल बैठकर सारे रेट तय हो जाते हैं जिससे उपभोक्ताओं को भारी नुकसान होता है और मध्यप्रदेश की जो बिजली कंपनियां हैं उनके राजस्व में हानि होती है और उसी का परिणाम है कि मध्यप्रदेश की बिजली कंपनियां सात हजार करोड़ से ज्यादा के घाटे पर आज चल रही हैं. और मध्यप्रदेश की जो बिजली कम्पनियां हैं उनके राजस्व में हानि होती है और इसी का परिणाम है कि मध्यप्रदेश की बिजली कम्पनियां 7 हजार करोड़ से ज्यादा के घाटे में आज चल रही हैं अगर मध्यप्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण पर दृष्टि डालें 2006-07 में बताया गया कि 2007-08, 2008-09 और 2009-10 में राज्य विद्युत उत्पादन कम्पनी ने बिजली उत्पादन योजना ही नहीं बनाई केवल ओमकारेश्वर जल विद्युत परियोजना से 520 मेगावॉट बिजली का उत्पादन बढ़ा जो मध्यप्रदेश शासन और निजी क्षेत्र का संयुक्त उपक्रम है जिसे कांग्रेस शासन ने मंजूरी देकर निर्माण कार्य शुरु कराया था इसी तरह 2015-16 और 2016-17 में भी सरकारी बिजली कम्पनियों से एक भी यूनिट बिजली की उपलब्धता बढ़ाने की कोई योजना नहीं बनाई है. बड़ी चतुराई से आज एक शब्द चलता है “उपलब्धता और उत्पादन”. माननीय मुख्यमंत्रीजी यह कहते हैं कि 15000 मेगावॉट बिजली की उपलब्धता है माननीय मंत्रीजी जब जवाब दें तो यह बतायें कि उपलब्धता कितनी है और उत्पादन कितना है वर्ष 2007-08 में केन्द्रीय क्षेत्र से 762 मेगावॉट बिजली दीर्घावधि खरीदी के अनुबंध के आधार पर ली गई है और 2006-07 में सरदार सरोवर से 228 मेगावॉट बिजली हमें मिलने लगी है इसी बीच मालवा ताप विद्युत परियोजना और वीरसिंह परियोजना से हमें बिजली मिलने लगी है और इस तरह 2012 तक राज्य की अपने संसाधनों से विद्युत उत्पादन क्षमता में 1790 मेगावॉट की वृद्धि हुई है इसका पूरा श्रेय मध्यप्रदेश के पूर्व कांग्रेस के शासन को है क्योंकि यह सभी परियोजनाएं 2003 तक या तो शुरु हो चुकी थीं या उनको मंजूरी मिल चुकी थी फिर केन्द्र के समक्ष मंजूरी लंबित थी पिछले दस वर्षों में राज्य में 40 उद्योग घरानों और बिजली उत्पादन कंपनियों ने विभिन्न इनवेस्टर्स मीट और राज्य सरकार से भेंटवार्ता के बाद राज्य में कुल 54830 मेगावॉट बिजली उत्पादन के लगभग 44 MOU साइन किए थे जिनका सरकार ने प्रचार भी किया था लेकिन जमीन पर यह बिजली परियोजनाएं कहां हैं यह माननीय मंत्री महोदय जी बताने की कृपा करें हमारी जानकारी में ज्यादातर बिजली बनाने वाले राज्य में हमारी जो जानकारी है उसके अनुसार जितने भी MOU हुए थे उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में काम करने का वातावरण नहीं है और इसलिए ज्यादातर लोग यह MOU छोड़कर भाग खड़े हुए. राज्य में सिंगाजी ताप परियोजना 1600 मेगावॉट, सतपुड़ा ताप बिजली परियोजना 500 मेगावॉट क्षमता की 2003 में ही कांग्रेस सरकार द्वारा मंजूर हो चुकी थी लेकिन इस सरकार ने दिसंबर 2008 में इन पर काम शुरु किया और अब इनसे लाभ मिलने लगा है. इसी तरह दादाजी धुनीवाले ताप बिजली परियोजना भी कांग्रेस के शासन के दौरान तैयार हुई थी और भारत सरकार के पास मंजूरी के लिए गई थी लेकिन तब NDA की सरकार थी और उस वक्त उसको मंजूरी नहीं मिली.
सभापति महोदय, नर्मदा पर आधारित गरुढे़श्वर जल बिजली परियोजना में मध्यप्रदेश अपने हिस्से का 242 करोड़ रुपए नहीं दे सका इस कारण से यह बिजली परियोजना पूरी तरह गुजरात के कब्जे में चली गई. इससे स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री को मध्यप्रदेश के हितों की कोई जानकारी नहीं है या उन्हें राज्य के हितों की कोई परवाह नहीं है. नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण के 1989 के पंचाट के अनुसार 2024 तक मध्यप्रदेश को अपने हिस्से के 19.25 मिलियन एकड़ फीट नर्मदा जल का उपयोग करने की क्षमता विकसित करना है लेकिन पिछले दस वर्षों में नर्मदा घाटी में जो काम हो रहा है और काम की जो रफ्तार है उसे देखकर नहीं लगता है कि हम अपने हिस्से के नर्मदा जल का उपयोग भी कर पायेंगे और पूरा खतरा इस बात का है कि अधिशेष नर्मदा जल गुजरात के हिस्से में चला जायेगा इससे मध्यप्रदेश के भविष्य के विकास में बाधा आएगी.
डॉ. नरोत्तम मिश्र—हम आपका भाषण सुनना चाहते थे आप कहां पढ़े जा रहे हैं.
श्री मुकेश नायक—इसमें जो स्टेटिसटिक्स हैं और आंकड़े हैं वह मैं रिकार्ड में दर्ज कराना चाह रहा हूँ.
सभापति महोदय—आंकड़ों में जैसा अभी आपने कहा कि पिछले दस वर्षों में नर्मदा के कितने पानी का उपयोग किया इसके पिछले 25 वर्षों में कितना उपयोग किया कांग्रेस की सरकार ने वह भी बोल देते उन्होंने तो शायद 5 प्रतिशत भी नहीं किया. क्योंकि यह विषय तो सबसे ज्यादा मेरा प्रिय विषय रहता है. (हंसी)
श्री बाला बच्चन-- सभापति महोदय, आप आसंदी की गरिमा को भंग कर रहे हों. शायद ऐसा ही लगा कि वे आसंदी पर नहीं हैं, शायद आपको यही ध्यान रह गया.
श्री मुकेश नायक-- माननीय सभापति महोदय, आपने ठीक कहा. इस विषय पर आप कभी चाहें तो हम अपना एक अशासकीय संकल्प मध्यप्रदेश की विधान सभा में ले आएँगे, उस पर आप चर्चा करवा लें, हमको इसकी पूरी जानकारी है, नर्मदा जल के बारे में काँग्रेस की क्या सोच रही, क्या समझ रही और हम क्या सोचते और समझते चले आए हैं. नदियों को इंटरकनेक्ट करने के दृष्टिकोण को लेकर, गंगा जल को दूसरी नदियों में इंटरकनेक्ट को लेकर, नर्मदा क्षिप्रा के मिलन को लेकर और कैन एवं सुनार नदी तथा बेतवा नदी एवं ब्यारवा नदी को इंटरकनेक्ट करने को लेकर तमाम नदियों के जल प्रवाह को सुनिश्चित करने को लेकर आप एक चर्चा सदन में ले आएँ. अभी आप चाहें तो इस विधेयक के बाद चर्चा करा लें हमारी पूरी तैयारी है. हम इस विषय पर आप से चर्चा करने के लिए तैयार हैं.
सभापति महोदय, मैं यह कहना चाहता हूँ कि मध्यप्रदेश में बिजली संकट है, उत्पादन भी जरुरत के अनुसार काफी कम है. इसके बाद भी राज्य में बिजली चोरी और जो ट्रांसमिशन लॉस है इसको रोकने के प्रति सरकार गंभीर नहीं है. ट्रांसमिशन लॉस कम करने के लिए अब तक एशियन डेवलपमेंट बैंक और नॉबार्ड से लगभग 2400 करोड़ रुपये विद्युत मंडल को कर्ज में मिला था. सभापति महोदय, आप विद्वान हैं इस विषय को आप जानते हैं. लेकिन स्थिति में सुधार के नाम पर जनता को धोखा दिया जा रहा है. इसी सत्र में राज्यपाल महोदय ने ट्रांसमिशन लॉस को 3 प्रतिशत तक के स्तर पर ले जाने की सूचना दी और सरकार ने यह भाषण लिख कर महामहिम राज्यपाल महोदय से इस सदन में कहलवा दिया, इसकी स्टेटिस्टिक्स, जो आर्थिक सर्वेक्षण दिया है मध्यप्रदेश की सरकार ने उसमें क्या लिखा है और गवर्नर साहब से क्या भाषण विधान सभा में पढ़वाया गया उसके अंतर्विरोध को मैं अभी आपको बताना चाहता हूँ. सरकार ने 2018 तक राज्य की विद्युत क्षमता 18 हजार मेगावॉट तक हो जाने का सपना दिखाया है. लेकिन यह क्षमता कहाँ से और कैसे प्राप्त होगी यह नहीं बताया है. हमारी जानकारी में निजी क्षेत्र ने जिन ताप जल बिजली परियोजनाओं के एम ओ यू को साइन किया था उसमें से कई वापस लौट गए. कई ने सरकार की अनसुनी कर परियोजना शुरू होने से पहले ऐसी ऊटपटांग और कठिन शर्तें रख दीं ताकि उन्हें एम ओ यू से भागने का अवसर मिल जाए. बिजली ट्रांसमिशन लॉस 3 प्रतिशत के स्तर पर आने की बात कही गई है. वास्तव में राज्य के मामले में ट्रांसमिशन लॉस ज्यादा है. भारी-भरकम कर्ज लेकर सिस्टम में सुधार किया गया, वह भी पूरी तरह से कारगर साबित नहीं हुआ. लेकिन यदि ट्रांसमिशन लॉस रुका है तो बिजली चोरी की घटनाएँ भी बढ़ी हैं. इसका सबूत है अदालत में चल रहे असंख्य मुकदमे, जो सरकार ने उपभोक्ताओं पर दर्ज कराए हैं.
माननीय सभापति महोदय, विधान सभा में 22 जुलाई 2014 को अतारांकित प्रश्न संख्या (क्रमांक) 88, माननीय श्री चन्द्रशेखर देशमुख के प्रश्न के उत्तर में ऊर्जा मंत्री ने बैतूल जिले में एल टी, एच टी, लाइन लॉस के बारे में जो जानकारी दी है वह आश्चर्यजनक है. मंत्री जी ने बताया है कि अप्रैल 2013 में 46.47 प्रतिशत ट्रांसमिशन लॉस है. मई 2013 में 54.41 प्रतिशत है. नवंबर 2013 में 46.9 प्रतिशत है और 2013 में 50.49 प्रतिशत है और जनवरी 2014 में 47.34 प्रतिशत ट्रांसमिशन लॉस है. इसका मतलब यह हुआ कि जो औसत ट्रांसमिशन लॉस है वह 29.67 प्रतिशत रहा है.
संसदीय कार्य मंत्री(डॉ नरोत्तम मिश्र)-- माननीय सभापति जी, माननीय सदस्य नियामक आयोग पर चर्चा की जगह पूरी विद्युत पर चर्चा कर रहे हैं. वे नियामक आयोग पर करें. आज इनको न जाने क्या हो गया?
सभापति महोदय-- किसी ने नोट्स अच्छे बनाकर दे दिए हैं.
श्री मुकेश नायक-- सब बातों पर चर्चा होगी. मैं यह कहना चाह रहा हूँ, यह तो एक जिले की स्थिति है. एक जिले में ऐसा ट्रांसमिशन लॉस है....
सभापति महोदय-- माननीय सदस्य थोड़ा विषय पर ज्यादा बोलें तो उचित रहेगा.
श्री मुकेश नायक-- जी, जिसे आम तौर पर सरकार छुपाती रही है. 22 जुलाई 2014 को श्रीमती इमरती देवी की अतारांकित प्रश्न संख्या 40 के उत्तर में ऊर्जा मंत्री ने कहा कि 2014-15 में मध्य पूर्व बिजली वितरण कंपनी की वितरण हानि घटकर 20 प्रतिशत लाने का लक्ष्य है औऱ मध्य क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी में वितरण हानि 21 प्रतिशत तथा पश्चिम क्षेत्र बिजली वितरण कंपनी में 18 प्रतिशत वितरण हानि लाने का लक्ष्य है. यह तमाम आंकड़े मध्यप्रदेश की विधानसभा में हमारी सरकार ने दिये हैं लेकिन मैं पूछना चाहता हूं जब बिजली मंत्री जवाब दें कि ऐसे कितने प्रकरण मध्यप्रदेश में हैं जो उपभोक्ताओं पर विचाराधीन हैं, कितने उपभोक्ता अभी तक बिजली चोरी और दूसरे आरोपों में जेल में जा चुके हैं, कितने उपभोक्ताओं की कुर्की हो चुकी है ,जिनका टेलीविजन, मोटर साइकिल, साइकिल बिजली विभाग ने जप्त की है और नियामक आयोग ने इन पर क्या संज्ञान लिया है और क्या अपने निर्णय इन सब विषयों को लेकर दिये हैं. सभापति महोदय, अस्थाई कनेक्शन एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है जिसमें नियामक आयोग ने कभी कोई हस्तक्षेप नहीं किया, नियामक आयोग के पास लोग गये.
सभापति महोदय-- आप कितना समय और लेंगे.
श्री मुकेश नायक --- दो मिनिट और लूंगा कभी भी अस्थाई कनेक्शन लेने के लिए जब कोई उपभोक्ता जाता है तो वह कहते हैं कि कम से कम आपको चार से छह महीने का बिजली का कनेक्शन लेना पड़ेगा और चार से छह महीने के पैसे ले लेते हैं लेकिन जो पानी का स्त्रोत है, नाला है, कुआं है, नदी है उसमें केवल दो महीने का जल स्तर है, दो महीने का पानी होता है लेकिन उपभोक्ता से चार महीने , छह महीने और तीन महीने की राशि एक साथ बिजली विभाग के लोग रखवा लेते हैं. लेकिन नियामक आयोग ने इस पर कभी अपना निर्णय नहीं दिया और न ही कभी उपभोक्ताओं का संरक्षण किया.प्राइवेट बिजली कंपनियाँ , आप सागर में चले जाइए , किस तरह से बिल की वसूली करती हैं. क्या तरीका उपभोक्ताओं के साथ अपनाती हैं, क्या व्यवहार करती हैं निजी कंपनियां , किस तरह से छीना-झपटी करती हैं लेकिन कभी भी नियामक आयोग ने उस पर ध्यान नहीं दिया. सभापति महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि आज किसान अपने जीवन के इन तीन चार सालों की प्राकृतिक विपदाओं के कारण और चार सालों में सब प्रकार की प्राकृतिक विपदायें आई . ओले भी गिरे, अतिवृष्टि भी हुई, सूखा भी पड़ा, हवा भी चली, तूफान भी आए और सब प्रकार की प्राकृतिक विपदाओं के कारण आज मध्यप्रदेश में किसान अपनी सबसे दुरावस्था से गुजर रहा है .लेकिन इसके बावजूद भी नियामक आयोग ने कभी इस तरह के किसानों के संरक्षण की बात नहीं कही. पिछले समय जब सूखे पर चर्चा हुई हम सब लोगों ने मुख्यमंत्री जी से कहा कम से कम आप बिजली विभाग की वसूली रुकवाईए . आज सहकारी बैंक के लोग कर्जा लेने के लिए खड़े हैं , बिजली विभाग वाले बिल वसूल करने के लिए खड़े हैं . सब तरह से किसान को परेशानी है और ऐसे में बिजली की वसूली को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जिस तरह की छीना झपटी हो रही है वह चिंता का विषय है और नियामक आयोग बिल्कुल पंगु और लंगड़े व्यक्ति की भूमिका में है इसलिए मैं निवेदन करुंगा कि इस नियामक आयोग का औचित्य क्या है, आप मुझे देखिये मैंने पूरी स्टेटिक्स अभी पढ़ना बंद कर दी है . एक ही महीने में महंगी बिजली खरीदी और उसी महीने में सस्ती बिजली राज्य शासन ने यह कहकर बेच दी कि सरप्लस है यह नियामक आयोग क्या कर रहा है. आप एक ही महीने में महंगी बिजली प्रति यूनिट खरीद रहे हैं और आप उसी महीने में सस्ती बिजली अपने राज्य की दूसरे राज्यों को बेच रहे हैं नियामक आयोग क्या कर रहा है.यह काम है नियामक आयोग का कि बिजली के उपभोक्ताओं का संरक्षण हो और उपभोक्ता को कम से कम दाम पर बिजली मिले. अगर आप कहें तो मैं तारीखें, महीने सब बता दूं, मेरे पास डिटेल जानकारी है.
सभापति महोदय--- अब आप समाप्त करें.
श्री मुकेश नायक --- सभापति महोदय, अप्रैल 2013 में 2.97 रुपये यूनिट की बिजली खऱीदी और उसी माह ढाई रुपये की दर से बेच दी आप बताइए कि जो 20 पैसे का अंतर है यह किस दलाल के पास गया, किस अधिकारी के पास गया.किसके पास गया है यह बीस पैसे का अंतर. आप बताइए कि बिजली की खरीदी और बेचने में आपने दलालों को कितना पैसा दिया. क्योंकि आपने ऑफिशियली यह कहा है कि बिजली की खरीदी और बेचने में दलाल होते हैं , पूरे देश में होते हैं तो यह तथ्य छुपाने की क्या जरूरत है जब ऑफिशियली आप कहते हैं कि बिजली के खरीदने के और बेचने में बीच में दलाल हैं. तो आप बताइये कि दलाल कौन हैं, उसका नाम बताइये और आपने कितना कमीशन दिया, उस कमीशन की जानकारी इस सदन को दीजिए, यह हमारा अधिकार है क्योंकि इसमें उपभोक्ता को नुकसान हो रहा है. आप एक तरफ कहते हैं कि मध्यप्रदेश में सरप्लस बिजली है और एक तरफ आप बिजली खरीदते हैं. उसी महीने महंगे दाम पर बिजली खरीदते हैं और अपने राज्य की बिजली सस्ते दाम पर बेच देते हैं तो नियामक आयोग इन सब बातों को लेकर क्या कर रहा है. दूसरी मैं जानकारी दे रहा हूँ, आपने 3.5 रुपये की दर से बिजली खरीदी और उसी महीने 2.87 रुपये की दर से बेच दी गयी. मार्च 2014 में आपने 2.68 रुपये की दर से बिजली खरीदी और 2.52 रुपये की दर से बेच दी.इसमें दलालों के कमीशन का कोई हिसाब नहीं दिया गया है. सरकार को बताना चाहिए कि बिजली खरीदी में दलाली में कितना रुपया,कब-कब, किस-किस व्यक्ति को दिया और उसे टोटल दलाली का पैसा, टोटल जो भार पड़ा बिजली कम्पनियों के ऊपर, वह कितना है, राज्य सरकार के ऊपर कितना है और उपभोक्ता के ऊपर कितना है, इसको केटेगरीकली आप पूरे सदन को बतायेंगे तो बड़ी कृपा होगी.
माननीय सभापति महोदय,यह बिजली नियामक आयोग उपभोक्ताओं के संरक्षण में पूर्णत: असफल रहा है और इसलिए मैं समझता हूँ कि इसकी समूची कार्यप्रणाली पर एक समीक्षा की आवश्यकता है. सारे के सारे अधिकारी प्रतिनियुक्ति पर रखे गये हैं. बिजली खरीदी और बेचने का कोई टेन्डर नहीं निकाला जाता. उपभोक्ताओं का कोई संरक्षण नहीं किया जाता और इसलिए विद्युत नियामक आयोग की पूरी कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार की आवश्यकता है. आपने मुझे समय दिया, इसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.
श्री लाखनसिंह यादव(भितरवार)—माननीय सभापति महोदय, मैं मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के वार्षिक प्रतिवेदन(वित्तीय वर्ष 2013-14) पर चर्चा के लिए खड़ा हुआ हूँ. मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग का गठन अधिनियम 1998 के अंतर्गत किया गया था. इस आयोग का मूल उद्देश्य कम्पनियों द्वारा उपभोक्ताओं को जो लाभ पहुंचाना था, जो उनका लगातार लम्बे समय से शोषण होता आ रहा था उसके लाभ पहुंचाने के लिए इस आयोग का गठन किया गया था लेकिन देखने में यह आया कि इस आयोग का गठन होने का बाद इसमें जो विद्युत मण्डल के जो कर्मचारी थे उनको प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया और उसका परिणाम यह हुआ कि वह लगातार बिजली विभाग की ही वकालत करते रहे, उपभोक्ताओं को उसका कोई लाभ नहीं हो पाया. सभापति महोदय, मेरा आपके माध्यम से निवेदन है कि इस आयोग में विद्युत विभाग के जो कर्मचारी-अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था उनको हटाकर मैं चाहता हूँ कि न्यायिक सेवाओं में जो कार्यरत अधिकारी हैं, उनको इसमे पदस्थ किया जाए और जो हमारे इस विधानसभा के वर्तमान विधायक हैं उनको भी उसमें रखा जाए जिससे कि कम से कम उपभोक्ताओं के संरक्षण का वे ख्याल रखें. यही मेरी आपसे विनती है. आपने मुझे बोलने का समय दिया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.
श्री राम निवास रावत—सभापति महोदय, ऊर्जा का प्रभार कौन देख रहा है?
(डॉ.नरोत्तम मिश्रा को) नोट हमारे बिसेन साहब कर रहे हैं,आप जबर्दस्ती अतिक्रमण कर रहे हो.
संसदीय कार्य मंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र)-- अगर आपके सम्मान में दो-दो, तीन-तीन मंत्री नोट करें तो क्या आपको तकलीफ है? हो तो बताओ हम सुधार कर लेते हैं.
आपको कोई तकलीफ तो नहीं है?
श्री रामनिवास रावत—नहीं-नहीं (हंसी)
श्री शंकरलाल तिवारी(सतना)- माननीय सभापति महोदय, मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा जो वार्षिक प्रतिवेदन रखा गया है उस पर चर्चा के लिए मैं खड़ा हूँ. वर्ष 2003 विद्युत अधिनियम की धारा 105 के अंतर्गत परम्परानुसार एक वर्ष के जो कार्य हैं विद्युत नियामक आयोग के, उनका संक्षिप्त प्रतिवेदन विधानसभा के समक्ष आया है. विद्युत नियामक आयोग की चर्चा में अभी इतनी बातें आयीं कि उनका उत्तर तो माननीय मंत्री जी देंगे पर विद्युत नियामक आयोग बनाने के पीछे भाव कुल इतना था कि दरों का निर्धारण और उसके साथ ही साथ उपभोक्ताओं को जो सेवाएँ दी जाती हैं उसकी भी चिन्ता, उसका भी ध्यान रखना कि उपभोक्ताओं के साथ भी न्याय हो.इस बात को लेकर नियामक आयोग का गठन हुआ. मान्यवर सभापति महोदय, दर निर्धारण के दौरान विद्युत नियामक आयोग जनसुनवाई कराता है और उस जनसुनवाई के माध्यम से उपभोक्ताओं की बात आती है और उस आधार पर कंपनियां चाहे जितना मांगें और नियामक आयोग जनसुनवाई के तर्क, उसके बाद जो समिति बनी है उसके तर्क, उस समिति में अधिकतम कृषि प्रतिनिधि प्रतिनिधित्व करते हैं सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के भी प्रतिनिधि रहते हैं, कृषि क्षेत्र से जुड़े हुए भी प्रतिनिधि रहते हैं और दर निर्धारित करते समय जनसुनवाई के बाद इस समिति की भी सलाह ली जाती है इसके बाद ही दर निर्धारण होता है. सभापति महोदय, इतना ही नहीं, दर निर्धारण की इस प्रक्रिया के बाद भी यदि राज्य शासन को लगता है कि कुछ वर्ग ऐसे हैं जिन्हें और भी कम दर पर बिजली दी जानी चाहिए उस पर प्रयास होता है और जब सरकार अपेक्षा करती है तो कम दर पर भी बिजली देने की बात नियामक आयोग के माध्यम से चर्चा करके होती है पर उसमें सब्सिडी राज्य सरकार को देनी पड़ती है. वर्तमान में एक हेक्टेयर तक के किसान और अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के 5 एकड़ तक के किसान को 5 हॉर्सपॉवर तक फ्री बिजली देने की बात विद्युत कंपनी कर रही है, मध्यप्रदेश की सरकार कर रही है. उसके लिए राज्य सरकार अपनी ओर से सब्सिडी भी कंपनियों को दे रही है. माननीय मुख्यमंत्री जी ने एक अभिनव योजना राज्य सरकार की ओर से किसानों को मीटर और बिल से छुट्टी करने के लिए शुरू की है ताकि उन्हें राहत मिले, कृषि फायदे का धंधा बने और उसमें बिजली बहुत बड़ा कारण है और फ्लेट रेट पर 1200 रुपये प्रति हॉर्सपॉवर पर बिजली देने की पिछले समय माननीय मुख्यमंत्री जी ने ऐतिहासिक बात की है और उसमें भी सब्सिडी देने का काम नियामक आयोग की स्वीकृति के बाद चर्चा के बाद राज्य सरकार ने किया और आज सच्चाई यह है कि एक साल में 5 हॉर्सपॉवर का जो नियामक आयोग के अनुसार निर्धारित दर पर बिल बनता है वह लगभग एक साल का 31 हजार रुपये का बनता है. परंतु माननीय मुख्यमंत्री जी कृपा से प्रदेश की किसानी को फायदे का धंधा बनाने के लिए क्योंकि निरंतर किसान परेशान हैं, कृषि कर्मण पुरस्कार फर्जी नहीं है यह ताकत का, इच्छाशक्ति का कृषि कर्मण है और इसलिए 31 हजार की बजाय मात्र 6 हजार रुपये प्रतिवर्ष 5 हॉर्सपॉवर बिजली के लिए देने की बात राज्य सरकार कर रही है और बाकी सब्सिडी सरकार अपने खजाने से कंपनियों को दे रही है.
मान्यवर सभापति महोदय, इस प्रतिवेदन के दौरान मैं सदन के समक्ष कहना चाहता हूँ कि इस वर्ष 2015-16 में फ्लेट रेट, अनुसूचित जाति जनजाति के 5 हॉर्सपॉवर तक के किसानों को फ्री, एक हेक्टेयर तक के किसान को फ्री, मान्यवर मुख्यमंत्री जी प्रदेश के खजाने से सब्सिडी के रूप में कृषि के लिए, अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति को सस्ती बिजली मिले और वह इसका लाभ उठा सकें, इसके लिए 7400 करोड़ रुपये की सब्सिडी अपने खजाने से जमा की है.
मान्यवर सभापति महोदय, मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा उपभोक्ताओं की सेवाओं की भी चिंता की जाती है उनको ध्यान में रखा जाता है अगर उनकी कोई शिकायतें हैं क्योंकि यह बहुत बड़ा काम है और इसमें शिकायतें आना और उनका निराकरण होना भी अत्यावश्यक है तो शिकायतों के निराकरण के लिए तीनों वितरण कंपनियों के मुख्यालयों में शिकायत निवारण फोरम स्थापित किया है. जबलपुर इंदौर और भोपाल में उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम काम कर रहे हैं. इ सी वर्ष 2013-14 में 252 शिकायतें उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम को प्राप्त हुई थीं, जैसा कि कहा गया कि उपभोक्ताओं की कोई चिंता नहीं होती है,उपभोक्ताओं के लिए नियामक आयोग कुछ नहीं करता है, विरोधी दल को यह भाषण अच्छा लगता है. मैंने तो शुरू में ही कहा था कि वेद पढ़ें लभेद मत पढ़ो.
श्री मुकेश नायक – अपने विधान सभा क्षेत्र में यह भाषण करके देखना आपको अगले चुनाव में पता चल जायेगा.
श्री शंकरलाल तिवारी – आपके यहां पर भी आकर करूंगा आप चिंता न करें. माननीय मैं कह रहा था कि 252 शिकायतें इन उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम में आयीं और इन 252 में से 201 शिकायतें उसी वर्ष निराकृत की गई हैं उपभोक्ताओं के हित में, शेष शिकायतों का बाद में उ सी वर्ष निपटारा किया गया है. अकेले उपभोक्ता फोरम ही नहीं नियामक आयोग के माध्यम से ही उपभोक्ता फोरम के बाद में बिजली लोकपाल की भी व्यवस्था की गई है. यदि उपभोक्ता फोरम में उपभोक्ता शिकायत करता है लेकिन वह संतुष्ट नहीं है निराकरण से तो वह विद्युत लोकपाल के यहां पर अपील कर सकता है जिसका कार्यालय भोपाल में है. इस विद्युत लोकपाल के द्वारा वर्ष 2013-14 में 91 उपभोक्ताओं की अपील का निपटारा किया गया है.
इस तरह से मेरा कहना है कि नियामक आयोग के बनने के बाद में जितना तेजी से बिजली के क्षेत्र में काम हुआ है, पिछले 2003 से लेकर के जब हम2015 में बात कर रहे हैं चाहे उत्पादन रहा हो चाहे लाइन लॉस रहा हो चाहे मेंटेनेंस का मामला रहा हो, चाहे छोटे और लघु किसानों को, अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को दरों में कमी करके या सब्सिडी देकर के उनको लाभ देने की बात की हो. नियामक आयोग या विद्युत कंपनियों ने मिलकर के उपभोक्ताओं के हित में बैलेंस बनाने का काम और नियामक आयोग को जो काम करना चाहिए था उसने पूरी दक्षता के साथ में काम किया है.
मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि वार्षिक प्रतिवेदन परम्परा के अनुसार उनका वर्ष भर का किया हुआ जो कार्य है उसका एक संक्षिप्त विवरण है. जिस तरह से बिजली के मामले में पिछली सरकारों ने पूरे प्रदेश का सत्यानाश किया था एक कहावत है बुंदेलखण्ड की कि कहीं पर भी पानी बरसे पर बाढ़ तो केन में ही आती है. बिजली के मामले में पिछली सरकार फेल हुई थी. वह जलन और घाव अभी तक नहीं जा रहे हैं और समस्या ऊपर से यह फंस गई कि मान्यवर मुख्यमंत्री जी ने और भाजपा की सरकार ने बिजली का उत्पादन, लाइन लॉस , मेंटेनेंस यह सब इतनी तेजी से किया है कि यह भी अभी हमारे प्रतिपक्ष के नेता कह रहे थे कि हम बिजली बेचते हैं वह रेट की बात कर रहे थे तो मंत्री जी उनको समझा देंगे क्योंकि उनकी पुरानी आदत है कि हर धंधे में दलाली होना ही चाहिए, हर धंधे में कमीशन होना चाहिए और इसलिए नियामक आयोक के प्रतिवेदन पर चर्चा में भी कांग्रेस के मित्र ने अपनी वह पुरानी बिजली की हार है, सड़कों की मार है, दिग्विजय सिंह के जमाने का हाहाकार है, वह नियामक आयोग के प्रतिवेदन में भी वोमिट करने से नहीं चूके हैं.
सभापति महोदय नियामक आयोग बिजली कंपनियां और प्रदेश की सरकार और मुख्यमंत्री जी को तो मैं धन्यवाद दूंगा कि निरंतर अपने खजाने से पिछले 12 वर्षों से , मैं भी लगातार 2003 से आप लोगों के आशीर्वाद से यहां पर बैठ रहा हूं , लगातार सरकार के खजाने से उन्होंने बिजली को आम आदमी के हितों तक पहुंचाने का काम किया है. आज भी जहां पर कृषि को अनुसूचित जाति जनजाति को सब्सिडी दी जा रही है वहीं पर शहरी क्षेत्र में झुग्गी झोपड़ी वालों को गरीबी रेखा से नीचे वाले अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को 30 यूनिट बिजली फ्री देने की बात हो रही है. मैं नियामक आयोग के इस प्रतिवेदन का स्वागत करता हूं और अपेक्षा करता हूं कि नियामक आयोग आगे जाकर और उपभोक्ताओं के हितों के लिए अधिक तेजी से इच्छाशक्ति के साथ में आगे आयेगा. आपने बोलने का समय दिया धन्यवाद्.
( व्यवधान )
श्री रामनिवास रावत- श्री शंकर लाल तिवारी जी बहुत अच्छे से आगे बढ़ रहे थे लेकिन नंबर नहीं आ रहा है. लेकिन वोमिट जैसे शब्दों का चयन तो तिवारी जी न करें. इससे आप ही हल्के होते हैं.
श्री शंकरलाल तिवारी—वापस ले लूंगा, आप जब जी भर के ओछरते हो तब हम नहीं बोलते हैं, हमने तो वोमिट बोला है ..
सभापति महोदय—तिवारी छोड़िये विषय को ,आगे चलने दें सदन को.
श्री कमलेश्वर पटेल ( सिहावल )—माननीय सभापति महोदय, विद्युत नियामक आयोग पर चर्चा के लिए आपने समय दिया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद. सभापति महोदय, विद्युत नियामक आयोग की क्या स्थिति है ,आप इसमें अगर देखेंगे ,विद्युत मंडल की जो सभी कंपनियां हैं ,वहां पर कितनी शिकायतें दर्ज हुईं और कितनों का निराकरण हुआ इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि लोगों का उस पर कितना विश्वास है. लोग विद्युत नियामक आयोग में जाना पसन्द नहीं करते. उसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि जो हमारे महानुभाव रिटायर हो जाते हैं उनके व्यवस्थापन की वहां व्यवस्था हो गई है. और उसके कारण से जो इन्टरेस्ट होना चाहिए काम के प्रति वह नहीं है. यह आयोग यदि बनाया गया है तो यह किसानों के, गरीबों के और आम जनता के हित के लिए बनाया गया है न कि लोगों के व्यवस्थापन के लिए बनाया गया है. माननीय सभापति महोदय, अभी हमारे तिवारी जी बहुत प्रशंसा कर रहे थे कि किस तरह से बिजली विभाग में कार्य चल रहा है और बिजली की उपलब्धता की बात अगर हम करें तो हमने कई बार यहां सदन में ही ,और बजट पर जो किताब मिलती है उसमें भी हमने देखा है . मध्यप्रदेश में 15000 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है और खपत 9000 मेगावाट की है. तो इसके बीच की जो बिजली है वह कहां जा रही है. एक तरफ हम कृषि कर्मण अवार्ड की बात करते हैं ,बहुत बड़ी बड़ी बातें करते हैं. तो हम किसानों को कितनी सुविधा दे रहे हैं यह कहीं समझ में नहीं आता. हम बात करते हैं कि हम सबसिडी दे रहे हैं ,पर किसानों को सबसिडी मिल नहीं रही है. किसानों को मिलने वाली बिजली की दर दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. तो फिर हम सुविधा दे कहां रहे हैं ,यह समझ से परे है. दूसरा, हमको तो जो जानकारी है उसके हिसाब से गरीबी रेखा से नीचे जो जीवन यापन कर रहे हैं उनके लिए जो सबसिडी की व्यवस्था सरकार की तरफ से बिजली विभाग की होनी चाहिए ,कई वर्षों से उनको सबसिडी नहीं दी गई. अगर आज की इस चर्चा में यह व्यवस्था बनायें कि जो गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे हैं ,जो उनको सबसिडी मिल रही है वह बहुत कम मिल रही है और कई वर्षों से यह व्यवस्था नहीं बनी है ,यह सबसिडी की व्यवस्था अगर हो जाती है ,सबसिडी ज्यादा हो जाती है तो शायद अभी जो गरीबों का बिजली का बिल एकबत्ती
कनेक्शन धारी का 500 रूपये, 800 रूपये आ रहा है शायद वह कम हो जाय.. और जो सबसे बड़ी समस्या गरीबों के सामने,किसानों के सामने है उनको शायद उससे निजात मिल सके. बात कर रहे थे कि बहुत सारा काम हुआ है, काम हुआ है, राजीव गांधी विद्युतीकरण में, जब दिल्ली में हमारी सरकार थी ..
सभापति महोदय—विद्युत नियामक आयोग के बारे में बोले..
श्री कमलेश्रर पटेल—विद्युत नियामक आयोग पर ही बात कर रहे हैं. ..
श्री मनोज पटेल—कमलेश्वर जी, ये राजीव गांधी विद्युतीकरण को छोड़ो यार, पांच हजार करोड़ देकर मध्यप्रदेश सरकार ने अपने खजाने से काम किया है. अलग से बजट में पैसा एलाट किया है. चाहे जब राजीव गांधी विद्युतीकरण...(व्यवधान ) अरे कुछ अच्छा किया है तो बोलना चाहिए, कांग्रेस के शासन में आपको नींद नहीं आती थी. रात भर सो नहीं पाते थे. ये जरा विचार करो, अब पंखे और ए.सी. में सोते हो.
…(व्यवधान )...
श्री कमलेश्वर पटेल—माननीय सभापति महोदय, आप व्यवस्था दीजिए, हम बतायेंगे. सभापति महोदय, आप अभी का भी आंकड़ा निकलवा लें. हम अनुपूरक बजट में देख रहे थे. कहीं जिक्र नहीं था कि केन्द्र सरकार से हमको कितने पैसे मिले. जब हमारी यूपीए की सरकार थी, राजीव गांधी विद्युतीकरण में करोड़ों-करोड़ रुपये दिये. पूरे देश में दिया, मध्यप्रदेश को भी दिये. फीडर सेपरेशन के काम हो. हम इसी से संबंधित बात कर रहे हैं. सत्ता पक्ष के साथियों ने इस तरह की बात की है, इसलिए हम यह बात कर रहे हैं. करोड़ों रुपये केन्द्र सरकार ने दिये. उसी विद्युतीकरण का काम हुआ है. उसमें भी इतना घटिया काम हुआ है. आदरणीय तिवारी जी जो मेंटेनेंस की बात कर रहे हैं. हमारे साथ 2-4 जगह चलें. हम बताते हैं कैसे काम हुआ है. हो सकता है कि तिवारीजी के क्षेत्र में बहुत बढ़िया काम हुआ हो. एक समाचार पत्र है जो पूरे रीवा संभाग में एक ही छपता है और सब जगह जाता है.
सभापति महोदय—विषय पर बोलें.
श्री कमलेश्वर पटेल—सभापतिजी, विषय पर ही चर्चा कर रहे हैं. जो हालात हैं वह बता रहे हैं. ट्रांसफार्मर जल गये हैं. एक रामकी-जानकी पता नहीं कौन सी कंपनी थी, उस कंपनी ने राजीव गांधी विद्युतीकरण में जो ट्रांसफार्मर के काम किये उसमें 6-6 महीने, साल-साल भर से ट्रांसफार्मर जले हैं तो बदलने का कोई काम नहीं किया है.हमने विधानसभा में प्रश्न लगाया था तो थोड़ी तत्परता दिखाई. इस तरह के हालात हैं. मेंटेनेंस की बात करें तो वह बिलकुल नहीं हो रहा है. विद्युतीकरण तो कर देते हैं लेकिन अगर कहीं तार टूट गया है. कहीं अंधड़ में खम्भा गिर गया है तो कोई देखने वाला नहीं है.
समय 4.32 बजे उपाध्यक्ष महोदय (श्री राजेन्द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए.
उपाध्यक्ष महोदय, लोक अदालतों के संबंध में हम हमारे जिले की ही बात कर रहे हैं. लोक अदालत में जिन किसानों ने बिजली का बिल जमा कर दिया या उनके ऊपर अवैध बिल का प्रकरण बनाया था, उसमें पैसा जमा करने के बाद भी उनसे दुबारा पैसा जमा कराया गया, जबकि उनके पास रसीद थी. कई किसानों को तो जेल के अंदर डाल दिया गया. पुलिस के वारंट जारी हो रहे हैं. आज किसान परेशान है. बिजली की समस्या को लेकर किसान सबसे ज्यादा परेशान है. मेरा आपके माध्यम से सरकार से निवेदन है कि व्यवस्था बनानी चाहिए. हम किसानों की बात तो करते हैं. हम कृषि कर्मण अवार्ड की बात करते हैं लेकिन जो लोग मेहनत करके यह अवार्ड सरकार को दिलवा रहे हैं, उनके हित की बात कहीं नहीं हो रही है. उनको वह सुविधा मिल नहीं रही है.
उपाध्यक्ष महोदय, आखरी बात कह रहा हूं. एक तरफ देखने को मिला है कि जो उद्योग स्थापित हैं. उद्योगपतियों को तो हम सस्ती बिजली दे रहे हैं लेकिन किसानों को सस्ती बिजली नहीं दे रहे हैं. इस पर भी सरकार को विचार करना चाहिए. उद्योगपतियों को बहुत सस्ती बिजली दे रहे हैं, उनका बिल अगर ज्यादा आ गया तो समझौता राशि भी बहुत कम कर लेते हैं लेकिन किसानों के साथ, गरीबों के साथ यह स्थिति नहीं है. हमारा सरकार से निवेदन है कि अगर हम बात करते हैं तो कुछ काम करके भी दें. आपने बोलने का अवसर दिया बहुत बहुत धन्यवाद.
डॉ मोहन यादव(उज्जैन-दक्षिण)—उपाध्यक्ष महोदय, मेरे मित्र कमलेश्वर जी और माननीय मुकेश जी को सदैव सम्मान के साथ देखता हूं कि वे कभी विषय से बाहर नहीं जाते लेकिन कमलेश्वरजी, मुकेशजी बगैर तैयारी के एक कर्मकांड जैसा कि बोलना है तो बोलना है.
उपाध्यक्ष महोदय, मैं इनसे पूछना चाहता हूं कि एक हेक्टेयर से कम या एक हेक्टेयर के किसानों के, अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों से विद्युत कंपनी यदि कोई बिल लेती हो तो एकाध बिल का उदाहरण बता दें तो ज्यादा अच्छा रहेगा. मेरे मित्र तिवारीजी ने जो बात रखी थी, मैं उसको दोहराना नहीं चाहता हूं. आपने कहा कि किसानों को क्या राहत दी है. जब यह विषय सदन में आ चुका है. इन्होंने सुना होगा कि 5 हार्स पावर तक के कनेक्शन के लिए सरकार को जो 31 हजार रुपया का खर्च आता है उसमें मात्र 6 हजार रुपये लेकर, 25 हजार रुपये का अनुदान सरकार दे रही है. इससे बड़ा प्रमाण क्या होगा. वह प्रमाण भी इनको नहीं दिख रहा है. अब इससे बड़ा प्रमाण क्या होगा, वह प्रमाण भी इनको नहीं दिख रहा है. 3 हार्सपॉवर तक का कनेक्शन जो 3600 रूपये मात्र लेते हैं एक्चुअल वह सरकार को 17874 रूपये में पड़ता है और इसके लिये सरकार अपने बलबूते पर 7400 करोड़ में भी 5500 करोड़ रूपया एमपीईबी को पेमेंट कर चुकी है, यह नियामक आयोग की आवश्यकता कहां से पड़ी. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपको याद दिलाना चाहूंगा यह नियामक आयोग इसीलिये हुआ कि पुरानी सरकारों ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जी के समय जो बिजली फ्री करने के बाद बिजली विभाग का जो बंटाढार किया गया, उसी के कारण 1998 में माननीय अटल बिहारी बाजपेयी जी की सरकार के समय यह नियामक आयोग का गठन किया गया. सरकार कोई भी हो, लेकिन जो यह मूलभूत सुविधायें हैं जिनका कोई विकल्प नहीं है, ऐसी व्यवस्थाओं को अपने राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण से राजनीतिक जोड़-घटाव के कारण से दुरूपयोग न करें, इसलिये नियामक आयोग बना था.
उपाध्यक्ष महोदय-- मोहन जी, नियामक आयोग विद्युत अधिनियम 2003 के तहत बना है.
डॉ. मोहन यादव-- यह 1998 में बना है, 2003 में संशोधन हुआ है. मैं आपको फिर बताना चाहूंगा, विद्युत नियामक आयोग 1998 में बना है और आप जो बता रहे हैं 2003 में यह संशोधित हुआ है और उसके बाद राज्य का और केन्द्र का अपना-अपना नियामक अयोग काम कर रहा है और उसी के अंतर्गत जो हमारी नई-नई योजनाओं का जो लाभ मिला है, मैं दोहराना नहीं चाहता हूं समय की सीमा भी है. हमारे पूर्ववर्ती मित्र जैसा कि मैंने कहा वह दिशा भटक गये और चूंकि किसी न किसी कारण से सत्ता दूर जाती है जाये, लेकिन सत्ता में अपनी जो मूल पकड़ है उसको बनाये रखना चाहिये. दिशा भटकते हुये उन्होंने जो बात रखी मैं उसे दोहराना नहीं चाहता हूं. जैसा मैंने कहा कि 30 यूनिट तक के जो गरीबी रेखा वाले लोग हैं उनको सरकार न केवल बिजली फ्री दे रही है बल्कि 2013 के पहले जिनका ओवर ड्राफ्ट हुआ है, किसी कारण से वह बिल भुगतान नहीं कर पाये, उनका भी बिल पूरा माफ कर दिया गया है. आयोग ने 2013-14 का जो प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है मूल रूप से इसी पर बात करना चाहिये थी. आप देखियेगा, विद्युत नियामक आयोग के प्रतिवेदन से स्पष्ट है आयोग अधिनियम द्वारा दिये गये कार्यों का निर्वहन करता है जो कार्य उसको देते हैं, उसके बाहर वह नहीं जाता है, इसलिये समय-समय पर वह संशोधित आदेश भी निकालता है. आप देखिये खुदरा रिटेल विद्युत प्रदाय में भी संशोधन किया गया है, इसी कारण से बायोमास, लघु जल विद्युत परियोजना, ठोस अपशिष्ट और सौर ऊर्जा जैसे परियोजना के टैरिफ भी अलग से जारी करने का भी इसी नियामक आयोग के आदेश का पालन सरकार ने किया है. हम सब देखते हैं इस नियामक आयोग के आधार पर ही, जब ट्रांसफार्मर जल जाते हैं तो ट्रांसफार्मर को समय सीमा में लगाने का काम भी नियामक आयोग के आदेश पर होता है. इसी के आधार पर जो विभिन्न शिकायतें हुई हैं और उनके आधार पर जो कार्यवाहियां हुई हैं, मैं कुछ उनकी बानगी आपको देना चाहूंगा. विद्युत नियामक आयोग द्वारा उपभोक्ता की शिकायतों का निवारण करने के लिये तीनों कंपनियों ने अलग-अलग अपने उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम भोपाल, इंदौर जबलपुर में स्थापित किये हैं.
वर्ष 2013-14 में 252 शिकायतें प्राप्त हुई हैं जिसमें से 201 शिकायतों का निवारण किया गया है, शेष शिकायतों का निवारण भी अगले वर्ष हो जायेगा. उपभोक्ता फोरम के निर्णय से असंतुष्ट होने पर विद्युत लोकपाल की बात माननीय तिवारी जी ने कही है, वहां भी आप अपील कर सकते हैं और 2013-14 में विद्युत लोकपाल द्वारा 91 प्रकरणों का निराकरण किया गया है. यह जो आयोग बना है, बेहतर होता इस आयोग के माध्यम से हम इसकी गंभीरता को समझते हुये चूंकि एक बहुत बड़ा काम सरकार ने किया है जिस तरह से पूर्ववर्ती मेरे वक्ताओं ने जो बात कही विरोध के लिये विरोध करना. बिजली के मामले में आपने स्वयं ने उसके पहले मोटर कराधान के मामले में जो तारीफ की है और जो पुरानी सरकारों से तुलना करते, बाकई हम सबको ध्यान में आ जाता है, सड़क, बिजली और पानी के मामले में जिस प्रकार से सरकार ने काम किया है, वह अद्भुत है.
आज के इस अवसर पर जो वार्षिक प्रतिवेदन 2013-14 मध्य प्रदेश विद्युत नियामक अयोग का जो प्रस्तुत हुआ है, उस पर अपनी बात यहीं खत्म करते हुये अपनी बात को इस रूप में लेता हूं कि बेहतर होता है कि जिस विषय पर बात की जाये उस विषय पर विस्तार से और उस विषय की कमियों पर विपक्ष अपनी बात रखे, लेकिन दुर्भाग्य से दिशा भटकते हुये मात्र जब बिजली का विषय आयेगा, मंत्री जी का विषय आयेगा तब आप अपनी बात कर लें, लेकिन कमी निकालना यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बात है. आज के ही दिन समाचार पत्रों में छपा है कि आज तक का रिकार्ड टूटा है सर्वाधिक रूप से जिस प्रकार से उपभोग के आधार पर विद्युत की पूर्ति विभाग द्वारा की गई है, बाकई वह काबिले तारीफ है. आपने बोलने का मौका दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्री सचिन यादव (कसरावद) – माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के वार्षिक प्रतिवेदन पर चर्चा में अपनी बात रखने के लिये मैं खड़ा हुआ हूं. उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के गठन का जो उद्देश्य था मैं समझता हूं कि मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग अपने उस उद्देश्य से भटक रहा है . मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग का जो काम है वह बिजली के उपभोक्ताओं का संरक्षण करना बिजली कंपनी पर सतत निगाहें रखना ही मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग का काम है. लेकिन देखने में यह आ रहा है कि बिजली कंपनियों का प्रदेश में जो काम चल रहा है उन बड़ी बड़ी बिजली कंपनियों के हितों का ध्यान यह मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग कर रहा है. उपभोक्ताओं की जो परेशानी है, जो समस्या है उस पर आयोग का ध्यान नहीं है, न ही आयोग की प्राथमिकताओं में यह चीजें हैं. जो बिजली कंपनियां प्रदेश में काम कर रही हैं वह बिजली के बिल के नाम पर उपभोक्ताओं का मानसिक और आर्थिक शोषण कर रही हैं. बिजली की कंपनियां एक केन्द्र बन कर के रह गई हैं. समय समय पर समाचार पत्रों और टीवी के माध्यम से जानकारी मिलती है कि प्रदेश के गरीब किसान भाई, मजदूर साथी बिजली विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की असंवेदनशीलता के काऱण आत्महत्या जैसे बड़े कदम भी उठाने पड़ रहे हैं.
उपाध्यक्ष महोदय सरकार एक तरफ बिजली में सरप्लस स्टेट होने का दावा करती है. वास्तव में यदि सरप्लस स्टेट बिजली में है तो फिर क्या कारण है कि मध्यप्रदेश के किसान भाईयों को 24 घंटे बिजली नहीं दी जा रही है. सरप्लस स्टेट में तो 24 घंटे बिजली मिलना चाहिये. प्रदेश में जो सेवायें बिजली कंपनी को उपभोक्ताओं को देना चाहिये, वह सेवायें नहीं दी जा रही है. उपभोक्ता जब बिल नहीं भर पाते हैं तो बिजली विभाग के लोग ...
खाद्य मंत्री (कुंवर विजय शाह) – उपाध्यक्ष महोदय, बिजली कंपनी पर चर्चा नहीं हो रही है . चर्चा हो रही है मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग पर, उस पर माननीय सदस्य बोलें. विद्युत कंपनियां तो नियामक आयोग से बंधी हुई हैं. नियामक आयोग के निर्देश पर विद्युत कंपनियां उसका पालन करती हैं. आपसे निवेदन है माननीय सदस्य मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग पर बात करें.
श्री सचिन यादव – मंत्री जी बिजली कंपनियां मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के अण्डर में ही आती हैं.
श्री यादवेन्द्र सिंह – माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मंत्री जी से मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने यह भी सिफारिश की थी कि 5 हजार लेकर के 25केवी के ट्रांसफारमर और 10 हजार रूपये में 100केवी के ट्रांसफारमर लगाओ . पूरे प्रदेश में किसानों के साथ में जो शोषण हो रहा है वह भी नियामक आयोग के निर्देश में हो रहा है क्या. सरकार को इसकी रोकथाम करना चाहिये. इस भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना चाहिये. इसके लिये सरकार कुछ इंतजाम करे .
श्री सचिन यादव – माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग का मुख्य काम मध्यप्रदेश के बिजली के उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखना उनका हित संरक्षण करना न कि बिजली कंपनियों का संरक्षण करना. अभी हमारे सत्ता पक्ष के साथियों ने कई बातें यहां पर ऱखी हैं, मैं उनकी कई बातों से सहमत नहीं हूं. सत्ता पक्ष के साथी जमीनी हकीकत से बहुत दूर हैं. एक काल्पनिक दुनिया में हमारे सत्ता पक्ष के लोग जी रहे हैं. आज जो हमारे किसान साथी हैं, उनसे पांच हार्स पॉवर के बिजली के बिल के नाम पर साढ़े सात हार्स पॉवर का बिजली का बिल लिया जा रहा है. उनसे मन माफिक तरीके से बिजली के बिल वसूले जा रहे हैं और कहीं कोई उनकी सुनवाई नहीं हो रही है.
उपाध्यक्ष महोदय, एक जनवरी,2009 से 2011 के बीच में लगभग 2 लाख 13 हजार 600 प्रकरण दर्ज किये गये थे, उनमें से 1 लाख 30 हजार प्रकरण कृषि क्षेत्र के थे और 38 हजार प्रकरण उद्योग क्षेत्र के थे. यह जानकारी हमारे माननीय ऊर्जा मंत्री जी ने 5 मार्च,2013 को इस सदन में अतारांकित प्रश्न के माध्यम से उपलब्ध कराई थी. मैं यह जानना चाहता हूं कि यह जो प्रकरण दर्ज किये थे, जो 38 हजार प्रकरण औद्योगिक क्षेत्र से संबंधित हैं, क्या इस सरकार ने उनके ऊपर किसी प्रकार की कोई कार्यवाही की है. क्या उनकी सम्पत्ति कुर्क की गई, क्या उनके ऊपर कोई प्रकरण दर्ज किये गये, क्या उनके ऊपर कोई कार्यवाही की गई. मैं समझता हूं कि ऐसी कोई कार्यवाही आयोग की तरफ से नहीं की गई है. दूसरी तरफ हमारे जो किसान साथी हैं, अगर वह बिजली का बिल नहीं भर पाता है, तो उसको जेल भेजने का काम यह सरकार और यह आयोग लगातार करता आ रहा है. एक तरफ सरकार दावा करती है कि जो जले हुए ट्रांसफार्मर हैं, उन जले हुए ट्रांसफार्मरों को 72 घण्टे के अंदर बदलने का नियम सरकार ने बनाकर रखा है. लेकिन जमीनी हकीकत कहीं इससे परे है. 15-15 दिन, महीने महीने भर हो जाता है, लेकिन जले हुए ट्रांसफार्मर बदले नहीं जाते हैं. किसान बार बार अपने स्वयं के खर्चे पर, अपने स्वयं के वाहन से बिजली विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटता रहता है, लेकिन उसकी कहीं सुनवाई नहीं होती है. तो मेरा इस सदन के माध्यम से नियामक आयोग के जितने भी लोग यहां बैठे हैं, सरकार के जो लोग बैठे हुए हैं, उनसे मेरा अनुरोध है कि जो हमारे उपभोक्ता हैं, उन उपभोक्ताओं का संरक्षण करने का काम नियामक आयोग करे. उपाध्यक्ष महोदय, आपने समय दिया, धन्यवाद, जय हिन्द.
उपाध्यक्ष महोदय – श्री ओमकार सिंह मरकाम. मैं सभी माननीय सदस्यों से यह कहना चाहूंगा कि अपने भाषण को नियामक आयोग पर ही फोकस रखें. ध्यान उधर ही ज्यादा रखें.
श्री ओमकार सिंह मरकाम (डिण्डोरी) – उपाध्यक्ष महोदय, बिजली इंसान की बहुत बड़ी आवश्यकता है और इस विषय को लेकर के तमाम तरह की विद्युत वितरण कम्पनियों के बीच में नियामक आयोग अपनी बेहतर नीति का निर्धारण करके और अंतिम व्यक्ति तक सुलभ बिजली पहुंचे, इसके लिये मैं समझता हूं कि नियामक आयोग को काम करने की आवश्यकता होती है.
श्री रामनिवास रावत – उपाध्यक्ष महोदय, आपने निर्देश दिया, आपके निर्देश का पूर्णतः पालन करेंगे. लेकिन नियामक आयोग का जो प्रतिवेदन है, उसके पृष्ठ 20 पर दिया हुआ है कि “आयोग द्वारा राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों हेतु प्रचालन, अनुपालन, मानदण्ड, यथा फ्यूज ऑफ कॉल का निवारण, उपभोक्ता को विद्युत प्रदाय पुनर्स्थापित किये जाने हेतु त्रुटियों में सुधार, मीटर(मापयंत्र) संबंधी शिकायतें, बिलिंग की त्रुटियों में सुधार, रुके हुए/खराब मीटरों तथा जले हुए ट्रांसफार्मरों को बदलने, उपभोक्ता शिकायतों का निराकरण आदि हेतु निर्दिष्ट समय सीमाओं को भी निर्धारित किया गया है.” तो हम क्यों नहीं चर्चा कर सकते.
उपाध्यक्ष महोदय -- नहीं, मैं कह रहा हूं कि उधर फोकस रखिये.
श्री रामनिवास रावत -- यह सब इस नियामक आयोग के पृष्ठ 20 में दिया हुआ है. यह आप देख लें. इसमें यह सारी चीजें कवर होती हैं.
संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) -- उपाध्यक्ष महोदय, निर्धारित करना और संचालन करना , दोनों में अंतर है.
श्री रामनिवास रावत – अभी मंत्री जी ने कहा कि नियामक आयोग क्या है, वह किताब भी लेकर गये, आप पृष्ठ 20 पर पढ़ लो. तब इंट्रप्ट करना.
राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य) – उपाध्यक्ष महोदय, विजय शाह जी का कहना भी यह था कि नियामक आयोग के दायरे के जो विषय हैं, उसी पर ही बात करें. उन्होंने गलत कहां कहा.
श्री ओमकार सिंह मरकाम – माननीय उपाध्यक्ष महोदय जी, माननीय मंत्री जी यहां जिस तरह से उत्तर देते हैं और बीच में अपनी अभिव्यक्ति करते हैं. मैं समझता हूँ अगर सच्चाई से अध्ययन करें तो ईश्वर में उन्हें, जो कर्तव्य करने का अवसर दिया है, उसमें हकीकत में कोई परिणाम ला सकें. यहां पर मध्यप्रदेश के अन्दर जो परिस्थिति बनी हुई है. उसमें नियामक आयोग वर्तमान समय में किसी भी प्रकार जनता के हित में निर्णय लेने में पूरी तरह अक्षम साबित हुआ है. नियामक आयोग के अधिकारी ए.सी. रूम में बैठकर निर्णय करते हैं. प्रदेश के अन्दर ही 2 नीति संचालित हैं. इस पर कभी नियामक आयोग ने अपना अभिमत नहीं दिया, न उस विषय में कभी सोचा. शहर के लोग आपके लिये महत्वपूर्ण हो जाते हैं, गॉव के लोग आपके लिए ग्रामीण हो जाते हैं क्योंकि वे आवाज नहीं उठा सकते, मीडिया में उनकी बात नहीं आ सकती. आप जैसे मंत्रियों को घेरकर अपनी बात नहीं कर सकते, इसलिए शायद गांव के लोगों को उतना ही पैसा देने के बावजूद, बिजली नहीं मिलती. शहर के लोगों को अगर एक घण्टे बिजली गायब होती है तो माननीय मंत्री जी चिन्तित हो जाते हैं. इंसान को बांटने के लिये आप लोगों ने नियामक आयोग के नियम बनाये हैं. यह मैं समझता हूँ कि क्या हमारे वास्तविक देश के संविधान के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने की यही परिकल्पना है ?
प्रदेश के अन्दर, नियामक आयोग देख ले कि 11 के.व्ही., 33 के.व्ही. के जो ट्रान्सफॉर्मर हैं, मैं पूरी सच्चाई के साथ कह रहा हूँ. यह राजनैतिक भाषण नहीं है. यह उस हकीकत का मेरा बयान है कि जो गांव के अन्दर के लोगों का दर्द के रूप में 11 के.व्ही., 33 के.व्ही. में प्रदेश के अन्दर हजारों मौतें हो जाती हैं. इनके 11 के.व्ही. लाईन के नीचे झुकने के कारण गरीबों की मौतें हो जाती है. उसमें एक रूपया का मुआवजा भी नहीं मिलता. नियामक आयोग नहीं समझ सकता कि गलती किसकी है ? तार किसका झुका है ? 11 के.व्ही. किसका है ? मैं यह कहना चाहता हूँ कि 11 के.व्ही. एवं 33 के.व्ही. कब बिछाई गईं? मैंटेनेन्स कर लीजिये, उसके बाद यह बात कहें कि हमारी सरकार बहुत बेहतर व्यवस्था दे रही है. 33 के.व्ही. लाईन एवं 11 के.व्ही. लाईन के मैन्टेनेन्स तो यह सरकार कर नहीं पा रही है एवं अपनी पीठ थपथपा रही है. हमारे देहात में कहते हैं, कहीं ऐसी बात होती है कि खुद अपनी बात कहें और खुद ही मस्त रहें. जनता के बीच में सच्चाई आना चाहिए.
उपाध्यक्ष महोदय, नियामक आयोग अगर इस विषय में 11 के.व्ही. एवं 33 के.व्ही. लाईन में देखेंगे तो प्रदेश के अन्दर 70 प्रतिशत 11 के.व्ही. एवं 33 के.व्ही. लाईन वह रिपेयरिंग और डिस्मेन्टल की स्थिति में हैं, उनकी मैन्टेनेन्स किये बिना आप अपना कानून बना देते हैं कि इतनी दर पर बिजली दी जाये. गरीबों को खासकर के दण्ड (पनिश) देते हैं. ऐसी स्थिति में नियामक आयोग के अधिकारियों द्वारा ए.सी. रूम में बैठकर निर्णय होता है. माननीय मंत्री जी, अगर एक बार आप बीहड़ क्षेत्र के गांव में बैठाकर, नियामक आयोग के निर्णय पर आप अगर किसी प्रकार से उसमें कोशिश करेंगे तो आपको हकीकत का पता चल जायेगा कि ग्रामीण जीवन कितना इन व्यवस्थाओं से समस्याग्रस्त है ? गांव में आप लोग दोहरे मापदण्ड अपनाये हुए हैं. मैं तो समझता हूँ आपकी नियत और नीति ही क्या है ? गरीब लोग अगर गांव में 100 लोगों का कनेक्शन है अगर दो लोग बिजली का बिल नहीं पटा पाये, उनका ज्यादा पैसा हो गया. 98 लोग पटा रहे हैं पर वे 2 लोगों के कारण आप बिजली काट देते हैं. यह किस अधिकार और किस नियम के तहत आपको अधिकार मिला हुआ है ? नियामक आयोग को कौन-सा अधिकार मिला हुआ है कि पूरी गांव की बिजली काटने के लिए आप निगम-मंडल के लोगों को कहते हैं. आपकी यह जो नीति और निर्णय है, यही आपकी सोच एक बड़े लोगों को अच्छा जीवन जीने के लिये, जो गांव के लोग देखकर के कहते हैं. ऐसी आपकी सोच है, हम चाहते हैं माननीय उपाध्यक्ष महोदय जी कि नियामक आयोग को सच्चाई के बीच में जाकर काम करने की आवश्यकता है. आज आपके बीच में जो विद्युतों की जो दर है, हम आपको बता रहे हैं. जिस दिन, अगर मंत्री जी चाहेंगे आप मेरे जिले में जा सकते हैं, दूसरे जिले में जा सकते हैं आप देखेंगे कि एक-एक व्यक्ति के पास दो-दो बिल पहुँचे हुए हैं. मेरे पास एक गरीब आदमी आया. उसने कहा कि भैया, मेरा तो एक ही बिल जलता है, दो मीटर लगे हुए हैं, दूसरे में तहसीलदार के न्यायालय से नोटिस पहुँचा हुआ है. मैंने कहा, ये तो हमारे अच्छे दिन के वादा करने वालों की सरकार है.
श्री ओंकार सिंह मरकाम - हम उम्मीद करेंगे,सरकार से, नियामक आयोग से बात करेंगे कि कहीं इसमें सुधार हो जाए, पर आज नियामक आयोग के जो अधिकारी हैं, विद्युत के जो हमारे मंत्री हैं, सच्चाई को स्वीकार करने की आवश्यकता है, माननीय उपाध्यक्ष महोदय, हालात यह हैं कि तार में करंट कम आता है,बोल्टेज डाउन रहता है, अगर तार को गांव वाले छू लेते हैं तो कहते हैं कि ज्यादा करंट नहीं है, जैसे ही बिजली के बिल छूते हैं तो उनको करंट लग जाता है कहते हैं कि कैसे भुगतान करेंगे, हालात यह हैं कि तार में करंट कम है, बिल में करंट ज्यादा आता है और ऐसी स्थिति में हम नियामक आयोग से चाहेंगे कि नियम बहुत बेहतर बनाना चाहिए, वेल सिंह भाई आप भी दण्ड से पीडि़त हो, क्या करोगे, सरकार में हो इसलिए उधर की बात करते हो, पर पीडि़त हो हम जानते हैं, हमारे मंत्री भी सच्चाई को जानते हैं, पर क्या करें, मुख्यमंत्री जी कहीं आउट न कर दें, इसलिए जबरदस्ती सरकार के पक्ष में कहते हैं कि बहुत अच्छा काम हो रहा है, पर सच्चाई यह है कि मंत्री पद न चला जाए , इसलिए बोलना पड़ता है और कई हमारे सदस्य इस ताक में भी बोल जाते हैं कि अभी विस्तार होने वाला है हमें मंत्री बना दें, तो यह सब अच्छी बात है, आपका प्रयास है । उसके लिए हम सहयोग कर रहे हैं, आप मंत्री बन जाओ, परन्तु गरीब आदमी तक बिजली पहुंचे, इसके लिए आपको प्रयास करना चाहिए । हम आपको बता दें 11 के.व्ही., 33 के.व्ही. लाईन ही नहीं है तो आपकी विद्युत सप्लाई कैसे होगी । मैं एक दिन अतरिया गांव जा रहा था, 11 के.व्ही का तार जो भानपुर लाईन है,वह टूट कर गिरा हुआ था, मैं वहां जैसे ही पहुंचा, आगे निकलना चाह रहा था, ईश्वर की कृपा हुई कि मुझसे पहले कुत्ता निकल गया, जैसे ही कुत्ता निकलकर गया,तार के संपर्क में आया, तुरन्त उसमें आग लग गई और स्पाट पर उसकी डेथ हो गई, मैंने गाड़ी को रूकवाया और भगवान से कहा कि आपने रक्षा की नहीं तो यह क्या होने वाला था,उस लाईन के लिए मैंने उस समय शिकायत की, आज दो साल हो गए हैं, पर उसकी मरम्मत नहीं हुई है, यह नियामक आयोग और हमारी विद्युत वितरण कंपनी की वास्तविक स्थिति है ।
उपाध्यक्ष महोदय - ओंकार सिंह जी, जो आपकी जगह शहीद हुआ है, आपको उसका एक स्मारक बनवा देना चाहिए ।
श्री ओंकार सिंह - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपको धन्यवाद देता हूँ, मैं आपको बताना चाहता हूँ डिण्डोरी जिले में इसका प्रमाण है और हमको इस बात का गर्व होता है कि डिण्डोरी जिले में कुक्करा मठ है, जहां भगवान शंकर जी का ऋण मुक्तेश्वर मंदिर है, उस मंदिर के हम दर्शन करते हैं । कल्चुरी समाज द्वारा उस कुत्ते की वफादारी पर यह मंदिर बनवाया गया था, जो आदमी कर्ज से मुक्त नहीं हो पाता, भगवान शंकर का वहां पर मंदिर हैं, मुझे इस बात का गर्व है, वहां बड़े -बड़े लोग आते हैं ।
श्री राजेन्द्र मेश्राम - अभी आप बोल रहे थे कि 11 के.व्ही. से करंट नहीं आ रहा है तो क्या बगैर करंट के कुत्ता मर गया ।
श्री मुकेश नायक - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, सरकार के ऊपर 1 लाख 10 हजार करोड़ रूपये का कर्ज हो गया है । मंत्रियों से मेरी प्रार्थना है कि थोड़ा वहां पर चले जाएं और दर्शन कर आएं ।
श्री प्रदीप अग्रवाल - उपाध्यक्ष महोदय, अनुसूचित जनजाति के 5 हार्स पावर के कनेक्शन सरकार फ्री में दे रही है, आप तो अनुसूचित जनजाति से आते हैं ।
श्री ओंकार सिंह मरकाम - अग्रवाल जी, आपको हमारा फ्री का कनेक्शन दिखने लगा और हम वाणिज्य कर वालों से पूछते हैं कि आप लोगों के व्यवसाय से जुड़े किन-किन सिस्टमों में छूट मिली हुई है । यह बहुत- बड़ा विषय हो जाएगा हमारी छूट पर अभी आप बहुत कम दे रहे हैं, हम तो कहते हैं प्रदेश के अंदर हमारे जिले में छटवीं अनुसूची लागू करने के लिए,आपकी सरकार यहां पर प्रस्ताव करेगी हम तो अशासकीय संकल्प भी ला सकते हैं कि जो संविधान में छटवीं अनुसूची के जो कार्य हैं, उसको हमारे जिले में लागू करके हम लोगों को आगे बढ़ने का अवसर देंगे आप लोग आरक्षण खत्म करने के लिए, बात करने के लिए, कहीं न कहीं दर्द महसूस करते हैं, मैं नियामक आयोग से अनुरोध करना चाहता हूँ ।
श्री घनश्याम पिरोनिया - आप लोग भ्रम फैला रहे हैं, समाज के होकर समाज को बदनाम कर रहे हैं । हम अनुसूचित जाति से आते हैं, आप निश्चिंत रहो आरक्षण कभी खत्म नहीं होगा ।
श्री ओंकार सिंह मरकाम - हम भी सतर्क हैं, आप इस बात को मत भूलिए कि आप लोगों की कूटनीति को न समझा जाए, आज भी हम हर प्रतिस्पर्धा में अपने आपको साबित कराने के लिए तैयार हैं, हम बता दें कि स्वतंत्रता की लड़ाई में अगर सबसे- बड़ी शहादत दी गई है, तो 1857 में शंकर शाह और रघुनाथ शाह की है और 1837 में अगर देखोगे तो बाबा तिलका माझी की शहादत है ।
उपाध्यक्ष महोदय - प्रतिवेदन पर चर्चा जारी रहेगी, सदन की कार्यवाही मंगलवार, दिनांक 15 दिसम्बर, 2015 को प्रात: 10:30 बजे तक के लिए स्थगित ।
सायं 05:00 बजे विधान सभा की कार्यवाही मंगलवार, दिनांक 15 दिसम्बर, 2015 (24 अग्रहायण,शक संवत्1937) के प्रात: 10:30 बजे तक के लिए स्थगित ।
भोपाल
दिनांक: 14 दिसम्बर 2015 भगवानदेव ईसरानी
प्रमुख सचिव
मध्यप्रदेश विधान सभा