मध्यप्रदेश विधान सभा

 

मंगलवार, दिनांक 14 मार्च 2023

 

(23 फाल्गुन, शक संवत्‌ 1944 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (श्री गिरीश गौतम) पीठासीन हुए.}

 

प्रश्न काल में मौखिक उल्लेख.

बी.बी.सी. द्वारा प्रसारित डाक्यूमेंट्री का अशासकीय संकल्प सर्वसम्मति से पारित किए जाने विषयक.

अध्यक्ष महोदय-- गोविन्द सिंह जी, बोलिए.

नेता प्रतिपक्ष (डॉ.गोविन्द सिंह)-- माननीय अध्यक्ष जी, मैं केवल आधा मिनिट में अपनी बात खत्म कर दूँगा. आज समाचार पत्र में पढ़ा कि कल विधान सभा में एक संकल्प बीबीसी के खिलाफ सर्वसम्मति से पारित हुआ है. अध्यक्ष जी, मैंने उस समय लास्ट में इसका विरोध किया था संकल्प सर्वसम्मति से पारित नहीं हो सकता, एक, दूसरा संकल्प का नियम है, संकल्प पूर्व से लगाया जाता है, नियम प्रक्रिया के तहत, कार्य मंत्रणा समिति में उसका प्रस्ताव आता है तब चर्चा होती है. शून्यकाल में कोई विषय उठाने के बाद इसको संकल्प में परिवर्तित किया जाए, जो नियम प्रक्रिया के तहत नहीं है, मैं इसका विरोध करता हूँ. इस तरह की परंपरा लोकतांत्रिक पद्धति, नियमों की, कानूनों की, सत्तापक्ष द्वारा धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं. इसकी मैं घोर निन्दा करता हूँ और बीबीसी के खिलाफ जो प्रस्ताव पारित किया है, उसकी भी घोर निन्दा करता हूँ. प्रस्ताव कोई सर्वसम्मति से नहीं हुआ, बहुमत के दम पर आपने किया है.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ.नरोत्तम मिश्र)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस वक्त यह संकल्प लाया गया, रखा गया, नेता प्रतिपक्ष सदन में मौजूद थे, एक बात, दूसरी बात, संकल्प यहाँ पर आपने मतदान से कराया है उसमें हाँ की जीत हुई है. तीसरी बात, सरकार पर आरोप लगाने के पहले अंतर्मुखी हों नेता प्रतिपक्ष, कि वे इतने ज्यादा सदन के प्रति उदासीन क्यों रहते हैं? अच्छा, वे अकेले उदासीन नहीं रहते, पूरा दल उस वक्त मौजूद था, आगे की बैंच माननीय कमल नाथ जी को छोड़ दें तो बाकी सब मौजूद थे. ये सब यहाँ पर मौजूद थे.

डॉ. गोविन्द सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मैंने खड़े होकर विरोध किया था.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सर्वथा मिथ्या बात है. आप रिकार्ड निकालकर देख लें वो अगर कहते हों.

श्री सज्जन सिंह वर्मा -- आपने विलोपित करवा दिया है.

अध्यक्ष महोदय -- नहीं विलोपित नहीं किया है.

श्री सज्जन सिंह वर्मा -- और संकल्प पारित होने का क्या यह तरीका है.

अध्यक्ष महोदय -- कोई बात विलोपित नहीं हुई है.

श्री सज्जन सिंह वर्मा -- नियम प्रक्रियाओं की किताब फाड़ी जाती है. नियम प्रक्रियाओं से आप सदन नहीं चलाते हो.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, यह अपनी वाहवाही कर रहे हैं नियम प्रक्रिया की किताब फाड़कर. यह उस पर खेद व्यक्त करें, यह इतने वरिष्ठ सदस्य हैं. अपने हाथ से अपनी पीठ ठोंक रहे हैं. यह गलत परम्परा है. नेता प्रतिपक्ष और सज्जन भाई भी, नेता प्रतिपक्ष नहीं बन पाए यह अलग बात है पर अपनी खीज ऐसे तो न निकालें.

श्री शैलेन्द्र जैन -- अध्यक्ष महोदय, सारे सदन की उपस्थिति में वह संकल्प ध्वनिमत से पारित हुआ है. आपकी उपस्थिति थी.

डॉ. गोविन्द सिंह -- आपने नहीं देखा.

श्री शैलेन्द्र जैन -- अब क्यों विरोध कर रहे हैं.

डॉ. गोविन्द सिंह -- आपने नहीं देखा. अगर आपकी नजरों में दृष्टि दोष है तो मैं उसके लिए कुछ नहीं कह सकता हूँ. मैंने लास्ट में विरोध किया था.

श्री सज्जन सिंह वर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा एक सेकंड का निवेदन है. आपने बीबीसी के विरुद्ध संकल्प पारित किया. आप उसको पूरा देख लेते. उसमें एक जगह..

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, क्या इनको बोलने की अनुमति दी गई है.

श्री विश्वास सारंग -- क्या इस पर डिसकशन होगा. (व्यवधान)

श्री सज्जन सिंह वर्मा -- विश्वास भाई सुन तो लो. (XXX) विपक्ष चुप बैठा रहेगा. यह संभव नहीं हैं. (XXX) (व्यवधान)

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- इनका जो मन करे, यह देश का अपमान करें. मोदी जी का विरोध करते करते देश का विरोध कर रहे हैं. फिर कहते हैं कि ईवीएम खराब है. फिर कहते हैं हम चुनाव हार जाते हैं. अभी जो चुनाव हुआ उसमें सूपड़ा साफ हो गया. कांग्रेस पार्टी का इसलिए सूपड़ा साफ हो जाता है. (व्यवधान)

श्री सज्जन सिंह वर्मा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस बीबीसी का आपने विरोध किया उसका एक सेंटेंस है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय -- आपकी बात आ गई है न. गोविन्द सिंह जी ने कह दिया.(व्यवधान)

श्री सज्जन सिंह वर्मा -- अध्यक्ष महोदय, मैं लंबी बात कर ही नहीं रहा हूँ. मैं तो एक सेंटेंस बोल रहा हूँ. बीबीसी की डाक्यूमेंट्री में एक शब्द (XXX) इसका भी विरोध कर दो. इसके खिलाफ भी ले आओ. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय -- यह नहीं लिखा जाएगा. बैठ जाइए. (व्यवधान)

श्री विश्वास सारंग -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सिर्फ आधा सेकण्ड दे दीजिए (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय --आप लोग बैठ जाइए (व्यवधान)

 

 

11.07 बजे

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा सदन से बहिर्गमन

 

डॉ. गोविन्द सिंह -- अध्यक्ष महोदय, यह सरकार की तानाशाही है, नियमों की धज्जियाँ उड़ाई गई हैं. इसलिए कांग्रेस पार्टी बीबीसी के खिलाफ जो निंदा प्रस्ताव पारित हुआ है उसके विरोध में सदन से बहिर्गमन करती है.

(नेता प्रतिपक्ष, डॉ. गोविन्द सिंह जी के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा बी.बी.सी. द्वारा प्रसारित डाक्यूमेंट्री का अशासकीय संकल्प सर्वसम्मति से पारित कर दिए जाने के विरोध में सदन से बहिर्गमन किया गया)

 

श्री विश्वास सारंग -- जब आसंदी से कोई निर्णय आ गया है तो उसके विषय में चर्चा नहीं होगी. कल इनको डांट पड़ी है.

अध्यक्ष महोदय -- मैं सदन को जानकारी दे दूं कि वह सर्वसम्मति का नहीं था उसमें प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ था और हां की जीत, हां की जीत करके पास हुआ है. यह कहना शायद ठीक नहीं होगा.

 

 

 

 

 

11.08 बजे तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

सी.एम. राइज स्‍कूल एवं आदर्श संस्‍कृत विद्यालय

[स्कूल शिक्षा]

1. ( *क्र. 2264 ) श्री उमाकांत शर्मा : क्या राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश के किन-किन जिलों के नगरों एवं ग्रामों में सी.एम. राइज विद्यालय एवं आदर्श संस्कृत विद्यालय प्रारंभ किये गये हैं? स्वीकृत विद्यालयों के नाम सहित जानकारी बतावें। इन विद्यालयों के संचालन हेतु कितनी-कितनी राशि कब-कब जारी की गई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) संदर्भ में इन विद्यालयों में कितने पद स्वीकृत किये गये हैं? विद्यालयवार जानकारी बतावें। कितने पदों पर पदस्थापना है, कितने पद रिक्त हैं? कितने पदों पर अतिथि शिक्षक शिक्षण कार्य कर रहे हैं? विद्यालयवार जानकारी देवें। (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के संदर्भ में कितने विद्यालयों के भवन स्वीकृत कर दिये गये हैं? स्वीकृत राशि सहित जानकारी बतावें। शेष विद्यालयों के भवन कब तक स्वीकृत कर दिये जावेंगे? इन विद्यालयों के भवन निर्माण हेतु कौन-कौन सी एजेन्सियों द्वारा डी.पी.आर. बनाई गई है एवं इन एजेन्सियों को कितना-कितना भुगतान कब-कब किया गया है? (घ) प्रश्‍नांश (ग) के संदर्भ में सी.एम. राइज विद्यालय सिरोंज एवं लटेरी एवं आदर्श संस्कृत विद्यालय का भवन कितनी राशि से स्वीकृत किया गया है एवं किस सर्वे नं. एवं रकबा नं. में निर्माण किया जावेगा? यदि भवन निर्माण की स्वीकृति नहीं हुई है तो कब तक भवन निर्माण की प्रशासकीय स्वीकृति दी जावेगी? (ड.) महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के माध्यम से संचालित आदर्श संस्कृत विद्यालय सिरोंज में कितने पद स्वीकृत हैं एवं कितने पदों पर नियमित शिक्षक पदस्थ हैं? यदि नियमित शिक्षक पदस्थ नहीं हैं तो कब तक पदस्थापना की जावेगी?

 

अध्यक्ष महोदय -- क्या आपको संशोधित उत्तर मिल गया है.

श्री उमाकांत शर्मा -- नहीं संशोधित उत्तर नहीं मिला है.

अध्यक्ष महोदय-- संशोधित उत्तर क्यों नहीं मिला है. पहले आप संशोधित उत्तर ले लीजिए.

श्री उमाकांत शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, मुझे आपका संरक्षण चाहिए.

अध्यक्ष महोदय -- मैं पूरा संरक्षण दूंगा, पहले आप संशोधित उत्तर ले लीजिए. अन्यथा आप पुराना पढ़ेंगे, नया वाला ले लीजिए.

श्री उमाकांत शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, मैं केवल दो प्रश्न कर रहा हूँ. सिरोंज में सीएम राइज विद्यालय बनाने का स्थान चिह्नित कर जो डीपीआर बनाई गई है उस स्थान पर बरसात में 3-3, 4-4 फिट पानी यानि कमर तक पानी अनेक बार भर जाता है. वह मैदान हॉकी का, क्रिकेट का नवाब के जमाने से ऐतिहासिक मैदान है. संकीर्ण मार्ग होने के कारण 15 किलोमीटर रेडियस के क्षेत्र से बसों का, वाहनों का आवागमन होगा तो बहुत परेशानी आएगी. उस जगह डीपीआर क्यों बनाई गई और उस डीपीआर पर खर्च क्यों किया गया. क्या माननीय मंत्री महोदय इसकी जांच कराकर ऐसे डीपीआर बनाने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे. यह ढाई हेक्टयर पर बनाया जा रहा है जबकि 10 हेक्टयर जमीन मध्यप्रदेश शासन ने दिनांक 7.12.2022 को उपलब्ध करा दी है. मैं मंत्री महोदय से जानना चाहता हूँ इस संबंध में अंतिम आदेश देने की कृपा करें कि नवीन स्थान पर कब से काम प्रारंभ हो जाएगा.

श्री इन्‍दर सिंह परमार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने जिस स्‍थान का डीपीआर बनाने के लिए कहा था वह जमीन पूर्व से ही शिक्षा विभाग के नाम है इसलिए उस स्‍थान का निर्णय किया था, चयनित किया था और इसलिए वहां की प्रक्रिया प्रारम्‍भ की गई थी लेकिन आदरणीय उमाकांत जी का आग्रह है तो आपने जिस स्‍थान का सुझाव दिया है जो दो ऐसे स्‍थान बताए हैं उसमें एक स्‍थान पांच किलोमीटर पहाड़ी पर है और दूसरा स्‍थान डेढ़ किलोमीटर है. पास में ही है, लेकिन जहां पर ग्रिड बना हुआ है वह थोड़ा जमीन से नीचे है वहां पानी भरने की संभावना है.

श्री उमाकांत शर्मा-- वहां पानी भरने की संभावना बिलकुल नहीं है और मैं चेलेंज कर रहा हूं कि दोनों जगह बरसात का सर्वे कराया जाए.

श्री इन्‍दर सिंह परमार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं उमाकांत जी के सभी प्रश्‍नों का पूरा जवाब दे रहा हूं.

अध्‍यक्ष महोदय-- उमाकांत जी आप बैठ जाइए.

श्री इन्‍दर सिंह परमार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कुछ रास्‍ते सकरे जरूर हैं परंतु बहुत वर्षों पहले से वह स्‍थान है. वहां की खास समस्‍या यह है कि वहां पर अन्य बच्‍चे भी खेल के लिए आते हैं और आजकल उसमें ऐसे लोग भी सक्रिय हो गए हैं जो उसको खेल के मैदान के रूप में रखना चाहता हैं. जिसमें कई सारे लोग उस खेल के मैदान से व्‍यवसाय भी करना चाहते हैं.

श्री उमाकांत शर्मा-- आज तक किसने व्‍यवसाय किया यह बताया जाए. असत्‍य जानकारी आ रही है, भ्रमित किया जा रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय-- उमाकांत जी आप मंत्री जी का पूरा उत्‍तर आ जाने दें.

श्री इन्‍दर सिंह परमार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उस पर बच्‍चे खेलते हैं यह बात सही है.

श्री उमाकांत शर्मा-- आप मुझे यह बताइए कि नवाबों के जमाने से आज तक उस मैदान का क्‍या व्‍यावसायिक उपयोग हुआ?

श्री इन्‍दर सिंह परमार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍कूल शिक्षा विभाग के नाम से दर्ज है फिर भी हमने यह तय किया है कि एक बार परीक्षण करने हमारे यहां से टीम जा रही है और जो माननीय विधायक जी का प्रश्‍न है या संशय है उसका समाधान करते हुए यदि आवश्‍यकता लगी तो हम स्‍थान परिवर्तन करेंगे. मैं सदन के माध्‍यम से आपको बताना चाहता हूं कि एक बार उनके साथ बैठकर, भ्रमण करके और यदि आवश्‍यकता पड़ी तो मैं स्‍वयं वहां जाकर देखकर उनके प्रश्‍नों का समाधान करूंगा. उसके बाद ही उस पर आगे कार्यवाही प्रारंभ की जाएगी.

श्री उमाकांत शर्मा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहता हूं. मैं बहुत ही पीडि़त और दुखी हूं, निरीह हूं. मैं गिड़गिड़ाकर, हाथ जोड़कर निवेदन कर रहा हूं कि मेरे साथ अन्‍याय मत होने दीजिए. अधिकारियों की तानाशाही मत चलने दीजिए. क्‍या कारण है.

अध्‍यक्ष महोदय-- उमाकांत जी आप कृपया कर बैठ जाइए. तरुण जी आप भी बैठ जाइए.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- तरुण जी आप भी दूसरे के ललना को पलना में खिलाने के लिए घूमते रहते हो आपको कुछ अपनी बातें तो उठाना नहीं है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सम्‍मानित विधायक निरीह नहीं हैं वह हमारे सम्‍मानित विधायक हैं उनके साथ कोई अन्‍याय नहीं होगा, वहां पर कोई अधिकारी राज नहीं होगा. सम्‍मानित विधायक की इच्‍छा के अनुरूप माननीय मंत्री जी बात करके ही इसे करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- उमाकांत जी मंत्री जी ने भी स्‍वयं कहा और संसदीय कार्य मंत्री जी ने भी कहा कि बिना आपकी इच्‍छा के विपरीत नहीं होगा. मंत्री जी ने तो यह भी कहा कि वह स्‍वयं चले जाएंगे इससे बड़ी बात और क्‍या हो सकती है. बिना आपसे पूछे नहीं करेंगे यह भी कह दिया. आपकी तीनों बातें मान लीं कि बिना आपकी इच्‍छा के नहीं होगा.

उमाकांत शर्मा -- मेरे क्षेत्र में अभी तक यह स्‍वीकृति नहीं हुई है. मेरा एक और निवेदन है कि डीपीआर की बात हो रही है. डीपीआर विदिशा में बनी स्‍वीकृति हो गई और उस मैदान पर तीस फिट तक कचरा निकला और अब वह निरस्‍त हो रहा है. कैसी डीपीआर बन रही है आप डीपीआर वालों पर कार्यवाही कीजिए.

श्री इन्‍दर सिंह परमार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह विदिशा की जिस जमीन का उल्‍लेख कर रहे हैं उस जमीन का जब स्‍वाइल टेस्‍ट किया गया तो वह जमीन भवन बनाने के पात्र नहीं पाई गई है लेकिन स्‍वाइल टेस्‍ट करना, उसका नापतोल करना, नक्‍शा तैयार करना यह प्रक्रिया भी साथ-साथ थी क्‍योंकि ऊपर से मैदान दिख रहा था, लेकिन जब स्‍वाइल टेस्‍ट किया गया था तो वह फेल पाई गई है इसलिए हम उस स्‍‍थान को बदलने का काम कर रहे हैं. जब स्‍वाइल टेस्‍ट किया तो पता चला कि वहां नहीं बन सकता है. पहले वहां कोई गड्डा होगा उसमें कचरा डाला जाता होगा. स्‍वाइल टेस्‍ट के पहले वह ऊपर से ऐसा नहीं दिख रहा था स्‍वाइल टेस्‍ट के बाद वह दिखा है इसलिए उसको हम कर रहे हैं.

श्री उमाकांत शर्मा-- डीपीआर बनाने वालों को जहां पानी बहता है बाढ़ आती है वह ज‍गह दिखाई नहीं देती है जहां कचरा डला है वह जगह दिखाई नहीं देती. मैं चाहता हूं कि आप ऐसी डीपीआर बनाने वालों को जो मध्‍यप्रदेश शासन का पैसा खराब कर रहे हैं, समय बर्बाद कर रहे हैं, महत्‍वकांक्षी योजना को नष्‍ट कर रहे हैं आप उनके खिलाफ कार्यवाही करेंगे?

श्री गोपाल भार्गव- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उमाकांत जी अभी परशुराम स्‍वरूप में हैं, ये दुर्वासा के स्‍वरूप में आयें, उसके पहले मैं, शासन की तरफ से अपने साथी मंत्री से आग्रह करता हूं कि उनकी मांग स्‍वीकार की जाये.

श्री इन्‍दर सिंह परमार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, कह चुका हूं कि वे जैसा चाहते हैं, वैसा ही हम समाधान करेंगे. हमारी प्रक्रिया पूर्ण हो जाये. अभी 2-3 दिनों में जब भी माननीय उमाकांत जी के पास समय होगा, उस समय मैं स्‍वयं उनके साथ जाकर, वह जगह देख आऊंगा.

श्री उमाकांत शर्मा- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी प्रश्‍न में मैंने आदर्श संस्‍कृत विद्यालय का निवेदन किया है. वर्ष 2013 में मेरे यहां मध्‍यप्रदेश की गीर्वाण वाणी, हमारी मातृभाषा, हमारी देवभाषा संस्‍कृत, जिसे माननीय मोदी जी और हमारे मुख्‍यमंत्री जी बहुत गौरवपूर्ण स्‍थान दिलाना चाहते हैं, वर्ष 2013 से मेरे यहां आदर्श संस्‍कृत विद्यालय स्‍वीकृत है लेकिन वहां न स्‍थाई स्‍टाफ है, न वहां उसका भवन है, वह भवन क्‍यों नहीं बना और कब तक बन जायेगा, समय-सीमा दें.

श्री इन्‍दर सिंह परमार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आदर्श संस्‍कृत विद्यालय के लिए हमने भूमि का आवंटन कर दिया है और आगे भवन निर्माण की प्रक्रिया हम प्रारंभ कर रहे हैं. मध्‍यप्रदेश में कुछ स्‍थान और हैं, जहां हम भवन निर्माण की प्रक्रिया कर रहे हैं. जल्‍दी ही वहां के भवन का निर्माण होगा ताकि संस्‍कृत में पढ़ने वाले बच्‍चों को पूरा लाभ मिल स‍के.

श्री उमाकांत शर्मा- आदर्श संस्‍कृत विद्यालय जो सिरोंज जिला विदिशा में है. वर्ष 2013 में स्‍वीकृत हुआ, वर्ष 2013 से 2023 आ गया और अब आप बता दें कि उसके भवन के लिए आप कब तक राशि देंगे ? और कब उसका काम पूर्ण होकर, विद्यालय अपने भवन में पहुंचेगा, और वहां स्‍टाफ पदस्‍थ हो जायेगा ?

श्री इन्‍दर सिंह परमार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रक्रिया चल रही है. उसकी नाप-तौल करके प्रक्रिया आगे ले ली है, जल्‍द ही माननीय सदस्‍य को भी उसका नक्‍शा और डिज़ाइन बताकर हम राशि स्‍वीकृत करने का काम करेंगे.

श्री उमाकांत शर्मा- मैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय के माध्‍यम से मंत्री महोदय से पूछना चाहता हूं कि क्‍या प्रक्रिया 10 साल चलती है ? मैं गिड़गिड़ा रहा हूं, आपकी शरण में हूं, आपको दण्‍डवत प्रणाम कर रहा हूं, हाथ जोड़ रहा हूं 10 साल हो गए हैं.

अध्‍यक्ष महोदय- उमाकांत जी आप बैठ जायें.

श्री तरूण भनोत- गृहमंत्री जी आप देख रहे हैं ? आपके विधायक हाथ जोड़ रहे हैं. जब माननीय विधायक की यह हालत है तो प्रदेश की जनता की क्‍या हालत होगी? सदन में माननीय विधायक गिड‍़गिड़ा रहे हैं, यह दयनीय स्थिति है.

श्री इन्‍दर सिंह परमार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो प्रश्‍न माननीय विधायक ने उठाये हैं, मैं, उनका समाधान करने की बात कह चुका हूं. हम जल्‍दी समाधान करेंगे, उनको बताकर करेंगे. उन्‍हें इतना वो करने की जरूरत नहीं है.

श्री विजय रेवनाथ चौरे- सत्‍ताधारी पक्ष के विधायक की यह हालत है तो विपक्ष के विधायकों की क्‍या हालत होती होगी ?

श्री तरूण भनोत- गृहमंत्री जी, आप दबाव मत डालिये. उमाकांत जी हाथ जोड़ रहे हैं, उनकी बात सुनें. वे रो रहे हैं. अगर उन्‍होंने कोई घातक कदम उठा लिया तो ?

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- हम दबा नहीं रहे हैं. ये हमारे दल का मामला है. आपके खुद के दल में तो दलदल मचा हुआ है.

श्री तरूण भनोत- यह आपके दल का मामला नहीं है, यह इस सदन का मामला है. गृहमंत्री जी ने दबाव से पंडित जी को बिठा दिया है.

अध्‍यक्ष महोदय- अब हो गया. प्रश्‍न क्रमांक 2

 

 

सी.एम. राइज विद्यालयों के विज्ञापन

[स्कूल शिक्षा]

2. ( *क्र. 2233 ) श्री सज्जन सिंह वर्मा : क्या राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) स्‍कूल शिक्षा विभाग द्वारा सी.एम. राइज विद्यालयों के प्रचार-प्रसार के लिये वर्ष 2022-23 में प्रदेश के समाचार पत्रों में कुल कितनी राशि के विज्ञापन किस-किस मद से दिये गये हैं एवं किन-किन समाचार पत्रों को कितनी-कितनी राशि का भुगतान किया गया है? (ख) शासन की उक्‍त महत्‍वाकांक्षी योजना होने के बाद भी स्‍कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित कितने सी.एम. राइज विद्यालयों में नियमित प्राचार्य हैं तथा कितने सी.एम. राइज विद्यालयों में प्रभारी प्राचार्य हैं? स्‍कूलवार जानकारी दें। (ग) जिन सी.एम. राइज विद्यालयों में नियमित प्राचार्य नहीं हैं, उन विद्यालयों में नियमित प्राचार्यों की पदस्‍थापना कब तक कर दी जायेगी? (घ) उपरोक्‍त प्रश्‍नांश के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या उक्‍त स्‍कूलों को परिवहन व्‍यवस्‍था से जोड़ा गया है? यदि नहीं, तो क्‍यों?

राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा ( श्री इन्‍दर सिंह परमार ) : (क) स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सी.एम. राइज विद्यालयों के प्रचार-प्रसार के लिये कोई विज्ञापन नहीं दिया गया है, अतः शेषांश का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता है। (ख) स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित सी.एम. राइज विद्यालयों में पदस्थ नियमित प्राचार्य एवं प्रभारी प्राचार्यों की स्कूलवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) सी.एम. राइज योजना अन्तर्गत चयनित विद्यालयों में नियमित प्राचार्यों की पदस्थापना की जाना प्रक्रिया में है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (घ) सी.एम. राइज योजना अन्तर्गत चयनित विद्यालयों में परिवहन व्यवस्था जिले स्तर से निविदा जारी की गई थी। उज्जैन जिले के एक विद्यालय में एवं बड़वानी जिले में परिवहन प्रारंभ कर दिया गया है। शेष जिलों में पर्याप्त निविदाकर्ता उपलब्ध न होने के कारण या निविदाकर्ताओं द्वारा निविदा में भाग नहीं लेने के कारण परिवहन व्यवस्था प्रारंभ नहीं हो सकी है।

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के जवाब में माननीय मंत्री जी ने इस बात को दर्शाया है कि सी.एम.राइज स्‍कूल के विज्ञापनों के लिए जो करोड़ों-अरबों रुपया खर्च किया गया, इन्‍होंने उस बात से इंकार किया कि हमारे विभाग से कोई राशि खर्च नहीं की गई है. किसी भी विभाग से खर्च की गई हो, विभाग आपका है, करोड़ों रुपया यदि आप विज्ञापनों से वाह-वाही लूटने के बजाए, जिन स्‍कूलों के भवन नहीं है, स्‍कूलों के खेलने के मैदान नहीं हैं, एक बीजेपी विधायक यहां रो रहे हैं कि कमर-कमर तक पानी में स्‍कूल बना रहे हो, यह पूरे प्रदेश के लिए शर्म की स्थिति है. आपके सी.एम.राइज स्‍कूल की वजह से 3.5 लाख बच्‍चे सरकारी स्‍कूलों से पलायन कर गए हैं कि चलो बड़े स्‍कूल में भर्ती होंगे भविष्‍य बनेगा लेकिन आपके यहां प्राचार्य तक नहीं है. मेरा मूल प्रश्‍न यह है कि कितने प्राचार्य सी.एम राइज स्‍कूल डेढ़ दो साल हो गये हैं, उनको आरंभ किये. माननीय मंत्री जी आपकी दयनीय स्थिति यह है कि 350 स्‍कूलों की संख्‍या आपने बतायी, उसमें से 104 प्रभारी प्राचार्य हैं, 68 प्राचार्य आपके पास हैं, 178 पर लोक सेवक कार्य कर रहे हैं. मतलब दो साल में आप प्राचार्य का पद नहीं भर पाये,अच्‍छे शिक्षक ढूंढ नहीं पाये और भवन की स्थिति यह है कि भवन पुराने स्‍कूलों में इतनी बुरी स्थिति में हैं, जो उमाकांत जी का दर्द है, तमाम सारे जिलों में पुराने और जर्जर भवनों में, जब आपके पास भवन बनाने का पैसा नहीं था तो वाह-वाही लूटने के लिये क्‍यों इतने विज्ञापन दिये, बच्‍चों का भविष्‍य खराब हो रहा है. मेरा प्रश्‍न यह है कि प्राचार्य के पद आप कब तक भर देंगे. आपने अपने जवाब में कहा है कि समय बताना संभव नहीं है. आप पद लेकर बैठे हो, मंत्री हो. एक प्रश्‍न यह बता दें कि सारे स्‍कूलों में प्राचार्य का पद कब तक भर देंगे और सारे स्‍कूल भवन कब तक बन जायेंगे, यह मेरा एक प्रश्‍न है.

श्री इंदर सिंह परमार:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍य प्रदेश की सरकार ने सी.एम. राइज योजना के जो विद्यालय प्रारंभ किये हैं, वह बजट में प्रावधान करके, प्‍लानिंग के साथ किये हैं और इसीलिये आज हम पहले राशि जारी हो जाती थी और जगह कहां बनायेंगे, पता नहीं किस स्‍थान पर बतायेंगे. पहली बार ऐसा हो रहा है कि एक तो हम उस जगह की भी टेस्टिंग कर रहे हैं, ताकि भवन की अवधि लंबी रहे. इसी प्रकार से..

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दो साल हो गये हैं. यह जवाब ही गलत आता है. 2 साल हो गये है तो क्‍या जगह का चयन 20 साल में करोगे क्‍या ?

श्री इंदर सिंह परमार:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक-एक चीज जवाब देना चाहता हूं. सदस्‍य धेर्य रखें. केवल कीचड़ उछालने से काम नहीं चलेगा.पूरी योजना मध्‍य प्रदेश सरकार ने राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को ध्‍यान में रखते हुए बनायी गयी है. हमारे प्रदेश में जो स्‍कूल शिक्षा विभाग के पास हैं, वह 274 कुल स्‍कूल हैं. बाकी स्‍कूल हमारे ट्रायबल विभाग के पास में हैं. 274 स्‍कूलों में से 104, इसमें हमने पूरी प्रकिया अपनायी थी. सी.एम राइज विद्यालय के लिये हमने प्राचार्य और उप-प्राचार्यों का चयन किया था और उसी में से हमने यह नियुक्ति देने का काम करा है. 104 हमारे नियमित प्राचार्य हैं, 102 उप-प्राचार्य हैं और 68 ऐसे हैं जो उस चयन प्रक्रिया के अंतर्गत नहीं आते थे, लेकिन थोड़ा सा अंतर के साथ वह आते थे. ऐसे उनको प्रभारी प्राचार्य बनाकर के पूरे स्‍कूलों में व्‍यवस्‍था संचालित की जा रही है, अच्‍छी व्‍यवस्‍था है. रहा सवाल भवनों का, भवनों के बारे में लगातार डीपीआर बनने का काम, भवन निर्माण करने का काम प्रारंभ हो गया है और कई जगह पर, हमारे जिले में एक बिल्डिंग बनकर भी तैयार हो गयी है. पहली बार ऐसा हो रहा कि 12 महीने में 25-25 करोड़, 30-30 करोड़ रूपये की बिल्डिंग बन सकती है क्‍या. यह संभव हुआ है, हो सकता है और नहीं तो हमने इनके समय का भी देखा है. पहले का भी कार्यकाल देखा है. लम्‍बे समय तक यदि 2 करोड़ रूपये देते थे तो तीन-तीन, चार-चार साल तक कोई हिसाब-किताब नहीं आता था कि बिल्डिंग बनी की नहीं. लेकिन हमने सुधार किया है कि सी.एम राइज योजना के विद्यालय समयावधि में बनें और इसलिये हमने 14-14 महीने का समय देकर के सभी भवनों को कम्‍प्‍लीट करना, ताकि आने वाले सत्र में हम, जितने स्‍कूल हमने इस साल घोषित कर दिये, राशि जारी कर दी, वह सब तैयार हो जायें. तब तक जो पुराने स्‍कूल भवन हैं, उनकी जो कैपिसिटी है, उस कैपिसिटी के मान से ही हमारे बच्‍चों को हम एडमिशन दे रहे हैं और आगे आने वाले समय में हम उनकी संख्‍या को बढ़ायेंगे और एक प्रकार से अच्‍छी व्‍यवस्‍था स्‍कूल शिक्षा विभाग की कैसे चले, यह हमारा प्रयास है. वह रिजल्‍ट हम देकर रहेंगे.

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पूरा भाषण हो गया. जवाब इस तरह आता है क्‍या ? यह प्राचार्य आप कब तक पूरे स्‍कूलों में भर दोगे.

श्री कांतिलाल भूरिया:- अध्‍यक्ष जी, आदिवासी क्षेत्रों में यह हालत है कि स्‍कूलों के प्‍लास्‍टर गिर रहे हैं. बच्‍चे पेड़ के नीचे पढ़ रहे हैं.

श्री इंदर सिंह परमार:- माननीय अध्‍यक्ष जी सज्‍जन सिंह जी का जो सवाल हैं, आज भी हमारे यहां उच्‍च पद की प्रक्रिया चल रही है. हम जल्‍दी जो प्रभारी के रूप में हैं, उनको भी हमारी प्रोसेस अपनाकर के उनकी जगह स्‍थायी प्राचार्य करने वाले हैं, क्‍योंकि अभी प्रमोशन नहीं होने के कारण कुछ कठिनाई थी, विभाग ने उसमें नीतिगत फैसला कर लिया है. बहुत जल्‍दी उन जगह प्राचार्य कर देंगे. बच्‍चों की पढ़ाई का मामला है, स्‍कूल खुले सोनकच्‍छ में बच्‍चे पढ़ लिखकर विद्वान बनें.

नेता प्रतिपक्ष (डॉ. गोविन्‍द सिंह) - आपको कुछ पता नहीं, आप कहां से बोल देंगे. सच्‍चाई है यह.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) - बैठो तो, मैं वही तो कह रहा हूं ये सच्‍चाई है. अध्‍यक्ष जी, ये मूल प्रश्‍न था, जो इन्‍होंने आखिरी में किया है. इसका मंत्री जी जवाब देंगे.

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा - क्‍या ये खराब प्रश्‍न है? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अच्‍छा प्रश्‍न है न.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - अध्‍यक्ष जी, इन्‍होंने अपनी बात में एक बात कही कि बच्‍चों ने सी.एम. राइज स्‍कूल के लिए भूख हड़ताल की, इससे आप सी.एम. राइज स्‍कूल की लोकप्रियता और गुणवत्‍ता समझ रहे होंगे. जो सज्‍जन वर्मा जी ने कही. (..मेजों की थपथपाहट)

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा - उन बच्‍चों ने भाजपा का भेदभाव दिखाया है कि पढ़ाई लिखाई में भी भेदभाव कर रहे हो, जहां कांग्रेस का विधायक है वहां काट दो, अरे मामा तो पूरे मध्‍यप्रदेश का है भाई (...व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय - बैठ जाइए, सज्‍जन सिंह जी बैठ जाइए. उमाकांत जी बैठ जाइए. (...व्‍यवधान) माननीय मंत्री जी, सज्‍जन सिंह जी का केवल एक प्रश्‍न है कि सोनकच्‍छ में कोई सी.एम. राइज स्‍कूल खोलना है और उसको उन्‍होंने मांगा है तो आप जरा बताइए.

श्री इन्‍दर सिंह परमार - मेरा कहना है कि इन्‍होंने कहा कि सरकार ने भेदभाव किया. भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किसी भी विधायक के साथ भेदभाव नहीं किया. ट्रायबलों में भी नहीं किया है और न अन्‍य जगह किया है. हमने नीतिगत रूप से (...व्‍यवधान) जितने स्‍कूल खुलने थे, सभी क्षेत्रों में देने का काम किया है अभी और हमारा काम प्रक्रिया में चल रहा है, क्‍योंकि हमको मध्‍यप्रदेश में कुल 9 हजार 200 स्‍कूलों की स्‍थापना करना है. हम आगे जाकर के जिला केन्‍द्र से 10 किलोमीटर दूर का भी है तो हम कोशिश करेंगे कि जिला केन्‍द्र पर भी विद्यालय प्रारंभ हो जाए. कोई डाक केन्‍द्र है उसमें यदि कोई छूटा हुआ हो तो उनको भी जोड़ने का काम करेंगे.

अध्‍ध्‍यक्ष महोदय - सोनकच्‍छ का?

श्री इन्‍दर सिंह परमार - किसी के साथ भी भेदभाव नहीं किया जाएगा, ये हमारी सरकार की प्रतिबद्धता है, मैं उसको आज यहां बताना चाहता हूं. कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा, हम सभी ब्‍लाक-केन्‍द्र को उसमें जोड़ने वाले हैं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - अध्‍यक्ष जी, 78 कांग्रेस के विधायकों के क्षेत्र में खुले हैं. ये जो कह रहे भेदभाव वाली बात, जिसके इसमें रह गया है, उसमें मंत्री जी कह रहे हैं कि उसको भी एक्‍जामिन करवा लेंगे.

श्री शशांक श्रीकृष्‍ण भार्गव - काम शुरू हो गया उसके बाद उसको ट्रांसफर कर दिया, ये भेदभाव नहीं है तो क्‍या है.

अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाइए.

डॉ. गोविन्‍द सिंह - माननीय अध्‍यक्ष जी, माननीय मंत्री जी से मैं मिला. मंत्री जी ने मुझे आश्‍वासन दिया था, पहले हमारे विधान सभा क्षेत्र मेहुना में, पहले बोला एक ब्‍लॉक में एक स्‍कूल खोलेंगे, उसके तहत इन्‍होंने एक स्‍कूल मेहुना क्षेत्र में खोला आर्डर पहुंचा, उसके बाद हटा दिया. फिर मैं माननीय मंत्री जी से स्‍वयं मिला और पहली बार मिला और आपने आश्‍वासन दिया था, हम सदन में आपकी चेयर पर गए थे कि अबकी बार निश्चित कर देंगे, इसके बाद भी आज तक आपने वचनबद्ध होने के बाद भी आश्‍वासन का उल्‍लंघन किया है और आज तक पक्षपात आपने किया, अभी तक आपने वह स्‍कूल नहीं दिया, वास्‍वत में लड़कों ने एडमिशन ले लिये, दूसरे स्‍कूल छोड़कर आ गए, वे भटकते फिरे. मैंने आपको चिट्ठी भी लिखी, क्‍या किया आपने ये पक्षपात नहीं है तो, क्‍या धर्मराज युधिष्ठिर जैसा फैसला कर रहे हो आप.

श्री इन्‍दर सिंह परमार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने किसी भी प्रकार से एडमिशन का, किसी भी स्‍कूल में जब तक उसका फुल केबिनेट में स्‍वीकृति नहीं हो गई तब तक हमने किसी को भी आदेश जारी नहीं किया था, निर्दश जारी नहीं किया था. हमारे प्रतिपक्ष के माननीय नेता ने व्‍यक्तिगत रूप से मुझे कहा था, वह मैंने कहा कि भाई यदि किसी जगह छूटा है तो उसको हम आगे जोड़ने वाले हैं, वह प्रक्रिया में है, जल्‍दी इनको सभी को समझ में आ जाएगा कि हमारी सरकार ने किसी के साथ भेदभाव नहीं किया है इसलिए केवल भाषण देना है तो दें.

श्री कमल नाथ - माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं उस विषय पर नहीं हूं, शिक्षक, कहां स्‍कूल खुले, अब तो सात महीने ही बचे हैं और मध्‍यप्रदेश की जनता गवाह है कि अस्‍पतालों में डाक्‍टर नहीं, स्‍कूलों में शिक्षक नहीं, खंभों में तार नहीं और तार में बिजली नहीं. मैं तो अपने साथियों को यही कहना चाहता हूं कि ज्‍यादा दुखी न होवे, जो इनकी मांगें हैं, सात महीने में पूरी करी जाएगी.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - अध्‍यक्ष जी, यह मुगालते में जी रहे हैं. इसको दिवास्‍वप्‍न कहते हैं. यह दिग्विजय सिंह की सरकार की बात कह गए हैं, खम्‍भे में तार नहीं, तार में बिजली नहीं. दिग्विजय सिंह की सरकार का वर्णन पूरा का पूरा कर दिया है. जहां तक इन्‍होंने कहा है कि 7 महीने रह गए हैं, यह दिवास्‍वप्‍न है. यह बनी बनाई नहीं चला पाए तो बनाएंगे कहां से. (हंसी)

श्री कमलनाथ - अध्‍यक्ष जी, कम से कम इन्‍होंने यह तो स्‍वीकार किया कि 7 महीने बचे हैं. मैं उसका स्‍वागत करता हूँ.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - पर यह सबको मालूम है.

श्री कमलनाथ - कुछ भी यहां कह लें, कुछ भी यहां बोल लें, कुछ भी जवाब दे दें, 7 महीने बाद तो जनता इन्‍हें जवाब देगी.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जनता ने जवाब दिया है, हमेशा 20 वर्षों से हमको वोट ज्‍यादा आए हैं. एक बार भी कांग्रेस को ज्‍यादा वोट नहीं आए हैं. सीट इनकी ज्‍यादा आ गई थी, हमारे संजीव और पंडित की दया है कि इन्‍होंने सरकार बना ली, वो भी चला नहीं पाये.

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा - भ्रष्‍टाचार के पैसे .... (व्‍यवधान)

(..व्‍यवधान..)

अध्‍यक्ष महोदय - आप लोग बैठ जाइये.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - अध्‍यक्ष महोदय, विपक्ष के नेता बनने लायक लोग नहीं आएंगे.

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा - जो भ्रष्‍टाचार आपने किया .. (व्‍यवधान)

डॉ. विजयलक्ष्‍मी साधौ - मोदी सरकार है .... (व्‍यवधान)

(..व्‍यवधान..)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - अध्‍यक्ष महोदय, जो लोक सभा में हालत है कांग्रेस की. वही यहां होगी.

(..व्‍यवधान..)

अध्‍यक्ष महोदय - आप लोग बैठ जाइये. सज्‍जन सिंह जी आपका जवाब आ गया न, जोड़ रहे हैं.

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा - जनता ने सन् 2018 में आईना दिखा दिया कि तुम कहां खड़े हो ?

(..व्‍यवधान..)

डॉ. विजयलक्ष्‍मी साधौ - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाइये.

श्री दिनेश राय 'मुनमुन' - अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रश्‍नकाल चल रहा है कि डिबेट चल रही है. यह क्‍या है ? आप प्रश्‍नकाल की मर्यादा रखें.

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय - आप लोग आधे-आधे घण्‍टे की बहस कर रहे हैं. हम लोग ऐसे ही बैठे रहें. आपकी हंसी-मजाक चलती रहे, आपकी आपस में बातें चलती रहें. आप सदन का समय व्‍यर्थ कर रहे हैं, हद हो रही है. घण्‍टों के हजारों-लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं. यह क्‍या तरीका है ? यह तो कोई बात ही नहीं हुई.

श्री तरुण भनोत - क्‍या समय गृह मंत्री जी खराब कर रहे हैं. यह आपके लिए (गृह मंत्री जी को देखकर) कह रहे हैं.

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय - आप विषय पर चर्चा कीजिये. हर विषय को बहस बना देते हैं. आप सब सदन की मर्यादा रखिये.

अध्‍यक्ष महोदय - डॉ. राजेन्‍द्र जी, आप बैठ जाइये. श्री आरिफ अकील जी. आपने हाथ उठाया था.

श्री आरिफ अकील (भोपाल उत्‍तर) - अध्‍यक्ष जी, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि जो भोपाल के सरकारी स्‍कूल हैं, क्‍या उनमें स्‍कूलों में पुताई एवं पीने के पानी की व्‍यवस्‍था करवा देंगे, लैट्रिन-बाथरूम बनवा देंगे. अगर भेदभाव नहीं है तो.

श्री विश्‍वास सारंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस तरह से तो एक ही प्रश्‍न चलेगा. हर एक विधायक प्रश्‍न पूछेगा. 10 लोग एक ही प्रश्‍न को पूछ चुके हैं.

श्री शैलेन्‍द्र जैन (सागर) - अध्‍यक्ष महोदय, बहुत सारे लोगों के प्रश्‍न लगे हुए हैं. प्रश्‍नकाल को प्रश्‍नकाल बने रहने दीजिये. शून्‍यकाल मत बनाइये.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी.

राज्‍यमंत्री, स्‍कूल शिक्षा (श्री इन्‍दर सिंह परमार) - क्‍या पूछना चाह रहे हैं ?

अध्‍यक्ष महोदय - श्री आरिफ अकील जी बताइये. आप कौन से स्‍कूल का कह रहे हैं ?

श्री आरिफ अकील - अध्‍यक्ष जी, भोपाल में जो सरकारी स्‍कूल बने हुए हैं. उनमें पुताई नहीं हुई है, लैट्रिन बाथरूम एवं पीने के पानी की व्‍यवस्‍था नहीं है. क्‍या आप करवा देंगे ?

श्री इन्‍दर सिंह परमार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आजादी के बाद पहली बार हमने मरम्‍मत, पुताई और सबके लिए पहली बार इतना पूरा फण्‍ड दिया है, जो प्रक्रिया में है. आप रिकॉर्ड उठाकर देख लें. कांग्रेस की सरकार ने नहीं दिया है, हमने दिया है. इस वर्ष हमारे जितने स्‍कूल हैं, सब स्‍कूलों में पुताई, कोई स्‍कूल नहीं छोड़ा है. सबको हमने फण्‍ड देने का काम किया है. ....(..व्‍यवधान..)

(..व्‍यवधान..)

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा - कितना असत्‍य बोलने वाला मंत्री है. यह असत्‍य बोलने की ट्रेनिंग है, भाई. एक शिक्षा मंत्री असत्‍य बोलेगा, उसका असर क्‍या पड़ेगा, अध्‍यक्ष जी.

(..व्‍यवधान..)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - अध्‍यक्ष जी, आरिफ भाई को यह जवाब है कि आरिफ भाई जिन स्‍कूलों की लिस्‍ट देंगे. उनकी तत्‍काल पुताई और पानी की व्‍यवस्‍था की जायेगी.

श्री आरिफ अकील - आप कितने दिन में कर देंगे ?

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - जैसे ही आप लिस्‍ट देंगे, उसी दिन से.

अध्‍यक्ष महोदय -- (एक माननीय सदस्‍य के अपने आसन पर खड़े होने पर) नहीं-नहीं मैंने सिर्फ श्री आरिफ जी को विशेष अनुमति दी थी. श्री लाखन सिंह यादव जी आप प्रश्‍न करें.

ग्वालियर जिले अंतर्गत स्वीकृत कार्य

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

3. ( *क्र. 958 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्वालियर जिले के भितरवार, घाटीगांव, डबरा एवं मुरार विकासखण्ड में दिनांक 01 अप्रैल, 2021 से प्रश्‍न दिनांक तक ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा कुल कितने कार्य स्वीकृत किये गये हैं? स्वीकृत किये गये कार्यों का विस्तृत विवरण ग्राम पंचायत का नाम, ग्राम का नाम, कार्य का नाम, मद, राशि एवं स्वीकृत दिनांक से अवगत करावें। उक्त कार्य में से कौन-कौन से कार्य विभागीय एवं कौन-कौन से कार्य ठेकेदार पद्धति से कराये जा रहे हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) में दर्शित स्वीकृत कार्यों के विरूद्ध कार्यों की भौतिक एवं वित्तीय जानकारी से अवगत करावें एवं जो कार्य अपूर्ण हैं, उन्हें कब तक पूर्ण कराया जावेगा? (ग) प्रश्‍नांश (क) में जो कार्य ठेकेदार पद्धति से कराये जा रहे हैं, उन कार्यों के विस्तृत विवरण, ग्राम पंचायत का नाम, ग्राम का नाम, कार्य का नाम, ठेकेदार का नाम, अनुबंधित राशि, कार्य पूर्ण करने की अनुबंधित तिथि, कार्य पूर्ण करने की तिथि एवं कार्य की भौतिक एवं वित्तीय जानकारी से अवगत करावें।

पंचायत मंत्री ( श्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया ) : (क) ग्वालियर जिले के भितरवार, घाटीगांव, डबरा एवं मुरार विकासखण्ड में दिनांक 01 अप्रैल, 2021 से प्रश्‍न दिनांक तक ग्रामीण यांत्रिकी सेवा द्वारा कुल 26 कार्य स्वीकृत किये गये हैं, जिनमें से 24 कार्य विभागीय एवं 02 कार्य ठेकेदार पद्धति से कराये जा रहे हैं। शेष जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) एवं (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।

परिशिष्ट - "एक"

श्री लाखन सिंह यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बड़ा दुर्भाग्‍यपूर्ण है कि हमारे सभी सम्‍माननीय विधायकों के यहां 25 प्रश्‍त आते हैं, बमुश्किल भाग्‍य से आते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं तो अपनी तरफ भी कहा करो न, अपनी तरफ भी बोलो सभी को.

श्री लाखन सिंह यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी 40 मिनिट हो गये हैं और 40 मिनिट में अभी दो प्रश्‍नों के जवाब आ पाये हैं. मैं ऐसा मानकर चलता हूं कि यह सबसे ज्‍यादा यदि कोई इंटरफेयर करते हैं तो यह सत्‍ता पक्ष के लोग करते हैं. हम लोगों का तो अधिकार है प्रश्‍न पूछने का, कम से कम से यह प्रश्‍न तो कर लेना चाहिये और मुझे लगता है कि कल जैसे छ: प्रश्‍न हुए आप जिस आसंदी पर बैठे हैं, हमको बड़ी उम्‍मीदें थीं, जब आप यहां अध्‍यक्ष बने थे. हम चाहते है कि इसमें कोई व्‍यवस्‍था आपकी तरफ से आये, कम से कम से 12-15, 20 प्रश्‍न तक तो मुझे नहीं लगता है कि आपके कार्यकाल में 25 प्रश्‍न एक भी बार अभी तक हो पाये हों.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं हुआ.

श्री लाखन सिंह यादव -- मेरा आपके माध्‍यम से निवेदन है कि इस पर थोड़ा सा ध्‍यान दें.

अध्‍यक्ष महोदय -- अभी आप प्रश्‍न करें.

श्री लाखन सिंह यादव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के जवाब में माननीय मंत्री जी ने जवाब दिया है कि भितरवार, घाटीगांव, डबरा एवं मुरार विकासखण्ड में दिनांक 01 अप्रैल, 2021 से प्रश्‍न दिनांक तक ग्रामीण यांत्रिकी सेवा द्वारा कुल 26 कार्य स्वीकृत हुए और जो परिशिष्‍ट में जवाब दिया है. आप भी मुझे लगता है कि देख रहे होंगे, नहीं देख रहे होंगे तो मैं बता रहा हूं, इसमें परिशिष्‍ट में जो प्रिंट किया गया है, उसमें कुछ भी समझ नहीं आ रहा है कि यह कौन से कार्य हैं, कहां कार्य हुए हैं. मैं आपके माध्‍यम से दो प्रश्‍न माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं परंतु मंत्री जी यहां पर नहीं है जवाब कौन देगा ? लेकिन मैं आपके माध्‍यम से दो प्रश्‍न करना चाहता हूं. नंबर एक बड़कागांव चंगौरा यह मुख्‍यमंत्री सड़क योजना में स्‍वीकृत हुआ है, दूसरा भितरवार नरवर रोड से कैठोद रोड है, यह भी मुख्‍यमंत्री सड़क योजना में स्‍वीकृत हुआ है, लेकिन आज दिनांक तक माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस पर काम शुरू नहीं हुआ है. आप यह काम कितने दिनों में शुरू करवा देंगे, इनकी वजह से पूरे क्षेत्र के लोगों में डेली घटनाएं हो रही हैं, रोज एक्‍सीडेंट हो रहे हैं. मेरा पहला प्रश्‍न तो यह है कि इनकी स्‍वीकृति कर कब आप कार्य शुरू करा देंगे? मैं दूसरा प्रश्‍न इसके जवाब आ जायेगा तब करूंगा.

राज्‍यमंत्री, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग (श्री रामखेलावन पटेल) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आर.ई.एस. विभाग द्वारा 26 कार्य स्‍वीकृत किये गये थे, 24 कार्य विभागीय चल रहे हैं, जिसमें 9 कार्य पूर्ण हो गये हैं, 15 कार्य प्रगतिरत हैं और 31 मार्च तक पूरे हो जायेंगे, दो कार्यों की संविदा हुई है, वहां फसल लगी हुई है फसल जैसे ही कट जायेगी, वह दोनों कार्य भी 31 अगस्‍त तक पूरे कर दिये जायेंगे.

श्री लाखन सिंह यादव -- 31 अगस्‍त ?

श्री रामखेलावन पटेल -- 31 अगस्‍त 2023 तक.

श्री लाखन सिंह यादव -- अच्‍छा मैंने सोचा 2025 कह रहे हैं.

श्री रामखेलावन पटेल -- दोबारा सुन लीजिये, 9 कार्य पूर्ण हो गये हैं, 15 कार्य प्रगतिरत हैं.

श्री लाखन सिंह यादव -- ये करा लेना, मंत्री जी तो है नहीं. आप जवाब दे रहे हैं, देख लेना करा देना इनको बहुत दिक्‍कत है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्‍न यह है कि चराईडांग से बसईकला यह बीस किलोमीटर का रोड है, यह स्‍वीकृति के लिये आपके यहां लंबे समय से पेंडिंग है, दूसरा बसई रोड से खितैरा यह साढ़े तीन किलोमीटर का रोड है, यह दोनों रोडों की वजह से पूरे क्षेत्र में स्थिति खराब है. यह स्‍वीकृति के लिये आपके यहां काफी लंबे समय से पेंडिंग हैं. कृपा करके आप सदन को यह जवाब दे दें कि क्‍या आप इनको स्‍वीकृत करा लेंगे?

श्री रामखेलावन पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह चराईडांग से बसईकला मार्ग बीस किलोमीटर है और दूसरा बसईकला रोड यह 4.8 किलोमीटर है, चूंकि मुख्‍यमंत्री सड़क योजना में 15 किलोमीटर सी.सी. रोड नहीं बनती है इसलिये काम पूरा नहीं हो पा रहा है. मुख्‍यमंत्री सड़क योजना में यह प्रावधान ही नहीं है, इसलिये यह अधूरा है.

श्री लाखन सिंह यादव -- अरे तो जिससे बनती हो, वह तो करा दो. स्थिति वहां खराब है, सी.सी. नहीं बनती है, मेरे भाई तो जो बन रहा हो, हमें तो रोड चाहिये. हमें तो आप रोड करवा दें, क्‍या करवा सकते हैं वह आप बता दें?

श्री रामखेलावन पटेल -- मुख्‍यमंत्री सड़क योजना में 15 किलोमीटर सी.सी. रोड बनती ही नहीं है, आधा किलोमीटर, एक किलोमीटर बनती है. आप इतना कहें तो हम बना देंगे. जब उस योजना में प्रावधान ही नहीं तो कैसे पूरा हो जायेगा.

नेताप्रतिपक्ष(डॉ.गोविन्‍द सिंह) -- अरे प्रधानमंत्री सड़क योजना में तो प्रावधान है. प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में आपने तीस-तीस किलोमीटर सड़क बनवाई है, उसमें करवा दो.

श्री रामखेलावन पटेल -- प्रधानमंत्री सड़क योजना में एक गांव जब किसी तरफ से जुड़ जाता है तो फिर दूसरी तरफ से उसको नहीं जोड़ा जाता है. यह प्रावधान है.

अध्‍यक्ष महोदय -- वह एक छोटी सड़क बता रहे हैं.

श्री लाखन सिंह यादव -- यह जो साढ़े तीन किलोमीटर वाली सड़क है इसी को करो दो, यह तो हो सकता है.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय विधायक जी, एक वह बीस किलोमीटर बता रहे हैं. एक कोई तीन किलोमीटर के आसपास आप ही बता रहे हो, तो वह तो हो सकता है.

 

श्री रामखेलावन पटेल -- जो चार किलोमीटर वाली सड़क है, मैं विभाग के अधिकारियों को निर्देश दूंगा कि उस कार्य को पूरा करा दिया जाये.

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है.

जबलपुर में खेल गतिविधियाँ

[स्कूल शिक्षा]

4. ( *क्र. 71 ) श्री लखन घनघोरिया : क्या राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शासन ने जिला शिक्षा विभाग जबलपुर के खेल गतिविधियों का संचालन, आयोजन करने, खेल सामग्री के क्रय हेतु किस-किस योजना मद में कितनी-कितनी राशि आवंटित की है एवं कितनी-कितनी राशि व्यय हुई? वर्ष 2018-19 से 2022-23 तक की जानकारी देवें। (ख) प्रश्‍नांश (क) में कब-कब कहां-कहां पर कौन-कौन सी खेल स्पर्धाएं, खेल गतिविधियां आयोजित की गईं एवं किन-किन कार्यों, आवास, भोजन व्यवस्था आदि पर कितनी-कितनी राशि व्यय हुई? इसका सत्यापन किसने किया है? (ग) प्रश्‍नांश (क) में कब-कब कहां-कहां से कौन-कौन सी खेल सामग्री कितनी-कितनी मात्रा में कितनी-कितनी राशि की क्रय की गई। स्कूलों को कब-कब कितनी-कितनी मात्रा में कौन-कौन सी खेल सामग्री एवं कितनी-कितनी राशि प्रदाय की गई। कौन-कौन सी कितनी-कितनी मात्रा में खेल सामग्री का वितरण नहीं किया गया एवं क्यों? बिलों की कितनी-कितनी राशि का कब-कब भुगतान किया गया? बिलों की छायाप्रति दें। विकासखण्डवार खेल सामग्री वितरण की जानकारी दें। (घ) प्रश्‍नांश (क) में संचालित कितने-कितने (10+2) हाई एवं हायर सेकेण्डरी स्कूलों में पर्याप्त खेल सुविधाएं, खेल मैदान, खेल शिक्षक, प्रशिक्षक नहीं हैं एवं क्यों? खेल शिक्षक, प्रशिक्षक के स्वीकृत कितने पद रिक्त हैं? इन स्कूलों में बच्चों को खेल प्रशिक्षण, खेल गतिविधियाँ संचालन की क्या व्यवस्था है?

राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा ( श्री इन्‍दर सिंह परमार ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-3 अनुसार है। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा विद्यालयों को खेल सामग्री वितरित नहीं की गई है, अपितु पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-4 अनुसार राशि प्रदाय की गई है। अतः शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-5 अनुसार है।

श्री लखन घनघोरिया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में माननीय मंत्री जी की तरफ से जो परिशिष्‍ट में आया है जबलपुर जिले में 196 हाईस्‍कूल और हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल हैं जिनमें 145 स्‍कूलों में खेल शिक्षक नहीं हैं और उसके बावजूद खेल सामग्री का क्रय हुआ है और राशि भी प्रदाय की गई है, इसका क्‍या उपयोग हुआ है, जब खेल शिक्षक नहीं है, व्‍यायाम शिक्षक नहीं हैं 145 स्‍कूलों में तो फिर खेल सामग्री का क्रय हुआ है, राशि प्रदाय हुई है. इसका उपयोग हुआ कि नहीं हुआ और नहीं हुआ तो क्‍या मंत्री जी इसकी जांच करायेंगे.

श्री इन्‍दर सिंह परमार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरे मध्‍यप्रदेश के सभी स्‍कूलों को हम खेल सामग्री के लिये राशि देते हैं और आवश्‍यकतानुसार उस राशि का वह उपयोग करते हैं, जहां पर खेल शिक्षक हैं वहां पर भी देते हैं और जहां पर नहीं हैं वहां पर भी देते हैं क्‍योंकि खेल का मैदान है, बच्‍चे खेलते हैं और खेलकूद की गतिविधियों के लिये उपयोगी सामग्री ही दी जाती है पूरी प्रक्रिया के साथ में क्‍योंकि माननीय सदस्‍य का बहुत लंबा चौड़ा प्रश्‍न है उसमें उन्‍होंने बहुत सारे प्रश्‍न किये हैं. मैं कहना चाहता हूं कि पूरी प्रक्रिया के साथ में हमारे वहां की स्‍थानीय एजेंसी है जो संस्‍थायें हैं उन्‍होंने उसका पालन करते हुये और सबका हम आडिट कराने का काम भी लगातार करते हैं, वगैर प्रक्रिया के किसी भी प्रकार की खरीददारी वहां नहीं हुई है और जहां क्रय किया गया है उसका उपयोग भी विद्यार्थियों के हित में किया जा रहा है.

श्री लखन घनघोरिया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी का कहना है कि जहां व्‍यायाम शिक्षक नहीं हैं वहां खेल सामग्री खरीदी गई है. 145 स्‍कूलों में नहीं हैं, स्‍वीकृत पद सिर्फ और सिर्फ 45 हैं 45 में सिर्फ 23 स्‍कूलों में व्‍यायाम शिक्षक हैं और 22 पद रिक्‍त अभी भी पड़े हैं. आप 145 तो छोड़ दें जो 45 स्‍वीकृत हैं उसमें 22 रिक्‍त पड़े हैं उसके बावजूद आप कहते हैं कि सामग्री खरीदी गई. यदि खरीदी गई तो उसका उपयोग हुआ या नहीं हुआ इसकी जांच कराने में मंत्री जी को क्‍या तकलीफ हो रही है.

अध्‍यक्ष महोदय-- वह तो कह रहे हैं कि उपयोग हुआ है.

श्री लखन घनघोरिया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जांच करा लें. क्‍या यह व्‍यवहारिक रूप से संभव है कि जहां व्‍यायाम के शिक्षक नहीं हैं, वहां खेल सामग्री खरीदी गई हो और उसका सदुपयोग हुआ हो. क्‍या यह व्‍यवहारिक रूप से संभव है.

श्री इन्‍दर सिंह परमार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍कूल शिक्षा विभाग में हम बच्‍चों को खेल की सामग्री क्रय करने के लिये कुछ राशि देते हैं और उस राशि से वह छोटी-छोटी सामग्री उनको जरूरत पड़ती है वह उसका उपयोग करते हैं और उसके अनुसार जब खरीददारी करते हैं तब उसकी भी पूरी आडिट रिपोर्ट तैयार होती है, आडिट होता है तभी वह सब किया जाता है. जहां तक खेल शिक्षकों का सवाल है निश्चित रूप से सब स्‍कूलों में खेल शिक्षक के पद अभी तक स्‍वीकृत नहीं थे, अभी हमने जितने खेल शिक्षक मध्‍यप्रदेश के सभी स्‍कूलों में हैं उनके लिये अभी हमने जो शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया है उसमें भी भर्ती कर रहे हैं और आने वाले समय में सभी जगह पर हम खेल शिक्षक देने का काम करेंगे, साथ ही जिन स्‍कूलों में अभी पद ही स्‍वीकृत नहीं हैं उनमें भी हम अतिथि शिक्षकों के माध्‍यम से उनको भी पद सृजन करके आने वाले समय में भी क्‍योंकि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति का हिस्‍सा बनने जा रहा है खेल और खेल से भी शिक्षा प्रारंभ की जा रही है इसलिये सभी जगह हम शिक्षकों के पद सृजन करेंगे और जरूरत पड़ी तो उस हिसाब से भर्ती प्रक्रिया पूरी करेंगे और जहां पर शिक्षक नहीं मिलेंगे उनको हम अतिथि शिक्षकों के माध्‍यम से पूर्ति करने का काम करेंगे ताकि हर खेल के शिक्षक भी हो जायें, खेल का मैदान भी हो जाये, हमारी सरकार की प्रा‍थमिकता है उसको हम पूरी करने वाले हैं.

श्री लखन घनघोरिया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने एक बात और स्‍वीकार की कि वर्ष 2020-21 में और वर्ष 2021-22 में कोरोना काल में स्‍कूल बंद रहे हैं फिर भी खेल सामग्री खरीदी गई है, अब इसे यह मानेंगे कि प्रदाय भी की गई होगी. यह आपका परिशिष्‍ट कह रहा है.

श्री इन्‍दर सिंह परमार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कुछ स्‍कूलों में वर्ष 2019-20 में 10-10 हजार रूपये दिये थे उसमें से ज्‍यादातर स्‍कूलों ने क्रय करने का काम किया है.

कुछ स्कूलों ने क्रय नहीं किया उसके बाद में 25-25 हजार रुपये की राशि हमने दी है परंतु चूंकि कोरोना काल था कोरोना के समय कुछ स्कूलों ने उस समय भी क्रय नहीं किया और यह सामग्री जो हम विद्यार्थियों के हाथ में खेल के मैदान में देते हैं वह जब खेलते हैं तब देते हैं वह सामग्री विद्यार्थी घर ले जाकर उपयोग नहीं करते हैं और स्कूल के स्टोर के रिकार्ड में वह है. इसलिये यह कहना कि उपयोग हुआ या नहीं हुआ. कोरोना के कारण खेल के मैदान बंद थे स्कूल बंद थे उस समय उसका उपयोग नहीं हुआ होगा लेकिन जैसे स्कूल खुले उसका उपयोग हो रहा है.

श्री लखन घनघोरिया - माननीय मंत्री महोदय, खेल में खेल हो रहा है और अधिकारी कर रहे हैं और उसके बावजूद जो अधिकारयों ने लिखकर दे दिया वही सुना रहे हैं क्या आप हकीकत की जमीन में जाकर देखेंगे. कोरोना काल में जब स्कूल बंद रहे हैं तब इतना लंबा भ्रष्टाचार आपका यह परिशिष्ट बता रहा है. 2019-20 में आपने 50 लाख 75 हजार की खरीदी की. 2021-22 में 11 लाख 98 हजार 817 रुपये की खरीदी की. यह गई कहां है. क्या यह कोरोना के मरीजों को दी थी. इसकी जांच कराएंगे क्या आप ?

श्री इन्दर सिंह परमार - अध्यक्ष महोदय, मैंने कहा है कि जो पैसा वर्ष में जारी होता है क्योंकि वर्ष के अंत में वह राशि लेप्स हो जाती है इसलिये स्कूल के लिये सामग्री खरीदी की गई है. जितना आपने प्रश्न में पूछा उसका सब समाधानकारक उत्तर हमने दिये हैं. एक भी इनके विषय को अनछुआ नहीं रखा है लेकिन उसके बाद भी आप बताएंगे किसी स्पेसिफिक स्कूल का उसकी जांच करा लेंगे क्योंकि हमारे यहां स्टाक रजिस्टर बनता है. स्टाक रजिस्टर से उनका वेरिफिकेशन होता है उसके बाद ही भुगतान करने की प्रक्रिया होती है.

अध्यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, माननीय सदस्य का संदेह केवल इतना है कि कोरोना काल में जब सब बंद था उस समय सामग्री की खरीदी कैसे हुई केवल यह वह मांग कर रहे हैं.

श्री इन्दर सिंह परमार - अध्यक्ष महोदय,कोरोना काल में भी जो खरीदी हुई है उसकी प्रक्रिया की भी जांच करा लेंगे और सामग्री स्कूल में उपलब्ध है कि नहीं इसकी भी जांच करा लेंगे.

श्री लखन घनघोरिया - अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के ख के उत्तर में जो जानकारी दी गई है. जिले में राज्य स्तरीय खेल प्रतिस्पर्धाएं आयोजित की गई हैं उन स्पर्धाओं से संबंधित प्रशिक्षण की व्यवस्था जिले के कितने स्कूलों में है. इसमें उत्तर नहीं आया है. एक तो आपने जांच का कहा है तो समय-सीमा निर्धारित नहीं की है. खेलों के आयोजन में जो राशि व्यय हुई है. कोरोना काल का लिखित दे दिया गया लेकिन जो राशि व्यय हुई है जितनी खेल की प्रतियोगिताएं हुई हैं उनकी जांच करा लेंगे.

अध्यक्ष महोदय - उन्होंने जांच का कहा है.

श्री इन्दर सिंह परमार - अध्यक्ष महोदय, जो खेल प्रतियोगिताएं हैं वह हमारी कोरोना काल में बंद थीं. जब स्कूल खुले हैं तभी प्रतियोगिताएं आयोजित हुई हैं. अलग-अलग जिलों में, अलग-अलग स्थानों पर हमने प्रतियोगिताएं आयोजित की हैं. एक निश्चित मापदण्ड के अनुसार हमने राशि जारी की है और उसका सारा रिकार्ड हमारे पास है.

श्री लखन घनघोरिया - 2020-21 का भी दे दिया कि प्रतिस्पर्धाएं आयोजित हुई हैं.कोरोना काल में भी आयोजित हुईं यह भी आपने जवाब दे दिया.

श्री इन्दर सिंह परमार - कोरोना काल में सामग्री जो स्कूलों ने ली होगी उसके अलावा खेल प्रतियोगिताओं के कोई भुगतान का कोई उसमें बिल नहीं है. खेल प्रतियोगिताएं कोरोना काल में बंद थीं. उसका किसी प्रकार का भुगतान नहीं हुआ है.

श्री लखन घनघोरिया - मंत्री जी, आप इसकी सूक्ष्मता से जांच कर लें.

श्री तरुण भनोत - (xxx)

अध्यक्ष महोदय - तरुण जी का नहीं लिखा जायेगा.

(..व्यवधान..)

श्री इन्दर सिंह परमार - अध्यक्ष महोदय,मैंने जवाब दिया है कोरोना काल में जब विद्यालय बंद थे. उस समय हमारी कोई प्रतियोगिताएं नहीं हुई हैं. जब स्कूल खुले हैं. जब प्रतिस्पर्धाएं हुई हैं.

(..व्यवधान..)

अध्यक्ष महोदय - उन्होंने जांच का कह दिया है. वह जांच करा लेंगे.

श्री तरुण भनोत - किसकी जांच करा लेंगे. जो प्रतियोगिताएं हुई नहीं उनकी जांच कराएंगे.

अध्यक्ष महोदय - कहा तो जांच कराएंगे.

श्री तरुण भनोत - वह कह रहे हैं जो सामग्री दी उसकी जांच कराएंगे.

अध्यक्ष महोदय - पर्टिकुलर बताईये.

श्री इन्दर सिंह परमार - अध्यक्ष महोदय, भी हायर सेकेंड्री स्कूल हमने कोरोना काल में भी खोले हैं. जब कोरोना काल समाप्त हो गया. जब सामान्य स्थिति हुई तब कुछ समय के लिये खोले हैं. उनमें यदि कोई प्रतियोगिताएं हुईं उस समय, सारी तारीखें फिक्स हैं. इस तारीख से इस समय तक स्कूल खुलेंगे. उस समय यदि कोई गतिविधि हुई है. उसके अलावा कहीं का नहीं हुआ है.

श्री तरुण भनोत-- अध्यक्ष महोदय, इस पर शासन के द्वारा रोक लगी थी कि प्रतियोगिताएं नहीं होंगी, उस समय खर्चा किया, क्या उसकी जांच करायेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- (श्री सज्जन सिंह वर्मा, सदस्य के खड़े होने पर) क्या हर सवाल पर खड़े होंगे सज्जन सिंह जी. हर सवाल पर नहीं खड़े होना है. नेता प्रतिपक्ष हैं ना. हर सवाल पर खड़े होने की आदम मत डालिये.

श्री लखन घनघोरिया-- अध्यक्ष महोदय, दो लाइन सुन लीजिये. तुम्हारा काम है वादा खिलाफी खेलते रहना और पब्लिक का काम है वादों की बारिश झेलते रहना. गजब है आपका शासन. खेलो इण्डिया और खेल में कितना खेल हो रहा है, इसका मंत्री जी जवाब दे नहीं रहे हैं. मंत्री जी, विश्वास सारंग जी को बड़ी तकलीफ हो रही है, हर चीज में खड़े होकर जवाब दे रहे हैं. यह प्रश्नकाल है, प्रश्नकाल में विपक्ष के विधायक नहीं पूछेंगे, तो क्या सत्ता पक्ष के लोग इसी समय में समय बर्बाद करेंगे. आधे से ज्यादा समय आप लोग बर्बाद करते हैं.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न संख्या 5, डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ जी. अब आप बैठिये, उनका प्रश्न आने दीजिये.

श्री लखन घनघोरिया-- विश्वास सारंग जी, कम से कम आप तो सीनियर हैं, वह जवाब नहीं दे पा रहे हैं, तो पहले ही कह दिया करें, उनकी जगह आप खड़े हो जाया करें.

अध्यक्ष महोदय-- साधौ जी, आप प्रश्न करिये. उनका हो गया.

श्री विश्वास सारंग-- अध्यक्ष महोदय, घनघोरिया जी का आज बैठने का मन ही नहीं हो रहा है. आज ये घर पर बोल कर आये थे.

शिकायतों पर कार्यवाही

[पंचायत और ग्रामीण विकास]

5. ( *क्र. 948 ) डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र महेश्‍वर के अंतर्गत विकासखण्ड महेश्‍वर एवं बड़वाह की ग्राम पंचायतों के निर्माण कार्यों की शिकायतें किन-किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को वर्ष 2019-20 से प्रश्‍न दिनांक तक में प्राप्त हुई, का विवरण वर्षवार, जनपदवार, अधिकारीवार देवें। (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार प्राप्त शिकायतों की जांच हेतु किन-किन अधिकारियों को कब-कब आदेश जारी किये गये? जांच में किन-किन अधिकारियों को दोषी मानकर कार्यवाही की गई एवं कितनी जांच कब से लंबित है?

पंचायत मंत्री (श्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अनुसार है।

डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ-- अध्यक्ष महोदय, पंचायत विकास कार्य की प्रथम कड़ी होती है. मेरा निवेदन यह है कि मुझे आपके माध्यम से प्रशासन की जानकारी बुलानी पड़ रही है यहां प्रश्न के माध्यम से. समय समय पर वर्ष 2019‑20, 2020-21,2021-22 एवं 2022-23 में बैठकों के माध्यम से, पत्रों के माध्यम से जनपद, जिला पंचायत से जानकारियां मांगीं, कुछ पंचायतों में बहुत निर्माण कार्यों में अनियमितताएं थीं. महेश्वर ब्लॉक ट्रायबल ब्लॉक है, वहां सब हमारे आदिवासी भाई लोग सरपंच हैं. वहां पर कुछ लोग पंचायतें चलाते हैं. वहां पर अनियमितताएं बहुत हुईं. समय समय पर मैंने जांच चाही, जानकारी चाही, लेकिन मुझे जानकारी नहीं दी गई. प्रश्न के माध्यम से मुझे आज जानकारी मिली है. लेकिन मैं इस जानकारी से संतुष्ट नहीं हूं. मंत्री जी यह बताना चाहेंगे कि कुछ प्रश्न में जो मैंने शिकायतें की थीं, ग्राम खाड़ी, जलकोटा, बाकानेर,मेलखेड़ी,जिजाखेड़ी, इसमें जो आपके जवाब आये हैं, कुछ तो आपने न्यायालय प्रकरण बताये हैं. सुलगांवगढ़ की पंचायत है, वहां न्यायलयीन प्रकरण बताया है कि यह न्यायालय में प्रकरण चल रहा है और उसके बाद में आपका जो कॉलम है, यदि लंबित है, तो कब से लंबित है दिनांक बतायें. उसमें आप पूर्ण बता रहे हैं. तो यह विसंगति क्यों है. न्यायालय में प्रकरण भी चल रहा है और आप उसको जांच पूर्ण बता रहे हैं. एक तो यह हो गया. दूसरा, एक जलकोटा करके हमारी ग्राम पंचायत है, वहां पर मैंने कई गंभीर शिकायतें की हैं. वर्ष 2018 में पुलिया के निर्माण के लिये 15 लाख स्वीकृत हुआ. 4 लाख में कर दिया. फिर रिपेयर के पैसे उसको अलग से दे दिये. 2019 में जलकोटा मार्ग में 8 लाख और उसमें सरपंच के फर्जी हस्ताक्षर, सरपंच प्रतिनिधि ने किये. तो मैं मंत्री जी से जानना चाहती हूं कि क्या इसकी जांच करायेंगे.

राज्यमंत्री, पंचायत (श्री रामखेलावन पटेल)-- अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2019-20 से प्रश्न दिनांक तक महेश्वर में 22 और बड़वाह में ..

डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ-- अध्यक्ष महोदय, यह मैंने पढ़ लिया है. टू दि पाइंट मंत्री जी जवाब दें, जो मैंने प्रश्न पूछा है. यह सब आ गया है, यह मैं पढ़ चुकी हूं.

श्री रामखेलावन पटेल-- अध्यक्ष महोदय, 24 शिकायतों पर आपकी 19 की जांच पूर्ण हो गई है. 5 शिकायत प्रकरणों में जदां की कार्यवाही प्रचलित है.

डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ-- अध्यक्ष महोदय, जो फर्जी दस्तखत किये हैं सरपंच के, उसकी जांच करवायेंगे क्या.

श्री रामखेलावन पटेल-- अध्यक्ष महोदय, जांच पूर्ण शिकायतों में 8 शिकायतें निराधार पाई गईं.

डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ-- अध्यक्ष महोदय, इसमें जवाब चाहिये. वह तो लम्बा पढ़ रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, वे जवाब दे रहे हैं कि 8 की जांच हो गई है.

श्री रामखेलावन पटेल-- अध्यक्ष महोदय, इन शिकायतों में धारा 92 की सुनवाई उपरांत प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया है. 3 शिकायतों में शासकीय धनराशि जमा कराई गई. संबंधितों की एक वेतन वृद्धि रोकने की शास्ति अधिरोपित की गई. 4 प्रकरणों में वसूली राशि की कार्यवाही प्रचलित है. एक प्रकरण माननीय उच्च न्यायालय, इन्दौर में प्रचलित है.

डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ-- अध्यक्ष महोदय, स्पेसीफिक प्रश्न पूछा है कि सरपंच के फर्जी हस्ताक्षर जो किये हैं, क्या उसकी जांच करवायेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्नकाल समाप्त.

 

(प्रश्नकाल समाप्त)


 

12.00 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

 

अध्यक्ष महोदय - निम्नलिखित माननीय सदस्यों की शून्यकाल की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जाएगी.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.01 बजे शून्यकाल में मौखिक उल्लेख

 

 

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन (बालाघाट) - अध्यक्ष महोदय, बालाघाट जिले में  36वीं पुलिस बटालियन जो है, वहां पर करोड़ों रुपयों के निर्माण कार्य चल रहे हैं, 25 जो आवास बन रहे हैं, उसमें ग्राउंड फ्लोर को मिट्टी से भर दिया गया और 25 करोड़ रुपये का सरकार को नुकसान हुआ है. इसका मैंने ध्यानाकर्षण दिया है. कल मैंने आपसे आग्रह किया था. मेरी विनम्र प्रार्थना है कि इतने बड़े भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए इस ध्यानाकर्षण को ग्राह्य करें. आपके सरंक्षण में हम चाहते हैं कि इस तरह की अनियममितताएं राज्य में न हों और यदि हाऊसिंग बोर्ड ने गड़बड़ी की है तो उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही हो. मेरी विनम्र प्रार्थना है कि इस ध्यानाकर्षण को आप स्वीकार करें.

 

श्री कुणाल चौधरी (कालापीपल) - अध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है.

अध्यक्ष महोदय - आप शून्यकाल की सूचना पढ़ें.

श्री कुणाल चौधरी - अध्यक्ष महोदय, आज बजट पर चर्चा रखी हुई है, इतनी मांगों पर चर्चा रखी हुई है. (XXX)

अध्यक्ष महोदय - यह नहीं आएगा. वह नियम में है. श्री प्रियव्रत सिंह जी, शून्यकाल की सूचना पढ़ें.

श्री प्रियव्रत सिंह (खिलचीपुर) - अध्यक्ष महोदय, मेरे जिले राजगढ़ में अभी एक गंभीर और दुखद घटना हुई है. एक रोड एक्सीडेंट में मोटरसाईकिल पर सवार दो नौजवान एक मेरी विधान सभा क्षेत्र का रहने वाला था, दूसरा सारंगपुर विधान सभा क्षेत्र का रहने वाला था. दोनों की बड़ी दुखद मृत्यु हुई और उसका कारण यह था कि जितनी भी रेत की, गिट्टी की ट्रालियां जो चलती हैं, जो ट्रेक्टर के पीछे ट्राली चलती है, उस ट्राली में रेडियम लाइटिंग कुछ नहीं होती है. अक्सर जब ट्राली पंक्चर हो जाती है तो ट्रेक्टर हटा दिया जाता है और मात्र ट्राली सड़क पर छूट जाती है, उसके कारण पूरे मध्यप्रदेश में भंयकर एक्सीडेंट होते हैं. परन्तु मेरे जिले में भी यह बड़ी दुखद घटना हुई. खजूरीगोकुल गांव और खजुरियाहरिगांव के दो नागर समाज के नौजवान थे. आबकारी विभाग द्वारा संचालित परीक्षा देकर वह भोपाल से मोटरसाईकिल से लौट रहे थे और इसी प्रकार से खंजरपुरजोड़ सारंगपुर खिलचीपुर में, संडावत और छापेड़ा के मध्य में एक्सीडेंट हुआ और उनकी मृत्यु हुई. मेरा अनुरोध है कि इसमें आप जरूर व्यवस्था दें और आने वाले समय में सरकार इस पर विचार करे. एक तो उन परिवारों की सहायता करे और दूसरा जितनी भी ट्रेक्टर ट्राली हैं, उनके पीछे रेडियम लाइटिंग लगाना अनिवार्य करें और स्थानीय पुलिस को भी हिदायत दें कि इस प्रकार से सड़क पर अगर कोई ट्रेक्टर ट्राली छोड़ता है तो उसको हटवाने के लिए पुलिस कारगर रहे, नाइट गश्त में पुलिस सतर्क रहे.

श्री कमलेश्वर पटेल (सिहावल) - अध्यक्ष महोदय, मैंने ध्यानाकर्षण की सूचना भी आपको दी है. हमारे यहां हनुमना से लेकर बहरी पहुंचमार्ग जो सिंगरौली की तरफ जाता है उसके पुल में क्रेक आने की वजह से लोगों को 100 कि.मी. की दूरी से जाना पड़ रहा है. पूरा जीवन अस्तव्यस्त है, यह 3 महीने होने वाले हैं. नवीन पुल का जो निर्माण हो रहा है, वह भी बहुत धीमी गति से हो रहा है. आपसे आग्रह है कि मेरा ध्यानाकर्षण स्वीकृत करें.

 

12.04 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर (म.प्र.) की वैधानिक आडिट रिपोर्ट वर्ष 2019-20 एवं वर्ष 2020-21

 

 

 


 

(2) परिवहन विभाग की निम्‍नलिखित अधिसूचनाएं-

(क) क्रमांक एफ 01-09/2021/आठ, दिनांक 24.02.2021,

(ख) क्रमांक एफ 19-76/2019/आठ, दिनांक 03.03.2021,

(ग) क्रमांक एफ 22-12/2015/आठ, दिनांक 28.04.2021,

(घ) क्रमांक एफ 22-142/2004/आठ,दिनांक 20.04.2021,

(ङ) क्रमांक एफ 22-112/ आठ/2020,दिनांक 11.01.2022,

(च) क्रमांक एफ 22-47/2021/आठ,दिनांक 11.01.2022,

(छ) क्रमांक एफ 22-16/2022/आठ,दिनांक 16.06.2022,

(ज) क्रमांक एफ 22-124/2019/आठ,दिनांक 05.08.2022,

(झ) क्रमांक एफ 22-57/2019/आठ,दिनांक 21.08.2022,

(ञ) क्रमांक एफ 22-23/2022/आठ,दिनांक 24.08.2022,

(ट) क्रमांक एफ 3/3/4/0001/2022/आठ,दिनांक 08.09.2022,

(ठ) क्रमांक एफ 22-12/2015/आठ,दिनांक 21.09.2022,

(ड) क्रमांक एफ 22-23/2022/आठ,दिनांक 30.09.2022,

(ढ) क्रमांक 1867/2018/2021/आठ,दिनांक 30.09.2022,एवं

(ण) क्रमांक एफ 19-55/2019/आठ,दिनांक 09.11.2022,

 

ठाकुर सुरेन्‍द्र सिंह नवल सिंह शेरा भैया -- ( XXX )

अध्‍यक्ष महोदय यह नहीं लिखा जायेगा.

 

 

 

 

 

(3) (क) जिला खनिज प्रतिष्‍ठान जबलपुर के वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021 एवं 2021-2022 तथा जिला नरसिंहपुर, अनूपपुर, बैतूल, कटनी, छतरपुर एवं अलीराजपुर के वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2021-2022, तथा

(ख) मध्‍यप्रदेश असंगठित शहरी एवं ग्रामीण कर्मकार कल्‍याण मंडल का वार्षिक प्रशासकीय प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

(4) मध्‍यप्रदेश पश्चिम विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इंदौर का 20 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2021-2022

 

(5) (क) (i) अवधेश प्रताप सिंह विश्‍वविद्यालय, रीवा (म.प्र.) का 54 वां प्रगति प्रतिवेदन वर्ष 2021-2022, एवं

(ii) जीवाजी विश्‍वविद्यालय, ग्वालियर (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन

वर्ष 2021-2022,

(ख) महर्षि पाणिनि संस्‍कृत एवं वैदिक विश्‍वविद्यालय, उज्‍जैन (मध्‍यप्रदेश) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021, तथा

(ग) पंडित एस.एन.शुक्‍ला विश्‍वविद्यालय, शहडोल (म.प्र.) का

वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2021-2022

 


(6) मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वार्षिक लेखा परीक्षण प्रतिवेदन

वर्ष 2021-2022

(7) मध्‍यप्रदेश जल निगम मर्यादित का आठवां वार्षिक प्रतिवेदन

वर्ष 2019-2020

 

 

 

 


 

12.10 बजे ध्‍यान आकर्षण

 

(1) भोपाल के दक्षिण पश्‍चिम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 30 चूना भट्टी क्षेत्र की कालोनियों में नल कनेक्‍शन देने एवं शिवाजी नगर क्षेत्र में पेयजल प्रदाय के समय में परिवर्तन किया जाना

 

श्री पी.सी. शर्मा (भोपाल दक्षिण-पश्‍चिम) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की भी सूचना थी, आपने नाम लिया था, उसमें आया नहीं, यह भी नगर-निगम से संबंधित है. स्‍ट्रीट लाइट बंद हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, पहले ध्‍यानाकर्षण की सूचना तो पढ़िए.

श्री पी.सी. शर्मा -- यह दूसरा है, शून्‍यकाल की सूचना अलग थी. स्‍ट्रीट लाइट बंद हैं, राजधानी भोपाल की पूरी कालोनियों की.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, इसको पढ़िए ना, शून्‍यकाल में उठाना था.

श्री पी.सी. शर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह) -- अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

श्री पी.सी.शर्मा (भोपाल दक्षिण-पश्‍चिम) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने स्‍वयं ही बता दिया कि इंडिविजुअल कनेक्‍शन में 1 करोड़ रूपए व्‍यय होना है. यह विधानसभा दक्षिण-पश्‍चिम में ही नहीं, पूरे भोपाल का है. माननीय कृष्‍णा गौर जी बैठी हुई हैं. इनके क्षेत्र का भी मामला है. पूरे भोपाल में जितनी कालोनियां हैं उनमें इंडिविजुअल कनेक्‍शन नहीं दे रहे हैं. उन्‍होंने बता दिया कि 1 करोड़ रूपए एक्‍स्‍ट्रा खर्च होगा, इसलिए नहीं दे रहे हैं. वर्ष 2020 से लगातार बजट में पैसे हैं और जो आपने बात की है कि इसमें पैसा खर्च होगा, तो अमृत-2 में इसी काम के लिए 500 करोड़ रूपए आ गए हैं. इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर वहां पूरा डेवलप है, पाइप लाईन डली हुई हैं और सब जगह टंकियां बन गई हैं, केवल कनेक्‍शन देना है. उसमें कौन-सा 1 करोड़ रूपए खर्च होगा. यह तो नगर निगम के लोग आपको गुमराह कर रहे हैं. इसमें कहीं कोई दिक्‍कत नहीं है. इंडिविजुअल कनेक्‍शन की स्‍थिति यह है. मेरे पास पेपर्स की कटिंग भी है (अपने हाथ में पेपर्स दिखाते हुए) इसमें मुख्‍यमंत्री जी की फोटो भी है. नगर सरकार बनने पर बल्‍क कनेक्‍शन नहीं दिये जाएंगे, इंडिविजुअल कनेक्‍शन दिये जाएंगे. जब महापौर जी चुनी गईं, इसी बात पर चुनी गईं और इंडिविजुअल कनेक्‍शन नहीं दिये जा रहे हैं. कालोनियों में दिक्‍कतें आ रही हैं. जब इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलप है जिससे पैसा मिलेगा. इसमें कहां दिक्‍कत आ रही है. मैं समझता हॅूं कि आपको इंडिविजुअल कनेक्‍शन देना चाहिए, आपको घोषणा करना चाहिए.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहिए. यह इंडिविजुअल कनेक्‍शन पूरे भोपाल की मांग है. यह केवल मेरे ही विधानसभा क्षेत्र का एक अकेला मामला नहीं है, यह पूरे भोपाल का मामला है. चाणक्‍यपुरी एक अच्‍छी कालोनी है वे हर तरह से पैसे देने को तैयार हैं. जैसे जानकी नगर, दीपक सोसायटी, छत्रपति विंडसर कालोनी, गोमती, आकृति, गौतम नगर, राजदीप रेसीडेंसी ऐसी तमाम कालोनियां हैं. नगर निगम को जितना पैसा चाहिए, वह देने को तैयार हैं तो मैं समझता हॅूं कि इसमें इंडिविजुअल कनेक्‍शंस देना अच्‍छा है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने भी घोषणा की थी कि इंडिवजुअल कनेक्‍शंस दिये जाएंगे, बल्‍क कनेक्‍शंस नहीं. नगर निगम का आपका जो घोषणा पत्र था, उसमें 5वें नंबर पर दिया हुआ है तो यह हाई टाइम है, पैसा भी है, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर भी है तो मैं समझता हॅूं कि आपको यह कहना चाहिए और घोषणा करना चाहिए कि इंडिविजुअल कनेक्‍शंस दिये जाएंगे.

श्री आरिफ मसूद -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय..

अध्‍यक्ष महोदय -- उनका उत्‍तर आ जाने दीजिए. आप बैठ जाइए.

श्री आरिफ मसूद -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे बोलने का मौका दिया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय -- अभी उनका उत्‍तर तो आ जाने दीजिए. आप बैठ जाइए न. अरे, यह कोई बात नहीं हुई. अभी उनके प्रश्‍न का उत्‍तर नहीं आया और आप बीच में खडे़ हो गए. बैठ जाइए न.

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य श्री पी.सी.शर्मा जी ने जो विषय रखा है, उन सबका हम परीक्षण करा लेंगे और जो भी यथासंभव होगा, वह यथासंभव हम लोग प्रयास करेंगे. हमारी सरकार की यह प्राथमिकता है कि लोगों को अच्‍छी से अच्‍छी सुविधाएं शहरी क्षेत्रों में हों. इसके लिये हमारी सरकार प्रतिबद्ध है और जो आपके सुझाव हैं उन सुझावों के अनुसार हम परीक्षण करा लेंगे. जो भी यथासंभव होगा, वह करेंगे.

श्री आरिफ मसूद -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पूरे भोपाल शहर की बात है और होता यह है कि अधिकारी रटा-रटाया उत्‍तर दे रहे हैं. जब मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा कर दी है कि हम इंडिविजुअल कनेक्‍शन देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- अरे भई, पी.सी.शर्मा साहब ने पूरे भोपाल का ही नाम लिया है.

श्री आरिफ मसूद -- अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी से कहलवा दीजिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- उन्‍होंने पूरे भोपाल का नाम लिया है.

श्री आरिफ मसूद -- अध्‍यक्ष महोदय, उन्‍होंने एक विधानसभा का नाम कोट किया है. मैं पूरे भोपाल की बात कर रहा हॅूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- एक नहीं किया है. उन्‍होंने पूरे भोपाल का नाम लिया है.

श्री आरिफ मसूद -- अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी कह दें, तो हम मान लेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप सुन नहीं रहे थे. श्री पी.सी.शर्मा जी ने श्रीमती कृष्‍णा गौर जी का नाम लिया, पूरे भोपाल का नाम लिया.

श्री पी.सी.शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, आरिफ भाई का जो मध्‍य क्षेत्र शाहपुरा में है उसकी भी यही स्‍थिति है. वहां कालोनियां हैं. माननीय मंत्री जी, इसमें कहीं कोई दिक्‍कत नहीं है. यह पैसा अमृत-2 में 500 करोड़ रूपए इन-इन चीजों के लिये है. कालोनियों में टंकियां बनी हुई हैं, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलप है और इससे पैसा मिलेगा. मुख्‍यमंत्री जी ने नगर निगम के चुनाव में घोषणा की थी. मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा को तो मान लीजिए. वे यहां बैठे हैं. कम से कम उनके सामने घोषणा हो जाएगी कि इसको तुरंत किया जाएगा.

श्री भूपेन्द्र सिंह-- मैं इसके लिए, जो आपने कहा है, मैं उसको बिल्कुल मना नहीं कर रहा हूँ. मैं तो स्वयं उस बात को कह रहा हूँ और मैं इस बात को भी कह रहा हूँ कि हमारी सरकार शहरों के विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है. शहरों का सुनियोजित विकास हो, शहरों में लोगों की जो मूलभूत आवश्यकताएँ हैं, उनकी सब पूर्ति हो और इसके लिए ही हमारी सरकार ने, चाहे वह अमृत मिशन हो, यह प्रारंभ किया और अमृत मिशन की जो आप बात कर रहे हैं, इसमें अमृत मिशन में जो भोपाल शहर का नवीन क्षेत्र है वह इसमें है. यह क्षेत्र नहीं है पर मैंने फिर भी कहा है कि इसका हम परीक्षण कराएँगे और आप जो चाह रहे हैं उसमें जो यथासंभव होगा वह पूरे भोपाल के लिए जो आप इंड्युजुअल कनेक्शन की बात कर रहे हैं, यह पूरे भोपाल के लिए जो आपका चूनाभट्टी का क्षेत्र है जो 25 कॉलोनीज़ की आप बात कर रहे हैं, वह भी है, जो आरिफ भाई बात कर रहे हैं, वह भी है. सभी भोपाल के लिए पूरी तरह से इसको हम लोग देखेंगे.

श्री पी.सी.शर्मा-- इसको कब तक कर लेंगे?

श्री भूपेन्द्र सिंह-- आप सुन लें. इसको जल्दी करेंगे और जो आपने शिवाजी नगर का भी कहा है, उसमें भी मेरा आप से आग्रह है कि शिवाजी नगर में चूँकि एक लाइन, आपको भी मालूम है, लाइन खराब हुई है, पुरानी लाइन थी और इस कारण से टाइम चेंज करना पड़ा है और इसमें भी अमृत मिशन के अंतर्गत नयापुरा ओव्हरहेड टैंक हम लोग बना रहे हैं और जैसे ही यह कंपलीट होगा तो फिर सुबह जो सप्लाई है वह हम लोग करेंगे. यह बात सही है कि वहाँ पर शासकीय कर्मचारी रहते हैं.

श्री पी.सी.शर्मा-- विधान सभा के रहते हैं, वल्लभ भवन के भी रहते हैं और शाम को कहाँ से भर लेंगे पानी?

श्री भूपेन्द्र सिंह-- बिल्कुल मैं आपकी बात से सहमत हूँ.

श्री पी.सी.शर्मा-- यह टाटा लाइन डाली गई थी, उसमें दो लाइन को एक कर दिया, वह टाटा के भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया. दो लाइन अगर होती तो पानी आता था. भाई, जब आप सुबह पहले देते थे तो अब देने में क्या दिक्कत है? अभी एक लाइन डलवा दें, कोलार से वहाँ लाइन डलवा दें. आपके घर के सामने ही वह टंकी है उसमें वह जोड़ना है. उसको जुड़वा दें तो यह पानी आ जाएगा. शासकीय कर्मचारी और विधान सभा के कर्मचारी ये सबकी उसमें मांग है क्योंकि कौन 5-6 बजे तक पहुँचेगा घर पर? ये तो पहुँचते हैं 7 बजे तक तो पानी कहाँ से मिलेगा? यह बहुत ही महत्वपूर्ण है अभी आप इसको तुरन्त कर सकते हैं. इसकी घोषणा तो कीजिए कि इसमें पाइप लाइन डलवा देंगे.

श्री भूपेन्द्र सिंह-- नहीं, मैं आपकी बात से सहमत हूँ और आपका कहना बिल्कुल सही है कि हमारे जो भी, चाहे शासकीय कर्मचारी हों, चाहे आम नागरिक, कोई भी हो, सबकी आवश्यकता सुबह पानी की होती है, मैं इस बात को मानता हूँ और सबको सुबह पानी मिलना चाहिए, शाम को असुविधा होती है, पर चूँकि वो लाइन खराब होने से और नई लाइन डलने के कारण यह कठिनाई आई है इसलिए शाम को वहाँ पर दे रहे हैं. हमने आज ही निर्देश दिए हैं कि इसका परीक्षण करें और हम कोशिश कर रहे हैं कि जल्दी हम यह व्यवस्था करें जिससे कि सुबह पानी वहाँ के लोगों को मिल सके. आपकी जो भावना है उस भावना के अनुसार हमने यह निर्देश जारी किए हैं और उसको हम लोग जल्दी करेंगे.

श्री पी.सी.शर्मा-- इड्युजुअल कनेक्शन में जहाँ जहाँ पॉसिबल है उसको तो कर दें उसमें क्या दिक्कत है.

श्री भूपेन्द्र सिंह-- बिल्कुल, जहाँ पॉसिबल होगा कर देंगे.

श्री पी.सी.शर्मा-- जितना जो पैसा जमा कर रहे हैं, पैसा देने को तैयार हैं फिर आपको क्या दिक्कत है?

अध्यक्ष महोदय-- हो गया, कर देंगे.

श्री भूपेन्द्र सिंह-- कर देंगे, जहाँ पॉसिबल....

श्री पी.सी.शर्मा-- चूना भट्टी में एक चीज और है कुछ क्षेत्र में एक दिन की आड़ में पानी आ रहा है. राजधानी में अगर आज आएगा फिर परसों आएगा तो फिर कल करेगा क्या? वहाँ पर गरीब क्षेत्र भी है, स्लम्स है.

श्री भूपेन्द्र सिंह-- उस व्यवस्था को भी ठीक करेंगे.

श्री पी.सी.शर्मा-- डेली पानी मिले और सुबह मिले, यह व्यवस्था.....

श्री भूपेन्द्र सिंह-- उस व्यवस्था को भी ठीक करेंगे और कुछ क्षेत्र में आपके यहाँ जो आपने हैण्डपम्प का बताया था, उसके लिए भी मैंने कहा है.

श्री पी.सी.शर्मा-- कुछ जगह आपके यहाँ से निर्देश गए हैं वहाँ पर भी....

श्री भूपेन्द्र सिंह-- उसको भी मैंने कह दिया आपने नहीं पूछा....

अध्यक्ष महोदय-- आपका भी नाम ले लिया. आशीष गोविन्द शर्मा जी....

श्री आरिफ मसूद(भोपाल मध्य)-- अध्यक्ष महोदय, बोर करने के लिए....

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, हो गया, आपका भी नाम लिया ना भैय्या उन्होंने.

श्री आरिफ मसूद-- अध्यक्ष महोदय, भोपाल में नगर निगम द्वारा बोर बंद किए जा रहे हैं. जो बोर चल रहे हैं. उन बोरों को, मंत्री जी को बताना पड़ेगा, उन बोरों को भी आपका कमिश्नर निकाल रहा है. वह निकाल देते हैं और नये कनेक्शन दे नहीं रहे हैं. वहाँ लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं, वहाँ तो जाता ही बोर से है. वह कहते हैं बिजली की वजह से हम इनको बोर का कनेक्शन नहीं देंगे. हमने कई बार कहा हमारी विधायक निधि से ले लो, बोर का पैसा, बोर कर दो, अगर वहाँ लाइन नहीं है तो वे कहते हैं बोर हम नहीं देंगे, भोपाल में एलाऊ नहीं करेंगे तो दो व्यवस्थाएँ एक साथ कैसे होंगी?

श्री पी.सी.शर्मा-- अध्यक्ष जी, मंत्री जी का ट्रैक रिकार्ड है कि इनसे सवाल पूछते हैं और बाहर जाकर वो सॉल्यूलशन लेकर मिलता है अधिकारी, तो आज ऐसा कुछ दिख नहीं रहा है, आज मामला कुछ गड़बड़ है...(व्यवधान)..

श्री आरिफ मसूद-- भूपेन्द्र भाई, आप मीटिंग भी कर चुके हों. तब भी आपने बल्क कनेक्शन पर भी वादा किया था.

श्री भूपेन्द्र सिंह-- आज भी ऐसा ही होगा.

अध्यक्ष महोदय-- शर्मा जी, उन्होंने निर्देश दे दिए हैं.

श्री भूपेन्द्र सिंह-- आप बता देना आरिफ भाई करा देंगे जहाँ आप बताएँगे करा देंगे.

अध्यक्ष महोदय-- ठीक है.

श्री आरिफ मसूद-- धन्यवाद.

श्री आरिफ अकील -- जब आप बोर शुरु करवा रहे हैं तो जहां निकाल लिए गए हैं या बंद कर दिए गए हैं उन्हें भी शुरु करवा दीजिए.

श्री भूपेन्द्र सिंह -- आरिफ भाई करवा देंगे.

 

(2) देवास जिले के खातेगांव क्षेत्र में कपिलधारा कुंआ योजना के तहत हितग्राहियों को भुगतान न होना

 

श्री आशीष गोविन्द शर्मा (खातेगांव) -- अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री (श्री राम खेलावन पटेल) -- माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

श्री आशीष गोविन्द शर्मा -- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि आपने जो उत्तर दिया है, निश्चित ही कुछ हितग्राहियों का लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व भुगतान हुआ है लेकिन मैंने स्वयं भी इस प्रक्रिया को समझा है. इनका जो पोर्टल है जिससे मजदूरों को मजदूरी का और सामग्री का भुगतान होता है वह बार-बार हाईड हो जाता है. मैं अधिकारियों के साथ भोपाल तक इस मामले को लेकर आया था. पोर्टल पर बिल हाईड हो जाने के कारण किसान भाइयों को अभी तक भुगतान नहीं मिल पा रहा है. दोनों तहसीलों में ऐसी संख्या लगभग 100 के आसपास है. एक वर्ष से अधिक का समय व्यतीत हो जाने के बाद भी कई किसानों का भुगतान लंबित है.

अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से इतना आग्रह करना चाहता हूँ कि यह जो तकनीकी त्रुटि है जिसके कारण जो पात्रता रखते हैं उनका भुगतान नहीं हो पा रहा है. किसानों ने अपने खेत पर कुँआ बना लिया उसका पक्का निर्माण भी कर लिया जिसके कारण उनके खेतों पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हुई है. अगर समय पर उनको पैसा मिल जाए तो उनको आर्थिक रूप से सहूलियत होती है. मंत्री जी से मेरा आग्रह है कि जितने भी प्रकरणों में जिन्हें भुगतान योग्य पाया गया है, जिसका मूल्यांकन भी हो चुका है और जो तकनीकी दृष्टि से भी ठीक हैं. ऐसे समस्त प्रकरणों का भुगतान आप किस समयावधि में करवा देंगे केवल इतना भर बता दें.

श्री दिलीप सिंह परिहार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, नीमच जिले के भी कपिलधारा के कुछ प्रकरण बाकी हैं. सभी जगह पर पेमेंट करवा दें.

श्री राम खेलावन पटेल -- माननीय अध्यक्ष महोदय, पब्लिक फायनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम लागू हो गया है. इसमें जनपद का सीईओ और एकाउन्टेंट के सिग्नेचर से भारत सरकार को वेरीफिकेशन का प्रस्ताव चला जाता है. भारत सरकार से जैसे ही पैसा अलाट होगा इनके कूपों का भुगतान करवा दिया जाएगा.

श्री आशीष गोविन्द शर्मा -- माननीय मंत्री जी सभी प्रकरण भुगतान योग्य हैं लेकिन आपका जो एफटीओ है वह पोर्टल बार-बार हाईड हो रहा है, यह कोई तकनीकी त्रुटि है.

श्री राम खेलावन पटेल -- मैं थोड़ी यह कह रहा हूँ कि भुगतान योग्य नहीं हैं. मैं तो कह रहा हूँ कि भुगतान की प्रक्रिया सतत् है भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है जैसे ही पैसा आ जाएगा अतिशीघ्र पेमेंट करा देंगे.

श्री दिलीप सिंह परिहार -- मध्यप्रदेश में सभी स्थानों पर भुगतान करवा दें.

श्री राम खेलावल पटेल -- अवधि के बारे में मैं कैसे कह सकता हूं. भारत सरकार से पैसा आता है. मैं कैसे कह सकता हूँ कि एक महीने के अन्दर भेज दो. मेरा प्रयास होगा कि शीघ्र पेमेंट हो जाए.

श्री आशीष गोविन्द शर्मा -- हाँ शीघ्र करा दें. किसानों से जुड़ा मामला है.

श्री दिलीप सिंह परिहार -- जल्दी करवा दें.

श्री राम खेलावन पटेल -- मैं रिमाइंडर लेटर भारत सरकार को भिजवा दूंगा.

श्री प्रियव्रत सिंह-- माननीय मुख्‍यमंत्री जी भी यहां पर विराजमान हैं यह समस्‍या एक जिले की नहीं है हर जिले की है, पूरे प्रदेश की है. पूरे बावन जिलों की हर जनपद में यह समस्‍या है. अगर इस पर थोड़ा सा संज्ञान लेंगे. निहायती गरीब लोगों का पेमेंट भुगतान नहीं हो पा रहा है.

श्री विजय रेवनाथ चौरे-- पूरे प्रदेश में यही स्थिति है. मनरेगा में बजट ही नहीं है.

श्री प्रियव्रत सिंह-- हर जनपद में पैतीस, चालीस प्रकरण ऐसे हैं जिनका भुगतान गरीब लोगों का नहीं हो पाया है.

अध्‍यक्ष महोदय-- यह विषय आ गया है. आप बैठ जाइए

श्री प्रियव्रत सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय यह आपकी तरफ से भी आसंदी से जा जाए.

 

12.31 बजे अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

ध्‍यानाकषर्ण सूचनाओं से संबंधित जानकारी मंत्रीगणों द्वारा समय सीमा में विधान सभा सचिवालय को भेजने हेतु संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाना

 

डॉ. गोविन्‍द सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो आपने आज प्रश्‍न न आने का शासकीय अधिकारियों द्वारा विभागों का उल्‍लेख किया है मैं आपके इस प्रस्‍ताव रखने के लिए और सरकार को सचेत करने के लिए आपने जो बात की है मैं आपकी भूरी-भूरी प्रशंसा करता हूं. आप पक्ष विपक्ष के संरक्षक हैं. वास्‍तव में माननीय मुख्‍यमंत्री जी के समक्ष भी और सभी माननीय मंत्री मण्‍डल के समक्ष भी अनेकों बार यह प्रस्‍ताव रखे जा चुके हैं, कहा जा चुका है. आसंदी की ओर से भी हमेशा निर्देश दिये जा रहे हैं लेकिन शासन ने आपके निर्देशों की भी धज्जीयां उड़ा दी हैं. मैंने अनेकों बार सभी से निवेदन भी किया और जहां देख रहे हैं कि जिन प्रश्‍नों में सरकार के खिलाफ या सरकार के कारनामे उजागर होते हैं उन प्रश्‍नों पर कभी भी जवाब नहीं दिया जाता है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी पिछले कई वर्षों से आप मुख्‍यमंत्री होने के नाते प्रजातंत्र के, संविधान से संरक्षक हैं. आपका भी दायित्‍व है कि कम से कम आप प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता के सामने सच्‍चाई को उजागर करने का काम करें. इस तरह तो प्रजातंत्र का, विधान सभा का और माननीय पक्ष, विपक्ष के सदस्‍यों का कोई मूल्‍य ही नहीं रहेगा. मैं आपसे पुन: प्रार्थना करता हूं कि कम से कम अपनी बेलगाम नौकरशाही पर कंट्रोल करें और माननीय मं‍त्रियों से भी हम प्रार्थना करते हैं कि बीस से पच्‍चीस दिन पहले आपको सूचना मिल जाती है तो कम से कम सदन में नियमित रूप से प्रश्‍नों के उत्‍तर आते रहें हम आपसे यह अनुरोध करते हैं और निवेदन भी करते हैं.

 

12.33 बजे प्रतिवेदनों की प्रस्‍तुति

 

 

12.33 बजे आवेदनों की प्रस्‍तुति

 

अध्‍यक्ष महोदय-- आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी आवदेन प्रस्‍तुत किए हुए माने जाएंगे.

 

12.34 राज्‍यपाल के अभिभाषण पर श्री यशपाल सिंह सिसौदिया, सदस्‍य द्वारा 27 फरवरी, 2023 को प्रस्‍तुत निम्‍नलिखित प्रस्‍ताव पर चर्चा का पुनर्ग्रहण

 

अध्‍यक्ष महोदय-- अब राज्‍यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का पुनर्ग्रहण होगा. राज्‍यपाल के अभिभाषण पर प्रस्‍तुत कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्‍ताव की चर्चा में दोनों पक्षों के 17-17 माननीय सदस्‍य बोल चुके हैं. प्रस्‍ताव पर आठ घण्‍टे चौंतीस मिनट चर्चा हो चुकी है. चूंकि चर्चा आज ही समाप्‍त करनी है. कार्यसूची में अन्‍य कार्य भी सम्मिलित हैं अत: माननीय नेता प्रतिपक्ष जी बालेंगे तत्‍पश्‍चात् माननीय मुख्‍यमंत्री जी चर्चाओं का जवाब देंगे.

नेता प्रतिपक्ष (डॉ. गोविन्‍द सिंह)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय राज्‍यपाल महोदय के द्वारा जो अभिभाषण दिया गया है मैं इसके बारे में चर्चा करता हूं लेकिन माननीय मुंख्‍यमंत्री जी से भी चाहता हूं कि पिछले वर्षों में देख रहा हूं कि कोई कार्यवाही में जब विपक्ष अपनी बात कहता है तो सरकार को अपने उत्‍तर में उन बातों का उल्‍लेख करना चाहिए और स्‍पष्‍टीकरण या जवाब देना चाहिए. लेकिन हम बरसों से देख रहे हैं कि जब अजय सिंह जी नेता प्रतिपक्ष थे, तब उन्‍होंने कुछ मामले रखे थे, उसका कोई जवाब नहीं आया. हमने अभी अविश्‍वास प्रस्‍ताव रखा, उसका कोई जवाब नहीं आया. मैं, माननीय मुख्‍यमंत्री जी से प्रार्थना करना चाहता हूं कि कम से कम जो जनहित के मुद्दे हैं, जिनसे वास्‍तव में प्रदेश में सुधार होता है और आम जनता का हित होता है, उनके बारे में आप कुछ निर्देश दें और सरकार बताये कि वह क्‍या करेगी.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, महामहिम राज्‍यपाल का अभिभाषण अमृतकाल से शुरू हुआ और मुख्‍यमंत्री जी की विकास यात्रा पर आकर, अंतिम समय में नग्‍न नृत्‍य पर जाकर समाप्‍त हुआ. यह वास्‍तव में निंदनीय है. यह हमारी महिला बेटियों का अपमान है. आपकी पार्टी के नेताओं के बीच, मंच पर गुटखा खाते हुए सरकारी अधिकारी के बीच, उसका समापन हुआ. मैं, कहना चाहता हूं इस तरह की परंपरा को रोकना चाहिए और जहां तक सवाल विकास यात्रा का है तो विकास यात्रा में आपने जो काम किए, उसके लिए थी. सरकार को काम करना चाहिए, उसमें हमारा कोई विरोध नहीं है लेकिन इस तरह की परंपरा को रोकें.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी और सरकार के द्वारा प्रवासी भारतीय सम्‍मेलन किया गया और उसमें विभिन्‍न विभागों द्वारा, सभी ने मिलकर लगभग 300 करोड़ रुपये का खर्च किया. वहां 20 करोड़ रुपये के पेड़-गमले आदि, सजावट और हरा-भरा करने के लिए खरीदे गए. अब, मैं, मुख्‍यमंत्री जी से जानना चाहूंगा कि ये जो 20 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, जो गमले खरीदे गए थे, वे आज कहां हैं ? क्‍योंकि वे गमले आज मौके पर नहीं हैं. एक तो कम पेड़ और गमले खरीदे गए और जो खरीदे भी गए तो बाद में कुछ अधिकारियों ने उन गमलों को वापस कर दिया और भुगतान की गई राशि वापस ले ली. हमें जो जानकारी दी गई है, उस आधार पर मैं यह बात कह रहा हूं. आप इस बात को दिखवायें कि वास्‍तव में सच्‍चाई क्‍या है ?

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वास्‍तव में आपने कार्यक्रम में 3000 प्रवासियों को आमंत्रित किया, उनकी व्‍यवस्‍था की. लेकिन जिस परिसर में यह कार्यक्रम रखा गया था, वहां अंदर आपकी पार्टी के लोग पहले घुस बैठे और अनुशासनहीनता की. हमारे विदेशी मेहमान और प्रवासी बाहर ही खड़े रह गए और वे अंदर जाने के लिए तरसते रहे, उनको अंदर जाने ही नहीं दिया गया. इससे भारत और मध्‍यप्रदेश की, विदेशों में छवि बिगड़ी है. इस बात के लिए मुख्‍यमंत्री जी आपसे निवेदन है कि जिन लोगों ने ऐसा किया है, उन पर कार्यवाही हो. क्‍योंकि आपका बुलडोज़र सब जगह चलता है लेकिन ऐसे अपराधियों पर पता नहीं क्‍यों, उल्‍टा मुड़ जाता है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी सरकार विधायक खरीदकर बनी. यह आपकी ईमानदारी है कि आपने सरकार खरीदी. अब, मैं, महामहिम राज्‍यपाल के अभिभाषण पर आता हूं. उसमें कहा गया कि प्रदेश में हवाई-अड्डे और हवाई-पट्टियां बनाई जा रही हैं. मध्‍यप्रदेश में जनता को रोटी-कपड़ा-मकान, यह पूरी तरह से उपलब्‍ध नहीं है, आप अभी तो जमीन के पट्टे बांट रहे हैं, मकान उपलब्‍ध करवाने का प्रयास कर रहे हैं. ऐसे में करोड़ों की हवाई-पट्टियां बनाकर हम शासकीय धन का दुरूपयोग कर रहे हैं. राज्‍य में ऐसे बड़े हवाई-अड्डे हैं, जहां से आपको व्‍यापार मिल सकता है. इंदौर-भोपाल-ग्‍वालियर में आप विस्‍तार करें, इसमें हमारा कोई विरोध नहीं है लेकिन जहां जरूरत नहीं है, वहां भी आप बना रहे हैं. एक ताकतवर मंत्री के दबाव में, आपने दतिया में हवाई-अड्डा बना दिया, वहां हवाई-पट्टी की क्‍या जरूरत है? मेरा कहना है कि वहां हवाई-पट्टी का कोई उपयोग नहीं है. आप इंदौर-भोपाल-ग्‍वालियर में विस्‍तार करते, वहां उसकी आवश्‍यकता थी. आखिर कैसे एक मंत्री के कहने पर जो चाहे दतिया में हो रहा है. सीहोर में नहीं है, कहीं प्रदेश में नहीं है. जितनी योजनाएं और जितने कार्यक्रम हैं, वह सब दतिया में पहुंच रहे हैं और वह इसलिये की मंत्री ताकतवर है, कहीं कुर्सी ना हिला दे, इसलिये उसके सब काम करो.

अध्‍यक्ष महोदय:- गोविन्‍द सिंह जी, कहीं उसमें इन्‍डायरेक्‍ट आपके मित्र हैं, इसलिये आपका भी तो इशारा नहीं है कि वहीं करना है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह:- थोड़ा बहुत लहार की तरफ भी भेज देते, लगा हुआ जिला है, सटा हुआ है. इसलिये मैं कह रहा हूं कि अ‍ब तो यह हो गया कि हवाई चप्‍पल वालों को हवाई जहाज में बैठा लें.

श्री अजय विश्‍नोई:- जो मंत्री जी कर रहे हैं उस बात पर डॉ. गोविन्‍द सिंह जी को एतराज नहीं है. एतराज इस बात पर है कि मिल बांट कर नहीं कर रहे हैं.

डॉ. गोविन्‍द सिंह:- आपको धन्‍यवाद, आप तो इतना सोचते भी रहे, लेकिन इधर नहीं सोचते.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने, कमलनाथ जी की सरकार ने बिल्‍कुल 100 रूपये 100 यूनिट, हर गांव और शहरों के उपभोक्‍ताओं के लिये इस तरह का नियम बनाया, आदेश निकाला और हर घर को बिजली पहुंची. आज 700 से 1200 रूपये प्रति माह दिया जा रहा है, जबकि आपने कहा कि हम हर उपभोक्‍ता के घर में चिराग जला रहे हैं, उजेला कर रहे हैं और बिना बिजली खरीदे करोड़ों रूपये का भुगतान आपकी सरकार ने कर दिया, आखिर इसकी जांच आपको करानी चाहिये की यह पैसा बाहर क्‍यों गया. आप सरप्‍लस बिजली बना रहे हैं. सरप्‍लस स्‍टेट की घोषणा कर रहे हैं. अभी हमारे सरदार जी नहीं हैं, हमें आज तक यही पता नहीं चला कि ऊर्जा विभाग में हमने उनसे पूछा कि आप क्‍या कर रहे हो, बोले अभी हमारे पास करने के कुछ है ही नहीं. अपने आप ऊर्जा बन रही है, सूर्य से बनेगी. हमने उनसे पूछा कोई योजना हो तो आप बताओ. हमारे यहां ग्‍वालियर और चंबल संभाग में पहुंचायें तो उसका जवाब नहीं दी पाये. अब आपने बिजली खरीदी है और हम गुजरात को और दिल्‍ली को बिजली बेच रहे हैं. वह हमसे सस्‍ती बिलजी लेकर महंगे दामों पर बेच रहे हैं. इस बात से हमारे मण्‍डल में 38 हजार करोड़ रूपये का घाटा हो गया है. कई आपके विभाग के अधिकारी भिण्‍ड जिले के आसपास और दतिया के हिस्‍से में सोहना तरफ और मुरैना के अम्‍बाहपुर की तरफ. बिजली के कर्मचारी बिजली लगाते हैं, लाइनें खिंचते हैं और उन्‍हीं में से कर्मचारी सांठगांठ करके दो दिन बाद सारे तार खिंचकर के बेचते हैं. बिजली के खम्‍बे अगर सड़क बनने के कारण निकाले जाते हैं, हटा दिये जाते हैं, वहां नये लगते हैं वह पीडब्‍ल्‍यूडी वाले लगाते हैं. वह सड़क के खम्‍बे बड़े मंहगे लोहे के पुराने समय के, सब चोरी करके इकट्ठा कर लेते हैं और एक बार हमने पकड़वाया भी, उसकी जांच भी हुई. अधिकारियों को बताया आपके मंत्री नहीं हैं, उनको भी लिखित में दिया लेकिल कोई कार्यवाही नहीं हुई और उन कर्मचारियों की नामजद एफआईआर भी करी और एक बार अधिकारियों ने उनको पकड़ा भी लेकिन आज तक उनको हटाने का काम नहीं किया, केवल ट्रासंफर कर दिया. लाखों रूपये की चोरी करने वाले इस तरह से आप बिजली बचायेंगे क्‍या ? थोड़ा सा पानी मंगवा दें.

अध्‍यक्ष महोदय:- पानी लाओ.

डॉ. गोविन्‍द सिंह:- अरे पानी रखना पड़ेगा. आप तो पानी मंगवा दो या क्‍या-क्‍या करा दो.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र:- 20 साल से आपको पानी ही पिलवा रहे हैं.

डॉ. गोविन्‍द सिंह:- अभी चार दिन पहले एक समाचार पत्र में छपा की (XXX) तो इसमें लिखा हुआ है कि जितना लूटो सो लूटो, यह कहावत है आज. (XXX) मैं बता रहा हूं कि यह घोटालों की सरकार है, आपका 15 करोड़ का व्‍यापम का घोटाला, पोषण आहार में हुआ, 12 करोड़ का घोटाला मध्‍याह्न भोजन में हुआ, हजारों करोड़ का घोटाला ई-टेण्‍डर में, छात्रवृत्ति घोटाला...

 

12.45 बजे (सभापति महोदय {श्री हरिशंकर खटीक}पीठासीन हुए)

 

डॉ. गोविन्द सिंह -- ..नर्सिंग घोटाला, शौचालय घोटाला, प्रधानमंत्री आवास घोटाला, बलराम तालाब घोटाला, फर्जी राशन घोटाला, चावल का घोटाला, फर्जी राशन कूपन का घोटाला, परिवहन घोटाला, फर्जी कन्या विवाह घोटाला, यह पंडित जी कहां चले गये इन्होंने उठाया था कन्या विवाह का मामला.

एक माननीय सदस्य--कमलनाथ जी के शासन में ट्रांसफर घोटाला.

डॉ. गोविन्द सिंह--हम तो अभी भी कह रहे हैं कि इनमें कोई दोषी हो तो उस पर कार्यवाही करिये. ऐसे लोगों को जेल भेजिये. चाहे वह किसी भी दल के हों, उनको सजा मिलना चाहिये. प्रोद्योगिकी विश्वविद्यालय घोटाला, बिजली घोटाला, 20 करोड़ का पोषण घोटाला, व्यापम इस प्रकार से कुल 364 घोटाला

श्री अनिरूद्ध (माधव) मारू-- कमलनाथ जी के शासन में सबसे बड़ा ट्रांसफर घोटाला. जो कागजों पर कहीं पर भी नहीं दिखता है लिया दिया. तब कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में ट्रांसफर उद्योग चलाया बजाय प्रदेश का विकास करने के. किसी भी प्रकार का विकास नहीं किया सिर्फ ट्रांसफर करने के.

डॉ. गोविन्द सिंह--यह आपको चुनाव के बाद पता चल जायेगा.आपको जवाब मिल जायेगा. इसका जवाब जनता दे देगी. माननीय महामहिम महोदय ने प्रदेश में 1 करोड़ 70 लाख दिहाड़ी मजदूरों का जिक्र किया. माननीय मुख्यमंत्री जी जो अभी आपकी रिपोर्ट आरबीआई की आयी है इसमें कृषि मजदूर जो आज है हमारे उनको देश में सबसे कम मजदूरी 217.80 पैसे मिल रही है. जबकि केरल में 728.80 पैसे का भुगतान हो रहा है. कृषि क्षेत्र के जो ग्रामीण मजदूर हैं उनको 266.70 पैसे मजदूरी मिल रही है. दूसरे प्रांतों से हम काफी कम हैं. निर्माण मजदूर हैं उनको करीबन 370.66 पैसे मध्यप्रदेश में मिल रहे हैं. केरल में उनको 870.80 पैसे मिल रहे हैं. हमारे 1 करोड़ 70 लाख दिहाड़ी मजदूर जो प्रदेश में हैं उनके हित कल्याण में आपने तमाम योजनाएं बनायी हैं. संबल योजना भी मदद करने के लिये है. देश में सबसे ज्यादा आत्म हत्या करने के लिये मजबूर हैं तो उनमें मध्यप्रदेश का नाम सबसे ऊपर हैं. यह सरकार का अमृतकाल किसका है, अमृतकाल है सरकार के अधिकारियों एवं मंत्रियों का आपके पास में शासकीय प्लेन, शासकीय हेलीकाप्टर है फिर भी मंत्रियों एवं अधिकारियों ने अपने पिछले तीन वर्षों में 1395 हवाई यात्राएं कीं और इसमें करोड़ो रूपये का व्यय कर दिया है. जबकि आपके शासन ने प्लेन, हेलीकाप्टर की खरीदी की है फिर इतने रूपये के व्यय की क्या आवश्यकता है ?

 

 

 

 

12.48 बजे अध्यक्षीय घोषणा

भोजनावकाश न होने विषयक

सभापति महोदय--आज भोजनावकाश नहीं होगा. माननीय सदस्यों के लिये भोजन की व्यवस्था सदन की लाबी में की गई है. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्ट करें.

 

12.49 बजे राज्यपाल के अभिभाषण पर प्रस्तुत कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर चर्चा का पुनर्ग्रहण (क्रमशः)

 

डॉ. गोविन्द सिंह--सभापति महोदय, आपके महामहिम जी के अभिभाषण में यह बताया है कि 5 करोड़ 18 लाख लोग सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत निशुल्क खाद्यान्न का वितरण हो रहा है. साढ़े आठ करोड़ प्रदेश की जनता है इसमें से 5 करोड़ 18 लाख लोग गरीब हैं, कमजोर है. इससे स्पष्ट है कि 61 प्रतिशत आबादी आज भी गरीबी रेखा के नीचे है. इधर आप अभिभाषण में खुद दर्ज करते हैं और उसका फिर खण्डन करते हैं कि प्रदेश काफी आगे जा रहा है विकासशील प्रदेश है. देश में इसका नाम है. आपने लगातार यह लिखा है कि शासकीय निशुल्क डायलिसिस, सिटी स्केन में पांच स्वास्थ्य केन्द्रों के नाम बताये हैं कि इन जगहों पर हो रहा है. अब आप बता दें नाम कि कहां कहां पर यह हो रहा है, यह स्पष्ट करें ताकि हम भी जाकर के पता करें कि ग्‍वालियर जैसा बड़ा चिकित्‍सालय जहां ढाई हजार बिस्‍तरों की आपने व्‍यवस्‍था की है, पहले दो हजार थी, 500 और आपने बढ़ाया है, इसके लिए धन्‍यवाद. लेकिन कई जगह बिस्‍तर नहीं है, कई जगहें मशीनें खरीदी गई हैं, धूल चढ़ी हुई है, इनमें कोई कार्यवाही नहीं हो रही है. आम जनता बाजार से 5-7 हजार में सीटी स्‍कैन करवाकर भुगतान कर रही है. ये अमृतकाल है? जनता लुट रही है, आप मशीनें दे रहे हो और डाक्‍टरों ने अपनी मशीनें लगा रखी है, उनसे लिखाया जाता है 30 प्रतिशत कमीशन, जो सी.टी स्‍कैन करवाने वाले डाक्‍टर लिखते हैं उनको भुगतान होता है. इस तरह से प्रदेश की गरीब जनता, किसान और मजदूर को लूटा जा रहा है. ये आपका अमृतकाल हो सकता है. आम आदमी, गरीब आदमी और किसान मजदूर का नहीं हो सकता. अभी आपने एक लाख पदों की भर्ती का लक्ष्‍य रखा है, 81 हजार पदों के विज्ञापन निकाले हैं, अभी शिक्षकों की भर्ती निकाली है, एक लाख में किसी विभाग का नाम नहीं, केवल शिक्षकों के 29 हजार पदो की भर्ती का उल्‍लेख किया है, तो बाकी के किस विभाग में कितने पद निकाल रहे हों, अगर आपकी भर्ती की, नौजवानों को रोजगार देने की इच्‍छा है, सरकार की नीयत साफ है, तो तत्‍काल इस व्‍यवस्‍था का काम करें. पूरे भाषण में ताकतवर मंत्री का विभाग छोड़ दिया, कहीं नाम निशान नहीं. अभी आपने कमिश्‍नर प्रणाली लागू कर दी और इस प्रणाली के लागू होने के बाद इस प्रदेश के गृहमंत्री के कार्यकाल में लाखों, तमाम महिलाओं पर अपराध बढ़े.

12:52 बजे      {अध्यक्ष महोदय (श्री गिरीश गौतम) पीठासीन हुए}

मध्‍यप्रदेश में बच्चियों पर अपराध, बलात्‍कार के प्रकरण और अन्‍य जगहें लूट-खसौट चालू है, माफिया पनप रहे हैं, लेकिन आप इसमें या भोपाल में ही क्राइम बहुत ज्‍यादा बढ़ गया है तो इस प्रणाली को लागू करके जनता की गाढ़ी कमाई का धन दुरुपयोग क्‍यों कर रहे हो. मैंने तो पहले भी इसका विरोध किया था कि कमिश्‍नर प्रणाली लागू नहीं होना चाहिए. तमाम लोग अलग अलग जगह पद पर बैठा दिए, बहुत ज्‍यादा पद बढ़ाकर अलग अलग आपस में खींचातानी मची हुई है. इसलिए तत्‍काल अभी भी जनता के हित का सवाल है, सरकारी धन अपव्‍यय होने से बचेगा अगर आप कमिश्‍नर प्रणाली समाप्‍त करें तो. माननीय मुख्‍यमंत्री जी आपका लगभग 18 वर्ष का कार्यकाल हो सकता है ज्‍यादा भी हो, मैंने गुणा-भाग नहीं लगाया हूं. लेकिन 18 वर्ष में मैं नेता प्रतिपक्ष बनने के पूर्व तीन बार, पहले तो टाइम ही नहीं मिलता था नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद टाइम लेकर आपसे 4 बार मिला हूं, दो बार हमारे कमलनाथ जी साथ थे, दो बार मैं स्‍वयं आपके यहां गया, हम जनता के हित से, क्षेत्र के हित से जुडे़ काम को लेकर गए, और आप सभी पर लिख देते हैं प्‍लस गोल कर देते हैं, उसका मतलब होता है कि 100 प्रतिशत काम होना है. मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि अभी आपका बजट हमने देखा. आपने करीब 179-180 के करीब सड़कें मंजूर की, लेकिन उन सड़कों में हमने देखा तो आपका प्‍लस वाला जाने कहां पोत दिया गया बाद में एक सड़क नहीं मिली भिण्‍ड जिले को और पिछले कई सालों से नहीं मिली. अब मैं कह रहा हूं सागर जिले में 41 सड़के हैं, अभी सागर के तीन तीन मंत्री बैठे हैं, आपकी कुर्सी सुरक्षित रखने के लिए आप उन्‍हें खुश करोगे, सीहोर जिले में 27 सड़कें हैं, तो सवाल इस बात का है, सड़कों के मामले में बजट में सागर, सीहोर हाफ, पूरे प्रदेश में जो मंजूर हुई थी दो जिलों में आधी और बाकी सब है साफ. उनमें हमारा भिण्‍ड जिला और लहार विधान सभा क्षेत्र भी आ रहा है. इतने बजट आ रहे, अरे भाई आप प्रेम से बोलते हो, सहृदयी है, भाषण भी आप लच्‍छेदार देते हों, अच्‍छे लगते हैं, लेकिन थोड़ा बहुत रहम करो, कम से कम विरोधियों के क्षेत्र को भी देखो, ऐसा आपने क्‍या कर दिया कि यहां कुछ काम ही नहीं होगा. अब दूसरा शब्‍द आया सुशासन. अमृतकाल के बाद आखरी में लिखा था सुशासन.

श्री लक्ष्‍मण सिंह (चाचौड़ा) - डॉक्‍टर साहब, मुझे एक मिनट दीजिये, अगर आप अनुमति दें तो. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी शासन ने सब विधायकों से 15-15 करोड़ रुपये की सड़क बनाने के प्रस्‍ताव मांगे थे, सत्‍ता पक्ष के विधायकों से मांगे थे, मगर विपक्ष के विधायकों से नहीं मांगे.

कुँवर प्रद्युम्‍न सिंह लोधी (मलहरा) - किसी से नहीं मांगे.

श्री लक्ष्‍मण सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, यह फर्क क्‍यों ? इसलिए मेरा माननीय मुख्‍यमंत्री जी से अनुरोध है कि आप फर्क न करें ? अगर आपने सत्‍ता पक्ष के विधायकों से मांगे है तो जरूर मांगिये. लेकिन विपक्ष के विधायकों से भी मांगिये और उन प्रस्‍तावों को पूरित करिये.

डॉ. गोविन्‍द सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने बजट में अल्‍पसंख्‍यकों के लिए बजट तो दिया है, बजट देते हैं लेकिन इस बार के बजट में कोई विकास कार्य नहीं दिये गये हैं.

अध्‍यक्ष महोदय, मैं मुख्‍यमंत्री जी आपसे कहना चाहता हूँ कि रोजगार कार्यालयों में करीब-करीब 38 लाख अशिक्षित लोगों के नाम दर्ज हैं, 41 लाख 80 हजार 669 तो शिक्षित बेरोजगार हैं और 1 लाख 12 हजार 470 बेरोजगार ऐसे हैं, जो पढ़े-लिखे नहीं हैं. कुल मिलाकर अभी तक आपने पिछले 2 वर्षों में 21 लोगों को रोजगार दिया है. आपके कार्यालय पर सब कार्य मिलाकर मध्‍यप्रदेश के 52 रोजगार कार्यालयों पर 16 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, उन पर आप वेतन भत्‍ते बांटते हैं, सुरक्षा और रंगाई-पुताई के लिए खर्च कर रहे हैं. लेकिन आपने पिछले 2 वर्षों में शिक्षित बेरोजगार और अशिक्षित बेरोजगार दोनों में मिलाकर 21 लोगों को आप रोजगार दे पाये हो. अब एक रोजगार कितने का पड़ा मुख्‍यमंत्री जी, एक व्‍यक्ति को रोजगार देने में 1 करोड़ 6 लाख रुपये खर्च कर दिए, तो आप रोजगार कार्यालयों पर इतना व्‍यय क्‍यों कर रहे हैं ? आप इन्‍हें समाप्‍त करें. जब आपकी इच्‍छा रोजगार देने की नहीं है, सरकार रोजगार देने में अक्षम साबित हुई है तो नौजवानों के साथ इस प्रकार का अन्‍याय न करें.

अध्‍यक्ष महोदय, इसके साथ ही आप लगातार बात करते हैं- जीरो टॉलरेंस की. मैं जीरो टॉलरेंस में आपसे पूछना चाहता हूँ कि मुख्‍यमंत्री जी आपके 49 आईएएस अधिकारियों के विरुद्ध लोकायुक्‍त और ईओडब्‍ल्‍यू में जांच वर्षों से चल रही है, विवेचना चल रही है और अनेकों के लिए लोकायुक्‍त और आर्थिक अपराध ब्‍यूरो ने आपसे चालान प्रस्‍तुत करने की, सरकार से अनुमति मांगी, आखिर जब आप इसमें इनवॉल्‍व नहीं हैं, आपका कहीं हाथ नहीं है, आपका कोई संरक्षण नहीं है तो आप इन अधिकारियों के विरुद्घ जो सत्‍ता के शीर्ष में बैठकर गरीबों को दी हुई राशि को हड़प रहे हैं, उनके खिलाफ आप तत्‍काल चालान प्रस्‍तुत कराएं ताकि आपका यह जीरो टॉलरेंस हो पायेगा, अन्‍यथा केवल जनता को बार-बार भाषण देने में इसका कोई मतलब नहीं रह जायेगा. इसके अतिरिक्‍त आपकी सरकार और भारत सरकार ने भी यह तय किया है कि प्रतिवर्ष शासकीय अधिकारी-कर्मचारी संपत्ति विवरण प्रस्‍तुत करे, उसका ब्‍यौरा प्रस्‍तुत करें, लेकिन आपके बहुत से अधिकारियों ने प्रस्‍तुत नहीं किया है और किया भी है तो जो अपनी नई संपत्ति करोड़ों रुपये की खरीदी है, अरबों रूपये इकट्ठे कर लिये, वह बालिग बच्‍चों के नाम कर दी. जो 18 वर्ष से ऊपर के हो गए हैं हमारे बेटे अलग हो गये हैं, उनके नाम करोड़ों की संपत्ति है, लेकिन अपने नाम से स्‍पष्‍ट नहीं किया है, मतलब उसको छुपाया है. इसलिये इसके साथ ही साथ माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारा कहना यह है कि जब पिछले समय आपसे पहले 15 महीने के करीब श्री कमलनाथ जी के नेतृत्‍व में सरकार आई थी, हमारे घोषणा पत्र में था, प्रत्‍येक विधायक संकल्‍प लाये, प्रत्‍येक विधायक अपनी संपत्ति प्रति वर्ष विधानसभा के पटल पर रखेंगे. यह संकल्‍प मैंने सामान्‍य प्रशासन मंत्री होने के नाते प्रस्‍तुत किया था और इस सदन के माननीय सभी सदस्‍यों ने उस संकल्‍प को सर्वसम्‍मति से पारित किया था, किसी ने भी इस सदन में विरोध नहीं किया था. वह बहुमत से पारित नहीं हुआ था, वह सर्वसम्‍मति से पारित हुआ था. लेकिन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं जानना चाहता हूं हालांकि इस पर दबाव नहीं है, उसमें प्रेशर नहीं है कि हर आदमी को देना है, लेकिन यह स्‍वेच्‍छया से है, हम समाज में राजनीति में आये हैं. हम जनता की भलाई के लिये अपना समय देते हैं. हम सरकार में जनता को देने के लिये आये हैं, लेने के लिये नहीं आये हैं, जनता को लूटने के लिये नहीं आये हैं. अगर हम पाक साफ हैं, हमारी नियत साफ है, हमने कुछ धन दौलत इकट्ठा नहीं की है तो हमारा माननीय मुख्‍यमंत्री जी से अनुरोध है और हम अपने पक्ष के माननीय सदस्‍यों से भी अनुरोध करते हैं कि आप भी प्रतिवर्ष जब आपकी सरकार का संकल्‍प था, आपने उसको पारित किया तो आपसे भी प्रार्थना है कि आप अपनी आमदनी का प्रतिवर्ष सदन में अपना लेखा जोखा प्रस्‍तुत करें. हम एक पक्ष के लिये नहीं कह रहे हैं, यह सभी के लिये है. अब वह आप पर अलग से कानूनी प्रतिबंध नहीं है, वह आपकी स्‍वेच्‍छया से है लेकिन पारित जब आपने किया है तो उसका पालन भी करें यह हमारी प्रार्थना है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जीरो टॉलरेंस, वह आपका आयुष्‍मान कार्ड घोटाला हुआ. अब ईओडब्‍ल्‍यू ने किसी ने प्रकरण भी दर्ज किया है, मैंने समाचार पत्र में पढ़ा है, प्रकरण चल रहे हैं. कुछ आयुष्‍मान कार्ड में जो प्रायवेट स्‍कूलों ने कई लोगों ने गड़बड़ी की है, उन पर प्रकरण दर्ज हुए हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन इसके साथ ही यह कहना चाहता हूं कि आपके शिवपुरी में एक अनुराग श्रीवता अपात्र ग्राही आई. 500 कार्ड बना डाले अभी तक उसके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं हुई है. इसके अलावा भी आयुष्‍मान कार्ड में जो अधिकारी हैं, कार्यालय हैं, इसमें करोड़ों के भ्रष्‍टाचार के उल्‍लेख हैं, चर्चा में आया है, सी.डी. में आया है. एक 4 जुलाई, 2023 को एक कर्मचारी रामचंद्र मीणा की शिकायत पर आशीष महाजन जो सहायक ग्रेड - 3 क्‍लर्क था, उसको सस्‍पेंड कर दिया गया और जो अधिकारी उसमें बैठे हुए थे, उनके विरूद्ध कार्यवाही नहीं हुई. एक तो आपके समाचार पत्र और मीडिया के द्वारा वीडियो भी वाइरल हुआ था कि हमें इतना पैसा दो, तब आपको इतना पैसा भुगतान करेंगे, फर्जी भुगतान होता था. न कोई बीमार हुआ, न अस्‍पताल हैं, न डॉक्‍टर हैं, लेकिन आयुष्‍मान के तहत करोड़ों रूपये उसमें भेजा जा रहा था और जिस अधिकारी की चर्चा हुई है, न उससे पूछताछ हुई है, न उस पर कार्यवाही की है, आखिर घोटाला करने के लिये आप उन पर क्‍यों मेहरबानी कर रहे हो ? कौन सा आपके ऊपर दबाव प्रेशर है, जो ऐसे अधिकारियों को आप छोड़े हुए हो, आप उन पर कार्यवाही करें तो आपकी जो जीरो टॉलरेंस की जो घोषणा है, उस पर प्रदेश की जनता को विश्‍वास होगा. अन्‍यथा आपकी थोती घोषणा का कोई मतलब नहीं है और उसमें लिखा है, स्‍वास्‍थ्‍य संचालनालय में तो यह लिखा है कि वसूली हो रही है, लगातार फिरौती मांगी जा रही है, इस तरह के लिखे हैं, लिखित आदेश के हैं. आपके शासकीय विभाग का है फिर भी कार्यवाही क्‍यों नहीं हो रही है. अब जगह-जगह आखिरी में बड़ा सुशासन की चर्चा हुई है, कानून व्‍यवस्‍था का इसमें कोई उल्‍लेख नहीं है.

अब कृपया कर कानून व्‍यवस्‍था का भी इसमें रखना चाहिये था. अभी आपके कानून व्‍यवस्‍था के संबंध में जो एनसीआरबी की रिपोर्ट आई है इसमें 12 प्रकार के अति गंभीर अपराधों में हमारा प्रदेश सबसे आगे है. महिलाओं पर विभिन्‍न अनाचार, अत्‍याचार, अनुसूचित जाति जनजातियों पर, बुजुर्गों पर, बुजुर्ग महिलाओं पर सामूहिक सपरिवार आत्‍महत्‍याओं के मामले, बुजुर्गों की हत्‍याओं के मामले, महिलाओं का अपहरण, बच्चियों पर अनाचार इन सबमें हमारा प्रदेश पूरे समुचे देश में टॉप पर है, हम गोल्‍ड मेडल प्राप्‍त कर रहे हैं अत्‍याचार में, पुलिस विभाग की कार्यवाही में कमिश्‍नर प्रणाली लागू होने के बाद भोपाल सहित समूचे प्रदेश के जिले में, यह हालत सुशासन की है, कानून व्‍यवस्‍था में चौपट, इसको जंगल राज नहीं कहेंगे तो क्‍या कहेंगे. रूस में एक सम्राट जॉर्ज थे यहां भी जॉर्जशाही का राज चल रहा है. आज प्रदेश में कानून का राज नहीं है, अमेरिका में बड़े-बड़े पूंजीपतियों ने लैटिन अमेरिका के गरीब देश थे जिसमें ब्राजील, उरूग्‍वे, चिली, वेनेजुएला, मैक्सिको, अर्जेंटीना, बोलिविया, पैरू, कोलंबिया एक बनाना राज्‍य था, तमाम पूंजीपतियों ने हजारों करोड़ एकड़ जमीन वहां ली और केले का उत्‍पादन चालू किया, इन लोगों ने वहां के पूजीपतियों को हटाकर गरीबों को लेकर लेबर का काम कराया, वहां कोई कानून का राज नहीं था, वहां पर सुबह से शाम तक 12-12, 14-14 घंटे काम कराते थे, छोटा-मोटा पेट भर भोजन देते थे, उनके विरूद्ध कोई आवाज नहीं उठाता था अगर आवाज उठाता था तो किसी के हाथ काट दिये जाते थे और किसी को फांसी पर लटका दिया जाता था, वहां पर कानून का राज ही नहीं था उस बनाना राज्‍य में लैटिन अमेरिका के देशों में जो 1940 से 1970 तक चला उसी प्रकार की नकल आज मध्‍यप्रदेश की सरकार कर रही है. यहां आज बोलने का अधिकार नहीं, अगर हम बोलते हैं तो हम पर मुकदमे लगा दिये जाते हैं, असत्‍य केस में फंसा दिया जाता है. हमारे साथी राजा पटैरिया उन्‍होंने साफ शब्‍दों में कहा था कि गरीबों की हत्‍या हो रही है संविधान की हत्‍या हो रही है तो आप (XXX), एक ही शब्‍द में यह वाक्‍य था, लेकिन 80 दिन के लिये उन्‍हें जेल में डाल दिया. मैंने आपके एक मंत्री से अनुरोध किया उनका नाम नहीं लूंगा कि उनको थोड़ा बुखार है, उनके यहां से खबर आई है उनके परिवार की तो आप उन्‍हें 2-3 दिन के लिये अस्‍पताल में भिजवा दें जब ठीक हो जायें तब जेल भेज देना. बोले नहीं हम नहीं कर सकते, ऊपर का आदेश है अब ऊपर में मुख्‍यमंत्री जी हो सकते हैं, और प्रधानमंत्री हो सकते हैं. अगर कोई बयान दे दे तो क्‍या 80-80 दिन जेल में डाला जायेगा क्‍या. क्‍या वाणी स्‍वतंत्रता प्रदेश में खत्‍म हो चुकी है. हमें अपनी बात कहने का अधिकार नहीं है. अगर कोई राजनैतिक आंदोलन करे तो तत्‍काल सैकड़ों मुकदमें छात्रों पर लाद दिये गये, 4-4 महीने तक गंभीर अपराधों में जेल में डाले जा रहे हैं और ग्‍वालियर जेल में उनके परिवार का कोई हितैषी शुभचिंतक मिलने जाये तो जेल के अधीक्षक को हटा दिया और उस पर कार्यवाही कर रहे हैं, यह क्‍या प्रजातंत्र है, जहां वाणी की स्‍वतंत्रता नहीं.

आपकी भारतीय जनता पार्टी सरकार में, अवैध उत्खनन हुआ. आज शराब माफिया,खनिज माफिया का राज है. भिण्ड जिले और शायद पूरे प्रदेश में भारी पैमाने पर पूरे मध्यप्रदेश की खनिज सम्पदा को बेरहमी से लूटा जा रहा है. एक बार मैं मुख्यमंत्री जी से 8-10 साल पहले दीपावली के अवसर पर मिला. पहले मैंने उनको शुभकामना दी. मुख्यमंत्री जी ने भी दी. मैंने कहा मुख्यमंत्री जी कम से कम हमारे यहां रेत का अवैध उत्खनन तो बंद कराओ. मुख्यमंत्री जी बोले कि महंगे ठेके ले लेते हैं. इसलिये वे करते हैं तो ठेके महंगे लेने वालों पर कार्यवाही क्यों नहीं होती. अगर महंगे ठेके लिये तो आप दोबोरा ठेके कराईये. अध्यक्ष महोदय, आप गोपनीय जांच करा लें, हमारी बात पर अगर विश्वास नहीं है. ग्वालियर,दतिया,भिण्ड और पूरे प्रदेश में जो समाचार पत्रों में खबरें मिल रही हैं. हमारे बगल में उत्तर प्रदेश की सीमा है. कानपुर में,आगरा,इटावा,उरई,जालोन और झांसी तक. पहले ट्रक चलते थे आज ग्रांडफादर आ गये. एक ग्रांड फादर चार ट्रकों के बराबर होता है. 24-24 पहिये वाले ट्रक आ गये. खनिज के जो ठेकेदार हैं उन्होंने कहा कि हमें रायल्टी दो. एक हजार देते थे उसकी जगह बारह सौ दे दो ले जाओ. नदियें खोखली कर दीं. जलीय जीव-जन्तु मर गये. मगर हमारे सिन्ध नदीं में हैं वहां पहले 25 फुट तक पानी उस नदी में भरा रहता था आज 5 फुट पानी है. सारी साफ कर दी. रेत उड़ रही है वहां. गोहद क्षेत्र में हजारों ट्रक गिट्टी के उत्तर प्रदेश जा रहे हैं और वहां जाकर एक-डेढ़-पौने दो लाख रुपये में यह रेत का ट्रक पड़ता है. प्रत्येक थाने में एसडीओपी 1 हजार रुपये, थाना प्रभारी 700 रुपये, खनिज विभाग वाला 300 रुपये और आपके राजस्व विभाग के अधिकारी उसमें मिले हुए हैं. कुछ यू.पी. के ट्रक वाले हमारे दोस्त भी हैं. हमने उनसे पूछा कि तुम्हारे ट्रक यहां क्यों आते हैं. बोला कि बांदा में भी तो मिलती है बोले वहां कड़ाई है पैसा वसूल होता है. यहां हमें एक ट्रक पर नीचे से ऊपर तक 9 से 10 हजार रुपये देते हैं. हमें खर्चा निकालकर एक ट्रक पर 50 से 60 ह जार रुपये मिल जाते हैं इसलिये हम यहां आते हैं. शासकीय संपत्ति है. खनिज सम्पदा है. इससे सरकार की आमदनी बढ़ाएं. सरकार का खजाना बढ़ाएं. प्रति महिने आपको कर्जा लेना पड़ रहा है. चार लाख रुपये के आसपास आपके ऊपर कर्जा है. यह आप जो बचत करेंगे तो इससे आपको काफी मदद मिलेगी. खनिज के अलावा वन माफिया है. आपके चार जिलों का समाचार पत्रों में उल्लेख आया है मीडिया में आ रहा है. क्या मुख्यमंत्री जी, आप तक यह संदेश नहीं पहुंचता. कैसा आपका प्रशासन है. आपका जनसंपर्क विभाग क्या कर रहा है. मैं उदाहरण देता हूं दिग्विजय सिंह जी की सरकार का. आप आलोचना भले करें. जब मैं सहकारिता मंत्री था 2002 में. एक समाचार समाचारपत्र में छपा भिण्ड में, सहकारिता मंत्री डॉ.गोविन्द सिंह जी ने एक अनुसूचित जाति के व्यक्ति की जमीन पर कब्जा कर लिया. वह समाचार यहां आया. मुख्यमंत्री जी ने पढ़ा होगा. उसमें उनसे लिखकर आया. माननीय सहकारिता मंत्री जी कृपया आकर चर्चा करें. अब हमने तो कोई काम नहीं किया जीवन में. अनजाने में कोई बात हुई हो तो अलग बात है. उसके बारे में हाई कोर्ट में केस चला. कलेक्टर,एस.पी. को निर्देश हुआ कि जमीन की माप करो. वहां आपकी पार्टी के लोगों ने गलतफहमी भर दी. कि आपकी जमीन हड़पी है. आपकी पार्टी के श्रीमान जी ने, नेता जी ने कि इन्होंने हड़पी है आपकी जमीनें. नाप तौल हुई कलेक्टर, एसपी का सर्टीफिकेट, हाई कोर्ट का डिसीजन, हम लेकर गये, हमने उनको दिखा दिया, वह कटिंग, उनके पत्र आज भी हैं. आज हमारे पास हैं, हमने उनको सुरक्षित रखा हुआ है, हमारी फाइल में अभी भी लगा है. आपके इतने समाचार पत्र, मीडिया में सब आ रहा है और आप तक समाचार नहीं पहुंच रहा है. या तो आपको अधिकारी गुमराह कर रहे हैं. आपके विभाग के लोग आपको जानकारी नहीं दे रहे हैं और अगर दे भी रहे हैं, तो फिर आप चुप क्यों हैं. इसका क्या माना जाये. क्या यह सब आपके संरक्षण में हो रहा है. अगर नहीं हो रहा है, तो आपको कार्यवाही करनी चाहिये. 8 करोड़ जनता के सामने अपना चेहरा साफ रखना चाहिये. जिस प्रकार शीशे में देखने पर दाग होता है, तो साफ करते हैं. तो भ्रष्टाचार की सफाई भी आपको करना चाहिये. यह हमारा अनुरोध है, अब नहीं करो, अब आपकी इच्छा है. सरकार आपकी है, बहुमत आपका है. जो चाहो सो करो. अभी हमारे बैठे एक साथी हैं, अब आपने विधायकों को भी नहीं छोड़ा है. ये हमारे श्री आलोक चतुर्वेदी जी, विधायक हैं. अभी हम छतरपुर गये थे. वहां लोगों ने बताया कि 40 वर्ष पहले इनकी जमीन फारेस्ट से राजस्व विभाग में की गई. इनकी खुद की जमीन थी वह कि राजस्व विभाग के तहत इसके मालिक श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी, श्री आलोक चतुर्वेदी हैं. इनको नोटिस जारी हो गया. विधान सभा में प्रश्न लगाया. तो बोला नहीं उनकी स्वयं की है, स्वामित्व की है, राजस्व विभाग ने दिया कि उनकी स्वामित्व की है. इसके बाद फिर शिकायत हुई, भाजपा वाले नहीं साहब इनको तो परेशान करना है. इनको जेल पहुंचाना है, ताकि ये आगे जेल चले जायेंगे, भयभीत हो जायेंगे, चुनाव नहीं लड़ पायेंगे. भाजपा का पट्टा साफ न हो, इसलिये दोबारा फिर दे दिया. फिर पुलिस पहुंच गई इनके घर. घर घेर लिया. बताओ साहब आप. आपने क्यों किया. इन्होंने कहा कि भाई विधान सभा के सवाल हैं,जांच हुई है, जांच में नहीं पाये गये हैं. दो बार आ चुका, तीसरी बार फिर फारेस्ट ने दे दिया. आखिर आप कितना प्रताड़ित करेंगे. जन प्रतिनिधियों के साथ इतना अन्याय क्यों कर रहे हैं. कब का आप बदला ले रहे हैं. इन्होंने आपका कौन सा ऐसा बिगाड़ दिया है. कौन सी आपकी जायदाद छीन ली, जो इनको लगातार रात दिन मानसिक रुप से परेशान कर रहे हो. घर के बच्चे एवं परिवार को पुलिस जाकर पूछताछ कर रही है. क्या यह आपका सुशासन है, इसी को सुशासन कहेंगे. यह सुशासन है कि कुशासन है. यह आप काम कर रहे हैं. इस प्रकार तमाम लोग हैं, एक नहीं हैं सैकड़ों हैं. अभी मुख्यमंत्री जी चले गये, यह तो मैं उनके सामने ही कहना चाहता हूं. (डॉ. नरोत्तम मिश्र द्वारा बैठे बैठे आ रहे हैं, कहने पर) आ रहे हैं, तो आ जाने दीजिये. अब बताइये साहब. मनोज चावला जी हमारे विधायक जी हैं. इन्होंने क्या अपराध कर दिया साहब. खाद रखी है गोदाम में. सोसाइटी के सेक्रेट्री और सहायक सेक्रेट्री खाद कहीं बांट रहे हैं. रात को ले जाकर एक एक बोरी पर 50-50 रुपये लेकर खाद दे रहे हैं. खाद की कमी है. खाद पहुंचा नहीं. जितनी व्यवस्था करनी चाहिये, नहीं की, क्योंकि सरकार की यह ड्यूटी है कृषि विभाग और स्वास्थ्य विभाग की. अप्रैल के महीने के बाद यह तय करें कि हमारी कितनी फसल होने वाली है, हमें कितना अगले वर्ष फर्टीलाइजर लाना चाहिये, गोदाम चाहिये, उसकी व्यवस्था करनी है. अगर आपकी यह आई कि एक लाख मीट्रिक टन की व्यवस्था खरीफ की फसल में पड़ेगी या रबी की फसल में जरुरत पड़ेगी, तो व्यवस्था पहले से ही पूरे जिले की डिमांड मंगाई जाती है. डिमांड मंगाने के बाद सरकार 10 प्रतिशत से ज्यादा एक लाख मीट्रिक टन की डिमांड आई, तो सरकार 1 लाख 10 हजार मीट्रिक टन तक स्टाक करती है. अब स्टाक कहां से करे. मार्कफेड, फेडरेशन एजेंसी थी, 6-7 हजार करोड़ रुपये का पिछला बकाया नहीं आया. उसके पास में पैसा नहीं है. तो छूट व्यापारी लेकर रात को वह खाद गोदाम की जो कुछ आई है, 50 परसेंट, 40 परसेंट, वह व्यापारियों को दे दी गई, बंटती थी. इस बात के लिए श्री मनोज चावला जी ने विरोध किया कि जब 4-5 दिन से खाद रखी है तो उसको बांट क्यों नहीं रहे? इन्होंने जाकर खड़े होकर कहा और खाद बंटवाई कि जनप्रतिनिधि हैं, जनता का दबाव है. जनप्रतिनिधि की ड्युटी है कि जनता की समस्या के लिए बात करे, जनता के बीच में जायं और उन्होंने कहा कि खाद बांटिए. उनके साथ सेक्रेट्री, गोदाम कीपर ने व्यवहार गलत किया, उन्हें उल्टा-सीधा बोला, उसको छोड़ो. जब गलत बात की, उनका अपमान किया तो उन्होंने कहा कि बैठिए, सामने बंटेगी और यह कहा कि आप रसीद काटते जाइए. एक-एक बोरी उठाते जाओ और आप रसीद से पैसा लेते जाओ. यह इनका अपराध हो गया? इसमें कौन-सा अपराध था? जनहित का काम था. किसानों के हित का काम था. मुख्यमंत्री जी आप तो किसान के बेटे हैं, किसान के हितैषी हैं. अनेक बार आप कह चुके कि किसान हमारा भगवान है, हम उनके पुजारी हैं तो आखिर किसी ने किसानों के हित में सच्चाई से कोई बात की और सामने कहा कि आप रसीद काटते जाओ. यह दो-दो बोरी उठा रहे हैं. दो बोरी आप लीजिए, रसीद पैसा इनसे लीजिए.

अध्यक्ष महोदय, चूंकि कांग्रेस का विधायक है, कैसे इसको दबोचना है, कैसे जनता के प्रतिनिधियों को तानाशाही तरीके से नीचा दिखाना है, उनको गिरफ्तार करा लिया. 6-7 लोग साथ में खड़े थे, जो खाद लेने आए थे, उन पर भी मुकदमा डाल दिया. 3-4 महीने तक जेल में डाल दिया. आपको धन्यवाद है! समय सबका एक-सा नहीं रहता है. समय आता जाता है. यह हमें भूलना नहीं चाहिए कि कभी हमें भी सत्ता के बाहर रहना पड़ेगा. हो सकता है कि आप अमृत्व लिखाकर लाए हो कि हम आखिर तक रहेंगे? वह बात अलग है. लेकिन इस तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए. उन्हें एक-डेढ़ महीने उन्हें जेल में काटने पड़े. जेल की इनकी तो मुझे जानकारी नहीं है लेकिन श्री राजा पटैरिया की जरूर जानकारी है. हम उनसे खुद मिलने के लिए गये थे. तब उन्होंने बताया था कि जेल में जो कंबल दिये हैं उन कंबलों में बदबू आ रही है, कई जगह छने हैं, सर्दी ज्यादा है तो घर में हमारे बेटे से कह दो कि हमें कुछ दे जाय. हमने जेलर से कहा तो उन्होंने कहा कि यह एलाऊ नहीं है. हम बाहर का सामान यहां पर नहीं आने देंगे तो हमने कहा कि फिर आप अपने घर से ही दे दो तो बोले कि हम कैसे दे दें? आपने ग्वालियर के जेल अधीक्षक का नहीं सुना, उसकी जानकारी आपको नहीं है? उसने कहा कि यह मैं नहीं कर सकता हूं, मैं आपके हाथ जोड़ता हूं, बुरा मत मानो लेकिन मैं नहीं दे पाऊंगा. यह हालत है, जो दो दो बार मंत्री रहा हो, विधायक रहा हो, जनता का नेता है, उसके साथ यह बर्ताव? ठीक है, यह तो आपका समय है. आप कर डालो.

अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री जी से एक मामले को लेकर दो बार मिला. वह किसलिए मिला, किसानों के साथ मुआवजा में हुए भ्रष्टाचार को लेकर मिला. मुख्यमंत्री जी से निवेदन किया कि आप न्याय करो. इनके बंगले पर गया, टाईम लेकर गया. मुख्यमंत्री जी से निवदेन किया कि किसानों के साथ अन्याय हो रहा है. वर्ष 2020 में भिण्ड जिले की गोहद तहसील में ओलावृष्टि हुई है. ओलावृष्टि में मुख्यमंत्री जी ने घोषणा की, सर्वे हुआ. सर्वे रिपोर्ट आई. मध्यप्रदेश शासन से पीड़ित किसानों की सूची, गांवों के नाम और गांवों के नाम के साथ राशि जारी हुई. अध्यक्ष महोदय, वहां के एसडीएम, तहसीलदार, रेवेन्यू के आरआई, पटवारी सहित, इन लोगों ने करीब 10 करोड़ रुपये. मुख्यमंत्री जी, जरा सुन लीजिए, 10 करोड़ रुपये लूट डाला और क्या हुआ? पैसा जो है, नाम गोविन्द सिंह का, किसान के नाम से राशि डाली और खाता लगा दिया आरिफ भाई का. वह पूरी राशि जिन गांवों में (श्री आरिफ अकील, सदस्य के बैठे बैठे कुछ कहने पर) उदाहरण दे रहा हूं भैया. उदाहरणार्थ कह रहा हूं तो दूसरों के नाम से पैसा पहुंच गया खातों में किसान भटक रहे हैं. हमने प्रमाण सहित सब निकालकर दिया, आंदोलन किया, धरना दिया, प्रदर्शन किसानों ने किया, मैंने भी किया. मुख्‍यमंत्री को दिया, विधान सभा में सवाल लगाये, कलेक्‍टर को ज्ञापन दिया, पत्रकार वार्ता की, लेकिन क्‍या आलीशान भिण्‍ड का जिला प्रशासन और मुख्‍यमंत्री का दबाव, मुख्‍यमंत्री का अधिकार या कहने का कोई मतलब नहीं. कहा होगा कि नहीं, पता नहीं. जब ज्‍यादा कहा हमने, तो जांच हुई. जांच में भी सिद्ध हो गया कि यह इतने-इतने लोगों को दूसरे गांवों में जहां ओले नहीं पड़े, 16 गांवों में दूसरे का नाम चला गया. पैसा डल गया और उसके बाद जब हमने ज्‍यादा किया तो दो पटवारियों से करीब 2 करोड़ से अधिक राशि वसूल हुई और वह पटवारी कह रहा है कि साहब हमसे ही अकेले क्‍यों कर रहे हैं उसके पैसे तो सबने लिये. हमारे पास उसके ऑडियो हैं. वह हमने माननीय लोकायुक्‍त में रखे हैं. इसके बाद मैंने लोकायुक्‍त महोदय को दिया है. 4 महीने हो गये, लेकिन पता नहीं बाहरी मेहमान लोकायुक्‍त बनाये जाते हैं कि वह न्‍याय करेंगे. अब क्‍या कह सकते हैं ऐसे लोकायुक्‍त को जो प्रमाण सहित देखा, बोले यह तो सच्‍चाई है, बोले यह तो खुले आम है, सिद्ध है, इसमें काहे की जांच, यह तो पूरा सिद्ध है प्रमाण है, तो हमने कहा ठीक है हो जायेगी कार्यवाही. 5-6 महीने हो गये कोई कार्यवाही नहीं हुई. किसान अभी 2 महीने पहले फिर धरने पर बैठे. आखिर कहां जाए किसान, कहां मांगे न्‍याय ? मुख्‍यमंत्री जी को दे रहे हैं तब कार्यवाही नहीं. कहीं भी दे रहे हैं, तो आखिर ऐसा हमारा निवेदन है. यह प्रमाण है. एक तो यह उदाहरण है.

अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा, उसी तहसील में ऐसी जो कोटवार की नियुक्ति होती है, कोटवार है ही नहीं, ना नियुक्ति हुई, फर्जी नियुक्ति कर दी. हर महीने ट्रेजरी से पैसा निकल रहा है. एक भृत्‍य है वहां का चौकीदार, उसको तहसीलदार कहते हैं जाओ पैसा ले आओ. 2-3 दुकानदार हैं उनसे कह दिया, उनके बयान हैं उन्‍होंने दिया था, हम तो यह कहते थे कि हमारे भाई का खाता नहीं है इसलिये हम आपके यहां पैसा भेज रहे हैं. उनसे हर महीने पैसे लाते रहे. जब ज्‍यादा जांच हुई तो जिन्‍होंने निकाला, जिनके हस्‍ताक्षर हैं वह कम्‍प्‍यूटर नहीं चला पाता, भृत्‍य है, चौकीदार कम्‍प्‍यूटर चलाकर निकालता था वही उसमें भेजता था. दोनों चौकीदार बर्खास्‍त. ना तहसीलदार पर कार्यवाही, ना एसडीएम पर कार्यवाही. ड्राइंग डिस्‍बर्सिंग पावर तहसीलदार, एसडीएम के पास थे, हर महीने आरआई उपस्थित रहकर, हाजिरी भरकर वेतन निकालता है, फिर आखिर यह क्‍यों है ? पूरे प्रमाण हमने दिया. जब मुख्‍यमंत्री जी से निवेदन किया वह यहां बैठे हैं, विश्‍वास सारंग जी ने उस दिन कहा जब हम ध्‍यानाकर्षण लाये राजस्‍व मंत्री यहां नहीं थे, राजस्‍व मंत्री की तरफ से आपने सरकार के मंत्री की ओर से विधान सभा में जवाब दिया, आपने विधान सभा के पटल पर स्‍वीकार किया, वह दस्‍तावेज हमारे पास है कि भ्रष्‍टाचार हुआ. आपने कह दिया कि कांग्रेसी का भी हुआ, तो मैंने कहा भाई कांग्रेस का हुआ तो उसको जेल भेजो. यह बात सही है कि 2-4 हों, लेकिन उसने कांग्रेस या कुछ और नहीं देखा, जिससे सांठ-गांठ पटवारी की और अधिकारियों की थी उसको दिया. कांग्रेस के कुछ हो सकते हैं 2-4 आदमी लेकिन आपकी पार्टी के करीब 80 परसेंट हैं जिनको भुगतान हुआ है और ऐसे लोग हैं जिनके फोटो मुख्‍यमंत्री जी के साथ हैं. कार्यक्रम में गये हों और फोटो निकालना कोई अपराध, बुरी बात नहीं है, कई खड़े हो जाते हैं, हम लोग भी हैं, लोग कहते हैं सेल्‍फी दो, यह दो, रोज ले जाते हैं सैकड़ों आदमीं, लेकिन मुख्‍यमंत्री जी, हैं कुछ आदमी फोटो सहित हम प्रमाण दे देंगे. आपने कह दिया. सरकारी जमीन के नंबर पर भी उनको मुआवजा बंट गया. शासकीय नंबर भी दिये थे. आपने जवाब में स्‍वीकार किया है. आपने आश्‍वासन दिया कि मैं कमिश्‍नर से जांच कराउंगा. आज डेढ़ साल हो रहा है कहां है जांच क्‍या हुआ ? अधिकारी एसडीएम हैं, तहसीलदार हैं, आरआई हैं, वहीं बैठे हुये हैं, हटाना तो दूर, आखिर न्‍याय मांगने कहां जाएं मुख्‍यमंत्री जी, आप बताओ ? मैं सच्‍चाई कह रहा हूं, अगर इसमें असत्‍य हो तो आप मेरे ऊपर केस दर्ज करके गिरफ्तार कराइये, मैं आपका स्‍वागत करूंगा. सत्‍यता के लिए हम कहां जाएं, किसानों की मांग को लेकर हम कहां जाएं. इस प्रकार के निरंकुश अधिकारी हैं.

अध्‍यक्ष महोदय, अब शिक्षा विभाग की बात करूंगा. शिक्षा मंत्री, ये बड़े बहादुर हैं. कल विदिशा का आ गया, मुख्‍यमंत्री जी, विदिशा आपके नजदीक है. पूरे प्रदेश में पिछले 3-4 वर्षों से, आरिफ भाई जो कह रहे थे, सच्‍चाई है, सरकार प्राइमरी स्‍कूल और मिडिल स्‍कूलों के लिए पैसा भेज रही है. हर वर्ष राशि जा रही है, पुताई के लिए, मरम्‍मत के लिए राशि जा रही है, लेकिन जिले के अधिकारी, जिला प्रशासन और सीईओ, ये सब मिलकर आपस में बांट रहे हैं, बंटवारा कर रहे हैं. पैसा शाला विकास समिति को जाना चाहिए, नहीं गया और नहीं जा रहा है. आधे से ज्‍यादा लोगों ने तो खाता ही नहीं खुलवाया है. हमने जिला शिक्षा अधिकारी से कहा, सीईओ से कहा, बोले साहब, खाते ही नहीं खुले तो क्‍या करते. सीधे ऑर्डर एक दुकान को दिया. पेमेंट वहां भेज दिया. उनसे लिखा लिया, न तो पुताई हो रही है, न कोई दूसरे काम. उनका यही है कि शाला विकास समिति का खाता ही नहीं है तो कहां भेजते. इसलिए किया. जिनके खाते हैं, उनसे भी लिखा लिया. मुख्‍यमंत्री जी, आपका बड़ा नाम होगा प्रदेश में, अभी आप अगर जांच करवा लें, बहुत बड़ा घोटाला है शिक्षा विभाग में, स्‍कूलों में 10-10 हजार, 5-5 हजार सफाई, पुताई के लिए भेजे जाते हैं. इसके अलावा आप 5 हजार और 10 हजार रुपये खेल सामग्री के लिए हर स्‍कूल को भेज रहे हैं. उस खेल सामग्री में ब्‍लॉक शिक्षा अधिकारी, ऊपर से कोई अधिकारी आया, उसने सबको बिठाया कि भई ऑर्डर ले आओ. सबको बुलाकर के शाला विकास समिति के, हो सकता है कि वे स्‍कूल के हेड मास्‍टर हों या इन्‍चार्ज हों, उनसे दस्‍तखत करवा लिए कि सामान प्राप्‍त हुआ. बाद में जब सामान भेजा एक बैग में और जब हमें मिडिल स्‍कूल के मास्‍टर ने, धौतपुरा गांव अभी हम दौरा कर रहे थे, हमने कहा कि आप दिखाओ बैग तो उसने दिखाया बैग कि यह सामान हमें मिला है. हमने पूछा कि तुमने क्‍यों नहीं खरीदा तो बोला कि साहब, पैसा ही नहीं दिया. वहीं लिखा लिया कि हम सामान भेजेंगे और हमसे बिल पर प्राप्‍ति लिखा ली. जब उस बैग में देखा तो वहां दो रस्‍सियां, कूदने वाली, जो बच्‍चे कूदते हैं, दो रस्‍सी, दो बल्‍ले, एक कैरम बोर्ड और दो खेलने की गेंदें, फुटबॉल, मिडिल स्‍कूल वालों को, कुल मिलाकर उस बैग में दो हजार या ढाई हजार का सामान होगा. दस हजार का बिल एक स्‍कूल का बनता है. भिंड में तो साढ़े तीन सौ के आसपास मिडिल स्‍कूल हैं. यह मैं एक जिले का बता रहा हूँ. अभी मुरैना में भी ऐसा ही हुआ. मुरैना के सभी बड़े-बड़े अखबारों में छपा कि तीन साल से कुछ दिया नहीं और भुगतान पूरा हो गया. अभी तीन-तीन लाख रुपये और आपने दे दिए. तीन लाख रुपये हाई स्‍कूल को और तीन लाख रुपये इंटर कॉलेज को. उनमें भी यह काम चालू हो गया है. हमने अभी प्रेस कांफ्रेंस की थी. कलेक्‍टर को, एसडीएम को और जिला शिक्षा अधिकारी से हमने कहा कि हम तुम्‍हें जेल पहुँचाएंगे. अब जाकर लहार में कुछ स्‍कूलों को कह दिया है कि भेज दिया है. पहले बोला कि हम क्‍या करें, खाते ही नहीं खुल रहे हैं तो हमने कहा कि क्‍या खाता खुलवाना हमारी जिम्‍मेदारी है. दस साल से सरकार का पैसा जा रहा है. स्‍कूलों में पुताई नहीं हो रही है. पैसा पहुँचे तो पुताई हो. पुताई होती तो कुछ थोड़ा-बहुत गड़बड़ करते लेकिन कुछ तो दिखता. इसके लिए आपको विशेष जांच समिति बनानी होगी. यही आपके विदिशा में हुआ है. विदिशा का मामला प्रमाण के साथ हमारे पास रखा है. अगर आप चाहो तो हम भेज देंगे. कई अधिकारी हैं. वहां तो बताया कि कुछ लोगों को यहीं बुला लिया, पूरे प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारियों को और लिख दिया कि हम यह काम करा रहे हैं, एक एजेंसी को दे दिया. दतिया में क्‍या हुआ, मंत्री जी बैठे हैं, आपको नहीं पता, आपके जिले में पूरी ड्रेस नहीं बंटी. बिना ड्रेस बंटवाए करोड़ों रुपयों का भुगतान हो गया. आपके पास भी लोगों ने शिकायतें कीं. हमारे पास प्रमाण हैं, सबूत हैं, ऑडियो भी है. आपने किसी समिति को दिया, आजीविका मिशन को दिया, उसकी अधिकारी कह रही हैं कि मैं क्‍या करूँ, ऑडियो है, आप जांच कराएं उसकी 18 लाख रूपए हम दे चुके. अब हम तुम्‍हें कहां से भुगतान करें और आदेश था. सीहोर की एक कंपनी है. उसने निम्‍न स्‍तर का कपड़ा भेज दिया. आखिर सब इतना खुलेआम भ्रष्‍टाचार मचा हुआ है, लोग लूट रहे हैं.

श्री अनिरूद्ध माधव मारू -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह अभिभाषण पर चर्चा हो रही है या भिंड, मुरैना, दतिया की बातें हो रही हैं. वही सब सुन-सुनकर दुखी कर दिया इन्‍होंने.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, सुशासन है सुशासन. अब आपकी अक्‍ल में सुशासन नहीं घुसा. यह शासन का सुशासन है.

अध्‍यक्ष महोदय -- बैठ जाइए. बैठ जाइए.

श्री अनिरूद्ध माधव मारू -- पूरा प्रदेश पड़ा है पूरा प्रदेश बोलने को. आप तो पीछे ही पड़ गये भिंड, मुरैना के.

अध्‍यक्ष महोदय -- बैठ जाओ, बैठ जाओ.

डॉ.गोविन्‍द सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, सुशासन में आ रहे हैं सुशासन में. हम जनता के लिए कैसा शासन चला रहे हैं. क्‍या हो रहा है, हम यह बता रहे हैं. ठीक है अब ज्‍यादा परेशानी आने लगी. (श्री अनिरूद्ध माधव मारू, सदस्‍य के अपने आसन पर बैठे-बैठे कुछ कहने पर) आपने नहीं किया या तो आप शामिल हो, तब ही बोल रहे हो. नहीं, तो क्‍या जरूरत है आपको बोलने की. हम आप पर तो आरोप नहीं लगा रहे हैं. मैं किसी व्‍यक्‍ति का नाम नहीं लगा रहा हॅूं. जिन्‍होंने किया, उन पर लगा रहे हैं. मैं कह रहा हॅूं और दावे के साथ कह रहा हॅूं. अगर जो बातें मैंने रेत-खदानों वाली उठायी हैं, आपके स्‍कूलों वाली बातें उठायी हैं, ड्रेस वाली बातें उठायी हैं और दतिया का ड्रेस वाला मामला तो हमारे पास प्रमाण सहित है. उसमें पैसा पहले ही बंट गया तो मुख्‍यमंत्री जी, मैं यह कह रहा हूँ कि जो कहा है, आप हमारे आरोपों की जांच कराएं और हमारे ऊपर कार्यवाही करें और अगर नहीं है, अगर हमारे आरोप सिद्ध हो जाएं या गलत साबित हों, तो मैं अपना खुद काला मुहं करा लूंगा.

अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी से हमारी चर्चा हुई. उन्‍होंने कहा कि आपके ऊपर ईडी की जांच है. हमने कहा, मुख्‍यमंत्री जी यह आपने कराई. हमसे पूछ रहे हैं. आखिर हम ईडी का नोटिस पर 27 जनवरी को प्रवर्तन निदेशालय, दिल्‍ली में उपस्‍थित रहे. वहां का नोटिस आ गया. हमारे परिवार वालों ने कहा कि आप कहां डकैती डाल आए. तुम तो बड़ी लंबी-चौड़ी बातें हांकते थे. (हंसी) हमारे चचेरे भाईयों ने कहा. नोटिस हमारे गांव लहार के पते पर पहुंचा था. उन्‍होंने पढ़ा. हमने कहा, अब जो समझो, सो करें. हम गये. हमने देखा. वहां राज्‍यसभा सांसद श्री विवेक तन्‍खा जी, वकील साहब से पूछा. उन्‍होंने कहा कि तुमने क्‍या किया. हमने कहा, जिन्‍होंने किया, उन पर तो कुछ कार्यवाही होती नहीं है. उन्‍होंने कहा, आप क्‍या करते हो. हमने कहा कि हमारे पास आमदनी के 4 साधन हैं. एक तो हमारे पास एमएलए की सैलरी है. हमारे नाम ईश्‍वर की कृपा से खेती ठीक-ठीक है. खेती की आमदनी है. भोपाल के मकान का किराया और भिंड में छोटा रेस्‍टहाउस है जो दो कमरों का बना है, उस पर टॉवर लगा है तो उसमें बीएसएनएल का 5000 रूपए का किराया आता है. यह कुल मिलाकर हमारे पास है. वे बोले, आपके पास कौन-सी कंपनी के शेयर हैं. हमने कहा कि साहब, शेयर होता क्‍या है, मैंने कई लोगों से पूछा. मैं शेयर नहीं जानता, मैं गांवों में रहा हॅूं. यहां से गये सीधे लहार गांव जाता हॅूं. शेयर क्‍या होता है, कंपनी क्‍या होती है. कोई कंपनी में नहीं हॅूं, मेंबर नहीं, सदस्‍य नहीं, किसी संस्‍था का डायरेक्‍टर नहीं, ट्रस्‍ट में नहीं हैं और मुझे अपने ऊपर विश्‍वास है कि हमने जीवन में ऐसा कोई काम नहीं किया है जिसमें हमें प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता के सामने नीचा देखना पडे़ या हमारी निगाह नीची हो. ऐसा हमने नहीं किया. इसके बाद भी ईडी का नोटिस हमें मिला. माननीय मुख्‍यमंत्री जी, आप सही-सही बता दीजिए. आप हमसे पूछ रहे हैं. सरकार की बिना इच्‍छा के नोटिस चला जाएगा. कहां से हुआ. अब बता रहे हैं कैसे हो गया. हमने कहा कि अब आप बताओ. नोटिस आप भेजो और पूछो हमसे. (हंसी) धन्‍यवाद.

श्री गोपाल भार्गव -- आप चिन्‍ता क्‍यों कर रहे हो, इसमें इज्‍जत बढ़ जाती है.

डॉ.गोविन्‍द सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो कह रहा हॅू कि हमारा पूरा परिवार परेशान है. अध्‍यक्ष जी, मैंने तो सोच लिया. हजारों साल पहले कई लोग आजादी के लिए लडे़. महात्‍मा गांधी जी लगभग 11 साल जेल में रहे. पंडित नेहरू जी जेल में रहे. मध्‍यप्रदेश हो, चाहे दिल्‍ली की सरकार हो, 302 से बड़ी धारा नहीं है और झूठे केस में 2 से 3 महीने से ज्‍यादा जेल नहीं है. जब महात्मा गाँधी, हम अगर चोरी में जाएँ, डकैती में जाएँ, भ्रष्टाचार में जाएँ, तो हमारी गर्दन नीची होगी. हम जानते हैं अभी तक का, ईश्वर की कृपा से, हमने ऐसा जानकारी के आधार पर कोई काम नहीं किया है, जिसमें हमें ईडी नोटिस दे, इतनी बड़ी संस्था हमें बदनाम करने का काम करे. फिर भी सरकार है, भाई, आपके ऊपर राज्य है, जैसा चलाओ, जैसा अन्याय करो, जेल में डालो, फाँसी पर लटकाओ, हम सही काम के लिए सहर्ष तैयार हैं. हम कोई घबराने वाले नहीं हैं, भागने वाले नहीं हैं. धन्यवाद.

अध्यक्ष महोदय-- माननीय मुख्यमंत्री जी.....(मेजों की थपथपाहट)

मुख्यमंत्री (श्री शिवराज सिंह चौहान)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं हमेशा से यह मानता रहा हूँ कि हमारे नेता प्रतिपक्ष श्रीमान् गोविन्द सिंह जी कभी असत्य भाषण नहीं करते. लेकिन आज उनका भाषण पता नहीं कौन से उन्होंने सलाह ले मारी. वह पूरा असत्य का पुलिन्दा ही है. (मेजों की थपथपाहट) अच्छा, उनका कद छोटा है, लेकिन मैं मानता था व्यक्तित्व बहुत बड़ा है. लेकिन यह भाषण देकर वे बौने हो गए हैं. माननीय अध्यक्ष महोदय, इन्दौर में कहाँ पेड़, कहाँ गमले, मैं यह कहना चाहता हूँ गोविन्द सिंह जी...

डॉ.गोविन्द सिंह-- हमने कहा जानकारी है. जानकारी दी गई है वह बताया मैंने, यह नहीं कहा कि है.

श्री शिवराज सिंह चौहान-- अब वो सही है कि गलत है यह पता नहीं है अभी. यह जानकारी अभी नहीं है. अच्छा, वे भोले भी हैं. वे अभी कह रहे थे कि केला बनाने की कहाँ कौनसे अफ्रिका में, लेटिन अमेरिका में, अब गोविन्द सिंह जी, सीधे मध्यप्रदेश की विधान सभा से लेटिन अमेरिका पहुँच गए आज. हमने सोचा कि लेटिन अमेरिका के उदाहरण का मतलब क्या है? और फिर कह रहे थे कि प्रवासी भारतीय सम्मेलन में बड़ी अनुशासनहीनता हो गई. अध्यक्ष महोदय, मैं गर्व के साथ कह रहा हूँ दुनिया भर के 42 देशों के प्रवासी भारतीय आए पर इन्दौर शहर ने, इन्दौर के नागरिकों ने, केवल सरकार ने ही नहीं, जैसी व्यवस्थाएँ कीं, जाते समय उनकी आँखों में आँसू थे कि ऐसी मेहमाननवाजी हमने कहीं देखी नहीं. (मेजों की थपथपाहट) इन्दौर आगे आया कि मत ठहराओ होटलों में हमारे दिल के दरवाजे भी खुले हैं और हमारे घर के दरवाजे भी खुले हैं, अपने घर में ठहराएँगे. (मेजों की थपथपाहट) इन्दौर के हमारे साथी यहाँ बैठे हैं, वहाँ के जनप्रतिनिधि, लोगों ने अपनी गाड़ियाँ लगाईं, घरों पर ठहराया. भोजन, चाय, नाश्ता, लाना ले जाना, दुनिया तारीफ कर रही है लेकिन गोविन्द सिंह जी कह रहे हैं कि भाजपा कार्यकर्ताओं पर कार्रवाई नहीं की. गोविन्द सिंह जी, कार्रवाइयाँ, जब आपकी सरकार थी, तब हुई थीं, 15 महीने की सरकार में, ये बैठे हैं नरोत्तम मिश्रा, 18 लोग इनके जेल में थे, जो आसपास थे, खानदान के खानदान का तबादला कर दिया था. हमारे पार्षद मीणा थे उनकी 60 दुकानें बुलडोजर चलाकर तोड़ दी गईं, राजू मीणा, इछावर के मंडल अध्यक्ष के स्कूल पर बुलडोजर चलाया गया. भूपेन्द्र सिंह जी बैठे हैं इनकी होटल नापी गई. संजय पाठक, पता नहीं, आज हैं कि नहीं, कहाँ से लुप के, छुप के, निकल के, बचते, बचाते, उस जमाने में कैसे निकले थे यह मैं जानता हूँ. एयर पोर्ट को छावनी बना दिया, पकड़ो, नापो, मारो, तोड़ो, यह राज अगर दिया था तो 15 महीने की कमल नाथ जी की सरकार ने दिया था. हाँ, हमने बुलडोजर चलाए हैं,

श्री लक्ष्मण सिंह-- तैयार हो, फिर आ रही है वह सरकार.

श्री शिवराज सिंह चौहान-- हाँ हमने चलाए हैं बुलडोजर और आज इस सदन के माध्यम से मैं फिर कहना चाहता हूँ, माफियाओं पर बुलडोजर चलेंगे, दुराचारियों पर बुलडोजर चलेंगे. (मेजों की थपथपाहट) गुण्डागर्दी करने वालों पर बुल्डोजर चलेंगे. आप बात कर रहे थे कि जेल भेज दिया, मोदी की हत्या कर दो, आखिर सुनने की भी सीमा होती है. माननीय अध्यक्ष महोदय, कांग्रेस का प्रदर्शन होता है (XXX) यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार में बैठे लोग नहीं करते हैं. शालीनता की सारी सीमाएं तोड़ी जा रही हैं. गंदी गालियाँ देंगे, हत्या कर दो फिर धीरे से और कुछ शब्द कह देते हैं. यह सदन लोकतंत्र का मंदिर है, केवल ईंट गारे का भवन नहीं है. मर्यादाएं, मुझे यह कहते हुए गर्व है कि मध्यप्रदेश की विधान सभा की गौरवशाली परम्परा रही है. आलोचनाएं होती हैं, होनी चाहिए. स्वस्थ आलोचना के हम पक्षधर हैं. मैं केवल गोविन्द सिंह जी के संदर्भ में बात नहीं कह रहा हूँ वे तो भले आदमी हैं, लेकिन क्या कमर के नीचे वार किए जाएंगे. क्या मर्यादाएं और शालीनता की सारी सीमाएं तोड़ी जाएंगी.

माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय नेता प्रतिपक्ष जी ने विषय उठाया है इसलिए कह रहा हूँ. वे कह रहे थे भिण्ड में कोई काम ही नहीं हुआ है. अभी-अभी मैं भिण्ड गया था वहां मेडिकल कॉलेज की घोषणा करके आया हूँ. दूसरी सप्लीमेंट्री में गोविन्द सिंह जी वहां शानदार मेडिकल कॉलेज बनने वाला है.

डॉ. गोविन्द सिंह -- उसके लिए मैं आपको धन्यवाद दे रहा हूँ. बन जाए बस.

श्री शिवराज सिंह चौहान -- वहां नगर निगम, वहां मेडिकल कॉलेज और सड़कों के 42 काम. एक सूची मैं आपके पास भिजवाऊंगा. 104 करोड़ रुपए के सेकेण्ड सप्लीमेंट्री में 42 काम दिए हैं और आपके क्षेत्र में दिए हैं. भरौली-अमाइन, क्या यह आपके क्षेत्र में नहीं है.

डॉ. गोविन्द सिंह -- नहीं है. (बैठे-बैठे)

श्री शिवराज सिंह चौहान -- अच्छा लहार-अमाइन तो है भाई. 3 करोड़ 26 लाख 77 हजार रुपए की रोड सेकण्ड सप्लीमेंट्री में स्वीकृत हुई है.

डॉ. गोविन्द सिंह -- मुख्यमंत्री जी हमारे क्षेत्र में केवल 10 किलोमीटर है बाकी की सब उधर भिण्ड जिले में है.

श्री शिवराज सिंह चौहान -- अरे, भिण्ड जिला भी तो आपका ही है, इतने छोटे तो नहीं हैं आप.

डॉ. गोविन्द सिंह -- ऐसा नहीं है, हमारे क्षेत्र में नई सड़क कोई भी नहीं है वह तो 50 साल पुरानी सड़क है. उसी पर डामर करा दिया.

श्री शिवराज सिंह चौहान -- मिहोना टाउन और मजबूतीकरण के लिए पैसा, लहार-अमाइन के लिए पैसा, भरौली-अमाइन के लिए पैसा. 42 कामों के लिए 104 करोड़ रुपए अलग से और आप कहेंगे तो पूरा हिसाब लाकर दे दूंगा. मध्यप्रदेश की सरकार सभी इलाकों में काम करने का प्रयास कर रही है. मैं केवल यह कह रहा हूँ कि आप कह रहे थे कि बिलकुल नहीं दिया है. यह मेरे पास रिकार्ड है. गोविन्द सिंह जी, लहार में भी दे देंगे आप क्यों चिंता करते हैं. आपकी दोस्ती तो नरोत्तम मिश्रा जी से है. शुरु में ही आपने अपने भाषण में मजबूती दे दी कि दतिया वाले पढ़ेंगे कि दतिया में यह हो गया, दतिया में वह हो गया. आप तो जिताने बैठे हो कि दतिया में इतना काम रहे हैं, जिताओ नरोत्तम को.

डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ -- नरोत्तम जी से दोस्ती है इसलिए सीएम साहब आपको कुछ नहीं दे रहे हैं.

श्री शिवराज सिंह चौहान -- माननीय अध्यक्ष महोदय, रेत माफियाओं को कुचलते हुए 14 हजार वाहन, 2 लाख 40 हजार घन मीटर रेत जब्त की गई है. 4 के खिलाफ एनएसए की कार्यवाही की गई. 34 के खिलाफ जिलाबदर की कार्यवाही की गई है. आगे भी कार्यवाहियाँ जारी रहेंगी. जहां गड़बड़ होगी वहाँ कार्यवाही होगी. अध्यक्ष महोदय, गोविन्द सिंह जी भर्ती का पूछ रहे थे. मैं कह रहा हूँ कि आज आप बिलकुल असत्य का पुलिंदा लेकर आ गए. आप नेता प्रतिपक्ष हैं, आप कह रहे थे कि 21 रोजगार दिए गए. मैं बताना चाहता हूँ कि इन पदों पर भर्ती या प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है. पटवारी 7000, शिक्षक 15700, उपयंत्री 2600, पेरा मेडिकल नर्सिंग स्टाफ 6500, फारेस्ट गार्ड, जेल वार्डन 2200, सहायक ग्रेड-3 स्टेनो 2700, पुलिस कांस्टेबिल 7500. माननीय अध्यक्ष महोदय, 15 अगस्त तक 1 लाख से ज्यादा पदों पर भर्ती हो जाएगी, प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी. हम लगातार काम करने का प्रयास कर रहे हैं.

माननीय अध्यक्ष महोदय, अभियोजन की अनुमति, इन्होंने विषय उठाया अभी 70 की अनुमति जारी की गई है. 150 प्रकरणों में अनुमति जारी करने की तैयारी हो रही है. हाँ कहीं-कहीं विधिक पेचिदगियां होती हैं उनमें थोड़ा बहुत समय लगता है. आप जानते हैं. आप जानते हैं कि एक निश्चित प्रक्रिया है, विभाग देता है. विभाग का, विधि विभाग का अलग-अलग अभिमत होता है और फिर वह एक अलग समिति में आता है, लेकिन आज मैं आश्‍वस्‍त करना चाहता हूं बेईमानी और भ्रष्‍टाचार करने वाला कोई बचेगा नहीं. जीरो टॉलरेंस की नीति ही रहेगी. हम लगातार कार्यवाही करेंगे.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मर्यादाओं की बात कर रहा था और मध्‍यप्रदेश की सदन की परम्‍परा बता रहा था. यहां तो कई बार संवेदनाओं का मजाक उड़ाया गया. बिना संवेदना के मनुष्‍य मनुष्‍य नहीं हो सकता है. संवेदना का मतलब दूसरे के दर्द से वैसे ही वेदना जो कि आपके मन मे होती है उसे संवेदना कहते हैं. यहां सदन में उदाहरण दिये गये, बंदरों की कहानियां सुनाई गई. यह बात सच है कि हम सतना में थे. सतना के मित्र यहां बैठे हैं. उसके पहले भी हम रीवा गये थे. गोविन्‍द सिंह जी रीवा में हवाई अड्डा बने इसमें आपको दिक्‍कत क्‍या है, क्‍या परेशानी है. विंध्‍य का विकास होने दीजिए. यह बात सही है कि सड़क जरूरी है, लेकिन आजकल तो हवाई अड्डा भी जरूरी है क्‍योंकि निवेश अगर आएगा तो बिना एयर कनेक्टिविटी के नहीं आएगा और जब विंध्‍य की यह आकांक्षा थी कि निवेश अगर हमारे यहां आए तो इसके लिए केवल हवाई पट्टी से काम नहीं चलेगा वहां प्रॉपर एयरपोर्ट बने. आप ग्‍वालियर की बात कर रहे थे ग्‍वालियर में भी बन रहा है, लेकिन विंध्‍य भी किसी से पीछे नहीं रहेगा यह सरकार का संकल्‍प है. हम हवाई अड्डे बनाएंगे, हवाई पट्टियां बनाएंगे, सड़कें बनाएंगे यह सरकार की ड्यूटी है, सरकार का कर्तव्‍य है. लेकिन उस दिन जो यहां सतना की घटना सुनाई गई. हां एक दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना हुई. कई भाई-बहनों की जान चली गई और सतना में मेरे मित्र जानते हैं जो सतना जिले से हैं, यहां विधायक है वह बैठे हैं मन में वेदना स्‍वाभाविक थी. घटनाएं होती हैं हम हर एक घटना को रोकने में सक्षम और समर्थ नहीं हैं और उस पर हमारा बस भी नहीं रहता है. एक बस खड़ी थी पीछे से किसी ट्रक ने टक्‍कर मार दी और उस बस का टायर फट गया, लोग दब गए. मैं मुख्‍यमंत्री हूं मैं बैचेन हुआ. पहले तो हमने वहीं वॉर रूम बना लिया और उसके बाद हम रातभर नहीं सोये. हम घटनास्‍थल पर गए, घटनास्‍थल के बाद अस्‍पताल गए, घायलों की व्‍यवस्‍था की, मृतकों की यथोचित व्‍यवस्‍था की. दस-दस लाख रुपए की राशि देने का फैसला किया और अंतिम संस्‍कार तक मंत्रियों को लगाया कि जाओ अंतिम संस्‍कार पूरा करवाकर आना. परिवार को सांत्‍वना भी दो और परिवार की पूरी सहायता भी करो. क्‍या यह संवेदना नहीं होना चाहिए और यह संवेदना है तो क्‍या इन संवेदनाओं का मजाक उड़ाया जाना चाहिए.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तराखण्‍ड में घटना हुई. मुझे नौ बजे खबर मिली. मन व्‍यथित हुआ. पता चला कि तीर्थ यात्री बस सहित काफी गहरी खाई में गड्डे में चले गए. मुझे नौ बजे खबर मिली. मैं दस बजे यहां से निकल गया. ग्‍यारह बजे जॉलीग्रेंट पहुंचे और बारह साढ़े बारह बजे में अस्‍पताल में था, घायलों को देख रहा था और उत्‍तराखण्‍ड के मुख्‍यमंत्री को लेकर रातों रात सारे शव निकलवाए. स्‍पेशल विमान किया उसमें पार्थिव शरीर रखे और हमारे पन्‍ना और छतरपुर जिले में भिजवाने का काम किया. क्‍या यह संवेदना नहीं होना चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय-- चुरहट में चार लोग एयर लिफ्ट हुए.

श्री शिवराज सिंह चौहान-- चुरहट में भी किया यह पहली बार हुआ कि मजदूर, पटवारी इनको भी एयरलिफ्ट करके दिल्‍ली के मेदांता अस्‍पताल में इलाज करवाने का काम किया है तो इस सरकार ने किया है. केवल नेताओं के परिजनों के लिए नहीं किया. यह संवेदना चाहिए और यही संवेदना है जो एक के बाद एक योजनाएं बनवाती हैं. आप अमृतकाल की बात कर रहे थे. हां मैं कह रहा हूं यह अमृतकाल है. प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी के नेतृत्‍व में एक वैभवशाली भारत, एक गौरवशाली भारत, एक संपन्‍न भारत एक शक्तिशाली भारत का निर्माण हो रहा है. और यह हम नहीं कहते हैं अब तो जमाना कहता है. अब तो पाकिस्‍तान वाले भी कहते हैं कि काश हमारे पास भी मोदी होता. हम समाचार चैनलों में देख रहे हैं. आज देश का जो मान बड़ा है, जो प्रतिष्‍ठा बड़ी है, जो सम्‍मान बड़ा है मैं सच कहता हूं कि नरेन्‍द्र मोदी जी युग पुरूष हैं भारत को भगवान का वरदान है नरेन्‍द्र मोदी जी.

अध्‍यक्ष महोदय, यह अमृतकाल नहीं तो क्‍या है सारे विश्‍व में हमारी साख बन रही है और यह कहते हुए गर्व है कि एक प्रधानमंत्री की संवेदना है कि तुर्की में अगर कहीं भूकम्‍प में लोग दबते हैं मारे जाते हैं. तो सबसे पहले भारत की फौज, भारत के डॉक्‍टर और नर्सिंग स्‍टाफ उनकी सेवा करने के लिए तुर्किये में पहुंच जाते हैं, यह आज का भारत है.

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा- असम के सी.एम. हिमंता बिस्‍वा शर्मा ने उनको हनुमान जी बोला, आपने आज यहां भगवान जी बोला. अच्‍छा है भाई, अपने-अपने नंबर बढ़ाते रहो, ऐसे भगवान पैदा होते रहें.

श्री शिवराज सिंह चौहान- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, संवेदना की बात कर रहा था. बचपन में मैंने अपने गांव, घर और आस-पास बेटियों के साथ अन्‍याय और भेदभाव होते देखा था. भेदभाव ये कि बेटा जन्‍म लेता था तो आनंद और प्रसन्‍नता मनाई जाती थी. बेटा आया है, बधाइयां गाओ, ढोल बजाओ, मिठाइयां बांटो, मायके वाले भी आ जायें लेकिन बेटी होती थी तो मां का चेहरा भी उतर जाता था. यह स्थिति मेरे मन में दर्द पैदा करती थी, पीड़ा पैदा करती थी. मैं, मन में सोचता था कि ये क्‍यों होता है, एक मां के कोख से बेटा भी जन्‍म ले और बेटी भी जन्‍म ले. लेकिन बेटी को उतना आदर न मिले. आज तेजी से परिस्थितियां बदली हैं लेकिन बहनों को पर्याप्‍त सम्‍मान नहीं था, भेदभाव होता था. पर्याप्‍त स्‍थान नहीं, पर्याप्‍त मान नहीं, पर्याप्‍त सम्‍मान नहीं और तब से मन में यह बात आती थी कि ऐसी योजना बननी चाहिए कि जिसके कारण मां-बहन-बेटी को सम्‍मान मिले. बेटा और बेटी को लोग बराबर मानें, यह मैंने, जब मैं, मुख्‍यमंत्री बना तब नहीं कहा.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब मैं कुछ नहीं था, कल्‍पना भी नहीं थी कि कभी विधायक भी बन सकते हैं, मुख्‍यमंत्री भी बन सकते हैं. तब ये भाव मन में आता था और छोटी-मोटी चीज़ें करने की कोशिश करते थे. जब मैं मुख्‍यमंत्री नहीं था, तब भी हम बेटियों के विवाह करवाते थे. लेकिन मुख्‍यमंत्री बनते ही तत्‍काल अगर पहली दो योजनायें बनाई तो इसी संवेदना के कारण, पहली योजना थी- ''मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना'' और यह तय किया कि बेटियों का विवाह सामूहिक रूप से होगा.

(मेजों की थपथपाहट)

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी योजना बनी थी- ''लाड़ली लक्ष्‍मी योजना''. जिसका अनुसरण पूरे देश के लगभग हर राज्‍य ने किया. आज 44 लाख 40 हजार लाड़ली लक्ष्‍मी बेटियां मध्‍यप्रदेश की धरती पर हैं. मुझे यह कहते हुए संतोष है, मन में आनंद भी है, समाधान भी है. उन बेटियों को जब वे 5वीं पास करके 6वीं में जाती हैं तो 2 हजार रुपये, 8वीं पास करके 9वीं में जाती हैं तो 4 हजार रुपये, 11वीं 12वीं में 6-6 हजार रुपये और अब कॉलेज में जाती हैं तो 12500 हजार रुपये, डिग्री प्राप्‍त करके निकलेंगी तो फिर 12500 हजार रुपये और अब तो हमने ये संकल्‍प लिया है कि यदि मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेज में लाड़ली लक्ष्‍मी बेटियां जाती हैं तो उनकी फीस भी मध्‍यप्रदेश की, भारतीय जनता पार्टी की सरकार भरवायेगी.

(मेजों की थपथपाहट)

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस योजना के कारण राज्‍य में लिंगानुपात में भी परिर्वतन आया है. वर्ष 2011-12 में जो 912 था, अब वह बढ़कर 956 हो गया है. बेटियों की संख्‍या राज्‍य में बढ़ रही है. मुझे यह कहते हुए गर्व है कि यह संवेदना ही है कि जिसने यह तय किया कि बहनों को राजनैतिक रूप से सशक्‍त किया जायेगा. महिला के राजनैतिक रूप से सशक्तिकरण की योजना बनी और हमने यह तय किया कि 50 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को हम स्‍थानीय निकाय के चुनावों में देंगे. आज कितनी बड़ी संख्‍या में बहनें और बेटियां चुनकर आ रही हैं. चाहे वे पंच हों, सरपंच हों, पार्षद हों, मेयर हों, नगर पालिका, नगर पंचायत की अध्‍यक्ष हों. नया राजनैतिक नेतृत्‍व उभरा है. ये हमारी सरकार थी जिसने यह तय किया, बहनों की, बेटियों की 30 प्रतिशत भर्ती हम पुलिस में भी करेंगे. जब हम ये प्रस्‍ताव लेकर आये थे, गृहमंत्री जी यहां बैठे हैं, आंतरिक विरोध हुआ था, काफी विरोध हुआ था कि बेटियां क्‍या कर लेंगी? लेकिन हमने जिद की कि 30 प्रतिशत बेटियों की भर्ती पुलिस फोर्स में भी होगी. ये हमारी संवेदना ही थी.

डॉ. विजय लक्षमी साधौ:- माननीय मुख्‍य मंत्री जी, आपके मंत्रिमण्‍डल में भी 50 प्रतिशत महिला हो जाये तो और ही अच्‍छी बात हो जायेगी.

श्री शिवराज सिंह चौहान:- जरूर, आप आगे-आगे देखते जाइये. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शिक्षकों की भर्ती में भी 50 प्रतिशत बेटियों की भर्ती हो गयी. मैं एक-एक चीज गिनाऊंगा तो घण्‍टों लगेंगे. बहनों को हमने रजिस्‍ट्री में छूट दी, स्‍टाम्‍प शुल्‍क केवल एक प्रतिशत लगाने का फैसला किया तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने लिया. आजीविका मिशन जिस तेजी से आगे बढ़ रहे हैं,मुझे कहने की आवश्‍यकता नहीं है लेकिन फिर भी मन में एक बैचेनी थी कि हमारी गरीब बहनें, निम्‍न, मध्‍यम परिवारों की बहनें छोटी-छोटी जरूरतों के लिये उनको परेशान होना पड़ता था, बाकी प्रयास लगातार चल रहे थे. लेकिन मन में लगा की एक ऐसी योजना चाहिये कि जिसके कारण बहन को कभी बहन को 1000-500 रूपये की जरूरत पड़े तो उसको हाथ ना फैलाना पड़े और माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने 2017 में एक प्रयोग किया था कि हमारी बैगा, भारिया और सहरिया यह तीनों अत्‍यंत पिछड़ी जनजाति से बहनें आती थी, उनके परिवार को हमने तय किया कि एक हजार रूपये हर महीने की राशि उनके खाते में डालेंगे. आदरणीय नेता प्रतिपक्ष जी, आपकी सरकार आयी तो वह एक हजार रूपया भी आपने बैगा, भारिया और सहरिया परिवारों के आपने बंद कर दिये थे.

श्री ओमकार सिंह मरकाम:- बंद नहीं किया गया था, मुख्‍यमंत्री जी आपसे अनुरोध है कि असत्‍य बात आप ना कहें. अगर ऐसा है तो आप उसके आदेश दिखा दें.

श्री शिवराज सिंह चौहान:- अध्‍यक्ष महोदय, मैं पूरी जिम्‍मेदारी के साथ कह रहा हूं.

श्री ओमकार सिंह मरकाम:- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय:- इनका नहीं आयेगा.

श्री शिवराज सिंह चौहान:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन कर रहा हूं और पूरी जिम्‍मेदारी के साथ कि बैगा, भारिया और सहरिया बहनों को एक हजार रूपये महीना दिया जाता था, वह बंद कर दिये गये थे उनको 15 महीने वह नहीं मिले. हमने आते ही चालू किये. आप संवेदना की बात करते हैं, हम तो जाते हैं अगर कहीं