मध्यप्रदेश विधान सभा
की
कार्यवाही
(अधिकृत विवरण)
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षोडश विधान सभा पंचम सत्र
मार्च, 2025 सत्र
सोमवार, दिनांक 10 मार्च, 2025
(19 फाल्गुन, शक संवत् 1946)
[ खण्ड-5 ] [अंक- 1 ]
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मध्यप्रदेश विधान सभा
सोमवार, दिनांक 10 मार्च, 2025
( 19 फाल्गुन, शक संवत् 1946 )
विधान सभा पूर्वाह्न 11. 02 बजे समवेत् हुई.
{ अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}
राष्ट्रगीत
राष्ट्रगीत ‘’वन्दे मातरम्’’ का समूहगान
अध्यक्ष महोदय -- अब, राष्ट्रगीत ‘’वन्दे मातरम्’’ होगा. सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया अपने स्थान पर खड़े हो जाएं.
(सदन में राष्ट्रगीत ‘’वन्दे मातरम्’’ का समूहगान किया गया.)
अध्यक्ष महोदय -- अब, सदन राज्यपाल महोदय के आगमन की प्रतीक्षा करेगा.
(सदन द्वारा माननीय राज्यपाल महोदय के आगमन की प्रतीक्षा की गई.)
11.12 बजे
(माननीय राज्यपाल महोदय का सदन में चल समारोह के साथ आगमन हुआ.)
11.13 बजे
राज्यपाल महोदय का अभिभाषण
राज्यपाल
महोदय (श्री
मंगूभाई पटेल)
--
(मेजों की थपथपाहट)
(राज्यपाल महोदय द्वारा अभिभाषण के पश्चात् पूर्वाह्न 11.34 बजे चल समारोह के साथ सभा भवन से प्रस्थान किया गया.)
11.38 बजे चैंपियंस ट्रॉफी जीतने पर भारतीय क्रिकेट टीम को बधाई
संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्यक्ष जी, क्रिकेट में भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी जीत ली है. (मेजों की थपथपाहट). पाकिस्तान मेजबान था, उनकी मेजबानी में जीती है. इसलिए इस जीत का बड़ा महत्व है. मैं समझता हूँ कि सर्वानुमति से टीम इंडिया को बधाई देनी चाहिए और सारे खिलाड़ियों को बधाई देनी चाहिए क्योंकि यह संयुक्त प्रयास था. सभी खिलाड़ियों ने बहुत उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन किया है. यह टीम वर्क था, इसलिए मैं चाहता हूँ कि पूरा सदन सर्वानुमति से टीम इंडिया को बधाई दे.
नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी के प्रस्ताव को सहमति देता हूँ. यह बड़े हर्षोल्लास की बात है और गर्व से हम कहते हैं कि हम भारतीय हैं और भारत जीतता है तो निश्चित तौर से देश और प्रदेश के युवाओं में जोश आता है. मैं भी अपने दल की ओर से इस प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ.
अध्यक्ष महोदय -- इसलिए आज महामहिम राज्यपाल जी ने कहा है कि सदस्य बहुत ही आदर्श भूमिका का निर्वाह करते हैं.
मुख्यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सबका सौभाग्य है. मैं तो 12 साल वाली नगरी से आता हूँ, जहां कुंभ भराता है. 12 साल बाद हमारा चैंपियंस ट्रॉफी का जीतना वाकई अद्भुत है. मेरी ओर से सारे खिलाड़ियों को बधाई. पूरा देश और समूचा क्रिकेट परिवार आनंद में डूबा हुआ है. यह और आनंद की बात है कि एक बार नहीं, दो बार नहीं, तीसरी बार हमने जीत की हैट्रिक लगाई है. जब से चैंपियंस ट्रॉफी शुरू हुई है, तीसरी बार जीतने वाली अकेली हमारी टीम है. उससे बड़ी और बात यह है कि हर खिलाड़ी जिसमें देश के लिए जीतने का जज्बा़ हो, वह हमें कदम-कदम पर दिखाई दिया. आमतौर पर बड़े प्लेयर हार जाते हैं या किसी कारण से अपने घुटने टेक देते थे तो वह टीम किनारे लग जाती थी. यह बात कपिल देव ने अपनी स्वयं की टिप्पणी में कोट किया है कि यह टीम ऐसी है, जिसमें हरेक के अंदर जीतने का जज्बा़ था. मेरी अपनी ओर से और समूचे सदन की ओर से भी बधाई.
अध्यक्ष महोदय - अत्यंत हर्ष का विषय है कि भारतीय क्रिकेट टीम ने लगातार तीसरी बार दुबई क्रिकेट स्टेडियम में न्यूजीलैण्ड टीम को हराकर चैम्पियन ट्राफी जीती है इससे हमारा देश व हम हम सभी गौरवान्वित हुए हैं. भारतीय क्रिकेट टीम की इस उपलब्धि के लिये टीम के कप्तान एवं सभी सदस्यों को एवं देशवासियों को सदन की ओर से हार्दिक बधाई.
11.41 बजे अध्यक्षीय व्यवस्था
राज्यपाल महोदय का अभिभाषण पढ़ा हुआ एवं पटल पर रखा माना जाना
अध्यक्ष महोदय - महामहिम राज्यपाल महोदय द्वारा अपने अभिभाषण में अधिकांश पैराग्राफ पढ़े गये हैं शेष समस्त पैराग्राफ पढ़े हुए माने जाएंगे तथा अभिभाषण पटल पर रखा माना जायेगा.
11.42 बजे राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव की प्रस्तुति
निधन का उल्लेख
(1) डॉ. मनमोहन सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री,
(2) श्री जुगल किशोर गुप्ता, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य,
(3) श्रीमती सविता बाजपेयी, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य,
(4) श्री मारोतराव खवसे, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य,
(5) श्री रायसिंह राठौर, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य, तथा
(6) श्री जयराम सिंह मार्को, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य.
मुख्यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि आपने बताया हमारे बीच हमारे पूर्व प्रधानमंत्री, सुयोग्य खासकर वित्त के मामले के जानकार जिनकी देश और दुनिया में एक अलग पहचान थी डॉ. मनमोहन सिंह उन्होंने कई प्रकार के अलग-अलग दायित्वों का निर्वहन किया है, हम सबके लिये यह अलग प्रकार का उनका जीवन आमतौर पर राजनेताओं से हटकर के माननीय मनमोहन सिंह जी जो गवर्नर के रूप में रहे, वित्तमंत्री के रूप में रहे, प्रधान मंत्री के रूप में रहे, लेकिन एक और जो उनसे जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण पक्ष है वह ऐसे राजनेता भी रहे जो समान रूप से सभी दलों के लिये आदर के पात्र रहे हैं. वह अपनी विद्वतता के बलबूते पर कई सारे वित्तमंत्री के समय से ही आर्थिक दृष्टि से कई नवाचार करते हुये देश के लिये समसामयिक विषयों में उन्होंने कठोरता से निर्णय लिये हैं. कई बार हमको उनकी उन सारी बातों से अतीत के पन्नों पर हम जायेंगे तो ध्यान में आयेगा कि कई उस समय के निर्णय अटपटे भी लगे, लेकिन मनमोहन सिंह जी कई निर्णयों पर दृढ़ रहे हैं. आमतौर पर उनकी दृढ़ता वाली छवि दूसरें कारणों से दब गई लेकिन वह ऐसे राजनेता भी रहे जो राज्यसभा के माध्यम से 6 बार लगातार आम तौर पर हमारे यहां प्रधानमंत्री की परंपरा लोकसभा से निर्वाचन की रही है लेकिन सभी दलों का आदर पाते हुये उन्होंने उच्च सदन को भी गौरवान्वित किया है ऐसे डॉ. मनमोहन सिंह जी हमारे बीच में नहीं रहे. मैं उनके निधन से मध्यप्रदेश विधान सभा की ओर से मेरे मन में उनके लिये विशेष श्रद्धा है मेरे सहित सभी सदस्यों के लिये, हम सब उनके जीवन का वह सब पक्ष भी देखें जिसमें वह प्रख्यात अर्थशास्त्री के साथ-साथ कुशल प्रशासक और अपनी पार्टी के अंदर ऐसे तमाम प्रकार के अंतर्विरोधों के बावजूद भी अपने मूल विचारों पर वह सदैव दृढ़ रहे हैं.
श्री जुगल किशोर गुप्ता जिनका जन्म 5 जुलाई 1944 को हुआ है, यह भी जनता पार्टी के समय लगातार आपातकाल में भी निरूद्ध रहे, लोकतंत्र सेनानी रहे, अनेक आंदोलनों में सक्रिय भाग लिया और वर्ष 1977 में जनता पार्टी की ओर से छठवीं विधान सभा में अनूपपुर से निर्वाचित हुये, आपके निधन से भी प्रदेश ने एक कर्मठ समाजसेवी खोया है.
श्रीमती सविता बाजपेयी, जैसा आपने उल्लेख किया 3 दिसम्बर 1938 को आपका जन्म हुआ. वर्ष 1957 से प्रजा समाजवादी दल के साथ आपने अलग-अलग दायित्वों का निर्वहन करते हुये आप समान रूप से एक तरफ पत्रकारिता के माध्यम से भी और समाज के अंदर अपनी एक नेतृत्व क्षमता के आधार पर आपकी अलग पहचान रहीं. यद्यपि आपने दो समाचार पत्रों संघर्ष और नयनतारा में संपादक, सह संपादक की भूमिका भी अदा की है और एक जागरूक पत्रकार होने के नाते से आपने भी आपातकाल के उस दर्द को सहा है, लेकिन लोकतंत्र की मसाल कायम रखी है. आप स्वयं हमारे बीच में वर्ष 1977 में जनता पार्टी की ओर से छठवीं सदस्य के रूप में सीहोर से निर्वाचित हुई, प्रदेश में राज्यमंत्री रहीं. आपके निधन से प्रदेश के सार्वजनिक जीवन की अपूरणीय क्षति हुई है.
श्री मारोतराव खवसे, जैसा कि आपने बताया है कि यह छिंदवाड़ा जैसे जिले से आते हैं और आप वर्ष 1979 में ग्राम पंचायत पारडी में सरपंच, कृषि उपज मंडी पांढुर्णा एवं जनपद पंचायत के सदस्य रहे हैं. आपने भाजपा किसान मोर्चे के उपाध्यक्ष तथा जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में भी काम किया है. आप वर्ष1985 में आठवीं, वर्ष 1990 में नौवीं और वर्ष 2003 की बारहवीं विधानसभा में विधायक के नाते से निर्वाचित हुए, आपके निधन से प्रदेश ने एक समाजसेवी और कर्मठ नेता को खोया है.
श्री रायसिंह राठौर, 6 जून, 1945 को आपका जन्म हुआ. वर्ष1977 से निरंतर शैक्षणिक, व्यापारिक ऐसे कई प्रकार के कामों के साथ-साथ आप खादी एवं कुटीर उद्योग से भी जुड़े रहे हैं. आपने पार्टी के कई दायित्वों का निर्वहन भी किया है और वर्ष 1990 में भारतीय जनता पार्टी की ओर से नवम विधानसभा में खरगौन से निर्वाचित हुए हैं. आपके निधन से भी प्रदेश ने एक लोकप्रिय नेता एवं समाजसेवी खोया है.
श्री जयराम सिंह मार्को, आपका जन्म 04 जुलाई, 1964 को ग्राम ओढ़की, जिला शहडोल में हुआ. आप आदिवासी अंचल से आते थे, लेकिन आपकी अपनी कर्मठता के बलबूते पर आपने संगठन के बहुत सारे दायित्वों का निर्वहन करते हुए, आप वर्ष 2003 में भारतीय जनता पार्टी की ओर से बारहवीं विधानसभा में जयसिंह नगर से निर्वाचित हुए. आपके निधन से भी प्रदेश ने एक कर्मठ समाजसेवी और नेता खोया है.
नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, निश्चित तौर से जब किसी महान विभूति एवं दिवंगत जो देश में, प्रदेश में जिनकी सामाजिक क्षेत्र में भूमिका रही और जिन्होंने समाज को एक नई दिशा दी और राजनीतिक क्षेत्र को एक नई दिशा दी. हमारे पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह जी, जो एक प्रख्यात अर्थशास्त्री थे और एक कुशल प्रशासक भी रहे, उनके समय में ऐसी कई पॉलिसीज बनी, जिससे देश की एक नई पहचान बनी, जैसे मनरेगा वर्ष 2005 में योजना बनी, जिससे पूरे देश में एक आम व्यक्ति को मजदूर को अपने गांव के अंदर रोजगार के अवसर मिले और वह लोग पलायन करने से बचे, तो यह एक मैं समझता हूं कि सामाजिक क्षेत्र में एक बहुत बड़ा बदलाव था और निश्चित तौर से एक आम गरीब व्यक्ति जो संघर्ष करता है, अगर सरकारें उनको लेकर योजना बनाती हैं, तो इस देश की एक नींव हमारी मजबूत होती है. मैं ऐसा मानता हूं. आर्थिक सुधार आपने किये, विशेषकर बैकिंग सेक्टर में कैसे प्रायवेटाईजेशन किया? निजीकरण को उन्होंने बढ़ावा दिया, श्री राजीव गांधी जी चाहते थे कि जिस प्रकार से कम्प्यूटर के युग का उन्हें हिंदुस्तान में कहा जाता था, उन्होंने उनके सपने को साकार किया है, वह जानते थे अर्थशास्त्री होने के नाते कि अगर जब तक निजीकरण को इस देश के अंदर ओपन नहीं करूंगा, दरवाजे इसके नहीं खोलूंगा, जब तक हम पूरे विश्व की जी-7 कंट्री से हम आगे नहीं आ पायेंगे तो यह उनकी सोच थी कि कैसे देश को आत्मनिर्भर बनाना चाहते थे, तो आज जिस प्रकार से प्रायवेटाईजेशन हुआ.
प्रायवेट सेक्टर को मौका मिला, तो मैं समझता हूं कि उनकी यह पहल, ये कदम, एक मील का पत्थर साबित हुआ, तब ही आज देश एक विकासशील देश से विकसित देश की ओर बढ़ रहा है. ये उनकी एक पहल है. मुझे लगता है कि देशवासी, अर्थशास्त्री, नेता और सामाजिक क्षेत्र के लोग इस बात को समझते हैं.
अध्यक्ष जी, इसके अलावा माननीय जुगल किशोर गुप्ता जी, जो लोकतंत्र, समाजसेवा के लिए संघर्षशील रहे, माननीय सविता बाजपेयी जी जो साहस और बलिदान के लिए जानी जाती थीं, जिन्होंने कई साहित्य लिखे संघर्ष को लेकर, उससे मालूम पड़ता है, उनकी लेखनी से पता लगता है कि आप किस प्रकार से समाज की कुरीतियों को दूर करना चाहते हो. समाज में आप बदलाव चाहते हो, समाज में जो घटनाएं घटती हैं, उसको लेकर आप आवाज बुलंद करते हो, तो मुझे लगता है कि ऐसे लोगों को, हम लोगों को हमेशा हमारे दिलों में याद रखना चाहिए.
अध्यक्ष जी, मारोतराव खवसे जी, जो कि ग्रामीण राजनीती से आए और किसान कल्याण के लिए समर्पित रहे.
श्रद्धेय रायसिंह राठौर जी, शिक्षा, व्यापार और सामाजिक क्षेत्र में योगदान देने वाले नेता रहे.
श्री जयराम सिंह मार्को, जनजातीय विकास के लिए समर्पित रहे.
साथ में मैं उन दिवंगतों को भी, जो अकस्मात प्रयागराज में, महाकुंभ में जिनकी मृत्यु हुई, उस शोकाकुल परिवार को भी सदन की ओर से और हमारे दल की ओर से मैं श्रद्धांजलि देना चाहता हूं.
निश्चित तौर से सभी महान विभुतियों के रूप में यह एक राष्ट्रीय और प्रादेशिक क्षति है, जिनको हम हमेशा याद रखेंगे, उनके कार्य और उनकी सेवा से. मेरे दल की ओर से उन परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और मैं समझता हूं कि ईश्वर उनकी आत्मा को अपने चरणों में स्थान दें, धन्यवाद.
डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह – माननीय अध्यक्ष महोदय, सदन में अभी माननीय मुख्यमंत्री जी ने, आपने और माननीय प्रतिपक्ष के नेता जी ने दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी है और उनके परिवारों के प्रति शोक संवेदना व्यक्त की है. मैं अपने आपको उन सभी से जोड़ता हूं. डॉ. मनमोहन सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री, श्री जुगल किशोर गुप्ता, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य, श्रीमती सविता बाजपेयी, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य, श्री मारोतराव खवसे, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य, श्री रायसिंह राठौर, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य, तथा श्री जयराम सिंह मार्को, भूतपूर्व विधान सभा सदस्य.
माननीय अध्यक्ष महोदय स्व. मनमोहन सिंह जी के बारे में जितना भी कहा जाए. मैं समझता हूं वह हमेशा कम होगा. वह एक ऐसे व्यक्तिव के धनी थे जो बहुत ही साधारण परिवार और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते थे लेकिन उन्होंने अपनी योग्यता से, परिश्रम से, दृढ़ निश्चय से, वह मुकाम हासिल किए, जो शायद विरले ही लोग इस दुनिया में हासिल करते हैं. पंजाब विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने कैम्ब्रिज से, तत्पश्चात ऑक्सफोर्ड से एम.फिल किया, डॉक्टरेट की डिग्री हासिल की और उसी के पश्चात उन्हें यू.एन.ओ. में काम करने का निमंत्रण मिला उन्होंने वहां से अपनी करियर की शुरूआत की.
उनकी प्रतिभा को देखते हुए तत्कालीन भारत सरकार, जब ललित नारायण जी मिश्र केन्द्र में मंत्री होते थे, तो उन्होंने इंदिरा जी से कहकर यह बात रखी और इनके बारे में बताया और मनमोहन सिंह जी को भारत सरकार के आर्थिक सलाहाकार के रूप में काम करने का उन्हें अवसर मिला. तत्पश्चात् अनेकों पदों को उन्होंने सुशोभित किया है, जिनका उल्लेख यहां पर किया गया है. वह आरबीआई के गवर्नर रहे, यूजीसी के चेयरमेन रहे, प्लानिंग कमीशन के डिप्टी चेयरमेन रहे. इस सबकी जीवन यात्रा के अपने पड़ाव में उन्होंने 1991 में देश में चुनाव हुए स्वर्गीय नरसिंम्हा राव जी के नेतृत्व में कांग्रेस एवं यू.पी.ए.की सरकार पहली बार दिल्ली में बनी. स्वयं नरसिंम्हा राज जी बड़े ही विद्वान व्यक्ति थे. उस समय भारत की अर्थ व्यवस्था बहुत ही खराब थी डगमगा रही थी. हमारा सौ टन सोना विदेश में गिरवी रखा था. हमारे पास में फारेन एक्सचेंज नहीं था. 15 दिन से ज्यादा अगर और हो जाते तो हम कोई भी चीज देश से आयात नहीं कर सकते थे. हमारी अर्थ व्यवस्था बहुत ही डांवा-डोल थी तो उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति को चुना जिसने इस तमाम समुद्र में जो हलचल थी शासन व्यवस्था की जो आर्थिक परिस्थितियां थीं उस नाव को अपने किनारे में लाने में बहुत बड़ी भूमिका उन्होंने निभाई है. बहुत कम लोग जानते होंगे माननीय अध्यक्ष महोदय, तब जो हमारा रूपया था डालर से कीमत से ज्यादा उसका मूल्य हुआ करता था, कैसे हुआ, क्या हुआ, यह इतिहास की बात है. लेकिन इस कारण हमारे निर्यात खत्म हो गये थे. कहीं पर कोई हम निर्यात नहीं कर पाते थे. इतनी कीमत थी भारतीय सामानों की. जो कुछ भी उस समय बाजार खुले थे. उन्होंने रूपये का अवमूल्यन भी किया ताकि हम निर्यात कर सकें. हमारी अर्थ व्यवस्था पटरी पर आये और हमारा जो फारेन एक्सचेंज जो खत्म हो रहा था वह हम वापस प्राप्त कर सकें. माननीय मनमोहन सिंह जी ने बहुत सारे ऐसे कदम उठाये जो कि एक अर्थ शास्त्री ही कर सकता था. उन कदमों में माननीय प्रधानमंत्री जी श्री नरसिंम्हा राव जी का उनको समर्थन प्राप्त था. 2004 के चुनाव के पश्चात् जब यूपीए की सरकार बनी तो माननीय मनमोहन सिंह जी को कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री बनाया. बहुत सारी चुनौतियां थीं शायनिंग इंडिया का एक सपना दिखाया गया था, लेकिन भारत की जनता ने उस शायनिंग इंडिया के कांसेप्ट को स्वीकार नहीं किया और यूपीए की सरकार बनी. माननीय मनमोहन सिंह जी ने जैसा कि माननीय नेता प्रतिपक्ष जी ने कहा कि पहला जो उन्होंने कानून बनाया वह मजदूरों के लिये बनाया. उनकी ब्रिंगिंग थी उनको वह भूले नहीं. उन्होंने सबसे पहला काम गरीबों के लिये किया. वह कानून लाये तत्पश्चात् अनेकों कानून बने. राईट टू इन्फर्मेशन एक्ट बना. इसके बाद भूमि अधिग्रहण कानून भी उन्होंने बनाया 2013 में. वन अधिकार अधिनियम, नेशनल हेल्थ मिशन और बहुत सारे ऐसे कानून उन्होंने बनाये. एक महत्वपूर्ण जो उन्होंने कानून बनाया उस समय उनकी बड़ी ही आलोचना हुई वह था आधार यूनिक आईडेंटीफिकेशन कोड जिसे हम आधार कहते हैं. बड़े बड़े लोगों ने कहा कि इसको तो समुद्र में फेंक दिया जायेगा. लेकिन आज आधार ही हमारी अर्थ व्यवस्था और सारे जो हमारे ट्रांजेक्शन्स हैं. गरीबों को जो हम पैसे देते हैं अथवा कोई भी प्रक्रिया आज बिना आधार के पूरी नहीं हो रही है. हमको आधार से ही बैंक एकाऊंट लिंक करने पड़ते हैं, सब कुछ करना पड़ता है. तो आधार वाली स्थिति भी उन्होंने दी. भारत की अर्थ व्यवस्था उनके नेतृत्व में आपको जानकर प्रसन्नता होगी कि 9 प्रतिशत ग्रोथ रेट था. दुनिया में सर्वाधिक था वर्ष 2007 में उसके पश्चात् विश्व में आर्थिक मंदी आयी 2009 में लेकिन माननीय मनमोहन सिंह जी ने भारत को सुरक्षित रखा उस समय की आर्थिक मंदी से भारत को उन्होंने प्रभावित नहीं होने दिया. इंडो न्यूक्लियर डील में उन्होंने अपना पद ही दांव में लगा दिया था. वह डील हुई. सदन से पास हुई. हमारा समझौता अमेरिका से हुआ. बहुत से लोग सोचेंगे कि समझौते का क्या अर्थ है. महत्वपूर्ण यह है कि हमारे ऊपर बहुत से प्रतिबंध लगे हुए थे और प्रतिबंध लगने के कारण हम आगे नहीं बढ़ रहे थे. विश्व में जो आर्थिक उदारीकरण आया था, तो हम अपने आपको विश्व की अर्थव्यवस्था से इंटीग्रेट नहीं कर पा रहे थे. वह हमको मिला और बहुत-सी ऐसी चीजें हैं, जो सराहनीय हैं और वास्तव में वह अन्तर्राष्ट्रीय व्यक्ति थे. दिल उनका भारत का था दिल भारत का धड़कता था. अन्तर्राष्ट्रीय व्यक्तित्व के धनी थे. वे एक कुशल प्रशासक, राजनेता, अर्थशास्त्री थे. हर आयाम से वे सुसज्जित थे. मैं इस अवसर पर दिवंगत डॉ.मनमोहन सिंह जी को श्रद्धांजलि देता हॅूं. उनके परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं और इसके साथ ही प्रयागराज में जो घटना हुई है जिसमें बहुत-से लोग लगभग 30 लोग जो रिकॉर्ड में है उन्होंने अपनी जान गंवाई, मैं उनको भी श्रद्धांजलि देता हॅूं और उनके शोक-संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हॅूं. साथ ही बहुत-से ऐसे लोग जो दिवंगत हुए, जिनकी गिनती नहीं हो सकी, उनका नाम कागजों में नहीं आया, उन परिवारों के प्रति भी मेरी संवेदनाएं हैं. धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय -- मैं सदन की ओर से शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हॅूं. अब यह दो मिनट सदन कुछ समय मौन खडे़ रहकर दिवंगत आत्माओं के प्रति श्रद्धा- सुमन अर्पित करेगा.
(सदन द्वारा दो मिनिट मौन खडे़ रहकर दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई.)
अध्यक्ष महोदय -- विधान सभा की कार्यवाही दिवंगत आत्माओं के सम्मान में मंगलवार, दिनांक 11 मार्च 2025, को प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्थगित.
अपराह्न 12.08 बजे विधान सभा की कार्यवाही मंगलवार, दिनांक 11 मार्च, 2025 ( फाल्गुन 20, शक संवत् 1946) को प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्थगित की गई.
ए.पी. सिंह
भोपाल, प्रमुख सचिव,
दिनांक-10 मार्च, 2025 मध्य प्रदेश विधानसभा