मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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पंचदश विधान सभा एकादश सत्र

 

 

मार्च, 2022 सत्र

 

गुरूवार, दिनांक 10 मार्च, 2022

 

(19 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1943 )

 

 

[खण्ड- 11 ] [अंक- 4 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरूवार, दिनांक 10 मार्च, 2022

 

(19 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1943)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.01 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (श्री गिरीश गौतम) पीठासीन हुए.}

 

हास-परिहास

 

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया (मंदसौर)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज तो नरोत्‍तम जी साफे में जम रहे हैं.

गृह मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज दो विषय हैं, उत्‍तर से पूर्व तक, पूर्व से उत्‍तर तक, राष्‍ट्रवाद और भगवा ही चल रहा है. कमल ही कमल है.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया- जय श्री राम, जय श्री राम.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्‍वास और कांग्रेस तथा सपा को वनवास वाला दिन है. माननीय मोदी जी का जो वैश्विक नेतृत्‍व है, आज आप देखेंगे कि हिन्‍दुस्‍तान के अंदर चारों तरफ, अभी मैं, रूझान देख रहा था.

श्री लक्ष्‍मण सिंह (चाचौड़ा)- वनवास के बाद ही लंका पर जीत हुई थी.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- लक्ष्‍मण जी, मैंने आपका ट्वीट देखा, आपने मध्‍यप्रदेश के बारे में बिल्‍कुल सही ट्वीट किया है. आपने जो कमलनाथ जी पर ट्वीट किया है कि जब तक इन बुजुर्गों के हाथ में कमान रहेगी, तब तक ऐसा ही रहेगा.

श्री लक्ष्‍मण सिंह- बिलकुल असत्‍य. मैंने आज कोई ट्वीट ही नहीं किया है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- मैं आपके आज के ट्वीट की बात नहीं कर रहा हूं. मैं केवल आपके ट्वीट की बात कर रहा हूं.

श्री लक्ष्‍मण सिंह- यह गलत बात है. आपको असत्‍य बोलने की आदत है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस विजय की आपको भी बधाई. इसके अतिरिक्‍त आपको एक और बधाई. कल, आपने जो विधायकों और मंत्रियों को एक लंबे समय से बंद पड़ी परंपरा को पुन: प्रारंभ कर सर्वश्रेष्‍ठ विधायकों और मंत्रियों को पुरस्‍कार दिया है, आपने हमारे भाई जयवर्द्धन सिंह, बहन श्रीमती झूमा डॉ.ध्‍यानसिंह सोलंकी, हमारे मंत्री श्री भूपेन्‍द्र सिंह जी, विश्‍वास भाई, वित्‍त मंत्री जी को पुरस्‍कार दिया, उसके लिए मैं, आपको, हमारी चयन समिति के अध्‍यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा, श्री यशपाल सिंह सिसौदिया के प्रति आभार व्‍यक्‍त करता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय- आपने जयवर्द्धन जी और श्रीमती झूमा सोलंकी जी का नाम नहीं लिया ?

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने सबसे पहले उन्‍हीं का नाम लिया है, बाद में अपनी सरकार के मंत्रियों का नाम लिया है.

राजस्‍व मंत्री (श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लक्ष्‍मण सिंह जी अनुभवी विधायक हैं, इनका भी नाम इसमें होना चाहिए था.

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा (सोनकच्‍छ)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, योगी जी साफा बांधें, मोदी जी साफा बांधें, तो ठीक है, अब नरोत्‍तम जी ने ऐसा कौन-सा चमत्‍कार कर दिया कि उन्‍होंने साफा बांधा है ?

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- वास्‍तव में हम अपनी पार्टी की खुशी को व्‍यक्‍त कर रहे हैं. आप तो दूसरे के लल्‍ला को पलना में खिलाते हो.

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा- आपने अभी कमल का जिक्र किया है, कमलनाथ जी का भी जिक्र कर देते.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- अभी कांग्रेस के दो-तीन ट्वीट हुए हैं, आप उन्‍हें पढि़ये.

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा- अभी आपने कहा उत्‍तर से दक्षिण त‍क, पूर्व से पश्चिम तक, लेकिन सूरज पश्चिम की तरफ भी जाता है, इसे ध्‍यान रखियेगा. सूरज अस्‍त भी होता है.

अध्‍यक्ष महोदय- सज्‍जन सिंह जी, कृपया बैठ जाईये. वैसे भी बारात में सिर्फ दूल्‍हा ही साफा नहीं बांधता है और भी बहुत-से लोग बांधते हैं तो इसे वैसा ही मानिये कि‍ खुशी व्‍य‍क्‍त कर रहे हैं. प्रश्‍न क्रमांक 1 अलावा जी. कृपया संक्षेप में शुरू करें.

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

वन संरक्षण

[वन]

1. ( *क्र. 1118 ) डॉ. हिरालाल अलावा : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कैम्पा अधिनियम के तहत विभाग को प्रश्‍न-दिनांक तक कुल कितनी राशि आवंटित की गई? आवंटित कुल राशि में से कितनी राशि किन-किन कार्यों में कब-कब किन नियमों के तहत खर्च की गई? वर्षवार पृथक-पृथक ब्यौरा देवें। (ख) कैंपा के तहत आवंटित कुल राशि में से कितनी राशि ऐसे ग्राम पंचायतों में खर्च की गई, जहां विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत पेड़ों की कटाई हुई? ग्राम पंचायतवार, वर्षवार ब्यौरा देवें। (ग) क्या कैंपा अधिनियम के दिशा-निर्देशों के तहत चलाए गये वृक्षारोपण अभियान के संबंध में अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं? यदि हाँ, तो तत्संबंधी ब्यौरा देवें। (घ) वित्त वर्ष 2018-19 से चालू वर्ष के दौरान वनों के संरक्षण, विकास और संवर्धन के लिए कुल स्रोतों से आवंटित राशि का वर्षवार ब्यौरा देवें। (ड.) जलवायु परिवर्तन पर अनुकूलन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कौन-कौन से कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं? तत्संबंधी ब्यौरा देवें। (च) वन-सर्वेक्षण-रिपोर्ट-2021 के अनुसार प्रदेश में वेरी-डेंस फॉरेस्ट, मोडरेटली-डेंस फॉरेस्ट, ओपन फॉरेस्ट तथा गैर-वन का क्षेत्रफल कितना है? वन-सर्वेक्षण-रिपोर्ट-2019 की तुलना में इन श्रेणियों में कितने की वृद्धि/कमी हुई? श्रेणीवार पृथक-पृथक जानकारी स्क्वॉयर/कि.मी./प्रतिशत में देवें।(छ) वर्ष 2004 से वर्ष 2021 तक कितनी वन भूमि निजी-क्षेत्र एवं उद्योगों को हस्तांतरित की गई? प्रत्येक वर्ष के लिए विभिन्न जिलेवार हस्तांतरित वन भूमि की जानकारी प्रत्येक उद्योग/निजी-क्षेत्र की जानकारी के साथ पृथक-पृथक देवें।

वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) कैम्‍पा अधिनियम के तहत विभाग को प्रश्‍न दिनांक तक वनमण्‍डलावार कुल आवंटित राशि एवं व्‍यय की गई राशि की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। आवंटित राशि से क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण, एन.पी.व्‍ही. अंतर्गत मिश्रित वृक्षारोपण, बिगड़े वनों का सुधार, वन विहीन पहाड़ि‍यों का हरा-भरा, मुनारा निर्माण, भवन निर्माण, वनों के संरक्षण विकास एवं संवर्धन अ‍धोसंरचना तथा वन्‍यप्राणियों हेतु जल स्‍त्रोतों का विकास आदि कार्य कराये गये हैं। उक्‍त राशि प्रतिकात्‍मक वन रोपण नि‍धि नियम, 2018 के अंतर्गत दिये गये प्रावधानों के अनुसार व्‍यय की गई है। नियम की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (ख) कैम्‍पा के तहत आवंटित कुल राशि में से ग्राम पंचायतों में खर्च की गई तथा विभिन्‍न सरकारी योजनाओं के तहत पेड़ों की कटाई की उक्‍त जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-3 अनुसार है। (ग) कैम्‍पा अधिनियम के दिशा-निर्देशों के तहत बीना बहुउद्देशीय संयुक्‍त सिंचाई परियोजना के अं‍तर्गत कराये गये वृक्षारोपण क्षेत्र तैयारी कार्य में उत्‍तर सागर एवं दक्षिण सागर वनमंडल में अनियमितताओं के मामले प्रकाश में आये हैं. उक्‍त वनमंडलों में कुल 38 अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध अनुशासनात्‍मक कार्यवाही में, 24 के विरूद्ध विभागीय जांच प्रारंभ, 6 के विरूद्ध एक वेतनवृद्धि संचयी प्रभाव से रोधित, 1 के विरूद्ध स्‍पष्‍टीकरण जारी, 2 के विरूद्ध स्‍पष्‍टीकरण, विचारोपरांत नस्‍तीबद्ध तथा 5 के विरूद्ध आरोप पत्र जारी हैं. (घ) प्रश्‍नाधीन जानकारी निम्‍नानुसार है :-

 

वर्ष

विकास हेतु आवंटित राशि

रू. लाख में

संरक्षण हेतु आवंटित राशि

रू. लाख में

2018-19

38775.00

2749.03

2019-20

42445.07

2580.73

2020-21

34843.56

2088.92

2021-22

35000.96

1725.98

 

(ड.) जलवायु परिवर्तन पर अनुकूलन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये कैम्‍पा अंतर्गत पृथक से कोई कार्यक्रम नहीं चलाये जा रहे हैं। (च) वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2021 अनुसार प्रश्‍नाधीन जानकारी निम्‍नानुसार है :-

 

क्र.

श्रेणी

वर्ष 2019 (वर्ग कि.मी.)

वर्ष 2021 (वर्ग कि.मी.)

1

VDF

6676

6665

2

MDF

34341

34209

3

OF

36465

36618

TOTAL

77482

77492

 

(छ) प्रश्‍नाधीन जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-04 अनुसार है।

 

डॉ. हिरालाल अलावा- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहते हुए, मंत्री जी से पूछना चाहूंगा और इस सदन को इस बात की जानकारी भी देना चाह रहा हूं कि मेरा प्रश्‍न कैम्‍पा अधिनियम से संबंधित हैख्‍ जो जंगलों से संब‍ंधित है और जंगल हम सभी के लिए महत्‍वपूर्ण है. कैम्‍पा अधिनियम में किस प्रकार भ्रष्‍टाचार हो रहा है, इसे लेकर मेरा प्रश्‍न है.

 

 

कभी आपने सोचा भी नहीं होगा इसलिए आपको मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहिए. आपको इस सरकार को धन्यवाद देना चाहिए कि आने वाले समय में जंगल के फायदे का 20 प्रतिशत मालिकाना हक देने का प्रस्ताव मध्यप्रदेश की भाजपा की सरकार बना रही है.

डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि ऐसे बोलने से भ्रष्टाचार नहीं हो जाता है तो वे बताएं कि कैसे भ्रष्टाचार हो जाता है.

खनिज रॉयल्‍टी की वापसी

[खनिज साधन]

2. ( *क्र. 1175 ) श्री सुनील सराफ : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के प्रश्‍न क्र. 878, दिनांक 22.12.2021 जो कि ग्राम कटकोना से संबंधित है, के प्रश्‍नांश (ग) के उत्‍तर में बताया गया है कि रेत का परिवहन ग्राम पंचायत कटकोना बैहाटोला में उपलब्‍ध मार्ग होने से एवं अन्‍य मार्ग न होने से परिवहन किया जा रहा है? (ख) क्‍या प्रश्‍न क्र. 880, दिनांक 22.12.2021 जो ग्राम कटकोना से ही संबंधित है, के प्रश्‍नांश (ग) के उत्‍तर में बताया गया है कि प्रश्‍नांश अनुसार गांव के भीतर से परिवहन नहीं हो रहा है, अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है? (ग) उपरोक्‍त प्रश्‍नांश (क) (ख) में से कौन सा उत्‍तर सही है, की जानकारी देवें। उत्‍तर तैयारकर्ता जिले के अधिकारियों पर इस तरह जानकारी देने के लिए शासन कब तक कार्यवाही करेगा? उत्‍तर देने वाले अधिकारियों के नाम, पदनाम सहित बतावें।

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) माननीय प्रश्‍नकर्ता द्वारा प्रश्‍नांश (ग) का उत्‍तर ग्राम पंचायत कटकोनाबैहाटोला बसाहट एरिया से संबंधित था। (ख) प्रश्‍नांश (ग) का उत्‍तर का उत्‍तर ग्राम पंचायत कटकोनाबैहाटोला बसाहट एरिया से संबंधित न होकर केवल ग्राम कटकोना से संबंधित था। (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में उल्‍लेखित ग्राम/क्षेत्रों में भिन्‍नता होने के कारण शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्री सुनील सराफ -- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय खनिज मंत्री जी से सीधे प्रश्न करना चाहता हूँ. पूर्व में मेरे द्वारा किए गए प्रश्न क्रमांक 878 और 880 जो कि सदन में एक ही दिन लगे थे. उसमें इनके विभाग के अधिकारियों द्वारा अलग-अलग उत्तर दिए गए हैं. मैंने प्रश्न किया था कि माननीय मंत्री जी यह बताने की कृपा करेंगे कि उन दोनों उत्तरों में सही उत्तर कौन सा है. दो अलग-अलग उत्तर इस सदन को जिन अधिकारियों ने दिए हैं और सदन को गुमराह किया है. मैं मंत्री जी का सम्मान करता हूँ. आपके अधिकारी सदन में लगातार पिछली तीन बार से आपको दिग्भ्रमित करके जवाब पेश करते हैं, यह सदन की गरिमा के खिलाफ है. सदन को इस तरह से गुमराह करने वाले अधिकारियों पर मंत्री जी क्या कोई कार्यवाही करेंगे.

अध्यक्ष महोदय, मैं एक विनती और करना चाहता हूँ. मंत्री जी जब भी जवाब देने के लिए खड़े होते हैं तो अधिकारियों का पक्ष लेते हैं चाहे अधिकारी सही जवाब दें या सही जवाब न दें. जब तक आप इस तरह से करते रहेंगे तब तक न विधायक की कोई गरिमा रहेगी न ही विधान सभा की कोई गरिमा रहेगी. हमारे प्रश्न लगाने का कोई अर्थ नहीं रहेगा.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, दोनों प्रश्न क्रमांक 878 एवं 880 एक ही दिन आए थे. इनमें से एक तारांकित था और दूसरा अतारांकित था. दोनों के उत्तर सही हैं. पहला प्रश्न क्रमांक जो कि 878 था वह तारांकित था. वह माननीय सदस्य ने कटकोना और बैहाटोला पंचायतों को लेकर लगाया था. इसका जो उत्तर गया था उसमें बताया गया था कि वहां पर जो रास्ता है उस रास्ते से जा रहा है और यदि वैकल्पिक रास्ता मिलेगा तो हम उसको बदल देंगे. दूसरा प्रश्न क्रमांक 880 लगाया गया था यह आपने ग्राम कटकोना को लेकर लगाया था. वहां से वह रास्ता नहीं निकलता है वह आज भी नहीं निकल रहा है. मेरा यह कहना है कि दोनों प्रश्नों का जवाब सही भेजा गया है.

श्री सुनील सराफ -- माननीय मंत्री जी, मैं विनम्रतापूर्वक आपसे आग्रह करूंगा कि आप पिछले सवाल पढ़ लें. ग्राम कटकोना बैहाटोला, कटकोना से निकलने के लिए बैहाटोला के अलावा कोई और रास्ता ही नहीं है. आप इसका भौतिक सत्यापन करवा लें. रेत खदान से गाड़ी निकलेगी वह कटकोना बैहाटोला होकर ही बाहर जाएगी. कोई और वैकल्पिक रास्ता नहीं है. पहले सवाल के जबाव में आपके अधिकारियों ने सही स्वीकार किया था कि कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं होने के कारण उस मार्ग से गाड़ियां जा रही हैं. दूसरे सवाल के जवाब में आपके अधिकारियों ने गलत जानकारी दी थी. मैंने आपसे आज जो सवाल किया है उस सवाल की मूल आत्मा को ही मार दिया गया है. मैंने यह कहा था कि इस तरह का उत्तर देने वाले अधिकारियों की जांच करके उन पर क्या कार्यवाही करेंगे. माननीय मंत्री जी आप इसमें कृपापूर्वक कार्यवाही करने की बात करें. आप मुझे शामिल करके भौतिक सत्यापन करवा लें कि कटकोना और बैहाटोला का एक ही रास्ता है या नहीं है. अगर अलग रास्ता होगा तो कोई बात नहीं है.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, कटकोना से बाहर से रास्ता है. पांच किलोमीटर जो रास्ता जाता है जो कि मनेन्द्रगढ़ एनएच से मिलता है. दूसरा बैहाटोला के बीच से रास्ता जाता है. बैहाटोला का रास्ता प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत बना है. वहां से आम निस्तार है और यदि आम निस्तार के उपयोग वे लोग भी कर रहे हैं तो इसमें क्या गलत है.

अध्यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, माननीय सदस्य यह चाहते हैं कि इसमें दो तरह की बातें आई हैं क्या इसकी कोई जांच हो सकती है.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आप इस बात को कह रहे हैं तो मैं उसको अस्वीकार नहीं कर रहा हूँ. मेरा यह कहना है कटकोना की बात कही है तो कटकोना के बाहर से रास्ता है और बैहाटोला के बीच से रास्ता जा रहा है और यह रास्ता प्रधानमंत्री सड़क योजना का रास्ता है.

श्री सुनील सराफ -- कटकोना बैहाटोला एक ही ग्राम पंचायत है.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह दो अलग-अलग पंचायतें हैं. दोनों की अनापत्ति भी पंचायतों ने दे रखी है.

अध्यक्ष महोदय -- उनका सवाल यह है कि दोनों सवालों के उत्तर अलग-अलग आए हैं. इसका भौतिक सत्यापन किया जा सकता है क्या इस तरह की कोई जांच हो सकती है.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आसंदी का यह कहना तो करवा लेंगे इसमें कोई आपत्ति नहीं है.

श्री सुनील सराफ -- अध्यक्ष महोदय, उस जांच में मुझे भी शामिल किया जाए.

अध्यक्ष महोदय -- माननीय सदस्य को भी जांच में शामिल कर लिया जाए.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- ठीक है, सदस्य को भी बुला लेंगे.

श्री सुनील सराफ -- बहुत-बहुत धन्यवाद.

नजूल भूमि से मुक्‍त किये जाने विषयक

[राजस्व]

3. ( *क्र. 1527 ) श्री सुखदेव पांसे : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सन् 1917-18 मिसल बंदोबस्‍त के अनुसार मुलताई नगर के खसरा नंबर 234 की 2.71 एकड़, 235 की 0.10 एकड़, 236 की 0.13 एकड़, 280 की 53.67 एकड़ तथा 573 की 0.16 एकड़ भूमि क्‍या प्रचलित आबादी की भूमि है एवं जो इसमें निवासरत थे, क्‍या वह उसके स्‍वामित्‍व की भूमि है? स्‍पष्‍ट करें। (ख) यदि प्रश्‍नांश (क) का उत्‍तर हाँ, है तो प्रदेश में लागू भू-राजस्‍व संहिता 2 अक्‍टूबर 1959 एवं आर.बी.सी. खण्‍ड-04 क्रमांक 1 के अंतर्गत भी भू-स्‍वामी का हक मिसल बंदोबस्‍त के खसरा नंबर 234, 2235, 236, 280 एवं 573 को प्राप्‍त है या नहीं? यदि हाँ, तो वर्तमान में मुलताई नगर की प्रचलित आबादी की उक्‍त खसरा नंबर 234 की जगह 553, 235 की जगह 554, 236 की जगह 555, 280 की जगह 1087 हो गया, इनके भू-स्‍वामी कौन-कौन हैं? उनके नाम बताएं। (ग) वर्तमान खसरा नंबर 553, 554, 555, 706 एवं 1087 मुलताई नगर की प्रचलित आबादी की जो भूमि म.प्र. भू राजस्‍व संहिता 1959 के पूर्व से जो भूमि, भूमिस्‍वामी अधिकार में दर्ज थी, क्‍या ऐसी आबादी को प्रक्रियात्‍मक या तकनीकी त्रुटि की वजह से नजूल घोषित कर दिया गया है? यदि हाँ, तो यह किस वर्ष किया गया? (घ) क्‍या सरकार अपनी तत्‍कालीन भूल सुधारते हुये राजस्‍व पुस्‍तक परिपत्र के तहत परिपत्र जारी कर म.प्र. भू राजस्‍व संहिता 1959 के पूर्व की प्रचलित आबादी के वर्तमान खसरा क्रमांक 553, 554, 555, 706 एवं 1087 की भूमि को नजूल भूमि से मुक्‍त घोषित करने का आदेश जारी करेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत ) : (क) मुलताई ग्राम के मिसल बन्दोबस्त वर्ष 1917-18 के खसरा अनुसार खसरा नंबर क्रमश: 234, 235, 236, 280 एवं 573 रकबा क्रमशः 2.71, 0.10, 0.13, 53.67 एवं 0.16 एकड़ भूमि प्रचलित आबादी मद में दर्ज होना पाया गया। मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 246 के अंतर्गत 'प्रत्येक ऐसा व्यक्ति जो मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम, 2018 के प्रवृत्त होने के ठीक पूर्व आबादी में गृहस्थल के रूप में कोई भूमि विधिपूर्वक धारण करता है, भूमिस्वामी होगा।' वर्तमान में उक्त भूमि नजूल में प्रविष्टि अंकित है। (ख) राज्‍य शासन द्वारा क्रमांक एफ. 6-75/2019/सात/शा-3, दिनांक 24 सितम्बर, 2020 को नगरीय क्षेत्रों की शासकीय भूमि के धारकों के धारणाधिकार के संबंध में परिपत्र जारी किया गया है, जिसकी कंडिका 3.2 अनुसार ''ऐसे भू-भाग जो नगरीय निकाय के गठन अथवा विस्तारण के समय किसी ग्राम की आबादी का भाग रहा है, ऐसे भू-भाग में यथास्थिति निकाय के गठन या विस्तारण की दिनांक या उसके पूर्व के अधिभोगी मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 246 के प्रावधानों के अनुसार उनके अधिभोग के गृहस्थल के भूमिस्वामी हैं। अतएव ऐसे अधिभोगी या उनके उत्तराधिकारी अथवा उत्‍तरवर्ती अंतरित यदि अपने आवेदन के साथ यदि इस आशय का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं कि वे उक्त प्रावधान अनुसार भूमिस्वामी रहे हैं तो सक्षम प्राधिकारी द्वारा परीक्षण कर ऐसी अधिभोगी को अधिभोग के समस्त भू-खण्ड का भूमिस्वामी अधिकार पत्र निर्धारित प्रारूप में दिया जायेगा।'' (ग) जी नहीं। मुलताई नगर के वर्ष 1972-73 के अधिकार अभिलेख अनुसार खसरा नंबर 553, 554, 555, 706 एवं 1087 प्रचलित आबादी मद में दर्ज होना पाया गया। नगरीय क्षेत्र में होने से उक्त सर्वे नं. नजूल घोषित किये गये। नजूल अधिकारी मुलताई के कार्यालय में उपलब्ध रिकॉर्ड अनुसार वर्ष 1979-80 में प्रथम बार नजूल का मेंटनेंस खसरा बनाया गया, जिसमें उक्त खसरे नं. 553, 554, 555, 706 एवं 1087 भूमि शासकीय नजूल दर्ज है। (घ) आवेदकों द्वारा उत्तर (ख) में वर्णित परिपत्र अनुसार सक्षम प्राधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किये जाने पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमानुसार आवेदन का निराकरण किया जा सकेगा।

श्री सुखदेव पांसे-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के जवाब में माननीय मंत्री जी ने स्वीकार किया है कि मुलताई ग्राम के मिसल बन्दोबस्त वर्ष 1917-18 के खसरा अनुसार, खसरा नंबर क्रमशः 234, 235, 236, 280 एवं 573, रकबा क्रमांक क्रमशः 2.71, 0.10, 0.13, 53.67, एवं 0.16 एकड़ भूमि प्रचलित आबादी मद में दर्ज होना पाया गया. यह भी स्वीकार किया है माननीय मंत्री जी ने कि 2 अक्टूबर 1959 मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 246 के अंतर्गत जो मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता संशोधन, जब अधिनियम 2018 में भी यह स्वीकार किया है कि प्रवृत्त होने के ठीक पूर्व आबादी में गृह स्थल के रूप में कोई भूमि विधि पूर्वक धारण करता है, भू-स्वामी होगा, यह भी स्वीकार किया है और तीसरा यह था कि जब यह आबादी की जमीन है यह स्वीकार किया है तो उसको भू स्वामित्व का अधिकार होना चाहिए. जबकि मुलताई में यह हुआ है कि इस आबादी की जमीन को नजूल के पट्टे बनाकर दे दिए गए जिसके कारण उसका भू स्वामित्व का अधिकार खत्म हो चुका है, उसके कारण उस करोड़ों की जमीन, प्लाट, मकान की जमीन, उनको हर तीस साल में रिन्युअल करना पड़ता है. उन्हें यदि कोई कर्जा लेना हो, गिरवी रखना हो, तो वह हकदार नहीं हैं अपनी जो पुश्तैनी जमीन है, जो भू स्वामित्व का अधिकार है, जो मौलिक अधिकार है, उससे वह वंचित हो जाता है, तो यह जो शासन के द्वारा त्रुटि हुई है, उसे नजूल मुक्त करके, यह जो स्वीकार किया है, मुलताई नगर के वर्ष 1972-73 के अधिकार अभिलेख अनुसार खसरा नंबर 553,554, 555, 706 एवं 1087 प्रचलित आबादी मद में दर्ज होना पाया गया है. इस खसरे को नजूल मुक्त कराकर शासन की भू-राजस्व संहिता में जो नियम है उसके तहत उसको भू अधिकार स्वामित्व का अधिकार देने का काम कितने दिनों में करेंगे? यह मुझे बता दें.

श्री गोविन्द सिंह राजपूत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने मिसल बन्दोबस्त का 2017-18 का मुलताई का प्रश्न किया है. अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 286 के अनुसार जिस व्यक्ति का ग्रामीण क्षेत्र में आबादी की भूमि स्वामी का मकान बना हो, वह भू-स्वामी ही होता है. जहाँ तक मैं समझ रहा हूँ सदस्य महोदय का सोच यह है कि आबादी की भूमि नजूल में हो गई. जब कोई व्यक्ति गाँव में पर्टिक्यूलर जगह में निवास करता है तो वह आबादी की जगह है यह आप समझते हैं. 2017-18 के बाद जब गाँव, शहर में आए होंगे तो गाँव, शहर में आते हैं तो वह भूमि नजूल में मानी जाती है. पर जहाँ तक आपका प्रश्न है करीब करीब 1 हजार 257 पट्टेधारी ऐसे हैं जो अब नजूल में और आपके मुलताई के शहर में निवास करते हैं. ये खसरा नंबर जो आपने पढ़े वही हैं, 234, 2.71 एकड़, 2375, 0.10 एकड़, 236, 0.13 एकड़, 080 की 53.67 एकड़ और 573 की 0.16 एकड़. अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य की जो शंका है जहाँ तक मैं समझ रहा हूँ, आप चाहते हैं कि आबादी के जो आपके लगभग 1257 लोग हैं. लगभग 1257 पट्टेधारी ऐसे हैं जो अब नजूल में हैं और आपके मुलताई के शहर में निवास करते हैं. यह खसरा नंबर जो आपने पढ़ें हैं वहीं हैं. खसरा नंबर 234 की 2.71 एकड़, 235 की 0.10 एकड़, 236 की 0.13 एकड़, 280 की 53.67 एकड़ तथा 573 की 0.16 एकड़. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य की जो शंका है जहां तक मैं समझ रहा हॅूं आप चाहते हैं कि आबादी के आपके जो लगभग 1257 लोग हैं वह नजूल की भूमि में आ गए हैं पहले तो यह त्रुटि नहीं हुई है. यह त्रुटि इसलिए नहीं हुई है क्‍योंकि गांव में यह आबादी है और यह शहर में नजूल है लेकिन आपकी जो शंका है जहां तक मैं समझ रहा हॅूं कि इन लोगों का क्‍या होगा. जो नई नीति हम लोग लाएं हैं, मध्‍यप्रदेश सरकार नई नीति लायी है इन पट्टेधारियों के लिए आवेदन करने पर नई धारणाधिकार नीति जो हम लाएं हैं, इस नीति में कंडिका 302 के प्रावधान के अनुसार वह भू-स्‍वामी अधिकार उनको ही मिल जाएगा. जो शहर में रह रहे हैं, बशर्ते उनको आवेदन करना पडे़गा.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, उनकी चिन्‍ता दूसरी है. उनकी चिन्‍ता यह है कि जिनको भू-राजस्‍व का जो अधिकारपूर्वक मिला था वह नजूल में आने के बाद वह सारे उनके समाप्‍त हो गए, तो जो अधिकार उनके पूर्व में थे, क्‍या वह बहाल करेंगे, उनका यह पूछना है.

श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो गांवों में रह रहे थे वह वर्ष 2017-18 में 71 थे, वह वहां थे. अब वह शहर में आ चुके हैं तो उनका अधिकार खत्‍म नहीं होगा. उनको भू-स्‍वामी अधिकार यहां भी मिला हुआ है, मिलेगा. बशर्ते, नई धारणाधिकार नीति जो हम अभी लाए हैं उस 2014 के पहले के, उनको भू-स्‍वामी का अधिकार मिलेगा, उनको 30 वर्षों के लिए पट्टे मिलेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, नहीं, वह तो लीज़ हो गया न.

श्री सुखदेव पांसे -- वह तो आपने किरायेदार बना दिया. खुद के मालिक को, खुद के प्‍लॉट को, पुश्‍तैनी जमीन को तो, जो 50 सालों से, 100 सालों से, जब यदि कोई गांव नगर पालिका बन जाता है तो वह नजूल कैसे हो जाएगा, जो पुश्‍तैनी जमीन है. आप गांवों में तो बिना किसी सबूत के स्‍वामित्‍व का अधिकार दे रहे हैं और यदि वह गांव नगर पालिका बन गया तो उसका हक छीनकर आप उसको उसकी खुद की जमीन का किरायेदार बना रहे हैं. आपका आशय सही है लेकिन उसको स्‍पष्‍ट कर दीजिए. यदि आप 30 साल का पट्टा देंगे तो उसको रिन्‍यूअल करना पडे़गा. उसको मुलताई की जगह कलेक्‍ट्रेट बैतूल जाना पडे़गा, चक्‍कर काटना पडे़गा. बिना पैसे लिये-दिये कोई पट्टा रिन्‍यूअल नहीं होता है. कोई लोन नहीं मिल पाता, कोई कर्जा नहीं मिल पाता है, अधिकार खतम हो जाता है तो मेरे कहने का आशय यह है कि जब आप भू-राजस्‍व आचार संहिता में आपने 2 अक्‍टूबर 1959 को स्‍पष्‍ट कर दिया है कि इसके पहले की जो आबादी की स्‍वामित्‍व की भूमि है वह उसका पूरा मालिकाना हक है, भू-स्‍वामित्‍व का अधिकार है तो उसको देने में आपको क्‍या हर्ज है. क्‍यों इतने बडे़ पूरे प्रदेश का नुकसान कर रहे हैं, शहर के सारे लोगों का नुकसान कर रहे हैं. इसमें मेरा स्‍पष्‍ट निवेदन है कि एक अनुविभागीय अधिकारी, मुलताई के नेतृत्‍व में एक सर्वे दल गठित करके जो स्‍वामित्‍व का अधिकार है जो उनकी पुश्‍तैनी, पट्टे और मकान है क्‍या उसको नजूल से मुक्‍त करके उसको भू-स्‍वामित्‍व का अधिकार कितने दिनों में एक सर्वे टीम बनाकर देंगे ?

श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य से मेरा निवेदन है कि जो शहर में भी, गांवों में आकर बसे हैं उनके गांव जो, उस समय परिसीमन हुआ होगा, जो गांव में आ गए होंगे उनको भू-स्‍वामी का अधिकार है. उनको भू-स्‍वामी का अधिकार आज भी है और जो आबादी के क्षेत्र में रह रहे होंगे, आबादी गांव में आज भी शहर में वह आबादी माने जाएंगे और उनको भू-स्‍वामी का अधिकार है. पूर्व वित्‍त मंत्री जी आप बैठिए. (श्री तरूण भनोत, सदस्‍य के अपने आसन से कुछ कहने पर)

अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी, आप जवाब दीजिए.

श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य से मेरा यह निवेदन है.

डॉ.नरोत्‍तम मिश्र -- अरे, तरूण भनोत जी, उसकी व्‍यवस्‍था की वजह से ही वहां बैठे हो...(हंसी)..

श्री तरूण भनोत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक वैल्‍यू होती है और उसकी एक न्‍यूसेंस वैल्‍यू होती है. आपके लिए वैल्‍यूएबल है और हमारे लिए न्‍यूसेंस है. हमारे यहां से जाने के बाद तो अब आपके लिए न्‍यूशेंस है..(हंसी)..

डॉ.नरोत्‍तम मिश्र -- हमको व्‍यवस्‍था दी है और हम दोनों ने मिलकर आपको व्‍यवस्‍था दी है.

श्री तरूण भनोत -- अध्‍यक्ष महोदय, दो वैल्‍यू होती है. एक वैल्‍यू और एक न्‍यूशेंस वैल्‍यू, तो हम तो यह मानते हैं कि वैल्‍यू वाले यहां रह गए और न्‍यूशेंस वैल्‍यू वाले चले गये.

श्री तुलसीराम सिलावट -- XXX

अध्‍यक्ष महोदय -- यह नहीं लिखा जाएगा. मंत्री जी, सीधा प्रश्‍न है उनका, प्रश्‍न यह है कि आप उनको अधिकार पुस्‍तिका दे रहे हैं, सब कुछ दे रहे हैं, परंतु पुराना जो अधिकार था, वह नहीं मिल रहा है, यह उनका कहना है, तो क्‍या वे अधिकार बहाल होंगे, उनका यह पूछना है. यही है ना पांसे जी ?

श्री सुखदेव पांसे -- अध्‍यक्ष महोदय, जो नजूल के पट्टे हैं, उनको निरस्‍त करते हुए स्‍वामित्‍व का अधिकार कितनों दिनों में दिया जाएगा ? अनुविभागीय अधिकारी के नेतृत्‍व में एक सर्वे टीम बना दीजिए.

श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा स्‍पष्‍ट कहना है कि जो गांव नगर में शामिल हो गए हैं, वहां के ग्रामवासी भू-स्‍वामी हैं, मैं यह कह रहा हूँ. वे आज भी भू-स्‍वामी हैं. दूसरी बात, आपका जो कहना है, रिकॉर्ड के बारे में, तो रिकॉर्ड धीरे-धीरे हम पूरे मध्‍यप्रदेश में ही ठीक करवा रहे हैं, केवल वहीं की बात नहीं है.

श्री सुखदेव पांसे -- मंत्री जी, आप पूरे मध्‍यप्रदेश का छोड़ो, मेरे मुलताई का कब तक और कितने दिनों में करवा रहे हो ?

श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत -- मेरी बात सुनिए. अध्‍यक्ष महोदय, जो लोग आबादी में रह रहे हैं, उन्‍हें धारणाधिकार नीति के अधिकार का कोई प्रीमियम नहीं लगेगा. उनसे हम कोई प्रीमियम, कोई टैक्‍स नहीं लेंगे. मात्र उनको भू-राजस्‍व देना होगा और जो आबादी के बाहर रह रहे हैं, उन्‍हें प्रीमियम और भू-भाटक दोनों देना होगा. यह नई नीति है. (श्री तरूण भनोत द्वारा अपना हाथ ऊपर करने पर) आप हाथ नीचे करिए. दाल भात में मूसल चंद अध्‍यक्ष महोदय, व्‍यवस्‍था दीजिए. ...(व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय -- जवाब आ जाने दीजिए. ...(व्‍यवधान)...

श्री तरूण भनोत -- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या ये हाऊस चला रहे हैं ? ...(व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय -- जवाब तो आ जाए. ...(व्‍यवधान)...

श्री तरूण भनोत -- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या ये सदन को चला रहे हैं ? ...(व्‍यवधान)...

श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सुखदेव पांसे जी को ही नहीं, सारे सदन को यह बताना चाहता हूँ कि हम नई धारणाधिकार नीति लाए हैं, जिसमें शहरों में वर्ष 2014 के पहले जो भी हजारों, लाखों लोग रह रहे हैं, हम उन सबके लिए पट्टा देने वाले हैं, 30 वर्षों के लिए, वे अपनी जगह पर रह सकते हैं. यह बहुत बड़ा प्रावधान है.

श्री सुखदेव पांसे -- अध्‍यक्ष महोदय, पट्टा देंगे तो वे किराएदार हो जाएंगे. यही तो गलत है.

श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत -- अध्‍यक्ष महोदय, यह माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा और हमारी सरकार द्वारा बहुत बड़ा निर्णय लिया गया है. ...(व्‍यवधान)...

श्री सुखदेव पांसे -- अध्‍यक्ष महोदय, 30 वर्षों के लिए पट्टा दिया जा रहा है, फिर हमारा अधिकार कहां है, खत्‍म हो जाएगा. यह गलत है. ...(व्‍यवधान)...

श्री तरूण भनोत -- अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक मेरी जानकारी है, साढ़े 18 लाख से अधिक परिवार ऐसे हैं, जो मध्‍यप्रदेश में आबादी की जमीन पर रह रहे हैं और हम जब सरकार में थे तो यह नीति बनाई थी, जिसको ये आगे बढ़ा तो रहे हैं, पर ये स्‍पष्‍ट उत्‍तर नहीं दे रहे हैं. उनको आप यह कह रहे हैं कि हम पट्टा देंगे, यह तो उनका अधिकार है, तो जो ये शहरी क्षेत्रों में साढ़े 18 लाख परिवार ऐसे हैं, पूरे मध्‍यप्रदेश में, जो आबादी के क्षेत्र में रहते हैं, तो आप उनको पट्टा क्‍यों दे रहे हैं, उनको जमीन का अधिकारी दीजिए ना, पट्टा मतलब वे सरकार की लीज़ पर हैं, उनको भू-अधिकार दीजिए.

श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत -- भू-स्‍वामी अधिकार देंगे. ...(व्‍यवधान)...

श्री तरूण भनोत -- आप तो पट्टा बोल रहे हैं. आपने अपने उत्‍तर में पट्टा बोला है, हम उनसे रेवेन्‍यू लेंगे, उनसे पैसे लेंगे. उनकी जमीन का पैसा क्‍यों लेंगे मंत्री जी ?

अध्‍यक्ष महोदय -- राजस्‍व तो लगेगा. ...(व्‍यवधान)...

श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत -- अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत अच्‍छा अवसर है.

श्री तरूण भनोत -- अध्‍यक्ष महोदय, राजस्‍व लगेगा, ये कह रहे हैं पट्टा देने के रेट के हिसाब से पैसे लेंगे. क्‍यों लेंगे ? ...(व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, वे नि:शुल्‍क कह रहे हैं. ...(व्‍यवधान)...

श्री सुखदेव पांसे -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इस पर प्रश्‍न है कि मुलताई में जो आबादी को नजूल के पट्टे दिए हैं, उनको कब तक निरस्‍त कर देंगे और कब तक उन मुलताई वासियों को भू-स्‍वामित्‍व का अधिकार सौंप देंगे, समय सीमा आप बता दें, सर्वे टीम बना दें, बस.

अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी, सीधा जवाब दें.

श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य को मैं समझाना चाहता हूँ, निरस्‍त करने का प्रश्‍न ही नहीं उठता. उनको भू-स्‍वामी अधिकार ऑलरेडी हैं.

श्री सुखदेव पांसे -- नहीं है, उनको पट्टा रिनूअल करना पड़ता है. आपने इसमें स्‍वीकार किया है. ...(व्‍यवधान)...

श्री तरूण भनोत -- अध्‍यक्ष महोदय, पट्टे का मतलब यह होता है कि उसको एक समय-सीमा के अंदर वापिस रिन्‍यू कराना पड़ेगा. वह किराएदार हुआ. यह तो लीज़ हुई.

श्री सुखदेव पांसे -- अध्‍यक्ष महोदय, उनको रिनुअल कराना पड़ता है. ...(व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय -- पांसे जी, बैठ जाएं. ...(व्‍यवधान)...

श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍य को कहूंगा कि आप हमारे चैम्‍बर में आकर चाय-नाश्‍ता करें, हम उनको पूरा समझा देंगे. ...(व्‍यवधान)...

श्री सुखदेव पांसे -- अध्‍यक्ष जी, यह मेरा पर्सनल मामला नहीं है. मेरे विधान सभा क्षेत्र के लोग सफर कर रहे हैं. ...(व्‍यवधान)...

श्री तरूण भनोत -- ये जवाब है इनका, चाय-नाश्‍ता आप बैंगलोर में कीजिए. ...(व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय -- बैठ जाइये. ...(व्‍यवधान)...

श्री सुखदेव पांसे -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं अपने हित के लिए नहीं बोल रहा हूँ. जनहित का मामला है. ...(व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय -- बैठ जाइये, कुछ कहने दीजिए. ...(व्‍यवधान)...

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- ये बैंगलोर गए थे, तभी तो आप उधर गए थे. सिद्धू और चन्‍नी दोनों पंजाब में हार रहे हैं.

श्री तरुण भनोत -- अगली बार इनको यूक्रेन ले जाना.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- पंजाब में सिद्धू और चन्‍नी दोनों हार रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- कुल मिलाकर मामला यह है कि जिनको आप शहरी क्षेत्रों में लाते हैं तो पहले उनके पास राजस्‍व की जो ऋणपुस्तिका रहती है उससे सारे अधिकार रहते थे. उसका राजस्‍व लगता था. आप नजूल में लाये. नजूल में आने के बाद उनको पट्टा दे रहे हैं, लीज दे रहे हैं, बाकी उनके राईट खत्‍म हो रहे हैं, तो जो पूर्ववत अधिकार थे क्‍या वे बहाल करेंगे ? यह प्रश्‍न है.

श्री गोविंद सिंह राजपूत -- मैं कन्‍फ्यूजन दूर करना चाहता हूं कि उनके कोई राईट खत्‍म नहीं होंगे. आज भी वह नजूल शब्‍द पढ़ा जा रहा है. वह आबादी में है. भूस्‍वामी का अधिकार उनको रहेगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- उनका केवल पुराना अधिकार समाप्‍त न हो यह कहने की जरूरत है.

श्री गोविंद सिंह राजपूत -- भूस्‍वामी अधिकार उनको रहेगा.

श्री सुखदेव पांसे -- फिर वह किराया क्‍यों दें. ?

श्री तरुण भनोत -- उनको पट्टा क्‍यों दे रहे हैं ? जब पट्टा दे रहे हैं तो उनका अधिकार कैसे रहेगा ?

श्री सुखदेव पांसे -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं कह रहा हूं कि नजूल के पट्टे निरस्‍त करके उनको भूस्‍वामित्‍व का अधिकार कितने दिनों में मुलताई वासियों को दे देंगे ?

श्री गोविंद सिंह राजपूत -- अध्‍यक्ष महोदय, भूस्‍वामी अधिकार के लिये उनको नई धारणाधिकार नीति के तहत आवेदन करना होगा. सरकार ने कोई त्रुटि नहीं की है. यह पूरे मध्‍यप्रदेश में हो रहा है. नई धारणाधिकार नीति के तहत आवेदन करिये. उनको भूस्‍वामित्‍व अधिकार है. जो लोग आबादी में हैं उनको प्रीमियम नहीं लगेगा भू-भाटक लगेगा और जो आबादी के बाहर हैं उन्‍हें प्रीमियम और भू-भाटक दोनों लगेगा.

श्री सुखदेव पांसे -- दोहरे मापदंड कैसे अपनाये जा रहे हैं ? गांव में कोई आवेदन नहीं करना पड़ता, केवल ड्रोन और सर्वे टीम जा रही है, उनके द्वारा ही उसे स्‍वामित्‍व का अधिकार दिया जा रहा है और शहर में आवेदन करने के लिये बोला जा रहा है ?

श्री तरुण भनोत -- अध्‍यक्ष महोदय, हमें समझ में नहीं आ रहा है. हम उत्‍तर से संतुष्‍ट नहीं हैं.

श्री विश्‍वास सारंग -- एक प्रश्‍न पर इतने सारे लोग प्रश्‍न कर रहे हैं. जो मूल प्रश्‍नकर्ता है वह बात करे. (XXX) हर कोई खड़ा हो जाता है. यह व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, हम लोगों के भी प्रश्‍न हैं. एक ही प्रश्‍न में आधा घंटा लग रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय -- सब लोग बैठ जाइये. आगे प्रश्‍न करने दीजिये.

श्री सुखदेव पांसे -- अध्‍यक्ष महोदय, कृपया उत्‍तर दिलवाइये. गांव में कोई कागज नहीं लग रहा, कोई आवेदन नहीं लग रहा और उनको स्‍वामित्‍व का अधिकार दे रहे हैं.

श्री कांतिलाल भूरिया -- जो सवाल आया है उसका जवाब तो दें.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाइये. इस प्रश्‍न को लेकर मैंने बहुत समय दिया है. ..(व्‍यवधान)..

श्री गोविंद सिंह राजपूत -- आपसे ज्‍यादा दिमाग रखते हैं. आप निश्चिंत रहिये.

अध्‍यक्ष महोदय -- इस प्रश्‍न के लिये बहुत समय दिया जा चुका है. उनका जवाब आया है कि उनके अधिकार समाप्‍त नहीं होंगे.

श्री सुखदेव पांसे -- अध्‍यक्ष महोदय, उनको कब तक भूअधिकार देंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय -- उन्‍होंने कहा तो भूअधिकार देंगे. धारणाधिकार नियम के तहत उनको अधिकार देंगे. जो उनकी धारणाधिकार पट्टे की नीति बनी है उसके तहत अधिकार देंगे.

श्री तरुण भनोत -- उनको वही अधिकार रहेगा जो अन्‍य का है ?

अध्‍यक्ष महोदय -- वह तो उन्‍होंने कानून बना लिया.

श्री तरुण भनोत -- वह कह रहे हैं कि नजूल के अंतर्गत पट्टा देंगे. पट्टा देंगे तो मालिक कहां हुआ ? जब पट्टा दिया तो वह मालिक कैसे हुआ ?

अध्‍यक्ष महोदय -- मालिक क्‍यों नहीं होगा, वह मालिक होगा ना.

श्री सुखदेव पांसे -- नहीं है ना. पुराना ऑलरेडी अभी पट्टा है. वह गलत हुआ है. वह पट्टा खत्‍म करके भूस्‍वामित्‍व का अधिकार कितने दिनों में देंगे ? एक सर्वे टीम मुलताई के लिये बना दीजिये और एक समय सीमा निश्चित कर दीजिये.

अध्‍यक्ष महोदय -- बना दीजिये उसकी सर्वे टीम. उनके लिये सर्वे टीम बना दीजिये.

श्री गोविंद सिंह राजपूत -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आखिरी बार कह रहा हूं. मैं आपके आदेश का पालन करूंगा. मैं अपनी बात पर आज भी अडिग हूं. सरकार सहूलियत देने की दृष्टि से शहरों में धारणाधिकार नीति लायी है, जिसमें हम उनसे भू-भाटक और प्रीमियम लेंगे. यह अकेले मुलताई के लिये नहीं है. मैं कह रहा हूं कि आपके जो 1,257 लोग हैं उनको भूस्‍वामित्‍व का अधिकार है.

श्री सुखदेव पांसे -- नहीं है. मैं यही तो बोल रहा हूं. 30 साल का उनको पट्टा दिया गया है, उनको रिन्‍युअल कराना पड़ता है. वह बैंक से लोन नहीं ले पा रहा है.

श्री गोविंद सिंह राजपूत -- मैं कह रहा हूं कि है. जो आबादी में हैं उनको प्रीमियम नहीं लगेगा, भू-भाटक लगेगा और उनको आवेदन करना पड़ेगा तभी वह भूस्‍वामी के अधिकारी होंगे. अभी हैं, लेकिन उनको परमानेंट तभी करेंगे जब वह भू-भाटक और प्रीमियम भर देंगे.

श्री सुखदेव पांसे -- अध्‍यक्ष महोदय ...

डॉ. सीतासरन शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, दूसरे प्रश्‍नों को अनुमति दें.

अध्‍यक्ष महोदय -- बस हो गया. बहुत हो गया. उन्‍होंने कहा कि अधिकार देंगे.

श्री सुखदेव पांसे - अध्यक्ष महोदय, वह बैंक से लोन नहीं ले पा रहा है.

अध्यक्ष महोदय - यह लोन की सुविधा कर दीजिए, वह लोन ले सके.

श्री गोविन्द सिंह राजपूत - अध्यक्ष महोदय, यह धारणा अधिकार नीति के अंतर्गत आवेदन करेंगे, उनको लोन भी मिलेगा, वह जमा कर सकते हैं. बेच सकते हैं.

श्री सुखदेव पांसे - जो नजूल के पट्टे हैं वह निरस्त कर भूमि स्वामी का अधिकार उन्हें कब तक दे देंगे?

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न संख्या 4 श्री सज्जन सिंह वर्मा. उनको लोन मिलेगा.

श्री सुखदेव पांसे - यह सरकार निजी जमीन को हड़पने के चक्कर में है.

अध्यक्ष महोदय - आपको प्रश्न नहीं पूछना है? उनका प्रश्न बहुत हो गया है.

श्री सज्जन सिंह वर्मा - जिसका जवाब संतुष्टिकारक नहीं आता. फायदा क्या? इतना सरल प्रश्न कि सम्पूर्ण भू-अधिकार दे दो, उसे लोन लेने की पात्रता हो, हर चीज की पात्रता हो.

श्री गोविन्द सिंह राजपूत - अध्यक्ष महोदय, माननीय वरिष्ठ सदस्य हैं, आपके कहने से तो नहीं दे देंगे. जो नीति हम लाए हैं उस नीति के तहत आवेदन करिए.

11.37 बजे बहिर्गमन

श्री सुखदेव पांसे, सदस्य द्वारा सदन से बहिर्गमन किया जाना

श्री सुखदेव पांसे - अध्यक्ष महोदय, आपको करना पड़ेगा, हम नियम के अनुसार चाह रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं इस जवाब से असंतुष्ट हूं और सदन से बहिर्गमन करता हूं. यह सरकार निजी भूमि को हड़पने के चक्कर में है.

(श्री सुखदेव पांस, सदस्य द्वारा शासन के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया.)

श्री रामेश्वर शर्मा - अध्यक्ष महोदय, भारत में पहली बार गांव से लेकर शहर तक आम नागरिक को अधिकार दिया है भू-अधिकार माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने, जो आज दिनांक तक कोई घर का मालिक नहीं था, बड़े बड़े हवेली और जागीदार बने बैठे थे, उनको भी आनरशिप देने का काम किया है आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी ने.

श्री सज्जन सिंह वर्मा - रिशफ्लिंग की सुगबुगाहट लग रही है.

श्री गोविन्द सिंह राजपूत - अध्यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि माननीय सदस्यों के लिए मैं निवेदन करता हूं कि नयी धारणा अधिकार नीति के तहत बहुत सुविधा होगी.

अध्यक्ष महोदय - यह हो गया है.

धान उपार्जन

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

4. ( *क्र. 1479 ) श्री सज्जन सिंह वर्मा : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विगत तीन वर्षों में न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य पर कितनी धान का उपार्जन हुआ तथा इसमें से कितनी धान की मि‍लिंग की गई तथा कितनी धान मिलिंग हेतु शेष है? (ख) उक्‍त में से कितनी धान खराब हुई एवं खराब हुई धान का मूल्‍य क्‍या था एवं इसके लिए कौन उत्‍तरदायी है तथा उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) धान की समय पर मिलिंग न होने से उपार्जन एजेंसियों को कितनी हानि हो रही है? वर्षवार, एजेंसीवार जानकारी दें। (घ) धान उपार्जन के संबंध में प्राप्‍त होने वाले व्‍ययों के लिए केन्‍द्र शासन को किस वर्ष तक का हिसाब प्रस्‍तुत कर दिया गया है एवं कितने वर्षों का हिसाब किन कारणों से प्रस्‍तुत किया जाना शेष है?

खाद्य मंत्री (श्री बिसाहूलाल सिंह)-

 

श्री सज्जन सिंह वर्मा -अध्यक्ष महोदय, मैंने खाद्य मंत्री जी से बड़ा स्पेसिफिक प्रश्न पूछा है कि 3 वर्षों में उपार्जन की गई कितनी धान खराब हुई है? मुझे जानकारी दी है कि लगभग 546 मी.टन धान खराब हुई है. अब यह मंत्री जी ने स्पष्ट नहीं किया है कि यह जो आंकड़ा माननीय मंत्री जी आपने बताया है यह बाहर रखी हुई धान का आपने बताया है, जो गोदाम और वेयरहाउस में धान रखी है, उसका आंकड़ा इसमें नहीं है तो थोड़ा-सा आप देख लीजिए, यह प्रश्न का आधा जवाब आपने दिया है. एक प्रश्न और कि 546 मी.टन धान खराब हुई उसका मूल्य 1 करोड़ रुपये बता रहे हैं. माननीय मंत्री जी, इतनी सारी धान मुझे दे दो, 1 करोड़ रुपये में. यदि 546 मी.टन धान, 1 करोड़ रुपये का मूल्य इसमें आप बता रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, यह सारी की सारी जानकारी असत्य दी जा रही है. मैंने दोनों बातें पूछी कि गोडाउन में रखी हुई धान और बाहर रखी हुई धान तो उन्होंने सिर्फ बाहर की धान का बता दिया, कितना मूल्य, 1 करोड़ रुपये, 546 मी. टन धान खराब हुई, उसका मूल्य 1 करोड़ रुपया है. माननीय मंत्री जी, यह किस भाव से लगाया है?

श्री बिसाहूलाल सिंह - अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं माननीय सदस्य को बताना चाहूंगा कि वर्ष 2019-20 में 2585525 मी.टन.

श्री सज्जन सिंह वर्मा - अध्यक्ष महोदय, यह तो मैंने भी पढ़ा है यह उत्तर में लिखा है.

श्री बिसाहूलाल सिंह - अध्यक्ष महोदय, तीनों साल का आंकड़ा मैंने दिया है और मिलिंग जो कराई गई उसका आंकड़ा भी आपको उपलब्ध हो गया है. यह जो बताया गया है कि अभी तक टोटल 1 करोड़ रुपये की धान खराब हुई है जो 0.0086 प्रतिशत है. यह आंकड़ा सही है इसमें गलत नहीं है.

श्री सज्जन सिंह वर्मा - अध्यक्ष महोदय, 546 मी. टन धान का मूल्य 1 करोड़ रुपये मात्र है! माननीय मंत्री जी, क्या रेट लगाया है? यह बता दें. अध्यक्ष महोदय, क्या यह जवाब है? 1 करोड़ रुपये में 546 मी.टन?

अध्यक्ष महोदय- आप ही बताएं, सरकारी रेट तय है, उसका गुणा करके बताएं.

श्री सज्जन सिंह वर्मा -अध्यक्ष महोदय, 1 करोड़ रुपये में, मैंने कहा कि मुझे दे दो, मुझे से 2 करोड़ रुपये ले लो. यदि इतनी धान, असल में अध्यक्ष महोदय, पूरा का पूरा अमला शराब माफियाओं से मिला हुआ है. देखिये, मेरा सदन में खुला आरोप है कि यह सारी धान यह शराब माफियाओं को दी जाती है, संरक्षण किन किन का है, मंत्री जी, मैं बोलूंगा नहीं. लेकिन आपने जवाब दिया है कि कोई अधिकारी इसका दोषी नहीं है धान खराब होने का और आप आरोप किस पर लगा रहे हैं, आप प्रकृति पर आरोप लगा रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न करिये.

श्री सज्जन सिंह वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, यह स्पेसीफिक प्रश्न है. एक भी तो जवाब सही नहीं आया.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं तो आप क्या चाहते हैं, बताइये.

श्री सज्जन सिंह वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, कोई अधिकारी दोषी नहीं है, उन्होंने ऐसा दिया है कि प्रकृति दोषी है. जो बोल नहीं सकती, उस पर आरोप लगा दो. जो अधिकारी शराब माफिया से मिले हैं, उनको आप बचाते रहो. यह आपने लिखा है अपने उत्तर में ..

अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न करिये. लिखा है उत्तर में, तो आप पूरक प्रश्न करिये. अपने को पूरक प्रश्न पूछना है ना.

श्री सज्जन सिंह वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, मैं तो आपकी आज्ञा के बिना प्रश्न करता ही नहीं हूं. वह पढ़ रहे हैं, वही प्रश्न का जवाब जो लिखा है.

अध्यक्ष महोदय-- वह तो उत्तर उन्होंने दे दिया. आप प्रश्न पूछिये कि आप क्या चाहते हैं.

श्री सज्जन सिंह वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, हमारा कहना यह है कि जब आप यह इसमें घोषित कर रहे हो कि धान का उत्पादन खूब हुआ, खूब उपार्जन हुआ, लेकिन सरकार के पास उसकी मिलिंग करने का साधन बहुत कमजोर हैं, यह उत्तर में है. तो फिर आपने क्यों नहीं साधन पैदा किये, क्यों आपके मुख्यमंत्री जी बार बार कृषि कर्मण अवार्ड लेने के लिये तो दिल्ली जाते हैं. बेचारा किसान इतनी धान पैदा कर रहा है और आपके पास उसको मिलिंग करने का साधन नहीं है.

अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न करिये. आप प्रश्न पूछ ही नहीं रहे हैं. आप प्रश्न पूछिये. आप इतने सीनियर हैं, आप प्रश्न पूछिये ना.

श्री सज्जन सिंह वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, सदन के सामने सारी बात तो आये.

अध्यक्ष महोदय-- बात तो आ गई है, आपने प्रश्न कर लिया, उन्होंने उत्तर दे दिया. आप प्रश्न पूछिये.

श्री सज्जन सिंह वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, एक करोड़ में इतनी धान. कायदे से तो इस पर आपको व्यवस्था देनी चाहिये.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, आप प्रश्न तो पूछिये. इसमें आपका प्रश्न नहीं आया.

श्री सज्जन सिंह वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, मेरा यही प्रश्न है कि आपके आपके पास साधन क्यों नहीं है. अधिकारियों को आप दोषी बता नहीं रहे हैं. अधिकारियों को आप बचा रहे हैं. इतनी 545.969 मेट्रिक टन धान खराब हो गई, उसके लिये कोई अधिकारी दोषी नहीं है.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी, मिलिंग के साधन आप बढ़ायेंगे क्या, यह प्रश्न है.

श्री बिसाहूलाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य से अनुरोध करना चाहता हूं कि वर्ष 2019-20 में खराब धान हुई 49097.92 मे.टन की . वर्ष 2020-21 में खराब धान हुई 13854.3 मे. टन की और वर्ष 2021-22 में कुछ धान खराब नहीं हुई. वर्ष 2019-20 में 13307.7 लाख रुपये की धान खराब हुई और वर्ष 2020-21 में 2588 लाख रुपये की धान खराब हुई. वर्ष 2021-22 में धान खराब हुई नहीं, तो उसकी क्या गणना की जाये.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, यह उत्तर में कुल 545.969 मे.टन खराब होना बताया है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- (xxx)

अध्यक्ष महोदय-- यह नहीं लिखा जायेगा.

श्री सज्जन सिंह वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, यह कोई जवाब ही नहीं है. कुल 546 मे. टन धान खराब हुई है. उस किसान की आत्मा पर क्या बीती होगी, परिश्रम से उसने धान उगाई है. एक प्रश्न का आप जवाब दे दें.

अध्यक्ष महोदय-- मैं आपकी तरफ से प्रश्न कर देता हूं. उनका कहना है कि आपके द्वारा मिलिंग के लिये साधन बढ़ाये जायेंगे क्या.

श्री बिसाहूलाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मैं सदन को यह बताना चाहूंगा कि पहले 25 रुपये में एक क्विंटल धान का हम मिलिंग कराते थे. हमारे विभाग ने 50 रुपये किया. इसके बाद 100 रुपये किया. आज 200 रुपया क्विंटल में हम मिलिंग कराने के लिये लोगों को आफर देते हैं और जब यहां के लोग 200 रुपया क्विंटल में भी मिलिंग नहीं कर रहे हैं, तो हम महाराष्ट्र में बात करके आज गोंदिया से मिलिंग करा रहे हैं.

श्री तरुण भनोत -- अध्यक्ष महोदय, हमारे यहां के धान की मिलिंग मिलर नहीं कर रहे हैं, मतलब नीति आपकी गलत है. आप महाराष्ट्र से मिलिंग करवा रहे हैं.

श्री बिसाहूलाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, आज भारत में 200 रुपये के रेट में कहीं पर मिलिंग नहीं हो रही है. हम तो 200 रुपये दे रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न संख्या -5. हो गया.

श्री सज्जन सिंह वर्मा-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी जवाब ही नहीं दे रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- उन्होंने कहा कि मिलिंग करा रहे हैं. बता दिया 200 रुपये में. प्रश्न संख्या -5 डॉ. सीतासरन शर्मा जी.

श्री सज्जन सिंह वर्मा-- मंत्री जी, आप साधन बढ़ायेंगे कि नहीं बढ़ायेंगे, केवल महाराष्ट्र और नागपुर से ही कराते रहेंगे. तो वहीं के मुख्यमंत्री जी को भेजो कृषि कर्मण अवार्ड लेने के लिये.

श्री बिसाहूलाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, हमारी नीति है कि अगर यहां कोई बड़ा मिल लगाना चाहता है तो उसको हम अपने विभाग की ओर से प्राथमिकता देंगे.

श्री तरुण भनोत -- गृह मंत्री जी, यह सब मिलिंग बेंगलूर में हुई है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- वहां से ये बासमती के बनकर आये हैं.

..(हंसी)..

 

श्री सज्जन सिंह वर्मा - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा एक ही प्रश्न हुआ है. आखिरी प्रश्न का जवाब दे दें कि नागरिक आपूर्ति निगम को प्रतिमाह कितना ब्याज लग रहा है इन सारी घटनाओं पर. जवाब नहीं आ पा रहे हैं ऐसे सदन का क्या फायदा है. पूरे प्रदेश को घाटे में आप झोंक दे रहे हो. तीन लाख करोड़ के कर्जे में प्रदेश डूब रहा है. प्रतिमाह कितना ब्याज देना पड़ रहा है यह बता दें.

होशंगाबाद में पिचिन की स्‍वीकृति

[जल संसाधन]

5. ( *क्र. 358 ) डॉ. सीतासरन शर्मा : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के प्रश्‍न क्र. 370, दिनांक 22.12.2021 के प्रश्‍नांश (घ) में जानकारी दी गई थी कि पिचिन निर्माण हेतु 6.71 करोड़ का प्राक्‍कलन राज्‍य आपदा मोचन निधि से प्रशासकीय स्‍वीकृति हेतु दिनांक 12.11.2021 को राहत को आयुक्‍त भेजा गया था? (ख) यदि हाँ, तो प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित पत्र राहत आयुक्‍त कार्यालय को कब प्राप्‍त हुआ? पत्र की पावती उपलब्‍ध करावें। (ग) क्‍या उक्‍त प्रस्‍ताव को स्‍वीकृति दी गई है? यदि हाँ, तो कब? (घ) प्रस्‍ताव को यदि स्‍वीकृति नहीं दी गई तो इसके क्‍या कारण हैं? (ड.) उक्‍त प्रस्‍ताव को स्‍वीकृति कब तक दी जावेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) जी हाँ। राहत आयुक्‍त भोपाल को प्रेषित प्रस्‍ताव की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''1'' अनुसार है। (ख) पावती की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ''2'' अनुसार है। (ग) से (ड.) जी हाँ। स्‍वीकृति आदेश की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ''3'' अनुसार है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

 

डॉ.सीतासरन शर्मा - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाहता हूं कि 6 करोड़ 71 लाख रुपये हमारे तवा-कोरेघांस सर्किट हाऊस प्रोटेक्शन वर्क के लिये स्वीकृत कर दिया मैं उनके प्रति आभारी हूं किन्तु वह कब तक इसका टेंडर करा देंगे कब तक इसका वर्कआऊट हो जायेगा और क्या माननीय मंत्री गर्मी के पहले इसका काम पूरा हो सकेगा या शुरू हो सकेगा.

श्री तुलसीराम सिलावट - माननीय अध्यक्ष महोदय, सदन के वरिष्ठतम् सदस्य ने प्रश्न पूछा है और उन्होंने मुझे धन्यवाद भी दिया है और जहां मां नर्मदा के विकास और प्रगति की बात हम करते हैं इस तट के कटाव के लिये 6 करोड़ 71 लाख रुपये स्वीकृत कर दिये गये हैं. मैं सम्मानीय वरिष्ठतम् सदस्य को यह अवगत कराना चाहता हूं और आज राहत आयुक्त द्वारा प्रस्ताव की प्रशासकीय स्वीकृति कर दी गई है और निविदा भी लगा दी गई है. एक वर्ष के अंदर काम हम पूरा कर देंगे यह मैं आपको माध्यम से सम्मानीय को आश्वस्त करता हूं.

डॉ.सीतासरन शर्मा - माननीय अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

विभाग अंतर्गत संचालित योजनाएं

[मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास]

6. ( *क्र. 912 ) श्री मनोज चावला : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग अंतर्गत रतलाम जिले में कुल कितने अधिकारी, कर्मचारी कार्यरत हैं, उनका नाम, पद, कर्तव्य स्थल की जानकारी मोबाइल सहित उपलब्ध कराएं? (ख) बताएं कि कार्यरत अधिकारी, कर्मचारी द्वारा वर्ष 2015-16 से प्रश्‍न दिनांक तक कुल कितने-कितने भ्रमण संचालित योजना स्थल, पट्टा धारकों के यहाँ किए गए और भ्रमण के दौरान क्या-क्या टीप/दिशा निर्देश योजना स्थल पर और पट्टा धारकों को दिए गए और क्या प्रतिवेदन विभाग प्रमुख को प्रस्तुत किये गए हैं? प्रतिवेदनों की प्रतिलिपि उपलब्ध कराएं। (ग) बताएं कि जिले में संचालित योजनाओं हेतु वर्ष 2014-15 से किन-किन स्थलों पर कितनी-कितनी मात्रा में मत्स्य पालन हेतु मछलियां कौन-कौन सी प्रजाति की हैं और उनके लिए आवश्यक सामग्रियां प्रदाय की गईं? इन पर कितना-कितना व्यय किया गया? इस हेतु कौन-कौन से वाहन किस प्रक्रिया से उपयोग किए गए और उन पर कितना खर्च हुआ? वर्षवार बतायें। (घ) क्या संचालित योजनाओं के प्रचार प्रसार हेतु कैंप/बैठक आयोजित किए जाते हैं? यदि हाँ, तो बताएं कि केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा संचालित योजनाओं के प्रचार प्रसार हेतु प्रश्‍न अवधि में कितने-कितने कैंप/बैठक तहसीलवार लगाए गए हैं? इसमें प्रचार प्रसार हेतु क्या कदम उठाए गए और इसमें कितने-कितने हितग्राहियों को योजनाओं की जानकारी दी गई है और कितनी राशि खर्च हुई है? तहसीलवार, वर्षवार जानकारी उपलब्ध कराएं।

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) प्रश्‍नांश की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) क्षेत्रीय अधिकारियों द्वारा समय-समय पर विभागीय योजनाओं का मत्‍स्‍य पालन योग्‍य जलक्षेत्रों के स्‍थल का भ्रमण किया जा कर प्रचार प्रसार कर हितग्राहियों को मार्गदर्शन दिया जाता है एवं चयन कार्यवाही उपरांत लाभार्थी बनाया जाकर योजना का लाभ दिया जाता है। (ग) जिले में मत्‍स्‍य पालन हेतु भारतीय प्रमुख सफर, कॉमन कार्प पंगास आदि प्रजाति की मछली उपलब्‍ध हैं, कृषकों द्वारा मत्‍स्‍य बीज क्रय कर स्‍वयं संचयन किया जाता है, अत: विभागीय वाहन की जानकारी निरंक। (घ) मैदानी अमले द्वारा विभागीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार हाट बाजारों तथा जिला जनपद स्‍तर पर आयोजित जन कल्‍याणकारी शिविरों में किया जाता है। परिशिष्ट - "एक"

 

श्री मनोज चावला - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा जो प्रश्न था मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास पर आधारित है इसमें मैंने "" में पूछा है कि भ्रमण के दौरान क्या-क्या टीप और दिशा निर्देश पट्टाधारकों को दिये गये और प्रतिवेदन की प्रतिलिपि उपलब्ध कराई जाए.इसकी प्रतिलिपि मुझे नहीं करायी गई है और उत्तर में भी यह नहीं है कि क्या-क्या दिशा निर्देश दिये गये हैं. "" जो प्रश्न है कि प्रचार-प्रसार पर जो राशि खर्च की गई है उसकी जानकारी दी जाए वह जानकारी मुझे नहीं दी गई है और जिले में जिन वाहनों से प्रचार-प्रसार के दौरान भ्रमण किया उसकी जानकारी दी जाए उसकी जानकारी मुझे नहीं दी है. यह जो मत्स्य विभाग है उसका नाम है तो मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास लेकिन न तो मछुआ कल्याण हो रहा है न मस्त्य का विकास हो रहा है. केवल सारी योजनाएं कागजों पर बन रही है और भारी भ्रष्टाचार पूरे जिले से लेकर प्रदेश तक व्याप्त है.

श्री तुलसीराम सिलावट - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे छोटे भाई के इस कथन से मुझे घोर आपत्ति है. जिस तरह से इन्होंने भ्रष्टाचार की बात कही यह शब्द वे वापस लें और जो उन्होंने कहा कि प्रतिलिपि नही मिली तो अतिशीघ्र मैं उनको प्रतिलिपि उपलब्ध करा दूंगा और विस्तृत रूप से उत्तर मैं दे चुका हूं और कुछ विशेष पूछना चाहते हों तो मैं दूंगा.

श्री मनोज चावला - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि जो भी योजनाएं वहां संचालित हैं उसकी न ही क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि जो हैं उनको कोई सूचना दी जाती है, बाहर केवल आफिस में बैठकर सारी कार्यवाही अधिकारी करते हैं और जो बीच के केन्द्र थे पूरे जिले में वे बंद हो गये हैं. कहीं संचालित नहीं हो रहे हैं. सब जगह योजनाएं केवल कागजों में हैं. जो पजेशन दिया जा रहा है वह भी केवल कागजों पर दिया जा रहा है.

श्री तुलसीराम सिलावट - माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे सम्मानित सदस्य ने जो बात कही है तो मैं आपके माध्यम से सारे अधिकारियों को निर्देशित करूंगा कि वे जनप्रतिनिधियों को उन सारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी देंगे.

श्री मनोज चावला - माननीय अध्यक्ष महोदय, कहां-कहां कौन-कौन से पट्टे संचालित हो रहे हैं. कहां पर क्या हो रहा है.

अध्यक्ष महोदय -उत्तर आ गया. वह पूरी जानकारी देंगे.

डीनोटीफाईड की गई वन भूमि

[वन]

7. ( *क्र. 399 ) डॉ. योगेश पंडाग्रे : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बैतूल जिले में भा.व.अ. 1927 की धारा 27 व धारा 34अ के अनुसार राजपत्र में किस दिनांक को किस कक्ष क्रमांक की कितनी भूमि एवं कितने राजस्व ग्रामों की समस्त संरक्षित वन भूमि डीनोटीफाईड की गई है? (ख) धारा 27 एवं धारा 34अ में डीनोटीफाईड की गई भूमियों को भा.व.अ. 1927 की धारा 29 एवं धारा 4 में पुनः अधिसूचित करने, नारंगी भूमि सर्वे एवं नारंगी वनखण्ड में शामिल करने, समझे गए वन परिभाषित करने का अधिकार या छूट वन अधिनियम 1927, वनसंरक्षण कानून 1980 की किस धारा में दिया गया है, सर्वोच्च अदालत ने सिविल याचिका क्रमांक 202/95 में किस दिनांक के आदेश में दिया है? (ग) बैतूल जिले में सारनी पावर हाउस एवं पुनर्वास क्षेत्र के लिए किस दिनांक को कितनी-कितनी भूमि किस-किस धारा के तहत डीनोटीफाईड की गई? यह भूमि किस-किस विभाग के मानचित्र एवं अन्य किस-किस शासकीय अभिलेख में किसके नाम पर वर्तमान में दर्ज है? (घ) सारनी पावर हाउस के लिए डीनोटीफाईड की गई भूमियों से संबंधित पटवारी मानचित्र, खसरा पंजी आदि किस वर्ष में तैयार किए गए हैं? खसरा पंजी में भूमि किसके नाम पर दर्ज है?

वन मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) भारतीय वन अधिनियम, 1927 की धारा 27 एवं धारा 34 (अ) में डिनोटिफाईड भूमियों को पुन: धारा 29 एवं धारा 4 में अधिसूचित करने के संबंध में अधिकार या छूट भारतीय वन अधिनियम, 1927, वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 की किसी धारा एवं माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय की याचिका क्रमांक 202/1995 के आदेश में उल्‍लेखित नहीं है। ले‍किन यदि वन संरक्षण अधिनियम, 1980 की धारा-2 अंतर्गत व्‍यपवर्तित वनभूमियों के एवज में डिनोटीफाईड भूमियां गैर वनभूमि के रूप में वैकल्पिक वृक्षारोपण हेतु प्राप्‍त होती हैं तो उन्‍हें भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा-29 एवं धारा-4 में अधिसूचित किया जा सकता है।

 

डॉ. योगेश पंडाग्रे-- अध्‍यक्ष जी, मेरा प्रश्‍न वन विभाग से था और इसमें मैं आपका संरक्षण चाहूंगा. मेरा प्रश्‍न महोदय जी यह था कि भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा-27 व धारा- 34अ के अनुसार फारेस्‍ट की जमीनों को डीनोटीफाईड कर दिया गया था. जब वह भू‍मि डीनोटीफाईड की गई थी और वह जमीन छोटे झाड़ और बड़े झाड़ के मद में दर्ज की गई है. अब मैं यह जानना चाहता हूं कि फारेस्‍ट में जो डीनोटीफाईड की गई जमीनें हैं वह किस धारा के या किस कानून के अंतर्गत है जब हम लोग कोई विकास कार्य करने जाते हैं, कोई औद्योगिक क्षेत्र यदि वहां पर घोषित करना चाहे, कोई टंकी बनाना चाहे, कोई रोड बनाना चाहे तो जो छोटे झाड़ और बड़े झाड़ के रूप में जो जमीन दर्ज है उस पर फारेस्‍ट अपना अधिकार जताता है. जबकि मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में स्‍पष्‍ट लिखा हुआ है कि डीनोटीफाईड भूमियों को पुन: धारा 29 व धारा 4 में अधिसूचित करने के संबंध में अधिकार या छूट भारतीय वन अधिनियम 1927, वन संरक्षण अधिनियम 1980 की किस धारा एवं माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय की याचिका क्रमांक 202/1995 के आदेश में उल्‍लेखित नहीं है. यह स्‍पष्‍ट रूप से लिखा है और साथ ही यह भी लिखा है, लेकिन यदि वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धारा-2 के अंतर्गत व्‍यपवर्तित भूमियों के एवज में डीनोटीफाईड भूमियां गैर वन भूमि के रूप में वैकल्पिक वृक्षारोपण हेतु प्राप्‍त होती हैं तो उन्‍हें भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा-29 एवं धारा-4 में अधिसूचित किया जा सकता है. महोदय जी, इसमें स्‍पष्‍ट रूप से उल्‍लेखित किया गया है कि जहां पर व्‍यपवर्तित भूमियों के एवज में केवल डीनोटीफाईड भूमियों पर फारेस्‍ट डिपार्टमेंट अपना अधिकार जता सकता है. बाकी डीनोटीफाईड जमीनें जो बड़े झाड़ और छोटे झाड़ के जंगल में उल्‍लेखित हैं उन पर फारेस्‍ट किस कानून के अंतर्गत अपना अधिकार जता रहा है और हमारे सारे विकास कार्य बाधित हो रहे हैं.

कुंवर विजय शाह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य का जो प्रश्‍न था डीनोटीफाईड एरिया का आपने पूछा था तो मैंने पूरी जानकारी दे दी. सुप्रीम कोर्ट में 200 वृक्ष से ज्‍यादा यदि प्रति हेक्‍टेयर में हैं और वह एरिया डीनोटीफाईड अगर कभी हुआ है तो उसके लिये फिर से सुप्रीम कोर्ट से ही परमीशन लेना पड़ेगी. अब यह किस एरिये की बात कर रहे हैं, वह एरिया बता दें तो उसकी जानकारी मिल जायेगी.

डॉ. योगेश पंडाग्रे-- महोदय जी, मैं पूरे बैतूल जिले में ऐसे लगभग 829 ग्राम हैं जहां पर जमीनों को डीनोटीफाईड किया जा चुका है और वह छोटे झाड़ और बड़े झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज है और जैसा मंत्री महोदय ने लिखा है कि 200 से ज्‍यादा पेड़ अगर वहां पर हैं तो उन पर फारेस्‍ट अपना अधिकार जता सकता है, लेकिन जो मुझे उत्‍तर दिया गया है इसमें कहीं भी इस चीज का उल्‍लेख नहीं किया गया है, यहां पर केवल लिखा गया है कि व्‍यपवर्तित भूमियों के एवज में ही केवल डीनोटीफाईड जमीनों का अधिकार फारेस्‍ट जता सकता है. इसके अलावा इस प्रश्‍न के उत्‍तर में मुझे कहीं भी ऐसा नहीं दिख रहा है जिसमें फारेस्‍ट के द्वारा इन जमीनों पर अपना अधिकार घोषित किया जा सके.

कुंवर विजय शाह-- माननीय अध्‍यक्ष जी, यह जमीनें कौन सी हैं, माननीय सदस्‍य का इसमें स्‍पष्‍ट नहीं आ रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय-- उसमें कुल मिलाकर जो 200 झाड़ कह रहे हैं कि ज्‍यादा हैं तो उसकी जांच हो जाये.

डॉ. योगेश पंडाग्रे-- अध्‍यक्ष महोदय जी, अगर ऐसा कोई नियम या कानून है तो उसकी जानकारी मुझे उपलब्‍ध करवा दी जाये क्‍योंकि इसके चलते इस क्षेत्र के काफी विकास कार्य बाधित हो रहे हैं और दूसरा फरवरी 2020 में एक टास्‍कफोर्स का गठन भी किया गया था जो एसीएस फारेस्‍ट की अध्‍यक्षता में हुआ था उसमें भी स्‍पष्‍ट रूप से कुछ 16 बिंदुओं पर जांच की गई थी और उसमें जमीनों के बंदोबस्‍त के लिये सिफारिशें की गईं थीं. मैं यह भी जानना चाहूंगा कि उन सिफारिशों पर अभी तक कोई अमल क्‍यों नहीं किया गया है.

कुंवर विजय शाह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां-जहां माननीय सदस्‍य को आपत्तियां हैं, वह एसडीएम के माध्‍यम से आप आवेदन लगा दें, अगर वन विभाग के पास आयेगा तो विस्‍थापन अधिकारी एसडीएम ही है.

डॉ. योगेश पंडाग्रे-- महोदय जी, मेरा बस यह कहना है कि जमीनों के सुधार के लिये जो सिफारिशें एसीएस फारेस्‍ट के द्वारा वर्ष 2020 में की गई थीं, मैं चाहता हूं कि उन सुधारों को लागू किया जा सके ताकि जो जमीनें विकास कार्यों के लिये उपलब्‍ध हो सकती हैं वह जनहित में काम आयेगी.

कुंवर विजय शाह-- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं सीसीएफ को और डीएफओ को निर्देशित कर दूंगा कि माननीय विधायक जी के साथ और एसडीएम के साथ बैठकर उसका परीक्षण कर लें.

प्रश्‍न संख्‍या 8 (अनुपस्थित)

 

अंतर्राज्‍यीय बाघ सिंचाई परियोजना

[जल संसाधन]

9. ( *क्र. 1147 ) सुश्री हिना लिखीराम कावरे : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र लांजी के अंतर्गत विषयांकित परियोजना की मुख्‍य केनाल में लाईनिंग कार्य करवाने हेतु प्रश्‍नकर्ता विधायक द्वारा कब-कब पत्राचार किया गया? पत्रों की छायाप्रति सहित जानकारी दें। (ख) विषयांकित परियोजना में मुख्‍य नहर पर लाईनिंग का कार्य कराने हेतु महाराष्‍ट्र शासन से कब-कब पत्राचार किया गया तथा इस बैठक को आयोजित करने के लिए क्‍या प्रयास किये गये? पत्रों की छायाप्रति सहित विस्‍तृत जानकारी दें। (ग) क्‍या शासन को माननीय मुख्‍यमंत्री कार्यालय के A+ मॉनिट पत्र के बाद महाराष्‍ट्र शासन से बैठक आयोजित करने का प्रयास करना चाहिए या प्रश्‍नकर्ता विधायक को तिथि‍ तय न होने की सूचना देकर विषय समाप्‍त करना चाहिए? (घ) महाराष्‍ट्र शासन के साथ सचिव स्‍तर की बैठक कब तक आयोजित कर ली जाएगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) विधान सभा क्षेत्र लांजी अन्तर्गत अन्‍तर्राज्‍यीय बाघ सिंचाई परियोजना की दांयी तट मुख्य नहर में लाइनिंग कार्य कराने हेतु मान. सदस्‍य द्वारा लिखे गये पत्रों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1, 2, 3 अनुसार है। (ख) बाघ दांयी तट मुख्‍य नहर में लाइनिंग कार्य कराने हेतु महाराष्ट्र शासन से किए गए पत्राचार की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13 अनुसार है। (ग) एवं (घ) अन्‍तर्राज्‍यीय मामला है। सहमति प्राप्‍त करने का प्रयास किया जा रहा है। बैठक के संबंध में निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

सुश्री हिना लिखीराम कावरे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न जल संसाधन विभाग का है, मात्र 20 करोड़ रूपये के नहरों की लाइनिंग का मामला है और 20 करोड़ रूपये नहरों की लाइनिंग में लगना है. मैं यह चाहती हूं चूंकि सेकेट्ररी लेबल की मीटिंग होना है और दिल से तो हम कभी नहीं चाहते हैं कि हमारे सरकार के मंत्री महाराष्‍ट्र सरकार के मंत्री से 20 करोड़ रूपये की बात करें, बीस हजार करोड़ रूपये की बात होगी तो हमको भी अच्‍छा लगेगा, लेकिन अंतर्राज्‍यीय परियोजना है और इसके लिये अभी तक जो भी पत्र व्‍यवहार हुआ है, तो सेकेट्ररी लेबल की बैठक अटैंड हो नहीं पाई है. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करती हूं कि क्‍या वह स्‍वयं वहां के मंत्री जी से बात करके इस बैठक को आयोजित करवायेंगे और इस परियोजना के लिये पैसे स्‍वीकृत करवायेंगे?

श्री तुलसीराम सिलावट -- सम्‍मानीय वरिष्‍ठतम सदस्‍य ने जो बात कही है, यह अंतर्राज्‍यीय महाराष्‍ट्र और मध्‍यप्रदेश दो प्रांतों की योजना है, इस परियोजना के दायीं तट पर नहर लगभग तीस किलोमीटर है, आपको पता है महाराष्‍ट्र राज्‍य की सीमा के अंतर्गत आती है और मध्‍यप्रदेश में 21 किलोमीटर आती है, जिस प्रकार से निरंतर हमने महाराष्‍ट्र सरकार से संवाद किया है और मैं भी संतुष्‍ट नहीं हूं, पर जो सम्‍मानीय सदस्‍या ने कहा है मैं उसको महाराष्‍ट्र सरकार के सिंचाई मंत्री जी से स्‍वयं बात करूंगा और मैं कोशिश करूंगा कि अतिशीघ्र इसका समाधान किया जा सके.

सुश्री हिना लिखीराम कावरे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद करती हूं लेकिन मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहती हूं कि यदि आपकी वार्तालाप और बात करने के बाद भी एक महीने के अंदर यदि यह राशि स्‍वीकृत नहीं होती है, क्‍योंकि माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसकी संभावना ज्‍यादा है, चूंकि महाराष्‍ट्र का लाभ इसमें उतना नहीं है, उनका एक तरह से इसमें नुकसान ही है, क्‍योंकि वह नहरे वहां से शुरू होती है. सबसे पहले वह हेड पोर्शन है, इसलिये पानी उनको मिल जाता है और मध्‍यप्रदेश आते तक टेल पोर्शन आता है, तो पानी नहीं मिल पाता है और ऐसी स्थिति में महाराष्‍ट्र सरकार कतई नहीं चाहेगी कि उनकी उस नहर का काम हो. इसलिये 20 करोड़ रूपये की बात है, 15 करोड़ उनको देना है और 5 करोड़ हमको लगाना है, यदि आपकी बात करने के बाद भी वहां से ऐसी कोई प्रतिक्रिया पॉजीटिव नहीं आती है तो क्‍या आप मध्‍यप्रदेश शासन से 20 करोड़ रूपये की राशि स्‍वीकृत करेंगे. मैं एक बात ओर कहना चाहती हूं कि इस मामले में अच्‍छी बात यह है कि ए प्‍लस मॉनिट में सी.एम. साहब की नोट शीट आपके पास गई हुई है, मैं चाहूंगी की सदन में आप इस बात की घोषणा कर दें.

श्री तुलसीराम सिलावट -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पूरा प्रयास करूंगा कि मध्‍यप्रदेश के सिंचाई का रकबा जो अधूरा पड़ा है, उसकी कोशिश की जायेगी आप‍ निश्चिंत रहे, सकारात्‍मक बात करके मैं आपको उत्‍तर भी दूंगा और उनसे बात भी कर लूंगा.

सुश्री हिना लिखीराम कांवरे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह मान लूं कि अगले बजट में या अनुपूरक बजट में इस राशि का प्रोवीजन हो जायेगा .

अध्‍यक्ष महोदय -- वह आपकी चिंता कर रहे हैं.

सुश्री हिना लिखीराम कांवरे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो बाद की बात कर रही हूं, चिंता करने के बाद की बात कर रहीं हूं. मैं तो मानने को तैयार हूं कि आप चिंता कर रहे हैं और आप जायज भी कर रहे हैं, लेकिन इसकी संभावना कम है, इसलिये मैं कह रही हूं कि क्‍या आने वाले अनुपूरक बजट में इसका प्रोवीजन हो जायेगा ?

अध्‍यक्ष महोदय -- आप संभावनाओं में सवाल म‍त करिये.

सुश्री हिना लिखीराम कांवरे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,माननीय मंत्री जी जवाब देने हेतु तैयार हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी आप बोलें.

श्री तुलसीराम सिलावट -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसी भी चीज की समय सीमा बताना इतना महत्‍वपूर्ण नहीं है लेकिन मैं अतिशीघ्र करने का प्रयास करूंगा आप निश्चिंत रहें.

सुश्री हिना लिखीराम कांवरे -- ए प्‍लस मॉनिट में नोटशीट आपके पास है.

श्री तुलसीराम सिलावट -- मैं अतिशीघ्र प्रयास करूंगा.

समर्थन मूल्‍य पर खरीदी गई धान का रख-रखाव

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

10. ( *क्र. 685 ) श्री तरूण भनोत : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जबलपुर जिले के अंतर्गत समर्थन मूल्‍य पर की गई धान खरीदी उचित रख-रखाव के अभाव में बारिश में गीला होने और सड़ने की शिकायतें मिली हैं? (ख) यदि हाँ, तो तत्‍संबंध में कितने नुकसान का आकलन किया गया है? (ग) क्‍या मौसम विभाग द्वारा लगातार खराब मौसम की संभावनाओं को व्‍यक्‍त करने के बावजूद भी खाद्य विभाग के अधिकारियों एवं समिति प्रबंधकों द्वारा धान की सुरक्षा के लिए तिरपाल एवं अन्‍य कोई व्‍यवस्‍थाएं नहीं की गईं थीं? (घ) यदि हाँ, तो इस नुकसान के जिम्‍मेदार अधिकारियों पर विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई है?

खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) जबलपुर जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में समर्थन मूल्‍य पर उपार्जित धान के उचित रख-रखाव के अभाव में बारिश में गीला होने के कारण सड़ने का कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं आया है। असामयिक वर्षा से आंशिक मात्रा में धान भीगी थी, जिसे सुखाकर जमा करा लिया गया है। (ख) प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में समर्थन मूल्‍य पर उपार्जित धान के उचित रख-रखाव हेतु उपार्जन नीति के प्रावधान अनुसार उपार्जन केन्‍द्रों पर तिरपाल एवं अन्‍य व्‍यवस्‍थाएं की गईं। (घ) प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री तरूण भनोत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने अपने जवाब में यह कहा है कि बरसात में आंशिक रूप से धान खराब हुई है और उसको हमने सुखाकर ठीक कर दिया है, तो प्रश्‍न यह है कि अगर सारी व्‍यवस्‍थाएं थीं तो बरसात में धान खराब क्‍यों हुई और कितनी खराब हुई थी और कितनी को आपने समेट लिया?

श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत -- डॉक्‍टर गोविन्‍द सिंह जी की जगह इनको उपनेता बना दो.

श्री तरूण भनोत -- अरे तुमसे पूछकर बना देंगे.

राजस्‍व एवं परिवहन मंत्री(श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत) -- हर प्रश्‍न में बोलने के अधिकार का पट्टा इन्‍होंने ले लिया है.

श्री तरूण भनोत -- मेरा प्रश्‍न है, आपको व्‍यवस्‍था पता नहीं होती है, आप बैंगलौर में मंत्री रहिये. आप लगते भी वहीं के हैं, साउथ के हीरो, आप वहीं मंत्री बन जाओ सरकार में.

अध्‍यक्ष महोदय -- जवाब आने दीजिये, आप जवाब आने दें.

श्री तरूण भनोत -- (XXX) अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न है, मैंने पूछा है, उसका उत्‍तर दिला दें.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी.

श्री तरूण भनोत -- कितनी धान गीली हुई थी, कितनी आपने सुखाकर ठीक कर ली है?

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी आप बोलें.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लायक नहीं है शब्‍द को विलोपित कर दिया जाये. (व्‍यवधान)...

श्री तरूण भनोत -- सिसौदिया जी लायक हैं, इसको भी विलोपित करवा दो.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया -- कौन लायक है, कौन लायक नहीं है, आप तय करेंगे. (व्‍यवधान)...

श्री तरूण भनोत -- सिसौदिया जी, मंत्री बनने के लायक हैं. (व्‍यवधान)...

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया -- आप शब्‍द तो ठीक करो, आप साथी को लायक नहीं बता रहे हैं. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय -- लायक नहीं, शब्‍द को विलोपित किया जाये. प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

 

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)


 

12.00 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

अध्‍यक्ष महोदय - निम्‍नलिखित शून्‍यकाल की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जाएंगी.

1. डॉ. सतीश सिंह सिकरवार -

2. डॉ. हिरालाल अलावा -

3. श्री सज्‍जन सिंह वर्मा -

4. श्री बाला बच्‍चन -

5. इंजी. प्रदीप लारिया -

6. श्री नीलांशु चतुर्वेदी -

7. श्री पी.सी.शर्मा -

8. श्री संजय सत्‍येन्‍द्र पाठक -

9. श्री बहादुर सिंह चौहान -

10. श्री दिलीप सिंह गुर्जर -

 

12.01 बजे

शून्‍यकाल में मौखिक उल्‍लेख

राजगढ़ जिले में ओलावृष्टि होना

श्री प्रियव्रत सिंह (खिलचीपुर) - अध्‍यक्ष जी, मेरा एक निवेदन है कि कल राजगढ़ जिले में ओलावृष्टि हुई है. मैं उस पर एक मिनट बोलना चाहता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय, कल राजगढ़ जिले की खिलचीपुर तहसील एवं जीरापुर तहसील के अधिकांश गांवों में ओलावृष्टि हुई है और भारी वर्षा हुई है, जिससे सन्‍तरे की फसल, गेहूँ की फसल, चने की फसल और सरसों की फसल नष्‍ट हुई है, छापेड़ा टप्‍पा एवं जीरापुर तहसील के अधिकांश गांवों में ऐसी परिस्थिति बनी है. मैं शासन से अनुरोध करूँगा कि इस ओलावृष्टि का तत्‍काल सर्वे करवाया जाये. ग्राम कुंआखेड़ा, सोनखेड़ाकलां, नाटाराम, धुंआखेड़ी, सेदरा, अमावता और जीरापुर तहसील के ग्राम बरखेड़ी उमट सिरपोई, झाड़मऊ, कवलसिंह खेड़ा, काशीखेड़ी एवं समस्‍त गांवों में और इनके अलावा भी कई गांवों में ओलावृष्टि हुई है. किसान बहुत बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं. इसके तत्‍काल सर्वे हेतु कमिश्‍नर भोपाल और राजगढ़ कलेक्‍टर को शासन निर्देश दे. ऐसा मेरा अनुरोध है.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) - अध्‍यक्ष जी, पूरे प्रदेश में ओलावृष्टि की, जो सम्‍मानित सदस्‍यों एवं विधायकों की चिन्‍ता है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने तत्‍काल सभी जिला कलेक्‍टरों को निर्देश दिए हैं, आज ही सर्वे प्रारंभ कर दिया गया है. अधिकारी खेतों पर रवाना कर दिए गए हैं. यह किसान के बेटे की सरकार है. किसानों के हितों की सरकार है, किसी किसान की आंखों में आंसू नहीं रहने देंगे. एक-एक किसान को मुआवजे के अनुसार राहत राशि दी जायेगी.

12.02 बजे

2. अध्‍यादेशों का पटल पर रखा जाना

1. (क) मध्‍यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज (द्वितीय संशोधन) अध्‍यादेश, 2021 (क्रमांक 15 सन् 2021), एवं

(ख) मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन अध्‍यादेश, 2022 (क्रमांक 1 सन् 2022)

विधि एवं विधायी कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) :- अध्यक्ष महोदय, मैं, भारत के संविधान के अनुच्‍छेद 213 की अपेक्षानुसार-

(क) मध्‍यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्‍वराज (द्वितीय संशोधन) अध्‍यादेश, 2021 (क्रमांक 15 सन् 2021), एवं

(ख) मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन अध्‍यादेश, 2022 (क्रमांक 1 सन् 2022)

पटल पर रखता हूँ.

 

 

 

 

 

 

12.03 बजे

3. पत्रों का पटल पर रखा जाना

1. मध्‍यप्रदेश वित्‍त निगम का 66 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021.

वित्त मंत्री (श्री जगदीश देवड़ा):- अध्यक्ष महोदय, मैं, दि स्‍टेट फायनेंशियल कार्पोरेशंस एक्‍ट, 1951 (क्रमांक 63 सन् 1951) की धारा 37 की उपधारा (7) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश वित्‍त निगम का 66 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021 पटल पर रखता हूँ.

 

2. मध्‍यप्रदेश रियल एस्‍टेट विनियामक प्राधिकरण की अधिसूचना क्रमांक-एमपीरेरा-कार्य संचालन-विनियमन 2021-1, दिनांक 15 सितम्‍बर, 2021.

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री भूपेन्द्र सिंह):- अध्यक्ष महोदय, मैं, दि रियल एस्‍टेट (रेग्‍युलेशन एण्‍ड डेव्‍हलपमेंट) एक्‍ट, 2016 की धारा 86 की उपधारा (2) के अधीन मध्‍यप्रदेश रियल एस्‍टेट विनियामक प्राधिकरण की अधिसूचना क्रमांक-एमपीरेरा-कार्य संचालन-विनियमन 2021-1, दिनांक 15 सितम्‍बर, 2021 पटल पर रखता हूँ.

 

3. (क) राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्‍वविद्यालय, ग्‍वालियर (म.प्र.) की वैधानिक ऑडिट रिपोर्ट वर्ष 2019-2020 (संचालक, स्‍थानीय निधि संपरीक्षा, म.प्र. ग्‍वालियर द्वारा प्रेषित प्रमुख आपत्तियां, स्‍पष्‍टीकरण हेतु उत्‍तर एवं प्रमण्‍डल की टिप्‍पणियां), तथा

(ख) जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्‍वविद्यालय, जबलपुर (म.प्र.) की वैधानिक ऑडिट रिपोर्ट वर्ष 2018-2019 (उप संचालक, स्‍थानीय निधि संपरीक्षा, जबलपुर (म.प्र.) द्वारा प्रेषित प्रमुख आपत्तियां, स्‍पष्‍टीकरण हेतु उत्‍तर एवं प्रमण्‍डल की टिप्‍पणियां)

किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री (श्री कमल पटेल):- अध्यक्ष महोदय, मैं -

(क) राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 2009 (क्रमांक 4 सन् 2009) की धारा 42 की उपधारा (3) की अपेक्षानुसार राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्‍वविद्यालय, ग्‍वालियर (म.प्र.) की वैधानिक ऑडिट रिपोर्ट वर्ष 2019-2020 (संचालक, स्‍थानीय निधि संपरीक्षा, म.प्र.ग्‍वालियर द्वारा प्रेषित प्रमुख आपत्तियां, स्‍पष्‍टीकरण हेतु उत्‍तर एवं प्रमण्‍डल की टिप्‍पणियां), तथा

(ख) जवाहरलाल नेहरु कृषि विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 1963 की धारा 40 की उपधारा (3) की अपेक्षानुसार जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्‍वविद्यालय, जबलपुर (म.प्र.) की वैधानिक ऑडिट रिपोर्ट वर्ष 2018-2019 (उप संचालक, स्‍थानीय निधि संपरीक्षा, जबलपुर (म.प्र.) द्वारा प्रेषित प्रमुख आपत्तियां, स्‍पष्‍टीकरण हेतु उत्‍तर एवं प्रमण्‍डल की टिप्‍पणियां)

पटल पर रखता हूँ.

 

4. (क) जिला खनिज प्रतिष्‍ठान, जिला अनूपपुर एवं जबलपुर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020 तथा जिला उमरिया, सागर एवं छिन्‍दवाड़ा के वार्षिक प्रतिेवेदन वर्ष 2020-2021, तथा

(ख) श्रम विभाग की अधिसूचना क्रमांक-1036-183-2018-ए-सोलह, दिनांक 02 अगस्‍त, 2021.

खनिज साधन मंत्री (श्री ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह) :- अध्यक्ष महोदय, मैं -

(क) मध्‍यप्रदेश जिला खनिज प्रतिष्‍ठान नियम, 2016 के नियम 18 के उप नियम (3) की अपेक्षानुसार जिला खनिज प्रतिष्‍ठान, जिला अनूपपुर एवं जबलपुर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020 तथा जिला उमरिया, सागर एवं छिन्‍दवाड़ा के वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021, तथा

(ख) मध्‍यप्रदेश बालक एवं कुमार श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) नियम, 1993 की धारा 19 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार श्रम विभाग की अधिसूचना क्रमांक-1036-183-2018-ए-सोलह, दिनांक 02 अगस्‍त, 2021

पटल पर रखता हूँ.

 

 

 

(5) कंपनी अधिनियम, 2013, एम.पी.पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड, जबलपुर का चतुर्दश वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020

ऊर्जा मंत्री (श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर) :- अध्यक्ष महोदय, मैं, कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार एम.पी.पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड, जबलपुर का चतुर्दश वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020 पटल पर रखता हूँ.

 

 

(6) मध्‍यप्रदेश राज्‍य पशुधन एवं कुक्‍कुट विकास निगम का वार्षिक प्रतिवेदन

वर्ष 2019-2020

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) :- अध्यक्ष महोदय, मैं,

(क) मध्‍यप्रदेश राज्‍य पशुधन एवं कुक्‍कुट विकास निगम अधिनियम, 1982 (क्रमांक 37 सन् 1982) की धारा 27 की उपधारा (3) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश राज्‍य पशुधन एवं कुक्‍कुट विकास निगम का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020, तथा

(ख) दिव्‍यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (क्रमांक 49 सन् 2016) की धारा 83 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार आयुक्‍त, नि:शक्‍तजन, मध्‍यप्रदेश का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021

पटल पर रखता हूँ.

(7)(क)( i) बरकतउल्‍ला विश्‍वविद्यालय, भोपाल (म.प्र.) का 49 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021,

(ii) रानी दुर्गावती विश्‍वविद्यालय, जबलपुर (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021 (1 जुलाई 2020 से 30 जून 2021 तक), एवं

(iii) अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा (म.प्र.) का 53 वां प्रगति प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021,

 

(ख) महात्‍मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्‍वविद्यालय चित्रकूट, सतना (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021,

उच्च शिक्षा मंत्री (डॉ. मोहन यादव) :- अध्यक्ष महोदय, मैं,

(क) मध्‍यप्रदेश विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा 47 की अपेक्षानुसार

(i) बरकतउल्‍ला विश्‍वविद्यालय, भोपाल (म.प्र.) का 49 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021,

(ii) रानी दुर्गावती विश्‍वविद्यालय, जबलपुर (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021 (1 जुलाई 2020 से 30 जून 2021 तक), एवं

(iii) अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा (म.प्र.) का 53 वां प्रगति प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021, तथा

(ख) चित्रकूट ग्रामोदय विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 1991 (क्रमांक 9 सन् 1991) की धारा 36 की उपधारा (5) की अपेक्षानुसार महात्‍मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्‍वविद्यालय चित्रकूट, सतना (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021,

पटल पर रखता हूँ.

(8) मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वार्षिक लेखा परीक्षण प्रतिवेदन

वर्ष 2020-2021

पर्यावरण मंत्री (श्री हरदीपसिंह डंग) :- अध्यक्ष महोदय, मैं, जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 40 की उपधारा (7) एवं वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 36 की उपधारा (7) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वार्षिक लेखा परीक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021 पटल पर रखता हूँ.

 

(9) अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्‍य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) का तेईसवां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2016, चौबीसवां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2017 एवं पच्‍चीसवां

वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2018

सामान्य प्रशासन राज्यमंत्री (श्री इन्‍दर सिंह परमार) :- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्‍यप्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्‍य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 (क्रमांक 21 सन् 1994) की धारा 19 की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्‍य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) का तेईसवां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2016, चौबीसवां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2017 एवं पच्‍चीसवां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2018 पटल पर रखता हूँ.

 

12.06 बजे   (4) दिसम्‍बर, 2019 सत्र से दिसम्‍बर, 2021 सत्र तक के प्रश्‍नों के अपूर्ण उत्‍तरों के पूर्ण उत्‍तरों का संकलन खंड-9 पटल पर रखा जाना.

अध्‍यक्ष महोदय - दिसम्‍बर, 2019 सत्र से दिसम्‍बर, 2021 सत्र तक के प्रश्‍नों के अपूर्ण उत्‍तरों के पूर्ण उत्‍तरों का संकलन खंड-9 पटल पर रखा गया .

12.07 बजे   (5) नियम 267-क के अधीन दिसम्बर,2021 सत्र में पढ़ी गई शून्‍यकाल की सूचनाओं तथा  उनके संबंध में शासन से प्राप्‍त उत्तरों का संकलन पटल पर रखा जाना.

अध्‍यक्ष महोदय - नियम 267-क के अधीन दिसम्बर,2021 सत्र में पढ़ी गई शून्‍यकाल की सूचनाएं तथा उनके संबंध में शासन से प्राप्‍त उत्तरों का संकलन पटल पर रखा गया.

 

 

12.07 बजे   (6) राज्‍यपाल की अनुमति प्राप्‍त विधेयकों की सूचना.

 

 

 

 

 


 

12.10 बजे

ध्यान आकर्षण

नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा जबलपुर की बड़ादेव सूक्ष्म उद्वहन सिंचाई परियोजना को लंबित रखा जाना.

श्री संजय यादव--मेरी ध्यान आकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है--

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

राज्यमंत्री नर्मदा घाटी विकास (श्री भारत सिंह कुशवाह)--अध्यक्ष महोदय,


 

श्री संजय यादव(बरगी):-अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी के जवाब से संतुष्‍ट नहीं हूं. पहली बात तो यह कि वहां अभी 15 दिन से लगातार आंदोलन चल रहा था. आप कह रहे हैं कि आक्रोश नहीं है. आप तो यह बतायें कि क्‍या माननीय मुख्‍यमंत्री जी मंशा पानी देने की नहीं थी. अगर मुख्‍यमंत्री की मंशा नहीं होती तो माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने एक बार 5 जनवरी, 2021 को मेरे मूल पत्र में तीन बार ए प्‍लस सीएम मॉनिट में, पांच बार बी में. मुझे तो लग रहा है कि या तो अधिकारी मुख्‍यमंत्री की बात नहीं मान रहे हैं या अधिकारियों को जानकारी नहीं है. यह आदिवासी बाहुल्‍य क्षेत्र है, जो विस्‍थापित होकर आये हैं और हिल में पड़ते हैं, पहाड़ी पड़ जाती है वहां पर सिर्फ उद्वहन सिंचाई योजना हो सकती है उनको पम्‍प से लाभ नहीं मिल सकता, अगर उनको पम्‍प से लाभ मिल जाता तो वह बिचारे गरीब आदिवासी वह आपसे क्‍यों पानी मांगते, क्‍यों आंदोलन करते. मैं तो आपसे कहना चाहता हूं कि सरकार की मंशा कागजों तक सीमित रहती है कि हम सिंचाई का रकबा बढ़ा रहे हैं. आपके उत्‍तर से स्‍पष्‍ट हो गया है कि आप आदिवासी विरोधी हैं. आपकी सरकार आदिवासियों को सिंचाई का साधन उपलब्‍ध नहीं कराना चाहती है. आपने स्‍पष्‍ट कर दिया है कि हम आदिवासियों को सिंचाई के साधन नहीं देंगे या मुख्‍यमंत्री की बात का...

अध्‍यक्ष महोदय:- आप बैठ जाइये आपका भाषण पूरा हो गया है. तरूण भनोत जी, लखन घनघोरिया जी, विनय सक्‍सेना जी.

श्री लखन घनघोरिया:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बड़ी चिंता का विषय है कि लंबे समय से यह मांग लंबित है और लगभग 10-15 दिन से वहां के आदिवासी समुदाय के तमाम लोग बहुत ज्‍यादा आक्रोश में अनशन पर बैठें हैं. आये दिन वहां आक्रोश जमीन पर परिलक्षित होते दिख रहा है. मंत्री जी का यह कहना कतई उचित नहीं है कि वहां आक्रोश नहीं है. लिफि्टिंग करके पानी पहुंचाने की व्‍यवस्‍था हो सकती है और सिर्फ और सिर्फ आदिवासी बहुल क्षेत्र को ही वंचित रखा जा रहा है. इसमें मंत्री जी से मेरा आग्रह है कि मंत्री जी इस बात का जमीनी स्‍तर पर हकीकत का पता लगायें, सिर्फ कागजी स्‍तर पर नहीं कि अधिकारियों ने कह दिया, आपने सुन लिया और आपने मान लिया. यदि आप जमीनी स्‍तर पर पता लगायेंगे तो, मैं समझता हूं कि हकीकत सामने आ जायेगी.

श्री भारत सिंह कुशवाह:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य जो कह रहे हैं, मुख्‍यमंत्री जी किसान पुत्र हैं और मुख्‍यमंत्री जी के रहते हुए प्रदेश के अंदर सिंचाई का रकबा भी बढ़ा है और इसी मंशा अनुसार मध्‍यप्रदेश को अपने हिस्‍से का जितना जल उपयोग करना है, उसके लिये कुछ परियाजनाएं निर्मित हैं और कुछ निर्माणाधीन हैं, कुछ निविदाएं प्रक्रिया में हैं. इसलिये कोई भी नयी योजना को वर्तमान में सम्मिलित करना संभव नहीं है.

श्री संजय यादव:-आप तो यह बतायें कि मुख्‍यमंत्री जी ने पत्र लिया या नहीं ? मंत्री जी की मंशा ठीक नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय:- आप बैठ जायें, आपकी बात आ गयी. संजय जी अब नहीं. मंत्री जी उनका कुल मिलाकर यह कहना है कि जो विस्‍थापित होकर ऊपर गये, वहां उनको पानी नहीं मिल रहा है, उस संबंध में आप कोई धरातल में जांच करायेंगे, वह ऐसा कह रहे हैं. उसकी जांच हो जायेगी कि वास्‍तविकता क्‍या है.

श्री भारत सिंह कुशवाह:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विभाग ने इस संबंध में निर्देश भी जारी किये हैं, जो संचालित नहर है उससे किसान स्‍वयं अपने खेतों की सिंचाई करने के लिये अपना पम्‍प लगाकर पानी को खींच सकते हैं. इस संबंध में निर्देश भी विभाग ने जारी कर दिये हैं.

श्री लखन घनघोरिया:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारा बिल्‍कुल सीधा सा प्रश्‍न था कि क्‍या आप जमीनी हकीकत पता करेंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय:- उनका कहना यह है कि मोटर के द्वारा पानी ऊपर चढ़ नहीं सकता है.

श्री लखन घनघोरिया:- माननीय मंत्री जी, मोटर से पानी चढ़ नहीं सकता, सिर्फ लिफि्टिंग ही एक व्‍यवस्‍था हो सकती है, लिफि्टिंग से ही पानी आ सकता है, आप जमीनी हकीकत पता करायेंगे क्‍या ?

श्री भारत सिंह कुशवाह:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जमीनी हकीकत पता करके ही यह निर्देश दिये कि किसान स्‍वयं अपने पम्‍प से पानी को खींच कर अपने खेतों तक आसानी से पहुंचा सकते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय:- यह उनका जुड़ा हुआ मामला है जो ऊपर चले गये. उनकी मंशा यह है कि आपके अधिकारियों ने यह कहा कि हमने उनको अनुमति दे दी, उनका कहना है कि अनुमति देने के बाद भी पानी नहीं चढ़ाया जा सकता है, तो क्‍या इस विषय की जांच करा लेंगे, ऐसा उनका कहना है. आप जांच करा लीजिये कि पानी चढ़ सकता है या नहीं चढ़ सकता है.

श्री भारत सिंह कुशवाह:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जांच करा लेंगे.

श्री विनय सक्‍सेना:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कुछ बातें छूट रही हैं, सिर्फ यह कह देने से की माननीय मुख्‍यमंत्री जी किसान पुत्र हैं, पानी नहीं मिल सकता किसी को. हर चीज का जवाब अगर हम यही देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय:- नहीं, उन्‍होंने जांच का बोल तो दिया.

श्री भारत सिंह कुशवाह:- आपके बोलने से थोड़े ही होता है. पूरे प्रदेश की जनता बोल रही है. प्रदेश की जनता खुद आ‍शीर्वाद दे रही है.

श्री विनय सक्‍सेना- ऐसा है, कुशवाह जी, आप माननीय अध्‍यक्ष महोदय की ओर देखकर जवाब दीजिये. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जबलपुर के उन आदिवासियों की पीड़ा यह है कि एक तरफ बरगी बांध से पूरे प्रदेश को पानी मिल रहा है, आप देखिये कि उनका दुर्भाग्‍य है- दिया तले अंधेरा. जिस जगह पर हमने आदिवासी भाईयों को विस्‍थापित किया, मंत्री जी जैसा आप कह रहे हैं, वह महत्‍वपूर्ण बात है कि जो अध्‍यक्ष महोदय जी कह रहे हैं, वह महत्‍वपूर्ण है.

अध्‍यक्ष महोदय- उसे मान तो लिया है.

श्री विनय सक्‍सेना- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस तरह से जवाब देना उचित नहीं है. मेरा आपसे निवेदन है कि हम विधायक पंप भी दे देंगे, डीज़ल का पैसा भी एक माह के लिए दे देंगे लेकिन मंत्री जी खुद किसी अधिकारी को खड़े करके, वहां पानी पहुंचाकर दिखा दें और यदि नहीं दिखा पाते, तो यह न कहें कि जन आक्रोश नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय- इसमें हो गया. उन्‍होंने कह दिया जांच करवा लेंगे.

श्री विनय सक्‍सेना- आपका आदेश होना चाहिए, इसमें निर्देश देना चाहिए. हम पैसे की व्‍यवस्‍था कर देंगे.

जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसीराम सिलावट)- मैं, आपको सिंचाई का रकबा बताऊं क्‍या कि वर्ष 2003 में कितना था केवल 7 लाख हेक्‍टेयर था और मुख्‍यमंत्री जी किसान पुत्र हैं, इसलिए अब रकबा 43 लाख हेक्‍टेयर हो गया है.

श्री विनय सक्‍सेना- तुलसी भाई, आप तो नाराज हुआ ही मत करो. तुलसी भाई, क्‍यों नाराज होने लगते हैं ?

12.22 बजे

(2) मुरैना जिले में पशुओं की मौत पर पशुपालकों को सहायता राशि न दिया जाना

 

श्री सूबेदार सिंह रजौधा (जौरा)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं, आपका आभार व्‍यक्‍त करता हूं. संसदीय मंत्री जी का आभार व्‍यक्‍त करता हूं कि किसानों की पीड़ा से जुड़े हुए प्रश्‍न को ध्‍यान आकर्षण की सूचना में शामिल किया है. मेरी ध्‍यान आकर्षण की सूचना में एक टाइपिंग की त्रुटि है उसमें पांचवी पंक्ति पर पशु के स्‍थान पर इंसान पढ़ा जाये.

राजस्‍व मंत्री (श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

श्री राकेश मावई- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुरैना में जो गौवंश मारा गया है, उसका क्‍या हुआ, मंत्री जी उसका जवाब दें.

अध्‍यक्ष महोदय- मावई जी, बैठ जाईये. मूल प्रश्‍नकर्ता को पहले बोलने दें.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जो ध्‍यानाकर्षण की सूचना आपको दी है, उसमें हजारों किसानों की पीड़ा है, वेदना है और किसान बिलकुल जमीन पर आ गये हैं. मैं एक गांव में गया था, वहां एक ही गांव में सौ भैंसें मरी थीं. एक-डेढ़ लाख रुपये की एक भैंस आती है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी का सगोरिया और बैरारा माता पर कार्यक्रम था, मैं एक किसान के घर, उनको धन्‍यवाद देने गया था कि वे अच्‍छी भीड़ लाये और मुख्‍यमंत्री जी का कार्यक्रम अच्‍छा हो गया तो उस किसान ने मुझे अंदर बुलाया और रोने लगा कि विधायक जी, मेरी चार भैंसें मर गई हैं, मेरे पास चार लड़के और चार बीघा जमीन है. उसमें मैं अपना जीवन यापन कैसे करता हूं जो चार भैंस दूध देती थीं उसको बेचकर मैं अपने परिवार का खर्चा चलाता था आप तो मेरे घर बैठने के लिए भी नहीं आए और हमने समझा कि मुख्‍यमंत्री जी इसी क्षेत्र में आ रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- रजौधा जी आप अपना प्रश्‍न पूछिए.

श्री सूबेदार सिंह सिकरवार रजौधा--माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें वेदना भरी है, बहुत कष्‍ट है. हजार भैंसें मरी हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप कहानी का वर्णन मत कीजिए आप तो केवल प्रश्‍न पूछिए. 

श्री सूबेदार सिंह सिकरवार रजौधा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे आपका संरक्षण चाहिए.

श्री लाखन सिंह यादव-- सूबेदार जी जो बात कह रहे हैं यह एक व्‍यक्ति का मुद्दा नहीं है. (व्‍यवधान)...

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पूरे मध्‍यप्रदेश का मामला है. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय-- आप उनका प्रश्‍न आ जाने दें. (व्‍यवधान)...

श्री पी.सी. शर्मा-- मध्‍यप्रदेश में गाय मर रही हैं, सरकार गाय की कोई व्‍यवस्‍था नहीं कर रही है. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय-- आप रजौधा जी की बात आ जाने दीजिए. (व्‍यवधान)...

श्री सुखदेव पांसे-- चारे का पैसा कम कर दिया था. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय-- आप सभी बैठ जाइए. (व्‍यवधान)...

श्री प्रियव्रत सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश में गौमाता मर रही हैं. आठ महीने से अनुदान राशि नहीं मिल रही है. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय-- कृपया करके आप सभी बैठ जाइए. पहले आप उत्तर तो आने दीजिए. लाखन सिंह जी आप बैठ जाइए. साधौ जी आप भी बैठ जाइए. आप सभी कृपया करके बैठ जाइए. (व्‍यवधान)...

श्री लाखन सिंह यादव--माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गौ हत्‍या बंद होना चाहिए और इसके लिए पूरी सरकार जिम्‍मेदार है. (व्‍यवधान)

डॉ. विजय लक्ष्‍मी साधौ--गौ हत्‍या बंद करो. (व्‍यवधान)...

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा-- अध्‍यक्ष महोदय, गौ हत्‍या बंद होना चाहिए. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय-- आप सभी पहले बैठिए तो. (व्‍यवधान)...

डॉ. विजय लक्ष्‍मी साधौ-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गौ-शालाएं संचालित नहीं हो रही हैं. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय-- आप मंत्री जी का जवाब भी तो आने दीजिए. (व्‍यवधान)...

डॉ. विजय लक्ष्‍मी साधौ-- पशुओं को खिलाने के लिए भूसा नहीं मिल रहा है. (व्‍यवधान)...

श्री पी.सी. शर्मा-- गौ-शालाएं बंद पड़ी हैं. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय-- आप कृपया जवाब आने दीजिए. (व्‍यवधान)...

श्री हर्ष यादव-- अध्‍यक्ष महोदय, गौ-शालाओं में गाय नहीं है और खाने की व्‍यवस्‍था भी नहीं है. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय-- आप सभी केवल एक बार बैठ जाइए. मैं व्‍यवस्‍था दे रहा हूं. प्रियव्रत जी बैठ जाइए. (व्‍यवधान)...

डॉ. गोविन्‍द सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गाय मर रही हैं. (व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय-- गोविन्‍द सिंह जी आप बैठ जाइए. (व्‍यवधान)...

श्री रवि रमेशचन्‍द्र जोशी-- अध्‍यक्ष महोदय, गौमाता के चारे और भूसे की व्‍यवस्‍था की जाए. (व्‍यवधान)...

 

11.28 बहिर्गमन

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगणों द्वारा सदन से बहिर्गमन किया गया.

श्री लाखन सिंह यादव-- हम सदन से बहिर्गमन करते हैं.

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगणों द्वारा शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया)

 

अध्‍यक्ष महोदय-- सूबेदार जी आप अपना प्रश्‍न करें.

श्री सूबेदार सिंह सिकरवार रजौधा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बात सत्‍य है कि इस प्रकार की घटना इस प्रकार की मृत्‍यु प्राकृतिक आपदा में नहीं आती है लेकिन जैसा कि माननीय मंत्री जी ने अपने जवाब में कहा कि डॉक्‍टरों ने परीक्षण किया कि निमोनिया था. मैं यह कहता हूं कि भैंसों की मौत के दौरान उनको इलाज लेने का कोई मौका ही नहीं मिला. दो मिनट में भैंसें बैठ गईं और खत्‍म हो गईं.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप सीधा-सीधा प्रश्‍न कीजिए.

श्री सूबेदार सिंह सिकरवार रजौधा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह मानता हूं कि यह प्राकृतिक आपदा में नहीं आता है लेकिन मैं एक उदाहरण देना चाहता हूं कि नरसिंहगढ़ में एक नहर टूट गई थी और उससे हजारों किसानों का नुकसान हुआ था. वह प्राकृतिक आपदा में नहीं आता था, लेकिन सरकार ने नुकसान को देखते हुए उसे प्राकृतिक आपदा में शामिल किया था.

अध्‍यक्ष महोदय-- रजौधा जी आप अपना प्रश्‍न कीजिए.

श्री सूबेदार सिंह सिकरवार रजौधा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब मुख्‍यमंत्री जी की सभा चल रही थी.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप केवल सीध प्रश्‍न कीजिए.

श्री सूबेदार सिंह सिकरवार रजौधा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रश्‍न ही पूछ रहा हूं.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप प्रश्‍न नहीं पूछ रहे हैं आप भाषण कर रहे हैं. आप सीधा प्रश्‍न पूछिए.

श्री सूबेदार सिंह सिकरवार रजौधा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रश्‍न ही पूछ रहा हूं मैं मुख्यमंत्री जी की धारणा को आप तक पहुंचा रहा हूँ.

अध्यक्ष महोदय -- आप प्रश्न पूछिए. आप मंत्री जी से यह पूछ सकते हैं कि क्या मंत्री जी इस तरह का कोई प्रावधान करेंगे. आप समय का थोड़ा ध्यान रखिए.

श्री सूबेदार सिंह सिकरवार रजौधा -- मुख्यमंत्री जी ने भी यह कहा था कि यह प्राकृतिक आपदा में नहीं आता है. वह बड़ी सभा थी. उन्होंने कहा था कलेक्टर इस पर विचार करें. इसमें किसानों का नुकसान हुआ है. मैं माननीय मंत्री जी से आश्वासन चाहूंगा कि जब नरसिंहगढ़ में उस आपदा को शामिल किया जा सकता है. जब माननीय मुख्मयमंत्री जी ने सभा के दौरान कलेक्टर को यह बोला है तो इसको प्राकृतिक आपदा में शामिल करने में क्या हर्ज है. क्या माननीय मंत्री जी इसको प्राकृतिक आपदा समझकर किसानों को मुआवजा देंगे.

श्री गोविन्द सिंह राजपूत -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य बहुत समझदार हैं. वे स्वयं इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि यह प्राकृतिक आपदा में नहीं आता है. प्राकृतिक आपदा आती है और उसमें पशुहानि हो, जनहानि हो, धनहानि हो, मकानहानि हो, दुकानहानि हो. उस समय इसे प्राकृतिक आपदा मानकर उसका मुआवजा दिया जाता है. यह मुआवजा कई बार आरबी 6 (4) के तहत दिया गया है. यहां जो मृत्यु हुई है वह प्राकृतिक आपदा से नहीं हुई है. जो टीम गई थी उस टीम ने बताया है कि यह मृत्यु निमोनिया, मिश्रित संक्रमण एवं रेसपायरेटरी फेल्योर के कारण हुई हैं. इसके कारण पशुओं की जो मृत्यु हुई है उसका मुआवजा देने का आरबीसी 6 (4) में प्रावधान नहीं है. जिस सभा का जिक्र माननीय सदस्य ने किया है उसमें माननीय मुख्यमंत्री जी ने यह कहा था कि इसका आरबीसी 6 (4) में प्रावधान नहीं है, यह उन्होंने भी स्वीकार किया था. लेकिन उन्होंने यह भी कहा था, तो हम इतने जल्दी आरबीसी 6 (4) में परिवर्तन नहीं कर सकते हैं. यह पहली बार हो रहा है कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने सारे विधायकों की स्वेच्छा निधि 15 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए कर दी है. माननीय सदस्य 50 लाख रुपए में से 10-10 हजार रुपए अभी दे दें जिससे तात्कालिक व्यवस्था हो जाएगी. बाकी आपने जो कहा है उस पर हम विचार करेंगे.

अध्यक्ष महोदय -- वह निधि विधायकों के पिछले सत्र की थी वह खत्म हो चुकी है.

श्री सूबेदार सिंह सिकरवार रजौधा -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय मुख्यमंत्री जी ने कलेक्टर को बोला था. मंत्री जी, कलेक्टर से बात कर लें. यह प्राकृतिक आपदा में शामिल नहीं है लेकिन एक गांव में 100 भैसों की मृत्यु हुई हैं. पोरसा ब्लाक में 620 भैंसों की मृत्यु हुई है, मेरे विधान सभा क्षेत्र में 300 दुधारु भैंसों की मृत्यु हुई है. इससे मुख्यमंत्री जी को पीड़ा हुई उन्होंने मेरे सामने सभा में मंच से बोला था, माननीय मुख्यमंत्री जी मेरी बात सुन रहे होंगे. उन्होंने कलेक्टर को बोला था कि यह आरबीसी 6 (4) में नहीं आता है लेकिन किसान को कैसे राहत मिले इस पर आप विचार करिए. उन्होंने कहा था कि मैं जो कर सकता हूँ वह करुंगा.

अध्यक्ष महोदय, मैं दूसरा प्रश्न पूछना चाहता हूँ इंसान को सर्प या कोई विषैला जीव काट लेता है तो उसे प्राकृतिक आपदा माना जाता है. पशुओं की सर्प और गौहेरे के काटने के कारण ज्यादा मृत्यु होती है. जब किसान पीएम करवाते हैं तो पता चलता है कि सर्प ने काटा है लेकिन उसका आरबीसी में प्रावधान नहीं है. भगवान ने ही पशु और इंसान में अन्तर किया है. बेजुबान पशु की मृत्यु से किसान प्रभावित होता है.

अध्यक्ष महोदय -- आपका प्रश्न आ गया है. बजट पर चर्चा के दौरान आप इन बातों को कहिएगा. इन सारी चीजों को जोड़ने के लिए बजट की चर्चा में आप बात रखिएगा. माननीय मंत्री जी माननीय सदस्य को सीधा जवाब दे दीजिए.

श्री गोविन्द सिंह राजपूत -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश की आरबीसी 6 (4) में बहुत बार संशोधन हुआ है. माननीय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह जी ने कई बार चीजों को समझा है. मैं जानता हूँ वे दयालु हैं. मैं आज नियम कायदे बंधा हूं लेकिन मैं इस पर विचार करूंगा और आपकी बात माननीय मुख्यमंत्री जी तक पहुंचाऊंगा कि ऐसी घटनाएं घटें तो उस पर विचार किया जाए.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.34 बजे

अनुपस्थिति की अनुज्ञा

 


 

श्रीमती रामबाई गोविन्द सिंह-- अध्यक्ष महोदय, मैं आप से 2 सेकण्ड बात करना चाहती हूँ.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, अभी हो जाने दीजिए.

श्रीमती रामबाई गोविन्द सिंह-- मेरा आप से निवेदन है प्लीज़.....

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जाइये. मैं आपको सुन लूँगा.

12.36 बजे

प्रतिवेदनों की प्रस्तुति.

याचिका समिति का अष्टम्, नवम्, दशम्, ग्यारहवाँ, बारहवाँ, तेरहवाँ, एवं चौदहवाँ तथा अभ्यावेदनों से संबंधित सत्रहवाँ, अठारहवाँ एवं उन्नीसवाँ प्रतिवेदन.

 

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया(सभापति)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, याचिका समिति के याचिकाओं से संबंधित अष्टम्, नवम्, दशम् ग्यारहवाँ, बारहवाँ, तेरहवाँ एवं चौदहवाँ तथा अभ्यावेदनों से संबंधित सत्रहवाँ, अठारहवाँ एवं उन्ननीसवाँ प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूँ.

अध्यक्ष महोदय, मैं आपका आभार व्यक्त करता हूँ, आपके कुशल मार्गदर्शन में विभिन्न समितियाँ जिस प्रकार से अपना काम कर रही हैं और याचिका समिति में, हमारे सभी सम्मानित वे साथी जो लगातार बैठकों में आ करके याचिकाओं का और अभ्यावेदनों का निराकरण कर रहे हैं, मैं सचिवालय को भी और हमारे अधिकारी, कर्मचारी, साथियों को भी और अध्यक्ष महोदय, आपके निर्देशानुसार जो साक्ष्य में प्रमुख सचिव लोग आ रहे हैं, उनके अधीनस्थ अधिकारी आ रहे हैं, वे सब समय पर आ रहे हैं, नतीजतन याचिकाओं की और अभ्यावेदनों की जो पैंडेंसी है, उसमें निरन्तरता हम बनाए रखे हुए हैं. आपका बहुत बहुत आभार.

 

 

 

 

नियम समिति का द्वितीय प्रतिवेदन.

डॉ विजय लक्ष्मी साधौ (सदस्या)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 231 के उपनियम (3) के अधीन नियम समिति का द्वितीय प्रतिवेदन पटल पर रखती हूँ.

12.37 बजे

याचिकाओं की प्रस्तुति.

अध्यक्ष महोदय-- आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी माननीय सदस्यों की याचिकाएँ प्रस्तुत हुई मानी जाएँगी.

सभापति तालिका की घोषणा.

अध्यक्ष महोदय-- मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन सम्बन्धी नियमावली के नियम 9 के उपनियम (1) के अधीन, मैं निम्नलिखित सदस्यों को सभापति तालिका के लिए नाम-निर्दिष्ट करता हूँ :-

1.      श्री लक्ष्मण सिंह जी,

2.      श्रीमती झूमा सोलंकी जी,

3.      श्री रामलाल मालवीय जी,

4.      डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय जी,

5.      श्री यशपाल सिंह सिसौदिया जी तथा

6.      श्रीमती नंदनी मरावी जी.

 

 

 

 

12.38 बजे

वर्ष 2021-2022 के तृतीय अनुपूरक अनुमान का उपस्थापन.

वित्त मंत्री (श्री जगदीश देवड़ा)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, राज्यपाल महोदय के निर्देशानुसार वर्ष 2021-2022 के तृतीय अनुपूरक अनुमान का उपस्थापन करता हूँ.

अध्यक्ष महोदय-- मैं, इस तृतीय अनुपूरक अनुमान पर चर्चा और मतदान के लिए दिनाँक 11 मार्च, 2022 को 2 घण्टे का समय नियत करता हूँ.

डॉ सीतासरन शर्मा, सदस्य कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव के संबंध में अपना भाषण प्रारंभ करेंगे.

(मेजों की थपथपाहट)

 

 

 

12.39 बजे

राज्यपाल के अभिभाषण पर डॉ.सीतासरन शर्मा, सदस्य द्वारा दिनाँक 7 मार्च, 2022 को प्रस्तुत प्रस्ताव पर चर्चा.

 

डॉ.सीतासरन शर्मा(होशंगाबाद)-- धन्यवाद अध्यक्ष महोदय. अध्यक्ष महोदय, महामहिम राज्यपाल के अभिभाषण पर मैं अपनी बात कहने के लिए उपस्थित हुआ हूँ. अध्यक्ष महोदय, राज्यपाल का अभिभाषण गत वर्ष के कार्य वर्तमान की गतिविधि और भविष्य की योजनाओं पर आधारित होता है. इसके द्वारा सरकार के समूचे कार्यों की समीक्षा की जा सकती है. यह एक तरह का विज़न डाक्यूमेंट भी होता है. जो भविष्य की योजनाएँ होती हैं और जो वर्तमान में चल रही योजनाएँ होती हैं, उनके लिए इसी अभिभाषण के आधार पर बजट में प्रावधान भी किए जाते हैं और इसीलिए अध्यक्ष महोदय, वास्तव में यदि सबसे अधिक महत्वपूर्ण विधान सभा की कार्यवाही में सभी सदस्यों के लिए कोई बात है तो वह महामहिम राज्यपाल महोदय का अभिभाषण ही है क्योंकि उसी के आधार पर साल भर सारे प्रदेश की सारी गतिविधियाँ चलती हैं, पिछले कार्यों की समीक्षा होती है और भविष्य की योजनाओं की बातचीत होती है और शायद इसीलिए अध्यक्ष महोदय, भारत के संविधान के आर्टिकल 176 (1), 175 (1) में यह प्रावधान किया गया है. हर साल पहले सत्र के समय महामहिम राज्‍यपाल महोदय का अभिभाषण हो, लेकिन अफसोस की बात है कि कुछ माननीय सदस्‍य तो बिना सुने ही इसका बहिष्‍कार करते हैं. बिना आए वॉकआउट करते हैं, ट्वीटर पर विधानसभा में कार्यवाही में वे क्‍या करने वाले हैं यह लिखते हैं. अध्‍यक्ष जी, इस तरह का अपमान और लोकतंत्र के इस बडे़ सदन की इस तरह की अवहेलना आज तक कभी देखी नहीं गयी. हॉं, यह बात सही है कि प्रतिपक्ष के नेता जी ने भी हमारी बात की भावनाओं में अपनी भावनाएं मिलायीं और तब ही से वह माननीय सदस्‍य पता नहीं, क्‍या हो गया वह यहां आ ही नहीं रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय, हमारे सामने जो माननीय सदस्‍यगण बैठे हैं इनका आचरण भी समझ में नहीं आता. एक सदस्‍य ट्वीटर से विधानसभा चला रहे हैं और बाकी सदस्‍यों ने बजट भाषण सुना ही नहीं और उसका विरोध करने खडे़ हो गए, तो क्‍या यह अंतरयामी हैं ? " बिनु पद चलइ, सुनइ बिनु काना". बिना कान के सुन लेते हैं, बिना पैर के चल देते हैं. अभिभाषण शुरू ही नहीं हुआ और खडे़ हो गये. कहने लगे कि भाषण में कुछ रखा नहीं है. लोकतंत्र चर्चा से चलता है. डेमोक्रेटिक गवर्नमेंट इज ए गवर्नमेंट बाइ डिस्‍कशन.

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा -- माननीय पूर्व अध्‍यक्ष महोदय जी, राज्‍यपाल महोदय जी से जो असत्‍य बयां कराया है, उससे आपकी सरकार की मेरी सरकार क्‍या करेगी, वह सारा परिदृश्‍य आ गया था तो अंतर्यामी थोडे़-थोडे़ हम बन गए हैं...(हंसी)..

डॉ.नरोत्‍तम मिश्र -- डॉ. साहब, क्‍या है कुछ लोग खतका मजमून भांप लेते हैं लिफाफा देखकर, यह तो डाकघर देखकर ही पता कर लेते हैं...(हंसी)..

डॉ.सीतासरन शर्मा -- आपके जो तृतीय नेत्र हैं आपने जो कहा, उसके लिए धन्‍यवाद.

डा.नरोत्‍तम मिश्र -- माननीय कमलनाथ जी निकालकर इनको दे गए हैं...(हंसी)..

डॉ.सीतासरन शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, बजट की चिन्‍ता हमारे मुख्‍यमंत्री जी ने भी उस दिन यह पाइंट आउट किया था. प्रदेश की जनता को भी रहती है. प्रेस भी यह जानना चाहती है क्‍योंकि प्रेस के माध्‍यम से ही वह प्रदेश की जनता तक जाती है. सीधा प्रसारण होता है किन्‍तु आपने हल्‍ला-गुल्‍ला करके इस काम से भी न केवल प्रेस को, न केवल सदन को बल्‍कि सारे प्रदेश को इस महत्‍वपूर्ण सूचना से वंचित किया है, इस महत्‍वपूर्ण काम से वंचित किया है.

अध्‍यक्ष जी, हमारी सरकार के बहुत से काम हैं और हमारे अन्‍य सदस्‍य भी बोलेंगे, इसलिए सारी बातों पर मैं नहीं जाऊंगा. किन्‍तु जो बहुत-सी बातें हैं वह आपके ध्‍यान में लाना है. एक बात तो मैंने विज़न की कही थी. कोई भी सरकार सिर्फ पुरानी बातों से और पुराने कार्यों से ही नहीं चलती. उसमें नई योजनाएं, नये विज़न बदलते हुए परिवेश के आधार पर विचार करना पड़ता है और बदलते हुए परिवेश के आधार पर काम करना पड़ता है और हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री जी का विज़न सारे प्रदेश की जनता के लिए है. वह हर वर्ग की सोचते हैं और इसलिए मैं शुरूआत करता हॅूं. आप सब जानते हैं हमारी सामाजिक परिस्‍थितियॉं हैं उसमें बेटियों की स्‍थिति क्‍या थी. तब भी थीं, जब आपका राज था. सामने बैठीं कांग्रेस दल की सदस्‍या हैं इनकी सरकार को यह कभी सूझा नहीं कि हम बेटियों के लिए, न्‍यू बॉर्न बेबीज़ के लिए कुछ करें. हमारे मुख्‍यमंत्री जी पहली बार लाड़ली लक्ष्‍मी योजना लेकर लाए. (मेजों की थपथपाहट) आज के समय में 41 लाख लाड़ली लक्ष्‍मी हैं. अब आपकी लाड़ली लक्ष्‍मी तो एक ही हैं. लड़की हॅूं लड़ सकती हॅूं. बाकी लाड़ली लक्ष्‍मी तो हमारे मुख्‍यमंत्री जी की हैं और हमारी सरकार की हैं. (मेजों की थपथपाहट)

सुश्री विजयलक्ष्‍मी साधौ -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक धृष्‍टता कर रही हॅूं. वैसे आप मेरे ही कॉलेज के हैं. मेडिकल में तो सीनियर-जूनियर का बहुत ज्‍यादा मान-सम्‍मान रहता है लेकिन आप जो बोल रहे हैं, आप निमाड़ की लाड़लियों का भी ख्‍याल करके बोलते. दिमाग में निमाड़ के लिए आइडिया भी आता.

12.45 बजे {सभापति महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय) पीठासीन हुए}

डॉ. कुँवर विजय शाह -- विजय लक्ष्‍मी के लिए नहीं बोला...(व्‍यवधान)...

डॉ. विजयलक्ष्‍मी साधौ-- आप तो मेहरबानी करें. निमाड़ की लाड़लियों पर भी ख्‍याल रख लेते और कमलनाथ जी की सरकार ने कन्‍याओं की शादियों का जो 51 हजार रुपया किया था, उसको घटाकर आप वापस ले आए हैं... ...(व्‍यवधान)...

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- एक को भी नहीं मिला... ...(व्‍यवधान)...

डॉ. कुँवर विजय शाह -- आप हमारे मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद दो ...(व्‍यवधान)...

सभापति महोदय -- कृपया शांत रहें, डॉक्‍टर साहब को बोलने दें. समय की भी कमी है ...(व्‍यवधान)...

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- सभापति महोदय, कमलनाथ जी ने जो घोषणाएं की थीं, अब तो उनके बच्‍चे तक हो गए, तो भी दहेज नहीं पहुँचा, जो 51 हजार रुपये की घोषणा की थी...(व्‍यवधान)...

डॉ. सीतासरन शर्मा -- सभापति महोदय, अब इस बात पर भी आऊंगा मै. ...(व्‍यवधान)...

डॉ. विजयलक्ष्‍मी साधौ -- असत्‍य कब तक बोलते रहोगे ...(व्‍यवधान)...

सभापति महोदय -- मेरा माननीय सदस्‍यों से निवेदन है, चर्चा जारी रहने दें, कृपया शांति रखें.

श्री पी.सी. शर्मा -- सभापति महोदय... ...(व्‍यवधान)...

डॉ. सीतासरन शर्मा -- सभापति महोदय, ये हमारे प्रभारी मंत्री थे, किसी को वहां पैसा नहीं मिला.. ...(व्‍यवधान)...

श्री पी.सी. शर्मा -- डॉक्‍टर साहब, एक बात है.. ...(व्‍यवधान)...

सभापति महोदय -- अब दोनों शर्मा जी, शर्मा जी हैं, थोड़ा आपस में समझ लें. पी.सी. शर्मा जी, थोड़ी शांति रखें.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- ये इंजीनियर हैं, मैं डॉक्‍टर हूँ साहब, मैं इनसे ज्‍यादा समझता हूँ..(हंसी).

श्री पी.सी. शर्मा -- सभापति महोदय, इन्‍होंने कहा कि हमारे नेता ने कहा कि 'लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ' तो क्‍या आप नहीं मानते कि लड़की लड़ सकती है. आपकी बात सुन के गैलरी में बैठी हुई लड़कियां चली गईं. ...(व्‍यवधान)...

डॉ. सीतासरन शर्मा -- मैंने ऐसा नहीं बोला, मैंने कहा एक ही लाड़ली है आपकी. ...(व्‍यवधान)...

श्री शैलेन्‍द्र जैन -- बाकी लाड़लियों की चिंता कब करोगे मेरे प्‍यारे भाई. प्रदेश की बेटियों की चिंता होगी कि नहीं होगी ? हम एयरपोर्ट बना देंगे, हम फलां करवा देंगे, एक पैसा नहीं दिया आपने. बेटियों के खाते में एक पैसा नहीं जमा किया. (व्‍यवधान)...

सभापति महोदय -- शैलेन्‍द्र जी, आपस की चर्चा बंद करें. डॉक्‍टर साहब, आप जारी रखें.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- सभापति जी, यह वीज़न का फर्क है. यह जनता की पीड़ा देखने का फर्क है. 50, 60, 70 साल से आप लोग थे, आपको बेटियों के जन्‍म के बारे में चिंता नहीं हुई. अभी आपने कन्‍यादान की बात की. ये योजना क्‍या वर्ष 2003 में राजा साहब शुरू कर गए थे, ये हमारे मुख्‍यमंत्री जी ने शुरू की है. अब आज ढपली बजाने लगे कि हमने बढ़ा दिए, अरे, आपको क्‍यों नहीं सूझा कि कन्‍याओं के विवाह में कितनी तकलीफ होती है. दीस इज़ विजन, ये आगे की सोच है.

श्री लक्ष्‍मण सिंह -- माननीय डॉक्‍टर साहब, आज बड़े भाई साहब का हिन्‍दी तारीख से जन्‍मदिन है, कम से कम आज के दिन तो कृपा करके उनको जन्‍मदिन की बधाई दे दीजिए. 15-20 साल हो गए, अभी भी वही, (हंसी) आप तो अपनी बात करिए. ...(व्‍यवधान)...

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- राजा साहब का नाम तो लिया ही नहीं.. ...(व्‍यवधान)...

श्री शैलेन्‍द्र जैन -- वे इतिहास पुरुष हैं. उन्‍हें मध्‍यप्रदेश की जनता कभी नहीं भूल सकती. वे इतिहास के पन्‍नों पर अंकित हो गए...(व्‍यवधान)...

डॉ. विजयलक्ष्‍मी साधौ -- माननीय सभापति महोदय, मेरी बात का उल्‍लेख हुआ है, इसलिए मैं एक सेकण्‍ड चाहूंगी. अभी डॉक्‍टर साहब ने जो कहा कि आदरणीय मामा की सरकार में यह योजना शुरू हुई है. दिग्‍विजय सिंह जी ने नाम का उल्‍लेख इन्‍डायरेक्‍ट वे में इन्‍होंने किया, मेरा आपसे निवेदन है.. ...(व्‍यवधान)...

श्री गोविन्‍द सिंह राजपूत -- आप तो विजय लक्ष्‍मी जी हैं.. ...(व्‍यवधान)...

डॉ. विजयलक्ष्‍मी साधौ -- आप तो बैठ ही जाओ. माननीय सभापति महोदय, मैं भी उस सरकार में थी, उस सरकार में, आदरणीय दिग्‍विजय सिंह जी की सरकार में बेटियों के सामूहिक विवाह में पैसा दिया जाता था. मैं अगर गलत हूँ तो आपकी सरकार है, आप उठाकर देख लें.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- कितना देते थे, बता दो जरा आप...(व्‍यवधान)...

डॉ. विजयलक्ष्‍मी साधौ -- आप उठाकर देख लें कि क्‍या दिग्‍विजय सिंह जी की सरकार में सामूहिक विवाह में पैसा दिया गया है या नहीं, दिग्‍विजय सिंह जी की सरकार में बेटियों के सामूहिक विवाह में सरकार के माध्‍यम से पैसा दिया गया है. आप पिछला रिकॉर्ड उठाकर देख लें, आपकी सरकार है.

सभापति महोदय -- आप अपनी बात समाप्‍त करें, प्‍लीज़.

डॉ. विजयलक्ष्‍मी साधौ -- आप पिछला रिकॉर्ड उठाकर देख लें, मैं दावे के साथ बोलती हूँ, मैं उस सरकार का अंग थी, उस सरकार ने शुरू किया था, बेटियों की चिंता की थी और बेटियों को सामूहिक विवाह में पैसे दिए जाते थे.

सभापति महोदय -- माननीय सदस्‍या, बैठिए, प्‍लीज़.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- सभापति महोदय, छोटे राजा ने अभी बताया.

श्री लक्ष्‍मण सिंह -- मैं लक्ष्‍मण सिंह हूँ. मेहरबानी करके मुझे लक्ष्‍मण सिंह कहें.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- मैं पूर्व मुख्‍यमंत्री जी को उनके जन्‍मदिवस की शुभकामनाएं देता हूं. वे दीर्घायु हों ऐसी प्रार्थना भी करता हूं.

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- वे ऐसे ही बने रहें और हमारा काम चलता रहे.

सभापति महोदय -- सदन भी उनके जन्‍म दिन के अवसर पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं, मंगलकामनाएं अर्पित करता है.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- मुख्‍यमंत्री तीर्थदर्शन योजना, हमारे देश की संस्‍कृति क्‍या है, इसको कभी आपने 50, 60 साल में समझा नहीं. बुजुर्ग जाते हैं दर्शन करने, कभी नहीं सोचा क्‍योंकि विजन नहीं है, विचार नहीं है, जनता की चिंता नहीं है. हमारे मुख्‍यमंत्री जी ने तीर्थदर्शन योजना शुरू की. सर्वधर्म समभाव के आधार पर सबका साथ, सबका विकास के आधार पर सांस्‍कृतिक विरासत को बनाने का, स्‍थाई करने का प्रयास भी किया.

श्री पी.सी. शर्मा -- आपकी सरकार बनने के बाद बंद हो गई. यह कमलनाथ जी की सरकार थी जो चालू थी और हमने लोगों को कुम्‍भ में भी भेजा.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- एक बार भेजा, उसके बाद में रह गये साल भर में, काये के लिये ढपली बजा रहे हैं.

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- आप तो किसी को नर्मदा जी तक नहीं ले गये.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- आपने यह नहीं सोचा कि मजदूरों के बच्‍चे भी पढ़ेंगे.

श्री गोविंद सिंह राजपूत -- कमलनाथ जी ने हम लोगों को बैंगलोर भिजवाया. उसके लिये धन्‍यवाद.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- मजदूरों के बच्‍चे भी पढ़ते हैं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने जाति-पाति से ऊपर उठकर अनुसूचित जाति और जनजाति के बच्‍चों के लिये जो व्‍यवस्‍थाएं थीं वह चल रही हैं और बढ़ रही हैं, इसके अलावा मजदूरों के बच्‍चों के लिये सारे बैरियर काटकर जो गरीब है, जो फीस नहीं दे सकता, जो किताबें नहीं खरीद सकता, उसके लिये स्‍कॉलरशिप का प्रावधान किया. सभी योजनाएं सर्वधर्म और सर्व समाज के लिये थीं.

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा -- 10 लाख रुपये छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है.

सभापति महोदय -- माननीय सदस्‍य बैठे-बैठे न बोलें.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- अब आदरणीय लक्ष्‍मण सिह जी ने एक बात कही, मैं थोड़ी सी उसकी चर्चा करना चाहता हूं और मुझे मालूम है आप भी यही बोलेंगे कि हरबार 50 साल की क्‍यों बोलते हो आप अपनी बात करें. बात हम अपनी भी कर रहे हैं आपकी भी बता रहे हैं, परंतु एक बात है कि कोई भी व्‍यक्ति एब्‍सोल्‍यूट नहीं होता है, कोई पूर्ण नहीं होता और इसीलिये तुलना करना ही पड़ता है. लॉ ऑफ रिलेटिवटी सिर्फ पदार्थों में नहीं है समाज में भी है, मनुष्‍यों में भी है और इसलिये तुलना तो करना पड़ेगा. हम बहुत लंबा नहीं जाएंगे. हम तो आपके 10 साल की बात करेंगे. धीरे-धीरे वहीं आते हैं. आएंगे और फिर आपको बताएंगे, क्‍योंकि हमारे पीछे के 10 साल और यह 14-15 महीने, यह किताबें रखी हैं, अभी सब पढ़कर बताएंगे. 10 साल आप रहे. यह योजनाएं जो मैंने पहले गिनाई हैं यह आपको सूझी नहीं. क्‍यों नहीं सूझी क्‍योंकि आपका विजन नहीं था. रामचरित मानस में राजधर्म के बारे में एक चौपाई कही गई है और मैं ऐसा मानता हूं कि उस चौपाई को सारा सार्थक कर रहे हैं तो हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह जी चौहान कर रहे हैं. ''राजधरम सरबस एतनोई, जिमि मन माह मनोरथ होई''. आपका मन जहां तक जाता है, आपके मन का मनोरथ जहां तक जाता है, वहां तक राजधर्म चलता है और इसलिये न्‍यू बॉर्न बेबी तक भी उनका मनोरथ गया. आपका तो नही गया और इसीलिये बड़ी हो गई, 18 साल, 19 साल की बच्‍ची उस तक उनका मनोरथ गया. इसलिये मजदूर के बच्‍चे तक मनोरथ गया.

सभापति जी, विजनरी लीडरशिप नहीं हो तो काम नहीं होते. अब आप में विजन तो था नहीं. समाज के अंतिम छोर तक तो आप पहुंचे नहीं, परंतु जो रुटीन काम था वही कर देते. बिजली, पानी और सड़क यह रुटीन वर्क था. यह 10 साल में आपको करना था. रुटीन वर्क पर मैं आपकी चर्चा करूं और हमारे रुटीन वर्क पर चर्चा करूं. उसके पहले एक बात बताना चाहता हूं.

उसके पहले एक बात बताना चाहता हूं कि 2 साल का हमारा कोविड पीरियड रहा, जिस पर माननीय राज्यपाल के अभिभाषण में हमारे साथी बोलेंगे. मैं तो विकास योजनाओं की बात करूंगा और रुटिन वर्क की बात करूंगा. यह तो अनापेक्षित-सा आ गया था. 2 साल कोविड के प्रबंधन में ही चले गये. मैंने पिछली बार एक शब्द उपयोग में ला दिया था तो श्री भनोट साहब गुस्सा हो गये थे. उसको मैंने रिफाइंड कर दिया है. वह जो 15 महीने थे, वह एडमिनिस्ट्रेटिव एनेकिज़म था, प्रशासकीय अराजकता. जब अराजकता प्रशासन में आ जाती है तो उसको ठीक करने में भी थोड़ा समय लगता है. वह 15 महीने उस एडमिनिस्ट्रेटिव एनेकिज़म के और 2 वर्ष इस कोविड के यह भी हमारे पीरियड में से डेवलपमेंट वर्क में से घटाना पड़ेगा.

श्री लक्ष्मण सिंह - एडमिनिस्ट्रेटिव एनेकिज़म के सारे मंत्रियों को आपने ले लिया और सरकार बना ली.

डॉ. सीतासरन शर्मा - सभापति महोदय, आधो को लिया है साहब और वह बहुत अच्छा काम कर रहे हैं

श्री पी.सी. शर्मा - इससे पहले तो आप एक्सटेम्पोर बोलते थे, इस बार आपको यह पर्चियां किसने दे दीं?

डॉ. सीतासरन शर्मा - नहीं, मैंने पाइंट्स लिखे हैं. अब पहले मैं कृषि पर आता हूं.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया - आदरणीय शर्मा जी, पर्चियां देखकर आपको कालेज की परीक्षाओं की याद आ गई क्या?

श्री पी.सी. शर्मा - यह विद्वान आदमी हैं. यह एक साथ बोल पड़ते हैं.

सभापति महोदय - टोकाटाकी न करें.

डॉ. सीतासरन शर्मा - सभापति महोदय, यह वर्ष 2002 का है, वर्ष 1993 में मुख्यमंत्री बने थे. मैं तुलना कर रहा हूं, आपने भी तुलना की थी. यह जब राज्यपाल महोदय का अभिभाषण था उसमें आपने कहा था कि वर्ष 2003-04 में इतना कर्जा था, वर्ष 2021-22 में इतना है. तुलना आपने भी की थी. तुलना तो करना ही पड़ेगी नहीं तो जनता को कैसे पता चलेगा कि आप क्या करते थे और हम क्या करते हैं. यह वर्ष 2002 का भाषण है. आपको सरकार में 9 साल हो गये थे. कृषि में राष्ट्रीय औसत और मध्यप्रदेश के बारे में इसमें फर्क है. फर्क क्यों है?इसलिए कि मध्यप्रदेश में अधिकांश खेती सूखी खेती है. आप 9 साल से क्या कर रहे थे दादा? वर्ष 2002 में भाषण में कह रहे हैं कि हमारी खेती सूखी, अब आपको मालूम पड़ा? वर्ष 2002 में, अभी मैं अपने आंकड़ों पर भी आऊंगा. आपने कहा कि वर्ष 2002 में अधिकांश खेती सूखी थी और वर्ष 2021 में क्या है, 7 लाख हैक्टेयर से सिंचाई बढ़कर 42 लाख हैक्टेयर सिंचाई हो गई, यह हमारे 15 साल की उपलब्धि है. हमारी सरकार की उपलब्धि है. आप तो 10 साल की सरकार के बाद कहते हैं कि सूखी खेती है इसलिए राष्ट्रीय औसत की बराबरी नहीं कर पाए. अरे, यह गर्व की बात है? यह (XXX) की बात है. सिर्फ सिंचाई तक मुख्यमंत्री जी रुके नहीं. फसल बीमा योजना, अभी हमारे साथी बोलेंगे, इसलिए बहुत आंकड़ें नहीं दे रहा हूं. किन्तु किसान को कहां कहां फायदा पहुंचा सकते हैं. प्रदेश की मांग कहां तक बढ़ा सकते हैं. प्रदेश का प्रोडक्शन कहां तक बढ़ा सकते हैं.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - वैसे ही परेशान हैं, पांचों प्रांतों के परिणाम से, आप और धांय, धांय, धांय.

डॉ. सीतासरन शर्मा - हो सकता है कि आत्मचिंतन करें, बचे हुए भी इधर ही आ जाएं.

श्री शैलेन्द्र जैन - जो क्रीम थी वह आ गई है, बाकी का छाछ छोड़ दिया है.

श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव - इनको आप क्रीम मान रहे हो?

श्री तुलसीराम सिलावट - सर्टिफिकेट जनता ने दे दिया है. आपको पता है कि नहीं.

डॉ. सीतासरन शर्मा - हमारी कृषि ग्रोथ आज 20 प्रतिशत पर है आज देश में सबसे ज्यादा है. हम अनाज के प्रोडक्शन में पंजाब से आगे बढ़ गये हैं. यह हमारी 15 साल की उपलब्धि है (मेजों की थपथपाहट)..बिजली, अब आई बिजली की बात, पुराने ऊर्जा मंत्री सामने बैठे हैं, धीमी गति के बुलेटिन थे. आप लोगों को मालूम है ना? उनसे प्रश्न पूछते थे आधा घंटे में उत्तर आता था. जितनी देर में इनके राज में बिजली आती थी, उतनी देर में इनका उत्तर विधानसभा में आता था .

 

श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति (एन.पी.)-- आप तो इतना बता दें कि आज आपका कितना बिजली का बिल आ रहा है.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- बिजली कितनी आ रही है, वह बतायेंगे. अब आप जब बिजली देते ही नहीं थे, तो बिल कहां से आता.

कुंवर विजय शाह -- जब करंट ही नहीं था, तो बिल कहां से आयेगा.

..(व्यवधान)..

सभापति महोदय -- कृपया चर्चा होने दें, आपस में चर्चा न करें.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- सभापति जी, 3 हजार मेगावाट का इनका प्रोडक्शन था. अब बिजली नहीं थी, तो लोग खपत कैसे करते, पर फिर भी मिनिमम तो जरुरत पड़ती ही है. तो साढ़े चार हजार मेगावाट की खपत होती थी, वह भी आप पूरी नहीं कर पाते थे. यह 2002 और 2003 में हम क्या नारे लगाते थे, वह हम बताना नहीं चाहते. बहुत से लोग बैठे हैं, वह डॉक्टर साहब पुराने बैठे हैं. कुछ मंत्रिगण भी बैठे हैं, उस वक्त के.

श्री गोविन्द सिंह राजपूत -- आप डॉक्टर साहब की आत्मा को मत छेड़ो. डॉक्टर साहब की केपेसिटी इतनी है, वे इतने केपेबल हैं कि वह कहां होना चाहिये थे, वह कहां बैठे हैं. ..(हंसी)..

डॉ. सीतासरन शर्मा -- सभापति महोदय, आप साढ़े चार हजार मेगावाट बिजली नहीं दे पाये. आज क्या स्थिति है. आज 5100 मेगावाट बिजली तो हम नवकरणीय ऊर्जा से बना रहे हैं. जो परम्परागत थे, वह तो करने के बतायेंगे अभी. जितनी आप पैदा नहीं करते थे, उससे दोगुनी बिजली तो हम नवकरणीय ऊर्जा से बना रहे हैं.

श्री सुरेश राजे -- तो फिर इतनी महंगी बिजली क्यों बेच रहे हैं. यह तो बता दें. अगर इतनी बिजली बना रहे हैं, तो इतनी महंगी बिजली क्यों बेच रहे हैं.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- सभापति महोदय, सूरज तो तब भी उगता था, सूरज अब भी उगता है. पर बिजली लेने की चिंता नहीं थी. क्योंकि जनता की चिंता नहीं थी. यही तो विजन है. रुटीन वर्क नहीं कर सकते थे. आज हम 21 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहे हैं. 15 साल में कहां से कहां पहुंच गया मध्यप्रदेश. आप 3 हजार मेगावाट, यहां 21 हजार मेगावाट, सात गुना हो गया. (श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति (एनपी), सदस्य द्वारा बैठे बैठे कुछ कहने पर) साढ़े पन्द्रह हजार मेगावाट की हमारी खपत ही है कुल. आपका अवसर आये जब बताना.

श्री शैलेन्द्र जैन -- इन लोगों ने महंगी, सस्ती के चक्कर में बिजली से तौबा ही कर ली थी. उस समय इनका मानना था कि न बिजली बनेगी, न बिजली के बिल जायेंगे. बड़ा जस्टीफिकेशन है साहब. मैं तो आपको बधाई देता हूं कि आप सबके इन्हीं कारणों से हम लोग यहां बैठे हैं.

सभापति महोदय -- काफी सदस्यों को बोलना है, कृपया डॉक्टर साहब को बात पूरी करने दें. डॉक्टर. साहब, आप भी समाप्त करें. आप और कितना समय लेंगे डॉ. साहब.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- सभापति महोदय, 3-4 पाइंट बचे हैं.

श्री पी.सी. शर्मा -- सभापति महोदय, बिजली के बड़े बड़े बिल लोगों को मिले हैं, हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया है. लोगों के बिजली के कनेक्शन कट गये. कोविड काल का बिजली का बिल लिया जा रहा है. रामेश्वर शर्मा जी, पूछो आप कोलार में. क्या हाल है. बिजली के बड़े बड़े बिल आ रहे हैं.

श्री रामेश्वर शर्मा -- वह तो कमलनाथ जी के समय की बात है. ..(व्यवधान).. आपने वादे किये थे कि बिजली के बिल माफ करेंगे, लेकिन माफ नहीं किये. हमारे मुख्यमंत्री जी ने समाधान योजना लागू की और हम 50 प्रतिशत से ज्यादा राशि कम करके बिजली के बिल ले रहे हैं.

..(व्यवधान)..

सभापति महोदय -- कृपया सब बैठ जायें. बीच में टोका-टोकी, हस्तक्षेप न करें. आप लोगों का जब समय आयेगा, तब आप अपनी बात रखें. डॉक्टर साहब आप अपनी बात जारी रखें. (श्री फुन्देलाल सिंह मार्को, सदस्य के खड़े होने पर) मार्को जी, आप बैठें.

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को -- डॉक्टर साहब, मैं 2 मिनट बोल लूं.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- आप बोलना, मैं बैठूंगा, सुनूंगा, पर जरा शिक्षा के बारे में तो सुन लो.

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को -- डॉक्टर साहब, शिक्षा की तो बहुत ही हालत खराब है. उसके बारे में तो न ही बोलिये.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- शिक्षा की स्थिति को आपने कहां पहुंचा दिया था.

सभापति महोदय -- मार्को जी, आप बैठिये. डॉ.साहब की बात पूरी होने दें. जब आपकी बारी आयेगी, तब आप अपनी बात रखियेगा.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- सभापति महोदय, 10 सालों में बहुत विचार, सोच किया कि क्या करें शिक्षा के लिये. तो जो existing school थे. एक रुपया भी नहीं दिया उनमें और उनमें से कुछ को उत्कृष्ट बना दिया पर विजन क्या होता है. इस साल 360 सी.एम.राइज स्कूल खोले जा रहे हैं. 7 हजार करोड़ रुपया लगेगा. शिक्षा के लिये खर्च करना पड़ता है. हमारे बच्चे भी प्रायवेट स्कूल के जैसी शिक्षा लें माननीय मुख्यमंत्री जी का यह विजन है.

परिवहन मंत्री(श्री गोविन्द सिंह राजपूत) - खुलने के बाद आप लोगों को देखने के लिये बुलाएंगे कि आप लोग आईये.

डॉ.सीतासरन शर्मा - 1 हजार 157 करोड़ रुपये इस साल बजट में दे दिये.यह शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता है हमारी. इनका एक भाषण और पढ़कर सुनाता हूं. 2002 का ही है. 9 साल हो गये थे सरकार में. मेडिकल कालेज और स्वास्थ्य. 1956 में पहला मेडिकल कालेज आया था और इसके बाद 1963 या 1966 में आखिरी रीवा का. इसके बाद यदि मेडिकल कालेज खोला सरकारी स्तर पर तो माननीय शिवराज सिंह जी चौहान ने खोला सागर में सबसे पहले और मुख्यमंत्री बनने के डेढ़ साल के अंदर.

डॉ.विजयलक्ष्मी साधौ - डाक्टर साहब, सागर की प्रक्रिया 2002 में चालू हो गयी थी.

सभापति महोदय - बार-बार डिस्टर्ब न करें. कृपया बात पूरी होने दें. समय की मर्यादा है.

डॉ.विजयलक्ष्मी साधौ - असत्य बोलेंगे तो जवाब तो देना ही पड़ेगा.

सभापति महोदय - आपका अवसर आये जब जवाब देना आप. आपस में चर्चा न करे.

डॉ.सीतासरन शर्मा - मैं 2002 का ही भाषण पढ़ रहा हूं. तत्कालीन मुख्यमंत्री जी का ही भाषण है. आपकी बात अभी गलत साबित होगी सुन लीजिये. रीवा मेडिकल कालेज के विजन का फर्क समझना आप. हम लोगों ने रीवा मेडिकल कालेज की सीट बढ़ाने के बारे में कहा है. 9 साल बाद सीट बढ़ाने की बात कर रहे थे तब भी मेडिकल कालेज खोलने की बात नहीं कर रहे थे. उसके बाद भी तो सुनिये आप. जो हम लोगों ने रीवा मेडिकल कालेज की सीट बढ़ाने के बारे में कहा है तो जो बेड हैं उसके आधार पर इतने एडमीशन बढ़ा सकते हैं इसके लिये मेडिकल काउंसिल से अनुरोध कर रहे हैं और स्वीकृति का प्रयास कर रहे हैं. मुझे भरोसा है कि हम ले पाएंगे.

श्री विनय सक्सेना - सभापति जी, मेरा प्वाइंट आफ आर्डर है.

सभापति महोदय - चर्चा पूरी होने दें. अभी प्वाइंट आफ आर्डर की कोई आवश्यकता नहीं है चर्चा जारी रहने दें.

श्री विनय सक्सेना - आप ही बता दीजिये कि यह राज्यपाल का अभिभाषण चल रहा है या सामान्य बजट है.

सभापति महोदय - डॉक्टर साहब आप अपनी बात पूरी करिये. कृपया आप बैठिये.

डॉ.सीतासरन शर्मा -यह भी राज्यपाल का ही अभिभाषण था. अदालत में साईटेशन देते हो कि नहीं. आपके राज्यपाल के अभिभाषण में सीट बढ़ाने का कह रहे थे 10 साल बाद और हमारे मुख्यमंत्री जी को देखो तो इसमें मण्डला, सिंगरौली, श्योपुर, राजगढ़, नीमच, मंदसौर. 1547 करोड़, मेडिकल कालेज के लिये स्वीकृत किये हैं. श्रीमान् इसीलिये बताना पड़ा कि आप 2003 में कहां खड़े थे और हम कहां खड़े हैं.

श्री विनय सक्सेना - अरे घोषणाएं हैं.

डॉ.सीतासरन शर्मा - 20-22 मेडिकल कालेज हो गये और कह रहे हैं कि घोषणाएं, यह कहां रहते हैं मध्यप्रदेश में रहते हैं कि कहां रहते हैं. गजब हो गया साहब. सुनना ही नहीं चाहते. अरे, सही बात तो सुनना पड़ेगा.सभापति जी, विषय तो बहुत हैं. एक बात है आखिरी में पिछड़ा वर्ग आयोग. एक तो कोर्ट में जाकर इन्होंने सबके हक रुकवा दिये और बड़े हितबद्ध बन रहे थे उनके.यह साल भर में पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्‍यक्ष को नियुक्‍त नहीं कर पाये, जब सरकार जाने लगी तो जे.पी. धनोपिया को जाते-जाते बना दिया. साल भर आपसे पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्‍यक्ष नहीं बना ? आप क्‍या चिंता करेंगे, किस वर्ग की चिंता करेंगे आप और इसमें यह गवर्नर एड्रेस है आपका. फिर आपने सामान्‍य वर्ग आयोग का गवर्नर एड्रेस में लिखा था, बना दिया आपने 15 महीने में, तो लिखा क्‍यों था, जब बनाना नहीं था तो लिखा क्‍यों था. बनाया हमारे मुख्‍यमंत्री जी ने, ''सबका साथ, सबका विकास''. एक और बताता हूं नर्मदा न्‍यास अधिनियम लायेंगे हम, 2019 का गवर्नर एड्रेस है, मुश्किल से तो मौका मिला था, कर लेते, 15-20 साल में आये थे, जो कुछ इसमें लिखा था 10-20 प्‍वाइंट का तो था ही, हमारे समान इतना मोटा कामों का पुलिंदा थोड़ी था, 10-20 काम थे कर लेते पर वह भी नहीं बना. मां नर्मदा न्‍यास अधिनियम लाया जायेगा, ले आये. नहीं लाये तो लिखते क्‍यों हो. मैं हल्‍की बात करता नहीं पर सभापति महोदय आप अनुमति दें तो एक कहानी बताकर और मैं क्षमा चाहता हूं सब सदन से मेरी आदत नहीं है, मैं हल्‍की फुल्‍की बात करता नहीं हूं पर आप कहो तो एक कहानी सुना दूं. (XXX) की कहानी आपने सुनी है, (XXX) वह कहते थे कि सबकी मांग पूरी करता है, वह कहता था बताओ तो कहा कि महाराज हमको मकान दे दो तो कहा दे देंगे, महाराज हमको ये दे दो तो कहा दे देगे अब चार-पांच मांग लिये, गये तो न मकान था न कुछ था तो कोई मांगता था तो ये देता नहीं था, केवल कहता था तो यह (XXX) है, यह (XXX) की सरकार थी, लिखती सब थी करती कुछ नहीं थी. सभापति जी बात तो बहुत है, मैं अपनी बात समाप्‍त करता हूं अब हमारे अन्‍य साथी इन विषयों को लेंगे. मैं कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्‍ताव को सर्व सम्‍मति से पास करने के लिये सदन से अनुरोध करता हूं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं, उनके कुशल नेतृत्‍व में हमारा प्रदेश निरंतर प्रगति की ओर बढ़ रहा है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह (लहार)-- माननीय सभापति जी, महामहिम राज्‍यपाल के अभिभाषण में पूरा पढ़ने के बाद यह प्रतीत होता है कि मध्‍यप्रदेश की सरकार मुख्‍यमंत्री न चलाकर प्रधानमंत्री चला रहे हैं. 22 बार लगातार प्रधानमंत्री जी का उल्‍लेख.

 

सभापति महोदय-- डॉ. साहब एक मिनट. राज्‍यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्‍ताव पर माननीय सदस्‍यों के संशोधनों की 983 सूचनायें प्राप्‍त हुई हैं. संशोधन विस्‍तृत रूप के हैं इसलिये पूरे संशोधन को न पढ़कर केवल उनके प्रस्‍तावकों के नाम और संशोधन क्रमांक ही पढूंगा. जो माननीय सदस्‍य सदन में उपस्थित होंगे उनके संशोधन प्रस्‍तुत हुये माने जायेंगे.

1. श्री विनय सक्‍सेना

2. श्री घनश्‍याम सिंह

3. श्री आरिफ मसूद

4. श्री आरिफ अकील

5. श्री लक्ष्‍मण सिंह

6. श्री प्रियव्रत सिंह

7. श्री नारायण सिंह पट्टा

8. श्री रवि रमेश चंद्र जोशी

9. श्री कमलेश्‍वर पटेल

10. श्री फुंदेलाल सिंह मार्को

11. श्री सज्‍जन सिंह वर्मा

12. श्री दिलीप सिंह गुर्जर

13. श्री मनोज चावला

14. श्रीमती सुनीता पटेल

15. श्री नीरज विनोद दीक्षित

16. श्री तरूण भनोत

17. कुं. विक्रम सिंह नातीराजा

18. श्री बाला बच्‍चन

19. श्री उमंग सिंघार

20. श्री सुनील सर्राफ

21. श्री आलोक चतुर्वेदी

22. श्री राकेश मावई

23. श्री पी.सी. शर्मा

24. श्री प्रताप ग्रेवाल

25. श्री मुरली मोरवाल

26. श्रीमती झूमा डॉ.ध्‍यानसिंह सोलंकी

27. डॉ. गोविन्‍द सिंह

28. श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति

29. श्री संजय यादव

30. डॉ. विजय लक्ष्‍मी साधौ

31. श्री कुणाल चौधरी

32. श्री शशांक श्रीकृष्‍ण भार्गव

33. श्री ओमकार सिंह मरकाम

34. श्री सतीश सिकरवार

 

माननीय सदस्‍य राज्‍यपाल के अभिभाषण पर चर्चा जारी रखें.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- माननीय सभापति महोदय, मैं इसलिये कह रहा हूं कि प्रधानमंत्री जी के मार्गदर्शन में, प्रधानमंत्री की कृपा से, प्रधानमंत्री के आशीर्वाद से, प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्‍व में, प्रधानमंत्री के सतत् और सक्रिय मार्गदर्शन में, प्रधानमंत्री की योजनाओं में, प्रधानमंत्री के कर कमलों के द्वारा शिलान्‍यासों में, उद्धघाटनों में और प्रधानमंत्री के सफल सतत् प्रयास से संचालन में मध्‍यप्रदेश सरकार चल रही है. इसलिये में यह कहना चाहता हूं कि यह सरकार प्रधानमंत्री चला रहे हैं या खड़ाउ सरकार है, जिस प्रकार राम के राज में भरत जी की बैठकर खड़ाउ लगाकर सरकार चल रही थी, क्‍या उसी प्रकार चल रही है? क्‍या हमारे मुख्‍यमंत्री इतने विद्वान और सक्षम नहीं है कि हर काम ऊपर से निर्देश मिले तभी यहां सरकार चले, हम चाहते हैं मुख्‍यमंत्री जी आप अपनी ताकत से सरकार चलाईये. आप बुजुर्गो का और सम्‍मानीयों का मार्गदर्शन लें, लेकिन हर जगह प्रधानमंत्री जी की कृपा पर नहीं अपनी कृपा पर भी प्रदेश को चलाईये.

माननीय सभापति महोदय, डॉ. सीतासरन शर्मा जी बहुत विद्वान सदस्‍य हैं, अध्‍यक्ष भी रहे हैं और हमारे सम्‍मानीय भी हैं, अभी वह लगातार वह बीस, पच्‍चीस, तीस साल पुरानी बातों का उल्‍लेख कर रहे थे. अब डॉक्‍टर साहब मैं आपसे पूछना चाहता हूं कि तीस साल पहले आप बच्‍चे थे अब दादा हो, तो क्‍या आप फिर बच्‍चा बनना चाहते हो ?

डॉ. सीतासरन शर्मा -- मतलब बिजली 4 हजार मेगावॉट पर ले आये हैं, आप क्‍या कह रहे हैं.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- सुनो, देश आगे बढ़ रहा है, आबादी बढ़ रही है, प्रगति चल रही है, यह विकास की सतत प्रक्रिया है, यह एक समय में नहीं होता है. आजादी जब हुई थी, तब यहां सुई भी नहीं मिलती, वह भी आती थी. अब आज वह पुरानी बातें, काहे को आप (XXX) कर रहे हो, आप कब तक करोगे ?

सभापति महोदय -- इस शब्‍द को विलोपित करें. सदस्‍यगण असंसदीय भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे, आप और हम सभी ने सहमति से, सर्वोनुमति से यह निश्चित किया था.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- चलो ठीक है, वैसे मैं करता नहीं हूं. (व्‍यवधान..)

सभापति महोदय -- किसी को अपमानित करने वाली बात न करें. (व्‍यवधान..)

मुख्‍यमंत्री( श्री शिवराज सिंह चौहान) -- डॉक्‍टर साहब वह अब विधवा नहीं है. अब वह बहनें कल्‍याणी हैं, इसलिये अब आप इस कहावत को बदल दीजिये (मेजों की थपथपाहट)

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- आप की बात स्‍वीकार है, लेकिन यह डॉक्‍टर साहब तीस साल पुरानी बात कर रहे हैं (हंसी).. माननीय सभापति महोदय, आज वास्‍तव में प्रदेश में प्रमुख समस्‍याएं जो हैं, जो आजकल सबसे ज्‍यादा दिक्‍कते हैं. आज फसलों का सही मूल्‍य न मिलने पर सबसे ज्‍यादा परेशान किसान है. महिलाएं मंहगाई से परेशान है और नौजवान बेरोजगारी से परेशान है और आम जनता भ्रष्‍टाचार से परेशान है. बिजली बिल भ्रष्‍टाचार के कारण है.

माननीय सभापति महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि लगातार, समस्‍याओं के चलते आज सबसे ज्‍यादा आज नौजवान बेरोजगार है, लोग पढ़ाई लिखते करते हैं, पहले व्‍यापमं था, अब पी.ई.बी. हो गया है, अब और नाम बदल रहा है. मेरा माननीय मुख्‍यमंत्री जी आपसे अनुरोध है, आप भी गांव के किसान है. आज भी मध्‍यप्रदेश की करीब 75 प्रतिशत से अधिक आबादी गांवों में बस्‍ती है. आपकी प‍रीक्षाएं आप करा रहे हो, बेरोजगार पढ़ लिखकर तैयार होकर आते हैं, पढ़ाई लिखाई करते हैं, उनके माता पिताजी तमाम पैसा कराकर इंजीनियरिंग पढ़ाते हैं, बी.ई.कराते हैं, तमाम बड़ी-बड़ी डिग्रियां लेते हैं, परंतु आज लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है. आज रोज शायद ही ऐसा कोई समाचार पत्र एक आध दिन छूटता हो, जिस दिन हमारे बच्‍चे बच्चियां जहर खाकर आत्‍महत्‍या न करने को मजबूर हो, कोई फांसी पर लटक गया है, यह आज पूरे प्रदेश की स्थिति है. पहले मैं आपसे यह निवेदन करना चाहता हूं कि पुराने समय में हमने एक संशोधन कमलनाथ जी की सरकार में किया था कि मध्‍यप्रदेश के निवासी, कानून में हम नहीं करते कानूनन, लेकिन रोजगार कार्यालय जो हैं. उन रोजगार कार्यालयों में जब पंजीबद्ध होगा, तब ही उसको रोजगार मध्‍यप्रदेश में मिलेगा. रोजगार कार्यालय में प्रदेश के बाहर के लोग जिला रोजगार कार्यालय में पंजीबद्ध नहीं होते हैं, तो यह प्रक्रिया आपने बन्‍द की है, उसको आप लागू करेंगे तो हमारे प्रदेश के लोगों को ही रोजगार मिलेगा और बाहर के कम से कम लोग आ पायेंगे. इस दिशा में माननीय मुख्‍यमंत्री जी आप विचार करें, सोचें.

सभापति जी, बच्‍चे पढ़ते-लिखते हैं, लेकिन आप परीक्षाएं भोपाल में करवाते हैं, बड़े महानगरों में करवा रहे हैं. एक बार में उनकी फीस भी ले रहे हैं और एक बच्‍चे को यहां आने पर जरूरी नहीं कि हर बार सफलता ही मिले, कभी असफलता भी मिलती है. उनके हजारों रुपये रहने में, ठहरने में, होटल में खर्च होते हैं, हर बच्‍चे के पास ऐसी व्‍यवस्‍था नहीं होती है. इसलिए जो जिला चयन समिति बोर्ड पहले चलते थे, आप उन्‍हें बनाइये. जो पीईबी है, उसको समाप्‍त करके जिला चयन बोर्ड बनाइये. वहां उसकी फीस भी कम लगेगी और आप जिला चयन बोर्ड में विद्वान शासकीय लोग जिनको रखना चाहें, रख लें. पीएससी या कोई भी बोर्ड बनाएं, उसके विद्वान, अच्‍छे योग्‍य और निष्‍ठावान अधिकारियों को रख सकते हैं ताकि वे भर्तियों में पारदर्शिता रखें. मैं आपसे बताना चाहता हूँ पुलिस में भर्तियां होती थी. आज भिण्‍ड, मुरैना की तरफ हमारे जिलों में वहां लोग पुलिस और मिलिट्री में जाते हैं. पहले वहां दौड़ लगाते थे. पहले यह प्रक्रिया थी कि आरक्षक भर्ती के लिए दौड़ हो, तो दौड़ में निकल जाते थे, पास हो जाते थे और अगर बाहर के लोग आ जाते थे, ज्‍यादा पैसे वाले लोग तो दौड़ में सिलेक्‍ट नहीं हो पाते थे. 100 में से 80-90 प्रतिशत गांव के मजदूर किसान के बेटे उसमें सिलेक्‍ट होते थे, फिर लिखित परीक्षा होती थी. परीक्षा में अगर आएंगे तो 90 प्रतिशत तो वही आएंगे और 10 प्रतिशत बाहर के भी आ जाएं, तो उनको भी रोजगार मिल जाता है. आपने आरक्षण प्रक्रिया लागू की है कि जो कमजोर एवं गरीब तबके के लोग हैं, अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग हैं, बरसों से दबे-कुचले लोग हैं, आप उनको आरक्षण दें. गांव के लोगों में, छोटे इलाकों में एवं छोटे कस्‍बों में आज ज्‍यादा बेरोजगारी बढ़ रही है. इसलिए मेरा निवेदन है कि 15 वर्ष तक तो किसी आरक्षक को तफ्तीश करने का अधिकार नहीं रहता है, तो जब इण्‍टर पास होते हैं तो 15 वर्ष बाद आप फीती लगाते हैं, तो कम से कम वह 15 वर्ष में तो तफ्तीश करना सीख जायेगा. गांव का एक बच्‍चा खेती-किसानी करके, भैंसों को धोकर, चारा लेकर, घर के पीने का पानी भरकर, तब आकर पढ़ाई-लिखाई करता है और वह 5,000 रुपये में इण्‍टर पास कर लेता है. जो पैसे वालों के बच्‍चे हैं, वह एक-एक महीने में 5-5,000 रुपये की ट्यूशन लगाए हुए हैं. अब आप इसमें कॉम्पिटिशन करवा&