मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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षोडश विधान सभा द्वितीय सत्र

 

 

फरवरी, 2024 सत्र

 

शुक्रवार, दिनांक 9 फरवरी, 2024

 

(20 माघ, शक संवत्‌ 1945)

 

 

[खण्ड- 2] [अंक- 3]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

शुक्रवार, दिनांक 9 फरवरी, 2024

 

(20 माघ, शक संवत्‌ 1945 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.01 बजे समवेत् हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

 

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- अध्‍यक्ष महोदय, कल आपने एक बहुत बड़ा निर्णय लिया और हमारा ध्‍यान चूक गया था, आज मैंने देखा तो मुझे लगा कि सदन में अगर आपको धन्‍यवाद नहीं दिया जायेगा तो शायद यह आपके साथ ज्‍यादती हो जायेगी. कल आपने जो निर्णय लिया है 805 प्रश्‍न जिनका कि अस्तित्‍व समाप्‍त हो गया था और आपने फिर से उनके उत्‍तर की अपेक्षा सरकार से की है और निर्देश भी दिये हैं कि उन 800 प्रश्‍नों के उत्‍तर आयेंगे, शायद मेरे ख्‍याल से मेरी जानकारी में इस प्रकार पहली बार कभी विधान सभा ने किया है कि जो प्रश्‍न करीब-करीब मृत हो गये थे उनको आपने फिर से जिंदा करके सरकार से जवाब मांगा है अध्‍यक्ष जी, मैं सदन की ओर से आपको धन्‍यवाद देता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय-- बहुत धन्‍यवाद.

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, यह अमृतकाल भी तो चल रहा है, अमृत सर्वत्र बंट रहा है.

 

 

 

 

 

 

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

प्रश्‍न संख्‍या-1 - (अनुपस्थित)

 

थाने को अपवर्जित किया जाना

[गृह]

2. ( *क्र. 767 ) श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. शासन गृह विभाग मंत्रालय वल्लभ भवन के आदेश क्र./01/1770880/2023/वी-3/दो भोपाल, दिनांक 02.01.2024 के अनुसार पुलिस थानों/चौकियों की सीमा निर्धारण किये जाने का प्रावधान है, जिसमें प्रश्‍नकर्ता के खरगापुर विधान सभा-47 के ग्राम-गुड़ा नज. पाली, मोररमन्‍ना, मगरई, पाली, फूलपुर, भटगोरा आदि ग्राम थाना खरगापुर से अपवर्जित (बदलकर) थाना जतारा में पूर्व की भाँति किये जाने हेतु ग्रामीणों के आवेदन पत्रों सहित प्रश्‍नकर्ता के पत्र क्र. 044, दिनांक 04.01.2024 को जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक, टीकमगढ़ को प्रस्ताव पत्र दिया है? क्या वर्णित ग्रामों को थाना जतारा में जोड़े जाने के आदेश जारी करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? (ख) क्या थाना जतारा में इन ग्रामों को जोड़े जाने से आम जनता की सुविधा अनुसार अनुविभागीय कार्यालय के कार्य, न्यायालय के कार्य, जेल के कार्य, स्वास्थ्य विभाग के कार्यों का लाभ आम जनता को प्राप्त होगा? क्योंकि थाना खरगापुर की दूरी अधिक है, जबकि जतारा थाना की दूरी कम है और वर्णित सभी शासकीय कार्यालयों से आम जनता के कार्य रहते हैं, इसलिये आम जनता के हितों को दृष्टिगत रखते हुये थाना खरगापुर से इन ग्रामों को अपवर्जित (बदलकर) थाना जतारा में जोड़े जाने का आदेश जारी कर आम जनता के कार्यों को सुगम कब तक कर दिया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री, गृह (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) : (क) जी हाँ। वर्ष 2021-2022 में सीमाओं के अधिकार क्षेत्र परिवर्तन हेतु प्रस्ताव/सुझाव जनप्रतिनिधियों एवं आमजन से प्राप्त हुए। तत्पश्‍चात ग्रामवासियों के पंचनामा/सुझाव प्राप्त कर जिला स्तरीय विचारण समिति के विचारण में रखा गया। जनता/जनप्रतिनिधियों की मांग ग्रामवासियों के पंचनामा प्रशासकीय भौगोलिक सुविधा क्षेत्र में गठित अपराधों में कानून व्यवस्था की स्थिति एवं कुशल पुलिस प्रबंधन को दृष्टिगत रखते हुए उक्त ग्रामों को दिनांक 11.05.2022 को थाना खरगापुर में जोड़ा गया। इसके विरूद्ध याचिकाकर्ता श्रीमती आशा सिंह गौर द्वारा म.प्र. राज्य व अन्य के विरूद्ध याचिका क्रमांक 12224/2022 वर्तमान में लंबित होकर मान. उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। प्रश्‍नकर्ता का प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। वर्णित ग्रामों को थाना खरगापुर में अपवर्जित कर थाना जतारा में जोड़े जाने के संबंध में मान. उच्च न्यायालय, जबलपुर के निर्णय के उपरान्त ही आवेदन पत्र पर कार्यवाही की जा सकेगी। (ख) उत्तरांश '''' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न जनता के हितों से जुड़ा हुआ है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा खरगापुर के 6 गांव फूलपुर, भटगोरा, मगरई, गुड़ा नज, पाली, मोररमन्‍ना को थाना खरगापुर से जोड़ दिया गया है. खरगापुर थाने की दूरी 30 से 35 किलोमीटर है, जतारा थाने की दूरी 5 से 10 किलोमीटर है, इसलिये इन गांवों को खरगापुर थाने से बदलकर जतारा थाने में जोड़ा जाये.

श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल-- आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं इस महान सदन में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं तो मैं अपने राष्‍ट्र का अपनी पार्टी संगठन का और अपने पूर्वजों का स्‍मरण करता हूं और आपको भी धन्‍यवाद देता हूं कि आपने मुझे सदन में बोलने का अवसर प्रदान किया और आपके अध्‍यक्ष बनने का मेरा भी बड़ा ताल्‍लुकात है वह भी बताना चाह रहा हूं कि जब आप युवा मोर्चा के अध्‍यक्ष थे तो मैं भी युवा मोर्चा में था, आप जब भाजपा के अध्‍यक्ष बने ...

उप नेता प्रतिपक्ष (श्री हेमंत कटारे)-- माननीय प्रश्‍नकाल का समय है कृपया कर आप इस महत्‍वपूर्ण समय को बाधित न करें, उनका उत्‍तर दीजिये.

श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल-- आप जब इस विधान सभा के अध्‍यक्ष बने हैं तो मैं प्रार्थना करता हूं कि आप बड़े-बड़े सदनों के अध्‍यक्ष बनते रहें.

अध्‍यक्ष महोदय-- उत्‍तर पर आ जायें मंत्री जी.

श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल-- हमारी सम्‍मानीय सदस्‍या ने जो प्रश्‍न किया उसमें उनकी जानकारी के लिये बताना चाहता हूं कि जो 6 गांव हैं उन गांवों में गुड़ा की दूरी 10 किलोमीटर कम हुई है, पाली गांव की 17 किलोमीटर कम हुई है, मगरई गांव की 12 किलोमीटर कम हुई है, मोररमन्‍ना की 15 किलोमीटर कम हुई है और फूलपुर की यथावत है और यह निर्णय तत्‍कालीन जनप्रतिनिधियों के सुझाव पर लिया गया है. धन्‍यवाद.

श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह असत्य है. 5 से 10 कि.मी. की दूरी पर खरगापुर थाना लगता है और अगर उनको अगर न्यायालय जाना है तो टीकमगढ़ जाना पड़ता है अगर एसडीओडी से काम पड़ता है तो टीकमगढ़ जाना पड़ता है तो टीकमगढ़ जाएंगे तो कहां से जाएंगे तो जतारा होते हुए जबकि जतारा में थाना,न्यायालय,एसडीओपी सभी काम उनका होता था इसीलिये जबर्दस्ती में यह गांव खरगापुर में जोड़े गये हैं. मेरा मुख्यमंत्री जी से निवेदन है कि थानों की बात आई थी इसीलिये मैंने अपना प्रश्न पूछा है और उन गांवों को जतारा थाना में जोड़ा जाए. उनको बहुत परेशानी है. मैं जब भी क्षेत्र में जाती हूं तो लोग मेरे सामने रोते हैं और कहते हैं कि हम पूरे जिले का भ्रमण करते हुए अपना काम करवा पाते हैं.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य अपने विधान सभा क्षेत्र के गांव निकालकर दूसरे विधान सभा क्षेत्र में भेजना चाहती हैं. अब यह उनका अपना सोच है परन्तु जो उन्होंने बात कही है तो मैं निवेदन करना चाहता हूं कि इसी विषय को लेकर श्रीमती आशा सिंह गौर द्वारा एक याचिका उच्च न्यायालय में लगाई गई है चूंकि उच्च न्यायालय में विचाराधीन मामला है इसीलिये इसमें अभी कोई भी टिप्पणी किया जाना उचित नहीं होगा.

श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सहमत हूं कि आशा सिंह द्वारा हाई कोर्ट में याचिका लगाई गई थी लेकिन याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लिये जाने का सहमति पत्र मुझे,एस.पी.साहब,कलेक्टर साहब को दिया गया है इसलिये माननीय मुख्यमंत्री महोदय ने जो निर्णय लिया है तो मेरे क्षेत्र के इन 6 गांवों को थाना खरगापुर से बदलकर थाना जतारा में जोड़े जाने का अनुरोध है आपसे.

अध्यक्ष महोदय - मंत्री जी कुछ कहना चाहेंगे.

उप नेता प्रतिपक्ष(श्री हेमंत कटारे) - (नेता प्रतिपक्ष के आसन से बोलते हुए) अध्यक्ष महोदय,आपका संरक्षण चाहूंगा.

सहकारिता मंत्री(श्री विश्वास सारंग) - अध्यक्ष महोदय,मेरा व्यवस्था का प्रश्न है. यह नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी से बो रहे हैं इनको समझा तो दीजिये. यह नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी से नहीं बोल सकते. अपनी कुर्सी से बोलिये. इनका प्रबोधन तो करवा दीजिये.

अध्यक्ष महोदय - हेमंत जी, नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री की कुर्सी नियत रहती है इसका ध्यान रखना चाहिये.

श्री हेमंत कटारे - (अपने आसन से बोलते हुए) अध्यक्ष महोदय,मैं आपका संरक्षण चाहूंगा. जो माननीय विधायक ने प्रश्न उठाया है उसमें न्यायालय की आड़ में माननीय मंत्री जी पूरे प्रश्न का सही उत्तर नहीं दे रहे हैं. पहली चीज यह कि जनता के हित में क्या है चूंकि जनता ने उनको चुनकर यहां प्रतिनिधि बनाकर भेजा है कि वे जनहित के कार्य करेंगी और जब वे चाह रही हैं तो न ही वहां के जो पुलिस अधिकारी हैं उनको इतना ज्ञान नहीं है जितना कि हमारी आदरणीय विधायक को होगा. एक तरफ न्यायालय वह अलग दिशा में है कलेक्ट्रेट अलग दिशा में है थाना अलग दिशा में है. इसीलिये मैं चाहूंगा कि आदरणीय विधायक से प्रस्ताव तो लिया जाना चाहिये.

अध्यक्ष महोदय - हेमंत जी, आपके मन में कोई पूरक प्रश्न है तो करो.

श्री हेमंत कटारे - अध्यक्ष महोदय,हमारी आदरणीय विधायक का प्रस्ताव लिये बिना उनके विधान सभा क्षेत्र में गांवों को बदला जाए यह गलत है.

अध्यक्ष महोदय - सम्माननीय विधायक ने प्रश्न किया. उसके बाद पूरक प्रश्न किया और फिर तीसरी बार भी वे बोलीं तो मैंने रोका नहीं क्योंकि महिला विधायक हैं उनकी अपनी पीड़ा सामने आनी चाहिये लेकिन सरकार जो उत्तर दे रही है उस उत्तर पर भी हमको ध्यान देना चाहिये. कोर्ट का निर्णय उन्होंने बताया. जो माननीय सदस्य के पास जानकारी है शायद वह सरकार के पास नहीं पहुंची हो.

श्री हेमंत कटारे - अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी यह कह रहे हैं कि कोर्ट का निर्णय आने तक रुकें.अब आप एक चीज समझिए. ऐसे तो हर व्यक्ति एक पिटीशन किसी भी विषय पर लगा देगा और हर मंत्री जवाब दे देगा कि वह कोर्ट में विचाराधीन है तो कभी कोई निर्णय ही नहीं होगा.

अध्यक्ष महोदय - हेमंत जी, प्रश्नकाल में हमको प्रश्नकाल की मर्यादा तक सीमित रहना पड़ेगा. प्रश्न करो, मंत्री का उत्तर सुनो. मंत्री जी कुछ कहना चाहते हैं.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं उप नेता प्रतिपक्ष से सहमत हूं कि जनप्रतिनिधि की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिये. यह जो निर्णय हुआ है. यह तत्कालीन विधायक माननीय राहुल लोधी जी के सुझाव पर तथा अन्य जनप्रतिनिधियों के सुझाव पर ही कलेक्टर समिति ने लिया है. अब जो नयी विधायक वहां से बनी हैं उनका प्रस्ताव आया है. उससे पहले चूंकि न्यायालय में विचाराधीन है तो उस पर कोई निर्णय नहीं कर सकता.

श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, याचिकाकर्ता ने अगर याचिका वापस लेने का प्रस्‍ताव दिया है तो इस पर केवल इतना कर दें कि जब वे याचिका कोर्ट से वापस ले लेंगी, तब आप ये 6 गांव जतारा में जोड़ेंगे क्‍या, इतना प्रश्‍न है महोदय आपसे.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- हमारे जिले का मामला है. वर्तमान में पूरे प्रदेश में युक्‍तियुक्‍तकरण का काम चल रहा है. आपके निर्देश पर चल रहा है, मुख्‍यमंत्री जी के निर्देश पर चल रहा है. अगर माननीय विधायक जी ने प्रस्‍ताव दिया है तो उसे मान लेने में आपको क्‍या दिक्‍कत है, आप पूर्व विधायक की बात कर रहे हैं, वर्तमान विधायक के प्रस्‍ताव को क्‍यों नहीं मान लेते आप ?

संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- मामला कोर्ट में है.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, कोर्ट में नहीं है. जिस दिन आप निर्णय ले लेंगे, वह कोर्ट से वापस ले लेंगी.

श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर -- कोर्ट से वापस लेने के लिए तैयार हैं.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- कोर्ट ने उस पर स्‍टे भी नहीं किया है.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- मुझे लगता है कि माननीय मंत्री जी ने बहुत स्‍पष्‍ट कहा है कि मामला सब-ज्‍यूडिश है, वह अगर वापस ले लें, उसके बाद विचार किया जा सकता है.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, यह आश्‍वासन आप दे दें.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- हो गया ना.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- कोर्ट से वापस ले लेंगे तो आप कर देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- वापस लेना तो चाहिए भई.

श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर -- वापस लेने के लिए तैयार हैं.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- पहले वापस ले लें, उसके बाद सरकार विचार करेगी.

अध्‍यक्ष महोदय -- संसदीय कार्यमंत्री जी का वक्‍तव्‍य मंत्रि-मण्‍डल की सामूहिक जिम्‍मेवारी के अंतर्गत आता है. संसदीय कार्यमंत्री ने कहा है तो हमें संतुष्‍ट होना चाहिए.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- वापस ले लें, उसके बाद सरकार विचार करेगी.

उद्योगों की स्‍थापना

[औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन]

3. ( *क्र. 885 ) श्री हरिशंकर खटीक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) टीकमगढ़ जिले के जतारा विधानसभा में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा उद्योग खोले जाने बाबत् प्रश्‍नकर्ता द्वारा कब-कब विधानसभा में प्रश्‍न किए गए हैं? कृपया सम्पूर्ण जानकारी दें एवं यह भी बताएं कि विभाग द्वारा उद्योग लगाने/खोले जाने हेतु शासन ने क्या-क्या मापदण्ड बनाए हैं? कृपया ऐसे समस्त आदेशों की छायाप्रतियां प्रदाय करें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के आधार पर यह बताएं कि इस विभाग के द्वारा प्रश्‍न दिनांक तक कोई उद्योग लगा हुआ है कि नहीं? अगर नहीं लगे हैं, तो क्या-क्या कारण हैं? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के आधार पर बताएं कि जनवरी 2020 से प्रश्‍न दिनांक तक कब-कब, कहां-कहां इन्‍वेस्टर्स मीट्स हुई हैं और किस-किस कार्य का किस उद्योगपति द्वारा कितनी-कितनी राशि का इन्वेस्ट किया गया है? कहां-कहां के उद्योग लगाने हेतु प्रश्‍न दिनांक तक क्या-क्या कार्यवाही हो चुकी है और क्या-क्या शेष है? कृपया प्रत्येक की अद्यतन जानकारी से अवगत कराएं। (घ) प्रश्‍नांश (क), (ख) एवं (घ) के आधार पर बताएं कि टीकमगढ़ जिले के जतारा विधानसभा क्षेत्र में जहां धसान नदी, सुखनई नदी, सपरार नदी एवं उर नदी बहती है, उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे इस क्षेत्र में विभाग द्वारा शासन द्वारा प्रश्‍न दिनांक तक उद्योग लगाने हेतु क्या-क्या पहल की जा चुकी है? निश्चित समय-सीमा सहित बताएं, कब तक जतारा विधानसभा क्षेत्र में बेरोज़गार को रोज़गार प्रदाय हेतु शासन उद्योग खोलने की स्वीकृति देगा?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन (श्री दिलीप अहिरवार) : (क) टीकमगढ़ जिले के जतारा विधानसभा में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन विभाग द्वारा उद्योग खोले जाने बाबत् प्रश्‍नकर्ता द्वारा प्रश्‍न क्रमांक 560 (सत्र फरवरी, 2019), 982 (सत्र फरवरी, 2022), 672 (सत्र दिसम्‍बर, 2022) एवं 2246 (सत्र फरवरी, 2023) विधानसभा में प्रश्‍न किए गए हैं। उद्योगों की स्‍थापना उद्यमियों/निवेशकों द्वारा की जाती है तथा राज्‍य शासन द्वारा नीति अंतर्गत भूमि एवं अन्‍य सुविधाएं उपलब्‍ध करायी जाती हैं। (ख) जी नहीं। विधानसभा क्षेत्र जतारा, जिला-टीकमगढ़ में विभाग के अधीन एम.पी. इण्‍डस्‍ट्रि‍यल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा कोई औद्योगिक क्षेत्र स्‍थापित नहीं किया गया है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के आधार पर जनवरी 2020 से प्रश्‍न दिनांक तक औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन विभाग के अंतर्गत इन्‍वेस्‍टर मीट का आयोजन नहीं किया गया है। अत: शेष प्रश्‍नांश की जानकारी निरंक है। (घ) विभाग द्वारा उद्योग स्‍थापित नहीं किया जाता है, अपितु निवेशकों को औद्योगिक इकाई स्‍थापित करने हेतु प्रोत्‍साहित किया जाता है।

श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम सबसे पहले अपने मुख्‍यमंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहते हैं. उन्‍होंने मध्‍यप्रदेश के प्रत्‍येक जिले में उद्योग स्‍थापित करने के लिए संभागीय बैठकें जो हुई हैं, उनमें बहुत अच्‍छी पहल की है कि हम हर जिला मुख्‍यालयों के माध्‍यम से वहां पर उद्योग लगाने के लिए पहल करेंगे. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी जो हम आपसे प्रश्‍न करना चाहते हैं, वह यह है कि टीकमगढ़ जिले का चाहे टीकमगढ़ रेलवे स्‍टेशन हो, चाहे झांसी रेलवे स्‍टेशन हो, चाहे हरपालपुर रेलवे स्‍टेशन हो, जब भी हम यात्रा करने के लिए कहीं भी जाते हैं तो वहां पर रेलवे स्‍टेशनों पर हमारे टीकमगढ़ जिले के लोग बाहर पलायन करने के लिए जाते हैं. जबकि हमारे टीकमगढ़ जिले में खनिज का अपार भण्‍डार है और खनिज के उद्योग न होने के कारण हमारे जिले के लोग अपना पेट पालने के लिए बाहर जाते हैं. सबसे पहले हमारा प्रश्‍न माननीय मंत्री जी से यह है कि जिस प्रकार से मध्‍यप्रदेश के हर जिले में जिला व्‍यापार एवं उद्योग केन्‍द्र स्‍थापित हैं तो उसी प्रकार से औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन विभाग के कार्यालय क्‍या हर जिले में खोले जाएंगे, यह हम माननीय मंत्री से पूछना चाहते हैं.

श्री दिलीप अहिरवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले तो मैं सदन में पहली बार बोल रहा हूँ तो माननीय अपने मुख्‍यमंत्री जी का धन्‍यवाद करना चाहूँगा. अध्‍यक्ष महोदय, आपका भी धन्‍यवाद कि मुझे बोलने का अवसर मिला है. माननीय विधायक जी, यह बात सही है कि टीकमगढ़ में औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन विभाग का औद्योगिक केन्‍द्र नहीं है. हम लोग इसका प्रयास कर रहे हैं. यह बात भी सही है कि बुंदेलखण्‍ड में खनिज का भण्‍डार है और पलायन हो रहा है, इस पर हम विचार कर रहे हैं. निश्‍चित रूप से इस पर विचार करके हम औद्योगिक केन्‍द्र खोलने का प्रयास करेंगे.

श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारा यह प्रश्‍न था कि जैसे जिला व्‍यापार एवं उद्योग केन्‍द्र जो हर जिले में हैं, वैसे औद्योगिक नीति एवं निवेश वाले जो केन्‍द्र हैं, वृहद उद्योग लगाने के लिए, क्‍या वह कार्यालय खोले जाएंगे, यह हमारा प्रश्‍न था.

श्री दिलीप अहिरवार -- माननीय सदस्‍य महोदय जी, हमारी जो इन्‍वेस्‍टर्स मीट सम्‍मिट होती है, उसमें भी हम ये उद्योग खोलने का विषय रखेंगे और निश्‍चित रूप से प्रयास करेंगे कि टीकमगढ़ में उद्योग खुलें.

श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय...

अध्‍यक्ष महोदय -- हरिशंकर जी, दोनों सप्‍लीमेंट्री हो गए हैं और मुझे लगता है कि मंत्री जी ने संतोषजनक उत्‍तर दिया है. आप व्‍यक्‍तिगत भी मिल सकते हैं.

श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वह तो बात आई नहीं कि औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्‍साहन विभाग का जो कार्यालय है, वह हर जिले में खुलेगा या नहीं खुलेगा, यह बात तो आई नहीं. लेकिन उनकी बात से हम संतुष्‍ट हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा यह है कि हमारे प्रश्‍न के उत्‍तर में बताया गया कि ....

अध्‍यक्ष महोदय -- हरिशंकर जी, आप पुराने सदस्‍य हैं. प्रश्‍न पर पहला और दूसरा, दो ही सप्‍लीमेंट्री किए जा सकते हैं. यह भाषण वाला सत्र नहीं है.

श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारा यह प्रश्‍न बहुत महत्‍वपूर्ण है.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, अब रहने दीजिए.

श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ठीक है. आपको और मंत्री जी को धन्‍यवाद.

आंगनवाड़ी भवनों की स्थिति व योजनाओं का क्रियान्‍वयन

[महिला एवं बाल विकास]

4. ( *क्र. 898 ) श्री देवेन्द्र पटेल : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) रायसेन जिले में वर्तमान में परियोजनावार कितने आंगनवाड़ी केन्‍द्र शासकीय भवनों में संचालित हैं? क्‍या इन आंगनवाड़ी भवनों में स्‍वच्‍छ पेयजल व्‍यवस्‍था व‍ विद्युत कनेक्‍शन हैं? किन-किन में हैं, किन-किन में नहीं? पेयजल व्‍यवस्‍था व विद्युत व्‍यवस्‍था हेतु क्‍या प्रयास किये जा रहे हैं व कब तक उक्‍त सुविधायें उपलब्ध करा दी जावेंगी? (ख) रायसेन जिले में बच्‍चों को कुपोषण मुक्‍त करने के लिए राष्‍ट्रीय पोषण मिशन व अन्‍य विभागीय योजनाओं के अंतर्गत गत दो वर्षों में क्‍या-क्‍या प्रयास किये गये? क्‍या इन प्रयासों के फलस्‍वरूप जिले में कुपोषित बच्‍चों की संख्‍या में कमी हुई है? यदि नहीं, तो क्‍यों? कुपोषण मुक्ति के लिये जिले में गत दो वर्षों में किस-किस कार्य में कितनी राशि व्‍यय की गई? (ग) क्‍या रायसेन जिला मीजल्‍स मुक्‍त है? यदि नहीं, तो डी.पी.टी./मीजल्‍स बूस्‍टर लगाये जाने हेतु क्‍या योजना है? इस हेतु क्‍या कार्यवाही प्रचलित है?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( सुश्री निर्मला भूरिया ) : (क) रायसेन जिले में वर्तमान में परियोजनाओं में 1141 आंगनवाड़ी केन्द्र शासकीय भवनों में संचालित हैं। इन केन्द्रों में स्वच्छ पेयजल व्यवस्था व 419 आंगनवाड़ी भवनों में विद्युत कनेक्‍शन हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। विद्युत व्यवस्था हेतु विद्युत वितरण कम्पनी से कनेक्‍शन हेतु निरन्तर प्रयास किये जा रहे हैं। सुविधाएं उपलब्ध कराने के संबंध में निश्चित समय-सीमा दिया जाना संभव नहीं है। (ख) पूरे प्रदेश के अनुरूप रायसेन जिले में भी कुपोषण निवारण हेतु मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्द्धन कार्यक्रम (M.M.B.A.S.K.) का क्रियान्वयन किया जा रहा है, साथ ही राष्ट्रीय पोषण मिशन अंतर्गत पोषण माह एवं पोषण पखवाड़े के आयोजन किये गये हैं। जी हाँ। कुपोषण मुक्ति हेतु मुख्यमंत्री बाल आरोग्य संवर्द्धन कार्यक्रम (M.M.B.A.S.K.) अंतर्गत राशि का आवंटन/व्यय नहीं किया गया है। राष्ट्रीय पोषण मिशन अंतर्गत उल्लेखित गतिविधियों हेतु व्यय राशि का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जी हाँ। रायसेन जिले में डी.पी.टी. मीजल्स टीकाकरण, नियमित टीकाकरण के रूप में किया जाता है एवं समय-समय पर विशेष अभियान चलाकर टीकाकरण किया जाता है।

श्री देवेन्‍द्र पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे रायसेन जिले में 2,000 आंगनवाड़ी केन्‍द्र हैं, जिसमें से मात्र 1,141 में भवन हैं और 1,141 भवन में मात्र 419 में विद्युत कनेक्‍शन हुए हैं, साथ ही जो विभाग के द्वारा जवाब आया है कि प्रत्‍येक आंगनवाड़ी केन्‍द्र में पानी की समुचित व्‍यवस्‍था है जबकि हमारे यहां सिलवानी विधान सभा क्षेत्र में करीब 15 गांव ऐसे हैं, जहां पर डेढ़-दो किलोमीटर दूर से बैलगाड़ी से पानी की टंकी से आज भी गांव के लोग जनवरी के बाद पीने का पानी लाते हैं, तो फिर उन आंगनवाड़ी केन्‍द्रों में पानी की समुचित व्‍यवस्‍था कैसे हो पाती है ? माननीय मंत्री जी बताएं.

उच्‍च शिक्षा मंत्री (श्री इन्‍दर सिंह परमार) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रायसेन जिले में कुल 1,858 केन्‍द्र स्‍वीकृत हैं, उसमें 1,462 आंगनवाड़ी केन्‍द्र हैं और 396 मिनी आंगनवाड़ी केन्‍द्र हैं, इनमें से 1,141 आंगनवाड़ी केन्‍द्र शासकीय भवनों में संचालित हैं, बाकि कुछ अन्‍य शासकीय भवनों को हमने लिया है और कुछ किराये में संचालित हैं. पानी का यह विषय महत्‍वपूर्ण है, जहां पर हैंडपंप लगे हुए हैं, जहां अपनी बिल्डिंग हैं, वहां व्‍यवस्‍था की गई है, कुछ जगह पर कुएं से पानी की व्‍यवस्‍था की गई है लेकिन कुछ जगह पर पानी दूर से भी लाकर, आंगनवाडि़यों में जो बच्‍चे आते हैं, उनके लिए पानी की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था की गई है. इसलिए उत्‍तर में जो लिखा गया है, वह सही लिखा है कि मैनुअल व्‍यवस्‍था करके बच्‍चों तक पानी बुलवाने की व्‍यवस्‍था की गई है.

श्री देवेन्‍द्र पटेल - अध्‍यक्ष महोदय, जहां गांव के लोग बैलगाड़ी से पानी लाते हैं, वहां आंगनवाड़ी वालों ने किस चीज से पानी लाने की व्‍यवस्‍था की है. मंत्री जी यह बताने का कष्‍ट करेंगे.

श्री इन्‍दर सिंह परमार - अध्‍यक्ष महोदय, जैसे गांव के लोग दूर से पानी लाते हैं, वैसे आंगनवाड़ी के लिए भी व्‍यवस्‍था करनी पड़ती है तो टैंकरों से वहां पानी बुलवाने की व्‍यवस्‍था की जाती है.

श्री देवेन्‍द्र पटेल - अध्‍यक्ष महोदय, उसके लिए क्‍या शासन ने कुछ आवंटन किया है, जिससे वह पानी ला सकें क्‍योंकि ऐसी व्‍यवस्‍था है नहीं.

श्री इन्‍दर सिंह परमार - यहां से निर्देश हैं. सभी आंगनवाड़ी केन्‍द्र में पर्याप्‍त पानी की व्‍यवस्‍था होनी चाहिए और वहां जिला कलेक्‍टर और आंगनवाड़ी के अधिकारी को मिलकर वैकल्पिक व्‍यवस्‍था करनी पड़ती है, तो वह व्‍यवस्‍था वहां पर करते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, आप कलेक्‍टर को अवगत करा दें. अगर कोई दिक्‍कत आ रही है, तो उसको दूर करें.

श्री इन्‍दर सिंह परमार - जी, अध्‍यक्ष जी. ऐसी जगह यदि कोई हो तो बता दीजिये. हम कलेक्‍टर को एक बार बोल देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय - देवेन्‍द्र जी, आप आंगनवाड़ी का नाम मंत्री जी को बता दीजिये.

श्री देवेन्‍द्र पटेल - जी हां.

श्री भंवर सिंह शेखावत - माननीय अध्‍यक्ष जी, माननीय सदस्‍य का जो प्रश्‍न है, वह बहुत गंभीर है. आधे से ज्‍यादा ऐसी आंगनवाडि़यां हैं, जहां पर आज भी कलेक्‍टर से बोलें कि आप साधन उपलब्‍ध करवाइये, वह कहते हैं कि हमारे पास इसके लिए फण्‍ड नहीं है, इसके लिए कोई पैसा नहीं दिया गया है. आदरणीय मंत्री जी, जब तक इसके लिए कोई राशि सुनिश्चित नहीं की जायेगी और कलेक्‍टर को इसके आदेश नहीं दिए जाएंगे, गांव के अन्‍दर आंगनवाडि़यों में बहुत बुरी स्थिति होने वाली है.

श्री इन्‍दर सिंह परमार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों में पेयजल के निर्देश हैं, हम समय-समय पर वहां बोर भी करते हैं, लेकिन क्‍योंकि गर्मी के समय पर जल स्‍त्रोत सूख जाते हैं और उस समय जो दिक्‍कत आती है, उसकी वैकल्पिक व्‍यवस्‍था की जाती है. मैं आपको बता देना चाहता हूँ कि जिस प्रकार से आंगनवाड़ी के भवनों की जो कमी थी, अभी हमको प्रधानमंत्री जनमन योजना में 194 भवनों को भारत सरकार द्वारा 12 लाख रुपये प्रति आंगनवाड़ी के मान से स्‍वीकृत किए गए हैं, भविष्‍य में उन सबको, क्‍योंकि भविष्‍य में आंगनवाड़ी शिक्षा का केन्‍द्र बनने वाली है, इसलिए स्‍कूलों के पास जगह देखकर उनका भी निर्माण करने के विभाग ने निर्देश दिए हैं, आगे जाकर पानी की जो व्‍यवस्‍था है, वह भी पूर्ण रूप से इन केन्‍द्रों में की जायेगी.

 

11.19 बजे स्‍वागत उल्‍लेख

डॉ. गौरीशंकर शेजवार, पूर्व मंत्री के सदन में उपस्थिति पर स्‍वागत

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दर्शक दीर्घा में डॉ. गौरीशंकर शेजवार जी यहां उपस्थित हैं. सदन उनकी उपस्थिति को रिकॉग्‍नाइज करता है. (मेजों की थपथपाहट)

अध्‍यक्ष महोदय - डॉ. गौरीशंकर शेजवार जी, इस सदन के बहुत ही वरिष्‍ठ सदस्‍य रहे हैं एवं वर्षों तक सरकार में एक सफलतम मंत्री के रूप में काम उनके द्वारा किया गया है. मैं सदन की ओर से उनका बहुत स्‍वागत करता हूँ और अभिनन्‍दन करता हूँ. (मेजों की थपथपाहट)

 

 

 

 

 

11.20 बजे

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर (क्रमश:)

अवैध रूप से रेत उत्खनन

[खनिज साधन]

5. ( *क्र. 132 ) श्री सुरेश राजे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला ग्वालियर में किस-किस स्थान की रेत खदानें स्वीकृत हैं? इनमें से किस-किस स्थान की रेत खदान किस ठेकेदार/फर्म को कब से कब तक के लिए कितनी राशि में दी गई? प्रत्येक रेत खदान का सर्वे नंबर एवं रकबा बतावें एवं अनुबंध पश्चात ठेकेदार/फर्म को प्रतिमाह कितनी-कितनी राशि जमा की जानी है? दिनांक 31 जनवरी, 2024 तक प्रत्येक रेत खदान से प्रतिमाह कितनी-कितनी राशि प्राप्त हुई? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार क्या नदी में पनडुब्बी डालकर रेत खनन करने एवं कृषि कार्य हेतु ट्रैक्टर-ट्रॉली से रेत परिवहन का प्रावधान है? यदि नहीं, तो रेत परिवहन कर रहे ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली के फिटनेस, बीमा, ड्राईवर लाइसेंस की जांच कब-कब की गयी? वर्ष 2022-23 में प्रश्‍न दिनांक तक दोषी पाए गए किस व्यक्ति के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई? (ग) जिला ग्वालियर में सिंध नदी से रेत परिवहन ट्रक/डंपर/ट्रैक्टर द्वारा कितना-कितना घन मीटर तथा कितनी-कितनी रॉयल्टी ली जा रही है? नियम आदेश की सत्यापित प्रति सहित बतावें।

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री, खनिज साधन (श्री दिलीप अहिरवार) : (क) प्रश्‍नांश अनुसार ग्‍वालियर जिले में रेत खदानों के संबंध में वांछित विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। अनुबंध निष्‍पादन उपरांत ठेकेदार/फर्म द्वारा प्रतिमाह जमा की जाने वाली राशि का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) मध्‍यप्रदेश रेत (खनन, परिवहन, भण्‍डारण तथा व्‍यापार) नियम, 2019 के तहत नदी में पनडुब्‍बी डालकर रेत खनन करने का नियमों में प्रावधान नहीं है। कृषि कार्य हेतु ट्रैक्टर-ट्रॉली से रेत परिवहन नियमान्‍तर्गत प्रतिबंधित नहीं है। रेत परिवहन कर रहे ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली की फिटनेस, बीमा, ड्रायवर लायसेंस की जांच का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। वर्ष 2022-23 में प्रश्‍न दिनांक तक दोषी पाए गए व्‍यक्तियों के विरूद्ध की गई कार्यवाही का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) प्रश्‍नांश अनुसार वाहनों के परिवहन क्षमता के अनुरूप ई-खनिज पोर्टल पर वाहनों के पंजीयन अनुसार प्रति घनमीटर रूपए 307.67/- की दर से देय राशि ली जा रही है। मध्‍यप्रदेश रेत (खनन, परिवहन, भण्‍डारण तथा व्‍यापार) नियम, 2019 के नियम 17 (9) की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

श्री सुरेश राजे- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न सरकार के साथ ही जनता के हितों से जुड़ा प्रश्‍न है. वैसे तो पूरे प्रदेश का मामला है लेकिन मैंने प्रश्‍न अपनी डबरा- भितरवार विधान सभा को लेकर पूछा है. वहां बड़े पैमाने पर रेत का अवैध उत्‍खनन जारी है. कई बार शासन स्‍तर पर, स्‍थानीय शासन स्‍तर पर, मेरे द्वारा लगातार शिकायत की गई है लेकिन कार्यवाही के नाम पर कोई पनडुब्‍बी या बहुत हुआ तो किसी ऐसी ट्रैक्‍टर-ट्रॉली को पकड़कर थाने में रख लिया जाता है, जिसकी कोई सिफारिश नहीं होती है. मेरा निवेदन है कि मेरे प्रश्‍न के जवाब में मंत्री महोदय ने बताया है कि इतनी वैध खदानें हैं. मैं, मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि कितनी वैध खदानें चल रही हैं और कितनी अवैध खदानें वहां संचालित हैं ?

श्री दिलीप अहिरवार- माननीय सदस्‍य महोदय जी, मैं, आपको बताना चाहता हूं कि जिस प्रकार आपने खनिज को लेकर प्रश्‍न किया है. हमारी सरकार द्वारा निश्चित रूप से जहां-जहां भी चाहे आपके जिले में हो, विधान सभा में हो या प्रदेश में कहीं भी हो, जहां भी ऐसा मामला आता है चाहे पनडुब्‍बी का मामला आता है या कोई अन्‍य, जो खनिज के उत्‍खनन को लेकर प्रकरण आते हैं तो निश्चित रूप से हमने उस पर कार्यवाही की है और उसका पूरा विवरण भी हमने आपके पास व्‍यक्तिगत रूप से भी पहुंचाने का प्रयास किया है. मैं व्‍यक्तिगत रूप से पूरे जिलेवार और आपके क्षेत्र की जानकारी, आपके पास पहुंचा दूंगा कि कितने प्रकरण हमने वहां दर्ज किए है और कितने उत्‍खनन चल रहे हैं. यह पूरी जानकारी मैं आपको उपलब्‍ध करवा दूंगा.

श्री सुरेश राजे- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने मुझे, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में जो जानकारी दी है, इन्‍होंने कहा है कि लिदौराखान खदान वैध है जबकि वास्‍तव में इस खदान से कोई रेत नहीं उठाई जा रही है बल्कि इसके एवज़ में इसे छोड़कर, किसी अन्‍य जगह से, जिसकी कोई लीज़ नहीं है, जिसका कोई सर्वे नंबर नहीं है, वहां से अवैध रूप से रेत उठाई जा रही है.

इसके अतिरिक्‍त मंत्री जी ने कहा है कि गजापुर खदान वैध है लेकिन आप मौके पर जाकर देखिये, गजापुर से कोई बालू नहीं उठाई जा रही है. इसके स्‍थान पर किसी अन्‍य जगह से जिसका कोई सर्वे नंबर नहीं है, वहां से लगातार बालू उठाई जा रही है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न, मंत्री जी से यह है कि मैं, आपकी जानकारी में यह बात ला दूं कि यह केवल अवैध उत्‍खनन का मामला नहीं है, इसके कारण करोड़ों रुपये की सड़कें, जो सरकार मुश्किल से एक बार किस्‍मत से ग्रामीण सड़कों का निर्माण करवाती है, वे करोड़ों रुपयों की सड़कें इस अवैध उत्‍खनन के कारण खराब हो रही है.

चाहे पुट्टी की सड़क हो, चाहे रायपुर सड़क हो, चाहे भीरमराना सड़क हो, चाहे देवगढ़-भारकरी की सड़क हो, चाहे सेमरी-सुखलियारी की सड़क हो.

यह है कि जितनी अवैध खदानें चल रही हैं उन्‍हें तत्‍काल बंद करवाया जाये.

दूसरा कहीं भी पनडुब्‍बी डालकर रेत खनन का कोई नियम नहीं है, वहां पोकलेन डाली जा रही है और अगर कोई इनकी शिकायत करता है.

अध्‍यक्ष महोदय- आप क्‍या पूछना चाह रहे हैं, कृपया वह बतायें.

श्री सुरेश राजे- अध्‍यक्ष महोदय, मैं, यह पूछना चाह रहा हूं कि मंत्री जी ने जवाब दिया है कि अवैध खदानें नहीं चल रही है. मेरा निवेदन है कि मेरे सामने यह शिकायतकर्ता का पत्र है, जो देवगढ़ का सरपंच भी है. जब इसने शिकायत की तो अवैध खनन करने वालों ने उसके घर जाकर धौंस दी, उससे कहा कि इस रिपोर्ट को वापस लें. यह स्थिति पूरे जिले में है.

अध्‍यक्ष महोदय- माननीय मंत्री जी.

श्री दिलीप अहिरवार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, आपकी जानकारी में लाना चाहता हूं और सदस्‍य महोदय को भी बताना चाहता हूं कि ग्‍वालियर जिले के अंदर हमारे पास लगभग 45 शिकायतें आयीं और इनमें से हमने लगभग 28 शिकायतों पर पंजीकृत प्रकरण दर्ज किये. निश्चित रूप से आप सही कह रहे हैं कि पनडुब्‍बी से बालू निकालना सही नहीं है. हम लोग भी कहते हैं, मगर जहां भी हम लोगों को शिकायत मिलती है हम उसका प्रकरण दर्ज करते हैं, मुकदमा बनाते हैं और मैं एक बात और जानकारी में लाना चाहता हूं कि हमारी सरकार का एक और कदम है इसके लिए मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि अवैध उत्‍खनन रोकने के लिए हम लोग जहां मध्‍यप्रदेश में ज्‍यादा खनिज है वहां ऐसे 40 इलेक्‍ट्रानिक बैरियर बना रहे हैं जहां पर कैमरे लगे रहेंगे और वहां पर उसकी एक-एक जानकारी कि कौन सी बालू अवैध है सब उस इलेक्‍ट्रानिक बैरियर में आ जाएगा. इसके लिए मैं मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि खजिन की रोकथाम के लिए उन्‍होंने बहुत ही अच्‍छा कदम उठाया है.

श्री सुरेश राजे-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन है.

अध्‍यक्ष महोदय-- सुरेश जी सप्‍लीमेंट्री हो गया, सेकेण्‍ड सप्‍लीमेंट्री हो गया और अब थर्ड सप्‍लीमेंट्री भी हो गया. आप कृपया बैठ जाएं.

श्री सुरेश राजे-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं केवल एक मिनट का समय चाहता हूं. मेरे सामने कागज है.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपको सदन की मर्यादा बनाकर रखना पड़ेगी.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं कि माननीय मंत्री जी ने जवाब जरूर दिया है, लेकिन वास्‍तविकता यह है कि आप जो कार्यवाही करते हो, कहते हो कि वह कार्यवाही शिकायत के ऊपर करते हैं. आपका पूरा अमला आपके पास में है. आपको शिकायत करने या करवाने की जरूरत नहीं पड़ती है, आपको कार्यवाही करना चाहिए. कल मैंने राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण में यह बात बोली कि जहां जो रेत खदानों की नीलामी हुई उस सीमा से हटकर अवैध रूप से रेत उठाई जा रही है और एक रॉयल्‍टी में चार-चार ट्रिप चार-चार डम्‍पर निकाले जा रहे हैं इस पर रोक कौन लगाएगा? मंत्री जी कह रहे हैं कि मुख्‍यमंत्री जी का धन्‍यवाद देता हूं कि आगे जाकर टोल नाके लगेंगे यह तो बाद की बात है वर्तमान की स्थिति में जितने अवैध उत्‍खनन हो रहे हैं आप भी समझ रहे हैं, मैं भी समझ रहा हूं कि इस पर रोक नहीं लग रही है. मंत्री जो यथार्थ सच्‍चाई है, उसे आप स्‍वीकारें और इस अवैध उत्‍खनन को आप रोकें.

श्री दिलीप अहिरवार-- माननीय सदस्‍य महोदय जी मैंने आपको पहले भी बताया कि ग्‍वालियर जिले में जहां-जहां शिकायत आई है 28 प्रकरण बने हैं और जहां-जहां शिकायत होगी वहां प्रकरण बनाएंगे और मैं आपको फिर कहना चाहता हूं कि जो कदम हमारे उठाए जा रहे हैं वर्ष 2003 के पहले आपकी स्थिति क्‍या थी?

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-- कोई शिकायत करेगा तब आप कार्यवाही करेंगे यह कौन सी बात है. (व्‍यवधान)

श्री दिलीप अहिरवार-- हम तो कार्यवाही कर रहे हैं. (व्‍यवधान)

श्री रजनीश हरवंश सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अवैध उत्‍खनन हो रहा है और कोई कार्यवाही नहीं हो रही है. पोकलेन चल रही हैं कोई सख्‍ती नहीं हो रही है. (व्‍यवधान)

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-- अध्‍यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश की स्थिति खराब है.

अध्‍यक्ष महोदय-- शेखावत जी अपनी बात कहें.

श्री भवंर सिंह शेखावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश की दृष्टि से यह विषय बहुत ही गंभीर है. रेत माफिया, खनन माफिया लगातार इस प्रदेश के अंदर अवैध खुदाई और अवैध खनन के अंदर लिप्‍त हैं. हमारे कई अधिकारी उनको रोकने जाते हैं तो उन पर बुल्‍डोजर, जेसीबी और जीपों के नीचे दबाकर उनकी हत्‍या कर दी गई है. ऐसे कई गंभीर प्रकरण हैं. रेत माफिया और खनन माफिया की हालत यह है कि वह न तो शासन को मानता है और न ही प्रशासन को मानता है. मैं आपको धार जिले के मेरे विधान सभा क्षेत्र की बात बताता हूं चार करोड़ रुपए की अवैध उत्‍खनन की राशि न रॉयल्‍टी दी गई, न पंचायत को पैसा दिया गया, न राज्‍य शासन के अंदर और आपके यहां का पूर्व मंत्री अवैध खनन करता रहा यह मैं कलेक्‍टर के संज्ञान में लाया हूं. आपके विभाग के अधिकारियों को लिखकर दिया है कि धार जिले की बदनावर विधान सभा के अंदर पुराने मंत्री ने कम से कम चार करोड़ रुपए की रॉयल्‍टी चोरी की है.

श्री तुलसीराम सिलावट-- जो इस सदन में नहीं है उसका उल्‍लेख क्‍यों कर रहे हैं.

श्री भवंर सिंह शेखावत-- माननीय श्रीमान आप जरा बैठ जाइए. वह आपका पुराना मित्र है. मेरा यह कहना है कि यह केवल एक विधान सभा क्षेत्र का झगड़ा नहीं है. रेत माफिया पूरे प्रदेश के अंदर हैं. नर्मदा को तो पूरा खोदकर रख दिया है. कौन माई का लाल बोल रहा है मुझे बताएं. जो अधिकारी जाते हैं उनको बुल्‍डोजर के नीचे और जीपों से घसीटकर मार दिया गया है. आज तक आपने कौन सी कार्यवाही की है. पूरा प्रदेश लुट रहा है और मंत्री जी मेरी आपसे मांग है कि आप पूरे प्रदेश के अंदर जो शिकायतें आईं हैं उनकी जांच करवाइए. चाहें तो आप अलग से एक कमेटी बना दीजिए. कांग्रेस और भाजपा की संयुक्‍त कमेटी बनाइए. कोई सुन नहीं रहा है. अधिकारी तो जाते हैं. अधिकारियों को क्‍या दोष देना. अधिकारियों का मर्डर हो रहा है. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय--शेखावत जी आप मंत्री जी को बोलने तो दीजिए.

श्री सोहनलाल बाल्मीक -- मंत्री जी यह जवाब दें कि कार्यवाही करेंगे. मेरा अवैध उत्खनन को लेकर आवेदन लगा हुआ है. आज तक उस पर कार्यवाही नहीं की है. (व्यवधान)

श्री महेश परमार -- मेरे विधान सभा क्षेत्र में 50 करोड़ की बात है, इनके विधान सभा क्षेत्र में तो 4 करोड़ की बात है. (व्यवधान)

श्री सोहनलाल बाल्मीक -- यह विभाग माननीय मुख्यमंत्री जी के पास है उनको इसका जवाब देना चाहिए.

श्री महेश परमार -- पूरे मध्यप्रदेश का लॉ एंड ऑर्डर बिगाड़ रखा है. माननीय मुख्यमंत्री जी को इस बात जवाब देना चाहिए. यह पहली बार के मंत्री क्या जवाब देंगे. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय -- प्लीज एक मिनट सुन लीजिए. कुल मिलाकर सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी होती है. राज्यमंत्री जी को मुख्यमंत्री जी ने अधिकृत किया है. वे मुख्यमंत्री जी द्वारा अधिकृत होने के कारण जवाब दे रहे हैं. अब यदि हम सब लोग एक साथ बोलेंगे तो न तो प्रश्न और न ही जवाब समझ में आएगा. मुझे इतनी देर की बहस से यह समझ में आ रहा है कि कुल मिलाकर पक्ष भी चिंतित है और विपक्ष भी चिंतित है. दोनों ही गंभीर हैं फिर भी हल क्यों नहीं निकल रहा है. कैलाश जी आप बोलें.

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्यक्ष जी, मंत्री जी ने अपने उत्तर में बहुत स्पष्ट किया है कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने इलेक्ट्रानिक कैमरे लगाकर 40 स्थानों पर इस प्रकार टोल नाके लगाने की व्यवस्था की है. मैं सरकार की ओर से सदन को विश्वास दिलाता हूँ कि अवैध खनन के खिलाफ सरकार कड़ी से कड़ी कार्यवाही करेगी किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. कोई कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति हो उसको छोड़ा नहीं जाएगा.

श्री दिनेश राय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा इस विषय में ध्यानाकर्षण भी है और प्रश्न भी लगाया है.

अध्यक्ष महोदय -- संसदीय कार्यमंत्री ने इतनी जिम्मेदारी से जवाब दे दिया है अब इसके बाद कुछ नहीं बचता है.

श्री दिनेश राय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा इस विषय में ध्यानाकर्षण भी है और प्रश्न भी लगाया है. अध्यक्ष महोदय, खनिज ठेकेदार हमारे खिलाफ एफआईआर करवा रहा है. निरीक्षण करने जाते हैं तो वह हमें खरीदने की बात करते हैं, कहते हैं 1 करोड़ 5 करोड़ दे देंगे.. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय -- मेरा कहना यह है कि इस प्रश्न पर पर्याप्त सदस्यों को बोलने का अवसर दिया गया है. बात आई है, सरकार ने संज्ञान लिया है. संसदीय कार्य मंत्री ने आश्वस्त किया है. मैं समझता हूँ कि आगे के सदस्यों के भी महत्वपूर्ण प्रश्न हैं.

श्री हेमंत कटारे -- आगे चर्चा का आश्वासन दे दीजिए. बाद में चर्चा कर लेंगे. इसमें आधे घंटे की चर्चा का आश्वासन दे दीजिए.

अध्यक्ष महोदय -- कार्यवाही आगे बढ़ गई है.

श्री अभय कुमार मिश्रा -- देख लीजिएगा कुछ दिनों में डिटोनेटर वाला एक ब्लास्ट आएगा सामने.

अध्यक्ष महोदय -- अभय जी आपके सदस्य बोल रहे हैं उन्हें बोलने दीजिए.

पुलिस विभाग में भर्ती के संबंध में

[गृह]

6. ( *क्र. 4 ) श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि प्रदेश में कब से एस.आई. के पदों की भर्ती नहीं हुई है? भर्ती नहीं होने के क्‍या कारण हैं? कब तक उक्‍त पदों पर भर्ती की जावेगी?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री, गृह (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) : सूबेदार/उप निरीक्षक संवर्ग भर्ती वर्ष 2018 आयोजित कराने हेतु प्रस्‍ताव पुलिस मुख्‍यालय के पत्र दिनांक 10.08.2018 के माध्‍यम से कर्मचारी चयन मण्‍डल (पी.ई.बी.) भोपाल को भेजा गया था, किंतु पी.ई.बी. भोपाल द्वारा परीक्षा का आयोजन नहीं किया गया। वर्ष 2019 में विधानसभा चुनाव थे एवं वर्ष 20202021 में को‍वि‍ड-19 के कारण भर्ती आयोजित नहीं की जा सकी। सूबेदार/उप निरीक्षक संवर्ग की भर्ती हेतु जारी म.प्र. कार्यपालिक (अराजपत्रित) सेवा भर्ती नियम 1997 में संशोधन की कार्यवाही प्रचलन में है।

श्री नितेन्द्र बृजेन्द्र सिंह राठौर -- सबसे पहले तो मैं आपका आभार व्यक्त करता हूँ कि प्रथम बार मैं इस सत्र में बोल रहा हूँ. मैंने प्रश्न के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जी से गृह विभाग से संबंधित जानकारी चाही थी. जिसका जवाब तो मुझे मिला है किन्तु संतोषजनक नहीं मिला है. वर्ष 2016 में 863 पदों पर सब-इंसपेक्टर के लिए भर्ती निकाली गई थी. वर्ष 2017 में 611 पदों पर सब-इंसपेक्टर के लिए भर्ती निकाली गई थी. इसके पश्चात् लगभग 7 वर्ष हो गए हैं तब से कोई भर्ती नहीं निकाली गई है. जो युवा नौकरी की तलाश में थे वे आज ओवरएज हो गए हैं. पिछले तीन वर्षों से समाचार पत्र के माध्यम से जानकारी निकलती है, नौजवान तैयारी करते हैं लेकिन भर्ती नहीं निकलती है. नौजवानों की परेशानी निरंतर बढ़ती जा रही है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है. किसी के माता-पिता जमा पूंजी तोड़ते हैं, अपना मकान गिरवी रखते हैं, जमीन गिरवी रखते हैं कि उनके बेटे या बेटी की नौकरी पुलिस में लग जाए. सरकार से आग्रह है कि यदि भर्ती नहीं कर सकते हैं तो स्पष्ट मना कर दें असत्य घोषणाओं के माध्यम से युवाओं को छलने का कार्य न करें. अध्‍यक्ष महोदय, आप यकीन नहीं करेंगे कि 3 दिसम्‍बर से लगातार हमारे नौजवान साथी कहीं ट्व्टिर के माध्‍यम से, कहीं फोन के माध्‍यम से यह चाहते हैं कि इस बात को व्‍यक्तिगत रूप से सदन में उठाया जाए. क्‍या यह सच नहीं है कि प्रदेश में अपराध बढने की वजह कहीं न कहीं गृह विभाग में पुलिस आरक्षी और एस.आई. के पद जरूरत से ज्‍यादा खाली हैं ?

अध्‍यक्ष महोदय -- नितेन्‍द्र जी, थोडा प्रश्‍न पर आइये, प्‍लीज.

श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं यही पूछ रहा हूं. क्‍या यह सच नहीं है कि प्रदेश में अपराध बढने की वजह गृह विभाग में पुलिस आरक्षी और एस.आई. के पद जरूरत से ज्‍यादा खाली हैं ? माननीय मुख्‍यमंत्री जी से मेरा यह आग्रह है कि यह कब भरे जाएंगे ?

 

 

 

11.36 बजे स्‍वागत उल्‍लेख

सदन में उपस्थित विद्यालय के छात्रों का स्‍वागत

अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी बोलें उसके पूर्व आज सदन की दर्शक दीर्घा में विद्यालय के छात्र भी उपस्थित हैं, यह स‍ब भारत का भविष्‍य हैं, यह सदन उनका स्‍वागत करता है.

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर (क्रमश:)

श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, जैसा सम्‍मानीय सदस्‍य ने प्रश्‍न किया है उन्‍होंने स्‍वयं ने माना है कि वर्ष 2016 और 2017 में भर्ती हुई है. चूंकि वर्ष 2018-2019 में चुनावी वर्ष रहे हैं, बाद में दो वर्ष कोविड में हो गये इसलिये भर्ती में थोडा विलंब हुआ है, लेकिन प्रक्रिया प्रारंभ है. प्रक्रिया को और पारदर्शी बनाने के लिये सरकार प्रयास कर रही है. पहले केवल एक 200 अंकों का सामान्‍य ज्ञान और भाषायी बोध पर आधारित परीक्षा होती थी और 10 अंक साक्षात्‍कार के लिये थे, अब उसमें थोडा परिवर्तन करते हुये सरकार उसको पारदर्शी बनाना चाहती है. उसमें एक प्रिलिमिनरी एग्‍जाम लेगी, जो विज्ञापित पद हैं उसके अगेंस्‍ट 10 गुने अभ्‍यर्थियों को बुलाया जाएगा, उनकी मुख्‍य परीक्षा होगी. उसके बाद जो शारीरिक रूप से परीक्षण होते थे उनके अंक नहीं जोडे जाते थे, लेकिन वह जोडना चाहिये ऐसा सरकार का विचार है. यह विचाराधीन है और शीघ्र प्रचलन में यह सारी व्‍यवस्‍था है. जहां तक सम्‍माननीय सदस्‍य ने चिंता व्‍यक्‍त की है उसके लिये मैं उन्‍हें बताना चाहता हूं कि 1,599 सहायक उपनिरीक्षक, कार्यवाहक उपनिरीक्षक के रूप में काम कर रहे हैं. अत: किसी भी तरह से पुलिस का काम प्रभावित नहीं हो रहा है. धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं अभी नहीं, सदस्‍य का दूसरा पूरक प्रश्‍न है. (श्री सोहनलाल बाल्‍मीक, सदस्‍य के खडे होने पर).

श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी, मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूं. इंडियन जस्टिस रिपोर्ट के अनुसार राष्‍ट्रीय स्‍तर पर 835 लोगों पर एक पुलिस आरक्षी है, वहीं मध्‍यप्रदेश में 1,051 है. क्‍या यह आम आदमी के जीवन के साथ खिलवाड नहीं है ? मैं बुंदेलखंड से आता हूं, पृथ्‍वीपुर मेरी विधान सभा है. पृथ्‍वीपुर में कल ही खुलेआम लूट का प्रयास किया गया क्‍योंकि वहां पर सब इंस्‍पेक्‍टर नहीं हैं, मैं अपने यहां की स्थिति आपको बयां कर रहा हूं, यही स्थिति हर जगह की है. आज लोग सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे हैं और पढ-लिखकर लोग बेरोजगार हैं. मेरा आपसे केवल इतना ही सवाल है कि आप यह बताएं कि कब तक उक्‍त पदों पर भर्ती की जाएगी ? यह जवाब मैं आपसे चाहता हूं.

श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैं पूर्व में ही प्रक्रिया का बता चुका हूं कि पारदर्शी प्रक्रिया करने के लिये पूरी व्‍यवस्‍था प्रचलन में है और जैसे ही यह तय होगा उसके बाद प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ होगी. पिछले वर्ष भी हमने लगभग 6,000 आरक्षकों की भर्ती की है और लगातार जो भी हमारे चूंकि पदोन्‍नति पर न्‍यायालय से रोक है इसके कारण कार्यवाहक के रूप में पदोन्‍नत करके समस्‍त पदों पर हमारे पुलिस विभाग में कार्यरत हैं और किसी भी तरह की कमी महसूस नहीं हो रही है. मैं समझता हूं कि माननीय सदस्‍य इससे संतुष्‍ट होंगे.

श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर -- तब तक जो लोग ओवरएज हो रहे हैं और जो बिगडती कानून व्‍यवस्‍था है उसका जिम्‍मेदार कौन है ?

अध्‍यक्ष महोदय -- नितेन्‍द्र जी, आपका सेकेंड सप्‍लीमेंट्री हो गया है. प्‍लीज.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी यह बता दें जो माननीय सदस्‍य का प्रश्‍न था कि यह जो बैकलॉग चल रहा है वह कब तक किया जाएगा, कब तक भर्ती की जाएगी यह बता दें. यह प्रक्रिया जो हो रही है वह हो रही है, अपनी जगह पर है, सारी प्रक्रिया आप कर लें, लेकिन एक तिथि बता दीजिये कि 4 महीने में, 6 महीने में यह सारे जो बैकलॉग हैं, जो खाली स्‍थान पडे हैं वह कब तक भरेंगे ?

श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर -- यह तिथि आप बता दीजिये.

श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पूर्व में भी बता दिया है चूंकि चयन में पारदर्शिता बनी रहे इसके लिये प्रक्रिया प्रचलन में है. जैसे ही तय होगा इनकी भर्ती करने की प्रक्रिया भी कर ली जाएगी.

श्री नितेन्‍द्र बृजेन्‍द्र सिंह राठौर -- निश्चित समय. निश्चित समय बताइये कि 1 साल, 2 साल, 3 साल कितना समय लगेगा आप तो निश्चित बता दीजिये.

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न क्रमांक 7, श्री दिव्‍यराज सिंह जी.

 

 


 

पुलिस अभिरक्षा में हुई संदिग्ध मृत्यु की निष्पक्ष जाँच

[गृह]

7. ( *क्र. 290 ) श्री दिव्‍यराज सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या रीवा जिले के थाना सिविल लाइन अंतर्गत घटित चोरी की घटना में अभियुक्त के तौर पर राजकली केवट की गिरफ्तारी की गई थी? यदि हाँ, तो पुलिस अभिरक्षा में क्या उक्त आरोपित महिला की मृत्यु हो गई थी? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुक्रम में पुलिस अभिरक्षा में हुई मृत्यु में चोरी की घटना से पीड़ित दम्‍पत्ति श्री यशोवर्धन सिंह एवं उनकी पत्नी श्रीमती प्रतीक्षा सिंह को आरोपी बनाने का क्या कारण है? (ग) क्या विषयांकित घटना की जाँच पृथक एजेंसी से कराई जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक जाँच संबंधी आदेश जारी किये जा सकेंगे?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री, गृह (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) : (क) जी हाँ, गिरफ्तारी की गई थी। पुलिस अभिरक्षा में आरोपी महिला राजकली केवट का स्वास्थ खराब होने पर इलाज हेतु अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ इलाज के दौरान डाक्टरों द्वारा आरोपी महिला को मृत घोषित कर दिया गया। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) विषयांकित घटना की न्यायिक जांच, न्यायिक दण्डाधिकारी प्रथम श्रेणी, रीवा द्वारा की जा रही है।

श्री दिव्यराज सिंह-- अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न में एक बहुत ही सेंसेटिव्ह मेटर हमारे रीवा में हुआ है. एक गरीब परिवार केवट वर्ग की महिला का देहांत थाने के अन्दर हो गया और इसमें पहली बात तो यह है कि 28 तारीख को इसमें चोरी हुई है, 30 तारीख को उसको थाने में लाया गया और फिर उसको रीवा, सीधी पता नहीं कहां कहां घुमाया गया और फिर 31 तारीख को उसकी थाने के बाद मौत हो गई है. तो इसमें पहली बात तो यह है कि दो पीड़ित परिवार हैं. एक तो जिसके घर में चोरी हुई और दूसरा जो महिला, जिसकी मृत्यु हो गई. पहली बात तो इसमें मैंने जो देखा, जवाब में यह दिया गया है कि केवल आरक्षकों के ऊपर कार्यवाही की गई है. तो इतनी बड़ी घटना थाने के अन्दर हो गई, बाकी किसी के ऊपर कोई कार्यवाही की गई है थाने के अन्दर.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल-- अध्यक्ष महोदय, जिस तरह की माननीय सदस्य ने चिंता व्यक्त की है, निश्चित रुप से उनकी चिंता होना चाहिये. इसमें प्रधान आरक्षक के खिलाफ भी कार्यवाही हुई है और दो आरक्षकों के खिलाफ भी कार्यवाही हुई है. एक सहायक उप निरीक्षक के खिलाफ भी कार्यवाही हुई है.

श्री दिव्यराज सिंह-- अध्यक्ष महोदय, वहां के टी.आई., एस.पी. क्या कर रहे थे.

अध्यक्ष महोदय-- दिव्यराज सिंह जी, पहले पूरा जवाब आ जाने दें, फिर उसके बाद दूसरा पूरक प्रश्न कर लें.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल-- अध्यक्ष महोदय, एक सहायक उप निरीक्षक, एक प्रधान आरक्षक तथा महिला आरक्षक के खिलाफ भी एफआईआर की गई है और विवेचना जारी है.

श्री दिव्यराज सिंह-- अध्यक्ष महोदय, मेरे इसमें जैसे दो विषय थे. एक तो जिसके घर में चोरी हुई है, उनके ऊपर आरोप लगा दिया गया कि इनके कारण इसकी मृत्यु हुई है. तो पहले तो इसमें क्योंकि थाना भी इन्वॉल्व है, सीसी टीव्ही कैमरा में भी दिखाया जा रहा है कि आरक्षक लोगों ने उसको मारा. उसके बाद उसकी मृत्यु हुई है. तो इसमें पहली बात तो इसकी बाहर से जांच कराई जाये. रीवा की पुलिस से इसकी जांच नहीं कराई जाये. एसआईटी इसमें बैठाकर के उसकी जांच कराई जाये और इसमें अगर कोई बड़े अधिकारियों को भी इसके बारे में जानकारी है, तो उनके खिलाफ भी कार्यवाही की जाये.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल-- अध्यक्ष महोदय, इसमें न्यायिक जांच जारी है श्रीमती पद्मिनी इसमें मुख्य मजिस्ट्रेट के द्वारा आदेशित किया गया है और उनकी न्यायिक जांच जारी है.

श्री दिव्यराज सिंह-- अध्यक्ष महोदय, इसमें एसआईटी की जांच कराई जाये, भोपाल से जांच कराई जाये.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल-- ठीक है.

श्री आरिफ मसूद -- अध्यक्ष महोदय, पूर्व में भी ऐसी घटना गुना में भी हुई थी. माननीय सदस्य ने बहुत अच्छा ध्यान आकर्षित किया है. मैं चाहता हूं कि एक बार दोषियों पर बजाय स्थानातरण करने के इनके खिलाफ कार्यवाही होने लगे, मुकदमे दर्ज होने लगे, तो इससे आम जनता को सहयोग मिलेगा. मैं चाहता हूं कि आसंदी से ऐसा निर्देश होना चाहिये.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल-- अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्य ने चिंता व्यक्त की है, इस केस में पुलिस के अधिकारियों, कर्मचारियों पर केस दायर किया गया है और न्यायिक जांच चल रही है.

 

 

 

आंगनवाड़ी भवन का संचालन

[महिला एवं बाल विकास]

8. ( *क्र. 25 ) श्री कुँवर सिंह टेकाम : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सीधी एवं सिंगरौली जिले के अन्तर्गत विकासखण्ड मझौली, कुसमी, जिला सीधी एवं विकासखण्ड देवसर, जिला सिंगरौली में कितने आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित हैं? नाम सहित जानकारी उपलब्ध करायें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में संचालित कितने आंगनवाड़ी केन्द्र भवन विहीन एवं कितने पेयजल विहीन हैं? आंगनवाड़ीवार नाम सहित जानकारी उपलब्ध करायें। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में भवन विहीन आंगनवाड़ी केन्द्रों में भवन का निर्माण कब तक करा दिया जावेगा? (घ) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में पेयजल विहीन आंगनवाड़ी केन्द्रों में हेण्डपम्प उत्खनन कराकर पेयजल कब तक उपलब्ध करायेंगे?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( सुश्री निर्मला भूरिया ) : (क) सीधी जिले के अंतर्गत विकासखण्ड कुसमी में 233 आंगनवाड़ी केन्द्र एवं विकासखण्‍ड मझौली में 324 आंगनवाड़ी केन्‍द्र संचालित हैं एवं सिंगरौली जिले के अन्तर्गत विकासखण्ड देवसर में 490 आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित हैं। नाम सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '1' अनुसार है। (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में सीधी जिले के अन्तर्गत विकासखण्ड कुसमी में 06 आंगनवाड़ी केन्द्र एवं विकासखण्‍ड मझौली में 03 आंगनवाड़ी केन्द्र भवन विहीन हैं। सिंगरौली जिले के अन्तर्गत विकासखण्ड देवसर के 49 भवन विहीन आंगनवाड़ी केन्‍द्रों के भवन निर्माण की स्‍वीकृति प्रदान की गई है, जो वर्तमान में निर्माणाधीन हैं। विकासखण्ड मझौली, कुसमी एवं देवसर में कोई भी आंगनवाड़ी केन्‍द्र पेयजल विहीन नहीं हैं। आंगनवाड़ीवार नाम सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '2' अनुसार है। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में भवन विहीन आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर है। अतः समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (घ) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री कुंवर सिंह टेकाम-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जो सिंगरौली के हिस्से में 49 आंगनवाड़ी भवन विहीन थे, उनकी स्वीकृति प्रदान कर दी गई है. इसके लिये मैं उनको धन्यवाद देता हूं. दूसरा, हमारे सीधी जिले के पार्ट मे कुसमी और मझौली विकास खण्ड में 9 आंगनवाड़ी केंद्र भवन विहीन हैं. आपने जानकारी दी है कि कुसमी विकास खण्ड में 6 में से 4 को आपने विस्थापित होने के कारण भवन विहान दर्शाया है, जबकि यह ग्राम कमछ का तुराटोला, जूरी का चपाटोला,ददरी का ददरीडोल ये विस्थापित नहीं हैं, न विस्थापित होने वाले ये ग्राम में सम्मिलित हैं. केवल एक दुबरीकला जरुर इसमें विस्थापित वाले गांव में जुड़ा हुआ है. मेरा आग्रह है कि यह जो विस्थापित वाले गांव में आपने दर्शाया है, इसका पुनः परीक्षण करा लें. ये विस्थापित ग्राम की श्रेणी में नहीं हैं और इसमें से 8 भवन विहीन हैं, सीधी जिले के हिस्से में, तो इनकी आंगनवाड़ी भवनों की स्वीकृति प्रदान कर देंगे, तो बड़ी कृपा होगी.

उच्च शिक्षा मंत्री (श्री इन्दर सिंह परमार)-- अध्यक्ष महोदय, पूरी जानकारी माननीय सदस्य को मिली है. हमारे पास जितने विभाग के भवन हैं, उसकी संख्या भी है. साथ ही कितने अन्य शासकीय भवनों में आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं. कुछ आंगनवाड़ी केंद्र और सीधी में 317 आंगनवाड़ी केन्‍द्र किराये के भवन में संचालित हैं, सिंगरौली में 97 हैं, मझौली ब्‍लाक में 3 हैं, सीधी का जो कुसमी ब्‍लॉक है उसमें 6 हैं और देवसर में कोई भी आंगनवाड़ी केन्‍द्र किराए के मकान में संचालित नहीं है. जहां पर अन्‍य शासकीय भवन में संचालित हैं, देवसर में ऐसे 49 भवनों पर काम चल रहा है और आगे जो हमारे 4000 के लगभग पुराने भवन या तो पूरे मध्‍यप्रदेश में अधूरे हैं, उन पर प्रक्रिया चल रही है. उनको पूरा एक साथ देकर के, क्‍योंकि केन्‍द्र सरकार से जो पैसा आता था प्‍लस राज्‍य सरकार का. इस कारण वह अधूरी रह गयी है उनको पूरा करने की प्रक्रिया चल रही है और जो ऐसे गांव हैं, जिसमें सीधी में भी जो चार भवन है, उनके लिये सीधे भारत सरकार उनको 12-12 लाख रूपये में स्‍वीकृत कर रहे हैं. ऐसे 194 भवन केन्‍द्रों के लिये राशि दे रहे हैं, उसमें चार भवन वहां भी मिलने वाले हैं. तो मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि आने वाले समय में सभी भवन, यदि कहीं स्‍कूल का भवन खाली होगा, क्‍योंकि स्‍कूल के भवन काफी जगह खाली हैं तो उनका परीक्ष्‍ाण करके आंगनवाड़ी केन्‍द्रों को वहां स्‍थानांतरित देंगे. ताकि किराए की स्थिति पूरी समाप्‍त हो जाये.

श्री कॅुवर सिंह टेकाम:- मेरा इसमें यह आग्रह था कि आपने जो विस्‍थापित गांव दर्शा दिये हैं. यह विस्‍थापित गांव में नहीं हैं. वह किराए में भवनों में चल रहे हैं.

श्री इंदर सिंह परमार:- अध्‍यक्ष महोदय, उनका परीक्षण कर लेंगे.

श्री कॅुवर सिंह टेकाम:- मंत्री जी, वहां आपको केवल 8 आंगनवाड़ी केन्‍द्र बनाने हैं.

श्री इंदर सिंह परमार:- अध्‍यक्ष महोदय, उनका परीक्षण करा लेंगे. यदि विस्‍थापित नहीं है तो तो उचित कार्यवाही करेंगे.

श्री कॅुवर सिंह टेकाम:- विस्‍थापित नहीं है, मुझे जानकारी है. वह केवल 8 आंगनवाड़ी केन्‍द्र हैं, आप आशवस्‍त 8 आंगनवाड़ी भवन हम स्‍वीकृत कर देंगे ? .

श्री इंदर सिंह परमार:- हम उनको दिखाकर के प्राथमिकता के साथ में भवन की उपलब्‍धता करा देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय:- मंत्री जी ने कह दिया है.

श्री कॅुवर सिंह टेकाम:- धन्‍यवाद.

प्रदेश में महिलाओं पर घटित अपराधों की जानकारी

[गृह]

9. ( *क्र. 750 ) श्री पंकज उपाध्याय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुरैना जिला में महिलाओं के विरूद्ध घटित अपराधों की शीर्षवार सूची वर्ष 2015 से दिसम्बर 2023 तक की वर्षवार, विधान सभावार देवें तथा बतावें कि 2019 की तुलना में 2023 में किस-किस शीर्ष में कितने प्रतिशत वृद्धि तथा कितने प्रतिशत कमी हुई? (ख) जौरा विधानसभा क्षेत्र में कितने थाने हैं? प्रत्येक थाने का क्षेत्र एरिया कितना है तथा कितनी आबादी शामिल है? उक्त थानों में स्वीकृत पद किस-किस प्रकार के कितने हैं तथा नियुक्ति कितनी है तथा खाली पद कितने हैं? दिसम्बर 2023 अनुसार बतावें। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के थानों के अनुसार महिलाओं, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विरूद्ध घटित अपराधों की शीर्षवार वर्ष 2015 से 2023 तक की जानकारी देवें तथा बतावें कि वर्ष 2019 से 2023 तक प्रतिवर्ष किस-किस शीर्ष में कितने प्रतिशत वृद्धि तथा कमी हुई? (घ) जौरा विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2015 से 2023 तक में महिलाओं, अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के विरूद्ध घटित अपराधों में शीर्षवार, वर्षवार, थाने अनुसार बतावें कि सजायाबी की दर कितने प्रतिशत है? (ड.) जौरा विधानसभा क्षेत्र में 2018 से दिसम्बर 2023 तक नाबालिग बालक-बालिका तथा महिलाओं के गुम होने के कितने प्रकरण हुए तथा कितने नाबालिग बालक-बालिका तथा महिलाएं दस्तयाब की गईं?

राज्‍य मंत्री, गृह (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) एवं (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ड.) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

श्री पंकज उपाध्‍याय:- धन्‍यवाद, माननीय अध्‍यक्ष जी पहली बार ही सदन में आया हूं और पहली बार ही बोलने का मौका मिला है. आप जब अध्‍यक्ष बने थे, जब भी मैंने सोचा था कि बोला जाये, परंतु पता नहीं था कि सदन में किस तरह से बोला जाता है. आप जब अध्‍यक्ष बने थे तो हमें बड़ी प्रसन्‍नता हुई थी कि आप हमारे क्षेत्र के हैं और बड़ा गौरव है कि आप इस स्‍थान पर विराजित हैं बड़ा गरिमामय सदन है और उच्‍चकोटि के ज्ञानी यहां पर बैठे हुए हैं. श्री प्रहलाद सिंह पटेल जी हैं, हमारे संसदीय कार्य मंत्री आदरणीय कैलाश जी यहां पर हैं. पहली बार सदन में आया हूं, समझता हूं कुछ सीखने के लिये मिलेगा, कुछ गलती करूं तो आप मुझे क्षमा करियेगा.

मैंने प्रश्‍न उठाया था उसका कोई यथोचित उत्‍तर नहीं दिया गया है, मेरा प्रश्‍न था कि प्रत्‍येक थाने में क्षेत्र में कितनी आबादी होनी चाहिये ? जब थाना बनता है और कितनी आबादी पर कितना पुलिस बल होना चाहिये. इसको कोई उचित जानकारी नहीं दी गयी है.

मैंने खण्‍ड(ग) में पूछा था कि एससीएसटी महिला अपराधों की संख्‍या कितनी हुई है और अपराधों में किन-किन लोगों को सजा दी गयी है. उसकी भी अधूरी जानकारी दी गयी है. मैं जानकारी चाहता हूं.

राज्‍य मंत्री, गृह (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल):- आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्‍य जानकारी चाहते थे, वह जानकारी उपलब्‍ध करायी गयी है. यदि वह कुछ अतिरिक्‍त जानकारी चाहते हैं तो मैं उनको व्‍यक्तिगत रूप से उपलब्‍ध करा दूंगा.

श्री पंकज उपाध्याय :- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैंने जानकारी चाही थी कि 7 थानों में वर्ष 2015 से 2023 तक कितनी एससीएसटी महिलाओं के खिलाफ अपराध दर्ज हुए और कितने लोग बरी हुए, यह तो साधारण सी जानकारी है, जिसको आप दे सकते थे.

दूसरा कि मेरे विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत 7 थाने हैं. एक थाना 90 किलोमीटर वर्ग क्षेत्र में आता है और दूसरा 900 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आता है. बागचीनी में 2 एसआई, 4 थाना प्रभारी और 14 आरक्षक हैं. जबकि निरार थाने में जो 500 स्‍क्‍वेयर मीटर में मात्र 1 एसआई, 3 प्रधान आरक्षक और 11 आरक्षक हैं और कोई अपराधों की जानकारी भी नहीं दी गयी है. महिला स्‍टॉफ की भी जानकारी नहीं दी गयी है. सम्‍पूर्ण विधान सभा क्षेत्र में स्‍टॉफ की मात्रा बहुत कम है. जैसा कि इन्‍होंने जो जानकारी दी है, उसमें देवगड़ में 14 आरक्षक होना चाहिये, लेकिन 4 हैं. चिन्‍नौनी में 22 आरक्षण होना चाहिये, परंतु वहां 11 आरक्षण हैं. हमारे जौरा में 22 आरक्षक होना चाहिये, लेकिन 20 हैं. लगभग आधा स्‍टॉफ है हम अपेक्षा करते हैं कि आप सुशासन लेकर आयेंगे. तो इस आधे स्‍टॉफ से तो हम सुशासन नहीं ला सकते हैं. क्‍योंकि हमारा क्षेत्र बड़ा अपराधों का क्षेत्र है, वहां पर बड़े अपराध होते हैं.

ऐसी ही महिलाओं के प्रति अपराधों में लगातार वृद्धि हो रही है, बलात्कार हो रहे हैं, वर्ष 2021 में इसमें 400 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वर्ष 2023 में तो इन्होंने जानकारी देना भी उचित नहीं समझा तो जो लूट हो रही हैं. मैंने एक चीज और पूछी थी कि चेन स्नेचिंग की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं. हमारे विधान सभा क्षेत्र में पिछले 3 दिन में 2-3 घटनाएं हो गईं. एक एफआईआर हुई है. श्रीमती पुष्पा गोयल नाम की हमारी चाची लगती हैं, श्री केशव गोयल जी की पत्नी हैं, उनकी सरेआम दिन दहाड़े चेन लूट ली गई, लेकिन उस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई. ऐसी कई सारी घटनाएं हैं जो चर्चा में भी नहीं आ पाती हैं. एफआईआर भी थानों में लिखाने में लोग हिचकिचाते हैं.

अध्यक्ष महोदय- माननीय मंत्री जी, माननीय सदस्य चाहते हैं कि बढ़ते हुए अपराधों पर सरकार क्या कर रही है?

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल - अध्यक्ष महोदय, जैसा उन्होंने चिंता भी व्यक्त की है और जो क्षेत्रफल की बात की थी कि एरिया के हिसाब से बात की तो एरिया के हिसाब से बल नहीं रखा जाता है क्योंकि उसमें पहाड़ी एरिया, बंजर एरिया शामिल है, इसलिए वहां का एरिया ज्यादा आपको दिख रहा है. सरकार बहुत सजग है और पुलिस फोर्स तत्परता से काम कर रहा है. यदि केस पंजीकृत हो रहे हैं तो यह स्पष्ट दिखाता है कि कार्यवाही हो रही है.

श्री पंकज उपाध्याय - मैंने जो बात कही है.

अध्यक्ष महोदय - पंकज जी, उन्होंने दोनों चीजों का जवाब दिया, जो जानकारी आपको अतिरिक्त चाहिए वह भी आपके पास पहुंचा देंगे. आपका प्रश्न हो गया, उसके बाद दूसरा पूरक प्रश्न हो गया. अभी दूसरे और तमाम सारे हैड हैं, जिन पर आप बोल सकते हैं.

 

डोलोमाइट खदानों का संचालन

[खनिज साधन]

10. ( *क्र. 628 ) श्री नारायण सिंह पट्टा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मण्डला जिला अंतर्गत कौन-कौन सी डोलोमाइट खदानें कब से संचालित हैं? ग्राम का नाम खसरा नंबर सहित खदान मालिक के नाम व संपर्क नम्बरों की जानकारी उपलब्ध करवाएं। वर्ष 2020 के बाद स्वीकृत खदानों की जानकारी भी उपलब्ध करवाएं। (ख) डोलोमाइट उत्खनन हेतु शासन के क्या नियम हैं? नियमों की प्रति उपलब्ध करावें। तत्कालीन मण्डला कलेक्टर श्रीमती स्वाति मीना के कार्यकाल में खदान संचालकों को जुर्माना हेतु नोटिस कब-कब जारी किए गए? नोटिसों की छायाप्रति उपलब्ध करावें। क्या जुर्माना राशि जमा हुई? यदि नहीं, तो क्यों? (ग) उक्त समस्त खदानों की लीज़ एवं एनवायर्नमेंटल क्लीयरेंस की जानकारी प्रदान करें। सितंबर 2023 से प्रश्‍न दिनांक तक किन-किन खदानों की एनवायर्नमेंटल क्लीयरेंस की समय-सीमा समाप्त हुई थी? क्या समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी खदानों में उत्खनन जारी रहा? क्या खदानों से डोलोमाइट का परिवहन करने वाले वाहन ओवरलोड परिवहन कर रहे हैं? (घ) प्रत्येक खदान में कार्यरत मजदूरों के नाम, नम्बर व किये जाने वाले मजदूरी भुगतान की जानकारी प्रदान करें। क्या सभी मजदूरों का श्रम विभाग में पंजीयन कराया गया है? क्या मजदूरों को शासन द्वारा निर्धारित समस्त सुविधाओं व योजनाओं का लाभ दिलाया जा रहा है?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री, खनिज साधन (श्री दिलीप अहिरवार) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। जिला मंडला अंतर्गत वर्ष 2020 के बाद डोलोमाईट खदान स्वीकृत नहीं की गई है। (ख) मध्‍यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 अधिसूचित है। शेष भाग की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "ब" अनुसार है। शेष नोटिसों की छायाप्रति एवं उनमें की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "स" अनुसार है। (ग) समस्त खदानों के एनवायर्नमेंटल क्लीयरेंस की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" अनुसार है। सितम्‍बर 2023 से जिला स्‍तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (डिया) से प्राप्‍त पर्यावरणीय अनुमति को स्‍थगित किया गया था। माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय की सिविल अपील क्रमांक 49608/2023 में पारित आदेश दिनांक 13.12.2023 से ऐसी समस्‍त खदानों का पुन: संचालन प्रारंभ हो गया है। शेष भाग अनुसार डोलोमाईट खनिज का ओवरलोड परिवहन पाये जाने पर नियमानुसार कार्यवाही की जाती है। (घ) प्रश्‍नांश अनुसार खदानों में कार्यरत मजदूरों को भारत सरकार श्रम और रोजगार मंत्रालय की अधिसूचना दिनांक 28.07.2017 अनुसार मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है। शेष प्रश्‍नांश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "द" एवं "इ" अनुसार है।

श्री नारायण सिंह पट्टा - अध्यक्ष महोदय, बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है और आपका संरक्षण चाहिए, पर्यावरण को प्रभावित करने वाला यह प्रश्न डोलोमाइट की खदानों को लेकर है. मैं माननीय मंत्री जी से सीधे-सीधे प्रश्न पूछना चाहता हूं कि डोलोमाइट की खदानें वन भूमि से लगी हुई हैं. इसमें कान्हा पार्क का क्षेत्र भी आता है, उसके बाद भी नई खदानों की स्वीकृति के लिए शासन स्तर से नोटिफिकेशन जारी किया गया था. हमने इसके विरोध में आन्दोलन भी किया था, तब जाकर इसमें रोक लगी थी, किन्तु हाई कोर्ट में खदान मालिकों के द्वारा रिट दायर करने के बाद अनुमति मिली है और मैं माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि क्या इसमें नई खदानों की स्वीकृति दी जाएगी और यदि दी जाएगी तो इसमें पर्यावरण कितना प्रभावित होगा, माननीय मंत्री जी यह बताने का कष्ट करेंगे?

श्री दिलीप अहिरवार - अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2020 के बाद डोलोमाइट खदान की स्वीकृति नहीं की गई. अब जो नीति अभी लागू होगी उसके बाद से इस विषय की जो जानकारी होगी वह मैं आपको उपलब्ध करा दूंगा. इसके बाद अभी कोई ऐसी जानकारी नहीं है, डोलोमाइट खदान वर्ष 2020 के बाद से स्वीकृत हुई नहीं हैं.

श्री नारायण सिंह पट्टा - अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी असत्य जवाब दे रहे हैं. निरंतर डोलोमाइट की खदानें चालू हैं मैंने यह पूछा है. अभी नई खदानों की अनुमति देने के लिए शासन ने नोटिफिकेशन जारी किया है तो नई खदानों की स्वीकृति शासन स्तर से या सरकार की तरफ से दी जाएगी क्या? दूसरा मेरा प्रश्न है कि तत्कालीन कलेक्टर महोदय के कार्यकाल में डोलोमाइट की इन सभी खदानों की संयुक्त जांच दल बनाकर जांच की गई थी और इस जांच के आधार पर खदान संचालकों के विरुद्ध लगभग 20 करोड़ रुपये के जुर्माने के नोटिस जारी किये गये थे, लेकिन खदान संचालकों ने कमिश्नर कार्यालय से जुर्माना नोटिस पर स्टे ले लिया और जांच प्रक्रिया को गलत बताकर प्रकरण ही समाप्त कर दिया गया. जब विभाग ने खुद जांच की तो जांच प्रक्रिया गलत कैसे हुई? उस जांच में कोई त्रुटि थी तो त्रुटि सुधार करते हुए जांच क्यों नहीं कराई गई? क्या अब फिर से जांच कराई जाएगी, यह मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं?

श्री दिलीप अहिरवार - अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को यह बता दूं कि जो कलेक्टर द्वारा किये गये नोटिस आदेश पर संबंधित पट्टेधारियों पर संचालक आयुक्त के समक्ष जो प्रकरण चल रहा है, वह कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण चल रहा है, इसलिए इसका जब निराकरण हो जाएगा तो इस विषय के लिए बाद में आपके पास व्यक्तिगत रूप से जानकारी दे दूंगा.

श्री नारायण सिंह पट्टा - अध्यक्ष महोदय, कमिश्नर कार्यालय से स्टे ले लिया गया. जब विभाग ने जांच की थी. अगर विभाग के द्वारा कोई गलत जांच हुई थी तो त्रुटि सुधार किया जाना था. क्‍या यह सही है कि ओसीएल की खदान वर्ष 2006 से बंद है क्‍या बंद खदान से उत्‍खनन किया जा सकता है. यदि नहीं, तो क्‍या बंद खदान से उत्‍खनन करने पर वर्ष 2012 में तात्‍कालिक कलेक्‍टर ओसीएल खदान पर जुर्माना लगाया गया. उनको नोटिस जारी किया गया और जबकि मंत्री जी के उत्‍तर में दिया गया है कि 2006 से यह खदान बंद है. जब खदान बंद है तो तात्‍कालिक कलेक्‍टर को वर्ष 2012 में नोटिस दिया जाता है, उनको रिकवरी की राशि जारी की जाती है और उसी रकबे से निरंतर दूसरे खदान मालिकों ने डोलोमाइट निकालकर के जो अवैध परिवहन होते हैं...

अध्‍यक्ष महोदय -- नारायण सिंह जी, आपकी चिन्‍ता वाजि़ब हो सकती है लेकिन मेरा आग्रह सिर्फ इतना है कि कुल मिलाकर जो जवाब आया है उसमें से हम प्रश्‍न क्‍या चाहते हैं जिसका जवाब मंत्री जी दें, तो वह प्रश्‍न आप उनसे करेंगे तो उनसे जवाब की उम्‍मीद हम कर सकते हैं.

श्री नारायण सिंह पट्टा -- जी माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से सिर्फ यही तो पूछना चाह रहा हॅूं कि जब ओसीएल की खदान 2006 से बंद है और तात्‍कालिक कलेक्‍टर के द्वारा 2012 में जांच दल के द्वारा जांच करके उनको नोटिस दिया जाता है, रिकवरी राशि का नोटिस दिया जाता है और उसी खदान से फिर जांच किया जाता है तो वहां का डोलोमाइट निकालकर के ओवरलोडिंग बेची जाती है, जो विभाग खुद उसको पकड़ता है तो क्‍या उन पर कार्यवाही की जाएगी. या उसको पुन: जांच किया जाएगा.

श्री दिलीप अहिरवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सदस्‍य महोदय को बताना चाहता हॅूं कि मैंने यह बताया है कि वर्ष 2020 के बाद कोई खदानें स्‍वीकृत नहीं हुईं. उसके पहले 41 खदानें स्‍वीकृत हैं और मैं आपको बता दूँ कि माननीय न्‍यायालय में यह प्रकरण चल रहा है इसलिए उसकी बात करना उचित नहीं है.

श्री नारायण सिंह पट्टा -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हॅूं...

अध्‍यक्ष महोदय -- नारायण सिंह जी, प्‍लीज. थर्ड सप्‍लीमेंट्री भी हो गई है. बाकी आप व्‍यक्‍तिगत रूप से मिलकर मंत्री जी को बताओ.

श्री नारायण सिंह पट्टा -- अध्‍यक्ष महोदय, सिर्फ मजदूरों से जुड़ा प्रश्‍न है...

अध्‍यक्ष महोदय -- श्री बाला बच्‍चन जी.

श्री बाला बच्‍चन -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न यह है कि ऐसा विधानसभा में कभी नहीं देखा कि एक-एक मंत्री को दो-दो आसन उपलब्‍ध कराया गया हो. क्‍या वे दो-दो सीट से जवाब दे सकते हैं. आज श्री इन्‍दर सिंह परमार जी अपनी सीट को छोड़कर महिला एवं बाल विकास विभाग की सीट से जवाब दे रहे हैं.

श्री विश्‍वास सारंग -- अरे, भईया, उनकी सीट चेंज हो गई है. वे अपनी ओरिजनल सीट से बोल रहे हैं.

श्री बाला बच्‍चन -- कल वे वहां से बोल रहे थे, इसलिए मेरी जानकारी के लिए भी मुझे पता होना चाहिए.

श्री विश्‍वास सारंग -- अरे भईया, उनकी सीट चेंज हो गई है. बाला बच्‍चन जी, यहां लिखा हुआ आता है, वह देख लिया करो.

श्री बाला बच्‍चन -- मैं भी मेरी जानकारी के लिये चाह रहा था कि ऐसी कहीं व्‍यवस्‍था में परिवर्तन तो नहीं हो गया है.

अध्‍यक्ष महोदय -- बाला बच्‍चन जी, परमार साहब ठीक स्‍थान पर बैठे हैं.

श्री बाला बच्‍चन -- धन्‍यवाद माननीय अध्‍यक्ष महोदय. क्‍योंकि कल वे वहां से जवाब दे रहे थे. आज अभी यहां से जवाब दे रहे हैं. इसलिए मैंने प्रश्‍न किया.

श्री विश्‍वास सारंग -- बाला भाई, यहां नीचे लिखा हुआ आता है.

श्री राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह इनका गोलपोस्‍ट है इनके पास है, वे बदल देते हैं यहां से बॉल आती है वहीं खड़ा कर देते हैं, गोल हो ही जाता है.

श्री नारायण सिंह पट्टा -- अध्‍यक्ष महोदय, मजदूरों से जुड़ा हुआ प्रश्‍न है. मजदूरों के पंजीयन के बारे में है.

अध्‍यक्ष महोदय -- नारायण सिंह जी, प्‍लीज.

थाना अम्‍बाह एवं पोरसा में अपराधों में वृद्धि

[गृह]

11. ( *क्र. 877 ) श्री देवेन्द्र रामनारायन सखवार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुरैना जिले के थाना अम्बाह एवं पोरसा में वर्तमान में पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी कब-कब से पदस्थ हैं? सभी के नाम एवं पदस्थापना दिनांक सहित सूची दें। (ख) अम्बाह एवं पोरसा थाना क्षेत्र अन्तर्गत विगत तीन माह में कौन-कौन से अपराध पंजीबद्ध किस-किस दिनांक को किये गये हैं? इन पंजीबद्ध अपराधों में से चोरी के कितने मामले पंजीबद्ध हुए? इन पंजीबद्ध मामलों में किन-किन मामलों में चोरी की सामग्री जप्ती की गई है? कृपया सभी प्रकरणों के पंजीबद्ध अपराध क्रमांक सहित सूची दें। (ग) क्या लंबे समय से इन दोनों थानों में पदस्थ पुलिस अधिकारियों की सांठ-गांठ अपराधियों से होने के कारण अपराधों में वृद्धि हो रही है? यदि नहीं, तो ऐसे क्या कारण हैं, जिसके कारण अपराध बढ़ रहे हैं?

मुख्यमंत्री ( डॉ. मोहन यादव ) अधिकृत - राज्‍य मंत्री, गृह (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) थाना अम्बाह एवं पोरसा में पदस्थ पुलिस अधिकारियों की अपराधियों से सांठ-गांठ नहीं हैं, अतः सांठ-गांठ के कारण अपराधों में वृद्धि होने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। विगत विधानसभा चुनाव 2023 के आलोक में चलाये गये अभियान (अवैध शराब, जुआ, सट्टा आदि) के दौरान पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही के कारण अपराधों की कायमी में आंशिक बढोत्तरी हुई है।

श्री देवेन्‍द्र रामनारायण सखवार -- अध्‍यक्ष महोदय, आपको धन्‍यवाद कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया. मैं बता देना चाहता हॅूं कि मैं आपके ही गृह क्षेत्र से विधायक हॅूं. मैंने गृह विभाग से प्रश्‍न किया है. उन दो प्रश्‍नों के जवाब तो मुझे सही मिले, लेकिन मेरा जो खंड-ग का सवाल है, उसका जवाब सही नहीं मिला है. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हॅूं कि क्‍या लंबे समय से इन दोनों थानों में पदस्‍थ पुलिस अधिकारियों की सांठगांठ अपराधियों से होने के कारण अपराधों में वृद्धि हो रही है. यदि नहीं, तो ऐेसे क्‍या कारण हैं जिसके कारण अपराध बढ़ रहे हैं. हमारी अम्‍बाह विधानसभा में आए दिन चोरियां हो रही हैं. 25-25 लाख रूपए तक की चोरियां हो रही हैं.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य जी ने जो प्रश्न किया है. ऐसा कोई कारण नहीं है ना ही उनके पास में ऐसा उदाहरण है कि ऐसी कोई सांठ-गांठ कदापि नहीं है. जहां तक अपराधों में वृद्धि का सवाल है. मैं नहीं समझता हूं कि वह कहां से अपराधों में वृद्धि का दावा कर रहे हैं, ऐसा कोई भी दावा उनका उचित नहीं है इसमें कोई भी ऐसा तथ्य नहीं है. यदि प्रकरण पंजीकृत हो रहा है. तो यह स्पष्ट दिखाता है कि पुलिस कार्यवाही हो रही है.

श्री देवेन्द्र रामनारायण सखवारअध्यक्ष महोदय, मैं यह पूछना चाहता हूं कि अभी कम से कम तीन प्रकरण ऐसे हैं जिनमें चोरियां हुई हैं उसमें कम से कम 25 से 30 लाख तक की चोरियां हुई हैं. आज तक उनकी कोई जप्ती नहीं हुई, ना ही कोई उसमें कोई कार्यवाही हुई है.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल अध्यक्ष महोदय, थाना पोरसा के तहत 2 चोरियां हुई थीं जिनमें 1 लाख 75 हजार की सम्पत्ति की चोरी होना बताई गई थी. एक चोरी की पकड़ हो गई है उसमें 1 लाख 21 हजार रूपये की रिकव्हरी भी हो गई है. थाना अम्बाह में 20 चोरियों की शिकायत थी जिसमें से 12 चोरियां रिकव्हरी कर ली गई हैं. 7 लाख 28 हजार रूपये की कुल सम्पत्ति का मूल्य की चोरी होना बताया गया था जिसमें से 6 लाख 24 हजार की रिकव्हरी हो गई है. अभी एक लूट हुई थी जिसमें चूंकि उनका ड्राईवर ही चोरी में शामिल था, इसलिये यह लूट हुई थी. लेकिन पुलिस से बहुत तत्परता से काम करते हुए उसकी रिकव्हरी की है उसमें ड्राईवर को पकड़ लिया है उसमें लगभग 600 ग्राम गोल्ड की रिकव्हरी हुई है.

अध्यक्ष महोदयप्रश्नकाल समाप्त

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

समय 12.02 अध्यक्षीय घोषणा

 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय)अध्यक्ष महोदय, मैं तो आपको धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने शून्यकाल में नये विधायकों को अवसर देने का काम किया है मैं समझता हूं कि उसकी जितनी प्रशंसा की जाये कम है. आपके इस नये सदस्यों को अवसर देने का जो आप बहुत अच्छा मौका हमारे माननीय सदस्यों को दे रहे हैं. एक बार चाहता हूं कि जोरदार लगना चाहिये कि वास्तव में यह बहुत ही प्रजातांत्रिक काम आपने किया है, यह प्रजातंत्र को मजबूत करने वाला काम है. एक बार फिर से सदन की ओर से आपको धन्यवाद देता हूं.

श्री रामनिवास रावतअध्यक्ष महोदय, मैं माननीय विजयवर्गीय जी की बात से सहमत होते हुए पहले भी मैंने पिछली विधान सभा में बात उठाई थी जो आपने नियम बनाया था वह भी आपने निरस्त करके सदस्यों के प्रश्नों को इस विधान सभा को बहुत महत्व प्रदान किया है. इसके लिये हम पूरे सदन के समवेत सदस्य आपको धन्यवाद देते हैं और भी सुधार की हम अपेक्षा रखेंगे. ,

अध्यक्ष महोदयआप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.04         बजे

नियम 267-क के अधीन विषय

अध्यक्ष महोदय--

निम्नलिखित माननीय सदस्यों की शून्यकाल की सूचनाएं पढ़ी हुई मानी जायेंगी

 


 

12.06 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना.

(1) मध्‍यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

 

(2) (क) मध्‍यप्रदेश राज्‍य लघु वनोपज (व्‍यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित, भोपाल का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2022-2023,

(ख) मध्‍यप्रदेश राज्‍य पावरलूम बुनकर सहकारी संघ मर्यादित, बुरहानपुर (म.प्र.) का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2022-2023,

(ग) मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी आवास संघ मर्यादित, भोपाल का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2022-2023,

(घ) मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भोपाल (म.प्र.) का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2022-2023,

(ङ) मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी उपभोक्‍ता संघ मर्यादित, भोपाल (म.प्र.) का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2022-2023, एवं

(च) मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी बैंक मर्यादित, भोपाल का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2022-2023

 

(3) कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख)

(i) मध्‍यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इंदौर का इक्‍कीसवां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023,

(ii) मध्‍यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड, जबलपुर का इक्‍कीसवां वार्षिक प्रतिवेदन वित्‍तीय वर्ष 2022-2023, तथा

 

(iii) एम.पी.पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड का 16 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2021-2022

 

 

(4) कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) मध्‍यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड का 39 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021


(5) विश्‍वविद्यालय, ग्‍वालियर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

 

(6) एन.एच.डी.सी. लिमिटेड का 23 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

 

(7) (i) म.प्र.प्‍लास्टिक पार्क डेव्‍हपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड के अन्तिम लेखे वर्ष 2022- 2023,

(ii) डी.एम.आई.सी. पीथमपुर जल प्रबंधन लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020, तथा

(iii) डी.एम.आई.सी. विक्रम उद्योगपुरी लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2021- 2022

 

 

12.10 बजे

तहसीलदार को निलंबित करने के संबंध में राजस्‍व मंत्री द्वारा घोषणा

राजस्‍व मंत्री(श्री करण सिंह वर्मा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक प्रार्थना थी कि मेरे विभाग से एक तहसीलदार एक आदिवासी को थप्‍पड़ मारते हुए वायरल हो रहा है. मैं उसको चूंकि एक किसान हमारा मालिक है, मैं उसको थप्‍पड़ मारने के उसमें, उसको निलंबित करने की घोषणा करता हूं. (मेजों की थपथपाहट)

 

12.11 बजे ध्‍यानाकर्षण

(1) सागर जिले में पाला एवं तुषार से फसल नष्ट होने से उत्पन्न स्थिति.

इंजी. प्रदीप लारिया (नरयावली) -- अनुपस्थित

(2) प्रदेश में स्थापित जल गुणवत्ता एवं निगरानी प्रयोगशालाओं में अनियमितता.

श्री महेश परमार (तराना) -- अनुपस्थित.

 

 

 

12.12 बजे आवेदनों की प्रस्‍तुति.

 

अध्‍यक्ष महोदय -- आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी आवेदन प्रस्‍तुत हुए माने जाएंगे.

मुझे लगता है कि इसमें याचिकाओं को आवेदन लिखा जाता है तो इस शब्‍दावली को अगले सत्र से बदल दें, चूंकि याचिका शब्‍द का अपना भी एक महत्‍व है, इसलिये अगले सत्र से इसको याचिका के रूप में ही अगर सदन सहमत है, तो हम लोग करेंगे.

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले याचिका ही होती थी और आपने सही कहा कि याचिका का एक अपना महत्‍व होता है.

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई)


 

12.13 बजे

 


 

12.15 बजे अध्‍यक्षीय घोषणा

भोजनावकाश न होना

अध्‍यक्ष महोदय-- आज चूंकि सदन को निरंतरित रखेंगे, भोजनावकाश नहीं होगा, लॉबी में भोजन की व्‍यवस्‍था रहेगी हम आते जाते भोजन ग्रहण कर सकते हैं, सभी सदस्‍य सूचित हों. प्रेस के लिये भी उसी प्रकार की व्‍यवस्‍था रहेगी.

 

12.16 बजे वर्ष 2023-24 के द्वितीय अनुपूरक अनुमान की

मांगों पर मतदान (क्रमश:)

 

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी द्वारा अनुपूरक वैसे तो रेग्‍यूलर बजट प्रस्‍तुत किया जाना था, लेकिन आने वाले लोक सभा चुनावों की वजह से सप्‍लीमेंट्री बजट प्रस्‍तुत किया है. माननीय वित्‍त मंत्री जी द्वारा जो बजट प्रस्‍तुत किया गया है यह तो एक सामान्‍य प्रक्रिया है कि आप बजट प्रस्‍तुत करेंगे, राज्‍य का खर्चा चलायेंगे, विधान सभा से अनुमोदित होगा, ले‍किन मैं इसके संबंध में यही कहना चाहूंगा कि आपकी जो वित्‍तीय स्थिति है वह किस तरह की है, इस तरह का विवरण जरूर प्रस्‍तुत किया जाना चाहिये. हम चाहते हैं कि इस पर पूरी तरह से सरकार एक श्‍वेतपत्र जारी करे कि सरकार की इनकम कितनी है, सरकार पर कर्जा कितना है और सरकार की स्थिति क्‍या है और जो आरबीआई के तहत कर्ज लेने की सीमा है उसके आप कितने नजदीक हो, अभी तो हो फिर आगे कैसे चलाओगे कितने नजदीक हो यह भी माननीय वित्‍तमंत्री जी स्‍पष्‍ट करें. आज की तारीख में मध्‍यप्रदेश सरकार पर 3.85 लाख करोड़ रूपये का कर्ज है. (श्री बालाबच्‍चन जी द्वारा बैठे-बैठे कुछ कहने पर)

अध्‍यक्ष महोदय-- बाला बच्‍चन जी समर्थन नहीं कर रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत-- नहीं वह समर्थन से आगे जा रहे हैं कि लगभग 4 लाख करोड़ और शायद पहुंच गया हो 4 लाख करोड़ कोई आश्‍चर्य नहीं है, क्‍योंकि वह एक कहावत है कि कर्ज से पूरी सरकार चल रही है, धीरे धीरे वह संस्‍कृत का श्‍लोक तो मुझे याद नहीं लेकिन, वह कर्ज लेकर घी पीना वह स्थिति इस सरकार की है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सरकार की आय कितनी है जो केन्‍द्र सरकार से प्राप्‍त नहीं होती उसके अलावा स्‍थानीय आपकी आय वाणिज्यिक और इन विभागों से लगभग 2.25 लाख करोड़ यह आपके राज्‍य की आय से ब्‍याज और ऋण की अदायगी जो होती है वह आपकी 54 हजार करोड़ रूपये अधिक है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कुल बजट का वेतन भत्‍तों और ब्‍याज भुगतान पर आपका खर्च हो जाता है जीएसडीपी का बजट का 26.2 प्रतिशत आपका पूरा व्‍यय होता है.

डॉ. सीतासरन शर्मा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाइंट ऑफ आर्डर है. माननीय रावत जी बहुत वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं, अनुपूरक मांगों में सिर्फ उन्‍हीं बातों पर चर्चा की जा सकती है, जो उसमें प्रस्‍तुत की गई हों. माननीय रावत जी आम बजट जैसा भाषण दे रहे हैं, मेरा अनुरोध है वह सीनियर मेम्‍बर हैं, अनुपूरक पर आयें.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपने ध्‍यान दिलाया, वह जरूर इस मामले में अपने को करेक्‍ट करेंगे, वह बहुत संजीता सदस्‍य हैं.

श्री रामनिवास रावत-- अगर कर्ज लेकर राशि का प्रावधान नहीं किया हो तो मैं कर्ज की बात नहीं करूंगा, यह स्‍पष्‍ट कर दें. अगर कर्ज लेकर सरकार ने राशि का प्रावधान नहीं किया हो तो स्‍पष्‍ट कर दें तो मैं कर्ज के बारे में चर्चा नहीं करूंगा. जब इस अनुपूरक अनुदान में कर्ज की राशि समाहित है तो मैं समझता हूं कि कर्ज पर चर्चा से...

अध्‍यक्ष महोदय-- आप इधर आसन की तरफ देखकर बोलो. ...(हंसी)...

श्री रामनिवास रावत - जी अध्यक्ष महोदय. माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश में प्रति व्यक्ति पर लगभग 50 हजार रुपये कर्ज इस समय पहुंच गया है और जो मैं समझता हूं कि वेतन,भत्ते,पेंशन और ऋण चुकाने के बाद विकास के लिये बड़ा भटकना पड़ता है. विकास के लिये राशि बची नहीं है. कर्ज लेकर हम राशि कार्यों पर लगा रहे हैं. ब्याज पर हम 24 हजार करोड़ रुपये दे रहे हैं. पेंशन पर हम 18636 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष दे रहे हैं और वेतन,भत्तों पर 56314 करोड़ रुपये हम दे रहे हैं जो कि बजट का टोटल 26.2 प्रतिशत है और वेतन पर 18.64 करोड़,पेंशन पर 6.16 और ब्याज और ऋण पर 8.29 करोड़, इस तरह से हमारे बजट की राशि खर्च हो रही है. आपने बजट प्रस्तुत किया है और बजट में मांगें भी की हैं. कल केग की रिपोर्ट भी आई है. बजट में कुछ चीजें जो आपके लिये जरूरी थीं आवश्यक थीं नहीं तो आपको आगे के लिये कर्ज नहीं मिलता. मुख्य शीर्ष 2049 इसमें आपने बाजार के ऋणों के भुगतान के लिये राशि ली है. मद क्रमांक 12 में भी प्राप्त ऋणों पर ब्याज के भुगतान के लिये राशि ली है. मद क्रमांक 13 में भी ब्याज और भुगतान के लिये राशि ली है.मद क्रमांक 14 में भी ब्याज और भुगतान के लिये राशि ली है और मुख्य शीर्ष 6003 में ऋणों के पुनर्भुगतान के लिये राशि ली है. ज्यादातर राशि तो ऋण भुगतान और ब्याज भुगतान पर खर्च करने के लिये आपने राशि ली है और मुख्यमंत्री के लिये विवेकाधीन राशि भी 19 करोड़ 40 लाख 9 हजार 664 रुपये ली है. मैं समझता हूं कि यह राशि मुख्यमंत्री इस सदन के नेता हैं. सरकार के मुखिया हैं. राशि ली है इसमें हमें आपत्ति नहीं है लेकिन हमें आपत्ति है कि इस राशि का वंटन वे कैसे करेंगे. हमें संदेह है. माननीय सभापति महोदया, यह राशि हम चाहते हैं कि आप विधान सभा से यह राशि लेंगे लेकिन इस राशि का आवंटन सबके लिये हो और सबकी आवश्यकतानुसार हो क्योंकि हमें संदेह है. मैं आगे आऊँगा कैलाश जी.

समय 12.22 बजे सभापति महोदया (श्रीमती झूमा ध्यान सिंह सोलंकी) पीठासीन हुईं.

संसदीय कार्य मंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय) - हमारे प्रधानमंत्री जी का नारा है सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और सबका प्रयास और उसी के  अनुसार हम काम करते हैं. इसलिये आप चिंता मत करिये आवंटन बिल्कुल बराबर होगा.

श्री आरिफ मसूद- कैलाश जी, हम अपना भी मान लें ना.

श्री रामनिवास रावत - मैं चाहूंगा कि आपने जो सूत्र बोला है सबका साथ,सबका विकास सबका विश्वास तो इस पर भी मैं आऊंगा. यह भरोसा इस इस सरकार ने तोड़ दिया है. इस बजट में ही तोड़ दिया है. सरकार पूरे प्रदेश की होती है भले आप भारतीय जनता पार्टी की सरकार है लेकिन आप मंत्री पूरे प्रदेश के हो भारतीय जनता पार्टी के व्यक्तियों के लिये नहीं हो. यह सरकार पूरे प्रदेश की है लेकिन जिस तरह से भेदभाव किया जा रहा है वह दुर्भाग्यपूर्ण है. अभी इसमें कुछ जो गारंटियों की बात कही गई है उनके लिये तो राशि ली गई है लेकिन कुछ के लिये राशि का प्रावधान नहीं किया गया है. आपने प्रदेश की लाड़ली बहनाओं का विश्वास जीतने के लिये आपने 3 हजार रुपये देने का वायदा किया था कि नहीं. गारंटी दी थी कि नहीं दी थीत लेकिन इस बजट में कहां है आप बता दो. आप 1250 रुपये के हिसाब से राशि दे रहे हो और वह भी आपका जो आंकड़ा है, वह प्रतिमाह बदलता जा रहा है, क्‍यों. सभापति महोदया, यह बहुत गंभीर मामला है. इसे आप भी देखें कि जो लाड़ली बहनाओं को राशि दी जा रही है, 1250 रुपये, हर महीने लाड़ली बहनाओं की संख्‍या बदलती जा रही है. जून में 1 करोड़ 19 लाख 83 हजार बहनाओं को राशि दी जा रही है. जुलाई में 1 करोड़ 24 लाख 15 हजार 581 बहनाओं को राशि दी गई. अगस्‍त में 1 करोड़ 23 लाख 85 हजार 605 बहनाओं को राशि दी गई. यहां आपकी संख्‍या बदल गई. सितंबर में 1 करोड़ 29 लाख लाड़ली बहनाएं हो गईं. यहां आपकी संख्‍या फिर बदल गई. दिसम्‍बर में 1 करोड़ 28 लाख 40 हजार 920 लाड़ली बहनाएं थीं और जनवरी में 1 करोड़ 28 लाख, यह संख्‍या क्‍यों बदलती जा रही है. माननीय वित्‍त मंत्री जी, इसमें कहीं न कहीं जबरदस्‍त गंभीर वित्‍तीय अनियमितता है. स्‍पष्‍ट करें कि जब दिसम्‍बर में आप लाभान्‍वित हितग्राहियों की संख्‍या 1 करोड़ 28 लाख 40 हजार 920 लाड़ली बहनाएं बता रहे हैं तो दूसरे महीनों में अलग बता रहे हैं, लाखों में आपने लाड़ली बहनाएं गायब कर दीं. किस तरह से आप प्रदेश को चलाना चाहते हैं. आप राशि क्‍यों मांग रहे हैं. पहले तो आप न्‍याय करें कि 3 हजार रुपये का आपने वायदा किया था कि नहीं किया था. अगर 3 हजार रुपये का वायदा किया था तो आप प्रदेश की उन लाड़ली बहनाओं के लिए 3 हजार रुपये का प्रावधान इसमें करते, हम खुलकर समर्थन करते. आप उनके खिलाफ वायदा खिलाफी कर रहे हैं. आप उनको धोखा दे रहे हैं. माननीय सभापति महोदया, इस तरह से ये कहते कुछ हैं, करते कुछ हैं. यह इनकी स्‍थिति है.

माननीय सभापति महोदया, आप राशि का कैसे उपयोग कर रहे हैं, यह भी स्‍पष्‍ट करें. पहले आपके वित्‍तीय लेखे साल भर के आने चाहिए थे कि वर्ष 2023-24 का कितना बजट प्रावधान था, कितनी राशि व्‍यय की गई और कितनी राशि आपने सरेण्‍डर की. किन-किन विभागों ने सरेण्‍डर की. वित्‍तीय लेखें प्रस्‍तुत किए जाते हैं, मैं समझता हूँ कि वित्‍तीय लेखा पटल पर नहीं आया है शायद. वित्‍तीय लेखें प्रस्‍तुत किए हैं क्‍या, नहीं किए हैं. जबकि वर्ष के अंत में चालू वर्ष के वित्‍तीय लेखे प्रस्‍तुत किए जाते हैं. आपने किस-किस मद की राशि का परिवर्तन करके बिना अनुमति के, बिना विधान सभा की स्‍वीकृति के कहां-कहां व्‍यय किए, यह भी गंभीर वित्‍तीय अनियमितता में आता है. कैग की रिपोर्ट में उन्‍होंने स्‍पष्‍ट किया है, उन्‍होंने आपत्‍ति ली है कि आपने गलत तरीके से राशि व्‍यय की है, उसमें भ्रष्‍टाचार प्रथम दृष्‍टया परिलक्षित होता है.

माननीय सभापति महोदया, एक आदेश है, मध्‍यप्रदेश शासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, मंत्रालय, वल्‍लभ भवन. राज्‍य शासन द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को सामान्‍य श्रेणी के लंबित मानदेय के भुगतान के लिए विशेष प्रकरण मानते हुए अनुसूचित जनजाति उपयोजना 0658070831004 में उपलब्‍ध शेष राशि 207 करोड़ की राशि को सामान्‍य योजना में पुर्नवियोजन किया जाना स्‍वीकृत किया जाता है. उपरोक्‍त स्‍वीकृति वित्‍त विभाग के जावक क्रमांक, दिनांक द्वारा प्रदान की गई. क्‍या महिला एवं बाल विकास विभाग इस तरह से कर सकता है. क्‍या वित्‍त विभाग इस तरह से स्‍वीकृति दे सकता है. यह कौन सी राशि है. अगर यह राज्‍य शासन की राशि है तो यह वह राशि है जो केन्‍द्र, ज्‍यादातर अनुसूचित जनजाति उपयोजना की जितनी भी योजनाएं हैं, जहां तक मेरी जानकारी में है, केन्‍द्र प्रवर्तित योजना है और केन्‍द्र प्रवर्तित योजनाओं में आपको अपनी राशि मिलानी पड़ती है. शायद या तो वह राशि है या केन्‍द्र से प्राप्‍त हुई राशि है, किस तरह से आपने इस राशि को महिला एवं बाल विकास विभाग के मद में परिवर्तित कर दिया.

क्‍या यह वित्‍तीय अनियमितता नहीं है. आप आज राशि किसी चीज के लिए मांग रहे हो और उपयोग किसी चीज में करोगे. आपका कैसे भरोसा करें ? आप राशि का उपयोग कैसे करोगे ? आप मध्‍यप्रदेश के उन अनुसूचित जनजाति वर्ग एवं प्रदेश के आदिवासियों के साथ भी धोखा कर रहे हो, छलावा कर रहे हो, उनके लिए प्रस्‍तावित की गई विकास की राशि को आप सामान्‍य योजना में परिवर्तित कर रहे हो.

माननीय सभापति महोदया, यह बहुत महत्‍वपूर्ण और आपत्ति लेने वाली बात है. यह दुर्भाग्‍य की बात है कि आप आदिवासी उपयोजना की राशि को किस तरह से व्‍यय कर रहे हो ? यह आपको स्‍पष्‍ट करना चाहिए कि आपने ऐसा क्‍यों किया ? यह तो एक विषय संज्ञान में आ गया था. आपके बजट की पूरी स्थिति की जानकारी मिलना चाहिए, हम तो यह चाहते हैं. इस बजट में आपने जनसम्‍पर्क के लिए राशि मांगी है, जब आप खर्च की सीमा के लगभग आरबीआई के जो निर्देश ऋण लेने की सीमा के नजदीक पहुँच रहे हो, तो आप अपव्‍यय को कम करते जाइये, व्‍यय को आप कम करते जाइये, आप फिजूलखर्ची रोकते जाइये. पहले भी ऐसा हुआ है कि राज्‍य सरकारें जिन व्‍ययों को कम कर सकती हैं, कम करें. आप जनसम्‍पर्क के अंतर्गत इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया के प्रचार हेतु 120 करोड़ रुपये का प्रावधान कर रहे हो. आप केवल प्रचार-प्रसार की सरकार हैं, यह सरकार केवल विज्ञापन की सरकार है, विज्ञापनों में आप चाहे जितना देते रहें. प्रदेश के हर कोने में विज्ञापन लगे हैं कि हम लाड़ली बहनाओं को 3,000 रुपये देंगे. आज भी प्रदेश के हर कोने में विज्ञापन लग रहे हैं कि हम 450 रुपये में बहनाओं को सिलेण्‍डर देंगे, लेकिन आपने सिलेण्‍डर नहीं दिये हैं. आप दे भी रहे हैं, तो उनका अता-पता नहीं है, आप संख्‍या दे रहे हैं. वह राशि कहां जा रही है ? जिन बहनाओं को आप सिलेण्‍डर का अनुदान दे रहे हैं, हम तो चाहते हैं कि आप उनकी क्षेत्रवाइज़ सूची सबको उपलब्‍ध कराएं. जिससे क्षेत्र में हम देख सकें कि यह पैसा कहीं कोई और तो नहीं निकाल रहा है, इसमें वित्‍तीय अनियमितता तो नहीं हो रही है, इसमें भ्रष्‍टाचार तो नहीं हो रहा है. आप केवल असत्‍य आंकड़े प्रस्‍तुत कर रहे हो. मैं तो यह मानता हूँ कि आपने बहनाओं को वायदा किया है और आपके होर्डिंग्‍स भी लगे हैं, आपके प्रचार-प्रसार के बड़े-बड़े पोस्‍टर्स और बैनर लगे हुए हैं. आप इन बहनाओं को 450 रुपये में सिलेण्‍डर दें, आप अपना वायदा निभाएं. आप इसके लिए राशि ले लें, हम समर्थन करेंगे. आप उनको 3,000 रुपये देने के लिए राशि दें, हम समर्थन करेंगे. हमने कब मना किया है ? आपने किसानों से वायदा किया था और किसानों के लिए वचन दिया था, आप जिस मोदी की गारंटी की बात करते हो, क्‍या मोदी की गारंटी में नहीं है 2,700 रुपये क्विंटल गेहूँ देना, आप 2,700 रुपये क्विंटल गेहूँ खरीदने के लिए आप इसमें राशि का प्रावधान करो, आप वचन दो. हम आपके बजट को सर्वसम्‍मति से पारित करवाएंगे. आप 3,100 रुपये क्विंटल धान के दो, हम बजट को सर्वसम्‍मति से पारित करवाएंगे, लेकिन आप पूरे प्रदेश की जनता के साथ वादाखिलाफी कर रहे हो, आप बहनाओं के साथ वादाखिलाफी कर रहे हो, आप किसानों के साथ वादाखिलाफी कर रहे हो, आप पदों को स्‍वीकृत करने के लिए इसमें व्‍यवस्‍था करते, पदों की आवश्‍यकता होती है, आप जानते हैं कि जो एनसीईआरटी के नियम हैं, उसके अनुसार शिक्षा विभाग में बच्‍चों की संख्‍या बढ़ती जा रही है, आपके पद उतने के उतने ही हैं. मैं आपकी तरफ इसलिए इशारा कर रहा हूँ.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटैल) - आप आसन्‍दी का सम्‍मान नहीं कर रहे हैं, आपको आसन्‍दी की तरफ देखकर बोलना चाहिए.

श्री रामनिवास रावत - मैं सभापति महोदया बराबर बीच में कहता जा रहा हूँ, मैं बहुत सम्‍मान करता हूँ. प्रहलाद जी, मैं आपकी तरफ इसलिए देख रहा हूँ कि मैं जो कह रहा हूँ, उसे आप समझ रहे हो बाकि का कोई भरोसा नहीं है. (हंसी)

डॉ. सीतासरन शर्मा - हम भी समझ रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत - आप तो मेरी पीठ के पीछे हैं. आपका तो सम्‍मान करता हूँ, आपको तो प्रणाम करता हूँ.

श्री रामेश्‍वर शर्मा - आपकी पीठ के पीछे बैठे हैं, उधर कोई नहीं समझ रहा है आपकी बात.

श्री रामनिवास रावत - वह सब समझ रहे हैं.

श्री रामेश्‍वर शर्मा - आप ही तो कह रहे हैं. (हंसी)

श्री रामनिवास रावत - माननीय सभापति महोदया, 3,100 रुपये भी मोदी की गारंटी है. क्‍यों रामेश्‍वर भाई है कि नहीं.

श्री रामेश्‍वर शर्मा - है.

श्री रामनिवास रावत - फिर वह पूरी क्‍यों नहीं करा रहे हो ? (हंसी) आप मानोगे न कि नहीं हो रही है.

डॉ. रामकिशोर दोगने - जैसे 15 लाख रुपये खाते में आएंगे, वैसे ही यह भी गारंटी.

श्री राम निवास रावत- माननीय सभापति महोदया, इसमें जो प्रावधान किए गए हैं, उन प्रावधानों की ओर, मैं और आगे जाता हूं. वित्‍त मंत्री जी मैं, आपका ध्‍यान अनुपूरक अनुमान की बजट पुस्‍तक की ओर दिलाना चाहूंगा. आपने पृष्‍ठ संख्‍या 116 में परीक्षित मद के अंतर्गत काफी कुछ व्‍यवस्‍था, सिंचाई सुविधाओं में सुधार हेतु की है. आप कृपया मुझे बतायें कि ये परीक्षित मद कौन सी हैं, इसमें आपने राशि की व्‍यवस्‍था कहां से की है, यह स्‍पष्‍ट करें. आपने परीक्षित मद के पीछे-पीछे सारे पृष्‍ठ जोड़े हैं और इसी तरह से पृष्‍ठ क्रमांक 120 पर लोक निर्माण विभाग के लिए व्‍यवस्‍था की है, यह अपरीक्षित मद है. यह अपरीक्षित मद कौन सी है, आप स्‍पष्‍ट करें कि अपरीक्षित मद और परीक्षित मद, कौन सी हैं और स्‍पष्‍ट करने के साथ-साथ अपरीक्षित मद और परीक्षित मद में आपने किन-किन विधान सभाओं के लिए, कामों की व्‍यवस्‍था की है और उन विधान सभाओं से किस-किस पार्टी के विधायक हैं. आपकी पूरी आधी किताब में किए गए बजट प्रावधानों के विषय में, मैं जानना चाहता हूं कि ये किन-किन के लिए है.

माननीय सभापति महोदया, मैंने मुख्‍यमंत्री जी के विवेकाधीन कोटे की राशि की बात कही थी, आपने इसमें जितने भी विधायक रखे हैं, सारे के सारे भारतीय जनता पार्टी के हैं. केवल एक पार्टी के लोगों के लिए आपने व्‍यवस्‍था की है. आपने जिस दिन शपथ ली थी, उस दिन शपथ में कहा गया था कि मैं संविधान के अंतर्गत किसी के साथ भेदभाव नहीं करूंगा.

12.37 बजे

{ सभापति महोदय (श्री अजय विश्‍नोई) पीठासीन हुए.}

 

श्री राम निवास रावत- माननीय सभापति महोदय, इन्‍होंने ईश्‍वर की शपथ ली थी कि मैं, राज्‍य की जनता के लिए न्‍याय करूंगा और किसी के साथ भेदभाव नहीं करूंगा. आपने अपनी शपथ को भी भंग किया है. माननीय उप मुख्‍यमंत्री जी आपसे हमें ऐसी उम्‍मीद नहीं थी. भाजपा के विधायकों से आपने 15 करोड़ रुपये के प्रस्‍ताव लिए हैं.

श्री अभय कुमार मिश्रा- आपने कहा था दलगत भावना से ऊपर उठकर काम करेंगे, प्रारंभ से ही चावल का दाना समझ आ रहा है.

श्री भवंर सिंह शेखावत (बाबु जी)- 15 करोड़ रुपये के प्रावधान भी कुछ लोगों से मांगे गए हैं, कुछ लोगों से नहीं मांगे गए हैं.

श्री विजय रेवनाथ चौरे- केवल भाजपा वालों से मांगे गए हैं.

श्री भवंर सिंह शेखावत (बाबु जी)- ये भाजपा-कांग्रेस क्‍या होता है ? यदि आप 15 करोड़ रुपये की व्‍यवस्‍था कर रहे हैं तो सभी के लिए कीजिए.

श्री अभय कुमार मिश्रा- आपको सभी को यह राशि देनी चाहिए. पूरे प्रदेश की जनता के लिए सरकार है. आप जनता का विकास रोक रहे हैं, हमारा क्‍या है, हम अपने लिए नहीं मांग रहे हैं, क्षेत्र की जनता के लिए मांग रहे हैं.

हमने 24 जनवरी को मुख्‍यमंत्री जी को पत्र भी लिखा था कि मुझे आपकी योग्‍यता पर संदेह नहीं, किंतु कार्य प्रणाली गरिमा के अनुरूप नहीं है.

श्री विजय रेवनाथ चौरे- आप यदि कांग्रेस वालों को भी 15 करोड़ रुपये दे देते तो हम भी आपकी प्रशंसा करते. 15 नहीं तो कम से कम 10 करोड़ रुपये ही दे देते.

श्री भवंर सिंह शेखावत (बाबु जी)- ये सबका विकास, सबको साथ लेकर चलने की परिकल्‍पना, आदरणीय मोदी जी इसे बार-बार दोहराते हैं लेकिन व्‍यवहार में क्‍या हो रहा है.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल)- माननीय सभापति महोदय, मुझे लगता है कि रावत जी वरिष्‍ठ विधायक हैं. हम सभी उनसे सीखेंगे लेकिन उनके विधायक ही उनका समय ले रहे हैं. वे अपनी बात रखने में समर्थ हैं.

श्री राम निवास रावत- ये केवल हमारे साथियों की पीड़ा है.

श्री भवंर सिंह शेखावत (बाबु जी)- पटेल जी, यहां रावत जी की समर्थता पर कोई प्रश्‍न चिन्‍ह नहीं है.

सभापति महोदय- शेखावत जी, आप रावत जी को अपनी बात कहने दें.

श्री राम निवास रावत- माननीय सभापति महोदय, आप भी सदन के वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं, राज्‍य सरकार में मंत्री भी रहे हैं, आपने भी मंत्रालय चलाया है, क्‍या आपने कभी ऐसा किया है कि भाजपा या कांग्रेस का विधायक है. विधायक, विधायक होता है, आपने हमेशा सम्‍मान दिया है. यह पहली बार प्रदेश की विधान सभा में हो रहा है, यह पहली बार इस सरकार के सामने हो रहा है, ऐसा भेदभाव हो रहा है.

श्री रामेश्‍वर शर्मा- रावत जी, आप नहीं थे, कमल नाथ जी ने ऐसा ही किया है.

सभापति महोदय-- रावत जी आप अपनी बात को जारी रखें.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय सभापति महोदय, यह अपरीक्षित मद कौन सा है इसे स्‍पष्‍ट करें और साथ ही यह स्‍पष्‍ट करें कि विधान सभा की जो प्राक्‍कलन समिति बनी हुई है. प्राक्‍कलन समिति की बजट प्रस्‍तुत करने के लिए क्‍या-क्‍या अनुशंसाएं हैं, प्राक्‍कलन समिति ने क्‍या-क्‍या रिपोर्ट दी है, उसका क्‍या पालन किया गया है इसमें एक-एक करोड़ रुपए से कम के कामों का प्रावधान किया गया है. बजट में प्राक्‍कलन समिति की रिपोर्ट में है कि 1 करोड़ रुपए से कम के कामों का बजट के किसी मद में उल्‍लेख नहीं किया जाएगा यह कौन सी मद है? आप ऐसा क्‍यों कर रहे हैं? यह द्वितीय अनुपूरक अनुमान आप केवल अपने सदस्‍यों को काम देने के लिए वह भी ऐसे काम हैं न जिनका प्राक्‍कलन है, न जिनका प्रस्‍ताव है. लिखकर दे गए, आपने काम दे दिया. न आपने स्‍पॉट देखा, न आपके विभाग से कुछ आया है और आपने काम शुरू कर दिये. यह कैसे, क्‍यों? मैं समझता हूं कि इनमें बहुत सारे काम तो ऐसे होंगे जिनमें भारी भरकम भ्रष्‍टाचार की स्थिति पैदा होगी. किस तरह से काम स्‍वीकृत होते हैं इसकी जानकारी भी मुझे है, चूंकि सदन में कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्‍हें कहना ठीक नहीं है, लेकिन आप उन्‍हें सुधारें.

सभापति‍ महोदय, यह अपरीक्षित मद हैं लागत और अनुपूरक 100 रुपए का प्रावधान किया गया है. यह बांटेंगे यह मद क्रमांक 18 में लगभग 29 हजार 190 करोड़ रुपए के हैं, मद क्रमांक 49 में 13 हजार 758 करोड़ रुपए के हैं, मद क्रमांक 10 में 26 हजार 533 करोड़ रुपए के हैं, मद क्रमांक 20 में 8 हजार 227 करोड़ रुपए के हैं, मद क्रमांक 17 में 2 लाख 92 हजार 992 करोड़ रुपए के हैं. यह पूरे के पूरे इन्‍हें यदि पूरा जोड़ें तो यह काम 1 करोड़ से कम लागत के हैं जिन्‍हें बजट में लाने की आवश्‍यकता नहीं थी जो अन्‍य मद होता है जिनमें मंत्रियों को विवेकाधिकार होता है. प्रहलाद जी आपके विभाग की भी राशि ले ली गई है. जिन कामों को स्‍वीकृत करने का अधिकार आपका था उन कामों को भी वहां से स्‍वीकृत कर रहे हैं.

माननीय सभापति महोदय, यह मांग संख्‍या 24 और मद क्रमांक 10 योजना क्रमांक 41 में 23 कार्यों को अपरीक्षित मद के रूप में शामिल किया गया है. इसी तरह से परीक्षित मद के रूप में शामिल किया गया है. कुछ एक करोड़ रुपए से कम के भी बहुत सारे काम है. यह सारे के सारे काम इनमें पूरा चंबल संभाग ही गायब है. एक किसी को पहुंच गया हो तो पहुंच गया हो. कोई ज्‍यादा ताकतवर भाजपा का एमएलए बनकर नहीं आया केवल एक मंत्री जी बैठे हैं इनके क्षेत्र में जरूर काम स्‍वीकृत हैं. आप इसको दिखवा लें मैंने पूरी किताब देखी है.

श्री तुलसीराम सिलावट-- आप सही लाईन चलो.

श्री रामनिवास रावत-- हम सही लाईन चल रहे हैं. हम संविधान का आदर करते हैं, प्रजातंत्र का आदर करते हैं और प्रजातंत्र का सम्‍मान करते हैं.

श्री तुलसीराम सिलावट-- माननीय सभापति महोदय, रावत जी विद्वान सदस्‍य हैं.

श्री बाला बच्‍चन-- माननीय मंत्री जी आप ही बता दो कि किस मद में दिया है.

श्री तुलसीराम सिलावट -- बाला बच्‍चन जी आप मिल लेना जब बोलो मैं जानकारी दे दूंगा.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय सभापति महोदय, माननीय मंत्री जी को भी मैं बता दूं कि परीक्षित मद योजना का नाम सेठारी बैराज, इंदौर, उज्‍जैन, कटनी, खण्‍डवा, छतरपुर, देवास, नर्मदापुरम, नीमच, पन्‍ना, धार, मंदसौर, रतलाम, शाजापुर, सागर, सीहोर, सिंचाई मंत्री जी सुन लीजिए.

श्री अभय कुमार मिश्रा -- माननीय सभापति महोदय, रीवा में सिर्फ सेमरिया को छोड़कर, संकीर्ण मानसिकता आप देखिए. सिर्फ एक विधान सभा क्षेत्र को छोड़कर क्योंकि वहां पर यह 800 वोट से हार गए थे तो वहां की जनता से बदला ले रहे हैं. इससे ज्यादा संकुचित मानसिकता क्या हो सकती है.

सभापति महोदय - अभय जी जब आपका नाम और आपका समय आएगा तब बोलिएगा.

श्री रामनिवास रावत -- मंत्री जी आप केवल मालवांचल के मंत्री नहीं हैं, पूरे प्रदेश के मंत्री हैं.

सभापति महोदय -- रावत जी आपका भाषण हो गया हो तो मैं आपके ही दल के सदस्य को बुला रहा हूँ. श्री अभय कुमार मिश्रा जी बोलें.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटैल) -- माननीय सभापति महोदय, मैं सोच रहा था कि रामनिवास जी का भाषण पूरा हो जाएगा तब मैं अपनी बात कहूंगा. आपने उल्लेख किया कि मेरे विभाग का पैसा भी बदल दिया गया है. मुझे लगता है कि तथ्यात्मक बातें करना चाहिए. जो बजट में है वह चीजें सामने हैं. आप जैसे माननीय सदस्य जो इतने वरिष्ठ हैं, मैं मानता हूँ कि चुटकी लेने के लिए तो ठीक है, तथ्य के हिसाब से ठीक नहीं है.

श्री रामनिवास रावत -- सभापति महोदय, मैं समझता हूँ कि मंत्री जी बहुत विद्वान व्यक्ति हैं. मंत्रालय से आपकी पहचान नहीं है बल्कि आपकी वजह से मंत्रालय का सम्मान बढ़ेगा, ऐसा मैं मानता हूँ. लेकिन आपके यहां मुद्रांक शुल्क भी आता है, आप पता कर लेना की मुद्रांक शुल्क भी इसमें समाहित कर लिया गया है. स्टाम्प कर भी आता है वह भी इसमें समाहित कर लिया गया है. खनिज विभाग से भी पंचायत कर आता है वह भी इसमें समाहित कर लिया गया है.

श्री प्रहलाद सिंह पटैल -- आपके सामने अनुदान की मांगें आ रही हैं, जैसा डॉक्टर साहब ने हस्तक्षेप किया था. हम जब अनुदान की मांगें लेकर आए तो जो स्थिति है उस परिस्थिति में आपके पास जो उपलब्ध राशि है उसका कैसे सदुपयोग करेंगे यही सदन के सामने रखा है.

श्री रामनिवास रावत -- बिलकुल है, लेकिन मेरा कहना था जो एक करोड़ से कम के कार्य हैं प्राक्कलन समिति की अनुशंसा के अनुसार उनका उल्लेख इसमें नहीं होना चाहिए लेकिन किया गया है. आपने केवल भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों से 15-15 करोड़ रुपए के प्रस्ताव मांगकर केवल उन्हीं के विधान सभा क्षेत्र में काम स्वीकृत किए हैं. इस तरह आप केवल भेदभाव ही नहीं कर रहे हैं आपने सदन में जो शपथ ली थी. ईश्वर की शपथ खाकर कहा था कि प्रदेश के लोगों के साथ भेदभाव नहीं करूंगा. आपने उस शपथ को भंग करने का काम किया है. यह बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है.

डॉ. योगेश पंडाग्रे (आमला) -- माननीय सभापति महोदय, माननीय सदस्य महोदय यहां पर बात कर रहे हैं तो फिर 15 महीने की सरकार पर भी यह बात उठनी चाहिए. बैतूल जिले में पांच विधान सभा क्षेत्र में से एक विधान सभा आमला की थी. उन डेढ़ वर्षों में जो सदस्य थे उनके साथ भेदभाव किया ही गया था, कोई विकास कार्य वहां पर स्वीकृत नहीं किए गए थे. इन्होंने भी जो शपथ ली थी उस पर भी बात करें. साथ ही किसानों के कर्ज माफी की बात की गई थी कि दो लाख रुपए तक का कर्ज माफ करेंगे. बाकी जगह पर तो शायद कुछ राशि दी गई थी आमला में तो किसानों के साथ भी भेदभाव किया गया था.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय सदस्य जब आपका नंबर आएगा तब आप बोलिएगा.

सभापति महोदय -- माननीय सदस्य आपका विषय आ गया है, रावत जी आपका विषय भी आ गया है, मेरा अनुरोध है कि अब आप समाप्त कर दें.

श्री रामनिवास रावत -- सभापति महोदय, मैं माननीय डिप्टी सीएम साहब से 2-3 बातें कहना चाहता हूँ. एक तो यह स्पष्ट कर दें कि आपने जिन कार्यों का प्रावधान किया है वह कौन कौन से विधान सभा क्षेत्र के हैं और केवल भारतीय जनता पार्टी के विधायकों के क्षेत्र में काम स्वीकृत किए हैं, मेरा यह आरोप है. आरबीआई के निर्देशों के अनुसार आपकी ऋण लेने की जो सीमा है वह कितनी है और आप कितनी सीमा तक पहुंच गए हैं वह स्पष्ट कर दें.

श्री दिलीप सिंह परिहार --रावत जी, जिन जिन विधायकों ने काम दिए हैं उनके स्वीकृत हो रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय सभापति महोदय, हम चाहते हैं कि यह भेदभाव न करें. सभी सदस्यों को एक दृष्टि से देखें. आदरणीय विजयवर्गीय जी आप कह रहे थे सबका साथ सबका विकास. अभी तक की सरकारों में ऐसा पहली बार हुआ है अभी तक के मेरे राजनीतिक जीवन में इस सरकार ने भारतीय जनता पार्टी के व्यक्ति और कांग्रेस के जनप्रतिनिधि में भेदभाव किया है. सबको एक दृष्टि से नहीं देखा है. इस सरकार ने जो शपथ ली थी उसको भी भंग करने का काम किया है. केवल भारतीय जनता पार्टी के लोगों से 15-15 करोड रुपये के प्रस्‍ताव लेकर ...

सभापति महोदय -- रावत जी, वही विषय दोहराया जा रहा है. मेरा अनुरोध है कि अब समाप्‍त करें और अपने दूसरे दल के सदस्‍यों को मौका दें.

श्री रामनिवास रावत -- सभापति जी, यह गंभीर विषय है.

सभापति महोदय -- आप इस विषय को कई बार कह चुके हैं. आपकी बात आ गई है.

श्री रामनिवास रावत -- यह गंभीर विषय है और कर्ज लेने की सीमा है. आप किस तरह से खर्च करेंगे और हम चाहते हैं कि आप अनुपूरक भी लाएं और बहुत महत्‍वपूर्ण बात है कि हरदा में इतनी बडी घटना हुई. हरदा में लोगों को कैसे पुनर्स्‍थापित करेंगे ?

सभापति महोदय -- हरदा की बात कल बहुत विस्‍तार से आपने ही स्‍टार्ट की थी और रख चुके हैं.

श्री रामनिवास रावत -- विस्‍तार से नहीं. उनको पुनर्स्‍थापित करने के लिये राशि की व्‍यवस्‍था करते तो हमें अच्‍छा लगता. हम उसका समर्थन करते. आप उनके पुनर्स्‍थापन के लिये राशि की व्‍यवस्‍था तो कर नहीं रहे, आप अपने-अपने लोगों को कौन बांटे रेवडी, चीन्‍ह-चीन्‍ह के दे, वह बात हो रही है. वहां कितना बडा नुकसान हुआ है, कितने लोगों को पुनर्स्‍थापन करने की आवश्‍यकता पडेगी उसके लिये राशि की व्‍यवस्‍था का कोई उल्‍लेख नहीं किया गया. उसके लिये राशि लम्‍पसम्‍प डाल देते तो हम समर्थन करते. जो अनुपूरक अनुमान आया है सरकार को चलाने के लिये जरूरी है, पारित होगा, हम कम हैं आप ज्‍यादा हैं, वह तो व्‍यय के लिये पारित कराना ही पडता है, लेकिन जो ग्‍यारंटी-ग्‍यारंटी रोज-रोज चिल्‍लाते हैं, मोदी की ग्‍यारंटी, मोदी की ग्‍यारंटी उन ग्‍यारंटियों को पूरा करने के लिये इस बजट में व्‍यवस्‍था करते तो हम इसका समर्थन करते. हम इसका इसलिये विरोध करते हैं क्‍योंकि यह इस प्रदेश की जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है. प्रदेश के युवा, प्रदेश के किसान, प्रदेश की लाडली बहना सबके साथ भारतीय जनता पार्टी की वर्तमान सरकार ने धोखा किया है और वायदा खिलाफी की है हम इसलिये इसका विरोध करते हैं.

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- सभापति महोदय, मेरा प्‍वाइंट ऑफ इन्‍फॉर्मेशन है. सबका साथ, सबका विकास का एक और उदाहरण बता देता हूं. अभी भारत सरकार ने तीन वरिष्‍ठ नेताओं को भारत रत्‍न से नवाजा है. चौधरी चरण सिंह जी जो कि लोकदल पार्टी से आते थे, नरसिंहराव जी जो कि इनकी पार्टी से आते थे जिनका सम्‍मान इन लोगों ने नहीं किया है, परंतु उनको भारत रत्‍न देने का काम मोदी जी ने किया है. उसी प्रकार वैज्ञानिक स्‍वामीनाथन जी को भी भारत रत्‍न से सम्‍मानित किया है मैं चाहता हूं मोदी जी का और भारत सरकार का इस बात के लिये अभिनंदन करना चाहिये.

सभापति महोदय -- सबका साथ सबका विकास के साथ सबका सम्‍मान भी शामिल किया है, उसके लिये मोदी जी का वाकई में धन्‍यवाद है.

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय सभापति जी, माननीय विजयवर्गीय जी ने जो बोला माननीय नरसिंहराव जी को तो हम लोगों ने देश का प्रधानमंत्री बनाया था कैसे सम्‍मान नहीं किया ?

सभापति महोदय -- देखिये, प्रधानमंत्री तो अटल जी भी रहे थे, परंतु भारत रत्‍न एक अपने आप में अलग चीज होती है.

श्री बाला बच्‍चन -- नरसिंहराव जी की बात आई तो हम लोगों ने कांग्रेस पार्टी ने तो उनको देश का प्रधानमंत्री बनाया था और उन्‍होंने शानदार सरकार चलायी.

सभापति महोदय -- अभय कुमार मिश्रा जी को अपनी बात करने दें. अभय जी, अपनी बात प्रारंभ करें. ..(व्‍यवधान)..

श्री सिद्धार्थ तिवारी -- जग जाहिर है कि कांग्रेस पार्टी ने नरसिंहराव जी के साथ क्‍या व्‍यवहार किया था.

श्री अभय कुमार मिश्रा -- सभापति जी, वर्तमान में 28,655 करोड का ..

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अब बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी, नरसिंहराव जी का जब निधन हुआ, उनकी शव यात्रा को जब कांग्रेस कार्यालय में ले जाया जा रहा था तब इनके एक जनरल सेक्रेट्री ने मना कर दिया और उनके शव को कांग्रेस कार्यालय में वह सम्‍मान नहीं मिला जो मिलना चाहिये था.

श्री रामनिवास रावत -- यह गलत बयानी है.

श्री बाला बच्‍चन -- ऐसा बिल्‍कुल नहीं हुआ है. ..(व्‍यवधान)..

श्री विश्‍वास सारंग -- बात तो इन्‍होंने निकाली ना.

श्री रामनिवास रावत -- केन्‍द्र सरकार ने जिन व्‍यक्तियों को भारत रत्‍न से सम्‍मानित करने का काम किया है, हम केन्‍द्र सरकार का धन्‍यवाद करते हैं.

श्री विश्‍वास सारंग -- इनको बोलिये ना. बाला भाई क्‍यों इतने उद्वेलित हो रहे हैं ?

श्री रामनिवास रावत -- हम गलत बयानी सुनना कतई पसंद नहीं करेंगे. वह इस देश के प्रधानमंत्री थे.

श्री बाला बच्‍चन -- उनको देश का पी.एम. बनाया था. शानदार परफॉर्मेंस उनका था.

श्री विश्‍वास सारंग -- इतने उद्वेलित क्‍यों हो रहे हैं इसके लिये मोदी जी को धन्‍यवाद दीजिये.

श्री रामकिशोर दोगने-- आडवाणी जी का क्‍या हाल है 10 साल बाद आडवाणी जी की याद आयी ? 10 साल बाद भारत रत्‍न दिया. प्रधानमंत्री मोदी जी सरकार में तो 10 साल से हैं, आखिरी में क्‍यों याद आयी ?

सभापति महोदय -- समय हो गया है. अभय कुमार मिश्रा जी, आप बोलिये.

श्री रामकिशोर दोगने -- मुरली मनोहर जोशी कहां हैं ? यशवंत सिन्‍हा कहां हैं ? इनको तो ढूढ लो .

श्री रामनिवास रावत -- सभापति जी, इस बात को कार्यवाही से निकाल दें.

सभापति महोदय -- बात तथ्‍यात्‍मक है इसलिये उसको बाहर निकालने की आवश्‍यकता नहीं है. अभय कुमार मिश्रा जी, आप बोलिये.

श्री सिद्धार्थ तिवारी -- शिवराज जी की फोटो गायब हो गई उसका तो पता करो सम्‍मान देने की बात करते हैं.

श्री रामनिवास रावत -- क्‍या प्रमाण है और क्‍या तथ्‍यात्‍मक है ? आप तथ्‍यात्‍मक कह रहे हैं. कौन सा तथ्‍य है कौन सा प्रमाण है ?

सभापति महोदय -- उस पर अलग से चर्चा कर लेंगे. अभी तो विषय आगे आने दीजिये.

श्री रामनिवास रावत -- आप भी वहां बैठकर, आप सभापति हैं. इस सदन के सभापति हैं. यह गलत बयानी है इसको कैसे कह रहे हैं तथ्‍यात्‍मक है ?

श्री बाला बच्‍चन -- सभापति महोदय, यह बिल्‍कुल असत्‍य है. उनको सम्‍मान दिया है उनको देश का प्रधानमंत्री बनाया है.

सभापति महोदय -- क्‍या विलोपित करना है, क्‍या नहीं करना है यह सभापति का अधिकार है.

श्री रामनिवास रावत -- हम कुछ भी कह दें अब वह तथ्‍यात्‍मक हो जाएगा.

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- आप सभापति पर उंगली मत उठाइये. ...

सभापति महोदय -- क्‍या विलोपित करना है यह आप निश्चित नहीं कर सकते.

..(व्यवधान)..

श्री विश्वास सारंग-- यह दबाव मत चलाइये रावत जी.

श्री रामनिवास रावत-- सभापति महोदय, चेयर का सम्मान करना चाहिये.

सभापति महोदय-- कोई दबाव में आ भी नहीं रहा है.

श्री प्रहलाद सिंह पटेल--सभापति महोदय, आपको नहीं, मैं रावत जी आपसे प्रार्थना करता हूं कि आप सभापति जी पर क्यों टिप्पणी कर रहे हैं. मतलब मुझे लगता है कि यह तो और भी खराब है. तथ्यात्मक नहीं है, विषय आपने निकाला. मुझे लगता है कि आप नहीं कहते तो कैलाश जी को कहने की जरुरत नहीं पड़ती. लेकिन हम सभापति जी को कहें. जब चर्चा दोनों तरफ से कर रहे हैं, तो वे कैसे तय करेंगे कि यह तथ्य से कैसे परे है. मुझे लगता है, मेरा निवेदन है कि आपको आसंदी पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिये.

श्री रामनिवास रावत-- सभापति महोदय, हमने विलोपन का निवेदन किया है.

श्री रामेश्वर शर्मा-- सभापति जी, अगर लगता है कि नरसिंहाराव जी को जो भारत रत्न मिला है, इससे ये सहमत हैं तो पूरी कांग्रेस पार्टी विधायक दल जो है, प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद दे ना यहां.

श्री रामनिवास रावत-- दे दिया, सुना नहीं क्या आपने. आपको क्या सुनाई नहीं देता. इसके लिये मोदी जी की सरकार को धन्यवाद दिया है.

श्री विश्वास सारंग-- सभापति महोदय, समय कम है, अब अभय जी से शुरु करवाइये.

श्री सोहनलाल बाल्मीक-- सभापति महोदय, विजयवर्गीय जी ने जो बात रखी है, इन्फर्मेशन देने की लिये की थी, किसी की आलोचना करने के लिये नहीं थी. 3 लोगों को भारत रत्न मिला है, यह बोल देते. आपने नरसिंहाराव जी के बारे में क्यों आलोचना की. यह शुरुआत तो यहां से हुई है ना. आलोचना करने की क्या जरुरत थी.

सभापति महोदय-- अननुपूरक बजट पर चर्चा चलने दें. समय आज कम है, अशासकीय कार्य भी अपने को लेना है.

श्री बाला बच्चन -- सभापति महोदय, वे इस लायक थे, इस काबिल थे, तब तो उनको भारत रत्न से सम्मानित किया गया.

सभापति महोदय--काबिल थे, इसी लिये दिया गया है भाई. यह कोई नहीं कह रहा है कि नाकाबिल लोगों को दे दिया गया है.

श्री बाला बच्चन -- हम इसके लिये धन्यवाद दे रहे हैं.

सभापति महोदय--बात यह रखी गई कि काबिलियत को भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने स्वीकारा.

श्री बाला बच्चन -- सभापति महोदय, उसके आगे जो विजयवर्गीय जी ने बोला, वह बिलकुल असत्य है. उसको कार्यवाही से निकालना चाहिये.

श्री अभय कुमार मिश्रा (सेमरिया)-- सभापति महोदय, मैं सदन को प्रणाम करता हूं. मैं वर्ष 2013 के बाद 2023 में इस सदन में आया हूं, 10 वर्ष के अन्तराल के बाद. मेरे मन मस्तिष्क में यह परिकल्पना थी कि सदन में जायेंगे, तो एक एक मुद्दे पर क्या हम बेहतर कर सकते हैं, सब लोग मिलकर चीजों को और अच्छा करेंगे. जैसे कि राज्यपाल महोदय के अभिभाषण में था कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है. 80 प्रतिशत गांवों में है. तो गांवों में एग्रीकल्चर एकॉनॉमी को बढ़ाने के लिये चाहे स्माल स्केल इण्डस्ट्रीज हो, इस दुनियादारी की संकल्पन, कल्पना को लेकर के हम यहां आये थे. हम टू द पाइंट बात करेंगे, हम 3 दिन से देख रहे हैं कि अजीब सा है. हां की जीत हुई, ना की हार हुई, मेरा ये, तेरा ये. हर बात पर राम राज्य, हर बात पर उसकी आलोचना कर रहे हैं. यह हो क्या रहा है. 2013 से 2023, इन 10 वर्षों के पहले यहां कुछ ज्यादा बेहतर स्थिति थी. उस समय का जब सदन था, तब इतना नहीं था. मैं थोड़ा नया जरुर हूं, हमसे बहुत वरिष्ठ विधायक हैं, मैं बोलने लायक नहीं हूं. पर मुझे अजीब सा लग रहा है, कुछ अच्छा हो. आज हम अनुपूरक बजट पर बात कर रहे हैं. 28650 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट हम लेकर आ रहे हैं. जिसमें एफआरबीएम एक्ट में जीडीपी का, जीडीपी हमारा कितना है. इसमें हम सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी का साढ़े 3 परसेंट कर्ज उठा सकते हैं. हम इसको क्रास कर चुके हैं. हम इससे ऊपर जा रहे हैं. 3 लाख 40 हजार करोड़ रुपये पिछली सरकार तक था, आज हम लगभग 3 लाख 85 हजार करोड़ रुपये पर आ गये हैं. भरना हम ही को है. यह सब हम ही को इसकी भरपाई करनी है या हमारी आने वाली जनरेशन को. अब हम इसमें बात करेंगे कि इसमें महत्वपूर्ण क्या है. हम बहुत आपके सामने जूनियर हैं, पर जो हम यह देख रहे हैं, इस द्वितीय अनुपूरक बजट से ज्यादा महत्वपूर्ण पुस्तक यह कैग की रिपोर्ट है. मेरा सभी सदस्यों से अनुरोध है कि इसको जरुर पढ़ लें. इसको पढ़ने के बाद शायद हमें थोड़ी सी लज्जा अनुभव होगी कि हम वेस्टेज ऑफ मनी कैसे कर रहे हैं.

सभापति महोदय--मिश्रा जी, एक मिनट के लिये आपको रोक रहा हूं,थोड़ी सी देर के लिये. वर्ष 2023-24 के द्वितीय अनुपूरक अनुमान पर चर्चा हेतु 2 घण्टे का समय नियत है. तद्नुसार दल संख्यावार चर्चा हेतु भाजपा के लिये 1 घण्टा 24 मिनट, इण्डियन नेशनल कांग्रेस के लिये 34 मिनट एवं भारत आदिवासी पार्टी के लिये 2 मिनट का समय आवंटित है. इस समय में माननीय मंत्री जी का उत्तर भी सम्मिलित है. सूची में बोलने हेतु बहुत से माननीय सदस्यों के नाम हैं. अतः मेरा अनुरोध है कि बोलने वाले सदस्य कृपया समय सीमा का ध्यान रखें. धन्यवाद.

श्री अभय कुमार मिश्रा-- इसमें आप यह कैग की रिपोर्ट में आप देखें. एक लाइन हम बतायेंगे. पैराग्राफ बना हुआ है. 312241 करोड़ रुपये का ऋण सकल घरेलु उत्पाद वर्ष 2021-22 की गणना की गई थी. हम किस स्थिति में हैं ? आगे चलकर क्‍या होगा तुरन्‍त का तो ठीक है. हमें इसके बाद आगे पांच साल और आपको सरकार चलाना है. आपकी सरकार भगवान करे और भी रहे. हमें उससे कोई दिक्‍कत नहीं है, लेकिन हम सब मिलकर प्रदेश को अच्‍छा करें. प्रदेश की जनता में आपको 160 से ऊपर सीट दी हैं, पूरे के पूरे तो देंगे नहीं कोई न कोई सीट तो जायेगी. अब आप उसमें प्रदेश की जनता से बदला लेंगे. मैंने 24 जनवरी को 26 जनवरी के पूर्व माननीय मुख्‍यमंत्री जी के यहां एक उप सचिव हैं, सोलंकी साहब. उनका सभी भारतीय जनता पार्टी के पास फोन आता था, सब हम लोग आपस में मित्र हैं. वह बताते थे कि आपको फोन नहीं आया क्‍या. हम अपना टी.एस बनाकर लेकर गये, एक तो वह रिसीव नहीं कर रहे थे. बड़े मुश्किल से उन्‍होंने रिसीव किया. रिसीव की कापी हमारे पास है. हमने मुख्‍यमंत्री जी को पत्र भी लिखा कि आपकी योग्‍यता पर मुझको संदेह नहीं, किन्‍तु कार्यप्रणाली पद के अनुरूप हमारे मुख्‍यमंत्री जी महाकाल के भक्‍त हैं, कुश्‍ती के चेंपियन हैं, मुक्‍केबाजी में गोल्‍ड मेडलिस्‍ट हैं, तलवार बाजी में भी हैं और वह हृदय से साफ हैं और आप जानते हैं कि उनकी बुद्धि अपने आप अद्वितीय होगी और उसका लाभ हमको जरूर मिलेगा. हमने यह उम्‍मीद की थी कि हमारे प्रदेश का विकास एक निर्मल मन के व्‍यक्ति के हाथ में पहुंच चुका है तो हम सबको उसका बराबर का लाभ मिलेगा. किन्‍तु जिस तरह से यह बजट में छोटा सा पक्षपातपूर्वक काम किया गया. आपका कितना चला जाता, हमारे पक्ष के करीब 60 विधायक हैं तो 15 छक्‍के 90 करोड़, क्‍या फर्क पड़ जाता नियत जरूर आपने दिखा दी. अब इससे पांच वर्षों के लिये प्रदेश की जनता में, आप जनता से न बदला ले रहे हैं. हम अपने घर के लिये थोड़े ही काम करवा रहे हैं.

दूसरा, आपने पुलिस के लिये कुछ नहीं दिया, सिर्फ 200 करोड़, नयी भर्ती करने की आपकी मंशा नहीं है. मैं एक और निवेदन करूंगा, इतने वर्ष हो गये हम इंसान हैं, हमने जेल कभी अंदर से नहीं देखा है. पर जो लोग जेल से छूटकर आते हैं और वह जेलों के अंदर की स्थिति बताते हैं, जो अंग्रेजों के बने रूल्‍स और एक्‍ट हैं, उन्‍हीं में सब कुछ चल रहा है. उसके लिये आप मात्र 200 करोड़ रूपये दे रहे हैं. बिजली में पुराने अनुबंधों का भुगतान उसमें हमारा पैसा जायेगा. सबसे ज्‍यादा जैसा कि हमारे नेता रावत जी ने बताया हम पुराने ही कर्ज को पटाने में, हम चूंकि गलत दिशा अख्तियार कर चुके हैं, केवल सड़क, रोड और कांक्रीट की एक-एक किलोमीटर की रोड ही सब कुछ नहीं है. सबसे बड़ी है, एग्रीकल्‍चर इकॉनामी , उसके लिये हम कितना पैसा दे रहे हैं. उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्‍करण के लिये हमने क्‍या किया. जब तक हम हल्‍दी की खेती नहीं करेंगे, मक्‍का, गन्‍ना की खेती नहीं करेंगे और शुगर मिल नहीं लगायेंगे और आलू की ग्रेडिंग नहीं करेंगे उनमें वेल्‍यू एडिशन नहीं करेंगे, तो किसानों को उनके उत्‍पाद का सही लाभ कैसे मिलेगा, एक किसान को 20 प्रतिशत आलू का मिलता है और एक आलू से एक पैकेट बनी चिप्‍स 12 रूपये की बिकती है, इस दिशा में इस बजट में ज्‍यादा फोकस किया जाना चाहिए. यह कुछ भी नहीं हुआ. फिर इसके बाद जनसम्‍पर्क की बात करता हूं..

सभापति महोदय:- अभय जी, यह अनुपूरक का विषय है, आप अनुपूरक के विषय पर बात करेंगे तो ज्‍यादा अच्‍छा होगा.

श्री अभय कुमार मिश्रा:- जी हां, मैं समझता हूं. 324 करोड़ रूपये जनसम्‍पर्क में डालने की क्‍या जरूरत है. यह वेस्‍टेज आफ मनी है, अभी आपने चुनाव के पहले किया, अभी हम फिर कर रहे हैं. दूसरी तरफ हम आर.आर.सी मतलब जो हमारी लोगों से वसूली है, जैसे विभागों में वसूली है, लोगों की तहसीलदार के यहां से कहते हैं कि आर.आर.सी कटती है, उसकी हम वसूली नहीं कर रहे हैं, हम मिनरल्‍स की वसूली नहीं कर रहे हैं. हम बहुत सारी चीजों से अपनी आय को बढ़ा सकते हैं, उधर हमारा ध्‍यान नहीं जा रहा है. अभी रामेश्‍वर शर्मा जी बैठे हैं उनकी मुझे चिंता है. मंदिर में पुजारी एवं भगवान में भोग के लिये आपने कुछ भी नहीं सोचा. राम राज्‍य की कल्‍पना हमारी है और उन्‍हीं के आर्शीवाद से हम कहां से कहां पहुंचे. परंतु उनकी सेवा करने वाले पुजारी की चिंता की होती, यदि उनकी सहायता राशि इक्‍यावन हजार से एक लाख बढ़ाये जाने का उल्‍लेख नहीं है और उस राशि को सीधे खाते में देना चाहिये. ग्राम पंचायतों के पंचों के मानदेय का क्‍या होगा. आज 1500 रूपये भी नहीं मिलता था, शायद साढ़े सात सौ रूपये जिला पंचायत के अध्‍यक्ष को मिलता था. मैं जिला पंचायत अध्‍यक्ष रहा हूं. अब 65 हजार रूपये वेतन मिलता है. पंच को 100 रूपये एक्‍ट में है. अभी उस राशि को 150 रूपये की, 30 वर्ष के बाद, गलत है ना ? गलत है, 50 वोट का मालिक पंच होता है. पंच परमेश्‍वर की कल्‍पना हम छोटे में अलगु चौधरी और जुम्‍मन खान की कहानी सुनते थे. आज उस पंच के लिये हमने कुछ सोचा ही नहीं है. मनरेगा में मजदूरों की मजदूरी न बढ़ाए जाने की स्थिति है. इसमें कोई भी उल्लेख नहीं है कि उसको बढ़ाएंगे. विवाह सहायता राशि, प्रधानमंत्री आवास में राशि नहीं बढ़ाई गई है.

सभापति महोदय - आपके दल को आवंटित समय खत्म हो गया है और अभी आपके यहां से 16 सदस्य बाकी हैं.

श्री अभय कुमार मिश्रा - सभापति महोदय, शहरों में आप 2.50 लाख रुपया दे रहे हो. गांव में 1.20 लाख रुपये दे रहे हैं. वास्तव में इससे काम नहीं हो पा रहा है. मजदूर इससे नहीं कर पा रहे हैं, उसमें सरपंच को बेमतलब परेशानी होती है. इसमें चिंता की जरूरत थी. आपने अपनी रिपोर्ट में कल जो दिया है कि आंगनवाड़ी भवन, पंचायत भवन ये सब आज भी 20 वर्षों की सरकार में भवन विहीन हैं. इसको पूरा कराएं. अधूरे भवन हमारे पड़े हुए हैं. कहीं पर अस्पताल हैं, कहीं पर स्कूल हैं, किसी ने काम छोड़ दिया है, लाखों लाख रुपये फंसे हैं. कम से कम इनको पूरा कराने के लिए काम करना चाहिए. नये आईटीआई के लिए प्रावधान करना चाहिए, स्कूलों का उन्नयन करना चाहिए. इन सबके लिए इसमें कोई प्रावधान नहीं दिया हुआ है.

सभापति महोदय - अभय जी, यह सामान्य बजट नहीं है, अनुपूरक बजट है.

श्री अभय कुमार मिश्रा - सभापति महोदय, आयुष्मान में जो आप पैसा डाल रहे हैं, आपके तो पास तो प्राइवेट नर्सिंग होम का अनुभव है. आप खुद जान रहे हैं कि इसका क्या खेल होता है. पूरा का पूरा पैसा किस तरह से इसमें लूटपाट होती है. इसका सही तरीका अख्तियार कर लिया जाय कि कम से कम इसका दुरुपयोग न हो. मेरा यही सब निवेदन है. सभापति महोदय, मैं यह चाह रहा हूं कि मुश्किल से हम 60-62 विधायक हैं, आप ऐसा न करें आपको यह शोभा नहीं देता है. आपको बिल्कुल शोभा नहीं देता है, प्रदेश की जनता देख रही है. हमारे यहां पर एनवीडीए की एक नहर है. जो हम चाहते हैं कि एनवीडीए नहर की प्रतापपुर माइनर सतना जिले से रीवा जिले के सेमरिया विधान सभा क्षेत्र में स्थित परमोहरा बांध में सबमाइनर के माध्यम से पानी पहुंचाने का कष्ट करें.

श्री फून्देलाल सिंह मार्को (पुष्पराजगढ़) - सभापति महोदय, मां नर्मदा को मैं प्रणाम करते हुए अपने बात रखूंगा. अपनी बात रखने के पूर्व तत्कालीन हमारे केन्द्रीय मंत्री रहे हैं आदरणीय श्री प्रहलाद पटेल जी, मां नर्मदा के सर्वांगीण विकास के लिए सौन्दर्यीकरण के लिए प्रसाद योजनान्तर्गत आपने 50 करोड़ रुपये अमरकंटक को दिये, जिससे उसके दोनों तटों का विकास हो सका है. वहां हरेभरे पौधे और सौन्दर्यीकरण के काम कराए जा रहे हैं, इसके लिए मैं आपको बहुत बहुत बधाई देता हूं.

माननीय सभापति महोदय, यह अनुपूरक बजट है. बजट पास होते हैं और विभाग काम करते हैं. प्रदेश की 8 करोड़ की जनसंख्या और वह जनसंख्या जहां जंगल और पहाड़ों में भी लोग निवास करते हैं. साढ़े 22 परसेंट हमारे जनजातीय समुदाय की जनसंख्या भी इसमें समाहित है और 140 करोड़ के देश में जहां केन्द्र और राज्य के बजट से विभिन्न विकास कार्य किये जा रहे हो, हमने वर्ष 2018 में एक ध्यानाकर्षण लाया कि जनजातीय सबप्लान का पैसा 251 का पैसा, 275 (1) के पैसे को सीधे कृषि विभाग को दे दिया गया और उसको देने का मुख्य उद्देश्य था कि सहरिया, भारिया और बैगा जनजाति के लोग परम्परागत जो खेती करते हैं, उनकी खेती में वृद्धि हो, फिर उनको पैकेजिंग करना, मार्केटिंग करना और कोई एक उत्पाद को ब्रांड नेम देने का भी, राशि देने का भी उसमें उद्देश्य रहा है. जब कृषि विभाग को वह राशि दी गई तो जिस उद्देश्य से राशि कृषि विभाग को दी, उसका अर्थ ही बदल गया, उसका उद्देश्य ही बदल गया. जहां सहरिया, भारिया, बैगों की बात खत्म और दूसरे कार्य में उसको खर्च कर लिया गया. मैं इस सरकार से अनुरोध करता हूं. अच्‍छा है आपको लगातार सफलताएं मिल रही हैं. सरकार बन गई, अब आप काम करिए न, आप क्‍यों बान्‍डिंग में लगे हैं. अभी 3 तारीख को हमारे माननीय वरिष्‍ठ सदस्‍य ने ध्‍याना आकर्षित करके जनजातीय समुदायों की चिन्‍ता व्‍यक्‍त की कि महिला बाल विकास विभाग ने पत्र जारी किया और 207 करोड़ राशि उन गरीबों के घर में जिसके यहां बल्‍ब लगता, पीने का पानी नहीं है, सड़क नहीं है, बिजली नहीं है वे भी शहर की ओर देखते हैं कि यदि इस देश-प्रदेश में स्‍मार्ट सिटी बन रही है तो मेरा गांव भी स्‍मार्ट विलेज बन जाए. चूंकि मैं भी इस देश का नागरिक हॅूं, प्रदेश का नागरिक हूँ और हमने भी इस प्रदेश के विकास के लिए यदि वह किसान है तो वह भी लगान देता है. कर्मचारी है तो वह टैक्‍स देता है. व्‍यापारी टैक्‍स देता है और टैक्‍स, लगान का पैसा जब वही गरीब के घर और गांव में जब मांग करते हैं तो वहां तक आज भी नहीं पहुंच पा रहा है. चुनाव लड़कर हम यहां आते हैं. हम लोग धरातल पर जाते हैं और वहां पर जो समस्‍याएं हमें देखने को मिलती हैं उन समस्‍याओं को हम सदन में रखते हैं. जहां इस प्रदेश की जनता के सर्वांगीण विकास के लिए बातें होती हैं हम भी चाहते हैं कि हमें अपनी बात रखने का अवसर मिले. माननीय विधायकों ने अपने क्षेत्र के और इस प्रदेश के विकास के लिए चिन्‍ता की. मेरा आपसे इतना निवेदन है कि एक अच्‍छे सोच के साथ मध्‍यप्रदेश में मुख्‍यमंत्री बाल आशीर्वाद योजना बनी इस योजना के अंतर्गत जिन बच्‍चों के माता-पिता नहीं हैं उनके भरण-पोषण के लिये 4 हजार रूपए प्रतिमाह दिये जाने का इसमें प्रावधान है. वर्ष 2022 में यह योजना लागू हुई और 5-6 माह से पूरे प्रदेश में यह राशि उन बच्‍चों को नहीं मिल पा रही है. यदि हम मात्र एक नगर की बात करें तो जबलपुर में 270 अनाथ बालक-बालिकाएं हैं. 270X4 हजार आप अनुमान लगा लें, लगभग 10 लाख 80 हजार रूपए प्रतिमाह का उनको भुगतान करना था, लेकिन यह सरकार उन गरीबों तक यह लाभ नहीं पहुंचा. मेरा आपसे अनुरोध है कि बजट पास हो, लेकिन जो अंतिम पंक्‍ति का व्‍यक्‍ति है आपकी तरफ जो निहार रहा है उनकी ओर वह राशि जानी चाहिए और प्रदेश में हो रहे भ्रष्‍टाचार और आपने जनता से जो वादा किया कि हम 2700 रूपया प्रति क्‍विंटल गेहूं खरीदेंगे. 3 हजार रूपए हम लाड़ली बहनों को देंगे. 3100 रूपया प्रति क्‍विंटल धान खरीदेंगे. साढे़ चार सौ रूपए का सिलेंडर देंगे, तो आपको देना चाहिए. आपको इस बजट में प्रावधान करना चाहिए. आपने यह क्‍यों नहीं किया.

मेरा सरकार से अनुरोध है कि पिछले वर्ष 2011-12 में तथा जनवरी, 2023 में इन्दौर में ग्लोबल इन्वेस्टर मीट हुई उसमें बॉडिंग अच्छी हुई इसमें प्रचार-प्रसार हुए. लाखों करोड़ों रूपये खर्च किये गये. उसके बाद हुआ क्या ? खोदा पहाड़ निकली चुहिया. कुछ इन्वेस्टरों ने प्रस्ताव भी रखे. हमें भी अच्छा लगा कि प्रदेश में 30-35 लाख युवाओं का भला होने जा रहा है. पढ़े-लिखे बच्चे जो आज चोराहों में भटक रहे हैं उनके माता-पिता दुखित हैं. रोजगार के अवसर खुल जाने से बच्चों को काम मिलता है, हमारे प्रदेश की बेरोजगारी कम होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. मैं अंत में यह कहना चाहूंगा कि जब पेपर में प्रकाशित हुआ मैंने सोचा कि इतना जल्दी माननीय मुख्यमंत्री जी दूसरे का अनुसरण तो नहीं करेंगे. पेपर में प्रकाशित हुआ कि 15-15 करोड़ रूपया सभी विधायकों को दिया गया तो मैं भी बनाने में लग गया.

सभापति महोदययह बात पहले आ चुकी है. आप अनुपूरक बजट पर बोलिये. सदन के समय को जाया मत करिये.

श्री फुन्देलाल सिंह मार्कोसभापति महोदय, मेरा आपसे अनुरोध है कि आपके द्वारा रेवड़ी चीन चीन के बांटी जा रही है, उसको बंद करें. हम भी इस प्रदेश की जनता से चुनकर के आये हैं. आप जितना भी भेदभाव करेंगे उसका संदेश भी उस क्षेत्र में जाता है. इसलिये मैं चाहता हूं कि प्रदेश में समदृष्टि हो और सबको समानता के साथ इस न्याय के मंदिर में देखें.बहुत बहुत धन्यवाद

डॉ.सीतासरन शर्मा(होशंगाबाद)सभापति महोदय, हमारे वरिष्ठ एवं विद्वान सदस्य श्री रामनिवास रावत जी ने इसकी शुरूआत की है. मैं बहुत बात नहीं करूंगा. मैं कम बोलूंगा. माननीय रावत जी ने जो विषय उठाये हैं उसका उत्तर तो माननीय वित्तमंत्री जी देंगे. दो तीन बातें कहना जरूरी हैं, क्योंकि वे वरिष्ठ सदस्य हैं. एक बात उन्होंने की कि पूरा बजट नहीं आया है. असल बात यह है कि यह जो मेन बजट आ चुका है उसमें से कुछ के लिये कमी रह गई है या कोई नये मद लिये गये हैं, उसके लिये अनुपूरक होता है, यह एक सामान्य प्रक्रिया है. अब आयेगा लेखानुदान तब लोकसभा वाली बात आयेगी, जो बात आपने कही थी कि लोक सभा के कारण, तो यह ना तो लेखानुदान है ना ही पूर्ण बजट है. यह पिछले बजट का ही अनुपूरक है जैसे हम कापी की सप्लीमेन्ट्री ले लेते हैं. सभापति जी किसी माननीय सदस्य जी ने श्वेत-पत्र की बात भी की, आय-व्ययक की बात भी की. कार्यसूची में जो आया है उसमें ही लिखा है कि आय-व्ययक जब प्रस्तुत किया जायेगा, जब लेखानुदान प्रस्तुत होगा उसके पहले. तो जो बात आपकी है, वह भी सरकार कर रही है. बजट पूरा हो या अनुपूरक हो मध्यप्रदेश की सरकार हमारे मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी के नेतृत्व में हमारे वित्तमंत्री जी के कुशल वित्तीय प्रबंधन में निरंतर समाज की चिन्ता कर रही है. अभी हमारे माननीय सदस्‍य कह रहे थे कि हमको नहीं मिला और आदरणीय रावत जी ने वह सूची पढ़ी, भैया हम 163 बैठे हैं, तो ज्‍यादा तो हमारी संख्‍या रहेगी बजट के अंदर. जनता ने आपको 66 सीट तो बैठायी है, हम क्‍या करें, हमारी गलती है क्‍या इसमें. इसलिए लिस्‍ट जब आप देखोगे तो उसमें हम लोगों की सूची लंबी रहेगी. ये तो जनता ने किया है साहब और आपने अपने कर्मों का फल भुगता है. विषय के बाहर जाने का मेरा स्‍वभाव नहीं है, परंतु आप 10 साल रहे, तब आपने दस साल में जो कर्म किए तो कांग्रेस की 230 में से 38 सीट हो गई थी, अभी 15 महीने रहे तो कांग्रेस की सीट 110 में से 66 हो गई. अरे सुधरो भाई, हमारी तुलना मत करो, हम क्‍या करें उसमें. क्षमा चाहता हूं रावत जी.

श्री रामनिवास रावत - क्षमा जैसे कोई बात नहीं है, सीटें कम ज्‍यादा हुई वह तो हकीकत है, अब क्‍यों हुई, लेकिन जो आप कह रहे हैं, उसको नहीं मानेंगे.

संसदीय कार्य मंत्री(श्री कैलाश विजय वर्गीय) - इसमें रामनिवास जी का कोई दोष नहीं है, दो बड़े नेताओं के झगड़े में हुआ है ये सब कुछ, वे उसमें क्‍या कर सकते थे.

डॉ. सीतासरन शर्मा - रावत जी आप मंत्री थे, तब मैं विधायक था, तब भी आपकी सरकार मैंने देखी, अनुपूरक बजट वगैरह सब देखा, कर्जा तब भी था. मैं उस पर नहीं आऊंगा, क्‍योंकि वह अभी की बात नहीं है. बजट 18-19 हजार करोड़ रुपए का होता था.

श्री रामनिवास रावत - 21 हजार करोड़, मात्र हर व्‍यक्ति 3500 रुपए का ऋण था और आज 50 हजार रुपए प्रति व्‍यक्ति ऋण है.

डॉ. सीतासरन शर्मा - बजट से ज्‍यादा कर्जा होता था, तब भी. सड़कें नहीं थीं, बिजली नहीं थी, अस्‍पताल नहीं थे, मेडिकल कॉलेज नहीं थे. अब यदि कर्जा ज्‍यादा है तो आप निकल जाइए सड़क पर और देखिए सड़कें बनी हैं कि नहीं, आप देखिए कि कितने मेडीकल कॉलेज बन रहे हैं, आप ये देखिए कि सीएम राइज स्‍कूल है.

श्री दिनेश गुर्जर - टोल टैक्‍स भी तो लगते हैं, सड़क बनी है तो प्रदेश की जनता को लूटा भी तो जा रहा है.

डॉ. सीतासरन शर्मा - गड्ढों में चलते थे, गाडि़या खराब हो जाती थी.

श्री दिनेश गुर्जर - हमारा निवेदन है कि आप ये बताइए कि आपने अस्‍पताल भवन बनवा दिए हैं, उनमें डॉक्‍टर नहीं है, दवा मिल नहीं रही, मरीज परेशान है, उस समय कांग्रेस पार्टी ने ही अस्‍पताल बनाए हैं, उद्योग बनाए हैं, आपके कार्यकाल में कितने उद्योग लगे हैं, ये बताए जरा.

डॉ. सीतासरन शर्मा - ये क्‍या बोल रहे इनको रोकिए सभापति जी, न तो ये प्रश्‍नकाल है, न शून्‍यकाल है, न मैं मंत्री हूं कि इनकी बात का उत्‍तर दूं.

श्री दिनेश गुर्जर - गलत बात बोलेंगे तो उस पर बोलना पड़ेगा.

श्री रामनिवास रावत - माननीय सभापति जी, जो सीएम राइज स्‍कूल खोले हैं, उसके लिए उनका समर्थन करता हूं, पर माननीय वरिष्‍ठ सदस्‍य ईमानदारी से बता दें कि उनके यहां जो सीएम राइज स्‍कूल हैं, उसमें फैकल्‍टी कितनी है, ईमानदारी से बता दें और उसका स्‍टे्टस क्‍या है.

डॉ. सीतासरन शर्मा - ईमानदारी से कह रहा हूं, आप विजिट कीजिए और देखिए सारी फैकल्‍टीज है और एक साल के अंदर बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है.

सभापति जी, अनुपूरक में विकास के साथ सामाजिक न्‍याय, कमिटमेंट्स की जो गारंटी की बात डॉ. राजेन्‍द्र सिंह साहब ने भी कही और आज आदरणीय रावत जी ने भी कही, वह भी पूरी कर रहे हैं. जो वादे जनता से किए हैं, उनको भी पूरे करने का प्रावधान इस अनुपूरक बजट में है. अब मैं आता हूं, उन विषयों पर जो इसमें है, ऊर्जा, इनके टाइम में साढ़े चार हजार मेगावाट इनके टाइम में बनती थी और 6 हजार मेगावाट की खपत थी. बिजली गायब रहती थी, खेतों को पानी नहीं था, उद्योगों को पानी नहीं था और इसलिए इस प्रदेश में उद्योग आना बंद हो गये थे. अब 22 हजार मेगावाट से ज्‍यादा का उत्‍पादन हो रहा है, साढ़े 17 हजार की खपत है, हम सरप्‍लस बिजली बना रहे हैं, यह हमारी उपलब्धि है.

सभापति महोदय, सौर ऊर्जा का इसमें नहीं है, पर सौर ऊर्जा से 5 हजार मेगावाट का हम उत्‍पादन कर रहे हैं और निरंतर बढ़ाने का काम कर रहे हैं. इन्‍होंने बिजली का कबाड़ा कर दिया था आपने तो बिजली कंपनियों को मदद करना भी जरूरी था, इसलिए 13 हजार 365 करोड़ रूपया उसके लिये है.

श्री पंकज उपाध्‍याय(जौरा) -- पंडित जी थोड़ा क्षमा चाहते हुए एक बार आप हमारे मुरैना जिले का दौरा करें और देखें जरा कि बिजली कितनी आप यहां बता रहे हैं और कितनी मिल रही है. किसानों को न समय पर बिजली मिल पा रही है, आदमी अपने खेतों में पानी देना चाह रहा है, लेकिन सुबह से शाम बिजली के इंतजार में बैठा रहता है, वह लूटा जा रहा है केवल बिजली के नाम पर, इसलिये आप बहुत वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं और आप भ्रामक जानकारी देंगे तो कैसे चलेगा.

सभापति महोदय -- पंकज जी, यह बहस का विषय नहीं है, माननीय सदस्‍य को बोलने दें, जब आपका समय आयेगा, तब आप बोलियेगा. डॉक्‍टर साहब आप अपनी बात जारी रखें.

श्री पंकज उपाध्‍याय -- पंडित जी थोड़ा निवेदन है मेरा आपसे, थोड़ा सा कम.

सभापति महोदय -- पंडित जी यह बहस का विषय नहीं है, आप अपना समय आयेगा, तब बोलियेगा.

डॉ.सीतासरन शर्मा -- अटल बिहारी ज्‍योति योजना के लिये 578 करोड़ रूपये. बिजली उत्‍पादन भी करना है और बिजली बचाना भी है और इसीलिये ऐसी व्‍यवस्‍थाएं जिससे की बिजली की बचत हो और सभापति महोदय पुराने लोगों ने कभी इस पर सोचा नहीं है. लोक स्‍वास्‍थ्‍य और चिकित्‍सा शिक्षा में अभी डॉक्‍टर्स की बात कर रहे थे. पांच मेडिकल कॉलेज थे,मेरा एडमीशन वर्ष 1967 मेडीकल कॉलेज में हुआ था, तब 6 मेडीकल कॉलेज थे, एक छत्‍तीसगढ़ में चला गया बचे 5 मेडीकल कॉलेज.

श्री महेश परमार -- डॉक्‍टर साहब आप जिस कॉलेज में पढ़े, वह किन्‍होंने मेडीकल कॉलेज खोला था.

डॉ.सीतासरन शर्मा -- कुल पांच मेडीकल कॉलेज थे, छटवा मेडीकल कॉलेज खोल देते भईया आप पच्‍चीस, तीस, चालिस साल सरकार में रहे. हमने तो पंद्रह साल में 5 मेडीकल कॉलेज से 24 पर ले आये, हमने 19 मेडीकल कॉलेज खोल दिये.

श्री कैलाश कुशवाहा -- पांच हजार डॉक्‍टरों की कमी है, पद रिक्‍त पड़े हैं. पांच हजार डॉक्‍टर नहीं है.

डॉ.सीतासरन शर्मा -- और अभी भी प्रक्रिया चालू है, सबके कॉलेज, स्‍कूल खुल गये, आपके टाईम पर कुछ नहीं था. (एक माननीय सदस्‍य द्वारा अपने आसन से कहने पर) भईया हमने भी पढ़ा है, डॉक्‍टर हिरालाल अलावा जी ने भी पढ़ा है. असंगठित क्षेत्र की भी चिंता नहीं की, असंगठित क्षेत्र के जनजाति के सेग्‍मेंट के लिये सवा करोड़ रूपये की व्‍यवस्‍था.

सभापति महोदय, मैं लोक स्‍वास्‍थ्‍य की बात कर रहा था, आशा कार्यकर्ता श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता, इनके लिये 200 करोड़, 220 करोड़ रूपये नये मेडीकल कॉलेज के लिये. मैंने जैसा कहा कि निरंतर प्रक्रिया चालू है और अनुपूरक में भी 362 करोड़ रूपये प्रावधान कर रहे हैं. अस्‍पताल का उन्‍नयन करना है, जो मेडीकल कॉलेज के साथ ए‍सोसियेट होते हैं, ताकि स्‍टूडेंट्स ठीक से पढ़ सकें, उसके लिये 119 करोड़ रूपये, एक्जिस्टिंग मेडीकल कॉलेज में और व्‍यवस्‍थाएं करने के लिये 56 करोड़ रूपये और सुपर स्‍पेशिलिटी अस्‍पताल के लिये 38 करोड़ रूपये का प्रावधान अनुपूरक बजट में किया है.

सभापति महोदय, महिला एवं बाल विकास में अभी सामाजिक न्‍याय की बात हो रही थी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिये, अच्‍छा पोषण आहार की इनके समय तो कभी चिंता ही किसी ने नहीं की थी, 127 करोड़ रूपये पोषण आहार के लिये, आंगनबाड़ी सेवा योजना के लिये 619 करोड़ रूपये. मात्र वंदना योजना हमने चालू की थी, इनके समय थी ही नहीं. अब इनके पुराने समय के बाला बच्‍चन जी और रावत जी ही बचे हैं (हंसी) सब खेत रहे युद्ध के मैदान में (हंसी) क्‍या करें.

श्री दिनेश गुर्जर -- पंडित जी आप भी बच गये, यह दुर्भाग्‍य है कि कांग्रेस ने परिवार में ही टिकिट दे दिया, वह बैठ गये, नहीं तो आप भी नहीं आ पाते.

डॉ.सीतासरन शर्मा -- 175 करोड़ रूपये मात्र वंदना योजना के लिये. बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के लिये 14.77 करोड़, लाड़ली लक्ष्‍मी योजना के लिये 759 करोड़, 15 महीने के लिये आप आये थे आपने इसमें से कुछ दिया था. योजना चालू भी हमने की और फिर आप लोगों ने कुछ दिया नहीं सरकार फिर से आ गई तो इनका भला हो गया. इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, रोजगार की बात कर रहे थे हमारे साथी, रोजगार किससे आयेगा. अधोसंरचना के लिये माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी मेन बजट में सबसे अधिक प्रावधान किया है, पिछले बजट में भी किया था, अभी भी किया है. अधोसंरचना से न केवल देश और प्रदेश का विकास होगा, रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. 1825 करोड़ रूपया विभिन्‍न मार्गों के लिये दिया है, ग्रामीण सड़क आपके समय थी ही नहीं, अटल जी जब दिल्‍ली में आये तब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू हुई और बाद में शिवराज जी ने मुख्‍यमंत्री सड़क योजना शुरू की है. आपने एक रूपया नहीं दिया दोनों ने. 1825 करोड़ रूपये की सड़कें अभी और जो हम कम्‍पनसेशन देंगे उसके लिये 400 करोड़. पंचायत विभाग की बात कर रहे थे रावत साहब, 569 करोड़ रूपया दिया है जनजाति सेगमेंट में, स्‍थानीय निकायों में 341 करोड़ अलग और स्‍थानीय निकाय के सामान्‍य सेगमेंट के लिये 1323 करोड़ रूपये, सामाजिक न्‍याय की चिंता की है. सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लिये राशि दी गई है. जल संसाधन के मंत्री जी बैठे हैं, जो आप अ‍परिक्षित की बात कर रहे थे, यह सांकेतिक राशि है, स्‍वीकृत कर दी है, योजना स्‍वीकृत कर दी है और थोड़ी-बहुत नहीं की हैं 41-42 योजनायें हैं लघु सिंचाई की. इसी प्रकार से बहुत सी सड़कें भी स्‍वीकृत की हैं.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय सभापति महोदय, आपने अपरिक्षित मद की बात की, मैं अपरिक्षित मद की बात कर रहा था कि यह कौन सा मद है. इस पुस्‍तक में मैंने देखा आरक्षित और अनारक्षित, आरक्षित मद है राज्‍य आपदा मोचन निधि, इसका पैसा डायवर्ट करके आपने राशि दी है. राज्‍य क्षतिपूर्ति वनरोपण निधि इसका पैसा डायवर्ट करके आपने राशि दी है. राज्‍य आपदा सामान्‍य निधि, अकाल राहत निधि, राजस्‍व आरक्षित निधि इस तरह की यह आरक्षित निधि है इसे डायवर्ट करके आप लोगों को पैसा दिया है.

डॉ. सीतासरन शर्मा-- फिर बजट आयेगा उसमें सारी राशियां फिर से आयेंगी तो अगले महीने है. 470 करोड़ रूपया एग्जिस्टिंग योजनाओं के लिये, 732 करोड़ नर्मदा घाटी विकास में. सभापति जी, वर्षों, सालों साल इस प्रदेश की जनता को पीने का पानी नहीं मिला, प्रधानमंत्री जी ने जल जीवन मिशन के माध्‍यम से घर-घर नल पहुंचाने की योजना बनाई, यह है सरकार काम करने वाली तो इसीलिये 20-20 साल टिक रहे हैं. इधर तो 15 महीने में ही मैदान साफ हो गया. जितने बचे थे इधर ही आते जा रहे हैं. सभापति महोदय, मेरे बहुत से साथियों को बोलना है इसलिये बहुत से मद मैंने छोड़ दिये हैं जिस पर वह अपनी बात रखेंगे, मैं बहुत लंबी बात नहीं करना चाहता और न ही अनुपूरक के बाहर जाना चाहता हूं, जब सामान्‍य बजट पर बात आयेगी तब जो माननीय सदस्‍यों ने, क्‍योंकि बहुत से सदस्‍यों ने तो वही बोला जैसा सामान्‍य बजट पर बोल रहे हैं तो उनसे भी मेरा अनुरोध है कि वह नियम पढ़कर के आयें ताकि हम सदन का समय बचा सकें. सभापति जी, मैं सदन से अनुरोध करता हूं कि इस अनुपूरक बजट को सर्वसम्‍मति से पास करें. आपने समय दिया इसके लिये आपका आभार.

श्री ओमप्रकाश सखलेचा (जावद) - माननीय सभापति महोदय, इस अनुपूरक बजट के समर्थन हेतु मैं खड़ा हुआ हूं और मैं बड़ी गंभीरता से सुन रहा था कि चर्चा की शुरुआत हुई कि कर्जा कितना हो गया ? कर्जा लेकर काम किस दिशा में किया वह महत्वपूर्ण है. क्या कर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा खर्च हो रहा है, क्या कर्जा विकास के लिये खर्च हो रहा है, क्या कर्जा जन हितैषी योजनाओं के लिये खर्च हो रहा है, क्या कर्जा लेकर और अपनी आमदनी बढ़ाकर हम जनसुविधाएं बढ़ा रहे हैं ? मैं पढ़ रहा था कि जितना इनका पूरे साल का 2003 का बजट नहीं होता था उससे ज्यादा हमारा अनुपूरक बजट है और उससे भी काफी ज्यादा है और दस गुने से ज्यादा हमारा उस समय से अभी के आम बजट का आंकड़ा आता है. अंतर केवल बात की नहीं कर रहे. हम बात कर रहे हैं कि अगर पीने का पानी शुद्ध न मिले तो उसको 50 से 60 प्रतिशत बीमारियां बढ़ती हैं. शुद्ध पानी का अगर किसी ने सोचा तो वह केवल भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सोचा इनके दिमाग में भी यह बात नहीं आईं कि पानी जरूरत है. बिजली की बात अगर मैं करूं तो वह बात बहुत अच्छे तरीके से हमारे डाक्टर साहब ने बता दी कि किसानी,खेती,व्यवसाय,बाजार,गांव, इन सबमें में जो सबसे पिछड़ा राज्य कहलाता था आज सबसे अग्रणी राज्यों, टॉप 5 में काउंटिंग में आना शुरू हो गया. मैं बात केवल बिजली,पानी की नहीं कर रहा हूं अगर मैं बात करूं सिंचाई के पानी की, नर्मदा के पानी का बंटवारा 1978 में हुआ था तब से लेकर 2006 तक उस पर कोई काम नहीं हुआ. आज अगर हमें डबल डिजिट की ग्रोथ कृषि में मिल रही है जिस पर पूरी दुनियां वाले आकर रिसर्च करते हैं तो वह नर्मदा के पानी का उपयोग करते हुए जगह-जगह बांध पहुंचाकर पूरे एरिये में पानी पहुंचाने के कारण है. आज अगर मैं बात करूं उस पानी और सिंचाई पर हम कितनी गंभीरता से काम कर रहे हैं और उसके कारण हमारी तरक्की हो रही है. चर्चा करें रोजगार और अन्य विषयों पर भी तो बिजली,पानी के साथ शिक्षा तो शिक्षा पर भी चाहे स्कूल शिक्षा हो चाहे कालेज की शिक्षा हो उसमें रुचि बढ़ाना, उस पर बजट बढ़ाना तो विभाग की बात करूं तो बहुत बड़ी राशि हमने अलाट की और पूरा एक परिवर्तन किया. आज शिक्षा के कारण पूरी दुनियां में भारत का नाम तेजी से बढ़ रहा है और मुझे यहां कहते हुए कोई झिझक नहीं है कि एक प्रधानमंत्री था जिसने पापुलेशन को लाइबिलिटी बनाकर अपने सब नकारे काम के कारण, उन्होंने कह दिया कि पापुलेशन के कारण देश की तरक्की नहीं हो सकती और एक प्रधानमंत्री आया जिसने पापुलेशन को असेट बनाकर काम करना शुरू कर दिया तो आज पूरा देश दुनियां में वापस विश्व गुरू बनने की स्थिति में आया. बात सोच की है. बात विषय की है कि किस विषय के माध्यम से कैसे आपके मन में विकास की रचना है. मैं देख रहा था कि ऊर्जा जैसे विषय और ऊर्जा में भी ऐसी ऊर्जा नहीं जिसमें प्रदूषण और कार्बन फैले और भविष्य के लिये चिंता का विषय हो तो पहले ऊर्जा की तरक्की की. ऊर्जा में हम आगे बढ़े और फिर आज ग्रीन और क्लीन ऊर्जा की बात कर रहे हैं. आज अगर मध्यप्रदेश टाप 5 राज्यों में से एक राज्य आ गया वह इसलिये कि ग्रीन ऊर्जा में हम सबसे तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. ऊर्जा के लिये 14124 करोड़ रुपये का प्रावधान किया अलग-अलग मदों में वह सिर्फ इसलिये किया कि यहां के किसानों की बढ़ती हुई जरूरत. यहां के विद्यार्थियों को घर में पढ़ने के लिये 24 घंटे बिजली चाहिये तो वह उपलब्धता करने के लिये हम बात करें तो अगर बिजली ही उपलब्ध नहीं होगी तो कैसे विकसित प्रदेश बनेगा, कैसे शिक्षित होगा, कैसे घर में शांति रहेगी. यह बात अलग है कि कुछ लोग बड़े शहरों में रहते थे वह कुछ भी कमेंट कर देते थे. अगर मैं बात करूँ तो दूसरा सबसे बड़ा पीडब्‍ल्‍यूडी का इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर का फण्‍ड है. पीडब्‍ल्‍यूडी के डिफरेन्‍ट विभागों का मैं टोटल कर रहा था तो 2,385 करोड़ रुपये सड़कों के जाल के लिए डिफरेन्‍ट मदों के माध्‍यम से जोड़कर सड़कों का अलग तरह का इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बनाया, तब जाकर उद्योग, बिजली, सड़क, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, एअरपोर्ट की जिस तेजी से कल्‍पना प्रधानमंत्री जी और राज्‍य सरकार मिलकर कर रहे हैं, उसके कारण आज मध्‍यप्रदेश की इंडस्‍ट्रीज़ की तरक्‍की के बारे में सोचा जा रहा है.

सभापति महोदय, मैं देख रहा था कि शिक्षा विभाग में भी 2,135 करोड़ रुपये, यह कोई सामान्‍य बात नहीं है. इतना इनका शायद उस समय पूरे बजट में नहीं होता होगा, जितना आज ये अनुपूरक बजट के छोटे से विषय की व्‍यवस्‍था में है. केवल शिक्षा में, उच्‍च शिक्षा के साथ सीएम राइज स्‍कूल, पूरे प्रदेश का भारत में नक्‍शा बदलने की तैयारी करने के लिए यह प्रावधान किया गया है. मैं बात कर रहा था कि पीएचई, शुद्ध प