मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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षोडश विधान सभा द्वितीय सत्र

 

 

फरवरी, 2024 सत्र

 

गुरुवार, दिनांक 8 फरवरी, 2024

 

(19 माघ, शक संवत्‌ 1945)

 

 

[खण्ड- 2 ] [अंक- 2 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

गुरुवार, दिनांक 8 फरवरी, 2024

(19 माघ, शक संवत्‌ 1945)

विधान सभा पूर्वाह्न 11.01 बजे समवेत हुई.

{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

 

निधन का उल्लेख

(1) दिनांक 6 फरवरी,2024 को हरदा जिले के ग्राम बैरागढ़ स्थित पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के बाद आग लगने से अनेक व्यक्तियों की मृत्यु होना.

(2) माह दिसम्बर,2023 में लेह-लद्दाख में आतंकवादियों से हुई मुठभेड़ में सेना के जवान श्री राजेश यादव का शहीद होना.

(3) दिनांक 30 जनवरी,2024 को छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के टेकलगुड़ेम में हुए नक्सली हमले में सीपीआरएफ के जवान एवं भिण्ड जिले के गांव कुपावली के निवासी श्री पवन भदौरिया सहित कई जवान शहीद होना.

(4) दिनांक 27 दिसम्बर,2023 को गुना से आरोन जा रही यात्री बस के डम्पर से टकराने से अनेक यात्रियों की जलने से मृत्यु होना.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मुख्यमंत्री (डॉ. मोहन यादव)-- अध्यक्ष महोदय, मुझे यह सूचित करते हुए अत्यन्त दुख हो रहा है कि दिनांक 6 फरवरी,2024 को हरदा जिले के ग्राम बैरागढ़ में एक पटाखा फैक्ट्री में भीषण विस्फोट हुआ और लगभग 11 लोगों का इसमें देवलोक गमन हुआ है और कई लोग घायल हुए हैं,यह हम सबको जानकारी है. इस भीषण हादसे को लेकर के मेरा मन भी व्यथित है. मैं स्वयं भी कल वहां गया था. घायलों से भी मिला हूं. मैं इस दु:ख की घड़ी में मृतक परिवारों के शोक में शामिल भी हूं और घायलों के शीघ्र स्‍वस्‍थ होने की बाबा महाकाल से कामना करता हूं.

माह दिसम्‍बर, 2023 में लेह लद्दाख में आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में हमारे सेना के जवान शहीद श्री राजेश यादव एक भीषण संघर्ष के बाद उन्‍होंने बहादुरी का परिचय देते हुए शरीर छोड़ा, वह सागर जिले की बंडा तहसील के ग्राम क्‍वायला के निवासी थे. हमारे ऐसे बहादुर जवान की शहादत पर गर्व भी है.

30 जनवरी, 2024 को छत्‍तीसगढ़ में नक्‍सलियों के हमले में हमारे अपने सीआरपीएफ के जवान जो मूलत: भिण्‍ड जिले के गांव कुपावली के निवासी थे. मैं ऐसे जवान जिन्‍होंने नक्‍सली हमले में प्राण गवां दिये, लेकिन मध्‍यप्रदेश को हमारे अपने जवान के जाने का गम है, लेकिन हमको गर्व भी है कि ऐसे बहादुरी के क्षण में अपने प्राणों की बाजी लगाकर के उन्‍होंने हम सब के लिये एक तरह से नक्‍सलियों के आगे न झुकने के प्रण को मजबूत करने का विश्‍वास दिलाया है.

इसी प्रकार 27 दिसम्‍बर, 2023 को गुना से आरौन जा रही बस के डंपर से टकराने से कई यात्री मारे गये हैं और कई लोग उसमें घायल भी हुए थे. मैंने उस घटना में स्‍वयं ने भी उनके घर जाकर के उन संवेदना में हिस्‍सेदारी की थी और इस संबंध में, मैं अपनी ओर से सदन में विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

आज के इस अवसर पर जाने-अंजाने इस सत्र के दरम्‍यान सभी दिवंगतों को अपनी ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

नेता प्रतिपक्ष ( श्री उमंग सिंघार):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछले कई सालों में प्रदेश में एक बड़ी घटना प्रदेश में हुई है. निश्चित तौर से देश के प्रधानमंत्री, देश के राष्‍ट्रपति सबने शोक व्‍यक्‍त किया. इस घटना में जिनकी मृत्यु हुइ उनके परिवारों के प्रति मेरी संवेदना है. भावनाएं तो हम व्‍यक्‍त करते हैं और संवेदना भी व्‍यक्‍त करते हैं. उस परिवार का जो भविष्‍य है, उनके बारे में भी संवेदनाओं के साथ हमें आगे सोचना चाहिये, तब जाकर के हमारी सच्‍ची श्रद्धांजलि होगी. उन परिवारों के प्रति मेरी ऐसी भावना है.

लेह लद्दाख में आंतकवादियों से मुठभेड़ में श्री राजेश यादव जी, जो सागर जिले के बंडा तहसील के रहने वाले थे, वह शहीद हुए उनके परिवार को भी मेरी ओर से श्रद्धांजलि.

छत्‍तीसगढ़ के बीजापुर जिले के टेकलगुड़ेम में श्री पवन भदौरिया जी भिण्‍ड जिले के थे, वह जवान लड़ते हुए शहीद हुआ, निश्चित तौर से हमारे प्रदेश के अंदर ऐसे बहादुर जवान हैं, जो देश और प्रदेश की सुरक्षा के लिये हमेशा तत्‍पर रहते हैं. गुना से आरौन जा रही बस के डंपर से टकराने में कई परिवारों के लोगों की आग लगने से मृत्‍यु हुई. इस प्रकार के हृदय विदारक जो भी हादसे प्रदेश में हुए हैं, उन सभी मृत व्‍यक्तियों को मेरे दल की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. मैं सदन की ओर से शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना व्‍यक्‍त करता हूं.धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय :- मैं सदन की ओर से शाकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं. अब सदन दो मिनिट मौन खड़े रहकर दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करेगा.

(सदन द्वारा 2 मिनट खड़े होकर श्रद्धांजलि अर्पित की गयी.)

अध्‍यक्ष महोदय:- दिवंगतों के सम्‍मान में सदन की कार्यवाही 10 मिनिट के लिये स्‍थगित.

 

(11.11 बजे सदन की कार्यवाही 10 मिनिट के लिए स्‍थगित)

 

 

11.22 बजे विधान सभा पुनः समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

अध्यक्ष महोदय - अब प्रश्नकाल प्रारंभ होगा. सभी लोग कृपया स्थान ग्रहण कर लें.


क्षेत्रीय नवीन महाविद्यालय की स्‍थापना

[उच्च शिक्षा]

1. ( *क्र. 469 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या क्षेत्रीय कठिनाई एवं आवश्यकता को दृष्टिगत रख छात्र एवं छात्राएं जावरा नगर में कन्या एवं विधि महाविद्यालय प्रारंभ किये जाने की मांग कर रहे हैं? (ख) क्या संपूर्ण रतलाम जिले में मात्र एक-एक ही कन्या एवं विधि महाविद्यालय होने से असंख्य छात्र-छात्राएं उच्च अध्ययन से विभिन्न कारणों से वंचित रह जाते हैं? (ग) यदि हाँ, तो आलोट, ताल, बड़ावदा, पिपलौदा एवं जावरा तहसील के छात्र-छात्राओं का भौगोलिक दृष्टि से जावरा नगर केंद्र न्यायोचित होकर जिले के शेष भाग का मुख्य नजदीकी केंद्र भी है? (घ) छात्र-छात्राओं के उच्च अध्ययन, अध्यापन एवं भौगोलिक दृष्टि से नजदीक केंद्र होने से जावरा नगर में विधि एवं कन्या महाविद्यालय प्रारम्भ किया जाये तो कब तक प्रारंभ किया जायेगा?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री इन्‍दर सिंह परमार ) : (क) कुछ विद्यार्थियों द्वारा जावरा नगर में विधि महाविद्यालय खोले जाने हेतु एक ज्ञापन दिनांक 30.07.2023 को प्राचार्य, भगतसिंह शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, जावरा को प्रस्तुत किया था. (ख) जी नहीं। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) एवं (घ) शासकीय महाविद्यालय जावरा, बडावदा एवं पिपलौदा में सहशिक्षा महाविद्यालय होने एवं विभाग के मापदण्ड अनुसार उक्त महाविद्यालय 20 से 30 कि.मी. की परिधि में होने के कारण जावरा में शासकीय कन्या महाविद्यालय एवं सीमित वित्तीय संसाधनों के कारण वर्तमान में विधि महाविद्यालय खोले जाने में कठिनाई है.

परिशिष्ट - "एक"

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय - अध्यक्ष महोदय, सर्वप्रथम तो मैं आपका अपनी ओर से और सदन की ओर से स्वागत करता हूं. सोलहवीं विधान सभा का यह पहला प्रश्न है. स्थानीय क्षेत्र के साथ प्रदेश और देश में आपका नेतृत्व, आपकी कार्यकुशलता और गंभीरता से हमने संरक्षण प्राप्त किया है. मैं इस प्रश्न में भी आपका संरक्षण चाहूंगा. अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न सामान्य-सा है, लेकिन अत्यंत आवश्यक है. रतलाम जिले में विगत वर्षों में 1963 से अशासकीय रूप से विधि महाविद्यालय संचालित होता रहा है और एकमात्र विधि महाविद्यालय है. इसको लगभग 60 वर्ष से अधिक हो चुके हैं और यही स्थिति वर्ष 1971 में कन्या महाविद्यालय जिला मुख्यालय पर प्रारंभ हुआ था. लगभग 53 वर्ष हो चुके हैं. लगातार छात्राओं की बढ़ती हुई संख्या और लगातार कानून की पड़ने वाली आवश्यकताएं, इन दोनों दृष्टि से कन्या महाविद्यालय अतिरिक्त रूप से जिले में प्रारंभ किया जाना चाहिए. मैं भारतीय जनता पार्टी की सरकार का, विगत वर्ष के शासनकाल का धन्यवाद भी ज्ञापित करना चाहता हूं कि अनेक महाविद्यालय प्रारंभ किये गये, किन्तु को-एजूकेशन के साथ-साथ कुछ पेरेंट्स यह भी चाहते हैं कि छात्राओं के लिए अलग से महाविद्यालय खोला जाय. लगातार छात्राओं की संख्या भी बढ़ रही है. अगर मैं मेरे स्थानीय जावरा क्षेत्र की ही बात करूं, रतलाम जिले का सेंटर पाइंट है. ताल, आलोट, बड़ावदा, उससे लगा हुआ है, लगभग साढ़े तीन हजार के आसपास छात्राएं.

अध्यक्ष महोदय - माननीय सदस्य प्रश्न करें.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय - अध्यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि कन्या महाविद्यालय और विधि महाविद्यालय प्रारंभ किये जाने की अनुमति प्रदान करें.

श्री इन्‍दर सिंह परमार -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय राजेन्‍द्र जी का प्रश्‍न तो महत्‍वपूर्ण है और विधि महाविद्यालय वहां से अशासकीय रूप से पहले से ही चल रहा है. अभी हमने कन्‍या महाविद्यालय जिला केन्‍द्र पर और पहले जो जिले से अन्‍य जगहों पर खुल चुके हैं, ऐसे 54 पूरे प्रदेश में अभी संचालित हैं. इसलिए अभी कई जिला केन्‍द्रों में भी हमारे पास कन्‍या महाविद्यालय नहीं हैं. इसलिए हम उस पर एक नीति बना रहे हैं और नीति के अनुसार धीरे-धीरे करके नीचे जाएंगे, फिर जिले में भविष्‍य में जो बडे़ सेंटर हैं, उनका परीक्षण कराकर आगे करने वाले हैं. क्‍योंकि इनके यहां का जो महाविद्यालय है वह भी बहुत पुराना है, जो अभी संचालित है और इसलिए उसकी जो कैपेसिटी है, उसमें अभी 5860 छात्र पढ़ते हैं तो हम अभी उसी महाविद्यालय को और कैपेसिटी के साथ में, उसको संसाधन देने का हमने तय किया है और करने वाले हैं और बाकी दोनों विधि महाविद्यालय और कन्‍या महाविद्यालय का परीक्षण कराकर के भविष्‍य में जब योजना बनेगी, उसको उसमें जोडे़ंगे.

डॉ.राजेन्‍द्र पाण्‍डेय -- धन्‍यवाद. माननीय मंत्री जी, एक परीक्षण करवा लें लेकिन दोनों में से एक महाविद्यालय की कम से कम स्‍वीकृति प्रदान कर दें कि अतिशीघ्र इसकी स्‍वीकृति दे दी जाएगी. अतिशीघ्र प्रारम्‍भ कर दिया जाएगा. अतिशीघ्र हम परीक्षण करवाकर इसको प्रारम्‍भ करेंगे, तो कुछ तो मुझे आश्‍वासन मिल जाए.

श्री इन्‍दर सिंह परमार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक बार पूरे मध्‍यप्रदेश के संदर्भ में सोचकर के, पूरा अध्‍ययन करके और आगे का जैसा भी होगा, उसको करेंगे. क्‍योंकि अभी कन्‍या महाविद्यालय में हमारे जिला केन्‍द्र छूटे हैं इसलिए उनको कवर करना है और जैसे-जैसे व्‍यवस्‍था होती जाएगी, करेंगे लेकिन मैंने व्‍यक्‍तिगत रूप से भी कहा है कि हम भविष्‍य में जरूर जावरा को....

डॉ.राजेन्‍द्र पाण्‍डेय -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी अभी जो बता रहे हैं, मैं उनको धन्‍यवाद देना चाहता हॅूं कि उन्‍होंने यह आश्‍वस्‍त किया है कि हमारे यहां का महाविद्यालय काफी पुराना है और उसमें छात्र-छात्राओं की संख्‍या भी अधिक है तो उसमें कम से कम अभी दोनों महाविद्यालयों के लिये जब तक यह परीक्षण करवाएं, तब तक वहां पर जो आवश्‍यकताएं हैं, जैसे एक तो वहां एम.ए. (अंग्रेजी), समाज शास्‍त्र, बी.ए. (होमसाइंस) और कृषि संकाय की आवश्‍यकता है तो कम से कम उसकी स्‍वीकृति प्रदान कर दें, ताकि वहां पर फैकल्‍टी खुल जाए.

श्री इन्‍दर सिंह परमार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एम.ए. (अंग्रेजी) और समाज शास्‍त्र यह हम अगले सत्र से प्रारम्‍भ कर देंगे. होम साइंस में थोड़ा देख लेते हैं कितने विद्यार्थी आते हैं क्‍योंकि ऐसे विषयों पर कम बच्‍चियां एडमिशन ले रही हैं लेकिन हम फिर भी इसका परीक्षण करके तय करेंगे और एक एग्रीकल्‍चर का है उसका भी थोड़ा, क्‍योंकि एग्रीकल्‍चर यूनिवर्सिटी चालू कर रहे हैं उसी क्रम में चालू किया है. उसको कैसे क्‍या कर पाएंगे, उसका भी परीक्षण कराकर देखेंगे. लेकिन एम.ए. (अंग्रेजी) और समाजशास्‍त्र अगले सत्र से कर देंगे.

 

उर्वरक भण्‍डारण, वितरण केन्‍द्र

[सहकारिता]

2. ( *क्र. 415 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या खेल एवं युवा कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या बरेला क्षेत्र के धनपुरी, कुटेली, महगवां डूंगा, कुडारी, उमरिया, तिलहरी, पडवार, सलैया एवं अन्‍य अनेक ग्रामों के किसानों को उर्वरक लेने हेतु डबल लॉक सेंटर जबलपुर लगभग 40 से 50 कि.मी. आना पड़ता है? (ख) क्‍या जबलपुर के व्‍यस्‍त ट्रैफिक एवं सीजन के समय ट्रैक्‍टर ट्रालियों के इकट्ठा हो जाने के कारण उर्वरक लेने हेतु एक से दो दिन का अतिरिक्‍त समय लगता है? (ग) प्रश्‍नांश (क), (ख) का उत्‍तर हाँ है तो क्‍या बरेला मुख्‍यालय में उर्वरक भण्‍डारण वितरण केन्‍द्र प्रारंभ किया जावेगा? (घ) यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री ( श्री विश्वास सारंग ) : (क) बरेला क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों की डबल लॉक सेन्टर जबलपुर से दूरी पृथक-पृथक है। किसानों की सुविधा अनुसार बरेला शाखा से संबद्ध सेवा सहकारी समिति पडवार, बरेला एवं पिन्डरई समिति से किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है। किसान आवश्यकता अनुसार निजी विक्रेताओं से भी उर्वरक प्राप्त कर सकते हैं। (ख) जबलपुर के व्यस्त ट्रैफिक एवं सीजन के समय ट्रैक्टर ट्रालियों के इकट्टा हो जाने के कारण उर्वरक लेने हेतु एक से दो दिन का अतिरिक्त समय लगने के संबंध में विपणन संघ को कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। विपणन संघ जबलपुर के समस्त उर्वरक विक्रय केन्द्रों में उपस्थित कृषकों को उनकी मांग अनुसार दैनिक रूप से उर्वरक उपलब्ध कराया जाता है। (ग) वर्तमान में बरेला उर्वरक भण्डारण वितरण केन्द्र खोलने की कोई प्रक्रिया प्रचलन में नहीं है। (घ) प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता है।

श्री सुशील कुमार तिवारी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा वास्‍तविक प्रश्‍न यह है कि हमारे यहां बहुत छोटे किसान हैं जिनके पास संसाधन भी नहीं हैं, ट्रेक्‍टर्स भी नहीं हैं उनको यदि ट्रैक्‍टर लेने जाना पड़ता है तो बहुत दूर लगभग 40-50 किलोमीटर व्‍यय अधिक आता है. मैंने डबल लॉक सेंटर की मांग की थी कि खाद डबल लॉक में किया जाना चाहिए. मेरा ऐसा कहना है कि अभी आपके उत्‍तर में आया है कि प्राइवेट लोगों से, प्राइवेट दुकानों से खाद ली जा सकती है तो मेरा आपसे यह निवेदन है कि क्‍यों नहीं ली जा सकती, तो इसका कारण आपको पता है कि प्राइवेट में क्‍या स्‍थिति होती है क्‍या अधिक दरें, ब्‍लैक या अन्‍य चीजें होती हैं. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हॅूं कि कोई ऐसी व्‍यवस्‍था लागू की जाए जिससे उन छोटे किसानों को वहीं लाभ प्राप्‍त हो सके. अभी वर्तमान में मुश्‍किल से सौ-डेढ़ सौ किसानों तक ही खाद पहुंच पाती है. यदि कोई डबल लॉक या अन्‍य कोई व्‍यवस्‍था माननीय मंत्री जी देंगे, तो मैं मानकर चलूंगा कि उन्‍हें किसानों के हित में बहुत बड़ा काम हो जाएगा, ऐसा मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है.

श्री विश्वास सारंगमाननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने जो प्रश्न पूछा है उसमें बरेला क्षेत्र में तीन पैक्स हमारे काम करते हैं. बरेला, पिन्डरई, पडवार तीनों में हमारे जो ऋणी किसान हैं. उनको समय से जब भी जरूरत होती है उर्वरक उपलब्ध होता है. माननीय विधायक जी ने जो बात की है वृत्तिकर्मी जो किसान हैं उनसे संबंधित है. पूरे प्रदेश में नगद खाद देने के लिये डबल लॉक की व्यवस्था है, परन्तु इस क्षेत्र में अभी जो परीक्षण हुआ है इसकी आवश्यकता महसूस नहीं होती. जहां तक हमारे जो ऋणी किसान हैं उनको उर्वरक उपलब्ध कराने की जो व्यवस्था वह सुचारू रूप से चल रही है. इसलिये जो माननीय विधायक जी ने जो दूरी दी है, वह भी बहुत ज्यादा है. मैंने पूरा परीक्षण कराया. सभी गांवों में इन सोसाईटियों से उर्वरक मिलता है. पर माननीय विधायक जी की कोई पर्टिक्यूलर बात होगी तो मैं उसका निश्चित रूप से निदान करूंगा.

अध्यक्ष महोदयपूरक प्रश्न.

श्री सुशील कुमार तिवारी इन्दू भैयाअध्यक्ष महोदय, मेरा ऐसा कहना है कि 262 आपने अस्थायी केन्द्र खोले थे. आखिर में हमारा क्षेत्र क्यों वंचित है. क्या इसकी कोई व्यवस्था की जा सकती है या नहीं की जा सकती है ? जो परीक्षण की बात आपने की है. 262 केन्द्र आपने खोले हमारे यहां का आपने परीक्षण किया उसमें दूरी अधिक है दोनों को यदि तुलना में मिला लें तो वहां पर इतनी खाद ही नहीं पहुंचती कि 100 से 150 किसानों से ज्यादा किसानों को खाद नहीं मिल पाती है. तो कोई ऐसी व्यवस्था की जाये डबल लॉक की व्यवस्था आप नहीं कर सकते हैं तो कोई अन्य व्यवस्था की जाये. पर छोटे किसान किराया लेकर जाये और भीड़ में जाकर खड़ा हो जबलपुर में उसमें भी आप कहते हैं कि इसकी शिकायत आपने विपणन संघ में नहीं की गई. विपणन संघ वाले तो खुद ही परेशान हैं.

अध्यक्ष महोदयतिवारी जी आप प्रश्न करें.

श्री सुशील कुमार तिवारी इन्दू भैयाअध्यक्ष महोदय, विपणन संघ वाले खुद ही परेशान हैं, वह तो खुद ही पुलिस को बुलवाते हैं दो दो दिन में वहां पुलिस आती है और वह अपनी कार्यवाही करती है, खाद वितरण करवाती है. तो हमारा यह निवेदन है कि ऐसे छोटे किसानों के लिये कोई शासन व्यवस्था करे डबल लॉक जब आप 262 जगहों पर कर सकते हैं, अस्थायी केन्द्र खोल सकते हैं.

अध्यक्ष महोदयआप अपना प्रश्न तो बताईये ?

श्री सुशील कुमार तिवारी इन्दू भैयाअध्यक्ष महोदय, हमारे छोटे किसानों के लिये क्या व्यवस्था है उसके लिये माननीय मंत्री जी आपसे निवेदन है कि आप कोई ऐसी व्यवस्था बनायें कि 262 केन्द्र जब आप अस्थायी खोल सकते हैं तो हमारे यहां का आप फिर से परीक्षण कराकर आप देख लें.

श्री विश्वास सारंगमाननीय अध्यक्ष महोदय, मैं जानकारी के लिये बताना चाहता हूं कि बरेला जो हमारी पैक्स है उसमें 218 किसानों को हम खाद उपलब्ध करवा रहे हैं, पिन्डरई में लगभग 170 को तथा पडवार में लगभग 357 किसानों को कर रहे हैं. पर जो भी माननीय विधायक जी ने बोला है कि जो अस्थायी हमारे नगदी के जो केन्द्र है उसके बारे में परीक्षण करवा के उसकी व्यवस्था को हम लागू करने का प्रयास करेंगे.

श्री सुशील कुमार तिवारी इन्दू भैयाअध्यक्ष महोदय, जी धन्यवाद.

प्रश्न संख्या-3

 

महाविद्यालयों में स्वीकृत पदों की जानकारी

[उच्च शिक्षा]

3. ( *क्र. 524 ) श्री राजन मण्‍डलोई : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बड़वानी विधानसभा क्षेत्र में संचालित महाविद्यालयों में सभी संवर्गों के कुल कितने पद स्वीकृत हैं? उसके सापेक्ष कुल कितने पद हैं, की जानकारी महाविद्यालय का नाम सहित देवें। उपरोक्तानुसार पद कितने समय से रिक्त हैं? प्रत्येक पद की रिक्तता की समयावधि बतावें। (ख) उक्त रिक्त पदों की पूर्ति कब तक कर ली जावेगी? (ग) वित्तीय वर्ष 2020-21, 2021-22 एवं 2022-23 की ऑडिट रिपोर्ट की प्रमाणित प्रतियां बड़वानी विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक महाविद्यालय के संदर्भ में देवें। जिन महाविद्यालयों ने ऑडिट नहीं कराया है, उन जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्यवाही की गई है? यदि कोई कार्यवाही नहीं की गई है तो शासन द्वारा कब तक कार्यवाही संस्थित की जावेगी? (घ) बड़वानी विधानसभा क्षेत्र के महाविद्यालयों में अध्यनरत छात्र-छात्राओं की कितनी छात्रवृत्ति कब से लंबित है? संख्या बतावें। छात्रवृत्ति के संदर्भ में महाविद्यालय का नाम, छात्र-छात्राओं का नाम, लंबित राशि, लंबित समयावधि सहित अनुसूचित जाति जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के संदर्भ में सूची पृथक-पृथक देवें। उक्त राशि का भुगतान कब तक कर दिया जावेगा?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री इन्‍दर सिंह परमार ) : (क) बड़वानी विधानसभा क्षेत्र में संचालित महाविद्यालयों में सभी संवर्गों के कुल 227 पद स्‍वीकृत हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) शैक्षणिक संवर्ग अंतर्गत प्रदेश के समस्‍त शासकीय महाविद्यालयों में रिक्‍त पदों पर भर्ती हेतु म.प्र. लोक सेवा आयोग, इंदौर द्वारा सहायक प्राध्‍यापकों के 1669 पदों, ग्रंथपाल के 255 पदों एवं क्रीडा अधिकारी के 129 पदों की पूर्ति हेतु विज्ञापन दिनांक 30.12.2022 को जारी किया जा चुका है। प्रयोगशाला तकनीशियन के रिक्‍त पदों की पूर्ति हेतु कर्मचारी चयन मंडल, भोपाल को मांगपत्र प्रेषित किया जा चुका है। रिक्‍त पदों की पूर्ति हेतु समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है। (ग) बड़वानी विधानसभा क्षेत्र के शहीद भीमानायक शासकीय स्‍नातकोत्‍तर महाविद्यालय, बड़वानी, शासकीय कन्‍या महाविद्यालय, बड़वानी एवं भगवान बिरसा मुण्‍डा शासकीय महाविद्यालय, पाटी की ऑडिट रिपोर्ट की प्रमाणित प्रतियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। शासकीय विधि महाविद्यालय, बड़वानी सत्र 2021-22 में प्रारंभ होने से ऑडिट का कार्य प्रक्रियाधीन है तथा नवीन आदर्श महाविद्यालय 2023-24 में प्रारंभ हुआ है। शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता। (घ) बड़वानी विधानसभा क्षेत्र के महाविद्यालयों में अध्‍ययनरत छात्र-छात्राओं की उच्‍च शिक्षा विभाग द्वारा संचालित समस्‍त छात्रवृत्तियों का भुगतान लंबित नहीं है, वर्ष 2023-24 की छात्रवृत्तियों का भुगतान प्रक्रियाधीन है। अन्‍य विभाग द्वारा प्रदाय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग के संबंध में पृथक-पृथक सूची की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

श्री राजन मण्डलोईअध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं मंत्री जी से बड़वानी महाविद्यालय के लिये जानकारी चाह रहा था. बड़वानी विधान सभा में चार कालेज बड़वानी में हैं और एक कालेज पार्टी विकासखण्ड में है. माननीय मंत्री जी हमारे कालेजों में जो 149 पद हैं उसके विरूद्ध मात्र 32 कार्यरत् हैं और 77 पद रिक्त हैं. इसके अलावा जो मॉडल कालेज खोला है. उस मॉडल कालेज में 39 पद स्वीकृत होकर मात्र 3 कार्यरत् हैं 36 पद रिक्त हैं. साथ में जो भृत्य और क्लर्क दूसरा स्टॉफ होता है उसके भी 78 पदों में से 40 कार्यरत् हैं और 38 पद रिक्त हैं. इन रिक्त पदों की भर्ती कब तक की जायेगी. क्योंकि हमारा बड़वानी जिला आदिवासी बाहुल्य जिला है वहां पर छात्रों को पढ़ाई में बहुत समस्या आती है. साथ में आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के बाद छात्रवृत्ति के आधार पर जो बच्चे पढ़ते हैं उनको प्रेरणा मिलती है, वह पढ़ने के लिये जा सकें. काफी समय से उनकी छात्रवृत्ति पेंडिंग पड़ी हुई है. छात्रवृत्ति उच्च शिक्षा विभाग नहीं देता, जनजाति विभाग द्वारा जारी की जाती है. लेकिन 2022 से अभी तक उनको छात्रवृत्ति नहीं मिली है. इस सत्र में तो छात्रवृत्ति के फार्म ही नहीं गये हैं, जबकि सत्र एण्ड होने जा रहा है. आदिवासी, दलित, ओ.बी.सी.छात्रों को आवास भत्ता एवं स्टेशनरी मिलती है. जब से कोरोना काल आया था उसके बाद से उनको स्टेशनरी भी मिलना बिल्कुल बंद हो गई है. आवास भत्ते की राशि भी उनको नहीं मिल रही है. ऐसी स्थिति में जो

अध्यक्ष महोदयमण्डलोई जी आप पूरा लब्बो लुआब निकालकर कोई प्रश्न तो करें. मंत्री जी भी भाषण का जवाब भाषण से देंगे तो एक ही प्रश्न में सारा मामला निपट जायेगा. श्री राजन मण्‍डलोई - अध्‍यक्ष जी, मेरा कहना है कि रिक्‍त पदो की पूर्ति कब तक कर ली जाएगी? कोई निश्‍चित समय सीमा बता दी जाए और साथ में स्‍कॉलरशिप और स्‍टेशनरी वगैरह कब तक उनको प्रदान कर दी जाएगी.

श्री इन्‍दर सिंह परमार - अध्‍यक्ष जी, मध्‍यप्रदेश में असिस्‍टेंट प्रोफेसर, ग्रंथपाल एवं क्रीड़ा अधिकारियों के कुल 2053 पदों की पूर्ति हेतु विज्ञापन जारी हो चुका है जिसकी परीक्षा भी तीन मार्च से प्रारंभ हो रही है. ओबीसी के आरक्षण को न्‍यायालयीन प्रक्रिया में होने के कारण से उसमें अभी 87 प्रतिशत का ही परीक्षा परिणाम घोषित किया जाएगा, इसलिए बहुत जल्‍दी है जैसे ही पीएससी चयन कर लेगी, उसके बाद तत्‍काल हम रिक्‍त पदों की पूर्ति कर देंगे. इसी प्रकार से जो छात्रवृत्तियां हैं, अलग अलग विभाग से अलग अलग प्रकार से संचालित होती है, हायर एजुकेशन के इस वर्ष के अलावा पिछले सालों की कोई पेंडेंसी नहीं नहीं है, लेकिन एससी, एसटी और पिछड़े वर्ग से जो छात्रवृत्ति आती है वह पिछले साल की भी बकाया है और इस साल की भी बकाया है. आज ही हम इसमें करके, मैं समझता हूं कि बहुत जल्‍दी निराकरण करने वाले हैं. सभी छात्रों को छात्रवृत्ति मिल जाए, पुरानी पेंडेसी मिल जाए, जो इस साल की है उसकी प्रक्रिया अभी प्रारंभ कर दी है. पोर्टल का भी विषय आया था, सभी जगह का पोर्टल खोल दिया गया है और इसलिए जल्‍दी उनके आंकड़े भी आ जाएंगे. पहले से जो एससी, एसटी के पोर्टल खुले हुए हैं, उसकी संख्‍या हमारे पास है, लेकिन जो पिछड़े वर्ग का पोर्टल नहीं खुला था. 26 जनवरी 2024 से ओबीसी का छात्रवृत्ति वाला पोर्टल खुल चुका है और जल्‍दी हम उसको समाधान की ओर ले जाएंगे. बच्‍चों तक छात्रवृत्ति पहुंचाने का काम करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय - मंडलोई जी कोई दूसरा पूरक प्रश्‍न, जरुरी नहीं है पूछना अगर नहीं है तो मत पूछो.

नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सदस्‍य की बात को आगे बढ़ाता हूं. ये पूरे प्रदेश का मामला है. चाहे पक्ष के हो या विपक्ष के हो कोई भी विधायक हो, सभी की विधान सभा का और सभी के कॉलेजों का मामला है. मैं चाहता हूं कि आसंदी की तरफ से ये निर्देश होना चाहिए कि सदन को और सदस्‍यों को आश्‍वासन होना चाहिए कि समय सीमा निश्‍चित हो. अगर एक-एक, दो-दो साल से छात्रवृत्ति नहीं मिलेगी तो उन छात्रों का भविष्‍य क्‍या होगा, वे कैसे आएंगे(...मेजो की थपथपाहट) मेरा आपसे अनुरोध है, इस बारे में आप निर्देशित करें.

श्री इन्‍दर सिंह परमार - विपक्ष के नेता जी ने जो कहा है, वह अगले 14 नंबर के प्रश्‍न में है, उसमें सारे प्रदेश की जानकारी हम दे रहे हैं, लेकिन मेरा केवल इतना सा निवेदन है कि कुछ तकनीकी कारणों से छात्रवृत्ति रुकी है, वर्ष 2021 की भी बहुत कम छात्रों की छात्रवृत्ति रुकी है. 2022 का आंकड़ा ज्‍यादा है और इस साल का है तो इस साल की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है और संबंधित विभागों को उसके लिए भी आवश्‍यक आदेश जारी हो रहे हैं. मैं समझता हूं कि इस सत्र में मार्च के पहले पहले सभी का भुगतान कर देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय - रामनिवास जी आप कुछ पूछना चाहते हैं.

श्री रामनिवास रावत - अध्‍यक्ष जी, पोर्टल खराब होने के कारण छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई है, छात्रवृत्ति नहीं मिल पाने से कई लोग परेशान भी रहे हैं, एससी, एसटी, ओबीसी के छात्र. मैं तो केवल एक ही प्रश्‍न करुंगा कि इस शिक्षा सत्र के समाप्ति के पूर्व क्‍या सभी छात्रों को पूरी पेंडिंग छात्रवृत्ति प्रदाय कर दी जाएगी.

श्री इन्‍दर सिंह परमार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो पुरानी पेंडेंसी है, उसको हम इसी सत्र में पहले पूरी कर लेंगे और ये जो वर्तमान है उसके लिए भी पोर्टल खोल दिया गया है, उसका भी जल्‍दी होगा. किसी की छात्रृत्ति पेंडिंग नहीं होगी, ये हम पूरी कोशिश करेंगे.

श्री आरिफ मसूद - अध्‍यक्ष जी, इसमें एसटी, ओबीसी की बात आ गई है तो अल्‍पसंख्‍यक भी छात्रवृत्ति का लाभ लेना चाहते हैं और सबका साथ सबका विकास होना है तो इसको भी जुड़वा दें. दूसरा छात्रों को बहुत परेशानी आती है, मार्च में परीक्षा है, चुनाव की वजह से इस बार मार्च-अप्रैल में परीक्षाएं हो रही हैं तो तमाम स्‍कूल, कालेज छात्रों को पेड करने को कहते हैं, छात्रवृत्ति जल्‍दी मिल जाए, मंत्री जी ने कहा है कि जल्‍दी करा देंगे. मैं समझता हूं कि मार्च में जल्‍दी करवा देंगे तो बेहतर होगा.

संसदीय कार्यमंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- मैं समझता हूं कि देश बढ़ रहा है और आगे बढ़ रहा है, श्री आरिफ भाई शिक्षा के ऊपर पर प्रश्‍न पूछ रहे हैं, मतलब यह बहुत बड़ी बात है.

अध्‍यक्ष महोदय -- मैं समझता हूं कि मंत्री जी ने समुचित उत्‍तर दिया है लेकिन फिर भी शीघ्रता करेंगे ऐसी मुझे आशा है.

महाराजा प्राथमिक उपभोक्ता भंडार द्वारा अनियमितता

[सहकारिता]

4. ( *क्र. 583 ) डॉ. सीतासरन शर्मा : क्या खेल एवं युवा कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या महाराजा प्राथमिक उपभोक्ता भंडार मर्या. वार्ड क्र. 13. इटारसी जिला नर्मदापुरम के संचालकों द्वारा फर्जी सदस्य बनाने सहित अन्य शिकायतों पर इटारसी थाने में अपराध क्र. 676/2020 में धारा 420, 467, 468, 471 आई.पी.सी. में प्रकरण पंजीबद्ध हुआ था? (ख) महाराजा प्राथमिक उपभोक्ता भंडार के संचालकों के खिलाफ विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की गयी? यदि हाँ, तो क्या एवं यदि नहीं, तो क्यों? (ग) क्या इस संबंध में संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जावेगी? यदि हाँ, तो क्या? (घ) क्या खाद्य विभाग से थाना प्रभारी इटारसी द्वारा कब-कब कौन-कौन सी जानकारी मांगी गयी थी? वांछित जानकारी क्या दे दी गयी है? यदि नहीं, तो क्यों? (ड.) संयुक्त संचालक, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, भोपाल द्वारा अपने पत्र क्र. 8033/शिकायत/2021, दिनांक 03.08.2021 से कलेक्टर, होशंगाबाद/नर्मदापुरम द्वारा राशन माफिया पर कार्यवाही हेतु लिखे गये पत्र के आधार पर क्या कार्यवाही की गयी?

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री ( श्री विश्वास सारंग ) : (क) जी हाँ। (ख) संस्था के संचालक मण्डल को म.प्र. सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1960 की धारा 53 (1) के अन्तर्गत अधिक्रमित कर प्रशासक नियुक्त किया गया है। (ग) उत्तरांश '' अनुसार कार्यवाही की गई है। (घ) थाना प्रभारी इटारसी द्वारा खाद्य विभाग से पत्र क्रमांक/था.ई./अप.-948/2023, दिनांक 09.06.2023 से चाही गई जानकारी खाद्य विभाग के पत्र क्रमांक/1634/खाद्य/2023 इटारसी दिनांक 08.07.2023 से प्रदाय की गई है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ड.) कृत कार्यवाही का प्रतिवेदन पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

डॉ.सीतासरन शर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न यह था कि फर्जी सदस्‍य बनाकर सोसाइटी बनाई गई और उसमें जांच हुई है और जांच में डी.आर. ने यह लिखा है कि उन्‍होंने कोई सूची उपलब्‍ध ही नहीं कराई, इससे भी जाहिर होता है कि फर्जी सदस्‍य थे. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा इसमें वित्‍तीय अनियमितताएं भी हैं और यह भी डी.आर. की जांच में आया है. मेरा माननीय मंत्री जी से प्रश्‍न है कि क्‍या वह इसकी विस्‍तृत जांच निश्चित समय सीमा में कराकर और यदि उस सोसाइटी में फर्जी सदस्‍य हैं, फर्जी सोसाइटी पायी जाती है तो क्‍या वह सोसाइटी के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज करायेंगे ?

श्री विश्‍वास सारंग -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो विधायक जी ने प्रश्‍न किया है और विधायक जी के पत्र पर ही, इस पर समुचित कार्यवाही हुई थी और सोसाइटी में प्रशासक बैठा दिया है और जो सभी संचालक मंडल थे, उसको भंग कर दिया गया है और उस संचालक मंडल के खिलाफ एफ.आई.आर. भी दर्ज हुई है, पर जैसा विधायक जी का कहना है कि हमारे विभाग की ओर से और विस्‍तृत जांच करा दें. मुझे आपके प्रश्‍न से ऐसा लगता है कि आप यह चाहते हैं कि विभाग की तरफ से भी एफ.आई.आर. की बात आ जाये तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि जब एफ.आई.आर. हुई थी, तो सभी दस्‍तावेज पुलिस ने अपने पास रखे हुए थे. माननीय विधायक जी ने जो कहा है, हम इसकी जांच करा लेंगे और उसके बाद जो भी उसमें निष्‍कर्ष निकलेगा उसके बाद यदि विभाग की ओर से यदि एफ.आई.आर. की जरूरत होगी तो करेंगे, पर यह बात सही है कि वहां पर अनियमितताएं थीं, इसलिये विभाग ने त्‍वरित कार्यवाही करके संचालक मंडल को हटा दिया है.

डॉ.सीतासरन शर्मा -- माननीय मंत्री जी कोई समय सीमा ओर बतला दें तो बढि़या होगा.

श्री विश्‍वास सारंग -- आपने बोला है, आप हम सबके बहुत आदरणीय हैं, तो एक महीने के अंदर हम जांच भी करा देंगे और आप जैसा उसमें जो एफ.आई.आर. की बात है, तो वह भी कर देंगे.

डॉ.सीतासरन शर्मा -- धन्‍यवाद.

आयुष महाविद्यालय की स्‍थापना

[आयुष]

5. ( *क्र. 345 ) श्री शैलेन्द्र कुमार जैन : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या मध्यप्रदेश में लगभग सभी संभागीय मुख्यालयों पर आयुष महाविद्यालय संचालित है, परन्तु बुन्देलखण्ड क्षेत्र के संभागीय मुख्यालय, सागर में अब तक आयुष महाविद्यालय संचालित नहीं है, इसका क्या कारण है? जबकि संभागीय मुख्यालय, सागर में आयुष महाविद्यालय की महती आवश्यकता है। (ख) क्या शासन के समक्ष संभागीय मुख्यालय, सागर में आयुष महाविद्यालय खोले जाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन है? यदि हाँ, तो वर्तमान तक क्या कार्यवाही प्रचलन में है? यदि नहीं, तो क्या शासन इस पर विचार करेगा तथा कब तक?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री इन्‍दर सिंह परमार ) : (क) जी हाँ, प्रदेश के 6 संभागीय मुख्‍यालयों पर आयुर्वेदिक महाविद्यालय संचालित हैं। (ख) जी नहीं।

श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपने प्रश्‍न के माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से जानकारी चाही थी और निवेदन भी किया था और मैं धन्‍यवाद देना चाहता हूं, माननीय मुख्‍यमंत्री जी को, सम्‍माननीय उच्‍च शिक्षा विभाग के संवेदनशील मंत्री जी को कि प्रश्‍न लगाते ही हमारी समस्‍या का समाधान हो गया है और न केवल हमारी समस्‍या का समाधान हुआ है बल्कि सागर के साथ साथ शहडोल, नर्मदापुरम, धार, झाबुआ, मण्‍डला, बालाघाट, शिवपुर और खजुराहो में भी आयुर्वेदिक महाविद्यालय खोलने का महामहिम राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण में उल्‍लेख है तो मैं धन्‍यवाद भी देना चाहता हूं (मेजों की थपथपाहट) लेकिन अध्‍यक्ष महोदय मेरा निवेदन यह है कि मैंने आयुष महाविद्यालय की मांग की है और उन्‍होंने घोषणा की है महज आयुर्वेदिक महाविद्यालय खोलने की तो आयुष में यूनानी और होम्‍योपैथी भी शामिल कराकर और आयुष महाविद्यालय के लिये घोषणा कर दें, यह मैं आपके माध्‍यम से मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहता हूं.

श्री इंदर सिंह परमार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आयुर्वेदिक महाविद्यालय जिन संभाग केंद्र पर नहीं है, वहां पर हम सब संभाग केंद्र पर खोलने जा रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- उच्‍च शिक्षा विभाग की लोकप्रियता ज्‍यादा है, प्रश्‍नों को देखकर लग रहा है(हंसी)

श्री इंदर सिंह परमार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, साथ ही और जिले भी हमने चिन्‍हित किये हैं, जिन स्‍थानों पर हम महाविद्यालय खोलने जा रहे हैं, दूसरा प्रश्‍न जो आदरणीय शैलेन्‍द्र जी का है, क्‍योंकि आयुष में तीनों आते हैं, यूनानी,होम्‍योपैथी और आयुर्वेदिक भी तो सरकार ने नीतिगत रूप से निर्णय किया है कि हम आयुर्वेदिक महाविद्यालय ही खोलेंगे, पहले से भी आयुर्वेदिक महाविद्यालय संचालित हैं और इसलिये सरकार की नीति के अनुसार सब स्‍थानों पर, यानि दस और हम महाविद्यालय खोलने जा रहे हैं.

श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक बार पुन: निवेदन करना चाहता हूं कि होम्‍योपैथी के प्रति भी विद्यार्थियों में काफी उत्‍साह है और इस पैथी को और इसकी लोकप्रियता को ध्‍यान में रखते हुए उस पैथी के विद्यार्थियों के कल्‍याण को ध्‍यान में रखते हुए अगर यह साथ में सम्मिलित कर लिये जायें क्‍योंकि आयुष में तीनों घटक शामिल हैं, अब दो घटकों को छोड़ दिया जायेगा तो ऐसे विद्यार्थियों के साथ अन्‍याय होगा.

श्री इंदर सिंह परमार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक विभाग में जरूर है, लेकिन प्रकृति तीनों की अलग-अलग है. एक आयुर्वेदिक कालेज में होम्‍योपैथी का अध्‍ययन कराना सरल नहीं होगा, इसलिये उन कठिनाईयों को ध्‍यान में रखकर के हमने अभी आयुर्वेदिक कॉलेज खोलने का निर्णय किया है, भविष्‍य में जब उस पर विचार करेंगे तो आपसे विचार विमर्श करके आगे का निर्णय करेंगे.

श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर अलग-अलग खोल रहे हैं तो आयुर्वेद का भी अलग से खोल दें....

अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय सदस्‍य से अनुरोध है कि माननीय मंत्री जी का जवाब आ गया है आप व्‍यक्तिगत रूप से मिलकर अनुरोध करें.

श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन-- बहुत-बहुत धन्‍यवाद अध्‍यक्ष महोदय और बहुत धन्‍यवाद माननीय मंत्री महोदय का.

पंचायतों को प्राप्‍त विकास कार्यों की राशि का उपयोग

[पंचायत एवं ग्रामीण विकास]

6. ( *क्र. 213 ) श्रीमती ललिता यादव : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर विधानसभा अंतर्गत ग्राम पंचायतों को दिनांक 01 जनवरी, 2019 से प्रश्‍न दिनांक तक किस-किस ग्राम पंचायत को किस-किस कार्य के लिए किस-किस दिनांक में कितनी-कितनी राशि प्रदान की गई? ग्राम पंचायतवार पृथक-पृथक राशि, कार्य का नाम, कार्य की स्थिति सहित बतायें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के प्रकाश में ग्राम पंचायतों ने कितनी-कितनी राशि किस-किस कार्य में व्यय की? ग्राम पंचायत, कार्य, राशि, दिनांक सहित पृथक-पृथक बतायें। (ग) ग्राम पंचायतों में कितने कार्य पूर्ण हो गए हैं? कितने कार्य अधूरे पड़े हैं और कितने कार्यों का मूल्यांकन हो चुका है? ग्राम पंचायतवार पृथक-पृथक बतायें। (घ) प्रश्‍नांश (ग) के प्रकाश में यदि कार्य अधूरे पड़े हैं तो कार्य पूर्ण न होने का कारण व जवाबदार पर विभाग द्वारा क्या-क्या कार्यवाही की गई? ग्राम पंचायतवार पृथक-पृथक बतायें।

 

 

पंचायत मंत्री ( श्री प्रहलाद सिंह पटैल ) :

श्रीमती ललिता यादव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं 16वीं विधान सभा में आपका अभिनंदन करती हूं, स्‍वागत करती हूं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न '' के जवाब में जो जानकारी पूर्ण कार्यों की दी गई है वह असत्‍य है. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहती हूं कि छतरपुर विधान सभा की 3 पंचायतों की जांच जिला पंचायत सीईओ के नेतृत्‍व में टीम बनाकर करवा ली जायेगी तो इसका दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा.

श्री प्रहलाद सिंह पटैल-- माननीय अध्‍यक्ष जी, ग्रामीण विकास मंत्रालय की 2-3 सूचनायें मैं आपके माध्‍यम से सदन को देना चाहता हूं और माननीय सदस्‍य का उत्‍तर मैं उसके बाद दूंगा. चूंकि आप भी इस विभाग के मंत्री रहे हैं. डोमेन पर जो चीजें पोर्टल के माध्‍यम से हैं, क्‍योंकि मैं प्रश्‍न पढ़ रहा था, मेरा पहला दिन है और पहली बार मेरा विधान सभा में उत्‍तर देने का अनुभव है तो मेरा आपके माध्‍यम से सभी....

अध्‍यक्ष महोदय-- लोक सभा में तो देते रहे हो आप, ऐसी कोई बात नहीं है. ...(हंसी)...

श्री प्रहलाद सिंह पटैल-- माननीय अध्‍यक्ष जी, यहां जिस प्रकार से प्रश्‍न पूछे जाते हैं उसमें तो पूरी पुस्‍तक ही देना पड़ेगी. पहला मेरा निवेदन यही है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय के तीन पोर्टल हैं, narega.nic.in दूसरा है egramswaraj.

श्री कैलाश विजयवर्गीय-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनको बैठकर बोलने की परमीशन दें या माइक को ऊंचा करवाया जाये. ...(हंसी)...

श्री प्रहलाद सिंह पटैल-- और तीसरा राज्‍य वित्‍त आयोग का prd.mp.gov.in तो मुझे लगता है कि उस दृष्टि से होंगे तो प्रश्‍न स्‍पेशिक पूछे जायेंगे और जैसा माननीय सदस्‍या ने कहा है गलत जानकारी सरकार ने दी है मैं थोड़ा इससे असहमत हूं, मुझे लगता है कि कार्यवाही में ऐसे शब्‍द न आयें, अगर उनको ऐतराज है कि कोई सूचना गलत है तो निश्चित रूप से आपके माध्‍यम से आपके पटल पर आना चाहिये, लेकिन जो जानकारी मुझे प्रश्‍न के माध्‍यम से मिली है, विधायक ने दी, जनपद पंचायत ने दी, महिला बाल विकास एक इसका आंकड़ा उनको दिया है कि 1534 निर्माण कार्यों की स्‍वीकृति इसमें थी और लगभग 5247 लाख रूपये की इसमें स्‍वीकृति थी, इसमें लगभग 4429 लाख का व्‍यय हुआ. दूसरा उनका यह मानना था कि हम नरेगा की जानकारी दें. नरेगा की जानकारी में जांच पेमेंट तभी होता है जब उसका मूल्‍यांकन हो जाता है और इसमें हमने 47 पंचायतों की जानकारी उनके विधान सभा में दी भी है, अगर उनको स्‍पेशिफिक 3 किसी भी पंचायत की जानकारी चाहिये तो निश्चित रूप से देने का मैं आपके माध्‍यम से आश्‍वस्‍त करता हूं कि जानकारी भी देंगे और गलती पाई जायेगी तो कार्यवाही भी करेंगे.

श्रीमती ललिता यादव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो आश्‍वस्‍त किया है तो मैं यही तो कहना चाहती हूं कि आप जब 3 पंचायतों की जांच करा देंगे तो सब दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा तो समय सीमा में माननीय मंत्री जी इसकी जांच करा लीजिये जो मूल्‍यांकन दिखाया गया है वह मूल्‍यांकन तो दिखाया है, लेकिन मौके पर इतने काम नहीं हुये हैं, तीन पंचायतों की जांच हो जायेगी तो सब सही हो जायेगा, मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करती हूं.

श्री प्रहलाद सिंह पटैल - अध्यक्ष महोदय, मुझे तीनों नाम मिल जाएंगे तो मैं कार्यवाही कर दूंगा.

अध्यक्ष महोदय - ललिता जी, मंत्री जी ने कह दिया कि आप तीनों पंचायतों के नाम दे दीजिये.

श्रीमती ललिता यादव - अध्यक्ष महोदय,पंचायतों का नाम मैं बता देती हूं. एक बरगवां पंचायत, एक खरका पंचायत है, एक रामपुर पंचायत है.

 

पंचायत सचिवों की पदस्थापना

[पंचायत एवं ग्रामीण विकास]

7. ( *क्र. 241 ) श्री हेमन्‍त विजय खण्‍डेलवाल : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पंचायत सचिवों को एक ही ग्राम पंचायत में अधिकतम पदस्थ रहने की क्या नीति है? (ख) यदि पदस्थ रहने की अवधि 03 वर्ष है तो स्थानांतरण नीति में 10 % की सीमा निर्धारित होने से क्या किसी पंचायत सचिव को 10 वर्ष के पूर्व स्थानांतरित किया जाना संभव है?

पंचायत मंत्री ( श्री प्रहलाद सिंह पटैल ) : (क) पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी पत्र दिनांक 07.07.2023 जिसमें ग्राम पंचायत सचिवों के स्‍थानांतरण के संबंध में कार्यवाही का लेख किया गया है, तदानुसार सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा समय-समय पर जारी स्‍थानांतरण नीति-निर्देश दिनांक 24.06.2021 की कण्डिका-17 के अनुसार सामान्‍यत: तीन वर्ष या उससे अधिक पदस्‍थापना की अवधि पूर्ण कर लेने के कारण स्‍थानांतरण किया जा सकेगा, की नीति है। (ख) जी हाँ।

श्री हेमन्त विजय खण्डेलवाल - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि पंचायत सचिवों को एक ही पंचायत में रहने की समय सीमा क्या है अगर वह तीन वर्ष है तो साल में एक बार स्थानांतरण नीति आती है और मेरा बड़ा नीतिगत प्रश्न है और उसमें लिमिट रहती है 10 परसेंट की तो क्या कोई सचिव या कोई कर्मचारी 10 वर्ष से पहले अपने स्थान से हट सकता है क्या. यह विरोधाभासी बातें क्यों आपके निर्देश में रहती हैं मुझे बताने का कष्ट करें.

श्री प्रहलाद सिंह पटैल - अध्यक्ष महोदय,बहुत अच्छा प्रश्न है और मैं मानता हूं कि सारा सदन इस तथ्य से इन्वाल्व भी होगा.जो नियमावली बनी उसमें साफ कहा गया कि हम जी.ए.डी. की गाईड लाईन का पालन करेंगे. जी.ए.डी. की गाईड लाईन बड़ी साफ कहती है कि अगर 200 का कोई ब्लाक है और 200 से नीचे संख्या है तो आप 20 प्रतिशत ट्रांसफर कर सकते हैं लेकिन ऊपर जाएंगे तो 200 से 2000 तक 10 परसेंट हो जाता है. अब इसमें कई बार उल्टा लगता है कि अगर 200 से ज्यादा संख्या होगी तो रेश्यो 10 परसेंट बढ़ जाएगा और हमारे छोटे जिले हैं जहां 200 से कम है लेकिन बड़े जिलों में यह समस्या है यह सच्चाई है लेकिन जी.ए.डी. का रूल तो यही है इसके लिये मंत्रालय ने, हमने निर्देश दिये हैं कि एक बार हमें रूल पर विचार कर लेना चाहिये कि हम इसमें क्या पालिसी बनाएं. मैं सदन से आग्रह करता हूं कि हमें कोई सुचारू व्यवस्था बनानी है तो हमें नियमों में थोड़ा परिवर्तन करके हम रास्ते पर जा सकते हैं लेकिन माननीय सदस्य को मैं जानकारी दे रहा हूं एक सर्कुलर मुझे मिला है वह 6.8.2021 का है तो यह रूल ही है कि पंचायत राज की तरफ से सर्कुलर निकला होगा. यह तीन चीजें हैं जो मदद कर सकती हैं, अगर किसी सचिव का रिश्तेदार किसी ग्राम पंचायत में सरपंच बन गया है तो वह वहां नहीं जा सकता. दूसरा उसमें बड़ा स्पष्ट लिखा है कि पैतृक गांव में या उसकी ससुराल में उसकी पोस्टिंग नहीं हो सकती तो युक्तियु्क्तकरण या सामन्जस्य से हो पर जैसा माननीय सदस्य कह रहे हैं कि 10 साल कोई रहे और उसको नहीं हटाया जा सकता ऐसा कहीं भी किसी भी नियम में नहीं है.

श्री हेमन्त विजय खण्डेलवाल - अध्यक्ष महोदय,मेरा पूरक प्रश्न है कि अगर 10 परसेंट की सीमा है और ट्रांसफर नीति साल में एक बार आती है तो आपकी गाईड लाईन जो भी कहती है अगर 100 में 10 का भाग देते हैं तो 10 साल से पहले न सिर्फ आपके विभाग में बल्कि कहीं भी कोई भी अधिकारी चेंज नहीं हो सकता इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है और सभी जगह यह स्थिति बनती है.

श्री प्रहलाद सिंह पटैल - अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य संसद के सदस्य भी रहे हैं. मैंने सिर्फ गाईड लाईन के कुछ हिस्से पढ़े हैं, अगर जहां संख्या 200 से नीचे है वहां पर तो 20 प्रतिशत का ट्रांसफर हो सकता है, तो आप मानकर चलिये कि आप उसको कुछ कर सकते हैं और अन्य कंडिकाओं में जो आप कार्यवाहियां कर सकते हैं. वह विकल्प सरकार के पास या प्रशासन के पास मौजूद रहता है. मैं माननीय सदस्य से कहूंगा कि हम पूरे राज्य की नीति को एक साथ मिल बैठकर बनाएं. यह सदन इसीलिये हैं. नियमों में परिवर्तन करके एक बार मैं सदन के सामने आऊँगा. आपको उसमें कोई सलाह देनी है तो आप उसको दे सकते हैं.

नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) - माननीय अध्यक्ष महोदय,इसमें तो आप निर्देश सरकार को दे सकते हैं.

श्री ओमप्रकाश सखलेचा - माननीय अध्यक्ष महोदय,मेरा आग्रह होगा कि जैसे हम कई विभाग में पांच साल से ज्यादा किसी एक आदमी को एक स्थान पर नहीं रखते.इसमें एक गाई़ड लाईन उस दिशा में भी अगर सोच लें क्योंकि कुछ पंचायतों में वास्तव में 20-20 सालों से वही सचिव बैठा हुआ है और ऐसे ही रोजगार सहायक की भी स्थितियां हैं. इन दोनों के बारे में एक बार विचार करके कि तीन या चार साल से ज्यादा एक पंचायत में वह न रह पाए उसकी भी गाईड लाईन उस नियमावली में बन जाए तो शायद अति उत्तम रहेगा. ऐसा सुझाव है.

श्री प्रहलाद सिंह पटैल - अध्यक्ष महोदय,मैंने पहले ही कहा है कि इसमें सभी लोगों की रुचि है और इसीलिये मैंने पहले ही कहा है कि हम रूल बनाकर एक कोई पालिसी इसकी जरूर बनाएंगे और मुझे लगता है कि इसके लिये मुझे और मेरे मंत्रालय को अवसर मिलना चाहिये.

श्री गिरीश गौतम -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें थोड़ी सी और आवश्‍यकता है कि सचिवों के लिए पहले यह था कि अपनी पंचायत में ही हो सकते हैं, वहीं पर अपाइंटमेंट होता था, उनका ट्रांसफर नहीं होता था. बाद में यह नियम बना कि वह अपनी पंचायत में नहीं रह सकता, वह हट जाए, बाहर चला जाए. अब जीआरएस जो हैं, जो ग्राम रोजगार सहायक कहलाते हैं, वे भी उसी पंचायत में नियुक्‍त होते हैं, उनके ट्रांसफर की कोई पॉलिसी नहीं है और इस समय सबसे ज्‍यादा जिम्‍मेदारी हितग्राहियों को पैसे देने की उन्‍हीं के हाथ में हैं. ऐसा कोई नियम बनाने की आवश्‍यकता है कि जीआरएस को भी उसकी पंचायत से बाहर करें.

श्री प्रहलाद सिंह पटैल -- अध्‍यक्ष जी, यह बात सामने आई है और बहुत से हमारे माननीय विधायकों ने मुझे ये पत्र दिए हैं. पर अभी तक जीआरएस के लिए कोई पॉलिसी नहीं है. इसलिए मैंने दोनों को जोड़कर ही कहा था कि हम उसमें कोई नीति बनाएंगे और उसकी नियमावली हम सामने लेकर आएंगे.

श्री गिरीश गौतम -- इसमें सब साथ देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- मुझे लगता है कि कुल मिलाकर जो तथ्‍य सामने आए हैं, उस मामले में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री जी एक बार सामान्‍य प्रशासन मंत्री जी के साथ बैठक करके इन तथ्‍यों के प्रकाश में विचार करें.

खेल सुविधाएं

[खेल एवं युवा कल्याण]

8. ( *क्र. 82 ) श्री लखन घनघोरिया : क्या खेल एवं युवा कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पूर्व विधानसभा क्षेत्र क्र. 97 जबलपुर के तहत कहां-कहां पर आउटडोर, इनडोर स्टेडियम, मिनी स्टेडियम, खेल परिसर हैं तथा स्थानीय जनता व खिलाड़ियों के लिये कहां-कहां पर कौन-कौन सी खेल सुविधाएं, संसाधन और क्या-क्या व्यवस्थाएं हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) में कांचघर लालमाटी (बर्न कम्पनी के खाली मैदान) में मिनी स्टेडियम, खेल परिसर का निर्माण हेतु कब कितनी राशि की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है एवं इसका कब किसने भूमि पूजन किया था? भूमि पूजन होने के पश्चात इसके लिये कब कितनी राशि आवंटित की गई? यदि नहीं, तो क्यों? (ग) प्रश्‍नांकित प्रस्तावित एवं स्वीकृत मिनी स्टेडियम (खेल परिसर) का निर्माण किस विधान सभा क्षेत्र में कब कितनी राशि में कराया गया? वर्तमान में इसकी क्या स्थिति है एवं क्या इसका उपयोग खिलाड़ियों द्वारा किया जा रहा है? (घ) क्या कांचघर लालमाटी में स्थानीय खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों के लिये मिनी स्टेडियम (खेल परिसर) की आवश्यकता है, जिसकी दीर्घकाल से निरंतर मांग की जा रही है? यदि हाँ, तो क्या शासन इसका निर्माण कराने हेतु आवश्यक बजट राशि का प्रावधान कर निर्माण कराना सुनिश्चित करेगा?

खेल एवं युवा कल्याण मंत्री ( श्री विश्वास सारंग ) : (क) खेल और युवा कल्याण विभाग के आधिपत्य का पूर्व विधानसभा क्षेत्र क्र. 97 जबलपुर में कोई भी आउटडोर इंडोर स्टेडियम, मिनी स्टेडियम, खेल परिसर नहीं है, शासन के अन्य विभागों के स्टेडियमों की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र 1 अनुसार है। स्थानीय जनता, खिलाड़ियों के लिये जबलपुर में उपलब्ध खेल सुविधाओं की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र 2 अनुसार है(ख) विभागीय जानकारी अनुसार कांचघर लालमाटी (बर्न कम्पनी के खाली मैदान) में खेल और युवा कल्याण विभाग द्वारा कोई स्वीकृति प्रदान नहीं की गई है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) विभाग द्वारा केंट विधानसभा क्षेत्र के रॉझी, जबलपुर में आउटडोर खेल परिसर में भारत सरकार की खेलो इंडिया योजनान्तर्गत केन्द्रीय सहायता से सिंथेटिक एथलेटिक ट्रैक राशि रू. 6.82 करोड़ की लागत से निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। उपरोक्त के अलावा म.प्र.राज्य तीरंदाजी अकादमी हेतु हॉस्टल भवन, टेक्नीकल बिल्डिंग, पेवेलियन आदि का राशि रू. 19.35 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य प्रगतिरत है। (घ) बर्न कंपनी खेल मैदान, कांचघर लालमाटी रेलवे विभाग के स्वामित्व का है। अतः शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - "दो"

श्री लखन घनघोरिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के जवाब में (ग) में माननीय मंत्री महोदय की तरफ से यह जवाब आया है कि विधान सभा क्षेत्रवार खेल विभाग के खेल परिसरों की जानकारी प्रपत्र '' में संलग्‍न है. प्रपत्र '' में पहले 12 आउटडोर स्‍टेडियम की जानकारी दी गई है, और खेल विभाग की दी है 19, ये भी भ्रामक है. लेकिन इसके साथ एक संशोधन प्रपत्र दिया है, जिसमें उन्‍होंने स्‍वीकार किया है कि करिया पत्‍थर मिनी स्‍पोर्ट सेंटर, स्‍मार्ट सिटी और दूसरा, बर्न कंपनी खेल मैदान, लाल माटी कांचघर सौरभा रेल्‍वे कॉलोनी में है, इसके संदर्भ में जब हमने जानकारी निकाली, इसमें इन्‍होंने स्‍वीकार कर लिया, लेकिन ये स्‍वीकार नहीं किया कि कहीं मिनी स्‍टेडियम बना है. कहीं भी जवाब में स्‍वीकार नहीं किया है. मेरा निवेदन यह है कि दिनांक 1.11.2019 को एक भूमि-पूजन हुआ था, जिसमें मल्‍टी स्‍पोर्ट कॉम्‍प्‍लेक्‍स, करिया पत्‍थर, और मल्‍टी स्‍पोर्ट कॉम्‍प्‍लेक्‍स, फूटाताल, इनकी दोनों की अलग-अलग लागत 4 लाख 39 हजार, 4 लाख 39 हजार रुपये है. इसका एलओए भी दिनांक 17.9.2019 को जारी हो गया था और उसमें बिल्‍कुल स्‍पष्‍ट है, दोनों का एलओए जारी हो चुका है, जबकि जवाब में यह दिया है कि ऐसा कोई प्रस्‍ताव नहीं है. भूमि-पूजन हो गया, एलओए जारी हो गया. एक स्‍टेडियम की बाऊंड्री वॉल बन चुकी और आपके रिकार्ड में नहीं है. आपके किसी रिकार्ड में नहीं है. न खेल विभाग के है, न किसी विभाग के रिकार्ड में है. दूसरे का स्‍थल परिवर्तन हुआ था, फूटाताल का, चूँकि मेरी ही विधान सभा में था, बर्न स्‍टेंडर्ड कंपनी, जो आधा हिस्‍सा रेल्‍वे को चला गया, आधा प्रदेश सरकार के पास है, उसमें आधे हिस्‍से में तत्‍कालीन कलेक्‍टर महोदय उस स्‍पॉट के इंस्‍पेक्‍शन...

अध्‍यक्ष महोदय -- लाखन भाई, प्रश्‍न कर लें, समय कम बचा है, नहीं तो उत्‍तर नहीं आ पाएगा.

श्री लखन घनघोरिया -- अध्‍यक्ष महोदय, ये दो जो एलओए जारी हुए, भूमि-पूजन हुआ, एक में आधी बाऊंड्री वॉल बन चुकी है, जिसका आपने कहीं उल्‍लेख नहीं किया है. मेरे मूल प्रश्‍न का कहीं भी उल्‍लेख नहीं किया. जानकारी भ्रामक है. मैं आपको यह दे रहा हूँ, आप इसमें से कर दें.

श्री विश्‍वास सारंग -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कोई भ्रामक जानकारी नहीं दी है. इसमें स्‍पष्‍ट है. विधायक जी थोड़ा सा कन्‍फ्यूज हो रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस स्‍थान की ये बात कर रहे हैं, वह रेल्‍वे का ग्राउंड है. खेल विभाग की ओर से कौन से खेल परिसर संचालित हैं, इसकी व्‍यापक और पूरी तरह से सही जानकारी विधायक जी को उपलब्‍ध कराई गई है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि विधायक जी चाहेंगे तो मैं सदन में वह प्रपत्र पढ़कर भी बता दूंगा. जबलपुर में कुल मिलाकर 19 ऐसे परिसर हैं, जहां पर खेल गतिविधियां होती हैं. उसमें से 4 खेल गतिविधियां हैं, जिनका संचालन खेल और युवा कल्‍याण विभाग, मध्‍यप्रदेश करता है. जिसमें कि इनडोर आउटडोर स्‍टेडियम, रानीताल का खेल परिसर जबलपुर, इनडोर आउटडोर स्‍टेडियम युवा सदन रामपुर, इनडोर आउटडोर स्‍टेडियम रांझी, आउटडोर स्‍टेडियम एमएलबी खेल परिसर जबलपुर. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसके अलावा नगर निगम जबलपुर, मध्‍य रेलवे, पश्चिम मध्‍य रेलवे जबलपुर, उच्‍च शिक्षा विभाग जबलपुर, मध्‍यप्रदेश विद्युत मण्‍डल, पुलिस लाईन्‍स, जबलपुर विकास प्राधिकरण, रेलवे ऑफिसर क्‍लब, कैंट सदन, सदर और ऑडिनेंस फैक्‍ट्री, व्‍हीकल फैक्‍ट्री, रावण पार्क, वन विभाग, नगर निगम, कृषि विभाग, इस तरह से माननीय अध्‍यक्ष महोदय 19 स्‍थान ऐसे हैं, जिस पर संचालन यह अलग-अलग विभाग करते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, माननीय सदस्‍य को व्‍यक्तिगत रूप से मिलकर और चर्चा कर लेंगे. प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

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12.01 बजे अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

 

अध्‍यक्ष महोदय - गत सत्र में की गई घोषणा के परिप्रेक्ष्‍य में, मेरे द्वारा विचार कर दिनांक 8 अगस्‍त, 2023 को जारी पत्रक अनुसार, अध्‍यक्ष के स्‍थाई आदेश के अध्‍याय- तीन ''प्रश्‍न और अल्‍प सूचना प्रश्‍न'' के अंतर्गत कण्डिका 13-क के पश्‍चात् संशोधन द्वारा अंत: स्‍थापित नवीन कण्डिका 13-ख को विलोपित कर दिया गया है. इसमें यह‍ प्रावधान था कि विधान सभा के किसी कार्यकाल के सत्रों में सदन की बैठकों हेतु प्राप्‍त प्रश्‍नों की वे सूचनाएं, जो स्‍वीकृत होकर विभागों को उत्‍तर हेतु भेजी जा चुकी हों, के अपूर्ण उत्‍तरों के पूर्ण उत्‍तर सभा के विघटन के ठीक पूर्व तक प्राप्‍त नहीं होने पर, सभा के विघटन पर व्‍यपगत माने जाएंगे.''

अब कि उक्‍तानुसार विधान सभा के विघटन के पूर्व सत्र तक लंबित प्रश्‍नों के अपूर्ण उत्‍तरों के उत्‍तर व्‍यपगत नहीं होंगे. इसके संबंध में परीक्षण कर प्रश्‍न एवं संदर्भ समिति द्वारा कार्यवाही की जावेगी तथा समिति द्वारा अनुशंसा सहित प्रतिवेदन प्रस्‍तुत किया जायेगा.

 

 

12.02 बजे शपथ/प्रतिज्ञान

अध्‍यक्ष महोदय - निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक‍- 184, कसरावद के निर्वाचित सदस्‍य श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव की सदस्‍यता और प्रतिज्ञान उस समय नहीं हो पाया था, तो मैं उनसे आग्रह करूँगा कि वह आएं और नामावली में हस्‍ताक्षर भी करें, शपथ ग्रहण भी करें.

1. श्री सचिन सुभाषचंद्र यादव (कसरावद) - शपथ

 

 

 

 

 

12.03 बजे स्‍थगन प्रस्‍ताव

हरदा शहर के ग्राम बैरागढ़ स्थित पटाखा फैक्‍ट्री में हुए

विस्‍फोट से उत्‍पन्‍न स्थिति

 

अत: इस लोक महत्‍व के विषय पर आज सदन की कार्यवाही स्‍थगित कर चर्चा करायी जाये, इसके संबंध में शासन का क्‍या मत है ?

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)- हमें स्‍वीकार है.

अध्‍यक्ष महोदय- चूंकि घटना गंभीर है और शासन पक्ष द्वारा चर्चा की सहमति दी गई है. अत: स्‍थगन प्रस्‍ताव पर चर्चा अभी प्रारंभ की जायेगी. जिसमें दोनों पक्षों के सदस्‍य भाग ले सकेंगे. इस चर्चा के लिए मैं, डेढ़ घंटे का समय निर्धारित करता हूं और मैं, समझता हूं कि यह एक सारगर्भित चर्चा होगी. तथ्‍य सामने आयें, तदुपरांत सरकार उसका संज्ञान ले.

इस चर्चा के तत्‍काल पश्‍चात् राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर प्रस्‍तुत कृतज्ञता ज्ञापन पर चर्चा प्रारंभ होगी.

श्री राम निवास रावत (विजयपुर)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, घटना की गंभीरता से सभी परिचित हैं लेकिन इस गंभीर विषय के लिए, न तो माननीय मुख्‍यमंत्री जी सदन में उपस्थित हैं और न ही गृह मंत्री जी हैं. हम चाहते हैं कि मुख्‍यमंत्री जी सदन में रहें.

अध्‍यक्ष महोदय- मंत्रिपरिषद के काफी सदस्‍य यहां उपस्थित हैं.

श्री बाला बच्‍चन- जिनके पास गृह मंत्रालय है वे भी सदन में उपस्थित नहीं हैं ये बोला गया है.

जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसीराम सिलावट)- रावत जी, कल ही माननीय मुख्‍यमंत्री जी स्‍वयं वहां से होकर आये हैं. वे इसे बहुत गंभीरता से ले रहें, आप चिंता न करें.

सहकारिता मंत्री (श्री विश्‍वास सारंग)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी अपने कक्ष में हैं और पूरी कार्यवाही सुन रहे हैं.

श्री राम निवास रावत- अब क्‍या कक्ष से सदन चलेगा ?

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रावत जी हमारे वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं और यह इतनी गंभीर घटना है, मुख्‍यमंत्री जी कक्ष में बैठे हैं. यदि वे संवेदनशील हैं तो उन्‍हें आना चाहिए. यह पूरे प्रदेश का मामला है. मंत्री सदन में हैं लेकिन सदन की गरिमा होनी चाहिए. (मेजों की थपथपाहट)

श्री कैलाश विजयवर्गीय- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी जवाबदार सरकार है, जवाबदार मंत्रीगण यहां बैठे हुए हैं. आपने स्‍थगन रखा और मैंने उसे स्‍वीकृति प्रदान की है. यह पहला सत्र है, पहला दिन है और विपक्ष के दिए हुए स्‍थगन को हमने स्‍वीकार कर लिया. इस विषय में कम से कम विपक्ष को सत्‍ता पक्ष की सराहना करनी चाहिए. इसलिए मेरा निवेदन है कि आप गंभीरता से चर्चा प्रारंभ करें, हमारा पूरा मंत्रिमण्‍डल गंभीर है, इस पर कार्यवाही भी करेंगे और जवाब भी देंगे.

(मेजों की थपथपाहट)

अध्‍यक्ष महोदय- रावत जी.

श्री राम निवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दिनांक 06.02.2024 को हरदा के बैरागढ़ में जो विस्‍फोट हुआ, वह कितना भयावह था इसकी जानकारी सभी को है. इसमें 12 लोगों की मृत्‍यु बताई गई है, 12 लोग काल के गाल में समा गए हैं. 60 घर तबाह हो गए हैं, सड़कों पर लाशें बिछी हुई थीं, सड़कों पर लाशों के हाथ कटे हुए पड़े थे, मौत यूं बरस रही थी मानो हम जंग के मैदान में खड़े हों. राकेट से जो हमला होता है उससे भी ज्‍यादा भयावह विस्‍फोट वहां हुए. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वहां केवल सुतली बम नहीं हो सकते हैं, क्‍योंकि सुतली बम से इतना बड़ा विस्‍फोट नहीं हो सकता है. वहां सुतली बम से हटकर जिलेटिन बनाने का काम भी किया जा रहा होगा. वहां रह-रहकर धमाके हो रहे थे, रेस्‍क्‍यू टीम अंदर नहीं जा पा रही थी और बचाव दल लोगों को बचा नहीं पा रहा था. अभी तक स्थिति स्‍पष्‍ट नहीं हो पाई है कि उस घटना स्‍थल पर तत्‍समय फैक्‍ट्री में कितने मजदूर काम कर रहे थे. उस फैक्‍ट्री में 500 लोगों के काम करने की क्षमता थी. यह तथ्‍य बार-बार आया है कि उसमें बाल श्रमि‍क भी मजदूरी करते थे और कई अन्‍य मजदूर भी काम करते थे. फैक्‍ट्री में तत्‍समय जब विस्‍फोट हुआ उस समय कितने मजदूर वहां काम कर रहे थे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है और जहां तक फैक्‍ट्री की बात है यह कोई पहला विस्‍फोट नहीं था. इस फैक्‍ट्री में सबसे पहला हादसा वर्ष 2015 में हुआ था और वर्ष 2015 से लेकर अभी तक कई हादसे इस फैक्‍ट्री में हुए हैं. मैं समझता हूं कि इस फैक्‍ट्री का जो मालिक था अग्रवाल, उसकी फैक्‍ट्री कुंजरग्राम में भी है वहां यह फैक्‍ट्री 10 हजार वर्गफीट जमीन पर है, यह फैक्‍ट्री पीपलपानी में भी है और बैरागढ़ में यह हादसा हुआ है वहां पर भी यह फैक्‍ट्री है. प्रशासन द्वारा एक वर्ष या छ: महीने में एक बार पटाखा गोदामों की जांच प्रशासन द्वारा होती है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, फैक्‍ट्री में कई बार हादसे हुए हैं और इस विस्‍फोटक सामग्री से पहले पेटलावद में भी हादसा हुआ है और 79 जाने गईं थीं. 8 अक्‍टूबर 2015 को इस फैक्‍ट्री मालिक की फैक्‍ट्री में हादसा हुआ, 6 फरवरी को हादसा हुआ और इस तरह से 22 लोगों की मौतें हुईं. फेक्ट्रियां चलती हैं, हादसे होते हैं, हम चर्चा करते हैं और चर्चा के बाद निर्देश होकर, ट्रांसफर होकर इतिश्री हो जाती है. अब आप और हम सभी को यह सोचना पड़ेगा कि इन हादसों के पीछे, इन अनियमितताओं को निरंतर चलने देने के पीछे आखिर कौन जिम्‍मेदार है? इस फैक्‍ट्री को अवैध रूप से कैसे संचालित किया जा रहा था? इस फैक्‍ट्री का जो लाइसेंस था उसमें तीन लाइसेंस थे जिसमें से दो तो निरस्‍त हो गए थे, केवल एक ही लाइसेंस था. जब दो लाइसेंस निरस्‍त हो गए तो उन स्‍थानों पर फैक्‍ट्री कैसे संचालित हो रही थी यह विचारणीय प्रश्‍न है? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वहां की एसडीएम बीच में रहीं थीं एसडीएम ने जांच करके रिपोर्ट प्रस्‍तुत की कि फैक्‍ट्री अवैध रूप से संचालित हो रही है. फैक्‍ट्री में तमाम अनियमितताएं हैं अत: फैक्‍ट्री को तुरंत बंद कराया जाए. उनके उन्‍हें अनियमितता की सूचना देने के बाद भी हादसे वाली फैक्‍ट्री में लाइसेंस की गड़बडी सामने आई थी. सूत्रों के मुताबिक 4 लाइसेंस थे. दो लाइसेंस एल-5 कैटेगिरी के थे, दो एल कैटेगिरी के थे. एल कैटेगिरी के लाइसेंस सस्‍पेंड हैं. एल-5 कैटेगिरी का लाइसेंस एक्टिव था जिसके तहत 300 किलो विस्‍फोटक रखा जा सकता था. जब दो लाइसेंस सस्‍पेंड थे तो यह तीसरा लाइसेंस जो है इसमें भी अनियमितता थी तो यह कैसे बना रहा था.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, फैक्‍ट्री में लाइसेंस देने के लिए, फैक्‍ट्री का लाइसेंस संचालित करने के लिए विस्‍फोटक विभाग या तीन चार विभागों से एनओसी ली जाती है. नगर निगम, विस्‍फोटक विभाग, फायर विभाग की एनओसी, इतने विभागों की एनओसी के बाद तब कहीं यह फैक्‍ट्री संचालित होती है, फैक्‍ट्री को अनुमति प्रदान की जाती है. किसी विभाग की अनुमति इस फैक्‍ट्री को नहीं थी तो फिर इसका लाइसेंस कैसे जारी किया गया? लाइसेंस कैसे बनाया गया? वर्ष 2022 में हरदा के स्‍थानीय लोगों ने इस फैक्‍ट्री में बारूद के अवैध भंडारण और सेफ्टी के मानकों को पूरा नहीं करने को लेकर जिला प्रशासन से शिकायत की थी. जिस पर प्रशासन द्वारा दिनांक 26 सितम्बर, 2022 को फैक्ट्री को सील कर दिया गया था. उसके पश्चात् तत्कालीन आयुक्त श्री माल सिंह के यहां अपील की गई थी उसके बाद मात्र एक माह का स्टे दिया गया था. उसके बाद लगातार फैक्ट्री का नियम विरुद्ध संचालन किया जा रहा है. सबसे बड़ा विचारणीय प्रश्न यह है कि आयुक्त ने स्टे कैसे दिया, क्यों दिया जबकि फैक्ट्री का अवैध संचालन किया जा रहा था. एक माह का ही स्टे दिया गया था तो अभी तक फैक्ट्री कैसे संचालित की जा रही थी. इन घटनाओं के लिए कौन जिम्मेदार है. इस तथ्य की जांच होना चाहिए. केवल कलेक्टर या एस.पी. को हटा देना पर्याप्त नहीं है. इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार कौन है. कहीं न कहीं राजनैतिक संरक्षण होगा. आज के समाचार पत्र में दिया है कि लोग एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं कोई कह रहा है कि कांग्रेसियों का संरक्षण है, कोई कह रहा है कि बीजेपी वालों का संरक्षण है. संरक्षण किसी का भी हो लेकिन इस तरह की घटनाओं में संरक्षण नहीं मिलना चाहिए. संरक्षण देने वाले भी इस घटना के लिए कहीं न कहीं जिम्मेदार हैं. इस तथ्य की जांच होना चाहिए. मैं माननीय अध्यक्ष महोदय को धन्यवाद देता हूँ कि आपने इस मामले में स्थगन प्रस्ताव को ग्रहण किया है. मुख्यमंत्री जी अभी सदन में नहीं हैं उन्होंने प्रयास भी किए हैं. वहां पर 140 फायर ब्रिग्रेड पहुंची, पहली बार किसी एक स्थान पर इतनी फायर ब्रिगेड एकत्रित हुई थीं. आपने एम्बूलेंस भी भिजवाईं, घायलों को उठवाया भी. लेकिन कार्यवाही कब की जाएगी, कैसे की जाएगी यह देखने वाला तथ्य है. इसके लिए हाई कोर्ट में भी एक रिट लगी हुई थी कि जो हाईराइज बिल्डिंग और हाईराइज मॉल बनाए जाते हैं उनमें फायर सेफ्टी, विस्फोटक विभाग और नगर निगम द्वारा एनओसी ली जाती है, तब कहीं चालू की जाती हैं. इस फैक्ट्री के संबंध में विस्फोटक नियंत्रक, दो कमिश्नर, एक कलेक्टर अभी तक हाई कोर्ट में जवाब नहीं दे पाए हैं. आपने जांच के लिए एसीएस की एक सदस्यीय समिति बनाई है. एसीएस तो गृह विभाग का है. एसीएस के विरुद्ध तो खुद ही प्रश्नवाचक चिह्न लगा हुआ है. पुलिस के संरक्षण के बिना कोई भी अवैध काम उस जिले में संचालित नहीं हो सकता है. चाहे वह दारू बेचने वाला काम हो, चाहे सट्टा चलाने का काम हो, चाहे फैक्ट्री चलाने का काम हो, चाहे अवैध खनन हो. यह काम बिना गृह विभाग, पुलिस के संरक्षण के नहीं चल सकते हैं. चाहे गृह विभाग राजनैतिक रुप से दबा हुआ हो. मैं इस ओर सबका ध्यान दिलाना चाहता हूँ. कहीं न कहीं हम लोगों को चिन्तन, मनन करना पड़ेगा. सरकारें आती जाती रहती हैं लेकिन ऐसे कामों के लिए हम कभी संरक्षण न दें. इस घटना में इस तथ्य तक पहुंचना बहुत आवश्यक है कि उसको किसने संरक्षण दिया और किसने उसे रोका और फैक्ट्री को अबाध रुप से चलने देने में किस किस का सहयोग है. ऐसे लोगों के खिलाफ प्रकरण कायम होना चाहिए. चाहे एसपी हो या कलेक्टर हो उन्हें हटाना पर्याप्त नहीं है, चाहे कोई राजनैतिक व्यक्ति हो जिसने संरक्षण दिया हो, वह चाहे उस पक्ष का हो या इस पक्ष का हो. ऐसे लोगों के खिलाफ आवश्यक रुप से कार्यवाही होना चाहिए. हम राजनैतिक रुप से इतने कमजोर होते जा रहे हैं कि ऐसी चीजों को संरक्षण दे रहे हैं जो कि मानव जीवन के लिए संकट उत्पन्न करती हों. यह बहुत बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. इससे पहले पेटलावद में विस्फोट हुआ 79 लोग उसमें मारे गए थे उसके लिए जितने भी आयोग बनाए गए उनकी रिपोर्टें आज तक प्रस्तुत नहीं हुई हैं. इस घटना के लिए भी आपने एक सदस्यीय समिति बना दी है इसकी भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं होगी. वहां के रहवासियों का कहना है कि माँ-पापा को पत्थर लगे वे गिरे तो उठे नहीं. हमने तीन बार फैक्‍ट्री बंद करने की शिकायत की, लेकिन अफसर आते हैं, बडी-बडी बातें करते हैं और नाश्‍ता पानी करके चले जाते हैं, यह वहां के रहवासियों का कहना है. यह वहां के रहवासी बयान कर रहे हैं. कृषि भूमि पर बिना लाइसेंस थी फैक्‍ट्री. बच्‍चों से बंधवाते थे सुतली बम. अध्‍यक्ष महोदय, यह राजस्‍व विभाग को भी देखना चाहिये कि उपयोग परिवर्तन नहीं कराया और कृषि भूमि जिस पर खेती किया जाना थी उस पर पटाखों की फैक्‍ट्री चला रहे हैं. इसके लिए आखिर कौन दोषी है ? यह भारी मात्रा में सुतली बम बनाने का काम किया जाता था. पूरे देश में यहां से सुतली बम भेजे जाते थे. निश्चित रूप से माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने मंत्री जी को भेजा था. मंत्री जी ने एस.पी. से पूछा कि आरोपी कहां हैं, तो वह नहीं बता पाए कि आरोपी कहां हैं, फिर आपने जब सख्‍ती की तब आरोपियों को पकडा गया है, लेकिन उनके विरुद्ध क्‍या कार्यवाही की जाएगी ? इसके पहले भी एक अधिकारी ने एक प्रायवेट परिवाद दायर किया था और इसके खिलाफ उसने चीफ ज्‍यूडीशियल मजिस्‍ट्रेट के यहां प्रकरण भी चला था, लेकिन उसमें वह गवाही के लिये ही नहीं गए. प्रकरण कायम करा दिया और प्रकरण का विचारण हुआ, गवाही देने नहीं गए. क्‍यों नहीं गए ? किसके दबाव में देने नहीं गए ? मैंने रोका या आपने रोका, यह बहुत महत्‍वपूर्ण है. मैं समझता हूं कि उसके लिये अगर मैंने रोका है तो मैं दोषी हूं और आपने रोका है तो आप दोषी हैं. किसी ने तो रोका होगा. अगर किसी ने नहीं रोका तो वह वह क्‍यों नहीं गया ? उसके खिलाफ प्रकरण कायम होना चाहिए. उसके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए. उसे शायद निलंबित कर दिया है, परंतु क्‍या निलंबन पर्याप्‍त है ? या निलंबन कोई सजा है ? या निलंबन कोई दण्‍ड है ? एस.पी. और कलेक्‍टर को हटाया गया है कि ट्रांसफर किया गया है. क्‍या ट्रांसफर कोई सजा है ? क्‍या ट्रांसफर कोई दण्‍ड है ? सामान्‍य प्रक्रिया में भी स्‍थानांतरण होते रहते है. इन बातों के लिये दोषी कौन है ? इतनी बडी घटना है. इसका संज्ञान सभी ने लिया है. मानव अधिकार आयोग ने इसका संज्ञान लिया है, एन.जी.टी. ने इसका संज्ञान लिया है.

अध्‍यक्ष महोदय, हम आर्थिक सहायता पीडित परिवारों को प्रदान करते हैं. एक तो मैं यह निवेदन करूंगा चाहे सरकार की तरफ से जाए, चाहे हमारी तरफ से जाए, चाहे स्‍टेटमेंट मीडिया वाले चलाएं कभी आर्थिक सहायता वाले मामले में मुआवजे का प्रयोग न करें. मृतकों के परिवारजनों को आर्थिक सहायता देने वाले मामले में मुआवजे का प्रयोग न करें क्‍योंकि यह सही नहीं लगता कि मुआवजा दिया गया. अध्‍यक्ष महोदय, यह पूरा विवरण दिया है कि हरदा में विस्‍फोटक का लाइसेंस लेकर काम करने वाले राजेश अग्रवाल को बचाने में अफसरों ने कोई कसर नहीं छोडी. 5 से 8 जुलाई, 2015 को तत्‍कालीन कारखाना निरीक्षक एवं सहायक संचालक औद्योगिक स्‍वास्‍थ्‍य सुरक्षा, नवीन कुमार वर्मा के द्वारा राजेश अग्रवाल की फैक्‍ट्री का निरीक्षण किया गया. बिना लाइसेंस के खतरनाक ढंग से काम व अधिक भंडारण की जानकारी की रिपोर्ट के साथ मापदंडों का खुला उल्‍लंघन मिला, सीढियां तंग मिली, फायर इंतजाम नहीं थे, इमरजेंसी प्‍लान भी नहीं था, इस जांच को लेकर मुख्‍य न्‍यायिक मजिस्‍ट्रेट के सामने परिवाद पेश किया और खुद साक्षी बने. प्रत्‍यक्ष में उन्‍होंने कमियां देखीं, बार-बार कोर्ट ने बैरवा को उपस्थित होने के लिये कहा. साक्षी को गवाही देने के लिये बुलाया लेकिन वह नहीं गये और 21 फरवरी, 2023 को कोर्ट ने आरोपी राजेश अग्रवाल को बरी कर दिया और कोर्ट ने निर्देश भी दिये कि बैरवा के खिलाफ अनुशासनात्‍मक कार्यवाही की जाए कि वह साक्ष्‍य देने क्‍यों नहीं गए.

अध्‍यक्ष महोदय, यह सारे जांच के बिंदु हैं. फैक्‍ट्री कृषि भूमि पर चल रही थी. पटवारी, तहसीलदार क्‍या कर रहे थे ? इनको भी सचेत किया जाए. इनके खिलाफ भी कार्यवाही की जाए. फैक्‍ट्री बेसमेंट में थी बारूद का स्‍टॉक रखा जाता था, इतना खतरनाक काम अवैध तरीके से चल रहा था कि अधिकारियों को मालूम नहीं हो यह कैसे हो सकता है. यह सारी चीजें बडी स्‍पष्‍ट हैं कि इसकी जानकारी सभी को थी. इसमें जांच में स्थानीय प्रशासन और स्थानीय बॉडी, नगर पालिका या नगर निगम जो भी हो, यह जिला स्तर का था, उनसे भी एनओसी चाहिये थी. फायर एनओसी भी चाहिये थी. विस्फोटक विभाग से भी एनओसी चाहिये थी. तो इस तरह से इसके लिये कहीं न कहीं पूरे के पूरे समस्त विभाग जो एनओसी के बाद लायसेंस जारी होने का काम करते हैं, उन सभी की लापरवाही इस घटना में थी. यह सर्व मान्य तथ्य है कि जिन स्थानों पर विस्फोटक और ज्वलनशील पदार्थों का संग्रहण होता है, बल्क में उपयोग किये जाते हैं, उनमें विस्फोट अधिनियम और नगर पालिका अधिनियम, फायर सेफ्टी अधिनियम का पालन करवाया जाना आवश्यक है. क्या यहां इसका पालन करवाया गया. इसके लिये सभी विभागों के सचिव से लेकर तत्कालीन वहां निचले स्तर तक अधिकारी जिम्मेदार हैं. इसके लिये एक आरटीआई एक्टिविस्ट श्री राजेन्द्र गुप्ता ने रिट भी लगाई थी और रिट के बाद नोटिस भी जारी हुए थे. नोटिस के बाद आज तक जवाब नहीं गया. हाई कोर्ट ने फटकार भी लगाई. हमारे प्रिंसिपल सेक्रेटरी तक ने जवाब नहीं दिया. यह बड़ी विडम्बना है.

अध्यक्ष महोदय--रावत जी, आपको थोड़ा संक्षिप्त करना पड़ेगा, आपके पक्ष की तरफ से बोलने वाले काफी लोग हैं.

श्री रामनिवास रावत-- जी अध्यक्ष महोदय. यह घटना केवल इतना ही नहीं है, कहीं पूरे प्रदेश में इस तरह की घटना न हो, भयावह घटना और कोई जान माल न जाये, इसमें श्रम विभाग भी आता है, कितनी लेबर लगती है. वहां लेबर का बीमा था कि नहीं था. श्रम विभाग ने क्यों नहीं देखा, वहां बाल श्रमिक काम करते थे. ऐसी घटनाओं पर चिंतन किया जाना चाहिये और ऐसी घटना हो क्यों रही है और घटना के लिये जिम्मेदार कौन है. जो इस घटना के लिये जिम्मेदार हैं, वही इन मौतों के लिये जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ, उन तथ्यों तक पहुंचने की हिम्मत दिखानी चाहिये. मुख्यमंत्री जी, आपने जिस तरह से सदाशयता,संवेदनशीलता के साथ जागरुकता दिखाई और वहां फायर वाहन पहुंचाये, एम्बुलेंस पहुंचाईं, उसी तरह से उतनी ही सख्ती के साथ प्रदेश में भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, प्रदेश में अनियमितताएं न हों, उसी सख्ती के साथ इस घटना के लिये जिम्मदार व्यक्ति तक पहुंचने के लिये आप क्षमता दिखायें, इसकी न्यायिक जांच की घोषणा करें. इसमें जो एक सदस्यीय एसीएस, गृह को जांच अधिकारी बनाया गया है, मैं उससे सहमत नहीं हूं, क्योंकि गृह विभाग के ही अधिकारी, कर्मचारी जो इस घटना को रोकने के लिये नीचे पूरा पुलिस डिपार्टमेंट गृह विभाग में ही आता है. मैं समझता हूं कि वह पूरा न्याय नहीं कर पायेंगे. इसकी न्यायिक जांच कराई जाये और मृतकों के परिवार जनों को 25-25 लाख, वैसे तो हमने लिखित में 1-1 करोड़ की राशि की मांग की है कि दी जाये, आर्थिक सहायता दी जाये. इसी के साथ उनके परिवार में अगर कोई नौकरी लगने वाला हो, शासकीय सेवा में रखने का काम किया जाये. सबसे बड़ा बिन्दु अभी तक यह कोई नहीं कह सकता कि तत्समय फैक्ट्री में काम करने वाले कितने लोग थे, क्योंकि फैक्ट्री में जो काम करने वाले लोग थे, उनका कुछ भी नहीं बचा होगा. 150-200 मीटर ऊपर तक ईंटें उठकर गई हैं. अगर ब्लास्ट आप देखते, ब्लास्ट का वीडियो आपने भी देखा होगा. तो दहल जायेगा आदमी, दंग रह जायेगा. 600 मकान जलकर ध्वस्त हो गये हैं. इतना बड़ा विस्फोट था. तो यह कहना या मैं यह समझता हूं कि जांच कर पाना कि तत्समय में फैक्ट्री में कितने लोग काम कर रहे थे, संभव ही नहीं है. इसकी जानकारी जरुर गंभीरता से ली जाये, यह जांच का प्रथम बिन्दु होना चाहिये. मेरा मानना है कि 500 मजदूर काम करने वाली फैक्ट्री में कुछ न कुछ मजदूर तो होंगे, जिनका अभी तक पता नहीं लग पा रहा है और इस घटना से हम सब दुखी हैं और व्यथित हैं. मैं समझता हूं कि हम चाहते हैं कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिये हिम्मत दिखायें, दोषी कोई भी हो, जिसने भी राजनैतिक हस्तक्षेप किया हो, जिसने भी इस फैक्ट्री को चलने देने में सहयोग किया हो, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही हो, बिना किसी भेदभाव के, यह हमारी अपेक्षा है और मैंने जो मांगें की हैं,उनको भी पूरी करने का काम मुख्यमंत्री जी सदाशयता से करायेंगे, ऐसी मेरी अपेक्षा है. अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया, बहुत बहुत धन्यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय:- रामनिवास जी से वैसे काफी विस्‍तार से तथ्‍य रखें. कोशिश यह करना चाहिये जो उनसे छूट गया हो, वैसा तथ्‍य आयेगा तो कम समय में आप अपनी बात रख सकेंगे.

डॉ.रामकिशोर दोगने(हरदा):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आंखों देखी घटना सुनाउंगा. मैं वहीं से विधायक हूं और मेरे क्षेत्र का ही मामला है और आपने स्‍थगन प्रस्‍ताव लिया इसके लिए मैं, आपका बहुत-बहुत आभारी हूं कि आपने हमको हमारी समस्‍या उठाने का मौका दिया और मुख्‍यमंत्री जी ने संवेदनशीलता दिखाकर हमारे वहां मेडिकल कालेज खुलवाये और सभी लोगों के लिये एंबुलेंस की व्‍यवस्‍था की मैं उनका भी आभारी हूं. किन्‍तु इस पर प्रश्‍न चिह्न बनता है कि यह प्रशासनिक लोग वहां क्‍या रहे थे. 15-20 साल से फैक्‍ट्री चल रही है, उस फैक्‍ट्री 600-700 लोग काम कर रहे हैं और 600-700 लोग काम कर रहे हैं उनका रिकार्ड अभी तक नहीं मिला है किसी के पास भी कि कितने लोग काम कर रहे थे. वहां जो अंदर लोग काम कर रहे थे उनमें से बचकर बाहर आये उन लोगों से हमने चर्चा की, उन्‍होंने हमको बताया कि हम 600-700 लोग अंदर थे. उसमें से 200-225 लोग अस्‍पताल तक आये हैं. इसके बाद बाकी लोग कहां गये. यह भी प्रश्‍न चिह्न है और यह जांच का विषय है, इसकी स्‍पष्‍ट जांच होना चाहिये. इसके साथ ही 225 लोगों में जो बाहर से रोड से निकल रहे थे तो जो फैक्‍ट्री के पत्‍थर, गिट्टी और सरिया उड़कर आये हैं वह उनको लगे हैं. उनसे भी लोग घायल हुए हैं उसमें वह लोग भी हैं. पर जो अंदर लोग काम कर रहे थे वह लोग कहां गये. इसकी जांच बहुत जरूरी है और फैक्‍ट्री के अंदर चार-पांच कमरे थे और नीचे तलघर था, तलघर के साथ टीन शेड के भी हॉल थे. इस तरह से चार-पांच जगह उनकी ढाई एकड़ की एक फैक्‍ट्री थी उसमें बारूद फैला हुआ था तो वहां उस समय कितने लोग थे, इसकी जांच होनी चाहिये. मेरा अनुमान है कि नीचे तलघर में 100-200 लोग जो काम कर रहे थे वह निकल नहीं पाये हैं और वहां जो अन्‍य लोग काम कर रहे थे, वह भी बता रहे हैं कि वह छत के नीचे दब गये हैं. पोकलेन मशीनों से सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों ने ऊपर से बराबर किया है. उन्‍होंने तलघर को खोलकर नहीं देखा है, उनको नीचे देखना चाहिये था कि नीचे कोई मृत तो नहीं है. उसमें इतनी आग निकली थी कि उससे सरिया और लोहा पिघल गया तो आदमियों के क्‍या हाल हुए होंगे.

अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत गंभीर घटना है और भयावह घटना है. इसकी प्रॉपर जांच होना चाहिये, ऐसा लग रहा है कि जांच के नाम पर लीपापोती की जा रही है. क्‍योंकि जांच प्रॉपर नहीं हो रही है और जांच भी जिन अधिकारियों से करायी जा रही है वहीं अधिकारी गृह विभाग के हैं. गृह विभाग के एसपी और कलेक्‍टर के संरक्षण में ही यह काम चल रहा था. आप बताइये सरकार चल रही है, सरकार के अधिकारी वहां हैं, सरकार के मंत्री वहां रहे हैं, सरकार के सत्‍ता पक्ष के वहां विधायक रहे हैं वह लोग क्‍या कर रहे थे ? यह फैक्‍ट्री इतने दिन से चल रही है और यह इतनी भयावह घटना हुई है और इस आदमी के द्वारा फैक्‍ट्री चलाने के साथ-साथ उसकी यह तीसरी घटना है. वहां पर दो बार और हत्‍याएं हुई हैं. लोग मारे गये हैं, चिथड़े उड़ गये हैं और चिथड़े के साथ में एक केस भी पंजीबद्ध हुआ है और उसमें इस आदमी को 10 साल की सजा भी हुई है. इसके बाद भी प्रशासनिक अमला नहीं चेता और फैक्‍ट्री को चलने दिया गया. अभी भी इसकी वहां पर चार फैक्ट्रियां चल रही थी. एक फैक्‍ट्री और थी, वहां से एक-डेढ़ किलो‍मीटर पर दो फैक्‍ट्रीयां और थीं और वहां आप देखोगे, आज पेपर में भी छपा है और आपने देखा होगा कि पूरे एक एकड़ में बम फेलाये हुए हैं, सूख रहे हैं. अब बताइये की अगर वहां पर विस्‍फोट हो जाये अगर जरा सी भी आग वहां चली जाये तो क्‍या होगा. अभी तो यह था की फैक्‍ट्री के आजू-बाजू गेहूं की हरी फसल थी. हरी फसल थी इसलिये आग नहीं फैल पायी, अगर आग फैल जाती तो हरदा शहर भी बर्बाद हो जाता और आसपास के गांव भी बर्बाद हो जाता और आसपास के गांव भी बर्बाद हो जाते. इस घटना में पूरा हरदा दहल गया. इसका विस्‍फोटक बेसमेंट में रखा गया था और विस्‍फोटक जो था वह बारूद नहीं था. बारूद के अलावा भी वहां संभावना व्‍यक्‍त की जा रही है और निश्चित वह होगा जो मिलेट्री में उपयोग किया जाता है '' ट्राई नाइट्रो ट्रोल विन'' नाम का जो बारूद जिसका उपयोग मिलिट्री में किया जाता है, दुश्‍मनों को मारने के लिये किया जाता है वह बारूद होगा. तभी वहां पर भूकंप जैसा माहौल बना. वह बेसमेंट में रखा था और बेसमेंट फूटने से पूरा हरदा हिल गया और हरदा के हर घर के कांच फूटे, खिड़कियां फूटी हैं, यह स्थिति है. लोगों को कांच गिरकर लगे हैं वह चीजें हुई हैं तो इतना बड़ा विस्‍फोटक इकट्ठा हो गया, कितने क्विंटलों से इकट्ठा हो गया था, जबकि इस आदमी के पास सिर्फ 15-15 किलो विस्‍फोटक रखने के दो लायसेंस थे. वह भी चालू नहीं थे, निरस्‍त थे. इसके बाद इतना बारूद इकट्ठा करके रखना यह प्रशासनिक अधिकारियों का या राजनीतिक दबाव का या क्‍या कारण था इसके ऊपर जाना चाहिये और निश्चित इसको निकालना चाहिए, जो भी हो राजनीतिक दल में, मैं वहां विधायक हूं, मैं हूं, मेरा संरक्षण है तो मुझे भी फांसी की सजा दी जाना चाहिए, नहीं तो वह विधायक को भी या वह मंत्री को भी जो वहां पर रहा है, उसको भी फांसी की सजा दी जाना चाहिए. वह अधिकारी, कलेक्टर और एसपी के ऊपर भी एफआईआर होना चाहिए, क्यों चला रहे थे, इस तरह का काम क्यों चल रहा था? यह इतने लम्बे समय से चल रहा था? कमिश्नर ने क्यों उस आदमी को एक महीने का स्टे दिया? दो साल पहले एक महीने का उसको स्टे दिया. दो साल पहले केस लगा, कलेक्टर ने लाइसेंस निरस्त कर दिया, कमिश्नर ने एक महीने का स्टे दे दिया, उसके बाद वह फैक्ट्री दो साल तक फिर चल गई, पता ही नहीं लगा, कोई अधिकारी चेक करने वाला नहीं था. इसमें कितने विभाग हैं, इसमें श्रम विभाग है, इसमें फारेंसिक विभाग है, इसमें विस्फोटक विभाग, नगर निगम, पुलिस थाना है, उसमें एसपी है, कलेक्टर है, राजस्व के अधिकारी हैं, सबको चेक करना चाहिए.

अध्यक्ष महोदय, वह फैक्ट्री कृषि भूमि पर चल रही थी. इसके बाद यह घटना हुई. कृषि भूमि की भी जांच नहीं हुई कि क्यों डायवर्सन नहीं कराया गया तो इस तरह से बहुत सारे जांच के विषय हैं और मेरा आपसे करबद्ध अनुरोध है, मुख्यमंत्री जी यहां पर बैठे हैं, मेरा निवेदन है कि इसमें जो अधिकारियों की टीम बनाई है, उसकी न्यायिक टीम बनाई जाय, न्यायिक ज्युडिश्यरी जांच कराई जाय और अगर वह नहीं हो रहा है तो अधिकारियों के साथ हमें रखा जाय, विधायक को भी रखा जाय, भाजपा के वहां के अध्यक्ष को भी रखा जाय, वहां दोनों पार्टी के आदमी हों. उनके साथ वहां पत्रकार भी हों, जिसमें वहां का मलबा हमको नीचे से निकालना चाहिए, तलघर में जो मलबा पड़ा है, जिसमें आदमी होने की संभावना है तो प्रापर उसकी जांच होगी. उस मलबे की जांच होगी तो पता लग जाएगा कि अंतर कितने लोग रह गये? वहां पर लोग अभी मिसिंग हैं. मेरे पास कल भी बहुत सारे लोग आए कि वह कह रहे हैं कि हमारे पिता नहीं है, कोई कह रहा है कि हमारा बच्चा नहीं मिल रहा है, कोई कह रहा है कि पत्नी नहीं मिल रही है, ये परिस्थितियां आ रही हैं तो वे लोग कहां गये होंगे? उस फैक्ट्री में बाहर के लोग काम कर रहे थे, यह तो लोकल के लोग आए. वहां बाहर के बैतूल की तरफ के लोग भी थे, कुछ खरगौन की तरफ के भी थे. कुछ खंडवा की तरफ के लोग भी थे, उन लोगों के मिसिंग की तो अभी जानकारी ही नहीं है, जब तक परिवार को पता लगेगा, परिवार ढूंढेगा, आएगा, तब पता लगेगा, नहीं तो उनका पता ही नहीं है कि वे लोग कहां पर गये हैं. इस तरह से वहां पर बहुत सारे लोग थे, उसकी प्रापर जांच होना चाहिए, मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालना चाहिए. मेरा तो यही निवेदन है कि यह जो एसपी, कलेक्टर और जितने भी अधिकारी हैं, जिनके अंडर में यह आता है, जो लाइसेंस देते हैं, लाइसेंस की प्रक्रिया में शामिल होते हैं, उन सब पर कार्यवाही होना चाहिए और आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध होना चाहिए. तब उन्हें न्याय मिलेगा और मैं यह भी चाहता हूं कि वहां के जो गरीब लोग हैं, जो लोग मारे गये हैं उनके परिवार को कम से कम 1 करोड़ रुपये दिये जाने चाहिए, जिससे उनके परिवार का जीवन-यापन हो सके, कम से कम 5 लाख रुपया मुआवजा जो घायल हुए हैं उनको दिया जाना चाहिए, जिससे वह अपना पालन कर सकें.

अध्यक्ष महोदय, किसी का हाथ गया है, किसी का पैर गया है, किसी का कुछ टूटा हुआ है तो वह आदमी जीवन-यापन कैसे कर पाएगा, कैसे रह पाएगा क्योंकि यह सरकार की विफलता के कारण, प्रशासनिक अधिकारियों की विफलता के कारण यह घटना हुई है. सरकार को अपनी गलती मानकर यह प्रापर मुआवजा देना चाहिए, उसमें व्यक्ति की गलती होती तो मान लेते. यह व्यापारी की गलती तो है ही, साथ साथ सरकार जो उसको संरक्षण दे रही थी, जो प्रशासनिक अधिकारी संरक्षण दे रहे थे, उनके संरक्षण में यह कार्य चल रहा था, इसलिए जो पीड़ित हैं उनको मुआवजा मिलना चाहिए, जिससे वह जीवन-यापन कर सकें. वहां पर हरदा के लोग बहुत त्रस्त हैं, बहुत दुखी हैं. सरकार से वह उम्मीद लगा कर बैठे हैं कि उनके लालन-पालन या उनका घर चलाने के लिए, जो उनके मकान टूटे हैं उसके लिए उनको सुरक्षा दी जाय और उनको मुआवजा दिया जाय, जिससे वह अपना मकान बना सकें, उसमें रह सकें और उनके बच्चों को पढ़ा-लिखा सकें. अध्यक्ष महोदय, आपने बोलने का जो मौका दिया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

परिवहन मंत्री (श्री उदय प्रताप सिंह) - अध्यक्ष महोदय, हरदा में बैरागढ़ में एक आकस्मिक हृदयविदारक घटना दिनांक 6 फरवरी, 2024 को जो हुई, सबसे पहले तो मैं आपका धन्यवाद देता हूं कि आपने इस महत्वपूर्ण विषय का स्थगन ग्राह्य किया और सरकार में माननीय मुख्यमंत्री जी का विशेष रूप से मैं आभार भी व्यक्त करता हूं, धन्यवाद भी ज्ञापित करता हूं कि उन्होंने आम तौर पर हमारा यह अनुभव रहा है कि सरकारें इन विषयों से बचती हैं, लेकिन आपने पूरी संवेदनशीलता और संजीदगी के साथ सरकार की तरफ से इस विषय पर यहां पर चर्चा के लिए सहमति दी. अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का बहुत हृदय से, आपका आभार भी व्यक्त करता हूं और जो दुर्घटना में जिनका आकस्मिक वहां पर निधन हुआ है, उनके प्रति भी श्रद्धासुमन अर्पित करता हूं.

अध्यक्ष महोदय, 6 तारीख को कैबिनेट की बैठक थी. माननीय मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में कैबिनेट चल रही थी. तभी आपको सूचना मिली कि हरदा में इस तरह का कोई वाकया हुआ है. कैबिनेट को तुरंत माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने लगभग पूर्णता प्रदान की और निर्देशित किया कि हरदा जाकर मौके पर तुरंत वहां पर देखें कि वहां क्‍या स्‍थिति है. एसीएस श्री अजित केसरी जी और एडीजी होमगार्ड, एक और अन्‍य एडीजी के साथ हम लोग हरदा गये. हम लोग सीधे घटनास्‍थल पर पहुंचे. मुझे लगता है कि जनप्रतिनिधियों में वहां पहुंचने वाले पहले हम लोग थे. मुख्‍यमंत्री जी के निर्देश पर हम लोग वहां सबसे पहले पहुंचे और घटनास्‍थल का मुआवना भी किया. सारे अधिकारी वहां पर थे. उसके बाद अस्‍पताल जाने का काम किया. मैं इसमें एक चीज सबसे पहले स्‍पष्‍ट रूप से कहना चाहता हॅूं कि आदरणीय रावत जी ने भी उसको बड़ी सहृदयता के साथ रखा है कि मुख्‍यमंत्री जी के निर्देश पर मुझे लगता है कि मध्‍यप्रदेश की शायद यह पहली घटना है जिसमें इतनी व्‍यापक तैयारी कुछ घंटों में हुई होगी. शायद यह मध्‍यप्रदेश के इतिहास में पहली बार इस तरह की चीज हुई है. बैतूल से प्‍लॉटून कमांडर्स और जवान, नर्मदापुरम से जिला सेनानी, भोपाल से संभागीय सेनानी और प्‍लॉटून कंमाडर्स, खंडवा से प्‍लॉटून कमांडर्स और सेनानी, हरदा से लोकल स्‍टॉफ सब लगातार काम कर रहे थे और एम्‍बुलेंसेस की सीरीज़ थी और सबसे महत्‍वपूर्ण इंदौर के लिये, नर्मदापुरम के लिये, भोपाल एम्‍स और हमारा जो मेडिकल कॉलेज है उसके लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया. यह इस बात का प्रमाण है कि सरकार ने इसे हाईएस्‍ट प्रॉयोरिटी पर इस विषय को लिया और जो घायल हैं वह बगैर समय लगे त्‍वरित शीघ्र गति से अस्‍पताल पहुंचें, उनका इलाज शुरू हो, इस बात की सरकार ने चिंता की.

अध्‍यक्ष महोदय, हम लोग वहां पर अस्‍पताल में गए, तो मुझे इस बात को कहते हुए संतोष है कि स्‍वास्‍थ्‍य का हमारा जो अमला है वहां आसपास के जिलों से डॉक्‍टर्स की जो टीम पहुंची, वह बहुत संजीदगी के साथ उन्‍होंने उस पूरे आपाधापी भरे सिस्‍टम को हेंडल किया. लोगों को संतुष्‍ट करने का भी काम कर रहे थे और जो घायल थे, उनका भी त्‍वरित गति से इलाज वहां पर कर रहे थे. मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहता हॅूं कि अगर इस घटना को जिस शीघ्रता के साथ सरकार ने संज्ञान में लिया, अगर उसमें विलंब होता तो शायद यह जो आज हम जो कह सकते हैं कि 11 मृतक हैं और हमारे घायल साथी, जो समय पर पहुंचे, जिन्‍हें इलाज मिला जिसके कारण हम उनका जीवन बचा सके, उसमें प्रशासन की, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की और सरकार की मंशा और उनकी जो एक त्‍वरित कार्यवाही है, उसी के कारण यह संभव हुआ कि यह आंकडे़ बढ़ नहीं पाए और आज हम यह कह सकते हैं कि हम घायलों का बेहतर इलाज कर पा रहे हैं.

माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद दूंगा कि भारत सरकार को भी आपने समय रहते इसकी सूचना दी और शायद यह पहली बार हुआ है कि हमारे एयरफोर्स के हेलीकॉप्‍टर्स इंदौर में आकर खडे़ हुए कि अगर किसी पेशेंट को ऐसा लगता है कि हिन्‍दुस्‍तान की किसी बर्निंग यूनिट में या कहीं और बेहतर इलाज के लिए भेजना पडे़ तो स्‍टेंडबॉय में एयरफोर्स के हेलीकॉप्‍टर्स वहां खडे़ रहें, लेकिन इसकी आवश्‍यकता नहीं पड़ी. हमारे प्रदेश के स्‍वास्‍थ्‍य के जो संसाधन थे, उनसे हम बेहतर इलाज कर पाए और आज हम कह सकते हैं कि उनका इलाज जो हॉस्‍पिटल में चल रहा है वह घायलों की दृष्‍टि से लगभग समुचित है. मैं इसके लिए भी माननीय मुख्‍यमंत्री जी का धन्‍यवाद करना चाहूंगा कि जो मृतक हैं, घायल हैं उनको तुरंत आर्थिक मदद करने का भी आपने काम किया. भारत सरकार को आपने अवगत कराया तो माननीय प्रधानमंत्री जी ने भी मृतकों के लिए 2 लाख रूपए और घायलों के लिए भी अलग से मदद की बात वहां से रखी है. जैसा अभी आदरणीय रावत जी कह रहे थे कि इसमें जो एक सदस्‍यीय जांच दल बनाया है, वह कैसे काम करेगा. मैं जानकारी के लिए बताना चाहता हॅूं कि यह एक सदस्‍यीय जांच दल नहीं हैं, यह एसीएस श्री संजय दुबे जी की अध्‍यक्षता में है. इसमें एडीजी और तकनीकी विषय को भी शामिल करते हुए पीडब्‍ल्‍यूडी के एक अधिकारी को भी इसमें शामिल किया गया है. चूंकि यह विषय इतना गंभीर है और घटना इतनी दु:खद है कि इस पर शायद राजनीति नहीं होना चाहिए और कर भी नहीं रहे हैं और आदरणीय रावत जी ने जिस तरह से इस विषय को रखा है, मुझे बहुत संतोष है कि आपने इस घटना पर जिस सहृदयता के साथ इस विषय को रखना चाहिये था, वही आपने काम किया. व्यक्तिगत रूप से मैं आपका बहुत धन्यवाद ज्ञापित करता हूं. अभी जो विषय आ रहे हैं कि मृतकों की संख्या बहुत बढ़ सकती है, कितने लोग हैं, यह जांच का विषय है ? उसमें मैं दखल नहीं देना चाहता, लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूं कि वहां पर मैंने लोगों से चर्चा की जो हमने लोगों से बात की कि उस दिन मंगलवार अवकाश दिवस था वहां जिसके कारण कर्मचारियों की संख्या दोगने, जी भी इससे सहमत होंगे कि कम थी. अवकाश नहीं होता तो शायद यह घटना बड़ी हो सकती थी. दूसरा कितने लोग और मरे हैं या सस्पेक्टेड हैं, क्या हो सकता है ? इसका सबसे बड़ा प्रमाण हो सकता है कि लोग ढूंढते हैं कि हमारा परिवार का व्यक्ति मिल नहीं रहा है, मिसिंग है, लापता है, तो बहुत चर्चा के बाद प्रशासन की बहुत खोजबीन के बाद जो खबरें मिल रही हैं उससे दो व्यक्तियों का जरूर कहते हैं कि पता नहीं है शायद वह रिश्तेदारों के पास गये थे, उनका फोन नहीं आ रहा है, कुछ नहीं आ रहा है. दो लोगों के अलावा इस तरह की अभी कोई सूचना नहीं है. अगर 100-200 लोग अगर मिसिंग हैं. अगर मिसिंग होते हैं तो आजकल सोशल मीडिया के माध्यम से यह खबर देश भर में जाती है. अगर बाहर के प्रांत का व्यक्ति काम कर रहा होता तो लोग कहते कि मेरे रिश्तेदार का क्या हुआ ? तो कहीं न कहीं से यह सूचना सरकार के पास जरूर आयी होती. तो भगवान का शुक्र है कि अभी तक इस तरह की कोई सूचना नहीं है जिससे हम मानकर के चल रहे हैं कि शायद ईश्वर करे यह संख्या आगे न बढ़े जो आज तक यह लग रहा है कि शायद ऐसा ही होगा. मैं बहुत लंबी बात न करते हुए इस विषय पर आपके माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जी का तो धन्यवाद ज्ञापित करता हूं. साथ ही पूरे सदन का कि हमें ऐसी घटनाओं में संवेदनशीलता दिखाते हुए एकजुटता का परिचय देना चाहिये. हमारा जो फेडरल स्ट्रक्चर है हमारे देश में काम करने का लोकतंत्र की जो व्यवस्था है. उसमें शायद जनता भी इस बात को चाहती हूं कि इन मामलों में सारा सदन दलीय राजनीतिक सीमाओं को छोड़कर लोग एकजुट हों और प्राकृतिक आपदाओं में आकस्मिक घटनाओं में एकजुट होकर उसके निराकरण में और भविष्य में इस तरह की कोई चीजें ना हों, पुनरावृत्ति ना हो. जांच में सहयोगात्मक रवैया अपनाते हुए एक बेहतर परिणामों की तरफ यह राज्य बढ़ेगा, यह सिस्टम बढ़ेगा उसमें आप सबका सहयोग रहा भी है और मुझे लगता है कि आगे इसकी यूनिटी का राज्य में दलीय सीमाओं से हटकर महत्वपूर्ण विषयों में हम सब एकजुट होकर एक बेहतरी के लिये काम करेंगे, शायद इसकी शुरूआत होगी और आपकी अध्यक्षता में वह चीज यहां पर परिलक्षित हो रही है. मैं आपका धन्यवाद ज्ञापित करते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी का विशेष रूप से लगातार इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं, लगातार वहां पर क्या बेहतर हो सकता है, प्रशासन के जो निर्णय हैं, वह भी आपने त्वरित गति से लिये हैं. लोगों की अपेक्षाओं को आप लगातार पूरा कर रहे हैं मैं आपके माध्यम से उनको भी धन्यवाद देता हूं. बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री फूलसिंह बरैया ( भाण्डेर ) अध्यक्ष महोदय, हरदा हादसा यह इस प्रकार का हादसा था उसमें धरती हिल गई थी. वहां पर जो हादसा हुआ उससे लाशों के टुकड़े हुए वह आसमान में कई किलोमीटर तक टुकड़े पाये गये. यह हादसा कोई पहला हादसा नहीं है. ऐसे हादसे अब नहीं होंगे,आगे नहीं होंगे. ऐसे हादसे कई होते रहे हैं और हम लोग गंभीरता से इसको लेकर के नहीं सोचेंगे तो यह हादसे बंद होने वाले नहीं हैं. सबसे पहले इस हादसे की जिम्मेदारी तय करनी चाहिये कि यह जिम्मेदारी किसकी थी, कौन है जिम्मेदार ? तो सबसे पहले जो जिम्मेदार है उसको हम लोग पकड़ें और जो जिम्मेदार है उसके ऊपर एफआईआर करें. एफआईआर करके उसको जेल में भेज दें. उसके बाद जांच होगी तो मुझे लगता है कि जांच फिर सही से जांच हो सकती है. पहले तो मैं यह कहना चाहूंगा कि सबसे पहले तो सरकार खुद ही जिम्मेदार है, सरकार तो अपने ही ऊपर एफआईआर करेगी नहीं. दूसरा जो जिम्मेदार होता है शासन को चलाने वाला वह जिम्मेदार होता है कलेक्टर और एसपी. कलेक्टर और एसपी कोई भी हमारे यहां पर फैक्ट्री या कारखाना चलता है, उसका मुआयना करने के लिये जाना चाहिये. पहले इसको लाइसेंस मिला था पटाखा फैक्‍ट्री का लेकिन आज मैं आपसे भरोसे से कह सकता हूं, जो हादसे का नेचर है वह पटाखा फैक्‍ट्री नहीं है, उसके बाद उस फैक्‍ट्री में बम बनाने लगे थे, बम बनने लगे थे, इसकी जांच कौन करेगा. क्‍योंकि पटाखे की बारुद का इतना बड़ा विस्‍फोट नहीं हो सकता है. ये एक बम का विस्‍फोट है, जिससे धरती हिल गई थी और मैं आपसे कहूंगा कि ये जो बम बन रहे थे तो कलेक्‍टर, एसपी ने इसकी बीच में जांच क्‍यों नहीं की. समय सीमा पर जाकर के पता क्‍यों नहीं किया कि इसमें कौन सी चीज बन रही है. अगर ये जांच हो जाती तो ये हादसा नहीं होता. सैकड़ों लोगों की जान बच जाती. परिवार तबाह हो गए वे बच जाते, लेकिन मैं आपसे कहूंगा कि अगर सही नियति से इस हादसे की अगर वास्‍तव में आपको जांच करवानी है तो सबसे पहले एसपी, कलेक्‍टर के ऊपर एफआईआर करके जेल भेजना चाहिए और इसके बाद अगर जांच होगी तो मुझे पूरा भरोसा है कि जांच करने वाला भी जांच सही करेगा. अगर ऐसा नहीं होता है तो जांच भी दो दिन, चार दिन बाद उसके रिश्‍तेदार सरकार के पास आ जाएंगे. मंत्रियों के पास आ जाएंगे, अरे साहब हो गया, तो हो गया, ऐसा होते रहता है.. और बचने की कवायद शुरू हो जाएगी और फैक्‍ट्री का मालिक, फैक्‍ट्री के सारे लोग बच जाएंगे. जैसे कोई ताकतवर आदमी मर्डर करता है, तो उस मर्डर के पीछे एक उसके नौकर को धारा 302 लगाकर जेल भेज देते हैं और कहते हैं, हमने भेज तो दिया जेल में.

अध्‍यक्ष महोदय, इस हादसे का तमाशा नहीं होना चाहिए. इस हादसे को अगर उस गंभीरता से सरकार लेती है तो मैं दावे से कह सकता हूं कि आने वाले समय में ऐसे हादसे कभी नहीं होंगे और इसमें परिवार के लोगों को, अभी माननीय मंत्री जी ने कहा कि दो लाख रुपए दिल्‍ली से प्रधान मंत्री जी की तरफ से जो सहायता आई है, दो लाख रुपए कुछ भी नहीं है. किसी का हाथ कट गया, किसी का पैर कट गया, किसी का कुछ हिस्‍सा कट गया है वह जीवन कैसे जीयेगा. अध्‍यक्ष महोदय मैं कहना चाहूंगा कि एक-एक करोड़ रुपए से कम नहीं और उनके जो घर, परिवार बिखर गए हैं, उनको भी स्‍थापित करने का काम सरकार करे और ये हम लोग सब मिलकर करेंगे तो ऐसे हादसे भविष्‍य में भी पूरी तरह से बंद हो जाएंगे. कभी ऐसे हादसे नहीं होंगे. यही मैं आपसे उम्‍मीद करूंगा, आशा करूंगा कि इस हादसे की जांच हो, इस हादसे की लीपा-पोती न हो, इस हादसा सही तरीके से जांच हो जाए और दूध का दूध, पानी का पानी हो जाए. अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

उपनेता प्रतिपक्ष(श्री हेमन्‍त कटारे) - माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं सबसे पहले आपको धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि आपने इस बेहद गंभीर विषय को स्‍थगन के रूप में चर्चा में स्‍वीकृत किया और मुझे बोलने का अवसर दिया. मैं हमारे नेता प्रतिपक्ष जी को भी धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि ये एक महत्‍वपूर्ण विषय है, जिसको मध्‍यप्रदेश ही नहीं प्रधानमंत्री जी तक नजर गड़ाकर देख रहे हैं. इस विषय पर उन्‍होंने स्‍थगन का प्रस्‍ताव रखा और मध्‍यप्रदेश के लोगों की नब्‍ज को समझा और उनके दुख में शामिल होने का एक प्रयास किया, उनको न्‍याय दिलवाने का एक प्रयास किया.

माननीय अध्‍यक्ष जी, सबसे पहले जो पीडि़त परिवार है उनको सच्‍चे दिल से श्रद्धांजलि अर्पित करना चाहूंगा और सिर्फ इस मंच के माध्‍यम से, इस आसंदी के माध्‍यम से ...

एक माननीय सदस्‍य - (आसन पर बैठे बैठे बोले) ये सदन है.

श्री हेमन्‍त कटारे - जी धन्‍यवाद, आपने मुझे करेक्‍ट किया, इसके लिए धन्‍यवाद. लेकिन अगर आप इसमें कुछ उत्‍तर दे सकते कि उनके लिए क्‍या किया तो वह जरुर सुनना चाहूंगा, ये तो मुझे बहुत अच्‍छा लगा. आप ये जरुर बताना कि इसमें क्‍या किया. अभी उस पर भी बात करेंगे, लेकिन आपके सुझाव के लिए धन्‍यवाद. सुझाव देते रहिए, मैं सीखूंगा.

अध्‍यक्ष महोदय - हेमन्‍त जी इनका जवाब आएगा आप तो अपनी बात रखो.

श्री हेमन्‍त कटारे - अध्‍यक्ष जी, जो अभी जवाब आया, उसमें कुछ नहीं किया, प्रशंसा करते रहे बैठे बैठे, क्‍या कार्यवाही किया, स्‍थानांतरण कोई कार्यवाही होती है? माननीय अध्‍यक्ष महोदय,एक आई.ए.एस. का स्‍थानांतरण कौन सी कार्यवाही होती है, आप बताईये ना, मैं पूछना चाहता हूं. मुख्‍यमंत्री जी तो अंदर बैठकर नई ट्रांसफर लिस्‍ट बना रहे होंगे, उन्‍होंने आपदा में अवसर ढूंढ लिया, जहां आपदा होती है, वहां ट्रांसफर करो, नए आई.ए.एस. को लेकर आ जाईये.

जल संसाधन मंत्री( श्री तुलसीराम सिलावट) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह अच्‍छी बात नहीं है कि यह लिस्‍ट बना रहे हैं, यह वापस करें.

अध्‍यक्ष महोदय -- श्री हेमन्‍त जी आप अपनी बात करें.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- काहे के लिये वापस करें.

श्री तुलसीराम सिलावट -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सब विलोपित करें, नहीं- नहीं, यह सब बिल्‍कुल नहीं चलेगा.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह आपको आदेशित करेंगे. श्री तुलसीराम सिलावट जी आप माननीय अध्‍यक्ष महोदय को आदेशित नहीं कर सकते हैं.

श्री तुलसीराम सिलावट -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह इस प्रकार से बिल्‍कुल नहीं चलेगा. आप इतने गंभीर विषय पर बोल रहे हैं और ऐसी बात कर रहे हैं. आप इतने गंभीर विषय पर बात कर रहे हो.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- श्री तुलसीराम सिलावट जी आपने आसंदी को आदेशित किया है, आप अपने शब्‍द वापस लीजिये. यह आपको आदेशित कर रहे हैं. इनको क्षमा मांगनी चाहिए, यह आपको आदेशित नहीं कर सकते हैं. आप पुराने सदस्‍य हैं, आप परंपरा को बेहतर जानते हैं, आप सिखा सकते हैं तो सीखने में भी संकोच न कीजिये.

अध्‍यक्ष महोदय -- श्री हेमन्‍त जी, चर्चा काफी गंभीर चल रही है और सौहार्दपूर्ण वातावरण में चल रही है, मैं समझता हूं जो नए तथ्‍य आयेंगे तो उसके बाद फिर सरकार का मार्गदर्शन होगा.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आसंदी यह निर्देशित कर दे कि अनावश्‍यक टीका टिप्‍पणी न करे, क्‍योंकि अगर वह टीका टिप्‍पणी करेंगे तो उसका उत्‍तर तो मिलेगा, क्रिया की प्रतिक्रिया तो होगी.

श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उधर भी निर्देश हो जाये कि जब यह बोल रहे थे, तो उनको बोलने की आवश्‍यकता नहीं थी. शुरूआत वहां से होगी तो यहां से भी होगी.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप मेरी तरफ मुखातिब होकर बोलें.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- जी, मैं आपको ही बोल रहा हूं लेकिन वहां से कान में आवाज आयेगी, तो उसका उत्‍तर तो जायेगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बोलें, नहीं आयेगा.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस घटना की जानकारी मुझे पत्रकारों के माध्‍यम से प्राप्‍त हुई और जब मैंने इसका दृश्‍य देखा एक वीडियो आया सबसे पहले जिसमें, आगजनी और धुंआ ऐसा दिखाई दे रहा था, जैसे बादल को छू रहा है, ऐसा दृश्‍य माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछली बार मैंने कभी देखा था तो एक हिस्‍ट्री चैनल आता है, उसमें जब विश्‍वयुद्ध के हम लोग पुराने वीडियोज देखते हैं तो उसमें इस तरह का दृश्‍य देखने को मिलता है. वास्‍तविकता में पहले देखकर ऐसा लगा ही नहीं कि कोई पटाखे की फैक्‍ट्री में आग लगी, मुझे पहले ऐसा लगा कि मैं पत्रकार से पूछूं कि यह कहां पर, कहां किन देशों में युद्ध झिड़ गया, इतना बड़ा धमाका, यह पटाखे नहीं है, यह सुतली बम बता रहे हैं लेकिन माननीय अध्‍यक्ष महोदय ऐसा प्रतीत तो नहीं हो रहा है, यह जांच का विषय है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अखबारों की खबर आपने भी पढ़ी होगी जो मृतक हैं, उनके शव जो हैं वह करीब दो-दो, तीन-तीन सौ फिट ऊपर उछलकर उनके चिथड़े-चिथड़े हो गये. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दुख इस बात का तो है ही उनके परिजनों को कि उनके परिवार का एक व्‍यक्ति चला गया, उससे एक गहरा दु:ख और है कि उसका व्‍यक्ति खो गया और आज उसका शव भी अंतिम संस्‍कार करने के लिये उपलब्‍ध नहीं है. अंतिम संस्‍कार के बाद हम लोग हिंदु धर्म में जानते हैं कि आत्‍मा को शांति प्रदान करने के लिये जब तक मृत्‍यु भोज, अंतिम संस्‍कार की क्रियाएं नहीं हो जायें, तब तक आत्‍मा भटकती रहती है और शरीर यहां पर रह जाता है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, संस्‍कार के लिये शरीर तक उपलब्‍ध नहीं हो रहे हैं, वह लोग रो रहे हैं, आप कल्‍पना कीजिये उनके दुख का.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहूंगा कि कल पहला दिन था सदन का माननीय महामहिम जी ने अभिभाषण दिया और जब तक आपने पूरी कार्यवाही समाप्‍त नहीं की तब तक मैंने कहा कि क्‍या इस विषय पर एक मिनिट का शोक नहीं जाहिर करना था सदन को, एक मिनट का शोक सिर्फ. मैं नहीं कह रहा हूं कि चर्चा करते, पर शोक तो जाहिर कर देते और यह पहली घटना नहीं है इसके पहले भी घटनाएं हो चुकी हैं और इसी स्‍थान पर इसी व्‍यक्ति के द्वारा पहले भी अलग-अलग हादसों में करीब 22 लोग यहां पर मृतक हो चुके हैं और जो अग्रवाल जी जो इसके मालिक हैं या जो भी इसके संचालक हैं, मुझे हमारे विधायक श्री आर.के.दोगने साहब ने बताया कि इनको कोर्ट के द्वारा दस साल की सजा भी हो चुकी है और यह अभी बेल पर चल रहे हैं, तो सजा तो उनको मिल ही चुकी है और वह आपराधिक प्रवृत्ति के तो है हीं. अब उनको क्‍या डर है, कोई डर नहीं है, खुलेआम संचालन कर रहे हैं, एक नहीं ऐसी अन्‍य भी फैक्ट्रियां चल रही हैं, कुछ उनके नाम से चल रही हैं, कुछ गैरों के नाम से चल रही हैं, और लोगों के नाम से चल रही हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं हमारे नेता प्रतिपक्ष जी के साथ हमीदिया अस्‍पताल गया, जैसे ही यह घटना की जानकारी मिली तो वहां पर जो घायल लोग थे, उनसे मिलने के लिये गया और वहां जाकर घायलों से चर्चा भी की और जब मैंने घायलों से चर्चा की तो जो चीजें उन्‍होंने बताई, उसमें से एक चीज तो जो हमारे माननीय मंत्री जी ने कहा कि आप इस बात से सहमत होंगे कि वहां कम लोग होंगे तो मैं इस बात पर असहमति जाहिर कर देता हूं. मुझे तो उल्‍टा उन्‍होंने यह बताया कि यह हमारा तनख्‍वाह लेने का समय था. हम सभी लोग तनख्‍वाह लेने के लिये इस समय पर जाते हैं, छुट्टी का अवकाश का दिन होता है तो उस दिन संख्‍या और अधिक होती, जो सामान्‍य से अधिक होती है, क्‍योंकि सब अपने परिवार को भी लेकर जाते हैं कि कुछ दो, पांच हजार रूपये मिल लाये, लेबर को क्‍या मिलेगा ? कोई दस, पांच हजार रूपये मिल गये तो परिवार के साथ वहीं से चले गये, थोड़ा सा बच्‍चों के साथ घूम आये तो उस दिन संख्‍या जो सामान्‍य है, उससे भी अधिक थी औरे जो घटना में बताया जा रहा है कि दस या ग्‍यारह लोग मृतक हैं, मुझे ऐसा लगता है माननीय अध्‍यक्ष जी जो बार-बार वहां पर मंत्री जी और सब लोग जा रहे हैं, मुख्‍यमंत्री जी जा रहे हैं, कहीं ऐसा तो नहीं कि घटना को दबाने के लिये जा रहे हैं क्‍योंकि प्रधानमंत्री जी की इस पर नजर है.

श्री रामेश्‍वर शर्मा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि जिस गंभीरता के साथ सत्‍तापक्ष ने इस चर्चा को स्‍वीकार किया है और रामनिवास रावत जी वरिष्‍ठ सदस्‍य ने जिस तरह इसकी पहल की है, डायरेक्‍ट इस तरह उप नेता प्रतिपक्ष जी न बोलें तो ज्‍यादा बेहतर है, चर्चा है और चर्चा कर लीजिये, दोनों पक्ष उस पर सहमत हैं, आप डायरेक्‍ट सरकार को कोड नहीं कर सकते और कोई दावा नहीं कर सकते, अगर चीफ मिनिस्‍टर दबाते तो हमने एसपी, कलेक्‍टर को तत्‍काल हटाया, आप ऐसे कैसे बात करते हैं.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सब टोक रहे हैं मैं सबका जवाब भी दूंगा.

अध्‍यक्ष महोदय-- अभी हेमन्‍त जी बोल रहे हैं, बाकी शांत रहें. हेमन्‍त जी आप अपनी बात पूरी करें.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे-- पहले मैं इन माननीय जी को बता देता हूं कि आपने एसपी, कलेक्‍टर को हटाया, स्‍थानांतरण किया, आप थोड़ी परिभाषा पढ़ लीजियेगा, स्‍थानांतरण एक सामान्‍य प्रक्रिया है वह कोई सजा नहीं होती है.

श्री रामेश्‍वर शर्मा-- हटाया है, स्‍थानांतरण नहीं किया है, हटाने के शब्‍द का मतलब नहीं समझते आप.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे-- कैसे हटाया आपने, नौकरी से हटाया, कुछ भी बोल रहे हैं, माननीय अध्‍यक्ष जी इनको ज्ञान ही नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय-- हेमन्‍त जी, आप भी वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं, उप नेता हैं, यह प्रश्‍नकाल नहीं है सवाल का जवाब देना जरूरी नहीं है, रामेश्‍वर जी आप भी ध्‍यान रखें.

श्री विजय रेवनाथ चौरे-- अध्‍यक्ष जी, अगर निलंबित करते तो सरकार की भी छवि अच्‍छी बनती. कम से कम इतना तो करते, मुख्‍यमंत्री जी तो इसमें हमेशा संवेदनशील रहते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- हेमन्‍त जी, आप अपनी बात पूरी कीजिये, टाइम हो रहा है अभी नेता प्रतिपक्ष और मुख्‍यमंत्री जी को भी बोलना है.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे-- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं सिर्फ इतना और कहना चाहूंगा कि जो वहां पर घायल लोगों ने हमें अवगत करवाया कि फैक्‍ट्री के आसपास घनी आबादी बसी हुई थी, कुछ चंद फीट की दूरी पर वहां काफी सारे घर बने हुये थे मैंने यह चीज हमारे विधायक जी से भी कंफर्म की और वहां पर वैसे भी वीडियों में दिखाई दे रहा है कि करीब दो चार सौ मीटर के आसपास घनी आबादी थी, जो नियम है वह इस चीज को एलाऊ नहीं करते. पहली चीज तो यह कि ऐसे में परमीशन क्‍यों दी, दूसरी चीज उन्‍होंने जो मृतकों का आंकड़ा बताया उनका कहना था कि यहां पर कम से कम 200 लोग मृतक होंगे, भगवान न करे ऐसा हो, लेकिन ऐसी उनकी आशंका थी. माननीय अध्‍यक्ष जी, इसमें अब मैं दो, तीन महत्‍वपूर्ण बिंदु कहकर अपनी बात को समाप्‍त कर देता हूं. एक चीज तो यह कि कलेक्‍टर और एसडीएम ने यह प्रपोजल कमिश्‍नर को भेजा था कि इस फैक्‍ट्री को सील किया जाये और कमिश्‍नर साहब ने उसको फिर से बहाल करने की अनुमति दे दी, इसमें कमिश्‍नर साहब का दोष कोई देखना ही नहीं चाह रहा, आप एक चीज देखिये, कमिश्‍नर साहब ने एक तर्क क्‍या दिया जो मैंने मीडिया के माध्‍यम से सुना, कमिश्‍नर साहब यह कह रहे हैं कि हमने दिवाली को देखते हुये उनको छूट दे दी, स्‍टे दे दिया. मैं एक चीज कमिश्‍नर साहब के भी संज्ञान में आपके माध्‍यम से पटल के माध्‍यम से लाना चाहता हूं कि क्‍या दिवाली की जानकारी एसडीएम और कलेक्‍टर को नहीं थी कि दिवाली आने वाली है, सिर्फ कमिश्‍नर को पता रहता है कि दिवाली कब आयेगी साल में, उनको पता था, लेकिन कमिश्‍नर साहब ने बड़ी चालाकी से आईएएस होते हैं तो थोड़ा सा ब्‍यूरोक्रेसी को इतनी कलम चलाने की अक्‍ल तो होती है तो उन्‍होंने स्‍टे दे दिया और दिवाली की आड़ में दे दिया, लेकिन गलत काम के लिये जो वास्‍तविकता में छूट दी है वह कमिश्‍नर साहब ने दी है अध्‍यक्ष जी. दूसरी चीज जो कार्यवाही एसपी, कलेक्‍टर पर की है, मैं उसको कार्यवाही नहीं मानता. एक स्‍थानांतरण या एक पद से हटाकर पीएचक्‍यू या किसी को लूप लाइन में अटैच कर देना कोई कार्यवाही नहीं है, यह सामान्‍य प्रक्रिया है. कार्यवाही यदि आपको करनी है तो जैसा हमारे आदरणीय बरैया साहब ने भी कहा कि एफआईआर दर्ज करके दिखाईये तो लगेगा कि हां आपने कार्यवाही की है.

माननीय अध्‍यक्ष जी, इसमें मेरी सिर्फ दो प्रार्थनायें हैं इस पूरे विषय में आपसे, पहली प्रार्थना तो यह है कि जो हमारा एक्‍सप्‍लोसिव रूल्‍स है 2008 यह स्‍पष्‍ट रूप से कहता है Licenses and certificate for specific purposes may be granted by the authority specified in part one of schedule four. schedule four माननीय अध्‍यक्ष जी यह कहता है कि डिस्ट्रिक्‍ट मजिस्‍ट्रेट को यह पॉवर है किसी भी ऐसी फैक्‍ट्री को 15 किलो तक स्‍टोर करने की देने के पॉवर है, 15 किलो एक्‍सप्‍लोसिव विस्‍फोट कर सके इतने पॉवर डिस्ट्रिक्‍ट मजिस्‍ट्रेट यदि इसके ऊपर किसी को पॉवर हैं तो वह है कंट्रोलर ऑफ एक्‍सप्‍लोसिव को तो माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं आपसे यह प्रार्थना करना चाहूंगा कि पहले तो यह देखना चाहिये कि इसमें कंट्रोलर ऑफ एक्‍सप्‍लोसिव की अनुमति थी क्‍या अधिक स्‍टोर करने की, क्‍योंकि बारूद क्षमता से अधिक नहीं अत्‍यधिक था पहली चीज. दूसरी चीज मैं इसमें माननीय अध्‍यक्ष जी आपके माध्‍यम से सरकार से भी प्रार्थना करूंगा कि जो एक्‍सप्‍लोसिव एक्‍ट है 1984 का उसका सेक्‍शन 9(A) क्‍लीयरली एलाऊ करता है कि यदि हम चाहें तो सेंट्रल गवर्नमेंट की अनुमति से इसमें ओपन कोर्ट की इंक्‍वायरी करवा सकते हैं. मैं समझता हूँ कि इसमें न विपक्ष को आपत्ति होना चाहिये न सत्‍ता पक्ष को, इसकी पूरी इंक्‍वायरी ओपन कोर्ट में हो जाना चाहिये और सेंट्रल गवर्नमेंट को एक प्रपोजल यहां से बनाकर भेज देना चाहिये कि इसकी ओपन कोर्ट में इंक्‍वायरी हो और हम भी देखें उसमें क्‍या चल रहा है और साथ ही जो अधिकारी हैं उसमें कमिश्‍नर को भी न बख्‍सा जाये और स्‍थानांतरण या हटाना कोई कार्यवाही नहीं है, उनके ऊपर एफआईआर दर्ज करना चाहिये माननीय अध्‍यक्ष जी, यह मेरी आपसे प्रार्थना है. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

सहकारिता मंत्री (श्री विश्वास सारंग) - माननीय अध्यक्ष महोदय, जिस स्थगन प्रस्ताव पर यहां पर चर्चा हो रही है वह निश्चित रूप से पूरे देश को हिलाने वाली घटना थी और एक ऐसी घटना जिससे हम सब बहुत दुखी भी हुए. यह सदन ने जिस जागरूकता के साथ सरकार की पहल पर इस स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार किया यह सरकार की संवेदनशीलता को भी प्रकट करता है और यह पूरा सदन इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो उसको लेकर भी विचार करने को तत्पर है, इस बात को सिद्ध करता है. बहुत लंबी बात करने की आवश्यकता नहीं है. रावत जी ने चर्चा की शुरुआत की. उन्होंने तथ्यों को रखा और मैं रावत जी को बहुत बधाई देता हूं कि उन्होंने सहृदयता के साथ और विशाल मन के साथ माननीय मुख्यमंत्री जी और इस सरकार ने इस पूरी घटना में जो त्वरित कार्यवाही की. जो संवेदनशीलता दिखाई उसके बारे में यहां पर तारीफ की. यह निश्चित रूप से इस सदन की गरिमा को बढ़ाने वाला और सरकार जितनी संवेदनशील है विपक्ष भी उसी संवेदनशीलता के साथ किसी घटना के बारे में विचार करता है इसको स्थापित करता है.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे आधे तथ्यों को तो स्वीकार कर रहे हैं और जो आधे मैंने कहे हैं उसके बारे में भी कह दें कि उन पर भी सत्ता पक्ष विचार करेगा.

अध्यक्ष महोदय - सभी तथ्यों को उन्होंने सुना है गंभीरता से. आप चिंता न करें.

श्री विश्वास सारंग - रावत जी जो अच्छी बात है मैंने बोली मुझे लगता है. दो बातें मैं कहूंगा. मैं हेमन्त कटारे जी को कोई बात नहीं कहना चाहता लेकिन जिस गंभीरता के साथ यह पूरी चर्चा चल रही है उसी गंभीरता के साथ हमें इस चर्चा को अंतिम पड़ाव तक पहुंचाना चाहिये. इसमें कोई राजनीति नहीं होनी चाहिये. दलगत राजनीति से ऊपर उठकर मैंने फिर कहा कि यहां पर चर्चा होगी. घटना क्या हुई है तथ्य आ गये पर इसकी पुनरावृत्ति न हो प्रदेश में हम ऐसी व्यवस्था का सुचारू रूप से पालन करें यह इस सदन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. माननीय अध्यक्ष महोदय, राव उदय प्रताप जी ने पूरी घटना के बारे में बताया.चूंकि राव उदय प्रताप जी मुख्यमंत्री जी के कहने पर तत्काल प्रदेश सरकार के और मुख्यमंत्री जी के प्रतिनिधि के रूप में पहुंचे थे. जैसा राव उदय प्रताप जी ने बताया कि केबिनेट की बैठक चल रही थी और लगभग 11.20-11.25 पर माननीय मुख्यमंत्री जी के संज्ञान में इस घटना को लाया गया और उन्होंने तत्काल बचाव कार्य के लिये निर्देश दिये और जो ऐसी आपदाओं के लिये एस.डी.आर.एफ. और और एन.डी.आर.एफ. की टीम घटना स्थल तक पहुंच सके और रेस्क्यू आपरेशन तत्काल प्रभाव से हो सके इसकी व्यवस्था की गई और उसके साथ-साथ उदय प्रताप सिंह जी और दो सीनियर अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया कि वे घटना स्थल पर जाएं. जबकि पेपर और टी.वी. चैनल पर देखा कि घटना होने के बात उसमें विस्फोट इस तरह से हो रहे थे कि उसके आसपास जाना भी सही मायने में खतरे से खाली नहीं था पर मैं माननीय मुख्यमंत्री जी और राव उदय प्रताप सिंह जी को भी मैं बधाई दूंगा कि वे तत्काल घटना स्थल पर पहुंचे. लगभग 11.20 पर इसकी सूचना मिली और एक से डेढ़ बजे के बीच में उदय प्रताप सिंह जी दोनों शीर्ष अधिकारियों के साथ वहां पर पहुंच गये थे. सरकार ने जो इस तरह की घटनाएं होती हैं उसके तीन पक्ष होते हैं.

श्री बाला बच्चन - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी बार-बार बधाई दे रहे हैं सरकार को. बधाई तो तब होती जब यह घटना ही नहीं होती. मंत्री जी क्या भाषण दे रहे हैं. आपने अभी तक के अपने वक्तव्य में कितनी बार सरकार को बधाई दी है. बधाई तब होती जब यह घटना नहीं होती. किस बात की बधाई दे रहे हैं आप.

श्री विश्वास सारंग -इसकी शुरुआत आपके रावत जी ने की. रावत जी की बात का आप खण्डन करना चाहते हैं. घटना के तीनों पहलुओं पर सरकार ने त्वरित कार्यवाही की. राहत और बचाव कार्य के लिये जैसा मैंने कहा कि एन.डी.आर.एफ. और एस.डी.आर.एफ. की टीम तत्काल पहुंची और घटना की सूचना मिलते ही लगभग 400 पुलिस जवानों का अतिरिक्त बल हरदा में उपलब्ध कराया गया. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उसके साथ ही सही मायने में त्‍वरित राहत के कार्य पहुँच सकें, हरदा जिले में जितनी एम्‍बुलेंस थीं, उसके अलावा आसपास के जिलों से तत्‍काल प्रभाव से एम्‍बुलेंस की उपलब्‍धता कराई गई. लगभग 100 एम्‍बुलेंस घटना स्‍थल पर पहुँचाई गईं. उसके साथ ही बर्न किट भी तत्‍काल प्रभाव से उपलब्‍ध कराए गए और जैसा माननीय मंत्री जी ने कहा कि घायलों को उचित और समय पर इलाज मिल सके, उसके लिए ग्रीन कॉरिडोर का भी वहां पर प्रबंध किया गया, जिससे कि बिना ट्रैफिक व्‍यवधान के घायलों को भोपाल के हमीदिया अस्‍पताल में, एम्‍स अस्‍पताल में, इन्‍दौर के एमवाय में और सुपर स्‍पेशियलिटी अस्‍पताल में समय से पहुँचाया गया. उसके साथ ही केन्‍द्र सरकार से बातचीत कर आर्मी के रेस्‍क्‍यू के जो हेलिकॉप्‍टर हैं, उनको भी तत्‍काल प्रभाव से मध्‍यप्रदेश बुलाया गया और इंदौर में उनको स्‍टेशन किया गया. उसके साथ ही पीड़ित परिवारों को भी तत्‍काल सहायता प्रदेश की सरकार से भी मिली और केन्‍द्र की सरकार से भी मिली, माननीय प्रधानमंत्री जी ने भी इसका संज्ञान लिया और केन्‍द्र की सरकार से भी उन्‍हें राहत राशि पहुँचाई गई. दोषियों पर सख्‍त कार्यवाही हुई है. राजेश अग्रवाल जी, सोमेश अग्रवाल जी, रफीक, अरविंद ये सब...(व्‍यवधान)...

श्री विजय रेवनाथ चौरे --माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये जी कह रहे हैं, वे सम्‍मान के लायक नहीं हैं...(व्‍यवधान)... मंत्री जी, अपराधियों के लिए आप जी लगा रहे हैं... ...(व्‍यवधान)...

श्री रामकिशोर दोगने -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये वरिष्‍ठ मंत्री हैं, विलोपित किया जाए. ...(व्‍यवधान)...

एक माननीय सदस्‍य -- इसका मतलब प्रदेश की सरकार का उनको संरक्षण हैं. ...(व्‍यवधान)...

श्री विश्‍वास सारंग -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं वापस ले रहा हूँ. ...(व्‍यवधान)...

श्री रामकिशोर दोगने -- अध्‍यक्ष महोदय, हरदा की जनता ने पूरी व्‍यवस्‍था संभाली है. ...(व्‍यवधान)...

श्री बाला बच्‍चन -- माननीय मुख्‍यमंत्री जी, इन पर आप लगाम लगाएं.. ...(व्‍यवधान)...

श्री विश्‍वास सारंग -- बाला भाई, आप हेमन्‍त कटारे जी का स्‍टेटमेंट पढ़िए और सुनिए, उन्‍होंने भी यही बोला था, मैं तो वापस ले रहा हूँ. मैंने तो वापस ले लिया, हेमन्‍त ने भी यही बोला था. ...(व्‍यवधान)...

श्री बाला बच्‍चन -- आप तो सरकार हो. ...(व्‍यवधान)...

श्री फुंदेलाल सिंह मार्को -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आग लगाके और कुँआ खोदने का काम कर रहे हैं. 18 साल से आपकी सरकार है...(व्‍यवधान)...

श्री विश्‍वास सारंग -- ये कैसे बोल रहे हैं. ...(व्‍यवधान)...

श्री फुंदेलाल सिंह मार्को -- वही है, मैं बता रहा हूँ. वैसे ही मैं बोल रहा हूँ, जैसे आप बोल रहे हैं. मेरा निवेदन है... ...(व्‍यवधान)...

संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वॉइंट ऑफ ऑर्डर है. ...(व्‍यवधान)...

श्री फुंदेलाल सिंह मार्को -- 18 साल से सरकार है और उसके बाद भी फिर से... ...(व्‍यवधान)...

अध्‍यक्ष महोदय -- आपको मैंने अनुमति नहीं दी है, कृपया बैठ जाइये.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वॉइन्‍ट ऑफ ऑर्डर है. मेरा प्‍वॉइन्‍ट ऑफ ऑर्डर यह है कि आपने अध्‍यक्ष महोदय... ...(व्‍यवधान)...

श्री रामनिवास रावत -- माननीय संसदीय कार्यमंत्री जी, स्‍थगन में प्‍वॉइन्‍ट ऑफ ऑर्डर नहीं होता.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- जब अव्‍यवस्‍था होती है तो बोलना पड़ता है. चाहे स्‍थगन हो या कोई भी हो. अध्‍यक्ष महोदय, आपने डेढ़ घण्‍टे का समय निर्धारित किया है. हमने सहृदयतापूर्वक माननीय विपक्ष ने जो स्‍थगन रखा, उसको स्‍वीकार किया और चर्चा के लिए रखा, आपने नाम निर्धारित किए, कौन-कौन बोलेगा, मैं समझता हूँ कि उसके अलावा जो लोग भी बोलें, उन्‍हें विलोपित कर दें. जहां तक विश्‍वास जी ने बोला, उन्‍होंने कहा है कि मैं वापस ले रहा हूँ, अब इससे बड़ी बात क्‍या हो सकती है. ये तो उनकी बहुत बड़ी सहृदयता है. इसलिए विश्‍वास जी को मैं धन्‍यवाद देता हूँ, अब आप कन्‍टिन्‍यु करें और विपक्ष यदि इस विषय को महत्‍वपूर्ण समझता है तो चर्चा करने दें. चर्चा होने दें. बड़ी सार्थक चर्चा हो रही है. अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निश्‍चित रूप से विपक्ष भी उतना ही महत्‍वपूर्ण समझता है और हमने सार्थक चर्चा प्रारंभ की थी. आपकी सदाशयता को भी हमने स्‍वीकार किया है, लेकिन मौतों के लिए जिम्‍मेवार कौन और घटना के लिए जिम्‍मेवार कौन, इसकी जांच विपक्ष नहीं करेगा, सरकार करेगी.

अध्‍यक्ष महोदय - राम निवास जी, यह बात आप पहले कह चुके हैं.

श्री विश्‍वास सारंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जांच की समिति भी बन गई है, उसने काम करना भी शुरू कर दिया है, पर सबसे महत्‍वपूर्ण बात माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो मैंने कहा था कि इसकी पुनरावृत्ति न हो. सरकार ने इसके समुचित प्रयास किए हैं और कल से ही पूरे प्रदेश में माननीय मुख्‍यमंत्री जी के निर्देश पर इस पर सघन कार्यवाही शुरू हो गई है. आपने समाचार-पत्रों में भी पढ़ा होगा, उन पर कार्यवाही हो रही है. सरकार इस बात को लेकर पूरी तरह से संवेदनशील है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी के माध्‍यम से, सरकार के माध्‍यम से हम पूरी तरह से यह सुनिश्चित करते हैं कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होगी. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय - श्री आरिफ मसूद जी, आप दो मिनट में समाप्‍त कीजिये.

श्री आरिफ मसूद (भोपाल मध्‍य) - अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक मिनट में समाप्‍त कर दूँगा. आपको धन्‍यवाद कि आपने इस गंभीर विषय पर स्‍थगन प्रस्‍ताव स्‍वीकार किया और सरकार का भी धन्‍यवाद. इसमें लगभग सभी बातें आ गई हैं. सबसे ज्‍यादा इस बात की खुशी हो रही है कि सदन में वास्‍तव में गंभीर चीजों पर, गंभीर चर्चा हो रही है. इस अवसर पर अपनी बात रखने का मौका सभी सदस्‍यों को मिला, यह अच्‍छी बात है. यह सरकार की अच्‍छी पहल है, इसका हम स्‍वागत करते हैं. हमने सबने श्रद्धांजलि भी दी है.

अध्‍यक्ष महोदय, इसमें दो-तीन बातें जरूर हैं. विषय इतना गंभीर था और उस पर मुख्‍यमंत्री जी ने बहुत तत्‍परता से कार्यवाही की, हमारे रामनिवास रावत जी ने भी कहा, सबने कहा. एक बात श्री उदय प्रताप सिंह जी, मंत्री जी कह रहे थे कि हेलीकॉप्‍टर इन्‍दौर के हैलीपेड में खड़े कराए. उससे बेहतर यह होता कि उन हेली‍कॉप्‍टरों का प्रयोग भी वह हरदा में कर लेते तो शायद हम थोड़ा और मदद कर लेते. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब बार-बार यह बात आ रही है कि मुख्‍यमंत्री जी भी गंभीर है, सरकार भी गंभीर है और यह घटना बिल्‍कुल चौंकाने वाली थी, तो इसके बाद अधिकारियों को क्‍यों छोड़ा जा रहा है ? और जब कमिश्‍नर के ऊपर बार-बार बात आ रही है तो उन्‍हें क्‍यों छोड़ा जा रहा है ? यह सोचने वाली बात है कि इस पर जब सबने स्‍थगन प्रस्‍ताव पर कहा है तो इस पर कार्यवाही होनी चाहिए. दूसरा, जनप्रतिनिधि की बात आई. माननीय मंत्री महोदय जी ने कहा कि हम सबसे पहले पहुँचने वाले जन प्रतिनिधि थे तो मैं माननीय मंत्री महोदय को आपकी तरफ से अवगत कराता हूँ कि हमारे वहां के स्‍थानीय विधायक डॉ. रामकिशोर दोगने जी सबसे पहले वहां पहुँच गए थे, तो जब जन प्रतिनिधि के बारे में भविष्‍य में कभी चर्चा हो तो उनका नाम आना चाहिए. यह गंभीर विषय है, मैं भोपाल को लेकर भी कहना चाहूँगा कि अभी श्री विश्‍वास सारंग जी कह रहे थे कि सरकार सचेत हो गई है और सब जगह मुख्‍यमंत्री जी ने निर्देश दे दिये हैं. मुख्‍यमंत्री जी सदन के माध्‍यम से आपसे मेरा आग्रह है कि भोपाल के अन्‍दर सिटी में बीचों-बीच व्‍यापार हो रहा है. अध्‍यक्ष महोदय, शादी-हॉलों में लगातार वहां पर शादियां होती हैं और विस्‍फोटक सामग्री भी वहीं रखी होती है और शादी-ब्‍याह वाले आतिशबाजी करते हैं तो जाहिर है कि कभी मालिक न करे कि दोबारा कभी ऐसी कोई घटना हो जाए. इस प्रकरण में हमको इस बात के लिए, आगे भविष्‍य के लिए आगाह हो जाना चाहिए कि ऐसी जगह जो इस शहर के बीचों-बीच में इस तरह की विस्‍फोटक सामग्री है, उसको वहां से हटा देना चाहिए. मैं आपके माध्‍यम से केवल यह कहना चाहता हूँ कि यह बहुत गंभीर विषय है और वास्‍तव में, सरकार गंभीर चर्चा करवा रही है. प्रदेश में जब भी कोई घटना हुई है तो बुलडोजर सबसे पहले पहुँचे हैं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी, अग्रवाल जी के घर बुलडोजर पहुँच जाता तो हमें लगता कि आप वास्‍तव में बहुत गंभीर हो गए हैं. यह बात सही है कि डॉ. मोहन यादव जी, हम आपको धन्‍यवाद देंगे कि आपने जिस तरह से मरीजों को लाने की व्‍यवस्‍था की, मैं भी हमीदिया अस्‍पताल उनको देखने पहुँचा था. हमारे प्रदेश अध्‍यक्ष श्री जितु पटवारी, नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार जी हम सब लोग पहुँचे थे. आपने व्‍यवस्‍था की और हम लोगों ने भी उसमें सहयोग किया. आप पहले दिन से हमारे बयान उठाकर देख लीजिये, विपक्ष ने सरकार पर कोई टीका-टिप्‍पणी नहीं की है और यह कहा है कि जो सहयोग चाहिए, वह कांग्रेस पार्टी देगी और कांग्रेस का कार्यकर्ता सहयोग देगा. लेकिन हम चाहते हैं कि आप निष्‍पक्षता दिखाएं और इन पर 302 का प्रकरण बनना चाहिए. डॉ. मोहन यादव जी, अधिकारियों में आपकी बहुत चर्चा है, आप बहुत कार्यवाही कर रहे हैं. मुख्‍यमंत्री जी, आप लगे हाथ कार्यवाही कर दो. अभी मौका मिला है और अच्‍छा मौका मिला है तो एक-दो अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज हो जाये तो दोबारा प्रदेश में इस तरह से कुछ नहीं होगा. आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय - बहुत धन्‍यवाद आरिफ भाई. सुरेश राजे जी.

श्री सुरेश राजे (डबरा) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद आपने मुझे इस गंभीर विषय पर बोलने का अवसर दिया. सारे विषय विस्‍तार से आ गए हैं लेकिन जो बात सबसे गंभीर है, जैसे अभी सारंग जी ने कहा, हम पूरे प्रदेश की चिंता करेंगे. मैं, अपनी बात में यही कहूंगा कि सरकार ने जितनी चिंता की है, अगर इस घटना की पुनरावृत्ति नहीं होनी है तो इस घटना के परिप्रेक्ष्‍य में, पूरे प्रदेश में ऐसी सभी अवैध फैक्ट्रियां कहां-कहां, किस-किस जिले में चल रही हैं, हमें इसे गंभीरता से देखना चाहिए. यदि हमने इसे यह सोचकर छोड़ दिया कि इस घटना की जांच हो गई, बस जांच के बाद कुछ निष्‍कर्ष आया, 18 वर्ष पूर्व एक जांच कमेटी बनी थी, उसका कोई निष्‍कर्ष आज तक इस सदन को नहीं दिया गया, मैं समझता हूं कि इस कारण ऐसी घटना की पुनरावृत्ति हुई है. अगर 18 वर्ष पूर्व जांच कमेटी, ऐसी ही पेटलावाद की घटना को लेकर कोई निष्‍कर्ष इस सदन के पटल पर रख देती तो हमें आज यह दिन देखने को नहीं मिलता. मेरा आग्रह है कि इस घटना की पुनरावृत्ति इस प्रदेश में न हो इसलिए सरकार इसे गंभीरता से देखें और प्रदेश में किस-किस जिले में, कहां-कहां इस तरह की वैध या अवैध फैक्ट्रियां हैं, यदि वे वैध हैं तो उसकी भी जानकारी हमारे पास हो, अगर वे अवैध हैं तो उन पर समय रहते अंकुश लगा दिया जाये, जिससे ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो, यही मेरा निवेदन है, धन्‍यवाद.

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश में भाजपा सरकार में कई घटनायें हुई हैं और उन घटनाओं पर लीपा-पोती हुई. किसी अधिकारी को दोषी नहीं पाया गया. पूर्व में पेटलावाद की घटना हुई, 9 वर्ष प्रकरण चला और अभी पता चला कि सभी बरी हो गए. सरकार जनता के लिए है कि अधिकारियों को बचाने के लिए है ? क्‍या मुख्‍यमंत्री जी अधिकारियों से डरते हैं ? आपने शपथ ली है कि मैं, प्रदेश की जनता के प्रति न्‍याय करूंगा और निष्‍पक्ष न्‍याय करूंगा. ट्रांसफर करके केवल खानापूर्ति की जाती है. फैक्‍ट्री के संचालक पर पूर्व में भी कई प्रकरण दर्ज थे, जेल भी गए लेकिन आपके कमिश्‍नर, कलेक्‍टर जो सरकार के काम करने के अंग होते हैं, क्‍या वे निरीक्षण नहीं करते थे, क्‍या जिन्‍हें विस्‍फोटकों के लाइसेंस दिए गए हैं, उनका 6 माह या 1 वर्ष में निरीक्षण करने का कोई प्रावधान नहीं है कि उनके गोदाम रिहाइशी क्षेत्रों से बाहर है या नहीं. क्‍या अधिकारियों ने कभी इसकी विवेचना की, जांच की, निरीक्षण किया, नहीं किया. इसलिए नहीं किया क्‍योंकि सभी भ्रष्‍टाचार में लिप्‍त थे, सभी को 5-10 लाख रुपये प्रतिमाह आ रहे थे तो क्‍यों वहां कलेक्‍टर और कमिश्‍नर जायेंगे.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा बताया जा रहा है वहां 15 किलोग्राम बारूद रखने की अनुमति थी लेकिन वहां 7 लाख 35 हजार रस्‍सी बम सूख रहे थे. क्‍या 15 किलोग्राम बारूद से इतने बम बन सकते हैं ? खुलेआम वार्ड क्रमांक 31 में प्रधानमंत्री आवास से लगे हुए रखे थे, वहां प्रधानमंत्री आवास भी टूट गए. उन परिवारों का आज क्‍या होगा ? उनके हाथ कट गए, टूट गए, आप उन घायलों को केवल 2-5 लाख रुपये देना चाहते हैं, जिनका जीवन भर के लिए हाथ टूट गया, पैर टूट गया, क्‍या अब वे कभी रोजगार कर पायेंगे ? उसके लिए आपने क्‍या आश्‍वासन दिया, कुछ नहीं दिया. यदि आप उस परिवार के प्रति वास्‍तव में संवेदना रखते हैं, इस सदन में कई माननीय सदस्‍यों ने कहा कि हमें मिलकर काम करना चाहिए, भाषण देने से काम नहीं होगा आपको हकीकत में काम करके बताना पड़ेगा, आप सरकार में बैठे हैं. सरकार के फोटो आ गए, हैलीकॉप्‍टर चले गए, आप मिल आये, लेकिन आज वहां पर कई परिवारों को उनके परिवार के सदस्‍य नहीं मिल रहे हैं. क्‍या कारण है कि प्रशासन को इतनी जल्‍दी वहां बुलडोज़र चलाने की आवश्‍यकता पड़ी ? क्‍यों वहां भूमि को समतल और बराबर करने की जरूरत पड़ी, इसका मतलब है कि वहां ज्‍यादा लोग मरे हैं.

 

 

1.25 बजे अध्‍यक्षीय घोषणा

सदन के समय में वृद्धि विषयक

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने डेढ़ घंटे का समय दिया था. डेढ़ घंटा हो गया है. मेरा ख्‍याल है कि आप निर्देशित कर दें कि जब तक माननीय मुख्‍यमंत्री जी का जवाब आए तब तक इस सदन की कार्यवाही चलती रहे.

अध्‍यक्ष महोदय-- स्‍थगन प्रस्‍ताव पर चर्चा पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाए. मैं समझता हूं कि सदन इससे सहमत है.

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.)

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे कह रहा था कि जैसे कि आज चार-चार जेसीबी चला दीं, समतल कर दिया. मुझे आज जानकारी मिली कि वहां कई जिलों के आदिवासी परिवार थे. आज उनको खबर मिल रही है अपने-अपने जिलों में धार, झाबुआ, बैतूल वह भागे-भागे जा रहे हैं कि हमारे परिवार का क्‍या होगा? प्रशासन ने व्‍यवस्‍था की उन परिवारों से मिलने की, उनके बारे में आपने क्‍या सूचना केन्‍द्र बनाया वह भी आपके पास नहीं है? मैं आपसे कहना चाहता हूं कि फोरेंसिक टीम आई नहीं और जब तक फॉरेंसिक टीम नहीं आती तब तक किसी चीज को अलग नहीं किया जा सकता है. मुख्‍यमंत्री जी यह घोर लापरवाही सरकार के अधिकारियों को नहीं दिख रही है क्‍या? यह मजाक है या लीपापोती करके बराबर कर दो. प्रदेश में किसी को दिखे नहीं की इस प्रकार की घटना हुई, बड़ी घटना हुई है. 11 लोग मरे, अभी हमारे अभिजीत जी हमारी तरफ से गये थे विधायक दल की तरफ से दोगने जी कांग्रेस की तरफ से कमेटी बनाकर भेजी थी. आपने बताया कि कई लोग वहां पर मरे हैं, लेकिन उनके बारे में वहां पर कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है. क्षेत्रीय विधायक सूचना दे रहे हैं, लेकिन कलेक्‍टर फोन नहीं उठा रहे हैं. रात को इन्‍होंने ट्रांसफर कर दिये. आरोपी है तो क्‍या सिर्फ ट्रांसफर करना ही‍ सबकुछ है? मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आप प्रदेश को क्‍या संदेश देना चाहते हैं? पुलिस ने लोकसेवकों पर भारतीय दण्‍ड संहिता की धारा 217 क्‍यों नहीं लगाई. इसमें स्‍पष्‍ट है कि कोई लोकसेवक किसी व्‍यक्ति को दण्‍ड से बचाने के लिए विधि पूर्वक आदेश की अवज्ञा करता है तो उसे धारा 217 लगती है. आपकी सरकार ने यह धारा क्‍यों नहीं लगाई? धारा 286 जब कोई व्‍यक्ति जानबूझकर, लापरवाही द्वारा किसी विस्‍फोटक पदार्थ को ऐसे स्‍थान पर रखेगा जिससे मानव जीवन को संकट उत्‍पन्‍न होने वाला है उस व्‍यक्ति पर भारतीय दण्‍ड संहिता की धारा 286 के अंतर्गत 6 माह की सजा होती है. आईपीसी की धारा 304 कोई भी लापरवाही से गैर इरादतन हत्‍या की श्रेणी में न आने वाले किसी व्‍यक्ति की मृत्‍यु का कारण बनता है तो उसे दो साल की सजा होती है. धारा 336, 120 (बी) के तहत तो जो आपके राजस्‍व निरीक्षक है, पटवारी है, कलेक्‍टर है, एसपी है एक थाने में अगर कोई घटना घटती है, किसी की मृत्‍यु होती है, बलात्‍कार होता है तो पूरा थाना सस्‍पेंड हो जाता है, सबको अटेच कर दिया जाता है यहां पर इतनी बड़ी घटना हो गई सीधे-सीधे अधिकारियों को बचाया जा रहा है. आप जनता के मुख्‍यमंत्री हैं या अधिकारियों के यह प्रदेश की बताना पड़ेगा. मैं यह कहना चाहूंगा कि यदि आप न्‍याय चाहते हैं तो आपको जनता के लिए निष्‍पक्ष न्‍याय करना पड़ेगा. अंत में मैं यही कहना चाहता हूं कि आप चाहते हैं कि इसकी निष्‍पक्ष जांच हो तो इसकी न्‍यायिक जांच होना चाहिए या फिर कानून के अनुसार ओपन कोर्ट जांच होना चाहिए. जिस पर हम चाहते हैं कि सरकार अपना पक्ष रखे और जिनके हाथ-पैर कट गए हैं, जो जीवनभर मजदूरी नहीं कर पाएंगे या रोजगार नहीं कर पाएंगे उनको दो लाख की बजाए कितना मुआवजा बढ़ा सकते हैं, 25 लाख रुपए, 1 करोड़ रुपए यह हम चाहेंगे कि उनको मिले क्‍योंकि वह परिवार जीवनभर कुछ नहीं कर पाएगा. माननीय मुख्‍यमंत्री जी एक विकलांग व्‍यक्ति की क्‍या स्थिति रहती है आप समझते हैं. यह महत्‍वपूर्ण तथ्‍य हैं, मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि इन तथ्‍यों पर, इन धाराओं से उन अधिकारियों को भी आरोपी बनाया जाए, जो तत्‍कालीन कमिश्‍नर थे उनको भी इसमें आरोपी बनाया जाए. यह मैं कांग्रेस पार्टी और विधायक दल की तरफ से आपसे मांग करता हूं. धन्‍यवाद, जय हिन्‍द.

मुख्यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, विस्फोट की घटना के बाद स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार करने का प्रतिपक्ष का आग्रह आया तो हमने भी सहमति दी और सबकी भावनाओं को देखते हुए हमने आपसे भी इस स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार करने का आग्रह किया. इस पर पक्ष ने प्रतिपक्ष ने जो बातें रखी हैं यह हम सबकी संवेदना और भावना बताती है. ऐसे गंभीर मसले पर मध्यप्रदेश की विधान सभा और इससे जुड़े हुए सारे सदस्यगण निश्चित रुप से पूरी संजीदगी के साथ इस तरह के विषयों पर चर्चा करने की एक नई धारा निकाल रहे हैं. इस मामले में मैं चूंकि घटना दुखद है इसलिए बधाई तो नहीं दूंगा लेकिन यह विश्वास व्यक्त करता हूँ कि आगे भी कभी ऐसी घटना आई तो यह मिसाल बनेगी जिससे इस तरह के संजीदगी वाले विषय पर हम सब मिलकर कैसे चल सकते हैं. दोनों बातें एक साथ हुई हैं अगर मैं अलग-अलग जवाब देना चाहूं तो मुझे लगता है कि ज्यादा लंबा जवाब हो जाएगा. घटना की जानकारी मुझे कैबिनेट की बैठक में 11 बजकर 20 मिनिट पर प्राप्त हुई. हमने बैठक को रोककर वहीं एक टीम बनाई राव उदय प्रताप सिंह जी को कहा कि आप तुरंत यहीं से जाएं उनके साथ दो जिम्मेदार अधिकारी भी भेजे. जिस समय यह घटना हुई थी उस समय हम इसका अंदाजा नहीं लगा सकते थे लेकिन वीडियो देखने के बाद अंदाजा हो गया था कि यह भीषण घटना है. शब्दों में इस घटना को बताना भी मुश्किल है, कुछ भी हो सकता था. ऐसा लग रहा था जैसे कि कोई परमाणु बम फूट गया हो. उस भयावहता के आधार पर हमने तुरंत निर्णय लिया राव उदय प्रताप सिंह जी और अधिकारी गए. 50 मिनट के अन्दर सारी तैयारी और प्रशासन की मुस्तैदी के साथ एक इमरजेंसी बैठक बुलाई. हरदा की भौगोलिक दूरी भोपाल, इंदौर और होशंगाबाद से ज्यादा थी. भारत सरकार के गृह मंत्री जी को भी 12 बजकर 20 मिनट पर बता दिया गया कि आप एनडीआरएफ की टीम भेजें. पहले सामान्य जानकारी उनको दी गई. टीम के साथ हेलीकाप्टर भेजने हेतु भी कहा गया. शुरुआत में यह आतंकवादी वारदात है या क्या है कुछ कहने की स्थिति में हम नहीं थे. जब इस बात की पुष्टि हो गई कि केवल पटाखे वाला ही मामला है तो भी हमने इसे पूरी गंभीरता से लिया. मुझे इस बात का संतोष है कि राव उदय प्रताप सिंह जी ने वहां जाकर कम्युनिकेशन किया. इस बीच यहां हम जो मेडिकल की सुविधा दे सकते थे जैसे ग्रीन कॉरिडोर बनाना, बर्न यूनिट तैयार करना वह हमने किया. यह बात सही है कि जलने पर दूरस्थ अंचलों में जो तुरंत सुविधा मिलना चाहिए उसको विकसित करना अभी बाकी है. फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भी इतनी नहीं थीं. जैसा कि चर्चा में आया सभी मित्रों ने बताया कि हमने 100 से ज्यादा फायर ब्रिगेड, 50 एम्बूलेंस भेजीं. एक तरह से रास्ता ही नहीं बचा था कि हरदा किस मार्ग से पहुंचाएं. पुलिस प्रबंधन की सहायता से यह साधन वहां पर पहुंचे. हेलीकाप्टर की भी बात आई. चूंकि बर्न व्यक्ति के साथ उसके परिवार के लोग भी आना चाह रहे थे, परिवार के लोगों को भी इसमें जोड़कर रखा गया ताकि घबराहट न फैले. मैं हमीदिया अस्पताल में एक-एक घायल से मिलकर आया हूँ. किसी को पत्थर से चोट लगी थी तो किसी को किसी और चीज से चोट लगी थी. वहां मुझे एक बहादुर महिला मिली, मैं उसे देखकर हिल गया. वह महिला बारूद बनाने की फैक्ट्री के अन्दर ही काम करती थी. इस घटना में उसका हाथ कट गया था. मैं जब डॉक्टर के पास गया तो उन्होंने कहा कि इस महिला का हाथ उड़ गया है तो मैंने डॉक्टर से कहा कि आप धीरे बोलें. वह होश में है सुनेगी तो उसको क्‍या लगेगा, मैं उससे कैसे बात करूं, तो डॉक्‍टर ने कहा नहीं यह तो उसने स्‍वयं बताया है वह बहुत हिम्‍मती है, आप उसकी‍ चिंता मत करिये, फिर भी यह बात सही है कि उसको कष्‍ट है परंतु ऊपर वाले की मेहरबानी से उसको हमने बचा लिया है और वह भी इस बात को जानती है. वास्‍तव में जब मैं दोबारा उससे मिला और मैंने पूछा कि अम्‍मा जी आपको क्‍या हुआ, तो उन्‍होंने कहा मेरा हाथ उड गया है लेकिन मुझे इस बात का अहसास था. चूंकि मैं दौड नहीं पा रही थी सब लोग दौडकर निकल गये. जब पहला विस्‍फोट हुआ तो लोग दौडकर चले गए इसलिये वह बच गए, परंतु भैया जैसा मुझसे बना चूंकि एकदम से यह घटना घटी है, तो मैंने कहा आपको मालूम है आपको क्‍या हुआ है, तो बोली हां मुझे मालूम है मेरा हाथ उड गया है लेकिन मैं बच गई मुझे इस बात का संतोष है, परंतु और बाकी लोग भी वहां घायल हुए थे उनके क्‍या हाल हैं. वह खुद का दर्द भूलकर बाकी दूसरे लोगों का पूछ रही थी. ऐसे ही हमारी फायर ब्रिगेड का कर्मचारी आग बुझाने में उसके स्‍वयं के हाथ का पंजा कट गया. यह जो भीषणता उस समय थी उसका मैं अहसास करा रहा हूं कि कैसी आग लगी और क्‍या हुआ और उसमें जो बाकी लोग मिले उनसे पूछा, तो बोले भैया पहले पटाखे फूटे तो ऐसा लगा कि हमको मदद करने के लिए जाना चाहिए, तो कुछ लोग जो मदद करने वाले थे और मदद करने के लिये जाने में उनकी यह स्थिति बनी. दोबारा जो विस्‍फोट हुआ वह और भीषण हुआ. उसमें वह लोग अधिकांश घायल हुए जो मदद करने गए थे या वीडियो बनाने गये थे या कोई रास्‍ते से जाने वाले राहगीर थे. इसलिये इस पूरी घटना के बारे में मैं बताऊंगा तो वह थोडा सही नहीं लगेगा बल्कि भविष्‍य की दृष्टि से इस पर हमारे कदम की बात की जानी चाहिये. घटना की मैंने थोडी सी संक्षिप्‍त छवि बताने का प्रयास किया है, लेकिन यह बहुत दुर्भाग्‍यपूर्ण घटना है और यह सरकार के लेबल पर पक्ष-विपक्ष की बात न करते हुए जिस ढंग से हम सबने बात की, मैं बाबा महाकाल से कामना करता हूं कि जिनका इस घटना में देहांत हुआ है उनको अपने चरणों में स्‍थान दें और घायलों को शीघ्र अतिशीघ्र ठीक करें. हमसे जो भी हो सकता है हमने सारे प्रबंधन भी किए और हमने कहा किसी को कोई भी खर्च ना देना पडे और जो अच्‍छे से अच्‍छा इसका इलाज हो सकता है, हमारे प्रदेश के बाहर भी जाना पडे तो हम उनको प्रदेश के बाहर भी ले जाएंगे. सरकार हर संभव मदद करेगी. जैसे मैंने कहा कि यह बातचीत अपने में से आई है कि राहत बचाव के कार्य के साथ हमने जिस प्रकार से सभी कदम एकसाथ उठाए कि जहां बीमार आ रहे हैं उन बीमारों के लिए डाक्‍टर्स की एडवांस टीम इकट्ठी की, वहां पर भी जो प्रबंधन था शहर के अंदर यह बात भी सही है कि तीन साल पहले किनकी सरकार थी, हो सकता है उस समय कुछ हो और आज कुछ हो, मैं इन सब चक्‍करों में नहीं पडना चाहता हूं क्‍योंकि शहर के अंदर हुआ है तो वह जो प्रधानमंत्री आवास हैं वह हम में से किसी को भी नहीं देना चाहिये था. चूंकि यह बात सही है कि जब फैक्‍ट्री बनी तब फैक्‍ट्री तो एकांत में थी लेकिन बाद में हमारे द्वारा ही जाने-अनजाने में बस्‍ती बसा दी गई. बस्‍ती बसाने में कौन-कौन दोषी है यह तो जांच में आएगा, लेकिन ऐसी चीजों में हम भी कहीं यह ध्‍यान रखें कि गरीबों को भी अगर किसी को आवास देना है तो उससे बचाना चाहिये. उतनी दूरी पर नहीं होना चाहिये.

अध्‍यक्ष महोदय, वहां पर मेरी निगाह में यह भी आया था और इसी के साथ-साथ जैसे अभी जानकारी में आया है कि अधिकारी हटाने के बारे में नेता प्रतिपक्ष ने भी बात की है, तो अधिकारी इसलिये हटाए हैं क्‍योंकि मेरी जानकारी में यह भी आया है, एक पत्र मैंने देखा है जिसमें दो महीने पहले का पत्र है जिसमें एक मातहत अधिकारी ने अपने बडे अधिकारी को लिखा है कि मैंने इसमें क्षमता से अधिक विस्‍फोटक पाया है, तो अभी चूंकि जांच चल रही है इसलिये मैं उस पर कोई कमेंट नहीं करते हुये हमने कहा वरिष्‍ठ अधिकारी चाहे कलेक्‍टर हो, चाहे एस.पी. हो, अगर उनके मातहत ने लिखा है और उनकी मौजूदगी में जांच होगी तो हो सकता है वह बचाने का प्रयास करेंगे. यह मैं आपको आश्‍वस्‍त करना चाहूंगा कि कितना भी बडा अधिकारी हो कोई भी हो, जांच के बाद कोई नहीं बचेगा निश्चित रूप से सब पर कठोर कार्यवाही करेंगे.

श्री रामनिवास रावत -- न्‍यायिक जांच.

श्री उमंग सिंघार -- न्‍यायिक जांच की बात कीजिये.

श्री हेमन्‍त कटारे -- माननीय मुख्‍यमंत्री जी, उसमें आप सदन के समक्ष आश्‍वासन दीजिये.

डॉ. मोहन यादव -- अभी आपसे निवेदन यह किया है कि आप मेरी बात सुनें. अगर आपको लगे कि जांच में कोई लीपापोती होती है, तो आप जरूर बताइएगा जैसा आपको जानकारी है.

श्री उमंग सिंघार -- माननीय मुख्‍यमंत्री जी, न्‍यायिक जांच की बात है. जांच हो रही है, अधिकारी कर रहे हैं यह बात नहीं है. अध्‍यक्ष जी, आपके माध्‍यम से मुख्‍यमंत्री जी से कहना चाहता हूं कि इस पर न्‍यायिक जांच की बात हो रही है. आप न्‍यायिक जांच कराना चाहते हैं कि नहीं कराना चाहते हैं सदन को स्‍पष्‍ट करें.

डॉ. मोहन यादव -- मेरा निवेदन तो सुनिये. अभी मेरी बात समाप्‍त हो जाएगी तब आप बताइए. एक के बाद एक अभी हाल में सारी चीजों को लेकर के आपके सामने सारी बातें रखी हैं और यह बात भी सही है कि भविष्‍य की दृष्टि से जैसा आज बताया गया है तो मैं बताना चाहूंगा कि 200 बेड तो हमने एम्‍स से लेकर और सारी जगह पर रिजर्व भी किये थे और बर्न यूनिट को लेकर भविष्‍य में हमको और बाकी जगह भी तैयारी रखनी चाहिये. तहसील स्तर पर, जिला, केन्द्र स्तर पर, क्योंकि यह ऐसी चीजें हैं, जिसमें भविष्य में आवश्यकता पड़ती है, तो नजदीक की जो जगह होती है, वहीं इसकी आवश्यकता पड़ती है, लेकिन यह मेडिकल का लम्बा, अब इसमें जो भविष्य में रहेगा, उस पर बात करेंगे. राहत को लेकर के भी जो बताया गया है कि राहत के मामले में माननीय प्रधानमंत्री जी ने, हमने भी घोषित किया है और एनजीटी ने भी कोई आर्डर किया है. मैं उसके आर्डर का परीक्षण कर रहा हूं,तो निश्चित रुप से एनजीटी भी जो कह रही है, वह भी सारी राशि उनको दिलाई जायेगी. इसके साथ साथ आपने खास करके भविष्य की दृष्टि से ये जो सारे 55 जिले हैं, एक साथ सभी के साथ हमने उसी दिन वी.सी. करके यानि एक मीटिंग तो सुबह की और एक मीटिंग शाम को की और मीटिंग करने के बाद हरदा के साथ साथ समान रुप से पूरे प्रदेश के अन्दर एक साथ जांच दल गठित करते हुए सारी दूर की जांच रिपोर्ट मंगवाई, इसलिये जो सुरेश राजे जी ने यह प्रश्न उठाया था, मैं बताना चाहूंगा कि हमारे जितने विस्फोटक लायसेंस दिये गये थे. अभी तक इसमें मण्डला में 17, दतिया में 4, मुरैना में 5, जबलपुर में 123, शिवपुरी में 10, ग्वालियर में 26, नरसिंहपुर में 6, डिंडोरी में 6, छिंदवाड़ा में 72, कटनी में 6, शहडोल में 29, अशोक नगर में 7 संस्थानों की जांच हमने एक साथ चालू कराई है और इसी में हरदा में 12 विस्फोटक लायसेंस जो दिये गये थे, उनकी जांच के बजाय उनको पहले सील किया है. तो 12 तो अकेले..(श्री उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष के खड़े होने पर) मेरी बात तो सुन लें.

श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से मुख्यमंत्री जी से अनुरोध है कि पूरे प्रदेश में जांच हो रही है. अधिकारी जा रहे हैं, पुलिस अधिकारी जा रहे हैं. स्टॉक की जांच हो रही है. लेकिन वह स्थान बाहर हैं कि नहीं, गोडाउन बाहर हैं कि नहीं, इसकी जांच नहीं हो रही है. दुकानों में ही विस्फोटक है, यह मैं आपकी जानकारी में ला रहा हूं.

डॉ. मोहन यादव -- अध्यक्ष महोदय, दोनों तरह से जांच कर रहे हैं. आपकी जानकारी के लिये बता दूं कि गोडाउन कहां है, माल कहां है, उससे आगे की भी जांच हो रही है. माल कितना रखना चाहिये, वहां उसकी क्षमता से अधिक है, तो भी हम उसको रोक रहे हैं, उस पर केस बना रहे हैं. जितना रिकार्ड में है, यह जो झगड़ा है यहां का, हरदा का, वह भी यही है. एक लायसेंस कितने का था और उससे कितना ज्यादा ले लिया. मैं तो यह सुनकर दंग रह गया कि मैंने यह कहा कि यहां आखिर इतनी बड़ी शिवा काशी जैसी फैक्ट्री बनी कैसे. तो उन्होंने बताया साहब, यह तो और बड़ी बात यह है कि यह तो अभी थोड़ा सा एक दो साल से सख्ती हो गई तो फैक्ट्री में आ गया. नहीं तो घर घर जाकर के बम बनाने के लिये वह बारुद बांटते थे और घर से बनवाकर मंगवाते थे. अब यह तमाशा पहली बार सुना है.

श्री रामनिवास रावत -- मुख्यमंत्री जी, क्या यह तमाशा बिना पुलिस अधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों के सहयोग के बिना हो सकता है.

डॉ. मोहन यादव -- मैं आपसे सहमत हूं, इसीलिये तो जांच करा रहे हैं कि यह संभव नहीं है.

श्री रामनिवास रावत -- इसलिये उनके खिलाफ कार्यवाही करिये, आप सहमत हैं तो.

डॉ. मोहन यादव -- हण्ड्रेस परसेंट.

श्री रामनिवास रावत -- इसमें न्यायिक जांच की घोषणा करिये और उनके खिलाफ केस कायम कराइये.

डॉ. मोहन यादव -- मैं आपसे सहमत हूं, एक भी आदमी जो इसमें लिप्त रहा होगा, आपको आश्वस्त करना चाहूंगा कि किसी को नहीं छोड़ेंगे, निश्चित रुप से सब पर कार्यवाही होगी और दूसरी बात आने वाले समय में जो बात हमने कही है कि जैसे रिहायशी फैक्ट्रियों के लिये जो अभी एक विषय बना है. अब अपने बीच में से मैं तो यह चाहूंगा कि भविष्य में अगर इस दिशा में कोई और ठोस कदम उठाना है, तो पक्ष विपक्ष के लोग मिलकर के, कमेटी बनाकर के भी इस दिशा में भविष्य में आप क्या चाहते हैं, मैं उसके लिये भी तैयार हूं.

श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे अनुरोध है कि आप न्यायिक जांच करायेंगे, न्यायिक जांच की बात हो रही है. उसके बारे में मुख्यमंत्री जी कहना नहीं चाह रहे हैं. अधिकारियों के खिलाफ, आरोपियों के खिलाफ क्या कार्यवाही करेंगे, यह बात हो रही है.

 

 

1.43 बजे बहिर्गमन

इण्डियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा सदन से बहिर्गमन.

 

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, हमने जो बिन्दु उठाये हैं, न्यायिक जांच की घोषणा,पीड़ित परिवारजनों को 1-1 करोड़ रुपये देने की बात, नौकरी देने की बात के संबंध में एक शब्द मुख्यमंत्री जी ने नहीं कहा है.

श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय, हम लोग बहिर्गमन करते हैं.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, तो हम सरकार के जवाब से असंतुष्ट होते हुए सदन से बहिर्गमन कर रहे हैं.

(श्री उमंग सिघार, नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में इण्डिन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया.)

अध्यक्ष महोदय-- सदन की कार्यवाही 3.30 बजे तक के लिये स्थगित.

(1.44 बजे से 3.30 बजे तक अंतराल)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3.34 बजे

{अध्‍यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए}

कार्य मंत्रणा समिति का प्रतिवेदन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3.36 बजे

गैर सरकारी सदस्‍यों के विधेयकों तथा संकल्‍पों संबंधी समिति के प्रथम प्रतिवेदन की प्रस्‍तुति एवं स्‍वीकृति

 

 

 

 

3.37 बजे

अध्‍यादेश का पटल पर रखा जाना

मध्‍यप्रदेश माल और सेवा कर (संशोधन) अध्‍यादेश , 2024( क्रमांक 1सन् 2024)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3.38

पत्रों का पटल पर रखा जाना

 

(क) (i) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का अनुपालन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन 31 मार्च, 2021 को समाप्‍त वर्ष के लिए (पर्यावरण, लोक निर्माण, ऊर्जा और उद्योग विभाग) मध्‍यप्रदेश शासन का वर्ष 2023 का प्रतिवेदन संख्‍या-2,

(ii) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का प्रतिवेदन लोक निर्माण विभाग द्वारा मध्‍यप्रदेश में वृहद पुलों के निर्माण पर निष्‍पादन लेखापरीक्षा पर 31 मार्च, 2020 को समाप्‍त वर्ष के लिए मध्‍यप्रदेश शासन का वर्ष 2023 का प्रतिवेदन क्रमांक-3,

(iii) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का राज्‍य के वित्‍त पर लेखापरीक्षा प्रतिवेदन 31 मार्च, 2022 को समाप्‍त वर्ष के लिए मध्‍यप्रदेश शासन का वर्ष 2023 का प्रतिवेदन संख्‍या-4,

(iv) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का 31 मार्च, 2021 को समाप्‍त वर्ष हेतु प्रतिवेदन अनुपालन लेखापरीक्षा प्रतिवेदन (खण्‍ड-प्रथम) मध्‍यप्रदेश शासन का वर्ष 2023 का प्रतिवेदन संख्‍या-5,

(v) भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक का 31 मार्च, 2021 को समाप्‍त वर्ष हेतु क्षिप्रा नदी के क्षरण पर निष्‍पादन लेखा परीक्षा प्रतिवेदन पर मध्‍यप्रदेश शासन का वर्ष 2023 का प्रतिवेदन क्रमांक-6,

(vi) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का स्‍थानीय निकाय पर प्रतिवेदन 31 मार्च, 2021 को समाप्‍त वर्ष के लिए मध्‍यप्रदेश शासन का वर्ष 2023 का प्रतिवेदन संख्‍या-7

(vii) मध्‍यप्रदेश सरकार के वित्‍त लेखे वर्ष 2022-2023 (खण्‍ड-I एवं II) एवं विनियोग लेखे वर्ष 2022-2023

(ख) त्रि-स्तरीय पंचायतराज संस्थाओं का संचालक स्थानीय निधि संपरीक्षा का वार्षिक संपरीक्षा प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020

(ग) स्थानीय निधि संपरीक्षा मध्यप्रदेश का वार्षिक संपरीक्षा प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(2) (क) (i) क्रमांक 693/मप्रविनिआ/2023, दिनांक 31 मार्च, 2023,

(ii) क्रमांक 558-मप्रविनिआ-2023, दिनांक 15 मार्च, 2023,

(iii) क्रमांक 497-मप्रविनिआ-2023, दिनांक 09 मार्च, 2023,

(iv) क्रमांक 220/मप्रविनिआ/2023,दिनांक 24 जनवरी,2023,

(v) क्रमांक 730/मप्रविनिआ/2023, दिनांक 05 अप्रैल,2023,

(vi) क्रमांक 2740/मप्रविनिआ/2023, दिनांक 07 दिसम्‍बर, 2023,

(vii) क्रमांक 1686-मप्रविनिआ-2023, दिनांक 26 जुलाई, 2023,

(viii) क्रमांक 1685-मप्रविनिआ-2023, दिनांक 26 जुलाई, 2023,

(ix) क्रमांक 2741/मप्रविनिआ/2023, दिनांक 07 दिसम्‍बर, 2023,

(x) क्रमांक 2896/मप्रविनिआ/2023, दिनांक 22 दिसम्‍बर,2023,एवं

(xi) क्रमांक 1684/मप्रविनिआ/2023, दिनांक 26 जुलाई, 2023,

(ख) मध्‍यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के वर्ष 2022-2023 के अंकेक्षित लेखे

(ग) मध्‍यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

 

 

 

3.42 बजे राष्ट्रपति की अनुमति प्राप्त विधेयक की सूचना

 

सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, प्रदाय और वितरण का विनियमन) मध्यप्रदेश संशोधन विधेयक, 2024

(क्रमांक 7 सन् 2023)

 

3.43 बजे अध्यक्षीय घोषणा

 

ध्यानाकर्षण की सूचनाएं एवं माननीय सदस्यों के आवेदनों की प्रस्तुति

आगामी दिवस में किया जाना

 

 

 

 

 

 

 

 

 

3.44 बजे

 

 

श्री रामेश्वर शर्मा जी कृतज्ञता ज्ञापन पर चर्चा प्रारंभ करेंगे. (मेजों की थपथपाहट)

 

 

 


 

3.45 बजे

राज्‍यपाल के अभिभाषण पर श्री रामेश्‍वर शर्मा, सदस्‍य द्वारा दिनांक 7 फरवरी, 2024 को प्रस्‍तुत कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्‍ताव पर चर्चा

 

श्री रामेश्‍वर शर्मा (हुजूर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, महामहिम राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन और उन्‍होंने जो अपना अभिभाषण दिया है, उसके समर्थन में मैं अपनी बात रखने के लिए खड़ा हुआ हॅूं. हम सब लोग एक ऐसे कालखंड में हैं कि जब हम लोगों ने अपने पूर्वजों से रामायण से, वेदों से, पुराणों से सुना था कि एक त्रेता युग है त्रेता युग में भगवान राम का जन्‍म हुआ और भगवान राम का त्रेतायुग में जन्‍म हुआ, तो जन्‍म के समय राजा राम का राज्‍याभिषेक का वक्‍त आया, तो किन्‍हीं कारणों से पिताश्री की आज्ञा से राम वन गए और वन से जब लंका विजय के बाद राम अयोध्‍या लौटकर आए थे, तो अयोध्‍यावासियों ने दीये जलाकर दीपावली मनायी. इस दीपावली के शब्‍द को हिन्‍दुस्‍तान त्रेता, द्वापर और कलयुग तक की श्रृंखला में आज दिनांक तक मनाते आया है लेकिन भारत के ऊपर एक समय ऐसा भी आया कि आक्रांताओं का जब आक्रमण हुआ और आक्रांताओं ने हमारी सांस्‍कृतिक विरासत को लूटा, धन लूटा, संपदा लूटी. बहन-बेटियों की इज्‍जत लूटी. मठ और मंदिरों को तोड़े और जब यह मठ-मंदिर तोडे़ गए, तो इसके लिए हमने सहज स्‍वीकार नहीं किया. पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसके लिए संघर्ष होता रहा. अनेक आत्‍माओं ने इसके लिए युद्ध लड़ा. अनेक साधु, महंत, अखाड़ों ने इसके लिए युद्ध लड़ा. लाखों लोग बलिदान हुए, लेकिन बार-बार यह दोहराते रहे कि जहां राम का जन्‍म हुआ है, मंदिर वहीं बनेगा. सन् 90 में भी यह संघर्ष आया. कारसेवकों ने गोली खायी. कहा तो यह जाता है कि अयोध्‍या उसका नाम है, जहां कभी किसी का वध नहीं हुआ हो लेकिन अयोध्‍या ने 500 वर्ष के कालखंड में ऐसे अनेक वध देखे, अनेक अपने ही भक्‍तों को मौत के मुंह में जाते हुए देखा. जिस निर्मल धारा से सरयू मैया बहती थी, उस निर्मल धारा में ऐसा भी समय आया कि हमारे कारसेवकों के हाथ-पैरों में पत्‍थर बांधकर सीमेंट की बोरियां बांधकर धक्‍के मारकर उनको फेंक दिया गया.

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या यह राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर चर्चा हो रही है ?

अध्‍यक्ष महोदय -- राज्‍यपाल के अभिभाषण पर चर्चा हो रही है.

श्री महेश परमार -- रामराज आ गया है. सुनो, रामराज आ गया है. रामेश्‍वर शर्मा जी, राम जी की एक कथा विधानसभा में कराना है...

...(व्‍यवधान)...

श्री प्रहलाद सिंह पटैल -- अध्‍यक्ष महोदय, एक का नाम राम और एक का नाम लक्ष्‍मण और राम पर आपत्‍ति कर रहे हैं....(व्‍यवधान)..

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- रामनिवास जी, हम तो आपके ही निवास ...(व्‍यवधान)...

श्री उमाकांत शर्मा -- हमको कृष्‍ण भगवान पर चर्चा करनी है, हमारे कृष्‍ण भगवान का नाम क्‍यों नहीं लेते....(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- अभी चर्चा करने दें..(व्‍यवधान)..

श्री रामनिवास रावत -- हमें भगवान राम पर कोई आपत्‍ति नहीं है केवल यह बता दें कि उनका जन्‍म हुआ या प्राकट्य हुआ ?

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष जी, आपका नाम रामनिवास है. आप इनको अयोध्‍याप्रसाद भी बोल सकते हैं...(हंसी)..

श्री रामनिवास रावत -- हमें उसमें भी आपत्‍ति नहीं है. लेकिन राम जी का जन्‍म हुआ या प्राकट्य हुआ, केवल यह बता दें.

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- आप क्‍या चाहते हैं राम जन्‍म हुआ, यह भी उल्‍लेख है और राम जी प्रकट हुए, यह भी उल्‍लेख है.

अध्‍यक्ष महोदय -- रामेश्‍वर जी, आपको हर चीज का जवाब नहीं देना है. आप सीधा जवाब दें.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, वे सीधा तो जवाब देंगे, क्‍योंकि वे पंडित हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- लेकिन आपको भी बार-बार खड़े नहीं होना चाहिए, क्‍योंकि आप वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं.

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, अभी तो हम आपके निवास की चर्चा कर रहे हैं. यही तो हिन्‍दुस्‍तान की खास बात है कि 15 अगस्‍त 1947 को जब देश आजाद हुआ, आजादी का जो जश्‍न मनाया गया, उस दिन भी पूज्‍य महात्‍मा गांधी जी ने यह कहा था, जो चित्र यहां पर लगा है, जिस चित्र की हम चर्चा करते हैं जिसके आधार पर भारत का संविधान चलता है, पूज्‍य बाबा साहब आंबेडकर जी का चित्र लगा है. बाबा साहब आंबेडकर के संविधान के प्रथम पृष्‍ठ पर रामलला विराजमान हैं. राम दरबार बैठा हुआ है और महामहिम राज्‍यपाल महोदय ने अपने अभिभाषण में भी उसका उल्‍लेख किया है. मैं यह कहना चाहता हॅूं कि त्रेतायुग की उस घड़ी में हम थे या नहीं थे, हमे नहीं मालूम और मध्‍यप्रदेश की विधानसभा की ओर से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी को धन्‍यवाद देता हॅूं कि त्रेता का युग कलयुग में दिया, जब रामलला प्रकट हुए, रामलला की प्राण-प्रतिष्‍ठा का आयोजन हुआ. पूरा देश ही नहीं, पूरा विश्‍व राममय था. सबको निमंत्रण आए थे. जैसे यहां भी कुछ 2-3 लोग खडे़ हो गए, ऐसे 2-3 लोगों ने वहां भी मना कर दिया कि हम नहीं जाएंगे.

श्री अभय कुमार मिश्रा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदन का कीमती समय प्रदेश के विकास की चर्चा पर हो.

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- वाह मेरी कांग्रेस वाह.

अध्‍यक्ष महोदय -- अभय जी, जरा विकास पर आने तो दो. आप बीच में टोकते हो, तो विषय पूरा नहीं होगा, तो तब तक वे विकास पर नहीं आएंगे...(हंसी).

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यही तो परेशानी है कि रामराज्‍य की बात करते हैं पर रामराज्‍य नहीं आ पाया और इसल&