मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

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षोडश विधान सभा                                                                      तृतीय सत्र

 

जुलाई, 2024 सत्र 

शुक्रवार, दिनांक 5 जुलाई, 2024  

(14 आषाढ़, शक संवत्‌ 1946)

[खण्ड- 3]                                                                                       [अंक- 5]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

शुक्रवार, दिनांक 5 जुलाई, 2024

(14 आषाढ़, शक संवत्‌ 1946 )

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03  बजे समवेत् हुई.

{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

मत्स्य पालन हेतु आवंटित जलाशय

[मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास]

1. ( *क्र. 1740 ) श्री प्रणय प्रभात पांडे : क्या राज्‍य मंत्री (स्वत्रंत प्रभार), मछुआ कल्‍याण एवं मत्‍स्‍य विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बहोरीबंद विधानसभा-क्षेत्र अंतर्गत वर्ष 2020-21 से प्रश्‍न-दिनांक तक कितने जलाशयों एवं ग्रामीण-तालाबों का पट्टा मत्स्य-पालन हेतु किन-किन मछुआ-सहकारी-समिति/स्व-सहायता समूहों को प्रदाय किया गया, कितनों में पट्टा अवधि-पूर्ण होने पर पट्टे की कार्यवाही किस स्तर पर लंबित हैं? सूची देवें। (ख) मछुआ-सहकारी-समिति का गठन किस आधार पर किन नियमों के तहत किया जाता है? नियमों की छायाप्रति देवें। वित्त वर्ष 2020-21 से प्रश्‍न-दिनांक तक बहोरीबंद-विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कहां-कहां पर नवीन-समितियां गठित की गईं? जलाशयों के क्षेत्रफल, सदस्यों के नाम-पता सहित-सूची देवें। (ग) शासकीय-जलाशय/ग्रामीण तालाबों को मत्स्य-पालन हेतु मछुआ-सहकारी समितियों/स्व-सहायता-समूहों को प्रति-सदस्य न्यूनतम कितने हेक्टेयर जल ग्रहण-क्षेत्र आवंटित किए जाने के शासन के स्थाई दिशा-निर्देश हैं एवं यह भी बतलावें कि क्या इनका पालन प्रश्‍नांश '' में आवंटित बहोरीबंद-विकासखंड के छपरी और मसंधा-जलाशय के आवंटन में किया गया है? यदि हाँ, तो कार्यवाही की छायाप्रति देवें? यदि नहीं, तो इसका दोषी कौन है? (घ) प्रश्‍नांश (क) में उल्लेखित बहोरीबंद-विधानसभा क्षेत्र के छपरी और मसंधा-जलाशय के आवंटन में स्वामित्व की ग्राम पंचायतों/जनपद-पंचायतों/कृषि स्थाई समिति से अनुशंसा प्राप्त की गई है? यदि हाँ, तो अनुशंसा की छायाप्रति देवें? यदि नहीं, ली गई तो इसका दोषी कौन है? (ड.) प्रश्‍नांश (क) एवं (घ) के संदर्भ में क्या शासन कटनी जिले में पदस्थ सहायक-संचालक मत्‍स्‍योद्योग को अन्‍यत्र स्थानांतरित कर जलाशयों के आवंटन में की गई अनियमितता की जांच करायेगा? उत्तर में यदि हाँ, तो किस प्रकार से कब तक? यदि नहीं, तो क्यों नहीं?

राज्‍य मंत्री (स्वत्रंत प्रभार), मछुआ कल्‍याण एवं मत्‍स्‍य विकास ( श्री नारायण सिंह पंवार ) : (क) बहोरीबंध विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत प्रश्‍नांश अवधि से प्रश्‍न दिनांक तक की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) मछुआ सहकारी समिति का गठन मछुआ नीति 2008 के भाग 2 के निर्देशानुसार किया जाता है। वर्ष 2020-21 से प्रश्‍न दिनांक तक बहोरीबंध विकासखंड क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत किवलहरा चरगंवा, छपरी, गुजिकला कुल 04 मछुआ सहकारी समिति का गठन किया गया। विस्‍तृत जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) शासकीय जलाशय/तालाबों को मत्‍स्‍य पालन हेतु समितयों/स्‍व-सहायता समूहों को प्रति सदस्‍य जलग्रहण क्षेत्र मछुआ नीति 2008 के भाग-2 की कंडिका 2.1 अनुसार किया जाता है। वर्तमान में छपरी ओर मसंधा जलाशय किसी भी समिति को आवंटित नहीं है। आवंटन की कार्यवाही जनपद पंचायत बहोरीबंध की कृषि स्‍थायी समिति स्‍तर पर लंबित है। (घ) बहोरीबंध विधान सभा के जनपद पंचायत बहोरीबंध स्‍वामि‍त्‍व के छपरी और मसंधा जलाशय आवंटित नहीं है। कार्यवाही जनपद पंचायत बहोरीबंध की कृषि स्‍थायी समिति में विचाराधीन है। (ड.) प्रश्‍नांश (क) में वर्णित जलाशयों का आवंटन मछुआ नीति 2008 के निर्देशानुसार ही कार्यवाही की गई है। अत: जांच कराने की स्थिति नहीं है।

श्री प्रणय प्रभात पांडे:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहोरीबंद विधान सभा क्षेत्र में कुल 109 छोटे-बड़े जलाशय, मेरे प्रश्‍न कंडिका -क के उत्‍तर में बताया गया है. इसमें 16 जलाशयों में 10 में मत्‍स्‍य का काम होता है तो वर्ष 2020-21 के प्रश्‍न दिनांक तक कुल 16 आवंटित किये गये हैं. इसमें 93 जलाशय आवंटन की कार्यवाही जनपद स्‍तर पर आज तक लंबित है.

अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री जी से प्रश्‍न है कि वर्ष 2020-21 से प्रश्‍न दिनांक तक इतनी अधिक संख्‍या में आवंटन लंबित हैं तो उनका निराकरण क्‍यों नहीं हुआ और कब तक होगा.

श्री नारायण सिंह पंवार:- अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न जिस तारतम्‍य में लगाया गया है, मैंने उसका उत्‍तर देने का प्रयास किया गया है. बहोरीबंद विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत प्रश्‍नांश अवधि से प्रश्‍न दिनांक तक की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है.

(ख) मछुआ सहकारी समिति का गठन मछुआ सहकारी समिति का गठन मछुआ नीति 2008 के भाग -2 के निर्देशानुसार किया जाता है. वर्ष 2020-21 से प्रश्‍न दिनांक तक बहोरीबंद विकासखण्‍ड क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत किवलहरा, चरगंवा, छपरी, गुजिकला कुल चार मछुआ सहकारी समिति का गठन किया गया है. विस्‍तृत जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिश्ष्टि -ब अनुसार है.

अध्‍यक्ष महोदय:- माननीय मंत्री जी, जो सदस्‍य का प्रश्‍न है उसका ही सिर्फ उत्‍तर दें, जो आपने उत्‍तर दे दिया है, वह तो प्रश्‍नोत्‍तरी में छपा हुआ है ही उनके पास.

श्री नारायण सिंह पंवार:- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने चार समितियों का आवेदन दिया है और चारों समितियों का निराकरण जनपद पंचायत में होना है. कृषि स्‍थायी समिति में भी वह लंबित है उसका निराकरण नहीं पाया है जब तक वहां से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी. दो बार वह जिला पंचायत, जनपद पंचायत से लौटकर जा चुका है इसलिये लंबित है. श्री प्रणय प्रभात पांडे - अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2020 से 93 मामले लंबित हैं, यह विभाग के, जनपद के बीच में आपस की लड़ाई में, ऐसे बहुत से समाज के लोग हैं, जैसे मछुआ समाज, आदिवासी समाज, इनका सीधा सीधा रोजगार छीना हुआ है. यह 93 समूह कम नहीं होते हैं, इन्होंने कोई 16 समूह की परमिशन कराई है. चूंकि विभाग की भी जवाबदारी होती है. 93 समूहों का आप अंदाज लगाइए कि कितना बड़ा समूह होता है, जिनको रोजगार मिलेगा. आज वे रोजगार से वंचित हैं. कहीं वे जनपद के चक्कर लगा रहे हैं, कहीं वे जिले के चक्कर लगा रहे हैं. आज यह स्थिति कैसे सुधरेगी, इसके लिए आपसी व्यवस्था चाहते हैं.

अध्यक्ष महोदय, चूंकि यह जनपद पंचायत में लंबित है, बिल्कुल सही बात है. माननीय मंत्री जी सही कह रहे हैं परन्तु इसके लिए कोई ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए कि मान लें कि जनप्रतिनिधियों का आपस में तालमेल नहीं हो पा रहा है तो कोई ऐसी समिति बना दी जाय, जिसमें एसडीएम, तहसीलदार, जनपद के कुछ सदस्य, ऐसे करके जनपद स्तर की एक समिति होना चाहिए, जिससे जो 5-5 साल, 6-6 साल मामले लंबित रहते हैं, वह लंबित रहना बंद हो जाय .

श्री नारायण सिंह पंवार - अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से माननीय सदस्य को निवेदन करना चाहता हूं कि उनकी पीड़ा भी सही है कि वर्षों से यह लंबित है. इनमें आपसी तालमेल हो नहीं पाता है. इसमें मेरा इतना निवेदन है कि हमने वहां के एडीएफ से बात करके, उनका सूचना करके कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से चर्चा करके कोशिश करेंगे कि इसका समाधान जल्दी हो जाय.

श्री प्रणय प्रभात पांडे - अध्यक्ष महोदय, यह कब तक हो जाएगा, यह आश्वासन मिल जाय क्योंकि पिछले 5 साल पहले भी यह प्रश्न लगाया था, 3 साल पहले भी यही जवाब आया था, आज फिर वही जवाब है, इसका निराकरण हो जाएगा, 93 समूह आज भी रोजगार के लिए वंचित हैं.

श्री नारायण सिंह पंवार - अध्यक्ष महोदय, कोशिश करेंगे कि जल्दी से समाधान हो.

 

 

पट्टे की भूमि से वन विभाग द्वारा बेदखली

[वन]

2. ( *क्र. 831 ) श्री मोहन सिंह राठौर : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या ग्वालियर जिले में जिन किसानों की भूमि राजस्व रिकॉर्ड में उनके नाम से भूमि स्वामी अंकित है एवं जिन्हें वन अधिकार पत्र दिये गए हैं, को वन विभाग बेदखल कर रहा है? ऐसा क्यों? (ख) सन 2006 के बाद किसानों की भूमि विगत तीस वर्षों से किसानों के नाम अंकित थी, इनकी के.सी.सी. भी बन चुकी है, ऐसी भूमियों पर अहस्तांतरणीय उल्लेखित किया गया है, यह किस आदेश से? कृपया आदेश की प्रति उपलब्ध करायें एवं अहस्तांतरणीय शब्द कब हटाया जायेगा? अवगत करावें। (ग) तहसील घाटीगांव, आंतरी, चीनौर एवं भितरवार के अंतर्गत प्रश्‍नांश (क) अनुसार कितने-कितने पट्टेदारों को वन विभाग द्वारा बेदखल किया गया है/किया जा रहा है? जानकारी तहसीलवार, नामवार उपलब्ध कराई जावे।

वन मंत्री ( श्री नागर सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं, शेष प्रश्‍नांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ख) कार्यालय कलेक्टर जिला ग्वालियर के आदेश क्रमांक/1828, दिनांक 30.07.2012 के द्वारा अहस्तांतरणीय अंकित किया गया। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। ''अहस्तांतरणीय शब्द कब हटाया जायेगा'' के संबंध में निर्णय शासन के निर्देशों के अधीन रहेगा। (ग) उत्तरांश '' अनुसार प्रश्‍नाधीन तहसील में पट्टेदारों को बेदखल नहीं किया गया है।

परिशिष्ट - "एक"

श्री मोहन सिंह राठौर - अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं यह जानना चाहता हूं कि ग्वालियर जिले की भीतरवार विधान सभा क्षेत्र में जो आदिवासी हैं, उन्हें लगातार पिछले 1 वर्ष से बेदखल किया जा रहा है और उसकी जो जानकारी दी गई है, वह पूरी तरह से असत्य है क्योंकि वहां पर मेरी जानकारी में करीबन 500 ऐसे आदिवासी हैं, जिनकी मैं सूची उपलब्ध करा सकता हूं कि जिनको वनाधिकार के पट्टे मिले. भू अधिकार के पट्टे मिले और आज उनको वर्तमान में जो वहां डीएफओ है, उनका जो निचला स्टॉफ है जो आदिवासी क्षेत्रों में निवास करता है, वह पूरी तरह से उनको विस्थापित कर रहा है, उनको वहां से हटा दिया है. पहले तो जब उनके पास में घर नहीं हुआ करते थे तब वे विस्थापित हो जाते थे. आज उनको माननीय मोदी जी ने घर दिये हैं. ऐसी स्थिति में वे अपने घरों को छोड़ नहीं सकते, उनको वन की जमीनों से बेदखल किया जा रहा है. मैं माननीय मंत्री जी से सिर्फ इतना जानना चाहता हूं कि उनकी बेदखली की कार्यवाही रोकी जाएगी क्या? और रोकी जाएगी तो कब तक रोकी जाएगी? उसमें जो दोषी अधिकारी हैं जिन्होंने उनको अभी बेदखल किया है, उनके विरुद्ध भोपाल स्तर के एक वरिष्ठ अधिकारियों की एक कमेटी बनाई जाय और उस कमेटी में स्थानीय विधायक को रखा जाय और पूरी जांच हो जाय कि कितने लोगों बेदखल किया गया है.

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - अध्यक्ष महोदय, मैंने आज सुबह भी जानकारी ली. मुझे तो जानकारी यह दी गई है कि एक भी ऐसा पट्टाधारी जिसको कि पट्टा मिला हो, उसको नहीं हटाया गया है. परन्तु जो माननीय विधायक जी कह रहे हैं तो वह सबूत दे देंगे तो मैं वहां के अधिकारियों को सस्पेंड कर दूंगा, जिन्होंने यह जानकारी भेजी है, परन्तु यह है कि तथ्य के साथ वह बता दें कि किस-किस के पट्टे हैं और इनको हटाया गया है. जो 40 साल से वहां पर जितने भी पट्टाधारी रह रहे हैं उसमें से एक भी नहीं हटाया गया है, यह मुझे जानकारी दी गई है और यदि यह गलत जानकारी होगी तो अधिकारी के खिलाफ हम कार्यवाही करेंगे.

श्री मोहन सिंह राठौर - अध्यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र में 50 हजार से अधिक आदिवासी हैं, उनकी सूचियां हैं. अगर आप एक कमेटी बनाएंगे, जो उसकी जांच करे क्योंकि स्थानीय अधिकारी भ्रमित जानकारी दे रहे हैं. मैं डीएफओ साहब से मिल चुका. मैं सीएफ साहब से मिल चुका. मैंने कलेक्टर साहब से भी बात की, इनका यह कहना है कि दोनों ही विभागों में कोई तालमेल नहीं है. राजस्व विभाग कहता है कि यह हमारी जमीन है. वन विभाग कहता है कि हमारी जमीन है और दोनों के लड़ाई झगड़े में आदिवासी विस्थापित हो रहा है. आदिवासियों की संख्या वहां पर ज्यादा है. एक भी आदिवासी बेदखल नहीं होना चाहिए, यह आश्वासन मुझे सदन से चाहिए.

श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को और सदन को अवगत कराना चाहता हूं कि डॉ. मोहन यादव जी की सरकार यह है. हम प्रतिबद्ध हैं. ऐसा कोई भी आदिवासी भाई जो पट्टाधारी है, उसको बिल्कुल नहीं हटाया जाएगा, इस बात की मैं जवाबदारी लेता हूं और सदन में घोषणा करता हूं. (मेजों की थपथपाहट)..

श्री मोहन सिंह राठौर -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरी एक जानकारी है कि जिन लोगों को पहले पट्टे दिये गये थे, 12 वर्ष के लिए उनको...

अध्‍यक्ष महोदय -- मोहन जी, समुचित उत्‍तर आ गया है अब बाकी के लिए मंत्री जी से आप मिलकर बात कर लें.

श्री मोहन सिंह राठौर -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी का बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

नर्मदा-गंभीर समूह जल प्रदाय परियोजना

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

3. ( *क्र. 1788 ) श्री सतीश मालवीय : क्या लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नर्मदा-गंभीर समूह जल प्रदाय परियोजनान्तर्गत उज्जैन जिले के कितने ग्रामों को जोड़ा गया है एवं इस संपूर्ण परियोजना पर किस-किस कार्य हेतु कितनी-कितनी राशि का व्यय किया जाना है? डी.पी.आर. के अनुसार संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करावें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार घट्टिया विधानसभा के उक्त परियोजना से कितने ग्राम जुड़ रहे हैं और कितने ग्राम परियोजना से छूटे हुए हैं? छूटे हुए ग्रामों को कब तक जोड़ा जावेगा? ग्रामवार संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) उक्त परियोजना निर्माण एजेन्सी के कार्यादेश से कार्य कब तक पूर्ण होना है? कार्यों के पूर्ण होने की समय-सीमा क्या है? संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करावें। (घ) क्या उक्त परियोजना में कार्य करने वाली निर्माण एजेन्सी द्वारा ग्रामों के अन्दर पेयजल पाइप लाइन डालने में सीमेन्ट कांक्रीट रोड एवं अन्य सड़कों को खोदकर जीर्ण-शीर्ण कर दिया गया है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में काफी असुविधा होती है? उक्त ग्रामों की सड़कों को कब तक सुधारा जावेगा?

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री ( श्रीमती संपतिया उइके ) : (क) नर्मदा-गंभीर परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले के 830 ग्रामों को जोड़ा गया है एवं अनुबंधानुसार संपूर्ण परियोजना कार्य हेतु राशि के प्रावधानित व्यय की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 01 अनुसार है। डी.पी.आर. की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 02 अनुसार है। (ख) नर्मदा-गंभीर परियोजना अंतर्गत घट्टिया विधानसभा के समस्त 254 ग्रामों को जोड़ा गया है, कोई भी ग्राम छोड़ा नहीं गया है। उक्‍त परियोजना में सम्मिलित ग्रामों की ग्रामवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 03 अनुसार है। (ग) उक्त परियोजना निर्माण एजेंसी के कार्यादेश से दो वर्ष, सितम्बर 2025 तक पूर्ण होना है। कार्यों के पूर्ण होने की समय-सीमा की संपूर्ण जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 01 अनुसार है। (घ) जी नहीं, निर्माण एजेंसी द्वारा पेयजल पाइप-लाइन डालते समय सीमेंट कांक्रीट रोड एवं अन्य सड़कों को आवश्यकतानुसार खोदा जाता है तथा पाइप लाइन टेस्टिंग के उपरांत खोदी गई सड़कों को अनुबंधानुसार पुनः यथावत कर दिया जाता है।

 

श्री सतीश मालवीय -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं सर्वप्रथम मध्‍यप्रदेश की सरकार, केन्‍द्र की सरकार को भी आपके माध्‍यम से धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि इतनी अति महत्‍वपूर्ण योजना को चलाया जा रहा है जो कि विगत कई वर्षों से पानी की समस्‍याओं से कई सारे गांव जूझ रहे थे. मेरी विधानसभा में करीब 254 गांव हैं. उन 254 गांवों में नर्मदा का पानी जाने वाला है, इसके लिए मैं आपके माध्‍यम से सरकार को और सब लोगों को धन्‍यवाद देना चाहता हॅूं. साथ ही मेरे प्रश्‍न "" की बात करूंगा, उसमें मैंने यह पूछा है कि कितनी सड़कें हमारे विधानसभा क्षेत्र में पेयजल पाइपलाईन को डालते समय खोदी गई हैं, वह कितने समय के अंदर बन जाएगीं, ताकि ग्रामीण जनों को इस बरसात के मौसम में समस्‍याओं का सामना न करना पडे़. यह मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हॅूं.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहले तो मैं माननीय विधायक जी को धन्‍यवाद देना चाहता हॅूं कि उन्‍होंने प्रधानमंत्री के जल-जीवन मिशन की प्रशंसा की है और हमारे देश के प्रधानमंत्री जी जब गरीब कल्‍याण की बात करते हैं तो उनका सपना है कि हर घर के अंदर नल-जल हो और मुझे कहते हुए बहुत गर्व है कि इस मिशन की शुरूआत वर्ष 2019 में लालकिले के प्राचीर से हुई थी और उस वक्‍त 3 लाख करोड़ की योजना थी, आज यह विश्‍व की सबसे बड़ी नल-जल योजना है जो अब 12 लाख करोड़ की हो गई है. (मेजों की थपथपाहट) और प्रत्‍येक घर में नल से शुद्ध पानी मिले, इसका सपना माननीय प्रधानमंत्री जी का है और यह सपना हम पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं. आपने जैसा कि कहा है, कुछ सड़कें काफी टूटी हैं. निश्‍चित रूप से काम हुआ है तो सड़कें टूटी होगीं. मैं आपको आश्‍वस्‍त करता हॅूं कि उन सब सड़कों को बनाने का काम विभाग करेगा और साथ में यह भी आपकी एक शिकायत थी कि आपके यहां कैसे काम होता है, यह आपको जानकारी नहीं मिलती. मैं अधिकारियों को निर्देश दे रहा हॅूं कि आपके साथ एक बार बैठकर पूरी कार्ययोजना आपसे समझ लें और आपके साथ चाहें तो आपको जो तकलीफ हो, वह उनको बता भी सकते हैं.

श्री सतीश मालवीय -- जी, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं धन्‍यवाद देना चाहता हॅूं. एक और छोटा-सा मेरा प्रश्‍न है चूंकि ये सड़कें तो आपके माध्‍यम से जरूर बनेंगी ही सही, लेकिन चूंकि इसके मापदण्‍ड ऐसे हैं कि 4 इंच की सड़कें बनायी जाएगीं और ग्राम पंचायतों के द्वारा अन्‍य मद से 8 इंच की सड़कें बनेंगी तो यह आने वाले समय में 4 इंच की सड़कें न बनते हुए, जो 8 इंच की सड़कें हैं, वह बनाईं जाए, ताकि अगर कुछ फंड की भी आवश्‍यकता हो, तो चूंकि आप सह्दयी हैं, आप उच्‍च सदन पर बैठे हैं. सभी विधायकों को भी बिना भेदभाव के मिल रहा है और आपका भी आशीर्वाद बिना भेदभाव के दोनों दलों को मिल रहा है, तो मैं आपसे निवेदन करना चाहूंगा कि मेरी विधानसभा में जितनी भी सड़कें खुदी हैं, वह 4 इंच की बजाय, 8 इंच की गुणवत्‍ता के साथ बने, ऐसा मेरा आपसे निवेदन है.

अध्‍यक्ष महोदय -- सतीश जी, पर्याप्‍त उत्‍तर आ गया है. अब इसके बाद सप्‍लीमेंट्री बनता नहीं है. यदि माननीय मंत्री जी कुछ कहना चाहें तो कहें.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, जो टेण्‍डर की शर्त है उसमें तो यह है कि जैसी सड़कें हैं वैसी ही बनेंगी. यदि 4 इंच की होगी, तो 4 इंच की बन जाएगी. 8 इंच की होगी, तो 8 इंच की बन जाएगी. 4 इंच की तो बनवा लो, बाद में 8 इंच की और बनवा देंगे. (हंसी)

श्री सतीश मालवीय -- अध्‍यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

 

जल समूह योजना के तहत जल जीवन मिशन की जानकारी

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

4. ( *क्र. 1800 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) जल समूह योजना के तहत जल जीवन मिशन से सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में कितने ग्राम खेड़े, मजरे, टोले, आबादी में पाइप लाइन पहुँचाने का कार्य नहीं हो पाया है? जानकारी देवें। (ख) लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी द्वारा नवीन पेयजल योजना एवं रेट्रोफिटिंग योजना जो वर्ष 2020 से 2023 तक दी गई है, उसे क्‍या जल समूह के अंतर्गत समाहित कर पेयजल उस ही नियम के तहत उपलब्ध कराया जावेगा? (ग) सुवासरा विधानसभा क्षेत्र के नवीन एवं रेट्रोफिटिंग कितने ग्रामों एवं पंचायतों में संचालित हो रही है एवं जल समूह का कार्य कितने ग्राम एवं पंचायत में कार्य किया जा रहा है? जानकारी देवें। (घ) जल समूह योजना के तहत जल जीवन मिशन कार्य योजना में कितने ग्राम एवं पंचायत में कनेक्शन हेतु पाइप डालकर रोड मरम्मत का कार्य कर दिया गया है? ग्राम एवं पंचायत के नाम सहित जानकारी देवें।

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री ( श्रीमती संपतिया उइके ) : (क) गांधीसागर-1 समूह जलप्रदाय योजना के तहत् जल जीवन मिशन अंतर्गत सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में 208 ग्रामों एवं इन ग्रामों के सभी खेडे, मजरे, टोले, आबादी में पाइप-लाइन बिछाने संबंधित कार्य प्रगतिरत है। ग्रामों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है, शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता है। (ख) जी हाँ। बल्क वॉटर सप्लाई ग्रामों में गांधीसागर-1 समूह जल प्रदाय योजना से एक निश्चित स्थान पर बल्क मात्रा में पेयजल प्रदाय किया जावेगा। (ग) नवीन एवं रैट्रोफिटिंग नल-जल प्रदाय योजनाएं 71 ग्राम पंचायतों के 84 ग्रामों में क्रियान्वित हो रही है। जल निगम द्वारा गांधीसागर-1 समूह जलप्रदाय योजना अंतर्गत सुवासरा विधानसभा क्षेत्र की 111 ग्राम पंचायतों के 208 ग्रामों में कार्य किया जा रहा है, शेष 84 ग्रामों में बल्क सप्लाई द्वारा एक निश्चित स्थान पर बल्क मात्रा में पेयजल प्रदाय किया जायेगा। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।

 

श्री हरदीप सिंह डंग -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मेरा यही प्रश्‍न है जो अभी सतीश जी ने रिपेयरिंग की बात कही, तो इसमें मैंने पूछा था कि कौन से मजरे-टोले बाकी हैं, कौन-सी बस्‍ती बाकी हैं जहां पर यह पाइपलाइन नहीं डाली गई हैं तो इसमें लिखा है कि कार्य प्रगति पर है और यहां पर आपने सीबीटी कटिंग की जो जानकारी दी है, उसमें जीरो-जीरो मतलब कार्य प्रारम्‍भ नहीं हुआ है तो जहां पर बाकी हैं, वहां पर प्रारम्‍भ कर दें. क्‍योंकि सरकार का कहना है कि हर घर में नल पहुंचना चाहिए और जो कटिंग है, वह भी रिपेयर करवा दें. यह तो पहला प्रश्‍न था, आप इसका उत्‍तर दे दीजिएगा. महत्‍वपूर्ण बात यह है कि अभी मैंने 2-3 साल पहले जो योजनाएं यहां से अपनी सरकार में ही पास कराई थीं, उसके काम हो चुके हैं. पी.एच.ई. ने जो काम कराये हैं एक जो जल मिशन कर रहा है. इसमें पी.एच.ई.बोलती है कि हमारा काम खत्म हो गया है. पी.एच.ई.ने जो काम कराये हैं उसमें कई मौहल्ले बाकी रह गये हैं. वहां पर पूरे गांव में पानी नहीं आ पा रहा है. जल समूह वाले बोल रहे हैं कि जो पी.एच.ई ने जो काम कराये हैं उसमें हम लोग काम नहीं करायेंगे. हम केवल वॉटर सप्लाई करेंगे. अगर जल समूह वाले सिर्फ पानी देंगे तो ठीक है. पर जिन मौहल्लों में पाईप लाईन पीएचई द्वारा बाकी रह गई है. जहां पर पाईप लाईन फूटी हुई है. मैंने उसको समाहित करने वाली बात जो बोली थी जल मिशन के तहत तो क्या पीएचई की जितनी भी लाईनें डली हैं उसको 10 साल की गारंटी जल समूह की है पानी देने की. जो पीएचई में काम हुए हैं उसमें कोई गारंटी नहीं है. तो क्या जल समूह इसको समाहित करके जो पीएचई के नये काम हुए हैं उसमें कंबाईन करके 10 साल की गारंटी और पानी पहुंचाने की गारंटी देंगे.

नेती प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)अध्यक्ष महोदय, इसमें मेरा भी एक सवाल है कि यह मुद्दा कई बार उठ चुका जल जीवन मिशन का उसमें माननीय पंचायत मंत्री जी ने कल कहा था कि सबूत हो तो बतायें. आपकी अनुमति होगी तो पूरे घोटाले के सबूत भी रख दूंगा. कल आपके वित्तमंत्री जी ने भी स्वीकार किया कि गड़बड़ी हुई है जलजीवन मिशन में. इसमें स्पष्ट जांच होना चाहिये. यह हर विधायक से जुड़ा हुआ मामला है. चाहे सत्तापक्ष के हों अथवा पक्ष के हों इसमें मैं चाहता हूं कि अध्यक्ष महोदय, आपकी तरफ से एक व्यवस्था हो.

श्री कैलाश विजयवर्गीयअध्यक्ष महोदय, माननीय डंग जी ने जो चिन्ता प्रकट की यह सारी समस्याओं का निराकरण जिले में ही हो जाना चाहिये. यह विधान सभा में आना ही नहीं चाहिये. क्योंकि जिला कलेक्टर, जिला पंचायत, सीईओ के द्वारा वहां पर एक कमेटी है जिला जल एवं स्वच्छता समिति जिसकी बैठक प्रति माह बुलानी चाहिये. शायद उसकी बैठक नहीं हो रही है. मैं आज ही निर्देश दूंगा कि प्रत्येक जिले के अंदर जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक हो उसमें आप लोगों को बुलाया जाये. आपको बुलाकर आपकी क्या समस्या है ? वहां पर चर्चा करें उसके बाद ही यदि कोई समस्या बाकी रह जाये तो निश्चित रूप से करेंगे. दूसरा आपने कहा कि पीएचई ने भी काम किया है. आपके पीएचई के जो भी काम अधूरे हैं वह भी जल मिशन को बता दीजियेगा. माननीय प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री जी का सपना है कि प्रदेश के अंदर एक भी घर ऐसा नहीं होना चाहिये जहां पर स्वच्छ जल नहीं पहुंचे. आपकी विधान सभा में एक भी ऐसा मकान नहीं होगा जहां पर नल जल योजना नहीं पहुंचेगी, यह आपसे वायदा करता हूं. उसके बाद भी कोई परेशानी होगी तो भी आप आईयेगा. क्योंकि यह प्रधानमंत्री जी का सपना है इसको पूरा करना हमारा दायित्व है.

श्री हरदीप सिंह डंग अध्यक्ष महोदय,माननीय मंत्री जी का धन्यवाद.

श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी आप एक जिले अथवा सभी जिलों के लिये यह व्यवस्था दे रहे हैं. थोड़ा स्पष्ट करिये.

श्री कैलाश विजयवर्गीयअध्यक्ष महोदय,आप थोड़ा सा यहीं पर रहा करें. आप बैठते यहां पर हैं और रहते कहीं और हैं. मैंने सभी जिलों के लिये बोला है.

श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय,आप हमारे सम्मानीय हैं. आप जिस प्रकार की बात करते हैं, यह बड़ी ही निम्न स्तर की बात करी तो चुन्नू-मुन्नू कहां पर काटेंगे आपको पता भी नहीं चलेगा. धन्यवाद.

श्री कैलाश विजयवर्गीयअध्यक्ष महोदय,मैं इसका डॉक्टर हूं. अभी तुम मेरे सामने बच्चे हो.

श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय,चीता भी छोटा ही होता है.

श्री भेरोसिंह शेखावतअध्यक्ष महोदय, यह बड़ा ही गंभीर विषय है. यह पीएचई की बात माननीय कैलाश जी ने की बहुत अच्छी बात है.

श्री कैलाश विजयवर्गीयअध्यक्ष महोदय,भंवर सिंह जी आ गये क्या ?

श्री भेरोसिंह शेखावतअध्यक्ष महोदय,जी हां. अध्यक्ष महोदय, यह एक विधायक की समस्या नहीं है. डंग जी ने जो मामला उठाय है, बहुत ही महत्वपूर्ण मामला है. आदरणीय कैलाश जी आपने बताया है कि माननीय प्रधानमंत्री जी का जो सपना है. पूरे नल जल की योजना गरीब तथा अमीर तक मिल जाये, गांव अथवा पंचायत में भी मिल जाये. लेकिन माननीय कैलाश जी आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि यह पीएचई की नल जल योजना घर घर में नल की थी इस बारे में सारे विधायकों को बुलाकर आप उनसे जानकारी ले लीजिये. आपकी जानकारी में आयेगा कि जिस एजेंसी ने जो काम किया है एक एक गांव की सारी की सारी सड़कें खोद दी हैं. कहीं ऊपर तो कहीं पर नीचे पाईप डाले गये एक भी टंकी से पाईप पूरे धार जिले के अंदर सही नहीं डाले. मैंने कलेक्टर जी ने पूछा कि आप बतायें एक भी पंचायत के अंदर इस योजना का पानी मिल रहा है. इन योजनाओं में भारी भ्रष्टाचार हुआ माननीय कैलाश जी इसकी आप जांच कराईये. यह सब विधायकों की पीड़ा है.

अध्‍यक्ष महोदय - भवर सिंह जी, हरदीप सिंह जी का प्रश्‍न आगे बढ़ने दीजिए.

श्री भवर सिंह शेखावत - प्रश्‍न तो आप आगे बढ़ाएंगे ही, मेरा ये निवेदन है कि इसमें भारी भ्रष्‍टाचार हुआ है नल योजना के माध्‍यम से, ये कहीं सक्‍सेस नहीं हुआ है, ठेकेदार पैसे लेकर भाग चुका है.

अध्‍यक्ष महोदय - कृपया बैठ जाइए.

श्री हरदीप सिंह डंग - अध्‍यक्ष जी, आरोप की जगह मेरा सुझाव है. जब मेरी संबंधितों से बात हुई तो पीएचई और जल निगम में जो अंतर आ रहा है, वह पीएचई की गारंटी लेने को तैयार नहीं है, जो नई लाइन डाली गई है और जल समूह वाले 10 साल की गारंटी दे रहे हैं. मेरा मानना है कि आप प्रदेश स्‍तर की मीटिंग करके जो पीएचई की नई लाइन डाली है जैसे जल समूह वाले 10 साल की गारंटी अपनी लाइन की दे रहे हैं, ऐसे ही जब वह समाहित तो पीएचई की गारंटी भी दस साल की रहे इस योजना के साथ, नहीं तो पीएचई दो हिस्‍सों में बंट जाएगा और पीएचई का अस्तित्‍व धीरे धीरे खत्‍म हो रहा है जल समूह पूरी जगह जा रहा है तो 10 साल की गारंटी पीएचई वालों की भी रहे.

श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्‍यक्ष जी, इनके सुझाव पर विचार जरुर करेंगे.

 

 

 

 

प्रधानमंत्री जल जीवन मिशन

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

5. ( *क्र. 1681 ) डॉ. प्रभुराम चौधरी : क्या लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) विधानसभा क्षेत्र सांची में प्रधानमंत्री जल जीवन मिशन के अंतर्गत कुल कितने ग्राम स्वीकृत हैं? सूची उपलब्ध करायें। (ख) सांची विधानसभा क्षेत्र में उक्त योजनांतर्गत स्वीकृत ग्रामों में से कितने ग्रामों का कार्य पूर्ण हो चुका है? यदि हाँ, तो सूची उपलब्ध करायें? यदि नहीं, तो कार्य अपूर्ण होने की स्थिति में कारण सहित ग्रामवार, पंचायतवार, विकासखण्डवार जानकारी देवें। (ग) क्या सांची विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आगामी वित्तीय वर्षों में नल-जल योजना स्वीकृत की जावेगी? उन ग्रामों की सूची उपलब्ध करावें।

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री ( श्रीमती संपतिया उइके ) : (क) एकल ग्राम नल-जल योजनाओं के अंतर्गत 226 ग्रामों के लिए योजनाएं स्वीकृत हैं एवं जल निगम द्वारा क्रियान्‍वयन हेतु विभिन्न स्वीकृत समूह जल प्रदाय योजनाओं में 369 ग्राम सम्मिलित हैं। 226 ग्रामों के लिए स्‍वीकृत एकल ग्राम नल-जल योजनाओं के अंतर्गत 222 ग्रामों में स्‍वीकृत समूह जल प्रदाय योजनाओं से बल्‍क वॉटर प्रदाय किया जाना प्रावधानित है। सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 01 एवं 02 अनुसार है। (ख) एकल ग्राम नल-जल योजनाओं के अंतर्गत 96 ग्रामों एवं जल निगम द्वारा क्रियान्वित बैगमगंज-गैरतगंज समूह जल प्रदाय योजना अंतर्गत 49 ग्रामों में कार्य पूर्ण हो गया हैसूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 03 एवं 04 अनुसार है। अपूर्ण योजनाओं की सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 02 एवं 03 अनुसार है। (ग) सभी ग्रामों के लिए नल-जल योजनाएं स्वीकृत हैं। अतः शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

डॉ. प्रभुराम चौधरी - अध्‍यक्ष जी, सबसे पहले तो मैं प्रधानमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि उन्‍होंने जल जीवन जैसी योजना बनाई, जिससे देश प्रदेश के एक एक घर तक टोंटी द्वारा पानी पहुंचा. मध्‍यप्रदेश सरकार को भी धन्‍यवाद देना चाहूंगा क्‍योंकि जो योजना बनाई उसमें आधा पैसा राज्‍य सरकार, मध्‍यप्रदेश की सरकार दे रही है. माननीय मंत्री जी को भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि मैंने जो प्रश्‍न किया, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में मंत्री जी ने बताया कि सांची विधान सभा क्षेत्र के प्रत्‍येक गांव को जल जीवन मिशन और एकल योजना में जोड़ दिया, इसके लिए भी धन्‍यवाद देना चाहता हूं.

अध्‍यक्ष जी, मंत्री जी ने जवाब दिया है कि 226 एकल योजनाएं सांची विधान सभा में स्‍वीकृत हैं. मैंने इसमें पूछा था कि पूर्ण कितनी और अपूर्ण कितनी है. इसमें जवाब आया कि 96 पूर्ण, बाकी सभी में समस्‍याएं हैं, उसमें परिशिष्‍ट में आपने बताया है. सामूहिक नल जल योजना के बारे में आपने बताया कि 369 गांवों में सामुहिक नल जल योजना स्‍वीकृत है, उसमें  49 सेमरी जलाशय से, 25 हलाली से, बाकी बारना डैम से. मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि जो एकल नल जल योजनाएं घोषित हैं, जिसमें 96 पूर्ण बताई और जो अपूर्ण बताई है, उनका टाइम निकल गया है, ठेकदार काम नहीं कर रहे या टंकी नहीं बन पा रही है, या बिजली की समस्‍या है, उसमें भी डिले हो रहा है. दूसरा जो 96 पूर्ण बताई है, उसमें बहुत सारी आधी से ज्‍यादा ठीक चल रही है, उसके लिए धन्‍यवाद. लेकिन जो नहीं चल पा रही है या तो खोद दिए हैं या फिर आधे गांव में लाइन डाली है, एससी-एसटी के मोहल्‍ले छोड़ दिए हैं, बेचारे जब हम गांव में दौरे पर जाते हैं तो कहते हैं कि साहब योजना तो चालू हो गई है, लेकिन हमारे यहां तक आ नहीं पा रही है. कई जगहों पर वाटर का सोर्स नहीं है योजना खड़ी हुई है, कई जगह टंकी नहीं बनी, बनी तो पानी नहीं चढ़ पा रहा है, इसमें ये समस्‍या है. प्रधान मंत्री जी, मुख्‍यमंत्री जी एवं विभाग की मंशा अच्‍छी है, लेकिन इन योजनाओं में दिक्‍कत आ रही है. एकल योजना की बात कर रहा हूं और सामूहिक जल योजना की जो बात है 49 योजना जो सेमरी से बताए गए ट्रायल पर चल रही है, वैसे ही दो साल डिले हो गए, कोरोना के पहले इस योजना को पूर्ण होना चाहिए था. मैंने भी अधिकारियों से एक दो बार बात की मेरे पास कई गांव के नाम है, इन गांवों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है, अधिकारियों से बात करो तो वे कहते हैं पानी पहुंच रहा है, आधे गांव में पानी पहुंच रहा है, हाहाकार मची हुई है, जैसे ही हम जाते हैं, वे कहते हैं आपने योजना अच्‍छी बनाई लेकिन हमको पानी नहीं मिल पा रहा है तो ये 49 गांव है चाहे हरदौट हो, मेंगवा हो, कउला हो, टेकापार हो, गोरखा हो, करौला हो, चाहे महुंना हो, ऐसे चाहे हरदोट हो, चाहे समनापुर हो.

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रभुराम जी प्रश्‍न तो करो. आप सीनियर एम.एल.ए. हैं.

डॉ.प्रभुराम चौधरी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रश्‍न यह कर रहा हूं कि यह जो कम्‍पलीट बताई जा रही हैं, इनकी आप एक जांच करा लें. पूर्ण लोगों को पर्याप्‍त पानी इसके लिये मिले, एक कमेटी बना दें और उसकी जांच कराई जाये और जो अधूरी अभी बड़ी जो योजना हलाली से लगभग 295 गावों की स्‍वीकृति, एक साल उसका हो गया है, सिंतबर 2023 में उसकी स्‍वीकृति हुई थी. अभी मुझे पता चला है कि कुछ दिन पहले दूसरे विधानसभा में कहीं उनके पाईप डालने का भूमि पूजन हो गया है और विधानसभा में तो लोगों को पता ही नहीं है, विधायक को कुछ पता ही नहीं है, तो मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि इसकी पूरी जांच करायें और जहां पर जो नल जल योजनाओं के माध्‍यम से पानी नहीं पहुंच पा रहा है, इसमें कहा लापरवाही है, ठेकेदार और अधिकारी लोग कहां दिक्‍कत कर रहे हैं? इसकी पूरी जांच कराई जाये और उस जांच में अगर मुझे भी रख देंगे तो मैं भी वहां पर उपस्थित रहूंगा यही मेरा प्रश्‍न है.

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- अध्‍यक्ष महोदय, चौधरी साहब बहुत सीनियर एम.एल.ए. हैं और मैं पहले ही आपके माध्‍यम से सदन को अवगत करा चुका हूं कि जिला स्‍तर पर एक कमेटी है, पर उसकी बैठक नहीं हो रही है, आज हम सारे कलेक्‍टर्स को निर्देशित कर रहे हैं कि इस जिला एवं जल स्‍वच्‍छता समिति जिसमें कलेक्‍टर भी होते हैं, सी.ई.ओ. भी होते हैं और सारे जन प्रतिनिधि होते हैं, यह प्रत्‍येक माह में बैठें और बैठकर जो समस्‍या है, उसका निराकरण वहीं पर करें (मेजों की थपथपाहट) उसके बाद यदि कोई तकलीफ होगी तो निश्चित रूप से आप हमारे पास आयें, हम आपकी समस्‍या का निराकरण करेंगे. जहां तक आपने जांच का बोला है तो मैं किसी अधिकारी को आपके क्षेत्र में चीफ इंजीनियर को भेजूंगा और आपके साथ जहां-जहां जो समस्‍या है, वह आप बताईयेगा निश्चित रूप से हम आपकी समस्‍या का निराकरण करेंगे.

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार ) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पूरे प्रदेश की समस्‍या है, माननीय प्रभुराम चौधरी जी के क्षेत्र की नहीं, आप हर विधानसभा में भेजें. मेरा आपसे अनुरोध है कि यह पू्रे प्रदेश की समस्‍या है, चाहे आपके क्षेत्र के लोग हों, या इधर के हों, सबकी समस्‍या है.माननीय  अध्‍यक्ष महोदय, आप यह व्‍यवस्‍था करायें कि सभी दूर जांच हो जाये.

श्री रजनीश हरवंश सिंह -- पीएचई डिपार्टमेंट के द्वारा रोड खोद दी गई है. (व्‍यवधान.)

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय उमंग सिंघार जी कल भी आप लोग इस विषय पर बोले हो, आज भी अनुदान मांगों पर बोलने का अवसर मिलेगा. (व्‍यवधान.)

श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, आज फिर विषय वापस आया है, इस पर कुछ होना तो चाहिए, कल भी कौन सी व्‍यवस्‍था दी थी, कोई व्‍यवस्‍था नहीं दी गई थी, वित्‍तमंत्री जी की कोई बात नहीं की गई, गड़बड़ी है तो उसकी जांच पूरे प्रदेश की होना चाहिए .

अध्‍यक्ष महोदय -- अभी सदस्‍यों के लिये प्रश्‍न काल चल रहा है और मंत्री जी उत्‍तर दे रहे हैं, तो सदस्‍यों के अधिकार का संरक्षण होना चाहिए, आप लोगों को कभी भी बोलने का समय मिलता है.

श्री उमंग सिंघार -- इसमें माननीय मंत्री जी बता दें कि सभी जिलों की जांच करा लेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रभुराम जी आप बोलें.

डॉ.प्रभुराम चौधरी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि आपने जो व्‍यवस्‍था दी है कि हर जिले में जो समिति है, वह बैठक करेगी, तो यह बैठकें जैसे रायसेन जिले की हों, तो उसमें तो पूरे जिले की बात होगी, लेकिन पर्टिकुलर मैंने सांची विधानसभा क्षेत्र की समस्‍याएं आपके सामने49 गावों की रखी हैं, वह वहां पर ठीक नहीं है, एकल योजनाएं हैं, वह ठीक नहीं हैं, इसके लिये अगर आप पूरा निर्देशित करेंगे क्‍योंकि जल निगम के जितने भी अधिकारी हैं, जिले में तो रहते नहीं है, भोपाल में होते हैं, ठेकेदार को यही बुलाया यही बिल पास कर दिये.

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रभुराम जी कृपया बैठि̕ये, मंत्री जी ने आपके क्षेत्र में अलग से अधिकारी भेजकर जांच कराने की बात कह दी है.

डॉ.प्रभुराम चौधरी -- अध्‍यक्ष महोदय, आपको और माननीय मंत्री जी को भी धन्‍यवाद .

जिला चिकित्‍सालय खोला जाना

[पशुपालन एवं डेयरी]

6. ( *क्र. 1776 ) श्री श्रीकान्त चतुर्वेदी : क्या राज्‍य मंत्री (स्वत्रंत प्रभार), पशुपालन एवं डेयरी महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नवगठित जिला मैहर के समुचित विकास की दृष्टि से किसानों के व्यावसायिक अंग पशुपालन के स्‍वास्‍थ्‍य उपचार एवं संवर्धन हेतु क्या निकट भविष्य में पशु जिला चिकित्‍सालय खुलवाये जाने की योजना शासन द्वारा बनायी गयी है? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार यदि हाँ, तो कब तक पशु जिला चिकित्सालय मैहर में खोला जावेगा? समयावधि बतायी जावे। यदि नहीं, तो क्यों?

राज्‍य मंत्री (स्वत्रंत प्रभार), पशुपालन एवं डेयरी ( श्री लखन पटैल ) : (क) जी नहीं। पूर्व से ही मैहर में पशु चिकित्‍सालय संचालित है। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्री श्रीकान्त चतुर्वेदी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे एक निवेदन करना चाहूंगा कि मेरा क्षेत्र मैहर, अब जिले के रूप में अस्तित्‍व में आ गया है और अभी व्‍यवस्‍थाएं जिले के रूप में नहीं हो पा रही हैं. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि क्‍या मैहर पशु जिला चिकित्‍सालय के रूप में अस्तित्‍व में कब आ रहा है, आ रहा है तो कृपया समय सीमा बतायें?

श्री लखन पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैहर नया जिला बना है, मैहर के साथ साथ पांढुर्ना और मउगंज यह भी नये जिले बने हैं, माननीय विधायक जी ने जो कहा है कि पशु जिला चिकित्‍सालय बनाने का तो कलेक्‍टर को इसका प्रस्‍ताव बनाकर भेज दिया गया कि वह इसका एस्‍टीमेट बनाकर यहां भेज दें तो उसकी स्‍वीकृति कर दी जायेगी. जहां तक जिला अस्‍पताल खोलने का प्रश्‍न है तो संचालित अभी विकासखंड मुख्‍यालय था, तो वह संचालित था, उसको अपग्रेड कर रहे हैं उप संचालक की पदस्‍थापना कर दी गई है और सिविल सर्जन की भी पदस्‍थापना कर दी गई है.

अध्‍यक्ष महोदय-- श्रीकांत जी, दूसरा पूरक प्रश्‍न.

श्री श्रीकांत चतुर्वेदी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे प्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री जी की मंशा है कि हमारे प्रदेश में उसी में मैहर जिला भी है कि कोई भी जानवर बाहर न जाये और जिनको रोड पर कोई भी चोट लगती है तो उनका तुरंत उपचार हो जाये, इसी की मंशा अनुसार मैंने प्रश्‍न किया था. माननीय मंत्री जी ने जो जवाब दिया मैं उससे संतुष्‍ट हूं और आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं कि बहुत ही जल्‍दी मेरे यहां जिला चिकित्‍सालय खुल जायेगा.

प्रश्‍न संख्‍या-7 (अनुपस्थित)

प्रश्‍न संख्‍या-8 (अनुपस्थित)

स्‍कूल एवं आंगनवाड़ियों में पेयजल व्‍यवस्‍था

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

9. ( *क्र. 1321 ) श्री रमेश प्रसाद खटीक : क्या लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या शिवपुरी जिले के करैरा विधान सभा क्षेत्र 23 के अंतर्गत जल जीवन मिशन के तहत करैरा-नरवर की तहसीलों से स्‍कूल, आंगनवाड़ी में पेयजल व्‍यवस्‍था हेतु विभाग द्वारा टेण्‍डर स्‍वीकृत होकर उक्‍त फर्म के द्वारा किये गये कार्यों की जानकारी प्रश्‍नकर्ता के पत्र क्र. MLA/211, 20.05.2024 को किये गये कार्यों की संपूर्ण जानकारी कार्यपालन यंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रि‍की विभाग, संभाग शिवपुरी से 7 दिवस में मांगी थी, परन्‍तु आज दिनांक तक उक्‍त जानकारी नहीं दी गई? क्‍यों नहीं दी गई? (ख) आंगनवाड़ी व स्‍कूलों में स्‍वीकृत टेंडर की कुल लागत व किस फर्म का टेण्‍डर स्‍वीकृत हुआ था एवं फर्म द्वारा कुल कितने स्‍कूलों एवं आंगनवाड़ियों में क्‍या-क्‍या कार्य किये गये थे? उक्‍त कार्यों का नाम व स्‍थान सहित जानकारी उपलब्‍ध करायें। (ग) टेण्‍डर अनुसार इले‍क्ट्रिक मोटर पम्‍प, जी.आई पाइप, एच.डी.पी. पाइप की टी.पी.आई. रिपोर्ट व टेण्‍डर अनुसार पाइप-मोटर डाले गये? उसकी लम्‍बाई तथा कितने नवीन बोर उत्‍खनन किये गये? कहां-कहां संपूर्ण जानकारी उपलब्‍ध करायें।

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री ( श्रीमती संपतिया उइके ) : (क) कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, खण्ड शिवपुरी के पत्र क्रमांक 1732, दिनांक 13.06.2024 से जानकारी उपलब्ध कराई गई है। शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता है। (ख) लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी उपखंड करैरा क्षेत्रांतर्गत आंगनवाड़ी व स्कूलों में पेयजल व्‍यवस्‍था हेतु स्वीकृत टेण्डर की कुल लागत रुपये 954.00 लाख है, टेण्‍डर मेसर्स जैन एण्ड सन्स करैरा का स्वीकृत हुआ था। इस टेंडर के अंतर्गत उक्‍त फर्म द्वारा करैरा विधानसभा क्षेत्रांतर्गत 432 स्कूलों व 250 आंगनवाड़ियों में कार्य किये गये हैं। किये गये कार्यों का नाम व स्थान सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।

श्री रमेश प्रसाद खटीक-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको कल के बजट के लिये धन्‍यवाद देता हूं, देवड़ा जी को भी और हमारे सम्‍मानीय मुख्‍यमंत्री जी को भी. मेरा प्रश्‍न है कि मैंने जो मांग की थी जल जीवन मिशन में आंगनबाड़ी स्‍कूलों के लिये जो टेण्‍डर हुये थे, बच्‍चों को जल पिलाने के लिये उसमें इन्‍होंने जो मोटर डाली है और जो टंकी बनाई है वह बिलकुल निम्‍न स्‍तर की है और उसकी जांच होना चाहिये और दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही होना चाहिये, यह मेरी मांग है. क्‍योंकि 500-600 करीबन स्‍कूल और आंगनबाड़ी की टंकी हैं. हजारों की तादाद में बच्‍चों के भविष्‍य की बात है, बच्‍चों को पानी मिलना चाहिये. अभी तक इनकी 80 प्रतिशत भी जल योजना नहीं चल रही है, लेकिन इन्‍होंने बता दिया कि हमारी योजना चल रही है तो यह बतायें कि योजना चल रही है और नहीं चल रही है तो क्‍यों. टंकी जो बनाई है वह निम्‍नस्‍तर की है और जो मोटर डाली है वह अमानक है, आईएसआई की मोटर नहीं डाली है, लोकल मोटर डाली है. इसलिये वह सारी की सारी बंद हैं तो इसकी जांच भी करायें.

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी को मैं आश्‍वस्‍त करता हूं कि जितने भी आंगनबाड़ी हैं, विद्यालय हैं जो इसमें तय हैं उनके अंदर निश्चित रूप से पानी पहुंचेगा. जहां तक उन्‍होंने अमानक स्‍तर के कार्य की बात कही है तो मैं उसको दिखवा लूंगा और हमारी भोपाल की टीम से कहूंगा कि एक अधिकारी वहां जाकर देखे और माननीय विधायक जी से संपर्क करके और कहां-कहां ऐसा लगता है इनको कि अमानक काम हुआ है, वहां यह बता देंगे तो हम कार्यवाही भी कर देंगे.

श्री रमेश प्रसाद खटीक-- धन्‍यवाद सर.

श्री दिनेश जैन बोस-- अध्‍यक्ष महोदय मैं एक प्रश्‍न पूछना चाहता हूं कि जो टंकी बन रही है पाइप लाइन बिछ रही हैं यह ठेकेदार सब ठेकेदार को दे देते हैं. मॉनीटरिंग करने के लिये केवल एक एसडीओ रहता है. मैं एक बहुत महत्‍वपूर्ण बात बता रहा हूं केवल एक एसडीओ रहता है और पूरी मॉनीटरिंग करता है. ठेकेदार सब ठेकेदार को दे देता है इस तरह से टंकी बनती नहीं है और चूने लगती है और जो ठेकेदार आते हैं यह बीच के यह खराब कर देते हैं हमारे खरंजे वगैरह रहते हैं उसके बाद वह उसको पूरते भी नहीं हैं. पहले ही तो हमको पंचायत में बहुत कम पैसा मिलता है और वह रोड वगैरह होते हैं वह भी खराब हो जाते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- ठीक है दिनेश जी. कालूसिंह जी.

जल जीवन मिशन

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

10. ( *क्र. 1388 ) श्री कालु सिंह ठाकुर : क्या लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) विधानसभा क्षेत्र धरमपुरी में जल जीवन मिशन अंतर्गत किन-किन ग्रामों में प्रश्‍न दिनांक तक किस फर्म/कम्पनी/ठेकेदार द्वारा कार्य किये गए हैं? प्राक्कलन लागत सहित जानकारी देवें। (ख) क्या जिन ग्रामों में पानी की टंकि‍या बनाई हैं, पाइप लाइन बिछाई गई हैं, वहां सी.सी. रोड को खोदा गया है और खोदने के पश्चात उन्हें सही तरीके से रिपेयर नहीं किया गया है? (ग) क्‍या लाखों रुपए की लागत से बने ग्रामीण क्षेत्रों में सी.सी. रोड का भारी नुकसान ठेकेदारों की लापरवाही से हुआ है? संचालित कार्यों का निरीक्षण किन-किन स्थानीय और उच्च अधिकारियों द्वारा किस पैमाने के आधार पर किया गया है? यदि सी.सी. रोड नहीं सुधरे तो क्या निर्देश नोटिस दिए गए हैं? (घ) जिन ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य पूर्ण होकर पेयजल उपलब्ध हो रहा है, वहां की पंचायत की सहमति, हैंडओवर करने संबंधी जानकारी देवें और संचालित योजनाओं के मेंटेनेंस का कार्य कब तक किस के द्वारा किया जायेगा?

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री ( श्रीमती संपतिया उइके ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 01 एवं 02 अनुसार है। (ख) जी हाँ, पाइप लाइन कार्य पूर्ण होने के उपरांत काटी गई सड़क की ट्रेंच को भरकर मार्ग को समतल/आवागमन योग्य बनाया जाता है एवं पाइप लाइन टेस्टिंग के उपरांत काटी गई सी.सी. रोड को पुनर्निर्माण/सुधार कर यथावत किया जाता है, शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी नहीं। संचालित कार्यों का निरीक्षण तृतीय पक्ष संस्था (टी.पी.आई.) के सदस्यों, विभागीय उपयंत्री, सहायक यंत्री के द्वारा समय-समय पर किया जाता है एवं उच्च अधिकारियों द्वारा निरीक्षण के समय मैदानी अधिकारियों को मापदंडानुसार गुणवत्तापूर्ण कार्य करने हेतु मौखिक रूप से स्थल पर निर्देश भी दिए जाते हैं। सी.सी. रोड का सुधार कार्य अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार संबंधित कार्य एजेंसियों द्वारा किया जा रहा है, अतः शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) एकल ग्राम नल-जल योजनाओं के कार्य पूर्ण कर तीन माह तक योजना का ट्रायल रन संबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा किये जाने के पश्‍चात संबंधित ग्राम पंचायत की सहमति अनुसार संधारण-संचालन के लिए हस्तांतरण किए जाने का प्रावधान है। समूह जल प्रदाय योजनाओं के अनुबंध में योजना पूर्ण होने के उपरांत 10 वर्ष तक योजना का संचालन-संधारण ठेकेदार द्वारा किए जाने का प्रावधान है।

श्री कालूसिंह ठाकुर-- अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद. मेरा प्रश्‍न जानकारी तो बहुत सारी मांगी थी, मैं ज्‍यादा कुछ नहीं बोलना चाह रहा पर मेरा आपके माध्‍यम से आग्रह है, पूरी विधान सभा की जानकारी मांगी थी, क्‍या स्थिति है लेकिन मैं पिछली बार विधायक था उस समय के स्‍वीकृत थे और टेण्‍डर लगाकर भूमिपूजन कर उनको चालू किया था लेकिन दूसरी बार फिर विधायक बनकर आया आज तक पूर्ण नहीं हुआ है साहब 10 साल हो गये. मंत्री जी से आग्रह है कि कब तक पूर्ण होंगे और किस कारण यह विलंब हुआ 10 साल में पूर्ण नहीं हुआ.

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - अध्यक्ष महोदय, आज मैं संयोग से आज इस विभाग का उत्तर दे रहा हूं. मैं अधिकारियों के साथ बैठा था मैं देख रहा था कि काफी योजनाओं में विलंब हुआ है. बीच में कोरोना काल के कारण काफी योजनाएं अपनी समय-सीमा में पूरी नहीं हुईं. अब काम तेज गति से चल रहा है. मुझे लगता है कि कालू सिंह जी की विधान सभा की जितनी भी योजनाएं हैं वे जल्दी से जल्दी समाप्त हो जाएंगी यह मैं उनको प्रामिस करता हूं और उन्होंने मुझसे पर्सनल भी कहा था. ये बगड़ी-सुलीबियाड़ी के बारे में, मैंने निर्देश दे दिये हैं. वहां सब जगह शीघ्र योजनाएं पूरी करके प्रत्येक घर में जल पहुंचाने का काम हो जायेगा.

श्री कालु सिंह ठाकुर - आपको बहुत-बहुत धन्यवाद. और एक आग्रह है कि यह योजना की राशि भी स्वीकृत हो गई है. हमारी सरकार बहुत अच्छा काम कर रही है. आपने देखा होगा पूर्व विधायक पांचीलाल मेड़ा जी द्वारा जब 15 महिने की सरकार में अधिकारियों पर धौंस बनाकर इनके ठेकेदार कई तो चले गये इसी कारण यह योजना पिछड़ रही है. आग्रह है कि यह योजना जल्दी पूर्ण हो.

अध्यक्ष महोदय - कालु सिंह जी धन्यवाद के बाद क्या होता है.

श्री कालूसिंह ठाकुर - चर्चा करनी थी कि इस कारण यह हुआ.

अध्यक्ष महोदय  - कृपया बैठ जाईये.

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) - अध्यक्ष महोदय, मेरा आपसे पुन: अनुरोध है आपके माध्यम से मंत्री जी से कि यह पूरे प्रदेश का मामला है. आपके सत्ता पक्ष के ही विधायक उठा रहे हैं. इतने प्रश्न लगे. इसमें विभाग क्या कर रहा है. 200-300 करोड़ के एक-एक विधान सभा में घोटाले हुए इस पर जांच बड़े स्तर पर क्यों नहीं होती. अध्यक्ष महोदय, इस पर आप चाहें तो आसंदी से निर्देश दे सकते हैं.

अध्यक्ष महोदय - अभी प्रश्नकाल चल रहा है. अभी आप कृपया बैठिये.

श्री उमंग सिंघार - इसी प्रश्न से उद्भूत हो रहा है. इतने सारे लोग बोल रहे हैं. पूरे प्रदेश के विधायक बोल रहे हैं. (XXX)

श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष महोदय, यह सारा रिकार्ड से निकलवाना चाहिये.

 

11.38 बजे बर्हिगमन

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा सदन से बर्हिगमन

नेता प्रतिपक्ष(श्री उमंग सिंघार) - सरकार जांच नहीं कराना चाहती है इसके विरोध में हम सदन से बर्हिगमन करते हैं.

(श्री उमंग सिंघार,नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा जांच न कराये जाने एवं शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बर्हिगमन किया गया.)

श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष महोदय, प्रश्नकाल में इस प्रकार आरोप लगाना. मैं समझता हूं कि नेता प्रतिपक्ष को थोड़ा गंभीर होना चाहिये. मेरा निवेदन है कि इस प्रकार एकदम आरोप लगा देना यह तो ठीक नहीं है इसको रिकार्ड से निकाला जाये.

अध्यक्ष महोदय - - अध्यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि जब प्रश्नकाल चले तो सदन में वरिष्ठ लोग हैं जिनको समय-समय पर अवसर मिलता रहता है. जिनके विशेषाधिकार भी हैं उनको बीच-बीच में टोकाटाकी नहीं करना चाहिये और प्रश्नकाल इसलिये होता है कि सदस्य की समस्या के निराकरण की दिशा निश्चित हो जाये और मैं समझता हूं कि प्रश्नकाल ठीक चल रहा था. मंत्री जी उत्तर दे रहे थे और ऐसे समय में आरोप-प्रत्यारोप करके प्रश्नकाल में व्यवधान पैदा करना उचित नहीं है और इसे कार्यवाही है से निकाला जाये.

 

 

 

11.39 बजे तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर (क्रमश:)

 

प्रश्न संख्या. 11 (xxx) कुंवर अभिजीत शाह (अनुपस्थित)

 

प्रदूषण नियंत्रण हेतु मापदण्‍डों का पालन

[पर्यावरण]

12. ( *क्र. 665 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रतलाम जिला अंतर्गत प्रदूषण नियंत्रण हेतु किस-किस प्रकार की फेक्ट्री, इकाइयों खनिज उत्खनन, शासकीय, अशासकीय चिकित्सालय, नर्सिंग होम, नगरीय निकाय की कचरा संग्रहण स्थल (ट्रेचिंग ग्राउंड) इत्यादि प्रकार की क्या कोई और भी वातावरण प्रदूषित करने वाले संस्थान किस-किस प्रकार के चिन्हित किए गए हैं? (ख) किन-किन वर्षों में उपरोक्तानुसार वातावरण को प्रदूषित करने वाली इकाइयां अथवा स्थल चिन्हित किए जा कर, इन्हें वातावरण को प्रदूषण से मुक्त किए जाने हेतु आदेशित/निर्देशित किस-किस दिनांक को किया जाता रहा है? (ग) जिले में वर्ष 2019-20 से लेकर प्रश्‍न दिनांक तक वातावरण को प्रदूषण मुक्त रखे जाने हेतु उपरोक्तानुसार प्रश्‍नों में उल्लेखित आने वाली इकाइयों अथवा कोई अन्य भी जो इस परिधि में आते हैं, ऐसे प्रदूषण फैलाने वाले स्थलों का निरीक्षण कब-कब किस के द्वारा किया जाकर क्या कार्यवाही की गई ? (घ) रतलाम जिला अंतर्गत आने वाले समस्त विकासखंडों के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण निर्धारित मानक क्या रहा तथा प्रदूषण फैलाने वाले उल्लेखित स्थलों पर प्रदूषण नियंत्रण किए जाने हेतु केंद्र/राज्य के मानक अनुसार जो मापदंड निर्धारित हैं, इस निर्धारित मापदंड के अनुसार किस-किस ने समुचित प्रबंधन किए? किस-किस ने समुचित प्रबंधन नहीं किए? उनके विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई?

वन मंत्री ( श्री नागर सिंह चौहान ) : (क) से (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट कॉलम 2, 3, 4, 5, 6 एवं 7 अनुसार है। (घ) वर्ष 2023-24 में रतलाम जिला अंतर्गत जिला मुख्‍यालय पर परिवेशीय वायु गुणवत्‍ता का मानक 'औसत' (मोडरेट) स्‍तर का रहा तथा जिले में प्रवाहित 05 नदियों के 07 बिन्‍दुओं पर मापी गई जल की गुणवत्‍ता '' 'बी' श्रेणी की पाई गई। पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के कॉलम-2 में उल्‍लेखित उद्योगों/संस्‍थाओं में से जिनके द्वारा उपरोक्‍त मानकों का पालन नहीं किया गया, उनके विरूद्ध की गई कार्यवाही का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के कॉलम-8 अनुसार है।

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय -  अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि रतलाम जिले में लगातार वायु प्रदूषण के साथ-साथ जल प्रदूषण भी बढ़ता जा रहा है और जिन-जिन स्थानों में इस तरह का प्रदूषण बढ़ रहा है उन स्थानों पर समुचित प्रबंधन नहीं किये जा रहे हैं और उसके कारण वायु प्रदूषण के साथ-साथ रतलाम जिले में जल में नाइट्रेट की जो मात्रा है वह बढ़ती जा रही है. बहुत अधिक हो गई है और भूजल सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार 400 मिलीलीटर,प्रति लीटर तक यह मात्रा बढ़ गई है. तो एक ओर तो वायु भी प्रदूषित हो रही है और जल भी प्रदूषित हो रहा है. विगत समय में एक गंभीर घटनाक्रम भी हुआ था. अज्ञात बीमारियों के कारण कि हैंडपंप का प्रदूषित जल पीने के कारण,वह कारण ज्ञात,अज्ञात की श्रेणी में आया था लेकिन उस समय काफी चर्चा में आया था मंत्री जी कि वह प्रदूषित जल पीने से बच्चे पोलियोग्रस्त हो गये थे तो ऐसे स्थानों को क्या विभाग चिन्हित करता है और यदि चिन्हित करता है तो उसके समुचित प्रबंधन के क्या-क्या उपाय किये गये हैं. किये जायेंगे. यह मेरा पहला प्रश्न है.

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय जी बड़े सीनियर और बहुत गंभीर विधायक हैं. उन्‍होंने जिस प्रकार की समस्‍या बताई है तो मुझे इसकी जानकारी नहीं थी, प्रश्‍न में ऐसा था भी नहीं, पर इन्‍होंने जो जानकारी दी है, उसे मैं बहुत गंभीरता से लूंगा. कलेक्‍टर से भी हम लोग रिपोर्ट मंगाएंगे. इसमें पॉल्‍यूशन कंट्रोल बोर्ड को भी मैं निर्देश दूंगा कि वे अपने अधिकारियों को एक बार भेजकर कि यदि पानी के अंदर इस प्रकार का प्रदूषण हो रहा है तो वे उसकी जांच करें, उसके कारणों की जांच करें और यदि उसमें कुछ उपाय की आवश्‍यकता होगी तो हम निश्‍चित रूप से करेंगे.

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय -- धन्‍यवाद माननीय मंत्री जी. लेकिन इसी के साथ-साथ आप और हम सभी भलीभांति परिचित हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी जो कचरा संग्रहण किया जाता है और नगरीय क्षेत्रों में भी जो कचरा संग्रहण किया जाता है, उसके कुछ विशेष स्‍थान हुआ करते हैं. वहां पर उसको डम्‍प कर दिया जाता है. डम्‍प करने के साथ अगर उसको उठाने की प्रक्रिया अगले 24 घण्‍टे में हो जाए तो बहुत बेहतर है, लेकिन कई स्‍थान माननीय मंत्री ऐसे रहते हैं कि जहां 15-15 दिन, 20-20 दिन, महीने-महीने भर तक कचरा उठाया नहीं जाता. उसके कारण कचरा सड़ता रहता है. वह सड़ान वायु प्रदूषण बढ़ाता है और इसके साथ में जमीन के भीतर वह रिसता जाता है और जल प्रदूषण भी होता है. ऐसे स्‍थानों को भी चिह्नित किया जाना चाहिए. इसी के साथ में निकायों के द्वारा जो कचरा प्रबंधन किया जाता है, बड़े महानगरों में निश्‍चित रूप से ट्रिटमेंट प्‍लांट लग रहे हैं, लेकिन रतलाम जिला अंतर्गत कोई ऐसे बड़े ट्रिटमेंट प्‍लांट नहीं लगाए गए हैं, नहीं लग सके हैं. जबकि निकायों को प्रदूषण विभाग के द्वारा नोटिस भी दिया गया है और उन पर क्षतिपूर्ति की राशि भी अधिरोपित की गई है. यह भी विगत वर्षों में की गई है. मेरा आग्रह यह है कि जो ट्रेचिंग ग्राउंड बनाए जाते हैं, वहां आसपास में रहवासी इलाके भी होते हैं. उसके कारण गंभीर बीमारियां और अज्ञात बीमारियां बढ़ती हैं तो ट्रेचिंग ग्राउंड का सबसे पहले प्रबंधन किस प्रकार से किया जाएगा, मेरे ही विधान सभा क्षेत्र में लगे हुए हैं और मेरी विधान सभा में भी तहसील जावरा अंतर्गत एक ग्राम सादाखेड़ी है, और एक पिपलौदा नगर परिषद् के अंतर्गत है. वहां पर आस-पास बहुत खराब और दूषित वातावरण हो गया क्‍योंकि उस कचरा संग्रहण के साथ-साथ उन नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में जो मवेशी मर जाते हैं, पशु मर जाते हैं, उनको भी वहीं पर डाल दिया जाता है. अब आप कल्‍पना कर सकते हैं कि वहां पर आस-पास क्‍या स्‍थिति होती होगी तो क्‍या सादाखेड़ी, पिपलौदा और रतलाम जिले में भी अन्‍य ऐसे स्‍थान हैं तो वहां पर ट्रिटमेंट प्‍लांट बनाए जाने के लिए आप आदेशित करेंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रतलाम शहर में उत्‍पन्‍न होने वाले सिवेज की मात्रा 4.8 एमएलडी है. रतलाम शहर के सिवेज के उपचार हेतु 1 एचटीपी क्षमता 21.5 एमएलडी स्‍थापित है. रतलाम शहर में सॉलिड वेस्‍ट 113 टन प्रतिदिन उत्‍पन्‍न होता है. रतलाम जिले में 9 नगरीय निकायों से उत्‍पन्‍न होने वाले सॉलिड वेस्‍ट की मात्रा 144 टन है. रतलाम जिले में नगरीय निकायों द्वारा सॉलिड वेस्‍ट की डोर-टू-डोर कलेक्‍शन की व्‍यवस्‍था भी की गई है तथापि अभी उसके डिस्‍पोजल की व्‍यवस्‍था पूरी नहीं है. आपने ग्रामीण क्षेत्र का भी कहा है. मैंने पहले ही आपके प्रश्‍न के उत्‍तर में कहा है कि मैं इसको गंभीरता से लूंगा. कलेक्‍टर से भी रिपोर्ट मंगाऊंगा और जितना भी सॉलिड वेस्‍ट है, उसके डिस्‍पोजल के लिए इंदौर में हम लोग इसका खाद बना रहे हैं और काफी अच्‍छा उसका रिसपांस भी है. इस प्रकार की कोई योजना वहां पर बन सकती है क्‍या, इसके बारे में हम लोग अधिकारियों को निर्देश देकर और उसकी संभावनाओं को तलाशेंगे और अगर होगा तो किस प्रकार हो सकता है, नगर-निगम करेगी या राज्‍य शासन से होगा. उसके बारे में कार्ययोजना बनाकर कार्यवाही करेंगे. पॉल्‍यूशन के प्रति सरकार बहुत गंभीर है और आपने जो दो-तीन बातें कीं, एयर पॉल्‍यूशन और वॉटर पॉल्‍यूशन दोनों हो रहा है. हम इसको गंभीरता से लेंगे और हमारे अधिकारियों की टीम यहां से भी भेजेंगे और जिला कलेक्‍टर से भी हम रिपोर्ट मंगाकर इस समस्‍या का निराकरण करेंगे.

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक अंतिम सुझाव है और आग्रह भी है. अंतिम प्रश्‍न है कि विभाग में निश्‍चित रूप से अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी होती है. जितने कार्य हैं, उतना बल नहीं होता है, लेकिन आग्रह है कि जो औद्योगिक इकाइयां हैं. खनिज इकाइयां हैं, निजी अस्‍पताल हैं, शासकीय अस्‍पताल हैं और यह ग्रामीण क्षेत्र के ग्राम पंचायत, नगर परिषद्, नगरपालिका और नगर निगम, तो एक बड़ा कार्य हो जाता है, वर्ष में एक बार या दो-तीन वर्षों में कभी एक बार निरीक्षण किया जाता है. मेरा आपसे आग्रह यह है कि प्रतिवर्ष या वर्ष में एक से अधिक बार ऐसे स्‍थानों को चिन्हित करते हुए उनके निरीक्षण किये जाने का आप निर्देश जारी करेंगे क्‍या ?

श्री कैलाश विजयवर्गीय - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसको हम बहुत गंभीरता से ले रहे हैं और इस पर जो विधायक जी चाहेंगे, उनके साथ बैठकर भी बात कर लेंगे.

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय - बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

प्रश्‍न क्रमांक 13 (अनुपस्थित)

नल-जल योजना के कार्यों की जानकारी

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

14. ( *क्र. 1811 ) श्री संजय सत्येन्द्र पाठक : क्या लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) जल जीवन मिशन अंतर्गत लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी एवं मध्यप्रदेश जल निगम द्वारा विधानसभा क्षेत्र विजयराघवगढ़ के किन-किन ग्रामों में जल जीवन मिशन की योजना स्वीकृत करा कर कार्य कराये गये? जानकारी ग्रामवार देवें एवं यह भी बताएं कि जो कार्य योजना बनायी गयी थी, उस योजना से पूरे गांव के लोग लाभान्वित हुये? यदि नहीं, तो कितनी अतिरिक्त योजनाएं ग्रामवार स्वीकृत करायी गयी? जानकारी देवें। प्रश्‍न दिनांक तक कितनी पूर्ण हुई एवं कितनी योजनाएं अपूर्ण हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) यदि हाँ, तो क्या ठेकेदार एवं विभाग द्वारा कार्य पूर्ण नहीं हुआ फिर भी अपूर्ण योजनाएं सरपंचों को स्थानांतरित (हैण्ड ओवर) की गई? जैसे विकासखण्ड विजयराघवगढ़ की ग्राम पंचायत खलवारा और परसवारा की अपूर्ण योजनाएं सरपंचों को प्रदान की गयी है? यदि हाँ, तो अन्य कितनी ग्राम पंचायतों को अपूर्ण योजनाएं स्थानांतरित की गयी हैं तथा यह भी बताएं कि क्या स्थानांतरित योजना से उस गांव के प्रत्येक घर को पानी मिल रहा है? यदि नहीं, तो कौन दोषी है?

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री ( श्रीमती संपतिया उइके ) : (क) लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग अंतर्गत स्‍वीकृत एकल ग्राम नल-जल योजनाओं की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 01 अनुसार है तथा मध्‍यप्रदेश जल निगम अंतर्गत प्रश्‍नांकित विधानसभा क्षेत्र के लिए स्‍वीकृत समूह जल प्रदाय योजनाओं एवं इन योजनाओं में सम्मिलित ग्रामों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 02 अनुसार हैसमूह योजनाओं के कार्य प्रगतिरत है। (ख) विभाग अथवा ठेकेदार द्वारा अपूर्ण योजना का हस्तांतरण ग्राम पंचायतों को नहीं किया गया है। ग्राम खलवारा एवं परसवारा की नल-जल प्रदाय योजना प्रस्ताव एवं डी.पी.आर. के अनुरूप कार्य पूर्ण होने के उपरांत ही संबंधित पंचायत को हस्तांतरित की गई है। जिन योजनाओं से ग्राम के समस्त घरों को पानी नहीं मिल रहा है, उन्हें पुनरीक्षित किया गया है, उक्त दोनों योजनाओं को पुनरीक्षित कर स्वीकृति के लिए कार्यवाही की जा रही है, अतः शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री संजय सत्‍येन्‍द्र पाठक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में जो जवाब आया है, वह पूर्ण रूप से सत्‍यता से परे है. विभाग ने जवाब दिया है कि खलवारा और परसवारा की योजना पूर्ण करके सौंप दी गई है, यह गलत जानकारी माननीय मंत्री जी के माध्‍यम से विभाग द्वारा रखवाई गई है. अध्‍यक्ष महोदय, अगर इसकी परतें खोलने पर जाएंगे तो मैं नहीं समझता कि वह उचित होगा. मैं तो माननीय मंत्री जी से सिर्फ इतना आग्रह करता हूँ कि इसकी यहां से अधिकारी भेजकर उच्‍चस्‍तरीय जांच करवा ली जाये और जब भी अधिकारी जाये तो मेरी उपस्थिति में जांच हो जाये, क्‍योंकि कई सारी योजनाएं जो ग्राम पंचायत को सौंपी गई हैं, वह अपूर्ण हैं, उनको पूर्ण बताकर सौंप दिया गया है. कई जगह बोरिंग नहीं है, टंकी भर नहीं रही है, पाईपलाइन नहीं बिछी है, आधा गांव इससे वंचित है और बहुत सारी बातें हैं. यह माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी की बहुत बड़ी योजना थी. अगर यह सही रूप से, साकार रूप से, अगर हर घर में यह योजना पहुँच जाये तो मैं समझता हूँ कि 75 वर्षों के इतिहास की यह सबसे बड़ी योजना है. इसलिए मैं चाहता हूँ कि माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी का जो सपना है कि हर घर में पानी पहुँचाना है, हर घर में नल से जल पहुँचाना है, तो इस सपने को साकार करने के लिए, इसको ईमानदारी से लागू करने के लिए एक वरिष्‍ठ अधिकारी को यहां से भेजकर जांच करवाएं. ताकि मेरी विधान सभा के अन्‍दर हर घर में नल से जल पहुँच सके, बस मेरी इतनी सी मांग है.

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले ही आपसे निवेदन किया है कि कलेक्‍टर अब इस बैठक को बुलाएंगे और उसमें सारे जन-प्रतिनिधियों को बुलाएंगे और हर विधान सभा की समीक्षा कराएंगे. यह महीने में एक बार होगा और उसके बाद भी अगर शिकायत रही तो मैं आपके माध्‍यम से, माननीय सदस्‍य को विश्‍वास दिलाता हूँ कि उनके यहां की समस्‍या के लिए, मैं किसी अधिकारी को भेजकर उसके निराकरण का पूरा प्रयास करूँगा.

श्री संजय सत्‍येन्‍द्र पाठक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कलेक्‍टर तो बुलाएंगे ही. मैं आदरणीय मंत्री जी के आश्‍वासन से संतुष्‍ट हूँ. लेकिन मैं चाहता हूँ कि कलेक्‍टर की बैठक के पहले एक बार भौगोलिक दृष्टिकोण से जांच हो जाये, कोई भी एक जगह भोपाल से एक अधिकारी चला जाये, कोई एक कमेटी यहां से बनकर चली जाये. एक-दो जगह के सैंपल टेस्‍ट हो जाएंगे तो कलेक्‍टर की बैठक में भी डिस्‍कस करना आसान हो जायेगा, तो पहले तो यहां से एक अधिकारी को भेज दें और एक-दो जगह की जांच हो जाये. दूसरा, जांच पर कार्यवाही भी होनी चाहिए. अगर ठेकेदार कार्य पूर्ण बताकर सरपंच को, सचिव को पैसा खिलाकर वह कार्य सौंपकर भाग गया है, तो उसके विरुद्ध भी कार्यवाही होनी चाहिए, तो जांच पहले हो जाये फिर कलेक्‍टर की बैठक में चले जाएंगे. कैलाश भैया से आग्रह है कि जांच पहले करा दें एक-दो जगह की.

श्री कैलाश विजयवर्गीय - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक वरिष्‍ठ अधिकारी को भेज दूँगा.

श्री संजय सत्‍येन्‍द्र पाठक - धन्‍यवाद भाईसाहब.

श्री अजय अर्जुन सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, आदरणीय कैलाश भाई ने बहुत अच्‍छी तरह से कहा है कि मैं एक क्षेत्र के लिए बड़े अधिकारी से जांच करा लूँगा. अध्‍यक्ष महोदय, यह सिर्फ पाठक जी के क्षेत्र का मामला नहीं है, पूरे मध्‍यप्रदेश में जहां भी जल जीवन का काम हुआ है, किसी क्षेत्र में भी सही तरीके से काम नहीं हुआ है. इसके लिए मैं आपसे आग्रह करना चाहता हूँ कि एक क्षेत्र में दो जगह सैंपल से काम नहीं चलेगा, इसके लिए उच्‍चस्‍तरीय जांच बैठाई जाये कि इनके क्षेत्र में जल जीवन में इतना भारी भ्रष्‍टाचार और विलंब क्‍यों हो रहा है ? मेरे क्षेत्र में तो टंकी बनी है, ट्यूबवेल ही नहीं है, पाईप है तो टंकी नहीं है, टोंटी है तो नल नहीं है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री नरेन्‍द्र मोदी जी की तारीफ हम भी करते हैं कि जल उनके लिए प्राथमिकता रही है, लेकिन जिस तरह से उस विषय पर यहां बंटाधार हो रहा है, उस पर भी थोड़ा ध्‍यान दिया जाये. माननीय मंत्री महोदय जी हम सभी विधायकों की पीड़ा है, सिर्फ मेरी पीड़ा नहीं है. हर क्षेत्र में इस तरह की पीड़ा है, इसको ध्‍यान में रखते हुए उचित कार्यवाही करें.

अवैध लकडि़यों का व्‍यापार

[वन]

15. ( *क्र. 1875 ) श्री सुरेन्‍द्र सिंह हनी बघेल : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या कुक्षी विधान सभा क्षेत्र के डही नगर पंचायत के वार्ड 8 के निवासियों द्वारा आरा मशीन से सागौन की लकड़ी काटकर सागवान की लकड़ियों का व्यापार किया जा रहा है? (ख) यदि हाँ, तो इनके नाम और क्‍या इन्हें आरा मशीन लगाने की अनुमति दी गई है? (ग) क्या इनके द्वारा तस्करी करके लाई गई सागवान की लकड़ी का अवैध व्यापार करने की शिकायत प्राप्त हुई है? (घ) यदि हाँ, तो अवैध कारोबार करने वाले एवं संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर क्या कार्यवाही की जाएगी/गई और कब तक समय-सीमा बताने का कष्ट करें।

वन मंत्री ( श्री नागर सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। (ख) उत्तरांश (क) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। ऐसी कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। (घ) उत्तरांश (ग) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल- अध्‍यक्ष महोदय, कैलाश जी के मिशन के बारे में प्रदेश के सभी लोग जानते हैं, पेड़ लगाने का जो अभियान उन्‍होंने प्रारंभ किया है, उसका अभिनंदन है. मेरा प्रश्‍न वनों की कटाई एवं अवैध परिवहन से संबंधित है. जब मैंने प्रश्‍न लगाया तो वन विभाग के अमले ने संबंधित व्‍यक्ति को पहले ही सूचना कर दी कि हम आपके यहां आने वाले हैं. अमले के पहुंचने के पहले ही संबंधित थाना प्रभारी ने वाहन भेजा, पिकअप और लकड़ी का वहां से अन्‍य स्‍थान पर परिवहन कर दिया गया. मेरा कैलाश जी से आग्रह है कि आप इस विषय की जांच करवायें कि ऐसा क्‍यों‍ किया गया, पेड़ों की कटाई को रोका जाये. तभी तो प्रकृति के विषय में जो आपकी सोच है, वह आगे बढ़ पायेगी.

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)- अध्‍यक्ष महोदय, यह सही है कि मैं पर्यावरण प्रेमी हूं और एक पेड़ भी कटता है तो मुझे बहुत तकलीफ होती है. यदि पेड़ कट रहे हैं तो यह अच्‍छी बात नहीं है लेकिन मेरे पास विभाग से जो जानकारी प्राप्‍त हुई है, उसके अनुसार जहां आपने कहा था कि आरा मशीन है वहां आरा मशीन नहीं मिली, आप कह रहे हैं कि उन्‍हें पूर्व में ही सूचना दे दी गई थी, इसके विषय में मैं क्‍या कहूं, यदि आपके पास इस संबंध में कोई सबूत हों तो आप मुझे दे दीजिये, मैं, व्‍यक्तिगत रूप से आपसे मिलकर, यदि ऐसा कुछ हो रहा होगा तो हम निश्चित रूप से इसमें कड़ी कार्यवाही करेंगे.

श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल- अध्‍यक्ष महोदय, यदि मेरे पास सबूत के विषय में पूर्व में जानकारी होती तो मैं, आपको लाकर देता. मेरा उद्देश्‍य केवल यह है कि वनों की कटाई रूकनी चाहिए. उस व्‍यक्ति के बारे में पूर्व में भी शिकायत हो चुकी है और वह पकड़ा भी जा चुका है. वह आदतन अपराधी है इसलिए मेरा कहना है कि आप इसमें ठोस कदम उठायें, विभाग के अमले को निर्देशित करें कि वे जाकर सुनिश्चित करें कि कटाई न हो और वनों में भी जाकर देखें कि आदिवासी बाहुल्‍य क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई न हो.

श्री कैलाश विजयवर्गीय- अध्‍यक्ष महोदय, मैं, अधिकारियों को निर्देश दे दूंगा.

 

जल जीवन मिशन योजना

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

16. ( *क्र. 878 ) श्री अम्बरीष शर्मा : क्या लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) भिंड जिले के अंतर्गत विधान सभा क्षेत्र लहार में क्या जल जीवन मिशन योजना संचालित की जा रही है? यदि हाँ, तो योजना की स्वीकृत राशि कितनी है एवं आज दिनांक तक ठेकेदार को कितना भुगतान किया गया है तथा क्षेत्र के कितने ग्राम योजना से लाभान्वित होंगे? कृपया गाँवों के नाम बतावें। (ख) विधानसभा क्षेत्र लहार में संचालित जल जीवन मिशन योजना में की गई अनियमितता के संबंध में विभाग को क्या कोई शिकायत प्राप्त हुई है? यदि हाँ, तो क्या उसकी जांच कराई गई, जांच में क्या पाया गया? (ग) क्या योजना के अंतर्गत पाइप लाइन निर्धारित गहराई में न बिछाई जाकर प्रावधान से कम गहराई में बिछाई गई है? बिछाई गई लाइन की गहराई किस अधिकारी के द्वारा जांच की गई? उसका नाम एवं पद बतावें। (घ) क्या घरों में घरेलू नल कनेक्शन में स्टैंड पोस्ट का निर्माण किया गया है? यदि हाँ, तो कितने घरों में कनेक्शन दिए गए तथा कितने घरों में स्टैंड पोस्ट बनाए गए? (ड.) क्या उच्च घनत्व पॉलि‍थीन पाइप/मध्यम घनत्व पॉलि‍थीन पाइप की जांच केंद्रीय पेट्रो रसायन अभियांत्रिकी एवं प्रोद्योगिकी संस्थान द्वारा कराई गई है? यदि हाँ, तो रिपोर्ट उपलब्ध करावें? यदि नहीं, तो क्यों?

लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री ( श्रीमती संपतिया उइके ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 01 अनुसार है। (ख) ग्राम असवार के संबंध में शिकायत प्राप्त हुईं, जांच कराई गई, कार्य स्‍वीकृत ड्रॉइंग डिजाइन के अनुसार गुणवत्‍तापूर्वक कराए गए हैं, पाइप-लाइन लीकेज का सुधार कर दिया गया है। (ग) जी नहीं, पाइप-लाइन के कार्य विभागीय मापदंडानुसार कराये गये हैं। कार्य का मापांकन एवं सत्यापन करने वाले विभाग के उपयंत्री एवं सहायक यंत्रियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 01 अनुसार है। (घ) 19,236 नल कनेक्शन दिये गये, जिनमें से 14801 में स्टैंड पोस्ट बनाये गये हैं। (ड.) पाइप की जांच केन्द्रीय पेट्रो रसायन अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान से कराई गई है, संदर्भ हेतु रिपोर्ट की एक प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 02 अनुसार है, शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

 

श्री अम्‍बरीष शर्मा (गुड्डू)- अध्‍यक्ष महोदय, सर्वप्रथम मैं भारत के यशस्‍वी प्रधानमंत्री मोदी जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि उन्‍होंने जल-जीवन मिशन के तहत जनता की बहुत चिंता की और इतनी बड़ी योजना हमें दी. अध्‍यक्ष महोदय, मैं, आपके माध्‍यम से मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि हमारी विधान सभा में जल-जीवन मिशन के तहत जितने कार्य हुए हैं, वे सभी अपूर्ण हैं और उनमें कमी है. मेरा निवेदन है कि क्‍या मंत्री जी इसकी जांच करवायेंगे और जांच करवाकर दोषी ठेकेदारों के भुगतान को तब तक रोका जाये, ऐसा मेरा आग्रह है.

अध्‍यक्ष महोदय- प्रदीप जी, आप कुछ कह रहे थे ,आप एक मिनट में अपनी बात रखें.

इंजीनियर प्रदीप लारिया- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन केवल इतना है कि प्रधानमंत्री जी की यह बहुत ही महत्‍वकांक्षी योजना है और मैं, समझता हूं आजादी के बाद से पेयजल के क्षेत्र में इतनी बड़ी योजना कभी नहीं आई. इसमें मूल दिक्‍कत यह है कि इसमें ठेकेदार बाहर के हैं, एक ठेकेदार ने 15-20 कार्य एक साथ ले लिए हैं. इसमें एक और दिक्‍कत यह है कि अमले की भी कमी है. एक इंजीनियर, एक एस.डी.ओ. को 100-100 योजनायें देखनी पड़ रही हैं. मेरा कहना है कि अमले के अभाव के कारण परेशानियां आ रही हैं, यदि इस योजना में अन्‍य विभागों का अमला दे दिया जाये, इंजीनियर दे दिए जायें, तो मैं समझता हूं, यह योजना सही ढंग से जमीनी स्‍तर पर अपना रूप ले सकेगी.

श्री अजय अर्जुन सिंह- ये भी बताओ कि सारे ठेकेदार किस प्रांत के हैं.

अध्‍यक्ष महोदय- प्रदीप जी, आपकी बात आ गई है. माननीय मंत्री जी.

श्री कैलाश विजयवर्गीय-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है कि जब योजनाओं की समीक्षा समय पर नहीं होती है तो थोड़ी शिकायत होना स्‍वाभाविक है. अभी लोकसभा के चुनाव हुए, विधान सभा के चुनाव हुए, आचार संहिता के कारण बहुत सारे जिलों की बैठकें नहीं हुई हैं. अध्‍यक्ष महोदय, मैं फिर अपनी बात को दोहरा रहा हूं कि हम आज ही पत्र भेजकर सारे कलेक्‍टर्स को निर्देश देंगे कि अपने-अपने जिलों की जल मिशन योजनाओं की समीक्षा करें. क्‍या कमी है वह जनप्रतिनिधियों से चर्चा करके हमें रिपोर्ट भेजें. पूरे प्रदेश की जितनी भी समस्‍याएं होंगी हम उसका निराकरण करेंगे. फंड की कमी होगी तो फंड देंगे, अधिकारियों की कमी होगी तो हम अधिकारी देंगे परंतु हम प्रधानमंत्री जी का सपना पूरा करेंगे कि हर घर के अंदर नल और जल हो.

श्री ओमप्रकाश सखलेचा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक और विषय पर आपका ध्‍यान दिलाना चाहता हूं. समीक्षा हो जाएगी, लेकिन पुरानी समीक्षाओं में हम लोगों ने कई बार चर्चा की है कि सभी सड़कें टूटी हुई हैं और रोज कम से कम दस से पंद्रह मोटर साईकिलें उन गड्ढों में गिर रही हैं और लोगों के हाथ-पांव टूट रहे हैं. वहां कलेक्‍टर्स को भी बता दिया है. पूरे विधान सभा क्षेत्रों में कम से कम 100-100 एफआईआर कटी हुई हैं. हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट की गाइडलाइन यह है कि जिस गलत काम के कारण हो उस अधिकारी और ठेकेदार पर डायरेक्‍ट क्रिमिनल केस बनाया जाए. यह स्‍टेज न आए इसके लिए जांच में सबसे पहला बिंदु है कि जितनी सड़कें डेमेज हुई हैं उन्‍हें यदि बरसात के पहले तुरंत ठीक नहीं कराया तो यह समस्‍या कई गुना ज्‍यादा गंभीर हो जाएंगी और इसके अलावा जितना कीचड़ में यह पाईप है यदि उसमें एक भी होल रह गया तो उस ब्‍लो होल से जितनी भी गंदगी है वह पाईप में जा रही है.

 

 

 

मौसम आधारित उद्यानिकी फसलों का बीमा

[उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्करण]

17. ( *क्र. 691 ) श्रीमती अर्चना चिटनीस : क्या सामाजिक न्‍याय एवं दिव्‍यांगजन कल्‍याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राज्य में उद्यानिकी फसलों के अंतर्गत फसलवार रकबा कितना है तथा कितने कृषकों द्वारा उद्यानिकी फसलें ली जाती है? (ख) मौसम आधारित उद्यानिकी फसल बीमा के अंर्तगत वर्ष 2014-2019 तक वर्षवार उद्यानिकी फसलों अंतर्गत कितने क्षेत्र का बीमा किया गया तथा वर्षवार कितने प्रीमियम का भुगतान किया गया? प्रीमियम के विरूद्ध कितनी बीमा राशि का वर्षवार भुगतान कृषकों को किया गया? (ग) क्या मौसम आधारित फसल बीमा के अंतर्गत वर्ष 2019-20 से वर्ष 2023-24 तक फसलों का फसल-बीमा का कृषकों के प्रदाय नहीं किया जा रहा है? यदि नहीं, तो क्यों? (घ) अन्य राज्य जैसे महाराष्ट्र आदि के कृषकों को उद्यानिकी फसलों के बीमा कवरेज के लिए कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, तो राज्य शासन द्वारा म.प्र. में ऐसी कार्यवाही क्यों नहीं की गई? उद्यानिकी फसलों के बीमा कवरेज के लिए शासन समय-सीमा निश्चित करेगा? यदि हाँ, समय-सीमा क्या होगी? (ड.) राज्य में मान. प्रधानमंत्री जी की महत्वाकांक्षी उद्यानिकी फसलों पर मौसम आधारित बीमा योजना लागू नहीं किये जाने के लिए अधिकारियों पर उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जायेगा? दोषी अधिकारियों को दंडित किया जायेगा?

सामाजिक न्‍याय एवं दिव्‍यांगजन कल्‍याण मंत्री ( श्री नारायण सिंह कुशवाह ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) वर्ष 2019-20 में योजना के क्रियान्‍वयन की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। आगामी वर्षों की स्थिति निम्‍नानुसार है :- खरीफ वर्ष 2020 से रबी 2022-23 के लिए 6 बार टेण्‍डर जारी किए गये, परन्‍तु दरें अधिक आने के कारण योजना का क्रियान्‍वयन नहीं किया जा सका। रबी 2022-23 से रबी 2023-24 के लिए निविदा आमंत्रित की गई परन्‍तु एक ही निविदा प्राप्‍त होने के कारण निविदा नहीं खोली गई। खरीफ 2023-24 से रबी 2025-26 के लिए निविदा आमंत्रित की गई परन्‍तु विभाग द्वारा भारत सरकार के नवीन निर्देश दिनांक 30.06.2023 अनुसार कार्यवाही करने का निर्णय लिया गया। (घ) भारत सरकार के नवीन दिशा निर्देशानुसार कार्यवाही प्रक्रियाधीन हैनवीन दिशा-निर्देश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ड.) भारत सरकार के नवीन दिशा निर्देशानुसार कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। नवीन दिशा-निर्देश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट- के प्रपत्र '''' अनुसार है। शेष प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता।

 

श्रीमती अर्चना चिटनीस-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण और गंभीर विषय पर चर्चा करना चाह रही हूं. मध्‍यप्रदेश में विगत 5 सालों से उद्यानिकी फसलों का मौसम आधारित बीमा नहीं हो पाया है जो कि माननीय प्रधानमंत्री जी की बहुत ही महत्‍वकांक्षी योजना है और अब प्रश्‍न पूछने पर भी विभाग यह कहेगा कि समय-सीमा नहीं बता सकते हैं तो यह तो बहुत ही चिंता की‍ स्थिति है. मेरा सीध प्रश्‍न यह है और मैं यह जानती हूं कि भारत सरकार ने उसकी नियम एवं शर्तें बदली हैं और मेन्‍यूअल 2023 के अनुसार इन्‍हें ऑटोमेटिक वेदर स्‍टेशन्‍स लगाना है तो ए.डब्‍ल्‍यू.एस की स्‍थापना विभाग कब तक करेगा और जब तक कि विभाग स्‍थापना नहीं करेगा तब तक हम उद्यानिकी फसलों का बीमा नहीं कर पाएंगे. मध्‍यप्रदेश में तीस हजार हेक्‍टेयर से अधिक उद्यानिकी फसलें हैं जिनका मौसम का, आंधी, तूफान का, ओले का सबसे अधिक असर उद्यानिकी फसलों पर पड़ता है.

श्री नारायण सिंह कुशवाह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दीदी का प्रश्‍न बहुत ही महत्‍वपूर्ण प्रश्‍न है और इस पर उद्यानिकी विभाग के अधिकारी निरंतर कार्यवाही कर रहे हैं. दीदी ने बहुत मेहनत की है, और दीदी दिल्‍ली भी गई हैं, परंतु केन्‍द्र सरकार के जो कृषि विभाग से नियम परिवर्तन हुए हैं उसके बावजूद चार से पांच बार बीमा कंपनियों के लिए टेंडर हुए हैं. टेंडर में रेट सही नहीं आने के कारण वह नहीं हो पाए परंतु किसानों की छति प्रतिपूर्ति के लिए आर.बी.सी.की धारा 6 (4) के अंतर्गत उन्‍हें राहत देने का काम जारी है. मैंने माननीय केन्‍द्रीय कृषि मंत्री जी को पत्र लिखा है और मैं स्‍वयं जाकर वर्ष 2014 से 2019 तक का जिस तरीके से बीमा देने का काम होता था उसमें मैं जाकर खुद प्रयास करूंगा और जल्‍द से जल्‍द किसानों को पूर्ण तरीके से बीमा की राहत मिल सके इसमें मैं पूरी मेहनत करके कार्यवाही करूंगा.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

अध्यक्ष महोदय -- संजय पाठक जी आप क्या कह रहे थे.

श्री संजय सत्येन्द्र पाठक -- अध्यक्ष महोदय, जल जीवन मिशन के संबंध में एक बात माननीय मंत्री जी के संज्ञान में डालना चाह रहा था कि कलेक्टर के पास ठेकेदारों के विरुद्ध कार्यवाही करने का कोई अधिकार नहीं है वह जल जीवन मिशन के पास है. इसीलिए क्षेत्र में या गांवों में जो नल जल योजना प्रभावित हो रही हैं, काम पूरे नहीं हो पा रहे हैं या गलत हो रहे हैं, कलेक्टर उन पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं कर पा रहा है. कलेक्टर को अधिकार देने का मेरा आग्रह है.

अध्यक्ष महोदय -- संजय जी बैठ जाइए.

12.01 बजे अध्यक्षीय व्यवस्था

जल जीवन मिशन योजना की समीक्षा और क्रियान्वयन किया जाना

अध्यक्ष महोदय -- माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी यहां हैं. मैं समझता हूँ कि प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के बाद अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन प्रारंभ हुई है. यह आज की बड़ी आवश्यकता भी है क्योंकि जिस प्रकार से पानी की स्थिति है, स्वच्छ जल हर आदमी को मिले यह सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी भी है. चूंकि केन्द्र सरकार ने यह स्कीम प्रारंभ की है. राज्य सरकार उसका क्रियान्वयन कर रही है. सभी सदस्यों की बातें सुनकर ऐसा लगता है कि कहीं-न-कहीं हमें और ध्यान देने की आवश्यकता है. मेरा आपसे अनुरोध है कि कलेक्टर के स्तर पर नियमित समीक्षा और क्रियान्वित करने की बैठकें होना ही चाहिए लेकिन राज्य स्तर पर भी इसकी समीक्षा कड़ाई से करनी चाहिए. जिसका फायदा आम जनमानस को भी होगा और राज्य शासन की छवि भी निखरेगी.

 

12.02 बजे नियम 267 (क) के अन्तर्गत विषय

अध्यक्ष महोदय -- नियम 267-क के अधीन लंबित सूचनाओं में से 25 सूचनाएं नियम 267-क (2) को शिथिल कर आज सदन में लिए जाने की अनुज्ञा मैंने प्रदान की है, यह सूचनाएं संबंधित सदस्यों द्वारा पढ़ी हुई मानी जावेंगी. इन सभी सूचनाओं को उत्तर के लिये संबंधित विभागों को भेजा जाएगा.

मैं समझता हूँ सदन इससे सहमत है. अब मैं सूचना देने वाले सदस्यों के नाम पुकारूंगा.

1. श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर

2. डॉ. सीतासरन शर्मा

3. श्री यादवेन्द्र सिंह

4. डॉ. हिरालाल अलावा

5. श्री विपिन जैन

6. इंजी. प्रदीप लारिया

7. श्री नारायण सिंह पट्टा

8. डॉ. रामकिशोर दोगने

9. श्री राजेन्द्र भारती

10. श्री प्रताप ग्रेवाल

11. श्री अभय मिश्रा

12. श्री दिलीप सिंह परिहार

13. श्री कमलेश्वर डोडियार

14. श्री कैलाश कुशवाह

15. श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे

16. श्री फूल सिंह बरैया

17. श्री राजेश कुमार शुक्ला

18. श्री श्रीकांत चतुर्वेदी

19. श्री रजनीश हरवंश सिंह

20. डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय

21. श्री प्रदीप अग्रवाल

22. श्री शरद जुगलाल कोल

23. श्री मधु भाऊ भगत

24. श्री दिनेश गुर्जर

25. श्री आशीष गोविन्द शर्मा.

 

 

 

 

 

12.03 बजे अध्यक्षीय व्यवस्था

 

श्री जयवर्धन सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, कल हमें सदन के अन्दर बताया था कि मंगलवार को नर्सिंग घोटाले के संबंध में ध्यान आकर्षण पर जो चर्चा हुई थी उसमें माननीय मंत्री विश्वास सारंग जी के वक्तव्य के संबंध में माननीय सदस्य सचिन यादव जी और मैंने आपको पत्र लिखकर जो उनके भाषण में भ्रमित जानकारी दी गई थी उसके संबंध में आपने हमें कल आश्वासन दिया था कि आप उसकी व्यवस्था देंगे.

अध्यक्ष महोदय -- कल व्यवस्था मैंने दे दी थी. मुझे सूचना प्राप्त हो गई है. मैं परीक्षण कर आगे की कार्यवाही करूंगा. अब दोबारा मैं समझता हूँ इस विषय पर चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है.

श्री जयवर्धन सिंह -- अध्यक्ष महोदय, क्या समय सीमा बताया जाना संभव है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.04 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) (क) भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक का राज्य के वित्त पर लेखा परीक्षा प्रतिवेदन 31 मार्च, 2023 को समाप्त हुए वर्ष के लिए मध्यप्रदेश शासन का वर्ष 2024 का प्रतिवेदन संख्या 1,

(ख) (i) मध्‍यप्रदेश वित्‍त निगम के 31 मार्च, 2023 को समाप्‍त हुए वर्ष के लेखों पर भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक का पृथक लेखा परीक्षा प्रतिवेदन एवं

(ii) मध्‍यप्रदेश वित्‍त निगम का 68 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

 

 

12.05 बजे.

 

मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी लिमिटेड का चतुर्थ वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2018-2019

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री( श्री कैलाश विजयवर्गीय)अध्यक्ष महोदय मैं

कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 394 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी लिमिटेड का चतुर्थ वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष2018-2019 पटल पर रखता हूं.

अधिसूचना क्रमांक एफ-7-0003-2024-सात-शा.7, भोपाल, दिनांक 14 मई, 2024

 

राजस्व मंत्री( श्री करण सिंह वर्मा)माननीय अध्यक्ष महोदय मैं मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 (क्रमांक 20 सन् 1959) की धारा 258 की उपधारा (4) की अपेक्षानुसार अधिसूचना क्रमांक एफ-7-0003-2024-सात-शा.7, भोपाल, दिनांक 14 मई, 2024 पटल पर रखता हू.

मध्‍यप्रदेश वेअरहाउसिंग एण्‍ड लॉजिस्टिक्‍स कार्पोरेशन का 19 वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं हिसाब-पत्रक वर्ष 2021-2022

 

खाद्य नागरित आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री( श्री गोविंद सिंह राजपूत)माननीय अध्यक्ष महोदय मैं, वेअरहाउसिंग कार्पोरेशन एक्ट, 1962 की धारा 31 की उपधारा (11) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश वेअरहाउसिंग एण्‍ड लॉजिस्टिक्‍स कार्पोरेशन का 19 वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं हिसाब-पत्रक वर्ष 2021-2022 पटल पर रखता हूं.

 

 

मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वार्षिक लेखा परीक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

संसदीय कार्य मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय)अध्यक्ष महोदय मैं जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 40 की उपधारा (7) तथा वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 36 की उपधारा (7) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वार्षिक लेखा परीक्षण प्रतिवेदन वर्ष

2022-2023 पटल पर रखता हूं.

 

 

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

 

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री इन्दर सिंह परमार) अध्यक्ष महोदय मैं मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 (क्रमांक 22 सन् 1973) की धारा 47 की अपेक्षानुसार रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023 पटल पर रखता हूं.

 

 

(क) द मध्यप्रदेश स्टेट माईनिंग कारपोरेशन लिमिटेड, भोपाल का 58 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021, तथा

(ख) डी.एम.आई.सी.पीथमपुर जल प्रबंधन लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021

 

राज्यमंत्री, वन ( श्री दिलीप सिंह अहिरवार)अध्यक्ष महोदय मैं(क) कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 394 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार द मध्यप्रदेश स्टेट माईनिंग कारपोरेशन लिमिटेड, भोपाल का 58 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021, तथा

(ख) कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार डी.एम.आई.सी.पीथमपुर जल प्रबंधन लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-2021 पटल पर रखता हूं.

 

 

 

12.08 बजे. बधाई एवं शुभकामना

अध्यक्ष महोदय श्री रामेश्वर शर्मा, सदस्य और श्री राजन मण्डलोई, सदस्य दोनों महानुभावों का आज जन्मदिन है यह सदन दोनों महानुभावों को बधाई देता है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.09 बजे. ध्यानाकर्षण

बुरहानपुर नगर की जल आवर्धन योजना का कार्य पूर्ण न होने से उत्पन्न स्थिति

 

श्रीमती अर्चना चिटनीस ( बुरहानपुर)--

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 


 

राज्‍यमंत्री नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग(श्रीमती प्रतिमा बागरी)-

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सदस्‍य महोदया को बताना चाहूंगीं कि

 

 

 


 

 

श्रीमती अर्चना चिटनीस:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो माननीय मंत्री जी ने उत्‍तर में सुनाया वह सुनकर अच्‍छा लगता है, पर परिस्थिति ऐसी नहीं है. मुझे आपको यह बताने में बड़ा कष्‍ट है कि जो बैसिक वहां की रिक्‍वायरमेंट जो इन्‍होंने ताप्‍ति नदी पर जो एक एनिकट इंटकवेल बताया, वह भी पिछली बारिश में टूट गया है, योजना प्रारंभ होने के पहले ही एक्‍चुअली उनकी ड्राइंग डिजाईन की कमी थी, एप्रोप्रेट डिजाईन न होने के कारण, वह एनिकेट ही हमारा टूट गया. जिसको पूरा होने में आज से एक महीने से अधिक समय लगेगा और जो तिथि माननीय मंत्री जी बता रहे हैं उस तिथि में काम पूरा लेकिन जमीन की परिस्थिति ऐसी नहीं है और वैसे भी मैं माननीय मंत्री जी यह बताना चाहता हूं कि काम पूरा होगा, यह दसवीं बार विषय आ रहा है, यह कंपनी 11वीं बार अभी एक्‍सटेंशन ले चूकी है, जब हम काम करेंगे तो पूरा कर देंगे, अब 6 महीने में कर देंगे, अब साल भर में कर देंगे. परंतु अभी भी काम पूरा हो सकेगा यह मुझे वहां की जमीनी स्थिति देखते हुए नहीं लगता है. सारी योजना को 12 वितरण जोन में बांटा गया है. मैं बहुत जवाबदारी से कह रहीं हूं कि एक भी वितरण जोन का काम आज की तारीख में पूरा नहीं है, 8 टंकियां निश्चित तौर पर बनकर खड़ी हैं, पर जो डिस्‍ट्रीब्‍यूशन पाईप लाइन है, जो कंडिशन उन्‍होंने अपने एग्रीमेंट में, उसके अनुसार उतनी गहराई पर नहीं डाली गयी हैं. बहुत सुपरफिशियल 4-6 इंच की डेप्‍थ पर ही उसकी डिस्‍ट्रीब्‍यूशन लाईन डाली गयी हैं. जिसका संधारण बहुत कठिन होगा और अवैध नल कनेक्‍शन भी उससे सहज भविष्‍य में लिये जा सकेंगे और मेरा माननीय मंत्री जी से ..

अध्‍यक्ष महोदय:- अर्चना जी, आप प्रश्‍न करें.

श्रीमती अर्चना चिटनीस:- मेरा माननीय मंत्री पहला तो यह प्रश्‍न है कि कम डेप्‍थ पर डिस्‍ट्रीब्‍यूशन पाईप लाइन डाली गयी है, वह इसकी जांच किसी थर्ड पार्टी से कराकर यह इसको सुनिश्चित करें कि डिस्‍ट्रीब्‍यूशन नेटवर्क प्रापर डलें, प्रापर डेप्‍थ पर डलें. क्‍योंकि बार-बार, कितना बड़ा पैसा है,163 करोड़ रूपये, क्‍या छोटा पैसा होता है. अब हमारे शहर को कभी ऐसा पैसा मिलने वाला नहीं है तो इसकी जांच होनी चाहिेये.

दूसरा, रेस्‍टोरेशन काम लगभग नहीं के बराबर हुआ है, बहुत खराब हुआ है और कायाकल्‍प की राशि मात्र से हम रेस्‍टोरेशन का काम पूरा नहीं कर सकेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय:- अर्चना जी, आप वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं. कृपया अपना प्रश्‍न करें.

श्रीमती अर्चना चिटनीस:- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से प्रश्‍न है कि एक तो डिस्‍ट्रीब्‍यूशन नेटवर्क की जांच हो जाये और दूसरा हमें रेस्‍टोरेशन के लिये एडिशनल राशि बुरहानपुर को 10 करोड़ की माननीय मंत्री जी उपलब्‍ध कराने का कष्‍ट करें और जो तिथि आप बता रहे हैं उस तिथि को काम हो जाये. इसको सुनिश्‍चित करने आसान नहीं है. कृपया आप उसको सुनिश्चित करने का कष्‍ट करें.

नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री( श्री कैलाश विजयवर्गीय):- अध्‍यक्ष जी, मैंने इनकी पूरी फाईल देखी थी. यह बात सही है कि बहुत ज्‍यादा विलंब हुआ है. उसमें बहुत सारे कारण और बहुत सारी बहानेबाजी भी है. पर अब हम सुनिश्चित करेंगे की कार्य समय-सीमा में हो. जहां तक आपने कहा कि थर्ड पार्टी से जांच करवायें तो मैं इसकी आई.आई.टी; इंदौर से इसकी जांच करवा देता हूं. जिससे की आपको यह कहने को नहीं मिलेगा कि सरकारी अधिकारियों ने जांच की है. मैं इसकी जांच आई.आई.टी; इंदौर से जांच करा देता हूं और आपने तीसरा रेस्‍टोरेशन के लिये बात की है तो मैं आपकी जानकारी के लिये बताता हूं कि लगभग 11 करोड़ से अधिक की राशि सड़कों के निर्माण और मरम्‍मत के लिये बुरहानपुर नगर निगम के लिये स्‍वीकृत है. यदि आप चाहेंगे हैं कि तो और भी राशि मिल जायेगी. पर आपके यहां कि सड़कें इस योजना के कारण खराब हुई हैं, वह निश्चित रूप से सारी सड़कें बना दी जायेंगी.

श्रीमती अर्चना चिटनीस:- अगर रेस्‍टोरेशन के लिये राशि मिल जायेगी उसके लिये मैं माननीय मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देती हूं और थर्ड पार्टी जैसा मैंने कहा था कि आप आई.आई.टी. इंदौर से जांच कराने की बात कर रहे हैं वह भी बहुत स्‍वागत योग्‍य है. माननीय मंत्री जी एम.पी.यू.डी.सी का सारे प्रदेश का काम आपको बहुत बारीकी से गौर करना चाहिये. ऐसा मेरा आपसे विनम्र आग्रह है.

अध्‍यक्ष महोदय:- श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को, अपनी ध्‍यानाकर्षण की सूचना पढ़े.

श्री अभय मिश्रा:- अध्‍यक्ष महोदय, मैं भी एक प्रश्‍न करना चाहता हूं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शुरू से ही इसकी प्‍लानिंग सही नहीं है....

अध्‍यक्ष महोदय:- आप बैठ जायें.

12.20 बजे (2) पुष्पराजगढ़ क्षेत्र में रपटा एवं सड़क मार्गों का निर्माण न होने से उत्पन्न स्थिति

 

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को (पुष्पराजगढ़) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

धन्यवाद अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य श्री मार्को जी ने अपना ध्यान आकर्षण सदन के सामने रखा है. उन्होंने 44 कामों की सूची वहां पर जिला प्रशासन को दी थी, उनके सूची देने के साथ ही वहां के जिला पंचायत के जो हमारे सीईओ हैं उन्होंने मध्यप्रदेश राज्य गारंटी परिषद के सामने दिनांक 8.2.23 को यह सारे के सारे प्रस्ताव भेजे भी थे. दिनांक 27.5.22 का जिसका उल्लेख अभी आपने कर दिया है. खनिज प्रतिष्ठान के दिनांक 6.3.23 को जो प्रभारी अधिकारी हैं, उनके पास भी जिला पंचायत के सीईओ ने यह काम पहुंचाए हैं. 44 में से कुल 7 कामों को स्वीकृति मिली थी, जिसमें खजुरदार का काम अभी प्रगतिरत् है. परोटा का काम पूरा हो गया है मेडिग्रामा का भी काम पूरा हो गया है, बेंदरी का काम भी पूरा हो गया है. रानीखुर्द का काम भी पूरा हुआ. बेहार और कदमसारा का काम प्रगतिरत् है. 7 स्वीकृत कामों से 4 काम पूरे हुए हैं, 3 प्रगतिरत् हैं. अगर इसमें भी उसके बाद सदस्य कुछ कहना चाहेंगे तो मैं जानकारी दूंगा.

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को - अध्यक्ष महोदय, यह मेरी कोई सीसी और फोर लेन, टू लेन की बात नहीं है. एक गांव से दूसरा गांव, एक टोला से दूसरा टोला की बात है. अभी बरसात का दिन है. आप वहां की जांच भी करा सकते हैं. लोग वहां पर बरसात के दिनों जा नहीं पाते हैं. मुक्ति धाम में नहीं जा पाते हैं. गांव से नर्मदा तट पर जाने का रास्ता 1-1, 2-2 कि.मी. का है, कोई बड़ी दूरी नहीं है. मैं आपसे विनम्रता से विनती करता हूं कि यह छोटे छोटे काम है जो एक टोला से दूसरे टोला जोड़ने के लिए यदि आपकी अनुमति हो जाएगी, ये मेरे गांव मुख्य मार्ग से जुड़ जाएंगे. इतनी कृपा कर दें, यह मैं माननीय मंत्री जी से निवदेन करना चाहता हूं. वैसे भी आप जैसे महाभारत के संजय की तरह यदि यहीं से बैठकर पुष्पराजगढ़ की ओर देखेंगे, आपकी वह नजर में है, इसलिए मैं आपसे कृपा चाहता हूं कि आप उस जंगल पहाड़ों में निवास करने वाले जनजाति समुदाय के ऊपर थोड़ा दृष्टि डालें और उनको स्वीकृत करने की कृपा करें.

श्री प्रहलाद सिंह पटेल - अध्यक्ष महोदय, मैंने आपको वास्तविक स्थिति बताई थी, बल्कि मैंने अपने अधिकारियों से भी कहा था मैं अमरकंटक अभी जाने वाला हूं. अगर प्रगतिरत् कामों आप संतुष्ट नहीं हैं तो एक जगह मुझे बता देना, मैं खुद वहां चला जाऊंगा, जो बातें आपने कही हैं, चूंकि राशि की जो मर्यादा है, आपने 44 का काम कहे थे, 7 स्वीकृत हुए हैं उसमें से 4 पूरे भी हो गये हैं, 3 चल रहे हैं, उसमें बाकी चीजें और होंगी, हम और आप बैठकर बात करेंगे तो जो संभव होगा, वह करेंगे.

श्री फुन्देलाल सिंह मार्को - अध्यक्ष महोदय, यह जो 7 काम आप बता रहे हैं यह 1-1 कि.मी. की है. माननीय मंत्री जी इसका उद्देश्य रोजगार देने का था. यह सब ग्रेवल मार्ग के रोड हैं कोई ऐसा नहीं है कि लोगों को गांव में काम भी मिल जाय, उस समय यह आवश्यक था, कोरोना के बाद का यह काम है तो लोगों के लिए रोजगार भी सृजन करना था और आवागमन के साधन को भी सुलभ कराने का उद्देश्य था. यदि आप थोड़ा-सा और करेंगे तो 7 में से तो हो ही गया है यह बाकी भी थोड़ा-सा हो जाए तो मैं चाहता हॅूं कि बड़ी कृपा हो जाएगी. आप थोड़ा बोल दें. आप मुस्‍कुरा देते हैं तो मुझे लगता है कि स्‍वीकृत ही हो गया. थोड़ी कृपा करें.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि आश्‍वासन की परम्‍परा आगे न बढे़. आपकी सूची मेरे पास है. मेरे काम करने के तरीके में भी मैं विधायक का एकाउंट रखता हॅूं, अगर उसमें से कुछ लगेगा, तो मैं आपको सूचित कर दूंगा.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- जी धन्‍यवाद.

अध्‍यक्ष महोदय -- मार्को जी, पूरा हो गया न.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- अध्‍यक्ष महोदय जी, माननीय मंत्री जी ने कह दिया है कि बैठकर के हम हल करेंगे. आश्‍वासन आपने दे दिया है. मैं संतुष्‍ट हो जाऊं. आपने 50-50 करोड़ मेरे क्षेत्र के लिए दिए हैं, जब आप केन्‍द्रीय मंत्री थे. आपके पास पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग है.

श्री प्रहलाद सिंह पटेल -- अध्‍यक्ष जी, मुझे लगता है कि आश्‍वासन सदन में देना काम आगे बढ़ाना है. मैंने माननीय सदस्‍य को कहा है कि उनकी सूची मेरे पास में है. अभी नये बजट के बाद में जो उपयुक्‍त होगा, मेरा कार्यालय स्‍वत: इनको फोन करके बता देगा कि भई, ये काम और हो सकते हैं लेकिन सदन में आश्‍वासन देना, मुझे लगता है कि एक काम बढ़ाना है.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी पर भरोसा कर सकते हैं.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका भी और माननीय मंत्री का भी भरोसा करता हॅूं और मुझे पूरा विश्‍वास है कि आप इन कामों को स्‍वीकृति प्रदान करेंगे. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

 

 

12.26 याचिकाओं की प्रस्‍तुति

अध्‍यक्ष महोदय -- आज की कार्यसूची में पद क्रमांक-4 पर जो याचिकाएं उल्‍लेखित की गई हैं वह प्रस्‍तुत की गईं मानी जाएंगीं.

 

 

12.27 स्‍वागत उल्‍लेख

ग्‍वालियर के सांसद श्री भारत सिंह कुशवाह का सदन में स्‍वागत

अध्‍यक्ष महोदय -- आज दर्शक दीर्घा में ग्‍वालियर के सांसद श्री भारत सिंह कुशवाह उपस्‍थित हैं. सदन की ओर से उनका स्‍वागत है. (मेजों की थपथपाहट)

 

 

 

 

 

 

 

 

12. 28 शासकीय विधि विषयक कार्य

(1) मध्‍यप्रदेश सुधारात्‍मक सेवाएं एवं बंदीगृह विधेयक, 2024 (क्रमांक 12 सन् 2024)

 

राज्‍य मंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हॅूं कि मध्‍यप्रदेश सुधारात्‍मक सेवाएं एवं बंदीगृह विधेयक, 2024 पर विचार किया जाय.

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्‍यप्रदेश सुधारात्‍मक सेवाएं एवं बंदीगृह विधेयक, 2024 पर विचार किया जाय.

अध्‍यक्ष महोदय -- श्री अभय मिश्रा जी, इस पर अपने विचार व्‍यक्‍त करें. क्‍या यहां अभय मिश्रा जी नहीं हैं.

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय अभय मिश्रा जी पानी पीने गये थे, मैंने सदस्‍य को बुलवाने के लिए भेजा है.

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है.

सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्‍थगित की जाती है.

(12.29 बजे सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्‍थगित)

 

शासकीय विधि विषयक कार्य (क्रमशः)

(अपराह्न 12.40 बजे विधान सभा की कार्यवाही पुनः समवेत हुई.)

12.40 बजे {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए}

श्री अभय मिश्रा(सेमरिया)माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे क्षमा चाहता हूं आपने मेरे लिये विधान सभा को 10 मिनट के लिये स्थगित किया.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेयअध्यक्ष महोदय, आप माननीय अध्यक्ष महोदय, आप क्षमायाचना के साथ आभार भी व्यक्त करें. माननीय अध्यक्ष महोदय ने आपके लिये ऐतिहासिक काम किया है.

अध्यक्ष महोदयसभी मौकों की प्रतिपूर्ति इसमें हो गई है.

श्री अभय मिश्रा-- अध्यक्ष महोदय,माननीय अध्यक्ष महोदय, का जीवन भर का आभारी अभी एक मिनट का थोड़े ही हूं. अध्यक्ष महोदय, मैं दोबारा ऐसी गलती नहीं करूंगा. क्षमा के साथ आपने मुझे अवसर दिया इसके लिये धन्यवाद. अध्यक्ष महोदय, नाम है मध्यप्रदेश सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदीगृह विधेयक, 2024 हमको यह पढ़ने में लिखा दिख रहा है. मध्यप्रदेश सुधारात्मक यातना एवं बंदीगृह विधेयक 2024 इसके अंदर जो पढ़ा है और इसको पास से देखा है. आप गरीबी का यह आलम समझ लीजिये एक व्यक्ति मुझे तीन साल पहले मिला पहले नागपुर में काम करता था, वह बोला आप हमें जेल भिजवा दीजिये हमें वहां पर खाना मिल जायेगा. जेल के अंदर अभी हमारे यहां पर पांच कैदी मर गये है. अभी हम उसी पाईंट पर आ रहे हैं. एक महीने के अंदर पांच लोग खर्च हो गये. जेल में जब कोई मरता है तो उसका खर्चा डालते हैं यह जो विधेयक बनाया गया है. यह किसी सदस्यीय कमेटी के द्वारा अगर बनाया जाता जो कि यहां पर अधिकारियों के द्वारा बना दिया गया है. अगर कोई कमेटी बनाकर के इसको वास्तव में अंदर की चीजें निकाली जातीं तो शायद इसमें और ही दृष्टि आती. अब मैं विनियोग लेखे के बारे में बताना चाहता हूं. आप कहेंगे कि आप विषय से भटक रहे हैं. विनियोग लेखे 2022-23 यह किताब किसकी है, सरकार की है, केग की है. इसकी स्थिति आप देखिये कि जेल के अंदर सुधार की क्या स्थिति है, देखिये. बंदियों के लिये औद्योगिक प्रशिक्षण हेतु आपने बजट दिया था मूल 1 करोड़ 46 लाख रूपये उसमें समर्पित राशि मतलब कि जो उपयोग नहीं हुई वह 79 लाख एक तो राशि दाल में जीरा के बराबर राशि दे रहे हैं. ऊपर से 55 प्रतिशत राशि का हम उपयोग नहीं कर रहे हैं. बंदियों द्वारा सामग्री निर्माण का एकमुश्त दिया था 6 करोड़ रूपये उसमें से समर्पित राशि मतलब कि अनयूज्ड राशि 4.56 करोड़ है यानि की 76 प्रतिशत इसका मतलब यह होता है कि वहां पर यह राशियां सरेण्डर हुईं और कोई काम नहीं कराये गये. इसी तरह से समर्पित की गई अन्य प्रत्याशित बचतें जो अभी भी जेल में लंबित हैं जैसे 46.82 करोड़ रूपये इसमें से जो राशि सरेण्डर की गई है. वह है 46.32 यानि कि 46 करोड़ 32 लाख रूपये. यह राशि अभी भी ज्यों की त्यों पड़ी हुई है. विभिन्न अनुदान विनियोग का यदि हम विवरण देखते हैं तो अनुदान संख्या 10 कुल बजट 70 करोड़ रूपये वास्तविक व्यय 31 करोड़ रूपये बचतें 38 करोड़ रूपये उसमें बचत का प्रतिशत 55 प्रतिशत से अधिक है. यह है विनियोग लेखे की किताब. इस विनियोग लेखे में केग ने अपनी रिपोर्ट दी है. इसमें वर्ष के दौरान जो अभ्यार्थित राशि है. इसमें भी मायनस 26 करोड़ 64 लाख रूपये इसी तरह से दूसरा है प्रभारित में 5 करोड़ रूपये यह भी सरेण्डर हुआ है. 100 में से 100 प्रतिशत. दत्तमत में इसमें 87 करोड़ रूपये में से 32 करोड़ रूपये सरेण्डर हुए हैं. आगे देखें कि जेलों के आधुनिकीकरण के लिये 275 करोड़ रूपये दिये गये थे जिसमें से 166 करोड़ रूपये सरेण्डर हुए हैं. बंदियों को सामग्री निर्माण के लिये एकमुश्त राशि 600 करोड़ रूपये दी गई थी उसमें भी 146 करोड़ रूपये सरेण्डर किये गये हैं. इसी तरह से अनुदान संख्या 5 है जेल है इसमें जेल भवनों के निर्माण में जो 400 लाख रूपये दिये गये थे यानि कि 4 करोड़ रूपये प्रत्याशित संभावित बचत के कारण हुई रूपये 2 हजार 2 सौ 94 लाख के अंतिम बचत के कारण सूचित नहीं किये गये हैं. इसके कारण नहीं बताये गये हैं कि यह पैसे सरेण्डर हुए हैं. बैरक का निर्माण, इसमें 400 लाख रुपए दिये गये थे और 400 लाख रुपए की निधियों का आवंटन अपर्याप्‍त बजट आवंटन के कारण हुआ, अंतिम बचत के कारण सूचित नहीं किए गए. इसमें बहुत कुछ है, मोटा मोटा इसलिए रख रहा हूं कि इससे पता लगता है कि हम जेल के अंदर कितने सीरियस हैं, कुल मिलाकर यदि व्‍यक्ति ने गलत काम किया है तो उसको सुधार के लिए या समाज में मैसेज देने के लिए कि समाज में ये एलाऊ नहीं है, जेल का प्रावधान रखा गया है, लेकिन वहां भी एक इंसान ही जाता है या तो उसको फिर मृत्‍युदंड दे दिया जाए, अगर मृत्‍युदंड नहीं है तो कम से कम वह जीवित तो रहे, उसके साथ इंसान जैसे व्‍यवहार हो. जेल के अंदर का आपको दृष्‍टांत बताता हूं, जेल के अंदर 40 प्रतिशात लोग ऐसे हैं, जिनके जमानतदार नहीं है. हमारे पंचायत मंत्री जी बहुत जमीनी है, आप खुद समझ रहे होंगे जमानतदार नहीं है, विधिक सहायता के नाम पर केवल एक फार्मेल्‍टी है, कोई भी व्‍यक्ति उसका लाभ नहीं उठा पा रहा है. दूसरी बात जब कोई कैदी जेल में रहता है तो वह अकेले जेल में नहीं रहता, उसका पूरा परिवार जेल में रहता है, उसका पूरा परिवार जेल के बारे में ही सोचता है, शरीर उसका वहां जलता है बाकी उसका पूरा परिवार प्रताडि़त होता है और जब वह उससे मिलने जाता है तो आप यकीन कीजिए अगर उसके जेब में दस हजार रुपए नहीं है तो वह रो रोकर चिल्‍लाता है कि घर बेच दो, लेकिन जेलर को 10 हजार रुपए रोज पहुंचाओ. जो बड़े अपराधी है, हम इलाहाबाद बगैरह की स्थितियां बताते हैं और जगह भी देखते हैं, हमारे पास के लागों को भी जानते हैं, जो महीने में 10 लाख रुपए सिर्फ इस बात के लिए जेल में देते हैं कि वे अच्‍छे से रह लें, उनको बैठने के लिए एक अच्‍छा से बिस्‍तर का इंतजाम हो जाए. एक छोटा कैदी भी है, हमारे यहां एक ठाकुर है, अच्‍छे परिवार के हैं, वे बेचारे फंस गए, हम गए जब वह मृत था उसके मरने के बाद उसको अस्‍पताल में फेंककर चले आए, हथकड़ी नहीं उतारे, हथकड़ी के साथ वह आदमी था, उसका भाई चिल्‍ला चिल्‍लाकर कल ही कह रहा था कि पहुंचा दो नहीं तो हमको मार डालेंगे. दो दिन पहले मैं मिलने गया था, तो फसल बेचने में लेट हो गया. हमारा यह कहना है कि जो सुधारात्‍मक वाला आपने बनाया हुआ है, इस पर पुनर्विचार कीजिए, इसको हमने अच्‍छे से पढ़ा है, इससे कोई रिजल्‍ट नहीं आना है, कागजों की खानापूर्ति है, हम आपस में मैसेज दे दें, ऐसे मैसेज हम कितने दिन देते रहेंगे, हम जो भी काम करें, ठोस करें और हमारा फंड उतना ही जा रहा है. कोई जो रिटायर्ड लोग हैं, उनकी कमेटी, कोई रिटायर्ड जज की कमेटी, कुछ अनुभवी, कोई हमारे पुराने वरिष्‍ठ मंत्री हैं, वे उसका दौरा कर लें और कैदियों से ही पूछकर कि वास्‍तव में उनके सुधार का क्‍या कार्यक्रम है, सुधार के कार्यक्रम के नाम पर क्‍या क्‍या कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, उनके भोजन के लिए इसमें कुछ भी नहीं बताया गया है, केवल इसमें यातनाएं ही यातना, हर चीज को और कड़ा करेंगे और जान निकाल लेंगे उसकी, यही पढ़ा हूं इसमें, कहीं भी उसको रिलीव या इंसानियत की बात या उसके साथ न्‍यायिक बात का जिक्र नहीं है. मेरा आपसे यही अनुरोध है कि ये वाला जो विधेयक लाया गया है, ये मैं अस्‍वीकार करता हूं. इसलिए नहीं कि मैं विपक्ष में बैठा हूं, अगर इसमें कुछ अच्‍छी चीज होती तो मैं इसमें बताता कि इसमें दो तीन बातें बहुत अच्‍छी है. इसमें उनकी ट्रेनिंग का प्रोग्राम दिया हुआ है वह हमें ठीक लगता है, लेकिन उसके लिए मद का जिक्र नहीं है, उतना मद देंगे भी नहीं, इसमें दूसरा एक प्रोग्राम अच्‍छा है उनके ध्‍यान योग का, ये कहने की बात है ये हो नहीं पाता. उनको बीच बीच में कहीं पर अलग अलग कैदिया के हिसाब से, दूसरी चीज इसमें जो सेल होता है जिसको कालकोठरी कहते हैं, उसको भी और ज्‍यादा किया है. मेरा कहना है कि जिसके रिश्‍तेदार जेलों में है वही इस दुख को समझ सकता है. आम आदमी नहीं समझता है. मेरा यह कहना है कि हम इस विधान सभा में आपसे अनुरोध करते हैं कि इसमें पुनर्विचार करवाकर, एक कमेटी बनवाकर एक बार और देख लें, नहीं तो ये हाथ से निकल जाएगा, फिर ज्‍यों की त्‍यों फार्मेल्‍टी हो जाएगी और जेल में सबसे बड़ी बात स्‍टाफ नहीं है, हमारे पास होमगार्ड है. एक नया बच्‍चा आईएएस, आईपीएस बनता है आप विश्‍वास करिए 20 से 25 अर्दली उसको मिलते हैं. बंगले में 20 से 25 लोग होते हैं, हम विधायक एक गनमैन के लिए तरसते हैं, हमें दो गनमेन मिलते हैं, एक गनमेन तो घर चले जाते हैं, एक ही डयूटी करते हैं और जो सच है वह सब विधायकों के साथ गुजरता है. अब रोज-रोज कहां शिकायत करेंगे. हमें तीन गनमेन नहीं मिल सकते हैं, ज्‍यादातर को तो एक ही गनमेन मिला है और वहीं पर अगर आप किसी अधिकारी के बंगले में चले जायें तो आफिस से लेकर बढि़या ए.के.47 से लेकर सजे हुए 30-30, 40-40 लोग, तो सबसे अच्‍छे तो वहीं हैं. [xxx] हमें अवसर दिये रहे हैं. मतलब यह स्थिति है कि जो पुराने जमाने से जमे हुए लोग हैं, कागज तमाम बने हुए हैं. मेरा आपसे यह अनुरोध हैं कि जो होमगार्ड के कर्मचारी हैं, अगर जेल में स्‍टॉफ में कमी हैं तो उस कमी को इन होमगार्ड से पूरा किया जाये.

सहकारिता मंत्री(श्री विश्‍वास सारंग) -- अध्‍यक्ष महोदय, विधानसभा के सचिवालय की इस तरह की बात करना मुझे लगता है कि औचत्‍यहीन है, इसको तो विलोपित किया जाये.

अध्‍यक्ष महोदय -- इसे विलोपित कर दिया जाये.

श्री अभय मिश्रा -- इसको विलोपित कर दिया जाये, ठीक बात है, मैं भी सहमत हूं, हो गया, मुंह है, थोड़ा निकल गया होगा (हंसी)

श्री विश्‍वास सारंग -- ऐसे मत निकाला करो, यहीं तो आप गड़बड़ कर जाते हो. (हंसी)

श्री अभय मिश्रा -- अब इसका भी कोई नियम बना दीजिये सिलने वाला तो फिर उसको इधर सिलकर रखा जाये(हंसी)

श्री विश्‍वास सारंग -- वह खुद ही सिलना पड़ता है(हंसी)

श्री अभय मिश्रा -- चलिए ठीक है( हंसी) मैं आपकी राय मानता हूं. अध्‍यक्ष महोदय मेरा यह निवेदन है और दूसरी सबसे महत्‍वपूर्ण बात जेल कौन चला रहा है, जेल वहां के जो छोटे-छोटे कर्मचारी हैं, चक्‍कर आफिसर हैं, जो प्रहरी हैं, उसमें हेड प्रहरी हैं, यह बीस-बीस, तीस-तीस साल से जमे हुए हैं, इनके बच्‍चे जेल के बाहर खुलेआम दुकान लगाकर बैठते हैं और एक-एक का पैसा जमा कराते हैं, इनका स्‍थानांतरण नहीं होता है, इनका स्‍थानांतरण नहीं होता है, साहब मैं ठीक कह रहा हूं.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री प्रहलाद पटेल) -- अभय भाई जेल गये हो?

श्री अभय मिश्रा -- नहीं, नहीं मैं आज तक जेल नहीं गया हूं, ईश्‍वर की कृपा थी.

श्री प्रहलाद पटेल -- फिर कैसे पता है?

श्री अभय मिश्रा -- हमारे से जुड़े बहुत लोग हैं. हमारे रिश्‍तेदार और इसमें कोई बड़ी बात नहीं है और साहब जेल क्‍या? हुई है वही जो राम रची राखा जिस दिन लिखा होगा आपका, आप भी चले जायेंगे, जिस दिन हमारा लिखा होगा, हम भी चले जायेंगे.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- मिश्रा जी पहले आपकी पार्टी में थे, वहां रहते रहते जो अनुभव मिला है वह सुना रहे हैं.

श्री प्रहलाद पटेल -- बात पार्टी की नहीं हो रही है, बात अनुभव की हो रही है, इनको पता है, मतलब यह भी गये हैं, मैं बात अनुभव की कर रहा हूं (हंसी)

श्री अभय मिश्रा -- चलिए ठीक है. मेरा यह कहना है कि आप जेल नहीं गये, इसलिए आपका यह कहना है कि जेल के कैदियों में जो प्रताड़ना हो रही है, उसका हमसे क्‍या मतलब और अगर हम उनके पक्ष में या उनके मानवता के दृष्टिकोण से बात कर रहे हैं तो उसका मतलब कि मैं अपराधी हूं, आप यही कहना चाह रहे हैं.

श्री भंवर सिंह शेखावत -- तुलसी सिलावट जी को जेल जाने का अनुभव है, इमरजेंसी में तो कांग्रेस में होते हुए जेल गये थे.

श्री अभय मिश्रा -- अध्‍यक्ष महोदय, यह पूरा प्रदेश देख रहा है, यहां की कार्यवाही पूरा प्रदेश देख रहा है और जेल के जो कैदी हैं, उनका भी परिवार है, उनके परिवार के लोग भी वोट देते हैं, वह भी देख रहे होंगे कि आपकी सोच एक कैदी के प्रति क्‍या है ?

डॉ.सीतासरन शर्मा -- हमारी सोच अच्‍छी नहीं होती है, तो हम यह विधेयक लाते ही क्‍यों, आपकी सरकार ले आती, पैंतालीस साल से लाये नहीं, लेकर हम आये और निंदा भी आप हमारी कर रहे हैं.

श्री अभय मिश्रा -- देखिये साहब बात बिगाड़ी गई है, मैं आपको बताऊं, मुझे माननीय प्रहलाद भाई साहब, माननीय मंत्री जी गलती हो गई, मैं इलाहाबाद में था मुझे कोर्ट में सरेंडर होना था. मेरे पास किराया नहीं था. मैंने खाना होटल में खा लिया तो मेरे पास बस का किराया नहीं था, तो एक दिन मैंने मजदूरी करी, सर पर ईंटा ढो लिया पचास रूपये के लिये, मैं वहां से चला आदमी हूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- अभय जी विषय पर रहिये और अपनी बात पूरी करिये, समय पूरा हो रहा है.

श्री अभय मिश्रा -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे जो वह बोल रहे हैं कि आप जेल गये होगे, तो यह बातें गलत हैं, विषय पर अब मैं क्‍या विषय रखूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपकी कल्‍पज्ञता की प्रशंसा कर रहे हैं.

श्री अभय मिश्रा -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा मन ही टूट गया कि अगर किसी गरीब के प्रति संवेदना की बात रखें, किसी जेल में यातना के लिये बात रखें तो माननीय मंत्री और लोग इस तरह कहते हैं कि अगर कोई न्‍यायिक बात करोगे तो तुम अपराधी होगे, इसलिए करोगे तो मुझे नहीं करनी बात, मैं अपनी बात समाप्‍त करता हूं, वाह री सरकार, वाह रे भारतीय जनता पार्टी आपकी जय हो, विजय हो, यह जनता देख रही है, धन्‍यवाद, नमस्‍कार .

श्री आशीष गोविन्‍द शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, मिश्रा जी को बिना जेल जाये, इतना जेल का अनुभव है, यह वाकई में काबिले तारीफ है.

12.54 बजे अध्‍यक्षीय घोषणा                             

       भोजनावकाश न होने विषयक

अध्‍यक्ष महोदय -- आज भोजन का अवकाश नहीं होगा, भोजन की व्‍यवस्‍था लॉबी में उपलब्‍ध है, अपनी सुविधा से सदस्‍य भोजन ग्रहण करने का कष्‍ट करें. आज दिनांक - 05 जुलाई 2024 सायं 7 बजे संसदीय कार्यमंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय जी के आवास क्रमांक- सी-21 शिवाजी नगर भोपाल में सहभोज और भुट्टा पार्टी का आयोजन किया गया है, इस पार्टी में सभी माननीय सदस्‍यगण आमंत्रित हैं (मेजों की थपथपाहट)

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह-- पार्टियों के साथ गीत संगीत का प्रोग्राम हमेशा कैलाश जी किया करते थे, इस बार भूल गये लगता है और यह तो स्‍वयं भी गीत गाते हैं.

श्री कैलाश विजयवर्गीय-- आपने सुझाव दिया है वहां पर कर लेंगे, आपका आदेश हो तो मैं अभी व्‍यवस्‍था करवा देता हूं, लेकिन आपको भी गाना पड़ेगा.

श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन-- पिछली विधान सभा में कैलाश जी की अनुपस्थिति के कारण भुट्टा पार्टी का आनंद ही नहीं ले पा रहे थे. धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि अब आप आ गये हैं तो भुट्टा पार्टियों का दौर चलता रहेगा.

अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी सुधारों के बारे में बताने वाले हैं ध्‍यान से सुने.

श्री प्रीतम लोधी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी जेल की बात चल रही थी थोड़ा निवेदन करना चाहता हूं मैं, हमारे जो गनमेन हैं उनसे बाहर जेल जैसा व्‍यवहार होता है. धूप में बरसात में अंदर नहीं आने दिया जाता है, बाहर खड़े रहते हैं, उनकी थोड़ी व्‍यवस्‍था सोची जाये.

लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा राज्‍यमंत्री (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस विधेयक की चर्चा प्रारंभ करने से पहले मैं श्रीकृष्‍ण भगवान को याद करना चाहता हूं जिनका जन्‍म कारावास में हुआ था. महात्‍मा गांधी के विचारों से इस विधेयक पर अपने विचार रख रहा हूं. महात्‍मा गांधी कहा करते थे कि अपराध के पीछे एक बीमार दिमाग होता है. अत: जेलों में इलाज एवं देखभाल के लिये अस्‍पतालों जैसा वातावरण होना चाहिये. यह संयोग है कि मेरे पास अस्‍पतालों का भी दायित्‍व है और साथ में माननीय मुख्‍यमंत्री जी के आदेश से आज जेल विधेयक आप सबके समक्ष रखा था. अभी अभय जी जिन विषयों की चर्चा कर रहे थे मैं उनको धन्‍यवाद करता हूं कि उन्‍होंने कुछ विषय की प्रशंसा भी की है. ट्रेनिंग और ध्‍यानयोग इत्‍यादि की जो उन्‍होंने प्रशंसा की है उसके लिये मैं उनका धन्‍यवाद ज्ञापित करता हूं, लेकिन चूंकि वह पीने का शौक रखते, नहीं माफ कीजिये, पानी पीने की वजह से बाहर चले गये थे ... (हंसी)... (श्री अभय मिश्रा जी के खड़े होने पर) अरे भाई साहब आप पानी पीने चले गये थे.

श्री अभय मिश्रा-- अच्‍छे-अच्‍छे शौक बताया करो न, मुझे मालूम सब है, बात खुलेगी तो दूर तक जायेगी साहब.

श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल-- भाई साहब आप पानी पीने गये थे तो मैं धन्‍यवाद आपका कर रहा हूं कि आपके चक्‍कर में पूरे सदन का लाभ हो गया था और माननीय अध्‍यक्ष जी ने सबको 10 मिनट का अवकाश दिया था, आपको इसलिये भी धन्‍यवाद दे रहा हूं.

श्री अभय मिश्रा-- गलती हो गई.

श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल-- नहीं, मैं तो आपको धन्‍यवाद दे रहा हूं कि हम सब लाभांवित हुये थे. मैं निवेदन करना चाहता हूं कि जो अंग्रेजों के और मुगलों के जमाने के कानून इस देश में लगातार चल रहे थे उनको बदलने का महाअभियान यशस्‍वी प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी के नेतृत्‍व में पूरे देश में चल रहा है. जिस तरह से यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्‍व में दण्‍ड संहिता को बदलकर भारतीय न्‍याय संहिता, नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय साक्ष्‍य अधिनियम 2023 इस देश में लागू कि‍ये गये हैं. जेल के संदर्भ में भी माननीय सदस्‍य हमारे अभी कह रहे थे कि अधिकारियों ने निर्मित कर दिया. निश्चित रूप से अधिकारियों की भूमिका रहती है, नि:संदेह रहती है, परंतु इसमें हमारे जो सदस्‍यगण हैं उनके भी सुझाव लिये गये हैं तथा आपसे भी तो मांगे सुझाव आपने किसी ने भी सुझाव नहीं दिये सदन के अंदर, लेकिन मैं आपको बताते हुये गर्व महसूस करता हूं कि भारत सरकार के केन्‍द्रीय गृह मंत्रालय ने वर्ष 2023 में संपूर्ण भारत वर्ष की जेलों की व्‍यवस्‍था एकरूप रहे, समरूप रहे इसके लिये Model Prisons Act, 2023 प्रस्‍तुत किया, प्रारूप तैयार किया था. चूंकि जेल राज्‍य का विषय है इसलिये इसमें केन्‍द्र सरकार कानून नहीं बना सकती, राज्‍य सरकार को ही कानून बनाना था और मुझे आपको बताते हुये प्रसन्‍नता है कि मध्‍यप्रदेश डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में पहला ऐसा राज्‍य बना है जिसने Model Prisons Act, 2023 के तारतम्‍य में और उसके अनुरूप पहला एक्‍ट मध्‍यप्रदेश सुधारात्‍मक सेवायें एवं बंदीगृह 2024 आप सबके समक्ष प्रस्‍तुत किया है. अभी तक 130 साल पुराने कानून इस देश में चल रहे थे. मुगल और अंग्रेज इस देश में राज करने के लिये आये थे. समाज को नियंत्रण के लिये उन्‍होंने नियम कानून बनाये थे. कैसे महात्मा गांधी जी को जेल में रखना है. कैसे डॉ. अम्बेडकर जी को जेल में रखना है. कैसे भगत सिंह जी को जेल में रखना है और कैसे वीर सावरकर जी को कालकोठरी में बंद रखना है तो ऐसे नियम,कानून अंग्रेजों ने बनाए थे परंतु अब देश के प्रधानमंत्री कहते हैं कि वे देश के प्रधान सेवक हैं. निश्चित रूप से हम समाज की सेवा के भाव से जनप्रतिनिधि बने हैं और हमारा दायित्व समाज के प्रति सेवा का है. इसलिये अब जेलों में भी अपराधियों के लिये भी सुधारात्मक सेवाएं दी जाएं ऐसा डॉ.मोहन यादव जी की सरकार विचार करती है. उसी तारतम्य में यह कानून लाया गया है. पहले ब्रिटिश काल में प्रचलित कानून, जेल अधिनियम 1894, 130 साल पुराना कानून इस देश में, इस प्रदेश में चल रहा था, उसको बदलने का काम इस विधेयक के माध्यम से होगा. बंदी अधिनियम सन् 1900, इस तरह के कानूनों को बदलने का काम इस विधेयक के माध्यम से होगा. जो जेल के अलग-अलग विधेयक थे जेल के नियमों के लिये उनको एकीकृत करके इस विधेयक में लाया गया है. इस विधेयक में ध्यान रखा गया है कि हम किस तरीके से अपनी जेलों में बंद अपराधी,जिन लोगों ने समाज को खतरा है,जोखिम है, ऐसे खतरनाक बंदियों पर कड़े नियंत्रण की व्यवस्था है. जो गैंगस्टर हैं. ऐसे बंदियों पर नियंत्रण के लिए इस कानून में प्रावधान किये गये हैं. पी.सी. के माध्यम से पेशी हो, मोबाईल डीएक्टीवेटर लगाएं जाएं. ई मुलाकात हो इस तरह के टेक्नालाजी के उपयोग भी इस विधेयक में किये गये हैं. इस विधेयक में कड़े प्रावधान किये गये हैं. ऐसे लोग जो जेल में मोबाईल या अन्य इलेक्ट्रानिक डिवाईस उपयोग करते हैं या उनको सहयोग करते हैं उनके खिलाफ 3 वर्ष तक का कठोर कारावास और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना किये जाने का प्रावधान इस विधेयक में किया गया है. आपको बताते हुए मुझे हर्ष है कि इस विधेयक में महिला बंदियों की विशेष रूप से चिंता की गई है. गर्भवती महिलाओं की चिंता की गई है. उनको उपयुक्त पोषण आहार मिलते रहें उसकी चिंता की गई है. जो बच्चों के साथ में कैदी हैं उनकी चिंता की गई है चाहे वह महिला हो चाहे पुरुष हों. उन बच्चों के भविष्य के लिये भी चिंता की गई है. ट्रांसजेंडर्स के लिये अभी तक किसी जेल में अलग से प्रावधान नहीं था परन्तु मध्यप्रदेश पहला ऐसा राज्य बन रहा है जहां ट्रांसजेंडर्स के लिये भी अलग से प्रावधान किये गये हैं. उनके लिये अलग से वार्ड बनाने के लिये,उनको अलग से चिकित्सा देने के लिये भी इस विधेयक में चर्चा हुई है. जेलों में जो भीड़भाड़ हो रही है जिसे ओवर क्राउडिंग कहा जाता है उससे बचने के लिये भी इस विधेयक में प्रावधान किये गये हैं. माननीय सदस्य ने कुछ विषय उठाए थे कि कमेटी बनाई जानी चाहिये. निश्चित रूप से इस विधेयक में कमेटियों का प्रावधान किया गया है. जिले के स्तर पर प्रावधान किया गया है. प्रदेश के स्तर पर जेल विकास बोर्ड बनाने का प्रावधान किया गया है. रिव्यू कमेटी बनाने का प्रावधान किया गया है.

श्री अभय मिश्रा - एक बात मुझसे छूट गई थी. जो कैदियों को वोट नहीं देने का अधिकार है तो कैदियों को वोट देने का अधिकार और दूसरे अगर मां-बाप दोनों जेल चले गये तो उसके बच्चे को उसके घर वाले गार्जियन भी नहीं लेते हैं तो इन दोनों चीजों को प्वाइंट आउट कर लीजिये. इसे आप नोट कर लीजिये.

श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल - माननीय अध्यक्ष महोदय, बंदियों के कल्याण के लिये भी इसमें चर्चा की गई है. बंदियों के छूटने के पश्चात् समाज में हम उनका पुनर्वास कर सकते हैं किस तरह से हम उनको समाज में पुनर्समाहित करते हैं. किस तरह से उन्हें समाज में पुन: सम्मान का जीवन जीने का मौका मिले इसके प्रावधान इस एक्ट में किये गये हैं. जेल के बुनियादी ढांचे में सुधार करने के लिये वास्तुकला का भी चिंतन इसमें किया गया है. मानसिक रूप से ग्रसित बंदियों के लिये भी इसमें चिंता की गई है. बंदियों के लिये चिकित्सा के प्रावधान भी इसमें किये गये हैं. हर जेल में चिकित्सा अधिकारी रखे जाएं इसका भी इसमें प्रावधान किया गया है. जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी समुचित प्रशिक्षण मिले, ताकि वे बंदी, जो सरकार की मंशा है...

श्री आशिष गोविन्‍द शर्मा -- माननीय मंत्री जी, इसमें एक मेरा भी सुझाव है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आशिष जी, मंत्री जी अपना भाषण दे रहे हैं तो बीच में हम सुझाव नहीं देते हैं.

श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आदरणीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी तथा हमारे वित्‍त मंत्री आदरणीय श्री जगदीश देवड़ा जी का भी हृदय से बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करता हूँ. हम ये जो विधेयक लाए हैं, उससे पूर्व ही जेलों के सुधार के लिए चिंता की है. उनके बजट में, जो कैदियों के लिए भोजन है, उसमें 25 करोड़ रुपये की वृद्धि की गई है, जो लगभग 20 प्रतिशत है. इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलपमेंट के लिए भी 110 करोड़ रुपये का प्रावधान है जो लगभग 25 प्रतिशत है. उन्‍होंने बजट में भी उल्‍लेख किया है. केन्‍द्र की सरकार ने भी उल्‍लेख किया है कि गरीब लोग जो हैं, छोटे-मोटे जुर्माना के कारण लंबे समय तक जेल में बंद रहते हैं, जबकि उनकी कैद पूरी हो चुकी होती है, उनका जुर्माना भरने का दायित्‍व भी मध्‍यप्रदेश सरकार ने लिया है. उसके लिए मैं माननीय मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी का, हमारे वित्‍त मंत्री आदरणीय श्री जगदीश देवड़ा जी का आभार व्‍यक्‍त करता हूँ. अध्‍यक्ष महोदय, अंत में मैं केवल एक बात कहकर अपनी बात समाप्‍त करूंगा, मुझे शेर तो आते नहीं, श्‍लोक आते हैं, चौपाइयां आती हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- जरूरी नहीं है शेर सुनाना, यह आवश्‍यक नहीं है. (हंसी).

श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल -- अध्‍यक्ष महोदय, अंत में केवल एक बात करके इस सदन से निवेदन करके अपनी वाणी को विराम दूंगा. यह हम सबका दायित्‍व है जो किसी कारण से छोटे-मोटे कारणों से या परिस्‍थितियों के कारण से अपराधी बन गए थे, उनको सुधार कर समाज में हम पुन: उनका पुनर्वास कर सकें, उस दिशा में यह विधेयक एक मिल का पत्‍थर साबित होगा. आप सबसे इसके समर्थन के लिए निवेदन करता हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न यह है कि मध्यप्रदेश सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदीगृह विधेयक, 2024 पर विचार किया जाए.

प्रस्‍ताव सर्वसम्‍मति से स्‍वीकृत हुआ.

अध्‍यक्ष महोदय -- अब विधेयक के खण्‍डों पर विचार होगा.

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 2 से 68 इस विधेयक का अंग बने.

 

खण्‍ड 2 से 68 विधेयक के अंग बने.

 

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तो सर्वसम्‍मत हुआ, किसी ने ''ना'' किया ही नहीं.

(संसदीय कार्य मंत्री) श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, इसको सर्वसम्‍मति कर दीजिए.

 

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

 

खण्‍ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

 

राज्‍यमंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूँ कि मध्‍यप्रदेश सुधारात्‍मक सेवाएं एवं बंदीगृह विधेयक, 2024 पारित किया जाय.

 

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्‍यप्रदेश सुधारात्‍मक सेवाएं एवं बंदीगृह विधेयक, 2024 पारित किया जाय.

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश सुधारात्‍मक सेवाएं एवं बंदीगृह विधेयक, 2024 पारित किया जाय.

 

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

 

विधेयक सर्वसम्‍मति से पारित हुआ.

(2) मध्यप्रदेश मंत्री (वेतन तथा भत्ता) संशोधन विधेयक, 2024 (क्रमांक 13 सन् 2024) का पारण

 

राज्‍यमंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण (श्रीमती कृष्‍णा गौर) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करती हूँ कि मध्यप्रदेश मंत्री (वेतन तथा भत्ता) संशोधन विधेयक, 2024 पर विचार किया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, क्‍या आप इस विधेयक के संबंध में और कुछ बोलना चाहती हैं ?

श्रीमती कृष्‍णा गौर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे आज यह कहते हुए बहुत प्रसन्‍नता है कि मध्‍यप्रदेश के इतिहास में हमारे यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व एक ऐतिहासिक निर्णय लिया गया. जिसके तहत अब मंत्रिमण्‍डल के सभी सम्‍मानित सदस्‍य अपने आयकर का स्‍वयं भुगतान करेंगे और इस निर्णय में आपने और नेता प्रतिपक्ष जी ने भी सहमति दिखाते हुए, एक अनुपम उदाहरण प्रस्‍तुत किया है. मध्‍यप्रदेश मंत्री (वेतन तथा भत्‍ता) अधिनियम 1972 की धारा 9 क के प्रावधान अंतर्गत राज्‍य के मंत्रियों को भुगतान किए गए आयकर की प्रतिपूर्ति राज्‍य शासन से प्राप्‍त होती थी. धारा 9 क वर्ष 1976 में अधिनियम में जोड़ी गई थी. इन प्रावधानों के अंतर्गत वित्‍तीय वर्ष 2019-20 में 51.38 लाख, वित्‍तीय वर्ष 2020-21 में 61.09 लाख, वित्‍तीय वर्ष 2021-22 में 59.48 लाख, वित्‍तीय वर्ष 2022-23 में 66.33 लाख एवं वित्‍तीय वर्ष 2023-24 में 79.08 लाख, इस प्रकार पिछले पांच वर्षों में 3.17 करोड़ रुपये आयकर की प्रतिपूर्ति राज्‍य शासन द्वारा मंत्रीगण को देय की गई थी. हमारा प्रस्‍ताव यह है कि हमारे मंत्रीगण आयकर को स्‍वयं वहन करेंगे व शासन से कोई वित्‍तीय सहायता नहीं लेंगे. आयकर की दृष्टि से 1972 के अधिनियम में बदलाव प्रस्‍तावित है. वित्‍तीय वर्ष 2024-25 की अपनी आय पर देय आयकर का भुगतान मं‍त्रीगण स्‍वयं ही करेंगे. अत: मध्‍यप्रदेश मंत्री (वेतन तथा भत्‍ता) अधिनियम 1972 की धारा 9 क के निरसन हेतु मध्‍यप्रदेश मंत्री (वेतन तथा भत्‍ता) संशोधन विधेयक, 2024 के पुरस्‍थापन का प्रस्‍ताव अनुमति के लिए प्रस्‍तुत है.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश मंत्री (वेतन तथा भत्‍ता) संशोधन विधेयक, 2024 पर विचार किया जाय.

प्रस्‍ताव सर्वसम्‍मति से स्‍वीकृत हुआ.

अध्‍यक्ष महोदय - अब, विधेयक के खण्‍डों पर विचार होगा.

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 2 इस विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 2 इस विधेयक का अंग बना.

प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने

श्रीमती कृष्‍णा गौर - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करती हूँ कि मध्‍यप्रदेश मंत्री (वेतन तथा भत्‍ता) संशोधन विधेयक, 2024 पारित किया जाय.

 

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्‍यप्रदेश मंत्री (वेतन तथा भत्‍ता) संशोधन विधेयक, 2024 पारित किया जाय.

प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश मंत्री (वेतन तथा भत्‍ता) संशोधन विधेयक, 2024 पारित किया जाय.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ

विधेयक सर्वसम्‍मति से पारित हुआ.

 

 

 

 

 

 

 

 

1.14 बजे

(3) मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2024 (क्रमांक 14 सन् 2024)

उच्‍च शिक्षा मंत्री (श्री इन्‍दर सिंह परमार) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूँ कि मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2024 पर विचार किया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2024 पर विचार किया जाए.

श्री भंवरसिंह शेखावत (बदनावर) - आदरणीय अध्‍यक्ष जी, वैसे तो इस निजी विश्‍वविद्यालय संशोधन विधेयक पर बहुत ज्‍यादा बोलने और न तो उसमें कुछ करने की आवश्‍यकता है. लेकिन मैं आदरणीय परमार जी का दो-तीन बातों पर ध्‍यान खींचना चाहता हूँ. हम निजी विश्‍वविद्यालय अधिनियम तो लाये, एजुकेशन का हाल हम सबको पता है, विश्‍वविद्यालयों का कार्य संचालन भी हमें पता है एवं जो देश एवं प्रदेश की समस्‍या है, उसके अन्‍दर हमारे विश्‍वविद्यालय काम कर रहे हैं, उनकी जो कार्यशैली है, उसके परिणामस्‍वरूप कई बार पेपर लीक और पेपर आऊट हो रहे हैं, परीक्षा समय पर नहीं हो रही हैं, रिजल्‍ट समय पर नहीं आ रहा है, ये सारी बातें हम देख रहे हैं. इन चीजों को देखते हुए ही आपने शायद निजी विश्‍वविद्यालयों को स्‍थापित करने की परिकल्‍पना की थी. कई निजी विश्‍वविद्यालय ऐसे खोले गए हैं, जिनके खुलने के बाद अभी तक उनका पुनरीक्षण नहीं किया गया कि जिन शर्तों पर आपने उन्‍हें खोलने का अवसर दिया था, वे उस अनुरूप चल रहे हैं कि नहीं चल रहे हैं. कई निजी विश्‍वविद्यालय खुल तो गए हैं लेकिन अभी-भी सभी मानदण्‍ड पूरे नहीं कर रहे हैं लेकिन हमने उनकी अनदेखी कर दी है और उन्‍हें स्‍थापित किया है. आज आपने इसमें वाइस चांसलर के स्‍थान पर कुलगुरू नाम किया है. कुलपति के स्‍थान पर आपने कुलगुरू कर दिया है, नाम परिवर्तित करने में तो परमार जी हम मास्‍टर हैं. जब 70-75 वर्ष कुलपति नाम चल गया तो अब ये कुलगुरू भी चल ही जायेगा. लेकिन हमारा शिक्षा का स्‍तर, काम करने की शैली, विद्यार्थियों के साथ न्‍याय-अन्‍याय का विषय वैसा ही है. जब कुलपति थे तो आज भी उतने ही पेपर लीक हो रहे हैं और जब कल कुलगुरू आ जायेंगे तो पेपर लीक नहीं होंगे या कोई समस्‍या नहीं आयेगी, ऐसा नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय, इन सभी बातों का उल्‍लेख मैं यहां इसलिए कर रहा हूं कि हमारी मूल अवधारणा नाम बदलने या नए नाम स्‍थापित करके, हम भारत के प्रति, अपने आपको साबित करना चाहते हैं कि हम हिंदी के बड़े पक्षधर हैं. कुलपति में भी पति तो हिंदी नाम ही था, पति में कोई गड़बड़ तो नहीं है. कैलाश जी, पति में आपको कोई आपत्ति ? राष्‍ट्रपति को भी पति ही कहते हैं.

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)- अध्‍यक्ष महोदय, हमारे भंवर सिंह जी भी छात्र नेता रहे हैं. हम उस समय इनके शिष्‍य थे, यह बात अलग है कि अब हम इनके शिष्‍य नहीं रहे.

अध्‍यक्ष महोदय- जी हां, ये पुराने छात्र नेता रहे हैं.

श्री भंवर सिंह शेखावत- आप जैसा शिष्‍य प्राप्‍त करने का गौरव सिर्फ मुझे ही प्राप्‍त है.

श्री कैलाश विजयवर्गीय- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे यह गौरव प्राप्‍त है कि मैं इनका शिष्‍य रहा हूं. मैं, भंवर सिंह जी की यहां प्रशंसा करना चाहता हूं कि उस समय सभी छात्र नेता, अलग से प्रिंसिपल के कमरे में बैठकर परीक्षा देते थे, नकल करते थे लेकिन ये एकमात्र छात्र नेता थे, जो ईमानदारी से परीक्षा देते थे.

अध्‍यक्ष महोदय- इस पर सदन को प्रसन्‍नता जाहिर करनी चाहिए. (मेजों की थपथपाहट)

श्री भंवर सिंह शेखावत- अध्‍यक्ष महोदय, इन सभी बातों के बीच परमार जी से मेरा निवेदन है कि ये सभी बातें तो होती रहेंगी लेकिन अभी जो शिक्षा का स्‍तर है और जिस दिशा में सारे विश्‍वविद्यालयों में अव्‍यवस्‍था है, उसके अंदर आप ध्‍यान दें, छात्रों के भविष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए ध्‍यान दें और मैं, समझता हूं कि इसमें कोई विरोध करने वाली बात नहीं है, आपने जो रखा है इसे यथा स्‍वीकार कर लिया जाये लेकिन कुछ बिंदु जो मैंने यहां इंगित किए हैं, आपको उनकी ओर ध्‍यान देना चाहिए. हम व्‍यवस्‍था की ओर ज्‍यादा ध्‍यान देंगे तो अच्‍छा होगा, धन्‍यवाद.

1.18 बजे

{ सभापति महोदया (श्रीमती अर्चना चिटनीस) पीठासीन हुई.}

 

डॉ. रामकिशोर दोगने (हरदा)- सभापति महोदया, विश्‍वविद्यालय संशोधन विधेयक जो आज पेश हुआ है, यह सही है कि नाम बदलने से काम बदल नहीं जाते, जबकि काम करने से नाम होता है. मेरा निवेदन है जो कुलपति था, वह भी ठीक था और अब कुलगुरू किया, उस पर भी हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन व्‍यवस्‍था में सुधार होना चाहिए. हमारे मध्‍यप्रदेश में 3 डीम्‍ड यूनिवर्सिटी हैं, 2 केंद्रीय विश्‍वविद्यालय हैं, 16 राज्‍य विश्‍वविद्यालय हैं और 20 निजी विश्‍वविद्यालय हैं. इसके अतिरिक्‍त 3 राष्‍ट्रीय महत्‍व के संस्‍थान भी हैं. जिनमें IIT, AIIMS और NIT है. जब IIT, AIIMS और NIT में कोई अच्‍छा काम होता है तो हम सभी कहते हैं कि ये अच्‍छा काम कर रहे हैं. वहां अच्‍छा इलाज हो रहा है, अच्‍छी पढ़ाई हो रही है. लेकिन शेष विश्‍वविद्यालयों में ऐसा क्‍यों नहीं होता है. वहां भी वही स्‍टाफ है, हमारे यहां भी वही स्‍टाफ है. सभी स्‍थानों पर एक जैसी ही व्‍यवस्‍थायें है लेकिन पढ़ाई में यह अंतर क्‍यों आता है. हमें इस पर ध्‍यान देना चाहिए.

सभापति महोदया, मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री जी से निवेदन है कि हमारे विश्‍वविद्यालयों के कुलपति का नाम तो हम बदल रहे हैं लेकिन वर्तमान में कॉलेजों में प्रभारी प्राचार्य हैं, प्रोफेसर नहीं हैं, लोग संविदा पर वहां पढ़ा रहे हैं या अतिथि विद्वान पढ़ा रहे हैं. हमें इस व्‍यवस्‍था को सुधरना चाहिए क्‍योंकि प्रदेश में 20 निजी विश्‍वविद्यालय हैं. आपने इनके लिए बहुत परमिशन दी है और अभी भी दे रहे हैं. यह अच्‍छी बात है, शिक्षा का क्षेत्र बढ़ना चाहिए क्‍योंकि शिक्षा रूपी चाबी हर ताले में लगती है. किसी भी क्षेत्र में भी जाएं, चाहे व्‍यवसाय में जाएं, चाहे राजनीजिक क्षेत्र में जाएं, चाहे प्रशासनिक सेवा में जाएं या किसानी करें. यदि सभी जगह शिक्षा होगी तो निश्चित सफलता मिलेगी और आदमी आगे बढ़ता है तो उसके लिए तो वह ठीक है परंतु मेरा आपसे निवेदन है कि जो हमारे कॉलेजों की व्‍यवस्‍थाएं हैं उनमें सुधार हो जाए तो ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा उसके साथ ही मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि आपने प्राईवेट स्‍कूल हैं उन पर तो आर.टी.ई. लगा दिया है, लेकिन जो प्राईवेट विश्‍वविद्यालय हैं उन पर भी आर.टी.ई. होना चाहिए ताकि गरीब बच्‍चे वहां भी एडमीशन ले सकें और उनको भी सारी सुविधाएं मिल सकें तो ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा. उनको भी लाभ मिलेगा तो वह अच्‍छे से पढ़ लिख जाएंगे. जिस तरह से प्राईवेट स्‍कूलों में बच्‍चे पढ़ रहे हैं उन बच्‍चों को भी लाभ मिलेगा तो यह ठीक रहेगा. मेरा केवल इतना ही सुझाव है. आप नाम बदलने जा रहे हैं अच्‍छी बात है. हमारे शास्‍त्रों में भी और पुरानी ज्ञान पद्धति में भी कुलगुरु का उल्‍लेख है. आपने इसे बदलकर कुलगुरु किया इसके लिए धन्‍यवाद.

श्री इन्‍दर सिंह परमार-- माननीय सभापति महोदया, मैं आदरणीय वरिष्‍ठ नेता शेखावत जी और रामकिशोर दोगने जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूं कि आपने विश्‍वविद्यालय में सुधार के लिए महत्‍वपूर्ण सुझाव दिये हैं. मध्‍यप्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार बदलाव करने का काम वर्ष 2020 से राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति के तहत संपन्‍न होने जा रहा है. भारत की ज्ञान परम्‍परा को भी विद्यार्थियों में समझने का एक अवसर मिलना चाहिए इसलिए ज्ञान परम्‍परा जोड़ने का संकल्‍प है. तेज गति के साथ में उसी प्रकार के पाठ्यक्रम बनाना, उसी प्रकार का प्रशिक्षण देना उस पर काम चल रहा है. यह जो नाम बदलकर कुलपति से कुलगुरु करने का जो संकल्‍प है मैं सोचता हूं कि भारत की ज्ञान परम्‍परा को स्‍थापित करने के लिए भारतीय दर्शन का प्रकटीकरण होता रहे क्‍योंकि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति भारत को केन्‍द्र में रखकर बनाई गई है. चाहे वह शासन द्वारा संचालित विश्‍वविद्यालय हो या निजी विश्‍वविद्यालय हो सभी में समानता के भाव से उसको लागू करने का संकल्‍प है और मैं सोचता हूं कि उसी भाव के लिए हम कुलगुरु शब्‍द रख रहे हैं. आपके जो महत्‍वपूर्ण सुझाव हैं हमने उन पर काम प्रारम्‍भ कर दिया है. हमने जहां पर प्रभारी प्राचार्य है, हमारे पास जो स्‍टॉफ है उसमें से परीक्षा लेकर पांच वर्ष के लिए स्‍थाई रूप से एक प्राचार्य मैं सोचता हूं कि दो से तीन महीने में हम सब पांच दलों तक पहुंचा देंगे. उसकी भी कुछ पात्रता है वह तय कर रहे हैं. यह निश्चित रूप से स्‍थाई प्राचार्य उस महाविद्यालय की चिंता कर सकेंगे. हमारे जो निजी विश्‍वविद्यालय हैं. निजी विश्‍वविद्यालय भी जो प्रारंभ किये गये हैं मूल भावना तो वह है कि हमारे भारत देश में शिक्षा अंग्रेजों के पहले कभी सरकार का विषय नहीं होती थी, समाज का विषय होती थी, समाज की जबावदारी होती थी और तब भी भारत की साक्षरता दर 90 प्रतिशत थी. यह अंग्रेजों का रिकार्ड कहता है. सात लाख स्‍कूल या कॉलेज मिलाकर होते थे. इसका मतलब समाज समृद्ध शिक्षा का अधिकार रखता था और इसीलिए निजी क्षेत्र का योगदान शिक्षा के क्षेत्र में भी हो क्‍योंकि सरकार की अपनी कुछ सीमाएं थीं उसको ध्‍यान में रखते हुए विश्‍वविद्यालयों की स्‍थापना की गई थी और कई विश्‍वविद्यालय आज बहुत अच्‍छा काम कर रहे हैं, लेकिन जहां-जहां शिकायत आ रही है उन सभी का निरीक्षण करने का व्‍यापक तंत्र स्‍थापित कर दिया है. मैं सोचता हूं कि ऐसी सभी जगहों  पर यदि कोई
त्रुटि पाई जाएगी तो हमने डी.जी. लाकर प्राईवेट
, सरकारी सभी की व्‍यवस्‍था की है. निजी विश्वविद्यालय में अब एडमीशन देंगे तो उन्हें तत्काल सूची सरकार के सिस्टम में देना पड़ेगी. यह हमने परिवर्तन कर दिया है. अब भविष्य में विद्यार्थियों को डीजी लॉकर से केवल मार्कशीट ही नहीं, हम जो उपाधि देते हैं, डिग्री देते हैं वह भी डीजी लॉकर से प्राप्त कर सकेंगे. माइग्रेशन सर्टिफिकेट भी उनको उसी से प्राप्त हो जाएगा. किसी प्रकार से उनको विश्वविद्यालय के चक्कर नहीं लगाना पड़ेंगे. चाहे सरकारी विश्वविद्यालय के छात्र हों या निजी विश्वविद्यालय के छात्र हों. ऐसी व्यवस्था बनाने का काम तेज गति से कर रहे हैं. एक विषय मैं दोगने जी को बताना चाहता हूँ आरटीई केवल आठवीं कक्षा तक लागू है. आपका सुझाव है कि गरीब बच्चों के लिए कुछ करना चाहिए हम इस पर जरुर विचार करेंगे. जो गरीब बच्चे पढ़ने में अच्छे हैं उनको सरकार की ओर से छात्रवृत्ति देने की व्यवस्था की गई है, लेकिन आपका जो सुझाव है उस पर और क्या कर सकते हैं इस पर जरुर सोचेंगे. मुझे चूंकि समय की सीमा में बांध दिया है इसलिए मैं यहीं पर अपनी बात को समाप्त कर रहा हूँ.

श्री यादवेन्द्र सिंह -- मंत्री जी, हम यह कह रहे हैं कि दो दिन पहले हमने इतनी बहस की विश्वास सारंग के मुद्दे पर वह तो पहले से ही लागू किए हुए थे उसको लागू रखते उसको सीबीआई को क्यों दे दिया.

सभापति महोदया -- प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2024 पर विचार किया जाय.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

सभापति महोदया -- अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.

प्रश्न यह है कि खण्ड 2 इस विधेयक का अंग बने.

खण्ड 2 इस विधेयक का अंग बना.

सभापति महोदया -- प्रश्न यह है कि खण्ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

खण्ड 1, पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

उच्च शिक्षा मंत्री (श्री इंदर सिंह परमार) -- सभापति महोदया, मैं, प्रस्ताव करता हूँ कि मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2024 पारित किया जाय.

सभापति महोदय -- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2024 पारित किया जाय.

प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2024 पारित किया जाय.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

विधेयक सर्वसम्मति से पारित हुआ.

1.29 बजे

मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2024

राज्यमंत्री, पशुपालन एवं डेयरी (श्री लखन पटेल) -- सभापति महोदया, मैं, प्रस्ताव करता हूँ कि मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2024 पर विचार किया जाय.

श्री जयवर्धन सिह ( राघौगढ़)माननीय सभापति महोदय इस विधेयक के संबंध में मुझे जो जानकारी दी गई है और जो जानकारी सदन में प्रस्तुत की गई है. इसमें इस विधायक के संशोधन के माध्यम से इस बात का उल्लेख किया गया है कि जब वहां पर इसकी कोई जब्ती होगी तो पूर्व में या अभी तक जो प्रक्रिया थी उ समें पहले न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास में प्रकरण जाता था. लेकिन जो संशोधन माननीय मंत्री जी ला रहे हैं. उ समें अब पहले कलेक्टर के माध्यम से भी पूरी कार्यवाही होगी फिर पुलिस के पास भी यह पूरा केस जायेगा. जब माननीय मंत्री जी बोलेंगे तो मैं चाहता हू कि वह जरूर इस बात का उल्लेख करें कि किस प्रकार से इसमें जो हमारा उ द्देश्य है हम उसको हासिल कर रहे हैं.

इसमें मेरी एक ही बात रह गई है कि आज सबसे बड़ी समस्या निराक्षित गौ माताओं की है आज भी अगर हम देखें तो 2020 तक कमलनाथ जी की सरकार के समय हमने गौशालाओं की योजना लाये थे जिसका क्रियान्वयन हमारे जो वर्तमान के वरिष्ठ मंत्री हैं पंचायती राज ग्रामीण विकास के उस विभाग के द्वारा लगभग अनेकों गौशालाएं पूरे मध्यप्रदेश में बनाई गई थी. लगभग हर जनपद में 10 से 15 गौशालाएं उ स समय बनाई गई थीं. लेकिन अफसोस की बात है कि 2020 के बाद में यह योजना बंद की गई है कोई भी नई योजना इसमें नहीं बनाई गई है, विभाग के द्वारा, वैसे तो यह शायद पशु पालन मंत्री जी के दायरे में नहीं आता है. वित्त मंत्री जी ने जरूर बजट भाषण में इस बात का उल्लेख किया है कि गौमाता की जो राशि है वह बढ़ाई गई है 40 रूपये की गई है लेकिन वह भी कहीं भी सही समय पर नही मिल पाती है 2 से 5 माह के बाद में मिलती है जो संचालक गौशाला के हैं वह उसका इंतजार करते हैं. वह राशि हर माह प्रथम सप्ताह में मिले हर गौशाला को ऐसा प्रावधान होना चाहिए. ताकि जो ऐसे समाज सेवी हैं जो गौमाता की सेवा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करते हैं. हम सबने यह देखा है कि गौशाला का निर्णाण करना कोई बहुत बडी बात नहीं है. जहां पर जगह है वहां पर निर्माण कार्य कर सकते हैं. लेकिन गौमाता की देखरेख करना और वह भी ऐसी गौमाता जो कि कहीं न कहीं बीमार हो, निराश्रित हो कोई और उनकी देखरेख करने वाला न हो. गौमाता की देखरेख करना कोई सरल काम नहीं है और जो लोग पूरा समय गौमाता के लिए देते हैं उनके लिए हम और सहयोग कैसे कर सकते हैं इस पर विचार करना चाहिए. यह जरूर अगर आप ठीक समझें तो इ स पर भी 2 मिनट आप बात कहें. वैसे मैं जानता हूं कि इस विधेयक का इस बात से ज्यादा संबंध नही है. फिर भी विषय गौमाता को लेकर के है तो मुझे लगा कि जब माननीय मंत्री जी अपना संबोधन देंगे तो इस विषय पर भी हमें आश्वासन दें कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा गौमातांएं जो कि गौशाला में रहती हैं उ नकी देखरेख अच्छी तरह से हो यह हम सबका प्रयास होना चाहिए, धन्यवाद्.

डॉ राजेन्द्र पाण्डे ( जावरा) सभापति महोदया मैं मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध संशौधन विधेयक का समर्थन करते हुए उसके प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए कुछ सुझाव भी रखना चाहता हूं. यह निश्चित रूप से सराहनीय है कि विगत वर्षों में तात्कालिक मुख्यमंत्री सुश्री उमा भारती जी के द्वारा 2004 में और फिर 2010 में माननीय शिवराज सिंह चौहान जी के द्वारा सदन में इस विधेयक को लाकर चर्चा करने का अवसर प्रदान किया था और विधेयक पारित हुआथा. अभी जो विधेयक प्रस्तुत किया गयाहै. यह केवल अवैध परिवहन के संबंध में संभवत: महसूस होता है कि पशुओं का अवैध परिवहन किये जाने पर गौमाता का किये जाने पर उसे जब्त किया जाय और जब्त करने के बाद मे उसकी जो न्यायालयीन कार्यवाही होती है उ स कार्यवाही को किया जाय. मैं इस चर्चा में इ सलिए सम्मिलित हुआ कि अ भी विगत माह ही 14 जून को मेरे जावरा विधान सभा में रतलाम जिले में प्रात: मतलब देर रात को 3 बजे रात ही कहूंगा. देर रात को मुझे सूचना मिली. मेरे कार्यालय और मेरे निवास के नजदीक एक शिव मंदिर है. मुझे सूचना मिली कि वहां पर गाय की हत्‍या कर उसका सिर उस मंदिर में फेक दिया गया है. माननीय मंत्री जी मैं करीब 3 बजकर 15-20 मिनट बजे उठकर पहुंचा. इतना दर्दनाक, इतना हृदय विदारक, इतना वीभत्‍स स्थिति में मैं स्‍वयं अपने आपको अभी भी नियंत्रित नहीं रख पा रहा हूं उस समय आप मेरी कल्‍पना कर सकते हैं. मात्र सात वर्ष की सजा भले ही यह संबंधित है अथवा नहीं है लेकिन हमारा जन्‍म इस हिन्‍दुस्‍तान में इस भारतवर्ष में इस भारतीय संस्‍कृति के संस्‍कारों को लेकर जन्‍म होता है और हम तो बचपन से सुन रहे हैं कि गाय हमारी माता है कृष्‍ण उन्‍हें पूजते थे गाय में गौमाता में समस्‍त देवताओं का वास होता है उस पर तो हाथ फेर दिया जाए तो अपना बीपी नियंत्रित हो जाता है लेकिन विषय अनुकूल नहीं होने के बावजूद मैं चाहूंगा सदन यह केन्‍द्र से भी संबंधित है, ऊपर भी कहीं जो मेरे विचार आए हैं अपनी भावनाओं को सम्मिलित करना चाहता था, उसे सिर्फ गिरफ्तार कर लिया जाता है. मेरा निवेदन है कि गौ को चिन्‍हित करते हुए, गाय को चिन्हित करते हुए क्षेत्र का, प्रदेश का देश का वातावरण बिगाड़ने का प्रयास किया जाता है, भ्रमित किया जाता है. धर्म में,मजहब में, कहीं न कहीं फर्क महसूस किया जाए, उसमें विवेक पैदा किया जाए, तनाव कैसा खड़ा किया जाए और किस तरह से लड़ाई झगड़ा हो जाए, फसाद हो जाए, दंगे हो जाएं, आगजनी हो जाए क्‍योंकि उसी दिन सुबह आक्रोश उत्‍पन्‍न हुआ, लोग भीड़ लेकर के निकले, मंदिर पर इक्‍टठा हुए. जैसे तैसे उन्‍हें नियंत्रित करने की कोशिश की. वह पूरे शहर भर में घूमे और शहर भर में पत्‍थरबाजी हुई. आगजनी की घटनाए&