मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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षोडश विधान सभा तृतीय सत्र

 

 

जुलाई, 2024 सत्र

 

गुरूवार, दिनांक 4 जुलाई, 2024

 

(13 आषाढ़, शक संवत्‌ 1946)

 

 

[खण्ड- 3] [अंक- 4]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

गुरूवार, दिनांक 4 जुलाई, 2024

(13 आषाढ़, शक संवत्‌ 1946 )

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत् हुई.

{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

11.03 शोक उल्‍लेख

श्री विराग सागर जी महामुनिराज की महासमाधि संबंधी उल्‍लेख

अध्‍यक्ष महोदय -- सदन को सूचित करते हुए मुझे अत्‍यंत दुख है कि परमपूज्‍य राजसंत भारत गौरव गणाचार्य बुन्‍देलखण्‍ड के प्रथमाचार्य युग प्रतिक्रमण प्रवर्तक उपसरविजेता महासंघ गणनायक आचार्य भगवंत श्री विराग सागर जी महामुनिराज की महासमाधि आज 4 जुलाई 2024, गुरूवार, चतुर्दशी प्रात: 2:30 बजे जालना (महाराष्‍ट्र) के नजदीक देवमूर्ति ग्राम सिंदखेड़ राजा रोड पर हुई है. ऐसे संतों-भगवंतों के चरणों में नमोस्‍तुते, नमोस्‍तुते, नमोस्‍तुते.

अब सदन दो मिनट का मौन रखकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करेगा.

(सदन द्वारा दो मिनट मौन खडे़ रहकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई.)

 

11.04 तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

बस कंपनियों में बसों के संचालन की अद्यतन स्थिति

[नगरीय विकास एवं आवास]

1. ( *क्र. 1368 ) श्री जयवर्द्धन सिंह : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बी.सी.एल.एल., ए.आई.सी.टी.एस.एल. एवं जे.सी.टी.एस.एस. के गठन से प्रश्‍न दिनांक तक कुल कितनी चल-अचल संपत्ति है? इस संपत्ति के अतिरिक्त और कौन-कौन से आय के स्रोत हैं? कितनी राशि भारत सरकार से, राज्य सरकार से किस-किस प्रयोजन से कब प्राप्त हुई? प्राप्त राशि का उपयोग उपरांत उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर दिया है, तो संपूर्ण जानकारी का पृथक गौशवारा मय दस्तावेजों के दें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्य में बी.आर.टी.एस. कॉरिडोर में बस स्टॉप के साथ दुकानों का निर्माण किया गया है? कुल कितनी दुकानें बनाई गईं, दुकानों का साईज क्या है? इन दुकानों को किसे किस दर पर कितनी अवधि के लिये किसी एजेन्सी विशेष को, अन्य किसे लीज, किराये या विक्रय किया गया है? अनुबंध की प्रति सहित संपूर्ण जानकारी का गौशवारा बनाकर बतायें। दुकानों की अद्यतन स्थिति क्या है? (ग) प्रश्‍नांश अवधि में कितनी-कितनी बसें किस शहर में संचालित हो रही हैं? बसों के संचालन के लिये कितनी निविदा आमंत्रित की गई ? किन निविदाकारों से किस दर पर किस प्रकार की कितनी बसें, किस-किस मापदण्डों के आधार पर क्रय की गईं? कब-कब, कितना-कितना भुगतान किस माध्यम से किया गया? वर्षवार, शहरवार, एजेन्सीवार पृथक-पृथक गौशवारा बनाकर बतायें। (घ) प्रश्‍नांश अवधि में कितने प्रश्‍न किस माननीय सदस्यों के कब-कब प्राप्त हुये हैं? संपूर्ण प्रश्‍नों का गौशवारा बनाकर बतायें। विधानसभा में जवाब प्रस्तुत करने वालों, कार्यों के लिये किन्हें क्या जिम्मेदारी तीनों कंपनियों को सौंपी गई थी, उनके नाम, पदनाम, उत्तरदायित्व सौंपा गया था? तीनों कंपनियों में कितने संविदाकर्मी किस पद पर कब से कार्यरत हैं, उनका सेवाकाल कब-कब बढ़ाया गया? नाम, पदनाम, मानदेय सहित गौशवारा बनाकर बतायें।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) :

 

 

श्री जयवर्द्धन सिंहमाननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न अमृत योजना के अंतर्गत जो अनुदान राशि मोबिलिटी के लिये दी गई है उसके संदर्भ में है. अमृत 2 के अंतर्गत बसों का टेण्डर किया गया था जिसमें सबसे पहले मैं बात करना चाहता हूं कि भोपाल लिंक सिटी सर्विसेज है. उसके अंतर्गत सबसे पहला टेण्डर एनआईटी 121 जिसमें 300 बसें क्रय करनी थीं उसमें सिर्फ 100 बसें ही क्रय कर पाये. उसके बाद जो दूसरा टेण्डर था उसमें एनआईटी 150 बसों की थी उसमें भी सिर्फ जिस ठेकेदार को टेण्डर मिला था उसमें 150 बसों में से 50 बसें क्रय कर पाया. इस योजना में केन्द्र सरकार के द्वारा वी.जी.एफ. वायबिल्टी गेप फंडिंग का प्रावधान दिया गया था. जो बस के मूल्य का 40 प्रतिशत था. उसमें अध्यक्ष महोदय एनआईटी में स्पष्ट लिखा है कि यह सिर्फ अनुदान एक बार दिया जायेगा तो मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि मैंने उल्लेख किया भोपाल के टेण्डरों के बारे में उसी प्रकार से जबलपुर की जो बस सर्विसिज कम्पनी है. वहां पर भी लगभग 200 बसों का टेण्डर हुआ था. मैं सदन को जानकारी देना चाहता हूं कि जो ठेकेदार जबलपुर में वही ठेकेदार भोपाल में भी है. वहां पर भी 200 बसों में से सिर्फ 50 बसें ही चल रही हैं. यह एक गंभीर विषय है दो टेण्डर भोपाल में हुए उसमें से पहले टेण्डर में 300 बसें आनी थीं उसमें 100 बसें आयीं दूसरे टेण्डर में 150 बसें आनी थीं उसमें से 50 बसें ही आयीं. एक तिहाई आयी. उसी प्रकार से जबलपुर के टेण्डर में जहां पर 200 बसें आनी थीं सिर्फ 50 बसें ही वहां पर आ पाई हैं, इसका कारण क्या है ? क्या इस पूरी प्रक्रिया में जो ठेकेदार अपना कमिटमेंट फुलफिल नहीं कर पाया है क्या उनके खिलाफ कोई एक्शन लिया गया है. इसके साथ साथ जैसा मैंने पहले पूछा था अब तक इस ठेकेदार को कितना वीजीएफ प्रदान किया गया है. मंत्री जी बतायें? यह पहला प्रश्न है अध्यक्ष महोदय.

श्री कैलाश विजयवर्गीयमाननीय अध्यक्ष महोदय, यह मेरा सौभाग्य है कि मैं इसी विभाग में 10 साल पहले भी मंत्री था. उस समय सरकार केन्द्र में मोदी जी की नहीं थी. मुझे कहते हुए प्रसन्नता है कि जब से डबल इंजन की सरकार आयी है. जब से नगरीय प्रशासन विभाग को जो केन्द्र से मदद मिल रही है हर क्षेत्र में पहले सिर्फ जवाहरलाल नेहरू शहरी विकास योजना थी उससे 10 गुना ज्यादा पैसा अलग अलग योजनाओं के माध्यम से मिल रहा है. इसलिये मैं देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी को इस बात के लिये बधाई देना चाहूंगा. माननीय सदस्य जी ने सही कहा है कि पहले 300 बसों का किया. इसमें यात्री कितने चल रहे हैं ? जैसे ही डिमाण्ड बढ़ेगी उसी हिसाब से बसों की संख्या भी बढ़ेगी. दुर्भाग्य से भोपाल एवं जबलपुर में यात्रियों की संख्या बहुत कम है इसलिये ठेकेदार पर कोई दबाव नहीं बनाया गया है कि वह 300 बसें एक साथ खरीदे. क्योंकि यह देश की हानि है हम कह दें आप 300 बसें खरीद लो, बसें खड़ी रहें. इसलिये जब जब जितनी बसों की आवश्यकता पड़ती है उतने बसें मंगायी जाती हैं. जहां तक राज्य शासन इसमें 40 प्रतिशत राशि देती है और केन्द्र सरकार से 60 प्रतिशत दी जाती है. केन्द्र सरकार के जितने भी प्रोजेक्ट हैं उसमें राज्य शासन की कहीं न कहीं से सहभागिता होती है.

अध्‍यक्ष महोदय, डबल इंजन की सरकार के माध्‍यम से प्रदेश के अंदर अमृत 1 एवं अमृत 2, ये सबके माध्‍यम से जहां इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर का विकास हो रहा है, वही ट्रांसपोर्टेशन के क्षेत्र में भी बहुत विकास हो रहा है और मैं बहुत गर्व से कह सकता हूं कि मध्‍यप्रदेश में, इंदौर में मेट्रो, भोपाल में मेट्रो ये सब केन्‍द्र के सहयोग से हो रहा है डबल इंजन की सरकार का आवागमन में बहुत महत्‍वपूर्ण योगदान है.

श्री जयवर्द्धन सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने बहुत सरल प्रश्‍न पूछा था, जिसका उत्‍तर माननीय नहीं दें पाएं. मैं उनका बहुत सम्‍मान करता हूं, बहुत वरिष्‍ठ नेता है. मैंने स्‍पष्‍ट प्रश्‍न पूछा है कि अब तक बीजीएफ के माध्‍यम से कितनी राशि दी गई है ठेकेदार को, मैं मेरे उत्‍तर के माध्‍यम से यह साबित करना चाहता हूं कि जो माननीय मंत्री जी उल्‍लेख कर रहे हैं, ये सरकार डबल इंजन नहीं, (XXX) की सरकार है. मेरा बहुत प्‍वाइंटेड प्रश्‍न है, मैं वापस वही प्रश्‍न पूछूंगा मंत्री जी से अब तक जबलपुर और भोपाल में कितनी राशि बीजीएफ की दी गई है कंपनी को अमृत 2 में.

श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्‍यक्ष जी, अगर इसमें आप मूल प्रश्‍न देखेंगे तो मूल प्रश्‍न में यह उल्‍लेखित नहीं था, फिर भी मैं बता देता हूं पूरक प्रश्‍न है इसमें लगभग 40 प्रतिशत बीजीएफ केन्‍द्र शासन का और 60 प्रतिशत हमारा है, राशि का आपने जहां तक उल्‍लेख किया है, अभी मेरे पास राशि का आंकड़ा नहीं है, मैं आपको व्‍यक्तिगत रूप से बता देता हूं.

श्री जयवर्द्धन सिंह - कोई बात नहीं, मैं उत्‍तर दे देता हूं, क्‍योंकि उत्‍तर तो मुझे आपने दिया है, इसमें पूरा उल्‍लेख है उत्‍तर का.

अध्‍यक्ष महोदय - जयवर्द्धन सिंह जी हो गया.

श्री जयवर्द्धन सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, ये मेरा अधिकार है. मैंने स्‍पष्‍ट प्‍वाइंटेड प्रश्‍न पूछा मंत्री जी से कुल कितना बीजीएफ दिया गया और मैं सदन में इस बात का उल्‍लेख करना चाहता हूं. प्रावधान यह था कि कुल जो टेण्‍डर किया गया है, एक बस की कीमत 25 लाख थी, उसमें केन्‍द्र सरकार के द्वारा अमृत योजना में यह प्रावधान दिया गया था कि 40 प्रतिशत बीजीएफ दिया जाएगा, जो 10 लाख रुपए प्रति बस पर आता है, इसके संबंध में भोपाल की जिसका मैंने उल्‍लेख किया कुल 150 बसें क्रय कर पाई थी कंपनी, उसमें से कुल आर्डर 450 बसों का था, सिर्फ 150 बस क्रय कर पाई, 150 बसों के लिए बीजीएफ दिया गया साढ़े नौ करोड़ रुपए का जो मेरे पास आपने जानकारी दी है. दूसरा पाइंट, मंत्री जी कह रहे है कि और बसों की आवश्‍यकता नहीं थी, डिमांड नहीं थी, लेकिन अध्‍यक्ष जी यही कंपनी 2022 में एक और टेण्‍डर निकालती है, 70 बसों का. जब पहले टेण्‍डर की पूर्ति नहीं हो पा रही तो दूसरा टेण्‍डर क्‍यों निकल रहा है, इसमें सबसे महत्‍वपूर्ण पाइंट है, अमृत योजना के अंतर्गत सिर्फ वन टाइम बीजीएफ का प्रावधान था, सिर्फ बस की कैपीटल कॉस्‍ट पर पूंजीगत व्‍यय पर लेकिन मैं मंत्री जा का इसमें सहयोग करना चाहता हूं. मैं आपको प्रश्‍न नहीं कर रहा हूं, सहयोग कर रहा हूं कि आपको आगे क्‍या करना चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय - जयवर्द्धन सिंह जी कोई प्रश्‍न हो तो पूछिए इसको लंबा मत कीजिए. प्रश्‍न काल में सुझाव नहीं देते हैं. प्रश्‍न है तो एक और पूछ लो दो से ज्‍यादा प्रश्‍न नहीं पूछे जाते कायदे से.

श्री जयवर्द्धन सिंह - अध्‍यक्ष जी, जैसा आप कहे, मेरा दूसरा प्रश्‍न है कि नगर पालिका निगम भोपाल के द्वारा दिनांक 24.11.2022 को आयुक्‍त नगरीय प्रशासन को पत्र दिया जाता है कि ठेकेदार के पास पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था नहीं है ऑपरेशनल कॉस्‍ट के लिए, वह मांग करता है कि इसमें जबलपुर और भोपाल में बस के संचालन के लिए ठेकेदार को अतिरिक्‍त्त राशि दी जाए और इस संबंध में स्‍टेट लेबल टेक्निकल कमेटी(एसएलटीसी), जिसमें मंत्री जी शायद आप नहीं बैठ पाते, शायद मैं गलत हो सकता हूं लेकिन जो मुझे जानकारी है कि उसमें आप मौजूद नहीं रहते, उसमें अधिकारी मौजूद रहते हैं, वे इसमें इसी ठेकेदार के लिए भोपाल में पांच करोड़ अतिरिक्‍त ऑपरेशनल एक्‍सपेंसेस की बात कर रहा हूं और जबलपुर में अतिरिक्‍त दो करोड़ का एक्‍सपेशेंस ठेकेदार के लिये स्‍वीकृत करते हैं, मान्‍य करते हैं (शेम शेम की आवाज) आप कल्‍पना कीजिए जब साढ़े चार सौ बसेस में से इस ठेकेदार से भोपाल में सिर्फ 150 संचालित हो रही हैं, जबलपुर में दो सौ में से सिर्फ 50 बसे संचालित हो रही हैं, लेकिन पहले ही शर्त की ठेकेदार पूर्ति नहीं कर पा रहा है और उसके बावजूद यह (XXX) की सरकार उसी ठेकेदार को अतिरिक्‍त सात करोड़ रूपये की मदद प्रति वर्ष देने का फैसला ले रही है(शेम शेम की आवाज) यह बहुत गंभीर मुद्दा है. मैं माननीय मंत्री जी से यही अनुरोध करूंगा कि जिस पत्र का उल्‍लेख मैंने किया है, जो अतिरिक्‍त राशि इस ठेकेदार को दी जा रही है, जबकि वह ठेकेदार अपनी ही जिस शर्त से उसने टेंडर लिया था, जब उसी की वह पूर्ति नहीं कर पा रहा है, तो कृपया आप इसका संज्ञान लें, आप इसकी स्‍वयं जांच करायें.

अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय जयवर्द्धन जी प्रश्‍न आ गया है, माननीय मंत्री जी कुछ कहना चाहेंगे.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍य को धन्‍यवाद देता हूं, बड़ी अच्‍छी जानकारी के साथ आपने प्रश्‍न पूछा है और यह बात सही है कि उनका पत्र भी आया है, पर मैं यह देख लूंगा कि अगर टेंडर की शर्तों के अंदर विशेष अनुदान दिया जा सकता है, तो दिया गया या नहीं दिया गया है. मैं प्रमुख सचिव को जांच के आदेश देता हूं और यदि इसमें किसी भी प्रकार की कोई अनियमितता होगी तो निश्चित रूप से हम कार्यवाही करेंगे, यह मैं माननीय सदस्‍य को आश्‍वासन देता हूं.

 

 

अनुसूचित जाति/जनजाति पंप धारक किसानों को नि:शुल्क विद्युत प्रदाय योजना

[ऊर्जा]

2. ( *क्र. 270 ) श्री आतिफ आरिफ अकील : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति के पंप धारक कृषि उपभोक्ताओं को नि:शुल्क विद्युत प्रदाय किए जाने की योजना वर्तमान में प्रचलन में होकर कृषकों को योजना अंतर्गत लाभ प्रदान किया जा रहा है? (ख) यदि हाँ, तो भोपाल एवं रायसेन जिले में वर्ष 2023 से योजना अंतर्गत नि:शुल्क विद्युत योजना का लाभ प्रदान करने में उपयोग में लाये गए कितने ट्रांसफार्मर जल गए तथा कितने जले ट्रांसफार्मरों को बदला गया? जले हुए ट्रांसफार्मरों को बदलने में कितने वाहनों का प्रयोग किया गया और उन वाहनों में कितना डीजल व्यय किया गया? (ग) प्रश्‍नांश "क एवं ख" के परिप्रेक्ष्य में ट्रांसफार्मर बदलते समय लाइट बंद एवं चालू करने में हुआ विलंब, एक से अधिक बार वितरण केन्‍द्र के अंतर्गत जलने वाले ट्रांसफार्मर की सूची मय कारणों के ट्रांसफार्मर जलने एवं बदलने की तिथि सहित संपूर्ण जानकारी से अवगत करावें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ) : (क) जी हाँ, प्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के 01 हेक्‍टेयर तक की भूमि वाले 05 हॉर्स पावर तक के पंप धारक कृषि उपभोक्‍ता‍ओं को नि:शुल्‍क विद्युत प्रदाय किये जाने की योजना वर्तमान में प्रचलन में है तथा उक्‍तानुसार पात्र कृषकों को योजनांतर्गत लाभ प्रदान किया जा रहा है। (ख) भोपाल जिले में वर्ष 2023 से दिनांक 10.06.2024 तक उक्‍त नि:शुल्क विद्युत प्रदाय योजना का लाभ प्रदान करने में उपयोग में लाये गए 14 वितरण ट्रांसफार्मर फेल/जले थे, जिन्‍हें बदल दिया गया है। रायसेन जिले में वर्ष 2023 से दिनांक 10.06.2024 तक उक्‍त नि:शुल्‍क विद्युत प्रदाय योजना का लाभ प्रदान करने में उपयोग में लाये गए 03 वितरण ट्रांसफार्मर फेल/जले थे, जिन्‍हें बदल दिया गया है। भोपाल एवं रायसेन जिलों के अंतर्गत फेल/जले ट्रांसफार्मर के बदलने हेतु पात्र होने एवं उनके बदलने का विवरण संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विभाग द्वारा अनुबंधित वाहन का उपयोग कर फेल/जले वितरण ट्रांसफार्मर को बदला जाता है। अनुबंधित वाहन के देयक का भुगतान वाहन मालिक को विद्युत वितरण कंपनी के द्वारा किलोमीटर के आधार पर किया जाता है। वाहन में डीजल भरने की जिम्‍मेदारी वाहन मालिक की होती है, अत: योजना के ट्रांसफार्मर बदलने में हुई डीजल की खपत संबंधी जानकारी पृथक से संधारित नहीं हो पाती है। भोपाल एवं रायसेन जिलों में प्रश्‍नाधीन फेल/जले वितरण ट्रांसफार्मरों को बलदने के लिये क्रमश: 3 एवं 1, वितरण कंपनी द्वारा अनुबंधित वाहनों का उपयोग किया गया। (ग) उत्‍तरांश "क" एवं "ख" के परिप्रेक्ष्‍य में ट्रांसफार्मर बदलते समय लाईट बंद एवं चालू करने में हुए समय का विवरण संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। भोपाल एवं रायसेन जिलों में वर्ष 2023 से दिनांक 10.06.2024 तक अनुसूचित जाति/जनजाति के 5 हॉर्सपावर तक के पंप धारक कृषि उपभोक्‍ताओं को नि:शुल्‍क विद्युत प्रदाय का लाभ प्रदान करने में उपयोग में लाये गये वितरण ट्रांसफार्मरों में से कोई भी वितरण ट्रांसफार्मर एक से अधिक बार नहीं जला है।

परिशिष्ट - "एक"

श्री आतिफ आरिफ अकील -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न माननीय ऊर्जा मंत्री जी के लिये था और मेरा प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश में एस.सी.,एस.टी., पंप धारक किसानों को किस योजना के अंतर्गत लाभ दिया जा रहा है, उस योजना की संपूर्ण जानकारी प्रदान करें. दूसरा भोपाल संभाग के एस.सी.,एस.टी. पंप धारक किसान जिन्‍हें योजना का लाभ मिल रहा है, उनकी सूची उपलब्‍ध करावें.

श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय विधायक जी को यह जवाब दे रहा हूं कि पहले तो हमारी सरकार द्वारा एक हेक्‍टेयर तक जो हमारे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के कृषक हैं, उनको पांच हार्स पावर तक के कृषि पंप वाली नि:शुल्‍क बिजली प्रदान की जाती है, वर्ष 2023-24 में इस हेतु रूपये 5 हजार 775 करोड़ रूपये जारी किये गये, इसमें 9 लाख 36 हजार कृषि उपभोक्‍ताओं को लाभ दिया जा रहा है. यह हमारी सरकार है जो किसानों और गरीबों के हित में काम कर रही है. इन्‍होंने पूछा है तो इन्‍होंने भोपाल में 3 हजार 548 नि:शुल्‍क विद्युत प्रदाय कनेक्‍शन धारी हैं, रायसेन में 16 हजार 854 हैं. इसके अलावा भोपाल में और क्‍या जानकारी चाहिए यह मुझसे पूछ लें मैं बता दूंगा.

श्री आतिफ आरिफ अकील -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय मैं प्रदेश की अगर बात करूं तो विजलैंस कमेटी जो गरीब लोगों के चालान बनाती रहती है, तो पहले एक कमेटी बना दी जाती थी, जो कहीं न कहीं एग्‍जामिन करती थी कि वह गलत है या सही है, तो अब वह कमेटी बंद कर दी गई है, उसको दोबारा गठित करने की आपसे उम्‍मीद करता हूं.

श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वैसे इस प्रश्‍न में यह चीज उद्भूत नहीं हो रही है, लेकिन जनहित में, गरीबों के हित में कोई बात आई है तो मैं विभाग में चर्चा करके जनहित और लोक कल्‍याणकारी कार्य अगर होगा तो उस पर विचार कर लेंगे.

श्री आतिफ आरिफ अकील -- अध्‍यक्ष महोदय, यह कमेटी अगर गठित हो जायेगी तो गरीबों के ऊपर जो ज्‍यादतियां हो रही हैं, वह नहीं होंगी.

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- अध्‍यक्ष महोदय, हमारे सदस्‍य ने बड़ा अच्‍छा मुद्दा उठाया है, इसमें कोई पार्टी पालिटिक्‍स वाली बात भी नहीं है, एस.सी., एस.टी., के लिये अच्‍छी योजनाएं सरकार की हैं, मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री जी से अनुरोध है कि इसमें सामान्‍यत: फील्‍ड में देखा जाता है कि महीनों भर तक ट्रांसफार्मर ठीक नहीं होते हैं, रिपेयर नहीं होते हैं, इसमें कोई समय सीमा दो दिन, चार दिन, पांच दिन, सात दिन ऐसी समय सीमा कम से कम फिक्‍स हो. समय सीमा रहती भी है तो वह होते नहीं है, उसके लिये अगर समय सीमा में नहीं हो रहे हैं, तो उसके लिये क्‍या कार्यवाही हो? यह भी एक निश्चित होना चाहिए ताकि किसान की फसल खराब नहीं हो, क्‍योंकि यह आदिवासी और सभी सामान्‍य किसान उनकी भी परेशानी रहती है, क्‍योंकि लाईन तो सब दूर जाती है, उसी से जाती है, मैं यह कहना चाहता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- वैसे मंत्री जी ने कहा है कि गरीबों के हित में वह गंभीरता से देखेंगे.

श्री उमंग सिंघार-- इसमें कोई एक नियम बन जाये ताकि आगे सुनिश्चित रहे, यह मेरा आपके माध्‍यम से आपसे अनुरोध है.

अध्‍यक्ष महोदय-- मंत्री जी, कुछ कहना चाहेंगे.

श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं पहले ही कह चुका हूं, दूसरा हमारी सरकार गरीबों के हित में लगातार काम कर रही है. आपके सकारात्‍मक सुझाव होंगे उनको हम स्‍वीकार करेंगे. हम पक्ष, विपक्ष के लिये नहीं बैठे, हम जनहित के लिये बैठे हैं.

राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण

[लोक निर्माण]

3. ( *क्र. 1100 ) श्री दिनेश राय मुनमुन : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शासन के प्रावधानों अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग समतल होना चाहिए? (ख) क्‍या नागपुर से जबलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिवनी जिले अंतर्गत छपारा से बंजारी घाटी के मध्‍य दरारें पड़ गयी हैं? (ग) क्‍या उक्‍त राजमार्ग पर अनेक स्‍थानों पर किये गये पेच वर्क के कारण मार्ग अनेक जगह असमतल हो गया है, जिसके कारण आये दिन दुर्घटनाएं घटित हो रही हैं, फलस्‍वरूप बड़ी संख्‍या में जन-धन की क्षति हो रही है? (घ) यदि हाँ, तो क्‍या उक्‍त मार्ग ठेकेदार से समतल कराये जाने एवं दरारे भरने हेतु विभाग द्वारा लिखा गया है? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री राकेश सिंह ) : (क) राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण कार्य आई.आर.सी. के मानकों अनुसार कराये जाते हैं। (ख) प्रश्‍नांकित मार्ग प्रमुख अभियंता, लो.नि.वि. के कार्यक्षेत्र अंतर्गत नहीं है, अपितु मार्ग भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण भारत सरकार से संबंधित है, उनसे प्राप्त उत्तर संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) एवं (घ) प्रश्‍नांश '' के उत्तर अनुसार।

परिशिष्ट - "दो"

श्री दिनेश राय मुनमुन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जो प्रश्‍न है वह राष्‍ट्रीय राजमार्ग से संबंधित है. मैं इसमें इसलिये आपका संरक्षण चाहूंगा क्‍योंकि वर्ष 2019 में भी यही प्रश्‍न मैंने उठाया था और तत्‍कालीन रोड का निर्माण कार्य चल रहा था और उस समय उस विभाग ने उस पर तत्‍परता नहीं दिखाने के कारण आज कम से कम सेकड़ों ऐसी दुर्घटनायें हुई हैं जिसमें 10 लोगों को तो कम से कम उठाने वाला मैं हूं, वहां से ले जाने वाला, क्‍योंकि वह मेरे मार्ग में आता है. घायलों को मृत लोगों को उठाने का काम मैंने खुद अपने हाथों से किया है और आज भी वहां पर कई गाडि़यां एक्‍सीडेंट में हैं. एनएचएआई को लगातार प्रश्‍न करने के बाद भी लेटर देने के बाद भी उन्‍होंने ठेकेदार पर कार्यवाही नहीं की. मुझे इस सदन को बताते हुये इस बात का बड़ा घोर दुख होता है कि वह व्‍यक्ति जो इस सदन का सदस्‍य है उसने उस मार्ग को बनाया. मेरा आपसे आग्रह है कि इसमें आप संरक्षण दें. इसमें हमेशा जवाब के माध्‍यम से जो दिया जाता है कि वह राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण है, इसमें हमारी सरकार कुछ नहीं कर सकती, लेकिन जो दुर्घटना हो रही है वह मेरी विधान सभा से निकलने वाले मार्ग में, मेरे ही राज्‍य के लोगों की हो रही हैं. जिस समय वह काम कर रहा था उस समय भी मैंने एनएचएआई को लिखकर दिया कि इसमें जो पहाड़ी काट रहा है उसकी मुरम और बोल्‍डर है वह ही उस सड़क में डाल रहा है. जब तक उसमें कम्‍प्रेशन नहीं होगा, दवाब नहीं बनाया जायेगा जब आपने अर्थवर्क किया है उसी का गुणवत्‍ताहीन काम किया है तो ऊपर डामर कैसे चलेगा और इसमें जो जवाब दे रहे हैं कि उसमें समतलीकरण है. आज भी अगर माननीय मंत्री जी उसका निरीक्षण करा लें तो आज भी रोड डेमेज है. 9 किलोमीटर में सबसे ज्‍यादा नागपुर से जबलपुर के बीच में अगर दुर्घटनायें होती हैं, वह इसी 9 किलोमीटर में होती हैं और वह व्‍यक्ति पीडब्‍ल्‍यूडी का 100 करोड़ का काम अभी मेरी विधान सभा में कर रहा है. मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करता हूं कि इसकी जांच करा लें.

श्री राकेश सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष जी माननीय विधायक जी की चिंता स्‍वाभाविक और जायज है. कहीं भी जब सड़कों का निर्माण होता है तो लोगों की अपेक्षा होती है कि वह अच्‍छी गुणवत्‍ता की होंगी और उसके साथ-साथ वह विकास का समवाहक भी बनेंगी. जिस सड़क की बात की जा रही है, यह सड़क राष्‍ट्रीय राजमार्ग के पास है, लोक निर्माण विभाग से सीधा उसका कोई संबंध नहीं है. लेकिन फिर भी चूंकि सड़क है और नेशनल हाइवे से जो जानकारियां हमें प्राप्‍त हुई हैं उसके माध्‍यम से मैं माननीय सदस्‍य को उत्‍तर देने का पूरा प्रयास करूंगा. अध्‍यक्ष महोदय, यह लखनादौन, सिवनी के बीच में लगभग 9.24 किलोमीटर की फोरलेन की सड़क है. इस कांट्रेक्‍ट जो था यह उदित इंफ्रा वर्ल्‍ड प्राइवेट लिमिटेड, प्रकाश असफाल्टिंग्‍स एण्‍ड टोल हाइवेज, रीवा के पास है और वर्ष 2018 में इसकी परफार्मेंस गारंटी भी समाप्‍त हुई, लेकिन यह बात सही है कि इस मार्ग पर जब काफी अधिक मात्रा में जब डस्टिंग हुई तो मार्ग असमतल हुआ और उसको दुरूस्‍त करने के लिये एनएचएआई ने बार-बार नोटिस जारी किये, लेकिन ठेकेदार ने इस कार्य को नहीं किया. बाद में रिस्‍क एण्‍ड कास्‍ट में ठेकेदार को नोटिस देते हुये और एनएचएआई ने इस काम को कराया और उसमें जो 60 लाख रूपये की लागत थी वह ठेकेदार से वसूले गये. बाद में जिसका जिक्र माननीय सदस्‍य जी कर रहे हैं कि कुछ दरारें भी वहां पर आई हैं तो एक बार जब रोड की क्‍वालिटी ठीक तरीके से नहीं बनती बेस ठीक से तैयार नहीं होता तो स्‍वाभाविक रूप से कुछ कठिनाईयां आती हैं वह दरारें आई हैं और उन दरारों को सुधारने के लिये भी एनएचएआई ने टेण्‍डर कॉल कर लिये हैं और उसका कार्य भी प्रारंभ होने की स्थिति में है. जहां तक दुर्घटनाओं की बात है तो यह बात सही है कि वह स्‍थान उसको एनएचएआई ने चिन्हित किया है, बंजारी घाटी और घुनई घाटी को वह ब्‍लेक स्‍पॉट की सूची में उसको शामिल किया है. यहां पर वर्ष 2020 और 2021 में कुछ अल्‍पकालिक यानि प्रारंभिग रूप से सुधार के कार्य भी कराये गये थे, लेकिन बाद में इसमें जियोमेट्रिक इम्‍प्रूवमेंट हो इसके लिये अब कार्य प्रारंभ कर दिया गया है और एनएचएआई ने यह सूचना दी है कि शीघ्र ही इस कार्य को पूरा कर लिया जायेगा. सदस्य महोदय को प्रसन्नता होगी मैं एक अतिरिक्त जानकारी उनको देना चाहता हूं कि वहां लखनादौन-रायपुर मार्ग, एनएचएआई ने उसकी भी लगभग स्वीकृति प्रदान कर दी है.डीपीआर के आदेश हो गये हैं. यह रोड जो बनेगी तो यह लखनादौन-बरघाट-सिवनी-लालबर्रा-रजेगांव होते हुए रायपुर तक लगभग 310 कि.मी. का रोड होगा जो पर्यटन की दृष्टि से,आर्थिक विकास की दृष्टि से और नक्सलाईट गतिविधियों को रोकने की दृष्टि से महत्वपूर्ण होगी और 120 कि.मी. प्रति घंटे की डिजाईन गति के साथ इस रोड का एक्सेस कंट्रोल होगा.

श्री दिनेश राय"मुनमुन" - माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें गंभीर मामला यह है एक तो राष्ट्रीय राजमार्ग रायपुर के लिये मैं धन्यवाद दूंगा मंत्री जी को. मेरा यह कहना है कि जब आपने ही इस बात को माना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर 60 लाख रुपये खर्च किये और वह गुणवत्ता विहीन है तो हमेशा उसमें ऊपर-ऊपर लीपापोती की जायेगी. जब बेस ही खराब है जिसकी नींव ही खराब है तो वह लैंटर्न कितने दिन तक चलेगी. मंत्री जी उस रोड का घटिया काम है. पूरी रोड नई खुदकर बनेगी तभी वह रोड आपकी संचालित,संधारित हो सकेगी.

संसदीय कार्य मंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय) - आपने एक गंभीर बात कही है कि सदन के सदस्य ने बनाई है.

श्री दिनेश राय"मुनमुन" - (XX)

श्री अभय मिश्रा - (XX)

श्री दिनेश राय"मुनमुन" - (XX)

(..व्यवधान..)

अध्यक्ष महोदय - दिनेश जी एक मिनिट बैठिये. यह सब चर्चा विलोपित की जाये. अभय जी बैठिये.

श्री अभय मिश्रा - मंत्री जी, 5 वर्ष की परफार्मेंस गारंटी की अवधि समाप्त हो चुकी है. यह विभाग आपका नहीं है. यह केन्द्र का है.

अध्यक्ष महोदय - अभय जी, आप अब बैठिये.

(..व्यवधान..)

श्री अजय सिंह (XXX) अगला प्रश्न लिया जाये. माननीय मंत्री महोदय, दोनों को अपने चेंबर में बुला लें और चर्चा कर लें.

अध्यक्ष महोदय - दोनों विधायकों की आपस की चर्चा मैंने विलोपित कर दी है.

श्री कैलाश विजयवर्गीय - माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है कि माननीय दिनेश राय "मुनमुन" जी ने जो प्रश्न उठाया है. मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि यदि रोड खराब है तो आप एनएचआई को एक पत्र लिखें कि वहां पर टोल नहीं लेना चाहिये, जब तक कि रोड ठीक न हो. यह हमारे मध्यप्रदेश की जनता के साथ अन्याय है कि वे गढ्ढे वाली सड़क पर भी चलें और टोल भी दें तो एक एनएचएआई को आप पत्र लिखें.

अध्‍यक्ष महोदय -- एक मिनट, दिनेश जी, आपका विषय यह नहीं है, भैरो सिंह बापू जी का प्रश्‍न चल रहा है. माननीय मंत्री जी कुछ कहना चाहते हैं.

श्री राकेश सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष जी, राष्‍ट्रीय राजमार्ग को लेकर लोक निर्माण विभाग का सीधा उस पर कोई नियंत्रण नहीं होता है, लेकिन फिर भी जो भावना माननीय सदस्‍य की है और माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी ने कहा है, उनको हम अवगत जरूर कराएंगे. उन्‍होंने यह जरूर जानकारी दी है कि जो रोड अभी खराब है, उसको लेकर उन्‍होंने टेण्‍डर कर लिया है और बहुत जल्‍दी ही उसको पूरा करेंगे. एक बात तो आप सबको माननी पड़ेगी कि पूरे देश में नेशनल हाईवे को लेकर जो एक कीर्तिमान बना है, सड़कों को लेकर पूरे देश में आज किसी भी स्‍थान पर हम चले जाएं, तो देश में सड़कों को देखकर ही कहा जाता है कि यह मोदी जी की सरकार है. राष्‍ट्रीय राजमार्ग बहुत अच्‍छी गुणवत्‍ता के हैं. कहीं पर किसी जगह पर अगर कोई ऐसी स्‍थिति बनी है तो वह खराब क्‍वालिटी के कारण बनी होगी, लेकिन नेशनल हाईवे ऐसे विषयों पर भी तत्‍परतापूर्वक कार्यवाही करता है. संबंधित ठेकेदार के खिलाफ 60 लाख रुपये की वसूली उन्‍होंने पहले ही की है. यदि विभाग को यह लगेगा कि नहीं, अभी भी कमी बाकी है तो विभाग और भी आगे की कार्यवाही करेगा, जिसमें पैसे की वसूली से लेकर ब्‍लैक लिस्‍टेड होने तक कार्यवाही उसमें शामिल है.

अधिक बिजली बि‍ल एवं विदयुत व्‍यवस्‍था में सुधार

[ऊर्जा]

4. ( *क्र. 1265 ) श्री भैरो सिंह बापू : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सुसनेर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत अतिभारित किन-किन ग्रि‍डों पर वर्तमान में कितने-कितने एम.वी.ए. ट्रांसफार्मर की ओर आवश्‍यकता है? इस हेतु विभाग से प्राप्‍त मांग पत्र पर शासन द्वारा क्‍या-क्‍या स्‍वीकृति प्रदान की गई है? (ख) विधानसभा क्षेत्र के कई इलाकों में वोल्‍टेज ड्रॉप की समस्‍या तथा अघोषित बिजली कटौती से क्षेत्र के लोगों को काफी परेशानी का सामाना करना पड़ रहा है, इस लापरवाही का जिम्‍मेदार कौन है? अघोषित कटौती क्‍यों की जा रही है? (ग) सुसनेर विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान में कितने स्‍थानों पर लाईनों में केबल डालना आवश्‍यक है तथा अतिभारित ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि कब तक की जावेगी? (घ) वर्तमान में बिजली बिल अत्‍यधिक राशि के दिये जाने का क्‍या कारण है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ) : (क) वर्तमान में म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इन्‍दौर अंतर्गत सुसनेर विधानसभा क्षेत्र में स्‍थापित कोई भी अति उच्‍चदाब एवं 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र (ग्रिड) अतिभारित नहीं है। अत: शेष प्रश्‍न नहीं उठता। (ख) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र अंतर्गत पर्याप्‍त संख्‍या में 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र एवं अन्‍य विद्युत अधोसंरचना उपलब्‍ध है, जिससे प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में पर्याप्‍त वोल्‍टेज पर आकस्मिक अवरोधों के कारण आए व्‍यवधानों को छोड़कर नियमानुसार कृषि प्रयोजन हेतु प्रतिदिन 10 घंटे एवं गैर कृषि प्रयोजन हेतु प्रतिदिन 24 घंटे गुणवत्‍तापूर्ण विद्युत प्रदाय किया जा रहा है तथा किसी भी प्रकार की अघोषित विद्युत कटौती नहीं की जा रही है। उल्‍लेखनीय है कि विद्युत लाईनों/अधोसंरचना के रख-रखाव हेतु पूर्व निर्धारित शट-डाउन लेने तथा तकनीकी कारणों/प्राकृतिक आपदा से आये आकस्मिक व्‍यवधानों जैसी अपरिहार्य स्थिति के कारण कतिपय अवसरों पर विद्युत प्रदाय बाधित होता है, जिसमें आवश्‍यक रख-रखाव/सुधार कार्य कर विद्युत प्रदाय शीघ्र ही सुचारू कर दिया जाता है। विद्युत अधोसंरचना के आवश्‍यक रख-रखाव कार्य हेतु लिए जाने वाले शटडाउन की सूचना विद्युत उपभोक्‍ताओं को अखबार एवं अन्‍य माध्‍यमों से दी जाती है। अत: उक्‍तानुसार की जा रही कार्यवाही के परिप्रेक्ष्‍य में किसी के दोषी होने का प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में 223 स्थानों पर विद्युत लाईनों के के‍बलीकरण का कार्य आवश्‍यक है, इस हेतु आर.डी.एस.एस. योजना के अंतर्गत 109 स्थानों पर केबलीकरण का कार्य स्वीकृत हुआ है। शेष स्‍थानों पर विद्युत लाइनों के के‍बलीकरण का कार्य आर.डी.एस.एस. योजना के द्वितीय चरण (सिस्टम मॉडर्नाईजेशन) में प्रस्तावित है। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में वित्‍तीय वर्ष 2022-23 से प्रश्‍न दिनांक तक की स्थिति में कुल 47 अतिभारित वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि के कार्य किए गए हैं। वर्तमान में प्रश्‍नाधीन क्षेत्रांतर्गत 108 वितरण ट्रांसफार्मर अतिभारित हैं, जिनमें से 43 वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षमतावृद्धि के कार्य एस.एस.टी.डी. योजना अंतर्गत स्‍वीकृत हैं, उक्‍त कार्यों को माह अक्‍टूबर, 2024 तक पूर्ण कर लिया जावेगा। शेष 65 अतिभारित वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि के कार्यों को आर.डी.एस.एस. योजना के द्वितीय चरण (सिस्टम मॉडर्नाईजेशन) में प्रस्तावित किया गया है, जिसकी स्वीकृति उपरांत कार्यों को शीघ्र पूर्ण किया जावेगा। (घ) विद्युत उपभोक्ताओं को उनके परिसर में स्थापित विद्युत मीटर में दर्ज विद्युत की वास्तविक खपत एवं म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी टैरिफ आदेश के तहत ही विद्युत देयक जारी किये जाते हैं। कतिपय प्रकरणों में किसी कारणवश त्रुटिपूर्ण विद्युत देयक जारी हो जाने पर विद्युत उपभोक्ता से आवेदन प्राप्‍त होने पर प्रकरण का नियमानुसार समुचित निराकरण किया जाता है।

श्री भैरो सिंह बापू -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने माननीय मंत्री महोदय से जानकारी चाही थी कि विद्युत की अघोषित कटौती मेरे क्षेत्र में हो रही है. आए दिन, चाहे नगरीय क्षेत्र हों, चाहे ग्रामीण क्षेत्र हों, चाहे किसान भाई हों, सभी विद्युत की कटौती से परेशान हैं. आज जो अधिकारियों द्वारा माननीय मंत्री महोदय को अवगत कराया गया, यह पूरा असत्‍य है कि विद्युत की कटौती नहीं हो रही है. दूसरा, जो 65 अतिभार वाले ट्रांसफार्मर जल्‍दी ही लगाने की आपने स्‍वीकृति प्रदान की है, वह कब तक लग जाएंगे, यही मेरा आपसे निवेदन है और मेरे क्षेत्र की ही नहीं, यह हर जगह की परेशानी है, बहुत से बिल मेरे पास हैं, अध्‍यक्ष महोदय, आप आदेश करेंगे तो मैं प्रस्‍तुत करूंगा, जैसे 126 यूनिट का बिल है, 1980 रुपये का...

अध्‍यक्ष महोदय -- भैरो सिंह जी, प्रश्‍न आ गया है, उत्‍तर आ जाने दीजिए.

श्री भैरो सिंह बापू -- अध्‍यक्ष महोदय, यही मेरा आपसे निवेदन है कि जल्‍द से जल्‍द पूरे क्षेत्र की ...

अध्‍यक्ष महोदय -- अब उत्‍तर सुन लें, दूसरा सप्‍लीमेंट्री इसके बाद कर लीजिएगा.

श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर -- माननीय अध्‍यक्ष जी, आपके माध्‍यम से मैं सम्‍माननीय सदस्‍य को बताना चाहता हूँ कि मध्‍यप्रदेश में बिजली कटौती नहीं है. बिजली अवरोध है, मतलब अवरोध के कई कारण हैं कि अगर ट्रांसफार्मर रखा हुआ है, वह ट्रांसफार्मर अगर 25 केवी का रखा हुआ है, अगर उस पर लोड ज्‍यादा आ जाएगा तो ट्रांसफार्मर या तो ट्रिप करेगा या फुंक जाएगा. उसके बारे में आप यदि मेरे साथ बैठेंगे, मैं आपको बता भी दूंगा, उसको ठीक करने की बात करूंगा. दूसरा, आपने पूछा है कि हमारे यहां जो आपके ट्रांसफार्मर हैं, जो ओवरलोडेड हैं, उसमें से 43 ट्रांसफार्मर आगामी रबी सीजन तक हम क्षमता वृद्धि ट्रिपल आईडीएस में कर देंगे. तीसरा, 65 ट्रांसफार्मर जो हैं, हमने फेज टू में आर.डी.एस.एस. में इनके लिए लिए हुए हैं, उनको भी हम करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय सदस्‍य, दूसरा पूरक प्रश्‍न करें.

श्री भैरो सिंह बापू -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके आश्‍वासन से मैं धन्‍यवाद देता हूँ कि जल्‍दी ही मेरे क्षेत्र की समस्‍या सुधरे. सबसे महत्‍वपूर्ण यह है कि ग्रामीण क्षेत्र के अंदर और शहरी क्षेत्र के अंदर जो केबल की स्‍थिति खराब है, मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि अधिकारियों की एक टीम बनाकर जल्‍दी से जल्‍दी पूरे क्षेत्र के अंदर केबल की व्‍यवस्‍था सुधारी जाए, जो आए दिन जनहानि हो रही है. एक और मेरा आपसे निवेदन है कि जो यह बिल की त्रुटि हो रही है, इसके लिए जल्‍दी से जल्‍दी तहसील स्‍तर पर आपके विभाग द्वारा शिविर लगाए जाएं और आम जनता को इससे राहत दी जाए. माननीय अध्‍यक्ष महोदय के माध्‍यम से यही आपसे निवेदन है.

श्री प्रद्युम्‍न सिहं तोमर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से सम्‍मानित सदस्‍य को बताऊंगा कि वर्तमान में इनके क्षेत्र में 496 किलोमीटर केबलीकरण है. उसमें से हमारे ट्रिपल आईडीएस में अभी 224 किलोमीटर केबल बदलने का प्रस्‍ताव है, उसे हम बदलेंगे. साथ ही सम्‍माननीय सदस्‍य ने जो बिल के बारे में चिंता जताई है, मैं यह चाहूँगा कि आपके बिलों में कोई शिकायतें हैं तो हमारे संबंधित एसई को जाकर वे शिकायतें आप बताएं और जो बिल त्रुटिपूर्ण होगा, विभाग की कोई कमी होगी, उसको सुधारा जाएगा. यह मैं आपको आश्‍वस्‍त करता हूँ.

 

वैध एवं अवैध कॉलोनी के दिशा-निर्देश

[नगरीय विकास एवं आवास]

5. ( *क्र. 964 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अवैध से वैध कॉलोनी हेतु शासन द्वारा क्या-क्या निर्देश जारी किए हैं ? (ख) सुवासरा विधानसभा के नगरीय क्षेत्र में चिन्हित अवैध एवं वैध कॉलोनियों के वार्ड क्र., नगर का नाम, कॉलोनाईजर के नाम सहित पृथक-पृथक जानकारी देवें। (ग) शासन द्वारा सीतामऊ, शामगढ़, सुवासरा के नगरीय क्षेत्र में चिन्हित अवैध कॉलोनियों को वैध करने हेतु क्या-क्या कार्यवाही की गई है? वार्ड क्र., कॉलोनी, शहर के नाम सहित जानकारी देवें। (घ) शासन द्वारा उपरोक्त अवैध से वैध कॉलोनी होने पर इनके विकास हेतु कौन जवाबदेह होगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) अवैध से वैध कॉलोनी करने हेतु कोई निर्देश जारी नहीं किए गए हैं, अपितु नगरीय क्षेत्र में निर्दिष्‍ट अवधि के पूर्व अस्तित्‍व में आई चिन्हित अनधिकृत कॉलोनियों में नागरिक अधोसंरचना एवं भवन अनुज्ञा प्रदान करने के लिए म.प्र. नगर पालिका (कॉलोनी विकास) नियम, 2021 में प्रावधान किए गए हैं। (ख) अनधिकृत कॉलोनियों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार एवं वैध कॉलोनियों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) उत्‍तरांश '''' के अनुसार नगर पालिका के सक्षम प्राधिकारी अर्थात कलेक्‍टर मन्‍दसौर द्वारा म.प्र. नगरपालिका (कॉलोनी विकास) नियम, 2021 के अंतर्गत चिन्हित अनधिकृत कॉलोनियों में नागरिक अधोसंरचना एवं भवन अनुज्ञा प्रदान करने के लिए की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है, यद्यपि म.प्र. नगरपालिका (कॉलोनी विकास) नियम, 2021 के अंतर्गत कार्यवाही पूर्ण होने पर अनधिकृत कॉलोनियों में नागरिक अधोसंरचना के विकास कार्य संबंधित स्‍थानीय नगरीय निकाय द्वारा कराए जायेंगे।

श्री हरदीप सिंह डंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपने प्रश्‍न में माननीय मंत्री जी से यह पूछा था कि अवैध कॉलोनी से वैध कॉलोनी करने के लिए विभाग द्वारा क्‍या निर्देश दिए गए हैं, तो उसमें लिखा है कि कोई ऐसे निर्देश नहीं दिए गए हैं और भवन अनुज्ञा एवं नागरिक अधोसंरचना के लिए म.प्र. नगर पालिका (कॉलोनी विकास) नियम, 2021 के तहत भवन के निर्माण की अनुमति दी जाती है. मैं यह पूछना चाहता हूँ कि जब अवैध और वैध कॉलोनी की अनुज्ञा दी जाती है तो वैध कॉलोनी पर दी जाती है कि अवैध कॉलोनी पर दी जाती है, क्‍योंकि लगातार जो मकान के काम चल रहे हैं, तो वहां पर हम उनको अवैध कॉलोनी बोल रहे हैं. जो अनुज्ञा दी गई है, वह वैध कॉलोनी पर दी गई है कि अवैध कॉलोनी पर दी गई है. मेरा यह प्रश्‍न है.

श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍य के प्रश्‍न का उत्‍तर दूँ. उसके पहले इसकी पृष्‍ठभूमि बताना चाहता हूँ. यह बात सही है कि मध्‍यप्रदेश में अवैध कॉलोनी की समस्‍या शहरों के अन्‍दर ज्‍यादा है और इसका एक नैक्‍सेस काम कर रहा है. अब माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने हमें निर्देश दिए हैं कि इसके लिए कड़े कानून बनाए जायें, जिससे अब अवैध कॉलोनियां नहीं बनें. हमारा विभाग उसके लिए काम कर रहा है. अध्‍यक्ष महोदय होता यह है कि वैध कॉलोनी वाला प्‍लॉट 1,000 रुपये स्‍क्‍वायर फीट में बिकता है और उससे आधा किलोमीटर दूरी पर अवैध कॉलोनी वाला प्‍लाट 250 रुपये स्‍क्‍वायर फीट में बिक जाता है. प्‍लॉट वाला, प्‍लॉट बेच देता है, तो लोग वहां पर मकान बनाकर रहने चले जाते हैं, फिर हम वहां से चुनाव लड़ते हैं, लोग हमको घेरते हैं कि आप सड़क बनाइये, पानी दीजिये. यह मेरी समस्‍या नहीं है, यह सभी की समस्‍या है. इसलिए अवैध कॉलोनी प्रदेश में नहीं बने, इसके लिए हम कड़े नियम बना रहे हैं. हम आने वाले समय में सदन में उसको प्रस्‍तुत करेंगे.

दूसरा, माननीय सदस्‍य ने पूछा कि यह बात सही है कि हम अवैध को वैध नहीं कर रहे हैं, पर वहां के नागरिकों को निर्माण की अनुमति मिले, वहां अधोसंरचना का विकास हो, इसकी अनुमति जरूर दे रहे हैं. अब इसका पॉलिटिकल कारण भी होता है, मैंने आपको बता दिया है कि जब हम वहां पर जीतकर जाते हैं, तो लोग कहते हैं कि हमने आपको वोट दिया है, आप सड़क बनवाइये, आप हमें पानी दीजिये, हमारे यहां विकास कीजिये. इसलिए हमारी सरकार ने पिछली बार इन सब कॉलोनियां में नागरिक सुविधाएं मिलें, अधोसंरचना का विकास हो, इसलिए मकानों को बनाने की अनुमति भी दी है और अधोसंरचना का विकास भी किया है.

श्री हरदीप सिंह डंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक निवेदन यह है कि कई वर्षों से हमारी छोटी-छोटी नगर परिषदें थीं, तो वहां पर पहले खेत हुआ करते थे. अब वहां पर किसान भी कहीं न कहीं व्‍यापार की तरफ ज्‍यादा बढ़ रहे हैं. उन्‍होंने स्‍वयं ही कॉलोनियां काटी हैं और वे कॉलोनी बनाकर भूल गए हैं कि कभी यह हमारी कॉलोनी थी. अब न तो वह कॉलोनी वालों से बोल पाते हैं और न ही नगर परिषद से बोल पाते हैं. अब ऐसे में अभी तक जो अवैध कॉलोनी मानी जाती हैं, तो उनको वैध करने के लिए जो 15-15 वर्ष, 20-20 वर्ष हो गए हैं, जिनको अवैध बोला जाता है, तो उनकी अभी विज्ञप्ति भी जारी की गई है, तो मेरा निवेदन है कि उनको वैध करने की कार्यवाही जो 20 वर्ष, 25 वर्ष पहले की कॉलोनी बनी हैं, तो उनको तत्‍काल वैध करके, जैसे इन्‍दौर में बड़ी-बड़ी चौड़ी एवं अच्‍छी सड़कें बनती हैं और 7 बार इन्‍दौर स्‍वच्‍छता में प्रथम आया है, उज्‍जैन भी सिंहस्‍थ के कारण पूरा विकास के रास्‍ते पर जा रहा है तो यह हमार नगर छोटी परिषद भी विकास की राह देख रही है, तो छोटी-छोटी गलियां, मुहल्‍ले वहां पर नगारिकों को सुविधाएं नहीं मिलती हैं तो मेरा यह मानना है कि एक तो यह किया जाये. दूसरा, सुवासरा में सन् 1938 एवं 1939 में बन्‍दोबस्‍त हुआ था, तो राजस्‍व विभाग और नगर परिषद आपस में दो ही टकराते हैं. कि यह जमीन आपकी है और यह जमीन आपकी है, तो यह मेरा प्रश्‍न भी था. यहां पर राजस्‍व मंत्री जी भी बैठे हुए हैं. अभी इन्‍होंने कहा था कि बन्‍दोबस्‍त का कार्य बन्‍द हो गया है, बन्‍दोबस्‍त में नक्‍शा सुधार, खसरा सुधार, बी-1 का सुधार हमारे नगर परिषद में राजस्‍व और नगर परिषद को यही पता नहीं है कि यह जमीन किसकी है ? तो आप एक आदेश जारी कर दें कि वहां पर नगर परिषद की जितनी भी जमीन हैं, उनके नक्‍शे सुधारे जाएं, उनके खसरे बी-1 सुधारे जाएं. जिससे वहां पर जनता को राहत मिल सके. यहां पर आप दोनों मंत्री जी तय कर लें कि वह काम कौन करेगा ? सन् 1938-39 के बाद आज तक नक्‍शा सुधार नहीं हुआ है. आपने कहा कि बंदोबस्‍त का कार्य बंद हो चुका है, तो नई कौन सी स्‍कीम आई है, जिससे नक्‍शे सुधारे जायेंगे. बड़े-बड़े भू-माफिया इसका लाभ उठा रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय- हरदीप जी, आप प्रश्‍न पर आ जायें.

श्री हरदीपसिंह डंग- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि बंदोबस्‍त का काम, जो कि बंद हो चुका है तो नगरीय क्षेत्र में कौन उन नक्‍शों को सुधारेगा, इन्‍हें या तो नगर परिषद सुधारे या राजस्‍व विभाग सुधारे, जिससे पता चल सके कि जमीन किसकी है.

श्री कैलाश विजयवर्गीय- अध्‍यक्ष महोदय, ये बात सही है कि सिर्फ सुवासरा नहीं, प्रदेश के काफी नगर पालिका और नगर निगमों में जमीन को लेकर संशय है कि भूमि राजस्‍व की है कि नगर निगम की है. हम इसके लिए अगल से सारे कलेक्‍टरों को निर्देश देंगे कि कम से कम नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत की जितनी भूमि है, उसे मार्क कर बतायें कि ये भूमि उनकी है.

दूसरा आपने सुवासरा के विषय में कहा कि जितनी भी अवैध कॉलोनी हैं, हम उन्‍हें वैध तो नहीं करेंगे लेकिन वहां पर नागरिक सुविधायें उनको मिल जाये और अधोसंरचना का विकास हो, वे बिल्डिंग परमिशन ले सकें, हम तीन माह के भीतर आपके यहां जितनी कॉलोनियां हैं, उन पर निश्चित रूप से अनुमति प्रदान कर देंगे.

श्री हरदीपसिंह डंग- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आखिर प्रश्‍न है.

अध्‍यक्ष महोदय- हरदीप जी, काफी हो गया, आप मंत्री जी से व्‍यक्तिगत रूप से मिल लीजियेगा.

श्री हरदीपसिंह डंग- अध्‍यक्ष महोद,य मेरा निवेदन है कि अभी सिंहस्‍थ आने वाला है, मेरी विधान सभा पूरे उज्‍जैन से जुड़ी हुई है. आप लाखों-करोड़ों रूपये उधर खर्च कर रहे हैं, निवेदन है कि हमारी नगर परिषदों को भी विकास के नाम पर कोई विशेष निधि स्‍वीकृत हो जाये तो उन कॉलोनीवासियों का उद्धार होगा और रास्‍ते भी बन जायेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय- आप व्‍यक्तिगत रूप से उनसे मिल लें. सिंहस्‍थ का विषय अलग है.

श्री हरदीपसिंह डंग- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे आपके माध्‍यम से ऐसा मौका मिला है, मंत्री जी अभी बोल दें कि मिल लेना.

श्री कैलाश विजयवर्गीय- हरदीप जी आप मुझसे मिल लीजियेगा. (मंत्री जी द्वारा माननीय सदस्‍य से अपने आसन पर बैठे-बैठे कहा गया.)

श्री हरदीपसिंह डंग- धन्‍यवाद.

 

 

विद्युत लाईन एवं विद्युत आपूर्ति

[ऊर्जा]

6. ( *क्र. 626 ) श्रीमती चंदा सुरेन्द्र सिंह गौर : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या खरगापुर विधान सभा के कई ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राम कोटरा खेरा अनु.जाति बस्‍ती खुमानगंज, वार्ड नं. 7 लाल्‍ले अहिरवार के घर से खज्‍जू रैकवार के घर तक नगर परिषद बल्‍देवगढ़ एवं ग्राम पठाघाट में ज्‍वाला के कुंआ से छोटे लाल के कुंआ तक घरों वाली लाईन से जोड़े जाने तथा विद्युत मण्‍डल पलेरा, खरगापुर, बल्‍देवगढ़ में प्रश्‍नकर्ता द्वारा स्‍टीमेट हेतु एवं लाईन लगवाकर बिजली आपूर्ति हेतु प्रस्‍ताव पत्र संबंधित अधीक्षण अभियंता (सं./सं.)/कार्यपालन अभियंता (सं./सं.) को लिखे हैं? क्‍या वर्णित लाईनों के कार्य एवं प्रस्‍तावों के अनुसार लाईने लगवाने तथा आम जनता को बिजली आपूर्ति की व्‍यवस्‍था कब तक करा दी जावेगी? (ख) क्‍या खरगापुर विधान सभा इन उल्‍लेखित लाईनों के खम्‍बे लगाकर लोगों को बिजली प्रदान किये जाने के आदेश जारी करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) क्‍या ऊर्जा विभाग द्वारा जिन स्‍थानों पर बिजली नहीं है, उन स्‍थानों पर बिजली लगाये जाने का सर्वे करायेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ) : (क) प्रश्‍नाधीन विद्युतीकरण के कार्यों हेतु माननीय प्रश्‍नकर्ता विधायक महोदया द्वारा अधीक्षण अभियंता (सं./सं.)/कार्यपालन अभियंता (सं./सं.) को नहीं अपितु कनिष्‍ठ यंत्री, विद्युत वितरण केन्‍द्र बल्‍देवगढ़ एवं खरगापुर को पत्र लिखे गये हैं। पत्रों में वर्णित विद्युतीकरण के कार्यों हेतु सर्वे कार्य पूर्ण कराकर जमा योजना अंतर्गत प्राक्‍कलन तैयार कर, प्राक्‍कलित राशि जमा कराये जाने हेतु माननीय प्रश्‍नकर्ता विधायक महोदया को कार्यालय बल्‍देवगढ़ वितरण केन्‍द्र के पत्र दिनांक 15.06.2024 से लेख किया गया है। नियमानुसार प्राक्कलन राशि जमा हो जाने के उपरान्त प्रश्‍नाधीन दोनों स्थानों पर लाईन विस्‍तार कार्य हेतु कार्यवाही की जा सकेगी। (ख) उत्‍तरांश (क) में उल्‍लेखित दोनों कार्यों हेतु नियमानुसार प्राक्‍कलित राशि जमा होने के उपरान्त ही आगामी कार्यवाही की जा सकेगी। (ग) विद्युतीकरण हेतु निर्धारित नीति अनुसार सर्वप्रथम प्रदेश के सभी आबाद ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य एवं तदुपरांत आबाद ग्रामों के चिन्हित मजरों/टोलों के विद्युतीकरण का कार्य वित्‍तीय उपलब्‍धता अनुसार क्रमश: केन्‍द्र शासन की विभिन्‍न विद्युतीकरण की योजनाओं, यथा-राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना एवं दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना, में किया गया। तदुपरांत सौभाग्‍य योजना के प्रावधानों के अंतर्गत शत्-प्रतिशत घरों के विद्युतीकरण का कार्य किया गया, किन्‍तु इस योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार खेतों में दूर-दूर अवस्थित घरों को तकनीकी एवं वित्‍तीय साध्‍यता नहीं होने के कारण योजना में सम्मिलित नहीं किया गया। सौभाग्‍य योजना के प्रावधानों के अंतर्गत प्रदेश के शत्-प्रतिशत घरों के विद्युतीकरण का कार्य दिनांक 22.10.2018 को पूर्ण कर लिया गया था। नये घरों/मजरों/टोलों का निर्माण एक सतत् प्रक्रिया है। उक्‍त योजनाओं के क्‍लोज हो जाने के उपरांत निर्मित मजरों/टोलों के विद्युतीकरण का कार्य वित्‍तीय एवं तकनीकी साध्‍यता अनुसार वित्‍तीय उपलब्‍धता के अनुरूप किया जा सकेगा, जिस हेतु वर्तमान में निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

श्री चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर- अध्‍यक्ष महोदय, मैं, मंत्री जी द्वारा जो उत्‍तर दिया गया है, उससे संतुष्‍ट हूं लेकिन मैं, मंत्री जी से एक अनुरोध करना चाहती हूं कि विधायक निधि से मुझे अपने क्षेत्र में और कई कार्य करने हैं और राशि कम है, मेरा क्षेत्र भी बहुत बड़ा है. इसलिए आपके विभाग की राशि से इन ग्रामों में बिजली पहुंचा दी जाये तो बहुत अच्‍छा होगा.

ऊर्जा मंत्री (श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर)- अध्‍यक्ष महोदय, मैं, बताना चाहता हूं कि विभाग के अंतर्गत समय-समय पर जो योजनायें आती हैं, जिन बस्तियों में विद्युतीकरण होता है, अभी पहले बड़े-बड़े गांव और मजरों में हो गया है, अब जब टोलों के लिए कोई योजना आयेगी तो उस योजना में इन्‍हें शामिल कर वहां काम करवाया जायेगा.

अध्‍यक्ष महोदय- चंदा जी, दूसरा पूरक प्रश्‍न करें.

श्री चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर- अध्‍यक्ष महोदय, मैं, केवल इतना चाहती हूं कि किसी न किसी माध्‍यम से आप इन ग्रामों में बिजली की व्‍यवस्‍था, अपने विभाग के माध्‍यम से करवा दें, धन्‍यवाद.

नगर निगम जबलपुर के नये वार्डों के वर्ष 2014 के पूर्व के नक्‍शे, पट्टे की जानकारी

[नगरीय विकास एवं आवास]

7. ( *क्र. 523 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या वर्ष 2014 के पूर्व के नक्‍शे, पट्टे आदि के अभिलेख उपलब्‍ध हैं ? (ख) यदि हाँ, तो कौन-कौन से अभिलेख उपलब्‍ध हैं? वार्डवार जानकारी देवें। (ग) प्रश्‍नांश (क) के अंतर्गत क्‍या हितग्राहियों को तत्‍कालीन समय के स्‍वीकृत नक्‍शों एवं पट्टों की जानकारी उपलब्‍ध नहीं कराई जा रही है? (घ) यदि हाँ, तो क्‍यों?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) जी नहीं। अपितु वर्ष 2014 के पूर्व नये वार्ड नगर निगम सीमांतर्गत न होने के कारण इन वार्डों में अनुज्ञा जारी नहीं की जाती थी। अत: इन वार्डों के नक्‍शे, पट्टे आदि के अभिलेख उपलब्‍ध नहीं है। (ख) से (घ) प्रश्‍नांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्री सुशील कुमार तिवारी- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न है कि वर्ष 2013-14 में परिसीमन लागू हुआ था. उसमें हमारी पंचायत की कुछ पंचायतें, नगर निगम के वार्डों में सम्मिलित हुई हैं परंतु उनके रिकॉर्ड नगर निगम में अभी तक नहीं दिए गए हैं. यह दो विभागों का मामला है. लोगों के मृत्‍यु प्रमाण-पत्र और जन्‍म-प्रमाण पत्र वहां 50 वर्षों के जो रिकॉर्ड रखे हैं, उससे नहीं मिल पा रहे हैं. जनपद पंचायत कहती है कि अब यह हमारी पूंजी नहीं रह गई है, यह नगर निगम की पूंजी है. हमारा अनुरोध है कि नगर निगम उस रिकॉर्ड को लाये क्‍योंकि उन्‍होंने परिसीमन के बाद, जब वे वार्ड शामिल कर दिए तो रिकॉर्ड लेना उनकी जवाबदारी होगी.

अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि मंत्री जी उस रिकॉर्ड को उपलब्‍ध करवायें जिससे जनता को उससे लाभ मिल सके, जिसमें मृत्‍यु प्रमाण-पत्र, जन्‍म-प्रमाण पत्र और भी कई अन्‍य आवश्‍यक दस्‍तावेज शामिल हैं, उन्‍हें जनता प्राप्‍त कर सके. क्‍योंकि लगभग 9 वर्ष हो गए हैं लेकिन इसका निराकरण नहीं हो पाया है.

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने आपके माध्‍यम से इसके पहले वाले प्रश्‍न में कहा है कि यह समस्‍या प्रदेश के अधिकांश नगर पालिका, नगर निगमों में है. हम कलेक्‍टरों को निर्देश दे रहे हैं कि कम से कम नगर पालिका और नगर निगम का सीमांकन करके उनकी भूमि कौन सी है वह सुनिश्चित करें. तिवारी जी मैं दो माह के अंदर आपके यहां किसी अधिकारी को नियुक्‍त कर दूंगा कि वह इसको देखेगा और दो माह के अंदर आपकी जो समस्‍या है उसका निराकरण हो जाएगा.

श्री सुशील कुमार तिवारी-- मंत्री जी बहुत बहुत धन्‍यवाद.

नगर परिषद अम्‍बाह में प्रतिवर्ष लगने वाले मेले से प्राप्‍त राजस्‍व

[नगरीय विकास एवं आवास]

8. ( *क्र. 106 ) श्री देवेन्द्र रामनारायन सखवार : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विधानसभा क्षेत्र अम्‍बाह के नगर परिषद अम्‍बाह में नगर परिषद द्वारा प्रतिवर्ष मौसमी मेला लगाया जाता है? (ख) यदि हाँ, तो वर्ष 2023 में जो मेला लगाया गया था, वह किस ठेकेदार द्वारा और कितनी राशि पर लगाया गया था? क्‍या ठेकेदार से नगर परिषद अम्‍बाह को तय राजस्‍व राशि प्राप्‍त हुई थी? यदि हाँ, तो कितनी? यदि नहीं, तो क्‍यों (ग) राजस्‍व राशि प्राप्‍त नहीं होने पर ठेकेदार के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? यदि कार्यवाही नहीं की गई तो क्‍यों? कारण स्‍पष्‍ट करें।

(घ) वर्ष 2023 के पूर्व नगर परिषद अम्‍बाह द्वारा विभागीय कमेटी बनाकर मेला लगाया जाता था? यदि हाँ, तो वर्ष 2023-24 में ठेकेदार द्वारा क्‍यों लगवाया गया?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) जी हाँ। (ख) निकाय द्वारा वर्ष 2023 में मेला लगाया गया था। उक्त मेले के ठेकेदार मे. पण्डित मेला महोत्सव सर्कस एवं मीना बाजार प्रो. रवि शर्मा पुत्र श्री महेश कुमार शर्मा निवासी डी-12, श्रीराम नगर दर्पण कॉलोनी थाटीपुर ग्वालियर म.प्र. से शासकीय प्रीमियम राशि 25,00,000/- (पच्चीस लाख रूपये) थी, जिसके विरूद्ध ठेकेदार द्वारा निकाय में कुल 11,25,000/- रूपये एवं 2,50,000/- धरोहर राशि राजसात कर निकाय के खाते में कुल 13,75,000/- जमा कराये गये हैं। (ग)

(घ) जी हाँ। वर्ष 2023-24 में निकाय द्वारा परिषद संकल्प 05, दिनांक 17.02.2023 में निर्णयानुसार उक्त मेले का आयोजन ऑनलाइन निविदा आमंत्रित कर ठेके से आयोजित किया गया।

श्री देवेन्‍द्र रामनारायन सखवार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से नगर परिषद अम्‍बाह में प्रतिवर्ष लगाये जाने वाले मेले के संबंध में पूछना चाहता हूं कि विधान सभा क्षेत्र अम्‍बाह के नगर परिषद अम्‍बाह में नगर परिषद् द्वारा प्रतिवर्ष मौसमी मेला लगाया जाता है. मुझे इसका जबाव मिला था कि वर्ष 2023 में जो मेला लगाया गया था वह ठेकेदार द्वारा लगाया गया था और वर्ष 2023 से पहले जो मेला लगाया जाता था वह स्‍थानीय नगर निगम की कमेटी के द्वारा लगाया जाता था. मेरा प्रश्‍न यह है कि वर्ष 2023 और 2024 में मेला ठेकेदारी प्रथा द्वारा क्‍यों लगाया गया ?

श्री कैलाश विजयवर्गीय-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो स्‍थानीय निकाय है यह चुनी हुई परिषद रहती है और अपना निर्णय स्‍वयं करती है. साधारण तौर पर हम इस विषय में कोई हस्‍तक्षेप नहीं करते हैं क्‍योंकि यह उनका अधिकार है, उन्‍होंने निर्णय लिया है परंतु आप कुछ सलाह देना चाहें तो हम वह सलाह उनके पास तक पहुंचा सकते हैं.

श्री देवेन्‍द्र रामनारायन सखवार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि वर्ष 2023 में जो मेला लगा था वह जिस ठेकेदार के द्वारा लगाया गया था उस ठेकेदार द्वारा पूर्ण राशि जमा नहीं की गई है. हमारे स्‍थानीय व्‍यापारी छोटे-छोटे दुकानदार इन सबको दोनों वर्षों में दुकानों के लिए परेशान होना पड़ा था. महंगी दुकानें उठी थीं. परिषद द्वारा जो मेला लगाया जाता था उसमें हमारे सभी स्‍थानीय दुकानदार सुरक्षित थे और महंगी दुकानें नहीं उठी थीं. मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि क्‍या यह ठेकेदारी प्रथा खत्‍म होगी या नहीं होगी.

श्री कैलाश विजयवर्गीय-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने पहले ही निवेदन किया है कि यह चुनी हुई परिषद है यह स्‍वयं निर्णय करते हैं परंतु मैं यह जरूर सुनिश्चित करूंगा कि वहां के लोकल दुकानदारों को संरक्षण मिले.

अवैध कॉलोनियों का निर्माण

[नगरीय विकास एवं आवास]

9. ( *क्र. 173 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रदेश भर के साथ ही रतलाम जिले में भी नियम विरुद्ध शहरी एवं शहरी क्षेत्र से लगे क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियां निरंतर बनाई जाकर आम गरीब जन को मूलभूत सुविधा से वंचित कर मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है? (ख) यदि हाँ, तो रतलाम जिला अंतर्गत किन-किन स्थानों पर अवैध एवं अविकसित कॉलोनी के साथ बिना किसी नियम प्रक्रिया पालन के काटी गई कितनी कॉलोनियां चिन्हित की गईं? (ग) क्या इनके मानचित्र संबंधित निकाय, नगर निवेश विभाग अथवा ग्राम पंचायत द्वारा अनुमोदित किए गए तो, क्या इन्हें कॉलोनी विकसित किए जाने के समय नोटिस दिए गए? नियमानुसार आश्रय शुल्क जमा किया गया तो कहां किस खाते में जमा किया गया एवं क्या नियमानुसार प्‍लॉट बंधक रखे गए तथा गरीब एवं मध्यम वर्ग हेतु एवं बगीचा इत्यादि हेतु भूमि रिक्त रखी गई? (घ) उपरोक्तानुसार नियम विरुद्ध काटी गई अनियमित कॉलोनियों के संबंध में क्या-क्या कार्यवाही की गई? उन कार्यवाहियों के परिणाम क्या आए? साथ ही विगत वर्षों में कॉलोनाईजर्स के विरुद्ध एफ.आई.आर. दर्ज की गई तो उसके पश्चात क्या विवेचना इत्यादि पूर्ण होकर न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत करवाया गया तथा बंधक प्‍लॉट विक्रय कर विकास कार्य किए गए एवं जमा आश्रय शुल्क की राशि के माध्यम से क्या-क्या कार्य किए गए?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) नगरीय क्षेत्र एवं नगरीय क्षेत्र से लगे क्षेत्रों में अनधिकृत रूप से कॉलोनियों का निर्माण होता हैजिनके विरूद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही करने के लिए अधिनियम में उपबन्‍ध भी रखे गए हैंजिसके अनुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्‍थानीय स्‍तर पर कार्यवाही की जाती है। अनधिकृत कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव रहता हैजिसके दृष्टिगत राज्‍य सरकार द्वारा निर्दिष्‍ट अवधि के पूर्व अस्तित्‍व में आई नगरीय क्षेत्र की चिन्हित अनधिकृत कॉलोनियों में नागरिक अधोसंरचना प्रदान करने के लिए म.प्र. नगरपालिका (कॉलोनी विकास) नियम, 2021 में प्रावधान है। (ख) जी हाँ। अनधिकृत कॉलोनियों की जानकारी पुस्‍तकालय रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार तथा विकास अनुमति प्राप्‍त अविकसित कॉलोनियों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। (ग) जी हाँ। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट  के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। (घ) जी हाँ। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''', '''', '''' एवं  '''' अनुसार है।

डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहूंगा कि माननीय मंत्री जी ने निश्चित रूप से उनके अनुभवों से बहुत ही विस्‍तार से जानकारी दी है और उनका उत्‍तर भी दिया है और विभाग ने यह स्‍वीकार किया है कि नगरीय क्षेत्र एवं नगरीय क्षेत्र से लगे क्षेत्रों में अनाधिकृत रूप से कॉलोनियों का निर्माण होता है जिनके विरुद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही करने के लिए अधिनियम में उपबंध भी रखे गये हैं. जिसके अनुसार सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्‍थानीय स्‍तर पर कार्यवाही की जाती है. निश्चित रूप से अनाधिकृत और अवैध कॉलोनियों में विकास की आवश्‍यकता होती है. रतलाम जिले की जो स्थिति है मैं थोड़ा सा निवेदनपूर्वक कहना चाहूंगा कि अनाधिकृत कॉलोनी रतलाम नगर निगम में 71 हैं. नगर पालिका जावरा में 64 हैं. आलोट में 41 हैं, ताल नगर परिषद में 30, वड़ावदा नगर परिषद में 21, पिपलौदा नगद परिषद में 3, नामनी नगर परिषद में 37, सैलाना में 16 इस तरह से 283 अनाधिकृत कॉलोनियां हैं और इसी के साथ में अविकसित कॉलोनी रतलाम नगर निगम में 55 हैं, जावरा नगर पालिका में 38 हैं. लगभग 93 हैं. दोनों की संख्‍या देखें तो 376 है. अवैध, अविकसित कॉलोनियां होकर के लगभग डेढ़ से दो लाख नागरिक नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो रहे हैं. एक ओर कहा जा रहा है कि स्‍थानीय स्‍तर पर सक्षम अधिकारी इसके विरुद्ध कार्यवाही कर सकता है. मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह प्रश्‍न है और वह काफी अनुभवी हैं. आपने अभी पिछले प्रश्‍न में भी अवगत कराया है और मैं निवेदन करना चाहता हूं कि एफआईआर दर्ज हो गई है, एफआईआर थाने में पहुंच गई, कुछ एफआईआर को दर्ज किये जाने के लिए निकाय के द्वारा निवेदन भी किया गया यह सम्‍पूर्ण जिले की स्थिति है तो जिनके विरुद्ध एफआईआर दर्ज हुई उनके विरुद्ध भी विवेचना नहीं की जा करके अभी तक कोई आगामी कार्यवाही नहीं की गई है. दूसरा कलेक्टर के द्वारा भी अनुविभागीय अधिकारी और सीएमओ को अवगत कराया गया था कि आगामी कार्यवाही करें. सीएमओ ने पुलिस विभाग को अवगत कराया किन्तु आगामी कार्यवाही के लिए न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही उस आवेदन पर कोई कार्यवाही की गई. जो पिछली एफआईआर थी उस पर आगामी कार्यवाही नहीं हुई. आगामी एफआईआर दर्ज की जाना है उन पर किसी प्रकार की कार्यवाही नहीं की गई है. क्या माननीय मंत्री जी के निर्देश पर एफआईआर दर्ज होने के पश्चात् विकास के कार्य भी करवाए जाएंगे और क्या एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को आश्वस्त करना चाहता हूँ. मैंने पहले भी कहा है कि प्रदेश में अवैध कॉलोनी एक बहुत बड़ी समस्या है. अवैध कॉलोनी और अनाधिकृत कॉलोनी दोनों में थोड़ा सा अन्तर है. अवैध कॉलोनी तो वह है जो ग्रीन लैंड में बन गई, तालाब में बन गई या सरकारी जमीन पर बन गई. यह वह अवैध कॉलोनियां हैं जो वैध हो ही नहीं सकती हैं. कुछ ऐसी कॉलोनियां हैं जो वैध हो सकती हैं हम उसका रास्ता निकालकर वहां के नागरिकों को अधोसंरचना मिले, वहां के मकान की रजिस्ट्री हो, रजिस्ट्री होने के साथ साथ वे लोन भी ले सकें. इस सब की सुविधा हम दे रहे हैं. जहां तक एफआईआर का सवाल है, यदि एफआईआर हो गई है और पुलिस ने कार्यवाही नहीं की है तो मैं भोपाल से किसी अधिकारी को भेज दूंगा वे जाकर देख लेंगे. भविष्य में अवैध कॉलोनियां नहीं बनें इसके लिए हम कड़े कानून बनाने वाले हैं. माननीय मुख्यमंत्री जी ने हमको निर्देश दिए हैं. हर शहर के लिए यह बहुत बड़ी समस्या है. मास्टर प्लान धरा का धरा रह जाता है. हम बड़ी मुश्किल से मास्टर प्लान बनाते हैं और अवैध कॉलोनी वाले अवैध प्लाट बेचते रहते हैं. वहां के नागरिक परेशान होते रहते हैं. हम इसके लिए कड़े कानून बनाने वाले हैं ताकि भविष्य में अवैध कॉलोनी का निर्माण न हो.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा एक और आग्रह था. जो मध्यमवर्गीय परिवार हैं, जो गरीब परिवार हैं इनके लिए कॉलोनियों में रिक्त भूमि छोड़ी जाती है. इसी के साथ साथ बगीचे की भूमि छोड़ी जाती है. साथ ही कुछ प्लाट भी बंधक रखे जाते हैं. क्योंकि बंधक प्लाट को बेचकर निकाय उस कॉलोनी का विकास कार्य कर सकता है. बगीचे का निर्माण हुआ या नहीं हुआ उसका निरीक्षण कर सकता है. जो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार के लोग हैं उनके लिए जो रिक्त भूमि छोड़ी गई है वहां पर उनको भूमि देकर उनके मकान का निर्माण कर सकता है. किन्तु कॉलोनाइजर द्वारा न तो बंधक प्लाट छोड़े जाते हैं और यदि छोड़े भी जाते हैं तो अन्य को उसे विक्रय कर दिया जाता है. इस तरह की घटनाएं भी जिले के अन्तर्गत हुई हैं. दूसरा गरीब परिवारों के लिए जो 15 प्रतिशत भूमि छोड़ी जानी चाहिए वह छोड़ी भी गई या नहीं छोड़ी गई, यह जाँच का विषय है. वहां पर भी प्लाट का विक्रय कर दिया गया है. तीसरा बगीचे के लिए जो भूमि छोड़ी गई वहां पर भी बगीचा नहीं बना है. क्या ऐसी कॉलोनियों का निरीक्षण, परीक्षण करते हुए आगामी विकास के कार्य मंत्री जी के निर्देश पर किए जाएंगे. क्या जाँच होगी.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, जो बंधक प्लाट रहते हैं साधारणतया एसडीएम उसकी परमीशन देता है उसकी परमीशन के बिना वह बेच नहीं सकता है. यदि उसने बेचे हैं तो हम उस पर सख्त कार्यवाही करेंगे, रजिस्ट्री तो उसकी हो ही नहीं सकती है. यदि ऐसा कुछ हुआ है तो हम सख्त कार्यवाही करेंगे. मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य से निवेदन करना चाहता हूँ कि ऐसे प्रकरण यदि आपके ध्यान में हैं आप मुझे लिखित में दे दीजिए. मैं कॉलोनाइजर के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्यवाही करवाउंगा. इस प्रकार जो शासन के नियमों का उल्लंघन करेगा हम उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही करेंगे.

डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, एक निवेदन है कि जो गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार हैं इनसे निकाय में प्रमाण-पत्र मांगा जाता है इनको प्रमाण-पत्र दिए जाने की व्यवस्था कर दें ताकि वह अपने मकान का निर्माण कर सके. अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि डूडा का अधिकारी सक्षम नहीं है. वह तृतीय श्रेणी कर्मचारी है, लोवर लेवल का अधिकारी है. डूडा और कॉलोनी सेल वह विगत कई वर्षों से देख रहा है. उसके कारण इतनी लापरवाहियां हो रही हैं. मैं आरोप भी नहीं लगाना चाहता हूँ लेकिन कहीं न कहीं विसंगतियां हैं कहीं न कहीं नियम विरुद्ध कार्य किए जा रहे हैं. डूडा अधिकारी की भी जाँच करके उसको वहां से पद से मुक्त किया जाए. गरीबों को प्रमाण-पत्र कहां से मिल जाएं इसकी व्यवस्था कर दी जाना चाहिए.

श्री दिनेश जैन बोस -- अध्‍यक्ष महोदय मेरा भी एक प्रश्‍न है कि टाऊन एंड कंट्री प्‍लानिंग की परमिशन के बिना, नगर निगम की परमिशन के बिना, पंचायत की परमिशन के बिना आज भी कालोनियों का काम चल रहा है. प्‍लाट भी बिक रहे हैं परमिशन भी नहीं है, कितनी भी बार शिकायत करने के बाद उनके ऊपर कोई कार्यवाही नहीं होती है. मेरे महिदपुर विधान सभा क्षेत्र के अंदर 20 कालोनियां अवैध हैं. नगर पालिका सीएमओ ने पुलिस में इनके ऊपर कार्यवाही करने की बात कही है, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई और टाऊन एंड कंट्री प्‍लानिंग की परमिशन के बिना यह काम ही क्‍यों करते हैं. अगर ऐसा आदेश जारी कर दिया जाएगा कि परमिशन लेंगे तो ही काम चालू होगा. आज भी धड़ल्‍ले से पूरे ग्रामीण क्षेत्र में, नगर पालिका में मेरे विधान सभा क्षेत्र में 25 से 30 कालोनियां बिना परमिशन के बिना डायवर्जन के बन गई हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाइये. मंत्री जी कुछ कहना चाहेंगे.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, पर्सनल मुझे शिकायत लिखकर दे देंगे और मुझसे मिल लेंगे मैं इनकी मदद कर दूंगा.

प्रश्‍न संख्‍या - 10 श्री सोहनलाल बाल्‍मीक (अनुपस्थित)

श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय मुझे एक प्रश्‍न करना है.

अध्‍यक्ष महोदय -- अगले वाले में पूछ लेना अभी कार्यवाही आगे बढ़ गई है.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह -- प्रश्‍न तो माननीय कैलाश जी से है.

श्री कैलाश कुशवाह -- अध्‍यक्ष महोदय, एक प्रश्‍न रखना चाहता हूं जो नगर पंचायत से संबंधित है.

अध्‍यक्ष महोदय नहीं. श्री बाला बच्‍चन जी अपना प्रश्‍न करेंगे.

प्रश्‍न संख्‍या - 11 श्री बाला बच्‍चन (अनुपस्थित)

नल-जल योजना

[नगरीय विकास एवं आवास]

12. ( *क्र. 935 ) श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अनूपपुर जिला अंतर्गत नगर पंचायत अमरकंटक के लिए 23 करोड़ की नल-जल योजना को वर्ष 2016-17 में स्वीकृति प्रदान की गई थी तथा समय से पूर्ण किया जाना था? परंतु आज दिनांक तक क्यों प्रारंभ नहीं की गई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) अंतर्गत नल-जल योजना नगर पंचायत अमरकंटक में कब तक पूर्ण होगी? ताकि नगर पंचायत के रहवासियों को 24 घंटे पेयजल उपलब्ध हो सकेगा? (ग) इस योजना में विलंब के कारण क्या हैं तथा जिम्मेदार कौन हैं? विभाग द्वारा की गई कार्यवाही की छायाप्रति उपलब्ध कराएं।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) : (क) जी नहीं, अपितु नगर परिषद अमरकटंक की पेयजल योजना मुख्‍यमंत्री शहरी पेयजल योजनान्‍तर्गत वर्ष 2017-18 में राशि रू. 12.56 करोड़ की स्‍वीकृत की गई थी। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) वस्‍तुस्थिति की जानकारी उत्‍तरांश '''' अनुसार है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ग) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

श्री फुंदेलाल सिंह मार्को -- अध्‍यक्ष महोदय, त्‍वदीय पाद पंकजम नमामि देवी नर्मदे. माई नर्मदा जी को प्रणाम करते हुये चूंकि यह मॉं नर्गदा जी का और पवित्र नगरी अमरकंटक का विषय है, वर्ष 2017-18 में यहां पर पेयजल स्‍वीकृत किया गया चूंकि नगर पंचायत पवित्र स्‍थान है, यहां पर बहुत से तीर्थ यात्री आते हैं और इस उद्देश्‍य से वहां नलजल को स्‍वीकृत किया गया था. यह पत्राचारों की पूरी पुस्‍तक बन गई और पत्र पर पत्र, पत्र पर पत्र लिखे जा रहे हैं वर्ष 2017-18 से और प्रश्‍न दिनांक तक यह पत्र ही मेरे हाथ में लगा है वहां के नगरवासियों से, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहूंगा कि जैसे संसदीय कार्यमंत्री जी बता रहे थे कि हमारे डबल इंजन की सरकार है धकाधक चल रही है, यह पत्र मुझे नहीं चाहिये, 7 साल हो गया और यह धकाधक करना छोड़ें और टपाटप (अनेक सदस्‍यों के बोलने पर) शांत रहो, टपाटप पानी मिलना चाहिये. आप नल से जल कब पहुंचाओगे ?

अध्‍यक्ष महोदय -- मार्को जी, प्रश्‍न करें टाईम खत्‍म हो रहा है फिर आपका प्रश्‍न रह जाएगा.

श्री फुंदेलाल सिंह मार्को -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि कब तक यह नल जल योजना आप प्रारंभ कर देंगे, नगर पंचायत के लोगों को शुद्ध पेयजल मिल सकेगा और यह विलंब का क्‍या कारण है आपने दोषियों पर क्‍या कार्यवाही की है ? जल्‍दी बता दें अब समय कम है एक ही मिनट है.

श्री राजेन्‍द्र पाण्‍डेय -- अध्‍यक्ष महोदय, खटाखट करने वाले आपके ही नेता हैं.

श्री फुंदेलाल सिंह मार्को -- अध्‍यक्ष महोदय, यहां भी चलेगा खटाखट, यहां भी होगा चिंता न करें.

अध्‍यक्ष महोदय -- जवाब आने दें. जवाब आ रहा है. एक मिनट बचा है.

श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है कि इस योजना में विलंब हुआ है और उसका कारण फॉरेस्‍ट की जमीन पर जो इन्‍होंने निर्णय लिया था, वह फॉरेस्‍ट की जमीन थी, उसकी परमिशन में थोड़ा सा समय लग गया, परंतु मैंने समय सुनिश्चित किया है कि तीन महीने के अंदर यहां से और भारत शासन से भी कोई चला जाएगा, मैं भारत शासन में खुद परश्‍यु करूंगा, हम कोशिश करेंगे कि तीन महीने के अंदर वहां काम प्रारंभ हो जाए. मार्को जी, फिर आप एकदम खटाखट और गटागट पानी पीना.

श्री फुंदेलाल सिंह मार्को -- मंत्री जी, आप एक और बात बता दें ताकि मैं चाहूंगा कि आप ही आकर उद्घाटन करें. मैं तीन महीने में आपसे ही उद्घाटन करवाऊंगा. तीन महीने उस समय की मैं प्रतीक्षा करूंगा. धन्‍यवाद.

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

 

समय 12.00 बजे.

 

शासकीय वक्तव्य

लोक पथ एप लांच करने के संबंध में लोक निर्माण मंत्री का वक्तव्य

अध्यक्ष महोदय श्री राकेश सिंह जी वक्तव्य देगे.

लोक निर्माण मंत्री ( श्री राकेश सिंह ) माननीय अध्यक्ष महोदय धन्यवाद्. चूंकि सड़कों को लेकर सभी की चिंता रहती है. मैं सदन को आपके माध्यम से एक सकारात्मक सूचना देना चाहता हूं. अभी दो दिन पूर्व माननीय मुख्यमंत्री जी के हाथों एक लोक पथ एप को लांच किया गया है. लोक निर्माण विभाग ने लगातार कड़ी मेहनत के बाद में इसको तैयार किया है. यह एप कोई भी व्यक्ति फिलहाल तो गूगल से डाऊन लोड कर सकता है बाद में यह बाकी के प्लेटफार्म पर भी उपलब्ध होगा. लोक निर्माण विभाग की जो सड़कें है उसमें से जो राष्ट्रीय राजमार्ग जो कि लोक निर्माण विभाग के पास है, स्टेट हाइवे और मुख्य जिला मार्ग. यह लगभग 40 हजार किलो मीटर के आसपास होता है. इसमें कहीं पर भी अगर सड़क पर गड्डा है तो कोई भी नागरिक उस एप के माध्यम से फोटो लेगा वह फोटो जीयो टैग फोटो होगी. वह स्वाभाविक रूप से सीधे संबंधित अधिकारी के पास जायेगी. वह सब कुछ उस एप में उसके डैश बोर्ड में दिखाई देगा. उस अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि 7 दिने के भीतर वह उस मौके पर पहुंचे, और 7 दिवस के भीतर वह उस गड्डे को रिपेयर करे और रिपेयर करने के बाद में वह वापस से उस एप में डाले तो शिकायतकर्ता तक वह फोटो पहुंचेगी. उसके माध्यम से विभाग कहीं ज्यादा जिम्मेदार होगा उत्तरदायी होगा साथ ही विभाग व जनता के बीच में समन्वय भी होगा और सड़कों को ठीक करने में भी कहीं ज्यादा आसानी होगी. अगर 7 दिन में वह संबंधित अधिकारी अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं करता है तो विभाग उस पर अगली कार्यवाही करेगा. यह एक बड़ी चुनौती है. आमतौर पर ऐसी चुनौतियां ली नहीं जाती है. विभाग और जनता के बीच में बेहतर तालमेल हो इसलिए माननीय मुख्यमंत्री जी से परामर्श के उपरांत यह एप लांच किया गया है. यह जनता की सहूलियत के लिए है. हमारे माननीय सदस्य उससे अवगत रहें इसलिए यहां पर यह जानकारी सभी को दी है. बहुत बहुत धन्यवाद.

अध्यक्ष महोदय बहुत धन्यवाद् राकेश जी.

श्री अभय मिश्रा5 वर्ष पहले इसका नोटिस जारी हुआ है.

अध्यक्ष महोदय इ स पर अभी चर्चा नहीं हो रही है. मुझे ऐसा लगता है कि इस एप की जानकारी लिखित में सभी जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना चाहिए ऐसी मेरी अपेक्षा है जिससे कि उसका ठीक से उपयोग हो सके.

विशेष उल्लेख

श्री चेतन्य कश्यप द्वारा वेतन समर्पण करने के संबंध में सूचना

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री ( श्री चेतन्य कश्यप ) माननीय अध्यक्ष महोदय मैं मंत्री के रूप में प्राप्त होने वाले वेतन भत्ते का समर्पण करना चाहता हूं. महोदय राष्ट्र सेवा, जन सेवा और समाज सेवा करना ही मेरा ध्येय है. इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए मैं राजनीति में आया हूं. किशोर अवस्था से ही समाज सेवा के कार्यों में अग्रसर हूं. कई सेवा प्रकल्पों का संचालन कर रहा हूं. ईश्वर ने मुझे इस योग्य बनाया है कि मैं जनसेवा में किंचित योगदान कर सकूं. मैं विधायक के रूप में प्राप्त होने वाले वेतन भत्ते एवं पेंशन प्राप्त नहीं कर रहा हूं. मैंने 14वी और 15वी विधान सभा में भी वेतन भत्ते प्राप्त नहीं किये हैं. 16वी विधान सभा में भी मैं वेतन भत्ते एवं पेंशन नहीं लेने की घोषणा कर चुका हूं.

इसी तारतम्य में मैंने मंत्री के रूप में प्राप्त होने वाले वेतन भत्ते नहीं लेने का निश्चय किया है. मैं चाहता हूं कि मंत्री के रूप में मिलने वाले वेतन भत्ते की राशि का राजकोष से ही आहरण न हो, ताकि उस राशि का उपयोग प्रदेश के विकास ए वं जनहित के कार्यों में हो सके. अनुरोध है कि आप मेरे निवेदन को स्वीकार कर अनुग्रहित करने का कष्ट करेंगे. ( मेजों की थपथपाहट)

 

नेता प्रतिपिक्ष ( श्री उमंग सिंघार ) अध्यक्ष महोदय शून्यकाल की सूचनाएं माननीय सदस्यों की तरफ से आ जाती तो ठीक रहता. मेरा आपसे अनुरोध है कि आसंदी से निर्देश हो जाय उसके बाद में यह व्यवस्था आयें तो ठीक है. चूकि आपने आगे कार्यवाही शुरू कर दी है लेकिन फिर भी मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि कल हमारे विधायक दल की तरफ से सचिन यादव, जयवर्द्धन जी ने विशेषाधिकार की सूचना आपको दी थी. मैं चाहता हूं कि उस पर आप व्यवस्था दें.

नर्सिंग बड़ा घोटाला है. माननीय तत्‍कालीन मंत्री विश्‍वास सारंग जी ने असत्‍य बोला आरोप लगाए, उस पर हमने आपको सूचना दी है, प्रमाण के साथ सूचना दी है. मैं चाहता हूं कि इस पर आप व्‍यवस्‍था दें.

 

 

 

 

 

 

 

12.10 बजे नियम 267 (क) के अंतर्गत विषय

अध्‍यक्ष महोदय-

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

विशेषाधिकार भंग की दी गई सूचनाएं

 

अध्‍यक्ष महोदय- नेता प्रतिपक्ष्‍ा ने विशेषाधिकार के मामले में ध्‍यान दिलाया है. मुझे विशेषाधिकार मामले की दो सूचनाएं कल प्राप्‍त हुई हैं, मैं इनका परीक्षण कर शीघ्र नियमानुसार कार्यवाही करूंगा.

नेता प्रतिपक्ष ( श्री उमंग सिंघार) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दो ही व्‍यवस्‍था हैं,चर्चा करा लें या कमेटी को दे दें.

अध्‍यक्ष महोदय- मुझे विचार तो करने दीजिए, परीक्षण तो करने दीजिए

श्री उमंग सिंघार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,क्‍या व्‍यवस्‍था बनी हैं, बता दें

पत्रों का पटल पर रखा जाना.

(1) (क) मध्‍यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का लेखा परीक्षा प्रतिवेदन वर्ष 2021-2022

(ख)भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण, मध्‍यप्रदेश का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

 

 

 

(2) (क) मध्‍यप्रदेश राज्‍य जैव विविधता बोर्ड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023 तथा

(ख) मध्‍यप्रदेश राज्‍य वन विकास निगम लिमिटेड का 46 वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे वर्ष 2020-2021

 

श्री कैलाश विजयवर्गीय (नगरीय विकास एवं आवास मंत्री)- अध्‍यक्ष महोदय मैं (क) जैव विविधता अधिनियम 2022 (क्रमांक 18 सन 2003) के अधीन बनाए गए मध्‍यप्रदेश जैव विविधता नियम 2004 के नियम 21 के उपनियम (3) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश राज्‍य जैव विविधता बोर्ड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-23 तथा

(ख) कंपनी अधिनियम 2013 ( क्रमाक 18 सन 2013) की धारा 394 की उपधारा दो की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश राज्‍य वन विकास निगम लिमिटेड का 46 वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे वर्ष 2020-21 पटल पर रखता हूं.

(3) (क) मध्‍यप्रदेश मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023,

(ख) शहपुरा थर्मल पॉवर कम्‍पनी लिमिटेड का 17 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023,

(ग) बाणसागर थर्मल पॉवर कम्‍पनी लिमिटेड का 12 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023 तथा

(घ) मध्‍यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड, जबलपुर का एकविशंति: (इक्‍कीसवां) वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023

 

 

(4) (क) विक्रम विश्‍वविद्यालय, उज्‍जैन का 66 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023,

(ख) अटल बिहारी वाजपेयी हिन्‍दी विश्‍वविद्यालय, भोपाल का ग्‍यारहवां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023,

(ग) महर्षि पाणिनि संस्‍कृत एवं वैदिक विश्‍वविद्यालय, उज्‍जैन (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2022-2023 तथा

(घ) मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय विनियामक आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा संपरीक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2023-2024

 

 

 

(5) मध्‍यप्रदेश लोक सेवा आयोग, इन्‍दौर का 65 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2021-2022

 

 

(6) नर्मदा बेसिन प्रोजेक्‍टस कंपनी लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2021-2022

 

(7) मध्यप्रदेश प्लास्टिक सिटी डेवलपमेंट कारपोरेशन ग्वालियर, लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा दिनांक 31 मार्च,2023.

राज्यमंत्री, वन (श्री दिलीप अहिरवार)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, कंपनी अधिनियम,2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ब) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश प्लास्टिक सिटी डेवलपमेंट कारपोरेशन ग्वालियर, लिमिटेड का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा दिनांक 31 मार्च,2023 को समाप्त वर्ष के लिये पटल पर रखता हूं.

 

 

 

 

 

12.11 अध्यक्षीय व्यवस्था (क्रमशः)

अध्यक्ष महोदय-- उमंग जी बताइये, आप क्या कह रहे हैं.

नेता प्रतिपक्ष ( श्री उमंग सिंघार) -- अध्यक्ष महोदय, जैसा कि मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमावली के नियम 165 में है कि- जो सदस्य विशेषाधिकार का प्रश्न चाहे, वह उसकी लिखित सूचना उस दिन की बैठक प्रारंभ होने से पूर्व..

संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- अध्यक्ष महोदय, इस पर मेरा पाइंट ऑफ आर्डर है.

अध्यक्ष महोदय-- उमंग जी, आप बोलें.

श्री उमंग सिंघार-- कृपया बोलने दें. इसमें स्पष्ट लिखा है कि इसमें आपको व्यवस्था देना है. क्योंकि तात्कालिक मुद्दा है. तत्काल आपका इस पर वक्तव्य आया,तत्कालीन मंत्री जी का. तो इसमें हम यह चाह रहे हैं कि इस पर चर्चा हो जाये. या आप जो व्यवस्था चाहें, वह आप दें. यह हमारा आपसे अनुरोध है. अब दो सदस्यों ने पूरे दल की तरफ से यह सूचना दी है. इस पर आपकी तो तत्काल व्यवस्था आना चाहिये ना.

श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, मेरा इस पर व्यवस्था का प्रश्न है. यह विधान सभा नियम और प्रक्रिया के अंतर्गत चलेगी. यह कोई (xx) का खेल नहीं है कि किसी भी प्रश्न पर आकर आप खड़े हो गये.

श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय, ये (xx) आप किसको बोल रहे हैं.

श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, आपके निर्देश हो गये, आपकी व्यवस्था हो गई, क्या उसके ऊपर कोई व्यवस्था का प्रश्न उठा सकता है.

..(व्यवधान)..

श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय, यह शब्द विलोपित करायें.

..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय--कृपा करके आप लोग बैठ जाइये. ..(व्यवधान).. कृपा करके आप लोग अपने स्थान पर बैठ जायें. आज बजट पर भी चर्चा शुरु होना है.

श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय, संसदीय कार्य मंत्री जी ने असंसदीय भाषा का उपयोग किया है, इस शब्द को विलोपित करायें. हमारा आपसे यह निवेदन है.

अध्यक्ष महोदय--नेता प्रतिपक्ष जी, मेरा भी आपसे निवेदन है कि आपने विषय को उठाया, मैंने उस पर व्यवस्था दे दी कि मुझे सूचनाएं प्राप्त हो गई हैं, मैं उन पर विचार कर नियमानुसार कार्यवाही करुंगा.

श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, अध्यक्ष की व्यवस्था पर व्यवस्था का प्रश्न हो सकता है क्या. उस पर ये व्यवस्था का प्रश्न उठा रहे हैं. फिर मैं (xx) नहीं कहूं, तो फिर क्या कहूं.

अध्यक्ष महोदय--अध्यक्ष की व्यवस्था पर पाइंट ऑफ आर्डर उठाने का प्रावधान नहीं होता है. इस शब्द को विलोपित करें. ..(हंसी)..

श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय, फिर हम भी बोलना चालू करें क्या. ओ प्यारे, ओ राजा, ऐसा बोलना चालू करें क्या फिर हम.

अध्यक्ष महोदय-- इस शब्द पर आपको आपत्ति क्यों है, यह बताओ मुझे. ..(हंसी)..

श्री उमंग सिंघार-- मुझे तो लगता है कि ये आपको बोल रहे हैं. इसलिये मैंने आपत्ति ली है.

अध्यक्ष महोदय-- मुझे बोलने का सवाल ही नहीं है. ..(व्यवधान).. अब ध्यानाकर्षण लिये जायेंगे. डॉ. सीतासरन शर्मा. कृपया सभी लोग बैठ जायें, यह विषय खत्म हुआ.

श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय, मेरा अब एक आखिरी निवेदन है.

अध्यक्ष महोदय--कृपया बैठ जायें, आप बजट पर चर्चा कर सकते हैं.

श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय, विशेषाधिकार पर तत्काल व्यवस्था दी जाती है. सामान्यतः परम्परा यह रही है.

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, बजट पर बोलने का सबको अवसर मिलेगा.

श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय, यह परम्परा रही है.

अध्यक्ष महोदय--मैंने व्यवस्था दे दी है. इस व्यवस्था पर कोई व्यवस्था का प्रश्न नहीं होगा.

श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्यक्ष महोदय, अध्यक्षीय व्यवस्था पर कोई व्यवस्था का प्रश्न नहीं उठता है. यह सदन की परम्परा रही है और आप बार बार उठ रहे हैं, फिर मैं इसको (xx) नहीं कहूं, तो क्या कहूं, आप बताइये.

श्री उमंग सिंघार-- अरे प्यारे, ओ राजा अब मैं यह बोलूं.

अध्यक्ष महोदय-- ध्यानाकर्षण. डॉ. सीतासरन शर्मा.

12.14 बजे ध्यानाकर्षण

प्रदेश में संचालित यूनानी महाविद्यालयों में पाठ्यक्रम को हिन्दी में न पढ़ाया जाना.

डॉ. सीतासरन शर्मा (होशंगाबाद)-- अध्यक्ष महोदय,

उच्‍च शिक्षा, आयुष मंत्री (श्री इन्‍दर सिंह परमार):- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

डॉ. सीतासरन शर्मा:- माननीय मंत्री जी कह रहे उनको सबको हिन्‍दी भाषी कर दिया है. इसके लिये धन्‍यवाद्.

किन्‍तु पिछले तीन सालों में एससीएसटी वर्ग के कितने छात्रों ने यूनानी महाविद्यालयों में प्रवेश लिया, कृपया जानकारी दे दें.

श्री इन्‍दर सिंह परमार:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे मध्‍यप्रदेश में एक शासकीय और तीन अशासकीय महाविद्यालय संचालित होते हैं. वर्ष 2021-22, 2022-23 और 2023-24 में एक भी एससीएसटी के छात्रों को एडमिशन नहीं मिला है उन्‍होंने एडमिशन नहीं मांगा है.

डॉ. सीतासरन शर्मा:- अध्‍यक्ष महोदय, यह गंभीर विषय है, पर अब जो हो गया सो हो गया. कृपया आपसे अनुरोध है कि स्‍पष्‍ट रूप से माननीय मंत्री बता दें कि क्‍या भविष्‍य में यह बंधन हटा दिया जायेगा ? और हिन्‍दी भाषी या अन्‍य भाषावादी छात्रों को वहां प्रवेश दिया जायेगा और साथ ही जो एससीएसटी और ओबीसी वर्ग के छात्र हैं, क्‍या उनके लिये भी सारे महाविद्यालय खुले रहेंगे ?

श्री इन्‍दर सिंह परमार:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एससीएसटी और ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों के लिये आरक्षण की व्‍यवस्‍था है. लेकिन ओबीसी वर्ग में तो एडमिशन पूरे हो जाते हैं और एससी और एसटी के छात्र हैं, उनकी सीट का कोटा तो दूसरे वर्ग से भर दिया जाता है. लेकिन वास्‍तव में एससी और एसटी का कोई विद्यार्थी उसमें नहीं आ पाता है. हमारे यहां जो पढ़ाई की व्‍यवस्‍था है वह हिन्‍दी, कुछ अंग्रेजी और उर्दू, ऐसी पढ़ाई की व्‍यवस्‍था है. लेकिन आम छात्रों में और आम समाज में यह मान्‍यता है कि यूनानी की पढ़ाई उर्दू में होती है और इसलिये हिन्‍दी भाषी छात्र, मुझे लगता है कि इधर आने से ही डरते हैं. इसलिये अभी हमने तय किया है कि हम हिन्‍दी माध्‍यम से अगले वर्ष से पढ़ाना प्रारंभ करेंगे और साथ में उसका प्रचार-प्रसार पहले से पर्याप्‍त मात्रा में किया जायेगा, ताकि हमारे अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के जो बेटे, बेटियां हैं जो वहां आना चाहते, पढ़ना चाहते हैं. वह हिन्‍दी में भी पढ़कर इस विधा का लाभ ले सकते हैं और आगे अपने जीवन के लिये रोजगार के अवसर उपलब्‍ध करा सकते हैं.

डॉ. सीतासरन शर्मा:- ऐसा क्‍यों साहब, माननीय मंत्री जी आप इसी वर्ष से प्रारंभ कीजिये. अभी जुलाई माह तो चल रहा है. दूसरा, सामान्‍य वर्ग का ई.डब्‍ल्‍यू.एस जो है उसके एडमिशन की भी व्‍यवस्‍था हो जाये.

अध्‍यक्ष महोदय:- डॉक्‍टर साहब, मंत्री जी कह रहे हैं.

श्री इन्‍दर सिंह परमार:- अध्‍यक्ष महोदय, उसमें जो नीट से पास करके आते हैं, उसमें से पहले कोई मेडिकल में चले जाते हैं, आयुर्वेद में जाते फिर होम्‍योपैथिक में जाते हैं और आखिरी में जो बच्‍चे बचते हैं , मुझे लगता है कि वह यूनानी में आते हैं. भारत सरकार के जो नियम हैं उसके कारण हमको कई सारी बाध्‍यताएं हैं, हम उनको भी लिखने वाले हैं कि इसमें हम संशोधन करना चाहते हैं. लेकिन अभी हिन्‍दी में किताबें नहीं हैं और यह सत्र अभी प्रारंभ हो रहा है तो हम पूरी तरह से किताबें लिखकर, उसके लिये पूरी तरह से हमको एक्‍सपर्ट बुलाने पड़ेगें, लेकिन एक बात और हम साथ में कर रहे हैं कि राष्‍ट्रीय शिक्षा नीति वर्ष 2020 में जिस प्रकार से हायर एजुकेशन में क्रियान्‍वयन समितियां बनायी हैं, देश भर के एक्‍सपर्ट को बुलाया. ऐसा ही यूनानी में, आयुर्वेद में और टेक्निकल में भी हम एक्‍सपर्ट लोंगों को बुलाकर के क्रियान्‍वयन समिति बना रहे हैं. यदि हमारे मध्‍य प्रदेश में एक्‍सपर्ट नहीं हैं तो बाहर के लोगों का हम सहयोग लेकर हिन्‍दी में किताब लिखवाने का काम करेंगे और अगले सत्र से हिन्‍दी माध्‍यम में पढ़ाई हो जायेगी.

डॉ. सीतासरन शर्मा:- धन्‍यवाद.

 

12.20 बजे (2) प्रदेश में वृद्धावस्था पेंशन न मिलने से उत्पन्न स्थिति

 

श्रीमती झूमा डॉ. ध्यानसिंह सोलंकी (भीकनगांव) (सर्वश्री आतिफ आरिफ अकील, लखन घनघोरिया)- अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री (श्री नारायण सिंह कुशवाह) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

श्रीमती झूमा डॉ.ध्‍यानसिंह सोलंकी -- अध्‍यक्ष महोदय, यह जो प्रक्रिया अपनायी जा रही है, इसमें ई-केवायसी प्रोफाईल अपडेट करें, इसमें कोई दिक्‍कत नहीं है. आज का युग कम्‍प्‍यूटर युग का जमाना है किन्‍तु इस दरमियान वृद्धजनों को पूरी तरह से कह दिया जाता है कि आपको पेंशन नहीं मिलेगी, आप अपात्र हो गए हैं तो यह एक तरह से गलत है और यह प्रक्रिया जारी रखें और पेंशन भी जारी रहे, मैं सिर्फ इतना चाहती हॅूं कि उनकी पेंशन जारी रहे. वे बहुत वृद्ध और गरीब व्‍यक्‍ति हैं और इस तरह से आज के जमाने की कार्यवाही से उनको गुजरना पड़ता है, यह कठिन है. इसलिए यह प्रक्रिया जारी रहे और इसमें उनको मदद की आवश्‍यकता है. यह प्रक्रिया जारी रहे, उस समय उनकी पेंशन जारी रहेगी, यह माननीय मंत्री जी मुझे बताएं.

श्री नारायण सिंह कुशवाह -- अध्‍यक्ष महोदय, दिनांक 01.4.2023 को कलेक्‍टर के माध्‍यम से सारे नगरीय निकाय, ग्राम पंचायतों को यह निर्देश जारी किया गया है. इसकी प्रक्रिया चल रही है इसमें जिनको पात्रता है उन्‍हें पूरी करने के लिए कैम्‍पों के माध्‍यम से पंचायत स्‍तर पर, वॉर्ड स्‍तर पर, मोहल्‍ला स्‍तर पर कैम्‍प लगाने के लिए भी विभाग ने एक आदेश जारी किया है. कहीं अगर ऐसी कोई दिक्‍कत आती है कि कोई हितग्राही पात्रता रखता है और वह कैम्‍प तक आने में भी सक्षम नहीं है तो यह निर्देश हमने जारी किए हैं कि संबंधित विभाग, संबंधित अधिकारी उसके घर पर जाकर केवायसी का काम पूरा करेंगे और पूरा एरियर सहित राशि पात्र हितग्राही को जितने माह की पेंशन रूकी है, वह पूरा प्रदाय करेंगे, ऐसा निर्देश भी जारी किया है. (मेजों की थपथपाहट)

श्रीमती झूमा डॉ.ध्‍यानसिंह सोलंकी -- अध्‍यक्ष महोदय, यह प्रक्रिया जारी हो, उनको उस दौरान की पेंशन जारी रहे, यह मैं आपसे जानना चाह रही हॅूं. आप एरियर दे रहे हैं और 6 महीने बाद दे रहे हैं तो 6 महीने का वक्‍त अधिक होता है. उस प्रक्रिया के दौरान भी 1 महीना, 2 महीना, 3 महीना वह उनको हर महीने लगातार पेंशन मिले, यह मैं कहना चाहती हॅूं. माननीय मंत्री जी, इसमें कोई ज्‍यादा तकलीफ नहीं है, आप यह कर सकते हैं. वह प्रक्रिया भी रहे और यह भी रहे. इसमें काफी वृद्धजन हैं यह कोई एक व्‍यक्‍ति की बात नहीं है. यह पूरे मध्‍यप्रदेश की बात है और सारे वृद्धजन मानसिक रूप से प्रताडि़त हो रहे हैं.

श्री नारायण सिंह कुशवाह -- अध्‍यक्ष महोदय जी, यह डॉ.मोहन यादव जी की सरकार है और मध्‍यप्रदेश में कहीं भी किसी भी गरीब या किसी नि:शक्‍त व्‍यक्‍ति के साथ में अन्‍याय नहीं होगा और सबको न्‍याय दिलाने के लिए है. कहीं भी अगर कोई हितग्राही पात्रता रखता है तो 6 माह की पेंशन, 4 माह की पेंशन, वैसे इसमें यह 2 माह अंतराल आया है, ज्‍यादा नहीं है, उसको पूरा भुगतान किया जाएगा. कहीं किसी की पेंशन रोकने का काम नहीं है. सबको बिल्‍कुल अच्‍छे आदर के साथ में उन्‍हें पेंशन वितरण का काम किया जाएगा.

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- अध्‍यक्ष महोदय, हमारी बहन का सीधा-सीधा यह कहना था कि एक सुनिश्‍चित नीति रहे कि हितग्राहियों को समय पर पेंशन मिले, तो 600 रूपए के लिए एक महिला, एक वृद्धजन, यदि उसे शक्‍कर खाना पडे़ तो उसके लिए उसको 5-5, 6-6 किलोमीटर जाना पडे़, तो उस महिला या वृद्ध के साथ ऐसा संघर्ष क्‍यो ? तो एक नीति तय होना चाहिए. आप 4 महीने, 6 महीने में उसको दे रहे हैं 6 महीने में अभी हाल प्रश्‍न लगा है, ध्‍यानाकर्षण लगा है तो कल पैसे डाले, तो यह क्‍या न्‍याय है ? इसमें किसी की जवाबदारी तय होना चाहिए. कलेक्‍टर ने लैटर लिख दिया तो क्‍या हुआ, ठीक है कि वहां रजिस्‍ट्रेशन हो गए. यह क्‍या है. एक सुनिश्‍चित समय-सीमा होना चाहिए कि इस 4 दिन के अंदर, 8 दिन के अंदर, 15 दिन के अंदर उसके रजिस्‍ट्रेशन होना चाहिए. इसमें नीति बन सकती है, नियम बन सकते हैं. इसमें क्‍या परेशानी है. आप यही चाहे रहे हो, सभी के लिए सामूहिक रूप से हो.

अध्यक्ष महोदयमाननीय मंत्री जी ने स्पष्ट कहा है कि अशक्त है, बुजुर्ग है, उसके घर जाकर के.वाय.सी.करायी जायेगी.

श्री उमंग सिंघारअध्यक्ष महोदय, बुजुर्गों एवं वृद्ध महिलाओं को छः छः महीने से पैसे नहीं मिल रहे हैं.

अध्यक्ष महोदयमंत्री जी कह रहे हैं कि उनको दो महीने से पेंशन नहीं मिल रही है.

श्री नारायण सिंह कुशवाह अध्यक्ष महोदय, सारी कसरत उसी बात की हो रही है कि उनका बैंक में खाता होगा तो उनको दोबारा बैंक जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी. ऴऴझझ अधDOअअधD अध््दतततततजजजजजजुुुुुुुुुुउनके खाते में ही पेंशन जायेगी.

श्री उमंग सिंघार-- अध्यक्ष महोदय, केवाईसी जो महिलाएं करवाती हैं, वह फिर से नहीं करवा पाती हैं महिलाएं उनको पता नहीं रहता है उन्होंने एक बार रजिस्ट्रेशन करा दिया. यह जवाबदारी अपने रोजगार सहायक अथवा नगर में जो भी जवाबदार कर्मचारी की होती है.

अध्यक्ष महोदयदरअसल क्या है कि ई केवाईसी तो बहुत जरूरी और यह होते ही रहना चाहिये जिससे कि पात्रता में हमेशा सुधार होता रहता है, लेकिन यह बात भी सही है कि उसके कारण किसी पात्र व्यक्ति को कोई तकलीफ न हो, यह मंत्री जी ध्यान में रखेंगे. इसमें आतिफ अकील जी, दो और माननीय सदस्य हैं, जिनको इनके बारे में प्रश्न करना है. माननीय झूमा जी ने पूरे विषय को गंभीरता के साथ रख दिया है. आपका दूसरा नाम है इसलिये आप पूरक प्रश्न पूछिये श्री आतिफ आरिफ अकील.

श्री आतिफ आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय, यह बुजुर्गों की बात है हम राजधानी की बात करें. तो राजधानी के अंदर मैं माननीय मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि बहुत सारे क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर मैं ऐसे बुजुर्गों से मिलवा सकता हूं कि उनकी पेंशन बंद है. उनको ई केवाईसी के नाम पर रोक दिया जाता है. उनके आधार कार्ड के माध्यम से फिंगर प्रिन्ट तक नहीं आते हैं. कई बुजुर्ग जो इन पैसों से अपने इलाज के लिये दवाएं खरीदते हैं हर महीने में उनको पेंशन नहीं मिलने के कारण बहुत परेशानी होती है.

अध्यक्ष महोदयअकील जी प्रश्न तो बताओ क्या है ?

श्री आतिफ आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय, फिंगर प्रिन्ट का जो इश्यू आ रहा है वह नहीं आ रहा है तो उसके लिये क्या करना पड़ेगा ?

श्री नारायण सिंह कुशवाह अध्यक्ष महोदय,उसमें दूसरी पहचान और है कि फिंगर प्रिंट की जगह उनकी आंख देखकरके भी केवाईसी करवा सकते हैं.

श्री आतिफ आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय, यह मध्यप्रदेश में होती है अथवा मध्यप्रदेश के बाहर होती है, यह और बता दीजिये ?

श्री नारायण सिंह कुशवाह अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में ही होती है.

श्री आतिफ आरिफ अकील अध्यक्ष महोदय, नगर निगम की क्या व्यवस्थाएं हैं, मुझे बखूबी मालूम है. आप मालूम कर लीजिये कि मध्यप्रदेश के बाहर होती है क्या यह व्यवस्था ? यह गरीब बुजुर्गों की बात हो रही है. मेरी व्यक्तिगत बात नहीं हो रही है. मध्यप्रदेश के सभी बुजुर्गों की बात हो रही है ? उनको छः सौ रूपये पेंशन नहीं मिल रही है.

अध्यक्ष महोदयमाननीय लखन सिंह जी थोड़ा इसको स्पष्ट कर देंगे.

श्री आतिफ आरिफ अकील-- अध्यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि जो बुजुर्ग हैं उनको पेंशन नहीं मिल पा रही है, वह क्या करें ? उनको सिर्फ छः सौ रूपये पेंशन मिलती है ? वैसे तो इसमें वृद्धि करनी चाहिये, लेकिन उनको छः सौ रूपये भी नहीं मिल रहे हैं, इसलिये उनको दर दर भटकना पड़ता है, बैंकों के चक्कर काटने पड़ते हैं.

श्री लखन घनघोरिया-- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने अपने जवाब में इस बात को स्वीकार किया है कि 1 लाख 17 हजार ऐसे हितग्राही जिनकी पेंशन रोकी गई है. उनके सत्यापन को आधार माना गया है. यह भी मंत्री जी द्वारा कहा गया है कि हमने 1.4.24 को संबंधित कलेक्टर एवं समस्त अधिकारियों को निर्देशित किया कि उनका भौतिक सत्यापन करें. उसमें मुसीबत यह होती है कि बुजुर्ग जो कम से कम 60-70 साल के होते हैं वह स्वयं तो जा नहीं पाते हैं और आपके पास इतना अमला नहीं है, नगर निगम हो, चाहे नगर पालिका हो, चाहे नगर परिषद हो, आपके पास इतना अमला नहीं है कि वह जाकर भौतिक सत्‍यापन करें, वे करना तो चाहते हैं, लेकिन अमला है नहीं. पूरी प्रक्रिया में कम से कम 6-7 महीने लग जाते हैं, जो बुजुर्ग पांचों प्रकार की पेंशन उठाते हैं, विशेषकर के दिव्‍यांग, विधवा और ओल्‍ड ऐज इनकी स्थिति यह होती है कि 6-7 महीने तक ये इंतजार नहीं कर पाते. विधायक बहन झूमा सोलंकी जी ने मंत्री जी से आग्रह किया है कि ये ई-केवायसी की प्रक्रिया चलती रहे और जो पहले प्रक्रिया थी कि तीन फोटो एवं आयु का प्रमाण पत्र लेकर, उसको देखकर कम से कम उसकी पेंशन जारी रखी जाती थी, यदि उसको जारी रखे तो वास्‍तव में ये व्‍यवहारिक भी होगा और कम से कम उन बुजुर्गो को सम्‍मान भी मिलेगा और उनकी असुविधा खत्‍म होगी, क्‍या मंत्री जी व्‍यवहारिक दृष्टिकोण से इस प्रक्रिया को जारी रखेंगे, हमारा प्रश्‍न यह है, क्‍योंकि आपने 1 अप्रैल को यह आदेश जारी किया है और कलेक्‍टर के यहां से साल भर बाद वहां पहुंचे नगर निगम, नगर परिषद, आपके पास आरआई, पटवारी तहसीलदार सब अमला है, लेकिन बहुत काम है. मेरा आपसे आग्रह है ई-केवायसी भी जरुरी है. मंत्री जी कह रहे थे आई स्‍कैनर का, तो ये कोई व्‍यक्त्‍िा करना चाहे तब तो होगा, थंब का भी कोई व्‍यक्त्‍िा करना चाहे तब‍ तो होगा, आपके पास उतना अमला नहीं है, हम सिर्फ बुजुर्गों की बात कर रहे हैं, कम से कम बुजुर्गों के साथ न्‍याय तो हो. 1-1 साल पोर्टल बंद है, कभी कुछ है, केवायसी के लिए जाते है तो पोर्टल बंद है.

अध्‍यक्ष महोदय - लखन जी आपका प्रश्‍न आ गया है.

श्री लखन घनघोरिया - मेरा यही आग्रह है कि आप कम से कम मंत्री जी संवेदनशीलता और बुजुर्गों के सम्‍मान में ये घोषणा कर देंगे कि ये दोनों चीजें एक साथ चलती रहेगी, ई-केवायसी भी आप करते रहे और कम से कम पुराने आधार पर जो आयु का प्रमाण पत्र, तीन फोटो और पेंशन की प्रक्रिया को जारी रखेंगे तो हम समझते हैं कि न्‍याय होगा.

श्री नारायण सिंह कुशवाहा - अध्‍यक्ष जी, इन पेंशनों में केन्‍द्र का भी योगदान है और केन्‍द्र के द्वारा विभाग को निर्देश मिले हैं कि केवायसी अत्‍यंत आवश्‍यक है. केवायसी करने के लिए कैम्‍पों के माध्‍यम से ऐसे निर्देश हम लोगों ने जारी किए है कि वृद्ध, दिव्‍यांग जो आने में असमर्थ है उसके घर जाकर कार्यवाही पूरी करवा लेंगे और मैं ऐसा मानता हूं कि तीन माह के अंदर ये प्रक्रिया विभाग के द्वारा पूरी कर ली जाएगी, इसमें कोई भी पात्र व्‍यक्ति छूटेगा नहीं इसकी गारंटी है.

श्री लखन घनघोरिया - अध्‍यक्ष महोदय, मेरा मंत्री जी से निवेदन है हर योजना केन्‍द्र के निर्देश से चलती है, मध्‍यप्रदेश की सरकार परिपालन करती है. हम नियम को शिथिल या खत्‍म करने की बात नहीं कह रहे हैं. हम ये नहीं कह रहे कि केवायसी मत कराएं. केवायसी करवाएं, लेकिन पारदिर्शता होनी चाहिए, कम से कम एक संवेदनशीलता तो दिखना चाहिए, बुजुर्गों को लगता है कि सरकार संवेदनशून्‍य हो गई है कि हमको 10 -10 महीने यहां से वहां भटकना पड़ता है, उनको यह नहीं पता कि उनको केवायसी करवाना है या कोई उनके घर आए, एक तो आते नहीं है, नगर निगम, नगर पालिका अभी जल संकट से जूझ रहा था, अब जलप्‍लावन से जूझेगा, आपके पास समय कितना है , आप दोनों चीजों को जारी कर दें, तो अच्‍छा होगा, उनके हितों साथ न्‍याय होगा, सरकार का भी तो अंशदान है छह प्रकार की पूरी पेंशन में. प्रदेश भी तो अपना पैसा देता है.

अध्‍यक्ष महोदय - लखन भाई कृपया समाप्‍त करें. विषयांतर हो रहा है. मंत्री जी कुछ कहना चाहते हैं.

श्री लखन घनघोरिया - कृपया जवाब दिलवा दें.

अध्‍यक्ष महोदय -- लखन भाई आप समाप्‍त करें. मंत्री जी, आप कुछ बोलना चाहते हैं.

श्री नारायण सिंह कुशवाह -- सरकार भी संवदेनशील है और यह विभाग भी संवेदनशील है और जो है, जैसा मैंने कहा कि मैंने स्‍वयं की दिलचस्‍पी लेकर यह सारी चीजें कराईं हैं, अब इसमें अपात्रता के कई कारण हैं, कहो तो मैं बता दूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी कृपया आप बैठें. लखन भाई और बाकी जो सदस्‍य हैं, सामान्‍य तौर पर उन सबका यह कहना है कि ई के.वाय.सी. कराना चाहिए, लेकिन पूरी संवेदनशीलता के साथ कराना चाहिए, मेरा भी आग्रह है कि पूरी संवेदनशीलता के साथ कराओ(मेजों की थपथपाहट)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.41 बजे अनुपस्थिति की अनुज्ञा

निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 122 जुन्नारदेव (अ.ज.जा.) से निर्वाचित सदस्‍य, श्री सुनील उईके एवं निर्वाचन क्षेत्र क्रमांक 128 पांढ़ुर्णा (अ.ज.जा.) से निर्वाचित सदस्‍य, श्री निलेश उईके को विधान सभा के जुलाई, 2024 सत्र में दिनांक 1 जुलाई से 13 जुलाई, 2024 तक की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुज्ञा.


12.44 बजे प्रतिवेदन की प्रस्तुति एवं स्वीकृति.

गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा संकल्पों संबंधी समिति का द्वितीय प्रतिवेदन

 

 

 

 


 

12.45 बजे कार्यमंत्रणा समिति का प्रतिवेदन

 

 

 

 

12.48 बजे बधाई एवं शुभकामना

कु. निर्मला भूरिया एवं श्री चन्‍दर सिंह सिसौदिया को जन्‍मदिन की बधाई.

अध्‍यक्ष महोदय-- आज हमारे सदन के सदस्‍य कु. निर्मला भूरिया जी और श्री चन्‍दर सिंह सिसौदिया जी दोनों का जन्‍मदिन है. सदन की ओर से उनको बहुत बधाई.

 

12.48 बजे याचिकाओं की प्रस्‍तुति

अध्‍यक्ष महोदय-- आज की कार्यसूची में पदक्रम 6 पर जो याचिकाओं का उल्‍लेख किया गया है उनको प्रस्‍तुत किया हुआ माना जायेगा.

 

 

 

 

 

 

 

12.48 बजे अध्‍यक्षीय घोषणा

भोजनावकाश न होने विषयक

आज चूंकि सामान्‍य बजट पर चर्चा होगी और इसलिये आज लंच नहीं होगा और भोजन लॉबी में उपलब्‍ध रहेगा. सभी लोग चर्चा करेंगे विमर्श करेंगे भोजन करेंगे और बजट को आगे बढ़ायेंगे.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.49 बजे समितियों के लिये सदस्‍यों का निर्वाचन

7. लोक लेखा प्राक्‍कलन सरकारी उपक्रमांक संबंधी तथा स्‍थानीय निकाय एवं पंचायतीराज लेखा समितियों के लिये सदस्‍यों का निर्वाचन.

 

 

12.50 बजे

अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति वर्ग के कल्याण संबंधी

समिति के लिए सदस्यों का निर्वाचन

 

 

 

 

 

12.52 बजे

 

पिछड़े वर्गों के कल्याण संबंधी समिति के लिए सदस्यों का निर्वाचन

 

 

 


 

12.55 बजे शासकीय विधि विषयक कार्य

 

(1) मध्यप्रदेश सुधारात्मक सेवाएं एवं बंदीगृह विधेयक, 2024 (क्रमांक 12 सन् 2024) का पुर:स्‍थापन

 

 

 

 

 

 

 

 

(2) मध्यप्रदेश मंत्री (वेतन तथा भत्ता) संशोधन विधेयक, 2024 (क्रमांक 13 सन् 2024) का पुर:स्‍थापन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(3) मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2024 (क्रमांक 14 सन् 2024) का पुर:स्‍थापन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(4) मध्यप्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2024 (क्रमांक 15 सन् 2024) का पुर:स्‍थापन

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(5) मध्यप्रदेश माल और सेवा कर (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2024 (क्रमांक 16 सन् 2024) का पुर:स्‍थापन

 

 

 

 

 

 

 

(6) मध्यप्रदेश खुले नलकूप में इंसानों के गिरने से होने वाली दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं सुरक्षा विधेयक, 2024 (क्रमांक 17 सन् 2024) का पुर:स्‍थापन

 

 

 

 

 

 

 

 

12.59 बजे अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

बजट पर सामान्‍य चर्चा में पहले भाग लेने वाले सदस्‍यों के अतिरिक्‍त अन्‍य सदस्‍यों को विभागवार चर्चा में भाग लेने का अवसर दिया जाना

 

 

 

1.00 बजे अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

अध्‍यक्ष महोदय - वर्ष 2024-2025 के आय-व्‍ययक पर सामान्‍य चर्चा प्रारंभ हो. उसके पूर्व एक जानकारी आपके ध्‍यान में लाना चाहता हूँ कि विगत दिनों 2 जुलाई को सदन ने एक ध्‍यानाकर्षण पर चर्चा की, वह ध्‍यानाकर्षण काफी लम्‍बा था, चर्चा में भी रहा. लेकिन मैंने विशेष अनुमति देकर उस ध्‍यानाकर्षण पर चर्चा कराई थी क्‍योंकि विषय ज्‍वलंत था और सब चाहते थे कि उस पर चर्चा हो. लेकिन इस प्रकार की चर्चा, आगे न तो उदाहरण के रूप में इस्‍तेमाल की जायेगी और न परम्‍परा बनेगी, यह ध्‍यान में रहना चाहिए.

 

 

 

 

1.01 बजे

वर्ष 2024-2025 के आय-व्‍ययक पर सामान्‍य चर्चा

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह (अमरपाटन) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय वित्‍त मंत्री देवड़ा जी के द्वारा प्रस्‍तुत वर्ष 2024-2025 के आय व्‍ययक पर कांग्रेस पार्टी की तरफ से, अपने दल की तरफ से बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ. चूंकि यह समर्थन करने योग्‍य नहीं है, इसलिए मैं पूरी तरह से इससे सहमत नहीं हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय, जब कल माननीय वित्‍त मंत्री जी बोल रहे थे, तो सदन में शोर हो रहा था. लेकिन फिर भी मैं एक कान लगाकर सुन रहा था और कैलाश जी की तरफ मेरा विशेष ध्‍यान था और कोई तो बोल नहीं रहा था.

अध्‍यक्ष महोदय - जो लोग सुन नहीं रहे थे, कैलाश जी उनका बार-बार ध्‍यान आकर्षित कर रहे थे.

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, जी. कैलाश जी हौसला-अफजाई कर रहे थे, कहीं वाह-वाह कर रहे थे, कहीं कुछ कर रहे थे. हमें लगा कि यह क्‍या हो रहा है ? इतने वरिष्‍ठ नेता हैं, हमारे कैलाश जी. हम लोगों ने, मध्‍यप्रदेश और इनकी पार्टी ने इनको राष्‍ट्रीय स्‍तर का नेता बनाया. वह वहां से भी लौटकर, यहां सदन में चले आए. उनका यहां रहना सदन की गरिमा, यहां जो चर्चाएं होती हैं, यह इसको ताकत ही प्रदान करता है, गरिमा देता है. इसमें कोई दो राय नहीं है और शेर भी आपने खूब सुनाए. चूंकि कैलाश जी इन्‍दौर के हैं, मैं शुरू करने के पहले सोच रहा था कि इन्‍दौर के ही राहत इंदौरी साहब का एक शेर बयां करूँ, ' चरागों को उछाला जा रहा है, हवा पर रौब डाला जा रहा है, न हार अपनी न जीत अपनी होगी, मगर सिक्‍का उछाला जा रहा है'.

अध्‍यक्ष महोदय, यह जो बजट है, आय-व्‍ययक है, तीन लाख पैंसठ हजार करोड़ रुपये का है और यह उल्‍लेख किया गया है कि पिछले वर्ष से लगभग 16 प्रतिशत अधिक है. यह डॉक्‍यूमेंट्स में परिलक्षित होता है. लेकिन मैं इसका समर्थन नहीं करता हूँ, इसका प्रमुख कारण यह भी है कि पूरा बजट कर्जे के बोझ के ऊपर रखा है. तीन लाख पैंसठ हजार करोड़ रुपये का बजट और तीन लाख पिचहत्‍तर हजार करोड़ का ऋण है, अगर मैं गलत हूँ तो देवड़ा साहब संशोधित एवं ठीक कर सकते हैं. यहां पर एक बड़ा महत्‍वपूर्ण मुद्दा आता है, एक परसेपशन बनाया जाता है, जो प्रचार होता है. एक तो वोकल फॉर लोकल, दिल्‍ली से कहीं कुछ आ जाता है कि स्‍टैंण्‍ड अप इण्डिया, सिट अप इण्डिया और पता नहीं क्‍या-क्‍या आ जाता है ? पता नहीं कौन-कौन से इण्डिया. मेक इन इण्डिया. अब वोकल, लोकल के लिए तो है, लेकिन अगर हम केन्‍द्र सरकार की बात करें, पूरे देश की बात करें. अध्‍यक्ष महोदय, चीन जिसके साथ हमारा तनाव हमेशा बना रहता है, गलवान घाटी और तमाम सीमा क्षेत्र हैं, वहां क्‍या परिस्थितियां हैं, उससे सभी अवगत हैं, कोई इससे अंजान नहीं है. हम चीन को जो निर्यात करते हैं और चीन से जो आयात करते हैं, उसमें एक से छ: गुना का फर्क है, यानि छ: गुना चीज़ या रूपये या terms of value हम ज्‍यादा आयात करते हैं और जो निर्यात करते हैं, पता नहीं उसमें ये लोकल फॉर वोकल कहां गया ? कुछ समझ नहीं आता.

अध्‍यक्ष महोदय, एक नया फार्मूला इन्‍होंने और दे दिया गया है, 5 एफ- फार्म टू, फाइबर टू, फैक्‍टरी टू, फैशन टू, फॉरेन, पता नहीं इसका मतलब क्‍या है, समझ नहीं आता. इतना जरूर है कि जो बजट बनाते हैं, सुझाव देते हैं, हम भी उस दौर से गुजर चुके हैं, बड़े-बड़े बुद्धिमान अधिकारी होते हैं, उच्‍च स्‍तर पर आई.ए.एस. और उनके समकक्ष अधिकरी बनने के लिए बड़ी योग्‍यता चाहिए, उनका दिमाग भी बड़ा फर्टाइल होता है. आजकल एक नई परंपरा हो गई कि अपने पॉलिटिकल बॉस को हमें खुश रखना है इसलिए ये अधिकारी नई-नई सलाह दे देते हैं. इन्‍होंने जो सलाह दी है, मैं, चा‍हता हूं कि मध्‍यप्रदेश सरकार कुछ अफसरों को चुनें और उनके लिए पद्म-श्री की भी सिफारिश करे. जिससे अगले बजट भाषण में और नई-नई चीजें हमारे सामने आयेंगी.

अध्‍यक्ष महोदय, अब रहा सवाल हमारी अर्थव्‍यवस्‍था की परफॉरमेंस का. भारत की कुल GDP में मध्‍यप्रदेश का हिस्‍सा केवल 3.16 प्रतिशत है और हमारी आबादी राष्‍ट्रीय आबादी का जो प्रतिशत है, वह 6.2 प्रतिशत है. तो हमारा परफॉरमेंस कहां है ? हम देश की अर्थव्‍यवस्‍था की गति में अपना कितना योगदान दे रहे हैं, यह एक सोचनीय प्रश्‍न है. जिसकी चिंता न सिर्फ आपको करनी चाहिए बल्कि हम सभी जो जिम्‍मेदार यहां बैठे हैं, को भी करनी चाहिए. यहां बजट की पुस्तिका में दिया गया है कि हम विश्‍व की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था हैं, इसमें कोई संशय नहीं है लेकिन हमारी आबादी कितनी है, हमारी आबादी अब 142 करोड़ हो गई है. अमेरिका जो सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है, जो हमसे कई गुना बड़ी है, उसकी आबादी 33 करोड़ है. जापान जो दूसरे नंबर पर है उसकी आबादी लगभग 12 करोड़, फिर जर्मनी है उसकी आबादी 8 करोड़ है, फ्रांस की आबादी 7 करोड़ है और हम 142 करोड़ हैं.

 

1.08 बजे

{सभापति महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय) पीठासीन हुए.}

और हम इस पर बड़ा गर्व करते हैं, अभी तक तो हमें प्रथम स्‍थान पर या कम से कम दूसरे स्‍थान पर कब का पहुंच जाना चाहिए था. लेकिन हमें अपनी पीठ थपथपाने की आदत है. हम परफॉरम करें या न करें. मुझे भी आज एक बहुत ही अद्भुत बालक का किस्‍सा याद आ रहा है.

सभापति महोदय, एक रेस हुई और बालक जब रेस के बाद घर पहुंचा तो उसके पिताश्री ने उससे पूछा कि बेटे रेस में कौन से स्‍थान पर आया तो वह बोला प्रथम आया, फिर पिताजी ने पूछा दूसरे नंबर पर कौन आया बालक बोला दूसरे नंबर पर भी हम ही हैं, फिर पिताजी ने नंबर तीन का पूछा तो उसने कहा हम ही हैं. वह ऐसा अद्भुत बालक है और हम अपनी पीठ थपथपाते हैं, आंकड़े आपके सामने हैं. हमारी GSDP (Gross State Domestic Product) अब 15 लाख करोड़ में पहुंची है और पिछले वर्ष जैसा मैंने कहा कि सरकार कर्ज के बोझ तले दबी है. 45 हजार करोड़ रुपए हम पिछले वित्‍तीय वर्ष 2023-2024 में ले चुके हैं और जो एफ.आर.बी.एम. एक्‍ट है जो रिजर्व बैंक की गाइडलाइन है कि कोई भी सरकार 3 प्रतिशत से ज्‍यादा अपने जी.एस.डी.पी. का कर्ज नहीं लेती है और इसके लिए भी केन्‍द्र सरकार अनुमति देती है. केन्‍द्र सरकार के पास से पता नहीं अनुमति आई कि नहीं आई. माननीय वित्‍त मंत्री जी अभी करेक्‍ट करेंगे कि इन्‍होंने आगे लोन लेने के लिए अनुमति ली कि नहीं ली ताकि ये योजनाएं जो आय व्‍यय पत्रक में हैं उनको पूरा कर सकें. केन्‍द्र सरकार को अनुमति के लिए पत्र भेजा है अनुमति आई कि नहीं आई यह जानकारी सदन को माननीय वित्‍त मंत्री जी दें. वर्ष 2023-2024 का 45 हजार करोड़ रुपए और वर्ष 2024-25 का बढ़क‍र लगभग 55 हजार करोड़ रुपये या इससे भी ज्‍यादा इतना कर्ज होने वाला है.

सभापति महोदय, अब जो 3 लाख 65 हजार करोड़ रुपए का बजट है इसमें विभिन्‍न विभागों की योजनाएं शामिल हैं. अपने साधनों, संसाधनों के अतिरिक्‍त आपको 95 हजार करोड़ रुपए और चाहिए. वित्‍त मंत्री जी को और सरकार को ताकि वह सुगमता से अपनी दी गई योजनाओं को क्रियान्वित कर सकें, इनको पूरा कर सकें. अब प्रश्‍न यह है कि 95 हजार करोड़ रुपए कहां से आएगा. अब वह कर्ज पूरक बजट में डाल देंगे, लेकिन अनुमति कौन देगा. केन्‍द्र सरकार दे नहीं रही है. बजट की पुस्‍तक में बड़ी-बड़ी योजनाओं का जिक्र है. अटल एक्‍सप्रेस-वे यह एक्‍सप्रेस- वे, वह एक्‍सप्रेस-वे कल ही मैं एक अखबार में पढ़ रहा था कि केन्‍द्र सरकार ने वह योजनाएं बंद कर दी हैं. पता नहीं यह वित्‍त मंत्री जी के संज्ञान में हैं कि नहीं हैं. यह योजनाएं अधूरी योजनाएं हैं पर कतिपय कारणों से, केन्‍द्र सरकार ने उन योजनाओं को बंद कर दिया है. अब कर्ज लेने के लिए वित्‍त मंत्री जी को ऋण भी मिलता है और कई तरह से लिया जाता है तो यह इनको विशेष प्रयास करना होगा तभी यह संभव हो पाएगा.

सभापति महोदय-- डॉ. साहब आप तो वरिष्‍ठ हैं. यह सभी शासन की व्‍यवस्‍थाएं रहती हैं. सभी शासन करता है.

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह-- माननीय सभापति महोदय, उल्‍लेख करना मेरा धर्म है तो मैं उसका उल्‍लेख कर रहा हूं. माननीय देवड़ा जी के नेतृत्‍व में इनका विभाग और माननीय मोहन जी मुख्‍यमंत्री यह चार्वाक ऋषि के अनुयायी हैं. यह बात सही है, आपने ठीक कहा और चार्वाक जी कहा कहते थे कि घी पियो और कर्ज लो, मौज करो. जो कुछ है अब देखिये हमारे सनातन धर्म में कितने तरह की विचारधाराएं थीं. उनका कहना था कि यहीं सब कुछ है इसके बाद कुछ भी नहीं है. न स्‍वर्ग है और न ही कुछ और है. खाओ, पियो और मस्‍त रहो. माननीय वित्‍त मंत्री जी यह सिद्धांत अब ठीक नहीं है. आप इतना कर्ज न लें और मैं समझता हूं कि आप चार्वाक ऋषि के रास्‍ते पर न चलें. किसी भी देश या प्रदेश में विकास या समृद्धि के दो पैमाने होते हैं ऐसा मैं सोचता हूं .प्रतिव्‍यक्ति आय कितनी है हर व्‍यक्ति जो शासन की आमदनी है प्रदेश की आमदनी है उस गरीब का क्‍या हिस्‍सा है.  प्रति व्यक्ति आय कितनी है और रोजगार कितने पैदा हो रहे हैं. अगर इन सूचकांकों पर सरकार खरी नहीं उतरती है तो मैं समझता हूँ कि यह सरकार का फेल्यीअर है. इस दिशा में काम करने की बहुत जरुरत है. वर्ष 2024-2025 के बजट में लगभग 3 लाख 80 हजार रोजगार पैदा होने की बात कही गई है. यह तो पत्रक में ही है. निजी क्षेत्र में 18500, शासकीय क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित होंगे. शिक्षाकर्मियों के 11 हजार पदों की बात कही गई है. मैं समझता हूँ करीब 27-28 हजार पर शिक्षा विभाग में रिक्त हैं. सरकार को इसे प्राथमिकता देना चाहिए. इन पदों को भरना चाहिए. बहुत से शिक्षित बेरोजगार कस्बों में रहते हैं, छोटे शहरों में रहते हैं सब बड़ी आशा भरी निगाह से सरकार की तरफ देखते हैं कि कब यह पद निकलेंगे, कब इनका प्रकाशन होगा, कब चयन होगा. उनकी आशाओं को पूरा करना हमारा दायित्व है. अब देश और प्रदेश में एक परम्परा बन गई है कि सारे पेपर लीक हो जाते हैं. बेचारा नौजवान हताश हो जाता है. उत्तर प्रदेश में जितनी परीक्षाएं हुईं सभी का पर्चा लीक हो गया. हमारे प्रदेश में भी हो गया. नीट वाला मामला बड़ा गंभीर है. व्यापम की चर्चा अब बेमानी है वह भी रहा है. पब्लिक सर्विस कमीशन से जो इम्तेहान होने थे उनका भी पर्चा लीक हुआ. पर्चा लीक न हुआ करे इसके लिए एक सुदृढ़ व्यवस्था बनानी चाहिए नहीं तो पढ़े लिखे नौजवानों में हताशा और निराशा घर कर जाएगी. किसी भी राष्ट्र का नौजवान अगर निराश हो तो वह राष्ट्र तेजी से आगे नहीं बढ़ सकता है.

सभापति महोदय, अभी रीजनल इनवेस्टर्स मीट मुख्यमंत्री जी ने उज्जैन में की. बहुत अच्छा है करना चाहिए, हमें उद्योगों को आकर्षित करना है. लोग आएंगे तो विकास की गति बढ़ेगी. विकास का पहिया घूमेगा. लोगों को रोजगार मिलेगा, माल बनेगा, व्यापार बढ़ेगा. अगर उद्योग आते हैं तो उस इलाके में एक Spin of benefit भी शुरु हो जाता है. रीजनल इनवेस्टर्स मीट से जो राशि आनी है वह लगभग 15 हजार करोड़ रुपए है. मैं समझता हूँ इस दिशा में काम करने की जरुरत है. लेकिन जो पुराने अनुभव हैं वो हमें संशय में डालते हैं, निराश करते हैं. जब शिवराज जी यहां मुख्यमंत्री थे उस समय बड़े धूमधाम से ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट हुआ था. अभी एक बहुत अच्छी बात है माननीय मोहन जी ने उसको ग्लोबल नाम नहीं दिया है रीजनल ही दिया है. ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट के आयोजन में बहुत राशि खर्च हुई थी. ऐसे ऐसे आंकड़े आए थे जो विश्वास करने योग्य नहीं थे. इसमें 29 लाख रोजगार पैदा करने का वादा किया गया था. यहां मोहन जी तो चंद लाखों की ही बात कर रहे हैं, लाख के अऩ्दर ही हैं. बहुत सारी धनराशि लगभग 15.42 लाख करोड़ रुपए इनवेस्ट होना था. कुछ नहीं आया, 5 प्रतिशत भी नहीं आया. यह किसकी जिम्मेदारी है, इतना व्यय हुआ और उसके बाद भी वह काम पूरा नहीं हुआ. उद्योग आए नहीं, रोजगार सृजित नहीं हुए. यह बड़ा महत्वपूर्ण मामला है. सरकार को इसको देखना चाहिए. दो इंडीकेटर हैं, रोजगार का मैंने बता दिया, प्रतिव्यक्ति आय यह भी मैं आपके माध्यम से इस सदन को बताना चाहता हूँ. माननीय वित्त मंत्री जी के ध्यान में लाना चाहता हूँ. आपके ही वर्ष 2023-24 के पत्रक में प्रति व्‍यक्ति आय 1,42,565 दी है. अब एक ऐसी परम्‍परा बन गई है शिवराज जी की सरकार में भी थी, यहां भी शुरुआत हो गई है कि हर चीज को वर्ष 2003-04 से कम्‍पेयर करते हैं. अरे भाई ! 20 वर्ष हो गये आपकी सरकार के, इसका रोना पीटना तो छोडि़ये. नये युग में जब इतनी टेक्‍नालॉजी आ गई है, आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस आ गया है, क्‍लाउड कम्‍प्‍यूटिंग है, तब रफ्तार बड़ी तेज होती है. जो विकास की रफ्तार आजादी के बाद वर्ष 1947 से 1972 तक थी उससे कहीं ज्‍यादा पिछले 20 साल तक की वह 5 साल में हुई और अब जो 20 साल हैं उसका तीन साल में होने की संभावना है बशर्ते हम सब संसाधनों को टैब कर सकें उपयोग कर सकें, तो यह रोना मैं समझता हूं खत्‍म करना चाहिये वित्‍त मंत्री जी, लेकिन मैं आपकी ऑंख भी खोलना चाहता हूं कि अब इन्‍होंने कहा है कि दिग्‍विजय सिंह जी की सरकार के समय वर्ष 2003-04 में प्रति व्‍यक्ति आय 13,465 थी और पिछले वर्ष 2023-24 में 1,42,565 कर दी. अब वह ज्‍यादा थी कि यह ज्‍यादा है. आपने विचार किया माननीय वित्‍त मंत्री जी, मैं सभापति महोदय आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि कौन सा ऐसा पैमाना है जिससे नाप सकते हैं कि किस सरकार की अर्थव्‍यवस्‍था में एक आम आदमी की आय ज्‍यादा थी या कम थी. सोना ले लीजिये दुनिया भर में चलने वाली सबसे स्‍टैंडर्ड चीज सोना होता है. सोने की कीमत वर्ष 2003 में 5,600 रुपये प्रति दस ग्राम थी वित्‍त मंत्री जी, यह आंकड़ा निकलवा लीजियेगा, आज वर्तमान में 2023-24 मैंने 31 मार्च, 2024 का आंकड़ा लिया है उसके बाद और थोड़ा फ्लक्‍चुएशन हुआ है चूंकि कमोडिटी की ट्रेडिंग बहुत होती है, पूरी दुनिया में होती है, तो इसकी कीमत है 71,252 रुपये प्रति दस ग्राम. अब इसमें बहुत साधारण गणित लगता है. 10 वीं का विद्यार्थी भी माननीय कैलाश जी सुन रहे हैं कि नहीं, वर्ष 2003 में आय ज्‍यादा थी कि अभी प्रतिव्‍यक्ति आय ज्‍यादा है. मैं यह माननीय सभापति जी के सौजन्‍य से बता रहा हूं आप विशेष रूप से इस पर ध्‍यान दें. पहले की बात तो आप समझ ही गये होंगे, तो मैं यह प्रश्‍न कर रहा हूं और जवाब भी मैं ही दूंगा. प्रश्‍न भी कर रहा हूं कि 13,465 ज्‍यादा थी कि अभी जो आय है वह ज्‍यादा है. अभी की आय आपकी 1,42,565 है. लगभग 12 गुना का अंतर है सोने की कीमत में और अगर 12 से गुणा करेंगे तो आंकड़ा 1,61,580 आता है. अब यह कौन सी आमदनी ज्‍यादा है. कब ज्‍यादा थी. अरे ! आमदनी का मुख्‍य माध्‍यम क्रय शक्ति होती है. तब वर्ष 2003 में 1,61,580 थी जिसको आप हमेशा याद करते रहते हैं भूलते नहीं हैं और आज आपकी आय जब इतने विकास की बात करते हैं, इतनी योजनाए हैं, आपने तो किताब भर दी है इतनी योजनाएं हैं कि आदमी कंफ्यूज हो जाता है और उनकी जो हितग्राही मूलक योजनाएं हैं मैं समझता हूं कि उनका 50 फीसदी लाभ भी जो चिह्नित और टारगेटेड लोग हैं, उनको नहीं मिल पाता है. सभापति महोदय मेरा यह कहना है कि वर्तमान सरकार न तो रोजगार दे पा रही है और न ही लोगो की आय बढ़ रही है. सरकार रोजगार नहीं दे पा रही है आप रोजगार कार्यालयो के आंकड़े देख लें.

सभापति महोदय मैं आपके माध्यम से वित्त मंत्री जी को बताना चाहूंगा कि 2022-23 में 23 लाख पढ़े लिखे नौजवान पंजीकृत हुए थे. अब तो 2024-25 शुरू हो गया है नया वर्ष है इस वर्ष में 3 लाख और जुड़े हैं यह 26 लाख हो गये हैं, घटे नहीं हैं. अगर रोजगार मिला होता तो ये रोजगार कार्यालय में पढ़े लिखे नौजवानों की पंजीकृत संख्या दिख रही है वह संख्य घटती, यह साफ जाहिर करता है कि यह आंकड़ो की बाजीगरी है, अच्छी कर लेते हैं, दुकान भी अच्छी सजती है, कैलाश जी, माल कैसा भी हो दुकान तो सजती है, ग्राहक आते हैं और आप मौके पर कुछ न कुछ देकर वोट ले लेते हैं. अब उसका ज्यादा उल्लेख मैं यहां पर नहीं करूंगा.

माननीय सभापति महोदय अब इनकी जो ग्यारंटी हैं. एक तो प्रधानमंत्री जी ने, मैं उनकी शान में गुस्ताखी नहीं करूंगा. प्रधानमंत्री जी ने गत विधान सभा चुनाव के दौरान दो प्रमुख ग्यारंटियां दी थी. आपको भी स्मरण होगा. गेहूं की खरीदी 2700 रूपये क्विंटल , धान की खरीदी 3100 रूपये क्विंटल, विधान सभा के चुनाव के बाद में खरीफ सीजन चला गया और उसके बाद में खरीदी चल रही थी. रबी का गेहूं का सीजन भी चला गया और यह फेलुवर है हमारा कि हम कि उचित मूल्य की दुकानों के लिए जो हमारा कोटा है खरीदी का जो एफसीआई देता है, वह 80 लाख टन का था हम मात्र 37 या 38 लाख टन ही खरीद सके हैं. यह वही प्रदेश है जिसने एक वर्ष 1 करोड़ 17 या 18 लाख टन गेहूं खरीदा था, तो इस वर्ष क्यों नहीं, तो क्यों नहीं उनको प्रधानमंत्री जी की घोषणा अनुसार लाभ दिया गया, यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है. इसका भी निराकरण समय पर होना चाहिए.

सभापति महोदय मध्यप्रदेश सरकार ने भी कुछ घोषणाएं की थीं. उन का क्या हुआ है यह भी हम जानना चाहेंगे क्योंकि चुनाव में आपने कहा था. लाड़ली बहना को आपने पहले 1250 रूपये प्रतिमाह दिया है जो कि अभी भी मिल रहा है. लेकिन चुनाव के समय आपने कहा था कि 3000 रूपये प्रतिमाह तक ले जायेंगे, बजट भी आ गया है लेकिन एक भी रूपये की राशि बढ़ी नहीं है. यह लाड़ली बहनाओं के प्रति अन्याय है या नहीं, धोखा है या नहीं है. उऩकी आंखों पर लोगो ने धूल झोंकी है, आपको इस पर आपको मनन करने की जरूरत है. सभी महिलाओं को 500 रूपये में गैस का सिलेण्डर मिलना था, वह भी नहीं मिल रहा है.

माननीय सभापति महोदय अब कुछ बातों पर मैं तारीफ भी कर सकता हूं, इसमें कोताही नहीं है. जगदीश जी का तो काम बहुत अच्छा है, बहुत अच्छे इंसान हैं, वे योग्य भी हैं. एक जो गौशाला निर्माण की बात है 2190 गौशाला संचालित हैं ऐसा आपने आंकड़ा दिया है. यह बात भी अपनी जगह पर सही है कि जब 2018-19 में कमलनाथ जी की सरकार थी तब एक हजार गौशालाएं बनी थीं. लेकिन उसमें आवारा पशु नहीं थे. गऊ गाय या जो भी प्रजाति है, अधिकांश गौशालाएं खाली थीं. उसका एक कारण यह भी था कि प्रति गाय, अब क्या कहें बड़ा संवेदनशील यह गौमाता का शब्द है, हाल ही जिंदाबाद मुर्दाबाद होने लगती है. प्रति गाय के हिसाब से 20 रूपये दिया जाता था जिसे आपने बढ़ाकर 40 रूपये किया. अब 40 रूपये में लोग प्रोत्साहित तो होंगे, कुछ स्वसहायता समूह है जो भी चलाते हैं अलग अलग, क्षेत्रों में अलग समितियां या समूह यह सारे लोग गौशाला चलाते हैं. तो 40 रूपये में उनको पर्याप्त भूसा चारा उऩको मिलेगा.

डॉं राजेन्‍द्र कुमार सिंह - गौशाला चलाते है, 40 रूपए में उनको चारा- भूसा अनाज मिलेगा तो वह प्रोत्‍साहित होंगे . माननीय सभापति महोदय, मैं पूरी तरह से आपको शाबासी तब दूंगा, जब प्रदेश के किसानों से यह भी सूचना मिलने लगे कि अब आवारा पशु उनके खेतों में नहीं जा रहे हैं. सब गौशालों में जा रहे हैं, जिनको देवड़ा साहब ने बनवाया है. राशि इतनी सारी दी है.यह भी सूचना मिले कि हमारे हाइवे और रोड में पशु घूम नहीं रहे हैं. जो एक्‍सीडेंट का सबसे बड़ा कारण होता है, कितने लोग-काल कवलित होते हैं, यह आप अच्‍छी तरह से जानते हैं. सभापति महोदय, आप तो इतने सीनियर नेता हैं, हर चीज से वाकिफ हैं और आपके इलाके में तो नीलगाय का भी बड़ा प्रकोप है, आपके यहां रोजड़ा कहते हैं.

सभापति महोदय- रोजड़ा नहीं, नीलगाय कहते हैं.

डॉं राजेन्‍द्र कुमार सिंह- इसका भी बड़ा प्रकोप है, उसके लिए भी कुछ प्रयास कीजिए जो जंगल के किनारे खेत हैं और मैं आपको बताना चाहता हूं यह जानवर जंगल में भी नहीं रहता ये खेतों में समतल जमीनों में रहता है और साल में दो बार बच्‍चे देता है, ये डियर प्रजाति है, दो बार बच्‍चे देता है, इसलिए इनकी संख्‍या भी बढ़ती है, बड़े हो जाते हैं तो मारने के लिए भी दौड़ते हैं, आप जानते हैं, घोड़ो के बराबर होते हैं, इनके लिए भी कुछ तो योगदान करिए, कोई नीति बनाइए संवेदनशील विषय है. आपको केन्‍द्र सरकार से भी वार्तालाप करनी पड़ेगी, चर्चा करना पड़ेगी फिर तमाम आपके जो पशु प्रेमी हैं, वह भी अड़चन पैदा करेंगे. एक पशु प्रेमी अब सांसद नहीं रह गई, वो बड़ा परेशान करती थीं, इन विषयों पर कोई निर्णय नहीं होने देती थीं. इनका भी आप ध्‍यान रखें. माननीय सभापति महोदय, आपके माध्‍यम से बताना चाहता हूं,मिलिट्स को प्रोत्‍साहन करने के लिए आपने बहुत अच्‍छा काम किया है.ये हमारे पुरातन काल से है हमारी फूड हेविट्स, हमारा कल्‍चर, हमारी सभ्‍यता से जुड़े हुए अन्‍न हैं. हमें याद है हम लोगों के यहां कोदू का बहुत बड़ा स्‍टॉक हुआ करता था. 5-5 हजार क्विंटल 10-10 हजार क्विंटल रखा जाता था और कोदू ऐसा अनाज है जो 100 साल तक भी खराब नहीं होता. माननीय सभापति महोदय, मैं जानता हूं आपके इलाके में कोदू नहीं होता आपके यहां तो अफीम बहुत होती है आप केश क्रॉप वाले हैं, हम लोग गरीब किसान है, हमारे यहां कोदू बहुत होती है और वह 100-100 साल खराब नहीं होती थी. लोग उसको भंडारित करके रखते थे और जब अकाल पड़ता था, सूखा पड़ता था. शासन के पास इतने संसाधन नहीं हुआ करते थे तो लोग दिया करते थे, कोदम है, कुटकी है, ये मिलिट्स का जो प्रोग्राम है, यह सराहनीय है. 10 रूपए प्रतिकिलो प्रोत्‍साहन राशि भी है इसको और प्रोत्‍साहन करना चाहिए और भी अनाज हैं सांवा है, मोरधन है, इनको भी प्रोत्‍साहित करना चाहिए. आप पशु पालकों को दूध दे रहे हैं आपने प्रोत्‍साहन राशि देने की बात कही है सब्सिडी देंगे जब वो सहकारी समिति के माध्‍यम से दूध बेंचे कितना देंगे इसका उल्‍लेख नहीं है पर अच्‍छी बात है दूध उत्‍पादन बढ़ेगा और आमदनी का वैकल्पिक स्‍त्रोत बढ़ेगा किसान के पास जब पैसा आएगा तो किसान समृद्व होगा खुशहाली आएगी अब दो चार बातें और रखकर मैं समाप्‍त करूंगा उत्‍पादकता बढ़ाने के लिए बहुत सारी चीजें की जाती है एक होता है मृदा परीक्षण किसानों को मालूम हो कि कौनसा पोषक तत्‍व उसकी जमीन में है कौनसे नहीं है कौनसे हमको डालना है एक बहुत जरूरी जानकारी होती है जो किसान को होनी चाहिए केन्‍द्र सरकार ने बहुत गंभीरता बरती है और राज्‍य सरकार ने भी लेकिन कहीं सिलिप कहते हैं कप और लिप में कम में पानी तो है पर वह पी नहीं पा रहे हैं. हम पूरे मध्यप्रदेश की बात नहीं करेंगे, क्योंकि ठोस जानकारी नहीं है, गलत नहीं हो जाये. हम अपने सतना जिले की बात करेंगे, उदाहरण के लिये. चैसे चावल पकता है, पूरा चावल पका है कि नहीं एक दाना निकाल कर देख लेते हैं, तो सतना जिले को ही चावल का एक दाना मान लीजिये. हमारे यहां 8 विकास खण्ड हैं. आठों में भवन बने हुए, वर्ष 2014-15 में भवन बन गये थे. 8 केन्द्र हैं हमारे. चार साल पहले मशीनें भी आ गईं,लेकिन स्टाफ एक भी नहीं है उसमें. वह कैसे चले मृदा परीक्षण केन्द्र और हालत यह है कि उसमें पीपल, बबूल इस तरह के पेड़ दीवारों के ..

1.36 बजे {अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तमोर} पीठासीन हुए.)

.. किनारे उग आये हैं. अध्यक्ष महोदय, आप जानते हैं कि पीपल और बबूल किसी भवन के किनारे उग आयें, तो उस भवन की दीवार भी जाने वाली है. तो यह मृदा परीक्षण केन्द्र जो है, आपने इसमें आवंटन कुछ नहीं किया है. मैं वित्त मंत्री जी को कहना चाहूंगा कि एक बहुत महत्वपूर्ण इंस्ट्रूमेंट होता है यह. उपयोगी होता है, हमारे यहां सिर्फ सतना मण्डी में एक चालू है और क्यों चालू है कि उसमें मण्डी ने अपने कर्मचारी लगा दिये हैं. इस योजना के तहत कृषि विभाग ने नहीं लगाये, तो एक चालू हो गई. तो यह मृदा परीक्षण केन्द्र यह हो जायें. पेय जल की आपकी समूह योजनाएं हैं. हमारे यहां से सबसे बड़ी लगभग हमारे क्षेत्र में योजना बन रही है, सतना बाण सागर समूह पेयजल योजना, इसमें लगभग 1056 गांव में पानी जाना है, पेय जल जाना है और जहां से लिफ्ट हो रहा है, हमारे क्षेत्र से ही बाण सागर है, वहां पर सोन नदी है, वहां से यह लिफ्ट हो रहा है. कुल प्रस्तावित जो घर हैं, जहां यह जायेगा, 2 लाख 52 हजार, वर्तमान में 1 लाख 41 हजार कनेक्शन दे दिये हैं, ऐसा बताते हैं अधिकारी. इसको चेक कर लीजियेगा. लेकिन पानी कितने नलों में आ रहा है, सवाल, महत्व इस बात का है. वह सिर्फ 21 हजार नलों में पानी आ रहा है. अब बताइये 1 लाख 41 हजार कनेक्शन दे दिये, पानी 21 हजार में आ रहा है. तो यह एक बड़ी विफलता है, इसका भी ध्यान रखने की जरुरत है और सिंचाई के बड़े बड़े दावे हैं. यह बड़ा हास्यास्पद है. 2013-14 में याद है मुझे जब शिवराज सिंह जी, मुख्यमंत्री थे. आंकड़ा बताया जाता था कि सिंचित रकबा हमने बढ़ाकर 50 लाख हेक्टेयर कर दिया. अब यह 2013-14 की बात है. चेक कर लीजिये भाषण में और आज भी बताया जा रहा है कि यह 50 लाख हेक्टेयर है. अब यह मिसमैच्ड हमें समझ में नहीं आ रहा है. कहीं न कहीं तो गलत बयानी है. 8 साल पहले 50 लाख हेक्टेयर था, अब भी 50 लाख हेक्टेयर है. बहरहाल सिंचाई बड़ा महत्वपूर्ण विषय है. यह तो होना ही चाहिये. हमारे यहां बड़ी बड़ी योजनाएं आ रही हैं. केन बेतवा लिंक है, चम्बल काली सिंध, पार्वती लिंक है. लेकिन वह ऐसी योजनाएं हैं कि एकाध पीढ़ियां गुजर जायेंगी. बाण सागर परियोजना हमारे यहां बनी है, उसको 27 साल लगे कम्प्लीट होने में. यह तो और बहुत बड़ी परियोजनाएं हैं. जितने माननीय सदस्य बचे हैं, बहुत युवा हैं, शायद वह देख लें, हम लोग तो नहीं देख पायेंगे. नर्मदा का जहां तक सवाल है, इसमें बहुत गंभीर होना चाहिये सरकार को, क्योंकि हमारा जो एलाटमेंट है 18.25 एमएएफ (मिलियन एकड़ फीट) है हमारा एलाटमेंट. अगर हम अगने वर्ष 2024 तक पानी इस्तेमाल नहीं कर लेंगे, तो फिर गुजरात राज्य वहां टकटकी लगाये बैठा है और गुजरात में पानी जाने से आप भी अन्दर से सहमत होंगे देवड़ा जी भी, सब भाजपा के नेता, सभी नेता सहमत होंगे कि उसको कोई रोक नहीं पायेगा. सारा पानी गुजरात चला जायेगा. मध्यप्रदेश के किसानों का हक मारा जायेगा. तो नर्मदा का जो जल है 18.25 एमएएफ, इसका उपयोग शीघ्रातिशीघ्र हो और विशेष इस प्रकार की योजना बने, क्योंकि जो संबंधित लोग हैं. मैं सिंचाई मंत्री जी से भी अनुरोध करुंगा, वैसे संसदीय कार्य मंत्री जी हमारे ऑल राउण्डर हैं. इनको अगर बता दिया जाता है, तो सब तक बात पहुंच जाती है.

अध्‍यक्ष महोदय:- इनको आप गंभीरता से बता दो.

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह:- जी, इनको तो बतायेंगे.

श्री कैलाश विजयवर्गीय:- मैं गंभीरता से सुन रहा हूं. अगर आप मुझे बोलने की अनुमति देंगे तो मैं एक-एक बात का जवाब भी दे सकता हूं. पर क्‍योंकि हमारे सीनियर सदस्‍य हैं, उनके सम्‍मान में मैं, पूरा सुन रहा हूं. जो सुनने लायक नहीं है वह भी सुन रहा हूं.

अध्‍यक्ष्‍ा महोदय:- जवाब वित्‍त मंत्री को जी को देना है.

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह:- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपने पूरे भाषण में एक भी ऐसी नहीं कही, जो किसी के सम्‍मान के विरूद्व हो.

श्री कैलाश विजयवर्गीय:- मैं वह नहीं कह रहा हूं. आपने जो आंकड़े दिये हैं, वह जरूर में थोड़े से आपको बता दूंगा. मैं इकट्ठे कर रहा हूं.

अध्‍यक्ष महोदय:- वह आप बाद में बता देना. राजेन्‍द्र सिंह जी अब आपको भाषण समाप्‍त करना पड़ेगा.

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह:- अध्‍यक्ष महोदय, मैं कैलाश जी को बताना हूं कि मैंने इन आंकड़ों का अध्‍ययन किया है. मैं भी मैथेमेटिक्‍स का स्‍टूडेंट हूं, वैसे इंजीनियर हूं. लेकिन फिर राजनीति शास्‍त्र करके इसमें आ गया, गोरखधंधे में. लेकिन मैथेमेटिक्‍स का स्‍टूडेंट हूं तो मैंने इसमें एक-एक चीज़ निकाली है. चूक एकाध जगह हो सकती है.

श्री कैलाश विजयवर्गीय:- स्‍टूडेंट आप भी रहे और हम भी रहे. हम लोग पास कैसे हुए यह हम भी जानते हैं और आप भी जानते हैं.

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह:- देखिये, हम बड़े साधारण आदमी हैं. हमारी पिताजी पुलिस अफसर थे.

श्री कैलाश विजयवर्गीय:- तो पढ़ने की जरूरत ही नहीं थी.

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह:- वह डी.जी के पद से रिटायर हुए. यहां विधान सभा में 74-75 साल की उम्र .में एक टर्म विधान सभा के सदस्‍य भी रहे. हम लोग बड़े अनुशासित वातावरण में पढ़े हैं. मेरे पिताजी आपके साथ रहे हैं तो आप उनको समझते होंगे, उनको जाना होगा, उनको अच्‍छी तरह से पहचाना होगा. वह बहुत अनुशासित रहते थे तो नकल करने की बात है नहीं. हां, इंदौर का माहौल मुझे मालूम है और जब नौजवान थे, कैलाश जी. वह बड़े उछंखल थे लोग बताया करते थे और जब बार यह विधायक बनकर आये मैं इधर मंत्री था तो इस तरह से हम लोगों को घूमा-फिरा के हम लोगों को तंग करते थे, लपेटते रहते थे और कुछ भी बोलते रहते थे. हम लोग इनका बुरा नहीं मानते थे.

अध्‍यक्ष महोदय:- अब आप बजट की चर्चा पर जायें.

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह:- इनकी दूधी बात कीजिये, पता नहीं बचपन में खेल खेला है कि नहीं, जो थोड़ा सा नटखट होता था तो लोग कह देते थे कि इसकी दूधीभाती है, चलने दो जो करता है, इसको झेलो. हम लोग कैलाश जी को हमेशा झेलते रहे हैं और झेलते रहेंगे, बड़े योग्‍य व्‍यक्ति हैं. हम लोग उनका बहुत सम्‍मान करते हैं.

अब मैं एकाध चीज और बताना चाहता हूं. आयुष्‍मान भारत योजना, एक हजार छ : सौ सत्‍तर से बढ़ाकर आपने एक हजार नौ सौ बावन को इसमें चिकित्‍सा प्रक्रियाओं को मान्‍यता दे दी है. लेकिन अभी इसको फाइन टयूनिंग करने की जरूरत है. मैं इसलिये कह रहा हूं और बड़ी जिम्‍मेदारी से कह रहा हूं कि सतना जिले को ही उदाहरण ले लीजिये, वहां का एक भी अस्‍पताल इस योजना से संबंद्व नहीं है. अब बताइये जिले का जिला, अब दो जिले बन गये हैं सतना और मैहर. एक भी योजना से जुड़ा नहीं है, राशि भी कम है. मैंने डॉक्‍टरों से पूछा कि आप क्‍यों नहीं लेते हो. तो बोले हर ऑपरेशन की या जो वह लोग करते हैं, इतनी कम राशि है कि हमें बड़ा घाटा होता है, नुकसान होता है. आपको इस पर विचार करना चाहिये. चूंकि यह केन्‍द्र की योजना है आप भी राशि देते हैं. आपने भी लगभग 2-3 हजार करोड़ का अंशदान इसमें रखा है. मैं यह समझता हूं कि सभी माननीय सदस्‍य इससे सहमत होंगे क्‍योंकि यह तो सबके क्षेत्र का मामला है और अध्‍यक्ष महोदय, फसल बीमा अभी एक महत्‍वपूर्ण पहलू है. फसल बीमा किसानों के लिये एक जीवन रेखा है. लेकिन हमारा जो अनुभव हैं, हम यह देखते हैं कि किसान बीमित हो जाता है. अपना शेयर देता है, राज्‍य सरकार दे देती है और केन्‍द्र सरकार दे देती है. लेकिन जब बीमा कंपनियां पेमेंट करती है तो वहां पर घालमेल है और इसको दुरूस्‍त किया जाना बहुत जरूरी है. आप एक बार आंकड़ें उन्‍होंने 20 हजार करोड़ सब बीमा कंपनियों को मिलाकर, यह आंकड़ा सही नहीं हो सकता; माननीय कैलाश जी आगे-पीछे हो सकता है. केन्द्र सरकार, राज्य सरकार एवं किसानों की लगभग 18-20 हजार करोड़ रुपये की उनको प्रीमियम की राशि मिलती है और जब वह भुगतान करते हैं तो यह भी आंकड़ा ले लीजिए, 4-5-6 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान नहीं करते हैं. अब इससे प्रॉफिटेबल धंधा कोई दुनिया में हो ही नहीं सकता है कि आप एक सीजन में 12-13 हजार करोड़ रुपये कमा लीजिए और पूंजी, पैसा तो आपको बाद में देना है. सरकार प्रतिपूर्ति करती रहती है. किसान पहले ही दे देता है. इसको भी देखने की जरूरत है क्योंकि यह किसानों से ताल्लुक रखता है और मेरी सब बातें आ गई हैं, आपने समय दिया और सबने सुना. श्री कैलाश जी ने सुना, किसी ने कोई टोका नहीं. मैं सभी का आभारी हूं. एक फिर कह दूं श्री कैलाश जी, आपने 3-4 कहे थे. अब देवड़ा साहब का तो हक बनता है, किताब में प्रिंटेड थे तो उनको तो पढ़ना पड़ता. अधिकारियों ने उसमें जोड़ दिया था. हालांकि इन्होंने कहा होगा, शेर भी लिखकर लाना. आंकड़े तो आपने लाते हैं शेर इनके दिये होंगे. अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से कहना चाहता हूं -

"थोड़ी मस्ती थोड़ा- सा ईमान बचा पाया हूं,

यह क्या कम है मैं अपनी पहचान बचा पाया हूं,

कुछ उम्मीदें, कुछ सपने, कुछ महकती यादें,

जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूं. "

 

अध्यक्ष महोदय, आपने जो समय दिया उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.

 

संसदीय कार्यमंत्री ( श्री कैलाश विजयवर्गीय ) - अध्यक्ष महोदय, आपके सम्मान में मैं केवल दो लाइन सुना देता हूं.

"किसी को आसानी से मत मिल जाना,

लोग सस्ता समझने लगते हैं."

 

डॉ. सीतासरन शर्मा (होशंगाबाद) - धन्यवाद अध्यक्ष महोदय, हमारे पूर्व वक्ता, विद्वान साथी डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह जी, आप सीनियर हैं विधान सभा में वर्ष 1980 में पहले आ गये थे, मैं वर्ष 1990 में आया. अब वह बी.ई. इंजीनियर हैं तो उन्होंने गणित से हिसाब-किताब लगाया. मैं डॉक्टर हूं तो मैं आपरेशन करूंगा. मैं माननीय मुख्यमंत्री जी का और माननीय वित्त मंत्री जी का बहुत आभार मानता हूं. उन्होंने एक सर्वस्पर्शी, सर्वव्यापी प्रदेश की जनता के हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए बजट प्रस्तुत किया. अध्यक्ष महोदय, यह बजट बड़े सोच विचार करके बनाया गया है. यह "खटाखट-खटाखट" नहीं बना. (मेजों की थपथपाहट).. और इसी कारण से एक भी रुपये का टैक्स बढ़ाया नहीं और वर्ष 2023-24 से गत वर्ष से 2024-25 में 16 प्रतिशत बजट का आकार बढ़ गया, यह बुद्धि का काम है, आंकड़ों का नहीं है. यह मैदान का काम है.

डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह - अध्यक्ष महोदय, आपने तो बहुत लोक-लुभावन बात की. एक पैसे का टैक्स नहीं बढ़ाया. मगर आपको तो पेट्रोल, डीजल पर टैक्स घटाना चाहिए था. महाराष्ट्र की सरकार ने टैक्स घटाया है और आप टैक्स लगा किसमें सकते हैं? डीजल, पेट्रोल, मोबिल, शराब, सिगरेट, तम्बाकू और बाकी में तो आप टैक्स लगा ही नहीं सकते. जीएसटी काउंसिल की बैठक में श्री देवड़ा जी जाते हैं. बेचारे प्रयास करते हैं लेकिन हो गया, वहां तो पूरे देश के वित्त मंत्री आते हैं. श्रीमती निर्मला जी वहां रहती हैं, वहां सब तय होता है तो टैक्स लगाने, न लगाने का उनका अधिकार ही नहीं है.

डॉ. सीतासरन शर्मा - अध्यक्ष महोदय, अब मैं वाद-विवाद में नहीं पड़ना चाहता हूं. कर्नाटक की सरकार ने विधान सभा चुनाव के बाद डीजल, पेट्रोल पर टैक्स बढ़ा दिया था. सरकार किसकी थी आप जानते हैं.

श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - अध्यक्ष महोदय, मैं एक चीज कहना चाहूंगा.

डॉ. सीतासरन शर्मा - अध्यक्ष महोदय, यही मुश्किल है, हमने शांति से सुना. (व्यवधान)

श्री दिलीप सिंह परिहार - जब आपका समय आए तब आप बोलिएगा.

अध्यक्ष महोदय - आप बैठें, आपको बोलने का समय मिलेगा.

श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे - अध्यक्ष महोदय, उसी से जुड़ी हुई बात है.

श्री शैलेन्द्र कुमार जैन - इनके भाषण में किसी भी एक व्यक्ति ने टोका-टाकी नहीं की. सबने बड़ी शालीनता से सुना है.

वित्‍त मंत्री (श्री जगदीश देवड़ा) -- अध्‍यक्ष महोदय...

उपनेता प्रतिपक्ष (श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे) -- अध्‍यक्ष महोदय, एक मिनट...

अध्‍यक्ष महोदय -- डॉ. सीतासरन शर्मा जी के अलावा किसी का ना लिखें.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- (XXX)

श्री जगदीश देवड़ा -- अध्‍यक्ष महोदय जी, यह न हो, तो अच्‍छा. सबका समय आए तो वे बोलें.

डॉ. सीतासरन शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं तो सीधी-सादी बात कर रहा हॅूं. जब आड़ी-तेड़ी बात करूं, तब आप जरा खडे़ हो जाएं.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, नहीं, आप बोलिए.

श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- (XXX)

डॉ. योगेश पंडाग्रे -- अध्‍यक्ष महोदय, इनको भी समय मिलेगा, तब यह अपने समय पर बोलें. यह व्‍यवस्‍था बिगाड़ने का काम कर रहे हैं, यह सुनना नहीं चाहते हैं.

डॉ.सीतासरन शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, जैसा वित्‍त मंत्री जी ने कहा था कि यह सिर्फ आय-व्‍यय का आय-व्‍ययक नहीं है. इस बजट में प्रदेश के विकास का रोडमैप है. इसमें शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर, कृषि, सिंचाई जैसी विकास की अनेक योजनाएं हैं और इसलिए जब वित्‍त मंत्री जी बजट प्रस्‍तुत कर रहे थे, तो प्रदेश के स्‍टूडेंट्स सुनना चाहते थे कि हमारे लिए क्‍या है. किसान जानना चाहते थे कि हमारे लिए क्‍या है. बहनें-महिलाएं जानना चाहती थीं कि उनके लिए क्‍या है. समाज का हर एक वर्ग जानना चाहता था कि सरकार उनके लिए क्‍या कर रही है. गृहणी जानना चाहती थी कि सरकार कोई नया टैक्‍स तो नहीं लगा रही है. नहीं जानना चाहते थे, तो ये 63 लोग थे. ये हल्‍ला मचा रहे थे. प्रदेश की जनता की नजर थी. पत्रकार और अर्थशास्‍त्री जानना चाह रहे थे. ये 63 लोग बैठे थे. ये सुनना नहीं चाहते थे. एक डॉक्‍टर राजकुमार सिंह साहब ने जरूर सुना. एक तरफ सुना, वह भी एक ही कान से सुना. दोनों कानों से नहीं सुना. एक कान से उनकी सुनते थे और दूसरे कान से हमारी सुनते थे. इन्‍हें प्रदेश की कोई चिन्‍ता नहीं है. यदि चिन्‍ता होती, तो ये नारे नहीं लगाते, ये राजनीति नहीं करते. ये सुनते कि सरकार प्रदेश की जनता के लिए क्‍या कह रही है, क्‍या ला रही है.

अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने आपसे अनुरोध किया कि इस बजट में सिर्फ जनता की नजर नहीं थी, पत्रकारों और अर्थशास्‍त्रियों की भी नजर थी. मैं पढूंगा नहीं, यदि आप अनुमति देंगे तो सिर्फ हैडिंग पढ़कर सुनाऊंगा. पत्रकारों ने इसमें क्‍या कहा. राज एक्‍सप्रेस ने कहा- आम जनता को राहत, युवाओं को रोजगार. हरिभूमि ने कहा- मोहन के बजट ने मोहा मन. नवदुनिया ने कहा-मनमोहन बजट. यह पत्रकारों की प्रतिक्रिया है. नवदुनिया में धनंजय प्रताप सिंह जी ने इस बजट के बारे में अपना स्‍टेटमेंट दिया, वह मैं बता देता हॅूं. मोहन सरकार के बजट में दिखा दीनदयाल का विज़न, मोदी का मिशन. यह पत्रकारों ने कहा. (मेजों की थपथपाहट) इन्‍हें समझ नहीं आएगा कि विरोध कर रहे हैं. चलिए जाने दीजिए. पत्रकारों ने कहा तो अर्थशास्‍त्रियों ने क्‍या कहा. अभी डॉ.सिंह साहब बजट के एफआरवीएम एक्‍ट की बात कर रहे थे, आंकड़ों की बात कर रहे थे. माननीय वित्‍त मंत्री जी उत्‍तर देंगे. एकाध बात मैं भी बोल दूंगा. देखिए, प्रोफेसर हिमांशु राय इंदौर के बिज़नेस मैनेजमेंट के इंस्‍टटीट्यूट में प्रोफेसर हैं. बजट में हेल्‍थ, इन्‍फ्रॉस्‍ट्रक्‍चर व जनकल्‍याण पर फोकस यानि मूलभूत जरूरतों पर ध्‍यान दिया गया है. प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी- मध्‍यप्रदेश का इन्‍फ्रॉस्‍ट्रक्‍चर अब सड़कों से आगे इंडस्‍ट्रीयल. अभी डॉ.साहब बात कर रहे थे. मध्‍यप्रदेश का इन्‍फ्रॉस्‍ट्रक्‍चर अब सड़कों से आगे, इंडस्‍ट्रीयल कॉरीडोर की ओर बढ़ रहा है. प्रोफेसर कन्‍हैया आहूजा- यह युवाओं पर फोकस बजट, महिलाओं और किसानों की जरूरतों पर भी ध्‍यान दिया गया है. यह अर्थशास्‍त्रियों ने कहा है. नौकरशाहों ने क्‍या कहा. चीफ सेक्रेटरी ब्‍योहार साहब, इन्‍हीं के समय के हैं, जो वामपंथी थे. वे विचारधारा से वामपंथी हैं. इसके बाद भी पूरी तारीफ तो कर नहीं सकते थे फिर भी उन्‍होंने क्‍या लिखा. बजट में नये-पुराने वादों के लिए कमिटमेंट है. यह है भारतीय जनता पार्टी की सरकार, यह है मोदी की गारंटी. (मेजों की थपथपाहट) एक्‍स चीफ सेक्रेटरी लिख रहे हैं. यह आपकी सरकार का है.

अध्‍यक्ष महोदय, डॉ.सिंह साहब ने घाटे की जो बात की, मैं उस वक्‍त भी था. अब वह आपने कहा कि वही पुराना रोना मत रोओ. जब तक हमारी पीढ़ी है तो हमने भुगता है. आप अध्यक्ष महोदय समय देंगे. आप भी उस समय विधान सभा में सदस्थ थे. एक बार स्वर्गीय बापट जी ने प्रश्न पूछा विधान सभा में कि यहां पर ऐसी कौन सी सड़क है जिसमें प्रति एक गज में गड्डा नहीं है. सरकार ने कहा कि पूरी सड़क में गड्डे ही गड्डे हैं. एक भी बिना गड्डे की सड़क नहीं है. एक एक गज में गड्डे थे. यह प्रश्न का उत्तर था बापट जी ने पूछा था आपको निकलवाकर भी दे दूंगा. उस समय आपका बजट 22 हजार करोड़ का बजट था और 24 हजार करोड़ रूपये का कर्जा था. उस समय न तो सड़क थी, न ही अस्पताल था, न ही स्कूल था और न ही मेडिकल कॉलेज थे.

श्री लखन सिंह घनघोरियाउस समय मुख्य सचिव जी आपके बड़े भैय्या थे.

डॉ.सीतासरन शर्माअध्यक्ष महोदय, लखन जी आप वरिष्ठ विधायक एवं मंत्री रहे हैं पिछले कार्यकाल में. अध्यक्ष महोदय, जब बजट आता है. उसका दो दृष्टियों से परीक्षण किया जाता है. एक दृष्टि तो डॉ.साहब बहुत ही विद्वान हैं उनके साथ बहुत ही निकटता के साथ मैंने काम किया है. मेरा ज्ञान उनके बराबर नहीं है. उन्होंने कहा कि जो एफआरबीएम एक्ट है उसका पालन नहीं हो रहा है. 3 प्रतिशत उसमें राजकोषीय घाटे की लिमिट है. सरकार ने उत्तर दिया है कि ऊर्जा की रिक्वायरमेंट भारत सरकार चाहती है. यदि उसको उस हिसाब से कर देंगे तो आधा प्रतिशत वह बढ़ा देंगे. तो यह 3.5 प्रतिशत हो जायेगी. इस तरह से इस राजकोषीय घाटे को सीमा में ले आयेंगे. दूसरी बात जो कि इस बजट की बड़ी विशेषता है. इस बजट में पूंजीगत व्यय 64 हजार करोड़ रूपये का है. बजट भाषण में भी माननीय वित्तमंत्री जी ने लिखा है कि सन् 2023-24 में 60 हजार करोड़ रूपये ऑल टाईम अधिकतम था. उससे अधिक का इस वर्ष का प्रस्तावित है. एक तो यह काम वित्तीय दृष्टि से किया जाता है. थोड़ी सी बात मैंने बतायी विस्तार से माननीय वित्तमंत्री जी बतायेंगे. अभी मेरे पीछे भी कई विद्वान साथी हमारे बैठे हैं, वह भी बतलाएंगे. यह तो अर्थशास्त्री परखते हैं कि वित्तीय प्रबंधन कैसा है ? पत्रकार एवं जनता क्या चाहते हैं उन पर आते हैं. पहले आते हैं आने वाली पीढ़ी की चिन्ता हम सब करते हैं. तो पहले आते हैं छात्रों पर जाऊंगा वहीं 2003-04 के पहले वाले पर पहले आप सुन लें उसके बाद ही जाऊंगा. आदरणीय उच्च शिक्षा मंत्री जी यहां पर बैठे हैं. उनके स्कूल शिक्षा मंत्री के कार्यकाल में माननीय शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में एक परिकल्पना थी सीएम राईज स्कूल की और सीएम राईज स्कूल का खाका उसी वक्त से डाला गया. इस वर्ष के बजट में 2 हजार 7 सौ 37 करोड़ रूपया सीएम राईज के लिये रखा गया है. 150 सीएम राईज 2024-25 में नवीन भवनों में शिफ्ट हो जाएंगे. लगभग 40 करोड़ रूपयों से बन रहा है. एक एक विधान सभा में 3-3, 4-4 बन रहे हैं. हमारा जिला छोटा है, वहीं 12-13 बन रहे हैं. आपके समय में क्या था एक उत्कृष्ट विद्यालय बमुश्किल से आपके कार्यकाल में घोषित किया गया था. जिले में एक विधान सभा में एक उनकी बिल्डिंग नहीं, पुरानी बिल्डिंगों में लगाओ. शिक्षकों की व्यवस्था नहीं करेंगे, जो पढ़ा रहे हैं वही पढ़ाएंगे ? आपने एक उत्कृष्ट विद्यालय को बने बनाये को चलाया.

कमलेश्वर डोडियारआप कहां से पढ़कर के आये ?

डॉ.सीतासरन शर्मा-- अध्यक्ष महोदय, हम तो प्रायवेट स्कूल से पढ़कर के आये हैं. क्योंकि जब हम पढ़ते थे तो सरकारी स्कूल ही नहीं थे. आप हमसे कहलवाओं मत.

श्री दिनेश गुर्जरप्रायवेट स्कूल कहां से आ गये थे.

डॉ.सीतासरन शर्मा-- अध्यक्ष महोदय, 70 साल पहले प्रायवेट स्कूल बी.आर.मेडिकल कॉलेज आपके बनाये हुए में पढ़े हैं हम.

श्री दिनेश गुर्जरइतने शासकीय स्कूल पहले भी रहे हैं.

एक माननीय सदस्यडॉ.साहब बहुत बढ़िया बोल रहे हैं आप सुनो.

अध्यक्ष महोदयकृपया दिनेश जी आप बैठें.

श्री दिनेश गुर्जरसारे स्कूल पहले नहीं थे, अस्पताल पहले नहीं थे. पहले भी हुआ करते थे.

अध्यक्ष महोदय दिनेश जी आप कृपया टोका-टाकी मत करें.

श्री दिनेश गुर्जर - डॉ साहब गलत बोल रहे, सरकारी स्‍कूल नहीं थे, इतने शासकीय स्‍कूल पहले भी रहे है. डाक्‍टर साहब गलत बोलेंगे सुनेंगे थोड़ी हम, क्‍या पहले अस्‍पताल नहीं थे, स्‍कूल नहीं थे क्‍या.

अध्‍यक्ष महोदय - दिनेश जी कृपया टोकाटाकी न करें.

डॉ. सीतासरन शर्मा - मेरे पास सब बात के उत्‍तर है, बात निकलेगी तो दूर तक जाएगी.

श्री दिनेश गुर्जर - आप तो कर लो उजागर और नर्मदा की कसम खाकर बोलो की पहले मध्‍यप्रदेश में शासकीय विद्यालय नहीं हुआ करते थे.

अध्‍यक्ष महोदय - दिनेश जी कृपया टोकाटाकी न करें, बैठ जाए

डॉ. सीतासरन शर्मा - अध्‍यक्ष जी, बड़ी तकलीफ हैं इन्‍हें, आप काम क्‍यों कर रहे हैं, काम कर रहे हैं, तो बता क्‍यों रहे हैं. हम नहीं सुनेंगे, सही बात नहीं सुनेंगे. बड़ी मुश्किल है, आपके यहां भी खुलेंगे सीएम राइज स्‍कूल, बच्‍चे तो हमारे है, इस प्रदेश के हैं, आपके समान भेदभाव नहीं करते.

श्री दिनेश गुर्जर - कई गांवों में विद्यालय नहीं है, जो शालाएं बंद हो गई हैं, मध्‍यप्रदेश सरकार ने उनके विद्यालय संचालन करने की कोई व्‍ययवस्‍था नहीं की है.

डॉ. सीतासरन शर्मा - अध्‍यक्ष महोदय, 2003 में तत्‍कालीन वित्‍त मंत्री जी का भाषण पढ़ा रहा था, गुरुजी को ये ढाई ढाई सौ रुपए देते थे, बात करते हैं, मत करो दिनेश जी, पूरी पोलपट्टी खुल जाएगी.

श्री यादवेन्‍द्र सिंह - शर्मा जी, जो दो दो सौ रुपए पाते थे, वे आज 75 से 80 हजार रुपए पा रहे हैं, वह आपने भर्ती नहीं करे हैं.

डॉ. सीतासरन शर्मा - अध्‍यक्ष जी, बड़ी खुशी है, ज्‍यादा नहीं बोलता इन्‍होंने एक कानून बनाया वह जो सुपर प्राइममिनिस्‍टर होते थí