मध्यप्रदेश विधान सभा
की
कार्यवाही
(अधिकृत विवरण)
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चतुर्दश विधान सभा दशम् सत्र
फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र
गुरुवार, दिनांक 3 मार्च, 2016
(13 फाल्गुन, शक संवत् 1937 )
[खण्ड- 10 ] [अंक- 8]
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मध्यप्रदेश विधान सभा
गुरुवार, दिनांक 3 मार्च, 2016
(13 फाल्गुन, शक संवत् 1937 )
विधान सभा पूर्वाह्न 10. 33 बजे समवेत हुई.
{ अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}
तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर.
प्रश्न संख्या-1 -(अनुपस्थित)
कटनी जिलांतर्गत फ्लेटों का निर्माण/विक्रय
2. ( *क्र. 3338 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता सदस्य द्वारा आयुक्त, नगर पालिका निगम कटनी से पत्र क्रमांक 2489, दिनांक 26.11.2015 से बिन्दु क्रमांक 1 से 8 तक की जानकारी चाही गई है? उक्त पत्र लिखने के बाद भी कार्यालयीन पत्र क्रमांक 2645 दिनांक 22.12.2015 लिखा गया है, किन्तु जानकारी नहीं दी गई है और न ही किसी प्रकार का उत्तर दिया गया? (ख) प्रश्नांश (क) यदि हाँ, तो उक्त जानकारी उपलब्ध कराने के साथ ही जानकारी न देने के आदी नगर निगम कटनी के उत्तरदायी अमले के विरूद्ध शासन क्या कार्यवाही करेगा? (ग) द्वारका सिटी कॉलोनाइजर द्वारा कटनी जिलान्तर्गत कितने फ्लेटों का निर्माण कर लिया है तथा उसमें से कितने विक्रय किये हैं, कितने फ्लेट निर्माण हेतु शेष हैं? आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति के कोटे के तहत किन-किन को भवन विक्रय किये गये हैं?
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। चाही गई जानकारी वृहद स्वरूप की थी, जिसे कार्यालयीन पत्र क्रमांक 6969/लो.नि.वि./2016 कटनी, दिनांक 12.02.16 के द्वारा माननीय विधायक को प्रेषित कर दी गई है। (ख) उत्तरांश ''क'' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) कॉलोनाईजर द्वारा 18 फ्लेट निर्माणाधीन हैं, विक्रय किये गये फ्लेटों की संख्या निरंक है, 82 फ्लेटों का निर्माण शेष है। आर्थिक रूप से कमजोर एवं निम्न वर्ग के व्यक्तियों के लिए आरक्षित भूखण्ड/भवनों का विक्रय नहीं किया गया है।
कुँवर सौरभ सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न कटनी नगर निगम के विषय में था. इसमें आवासीय सह व्यावसायिक योजना क्रमांक-3 के नाम से कार्य कराकर तत्कालीन महापौर और कमिश्नर ने एक ठेकेदार को अवैध लाभ पहुंचाया था. इसमें मेरा प्रश्न था, मेरे द्वारा एक जानकारी चाही गयी है जो आज दिनांक तक अप्राप्त है एवं वहां पर जो लोग रह रहे हैं. इस विषय में जो उत्तर आया है उससे मैं पूर्णत: असंतुष्ट हूँ.
अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न करें. इसमें लिखा है कि 12 फरवरी को आपको दे दी.
कुँवर सौरभ सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें यह लिखा गया है कि 12 फरवरी को हमको दे दी गयी है और इसमें (ग) में लिखा गया है, 18 फ्लैट निर्माणाधीन हैं. विक्रय किये गये फ्लैटों की संख्या निरंक है जबकि हकीकत यह है कि अगर मौके पर दिखवा लिया जाए तो बिजली के कनेक्शन हैं ,लोग रह रहे हैं, बाहर चौकीदार लगे हुए हैं. पूरा का पूरा उत्तर ही असत्य है.
राज्य मंत्री,सामान्य प्रशासन(श्री लालसिंह आर्य)-- अध्यक्ष महोदय,माननीय सदस्य चाहते क्या हैं, यह बता दें?
कुँवर सौरभ सिंह-- अध्यक्ष जी, मैं यह चाह रहा हूँ कि संबंधित कमिश्वर को सस्पेंड करके जो वहां कार्य हुए हैं उसकी जांच करायी जाए और जिसने असत्य उत्तर दिया है उस पर कार्यवाही की जाए. अध्यक्ष जी, जो पूछा गया है वे बोल रहे हैं जानकारी दे दी. जानकारी दी नहीं है और उन्होंने यहां उल्लेख कर दिया है. वहां बता रहे हैं कि कोई नहीं रह रहा है. पूरी कालोनी बसी हुई है.गरीबों के लिए जो आवंटन किया जाना है वह नहीं किया गया. मेरा निवेदन यह है कि संबंधित कमिश्नर को सस्पेंड करके उसकी जांच करायी जाए. वहां लोग रह रहे हैं और ठेकेदार को नगर निगम का पैसा लगाकर लाभ दिया गया है, उन लोगों पर कार्यवाही की जाए.
श्री लालसिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य को मैं संतुष्ट करना चाहता हूँ, भवन अनुज्ञा से लेकर कलेक्टर के आदेश, शासन के आवंटन नियमों का पालन करते हुए हमने कालोनाईजर को अनुमति दी है और चूंकि सारी कार्यवाहियां हमने वैधानिक की हैं. मैं एक चीज और बताना चाहता हूँ, कोई भी ठेकेदार सरकारी लैंड पर अपना पैसा खर्च करके निर्माण नहीं करता है और वह सम्पत्ति अपने कब्जे में भी नहीं की. इसके बाद भी उसने नेहरु वार्ड के अंतर्गत बीएसएनएल रोड से एनएच-7 तक,द्वारका सिटी तक उसने सीमेंट कांक्रीट की रोड अपने पैसे से बनाकर दी.नियमों का पालन हुआ है इसलिए कार्यवाही करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है.
कुँवर सौरभ सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इन्होंने जवाब दिया है, जानकारी दी गयी है जबकि जानकारी नहीं दी गयी. ये कह रहे हैं कि वहां पर कोई नहीं रह रहा है, अभी निर्माणाधीन है. मौके पर जाकर जांच करवायें. वहां पर पूरी आबादी बसी हुई है.
अध्यक्ष महोदय-- आपका उत्तर आ गया.
श्री बाला बच्चन-- अध्यक्ष महोदय, उनका प्रश्न है और जो प्रश्न पूछने का आशय था, उससे संबंधित कोई उत्तर आया नहीं तो क्या आप जांच कराकर जैसे कि भ्रमित किया गया है उत्तर में, उन अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे.आदरणीय विधायक जी का कहना है कि पूरी कालोनी बस गयी है, रहने आ गये हैं. सरकार जवाब गलत दे रही है. इससे बड़ा असत्य क्या हो सकता है. थोड़ा आप इसको दिखवायें और जांच करवायें जिससे कि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके और आदरणीय विधायक जी को इसमें थोड़ा संरक्षण भी दें. प्रथम बार के विधायक हैं, प्रश्न अच्छा है.
श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे पास जानकारी है, 276 उनके भूखण्डों में से 176 भूखण्ड हैं,उनकी हमने लीज 2.1.2014 को हमने उसके निर्माण की अनुज्ञा प्रदान की है और आरक्षित जो हैं उनको भी अभी विक्रय नहीं किया गया है फिर भी माननीय सदस्य अगर यह चाहते हैं उसकी जांच करा लें तो मैं उसकी जांच करा लूंगा और दोषी कोई पाया जाएगा तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी.
कुँवर सौरभ सिंह-- अध्यक्ष जी, यह तो गोलमोल जवाब हो रहा है,आपका संरक्षण चाह रहा हूँ.
अध्यक्ष महोदय-- नेता जी ने जो कहा वह भी मान लिया, जांच कराने को तैयार हैं.
कुँवर सौरभ सिंह-- अध्यक्ष महोदय, वहां जवाब असत्य है, यह कैसे मालूम होगा. यह जांच के लिए कह रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय-- जांच से ही तो पता लगेगा कि जवाब असत्य है या नहीं.
कुँवर सौरभ सिंह-- अभी भी तो जो जवाब आया है वह गलत जवाब आया है.
प्रश्न संख्या 3 (अनुपस्थित)
प्रश्न संख्या 4 (अनुपस्थित)
प्रमुख अभियंता/मुख्य अभियंता के स्वीकृत पद
5. ( *क्र. 4076 ) श्री प्रदीप अग्रवाल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. शासन जल संसाधन विभाग भोपाल के अंतर्गत संरचना अनुसार प्रमुख अभियंता/मुख्य अभियंता/कार्यपालन यंत्री के कुल कितने पद स्वीकृत हैं तथा उनके विरूद्ध कितने पद भरे जाकर कार्यरत हैं? (ख) म.प्र. शासन जल संसाधन विभाग में मुख्य अभियंता के स्वीकृत पदों के विरूद्ध संरचना अनुसार कितने पदों पर नियमित रूप से अधिकारी कार्यरत हैं तथा कितने अन्य प्रकार से संभावित किये गये हैं? उक्त अधिकारियों में कितने सेवा निवृत्त होने के पश्चात् भी अन्य प्रकार के संयोजन से कार्यरत हैं? (ग) प्रश्नांश (ख) उल्लेखित पदस्थापना के कारण अन्य कनिष्ठ अधिकारियों की वरीयता एवं पदोन्नति प्रभावित हो रही है? यदि हाँ, तो क्यों? (घ) क्या विभाग में पदस्थ अधिकारियों को एक ही नीति से वरीयता एवं पदोन्नति प्रदान की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक, यदि नहीं, तो क्यों?
जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) विभाग के अंतर्गत संरचना अनुसार प्रमुख अभियंता 01, मुख्य अभियंता 13 एवं कार्यपालन यंत्री के 204 पद स्वीकृत हैं। इन स्वीकृत पदों के विरूद्ध 01 प्रमुख अभियंता, 12 मुख्य अभियंता, 183 कार्यपालन यंत्री कार्यरत हैं। (ख) मुख्य अभियंता के स्वीकृत पदों में से एक पद पर अधीक्षण यंत्री को मुख्य अभियंता का प्रभार दिया गया है। सेवानिवृत्ति पश्चात कोई मुख्य अभियंता संविदा पर नियुक्त नहीं किया गया है। सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, श्री एस.के. खरे की विशेषज्ञ सेवाएं आवश्यकतानुसार वृहद बांध निर्माण के लिए सलाहकार के रूप में लेने की व्यवस्था की गई है। पूर्णकालिक नियोजन नहीं है। (ग) एवं (घ) जी नहीं। पदों का रिक्त होना और रिक्त पदों के लिए पदोन्नति की जाना एक सतत् प्रक्रिया है। मध्यप्रदेश जल संसाधन अभियांत्रिकी तथा भौमिकी सेवा (राजपत्रित) भर्ती नियम, 1968 के तहत सीधी भर्ती एवं पदोन्नति करने की सुस्पष्ट व्यवस्था है।
श्री प्रदीप अग्रवाल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का जो जवाब आया है वह गलत है इसमें मुख्य अभियंता का एक पद बताया गया है , वह गलत है जबकि मुख्य अभियंता के तीन पद स्वीकृत हैं . मेरे पास इसकी कॉपी भी है और मैं चाहूं तो उसको पटल पर रख सकता हूं.
अध्यक्ष महोदय--- प्रमुख अभियंता का 1 पद है और मुख्य अभियंता के 13 पद स्वीकृत हैं.
श्री प्रदीप अग्रवाल-- मुख्य अभियंता के 3 पद हैं जबकि उत्तर में 1 पद बताया गया है वर्ष 2015 में जो मुख्य अभियंता से प्रमुख अभियंता के पदों के लिए डीपीसी की बैठक हुई थी उसमें भी 2 पद बताये गये थे.
श्री जयंत मलैया--- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो मैंने अपने उत्तर में बताया है यह बिल्कुल सही है और जल संसाधन विभाग में प्रमुख अभियंता का 1 ही पद है और मुख्य अभियंता के 12 पदों में से 11 पद भरे हैं और 1 प्रभारी मुख्य अभियंता ग्वालियर में हैं .
श्री प्रदीप अग्रवाल--- माननीय अध्यक्ष महोदय, मुख्य अभियंता जैसे महत्वपूर्ण पद पर संविदा वाले व्यक्ति को पिछले पांच वर्ष से लगातार बिठाये हुए हैं .
श्री जयंत मलैया--- माननीय अध्यक्ष महोदय, पहले तो माननीय सदस्य क्लियर कर लें . प्रमुख अभियंता अलग होता है और मुख्य अभियंता अलग होता है वह कहना क्या कहना चाहते हैं.
अध्यक्ष महोदय-- वह प्रमुख अभियन्ता है, मुख्य नहीं.
श्री प्रदीप अग्रवाल-- मैं प्रमुख अभियन्ता की बात कर रहा हूँ.
श्री जयन्त मलैया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है कि प्रमुख अभियन्ता के पद पर पिछली 4 बार से हमने 1-1 वर्ष की संविदा नियुक्ति श्री चौबे को दी थी.
श्री प्रदीप अग्रवाल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत जो भर्ती नियम बनाए गए हैं उसका उल्लंघन कर सर्क्यूलर के आधार पर संविदा नियुक्ति क्यों की गई? इसके लिए संविधान क्यों नहीं बनाया गया मतलब और भी बहुत सारे लोग हैं जो कि इंतजार में हैं लेकिन उसके बाद भी इन सब नियमों को शिथिल करते हुए संविदा पर बैठे व्यक्ति को 4-4 साल से हम लगातार बैठाए हुए हैं जबकि उसके खिलाफ केस भी चले हैं, उसको दंडित भी किया गया है. (शेम-शेम की आवाज)
अध्यक्ष महोदय-- शासन का निर्णय है...मंत्री जी, आप उत्तर दे रहे हों तो दे दीजिए.
श्री जयन्त मलैया-- अध्यक्ष महोदय, जहाँ तक संविदा नियुक्ति का प्रश्न है मैंने अपने उत्तर में ही दिया है कि यह हमारे मध्यप्रदेश जल संसाधन अभियांत्रिकी तथा भौतिकी सेवा राजपत्रित भर्ती नियम 1968 के तहत सीधी भर्ती एवं पदोन्नति करने की सुस्पष्ट व्यवस्था है.
परियोजनाओं का निर्माण
6. ( *क्र. 1847 ) श्री मुकेश नायक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान राज्यों के साथ मध्यप्रदेश नर्मदा घाटी की जिन संयुक्त बांध, सिंचाई और जल विद्युत परियोजनाओं में हिस्सेदारी है, उनमें मध्यप्रदेश अपने हिस्से की धनराशि समय पर नहीं चुका सका है? (ख) पिछले दस वर्षों में संयुक्त क्षेत्र की नर्मदा घाटी सिंचाई और जल विद्युत परियोजनाओं में मध्यप्रदेश ने अपने हिस्से की कितनी धनराशि का भुगतान कर दिया है और फरवरी 2016 की स्थिति के अनुसार कुल कितनी धनराशि बकाया है? (ग) संयुक्त क्षेत्र की गरूड़ेश्वर जल विद्युत परियोजना में मध्यप्रदेश को कितनी धनराशि चुकानी थी और कितनी धनराशि चुकायी गयी? (घ) क्या गरूड़ेश्वर परियोजना में मध्यप्रदेश 240 करोड़ रूपयों की राशि चुका नहीं पाया, इसलिये धन के बदले गुजरात ने पूरी परियोजना पर अपना अधिकार कर लिया है? हाँ या न, दोनों स्थिति में फरवरी 2016 के अनुसार इस परियोजना की स्थिति क्या है और इससे मध्यप्रदेश को क्या लाभ है?
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। (ख) पिछले 10 वर्षों अर्थात 2005-06 से 2015-16 में मध्यप्रदेश ने अपने हिस्से के कुल रूपये 383.76 करोड़ का भुगतान गुजरात राज्य को किया है। इसके साथ-साथ सरदार सरोवर परियोजना के परिचालन एवं संधारण व्यय हेतु रूपये 75.9839 करोड़ का भुगतान भी किया गया है। इस प्रकार कुल राशि रूपये 459.7439 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। माह फरवरी तथा माह मार्च में इंदिरा सागर परियोजना यूनिट 01 तथा सरदार सरोवर परियोजना के अंतर्गत पुनर्वास कार्यों में हुये व्यय के समायोजन एवं डूब प्रभावित शासकीय राजस्व एवं वन भूमि की लागत तय होने के पश्चात ही लेखा अंतिम होगा। (ग) एवं (घ) गरूड़ेश्वर वीयर से मध्यप्रदेश को लाभ-हानि का तुलनात्मक अध्ययन किया जा रहा है और तदनुसार ही इसमें सहभागिता पर निर्णय लिया जाएगा। अत: शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
श्री मुकेश नायक-- माननीय अध्यक्ष महोदय, नर्मदा घाटी की संयुक्त सिंचाई और जल विद्युत परियोजनाओं में मध्यप्रदेश सरकार की गुजरात सरकार के लिए कितनी देनदारियाँ बनती हैं, मैंने यह प्रश्न माननीय मंत्री जी से पूछा है. मैं यह जानना चाहता हूँ कि क्या यह सही है कि गुजरात के सिंचाई मंत्री ने अनेकों बार पत्र लिखा है कि संयुक्त परियोजनाओं में मध्यप्रदेश के हिस्से के साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये बकाया हैं और गरूड़ेश्वर पन विद्युत परियोजना में पहले ही 245 करोड़ रुपये नहीं देने के कारण मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी में कमी आई है. मंत्री जी बताने की कृपा करें.
राज्य मंत्री, नर्मदा घाटी विकास(श्री लाल सिंह आर्य)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,माननीय सदस्य का यह कहना सही नहीं है कि तीन हजार करोड़ से अधिक की देनदारियाँ मध्यप्रदेश सरकार पर है. मैं आपको आँकड़ा बता देता हूँ. अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश की लेनदारियाँ ज्यादा हैं. देनदारियाँ हमारी बहुत कम हैं इसलिए गुजरात राज्य से अनुमानित 5883.66 करोड़ की लेनदारियाँ हैं, मतलब हमको लेना है और गुजरात राज्य को जो देनदारी है वह केवल 973.03 करोड़ है. बल्कि कुल मिलाकर हमको 4910.63 करोड़ की लेनदारियाँ हैं, हमको लेना है, हमको देना नहीं है. अध्यक्ष महोदय, जहाँ तक गरूड़ेश्वर परियोजना की बात है तो अभी इस पर बातचीत चल रही है. अभी हमारी कोई सहमति नहीं है और जब तक हम उसमें देखेंगे कि हमारे राज्य का लाभ क्या है. तब तक हम उसमें, अभी तक कोई निर्णय उसमें चूँकि हुआ नहीं है इसलिए इसमें कुछ भी कहना उचित नहीं होगा.
श्री मुकेश नायक-- अध्यक्ष महोदय, मेरी जानकारी में यह है कि गुजरात के सिंचाई मंत्री ने गुजरात की विधान सभा में अपने भाषण में यह कहा कि संयुक्त क्षेत्र में चल रही जो सिंचाई परियोजनाएँ हैं, उनमें साढ़े तीन हजार करोड़ मध्यप्रदेश सरकार से लेना है और इसके रिमांइडर्स भी मध्यप्रदेश सरकार को पत्र लिख कर उन्होंने दिए हैं. क्या यह जानकारी सही है कि सिंचाई मंत्री ने कोई पत्र मध्यप्रदेश शासन और सिंचाई विभाग को लिखा है?
श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, उनकी विधान सभा में उन्होंने क्या कहा यह मैं नहीं कह सकता. लेकिन हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है.
श्री मुकेश नायक-- अध्यक्ष महोदय, आपके पास गुजरात सरकार का कोई पत्र नहीं आया?
श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, किसी प्रकार की लेनदारियों से संबंधित कोई पत्र नहीं आया. जहाँ तक पत्राचार, चूँकि संयुक्त परियोजनाएँ बहुत सारी रहती हैं, लेकिन लेनदारियों से संबंधित कोई पत्र हमारे पास नहीं आया.
श्री मुकेश नायक-- आप यह घुमा-फिरा कर के नहीं, स्पष्ट बताएँ, कोई पत्र आया कि नहीं?
श्री लाल सिंह आर्य-- मैं कह तो रहा हूँ.
श्री मुकेश नायक-- नहीं आया?
श्री लाल सिंह आर्य-- नहीं.
अध्यक्ष महोदय-- लेनदारियों से संबंधित नहीं आया.
मांझी जाति को दतिया जिले में अनुसूचित जनजाति का दर्जा
7. ( *क्र. 2079 ) श्रीमती शकुन्तला खटीक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ता.प्र.संख्या 06 (क्रमांक 418) दिनांक 07 दिसम्बर, 2015 के भाग (क) में करैरा जिला शिवपुरी की गैस एजेंसी अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में स्वीकृत होने तथा भाग (ग) के उत्तर में नायब तहसीलदार दतिया द्वारा श्रीमती नीति पत्नि श्री अनिल कुमार निवासी ग्राम एरई जिला दतिया को अनुसूचित जनजाति श्रेणी के प्रमाण पत्र जारी किए जाने की जानकारी दी थी? यदि हाँ, तो जाति प्रमाण पत्र की प्रति उपलब्ध करावें? (ख) क्या अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र नायब तहसीलदार स्तर के अधिकारी को जारी करने के अधिकार हैं? (ग) यदि मांझी जाति को दतिया जिले में अनुसूचित जनजाति माना गया है, तो क्या मांझी जाति के अन्य परिवारों को भी अनुसूचित जनजाति का लाभ दिया जावेगा?
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। जाति प्रमाण पत्र की प्रति संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को जाति प्रमाण पत्र जारी किये जाने हेतु ज्ञापन दिनांक 08.1.1962 द्वारा राजपत्रित अधिकारी, तहसीलदार या फारेस्ट रेंजर द्वारा जारी प्रमाण पत्र स्वीकार करने के निर्देश थे। परिपत्र दिनांक 10 अप्रैल, 1975 द्वारा माननीय मंत्रीगणों द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र स्वीकार किया जाने के निर्देश जारी किए गए। परिपत्र दिनांक 26.7.1984 द्वारा उपरोक्त के अतिरिक्त नायब तहसीलदारों को भी जिन्हें भू-राजस्व संहिता के अंतर्गत तहसीलदारों के अधिकारों से वेष्टित किया गया हो, को भी जाति प्रमाण पत्र जारी किये जाने हेतु अधिकृत किया गया व परिपत्र दिनांक 26 मई, 1987 द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी करने हेतु केवल 1. कलेक्टर/एडीशनल कलेक्टर/डिप्टी कलेक्टर/एस.डी.ओ./ सबडिवीज़नल मजिस्ट्रेट/सिटी मजिस्ट्रेट। 2. तहसीलदार 3. नायब तहसीलदार 4. परियोजना प्रशासक/अधिकारी (वृहद्ध/मध्यम/लघु) एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना अधिकृत किया गया। विभागीय परिपत्र दिनांक 01.8.1996 की कंडिका 1 अनुसार अनुसूचित जाति, जनजाति के सदस्यों को स्थायी प्रमाण पत्र जिलाध्यक्ष/अपर जिलाध्यक्ष/उप जिलाध्यक्ष/अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को अधिकृत किया गया है। वर्तमान में विभागीय परिपत्र दिनांक 13.1.2014 द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी करने हेतु अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को पदाभिहित अधिकारी घोषित किया गया है। (ग) भारत सरकार द्वारा दिनांक 19.11.2000 को संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश 1950 में किए गए संशोधन के माध्यम से मध्यप्रदेश के लिये जारी अनुसूचित जनजातियों की सूची में अनुक्रमांक 29 पर मांझी जाति को अधिसूचित किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
श्रीमती शकुंतला खटीक-- माननीय अध्यक्ष महोदय, दतिया जिले में मांझी जाति को जनजाति का जाति प्रमाण-पत्र देकर करेरा, जिला शिवपुरी में जनजाति कोटे की गैस एजेन्सी दे दी. श्रीमती नीति मांझी के जाति प्रमाण-पत्र की दिनाँक परिशिष्ट 2 में 16.4.95 पढ़ने में आ रही है. जबकि भारत सरकार के परिपत्र दिनाँक 16.11.2000 के द्वारा मांझी जाति को जनजाति की श्रेणी में माना गया था.
अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, वे प्रमाण-पत्र के बारे में जानना चाहती हैं.
श्री लालसिंह आर्य--केन्द्र सरकार की जो अनुसूची है जो प्रदेश को दी जाती है उसमें 29 नंबर पर मांझी जाति का उल्लेख है और उस समय नायब तहसीलदार को जाति प्रमाण-पत्र बनाने के अधिकार थे. इसके अलावा कोई और जानकारी चाहती हों तो बता दें.
श्रीमती शकुन्तला खटीक--माननीय मंत्रीजी यह जाति प्रमाण-पत्र फर्जी है मांझी जाति के स्थान पर यह गैस एजेंसी जनजाति के व्यक्ति को दी जाना थी. गैस एजेंसी उचित व्यक्ति को नहीं दी गई है.
अध्यक्ष महोदय--वैसे तो उत्तर स्पष्ट है.
श्रीमती शकुन्तला खटीक--माननीय अध्यक्ष महोदय, फर्जी प्रमाण-पत्र है हमारे आदिवासी भाइयों को लाभ नहीं मिल पा रहा है अधिकारी इसमें घोटाला कर रहे हैं मैं मेरे विधान सभा क्षेत्र में ऐसा नहीं होने दूंगी.
श्री मुकेश नायक--माननीय अध्यक्ष महोदय, विधायिका जी ने मंत्री जी से स्पष्ट पूछा है कि अनुसूचित जाति और जनजाति के व्यावसायिक अधिकार का किसी ने गलत प्रमाण-पत्र देकर दुरुपयोग कर लिया है अब इसमें जांच करा लें फर्जी प्रमाण-पत्र बनाया है तो उन पर कार्यवाही करने का हाउस में एनाउंसमेंट करें अगर विधायिका जी की जानकारी सही है तो.
श्री लाल सिंह आर्य--मैं माननीय सदस्य की भावना से अवगत हूं यदि उनके पास कोई दस्तावेज हों तो मुझे जानकारी दे दें मैं उसकी जांच करा लूंगा.
श्री बाला बच्चन--माननीय अध्यक्ष महोदय मेरा माननीय मंत्रीजी से व्यवस्था का प्रश्न है.
अध्यक्ष महोदय--प्रश्नकाल में व्यवस्था नहीं होती है आप वैसे ही पूछ लीजिये.
श्री बाला बच्चन--माननीय विधायिका जी ने जो प्रश्न लगाया है वह एथेंटिक ही है जबलपुर से चलकर यहां तक बात आ चुकी है. क्या आप इसमें फर्जी अनुसूचित जाति या जनजाति का प्रमाण-पत्र लेने वालों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे जिससे कि अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों का हक न मारा जाए और उसकी गैस एजेंसी भी निरस्त हो व वह भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति करने का प्रयास न करे साथ ही वह व्यक्ति ही नहीं मध्यप्रदेश में जो इस तरह के काम हो रहे हैं उस पर रोक लग सके.
अध्यक्ष महोदय--असल में प्रश्न इस बात का नहीं है, विषय यह है कि मांझी जाति को जनजाति का प्रमाण-पत्र दिया और इसके उत्तर में लिखा है कि अनुक्रमांक 29 पर वह अनुसूचित जनजाति दी गई है. यह प्रश्न है कि क्या इस जाति को यह प्रमाण-पत्र दिया जा सकता है.
डॉ. गोविन्द सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, जो पानी भरते थे कहार जाति के लोग उनको यह प्रमाण-पत्र मिल गये हैं. मांझी और कहार लोगों ने अनुसूचित जाति के नाम पर फर्जी प्रमाण-पत्र मिल गए हैं.
श्री बाला बच्चन--क्या यह अनुसूचित जाति, जनजाति में आते हैं. प्रश्न इसीलिए लगाया गया है कि वह व्यक्ति अनुसूचित जनजाति में नहीं आता है.
श्री लाल सिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय प्रभारी नेता प्रतिपक्ष को संतुष्ट करना चाहता हूँ वे भी माननीय मंत्री रहे हैं.
डॉ. गोविन्द सिंह--ढीमर और कहार जाति के लोगों ने फर्जी प्रमाण-पत्र बना लिए हैं आप तो जांच करा लें जिसको मिला है वह कौन है कहार है या ढीमर है, हमारी जानकारी में वह ढीमर है और उसने गलत प्रमाण-पत्र ले लिया है.
अध्यक्ष महोदय--सवाल ढीमर और कहार का नहीं है आप उत्तर सुन लीजिये.
श्री लाल सिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय गोविन्द सिंह जी, माननीय बाला बच्चन जी मंत्री रहे हैं. शासन में प्रक्रिया है कि अनुसूचित जाति, जनजाति का कोई फर्जी प्रमाण-पत्र बनाकर लाभ लेता है तो इसकी जांच के लिए अनुसूचित जाति, जनजाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में एक एजेंसी नियुक्त की गई है वह इसकी जांच करती है और उस जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो शासन उसके खिलाफ कार्यवाही करता है और ऐसी कार्यवाहियां मध्यप्रदेश में हुई हैं. उस एजेंसी को आप लिखकर देंगे तो हम उससे जांच करा लेंगे.
अध्यक्ष महोदय--ठीक है.
प्रश्न संख्या- 08 (अनुपस्थित)
छतरपुर जिले में रेत खदानों से खनन/परिवहन
9. ( *क्र. 4121 ) श्रीमती रेखा यादव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर जिले में गत दो वर्षों में किस-किस रेत खदान से कितनी रेत का खनन एवं परिवहन किया गया है, कौन-कौन सी रेत खदान किन कारणों से किस दिनांक से बंद है? (ख) रेत की खदानों के बंद होने के कारण रेत उपलब्ध करवाए जाने की विभाग ने क्या वैकल्पिक व्यवस्था की है? यदि नहीं, की गई तो कारण बतावें? (ग) गत दो वर्षों में जिले में रेत के अवैध खनन एवं अवैध परिवहन के कितने प्रकरण बनाए जाकर कितनी रेत जप्त की गई, कितना अर्थदण्ड वसूल किया गया। (घ) रेत की खदान प्रारंभ किए जाने के संबंध में क्या कार्यवाही कब तक की जावेगी?
ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) :
(ख) आसपास के जिलों से वैधानिक रूप से स्वीकृत होकर संचालित रेत खदानों से रेत क्रय करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अत: वैकल्पिक व्यवस्था किये जाने जैसी स्थिति नहीं है। (ग) गत दो वर्षों में रेत के अवैध खनन के 10 प्रकरण मात्रा 34706 घनमीटर के बनाये जाकर रूपए 143943560/- अर्थदण्ड प्रस्तावित कर प्रकरण संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों के न्यायालयों में निराकरण हेतु भेजे गए हैं एवं अवैध भण्डारण के 45 प्रकरण रेत मात्रा 19408 घनमीटर जप्त कर प्रकरणों में प्रस्तावित अर्थदण्ड रूपए 45420300/- किया जाकर प्रकरण संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों के न्यायालय में भेजे गये हैं एवं 1 प्रकरण में रूपए 2,55,000/- अर्थदण्ड राशि वसूल की गई है। अवैध परिवहन के 573 प्रकरण बनाए जाकर रूपए 13287910/- अर्थदण्ड वसूल किया गया है। (घ) रेत की खदानें जो ई-आक्शन से नीलाम हुईं हैं, उन बोलीदारों को सैद्धांतिक अनुमति जारी कर 'सिया' से पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने हेतु निर्देशित किया गया है। 'सिया' से पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त होने के उपरांत नियमानुसार रेत खदानें प्रारंभ की जावेंगी।
श्रीमती रेखा यादव :- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहते हुए माननीय मंत्री जी से जानना चाहती हूं कि जो आपने मेरे प्रश्न के '' ख'' में उसमें आपने बताया है कि रेत जो जिले में आयी हुई है वह आसपास के जिलों से लायी गयी है . मैं यह जानना चाहती हूं कि वह आसपास के जिले कौन से हैं, जिनकी वैधानिक रूप से स्वीकृति मिली है और वहां से रेत क्रय कर सकते हैं.
श्री राजेन्द्र शुक्ल :- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो स्वीकृत खदाने हैं उनकी सूची माननीय सदस्या को उपलब्ध करा देंगे. वैसे टीकमगढ़ जिले में 7 रेत की खदाने हैं और पन्ना जिले में पांच रेत की खदाने संचालित हैं तो यहां से भी लोगों को रेत उपलब्ध हो जाती है.
श्रीमती रेखा यादव :- माननीय अध्यक्ष महोदय, ग्रीन ट्रीब्यूनल के उच्चतम न्यायालय में 2014 से रेत की खदाने बंद पड़ी हुई है, तो जो रेत खदानें उनकी दी गयी है तो वह किस हिसाब उनको खदानें दी गयी है.
श्री राजेन्द्र शुक्ल :-माननीय अध्यक्ष्ा महोदय, नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल ने सिया की परमीशन के उपरान्त ही रेत के उत्खनन के निर्देश उन्होंने दिये थे. जिन खदानों में उन निर्देशों का पालन हो गया उन खदानों को संचालित करने में कोई परेशानी नहीं है.
श्रीमती रेखा यादव :- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने प्रश्न ''ग'' में पूछा है कि मध्यप्रदेश गौड़ खनिज नियम 1996 के नियम 53 के अवैध खनन के प्रकरण को अनुविभागीय अधिकारी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है. यह माननीय मंत्री महोदय के जवाब में आया है, लेकिन यह संशोधन किस दिनांक में और कब किया गया है.
श्री राजेन्द्र शुक्ल :- अध्यक्ष महोदय, अवैध उत्खनन के प्रकरण जो एस डी एम न्यायालय में प्रकरण बनाकर वहां पर प्रस्तुत किये जाते हैं वहां पर जो निर्णय होता है उसके आधार पर वसूली की कार्यवाही होती है.
अशोकनगर जिलांतर्गत रेत खदानों की नीलामी
10. ( *क्र. 2871 ) श्री गोपीलाल जाटव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं वर्ष 2015-16 में अशोकनगर जिले में कितनी लीजें दी गईं और कितनी नीलामी बोली में गौण खनिज नीलाम की गई? (ख) क्या नीलाम की गई रेत खदानों का एग्रीमेंट हुआ है? यदि नहीं, तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्यवाही की जावेगी? (ग) उक्त नीलाम की गई रेत खदानों पर मशीन लगाकर सिंध नदी और बेतवा पर अवैध उत्खनन कब तक रोका जावेगा?
ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) :
(ख) जी
नहीं। प्रश्नांश
'क' में
दिये उत्तर
अनुसार वर्ष 2013-14
एवं वर्ष 2015-16
में नीलाम की
गई रेत की
खदानों का
अनुबंध नहीं
हुआ है। इसका
कारण संलग्न
परिशिष्ट में
दर्शाया गया
है। अत: शेष
प्रश्न
उपस्थित नहीं
होता।
(ग) वर्ष
2013-14
में नीलाम की
गई खदानें
बेतवा नदी पर
नहीं है, बल्कि
सहायक नदियों
पर हैं। उक्त
नदियों में
कोई अवैध उत्खनन
का प्रकरण
नहीं पाया
गया। वर्ष 2015-16
में नीलाम की
गई 05 रेत
खदानों में से
नीलाम खदान
ग्राम सोबत के
समीप सिंध नदी
से लगे ग्राम
सुनेरा में
रेत निकालने
पर अवैध उत्खनन
का प्रकरण
अनुविभागीय
अधिकारी
(राजस्व)
अशोक नगर
द्वारा बनाया
गया है, जिसे
कलेक्टर न्यायालय
में निराकरण
हेतु प्रस्तुत
किया गया है।
शेष नीलाम
खदानों पर
निगरानी रखी
जा रही है।
बेतवा नदी पर
कोई रेत खदान
वर्तमान में
नीलाम नहीं की
गई है।
श्री गोपालाल जाटव :- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अपने प्रश्न के जवाब से संतुष्ट हूं. इसके लिये मैं मंत्री जी को संतुष्ट देता हूं.
मांडवी एवं खोडाना तालाब कार्य योजना की स्वीकृति
11. ( *क्र. 3509 ) डॉ. राजेन्द्र पाण्डेय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विगत वर्षों में जावरा विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत मांडवी एवं खोडाना तालाब कार्य योजनाएं क्षेत्र सिंचित रकबा बढ़ाए जाने हेतु एवं जल संकट की गंभीरता को दृष्टिगत रख बनाई गई थी? (ख) यदि हाँ, तो क्या मांडवी एवं खोडाना तालाब कार्य योजनाएं शासन/विभागीय संपूर्ण सर्वे एवं नियमानुसार कार्यवाहियों को पूर्ण कर दोनो योजनाओं को स्वीकृति दी जाकर प्रारंभ किया जाना था? क्या कारण रहे कि ये प्रारंभ नहीं हुई?
जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। माण्डवी तालाब, जिला रतलाम की प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 27.06.2007 को रू. 111.84 लाख की एवं खोडाना परियोजना जिला मंदसौर की प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 07.08.2007 को रू. 819.18 लाख की प्रदान की गई थी। खोडाना परियोजना एक निम्मजित तालाब है, जिसका मूल उद्देश्य भू-जल स्तर को बढ़ाना होकर वर्षा ऋतु उपरांत तालाब खाली कर तालाब के तल में कृषि की जाना है। खोडाना परियोजना की प्रति हेक्टेयर लागत निर्धारित मापदण्ड से अधिक हो गई थी। अत: परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 16.06.2011 को निरस्त की गई। माण्डवी परियोजना के डूब क्षेत्र में नदी घाटी योजना के अंतर्गत ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा निर्मित एक परकोलेशन तालाब आने से परियोजना तकनीकी मापदण्ड पर साध्य नहीं रही। अत: शेष प्रश्न उत्पन्न नहीं होता है।
डॉ राजेन्द्र पाण्डेय:- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहूंगा, मेरे जावरा विधान सभा क्षेत्र का जल स्तर लगभग 1000 से 1200 फीट नीचे जा चुका है और वह डार्क एरिया भी घोषित हो चुका है. दो योजनाएं स्वीकृत हुई थी, मांडवी एवं खोडाना तालाब . मांडवा तालाब की प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 27.6.2007 को 111.84 लाख रूपये की एवं खोडाना तालाब प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 07.08.2007 केा रूपये 819.18 लाख रूपये की. मुझे प्रश्न के जवाब में बताया गया है कि दोनों असाध्य पाकर खारिज कर दी गयी है. मेरा माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि जब पूर्व इसके सर्वे की स्वीकृति दी गयी और सर्वे की राशि स्वीकृत की गयी और सर्वे का कार्य पूर्ण किया गया, वहां पर सम्पूर्ण सर्वे किया गया और उसके पश्चात उन योजनाओं की स्वीकृति दी जाकर के कार्य प्रारंभ करने की स्थिति भी आ गयी, ऐसी कौन सी स्थितियां आ जाती है, जिनके कारण यह असाध्य घोषित कर दी जाती है. यदि कर दी गयी है तो इसके बारे में आगे क्या किया जा सकता है क्योंकि वहां का जल स्तर काफी नीचे जा चुका है और वह डार्क जोन एरिया है. इसके बारे में विभाग क्या करने वाला है. ?
श्री जयंत मलैया :- माननीय अध्यक्ष महोदय, एक योजना तो इनके जावरा विधानसभा क्षेत्र की थी और दूसरी मंदसौर जिले की थी. इन दोनों परियोजनाओं की प्रशासकीय स्वीकृति दी गयी थी. परन्तु परियोजनाएं हमारे तकनीकी आधार के ऊपर और वित्तीय मापदण्डों पर साध्य नहीं थीं इसके कारण इसको निरस्त किया गया. जहां तक माण्डवी का प्रश्न उठता है जैसा माननीय सदस्य ने कहा है इसमें योजना जो असाध्य हुई है डूब क्षेत्र में ग्रामीण यांत्रिकी विभाग का एक परकोलेशन टेंक वहां पर बना हुआ है इसके साथ-साथ इससे जो जल उपलब्ध है यह बहुत कम उपलब्धता है सिंचाई करने की और तीसरी बात है इसकी प्रति हेक्टेयर लागत काफी ज्यादा आ रही है क्योंकि डूब क्षेत्र इसमें 30 प्रतिशत से अधिक है इसलिये इस योजना को अस्वीकृत कर दिया गया परन्तु मैं यहां माननीय सदस्य से निवेदन करना चाहता हूं कि आपके विधान सभा क्षेत्र में और पूरे मालवा अंचल में जल क्षेत्र अंडर ग्राउण्ड वाटर का स्तर काफी नीचे है तो इसके लिये हमने 3 बैराज की साध्यता के आदेश कर डीपीआर बनाने के निर्देश जावरा विधान सभा क्षेत्र के लिये दे दिये हैं. एक डोडियाना बैराज है, पाताखेड़ी बैराज है और हासनपालिया बैराज है.
डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय - माननीय अध्यक्ष महोदय, क्षमा चाहूंगा थोड़ा विनम्रतापूर्वक निवेदन करना चाहता हूं. मेरे विधान सभा क्षेत्र का परिसीमन हो चुका है. माननीय मंत्री जी को धन्यवाद कि कहीं पर भी बने बनना चाहिये लेकिन यह आलोट विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं जो कि बनने वाले हैं. मैं आग्रह करना चाहूंगा जो मैंने लिखित में दिये हुए हैं. चंबल और मलिनी नदी पर सिरीज आफ स्टाप डेम, एक कामलियाकुची घाट पर स्टाप डेम,मचून नदी पर स्टाप डेम, नांदलेटा के समीप मलेनी नदी पर स्टापडेम,गोठडा में स्टापडेम,आलमपुर-टिकरिया बैराज,मांडवी तालाब निर्माण,कुशलगढ़-अमेठी में स्टाप डेम कम रपटा,धतुरिया-बछोड़िया के मध्य स्टाप डेम कम रपटा,कोटडा तालाब योजना,बछोडिया स्टापडेम सह पुलिया, हतनारा बैराज,सुखेड़ा-सिलियाखेड़ी के मध्य स्टापडेम सह पुलिया,रानीगांव-ठिकरिया से मांडवी के मध्य स्टापडेम सहपुलिया,हसनपालिया बैराज और धामेडी स्टाप डेम. इनमें से यदि कुछ स्वीकृत करते हैं तो वह जावरा विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत आयेगा और वहां का जल स्तर बढ़कर वहां पर कृषकों को लाभ होगा और सिंचाई के संसाधनों में वृद्धि होगी. मेरा आग्रह स्वीकार करें.
श्री जयंत मलैया - आदरणीय पाण्डे जी से निवेदन है कि वे अपनी सूची मुझे दे दें मैं इसकी साध्यता का परीक्षण करा लेता हूं और जो भी साध्य होंगे उनमें से कुछ परियोजनाओं को लेने की कोशिश करेंगे.
डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय - माननीय अध्यक्ष महोदय,बहुत-बहुत धन्यवाद. एक सुझाव के रूप में निवेदन है चूंकि दोनों सर्वे हो गये थे सर्वे होने के बाद वह असाध्य होकर निरस्त किये गये उससे बहुत भ्रामक स्थिति क्षेत्र में बन गई है. आगामी समय में ऐसा न किया जाये.
श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - माननीय अध्यक्ष महोदय, राजेन्द्र पाण्डेय जी ने जो प्रश्न किया वह मेरे विधान सभा क्षेत्र से भी संबंधित है. खुड़ाना जो तालाब है वह निजी कृषकों की भूमि स्वामी का तालाब है उस तालाब को समय प र यदि नहीं खोला जाता है तो जो किसान 400-500 की संख्या में मुआवजा मांगते हैं. मैं माननीय मंत्री जीको धन्यवाद भी देना चाहूंगा कि तेरहवीं विधान सभा में जब मैं सदस्य था ध्यानाकर्षण आया था तो आपने ढाई करोड़ रुपये की राशि वहां के किसानों को मुआवजे की दी थी. यह समस्या हमेशा की बनी हुई है जब शासन,प्रशासन को उस भरे हुए पानी की आवश्यक्ता पड़ती है जल को ऊपर उठाने के नाम से जो निजमित तालाब हैं स्वयं के मालिक हैं उनको तालाब नहीं खोलने दिया जाता ताकि आसपास के कुंओं में पानी बना रहे जल स्तर बना रहे लेकिन उसके कारण किसानों को नुकसान होता है. जहां तक राजेन्द्र पाण्डेय जी ने कहा कि जो योजना 2007 में प्रशासकीय स्वीकृति के साथ स्वीकृत हुई थी साध्यता थी और 2011 में असाध्य हो गई है. मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि क्या यह परियोजना सूक्ष्म परियोजना जो प्रधानमंत्री जी की चल रही है उसके अंतर्गत यह डायवर्ट हो सकती है वृहद न होते हुए सूक्ष्म परियोजना दूसरे 31 नवंबर को वहां जल उपभोक्ता समितियां उसको खोलने के निर्देश देती है. अगर इस भरे पानी को दिसम्बर या जनवरी तक आसपास के किसानों को उनके स्वयं के संसाधनों से पानी को लिफ्ट करने की अनुमति दे दी जाये तो आसपास के किसान पानी को उपयोग कर लेंगे. अभी उस पानी को छोड़ना पड़ता है वह नदी,नालों में जनवरी-फरवरी में बह जाता है. मैं चाहूंगा माननीय मंत्री जी ऐसे निर्देश जारी कर दें या ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित कर दें कि उस पानी का उपयोग सांप भी मर जाये लाठी भी न टूटे. क्या ऐसी व्यवस्था माननीय मंत्री जी निर्देशित करेंगे कि आसपास के किसान उस पानी को अपने संसाधनों से लिफ्ट कर सकें ?
श्री जयंत मलैया - माननीय अध्यक्ष महोदय, जो आपने सिंचाई पद्धति से बात कही है इसमें भी यह परियोजना साध्य नहीं है. दो विकल्प आपने जो बताये एक तो एक माह बढ़ाने के लिये इसके लिये हमारे विभाग से कोई कार्यवाही नहीं होती है. एक जिला समिति होती है
उसके अध्यक्ष कलेक्टर होते हैं वह वहां की परिस्थिति तथा जल की व्यवस्था को देखते हुए उसका प्रबंध कर सकते हैं. दूसरी बात जहां तक आपने कहा कि निमजिद तालाब से पानी लेने की बात है उससे वहां की सिंचाई हो जाए, पानी नालों में बहकर के न जाए, यह अच्छी बात है कि तालाब के बाहर से कोई जितना भी पानी ले जाना चाहे उसकी मर्जी है वह ले जा सकता है.
प्रश्न संख्या 12
नगर पालिका परिषद, गुना द्वारा स्वीकृत प्रस्ताव
12. ( *क्र. 2773 ) श्री अजय सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या किसी नगर पालिका परिषद को राजपत्र में प्रकाशित वार्ड सीमा से बाहर स्थायी निर्माण कार्य करने का अधिकार है? (ख) क्या नगर पालिक परिषद को निजी स्वामित्व की भूमि, बिना अधिग्रहण किए नजूल भूमि पर बिना किसी पूर्व अनुमति के अन्य प्रयोजन से स्थायी निर्माण कार्य करने का अधिकार प्राप्त है? क्या ऐसे सभी निर्माण के पूर्व टाउन एवं कंट्री प्लानिंग की अनुमति आवश्यक है? (ग) क्या नगर पालिका परिषद, गुना के साधारण सम्मेलन दिनांक 24.02.15 के एजेन्डा क्र. 1 के बिन्दु क्र. 16 (व्यय लगभग 20 लाख) व बिन्दू क्र. 27 (व्यय लगभग 10 लाख), बिन्दु क्रं.32 (व्यय 30 लाख) तथा साधारण सम्मेलन के एजेन्डा-3 दिनांक 19.10.15 के बिन्दु क्र.5 (व्यय 40 लाख) एवं बिन्दु क्र. 13 (व्यय 35 लाख), बिन्दु क्र. 21 (व्यय 35 लाख) के प्रस्ताव के अलावा प्रेसिडेन्स इन काउन्सिल का एजेन्डा क्रं. 1 बैठक दिनांक 27.01.15 के बिन्दु क्रं. 1, 2 (व्यय 9 + 9 लाख), बैठक दिनांक 05.02.15 एजेन्डा क्रं. 2 के बिन्दु क्र. 42, 43 (व्यय 9.5 + 10 लाख), बैठक दिनांक 16.03.15 के एजेन्डा क्रं. 4 का बिन्दु क्र. 72 (व्यय 10 लाख), बैठक दिनांक 17.04.15 का एजेन्डा क्र. 5 के बिन्दु क्रमांक 102, 103 (व्यय 9 + 9 लाख) आदि के द्वारा स्वीकृत प्रस्तावों का कार्य पूर्ण हो चुका है? यदि हाँ, तो कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन एवं व्यय राशि का विवरण क्या है? (घ) प्रश्न बिन्दु (क), (ख), (ग) द्वारा यदि नगर पालिका अधिनियम 1961 के नियमों का उल्लंघन होना पाया जाता है तो क्या शासन जाँच करवाकर दोषियों पर कार्यवाही करेगा?
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। (ख) जी नहीं। उत्तरांश के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (घ) नगर पालिका अधिनियम 1961 के नियमों का उल्लंघन नहीं होने से शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।
श्री अजय सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न (क) एवं (ख) के उत्तर में माननीय मंत्री जी ने कहा कि जी नहीं. मैं मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि यह जानकारी उनकी असत्य है वहां पर नगर परिषद् गुना में तीन पंचायतों में नगरी निकाय का पैसा लगाया गया है, शहदपुरा, माधोपुर, हरिपुर क्या नगरीय निकाय की राशि किसी पंचायत क्षेत्र में लगायी जा सकती है.
अध्यक्ष महोदय--तभी तो उन्होंने मना कर दिया है.
श्री अजय सिंह--अध्यक्ष महोदय, तीन पंचायतें हैं शहदपुरा, माधोपुर, हरिपुर यदि इसमें राशि लगाई गई है तो उसकी आप जांच करवाएंगे ?
राज्यमंत्री, नगरीय प्रशासन एवं विकास (श्री लाल सिंह आर्य)--अध्यक्ष महोदय, आपने तीन गांवों के नाम लिये हैं वैसे इन गांवों में तो राशि नहीं लगायी गई है, लेकिन आप कह रहे हैं तो इसकी मैं भोपाल से अधिकारियों को भेजकर जांच करवा लूंगा उसमें दोषी अधिकारी पाये जाएंगे तो उन पर कार्यवाही करूंगा.
श्री अजय सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण प्राप्त करते हुए बताना चाहता हूं कि वहां पर जो नगर-पालिका के अध्यक्ष हैं सलूजा जी वह वहीं हैं जो पूर्व में विधायक थे उनको जाति प्रमाण पत्र के मामले में हटाया गया था. उन्होंने अपने विधायक पद से एक 10 सीटर सुलभ शोचालय विधायक मद से बनवाया था और उसी शौचालय को नगरीय निकाय के फंड से फिर से दिखाया गया है, उसकी भी आप जांच करवा लेंगे.
श्री लालसिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह जानकारी पूछी नहीं गई थी मैं उसकी भी जानकारी मंगवा लेता.
श्री अजयसिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, इस तरह के कामों की उच्च स्तरीय अधिकारियों से जांच करवा लेंगे जैसा कि आपने कहा. आपने परिशिष्ट के उत्तर में हनुमान टेकरी की बात कही है मंत्रीजी ने उसमें भी थोड़ी सी विसंगति है. हनुमान टेकरी में तीन सर्वे नंबर हैं मेरा आरोप है कि जो निजी भूमि का सर्वे नंबर है उस पर नगरीय निकाय के पैसे खर्च हुए हैं जो कि अवैधानिक हैं, उसकी भी जांच करवा लें. तीन मुद्दे हैं नगरीय निकाय के पैसे तीन पंचायतों में लगाये गये कि नहीं उसकी जांच, जो हनुमान टेकरी का उत्तर परिशिष्ट में उत्तर दिया है उसमें तीन सर्वे नंबर हैं एक सर्वे नंबर में प्रायवेट आदमी की जमीन है उनसे जानकारी भी नहीं ली तथा परमीशन भी नहीं ली वहां पर आपने खर्च कर दिया उसकी जांच करवा देंगे.
श्री लालसिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह था कि सर्वे नंबर कौन सा आप बता दें राजपत्र मेरे हाथ में है यदि उसमें सर्वे नम्बर होगा तो हम उसकी जांच करवा लेंगे.
अजय सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, आपको मैं पूरी जानकारी दे दूंगा.
श्री लालसिंह आर्य--ठीक है. माननीय अध्यक्ष महोदय.
प्रश्न संख्या13
नगर परिषद लहार, मिहोना, दबोह में सड़क निर्माण
13. ( *क्र. 441 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिण्ड जिले की नगर परिषद लहार, मिहोना, दबोह में 01 जनवरी, 2010 से 31 दिसम्बर, 2014 तक सार्वजनिक, शासकीय एवं नगर परिषदों के स्वामित्व की भूमियों को छोड़कर निर्मित सड़कों के सर्वे क्रमांक भूमि स्वामित्व तथा व्यय का विवरण दें? (ख) उपरोक्त प्रश्नांश के परिप्रेक्ष्य में निजी स्वामित्व की भूमि पर उपरोक्त अवधि में निर्माण कराई गई सड़कों के डायवर्सन एवं जनहित में दान की गई भूमियों का ब्यौरा दें? (ग) क्या उपरोक्त अवधि में नगर परिषद लहार, मिहोना एवं दबोह द्वारा निजी भूमि स्वामियों से सांठ-गांठ कर सड़कें बनवाकर प्लाट विक्रय कराने की उच्च स्तरीय जाँच कराई जाएगी? यदि नहीं, तो क्यों? दोषी पाए जाने पर कब तक कार्यवाही की जाएगी?
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (ग) निजी स्वामित्व की भूमि में सड़कों का निर्माण कार्य नहीं कराये जाने से जानकारी निरंक है
डॉ.गोविन्द सिंह--माननीय अध्यक्ष जी मेरा आपसे विनम्र निवेदन है कि कम से कम इस सरकार में जो 80-90 प्रश्नों के गलत जवाब आ रहे हैं इसके लिये आप इनको प्रताड़ित करें अगर नहीं कर सकते हैं इनको गोल्ड मेडिल दे दिया जाए.
अध्यक्ष महोदय--बिल्कुल एक्सट्रीम या तो इधर या उधर
डॉ.गोविन्द सिंह--अध्यक्ष महोदय, अब लगातार एक के बाद एक गलत उत्तर आ रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय--या तो प्रताड़ित करें या स्वर्ण पदक दें.
श्री उमाशंकर गुप्ता--आप तो डायमंड की बात करते थे आप तो गोल्ड पर आ गये (हंसी)
डॉ.गोविन्द सिंह--डायमंड तो सदन में एक ही हैं हमारे हीरो (हंसी)
अध्यक्ष महोदय--आप प्रश्न करें.
डॉ.गोविन्द सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय मैं 24 घंटे गांवों में रहने वाला आदमी हूं मुझे पूरी जानकारी एवं तथ्य मिलते हैं तभी मैं प्रश्न लगाता हूं नहीं तो नहीं.
डॉं गोविन्द सिंह- माननीय अध्यक्ष महोदय, नगर परिषद मिहोना के वार्ड क्रमांक 6 .
श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्यक्ष महोदय, पहले प्रश्न का जवाब आ जाए प्रताडि़त तो आप करेंगे नहीं, गोल्ड मेडल ही बनवा दें ।
अध्यक्ष महोदय- प्रश्न तो उनको मंत्री जी से करना है ।
डॉ. गोविन्द सिह- मंत्री जी, बाहर, विदेश के नहीं हैं, भिण्ड के ही हैं ।
गृहमंत्री(श्री बाबूलाल गौर)- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो भी उत्तर आते हैं वह विभाग के माध्यम से आते हैं, सरकार के द्वारा पूरी जांच पड़ताल के बाद आते हैं ।
डॉ. गोविन्द सिंह- आपको डायमण्ड पारितोषिक देंगे, आप ही तो सदन के हीरो हो ।
अध्यक्ष महोदय- प्रश्न करिए, अन्य सदस्यों के भी प्रश्न हैं ।
डॉं. गोविन्द सिंह- माननीय अध्यक्ष महोदय, नगर परिषद मिहोना के वार्ड क्रमांक 6 भिण्ड-भाण्डेर रोड से भौरया स्कूल तक निजी भूमि है,इसी प्रकार वार्ड क्रमांक 6 में सुरभि कान्वेंट और उसके आगे तक निजी भूमि है, वार्ड क्रमांक 7 में गल्ला मंडी के पीछे शिवाजी माध्यमिक विद्यालय तक निजी भूमि है, वार्ड क्रमांक 14 में गोपालधाम के आगे तक खेतों में निजी लोगों से 10-10, 20-20 लाख रूपए वसूल किए, ताकि जमीन महंगी हो जाए और प्लाट बिक गए, जो प्लाट 2-3 लाख का नहीं था, वह 10-10 लाख का बिक गया, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि आपने हमसे चर्चा में कहा भी था कि हम इसकी जांच कराएंगे आप निष्पक्ष रूप से कलेक्टर भिण्ड के द्वारा जिन नम्बरों का हमने हवाला दिया है, उनकी जांच एक माह में सुनिश्चित कर, दोषियों ने जिन्होंने गलत जवाब दिया है और जिन्होंने शासन के पैसों का,शासकीय धन का दुरूपयोग किया है, उसकी जांच कराकर दण्डित करेंगे ।
राज्यमंत्री,नगरीय प्रशासन(श्री लालसिंह आर्य)- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो प्रश्न पूछा है, मैं केवल मिहोना की नहीं, बल्कि लहार और दबोह की तीनों नगर पंचायतों में अगर निजी भूमि पर शासकीय राशि खर्च करके निर्माण कार्य कराया गया है तो हम एक माह के भीतर जांच भी कराएंगे और कठोर कार्यवाही भी करेंगे।
डॉं. गोविन्द सिंह, माननीय अध्यक्ष महोदय, इसलिए धन्यवाद क्योंकि मिहोना और दबोह के अध्यक्ष तो भाजपा के ही हैं, वह कल आकर आपसे गिड़गिड़ा रहे थे तो मैंने कहा रहने दो अब आप उनकी भी करा लो,धन्यवाद ।
अध्यक्ष महोदय- अब गोल्ड मेडल दे कि नहीं दें । (हंसी)
तालाब के वेस्टवीयर पर पुलिया निर्माण
14. ( *क्र. 1301 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रश्नकर्ता के प्रश्न क्रमांक 118 दिनांक 08 दिसंबर, 2015 के उत्तर में बताया गया था कि तहसील ब्यावरा के ग्राम झरखेड़ा तालाब के अंतर्गत ग्राम पाडली महाराज के निकट तालाब के वेस्टवीयर पर पुलिया निर्माण हेतु डूब क्षेत्र में जल भरा होने से सर्वेक्षण कराना संभव नहीं हो सका है? यदि हाँ, तो क्या वर्तमान में उक्त डूब क्षेत्र में जल भराव नहीं है? (ख) यदि हाँ, तो क्या शासन ग्रामीणजनों को आवागमन की सुविधा सुलभ कराये जाने हेतु पुलिया निर्माण कार्य करवायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? उक्त वेस्टवीयर पर पुलिया निर्माण नहीं कराये जाने से भविष्य में यदि कोई जनहानि होती है तो इसके लिये कौन उत्तरदायी रहेगा?
जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। (ख) जी नहीं। प्रश्नाधीन स्थल पर शासकीय रास्ता नहीं होने तथा ग्राम पाडली महाराज से झरखेड़ा होते हुए ब्यावरा तक तथा ग्राम जामी होते हुए मलावर तक पक्का मार्ग आवागमन हेतु उपलब्ध होने के कारण। शेष प्रश्नांश उत्पन्न नहीं होता है।
श्री नारायण सिंह पँवार :- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में झरखेड़ा तालाब है, उसके वेस्टवीयर के पानी से आम ग्रामीणों का रास्ता बंद है, मुझे उत्तर मिला है कि इसमें ब्यावरा जाने का मार्ग खुला हुआ है, मेरा निवेदन है ब्यावरा जाने के मार्ग से नहीं था, उनकी खेती-बाडी का पूरा रास्ता बंद है, मैंने पिछले सत्र में भी आग्रह किया था, मुझे जवाब मिला था कि अभी पुलिया में पानी भरा हुआ है, इसलिए सर्वे करना संभव नहीं है, मैंने मंत्री जी से भी अनुरोध किया था,विभाग के अधिकारियों से भी अनुरोध किया था कि उस मार्ग पर पुलिया बनाना अत्यन्त अनिवार्य है, लोगों को खेती-बाड़ी के लिए जाना अनिवार्य है, पशुधन का आना-जाना बंद है, इसलिए उस पर पुलिया या रपटा बनाना अत्यन्त आवश्यक है ।
श्री जयंत मलैया- माननीय अध्यक्ष महोदय, झरखेड़ा तालाब के ऊपर वेस्टवेयर पर पुलिया निर्माण के लिए माननीय विधायक जी ने पहले भी दो बार प्रश्न लगाए हैं, एक बार अतारांकित एक बार तारांकित, इसके बाद वहां पर अधिकारियों को भेजा गया था और उन्होंने जाकर देखा वहां पर पानी भरा हुआ था, इसके बाद वहां बन सकता है कि नहीं बन सकता है, उन्होंने बताया था कि जब पानी नहीं हो, तब इसका देख लेते हैं । मैं कार्यपालन यंत्री, नरसिंहगढ़ को निर्देश कर दूंगा वह माननीय विधायक जी के साथ जाकर निरीक्षण कर लेंगे और यदि किफायती दाम में पुलिया बन सकती है, तो पुलिया बना देंगे ।
श्री नारायण सिंह पँवार :- माननीय मंत्री महोदय, बहुत-बहुत, धन्यवाद ।
नर्मदा नदी पर बांध निर्माण
15. ( *क्र. 732 ) श्री जितेन्द्र गेहलोत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 1972 में प्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी पर 29 बड़े बांध बनाने की योजना बनाई थी? (ख) क्या उक्त बांधों के निर्माण की मंजूरी नर्मदा जल न्यायिक प्राधिकरण द्वारा 1979 में प्रदान की गई थी? तत्संबंधी ब्यौरा क्या है। (ग) उक्त (क) एवं (ख) की स्वीकृतियों में से कितने एवं कौन-कौन से बांध निर्मित हो चुके? उनका निर्माण व्यय संबंधी ब्यौरा क्या है? (घ) कितने बांध अब तक निर्मित नहीं हुए एवं किस कारण? पूर्ण ब्यौरा क्या है।
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) जी नहीं। नर्मदा न्यायिक प्राधिकरण द्वारा मध्यप्रदेश को 18.25 मिलियन एकड़ फीट नर्मदा कछार जल का बंटवारा किया। मध्यप्रदेश को अपने हिस्से के जल उपयोग अंतर्गत प्रश्नांश (क) अनुसार प्रदेश सरकार ने 29 बड़े बांध बनाने की योजना बनाई थी। (ग) 10 परियोजनाएं निर्मित हो चुकी हैं, जिनकी जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र ‘’अ’’ अनुसार है। 06 परियोजनाएं प्रगतिरत हैं, जिनकी जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र ‘’ब’’ अनुसार हैं। (घ) 13 परियोजनाएं अब तक निर्मित नहीं हुईं हैं, जिनकी जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र ‘’स’’ अनुसार हैं।
श्री जितेन्द्र गेहलोत- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूँ कि 1972 के अंदर नर्मदा नदी के ऊपर 29 डेम की कार्य योजना बनाई थी, जिसके अंदर से 10 डेम पूर्ण हो चुके हैं और 13 अभी तक वंचित हैं और 6 की स्वीकृति और 6 डेम बनना अभी तक शेष हैं तो वह 6 डेम कब तक बना लिए जाएंगे और 13 की जो योजना है, वह अभी तक पूर्ण है, उसको सम्मिलित नहीं किया गया है, उन 13 की स्वीकृति कब तक प्रदान कर दी जाएगी ।
राज्यमंत्री, नर्मदा घाटी (श्री लाल सिंह आर्य) - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी जो प्रश्न कर रहे हैं. मैं उनको बताना चाहता हूँ कि हमारी जो 9 परियोजनाएं हैं, वे पूर्ण हो चुकी हैं. वे 10 परियोजनाएं नहीं हैं, एक ऊर्जा विभाग से संबंधित है. शेष हमारी जो 6 परियोजनाएं हैं, वे प्रगति पर हैं. किसी का 98 प्रतिशत, किसी का 90 प्रतिशत काम हो गया है. माननीय अध्यक्ष महोदय, वर्ष 2024 के पूर्व, हम उनको पूर्ण करेंगे. यह हमारा संकल्प है. माननीय मुख्यमंत्री जी ने सदन में कहा भी है कि हमारे हिस्से का जो वाटर है, उसे हम 2024 से ही पहले प्राप्त करेंगे. इसलिए सदस्यों को कहना चाहता हूँ कि आप चिन्ता नहीं करें. नर्मदा घाटी विकास विभाग में जो भी हमारी संरचनाएं एवं कार्ययोजनाएं हैं, उनको वर्ष 2024 के पहले पूर्ण करेंगे.
श्री जितेन्द्र गहलोत - मैं माननीय मंत्री जी से और भी पूछना चाहता हूँ. मेरी विधानसभा अनुसूचित जाति बाहुल्य है. जिसके अन्दर कई बैराज बनना हैं. क्या उसकी स्वीकृति प्रदान करेंगे ? जिसका मैं नाम उल्लेख करना चाहता हूँ. मेरे यहां 5 नदियां हैं- जिसमें मलिनी नदी पर, ग्राम हनुमंतिया पर, चम्बल नदी पर, ग्राम भानपुरा पर, लूनी नदी पर, लूनी और क्षिप्रा नदी पर ताजली, जिससे किसानों को सिंचाई का रकबा बढ़ेगा और सौगातें मिलेगी. आज जिस प्रकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की जो सिंचाई परियोजनाएं हैं.
अध्यक्ष महोदय - आगे, आपका प्रश्न उद्भूत नहीं होता.
श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्यक्ष महोदय, बैराज एन.व्ही.डी.ए. नहीं बनाता है, वह जल संसाधन बनाता है.
विभागीय पदोन्नति समिति की बैठकों का आयोजन
प्रश्न- 16. ( *क्र. 3384 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा विभागीय पदोन्नति समिति की बैठकों के निर्देश दिये गये हैं? यदि हाँ, तो क्या कटनी जिले के शासकीय विभागों में विभागीय पदोन्नति समितियों का गठन किया जा चुका है? वर्तमान में समितियों का गठन कब किया गया? वर्ष 2014 से प्रश्न दिनांक तक कब-कब बैठकें आयोजित कर क्या अनुसंशायें की गईं? (ख) कटनी जिले में स्कूल शिक्षा विभाग एवं स्थानीय निकायों के शिक्षकों की पदोन्नति एवं संविदा शिक्षकों के संविलियन की कार्यवाही, कब से किन-किन कारणों से लंबित है? (ग) क्या कारण है कि विभागीय पदोन्नति समितियों की बैठकों का नियमानुसार आयोजन नहीं किया जाता, शिक्षकों की पदोन्नति की अनुशंसायें नहीं की जा रही हैं एवं संविदा शिक्षकों का संविलियन नहीं किया गया है, क्या इन अनियमितताओं का संज्ञान लेते हुये समुचित जाँच एवं कार्यवाही कर शासकीय सेवकों को शासनादेशों का लाभ दिलाया जायेगा ?
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। विभागीय भर्ती नियम में विभागीय पदोन्नति समिति का प्रावधान होता है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र ‘एक’ एवं ‘दो’ अनुसार है। (ख) वर्ष 2015 में पदोन्नति की कार्यवाही गोपनीय प्रतिवेदनों के अभाव में। वर्ष 2015 में संविदा शाला शिक्षक वर्ग-3 से 473 का सहायक प्राध्यापक के पद पर तथा संविदा शाला शिक्षक वर्ग-2 से 04 का अध्यापक पद पर संविलियन किया गया। (ग) प्रश्नांश ''क'' एवं ''ख'' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।
श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का जो जवाब आया है. उसमें, मैं माननीय मंत्री जी का, शासन के 2 पत्र दि. 3/7/2014 की कण्डिका 2 और दि. 12/5/2014 की कण्डिका 2 में ध्यान आकृष्ट कराना चाहता हूँ. गोपनीय प्रतिवेदन के अभाव में पदोन्नति समिति की बैठक नहीं टाली जा सकती. इसमें शासन के स्पष्ट निर्देश हैं. पदोन्नति समिति की बैठक वर्ष में 2 बार अनिवार्य रूप से हों, क्यों नहीं हुईं ? इस संबंध में जांच और दोषी अधिकारियों को दण्डित किया जाये और आगामी एक माह के अन्दर पदोन्नति समिति की बैठक आयोजित कर पदोन्नति के प्रकरण का निपटारा किया जाकर, मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्यम से अनुरोध करना चाहूँगा. दूसरा प्रश्न, नगरपालिक निगम कटनी में वर्ष 2001 से संविदा में नियुक्त शिक्षाकर्मियों के संविलियन का प्रकरण बार-बार शासन से अनुरोध के लिए पत्र लिखे जाने के बावजूद, शासन के स्पष्ट निर्देश होने के बावजूद, उन्हें पद के अभाव में नहीं दिया जा रहा है. जबकि रिटायर्ड हुए कर्मचारियों एवं अधिकारियों के पद रिक्त हैं, उन पर संविदाकर्मियों की भर्ती दी गई है, तो क्या उनके लिये आदेश प्रदान किये जायेंगे ?
राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन विभाग (श्री लाल सिंह आर्य) - माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्य ने कहा है कि शासन के नियम हैं तो स्वाभाविक है एक वर्ष में दो बार पदोन्नति के लिए बैठक होती है. कटनी नगर-निगम में जिन विभागों द्वारा जिनकी समितियां पहले से गठित हैं. उन्होंने 2 वर्ष के अन्दर पदोन्नति की कार्यवाही यदि नहीं की है तो वह कौन-सा अधिकारी है ? और जिसने शासन के नियमों का पालन नहीं किया है. माननीय अध्यक्ष महोदय, हम आदेश जारी करेंगे कि उनके खिलाफ कार्यवाही हो.
श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल - माननीय मंत्री जी, कटनी के संविदा में नियुक्त कर्मचारियों शिक्षाकर्मियों का संविलियन नहीं हो पा रहा है और जो पदोन्नति का शिक्षा विभाग का है. जिला शिक्षा अधिकारी महोदय द्वारा पदोन्नति समिति की बैठकें आयोजित नहीं की गई हैं. दोनों अलग-अलग हैं.
अध्यक्ष महोदय - इसका उत्तर आ गया है. वैसे एक ही 2 अलग-अलग प्रश्न थे.
श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल - माननीय अध्यक्ष महोदय, संविदा को नियमित करने का और यह पदोन्नति समिति की बैठक नहीं होने का है.
श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्यक्ष महोदय, कल ही हम पत्र जारी करेंगे कि संबंधित जिले के कलेक्टर को, कि उनसे रिलेटेड जो भी विभाग की कमेटियां हैं, उनका शीघ्र बैठक करके और संबंधितों को उनका अधिकार प्राप्त हो, इसकी कार्यवाही करेंगे.
हरदा जिले में ट्रांसफार्मर एवं बिजली व्यवस्था
प्रश्न-17. ( *क्र. 4037 ) श्री संजय शाह मकड़ाई : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्रामीण और कृषि उपभोक्ता के जले ट्रांसफार्मर बदले जाने हेतु क्या नियम निर्देश लागू हैं? निर्देशों की प्रति उपलब्ध करावें। (ख) हरदा जिले में वर्तमान 2015-16 के रबी सीजन में खराब हुए ट्रांसफार्मरों को कितने-कितने दिनों में बदला गया? दिनांक एवं स्थान सहित जानकारी दें। (ग) टिमरनी तहसील के ग्राम बघवाड़ा में ट्रांसफार्मर समय में नहीं सुधारने में कौन-कौन उत्तरदायी हैं? ऐसे उत्तरदायी लोगों पर क्या कार्यवाही की गई है? (घ) टिमरनी विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नौसर के खेरी टप्पर एवं ग्राम खारी में विद्युत व्यवस्था है? यदि नहीं, तो क्या इसके लिए शासन की तरफ से कोई योजना है ?
ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) ग्रामीण क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं के जले/फेल वितरण ट्रांसफार्मर वर्षा ऋतु (जुलाई से सितम्बर) में 7 दिन तथा शेष वर्ष के दौरान सूखे मौसम में 3 दिन में बदले जाने के नियम/निर्देश हैं, किन्तु जले/फेल वितरण ट्रांसफार्मर से संबद्ध उपभोक्ताओं के विरूद्ध बकाया राशि होने पर नियमानुसार बकाया राशि का 10 प्रतिशत जमा होने के उपरान्त उक्तानुसार उल्लेखित अवधि में ट्रांसफार्मर बदले जाने के निर्देश हैं। निर्देशों की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अ-1' एवं प्रपत्र 'अ-2' अनुसार है। (ख) हरदा जिले में वर्ष 2015-16 के रबी सीजन में खराब हुये ट्रांसफार्मरों को बदलने में लगे समय तथा बदलने की दिनांकवार एवं स्थानवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब' अनुसार है। (ग) टिमरनी तहसील के ग्राम बघवाड़ा में फेल ट्रांसफार्मर समय-सीमा में नहीं बदलने एवं क्षतिग्रस्त डी.पी. स्ट्रक्चर का सुधार कार्य समय-सीमा में नहीं करने के कारण संबंधित कनिष्ठ यंत्री, करताना वितरण केन्द्र को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है।(घ) टिमरनी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत नौसर के अंतर्गत खारी नाम का कोई ग्राम नहीं है। ग्राम पंचायत नौसर के अंतर्गत स्थित खड़ी टप्पर में कुल 09 मकान (टप्पर) बने हुए हैं। जिले में संचालित राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के प्रावधानों के अनुसार 100 एवं 100 से अधिक आबादी वाली बसाहटों/मजरों/टोलों को ही योजना में सम्मिलित किया जा सका था। उक्त प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आने के कारण उक्त मजरे का कार्य जिले हेतु स्वीकृत उक्त योजना में शामिल नहीं किया जा सका। वित्तीय उपलब्धता के आधार पर उक्त मजरे के विद्युतीकरण का कार्य भविष्य में स्वीकृत होने वाली योजना में सम्मिलित किया जा सकेगा। तथापि सांसद/विधायक निधि द्वारा वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जाती है तो उक्त मजरे के विद्युतीकरण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराया जावेगा।
श्री संजय शाह मकड़ाई - माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे जो जानकारी दी गई है, उसमें और मेरे पास जो जानकारी है, उसमें थोड़ी भिन्नता है. मेरे 'क' के जवाब में दिया गया है कि नियमानुसार ट्रान्सफॉर्मर बदले जाते हैं. माननीय मंत्री महोदय, नियम 7 दिन एवं 3 दिन हैं. लेकिन हमारे जिले में लगता है कि 7 और 3 दिन, मेरे ख्याल से कोई भी ट्रान्सफॉर्मर नहीं बदला गया. माननीय मंत्री जी, मैं इकट्ठे ही प्रश्न कर लेता हूँ. 'ख' में मुझे जानकारी दी है और पूरा फोल्डर दिया गया है, उसमें हर गांव में किसी में 2 दिन में, किसी में 3 दिन में ट्रान्सफॉर्मर बदलने की बात कही गई है. अगर यह 2 और 3 दिन में सब जगह ट्रांसफार्मर बदला जाता, तो शायद मुझे यहां पर प्रश्न करने की आवश्यकता ही नहीं होती. तो बहुत ही असत्य जानकारी मुझे यहां पर अधिकारियों के द्वारा दी गयी है. मैं इस ओर मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा. प्रश्नांश (ग) में ग्राम बघवाड़ा में जो ट्रांसफार्मर विलम्ब से लगाया गया था, वह मुझे यहां पर लगभग 15 दिन की जानकारी दी गयी है, लेकिन मेरी जानकारी के अनुसार वहां पर एक महीने से ऊपर का समय लिया गया गया था और सिर्फ एक शोकॉज नोटिस के माध्यम से इतिश्री कर ली गयी थी. मेरा सीधा प्रश्न है कि एक तो छोटे कर्मचारी को सिर्फ शोकॉज नोटिस देना, क्या यह सत्य है कि इसमें वरिष्ठ अधिकारियों की कोई जवाबदारी नहीं थी. सीजन में किसी गांव का ट्रांसफार्मर जल जाये और इतने दिनों के बाद ट्रांसफार्मर बदला जाये, तो वहां के किसानों की क्या हालत होती होगी, यह आप खुद समझ सकते हैं. दूसरा यह कि जो ट्रांसफार्मर नियमानुसार जितने दिनों में बदला जाना था, 7 दिन में मैक्सीमम बदलने का दिया था, तो इन्होंने 2-3 दिन में ही बदल लिया. तो ये कम से कम जानकारी में 7 दिन ही लिख देते. तो आपने जो जानकारी दी है, वह पूर्णतः असत्य है. इसमें कार्यवाही होनी चाहिये और वहां पर जितने भी ट्रांसफार्मर बदले गये हैं, सब 15 दिन, 20 दिन एवं एक महीने में लगाये गये हैं और उसमें भी कुछ व्यवस्था शुल्क के नाम पर लिया जाता है, उसके बाद ही होता है. यह व्यवस्था आप दिलवायेंगे, तो प्रसन्नता होगी.
श्री राजेन्द्र शुक्ल -- अध्यक्ष महोदय, जैसा कि हमारे जवाब में यह स्पष्ट है कि बघवाड़ा को छोड़कर, क्योंकि बघवाड़ा में ट्रांसफार्मर भर ही नहीं जला था, उसकी डीपी ही नहर के पानी से गिर गयी थी. तो डीपी को खड़ा करना, फिर उसमें ट्रांसफार्मर लगाना इसके कारण उसमें समय जरुर लगा है. लेकिन आपका यह कहना है कि 2-3 दिन में, वर्षा ऋतु को छोड़ कर 3 दिन में बदलना है, रबी और खरीफ के सीजन में और बाकी 7 दिन में वर्षा ऋतु में. लेकिन आपका यह कहना है, यदि आप स्पेसीफिक कोई जानकारी देंगे, तो सिर्फ कारण बताओ नोटिस ही नहीं देंगे, कड़ी कार्यवाही भी करेंगे.
श्री संजय शाह मकड़ाई -- अध्यक्ष महोदय, मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि इसमें वरिष्ठ अधिकारियों की भी जवाबदारी तय होनी चाहिये. आप ग्रिड से भी देख सकते हैं कि कब उनका ट्रांसफार्मर ठीक हुआ था, कितने दिनों में ठीक हुआ था और कितनी बिजली की खपत हुई थी. इस तरीके से आप वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्यवाही करने का आश्वासन दें.
श्री राजेन्द्र शुक्ल -- अध्यक्ष महोदय, जो भी तरीके जांच करने के हो सकते हैं कि ट्रांसफार्मर कब जला और कब बदला गया, उन सारे तरीकों के आधार पर हम उस जानकारी को निकालेंगे कि एक्चुअल में ट्रांसफार्मर कितने दिनों में बदले गये हैं. यदि यह जानकारी गलत पाई गई और दूसरे तरीकों से जांच करने में मालूम पड़ गया कि यह जानकारी गलत है, तो वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कार्यवाही होगी.
श्री संजय शाह मकड़ाई -- अध्यक्ष महोदय, एक छोटा सा प्रश्न और है.
अध्यक्ष महोदय -- आपकी पूरी बात आ गई है. सारी बातों का जवाब आ गया है.
श्री संजय शाह मकड़ाई -- अध्यक्ष महोदय, इसके लिये तो मैं आपको और मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूं. पर एक जानकारी और चाहिये. जो 2-3 सालों से वहां पर वरिष्ठ अधिकारी जमे हुए हैं, उनका स्थानान्तरण करके वहां पर नये अधिकारी भिजवाने का कष्ट करें.
अध्यक्ष महोदय -- आप उनको लिख करके दे दीजिये.
प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थ पर लगने वाले टैक्स
18. ( *क्र. 3121 ) श्री रामनिवास रावत : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. में पेट्रोल, डीजल, कैरोसीन एवं रसोई गैस, सिलेण्डर प्रति यूनिट, उत्पादन कंपनियों से म.प्र. को मूल रूप से किस दर पर प्राप्त होते हैं? पेट्रोल, कैरोसीन एवं डीजल की दर प्रति लीटर एवं रसोई गैस सिलेण्डर की दर प्रति सिलेण्डर में मूल रूप से प्राप्त होने की दर एवं प्रदेश में लगने वाले विभिन्न टैक्स उपरांत विक्रय की दर बतावें? (ख) वर्तमान में म.प्र. में पेट्रोल, डीजल, कैरोसीन एवं रसोई गैस पर कौन-कौन से टैक्स किस-किस दर पर लगाए जा रहे हैं? विगत दो वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा इनमें से कौन-कौन से टैक्सों में कितनी-कितनी वृद्धि की गई है? वर्तमान में पड़ोसी राज्यों छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात एवं महाराष्ट्र, हरियाणा, उत्तरप्रदेश व दिल्ली में इन उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैक्सों की जानकारी म.प्र. सहित तुलनात्मक विवरण दें? (ग) क्या प्रदेश में अन्य पड़ोसी राज्यों की तुलना में इन उत्पादों पर टैक्स अधिक होने से सीमांत इलाकों में पड़ोसी राज्यों से डीजल, पेट्रोल लाकर प्रदेश में बेचा जा रहा है, जिससे प्रदेश को राजस्व की हानि हो रही है? क्या प्रदेश सरकार अन्य पड़ोसी राज्यों के समान उक्त उत्पादों पर लगने वाले टैक्स अनुसार टैक्स की दर निर्धारित करेगी? (घ) वित्तीय वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में प्रश्नांकित दिनांक तक प्रश्नांश (क) अनुसार उत्पादों पर लगने वाले विभिन्न प्रकार के टैक्सों से प्रदेश को कितने रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ? कृपया वर्षवार बतावें।
जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) यह जानकारी विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है। (ख) वर्तमान में मध्यप्रदेश में पेट्रोल, डीजल, कैरोसिन एवं रसोई गैस पर लगाए जा रहे कर की दर की जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र 'ए' अनुसार है। अन्य राज्यों में लागू कर की दर विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है। (ग) प्रदेश के सीमांत इलाकों में पड़ोसी राज्यों से डीजल, पेट्रोल लाकर प्रदेश में बेचे जाने की कोई जानकारी प्रकाश में नहीं आई है। प्रदेश सरकार प्रदेश में बजट अनुमान एवं राजस्व संग्रहण के आधार पर कर की दरें निर्धारित करती है। (घ) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र 'बी' अनुसार है।
श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले आपको धन्यवाद कि कल पूरे 25 प्रश्नों पर चर्चा हुई और आज भी 18 प्रश्नों पर पहुंच गये, लगभग पूरे होंगे. आपका संरक्षण चाहूंगा. मैंने मंत्री जी से प्रश्न किया था कि प्रदेश में पेट्रोल,डीजल, कैरोसिन, रसोई गैस, सिलेण्डर प्रति यूनिट किस रुप में कम्पनियों से मूलतः प्राप्त होती है. आपने कहा कि यह जानकारी विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है. मैंने पूछा कि टैक्स लगाने के बाद कितने रुपये में बेची जाती है, वह भी जानकारी संधारित नहीं की जाती है. आप टैक्स लगाते हैं, डीजल पर आपका वेट टैक्स है 27 प्रतिशत, इंट्री टैक्स 1 प्रतिशत. तो आप यह बता दें कि यह 27 प्रतिशत कौन सी राशि पर टैक्स लगाते हैं. अगर आपको जब यह नहीं पता कि मूल रुप में कितने कीमत पर प्राप्त होती है, तो यह 27 प्रतिशत वेट टैक्स, एक प्रतिशत इंट्री टैक्स और वह ठीक है एक लीटर पर 1.50 रुपये फिक्स कर दिया है, उसके बारे में कुछ नहीं कहना है. लेकिन जो टैक्स लगाते हैं, जब आपको राशि, कीमत ही नहीं पता, तो किस कीमत पर टैक्स लगाते हैं, यह बतायें.
श्री जयंत मलैया -- अध्यक्ष महोदय, जैसे मैंने अपने उत्तर में निवेदन किया, यह बात सही है कि यह जानकारी हम संधारित नहीं करते हैं. उसका भी कारण है. हमारे प्रदेश में 5 पेट्रोलियम कम्पनीज हैं. इंडियन ऑयल कारपोरेशन, हिन्दुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम, रिलायंस पेट्रोलियम और एस.आर. पेट्रोलियम. इन सबसे यहां पर डीजल, पेट्रोल और कैरोसीन आता है. दूसरी बात यह है कि इनके अलग अलग जगह डिपो होते हैं, सबके अपने अलग अलग दाम होते हैं और लीड के हिसाब से हरेक जगह के डिपो के हिसाब से अंतर रहता है 600-650 जगह की जानकारी संधारित करना संभव नहीं है. इसलिये इसकी जानकारी संधारित नहीं की जाती है. आप देखेंगे एक शहर में ही डीजल और पेट्रोल के अलग अलग डिपो से आये हुये, अलग अलग कंपनी के दामों में भी थो़ड़ी बहुत भिन्नता होती है. हरेक जगह से जिस आउट-लेट से वह डीजल या पेट्रोल निकलता है उसके ऊपर हम वेट और एन्ट्री टैक्स लगाते हैं.
श्री रामनिवास रावत- आउट-लेट से जिस भाव में बेचते हैं उस पर एन्ट्री टैक्स लगाते हैं ? जैसे 50 रूपये बेचा तो 50 रूपये पर आपका टैक्स है ? आपने कहा कि आउट लेट से बेचते हैं, अलग अलग रेट हैं, अलग अलग रेट तो ट्रांसपोर्टेशन की दर के कारण हो जाते हैं, डिपो से तो दर एक ही होना चाहिये .
श्री जयंत मलैया-- उसका भी लीड कारण होता है. आउट लेट की लीड और वहां से डिपो की लीड.
श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि अभी जो डीजल और पेट्रोल के रेट हैं , डीजल पहले जब 150 रूपये प्रति बैरल था तब भी लगभग यही रेट था आज 35 रूपये डॉलर प्रति बैरल है तब भी यही रेट है. केन्द्र सरकार की पहले एक्साइज ड्यूटी थी 3 और आज डीजल 70 रूपये है पेट्रोल पर थी 9 आज 31 रूपये है.
अध्यक्ष महोदय-- आप जानकारी मत दें. आप प्रश्न करिये.
श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि अभी जो आपकी केबिनेट हुई थी, पेपरों में छपा था कि आपने डीजल पर फिक्स रेट बढ़ा दिया है. (मंत्री जी द्वारा बैठे बैठे बोलने पर कि बढाया नहीं है, बढायेंगे ) ठीक है बढाया नहीं है तो कब से बढ़ायेंगे.
श्री जयंत मलैया-- हमारी मर्जी हम कब से बढ़ायें, आपसे पूछ कर के थोड़े ही बढायेंगे.
अध्यक्ष महोदय-- आप सीधा प्रश्न कर दीजिये. अन्य सदस्यों के भी प्रश्न हैं.
श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, सीधा प्रश्न यह है कि अभी आपने 23.1.2016 से जो 50 पैसा लगता था अतिरिक्त कर 1 रूपये 50 पैसे कर दिया है. इस प्रकार आप कम से कम 24 रूपये आप लेते हैं और 21 रूपये केन्द्र सरकार ले लेती है, 35 रूपये लगभग आप डीजल और पेट्रोल पर लेते हैं. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि प्रदेश में सूखा पड़ा हुआ है, किसान आंदोलित है, किसान आत्महत्या कर रहा है..
अध्यक्ष महोदय-- सीधा सीधा प्रश्न करें, भाषण मत दीजिये.
श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, क्या मंत्री जी किसानों के लिये उनकी कृषि भूमि की जोत सीमा के आधार पर बिना टेक्स की डीजल उपलब्ध करायेंगे.
श्री जयंत मलैया -- अध्यक्ष महोदय, हमने सब किसानों के लिये बिजली उपलब्ध कराई है अब डीजल की आवश्यकता उनको नहीं होती है. सिर्फ ट्रेक्टर के लिये आवश्यकता लगती है.
प्रश्न संख्या - 19 ( अनुपस्थित )
सिवनी जिले में खनिज खदानों की लीज़ स्वीकृति
20. ( *क्र. 3891 ) श्री दिनेश राय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में स्टोन क्रेशर, रेत, फर्शी, पत्थर आदि खदानों की लीज़ स्वीकृत किये जाने की क्या प्रकिया है? नियम व शर्तों की प्रतिलिपि उपलब्ध कराएं। (ख) सिवनी जिले में विगत 5 वर्षों में किस-किस गांव में किस-किस सर्वे नम्बर में कितने-कितने क्षेत्रफल की स्टोन क्रेशर, पत्थर, रेत आदि खनिजों की लीज़ पर किन-किन फर्मों या व्यक्तियों को कब-कब, कितनी-कितनी अवधि के लिये स्वीकृत की गई? (ग) प्रश्नांश (ख) से संबंधित 2010 से प्रश्न दिनांक तक अवैध उत्खनन करने या नियमों का पालन नहीं करने या पर्यावरण प्रदूषित करने हेतु कितने-कितने प्रकरण, किस-किस फर्म या व्यक्तियों पर कहाँ-कहाँ दर्ज किये गये व उन्हें क्या दण्ड दिया गया?
ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) म.प्र. गौण खनिज नियम 1996 में स्टोन क्रेशर हेतु पत्थर खनिज, निजी भूमि में स्थित फर्शी पत्थर, म.प्र. राज्य खनिज निगम के पक्ष में रेत खनिज का उत्खनिपट्टा स्वीकृत किये जाने का प्रावधान है। शासकीय भूमि में स्थित फर्शी पत्थर एवं पत्थर को नीलामी के माध्यम से व्यापारिक खदान के रूप में स्वीकृत किये जाने का प्रावधान है। यह नियम अधिसूचित नियम है, जिसमें प्रक्रिया, नियम तथा शर्तें उल्लेखित हैं। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अ' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'ब' एवं 'स' अनुसार है।
श्री दिनेश राय-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहूंगा.मैंने मंत्री जी से जो प्रश्न किया था उसमें (क) (ख) में जो जानकारी दी है वह पूर्ण जानकारी नहीं दी गई है उसमें सिर्फ क्रेशरों की जानकारी दी गई है, उसमें मुरम, रेत,उत्खनन की जानकारी भी मांगी थी, वह पूर्ण जानकारी मुझे नहीं दी गई है.
श्री राजेन्द्र शुक्ल --माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने स्टोन, पत्थर, रेत आदि खनिजों की लीज पर किन किन फर्मों/व्यक्तियों की जानकारी चाही है. उस जिले में जितनी भी संचालित खदानें हैं, जो स्वीकृत हैं उन सभी की जानकारी परिशिष्ट में है. लगभग 94वें क्वेरी लीज हैं 45 आक्शन हैं जिसमें रेत, पत्थर, और मुरम है, 45 खदानें आक्शन की हैं.
श्री दिनेश राय-- अध्यक्ष महोदय, जो क्रेशरें आटोमेटिक बंद हैं उनकी जानकारी हैं, उनमें 2 हेक्टेयर की आप परमीशन देते हो, 5-5, 8-8 हेक्टेयर में वह खुदाई कर रहे हैं, 20 फीट गहराई तक ही आप अनुमति देते हैं, 40 फीट तक वह गहरा कर रहे हैं, ब्लास्टिंग कर रहे हैं, तो मैं चाहूंगा कि उनकी जांच करायेंगे, क्योंकि जांच हो नहीं रही है, जो अधिकारी है वह प्राइवेट गाड़ी में बत्ती लगाकर घूमते हैं. माननीय अध्यक्ष महोदय, पिछली बार भी मैंने इसी बात को उठाया था, फिर उठा रहा हूं. उसकी जांच करायेंगे उच्च अधिकारियों से और मुझे साथ रखेंगे क्या.
श्री राजेन्द्र शुक्ल-- जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं है, हालांकि अवैद्य उत्खनन, परिवहन के प्रकरण बनाये गये हैं, जिसकी डिटेल परिशिष्ट में संलग्न है. लेकिन फिर भी जांच तो एक सतत प्रक्रिया है और हमने जिले में टॉस्क फोर्स भी बनाई है, वह टॉस्कफोर्स नियमित रूप से अभियान चलाकर अवैद्य उत्खनन वालों को पकड़ती है और उनके मामले बनाती है और परिवहन करते हुये यदि कोई वाहन मिलते हैं तो तत्काल उनको जप्त करके वसूली की कार्यवाही भी होती है, उसके रिकार्ड संलग्न हैं.
श्री दिनेश राय-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हम खुद प्रभारी मंत्री जी के साथ मंगवानी गये थे क्रिकेट मैच में, वहां पर इनका माइनिंग अधिकारी 2 गाड़ी रोकता है हम लोगों को देखकर, उसके कुछ मिनट बाद जैसे ही हम लोग निकल जाते हैं, आधा घंटे बाद रिपोर्ट मिलती है गाडि़यां छोड़ दी जाती हैं.
अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 21, श्री कमल मर्सकोले.
श्री दिनेश राय-- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमको जांच दल में आप रखेंगे क्या, आपकी जो समिति है उस पर हमको भरोसा नहीं है. नहीं, नहीं माननीय अध्यक्ष महोदय मैं बहिष्कार करता हूं, आपके द्वारा संरक्षण नहीं मिलता मुझे.
अध्यक्ष महोदय-- जांच दल में इनको, सुन तो लें....
श्री दिनेश राय-- जानकारी असत्य है, मैं बहिर्गमन करता हूं, मैं संतुष्ट नहीं हूं.
बहिर्गमन
(निर्दलीय श्री दिनेश राय, सदस्य द्वारा शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया)
नगर परिषद लांजी से प्राप्त शिकायतों की जाँच
21. ( *क्र.
3217 ) श्री
कमल
मर्सकोले
: क्या
मुख्यमंत्री
महोदय
यह
बताने
की
कृपा
करेंगे
कि
(क)
राज्य
शासन
द्वारा
लांजी
नगर
परिषद
के
दिनांक
25.08.2009 से
गठन
के
उपरांत
कितने
विकास
कार्यों
के
लिये
नगर
परिषद
लांजी
ने
प्रेसिडेंट
कौंसिल
एवं
नगर
परिषद
ने
प्रस्ताव
पारित
कर
राज्य
शासन
को
दिनांक
29.01.2016 तक
भेजे
एवं
राज्य
शासन
ने
उस
पर
क्या
कार्यवाही
की?
(ख)
अध्यक्ष
नगर
परिषद
लांजी
ने
विकास
कार्य
नहीं
होने
की
कितनी
शिकायतें
प्रमुख
सचिव
नगरी
विकास
एवं
संचालनालय
नगरीय
विकास
को
प्रेषित
की
एवं
उन
पत्रों
पर
संबंधित
अधिकारियों
द्वारा
क्या
कार्यवाही
की
गई?
(ग)
नगर परिषद
लांजी
को
फायर
बिग्रेड
खरीदने
एवं
शौचालय
तथा
शहर
में
नालियों
के
निर्माण
के
लिये
बजट
नहीं
दिये
जाने
का
कारण
बताया
जावे
तथा
फायर
बिग्रेड
का
अनुदान
एवं
गंदे
पानी
के
निकासी
के
लिये
नालियां
बनाने
डी.पी.आर.
बनाने
की
अनुमति
कब
तक
प्रदान
की
जायेगी?
निश्चित
अवधि
बताई
जावे।
(घ)
नगर परिषद
लांजी
को
आवंटित
बजट
का
ऑडिट
एवं
कर्मचारियों
की
भर्ती
की
जाँच
कब
तक
करायी
जावेगी?
मुख्यमंत्री
( श्री
शिवराज
सिंह
चौहान
) : (क)
जानकारी
पुस्तकालय
में रखे परिशिष्ट
अनुसार
है।
(ख)
नगर परिषद
लांजी
में
विकास
कार्य
नहीं
होने
की,
अध्यक्ष
द्वारा
कोई
शिकायत
प्राप्त
नहीं
हुई
है।
(ग)
नगर परिषद
लांजी
जिला
बालाघाट
को
फायर
बिग्रेड
क्रय
के
लिए
राशि
रू.
25.00 लाख उपलब्ध
कराया
गया
है।
व्यक्तिगत
शौचालय
500 नग के
लिए
राशि
रू.
98.60 लाख की
कार्ययोजना
स्वीकृत
की
गई
है।
नगर
परिषद
लांजी
द्वारा
गंदे
पानी
के
निकासी
के
लिए
नाली
निर्माण
का
कोई
प्रस्ताव
तैयार
नहीं
किया
गया
है।
शेषांश
का
प्रश्न
उपस्थित
नहीं
होता
है।
(घ)
नगर परिषद
लांजी
द्वारा
उप
संचालक,
स्थानीय
निधि
संपरीक्षा
जबलपुर
को
पत्र
क्रमांक
2375 दिनांक
08.01.2016 से
ऑडिट
कराने
का
अनुरोध
किया
गया
है।
कर्मचारियों
के
भर्ती
की
जाँच
संबंधी
कोई
भी
प्रकरण
वर्तमान
में
लंबित
नहीं
होने
से
शेषांश
का
प्रश्न
उपस्थित
नहीं
होता।
श्री कमल मर्सकोले-- माननीय अध्यक्ष महोदय, लांजी नगर पंचायत के गठन के उपरांत ग्राम पंचायत के कर्मचारी को नियम विरूद्ध संविलियन कर स्थाई कर दिया गया है, जो भरती नियम के तहत नहीं की गई है और न ही आरक्षण नियमों का पालन किया गया है, इसकी शिकायत कई बार की गई है. दूसरा मेरा यह प्रश्न है माननीय मंत्री जी से कि जब से नगर पंचायत का गठन हुआ है, उस नगर पंचायत का अभी तक आडिट नहीं हुआ है और न ही वहां का बजट बना है.
नगरीय विकास एवं पर्यावरण राज्य मंत्री (श्री लाल सिंह आर्य)-- माननीय सदस्य ने न तो संविलियन की कोई जानकारी चाही है, न आडिट की कोई जानकारी चाही है माननीय अध्यक्ष महोदय. उन्होंने जानकारी चाही थी विकास कार्यों की, मैं पूरे लेकर आया हूं, लेकिन फिर भी अगर आडिट नहीं हुआ है तो हम निर्देश जारी करेंगे कि आडिट हो.
श्री कमल मर्सकोले -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने अपने प्रश्न ख में मैंने बजट के आडिट और कर्मचारियों की भरती की बात की है.
अध्यक्ष महोदय-- आडिट की की है.
श्री कमल मर्सकोले -- आडिट की और कर्मचारी भरती की जांच की भी मैंने बात की है.
अध्यक्ष महोदय-- आडिट की की है खाली, आडिट आप (माननीय मंत्री जी की ओर हाथ दिखाते हुये) करा देंगे, ऐसा उन्होंने आश्वासन दिया है.
आरक्षित वर्ग के कृषकों को मुआवजा
22. ( *क्र.
3068 ) श्री
लखन
पटेल
: क्या
जल
संसाधन
मंत्री
महोदय
यह
बताने
की
कृपा
करेंगे
कि
(क)
क्या
दमोह
जिले
में
तहसील
पथरिया
के
ग्राम
हथना
(नंदरई)
में
सिंचाई
विभाग
द्वारा
तालाब
निर्माण
कराया
गया?
इसमें
कितने
किसानों
की
जमीन
डूब
क्षेत्र
में
हैं?
(ख)
ऐसे किसानों
की
संख्या
नाम
सहित
बताएंगे,
किस-किस
किसान
की
भूमि
व
कितना-कितना
रकबा
डूब
क्षेत्र
में
है?
(ग)
इन किसानों
को
वर्ष
1970-71 में
राजस्व
विभाग
द्वारा
अनुसूचित
जाति
एवं
अनुसूचित
जनजाति
के
लोगों
को
खेती
के
लिए
पट्टे
दिए
गए
थे?
यदि
हाँ,
तो
उनकी
जमीन
डूब
क्षेत्र
में
आने
से
उन्हें
मुआवजा
दिया
गया?
यदि
नहीं,
तो
क्यों?
कब
तक
दिया
जायेगा?
कितनी-कितनी
राशि
दी
जावेगी
एवं
कब
तक?
जल संसाधन
मंत्री
( श्री
जयंत
मलैया
) : (क)
जी हाँ,
ग्राम
हथना
(नंदरई)
में
बासांकला
जलाशय
का
निर्माण
कराया
गया
है।
43 कृषकों
की
भूमि
डूब
क्षेत्र
में
है।
(ख)
जानकारी
संलग्न
परिशिष्ट
के
प्रपत्र
''1'' एवं
''2'' अनुसार
है।
(ग)
वनभूमि
पर
राजस्व
विभाग
द्वारा
पट्टे
दिए
जाना
नियम
संगत
नहीं
होने
के
कारण
मुआवजा
भुगतान
संभव
नहीं
हो
सका।
पट्टे
की
वैधानिकता
का
परीक्षण
कर
3 माह के
भीतर
निराकरण
करने
के
निर्देश
कलेक्टर
को
दे
दिए
गए
हैं।
श्री लखन पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के जवाब से संतुष्ट हूं, परंतु आपका संरक्षण चाहता हूं. अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों से जुड़ा हुआ मामला है. मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से आश्वासन चाहूंगा कि क्या डूब में आये हुये आदिवासी और अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों का मुआवजा दिलायेंगे क्या.
जल संसाधन मंत्री (श्री जयंत मलैया)-- कलेक्टर को निर्देशित कर दिया गया है, 3 माह में मुआवजा बंट जायेगा.
श्री लखन पटेल-- धन्यवाद, माननीय मंत्री जी.
ट्रांसफार्मर का अन्यत्र व्यवस्थापन
23. ( *क्र. 3974 ) श्री मानवेन्द्र सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या अतारांकित प्रश्न संख्या 104 (क्रमांक 2364), दि. 28.07.2015 के प्रश्नांश (ख) भाग के उत्तर में नगरीय प्रशासन एवं पर्यावरण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त अनुज्ञाओं में तत्कालीन प्रचलित नियमों के तहत खुला क्षेत्र, सर्विस क्षेत्र, पार्क आदि स्वीकृत किया जाना स्वीकार किया है, तो उक्त ट्रांसफार्मर चयनित स्थल पर स्थापित है या अचयनित स्थल पर? (ख) क्या अतारांकित प्रश्न क्रमांक 2197 उत्तर दिनांक 15.12.2015 के प्रश्नांश (घ) भाग के उत्तर में अध्यक्ष, विनीत कुंज, गृह निर्माण संस्था की लिखित सहमति प्राप्त नहीं होना लेख किया गया है? हाँ, तो इस प्रश्न दिनांक तक उक्त संस्था से तत्संबंधी सहमति प्राप्त कर ली गई है, तो सहमति पत्र प्रस्तुत करें? यदि नहीं, तो शिथिलीय कार्यवाही करने के लिए कौन-कौन अधि./कर्म. दोषी हैं? दोषियों के नाम व पदनाम उल्लेखित करें। (ग) शासन, संभावित जनहानि को जन्म देने वाली व सहमति देने में शिथिलता बरतने वाली उक्त संस्था के कॉलोनाईजर संबंधी अनुज्ञापत्र को निरस्त करने की कार्यवाही करेगा? हाँ तो अवधि नियत करें?
ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। प्रश्नाधीन ट्रांसफार्मर को विनीत कुंज, गृह निर्माण संस्था की सहमति पर तात्कालिक प्रचलित नियमों एवं सुरक्षा की दृष्टि से अनुकूल चयनित स्थल पर तकनीकी साध्यता तथा स्वीकृत बाह्य विद्युतीकरण के प्राक्कलन अनुसार 'अ' श्रेणी के विद्युत ठेकेदार के माध्यम से स्थापित कराया गया है। (ख) जी हाँ। अध्यक्ष विनीत कुंज गृह निर्माण संस्था के द्वारा दिनांक 18.02.16 को लिखित सहमति दी गई है। उक्त सहमति पत्र की छायाप्रति संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) उत्तरांश (क) में दर्शाए अनुसार प्रश्नाधीन ट्रांसफार्मर तकनीकी साध्यता के अनुरूप ही लगाया गया था एवं वर्तमान में अध्यक्ष विनीत कुंज गृह निर्माण संस्था से 5 प्रतिशत पर्यवेक्षण शुल्क के आधार पर कार्य कराने की लिखित सहमति दिनांक 18.2.16 को प्राप्त हो चुकी है, अत: उक्त परिप्रेक्ष्य में वर्तमान में कोई कार्यवाही किया जाना प्रस्तावित नहीं है।
श्री मानवेन्द्र सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने अपने प्रश्न में माननीय मंत्री जी से जो जानकारी चाही थी कि विनीत कुंज गृह निर्माण संस्था की जो सोसायटी यहां भोपाल में है, यहां पर एक कंज्यूमर ने अपनी शिकायत की है कि वहां पर जो ट्रांसफार्मर लगा है, वह पूरे पोल और ट्रांसफार्मर की स्थिति उसके घर की ओर झुक चुकी है, उन्होंने अपना मांग पत्र दिया था कि यह ट्रांसफार्मर यहां से हटाया जाये, आज की स्थिति में अगर वह ट्रांसफार्मर वहां से नहीं हटाया जाता है तो किसी भी समय उनके घर पर वह ट्रांसफार्मर गिर सकता है. मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है क्योंकि अध्यक्ष ने अपनी सहमति दे दी है ट्रांसफार्मर की शिफ्टिंग की लेकिन 5 प्रतिशत जो उस पर शुल्क लगाया जा रहा है, वह उपभोक्ता से मांग की जा रही है. मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि यह विभाग से 5 प्रतिशत का शुल्क जमा कराकर के उसकी शिफ्टिंग करा दी जाये.
ऊर्जा मंत्री (श्री राजेन्द्र शुक्ल)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो 600 रूपये का मामला है, वह जमा भी हो चुका है, यदि जमा नहीं होता तो इस पर विचार किया जा सकता था, लेकिन वह जमा हो चुका है, अब अतिशीघ्र वह ट्रांसफार्मर शिफ्ट हो जायेगा.
श्री मानवेन्द्र सिंह-- बहुत-बहुत धन्यवाद.
अध्यक्ष महोदय-- प्रश्नकाल समाप्त.
प्रश्नकाल समाप्त
अध्यक्ष महोदय-- शून्यकाल की सूचनाएं.
श्री आरिफ अकील--अध्यक्ष महोदय...
अध्यक्ष महोदय-- पहले शून्यकाल की सूचनाएं पढ़ लेने दीजिए फिर आपको समय दे दूंगा.
नियम 267-क के अधीन सूचनाएं
(1) नरयावली के ग्राम भायेल में स्कूल भवन का निर्माण कराया जाने.
इंजी.प्रदीप लारिया(नरयावली)-- अध्यक्ष महोदय, सागर जिला के नरयावली विधानसभा क्षेत्र के ग्राम भायेल में हाई स्कूल एवं हायर सेकंडरी स्कूल संचालित हैं. यहां पर अध्ययनरत् छात्रों की संख्या लगभग 600 है. उक्त दोनों स्कूल मीडिल स्कूल के भवन में संचालित हैं. विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण स्कूल दो शिफ्ट लगने के बाद भी विद्यार्थियों को अध्ययन हेतु कक्षों की कमी बनी रहती है. यहां के आमजन एवं विद्यार्थी नये शाला भवन निर्माण की मांग समय समय पर करते रहे हैं. मेरे द्वारा भी शासन एवं प्रशासन से भवन निर्माण की मांग की जाती रही है. लेकिन अभी तक नया भवन निर्माण की अनुमति प्राप्त नहीं हो पायी है. जिसके कारण विद्यार्थियों की शिक्षा में समस्या आ रही है. मेरी मांग है कि अतिशीघ्र हाईस्कूल एवं हायर सेकंडरी भवन के निर्माण की अनुमति प्रदान करें जिससे विद्यार्थियों की समस्या का निराकरण हो सके. समस्या का निराकरण नहीं होने की दशा में विद्यार्थियों एवं जनमानस में रोष व्याप्त है.
(2) सिवनी जिले में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था ठीक न होना.
श्री दिनेश राय,मुनमुन(सिवनी)-- अध्यक्ष महोदय, सिवनी जिला/सिवनी शहर में जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में वितरित होने वाले अनाज की गुणवत्ता काफी निम्न स्तर की है. मेरे द्वारा कई बार शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के भ्रमण के दौरान राशन दुकानों का निरीक्षण करने पर चावल की गुणवत्ता काफी खराब पायी गई. चावल में कचरा,इल्ली, चावल का टूटा होना पाया गया. इसके अलावा राशन दुकानों का समय पर न खुलना, राशन की सही मात्रा न दिया जाना आदि समस्याओं के संबंध में आमजनों द्वारा मुझे अवगत कराया गया तथा मेरे द्वारा निरीक्षण करने पर भी यह बातें सत्य पायी गईं. इसके अलावा स्कूलों में भी मध्यान्ह भोजन हेतु वितरित होने वाले अनाज की गुणवत्ता भी काफी निम्न स्तर की पायी गई है जिसके खाने में बच्चों का कोई रुझान नहीं है. जो बच्चे इस दूषित खाद्यान्न को खा रहे हैं, खाने के बाद उनके बीमार होने की घटनाएं अक्सर हमें ज्ञात होती रहती हैं. मेरे द्वारा समय समय पर निरीक्षण उपरान्त संबंधित विभागीय अधिकारियों को तत्संबंध में पत्राचार किया जाता रहा है किन्तु आज तक प्रभावी कार्यवाही अपेक्षित है. अतः मैं सदन से अनुरोध करता हूं कि इस विषय पर शीघ्र उचित कार्यवाही कर खाद्यान्न वितरण व्यवस्था एवं वितरित अनाज की गुणवत्ता सुधारने हेतु प्रभावी कार्यवाही करने की कृपा करें.
(3) विधानसभा क्षेत्र पथरिया में पेयजल संकट हेतु बंद पड़े जल स्रोतों को चालू कराये जाने.
श्री लखन पटेल(पथरिया)--अध्यक्ष महोदय, विधानसभा क्षेत्र पथरिया के अधिकांश ग्राम में जल स्तर दिनोदिन काफी नीचे जा रहा है जिसके कारण गांवों में पेयजल का भारी संकट व्याप्त हो गया है. काफी हैंडपंप बिगड़े पड़े हैं तथा काफी हैंडपंप जल स्तर नीचे होने से बंद हो गये हैं. गांवों में अन्य स्रोतों से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग ग्रामीणों द्वारा की गई है. कृपया शीघ्र पेयजल की व्यवस्था की जावे.
(4) ब्यावरा विधानसभा क्षेत्र के सुठालिया नगर में पुराने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के नये भवन में स्थानांतरण न होने.
श्री नारायण सिंह पंवार(ब्यावरा)--अध्यक्ष महोदय, राजगढ़ जिले के विधानसभा क्षेत्र ब्यावरा के अंतर्गत नगर सुठालिया में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा आमजरों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दृष्टि से वर्ष 2013-14 में 1 करोड़ 21 लाख रुपये की लागत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सुठालिया हेतु नवीन भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई थी. उक्त भवन का निर्माण पूर्ण हुए भी लगभग डेढ़ वर्ष हो चुका है. लेकिन उक्त भवन में वर्तमान तक विद्युतीकरण कार्य एवं पदस्थ स्टाफ हेतु आवासीय भवनों का निर्माण नहीं कराये जाने से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र को स्थानांतरित नहीं किया जा सका है. जिससे पुराने भवन में ही स्वास्थ्य सुविधा आमजनों को दी जा रही है. लेकिन पुराने भवन में स्थान अभाव के कारण कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व निर्मित भवन का वर्तमान तक उपयोग नहीं किये जाने से आमजन में आक्रोश व्याप्त है.
(5) पोहरी विधान सभा क्षेत्र के ग्रामों में पेयजल संकट
श्री प्रहलाद भारती (पोहरी) - अध्यक्ष महोदय,
(6) सीहोर के ग्राम खेरी के पहुंच मार्ग का घटिया निर्माण होना
श्री शैलेन्द्र पटेल (इछावर) - अध्यक्ष महोदय, सीहोर जिले के अंतर्गत इछावर विधान सभा के ग्राम खेरी तहसील इछावर के पहुंच मार्ग का निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा किया गया है. इस डामर मार्ग की स्थिति बड़ी दयनीय हो गई है. यह डामर मार्ग पूरा उखड़ गया है, रोड गड्ढे में हो गई है. आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं. अतः इस रोड का पुनः निर्माण कराया जाय.
श्री मेहरबान सिंह रावत - (अनुपस्थित)
(7) श्योपुर के खैरकछा ग्राम में अभ्यारण्य के लिए ली गई भूमि का मुआवजा न मिलना
श्री रामनिवास रावत (विजयपुर) - अध्यक्ष महोदय,
(8) छतरपुर शहर में बायपास मार्ग न बनने से दुर्घटनाएं होना
श्रीमती ललिता यादव (छतरपुर) - अध्यक्ष महोदय,
(9) कुक्षी क्षेत्र में विद्युत कटौती को समाप्त किया जाना
श्री सुरेन्द्र सिंह हनी बघले (कुक्षी) - अध्यक्ष महोदय,
मेरी विधानसभा में फीडर सेपरेशन का काम अधूरा है. कृषि फीडर से गांव की बिजली को जोड़ दिया गया है, जिससे ग्रामीण जनता को 24 घंटे बिजली नहीं मिल रही है. कई गांवों में जो फीडर सेपरेशन का काम हुआ है, वहां पर भी तार और पोल टूट गये हैं, कृपया उचित कार्यवाही करें.
श्री आरिफ अकील ( भोपाल उत्तर ) -- अध्यक्ष महोदय विकलांग, अंधे, लूले और लंगड़े लोग धरने पर बैठे हैं उन्होंने आमरण अनशन किया है परंपरा रही है कि कई मर्तबा अध्यक्ष जी ने बुलाकर व्यवस्था करवायी है. वह अपनी पेंशन और दूसरी मांगों के लिए बात कर रहे हैं आपकी मेहरबानी हो जाय या तो मेरे ध्यानाकर्षण पर चर्चा करा लें या तो उनको बुलाकर उनकी मांगों पर मदद करवा दें. आपको भी सबाब मिलेगा, सबाब का काम है सभी विकलांग लोग हैं. अनश्चितकाली धरने आमरण अनशन पर बैठे हैं.
डॉ नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय यह क्या है कि आपने यहां पर एसी चलवा दिया है. आज गौर साहब अलग ही अंदाज में हैं गुलबंद वगैरह पहनकर आये हैं. गुलबंद का मतलब सर्दी से प्रभावित एसी के कारण है या इन्होंने किसी उससे प्रभावित होकर पहना है.
अध्यक्ष महोदय -- किसी उससे यानि क्या.
श्री बाबूलाल गौर -- अध्यक्ष महोदय यह गुलबंद अभिमंत्रित है, जो इसको छूयेगा उसका दिमाग ठीक नहीं रहेगा.
श्री आरिफ अकील -- और जो गले में डालेगा उसका. अध्यक्ष महोदय मेहरबानी करके उनको बुला लीजिए आपको सबाब मिलेगा हम आपसे अनुरोध कर रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय -- आपकी बात पर विचार कर लेंगे.
श्री तरून भनोत --अध्यक्ष महोदय, गत 26 तारीख को जबलपुर में एक बहुत ही हृदयविदारक घटना घटी है. एक घर में जब पूजन का कार्यक्रम चल रहा था तब तीन सिलेण्डर फटे, जिसमें करीब 15 लोग घायल हुए थे और कल उनमें से 5 महिलाओं की मृत्यु हो गई है. मैं यह चाहता हूं कि स्वास्थ्य मंत्री जी जो बाकी बचे गंभीर मरीज हैं उसमें से 5 की स्थिति अभी भी बहुत चिंताजनक है तत्काल अगर हम उनको किसी बेहतर अस्पताल में शिफ्ट करा सकते हैं तो करायें उनका समुचित इलाज कराया जाय और एक बहुत पुरानी मांग जबलपुर मेडीकल कालेज में बर्न यूनिट की पड़ी है. इसके लिए केन्द्र से राशि भी स्वीकृत है उसकी व्यवस्था करायी जाय.
श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्यक्ष महोदय प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं चल रही हैं. इन बोर्ड परीक्षाओं के चलते बच्चों पर इतना दवाब है कि आत्महत्या की घटनाएं बढ़ती जा रही है. यह बहुत ही संवेदनशील मामला है. छोटे बच्चों की जिंदगी और भविष्य का सवाल है.
अध्यक्ष महोदय -- उसको ध्यानाकर्षण में ले रहे हैं.
समय 11.42 पत्रों का पटल पर रखा जाना.
विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन का 57 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-14
उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) -- अध्यक्ष महोदय मैं मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 (क्रमांक 22 सन् 1973) की धारा 47 की अपेक्षानुसार विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन का 57वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-14 (1 जुलाई 2013 से 30 जून 2014 तक ) पटल पर रखता हूं.
मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड का तेरहवां वार्षिक प्रतिवेदन 2014-15
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ( डॉ नरोत्तम मिश्र ) -- अध्यक्ष महोदय मैं कंपनी अधिनियम 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड का तेरहवां वार्षिक प्रतिवेदन 2014-15 पटल पर रखता हूं.
मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का लेखा परीक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2013-14
राज्यमंत्री नगरीय विकास एवं पर्यावरण ( श्री लाल सिंह आर्य ) -- अध्यक्ष महोदय मैं जल अधिनियम 1974 की धारा 40 की उपधारा (7) एवं वायू अधिनियम 1981 की धारा 36 की उपधारा (7) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का लेखा परीक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2013-14 पटल पर रखता हूं.
समय 11.44
ध्यानाकर्षण
मण्डला जिले के ग्राम घोटा में निजी भूमि पर कन्या छात्रावास का निर्माण किये जाने से उत्पन्न स्थिति
श्री राम प्यारे कुलस्ते ( निवास )-- माननीय अध्यक्ष महोदय
राज्य मंत्री, स्कूल शिक्षा (श्री दीपक जोशी) -- माननीय अध्यक्ष महोदय,
श्री रामप्यारे कुलस्ते -- माननीय अध्यक्ष महोदय, ये बात तो आ गई है कि निर्माण कार्य खसरा नं. 42 में हुआ है, वह आदिवासी किसान की जमीन है. जैसा कि मैंने ध्यान आकर्षण की सूचना में बताया है कि निर्माण कार्य के पूर्व के समय भी गांव वाले और स्वयं कृषक के द्वारा आपत्ति करने के बावजूद निर्माण कार्य किया गया. सरकारी जमीन बताकर प्राइवेट जमीन में निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ, धन का अपव्यय हुआ. माननीय मंत्री जी ने कहा है कि 19 लाख के करीब खर्च हुआ है तो निश्चित रूप से धन का अपव्यय हुआ है. दूसरी बात मैं यह कह रहा हूँ कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्यवाही करेंगे ? एक और विषय इसमें यह भी आता है कि राष्ट्रीय राजमार्ग की अधिसूचना इसके पूर्व भी हो चुकी थी तो अधिसूचना होने के बाद भी जान-बूझकर कार्य को बाधित करना, इस तरह की स्थिति निर्मित करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे क्या ? और जो पैसे का अपव्यय हुआ है उसकी वसूली के लिए क्या कार्यवाही करेंगे ?
श्री दीपक जोशी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, परियोजना संचालक, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान द्वारा दिनांक 04.02.2016 को जिला कलेक्टर को जांच कर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने हेतु निर्देश दिए गए थे. कलेक्टर द्वारा प्रथम दृष्टव्य आर.आई. और पटवारी को दोषी पाए जाने पर उनको सस्पेंड करने की कार्यवाही कर दी गई है. आगामी जांच प्रतिवेदन आने के बाद आगामी कार्यवाही प्रचलित की जाएगी.
श्री रामप्यारे कुलस्ते -- माननीय अध्यक्ष जी, राष्ट्रीय राजमार्ग में जो जमीन आ रही है उसका अवार्ड तो घोषित कर दिया गया है परंतु किसान को क्या दिया जा रहा है जिसको नुकसान हुआ है और हमारे छात्र-छात्राओं को आवासीय व्यवस्था में जो असुविधा हुई और उस वसूली के बारे में एक बार मंत्री जी आश्वस्त कर दें तो मैं समझता हूँ कि अच्छा होगा.
श्री दीपक जोशी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि हमने पटवारी और आर.आई. को कलेक्टर के निर्देश के बाद सस्पेंड कर दिया है और चूँकि अभी रिपोर्ट आई नहीं है अभी एकाध हफ्ता ही हुआ है तो दो हफ्ते के अंदर जैसे ही रिपोर्ट आएगी, जो उसमें दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्यवाही करेंगे और छात्रावास को बनाने के लिए पुनरीक्षित लागत और जमीन का आवंटन भी हमने ले लिया है, शीघ्रातिशीघ्र वहां पर छात्रावास बना दिया जाएगा.
श्री रामप्यारे कुलस्ते -- माननीय अध्यक्ष महोदय, वसूली कब तक कर ली जाएगी.
अध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी ने वसूली का कहा ही नहीं.
श्री दीपक जोशी -- जांच रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी, अभी जांच रिपोर्ट आई नहीं है.
(2) रीवा शहर में प्रदूषित पेयजल प्रदाय से उत्पन्न स्थिति
श्री सुन्दरलाल तिवारी(गुढ़)-- अध्यक्ष महोदय,
राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं पर्यावरण(श्री लाल सिंह आर्य)-- अध्यक्ष महोदय,
श्री सुन्दरलाल तिवारी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने कहा है कि कोई आक्रोश जनमानस में नहीं है. आक्रोश है कि नहीं, इसका मापदण्ड आपके पास क्या है मुझे मालूम नहीं, लेकिन यह वहां के स्थानीय अखबार हैं जिनमें पेयजल की समस्या का विधिवत बिन्दुवार दिया है कि यह अशुद्ध पानी दिया जा रहा है और रीवा में रोज अखबारों में यह प्रकाशित हो रहा है. नगर निगम के पार्षदों ने आंदोलन किया, आयुक्त को ज्ञापन दिया. वहां के जिले का विधायक होने के नाते हमने भी नगर निगम के आयुक्त को हमने ज्ञापन दिया. इसके बाद कमिश्नर, रेवेन्यू को ज्ञापन दिया. इसके बाद हम एस.पी. से मिले अपराध पंजीबद्ध करने के लिए और रेवेन्यू कमिश्नर ने मुझे पत्र भी लिख के दिया कि मैं इसकी जांच कराऊंगा और जांच के उपरांत शुद्ध पानी, पीने योग्य पानी मैं शहरवासियों को दूंगा. मैं आपसे यह निवेदन करना चाहता हूँ कि वहां बहुत सारी पाइप लाइनें ऐसी हैं जो सीवर,जहां से गंदा पानी जाता है, उनके बीच में बिछाई हुई है. वह जगह जगह फूटी हुई हैं, टूटी हुई हैं और जब उनका पानी का फोर्स कम हो जाता है, पानी टंकियों से देना बंद हो जाता है तो गंदा पानी उन पाइपों में आकर के आम जनमानस के घरों में जाता है और उसको वे पी रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय--- कृपया प्रश्न करें.
श्री सुंदरलाल तिवारी ---- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि क्या इस बात की आप गांरटी या जिम्मेदारी लेंगे और जांच कराएंगे कि यह पुरानी सड़ी हुई पाइपलाइन सीवर ड्रेनेज से कहाँ –कहाँ पार हो रही है, उनको तुरंत हटवाकर और उनको दुरुस्त करवाएंगे. दूसरा मेरा यह कहना है कि शुद्ध जल प्राप्त करना हमारा संवैधानिक अधिकार है , यह सुप्रीम कोर्ट के द्वारा भी निर्धारित हो गया. इनका जो पाल्युएशन बोर्ड है, जो एक्ट है, उसमें जनता को कोई अधिकार नहीं दिया गया है उसमें यह है कि हम अदालत में भी कोई कंपलेंट दायर नहीं कर सकते हैं. कंपलेट दायर करने का अधिकार शासन को है. अब हम पीने के गंदे पानी की शिकायत करने के लिए थाने में जाते हैं या कहीं और शिकायत करते हैं तो कोई कार्यवाही नहीं हो पाती है. मेरा कहना है कि एक्ट में जो यह प्रोविजन इन्होंने बना रखा है कि प्रदूषण बोर्ड ही उसमें कंपलेंट दायर करेगा तो क्या यह अधिकार आम जनमानस को मिलेगा कि वह एक स्टेबलिश लेबोरेटरी से उस पानी की जांच करायें और अगर वह गलत पाया जाता है तो उसको सीधे अपराध में कंपलेंट दायर करने का अधिकार मिले या पुलिस में रिपोर्ट करने का अधिकार मिले. आप इस कानून में यह सुधार कराएंगे क्या.
श्री लालसिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जिन विषयों को रखा हैं , उसमें मैं एक आग्रह तो यह करना चाहता हूं कि मैंने पहले ही स्वीकार किया है कि पुरानी पाइपलाइन थी और पानी के फोर्स से पुरानी पाइपलाइनें टूटती भी हैं लेकिन नगर निगम समय-समय पर उनको ठीक भी कराता है और इसी समस्या के निदान के लिए हमने अमृत योजना स्वीकृत की है. अध्यक्ष महोदय, हमारी निविदायें जारी हो चुकी हैं, आठ-दस दिन में निविदायें खुलना है और इसके बाद यह काम होना शुरु हो जाएगा. हमारा प्रत्येक परिवार को लगभग 135 लीटर पानी प्रतिव्यक्ति को प्रति दिन 2018 तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का संकल्प है और माननीय सदस्य के पास कोई अथेंटिक जानकारी इस प्रकार की हो कि जहाँ पाइप-लाइन फूटी है और वहाँ ठीक नहीं हुई है तो हम 8 दिन के अन्दर उन पाइप-लाइनों को वहाँ ठीक करा देंगे.
श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, मेरा एक सवाल और था कि यह जो इनका कानून है, जल प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण अधिनियम....
अध्यक्ष महोदय-- कॉल अटेंशन में कानून संशोधन की बात कैसे कर रहे हैं?
श्री सुन्दरलाल तिवारी-- संशोधन की बात नहीं कर रहा हूँ. आदमी का जो मौलिक अधिकार है...
अध्यक्ष महोदय-- आप उसके लिए एक्ट ले आइये, संशोधन अधिनियम.
श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि क्या इस दिशा में सरकार ध्यान देगी, माननीय मंत्री जी ध्यान देंगे कि उसमें संशोधन हो? आम आदमी को दूषित पानी से लड़ने का अधिकार मिले. यह मेरा और सभी का सवाल है कोई मेरे अकेले का सवाल नहीं है. सभी सदस्यों का, हर नागरिक का सवाल है. इस पर भी आप कुछ विचार करेंगे?
अध्यक्ष महोदय-- विचार करने की कह रहे हैं.
श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जल एवं वायु की जो जाँच होती है उसके केन्द्रीय नियम बने हैं उसके अंतर्गत ही विभिन्न प्रदेशों में काम किया जाता है, उसमें संशोधन करने का किसी भी प्रदेश को अधिकार नहीं है इसलिए वह संभव नहीं है.
श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, मैं अंतिम बात यह कहना चाहता हूँ कि फ्लोरोसिस नियंत्रण, खारा पानी, लौहत्व, नाइट्रेट, इन सबकी अधिकता रीवा शहर में पानी में है और जिसकी वजह से वहाँ लोगों को गंभीर बीमारियाँ फैल रही हैं तो इन बीमारियों का क्या प्रतिशत है, इनकी जाँच करने के लिए, क्या कोई अलग से व्यवस्था करेंगे?
श्री मनोज निर्भयसिंह पटेल-- माननीय मंत्री जी, वहाँ से तिवारी जी को हटा लो तो वह सारी समस्याओं का निराकरण हो जाएगा. पानी भी स्वच्छ हो जाएगा और बीमारियों से वहाँ के क्षेत्र के लोग भी मुक्त हो जाएँगे.
अध्यक्ष महोदय-- यह कार्यवाही से निकाल दें.
श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, मैं पुनः कहना चाहता हूँ ये माननीय सांसद भी रहे हैं, वरिष्ठ सदस्य हैं, मेरा कहना है कि आप अथेंटिक जानकारी दीजिए. इस प्रकार की कहीं कोई बीमारी फैल रही है या कुछ हो रहा है. मुझे जानकारी दीजिए. मैं जब कह रहा हूँ कि आप जानकारी दीजिए हम उस पर परीक्षण करा लेंगे, उस पर कार्यवाही करेंगे.
अध्यक्ष महोदय-- आप पानी की जाँच के लिए पत्र लिख दें. वे फिर उसकी जाँच कराएँगे.
श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अध्यक्ष महोदय, मैं आपको अकेले जानकारी दे दूँगा लेकिन जनता रोज मंत्री जी को जानकारी कहाँ देगी, उसकी व्यवस्था की मैं बात कर रहा हूँ.
अध्यक्ष महोदय-- वे कह रहे हैं आप जनता की तरफ से दे दीजिए.
श्री सुन्दरलाल तिवारी-- धन्यवाद.
श्री लाल सिंह आर्य-- वह गारंटी मध्यप्रदेश सरकार की है आप चिन्ता मत करिए.
12.05 बजे प्रतिवेदन की प्रस्तुति
प्रत्यायुक्त समिति का सप्तम प्रतिवेदन.
श्री शंकरलाल तिवारी (सभापति)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रत्यायुक्त विधान समिति का सप्तम् प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूँ.
12.06 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति
अध्यक्ष महोदय--आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.
12.06 बजे वर्ष 2016-2017 की अनुदानों की मांगों पर मतदान
राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य)--अध्यक्ष महोदय, मैं,राज्यपाल महोदय
श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा पाइंट ऑफ ऑर्डर है. कटौती प्रस्ताव और मांगों पर चर्चा प्रारंभ हो चुकी है. कौल-शकधर की जो पुस्तक है उसमें पेज 855 पर स्पष्ट दिया हुआ है. "मंत्रालय के वार्षिक प्रतिवेदनों और कार्य निष्पादन परिणामी बजटों का परिचालन, बजट चर्चा के संबंध में मंत्रालय के वार्षिक प्रतिवेदनों की प्रतियां सदस्यों को उपलब्ध कराई जाती हैं इन प्रतिवेदनों में चालू वर्ष के दौरान मंत्रालय के कार्य निष्पादन के संबंध में आवश्यक जानकारी और उसके कार्यकरण की पृष्ठभूमि तथा अगले वित्तीय वर्ष का कार्यक्रम भी दिया जाता है."
मूलत: इससे ही सदस्यों को जानकारी मिलती है और चर्चा कराई जाती है. पैरा दो में स्पष्ट दिया है कि "वार्षिक प्रतिवेदन सामान्यत: बजट पेश किए जाने के बाद परन्तु मंत्रालय विशेष से संबंधित मांगों पर सभा में चर्चा होने से पहले सदस्यों को उपलब्ध कराए जाते हैं. विभागों से संबंधित स्थायी समिति प्रणाली की शुरुआत होने से इन समितियों को भी अनुदान की मांगों पर विचार करने के संबंध में वार्षिक प्रतिवेदनों और कार्य निष्पादन प्रणामी बजटों की प्रतियां उपलब्ध करा दी जाती हैं."
अध्यक्ष महोदय, लोक सभा में एक बार बिना प्रशासकीय प्रतिवेदन के चर्चा की बात आई किसी ने आपत्ति की तो माननीय लोकसभा अध्यक्ष ने...
संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)--प्रतिवेदन तो बंटे हैं यह जिस विषय पर चर्चा कर रहे हैं प्रतिवेदन तो दिए गए हैं, यह सामने टेबिल पर रखे हैं. अगर मैं गलत बोल रहा हूँ तो यह सामने रखे हैं.
श्री रामनिवास रावत--आप संसदीय कार्य मंत्री हैं आप मेरी पूरी बात सुन लें.
अध्यक्ष महोदय--उनकी पूरी बात आ जाने दें फिर उत्तर दे दें.
श्री रामनिवास रावत--अब मिल भी जायेगा तो कैसे पढ़ पायेंगे. मेरी पूरी बात सुन लें अध्यक्ष जी ने स्पष्ट निर्देश दिये थे कि मंत्रियों को यह बात सुनिश्चित करनी चाहिये कि सामान्य चर्चा प्रारंभ होने से पूर्व ही यह प्रतिवेदन सदस्यों को उपलब्ध करा दिये गये हों, क्योंकि जब तक यह विभिन्न प्रतिवेदन सदस्यों को नहीं मिलते, तब तक सामान्य चर्चा का कोई लाभ नहीं और यह आवश्यक नहीं है कि सभी सदस्य प्रत्येक विषय में रूचि रखते हों, परन्तु सामान्य चर्चा का उद्देश्य यही होता है कि सभी विषयों पर चर्चा हो सके. माननीय अध्यक्ष महोदय, इसके लिये लोक सभा में वर्ष 1969 में प्रशासनिक सुधार आयोग गठित किया गया और उन्होंने सिफारिशें प्रस्तुत की कि उसके पैरा -856 के अंतिम पैरा की चार लाईन पढ़कर बता हूं- '' बजट सत्र प्रारंभ होने के पूर्व सरकार को सभी मंत्रालयों एवं विभागों को यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया जाता है कि मंत्रालयों के वार्षिक प्रतिवेदनों और कार्य निष्पादन आऊट कम बजटों की प्रतियां लोक सभा सचिवालय को पर्याप्त संख्या में पहले से उपलब्ध करा दी जायेंगी, ताकि संबंधित मंत्रालय की अनुदान मांगों पर चर्चा प्रारंभ होने से पहले से एक सप्ताह पूर्व ही उन्हें सदस्यों को परिचालित किया जा सके.''
माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें यह व्यवस्था है. अभी प्रशासनिक प्रतिवेदन आ गये होंगे. लेकिन हमें बिना कहे एक दिन पहले मिल जाते हैं. क्या अभी प्रतिवेदन लेकर के कोई भी सदस्य विभाग की पूरी जानकारियां प्राप्त कर सकता है ? एक सप्ताह पूर्व उन्होंने प्रस्तुत करने की सिफारिश की है. यह कौल एण्ड शकधर की किताब में लिखा हुआ है. अध्यक्ष महोदय मेरा निवेदन है कि सदन को नियमों और प्रक्रियाओं से चलाएं.(XXX)
अध्यक्ष महोदय :- यह कार्यवाही से निकाल दें.
श्री रामनिवास रावत :- इस पर चर्चा रोकें.यह उचित नहीं है. हम आप से भी निवेदन करेंगे की आप भी हमें संरक्षण दें. अभी हम क्या चर्चा कर पायेंगे.
संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) :- अध्यक्ष महोदय, मोटी-मोटी किताब लेकर बोलने से कोई बात वजनदार तो हो नहीं जाती है.
(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय :-आपने जो पाईंट आफ आर्डर उठाया है उसके बारे में संसदीय कार्य मंत्री जी का क्या कहना है. (व्यवधान) आप सभी लोग बैठ जायें. यह कार्यवाही से निकाल दें जो बाद में जो कहा है.
डॉ. नरोत्त्म मिश्र :- अध्यक्ष महोदय, रामनिवास जी का दल उनको प्राथमिकता देता नहीं है, न बजट में बोलने को देता है न राज्यपाल के अभिभाषण पर बोलने देता है. अब अपनी भड़ास निकालने के लिये असत्य वाचन कर देते हैं. यह आर. एस.एस से आपका क्या रिश्ता है, हम स्वयं सेवक हैं, हमें गर्व है आर.एस.एस. के स्वयं सेवक होने का. (व्यवधान)
श्री रामनिवास रावत :- मैं सचेतक हूं. (व्यवधान) नाम मैं देता हूं.
डॉ. नरोत्तम मिश्र :- मुझे गर्व है, आर. एस. एस. के स्वयं सेवक होने पर गर्व है. (व्यवधान)
श्री रामनिवास रावत :- मैं नाम देता हूं और आप कह रहे हैं कि मुझे मौका नहीं मिलता. (व्यवधान)
डॉ. नरोत्तम मिश्र :-हम आर.एस.एस. के स्वयं सेवक हैं, यह रिश्ता है आर.एस.एस. हमारा.
(..व्यवधान..)
श्री रामनिवास राव - (XXX)
अध्यक्ष महोदय - कृपया बैठ जाएं. क्या नियम कानून से विधान सभा नहीं चलाओगे.
(..व्यवधान..)
डॉ.नरोत्तम मिश्र - (XXX)
डॉ.गोविन्द सिंह - (XXX)
डॉ.नरोत्तम मिश्र - (XXX)
अध्यक्ष महोदय - यह कार्यवाही से सब निकाल दें.
डॉ.नरोत्तम मिश्र - (XXX)
श्री रामनिवास रावत - (XXX)
अध्यक्ष महोदय - यह कार्यवाही से निकाल दें.
डॉ.नरोत्तम मिश्र - हम राष्ट्रभक्त हैं.
श्री रामनिवास रावत - यह आजाद भारत है. सदन नियम कानूनों से चलेगा. यह कोई तरीका नहीं है.(..व्यवधान..) अध्यक्ष महोदय,मेरी अपील है कि चर्चा स्थगित की जाये और आज प्रशासनिक प्रतिवेदन प्रस्तुत हुए हैं कल चर्चा कराई जाए और स्थाई आदेश दिये जायें कि एक दिन पूर्व प्रशासनिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किये जायें.
डॉ.गोविन्द सिंह - (XXX)
अध्यक्ष महोदय - कृपया बैठ जाएं.(...व्यवधान..) सभी सदस्य कृपया बैठ जाएं. कृपया बैठ जाएं.
डॉ.नरोत्तम मिश्र - (XXX)
गर्भगृह में प्रवेश
( इंडियन नेशनल कांग्रेस के श्री रामनिवास रावत एवं अन्य सदस्य संसदीय कार्य मंत्री के कथन के विरोध में गर्भगृह में आए.)
अध्यक्ष महोदय - यह विषय नहीं है.
(..व्यवधान..)
डॉ.नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, (XXX).
(..व्यवधान..)
डॉ.गोविन्द सिंह - (XXX)
अध्यक्ष महोदय - कृपया सभी बैठ जाएं. दोनों तरफ के माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया बैठ जाएं.
डॉ.नरोत्तम मिश्र - माननीय अध्यक्ष महोदय, राहुल गांधी पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज है कि नहीं. देशद्रोही पार्टी के लोग हैं यह.
(..व्यवधान..)
श्री लालसिंह आर्य - माननीय अध्यक्ष महोदय, (XXX)
अध्यक्ष महोदय - सदन की कार्यवाही दस मिनट के लिये स्थगित.
(12 बजकर 17 मिनट पर सदन की कार्यवाही दस मिनट के लिये स्थगित की गई.)
12.36 बजे विधान सभा की कार्यवाही पुनः समवेत हुई.
{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.
अध्यक्ष महोदय--सारी बातें कार्यवाही से निकाल दें. आप लोग कृपया बैठ जाएं. कृपया आप लोग सदन को चलने दें.
(व्यवधान)
श्री रामनिवास रावत--यह भाजपा की संस्कृति है.
डॉ.नरोत्तम मिश्र--हमको संस्कृति बता रहे हैं इतना तो बताएं कि राहुल गांधी पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज है कि नहीं. आपका प्रदेश अध्यक्ष संघ कार्यालय में झण्डा फहराने गया था कि नहीं.
(व्यवधान)
श्री रामनिवास रावत--तुमसे पाठ नहीं सीखना है और तुम होते कौन हो पाठ सिखाने वाले.
डॉ.नरोत्तम मिश्र--राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज है कि नहीं देशद्रोहियों के समर्थक हैं.
(व्यवधान)
डॉ.गोविन्द सिंह-- (XXX).
अध्यक्ष महोदय--सब लोग बैठ जाएं अजय सिंह जी कुछ कह रहे हैं.
श्री अजय सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मामला बहुत ही उत्तेजित हो रहा है कृपया सब लोग शांत हो जाएं. अध्यक्ष महोदय, माननीय रावत जी ने एक व्यवस्था का प्रश्न उठाया जिन विभागों की किताबें विधायकों को नहीं मिली उस पर इन्होंने अपनी आपत्ति दर्ज करायी अपने व्यवस्था के प्रश्न में यदि यह सही है लोकसभा में पारित हो चुका उनका आदेश है तो यह सुनिश्चित कराया जाए कि विधायकों को यह पुस्तिका पहले मिले. हफ्ते भर न सही 2-3 दिन पहले मिल जाए जिससे हम लोग आपसे चर्चा करने थोड़ा विभाग का सहयोग कर सकें. पिछली बार भी विधान सभा में यही बात उठायी गई थी आपने उस पर स्पष्ट आदेश दिये थे अगले दफे से ऐसा नहीं होगा. माननीय संसदीय मंत्री महोदय यदि आप सुनिश्चित कर दें कि जिन विभागों की अभी चर्चा होनी है उनकी किताबें एक दिन पहले मिल जाएं. वैसे तीन दिन पहले मिलना चाहिये, मैं तो यह कह रहा हूं कि किताबें 2 दिन पहले मिल जाएं. वैसे 7 दिन पहले देने के नियम है. जो विभाग आज चर्चा में है जिनकी किताबें उपलब्ध नहीं हुई हैं उनको चर्चा के लिये आगे बढ़ाया जाए और जिनकी किताबें आ चुकी हैं उनको चर्चा में ले लिया जाए, इतनी सी बात है.
डॉ.नरोत्तम मिश्र--अध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है मेरा इसमें यह निवेदन है माननीय अजय सिंह जी से कि यह सच है कि यह चारों प्रतिवेदन जब प्रश्न उठा था यहां पर आ चुके थे, लेकिन इस बात में आंशिक सचाई है कि एक प्रतिवेदन में थोड़ा विलंब हुआ है.
डॉं. नरोत्तम मिश्र- एक प्रतिवेदन में थोड़ा विलम्ब हुआ, उसका कारण सिर्फ इतना सा है कि जो क्रम विधान सभा निर्धारित करती है, कल तक के बाद क्रम में एक दम चेंज आ गया, जब चेंज आ गया तो स्वाभाविक रूप से यहां कार्य मंत्रणा समिति का जो प्रतिवेदन सुनाया गया था, उस क्रम से पहले आ गया, लेकिन इसके बाद भी सम्मानित सदस्यों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए हर हाल में यह कोशिश होगी कि हम 24 घण्टे पहले प्रतिवेदन पहुचाएं ।
माननीय अध्यक्ष जी, इसके साथ मेरा एक निवेदन और है कि जब कोई विषय सारगर्भित चल रहा हो, हम उदाहरण किताबों का दे रहे हैं तो किताबों से सुनें, उस वक्त कम से कम राजनीतिक रोटी सेंक कर, यह तीसरी बार इनके चीफ ने (कांग्रेस के सदस्यों की तरफ इशारा करते हुए) ऐसा किया है, तीसरी बार आर.एस.एस. का उल्लेख किया है, यह ठीक नहीं है । माननीय अध्यक्ष जी, जब आपकी व्यवस्था आए तो यह भी आना चाहिए ।
....(व्यवधान)....
अध्यक्ष महोदय- उस बारे में करेंगे ।
डॉं. नरोत्तम मिश्र- यह भी आना चाहिए कि अकारण कोई तनाव पैदा नहीं करना चाहिए ।
अध्यक्ष महोदय- आप बैठ जाएं, व्यवस्था तो देने दें ।
डॉ. नरोत्तम मिश्र- अगर कोई क्रिया करेंगे, तो प्रतिक्रिया होगी ।
......(व्यवधान)...
श्री रामनिवास रावत- यह सदन नियमों कानूनों से चलेगा ।
....(व्यवधान)....
श्री अजय सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, संसदीय कार्य मंत्री उत्तेजित क्यों होते हैं ।
अध्यक्ष महोदय- आप सभी बैठ जाएं, श्री गोपाल भार्गव बोलिए ।
पंचायत मंत्री(श्री गोपाल भार्गव)- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी ने कहा है, सारे के सारे प्रतिवेदन आज की कार्यसूची में, संबधित जिन दोनों विभागों, मंत्रियों के बारे में प्रतिवेदन थे, वह सभी सदस्यों को उपलब्ध करा दिए गए हैं । अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है कि इसमें थोड़ा विलम्ब हुआ है और उसी कारण से जैसा माननीय संसदीय कार्यमंत्री जी ने बताया जो क्रम था,वह क्रम थोड़ा परिवर्तित हुआ, इस कारण से जितने समय पहले दिया जाना चाहिए था, उतने पहले नहीं दिया जा सका, लेकिन मैं यह मानकर चलता हूँ कि यदि हमने आज सुबह या कल रात को यदि उसको दिया है तो पर्याप्त समय है और माननीय सदस्य इतने विद्वान, हैं,ज्ञानी हैं, इतने अनुभवी हैं, वरिष्ठ हैं तो मैं मानकर चलता हूँ कि इसमें उनको परेशान होने की आवश्यकता नहीं है ।
अध्यक्ष महोदय- अब व्यवस्था देंगे, आपने जो विषय उठाया है, प्वाइंट ऑफ आर्डर को स्वीकार किया है । प्वाइंट ऑफ आर्डर पर व्यवस्था सुनेंगे कि वह भी नहीं सुनेंगे ।
श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपसे निवदेन करके सिर्फ एक लाईन ।
अध्यक्ष महोदय- आप बैठ जाइए व्यवस्था दे रहे हैं, अब नहीं, अब उसमें बहुत बहस हो चुकी है ।
श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपकी अनुमति से इसमें दिया हुआ है कि संबंधित मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा होने से एक सप्ताह पूर्व ही उन्हें सदस्यों को वितरित किया जाएगा ।
अध्यक्ष महोदय - उसका ही उत्तर दे रहा हूँ, आप बैठ जाइए ।
अध्यक्ष महोदय- माननीय सदस्य श्री रामनिवास रावत जी ने जो विषय उठाया है, प्वाइंट ऑफ आर्डर के माध्यम से और माननीय सदस्य श्री अजय सिंह जी ने उसके समर्थन में अपनी बात कही है,हमारे सचिवालय से यह बाट दिए गए हैं, किन्तु माननीय मंत्रीद्वय ने संसदीय कार्य मंत्री और शासन की ओर से श्री गोपाल भार्गव जी ने भी अपनी बात रखी और यह कहा कि देर हुई है, दोनों ने स्वीकार भी किया है, मैं भी इस बात को स्वीकार करता हूँ किन्तु कॉल शकधर का आपने कोड किया है, मैं भी कोड करता हूँ, आप कृपया इसको देखें, पृष्ठ 855 मंत्रालयों के वार्षिक प्रतिवेदनों और कार्य निष्पादन परिणामी बजटों का परिचालन,वार्षिक प्रतिवेदन सामान्यत: बजट पेश किए जाने के बाद परन्तु मंत्रालय विषय से संबंधित मांगों पर सभा में चर्चा होने से ..(पहले आप पूरा सुन लें, इसमें समय सीमा नहीं दी है,) समय से पहले सदस्यों को उपलब्ध कराए जाते हैं, विभागों से संबद्व स्थायी समिति प्रणाली की शुरूआत होने से इन समितियों को भी अनुदान की मांगों पर विचार के संबंध में वार्षिक प्रतिवेदनों और कार्य निष्पादन प्रणाली विधेयकों की प्रति उपलब्ध कराएं जो संसदीय समितियों के बारे में है । मंत्रियों को यह बात सुनिश्चित करनी चाहिए कि सामान्य चर्चा प्रारम्भ होने से पहले ही समस्त प्रतिवेदन समस्त सदस्यों को उपलब्ध करा दिए गए हों, 2 बार पेज 855 पर पहले ही आया है । समय सीमा नहीं लिखी, जो समय सीमा आपने पढ़ी है, वह प्रशासनिक सुधार आयोग 1969 में बना था, उस प्रशासनिक सुधार आयोग ने यह रिपोर्ट दी थी जिसको आप कॉल शकधर की कामेंट्री कहकर, जिसको आप कोड कर रहे हैं, वह कॉल शकधर की कामेंट्री नहीं है, वह कॉल शकधर की सूचना है कि प्रशासनिक सुधार आयोग ने यह रिपोर्ट दी थी कि 7 दिन पहले प्रस्तुत हो जाना चाहिए । यह रिपोर्ट है. यह व्यवस्था नहीं है. फिर भी आपने जो पाइन्ट ऑफ ऑर्डर उठाया है, मैं उससे सहमत हूँ.
मैं माननीय मंत्रीगणों को भी निर्देशित करता हूँ कि इस चर्चा के प्रारम्भ होने के कम से कम 2 दिन पूर्व प्रतिवेदन उपलब्ध करवायें. किन्तु माननीय सदस्य श्री रामनिवास रावत ने सचिवालय की तुलना और सचिवालय पर सीधा आक्षेप लगाया है. यह अत्यन्त खराब बात है. मध्यप्रदेश विधानसभा के सचिवालय पर, इस तरह के आक्षेप भारतवर्ष के संसदीय इतिहास में कभी नहीं लगे. मेरा अनुरोध है कि व्यंग्य या कोई बात करना है तो सत्ता पक्ष से करें, विधानसभा सचिवालय से न करें तो उचित होगा. (सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के माननीय सदस्यों द्वारा मेजों की थपथपाहट)
श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, मैंने विधानसभा सचिवालय पर आरोप नहीं लगाया है. मैंने नियमों को कोड करते हुए, आपने जो पढ़ा वह सही है. फिर भी, यदि ऐसा लगता है तो मैं इसे वापिस लेता हूँ.
अध्यक्ष महोदय - धन्यवाद.
श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, विधानसभा 10.30 बजे प्रारम्भ होती है या तो हम सब सदस्य विधानसभा छोड़कर बाहर जायें और प्रतिवेदन लेकर पढ़ें.
अध्यक्ष महोदय - अब यह विषय समाप्त हो गया है. श्री रामनिवास रावत जी अनुरोध है कि वे व्यवधान न डालें. (व्यवधान)
श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे पीड़ा हुई है. आपने यह कहा कि मैंने सचिवालय पर आरोप लगाये हैं तो मैंने सचिवालय पर आरोप नहीं लगाये हैं.
अध्यक्ष महोदय - आपकी बात आ गई. (व्यवधान)
श्री राम निवास रावत - अध्यक्ष महोदय, लेकिन मैंने सरकार पर जरूर लगाया है.
अध्यक्ष महोदय - आपकी बात आ गई है कि आपने नहीं लगाया है. श्री जितु पटवारी अपना विषय प्रारंभ करें. (व्यवधान)
डॉ. नरोत्तम मिश्र - सरकार पर पूरे असत्य और मिथ्या आरोप लगाना और छेड़ने की इनकी परम्परा गलत है.
अध्यक्ष महोदय - नहीं, कंडीशनल उन्होंने उसको वापिस ले लिया है. विषय यहीं समाप्त हो जाता है. माननीय मंत्री जी आप बैठ जायें. (व्यवधान)
डॉ. नरोत्तम मिश्र (श्री रामनिवास रावत की ओर इशारा करते हुए) - आप उसमें राष्ट्रभक्त का उल्लेख करोगे. क्या आपको यहां संगठन का उल्लेख करना जरूरी है ? आप राष्ट्रभक्त संगठन का उल्लेख करोगे तो क्या हम देशद्रोही का उल्लेख नहीं करेंगे. (व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय - यह विषय समाप्त हो गया है. मैं आपसे सहमत हूँ. माननीय मुख्य सचेतक और माननीय संसदीय कार्यमंत्री कृपया बैठ जाइये. आप लोग बैठ जाएं.
डॉ. नरोत्तम मिश्र - आपका यह तरीका रहेगा तो हमारा भी यही तरीका रहेगा.
अध्यक्ष महोदय - रावत जी तथा मंत्री जी बैठ जाइये. (व्यवधान) आप लोगों से अनुरोध है कि सदन चलने दें. विषय समाप्त हो गया. बैठ जाएं.
श्री जितु पटवारी - आदरणीय अध्यक्ष जी, आपने मुझे अनुदान की मांगों पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिये मैं धन्यवाद देता हूँ और सभी सदन में पारिवारिक एवं हमारे परिवार के सदस्यों से अनुरोध करता हूँ कि जब बजट की बात हो, मुख्यमंत्री जी का, राज्यपाल के अभिभाषण के बाद उन्होंने मध्यप्रदेश का बहुत अच्छे से वर्णन किया है कि इस बात का कि किस तरह से मध्यप्रदेश तेजी से विकास कर रहा है और आप लोगों की भी, अपनी बातों में कई बार मध्यप्रदेश के उच्च मापदण्ड हैं, उसका हवाला दिया है.
मैं समझता हूँ कि सदन में उच्च मापदण्डों का आप ध्यान रखेंगे और जब मैं आपसे बात करूँ तो आप कतई यह न समझें कि मैं कांग्रेस का एम.एल.ए. हूँ. यह समझें कि मैं इस परिवार और मध्यप्रदेश के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं. और मेरा अनुरोध है कि आप भी व्यवस्था बनाने में मदद करेंगे. मुख्यमंत्री जी ने अपने राज्यपाल जी के अभिभाषण में और चूंकि मैं जिन मांगों पर बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं, वे विभाग भी मुख्यमंत्री जी के पास हैं. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश किन किन चीजों में नम्बर एक पर है और लगातार लम्बे एक धारा प्रवाह में उन्होंने कई चीजों को गिनाया. कृषि के क्षेत्र में, उद्योग के क्षेत्र में, रोजगार के क्षेत्र में, शिक्षा के क्षेत्र में और चिकित्सा के क्षेत्र में. चिकित्सा की जहां बात आई और नरोत्तम मिश्र जी की तारीफ न हो, मैं नहीं समझता हूं कि चिकित्सा की बात करना अधूरी रह जायेगी. पहले मुख्यमंत्री जी ने जो बातें कहीं कि किस किस चीज में मध्यप्रदेश अग्रणी है, मुझे खुशी हुई और मुझे लगा भी कि क्या हम पढ़ लिखकर नहीं आते हैं. उन्होंने रामनिवास रावत जी को दो बार टोका कि रामनिवास जी, पढ़ लिख कर आया करो. मुख्यमंत्री जी को इतने आईएएस, आईपीएस सब ब्रीफिंग करते हैं, उसके बाद भी (xx) असत्य बोले और आंकड़ों से..(व्यवधान)..
अध्यक्ष महोदय -- इस शब्द को निकाल दें.
श्री जितू पटवारी -- वे असत्य बोले. मध्यप्रदेश पूरे देश में राजकोषीय घाटे में, यह याद होना चाहिये हम सब को.. (व्यवधान).. मेरे द्वारा (xx) असत्य कहने से आप लोगों को कहीं धक्का लगा तो मैं वह शब्द वापस लेता हूं और उसको असत्य कहता हूं. मेरा आप लोगों से अनुरोध है कि मध्यप्रदेश यह राजकोषीय घाटे के बजट के मामले में देश में नंबर एक पर है. पूरे देश में जितनी भी रिपोर्ट्स आई हैं, भारत सरकार के अलग अलग एजेंसियों के द्वारा आई हैं. मैं जो बोलूंगा, कोड करुंगा. अगर एक भी बात गलत निकल गई, तो आपका जूता और मेरा सिर. मैं आप लोगों से अनुरोध करना चाहता हूं कि पूरी अथेंटिकली बात करुंगा, पूरा सुनना. सुनने में गड़बड़ मत करना. मध्यप्रदेश का राजकोषीय घाटे का बजट यह देश में पहला है, जो सबसे बड़ा है. इसके अलावा छोटे छोटे राज्य मणिपुर, मेघालय, उत्तरांचल, झारखण्ड ये भी मध्यप्रदेश से आगे हैं. मुख्यमंत्री जी ने यह तो कहा कि इसमें नंबर वन पर हैं, पर यह नहीं कहा कि राजकोषीय घाटे में मध्यप्रदेश पीछे से नम्बर वन पर है. मैं अनुरोध करना चाहता हूं कि राष्ट्रीय क्राइम ब्यूरो के भारत सरकार के ये आंकड़े हैं. जो मुख्यमंत्री जी ने कहा, उनका भी भाषण मेरे पास है और मैं उसकी रिपोर्ट भी लेकर आया हूं. सब चीजों का मूल्यांकन करने के बाद महाराष्ट्र जैसा प्रदेश, जो सबसे उन्नतशील प्रदेशों में आता है, वह भी क्राइम में मध्यप्रदेश से पीछे है, जिसमें मुम्बई है, जहां पर आतंकवादी हैं, माफिया हैं. (व्यवधान) मैं डिमांड पर भी चर्चा करुंगा. राज्य सभा में बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार के मंत्री..
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(xx) प्रतिस्थापित शब्द
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श्री लाल सिंह आर्य -- पटवारी जी, यह गृह विभाग पर चर्चा नहीं है, यह सामान्य प्रशासन विभाग की मांगों पर चर्चा है.
श्री जितू पटवारी -- मंत्री जी, आप सुनें, आप सबसे बुद्धिमान राज्यमंत्री हैं इस सरकार के.
अध्यक्ष महोदय -- माननीय सदस्य से मेरा अनुरोध है कि मंत्री जी ठीक कह रहे हैं. पटवारी जी, गृह विभाग की मांगें आयें, तब आप क्राइम पर बोलिये. अभी जो विभाग हैं, न यह बजट पर सामान्य चर्चा है, न राज्यपाल के अभिभाषण पर कृतज्ञता ज्ञापन पर चर्चा है. यह मांगों पर चर्चा है. आप विषय तक सीमित रहेंगे, तो अच्छा रहेगा. नहीं तो सभी सदस्य विषय से बाहर जायेंगे. आप डिमांड्स पर बोलेंगे, तो ठीक रहेगा.
श्री जितू पटवारी -- अध्यक्ष महोदय, आपने बजट पर सामान्य चर्चा दो दिन से कट कर एक दिन कर दी. हम थोड़े इशू सब लेंगे. थोड़ी आप भी मेहरबानी करें, हम संबंधित विभाग की मांगों पर भी चर्चा करेंगे.
अध्यक्ष महोदय -- ऐसे कैसे होगा. फिर सब सिस्टम ही बिगड़ जायेगा. हम अभी डिमांड्स पर चर्चा कर रहे हैं, जिन डिमांड्स पर सरकार ने पैसे मांगे हैं, उन्हीं मांगों पर चर्चा करना पड़ेगा. जब गृह विभाग की मांगें आयेंगी, तब गृह विभाग पर चर्चा करना. जब स्वास्थ्य विभाग की मांगें आयेंगी, तब स्वास्थ्य विभाग पर चर्चा करना. जिस विभाग की चर्चा हो, तब उस विषय पर बात करें. हमको आपकी बात पर एतराज नहीं है, पर आज जो विषय है, उस पर बात करिये.
श्री जितू पटवारी --अध्यक्ष महोदय, मेरा अनुरोध आपसे यह है कि जितू पटवारी अगर आसंदी का सम्मान नहीं करेगा तो कौन करेगा. अध्यक्ष जी मेरे पर तो आपको कितना भरोसा है . मेरा अनुरोध है आपसे कि कुछ बातें आसपास की आयेंगी और उनको सुनना भी चाहिये, हम प्रदेश के हित में सब बातें कर रहे हैं. प्रदेश की जनता ने हम लोगों को विपक्ष में इसलिये रखा है कि सरकार की हम कमियां बताये और मैं समझता हूं कि सत्ता में रहने वाले लोगों को यह आभास होना चाहिये कि वह हमें सुने, फिर सुधार करना. मैं यह थोडे ही कह रहा हूं कि आज सुधार हो जायेगा.
श्री मनोज पटेल -- हमारी शुभकामनायें हैं कि आप लगातार विपक्ष में रहें.
श्री जितू पटवारी-- अध्यक्ष महोदय, सब लोगों से अनुरोध है कि सुनें. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की देश की मंत्री ने राज्यसभा में जो उत्तर दिया है वह मैं बता रहा हूं और उत्तर के आधार पर कुपोषण के मामले में मध्यप्रदेश नंबर एक पर है. 1000 में से 60 बच्चे कुपोषित हैं. किसानों की आत्महत्याओं के मामले में मध्यप्रदेश 3 नंबर पर है.
श्री लाल सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है. सामान्य प्रशासन विभाग की मांग पर चर्चा हो रही है, यह अन्य विभाग की बात कर रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय-- माननीय जितू पटवारी जी, मंत्री जी आपत्ति ले रहे हैं कि जो विषय उनका नहीं है उसका उत्तर वे कैसे देंगे. उनको विभाग की मांगो पर उत्तर देना है.
श्री जितू पटवारी-- मंत्री जी, जो उत्तर आप देना चाहें वह दे देना, बाकी मत देना.
श्री लाल सिंह आर्य -- सदन का समय कीमती है . समय नष्ट मत करिये.
अध्यक्ष महोदय-- ऐसा नही चलेगा. जो विभाग उनका नहीं है उसका उत्तर वे कैसे देंगे.
श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, मेरी व्यवस्था का प्रश्न है.
श्री जितू पटवारी-- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन को बताना चाहता हूं कि किसानों की आत्महत्या के मामले में मध्यप्रदेश देश में नंबर तीन पर है. अब बेरोजगारी की बात करना चाहता हूं.
श्री लाल सिंह आर्य -- मेरी आपत्ति है. विभाग से बाहर की बातों को लिखा नहीं जाये.
श्री जितू पटवारी -- जो आप कहेंगे वह मैं नहीं बोलूंगा. मुझे पता है क्या बोलना है. आपकी तारीफ आप लोग कर सकते हो, मैं नहीं कर सकता हूं. बेरोजगारी की सुनो 1000 लोगों में से सिर्फ 29 लोगों को यह सरकार काम देती है. यह शहरी क्षेत्र के आंकडे हैं, ग्रामीण क्षेत्र की स्थिति 1000 पर 9 लोगों को यह सरकार काम देती है, बेरोजगारी में नंबर वन पर मध्यप्रदेश है.
श्री लाल सिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, व्यवस्था का प्रश्न है.
अध्यक्ष महोदय (श्री जितू पटवारी से) आप बैठ जायें. मैंने मंत्री जी को अनुमति दी है.मंत्री जी खडे हैं. बैठ जायें.
श्री लाल सिंह आर्य -- माननीय अध्यक्ष महोदय, नियम और परम्परा है कि बजट के बाद में मांगो पर चर्चा होती है. सामान्य प्रशासन विभाग, नर्मदा घाटी विकास, विमानन विभाग, पर्यटन और संस्कृति विभाग पर चर्चा सदस्य को करना चाहिये. यह पता नहीं हवा में लट्ठ कहां घुमा रहे हैं. यह आपत्तिजनक है, सम्मानीय सदस्य को मांगों पर चर्चा करना चाहिये लेकिन मुझे लगता है कि तैयारी करके नहीं आये हैं इसलिये वे यहां हवाई फायर कर रहे हैं. मेरा आपसे अनुरोध है कि आप व्यवस्था देने का कष्ट करें. मांगों पर चर्चा करें.
श्री जितू पटवारी -- अध्यक्ष महोदय, औद्योगिक विकास की बात भी मैं करूंगा. आप चिंता मत करो. नवम्बर में बिहार में ..
अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी ने जो बात कही है यह जिन विभागों की मांग आज प्रस्तुत हुई हैं उन्हीं पर चर्चा होना चाहिये और मेरा सभी माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि विषय तक सीमित रहेंगे तो चर्चा व्यवस्थित रहेगी.
12.59 बजे
अध्यक्षीय घोषणा
दलीय स्थिति के आधार पर मांगों पर चर्चा हेतु समय का निर्धारण
अध्यक्ष महोदय -- सामान्य प्रशासन एवं संबंधित विभागीय मांगों पर चर्चा हेतु 2 घण्टे का समय नियत है. जिसमें कांग्रेस पक्ष हेतु 28 मिनट, भारतीय जनता पार्टी हेतु 1 घंटा 26 मिनट, बहुजन समाजवादी पार्टी हेतु 4 मिनट एवं निर्दलीय सदस्य हेतु 2 मिनट आते हैं. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया सहयोग करें.
श्री जितू पटवारी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे पास में 28 मिनट है. मुझे आप जरा छूट दे दें. मेरा अनुरोध माननीय मंत्री जी से यह है कि जो आपके विभाग हैं जिसका आप उत्तर दे सकते हैं उनके दे देना बाकी नहीं देना.
श्री मनोज पटेल -- जितू भैया अब मेंटली कुपोषित हो रहे हो आप.
श्री लाल सिंह आर्य -- इसका मतलब यह है कि आपकी तैयारी नहीं है. यह स्वीकार करिये आप.
श्री जितू पटवारी -- अध्यक्ष महोदय, मेरा अनुरोध यह है कि मैं फिर से कह रहा हूं कि मुख्यमंत्री जी ने अपना वक्तव्य दिया आपने बजट पर 1 दिन की चर्चा की मुझे बजट पर कहा गया था कि आज बजट पर बोलना है, उसके हिसाब से मेरी तैयारी है.
अध्यक्ष महोदय-- विनियोग विधेयक में आप फिर बोल लेना. यही सब बातें किंतु अभी आप मांगो पर आईये. आपके पास में इन बातों को कहना का एक अवसर अभी और है. अब आप बोल सकते हैं.
श्री जितू पटवारी -- अध्यक्ष महोदय, चलो अच्छा अब मैं विमानन पर आ जाता हूं. विमानन पर सुनो.
अध्यक्ष महोदय-- विभाग पर आ गये कृपया सब लोग सुनें. विभाग की मांगों पर बोल रहे हैं. बैठ जायें. कृपया सुनें.
श्री जितू पटवारी-- अध्यक्ष महोदय, आपसे अनुरोध यह है कि मध्यप्रदेश में यह तो जरूर है कि हमारे मुख्यमंत्री जी पांव-पांव वाले भैया थे और उनको प्रदेश की जनता ने चुना भी इसीलिये हम लोगों को भी लगता था कि यह कितना अच्छा सामान्य पैदल-पैदल चलने वाला दुबला-पतला खूबसूरत सा आदमी पूरे प्रदेश में दौड़ते हैं, लेकिन मैंने पिछले एक साल का विमानन से संबंधित सवाल उठाया कि उन्होंने हेलीकाप्टर का कितना उपयोग किया, तो सरकार ने मुझे जो उत्तर दिया है उसके अनुसार एक साल में मुख्यमंत्री जी ने 16 करोड़ रूपये का मध्यप्रदेश का हेलीकाप्टर का उपयोग किया. प्रतिदिन, एक दिन भी ऐसा नहीं गया जब मुख्यमंत्री जी हेलीकाप्टर में नहीं थे. चार विमान हैं इनके पास, तो यह पांव-पांव वाले भैया कैसे रहे, यह बतायें आप, यह भी आपत्ति जनक है.
श्री घनश्याम पिरोनिया-- XXX
अध्यक्ष महोदय-- बैठ जायें सुन लें, कृपया करके सुने उनको.
श्री जितू पटवारी-- अध्यक्ष जी, मेरा अनुरोध है, यह आपत्ति जनक है उनकी बात रिकार्ड से बाहर निकालो.
अध्यक्ष महोदय-- हां निकाल दी कार्यवाही से.
श्री जितू पटवारी-- यह गलती मत करो दोस्त मैं परिवार का साथी हूं, बैठो. .... (व्यवधान)... यह सब बोला जायेगा अध्यक्ष जी यह तो कोई तरीका नहीं है.
श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- डिमांड पर बोलें न, मैंने प्रारंभ में ही कहा है वह डिमांड पर तो बोल नहीं रहे हैं, पूरा ट्रेक छोड़ रहे हैं, पता नहीं क्या लिखकर के ले आये आप, पता नहीं किसने क्या लिखकर के दे दिया वह आकर के बोल रहे हैं, अरे विषय पर बोलो न डिमांड पर बोलो. 4 विभाग हैं उस पर बोलो. आप होम पर बोल रहे हो, आंगनबाडि़यों पर बोल रहे हो, कुपोषण पर बोल रहे हो, वह विभाग अलग है, जितू भाई. आप समझ ही नहीं पा रहे हो इसको.
अध्यक्ष महोदय-- सुन लें कृपा करके.
श्री जितू पटवारी-- मेरा अनुरोध यह है कि विमानन की बातें हैं, सरकार का उत्तर है अगर इसका मैं यहां पर जिक्र नहीं करूंगा तो अधूरी रहेगी बात. आप सुनो अगर मैं असत्य बोलता हूं तो आपत्ति करो, गलत बोलता हूं तो आपत्ति करो, गलत शब्दों का उपयोग करता हूं तो आपत्ति करो, आपको सच सुनने की आदत क्यों नहीं बची. यही गलती हम लोगों ने की थी और यहां बैठे हैं, वह दौर आपका आने वाला है, चिंता मत करो. मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं अध्यक्ष जी... (व्यवधान)...
श्री शंकरलाल तिवारी-- सच समझने की आदत भी डालो न, नहीं तो वहीं रहोगे जन्मभर, सच समझो, सच यह है कि प्रदेश की सरकार ने प्रदेश का नक्शा बदल दिया है.
श्री जितू पटवारी-- तिवारी जी मेरा अनुरोध है, अध्यक्ष जी मैं आखिरी बात कहकर ... (व्यवधान)... अध्यक्ष जी मैं समझ चुका हूं कि आप लोगों को वही बातें अच्छी लगती हैं जो अच्छी हों, सच्ची बातें अच्छी नहीं लगती हैं.
श्री गोविंद सिंह-- अब लंच के बाद बोलिये, तब तक शांति हो जायेगी और जब तक तैयारी भी हो जायेगी. ...(हंसी)...
श्री रामनिवास रावत जी-- लंच के बाद.
अध्यक्ष महोदय-- आखिरी बोल रहे हैं वह. चलिये बोलिये जितू भाई, आप कुछ आखिरी बात कह रहे थे. ... (व्यवधान)...
अध्यक्षीय घोषणा
सदन के समय में वृद्धि विषयक
माननीय सदस्य का वक्तव्य पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाये. मैं समझता हूं सदन इससे सहमत है. ... (व्यवधान)... (सहमति दी गई)
श्री जितू पटवारी-- मैं अपनी आखिरी बात कहकर समाप्त करता हूं, लगता है लंच का समय हो गया है सबका. मुख्यमंत्री जी ने अपने वक्तव्य में कहा, यह मेरी भावना की बातें हैं और मेरा अनुरोध है, मनोज आप भी सुनें. ... (व्यवधान)...
अध्यक्ष महोदय-- कृपया सुन लें.
श्री जितू पटवारी-- मेरा अनुरोध यह है कि मुख्यमंत्री जी ने अपने वक्तव्य में कहा जितू, मेरा नाम लिया था इसलिये मैं कोट कर रहा हूं कि आप बाहर तो मुझसे हाथ मिलाते हो और अंदर मुझसे लड़ते हो, यह रिकार्ड में है बात. मेरा अनुरोध है मेरे प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं वह. मैं एक माननीय सदस्य हूं यहां का अगर मैं उनसे बात करता हूं, उनसे मिलता हूं ... (व्यवधान)...
अध्यक्ष महोदय-- आने दो रिकार्ड में, आपको क्या तकलीफ है. ... (व्यवधान)... श्री जितू पटवारी-- यह गलत तरीका है, अध्यक्ष जी ... (व्यवधान)... बाहर हाथ मिलाना एक मुख्यमंत्री से कौन सा गुनाह है और अगर सम्मानित सदस्य उनसे मिलते हैं अपने काम को लेकर भी तो कौन सा गुनाह कर दिया. मेरे पारिवारिक संस्कारों ने मुझे सिखाया है कि बड़ो का सम्मान करो और मेरे मतदाताओं ने और देश के लोकतंत्र ने मुझे अधिकार दिया कि मैं बात करूं तो मुख्यमंत्री यह कहकर यह बताना चाहते हैं कि बाहर मैं गलती करता हूं.
श्री शंकरलाल तिवारी-- फालतू चिल्लाने पर उन्होंने कहा है.
श्री जितू पटवारी-- यह जितू पटवारी के खून का नमूना दे दूंगा, उसको टेस्ट कर लेना, उसमें से एक ही आवाज निकलेगी कि उधर से इधर लाने की तुम लोगों को, कोई समझौता नहीं होगा. मध्यप्रदेश की 25 हजार करोड़ के घाटे की यह मांग है, इसका मैं विरोध करता हूं. ... (व्यवधान)...
अध्यक्ष महोदय-- सदन की कार्यवाही 2.30 बजे तक के लिये स्थगित.
(1.05 बजे से 2.30 बजे तक अंतराल)
समय 2.37 बजे अध्यक्ष महोदय (डॉ सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.
श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, भोजन अवकाश के पूर्व जब व्यवस्था के प्रश्न पर चर्चा चल रही थी तब अध्यक्षीय दीर्घा में बैठे हुए कुछ लोग जोर जोर से तालियां बजा रहे थे और नारे भी लगा रहे थे. यह बहुत चिन्ता का विषय है. आपसे निवेदन करते हैं कि इस तरह की कोई व्यवस्था आ जाये कि जिस विधायक की अनुशंसा पर प्रवेश पत्र बनाये जाते हैं और इस परिसर में किसी भी तरह की ऐसी बातें या घटना होती हैं तो उसको रोकने की व्यवस्था की जाये. ऐसा निवेदन है.
अध्यक्ष महोदय-- मैं इसकी जानकारी ले लूंगा. बात गंभीर है. माननीय सदस्यों से मेरा अनुरोध है कि पूरी जानकारी लेकर ही पास जारी करें ताकि भविष्य में इस तरह की घटना न हो.
सुश्री हिना कांवरे(लांजी)-- अध्यक्ष महोदय,सामान्य प्रशासन विभाग की चर्चा में मैं सबसे पहले ग्राम पंचायत के प्रशासन पर चर्चा करना चाहती हूं.
अध्यक्ष महोदय, ग्राम पंचायतों के सचिवों के चयन की प्रक्रिया क्या है इससे हम सब अवगत हैं. प्रारंभ में 500 रुपये का वेतन पाने वाला एक कर्मचारी 5 लाख रुपये की AS(प्रशासनिक स्वीकृति) जारी करता था. अब सचिवों का वेतन 15 हजार रुपये हो गया है और वह 15 लाख रुपये का प्रशासनिक स्वीकृति जारी करता है. आज पंचायतों में जिस प्रकार धडल्ले से भ्रष्टाचार हो रहा है, आर्थिक अपराध बढ़े हैं इसका प्रमुख कारण यही है. एक एसडीओ ने TS (तकनीकी स्वीकृति) जारी की और पंचायत सचिव ने उस पर AS (प्रशासनिक स्वीकृति) जारी कर दी. इस सदन को इस व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.
अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मुख्यमंत्रीजी को यह सुझाव देना चाहती हूं कि प्रदेश में करीब 23 हजार ग्राम पंचायतें हैं. यदि हम 10 ग्राम पंचायतों के पीछे एक नया प्रशासनिक पद सृजित करें जो नियमित पद हो तथा जिसकी भर्ती PSC के माध्यम से हो जिससे निश्चित रुप से हमारे पढ़े-लिखे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी निकलेंगे तथा पंचायतों में रुपयों की जो अफरा-तफरी हो रही है, उस पर भी अंकुश लगेगा.
अध्यक्ष महोदय, मुझे मेरे साथी विधायक श्री शैलेन्द्र पटेल जी, जो अभी यहां पर उपस्थिति नहीं हैं, श्री शैलेन्द्र पटेल जी ने बताया कि उनके विधान सभा के प्रश्न के जवाब में शासन ने बताया कि पंचायत सचिव शासकीय कर्मचारी नहीं है. आखिर इतना बड़ा पैसों का लेन-देन, जिनके हाथों से हम करवा रहे हैं, उनको इस लेन-देने के लिए उत्तरदायी कैसे माना जाय? अभी अभी बालाघाट में फर्जी टीपी का मामला हुआ, बालाघाट कलेक्टर खूब चर्चा में रहे. जबकि इसकी सच्चाई यह है कि मध्यप्रदेश में आदिवासियों की निजी भूमि पर उनके वृक्षों को काटने की अनुमति देने वाले अधिनियम 1999 में आदिवासियों को लकड़ी की कटाई की अनुमति देने का अधिकार केवल कलेक्टर के पास है. जबकि ये अनुमतियां कलेक्टर की बजाय एडीएम, तथा एसडीएम ही जारी करते रहे हैं. कलेक्टर तक इस संबंध में कोई फाईल नहीं भेजी गई. मेरा शासन से यह निवेदन है कि बालाघाट की घटना से सबक लेते हुए प्रदेश में यदि ऐसी परमिशन दी जा रही है तो शासन को उस पर रोक लगाना चाहिए. अध्यक्ष महोदय, साथ ही साथ एक युवा कलेक्टर पर अपने घर पर लकड़ी ले जाने का जो आरोप है, उसकी सच्चाई को भी जल्दी से जल्दी सामने लाना चाहिए क्योंकि मैं जानती हूं कि घर लकड़ी भेजने का मामला, फर्जी टीपी का मामला, ये दोनों मामले अलग-अलग हैं. तत्कालीन कलेक्टर वी. किरण गोपाल को अनावश्यक घसीटा जा रहा है क्योंकि उनके घर जो लकड़ी गई वह लकड़ी जिस गोलाई का सागौन गया था, वैसा सागौन केवल बस्तर के जंगलों में पाया जाता है तथा उनके पिता ने आरटीजीएस से लकड़ी की पूरी कीमत पहले दी है, उसके बाद लकड़ी भेजी गई है. लकड़ी भेजने वाले को तो यह तक पता नहीं था..
राज्यमंत्री, पर्यटन (श्री सुरेन्द्र पटवा) - अध्यक्ष महोदय, यह वन विभाग का मामला नहीं है. अभी सामान्य प्रशासन विभाग पर चर्चा चल रही है.
सुश्री हिना लिखीराम कावरे - ..आप मेरी बात पूरी सुनेंगे तो सामान्य प्रशासन विभाग का ही यह मामला अंत में देखेंगे और आपको तो खुश होना चाहिए कि मैं इधर बैठकर तारीफ कर रही हूं. अध्यक्ष महोदय, लकड़ी भेजने वाले को तो यह तक पता नहीं था कि यह लकड़ी कलेक्टर के घर जा रही है. बालाघाट समेत प्रदेश में डिप्टी कलेक्टर्स के रिक्त पदों को जल्दी से जल्दी भरा जाना चाहिए. मेरे विधान सभा क्षेत्र किरनापुर में एसडीएम कार्यालय तो बन गया है, किन्तु डिप्टी कलेक्टर्स की कमी वजह से वहां एसडीएम नियुक्त नहीं किया गया है. शासन को कम से कम तहसीलदार, नायब तहसीलदार के रिक्त पदों पर भर्ती यथाशीघ्र करनी चाहिए. हमारे एक शिक्षक जब पढ़ाते थे तो उनकी लोकप्रियता, उनके पढ़ाने की शैली चारों तरफ बहुत चर्चित थी, किन्तु प्रमोशन के बाद जब वह प्राचार्य बने तो वह स्कूल का प्रशासन नहीं चला सके. मेरे कहने का मतलब है कि यही बात अच्छे डॉक्टर के लिए भी होती है. एक डॉक्टर बहुत अच्छा इलाज कर सकता है, किन्तु जब वह प्रमोट होकर बीएमओ या सीएमएचओ बन जाता है तो प्रशासन में असुविधा होती है. अध्यक्ष महोदय, मेरा शासन से निवेदन है कि सीनियरिटी पर आप वेतनमान बढ़ा दीजिए, लेकिन प्रशासन चलाने के लिए सभी विभागों में अलग से पीएससी के द्वारा भर्ती होनी चाहिए, जिसमें डिपॉर्टमेंट के लोगों को भी अवसर दिया जाना चाहिए. ऐसा करने से प्रशासनिक मजबूती आएगी.
अध्यक्ष महोदय, अध्यापकों के स्थानांतरण की नीति भी बननी चाहिए क्योंकि जो अपने घरों से हजारों कि.मी. दूर रहकर नौकरी कर रहे हैं, वे यदि अपनी मनचाही जगह पर आकर नौकरी करेंगे तो निश्चित रूप से उनके कामों में उनकी दक्षता जरूर नजर आएगी. माननीय मुख्यमंत्री जी जब सदन में बोल रहे थे तो उन्होंने जनसंख्या को अपनी ताकत बनाने की बात कही थी. आज अध्यापक संवर्ग की संख्या दो से ढ़ाई लाख है, किन्तु कोई भी आकस्मिक दुर्घटना होने पर पेंशन अथवा ग्रेच्युटी के प्रावधान नहीं हैं.
माननीय अध्यक्ष महोदय मेरा आपसे अनुरोध है कि प्रत्येक अध्यापक के वेतन से 10 रूपये की राशि काटकर ऐसा फण्ड बनाया जाना चाहिए जो उनके वेल्फेयर में खर्च हो.
माननीय अध्यक्ष महोदय राजस्व अनुविभाग एवं पुलिस अनुविभाग एक जैसे होने चाहिए क्षेत्र की दृष्टि से दोनों अलग अलग होने से प्रशासनिक दिक्कतें आती हैं जिस प्रकार से एसडीओपी की नियुक्ति जिला स्तर पर न होकर प्रदेश स्तर पर होती है वैसे ही एसडीएम की नियुक्ति भी प्रदेश स्तर से की जाना चाहिए इससे उनका काम करने का ज्यादा आत्मविश्वास बढ़ेगा, उन्हें भी किसी भी मेटर पर कलेक्टर द्वारा हटाये जाने का भय नहीं होगा. अंत में मैं फिर अपनी बात करना चाहती हूं जो मैं हमेशा बोलती हूं और आज भी कहना चाहूंगी रिक्त पदों की पूर्ति किये बगैर लोक सेवा ग्यारंटी अधिनियम लागू करना कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है सरासर अन्याय है उनके साथ . आपने मुझे बोलने का समय दिया बहुत बहुत धन्यवाद्.
श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर ( मांधाता ) -- माननीय अध्यक्ष महोदय मैं सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित अन्य व्यय व संस्कृति, पर्यटन एवं नर्मदा घाटी विकास और विमानन विभाग की मांगों के समर्थन में खड़ा हुआ हूं. पहली बार 2003 के बाद में मध्यप्रदेश की जनता को और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को यह लगा है कि स्कूलों में अब सुशासन आया है और उसके पहले की स्थिति यह थी कि कोई सुनने वाला नहीं था कोई करने वाला नहीं था. इसलिए इ स सुशासन के अंतर्गत सामान्य प्रशासन विभाग में यह एक ऐसा विभाग है जो कि अन्य विभागों के बीच में सामन्जस्य करके काम करने का रास्ता बनाता है. इ समें सारे अधिकार निहित हैं. इसलिए यह समन्वय निभाने की भूमिका भी निबाहता है. मैं आपसे कहना चाहता हूं यह पहली बार ऐसा हुआ है जिसमें अनुसूचित जाति जनजाति पिछड़े वर्ग के लोगों को पहले जाति प्रमाण बनवाने केलिए पहले बहुत भटकना होता था. इधर उधर जाना पड़ता था पहली बार ऐसी व्यवस्था की गई है, अब इधर उधर भटकने की आवश्यकता नहीं है. अब लोक सेवा ग्यारंटी के माध्यम से आवेदन दिये जायें और मान्यवर आध्यक्ष महोदय एक डेढ़ वर्ष में 1 करोड़ 26 लाख आवेदन आये हैं और उसमें से 1 करोड़ 14 लाख 26 हजार जातियों के प्रमाण पत्र डिजिटल के माध्यम से हस्ताक्षर युक्त लेमिनेटेड बनाकर दिये गये हैं. मध्यप्रदेश के इतिहास में यह पहली बार हुआ है. इ तना ही नहीं अब और नीचे जाकर स्कूलों में जब बच्चे पहली क्लास मेंप्रवेश लेते हैं वहीं से इसकी शुरूवात हो गई है. अब किसी भी व्यक्ति को इधर उधर भटकने की आवश्यकता नहीं होती है.
अध्यक्ष महोदय सामान्य प्रशासन विभाग का भी काम है पदोन्नति करने का , नियुक्ति करने का, और इसमें भी पहले जो होता था अब एक नया लोक सेवा आयोग के माध्यम से इसमें पारदर्शिता बनी रहे इसलिए आनलाइन परीक्षा की भी व्यवस्था की गई है. मान्यवर अध्यक्ष महोदय पहली बार मध्यप्रदेश की धरती पर आमजनों की समस्याएं और उनका समाधान कैसे हो इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने नियमों केतहत जनसुनवाई का कार्यक्रम भोपाल से लगाकर विभागाध्यक्ष से लगाकर विकास खण्ड स्तर तक जनता जाये अपनी समस्याएं बताये और उसका समाधान वहां पर होता है और समस्याएं बताएं, उनका समाधान वहां होता है. मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, फोन उठाओ मोबाईल उठाओ, फोन कर दो, यह समस्या है, यहां यह हो रहा है, हमारी यह समस्याएं हैं, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से भी आम जनता की समस्याओं का समाधान बहुत तेज गति से हो रहा है.
मान्यवर अध्यक्ष महोदय, समाधान योजना ऑनलाइन कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं और उसमें स्वयं मुख्यमंत्री जी बैठते हैं और उनके सामने जिसकी समस्या है वह खुद बैठता है, अपनी समस्या स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री जी को बताता है और तत्काल उस समस्या का वहां पर निराकरण होता है. यह वह मध्यप्रदेश है. इस मध्यप्रदेश की धरती पर सुशासन की व्यवस्था वर्ष 2003 के बाद करने का प्रावधान किया गया है. अब जनदर्शन का कार्यक्रम प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी कर रहे हैं, जीतु पटवारी जी यहां पर अभी हैं नहीं, वे बार-बार आक्षेप करते रहते हैं, अब उनके पास इसके अलावा कोई काम बचा नहीं है और झूठी, गलत, असत्य बातें यहां पर सिर्फ कहते रहते हैं. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पांव-पांव वाले हैं, पैदल चलने वाले हैं पर पूरे मध्यप्रदेश का अगर दौरा करना है तो विमान की आवश्यकता पड़ती है और इसलिए अगर उसमें उन्होंने 16 करोड़ रुपये खर्च कर दिए तो जीतु पटवारी जी के पेट में क्यों मरोड़ हो रही है, वे क्यों बौखला जाते हैं. अगर इसमें और पैसे की जरूरत होगी तो उन्हें खर्च करना चाहिए क्योंकि मुख्यमंत्री जी शहरों में ही नहीं जाते, जब जनता पर कोई विपत्ति आती है, आपदा आती है तो पांव-पांव वाले मुख्यमंत्री किसान के खेतों तक जाते हैं और उनकी समस्याओं का निराकरण करने का काम करते हैं. ये मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री का काम है नहीं तो पुराने मुख्यमंत्री के क्या काम रहे हैं, मुझे ज्यादा कहने की आवश्यकता नहीं है, यह जनता भी जानती है और कांग्रेस के लोग भी जानते हैं.
मान्यवर अध्यक्ष महोदय, संस्कृति विभाग स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों, महापुरुषों, जननायकों और रणकुबेरों की जयंति और पुण्यतिथि मनाता है. हमारे यहां भी संस्कृति विभाग के माध्यम से किशोर कुमार अलंकरण समारोह किया जाता है. संस्कृति विभाग ग्रामीण क्षेत्रों की संस्कृति को बचाने के लिए ग्रामीण मेलों में भी अपना योगदान देता है. अभी 2016 का बहुत बड़ा महाकुंभ आया हुआ है. इसमें आध्यात्मिक और वैचारिक कुंभ भी होने वाला है. दुनिया के सौ देशों के लोगों को वहां पर बुलाया गया है, हिंदुस्तान के प्रत्येक कोने से लोगों को बुलाया गया है कि हिंदुस्तान की संस्कृति में और क्या किया जा सकता है. इसी के लिए महाकुंभ का आयोजन हुआ है.
मान्यवर अध्यक्ष महोदय, पर्यटन विभाग, इस विभाग में भी बहुत कुछ संभावनाएं हैं. वर्ष 2003 के बाद हमने पर्यटन के क्षेत्र में काम किया है, हमारी सरकार ने किया है, मुख्यमंत्री जी ने किया है. अलग-अलग लोगों को ट्रेनिंग देने का कार्य भी मध्यप्रदेश की सरकार ने किया है.
मान्यवर अध्यक्ष महोदय, मेरे विधान सभा क्षेत्र में एशिया का सबसे बड़ा जलाशय इंदिरा सागर है. उस जलाशय में बहुत से वन डूबते हैं, बहुत सारी खेती डूबती है, कृषि भूमि डूबती है, कई लोग विस्थापित होते हैं और इंदिरा सागर जैसे जलाशय में फारेस्ट डूबा है और जो फारेस्ट बचा है, यह पहली बार हुआ है, वहां ऐसे बने हुए 95 टापू हैं, जहां चारों तरफ पानी भरा है. ऊपर से फारेस्ट का एरिया बचा हुआ है और इसलिए वहां पर पहली बार केबिनेट की बैठक क्रूज में हुई. पहली बार मध्यप्रदेश सारे मंत्री, मुख्यमंत्री, सारे अधिकारी वहां जाकर के पर्यटन को और कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है और इसके लिए वहां पर्यटन के लिए केबिनेट की एक अलग से कमेटी बना दी गयी है और इतना ही नहीं इसके आगे वहां पर 12 फरवरी 21 फरवरी तक जल महोत्सव मनाया गया है. मुख्यमंत्री जी ने दृढ़ इच्छा-शक्ति व्यक्त की है कि आने वाले समय में हम हनुवंतिया को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनायेंगे और आने वाले साल में 15 दिसम्बर से 15 जनवरी तक पुन: वहां पर जल महोत्सव मनाया जायेगा.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मूल विभाग पर अब आया हूँ नर्मदा घाटी विकास विभाग. अमरकंटक से चल कर के बड़वानी के आखिरी छोर तक और गुजरात में जाती है और इसलिए नर्मदा हमारी जीवनदायिनी है और इसलिए 50 साल तक जो अभी इधर बैठे हैं, ये उधर भी बैठे थे. इन्होंने कोई काम नहीं किया. कोई सिंचाई का रकबा नहीं बढ़ाया. जब सिंचाई का रकबा 1993 से 2000 के बीच में मात्र 55 हजार हेक्टेयर के लगभग था और आज 3 तारीख है तो आज हम 4 लाख 50 हजार हेक्टेयर इस नर्मदा मैय्या के पानी से किसानों के खेत लहलहा रहे हैं, किसानों के चेहरों पर खुशहाली आयी है. यह काम क्या कांग्रेस की सरकार नहीं कर सकती थी? क्या कांग्रेस के लोग नहीं कर सकते थे? लेकिन इन्होंने सिर्फ सत्ता में बैठकर के सिर्फ अपना उपयोग किया है.मैं एक उदाहरण देना चाहता हूँ, दृढ़ इच्छा-शक्ति का, काम करने के तरीके का, मेरे यहां पुनासा उदवहन सिंचाई योजना स्वीकृत हुई थी. जब मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह जी मण्डी रोड के उदघाटन के लिए आये. तत्कालीन विधायक राजनारायण सिंह जी फूले नहीं समा रहे थे, वे कहते थे, हमारी सरकार, हमारा मुख्यमंत्री मेरे क्षेत्र में आ रहा है, मैं यह मंजूर करा कर रहूंगा. उसमें हमारे सांसद थे नंदकुमारसिंह जी चौहान, वह भी वहां मौजूद थे, उस मंच पर थे, जब राजनारायणसिंह जी ने मांग रखी कि इस पुनासा क्षेत्र के लोगों के लिए पुनासा उदवहन सिंचाई योजना आप मंजूर करिये. कांग्रेस के साथियों, सुन लो, इधर देख के सुन लो, वह दिग्विजयसिंह...
डॉ. गोविन्द सिंह-- दिग्विजयसिंह के चरण छुए थे कि नहीं नंदकुमार सिंह जी ने.आपके प्रदेश अध्यक्ष ने सार्वजनिक रुप से उनके पैर छुए थे
श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर-- तो वह भी बोल रहा हूँ न, आप अभी देखो तो सही.संवेदनशील हैं,वह भी कह रहा हूँ.
संसदीय कार्य मंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र)-- गोविन्दसिंह जी, आप दिग्विजयसिंह के समर्थक हो या कमलनाथ के?
डॉ. गोविन्द सिंह-- हम तो आपके हैं (हंसी)
डॉ.नरोत्तम मिश्र-- नहीं, इन दोनों में से किस के समर्थक हो? अभी बाहर आप कमलनाथ का बोल के आये हो. आज आपको बताना पड़ेगा कि आप किसके समर्थक हो.
डॉ. गोविन्द सिंह-- कांग्रेस के सब नेता हैं हमारे, सभी से हमारा नाता (हंसी) लेकिन सार्वजनिक पैर छुए वह तो बोल जाओ जरा.
श्री कैलाश चावला-- अध्यक्ष जी, ये गंगा गए तो गंगाराम और जमना गए तो जमनादास.
डॉ. नरोत्तम मिश्र-- ऐसा नहीं है, गोविन्दसिंह जी बात के धनी है,मैं उन्हें बचपन से जानता हूँ. कमलनाथ के ही रहेंगे. अच्छा आपने नहीं की बात कमलनाथ की, खाओ सौगंध
श्री रामनिवास रावत-- आपको इधर की चिन्ता क्यों पड़ी है?
डॉ. नरोत्तम मिश्र- मैंने सिंधिया जी की बात ही नहीं की. अभी मैंने सिंधिया जी की बात की है क्या. अभी तो कालूखेड़ा जी बैठे हैं. आपका नम्बर नहीं लगेगा. सिंधिया गुट में अभी कालूखेड़ा जी है नम्बर वन.
श्री रामनिवास रावत-- आप अपनी चिन्ता करो.
डॉ. नरोत्तम मिश्र-- आप विश्वास करो, अभी कालूखेड़ा जी हैं.
श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर--- माननीय अध्यक्ष महोदय, जब यह तत्कालीन मुख्यमंत्री वहाँ गये , राजनारायण सिंह जी ने मांग की कि पुनासा की उद्वहन सिंचाई योजना को दिग्विजय सिंह जी मंजूर कर दीजिये, हमारे सांसद नंदकुमार सिंह चौहान वहाँ थे , उन्होंने कहा आप दो काम कर दीजिये हरसूद के इंदिरा सागर बांध में जो लोग डूब में आए उनका मुआवजा बढ़ा दीजिये और इस योजना को मंजूर कर दीजिये मैं सार्वजनिक रूप से आपके पैर छुऊंगा, फिर भी वह पसीजे नहीं , और वह कैसा मुख्यमंत्री,उन्होंने मंच से कहा कि पैसा नहीं है ये योजना मंजूर नहीं कर सकता हूं, यह तकनीकी दृष्टि से उचित नहीं है और वह मुख्यमंत्री कौन, जिसने इंजीनियरिंग कर रखी है, बीई कर रखा है. वाह, क्या मुख्यमंत्री है.
अध्यक्ष महोदय--- कृपया समाप्त करें.
श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर--- अध्यक्ष महोदय, तब उन्होंने मंच से मना कर दिया . बीई किया हुआ मुख्यमंत्री , चाहते तो कहते कि यह संभव है हम करके दिखाएंगे . इन्होंने मना कर दिया. हम सब मध्यप्रदेश वासियों को, जनता को इस बात की खुशी है कि जो काम इंजीनियर मुख्यमंत्री नहीं कर सका वह काम हमारा 15 एकड़ के किसान का बेटा , जैतपुर का रहने वाला , नान टेक्नीकल आदमी मुख्यमंत्री बना, उसने कर दिखाया, उन्होंने कहा इस योजना को मैं स्वीकृत करता हूं किसानों के खेत तक मैं पानी पहुंचाने का काम करूंगा. एक इनका इंजीनियर मुख्यमंत्री और एक यह जनता का मुख्यमंत्री, किसानों के, गरीबों के दुख को दूर करने वाले मुख्यमंत्री. उस पुनासा की 418 करोड़ रुपये की उदवहन सिंचाई योजना से आज लगातार किसानों का पानी मिल रहा है. सिंचाई हो रही है , गेहूं पैदा हो रहा है. हमारी छैगांव लिफ्ट इरीगेशन, सिंहाड़ा लिफ्ट इरीगेशन योजनाओं की लंबी चौड़ी लिस्ट है. आज वहाँ पर 110 गांवों की 35 हजार एकड़ जमीन सिंचित हो रही है. यह काम करने का तरीका , यह दृढ़ इच्छाशक्ति , यह लोगों तक पहुंचने का एक माध्यम है. माननीय अध्यक्ष महोदय, इसके साथ में अलीराजपुर सिंचाई उदवहन योजना ,सेवड़ा और चिंकी परियोजना ,जोबट विस्तार योजना , माइक्रो इरीगेशन , अपरवेदा योजना जैसी बहुत सारी योजनायें हैं,जो इस सरकार ने मंजूर की है . अध्यक्ष महोदय, कांग्रेस वालों से मैं कहना चाहता हूं कि साथियों इन्दौर जाते हो, पहले क्षिप्रा सूखी रहती थी , नर्मदा के पानी को क्षिप्रा में पहुंचाने का काम अगर किसी माई के लाल ने किया है तो भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी ने किया है .दूसरा काम नर्मदा का पानी गंभीर में पहुंचाने का काम चालू होने वाला है .
श्री सचिन यादव--- यह पानी तो सिंहस्थ के लिए लाया जा रहा है.
श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर—नर्मदा का पानी कालीसिंध में लाने की योजना प्रस्तावित है.नर्मदा का पानी पार्वती नदी में डालने का काम यह सरकार करेगी.मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी करेंगे. अनेक योजनायें हैं, सबसे बड़ा जलाशय है.(XXX).
अध्यक्ष महोदय-- कृपया समाप्त करिये .
श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर--- माननीय अध्यक्ष महोदय, आज थोड़ी देर बोल लेने दीजिये मेरी खाँसी भी आज रूकी हुई है, नहीं तो मुझे खांसी बहुत चलती है . 24 घंटे में से 12 -13 घंटे मैं सोता भी नहीं हूं, लगातार खांसी चलती है पर इनके कारण नहीं चल रही है, यह व्यवधान करते हैं विधानसभा में.यहाँ कुछ हैं बाहर कुछ हैं.
एक माननीय सदस्य---- यह तो इलाज है न कांग्रेसियों के कारण खांसी बंद हो गई.
अध्यक्ष महोदय--- तोमर जी, कृपया अब बैठ जाएं.
डॉ. नरोत्तम मिश्र--- माननीय अध्यक्ष महोदय, लोकेन्द्र सिंह जी घर के बड़े-बूढ़े हैं तो क्या है कि जब बहुएं आ जाती हैं तो बड़े –बूढ़ों को खांसकर जाना पड़ता है वह वाली खांसी है इनको.
श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर--- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह हमारे काम का तरीका है, हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री जी के काम का तरीका है , भाजपा के काम तरीका है कि आज कांग्रेस से तीन-तीन विधायक इधर बैठे हैं. कांग्रेस की गुटबाजी के कारण ,कांग्रेस की संस्कृति के कारण, काँग्रेस कुछ काम नहीं करती है इसलिए...
अध्यक्ष महोदय-- अब आप समाप्त करिए.
श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर-- संजय पाठक जी आए हैं, उनके बाद नारायण त्रिपाठी जी भी आए हैं.
अध्यक्ष महोदय-- अब आप समाप्त करिए. अब आप बैठ जाएँ.
श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर-- इनसे पहले मानवेन्द्र सिंह जी भी आए...(व्यवधान).. समझ में आ गया है कि चौथी बार मध्यप्रदेश के अन्दर हमारी सरकार नहीं बनेगी. चौथी बार भी यदि कोई सरकार बनाएगा तो वह भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाएगा. जनता चौथी बार उसे वोट देने के लिए लालायित है.
अध्यक्ष महोदय-- अब आप समाप्त करें.
श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर-- मेरे क्षेत्र में आदरणीय नरोत्तम मिश्र जी गए थे. लोगों ने नारे लगाए थे...
अध्यक्ष महोदय-- अब लोकेन्द्र सिंह जी जो बोलेंगे वह नहीं लिखा जाएगा. अब कुछ नहीं लिखा जाएगा.
श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर-- (xxx)
अध्यक्ष महोदय-- अब श्री गिरीश भंडारी बोलेंगे.
श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर-- (xxx)
अध्यक्ष महोदय-- रिकार्ड में कुछ नहीं आ रहा है.
श्री लोकेन्द्र सिंह तोमर-- (xxx)
श्री मुकेश नायक-- माननीय अध्यक्ष महोदय, (XXX)
श्री गिरीश भण्डारी(नरसिंहगढ़)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 1, 2, 26,
37,48 एवं 65 की अनुदान मांगों का विरोध करता हूँ. अध्यक्ष महोदय, सामान्य प्रशासन विभाग जो कि सभी विभागों को संचालित करने वाला विभाग है और बिना प्रशासनिक व्यवस्था के कोई भी विभाग संचालित नहीं हो पाता है. लेकिन प्रशासनिक व्यवस्था करने में विभाग अक्षम रहा है. हम विधायक लोग चुनकर आते हैं, हम विभागों को पत्र लिखते हैं. हम उम्मीद रखते हैं कि विभाग उन पत्रों का उत्तर, सामान्य प्रशासन विभाग के नियम अनुरूप हमें दें. लेकिन बहुत दुःख के साथ यह कहना पड़ रहा है कि मैंने सामान्य प्रशासन विभाग के लिए दो-दो प्रश्न लगाए तब जाकर मेरे पत्रों का उत्तर दिया गया. यह तो सामान्य प्रशासन विभाग की स्थिति है. इस व्यवस्था में सुधार होना चाहिए. इसमें कठोर नियम बनने चाहिए. आज बड़े आश्चर्य की बात है कि राजगढ़ जिले में जिस सामान्य प्रशासन विभाग की मैं बात कर रहा हूँ. आज हमारे यहाँ राजगढ़ जिले में योजना अधिकारी, जो कि पूरे जिले को चलाने वाला योजना अधिकारी होता है, एक साल से पद रिक्त पड़ा है और प्रभारी जो बनाया वह हमारे भोपाल के ज्वाईंट डायरेक्टर महोदय को बनाया, जो कि आज तक वहाँ उपस्थित नहीं हुए. इस तरीके से तो ये जिले को चलाना चाहते हैं.
अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 26 एवं 37 का विरोध करता हूँ. माननीय वित्त मंत्री जी का भाषण, माननीय मुख्यमंत्री जी के भाषण और हमारे माननीय तोमर जी अभी बता रहे थे कि किस तरीके से हमने इस मध्यप्रदेश में पर्यटन को इतना आगे बढ़ाया है. सिर्फ एक हनुवंतिया टापू इन 13 सालों में विकसित करने में आप अपने आपकी बहुत बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं. जबकि होना यह चाहिए था कि जो हमारे पुराने ऐतिहासिक स्थल हैं, पुराने जो पर्यटन के हिसाब से बहुत विकसित क्षेत्र हैं, उन क्षेत्रों को विकसित करना चाहिए था और मैं इस अवसर पर माननीय वित्त मंत्री जी और माननीय पर्यटन मंत्री जी का ध्यानाकर्षित करना चाहता हूँ. आज से 3 साल पहले नरसिंहगढ़ में माननीय मुख्यमंत्री जी ने घोषणा की थी कि नरसिंहगढ़ को पर्यटन स्थल घोषित किया जाएगा. शायद नरसिंहगढ़ का दुर्भाग्य है कि आज 3 साल होने के बाद भी उस नरसिंहगढ़ को पर्यटन स्थल घोषित नहीं किया गया है. जबकि वहाँ की अपार संभावनाएँ हैं. जब 4-5 साल पहले यूपीए की सरकार थी हमने वहां से नरसिंहगढ़ के पर्यटन के लिए राशि मंजूर करवायी थी राशि स्वीकृत भी हुई लेकिन इतना सब कुछ करने के बाद भी नरसिंहगढ़ शहर जो कि बहुत ऐतिहासिक शहर है वहां पर चिड़ीखोह, शाकाजी का मंदिर, छोटा महादेव, बड़ा महादेव इस तरह के पुराने ऐतिहासिक स्थल हैं उसके बावजूद वह पर्यटक स्थल घोषित नहीं हो पाया है. मैं पर्यटन मंत्रीजी से विनम्र अनुरोध करता हूँ कि इसको वे जल्दी से संज्ञान में लें और नरसिंहगढ़ को पर्यटक स्थल घोषित करें. तीन साल पहले संस्कृति विभाग द्वारा नरसिंहगढ़ में "नरसिंहगढ़ महोत्सव" का आयोजन किया जाता था वहां पर कांग्रेस का विधायक जीतने के कारण मेरे विधान सभा चुनाव के बाद से संस्कृति महोत्सव का आयोजन बंद कर दिया गया है. मैंने इसके लिए दो-दो प्रश्न भी लगाये हैं. मैं संस्कृति मंत्रीजी से निवेदन करता हूँ नरसिंहगढ़ महोत्सव की जो परम्परा चालू की गई थी उस परम्परा को पुन: चालू किया जाये संस्कृति विभाग उसमें राशि दे ताकि वह कार्यक्रम बहुत अच्छे से वहां पर हो सके.
अध्यक्ष महोदय, आपने बोलने का समय दिया उसके लिए धन्यवाद.
श्री दुर्गालाल विजय (श्योपुर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सामान्य प्रशासन, नर्मदा घाटी, विमानन, पर्यटन और संस्कृति विभाग की मांगों का समर्थन करने के लिए खड़ा हुआ हूं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, सामान्य प्रशासन विभाग संविधान की दृष्टि से देश का और सभी प्रदेशों का महत्वपूर्ण विभाग होता है. सभी विभागों का समन्वय करना और विशेषकर राज्य की नीति, जनकल्याणकारी कार्यों का ठीक से संचालन उनकी मॉनिटरिंग, विभाग में कार्य करने वाले और निचले स्तर तक सभी वर्गों के लिए आरक्षण की नीति, अनुसूचित जाति, जनजाति, महिला पिछड़ा वर्ग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, आपातकाल के सैनिक ऐसे बहुत सारे लोगों को आरक्षण की नीति बनाकर उनका ठीक तरीके से नियंत्रण हो इसका काम भी यह विभाग करता है. विभाग में विभिन्न संगठनों के माध्यम से चाहे लोकायुक्त हो, ई.ओ.डब्ल्यू हो अथवा मानवाधिकार आयोग हो या अन्य आयोग हों उनके माध्यम से राज्य में ऐसे लोगों पर नियंत्रण करने का काम भी इस विभाग के माध्यम से किया जाता है जिसमें आर्थिक अपराध हैं या नौकरशाही से संबंधित अपराध हैं उनका नियंत्रण करने का काम भी यह विभाग करता है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, विशेष उल्लेख की बात यह है कि मध्यप्रदेश में अभी जो अवर्षा की स्थिति निर्मित हुई थी उससे जो परिस्थितियां पूरे राज्य में उत्पन्न हुईं उनका ठीक तरीके से आंकलन करने के लिए और मौके पर पहुंचकर लोगों से जानकारी हासिल करके लोगों को किस प्रकार से राहत दी जा सकती है, क्या करना चाहिये इसके विषय में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, पुलिस प्रशासनिक सेवा के अधिकारी, वन सेवा के अधिकारियों को माननीय मुख्यमंत्रीजी ने गांव में स्थल पर भेजकर उस स्थिति का आंकलन कराया जिसके कारण से तीन दिन लगातार अधिकारी गांव में रहे और चौपाल पर बैठे और उन्होंने पूरी वस्तुस्थिति को देखा और उसके बाद यहां पर जो एक दिन की कार्यशाला आयोजित हुई उसमें पूरे प्रदेश का वर्णन आया उसके कारण से हमारे प्रदेश को ठीक से राहत पहुंचाने का काम भी विभाग के प्रस्तावना के आधार पर, उनके प्रतिवेदन के आधार पर किया गया. अध्यक्ष महोदय, प्रदेश की सरकार और सामान्य प्रशासन विभाग के ठीक से कार्य करने के कारण से आज प्रदेश प्रगति और तरक्की की ओर जा रहा है. मैं हमारे विभाग मंत्री माननीय लाल सिंह आर्य जी को बहुत बहुत बधाई देना चाहता हूं. माननीय मुख्यमंत्री जी को बधाई और धन्यवाद देना चाहता हूं कि उनके कुशल प्रशासन और नेतृत्व के कारण ठीक तरह से सम्पूर्ण कार्यवाही संचालित होती है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश में बहुत सारी सांस्कृतिक धरोहर हैं. हमारा पूरा प्रदेश पर्यटन की संभावनाओं से भरा हुआ प्रदेश है. पिछले वर्षों में पर्यटन की तरफ ज्यादा ध्यान न देने के कारण हमारा प्रदेश देश के अन्दर पर्यटन की संभावनाओं में ऊपर नहीं आ पाया है. लेकिन मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि पिछले वर्षों में माननीय मुख्यमंत्री जी ने और हमारे विभाग के मंत्री जी ने प्रयास करके कुछ नीतियां बनायी और नीतियों के कारण से प्रदेश के अन्दर पर्यटन की संभावनाओं में दिन प्रतिदिन वृद्धि होती जा रही है और न केवल हमारे राज्य के बल्कि विदेशी पर्यटक भी मध्यप्रदेश में आते हैं. पहले से ही खजुराहो, ओरछा, सांची और बहुत सारे ऐसे स्थान हैं जहां पर देशी और विदेशी पर्यटक आते थे लेकिन अभी जो नीति बनी है, उस नीति के अंतर्गत जो हमारे सांस्कृतिक धरोहर और पुराने प्राचीन जितने भी पर्यटन के स्थान हैं उन सब स्थानों को और अच्छा करने का काम किया जा रहा है. लगातार यह भी कोशिश हो रही है कि जल की दृष्टि से भी ऐसे स्थान जैसे कि अभी जिक्र किया था खंडवा जिले में तो हुआ ही है लेकिन अन्य स्थानों में भी ऐसे स्थान पर्यटन के हिसाब से विकसित करने का काम हमारे माननीय मंत्री जी और प्रदेश की सरकार कर रही है.
अध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि जिन पर्यटन के स्थानों का उल्लेख आया है वास्तव में उनको ठीक करने की आवश्यकता तो है ही, लेकिन एक और विशेष मध्यप्रदेश में ऐसा स्थान है जिसको ठीक तरह से विकसित किया जाये तो वह न केवल भारत का बल्कि पूरे विश्व का एक महत्वपूर्ण स्थान होगा. श्योपुर जिले के अन्दर कूनो पालपुर सेन्चुरी के नाम से एक बहुत बड़ा स्थान जो वन क्षेत्र के अन्दर है वह विकसित किया गया है. उसमें बहुत सारा पैसा भी खर्च किया गया है, वहां पर आज की परिस्थिति में ठीक तरह से पर्यटन विभाग के द्वारा उसको विकसित किये जाने की आवश्यकता है. पर्यटन विभाग ने वहां पर कुछ कार्य भी प्रारंभ किये हैं. वहां पर पुराना का जो कूनो का डाक बंगला था उसको बड़ा होटल बनाने का काम तो चल ही रहा है, इसके साथ साथ उसके अन्दर और अधिक कार्य की आवश्यकता है. इसके कारण से हमारे उस वनवासी क्षेत्र में वहां रहने वाले वनवासी लोगों को निश्चित रूप से वहां रहने वाले लोगों को रोजगार का अवसर भी प्राप्त होगा. वह देशी विदेशी पर्यटकों के लिये एक बहुत बड़ा स्थान मध्यप्रदेश राज्य के अन्दर स्थापित होगा. वहां पर पहले शेर लाने की बात थी उसका प्रयास लगातार चल ही रहा है. लेकिन इसके बावजूद वहां पर जितने वन्य प्राणी हैं, उन वन्य प्राणियों को देखने के लिये भी वहां पर एक बड़ी चैन बनायी जा सकती है. सवाई माधोपुर में टाईगर की बड़ी सेन्चुरी है, वह लोगों के आवागमन का अच्छा स्थान है. बीच में भी पर्यटन के लिये चम्बल नदी के किनारे बहुत बड़ी संभावना है, इसको ध्यान में रखकर कार्य करने की आवश्यकता है. मैं मंत्री जी को वहां आने के लिये आमंत्रित भी करता हूं. एक दिन वह श्योपुर जिले में पधारे और विशेषकर के इस सेन्चुरी का अवलोकन करें तो यह काम ठीक से हो जायेगा. आपने बोलने के लिये समय दिया धन्यवाद.
श्री फुन्देलाल सिंह मार्को(पुष्पराजगढ़) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 1,2,26,37,48,65 का विरोध करता हूं और मां नर्मदा को नमन और प्रणाम करते हुए अपनी बात रखना चाहता हूं. मां नर्मदा अमरकंटक से प्रवाहित होकर अपने पवित्र जल से पूरे प्रदेश को हराभरा कर रही हैं और जहां उनका उद्गम है वहां विकास की अपार संभवनाएं हैं वे वहां विकास से वंचित हैं. मैं चाहता हूं कि वहां की मूलभूत सुविधाओं को इस बजट में शामिल करते हुए वहां विकास कार्य कराये जायें ताकि देश और विदेश के लोग जो वहां दर्शन करने जाते हैं वे एक-दो दिन वहां रुकें इससे वहां के व्यापार व्यवसाय में वृद्धि होगी. मैं चाहता हूं कि अमरकंटक में शहर के गंदे पानी निकास हेतु नाली निर्माण किया जाये.घाटों का निर्माण किया जाये. नर्मदा नदी के दोनों और वृक्षारोपण व सौंदर्यीकरण का कार्य किया जाये. सार्वजनिक शौचालय निर्माण कराये जायें. सार्वजनिक धर्मशाला का निर्माण कराया जाये. सोनमूढ़ा,माई की बगिया,कपिलधारा और वहां के धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण कराया जाये. पहुंच मार्ग का निर्माण किया जाये. धर्मशाला का निर्माण किया जाये. जालेश्वर धाम में बाउंड्रीवाल का निर्माण किया जाये. छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश से लगा हुआ यह जालेश्वर धाम है. जो हमेशा सीमा विवाद में रहता है. वहां बाउंड्रीवाल बन जाने से सीमा विवाद खत्म होगा. वृक्षारोपण,सौंदर्यीकरण जालेश्वर धाम में कराया जाये. मुख्य मार्ग से जालेश्वर धाम तक सी.सी. रोड का निर्माण किया जाये. अमरकंटक नगर पंचायत क्षेत्र में जड़ी बूटी व वन औषधियों का संरक्षण किया जाये. नगर पंचायत की अन्य बसाहटों में जो मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा जो व्यवसायिक जमीन है वहां दुकानों का निर्माण किया जाये ताकि बेरोजगार युवकों को वहां रोजगार दिया जा सके. कचरा वाहनों की व्यवस्था की जाये. यह तमाम व्यवस्था अमरकंटक में करने की कृपा करें. संस्कृति एवं पर्यटन विभाग को मैं यह कहना चाहता हूं कि मां नर्मदा की जयंती और महाशिवरात्रि के पर्व पर वहां के लिये बजट में प्रावधान किया जाये. लाखों लोग इस अवसर पर वहां दर्शन करेंगे और बहुत सारी समस्याएं उत्पन्न होती है ताकि और लोग उत्साह से मां नर्मदा एवं शिवरात्रि मना सकें. मेरे क्षेत्र में गणेश आश्रम है वह बहुत पुराना आश्रम है. मैं चाहता हूं कि इसे धार्मिक स्थलों में शामिल किया जाकर उसका विकास किया जाये.
सामान्य प्रशासन विभाग के बारे में कहना चाहता हूं कि वहां तहसीलदार का एक पद है वह रिक्त है. नायब तहसीलदार के 4 पद हैं 3 रिक्त हैं. पटवारियों के 120 पद स्वीकृत हैं. 60 पद रिक्त हैं. प्रत्येक पटवारी हलके में पटवारी निवास बनाया जाये. जिला और जनपद पंचायतों के लिये राशि की व्यवस्था की जायेआपने बोलने का समय दिया धन्यवाद.
श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक (बिजावर)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 1-2-26-37-48 एवं 65 के समर्थन में अपनी बात कहने के लिये उपस्थित हुआ हूं. मांग संख्या 1 में सामान्य प्रशासन विभाग है. मैं अपने अल्प ज्ञान की वजह से सामान्य प्रशासन विभाग को केवल भवन आवंटन विभाग समझा करता था, लेकिन उसका आय-व्ययक का पत्रक देखने के बाद यह ध्यान में आया कि सारे विभागों में सबसे महत्वपूर्ण यही विभाग है इसकी मांगों का समर्थन करना मेरे लिये बहुत जरूरी है. अभी राज्य सेवा की प्रारंभिक परीक्षाएं विभाग के द्वारा आयोजित की गईं लोक सेवा आयोग ने इन परीक्षाओं का आयोजन किया 22 फरवरी 16 को आश्चर्यजनक रूप से 10 दिन के अंदर एक मार्च को उसका रिजल्ट आया उसका इतना ज्यादा लाभ प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लेने वाले विद्यार्थियों का हुआ होगा कि वे निश्चित रूप से सरकार की सराहना कर रहे होंगे. नियुक्तियों, पदोन्नतियों के मामले में पारदर्शिता के नये कीर्तिमान स्थापित किये हैं इसके लिये मैं इस विभाग की मांगों का समर्थन करने के लिये आपके बीच में उपस्थित हूं. विभागीय पदोन्नति के लिये ऑन लाईन समिति बनाकर के व्यवस्था बनायी गई है उससे पारदर्शिता भी बढ़ी है और उसके परिणाम भी जल्दी आने लगे हैं, यह पूरी प्रशासनिक व्यवस्था में दिखाई देता है. मुख्यमंत्री हेल्पलाईन इतनी ज्यादा सुगम है यह बहुत ज्यादा नीचे तक लोगों की पहुंच में है कि इससे कई बार तो हास्यास्पद स्थिति बनती है. मैं एक उदाहरण आपके बीच में रखना चाहूंगा. मेरी विधान सभा क्षेत्र के एक गांव ईसानगर के व्यक्ति ने शिकायत कर दी कि विधायक जी ने हमें 10 हजार रूपये नहीं दिये हेल्पलाईन में यह शिकायत पहुंच गई और उसका क्रियान्वयन इतना जबरदस्त हुआ कि खेल विभाग में निराकरण के लिये पहुंची और खेल विभाग से हम तक यह बात आयी कि ऐसा क्या हुआ तो मैंने उनको बताया कि खेल एवं विधायक की प्रतियोगिता चल रही थी मुझे नहीं मालूम कि कैसे क्या हुआ ? हम उन तक पहुंचे भी उन्होंने बोला कि हमको किसी ने बताया था कि जो कोई कबड्डी में जीतेगा उसको 10 हजार रूपये मिलेंगे इसलिये हमने उसकी शिकायत कर दी उसका इतना अच्छा निराकरण हुआ हालांकि उनसे बातचीत हुई और उनको समझ में आ गया कि उन्होंने गलत शिकायत की है, लेकिन उस पर जो त्वरित कार्यवाही हुई इस बात को लेकर विभाग की प्रशंसा करना चाहता हूं कि इसकी पहुंच इतने भीतर एवं नीचे तक है कि आमजन के बीच में यह बड़ी ही लोकप्रिय व्यवस्था बनी हुई है. समाधान ऑन-लाईन के माध्यम से सीधी सुनवाई होती है प्रत्येक मंगलवार को जन सुनवाई होती है उसकी इतनी ज्यादा लोकप्रियता है कि कलेक्टर एवं एसडीएम के कार्यालय में मंगलवार को इतनी भीड़ मिलती है कि तमाम जो सप्ताह भर की लोगों को दिक्कतें होती हैं उसका मंगलवार के दिन निराकरण मानने लगे हैं और मुझे तो लगता है कि मंगलवार को मध्यप्रदेश में केवल दो जगह भीड़ होती है या तो हनुमान जी के मंदिर में या दूसरा कलेक्टर कार्यालय में समस्याओं के समाधान को लेकर. मानव अधिकार आयोग ने 8 हजार 815 में से 7 हजार 440 शिकायतों का समाधान किया है, यह अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है. जहां तक हम बात करते हैं प्रमाण-पत्रों की चाहे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र हों अथवा पिछड़ा वर्ग के लोगों के प्रमाण पत्रों की बात हो तो लोग बड़े परेशान मिलते हैं लोग हम तक आते हैं जिनको पिछड़े वर्ग का प्रमाण पत्र चाहिये होता है तो उनको हमको 1984 की स्थिति बतानी पड़ती है, अनुसूचित जनजाति वालों को 1950 की स्थिति बतानी पड़ती है, जब कि भारत वर्ष की परम्परा यह रही है कि लोगों की आदत में नहीं है अपने कागजों को संभालकर के रखना इसलिये ऐसे लोगों को बड़ी दिक्कत होती है. अपनी चूंकि श्रृति परम्परा रही है एवं सारी चीजें श्रृति परम्परा के माध्यम से आयी हैं इसलिये लिखा-पढ़ी का लोगों के अनुभव एवं अभ्यास में नहीं है इस बात का समाधान करके सरकार ने इतनी अच्छी व्यवस्था दी है कि अभी मैं अपने क्षेत्र के एक स्कूल में गया था वहां पर बच्चों के बीच में हिन्दी एवं अंग्रेजी में लेमीनेटेड प्रमाण-पत्र उनकी जाति के दिये.
अध्यक्ष महोदय- समय कम है, कृपया समाप्त करें ।
श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक- माननीय अध्यक्ष महोदय, जितने भी अनुशासित सदस्य हैं, उनके लिए विशेष प्रावधान करके समय की सीमा बढ़ाएं नहीं तो अनुशासित रहने वाले सदस्यों को कहां मौका मिलेगा न वे चिल्ला चोट में भाग ले पाते हैं और न ही वे शांति से बात कर पाते हैं ।
अध्यक्ष महोदय- चलिए दो मिनट में अपनी बात समाप्त कर दीजिए ।
श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक- माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद, अनुकंपा नियुक्ति का सरलीकरण हुआ है, मैंने खुद ही भुगता है, मेरे परिवार की एक अनुकंपा नियुक्ति के मामले में,वर्ष 2000 में मृत्यु होने के बाद अनुकंपा नियुक्ति के लिए मुझे वर्ष 2004 तक इंतजार करना पड़ा, 6-7 साल के जो अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरण पड़े थे, उनका समाधान शीघ्रता से हुआ है, इसके लिए मैं विभाग को बहुत बधाई देता हूँ और उनकी मांगों का समर्थन करता हूँ ।
माननीय अध्यक्ष महोदय,लोकायुक्त संगठन के द्वारा जो शिकायतों का निराकरण हुआ है, वह भी बहुत महत्वपूर्ण है, हालांकि भ्रष्टाचार का विषय ऐसा विषय है जिस पर एक दूसरे पर आरोप हम कर सकते हैं, लेकिन वास्तव में यह पूरे समाज का जहर है और इसे ठीक करने के लिए प्रयास सरकार के द्वारा किए जा रहे हैं तो निश्चित ही प्रशंसनीय है और हमको चिन्ता करनी चाहिए उस दिशा में जो भी कदम उठाए जा रहे हैं, उनकी निश्चित रूप से सराहना होनी चाहिए, सबको मिलकर सराहना करना चाहिए . 16 विभागीय जांचें हुई हैं, 439 चालान पेश हुए हैं, 411 ट्रेप किए जाने के प्रकरण इसमें आए हैं, यह निश्चित रूप से अच्छा काम हुआ है ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, संस्कृति विभाग के बारे में कहना चाहता हूँ, चाहे वह खजुराहों डांस फेस्टिवल हो, जिसमें भारत वर्ष के तमाम नृत्य कलाओं को वहां प्रोत्साहन मिलता है, चाहे वह कणकुण्डार का महोत्सव हो, जहां कणकुण्डार के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाने के लिए विशेष आयोजन तीन दिनों के लिए चलते हैं, चाहे वह चित्रकूट शरद महोत्सव हो, शरद महोत्सव का तो इतना अच्छा आनंद है, जिन सदस्यों ने उसमें भाग न लिया हो, उनको जाना चाहिए, मंदाकिनी नदी के एक किनारे पर मंच बनता है, उस पर सांस्कृतिक आयोजन होते हैं, नदी के दूसरी तरफ नाव लगाकर, घाट बनाकर, इतनी अच्छी व्यवस्था वहां पर देखने के लिए रहती है, बहुत आनंद का विषय रहता है, लोगों को वहां जाना चाहिए और संस्कृति विभाग के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित करनी चाहिए ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं पर्यटन को लेकर कहना चाहता हूँ, हालांकि भारत वर्ष की जो परंपरा रही है, वह दीर्थाटन की रही है, तीर्थाटन में तीर्थ स्थानों पर जाने की परंपरा अपने देश की रही है, पर्यटन में केवल इतना हुआ कि जो दर्शनीय स्थल हैं, उन पर जाने को हमने पर्यटन कह दिया लेकिन वास्तव में आज भी भारत का मानस तीर्थाटन को विशेष महत्व देता है, भले ही लोग कश्मीर की घाटी में घूमने जाएं लेकिन वह वैष्णो माता की यात्रा जरूर सम्मिलित करते हैं । किसी भी तीर्थ यात्रा पर यदि लोग जाएंगे तो पर्यटन उसके साथ जोड़ेगे दूसरे किसी भी स्थान पर जाएं तो उसमें तीर्थाटन को जोड़ते हैं, इसमें दोनों यात्रओं को पर्यटन के साथ तीर्थाटन को विशेष महत्व मिलना चाहिए ,हर तीर्थ स्थान के साथ जहां जहां पर्यटन के केन्द्र हैं, निश्चित रूप से उनको बढ़ावा देना चाहिए, आपने बोलने का समय दिया, समय-सीमा का पालन करके आपकी बात को महत्व दिया, बहुत बहुत धन्यवाद ।
कुंवर सौरभ सिंह(बहोरीबंद)- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 1,2,26,37,48 और 65 का विरोध करता हूँ ,माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा वर्ष 2012 से भतियां नहीं की गई हैं ,वर्ष 2012 में रिजल्ट आया था, लगभग सवा चार लाख बच्चों ने परीक्षा दी, 6500 बच्चे प्रारंभिक परीक्षा में पास हुए, 100 मेन्स में पास हुए और लगभग दस, पांच बच्चों की गलतियों के कारण आपने आज तक इंटरव्यूह नहीं लिया है । माननीय मैं कहना चाहूंगा संघ लोक सेवा आयोग राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा एक साल में कर लेता है, यानि जिस साल फार्म भरवाता है उसी साल परीक्षा लेता है, उसी साल रिजल्ट देता है, इस परीक्षा को लेने में हमको लगभग 3 साल लगते हैं ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय लोकायुक्त संगठन शासन की कठपुतली बनकर रह गया है । आप नई नियुक्ति नही कर रहे हैं, एक्सटेंशन पर एक्सटेंशन दे रहे हैं । जब अधिकारी आपसे ऑबलाईज रहेगा तो शासन के विरूद्व निष्पक्ष कार्यवाही कैसे करेगा ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, शासन के द्वारा विभिन्न घटनाओं के लिए जांच आयोग बनाए गए हैं । विधान सभा के पटल पर 12 वर्षों में एकाध बार ही कोई चर्चा हुई हो तो बड़ी बात है, लगभग 2 साल में लोकायुक्त के प्रतिवेदन पर एक बार भी चर्चा नहीं हुई है । माननीय जांच आयोग बैठा दिया जाता है, रतनगढ़ में एक भगदड़ की घटना हुई, जांच आयोग बैठा दिया गया, घटना दोबारा हुई फिर जांच आयोग बैठा दिया गया, न रिपोर्ट आई और न ही चर्चा हुई और न ही दोषियों पर कार्यवाही हुई । हम जनता के साथ संवेदनशील होने का सिर्फ दिखावा कर रहे हैं, माननीय ई.ओ.डब्लू. का गठन, आर्थिक अपराधों के रोकथाम के लिए हुआ है, कई वर्षों से जांच पूरी नहीं हुई है और न ही कोर्ट में चालान पेश हो रहे हैं और न ही आपके पास स्टाफ है, जब आपको आर्थिक चोरी का प्रकरण ही नहीं करना तो जनता के साथ आप दिखावा क्यों करते हैं । यह नो टॉलरेन्स की घोषणा माननीय लोग करते हैं, वह हकीकत में बिल्कुल जीरो है. अनुकम्पा नियुक्ति के मामले में, हमारे साथी विधायक कह रहे थे कि इतने ज्यादा प्रकरण पेण्डिंग पड़े हैं. जिस व्यक्ति के यहां गमी हो गई है, उसके उत्तराधिकारी को हम नौकरी दे रहे हैं पर उसके जूते घिसे जा रहे हैं लेकिन अनुकम्पा नियुक्ति नहीं हो पा रही है.
माननीय, प्रमोशन के बारे में, विभागीय पदोन्नति की बैठकें समय पर नहीं हो रही हैं, जो पात्र हैं उनको प्रमोशन नहीं मिल रहे हैं, असन्तोष की भावना अच्छे अधिकारियों में घर कर रही है. हमारे यहां की प्रशासन अकादमी, राष्ट्रीय स्तर के अधिकारियों को प्रशिक्षण देती है पर हमारे यहां फैकल्टी नहीं है, हम धीरे-धीरे संस्था को समाप्त करते जा रहे हैं.
माननीय मांग संख्या 48 पर नर्मदा घाटी विकास का कार्य बहुत धीमी गति से चल रहा है. माननीय बरगी बांध परियोजना में टनल के निर्माण के कार्य को सन् 2007 में 799 करोड़ रूपये में दिया गया था. दि. 26/3/2008 को वर्क आर्डर दिया गया था, 40 माह की अवधि थी. अर्थात् दि. 25/07/2011 को इस कार्य को पूर्ण होना था. माननीय 40 माह यानि दि. 25/07/2011 को कार्य पूर्ण नहीं हुआ. तो सरकार ने पुन: 29 माह की समयावधि बढ़ा दी, लगभग 75 प्रतिशत की समयावधि दोबारा बढ़ाई गई, दि. 31/12/2013 को कार्य पूर्ण होना था पर कार्य पूरा नहीं हुआ फिर हमने 30 माह की समयावधि बढ़ा दी.
माननीय अध्यक्ष महोदय, न सिर्फ 30 माह बल्कि 118 करोड़ रूपये की मूल्यवृद्धि का भी लाभ दिया गया. आपने समय पर एक बार काम नहीं किया, दोबारा समय पर काम नहीं किया, इसकी सजा आपको यह मिली कि आपको बोनस मिल गया. मैं अपने साथी विधायकों से पूछना चाहता हूँ लगातार हम सन् 2003 के गड्डे और लाईट की बात करते हैं. इसके बारे में हम क्या कहेंगे. आदरणीय, फिर बढ़ी हुई समयावधि 30 माह की थी, वह भी 2016 में समाप्त हो गई. केवल 1450 मीटर टनल का कार्य पूर्ण हुआ तो फिर किसानों के साथ असत्य क्यों कहा गया ?
अध्यक्ष महोदय - अब समाप्त करें. केवल एक मिनिट में अपनी बात कहें. बोलने हेतु बहुत सदस्य हैं.
कुँवर सौरभ सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, कभी-कभी तो मौका मिलता है. आप उसमें भी बिठा देते हैं. एक अन्तर्राज्यीय समझौता हुआ है, जिसमें हमें सन् 2024 तक निर्धारित 1825 एम.ए.एफ. मिलियन एकड़ फीट जल का उपयोग करना है. जिसे हम आज तक सिर्फ 5 एम.ए.एफ. मिलियन एकड़ फीट उपयोग कर पाये हैं. माननीय मुख्यमंत्री जी कहते हैं कि हम सन् 2020 तक पूरा कर पायेंगें. यह टनल पूरी नहीं हुई तो आप कहां से पूरा कर लेंगे ? हमें इसके उपयोग को पूरा करने के लिए लग 30,000 करोड़ रूपये की आवश्यकता है. हम नर्मदा घाटी में कुल 1,500 करोड़ रूपये देते हैं. इसको पूरा करने के लिए न सिर्फ 30,000 करोड़ रूपये बल्कि ईमानदारी से इच्छाशक्ति की भी आवश्यकता है. माननीय मुख्यमंत्री जी कहते हैं कि जनता मेरी भगवान है. ऐसा लगा कि भाषणों में सुना है. फिर भगवान को चन्दन लगाइये, हल्दी लगाइये, सिन्दूर लगाइये, रोली लगाइये, हम चूना क्यों लगा रहे हैं ?
माननीय अध्यक्ष जी, आप कल्पना करें कि टनल न बन पाने से लगभग डेढ़ लाख हैक्टेयर सिंचाई न होने से, किसानों की कितनी फसल का नुकसान हो रहा है. यह राशि लगभग 1,085 करोड़ रूपये प्रतिवर्ष होती है. इसके लिए कौन जवाबदार है ? बरगी से जो नहर निकलती है, अगर उसको दिनारी खमरिया के पास से सीहोरा के पास से काटा जाये तो वहां उसकी ऊँचाई 18.79 मीटर होती है. अगर यह नहर वहां से काटकर निकाली जाये तो बोहरीबन्द पठार और ईठी पठार में पानी जा सकेगा. अध्यक्ष महोदय, हम सिर्फ कह रहे हैं कि हम काम कर रहे हैं. अगर हम काम कर रहे हैं तो जनता को दिखता. आपने बोलने का अवसर दिया. उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्री देवेन्द्र वर्मा (खण्डवा) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 1, 2, 26, 37, 48 और 65 के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ. जैसा कि हमारे धर्म ग्रन्थों में मां नर्मदा के तट पर, हम मां नर्मदा का अष्टक करते हैं.
''कृतान्तधूत कालभूत भौतिहारी नर्मदे,
त्वदीय पाद पंकजम्
नमामि देवी नर्मदे,''
इन पंक्तियों को आदि शंकराचार्य द्वारा मां नर्मदा के पावन तट, ओंकारेश्वर पर हजारों वर्ष पूर्व इसकी रचना की गई थी और आज भी इन पंक्तियों का नर्मदा अष्टक के माध्यम से निमाड़ ही नहीं, पूरे मां नर्मदा के कछार अर्थात् हम कहें कि पूरे मध्यप्रदेश में, हम मां नर्मदा का, इस अष्टक का, स्त्रोत का पाठ करते हैं. मां नर्मदा के दर्शन मात्र से विपत्ति का नाश होता है. जैसा इस पंक्ति में कहा गया है कि यम के दूत भी जहां पर आने से डरते हैं. अगर हम बात करें मां नर्मदा की तो निश्चित रुप से हम कह सकते हैं कि मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास, कृषि, सिंचाई के क्षेत्र में हमारे प्रदेश को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने में, अगर उससे हम आगे बढ़कर कहें कि धार्मिक, सांस्कृतिक और अधोसंरचना के विकास में मां नर्मदा अपना मध्यप्रदेश में एक महत्वपूर्ण स्थान आज निभाने जा रही है. अगर इस कड़ी में हम बात करें, तो आज हम कह सकते हैं कि इंदिरा सागर जैसा कि लगभग एक हजार वर्ग किलोमीटर में एक जल सैलाब यहां पर बना है. इसी प्रकार ओंकारेश्वर परियोजना जो हमारे मुख्यमंत्री जी ने एक रिकार्ड समय में पूर्ण करके मध्यप्रदेश को एक गौरवशाली इतिहास दिया है कि इतने कम समय में यह परियोजना पूर्ण हुई और उसके माध्यम से हमारा खण्डवा जिला इन प्रोजेक्ट्स के माध्यम से मध्यप्रदेश को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने का काम कर रहा है. इन योजनाओं के माध्यम से अनेक प्रकार की उद्वहन सिंचाई योजनाएं आज बन रही हैं. अगर इस कड़ी में बात करें, तो ध्यान में आता है कि कहीं न कहीं भू-अधिग्रहण और इस प्रकार की जो झंझटें हैं, उससे किस प्रकार से मुक्ति मिले, इसके लिये मुख्यमंत्री जी ने निर्णय लिया है कि उद्वहन सिंचाई योजनाओं के माध्यम से हम प्रदेश में ज्यादा से ज्यादा क्षेत्र को सिंचित करने का काम करेंगे. इसके लिये जब पहली योजना हमारे खण्डवा में पुनासा उद्वहन सिंचाई योजना बनी थी, तो अनेक प्रकार की शंका और कुशंकाएं लगाई जा रही थी. आज उस योजना से लगभग 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित हो रहा है और आने वाले समय में इन योजनाओं को और ज्यादा विस्तार रुप दे सकें, इसलिये हमारे मुख्यमंत्री जी ने खण्डवा जिले में सिहाड़ा उद्वहन सिंचाई योजना की घोषणा की है, जो लगभग 100 करोड़ रुपये की है. इसी प्रकार अगर हम बात करें तो हमारा छेगांवमाखन बेल्ट, जहां पर जल स्तर लगभग 1 हजार फिट से भी ज्यादा नीचे है. यहां पर पेयजल की भी दिक्कत आती है, वहां पर हम अगर इस बजट की कॉपी देखें, तो ध्यान में आता है कि लगभग 750 करोड़ रुपये की योजना आज छेगांवमाखन को मिली है. इन योजनाओं के माध्यम से जहां एक ओर हमारी नर्मदा की नहर बड़वानी तक लगभग 250 किलोमीटर पहुंची है, वहीं दूसरी ओर हमारे छेगांवमाखन जिस क्षेत्र में से..
श्री लाल सिंह आर्य -- सचिन जी, इससे आपके क्षेत्र में और प्रदेश अध्यक्ष के क्षेत्र में भी पानी मिलेगा.
श्री सचिन यादव -- मैं आपकी जानकारी के लिये बता दूं कि यह योजना हमारे पिताजी ने चालू करवाई थी. 1984 में स्वर्गीय इंदिरा जी को लेकर के पुनासा में इसकी आधारशिला रखी गयी थी. तब मेरे पिताजी वहां के सांसद थे और तभी से उस बांध की शुरुआत हुई थी. उसके बाद लगातार उस विभाग के मंत्री रहे थे और उन्हीं ने इस विभाग को आगे बढ़ाया था, जिसका प्रभार आज आप संभाल रहे हैं.
श्री देवेन्द्र वर्मा -- अध्यक्ष महोदय, आप इतिहास बता रहे हैं, मैं आपको बताना चाहता हूं कि इसकी चर्चा जवाहरलाल नेहरु और अंग्रेजों के समय में हुई थी. लेकिन इसका भूमि पूजन जब इंदिरा गांधी जी के द्वारा किया गया1983 में, उसके बाद 20 साल तक पत्थर उसी प्रकार लगा रहा. 20 साल तक उसमें भ्रष्टाचार होता रहा. जब 2003 में हमारे मुख्यमंत्री, शिवराज सिंह चौहान जी बने, तब वह योजना आगे बढ़ी है. मुख्यमंत्री जी की एक ऐतिहासिक योजना और कहीं न कहीं उसमें सबसे अधिक बजट स्वीकृत करके उस योजना की मानीटरिंग की गई और उसके बाद बनने वाली ओंकारेश्वर योजना अटल बिहारी वाजपेयी जी द्वारा जिसका भूमि पूजन किया गया और मात्र वह कुछ ही वर्षों में बनकर तैयार हुई थी. मैं बताना चाहता हूं कि इन योजनाओं के माध्यम से हमारा प्रदेश विकास के रास्ते पर आगे बढ़ा है. मैं चर्चा कर रहा था कि हमारी पहली पुनासा उद्वहन सिंचाई योजना बनी थी, तो अनेक प्रकार की शंका, कुशंका लगाई जा रही थी. आज उससे लगभग 35 हजार हेक्टेयर खण्डवा का क्षेत्र सिंचित हो रहा है. पुनासा पूरा ब्लाक सिंचित हो रहा है. उससे आगे बढ़कर इस बजट में जो सबसे बड़ा निर्णय लिया गया है कि छेगांवमाखन उद्वहन सिंचाई योजना, जिसमें कि लगभग दो ब्लाक सिंचित होंगे, लगभग 750 करोड़ रुपये की स्वीकृति आज हमारे बजट में मिली है. इसके लिये मैं मुख्यमंत्री जी एवं मंत्री जी को बधाई देता हूं, जिन्होंने हमारे क्षेत्र को इस प्रकार की एक ऐतिहासिक योजनायें देने का काम किया है. उससे आगे बढ़कर हमारे भूतपूर्व प्रधानमंत्री, अटल बिहारी वाजपेयी जी ने जिस प्रकार सपना देखा था कि हम नदी से नदी को जोड़ेंगे, तो मध्यप्रदेश और देश के इतिहास में अगर पहले इस प्रोजेक्ट पर अमल करने का काम किया है, तो मुख्यमंत्री जी ने नर्मदा को क्षिप्रा से जोड़ने का काम किया है. आने वाले समय में चाहे पार्वती, सिंध,माही नदी हो. इस प्रकार अनेक नदियों को जोड़कर पूरे प्रदेश में जहां 7 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर लगभग 40 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य मुख्यमंत्री जी ने रखा है. हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी ने रखा है तो निश्चित रूप से मां नर्मदा की अपार जलराशि के माध्यम से मध्यप्रदेश की एक-एक इंच भूमि सिंचित करने का काम मुख्यमंत्री जी करेंगे. अध्यक्ष महोदय, पुनासा उद्वहन सिंचाई योजना जहां हमें मिली है वहीं छेगांव माखन उद्वहन सिंचाई के माध्यम से लगभग 35 हजार क्षेत्र सिंचित होगा. लगभग 10 करोड़ की सिंघाड़ा उद्वहन सिंचाई योजना के माध्यम से खंडवा का लगभग 60% क्षेत्र सिंचित होगा, इस योजनाओं के माध्यम से निमाड़ सिंचित क्षेत्र में लगभग पू्र्ण होने की स्थिति में होगा, निश्चित रूप से इस प्रकार की सिंचाई योजनायें हमारे मध्यप्रदेश के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रही है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, पर्यटन के बारे में कहना चाहता हूं कि प्रदेश, देश में नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अगर चर्चा होती है तो खंडवा जिले के हनुमंतिया की होती है. कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि हनुमंतिया में ऐसा क्या है, हनुमंतिया को क्यों टारगेट किया जा रहा है. अध्यक्ष महोदय, मैं बताना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश के विकास में मां नर्मदा ने योगदान दिया है तो खंडवा ऐसा जिला है जहां पर लगभग 250-300 गांव डूबे थे और इन गांव के लोगों ने विस्थापन का दर्द झेला था, निश्चित रूप से ऐसे समय में पूरे निमाड़ में इस प्रकार की शंका थी कि हमारे निमाड़ का नुकसान हुआ है, लेकिन आज हम देख रहे हैं कि पूरे निमाड़ में नहीं, मध्यप्रदेश में उत्साह है . 1000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में जल का भराव है, समुद्र जैसा दृष्य वहां पर दिखता है. वहां पर पर्यटन की अपार संभावना है. हमारे मुख्यमंत्री जी ने इस स्थल को ढूंढकर निकाला है और उसको पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिये लगभग 15 से 20 करोड़ रूपये की राशि से उस क्षेत्र का विकास किया है. 2015 को जल महोत्सव के माध्यम से मनाने का काम मुख्यमंत्री जी ने किया है. उस उत्सव में पूरे देश के पर्यटक आये, आने वाले समय में पूरे मध्यप्रदेश के 15 पर्यटक स्थल को विकसित करने का काम मुख्यमंत्री जी करने जा रहे है. पर्यटक के नक्शे पर मध्यप्रदेश शामिल होने जा रहा है इसके लिये मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को, माननीय मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं जिन्होंने इस प्रकार की सौगात हमारे जिले को हमारे प्रदेश को दी. अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया उसके लिये आपको भी बहुत बहुत धन्यवाद.
डॉ. गोविंद सिंह (लहार) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सामान्य प्रशासन विभाग मांगों के संबंध में मैं अपनी बात कहने के लिये खड़ा हुआ हूं. अध्यक्ष महोदय, सामान्य प्रशासन विभाग अंतर्गत मंत्रालय में जो अनुभाग अधिकारी और विधानसभा के अनुभाग अधिकारी हैं उनका ग्रेड-पे समान है 4200 से लेकर 5400 परंतु मंत्रालय में ही कुछ ऐसे अनुभाग अधिकारी हैं जिनको स्वीकृत ग्रेड-पे 4200 से कम दिया जा रहा है. मुख्यमंत्री जी ने दो बार इस विसंगति को दूर करने के लिये घोषणा भी की थी परंतु अभी तक उसका पालन नहीं हो पाया है. अनुरोध है कि इस विसंगति को आप दूर कराने का कष्ट करें.
अध्यक्ष महोदय, आयोग के बारे में कहना चाहता हूं कि जब कोई आयोग का गठन होता है तो उसकी रिपोर्ट आती है. पेंशन घोटाले में भी 2008 में आयोग का गठन किया गया था, उसकी रिपोर्ट 2012 में उसकी रिपोर्ट भी आ गई. उसके बाद मंत्रि मंडल में समीक्षा के लिये वह रिपोर्ट गई, अब 4 वर्ष तक मंत्रि मंडल पेंशन घोटाला आयोग की रिपोर्ट की समीक्षा क्यों नहीं कर रहा है. अगर समीक्षा हो गई है तो पेंशन घोटाले की सच्चाई विधानसभा के पटल पर रखें अन्यथा लिख दें कि जो मंत्री भ्रष्टाचार में डूबेंगे उनके लिये आयोग का कोई महत्व नहीं है, आयोग को समाप्त करो, कम से कम दो में से कोई एक निर्णय यह सरकार करे.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मीसा बंदियों के बारे में कहना चाहता हूं कि इनके बारे में सरकार ने निर्णय 2008 में लिया और उसमें लिखा कि केवल उन व्यक्तियों को मीसा और डीआईआर में कानून के अधीन जो राजनेतिक सामाजिक कारणों से निरूद्ध थे. केवल उन व्यक्तियों को मीसा और डीआईआर में कानून के अधीन राजनैतिक, सामाजिक कारणों से निरूद्ध थे, उनका तत्समय पुलिस रिकार्ड में कोई पृथक आपराधिक अथवा सामाजिक गतिविधियों में इतिहास नहीं था, उनको दिया जायेगा. लेकिन आज मध्यप्रदेश में तमाम ऐसे व्यक्ति हैं, जिनके बाद में प्रकरण दर्ज हुये हैं और उसमें से अनेकों पर अभी भी केस चल रहे हैं, परंतु उन सबको मीसाबंदी की पेंशन जो निर्धारित है, 6 माह से कम रूपये 10 हजार, और 6 माह जो मीसाबंदी जेल में रहे हैं उनको 15 हजार. परंतु क्या कारण है एक छात्र नेता ग्वालियर में उदयवीर सिंह भदौरिया इनको लगातार वह 4-5 साल से, अब बुजुर्ग हो गये हैं, एक्सीडेंट हो गया, चलने-फिरन में असमर्थ हैं, 1980 में जब गिरफ्तार हुये थे करीब 18 महीने से अधिक जेल में रहे हैं और लगातार कलेक्टर को दिया, 1980 में केस रजिस्टर्ड हुआ, बस ट्रांसपोर्टर हो गये, बसों में झगड़े हुये. झगड़े के केस उनके पास 1980, 1985 1999, 2002, चार प्रकरण हुये और आज भी 2002 के बाद 14 वर्ष हो गये और उन पर कोई प्रकरण दर्ज नहीं है, केवल एक प्रकरण चल रहा है, गवाह नहीं आ रहा, उसका पता नहीं चल रहा इसलिये वह अटका हुआ है, बांकी के सब प्रकरण समाप्त हो चुके. उन्होंने कलेक्टर को लगातार आवेदन दिया, जो जिला समिति थी प्रभारी मंत्री को दिया, परंतु वहां के पुलिस अधिकारियों ने रिपोर्ट लिख दी कि इनका चरित्र खराब है, केस चल रहे हैं और केस चलने के कारण उनकी पेंशन निरस्त कर दी. उन्होंने शासन में अपील की, शासन में एक-डेढ़ साल से अपील चल रही है कोई सुनवाई नहीं हो रही. इसके बाद मैंने भी कलेक्टर को पत्र लिखा कि आप अपराध का विवरण दें, फिर नहीं आया, फिर सामान्य प्रशासन विभाग ने फरवरी में लिखा कि मीसाबंदी के तथ्य की जानकारी आप भेजें, परंतु अभी तक नहीं आई. आज ही मेरा विधानसभा प्रश्न था उसमें भी लिख दिया गया है कि जानकारी मंगाई जा रही है. आखिर सरकार है, या भर्राशाही है, 2-2, 3-3 साल एक आदमी परेशान हो रहा है.
अध्यक्ष महोदय-- कृपया समाप्त करें, एक ही विषय में तो पूरा समय ले लिया आपने.
डॉ. गोविंद सिंह-- नहीं तो उसका न्याय तो मिल जाये, पहले भी मेरे निवेदन पर एक व्यक्ति को आपने न्याय दिलवाया है.
अध्यक्ष महोदय-- वह उत्तर दे देंगे उसका, आगे बढ़े.
डॉ. गोविंद सिंह-- एक वर्ष पहले भी आपसे एक डॉ. पवन कटनी का दिलवाया था तो आपको अभ्यावेदन दिया था तब आपने लिखा था, तब मिल पाया था. इसराणी जी ने भी पत्र लिखा था. अब मैं इसलिये कहना चाहता हूं कि वह पुलिस में लिखवाने गये तो पुलिस वाला कहता है कि........ (XXX)
अध्यक्ष महोदय-- इसको कार्यवाही से निकाल दें.
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)-- जिन पर राष्ट्रद्रोह चल रहे हैं वह चलायेंगे सरकार. तो क्या राहुल गांधी चलायेंगे सरकार, अफजल गुरू चलायेंगे सरकार, क्या प्रमाण हैं आपके पास में.
डॉ. गोविंद सिंह-- आपको भी बता देंगे, आपने क्या घपला किया है.
डॉ. नरोत्तम मिश्र-- जानबूझकर कुछ भी बात बोलते हैं, असत्य वाचन कर रहे हैं. फिर वही घटना की पुनरावृत्ति करते हैं आप और फिर अध्यक्ष जी क्रिया पर प्रतिक्रिया होती है तो आप नाराज होते हैं.
डॉ. गोविंद सिंह-- हम लिखित में दे देंगे, हमारे पास रखा है.
डॉ. नरोत्तम मिश्र-- लिखित में यहां रखिये न प्रमाण, सबको दिखओ, आपके माध्यम से, मीडिया के माध्यम से जनता में जायेगा.
डॉ. गोविंद सिंह-- अच्छा तो फिर इसे क्यों नहीं मिला.
डॉ. नरोत्तम मिश्र-- यह अलग विषय हो सकता है.
डॉ. गोविंद सिंह-- इसके लिये दोषी कौन है.
डॉ. नरोत्तम मिश्र-- जो दोषी होगा वह दंडित होगा.
डॉ. गोविंद सिंह-- कब तक दंडित होगा, दंडित तो आपके विजयवर्गीय नहीं हो पाये आज तक 10 साल हो गये.
डॉ. नरोत्तम मिश्र-- जो दोषी होगा वह दंडित होगा.
अध्यक्ष महोदय-- कृपया सीधे बात नहीं करें.
डॉ. नरोत्तम मिश्र-- देशद्रोही जिस पार्टी में हों जिन पर केस चल रहे हैं देशद्रोह के उस पार्टी में गोविंद सिंह जी आप खुद बैठे हुये हैं. जो अफजल गुरू के समर्थक हैं उनके बीच में आप बैठे हुये हो.
डॉ. गोविंद सिंह-- आप क्यो बार-बार खड़े हो जाते हैं.
डॉ. नरोत्तम मिश्र-- आप क्यों अकारण नाम लेते हैं, असत्य वाचन क्यों करते हैं सदन में. अध्यक्ष जी असत्य वाचन नहीं होगा यहां पर.
अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी बैठ जाइये, डॉ. साहब एक मिनट में बात समाप्त कर दें.
डॉ. गोविंद सिंह-- मेरा यह अनुरोध है कि आप तत्काल उनको दें और यह प्रतिबंध हटायें कि कार्यालय से लिखाया जाये.
डॉ. नरोत्तम मिश्र-- फिर वही बात.
अध्यक्ष महोदय-- नहीं उन्होंने नाम नहीं लिया.
डॉ गोविन्द सिंह-- दूसरी बात यह है कि 2012 में आपने फिर संशोधन कर दिया. उसमें यह लिखा दिया कि दो व्यक्ति जो जेल में रहे, उनसे लिखा लाओ. उसमें भी ऐसे तमाम लोग पेंशन प्राप्त करने लगे, जो कभी जेल में नहीं गये. फर्जी लिखवा लाये. क्या उनकी भी जांच करायेंगे? वह लोग कौन है? वह लोग आपके अगल-बगल में घूमने वाले हैं. इसकी जांच करके अगर नियम में आ रहा है तो उसको दें और अगर नहीं आ रहा है तो हम नहीं कहेंगे कि आप दें.धन्यवाद.
श्री दिलीप सिंह परिहार(नीमच)--अध्यक्ष महोदय, मैं, मांग संख्या 1,2,26,37,48 और 65 का समर्थन करता हूं.
अध्यक्ष महोदय, जिस स्वर्णिम मध्यप्रदेश की हम कल्पना करते हैं, वह इस देश का हृदयस्थल है. अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में पर्यटन में अपार संभावनाएं हैं.
'सुख का दाता, सबका साथी, सुख का यह संदेश है,
मां की गोद, पिता का आश्रय, मेरा मध्यप्रदेश है.'
अध्यक्षजी, यह मध्यप्रदेश महान है. माननीय मुख्यमंत्री जी और माननीय पटवा जी, राज्यमंत्री, पर्यटन के नेतृत्व में पर्यटन जो विकास कर रहा है. उस विकास में कहीं न कहीं पर्यटन के क्षेत्र में हम देखते हैं कि अपार संभावनाएं जाग्रत हुई है. उस संभावनाओं की वजह से हम देखते हैं जहां-जहां भी विकास करने का अवसर मिला. खंडवा में इंदिरा सागर डेम के पास हनुवंतिया में पर्यटन क्षेत्र का शुभारंभ हुआ. अध्यक्ष महोदय, हमारे जिले में गांधी सागर डेम है, वहां भी पर्यटन की ऐसी संभावना दिखती है. यदि गांधीसागर में भी यदि पर्यटन का विकास किया जायेगा तो राजस्थान के उदयपुर,जयपुर में अन्य प्रदेशों से जो लोग आते हैं, वह उसका लाभ उठायेंगे और एक सुन्दर वातावरण निर्मित हो सकता है.अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश जिस गति से विकास की ओर बढ़ रहा है, उसमें गांधी सागर को भी जोड़ेंगे तो उसका बहुत लाभ होगा.
अध्यक्ष महोदय, नीमच जिले में एक हवाई पट्टी है. आपने पर्यटन के क्षेत्र में गतिविधियां बढ़ाने के लिए दतिया,सिवनी तथा मंडला में नवीन शासकीय हवाई पट्टिओं का निर्माण कराया है. हम देखते हैं कि लोगों के पास आज अपार धन है. वे लोग अपने मन को संतोष देने के लिए अच्छे प्राकृतिक सौंदर्य देखने जाना चाहते हैं तो वह हवाई जहाज का उपयोग करते हैं. मेरा नीमच सीआरपी की जन्मस्थली है. वहां पर हमारे सेना के जवान और अन्य लोग भी आते हैं. नीमच में जो हवाई पट्टी है वह 1700 मीटर लंबी और लगभग 30 मीटर चौड़ी है. वहां अस्थायी तार लगे हैं, जिससे नुकसान होता है. मैं माननीय पटवा जी, से यह मांग करुंगा कि पर्यटन विभाग की तरफ से वहां एक स्थायी बाऊंड्री वॉल बना कर उस पट्टी के उन्नयन का काम करें. नीमच जिले से आपको विशेष लगाव भी है. इसके बनने से वहां निश्चित रुप से फायदा होगा.
अध्यक्ष महोदय, पर्यटन में यदि हम नीमच जिले में भी कोई संभावनाएं ढूंढते हैं तो हमें बहुत सारी संभावनाएं दिखेंगी. वहां सुखदेव जी की तपोस्थली सुखानंद जी है, वहां पर भी हम पर्यटन का विकास कर सकते हैं. नीमच में एक शहीद बगीचा है जहां हमारे पुरखों ने जहां हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूले हैं, उस बगीचे को भी यदि आप पर्यटन के रुप में विकसित करेंगे तो अच्छा रहेगा. वहां पर माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह जी पधारे थे उन्होने उसका उद्घाटन किया था.
समय 3.59 बजे उपाध्यक्ष महोदय (श्री राजेन्द्र कुमार सिंह )पीठासीन हुए.
उपाध्यक्ष महोदय, पर्यटन की संभावनाओं से हम नकार नहीं सकते हैं. चम्बल नदी और गांधी सागर का पानी सीधे राजस्थान में जाता है और वहां खेतों में सिंचाई होती है. उसी प्रकार नर्मदा नदी का पानी हमारे प्रदेश के किसान के खेत की शोभा बढ़ा रहा है. पहले जब नर्मदा के पानी का बंटवारा हुआ था, मध्यप्रदेश उसका उपयोग नहीं कर पाया था. मुझे याद है जब माननीय मोदी जी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उस समय कच्छ-भुज तक नर्मदा का पानी ले गये थे. लेकिन हमारे प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री, सबसे प्रिय मुख्यमंत्री श्री शिवराज चौहान ने नर्मदा के पानी का उपयोग मालवा में किया है. मालवा, जहां भगवान महाकाल का स्थान है. कहा जाता है मालव माटी गहन गंभीर, पग पग रोटी, डग डग नीर यह कहावत चरितार्थ करते हुए मालवा में नर्मदा नदी का पानी गया है. सिंहस्थ में नर्मदा और क्षिप्रा के पानी से आनंद लेने वाले हैं. हम पर्यटन की संभावनाओं को कहीं भी नकार नहीं सकते है. आज छोटी छोटी जगह पर भी पर्यटन का विकास किया जा सकता है.
उपाध्यक्ष महोदय, सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा अनुसूचित जाति,जनजाति और पिछड़े वर्ग के लिए प्रमाण पत्र बनाया करते हैं या हम देखते हैं कि जब नीमच जिला बना, तब श्री बाबूलाल गौर साहब मुख्यमंत्री थे, उन्होंने वहां पर उस समय जिला कलेक्टर कार्यालय की बिल्डिंग दी. मगर उस समय एक न्यायालय की बिल्डिंग विचारधीन रह गई है. यदि इस बजट सत्र में वहां पर सेशन न्यायालय का सामान्य प्रशासन के माध्यम से उन्नयन करेंगे, सुविधा देंगे तो वहां के वकील हमें प्रोत्साहित करेंगे, धन्यवाद देंगे.
उपाध्यक्ष महोदय, जो अभी मीसा बंदियों की बात चल रही थी. मुझे याद है कि वर्ष 1975-76 में कॉलेज में था, उस समय तीन साल पहले मेरे पिताजी शांत हो गये थे तो किसी ने कहा कि आप जाओ और मृतक शासकीय कर्मचारी होने की वजह से आपकी नौकरी लग जाएगी. मगर कांग्रेस का समय था, मेरी चप्पल घिस गई, परन्तु मेरी नौकरी नहीं लगी. मैं पढ़ने में तो सेकण्ड डिवीजन था, मगर खेलने में अच्छा था. यूनिवर्सिटी में फुटबाल खेलता था. विवेकानंद जी ने कहा था कि फुटबाल खेलने वाले लोग आगे बढ़ते हैं. मैं राजनीति में आशीर्वाद से आगे बढ़ा और जनता ने नोट भी दिये, वोट भी दिये, मुझे जिताने का काम किया है. मैं यह बात इसलिए कह रहा हूं कि आज जब किसी भी कर्मचारी की मृत्यु होती है. हमारे सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा तत्काल उसको अनुकंपा नियुक्ति दी जाती है, इसलिए मैं सरकार की प्रशंसा करता हूं.
डॉ. गोविन्द सिंह - आपने कहा कि नोट दिये, लेकिन आपने नोट का हिसाब आयोग में कहां दिया है?
श्री दिलीप सिंह परिहार - माननीय हमने वहां पर पेश किया है. डॉक्टर साहब आप बरसों से कांग्रेस में जो नोट लाते थे, वह आपके यहां जमा करते थे.
डॉ. गोविन्द सिंह - नोट का हिसाब आपने आयोग में कहां दिया है, आप यहां फर्जी बात करते हैं.
श्री दिलीप सिंह परिहार - इसीलिए जनता ने आपको गोविन्द सिंह जी सिमटा दिया है.
इंजी. प्रदीप लारिया - (व्यवधान)...आपके पास तो खजाना भरा था, चुनाव लड़ते थे. लेकिन जनता ने उनको पैसा दिया है.
उपाध्यक्ष महोदय - अब आप एक मिनट में समाप्त करें.
श्री दिलीप सिंह परिहार - उपाध्यक्ष महोदय, आज जो जन-सुनवाई होती है, वह जन-सुनवाई में गरीबों की सुनवाई होती है. मुझे याद है कि हमारे यहां पर जिलाधीश महोदय, यदि कोई गरीब आता है तो उसको बैंच पर बिठाते हैं, पानी पिलाते हैं. उसके सुख-दुःख की बातें करते हैं. यदि उसका कोई काम होता है तो तत्काल करवाते हैं. यदि तत्काल गरीब का काम होता है तो वह सरकार की प्रशंसा करता है और प्रशंसा की वजह से तीसरी बार श्री शिवराज सिंह चौहान प्रदेश के मुख्यमंत्री बन जाते हैं.
उपाध्यक्ष महोदय - अब आप समाप्त करें.
श्री दिलीप सिंह परिहार - हेल्प लाईन के माध्यम से, ऑन लाईन समाधान के माध्यम से भी जिन-जिन गरीबों को यदि कोई परेशानी होती है तो उनका समाधान मध्यप्रदेश की सरकार कर रही है. लोक सेवा आयोग के माध्यम से आज नियुक्तियां हो रही हैं, या परिणाम आ रहे हैं, उसको हम सराहना करते हैं. जैसा अभी लोक तंत्र के रक्षक की बात कर रहे थे. हमारे कई नेता जिन्होंने लम्बे समय तक इस पार्टी की सेवा की है. इंदिरा गांधी जी के समय हमारे यहां जब लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा था, उस समय कई लोग जेल में थे. जब वह लोग जेल में गये, उनको यह कल्पना नहीं थी कि हम जैसे लोगों का सम्मान होगा और आज मीसा बंदी और लोक तंत्र के रक्षकों का सम्मान हो रहा है, उनकी चिकित्सा की व्यवस्था हो रही है. उनको पेंशन दी जा रही है तो यह सराहनीय कार्य है. यह सामान्य प्रशासन विभाग का अभिनंदनीय कार्य है.
उपाध्यक्ष महोदय, मैं तो यही कहूंगा कि जो अनुसूचित जाति, जनजाति के प्रमाण पत्रों के लिए लाईन लगाना पड़ती थी, वह आज ऑन लाईन के माध्यम से मिल रहे हैं तो मैं इस अवसर पर हमारे माननीय श्री लाल सिंह आर्य जी, माननीय मुख्यमंत्री जी से यह निवेदन करूंगा कि नीमच जिले में गांधी सागर में जो संभावनाएं हैं उनको भी विकसित करे और आशीर्वाद बनाए रखें. उपाध्यक्ष महोदय, आपने जो बोलने का अवसर दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.
कुंवर विक्रम सिंह (राजनगर) - उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 1, 26, 37, 48 एवं 65 का विरोध करता हूं. सबसे पहले मैं सामान्य प्रशासन विभाग के बारे में एक बात कहना चाहूंगा. मुझसे पूर्व वक्ता आदरणीय डॉक्टर गोविन्द सिंह जी ने भी इस बात को कहा है. जस्टिस जैन आयोग की रिपोर्ट, इंदौर का पेंशन घोटाला, ये विधान सभा में प्रस्तुति के लिए रखा जाना है, अनिवार्य रूप से यह सामान्य प्रशासन विभाग की व्यवस्था थी. कोर्ट के आदेश के बाद में भी अभी तक इसको रखा नहीं गया है. वर्ष 2012 में यह मामला जस्टिफाईड होकर आ चुका है, लेकिन आज तक विधान सभा में इसको रखा नहीं गया है.
मैं अनुरोध करूंगा कि इसमें व्यवस्था करवायें और इसको जल्दी से जल्दी विधान सभा में रखा जाय. लोकायुक्त के द्वारा जिन लोगों को अनुमति दे दी गई है, जिनको क्लीन चिट दे दी गई है वह बात अलग है, लेकिन जिनके विरूद्ध मामलों में विचार हो चुका है जिन पर दोष सिद्ध हो चुका है, उनके मामलों को अभी तक क्यों नहीं लिया जा रहा है उनको क्यों नहीं सदन में रखा जा रहा है . उपाध्यक्ष महोदय मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार इस कदर से पसर गया है जिस प्रकार से एक जमाने में अंग्रेजों का तंबू बेस्ट बंगाल से पसरा था और उसके बाद वह पूरे भारत में फैल गया है. भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का काम सरकार का है सरकार अपने काम को करे और जो भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच गया है उस पर अंकुश लगायें.ऐसा नहीं है कि भ्रष्टाचार पहले नहीं होता था लेकिन भ्रष्टाचार जिस समय से भाजपा की सरकार सत्ता में आयी है 2003 से लेकर वह इस तरह से बढ़ गया है कि पटवारी से लेकर जहां जहां तक भी जाना हो वहां पर केवल पैसे के अलावा किसी कीबात नहीं सुनी जाती है.
श्री वेल सिंह भूरिया -- कामनवेल्थ घोटाला भूल गये क्या. मजदूरों के पैसे मनमोहन सिंह जी ने खेलकूद में लगा दिये हैं.
कुंवर विक्रम सिंह -- सारे घोटाले हैं सब खुलेंगे आप चिंता मत करो. मध्यप्रदेश के लोकायुक्त विभाग से संबंधित एक बात और मैं कहना चाहूंगा कि वह अधिकारी धन्यवाद के पात्र हैं जिन्होंने मध्यप्रदेश के कुछ ऐसे व्यक्तियों को लोकायुक्त के माध्यम से निशाना बनाया और जिनके पास में अकूत संपत्तियां बरामद हुई हैं, मैं धन्यवाद देता हूं ऐसे कर्तव्यनिष्ठ अधिकारियों को जिन्होंने अपने कर्तव्यों की निष्ठा के प्रति, और अपनी सेवा के प्रति अपनी जान को दांव पर लगाकर अपना काम किया है.
उपाध्यक्ष महोदय मैं संस्कृति और पर्यटन विभाग के बारे में भी कुछ कहना चाहता हूं. खजुराहो जिसे विश्व धरोहर संपदा का एक स्मारक है. बड़ा दुख होता है जब से मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार प्रदेश में आयी है तब से गिन लिया जाय कि पर्यटन का ग्राफ प्रदेश मेंकिस तरह से गिरा है. खजुराहों के पास ऐसी बहुत सी जगह हैं जिनको एक आइटनरी को दूसरी आइटनरी से जोड़कर जैसे बांधवगढ़ है उसके साथ में ओरछा है पन्ना है एक सर्किट बनाकर के अगर लोगों के सामने पेश किया जायेगा तो मैं समझता हूं कि यह बेहतर पर्यटन के उपाय होंगे. मैं दो बातें अंत में कहना चाहूंगा. पर्यटन के क्षेत्र में हमारा खजुराहो है तो उसे जब तक कनेक्टिविटि हवाई मार्ग से चैन्नई से, मुंबई, कोलकाता और कांठमांडू से नहीं मिलेगी तब तक टूरिज्म का इनफ्लो खजुराहों में बढ़ने वाला नहीं है. मैं आपके माध्यम से यह निवेदन करना चाहता हूं कि वहां पर प्रत्येक व्यक्ति जो भी खजुराहो में रहते हैं वह प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से सब पर्यटन से जुडे हुए हैं. हमारे मंत्री जी बड़े उदार हैं वे इस संबंधमें केन्द्र सरकार को एक योजना बनवाकर सर्किट ओपनिंग की भेजेंगे ताकि खजुराहो में आने जाने वाले सैलानियों की संख्या बढ़ सके.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं आखिरी बात कहना चाहूँगा और वह सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित है. मैं चाहता हूँ कि सामान्य प्रशासन विभाग के मंत्री जी और सामान्य प्रशासन विभाग के समस्त अधिकारी जो यहां पर इस समय मौजूद हैं, मेरी बात को सुनें क्योंकि यह प्रदेश का ज्वलंत मुद्दा है. रोज़ और सुअर से पूरे मध्यप्रदेश के किसान त्रस्त हैं और रोज़ तथा सुअरों की जनसंख्या तेज गति से बढ़ रही है.
उपाध्यक्ष महोदय -- इनका जीएडी विभाग से कैसे संबंध है.
कुंवर विक्रम सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह चाहता हूँ कि यह बात केन्द्र सरकार तक पहुँचे और मध्यप्रदेश में भी रोज़ और सुअरों के लिए परमिट खोले जाएं. जब हिमाचल प्रदेश ने खोल रखा है, हरियाणा ने खोल रखा है, पंजाब ने खोल रखा है तो मध्यप्रदेश में क्यों नहीं खुल सकता. रोज़ के बारे में मैं एक बात बता दूँ परमार साहब, रोज़ गाय प्रजाति का नहीं है यह एंटीलोप प्रजाति का प्राणी है.
उपाध्यक्ष महोदय -- यह चर्चा हो चुकी है, अब आप समाप्त करें.
कुंवर विक्रम सिंह -- धन्यवाद, उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया.
उपाध्यक्ष महोदय -- लेकिन आपने रोज़ और सुअरों को जीएडी विभाग में क्यों भेज दिया. (हंसी)
कुंवर विक्रम सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, क्योंकि योजनाओं का क्रियान्वयन यहीं से होना है, योजनाएं यहीं से बननी हैं इसलिए. यह पूरे मध्यप्रदेश की समस्या है.
राज्य मंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं विक्रम सिंह को लगभग 3-4 साल से सुन रहा हूँ, ये सुअरों के पीछे ज्यादा पड़े हैं समझ में नहीं आ रहा है.
कुंवर विक्रम सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं तो वर्ष 2004 से इस बात को कह रहा हूँ. मैं वर्ष 2003 में निर्वाचित हुआ था और वर्ष 2004 के बजट सत्र को उठाकर देख लीजिए तब से मैं लगातार आज तक इस बात को कह रहा हूँ लेकिन मध्यप्रदेश की सरकार की कान पर जूँ तक नहीं रेंग रही है.
डॉ. गोविंद सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, रोज़ को मारने का आदेश हमने माननीय वन मंत्री जी को दे दिया है और उनसे कहा है कि यह आदेश सभी विधायकों को भी दो, यह आदेश 2003 में जारी हो चुका था, आपकी नॉलेज में नहीं है आप ले लेना, वैसे मैंने निवेदन किया है कि यह आदेश सभी माननीय विधायकों को दे दें ताकि सभी को जानकारी हो जाए.
उपाध्यक्ष महोदय -- यदि ये कभी मंत्री बनेंगे तो एक विभाग रोज़ों का और सुअरों का उसमें अलग से खोला जाएगा. (हंसी)
श्रीमती रंजना बघेल (मनावर) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग सं. 1, 2, 26, 37, 48 और 65 का समर्थन करती हूँ. सामान्य प्रशासन विभाग एक ऐसा विभाग है जो सभी विभागों का समन्वयक है. यह विभाग नीतिगत नियम बनाता है. वर्ष 2003 के पहले सभी विभागों में देखा जाए तो चाहे पदोन्नति हो, चाहे भर्ती हो, कोई नियम नहीं थे लेकिन वर्ष 2003 के बाद जब श्री शिवराज सिंह चौहान जी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में सरकार बनी तो अधिकांश विभागों में नीतिगत नियम बने और पदोन्नति के नियम बने. उसके बाद जनता के हित के काम करने के लिए इस विभाग ने जनसुनवाई, परख, लोक सेवा गारंटी अधिनियम 2005 आदि शुरू किए ताकि कान्फ्रेंस के माध्यम से, जिले के विभाग के अधिकारियों के माध्यम से जनता के काम सुसंचालित रूप से हों और कार्य यथार्थ रूप से परिणत हों इसलिए उन्होंने इन अभिनव योजनाओं की शुरूआत की और अभिनव कार्यक्रम चलाए गए.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, बहुत आश्चर्य होता था कि अनुसूचित जन जाति के बेटे और अन्य छात्र भी जब लोक सेवा आयोग के माध्यम से भर्ती होती थी और परीक्षा देते थे तो उसका रिजल्ट 6-6 महीने, साल-साल भर में आता था. कई बार मार्कशीट नहीं मिलती थी लेकिन आज पहली बार हमारी सरकार ने निर्णय लिया है कि अभी हाल ही में 22 तारीख को परीक्षा हुई और 1.3.16 को उसका रिजल्ट भी निकल गया. सभी हमारे भारतीय जनता पार्टी के विधायकों ने सभी विभागों पर अपने अपने वक्तव्य दिये हैं लेकिन मैं इतना कहना चाहती हूँ कि यह भारत की ऐसी पहली मध्यप्रदेश की सरकार है और पहला ऐसा मुख्यमंत्री है जिन्होंने भ्रष्टाचार के ऊपर अंकुश लगाया है. इस सरकार में दम है, जिन्होंने 211 शिकायतें जांच हेतु पंजीकृत किया. 16 प्रकरणों में विभागीय जांच की कार्यवाही की अनुशंसा की. 411 ट्रेप प्रकरण पंजीबद्ध किये और छापे के 26 प्रकरण पंजीबद्ध किये गये और 503 चालान काटे गये तथा 439 प्रकरणों में चालान प्रस्तुत किये गये.यह दम सिर्फ भारतीय जनता पार्टी के सरकार में ही है. अच्छा चाहती है, अच्छा काम चाहती है तो अच्छा करने के लिए कार्यवाही करती है. जिस तरह मानव अधिकार आयोग कभी कभी कानून की अवहेलना करते हुए, कभी किसी भी मानव पर अत्याचार हो, मानसिक प्रताड़ना हो तो मानव अधिकार आयोग के द्वारा भी लगभग 8815 प्राप्त शिकायतों में 7440 शिकायतों में कार्यवाही की है. अभी जैसे कि हमारा देश सबसे बड़ा प्रजातांत्रिक देश है और इस देश के राष्ट्र के संविधान निर्माता डॉ. अम्बेडकर जी के चिन्तन और दर्शन से प्रेरणा लेकर के माननीय मुख्यमंत्री जी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रमाणपत्र में पहली बार आन लाइन सिस्टम लागू किया है , पहले जब तहसीलदार की चौखट पर जाते थे, जो वहां का चपरासी गेट पर खड़ा होता था, 50- रुपये लेता था तो कोई 100 रुपये लेता था, लेकिन पहली बार डिजिटल और लेमीनेटेड अनुसूचित जाति और जनजाति प्रमाण पत्र आन लाइन सिस्टम लागू किया है. कभी अनूसूचित जाति और जनजाति के लोगों ने कभी कल्पना की थी कि हमारे बेटे और बेटियां एयर होस्टेज और पायलट बनें. कांग्रेसियों ने हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति की है. 50 सालों में मुसलमान, आदिवासी,अनुसूचित जाति और जनजाति को बांटने का काम किया है लेकिन आज जो अनूसूचित जाति और जनजाति के बेटे और बेटियां हैं, जब 2007 में जीएडी मिनिस्टर थी उस समय से आज तक एयर होस्टेज और पायलट की ट्रेनिंग दी जाती है और अभी लगभग 32 हवाई पट्टी खोली गयीं, मैं चाहूंगी कि एक माण्डू में भी खुले.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, संस्कृति हमारी धरोहर होती है. हम मूल्य आधारित राजनीति करते हैं. भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा विचारधारा को लेकर के राजनीति की है. अभावग्रस्त साहित्यकार, कलाकार, बीमारी के इलाज, विकलांग के लिए, अशासकीय संस्थाओं के लिए और अनूसूचित जाति और जनजाति के संरक्षण के लिए भी उन्होंने राशि का प्रावधान रखा है और जितने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हैं उन लोगों के लिए यादगार प्रेरक प्रसंगों को एक दुर्लभ गीतों को सुनने के लिए लखनऊ और दिल्ली, दिल्ली और मुम्बई के लिए तो किया लेकिन मध्यप्रदेश के सभी केन्द्रों के साथ साथ में इस तरह के 218 सामुदायिक रेडियों केन्द्रों को कन्सेंट शेयर योजना अंतर्गत शामिल किया है, इसके लिए वास्तव में साधुवाद के पात्र हैं.चूंकि मैं धार,झाबुआ, अलीराजपुर आदिवासी क्षेत्र से आती हूँ और अभी एक भगोरिया पर्व मनता है, भगोरिया पर्व चूंकि सामान्य बोलचाल की भाषा में भोंगरिया है और जो भोंगरिया है वह भागने वाला नहीं है, यह मौज मस्ती का मेला, बच्चे से लेकर के,बुजुर्ग और बहुएँ भी बाजार में आती हैं और मांदल की थाप पर पूजा की सामग्री लेकर के बाहर जाती हैं और जबसे होली का डंडा गड़ता है तब से लेकर होली जलने तक शादी और विवाह की बात नहीं होती लेकिन यह परिणय पर्व के नाम से समाज के साथ कुठाराघात किया जाता है तो इसको भगोरिया की जगह भोंगरिया किया जाये और यह मौजमस्ती के मेले हैं, पौराणिक और ऐतिहासिक मेले हैं, जो पूरे वेषभूषा के साथ मेले में आते हैं और इसमें धार जिला भी सम्मिलित किया जाये. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा में लगभग 168 गांव ओंकारेश्वर परियोजना से सिंचित हैं. मेरी विधानसभा में 78 हैं, धरमपुरी में 58 हैं और कुक्षी में 32 हैं. मैं मंत्री जी से चाहती हूं कि जो ओंकारेश्वर नहर जो गई है उससे 18949 हेक्टेयर भूमि मेरे 78 गांवों में सिंचित होगी तो वहाँ के टेल एंड तक पानी नहीं जा रहा है. आठ दिन से पानी बंद है , गेहूं को चार पानी की आवश्यकता होती है,उसमें आखिरी पानी देना बाकी है. यदि कमजोर गेहूं आएगा भाव अच्छे नहीं मिलेंगे इसलिए केनाल चालू कर दी जाये . दूसरी बात यह है कि मान डेम से दांई और बांई ओर नहर जाती है तो वहाँ पर झापड़ी और साल गांव में वेस्टेज पानी की एक छोटी सी केनाल बन जाएगी तो मेरा 74002 हेक्टेयर में से सिर्फ टोटल मिलाकर 19709 असिंचित जमीन रहेगी तो मंत्री जी, दांई औऱ बांई केनाल है,वह वेस्टेज पानी के लिए जोड़ने का नरेगा से प्रावधान करेंगे तो ठीक रहेगा. धन्यवाद.
श्रीमती शीला त्यागी(मनगवां)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 1, 30, 34, 13 और 54 पर अपनी बात रखना चाहती हूं. जैसा कि मध्यप्रदेश सरकार की मंशा है कि हमारे प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिले और पर्यटन के क्षेत्र में हमारा प्रदेश आगे रहा है और आने वाले समय में भी रहे इसके तहत मैं अपने रीवा जिले के मनगवां विधानसभा में जनपद पंचायत गंगेव से लगभग 10 किलोमीटर दूरी पर उत्तर दिशा में स्थित बौद्धकालीन प्राचीन स्थान है, उसके संबंध में आपसे बताना चाहती हूं कि बौद्धकालीन प्राचीन स्थान होने के कारण वहाँ पर बौद्धकालीन स्तूप भी हैं, पुरातत्व की धरोहर हैं और साथ ही साथ ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व है, इसको विश्व पर्यटन की श्रेणी में शामिल किया जा सकता है वहाँ पर श्रीलंका,थाइलैंड,जापान ,चीन और कोरिया के बौद्ध पर्यटक शोध के लिए आते हैं , उनके लिए वहाँ पर सुविधायें नहीं हैं. मैं सरकार से चाहती हूं कि उसको भी पर्यटन की श्रेणी में विकसित किया जाये . इसके साथ ही रीवा जिले से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर विकासखंड गंगेव के अंतर्गत एक केवटी जलप्रपात है , जो कि ऐतिहासिक एवं प्राकृतिक महत्व का क्षेत्र है जो कि जैव विविधता और वनसंपदा ,जलराशि से बहुत संपन्न है. यहाँ पर भी पर्यटन की अपार संभावनायें हैं, इसको भी जोड़ा जाये. साथ ही साथ मनगवां विधानसभा में बहुत सारे ऐसे क्षेत्र हैं जैसे बहुती है , पुरवा है यह सारे जलप्रपात हैं, यह बहुत ज्यादा प्राकृतिक और जैव विविधता के महत्व हैं इनको भी जोड़ा जाये जिससे कि आने वाले समय में हमारे प्रदेश को एक अच्छे पर्यटक स्थल मिल सके.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 1 के बारे में कहना चाहती हूं यह सामान्य प्रशासन का विभाग है . इस विभाग की जो गति है बहुत धीमी है, इसका जो उद्देश्य है कि सामान्य प्रसाशन के द्वारा आर्थिक अपराध के जो भी अधिकारी-कर्मचारी हैं, उनके ऊपर शिकंजा कसा जाये , उसके तहत जो हमारा पंचायती राज है और भी जो विभाग हैं, जो विकास कार्य से जुड़े हुए हैं वहाँ पर जो अधिकारी – कर्मचारी विकास कार्यों में अड़ंगाबाजी करते हैं काम को रोकते हैं, ऐसे लोगों के ऊपर विभाग ने अभी तक बहुत कम शिकंजा कसा है इसको और भी गति देने की जरूरत है. मध्यप्रदेश शासन के लोक सेवा , अनुसूचित जाति एवं जनजाति तथा अन्य पिछड़े वर्गों के लिए जो आरक्षण अधिनियम 1994 की धारा 19 के तहत बताना चाहती हूं कि जो यह अधिनियम बना है, उसके तहत यह उद्देश्य है कि जो एस टी, एस सी, ओ बी सी, के कर्मचारी हैं, उनके साथ उदारता बरती जाए, उनको उनकी गलती पर मौका दिया जाए, उनको अच्छे से सुन लिया जाए, तब उनको शो-काज़ का नोटिस दिया जाए. लेकिन माननीय उपाध्यक्ष महोदय, इस अधिनियम का समुचित पालन नहीं हो रहा है. तीनों आरक्षित वर्ग का जो निर्धारित प्रतिनिधित्व है, वह भी दिया जाना चाहिए था, लेकिन अभी तक नहीं दिया गया साथ ही साथ आरक्षण रोस्टर के पालन में भी अनियमितता बरती जा रही है. आप सब, खास कर सदन के जो हमारे आदरणीय साथी हैं, मंत्रीगण हैं, आप भी आए दिन पेपरों में, मीडिया के माध्यम से सुनते रहते हैं कि हमारे प्रदेश में आई ए एस और आय पी एस जो अधिकारी हैं उनके साथ आज भी पक्षपात होता है. जबकि उनके लिए स्पेशल यह अधिनियम बनाया गया है. इसके तहत अभी भी उनको अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं. उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपको बताना चाहती हूँ कि बहुत सारे ऐसे विभाग हैं जहाँ पर कई पद जो हैं पोस्ट डॉकेड भर लिए गए, जो एस सी, एस टी, ओ बी सी के जो पद थे.
उपाध्यक्ष महोदय-- अब आप एक मिनट में समाप्त करें.
श्रीमती शीला त्यागी-- उपाध्यक्ष महोदय, अभी तो मेरी एक ही मांग में बात हुई है. मैंने तो तीन में नाम दिया है.
उपाध्यक्ष महोदय-- नहीं, इतना समय एक-एक मांग पर लेंगी तो बहुत समय हो जाएगा. दूसरे विभाग पर भी चर्चा होना है. अब आप समाप्त करें.
श्रीमती शीला त्यागी-- उपाध्यक्ष महोदय, मैं आप से कहना चाहती हूँ कि आयुष विभाग में 2010 में 50 आरक्षित पदों के विरुद्ध सामान्य वर्ग के लेक्चरर, रीडर और प्रोफेसर्स की भर्ती कर दी गई. बाद में उनको नियमित भी कर दिया गया. जबकि आरक्षण अधिनियम 1994 में धारा 3 एवं 2 में स्पष्ट प्रावधान है कि आरक्षित पदों के विरुद्ध किसी भी परिस्थिति में सामान्य वर्ग की नियुक्ति नहीं की जाएगी. न ही पदोन्नति की जाएगी. लेकिन अधिनियम की धज्जियाँ उड़ाते हुए भर्ती कर ली गई और साथ ही साथ क्रमोन्नति और पदोन्नति में भी पक्षपात किया जाता है, यह मैं आपको बताना चाहती हूँ कि इस अधिनियम के तहत जो भी हमारे शासकीय अधिकारी, कर्मचारी, हैं, जो आरक्षित वर्ग के हैं, उनके साथ आए दिन अन्याय होते रहता है. मैं यह भी बताना चाहती हूँ कि जो आरक्षित वर्ग के संविदा कर्मचारी, अधिकारी हैं, वह कोटे से चले गए और हमारे लोग जो थे, जिनके लिए यह प्रावधान बना था, उनको कोई भी उसका लाभ नहीं मिल पाया. साथ ही साथ मैं दो और जो मेरी मांग है उसके तहत मैं बताना चाहती हूँ....
उपाध्यक्ष महोदय-- आप अपने क्षेत्र से जो मांग हों उनको रख दीजिए बस.
श्रीमती शीला त्यागी-- मेरे क्षेत्र के ही थे. मेरे क्षेत्र में भी एस टी, एस सी, ओ बी सी, के कर्मचारी हैं उनके साथ पक्षपात होता है. मनगँवा विधान सभा मध्यप्रदेश से अलग नहीं है.
उपाध्यक्ष महोदय-- वह बात आ गई.
श्रीमती शीला त्यागी-- मैंने अपने क्षेत्र की ही बात की. आयुष विभाग में मनगँवा विधान सभा में आयुष विभाग भी आता है.
उपाध्यक्ष महोदय-- वह ठीक है लेकिन समय की भी अपनी सीमा है. अब आप समाप्त करें.
श्रीमती शीला त्यागी-- जी उपाध्यक्ष महोदय.
श्री रामनिवास रावत-- उपाध्यक्ष महोदय, एस टी, एस सी, ओ बी सी, के पदों के बारे में कह रही हैं, भर्तियों के बारे में कह रही हैं.
उपाध्यक्ष महोदय-- वह कह चुकीं.
श्री रामनिवास रावत-- वह पूरी बात बता रही हैं, किस तरह से एस टी, एस सी, ओ बी सी के लोगों के साथ अन्याय हो रहा है.
उपाध्यक्ष महोदय-- रावत जी, वह कह चुकी हैं. उनकी पूरी बात आ गई.
श्रीमती शीला त्यागी-- धन्यवाद रावत जी. उपाध्यक्ष महोदय, मैं एक दो उदाहरण बता दूँ अगर आप की आज्ञा हो तो. मैं बता दूँ किनके साथ हुआ है? नहीं तो फिर मैं लिख कर आपको दे दूँगी.
उपाध्यक्ष महोदय-- नहीं, अब समाप्त करिए.
श्रीमती शीला त्यागी-- प्लीज़ मुझे दो मिनट का और समय दे दीजिए.
उपाध्यक्ष महोदय-- नहीं, अब संभव नहीं है. अब समाप्त करिए.
श्रीमती शीला त्यागी-- उपाध्यक्ष महोदय, कोई बात नहीं, नहीं बात रखने देना चाहते हैं तो फिर मांग में आपने चर्चा क्यों बुलाई?
उपाध्यक्ष महोदय-- श्री नागर सिंह चौहान.....
श्रीमती शीला त्यागी-- उपाध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.
श्री नागर सिंह चौहान-- (अनुपस्थित)
सुश्री उषा ठाकुर(इन्दौर-3)-- माननीय उपाध्यक्ष जी, मैं मांग संख्या 26 के संदर्भ में अपना विचार व्यक्त करना चाहती हूँ. माननीय उपाध्यक्ष जी, हम जानते हैं कि संस्कृति राष्ट्र का प्राण है, राष्ट्र की रीढ़ है, हम सबकी पहचान है. उपाध्यक्ष जी, किसी ने कहा है--
जिसको न निज देश धर्म और संस्कृति का अभिमान है,
वह नर नहीं, है पशु निरा और मृतक समान है.
उपाध्यक्ष महोदय, हमारे संस्कृति विभाग के माध्यम से संस्कृति की चिन्ता करते हुए हमने इसके प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है. हम जानते हैं पूर्व दिशा से ऊगता सूरज, पश्चिम में अस्ताचल को जाता हुआ, अपना असीम सौरभ, जिस देश के कण-कण पर नित्य प्रति न्यौछावर करता है, जिसके ज़र्रे, ज़र्रे, से यही आवाज आती है कि भारत जैसी भूमि विश्व में कहीं नहीं है. यह अर्पण-तर्पण सर्वस्व समर्पण की भूमि है. उपाध्यक्ष जी, पूरी दुनिया में इकलौते हम ही हैं जो अपनी भौगोलिक इकाई को माँ के संबोधन से संबोधित करती है. माननीय उपाध्यक्ष जी, हमारी यह कालजयी विश्व-विजय संस्कृति रसमयी है, रसमयी है, ज्ञानमयी है, समन्वयवादी है. हम जीवमात्र की चिन्ता करते हैं. पांचों तत्वों को क्षितिज, जल, पावक, गगन, समीर को पांच विनायक मानकर हम इनकी वंदना करते हैं. पर्यावरण की चेतना हमारी संस्कृति का एक अभिन्न हिस्सा है. प्राणीमात्र की चिन्ता करना हमारा संस्कार है. चींटी को कण, हाथी को मन, पक्षी को दाना और गाय को पानी यह संस्कार बचपन से हमारे परिवारों द्वारा हमें मिलते हैं. मुझे गर्व है और आप सबको भी होगा ही कि इस पावन संस्कृति में आप और हम जन्मे हैं. मैं कहना चाहती हूँ कि--
सुन्दरतम् जिसका वेष है, श्रृंगार अभी भी शेष है,
मन मंदिर में प्रतिमा जिसकी आराध्य वह मेरा देश है.
इस पावन भाव को लेकर हमारे लोक नायक,जन नायक मुख्यमंत्रीजी ने, हमारे संस्कृति मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा जी ने बहुत ही पुख्ता नीतियों के साथ संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की चिंता की है. हम जानते हैं कि दण्ड और पुरस्कार सुशासन की श्रेष्ठ नीति है इसलिये यह बहुत आवश्यक हो जाता है कि यदि कोई नागरिक श्रेष्ठ कार्य करे तो उसकी हौसला अफजाई अवश्य होना ही चाहिए. इस कार्य हेतु हमारा संस्कृति विभाग 81 पुरस्कारों का आयोजन करता है जो कला, संगीत, नाट्य, गायन, वादन, समाज सेवा, सद्भाव के क्षेत्र में कार्य करने वालों को निरन्तर दिए जाते हैं. संस्कृति विभाग वर्ष में 1800 कार्यक्रम आयोजित करता है जिनके माध्यम से संस्कृति का जनजागरण हो. हम जानते हैं कालीदास समारोह, तानसेन समारोह, कुमार गंधर्व समारोह और भोजपुर उत्सव अनेकानेक उत्सवों का आयोजन विभाग द्वारा संस्कृति के जनजागरण हेतु ही किया जाता है. इस सब कार्यक्रमों की वजह से 10 हजार कलाकारों को अपनी प्रतिभा को अभिव्यक्त करने का मौका मिलता है और इतना ही नहीं हमने भोपाल में नाट्य विद्यालय स्थापित कर रंगमंचीय विविध विधाओं का प्रशिक्षण भी देना प्रारंभ किया है. हमने जनजातीय संग्रहालय भी स्थापित किया. 306 अशासकीय संस्थानों को भी सांस्कृतिक जागरण के लिए सांस्कृतिक कार्यों के लिए अनुदान प्रदान किया है. राजा मानसिंह कला एवं संगीत कला एवं संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना की है जिसके अन्तर्गत 85 महाविद्यालय हैं 8000 विद्यार्थी इसमें अध्ययनरत् हैं. हमारी पंचनिष्ठाओं में सर्वधर्म समभाव शामिल है हम सत्ता में रहें या मैदान में इसका अक्षरश: पालन हम करते हैं. हमने हिन्दी के साथ-साथ ऊर्दू की भी चिंता की है. मैं कहना चाहती हूँ कि--
यहां पर राम बसता है, यहां रहमान बसता है,
यहां हर धर्म जाति मजहब का इंसान बसता है,
जो हिंदी बोलते हैं वे केवल हिंदी नहीं होते हैं
वे सब हिंदी हैं जिनके दिल में हिंदुस्तान बसता है.
हम ऊर्दू को भी हिंदी की सगी बहन मानते हुए कव्वालियों का, मुशायरों का, सूफीयाना कव्वालियों का इंतजाम करते हैं और उसकी उन्नति, प्रगति के लिए भी सदैव ही चिंतित रहते हैं. स्वातंत्र वीर नायकों को यदि सम्मान नहीं दिया तो आने वाली पीढ़ी राष्ट्रप्रेम से वंचित ही हो जाएगी और JNU जैसी घटनायें आये दिन घटने लग जायेंगी. इसलिये कहना चाहती हूं--
मैं अमर शहीदों के चारण उनके यश गाया करती हूं,
जो कर्ज राष्ट्र ने खाया है मैं उसे चुकाया करती हूँ,
यह सच है याद शहीदों की हम लोगों ने दफनाई है,
यह सच है उनकी लाशों पर चलकर आजादी आई है,
यह सच है हिंदुस्तान आज जिंदा उनकी कुर्बानी से,
यह सच अपना मस्तक ऊंचा उनकी बलिदान कहानी से,
वे अगर न होते तो भारत मुर्दों का देश कहा जाता,
जीवन ऐसा बोझा होता जो हमसे सहा नहीं जाता,
यह सच है दाग गुलामी के उनने लहू से धोये हैं
हम लोग बीज बोते उनने धरती में मस्तक बोये हैं,
इस पीढ़ी में उस उस पीढ़ी के मैं भाव जगाया करती हूँ,
मैं अमर शहीदों की चारण उनके यश गाया करती हूँ.
इन क्रांतिकारियों को सम्मान देने के लिए संस्कृति विभाग ने चन्द्रशेखर आजाद जी पुरस्कार प्रारंभ किया. वीरांगना लक्ष्मीबाई और बहुत सारे पुरस्कारों को..
उपाध्यक्ष महोदय--ऊषा जी कृपया समाप्त करें.
श्री रामनिवास रावत:- ऐसे कितने लोग हैं जिनके परिवार में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे हैं.
उपाध्यक्ष महोदय :- वह अच्छा बोल रही हैं, लेकिन मुझे भी अपने कर्तव्य का पालन करना है. अब आप समाप्त करिये .
सुश्री उषा ठाकुर :- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं दो महत्वपूर्ण विषयों पर मैं अपना भाव प्रकट करना चाहती हूं कि यह विश्व हिन्दी सम्मेलन करके राष्ट्रभाषा के मान को बढ़ाने का काम परमआदरणीय मुख्यमंत्री जी ने किया है. आर्याय रामचन्द्र जी शुक्ल ने कहा था कि अपनी मां को असहाय अवस्था में छोड़कर दूसरों की सेवा करना इससे बड़ा जघन्य अपराध कोई और हो नहीं सकता. दसवां विश्व हिन्दी सम्मेलन हमारा मान है, हमारी राष्ट्रभाषा के सम्मान में मील का पत्थर साबित हुआ है. इसमें निर्णय लिया गया कि न्याय हो, शिक्षण हो, विधि हो, विज्ञान हो, तकनीकी हो सभी क्षेत्रों में हिन्दी को सर्वोच्च प्राथमिकता की जायेगी. उसकी उपेक्षा किसी भी कीमत में नहींकी जायेगी. माननीय मुख्यमंत्री जी ने हिन्दी को सम्मानित हेतु पांच पांच पुरस्कारों की घोषणा की है. माननीय उपाध्यक्ष जी, सूचना एवं प्रोद्योगिकी के लिये यदि कोई हिन्दी का सॉफ्टवेयर और तकनीकी में काम करेगा. निर्मल वर्मा पुरस्कार है वह अप्रवासी भारतीयों को मिलेगा, हिन्दी के लिये श्रेष्ठ कार्य करने के लिये. कई पुरस्कारों की घोषणा यह हिन्दी के मान को बढ़ायेगी.
उपाध्यक्ष महोदय, सिंहस्थ पर मैं निवेदन करना चाहती हूं कि यह हमारा सबसे बड़ा सांस्कृतिक महोत्सव है और हमने इसके लिये 3000 करोड़ का प्रावधान कर अद्योसंरचना का काम जहां पूरा किया, वहीं इसके वास्तविक स्वरूप को पूरे विश्व के सामने ले जाने की चिन्ता की. माननीय मुख्यमंत्री जी ने वैचारिक कुम्भ आयोजित किया है. माननीय उपाध्यक्ष जी जलवायु परिवर्तन, विश्व का बढ़ता तापमान, नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन ऐसे व्यवाहारिक बिन्दुओं पर चर्चा होगी, विचार मंथन होगा. उपाध्यक्ष महोदय, मैंने अपनी विधान सभा में आचरण कुम्भ का शुभारम्भ किया है.
श्री गोपाल भार्गव :- आपने बजट भाषण सुना होगा, आपकी आवाज में तो बहुत करकशता है.
सुश्री उषा ठाकुर :- उपाध्यक्ष महोदय, मैंने मुख्यमंत्री जी से प्रेरणा पाकर विधान सभा में आचरण कुम्भ प्रारंभ किया, हम घर-घर, द्वार-द्वार दस्तखत दे रहे हैं. एक पत्रक बनाया कि मैं अपने माता पिता, अपने सदगुरू कुल देवी-देवता को साक्षी मानकर यह संकल्प करता हूं कि जिस समातन धर्म में मैं जन्मा हूं उसको साक्षी मानकर यह संकल्प करता हूं कि जिस सनातन धर्म में जन्मा हूं उसके माध्यम से समस्त मानवता के कल्याण के लिये यह चार कार्य आजन्म करता रहूंगा. इन्हीं पक्तियों के साथ अपनी बात समाप्त करती हूं कि '' इस जीवन का लक्ष्य नहीं है, शांत भवन में टिक रहना, किन्तु पहुंचना उस सीमा तक,जिसके आगे राह नहीं. आपने समय दिया, बहुत बहुत धन्यवाद् .
श्री सुदर्शन गुप्ता(इंदौर -1) :- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या- 1, 2, 26, 37, 48 और 65 का समर्थन करता हूं.
उपाध्यक्ष महोदय, प्रदेश की सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर पर्यटन के लिये प्रदेश आकर्षण का केन्द्र है. पर्यटन की गतिविधियों के कारण, पर्यटन नागरिकों के आवागमन में तेजी से बढ़ता है और वहां पर स्थानीय नागरिकों को रोजगार मिलता है. मध्यप्रदेश की सरकार से वर्ष 2015 को पर्यटन के वर्ष के रूप में मनाया है और पर्यटन स्थलों और पर्यटन सुविधाओं के विकास में मध्यप्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभायी गयी है.ऐसे पर्यटन केन्द्र जहां पर पर्यटन सुविधाएं उपलब्ध नहीं है, वहां पर सुविधाएं विकसित करने तथा विकास कार्य पर्यटन विभाग द्वारा किया जा रहा है. पिछले वर्ष पर्यटन विभाग द्वारा प्रदेश में अनेक पर्यटन स्थलों का विकास किया गया तथा सौन्दर्यीकरण किया गया, जिससे पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है. सरकार द्वारा राज्य में पर्यटन की गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिये उद्देश्य से दतिया, सिवनी तथा आदिवासी जिला मण्डला में नवीन शासकीय हवाई पट्टी का निर्माण किया गया है. प्रदेश में पर्यटन विभाग ने तथा हमारे मंत्री भाई सुरेन्द्र जी पटवा के मार्गदर्शन में इंदौर में रीजनल पार्क में वोट क्लब और क्रूज चलाया गया और इन्दौर के राजबाड़े में लाईट एण्ड साउण्ड का शो प्रारम्भ किया गया. उसमें आकर्षक विद्युत साज-सज्जा के साथ-साथ महानायक अमिताभ बच्चन की आवाज में होलकर शासनकाल के इतिहास के प्रस्तुतिकरण का काम विभाग द्वारा किया गया है. हनुमन्तया में प्रदेश का सबसे बड़े जल क्रीड़ा स्थल का विकास किया गया है. पर्यटन स्थान बनाया और यह देश में गोवा के बाद सबसे बड़ा पर्यटन स्थल होगा. इसको विकसित करने की दृष्टि से मध्यप्रदेश शासन द्वारा योजना तैयार की गई है. मैं हमारे मंत्री सुरेन्द्र पटवा जी को सुझाव देना चाहूंगा कि इन्दौर में पर्यटन को और बढ़ावा देने की दृष्टि से बिजासन माता मंदिर से गोमठगिरी होते हुए पितृपर्वत के बीच में रोपवे चालू कराया जाये. जिससे वहां पर्यटन बढ़ेगा और इन्दौर की कुलदेवी है बिजासन माता मंदिर उसके सौंदर्यीकरण और विकास का कार्य कराया जाये क्योंकि पूर्व में यह टेकरी बी.एस.एफ. के अंडर में थी. हमारी लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन जी के प्रयास से प्रदेश शासन और जिला प्रशासन के अंडर में आयेगी. वहां का हम सौंदर्यीकरण कराएंगे तो निश्चित ही वहां पर पर्यटन बढ़ेगा. पिपल्या तालाब जो अभी नगर निगम द्वारा विकसित किया गया है उसको भी पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जायेगा तो वहां भी पर्यटक और आएंगे. इन्दौर में छत्रीबाग,राजस्वग्राम,घनघोरघाट में शासकीय पुरानी छतरिया हैं उनका जीर्णोद्धार करके विकास किया जाता है तो पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. सन् 1990 में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी और मुख्यमंत्री माननीय सुन्दरलाल पटवा थे उस समय उन्होंने इन्दौर की खान नदी के पास कृष्णपुरा पुल की छतरियों तथा श्रीकृष्ण टाकीज के पास एम.जी.रोड पर बोलिया सरकार की छतरियों को अतिक्रमण से मुक्त कराया था. यानी सुन्दरलाल पटवा जी ने भी पर्यटन को बढ़ावा दिया था और अभी सुरेन्द्र पटवा जी भी मंत्री के रूप में प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं. मैं मंत्री लालसिंह आर्य जी का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि इन्दौर में एयरपोर्ट की भूमि पर वर्तमान में अवैध कालोनाईजरों द्वारा प्लाट काटकर भोलीभाली गरीब जनता को बेचे जा रहे हैं. वह अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के रूप में वह विकसित होने वाला है और वहां पर अंतर्राष्ट्रीय फ्लाईटें प्रारम्भ होने वाली है तो इस भूमि कि हमको आवश्यक्ता होगी लेकिन तब तक कई मकान बन चुके होंगे. इस ओर तुरंत ध्यान दें और प्लाट जो वहां काटे जा रहे हैं उस पर सख्ती से रोक लगायें. योजनाबद्ध तरीके से वहां पर बंग्लादेश से आये हुए व्यक्तियों को बसाया जा रहा है. मैं मंत्री जीसे निवेदन करूंगा कि वह एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिये भी खतरा है.
सामान्य प्रशासन विभाग राज्य शासन का अतिमहत्वपूर्ण विभाग है. वह न केवल प्रशासन संबंधी कार्य देखता है बल्कि विभिन्न विभागों में समन्वय की भूमिका भी निर्वाह करता है. विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश सरकार की प्राप्त उपलब्धियों में सामान्य प्रशासन विभाग का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष योगदान है. अनुसूचित जाति,जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लिये जाति प्रमाणपत्र बनाना एक कठिन काम था लेकिन जब से प्रदेश में शिवराजसिंह जी की सरकार आई है तब से सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जाति प्रमाणपत्र बनाये जाने की प्रक्रिया कोसरल बनाते हुए आनलाईन जाति प्रमाणपत्र बनाने की व्यवस्था की गई है. जाति प्रमाणपत्र बनाने के काम को लोक सेवा गारंटी अधिनियम के अंतर्गत शामिलकरते हुए यह कार्य एक अभियान के रूप में चलाया जा रहा है. इसी तरह सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा नियुक्ति,पदोन्नति में और पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से लोक सेवा आयोग के लिये नया परीक्षा नियम ब नाया गया है. लोक सेवा आयोग द्वारा राज्य सेवा की प्रारम्भिक परीक्षा दिनांक 22.2.2016 को आयोजित की गई और इसका परिणाम एक सप्ताह की अवधि में 1 मार्च को घोषित कर दिया गया.यह उल्लेखनीय काम प्रदेश सरकार का है. प्रदेश सरकार सुशासन की दिशा में अनेक काम कर रही है. जनता की समस्याओं के निराकरण के लिये प्रत्येक मंगलवार को जनसुनवाई होती है.इसी क्रम में मुख्यमंत्री हेल्पलाईन काफी लोकप्रिय है और लोगों की समस्याओं का समाधान द्रुतगति से हुआ है. माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा समाधान आनलाईन कार्यक्रम भी आयोजित किया गया जिसमें शिकायतकर्ता को अपने समक्ष सुना गया और उनकी समस्याओं का निराकरण किया गया.
श्री सुदर्शन गुप्ता--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिये लोकायुक्त संगठन के द्वारा 241 शिकायतें जांच हेतु पंजीबद्ध की गईं, उसमें 16 प्रकरण विभागीय जांच की कार्यवाही की अनुशंसा की गई. संगठन के द्वारा 411 पेय प्रकरण पंजीबद्ध किये गये और छापे में 26 प्रकरण पंजीबद्ध किये गये. गत वर्ष 530 चालान काटे गये तथा 439 प्रकरणों में चालान प्रस्तुत किये गये यह माननीय मुख्यमंत्री जी की भ्रष्टाचार को रोकने की जो नीति है उसका परिणाम है. पूरे देश में कहीं पर भी इस तरीके से छापे नहीं मारे गये हैं जहां पर भी शिकायतें आती हैं उसमें तुरंत कार्यवाही की जाती है. माननीय अधिकार आयोग के द्वारा गत वर्ष 8 हजार 815 प्राप्त शिकायतों में से 7 हजार 740 शिकायतों का निराकरण किया गया है. इसी प्रकार मध्यप्रदेश में नर्मदा घाटी का परिदृश्य तेजी के साथ में बदल रहा है इसी कारण नर्मदा घाटी परियोजना से तेजी के साथ किसानों को लाभ पहुंच रहा है. धन्यवाद.
श्री रामकिशोर दोगुने (हरदा)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 1, 2, 26, 37, 48 एवं 65 के विरोध में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं उसकी शुरूआत सामान्य प्रशासन विभाग से कर रहा हूं. आज हम देखें जैसे टीम में सभी विभागों का एक कप्तान होता है वह सामान्य प्रशासन विभाग का कप्तान होता है, पर सामान्य प्रशासन विभाग की जो लापरवाहियां और उनके द्वारा जो कार्य किये जाते हैं उससे समाज में भी, प्रदेश में भी, आम आदमी में भी, गरीबों में भी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के भाईयों में भी तथा पिछड़ा वर्ग के लोगों में भी समस्या का समाधान नहीं हो पाता है और यह लोग समस्या का समाधान नहीं करते हैं इसके पीछे बहुत बड़ा कारण मैं आपको बताना चाहता हूं कि जैसे पीएससी की परीक्षा में से सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारी निकलते हैं उस परीक्षा में सुधार करें वहां पर भ्रष्टाचार से आदमी नहीं आयेगा तो यहां पर भ्रष्टाचार नहीं करेगा, उस परीक्षा को संशोधित करके अच्छे से तथा वगैर भ्रष्टाचार के करायें, क्योंकि हम देखते हैं कि पीएससी की परीक्षाएं होती हैं उसके बाद से ही पीएससी कार्यालय का चपरासी से लगाकर सदस्य तक और शहर के लोग भी लोगों से पैसा लेकर के रख लेते हैं और लोगों को सिफारिश से भर्ती कराने की बात करते हैं इस समस्या का समाधान जब तक हम परीक्षा का जब तक हम अच्छी तरह से नहीं करेंगे तो भ्रष्टाचार से पीड़ित व्यक्ति अगर प्रशासन में नहीं आयेगा तो वह भी भ्रष्टाचार नहीं करेगा इसी उम्मीद के साथ मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा ऑन लाईन परीक्षा होना चाहिये और ऑन लाईन में भी उसी समय उस परीक्षा का रिजल्ट मिल जाना चाहिये. दूसरी यूनिवर्सिटियां जैसे जो साऊथ में अथवा दूसरी जगहों पर काम करती हैं उक्त यूनिवर्सिटियां उसी समय परीक्षाएं लेती हैं उसी समय ही रिजल्ट निकालकर के दे देती हैं उसमें न तो मुन्नाभाई के बैठने की जरूरत पड़ती न किसी के बैठने की जरूरत पड़ती है उसी समय उसी का फोटो भी हो जाता है, फिंगर प्रिन्ट भी हो जाता है उसकी उत्तर पुस्तिका भी सामने आ जाती है उसमें कितने नंबर आये वह भी आ जाते हैं. इस तरह से कार्यों को अपनाएंगे तो निश्चित रूप से हमारे यहां भ्रष्टाचार कम होगा प्रशासनिक व्यवस्था भी सुधरेगी. मैं आपको बताना चाहता हूं कि जैसे केन्द्रीय सरकार में हमारे जो कर्मचारी हैं उनका मध्यप्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग के कर्मचारी उनके वेतन का निर्धारण करता है, पर जब केन्द्र सरकार उनको वेतन देते हैं, या वेतन को बढ़ाया जाता है अथवा वेतनमान देती है उस वेतनमान को मध्यप्रदेश में भी दिया जाएगा तो वह कर्मचारी पीड़ित नहीं होगा उसमें भ्रष्टाचार में लगाम नहीं लगेगी और वह अच्छे से काम करेगा और सब लोगों के लिये काम करेगा, इसके साथ ही मैं आपको बताना चाहता हूं कि प्रोफेसर, डॉक्टर, नर्स की 65 साल तक सेवा की उम्र कर दी गई है, ऐसा ही दूसरे विभागों में कर दिया जाए हर जगह पर समानता की बात होना चाहिये, समानता की भावना नहीं होती है तब ही भेदभाव आता है जिससे उसको कार्य करने में परेशानी होती है उसको अपने आप में ग्लानि महसूस होती है और वह काम नहीं कर पाता है. मेरा आपसे निवेदन है कि यह समानता का भाव हो, समानता का वेतनमान हो, क्योंकि हम शिक्षा विभाग में भी देख रहे हैं उसमें तीन प्रकार के शिक्षक होते हैं वह कैसे शिक्षा दे पायेगा, एक संविदा शिक्षक होता, एक अतिथि विद्वान होता है एक परमानेन्ट शिक्षक होता है उन तीनों के वेतनमान में जमीन आसमान का अंतर होता है उसमें किसी को 5 हजार मिलता है, किसी को 10 हजार रूपये मिलते हैं तथा किसी को 50 हजार रूपये मिलते हैं उसमें समानता नहीं रहेगी.
डॉं. रामकिशोर दोगने- इसी तरह से दूसरे विभागों में भी दिक्कते हैं, उनको समानता का वेतनमान मिलेगा तो समान तरीके से काम करेगा और समान तरीके से व्यवहार करेगा, देश का विकास करेगा और प्रदेश का विकास करेगा, इसलिए मेरा निवेदन है कि सभी का वेतन समान होना चाहिए ।
उपाध्यक्ष महोदय- दो मिनट में समाप्त करें ।
डॉं. रामकिशोर दोगने- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, अभी चालू किया है, इसके साथ ही कर्मचारी संगठनों को देखें तो जगह - जगह हड़तालें चल रही हैं, सरकार बताती है कि हम अच्छे से काम कर रहे हैं, अच्छे से वेतन दे रहे हैं और खूब काम करवा रहे हैं, पर कहां हो रहा है, आज हमारे प्रदेश के कई विभागों के कर्मचारी हड़ताल पर बैठे हुए हैं, हड़तालें चल रही है, इसका समाधान भी समय पर होना चाहिए, लम्बे समय तक हड़ताले चलती हैं तो उससे सरकार का काम बाधित होता है और उसका भी नुकसान होता है, इसके साथ ही मैं आपको बताना चाहता हूँ, सामान्य प्रशासन विभाग के संबंध में कि हमारे हरदा जिले में ही देखें कि हमारे यहां प्रशासनिक व्यवस्था में अधिकारियों की बहुत कमी है, अधिकारियों की भर्ती की जाए, अधिकारियों की भर्ती करके वहां पदस्थ करेंगे तो निश्चित ही प्रशासन अच्छी तरह से चलेगा । आज देखें दो-दो पंचायतों में एक एक पटवारी है,आधे पटवारी,आधे तहसीलदार,आधे नायब तहसीलदार हैं, यदि पद पूरे नहीं होंगे तो काम पूरा नहीं होगा और यदि काम पूरा नहीं होगा तो उससे आम आदमी को, जनता को ही परेशानी होती है, उसके साथ ही मैं अनुकंपा नियुक्ति के बारे में बात करना चाहता हूँ अनुकंपा नियुक्ति यदि समय पर मिलेगी तो निश्चित ही काम बाधित नहीं होगा और आगे बढ़ेगा ।
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, संस्कृति की बात करना चाहता हूं, हरदा में एक मोहाना उत्सव मनाया जाता है, पर दो साल से यह उत्सव बंद करके रखा है, संस्कृति विभाग के मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि मोहाना उत्सव क्यों बंद कर दिया गया, इतने सालों से क्यों चल रहा था, क्या भारतीय जनता पार्टी का विधायक हार गया , कांग्रेस का विधायक वहां पर बैठा है, इसलिए यह उत्सव नहीं हो रहा है, क्या कारण है स्पष्ट करें या इसको चालू करें, क्योंकि संस्कृति संस्कार को जीवन देती है और संस्कार से ही हमारे प्रदेश और आम आदमी की स्थिति सुधरती है और भावना बनती है और भावना से प्रदेश और देश चलता है ।
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मैं मांग करता हूँ, हरदा जिले में हण्डिया एक ऐसा क्षेत्र है, नर्मदा नदी जिसको पूरे मध्यप्रदेश के लोग मानते हैं और मध्यप्रदेश की जीवन दायनी नदी है,उसका सेंटर है, उसको नाभि कुण्ड बोलते हैं और नाभि को ही विकसित नहीं करेंगे तो पूरा शरीर कैसे विकसित होगा, इसलिए पर्यटन विभाग से मेरा निवेदन है, हण्डिया ऐसा क्षेत्र है जहां कुबेर ने भी अपनी तपस्या की थी, वहां कुबेर द्वारा स्थापित मंदिर भी है, वहां अकबर कालीन की समाधियां भी है, तेली की सराय भी है और वहां पाण्डवों के काल के मंदिर भी हैं, ऐसी जगह है वहां यदि विकास करेंगे तो निश्चित ही विकास होगा और हमारे हरदा जिले का भी विकास हो जाएगा, इसके साथ ही हमारे यहां बैकवॉटर जैसे अभी हनुवंतिया की बात कर रहे थे,उससे ज्यादा अच्छे स्पॉट हैं हमारे यहां बीच में जोगा का किला है चारों तरफ से पानी भरा हुआ है, और बैकवॉटर से पूरा पानी भरा हुआ है वहां भी यदि विकास करेंगे निश्चित ही हनुवंतिया जैसे टापू वहां भी होंगे ।
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, नर्मदा घाटी के अंतर्गत जो 100 स्पॉट बताए गए हैं, उसी प्रकार के स्पॉट हरदा तरफ भी है, अगर उनको भी विकसित किया जाएगा तो निश्चित ही हरदा जिले का भी विकास होगा, प्रदेश का नाम भी होगा और पयर्टन का नाम भी होगा ,इसके अतिरिक्त बहुत सारी बातें थीं, परन्तु माननीय उपाध्यक्ष महोदय जी का प्रतिबंध है इसलिए मैं माफी चाहता हॅूं, आपने बोलने के लिए मौका दिया बहुत-बहुत धन्यवाद ।
श्री के.के.श्रीवास्तव(टीकमगढ़)- माननीय उपाध्यक्ष महोदय मैं मांग संख्या 26,37,संस्कृति और पर्यटन विभाग की बजट अनुदान मांगों के समर्थन में यहां खड़ा हुआ हूँ । माननीय उपाध्यक्ष महोदय,मध्यप्रदेश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, बहुत काम मध्यप्रदेश में पर्यटन के ऊपर हुआ है, उसके बाद भी और कुछ करने की जरूरत है, मध्यप्रदेश में विशेष पहचान बनाने के लिए काम हो रहे हैं लेकिन पर्यटन स्थलों का यदि हम वर्गीकरण कर देते हैं, इसको तीन चार हिस्सों में देखें तो पर्यटन के जो स्थल हैं, उनको हम ऐतिहासिक दृष्टि से, कुछ पुरातात्विक दृष्टि से, कुछ धार्मिक दृष्टि से और वन्य अभ्यारण्य के रूप में अगर हम विकसित करने की हम श्रेणीवार श्रृंखला खड़ी करेंगे, तो मैं समझता हूँ कि मध्यप्रदेश में और ज्यादा पर्यटन को महत्व दिया जा सकता है ।
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने न केवल शहरी क्षेत्रों में, पुराने ऐतिहासिक और पर्यटक स्थलों का संरक्षण किया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्यटन को और कैसे ज्यादा प्रभावी तरीके से उसका उन्ययन किया जाए, संरक्षण किया जाए, संवर्धन किया जाए इस दृष्टि से भी मध्यप्रदेश की सरकार काम कर रही है ।
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, पर्यटन के क्षेत्र में बुन्देलखण्ड में बहुत अपार संभावनायें हम समझ पा रहे हैं. अगर बुन्देलखण्ड में भी पर्यटन को बहुत ज्यादा अवसर दिया जाता है तो उस क्षेत्र में भी बहुत काम हुए हैं. अभी जलाशयों वाले विषय पर, जैसे हनुमंतिया के विषय पर यहां पर बातचीत हो रही थी. ऐसे विशाल जलाशयों को कहीं न कहीं वाटर टूरिज्म, कैसे और ज्यादा डेवलप किया जाये ? कैसे पानी के जो सोर्स हैं ? उन पर भी हम पर्यटकों को आकर्षित करते, उनको भी हम लुभाकर मध्यप्रदेश की धरती पर लाएंगे तो पर्यटन बढ़ेगा और हमारी आय में भी वृद्धि होगी. इस दिशा में, मध्यप्रदेश की सरकार बहुत अच्छा कार्य कर रही है. मैं समझता हूँ कि केवल पर्यटन के साथ-साथ हमने जलक्रीड़ा और साहसिक गतिविधियों को भी विश्वस्तरीय अधोसंरचना का निर्माण कर, उस क्षेत्र में भी हम कहीं न कहीं बढ़ रहे हैं. आज पर्यटन के क्षेत्र में निजी भागीदारी एवं निजी निवेश भी बढ़े. इस दृष्टि से भी मध्यप्रदेश के पर्यटन विभाग ने 16 विशेष पर्यटन क्षेत्र घोषित किये हैं. जिनमें निजी निवेश की संभावनाएं हम तलाश कर रहे हैं और मैं समझता हूँ कि सरकार अपने उपलब्ध संसाधनों के दम पर तो पर्यटन को बढ़ावा दे रही है लेकिन इसमें निजी निवेश भी बढ़े. इसलिए उन विशेष पर्यटन क्षेत्रों की तरफ हम निवेश को आकर्षित कर रहे हैं.
उपाध्यक्ष महोदय - श्री के.के.श्रीवास्तव जी समाप्त करें. आप विभाग भी बदलिये.
श्री के.के.श्रीवास्तव - हम समय पर कर लेंगे. हमारा विभाग संस्कृति एवं पर्यटन है. फिल्म एवं टूरिज्म के लिए भी बेहतर सुविधाएं एवं संभावनाएं, मध्यप्रदेश में आज देख रहे हैं और अच्छे-अच्छे नामचीन फिल्म निर्माता-निर्देशक एवं अभिनेता मध्यप्रदेश में आकर फिल्मों का निर्माण कर रहे हैं. यह मध्यप्रदेश के बेहतर प्रबन्धन एवं सुविधाओं का ही परिणाम है. हमने पर्यटन के क्षेत्र लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें इसलिए 'पर्यटक मित्र प्रदेश' के नाम से इसको एक नई संस्कृति डेव्हलप की है कि जो पर्यटक बाहर से आते हैं, उनको बेहतर सुविधायें मिलें, उनके साथ अच्छा व्यवहार हो, उनके साथ बेहतर चाहे वह ढाबा संचालक हो, चाहे होटल मालिक हों, चाहे वेटर हों, चाहे टैक्सी-रिक्शा चालक हों, सबको ठीक ट्रेनिंग देकर ट्रेण्ड किया जा रहा है.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का कार्य मध्यप्रदेश की सरकार कर रही है. संस्कृति के क्षेत्र में आज पुरातत्व के सर्वेक्षण में नित्य नये काम हो रहे हैं. उसमें मध्यप्रदेश में मौर्यकालीन सभ्यता, हड़प्पा संस्कृति, महाभारत काल के अवशेष मिले हैं. इनको सहेजने का कार्य मध्यप्रदेश सरकार कर रही है. बौद्ध धर्म भारत का है, यहां उसका प्रादुर्भाव हुआ. उसको हमने विश्व में पहुँचाया है. उसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिये, सांची में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के बौद्ध विश्वविद्यालय की स्थापना, उसकी आधारशिला रखी गई.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, 100 एकड़ की भूमि मध्यप्रदेश की सरकार, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री ने देने की घोषणा की है. जिसमें 65 एकड़ भूमि, उस विश्वविद्यालय के लिये दे भी दी गई है. कई सांस्कृतिक महोत्सव मध्यप्रदेश की धरती पर जगह-जगह वहां की संस्कृतियों को सहेज कर, चाहे वह निमाड़ हो, चाहे बुन्देलखण्ड हो, चाहे ओरछा हो, चाहे दूसरे अन्य क्षेत्र हों. सब जगह. मैं मध्यप्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ. हमारे संस्कृति मंत्री श्री सुरेन्द्र पटवा जी को, जिन्होंने कुण्डेश्वर की 20 - 25 वर्ष पुरानी मांग को 'कुण्डेश्वर महोत्सव' को भी सहमति देकर, इसी वर्ष महाशिवरात्रि को उसको आयोजित कराने का संकल्प व्यक्त किया है.
उपाध्यक्ष महोदय - धन्यवाद. श्रीवास्तव जी आधे मिनिट में समाप्त करें.
श्री के.के.श्रीवास्तव - माननीय उपाध्यक्ष महोदय,
'उनकी तुरवत पर दिया भी नहीं, जिनके खून से जलते थे, ये चिरागे वतन,
जगमगा रहे थे मकबरे उनके, जो बेचा करते थे शहीदों के कफन',
मध्यप्रदेश में उन लोगों को कभी सम्मान नहीं मिला. चाहे वह टंट्या भील हों, चाहे बिरसा मुण्डा हो, ऐसे लोगों को मध्यप्रदेश की सरकार ने वह सम्मान दिया है, जो उस सम्मान के लायक थे.
आज उनकी समाधियों पर, उनके स्थलों पर, उनकी शहीद स्थलियों पर मेले आयोजित किये जा रहे हैं. चाहे चन्द्रशेखर आजाद हों, उनके स्थान पर हम बहुत बड़ा आयोजन करते हैं. मैं संस्कृति मंत्री महोदय से अनुरोध करता हूँ कि टीकमगढ़ में एक महान् क्रांतिकारी अमर शहीद नारायण दास हुए थे. जिनकी स्मृति में आज भी 60 - 62 वर्षों से वहां के स्थानीय लोग एक मेला आयोजित करते हैं. शहीद मेला- उस मेले को मध्यप्रदेश की स्वराज संस्था की ओर से अगर आयोजित करायेंगे तो वहां के लगभग 25 - 30 गांव के लोग, उस मेले को 60 वर्षों से सहेजे हुए हैं, तो शहीद की स्मृति में एक बड़ा काम होगा. सूर्य मंदिर हिन्दुस्तान में बहुत गिने चुने हैं. टीकमगढ़ में दो सूर्य मंदिर हैं, उनको भी सहेजने की जरुरत है. वह भी हमारी विरासत है. ओरछा है ही. अस्तोन एक किला है, जहां 1857 की क्रांति के अग्रदूत महारानी लक्ष्मीबाई एवं तात्या टोपे जी अस्तोन के किले में अंग्रेजों से युद्ध करते समय रणनीतिक गतिविधियां वहां से उन्होंने संचालित की हैं. उसको भी संरक्षित करने की जरुरत है.
उपाध्यक्ष महोदय -- श्रीवास्तव जी, अब आप बैठ जायें.
श्री के.के.श्रीवास्तव -- टीकमगढ़ की एक ताल कोठी है, जो कि एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक धरोहर है. उसीकी एक मंजिल तालाब के अंदर है, उसको भी सहेजने की जरुरत है.मेरा निवेदन है कि उसको हेरिटेज बनाया जाय. उपाध्यक्ष महोदय, आपने बोलने के लिये समय दिया, उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.
5.01 बजे अध्यक्षीय घोषणा
सदन के समय में वृद्धि विषयक
उपाध्यक्ष महोदय -- आज की कार्य सूची के पद क्रमांक 7 के उप पद 1 का कार्य पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाये. मैं समझता हूं कि सदन इससे सहमत है.
(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.)
5.02 बजे वर्ष 2016-2017 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमशः)
श्री बहादुर सिंह चौहान (महिदपुर) -- उपाधय्क्ष महोदय, मैं मांग संख्या 1,2,26,37,48 एवं 65 का समर्थन करते हुए अपनी बात रखना चाहूंगा. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की भिन्न भिन्न परियोजनाओं द्वारा सिंचाई का रकबा बढ़ा है. मां नर्मदा 98795 वर्ग किलो मीटर में बहती है और वह अमरकंटक से बहती हुई मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से होते हुए महाराष्ट्र और गुजरात से होते हुए खंभात की खाड़ी अरब सागर में समाहित हो जाती है. मां नर्मदा 1312 किलोमीटर बहती है. उसमें से 1077 किलोमीटर मध्यप्रदेश के अन्दर बहती है और इस नदी का पूरे मध्यप्रदेश को जो लाभ है, मैं समझता हूं कि उसका चित्रण करने की आवश्यकता नहीं है. परंतु हम लोग मालवा के हैं और मालवा में एक कहावत है कि मालव माटी गहन गंभीर. पग पग रोटी डग डग नीर. यह कहावत चरितार्थ रह गई. अब पानी की समस्या मालवा में हो गयी है. अब चूंकि नर्मदा का पानी सिंहस्थ की दृष्टि से उज्जैन में लाना था. पूर्व की सरकार ने काफी प्रयास किया, लेकिन नर्मदा क्षिप्रा सिंहस्थ लिंक परियोजना उस समय नहीं हो पाई. हमारे मुख्यमंत्री जी की इच्छा शक्ति से नर्मदा का पानी 400 मीटर ऊपर उठाकर मां क्षिप्रा में डाला और हमारा नर्मदा के अंदर जो डेम बना हुआ है, 5 क्यूसिक पानी का उद्वहन करके मां क्षिप्रा में आने के बाद उसको प्रवाहित किया. इसको मैं इसलिये जोड़ रहा हूं कि हिन्दुस्तान में जहां सिंहस्थ चार स्थानों में होते हैं. उसमें से एक स्थान हमारा उज्जैन है. भूत भावन महाकाल की नगरी उज्जैनी में सिंहस्थ महापर्व 12 वर्षों के उपरांत आता है और तत्कालीन सरकारें उस सिंहस्थ महा पर्व को मनाने के लिये अपनी सम्पूर्ण शक्ति लगा देती हैं. आज प्रदेश की सरकार के जितने भी विभाग हैं, सिंहस्थ की तैयारियों में रात और दिन लगे हुए हैं. हमें पूरी उम्मीद है कि अभी तक जो 5 सिंहस्थ हुए हैं, पहले भी अच्छे सिंहस्थ होते आये हैं, लेकिन इस सिंहस्थ की जो तैयारी है, भूत भावन महाकाल की नगरी उज्जैनी में मोक्ष दायिनी क्षिप्रा बहती है और क्षिप्रा के अंदर नर्मदा का पानी आ गया है. मां क्षिप्रा में स्नान करने के लिये देश विदेश के लोग आते हैं और इस सिंहस्थ महापर्व में लगभग 5 करोड़ श्रृद्धालु या पर्यटक के रुप में आने वाले हैं. उन सब की तैयारियों के लिये सरकार लगी हुई है. मैं मां क्षिप्रा मोक्ष दायिनी में स्नान करने के लिये इस वक्त पहले पानी नहीं हुआ करता था. मां नर्मदा का पानी आज क्षिप्रा में आ गया है, कई स्टाप डेम लबालब भरे हुये हैं. मां क्षिप्रा जो बहती हैं, उज्जैन से 50 किलोमीटर दूर मेरी विधानसभा लग जाती है वहां पर भी इसका पानी आया है. आगे तक मां नर्मदा का पानी हम सबको मिलने वाला है. माननीय मुख्यमंत्री जी ने नर्मदा-मालवा गंभीर परियोजना का भी प्रथम चरण प्रारंभ किया है. 2187 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति भी जारी की जा चुकी है. इसका मालवा क्षेत्र में क्या लाभ होगा, वह मैं बताना चाहता हूं. इस योजना के बनने से इंदौर-उज्जैन के कई गांव में 50 हजार हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा साथ में पीने का पानी भी इस योजना से मिलेगा और उद्योगों को भी इस योजना से लाभ होगा. इसलिये आज हम कह सकते हैं कि क्षिप्रा का पानी आने के पहले तक हम मालवा के लोग दो तरह की फसलें लिया करते थे, रवी की फसल में सोयाबीन और बाद में गेहूं चना और ले लेते थे, लेकिन क्षिप्रा के पानी का प्रभाव होने से मैतूर के किनारे रहने वाले किसान अब तीसरी मूंग की फसल भी लेने लगे हैं. मां नर्मदा का पानी वहां तक आ गया है. यह बहुत बड़ी योजना मालवा के लिये मुख्यमंत्री जी ने लागू की है इसके लिये मुख्यमंत्री जी, इस विभाग के राज्य मंत्री लाल सिंह आर्य जी धन्यवाद के पात्र हैं. मैं संस्कृत मंत्री जी को धन्यवाद इसलिये देना चाहता हूं कि प्रतिवर्ष के अनुसार कालीदास समारोह हमारे प्रदेश में अद्वितीय होता है . वह कई दिनों तक आपके विभाग के नेतृत्व में चलता है. मोक्षदायिनी मां क्षिप्रा नदी के अंदर मंच बनाकर के यह महत्वपूर्ण आयोजन आपके विभाग के माध्यम से होता है. चूंकि समय का अभाव है इसलिये संक्षेप में कहना चाहता हूं कि पर्यटन विभाग से मेरे क्षेत्र में चूंकि बाबा रामदेग को राजस्थान में बहुत माना जाता है, हमारी विधानसभा से आगे राजस्थान का झालावाड़ जिला लग जाता है. मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि बाबा रामदेग के मंदिर का जन्म स्थान जो भादवा मंदिर के नाम से है, उसमें लाखों लोग आते हैं. उस मंदिर के जीर्णोद्वार के लिये निश्चित रूप से आने वाले समय में राशि स्वीकृत करके उस मंदिर का जीर्णोद्वार करवायेंगे. और भी बात कहना थी लेकिन अंतिम बात कहकर मैं अपनी बात को समाप्त करूंगा.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह जो सिंहस्थ है यह विचारों का सिंहस्थ हमारी सरकार ने बनाया है . मैं यहां पर बैठे हुये सभी सदस्यगणों से आग्रह करता हूं कि 12 वर्षों में एक बार यह अवसर मिलता है. इस बार अलग प्रकार का अवसर है पूर्व में जो सिंहस्थ हुये हैं उससे इसका महत्व और अधिक है. मेरा सभी से आग्रह है कि जो शाही स्नान है 22 अप्रैल से यह महापर्व प्रारंभ होगा और 21 मई को इसका समापन होगा, आप सभी पधारिये आपके स्वागत के लिये हम उज्जैन जिले के लोग तैयार बैठे हैं. उपाध्यक्ष महोदय, आपने समय दिया बहुत बहुत धन्यवाद.
उपाध्यक्ष महोदय-- धन्यवाद बहादुर सिंह जी आपने सबको आमंत्रण भी दे दिया.
श्री बहादुर सिंह चौहान -- उपाध्यक्ष महोदय, सभी सदस्य कह रहे हैं कि रामनिवास रावत जी को अलग से निमंत्रण दो. मैं माननीय रावत जी को भी निमंत्रण देता हूं.
श्री रामनिवास रावत-मैं बचपन से ही हर सिंहस्थ में जाता हूं. इसमें भी आऊंगा.
श्रीमती उषा चौधरी(रैगांव) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 1, 2, 26 37, 48 और 65 का विरोध करती हूं और कटौती प्रस्ताव का समर्थन करती हूं. उपाध्यक्ष महोदय, सामान्य प्रशासन विभाग के बारे में कहना चाहती हूं कि पूरे मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग की भर्ती में सरकार के द्वारा जो रोक लगाई है उसको हटाकर के भर्ती की कार्यवाही की जाये. लोक निर्माण विभाग में कई स्तर पर अनियमिततायें हैं, इस विभाग के द्वारा क्लाविटी कन्ट्रोल रूम, हेड सर्किट और अधीक्षक यंत्री स्तर कार्यालयों पर खोली गई प्रयोगशाला में भी इस वर्ग के अनेक पद रिक्त पड़े हैं जिनके भरने की कार्यवाही विभाग के द्वारा की जानी चाहिये. लोक निर्माण विभाग में 2002 से आज दिनांक तक रिक्त पड़े हुये पदों पर विशेष भर्ती अभियान चलाकर के इन पदों को भरने की कार्यवाही सरकार के द्वारा की जानी चाहिये.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं पर्यटक विभाग पर बोलना चाहती हूं, पर्यटक विभाग में सतना जिले में पर्यटक स्थलों की, सतना जिले में भरहुत एक पर्वत है जहां गौतम बुद्ध की स्थली है, वहां पर प्राचीनकाल से जो वहां शिलालेख हैं पॉली भाषा के हैं और पुरातत्व विभाग ने भी वहां पर खोज की थी, काफी कीमती मूर्ति वहां से चोरों ने निकाल कर वहां से सप्लाई कर दी, कई लोग उसमें अधिकारी, कर्मचारी भी लिप्त थे. मैंने कई बार जब-जब सदन चला है तब-तब बोली हूं केवल एक गेट लगवाकर थोड़ी बाउंड्रीवाल की गई है, क्योंकि प्राचीन काल में दक्षशिला के नाम से वहां पर पाठशालायें भी चलती थीं, गौतम बुद्ध जी के काल में, अगर वहां पर पर्यटक विभाग द्वारा एक मेले के लिये जैसे गौतम बुद्ध जी की जयंति जब मनाई जाती है तां वहां काफी संख्या में जगह-जगह से लोग आते हैं, वहां पर और अच्छी व्यवस्था और धर्मशाला बनाने का काम अगर किया जाये तो बहुत अच्छा होगा. माननीय उपाध्यक्ष महोदय कई बार मैंने सदन में भी और बजट सत्र में भी बोली हूं कि सतना जिले में रामवन में जहां 7 दिन का मेला लगता है, वहां पर कई निर्माण कार्य कराये गये हैं, कई करोड़ रूपये लगाये गये हैं. 1978 में संत रविदास जी का बना हुआ वहां मंदिर है जिसमें एक रूपया भी नहीं लगाया गया, जीर्णशीर्ण पड़ा हुआ है, उसका भी विकास कराकर उसको अच्छी तरह से बनवा दिया जाये.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरे रैगांव विधानसभा में कई बार मैंने कहा कि बराकलां, गिंजारा, नक्ती, रामपुर चौरासी में संत रविदास जी की प्रतिमायें रखी हैं वहां पर भी मंदिरों का निर्माण किया जाये.
उपाध्यक्ष महोदय-- उषा जी एक मिनट में समाप्त करेंगी.
श्रीमती ऊषा चौधरी-- जी उपाध्यक्ष महोदय, भरजुना कला में, हमारे रैगांव विधानसभा में जहां 9 दिन का मेला लगता है नवदुर्गा के समय वहां पर मां दुर्गा की प्रतिमाओं को विसर्जित किया जाता है, वहां की नदी जो एकदम सूखी पड़ी हुई है, वहां पानी की व्यवस्था कराई जाये और वहां भी काफी प्राचीन संस्कृति देखने को मिलती है, वहां पर बाउंड्रीवाल भी करा दी जाये.
माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं अनुसूचित जाति थाना इसमें जो डीएसपी और टीआई होते हैं वह अनुसूचित जाति के नहीं होते हैं इसलिये अनुसूचित जाति, जनजाति के लोगों को न्याय नहीं मिल पाता है, कई बार उनकी रिपोर्ट ही दर्ज नहीं की जाती और बोलते हैं कि अपने थाने, अनुसूचित जाति में जाइये, कोई कहता है संबंधित थाने में जाइये, इस कारण से उनको न्याय नहीं मिल पाता है तो वहां पर जो अनुसूचित जाति के थाने हैं उनमें डीएसपी और टीआई अनुसूचित जाति, जनजाति का होना चाहिये. मांग संख्या 13 पर माननीय उपाध्यक्ष महोदय बोलना चाहती हूं.
उपाध्यक्ष महोदय-- आधा मिनट में समाप्त करें ऊषा जी.
श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, कई लोगों ने इस सदन के अंदर प्रवचन दिये और कई लोगों ने तमाम तरह की बातें कहीं, सरकार इतना डिंढोरा पीटती है, सब सुनते हैं आप लेकिन मैं अपने क्षेत्र के काम की बात कर रही हूं, माननीय उपाध्यक्ष महोदय, भाग और भगवान के नाम से सदन नहीं चलता है, यह विधानसभा अगर चलती है तो इस देश के संविधान से चलती है और मेरे बाबा साहेब अंबेडकर जी के बनाये हुये कानून से चलती है, इसलिये आपको सुनना पड़ेगा.
उपाध्यक्ष महोदय-- समाप्त करिये आप.
श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, खादी ग्राम में 20 सालों से सोसायटी बंद पड़ी है, उसको संचालित करा दिया जाये ताकि किसानों को बीज समय से मिल सके. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाह रही हूं कि हम लोगों की जो विधायक निधि है, जो स्वेच्छानुदान लोगों को ऑनलाइन कर दिया गया है, कर्मचारी, अधिकारी उन गरीबों के खातों में पैसा नहीं डालते हैं, कहीं तो खाते गलत कर देते हैं, कहीं कह देते हैं आपके विधायक के यहां से नहीं आया, तो इसकी व्यवस्था भी बनाई जाये. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया इसके लिये धन्यवाद.
श्री मानवेन्द्र सिंह( महाराजपुर)--उपाध्यक्ष महोदय, मांग संख्या 37 पर्यटन का मैं समर्थन करता हूं. माननीय मंत्रीजी ने इसमें 246.56 करोड़ रुपये का प्रावधान करवाया है, उसके लिए मैं उनको बधाई देता हूं. मध्यप्रदेश में पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है. खासकर हनुवंतिया पर्यटन स्थल के लिए जो प्रयास माननीय मंत्रीजी और मुख्यमंत्रीजी ने किया है यह बहुत ही प्रशंसनीय है.
उपाध्यक्ष महोदय, मैं अपने बुंदेलखंड क्षेत्र के बारे में आपके माध्यम से माननीय मंत्रीजी से अनुरोध करना चाहूंगा. भारत में 80 प्रतिशत जो पर्यटक आता है, वह मध्यप्रदेश में खजुराहो देखने जरुर आता है. राजस्थान से पर्यटक मध्यप्रदेश में आता है तो यहां पर जो हरियाली और स्थान देखता है तो बड़ा खुश होता है. वह काफी समय यहां पर बिताना चाहता है. जैसे अभी 1 या 2 दिन उनका रुकना होता है लेकिन जब वह यहां का वातावरण, हरियाली देखता है तो उसको देखकर 3-4 दिन भी व्यतीत करने का प्रयास करता है. मेरा आपके माध्यम से अनुरोध है कि पहले भी खजुराहो में एक गोल्फ कोर्स की व्यवस्था की बात हुई थी. अगर गोल्फ कोर्स और केन नदी में माछेर या मछली पालन की व्यवस्था की जाये तो यहां पर जो जापानी और अन्य पर्यटक जो गोल्फ के बड़े शौकीन होते हैं. चूंकि विदेशों में बहुत महंगा गोल्फ होता है. यहां पर आकर खेलकर जाने में भी वह सस्ता पड़ता है जितना उनका विदेशों में खर्च होता है. खजुराहो में पर्यटकों के लिए गोल्फ कोर्स खोलने का अनुरोध करता हूं और माछेर मछली वहां पर है उसको बढ़ाकर फिशिंग का प्रावधान करेंगे तो विभाग को काफी राजस्व आयेगा.
उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्रीजी का जैसा सोच था कि कृषि के बाद पर्यटन से रेवेन्यू की व्यवस्था काफी हो सकती है. मेरा अनुरोध है कि इन दोनों का विकास करने से बुंदेलखंड में पर्यटकों का रुकना काफी हद तक बढ़ेगा.
उपाध्यक्ष महोदय, एक निवेदन और करना चाहूंगा. कुछ पर्यटक ग्राम घोषित किये थे लेकिन उसमें विकास की जो व्यवस्था होना चाहिए, वह अभी तक नहीं हो पायी है. क्योंकि मैंने देखा है कि जो पर्यटक आते हैं, वह ग्रामीण परिवेश में गांव के लोग किस तरह रहते हैं, पढ़ते हैं, क्या व्यवसाय करते हैं, उनको देखने की बड़ी इच्छा रहती है. गांव की व्यवस्था देखने के लिए वह एक दो दिन रुकना चाहते हैं. उपाध्यक्षजी, हेरिटेज होटल के लिए एक लेकुना लगाया गया था कि इस वर्ष के बाद जो होटल खुलें हैं उनको ही सबसीडी देने का प्रावधान रहेगा. मेरा अनुरोध है कि यह लेकुना हटाया जाये. जो लोग भी हेरिटेज होटल खोल रहे हैं, खोल चुके हैं उनको शासन की जो भी सुविधाएं हैं वह बराबर सामान्य रुप से मुहैया करायी जाये जिससे कि जो आगे होटल खोले या जो खोल चुके हैं. जिन्होंने पहले खोले वह निश्चित ही उसमें विकास करना चाहते हैं, बढ़ाना चाहते हैं तो दोनों को यह सुविधा रहेगी. मैं आपके माध्यम से यह अनुरोध करना चाहूंगा कि टेक्स में कितने सालों की छूट रहेगी इसको सामान्य रुप से करने का प्रावधान किया जाये जिससे हेरिटेल टूरिज्म के साथ हेरिटेज स्टे भी बढ़े. धन्यवाद.
श्री दिनेश राय, मुनमुन(सिवनी)--उपाध्यक्ष महोदय, मैं पर्यटन, संस्कृति और सामान्य प्रशासन विभाग पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं.
उपाध्यक्ष महोदय, सामान्य प्रशासन विभाग के और पर्यटन विभाग के मंत्रियों में शक्ल से ही मुझे नम्रता और सज्जनता झलकती है. मैं यह उम्मीद करता हूं कि मेरे जिले में भी आप पर्यटन को बढ़ावा देवे. हमारे यहां शहर के अंदर एक सुन्दर जलसागर तालाब है. उसमें बीच में टापू है. उसमें मोटर बोटिंग आदि सब होती है. अगर उसमें भी आप क्रूज की व्यवस्था कर दें तो आपको मैं बहुत बहुत धन्यवाद दूंगा.
उपाध्यक्ष महोदय, बेनगंगा नदी हमारे जिले से निकलती है. जैसा मुख्यमंत्रीजी का कहना है,नदी से नदी को जोड़ना है. मेरा निवेदन है कि नर्मदा नदी हमारे जिले से जाती है. बरगी डेम से दूसरे जिलों में सिंचाई होती है. उसको भी जोड़ दें तो बेहतर होगा.बबरिया तालाब का गहरीकरण और सौंदर्यीकरण चाहता हूं. संजय सरोवर बांध मेरे जिले में आता है, जो एशिया का मिट्टी से बना हुआ सबसे बड़ा बांध है. उसमें भी आप सौंदर्यीकरण करने की कृपा करेंगे. मेरा आपसे निवेदन है कि पेंच नेशनल पार्क को बढ़ावा देने के लिए हमारे यहां पर एयरस्ट्रिप बनी हुई है, उसमें रात्रि में प्लेन उतरने की व्यवस्था नहीं है. मेरा निवेदन है कि वहां पर उतरने की व्यवस्था हो जाय, जिसमें कभी कभार हम भी उतर जाएं, या एम्बुलेंस भी उतार सके, ऐसा मेरा आपसे आग्रह है. संस्कृति विभाग द्वारा हमारे यहां पर कुछ मूर्तियां स्थापित की गई हैं, परन्तु उसका स्थल निरीक्षण नहीं किया गया है. कहीं पर भी वे लग गई हैं, चौराहों पर लग रही हैं. मेरा निवेदन है कि चौराहों पर लगने की अनुमति आप प्रदान न करें. आधे गांव की गढ़ी है, मेला भी लगता है, धूमावती माता है, प्राचीन जैन मंदिर है, स्वामी शंकराचार्य की सिवनी जन्म-स्थली है, मेरा निवेदन है कि उस क्षेत्र में भी आप पर्यटन पर ध्यान देंगे.
उपाध्यक्ष महोदय, हमारे यहां पर पर्यटन सबसे बड़ा रोजगार का साधन है, जिसमें युवाओं को रोजगार मिलेगा, ऐसा मेरा आग्रह है. मेरा विनम्र निवेदन है कि जन सुनवाई की बात जो आ रही है तो हमारे यहां पर जन सुनवाई में जब महिला-पुरुष गये तो महिलाओं को डग्गे में भरकर घर पहुंचा दिया गया और 33 पुरुषों को जेल पहुंचा दिया गया तो जन सुनवाई में अगर आदमी आए और उसको जेल में डाल दें तो क्या औचित्य है? अभी यहां पर काफी मामला भ्रष्टाचार का चल रहा था. मेरा विनम्र आग्रह है कि भ्रष्टाचार तो बंद हो नहीं पा रहा है. हमारे प्रशासनिक मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि उस भ्रष्टाचार को आप वेलिड कर दें, लीगल कर दो. कम से कम लेन-देन व्हाइट में हो जाय, नीचे स्तर से लेकर ऊपर स्तर तक के अधिकारियों के रेट फिक्स कर दो, काम के रेट फिक्स कर दो तो सरकार की भी आय हो और हम लोगों के काम भी ईमानदार से होने लगें.
उपाध्यक्ष महोदय, हमारे यहां पर मठघोघरा, एक बहुत प्राचीन गुफा है, उसको भी यदि पर्यटन में स्थान मिल जाय तो इससे जिले का विकास संभव है. उपाध्यक्ष महोदय, आपने बोलने का समय दिया, मैं पहली बार समय के पहले बैठ रहा हूं, आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं.
उपाध्यक्ष महोदय - बहुत-बहुत धन्यवाद. आपने बड़ा अनुशासन का पालन किया है. श्री कमलेश्वर पटेल जी, आप भी अनुसरण करेंगे, मेहरबानी होगी.
श्री कमलेश्वर पटेल - उपाध्यक्ष महोदय, बहुत ही संक्षेप में बात रखेंगे. उपाध्यक्ष महोदय, मांग संख्या 1, 2, 26,37,48 एवं 65 की अनुदान मांगों के विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं. उपाध्यक्ष महोदय, अभी हमारे साथी श्री दिनेश जी की बातों से ही लगता है शुरुआत करना उचित रहेगा. सामान्य प्रशासन विभाग के बारे में जैसा कई साथियों ने उल्लेख किया कि पूरे प्रदेश में सबसे महत्वपूर्ण विभाग है और सभी शाखाएं सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से ही गई हुई हैं. सामान्य प्रशासन विभाग में जो कसावट होनी चाहिए, एक तरफ खुशी भी होती है कि इसके मंत्री, मुख्यमंत्री जी हैं, राज्यमंत्री श्री लाल सिंह जी हैं. परन्तु पता नहीं कहां श्री लाल सिंह जी का प्रशासन राज्यमंत्री में लगता है कि ठंडा हो जाता है और मुख्यमंत्री जी के पास बहुत बोझ है. जिस तरह की प्रशासनिक व्यवस्था पूरे प्रदेश में होनी चाहिए, पूरी तरह से प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई है और भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है. किसी भी ऑफिस में बिना लेन-देन के काम नहीं होता है. सब जगह रेट फिक्स है और हमारे ही विधान सभा क्षेत्र में यह नहीं है, आप किसी भी जिले में चले जाइए. मुझे लगता था कि सिर्फ हमारे जिले में ही इस तरह की व्यवस्था होगी.
राज्यमंत्री, पर्यटन (श्री सुरेन्द्र पटवा) - आप किस आधार पर बोल रहे हैं, आपके पास कोई प्रूफ हैं क्या?
श्री कमलेश्वर पटेल (सिहावल) - उपाध्यक्ष महोदय, हम कई उदाहरण दे सकते हैं. हम प्रूफ पर भी आ रहे हैं. किस तरह से ऐसे लोगों को यह संरक्षण सरकार दे रही है इसका जीता-जागता उदाहरण है कि लोकायुक्त में कितने सारे प्रकरण दर्ज हुए थे, मुख्यमंत्री, मंत्रीगण, 24 में से 22 को क्लीन चिट हो गई, 2 पर कार्यवाही सिर्फ लंबित है, कार्यवाही किसी पर नहीं हुई है. आईएएस अधिकारियों में 111 पर प्रकरण दर्ज हुए और 106 आईएएस को क्लीन चिट दे दिया, 3 लोगों पर अभी कार्यवाही लंबित है. ऐसे ही आईपीएस में 33 पर प्रकरण दर्ज हुए, 31 को क्लीन चिट दे दी है, 2 पर कार्यवाही अभी लंबित है. इसी तरह से 19 आईएफएस अधिकारियों पर प्रकरण दर्ज हुआ है और 17 को क्लीन चिट दे दी है और 2 अभी लंबित हैं, 18 विभागाध्यक्षों पर प्रकरण दर्ज हुआ था 12 को क्लीन चिट दी गई है और 3 अभी लंबित हैं. क्या यह सब उदाहरण नहीं हैं मंत्री जी. अगर कुछ हुआ है तब ही तो लोकायुक्त में इस तरह के प्रकरण दर्ज हुए हैं. क्या आपके सामने व्यापम उदाहरण नहीं है. यहां पर आपकी सरकार सुशासन की बात करती है कहां है सुशासन अगर सुशासन होता तो यह कुशासन का व्यापम जैसा घोटाला नहीं होता. हम तो उन्हीं घटनाओं के बारे में बात कर रहे हैं जो कि मध्यप्रदेश में घटी हैं. क्या व्यापम का घोटाला नहीं हुआ है.
सुश्री कुसुमसिंह महदेले -- अभी तुरंत की जमानत की याद कर लें दिग्विजय सिंह जी की .
श्री कमलेश्वर पटेल -- दिग्विजय सिंह जी हमारे नेता हैं, उनको कोई चिंता नहीं है सरकार में हिम्मत है तो वह उनको गिरफ्तार करे. अगर सरकार में हिम्मत है तो अभी संसदीय मंत्री जी बार बार उल्लेख कर रहे थे. हमारे नेता राहुल गांधी जी का, आपकी केन्द्र में भी सरकार है मोदी जी में हिम्मत है तो उनको गिरफ्तार करें, आज मोदी जी बोल रहे थे और सदन में राहुल गांधी जी बैठे थे. अगर वह देश द्रोही थे उनको गिरफ्तार क्यों नहीं कराते हैं. हम यहां पर जो भी बात कर रहेहैं वह सरकार को सुनना चाहिए और उसमें जो कमी हैं उसमें सुधार करना चाहिए. हम यहां परकिसी का नाम नहीं ले रहे हैं. एक उदाहरण और हम यहां पर बता देते हैं. माननीय सांसद जी श्री नंदकुमार सिंह जी जो कि अभी भाजपा के अध्यक्ष हैं उन्होंने बैतूल में खुद कहा था हमने मीडिया में सुना था. उन्होंने कहा था कि लोकायुक्त जो संगठन है वह मुख्यमंत्री जी के इशारे पर चलता है क्या ऐसा नहीं कहा था न्यूज पेपर में नहीं छपा था. क्या हम यहां पर असत्य बोल रहे हैं. इस तरह की घटनाएं अगर हुई हैं तो कहीं न कहीं पर शंका पैदा होती है.
श्री इंदर सिंह परमार -- नंदकुमार सिंह जी इस सदन के सदस्य नहीं है उनका नाम आप नहीं ले सकते हैं.
चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी -- उपाध्यक्ष महोदय यह बहुत ही गलत परंपरा है .
श्री लाल सिंह आर्य -- उपाध्यक्ष महोदय इसे विलोपित करा दें.
श्री कमलेश्वर पटेल -- अगर यह विलोपित होगा तो राहुल गांधी जी का जितनी बार भी नाम आया है वह भी विलोपित होगा. क्यों विलोपित कर दें. जो स्टेटमेंट दिया है वही तो बात हो रही है.
उपाध्यक्ष महोदय -- देखिये आप सभी बैठ जायें मानहानिकारक नहीं है.
श्री कमलेश्वर पटेल -- जोबोला है उसके लिए पेपर कटिंग वीडियो रिकार्डिंग जो कि न्यूज चैनल में चले हैं वह भी अगर हम जरूरत समझेंगे तो यहां पर पटल पर रख सकते हैं. हम असत्य बात नहीं कर रहे हैं. हम व्यवस्था की बात कर रहे हैं. सामान्य प्रशासन विभाग बहुत महत्वपूर्ण विभाग है. आप अगर जनपद में खण्ड स्तरिय अधिकारी से लेकर जिला प्रशासन कलेक्टर से लेकर जहां पर भी देखेंगे तो पूरी प्रशासनिक व्यवस्था का कण्ट्रोल आपके सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से है और सामान्य प्रशासन विभाग पर अगर मुख्यमंत्री जी का कण्ट्रोल नहीं है तो हम कहते हैं कि मुख्यमंत्री जी अक्षम हैं. अगर वह भ्रष्टाचार को नहीं रोक सकते हैं तो फिर पूरी तरहसे यह सरकार फेल है. अभी हम ही नहीं हमारे साथी जब प्रश्न लगाते हैं चाहे वह पक्ष के हों या विपक्ष के हों, जनता के जनादेश का हम भी स्वागत कर रहे हैं. यह सरकार नीतियों पर बात करती है. नीतियों पर ठीक से अमल नहीं हो रहा है और कई नीतियां ऐसी हैं जो कि समय अनुसार पुरानी हो गई है. जैसे आपका खाद प्रसंस्करण की नीति मियाद समाप्त हो गई है नई नीति का अभी तक निर्धारण नहीं हुआ है. युवा नीति का मध्यप्रदेश सरकार ने उल्लेख किया था उ सकी कितनी बार मीटिंग हुई है कितनी बार समीक्षा हुई है. हम यहां पर अपने क्षेत्र के बारे में दो चार सुझाव देना चाहते हैं.
5.30 बजे {अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए}
माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे यहां सिंगरौली जिले में माननीय मुख्यमंत्री जी ने इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने की घोषणा की थी लेकिन उसका कहीं कोई जिक्र नहीं है. आपका सरंक्षण चाहूंगा, दूसरी बात यह है कि सीधी जिले में सोनगलियार अभ्यारण्य है उसे टूरिज्म ने तो ले लिया है लेकिन उसका भी अभी तक कहीं कोई उल्लेख नहीं है और न ही वहां पर किसी प्रकार की कोई व्यवस्था है. इसी तरह सीधी जिले के सिंहावल ब्लॉक में बीरबल जी की जन्मस्थलि है घोघरादेवी जी का मंदिर है उसे भी टूरिज्म विभाग ने ले लिया है लेकिन अभी तक किसी तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. अत: माननीय मंत्री जी से हमारा निवेदन है कि उसमें वे व्यवस्था बनाएं. दूसरी तरफ जिस तरह से पर्यटन विभाग ने करोड़ों रुपये का प्रावधान हेलीकॉप्टर और नए हवाई-जहाज खरीदने के लिए किया है हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं. इस संकट के दौर में मध्यप्रदेश सरकार को इस तरह का कठोर कदम नहीं उठाना चाहिए, इसकी हम निंदा करते हैं और इस बजट का विरोध करते हैं. धन्यवाद.
श्री जालम सिंह पटेल (नरसिंहपुर) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 1, 2, 26, 37, 48 और 65 के समर्थन में अपनी बात रखता हूँ. मैं ऐसा मानता हूँ कि प्रदेश के जितने भी विभाग हैं और कार्यक्रम हैं उनका संचालन सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा ही होता है. उसके अनुसार प्रदेश की व्यवस्था चलती है और देश की भी व्यवस्था चलती है. अन्य वक्ताओं ने भी अपनी बात कही और मैं ऐसा मानता हूँ कि इस प्रदेश से भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए हमारे प्रदेश के मुखिया आदरणीय श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने ई-टेंडरिंग की व्यवस्था लागू की है और ई-पेमेंट के माध्यम से सीधे खातों में पैसे जमा करने के लिए बहुत अच्छी योजनाओं के माध्यम से काम किया है. इसी को लेकर लोक सेवा गारंटी कानून बनाकर के सरकार ने जवाबदेही का उदाहरण प्रस्तुत किया है. लोक सेवा गारंटी में 161 सेवाएं अधिसूचित हैं जिसमें से लगभग 107 सेवाएं ऑनलाइन की गई हैं. मैं ऐसा मानता हूँ कि भ्रष्टाचार को अगर समाप्त करना है तो इसी प्रकार के उपाय करने की आवश्यकता है. अब तक लोक सेवा गारंटी के माध्यम से 3 करोड़ 52 लाख ऑनलाइन आवेदन-पत्र प्राप्त हुए हैं और इस व्यवस्था को चलाने के लिए आदरणीय मुख्यमंत्री जी ने बजट में लगभग 133 करोड़ का प्रावधान भी किया है.
श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि यह देख लिया करें कि आज बजट की मांगों में लोक सेवा प्रबंधन नहीं है, लोक सेवा प्रबंधन भूपेन्द्र जी के पास है. आपने माननीय सदस्य को लोक सेवा प्रबंधन पर बोलने के लिए समय दे दिया है.
डॉ. नरोत्तम मिश्र -- बता दो जरा इनको.
श्री लाल सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, लोक सेवा प्रबंधन का आदेश यहीं से जारी होगा.
श्री जालम सिंह पटेल -- अध्यक्ष महोदय, मैं रावत जी से निवेदन करता हूँ कि किसी ने मुझे इस विभाग पर बोलने के लिए नहीं कहा है और न ही मंत्री ने कहा है, मैं स्वयं ही बोल रहा हूँ. नर्मदा घाटी विकास मंत्रालय जो है, मैं ऐसा मानता हूँ कि हमारे प्रदेश में मां नर्मदा जी एक जीवनदायिनी के रूप में यहां से निकलती है और नर्मदा जी का उद्गम स्थल अमरकंटक है और नर्मदा नदी भारतीय महाद्वीप की पांचवीं सबसे बड़ी नदी है. नर्मदा जी का उद्गम सतपुड़ा विंध्याचल पर्वतों के बीच स्थित छोटे से कुंड से हुआ है. इसका उद्गम किसी ग्लेशियर से नहीं हुआ है. पर्वतों पर जड़ी-बूटी, मिनरल, पेड़ पौधे और सहजीवों से स्रोतों से उसका सरंक्षण होता है.जिन स्रोतों से जल का संरक्षण होता है उसमें लगातार कमी आ रही है. चाहे हम जंगलों की बात करें. चाहे मिनरल्स की बात करें और उसके कारण पानी का संकट लगातार बना हुआ है. माई की बगिया है जहां माँ नर्मदा निकली है, मंदिर कुण्डों का जल स्तर भी लगातार घट रहा है. नर्मदा जी की तीन सहेली नदिया हैं गायत्री, सावत्री और सरस्वती, जो मंदिर के बाजू से निकलती हैं. ग्रामवासियों के द्वारा, आश्रमों के द्वारा उसमें सीधा गटर का पानी डालने से वहां बहुत सारी समस्याएँ पैदा हो गयी हैं. नर्मदा नदी जो हमारा अमरकंटक का स्थान है वह समुद्र से 900 मीटर की ऊँचाई पर है और पूरब से पश्चिम की ओर माँ नर्मदा जी बही हैं. मैं ऐसा मानता हूँ कि जो उनकी दूरी है लगभग अरब सागर तक 1322 किलोमीटर प्रवाहित होती है. नर्मदा अपने उदगम के बाद अनूपपुर, डिण्डोरी, मण्डला, जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, हरदा, खण्डवा, धार, अलीराजपुर और बड़वानी जिलों में प्रवाहित होती है. मैं निवेदन करता हूँ कि हमारे खासकर नरसिंहपुर जिले में रानी अवंतीबाई नहर परियोजना के माध्यम से पूरे जिले में अधिकतम 50 प्रतिशत उससे सिंचाई होती है और उसके माध्यम से उत्पादन में भी वृद्धि होती है. जल स्तर भी उससे बढ़ा है. मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद भी देता हूँ कि इस बजट में चिन्की उदवहन परियोजना के माध्यम से 1495 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गयी है.उसमें लगभग 1 लाख हेक्टेयर जमीन में उससे सिंचाई होगी. इसके अलावा भी मैं मंत्री जी से निवेदन करता हूँ कि हमारे जिले में कृषि के साथ उद्योगों की भी अधिक संभावना है. इसलिए यहां एनटीपीसी का भी निर्माण हो रहा है,जिससे बिजली उत्पादन होगी तो वहां एक हवाई पट्टी की भी आवश्यकता है उस पर भी आप ध्यान देंगे. मैं संस्कृति विभाग के बारे में भी कुछ कहना चाहता हूँ कि हमारी जो संस्कृति है, उस संस्कृति के माध्यम से हमारा जीवन-यापन हो रहा है और संस्कृति विभाग ने जिसप्रकार से बहुत सारी जातियों का, बहुत सारी बोलियों का ,भाषाओं का संरक्षण किया है. हम देख रहे हैं कि अंग्रेजी के इस युग में बहुत सारी जो हमारी क्षेत्रीय भाषाएँ हैं, बहुत सारी क्षेत्रीय हमारी बोलियां हैं, संस्कृति है, जातियां हैं. डिण्डौरी के जिले में परिक्रमा के क्षेत्र में हमको बैगा जाति के लोग वहां मिलते थे. वहां आज भी बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो कपड़े नहीं पहनते या उनकी जो भाषा है, समझ में नहीं आती. छिंदवाड़ा के क्षेत्र में भी इसी प्रकार की बहुत सारी जातियां हैं उसको संरक्षित करने का काम हमारी प्रदेश की सरकार ने किया है. आपने बोलने का अवसर दिया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.
श्री प्रदीप अग्रवाल(सेवढ़ा)- माननीय अध्यक्ष महोदय,मैं मांग संख्या 26 और 37 के समर्थन में बोलना चाहता हूँ.हमारे मध्यप्रदेश में पर्यटन की अपार संभावना है. पिछले वर्षों की अपेक्षा मध्यप्रदेश में पर्यटन के क्षेत्र में बेहतर विकास हुआ है. पिछले वर्ष अक्टूबर तक यहां 6 करोड़ 60 लाख पर्यटक मध्यप्रदेश में आये. किसी भी प्रदेश के पर्यटन के विकास के लिए उसके इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बहुत महत्व देना पड़ता है. पिछले वर्षों में हमारे यहां सड़कों की हालत बहुत खराब थी. पर्यटन के लिए हमें सड़क, रेल और हवाई मार्ग की आवश्यकता पड़ती है. रेल मार्ग हमारे मध्यप्रदेश में पर्याप्त है. हवाई मार्ग के भी बेहतर साधन हमारे मध्यप्रदेश में होते जा रहे हैं. माननीय मुख्यमंत्री जी के प्रयासों से मध्यप्रदेश में सड़कों की बेहतर व्यवस्थाएँ हुई हैं. आज हम दावे के साथ कह सकते हैं कि मध्यप्रदेश में पर्यटन बेहतर हुआ है. हमारे यहाँ दतिया में गामा पहलवान जैसे विश्व विख्यात पहलवान हुए हैं, जिन्होंने भारत में नहीं,विश्व में भी अपना नाम रोशन किया है. माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे दतिया में ऐतिहासिक महल है सम्राट अशोक का वह शिलालेख है, जो उन्होंने अपने शासनकाल में , अपने राज्य के संपूर्ण शासन का सीमांकन कराया था तो उसका सेंटर दतिया का गुजर्रा ग्राम आया था. वह शिलालेख मध्यप्रदेश के दतिया जिले के गुजर्रा गांव में स्थित है. हमारे दतिया जिले में प्रसिद्ध जैन तीर्थ सोनागिर है, दतिया जिले में उन्नाव का प्रसिद्ध सूर्य मंदिर है. ऐसा सूर्य शायद ही भारत में कहीं देखने को मिले. हमारे दतिया जिले के सेवढ़ा विधानसभा में सिन नदी के तट पर स्थित ब्रह्मा जी के मानसपुत्रों सनक,सनंदन,सनातन,सनत कुमार की तपस्थली रही है यहाँ पर उन्होंने सैकड़ो वर्ष उन्होंने तपस्या की है , यह एक सुंदर मनोहारी स्थल भी है और सुंदर मनोहारी जलप्रपात भी है. यदि इस क्षेत्र को पर्यटन के रूप में विकसित किया जाता है तो निश्चित रूप से मध्यप्रदेश में पर्यटन की और अपार संभावनायें विकसित होंगी. हमारे सेवढ़ा विधानसभा क्षेत्र में माता रतनगढ़ का विशाल मंदिर है. दतिया में माँ पीताम्बरा का विशाल मंदिर है. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय पर्यटन मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि हमारे इस क्षेत्र की ओर ध्यान दिया जाये यहाँ पर्यटन की अपार संभावनायें हैं, इसको विकसित किया जाये जिससे कि यहाँ रोजगार भी बढ़े और यहाँ के युवा इस क्षेत्र में लगे और हमारे क्षेत्र को और सुंदर बनाया जा सके. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया उसके लिए धन्यवाद ज्ञापित करता हूं और अपनी बात को समाप्त करता हूं.
श्री हरदीप सिंह डंग(सुवासरा )--- माननीय अध्यक्ष महोदय , मांग संख्या 1,2,26, 37,48 और 65 के विरोध में यहां पर खड़ा हुआ हूं और काम हो गया तो समर्थन बाद में कर दूंगा. पर्यटन के क्षेत्र में यह खुशी की बात है कि यहाँ पर प्रभारी मंत्री जी और पर्यटन मंत्री जी यहाँ पर सारी बातों को सुन रहे हैं और सामान्य प्रशासन के मंत्री जी यहाँ पर बैठे हैं. मेरा मानना है कि पर्यटन के क्षेत्र में मंदसौर जिले में जो अभी योजना बनाने का कार्य चल रहा है इसमें सुवासरा विधानसभा का धर्मराजेश्वर मंदिर, जो एक ही पत्थर से महादेव का विशाल मंदिर बना हुआ है यदि उस पर ध्यान दिया गया तो मैं मानता हूं कि पूरे भारत में ऐसा मंदिर कहीं नहीं होगा जैसा धर्मराजेश्वर मंदिर वहाँ पर है, उस उसी प्रकार ध्यान दिया जाये जैसे दूधाखेड़ी माता जी के मंदिर पर शासन द्वारा बहुत ही भव्य मंदिर की योजना बनाई जा रही है. एक और मंदिर माकड़ी माता का है जो पर्यटन के क्षेत्र में जो काम आएगा और घसवई जो कि पुरातत्व की दृष्टि से भी इतिहास में भी महत्वपूर्ण माना जाता है वहाँ पर जब भी जमीन खुदती है तो वहाँ मूर्तियाँ निकलती है, वहाँ पर आनंदधाम में महावीर जी की बहुत ही प्राचीन मूर्तियाँ निकली है उसको भी पर्यटन के स्थल के तौर पर उसको विकसित किया जाये. हरणेश्वर, घसोई जो महादेव मंदिर है वह भी बहुत प्राचीन है , वहाँ पर धर्मराज युधिष्ठिर और भीम आकर के पूजा किया करते थे, वहाँ कालभैरव के मंदिर में कोई व्यक्ति जाकर के धन मांगता था तो उसको उधार के रूप में रुपये मिलते थे और कुछ दिन बाद वह व्यक्ति पांच दस रुपये रखकर दे जाता था तो डबल भी ले सकता था, ऐसा कालभैरव मंदिर वहाँ पर है. उसका भी विकास किया जाएगा तो वह भी बहुत बड़ा पर्यटन स्थल होगा. लदूना में एक महल है, मोहझिर माता जी का मंदिर है और अभी एलवी महादेव में, वहाँ पर अभी जो जिला योजना की मीटिंग रखी गई थी , वहाँ पर शिवना और चंबल का जो संगम है वहाँ पर पर्यटन के हिसाब से एक पुल होना चाहिए. वहाँ पर 120 किलोमीटर गरोठ और भैसोदा मंडी तक जाना पड़ता है. किलगारी पंचायत का एक आवरी गाँव है, इधर बाजखेड़ी का एक आवरा गाँव है, आवरी और आवरा के बीच में अगर एक पुल बनाया जाता है तो 50 किलोमीटर की दूरी कम होगी और जो छोटा महादेव, बड़ा महादेव और चंबल नदी पर जो पर्यटन का जो अभी प्लान बनाया जा रहा है. अगर वह पुल बनेगा तो और अधिक संभावनाएँ बढ़ेंगी. बड़केश्वर महादेव मंदिर, कोटेश्वर महादेव मंदिर, ये बहुत प्राचीन मंदिर हैं, इनको भी वहाँ पर विकसित किया जाए.
अध्यक्ष महोदय, मैं विमानन के बारे में भी कहना चाहता हूँ कि सीतामऊ में हवाई-पट्टी है, बहुत पुरानी है, उसमें जमीन है, हवाई-पट्टी के नाम से जानी जाती है. हवाई जहाज बढ़ रहे हैं पर पट्टी खतम की जा रही है तो मेरा निवेदन है कि सीतामऊ में जो हवाई पट्टी है उसकी वहाँ पर यथास्थिति रखी जाए और कभी भी कोई प्रोग्राम बने तो उस पर अधिकतर हों.
अध्यक्ष महोदय, संस्कृति विभाग के बारे में मैं यह निवेदन करना चाहता हूँ कि इस विभाग द्वारा अभी तक जितने भी प्रोग्राम होते हैं, देखा गया है कि भोपाल या बड़े शहरों में होते हैं. अध्यक्ष महोदय, अगर ग्रामीण क्षेत्र में यह प्रोग्राम ज्यादा से ज्यादा कराएँगे तो ग्रामीण क्षेत्र की जनता भी इसको समझेगी और उनको भी इसका लाभ मिलेगा और हमारे यहाँ पर एशिया का सबसे बड़ा....
अध्यक्ष महोदय-- कृपया समाप्त करें.
श्री हरदीप सिंह डंग-- बस समाप्त ही कर रहा हूँ. अध्यक्ष महोदय, हमारे यहाँ पर एशिया की सबसे बड़ी लायब्रेरी, नटनागर शोध संस्थान है, जो एशिया की सबसे बड़ी है. वहाँ पर बहुत दूर-दूर से तथा विदेश से भी शोध के लिए आते हैं. उस पर भी अगर आप अधिक ध्यान देंगे तो उसमें और बढ़ोत्तरी होगी.
अध्यक्ष महोदय, मैं सामान्य प्रशासन विभाग के बारे में भी कहना चाहता हूँ कि अभी मध्यप्रदेश शासन ने प्रदेश के अधिकारियों को जो जिले में भेजा था, उसमें माननीय मुख्यमंत्री जी ने प्रशासन अकादमी में 30.10.15 को जो मीटिंग ली थी और उसके बाद 3.11.15 को जो समीक्षा रखी थी कि यहाँ पर जो प्रदेश के अधिकारी आए थे, जो रिपोर्ट ली थी, वह मंदसौर जिले के किसानों के बारे में क्या रिपोर्ट आई, इसकी अगर जानकारी देंगे तो बहुत बढ़िया रहेगा.
अध्यक्ष महोदय-- कृपया समाप्त करें.
श्री हरदीप सिंह डंग-- बस आखरी बात कह रहा हूँ. अध्यक्ष महोदय, एक सैनिक, सैनिक सम्मान में जिनको योजनाओं का लाभ मिलता है, एक भूमिहीन सैनिक शिव सिंह परिहार, जो 1991 में रिटायर हो गए हैं, उन्होंने बार-बार जमीन मांगी आज तक उनको कोई जमीन नहीं दी गई है. स्वतंत्रता सेनानी फतेहचंद जी आर्य, जो कई दिनों से ऑफिसेस के चक्कर काट रहे हैं उनको जो योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए, जो पेंशन का लाभ मिलना चाहिए, वह आज तक नहीं मिल पाया है. अध्यक्ष महोदय, भैय्याश्री मिश्रीलाल गंगवाल सद्भावना पुरस्कार, जो कुरीतियों को समाप्त करने के लिए एक पुरस्कार दिया जाता है, उसमें जंगी बाबू तंवर, वाल्मिकी समाज के हैं, वे कम से कम 80-90 साल के हो गए हैं. लगातार उन्होंने समाज के लिए अच्छा काम किया है. अगर उनका नाम इसमें सम्मिलित किया जाएगा.....
अध्यक्ष महोदय-- कृपया समाप्त करें.
श्री हरदीप सिंह डंग-- अध्यक्ष महोदय, इंदिरा गाँधी सांप्रदायिक सद्भावना, 2004 में एक व्यक्ति ने सांप्रदायिक सद्भाव को बनाने के लिए बहुत बड़े कदम उठाए और उनको केवल एक प्रमाण-पत्र दिया गया है. मेरा मानना है कि अगर उनको प्रदेश स्तर पर 15000, का फर्स्ट, 10,000 का सेकंड और थर्ड 5000 का जो इनाम मिलता है, हायतउल्ला काजी, निवासी सीतामऊ, उनको केवल एक प्रमाण-पत्र दिया गया है, उनको भी अगर सद्भावना की दृष्टि से सम्मानित किया जाएगा तो अच्छा रहेगा. धन्यवाद, जयहिन्द, जयभारत.
श्री दिव्यराज सिंह(सिरमौर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 37 पर्यटन के बारे में मैं अपना वक्तव्य रखूँगा. अध्यक्ष महोदय, किसी भी राज्य या देश को अगर पर्यटन को बढ़ावा देना है तो सर्वप्रथम इन्फ्रास्ट्रक्चर, सर्विस फैसिलिटीज़ और ईज़ आफ ट्रैव्हलिंग, की आवश्यकता होती है. माननीय प्रधानमंत्री जी जहाँ भी जाते हैं वहाँ पर्यटन का उल्लेख करते हैं. उनके प्रयास से आज हमारे देश में विदेशी सैलानियों को लाने के लिए जो वीज़ा नीति लाई गई है उसमें वीज़ा और लरावल और ई-वीज़ा के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. अध्यक्ष महोदय, यह साल पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश के लिए एक मील का पत्थर जैसा साबित हो रहा है. माननीय मुख्यमंत्री जी और मंत्री जी की सोच यह है कि मध्यप्रदेश को इस क्षेत्र में पूरे देश में प्रथम राज्य बनायें. इस साल जिस प्रकार से सिंहस्थ के माध्यम से उज्जैन और उसके आसपास के पर्यटक स्थलों को विकसित किया जा रहा है यह बहुत ही सराहनीय काम हो रहा है. कुछ ही दिनों पहले एक नया प्रयोग शुरु किया गया हनुवंतिया जैसी सुंदर जगह को पर्यटक स्थल के रुप में विकसित किया गया. मध्यप्रदेश एक ऐसा प्रदेश है जहां धार्मिक, प्राचीन, ऐतिहासिक,पुरातत्वीय, प्राकृतिक सौंदर्य और वनों का अंबार है. हमारे प्रदेश में वाइल्ड लाइफ टूरिज्म का अहम स्थान रहता है बांधवगढ़, कान्हा, पन्ना, पेंच नेशनल पार्क में देश और विदेश के लाखों सैलानी आते हैं. वाइल्ड लाइफ टूरिज्म को अगर हमें सफल बनाना है तो उसके लिए टाइगर साइटिंग की बहुत बड़ी आवश्यकता होती है. जब से नई योजना के अन्तर्गत टाइगर सफारी (हाथी के ऊपर से टाइगर को दिखाया जाना) बंद कर दी गई है इसके कारण जो पर्यटक शेर को नहीं देख पाते हैं वे निराश होकर वापिस चले जाते हैं. कोई भी पर्यटक बांधवगढ़, पन्ना, कान्हा जैसी जगह आता है तो वह 30-40 हजार रुपये खर्च करके जाता है इतना पैसा खर्च करने के बाद अगर उसको शेर न दिखाई दे तो उसको बड़ा दुख होता है.
अध्यक्ष महोदय, माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार कोर जोन में टूरिज्म में काफी कटौतियां की गई हैं. मैं माननीय मंत्रीजी से अनुरोध करुंगा कि टूरिज्म को अब बफ़र जोन में बढ़ायें इसका प्रयास शुरु हो गया है इसको और विकसित करें. टाइगर सफारी जो पहले कोर जोन में होती थी उसको बफर जोन में भी शुरु करें.
अध्यक्ष महोदय, मैं एक और महत्वपूर्ण बात बोलना चाहता हूँ. वाइल्ड लाइफ टूरिज्म को यदि सफल बनाना है तो टूरिज्म और फारेस्ट डिपार्टमेंट को सेपरेट करना पड़ेगा. नेशनल पार्क फारेस्ट डिपार्टमेंट के अधीन रहते हैं और फारेस्ट डिपार्टमेंट की सोच टूरिज्म के प्रति ज्यादा नहीं होती है नेशनल पार्क को टूरिज्म डिपार्टमेंट में लाना चाहिए और नेशनल पार्क की जो व्यवस्था है वह फारेस्ट डिपार्टमेंट के पास रहना चाहिये उसका कंजरवेशन फारेस्ट ही करे और टूरिज्म का काम टूरिज्म डिपार्टमेंट करे जिससे कि टूरिस्ट फ्रेंडली नीतियां वहां पर लागू की जा सकें.
अध्यक्ष महोदय, मुझे बहुत गर्व हो रहा है कि आज हमारे विन्ध्य में पुन: सफेद शेर की वापसी हुई है. माननीय मुख्यमंत्रीजी और हमारे क्षेत्रीय मंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल जी के अथक प्रयासों से आज मुकुन्दपुर में व्हाइट टाईगर सफारी स्थापित हुई है इसके माध्यम से विन्ध्य में टूरिज्म की संभावनायें बढ़ेंगी.
अध्यक्ष महोदय, मेरी एक और मांग है रीवा जिले में अनेक सुन्दर जल प्रपात हैं जैसे क्योंटि, पुरवा, बहोती इनको भी विकसित करेंगे तो यहां पर एडवेंचर टूरिज्म और अलग-अलग तरह की टूरिस्ट एक्वीविटीज यहां पर शुरु कर पायेंगे. मैं इतनी ही बात रखना चाहता हूँ बहुत-बहुत धन्यवाद.
श्रीमती झूमा सोलंकी (भीकनगांव) :- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या - 1, 2, 26, 37,48 और 65 का विरोध करती हूं और अपनी बात रखती हूं.
अध्यक्ष महोदय:- माननीय सदस्यों के लिये स्वलपाहार की व्यवस्था सदन की लाबी में की गयी है. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार स्वलपाहार ग्रहण करने का कष्ट करें.
श्रीमती झूमा सोलंकी:- अध्यक्ष महोदय, लोक लुभावने वादे और जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर कैसे पहुंचायेंगे, जाति प्रमाण पत्र बनाना कैसे सार्थक होंगे, जनता लोक सेवा प्रबंधन सुविधा का लाभ कैसे उठाये और अधिकारियों की कमी की वजह से किस तरह से क्षेत्र का काम हो यह बहुत बड़े सवाल हैं, जो आज पूरे सदन में हर तरफ से बात आयी है कि सारे काम बहुत अच्छे तरह से हो रहे हैं. मैं अपने क्षेत्र की बात रख रही हूं कि किस तरह से जनता तकलीफ में है और अपने काम नहीं कर पा रही है. अध्यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र में दो तहसील होने के बावजूद एक तहसीलदार पूरे क्षेत्र को संभाल रहा है. इसी तरह से एक पटवारी दो-दो, तीन-तीन हल्के का काम कर रहा है. इतना बोझ की सर्वे हुआ ही नहीं, मुआवजा भी नहीं मिला और किसानों में त्राही मची हुई है. इसी तरह से बी ओ नहीं है, शिक्षा विभाग किस तरह से चलता होगा यह हम समझ सकते हैं. दोनों जनपदों को एक सी.ओ. चला रहा है. एक जनपद में 76 पंचायतें, दूसरी पंचायत में 37 पंचायतें और इतनी पंचायतों को संभालना एक सी.ओ. के बस की बात नहीं है. इन अभावों में जनता किस तरह से भटक रही है यह हम समझ सकते हैं. अध्यक्ष महोदय, बी.आर.सी को प्रभारी बना दिया गया है, वह बी.ओ. का भी काम देख रहा है. महिला एवं बाल विकास अधिकारी वह भी प्रभारी हैं, सुपरवाईजर संभाल रही हैं. यदि इन कर्मचारियों की नियुक्ति उनके पदों पर नहीं की गयी तो निश्चित तौर से सारी व्यवस्थाएं चरमरा गयी है.
अध्यक्ष महोदय, मुख्यालय पर कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी है और उसके साथ यह अधिकारी वहां पर उपस्थित नहीं रहते हैं. मुख्यालय पर कोई नहीं मिलेगा. सचिव नहीं मिलते हैं, पटवारी नहीं मिलते हैं, तहसीलदार नहीं मिलते हैं और न ही सी.ओ मिलता है. दो थानों में एक टी.आई है, महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार हम सब जानते हैं और हम सब जानते हैं कि हमारा प्रदेश अपराधों के मामले में नंबर एक पर है. हमारे यहां पर एक टी.आई होने के कारण वह एक टी.आई दोनों थानों को संभाल रहा है. अध्यक्ष महोदय, इन सभी मांगों की पूर्ति हो, जैसा में चाहती हूं. ताकि वहां पर व्यवस्था बनी रहे. एक बात और कहना चाहती हूं कि नील गाय की बार-बार बात हो रही है और जंगली सूअरों की भी बात हो रही है. मेरे क्षेत्र में भी बहुत ज्यादा नुकसानी हो रही है और इनकी वजह से किसानों को मुआवजा नहीं मिलता है. एक घटना और बताना चाहती हूं कि एक खरगोश हमारे आदिवासी भाईयों ने पकड़ा तो तुरन्त उन पर एफ.आई.आर हो गयी और 10 आदिवासियों को जेल में डाल दिया गया. किन्तु हजारों की तादात में नीलगाय और सुअर किसानों की फसलों का नुकसान करते हैं तो उसका एक भी रूपये का मुआवजा नहीं मिलता है. मेरा एन.वी.डी.ए के बारे में भी एक बात बताना चाहती हूं कि विधान सभा भिकनगांव में अधिकतर क्षेत्र सूखा है. 107 ग्राम पंचायतों का क्षेत्रफल है, जिसमें 20 पंचायतें पहाड़ी क्षेत्र की हैं. जहां पर वन ग्राम हैं, वहां पर सिंचाई के साधन जुटाना बहुत ही कठिन है. क्योंकि वन ग्राम होने के कारण हमको वहां पर परमीशन नहीं मिलती है और 87 ग्राम पंचायतों के समीप बड़े स्त्रोत जैसे इंदिरा सागर की मुख्य नहरें, छिरवा टैंक वर्तमान में स्वीकृत छेगामा खण्ड परियोजना है, इन दोनों ही स्त्रोतों से 28-28 पंचायतों को स्वीकृत किया जा सकता है, यदि इन्हें सम्मिलित किया जाये तो पूरा क्षेत्र सिंचित हो जायेगा और वहां पर जो सिंचाई की कमी है, वह पूरी हो जायेगी. इन योजनाओं को स्वीकृति में शामिल किया जाए. अपरवेदा डेम की राईट केनाल स्वीकृत है उसको पूरा कर दिया जाए, यह मेरा अनुरोध है. आपने मुझे बोलने का समय दिया उसके लिये बहुत-बहुत धन्यवाद्.
(..व्यवधान..)
अध्यक्ष महोदय - कृपया सभी बैठ जाएं.
श्री गोपाल परमार - अध्यक्ष महोदय, दो मिनट दे दें. बहुत जरूरी मेरे जिले से संबंधित बात है.
चौधरी मुकेश सिंह चतु्र्वेदी - अध्यक्ष महोदय, दो मिनट, सिर्फ चंबल सफारी डेवलहप कराने बनाने की बात है.
अध्यक्ष महोदय - नहीं. माननीय मंत्री जी बोलेंगे.
श्री गोपाल परमार - अध्यक्ष महोदय, दो मिनट दे दें. मैंने नाम दिया है.
अध्यक्ष महोदय - गोपाल जी सहयोग करें. बाद में नाम आया है. इस तरह से काम नहीं चलेगा. आप अपनी बात मंत्री जी को लिखकर दे दें.
राज्यमंत्री,सामान्य प्रशासन(श्री लाल सिंह आर्य) - अध्यक्ष महोदय, मेरे विभाग की मांगों पर माननीय सदस्य जितू पटवारी,हिना कावरे जी, लोकेन्द्र तोमर जी,गिरीश भण्डारी,दुर्गालाल विजय जी, फुन्देलाल मार्को जी,पुष्पेन्द्र नाथ जी, सौरभ सिंह, देवेन्द्र वर्मा जी, गोविन्द सिंह जी, रंजना बघेल जी, श्रीमती शीला त्यागी जी,सुश्री ऊषा ठाकुर, सुदर्शन गुप्ता जी, डाक्टर रामकिशोर दोगने जी, के.के.श्रीवास्तव जी,बहादुर सिंह चौहान जी, ऊषा चौधरी जी,मानवेन्द्र सिंह जी, कमलेश्वर पटेल जी, जालम सिंह पटेल जी, प्रदीप अग्रवाल जी, श्रीमती झूमा सोलंकी जी, कुल 29 सदस्यों ने भाग लिया है मैं उनको धन्यवाद देना चाहता हूं. उन्होंने अपने उद्बोधन में कुछ सुझाव भी दिये हैं कुछ मांग भी रखी हैं कुछ आपत्तियां भी की हैं. माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में सामान्य प्रशासन,विमानन इन विभागों में निरंतर मध्यप्रदेश की जनता की आशाओं के अनुरूप हम लोग काम करने की कोशिश कर रहे हैं. कुछ माननीय सदस्यों ने अपनी बात रखी हैं उनके बारे में मैं पहले कहना चाहता हूं. कमलेश्वर पटेल जी ने कहा था कि सिंगरौली में हवाई अड्डे का काम नही हो रहा है. मैं क हना चाहता हूं कि 14 करोड़ रुपये हमने उनको भूअर्जन के लिये दे दिये हैं. माननीय मुख्यमंत्री जी संवेदनशील हैं आप सब भी इस बात को मानते हैं. सरकार यह चाहती हैकि प्रत्येक जिले में हवाई पट्टी बने लेकिन उसके लिये हमें जगह मिले. इसीलिये आपका,हमारा नहीं किसी दल का नहीं किसी समाज का धर्म का नहीं बल्कि हर जिले में हवाई पट्टी बने यह शासन की कहीं न कहीं मंशा है. डाक्टर गोविन्द सिंह जी ने कहा कि उदयवीर सिंह भदौरिया की मीसाबंदी का प्रकरण है. एक नहीं इसी प्रकार के और प्रकरण होंगे तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि सरकार उनकी मीसाबंदी का प्रकरण स्वीकृत करेगी लेकिन मापदण्ड फालो होना चाहिये. पद खाली हैं इस बारे में अभी बहुत सारी बातें कही गईं. मैं निवेदन करना चाहता हूं क्रमोन्नति,पदोन्नति,वेतन विसंगति,कर्मचारियों के बारे में बात कह रहा हूं. मैं गौरव के साथ कह सकता हूं कि विपक्षी बेंचों की सत्ता के समय जितने तगड़े आंदोलन कर्मचारियों के हुए थे उन पर जितना लाठी चार्ज किया गया था शिवराज सिंह जी की सरकार के नेतृत्व की सरकार ने ज्ञापन तो दिये गये होंगे आंदोलन भी छुटपुट हुए होंगे लेकिन उनकी समस्या का निदान निकालने के लिये कहीं न कहीं गंभीरता से कोशिश की इसीलिये माननीय मुख्यमंत्री जी ने एक उप समिति माननीय वित्त मंत्री जी के नेतृत्व में बनाई है उसका उद्देश्य है कि सभी विभागों के कर्मचारी,अधिकारियों जिनकी क्रमोन्नति,पदोन्नति वेतन विसंगतियां हैं उनका एक साथ निराकरण होना चाहिये.
श्री लालसिंह आर्य (जारी)--माननीय अध्यक्ष महोदय, सभी विभागों के कर्मचारी/अधिकारी जिनकी कर्मोन्नति, पदोन्नति अथवा वेतन विसंगतियां हैं उनका एक साथ कहीं न कहीं निराकरण होना चाहिये इस दिशा में कमेटी की दो बैठकें हो चुकी हैं. प्रशिक्षण के बारे में बात कही गई की प्रशासन अकादमी में कुछ काम नहीं हो रहा है. मैं कहना चाहता हूं कि 2014-15 में 276, 2015-16 में 244, 2016-17 में 103 प्रशिक्षण प्रशासनिक अकादमी में हमने सम्मन्न किये हैं. प्रथम वक्ता के रूप में जितु भाई थे, समझ में नहीं आ रहा है कि वह कहां चले गये हैं वह विभाग की तैयारी भी करके नहीं आये थे. बहुत सारे लोगों ने कहा कि भ्रष्टाचार आप लोग भूल गये हैं पटवारी की परीक्षाओं, शिक्षाकर्मियों, पुलिस की परीक्षाओं में बोलियां लगती थीं, यहां मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह जी की सरकार है जहां पर ऑन लाईन आवेदन-पत्र प्राप्त किये जाते हैं आपके समय में आवेदन पर आय प्रमाण-पत्र एवं जाति प्रमाण पत्र लिये जाते थे.
डॉ.गोविन्द सिंह--आपकी श्रीमती जी की नौकरी रिश्वत में लगी या मुफ्त में लगी यह बताएं.
श्री लालसिंह आर्य--मुफ्त में.
डॉ.गोविन्द सिंह--फिर यहां पर ऐसी बातें क्यों कह रहे हैं.
श्री लालसिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं एक और निवेदन करना चाहता हूं कि जहां तक पदोन्नति का विषय है माननीय मुख्यमंत्री जी ने सभी विभागों की समीक्षा की उनमें उन्होंने कहा है कि शासन के द्वारा जो निर्धारित जनवरी-फरवरी में समय है 6-6 महीने में दो बार समीक्षा होना चाहिये वह कन्टीन्यू होना चाहिये. राज्य प्रशासनिक सेवा से, भारतीय प्रशासनिक सेवा में 16, गैर राज्य प्रशासनिक सेवा से भारतीय सेवा में 4 पद, तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर के 128 पद, पीएससी की रिजल्ट के बारे में मैं कहना नहीं चाहता हूं उस बारे में माननीय सदस्यों ने विस्तार से बता दिया है उसमें 2013 का रिजल्ट न्यायालयीन प्रकरणों के कारण रूका था. 2014 में परीक्षा की है उसके परिणाम आने वाले हैं अभी भी उस प्रक्रिया में हैं. जहां तक बजट की बात है उसमें ज्यादा उल्लेख नहीं करना चाहता हूं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि पिछला जो बजट था उस बजट से 15 करोड़, 42 लाख, 79 हजार रूपये बजट अब की बार सामान्य प्रशासन विभाग का रखा है. माननीय विधायकों ने मांग की थी कि मध्यप्रदेश भवन में अब हमारे लिये शुल्क लगने लगा है मैं बताना चाहता हूं कि उक्त आदेश शासन ने अभी वापस ले लिये है उसमें आपके जो अधिकार थे उनको पुनः बहाल कर दिया है. जो विषय माननीय सदस्यों ने अपने उल्लेख में किये हैं उनका उल्लेख नहीं करना चाहता हूं एक ऐतिहासिक निर्णय मध्यप्रदेश के युवाओं के पक्ष में मध्यप्रदेश की सरकार ने लिया है. विगत् वर्षों में यहां मध्यप्रदेश में जो भर्ती होती थी उसमें जो उम्र की सीमा है वह 35 वर्ष होती थी उसको बढ़ाकर के 40-45 किया था. अनुसूचित जाति, जनजाति तथा पिछड़े वर्ग के लिये 45 हुआ था और बाहर के लोगों के लिये भी था. हमने माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में पिछली केबिनेट में यह व्यवस्था समाप्त कर दी है और यह व्यवस्था इसलिये समाप्त की है 35 वर्ष इसलिये लाये हैं कि मध्यप्रदेश के हमारे जो केंडीडेंट हैं उनको ही इसका लाभ मिले, बाहर के लोग उसका लाभ नहीं ले पाये, यह एक ऐतिहासिक निर्णय भी हुआ है. इसी प्रकार से अनुकम्पा नियुक्ति की बहुत कठिन व्यवस्था थी उसको मध्यप्रदेश की सरकार ने अनुकम्पा नियुक्ति के जो नियम थे उसको शिथिल कर दिया है और जिन परिवारों के पास यदि कोई लड़का नौकरी के लिये नहीं है उनकी बेटी यदि शादी होकर के चली गई है और परिवार के पास बेटा-बेटी नहीं है उनको भी अनुकम्पा नियुक्ति के अधिकार इस शासन ने दे दिये हैं. इतना ही नहीं किया है अगर किसी ने गोदनामा बेटा लिया है कानूनन दृष्टि से हमने उसको भी अनुकम्पा नियुक्ति के दायरे में लाने का काम किया है. इसी प्रकार से शीला त्यागी जी एवं ऊषा चौधरी जी कह रही थीं कि सरकार अनुसूचित जाति के लोगों की विरोधी है.
श्री लालसिंह आर्य- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से कहना चाहता हूँ, विशेष भर्ती अभियान में 48,233 पदों को इसी सरकार ने भरा है, माननीय शिवराज सिंह जी की सरकार ने भरा है और जो पद खाली भी हैं, अनुसूचित जाति,जनजाति के नहीं हैं,चाहे वह पिछड़ा वर्ग के हो या अन्य हो, जहां भी खाली है, विशेष भर्ती अभियान के माध्यम से भरे जा रहे हैं ।
श्रीमती शीला त्यागी- माननीय अध्यक्ष महोदय,आपके माध्यम से मंत्री जी को बताना चाहती हूँ कि पद जरूर भरे गए है, परन्तु अनुसूचित जाति,जनजाति की जगह सामान्य वर्ग के भरे गए हैं, जबकि बैकलाग के पद थे, आपकी जानकारी में बता देना चाहती हूँ ।
श्री लालसिंह आर्य- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सरकार माननीय शिवराज सिंह जी की दलितों की, गरीबों की,शोषितों की, पीडि़तों की सरकार है । मैं आपके माध्यम से शीला जी को कहना चाहता हूँ कि यह वही शिवराज सिंह जी चौहान हैं जिन्होंने डॉं भीमराव अम्बेडकर के नाम से सामाजिक विश्वविद्यालय, मध्यप्रदेश की धरती पर बना दिया है,यह वही शिवराज सिंह चौहान हैं जो गरीब अनुसूचित जाति के आयकर दाता हैं, उनसे हटकर शेष गरीबों को अनुसूचित जाति,जनजाति के लोगों को एक रूपए किलो गेहूं,एक रूपए किलो चावल देने का काम कर रहे हैं ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, यह वही शिवराज सिंह चौहान हैं, जो 14 अप्रैल को डॉं भीमराव अम्बेडकर के जन्म स्थान पर वहां अम्बेडकर महाकुम्भ लगाते हैं, सिर्फ महाकुम्भ ही नहीं लगाते, आप टूटी हुई झोपड़ी छोड़ गए थे, वहां भव्य राष्ट्रीय स्मारक बनाने का काम किसी के नेतृत्व में हुआ है तो वह शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में हुआ है और इसलिए दलितों और आदिवासियों के ऊपर अत्याचार इस सरकार में सपना है, यह कांग्रेस के समय में होता था, उस समय का रिकार्ड निकालिए ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, जाति प्रमाण-पत्र की बात मैं जान-बूझकर कहना चाहता हूँ, चाहे सत्ता पक्ष के लोग हों, चाहे विपक्ष के लोग हों,अनुसूचति जाति,जनजाति के बच्चों के साथ में, 1950 में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय हुआ था,उस निर्णय के आधार पर जाति प्रमाण पत्र बनवाने में कठिनाईयां थीं, माननीय शिवराज सिंह जी के नेतृत्व में समीक्षा बैठक हुई और यह तय किया कि 100 दिन के अंदर जो हमारा दलित है,आदिवासी है, इसके जाति प्रमाण-पत्र का सरलीकरण कैसे किया जाए, मुझे फक्र होता है, हमने निर्णय किया कि 100 दिन के अंदर विशेष अभियान चलाकर अनुसूचित जाति,जनजाति के जो हमारे बेटा-बेटी हैं, इनके जाति प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए एस.डी.एम.,तहसीलदार के कार्यालय के चक्क्र लगाना पड़ता था, यह पीड़ा थी, सरकार की कि उसका परिवार का जो मुखिया है, वह मजदूरी करने जाए या प्रमाण-पत्र बनवाने जाए । माननीय अध्यक्ष्ा महोदय, शिक्षा के क्षेत्र में मैं भी उस समय रहा हूँ, प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए हमें अपमान महसूस करना पड़ता था, कहते थे कि जाइए तीन दिन बाद आइए, अभी समय नहीं है । जाति प्रमाण-पत्र बनवाने आते थे तो इसी प्रकार की बात सुननी पड़ती थी, उस कलंक से मुक्ति इस मध्यप्रदेश की सरकार ने दी है और कक्षा एक से लेकर बारहवीं तक का बच्चा जहां प्रवेश लेने जाता है, उसको सम्मान पूर्वक वहीं पर जाति प्रमाण-पत्र का फार्म दे दिया जाता है और वह प्रमाण पत्र भरकर लाता है,उसमें शपथ पत्र लगता है, उस शपथ पत्र में 100 रूपए का स्टाम्प लगता था, 200 रूपए की नोटरी फीस लगती थी, इस तरह 300 रूपए लगते थे, उसको भी मुक्त कर दिया । शिक्षक प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए एस.डी.एम. के पास जाता है और एस.डी.एम. ही बनवा के दे देता है, 1 करोड़ 15 लाख के लगभग हमने जाति प्रमाण पत्र अनुसूचित जाति,जनजाति को सम्मान पूर्वक स्कूल में ही दे दिए हैं, डिजिटल लेमीनेटेड हस्ताक्षर मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार हुआ है । शीला जी, कांग्रेस 43 साल सरकार में रही है, जाति प्रमाण पत्र के सरलीकरण की कार्यवाही नहीं कर पाई है ,सुप्रीमकोर्ट का निर्णय अगर सामान्यों के प्रकरणों में केन्द्र में बदला जा सकता था, तो मेरे अनुसूचित जाति,जनजाति के लोगों का यह आदेश भी बदला जा सकता था, परन्तु बदला नहीं गया, क्योंकि कहीं न कहीं कांग्रेस अनुसूचित जाति,जनजाति की विरोधी थी, मैं यह मानता हूँ ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, नि:शक्तजनों के आरक्षित पद हैं, उनको भरने की प्रक्रिया है,वॉक इन इन्टरव्यू से भरने की प्रक्रिया है । इसी तरह लोकायुक्त और ई.ओ.डब्लू. के बारे में बहुत सारे लोगों ने बातचीत की है, मैं उसमें जाना नहीं चाहता हूँ । सुशासन के क्षेत्र में जरूर बात करना चाहता हूँ, यह शिवराज सिंह जी की सरकार है जहां ई-पेमेंट होने लगा है, ई-टेण्डिरिंग होने लगा है,ई-मेजरमेंट होने लगा है, मुख्यमंत्री हेल्प लाईन 181 के फोन पर दी जाने वाली सूचना के माध्यम से 60 लाख लोगों की समस्याओं का निराकरण हो जाता है । सुशासन के क्षेत्र में इससे ज्यादा प्रक्रिया और क्या चाहिए । पुलिस की भर्ती होती थी किसी भी नेता ने फोन कर दिया, भर्ती हो गई, अब चार चार कैमरे लगते हैं, चार चार टीमें बनती हैं । प्रशासनिक सुधार के क्षेत्र में माननीय मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक नहीं अनेक काम हुए हैं, कल स्वेच्छानुदान के ऊपर बहुत सारी बातें की गई थीं ।
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं गर्व के साथ कहना चाहता हूँ कि आप आर.टी.आई. लगाकर पूरा रिकॉर्ड निकाल लीजिये. मैं गौरव के साथ कहना चाहता हूँ कि जो 70 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है, वह कांग्रेस के समय केवल 3 करोड़ रूपये था. माननीय मुख्यमंत्री जी, सत्ता-विपक्ष के किसी भी विधायक को नहीं देखते हैं, जो भी पत्र लेकर जाता है तो वे कहते हैं कि आप तो लाईये, प्रकरण ऐसे होंगे जिनको स्वीकृत करने का काम हम करेंगे. इसी प्रकार से, मध्यप्रदेश में सामान्य प्रशासन के क्षेत्र में एक नहीं, अनेक कार्य हुए हैं.
माननीय अध्यक्ष महोदय, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बारे में, मैं जान-बूझकर कहना चाहता हूँ. स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के पुत्र और पुत्रियों के लिये मध्यप्रदेश की सरकार ने एक व्यवस्था दी है. उनको इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडीकल कॉलेज एवं कृषि में 3 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान कर दिया है. इसी प्रकार से मीसाबन्दी शब्द ऐसे लगता था, जैसे अपमानित कर रहा है. इसलिये हमने इस विभाग की समीक्षा की. मैंने कहा कि मीसाबन्दी शब्द खत्म कीजिये. लोकतन्त्र सेनानी नाम रखिये क्योंकि उन्होंने लोकतन्त्र को बचाने की रक्षा की थी, हमने यह भी निर्णय कर लिया है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, जहां तक नर्मदा घाटी के विकास की बात है तो मैं कहना चाहता हूँ कि बरगी डायवर्सन के ऊपर एक बात अभी आई है. मित्रों, मैं कहना चाहता हूँ कि कुछ भूगर्भीय अव्यवस्थायें इस प्रकार की थीं, जिसके कारण 12 किलोमीटर की टनल बनाने के लिये, हमारी जो मशीन वहां लगी थीं, वह ठप्प हो गई. लेकिन मध्यप्रदेश सरकार का कहीं न कहीं संकल्प मजबूत था, इसलिए तय कर लिया कि उसी ठेकेदार से, उसी पैसे में हम काम करायेंगे और गर्व के साथ कहना चाहते हैं कि हमने जर्मनी से दूसरी मशीन मंगाई है और इसी महीने के अन्तिम समय तक बरगी की 12 किलोमीटर की टनल का कार्य प्रारम्भ होगा. एक तरफ से वह मशीन कार्य करेगी और दूसरी ओर बरगी में जनवरी की जो मशीन है, वह टनल का कार्य करेगी और सन् 2018 तक हमारी चाहे रीवा की जमीनें हों, सतना की जमीनें हों, मझगवां तक जहां तक लोग सिंचाई की अपेक्षा करते हैं, वह सिंचाई के लिए हम कटिबद्ध हैं और मुझे लग रहा है कि माननीय उपाध्यक्ष महोदय का क्षेत्र भी आता है. इसलिए पानी पहुँचाने का संकल्प हमारा है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं एक निवेदन आपके माध्यम से जरूर करना चाहता हूँ चूँकि परिवहन में बहुत सारी बातें आ गई हैं. कई बार समाचार-पत्रों में उल्लेख होता है, मुझे भी पत्रकार कभी-कभी पूछ लेते हैं कि आपका पुराना बन गया है, नया खरीदेंगे कि नहीं. मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हॅूं कि मध्यप्रदेश शासन ने टेण्डर प्रक्रिया में चली गई है और एक डबल इंजिन का जेट विमान खरीदने का निर्णय मध्यप्रदेश की सरकार के द्वारा किया गया है. इस विषय में बहुत सारी बातें पूर्व में हो चुकी हैं. जहां तक नर्मदा घाटी की बात में करना चाहता हूँ कि सिंचाई के क्षेत्र में जल संसाधन विभाग, नर्मदा घाटी विकास विभाग ने मिलकर इस मध्यप्रदेश को इतनी ऊँचाई और सम्मान दिया है कि हिन्दुस्तान के प्रधानमंत्री भी, अगर वे किसी अन्य प्रदेश से भी उद्बोधन करते हैं तो वहां से मध्यप्रदेश को सम्मान देने का काम करता है. कृषि के क्षेत्र में अभूतपूर्व सफलता अगर प्राप्त की है तो एक तरफ नर्मदा घाटी, जहां से नर्मदा बहती है और एक तरफ जल संसाधन विभाग है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से बताना चाहता हूँ कि कई लोगों ने जान-बूझकर उन अच्छाईयों को, कोई अच्छा कार्य करता है तो उसकी पीठ भी थपथपाना चाहिए. जो सिंहस्थ आ रहा है, इसमें क्षिप्रा जी सूख चुकी थीं. मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूँ कि अगर क्षिप्रा में हम नर्मदा जी को नहीं लाते तो मध्यप्रदेश का सम्मान, देश का सम्मान घटता की नहीं. आप उज्जैन से लेकर ओंकारेश्वर तक जाइये और बीच में पहाड़ों पर देखिये. पहाड़ों में किस प्रकार हमारे अधिकारी/कर्मचारी पाईपलाईन ले गये ? बहुत आश्चर्य है, केवल 14 महीनों में हमारे अधिकारियों ने, जिसमें बरसात भी शामिल है. उस समय में, क्षिप्रा में पानी डालकर मध्यप्रदेश के सम्मान को बढ़ाने का काम, हमारे विभाग नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने किया है. माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी सचिन जी नहीं हैं. इनका परिवार कृषि मंत्री, एनवीडीए मंत्री, सिंचाई मंत्री, सहकारिता मंत्री. मांग होती थी कि पानी दो. मैं कहना चाहता हूं कि पिछले दिनों इंदिरा सागर का हमने पानी छोड़ा, दो मीटर बढ़ाया, आंदोलन करने लगे. अरुण यादव जी का बयान अलग आया. मैंने उस समय भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में कहा था कि मैं पूछना चाहता हूं कि आप विकास, किसान विरोधी हैं या पक्षधर हैं. आपके हाथ में जब नर्मदा घाटी विकास विभाग की कमान थी, आप बड़वानी तक पानी नहीं पहुंचा पाये. आपने खरगोन तक पानी नहीं पहुंचाया और हमारे नर्मदा घाटी विकास विभाग ने जब इंदिरा सागर का वाटर बढ़ाया, तो बड़वानी की सीमा तक उस पानी को पहुंचाने का काम किया. 65 हजार हेक्टेयर में पानी पहुंचाने का काम किया. हमारी खरगोन लिफ्ट इरीगेशन योजना शुरु हो गयी. एक नहीं कई योजनायें हैं. मैं किस किस को गिनाऊं. इसलिये हमारा लक्ष्य एक ही है और वह लक्ष्य है कि किसान के खेत तक पानी पहुंचाना. पहले नहरों के माध्यम से हमारी योजनाएं बहुत महंगी होती थीं, उनको हमने परिवर्तित करके अब पाइप लाइन के माध्यम से, उद्वहन के माध्यम से हम कहीं न कहीं पानी पहुंचाने का काम कर रहे हैं. मालवा में एक गंभीर परियोजना है. कौन सपना देखता था. इनकी 43 साल सरकार रही है. 50 लाख हेक्टेयर में सिंचाई करने का लक्ष्य अगर किसी ने साधा है, तो शिवराज सिंह चौहान जी के नेतृत्व में हुआ है. इनके शासन काल में देवास में पानी रेलवे के टेंकरों से आता था. लेकिन शिवराज सिंह जी के नेतृत्व में अब रेलवे के टेंकरों से पानी देवास नगर निगम में नहीं आता है. अब नर्मदा जी का पानी हम देने का काम कर रहे हैं. गंभीर, इसके बाद काली सिंध, पार्वती. यह मालवा का पूरा इलाका आष्टा से लेकर सीहोर तक. यह इलाका कहीं न कहीं यह सोचता था कि मुझे पानी मिलना चाहिये. यह पानी मिलने का सौभाग्य अगर किसी के नेतृत्व में प्राप्त हो रहा है, तो शिवराज सिंह जी के नेतृत्व में हो रहा है. एक बात मैं जरुर कहना चाहता हूं कि चिंकी परियोजना के बारे में बहुत सारे सदस्यों ने बात कही है. खास करके जालम सिंह पटेल जी ने. जब नीति अच्छी हो, नेता अच्छा हो और उसकी नीयत अच्छी हो, तो काम अंजाम तक पहुंचता ही है. यह चिंकी परियोजना अगर हम इसे उद्वहन के माध्यम से, बांध बनाकर बनाते तो बहुत महंगी योजना थी. लेकिन हमारे अधिकारियों ने वहां सर्वे किया और सोलर के माध्यम से हम एक तरफ बिजली का उत्पादन करेंगे, वहीं दूसरी ओर पानी को लिफ्ट करेंगे, ताकि शासन का पैसा कम लगे और खेतों तक पानी पहुंचने का काम हो जाय. ऐसा निर्णय मध्यप्रदेश की सरकार ने किया है. नर्मदा घाटी के माध्यम से मुख्यमंत्री जी की समीक्षा बैठक में एक बार बात हुई थी कि हमको 25 लाख हेक्टेयर से 40 लाख हेक्टेयर तक अगर पानी ले जाना है, तो हमें कहीं न कहीं 3 महीने की, साल भर की, 3 साल की और 5 साल की कार्य योजना बनाना पड़ेगी. हम लोगों ने अधिकारियों के साथ बैठकर योजना बनाई और मैं कह सकता हूं कि उसमें तय हुआ कि साढ़े सात लाख हेक्टेयर सिंचाई बढ़ाने का काम नर्मदा घाटी विकास विभाग करेगा और साढ़े सात लाख हेक्टेयर जल संसाधन विभाग करेगा. इस प्रकार से 15 लाख हेक्टेयर सिंचाई बढ़ाकर और 40 लाख हेक्टेयर हो जाये. यह लक्ष्य हमने तय किया है. मैं और विस्तार में जाना नहीं चाहता. मैं केवल इतना कहना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में चाहे सामान्य प्रशासन विभाग हो, चाहे नर्मदा घाटी विकास विभाग हो, हमने केवल जनता को सामने रखा है, मध्यप्रदेश को सामने रखा है और जो मुख्यमंत्री यह कहता हो कि मध्यप्रदेश मेरा मंदिर है, उसमें बैठी हुई जनता ही मेरी भगवान है, उसका पुजारी शिवराज सिंह चौहान है. वहां किसी के साथ अन्याय हो जाये, यह संभव ही नहीं है. केवल एक ही सपना मुख्यमंत्री जी का है कि इन विभागों के माध्यम से हम अच्छा से अच्छा सुशासन मध्यप्रदेश में दे सकें, विकास की नई संरचनायें खड़ी कर सकें. नर्मदा घाटी विकास विभाग के माध्यम से पानी खेत तक पहुंचा सकें, यह कल्पना है. इसलिये मुझे लगता है कि मैंने जितने वक्ताओं को सुना है, उन्होंने सरकार की शायद नर्मदा घाटी विकास विभाग की या हमारे सामान्य प्रशासन विभाग की हो सकता है कि कुछ छोटी मोटी त्रुटियों का उल्लेख किया हो. सब ने कहीं न कहीं अच्छा बताया है. इसलिये मैं सदन से आग्रह करता हूं कि हमारे विभाग की मांगों को सर्वसम्मति से पारित करने का कष्ट करें. धन्यवाद.
संस्कृत एवं पर्यटन राज्य मंत्री (श्री सुरेन्द्र पटवा) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आज पर्यटन और संस्कृति विभाग के ऊपर माननीय सभी सदस्यों ने जो सुझाव दिये हैं, मैं उनका नाम मेरे वक्तव्य में लूंगा. स्वाभाविक रूप से आज सभी ने पर्यटन और संस्कृति के बारे में काफी अच्छे सुझाव दिये हैं. माननीय मुख्यमंत्री लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि मध्यप्रदेश सरकार में जितने भी विभाग हों, सभी विभाग एक नंबर पर पहुंचे. चाहे वो कृषि हो चाहे अन्य क्षेत्र के सारे विभाग हों. माननीय मुख्यमंत्री जी ने संस्कृति और पर्यटन को प्राथमिकता देकर अपने पास वो विभाग रखने का काम किया. उसका कारण है कि मुख्यमंत्री जी पर्यटन और संस्कृति को बहुत आगे ले जाना चाहते हैं. मध्यप्रदेश की एक पहचान संस्कृति और पर्यटन विभाग से बनी है. मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में हम लोग इस विभाग में बहुत सारे ऐसे काम कर रहे हैं जो पिछली सरकार ने कभी नहीं किये. लगातार 2003 से लेकर के अभी तक बहुत सारे ऐसे काम हुये हैं जिससे कि मध्यप्रदेश का जो पर्यटन और संस्कृति विभाग है वह कहीं न कहीं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर ऊभरकर हमारा अभिभाग आया है.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में पर्यटकों के आकर्षण के लिये सभी प्रकार के पर्यटन उपलब्ध हैं . अगर मैं मध्यप्रदेश में तीन-तीन Word-Heritage वर्ड-हेरिटेज की बात करूं तो खजुराहो, सांची, भीम-बैठिका है. इसके अलावा ऐतिहासिक स्थलों में माण्डू, ग्वालियर, औरछा और बुरहानपुर है. इसी तरह से धार्मिक स्थलों की बात करूं तो अमरकंटक, चित्रकूट, उज्जैन, महेश्वर, ओंकारेश्वर, भोजपुर मंदिर जहां से मैं स्वयं प्रतिनिधित्व करता हूं. सबसे बड़ा शिवलिंग विश्व में अगर कहीं है तो वह हमारे भोजपुर में है. इसी तरह से प्राकृतिक सौन्दर्य के बारे में अगर हम बात करें तो पचमढी, भेड़ाघाट, तामियां, सतपुड़ा यह सभी के सभी स्थल हमारे मध्यप्रदेश में हैं. आने वाले समय में आपने देखा होगा कि वन पर्यटन में भी हमारी सरकार ने बहुत सारा काम करने का प्रयास किया है. चाहे वह पेंच हो, कान्हा-किसली हो, बांधवगढ़ हो, पन्ना हो, सतपुड़ा हो, संजय गांधी नेश्नल पार्क हो, यही नहीं मुख्यमंत्री जी ने इससे भी एक कदम आगे बढ़कर जल पर्यटन के क्षेत्र में भी एक योजनाबद्ध तरीके से काम करने का प्रयास किया है, चाहे वह इंदिरा सागर हो, तवा-बरगी या गांधी सागर हो, एक योजनाबद्ध तरीके से पूरे पर्यटन के क्षेत्र में मुख्यमंत्री जी लगातार काम कर रहे हैं लगातार उनके नेतृत्व में हमारा विभाग काम कर रहा है. पर्यटन के क्षेत्र में जितने भी विकास के काम हम लोगों ने किये हैं, प्रचार प्रसार किया है , और जितनी भी सुविधायें मध्यप्रदेश में हमारे पर्यटको के लिये बढ़ाने का काम हम लोगों ने किया है इसकी भूरि भूरि प्रशंसा हमारी भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने और पर्यटन से संबंधित जो अन्य संस्थायें हैं उन्होंने भी की हैं. माननीय अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री जी की सोच और उनकी दूरगामी दृष्टि का यह परिणाम है कि देश में मध्यप्रदेश का पर्यटन उसके मानचित्र में एक प्रभावी उपस्थिति दर्ज करने में सक्षम हुआ है. मुख्यमंत्री जी ने 2015 में और 2016 में पर्यटन वर्ष घोषित करने का काम किया था, लगातार 2015 और 2016 से पर्यटन वर्ष घोषित हो चुका है और उसी के अंतर्गत बहुत सारे काम हम लोगों ने किये हैं. अभी 12 फरवरी 2016 को मुख्यमंत्री जी ने हनुमंतिया में पूरी कैबिनेट ले जाकर के कैबिनेट की बैठक ही और एक प्रकार से यह संदेश दिया कि हम पर्यटन के मामले में बहुत ज्यादा चिंतित हैं. वहां पर उन्होंने कृषि कैबिनेट के अनुरूप हमारे यहां पर्यटन कैबिनेट की घोषणा करने का काम मुख्यमंत्री जी ने किया है. उनका यह सोच है कि कहीं न कहीं अगर पर्यटन कैबिनेट होगी तो हर विभाग का समन्वय होगा और मैं यह भी बताना चाहता हूं कि देश में सिर्फ मध्यप्रदेश का ही पर्यटन विभाग एक ऐसा विभाग है जहां पर्यटन कैबिनेट की घोषणा मुख्यमंत्री जी ने की है. माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे यहां जितने भी कैबिनेट में पर्यटन विभाग के साथ अन्य विभागों का समावेश होगा उसका काम भी हम लोग सुचारू रूप से देखेंगे.
माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से हमारे सदन के सभी सदस्यों को बताना चाहूंगा कि लगातार हमारे यहां पर्यटकों की संख्या निरंतर 2003 से बढ़ती जा रही है. 2003 में जब सड़कों के पते नहीं थे, बिजली के पते नहीं थे उस समय सिर्फ मध्यप्रदेश में 60 लाख लोग हमारे यहां पर्यटक के रूप में आते थे लेकिन मुझे बताते हुये बड़ी खुशी हो रही है कि मध्यप्रदेश में पिछले साल लगभग 6 करोड़ 40 लाख 2 हजार पर्यटक 2014 में आये और उसके बाद 2015 में 7 करोड़ 84 लाख पर्यटक आये लगभग 22% की वृद्धि हमारे यहां पर पर्यटकों की हुई है. माननीय अध्यक्ष महोदय, इन्हीं सब बातों को देखते हुये पिछले 5 सालों में लगभग 70 राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पुरस्कार मध्यप्रदेश की सरकार के पर्यटन विभाग को मिले हैं, यह इस बात को दर्शाता है कि माननीय मुख्यमंत्री जी लगातार इस विभाग में ऊंचाईयां हासिल कर रहे हैं. 18 सितम्बर 2015 में महामहिम राष्ट्रपति जी ने जो पर्यटन के क्षेत्र में 12 पुरस्कार दिये जाते हैं, पूरे देश में हर साल पर्यटन में 12 पुरस्कार दिये जाते हैं, मुझे बताते हुये अत्यंत खुशी और गौरव हो रहा है कि उन 12 पुरस्कारों में से 6 पुरस्कार एक साथ मध्यप्रदेश को मिले हैं जो कि आज तक देश में किसी भी राज्य को एक साथ नहीं मिले हैं. Compressive development of Tourism द्वितीय मध्यप्रदेश वेस्ट टूरिस्ट फेंडली रेलवे स्टेशन हबीबगंज मध्यप्रदेश, Most innovative and unique Tourism project सैर सपाटा, भोपाल, Best maintain disable friendly moneyman's Bhojpur Mandir, Best civic management of tourist destination of in India municipal council of Maheswar, Khargone और छठा पुरस्कार वेस्ट हैरीटेज सिटी, ग्वालियर, अभी-अभी हमारे यहां के सदस्य देवड़ा जी ने भी कुछ सुझाव दिये थे कि वाइल्ड लाइफ सर्किट के बारे में जो भी हमारे पार्क पन्ना संजय गांधी, बांधवगढ़ और कान्हा, उसके लिये हम कोई न कोई योजना बनायें. मैं यहां हमारे सदस्य को बताना चाहूंगा कि हम लोगों ने केन्द्र सरकार को प्रस्ताव बनाकर भेजा था, लगभग 12 करोड़ का प्रस्ताव वाइल्ड सर्किट के लिये मंजूर हो चुका है और आने वाले समय में इन सभी हमारे जितने भी वन क्षेत्र हैं उनके यहां वफर जोन में काम किया जायेगा.
माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी और हमारे विभाग के सभी अधिकारियों ने होम स्टे योजना के बारे में भी सोचा, विचार किया कि मध्यप्रदेश में ऐसे परिवार भी हैं मध्यम परिवार जिनके यहां कोई रहने के लिये अकेले प्राणी हैं और कहीं न कहीं दो प्राणी रहती हैं लेकिन मकान उनका खाली रहता है तो इस तरह से हम लोगों ने निजी मकानों, निजी गेस्ट हाउस और इसके अंतर्गत अनुबंध करके उनको भी रोजगार देने का काम किया है. इसी तरह से Way side amenities जो कि डोडी पूरे मध्यप्रदेश में नहीं बल्कि पूरे देश में जो भी व्यक्ति भोपाल से इंदौर जाता है तो डोंडी जरूर रूकता है. डोंडी के तर्ज पर हम लोगों ने आने वाले समय में मध्यप्रदेश में लगभग 50 से 100 किलोमीटर के दरमियान 69 Way side amenities स्वीकृत किये हैं, जिसमें से 41 पूर्ण हो चुके हैं और आने वाले समय में 12 Way side amenities को हम सौंप देंगे और 29 पर प्रक्रिया चल रही है ताकि उसको भी जल्द से जल्द सौंपा जाये और कोशिश करेंगे कि यह 69 जितने भी हमारे Way side amenities हैं वह हमारे पूरे प्रदेश में आने वाले सालों में शुरू हो जायें. हमारे बहुत सारे सदस्यों ने हनुमंतिया की बात कही, जैसा मैंने पहले भी मेरे संबोधन में कहा जल महोत्सव को लेकर माननीय मुख्यमंत्री जी की सोच अलग है, चाहे वह इंदिरा सागर हो, चाहे तवा हो, चोरल डेम हो, बरगी डेम हो, इनके बारे में माननीय मुख्यमंत्री जी एक अलग योजना से काम कर रहे हैं और हनुमंतिया में 15 दिन का हम लोगों ने कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें वॉटर स्पोर्टस, विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से सदन को बताना चाहूंगा कि उन 15 दिनों में हजारों हजार, लाख लोग उस पर्यटन क्षेत्र में आये और उन लोगों ने पर्यटन क्षेत्र का लाभ लिया, लगभग 950 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है और यह मानव निर्मित है, वॉटर वॉडी है. यह मध्यप्रदेश नहीं, देश नहीं बल्कि विश्व का अद्वितीय स्थान है. मैं हमारे सभी विधायकों से अनुरोध करूंगा, चाहे वह सत्ता पक्ष के हों, चाहे प्रतिपक्ष के हों, वह स्वयं वहां जायें और उस जगह को देखें और अपने सुझाव दें ताकि और उसमें हम काम कर सकें, सुविधा हम लोग दे देंगे सभी के लिये.
पर्यटन विभाग, ग्रामीण विभाग के बारे में भी लगातार कोशिश कर रहा है कि ग्रामीण विभाग में ग्रामीण संस्कृति, कला, शिल्प, परंपरा इनकी भागीदारी सुनिश्चित करते हुये विकास के कार्य किये जायें.
श्री बहादुर सिंह चौहान-- आप अपने नेतृत्व में एक बार सबको ले चलो.
श्री सुरेन्द्र पटवा-- ठीक है. साथ ही आदिवासी क्षेत्रों में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्सव एवं मेलों का आयोजन किया जा रहा है. इसके लिए प्रमुख रुप से भगोरिया हाट का वृहत स्तर पर हमेशा आयोजन किया जाता है.
अध्यक्ष महोदय, पर्यटकों को आधारभूत सुविधा और सुरक्षा निधि के मामले में मध्यप्रदेश की सरकार काफी ज्यादा चिन्तित है. वास्तव में कोई पर्यटक हमारे देश में आता है या हमारे देश का पर्यटक आता है अगर उसकी पर्यटक के रुप में हम सुरक्षा नहीं कर सकते तो कहीं न कहीं मध्यप्रदेश की सरकार पर एक प्रकार से धब्बा लगता है. हमारे यहां हमने 12 पर्यटक स्थलों पर टूरिस्ट की चौकी स्थापित की है. लगभग 228 पुलिस आरक्षकों को प्रशिक्षण देने का काम किया है.
अध्यक्ष महोदय, इसके अलावा टेक्सी ड्रायवर, कुली, होटेलियर इत्यादि को प्रशिक्षण दिया जा रहा है.
अध्यक्ष महोदय, टूरिस्ट हेल्प लाईन भी प्रचलित है.
अध्यक्ष महोदय, लगभग 16 क्षेत्र हम लोगों ने पर्यटन के क्षेत्र में घोषित किये हैं जिसमें इंदिरा सागर,मांडू,दतिया,सलकनपुर,और चित्रकूट आदि और भी नाम हैं जिनको हमने अलग से घोषित किया है.
अध्यक्ष महोदय, सिंहस्थ की तैयारियों को लेकर मध्यप्रदेश में सभी विभाग लगातार काम कर रहे हैं. अभी कल ही माननीय मुख्यमंत्रीजी ने लगभग 9 करोड़ रुपये की उज्जयिनी होटल का लोकार्पण किया और क्षिप्रा होटल के उन्नयन का हम लोगों ने काम किया है जिससे जो यात्री आयेंगे वह वहां ठहर सकते हैं. माननीय मुख्यमंत्रीजी द्वारा 300 अस्थायी टेंट लगाये जाने का काम भी कर रहे हैं.
अध्यक्ष महोदय, विभिन्न प्रचार माध्यमों से सिंहस्थ 2016 का राष्ट्रीय एवं अंतरार्ष्ट्रीय स्तर पर प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है. सिंहस्थ आधारित विशेष प्रदर्शनी बस देश के प्रमुख शहरों में भ्रमण कर रही है.
अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्रीजी कितना समय लेंगे?
श्री सुरेन्द्र पटवा--अभी तो पर्यटन चल रहा है. इसके बाद संस्कृति विभाग पर बोलूंगा. अध्यक्ष महोदय, क्रिकेट में 11वां प्लेयर होता है, वह कभी भी आऊट हो सकता है.
अध्यक्ष महोदय, लाईट एंड साऊंड शो प्रोग्राम के मामले में हमने एक अलग योजनाबद्ध तरीके से काम किया है ताकि मध्यप्रदेश की जो समृद्ध ऐतिहासिक विरासत है, उसके बारे में हम, हमारे जितने भी पर्यटक हैं जो प्रदेश में आते हैं. हमारे यहां खजुराहो,ओरछा,ग्वालियर और इंदौर के राजवाड़ा में हम लोगों ने अभी लाईट एंड साऊंड शो का कार्यक्रम शुरु किया है. इनमें से कुछ कार्यक्रम पहले से चले आ रहे हैं. आने वाले समय में शीघ्र ही मांडू, सांची,उज्जैन में भी लाईट एंड साऊंड शो का काम शुरु करेंगे.
अध्यक्ष महोदय, अभी परसों ही बाला बच्चन जी ने बताया था कि पर्यटन विभाग 12 करोड़ रुपये के घाटे में है. मुझे लगता है उन्होंने 2003 का कुछ पढ़ लिया था. वर्ष 2003 में जरुर पर्यटन विभाग 12.55 करोड़ रुपये हानि में था लेकिन उसके बाद वर्ष 2014 में निगम का शुद्ध लाभ 7.71 करोड़ रुपये हो गया है. यह पहली बार हुआ है कि मध्यप्रदेश का निगम प्राफिट में आया है. शुद्ध लाभ में आया है.
अध्यक्ष महोदय, निर्माण कार्यों की मैं बात करुं तो फ्रुट क्राप इंस्टीट्यूट ऑफ जबलपुर जिसकी कुल लागत 5 करोड़ रुपये है, वह लगभग पूर्ण हो चुका है. जल्दी से जल्दी उसका लोकार्पण होगा. टूरिस्ट मोटल, डोडी जिसकी लागत 2 करोड़ रुपये है, हमने 8 कमरों का होटल वहां पर शुरु कर दिया है. हाई-वे ट्रीट हंडिया के बारे में हमारे विधायक जी कह रहे थे कि वहां कुछ काम नहीं हुआ तो बताना चाहूंगा कि वहां 1.5 करोड़ रुपये की इकाई प्रारंभ हो चुकी है. इसके अलावा कान्हा रिसोर्ट, नगर पालिका और मलाजखंड से प्राप्त भवन इकाई का 3 करोड़ का कार्य कर,उन्नयन किया जा रहा है. भोपाल में मिन्टो हाल के उन्नयन का काम हम लोग कर रहे हैं. कन्वेंशन सेंटर के रुप में परिवर्तित करने का काम करेंगे. लगभग 32 करोड़ रुपये के आसपास उसकी लागत होगी. लगभग 32 करोड़ रुपए के आसपास उसकी लागत होगी. अध्यक्ष महोदय, समय की कमी को देखते हुए, मैं आपसे यही कहना चाहूंगा कि जो पर्यटन और संस्कृति विभाग है, लगातार मध्यप्रदेश में एक अलग पहचान बना रहा है. जहां तक संस्कृति का सवाल है. हम जिस देश में रहते हैं, उसको भारत मां कहा जाता है. हम इसी संस्कृति में रहते हैं, जहां हमारी संस्कृति रीति-रिवाज परंपरा इन बातों को सृजित करने का काम आप और हम सबको मिलकर करना चाहिए. किसी भी तरह का हम भेदभाव नहीं करते हैं, चाहे किसी भी तरह के वे सांस्कृतिक कार्यक्रम हों. अभी यहां नरसिंहगढ़ के बारे में बात कही जा रही थी कि वहां पर कोई कार्यक्रम बंद कर दिये गये और भी विधायकों ने कहा, लेकिन मैं दावे के साथ कह सकता हूं, मेरे पास इसकी जानकारी नहीं है. मेरे पास तो सिर्फ एक ही जानकारी है कि श्री दिग्विजय सिंह जी ने जो भोजपुर में महोत्सव था, उसको बंद करा दिया था और श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने उसकी शुरुआत करवाई.
श्री गिरीश भण्डारी - नरसिंहगढ़ महोत्सव को आप दिखवा लीजिए, वह 3 साल से बंद है.
श्री सुरेन्द्र पटवा - स्वाभाविक रूप से, मैं निश्चित रूप से देखूंगा.
डॉ. रामकिशोर दोगने - हरदा गोहारा उत्सव, इसको भी नोट कर लें.
श्री सुरेन्द्र पटवा - मैं निश्चित रूप से देखूंगा. अध्यक्ष महोदय, संस्कृति विभाग के द्वारा लगभग 230 बड़े समारोह किये जाते हैं. लगभग 30 पुरस्कार दिये जाते हैं, जिसमें 23 राष्ट्रीय पुरस्कार हैं और 7 राज्य स्तरीय पुरस्कार हमारे विभाग के द्वारा दिये जाते हैं. पूरे वर्ष में लगभग 27 प्रदर्शनियां लगाई जाती हैं. रविन्द्र भवन के उन्नयन का काम हम लोग कर रहे हैं. 6 करोड़ 70 लाख रुपए का उसमें काम हो चुका है. आने वाले समय में खंडवा, विदिशा और भोपाल में रविन्द्र भवन की तर्ज पर नये सभागारों का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें भोपाल के नवीन सभागृह का शिलान्यास माननीय मुख्यमंत्री जी ने किया है और लगभग 24 करोड़ रुपए की उसकी लागत आई है, जिसमें 1500 लोगों के बैठने की व्यवस्था होगी. अभी अभी 10 या 11 सितम्बर को हिन्दी विश्व सम्मेलन हुआ. वास्तव में हिन्दी विश्व सम्मेलन हमारे देश के लिए गौरव और गर्व की बात है. पिछली बार भी संस्कृति विभाग ने उसमें सहभागिता रखी थी.
श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, हनुमंतिया की तर्ज पर माननीय उपाध्यक्ष महोदय के क्षेत्र बाण सागर में भी 2 टापू हैं, उन्हें भी विकसित किया जाय.
श्री सुरेन्द्र पटवा - निश्चित रूप से, चाहे बाण सागर हो, चाहे गांधी सागर हो, चाहे तवा बांध हो, सब जगह हम काम करेंगे. आप इस बात से सहमत होंगे कि पर्यटन और संस्कृति विभाग को जो बजट मिलता है, वह सीमित बजट मिलता है.
श्री रामनिवास रावत - चंबल नदी में भी बहुत अच्छे-अच्छे टापू हैं, वहां पर भी कुछ करवा दें.
श्री सुरेन्द्र पटवा - अध्यक्ष महोदय, शासन द्वारा सिंहस्थ के परिप्रेक्ष्य में एक वैचारिक महाकुंभ के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन किये जाने का निर्णय लिया है, उसके अंतर्गत हमारे पूरे मध्यप्रदेश में 4 बड़े कार्यक्रम हुए हैं, मूल्य आधारित जीवन, मानव कल्याण के लिए धर्म, ग्लोबल वॉर्मिंग एवं जलवायु परिवर्तन समाधान की ओर तथा चौथा, विज्ञान और अध्यात्म विषय पर संगोष्ठियां आयोजित हो चुकी है. आने वाले समय में इन चारों सम्मेलनों की जो अनुशंसाएं हमारे यहां आएगी, उसको सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान शिखर सम्मेलन के माध्यम से एक साथ मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा. (मेजों की थपथपाहट)..सिंहस्थ के अलावा विश्व धर्म सभा का आयोजन होगा. टंटया भील स्मारक के बारे में पहले बोला जा चुका है, भीमा नायक प्रेरणा केन्द्र के बारे में बोला जा चुका है.
श्री गोपाल परमार - आगर में एक वैद्यनाथ महादेव का मंदिर और दूसरा शक्तिपीठ है. देश भर से लोग शक्तिपीठ पर आते हैं, इन दोनों को पर्यटन स्थल घोषित किया जाय. मंत्री जी ने वहां पर एक बहुत बढ़िया होटल बनवा दिया है, उसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद.
श्री सुरेन्द्र पटवा - मैं जिस क्षेत्र से आता हूं, शिवजी का बड़ा आशीर्वाद है. जब सबसे पहले प्रभारी मंत्री बनकर आगर में आया था तो आपके बिना मांगें मैंने 3 करोड़ रुपए की घोषणा की थी और आने वाले समय में उसका काम पूरा करना मेरा काम होगा.
श्री विजयपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय मढई और तवा को भी पर्यटन के क्षेत्र में जोड़ा जाय.
श्री सुरेन्द्र पटवा -- अध्यक्ष महोदय मैं अंत में विजय जी की बात को भी सम्मिलित करता हूं. मैं एक बार फिर से जितने भी नाम हैं. मैं उन सभी के नाम यहां पर पढ़ नहीं सकता हूं लेकिन कुंवर विक्रम सिंह जी ने जो कहा है खजुराहो विश्व पर्यटन धरोहर है. खजुराहों में पर्यटन विकास के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है. अभी अभी मुख्यमंत्री जी एयरपोर्ट टर्मिनल का उद्घाटन किया है. जिससे ट्रेफिक बढ़ेगा और हवाई सेवाएं भी बढ़ेगी.
श्रीमती ऊषा चौधरी -- मंत्री जी मेरे यहां पर भरजुआ माई हैं जहां पर नौ दिन का मेला लगता है.
श्री सुरेन्द्र पटवा -- माननीय मुख्यमंत्री जी ने फ्रूट काप जो इंस्टीट्यूट है उसका शिलान्यास किया है. खजुराहों को पन्ना नेश्नल पार्क, ओरछा आदि से सर्किट के रूप में जोड़ा जा रहा है. इसके साथ साथ राम किशोर दोगने जी ने जो कहा है हंडिया में मध्यप्रदेश पर्यटन निगम ने इकाई प्रारम्भ की है, जोगा के किले के बारे में आपने कहा है तो वहां पर इंदिरा सागर का बेक वाटर पहुंचता है तो उसको हनुमंतिया से क्रूज के माध्यम से जोड़ा जा रहा है. दिलीप सिंह परिहार जी ने गांधी सागर को पर्यटन केन्द्र के रूप में विकसित करने की बात कही है. लगभग 2.5 करोड़ के काम वहां पर प्रचलित हैं. नीमच सिटी शहीद बगीचा जो कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने उद्घाटित किया था. उसका भी विकास किया जायेगा. सुखदेव जी की तपोभूमि सुखानंद जी का भी विकास अतिशीघ्र किया जायेगा. गिरीश भण्डारी जी ने जो बात कही है उनके यहां पर नरसिंहगढ़ का जो भी कार्यक्रम समारोह है स्वाभाविक रूप से हम लोग उसको शुरू करेंगे. आप उसके बारे में मुझे एक आवेदन दे दें हम उसे शुरू करेंगे. हरदीप सिंह जी की बात है, दुर्गालाल जी विजय, दिलीप सिंह परिहार जी सुदर्शन गुप्ता जी, राम किशोर दोगने जी और कुंवर विक्रम सिंह जी . अध्यक्ष महोदय मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं, यहां पर बैठे हुए पक्ष और प्रतिपक्ष के सभी सदस्यों को विश्वास दिलाना चाहता हूं और यह भी अनुरोध करना चाहता हूं कि वास्तव में हम जनप्रतिनिधि बनें, यह सोच को लेकर बनें, क्या हम लोग संविधान का पालन करेंगे, अगर कहीं पर हास परिहास होता है तो उसमें दिक्कत नहीं है लेकिन आपका और हमारा सबका कर्तव्य एकही है कि हम किस तरह से मध्यप्रदेश को विकास की ऊंचाईयों पर ले जायें. चाहे कोई भी विभाग हमारे पास में हो, चाहे पर्यटन संस्कृति हो या एनवीडीए हो हम लोगों का यह प्रयास होगा कि लगातार हम लोग काम करें. अभी यहां पर सचिन यादव जी उनके पिताजी की बात कर रहे थे तो मैं भी यहां पर सोच रहाहूं कि मैं भी सुंदरलाल पटवा जी की बात कर लेता हूं. उन्होंने जिसतरह से काम किया है मैं यहां पर सदन में वादा करता हूं कि मैं उसी तरह से काम करने का प्रयास मैं स्वयं भी करूंगा. यहां पर बैठे हुए हमारे सभी प्रतिपक्ष के सदस्यों से अनुरोध करूंगा कि जब भी बजट पर परिचर्चा हो तो कांग्रेस के हमारे सभी सदस्यों का यहां पर होना आवश्यक है ताकि लगे कि आप वास्तव में विकास के मामले में रूचि ले रहे हैं, केवल विरोध करने के लिए विरोध करने की आवश्यकता नहीं है. कहीं न कहीं आपको जैसा विपक्ष पहले हुआ करता था वैसे विपक्ष की आवश्यकता है. अन्यथा चौथी बार भी भाजपा की ही सरकार आ रही है. मैं यह बात दावे के साथ कह सकता हूं. वास्तव में शिवराज जी इतने सहज सरल हैं, मुझे अब कैबिनेट मंत्री बनने की आवश्यकता नहीं है. मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्र में हम ऊंचाइयां हासिल करेंगे. आने वाले समय में मध्यप्रदेश को एक नंबर का पर्यटन के क्षेत्र में बनाने का काम करेंगे. बहुत बहुत धन्यवाद्.
अध्यक्ष महोदय -- मैं पहले कटौती प्रस्तावों पर मत लूंगा.
प्रश्न यह है कि मांग संख्या 1, 2, 26, 37, 48 एवं 65 पर प्रस्तुत कटौती प्रस्ताव स्वीकृत किए जाएं.
कटौती प्रस्ताव अस्वीकृत हुए.
अध्यक्ष महोदय -- आज माननीय मंत्री श्री लाल सिंह आर्य जी ने प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण और अनुदान की मांगें, लगातार तीनों विषयों पर उत्तर दिए और तनाव रहित रहे इसके लिए उनको साधुवाद.
विधान सभा की कार्यवाही शुक्रवार, दिनांक 4 मार्च, 2016 को प्रातः10.30 बजे तक के लिए स्थगित.
सायं 6.51 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुक्रवार, दिनांक 4 मार्च, 2016 (14 फाल्गुन, शक संवत् 1937 ) के पूर्वाह्न 10.30 बजे तक के लिये स्थगित की गई.
भगवानदेव ईसरानी
भोपाल : प्रमुख सचिव
दिनांक : 3 मार्च, 2016 मध्यप्रदेश विधान सभा