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मध्यप्रदेश विधान सभा


प्रश्नोत्तर-सूची
जुलाई, 2016 सत्र


मंगलवार, दिनांक 26 जुलाई, 2016


भाग-1
तारांकित प्रश्नोत्तर


 

( वर्ग 2 : सामान्य प्रशासन, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, संस्कृति, पर्यटन, प्रवासी भारतीय, नगरीय विकास एवं आवास, पर्यावरण, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम, जल संसाधन, वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, जनसंपर्क, खनिज साधन )

 

पुनासा डेम के अंतर्गत संचालित परियोजनाएं

1. ( *क्र. 2857 ) श्री सचिन यादव : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इंदिरा सागर परियोजना (पुनासा डेम) के अंतर्गत ऐसी कितनी परियोजनाएं हैं, जिनके माध्‍यम से कितने ग्रामों की कितनी-कितनी हेक्‍टेयर कृषि भूमि को सिंचित एवं अपरिष्‍कृत पेयजल सुविधा उपलब्‍ध कराई जा रही है? इनका विस्‍तार कर और कितने ग्रामों एवं क्षेत्र की कृषि भूमि को सिंचित किया जायेगा एवं कितनी-कितनी परियोजनाएं स्‍वीकृत एवं प्रस्‍तावित हैं, उन परियोजनाओं से कितने ग्रामों की कितनी हेक्‍टेयर कृषि भूमि को सिंचित एवं अपरिष्‍कृत पेयजल सुविधा उपलब्‍ध कराने का लक्ष्‍य रखा गया है एवं उनके विस्‍तारीकरण की भी क्‍या आगामी कार्ययोजना है? (ख) क्‍या इंदिरा सागर परियोजना (पुनासा डेम) जलाशय की भंडारण क्षमता के मान से प्रश्‍नांश (क) में दर्शित परियोजनाएं बनाई गई हैं? हाँ तो उक्‍त परियोजनाओं की पूर्ति के उपरांत कितना पानी उक्‍त डेम में शेष रहेगा? (ग) प्रश्‍नांश (क) अनुसार जिला खरगोन के कितने-कितने ग्रामों की कितनी-कितनी हेक्‍टेयर कृषि भूमि को सिंचित एवं अपरिष्‍कृत पेयजल सुविधा दी जा रही है एवं दी जायेगी तथा अस्‍वीकृत एवं प्रस्‍तावित आगामी परियोजनाओं से कितने हेक्‍टेयर कृषि भूमि को सिंचित एवं अपरिष्‍कृत पेयजल सुविधा दिये जाने का लक्ष्‍य रखा गया है? (घ) क्‍या उक्‍त परियोजनाओं के अंतर्गत क्षेत्रों में पड़ने वाले तालाबों, जलाशयों आदि को भी इन परियोजनाओं के माध्‍यम से पानी डाला जायेगा? हाँ तो बतायें? नहीं तो क्‍यों?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) इस संरचना के अंतर्गत दो परियोजनाएं आती हैं, जिसमें से एक इंदिरा सागर नहर परियोजना एवं दूसरी पुनासा उद्वहन सिंचाई परियोजना है। (1) इंदिरा सागर परियोजना के अंतर्गत खरगोन उद्वहन नहर का कार्य भी सम्मिलित है। वर्तमान में इंदिरा सागर परियोजना से लक्षित 596 ग्रामों की 123000 हेक्‍टेयर के विरूद्ध 358 ग्रामों की 105000 हेक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराई जा रही है एवं खरगोन उद्वहन नहर से 152 ग्रामों में अपरिष्‍कृत पेयजल उपलब्‍ध कराया जाना प्रस्‍तावित है। (2) पुनासा उद्वहन सिंचाई परियोजना में इंदिरा सागर जलाशय से सीधे पानी उद्वहन कर खण्‍डवा जिले के 99 ग्रामों की 35000 हेक्‍टेयर कृषि भूमि को सिंचित एवं अपरिष्‍कृत पेयजल सुविधा उपलब्‍ध कराई जा रही है। (3) इंदिरा सागर की मुख्‍य नहर के विस्‍तारीकरण के अंतर्गत दो परियोजनाएं स्‍वीकृत हैं, जिनका विवरण निम्‍नानुसार है :- (i) छैगाँवमाखन उद्वहन योजना-सिंचाई क्षमता 35000 हेक्‍टेयर, लाभान्वित ग्रामों की संख्‍या 58, अपरिष्‍कृत जल उपलब्‍ध कराये गये ग्रामों की संख्‍या 0. (ii) बिस्‍टान उद्वहन योजना-सिंचाई क्षमता 22000 हेक्‍टेयर लाभान्वित ग्रामों की संख्‍या 92, अपरिष्‍कृत जल उपलब्‍ध कराये गये ग्रामों की संख्‍या 0. (4) पुनासा सिंचाई योजना के विस्‍तारीकरण के अंतर्गत सिंहाडा उद्वहन योजना स्‍वीकृत है, जिसकी सिंचाई क्षमता 5750 हेक्‍टेयर, लाभान्वित ग्रामों की संख्‍या 17 तथा अपरिष्‍कृत जल उपलब्‍ध कराये गये ग्रामों की संख्‍या 17 है। (5) इसके अतिरिक्‍त इंदिरा सागर परियोजना के जलाशय से हरसूद उद्वहन योजना प्रस्‍तावित है, जिससे खण्‍डवा जिले की हरसूद तहसील के 13 ग्रामों में 5648 हेक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्‍तावित है। (ख) इंदिरा सागर परियोजना के जलाशय से सिंचाई हेतु 1730 मिलियन क्‍यू.मी. पानी सुरक्षित रखा गया है जो कि प्रश्‍नांश (क) में दर्शाई गई योजनाओं हेतु सुरक्षित है। उक्‍त योजनाओं में पानी की आपूर्ति के पश्‍चात (पुनासा डेम) में 8020 मिलियन क्‍यू.मी. पानी उपलब्‍ध रहता है। (ग) प्रश्‍नांश (क) अनुसार जिला खरगोन के 225 ग्रामों की 54000 हेक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता निर्मित हो चुकी है तथा योजना का शेष कार्य पूर्ण होने पर 62 ग्रामों की 12551 हेक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा एवं 152 ग्रामों के लिये अपरिष्‍कृत पेयजल उपलब्‍ध कराई जावेगी एवं स्‍वीकृत बिस्‍टान उद्वहन नहर सिंचाई योजना से 92 ग्रामों की 22000 हेक्‍टेयर क्षेत्र को सिंचित कराया जाना प्रस्‍तावित है। (घ) जी नहीं। प्रस्‍तावित परियोजनाओं में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण

2. ( *क्र. 1481 ) श्री मनोज कुमार अग्रवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सामान्‍य प्रशासन विभाग के आदेश क्र. एफ 5-3/2006/1/3 भोपाल दिनांक 29 सितम्‍बर, 2014 के अनुसार म.प्र. शासन के विभिन्‍न विभागों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को 31 मार्च, 2016 तक नियमित किये जाने के आदेश दिये हैं? (ख) शासन के किन विभागों ने इस आदेश के तहत विभागों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित नहीं किया है? सूची प्रदाय की जावे (ग) उक्‍त आदेश का पालन संबंधित विभागों द्वारा कब तक किया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। (ख) एवं (ग) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

भाण्‍डेर विधान सभा क्षेत्रांतर्गत सांस्‍कृतिक कार्यक्रम का आयोजन

3. ( *क्र. 2402 ) श्री घनश्‍याम पिरोनियाँ : क्या राज्‍यमंत्री, संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या संस्‍कृति विभाग द्वारा दतिया महोत्‍सव बड़ोनी, महोत्‍सव, बसई महोत्‍सव एवं सेवढ़ा महोत्‍सव मनाये जा चुके हैं? यदि हाँ, तो उन पर किस-किस कार्यक्रम पर कितनी-कितनी राशि व्‍यय हुई? (ख) क्‍या भाण्‍डेर विधान सभा क्षेत्र के ऐतिहासिक एवं सांस्‍कृतिक विरासत के प्रतीक उनाव बालाजी, भाण्‍डेर एवं गिर्जुरा (सम्राट अशोक के पाषाण शिलालेख) महोत्‍सव मनाने के लिए जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार मांग की गई है? (ग) जनप्रतिनिधियों द्वारा बार-बार मांग करने के बावजूद भाण्‍डेर विधान सभा क्षेत्र में अभी तक संस्‍कृति विभाग द्वारा कोई आयोजन नहीं किया गया है? इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? (घ) क्‍या भाण्‍डेर विधान सभा क्षेत्र को संस्‍कृति विभाग द्वारा कोई भी कार्यक्रम/महोत्‍सव कराने के लिए प्रतिबंधित कर रखा है? यदि नहीं, तो कार्यक्रम क्‍यों नहीं कराये जा रहे हैं?

राज्‍यमंत्री, संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) विभाग द्वारा दतिया महोत्‍सव आयोजित किया गया. सिंहस्‍थ-2016 के दृष्टिगत अनुगूँज आयोजन बड़ोनी एवं बसई में किये गये. दतिया महोत्‍सव पर राशि रूपये 55,66,000/- बड़ोनी में राशि रूपये 29,67,085.00 एवं बसई में राशि रूपये 9,87,126.00 व्‍यय हुआ. (ख) जी हाँ. (ग) संस्‍कृति विभाग द्वारा प्रत्‍येक विधानसभा के क्षेत्रों में कार्यक्रमों का आयोजन संभव नहीं होता है. आयोजन प्राय: उन स्‍थानों पर किया जाता है, जहां व्‍यापक रूप से कई अंचल जुड़ जाते हैं. ऐसे स्‍थलों पर आयोजन करने से आस-पास बड़े क्षेत्र में सांस्‍कृतिक गतिविधि का लाभ आमजन और सांस्‍कृतिक अभिरूचि वाले लोगों तक पहुँचता है. अत: किसी के जिम्‍मेदार होने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता. (घ) जी नहीं. कार्यक्रम के आयोजन के पीछे मूल विचार व्‍यापक आंचलिकता से जुड़ा है, यह प्रश्‍नांश () के उत्‍तर में भी उल्‍लेख किया गया है.

अवैध खनन के प्रकरण में वसूली

4. ( *क्र. 1136 ) श्री बहादुर सिंह चौहान : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कमिश्‍नर उज्‍जैन के समक्ष दिनेश पिता मांगीलाल जैन निवासी महिदपुर रोड के विरूद्ध चल रहे प्रकरण की अद्यत‍न स्थिति बतावें (ख) विगत 3 माह में इसमें कितनी तारीखें लगीं? इसकी जानकारी देवें (ग) इस प्रकरण का कब तक निराकरण होगा और क्‍या इनसे राशि वसूल की जावेगी? समय-सीमा बतावें।

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रकरण न्‍यायालय, अपर आयुक्‍त, उज्‍जैन संभाग, उज्‍जैन के समक्ष प्रकरण क्रमांक 395/15-16 दर्ज है। इसमें दिनांक 25.07.2016 को पेशी नियत है। (ख) प्रश्‍नाधीन अवधि में प्रकरण में 5 तारीखें सुनवाई हेतु लगी हैं। (ग) प्रकरण अर्धन्‍यायिक प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है। अत: प्रश्‍नानुसार समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

डायवर्सन शुल्‍क एवं सम्‍पत्तिकर का निराकरण

5. ( *क्र. 1812 ) श्री सूबेदार सिंह रजौधा : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या नगर परिषद जौरा क्षेत्रान्‍तर्गत डायवर्सन कर समाप्‍त करने बावत परिषद द्वारा सर्वस‍म्‍मति से प्रस्‍ताव पारित कर कलेक्‍टर मुरैना व राज्‍य शासन की ओर से पत्र क्रं. 108570/860 दिनांक 17-09-2004 को भेजा गया था? यदि हाँ, तो उस पर क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) क्‍या अभी भी नगर के लगभग 3000 भवन स्‍वामी सम्‍पत्ति कर व डायवर्सन शुल्‍क दोनों भार वहन कर रहे हैं? यदि हाँ, तो क्‍या दोनों शुल्‍क अदा करना न्‍याय संगत है? (ग) प्रश्‍नांश (क) (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या नगर के भवन स्‍वामियों को दोहरी शुल्‍क अदायगी से मुक्‍त किया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करे?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ, नगर परिषद, जौरा द्वारा जौरा क्षेत्रांतर्गत डायवर्सन कर समाप्‍त करने हेतु प्रस्‍ताव अनुविभागीय अधिकारी एवं कलेक्‍टर महोदय जिला-मुरैना की ओर भेजा गया है, सही है, किन्‍तु डायवर्सन शुल्‍क राज्‍य शासन के प्रावधानानुसार होने से कोई कार्यवाही प्रचलित नहीं है। (ख) जी हाँ (1) जौरा नगर में नगर परिषद द्वारा म.प्र. नगर पालिका अधिनियम, 1961 के अध्‍याय 7 भाग 1 की धारा 126 अनुसार दर निर्धारित कर संपत्ति कर एवं समेकित कर अधिरोपित किया जाता है, जो कि नियमानुसार है, (2) डायवर्सन शुल्‍क म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता, 1961 के अध्‍याय 11 की धारा 57, 58 एवं 137 से 140 तक में भू-राजस्‍व के अधिरोपण एवं वसूली के संबंध में प्रावधान है, धारा 57 के अनुसार समस्‍त भूमि राज्‍य सरकार की संपत्ति है, धारा 58 के अंतर्गत समस्‍त भूमि चाहे वह किसी भी प्रयोजन के लिये उपयोजित की जाती हो और चाहे वह कहीं भी स्थित हो राज्‍य सरकार को राजस्‍व के भुगतान के लिये दायित्‍वाधीन है, 57 एवं 58 से स्‍पष्‍ट है कि प्रत्‍येक भूमि पर भू-राजस्‍व देय होता है, जो कि सांकेतिक रूप से दर्शाता है कि सभी भूमि का अंतिम स्‍वामित्‍व सरकार में ही निहित है और भूमि स्‍वामी/भू-धारक/उपयोगकर्ता उक्‍त भूमि के उपयोग के एवज में राज्‍य शासन को भू-राजस्‍व अदा कर रहा है। इस प्रकार सम्‍पत्ति कर व डायवर्सन शुल्‍क अदा करना नियमानुसार है। (ग) जी नहीं, शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

बादलडोह जलाशय की नहर की मरम्‍मत

6. ( *क्र. 1935 ) श्री चैतराम मानेकर : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बादलडोह जलाशय की नहर का निर्माण कब हुआ? (ख) क्‍या सिंचाई के समय नहर का पानी अत्‍याधिक मात्रा में सीवेज होता है? (ग) यदि नहीं, तो सिंचाई के समय नहर के नीचे खेतों में पानी का जमाव कैसे होता है? नहर को कब तक ठीक कर लिया जायेगा?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) ग्रीष्‍म काल 2016 में। (ख) एवं (ग) निर्माणाधीन नहर की लाईनिंग का कार्य पूर्ण कराए बगैर रबी सिंचाई में पानी देने से सीपेज हुआ जो स्‍वभाविक था। लाईनिंग का कार्य पूर्ण करा लिया गया है।

सीहोर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत खराब/जले ट्रान्‍सफार्मर

7. ( *क्र. 111 ) श्री सुदेश राय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला सीहोर अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र 159 सीहोर में ऐसे कितने ट्रान्‍सफार्मर हैं जो जल जाने एवं अन्‍य कारणों से खराब पड़े हैं, इनमें से कितने को बदला गया तथा कितने बदले जाने शेष हैं? यदि शेष हैं तो इनको बदलने में देरी का कारण बतावें तथा कब तक बदल दिये जायेंगे? (ख) खरीफ फसल की बुआई के पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रान्‍सफार्मरों के रख-रखाव के लिये विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की जा रही है और यदि कृषकों को फसलों की बुआई के बाद तत्‍काल में ट्रान्‍सफार्मर की आवश्‍यकता होती है तो उसकी आपूर्ति किस प्रकार की जावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) सीहोर विधान सभा क्षेत्रान्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में प्रश्‍न दिनांक तक 68 ट्रांसफार्मर फेल हुए हैं, जिसमें से 67 ट्रांसफार्मर बदल दिये गये हैं, 1 ट्रांसफार्मर संबद्ध उपभोक्‍ताओं द्वारा रू. 10 लाख की बकाया राशि में से नियमानुसार राशि जमा नहीं करने के कारण बदला जाना शेष है। नियमानुसार बकाया राशि जमा होने पर उक्‍त ट्रांसफार्मर बदल दिया जावेगा। (ख) खरीफ फसल की बुआई के पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मरों का रख-रखाव कार्य वितरण कंपनी द्वारा विभागीय स्‍तर पर सुनिश्चित किया जाता है। साथ ही वितरण कंपनी द्वारा विभागीय तौर पर एवं रेट कान्‍ट्रेक्‍ट के माध्‍यम से विभिन्‍न फर्मों से जले/खराब ट्रांसफार्मरों में आवश्‍यक सुधार कार्य करवाकर क्षेत्रीय भण्‍डारों में ट्रांसफार्मरों की उपलब्‍धता सुनिश्चित की जाती है। कृषि कार्यों हेतु ट्रांसफार्मरों की पर्याप्‍त उपलब्‍धता सुनिश्चित करने हेतु मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उक्‍तानुसार कार्यवाही की जा रही है।

नगरपालिका हटा/पटेरा द्वारा शौचालयों का निर्माण

8. ( *क्र. 1277 ) श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नगर पालिका परिषद हटा एवं नगर पंचायत पटेरा द्वारा विगत वर्ष 2014-152015-16 में कितने शौचालय बनाये गये? नाम, पतावार सूची उपलब्‍ध करायें। (ख) नगर परिषद पटेरा द्वारा गठन दिनांक से प्रश्‍न दिनांक तक नगर पंचायत अंतर्गत क्‍या-क्‍या खरीदी एवं कार्य किए गए? राशिवार कार्यों की जानकारी उपलब्‍ध करायें। साथ ही भ्रमण उपरांत प्राप्‍त शिकायतें व कार्यों की व खरीदी की जाँच हेतु दल गठित कर जाँच कराई जावेगी एवं दोषियों पर कार्यवाही के निर्देश कब तक प्रदाय किये जावेंगें।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) वर्ष 2014-15 में नगरपालिका परिषद हटा एवं नगर परिषद पटेरा के द्वारा कोई शौचालय नहीं बनाये गये हैं। वर्ष 2015-16 में नगर पालिका परिषद हटा द्वारा 25 तथा नगर परिषद पटेरा द्वारा 60 शौचालयों का निर्माण कराया गया जिनकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। कोई शिकायत प्राप्त नहीं होने से शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

सड़क निर्माण हेतु मुरम खदानों के आवंटन में रियायत

9. ( *क्र. 1450 ) श्रीमती नीना विक्रम वर्मा : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या धार-गुजरी सीमेंटीकृत रोड के निर्माण हेतु संबंधित ठेकेदार को धार जिले में मुरम खदान आवंटित की गई है? (ख) यदि हाँ, तो कहाँ-कहाँ आवंटित की गई है? ग्राम का नाम, खसरा नम्‍बर व क्षेत्रफल सहित निर्मित किये जा रहे मार्ग से दूरी बताएं (ग) क्‍या सड़क निर्माण हेतु मुरम खदानों के आवंटन में ठेकेदारों को कुछ रियायत दी जाती है तथा इस प्रयोजन हेतु मुरम खदान कितने समयावधि के लिये आवंटित की जाती है? (घ) क्‍या मुरम का परिवहन अधिक क्षमता के भारी डम्‍पर के माध्‍यम से करने में ग्रामीण सड़कों को हो रहे नुकसान की भरपाई संबंधित ठेकेदार से करवाये जाने का प्रावधान है अथवा ठेकेदार से इन मार्गों की मरम्‍मत करवाये जाने का प्रावधान है?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं। (ख) प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) मध्‍यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 के नियम 68 के तहत सड़क निर्माण हेतु मुरम खनिज के उत्‍खनन अनुज्ञा दिये जाने का प्रावधान है। यह उत्‍खनन अनुज्ञा निर्माण की कालावधि हेतु दिये जाने का प्रावधान है। राज्‍य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम, स्‍थानीय निकाय तथा सरकारी विभागों के अधीन किये जाने वाले समस्‍त निर्माण कार्यों के लिये मुरम पर रॉयल्‍टी देय नहीं है। (घ) जी नहीं। प्रश्‍नानुसार प्रावधान नियमों में नहीं है।

शास. कार्यों के भूमिपूजन/लोकार्पण में क्षेत्रीय विधायकों को आमंत्रित किया जाना

10. ( *क्र. 2820 ) श्रीमती इमरती देवी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या म.प्र. शासन सामान्‍य प्रशासन विभाग के आदेशानुसार शासकीय कार्यों के भूमिपूजन/लोकार्पण में क्षेत्रीय विधायक को भी आंमत्रित करना तथा पट्टिका में भी क्षेत्रीय विधायक का नाम अंकित करने के निर्देश हैं? (ख) यदि हाँ, तो वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में नगर पालिका परिषद् डबरा, नगर पंचायत पिछोर एवं नगर परिषद् बिलौआ जिला ग्‍वालियर में वर्षवार उक्‍त अवधि में कितने कार्य स्‍वीकृत हुए तथा कितने पूर्ण/अपूर्ण हैं? उक्‍त अवधि में इनमें से कितने कार्यों के भूमिपूजन/लोकार्पण में क्षेत्रीय विधायक को आमंत्रित किया गया? यदि नहीं, तो क्‍या शासन के आदेश की अवहेलना की गई है? इसके लिये कौन दोषी है, उस पर क्‍या कार्यवाही की गई है? नहीं तो कब तक की जावेगी?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। नगर पालिका परिषद, डबरा, नगर परिषद, पिछोर एवं बिलौआ द्वारा वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में कराए गए कार्यों का भूमिपूजन/लोकार्पण नहीं कराया गया है, जिससे शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''एक''

चंदला विधानसभा क्षेत्र में रेत/बालू माफियाओं द्वारा अवैध खनन

11. ( *क्र. 2051 ) श्री आर.डी. प्रजापति : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या छतरपुर जिले की चंदला वि.स. क्षेत्र की केन नदी में म.प्र. एवं उत्‍तर प्रदेश के खनन माफिया दिन-रात केन नदी के पास की खदानों में आये दिन अवैध खनन करते हैं। क्‍या इन बालू माफिया से गरीब जनता व किसानों में भय व्‍याप्‍त है? (ख) क्‍या मवईघाट, परेई, वरूआ, त्‍तेपुर, रामपुर, हर्रई, कुरधना, बधारी आदि से अवैध रूप से किसी किसान के खेत से बालू उठाने के नाम पर पट्टा लेकर सीधे नदी से रेत/बालू निकाल रहे हैं एवं इसकी कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुयी हैं? सूची प्रदाय करें (ग) क्‍या प्रतिदिन लगभग 800 से 1000 ट्रक/ट्रालों से बालू निकाली जाती है? बालू उठाने की स्‍वीकृति कहीं की होती है, परन्‍तु उठाते सीधे नदी से पोपलेन एवं एल.एन.टी. आदि मशीनों से बालू उठाते हैं जिससे अवैध उत्‍खनन से सिर्फ पर्यावरण संतुलन ही नहीं बल्कि केन नदी के अस्तिव पर भी खतरा मंडरा रहा है, इससे प्रतिदिन कितने राजस्‍व की चोरी होती है? (घ) क्‍या खनिज माफिया आये दिन फायरिंग कर यहां के ग्रामीणों को धमकाते हैं, दिनांक 10.3.16 को फत्‍तेपुर में फायरिंग हुयी एवं मवईघाट में फायरिंग हुयी, जिसमें 02 लोग मारे गए एवं कई घायल हो गये हैं? यदि हाँ, तो इससे कितने किसानों ने पलायन किया है? सूचीवार जानकारी देवें

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं। (ख) जी नहीं। प्रश्‍नानुसार प्राप्‍त शिकायतों का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) एवं (घ) जी नहीं। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

नर्मदा विकास संभाग क्र. (4) सिहोरा में नियमित कार्यपालन यंत्री की नियुक्ति

12. ( *क्र. 1326 ) श्री तरूण भनोत : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) तारांकित प्रश्‍न क्र. 1420 दिनांक 27/02/2015 के उत्‍तर में मान. मुख्‍यमंत्री महोदय जी द्वारा बताया गया था कि विभाग में स्‍वीकृत पदों के मान से कार्यपालन यंत्रियों की सेवायें प्राप्‍त होने पर नर्मदा विकास संभाग क्र. (4) सिहोरा जबलपुर में नियमित कार्यपालन यंत्री की नियुक्ति कर दी जावेगी? तो क्‍या अब विभाग को कार्यपालन यंत्रियों की सेवायें प्राप्‍त हो गयी हैं? (ख) यदि हाँ, तो नर्मदा विकास संभाग क्र. (4) सिहोरा जिला जबलपुर में इनकी नियुक्ति कर दी जावेगी?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। यह बताया गया था कि विभाग में स्‍वीकृत पदों के मान से कार्यपालन यंत्रियों की सेवायें जल संसाधन‍ विभाग से प्राप्‍त होने पर ही नियमित कार्यपालन यंत्री की पदस्‍थापना संभव है। जी नहीं, विभाग में कार्यपालन यंत्री के स्‍वीकृत 88 पदों के विरूद्ध वर्तमान में केवल 58 कार्यपालन यंत्री पदस्‍थ हैं। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

फीडर विभक्तिकरण योजनांतर्गत विद्युतीकरण

13. ( *क्र. 3134 ) श्री रामकिशन पटेल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र में फीडर विभक्तिकरण योजना में कुल कितने ग्रामों में विद्युत लाईनों के खुले तारों को हटाकर उनके स्थान पर निम्‍न दाब केबल लाईन डाली गई है? डाली गई केबल लाईन की कुल लंबाई बतावें। (ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित निकाले गये खुले तारों की कितनी मात्रा प्राप्त हुई तथा उनका क्या उपयोग किया गया? क्या निकाले गये तारों की चोरी हुई है? यदि हाँ, तो कितनी मात्रा की चोरी हुई? (ग) वर्ष 2015-16 में माह जून, 2016 तक उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र में कितनी मात्रा में विद्युत लाईनों के तार चोरी हुये हैं? ग्रामवार बतायें। इन चोरी के प्रकरणों में विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की गई है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) उदयपुरा विधान सभा क्षेत्र में फीडर विभक्तिकरण योजना में कुल 140 ग्रामों में विद्युत लाईनों के खुले तारों को हटाकर उनके स्‍थान पर निम्‍नदाब केवल लाईन डाली गई है। उक्‍तानुसार डाली गई केबल लाईन की कुल लंबाई लगभग 86 कि.मी. है। (ख) उत्‍तरांश (क) में उल्‍लेखित निकाले गये खुले तारों (स्‍क्रैप) की लगभग 7291 कि.ग्रा. मात्रा प्राप्‍त हुई है, जिसमें से 5875 कि.ग्रा. खुला तार (स्‍क्रैप) ठेकेदार एजेन्‍सी द्वारा मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के क्षेत्रीय भण्‍डार में जमा करा दिया गया है तथा शेष 1416 कि.ग्रा. खुलातार (स्‍क्रैप) ठेकेदार एजेन्‍सी द्वारा क्षेत्रीय भण्‍डार भोपाल में जमा करने की कार्यवाही की जा रही है। उपरोक्‍त निकाले गए तारों की चोरी का कोई प्रकरण जानकारी में नहीं आया है। (ग) वर्ष 2016-17 (वर्ष 2015-16 नहीं) में माह जून, 2016 तक उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र में विद्युत लाईनों के तार चोरी होने की कोई घटना घटित नहीं हुई है, अत: प्रश्‍न नहीं उठता।

नाले की नियमित साफ-सफाई

14. ( *क्र. 1046 ) श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या भोपाल स्थित वार्ड 30 में कोलार में चिनार वुडलैंड सोसायटी एवं जानकी नगर चूनाभट्टी के बीच नाला स्थित है? यदि हाँ, तो यह कहाँ से शुरू होकर कहाँ निकल रहा है? (ख) क्‍या किसी रहवासी बहुमंजिला के सीवेज को नाले में सीधे निकाला जा सकता है? यदि हाँ, तो नियम बताएं? यदि नहीं, तो ऐसा पाये जाने पर किस प्रकार की कार्यवाही किये जाने का प्रावधान है? (ग) क्‍या इस नाले की वर्षों से साफ सफाई नहीं हुई है तथा यह गंदगी से भरा पड़ा है एवं क्‍या नाले के ऊपर से कोलार की पाईप लाईन जाती है एवं इसकी साफ-सफाई न होने से वहां की भूमि के जल स्‍तर में भी गंदगी मिल रही है? (घ) कब तक उक्‍त नाले की साफ-सफाई कर दी जायेगी, समय-सीमा बताएं एवं नियमित साफ सफाई नहीं किए जाने के लिए कौन दोषी है?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। यह नाला एम.ए.सी.टी. की पहाड़ी से प्रारंभ होकर शाहपुरा झील में मिल रहा है। (ख) जी नहीं, मध्‍यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 216 अंतर्गत यह निषेध है। अधिनियम के प्रावधान अनुसार कार्यवाही की जाती है। (ग) जी नहीं। यह कहना सही नहीं है कि प्रश्‍नाधीन नाले की सफाई वर्षों से नहीं हुई है। वर्षा ऋतु से पूर्व प्रतिवर्ष नाले की साफ-सफाई कराई जाती है। नाले के ऊपर से कोलार लाईन की पाईप लाईन जाती है। यह सही नहीं है कि नाले की सफाई नहीं होने से भूमि के जलस्‍तर में गंदगी मिल रही है। इस प्रकार की कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है। (घ) उक्‍त नाले की साफ-सफाई दिनांक 15 से 20 जून 2016 को पूर्ण रूप से कराई गई है एवं समय-समय पर साफ-सफाई की जाती है। अत: शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

आरक्षित वर्ग के शासकीय सेवकों की पदोन्‍नति

15. ( *क्र. 2976 ) श्री मधु भगत : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विभागाध्‍यक्ष द्वारा म.प्र. लोक सेवा (अनु.जा., अनु.जन. जाति और पि. वर्ग के लिये आरक्षण) अधिनियम 1994 का पालन किया जा रहा है और उसके प्रावधानों का संज्ञान है? यदि हाँ, तो सा.प्र.वि. के परिपत्र दिनांक 19 मार्च, 1998 और 14.03.1995 में दिये गये निर्देशों का पालन किया गया? (ख) क्‍या जल संसाधन विभाग के पत्र क्रमांक एफ-22-06/2013/पी-1/31 दिनांक 27 मई, 2013 के द्वारा स.प्रा.वि. को भेजे गये पत्र के साथ प्रमुख अभियंता (विभागाध्‍यक्ष) द्वारा हस्‍ता‍क्षरित प्रपत्र-ब में कुल 32 प्रकार के पद जो कि विभिन्‍न पदनाम से जाने जाते हैं, का विवरण भेजा गया है? (ग) यदि हाँ, तो बतायें कि जल संसाधन विभाग के पत्र क्रमांक एफ-2-29/99/पी-31 दिनांक 6 मार्च, 2003 के साथ संलग्‍न परिशिष्‍ट '' के कालम एक-दो में 133 प्रकार के पदनाम विभाग में होना स्‍वीकार किया गया है? तो मात्र 32 पदों की जानकारी पत्र दिनांक 27 मई, 2013 द्वारा क्‍यों भेजी गई? शेष पदों की जानकारी न भेजा जाना क्‍या इस तथ्‍य का प्रमाण नहीं है कि शेष पदों पर कार्यरत आरक्षित वर्ग के शासकीय सेवकों को पदोन्‍नति से वंचित किया जाकर उन्‍हें हानि पहुंचाई? (घ) यदि हाँ, तो इसके लिये कौन जिम्‍मेदार है? क्‍या उसके विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही की जायेगी

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। (ग) प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित दिनांक 6 मार्च, 2003 की जानकारी में 133 प्रकार के वह पद हैं, जो विभाग में स्‍वीकृत हैं, जबकि दिनांक 27 मई, 2013 के पत्र में 32 प्रकार के वह पद हैं, जिन पर पदोन्‍नति से ही पद पूर्ति की जाती है। (घ) प्रश्‍नांश () के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

अध्‍यक्ष वक्‍फ बोर्ड को प्रदत्‍त मानदेय/भत्‍ते

16. ( *क्र. 1234 ) श्री आरिफ अकील : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या वर्तमान अध्‍यक्ष म.प्र. वक्‍फ बोर्ड को राज्‍य सरकार ने केबिनेट मंत्री का दर्जा देने संबंधी आदेश जारी किया है? यदि हाँ, तो कब और क्‍या? सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा विधि विभाग से इस संबंध में सहमति प्राप्‍त की गई थी तथा केबिनेट का अनुमोदन लिया गया है? यदि हाँ, तो प्रति उपलब्‍ध करावें तथा क्‍या पिछड़ा वर्ग तथा अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण विभाग से कोई प्रस्‍ताव प्राप्‍त किया गया? यदि नहीं, तो विभाग से मानदेय, भत्‍ते सुविधाएं स्‍टॉफ वाहन आदि की सुविधा किस प्रावधान आदि के तहत प्रदान की जा रही है? (ख) मध्‍यप्रदेश में वक्‍फ बोर्ड गठित होने कि दिनांक से प्रश्‍न दिनांक की स्थिति में कौन-कौन अध्‍यक्ष रहे हैं और किन-किन अध्‍यक्षों को केबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया और यदि नहीं, दिया गया तो क्‍यों नहीं दिया गया? (ग) क्‍या अध्‍यक्ष वक्‍फ बोर्ड का पद केबिनेट मंत्री स्‍तर का चिन्हित है? इस संबंध में क्‍या दिशा निर्देश हैं?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। सामान्‍य प्रशासन विभाग के आदेश क्रमांक एफ ए 3-07/2015/एक (1) दिनांक 27.03.2015 द्वारा केबिनेट मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है। जी नहीं। प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। मानदेय, भत्‍ते, वाहन आदि की सुविधा मध्‍यप्रदेश वक्‍फ बोर्ड द्वारा वित्‍त विभाग के ज्ञाप क्रमांक एफ 11-36/2003/नियम/चार दिनांक 04 फरवरी 2006 एवं संशोधित ज्ञाप क्रमांक एफ 11-15/2010/नियम/चार दिनांक 10 अगस्‍त 2011 एवं ज्ञाप क्रमांक एफ 11-15/2010/नियम/चार दिनांक 29 फरवरी 2012 के अंतर्गत प्रदान की गई है। इनके द्वारा स्‍टाफ की सुविधा नहीं ली गई है। (ख) मध्‍यप्रदेश में वक्‍फ बोर्ड गठित होने के दिनांक से प्रश्‍न दिनांक तक मध्‍यप्रदेश वक्‍फ बोर्ड में क्रमश: सर्व श्री ईसा भाई, श्री मुल्‍ला फख्‍रूद्दीन, श्री खान शाकिर अली खान, श्री ए.जी. कुरैशी, श्री मुजफ्फर अली, श्री अब्‍दुल शकूर खान, श्री डॉ निजामउद्दीन, श्री मोहम्‍मद सईद मुजद्ददी, श्री आलमगीर गौरी, श्री गुफरान आजम वक्‍फ बोर्ड के अध्‍यक्ष रहे तथा वर्तमान में श्री शौकत मोहम्‍मद खान वक्‍फ बोर्ड के अध्‍यक्ष हैं। इनमें से श्री ए.जी. कुरैशी, श्री गुफरान आजम एवं श्री शौकत मोहम्‍मद खान को केबिनेट मंत्री का दर्जा प्रदान किया गया है। मंत्री स्‍तर का दर्जा दिया जाना राज्‍य शासन के विवेकाधीन है। (ग) जी नहीं। इस संबंध में कोई दिशा निर्देश नहीं हैं।

अवैध कॉलोनी निर्माण पर कार्यवाही

17. ( *क्र. 3257 ) श्रीमती अनीता नायक : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या नगरपालिक निगम, कटनी में वर्ष 2002 से 2005 तक 44 अवैध कॉलोनियों का नियमितीकरण किया गया था और वर्तमान में 90 कॉलोनियां अवैध हैं? (ख) यदि हाँ, तो म.प्र. नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 292 (ग) के तहत कॉलोनी निर्माताओं पर क्‍या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) म.प्र. नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 292 (घ) एवं 292 (छ) के तहत आयुक्‍त द्वारा जिम्‍मेदार अधिकारियों, उपयंत्री, सहायक यंत्री, कार्यपालन यंत्री, उपायुक्‍त तथा पुलिस सहायता उपलब्‍ध कराने के दायित्‍वाधीन कोई पुलिस अधिकारी के विरूद्ध अवैध कॉलोनी विकसित होने पर, क्‍या कार्यवाही की गई है? यदि नहीं, तो क्‍या यह माना जावेगा कि आयुक्‍त द्वारा अवैध व्‍यपवर्तन की रिपोर्ट पर कार्यवाही करने का जानबूझकर लोप किया है? (घ) क्‍या निगमायुक्‍त अवैध कॉलोनी निर्माण की भूमि का प्रबंध ग्रहण न करने के लिये उत्‍तरदायी हैं, जिनके द्वारा जानबूझकर म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता 1959 (क्रमांक-20) एवं म.प्र. नगर पालिक निगम अधिनियम की धारा 292 (च) तथा धारा 292 (ड.) के तहत कार्यवाही नहीं की गयी है? (ड.) प्रश्‍नांश (ख) से (घ) तक अधिनियम के तहत कार्यवाही न करने का कौन जिम्‍मेदार है, जिम्‍मेदार शासकीय सेवकों पर क्‍या कार्यवाही कब तक की जायेगी? यदि नहीं, तो क्‍यों?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। अवैध निर्माताओं के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने से शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी नहीं। प्रश्‍नांकित अधिकारियों द्वारा विधि सम्‍मत कार्यवाही उत्‍तरांश (ख) अनुसार किये जाने से प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) जी नहीं। प्राधिकृत अधिकारी द्वारा म.प्र. नगर पालिका (कॉलोनाईजर का रजिस्‍ट्रीकरण निर्बंधन एवं शर्तें) नियम 1998 में वर्णित प्रक्रिया, प्रावधानों एवं राज्‍य शासन के निर्देशानुसार, अवैध कॉलोनियों के नियमितीकरण की कार्यवाही की जा रही है। (ड.) म.प्र. नगर पालिका अधिनियम 1956 की धारा 292 (ग) एवं म.प्र. नगर पालिका (कॉलोनाईजर का रजिस्‍ट्रीकरण निर्बंधन एवं शर्तें) नियम 1998 में वर्णित प्रक्रिया व प्रावधानों के अनुसार प्राधिकृत अधिकारी द्वारा अवैध कॉलोनी निर्माताओं के विरूद्ध कार्यवाही की गई है, जिसमें शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्‍योपुर जिले में मूंझरी बांध का निर्माण

18. ( *क्र. 610 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) श्‍योपुर जिले में ग्राम गोरस में माननीय श्री नरेन्‍द्र सिंह जी तोमर केन्‍द्रीय मंत्री द्वारा ग्रामवासियों को संबोधित करने के उपरांत माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने मोबाईल पर उपस्थित जनता को संबोधित करते हुए मूंझरी बांध का निर्माण कराये जाने की घोषणा की थी? (ख) दिनांक 28.04.2016 को सम्‍पन्‍न जिला योजना समिति की बैठक में जल संसाधन विभाग द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनांतर्गत मूंझरी बांध निर्माण हेतु राशि 251.57 करोड़ का प्रस्‍ताव अनुमोदन उपरांत शासन/केन्‍द्र सरकार को स्‍वीकृति हेतु भेजा है? यदि हाँ, तो प्रस्‍ताव वर्तमान में किस स्‍तर पर परीक्षणाधीन है, परीक्षण कार्य कब तक पूर्ण हो जावेगा? (ग) क्‍या उक्‍त बांध के निर्माण उपरांत जिले की 5600 हेक्‍टेयर असिंचित भूमि में सिंचाई होने लगेगी, इसी कारण जिलेवासी उक्‍त बांध निर्माण की मांग कई दशकों से करते चले आ रहे हैं? (घ) यदि हाँ, तो क्‍या शासन उक्‍त बांध निर्माण हेतु समस्‍त विधिमान्‍य प्रक्रियाओं को शीघ्र पूर्ण कराकर उक्‍त घोषणा के पालन में जल संसाधन विभाग द्वारा प्रेषित उक्‍त प्रस्‍ताव को स्‍वीकृत करके केन्‍द्र सरकार से भी इसकी स्‍वीकृति अविलंब करवाएगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) जी नहीं, अभिलेखों के मुताबिक मूंझरी बांध की घोषणा किये जाने का लेख नहीं है। (ख) से (घ) कृषि विभाग के अधीन प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत श्‍योपुर जिले की आयोजना में मूंझरी परियोजना शामिल की जाना प्रतिवेदित है। मूंझरी परियोजना जल संसाधन विभाग के तकनीकी वित्‍तीय मापदण्‍डों पर साध्‍य नहीं पाई गई है। अत: परियोजना की स्‍वीकृति दी जाना अथवा निर्माण कराया जाना संभव नहीं है।

निविदाओं में अनावश्‍यक पी.क्‍यू.आर. लागू किया जाना

19. ( *क्र. 1744 ) श्री रामेश्‍वर शर्मा : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र.पा.ज.कं.लि. में निविदाओं की पी.क्‍यू.आर. तय करने हेतु किस स्‍तर के अधिकारी सक्षम हैं और किस स्‍तर के अधिकारी की अनुमति जरूरी है? क्‍या म.प्र.पा.ज.कं.लि. में पिछले दो वित्‍तीय वर्षों में विभिन्‍न छोटी-छोटी निविदाओं में लागू की गई पी.क्‍यू.आर. हेतु सक्षम अधिकारी की स्‍वीकृति ली गई है? क्‍या इस मामले में जाँच करवाई जाएगी? (ख) म.प्र.पा.ज.कं.लि. की निविदाओं में क्‍या साफ-सफाई के कार्य और वाहन किराए पर लेने सहित सभी छोटे-मोटे कार्यों में भी पी.क्‍यू.आर. की शर्तें लगायी जाती है? यदि हाँ, तो क्‍या यह उचित है? इससे संबंधित नियमों की प्रति उपलब्‍ध करवायें (ग) प्रश्‍नांश (ख) यदि नहीं, तो सारनी पावर हाउस के पी.एण्‍ड.डब्‍लू. विभाग द्वारा ऐसे सभी कार्यों पर पी.क्‍यू.आर. क्‍यों लागू किया जा रहा है? इस मामले में दोषियों पर क्‍या कार्यवाही की जाएगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) म.प्र. पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड (म.प्र.पा.ज.कं.लि.) में निविदाओं की पी.क्‍यू.आर. तय करने हेतु निविदाकर्ता अधिकारी, जो कि कार्यालय प्रमुख या विद्युत गृह प्रमुख होते हैं, ही सक्षम अधिकारी हैं, इन्‍हीं की स्‍वीकृति/अनुमोदन उपरांत निविदाएँ जारी की जाती हैं। विगत दो वित्‍तीय वर्षों में जारी विभिन्‍न निविदाओं में लागू की गई पी.क्‍यू.आर. की सक्षम अधिकारी से अनुमोदन/स्‍वीकृति ली गई है। अत: जाँच की आवश्‍यकता नहीं है। (ख) म.प्र.पा.ज.कं.लि. के प्रोक्‍यूरमेन्‍ट मेन्‍युअल में निहित निर्देशों के अनुसार निविदा में निविदाकर्ता की पात्रता एवं योग्‍यता इंगित करना आवश्‍यक है। अत: उपरोक्‍त नियमों का पालन करते हुए ही निविदाएं जारी की जाती हैं। जी हाँ, कार्य के सुचारू संपादन एवं गुणवत्‍ता हेतु यह आवश्‍यक है। प्रोक्‍यूरमेन्‍ट मेन्‍युअल में निहित निर्देशों एवं वाहन किराए पर लगाने संबंधी परिपत्र की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '1' एवं '2' अनुसार है। (ग) उत्‍तरांश () के परिप्रेक्ष्‍य में अपेक्षित नहीं।

नगरपालिका परिषद् वारासिवनी द्वारा संचालित सामुदायिक भवन

20. ( *क्र. 945 ) डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) बालाघाट जिले की नगरपालिका वारासिवनी द्वारा संचालित कुल कितने सामुदायिक भवन कहाँ-कहाँ, किस-किस स्‍थान पर संचालित हैं? वार्डवार जानकारी देवें (ख) इन सामुदायिक भवनों को सामाजिक कार्यों में उपयोग किया जा रहा है या किसी व्‍यक्ति विशेष द्वारा अपने व्‍यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग किया जा रहा है? यदि हाँ, तो जानकारी देवें (ग) वर्ष 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक नगरपालिका वारासिवनी को इन सामुदायिक भवनों से कितनी आय प्राप्‍त हुई? भवनवार जानकारी देवें (घ) सामुदायिक भवनों के रख-रखाव व मरम्‍मत हेतु 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक कितना व्‍यय किया गया है?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) नगर पालिका वारासिवनी, जिला बालाघाट द्वारा 4 सामुदायिक भवन संचालित हैं, जिनकी जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी हाँ। जी नहीं। (ग) वर्ष 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक सामुदायिक भवनों से कुल रू. 4,27,460/- की आय हुई जिसकी जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (घ) वर्ष 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक चारों सामुदायिक भवनों के रख रखाव पर व्‍यय राशि रू. 38,940/- है।

परिशिष्ट - ''दो''

माननीय न्‍यायालयों में गौण खनिज खनन के चल रहे प्रकरण

21. ( क्र. 1552 ) श्री रजनीश सिंह : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) माननीय म.प्र. उच्‍च न्‍यायालय माननीय, उच्‍चतम न्‍यायालय एवं माननीय ग्रीन ट्रिब्‍यूनल म.प्र. में खनिज विभाग से संबंधित गौण खनिज के खनन के चल रहे प्रकरणों के संबंध में जानकारी संधारित किये जाने, प्रकरणों में विभाग की ओर से उपस्थित होने बाबत् वर्तमान में क्‍या व्‍यवस्‍था है? संचालनालय खनिकर्म एवं भौमिकी कार्यालय में क्‍या व्‍यवस्‍था है? (ख) गत तीन वर्षों में किन न्‍यायालयों या ग्रीन ट्रिब्‍यूनल के द्वारा किस-किस गौण खनिज के खनन पर रोक लगाए जाने या स्‍थगन दिए जाने के आदेश किस प्रकरण क्रमांक दिनांक में दिए, उसके अनुसार संचालनालय भोपाल ने किस दिनांक को किस-किस को पत्र जारी किए? (ग) उपरोक्‍त अवधि में न्‍यायालयीन आदेश के अनुसार किस-किस अवधि में किस जिले में रेत के खनन पर रोक लगाई गई एवं इस रोक को किस दिनांक के आदेश से हटाया गया?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) न्‍यायालयीन प्रकरणों में शासन पक्ष प्रतिरक्षण हेतु प्रभारी अधिकारी नियुक्‍त किये जाते हैं। प्रभारी अधिकारी द्वारा यथास्थिति, शासकीय अधिवक्‍ता अथवा स्‍थायी अधिवक्‍ता के माध्‍यम से जबाव दावा तैयार कर माननीय न्‍यायालय में प्रस्‍तुत किया जाता है। संचालनालय, भौमिकी तथा खनिकर्म में प्रकरणों के संबंध में पंजी संधारित है। (ख) प्रश्‍नांश से संबंधित जानकारी पृथक से संधारित नहीं की जाती है। प्रकरण विशेष में न्‍यायालयीन आदेश के अनुरूप निर्देश जारी किये जाते हैं। प्रश्‍नांश में किसी प्रकरण विशेष की जानकारी नहीं चाही गई है। अत: शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्‍नांश में चाही गई जानकारी किसी प्रकरण विशेष से न होने के कारण प्रश्‍नांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

विधान सभा क्षेत्र निवाड़ी अंतर्गत स्‍टेडियम का निर्माण

22. ( *क्र. 2141 ) श्री अनिल जैन : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या विधान सभा क्षेत्र निवाड़ी के अंतर्गत निवाड़ी नगर में एक स्‍टेडियम निर्माण की घोषणा प्रदेश के माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा वर्ष 2012 में की गई थी। यदि हाँ, तो क्‍या इसका प्राक्‍कलन नगर परिषद निवाड़ी के द्वारा सक्षम अधिकारी तक स्‍वीकृति हेतु भेजा गया है। यदि हाँ, तो स्‍वीकृति किस स्‍तर पर लंबित है। कारण सहित बताया जावे। (ख) उक्‍त स्‍टेडियम की स्‍वीकृति प्राप्‍त होकर कब तक कार्य प्रारंभ हो सकेगा।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। संचालनालय, नगरीय प्रशासन एवं विकास द्वारा योजना को तकनीकी स्‍वीकृति दी जा चुकी है। (ख) नगर परिषद द्वारा निविदा आदि की औपचारिकतायें पूर्ण करने के उपरांत कार्य प्रारंभ हो सकेगा। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

पथरिया विधानसभा क्षेत्रांतर्गत ग्रामों का विद्युतीकरण

23. ( *क्र. 3124 ) श्री लखन पटेल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र पथरिया में ऐसे कितने ग्राम हैं जो विद्युतीकरण से वंचित हैं? सूची उपलब्‍ध करावें। (ख) इन ग्रामों में विद्युतीकरण का कार्य कब तक किया जावेगा? (ग) विधानसभा क्षेत्र पथरिया में ऐसे कितने ग्राम हैं, जो विद्युतीकरण से छूटे हैं? सूची उपलब्‍ध करावें (घ) क्‍या इन ग्रामों को दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में विद्युतीकरण हेतु शामिल कर लिया गया है? यदि हाँ, तो इनका विद्युतीकरण कार्य कब तक हो जावेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) दमोह जिले के पथरिया विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत 2 वनबाधित ग्राम यथा-सेमर कछार एवं चूना सगोनी (डी-इलेक्ट्रिफाईड ग्राम) विद्युतीकरण से वंचित हैं। (ख) ग्राम सेमर कछार के विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण हो गया है तथा ग्राम का ऊर्जीकरण यथाशीघ्र कर दिया जायेगा। डी-इलेक्ट्रिफाईड ग्राम चूना सगोनी के सघन विद्युतीकरण का कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में सम्मिलित है, वन विभाग से अनुमति प्राप्‍त करने तथा टर्न-की ठेकेदार के कार्य कराए जाने हेतु निविदा कार्यवाही पूर्ण होने के उपरांत उक्‍त ग्राम के सघन विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण किया जा सकेगा, जिस हेतु वर्तमान में समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ग) उत्‍तरांश (क) में उल्‍लेखित दो वनबाधित ग्रामों में वर्तमान में विद्युत सुविधा उपलब्‍ध नहीं है। (घ) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार पथरिया विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत वर्तमान में 2 ग्राम यथा-सेमर कछार तथा चूना सगोनी विद्युत सुविधा विहीन हैं। दोनों ग्राम दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में शामिल हैं। ग्राम सेमर कछार वनबाधित अविद्युतीकृत ग्राम है, जिसके विद्युतीकरण हेतु वन विभाग से अनुमति प्राप्‍त हो चुकी है तथा वर्तमान में विद्युतीकरण का कार्य वितरण कंपनी द्वारा विभागीय स्‍तर पर पूर्ण कर लिया गया है, किन्‍तु ऊर्जीकरण का कार्य वर्तमान में प्रगति पर है, जिसे यथाशीघ्र पूर्ण कर लिया जायेगा। ग्राम चूना सगोनी वनबाधित डी-इलेक्ट्रिफाईड ग्राम है, जो दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में सघन विद्युतीकरण हेतु प्रस्‍तावित है। वन विभाग से अनुमति प्राप्‍त किये जाने हेतु प्रस्‍ताव योजना के अंतर्गत दिये गये प्रावधानों के अनुसार बनाया जा रहा है। उक्‍त ग्राम सहित दमोह जिले हेतु दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के अंतर्गत कार्य टर्न-की आधार पर ठेके से कराये जाने हेतु निविदा कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में ग्राम चूना सगोनी के सघन विद्युतीकरण के कार्य पूर्ण होने की समय-सीमा वर्तमान में बता पाना संभव नहीं है।

कलेक्‍टरों के खिलाफ दर्ज प्रकरण

24. ( *क्र. 2364 ) श्रीमती ऊषा चौधरी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश के सभी जिलों में पदस्‍थ कलेक्‍टरों में से कितने जिलों के कलेक्‍टरों के विरूद्ध राज्‍य आर्थिक अपराध अन्‍वेषण ब्‍यूरो द्वारा प्रकरण पंजीकृत किये गये हैं? जिलेवार जानकारी देवें। (ख) क्‍या सतना कलेक्‍टर नरेशपाल कुमार जो नरसिंहपुर कलेक्‍टर रहते अवैध रेत खनन में पकड़े गये, 150 वाहनों को 50 हजार के मान से करीब 37 लाख रूपये बतौर रिश्‍वत लेकर छोड़ने के मामले में उनके खिलाफ राज्‍य आर्थिक अपराध अन्‍वेषण ब्‍यूरो द्वारा प्रकरण क्र. आर-950/2016 पंजीकृत किया गया है? क्‍या उक्‍त प्रकरण के अलावा भी भ्रष्‍टाचार के मामले लंबित हैं? यदि है, तो विवरण सहित बताएं। (ग) क्‍या कटनी कलेक्‍टर प्रकाश जांगरे व जिला आबकारी अधिकारी आर.सी. त्रिवेदी द्वारा वर्ष 2016-17 में फर्जी डिमान्‍ड ड्राफ्ट से 62 शराब दुकानों को आवंटन मामले में लोकायुक्‍त पुलिस ने एफ.आई.आर. दर्ज कर धारा 7,13 बी की भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है? क्‍या राज्‍य सरकार द्वारा कार्यवाही करते हुए कटनी कलेक्‍टर को मंत्रालय अटैच कर लिया गया व जिला आबकारी अधिकारी कटनी को हटाते हुए ग्‍वालियर पदस्‍थ किया गया है? (घ) यदि प्रश्‍नांश (ग) हाँ तो सतना कलेक्‍टर नरेश पाल कुमार के विरूद्ध राज्‍य आर्थिक अपराध अन्‍वेषण ब्‍यूरो द्वारा प्रकरण पंजीकृत करने के बाद भी इन्‍हें क्‍यों नहीं हटाया गया, कारण बताएं? कब तक राज्‍य सरकार द्वारा इन्‍हें भी कलेक्‍टर पद से हटाकर मंत्रालय में अटैच किया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी निरंक। (ख) जी नहीं। बल्कि सतना कलेक्‍टर श्री नरेश कुमार पाल के विरूद्ध आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ में शिकायत आर क्रमांक 950/2016 आवक हुई है, जो जांचाधीन है। श्री पाल के विरूद्ध भ्रष्‍टाचार के कोई मामले लंबित नहीं हैं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी हाँ। श्री प्रकाश जांगरे, कलेक्‍टर कटनी एवं श्री आर.सी. त्रिवेदी, जिला आबकारी अधिकारी कटनी को प्रशासकीय आधार पर क्रमश: उप सचिव, म.प्र. मंत्रालय एवं उपायुक्‍त आबकारी संभागीय उड़नदस्‍ता संभाग ग्‍वालियर में पदस्‍थ किया गया है। (घ) उत्‍तरांश (ख) के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

विकास खण्‍ड चन्‍देरी व ईसागढ़ में इमारतों का संरक्षण

25. ( *क्र. 1996 ) श्री गोपालसिंह चौहान (डग्‍गी राजा) : क्या राज्‍यमंत्री, संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला अशोक नगर के विकासखण्‍ड चन्‍देरी एवं ईसागढ़ के पुरातत्‍व विभाग द्वारा कितनी इमारतों का संरक्षण घोषित किया गया है? (ख) संरक्षित इमारतों के जीर्णोद्धार एवं रख-रखाव में कितनी राशि खर्च की गई है?

राज्‍यमंत्री, संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) जिला अशोक नगर के विकासखण्‍ड चंदेरी में पुरातत्‍व विभाग द्वारा 53 स्‍मारकों को संरक्षित घोषित किया गया है एवं ईसागढ़ में विभाग का कोई स्‍मारक संरक्षित नहीं है. (ख) 13वें वित्‍त आयोग के अंतर्गत चंदेरी, जिला अशोक नगर स्थित राज्‍य संरक्षित 13 स्‍मारकों पर कुल राशि रूपये 63,47,333/- व्‍यय की गई एवं विभागीय बजट से वित्‍तीय वर्ष 2005-06 में एक स्‍मारक पर कुल राशि रूपये 1,96,930/- व्‍यय की गई.

 


 


 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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भाग-2

नियम 46 (2) के अंतर्गत अतारांकित प्रश्नोत्तर के रुप में परिवर्तित तारांकित प्रश्नोत्तर


ठेकेदार द्वारा अवैध वसूली

1. ( क्र. 26 ) डॉ. मोहन यादव : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सिंहस्‍थ महापर्व पर महाकालेश्‍वर मंदिर पर कल्‍याणी किसान उत्‍थान समिति को जूते चप्‍पल के संबंध में दिये गये ठेके की विज्ञप्ति, टेण्‍डर, अनुबंध आदि की प्रमाणित प्रति उपलब्‍ध करावें? उक्‍त ठेका कितने रूपये प्रति नग की दर पर स्‍वीकृत किया गया था? (ख) प्रश्‍नांश (क) की जानकारी अनुसार यह बतायें कि वर्तमान में 10 पैसे चलन में है अथवा नहीं? यदि नहीं, तो 10 पैसे प्रति नग की दर पर ठेका स्‍वीकृत करने के क्‍या आधार रहे? उक्‍त ठेके को किस अधिकारी के द्वारा स्‍वीकृत किया गया? चलन से बाहर राशि का ठेका स्‍वीकृत करने वाले दोषी अधिकारी के विरूद्ध कब तक कार्यवाही की जावेगी? उक्‍त ठेकेदार द्वारा अवैध राशि वसूली के संबंध में कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुई? शिकायतों पर की गई कार्यवाही की प्रति उपलब्‍ध करावें? (ग) प्रश्‍नांश (ख) की जानकारी अनुसार क्‍या संबंधित सक्षम अधिकारी द्वारा अवैध राशि वसूल किये जाने की शिकायत प्राप्‍त होने के पश्‍चात् भी ठेकेदार के विरूद्ध वसूली से संबंधित कोई कार्यवाही नहीं की गई? यदि हाँ, तो क्‍यों? क्‍या भविष्‍य में वसूली से संबंधित कोई कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो समयावधि बतावें? यदि नहीं, तो कारण बतावें?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है, उक्‍त ठेका 10 पैसे प्रति जोड़ न्‍यूनतम दर पर स्‍वीकृत किया गया था। (ख) जी नहीं। दिनांक 17.04.2016 को जिला-कलेक्‍टर, उज्‍जैन की अध्‍यक्षता में हुई बैठक में लिये गये निर्णयानुसार संक्षिप्‍त विज्ञप्ति जारी कर निविदा बुलाई गई जिस पर दिनांक 20.04.2016 तक प्राप्‍त 02 निविदाओं में से कल्‍याणी किसान उत्‍थान समिति को स्‍वीकृत किया गया था, प्रशासक एवं अपर कलेक्‍टर, श्री महाकालेश्‍वर मंदिर प्रबंध समिति, उज्‍जैन द्वारा स्‍वीकृत किया गया। न्‍यूनतम दर की निविदा स्‍वीकृत की जाने से कोई अधिकारी दोषी नहीं है। मौखिक रूप से प्राप्‍त शिकायतें तथा दैनिक भास्‍कर समाचार पत्र में दिनांक 01.05.2016 को ठेकेदार द्वारा अवैध राशि वसूली के संबंध में समाचार प्रकाशित हुआ था जिस पर ठेकेदार को निर्धारित दर पर राशि वसूली करने के लिये सचेत किया गया तथा लिखित रूप से चेतावनी दी गई। (ग) लिखित शिकायत तथा अवैध वसूली की निश्चित राशि ज्ञात न होने से ठेकेदार के विरूद्ध कार्यवाही नहीं की गई, किंतु निविदा शर्तों का उल्‍लंघन होने से कलेक्‍टर, जिला-उज्‍जैन के आदेश दिनांक 13.05.2016 से उक्‍त जूता स्‍टैण्‍ड का ठेका तत्‍काल प्रभाव से निरस्‍त किया गया एवं निविदाकार द्वारा जमा की गई धरोहर राशि रूपये 25,000/- राजसात कर ली गई।

विभागीय पदोन्‍नति

2. ( क्र. 30 ) डॉ. मोहन यादव : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) परि.अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या 89 (क्रमांक 7492) दिनांक 01.04.2016 के प्रश्‍नांश (ग) की जानकारी में सिर्फ नगर परिषद् माकडोन के संबंध में संचालनालय के पत्र का ही उल्‍लेख किया गया है? यदि हाँ, तो क्‍या कार्यालय संभागीय उपसंचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास उज्‍जैन संभाग उज्‍जैन के पत्र क्रमांक स्‍था/न.पा./2013/2069, दिनांक 03/08/016 द्वारा आयुक्‍त नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग म.प्र. शासन भोपाल से नगर पालिका परिषद् खाचरौद राजस्‍व उपनिरीक्षक के पद पर पदोन्‍नति हेतु मार्गदर्शन मांगा है तथा वरिष्‍ठता सूची में निचले क्रम में होने के पश्‍चात् भी इसी तरह के अन्‍य प्रकरण में विभागीय पदोन्‍नति कर दी गई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) का जवाब हाँ है तो सदन में उक्‍त जानकारी को छुपाने एवं गलत जानकारी देने के लिये कौन अधिकारी दोषी हैं। दोषियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही कब तक की जावेगी? यदि नहीं, तो क्‍यों?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। वस्‍तुत: संभागीय उप संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, उज्‍जैन संभाग द्वारा प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित पत्र क्रमांक- स्‍था/न-पा/2013/2069, दिनांक 03.08.2016 तो नहीं वरन् पत्र क्रमांक-स्‍था/न-पा/13/2069, दिनांक 03.08.2013 द्वारा सहायक राजस्‍व निरीक्षक की वरिष्‍ठता सूची के छठवें क्रम में अंकित कर्मचारी की वरिष्‍ठता सूची क्रमांक-1 से 5 तक के कर्मचारी द्वारा दिए गए शपथ पत्र के आधार पर पदोन्‍नति दी जा सकती है अथवा नहीं के संबंध में मार्गदर्शन चाहा गया, परन्‍तु इस बीच माननीय उच्‍च न्‍यायालय खण्‍डपीठ, इन्‍दौर में श्री शंकर लाल गोसर, सहायक राजस्‍व निरीक्षक, खाचरौद जो वरिष्‍ठता सूची में दूसरे नंबर पर थे, द्वारा दायर याचिका क्रमांक 7886/2014 में माननीय के आदेश दिनांक 11.11.2014 के परिपालन में उक्‍त प्रकरण में दिनांक 02.05.2015 को संभागीय संयुक्‍त संचालक द्वारा जिला चयन समिति की कार्यवाही पूर्ण करते हुए वरिष्‍ठ सहायक राजस्‍व निरीक्षक, श्री रामेश्‍वर रायकवार की पदोन्‍नति राजस्‍व उप निरीक्षक के पद पर किये जाने की अनुशंसा की गई। (ख) माननीय उच्‍च न्‍यायालय के आदेश के परिपालन में जिला चयन समिति की कार्यवाही संभागीय संयुक्‍त संचालक, उज्‍जैन संभाग द्वारा पूर्ण किये जाने के कारण प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित पत्र का उल्‍लेख उत्‍तर में नहीं किया गया था। माननीय उच्‍च न्‍यायालय के आदेश के परिपालन में की गयी कार्यवाही किये जाने के कारण शेषांश उपस्थित नहीं होता।

उद्योग विभाग की भूमि पर अवैध खनन

3. ( क्र. 66 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या 09 जून 2016 अशोकनगर शहर से 2 किलोमीटर दूर पलकटोरी गांव में उद्योग विभाग की भूमि पर अवैध उत्‍खनन के कारण जब अवैध जेसीबी डम्‍पर पोर्सलेन ट्रैक्‍टर आदि जब जप्‍त कर तहसीलदार, पुलिस पटवारी आदि ले जा रहे थे तब विवेकानंद स्‍कूल के पास अजयपाल, यादवेन्‍द्र व बीस शस्‍त्रों से लैस लोगों ने हमला व दुर्व्‍यवहार कर वाहन छुड़ा लिया? उन पर किस-किस धारा में प्रकरण दर्ज हुआ व 20 लोगों में कितने गिरफ्तार हुए व बाकि कब तक हो जायेंगे? (ख) पलकटोरी उद्योग विभाग की खदान में पिछले 3 वर्षों में सैकड़ों टन अवैध खनन का आंकलन कर कब तक जुर्माना करेंगे? (ग) उक्‍त वाहन जिस भोंसले के बाड़े में से जप्‍त किये उस पर अतिक्रमण कर किस व्‍यक्ति का कब्‍जा है तथा क्‍या इस अतिक्रमण को हटाने के लिए माननीय उद्योग मंत्री ने पत्र क्रमांक 2261/min/C&I/2014 दिनांक 16.09.2014 व माननीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री का पृ.क्रमांक/417 भोपाल दिनांक 20.10.14 को जिलाधीश अशोकनगर को लिखा था तथा पूर्व में इन भूमि पर तत्‍कालीन जिलाधीश गुना श्रीमती नीलम राव ने कब्‍जा पुलिस की मदद से हटाया था तथा इस परिसर का उपयोग अवैध उत्‍खनन के वाहन व सामग्री रखने को किया जा रहा है तो अवैध गतिविधियों के केन्‍द्र इस शासकीय भूमि पर पुन: जिला प्रशासन अपने कब्‍जें में कब तक लेगा ताकि वहां अवैध खनन की साम्रगी व अवैध खनन करने वाले वाहन नहीं रखे जा सके?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। उन पर अपराध क्रमांक 266/16 में धारा 353, 341, 186, 379, 147, 148 एवं 149 का प्रकरण कायम कर विवेचना में लिया है। आरोपी घटना दिनांक से फरार है। प्रकरण विवेचना में है। आरोपीगणों की गिरफ्तारी के हर संभव प्रयास जारी हैं। (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित व्‍यक्तियों के विरूद्ध उद्योग विभाग की ग्राम पलकटोरी की भूमि पर 1,02,640 घन मीटर मुरम के अवैध उत्‍खनन का प्रकरण कलेक्‍टर, न्‍यायालय में दर्ज किया गया है। जिसमें राशि रूपये 10,26,40,000/- का अर्थदण्‍ड आरोपियों के विरूद्ध आरोपित किया गया है। प्रकरण न्‍यायालय कलेक्‍टर, अशोकनगर के समक्ष विचाराधीन है। प्रकरण न्‍यायालयीन प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है, अत: वसूली किये जाने की समयावधि बताया जाना वर्तमान में संभव नहीं है। (ग) कस्‍बा अशोकनगर की भूमि सर्वे नम्‍बर 555/2 रकबा 1.0456 हेक्‍टेयर के अंश भाग 100X100 वर्ग फूट पर गजराम सिंह पुत्र अलोल सिंह यादव निवासी खानपुर, तहसील चंदेरी द्वारा बाउण्‍ड्रीवॉल बनाकर अतिक्रमण किया गया है। न्‍यायालय तहसीलदार अशोकनगर द्वारा प्रकरण क्रमांक 0868/13-14 में आदेश दिनांक 10.02.2014 से अतिक्रामक को बेदखल किये जाने का आदेश पारित किया गया है। जिसमें माननीय उच्‍च न्‍यायलय खण्‍डपीठ ग्‍वालियर द्वारा डब्‍लू.पी. 8034/2014 में पारित आदेश दिनांक 22.12.2014 द्वारा स्‍थगन आदेश दिया गया था। माननीय राजस्‍व मंडल, ग्‍वालियर द्वारा दिनांक 22.09.2016 तक अधीनस्‍थ न्‍यायालय के आदेश के क्रियान्‍वयन को स्‍थगित किया गया है। इसलिए वर्तमान में कोई कार्यवाही किया जाना संभव नहीं है।

 

विधायकों के पत्रों पर कार्यवाही

4. ( क्र. 83 ) श्री गिरीश भंडारी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधायक के पत्रों के उत्‍तर देने/विधायक की अवमानना होने के शासकीय नियम क्‍या हैं? (ख) प्रश्‍नकर्ता विधायक ने दिनांक 16/06/16 को पत्र क्र. 1122/MLA/16 से प्रमुख सचिव सामान्‍य प्रशासन विभाग, भोपाल को पत्र लिखकर नरसिंहगढ़ नगर पालिका के तत्‍कालीन मुख्‍य नगर पालिका अधिकारी द्वारा सड़कों के भूमिपूजन कार्यक्रम के आमंत्रण में नाम नहीं छापने व विधायक की अवमानना करने हेतु अवगत कराया था? (ग) प्रश्‍नांश (क) में उपलब्‍ध कराये गये शासकीय नियमों के आधार पर प्रश्‍न दिनांक तक शासन ने किस-किस दिनांक को क्‍या-क्‍या कार्यवाही की तथा पत्र लिखे? उन पत्रों के उत्‍तर तथा शासन द्वारा किस दिनांक को क्‍या कार्यवाही की है? जानकारी उपलब्‍ध करावें? (घ) प्रश्‍नांश की कंडिका (क), (ख) (ग) के आधार पर यदि निर्वाचित विधायक की अवमानना हुई है, तो शासन द्वारा दोषी अधिकारी के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की है? यदि कार्यवाही नहीं की, तो क्‍यों नहीं?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जी हाँ। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) दोषी अधिकारी के विरूद्ध नियमानुसार अनुशासनात्‍मक कार्यवाही करने हेतु कलेक्‍टर राजगढ़ को निर्देशित किया गया है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

पेयजल टैंकर क्रय बाबत् एजेंसियां

5. ( क्र. 87 ) श्री हरवंश राठौर : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधायक विकास निधि से पेयजल टैंकर किन-किन एजेंसियों द्वारा क्रय किए जा सकते हैं? (ख) वर्ष 2016-17 में सागर जिले की किन-किन विधानसभाओं में किन-किन एजेंसियों द्वारा पेयजल टैंकर क्रय किए गए हैं? विधानसभावार सूची उपलब्‍ध कराएं। (ग) क्‍या पेयजल टैंकर हेतु एजेंसियां अधिकृत थी?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना की मार्गदर्शिका में पेयजल टैंकर हेतु एजेन्सियों का उल्लेख नहीं है। (ख) वर्ष 2016-17 में सागर जिले के विधानसभा क्षेत्रों में मान. विधायकों की अनुशंसा अनुसार पेयजल टैंकर क्रय की सूची विधानसभा क्षेत्रवार पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) प्रश्नांश '''' के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

जनभागीदारी योजनांतर्गत स्‍वीकृत कार्य

6. ( क्र. 89 ) श्री हरवंश राठौर : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्रांतर्गत बण्‍डा/शाहगढ़ में जनभागीदारी योजनांतर्गत कौन-कौन से कार्य स्‍वीकृत किए गए हैं? बण्‍डा/शाहगढ़ विकासखण्‍ड की सूची उपलब्‍ध कराई जावे? (ख) क्‍या पक्‍के निर्माण कार्यों पर ही जनभागीदारी की राशि दी जावेगी? अन्‍य अर्थवर्क, मुरम, बोल्‍डर आदि कार्य पर नहीं? (ग) जनभागीदारी योजनांतर्गत शासन आदेश की प्रति उपलब्‍ध कराई जाए?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ख) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जनभागीदारी योजना के नियम की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है।

सामुदायिक विकास भवन पर अवैध कब्‍जा

7. ( क्र. 107 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) अशोकनगर शहर में तायडे कॉलोनी में नगरपालिका द्वारा बनाया गया सामुदायिक विकास भवन किस निजी व्‍यक्ति ने मंदिर के नाम पर बाउण्ड्री बनाकर अपने कब्‍जे में कर लिया है तथा अपना कार्यालय व गतिविधियाँ कितने वर्षों से वहां की जा रही है? विवरण दें तथा उक्‍त अतिक्रमण हटाने हेतु शासन ने इतने वर्षों में कार्यवाही क्‍यों नहीं की? कब तक कब्‍जा हटवाया जायेगा? (ख) प्रश्‍नकर्ता द्वारा इस संबंध में जिलाधीश अशोकनगर एवं भोपाल में अधिकारियों को लिखे पत्र पर क्‍या कार्यवाही हुई?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) अशोकनगर शहर में वार्ड 02 अंतर्गत तायडे कॉलोनी में सामुदायिक विकास भवन श्री लखन यादव पुत्र श्री सनमान सिंह यादव द्वारा अतिक्रमण करने की शिकायत वर्ष 2013 में प्राप्‍त हुई थी, उक्‍त भवन पर कोई कब्‍जा नहीं था, भवन का उपयोग आम नागरिकों द्वारा किया जा रहा था, इस संबंध में कार्यालयीन पत्र क्रमांक 3014 दिनांक 31.10.2013 द्वारा अपर कलेक्‍टर जिला अशोकनगर को अवगत कराया गया था। माह जुलाई 2016 में श्री लखन यादव पुत्र श्री सनमान सिंह यादव का अवैध कब्‍जा पाये जाने पर उनसे खाली कराये जाने के लिये नगरीय निकाय द्वारा पत्र क्रमांक 4285 दिनांक 02.07.2016 से नोटिस जारी कर कार्यवाही प्रारंभ की गई है। (ख) जिलाधीश अशोकनगर को लिखे पत्र के अनुपालन में अनुविभागीय दण्‍डाधिकारी अशोकनगर को लिखे पत्र के अनुपालन में अनुविभागीय दण्‍डाधिकारी अशोकनगर के पत्र क्रमांक 970 दिनांक 07.07.2016 द्वारा उक्‍त सामुदायिक विकास भवन पर अतिक्रमण हटाने एवं कब्‍जे में लेने के संबंध में कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है।

कॉलोनाइजर द्वारा भवनों का निर्माण व बिक्री

8. ( क्र. 147 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) कटनी नगर निगम क्षेत्रान्‍तर्गत द्वारका सिटी कॉलोनाइजर द्वारा कितने डुपलेक्‍स/फ्लैटों का निर्माण किया जाकर विक्रय किया गया है? विक्रित डुपलैक्‍स/फ्लैट एवं अन्‍य भवनों की जानकारी दें? उक्‍त फ्लैटों का विक्रय विलेख किस-किस दिनांक को किया गया है नाम पता सहित विवरण दें? (ख) प्रश्‍नांश (क) के विक्रित भवनों/मकानों में किस-किस दिनांक को विद्युत कनेक्‍शन दिया गया है, विवरण दें? (ग) कालोनाइजर के भवनों में विद्युत कनेक्‍शन हेतु निरीक्षण रिपोर्ट किसके द्वारा कब लगाई गई तथा नगर निगम के किस अधिकारी ने भवनों का निरीक्षण किया?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) 71 डुप्‍लैक्‍स। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। भवनों का निरीक्षण नगर निगम, कटनी के किसी अधिकारी द्वारा नहीं किया गया है।

वन मंडल कटनी के कार्यों की जाँच

9. ( क्र. 152 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य द्वारा पत्र क्रमांक 86-87 दिनांक 13.04.2016 क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कटनी को लिखते हुए प्रतिलिपि कलेक्‍टर कटनी तथा वन मंडल अधिकारी को लिखकर कुछ कोयला आधारित उद्योग, कुछ आयल बेस्‍ड, कुछ विद्युत से वायर चलाने, फरनेस या उत्‍पाद को गरम करने की आवश्‍यकता होती है, जिसमें लकड़ी का उपयोग फ्यूज की तरह हो रहा है, जिस पर प्रश्‍नकर्ता ने ध्‍यान आकृष्‍ट किया गया था? उस पर शासन ने क्‍या कार्यवाही की है? यदि नहीं, तो क्‍यों इसके लिए कौन उत्‍तरदायी हैं? (ख) क्‍या कटनी जिले में लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है वर्ष 2014-15 से प्रश्‍न दिनांक तक कितनी शिकायतें शासन प्रशासन एवं क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी को किस-किस के द्वारा की गई है? क्‍या उनको सुना जाकर जाँच की गई? यदि नहीं, तो कब तक की जावेगी और अब तक न करने के लिए कौन उत्‍तरदायी हैं?

पशुपालन मंत्री ( श्री अंतरसिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा किसी भी उद्योग को लकड़ी का उपयोग फ्यूल के रूप में करने हेतु सम्मति प्रदान नहीं की गई है। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) जी नहीं। क्षेत्रीय कार्यालय, मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कटनी को प्रश्नाधीन अवधि में कुल 81 शिकायतें प्राप्त हुई है, जिन पर की गई कार्यवाही संबंधी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।

नागदा में उत्‍कृष्‍ट सड़क योजना की स्‍वीकृति

10. ( क्र. 188 ) श्री दिलीप सिंह शेखावत : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या नागदा शहर करीब 1 लाख से ऊपर की आबादी क्षेत्र है तथा पूर्व में विभाग द्वारा नगर पंचायतों, नगर पालिकाओं को उत्‍कृष्‍ट सड़क योजना का लाभ दिया गया है, जबकि नागदा नगर पालिका बड़ी होने एवं औद्योगिक शहर होने के बावजूद इसकी अनदेखी की गई है? (ख) क्‍या नागदा में उत्‍कृष्‍ट सड़क योजना प्रस्‍तावित है? यदि नहीं, है, तो कब तक इस योजना में सम्मिलित कर लिया जावेगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। जी नहीं। विभाग के अंतर्गत उत्‍कृष्‍ट सड़क योजना नाम की कोई योजना संचालित नहीं है। (ख) जी नहीं। शेषांश का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता है।

मध्‍य भारत एग्रो प्रोडक्‍ट कंपनी रजौआ से प्रदूषण

11. ( क्र. 196 ) इन्जी. प्रदीप लारिया : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या नरयावली विधानसभा क्षेत्र में स्थित मध्‍य भारत एग्रो प्रोडक्‍ट कंपनी/फैक्‍ट्री रजौआ से पर्यावरण को क्षति पहुँच रही है एवं इस संबंध में विभाग को शिकायतें प्राप्‍त हो रही है एवं प्रश्‍न दिनांक तक कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुई? (ख) मध्‍य भारत एग्रो प्रोडक्‍ट कंपनी से निर्मित खाद निर्माण का कार्य उपरांत कौन से अपशिष्‍ट पदार्थ/गैस बाहर निकलते है एवं अपशिष्‍ट पदार्थों से प्रदूषण न हो इस हेतु फैक्‍ट्री द्वारा क्‍या उपाय किये गये है? (ग) म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सागर द्वारा किन मानक/प्रमाणों को आधार मानकर कंपनी रहवासी एवं कृषि क्षेत्र में स्थित फैक्‍ट्री को अनापत्ति प्रमाण पत्र/फैक्‍ट्री स्‍थापित करने का प्रमाण पत्र किन मानक शर्तों पर दिया गया?

पशुपालन मंत्री ( श्री अंतरसिंह आर्य ) : (क) उद्योग में प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था होने से पर्यावरण को क्षति पहुँचने जैसी स्थिति नहीं है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रश्न दिनांक तक प्राप्त शिकायतों एवं उन पर की गई कार्यवाही संबंधी जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) खाद निर्माण की प्रक्रिया से सिलिका स्लंज (ठोस अपशिष्ट) हाइड्रो फ्लोरो सेली सेलिक एसिड (द्रवीय अपशिष्ट) तथा हाइड्रोजन फ्लोराईड, सिलिकोन टेट्रा फ्लोराईड गैस के रूप में निकलती है। मिक्सिंग प्रक्रिया वैक्यूम में होती है तथा उत्पन्न होने वाली गैसों को सक्शन कर स्क्रबिंग की जाती है। स्क्रबिंग तीन चरणों में होती है। स्क्रबिंग चैम्बर के द्रव की पीएच 3-4 होने पर जल को दो सेटलिंग टैंको में एकत्रित किया जाता है तथा सुपरनेटेट जल को पुनः प्रक्रिया में उपयोग कर लिया जाता है। उत्पन्न सिलिका स्लंज को उत्पाद में मिलाया जाता है। स्क्रबिंग गैसों के उत्सर्जन हेतु उद्योग द्वारा 50 मीटर चिमनी की स्थापना की गई है। (ग) मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण अधिनियम, 1974 तथा वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम,1981 के अंतर्गत सशर्त सम्मति प्रदान की गई है। वायु सम्मति पत्र में फ्लोरिन की मानक सीमा 10 मिग्रा./नार्मल घनमीटर, फ्लोराईड की मानक सीमा 25 मिग्रा./नार्मल घनमीटर तथा पर्टिकुलेट मैटर उत्सर्जन की मानक सीमा 150 मिग्रा./नार्मल घनमीटर निर्धारित की गई है।

परिशिष्ट - ''तीन''

जिर्णोधार कार्ययोजना की स्वीकृति

12. ( क्र. 210 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जावरा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जावरा तहसील एवं पिपलौदा तहसील में गिरते जल स्तर एवं सिंचाई सुविधा को बढ़ाए जाने हेतु नवीन तालाब निर्माण, तालाब जीर्णोधार,एवं नवीन स्टाप डेम बनाए जाने के साथ ही पुराने डेमों की मरम्मत एवं नहरों की मरम्मत के प्रस्ताव प्रश्‍नकर्ता द्वारा शासन/विभाग को वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनांक तक भेजे गए है? (ख) यदि हाँ, तो क्या शासन/विभाग को उपरोक्त क्षेत्रीय प्रस्ताव प्राप्त होकर उनकी कार्ययोजना बनाए जाने के निर्देश शासन/विभाग द्वारा दिए गए है? (ग) यदि हाँ, तो क्‍या शासन/विभाग के निर्देश पर उपरोक्त क्षेत्रीय प्रस्तावों पर कार्ययोजनाएं बनाई जाकर शासन/ विभाग को अग्रेषित की गयी है? (घ) यदि हाँ, तो उपरोक्त प्रस्तावों की कार्ययोजना को बजट में कब सम्मिलित किया जाकर इनकी स्वीकृतियां कब प्रदान की जाएगी? साथ ही इन कार्ययोजनाओं पर कार्य कब तक प्रारम्भ हो सकेगा?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) से (घ) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। उपलब्‍ध सीमित वित्‍तीय संसाधन पूर्व से स्‍वीकृत परियोजनाओं के लिए आबद्ध होने से नई परियोजनाओं की स्‍वीकृति के लिए समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''चार''

राजस्‍व भूमि पर हो रहे अवैध उत्‍खनन की जाँच

13. ( क्र. 295 ) श्री रामसिंह यादव : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शिवपुरी जिले में जून-2016 की स्थिति में राजस्‍व भूमि पर फर्शी-पत्‍थर, खण्‍डा-बोल्‍डर, रेत एवं मुरम का अवैध उत्‍खनन हुआ है? यदि हाँ, तो कहाँ-कहाँ पर कितनी-कितनी राजस्‍व भूमि पर किस-किस खनिज का अनुमानित कितना-कितना अवैध उत्‍खनन हुआ है? (ख) क्‍या विगत दो वर्षों में शिवपुरी जिले में राजस्‍व भूमि में फर्शी-पत्‍थर, खण्‍डा-बोल्‍डर, रेत एवं मुरम का अवैध उत्‍खनन हुआ है? जिसे रोकने की जिला प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई? यदि हाँ, तो क्‍यों और नहीं तो क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) क्‍या शिवपुरी जिले में विगत दो वर्षों में फर्शी-पत्‍थर, खण्‍डा-बोल्‍डर एवं रेत जब्‍त की गई है? यदि हाँ, तो कहाँ-कहाँ पर कब-कब कितना-कितना अनुमानित वर्णित खनिज किस-किस अधिकारी द्वारा जब्‍त किया गया? जब्‍त खनिज किसकी सुपुर्दगी में दिया गया? अंत में जब्‍त खनिज का क्‍या निराकरण किसके द्वारा किया गया? (घ) क्‍या अवैध उत्‍खनन रोकने के लिए शासन द्वारा जिला स्‍तर पर टास्‍क फोर्स का गठन किया गया है? यदि हाँ, तो विगत दो वर्षों में टास्‍क फोर्स की कब-कब मीटिंग हुई एवं टास्‍क फोर्स द्वारा मीटिंग में क्‍या निर्णय लिए गए? लिए गए निर्णय पर क्‍या कार्यवाही की गई?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नाधीन जिले में विगत 2 वर्षों में फर्शी-पत्‍थर, बोल्‍डर पत्‍थर, रेत एवं मुरम के अवैध उत्‍खनन के प्रकरण प्रकाश में आये हैं। प्रश्‍नांश की शेष जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-अ में दर्शित है। (ख) प्रश्‍नाधीन अवधि में शिवपुरी जिले में राजस्‍व भूमि में फर्शी-पत्‍थर, बोल्‍डर, मुरम तथा रेत के अवैध उत्‍खनन 19 प्रकरण दर्ज किये गये हैं। जिसमें से 17 प्रकरणों में रूपये 11,61,200/- का अर्थदण्‍ड आरोपित कर वसूल किये गये हैं। शेष दो प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) के न्‍यायालय में विचाराधीन है। प्रकरण में जिला प्रशासन द्वारा कार्यवाही की गई है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) वांछित जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-ब में दर्शित है। (घ) जी हाँ। विगत दो वर्षों में टास्‍क फोर्स की बैठक दिनांक 13.03.2014, 02.02.2015, 22.06.2015, 14.09.2015 एवं 16.05.2016 को आयोजित की गई तथा बैठक में खनिजों के अवैध उत्‍खनन, परिवहन एवं भण्‍डारण के रोकथाम हेतु निर्देश दिये गये। जिसके परिप्रेक्ष्‍य में संयुक्‍त एवं पृथक-पृथक कार्यवाहियां की गई हैं।

परिशिष्ट - '' पाँच''

गंभीर-चम्‍बल लिंक योजना

14. ( क्र. 335 ) श्री दिलीप सिंह शेखावत : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या वर्तमान में नर्मदा-गंभीर लिंक योजना पर शासन द्वारा कार्य किया जा रहा है? क्‍या यदि गंभीर नदी पर उन्‍हेल-रूपाखेड़ी तह. नागदा से गंभीर-चम्‍बल लिंक योजना प्रस्‍तावित की जाती है तो गंभीर का पानी ग्रेविटी से ही चंबल नदी में चला जावेगा? (ख) क्‍या नागदा औद्योगिक शहर होने से यहां के उद्योगों को पानी अधिक मात्रा में लगता है, जिससे गर्मी के दिनों में यह करीब दो माह बंद हो जाने एवं शासन को करोड़ों रूपये राजस्‍व की हानि होती है? (ग) यदि हाँ, तो उक्‍त योजना कब तक बना ली जावेगी? क्‍या इसमें की कोई योजना प्रस्‍तावित है?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। जी नहीं, क्‍योंकि रूपाखेड़ी पर नदी का लेवल लगभग 465 मीटर हैं। नागदा के नजदीक चंबल का लेवल भी लगभग 465 मीटर हैं। इन दोनों स्‍थानों को सीधा जोड़ने पर बीच में ऊँची रिज है जो लगभग 465 से 515 मीटर तक ऊँची और लगभग 25 कि.मी. लंबी है। अत: ग्रेविटी से पानी सीधे लिंक से नहीं जा सकता। (ख) जी हाँ। ग्रीष्‍मकाल में लगभग डेढ़ माह से दो माह पानी की पूर्ति नहीं होने से जल आधारित उद्योग बंद रहते हैं। (ग) उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। वर्तमान में ऐसी कोई योजना प्रस्‍तावित नहीं है।

राजगढ़ विधानसभा में कृषक अनुदान योजना

15. ( क्र. 345 ) श्री अमर सिंह यादव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग द्वारा प्रदेश में कृषक अनुदान योजना कब से प्रारंभ की गई? इस योजनांतर्गत क्‍या-क्‍या कार्य कराये जाने है? कितना अनुदान पर डी.पी. लगाये जाने का प्रावधान है? (ख) राजगढ़ जिले की विधानसभा क्षेत्र राजगढ़ में वर्ष 2013-14, 2014-15, 2015-16 में किन-किन ग्रामों में कृषक अनुदान योजनांतर्गत कितने कृषकों को कितने अनुदान पर डी.पी लगवाई गई है? (ग) राजगढ़ जिले की विधानसभा राजगढ़ में ऐसे कौन-कौन से ग्रामों में कितने कृषक ऐसे है जिनके द्वारा राशि भी जमा की जा चुकी है, परन्‍तु अनुदान की डी.पी. आज दिनांक तक नहीं लग पाई है? (घ) यदि आज दिनांक तक डी.पी. नहीं लग पाई है तो इसके लिये कौन दोषी है? कब तक डी.पी. लग पावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) प्रदेश में कृषक अनुदान योजना 01 अप्रैल, 2011 से प्रारंभ की गई है। इस योजनान्‍तर्गत विद्युत लाईन का विस्‍तार कर एवं आवश्‍यकता अनुसार ट्रांसफार्मर स्‍थापित कर कृषकों को स्‍थाई विद्युत पंप कनेक्‍शन प्रदाय किया जाना है। योजना के प्रावधानों के अनुसार वर्तमान में लघु एवं सीमान्‍त कृषकों (2 हेक्‍टेयर से कम के भूमि धारक) द्वारा रू. 7000 प्रति हार्सपावर तथा अन्‍य कृषकों द्वारा रू. 11200 प्रति हार्सपावर की दर से अंश राशि जमा करनी होती है। इस योजना में प्रत्‍येक कृषक हेतु रू. 1.5 लाख की राशि का प्राक्‍कलन स्‍वीकृत करने की सीमा निर्धारित की गई है तथा प्राक्‍कलन लागत एवं कृषक द्वारा प्रति हार्सपावर भुगतान की गई राशि के अंतर की राशि का भुगतान राज्‍य शासन द्वारा विद्युत वितरण कंपनियों को अनुदान के रूप में किया जाता है। (ख) राजगढ़ जिले के विधानसभा क्षेत्र राजगढ़ में वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16, में कृषक अनुदान योजना के अन्‍तर्गत स्‍थापित किये गये ट्रांसफार्मरों की ग्रामवार, कृषकवार एवं अनुदान राशि के विवरण सहित वर्षवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '', '' एवं '' अनुसार है। (ग) राजगढ़ जिले के विधानसभा क्षेत्र राजगढ़ में राशि जमा करने के उपरान्‍त वर्ष 2015-16 में 12 कृषकों एवं वर्ष 2016-17 में एक कृषक का कार्य लंबित है, जिनका कृषकवार एवं ग्रामवार विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (घ) उत्‍तरांश '' में उल्‍लेखित लंबित प्रकरणों में, सीमित वित्‍तीय उपलब्‍धता के कारण प्राक्‍कलन स्‍वीकृत नहीं किये जा सके थे। माह अप्रैल 2016 में उक्‍त कृषकों के पंपों के प्राक्‍कलन स्‍वीकृत कर कार्यादेश जारी कर दिये गये हैं तथा इनका कार्य माह अक्‍टूबर 2016 तक पूर्ण करवाने हेतु कार्यवाही की जा रही है।

मुख्‍यमंत्री स्‍वरोजगार योजना

16. ( क्र. 375 ) श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल : क्या राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुख्‍यमंत्री युवा स्‍वरोजगार योजना के अन्‍तर्गत इन्‍दौर जिले में 2013-14, 2014-15, 2015-16 में कितने-कितने आवेदन पत्र प्राप्‍त हुए? (ख) योजना के अंतर्गत प्राप्‍त आवेदनों में से कितने प्रकरणों का निराकरण किया गया, कितनों को योजना का लाभ प्राप्‍त हुआ? (ग) इस योजना के अंतर्गत कितने प्रकरण लंबित हैं वर्षवार कारण सहित बतावें। (घ) उक्‍त योजना के लंबित प्रकरणों का निराकरण कब तक किया जावेगा?

राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम ( श्री संजय पाठक ) : (क) मुख्‍यमंत्री युवा स्‍वरोजगार योजना के अंतर्गत इन्‍दौर जिले में कुल 6120 प्रकरण निम्‍न अनुसार वर्षवार प्राप्‍त हुये :-

 

क्र.

वर्ष

प्राप्‍त आवेदन

रिमार्क

1

2013-14

6120

-

2

2014-15

निरंक

योजना 31.07.2014 से बन्‍द होने से आवेदन प्राप्‍त नहीं हुए।

3

2015-16

निरंक

उपरोक्‍तानुसार निरंक

 

योग

6120

 

(ख) योजना के अंतर्गत प्राप्‍त आवेदनों में से बैंकों द्वारा 2261 प्रकरणों में स्‍वीकृति प्रदान कर निराकरण किया गया एवं 1740 हितग्राहियों को बैंक द्वारा योजना का लाभ प्राप्‍त हुआ। (ग) योजना 31.07.2014 को बन्‍द होने से वर्तमान में एक भी प्रकरण लंबित नहीं है। (घ) उत्‍तर '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

सेंधवा में कॉलोनियों की प्रदान अनुमतियां

17. ( क्र. 380 ) श्री विजय सिंह सोलंकी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सेंधवा में वर्ष 2010 से 2013 तक प्रदत्‍त समस्‍त कॉलोनियों को किन शर्तों पर अनुमति प्रदान की गई प्रति देवें। इन शर्तों के अनुसार निर्माण कार्यों को कब-कब, किस अधिकारी द्वारा चेक किया गया सूची देवें? (ख) सेंधवा में वर्ष 2010 से 2013 तक कॉलोनाईजरों के द्वारा कब-कब, कितने आवेदन विभागीय कार्यालय को प्राप्‍त हुए, कितने स्‍वीकृत, अस्‍वीकृत हुए कारण सहित बतायें? (ग) सेंधवा में व्‍यवसायिक या आवासीय काम्‍प्‍लेक्‍सों के कितने आवेदन प्राप्‍त हुए, कितने किन शर्तों पर स्‍वीकृत हुए, प्रति देवें?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) सेंधवा में वर्ष 2010-2013 के मध्‍य नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा 04 कॉलोनियों की अनुमति प्रदान की गई। शर्तें जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। जिसमें से 02 कॉलोनियों का सुपर विजन चार्ज नगर पालिका में जमा किया जाकर सक्षम प्राधिकारी से विकास अनुमति प्राप्‍त कर निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया, जिसका विवरण निम्‍नानुसार है :- 1. ड्रीम लेंड सिटी कॉलोनी। 2. वृंदावनधाम कॉलोनी। निर्माण कार्यों का सुपरविजन मुख्‍य नगर पालिका अधिकारी, उपयंत्री राजेश मिश्रा द्वारा दिनांक 06-09-2012, 13.09.2012, 12.09.2012 एवं 04-10-2012 को निरीक्षण किया गया। (ख) 1. लेआउट के अनुमोदन हेतु नगर तथा ग्राम निवेश को प्रश्‍नाधीन अवधि में 04 कॉलोनियों ड्रीम लाईन सिटी, वृदावनधाम, वासुतीर्थ एवं स्‍वगर्णकोर गुरूद्वारा के आवेदन प्राप्‍त हुए थे। चारों को स्‍वीकृत किया गया। 2. नगर तथा ग्राम निवेश के अनुमोदन उपरांत विकास अनुमति हेतु नगर पालिका सेंधवा में 03 आवेदन कॉलोनाईजर ड्रीम लेंड सिटी, वृंदावनधाम, वासुतीर्थ के प्राप्‍त हुए थे। जिनको विकास अनुमति की स्‍वीकृति दी गई। स्‍वर्णकोर कॉलोनाईजर द्वारा विकास अनुमति हेतु आवेदन नहीं किया गया। (ग) उल्‍लेखित अवधि में निकाय द्वारा किसी भी व्‍यवसायिक या आवासीय काम्‍पलेक्‍सों की स्‍वीकृत प्रदान नहीं की गई है।

हितग्राही मूलक रोजगार योजनाओं का क्रियान्‍वयन

18. ( क्र. 397 ) श्री राजकुमार मेव : क्या राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विभाग द्वारा खरगोन जिले की विकासखण्‍डवार नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को स्‍वरोजगार उपलब्‍ध कराने के लिए वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में भौतिक एवं वित्‍तीय लक्ष्‍य बैंक शाखावार शासन से आवंटित किये गये हैं? क्‍या विभाग द्वारा एवं बैंक शाखावार लक्ष्‍य अनुसार वित्‍तीय एवं भौतिक लक्ष्‍य की पूर्ति की गई है? यदि हाँ, तो बतावें? यदि नहीं, तो क्‍या कारण है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्य में विभाग द्वारा वित्‍तीय वर्ष 2014-15 से प्रश्‍न दिनांक तक मुख्‍यमंत्री स्‍वरोजगार योजना, मुख्‍यमंत्री युवा उद्यमी स्‍वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम एवं अन्‍य विभाग की स्‍वरोजगार योजनांतर्गत कितने युवा बेरोजगारों के आवेदन प्राप्‍त हुए, कितने प्रकरण बैंक शाखाओं द्वारा स्‍वीकृत कर कितनी-कितनी राशि का वितरण कर उन्‍हें अनुदान के रूप में उपलब्‍ध कराई गई एवं कितना किस-किस हितग्राही की खाते में अनुदान आना शेष है? कब तक उपलब्‍ध कराया जावेगा? (ग) शासन द्वारा मुख्‍यमंत्री स्‍वरोजगार योजना, मुख्‍यमंत्री युवा उद्यमी स्‍वरोजगार योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम एवं अन्‍य विभाग की स्‍वरोजगार योजनांतर्गत प्राप्‍त आवेदन पत्रों की स्‍वीकृति, लंबित, विवरण प्रक्रिया के संबंध में सांसद/विधायक/जन प्रतिनिधि की उपस्थिति में समीक्षा हेतु कोई निर्देश जारी किये गये हैं? यदि हाँ, तो क्‍या आदेश की प्रति उपलब्‍ध कराई जावे? (घ) प्रश्‍नांश (ग) के संबंध में समीक्षा हेतु कोई निर्देश जारी नहीं किये गये हैं तो शासन कब तक समीक्षा हेतु निर्देश या नियम बनाकर जारी करेंगे? ताकि योजना का लाभ जन-जन तक पहुँच सके।

राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम ( श्री संजय पाठक ) : (क) खरगोन जिले में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2015-16 में भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य की पूर्ति की गई है एवं वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिये भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं। (ख) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्य में विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2014-15 से प्रश्न दिनांक तक मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम एवं अन्य विभाग की स्वरोजगार योजनान्तर्गत 5609 युवा बेरोजगारों के आवेदन प्राप्त हुये, उक्त योजना अंन्‍तर्गत जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र खरगोन द्वारा 1204 प्रकरण स्वीकृत कर राशि रूपये 10179.20 लाख का वितरण किया गया। हितग्राही के खाते में अनुदान बैंक द्वारा जमा कराई जाती हैं। जो विभाग स्तर पर संधारित नहीं होता हैं। (ग) योजना आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के पत्र क्रमांक 93/132/2016/23/यो.आ.सा. दिनांक 18/01/2016 द्वारा स्वरोजगार योजनाओं की प्रगति की समीक्षा को जिला योजना समिति की बैठक में स्थायी एजेंडे के रूप में सम्मिलित करने हेतु निर्देशित किया गया है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (घ) प्रश्नांश उत्पन्न नहीं होता है।

परिशिष्ट - '' छ: ''

म.प्र. निर्वाचन पर्यवेक्षक सेवा भर्ती नियमों का उल्‍लंघन

19. ( क्र. 582 ) श्रीमती ममता मीना : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विधि एवं विधायी (निर्वाचन) कार्य विभाग म.प्र. शासन भोपाल के आदेश क्रमांक 127 स्‍थापना निर्वा.-2002-757 दिनांक 29.09.2013 एवं म.प्र. राज्‍यप्रत्र में प्रकाशित अधिसूचना दिनांक 07.11.2013 में निहित प्रावधानों के अनुसार निर्वाचन पर्यवेक्षक सेवा (तृतीय श्रेणी) भर्ती और सेवा शर्तों नियम 2013 के अनुसार गुना जिले में निर्वाचन पर्यवेक्षक को नियुक्त किया गया है, यदि नहीं, तो क्‍यों? (ख) वर्तमान में पदस्‍थ निर्वाचन पर्यवेक्षक की पदस्‍थापना किस विभाग, किस पद एवं कौन से जिले से नियुक्ति की गई है? क्‍या वर्तमान में पदस्‍थ निर्वाचन पर्यवेक्षक प्रश्‍नांश (क) में वर्णित भर्ती एवं सेवा शर्तों की योग्‍यता रखते है अथवा नहीं? (ग) क्‍या म.प्र. राज्‍यपत्र में प्रकाशित अधिसूचना दिनांक 07.11.2013 के अनुक्रम में गुना जिले में राजस्‍व विभाग एवं अन्‍य जिला स्‍तर के कार्यालयों में वांछित योग्‍यता अनुसार कर्मचारी नहीं है? यदि कर्मचारी हैं तो राजपत्र की अधिसूचना दिनांक 07.1.2013 का गुना जिले में पालन क्‍यों नहीं किया गया है? (घ) अपात्र निर्वाचन पर्यवेक्षक को मूल पदस्‍थापना स्‍थल हेतु कब तक कार्यमुक्‍त किया जाकर शासन नीति के तहत पात्र कर्मचारी को निर्वाचन पर्यवेक्षक कब तक पदस्‍थ किया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

विधायक निधि की मार्गदर्शिका का उल्‍लंघन कर बंगला निर्माण किये जाना

20. ( क्र. 583 ) श्रीमती ममता मीना : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या वर्ष 2011-12 से वर्ष 2013-14 तक गुना जिले में विधायक निधि से बंगला निर्माण कार्य स्‍वीकृ‍त किये जाकर विधायक निधि की राशि का अपव्‍यय किया गया है? (ख) यदि हाँ, तो कृपया बतायें कि बंगला निर्माण कार्य विधायक निधि की मार्गदर्शिका अनुसार स्‍वीकृत किया जा सकता है, मार्गदर्शिका की सत्‍यप्रति उपलब्‍ध करावें? (ग) मार्गदर्शिका में बंगला निर्माण का उल्‍लेख नहीं है इसके उपरांत भी बंगला निर्माण स्‍वीकृत कराने वाले तत्‍कालीन प्रभारी जिला योजना अधिकारी एवं दोषी कर्मचारियों के विरूद्ध आज दिनांक तक विभागीय जाँच संस्थित क्‍यों नहीं की गई है? विभागीय जाँच कब तक संस्थित की जावेगी? (घ) मार्गदर्शिका का उल्‍लंघन कर बंगला, निर्माण कार्य स्‍वीकृत कराने वाले दोषी अधिकारी एवं कर्मचारियों के नाम स्‍पष्‍ट करें, इन दोषी अधिकारी एवं कर्मचारियों से विधायक निधि से बंगला निर्माण पर व्‍यय राशि की क्‍या वसूली की जावेगी अथवा इनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जावेगी?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) जी नहीं। (ख) सार्वजनिक चबूतरे को स्‍थानीय भाषा में बंगला कहा जाता है। सार्वजनिक चबूतरा निर्माण मार्गदर्शिका में अनुमत कार्यों की परिशिष्‍ट- ''1'' के बिन्‍दु क्रमांक 25 में उल्‍लेखित है। मार्गदर्शिका की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) प्रश्‍नांश '''' के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

लीज़ निरस्‍त करना

21. ( क्र. 586 ) श्रीमती ममता मीना : क्या राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या गुना जिले में वर्ष 2010 से 2015 तक औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यमियों द्वारा घोषित व्‍यापार हेतु भूमि का आवंटन किया था? यदि हाँ, तो बतायें कि कितने व्‍यवसायियों ने व्‍यापार बदल दिये कितने लोगों ने भूमि विक्रय कर दी, कितने लोगों ने रहवास बना लिये? (ख) प्रश्‍नांश (क) अंतर्गत किस कारोबार के लिये भूमि आवंटित हुई है, तो क्‍या उस व्‍यापार को न कर अन्‍य व्‍यापार करें या उस भूमि में रहवास बनाये या व्‍यापार बंद करके भूमि रिक्‍त रखें तो उनकी लीज़ निरस्‍त कब और कैसे होगी? (ग) क्‍या गुना जिले के औद्योगिक क्षेत्र में आवंटित भूमि पर विभाग की शर्तों का कौन-कौन पालन नहीं कर रहे हैं? यदि पालन नहीं किया तो विभाग उनकी लीज़ कब तक निरस्‍त कर नये उद्यमियों को आवंटित करेगा? (घ) क्‍या गुना शहर के औद्योगिक क्षेत्र में देशी या विदेशी मदिरा की दुकान संचालित है, यदि हाँ, तो किस नियम से? क्‍या उक्‍त दुकान को बंद कराने की कार्यवाही होगी? क्‍या प्रश्‍नांश (क) (ख) और (ग) में उल्‍लेखित तथ्‍यों की जाँच और भौतिक सत्‍यापन कराकर कार्यवाही की जावेगी?

राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम ( श्री संजय पाठक ) : (क) वर्ष 2010 से 2015 तक औद्योगिक क्षेत्रों में उद्यमियों द्वारा घोषित व्‍यापार हेतु राशि भूमि का आवंटन नहीं किया गया है। अत: प्रश्‍नांश के शेष भाग का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता। (ख) प्रश्‍नांश (क) के संबंध में प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता। (ग) गुना जिले के औद्योगिक क्षेत्र में आवंटित भूमि पर विभाग की शर्तों का जिनके द्वारा पालन नहीं किया जा रहा था, ऐसी 29 इकाइयों के विरूद्ध भौतिक सत्‍यापन उपरांत भूमि, शेड आवंटन नियमानुसार लीजडीड निरस्‍त करने की कार्यवाही की जा चुकी है। निरस्‍तीकरण के पश्‍चात् म.प्र. राज्‍य औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम-2015 के तहत आवंटन की कार्यवाही की जाती है। (घ) गुना शहर के औद्योगिक क्षेत्र के भूखण्‍ड क्रमांक-24 में मेसर्स प्रेम मोटर्स को सर्विस सेंटर तथा वाहन रिपेरिंग गतिविधि के लिये आवंटित है। कार्यालय को प्राप्‍त शिकायतों एवं भौतिक सत्‍यापन उपरांत मदिरा की दुकान संचालित करने के कारण इकाई की लीजडीड निरस्‍त की जा चुकी है।

अवैध उत्‍खनन एवं अवैध परिवहन के मामले

22. ( क्र. 678 ) श्री दिनेश राय : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिवनी जिले में अवैध उत्‍खनन एवं अवैध परिवहन के संबंध में वर्ष 2012 से 2016 प्रश्‍न दिनांक तक कितने प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही की गई? (ख) प्रश्‍नांश (क) वर्णित अवधि में खदानों में बिना अनुमति के ब्‍लास्टिंग पर कहाँ पर क्‍या कार्यवाही की गई? कितनी खदानों को ब्‍लास्टिंग की परमिशन दी गई एवं क्‍या मापदण्‍डों के आधार पर ब्‍लास्टिंग नहीं करने वालो पर क्‍या कार्यवाही आज दिनांक तक की गई? (ग) रेत मुरम मिट्टी गिट्टी पत्‍थर एवं अवैध कोयला परिवहन में विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी की मिलीभगत से करोड़ों रूपये का रायल्‍टी का नुकसान हुआ है? क्‍या संबधित अधिकारी एवं कर्मचारियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जा रही है?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नांकित अवधि में खनिजों के अवैध उत्‍खनन के 136 प्रकरण तथा अवैध परिवहन के 613 प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही की गई है। (ख) लायसेंसधारी व्‍यक्तियों द्वारा ही ब्‍लास्टिंग करने तथा किसी प्रकार की कोई शिकायत अथवा जनहानि की सूचना प्राप्‍त नहीं होने के कारण किसी प्रकार की कार्यवाही का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता। विभाग द्वारा खदानों में ब्‍लास्टिंग की अनुमति देने की कार्यवाही नहीं की जाती है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

ट्रांसपोर्ट नगर निर्माण योजना

23. ( क्र. 684 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) शासन द्वारा कटनी ट्रांस‍पोर्ट नगर हेतु भूमि की किस दिनांक को स्‍वीकृति‍ एवं आधिपत्‍य दिया गया एवं कितना भू-भाटक एवं प्रीमियम राशि का भुगतान किस-किस दिनांक को नगर पालिक निगम कटनी द्वारा किया गया. (ख) प्रश्‍नांश (क) के अन्‍तर्गत आवंटित भूमि में किये गये निर्माण कार्यों की स्‍वीकृति, किये गये निर्माण कार्य एवं ट्रांसपोटर्स द्वारा जमा की गई राशि का पूर्ण विवरण 95 से 99, 2000 से 2004, 2005 से दिसंबर 2009, 2010 से 2014 एवं जनवरी 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक परिषद् कार्यकालवार मय दिनांक के प्रदान करें. (ग) क्‍या शासन के समक्ष ट्रांसपोटर्स को निर्माण लागत में छूट प्रदान करने एवं नये ट्रांसपोटर्स को प्‍लॉट आवंटन सूची में शामिल करने हेतु नगर पालिक निगम कटनी का कोई प्रस्‍ताव लंबित है? यदि हाँ, तो प्रति सहित शासन द्वारा की गई कार्यवाही भी बतायें. (घ) क्‍या स्‍थानीय सांसद एवं विधायक भी धारा 9 के अन्‍तर्गत नगर पालिक निगम की संरचना में आते हैं तथा बतायें कि क्‍या कलेक्‍टर कटनी द्वारा ट्रांस‍पोर्ट नगर पर २०१६ जून माह में कोई बैठक बुलाई थी? यदि हाँ, तो किस-किस जनप्रतिनिधि को बैठक में आमंत्रित किया गया था. बैठक में लिए गये निर्णय तथा कलेक्‍टर कटनी द्वारा दिये गये निर्देश एवं इन पर की गई कार्यवाही बतायें.

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) ट्रांसपोर्ट नगर हेतु मध्‍यप्रदेश शासन राजस्‍व विभाग द्वारा भूमि आवंटन की स्‍वीकृति दिनांक 19.02.2008 को दी गई एवं भूमि का अग्रिम आधिपत्‍य नगर पालिक निगम, कटनी (तत्‍कालीन सुधार न्‍यास कटनी) को दिनांक 09.01.1984 को प्राप्‍त हो हुआ। भूमि का भू-भाटक एवं प्रीमियम की राशि रूपयें 12,12,746/- क्रमश: रू. 9,33,743/- दिनांक 17.03.2008 एवं रू. 2,79,003/- का भुगतान किया गया। (ख) निर्माण कार्यों की स्‍वीकृति का विवरण जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। ट्रांसपोर्ट द्वारा जमा की गई राशि का विवरण जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जी हाँ, अपितु राज्‍य शासन को पत्र क्रमांक 681/स.शा/नगर निगम/2012-13 दिनांक 13.09.2012 प्रेषित कर नये ट्रांसपोर्टरों को प्‍लाट आवंटन सूची में शामिल करने के लिए अनुमति चाही गई है। प्रस्‍ताव में निर्माण लागत में छूट की मांग शामिल नहीं है। पत्र की प्रतिलिपि जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। कार्यवाही विचाराधीन है। (घ) जी हाँ। जी हाँ। बैठक में जन प्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किया गया था। बैठक की कार्यवाही का विवरण जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। बैठक में लिये गये निर्णयों पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

तिलहन संघ के संविलियत सेवायुक्‍तों के वेतन का निर्धारण

24. ( क्र. 692 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. राज्‍य तिलहन संघ से गत लगभग दो वर्षों से शासन के विभिन्‍न विभाग सहकारिता, राजस्‍व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वाणिज्यिक कर में संविलियत लगभग 500 सेवायुक्‍तों का वेतन निर्धारण आदेश जारी नहीं किया गया? कब तक करेंगे? (ख) विधानसभा परि. अता. प्रश्‍न संख्‍या-14 प्रश्‍न (क्रमांक 2535), जुलाई, 2015 एवं ध्‍यानाकर्षण क्रमांक 366, बजट सत्र, 2016 में बताया गया है कि जी हाँ वेतन निर्धारण प्रक्रियाधीन/प्रचलन में है? यदि हाँ, तो कब तक पूर्ण होगी? कब से नियमित वेतन भुगतान दिया जावेगा? (ग) क्‍या तिलहन संघ के शासन में संविलियत सेवायुक्‍तों को संविलियन पूर्व प्राप्‍त हो रहे वेतन से कम वेतन दिया जा रहा है? यदि हाँ, तो क्‍यों? क्‍या संविलियन पूर्व प्राप्‍त हो रहे वेतन को ही वेतन निर्धारण प्रक्रिया आदेश तक (वेतन) दिये जाने का आदेश देंगे? (घ) क्‍या तिलहन संघ के संविलियत सेवायुक्‍तों को वेतन निर्धारण करते समय पूर्व वेतन संरक्षण का प्रावधान करेंगे? क्‍या वेतन संरक्षण प्रावधान का आदेश अलग से जारी करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) वेतन निर्धारण की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है समय-सीमा बतायी जाना संभव नहीं है। (ख) से (घ) उत्‍तरांश '''' अनुसार।

इंदौर नगर निगम में नगर निगम की अनुमति के बिना निर्माण कार्य

25. ( क्र. 801 ) श्री रामनिवास रावत : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या इंदौर शहर के प्रकाशित मास्‍टर प्‍लान दिनांक 21.03.1975 एवं वर्तमान में प्रभावशील मास्‍टर प्‍लान में दिगंबर जैन उदासीन आश्रम, 584, एम.जी. रोड जो पूर्व में स्थि‍त रोड की जो पूर्व में स्थित रोड की चौड़ाई 30 मीटर रखी गई है? स्‍पष्‍ट बतावें। (ख) क्‍या उक्‍त रोड की भूमि पर मास्‍टर प्‍लान का उल्‍लंघन करते हुए बिना नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की अनुमति के तथा बिना स्‍वीकृ‍त नक्‍शे के नगर निगम इंदौर द्वारा 56 दुकान नामक मार्केट का निर्माण किया गया है? यदि हाँ, तो क्‍यों? इसके लिए कौन-कौन जिम्‍मेदार है? नाम व पद बतावें? साथ ही उक्‍त निर्माण में व्‍यय हुई राशि की वसूली के लिए कौन उत्‍तरदायी होगा? यदि निर्माण अवैध है तो उसे हटाए जाने की कार्यवाही क्‍यों नहीं की गई? (ग) क्‍या उक्‍त अवैध 56 दुकानों में से कई दुकानदारों ने दुकान के पीछे स्थित उदासीन आश्रम की एम.ओ.एस. की भूमि को जोड़कर भी बिना स्‍वीकृत नक्‍शे पास कराए अवैध निर्माण कर लिया गया है? जिसकी शिकायत शासन में की गई थी तथा उस पर प्रमुख सचिव नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा कलेक्‍टर इंदौर/आयुक्‍त नगर निगम इंदौर को पत्र लिखकर प्रतिवेदन चाहा था जो शासन को किस दिनांक को दिया गया? यदि नहीं, तो क्‍यों? स्‍पष्‍ट करे कि इस कदारचरण के लिए कौन-कौन उत्‍तरदायी है? उनके नाम बतावें व कब तक इस अवैध निर्माण को हटाया जावेगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। विकास योजना दिनांक 23.03.1975 एवं विकास योजना 01.01.2008 में प्रश्‍नाधीन सड़क की चौड़ाई 30 मीटर प्रावधानित रही है। (ख) प्रश्‍नाधीन स्‍थल पर वर्ष 1975 एवं 1976 के दरम्‍यान 50 दुकानों के निर्माण की प्रशासकीय स्‍वीकृति तत्‍कालीन प्रशासक द्वारा संकल्‍प क्रमांक 1065 दिनांक 25.11.1975 के माध्‍यम से दी गई थी एवं इस अवधि में ही दुकानों का निर्माण तत्‍समय नगर निगम, इन्‍दौर द्वारा भारतीय स्‍टेट बैंक से ऋण प्राप्‍त कर किया था। यह सही है कि दुकानों के निर्माण के समय 1975 की विकास योजना प्रभावशील रही है तथा यह दुकानें सड़क की चौड़ाई की परिधि में ही निर्मित की गई थी। नगर निगम द्वारा निर्मित दुकानें कराने के पूर्व नक्‍शा नगर तथा ग्राम निवेश से स्‍वीकृत नहीं कराया गया था। उपलब्‍ध अभिलेख अनुसार यह निर्माण कार्य तत्‍कालीन प्रशासक के संकल्‍प दिनांक 25.11.1975 के तारतम्‍य में वर्ष 1975 एवं 1976 में कराया गया था। इस निर्माण कार्य में जिसमें तत्‍समय 50 दुकानें बनाने की स्‍वीकृति दी गई थी, रूपयें 1 लाख की लागत प्रस्‍तावित थी। प्रश्‍नाधीन प्रकरण में जाँच की जा रही है तथा इन वर्षों के उपलब्‍ध अभिलेखों अनुसार तत्‍कालीन प्रशासक संकल्‍प क्रमांक 522 दिनांक 27.07.1976 में तत्‍कालीन आयुक्‍त की अनुशंसानुसार 50 दुकानों के स्‍थान पर 57 दुकानें संशोधित प्राक्‍कलन 168163.68 रू. की स्‍वीकृति दी गई थी। समक्ष में चौड़ा मार्ग होने से इस निर्माण को हटाये जाने की आवश्‍यकता निर्मित नहीं हुई है। भविष्‍य में ट्रैफिक घनत्‍व बढ़ने पर आवश्‍यकतानुसार मास्‍टर प्‍लान में अंकित सड़क चौड़ाई निर्माण हेतु दुकानों को नियमानुसार हटाये जाने की कार्यवाही की जा सकेगी। (ग) यह सही है कि 56 दुकानों में से कई दुकानदारों ने दुकान के पीछे स्थित उदासीन आश्रम की एम.ओ.एस. की भूमि को किरायेनामा निष्‍पादित कर नगर निगम द्वारा निर्मित अपनी दुकान से जोड़ दिया है तथा शेड बनाकर उसका व्‍यवसायिक उपयोग किया जा रहा है। यह भी सही है कि शासन की ओर से कलेक्‍टर इन्‍दौर/आयुक्‍त नगर निगम, इन्‍दौर को पत्र लिखकर प्रतिवेदन चाहा गया है। प्रतिवेदन तैयार करने की प्रक्रिया के तहत जाँच प्रचलित है तथा दुकानदारों को नोटिस जारी कर उनसे जवाब प्राप्‍त किये गये है। दुकानदारों से प्राप्‍त जवाबों का परीक्षण किया जा रहा है। जाँच पूर्ण होने पर उसके प्राप्‍त निष्‍कर्षो के आधार पर पीछे निर्मित निर्माण कार्यों के संबंध में निम्‍नानुसार वैधानिक कार्यवाही की जा सकेगी।

नगर पंचायत रानापुर में निर्मित दुकानें

26. ( क्र. 866 ) श्री शान्तिलाल बिलवाल : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नगर पंचायत रानापुर में पशु गुजरी में निर्माण की गई दुकानों पर स्‍वीकृति किसके द्वारा दी गई थी? क्‍या उक्‍त नजूल भूमि का हस्‍तांतरण राजस्‍व विभाग द्वारा किया गया था? (ख) राजस्‍व विभाग द्वारा नजूल भूमि का हस्‍तांतरण नहीं किया गया तो दुकान का निर्माण किसके आदेश से किया गया? (ग) अनुविभागीय अधिकारी राजस्‍व झाबुआ द्वारा निर्मित दुकानों पर लगाये गये स्‍थगन के बावजूद भी दुकानों का निर्माण एवं दुकानों की नीलामी किसके आदेश से की गई? (घ) नगर पंचायत रानापुर के अधिकारियों द्वारा स्‍थगन आदेश का पालन नहीं किया गया तो उस अधिकारी के विरूद्ध शासन कोई कार्यवाही करेगा क्‍या?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) दुकानों के निर्माण की अनुमति परिषद् के संकल्‍प क्रमांक 80 दिनांक 25.07.2013 दी गई है, भूमि का हस्‍तांतरण राजस्‍व विभाग द्वारा नहीं किया गया। (ख) दुकान का निर्माण परिषद् के संकल्‍प क्रमांक 80 दिनांक 25.07.2013 के आदेश से किया गया। (ग) स्‍थगन दिये जाने के पश्‍चात् दुकानों का निर्माण कार्य नहीं करवाया गया और ना ही नीलामी की गई। (घ) शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

अधीक्षक की पदोन्‍नति

27. ( क्र. 877 ) श्री रामपाल सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विभागीय परीक्षा उत्‍तीर्ण तहसीलदार, अधीक्षक भू-अभिलेख, संभागायुक्‍त एवं कलेक्‍टर कार्यालय के अधीक्षक पद से डिप्‍टी कलेक्‍टर के पद पर वरिष्‍ठता के आधार पर एक साथ पदोन्‍नति की कार्यवाही शासन द्वारा की जाती थी? (ख) क्‍या फरवरी 2016 में विभागीय पदोन्‍नति समिति की बैठक में संभागायुक्‍त एवं कलेक्‍टर कार्यालय में कार्यरत अधीक्षकों की पदोन्‍नति नहीं की हैं? यदि हाँ, तो क्‍यों और उक्‍त पद की पदोन्‍नति संबंधित कार्यवाही का कब तक निराकरण किया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। तहसीलदार व अधीक्षक भू-अभिलेख से डिप्‍टी कलेक्‍टर तथा अधीक्षक, कलेक्‍टर कार्यालय से डिप्‍टी कलेक्‍टर के पद पर पदोन्‍नति की कार्यवाही पृथक-पृथक की जाती है। (ख) जी हाँ। समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

योजनाओं का क्रियान्‍वयन

28. ( क्र. 884 ) श्री रामपाल सिंह : क्या राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शहडोल जिले में उद्योग एवं रोजगार मुहैया कराने के लिये विभिन्‍न योजनाओं के तहत् शासन द्वारा सहायता एवं ऋण मुहैया कराये जाने का कार्य किया जा रहा है? (ख) यदि प्रश्‍नांश (क) हाँ तो उक्‍त संबंध में कौन-कौन सी योजनाएँ उक्‍त जिले में संचालित हैं और उनको प्राप्‍त करने के लिए कौन-कौन से नियमों की पूर्ति संबंधित हितग्राही को करना पड़ता है? (ग) क्‍या रोजगार मुहैया कराने हेतु संबंधित विभाग से प्रकरण तैयार करने के उपरांत संबंधित बैंक को भेज दिया जाता है? यदि हाँ, तो बैंक द्वारा अनावश्‍यक विलंब किये जाने के कारण शासन द्वारा कोई नियम निर्धारित किया गया है जिससे संबंधित बैंक के दोषी कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही की जा सके? यदि नहीं, तो क्‍या उक्‍त नियम बनाकर भविष्‍य में ऐसे मामलों से निजात पाने की कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम ( श्री संजय पाठक ) : (क) जी हाँ। (ख) विभाग द्वारा निम्‍नानुसार तीन योजनाएं संचालित की जा रही है:- 1. मुख्‍यमंत्री युवा उद्यमी योजना 2. मुख्‍यमंत्री स्‍वरोजगार योजना 3. प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) कार्यालय में आवेदन प्राप्‍त होने के उपरान्‍त प्रकरण टास्‍क फोर्स समिति के समक्ष रखा जाता है। तथा टास्‍क फोर्स समिति से अनुमोदन उपरान्‍त प्रकरण बैंक को भेजा जाता है। टास्‍क फोर्स समिति द्वारा आवेदकों के प्रकरणों में बैंकों को अनुशंसा की जाती है, प्रकरणों की अंतिम ऋण स्‍वीकृति का अधिकार बैंकों को ही है। बैंक शासन के अधीन नहीं आते, अत: बैंक पर कार्यवाही संभव नहीं, परन्‍तु आवेदक को बैंक से आने वाली कठिनाइयों के संबंध में शासन प्रतिनिधि द्वारा राज्‍य स्‍तरीय बैंकर्स समिति में उनकी समस्‍याओं को उठाया जाता है तथा जिला परामर्शदात्री समिति में बैंकों के साथ ऐसे प्रकरण की समीक्षा की जाती है।

सागर नगर की राजीव आवास योजना

29. ( क्र. 911 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) अतारांकित प्रश्‍न क्रमांक 970 दिनांक 03 मार्च 2016 के प्रश्‍नांश के उत्‍तरांश में बताया गया था कि, या तो ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जायेगा अन्‍यथा ब्‍लेक लिस्‍टेड कर दिया जायेगा एवं पुन: निविदा जारी कर, नये ठेकेदार से कार्य करवाया जायेगा। इस संबंध में अभी तक क्‍या कार्यवाही हुई है? (ख) क्‍या उपरोक्‍त वर्णित तीनों कार्यों में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है, न ही कोई कार्यवाही प्रचलन में हैं? इसके लिए कौन दोषी है, उन पर कोई कार्यवाही की जायेगी एवं शासन स्‍तर से इस संबंध में निर्णय कर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) ठेकेदार द्वारा कार्य प्रारंभ कर दिया गया है, जिससे कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ख) ठेकेदार द्वारा कार्य प्रारंभ कर दिये जाने के कारण प्रगति हो रही है, अत: वर्तमान स्थिति में शासन स्‍तर से किसी प्रकार की कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

खदानों से अवैध उत्खन

30. ( क्र. 942 ) श्री संजय शाह मकड़ाई : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) माननीय मंत्री जी द्वारा जिला हरदा में दिनाक 18 मार्च 2016 को ता.प्र. क्र. 6372 को दिए गए जवाब के अनुसार कई खदानों की परमिशन नहीं पाई गई थी लेकिन आज दिनांक तक भी उन सभी खदानों से अवैध उत्खन का कार्य हो रहा है जिनमें सभी प्रकार की खदानें शामिल है. क्या इसकी उच्च स्तरीय जाँच करवायेंगे? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार किन किन खदानों को परमिशन दी गई है? उसकी जानकारी से अवगत करायें?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित प्रश्‍न के संबंध में विभाग द्वारा प्रश्‍नानुसार जानकारी नहीं दी गई थी। प्रश्‍न पर चर्चा में यह जानकारी दी गई थी। दो रेत खदान की परमिशन सिया से मिली है। बाकी सिया से प‍रमिशन की कार्यवाही चल रही है। (ख) जिले में स्‍वीकृत खदानों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट पर दर्शित है। इसमें पर्यावरण अनुमति प्राप्‍त खदानों की जानकारी दी गई है।

परिशिष्ट - '' सात ''

आश्रितों हेतु अनुकम्‍पा नियुक्ति

31. ( क्र. 971 ) श्री प्रताप सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश राज्‍य विद्युत मंडल एवं एम.पी. पावर मेनेजमेंट कम्‍पनी में कार्यरत तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग के कर्मचारियों के आश्रितों हेतु अनुकम्‍पा नियुक्ति किये जाने के कितने प्रकरणों कब से प्रश्‍न दिनांक तक विचाराधीन है? अभी तक कुल कितने प्रकरणों का निराकरण किया चुका है, कितने अवशेष हैं, अवशेष प्रकरणों का निराकरण अभी तक न किये जाने का क्‍या कारण है? मध्‍यप्रदेश शासन ऊर्जा विभाग के अनुकम्‍पा नियुक्ति संबंधी क्‍या नियम/नीति/निर्देश हैं, उसकी प्रति उपलब्‍ध करावें? (ख) क्‍या मध्‍यप्रदेश विद्युत मण्‍डल के मृत कर्मचारियों के आश्रित विधवा महिलाएं एवं उनके परिवारजनों द्वारा 11 मार्च 2013 को जबलपुर के शक्ति भवन के समक्ष धरना प्रदर्शन कर अनुकम्‍पा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों को निपटाने हेतु मांग की गई थी? क्‍या माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा 09 मई 2013 को आंदोलन के दौरान उल्‍लेखित अनुकम्‍पा नियुक्ति के प्रकरण निपटाये जाने हेतु संबंधितों को आश्‍वस्‍त किया गया था? (ग) क्‍या शासन द्वारा अनुकम्‍पा नियुक्ति हेतु निर्मित नियम/नीति/निर्देश 2013 की शर्त क्रमांक 3.8 कंडिका 1 के अनुसार 10/04/12 के पूर्व एवं दिनांक 15/11/2000 के पश्‍चात् के दुर्घटना मृत्‍यु के प्रकरणों को छोड़कर शेष अस्‍वीकृत, निराकृत एवं लंबित प्रकरणों पर विचार नहीं किया जावेगा? क्‍या उल्‍लेखित शर्त न्‍यायसंगत एवं नीति संगत तथा मृत कर्मचारियों के आश्रितों के हितों के अनुरूप नहीं होने से पुन: विचार कर उसे विलुप्‍त करते हुए शासनाधीन अन्‍य विभागों की तरह एक समान अनुकम्‍पा नीति लागू करने का निर्णय लेंगे?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) म.प्र.राज्‍य विद्युत मंडल वर्तमान में अस्तित्‍व में नहीं है। अपितु इसकी छ: उत्‍तरवर्ती कंपनियां है। म.प्र.राज्‍य विद्युत मण्‍डल के समान कंपनियों में भी अनुकम्‍पा नियुक्ति पर रोक लगी थी। सितम्‍बर 2013 में मंत्रि-परिषद् से अनुमोदन के उपरान्‍त कंपनियों में अनुकम्‍पा नियुक्ति प्रारंभ की गई। तत्समय अंतिम अंतरण दिनांक 10.04.2012 तक के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी वर्ग के कार्मिकों के कुल 3331 अनुकम्‍पा नियुक्ति प्रकरण उत्‍तरवर्ती कंपनियों को हस्‍तांरित थे, जिनमें सामान्‍य मृत्‍यु के 2838 प्रकरण तथा दुर्घटना मृत्‍यु के 493 प्रकरण सम्मिलित थे। प्रश्‍न दिनांक तक उक्‍त प्रकरण तथा नए प्रकरणों सहित अनुकम्‍पा नियुक्ति नीति (संशोधित), 2013 के अनुसार उत्‍तरवर्ती कंपनियों में पात्र आवेदनों की संख्‍या कुल 1549 है तथा इस संख्‍या में पूर्ववर्ती म.प्र.राज्‍य विद्युत मण्‍डल के दुर्घटना मृत्‍यु के 493 प्रकरण सम्मिलित हैं। उपरोक्‍त 1549 पात्र प्रकरणों में से 356 आवेदकों को अनुकंपा नियुक्ति पत्र प्रदान किये जा चुके हैं। 159 प्रकरण वित्‍तीय सहायता प्रदत्‍त कर निराकृत किये गये हैं। 865 आवेदकों को उनके आवेदन पर अनुकम्‍पा नियुक्ति के प्रावधानानुसार शैक्षणिक योग्‍यता प्राप्‍त करने हेतु 3 वर्ष का समय दिया गया है तथा अभिवचन पत्र जारी किये गये हैं कि शैक्षणिक योग्‍यता प्राप्‍त करने पर उन्‍हें नियुक्ति दी जायेगी। शेष 169 प्रकरण विचाराधीन हैं, जिन्‍हें पद रिक्‍त होने पर नियुक्ति प्रदान की जा सकेगी। प्रकरणों के निराकरण न होने का कारण, आवेदकों के पास वांछित शैक्षणिक योग्‍यता न होना या कंपनियों में वांछित पद का रिक्‍त न होना है। विस्‍तृत विवरण एवं उत्‍तरवर्ती कंपनियों द्वारा जारी अनुकंपा नियुक्ति नीति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' एवं '' अनुसार है। (ख) जी हाँ, दिनांक 11 मार्च, 2013 को शक्ति भवन परिसर के बाहर कुछ व्‍यक्तियों, जिनमें महिलायें भी शामिल थी, द्वारा अनुकंपा नियुक्ति हेतु प्रदर्शन किया गया था। शेष प्रश्‍नांश के विषय में कोई आधिकारिक जानकारी प्राप्‍त नहीं है। (ग) जी हाँ। पूर्ववर्ती म.प्र.राज्‍य विद्युत मण्‍डल के समस्‍त कार्मिकों का, दिनांक 10.04.2012 को, उत्‍तरवर्ती कंपनियों में अंतिम अंतरण हुआ था, उसी आधार पर अनुकंपा नियुक्ति नीति की कंडिका 3.8 की कंडिका-1 में प्रावधान शामिल है, जो कि सुविचारित हैं। विद्युत कंपनियों की अनुकम्‍पा नियुक्ति नीति राज्‍य शासन के अन्‍य विभागों के अनुरूप ही, मंत्रि-परिषद् के अनुमोदन के उपरान्‍त, लागू की गयी है।

उत्‍खनन की स्‍वीकृति

32. ( क्र. 972 ) श्री प्रताप सिंह : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विगत तीन वर्षों में जबेरा विधानसभा क्षेत्र में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत सड़कों के निर्माण कार्यों में किस-किस ठेकेदार द्वार मुरम एवं मिट्टी हेतु खनिज विभाग से प्रारंभ वित्‍तीय वर्ष में उत्‍खनन की स्‍वीकृति मांगी गई है? (ख) मांगी गई स्‍वीकृति किस पटवारी हल्‍के के किस ग्राम में तथा कितने रकबे की स्‍वीकृति दी गई है? (ग) क्‍या ठेकेदारों द्वारा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कों के निर्माण के लिए अवैध उत्‍खनन किया गया है यदि हाँ, तो विभाग द्वारा अभी तक किन-किन ठेकेदारों के विरूद्ध अवैध उत्‍खनन की कार्यवाही में कितना राजस्‍व वसूला गया है?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में प्रश्‍नाधीन अवधि में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत मुरम एवं मिट्टी के लिये किसी ठेकेदार द्वारा कोई आवेदन प्रस्‍तुत नहीं किया गया है। (ख) कोई आवेदन प्राप्‍त न होने पर स्‍वीकृति दिये जाने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं।

 

बकाया विद्युत बिल की राशि की वसूली

33. ( क्र. 1096 ) श्री जतन उईके : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या छिन्‍दवाड़ा जिले के पांढुर्णा विधान सभा क्षेत्र के कृषक एवं घरेलु कनेक्‍शन के बकाया राशि के कारण बिजली कनेक्‍शन काटने के पश्‍चात् बिना वसूली किये आर.सी. के नाम पर पुन: कनेक्‍शन जोड़े जाने का शुल्‍क उपभोक्‍ताओं से वसूल किया जा रहा है? यदि हाँ, तो कितना? (ख) क्‍या आर.सी.डी.सी. (लाईन काटना और लाईन जोड़ना को क्षति राशि म.प्र. वि.मं.लि. के किस प्रावधान के अनुसार है? प्रावधान की प्रति उपलब्‍ध करायें? क्‍या आर.सी.डी.सी. की राशि विशेष न्‍यायालय के माध्‍यम से वसूली करने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो राशि न्‍यायालय में प्रकरण दर्ज कर वसूली की जा रही है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी नहीं। विद्युत बिल की बकाया राशि के कारण उपभोक्‍ता की विद्युत लाईन काटने के पश्‍चात् उपभोक्‍ता द्वारा बकाया राशि की अंश राशि या बकाया राशि जमा करने पर पुन: लाईन जोड़ने के लिये आर.सी.डी.सी. (रीकनेक्‍शन एवं डिसकनेक्‍शन) चार्ज की राशि रू. 200 लेने का प्रावधान है एवं तदनुसार ही प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में कार्यवाही की जा रही है। (ख) म.प्र.विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी म.प्र.विद्युत प्रदाय संहिता 2013 के अध्‍याय-9, शीर्षक '' भुगतान एवं संयोजन विच्‍छेद '' की कंडिका 9.15 के अनुसार प्रावधान है कि '' अस्‍थाई संयोजन विच्‍छेद के पश्‍चात् विद्युत प्रदाय उसी दशा में पुनर्स्‍थापित किया जाएगा जब उपभोक्‍ता बकाया प्रभारों/देय राशि/निर्धारित की गई किश्‍त की राशि मय संयोजन विच्‍छेद तथा उसे जोड़ने के प्रभारों सहित भुगतान कर देता है। '' तदनुसार अनुज्ञप्तिधारी को प्रदत्‍त अधिकार के परिपालन में म.प्र.विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी मध्‍यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग (विद्युत प्रदाय के प्रयोजन से विद्युत लाईन प्रदाय करने अथवा उपयोग किये गये संयंत्र हेतु व्‍ययों तथा अन्‍य प्रभारों की वसूली) विनियम (पुनरीक्षण प्रथम), 2009 के प्रावधानानुसार मीटरिंग एवं अन्‍य प्रभार के शेड्यूल के अनुसार आर.सी.डी.सी. राशि की वसूली की जाती है। उक्‍त प्रावधानों की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र- '' एवं '' अनुसार है। आर.सी.डी.सी. की राशि विशेष न्‍यायालय के माध्‍यम से वसूल करने का प्रावधान नहीं है। अत: न्‍यायालय में प्रकरण दर्ज कर राशि वसूलने का प्रश्‍न नहीं उठता।

खनिज खदानों का अवैध उत्‍खनन

34. ( क्र. 1103 ) श्री जतन उईके : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छिन्‍दवाड़ा जिले में प्रश्‍न दिनांक से पिछले 03 वर्षों में कितने खदानों के पट्टे जारी किये गये हैं और कितने खदानों के पट्टे निरस्‍त किये गये है? खदान एवं पट्टेधारियों के जारी एवं निरस्‍त सहित सूची उपलब्‍ध करावें? (ख) क्‍या निरस्‍त किये गये खदानों के पट्टाधारियों से शासन की राशि वसूली की जानी है? यदि हाँ, तो उन पट्टाधारियों की सूची बकायादारों के नाम व बकाया राशि सहित  उपलब्‍ध करायें? क्‍या निरस्‍त खदानों से भी भारी मात्रा में अवैध उत्‍खनन किया जा रहा है? इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? शासन उस पर क्‍या कार्यवाही करेगा? (ग) क्‍या खनिज अधिकारी जिला छिन्‍दवाड़ा के द्वारा बकायादारों से सांठ-गांठ कर बकाया राशि वसूली के संबंध में कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है? जिससे शासन को करोड़ों रूपयों की राजस्‍व हानि हो रही है? यदि हाँ, तो ऐसे जिला खनिज अधिकारी के विरूद्ध शासन के द्वारा क्‍या कार्यवाही की जावेगी?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ एवं ब में दर्शित है। (ख) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब में दर्शाई गई है। जी नहीं। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

शुगर मिल एवं मिल से संलग्‍न भूमियों पर औद्योगिक कार्य

35. ( क्र. 1225 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या इस वर्ष शासन/विभाग द्वारा सहकारिता विभाग को दिये गये शुगर मिल एवं मिल से संलग्‍न भूमियों को पुन: प्राप्‍त कर अपने आधिपत्‍य में ले लिया गया है? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या शुगर मिल जावरा नगर में स्‍थापित होकर रेल्‍वे स्‍टेशन से लगा होकर लगभग 80-90 बीघा भूमि के परिसर में होकर स्‍थापित है? साथ ही मिल से संलग्‍न अतिरिक्‍त लगभग 112.504 हेक्‍टेयर भूमि नगर के आसपास ही है? (ग) यदि हाँ, तो उद्योग विभाग के पुन: आधिपत्‍य में आये इस मिल एवं मिल परिसर में कोई बड़ा वृहद उद्योग एवं मिल से संलग्‍न आसपास की भूमियों पर लघु कुटीर उद्योग इत्‍यादि हेतु विचार प्रारंभ हुआ है? (घ) यदि हाँ, तो रतलाम जंक्‍शन से मात्र 30-35 कि.मी. दूर जावरा नगर रेल्‍वे स्‍टेशन से संलग्‍न रेल्‍वे स्‍टशेन से लेकर मिल के भीतर तक डली रेल्‍वे लाईन रखने वाले मिल परिसर हेतु एवं संलग्‍न भूमियों हेतु क्‍या कार्य-योजना बनाई जा रही है?

राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम ( श्री संजय पाठक ) : (क) जी हाँ। शहीद नरेन्‍द्र सिंह चन्‍द्रावत सहकारी शक्‍कर कारखाना मर्यादित जावरा जिला रतलाम का आधिपत्‍य उद्योग विभाग द्वारा प्राप्‍त किया गया। (ख) उक्‍त शुगर मिल प्‍लांट कुल रकबा 36.539 हेक्‍टेयर भूमि में स्‍थापित है। जी हाँ, कुल 112.504 में से 36.539 हेक्‍टेयर भूमि के अतिरिक्‍त शेष भूमि नगर के आसपास ही है। (ग) उद्योग विभाग द्वारा उद्योगों की स्‍थापना नहीं की जाती, उद्यमियों की मांग एवं संभावनाओं के आधार पर कार्य योजना तैयार की जाती है। (घ) जी,नहीं।

विधायक निधि के कार्यों की स्‍वीकृति

36. ( क्र. 1255 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विधान सभा निवार्चन क्षेत्र विकास योजना के अंतर्गत सर्कुलर क्र. 893 दिनांक 20.02.2013 के अनुसार विधायक निधि की स्‍वीकृति हेतु सामान्‍यत: 30 दिवस की समय-सीमा निर्धारित की गई है एवं क्‍या सामान्‍यत: 30 दिवसों के पश्‍चात् ही कार्य की स्‍वीकृति दी जाती है? (ख) क्‍या पनागर विधान सभा क्षेत्र की नगर परिषद् बरेला को पेयजल सप्‍लाई हेतु विधायक निधि से एक ट्रैक्‍टर की प्रशासकीय स्‍वीकृति दि. 25.05.2016 को जारी की गई हैं एवं प्रश्‍न दिनांक तक निधि का भुगतान नहीं किया गया हैं? (ग) क्‍या अल्‍प वर्षा की स्थिति में यह स्‍वीकृति प्राथमिकता से दी जाना आवश्‍यक नहीं है? इसके लिये कौन दोषी हैं? क्‍या दोषी अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी? (घ) यदि हाँ, तो योजना के क्रियान्‍वयन में अनुभूत कठिनाईयों/आवश्‍यकताओं के परिप्रेक्ष्‍य में न्‍यूनतम समय-सीमा की जा सकती है? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) जी हाँ। सामान्‍यत: 30 दिवसों के अंदर ही प्रशासकीय स्‍वीकृति प्रदान की जाती है। (ख) जी हाँ। प्रश्‍न दिनांक तक (दिनांक 09-06-2016) राशि का भुगतान किया जा चुका है। (ग) अल्‍प वर्षा की स्थिति में यह स्‍वीकृति प्राथमिकता से दी जाना आवश्‍यक है और स्‍वीकृति जारी की जा चुकी है। अत: किसी के दोषी होने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना-2013 की मार्गदर्शिका के बिन्‍दु क्रमांक 3.4 में स्‍पष्‍ट निर्देश होने से शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

इंदिरा सागर परियोजना की नहरों का समय-सीमा में पूर्ण किया जाना

37. ( क्र. 1305 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यानसिंह सोलंकी : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या खरगोन जिले में इंदिरा सागर परियोजना की नहरों की स्‍वीकृति हुई है? यदि हाँ, तो इसकी निविदा कब जारी हुई? निविदा में कार्य पूर्ण करने के लिये कितनी अवधि निर्धारित की गई थी? निविदा जारी होने की दिनांक, राशि एवं कार्यावधि सहित संपूर्ण जानकारी दी जावें। (ख) कार्यादेश जारी होने के दिनांक तक क्‍या ठेकेदार द्वारा समय-सीमा में कार्य पूर्ण कर लिया गया है? यदि नहीं, तो कार्यावधि पूर्ण करने के लिये ठेकेदार को कितनी बार समयवृद्धि की गई? समय पर कार्य न होने के क्‍या कारण रहे है? क्‍या विभाग की गलती रही है? यदि हाँ, तो विभागीय अधिकारियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? यदि ठेकेदार की त्रुटि रही है तो ठेकेदार के विरूद्ध समय-समय पर कितनी बाद दण्‍ड किया गया है? क्‍या इन नहरों में किसानों की गर्मी से फसल उत्‍पादन के लिये पानी छोड़ने के क्‍या प्रावधान है? विगत एक माह में कब-कब पानी छोड़ा गया है? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के अनुसार जो कार्य शेष रहे है वह कब तक पूर्ण कर लिया जावेगा, उसकी समय-सीमा बताई जावें। पानी छोड़ने की समयावधि निर्धारित करेगें, ताकि किसानों को आंदोलन नहीं करना पड़ेगा।

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। विस्‍तृत परियोजना प्रतिवेदन के अनुसार ग्रीष्‍म कालीन फसलों हेतु कुल सिंचित क्षेत्र के 10 प्रतिशत क्षेत्र अर्थात 12300 हेक्‍टेयर में पानी देने का प्रावधान है। दिनांक 25/05/2016 को मुख्‍य नहर के 58.00 कि.मी तक एवं दिनांक 06/06/2016 को 105.00 कि.मी. तक पानी छोड़ा गया। (ग) मुख्‍य नहर के शेष कार्यों को अक्‍टूबर 2016 तक तथा शेष समस्‍त कार्यों को माह जून 2017 तक पूर्ण करना लक्षित है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''आठ''

अवैध उत्‍खनन

38. ( क्र. 1335 ) श्री मुकेश नायक : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पन्‍ना जिले की पवई विधानसभा क्षेत्र में आदिवासियों की भूमि पर अवैध उत्‍खनन की जानकारी के संबंध में प्रश्‍नकर्ता विधायक द्वारा पत्र क्रमांक MLA/1375, दिनांक 19.06.2016, MLA/1351, दिनांक 06.04.2016, MLA/1347, दिनांक 06.04.2016, MLA/1017, दिनांक 05.10.2015, MLA/979, दिनांक 26.08.2015, MLA/967, दिनांक 24.08.2015, MLA/966, दिनांक 24.08.2015, MLA/965, दिनांक 24.08.2016, MLA/382, दिनांक 09.01.2015, कई पत्र भेजे गये लेकिन आज दिनांक तक कोई कार्यवाही नहीं की गई? (ख) पन्‍ना जिले की तह. पवई के ग्राम बछौन के खसरा क्रमांक 30, 28/1, 47, 32/1, ग्राम हरदुआ तह. पवई खसरा क्रमांक 151/1, 151/2, 152/1, ग्राम कुटमी तह. पवई खसरा क्रमांक 196/1, 276/2 में भारी मात्रा में अवैध उत्‍खनन हो रहा है ये जमीने सभी आदिवासियों की है जिन पर जबरन कब्‍जा कर अवैध उत्‍खनन हो रहा है? जिसकी कई बार शिकायत करने पर भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। इन सभी स्‍थानों पर एक भी खदान स्‍वीकृत नहीं है फिर भी भारी मात्रा में अवैध उत्‍खनन हो रहा है? क्‍या शासन विभाग की टीम गठित कर उक्‍त अवैध उत्‍खनन की जाँच करायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? (ग) क्‍या पन्‍ना जिले की पवई विधानसभा क्षेत्र के ग्राम ककरी कछार में कलेक्‍टर पन्‍ना द्वारा निरीक्षण के दौरान अवैध खदान एवं अवैध क्रेसर पायी जाने पर नोटिस जारी किया था? उस नोटिस के आधार पर खनिज विभाग पन्‍ना ने आज दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई एवं खनिज निरीक्षक जिनकी उदासीनता से अवैध उत्‍खनन चल रहा है। विभाग उन पर क्‍या कार्यवाही की है अगर नहीं तो कब तक?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) माननीय विधायक द्वारा प्रस्‍तुत पत्रों के संबंध में चाही गई जानकारी खनिज विभाग कार्यालय द्वारा जबावी पत्रों के माध्‍यम से दी गई है। जिसकी जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-अ पर दर्शित है। (ख) प्रश्‍नानुसार उल्‍लेखित क्षेत्रों पर की गई कार्यवाही की जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-ब पर दर्शित है। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब में दर्शाये अनुसार प्रकरण पंजीबद्ध कर कार्यवाही की गई है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र पर दिनांक 11.12.2015 को खसरा क्रमांक 93 में अवैध रूप से भण्‍डारित गिट्टी तथा क्रेशर मशीन जब्‍त कर मध्‍यप्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भण्‍डारण) नियम 2006 के तहत अवैध भण्‍डारण का प्रकरण तैयार किया गया था। जिसे नियमानुसार अग्रिम कार्यवाही हेतु अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व), पवई को भेजा गया है। खनि निरीक्षक द्वारा अवैध उत्‍खनन के 10 प्रकरण, जिसमें रूपये 3,31,25,928/- का अर्थदण्‍ड प्रस्‍तावित किया गया है, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व), पवई के न्‍यायालय में निराकरण हेतु भेजा गया है। इस कार्यवाही से खनि निरीक्षक की उदासीनता प्र‍तीत नहीं होती है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''नौ''

नगर पालिका परिषद् गोटेगांव में स्‍वीकृत निर्माण कार्य

39. ( क्र. 1339 ) डॉ. कैलाश जाटव : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नगर पालिका परिषद् गोटेगांव अंतर्गत वित्‍त वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में किन-किन मदों में राशि का व्‍यय किया गया? मदवार सूची उपलब्‍ध करावें? (ख) प्रश्‍नांक (क) अनुसार वित्‍त वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में नगरपालिका परिषद् गोटेगांव में स्‍वीकृत निर्माण कार्यों की वर्तमान स्थिति क्‍या है एवं जो कार्य निर्माणाधीन हैं, उनमें आज दिनांक तक कितनी-कितनी राशि आहरित की गई विवरण सूची सहित उपलब्‍ध करावें? (ग) नगर पालिका परिषद् गोटेगांव अंतर्गत वित्‍त वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में नगर में निर्माण किये गये शौचालयों की वर्तमान स्थिति क्‍या है? निर्माणाधीन एवं प्रस्‍तावित शौचालयों की सूची उपलब्‍ध करावें?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) प्रस्‍तावित 1915 शौचालयों में से 1122 शौचालयों का कार्य पूर्ण/निर्माणाधीन है, जिसकी सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है तथा 793 शौचालयों की सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

तालाबों का निर्माण

40. ( क्र. 1345 ) डॉ. कैलाश जाटव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव अंतर्गत वित्‍त वर्ष 2014-15, 2015-16 एवं 2016-17 में कितने तालाब निर्माण स्‍वीकृत किये गये? सूची उपलब्‍ध करावें? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार क्‍या स्‍वीकृत समस्‍त तालाब निर्माण किये जा चुके है? यदि हाँ, तो सूची उपलब्‍ध करावें यदि नहीं, तो इनके निर्माण पूर्ण किये जाने की समय-सीमा बतावें? (ग) प्रश्‍नांश (क) अनुसार क्‍या तालाबों को पानी से भरने हेतु नहरों से पानी तालाब में छोड़े जाने की शासन की कोई मंशा है, यदि हाँ, तो बतावें यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) प्रश्‍नाधीन अवधि में विभाग ने कोई सिंचाई जलाशय स्‍वीकृत नहीं किया है। (ख) से (ग) जानकारी निरंक है।

विधायक निधि के कार्य

41. ( क्र. 1347 ) डॉ. कैलाश जाटव : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र गोटेगांव अंतर्गत जनपद पंचायत गोटेगांव एवं जनपद पंचायत नरसिंहपुर में वित्‍त वर्ष 2014-15, 2015-16 में विधायक निधि से स्‍वीकृत कार्यों की वर्तमान स्थिति क्‍या है? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार वर्तमान में वित्‍त वर्ष 2014-15, 2015-16 में विधायक निधि से स्‍वीकृत कितने कार्य पूर्ण हो चुके है? सूची उपलब्‍ध करावें। (ग) प्रश्‍नांश (क) अनुसार विधान सभा क्षेत्र में वित्‍त वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में स्‍वीकृत अपूर्ण कार्य की सूची प्रदान करें एवं अपूर्णता का स्‍पष्‍ट कारण बतायें। कार्य समय-सीमा में पूर्ण न होने पर संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों में अनुशासनात्‍मक कार्यवाही शासन द्वारा की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव अन्तर्गत जनपद पंचायत गोटेगांव एवं जनपद पंचायत नरसिंहपुर में वित्त वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में विधायक निधि से कुल 110 कार्य स्वीकृत किये गये थे जिनमें से 18 कार्य पूर्ण है शेष 92 कार्य प्रगतिरत/अपूर्ण है। (ख) पूर्ण कार्यों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के कालम 5 में दर्शित है। (ग) प्रश्नानुसार स्वीकृत अपूर्ण कार्यों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के कालम 5 में दर्शित हैं। कार्यों के अपूर्ण रहने का कारण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के कालम 6 में उल्लेखित है। अपूर्ण कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने हेतु संबंधित निर्माण एजेन्सियों को निर्देशित किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

रेत खदानों के आवंटन में पर्यावरण की अनुमति की जानकारी विषयक

42. ( क्र. 1364 ) सुश्री हिना लिखीराम कावरे : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या पाँच हेक्‍टेयर से कम रकबे की रेत खदानों को पर्यावरण की एन.ओ.सी. केन्द्र सरकार से लेने संबंधी आदेश में बदलाव किया गया है? यदि हाँ, तो क्‍या पूर्व की तरह यह एन.ओ.सी. अब जिला स्‍तर पर दी जा सकेगी? (ख) लांजी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पाँच हेक्‍टेयर से कम रकबे वाली ऐसी कितनी खदानें है, जिनकी निलामी की जानी है? अब तक नीलामी न किये जाने के क्‍या कारण हैं? (ग) पाँच हेक्‍टेयर से ज्‍यादा कितनी खदानें विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत हैं? क्‍या इनकी निलामी की जा चुकी है? यदि हाँ, तो ठेकेदारों के नाम खदान अनुसार जानकारी दें? यदि नहीं, तो क्‍यों?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। (ख) प्रश्‍नाधीन विधानसभा क्षेत्रांतर्गत प्रश्‍नानुसार चार खदानों को नीलामी हेतु चिन्‍हित किया गया है। इन खदानों पर नियमानुसार संबंधित ग्राम पंचायत एवं वन विभाग को अभिमत हेतु लेख किया गया है। इनसे प्रतिवेदन प्राप्‍त न होने के कारण इनकी नीलामी नहीं की गई है। (ग) प्रश्‍नाधीन विधान सभा क्षेत्रांतर्गत प्रश्‍नानुसार चार खदानें हैं जिनकी नीलामी की गई है। प्रश्‍नांश की शेष जानकारी संलग्न परिशिष्ट में दर्शित है। अत: शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''दस''

33/11 KVA सब स्‍टेशन की स्‍थापना

43. ( क्र. 1365 ) सुश्री हिना लिखीराम कावरे : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र लांजी अंतर्गत ग्राम पंचायत आवा वि.वि. केन्‍द्र भानेगांव तथा ग्राम पंचायत माटे, वि.वि. केन्‍द्र किरनापुर में 33/11 के.व्‍ही.ए. सब स्‍टेशन प्रारंभ करने हेतु कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन है? (ख) यदि हाँ, तो इस पर कब तक स्‍वीकृति प्रदान कर दी जाएगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी नहीं, विधानसभा क्षेत्र लांजी अन्‍तर्गत ग्राम पंचायत-आवा, वितरण केन्‍द्र-भानेगांव तथा ग्राम पंचायत माटे, वितरण-केन्‍द्र किरनापुर में 33/11 के.व्‍ही. सब-स्‍टेशन प्रारंभ करने हेतु वर्तमान में कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन नहीं है। उल्‍लेखनीय है कि ग्राम आवा को वर्तमान में विद्युत प्रदाय कर रहे भानेगांव 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र से निकले 11 के.व्‍ही. फीडर पर भार 155 एम्‍पीयर एवं वोल्‍टेज रेग्‍यूलेशन 10.87% है जो कि निर्धारित मानक स्‍तर से अधिक है। उक्‍त स्थिति तथा भविष्‍य की भार वृद्धि के दृष्टिगत उक्‍त फीडर को भानेगांव उपकेन्‍द्र से आवा ग्राम तक की 5 कि.मी. की दूरी तक दो भागों में विभक्‍त किये जाने हेतु चिन्हित किया गया है तथा विभक्तिकरण के उपरांत दोनों विभक्‍त फीडरों के अंतिम छोर पर वोल्‍टेज रेग्‍यूलेशन 9% के मानक स्‍तर का हो जाएगा। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में वर्तमान में ग्राम आवा में 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र का कार्य किया जाना आवश्‍यक नहीं है। ग्राम माटे को वर्तमान में विद्युत प्रदाय कर रहे किरनापुर 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र से निकले 11 के.व्‍ही. फीडर पर भार 55 एम्‍पीयर तथा वोल्‍टेज रेग्‍यूलेशन 8.1% है, जो कि निर्धारित मानकों के अनुरूप है। अत: वर्तमान में ग्राम माटे में 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र का कार्य किया जाना तकनीकी रूप से साध्‍य नहीं है। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न नहीं उठता।

बाघ सिजारा परियोजना का टेंडर

44. ( क्र. 1383 ) कुँवर विक्रम सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विगत 5 वर्षों में टीकमगढ़ जिला स्थित बांध सिजारा परियोजना के सम्‍बंध में कब-कब कौन-कौन से टेंडर जारी किये गये? उक्‍त टेंडरों के उत्‍तर में कौन-कौन से ठेकेदारों ने अर्हता के पूर्व भाग लिया और उन्‍होंने कौन-कौन से दस्‍तावेज ऑनलाईन किस दिनांक को जमा किये? (ख) क्‍या टेंडर नियमों के पूर्व अर्हता के निविदा खोलने के बाद किसी ठेकेदार से अतिरिक्‍त रूप से अभिलेख प्राप्‍त किये गये? यदि हाँ, तो किस ठेकेदार से किस दिनांक को? (ग) क्‍या टेंडर खोलने के बाद अतिरिक्‍त रूप से दस्‍तावेज प्राप्‍त करने की घटना को कौन से मुख्‍य अभियन्‍ता ने आपत्ति दर्ज की थी? यदि हाँ, तो उनके नाम और आपत्ति की तिथि बताये? (घ) यदि उपरोक्‍तानुसार कार्यवाही से लाभ किसी एक ठेकेदार को पहुँचता है, तो ऐसी कार्यवाही का अनुमोदन देने वाले अधिकारी का नाम पद बताये और उसके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही कब की जावेगी? यदि नहीं, तो क्‍यों?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' एवं '''' एवं '''' अनुसार है। (ग) एवं (घ) जी नहीं। जी नहीं। शेष प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

खाता धारकों को मुआवजा राशि

45. ( क्र. 1384 ) कुँवर विक्रम सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्राम बरेठी तहसील राजनगर जिला-छतरपुर में नेशनल थर्मल पॉवर कॉर्पोरेशन (NTPC) में कुल कितनी जमीन अधिग्रहण की गई तथा संबंधित खाताधारकों को (कृषि) शासन के माप दण्‍डानुसार कितना मुआवजा वितरित किया गयातथा कुल कितनी राशि स्‍वीकृत की गई? (ख) कितना मुआवजा वितरण के लिए शेष है? किसानों की सहमति के आधार पर किया गया अथवा नहीं? कारण सहित स्थिति स्‍पष्‍ट करें? (ग) क्‍या काफी खाता धारकों को वंचित रखा गया है? इस पर राज्‍य सरकार क्‍या कार्यवाही कर रही है? क्‍या जिन कृषकों की भूमि का अधिग्रहण किया गया है, उनके परिवार के सदस्‍यों को नौकरी दी जावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जिला छतरपुर अंतर्गत ग्राम-बरेठी की 510-611 हेक्‍टेयर निजी भूमि का अर्जन नेशनल थर्मल पॉवर कॉर्पोरेशन (एन.टी.पी.सी.) के लिये किया गया। उक्‍त भूमि के खाता धारकों को भू-अर्जन अधिनियम, 1894 के तहत् तथा शासन के आदेशों के अनुरूप अवार्ड पारित कर राशि रूपये 47,62,93,228/- का वितरण किया गया है। ग्राम बरेठी हेतु रूपये 48,70,42,179/- की अवार्ड राशि (स्‍वीकृति) पारित की गई है। (ख) प्रश्‍नांश (क) में अंकित ग्राम बरेठी की रूपये 1,07,48,951/- मुआवजा राशि वितरण के लिये शेष है। कृषकों की भूमि का अर्जन भू-अर्जन अधिनियम, 1894 के अन्‍तर्गत किया गया है। (ग) प्रश्‍नांश (क) में अंकित ग्राम बरेठी की (एन.टी.पी.सी. हेतु) अर्जन की गई भूमि के प्रभावित खाता धारकों में से किसी भी खाता धारक को मुआवजा से वंचित नहीं किया गया है, अतएव कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न ही उत्‍पन्‍न नहीं होता है। जिन कृषकों की भूमि का अर्जन किया गया है, उनके परिवारों को नौकरी के एवज में म.प्र.शासन की पुनर्वास नीति (योजना) दिनांक 12.09.2012 के अनुसार रूपये 3,00,000/- या विशेष प्रकरण मान कर एक बार के लिये रूपये 3,50,000/- प्रति एकड़ के मान से रोजगार अनुदान राशि दी गई है।

धार में महाराजा भोज की मूर्ती की स्‍थापना

46. ( क्र. 1451 ) श्रीमती नीना विक्रम वर्मा : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या राजा भोज के पंद्रहसौवे राज्‍यावरोहण के क्रम में माननीय मुख्‍यमंत्री की अध्‍यक्षता में गठित समिति द्वारा धार जिला मुख्‍यालय पर राजा भोज की प्रतिमा स्‍थापित करने तथा भोजकालीन पार्क अनुरूप बगीचे के निर्माण का निर्णय लिया था? (ख) यदि हाँ, तो धार शहर में पूर्व हवा बंगले के पास राजाभोज की प्रतिमा सह उद्यान की घोषणा माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा की गई है? (ग) यदि हाँ, तो नगर पालिका परिषद् धार द्वारा प्रस्‍तुत नक्‍शा व प्रस्‍ताव विभाग को प्राप्‍त हो चुके हैं? (घ) राजा भोज की प्रति‍मा धार जिला मुख्‍यालय पर स्‍थापित करने हेतु क्‍या कार्रवाई की गई है तथा प्रकरण में वर्तमान स्थिति से अवगत करावें।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। (ग) जी नहीं। (घ) निकाय द्वारा विस्‍तृत योजना प्रतिवेदन राशि रू. 229.00 लाख तैयार कर लिया गया है। जिला कलेक्‍टर के माध्‍यम से शासन को प्रस्‍तुत किया जा रहा है।

रेत खदानों का आवंटन

47. ( क्र. 1457 ) श्री प्रदीप अग्रवाल : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दतिया जिले में वर्तमान में खनिज विभाग द्वारा कौन-कौन सी रेत खदानों किस दिनांक को कितने समय के लिये, किस फर्म को आवंटित की गई तथा कितने लोगों को कौन-कौन से ग्राम में निजी भूमि से रेत उत्‍खनन की अनुमति प्रदान की? सर्वे नंबरों सहित जानकारी उपलब्‍ध कराई जावें। (ख) कंडिका (क) में वर्णित समस्‍त रेत खदानों में कितने घनफुट रेत उत्‍खनन को मंजूरी संबंधित ठेकेदार को दी गई है एवं प्रश्‍न दिनांक तक उसमें से कितने घनफुट रेत उक्‍त खदानों से उठाई जा चुकी है तथा कितनी उठाई जाना शेष है? (ग) आवंटन के उपरांत कौन सी रेत खदान से कितनी-कितनी रायल्‍टी प्रश्‍न दिनांक तक जमा हुई दिनांकवार/खदानवार जानकारी उपलब्‍ध कराई जावें। निजी भूमि से रेत उत्‍खनन किये जाने के संबंध में शासन का क्‍या नियम है। (घ) क्‍या उक्‍त खदानों के ठेकेदार को रेत भण्‍डारण की स्‍वीकृति दी गई है? यदि हाँ, तो किसको और कितनी-कितनी खदानवार जानकारी दें? क्‍या विभाग द्वारा इनके भण्‍डारण की जाँच की गई है? यदि हाँ, तो जानकारी दें कि किसके द्वारा कहाँ-कहाँ कितना-कितना भण्‍डारण किया गया है? भण्‍डारण की रायल्‍टी विभाग में जमा की गई है या नहीं?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नाधीन जिले में मध्‍यप्रदेश राज्‍य खनिज निगम के पक्ष में रेत खनिज के 26 उत्‍खनिपट्टे 10 वर्ष की अवधि के लिये स्‍वीकृत किये गये हैं। मध्‍यप्रदेश राज्‍य खनिज निगम द्वारा ई-नीलामी के माध्‍यम से पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार 20 रेत खदान के ठेके दिये गये हैं। प्रश्‍नाधीन जिले में निजी भूमि पर रेत परिवहन की अनुज्ञा दो व्‍यक्तियों को जारी की गई है। प्रश्‍नांश की शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब में दर्शित है। (ख) प्रश्‍नांश (क) में‍ दिये उत्‍तर में दर्शित रेत खदानों की स्‍वीकृत वार्षिक ठेका मात्रा की जानकारी तथा जिन 3 रेत खदानों में रेत उत्‍खनन कार्य प्रारंभ हुआ है, उनमें रेत खदानों से उठाई गई मात्रा एवं शेष मात्रा की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ में दर्शित है। निजी भूमि में दी गई परिवहन अनुज्ञा के संबंध में प्रश्‍नानुसार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब में दर्शित है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ एवं ब में दर्शित है। प्रश्‍नांश के शेष भाग की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-स में दर्शित है। (घ) पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ में दर्शाये गये ठेकेदारों में से चार ठेकेदारों को नियमानुसार भण्‍डारण अनुज्ञप्ति जारी की गई है। जिसका विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब में दर्शित है। विभाग द्वारा एक भण्‍डारण स्‍थल ग्राम रूहेरा की जाँच की गई है। जिसमें 25,000 घन मीटर रेत का भण्‍डारण पाया गया है। जिसकी रॉयल्‍टी जमा है।

जल आवर्धन योजना

48. ( क्र. 1458 ) श्री प्रदीप अग्रवाल : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) वर्ष 2010 के उपरांत ग्‍वालियर चंबल संभाग में कौन-कौन सी नगर निगम/नगर पालिका/ नगर पंचायतों में जल आवर्धन योजना/फिल्‍टर प्‍लान्‍ट स्‍वीकृत हुये? ये योजनायें किस मद से स्‍वीकृत हुई, इनकी लागत राशि/कार्य एजेंसी का नाम/ कार्य पूर्ण होने की समय-सीमा के साथ-साथ जानकारी उपलब्‍ध करायें कि कौन-कौन से कार्य पूर्ण एवं कौन-कौन से कार्य अपूर्ण या अधूरे हैं? (ख) कंडिका (क) में वर्णित जल आवर्धन योजनाओं में वानकों कंस्‍ट्रक्‍शन प्रा.लिमि.कंपनी ग्‍वालियर द्वारा कहाँ-कहाँ कार्य करायें, जिनमें से कितने पूर्ण कराकर विभाग को सुपुर्द की जा चुकी है तथा कितने अपूर्ण है, कितने व कौन-कौन से कार्य प्रारंभ ही नहीं हुए है? कार्य के नाम/लागत राशि सहित जानकारी उपलब्‍ध करायें। (ग) क्‍या उक्‍त कंपनी द्वारा प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट में अंकित पाईप (गेज और कंपनी) का उपयोग नहीं किया गया? यदि हाँ, तो कंपनी के खिलाफ क्‍या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो किन-किन अधिकारियों द्वारा पाईप की गुणवत्‍ता संबंधी जाँच की गई? उनके नाम/पद एवं उनके द्वारा दिये गये प्रतिवेदनों की छायाप्रतियां उपलब्‍ध कराई जावें। (घ) क्‍या उक्‍त कंपनी को ब्‍लेक लिस्‍ट किया गया है? यदि हाँ, तो कब? क्‍या उक्‍त कंपनी द्वारा कई योजनायें समय-सीमा समाप्‍त होने के बावजूद विभाग को सुपुर्द नहीं की है उसके बावजूद विभाग द्वारा इनके मेंटीनेंस पर लाखों रूपये व्‍यय किये जा रहे है? यदि हाँ, तो इसके लिये कौन-कौन उत्‍तरदायी हैं? यदि नहीं, तो उक्‍त कंपनी द्वारा कराये गये संपूर्ण कार्यों की जाँच राज्‍य स्‍तरीय अधिकारियों द्वारा समिति बनाकर कराई जावेगी।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट में किसी भी कंपनी का उल्‍लेख नहीं किया गया है। भारतीय मानक ब्‍यूरो द्वारा निर्धारित मापदण्‍डों के अनुसार पाईप का प्रावधान किया जाता है। तदानुसार ही कंपनी द्वारा पाईप का उपयोग किया जा रहा है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। माधव इन्‍स्‍टीट्यूट ऑफ साईंस एण्‍ड टेक्‍नोलॉजी द्वारा दिनांक 14.12.2013 को दतिया की योजना का निरीक्षण कर प्रतिवेदन दिया गया है। प्रतिवेदन की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। थर्ड पार्टी इन्‍स्‍पेक्‍शन के उपरांत कार्य का भुगतान किया गया है। (घ) जी नहीं। म.प्र. लोक निर्माण विभाग के मुख्‍य अभियंता के आदेश क्रमांक/सा./401/कॉन/70/2015/4392-93 दिनांक 05.04.2016 से 02 वर्ष के लिए निलंबित किया गया था, जिसे मध्‍यप्रदेश लोक निर्माण विभाग प्रमुख अभियंता के आदेश क्रमांक 212/वनिस/पंजी. अपील/प्र.अ./लो.नि.वि./2016/429 दिनांक12.07.2016 द्वारा कंपनी का पंजीयन बहाल कर दिया गया है। जी नहीं। वर्ष 2013 से नगर पालिका, दतिया द्वारा योजना का संचालन-संधारण किया जा रहा है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

 

ग्‍वालियर जिले के अंतर्गत हरसी कैनाल से रमौआ बांध में पानी भरना

49. ( क्र. 1503 ) श्री भारत सिंह कुशवाह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या ग्‍वालियर की हरसी कैनाल से रमौआ बांध में जल भराव करने हेतु योजना बनाई गई है? (ख) यदि हाँ, तो योजना की भौतिक स्थिति क्‍या है? (ग) हरसी कैनाल से रमौआ बांध में पानी भरने हेतु कार्य कब तक पूर्ण कराया जावेगा?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) से (ग) निर्माणाधीन हरसी उच्‍चस्‍तरीय के कि.मी. 76.305 से नाले में पानी छोड़कर रमौआ बांध में ले जाने का प्रावधान किया गया है। निर्माणाधीन कार्य वर्ष 2017-18 में पूर्ण होना संभावित है।

न्‍यायालय में प्रस्‍तुत प्रकरणों में निर्णय उपरांत दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही

50. ( क्र. 1547 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विगत दो वर्षों में पुलिस, लोकायुक्‍त तथा ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. द्वारा न्‍यायालयों में प्रस्‍तुत प्रकरणों में से कितने प्रकरणों पर अंतिम निर्णय हुआ तथा उनमें से कितनों में आरोपियों को सजा हुई एवं कितनों में आरोपी बरी हुए? पुलिस, लोकायुक्‍त तथा ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. के प्रकरणों की संख्‍या अलग-अलग बताएं? (ख) न्‍यायालयों द्वारा जनवरी 2015 से जून 2016 तक महिला उत्‍पीड़न की विभिन्‍न धाराओं में दर्ज प्रकरणों में से कितने प्रकरणों पर अंतिम निर्णय दिया गया? उनमें से कितने प्रकरणों में आरोपियों को सजा हुई तथा कितने प्रकरणों में आरोपी बरी हुए? (ग) महिलाओं का अपहरण, बलात्‍कार, बलात्‍कार के बाद हत्‍या, सामूहिक बलात्‍कार, देह शोषण के कितने प्रकरण विभिन्‍न न्‍यायालयों में लंबित हैं? प्रकरण क्रमांक, कायमी दिनांक, धारा सहित नाबालिग की सूची अलग से बताएं? (घ) महिला उत्‍पीड़न के प्रकरणों पर शीघ्र निर्णय हो सके, इस हेतु न्‍यायालयीन स्‍तर पर विगत दो वर्षों में क्‍या-क्‍या प्रयास किए गए?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

जबलपुर में रेत खदानों का संचालन

51. ( क्र. 1551 ) श्री रजनीश सिंह : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगें कि (क) जबलपुर जिले के लिए  कौन-कौन सी रेत खदान शासन ने निर्धारित की है ? इसमें से किस रेत खदान को कितनी राशि में किस दिनांक को नीलाम किया, किस दिनांक को खदान का अनुबंध किया ? कौन सी खदान किस दिनांक से प्रारंभ की गई? किस खदान को किन कारणों से प्रश्‍नांकित दिनांक तक भी प्रारंभ नहीं किया जाएगा? (ख) किस रेत खदान में कितने क्‍यूबिक मीटर रेत का अनुमान लगाया जाकर उसकी कितनी अपसेट प्राईज निर्धारित की गई थी ? उस खदान को कितनी राशि में नीलाम किया गया? किस रेत खदान से रेत का प्रति क्‍यूबीक मीटर कितना बाजार मूल्‍य निर्धारित किए जाने का अधिकार अनुबंधकर्ता को दिया गया है? (ग) रेत खदानों पर C.C.T.V. कैमरे लगाए जाने रेत परिवहन करने वाले वाहनों में G.P.S. सिस्‍टम लगाये जाने के प्रावधान किस दिनांक से लागू किए गए है? उसके अनुसार कितनी खदानों में C.C.T.V. कैमरे लगा दिये गये हैं? कितने वाहनों में G.P.S. System लगा दिया गया है?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट पर दर्शित है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट पर दर्शित है। प्रश्‍नानुसार प्रावधान नहीं है। (ग) प्रश्‍नानुसार प्रावधान लागू नहीं किये गये हैं। अत: शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता।

शिवपुरी जिले में स्‍वीकृत औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण

52. ( क्र. 1571 ) श्री रामसिंह यादव : क्या राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शिवपुरी जिले में जून 2016 की स्थिति में औद्योगिक क्षेत्र स्‍वीकृत है? यदि हाँ, तो कौन-कौन से औद्योगिक क्षेत्र कहाँ-कहाँ पर कब से स्वीकृत है? इन स्‍वीकृत औद्योगिक क्षेत्रों को कहाँ-कहाँ पर कितनी-कितनी भूमि आवंटित की गई है? उक्‍त औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण कब तक पूर्ण होगा? औद्योगिक क्षेत्रवार बताएं। (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) में वर्णित औद्योगिक क्षेत्रों के विकास हेतु राशि आवंटित की गई है? यदि हाँ, तो कितनी-कितनी राशि कब-कब किन-किन औद्योगिक क्षेत्रों हेतु आवंटित की गई? आवंटित राशि से कहाँ-कहाँ पर कब-कब कितना-कितना क्‍या-क्‍या कार्य कितनी राशि से कराया गया? (ग) क्‍या शिवपुरी जिले में उक्‍त स्‍वीकृत औद्योगिक क्षेत्रों का निर्माण अपूर्ण है? यदि हाँ, तो निर्माण कार्य अपूर्ण क्‍यों है एवं निर्माण कार्य कब तक पूर्ण होगा? (घ) क्‍या प्रश्‍नाधीन वर्णित औद्योगिक क्षेत्रों के विकास एवं निर्माण हेतु शासन द्वारा कोई बजट आवंटन नहीं किया गया है? यदि हाँ, तो क्‍यों नहीं किया गया है तथा शासन द्वारा कब तक बजट आवंटन किया जाएगा?

राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम ( श्री संजय पाठक ) : (क) जी हाँ। जून 2016 की स्थिति में शिवपुरी जिले में निम्‍नलिखित 03 औद्योगिक क्षेत्र स्‍वीकृत है -

क्र.

औद्योगिक क्षेत्र का नाम

रकबा (हेक्‍टेयर में)

वर्ष

1

अर्द्धशहरी औद्योगिक संस्‍थान गुना नाका शिवपुरी

12.040

1966

2

औद्योगिक क्षेत्र बडौदी शिवपुरी

26.013

1984

3

औद्योगिक क्षेत्र बराड शिवपुरी

08.100

1991

उक्‍त तीनों औद्योगिक क्षेत्रों में से क्रमांक 1 एवं 2 पर उल्‍लेखित औद्योगिक क्षेत्रों में निर्माण कार्य पूर्ण हो चुके हैं। (ख) वर्ष 2014 से स्‍वीकृत विकास कार्यों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी नहीं, कार्य प्रगति पर है। शेष का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता। (घ) प्रश्‍नांश-क के बिन्‍दु क्रमांक-1 एवं 2 में दर्शित औद्योगिक क्षेत्रों के विकास हेतु राशि स्‍वीकृत की गयी है।

परिशिष्ट - ''ग्यारह''

पात्र होने के पश्‍चात् भी डिप्‍टी कलेक्‍टर के पद पर पदोन्‍नति नहीं किया जाना

53. ( क्र. 1580 ) पं. रमेश दुबे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश में इस वर्ष किन-किन तहसीलदारों को डिप्‍टी कलेक्‍टर के पद पर कब पदोन्‍नत कर कहाँ-कहाँ पर पदस्‍थ किया गया है? पदोन्‍नति हेतु राजस्‍व विभाग से तहसीलदारों के संनिष्ठा की जानकारी कब प्राप्‍त की गयी? (ख) क्‍या राजस्‍व विभाग द्वारा किसी भी तहसीलदार के विरूद्ध कोई भी दंड या जाँच प्रभावशील नहीं होने के बावजूद भी दण्‍ड प्रभावशील होने की गलत जानकारी भेजी गयी, जिसके कारण उनसे जूनियर तहसीलदारों की पदोन्‍नति हो गयी और वे पदोन्‍नति से वंचित रह गये? (ग) क्‍या यह भी सही है कि उक्‍त कारणों को स्‍पष्‍ट करते हुए प्रश्‍नकर्ता ने भी मान. सामान्‍य प्रशासन मंत्री एवं राजस्‍व मंत्री को पत्र प्रेषित किया है? यदि हाँ, तो इन पत्रों पर किस स्‍तर से अब तक क्‍या कार्यवाही की गयी? (घ) क्‍या शासन गलत जानकारी भेजने वाले अधिकारी कर्मचारी की जिम्‍मेदारी नियत कर उनके विरूद्ध कार्यवाही करेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। विभागीय पदोन्‍नति समिति की बैठक दिनांक 19/02/2016 से पूर्व संनिष्‍ठा संबंधी अंतिम जानकारी राजस्‍व विभाग से दिनांक 17/02/2016 को प्राप्‍त हुई है। (ख) जी नहीं। (ग) (1) जी हाँ। प्रश्‍नकर्ता द्वारा माननीय राज्‍य मंत्री जी, सामान्‍य प्रशासन विभाग को प्रेषित पत्र दिनांक 17/05/2016 माननीय राज्‍य मंत्री जी की ओर से नियमानुसार आवश्‍यक कार्यवाही हेतु इस विभाग को दिनांक 04/07/2016 को प्राप्‍त हुआ है। जिसे राजस्‍व विभाग को विभागीय पत्र दिनांक 15/07/2016 को आवश्‍यक कार्यवाही हेतु भेजा गया है। (2) प्रश्‍नकर्ता द्वारा माननीय राजस्‍व मंत्री जी का भेजा गया पत्र दिनांक 30/03/2016 को तत्‍कालीन राजस्‍व मंत्रीजी द्वारा प्रस्‍तुत प्रमुख सचिव राजस्‍व विभाग को दिनांक 31/03/2016 को नियमानुसार आवश्‍यक कार्यवाही हेतु भेजा गया जो सामान्‍य प्रशासन विभाग को प्राप्‍त नहीं हुआ। (घ) प्रश्‍नांश '''' के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

नजूल भूमि के पट्टों का वितरण

54. ( क्र. 1610 ) डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) बालाघाट जिले की नगरपालिका परिषद् वारासिवनी अंतर्गत नजूल भूमि किस-किस खसरा न. पर कहां-कहां पर कितनी-कितनी स्थित हैं व उक्‍त भूमि का कब-कब सीमांकन किया गया है? उक्‍त नजूल भूमि पर किन-किन व्‍यक्तियों का कब से कब्‍जा हैं? नाम सहित जानकारी देवें? (ख) क्‍या उक्‍त भूमि का पर कब्‍जाधारियों के द्वारा पूर्व में वितरित पट्टे के नवीनीकरण हेतु कब-कब किस-किस के द्वारा आवेदन प्रस्‍तुत किया गया? क्‍या प्राप्‍त आवेदनों का निराकरण समय-सीमा में किया गया हैं? यदि हाँ, तो कितने आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है और कितने आवेदको के आवेदनों का निराकरण किया जाना शेष है? (ग) उक्‍त नजूल भूमि का सीमांकन नहीं किये जाने के क्‍या कारण हैं? सीमांकन एवं संबंधितों के आवेदन अनुसार पट्टों का नवीनीकरण कब तक कर दिया जायेगा? (घ) क्‍या आवेदकों के आवेदन जानबूझकर लम्‍बित रखे गये हैं? यदि नहीं, तो उक्‍त प्रकरण की जाँच कराकर दोषी अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जावेगी?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) बालाघाट जिले की नगर पालिका परिषद्, वारासिवनी अंतर्गत वारा, सिकन्‍द्रा, सिवनी एवं चेदोरी में‍ स्थित नजूल भूमि के खसरा नंबर की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है, उक्‍त भूमि के सीमांकन हेतु आवेदन प्राप्‍त न होने से सीमांकन नहीं किया गया है, नजूल भूमि में कब्‍जे के संबंध में सर्वे कराया जा रहा है। (ख) पट्टा नवीनीकरण हेतु आवेदन प्राप्‍त न होने से पट्टा नवीनीकरण नहीं किया गया। (ग) आवेदन पत्र प्राप्‍त न होने से सीमांकन नहीं‍ किया गया है, आवेदन प्राप्‍त होने पर सीमांकन व नवीनीकरण की कार्यवाही नियमानुसार की जावेगी। (घ) आवेदन पत्र प्राप्‍त नहीं हुये है, अत: कोई भी आवेदन लंबित नहीं है।

गारंटर की आर्थिक स्थिति का आंकलन

55. ( क्र. 1611 ) श्री यशपालसिंह सिसौदिया : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या म.प्र. वित्त निगम दवारा औद्योगिक इकाइयों को आसान किस्तों पर लोन उपलब्ध कराया जाता है? यदि हाँ, तो शर्तों की प्रति उपलब्ध करायें? (ख) प्रश्‍नांश (क) संदर्भित लोन में क्या गारंटर की आर्थिक स्थिति का आंकलन किया जाता है या सीधे ही ऋण,भवन, सामग्री व बाज़ार दर के आधार पर लोन दिया जाता है? क्या ऋण राशि व भवन संयंत्र का अन्तर रिकार्ड किया जाता है? (ग) यदि उद्यमी ऋण लौटाने में सक्षम न रहे तो क्या गारंटर से राशि वसूली जाती है? यदि हाँ, तो 1 जनवरी 2010 के पश्चात कितने गारंटर से इंदौर उज्जैन संभाग में कितनी कितनी राशी वसूली? क्या वसूली का अन्य कोई विकल्प है? उक्त आवधि तक उक्त संभागों में कितनी राशी वसूल किया जाना शेष है? (घ) वित्त निगम की जिला स्तरीय समिति के अधिकार व कर्तव्यों का विवरण देवें?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी हाँ। ऋण स्‍वीकृत करने के पूर्व गारंटर की आर्थिक स्थिति का आंकलन किया जाता है। भवन सामग्री व बाजार दर के आधार पर ऋण नहीं दिया जाता है। परंतु ऋण राशि व भवन संयंत्र का अंतर रिकार्ड किया जाता है। (ग) जी हाँ। उद्यमी ऋण लौटाने में सक्षम न रहे तो गारंटर से राशि की वसूली की जाती है। 01 जनवरी, 2010 के पश्‍चात् 08 गारंटर से निगम द्वारा रूपये 872.34 लाख इंदौर, उज्‍जैन संभाग में राशि वसूल की गई है। बकाया राशि शेष रहने पर अन्‍य विकल्‍प के रूप में मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता 1959 एवं राज्‍य वित्‍त अधिनियम, 1951 की धारा-32 जी के प्रावधानों के अंतर्गत राशि वसूल की जाती है। उक्‍त अवधि में उक्‍त संभागों से राशि रूपये 544.00 लाख वसूल किया जाना शेष है। (घ) वित्‍त निगम में जिला स्‍तरीय समिति गठित नहीं है। अत: कर्तव्‍यों का विवरण देने का प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''बारह''

उदयोग स्‍थापना हेतु कार्ययोजना

56. ( क्र. 1614 ) श्री दिनेश राय : क्या राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सिवनी जिला उद्योगों की दृष्टि से पिछड़े जिलों की श्रेणी में आता है, जिसमें विशेषकर सिवनी विधान सभा क्षेत्र पूरी तरह उद्योग विहीन है? यदि हाँ, तो क्‍या शासन द्वारा पिछड़े जिलों में नवीन उद्योगों की स्‍थापना हेतु विशेष नीति बनाई गई है? (ख) क्‍या विधान सभा क्षेत्र सिवनी अंतर्गत कहीं कोई भी भूमि लैंड बैंक के रूप में चिन्हित की गई है? यदि हाँ, तो क्‍या उक्‍त भूमि पर शासन द्वारा अभी तक उद्योग स्‍थापना हेतु क्‍या कोई कार्ययोजना बनाई गई है? (ग) क्‍या पिछले दो वर्षों के बीच बड़े औद्योगिक घराने से संबंधित कोई टीम उक्‍त भूमि का अवलोकन करने के लिए आई थी? यदि हाँ, तो क्‍या अतिशीघ्र उक्‍त भूमि पर किसी बड़े उद्योग के आकार लेने की संभावना है?

राज्‍यमंत्री, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम ( श्री संजय पाठक ) : (क) जी हाँ, सिवनी जिला पिछड़ा जिला श्रेणी '''' में आता है। सिवनी विधानसभा क्षेत्र में उद्योग स्‍थापित होने से यह क्षेत्र उद्योग विहीन नहीं है। शासन द्वारा 01.10.2014 को उद्योग संवर्धन नीति-2014 जारी की गई है, जिसमें पिछड़े जिले की अवधारणा समाप्‍त की जाकर प्राथमिकता विकासखण्‍ड का प्रावधान है। इस व्‍यवस्‍था अंतर्गत ऐसे विकासखण्‍ड जहां दिनांक 01.10.2014 को वृहद औद्योगिक स्‍थापित नहीं हो, उन्‍हें प्राथमिकता विकासखण्‍ड की श्रेणी में रखा गया है। सिवनी जिले के 8 में से 7 विकासखण्‍ड प्राथमिकता विकासखण्‍डों के रूप में घोषित है। प्राथमिकता विकासखण्‍डों में स्‍थापित होने वाले इकाइयों को पात्रता अनुसार अतिरिक्‍त सुविधाएं प्राप्‍त है। (ख) विधानसभा क्षेत्र सिवनी के अंतर्गत लैंड बैंक में औद्योगिक क्षेत्र भुरकल खापा ì