परिवर्तित अतारांकित अतारांकित

मध्यप्रदेश विधान सभा


प्रश्नोत्तर-सूची
जुलाई, 2015 सत्र


मंगलवार, दिनाँक 21 जुलाई 2015


भाग-1
तारांकित प्रश्नोत्तर


पेयजल हेतु टैंकरों की व्‍यवस्‍था 

1. ( *क्र. 231 ) श्री मेव राजकुमार : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पेयजल की सुविधा हेतु इंदौर संभाग में वर्ष 2012-13 से वर्तमान तक विधायक निधि एवं अन्‍य निधियों से स्‍थानीय संस्‍थाओं को कितने-कितने पेयजल टेंकर उपलब्‍ध कराये गये ? वर्षवार जानकारी बताई जावे ? (ख) उपलब्‍ध कराये गये पेयजल टैंकर की वर्तमान में क्‍या स्थिति है ? कितने टैंकर पेयजल उपलब्‍ध कराने हेतु पूर्ण रूप से ठीक हैं एवं कितने टैंकर पेयजल उपलब्‍ध कराने की स्थिति में नहीं हैं अथवा पूर्ण रूप से खराब हो चुके ? (ग) क्‍या पेयजल टैंकरों के रखरखाव/मरम्‍मत हेतु बजट प्रावधान किया जाता है यदि हाँ, तो प्रतिवर्ष कितना ? पेयजल टैंकरों के रखरखाव एवं मरम्‍मत हेतु स्‍थानीय संस्‍थाओं द्वारा वर्षवार कितना व्‍यय किया गया ? (घ) खरगोन जिले में विकासखण्‍डवार, वर्ष 2012-13 से वर्तमान तक विधायक एवं अन्‍य तक किस-किस निधि से कितने-कितने पेयजल टैंकर, कौन-कौन सी संस्‍थाओं को उपलब्‍ध कराये गये ? संस्‍थावार कितने टैंकर पेयजल उपलब्‍ध कराने हेतु ठीक स्थिति में हैं एवं कितने खराब अथवा मरम्‍मत के अभाव में अनुपयोगी हैं ? वर्तमान तक उक्‍त पेयजल टैंकरों पर वर्षवार कितना व्‍यय किया गया है ? संस्‍थावार बताया जावे ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) इन्‍दौर संभाग में केवल विधायक निधि योजना से वर्ष 2012-2013 में 478, 2013-14 में 444, 2014-15 में 312 एवं वर्ष 2015-16 में 76 (कुल 1310) टेंकर प्रदाय किये गये । (ख) 1310 टेंकरों में से 1298 टेंकर पूर्ण रूप से ठीक हैं । 11 टेंकर पेयजल उपलब्‍ध कराने की स्थिति में नहीं हैं, 01 टेंकर पूर्ण रूप से खराब हो चुका है । (ग) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजनान्‍तर्गत टेंकरों के रखरखाव/मरम्‍मत हेतु बजट का कोई प्रावधान नहीं है । शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता । (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है ।

नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्र में विद्युत प्रदाय

2. ( *क्र. 697 ) श्री गिरीश भंडारी : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. में ऊर्जा विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में कृषि कार्य/घरेलु बिजली सप्‍लाई का क्‍या शेड्यूल है ? क्‍या शासन के शेड्यूल अनुसार बिजली सप्‍लाई की जा रही है या नहीं ? अगर नहीं तो क्‍या कारण हैं ? (ख) प्रश्‍नांश (क) की उपलब्‍ध जानकारी अनुसार क्‍या नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्र में भी शासन के बिजली सप्‍लाई शेड्यूल अनुसार बिजली दी जा रही है या नहीं ? अगर नहीं तो कारण बतायें ? क्‍या दोषी पर कार्यवाही की जायेगी ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्र में कृषि कार्य हेतु 10 घंटे एवं घरेलू उपभोक्‍ताओं सहित गैर कृषि उपभोक्‍ताओं को 24 घंटे विद्युत प्रदाय किये जाने का शेड्यूल निर्धारित है । विद्युत लाईनों के रख रखाव एवं आकस्मिक रूप से हुए विद्युत लाईन व्‍यवधान जैसे अपरिहार्य कारणों को छोडकर निर्धारित शेड्यूल अनुसार ही विद्युत प्रदाय किया जा रहा है । (ख) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार अपरिहार्य कारणों को छोड़कर निर्धारित शेड्यूल के अनुसार ही नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्र में विद्युत प्रदाय किया जा रहा है । अत: किसी के दोषी होने अथवा कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता ।

भिण्‍ड जिले में रेत का अवैध उत्‍खनन

3. ( *क्र. 417 ) श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शासन को यह ज्ञात है कि भिण्‍ड जिले में 23 मई 2015 को रोन के बिरोना गांव में 3 फाकलेन मशीन 7 ट्रक सिन्‍ध नदी के किनारे मिले थे अवैध रेत का उत्‍खनन हो रहा था प्रश्‍नांश दिनाँक तक क्‍या कार्यवाही की गई विवरण देवें ? (ख) दिनाँक 20 जून 2015 को रोन के बिरोना गांव में 3 फाकलेन मशीन 1 ट्रक 4 करोड़ की अवैध रेत उत्‍खनन मिली यदि हाँ, तो उसी स्‍थान पर पुन: मिलने के कारण माइनिंग विभाग क्‍या कार्यवाही कर रहा है ? (ग) विगत पांच वर्षों में भिंड जिले में अवैध रेत कहाँ पर पकड़ी गयी उस पर शासन द्वारा क्‍या कार्यवाही की जा रही है क्‍या माइनिंग विभाग की निष्क्रियता के कारण निरंतर अवैध रेत का उत्‍खनन भिण्‍ड जिले में हो रहा है ? क्‍या रेत खदानों को माइनिंग विभाग का संरक्षण प्राप्‍त है विगत पांच वर्षों में रेत के अवैध उत्‍खनन भण्‍डारण पर प्रश्‍नांश दिनाँक तक क्‍या कार्यवाही की गई विवरण देवें ? (घ) क्‍या यह सही है कि भिण्‍ड जिले में 20 मई 2015 को पुलिस ने 3 ट्रक बिना रायल्‍टी के पकडे थे अवैध लोगों ने ट्रक मालिक से 14000 रू. रायल्‍टी के नाम पर लिये थे रसीद क्‍यों नहीं दी गई ? थाना प्रभारी रोन के क्षेत्र में फाकलेन के द्वारा रेत उत्‍खनन क्‍यों हो रहा है बिरोना- रोन में खदान उनके संरक्षण में होने के उपरांत सिंध नदी पर पुल का निर्माण भारी मात्रा में फाकलेन द्वारा रेत उत्‍खनन करवाया जा रहा है ? यदि हाँ, तो क्‍यों जानकारी दें ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं । (ख) दिनाँक 20 जून 2015 को रोन के विरोना गांव स्थित सिंध नदी के किनारे  3 पोकलेन मशीनें, 1 ट्रक खड़े पाये गये थे अवैध रेत खनन होने की आशंका के आधार पर इन्‍हे जब्‍त कर थाने में खड़ा कराया गया था । मौके पर एक घन मीटर अवैध रेत पाई गई थी । जिसमें विभाग द्वारा नियम अनुसार अर्थदण्‍ड जमा कराया गया था । प्रश्‍नांश 'के उत्‍तर के प्रकाश में शेष का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता । (ग) वस्‍तुस्थिति यह है कि भिण्‍ड जिले में समय-समय पर पर जाँच की जाती है । विगत 5 वर्षों में (वर्ष 2010 से अब तक) भिण्‍ड जिले में रेत खनिज के बनाए गए अवैध उत्‍खनन/भण्‍डारण के प्रकरणों की जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट 'एवं '' पर है । इसके अलावा समय-समय पर कार्यवाही की जाकर विगत 5 वर्षों में अवैध परिवहन के 1058 प्रकरण बनाकर  3,73,67,000/- अर्थदण्‍ड राशि, अवैध उत्‍खनन के 14  प्रकरण बनाकर 4,09,000/-  अर्थदण्‍ड राशि तथा अवैध भण्‍डारण के  12 प्रकरण बनाकर  15,00,000/-  अर्थदण्‍ड राशि कुल  1084 प्रकरण बनाकर कुल  3,92,76,000/- अर्थदण्ड राशि खनिज मद में जमा करवाई गई है । अत: खनिज विभाग की निष्क्रियता एवं संरक्षण प्रदान करने का आक्षेप सही नहीं है । (घ) दिनाँक 20 मई 2015 को पुलिस थाना रोन द्वारा कोई ट्रक बिना रायल्‍टी के नहीं पकड़े गए हैं और न ही ट्रक मालिकों से रायल्‍टी के नाम पर 14, 000/- रूपए लिए थे और न ही पुलिस थाना रोन के संरक्षण में रेत उत्‍खनन कराया जा रहा है ।

परिशिष्ट ''एक'' (पृष्‍ठ क्रमांक 11)

निर्माण कार्यों में अनियमितता

4. ( *क्र. 331 ) श्रीमती ललिता यादव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर विधान सभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत सरानी, बगौता, निवारी वनगाय एवं वारी के लिये 1 अप्रैल 2012 से प्रश्‍न दिनाँक तक कौन-कौन से कार्यों के लिये विधायक निधि से कितनी-कितनी राशि प्रदान की गई ? (ख) प्रश्‍नांश (क) के प्रकाश में इन पंचायतों में कराये गये कार्यों का मूल्‍यांकन किस उपयंत्री द्वारा किया गया बतायें ? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के प्रकाश में इन पंचायतों में मूल्‍यांकन के बाद भी कितने कार्य पूर्ण हैं और अपूर्ण कितने हैं पंचायतवार कार्य की स्थिति सहित बतायें ? (घ) अपूर्ण कार्यों की शेष राशि प्रश्‍नांश दिनाँक में कहाँ है ? अगर राशि के आहरण के बाद भी कार्य अपूर्ण हैं तो इसके लिये जवाबदार सरपंच, सचिव व उपयंत्री के खिलाफ क्‍या कार्यवाही की गई ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) से (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट पर है । (घ) अपूर्ण कार्यों की शेष राशि रू. 3,20,000/- जनपद पंचायत छतरपुर में उपलब्‍ध है, संबंधित सरपंच से 01 कार्य की राशि वसूली की कार्यवाही प्रचलन में है ।

परिशिष्ट - ''दो'' (पृष्‍ठ क्रमांक 13)

व्‍यापम में फर्जी नियुक्तियों की जाँच

5. ( *क्र. 783 ) श्री रामनिवास रावत : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या यह सही है कि 02 जुलाई 2014 को मा. मुख्‍यमंत्री जी द्वारा सदन में कहा कि गुप्‍तचर शाखा इंदौर को 20 जून, 2013 को पी.एम.टी. परीक्षा में फर्जी छात्रों के बैठने के बारे में गुमनाम पत्र मिला तथा उस पत्र में दो व्‍यक्तियों के नाम का उल्‍लेख था ? यदि हाँ, तो बतावें कि वह पत्र वर्तमान में किस विभाग के पास दस्‍तावेज के रूप में रखा है ? (ख) क्‍या 15 जनवरी, 2014 को मा. मुख्‍यमंत्री जी ने विधानसभा में कहा कि 2007 से अब तक लगभग 1000 नियुक्तियां ऐसी हैं, जो फर्जी हैं ? (ग) क्‍या यह सही है कि मा. मुख्‍यमंत्री जी के पास 2007 से दिसंबर 2012 के मध्‍य चिकित्‍सा शिक्षा विभाग का प्रभार रहा ? यदि हाँ, तो किस दिनाँक से किस दिनाँक तक ? साथ ही यह भी बतावें कि उक्‍त अवधि की पी.एम.टी. एवं प्री-पीजी की कौन-कौन से वर्ष की परीक्षाओं की जाँच एस.टी.एफ. द्वारा की जा रही है ?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) से (ग) की जानकारी एकत्रि‍त की जा रही है ।

पीपलरावा में शासकीय महाविद्यालय की स्‍वीकृति 

6. ( *क्र. 144 ) श्री राजेन्द्र फूलचन्‍द वर्मा : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या पीपलरावा जिला देवास में शासकीय महाविद्यालय स्‍वीकृत है ? यदि नहीं, तो भविष्‍य में स्‍वीकृत होने की संभावना है ? (ख) क्‍या विभाग द्वारा पीपलरावा में शा. महाविद्यालय खोलने के लिये कोई प्रस्‍ताव है ? यदि हाँ, तो जानकारी स्‍पष्‍ट करें ? (ग) क्‍या छात्र, छात्राओं के भविष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए भविष्‍य में पीपलरावा को शासकीय महाविद्यालय प्राप्‍त हो सकेगा ?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी नहीं । वर्तमान में शासन द्वारा पूर्व से संचालित महाविद्यालयों का सुदृढ़ीकरण करने एवं उनके गुणवत्ता विकास के प्रयास किये जा रहे हैं । अत: पीपलरावा में शासकीय महाविद्यालय की स्वीकृति प्रदान करने में अभी कठिनाई है । (ख) जी नहीं । प्रश्नांश "क" के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है । (ग) प्रश्नांश "क" के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है ।

श्‍योपुर अंतर्गत मूंझरी बांध के निर्माण की स्‍वीकृति

7. ( *क्र. 573 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) श्‍योपुर जिले में मूंझरी बांध के निर्माण हेतु क्षतिपूरक वनिकरण हेतु गैर वन भूमि की मांग के संबंध में प्रश्‍नकर्ता के तारांकित प्रश्‍न संख्‍या-09 (क्रमांक-1195) दिनाँक 27.02.15 के प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर में अवगत कराया है कि कलेक्‍टर श्‍योपुर ने अपने पत्र क्रमांक/2010 दिनाँक 31.12.10 में ग्राम जाखदा जागीर में 345.374 हैक्‍टेयर एवं पत्र क्रमांक-2014 दिनाँक 01.07.14 से श्‍योपुर जिले के विभिन्‍न ग्रामों में से और वन भूमि देने हेतु एस.डी.एम. श्‍योपुर को चयनित कर भूमि देने हेतु प्रस्‍ताव दिया है ? यदि हाँ, तो बतावें कि एस.डी.एम. श्‍योपुर द्वारा उक्‍त प्रस्‍तावनुसार वर्तमान तक क्‍या कार्यवाही की गई यदि नहीं, तो क्‍यों कब तक पूर्ण की जावेगी ? (ख) क्‍या मूंझरी बांध के निर्माण हेतु सर्वे कार्य की डी.पी.आर. तैयार कर ली गई है ? यदि हाँ, तो इसे शासन/विभाग को स्‍वीकृति हेतु कब भेजा वर्तमान में ये किस स्‍तर पर लंबित है ? (ग) श्‍योपुर जिले के समग्र विकास के मद्देनज़र क्‍या शासन/विभाग उक्‍त डी.पी.आर. की लागत राशि की व्‍यवस्‍था चालू वित्‍तीय वर्ष के अनुपूरक बजट में करके इसे शीघ्र स्‍वीकृति प्रदान करेगा ? यदि नहीं, तो क्‍यों ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी नहीं । राजस्‍व, वन एवं जल संसाधन विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रश्‍नाधीन भूमि का संयुक्‍त निरीक्षण किया गया । वन विभाग द्वारा वैकल्पिक वृक्षारोपण हेतु भूमि उपयुक्‍त नहीं पाई गई । (ख) एवं (ग) परियोजना निम्‍न कारणों से असाध्‍य पाई गई है :- (i) वैकल्पिक वृक्षारोपण हेतु भूमि उपलब्‍ध नहीं है । (ii) परियोजना के डूब क्षेत्र में निवासरत सहरिया जनजाति के परिवारों के पुनर्विस्‍थापन के लिए भू-अर्जन, पुर्नवास एवं पुर्नस्‍थापन अधिनि‍यम-2013 के प्रावधानों के तहत उन्‍हे भूमि के बदले भूमि आवंटित करने के लिए भूमि उपलब्‍ध नहीं है । (iii) परियोजना की लागत बहुत अधिक है ।

हटा तहसील में स्‍वीकृत पत्‍थर खदान 

8. ( *क्र. 566 ) श्री लखन पटेल : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) परि. अता. प्रश्‍न संख्‍या 96 (क्रमांक 2826), दिनाँक 12 मार्च 2015 के उत्‍तर में बताया गया है कि हटा तहसील में पत्‍थर खदान स्‍वीकृत नहीं है, पत्‍थर लाइम स्‍टोन सीमेंट ग्रेड का है । प्रतिशत नहीं बताया गया, सड़क निर्माण में उपयोगी है ? (ख) हटा से गैसाबाद-सिमरिया सड़क निर्माण में पत्‍थर गिट्टी के रूप में उपयोग में लाया गया क्‍या इसकी जाँच कराई जावेगी कि यह पत्‍थर हटा तहसील की ही खदानों का है ? (ग) इस पत्‍थर में सीमेंट का ग्रेड कितना है ? यदि हटा तहसील में किसी को भी पत्‍थर खदान आवंटित नहीं है तो इसका पत्‍थर सड़क में उपयोग में क्‍यों लाया गया ? (घ) सड़क निर्माण के लिए खदानों से पत्‍थर निकालकर उपयोग करने वालों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जावेगी ? ठेकेदार द्वारा कितनी रायल्‍टी जमा की गई लाइम स्‍टोन की या पत्‍थर की ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) अतारांकित प्रश्‍न क्रमांक 2826 में यह उत्‍तर दिया गया था कि दमोह जिले की हटा तहसील के अंतर्गत पत्‍थर की कोई खदान स्‍वीकृत नहीं है । लाईम स्‍टोन की खदान स्‍वीकृत है । लाईम स्‍टोन की श्रेणी सीमेंट ग्रेड है । प्रश्‍न में प्रतिशत की जानकारी नहीं चाही गई थी । निम्‍न श्रेणी के लाईम स्‍टोन का नियमानुसार उपयोग सड़क निर्माण में किया जा सकता है । (ख) प्रश्‍नाधीन सड़क निर्माण हेतु तिरूपति बिल्‍डकोन को हटा तहसील में पत्‍थर गिट्टी हेतु तीन अस्‍थाई अनुज्ञापत्र स्‍वीकृत किया गया था । अनुज्ञा स्‍थल की जाँच क्षेत्रीय प्रमुख जबलपुर से कराई गई है । रासायनिक विश्‍लेषण में इन अनुज्ञा स्‍थल से प्राप्‍त पत्‍थर निम्‍न श्रेणी के चूनापत्‍थर है । अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता । (ग) प्रश्‍नांश (ख) में यह स्‍पष्‍ट किया है कि यह निम्‍न श्रेणी का चूनापत्‍थर है । हटा तहसील में पत्‍थर खदान आवंटित नहीं है । अपितु अस्‍थाई अनुज्ञा पत्र स्‍वीकृत किए गए हैं । जिसमें प्राप्‍त पत्‍थर निम्‍न श्रेणी का चूनापत्‍थर होने के कारण इसका उपयोग पत्‍थर गिट्टी के रूप में सड़क निर्माण में लाया गया है । (घ) प्रश्‍नांश (ख) एवं (ग) में दिये गये उत्‍तर के प्रकाश में संबंधित के विरूद्ध कार्यवाही का प्रश्‍न ही उत्‍पन्‍न नहीं होता । ठेकेदार द्वारा पत्‍थर गिट्टी की रायल्‍टी जमा की गई है । जमा की गई रायल्‍टी की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट में दर्शित है ।

परिशिष्ट ''तीन'' (पृष्‍ठ क्रमांक 14)

उड़नदस्‍तों द्वारा महाविद्यालयों का निरीक्षण

9. ( *क्र. 929 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में विश्‍वविद्यालय स्‍तर पर परीक्षाओं के दौरान उड़नदस्‍ते के रूप में जिले के किन-किन कॉलेजों को अधिकार दिए गए हैं ? आदेश व नियमों की एक प्रति दें उड़नदस्‍तें में किन-किन अधिकारी कर्मचारियों को रखा जा सकता है ? (ख) जीवाजी वि.वि. से संबंधित महाविद्यालयों ने सत्र 2012-13, 2013-14 में किन-किन दिनांकों में किन-किन महाविद्यालयों का निरीक्षण किया ? वर्षवार, स्‍थलवार, महाविद्यालयवार जानकारी दें ? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के तहत भिण्‍ड जिले के चिन्हित महाविद्यालयों के अधिकारी कर्मचारी ने कब-कब किन कॉलेजों का उड़नदस्‍ते की टीम के रूप निरीक्षण कर कितना, भुगतान/भत्‍ता लिया, निरीक्षण में किस गाड़ी का उपयोग किया जानकारी दें ? (घ) प्रश्‍नांश (ग) के तहत क्‍या महाविद्यालय ने वि.वि. से अनुमति ली थी ?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) विश्वविद्यालयीन स्तर की परीक्षाओं में शासन स्तर से उड़नदस्ता बनाए जाने का कोई नियम नहीं  है । प्रतिवर्ष सामान्य निर्देशों के तहत जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को परीक्षाओं में अनुशासन बनाए रखने हेतु निर्देश दिए जाते हैं । विश्वविद्यालयीन परीक्षाओं के लिए अध्यादेश क्रमांक 5 की कंडिका 7 के अनुसार प्रत्येक विश्वविद्यालय अपने परिक्षेत्र में होने वाली परीक्षाओं के लिए उड़नदस्ते का गठन विहित नियमों के तहत करता है । उड़नदस्ते का प्रावधान निम्नांकित है :- "The University may from time to time appoint inspectors or Board of inspectors to see that the conduct of the examination is strictly according to the rules and procedure laid down. In the event of the Inspector pointing our serious breach of rules or procedure, the kulpati may take such action as may be necessary, including postponement or cancellation, wholly or in part, of the examination at the centre, and if any action is taken, a report on the action taken shall be made to the Executive Council at its next meeting. The Kulpati may appoint flying squad to inspect the examination centres consisiting of one or more persons. The flying squad so appointed shall have the powers to visit and inspect any examination centre at any time and have the powers to take personal search of the examinees if so required. The flying squad will report the cases of unfair means if noticed during their visit to the superintendent of examination centre for necessary action. The flying squad shall submit its report immediately to the Registrar, who shall take such action or steps as may be considered necessary, During the course of inspection of the examination centre the members of the flying squad shall act as invigilators. प्रदेश के पारंपरिक विश्वविद्यालयों में उपरोक्त नियम प्रभावशील है । (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है । (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है । निरीक्षण में प्राइवेट टेक्सी का उपयोग किया गया । (घ) जी हाँ ।

 

 

जमुनिया जलाशय के क्षतिग्रस्‍त होने की जाँच 

10. ( *क्र. 919 ) श्री मधु भगत : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बालाघाट जिले के अन्‍तर्गत जमुनिया जलाशय, कब क्षतिग्रस्‍त हुआ था ? इसका निर्माण कब हुआ तथा क्षतिग्रस्‍त होने से मरम्‍मत में कितनी राशि कब-कब खर्च हुई ? (ख) क्‍या जलाशय क्षतिग्रस्‍त होने में, किसी अधिकारी को निलंबित किया गया था ? यदि हाँ, तो किसे-किसे, आदेश की प्रति बतायें तथा किस-किस के विरूद्ध क्‍या-क्‍या अनुशासनिक कार्यवाही की गई थी ? आरोप पत्र, नोटिस दण्‍डादेश की प्रति बताये ? (ग) क्‍या बांध/जलाशय क्षतिग्रस्‍त होने की जाँच किसी अधिकारी से कराई गई थी ? यदि हाँ, तो अधिकारी का नाम, पद जाँच रिपोर्ट की प्रति तथा प्रस्‍तुत करने का दिनाँक बताएं ? जाँच रिपोर्ट पर क्‍या-क्‍या कार्यवाही किस-किस के विरूद्ध की गई ? यदि नहीं, की गई तो क्‍यों ? (घ) जलाशय क्षतिग्रस्‍त होने से कितनी आर्थिक हानि प्रत्‍यक्ष/अप्रत्‍यक्ष रूप से तथा कितनी जनहानि हुई थी ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) दिनाँक 20.08.2002 को । निर्माण वर्ष 1921जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-1 अनुसार है । (ख) एवं (ग) जी हाँ निलंबन आदेश, आरोप पत्र, जाँच प्रतिवेदन एवं दण्‍डादेश की प्रतियां पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-2/3/4 एवं 5 अनुसार है । (घ) कोई जन‍हानि नहीं हुई थी । प्रभावित परिवारों को रू. 69,13,735/- की क्षतिपूर्ति की गई ।

बांधों के सुधार हेतु व्‍‍यय राशि 

11. ( *क्र. 907 ) कुँवर विक्रम सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में बांधों के सुधारात्‍मक कार्य करवाने के संबंध में वर्ष 2013 से प्रश्‍न दिनाँक तक कितनी राशि व्‍यय की गई ? (ख) छतरपुर जिले के उर्मिल बांध पर सुधारात्‍मक कार्य हेतु किस-किस कार्य के प्राक्‍कलन स्‍वीकृत किये गये ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) प्रदेश में बांधो के सुधारात्‍मक कार्य हेतु डेम रिहेबिलिटेशन एण्‍ड इंप्रुव्‍मेंट प्रोजेक्‍ट (ड्रिप) के अंतर्गत प्रश्‍नाधीन अवधि तक रू. 4,592.48 लाख व्‍यय किये गये । (ख) छतरपुर जिले के उर्मिल बांध का अधिपत्‍य उत्‍तरप्रदेश सरकार के पास होने से शेष प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं ।

पेंच व्‍यपवर्तन परियोजना का निर्माण 

12. ( *क्र. 222 ) श्री दिनेश राय (मुनमुन) : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिवनी जिले के विधान सभा क्षेत्र सिवनी के अंतर्गत माचा गोरा पेंच नहर सिंचाई परियोजना से कलार बांकी (बण्‍डोल) एवं गोपालगंज क्षेत्र के कितने ग्राम की कितनी भूमि सिंचित होगी ? कितने ग्राम सिंचाई से वंचित हो रहे हैं ? ग्रामवार जानकारी उपलब्‍ध करावें ? (ख) क्‍या सिवनी विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत पूर्व में हुए सर्वे अनुसार ही पेंच नहर सिंचाई परियोजना का निर्माण किया जा रहा है ? यदि नहीं, तो कारण बतावें ? (ग) क्‍या सिवनी विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत पूर्व में सर्वे हुए ग्रामों से होकर ही नहर निर्माण कार्य कराया जा रहा है ? यदि नहीं, तो कारण बतावें ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) सिवनी जिले में पेंच व्‍यपवर्तन परियोजना की सिवनी शाखा नहर से 81 ग्रामों की 23,345 हे. भूमि, बखारी शाखा नहर से 39 ग्रामों की 13,978 हे. भूमि और हरदुआ वितरिका नहर से 7 ग्रामों की 1,659 हे. भूमि कुल 127 ग्रामों की 39,982 हे. भूमि सिंचित होना संभावित है । ग्रामों की सूची संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-1/2/3 अनुसार है । परियोजना से सिंचित होने वाले ग्रामों की जानकारी संधारित की जाती है, सिंचाई से वंचित रहने वाले ग्रामों की जानकारी संधारित नहीं की जाती है । (ख) एवं (ग) पूर्व में किया गया सर्वेक्षण प्रारंभिक और केवल डीपीआर बनाने के उद्देश्‍य से किया गया होने से विस्‍तृत सर्वेक्षण के आधार पर नहरों का निर्माण कराया जा रहा है । नहरों का विस्‍तृत सर्वेक्षण एवं रूपांकन किया जाना एक तकनीकी आवश्‍यकता होती है । डीपीआर बनाने के लिए किए गए प्रारंभिक सर्वेक्षण और नहरों के निर्माण के समय विस्‍तृत सर्वेक्षण में अंतर आना स्‍वभाविक होता है ।

परिशिष्ट ''चार'' (पृष्‍ठ क्रमांक 15)

जिला विदिशा अंतर्गत नवीन महाविद्यालय की स्‍थापना 

13. ( *क्र. 356 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला विदिशा अंतर्गत किस-किस तहसील में महाविद्यालय संचालित है, किस-किस तहसील में नहीं ? (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित अनुसार जिस तहसील में महाविद्यालय संचालित नहीं है, तो इस क्षेत्र के छात्र-छात्राओं को उच्‍च शिक्षा हेतु 50-100 कि.मी. दूर जाना पड़ता है या नहीं ? इन तहसीलों में महाविद्यालय खोले जाने की शासन की क्‍या योजना है ? (ग) क्‍या यह सही है कि प्रश्‍नकर्ता की मांग पर क्षेत्रीय सांसद का तहसील त्‍यौंदा एवं ग्‍यारसपुर में महाविद्यालय खोलने की स्‍वीकृति जारी करने हेतु पत्र प्राप्‍त हुआ या नहीं ? यदि हाँ, तो सांसद के पत्र पर विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई ? यदि नहीं, तो कारण देवें ? उक्‍त तहसील में कब तक महाविद्यालय खोलने की स्‍वीकृति जारी की जावेगी ?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है । (ख) जी नहीं । तहसील त्यौंदा से शासकीय महाविद्यालय, गंजबासौदा 30 कि.मी. तहसील ग्याररसपुर से शासकीय महाविद्यालय विदिशा एवं शासकीय महाविद्यालय गंजबासौदा 40 कि.मी. तथा तहसील पठारी से शासकीय महाविद्यालय कुरवाई 35 कि.मी. की दूरी पर संचालित है, जहां विद्यार्थी अध्ययन कर सकते हैं । (ग) जी हाँ । ग्यारसपुर, त्यौंदा एवं पठारी तहसील स्तर पर शासकीय महाविद्यालय प्रारंभ करने संबंधी नीतिगत विषय विचाराधीन है । समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है ।

परिशिष्ट ''पांच'' (पृष्‍ठ क्रमांक 18)

ग्रेनाइट उत्‍खनन हेतु अनापत्ति प्रमाण पत्र के नियम

14. ( *क्र. 528 ) श्री अनिल जैन : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या स्‍टोन क्रेशर प्‍लांट स्‍थापित करने व ग्रेनाइट उत्‍खनन हेतु भूमि लीज़ पर लेने के लिये प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना आवश्‍यक है ? यदि हाँ, तो एन.ओ.सी. की अवधि, इसके नवीनीकरण की अवधि शर्तों सहित बताई जाये ? (ख) विधानसभा क्षेत्र निवाड़ी में कितने स्‍टोन क्रेशर उद्यमियों व लीज़ प्राप्‍तकर्ताओं को यह अनापत्ति प्रमाण पत्र कब से कब तक के लिये प्रदत्‍त और नवीनीकृत किये गये कितने प्‍लांट व खदानें बिना एन.ओ.सी. के संचालित हैं और किन-किन के आवेदन प्रश्‍न दिनाँक को कब से और क्‍यों शासन के विचाराधीन है ? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में वर्णित प्‍लांट/खदानों के अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किये गये हैं ? क्‍या इसके प्रावधानों का प्रश्‍नांश (ख) के स्‍टोन क्रेशर प्‍लांट इकाईयों व लीज़ प्राप्‍तकर्ताओं द्वारा पालन किया जा रहा है ? यदि नहीं, तो की गई कार्यवाही विवरण सहित बतायी जावे ? (घ) लीज़ खदान में क्‍या कोई अधिकतम गहराई सीमा का प्रावधान है तथा प्रश्‍नांश (ख) में से किन-किन के द्वारा निर्धारित गहराई सीमा से अधिक उत्‍खनन किया जा रहा है तथा वर्ष 2013-14 से अब तक अधिकारियों द्वारा किन-किन लीज़ खदानों का निरीक्षण किया गया तथा उल्‍लंघनकर्ताओं के विरूद्ध की गई कार्यवाही की जानकारी लीज़वार दिनाँकवार विवरण सहित बतायी जावे ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं । पर्यावरणीय अधिनियमों में अनापत्ति प्रमाण पत्र देने का प्रावधान नहीं है । अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता । (ख) एवं (ग) प्रश्‍नांश (क) में दिये उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता । (घ) मध्‍प्रदेश गौण खनिज नियम 1996 में लीज़ में गहराई संबंधी कोई प्रतिबंधात्‍मक प्रावधान नहीं है । अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता ।

पेट्रोलियम पदार्थों पर लागू वैट टैक्‍स

15. ( *क्र. 15 ) श्री विश्वास सारंग : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍न दिनाँक को प्रदेश में पेट्रोल, डीजल और घरेलू/अन्‍य एलपीजी के सिलेण्‍डर पर कितना वैट व अन्‍य कर लिया जा रहा है ? (ख) प्रश्‍नांश (क) के तहत क्‍या प्रदेश में टैक्‍स बढ़ने के बाद पेट्रोल-डीजल की बिक्री कम हुई है ? यदि हाँ, तो कितनी-कितनी ? (ग) प्रश्‍नांश (क) व (ख) के तहत क्‍या प्रदेश में वैट व अन्‍य कर पड़ौसी राज्‍य की अपेक्षा अधिक होने के कारण टैक्‍स भी कम मिला है ? वर्ष 2012-13, 2013-14, 2014-15 में प्राप्‍त टैक्‍स और विक्रय हुए डीजल-पेट्रोल की जानकारी वर्षवार, विक्रय डीजल-पेट्रोल केएलबार व प्राप्‍त टैक्‍सवार जानकारी दें ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'''' अनुसार है । (ख) प्रदेश में टैक्‍स की दर बढ़ाने के बाद पेट्रोल-डीजल की बिक्री कमी होने संबंधी जानकारी विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है । (ग) प्रदेश में वेट व अन्‍य कर पड़ोसी राज्‍य की अपेक्षा भिन्‍न होने संबंधी जानकारी विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है । वर्ष 2012-13, 2013-14, 2014-15 में पेट्रोल-डीजल के वर्षवार विक्रय तथा उक्‍त पर अधिनियमवार प्राप्‍त राजस्‍व की जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-''बी'' अनुसार है । डीजल-पेट्रोल विक्रय की मात्रात्‍मक जानकारी विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है ।

परिशिष्ट ''छ: '' (पृष्‍ठ क्रमांक 19)

 

औंकारेश्‍वर परियोजना अंतर्गत नहर निर्माण

16. ( *क्र. 123 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यान सिंह सोलंकी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या औंकारेश्‍वर परियोजना अंतर्गत बड़वाहा विधान सभा क्षेत्र के ग्राम मोगावा एवं ग्राम भोगवासिपानी (महेंगांव) के किसानों द्वारा ग्राम के आसपास दो-दो जीवित नदियाँ एवं भूगर्भ जलस्‍तर अधिक होने के कारण औंकारेश्‍वर परियोजना की नहर के निर्माण को औचित्‍यहीन बताकर निरस्‍त करने की मांग का आवेदन-पत्र प्राप्‍त होने से प्रश्‍नकर्ता द्वारा दिनाँक 10/12/2014 एवं 25/12/2014 को प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया गया था, यदि हाँ, तो तदानुसार वर्तमान तक इस संबंध में विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई है ? (ख) क्‍या प्रस्‍तावित स्‍वीकृत नहर का निर्माण कार्य वर्तमान में भी चल रहा है यदि हाँ, तो विभाग द्वारा नहर को निरस्‍त करने के संबंध में क्‍या कार्यवाही की गई है ? यदि निरस्‍त करने संबंधी कार्यवाही नहीं की जा रही है तो कब तक की जावेगी समय-सीमा बताई जावे ?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) माननीय विधायक महोदय के पत्र दिनाँक 10/12/2014 एवं 25/12/2014 विभाग को प्राप्‍त हुए, जिन नहरों को निरस्‍त करने की मांग की गई है, वह ग्राम मोगांवा, मेहगांव रूपखेड़ा में निर्मित हो गई है । नहरों का निर्माण औचित्‍यहीन नहीं है, क्‍योकि इन नहरों के निर्माण से 795 कृषकों की 459.87 हे. क्षेत्र की भूमि में सिंचाई होगी । जबकि नहर के निर्माण हेतु मात्र 9.935 हे. भूमि ही अधिग्रहित की गई है । (ख) स्‍वीकृत नहरों का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है । लघु कृषकों के व्‍यापक हितों को दृष्टिगत रखते हुए तथा उनकी निजी उदृवहन सिंचाई की योजनाओं से मंहगे पानी पर निर्भरता को कम करने के लिए इन नहरों का निर्माण आवश्‍यक है । यह भी ज्ञातव्‍य है कि छोटे एवं सीमांत कृषक तथा कमजोर वर्गों के कृषकों के लिये नहरों से सस्‍ता पानी ही बेहतर विकल्‍प है । ऐसी मांग जब तक शत् प्रतिशत कृषकों से नहीं आती तब तक ऐसी मांग पर विचार किया जाना उचित नहीं है । शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता ।

रायसेन जिलांतर्गत ग्रामों में बिजली की आपूर्ति

17. ( *क्र. 840 ) श्री चम्पालाल देवड़ा : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 20 जून 2015 की स्थिति में रायसेन जिले के किन-किन ग्रामों में विद्युत आपूर्ति बिजली का बिल बकाया होने या ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण कब से बन्‍द है ग्रामों की सूची, उपभोक्‍ता संख्‍या, बकाया उपभोक्‍ता राशि सहित दें ? (ख) उक्‍त ग्रामों में जिन उपभोक्‍ताओं/कृषकों पर बिजली का बिल बकाया नहीं है उनको बिजली उपलब्‍ध करावाने हेतु क्‍या व्‍यवस्‍था की गई है ? यदि नहीं, तो क्‍यों कारण बतायें तथा बिजली बन्‍द रहने की अवधि के बिल का क्‍या होगा ? (ग) किसान अनुदान योजना, बकाया बिजली के बिल का सरचार्ज माफ आदि समझौता की कौन-कौन सी योजनायें संचालित हैं तथा उनमें क्‍या-क्‍या प्रावधान है पूर्ण विवरण दें ? (घ) पुराना बिजली का बकाया बिल के समझौता हेतु विभाग क्‍या कोई योजना बनाने पर विचार करेगा यदि हाँ, तो कब तक तथा यदि नहीं, तो क्‍यों ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) रायसेन जिले के अन्‍तर्गत 20 ग्रामों में उपभोक्‍ताओं पर शत-प्रतिशत विद्युत देयक की राशि बकाया होने से ट्रांसफार्मर बंद होने/उतारे जाने के कारण विद्युत आपूर्ति बंद है एवं 10 ग्रामों में उपभोक्‍ताओं पर शत-प्रतिशत विद्युत देयक बकाया होने से खराब ट्रांसफार्मर नहीं बदलने के कारण विद्युत प्रदाय अवरूद्ध है । ग्रामों की सूची, उपभोक्‍ताओं की संख्‍या एवं बकाया राशि सहित विस्‍तृत जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ एवं प्रपत्र-ब अनुसार है । (ख) उक्‍त ग्रामों में शत-प्रतिशत उपभोक्‍ताओं पर बकाया राशि होने के कारण विद्युत आपूर्ति बंद है । अत: प्रश्‍न नहीं उठता । (ग) कृषकों को स्‍थाई विद्युत पंप कनेक्‍शन प्रदान करने हेतु लागू कृषक अनुदान योजना के अन्‍तर्गत लघु एवं सीमांत कृषकों से 6500 रूपये प्रति हा.पा. एवं अन्‍य कृषकों से 10400 रूपये प्रति हा.पा. की दर से अंशदान जमा करवाकर स्‍वीकृत प्राक्‍कलन के अनुसार 1.50 लाख रूपये तक के लाईन विस्‍तार कार्य योजनान्‍तर्गत किये जाते हैं । प्राक्‍कलन राशि 1.50 लाख रूपये से अधिक होने पर शेष राशि कृषक द्वारा जमा करवाने के उपरांत कार्य करवाने का प्रावधान है । दीनबंधु योजना के अन्‍तर्गत गरीबी रेखा (बी.पी.एल.) से नीचे जीवन यापन करने वाले घरेलू उपभोक्‍ताओं के जून 2013 की स्थिति में बिजली बिलों की बकाया राशि माफ किये जाने के प्रावधान हैं । इसी प्रकार किसान समृद्धि योजना के अन्‍तर्गत दिनाँक 28.02.2013 की स्थिति में बकाया राशि में सम्मिलित शत-प्रतिशत सरचार्ज को शून्‍य कर कृषि उपभोक्‍ता द्वारा शेष ऊर्जा प्रभार की 50 प्रतिशत राशि योजना के प्रावधान के तहत जमा करने पर शेष 50 प्रतिशत राशि राज्‍य शासन द्वारा अनुदान के रूप में विद्युत वितरण कंपनी को देने का प्रावधान है । साथ ही कृषि उपभोक्‍ता यदि चाहें तो प्रावधान अनुसार दिनाँक 28.02.2013 की स्थिति में स्थिर किये गये ऊर्जा प्रभार को 10 छ:माही किस्‍तों में जमा करा सकता है । (घ) बिजली के बिल की बकाया राशि हेतु कोई भी नई योजना विचाराधीन नहीं है, तथापि उपभोक्‍ता वर्तमान में क्रियाशील किसान समृद्धि योजना एवं दीनबंधु योजना के अन्‍तर्गत दिये गये प्रावधानों के अनुसार बकाया राशि भुगतान की सुविधा का लाभ उठा सकता है ।

परिशिष्ट - ''सात'' (पृष्‍ठ क्रमांक 21)

सिंगरौली में माइनिंग कालेज की स्‍थापना 

18. ( *क्र. 732 ) श्री राम लल्लू वैश्य : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जिला सिंगरौली में माइनिंग कालेज की स्‍थापना हेतु डी.पी.आर. शासन द्वारा तैयार कराया जा चुका है ? यदि नहीं, तो कब तक इसे पूर्ण कराया जावेगा ? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संबंध में शासन द्वारा डी.पी.आर. तैयार कराने हेतु किस एजेन्‍सी को कार्य दिया गया है तथा अभी तक कितनी राशि का भुगतान किया गया है तथा कितनी राशि का भुगतान किया जाना शेष है ? विवरण सहित सम्‍पूर्ण जानकारी देवें ?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी नहीं । डी.पी.आर. शीघ्र तैयार हो जायेगी । समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं हैं । (ख) डीपीआर तैयार करने का कार्य इण्डियन स्‍कूल ऑफ मांईन्‍स धनबाद को सौंपा गया हैं । वर्तमान में रूपये 22,38,000/- की राशि का अग्रिम भुगतान किया गया हैं एवं शेष राशि रूपये 33,56,857/- का भुगतान किया जाना शेष हैं ।

शास. महा. पोलायकलां के भवन का निर्माण 

19. ( *क्र. 923 ) श्री इन्‍दर सिंह परमार : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शासकीय महाविद्यालय पोलायकलां के भवन निर्माण की स्‍वीकृति हो चुकी है ? यदि हाँ, तो कितनी राशि का आवंटन प्रदाय किया गया है ? (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित निर्माण कार्य में क्‍या उच्‍च शिक्षा विभाग व निर्माण एजेन्‍सी के मध्‍य अनुबंध किया गया है ? यदि हाँ, तो क्‍या शर्तें हैं ? (ग) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित महाविद्यालय के भवन निर्माण की गुणवत्‍ता बनाये रखने हेतु निर्माण एजेंसी की ओर से तकनीकी सुपरविजन किसके द्वारा किया जा रहा है ? क्‍या प्राचार्य अथवा अतिरिक्‍त संचालक उज्‍जैन को निर्माण संबंधी जानकारी दी गई है ? (घ) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित भवन की प्रशासकीय स्‍वीकृति, प्राक्‍कलन एवं मानचित्र की प्रति उपलब्‍ध कराये ?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ । प्रश्नाधीन कार्य हेतु राशि रूपये 338.00 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति जारी की गई है । (ख) जी हाँ । जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-"अ" अनुसार है । (ग) महाविद्यालय के निर्माण कार्य की गुणवत्ता हेतु तकनीकी सुपरविज़न का कार्य मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसरंचना विकास मंडल के यांत्रिकी स्टाफ द्वारा किया जावेगा । मंडल द्वारा निर्माण संबंधी जानकारी संबंधित क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा एवं संबंधित प्राचार्य को दी गई है । (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-"ब" प्रशासकीय स्वीकृति, प्रपत्र-"स" प्राक्कलन एवं प्रपत्र-"द" मानचित्र अनुसार हैं ।

जलाशय निर्माण की स्‍वीकृति 

20. ( *क्र. 823 ) श्री सोहनलाल बाल्‍मीक : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) परासिया विधान सभा क्षेत्र में 5 जलाशयों का निर्माण किये जाने हेतु प्रश्‍नकर्ता द्वारा एवं विभाग द्वारा शासन को स्‍वीकृति हेतु पत्र (प्रस्‍ताव) प्रेषित किया गया था ? क्‍या मंत्रालय द्वारा इन सभी जलाशयों के निर्माण की स्‍वीकृति प्रदान की गई है ? (ख) यदि जलाशय निर्माण की स्‍वीकृति प्रदान नहीं की गई है तो विलंब का क्‍या कारण है और कब तक स्‍वीकृति प्रदान कर दी जायेगी ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ । जी नहीं । (ख) निर्धारित मापदण्‍ड से लागत अधिक होने के कारण प्रश्‍नाधीन सभी परियोजनाएं असाध्‍य पाई गई हैं ।

ऑनलाईन बिक्री पर नियंत्रण 

21. ( *क्र. 255 ) श्री यशपालसिंह सिसौदिया : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्‍जैन इंदौर संभाग में प्रश्‍न दिनाँक तक कितनी कम्‍पनियों द्वारा ऑनलाईन सामान बेचा जा रहा है क्‍या इन ऑनलाईन कम्‍पनियों पर सरकार का किसी भी प्रकार का नियंत्रण है, यदि हाँ, तो अवगत करावें ? (ख) ऑनलाईन बिक्री के नाम पर उपभोक्‍ताओं से होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिये शासन की क्‍या व्‍यवस्‍था है ? (ग) इन ऑनलाईन कंपनियों से क्‍या शासन को राजस्‍व प्राप्ति होती है ? यदि हाँ, तो 1 जनवरी 2014 से प्रश्‍न दिनाँक तक की जानकारी देवें ? (घ) क्‍या राज्‍यों में उत्‍पादकों का ऑनलाईन प्रदर्शन, बिक्री, डिलेवरी पर नगद भुगतान कंपनियों द्वारा लिया जाता है, यदि हाँ, तो किस प्रकार किसी व्‍यवसायिक प्रतिष्‍ठान से पृथक है ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) उज्‍जैन, इन्‍दौर संभाग में ऑनलाईन सामान बेचने वाली 5 कम्‍पनियां पंजीयत हैं, जिनके द्वारा सामान बेचा जा रहा है । ऑनलाईन सामान बेचने वाली पंजीयत कम्‍पनियों पर विभाग का अन्‍य पंजीयत व्‍यवसाईयों के समान नियंत्रण होता है । (ख) ऑनलाईन बिक्री के नाम पर उपभोक्‍ताओं से होने वाली धोखाधड़ी से संबंधित कार्यवाही इस विभाग द्वारा नहीं की जाती है । (ग) जी हाँ । जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है । (घ) राज्‍यों में उत्‍पादों का ऑनलाईन प्रदर्शन, बिक्री, डिलेवरी पर नगद भुगतान कम्‍पनियों द्वारा लिया जाता है या नहीं इस तरह की जानकारी विभाग के पास संधारित नहीं है ।

परिशिष्ट - ''आठ'' (पृष्‍ठ क्रमांक 23)

व्‍यापम द्वारा आयोजित परीक्षाओं की जाँच 

22. ( *क्र. 888 ) श्री सुन्‍दर लाल तिवारी : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) व्‍यापम के संज्ञान में किस वर्ष यह आया कि वर्ष 2000 से पी.एम.टी. परीक्षा में संगठित गिरोह कार्य कर फर्जी अभ्‍यार्थियों को प्रवेश दिलवा रहे हैं ? अध्‍यक्ष व्‍यापम के यह संज्ञान में आने के बाद विभागीय जाँच कब स्‍थापित की ? (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित घटना संज्ञान में आने के बाद अध्‍यक्ष व्‍यापम ने इसे रोकने हेतु विभागीय स्‍तर पर क्‍या-क्‍या कदम उठाये ? (ग) अध्‍यक्ष व्‍यापम द्वारा वर्ष 2009 तथा 2010 में पुलिस महानिदेशक को पी.एम.टी. फर्जीवाड़े को रोकने हेतु कार्यवाही करने का पत्र किस दिनाँक को लिखा गया ? उसका क्रमांक बतावें तथा पत्र की प्रति देवें । (घ) अध्‍यक्ष अथवा संचालक व्‍यापम द्वारा 2009 तथा 2010 में प्रमुख सचिव चिकित्‍सा शिक्षा तथा संचालक चिकित्‍सा शिक्षा के साथ पी.एम.टी. परीक्षा में फर्जीवाड़े को लेकर कब-कब बैठक आयोजित की गई ?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) मंडल में किसी भी प्रकार के संगठित गिरोह द्वारा प्रवेश दिलाये जाने संबंधित जानकारी उपलब्‍ध नहीं हैं । (ख) प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर के परिपेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता । (ग) वर्ष 2010 की पीएमटी परीक्षा में व्‍यापम अध्‍यक्ष द्वारा विषयान्‍तर्गत पुलिस महानिदेशक को अर्द्धशासकीय पत्र क्र. 5-प-1/190/2925/2010, दिनाँक 16.06.2010 को प्रेषित किया गया । (घ) जानकारी एकत्रि‍त की जा रही है ।

सिंगरौली जिले में स्‍थापित विद्युत सब स्‍टेशन

23. ( *क्र. 9 ) श्रीमती सरस्‍वती सिंह : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिंगरौली जिले के चितरंगी विकासखण्‍ड अंतर्गत कितने ग्राम हैं और कितने विद्युत सब-स्‍टेशन स्‍थापित किये गये हैं ? (ख) क्‍या बगदरा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रेही व ग्राम तमई में विद्युत सब स्‍टेशन स्‍थापित करने की योजना है ? यदि हाँ, तो कब तक ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) सिंगरौली जिले के चितरंगी विकासखण्‍ड के अन्‍तर्गत 283 ग्राम विद्यमान हैं तथा वर्तमान में उक्‍त क्षेत्रान्‍तर्गत 33/11 के.वी. के 4 विद्युत उपकेन्‍द्र स्‍थापित हैं । (ख) जी नहीं, वर्तमान में बगदरा क्षेत्र अन्‍तर्गत ग्राम रेही व ग्राम तमई में विद्युत उपकेन्‍द्र स्‍थापित करने की कोई योजना प्रस्‍तावित नहीं है ।

अनुविभागीय अधिकारी कटनी द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र

24. ( *क्र. 190 ) श्री संदीप श्रीप्रसाद जायसवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) कटनी में अक्‍टूबर 2014 से प्रश्‍न दिनाँक तक प्राप्‍त जाति प्रमाण पत्र के कितने आवेदनों का निराकरण समय-सीमा बाहय किया गया, माहवार बतायें एवं प्राप्‍त आवेदनों में से कितने आवेदनों को किन-किन कारणों से निरस्‍त किया गया ? (ख) प्रश्‍नांश (क) के तहत आवेदनों को अस्‍वीकृत करने पर विभाग के 13 जनवरी 2014 के आदेश पत्र की कंडिका 8.8 के अनुसार स्‍पष्‍ट कारण दर्शाना प्रावधानित है, तो पदाभिहित अधिकारी द्वारा आनलाईन आदेश में ''तहसीलदार प्रतिवेदन के आधार पर निरस्‍त'' लिखना क्‍या नियमानुसार पर्याप्‍त है, यदि हाँ, तो आवेदक को कैसे पता चलेगा कि किन कारणों, दस्‍तावेजों के अभाव या जाँच के आधार पर आवेदन निरस्‍त किया गया है ? यह भी बतायें कि आवेदनों में विभाग के आदेश पत्र की कंडिका 5.2 (i) एवं (ii) के अनुसार दस्‍तावेजों की पूर्ति करने पर भी क्‍या ऐसे आवेदनों को निरस्‍त करना नियमानुसार सही है ? यदि हाँ, तो क्‍यों ? (ग) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्राप्‍त आवेदनों में से कितने प्रकरणों में प्रथम अपील की गई बतायें एवं स्‍वीकार की गई अपील के प्रकरणों में जाति प्रमाण पत्र जारी न करने के स्‍पष्‍ट आदेश ना करने, शास्ति अधिरोपित करने की अनुशंसा ना करने की कार्यशैली क्‍या सही है ? (घ) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में बताये कि लोक सेवा गारंटी अधिनियम में क्‍या समय-सीमा बाह्य आवेदनों को स्‍वप्रेरणा से अपील में लेना प्रावधानित है, यदि हाँ, तो कितने प्रकरण स्‍वप्रेरणा से अपील में लेकर क्‍या कार्यवाही की गई ?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है ।

करैरा तहसील में स्‍टोन क्रेशरों का संचालन 

25. ( *क्र. 548 ) श्रीमती शकुन्‍तला खटीक : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला शिवपुरी अन्‍तर्गत करैरा तहसील क्षेत्र में दिसम्‍बर 2014 की स्थिति में किन-किन व्‍यक्तियों की क्रेशर संचालित है ? इन क्रेशर मालिकों को पत्‍थर हेतु किस नाम से कितनी शासकीय एवं निजी भूमि कब से कब तक के लिये लीज़ पर दी गई है ? खसरा नं. एवं रकबा सहित बतावें ? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार किन-किन क्रेशर संचालकों को पर्यावरण (SEIAA) द्वारा एन.ओ.सी. जारी की गई है ? (ग) जिन क्रेशरों को पर्यावरण (SEIAA) द्वारा एन.ओ.सी. नहीं दी गई है ? उन संचालित क्रेशरों के संचालकों पर क्‍या प्रश्‍न दिनाँक तक कोई कार्यवाही की गई है ? यदि नहीं, तो कब तक कार्यवाही की जायेगी ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट पर है । निजी भूमि पर कोई लीज़ नहीं दी गई है । (ख) एवं (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है ।

परिशिष्ट - ''नौ'' (पृष्‍ठ क्रमांक 24)

 

 

 


 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

भाग-2

नियम 46 (2) के अंतर्गत अतारांकित प्रश्नोत्तर के रुप में परिवर्तित तारांकित प्रश्नोत्तर


चितरंगी विधान सभा क्षेत्रांतर्गत बांध निर्माण‍ 

1. ( क्र. 10 ) श्रीमती सरस्‍वती सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिंगरौली जिले के चितरंगी विधानसभा अन्‍तर्गत जल संसाधन विभाग द्वारा वर्ष 2012-13 तथा 2013-14 से प्रश्‍न दिनाँक तक कौन-कौन से कार्य, कितनी-कितनी राशि से कहां-कहां कराये गये ? ग्रामवार, मदवार, वर्षवार जानकारी उपलब्‍ध करायें ? (ख) क्‍या ग्राम अमलिहवा और भैंसहार के मध्‍य गोतान नाला में और सुलखान और मीटिहनी के मध्‍य गोतान नाला में बांध बनाने की योजना है ? यदि हाँ, तो विवरण दें ? (ग) प्रश्‍नांश (क) उक्‍त कार्यों का मापन, मूल्‍यांकन एवं सत्‍यापन किस-किस अधिकारी व कर्मचारी के द्वारा किया गया ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है । (ख) जी नहीं, ग्राम अमलिहवा और भैसहार के मध्‍य तथा सुलखान एवं मीटिहनी के मध्‍य गोतान नाला में चिन्हित स्‍थल तकनीकी रूप से परियोजना निर्माण के लिए उपयुक्‍त नहीं पाये गये है ।

परिशिष्ट ''दस''

कार्यालयों में शिकायत पेटी लगाई जाना 

2. ( क्र. 32 ) श्री कुंवर सौरभ सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सामान्‍य प्रशासन विभाग के निर्देश क्रमांक/एफ-11-47/2011/1/9, भोपाल, दिनाँक 16.11.2012 द्वारा निर्धारित किया गया था कि म.प्र. शासन के समस्‍त विभागों में भ्रष्‍टाचार संबंधी शिकायतों हेतु सहजदृस्‍य स्‍थानों पर शिकायत पेटी लगाई जा रही है, कटनी जिलान्‍तर्गत ऐसे किन-किन कार्यालयों में शिकायत पेटी लगाई, किन-किन में नहीं ? (ख) यदि प्रश्‍नांश (क) उत्‍तर हां है, तो उक्‍त शिकायत पेटी प्रतिदिन किस प्राधिकृत अधिकारी द्वारा निर्धारित समय में कटनी जिले के किन-किन कार्यालयों में किन-किन अधिकारियों द्वारा खोली जाकर, निकाले गए कितने पत्रों पर 2012 से प्रश्‍न दिनाँक तक शिकायतों पर कार्यवाही की गई ? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) से संबंधित पत्र के बिन्‍दु क्रमांक 4 के अनुसार प्राप्‍त शिकायतों को प्रति सप्‍ताह कार्यालय/विभाग की वेबसाइट में भी प्रदर्शित किये जाने के निर्देश थे ? (घ) प्रश्‍नांश (क), (ख), (ग) की प्रक्रिया पूर्ण न करने के लिये कौन-कौन अधिकारी/कर्मचारी उत्‍तरदायी हैं ? शासन के निर्देश का पालन सुनिश्चित करवाते हुये, दोषियों पर क्‍या कार्यवाही की जावेगी एवं कब तक ?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) :(क) जी हाँ । किन्‍तु निर्देश दिनाँक 16.11.2012 को नहीं अपितु दिनाँक 16.12.2011 को जारी किये गये । कटनी जिले में सभी विभागों के कार्यालय में शिकायत पेटी लगायी गयी है । जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट पर है । (ख) कलेक्‍टर कार्यालय में लगी शिकायत पेटी कार्यालय अधीक्षक द्वारा एवं अन्‍य कार्यालयों में लगी शिकायत पेटी कार्यालय प्रमुख द्वारा नियमित खोली जाती है । प्रश्‍नाधीन अवधि में भ्रष्‍टाचार संबंधी कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई । अत: शेषांश प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता । (ग) जी हाँ । (घ) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता ।

परिशिष्ट ''ग्यारह''

अवैध उत्‍खनन पर कार्यवाही 

3. ( क्र. 33 ) श्री कुंवर सौरभ सिंह : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नोत्‍तरी दिनाँक 01.07.2014 में मुद्रित प्रश्‍न क्रमांक 992 में प्रश्‍नांश (ग) के उत्‍तर में बताया गया है कि प्रश्‍नाधीन कंपनी को दिये गये मांग की जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट पर है । कंपनी द्वारा इस संबंध में कोई जवाब नहीं दिया गया है ? अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है ? यदि कंपनी ने उत्‍तर नहीं दिया, तो विभाग द्वारा क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई है ? विवरण देवें ? (ख) प्रश्‍नांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या यह सही है कि ए.सी.सी. कैमोर की बकाया रायल्‍टी करोड़ों में है फिर भी कंपनी से पत्राचार किया जा रहा है और कंपनी पत्र का उत्‍तर तक नहीं दे रही है ? ऐसी स्थिति में फर्म की लीज निरस्‍त करने की कार्यवाही क्‍यों नहीं की गई है ? (ग) फर्म स्‍वेल माइन्‍स कटनी को कितने खनिपट्टा कब-कब दिये गये थे ? पृथक-पृथक विवरण दें, तथा उक्‍त फर्म पर किस-किस वर्ष की कितनी-कितनी रायल्‍टी बकाया है ? विवरण दें ? क्‍या रायल्‍टी राशि बकाया रहते फर्म को फिटपास जारी किये गये हैं, तो उसका पूरा विवरण दें ? तथा इसकी शासन जाँच कराकर दोषियों को दंडित करेगा ? फर्म को दिये गये खनि पट्टे कब-कब निरस्‍त किये गये ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ यह उत्‍तर दिया गया था कि कार्यालय कलेक्‍टर (खनिज शाखा) द्वारा दिए गए मांग पत्र के संदर्भ में कंपनी (मेसर्स ए.सी.सी. लिमिटेड) द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया था । जहाँ तक जवाब न देने पर कंपनी के विरूद्ध कार्यवाही करने का प्रश्‍न है, इस संबंध में लेख है कि मांग पत्रों का जवाब नहीं देते हुए मांग पत्रों के विरूद्ध उक्‍त कंपनी द्वारा माननीय उच्‍च न्‍यायालय, जबलपुर में याचिका क्रमांक 1913/13 प्रस्‍तुत की गई थी । जिसके परिप्रेक्ष्‍य में माननीय उच्‍च न्‍यायालय द्वारा दिनॉंक 18.02.2013 एवं 14.03.2013 को अंतरिम आदेश (स्‍थगन आदेश) पारित किया गया था जिसकी प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट-अ पर है । (ख) पट्टाधारी कंपनी (मेसर्स ए.सी.सी. लिमिटेड) के द्वारा स्‍वीकृत खनिपट्टा की रायल्‍टी राशि जमा की जा रही है, किन्‍तु 1:1.6 परिवर्तन सूत्र के आधार पर अन्‍तर की रायल्‍टी राशि जमा किये जाने हेतु भेजे गये मांग पत्रों के विरूद्ध मेसर्स ए.सी.सी. लिमिटेड द्वारा माननीय उच्‍च न्‍यायालय, जबलपुर में विभिन्‍न याचिकाऐं दायर की गई हैं । माननीय उच्‍च न्‍यायालय, जबलपुर द्वारा याचिका क्रमांक डब्‍लू.पी. 6909/2002 एवं अन्‍य याचिकाओं के संबंध में पारित आदेश दिनाँक 08.07.2014 में प्रदेश के समस्‍त सीमेंट संयंत्रों का नये सिरे से कर निर्धारण कर बकाया रायल्‍टी राशि की गणना किये जाने हेतु आदेशित किया गया है । कर्णधारण की कार्यवाही वर्तमान में प्रचलन में है । (ग) खनिपट्टे नहीं अपितु उत्‍खनिपट्टे स्‍वीकृत किये गये थे, जिनकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट-ब पर है । शेष जानकारी भी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट-ब पर है । पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट-स अनुसार उक्‍त फर्म के विरूद्ध विभिन्‍न बकाया आदि के संबंध में माननीय प्रश्‍नकर्ता का पत्र दिनाँक 11.04.2015 प्राप्‍त हुआ था जिसमें रायल्‍टी बकाया का भी उल्‍लेख है उक्‍त के संदर्भ में जाँच हेतु विभाग द्वारा आदेश दिनाँक 02.05.2015 से जाँच दल गठित किया गया है, जिसकी प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट-पर है । जाँच दल का प्रतिवेदन प्राप्‍त होने पर नियमानुसार अग्रिम कार्यवाही की जावेगी ।

अनूपपुर जिले में सृजित पद एवं पदस्‍थापना

4. ( क्र. 43 ) श्री रामलाल रौतेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अनूपपुर जिले में राज्‍य प्रशासनिक सेवा के कुल कितने पद सृजित हैं ? सृजित पद के विरूद्ध कितने अधिकारी कार्यरत हैं ? (ख) अधिसूचित क्षेत्रों में पद पूर्ति हेतु शासन ने कोई नियम बनाया है ? यदि हाँ, तो क्‍या है ? क्‍या अनूपपुर जिले के लिए नियमों का पालन होगा ? यदि हाँ, तो कब तक ?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) 06 पद । 03 अधिकारी । (ख) शासन द्वारा पृथक से कोई अधिसूचित क्षेत्र घोषित नहीं किये गये हैं, शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता ।

विद्युत केन्‍द्रों की स्‍वीकृति 

5. ( क्र. 56 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेडा : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍न दिनाँक 27 फरवरी 2015 के अता. प्रश्‍न संख्‍या 21 (क्र. 786) के संदर्भ में बताऐं कि - बंगला चौराहा पर जिस विद्युत केन्‍द्र का शिलान्‍यास केन्‍द्रीय मंत्री जी व स्‍थानीय सांसद ने किया था क्‍या वहां से स्‍थान बदलकर अन्‍यत्र बनाने की योजना क्‍यों बनाई जा रही है जबकि ग्रामवासी वहां भूमि देने को तैयार है ? (ख) विक्रमपुर विद्युत उपकेन्‍द्र को क्‍या वन विभाग की चौकी के पास बनाने के प्रश्‍नकर्ता के अनुरोध का तकनीकी परीक्षण हो गया है तथा वहां शासकीय भूमि उपलब्‍ध है उसके आवंटन हेतु निवेदन कर दिया गया है व कब तक इस स्‍थान पर विद्युत केन्‍द्र निर्माण प्रारम्‍भ हो जायेगा ? (ग) क्‍या प्रश्‍नकर्ता व्‍दारा विभाग व शासन को जिन-जिन बस्तियों में बिजली नहीं है उनकी सूची दी है उस सूची की बस्तियों का उल्‍लेख देते हुए बताए कि वहां बिजली कब तक पहुँचेगी व इस संबंध में क्‍या प्रयास हुए ? (घ) क्‍या विभाग व अधिकारी ऐसी बस्तियां जिनका जनगणना में उल्‍लेख नहीं है, उनका सर्वे कर वहां बिजली पहुँचाने का प्रयास करेगा ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) संचालन-संधारण संभाग मुंगावली के अन्‍तर्गत ग्राम बंगला चौराहा पर प्रश्‍नांश अनुसार शिलान्‍यास किये गये 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र हेतु शासकीय भूमि का आवंटन लगभग 3 कि.मी. दूर ग्राम इकोदिया के पास किया गया था । उक्‍त भूमि अत्‍यंत ऊबड़-खाबड़ है तथा इस भूमि पर पूर्व से धार्मिक स्‍थल होने के कारण ग्रामीणों द्वारा उपकेन्‍द्र निर्माण में अवरोध उत्‍पन्‍न किया जा रहा था । ग्राम बंगला चौराहा पर ही दान की भूमि उपलब्‍ध हो जाने से जो कि ग्राम से मात्र 200 मीटर की दूरी पर स्थित है, उपकेन्‍द्र का निर्माण, अन्‍य स्‍थल पर ग्राम बंगला चौराहा में ही किया जा रहा है । (ख) ग्राम विक्रमपुर में विद्युत उपकेन्‍द्र पूर्व से ही स्‍वीकृत हैं । प्रस्‍तावित विक्रमपुर उपकेन्‍द्र के स्‍थान परिवर्तन हेतु माह मई-2015 में परीक्षण किया गया एवं तकनीकी रूप से साध्‍य नहीं पाए जाने के कारण पूर्व से ही कलेक्‍टर कार्यालय भू-अभिलेख जिला अशोकनगर के द्वारा पत्र दिनाँक 26.02.2014 से आवंटित भूमि पर उपकेन्‍द्र निर्माण हेतु सर्वे का कार्य प्रारम्‍भ किया गया है । उक्‍त कार्य कराए जाने हेतु मेसर्स इनरगो कंपनी से मार्च 2015 में अनुबंध किया गया है एवं अनुबंध दिनाँक से 24 माह में उक्‍त कार्य पूर्ण किया जाना है । (ग) माननीय विधायक महोदय द्वारा समय-समय प्रेषित पत्रों के माध्‍यम से जिन बस्तियों में विद्युतीकरण हेतु प्रस्‍ताव दिये गये थे उनकी जानकारी एवं कार्य प्रगति संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है । शेष अविद्युतीकृत बस्तियों के विद्युतीकरण के कार्य 12वीं पंचवर्षीय योजना में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अन्‍तर्गत सम्मिलित कर लिये गये है । उक्‍त कार्य सहित योजना का कार्य टर्न-की आधार पर करने हेतु ठेकेदार एजेंसी मेसर्स इनरगो-एबसाल्‍यूट इंजीनियरिंग प्रोजेक्‍ट लिमि‍टेड को दिनाँक 12.02.2015 को कार्यादेश जारी कर दिनाँक 11.03.2015 को अनुबंध किया गया है । अनुबंध दिनाँक से कार्यों को पूर्ण करने की अवधि 24 माह है । (घ) आगामी वर्षों में केन्‍द्र/राज्‍य शासन की विभिन्‍न वित्‍त पोषित योजनाओं में वित्‍तीय उपलब्‍धता होने पर ऐसी बस्तियों के विद्युतीकरण के प्रयास किये जा सकेंगे ।

परिशिष्ट ''बारह''

अटल ज्‍योति योजना का क्रियान्‍वयन 

6. ( क्र. 74 ) श्री विष्‍णु खत्री : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बैरसिया विधानसभा क्षेत्र में ऐसी कितनी ग्राम पंचायतें एवं उनके ग्राम/मजरे टोले आदि है जो आज भी अटल ज्‍योति योजना से नहीं जुड पाएं है । पंचायतवार नाम सहित बताऐं ? (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित ग्राम पंचायतें एवं उनके ग्राम/मजरे टोले आदि को अटल ज्‍योति योजना अंतर्गत जोड़े जाने हेतु विभाग द्वारा क्‍या कार्ययोजना बनायी है, ताकि ग्रामीणों को इस योजना का लाभ मिल सकें ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) बैरसिया विधानसभा क्षेत्र के अन्‍तर्गत 26 ग्राम पंचायतों के 31 मजरे/टोले वर्तमान में अविद्युतीकृत है अत: इन्‍हें अटल ज्‍योति अभियान का लाभ नहीं मिल पाया है । अविद्युतीकृत मजरों/टोलों की ग्राम पंचायतवार सूची संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है । (ख) उत्‍तरांश '' में उल्‍लेखित मजरों/टोलों के विद्युतीकरण का कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में सम्मिलित कर लिया गया है । योजना की स्‍वीकृति केन्‍द्र शासन से प्रतीक्षित है । उक्‍त कार्य पूर्ण होने के उपरांत प्रश्‍नाधीन मजरों/टोलों को अटल ज्‍योति अभियान का लाभ मिल सकेगा ।

परिशिष्ट - ''तेरह''

केमरी पहाड़ में माईनिंग लीज़ की स्‍वीकृति 

7. ( क्र. 89 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) केमरी पहाड़ में कितने लोगों को माईनिंग लीज़ स्‍वीकृत है ? (ख) कितनी वैध तथा कितनी अवैध माईनिंग वर्तमान में चल रही है ? (ग) क्‍या अवैध माईनिंग करने वालों के डंपर एवं जे.सी.बी. अबेर थाना द्वारा पकड़ी जाती है ? विगत एक वर्ष में कब-कब कितनी डंपर जे.सी.बी. थानें द्वारा पकड़े गये हैं वाहन मालिक एवं वाहन क्रमांक सहित बतायें ? (घ) प्रश्‍नांश (ग) यदि सही है तो अवैध माईनिंग करने वालों के विरूद्ध विभाग द्वारा क्‍या-क्‍या कार्यवाही कब-कब की गई है ? केमरी पहाड़ से अवैध उत्‍खनन में कब तक रोक लगा दी जावेगी तथा अवैध माइनिंग को प्रोत्‍साहित करने वाले अधिकारियों को कब तक हटा दिया जावेगा ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट-अ अनुसार है । (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट '' अनुसार वर्तमान में प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में 05 खनिपट्टे स्‍वीकृत हैं, जिसमें से 02 कार्यशील एवं 03 शिथिल हैं । वर्तमान में खनिज निरीक्षक द्वारा क्षेत्र का समय-समय पर निरीक्षण करने पर निरीक्षण के दौरान केमरी पहाड़ क्षेत्र में कोई अवैध माइनिंग संचालित नहीं पाई गई । (ग) जी हां यह सही है । केमरी पहाड़ व आसपास के क्षेत्रों में पकड़े गये अवैध उत्‍खनन/परिवहन के प्रकरणों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट '' एवं '' पर है । डम्‍फर / जे.सी.बी. की जानकारी भी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट '' एवं '' पर है । (घ) अवैध उत्‍खननकर्ताओं / परिवहनकर्ताओं के विरूद्ध की गई कार्यवाही का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट '' एवं '' अनुसार है । केमरी पहाड़ में समय-समय पर खनिज, राजस्‍व व पुलिस अमले द्वारा निरीक्षण कर अवैध उत्‍खनन / परिवहन पाए जाने पर दोषियों के विरूद्ध प्रकरण आदि दर्ज कर कार्यवाही की जाती है । अत: अवैध माइनिंग को प्रोत्‍साहित करने तथा अधिकारियों को हटाने का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता ।

म.प्र.शासन को राजस्‍व एवं अन्‍य स्‍त्रोतों से प्राप्‍त आय

8. ( क्र. 105 ) श्री सचिन यादव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश सरकार की राजस्‍व व अन्‍य स्‍त्रोतों से कुल आय प्रत्‍येक वर्षों में कितनी-कितनी हुई विगत पांच वर्षों से प्रश्‍न दिनाँक तक की वर्षवार जानकारी दें ? (ख) भारत सरकार ने प्राकृतिक आपदा के समय मध्‍यप्रदेश सरकार को कितनी-कितनी राशि कब-कब आर्थिक मदद के रूप में मुहैया कराई विगत पांच वर्षों की अलग-अलग जानकारी दें ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) मध्‍यप्रदेश सरकार की विगत पाँच वर्ष तक राजस्‍व व अन्‍य स्‍त्रोतों से कुल आय का विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र -1 के अनुसार है । (ख) भारत सरकार ने विगत पाँच वर्षों में प्राकृतिक आपदा के समय मध्‍यप्रदेश सरकार को संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र -2 के अनुसार आर्थिक मदद मुहैया कराई है ।

परिशिष्ट ''चौदह''

कसरावद विधान सभा क्षेत्रान्‍तर्गत विद्युतीकरण 

9. ( क्र. 108 ) श्री सचिन यादव : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के प्रथम चरण से प्रश्‍न दिनाँक तक कसरावद विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत कितने ग्राम लाभान्वित हुए हैं ? योजना में सम्मिलित ग्रामों की सूची देवें ? (ख) राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में खरगोन जिले में कितनी-कितनी राशि कब-कब स्‍वीकृत की गई ? योजना अनुसार संबंधित ठेकेदार के नाम सहित बतावें ? स्‍वीकृति दिनाँक तथा कार्य पूर्णता दिनाँक का भी उल्‍लेख करें ? उक्‍त योजना में लगने वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता क्‍या है एवं क्षमतावार कितने ट्रांसफार्मर स्‍थापित किये गये है, संख्‍या बतावें ? उक्‍त योजना में जिन ग्रामों में कम ट्रांसफार्मर लगे हैं उनमें कब तक शेष ट्रांसफार्मर लगा दिये जायेगें ? समय सीमा बतावें ? (ग) उक्‍त निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण नहीं करने वाले ठेकेदारों की सूची दें एवं इसकी अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर क्‍या कार्यवाही की गई है और इस कार्यावधि में किस-किस के द्वारा कितनी-कितनी शिकायतें किस-किस प्रकार की प्राप्‍त हुई और उस पर प्रश्‍न दिनाँक तक क्‍या कार्यवाही की गई ? (घ) उक्‍त योजनान्‍तर्गत ऐसी कितनी ग्राम पंचायतें एवं उनके ग्राम/मजरे टोले आदि हैं जो आज भी इस योजनाओं के अंतर्गत नहीं जुड़ पाये हैं ? उनकी सूची दें । साथ ही इस संबंध में विभाग ने अपने उक्‍त कार्य को पूरा करने की क्‍या कार्ययोजना बनाई है, जिससे सभी ग्रामीणों व मजरे-टोलों को इन योजना के लाभ से लाभान्वित किया जा सकेगा ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में प्रथम चरण से प्रश्‍न दिनाँक तक कसरावद विधानसभा क्षेत्र के अन्‍तर्गत 151 ग्राम लाभान्वित हुए है । योजना में सम्मिलित 227 ग्रामों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है । (ख) खरगोन जिले के लिए राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना मे आर.ई.सी.‍लिमिटेड द्वारा पत्र क्रमांक 1617 दिनाँक 16.12.2011 से रू. 7079.91 लाख की योजना की स्‍वीकृति दी गई थी तथा पत्र क्रमांक-862, दिनाँक 11.09.2012 से रू. 8994.24 लाख की पुनरीक्षित स्‍वीकृति दी गई थी । स्‍वीकृति के अनुसार मेसर्स विन्‍ध्‍या टेलिलिन्‍कस लिमिटेड, नई दिल्‍ली एवं मेसर्स कोस्‍टल प्रोजेक्‍ट लिमिटेड, हैदराबाद को निम्‍नानुसार कार्यादेश जारी किए गए : I मेसर्स विध्‍या टेलिलिन्‍कस लिमिटेड, नई दिल्‍ली - अ) आदेश क्रमांक 9366, दिनाँक 26.03.2012 रू. 2720.32 लाख (सप्‍लाई), ब) आदेश क्रमांक 9368, दिनाँक 26.03.2012 रू. 4815.15 लाख (इरेक्‍शन), II मेसर्स कोस्‍टल प्रोजेक्‍ट लिमिटेड, हैदराबाद - अ) आदेश क्रमांक 9370, दिनाँक 26.03.2012 रू. 4269.61 लाख (सप्‍लाई), ब) आदेश क्रमांक 9372, दिनाँक 26.03.2012 रू. 9271.04 लाख (इरेक्‍शन) -उपरोक्‍त दोनों कार्यादेशों के अनुसार कार्य पूर्णता की अवधि 24 माह अर्थात् दिनाँक 25.03.2014 थी । उक्‍त योजना में लगने वाले ट्रांसफार्मरों की क्षमता 25 के.व्‍ही.ए. है । योजना का कार्य प्रगति पर है एवं अब तक 25 के.व्‍ही.ए. क्षमता के 94 ट्रांसफार्मर योजना अन्‍तर्गत स्‍थापित किए गए है । इसके अतिरिक्‍त 63 के.व्‍ही.ए. क्षमता के 46 एवं 100 के.व्‍ही.ए. क्षमता के 16 ट्रांसफार्मर पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा ठेकेदार को दिए गए जिन्‍हे ठेकेदार द्वारा डी.पी.बनाकर गांव के लोड के अनुरूप स्‍थापित किया गया है । योजनान्‍तर्गत किसी भी ग्राम में कम ट्रांसफार्मर नहीं लगे है । (ग) कार्यपूर्ण नहीं करने वाले ठेकेदारों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है । राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना एक वृहद योजना है जिसमें दूर-दराज के क्षेत्रों में विद्युत अधोसंरचना का निर्माण किया जाना है । उक्‍त कार्य एक जटिल कार्य है जिसके दौरान कृषकों एवं ग्रामीणों द्वारा विद्युत लाईन के निर्माण कार्य में व्‍यवधान उत्‍पन्‍न करने, निर्माण कार्य करने वाली कंपनियों के पास कुशल श्रमिक उपलब्‍ध नहीं होने, आवश्‍यक सामग्री समय से उपलब्‍ध नहीं होने आदि कारणों से विलंब हुआ है, जिसके लिये किसी अधिकारी/कर्मचारी के दोषी होने का प्रश्‍न नहीं उठता । कार्य में देरी होने के कारण ठेकेदारों से टेंडर के प्रावधानों के अनुसार रू. 297.32 लाख की राशि लिक्विडेटेड डैमेज के रूप में पैनाल्‍टी स्‍वरूप वसूल की जा चुकी है । कसरावद विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के क्रियान्‍वयन से संबंधित कोई शिकायत पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को प्राप्‍त नहीं हुई है । (घ) कसरावद विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना अन्‍तर्गत चिन्हित 68 ग्राम पंचायतों के 105 ग्रामों के 136 मजरे/टोले है, जिनमें सघन विद्युतीकरण का कार्य करना शेष है, जिसकी सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है । कार्य योजना अनुसार शेष बचे कार्य को मार्च, 2016 तक पूर्ण कराए जाने के प्रयास है ।

पी.एम.जी.एस.व्‍हाय./लोक निर्माण विभाग के मार्गों में बाधक विद्युत लाईन 

10. ( क्र. 127 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यान सिंह सोलंकी : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना एवं लोक निर्माण विभाग या अन्‍य किसी योजना में स्‍वीकृत सड़क के किनारे अत्‍यधिक नीचे विद्युत लाईन को विभाग द्वारा हटाये जाने के प्रावधान है ? यदि हाँ, तो बड़वाहा विधान सभा क्षेत्र में ऐसी कितनी विद्युत लाईने हैं जो सड़क किनारे अत्‍यधिक नीचे आने के कारण हटाई जाना है ? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार क्‍या संबंधित निर्माण विभाग द्वारा नीचे आने वाली विद्युत लाईन को हटाने के संबंध में निर्धारित शुल्‍क जमा किया जाता है ? यदि हाँ, तो विगत 2 वर्ष में जमा किया गया शुल्‍क की जानकारी वर्षवार दी जावे ? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के अनुसार मार्ग के किनारे स्‍थापित अत्‍यधिक नीचे विद्युत लाईन को हटाने के संबंध में कब तक कार्यवाही की जावेगी ? समय-सीमा बताई जावे ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ, विभिन्‍न योजनाओं में स्‍वीकृत सड़क के किनारे अथवा क्रासिंग में निर्धारित मापदण्‍डों से कम उर्ध्‍वाधर दूरी वाली विद्युत लाईनों को हटाने के लिए वितरण कंपनी द्वारा जमा योजना में कार्य करने का प्रावधान है । विधानसभा क्षेत्र बड़वाह में वर्तमान में पांच सड़क मार्गों से संबंधित पांच लोकेशन पर विद्युत लाईनों को हटाये जाने अथवा सुरक्षित ऊंचाई पर लाने के कार्य लंबित है, जिनका विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट के सरल क्रमांक-6 से 10 पर दर्शाए अनुसार है । लाईन हटाए जाने की आवश्‍यकता नहीं होने पर विद्यमान विद्युत लाईनों के ढ़ीले तारों को दुरूस्‍त कर निर्धारित मानकों के अनुरूप व्‍यवस्थित करने का कार्य वितरण कंपनियों द्वारा स्‍वयं के व्‍यय पर किया जाता है । (ख) जी हाँ, संबंधित निर्माण विभाग, निर्धारित मापदण्‍डों से कम उर्ध्‍वाधर दूरी वाली विद्युत लाईनों को हटाने हेतु स्‍वीकृत प्राक्‍कलन की संपूर्ण राशि जमा योजना अन्‍तर्गत जमा करके वितरण कंपनी से कार्य करा सकता है अथवा वितरण कंपनी में सुप‍रविजन चार्ज एवं सर्विस टेक्‍स की राशि जमा करवाकर स्‍वयं के व्‍यय पर '' श्रेणी के पंजीकृत विद्युत ठेकेदार से कार्य करा सकता है । वर्ष 2013-14 में संबंधित विभाग द्वारा वितरण कंपनी में कोई राशि जमा नहीं कराई गई है तथा वर्ष 2014-15 में रूपये 1, 58, 226/- की राशि जमा कराई गई है । वर्षवार विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है । (ग) उत्‍तरांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में संबंधित विभाग द्वारा नियमानुसार राशि जमा नहीं कराए जाने के कारण प्रश्‍नाधीन कार्य लंबित है, अत: वर्तमान में उक्‍त कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है ।

परिशिष्ट - ''पंद्रह''

स्‍टापडैम निर्माण में अनियमितता की जाँच

11. ( क्र. 169 ) श्री यादवेन्‍द्र सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सतना जिले के नागौद तहसील के अन्‍तर्गत शहपुर में स्‍टापडैम का निर्माण कितनी लागत से कब बनाया गया था ? (ख) प्रश्‍नांश (क) से संबंधित स्‍टापडैम निर्माण के कुछ समय बाद बह गया जिसका पुन: जीर्णोद्धार किया जाकर कितनी राशि व्‍यय की गई है । उसके बाद भी स्‍टापडैम की गुणवत्‍ता खराब है जीर्णशीर्ण है और पानी का ठहराव उक्‍त स्‍टापडैम से नहीं हो पा रहा है ? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संबंध में उक्‍त स्‍टापडैम का भौतिक सत्‍यापन किस अधिकारी द्वारा किस दिनाँक को किया गया है ? (घ) प्रश्‍नांश (क) (ख) (ग) के परिप्रेक्ष्य में घटिया स्‍टापडैम निर्माण कराने वाले दोषी अधिकारी कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही करते हुये फर्जी भुगतान की वसूली की जायेगी ? यदि हाँ, तो कब तक ? यदि नहीं तो क्‍यों बताएँ ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) प्रश्‍नाधीन स्‍टॉपडेम का निर्माण रू.75.14 लाख की लागत से वर्ष 2012-13 में पूर्ण कराया गया । (ख) एवं (घ) जी नहीं । वर्ष 2013 में भारी वर्षा से प्रश्‍नाधीन स्‍टॉपडेम के दांए किनारे पर मिट्टी का कटाव होकर किनारे की दीवार क्षतिग्रस्‍त हुई थी । रूपांकन में कमी पाई जाने के लिए 07 अधिकारियों क्रमंश: तत्‍कालीन मुख्‍य अभियंता श्री ए.के.सिंघल, तत्‍कालीन अधीक्षण यंत्री श्री एन.एन.गांधी, तत्‍कालीन कार्यपालन यंत्री श्री व्‍ही.के.कुकरेजा, तत्‍कालीन कार्यपालन यंत्री श्री पी.के.पाण्‍डेय एवं श्री आई.डी. कुमरे, तत्‍कालीन सहायक यंत्री श्री एन.डी. मिश्रा एवं तत्‍कालीन उपयंत्री श्री आई.पी. बागरी के विरूद्ध विभागीय जाँच संस्थित की जा चुकी है । सुधार कार्य रू. 38.25 लाख का गत वर्ष कराया गया । जी नहीं, स्‍टॉपडेम में रूपांकित क्षमता अनुसार जल संग्रहण किया जाकर वर्ष 2014-15 में 95 हे. में सिंचाई की गई । (ग) दिनाँक 05.07.2012 को तत्‍कालीन कार्यपालन यंत्री श्री सुभाष जैन और उसके पश्‍चात दिनाँक 15.03.2015 को कार्यपालन यंत्री श्री उदय लाले द्वारा भौतिक सत्‍यापन/निरीक्षण किया गया ।

बरगी बॉई तट नहर का निर्माण 

12. ( क्र. 174 ) श्री नीलेश अवस्‍थी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बरगी बांई तट नहर निर्माण अन्‍तर्गत कौन-कौन सी मुख्‍य नहर, वितरण शाखा, लघु नहरों, उप नहरों का पाटन विधान सभा क्षेत्र अन्‍तर्गत निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है एवं कौन-कौन सा निर्माण कार्य किन कारणों से शेष है ? शेष निर्माण कार्य किनके द्वारा किया जा रहा है एवं कब तक पूर्ण कर लिया जावेगा ? (ख) प्रश्‍नांश (क) उल्‍लेखित पूर्ण हुई नहरों द्वारा वर्ष 2014-15 कुल कितना रकवा पाटन विधान सभा क्षेत्र में सिंचित किया गया ? नहरवार सूची देवें एवं कृषकों को रू‍पांकित सिंचाई क्षमता के अनुरूप पानी उपलब्‍ध न होने के क्‍या कारण हैं ? (ग) पाटन विधानसभा क्षेत्र अन्‍तर्गत नहरों के रख रखाव एवं सुधार कार्य हेतु वित्‍त वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनाँक तक किन-किन कार्यों पर कितनी राशि व्‍यय की गई ? फरवरी 2015 में मझौली वितरण केन्‍द्र की सब डिस्‍ट्रीब्‍यूटरी नहर फूटने का क्‍या कारण है ? (घ) नहरों के निर्माण में हुये भ्रष्‍टाचार के कारण जर्जर नहर निर्माण के कारण नहरों में हो रही क्षति की शासन जाँच कराकर दोषियों पर कार्यवाही करेगा एवं शेष निर्माण कार्य समय पर पूर्ण न करने वालों पर कार्यवाही करेगा ? यदि हाँ, तो कब तक ?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे प्रपत्र 1, 2, एवं 3 अनुसार है । (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे प्रपत्र 4 अनुसार है । (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे प्रपत्र 5 एवं 6 अनुसार है । फरवरी 2015 में मझौली वितरण नहर की सब डिस्‍ट्रीब्‍यूटरी नहर नहीं फूटी थी । अत: शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता । (घ) पाटन विधानसभा क्षेत्र काली मिट्टी का क्षेत्र है । नहरों के निर्माण में स्‍थानीय उपलब्‍ध मिट्टी का प्रयोग किया गया है । अतिवर्षा तथा कृषि उपकरणों के परिवहन के कारण नहरों के बैंक क्षतिग्रस्‍त होते है । इसके अतिरिक्‍त रबी एवं खरीफ फसलों हेतु पानी छोडे जाने के दौरान कृषको द्वारा नहरे काटने से नहरों में क्षति होती है, जिसके सुधार के कार्य नियमानुसार कराये गये है । नहरों के शेष निर्माण कार्यों हेतु लगातार निविदाओं के आमंत्रण की प्रक्रिया जारी है । स्‍थापित नियमों एवं प्रक्रियाओं के पालन में लगने वाले समय हेतु कोई भी दोषी नहीं है । अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता ।

जबलपुर जिले की मझौली तहसील मुख्‍यालय में संचालित देशी शराब दुकान का स्‍थल परिवर्तन 

13. ( क्र. 177 ) श्री नीलेश अवस्‍थी : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राज्‍य शासन द्वारा किसी स्‍थल पर शराब दुकान संचालन की अनुमति के क्‍या नियम एवं मापदंड हैं ? नियमों की छाया प्रति देवें ? (ख) पाटन विधान सभा क्षेत्र अन्‍तर्गत नगर पंचायत मझौली में पोला तिराहा काली मॉई मंदिर के पास देशी शराब दुकान संचालन की अनुमति शासन द्वारा किन मापदण्‍डों के आधार पर कब किसके द्वारा दी गई ? (ग) प्रश्‍नांक (ख) में उल्‍लेखित स्‍थल पर शराब दुकान संचालन के विरोध में ग्रामवासियों द्वारा तहसीलदार मझौली, अनुविभागीय अधिकारी सिहोरा को एवं प्रशासनकर्ता द्वारा स्‍वयं कलेक्‍टर जबलपुर को पत्र लिखकर उक्‍त शराब दुकान अन्‍यत्र स्‍थानांतरण की मांग पूर्व में की गई थी एवं ग्रामवासियों द्वारा मझौली नगर सांकेतिक बंद कर अपना विरोध प्रदर्शित किया था ? (घ) प्रश्‍नांक (ग) में की गई शिकायतों पर शासन द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई ? क्‍या शासन ग्रामवासियों की मांग पर देशी शराब दुकान का स्‍थल परिवर्तित करेगा ? यदि हाँ, तो कब तक ? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) :(क) किसी स्‍थल पर शराब दुकान के संचालन की अनुमति के नियम एवं मापदण्‍ड मध्‍यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 62 (2) के अंतर्गत बने सामान्‍य प्रयुक्ति के नियमों के नियम-1, दुकानों की अवस्थिति, में वर्णित अनुरूप, जैसा कि मध्‍यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) क्रमांक-55 दिनाँक 06 फरवरी 2015 में अधिसूचना क्रमांक बी-1/05/2015/2 पाँच (5), दिनाँक 06.02.2015 द्वारा प्रकाशित किये गये है, में वर्णित है । उक्‍त की छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट-एक अनुसार है । (ख) पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट-एक में वर्णित मापदण्‍डों के आधार पर पाटन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत नगर पंचायत मझौली में पोला तिराहा के पास देशी शराब दुकान मझौली का संचालन वर्णित नियमों के अन्‍तर्गत वर्ष 2012-13 से किया जा रहा है । उक्‍त दुकान वर्ष 2012-13 में जिला समिति द्वारा नवीनीकरण के माध्‍यम से निष्‍पादित की गई थी तथा वित्‍तीय वर्ष 2015-16 के लिए जिला समिति द्वारा टेण्‍डर के माध्‍यम से निष्‍पादित की गई है । (ग) प्रश्‍नांश (ख) में उल्‍लेखित स्‍थल पर शराब दुकान के संचालन के विरोध में दिनाँक 16.04.2013 को स्‍थानीयजनों द्वारा स्‍थल परिवर्तन हेतु कलेक्‍टर, जबलपुर को आवेदन प्रस्‍तुत किया गया था । (घ) प्रश्‍नांश (ग) के उत्‍तर में उल्‍लेखित अनुसार मझौली ग्रामवासियों द्वारा कलेक्‍टर जबलपुर को दिनाँक 16.04.2013 को देशी शराब दुकान मझौली को हटाये जाने की मांग के संबंध में वृत के प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी वृत-सिहोरा द्वारा प्रेषित प्रतिवेदन क्रमांक 24, दिनाँक 07.05.2013 में देशी शराब दुकान मझौली से बस स्‍टेण्‍ड की दूरी 50 मीटर से अधिक होना दर्शाये जाने तथा यह दुकान मझौली पोला तिराहा के पास सामान्‍य प्रयुक्ति के नियमों के अंतर्गत आपत्तिरहित स्‍थल पर स्‍थापित होने से उसके स्‍थान परिवर्तन की स्थिति निर्मित नहीं हुई है ।

जनभागीदारी योजनांतर्गत स्‍वीकृत अंशदान की राशि का ऑडिट

14. ( क्र. 198 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिण्‍ड जिले में जनभागीदारी योजना के अंतर्गत वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में शासन द्वारा कितनी-कितनी राशि आवंटित की गई ? वर्षवार विवरण दें ? (ख) उपरोक्‍त अवधि में किन-किन नगरीय निकाय एवं ग्राम पंचायतों एवं संस्‍थाओं को किस-किस कार्य हेतु कितनी-कितनी राशि किस-किस अधिकारी द्वारा स्‍वीकृत कर प्रदाय की गई नाम पद सहित बतायें ? किन-किन संस्‍थाओं एवं व्‍यक्तियों ने कार्यों के प्रस्‍ताव कब-कब कलेक्‍टर एवं मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत भिण्‍ड को दिये गये ? (ग) उपरोक्‍त प्रस्‍तावों हेतु ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों एवं संस्‍थाओं ने कितना-कितना अंशदान किस-किस बैंक में जमा किया तथा शासन का अंशदान कब-कब स्‍वीकृत कर भुगतान किया गया, दिनाँक सहित बतायें ? (घ) उक्‍त अवधि में जनभागीदारी के तहत स्‍वीकृत अंशदान की राशि एवं संगृहित राशि का ऑडिट कब-कब किस-किस ऑडिट एजेंसी द्वारा किया गया । प्रत्‍येक की ऑडिट रिपोर्ट प्रस्‍तुत करें ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) भिण्‍ड जिले में जनभागीदारी योजना के अन्‍तर्गत वर्ष 2013-14 में राशि रूपये 3, 00, 00, 000/-, 2014-15 में राशि रूपये 3, 60, 00, 000/- एवं 2015-16 में राशि रूपये 67, 80, 241/- का आवंटन प्राप्‍त हुआ । (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट-'' अनुसार है । (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट-'' अनुसार है । (घ) उक्‍त अवधि में जनभागीदारी योजना का ऑडिट न होने से शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता ।

नये विद्युत कनेक्‍शन हेतु उपभोक्‍ता से ली जाने वाली राशि 

15. ( क्र. 223 ) श्री दिनेश राय (मुनमुन) : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिवनी जिले में जनवरी 2013 से दिसम्‍बर 2013, जनवरी 2014 से दिसम्‍बर 2014 एवं जनवरी 2015 से मार्च 2015 तक कितने घरेलू, गैर घरेलू, कृषि पंप एवं अन्‍य नये विद्युत कनेक्‍शन दिये गये ? घरेलू, गैर घरेलू, कृषि पंप एवं अन्‍य विद्युत कनेक्‍शन को अलग-अलग संख्‍या सहित जानकारी देवें ? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में नये विद्युत कनेक्‍शन के लिये उपभोक्‍ताओं से किस-किस मद/निधी में राशी ली जाती है ? (ग) क्‍या उपभोक्‍ताओं से नये कनेक्‍शन हेतु अधेसित स्‍टेम्‍प चार्ज रजिस्‍ट्रेशन शुल्‍क लिया जाता है । यदि हाँ, तो सिवनी जिले में दिये गये नये कनेक्‍शनों से अधेसित स्‍टेम्‍प चार्ज मद में कितनी राशि प्राप्‍त हुई ? (घ) सिवनी जिले में विद्युत विभाग के संभागीय कार्यालयों द्वारा जिला कोषालय से जनवरी 2013 से मार्च 2015 तक कितनी राशि के अधेसित स्‍टेम्‍प चार्ज खरीदे गये ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) सिवनी जिले में प्रश्‍नाधीन अवधि में दिये गये विद्युत कनेक्‍शनों की श्रेणीवार संख्‍या सहित जानकारी निम्‍नानुसार है ।

क्रमांक

संभाग का नाम

अवधि

घरेलू

गैर घरेलू

कृषि पंप

अन्‍य

1

सिवनी

जनवरी 13 से दिसम्‍बर 13

3567

490

609

316

 

जनवरी 14 से दिसम्‍बर 14

3142

565

8870

164

जनवरी 15 से मार्च 15

698

35

532

143

योग

7407

1090

10011

623

2

लखनादौन

जनवरी 13 से दिसम्‍बर 13

970

65

3556

0

 

जनवरी 14 से दिसम्‍बर 14

1866

54

5538

2

जनवरी 15 से मार्च 15

844

98

72

2

योग

3680

217

9166

4

 

 

कुल योग

11087

1307

19177

627

(ख) नये विद्युत कनेक्‍शन के लिए आवेदकों से आवेदन, पंजीयन, अमानत राशि एवं सप्‍लाई अफोर्डिंग अनुबंध शुल्‍क के मद में राशि ली जाती है । (ग) राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अन्‍तर्गत दिये जाने बी.पी.एल. कनेक्‍शनों को छोडकर शेष उपभोक्‍ताओं से अधेसिव स्‍टेम्‍प चार्ज, रजिस्‍ट्रेशन शुल्‍क लिया जाता है । सिवनी जिले के अंतर्गत प्रश्‍नाधीन अवधि में अधेसिव स्‍टेम्‍प चार्ज मद में रू. 21, 10, 600/- प्राप्‍त हुए है । (घ) जनवरी 13 से मार्च 15 तक की अवधि में पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सिवनी संभाग अन्‍तर्गत जिला कोषालय से दस लाख रूपये के अधेसिव स्‍टेम्‍प खरीदे गये, लखनादौन संभाग द्वारा वितरण केन्‍द्र से मांग पत्र प्रस्‍तुत नहीं करने के कारण उक्‍त अवधि में अधेसिव स्‍टेम्‍प नहीं खरीदी गई है ।

खराब, जले अथवा क्षमता वृद्धि हेतु ट्रांसफार्मरों को बदला जाना 

16. ( क्र. 235 ) श्री मेव राजकुमार : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या खराब, जले ट्रांसफार्मर बदलने की कोई समय-सीमा निर्धारित है ? ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि हेतु प्राप्‍त आवेदन पत्रों के निराकरण की समय-सीमा क्‍या है ? (ख) खरगोन जिले में विधानसभा क्षेत्रवार वर्ष 2013-14 एवं 2014-15 में कुल कितने विद्युत वितरण ट्रांसफार्मर जले/खराब हुए संख्‍या बतावे ? इनमें से कितने ट्रांसफार्मर निर्धारित समयावधि में बदल दिये हैं एवं कितने ट्रांसफार्मर समयावधि पश्‍चात् बदले गये और कितने बदलने हेतु शेष है ? प्रश्‍नाधीन जिले एवं अवधि में कितने अतिभारित विद्युत वितरण ट्रांसफार्मर चिहिन्‍त किये गये एवं कितने ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि कर दी गई है संख्‍या बतावें ? (ग) महेश्‍वर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत ऐसे कितने विद्युत वितंरण ट्रांसफार्मर जले/खराब हैं जो बदलने हेतु शेष हैं की जानकारी दिनाँक 30.06.2015 की स्थिति में बतावें ? वर्ष 2015-16 में जून, 2015 अंत तक प्रश्‍नांधीन विधानसभा क्षेत्र में ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि हेतु कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुई है एवं उनमें से कितने प्रकरणों में क्षमता वृद्धि का कार्य पूर्ण किया जा चुका है ? वर्तमान में विद्युत वितरण ट्रांसफार्मर जले/खराब होने के कारण विधानसभा क्षेत्र की कितनी पेयजल योजनाएं बंद है जानकारी देवें ? (घ) क्‍या माहेश्‍वर विधान सभा क्षेत्र के किसान भगवान फकीरा एवं अन्‍य पाँच कृषक निवासी चिंदडिया द्वारा मौगांवा बीड वाली डी.पी.को 63 किलोवाट के स्‍थान पर 100 किलोवाट का ट्रांसफार्मर हेतु आवेदन वर्तमान तक लंबित है ? एवं वहीं पर नया 100 किलोवाट का ट्रांसफार्मर स्‍वीकृत होने के उपरान्‍त भी नहीं लगाया जा रहा है ? जिसके कारण कृषकों को सिंचाई हेतु प्रर्याप्‍त वोल्‍टेज नहीं मिल रहा है ? इसके लिए कौन उत्‍तरदायी है एवं यह कार्य कब तक हो जावेगा ? अवधि बतावें ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ । जले/खराब वितरण ट्रांसफार्मरों को शहरी क्षेत्र में अधिकतम 24 घंटे एवं ग्रामीण क्षेत्रों में शुष्‍क मौसम में 3 दिन तथा वर्षा ऋतु (जुलाई से सितम्‍बर) में 7 दिन में बदले जाने की समय-सीमा निर्धारित है । वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षमतावृद्धि हेतु प्राप्‍त आवेदन पत्रों के निराकरण की कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है, अपितु वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि का कार्य तकनीकी साध्‍यता एवं वित्‍तीय उपलब्‍धता के अनुरूप क्रमश: किया जाता है । (ख) खरगोन जिले में वर्ष 2013-14 एवं 2014-15 में जले/खराब हुए वितरण ट्रांसफार्मरों की विधानसभा क्षेत्रावार जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है । उक्‍त सभी जले/खराब ट्रांसफार्मरों को नियत समयावधि में बदला गया है । वर्ष 2013-14 में कुल 2404 ट्रांसफार्मर फेल हुए थे एवं सभी को बदल दिया गया है तथा वर्ष 2014-15 में फेल 2737 ट्रांसफार्मरों में से नियमानुसार बकाया राशि का भुगतान नहीं होने के कारण वर्तमान में दो ट्रांसफार्मर बदलना शेष है । वर्ष 2013-14 एवं 2014-15 में खरगोन जिले में क्रमश: 231 एवं 33 अतिभारित वितरण ट्रांसफार्मर चिन्हित किये गये है एवं इन सभी की क्षमता वृद्धि के कार्य पूर्ण किये जा चुके हैं, विधानसभा क्षेत्रावार विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है । (ग) महेश्‍वर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत दिनाँक 30.06.2015 की स्थिति में कोई भी जला/खराब वितरण ट्रांसफार्मर बदलने हेतु शेष नहीं है । वर्ष 2015-16 में माह जून-15 के अंत तक वितरण ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि हेतु दो आवेदन/शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं जिनमें वितरण ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि का कार्य तकनीकी साध्‍यता होने पर वित्‍तीय संसाधनों की उपलब्‍ध्‍ता के अनुरूप किया जा सकेगा । वर्तमान में महेश्‍वर विधानसभा क्षेत्र में किसी भी पेयजल योजना का विद्युत प्रदाय बन्‍द नहीं है । (घ) जी नहीं, ग्राम चुन्‍दडिया (चिन्‍दडिया नहीं) में मौगांवा बीड वाले वितरण ट्रांसफार्मर की क्षमता वृद्धि कर 100 के.व्‍ही.ए. का ट्रांसर्फार लगाया जा चुका है । इसी स्‍थान पर नया 100 के.व्‍ही.ए. क्षमता का ट्रांसफार्मर स्‍थापित करने का कार्य स्‍वीकृत नहीं है एवं न ही वोल्‍टेज की कोई समस्‍या है । उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में किसी के उत्‍तरदायी होने का प्रश्‍न नहीं उठता ।

परिशिष्ट - ''सोलह''

महेश्‍वर पर्यटन विकास योजना 

17. ( क्र. 236 ) श्री मेव राजकुमार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सरदार सरोवर डेम के बेकवॉटर बड़ने से महेश्‍वर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभाग व्‍दारा क्‍या योजना बनाई गई है एवं उसमें क्‍या प्रावधान किये जा रहे हैं ? (ख) महेश्‍वर में पर्यटन को बढ़ावा दिये जाने हेतु नर्मदा नदी में स्‍टीमर चलाये जाने की कोई योजना तैयार की गई है ? यदि हाँ तो क्‍या एवं कब तक इसका क्रियान्‍वयन किया जावेगा ? (ग) महेश्‍वर में देशी एवं विदेशी पर्यटकों की सुविधा हेतु विभाग व्‍दारा क्‍या-क्‍या योजना बनाई जा रही है एवं उनका क्रियान्‍वयन कब तक किया जावेगा ? (घ) क्‍या सिंहस्‍थ 2016 को दृष्टिगत रखते हुये महेश्‍वर पर्यटन के लिए कोई विशेष कार्य योजना बनाई गई है ? यदि हाँ तो क्‍या ? एवं उसका क्रियान्‍वयन कब तक किया जावेगा ?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं । शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता । (ख) पूर्व में ओंकारेश्‍वर से महेश्‍वर तक मिनी क्रूज चलाने की योजना बनाई गई थी । महेश्‍वर से ओंकारेश्‍वर तक मिनी क्रूज चलाने के लिये सर्वेक्षण किया गया परन्तु पाया गया कि नदी के पूर्ण जलस्तर होने पर बुड़वा ब्रिज के पास बहुत सारी चट्टाने तथा जल स्तर अत्‍यन्‍त निम्न होने के कारण वर्तमान स्थिति में मिनी क्रूज बोट का संचालन सुरक्षित नहीं है । (ग) पर्यटन विभाग द्वारा आवास सुविधा उपलब्‍ध कराई गई है उसका संचालन किया जा रहा है । (घ) सिंहस्थ 2016 में आने वाले पर्यटकों के लिए, महेश्वर के लिए, पैकेज टूर का संचालन प्रारंभ किया जायेगा । पर्यटन निगम की इकाई में चार नये कक्षों का निर्माण किया जा रहा है तथा संपूर्ण इकाई का संवर्धन व उन्‍नयन किया जा रहा है ।

शहरों में संचालित कोचिंग सेन्‍टर हेतु मापदण्‍ड 

18. ( क्र. 256 ) श्री यशपालसिंह सिसौदिया : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रदेश के सभी बड़े शहरों में बड़ी संख्‍या में कोचिंग सेन्‍टर संचालित हैं ? यदि हाँ, तो क्‍या उक्‍त कोचिंग सेन्‍टरों के संचालन हेतु कोई मापदण्‍ड व नियम सरकार द्वारा निर्धारित किये हुए हैं, तो क्‍यों एवं नहीं तो क्‍यों ? (ख) क्‍या अधिकांश कोचिंग सेन्‍टर रिहायशी इलाके में स्‍थापित है ? क्‍या यह भी सही है कि यह शुद्ध व्‍यावसायिक गतिविधि है ? यदि हाँ, तो शहरों में इसका संचालन किस आधार पर किया जा रहा है ? (ग) क्‍या इन सभी कोचिंग सेन्‍टरों के पास स्‍वंय का भवन, पार्किंग एवं अन्‍य आवश्‍यक सुविधाऐं उपलब्‍ध नहीं है ? यदि हाँ, तो सरकार इस संबंध में कोई कार्यवाही करने का विचार कर रही है ? (घ) क्‍या कोचिंग सेन्‍टरों के कारण उक्‍त क्षेत्र में व्‍यावसायिक गतिविधियों एवं आपराधिक घटनाएं बढ़ने से पूरे रिहायशी क्षेत्रों में रहने वाली आबादी प्रभावित हो रही है ? यदि हाँ, तो इसे रोकने हेतु सरकार क्‍या कार्यवाही कर रही है ?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) कोचिंग सेन्टर स्वतंत्र रूप से व्यवसाय करते है एवं इनका नियंत्रण विभाग के अधिकार क्षेत्र में नहीं है । अतः कोचिंग सेंटर के संबंध में विभाग में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है । (ख) एवं (ग) प्रश्नांश  के संदर्भ में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है । अतः जानकारी निरंक है ।

ग्रामों का शत प्रतिशत विद्युतीकरण 

19. ( क्र. 299 ) श्री जतन उईके : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शासन द्वारा प्रदेश के ग्रामों में शत प्रतिशत विद्युतीकरण किये जाने हेतु कोई योजना अथवा लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है ? (ख) यदि हाँ, तो कब तक यह कार्य पूर्ण कर लिया जावेगा तथा कितने ग्रामों को विद्युतीकरण कर दिया गया है तथा कितनों का शेष है ? (ग) विद्युतीकरण किये गये ग्रामों में ग्रामीणों द्वारा बिजली बिल भुगतान न करने अथवा विलंब करने पर क्‍या इन ग्रामों में लगाए गए ट्रांसफार्मर तथा विद्युत पोल से तार उखाड़कर ले जाने एवं उन ग्रामों में पुन: अंधेरा करने के कोई प्रावधान है ? (घ) पांढुर्णा तहसील में कितने ग्रामों की विगत 05 वर्षों में कितने ट्रांसफार्मर उखाड़कर विभाग द्वारा ले गये है तथा ग्रामों में अंधेरा किया गया है ? यदि नहीं तो पांढुर्णा तहसील में उखाड़े गये ट्रांसफार्मर एवं उखाड़े गए तार के लिये कौन जिम्‍मेदार है ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हां, शासन द्वारा जिन अविद्युतीकरण ग्रामो का विद्युतीकरण पांरपरिक ऊर्जा स्‍त्रौतों से संभव है उनका शत प्रतिशत विद्युतीकरण किये जाने हेतु मार्च 2016 तक का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है । (ख) लाईन विस्‍तार कर विद्युतीकृत किये जाने वाले प्रदेश के शत प्रतिशत ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य मार्च 2016 तक पूर्ण करने के प्रयास किये जा रहे हैं । जून 2015 की स्थिति में लाईन विस्‍तार कर मध्‍य प्रदेश के 51272 ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य ग्राम विद्युतीकरण की तत्‍कालीन परिभाषा अनुसार पूर्ण कर लिया गया है एवं 306 ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य शेष हैं । (ग) जी नहीं । बकाया राजस्‍व की वसूली सुनिश्चित करने हेतु म.प्र.विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी म.प्र.विद्युत प्रदाय संहिता 2013 की कंडिका क्रमांक 9.13 और 9.14 के अनुपालन उपरांत वसूली नहीं होने के पश्‍चात् ही कनेक्‍शन को स्‍थाई रूप से विच्‍छेदित करने की कार्यवाही की जाती है । (घ) पांढुर्णा तहसील के अन्‍तर्गत विगत 5 वर्षों में कोई भी ट्रांसफार्मर नहीं हटाया गया है, अपितु जिन उपभोक्‍ताओं पर बकाया राशि है, उनके कनेक्‍शन काटे गये हैं, अत: किसी के जिम्‍मेदार होने का प्रश्‍न नहीं उठता ।

ग्राम सेमलापार 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र की स्‍वीकृति 

20. ( क्र. 324 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के परि.अता. प्रश्‍न संख्‍या-39 (क्रमांक 1315) दिनाँक 27 फरवरी 2015 के उत्‍तर में बताया गया था कि ग्राम सेमलापार में 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र की स्‍थापना के कार्य की स्‍वीकृति अभी प्रक्रियाधीन है, तथा म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा ग्राम सेमलापार में 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र के कार्य को दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में प्रस्‍तावित किया गया है ? यदि हाँ तो क्‍या दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजनान्‍तर्गत विभाग को पर्याप्‍त राशि का आवंटन प्राप्‍त हो चुका है ? और क्‍या पूर्व प्रस्‍ताव अनुसार ग्राम सेमलापार में 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र की स्‍वीकृति दी जा चुकी है तथा कब तक कार्य प्रारंभ करा दिया जावेगा ? (ख) यदि नहीं तो क्‍या आगामी सिंचाई सीजन तक स्‍वीकृति प्रदान कर कार्य प्रारंभ करा दिया जावेगा ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ । म.प्र. म.क्षे.वि.वि.कं.लि. भोपाल के अंतर्गत राजगढ़ जिले के ग्राम सेमलापार में 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र स्‍थापित किये जाने का कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में सम्मिलित किया गया है । योजना की डी.पी.आर. ग्रामीण विद्युतीकरण निगम लिमिटेड को प्रेषित की जा चुकी है, जिसकी स्‍वीक़ृति लंबित है । अत: वर्तमान में उक्‍त कार्य आरंभ किये जाने की निश्चित समय सीमा बताया जाना संभव नहीं है । (ख) उत्‍तरांश '' के परिप्रेक्ष्‍य में वर्तमान में प्रश्‍नाधीन विद्युत उपकेन्‍द्र का कार्य आंरभ किये जाने की समय-सीमा बताना संभव नहीं है ।

लघु सिंचाई परियोजनाओं की स्‍वीकृति 

21. ( क्र. 325 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विधान सभा क्षेत्र ब्‍यावरा के अंतर्गत पार्वती नदी पर सेमलापार बैराज पूर्व से विभाग की सर्वेक्षित परियोजनाओं की सूची में सम्मिलित है तथा विभाग की साध्‍यता सूची में क्रमांक 1266 पर दर्ज है ? (ख) क्‍या उक्‍त परियोजना कम लागत की होकर बिना किसी मुआवजा राशि के किसानों की 600 हेक्‍टेयर भूमि सिंचित करने की क्षमता रखने के बाद भी जलसंसाधन विभाग द्वारा निरंतर अनदेखी कर योजना को टाला जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय किसान सिंचाई से वंचित है ? यदि हाँ तो क्‍या शासन उक्‍त परियोजना की शीघ्र स्‍वीकृति प्रदान करेगा ? यदि हाँ तो कब तक ? यदि नहीं तो क्‍यों ? (ग) क्‍या उपरोक्‍तानुसार विधानसभा क्षेत्र ब्‍यावरा के अंतर्गत पार्वती नदी पर ही एक अन्‍य स्‍थल सुठालिया-मधूसूदनगढ़ मार्ग पर घोघराघाट नामक स्‍थान पर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग द्वारा पूर्व में 3-4 फीट ऊँचाई का बंधान बनाया गया था, जिससे क्षेत्र के 15-20 ग्रामों के किसानों को सीधे सिंचाई का लाभ प्राप्‍त हो रहा है ? क्‍या यह सही है कि यदि जलसंसाधन विभाग उक्‍त बंधान के समीप 3 मीटर ऊंचाई का बांध निर्माण करे तो अतिरिक्त इतने ही ग्रामों को और सिंचाई सुविधा का लाभ प्राप्‍त हो सकेगा, जो कि अत्‍यंत कम लागत में निर्मित होकर नदी के जल स्‍तर को पर्याप्‍त भंडारण में बदल सकेगा ? क्‍या विभाग उक्‍त स्‍थल का परीक्षण कर प्राक्‍कलन तैयार कराऐगा ? यदि हाँ, तो कब तक ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी नहीं । विभागीय वेबसाइइट पर साध्‍यता सूची में दर्ज है । (ख) जी नहीं । परियोजना का चिन्हित स्‍थल पर नींव (फाऊण्‍डेशन) के लिए उपयुक्‍त नहीं होने के कारण परियोजना तकनीकी आधार पर साध्‍य नहीं पाई गई है । शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते है । (ग) ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग द्वारा निर्मित परियोजनाओं की जानकारी का आंकलन, संधारण एवं पर्यवेक्षण जल संसाधन विभाग द्वारा नहीं किया जाता है । उपलब्‍ध वित्‍तीय संसाधनों से स्‍वीकृत एवं निर्माणाधीन परियोजनाओं को पूर्ण कराना सर्वोच्‍च प्राथमिकता होने के परिपेक्ष्‍य में सिंचाई परियोजनाओं की स्‍वीकृति का कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन नहीं होने से शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते है।

बिजली की मांग एवं खपत 

22. ( क्र. 347 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. शासन के सभी उपक्रमों से वर्ष 2014-15 में हर माह कितने मिलियन यूनिट विद्युत का उत्‍पादन हुआ ? माहवार, स्‍त्रोतवार ब्‍यौरा देवें ? (ख) वर्ष 2014-15 में प्रदेश को केन्‍द्रीय क्षेत्र से कितनी विद्युत प्राप्‍त हुई? माहवार मिलियन यूनिट में ब्‍यौरा देवें ? वर्ष 2014-15 में प्रदेश की मिलियन यूनिट में कितनी मांग थी ? मॉग और आपूर्ति में कितना अन्‍तर रहा ? (ग) क्‍या सरकार निजी संस्‍थाओं से बिजली खरीद रही है ? यदि हाँ, तो कितनी एवं किस दर पर ? (घ) निजी संस्‍थाओं को बिजली खरीदी के ऐवज में क्‍या-क्‍या सुविधायें दी जा रही हैं ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) म.प्र.शासन के सभी उपक्रमों से वर्ष 2014-15 में माहवार, स्‍त्रोतवार विद्युत उत्‍पादन की जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-1 अनुसार है । (ख) वर्ष 2014-15 में प्रदेश को केन्‍द्रीय क्षेत्र से प्राप्‍त हुई विद्युत की माहवार मिलियन यूनिट में जानकारी निम्‍नानुसार है :-

माह (2014-15)

केन्‍द्रीय क्षेत्र से प्राप्‍त विद्युत (मि.यूनिट में)

अप्रैल

1768.22

मई

1856.64

जून

1658.34

जुलाई

1644.36

अगस्‍त

1528.77

सितम्‍बर

1715.65

अक्‍टूबर

2010.96

नवम्‍बर

1979.56

दिसम्‍बर

1772.31

जनवरी

1514.28

फरवरी

1562.04

मार्च

1509.41

कुल

20520.5

वर्ष 2014-15 में प्रदेश की कुल मांग एवं आपूर्ति 57014.51 मिलियन यूनिट थी । वर्ष 2014-15 में प्रदेश की मांग और आपूर्ति में कोई अंतर नहीं रहा । (ग) जी हाँ । विवरण निम्‍नानुसार है :-

उत्‍पादन संयंत्र का नाम

म.प्र.सरकार का हिस्‍सा

विद्युत क्रय की दर

बी.एल.ए.पावर

5 प्रतिशत

म.प्र.विद्युत नियामक आयोग द्वारा संबंधित उत्‍पादन संयंत्र हेतु जारी टैरिफ आदेश के प्रावधानों के अनुसार ।

जे.पी.बीना (ईकाई-1)

5 प्रतिशत

जे.पी.बीना (ईकाई-2)

5 प्रतिशत

जे.पी.निगरी

7.5 प्रतिशत

वर्ष 2014-15 में उपरोक्‍त उत्‍पादन संयंत्रों से शासन द्वारा खरीदी गयी विद्युत का माहवार विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-2 में दर्शाए अनुसार है । शेष विद्युत का क्रय एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा किया जाता है । (घ) कोई सुविधा नहीं दी जा रही ।

परिशिष्ट - ''सत्रह''

केन्‍द्र सरकार द्वारा प्रदेश सरकार को राशि का आवंटन 

23. ( क्र. 348 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. शासन को केन्‍द्र शासन से वर्ष 2015-16 में विभिन्‍न मदो में विभिन्‍न विभागों को कितनी-कितनी राशि प्रदान की गयी ? वर्ष 2012-13 से 2014-15 तक का वर्षवार पृथक-पृथक ब्‍यौरा देवें ? (ख) क्‍या कुल आवंटन राशि में केन्‍द्र के द्वारा कमी की गयी ? यदि हाँ, तो कितनी कमी की गयी ? विभागवार जानकारी देवें ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) मध्‍यप्रदेश शासन को केन्‍द्र शासन से वर्ष 2012-13, 2013-14 में संलग्‍न परिशिष्‍ट के अनुसार विभिन्‍न विभागों को राशि प्राप्‍त हुई है । वर्ष 2014-15 का लेखा महालेखाकार कार्यालय द्वारा तैयार नहीं किया गया है । वर्ष 2015-16 में अब तक प्राप्‍त राशि का विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है । (ख) प्रश्‍नांश (ख) भारत सरकार से संबंधित है ।

परिशिष्ट - ''अठारह''

नवीन विद्युत वितरण केन्‍द्र की स्‍थापना 

24. ( क्र. 357 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शासन द्वारा कितने ग्रामों पर, कितनी दूरी पर विद्युत वितरण केन्‍द्र स्‍थापित किये जाने का क्‍या प्रावधान है ? (ख) विदिशा जिले के जिलान्‍तर्गत किस-किस गांव में विद्युत वितरण केन्‍द्र संचालित किये जा रहे हैं ? इन केन्‍द्रों से कितने ग्रामों को विद्युत वित‍रण किया जा रहा है ? केन्‍द्र से ग्राम की दूरी बताते हुये जानकारी तहसीलवार एवं विधानसभा क्षेत्रवार देवें ? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (ख) में उल्‍लेखित वितरण केन्‍द्रों के अधीन गांवों की संख्‍या अधिक होने एवं वितरण केन्‍द्र से गांवों की दूरी अधिक होने के कारण विद्युत वितरण सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है ? इस संबंध में किसानों एवं नागरिकों द्वारा कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुईं ? (घ) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा अधीक्षण यंत्री म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्‍पनी लिमि. संभाग विदिशा के पत्र क्रमांक 1039 दिनाँक 22.11.14 के माध्‍यम से प्रश्‍नांश (ग) के प्रकाश में विधानसभा क्षेत्र के ग्राम घटेरा (बासौदा), बागरोद (त्‍यौंदा), हैदरगढ़ (ग्‍यारसपुर), सीहोद (ग्‍यारसपुर), विद्युत वितरण केन्‍द्र बढ़ाने की मांग की गई थी या नहीं ? यदि हाँ, तो पत्र पर क्‍या कार्यवाही की गई ? नहीं, तो क्‍यों ? कब तक कार्यवाही की जावेगी ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) वितरण केन्‍द्र स्‍थापित किये जाने हेतु ग्रामों की संख्‍या अथवा वितरण केन्‍द्रों से दूरी के आधार पर कोई मानक वितरण कंपनी द्वारा निर्धारित नहीं किये गये है । (ख) विदिशा जिले के अन्‍तर्गत संचालित विद्युत वितरण केन्‍द्रों की प्रश्‍नाधीन चाही गई ग्रामवार, तहसीलवार एवं विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है । (ग) विद्युत संबंधी कार्य सुचारू रूप से संपादित किये जा रहे हैं । उत्‍तरांश '' में उल्‍लेखित वितरण केन्‍द्रों से ग्रामों की अधिक दूरी होने के कारण विद्युत प्रदाय सुचारू रूप से नहीं होने संबंधी किसानों अथवा नागरिकों की कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है । (घ) जी हाँ, माननीय विधायक महोदय के पत्र क्रमांक 1039 दिनाँक 22.11.2014 के द्वारा बासौदा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम घटेरा (बासौदा), ग्राम बागरोद (त्‍यौंदा), ग्राम हैदरगढ़ (ग्‍यारसपुर) एवं ग्राम सीहोद (ग्‍यारसपुर) में विद्युत वितरण केन्‍द्र स्‍थापित करने की मांग की गई है । नवीन विद्युत वितरण केन्‍द्रों की स्‍थापना वित्‍तीय साध्‍यता के अनुरूप आवश्‍यक होने पर संसाधनों की उपलब्‍धता के अनुसार की जा सकेगी, जिस हेतु वर्तमान में कार्यवाही किया जाना अथवा इस हेतु समया-सीमा बताया जाना संभव नहीं है ।

परिशिष्ट - ''उन्नीस''

प्रदेश की कोयला खदानों से प्राप्‍त कोयला 

25. ( क्र. 380 ) श्री मुकेश नायक : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्तमान में प्रदेश के ताप विद्युत ग्रहों का कोयला प्रदेश के बाहर राज्‍यों खास तौर पर छत्‍तीसगढ़ राज्‍य में कहां-कहां एवं किस-किस कोयला खदान से आता है, ताप विद्युत गृह जहां से कोयला आता है ? उनकी खदान की दूरी बतावें ? साथ ही परिवहन चार्ज प्रति टन एवं कुल कितना परिवहन चार्ज आता है वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनाँक कि अवधि तक का बतावें ? (ख) क्‍या माननीय मुख्‍यमंत्री जी व्‍दारा पूर्व में आपत्ति ली गई थी कि केन्‍द्र सरकार व्‍दारा छत्‍तीसगढ़ राज्‍य से प्रदेश के ज्‍यादातर विद्युत क्षेत्र राज्‍यों को कोयला दिया जाता है एवं समीप कि खदानों से नहीं दिया जाता है ? क्‍या इस दिशा में प्रयास करेगें कि जहां-जहां पावर हाउस है उन्‍हीं के समीप की खदानों से कोयला प्राप्‍त हो सके जिससे परिवहन में होने वाले अधिक व्‍यय से बचा जा सके ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) वर्तमान में म.प्र.पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के ताप विद्युत गृहों को प्रदेश के बाहर के राज्‍यों, विशेष तौर पर छत्‍तीसगढ़ स्थित जिन कोयला खदानों से कोयले का प्रदाय किया जा रहा है उनके नाम तथा विद्युत गृहों से उनकी दूरी की जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है । साथ ही म.प्र.पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के विद्युत गृहों में वर्ष 2013-14 से जून 2015 तक प्रदाय किये कोयले के परिवहन भाडे़ पर प्रति टन एवं कुल व्‍यय की जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब अनुसार है । (ख) म.प्र.पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के ताप विद्युत गृहों को प्रदेश के बाहर दूरस्‍थ कोयला खदानों के स्‍थान पर निकटस्‍थ खदानों से कोयला प्रदाय किये जाने का मुद्दा माननीय मुख्‍यमंत्रीजी/ राज्‍य सरकार द्वारा विभिन्‍न स्‍तरों पर केन्‍द्र सरकार के सामने उठाया जाता रहा है । उक्‍त प्रयासों के फलस्‍वरूप तत्‍कालीन केन्‍द्रीय कोयला मंत्री द्वारा जून 2010 में एक अंतर मंत्रालय टास्‍क फोर्स का गठन किया गया था जिसका कार्य विभिन्‍न बिजली उत्‍पादन इकाईयों को कोल इंडिया लिमिटेड की कोयला खदानों से इस प्रकार युक्तिसंगत आवंटन निर्धारित करना था जिससे सभी उत्‍पादन इकाईयों को परिवहन भाडे़ पर कम से कम खर्च करना पडे । यह निर्धारण विद्युत गृहों का संचालन करने वाली कंपनियों की आपसी सहमति से होना था । टास्‍क फोर्स द्वारा म.प्र.पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के संजय गांधी एवं सतपुड़ा ताप विद्युत गृहों को प्रदाय किये जा रहे कोयले के युक्तिकरण हेतु कुछ सुझाव सितम्‍बर 2011 में दिये गये थे किन्‍तु दूसरे राज्‍यों की विद्युत कंपनियों से आपसी सहमति नहीं बनने के कारण उक्‍त सुझावों पर अमल नहीं हो पाया । वर्तमान में खंडवा स्थित श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना के प्रथम चरण हेतु प्रदाय किये जा रहे कोयले के युक्तिकरण हेतु प्रयास किये जा रहे हैं ताकि परियोजना को छत्‍तीसगढ़ स्थित एस.ई.सी.एल. की खदानों के स्‍थान पर समीपस्‍थ डब्‍ल्‍यू.सी.एल. की खदानों से कोयले का आवंटन निर्धारित किया जा सके । इसी क्रम में माननीय मुख्‍यमंत्रीजी द्वारा माननीय केन्‍द्रीय कोयला एवं विद्युत राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) महोदय से मई 2015 के पत्र के माध्‍यम से श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना खंडवा के प्रथम चरण हेतु कोयले का आवंटन निकटस्‍थ डब्‍ल्‍यू.सी.एल. की खदानों से किये जाने का अनुरोध किया गया है ।

परिशिष्ट ''बीस''

मुरैना सबल गढ़ मार्ग निर्माण में पोल शिफ्टिंग में अनियमितता 

26. ( क्र. 399 ) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुरैना जिले की सबलगढ़-मुरैना सड़क निर्माण के समय वर्ष 20132014 में विद्युत लाइन शिफ्टिंग के कितने प्राक्‍कलन तैयार कर स्‍वीकृत कराये प्राक्‍कलन क्रमांक, दिनाँक, राशि सहित स्‍वीकृति कर्ता अधिकारी का नाम सहित जानकारी दी जावे ? (ख) क्‍या स्‍वीकृत प्राक्‍कलनों के विरूद्ध कार्य करने वाली कम्‍पनी व्‍दारा सुपरवीजन चार्ज जमा नहीं कराया गया ? यदि हाँ, तो क्‍यों ? लाइन शिफ्टिंग करने वाली कम्‍पनी के विरूद्ध कार्यवाही क्‍यों नहीं की गई पूर्ण प्रक्रिया सहित जानकारी दी जावे ? (ग) विद्युत विभाग की लाइन शिफ्टिंग करते समय कम्‍पनी व्‍दारा कितना पुराना सामान निकाला प्रावधानों के अनुसार विभागीय स्‍टोर में जमा कराया गया ? यदि हाँ, तो कितना ? (घ) क्‍या उक्‍त सामान हेतु कई बार शिकायतों के बावजूद भी अधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई ? लाखों रुपये का सामान खुर्दबुर्द कर दिया गया ? क्‍या जाँच कर कार्यवाही की जावेगी ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) मुरैना जिले के सबलगढ़-मुरैना मार्ग पर सड़क निर्माण में आने वाली विद्युत लाईन शिफ्टिंग के 33 प्राक्‍कलन मध्‍य प्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा आवेदन करने पर पांच प्रतिशत सुपरविजन राशि जमा करवाकर कार्य आवेदक द्वारा स्‍वंय कराए जाने के विकल्‍प के अंतर्गत मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सक्षम कार्यालय द्वारा स्‍वीकृत किये गये हैं । प्रश्‍नाधीन चाही गई जानकारी सहित विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है । (ख) जी हां । म.प्र. सड़क विकास निगम द्वारा मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के संबंधित संभागों से प्रेषित डिमाण्‍ड नोट एवं पत्राचार के उपरांत भी सुपरविजन चार्ज के विरूद्ध राशि जमा नहीं की गई है । बागचीनी वितरण केन्‍द्र के प्रबंधक द्वारा लाईन शिफ्टिंग करने वाली कंपनी के ठेकेदार के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही करने हेतु पत्र क्रमांक 2457 दिनाँक 24.03.2015 एवं पत्र क्रमांक 2611 दिनाँक 18.05.2015 द्वारा थाना बागचीनी को लेख किया गया है । सुपरविजन राशि जमा नहीं करने के कारण प्रश्‍नाधीन स्‍वीकृत सभी प्राक्‍कलनों को निरस्‍त कर दिया गया है । (ग) उत्‍तरांश (ख) में दर्शाए अनुसार स्‍वीकृत प्राक्‍कलनों के विरूद्ध म.प्र. सड़क विकास निगम के द्वारा एवं (घ) सुपरविजन की राशि जमा नहीं करने के कारण कार्यादेश जारी नहीं किया गया है तथा सभी स्‍वीकृत प्राक्‍कलन निरस्‍त कर दिये गये हैं । विद्युत लाईन की अवैध रूप से शिफ्टिंग करने में निकली सामग्री के संबंध में जाँच सहित म.प्र.म.क्षे.वि.वि.कं. मुख्‍यालय द्वारा मुख्‍य महाप्रबंधक स्‍तर के अधिकारी के द्वारा प्रकरण की विस्‍तृत जाँच करवायी जा रही है ।

परिशिष्ट ''इक्कीस''

मुरैना जिले में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में अनियमितता 

27. ( क्र. 400 ) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुरैना जिले में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत वर्ष 2009 से 2013 तक के.ई.सी. कम्‍पनी व्‍दारा कितने गांवों में विद्युत कार्य किये गये थे तथा कम्‍पनी को कितनी राशि का भुगतान किया गया था गांवों के नाम, राशि सहित पूर्ण जानकारी दी जावे ? (ख) क्‍या के.ई.सी. कम्‍पनी को कार्य पूर्ण होने पहिले ही टर्मिनेट कर दिया गया था तो उसे कार्य से अधिक भुगतान क्‍यों किया गया अधिक भुगतान के लिये सुपरवीजन व जिम्‍मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्‍या कार्यवाही की गई ? (ग) क्‍या यह भी सही है कि राजीव गांधी विद्युतीकरण कार्य करते समय बोफकोर्स कम्‍पनी गुडगांव (हरियाणा) को सुपरवीजन हेतु नियुक्‍त किया गया था तो के.ई.सी. को बिना सत्‍यापन के भुगतान क्‍यों किया गया ? क्‍या विभाग सम्‍पूर्ण प्रकरण की जाँच कमेटी बनाकर कार्यवाही करेगा ? यदि हाँ, तो कब तक ? (घ) मुरैना जिले में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना का कार्य समय पर नहीं होने, अनियमितताओं के लिये दोषी कम्‍पनी, जिम्‍मेदार अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही कब तक की जावेगी ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) मुरैना जिले में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत मेसर्स के.ई.सी. इन्‍टरनेशनल कंपनी को दिनाँक 26.11.09 को रू. 73.8 करोड़ की राशि का अवार्ड जारी किया गया था जिसे पुनरीक्षित कर दिनाँक 02.01.12 को रू. 88.09 करोड़ किया गया । उक्‍त अवार्ड के तहत 1812 कि.मी. 11 के.व्‍ही. लाईन, 734 कि.मी. निम्‍नदाब लाईन, 2017 डिस्‍ट्रीब्‍यूशन ट्रांसफार्मर, 35444 बी.पी.एल. कनेक्‍शन तथा 8 पावर ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि करने का प्रावधान किया गया था । मेसर्स के.ई.सी. इन्‍टरनेशनल कंपनी द्वारा 190 ग्रामों का कार्य पूर्ण कर ऊर्जीकृत किया गया है, जिसके तहत उक्‍त कंपनी द्वारा उक्‍त 190 ग्रामों में 731.67 कि.मी. 11 के.व्‍ही. लाईन, 490.80 कि.मी. निम्‍नदाब लाईन, 538 वितरण ट्रांसफार्मर 11773 बी.पी.एल. कनेक्‍शन तथा 8 पॉवर ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि का कार्य किया गया है, जिसके विरूद्ध के.ई.सी. कंपनी को रूपये 39.58 करोड़ राशि का भुगतान किया जा चुका है । विद्युतीकृत किये गये ग्रामों की ग्रामवार एवं राशि सहित सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है । (ख) जी हां, राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजनांतर्गत मुरैना जिले में, मेसर्स के.ई.सी. इन्‍टरनेशनल कंपनी द्वारा कार्य में अत्‍याधिक विलंब करने के कारण उक्‍त कंपनी को जारी आदेश कार्य पूर्ण होने से पहले दिनाँक 23.11.13 को निरस्‍त कर दिया गया था । उक्‍त कंपनी द्वारा जमा की गई परफारमेन्‍स बैंक गांरटी एवं मोबेलाइजेशन बैंक गांरटी रू. 2370.31 लाख का संबंधित बैंक से नगदीकरण किया जा चुका है । मेसर्स के.ई.सी. इन्‍टरनेशनल द्वारा ग्रामों में पूर्ण किये गये अधोसंरचना के कार्यों का भौतिक सत्‍यापन कराये जाने पर वास्‍तविक रूप से किये गये कार्यों में उपयोग की गई विद्युत सामग्री की मात्रा में एवं उक्‍त कंपनी द्वारा प्रस्‍तुत देयकों में दर्शाई गई विद्युत सामग्री की मात्रा में अंतर पाया गया था । मेसर्स के.ई.सी. इन्‍टरनेशनल कंपनी द्वारा इस प्रकार रू. 9.32 करोड़ अधिक राशि का बिल प्रस्‍तुत कर भुगतान प्राप्‍त किया गया है । उपरोक्‍त राशि की वसूली के लिये म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा मेसर्स के.ई.सी. इन्‍टरनेशनल कंपनी के अपूर्ण अधो-संरचना कार्य एवं उनके भण्‍डार में उपलब्‍ध विद्युत सामग्री को अधिग्रहित किया गया है, जिसका अनुमानित मूल्‍य रू.12 करोड़ है । उपरोक्‍त सामग्री का शेष कार्यों को विभागीय तौर पर पूर्ण किये जाने में उपयोग किया जा रहा है । साथ ही उक्‍त कंपनी को ठेका समाप्ति की तिथि से 3 वर्ष की अवधि में मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के क्षेत्रांतर्गत कार्य करने पर रोक लगा दी गई है । अधो-संरचना कार्यों में भौतिक सर्वेक्षण के दौरान किये गये कार्यों के सत्‍यापन में अनियमितता पाये जाने पर संबंधित तत्‍कालीन अधिकारी एवं तृतीय पक्ष जाँच इकाई (वेपकास लिमि.) के विरूद्ध पर्यवेक्षण एवं कार्यों को सत्‍यापन में कमी पाये जाने के कारण मध्‍य क्षेत्र वि.वि. कंपनी द्वारा कार्यवाही की जा चुकी है । अधो-संरचना कार्यों के भौतिक सत्‍यापन में अनियमितता पाये जाने पर तृतीय पक्ष जाँच इकाई (वेपकास लिमि.) का कार्य आदेश दिनाँक 29/11/2013 को निरस्‍त कर दिया गया है तथा संबंधित अधिकारियों के विरूद्ध विभागीय जाँच पूर्ण होने के पश्‍चात अनुशासनात्‍मक कार्यवाही करते हुए दंडित किया गया है जिसका विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब अनुसार है । (ग) जी हां, यह सही है कि राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के कार्य मेसर्स बेपकास कंपनी गुड़गांव (भारत सरकार का उपक्रम) को टी.पी.आइ.ए. (तृतीय पक्ष इकाई) नियुक्‍त किया गया था, जिसके द्वारा कार्य के दौरान आवश्‍यकता अनुरूप निरीक्षण नहीं किये जाने के कारण किये गये अधो-संरचना कार्यों में निर्धारित मापदण्‍ड अनुसार कार्यों का मानक स्‍तर सुनिश्चित नहीं किया गया तथा निरीक्षण एजेंसी (टीपीआई) के द्वारा किये गये कार्यों के सत्‍यापन में अनियमितता पाये जाने पर उनका कार्यादेश दिनाँक 29/11/2013 को निरस्‍त कर दिया गया है । अत: जाँच कमेटी बनाए जाने की आवश्‍यकता नहीं है । (घ) मुरैना जिले में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना का कार्य समय पर नहीं होने के कारण के.ई.सी. इंटरनेशनल कंपनी का अवार्ड निरस्‍त किया जा चुका है तथा किये गये कार्यों के सत्‍यापन में अनियमितताओं के लिये दोषी संबंधित तत्‍कालीन अधिकारियों के विरूद्ध भी विभागीय जाँच पूर्ण होने के पश्‍चात अनुशासनात्‍मक कार्यवाही करते हुए दंडित किया गया है ।

हरसी उच्‍चस्‍तरीय नहर निर्माण में किये जा रहे गुणवत्‍ताविहीन कार्यों की जाँच के सम्‍बन्‍ध में

28. ( क्र. 485 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्‍वालियर जल संसाधन विभाग व्‍दारा ककैटों-पेहसारी नहर का आधुनिकीकरण एवं सुदृणीकरण का कार्य स्‍वीकृत किया गया है कौन ऐजेन्‍सी/ठेकेदार व्‍दारा इस कार्य को किन-किन यंत्रियों के सुपरवीजन में कराया जा रहा है इस कार्य के लिये कितनी राशि स्‍वीकृत की गई है वर्तमान में इस कार्य की भौतिक तथा वित्‍तीय स्थिति स्‍पष्‍ट करें क्‍या इस कार्य के आधुनिकीकरण एवं सुदृणीकरण के गुणवत्‍ता सम्‍बन्‍धी शिकायतें की गई है यदि हाँ तो उन पर क्‍या कार्यवाही की गई है ? (ख) क्‍या हरसी उच्‍चस्‍तरीय नहर के निर्माण में जो रेत लगाई जा रही है वह बहुत ही घटिया किस्‍म की आधी मिट्टीयुक्‍त रेता लगाने की स्‍वीकृति दी गई है ? इसके लिये कौन-कौन अधिकारी दोषी है क्‍या गुणवत्‍ताविहीन कार्य को बन्‍द कराकर प्रश्‍नकर्ता क्षेत्रीय विधायक के साथ उच्‍च स्‍तरीय टीम गठित कर निर्माणाधीन हरसी नहर का निरीक्षण कराया जा सकता है यदि हाँ तो कब यदि नहीं तो क्‍यों कारण सहित स्‍पष्‍ट करें ? (ग) हरसी उच्‍च स्‍तरीय नहर निर्माण किन-किन यंत्रियों/अधिकारियों के सुपरवीजन में किस ठेकेदार/ऐजेन्‍सी व्‍दारा निर्माण कराया जा रहा है ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) अपर ककैटो वृहद परियोजना की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्‍वीकृति दिनाँक 24.05.2015 को दी गई जिसमें ककैटो-पेहसारी नहर के सुदृढ़ीकरण हेतु रू.1379.31 लाख का प्रावधान है । पेहसारी नहर शाखा के सुदृढ़ीकरण के कार्य का ठेका मेसर्स भारती बिल्‍डकॉन, ग्‍वालियर को दिनाँक 16.07.2014 को राशि रू.1711.86 लाख का दिया गया है । निर्माण कार्य लगभग 50 प्रतिशत पूर्ण होकर अद्यतन व्‍यय रू.862.32 लाख है । निर्माण कार्य कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, ग्‍वालियर, अनुविभागीय अधिकारी के.टी.एफ. संभाग, मोहना और उनके अधीनस्‍थ उपयंत्रियों के पर्यवेक्षण में कराया जा रहा है । निर्माण कार्य की गुणवत्‍ता के संबंध में सरपंच, ग्राम पंचायत पेहसारी से शिकायत प्राप्‍त हुई थी । परीक्षण पर निर्माण में उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्‍ता अपेक्षित स्‍तर की पाई गई । (ख) जी नहीं । गुण नियंत्रण इकाई उपसंभाग-3, डबरा द्वारा निर्माण कार्य में लगाई जा रही रेत परीक्षण में मानक स्‍तर की पाई गई है । अत: शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते है । (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है

एस्‍सेल कम्‍पनी की अनियमिततायें 

29. ( क्र. 518 ) श्रीमती पारूल साहू केशरी : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सागर एस्‍सेल विद्युत वितरण कम्‍पनी राज्‍य शासन को करार के अनुसार देय राशि का भुगतान नहीं कर रही है, जबकि वह सभी उपभोक्‍ताओं से नियमित रूप से बिल के रूप में राशि वसूल कर रही है ? शासन को एस्‍सेल वितरण कम्‍पनी सागर से कितनी-कितनी राशि कब-कब से लेना बकाया है और शासन कम्‍पनी से राशि वसूल करने में क्‍यों नरमी बरत रही है ? निर्धारित समय सीमा में एस्‍सेल कम्‍पनी व्‍दारा राशि जमा नहीं करने पर क्‍या करार अनुबंध निरस्‍त कर दिया जावेगा ? यदि नहीं तो क्‍यों ? (ख) क्‍या एस्‍सेल विद्युत वितरण कम्‍पनी के अधीनस्‍थ स्‍थायी/अस्‍थायी, अर्द्धस्‍थायी तथा दैनिक वेतन भोगी अधिकारी एवं कर्मचारी, आम विद्युत उपभोक्‍ताओं को बिजली कनेक्‍शन काट देने, बिजली बंद कर देने, मामलों में फंसा देने की धमकी देकर, कनेक्‍शन की जाँच, मीटर बदलने, नवीन कनेक्‍शन देने, अधिभार कम करने एवं बढ़ाने एवं अधिक राशि के बिल देकर बाद में सुधार कर कम राशि के बिल बनाकर देने के नाम पर अनाधिकृत रूप से राशि वसूल कर रहे हैं ? जिसकी शिकायतें कम्‍पनी कार्यालयों में, सीएम ऑन लाइन में, समाधान ऑन लाइन में एवं जनसुनवाई के माध्‍यम से आम जनता व्‍दारा निरंतर की जा रहीं हैं ? (ग) यदि हाँ तो क्‍यों ? इस प्रकार की कार्यवाहियों पर स्‍वयं विद्युत कम्‍पनी एवं जिला प्रशासन कठोर कार्यवाही कर अनियमितताओं में सुधार कब तक ला पायेगें ? (घ) यदि नहीं तो यह बतावें कि दिनाँक 1 जनवरी 2015 से प्रश्‍न दिनाँक तक कम्‍पनी कार्यालयों में, सीएम ऑन लाइन में, समाधान ऑन लाइन में एवं कलेक्‍टर सागर की जनसुनवाई के माध्‍यम से कितने व्‍यक्तियों ने कितनी शिकायतें की ? इनमें से कितनी शिकायतों पर कार्यवाही की गयी और कितनी शिकायतें अभी कार्यवाही हेतु लंबित है ? लंबित शिकायतों पर कब तक कार्यवाही की जावेगी ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) मेसर्स एस्‍सेल विद्युत वितरण कंपनी प्रा. लिमिटेड सागर के द्वारा म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड को अनुबंधानुसार मासिक देय राशि का नियमित भुगतान नियत तिथि पर न करके आंशिक भुगतान की प्रक्रिया अपनाकर भुगतान किया जा रहा है । म.प्र.पू.क्षेत्र.वि.वि.कं.लि द्वारा करार की शर्त क्रमांक 10.2 के अनुसार बकाया राशि पर 1.25 प्रतिशत प्रतिमाह की दर से सरचार्ज लगाया जाता है । वर्तमान में दिनाँक 30.06.15 तक फ्रेंन्‍चाइजी मेसर्स एस्‍सेल विद्युत वितरण कंपनी प्रा.लिमिटेड सागर से म.प्र. पूर्व क्षेत्र में विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड को लेने वाली शेष राशि संलग्‍न परिशिष्‍ट के अनुसार है । म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा बकाया राशि की वसूली हेतु सतत् कार्यवाही की जा रही है । इसी तारतम्‍य में मेसर्स एक्‍सेल विद्युत वितरण कंपनी प्रा.लि. सागर से नियामानुसार पत्राचार कर राशि वसूलने हेतु कार्यवाही की जा रही है । पत्र क्रमांक 9127 दिनाँक 23.02.2015 के द्वारा इवेन्‍ट ऑफ डिफाल्‍ट का नोटिस फ्रेन्‍चाइजी कंपनी को जारी किया गया है एवं इसी तारतम्‍य में दिनाँक 20.03.2015 को एक्‍सेल कंपनी द्वारा जमा बैंक गारंटी रू. 14.70 करोड़ की राशि पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बैंक से ली जा चुकी है । एक्‍सेल कंपनी द्वारा शेष राशि का पूर्ण भुगतान नहीं करने पर अनुबंध की शर्तों के अनुसार अनुबंध समाप्‍त करने का प्रावधान डी.एफ.ए. दिनाँक 10.05.2012 में समाहित है परन्‍तु वर्तमान में एक्‍सेल विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कुछ तकनीकी विवादों के निराकरण हेतु माननीय हाईकोर्ट जबलपुर में रिट पिटीशन क्रमांक 8009/2015 दर्ज कराई है जिस पर पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कार्यवाही जारी है तथा आगामी सनुवाई दिनाँक 14.07.2015 को निश्चित है । (ख) एवं (ग) मेसर्स एक्‍सेल विद्युत वितरण कंपनी प्रा.लि. सागर के अधीनस्‍थ स्‍थाई/अस्‍थाई/अर्द्धस्‍थाई तथा दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों एवं अधिकारियों के द्वारा उपभोक्‍ताओं के विरूद्ध प्रश्‍नाधीन उल्‍लेखित अनाधिकृत रूप से राशि वसूलने से संबंधित जो शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं उनमें म.प्र.पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमि. द्वारा हर पहलू पर सजगता से जाँच कार्यवाही की गई है किन्‍तु लगाये गये आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है । (घ) दिनाँक 01.01.2015 से प्रश्‍न दिनाँक तक पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी कार्यालय सी.एम.ऑनलाइन समाधान ऑनलाइन एवं कलेक्‍टर कार्यालय की जनसुनवाई के माध्‍यम से कुल 4732 शिकायत प्राप्‍त हुई है जिनमें से 4659 शिकायतों को उचित कार्यवाही कर निराकृत कर दिया गया है । शेष 73 शिकायतें लंबित है जो अल्‍पावधि की है । उक्‍त लंबित शिकायतों के शीघ्र निराकरण की कार्यवाही की जा रही है ।

परिशिष्ट ''बाईस''

अवैध उत्‍खनन कर संचालित स्‍टोन क्रेसरों के विरूद्ध कार्यवाही 

30. ( क्र. 549 ) श्रीमती शकुन्‍तला खटीक : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) करैरा, जिला शिवपुरी में स्‍वीकृत स्‍टोन क्रेसरों के संचालकों को कितनी-कितनी भूमि (जमीन) शासकीय व अशासकीय लीज पर दी गई है ? इकाईवार भूमि सर्वे क्रमांक, रक‍बा, दी गई लीज का क्षेत्रफल की जानकारी विस्‍तार से दी जावे ? (ख) क्‍या लीज पर दी गई भूमि के अतिरिक्‍त भी अधिक जमीन का अवैध रूप से खनन कर रहे हैं ? यदि हाँ तो ऐसे कौन-कौन से स्‍टोन क्रेसर संचालक है जिन्‍होंने ऐसा अवैध कार्य किया है उनकी जानकारी उपलब्‍ध करावें ? (ग) क्‍या अवैध लीज के अतिरिक्‍त भूमि पर खनन कर रहे प्रकरणों पर शासन वरिष्‍ठ अधिकारियों की समिति बनाकर प्रश्‍नकर्ता के समक्ष जाँच की जावेगी ? यदि हाँ, तो कब तक ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट पर है । अशासकीय भूमि पर कोई लीज नहीं दी गई है । (ख) जी नहीं । (ग) प्रश्‍नांश '''' के उत्‍तर के प्रकाश में शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता ।

परिशिष्ट ''तेईस''

दमोह जिले में पथरिया एवं बटियागढ़ तहसील में अटल ज्‍योति योजना का लाभ 

31. ( क्र. 567 ) श्री लखन पटेल : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अटल ज्‍योति अभियान के अंतर्गत पथरिया एवं बटियागढ़ विकासखड़ों में किन-किन ग्रामों में इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है । यदि कार्य अपूर्ण है तो कब तक पूर्ण कर लिया जावेगा ? (ख) इस योजना में ग्रामों के अतिरिक्‍त मजरेटोलो को भी शामिल किया गया है यदि नहीं तो यह कार्य कब तक पूर्ण कर लिया जावेगा ? (ग) बटियागढ़ विकासखंड में 132/11 के.व्‍ही.सब स्‍टेशन कब स्‍वीकृत हुआ ? इसका निर्माण कार्य कब तक पूर्ण कर लिया जावेगा ? (घ) पथरिया एवं बटियागढ़ विकासखंडों में निर्माणाधीन 11 के.व्‍ही. के फीडर कब तक पूर्ण कर लिये जावेगे ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) अटल ज्‍योति अभियान के अंतर्गत पथरिया एवं बटियागढ़ विकासखण्‍डों के सभी विद्युतीकृत ग्रामों में गैर कृषि फीडरों से संबद्ध उपभोक्‍ताओं को 24 घण्‍टे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है । इस प्रकार प्रश्‍नाधीन क्षेत्र के सभी ग्राम लाभान्वित हो रहे हैं । अत: प्रश्‍न नहीं उठता । (ख) अटल ज्‍योति अभियान में सभी विद्युतीकृत ग्रामों एवं विद्युतीकृत मजरों/टोलों को शामिल किया गया है । (ग) बटियागढ विकासखण्‍ड के अंतर्गत बटियागढ़ में 132 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र का कार्य दिनाँक 20.10.2011 को स्‍वीकृत हुआ था । उक्‍त उपकेन्‍द्र का निर्माण कार्य अगस्‍त 2015 के द्वितीय सप्‍ताह तक पूर्ण कर उर्जीकृत किये जाने के प्रयास किये जा रहे हैं । (घ) पथरिया एवं बटियागढ़ विकासखण्‍डों में प्रश्‍नाधीन उल्‍लेखित 11 के.व्‍ही. के फीडरों का कार्य जून-2016 तक पूर्ण कराने का प्रयास किया जा रहा है ।

जले हुए ट्रांसफार्मरों को पुन: लगाया जाना 

32. ( क्र. 597 ) श्री सुखेन्‍द्र सिंह (बन्ना) : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या रीवा जिले के विधानसभा क्षेत्र मऊगंज अन्‍तर्गत राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना एवं विभाग के ग्राम पंचायत नाउन कला में बरयॉ प्‍लाट आदिवासी बस्‍ती, ग्राम पंचायत पैपखार में पिपराही आदिवासी बस्‍ती, ग्राम पंचायत बरौंही में हरिजन एवं आदिवासी बस्‍ती, ग्राम पंचायत बिरहा कन्‍हई, ग्राम पंचायत बरही, ग्राम पंचायत खूँटा, ग्राम पंचायत मिसिरगवॉ एवं ग्राम पंचायत बन्‍ना जवाहर सिंह इत्‍यादि ग्रामों के ट्रांसफार्मर विभाग व्‍दारा निकाल लिये गये हैं ? (ख) प्रश्‍नांश (क) का उत्‍तर यदि जी हां तो इन्‍हें कब तक लगा दिया जावेगा ? समय सीमा बतावें ? एवं किसानों के विद्युत देयक जमा करने के बाद भी विभाग व्‍दारा ट्रांसफार्मर न लगाकर उल्‍टे उसी अवधि में मनमानी बिल जारी कर बेजा पेरशान क्‍यों किया जा रहा है ? इसके लिये कौन जिम्‍मेदार है ? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के संदर्भ में ट्रांसफार्मर लगने के बाद जिस अवधि में विद्युत कनेक्‍शन कटा था, उस अवधि को घटाकर विद्युत प्रवाह की दिनाँक से ही आगे का बिल जारी किया जावेगा ? यदि नहीं तो कारण स्‍पष्‍ट बतावें ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं । रीवा जिले के विधानसभा क्षेत्र मऊगंज अन्‍तर्गत प्रश्‍नाधीन उल्‍लेखित ग्रामों के ट्रांसफार्मर पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा निकाले नहीं गये हैं, बल्कि इन ग्रामों के वितरण ट्रांसफार्मर फेल हुए हैं जिसका विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है । प्रश्‍नाधीन 8 ग्रामों में से 7 ग्रामों के वितरण ट्रांसफार्मर बदल दिये गये हैं तथा ग्राम मिसिरगवां का वितरण ट्रांसफार्मर बकाया राशि लंबित होने के कारण नहीं बदला जा सका है । नियमानुसार बकाया राशि जमा होने पर उक्‍त ट्रांसफार्मर प्राथमिकता के आधार पर बदल दिया जायेगा । (ख) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कोई भी ट्रांसफार्मर नहीं निकाला गया है, बल्कि जिन प्रश्‍नाधीन ग्रामों के 8 वितरण ट्रांसफार्मर फेल हुए हैं उनमें से उत्‍तरांश (क) अनुसार 7 ट्रांसफार्मर बदल दिये गये हैं, तथा शेष एक खराब ट्रांसफार्मर से सम्‍बद्ध उपभोक्‍ताओं द्वारा नियमानुसार बकाया राशि जमा करने पर उसे प्राथमिकता के आधार पर बदल दिया जायेगा । नियमानुसार ही विद्युत बिल जारी किये जा रहे हैं । (ग) जी हाँ । ट्रांसफार्मर जलने के बाद जिस अवधि में विद्युत प्रवाह बन्‍द रहता है, उस अवधि में म.प्र.विद्युत प्रदाय संहिता 2013 में निहित प्रावधानों के अनुसार प्रत्‍येक प्रकरण का परीक्षण कर बिल पुनरीक्षण की कार्यवाही की जाती है ।

परिशिष्ट - ''चौबीस''

नियम विरूद्ध संविदा पर नियुक्ति 

33. ( क्र. 598 ) श्री सुखेन्‍द्र सिंह (बन्ना) : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. शासन जल संसाध‍न विभाग में सेवा निवृत्‍त अधिकारियों को संविदा पर नियुक्ति देने के क्‍या प्रावधान है ? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में कृपया बताऍं वर्तमान में कार्यरत प्रमुख अभियंता को कितनी बार प्रमुख अभियंता के पद पर सेवा वृद्धि/संविदा पर नियुक्ति दी गई ? (ग) विभाग में मुख्‍य अभियंता के पद पर पदस्‍थ अधिकारियों को क्‍या पदोन्‍नति कर प्रमुख अभियंता बनाया जावेगा ? यदि हाँ तो कब तक ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) विभाग में सेवानिवृत्‍त शासकीय सेवकों की संविदा नियुक्ति के लिए सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा जारी निर्देश परिपत्र क्रमांक-सी-3-12/2011/3/एक दिनाँक 03 सितम्‍बर, 2011 लागू है । (ख) चार बार । (ग) वर्तमान में प्रमुख अभियंता के पद रिक्‍त नहीं होने से प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता है ।

ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत देयकों की वसूली के प्रति लापरवाही 

34. ( क्र. 601 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र सारंगपुर अन्‍तर्गत कितने विद्युत केन्‍द्र है ? उक्‍त केन्‍द्रों पर सम्‍पूर्ण ग्रामीण क्षेत्र में कितने विद्युत फीडर है ? प्रश्‍नांश फीडरों पर औसतन कितने घण्‍टे विद्युत प्रदाय की जा रही है ? क्‍या शासन नियमानुसार ग्रामीण क्षेत्र में विद्युत प्रदाय की जा रही है ? अवगत कराये ? यदि शासन नियम से कम विद्युत प्रदाय की जा रही है तो संबंधित अधिकारी/कर्मचारियों के विरूद्ध विभाग क्‍या कार्यवाही करेगा ? (ख) वित्‍तीय वर्ष 2014-15 से प्रश्‍न दिनाँक तक विकासखण्‍ड सारंगपुर के अन्‍तर्गत आने वाले वितरण केन्‍द्रों में कितनी-कितनी राशि वसूली गई ? क्‍या वसूली के अभाव में क्षेत्र से विभाग द्वारा ट्रांसफार्मर उतार लिये गये हैं ? यदि हाँ तो ग्रामवार उतारे गये ट्रांसफार्मर की जानकारी देवें ? (ग) विभाग व्‍दारा वसूली हेतु क्‍या-क्‍या प्रयास किये गये ? विकास खण्‍ड सारंगपुर में वसूली हेतु कितने ग्रामों में वसूली केन्‍द्र लगाये गये एवं केन्‍द्रों में किस-किस स्‍तर के अधिकारियों/कर्मचारियों को अधिकृत किया गया था ? केन्‍द्रवार, दिनाँकवार विवरण देवें ? (घ) प्रश्‍नांश (ग) अनुसार वसूली के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारी/कर्मचारियों के विरूद्ध विभाग क्‍या कार्यवाही करेगा ? स्‍पष्‍ट करें ? नहीं तो क्‍यों नहीं ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) विधानसभा क्षेत्र सारंगपुर के अन्‍तर्गत 14 विद्युत उपकेन्‍द्र हैं एवं इनसे निर्गमित 46 फीडरों से ग्रामीण क्षेत्रों को विद्युत आपूर्ति की जा रही है । उक्‍त फीडरों से, कतिपय अवसरों पर आकस्मिक रूप से विद्युत लाईनों में आए व्‍यवधान एवं रखरखाव हेतु आवश्‍यक होने जैसे अपरिहार्य कारणों को छोड़कर प्रश्‍नाधीन संपूर्ण ग्रामीण क्षेत्र में शासन की नीति अनुसार विद्युत प्रदाय किया जा रहा है । वित्‍तीय वर्ष 2014-15 में विधानसभा क्षेत्र सारंगपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में गैर कृषि फीडरों पर औसतन 22.30 घण्‍टे तथा कृषि फीडरों पर औसतन 09.30 घंटे विद्युत प्रदाय किया गया । (ख) विकासखण्‍ड सारंगपुर में 8 वितरण केन्‍द्रों के क्षेत्रान्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2014-15 में वसूली गई राशि का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'''' अनुसार है । बकाया राशि के कारण उतारे गये 243 वितरण ट्रांसफार्मरों का ग्रामवार विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'''' अनुसार है । (ग) बकाया राशि की वसूली हेतु शत प्रतिशत बकाया राशि वाले ट्रांसफार्मरों से विद्युत प्रदाय विच्‍छेदित करने के अलावा विभिन्‍न स्‍थलों पर वसूली केन्‍द्र लगाकर विद्युत बिलों की बकाया राशि की वसूली का सघन अभियान चलाया गया है । मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विकासखण्‍ड सारंगपुर के अन्‍तर्गत बकाया राशि की वसूली हेतु 11 ग्रामों में शिविर लगाये गए । शिविर हेतु अधिकृत अधिकारियों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'''' अनुसार है । (घ) प्रश्‍नांश '''' अनुसार सारंगपुर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत वसूली के प्रति लापरवाही बरतने वाले 7 कनिष्‍ठ यंत्रियों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किये जाकर 5 कनिष्‍ठ यंत्रियों के विरूद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की गई है, जिनकी सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'''' अनुसार है

गुना जिले में फीडर सेप्रेशन के कार्य

35. ( क्र. 652 ) श्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) गुना जिले के लिये मध्‍यप्रदेश विद्यु‍त मण्‍डल द्वारा कितने फीडर सेप्रेशन किये गये विधानसभावार जानकारी दे ? (ख) विधान सभा क्षेत्र बमोरी के अंतर्गत कितने ग्रामों में फीडर सेप्रेशन का कार्य किया गया एवं कितने फीडर सेप्रेशन किये गये है ? ग्रामवार जानकारी देवे ? (ग) गुना जिले में फीडर सेप्रेशन जो किये गये हैं उनका कार्य किस समय सीमा में पूर्ण हो जायेगा अवगत करावे ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) गुना जिले में फीडर विभक्तिकरण योजना के अन्‍तर्गत किये गये कार्यों की विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'' अनुसार है । (ख) विधानसभा क्षेत्र बमोरी के अन्‍तर्गत 36 ग्रामों के 11 फीडरों के विभक्तिकरण का कार्य किया गया । ग्रामवार जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'' अनुसार है । (ग) गुना जिले में फीडर विभक्तिकरण योजना के अन्‍तर्गत ठेकेदार एजेंसी मेसर्स एस्‍टर प्रायवेट लिमिटेड द्वारा कार्य किया जा रहा था किन्‍तु कार्य में अत्‍याधिक विलंब किये जाने के कारण उसका कांट्रेक्‍ट अवार्ड दिनाँक 25.11.2014 को निरस्‍त किया जा चुका है । शेष कार्य को पूर्ण करने हेतु निविदा कार्यवाही प्रक्रियाधीन है । अत: वर्तमान में शेष कार्य पूर्ण करने की समय सीमा बताया जाना संभव नहीं है ।

परिशिष्ट - ''पच्चीस''

विद्युत प्रदाय एवं ओ.वाय.टी. योजना में अनियमितता

36. ( क्र. 660 ) श्री महेन्‍द्र सिंह सिसौदिया : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या गुना जिले के विधान सभा क्षेत्र गुना एवं बमोरी के विद्युत प्रदाय सब स्‍टेशनों में म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता 2004 के अध्‍याय 3 के 3-2 (1) (2) (3) में उल्‍लेखित लाईनों में घोषित वोल्‍टेज कम्‍पनी ने गत तीन वर्षों में प्रदाय किया है कि नहीं, यदि नहीं तो सबस्‍टेशनों के रिकार्ड में प्रदाय वोल्‍टेज के वार्षिक अनुपात की जानकारी दें ? (ख) क्‍या गुना बमोरी विधान सभा में ओ.वाय.टी. योजना में कितने महिनों का अस्‍थाई पम्‍प कनेक्‍शन देने का नियम है बताये गत तीन वर्षों में उक्‍त नियम कौन ने तोड़ा, उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की, कम्‍पनी के नुकसान का जिम्‍मेदार कौन है विवरण दें ? (ग) ओ.वाय.टी. योजना में स्‍थापित ट्रांसफार्मर, सबस्‍टेशनों पर क्‍या क्‍यू.टी.आर. मीटर लगाने का प्रावधान है ? क्‍या मीटर की राशि उपभोक्‍ता से ली गई या नहीं, मीटर लगे या नहीं गत तीन वर्षों की विवरण सहित जानकारी दें ? (घ) कम्‍पनी के गुना वृत्‍त में गत तीन वर्षों में घोषित वोल्‍टेज से कम वोल्‍टेज कौन-कौन से केन्‍द्रों पर दिया ? माहवार प्रदाय वोल्‍टेज सबस्‍टेशन के नाम सहित बताएं एवं ओ.व्‍हा.टी योजना में गत 3 वर्षों में स्‍वीकत प्राक्‍कलन अनुसार कितने मीटर स्‍थापित किए गए विवरण दें एवं अनियमितता की जानकारी दें ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता-2004 जो वर्तमान में पुनरीक्षित होकर म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता-2013 हो गई है, के अध्‍याय तीन के उपबंध 3.2 में उल्‍लेखित निर्धारित वोल्‍टेज अनुसार विद्युत प्रवाह प्रदाय की वोल्‍टेज में नियत सीमा से सामान्यतः विचलन नहीं हुआ है । (ख) स्‍वयं का ट्रांसफार्मर योजना (ओ.वाय.टी.) में उल्‍लेखित शर्तों के अन्‍तर्गत अस्‍थाई विद्युत कनेक्‍शन देने का कोई नियम नहीं है, अत: प्रश्‍न नहीं उठता । (ग) जी हाँ, ओ.वाय.टी. योजना के अन्‍तर्गत जारी निर्देशानुसार उपभोक्‍ता/उपभोक्‍ता समूह द्वारा सुपरविजन चार्ज की राशि जमा कर स्‍वयं के व्‍यय पर डीटीआर (क्‍यू.टी.आर.नहीं) मीटर स्‍थापित किए जाने का प्रावधान है एवं विकल्‍प के रूप में उपभोक्‍ता/उपभोक्‍ता समूह द्वारा प्राक्‍कलन की संपूर्ण राशि विद्युत वितरण कंपनी कार्यालय में जमा करा कर कार्य करवाया जा सकता है । गुना वृत्‍त के अन्‍तर्गत ओ.वाय.टी. योजना में सभी प्राक्‍कलन उपभोक्‍ता से सुपरविजन चार्ज की राशि जमा करवाकर स्‍वीकृत किये गये हैं, अत: प्रश्‍न नहीं उठता । (घ) उत्‍तरांश '' अनुसार निर्धारित वोल्‍टेज की नियत सीमा पर ही विद्युत प्रदाय किया गया है । प्रदाय वोल्‍टेज की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है । ओ.वाय.टी.योजना अन्‍तर्गत गत 3 वर्षों में स्‍वीकृ‍त प्राक्‍कलनों की संख्‍या पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब अनुसार है । उत्‍तरांश '' में दर्शाए अनुसार डी.टी.आर. मीटर उपभोक्‍ता को स्‍वयं स्‍थापित करवाए जाने थे, अत: मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा डी.टी.आर.मीटर स्‍थापित करवाए जाने का प्रश्‍न नहीं उठता ।

सिंहस्‍थ 2016 हेतु पर्यटन विकास की योजना 

37. ( क्र. 673 ) डॉ. मोहन यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पवित्र धार्मिक नगरी उज्‍जैन को पर्यटन केन्‍द्र के रूप में विकसित करने के लिये आगामी सिंहस्‍थ को ध्‍यान में रखते हुये विभाग द्वारा कौन-कौन से प्रस्‍ताव स्‍वीकृत किये गये है एवं कौन-कौन से प्रस्‍ताव स्‍वीकृत होना है ? जानकारी प्रदान करें ? (ख) स्‍वीकृत प्रस्‍ताव की क्‍या प्रगति है, कब तक पूर्ण हो जावेगें जानकारी प्रदान करें ?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

राजीव गांधी विद्युतीकरण योजनांतर्गत ट्रांसफार्मर की स्‍थापना 

38. ( क्र. 688 ) श्रीमती ललिता यादव : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर विधानसभा क्षेत्र के किन-किन हितग्राहियों (किसानों) द्वारा दिनाँक 1.4.2014 से 30.6.2015 तक कृषक अनुदान योजना के तहत खेत में ट्रांसफार्मर लगाने के लिये राशि जमा की गई है ? जमा राशि का दिनाँक, हितग्राही किसान का नाम सहित बतायें ? (ख) प्रश्‍नांश (क) के प्रकाश में किन-किन हितग्राहियों के यहां ट्रांसफार्मर लग चुके हैं उनके नाम, दिनाँक, स्‍थान सहित बतायें ? (ग) इस योजना के तहत कितने दिनों में हितग्राही को योजना का लाभ देने की समयावधि है ? (घ) प्रश्‍नांश (क) के प्रकाश में समय सीमा पर हितग्राही को लाभ न मिलने पर कौन जवाबदार होगा और उसके खिलाफ क्‍या कार्यवाही की जायेगी ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) छतरपुर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत दिनाँक 1.4.14 से 30.06.15 तक 49 कृषकों द्वारा स्‍थाई पम्‍प कनेक्‍शन हेतु कृषक अनुदान योजनांतर्गत वितरण ट्रांसफार्मर लगाने के लिये राशि जमा की गई है । कृषकों के नाम तथा राशि जमा करने की दिनाँक की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है । (ख) उत्‍तरांश (क) में उल्‍लेखित 49 कृषकों में से 32 कृषकों हेतु ट्रांसफार्मर लगा दिए गये है । ट्रांसफार्मर लगाने की दिनाँक तथा स्‍थान सहित कृषकों के नामवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब अनुसार है । (ग) कृषक अनुदान योजनांतर्गत कृषकों द्वारा औपचारिकता पूर्ण कर राशि जमा किये जाने के पश्‍चात 180 दिवस तथा कार्य आदेश जारी होने एवं राइट ऑफ वे उपलब्‍ध होने पर 150 दिवस में कार्य पूर्ण किये जाने का प्रावधान है । (घ) उत्‍तरांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में 49 कृषकों में से 32 कृषकों के कार्य पूर्ण कर दिए गए हैं । 3 कृषकों के कार्यों में आर.ओ.डब्‍ल्‍यू की समस्‍या है । शेष 14 कृषकों के कार्य प्रगति पर है, जिन्‍हें योजना के प्रावधानों के अनुसार समय-सीमा में पूर्ण किया जा रहा है अत: किसी के जवाबदार होने अथवा कार्यवाही किए जाने का प्रश्‍न नहीं उठता ।

सिंचाई के संसाधन जुटाने हेतु योजना

39. ( क्र. 689 ) श्रीमती ललिता यादव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर विधान सभा क्षेत्र में कितनी कृषि भूमि के लिये विभाग द्वारा नहरें/डेम सिंचाई के संसाधन बनाये गये हैं ? (ख) छतरपुर विधानसभा क्षेत्र के कितने ग्रामों में सिंचाई के संसाधन नहीं हैं ? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में बताऍ कि क्‍या वि‍भाग द्वारा इन ग्रामों में सिंचाई के संसाधन जुटाने के लिये कोई योजना बनाई गई है ? अगर हां तो क्‍या ?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) छतरपुर विधान सभा क्षेत्र में जल संसाधन विभाग की निर्मित एवं निर्माणाधीन परियोजनाएं और उनके सिंचाई क्षेत्र की जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के अनुसार है । (ख) विभाग में प्रश्‍नधीन जानकारी संकलित एवं संधारित नहीं की जाती है । (ग) केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के कमाण्‍ड क्षेत्र में छतरपुर विधान सभा क्षेत्र के ग्रामों को शामिल करने के लिए भरसक प्रयास किए गए है ।

परिशिष्ट ''छब्बीस''

लोकायुक्‍त की अनुशंसा पर कार्यवाही 

40. ( क्र. 707 ) श्री आरिफ अकील : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश लोकायुक्‍त संगठन द्वारा भ्रष्‍ट प्रवृत्ति के दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही करने की अनुशंसा करने के उपरांत अधिकतम कितनी अवधि में अभियोजन की कार्यवाही करने की अनुमति प्रदान करने का प्रावधान है ? (ख) क्‍या माननीय लोकायुक्‍त द्वारा विभिन्‍न विभागों के दोषियों के विरूद्ध की गई अनुशंसा पर सामान्‍य प्रशासन विभाग में अभियोजन की स्‍वीकृति हेतु किस-किस विभाग के कितने प्रकरण वर्ष 1998 से प्रश्‍न दिनाँक की स्थिति में लंबित हैं तथा कब तक अभियोजन की स्‍वीकृति दी जावेगी ? विभागवार, नाम पद सहित बतावें ?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) - जानकारी एकत्रित की जा रही है ।

पॉलिटेक्नीक कॉलेज की स्‍थापना 

41. ( क्र. 727 ) श्री मुरलीधर पाटीदार : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में कुल कितने पॉलिटेक्‍नीक महाविद्यालय वर्तमान में संचालित हैं ? इनमें से कितने शासकीय एवं कितने अशासकीय है ? सूची उपलब्‍ध करावे ? (ख) नवीन पॉलिटेक्‍नीक महाविद्यालय प्रारम्‍भ किए जाने हेतु शासन के क्‍या मापदण्‍ड हैं, विवरण देवें ? (ग) सुसनेर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत तकनीकी शिक्षा के अध्‍ययन को बढ़ावा देने हेतु शासन कोई पहल करने जा रहा है ? यदि हाँ तो विवरण देवें ? यदि नहीं तो क्‍या इस ओर पहल की जावेगी ? (घ) सुसनेर विधानसभा क्षेत्र में नवीन पॉलिटेक्‍नीक कॉलेज की स्‍थापना संबंधी कोई प्रस्‍ताव/मांग प्राप्‍त हुई है ? यदि हाँ तो इस ओर क्‍या कार्यवाही की गई ?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) प्रदेश में वर्तमान में कुल 150 पोलीटेकनिक महाविद्यालय संचालित है, जिसमें 63 शासकीय, 02 अनुदान प्राप्त, 01 स्ववित्तीय एवं 84 अशासकीय (निजी) पोलीटेकनिक कॉलेज संचालित है । जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है । (ख) नवीन पोलीटेकनिक कॉलेज प्रारंभ किये जाने हेतु भारत सरकार की सांविधिक निकाय ए.आई.सी.टी.ई. नई दिल्ली द्वारा निर्धारित है, जो कि ए.आई.सी.टी.ई.की वेबसाईट पर उपलब्ध है । राज्‍य शासन के पृथक से मापदण्ड नहीं हैं । (ग) सुसनेर जिला-आगर, उज्जैन संभाग में है, जहाँ 06 शासकीय पोलीटेकनिक महाविद्यालय, 04 निजी पोलीटेकनिक कॉलेज, 01 शासकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय, 01विश्वविद्यालयीन एवं 10 निजी इंजीनियरिंग महाविद्यालय संचालित है । इन सभी कॉलेजों में सुसनेर जिला-आगर के छात्र/छात्राओं को तकनीकी शिक्षा का लाभ मिल रहा है । (घ) जी हाँ । विभाग द्वारा दिनाँक 22 दिसम्‍बर 2014 के द्वारा भारत सरकार की नवीन पोलीटेकनिक महाविद्यालय प्रारंभ करने की योजना ''सब-मिशन ऑन पोलीटेकनिक अंडर कोआर्डिनेटेड फॉर स्किल डेवलपमेंट'' के तहत् प्रस्‍ताव भेजा गया, जो कि उच्‍चतर शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पत्र दिनाँक 13 मई 2015 के द्वारा योजना पूर्ण हो जाने से अस्‍वीकृत किया गया ।

शास‍कीय महाविद्यालय सांवरे में रिक्‍त पदों की पूर्ति 

42. ( क्र. 731 ) श्री राजेश सोनकर : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शा. महाविद्यालय सांवेर में प्राध्‍यापक संवर्ग, तकनीकी संवर्ग (लेब असिस्‍टेन्‍ट, प्रयोगशाला तकनीशियन) एवं चतुर्थ श्रेणी के कुल कितने पद रिक्‍त हैं ? (ख) क्‍या यह सही है कि महाविद्यालय में उक्‍त पदों के रिक्‍त रहने से छात्रों को काफी दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है ? (ग) उक्‍त रिक्‍त पदों की पूर्ति कब तक कर दी जायेगी जिससे महाविद्यालय का कार्य सुचारू रूप से चल सके ?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र -  एवं  अनुसार है । (ख) जी नहीं शैक्षणिक रिक्त पदों के विरुद्ध अतिथि विद्वानों के आमंत्रण से छात्रों के अध्यापन पर कोई दिक्कत नहीं है । (ग) शैक्षणिक संवर्ग के रिक्त पदों की भर्ती का विज्ञापन लोक सेवा आयोग से दिनाँक 09/07/2014 को जारी हो चुका है । चयन की प्रक्रिया प्रचलन में है । प्रयोगशाला तकनीशियन, प्रयोगशाला परिचारक तथा भृत्य के पदों की पूर्ति "आउटसोर्स" से की जाना है । पद पूर्ति की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है । निश्चित समयावधि बताना संभव नहीं है ।

 परिशिष्ट ''सत्ताईस''

सिंगरौली में शास. कन्‍या महाविद्यालय का भवन का निर्माण 

43. ( क्र. 733 ) श्री राम लल्लू वैश्य : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जिला सिंगरौली स्थित विकास खण्‍ड बैढ़न में शासकीय कन्‍या महाविद्यालय हेतु 4 एकड़ भूमि आरक्षित की गई है, परन्‍तु इस महाविद्यालय भवन का कार्य अभी तक नहीं हुआ है ? यदि हाँ, तो कब तक इस महाविद्यालय भवन का कार्य आरम्‍भ कराया जा सकेगा ? (ख) सिंगरौली जिले के विकासखण्‍ड बैढ़न स्थित महाविद्यालयों में प्राचार्य एवं प्राध्‍यापक व सहायक प्राध्‍यापकों के कितने पद रिक्‍त हैं ? इनकी पूर्ति कब तक शासन द्वारा की जावेगी ? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संबंध में विषयमान से इन शासकीय महाविद्यालयों में प्राध्‍यापकों की पदस्‍थापना हेतु निश्चित समय सीमा बतायें ?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ । भवन निर्माण की कार्यवाही प्रकियाधीन है । निश्चित समयावधि बताया जाना संभव नहीं है । (ख) सिंगरौली जिले के विकास खंड बैढ़न स्थित महाविद्यालयों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है । प्राचार्य के पद पर पदोन्नति की कार्यवाही सेवा भर्ती नियमों में संशोधन की कार्यवाही प्रक्रियाधीन होने के कारण लंबित है । शैक्षणिक संवर्ग के रिक्त पदों की पूर्ति हेतु लोक सेवा आयोग द्वारा दिनाँक 09.07.2014 को विज्ञापन जारी किया जा चुका है । तदनुसार चयनित अभ्यर्थियों की सूची प्राप्त होते ही रिक्त पदों की पूर्ति की जावेगी । (ग) प्रश्नांश "ख" अनुसार ।

 परिशिष्ट - ''अट्ठाईस''

नियम विरूद्ध कृषि उपभोक्‍ताओं का विद्युत भार बढ़ाया जाना 

44. ( क्र. 736 ) श्री हर्ष यादव : क्या उर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कृषक व विद्युत वितरण कंपनी के मध्‍य किन शर्तों के आधार पर सिंचाई हेतु विद्युत कनेक्‍शन प्रदाय किया जाता है ? (ख) विद्युत वितरण कंपनी द्वारा किस आधार व नियम के अनुसार कृषकों के 3HP को 5 HP, 5 HP को 7 HP 7 HP को 10 HP में परिवर्तित किया जाता है और विद्युत भार बढ़ाकर देयक दिये जाते हैं ? क्‍या इस हेतु सक्षम अधिकारी द्वारा निरीक्षण कर पंचनामा, सहमति आदि ली जाती है ? (ग) विगत तीन वर्षों में सागर जिले की देवरी विधान सभा क्षेत्र के कितने कृषक विद्युत उपभोक्‍ताओं के विद्युत भार बढ़ाये गये, किस-किस कारण से ? किस-किस सक्षम अधिकारी द्वारा कनेक्‍शन स्‍थल का निरीक्षण किया गया ? (घ) क्‍या विद्युत वितरण कंपनी द्वारा नियम विरूद्ध, स्‍वेच्‍छाचारिता कर बिना निरीक्षण किये कृषकों के विद्युत भार बढ़ाकर मनमाना बिजली बिल वसूला है ? इस हेतु कौन उत्‍तरदायी है ? दोषियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही होगी ?

उर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) मध्‍यप्रदेश विद्युत प्रदाय संहिता 2013 में निहित प्रावधानों के अनुसार विद्युत वितरण कंपनी द्वारा जारी/लागू अनुबंध प्रपत्र में निहित शर्तों के आधार पर अनुबंध कराकर सिंचाई हेतु विद्युत कनेक्‍शन प्रदाय किया जा रहा है । अनुबंध प्रपत्र की छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है । (ख) समय-समय पर कंपनी के मैदानी अधिकारियों/ कर्मचारियों द्वारा स्‍थापनाओं का निरीक्षण किया जाता है एवं संबद्ध भार, अनुबंधित भार से अधिक पाये जाने की स्थिति में मध्‍यप्रदेश विद्युत प्रदाय संहिता 2013 की कंडिका क्रमांक 7.26 के अनुसार कार्यवाही कर भार परिवर्तन किया जाता है । उक्‍त नियम की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब अनुसार है । संयोजित भार का निरीक्षण सक्षम अधिकारी/कर्मचारी द्वारा किया जाता है, जिसमें उपभोक्‍ता या उपभोक्‍ता प्रतिनिधि की सहमति के परिप्रेक्ष्‍य में हस्‍ताक्षर लिये जाते हैं, तदनुसार विद्युत देयक जारी किये जाते हैं । (ग) विगत तीन वर्षों में देवरी विधान सभा क्षेत्र के 904 कृषक उपभोक्‍ताओं के कनेक्‍शनों के निरीक्षण के दौरान क्षमता से अधिक भार पाये जाने पर भार बढ़ाये जाने की कार्यवाही की गई है । देवरी विधान सभा क्षेत्रांतर्गत वितरण केन्‍द्र महाराजपुर, देवरी शहर, देवरी ग्रामीण, गौरझामर, केसली प