मध्यप्रदेश विधान सभा


प्रश्नोत्तर-सूची
दिसम्‍बर, 2019 सत्र


गुरुवार, दिनांक 19 दिसम्बर, 2019


भाग-1
तारांकित प्रश्नोत्तर



रीवा जिलान्‍तर्गत खरीफ फसल का सर्वे

[राजस्व]

1. ( *क्र. 1242 ) श्री राजेन्द्र शुक्ल : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रीवा जिले में कंडो रोग से धान की फसल व भारी बारिश से दलहनी फसलों को हुये नुकसान का सर्वे कार्य क्‍यों नहीं कराया गया? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में फसलों की नुकसानी का सर्वे तीन माह बीत जाने के बावजूद क्‍यों नहीं कराया गया? स्‍पष्‍ट करें कि क्‍या फसल नुकसानी का सर्वे कराया जावेगा? यदि हाँ, तो सर्वे की समयावधि सहित विवरण स्‍पष्‍ट करें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) रीवा जिले में कंडो रोग से धान की फसल व भारी बारिश से दलहनी फसलों के हुए नुकसान का सर्वे कार्य कराया गया। फसल नुकसानी 25 प्रतिशत से कम पायी गयी। (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में फसलों की नुकसानी का सर्वे रीवा जिले में कराया जा चुका है। शेष प्रश्‍न उदभूत नहीं होता।

बैरसिया विधान सभा क्षेत्रांतर्गत अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्‍त हुई फसल का मुआवजा

[राजस्व]

2. ( *क्र. 24 ) श्री विष्‍णु खत्री : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत वर्ष 2019 में अतिवृष्टि से हुई फसल क्षति का आंकलन किया गया अथवा नहीं? कितनी राशि का आंकलन किया गया है? (ख) प्रश्नांश (क) में दर्शित आंकलन का मुआवजा वितरण कितने कृषकों को प्रश्‍न दिनांक तक किया गया है?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत कुल राशि रूपये 80,75,18,766/- का आंकलन किया गया है, (ख) विधानसभा अंतर्गत कुल 13072 कृषकों को मुआवजा वितरण 10.12.2019 तक किया गया है।

तत्‍कालीन अनुभागीय अधिकारी पर कार्यवाही

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

3. ( *क्र. 1286 ) श्री राजेश कुमार प्रजापति : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के प्रश्‍न क्रमांक 1019, दिनांक 10.07.2019 को खाद्य मंत्री द्वारा उत्‍तर दिया था कि तत्‍कालीन अनुविभागीय अधिकारी पर सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा प्रकरण में विभागीय कार्यवाही की जा रही है? यदि हाँ, तो क्‍या उक्‍त विभाग द्वारा उक्‍त अधिकारी पर विभागीय कार्यवाही को पूर्ण कर लिया गया है? यदि हाँ, तो संपूर्ण दस्‍तावेजों की प्रति उपलब्‍ध करायें। यदि नहीं, तो क्‍यों? (ख) क्‍या प्रशासनिक अधिकारी द्वारा पद एवं शक्ति का दुरूपयोग कर अधिकारिता विहीन आदेश जारी करने वाले अधिकारी के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के प्रावधान हैं? यदि हाँ, तो क्‍या विभाग तत्‍कालीन अनुविभागीय अधिकारी पर आपराधिक प्रकरण दर्ज करने के आदेश जारी करेगा? यदि हाँ, तो समय-सीमा बतायें? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें। (ग) क्‍या प्रश्‍न क्रमांक 1019, दिनांक 10.07.2019 के संबंध में प्रेम गुप्‍ता के नाम से सूचना के अधिकार का आवेदन लोक सूचना अधिकारी प्रमुख सचिव, मध्‍यप्रदेश शासन (क‍ार्मिक) सामान्‍य प्रशासन विभाग मंत्रालय भोपाल में विचाराधीन है? यदि हाँ, तो क्‍या आवेदक को जानकारी प्रदाय कर दी गयी है? यदि हाँ, तो कब? यदि नहीं, तो क्‍यों?

खाद्य मंत्री ( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ) : (क) जी हाँ। जी नहीं। सामान्‍य प्रशासन विभाग में प्रकरण प्रचलित है। (ख) जी नहीं, मध्‍यप्रदेश सार्वजनिक वितरण प्रणाली नियंत्रण आदेश, 2009 में ऐसा प्रावधान नहीं था। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। सामान्‍य प्रशासन विभाग (कार्मिक) द्वारा मूल आवेदन पर आदेश दिनांक 07.11.2019 को पारित कर आवेदक को दिनांक 08.11.2019 को अवगत कराया गया है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

खण्‍डवा जिले में अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्‍त फसलों का मुआवजा

[राजस्व]

4. ( *क्र. 142 ) श्री देवेन्द्र वर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश के कितने जिलों में इस वर्ष औसत से अधिक वर्षा होने से अतिवृष्टि की स्थिति निर्मित हुई है? (ख) क्या अतिवृष्टि प्राकृतिक आपदा की श्रेणी में आती है? यदि हाँ, तो खण्डवा जिले में अतिवृष्टि से प्रभावित खरीफ फसलों का रकबा कितना है एवं कितने किसानों की फसलों के नुकसान का सर्वे शासन द्वारा कराया गया है? (ग) किसानों को फसल नुकसान के सर्वे में कितनी राशि का मुआवजा शासन द्वारा अब तक भुगतान किया गया है? यदि नहीं, तो क्यों? (घ) प्रदेश के किसानों को अतिवृष्टि से हुए नुकसान का मुआवजा एवं गत वर्ष के देय गेहूँ का बोनस का भुगतान कब तक किया जाएगा? (ड.) क्या किसानों ने कर्जा माफ होने के भ्रम में फसलों का मुआवजा नहीं कराया एवं जिन किसानों ने बीमा कराया है उन्हें बीमा राशि आज दिनांक तक प्राप्त नहीं हुई है? इन किसानों को कब तक राहत दी जाएगी?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) मानसून वर्ष 2019-20 में बाढ़/अतिवृष्टि से 41 जिले प्रभावित हुए हैं। (ख) जी हाँ। खण्‍डवा जिले में खरीफ फसल का कुल 233845.97 हेक्‍टेयर रकबा प्रभावित है एवं समस्‍त प्रभावित क्षेत्र के किसानों की फसल का सर्वे कराया गया। (ग) खण्‍डवा जिले में किसानों को नुकसान के सर्वे में राशि रूपये 44,38,84,575/- (रूपये चवालीस करोड़ अड़तीस लाख चौरासी हजार पाँच सौ पिचहत्‍तर) का भुगतान किया गया है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) अतिवृष्टि से हुए नुकसान के मुआवजा वितरण की समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। गत वर्ष गेहूँ का बोनस का प्रावधान नहीं था। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ड.) जी नहीं। फसल बीमा एवं राहत का मुआवजा भुगतान पृथक प्रक्रिया है। मुआवजा भुगतान फसल बीमा से संबंधित नहीं है। अतिवृष्टि से प्रभावित समस्‍त पात्र किसानों को राहत स्‍वीकृत है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

शिवपुरी सीवर प्रोजेक्‍ट कार्य में अनि‍यमित भुगतान

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

5. ( *क्र. 145 ) श्री सुरेश धाकड़ : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शिवपुरी नगर में सीवर प्रोजेक्‍ट के तहत 47 डब्‍लू.बी.एम. सड़कों एवं समतलीकरण का मूल्‍यांकन माप पुस्तिका क्र. एल 105 में वर्ष 2015-16 में अंकित किया गया था? यदि हाँ, तो वह 47 सड़कें कौन सी हैं, इनका कितनी राशि का बिल तैयार किया गया, उसमें से कितना भुगतान एजेंसी को किया गया? कितना भुगतान शेष है? उस दौरन कार्यपालन यंत्री कौन थे? (ख) क्‍या बिल क्र. 25 माप पुस्तिका 524 में दर्ज उक्‍त कार्य का मूल्‍यांकन 2 करोड़ 56 लाख का अंकित किया गया है? जिसमें से 01 करोड़ 12 लाख का भुगतान निर्माण एजेंसी को किया है? यदि हाँ, तो शेष भुगतान किया गया है अथवा नहीं और कार्यपालन यंत्री द्वारा किन-किन सड़कों का निरीक्षण भुगतान से पूर्व किया गया है? (ग) क्‍या माप पुस्तिका क्र. एल 456 में भी प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर में वर्णित उक्‍त 47 सड़कों का वर्ष 2014-15 में मूल्‍यांकन दर्ज किया जा चुका था तथा निर्माण एजेंसी को 1 करोड़ 97 लाख रूपये का भुगतान किया जा चुका है? यदि हाँ, तो प्रश्नांश (क) में वर्णित 47 सड़कें जो कि बनाई ही नहीं गई हैं, का 1 करोड़ 12 लाख रूपये का एक ही कार्य का दो बार भुगतान बिल क्र. 25 द्वारा निर्माण एजेंसी को कैसे एवं क्‍यों किया गया? (घ) क्‍या माप पुस्तिका क्र. एल 105 में जिस अधिकारी की हैण्‍ड राईटिंग में मूल्‍यांकन अंकित किये गये हैं वह अधिकारी वर्ष 2015-16 में सीवर प्रोजेक्‍ट में पदस्‍थ थे अथवा नहीं? यदि पदस्‍थ थे तो आदेश की छायाप्रति संलग्‍न कर जानकारी दें? यदि पदस्‍थ नहीं थे तो मूल्‍यांकन किसके आदेश पर किया गया?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( श्री सुखदेव पांसे ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 के अनुसार है। (ख) एवं (ग) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) सीवर परियोजना में अमले की कमी के कारण उपखण्ड शिवपुरी के दो उपयंत्रियों को स्थानीय स्तर पर परियोजना का कार्य करने हेतु निर्देशित किया गया था, पत्रों की छायाप्रतियाँ पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 एवं 3 के अनुसार है।

रायरू डिस्‍लरी का निरीक्षण

[वाणिज्यिक कर]

6. ( *क्र. 242 ) श्री भारत सिंह कुशवाह : क्या वाणिज्यिक कर मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्‍वालियर ग्रामीण क्षेत्र अंतर्गत रायरू डिस्‍लरी का डी.एम. द्वारा किस-किस दिनांक को निरीक्षण किया गया? निरीक्षण के दौरान कौन-कौन सी कमी पाई गई जिस पर डी.एम. द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? क्‍या डी.एम. के निरीक्षण के बाद विभागीय मंत्री द्वारा निरीक्षण किया गया? यदि हाँ, तो उस पर मंत्री जी द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) ग्‍वालियर ग्रामीण क्षेत्र अंतर्गत रायरू डिस्‍लरी प्‍लांट (विस्‍तार भाग) की अद्यतन स्थिति क्‍या है? क्‍या जमीन के आवंटन के संबंध में एवं प्‍लांट से संबंधित कोई धोखाधड़ी हुई व एफ.आई.आर. दर्ज हुई है? यदि हाँ, तो किस थाने में? प्रकरण की पूर्ण जानकारी दें। (ग) क्‍या रायरू डिस्‍लरी का नया प्‍लांट स्‍थापित किया गया? नये प्‍लांट की भूमि का आवंटन विशेष क्षेत्र साडा द्वारा किया गया? साडा द्वारा कितने हेक्‍टेयर भूमि की अनुमति किस दिनांक को दी गई? अनुमति के पूर्व भूमि के लैण्‍ड यूज चेंज करने की प्रक्रिया किस दिनांक को की गई? परिवर्तन पूर्व भूमि किस प्रयोजन के लिए सुरक्षित थी?

वाणिज्यिक कर मंत्री ( श्री बृजेन्द्र सिंह राठौर ) : (क) जिला मजिस्‍ट्रेट, ग्‍वालियर द्वारा खाद्य एवं औषधि प्रशासन के दल के साथ दिनांक 30.04.2019 को रायरू डिस्‍टलरी का भ्रमण किया गया। खाद्य एवं औषधि प्रशासन के दल द्वारा देशी मदिरा मसाला, राइस फ्लोर (लूज) कापी मीस्‍ट (पेक्‍ड) Novazyme Saczyme plus (लूज) Mash of rice flour (लूज) के विहित विधि से 05 सेम्‍पल लिये गये। उपरोक्‍त सेम्‍पल राज्‍य परीक्षण, प्रयोगशाला खाद्य एवं औषधि प्रशासन, भोपाल मध्‍यप्रदेश को प्रेषित किये गये। प्रयोगशाला से प्राप्‍त रिपोर्ट अनुसार देशी मदिरा मसाला मिथ्‍या छाप की बतायी गयी एवं राइस फ्लोर लूज अवमानक प्रतिवेदित की गई। इस आधार पर न्‍याय निर्णयन, अधिकारी ग्‍वालियर के न्‍यायालय में प्रकरण दायर किया गया है। जो प्रकरण क्रमांक 50/2019 पर दर्ज होकर प्रचलित है। माननीय मंत्री, वाणिज्यिक कर विभाग, मध्‍यप्रदेश शासन द्वारा दिनांक 21.06.2019 को उपरोक्‍त इकाई का भ्रमण किया गया था। (ख) ग्‍वालियर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित रायरू डिस्‍टलरी प्‍लांट (विस्‍तार भाग) का कोई नया विस्‍तार नहीं किया गया है। शासन की ओर से इकाई को कोई भूमि आवंटन नहीं की गई है। प्‍लांट के संबंध में धोखाधड़ी/एफ.आई.आर. की कोई सूचना, विभाग के पास नहीं है। (ग) रायरू डिस्‍टलरी का कोई नया प्‍लांट स्‍थापित नहीं किया गया है। विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण की ओर से उपरोक्‍त इकाई को कोई भूमि आवंटन नहीं की गई है। लैंड यूज के परिवर्तन की कोई कार्यवाही नहीं की गयी है। शेष अंश के उत्‍तर का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को नियमित वेतनमान का भुगतान

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

7. ( *क्र. 1000 ) श्री बनवारीलाल शर्मा : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय नई दिल्‍ली के पारित आदेश दि. 21-1-2015 के परिपालन हेतु 151 कर्मचारियों के आदेश मुख्‍य अभियंता लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग ग्‍वालियर परिक्षेत्र ग्‍वालियर को जारी हो चुके हैं? क्‍या मा. उच्‍च न्‍यायालय के परिपालन से 152 कर्मचारियों के आदेश के अलावा लगभग 511 कर्मचारियों के नियमित वेतनमान एवं वेतन अंतर राशि फर्जी तरीके से प्रदाय की गई है? यदि हाँ, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ क्‍या कार्यवाही कब तक की जावेगी? (ख) क्‍या प्रश्नांश (क) अनुसार छोड़कर शेष न्‍यायालयीन प्रकरणों में पारित आदेशों के संबंध में कर्मचारियों की जानकारी श्रम न्‍यायालय/औद्योगिक न्‍यायालय/उच्‍च न्‍यायालय/अवमानना के प्रस्‍ताव पृथक-पृथक दिनांक 31-3-2016 की स्थिति में उपलब्‍ध कराने हेतु अधीक्षण यंत्री लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग ग्‍वालियर-मण्‍डल को निर्देशित किया गया था? (ग) क्‍या प्रश्नांश (ख) अनुसार उक्‍त वांछित जानकारी आज दिनांक तक विभाग द्वारा नहीं दी गई है? इसमें दोषी अधिकारी/कर्मचारी के खिलाफ क्‍या कार्यवाही कब तक प्रस्‍तावित की जावेगी? (घ) क्‍या अधीक्षण यंत्री (तत्‍कालीन) द्वारा जो दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी नहीं थे, उन्‍हें नियमित वेतनमान देकर उन्‍हें नियमित कर दिया गया था? यदि हाँ, तो तत्‍कालीन अधीक्षण यंत्री के खिलाफ क्‍या कार्यवाही कब तक प्रस्‍तावित कर दी जावेगी?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( श्री सुखदेव पांसे ) : (क) जी नहीं, अपितु, मान. उच्चतम न्यायालय के आदेश दिनांक 21.01.2015 के अनुपालन में मुख्य अभियंता, परिक्षेत्र ग्वालियर द्वारा 150 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के स्थायी वर्गीकृत आदेश दिनांक से न्यूनतम वेतनमान एवं वेतन अंतर की राशि के भुगतान के आदेश दिनांक 31.03.2016 को जारी किये गए। जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) जी हाँ। (ग) एवं (घ) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, कल्याणमल नर्सिंग होम का निर्माण

[चिकित्सा शिक्षा]

8. ( *क्र. 1181 ) श्री महेन्द्र हार्डिया : क्या चिकित्सा शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या आँखों के इलाज हेतु सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, कल्याणमल नर्सिंग होम, इन्दौर का निर्माण प्रस्तावित है? यदि हाँ, तो प्रोजेक्ट की कुल लागत कितनी है? सिविल एवं उपकरणों की अलग-अलग बतावें। (ख) क्या इस हेतु चिकित्सकों का चयन कर लिया गया है? यदि हाँ, तो क्या इनकी नियुक्ति एमसीआई के मापदंडानुसार की गई है? क्या सहायक प्राध्यापकों के चयन में सीनियर रेसीडेंसी करना अनिवार्य है? यदि हाँ, तो क्या चयनित सहायक, एसोसिएट या प्राध्यापकों द्वारा पूर्व में सीनियर रेसीडेंट के पद पर कार्य किया गया है? (ग) क्या अभी सिविल निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है? यदि नहीं, तो चयनित चिकित्सकों से अभी विभाग द्वारा क्या कार्य लिया जा रहा है?

चिकित्सा शिक्षा मंत्री ( डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ) : (‍क) जी हाँ। प्रोजेक्‍ट की कुल लागत राशि रूपये 39.69 करोड़ है। सिविल कार्य हेतु राशि रूपये 20.06 करोड़ एवं उपकरण हेतु राशि रूपये 19.63 करोड़ है। (ख) जी हाँ। शैक्षणिक संवर्ग के 12 स्‍वीकृत पदों में से 10 चिकित्‍सकों का चयन नियमानुसार संभागायुक्‍त की अध्‍यक्षता में गठित समिति द्वारा कर लिया गया है। स्‍कूल ऑफ एक्‍सीलेंस फॉर आई संस्‍था का उद्देश्‍य उच्‍च स्‍तरीय नेत्र रोग से संबंधित सुविधायें उपलब्‍ध कराना व फेलोशिप कोर्स प्रारम्‍भ करना है, जिसके लिए एम.सी.आई. अर्हताओं की आवश्‍यकता नहीं है। फेलोशिप कोर्स हेतु चिकित्‍सा शिक्षकों को सीनियर रेसीडेंसी की अनिवार्यता नहीं है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी नहीं। चयनित चिकित्‍सकों द्वारा अभी कार्यभार ग्रहण नहीं किया गया है।

अतिवृष्टि से प्रभावित फसल/जनधन की हानि का सर्वे

[राजस्व]

9. ( *क्र. 652 ) श्री रमेश मेन्‍दोला : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शासन ने अतिवृष्टि/बाढ़ से नष्ट हुई फसलों तथा जनधन की हानि की स्थिति जानने हेतु प्रदेश में कोई जमीनी सर्वेक्षण करवाया है? (ख) यदि हाँ, तो ये सर्वे प्रदेश के कितने जिलों में करवाया गया है तथा जिन जिलों में सर्वे हुआ है वहां सर्वेक्षण का कार्य किस विभाग के अधिकारियों द्वारा किया है?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। (ख) प्रदेश में फसल नुकसान के आंकलन हेतु 41 जिलों में सर्वे कराया गया है। जिलों में राजस्‍व, कृषि विभाग, उद्यानिकी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों द्वारा सर्वेक्षण किया गया।

चिन्हित ग्रामों को राजस्‍व ग्राम का दर्जा

[राजस्व]

10. ( *क्र. 1126 ) श्री हरदीपसिंह डंग : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 22.03.2018 को प्रश्न 148 (क्र. 5159) प्रश्नकर्ता द्वारा पूछे गये प्रश्न के उत्तर (ग) में दर्शाये गये घसोई पंचायत के बागरीखेड़ा एवं सुवासरा विधानसभा क्षेत्र के अन्य गांव राजस्व गांव घोषित करने की कार्यवाही प्रचलित बताया गया था तथा (घ) में अमले की कमी की जानकारी दी गई थी, उसके उपरांत तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा क्या कार्यवाही की गई थी? (ख) सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में राजस्व ग्राम घोषित करने हेतु मापदण्ड अनुसार कौन-कौन से ग्राम चिन्हित किये गये हैं? ग्रामवार जानकारी देवें। (ग) शासन द्वारा चिन्हित ग्रामों को राजस्व ग्राम घोषित करने हेतु क्या कार्यवाही की गई है? (घ) शासन की योजना के लाभ हेतु चिन्हित ग्रामों को कब तक राजस्व ग्राम घोषित किया जावेगा?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) विधान सभा क्षेत्र सुवासरा के अंतर्गत घसोई पंचायत के मजरा बागरीखेड़ा में जो कमियां/त्रुटियां पाई गईं थीं, उनकी पूर्णता करवाई गई है। उक्‍त सहित कुल 7 मजरा टोला से राजस्‍व ग्राम घोषित करने के प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए हैं, जिनका परीक्षण कर आगामी कार्यवाही प्रचलित है। (ख) सुवासरा विधान सभा क्षेत्र में राजस्‍व ग्राम घोषित करने हेतु कुल 7 ग्राम चिन्हित किये गये हैं। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) चिन्हित ग्रामों की जानकारी प्राप्‍त होने पर कार्यवाही की जावेगी। (घ) नियमानुसार पात्र पाये जाने पर समस्‍त मजरे टोलों को राजस्‍व ग्राम घोषित करने की कार्यवाही की जाती है।

परिशिष्ट - "एक"

ब्यावरा में नल-जल पाईप लाईन कार्य को पूर्ण किया जाना

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

11. ( *क्र. 1104 ) श्री गोवर्धन दांगी : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र ब्यावरा में बांकपुरा परियोजना अंतर्गत 126 ग्रामों में शामिल नल-जल योजना ग्रामों की सूची उपलब्ध करवाएं, शेष ग्रामों को कब तक जोड़ा जायेगा, उसकी क्या कार्ययोजना बनी है? (ख) उक्त ग्रामों में कितनी पानी की टंकिया पूर्ण हो चुकी हैं व कितनी प्रगतिरत हैं एवं कितनी शेष हैं? सूची उपलब्ध करवाएं। (ग) जिन ग्रामों में नल-जल हेतु पाईप लाईन डाली गई है उन ग्रामों में जो सीसी रोड व मार्ग खराब हुए हैं, उन्हें यथास्थिति में लाने हेतु कौन जिम्मेदार है व कब तक मार्ग यथावत होंगे। (घ) नल-जल योजना अंतर्गत किये गये टेंडर किस आधार पर किये गये व विभाग द्वारा ठेकेदार से कार्य की समय-सीमा कितनी रखी गई?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( श्री सुखदेव पांसे ) : (क) विधानसभा क्षेत्र ब्यावरा में बांकपुरा-कुशलपुरा परियोजना में शामिल 126 ग्रामों की सूची पुस्तकालय में रखे गये परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। विधानसभा क्षेत्र ब्यावरा के शेष 202 ग्रामों में से 82 ग्राम पहाड़गढ़ समूह जलप्रदाय योजना में सम्मिलित हैं तथा 120 ग्रामों को नरसिंहगढ़ समूह जलप्रदाय योजना (रिंसी डेम आधारित) से जोड़ना प्रस्तावित है, जिसकी डी.पी.आर. बनाने का कार्य प्रगतिरत है, निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है। (ख) बांकपुरा-कुशलपुरा परियोजना के अंतर्गत 39 उच्च स्तरीय टंकियां पूर्ण हो चुकी हैं एवं शेष 19 के कार्य प्रगतिरत हैं। सूची पुस्तकालय में रखे गये परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (ग) अनुबंध अनुसार पाइप लाइन बिछाने के लिये खोदे गये सड़क के हिस्से को पूर्ववत करने की जिम्मेदारी ठेकेदार की है। पाइप लाइन की हाइड्रो टेस्टिंग होने एवं सभी घरों में नल कनेक्शन का कार्य पूर्ण होने पर ठेकेदार द्वारा सड़कों के खोदे गये हिस्से को पूर्ववत किया जायेगा, निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है। (घ) समूह जलप्रदाय योजना बांकपुरा-कुशलपुरा का टेण्डर टर्न की जॉब (एकमुश्त दर) पद्धति पर किया गया है। बांकपुरा-कुशलपुरा परियोजना में ठेकेदार से कार्य की समय-सीमा 24 माह रखी गई है।

बायोमेट्रिक प्रणाली से राशन का वितरण

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

12. ( *क्र. 1429 ) श्री अर्जुन सिंह : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या राशन वितरण केन्‍द्रों में सही समय में राशन नहीं पहुंच पाने की शिकायतें निरंतर प्राप्‍त हो रही हैं तथा नियत समय पर कोटा वि‍तरण केन्‍द्रों पर नहीं पहुंच पाने के लिए कौन जिम्‍मेदार है? (ख) उपरोक्‍त प्रश्नांश (क) के संदर्भ में क्‍या बायोमेट्रिक मशीन के माध्‍यम से राशन वितरण प्रणाली लागू कर दी गयी है, किन्‍तु ग्रामीण अंचलों में नेटवर्क की समस्‍या और हमेशा सर्वर की समस्‍या बनी रहती है, लोग पेड़ों पर चढ़कर अंगूठा लगा रहे हैं? बिना नेटवर्क और अन्‍य अधोसरंचना के यह व्‍यवस्‍था लागू करने के लिए कौन जिम्‍मेदार है? (ग) जब तक नेटवर्क की समस्‍या और सर्वर की समस्‍या ठीक नहीं होती तब तक राशन वितरण की वैकल्पिक व्‍यवस्‍था क्‍या है?

खाद्य मंत्री ( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ) : (क) उचित मूल्‍य दुकानों पर द्वार प्रदाय योजना के तहत समय-सीमा में राशन प्रदाय का प्रयास किया जाता है तथापि विभिन्‍न स्रोतों से MDM, ICDS आदि से उपयोगिता एवं नवीन मांग लेकर आवंटन जारी करने में, नवीन परिवहन निविदाओं का अंतिमिकरण, दुकानों पर स्‍थानाभाव आदि जैसे कारणों से कुछ दुकानों पर माह प्रारंभ से पूर्व पूर्ण आवंटन नहीं पहुंच पाता है। इन तथ्‍यों को दृष्टिगत रखते हुए किसी की जिम्‍मेदारी तय की जाना सम्‍भव नहीं है। पात्र हितग्राहियों को राशन वितरण हेतु उचित मूल्‍य दुकानों पर राशन उपलब्‍ध रहे, इस हेतु माह जनवरी एवं फरवरी, 2020 का (दो माह का) एक साथ अग्रिम खाद्यान्‍न आवंटन जारी किया गया है। (ख) माह अक्‍टूबर, 2019 से प्रदेश में आधार आधारित राशन वितरण व्‍यवस्‍था (AePDS) लागू की गई है। जिन पात्र हितग्राहियों के बायोमेट्रिक सत्‍यापन किन्‍हीं कारणों से सफल नहीं हो पाते हैं, उनके सही आधार नंबर दर्ज कर अथवा नामिनी के माध्‍यम से राशन वितरण किया जाता है। उल्‍लेखनीय है कि उचित मूल्‍य दुकान से परिवार का कोई भी सदस्‍य राशन प्राप्‍त कर सकता है। प्रदेश की जिन 1909 उचित मूल्‍य दुकानों पर नेट कनेक्टिविटी उपलब्‍ध नहीं है, उनमें आंशिक ऑफलाईन (बिना बायोमेट्रिक सत्‍यापन) राशन वितरण की व्‍यवस्‍था की गई है। सर्वर की समस्‍या आने पर वैकल्पिक व्‍यवस्‍था की जाती है। किसी भी पात्र परिवार को तकनीकी कारणों से राशन प्राप्‍त करने से वंचित नहीं किया जा रहा है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्नांश (ख) के उत्‍तर अनुसार।

शहपुरा ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना की स्‍वीकृति

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

13. ( *क्र. 1560 ) श्री संजय यादव : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या बरगी विधान सभा क्षेत्र शहपुरा के 137 ग्रामों को जल प्रदाय हेतु शहपुरा ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना स्‍टेज-1 को रिपोर्ट एवं प्राक्‍कलन महाप्रबंधक म.प्र. जल निगम पी.आई.यू. जबलपुर द्वारा परियोजना निर्देशक को अपने पत्र क्र. 219, दिनांक 06.07.2019 के द्वारा प्रेषित की गई थी? यदि हाँ, तो उक्‍त जल प्रदाय योजना की प्रशासकीय एवं वित्‍तीय स्‍वीकृति हेतु अब तक क्‍या कार्यवाही की गई? परियोजना कब तक स्‍वीकृत की जायेगी? (ख) बरगी विधान सभा क्षेत्र के ग्राम पड़वार पड़रिया जल प्रदाय योजना की स्‍वीकृति हेतु शासन द्वारा अब तक क्‍या कार्यवाही की गई? उक्‍त योजना कब तक स्‍वीकृत होगी? (ग) बरगी विधान सभा क्षेत्र में निर्माणाधीन पायली समूह जल प्रदाय योजना का कार्य अत्‍यन्‍त धीमी गति से चल रहा है, उक्‍त कार्य समय-सीमा में पूर्ण करने हेतु विभागीय अधिकारियों को शासन द्वारा कब तक निर्देशित किया जायेगा?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( श्री सुखदेव पांसे ) : (क) जी हाँ। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने हेतु निविदा प्रक्रिया प्रगतिरत है। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार होने के उपरांत वित्तीय संयोजन प्राप्त होने पर अग्रिम कार्यवाही की जा सकेगी। निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है। (ख) पड़वार-पड़रिया समूह जलप्रदाय योजना की डी.पी.आर. तैयार की गई है। वित्तीय संयोजन प्राप्त होने पर अग्रिम कार्यवाही की जा सकेगी। निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है। (ग) योजना के कार्यों का सतत् अनुश्रवण मध्यप्रदेश जल निगम द्वारा किया जा रहा है एवं कार्य समय-सीमा में पूर्ण करने हेतु ठेकेदार को समय-समय पर निर्देशित किया जा रहा है।

सिवनी मेडिकल कॉलेज का निर्माण

[चिकित्सा शिक्षा]

14. ( *क्र. 789 ) श्री दिनेश राय मुनमुन : क्या चिकित्सा शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सिवनी जिले में पूर्ववर्ती सरकार द्वारा शासकीय मेडिकल कॉलेज की घोषणा की गई थी? (ख) यदि हाँ, तो किसके द्वारा कब और कहाँ? प्रशासकीय स्‍वीकृति कब प्रदाय की गई? उक्‍त मेडिकल कॉलेज हेतु कब और कहाँ पर कितनी भूमि आवंटित की गई? क्‍या उक्‍त भूमि को शासन ने मेडिकल कॉलेज निर्माण हेतु विभाग को प्रदाय कर दी है? यदि हाँ, तो कब, नहीं तो क्‍यों? (ग) प्रश्नांश (क) के अनुक्रम में क्‍या मेडिकल कॉलेज के निर्माण हेतु निविदा आमंत्रित की गई? यदि हाँ, तो कब? कितना बजट शासन द्वारा विभाग को आवंटित किया गया? कब प्रदाय किया गया? कार्य की वर्तमान स्थिति क्‍या है? (घ) नवीन मेडिकल कॉलेज खोले जाने के संबंध में राज्‍य सरकार और भारत सरकार के किन-किन विभागों की अनुमति, अनापत्तियां आदि आवश्‍यक होती हैं, सिवनी मेडिकल कॉलेज के संबंध में उक्‍त में से कितनी अनुमतियां, अनापत्तियॉ, प्राप्‍त हो चुकी हैं कितनी शेष हैं? (ड.) मेडिकल कॉलेज खोले जाने के विभिन्‍न क्रम में चरण एवं प्रक्रिया क्‍या होती है? सिवनी मेडिकल कॉलेज हेतु उक्‍त प्रक्रिया एवं चरण किस स्थिति में है? शासन ने सिवनी मेडिकल कॉलेज किस योजना या मद से खोले जाने का निर्णय लिया है।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री ( डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ) : (‍क) जी हाँ। (ख) तत्‍कालीन मान. मुख्‍यमंत्री जी द्वारा सिवनी में दिनांक 05.05.2018 को घोषणा की गई। दिनांक 04 अक्‍टूबर 2018 को प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी की गई। दिनांक 24.09.2018 द्वारा शासकीय चिकित्‍सा महाविद्यालय की स्‍थापना हेतु ग्राम कंडीपार जिला सिवनी में कुल 14.78 हेक्‍टेयर भूमि आवंटित की गई है। जी हाँ, शासन द्वारा आवंटित भूमि विभाग को प्रदाय कर दी है। (ग) जी हाँ। दिनांक 24.12.2018 को निविदा जारी की गई। मेडिकल कॉलेज के निर्माण हेतु राशि रूपये 26.03 लाख का आवंटन लोक निर्माण विभाग (पी.आई.यू.) को वर्ष 2019-20 में उपलब्‍ध कराया गया। मेडिकल कॉलेज हेतु आवंटित भूमि पर बॉउन्‍ड्रीवाल का निर्माण किया गया। (घ) नवीन मेडिकल कॉलेज खोले जाने हेतु भारत शासन से प्राप्‍त की जाने वाली अनुमतियां संबंधी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र 01 अनुसार है। राज्‍य शासन से विभिन्‍न विभागों से प्राप्‍त की जाने वाली अनुमतियों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र 02 अनुसार है। वर्तमान में अनुमतियां प्राप्‍त नहीं की गईं हैं। (ड.) मेडिकल कॉलेज खोले जाने की प्रक्रिया के संबंध में एम.सी.आई. द्वारा जारी की गई गाइडलाईन संबं‍धी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र 03 अनुसार है। निर्माण के लिए डीपीआर पश्‍चात् निविदा आमंत्रित की जाती है। मेडिकल कॉलेज हेतु आवंटित भूमि पर बॉउन्‍ड्रीवाल का निर्माण किया गया है। सिवनी मेडिकल कॉलेज का निर्माण मांग संख्‍या 52 अंतर्गत वर्ष 2019-20 राज्‍य योजना अंतर्गत योजना क्रमांक 9077 में स्‍वीकृत है।

विधानसभा क्षेत्र निवाड़ी अंतर्गत पेयजल योजना का क्रियान्‍वयन

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

15. ( *क्र. 634 ) श्री अनिल जैन : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विधानसभा क्षेत्र निवाड़ी अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल प्रदाय हेतु नल-जल योजना शुरू की गई है? यदि हाँ, तो विधानसभा क्षेत्र निवाड़ी के अंतर्गत आने वाले किन-किन ग्रामों में उक्त योजना द्वारा जल प्रदाय किया जाना है? ग्रामवार नाम बतावें (ख) क्या प्रश्नांश (क) में प्रश्नगत उक्त समस्त ग्रामों में पेयजल योजना द्वारा जल प्रदाय प्रारंभ कर दिया गया है अथवा नहीं? यदि नहीं, तो कब तक समस्त ग्रामों में पेयजल योजना द्वारा जल प्रदाय प्रारंभ कर दिया जायेगा? (ग) क्या विधानसभा क्षेत्र निवाड़ी में पेयजल योजना अंतर्गत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लाईन बिछाते समय मार्गों में पक्की सड़क को तोड़कर पाईप लाईन डाली गयी है? यदि हाँ, तो पाईप डालने एवं टेस्टिंग उपरांत सड़कों को पूर्ववत फर्म द्वारा मरम्मत करने का प्रावधान होने के बाद भी उक्त मार्गों की मरम्मत न करने के लिए कौन दोषी है एवं उक्त मार्गों की मरम्मत कब तक कर दी जायेगी।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( श्री सुखदेव पांसे ) : (क) जी हाँ, निवाड़ी समूह जलप्रदाय योजना में निवाड़ी विधानसभा क्षेत्र के 32 ग्राम एवं निवाड़ी-पृथ्वीपुर-1 समूह जलप्रदाय योजना में निवाड़ी विधानसभा क्षेत्र के 94 ग्राम सम्मिलित हैं, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'एक' एवं 'दो' के अनुसार है। (ख) निवाड़ी समूह जलप्रदाय योजना के 32 ग्रामों में जल प्रदाय प्रारम्भ कर दी गई है। निवाड़ी-पृथ्वीपुर-1 समूह जलप्रदाय योजना में लगभग 84 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो गया है, जिससे अप्रैल, 2020 तक जलप्रदाय प्रारम्भ किया जाना लक्षित है। (ग) जी हाँ, सड़कों में ट्रेन्च खोदकर पाइप लाइन बिछाई जा रही है, कार्य उपरांत ठेकेदार द्वारा पूर्ववत किये जाने का प्रावधान है। जैसे-जैसे पाइप लाइनों की हाइड्रो टेस्टिंग एवं घरेलू कनेक्शन का कार्य पूर्ण होता जा रहा है, वैसे-वैसे सड़कों को पूर्ववत किया जा रहा है, अतः कोई दोषी नहीं है। निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

आबकारी नीति में संशोधन

[वाणिज्यिक कर]

16. ( *क्र. 1299 ) श्री भूपेन्द्र सिंह : क्या वाणिज्यिक कर मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रदेश सरकार द्वारा इस वर्ष आबकारी नीति में संशोधन किया गया है? यदि हाँ, तो क्या-क्या नवीन प्रावधान किये गये हैं? (ख) क्या सरकार द्वारा सिर्फ राजस्व बढ़ाने के लिए ही इस वर्ष ऑफ-शॉप को ऑन-शॉप में बदला गया है? यदि हाँ, तो कितना अतिरिक्त राजस्व अभी तक प्राप्त हुआ? (ग) सरकार द्वारा ऑन-शॉप हेतु जो अहाता की स्वीकृति दी जावेगी उसके लिए क्या-क्या शर्तों का प्रावधान किया गया है?

वाणिज्यिक कर मंत्री ( श्री बृजेन्द्र सिंह राठौर ) : (क) मध्यप्रदेश शासन द्वारा मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) क्रमांक 125 दिनांक 16.03.2019 द्वारा वर्ष 2019-20 के लिये आबकारी नीति का प्रकाशन कराया गया है, जिसके अनुसार, (1) देशी/विदेशी मदिरा दुकानों का निष्पादन गत वर्ष 2018-19 के वार्षिक मूल्य में 20 प्रतिशत की वृद्धि कर प्रथमतः नवीनीकरण एवं लॉटरी आवेदन पत्र के माध्यम से, शेष रही देशी/विदेशी मदिरा की दुकानों का निष्पादन ई-टेण्डर (क्लोज बिड एवं ऑक्‍शन) के माध्यम से किया गया है। (2) वर्ष 2019-20 में प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मात्र रिसोर्ट बार (एफ.एल.-3-क) लायसेंस में फीस में कमी एवं शर्तों का सरलीकरण किया गया है। (3) शासकीय राजस्व में वृद्धि एवं मदिरा दुकान के आसपास मदिरा के अवैध उपभोग पर अंकुश लगाये जाने के प्रयोजन से ऑफ श्रेणी की देशी/विदेशी मदिरा की दुकानों को अतिरिक्त मूल्य प्रभारित किये जाने पर शॉपबार का लायसेंस दिये जाने का प्रावधान, मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) क्रमांक 454 दिनांक 14.11.2019 अनुसार किया गया है। (4) शासन आदेशानुसार मदिरा के न्यूनतम विक्रय मूल्य पर लगने वाले वैट की दर को दिनांक 21.09.2019 से 5 प्रतिशत के स्थान पर 10 प्रतिशत किया गया है। तद्नुक्रम में मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) क्रमांक 453 दिनांक 14.11.2019 में प्रकाशित व्यवस्था अनुसार वर्ष 2019-20 के लिये देशी मदिरा की प्रत्येक किस्म एवं धारिता की बोतल के परिगणित न्यूनतम फुटकर विक्रय मूल्य में 20 प्रतिशत के बजाय 25 प्रतिशत तथा विदेशी मदिरा (स्पिरिट, वाईन तथा बीयर) के परिगणित न्यूनतम फुटकर विक्रय मूल्य में 15 प्रतिशत के बजाय 20 प्रतिशत की वृद्धि की जाकर अधिकतम विक्रय मूल्य परिगणित किया गया। (5) प्रत्येक लेबल के अधीन, उसके प्रत्येक रूपांतर (Variant) का पंजीकरण 10% अतिरिक्त फीस के साथ किया जाना प्रावधानित किया गया है। (ख) शासकीय राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ, मदिरा दुकान के आसपास मदिरा के अवैध उपभोग पर अंकुश लगाये जाने के प्रयोजन से ऑफ श्रेणी की देशी/विदेशी मदिरा की दुकानों को नियमानुसार पात्रता होने पर अतिरिक्त मूल्य प्रभारित किये जाने पर शॉपबार का लायसेंस दिया जाना प्रावधानित किया गया है। प्रदेश में शॉपबार लायसेंस से राशि रूपये 6,03,87,174/- का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ है। (ग) शॉपबार का लायसेंस दिये जाने संबंधी शर्तों का प्रकाशन, मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) क्रमांक 454, दिनांक 14.11.2019 में कराया गया है, उक्त राजपत्र की प्रति संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है।

परिशिष्ट - "दो"

प्रदेश में अतिवृष्टि से फसलों को नुकसान

[राजस्व]

17. ( *क्र. 1035 ) डॉ. नरोत्तम मिश्र : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या इस वर्ष समूचे प्रदेश में माह जुलाई से प्रश्‍न दिनांक तक अतिवृष्टि से किसानों की फसल बर्बाद हुई है? (ख) प्रश्नांश (क) यदि हाँ, तो शासन के सर्वे अनुसार समूचे प्रदेश में कितना नुकसान अतिवृष्टि से हुआ है? (ग) शासन/प्रशासन द्वारा प्रश्‍न दिनांक तक अतिवृष्टि से हुए नुकसान के मुआवजे के रूप में कितनी मुआवजा राशि किसानों को दी गई? जिलेवार राशि की जानकारी दें। (घ) क्‍या प्रश्‍न दिनांक तक सभी किसानों को मुआवजा राशि का वितरण हो गया है? यदि नहीं, तो क्‍यों? कब तक मुआवजा राशि का वितरण हो जायेगा?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) मानसून सत्र 2019 में प्रदेश के 41 जिलों में अतिवृष्टि से किसानों की फसलें प्रभावित हुईं हैं। (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में सर्वे अनुसार वर्षाकाल में लगभग कुल 65.83 लाख हेक्‍टेयर फसल की क्षति हुई है। (ग) जिलेवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (घ) जी नहीं, आंकलित लगभग 7041 करोड़ फसल मुआवजा के विरूद्ध लगभग 1400 करोड़ का मुआवजा दिया गया है। शेष राशि वितरण हेतु समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - "तीन"

राशन वितरण हेतु वैकल्पिक व्‍यवस्‍था

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

18. ( *क्र. 1579 ) श्री सोहनलाल बाल्‍मीक : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या परासिया ब्‍लॉक में स्थि‍त सभी शासकीय उचित मूल्‍य दुकानों में पी.ओ.एस. मशीन लगाई जा चुकी है? जहां मशीन ऑन-लाइन है, क्‍या वहां सर्वर की समस्‍या के कारण मशीन नहीं चलती है और सर्वर की समस्‍या ठीक होने के कोई निश्चित समय निर्धारित नहीं है? क्‍या एक दिन में केवल 20-25 कार्डों का राशन वितरण हो पा रहा है और बाकी लोग बिना राशन लिए लौट रहे हैं? क्‍या एक महीने का राशन लेने के लिए लगभग 5 बार राशन दुकान आना पड़ रहा है। अगर पी.ओ.एस. मशीन खराब हो जाती है तो क्‍या उसके ठीक होने की कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है, जिसके कारण राशन प्राप्‍त करने के लिए पूरे दिन हितग्राही परेशान होते रहते हैं। (ख) प्रश्नांश (क) के अनुसार यदि हाँ, तो क्‍या हितग्राहियों को अन्‍य माध्‍यम से राशन वितरण करने की वैकल्पिक व्‍यवस्‍था शासन/विभाग द्वारा तुरंत ही की जावेगी, जिससे हितग्राहियों को समय पर राशन प्राप्‍त हो सके? यदि हाँ, तो वैकल्पिक व्‍यवस्‍था कब तक बनाई जायेगी? (ग) क्‍या प्रश्नांश (क) स्‍थान पर अनेक बी.पी.एल. कार्डधारी एवं अन्‍य विभिन्‍न श्रेणी में पात्र उपभोक्‍ताओं को राशन की पात्रता पर्ची विभाग द्वारा समय पर जारी नहीं की जा रही है, जिससे हितग्राहियों को राशन नहीं मिल पा रहा है? समय पर पात्र हितग्राहियों को पात्रता पर्ची प्रदान नहीं किये जाने का क्‍या कारण है? कब से हितग्राहियों को समय पर पात्रता पर्ची प्रदान किये जाने हेतु विभाग द्वारा व्‍यवस्‍था बना दी जायेगी? (घ) जिन हितग्राहियों के आधार नम्‍बर ग्राम पंचायत एवं नगरीय निकायों द्वारा समग्र पोर्टल में पहले से फीड हैं, विभाग द्वारा उनका बार-बार आधार नम्‍बर मशीन में फीड कराया जाता है और आधार नं. एक बार में फीड नहीं होता है, जिसके कारण उपभोक्‍ता निरंतर परेशान हो रहे हैं। उक्‍त संबंध में भी विभाग द्वारा कब तक व्‍यवस्‍था बना दी जायेगी?

खाद्य मंत्री ( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ) : (क) जी हाँ। परासिया विकासखण्‍ड की कुल 93 उचित मूल्‍य दुकानों में से 42 नेट कनेक्टिविटी उपलब्‍ध वाली दुकानों पर ऑनलाईन एवं 51 दुकानों पर नेट कनेक्टिविटी उपलब्‍ध न होने के कारण आंशिक ऑफलाईन राशन का वितरण किया जा रहा है। उचित मूल्‍य दुकानों की पी.ओ.एस. मशीन खराब रहने या अन्‍य कोई तकनीकी समस्‍या होने पर पात्र हितग्राहियों को वितरण पंजी से राशन वितरण के निर्देश दिये गये हैं। उचित मूल्‍य दुकान के विक्रेता द्वारा पी.ओ.एस. मशीन खराब होने की शिकायत कॉल सेन्‍टर पर दर्ज करने के 48 घंटे में पी.ओ.एस. मशीन का सुधार करने की समय-सीमा निर्धारित है, निर्धारित समयावधि में सुधार न कराने पर सेवाप्रदाता को खराब मशीन का किराया भुगतान नहीं किया जाता है। वर्तमान में परासिया विकासखण्‍ड में कोई पी.ओ.एस. मशीन खराब नहीं है। (ख) उचित मूल्‍य दुकानों की पी.ओ.एस. मशीन खराब रहने या अन्‍य कोई तकनीकी समस्‍या होने पर पात्र हितग्राहियों को वितरण पंजी से राशन वितरण के निर्देश दिये गये हैं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत प्रदेश की वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 75% आबादी की सीमा तक ही लाभ दिया जा सकता है। इस सीमा से अधिक हितग्राहियों को लाभान्वित करने का प्रावधान अधिनियम की धारा-3 के अंतर्गत नहीं है। वर्तमान में सम्मिलित पात्र परिवारों में से हितग्राही की मृत्‍यु होने, विवाह होने से, अन्‍य स्‍थान पर निवास करने एवं पात्रता श्रेणी में न रहने के कारण हितग्रा‍ही की पात्रता में परिवर्तन होना एक निरंतर प्रक्रिया है। तदनुसार नवीन पात्रता पर्ची निर्धारित सीमा में जारी की जाती है। जिले में जितने अपात्र परिवारों को पोर्टल पर विलोपित किया जायेगा, उतनी ही संख्या में संबंधित जिले के नवीन सत्यापित परिवारों को सम्मिलित किया जाता है। जुड़ने वाले नवीन परिवारों में बी.पी.एल. एवं अनुसूचित जाति/जनजाति श्रेणी को प्राथमिकता दी जाती है। वर्तमान में परिवारों के सत्‍यापन के अभियान की कार्यवाही प्रचलित होने के कारण पात्रता पर्ची जारी नहीं की जा रही है। (घ) जिन पात्र हितग्राहियों के डाटाबेस में पूर्व से सही आधार नंबर दर्ज हैं, उन हितग्राहियों से पुन: आधार नंबर मांगे जाने के संबंध में कोई निर्देश नहीं हैं। पात्र हितग्राही जिनके डाटाबेस में आधार नंबर दर्ज नहीं हैं अथवा त्रुटिपूर्ण दर्ज हैं, उनके सही आधार नंबर उचित मूल्‍य दुकानों पर पी.ओ.एस. मशीन के माध्‍यम से दर्ज किये जा रहे हैं। भारत सरकार द्वारा अधिनियम के अंतर्गत सम्मिलित समस्‍त पात्र हितग्राहियों की पहचान सुनिश्चित करने हेतु e-KYC सभी हितग्राहियों के किये जा रहे हैं।

बुरहानपुर जिले में अतिवृष्टि/आंधी तूफान से नष्‍ट हुई फसलों का सर्वे

[राजस्व]

19. ( *क्र. 1227 ) ठाकुर सुरेन्द्र नवल सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जिला बुरहानपुर में वर्ष 2019 में प्राकृतिक आपदा/अतिवृष्टि से कृषकों की नष्‍ट हुई फसलों के सर्वे का कार्य पूर्ण हो चुका है? यदि हाँ, तो ग्रामवार कितनी प्रतिशत फसल नष्‍ट हुई है, की सूची प्रदान करें। यदि सर्वे पूर्ण नहीं हुआ है तो कब तक सर्वे पूर्ण होकर सूची प्रदान की जावेगी? (ख) उक्‍त पीड़ि‍त किसानों को कितनी मुआवजा राशि का अब तक वितरण किया गया? यदि नहीं, किया गया तो कब तक भुगतान किया जायेगा? साथ ही विलम्‍ब का कारण बतावें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। जिला बुरहानपुर अंतर्गत वर्ष 2019 में प्राकृतिक आपदा/अतिवृष्टि से नष्‍ट हुई फसलों के सर्वे का कार्य पूर्ण हो चुका है। सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार हैअत: शेष प्रश्‍न उदभूत नहीं होता है। (ख) जिला बुरहानपुर में कुल राहत राशि 1,61,72,656/- (एक करोड़ इकसठ लाख बहत्‍तर हजार छ: सौ छप्‍पन रूपये) का वितरण प्रभावित कृषकों को किया गया है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। राशि प्राप्ति के अनुसार भुगतान किया गया है। विलम्‍ब नहीं हुआ है।

प्राकृतिक प्रकोपों से हुई क्षतियों पर आर्थिक सहायता

[राजस्व]

20. ( *क्र. 293 ) श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शासन द्वारा राजस्व पुस्तक परिपत्र खण्ड छः क्रमांक 4 यथा संशोधित करते हुए 01 मार्च, 2018 से प्रभावशील की गई है? यदि हाँ, तो वर्ष 2019 की अवधि में प्रदेश में हुई अतिवृष्टि से कितने हेक्टेयर क्षेत्र में फसल प्रभावित हुई है तथा किसानों को कितनी धनराशि आर्थिक सहायता के रुप में भुगतान करने का आंकलन किया गया है? (ख) प्रश्नाधीन अवधि में नीमच जिले के कौन-कौन से ग्राम प्राकृतिक प्रकोप से प्रभावित हुए हैं और उन्‍हें किन-किन कारणों से हुई क्षतियों के लिये आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु सूचीबद्ध किया गया है? तहसीलवार/ग्रामवार संख्‍यात्‍मक सूची उपलब्‍ध कराई जावे। स्‍वीकृत आर्थिक सहायता राशि का भुगतान किन मानदण्‍डों के आधार पर किया जा रहा है? (ग) प्रश्नांश (ख) में उल्लेखित प्रभावितों को कितनी राशि आर्थिक सहायता के रुप में भुगतान की गई है तथा कितनी राशि का अब भी भुगतान किया जाना शेष है? तहसीलवार/ग्रामवार संख्‍यात्‍मक सूची उपलब्‍ध कराई जावे। (घ) प्रश्नांश (ग) में भुगतान हेतु लंबित दर्शाये गये ग्रामों/कस्बों के प्रभावितों को कब तक आर्थिक सहायता राशि का भुगतान किया जा सकेगा? क्या इस संबंध में कोई शिकायतें शासन को प्राप्त हुई हैं? यदि हाँ, तो उस पर अब तक की गई कार्यवाही से अवगत करायें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। वर्ष 2019 की अवधि में प्रदेश में हुई अतिवृष्टि से लगभग 65.82 लाख हेक्‍टेयर फसल प्रभावित हुई है तथा प्रभावित कृषकों को लगभग राशि 7041 करोड़ रूपये भुगतान किये जाने का आंकलन किया गया है। (ख) नीमच जिले के समस्‍त ग्राम/कस्‍बे प्राकृतिक प्रकोप से प्रभावित हुए हैं। फसल, मकान/दुकान, पशु हानि, जनहानि, पशु घर हानि, कुंआ हानि, खाद्यान्‍न इत्‍यादि क्षतियों के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने हेतु सूचीबद्ध किया गया है। तहसीलवार/ग्रामवार संख्‍यात्‍मक सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। स्‍वीकृत आर्थिक सहायता राशि का भुगतान राजस्‍व पुस्‍तक परिपत्र खण्‍ड छ: क्रमांक 4 के प्रावधानों के अनुसार किया जा रहा है। (ग) नीमच जिले में प्रभावितों को जो राशि आर्थिक सहायता राशि के रूप में भुगतान की गई है एवं भुगतान किया जाना शेष है। उसकी तहसीलवार/ग्रामवार संख्‍यात्‍मक सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। आवेदिका श्रीमती रचना कुवर निवासी महागढ़ तहसील मनासा जिला नीमच की सोयाबीन की फसल नष्‍ट हो जाने के कारण मुआवजा राशि के संबंध में शिकायत प्राप्‍त हुई तदानुसार संबंधित शिकायतकर्ता को नियमानुसार राहत राशि 43,024/- (तिरतालिस हजार चौबीस) रूपये आर्थिक राहत राशि स्‍वीकृत कर ई-पेमेन्‍ट के माध्‍यम से संबंधित के खाते में जमा की जा चुकी है।

आयुर्वेद/होम्‍यो तथा यूनानी में चिकित्‍सकों के स्‍वीकृत/रिक्‍त पद

[आयुष]

21. ( *क्र. 133 ) श्री पुरुषोत्तम लाल तंतुवाय : क्या चिकित्सा शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आयुर्वेद/होम्‍यो तथा यूनानी में चिकित्‍सा अधिकारियों के कितने-कितने पद स्‍वीकृत हैं, कितने-कितने पद रिक्‍त हैं एवं कितने-कितने पद भरे हैं। भरे हुए एवं रिक्‍त पदों की संख्‍या अलग-अलग बताएं। (ख) केन्‍द्र सरकार एवं अन्‍य राज्‍यों में सभी पैथी के चिकित्‍सकों की सेवानिवृत्ति की आयु एक समान करके सेवानिवृत्ति की आयु में भेदभाव समाप्‍त किया जा चुका है, उसी तरह प्रदेश के आयुष चिकित्‍सकों की सेवानिवृत्ति की आयु, एलोपैथिक चिकित्‍सकों के समान 65 वर्ष कब तक की जावेगी।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री ( डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) परीक्षण कर कार्यवाही की जावेगी, समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - "चार"

'किसान सम्‍मान निधि' अंतर्गत किसानों का पंजीयन

[राजस्व]

22. ( *क्र. 81 ) श्री आशीष गोविंद शर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) केन्‍द्र सरकार द्वारा प्रारंभ 'किसान सम्‍मान निधि' के अंतर्गत म.प्र. में कितने किसानों को इस योजना में पात्र माना गया है? देवास जिले के कुल कितने किसानों को इस योजना की हितग्राही सूची में शामिल किया गया है? (ख) प्रश्‍न दिनांक तक देवास जिले में कितने किसानों के खातों में प्रथम, द्वितीय, तृतीय किश्‍त जमा हो चुकी है? तहसीलवार किसान संख्‍या का उल्‍लेख करें। (ग) क्‍या कारण है कि कन्‍नौद एवं खातेगांव तहसील के लगभग 50 गांवों के किसानों के खातों में अभी तक प्रथम किश्‍त की राशि भी जमा नहीं हो पाई है? क्‍या इसमें पटवारियों की लापरवाही प्रतीत होती है? (घ) क्‍या प्रश्‍न दिनांक तक जिन किसानों के नाम पोर्टल पर अपलोड नहीं हो पाये हैं, उनके समाधान हेतु विभाग कोई कार्यवाही शीघ्र करेगा?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) दिनांक 05.12.2019 की स्थिति में केन्‍द्र सरकार द्वारा प्रारंभ किसान सम्‍मान निधि के अंतर्गत म.प्र. में 5237289 किसानों को इस योजना में पात्र माना गया है। पी.एम. किसान पोर्टल अनुसार देवास जिले के 129921 किसानों को इस योजना की हितग्राही सूची में शामिल किया गया है। (ख) पी.एम. किसान पोर्टल अनुसार प्रश्‍न दिनांक तक देवास जिले में 99138 कृषकों को प्रथम किश्त, 76127 कृषकों को दूसरी किश्त का लाभ दिया जा चुका है। ग्रामवार हितग्राहियों की जानकारी www.pmkisan.gov.in पोर्टल पर उपलब्ध है। (ग) जिला देवास के तहसील कन्नौद के 66 ग्रामों में से 64 ग्रामों के 6922 किसानों को प्रथम किश्त एवं 5416 किसानों को द्वितीय किश्त एवं तहसील खातेगांव के 168 ग्रामों में से 164 ग्रामों के 11603 किसानों को प्रथम किश्त एवं 8126 किसानों को द्वितीय किश्त का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में किया जा चुका है। पटवारियों द्वारा पी.एम. किसान सम्मान निधि सम्बन्धी कार्य किया जाता है। (घ) पात्रता परीक्षण कर कृषक परिवारों को चिन्हित करने हेतु कार्यवाही की जाती है।

वि.स. क्षेत्र चांचौड़ा में स्थित ऐतिहासिक किले का संरक्षण

[संस्कृति]

23. ( *क्र. 1370 ) श्री लक्ष्‍मण सिंह : क्या चिकित्सा शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र चांचौड़ा में स्थित ऐतिहासिक किले के संरक्षण और जीर्णोद्धार हेतु विभाग द्वारा क्‍या प्रयास किया जा रहा है?

चिकित्सा शिक्षा मंत्री ( डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ) : (क) विधानसभा क्षेत्र चांचौड़ा स्थित प्राचीन किले को विभाग द्वारा संरक्षित घोषित किया गया है। किले के अनुरक्षण एवं विकास कार्यों के लिए राशि रूपये 490.97 लाख की स्‍वीकृति जारी की जा चुकी है। निविदा कार्यवाही प्रचलन में है।

बड़नगर तहसील में ग्रामीण नल-जल योजना का क्रियान्‍वयन

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

24. ( *क्र. 470 ) श्री मुरली मोरवाल : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्जैन जिले के बड़नगर विधानसभा क्षेत्र में प्रश्न दिनांक से विगत 03 वर्षों में कितनी नल-जल योजना स्वीकृत की गई, कितनी नल-जल योजना पूर्ण होकर चालू है तथा कितनी नल-जल योजना अपूर्ण होकर बंद है? किस-किस नल-जल योजना पर कितना व्यय किया गया है? योजनावार राशि की जानकारी उपलब्ध करावें। कौन-कौन सी नल-जल योजना अनुबंध अवधि में पूर्ण हुई एवं कौन-कौन सी नल-जल योजना अनुबंध अवधि के बाद बंद हुई? समय अवधि में पूर्ण नहीं होने पर विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की गई? नल-जल योजनावार जानकारी उपलब्ध करावें। (ख) बंद पड़ी नल-जल योजनाओं को चालू करने हेतु किस-किस नल-जल योजना पर कितना-कितना व्यय किया गया? स्थानवार जानकारी उपलब्ध करावें। वर्तमान में कितनी नल-जल योजनाएकिस कारण से बंद हैं? विभाग द्वारा चालू करने हेतु क्या प्रयास किये गये? जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में बड़नगर विधानसभा क्षेत्र में नल-जल योजना के निर्माण में भारी अनियमितता हुई है एवं शासन को करोड़ों रूपये की क्षति हुई है, क्या शासन द्वारा इस गंभीर अनियमितता की जांच प्रदेश स्तरीय कमेटी बनाकर की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( श्री सुखदेव पांसे ) : (क) 08 नल-जल योजनाएं स्वीकृत की गईं। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। वर्तमान में एक ग्राम नरसिंगा की नल-जल योजना पावर पंप फंसने के कारण बंद है, जिसको चालू करने हेतु कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (ग) जी नहीं। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है।

पंजीकृत फर्मों से कर की वसूली

[वाणिज्यिक कर]

25. ( *क्र. 1661 ) श्री शरद जुगलाल कोल : क्या वाणिज्यिक कर मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के निर्वाचन क्षेत्र ब्‍यौहारी अंतर्गत 01 जनवरी, 2018 से अब तक कुल क‍ितनी रजिस्‍टर्ड फर्म हैं, जिनका पंजीयन विभाग में दर्ज है एवं किन-किन फर्मों से कितनी-कितनी कर वसूली की गयी है? सूची उपलब्‍ध करायी जाये। (ख) विभाग में जो फर्म पंजीकृत हैं, किन्‍तु आज दिनांक तक उनकी फर्म कहीं संचालित नहीं है, उनके बिल का भुगतान किस आधार पर किया जाता है? (ग) वर्ष 2018-19 में शहडोल जिलान्‍तर्गत समस्‍त रजिस्‍टर्ड फर्म की आय कितनी निर्धारित थी एवं विभाग द्वारा कितनी कर के रूप में प्राप्‍त हुई। राशि का विवरण, फर्म सहित सूची उपलब्‍ध कराई जाये। (घ) प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ब्‍यौहारी एवं जयसिंहनगर जनपद पंचायत के अंतर्गत कितने फर्म एवं टिन नंबर जारी किये गये थे? उनसे कुल कितनी कर वसूली की गयी? 01 जनवरी, 2015 से 31.12.2018 तक जानकारी उपलब्‍ध करायी जाये।

वाणिज्यिक कर मंत्री ( श्री बृजेन्द्र सिंह राठौर ) : (क) निर्वाचन क्षेत्र ब्यौहारी अंतर्गत 01 जनवरी, 2018 से दिनांक 30.11.2019 तक कुल 158 करदाता पंजीयत हैं। जी.एस.टी. के अन्‍तर्गत पंजीयन केन्‍द्र सरकार एवं राज्‍य सरकार के अधिकारियों द्वारा जारी किये जाते हैं। केन्‍द्र सरकार के अधीन 86 करदाता एवं राज्‍य सरकार के अधीन 72 करदाता पंजीयत हुए हैं। इन पंजीयत करदाताओं से उक्‍त अवधि के लिये कुल 2.24 लाख का एस.जी.एस.टी. (राज्‍य कर) प्राप्‍त हुआ है। करदाताओं की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) ब्‍यौहारी क्षेत्र से पंजीयत करदाताओं में से एक करदाता का व्‍यवसाय स्‍थल होना नहीं पाया गया। करदाता द्वारा जारी विक्रय बीजकों की जानकारी उन्‍हें प्रतिमाह प्रस्‍तुत की जाने वाली विवरणी में देना होता है। विभाग द्वारा फर्म के द्वारा जारी किये गये बिलों का भुगतान नहीं किया जाता है। (ग) वर्ष 2018-19 में शहडोल वृत्‍त के अन्‍तर्गत केन्‍द्र सरकार के अधीन 1027 तथा राज्‍य सरकार के अधीन 1035 करदाता पंजीयत रहे हैं। शहडोल वृत्‍त के अन्‍तर्गत पंजीयत उक्‍त करदाताओं से राज्‍य कर (एस.जी.एस.टी.) रूपये 84.15 करोड़ प्राप्‍त हुए, इन्‍हीं करदाताओं के द्वारा केन्‍द्रीय कर (सी.जी.एस.टी.), एकीकृत कर (आई.जी.एस.टी.) एवं जी.एस.टी. सेस की राशि 669.25 करोड़ जमा की गई। सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) ब्यौहारी एवं जयसिंहनगर जनपद पंचायत के अंतर्गत मध्‍यप्रदेश वेट अधिनियम के अन्‍तर्गत 01 जनवरी, 2015 से 30.06.2017 तक 440 करदाता पंजीयत रहे हैं। 01 जुलाई, 2017 से जी.एस.टी. अधिनियम लागू होने के पश्‍चात 31.12.2018 तक 239 पंजीयन जी.एस.टी. के अन्‍तर्गत जारी किए गए। इन करदाताओं से अवधि 01 जनवरी 2015 से 30 जून 2017 तक 13.89 लाख का राजस्‍व प्राप्‍त हुआ तथा अवधि 01.07.2017 से 31.12.2018 तक 14.09 लाख एस.जी.एस.टी. (राज्‍य कर) प्राप्‍त हुआ। सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

 

 

 

 








भाग-2

नियम 46 (2) के अंतर्गत अतारांकित प्रश्नोत्तर के रुप में परिवर्तित तारांकित प्रश्नोत्तर


गरीब भूमिहीन परिवारों को पट्टा देना

[राजस्व]

1. ( क्र. 5 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विगत 3 वर्षों में जबलपुर जिलांतर्गत शासन द्वारा गरीब भूमिहीन परिवारों को आवास बनाने हेतु पट्टे दिये गये हैं? (ख) यदि हाँ, तो नगर निगम जबलपुर के वार्ड क्रमांक 79 में पचासों वर्ष से निवासरत 90 परिवारों को पट्टे क्यों नहीं दिये गये? (ग) क्या इन परिवारों को पट्टे दिये जावेगें? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? (घ) विधानसभा क्षेत्र पनागर के अंतर्गत प्रश्‍नांकित अवधि में कितने हितग्राहियों को पट्टे देने हेतु चयन किया गया है? सूची देवें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। (ख) जिले के नगर निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 79 में सभी पात्र हितग्राहियों को पट्टे दिये गये है। (ग) प्रश्न उद्भूत नहीं होता है। (घ) जिले की विधानसभा क्षेत्र पनागर अंतर्गत पूर्व में ही पात्र हितग्राहियों को पट्टे दिये जा चुके है।

अतिवर्षा के कारण गिर गये मकानों की क्षतिपूर्ति

[राजस्व]

2. ( क्र. 6 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विधानसभा क्षेत्र पनागर अंतर्गत इस वर्ष हुई अतिवर्षा के कारण करमेता, मड़ई, अमखेरा, महाराजपुर, सुहागी में गिर गये 19 मकानों के पुनर्निर्माण हेतु हितग्राहियों को सहायता राशि दी गई है? (ख) यदि हाँ, तो हितग्राहिवार दी गई राशि की जानकारी देवें एवं राशि किन मापदण्डों के आधार पर दी गई है बतावें? (ग) यदि राशि नहीं दी गई है तो क्या कारण है? कब तक राशि दी जायेगी।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। जिले की पनागर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत इस वर्ष अतिवर्षा के दौरान ग्राम करमेता, मड़ई, अमखेरा, महाराजपुर, सुहागी के कुल 81 मकान क्षतिग्रस्‍त हुए। क्षतिग्रस्‍त मकानों के प्रकरण तैयार कर आर.बी.सी 6-4 के मापदण्‍डों के आधार पर रू. 326500/- राहत राशि स्‍वीकृत की जाकर 68 हितग्राहियों को 294000/- रूपये वितरित कर दी गयी है। (ख) हितग्राहीवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। राशि आर.बी.सी. 6-4 के मापदण्‍डों के आधार पर दी गई है। (ग) प्रश्‍नांश उद्भूत नहीं होता।

प्रश्‍नकर्ता के पत्र पर कार्यवाही

[राजस्व]

3. ( क्र. 28 ) श्री विष्‍णु खत्री : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के विधान सभा क्षेत्र बैरसिया अंतर्गत जगदीशपुर के लिये भारत शासन गृह मंत्रालय द्वारा मुख्‍य सचिव, म.प्र. शासन को संबोधित पत्र क्रमांक 11/9/2008 M&G प्राप्‍त हुआ था? यदि हाँ, तो इस संबंध में की गयी कार्यवाही से अवगत करावें। (ख) प्रश्नांश (क) के तारतम्‍य में प्रश्‍नकर्ता द्वारा मुख्‍य सचिव, म.प्र. शासन को संबोधित पत्र क्रमांक 292, दिनांक 09.09.2019 पर क्‍या कार्यवाही की गयी? पत्राचार/निर्देशों की प्रति उपलब्‍ध करावें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार। (ख) पत्र अप्राप्‍त। शेष प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता।

परिशिष्ट - "पाँच"

अशासकीय स्कूलों में संचालित स्कूल बसें
[परिवहन]

4. ( क्र. 39 ) श्री संजय शर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अशासकीय स्कूलों में विद्यार्थियों के आवागमन हेतु स्कूल बसों एवं निजी वाहनों के संचालन का क्या प्रावधान है एवं क्या परिवहन विभाग द्वारा इन स्कूल बसों एवं वाहनों को परमिट प्रदान किये जाते हैं? यदि हाँ, तो इन बसों को परमिट प्रदान करने का क्या मापदण्ड है एवं इसकी समयावधि क्या है? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार, क्या विभाग द्वारा बस एवं वाहन मालिकों को परमिट जारी करते समय वाहन की फिटनेस की जाँच की जाती है? (ग) तेंदूखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत अशासकीय स्कूलों में संचालित निजी स्कूल बसों को परमिट किस आधार पर प्रदान किये गये हैं? प्रत्येक अशासकीय स्कूलों में कितनी-कितनी स्कूल बसें संचालित हैं? वाहन मालिकों के नाम सहित जानकारी प्रदान करें। (घ) क्या इन वाहनों द्वारा मानक संख्या से अधिक संख्या में विद्यार्थियों को लाने-ले जाने के सम्बंध में आर.टी.ओ. द्वारा समय-समय पर जाँच की जाती है? यदि हाँ, तो दोषी पाये गये वाहन मालिकों के विरुद्ध कब-कब क्या कार्यवाही की गई?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) अशासकीय स्कूल में स्कूल के स्वामित्व की/स्कूल द्वारा अनुबंधित की गई निजी बसों द्वारा विद्यार्थियो का आवागमन किया जाता है। स्कूल के स्वामित्व/अनुबंधित बसों को मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 72 एवं 87 के अधीन परमिट स्वीकृत किए जाते हैं। परमिट स्वीकृत करते समय माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्कूल बसों के लिये निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने संबंधी समस्त शर्तें परमिट पर अधिरोपित की जाती है। स्कूल बसों को, स्कूल बस हेतु निर्धारित मापदण्डों की पूर्ति करने पर ही परमिट स्वीकृत किये जाते है। स्थाई परमिट की अवधि 05 वर्ष तथा अस्थाई परमिट की अवधि 04 माह होती है। मोटरयान अधिनियम 1988 की धारा 72 एवं 87 के प्रावधानों की प्रति  पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों की प्रति प्रति  पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र  '' अनुसार है। (ख) जी हाँ, फिटनेस वैध होने पर ही परमिट जारी किये जाते हैं। (ग) तेन्दूखेडा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत अशासकीय स्कूलों में संचालित निजी स्कूल बसों को मोटरयान अधिनियम की धारा 72 एवं 84 में वर्णित शर्तों के अनुसार परमिट प्रदान किये जाते हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र  '' अनुसार  है। (घ) जी हाँ। विद्यार्थियों को लाने-ले जाने के संबंध में आर.टी.ओं द्वारा समय-समय पर जाँच की जाती है। दोषी वाहन मालिकों के विरूद्ध की गई कार्यवाही की  जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार  है।

प्रश्‍नकर्ता द्वारा प्रेषित पत्रों पर कार्यवाही

[संस्कृति]

5. ( क्र. 55 ) श्रीमती नीना विक्रम वर्मा : क्या चिकित्सा शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रश्नकर्ता द्वारा कलेक्टर धार को धार की विरासत व ऐतिहासिक धरोहर धार-राजवाड़े को संरक्षित करने तथा कतिपय व्यक्तियों द्वारा अतिक्रमण करने के प्रयास को रोकने विषयक पत्र लिखे गये हैं? (ख) यदि हाँ, तो प्रश्नकर्ता द्वारा इस संबंध में कब-कब पत्र लिखे गये तथा उन पत्रों पर जिला प्रशासन द्वारा क्या-क्या कार्रवाई की गई एवं इस संबंध में कृत कार्रवाई से विधायक को कब-कब अवगत करवाया? (ग) क्या जनप्रतिनिधियों के पत्रों के जवाब दिये जाने के संबंध में शासन द्वारा समय-समय पर निर्देश दिये गये हैं? यदि हाँ, तो प्रश्नकर्ता विधायक के पत्र के उत्तर कलेक्टर द्वारा न दिये जाने पर शासन कोई दिशा-निर्देश देगा। (घ) आम जनमानस से जुड़े धार राजबाड़े को संरक्षित करने हेतु शासन द्वारा क्या कार्यवाही की जा रही हैं?

चिकित्सा शिक्षा मंत्री ( डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ) : (क) जी हाँ. (ख) मान. विधायक श्रीमती नीना विक्रम वर्मा द्वारा प्रस्‍तुत पत्र क्रमांक 40 दिनांक 08.07.2019 के संबंध में कलेक्‍टर कार्यालय, धार द्वारा पत्र क्रमांक 7030/व.लि./2019 दिनांक 16.07.2019 अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) धार एवं मुख्‍य नगर पालिका अधिकारी नगर पालिका धार को पत्र जारी कर कार्यवाही हेतु पत्र लिखा जाकर मान. विधायक को पृष्‍ठांकन क्रमांक 7031/व.लि./2019 दिनांक 16.07.2019 द्वारा अवगत कराया गया. पत्र दिनांक 16.07.2019 की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार. (ग) जी हाँ. शासन द्वारा जनप्रतिनिधियों के पत्रों के जवाब दिये जाने के परिप्रेक्ष्‍य में माननीय विधायक श्रीमती नीना विक्रम वर्मा को कलेक्‍टर कार्यालय, धार द्वारा उनके पृष्‍ठांकन क्रमांक 7031 दिनांक 16.07.2019 से अवगत कराया गया. पत्र की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार. (घ) कलेक्‍टर, धार के पत्र क्र. 2396/व‍.लि/2015 दिनांक 02.03.2015 द्वारा यह अवगत कराया कि भवन स्‍वामिनी श्रीमती मृणालनी देवी का निधन हो चुका है तथा उनका कोई वैध उत्‍तराधिकारी नहीं है. जिला प्रशासन, धार द्वारा राजवाड़ा को सील कर कार्यवाही प्रारंभ की गई. कलेक्‍टर, धार से राजवाड़ा के स्‍वामित्‍व के संबंध में तथा मान. उच्‍च न्‍यायालय में वाद की अद्यतन स्थिति की जानकारी संचालनालय पुरातत्‍व के पत्र दिनांक 06.06.2016 एवं 01.08.2018 द्वारा चाही गई जानकारी अद्यतन अपेक्षित है. पत्रों की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार.

मंदसौर में बाढ़ से हुये नुकसान एवं मुआवजा

[राजस्व]

6. ( क्र. 56 ) श्री यशपाल सिंह सिसौदिया : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 1 जुलाई 2019 के पश्‍चात मंदसौर जिले में विभिन्‍न विभागों के अंतर्गत बाढ़ से कितनी शासकीय एवं अशासकीय एवं अन्‍य संपत्ति का नुकसान हुआ? क्या नुकसान का आंकलन विभाग द्वारा तैयार कर लिया गया है? यदि हाँ, तो कितना? विभागवार जानकारी देवें। (ख) शासन द्वारा मंदसौर विधानसभा क्षेत्र में प्रश्‍न दिनांक तक बाढ़ राहत हेतु कितनी राशि का किन-किन पंचायतों में मुआवजा दिया गया? क्‍या यह मुआवजा आंकलन के अनुरूप है या कम? (ग) प्रश्‍नांश (ख) अंतर्गत जिन विभागों में मुआवजा अभी तक प्रदान नहीं किया गया है इनकी अद्यतन स्थिति क्‍या है, कब तक आंकलन अनुसार मुआवजा प्रदान कर दिया जायेगा? (घ) क्‍या माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने  मंदसौर जिले के भ्रमण के दौरान बाढ़ प्रभावित लोगों को 6 माह तक 50 किलो गेहूँ दिये जाने के निर्देश अधिकारियों को दिये थे? यदि हाँ, तो क्या बाढ़ पीड़ित परिवारों को वर्तमान में भी 50 किलो गेहूँ दिए जा रहा है? यदि हाँ, तो मंदसौर विधान सभा क्षेत्र के परिवारों की सितम्बर-अक्टूबर माह की सूची उपलब्ध करायें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) मंदसौर जिले में 1 जुलाई 2019 के पश्‍चात विभिन्‍न विभागो के अंतर्गत बाढ़ से शासकीय एवं अन्‍य संपत्ति का 70.80 करोड़ रूपये का नुकसान आंकलित है। फसल हानि, मकान क्षति, पशुहानि में नुकसान के आंकलन के आधार पर 793 करोड़ रूपये मुआवजा निर्धारित है। जी हाँ आंकलन तैयार किया गया है। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' पर है। (ख) शासन द्वारा मंदसौर विधान सभा क्षेत्र की 74 ग्राम पंचायत, 1 मंदसौर नगरपालिका, 1 नगरपंचायत नगरी, कुल 76 में प्रश्‍न दिनांक तक रू 57.82 करोड़ राशि वितरित की गई है। जो राजस्‍व पुस्‍तक परिपत्र 6-4 के आंकलन के अनुरूप है। पंचायतवार सूची  संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' पर है। (ग) उत्‍तरांश ''' अनुसार जिले में फसल क्षति हेतु शेष राहत राशि भुगतान बजट में राशि प्राप्‍त होने पर की जावेगी। विभागीय शासकीय अधोसंरचना को हुये नुकसान का सुधार कार्य कराया जाता है, मुआवजा नहीं दिया जाता है। (घ) जी हाँ, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने मंदसौर जिले के भ्रमण के दौरान बाढ़ प्रभावित लोगों को 6 माह तक 50 किलो गेहूँ दिये जाने के निर्देश दिये गये थे। जिसके पालन में स्‍वीकृति प्रक्रियाधीन है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - "छ:"

उपार्जित खाद्यान्‍न का भण्‍डारण

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

7. ( क्र. 64 ) श्री रामपाल सिंह : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रायसेन जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2017-18 तथा 2018-19 एवं रबी विपणन वर्ष 2018-19 तथा 2019-20 में कितनी मात्रा में कौन-कौन से खाद्यान्‍न का उपार्जन संस्‍थावार किया गया? उपरोक्‍त उपार्जन किये गये खाद्यान्‍न में से कितनी-कितनी मात्रा में किन-किन वेयर हाउसों में भंडारण किया गया? कितना खाद्यान्‍न कम क्‍यों जमा हुआ? (ख) प्रश्नांश (क) में उपार्जन किये गये खाद्यान्‍न में से कितना खाद्यान्‍न अन्‍य जिले के वेयरहाउसों में भंडारण हेतु भेजा गया तथा क्‍यों? रायसेन जिले के वेयर हाउस के स्‍थान पर अन्‍य जिलों में परिवहन पर कितना अतिरिक्‍त व्‍यय हुआ? (ग) कितने किसानों को कितनी राशि का भुगतान बकाया है? कब तक राशि का भुगतान किया जायेगा? राशि भुगतान न होने के लिए कौन-कौन अधिकारी जवाबदार हैं? शासन ने क्‍या-क्या कार्यवाही की? (घ) दोषी अधिकारियों के खिलाफ विभाग क्‍या-क्‍या कार्यवाही करेगा क्‍या किसानों को शासन ब्‍याज सहित राशि देगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

खाद्य मंत्री ( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ) : (क) रायसेन जिले में खरीफ विपणन वर्ष 2017-18 तथा 2018-19 एवं रबी विपणन वर्ष 2018-19 तथा 2019-20 में समर्थन मूल्‍य पर उपार्जित खाद्यान्‍न (गेहूं एवं धान) की समितिवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। उपार्जित खाद्यान्‍न (गेहूं एवं धान) की गोदामवार भंडारित मात्रा की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। उपार्जित मात्रा के विरूद्ध गोदामों में कम जमा होने का कारण उपार्जन केन्‍द्रों पर सूखत एवं परिवहन में हुई कमी है। कम जमा हुए खाद्यान्‍न (गेहूं एवं धान) की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ख) रायसेन जिले में रबी विपणन वर्ष 2018-19 में समर्थन मूल्‍य पर उपार्जित गेहूं का भंडारण जिले के समस्‍त भंडारण केन्‍द्रों में संग्रहण करने के उपरांत शेष मात्रा 67770.60 मे.टन तथा रबी विपणन वर्ष 2019-20 में 50490 मे.टन अन्‍य जिलों के गोदामों में भंडारण कराया गया। विकेन्‍द्रीकृत उपार्जन योजनांतर्गत उपार्जित खाद्यान्‍न के सुरक्षित भंडारण का दायित्‍व राज्‍य सरकार का है। जिले में उपार्जित गेहूं अनुसार रिक्‍त भंडारण क्षमता उपलब्‍ध न होने पर जिन जिलों में रिक्‍त भंडारण क्षमता उपलब्‍ध होती है, उन जिलों में भंडारण कराया जाता है। उपार्जन केन्‍द्र से प्रथम भंडारण स्‍थल तक खाद्यान्‍न के परिवहन का व्‍यय भारत सरकार द्वारा वहन किया जाता है। रायसेन जिला गेहूं का सरप्‍लस जिला है, इस कारण सरप्‍लस मात्रा को अन्‍य कमी वाले जिलों में अथवा केन्‍द्रीय पूल में परिदान किया जाता है, इस कारण अन्‍य जिलों में परिवहन कर भंडारण करने पर अतिरिक्‍त व्‍यय होने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) समर्थन मूल्‍य पर उपार्जित गेहूं एवं धान का समस्‍त किसानों को भुगतान किया जा चुका है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) प्रश्‍नांश (ग) के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

राहत राशि का भुगतान

[राजस्व]

8. ( क्र. 65 ) श्री रामपाल सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 1 जून 2019 से 30 नवंबर 2019 तक की अवधि में बाढ़, अतिवृष्टि, अफलन से रायसेन जिले में कितने किसानों की फसलों को नुकसान हुआ? तहसीलवार,ग्रामपंचायतवार संख्‍या बतायें। उनको किस-किस योजना में कितनी रा‍हत रा‍शि का भुगतान हुआ? यदि नहीं, तो कारण बतायें तथा कब तक राशि का भुगतान होगा? (ख) 1 जून, 2019 से 30 नवम्‍बर 2019 तक की अवधि में बाढ़ अतिवृष्टि, आंधी से रायसेन जिले में कितने के मकान गिरे, कितने के घरों में पानी भरने से सामग्री, अनाज खराब हुआ? उनकों किस-किस योजना में कितनी रा‍हत राशि का भुगतान हुआ? (ग) 1 जून 2019 से 30 नवंबर 2019 तक की अवधि में सर्पदंश, पानी में डूबने, कुआं में गिरकर मृत्‍यु होने के कितने आवेदन प्राप्‍त हुये तथा उनकों भारत सरकार तथा राज्‍य सरकार की किस-किस योजना में कितनी राशि का भुगतान हुआ कितने को भुगतान नहीं हुआ तथा क्‍यों? (घ) 1 जून 19 से 30 नवंबर 2019 तक की अवधि में आर.बी.सी. 6-4 के अन्‍तर्गत राहत राशि का भुगतान के संबंध में प्रश्‍नकर्ता विधायक के क्‍या पत्र प्राप्‍त हुए तथा उन पर क्‍या कार्यवाही की गई? पत्रों के जबाब दिये गए? यदि नहीं, तो कारण बताएं। कितने को राशि का भुगतान किया, कितने को राशि का भुगतान नहीं किया तथा क्‍यों? कब तक राशि का भुगतान करेंगे?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) 88365 किसानों की फसलों का नुकसान हुआ है। तहसीलवार, ग्राम पंचायतवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। जिन किसानों का नुकसान हुआ है उनको आर.बी.सी. 6-4 के प्रावधानों के अनुसार स्‍वीकृत राशि 91,44,22,905/- रूपये में से 16,92,54,238/- रूपये का भुगतान हुआ है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) 9222 मकान क्षतिग्रस्‍त हुये हैं। 40 घरों में पानी भरने से सामग्री अनाज खराब हुआ है। प्रभावितों को आर.बी.सी. 6-4 के तहत 3,34,85,608/- रूपये राहत राशि का भुगतान हुआ है। (ग) जिले में सर्पदंश से 51, पानी में डूबने से 50, कुएं में गिरने से 04 व्‍यक्तियों की मृत्‍यु होने के आवेदन प्राप्‍त हुए तथा उनको राज्‍य शासन द्वारा आर.बी.सी. 6-4 के प्रावधानों के अनुसार 4 लाख प्रति व्‍यक्ति के मान से कुल 4,20,00,000/- रूपये का भुगतान किया गया है। 10 आवेदनों में भुगतान प्रचलित है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) जी हाँ। 09 पत्र प्राप्‍त हुए थे। 3 आवेदन पत्र पात्र होने से राशि स्‍वीकृत की गई। शेष 06 आवेदन पत्र जांच में अपात्र होने से अस्‍वीकृत किये गये। जी हाँ माननीय विधायक महोदय जी को जानकारी प्रे‍षित की गई। पात्र पाये गये 03 कृषकों को 27020/- रूपये की राशि स्‍वीकृत की गई। 02 कृषक भुगतान हेतु शेष है। भुगतान की समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं।

मंदसौर में बाढ़ से हुये नुकसान एवं मुआवजा

[राजस्व]

9. ( क्र. 86 ) श्री यशपाल सिंह सिसौदिया : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजस्व विभाग द्वारा मंदसौर जिले में 1 जुलाई 19 के बाद वर्षा ऋतु में अत्यधिक वर्षा एवं बाढ़ से कितनी फसलों का एवं अन्य नुकसान का आंकलन किया गया? आंकलन रिपोर्ट की प्रतिलिपि उपलब्ध करायें। (ख) नुकसान आंकलन से मंदसौर विधानसभा क्षेत्र में कितना मुआवजा किस-किस पंचायत में दिया गया? (ग) मा. मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार मंदसौर विधान सभा क्षेत्र में कितने कृषकों के 2 लाख तक के कर्जे पूर्ण रूप से माफ़ हो गये हैं, कितनों के शेष हैं? कितने कर्जे माफ़ होने के कारण बैंकों से डिफाल्टर हो गये हैं?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) मंदसौर जिले मे सोयाबीन, मक्‍का, उड़द, मूंग, तुअर, मूंगफली एवं अन्‍य नुकसान जनहानि, पशुहानि, मकान हानि, रोड, ब्रिज इत्‍या‍दि का नुकसान हुआ है। आंकलन रिर्पोट पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''', '''', '''', '''' अनुसार है। (ख) मंदसौर विधानसभा क्षेत्र की 74 ग्राम पंचायतों, 1 मंदसौर नगर पालिका एवं 1 नगर पंचायत नगरी कुल 76 में नुकसानी आंकलन अनुसार मकान हानि पर 14.00 करोड़, पशु हानि पर 0.48 करोड़, जन-हानि पर 0.56 करोड़, एवं फसल हानि पर 65.91 करोड़ कुल रूपये 80.95 करोड़ की राहत राशि दी गई है। विस्‍तृत जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) मंदसौर जिले में 10361 कृषकों के 2.00 लाख तक के कर्जे पूर्ण रूप से माफ किये है एवं 38319 कृषक शेष है। कर्जा माफ होने के कारण कोई कृषक बैंक डिफाल्‍टर नहीं होता है।

शासकीय भूमि पर अतिक्रमण हटाना

[राजस्व]

10. ( क्र. 127 ) श्री बिसाहूलाल सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला अनूपपुर की तहसील अनूपपुर के ग्राम फुनगा तथा भालूमाड़ा (पसान) में कौन-कौन व्‍यक्तियों द्वारा राजस्‍व की शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर अवैध निर्माण करा लिया गया है। प्रशासन द्वारा उक्‍त अतिक्रमण को हटाये जाने हेतु अब तक क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? अतिक्रमणकर्ताओं के नाम पता सहित जानकारी उपलब्‍ध करावें। (ख) प्रश्नांश (क) में वर्णित भूमि पर अतिक्रमण होने के कारण शासकीय अस्‍पताल में ग्रामीणों को आने जाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है तथा उक्‍त भूमि पर से अवैध अतिक्रमण हटाये जाने हेतु प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य द्वारा बार-बार जिला प्रशासन से अनुरोध करने के उपरांत भी अभी तक अतिक्रमण न हटाये जाने का क्‍या कारण है? कारण सहित बतावें तथा उक्‍त अतिक्रमण कब तक हटा लिया जायेगा।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जिला अनूपपुर की तहसील अनूपपुर के ग्राम फुनगा तथा भालूमाडा (पसान) के अन्तर्गत शासकीय भूमि में अतिक्रमणकर्ताओं के नाम, पता तथा बेदखल किये जाने की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ एवं ब अनुसार है। अतिक्रमण हटाने के संबध में म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत प्रकरण दर्ज कर बेदखली की कार्यवाही संबंधित तहसीलदार द्वारा की गई है। (ख) ग्राम फुनगा की आ.ख.न. 441/1/ख/4 रकवा 1.000 हे. के अंश रकवा में निर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में जाने हेतु 02 रास्ते निर्मित है जो लगभग 12-15 फिट चौड़ा है, जिसमे ग्रामीणों को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में जाने हेतु किसी भी प्रकार की कोई भी कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ रहा है एवं तीसरे रास्ते हेतु मांग की जा रही है, जो स्वास्थ्य केन्द्र के ठीक सामने मुख्य सड़क से लगी हुई भूमि खसरा नम्बर 436/1/क/1/2 रकवा 0.032 हेक्टेयर आदिवासी भूमि स्वामी के स्वत्व की भूमि है, यह भूमि खाली है, मुख्य मार्ग से अस्पताल तक इस खाली भूमि से होकर आवागमन होता है। यह भूमि स्वामित्व की भूमि होने के कारण वैधानिक रूप से रास्ता नहीं बनाया जा सकता है। इस भूमि में कोई अतिक्रमण नहीं है।

कोयला उत्‍खनन हेतु जमीन का अधिग्रहण

[राजस्व]

11. ( क्र. 128 ) श्री बिसाहूलाल सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जिला अनूपपुर में एस.ई.सी.एल. (साउथ ईस्‍टर्न कोल्‍ड फील्‍ड लिमिटेड) जमुना-कोतमा क्षेत्र में आमाडाड में खुली खदान (ओपन काष्‍ट) कोयला उत्‍खनन हेतु किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। यदि हाँ, तो कौन-कौन से ग्रामों के कितने किसानों की कितनी जमीन अधिग्रहित की गई थी? जमीन अधिग्रहण के समय एस.ई.सी.एल. द्वारा जमीन अधिग्रहण संबंधी क्‍या समझौता किया गया था? जमीन अधिग्रहित किये गये किसानों के नाम, भूमि का क्षेत्र, समझौते की प्रति उपलब्‍ध करावें। (ख) क्‍या जमीन अधिग्रहित करने संबंधी यह भी समझौता हुआ था कि जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की जायेगी उसके परिवार से एक सदस्‍य को जमीन का मुआवजा एवं नौकरी प्रदान की जायेगी? यदि हाँ, तो किन-किन किसानों को कितना मुआवजा तथा नौकरी प्रदान की गई? नामवार, ग्रामवार जानकारी उपलब्‍ध करावें। (ग) क्‍या कुछ व्‍यक्तियों द्वारा अवैध तरीके से सांठगांठ कर फर्जी वसीयतनामा बनाकर फर्जी तरीके से अपने परिवार के लोगों को एस.ई.सी.एल. में नौकरी प्राप्‍त करा चुके हैं? यदि हाँ, तो ऐसे लोगों के विरूद्ध शासन क्‍या कार्यवाही करेगा? क्‍या फर्जी तरीके से नौकरी दिलाने एवं फर्जी वसीयतनामा बनाने वालों के खिलाफ चौकी रामनगर, थाना बिजुरी एवं थाना कोतमा, जिला अनूपपुर में प्रकरण पंजीबद्ध किये गये थे? यदि हाँ, तो किन-किन लोगों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? नाम, पता सहित जानकारी उपलब्‍ध करावें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। जिला अनूपपुर के कोतमा अनुभाग अंतर्गत ग्राम आमाडांड खुली खदान परियोजना हेतु ग्राम आमाडांड एवं कुहका की 702.379 हे. भूमि का अधिग्रहण वर्ष 2004, 2006 एवं 2014 में किया गया है। भूमि का विवरण एवं विस्‍तृत जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र- 1, 2 एवं 3 अनुसार  है। (ग) एस.ई.सी.एल. के प्रतिवेदन अनुसार अनुभाग अंतर्गत माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के आदेश दिनांक 25.01.2018 के परिपालन में जिला स्तरीय पुनर्वास समिति द्वारा कलेक्टर अनूपपुर की अध्यक्षता में रोजगार की स्क्रूटनी की जा रही है, माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार सी. आई.एल. नीति 2008 पैकेज डील के तहत स्वीकृत रोजगार की स्क्रूटनी की कार्यवाही प्रकियाधीन है। स्क्रूटनी के दौरान फर्जी पाये जाने पर प्रावधानों के अनुसार एस.ई.सी.एल द्वारा कार्यवाही की जावेगी। थाना एस.ई.सी.एल.जमुना कोतमा क्षेत्र द्वारा कोई प्रकरण दर्ज नहीं हैं।

रेल्‍वे द्वारा अधिग्रहीत भूमि का मुआवजे एवं शासकीय सेवा का लाभ

[राजस्व]

12. ( क्र. 134 ) श्री शरदेन्दु तिवारी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या रीवा से सीधी एवं सिंगरौली रेल मार्ग हेतु भू‍मि अधिग्रहण का कार्य विगत 5 वर्षों से प्रारंभ है? यदि हाँ, तो चुरहट विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामों में से किन-किन भू-स्‍वामियों की भूमि का अधिग्रहण हुआ है और इन्‍हें कितना मुआवजा दिया गया है? उसकी सूची वर्षवार, ग्रामवार, भूमि स्‍वामीवार पृथक-पृथक वर्तमान स्थिति तक बतावें। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार भूमि अधिग्रहण के संबंध में जिला प्रशासन द्वारा रेल्‍वे मंत्रालय के अधिकारियों से किन-किन शर्तों पर अधिग्रहण की सहमति दी गयी थी? (ग) क्‍या अधिग्रहित भू-स्‍वामी के परिवारजनों को रेल्‍वे में शासकीय सेवा में लिए जाने हेतु प्रक्रिया की गयी है? यदि हाँ, तो गांववार वर्षवार, भूमि स्‍वामीवार विवरण दें। (घ) क्‍या 1 वर्ष पूर्व 2018-19 एवं सितम्‍बर 19 तक के अधिग्रहित भू-स्‍वामी के परिवारजनों को शासकीय सेवा में रेल्‍वे द्वारा नहीं लिया गया है जिसकी शिकायत प्रश्‍नकर्ता द्वारा जिलाधीश सीधी से की गयी है? यदि हाँ, तो जिला प्रशासन एवं शासन द्वारा क्‍या कार्यवाही की गयी है?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) रीवा-सीधी-सिंगरौली रेल मार्ग हेतु भूमि अधिग्रहण का कार्य वर्ष 2011-12 से प्रारंभ है। चुरहट विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत प्रभावित ग्रामों के भूमिस्वामियों के भूमि का मुआवजा दिया गया हैजानकारी  संलग्न परिशिष्ट पर है(ख) जिले में भूमि अधिग्रहण के संबंध में भू-अर्जन अधिकारी के द्वारा भूमि-अर्जन पुनर्वासन और पुनर्व्‍यवस्थापन में उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 के धारा-23 के अनुरुप अर्जित भूमि का प्रतिकर निर्धारण कर अवार्ड पारित किया गया। रेलवे मंत्रालय के अधिकारियों को किसी विशिष्ट शर्त पर अधिग्रहण की सहमति नहीं दी गई है बल्कि अधिनियम के शेड्यूल 2 (4) के तहत प्रभावित परिवारों को उनके आवेदन पत्र के आधार पर रेलवे में नियोजन हेतु प्रमाण पत्र जारी किए गए है। (ग) अधिग्रहण से प्रभावित परिवारजनों को पश्चिम मध्य रेलवे के द्वारा भू-अर्जन अधिकारियों द्वारा जारी प्रमाण पत्रों के आधार पर सेवा में लिया गया है। पश्चिम मध्य रेलवे से प्राप्त जानकारी अनुसार रीवा सीधी रेल लाईन हेतु वर्ष 2015 में 118 वर्ष 2016 में 52 वर्ष 2017 में 103 वर्ष 2018 में 180 वर्ष 2019 में 88 इस प्रकार कुल 541 लोगों को रेलवे सेवा में नियुक्ति की गई है। (घ) वर्ष 2018 में एवं वर्ष 2019 में रेलवे के द्वारा नियोजन की कार्यवाही की गई है। शिकायत के अनुक्रम में पश्चिम मध्‍य रेलवे को निर्देशित किया गया है।

परिशिष्ट - "सात"

नलकूप खनन में भ्रष्‍टाचार

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

13. ( क्र. 146 ) श्री सुरेश धाकड़ : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शिवपुरी एवं पोहरी विकासखण्‍ड में जनवरी 2016 से नवम्‍बर 2019 तक किन-किन ग्रामों में विभाग एवं ठेकेदार द्वारा नलकूप खनन किये गये? खनित नलकूपों की लोकेशन सहित सूची दें? (ख) उक्‍त खनन किये गये नलकूपों में से किन-किन नलकूपों का किस-किस मद से भुगतान किया गया? विभाग एवं ठेकेदारों की पृथक-पृथक जानकारी दें? (ग) शिवपुरी जिले में वर्ष 2016 से नवम्‍बर 2019 तक खनन कार्य हेतु लगाई गई निविदाओं में किन-किन ठेकेदारों द्वारा भाग लिया गया? ठेकेदारों द्वारा प्रस्‍तुत रिग मशीन के पंजीयन की प्रति एवं उक्‍त मशीन का भौतिक सत्‍यापन प्रमाण पत्र की प्रति सहित जानकारी दें। (घ) उक्‍त अवधि में शिवपुरी एवं पोहरी उपखण्‍ड के अंतर्गत ठेकेदारों द्वारा नलकूप खनन किये गये है? खनन किये गये समस्‍त नलकूपों के कार्यादेश का विवरण देवें।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( श्री सुखदेव पांसे ) : (क) एवं (ख) ठेकेदार द्वारा खनित नलकूपों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार एवं विभागीय रिग मशीनों द्वारा खनित नलकूपों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-3 एवं 4 अनुसार है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है।

खण्डवा जिले में कुपोषण

[महिला एवं बाल विकास]

14. ( क्र. 158 ) श्री देवेन्द्र वर्मा : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) विगत दिनों खण्डवा जिले में आंगनवाड़ी केन्द्रों का पोषण आहार कहाँ और कितनी मात्रा में नाले में होना पाया गया था? इसमें कौन जिम्मेदार है? (ख) क्या प्रदेश सरकार कुपोषण दूर करने के लिये प्रतिबद्ध है? यदि हाँ, तो लोकायुक्त की कार्यवाही प्रचलित होने पर भी जिला कार्यक्रम अधिकारी की पदस्थापना खण्डवा जिले में किस आधार पर की गई है? (ग) जिले में विगत पाँच वर्षों में कुपोषण दूर करने के उपायों पर वर्षवार कितनी राशि व्यय की गई है? (घ) क्या वर्तमान में निलंबित जिला अधिकारी द्वारा स्थानान्तरण नीति के विरुद्ध मान. प्रभारी मंत्री की अनुशंसा के विपरित स्वेच्छाचारिता से विभाग में स्थानान्तरण आदेश कलेक्टर को भ्रमित कर जारी कराये गये है? (ड.) यदि हाँ, तो क्या ऐसे अधिकारी के विरुद्ध कुपोषण को कम करने की योजना में गंभीर लापरवाही बरतने एवं मनमाने ढंग से स्थानान्तरण करने की उच्चस्तरीय जाँच कराई जाएगी? यदि हाँ, तो कब तक?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती इमरती देवी ) : (क) खण्डवा जिले की आदिवासी परियोजना खालवा के ग्राम मल्हारगढ़ के पास 15 बैग (228 किलोग्राम) पोषण आहार लावारिस अवस्था में वर्षा से खराब पाये गये। इसके लिये अनुबंधित परिवहनकर्ता चावला रोड लाईन्स कहारवाड़ी खण्डवा प्रोपराइटर मोहम्मद निजामुद्दीन जाटू जिम्मेदार थे, जिनका अनुबंध निरस्त कर पूरक पोषण आहार की क्षतिपूर्ति राशि रू. 13839/- की वसूली की गई है। (ख) जी हाँ। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) विगत पाँच वर्षों में कुपोषण बचाव के कार्यों पर व्यय की गई राशि का वर्षवार विवरण निम्नानुसार है :-

क्र.

वर्ष

(राशि लाख रूपयों में) व्यय राशि

1

2014-15

1210.41

2

2015-16

1227.37

3

2016-17

1179.76

4

2017-18

1069.80

5

2018-19

1032.53

 

कुल योग

5719.87

(घ) नहीं। शासन के निर्देशानुसार जिला स्तर पर गठित स्थानांतरण बोर्ड मा. प्रभारी मंत्रीजी, जिला कलेक्टर, जिला कार्यक्रम अधिकारी की नस्ती पर लिए गए निर्णय/अनुमोदन अनुसार जिला स्तर के कर्मचारियों का एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में स्थानांतरण किया गया है। किसी को भ्रमित करने की स्थिति नहीं है। (ड.) प्रश्नांश (घ) के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - "आठ"

आवंटन एवं व्‍यय की जानकारी

[महिला एवं बाल विकास]

15. ( क्र. 173 ) श्री रामलाल मालवीय : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) विधानसभा सत्र जुलाई 2019 के प्रश्न क्र.1569 दिनांक 17.07.2019 को प्रस्तुत जानकारी अनुसार (कॉलम 3) राशि आहरण देयक क्र. 38, 54, 69, 92, 93, 137, 152, 184, 185, 190, 200, 206, 207, 208, 215, 231, 255, 288, 299, 300, 310, 322, 232, 324, 333, 340, 379, 403, 409, 429, 435, 436, 437, 441, 442, 467, 485, 486, 511, 523, 524, 527, 531, 567, 577, 578, 579, 584, 585, 589, 590, 607, 610, 612,620, 629, 630, 641, 642, 649, 651, 661, 665, 666, 667, 668, 672, 673, 674, 687, 688, 689, 690, 697, 698, 703, 704707, 710, 712, 713, 719, 720, 721, 722, 723, 724, 725, 726, 727, 728, 729, 730, 731, 732, 733, 734, 735, 736, 744, 745, 747, 748, 749, 750, 757, 758, 759, 760, 761, 762, 576, की राशि का व्यय किन योजनाओं के लिए, किन किन दिशा निर्देशों के रूप में किया गया? (ख) प्रश्नांश (क) के उक्त देयकों के व्यय से पूर्व किस प्रक्रिया को अपनाया गया है? राशि का भुगतान किस रूप में किस फर्म/व्यक्ति आदि को किया गया है? योजनाओं के क्या दिशा निर्देश थे?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती इमरती देवी ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) प्रश्नांश (क) के उक्त देयकों के व्यय हेतु संचालनालय से समय-समय पर प्राप्त निर्देशों एवं म.प्र. कोषालय संहिता, म.प्र. वित्तीय संहिता एवं भंडार क्रय नियम अनुसार कार्यवाही की गई है। राशि का भुगतान जिला कोषालय उज्जैन द्वारा ई-पेमेंट के माध्यम से किया गया है। राशि भुगतान जिन फर्म/व्यक्तियों को किया गया है उनकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 के कॉलम 8 में अंकित है। योजनाओं के संबंध में दिशा निर्देश जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 के कॉलम 7 में अंकित है विस्तृत निर्देश  पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है।

डामर से संबंधित संयंत्र की भूमि का डायवर्सन

[राजस्व]

16. ( क्र. 186 ) श्रीमती नीना विक्रम वर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या धार विधानसभा क्षेत्र के ग्राम नियामतखेड़ी में डामर से संबंधित एक संयंत्र स्थापित है? यदि हाँ, तो क्या इस हेतु जिला प्रशासन से विधिवत समस्त अनुमतियां प्राप्त की गई थी? यदि हाँ, तो कौन-कौन सी? क्या ग्राम पंचायतों से भी एन.ओ.सी. प्राप्त की गई है? (ख) यह संयंत्र जिस भूमि पर निर्मित हुआ है उसका खसरा नम्बर क्या है तथा इस भूमि को कृषक से कौन से वर्ष में क्रय किया गया एवं भूमि का कितने वर्ष पश्चात् डायवर्सन स्वीकृत किया गया? क्या डायवर्सन नियम विरूद्ध हुआ है? यदि नहीं, तो स्पष्ट करें। (ग) क्या प्रदूषण बोर्ड व जिला प्रशासन द्वारा उक्त संयंत्र पर माह नवम्बर 2019 में कार्रवाई करते हुए इसे बंद करवाया है? यदि हाँ, तो संयंत्र में क्या विसंगतियां पायी गयी तथा प्रकरण में किन-किन धाराओं में किसे आरोपी बनाया गया? (घ) क्या इस प्रकार प्रदूषण फैलाने वाली इकाईयों को औद्योगिक क्षेत्र से दूर ग्रामीण रहवासी क्षेत्र में स्थापित किये जाने पर जिला प्रशासन विवेचना कर कोई कार्रवाई करेगा?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी नहीं। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) यह संयंत्र ग्राम उटावद की भूमि खसरा नम्बर 535/4/1/2 रकवा 0.862 हेक्टेयर पर निर्मित है। इस भूमि को वर्ष 2017 में जुगल किशोर पिता वल्लभजी जायसवाल जाति कलाल निवासी ग्राम-मालीपुरा तहसील व जिला धार, हा.मु. आष्टा जिला सिहोर द्वारा क्रय किया गया है। उपरोक्त भूमि का डायवर्सन नहीं किया गया है, बल्कि पटवारी रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय अनुविभागीय दण्डाधिकारी, धार द्वारा राजस्व प्रकरण क्रमांक 113/अ-2/2019-20 आदेश दिनांक 24/08/2019 में म.प्र. भू-राजस्व संहिता की धारा 59 (9) के अंतर्गत असेसमेंट एवं अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया है। (ग) जी, नहीं। प्रश्नांश के शेष भाग का उत्तर ही उत्पन्न नहीं होता है। (घ) प्रदूषण फैलाने वाले संयंत्र के विरूद्ध तहसीलदार, तहसील धार द्वारा अनावेदक जुगल किशोर पिता वल्लभजी जायसवाल, जाति कलाल, निवासी ग्राम मालीपुरा तहसील व जिला धार, हा.मु. आष्टा जिला सीहोर के विरूद्ध धारा 133 पब्लिक न्यूज के तहत कार्यवाही किये जाने हेतु न्यायालय तहसीलदार, धार के प्रकरण क्रमांक 487/बी-121/19-20 दिनांक 06/11/19 द्वारा प्रस्ताव अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अनुभाग- धार को प्रेषित किया गया। जिस पर अनावेदक के विरूद्ध न्यायालय अनुविभागीय दण्डाधिकारी धार में अपराधिक प्रकरण क्रमांक 02 दर्ज कर अनावेदक के विरूद्ध दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 (1) के अंतर्गत प्रारंभिक आदेश दिनांक 15/11/2019 जारी किया जाकर, जवाब प्रस्तुत करने हेतु प्रकरण में पेशी दिनांक 10/12/2019 नियत है।

अवैध शराब का परिवहन वाहन

[वाणिज्यिक कर]

17. ( क्र. 188 ) श्रीमती नीना विक्रम वर्मा : क्या वाणिज्यिक कर मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या धार नगर व आस-पास के क्षेत्र में शासकीय शराब की दुकानों के अतिरिक्त छोटी-छोटी किराना दुकानों पर भी शराब की अवैध बिक्री होती है? (ख) यदि हाँ, तो क्या दिनांक 3 नवम्बर 2019 को नौगांव (धार) थाना क्षेत्र में अवैध रूप से शराब परिवहन करते हुए एक बोलेरो वाहन को क्षेत्रवासियों द्वारा पकड़ कर पुलिस को सुपुर्द किया था? (ग) यदि हाँ, तो उक्त वाहन से कितनी पेटी शराब किस-किस ब्राण्ड की जब्त की गई तथा उक्त वाहन किस शराब दुकान/फेक्ट्री से शराब भरकर किस प्रयोजन से किन स्थानो/व्यक्तियों को आपूर्ति करने जा रहा था? (घ) अवैध परिवहन करने वाली बोलेरो का मालिक कौन है, उसके विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई तथा इस प्रकरण में किन्हे आरोपी बनाया गया है? एवम्‌ विभाग द्वारा तत्संबंधी क्या कार्रवाई की गई है? (ड.) क्या धार विधानसभा के इण्डोरामा क्षेत्र में भी इसी प्रकार अवैध वाहनों द्वारा अवैध शराब का परिवहन किया जाकर आस-पास के गांवों में अवैध विक्रय किया जा रहा है, विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की जा रही है?

वाणिज्यिक कर मंत्री ( श्री बृजेन्द्र सिंह राठौर ) : (क) जी नहीं। धार नगर व आस-पास के क्षेत्र में शासकीय शराब की दुकानों के अतिरिक्‍त छोटी-छोटी किराना दुकानों पर भी शराब की अवैध बिक्री नहीं होती है। (ख) जी नहीं, शेष प्रश्‍नांश के बारे में थाना प्रभारी थाना नौगांव, जिला धार से प्राप्‍त जानकारी अनुसार दिनांक 03.11.2019 को सूचना के आधार पर मायापुरी कालोनी रेती मंडी धार के पास खड़ी बोलेरो वाहन क्रमांक एमपी-11 सीसी-2077 से अवैध रूप से 132 लीटर अंग्रेजी शराब जप्‍त की गई, जिसे क्षेत्रवासियों द्वारा पकड़कर सुपुर्द नहीं किया गया था। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संबंध में जप्‍त वाहन बोलेरो वाहन क्रमांक एमपी-11-सीसी-2077 से जिसमें मेजिक मूमेन्‍ट 1 पेटी, मेक्‍डावल 1 पेटी, रॉयल चैलेन्‍ज 2 पेटी, रॉयल स्‍टेज 2 पेटी, ऑफीसर च्‍वाइस ब्‍लू 2 पेटी, फाक्‍स 3 पेटी तथा मेक्‍डावल 5 पेटी, इस प्रकार विभिन्‍न ब्राण्‍ड की 16 पेटी विदेशी मदिरा जप्‍त की गई है तथा आरोपी चालक की तलाश की जा रही है एवं प्रकरण पुलिस थाना नौगांव, जिला धार के अधीन विवेचनाधीन है। (घ) थाना प्रभारी थाना नौगांव से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार वाहन स्‍वामी की जानकारी परिवहन विभाग की वेबसाईट के आधार पर सुरजीत सिंह पिता मोहनसिंह सलूजा, निवासी 207, होल्‍कर अपार्टमेंट माणिकबाग रोड इन्‍दौर होना पाई गई। पुलिस थाना नौगांव जिला धार द्वारा प्रकरण क्रमांक 363/2019 पंजीबद्ध किया जाकर, विवेचनाधीन होकर वाहन स्‍वामी की तलाश जारी है। (ड.) सहायक जिला आबकारी अधिकारी वृत्‍त सागौर द्वारा प्रस्‍तुत प्रतिवेदन अनुसार धार विधानसभा के इंडोरामा क्षेत्र में अवैध वाहनों द्वारा अवैध शराब का परिवहन एवं विक्रय के प्रकरण प्रकाश में नहीं आये हैं।

शासकीय भूमि पर निर्माण

[राजस्व]

18. ( क्र. 193 ) श्री संजय शर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रश्नकर्ता द्वारा दिनांक 17 जुलाई 2019 को प्रश्न क्र. 1210 द्वारा तेंदूखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत लिंगा के ग्राम खामघाट की शासकीय भूमि के सम्बंध में पूछे गये प्रश्न के उत्तर में 1975-76 राजस्व पुस्तक परिपत्र 4 (अ) के तहत पट्टा आवंटित किया जाना प्रतीत होता है की जानकारी दी है? तो पट्टा आवंटित किया जाना प्रतीत होता है से क्या तात्पर्य है? (ख) जब पट्टेधारियों को बिना शासन की अनुमति के भूमि विक्रय का अधिकार नहीं है, तो 12 व्यक्तियों के नाम से शासकीय भूमि कैसे भूमि स्वामी हक में दर्ज हुई? क्या अभिलेखों की विस्तृत जाँच कर ली गई है? यदि हाँ, तो स्पष्ट करें इसके लिये कौन-कौन लोग दोषी हैं एवं उनके विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई? (ग) प्रश्न के उत्तर में जानकारी दी गई है कि 134.565 हेक्टेयर भूमि राजस्व विभाग के नाम दर्ज होकर सुरक्षित है, जानकारी सत्‍य है, क्या वर्तमान में इस 134.565 हेक्टेयर भूमि का भी विक्रय कर भूमि स्वामी हक भू-माफियाओं को दे दिया गया है? यदि हाँ, तो भूमि स्वामियों के नाम एवं रकवा सहित जानकारी प्रदान करें। (घ) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के प्रकाश में बतावें कि उक्त जाँच किस अधिकारी द्वारा की गई है? जाँच में क्या-क्या तथ्य उजागर हुये? जाँच के तथ्यों सहित जाँच प्रतिवेदन उपलब्ध करावें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) विस्‍तृत जांच की कार्यवाही प्रचलित है। जांच पश्‍चात ही सुनिश्चित होगा कि उक्‍त पट्टा राजस्‍व पुस्‍तक परिपत्र 4 (अ) के अनुसार ही पात्रों को आवंटित हुए है अथवा नहीं। इस कारण प्रतीत शब्‍द लिखा गया है। (ख) विस्‍तृत जांच की कार्यवाही प्रचलित है। (ग) प्रश्‍नांकित भूमि राजस्‍व विभाग के पास सुरक्षित है। (घ) कलेक्‍टर न्‍यायालय में 08 प्रकरणों में कार्यवाही प्रचलित है। जांच में दोषी पाए जाने पर दोषी अधिकारी/कर्मचारी पर नियमानुसार कार्यवाही की जाती है।

राजस्‍व भूमि की उपलब्‍धता

[राजस्व]

19. ( क्र. 197 ) श्री आशीष गोविंद शर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) देवास जिले की कन्‍नौद एवं खातेगांव तहसील में किन-किन ग्राम पंचायतों में विभिन्‍न विभागीय निर्माण कार्यों के लिये राजस्‍व भूमि उपलब्‍ध कराने हेतु मांग पत्र/आवेदन संबंधित तहसीलदार के पास लंबित है? प्रश्‍न दिनांक तक की जानकारी देवें। (ख) क्‍या अधिकांश गांवों में निर्माण कार्यों के लिये शासकीय भूमि उपलब्‍ध नहीं है? यदि हाँ, तो उन ग्रामों के नाम उपलब्‍ध करायें, जहां शासकीय जमीन शेष नहीं है। (ग) वर्ष 2018 एवं 2019 में क्षेत्र की किन ग्राम पंचायतों में शासकीय भूमि अतिक्रमण मुक्‍त करवाकर स्‍कूल, हॉस्पिटल का निर्माण करवाया गया? ग्राम पंचायतों का नाम एवं कार्य बतायें। (घ) वर्तमान में सर्वाधिक रिक्‍त शासकीय भूमि किस ग्राम पंचायत में उपलब्‍ध है? रकवा बतायें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) कोई मांग पत्र लंबित नहीं है। (ख) जी नहीं, शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जिला देवास की तहसील कन्नौद में वर्ष 2018 एवं 2019 में शासकीय भूमि अतिक्रमण मुक्त करवाकर स्कूल, हॉस्पिटल का निर्माण नहीं करवाया गया। वर्ष 2019 में तहसील खातेगांव की ग्राम पंचायत विक्रमपुर में हायर सेकेण्डरी स्कूल, ग्राम पंचायत हरणगांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हेतु शासकीय भूमि अतिक्रमण मुक्त कराई जाकर निर्माण कार्य प्रचलित है। (घ) तहसील कन्नौद के ग्राम ननासा में सर्वाधिक सर्वे नम्बर 36/1 रकवा 33.53 हेक्टेयर उपलब्ध है। तथा तहसील खातेगांव की ग्राम पंचायत पुरोनी, विक्रमपुर एवं सोमगांव में 10 हेक्टेयर तक भूमि उपलब्ध है।

ओव्‍हरलोड एवं बिना नंबर प्‍लेट वाहन

[परिवहन]

20. ( क्र. 198 ) श्री आशीष गोविंद शर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) परिवहन विभाग द्वारा कितने दिनों में आकस्मिक चैकिंग इस मार्ग पर की जाती है वर्ष 2019 में कितनी बार भारी वाहनों, ओव्‍हरलोड डंपरों एवं बिना नंबरों के डंपरों पर कार्यवाही की गई है? (ख) क्‍या प्रत्‍येक वाहन के अगले एवं पिछले हिस्‍से में गाड़ी का नंबर स्‍पष्‍ट अक्षरों में दिन एवं रात्रि‍ में आसानी से दिखना चाहिये एवं डंपरों की बाडी में अतिरिक्‍त क्षमता वृद्धि हेतु शटर लगाई जा सकती है? (ग) यदि नियमों में अस्‍पष्‍ट नंबर प्‍लेट और अतिरिक्‍त भार क्षमता वृद्धि हेतु बनावट परिवर्तन करना अपराध है, तो विभाग ने ऐसे मामलों में क्‍या कार्यवाही विगत 3 वर्षों में की है?
राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) परिवहन विभाग द्वारा राष्‍ट्रीय राजमार्ग 59-A इन्‍दौर-बैतूल की समय-समय पर आकस्मिक चैकिंग की जाती है। वर्ष 2019 में विभाग द्वारा ओव्‍हरलोड डंपरों एवं बिना नंबरों के डंपरों सहित अन्‍य वाहनों की चैकिंग करते हुये 12 वाहनों के विरूद्ध चालानी कार्यवाही की गई हैं। (ख) जी हाँ। केन्‍द्रीय मोटरयान नियम 1989 के नियम 50 में दिये गये प्रावधान अनुसार वाहनों पर नंबर अंकित किया जाता है। जिसमें वाहन के पिछले एवं आगे भाग पर स्‍पष्‍ट रूप से वाहन का नंबर उपदर्शित हो सकें। वाहन निर्माता द्वारा विनिर्मित वाहन पर किसी भी प्रकार से अतिरिक्‍त भाग का निर्माण नहीं किया जा‍ सकता। (ग) जी हाँ। विभाग द्वारा गत तीन वर्षों में ऐसे वाहनों पर निम्‍नानुसार कार्यवाही की गई :-

स.क्र.

वर्ष

चालान संख्‍या

राशि (रूपये में)

01

2017-18

157

1902100

02

2018-19

129

1681840

03

2019-20 (31-10-2019 तक)

12

117900


राजस्‍व अभिलेखों में विभिन्‍न मदों में दर्ज शासकीय भूमि के संदर्भ में

[राजस्व]

21. ( क्र. 208 ) श्री प्रणय प्रभात पाण्डेय : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजस्‍व अभिलेखों में विभिन्‍न मदों में दर्ज शासकीय भूमि के मद परिवर्तन करने के क्‍या नियम प्रक्रिया है? नियमों की छायाप्रति देवें एवं क्‍या राजस्‍व अभिलेखों में पानी की निकासी हेतु नाला मद में दर्ज शासकीय भूमि का मद परिवर्तित कर उसे निजी भूमि स्‍वामी दर्ज किया जा सकता है? यदि हाँ, तो किस नियम के तहत किसके द्वारा किन वैधानिक प्रक्रियाओं से? (ख) ग्राम निमास तहसील बहोरीबंद (नवीन तहसील स्‍लीमनाबाद) जिला कटनी का खसरा 686 (छ: सौ छयासी) वित्‍त वर्ष 2000-2001 तक राजस्‍व अभिलेखों में किस मद पर किसके नाम पर दर्ज था तथा वर्तमान में किसके नाम पर किस मद में कब से दर्ज है? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के संदर्भ में क्‍या खसरा नम्‍बर 686 का स्‍वामित्‍व शासकीय अभिलेखों में नाला मद म.प्र. शासन के स्‍थान पर निजी भूमि स्‍वामी के नाम पर दर्ज होना विधि सम्‍मत है? अगर नहीं तो क्‍या शासन इस प्रकरण की जांच कर, उपरोक्‍त भूमि पुन: मध्‍यप्रदेश शासन के नाम पर दर्ज करेगा? यदि हाँ, तो किस प्रकार से कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 237 में वर्णित प्रावधानों के तहत शासकीय भूमि का मद परिवर्तन किया जा सकता है। संलग्न परिशिष्ट पर है। शासकीय नाला मद में दर्ज शासकीय भूमि का मद परिवर्तित कर उसे निजी भूमिस्वामी हक में दर्ज नहीं किया जा सकता है। (ख) ग्राम निमास रा.नि.मं. स्लीमनाबाद जिला कटनी स्थित भूमि ख.नं. 686 वर्ष 2000-2001 तक राजस्व अभिलेखों में म.प्र.शासन मद पानी में दर्ज था। वर्तमान में उक्त ख.नं. प्रभाष कुमार पिता स्व. विश्वनाथ राजगढ़िया साकिन कटनी के नाम पर भूमिस्वामी मद में दर्ज है। लगातार उक्त भूमिस्वामी के नाम पर दर्ज है। (ग) ग्राम निमास के खसरा क्रमांक-686 के स्वामित्व के संबंध में न्यायालय तहसीलदार स्लीमनाबाद के प्रकरण क्रमांक/0740/बी-121/19-20 संस्थापित कर जांच प्रारंभ कर दी गई है। इस हेतु वर्तमान भूमिस्वामी से स्वत्व संबंधी दस्तावेजों का परीक्षण किया जाना अनिवार्य है। वर्तमान भूमिस्वामी को सुनवाई का अवसर प्रदाय किये जाने के उपरांत गुण-दोषों के आधार पर एवं दस्तावेजों के परीक्षण उपरांत प्रकरण का निराकरण न्यायालीन प्रक्रिया के अनुसार किया जावेगा। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - "नौ"

स्‍टाम्‍प ड्यूटी की राशि का गबन अतिक्रमणकारी के विरूद्ध कार्यवाही

[वाणिज्यिक कर]

22. ( क्र. 255 ) श्री प्रदीप पटेल : क्या वाणिज्यिक कर मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या अतारांकित प्रश्‍न क्र. 780 दिनांक 14.03.2018 के प्रश्नांश (क) एवं (ग) में कॉलोनाईजर को पार्क की भूमि पर हॉस्‍टल का अवैध निर्माण किया जाना एवं हर हाल में रिक्‍त छोड़ी जाने वाली भूमि पर रिक्‍त भूखण्‍डों की रजिस्‍ट्री करवाते हुये पूरा बना बनाया मकान बनाकर बेच दिया जाना पाया गया है? (ख) क्‍या कार्यवाही 14.03.2018 के पश्‍चात कलेक्‍टर एवं जिला दण्‍डाधिकारी सतना के द्वारा प्रश्‍नतिथि तक अपने ही आदेश दिनांक 09.02.2017 के बाद की है? क्‍या प्रश्‍नतिथि तक पार्क पर बने अवैध हॉस्‍टल को तोड़ा गया? अगर नहीं तो क्‍यों? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) में उल्‍लेखित कलेक्‍टर एवं जिला दण्‍डाधिकारी सतना से रिक्‍त भूखण्‍डों की रजिस्‍ट्री करवाकर पूरा बना बनया मकान बेच दिये जाने के आरोपी कॉलोनाइजर को स्‍टाम्‍प ड्यूटी चोरी करने पर उसके विरूद्ध संबंधित थाना क्षेत्र में अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध करवाते हुये स्‍टाम्‍प ड्यूटी एवं पंजीयन शुल्‍क की वसूली प्रश्‍नतिथि तक की है? अगर नहीं की तो कारण दें एवं बतायें कि कब तक कितनी राशि की वसूली कब तक की जायेगी? (घ) क्‍या राज्‍य शासन अवैधानिक कार्य करने वाले कालोनाईजर को संरक्षण प्रदान कर रहा है? अगर नहीं तो प्रश्नांश (क) (ख) (ग) में स्‍पष्‍ट रूप से दोषी पाये जाने एवं कलेक्‍टर सतना के आदेश के बाद भी उक्‍त अवैधानिक निर्माण को कलेक्‍टर सतना/कमिश्‍नर नगर निगम/एस.डी.एम. रघुराजनगर कब तक तोड़ेंगे?

वाणिज्यिक कर मंत्री ( श्री बृजेन्द्र सिंह राठौर ) : (क) जी हाँ। पार्क की भूमि एवं रिक्‍त छोड़ी जाने वाली भूमि पर अवैध आवासीय निर्माण किया जाना पाया गया है जिसके संबंध में नगर तथा ग्राम निवेश विभाग एवं नगर निगम सतना द्वारा संबंधित कॉलोनाइजर के विरूद्ध माननीय न्‍यायालय मुख्‍य न्‍यायिक दण्‍डाधिकारी सतना की कोर्ट में दिनांक 28/02/2019 एवं दिनांक 26/08/2019 को पृथक-पृथक परिवाद दायर किये जा चुके है। रिक्‍त 15 भूखण्‍डों की रजिस्ट्रियां कालोनाइजर द्वारा विभिन्‍न क्रेतागण को फरवरी 2004 से फरवरी 2005 के मध्‍य की है जिनमें से 05 भूखण्‍डों का रजिस्‍ट्री के समय तत्‍कालीन उप पंजीयक द्वारा स्‍थल निरीक्षण के समय मौके पर सभी भूखण्‍ड रिक्‍त ही पाये गये थे। स्‍थल निरीक्षण की टीप तत्‍कालीन उप पंजीयक उप पंजीयक द्वारा तत्‍समय की मिनिट बुक में भी की गई है। चूंकि उप पंजीयक के स्‍थल निरीक्षण के समय नवम्‍बर 2004 एवं फरवरी 2005 में भी भूखण्‍ड रिक्‍त की पाये गये थे इस कारण मकान की जगह भूखण्‍ड की रजिस्‍ट्री कराया जाना नहीं पाया गया तथा मुद्रांक व पंजीयन शुल्‍क (कर) अपवंचन नहीं पाया गया अत: पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग द्वारा इस मामले में कोई कार्यवाही अपेक्षित नहीं है। (ख) कालोनाइजर द्वारा माननीय म.प्र. उच्‍च न्‍यायालय जबलपुर में याचिका क्रमांक 3413/2017 दायर की थी, जिसमें माननीय मध्‍यप्रदेश उच्‍च न्‍यायालय द्वारा पारित आदेश दिनांक 09/01/2018 के पालन में कलेक्‍टर, सतना ने अपने प्रकरण क्रमांक 184/अ-74/2017/2017-18 में दिनांक 01/02/2018 का आदेश पारित करते हुये नगर निगम सतना तथा नगर एवं ग्राम निवेश विभाग सतना को संबंधित कॉलोनाईजर के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने हेतु आदेशित किया गया। शेष कार्यवाही पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग से संबंधित नहीं है। (ग) प्रश्‍नाधीन भूखण्‍ड/मकान की रजिस्‍ट्री के समय मौके पर भूखण्‍ड ही थे। जैसा कि प्रश्‍नांश () के उत्‍तर में अंकित है। स्‍टाम्‍प व पंजीयन शुल्‍क (क‍र) अपवंचन का कोई मामला न होने से स्‍टाम्‍प एवं पंजीयन विभाग द्वारा कोई कार्यवाही अपेक्षित नहीं है। (घ) राज्‍य शासन अथवा किसी शासकीय अधिकारी/कर्मचारी द्वारा उक्‍त कॉलोनाईजर को कोई संरक्षण आदि नहीं दिया गया है।

परिवहन चेक पोस्‍टों पर अवैध वसूली

[परिवहन]

23. ( क्र. 256 ) श्री प्रदीप पटेल : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कार्यालय कलेक्‍टर जिला नीमच के पत्र क्रमांक 731/शिकायत/15 दिनांक 28.08.2015 से आयुक्‍त म.प्र. परिवहन विभाग को पत्र लिखा था? उक्‍त पत्र की एक प्रतिलिपि, प्रमुख सचिव, परिवहन म.प्र./आयुक्‍त वाणिज्‍य कर म.प्र. इंदौर/आयुक्‍त उज्‍जैन संभाग उज्‍जैन/डी.आई.जी. लोकायुक्‍त संगठन, भोपाल/पुलिस अधीक्षक जिला नीमच/क्षे. परिवहन अधिकारी नीमच/अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) जावद को भेजी गयी थी? उक्‍त पत्र पर प्रश्‍नतिथि तक किस-किस सक्षम कार्यालयों के द्वारा किस आदेश क्रमांकों एवं दिनांकों से कब व क्‍या कार्यवाही की गयी? जारी सभी आदेशों/पत्रों की एक-एक प्रतिलिपि उपलब्‍ध करायें। (ख) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के द्वारा रीवा जिले के हनुमना बैरियर पर आम जनमानस के साथ जाकर देखा गया तो पाया गया कि बैरियर पर अवैध रूप से विभिन्‍न स्‍टीकरों/पर्चियों के माध्‍यम से वाहन चालाकों से अवैध वसूली की जा रही है? क्‍या प्रश्‍नकर्ता/विधायक के द्वारा उक्‍त पर्चियों को मीडिया के माध्‍यम से सैकड़ों जनमानस के साथ राजस्‍व एवं पुलिस अधिकारियों के सामने बैरियर पर हो रही अवैध वसूली को उजागर किया था? (ग) पूरे प्रदेश में परिवहन चौकियों पर हो रही अवैध वसूली को रोके जाने एवं परिवहन व्‍यवसायियों के हितों के लिये राज्‍य शासन द्वारा क्‍या-क्‍या निर्णय प्रश्‍नतिथि तक लिये गये हैं? बिन्‍दुवार विवरण उपलब्‍ध करायें। (घ) प्रश्नांश (क) एवं (ख) में उल्‍लेखित घटनाओं के फलस्‍वरूप क्‍या-क्‍या कार्यवाही प्रमुख सचिव परिवहन/परिवहन आयुक्‍त म.प्र. द्वारा प्रश्‍नतिथि तक किस-किस नाम/पदनाम के विरूद्ध किस-किस जारी आदेश क्रमांकों/दिनांकों से की गयी है की एक प्रति उपलब्‍ध कराते हुये दें। अगर नहीं की गयी है तों क्‍यों?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। कलेक्टर नीमच द्वारा पत्र क्रमांक 731 शिकायत 15 दिनांक 28.08.2015 परिवहन आयुक्त को लिखा गया था। शेष प्रश्नांश की जानकारी एकत्रित की जा रही है। (ख) प्रश्नकर्ता माननीय विधायक हनुमना बैरियर पर उपस्थित हुये थे। ऐसी जानकारी प्राप्त हुई है। शेष प्रश्नांश की जानकारी एकत्रित की जा रही है। (ग) यह कहना सही नहीं है कि परिवहन जाँच चौकियों पर अवैध वसूली होती है। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (घ) प्रश्नांश () एवं () में उल्लेखित घटना के संबंध में प्रतिवेदन प्राप्त होने पर तदनुसार अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।

अवैध निर्माण को तोड़ा नहीं जाना एवं अवैध संरक्षण देना

[राजस्व]

24. ( क्र. 259 ) श्री प्रदीप पटेल : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या नगर पालिक निगम सतना के भरहुत नगर स्थित घनश्‍याम बिहार कालोनी के संबंध में दिनांक 14.03.2018 को अतारांकित प्रश्‍न क्र. 780 के भाग (ग) में सदन में दिये उत्‍तर में शासन ने स्‍वीकार किया है कि उक्‍त कालोनाईजर के द्वारा पार्क की भूमि पर हॉस्‍टल का निर्माण किया एवं जो भूमि कालोनी बनाने के समय अनिवार्य रूप से रिक्‍त छोड़ी जानी अत्‍यावश्‍यक थी उस पर अवैध रूप से मकान बनाकर बेच दिये गये हैं? (ख) क्‍या प्रश्नांश (क) में वर्णित कालोनी के संबंध में भी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) तहसील रघुराजनगर ने भी अपनी रिपोर्ट में लेख किया है कि रिक्‍त भूखण्‍डों की रजिस्‍ट्री करवाकर पूरा बना बनाया मकान बेचा गया एवं स्‍टाम्‍प ड्यूटी की चोरी कर ली गई? (ग) क्‍या दिनांक 14.03.2018 को सदन में अतारांकित प्रश्‍न क्र. 780 के प्रश्‍नांश (ख) में भी यह स्‍पष्‍ट लेख है कि उक्‍त कॉलोनाईजर ने नगर तथा ग्राम निवेश विभाग ने नियमों के विपरीत गड़बड़ी पाई? दिनांक 18.03.2019 को घनश्‍याम बिहार कॉलोनी भरहुत नगर सतना का जो जांच प्रतिवेदन उप/सहायक/कार्यपालन यंत्री/कमिश्‍नर नगर निगम सतना एवं संयुक्‍त संचालक वास्‍ते उप संचालक नगर तथा ग्राम निवेश सतना जो तैयार किये उस प्रतिवेदन की एक प्रति दें। (घ) राज्‍य शासन/जिला प्रशासन/कमिश्‍नर नगर निगम सतना कब तक पार्क की भूमि पर बने अवैध हास्‍टल को एवं रिक्‍त पड़ी भूमि पर बनाये गये मकानों को तोड़ेगा? कब तक कालोनाईजर के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण सक्षम थाने में किन-किन धाराओं में दर्ज करवायेगा? अगर नहीं तो क्‍यों?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। (ग) जी नहीं। जाँच प्रतिवेदन  पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) विधि अनुसार कार्यवाही की गई है, समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। कालोनाईजर के विरूद्ध परिवाद पत्र अन्तर्गत धारा 291, 292, 292, 396, 398 एवं 440 म.प्र. नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 के अन्तर्गत माननीय मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

प्रदेश में अतिवृष्टि एवं बाढ़ से प्रभावित किसानों को क्षतिपूर्ति/मुआवजा राशि दिया जाना

[राजस्व]

25. ( क्र. 276 ) श्री शिवराज सिंह चौहान : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों, बाढ़ पीड़ि‍तों को समय-सीमा में राहत राशि उनके खाते में जमा किये जाने के आदेश दिये गये हैं? यदि हाँ, तो कब? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ख) प्रदेश में कितने प्रतिशत किसानों की फसलें नष्‍ट हुई हैं? (ग) क्‍या माह अगस्‍त-सितम्‍बर 2019 में मंदसौर दौरे के दौरान माननीय मुख्‍यमंत्री द्वारा किसानों, बाढ़ प्रभावितों को दी जाने वाली राशि का उल्‍लेख करते हुए कहा गया है कि आर.बी.सी. 6 (4) के प्रावधानों के अनुसार सभी प्रभावित किसानों को 33 से 50 प्रतिशत तक की फसल क्षति पहुँचने पर 08 हजार रूपये से लेकर 26 हजार रूपये प्रति हेक्‍टेयर तथा 50 प्रतिशत से अधिक फसल खराब होने पर 16 हजार से लेकर 30 हजार रूपये तक प्रति हेक्‍टेयर मुआवजा दिया जावेगा? (घ) प्रश्‍नांश (ग) यदि हाँ, तो अभी तक कुल कितनी राशि कितने किसानों के खाते में जमा कराई जा चुकी है? जिन किसानों की फसलें 100 प्रतिशत नष्‍ट हो गई है, उन प्रभावित किसानों को कितनी राशि दिये जाने का निर्णय लिया गया है? यदि नहीं, तो क्‍यों?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। जन-हानि, पशु हानि, मकान हानि के दर्ज प्रकरणों में संपूर्ण स्‍वीकृत राशि का भुगतान के निर्देश दिये गये है। फसल हानि से प्रभावित 41 जिलों में से 14 जिलों में 100% राशि वितरण एवं 27 जिलों में कुल स्‍वीकृत राशि का प्रथम किस्‍त के रूप में 25% राशि का वितरण के निर्देश दिनांक 27/11/2019 के पत्र द्वारा दिये गये है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ख) प्रदेश में कुल 5536517 कृषकों की फसलें नष्‍ट हुई है। (ग) मंदसौर जिले में राजस्‍व पुस्‍तक परिपत्र 6-4 के अनुसार मुआवजा राशि दिये जाने के निर्देश है। (घ) उत्‍तरांश (ग) के प्रकाश में मंदसौर जिले में राशि रूपये 288.47 करोड़ 161912 किसानों को वितरित कर दी गई है। 100% फसल नष्‍ट हुए किसानों को आर.बी.सी. के प्रावधान के अनुसार 520 करोड़ राशि जारी करने का निर्णय लिया गया है अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

अतिवृष्टि से किसानों की फसलें नष्‍ट होना

[राजस्व]

26. ( क्र. 277 ) श्री शिवराज सिंह चौहान : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश में अतिवृष्टि, बाढ़ से प्रदेश के कितने जिलों में किसानों की फसलें वर्ष 2019 में नष्‍ट हुई? (ख) प्रश्नांश (क) के प्रकाश में प्रभावित किसानों को कितना मुआवजा/राहत राशि दी गई? कितनी शेष है? क्या यह राशि किसानों के खाते में जमा कराई जा चुकी है, तो कितनी? कितनी जमा होना शेष है?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) प्रदेश में मानसून वर्ष 2019 में अतिवृष्टि, बाढ़ से 41 जिलों के किसानों की फसल क्षति हुई है। (ख) प्रश्‍नांश () के प्रकाश में प्रभावित कृषकों को फसल एवं अन्‍य क्षति के लिये उत्‍तर दिनांक तक लगभग 1400 करोड़ राशि वितरित की गई है एवं लगभग रूपये 6000 करोड़ राशि का वितरण शेष है। जी हाँ, राशि का कोषालय से सीधा भुगतान संबंधित कृषक के बैंक खाते में किया जाता है। जिलों से प्राप्‍त पृथक-पृथक जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि प्रदाय करना

[राजस्व]

27. ( क्र. 317 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना अंतर्गत किसानों को 01.12.18 से पात्र हितग्राहि‍यों को प्रत्येक चार माह के अन्तराल से तीन बराबर किश्तों में सम्मान निधि प्रदाय किये जानें के नियम हैं? यदि हाँ, तो विधान सभा क्षेत्र सारंगपुर अंतर्गत कितने पात्र हितग्राहि‍यों को प्रथम किश्तों की सम्मान निधि प्रदाय की गई? कितने हितग्राही शेष है? ग्रामवार जानकारी से अवगत करायें। पात्र हितग्राहि‍यों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की प्रथम किस्‍त न मिलने के क्या कारण हैं? अवगत करावें। (ख) क्‍या प्रश्नांश (क) अनुसार पात्र हितग्राहि‍यों को किसान सम्मान निधि समय पर नहीं प्रदाय करने हेतु जिला प्रशासन को अधोहस्ताक्षरकर्ता द्वारा पत्राचार किया गया है? यदि हाँ, तो प्रशासन द्वारा क्या कार्यवाही की गई? (ग) प्रश्नांश (क) में वर्णित कारणों से किसानों को समय पर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि नहीं मिलने हेतु कौन अधिकारी/कर्मचारी दोषी हैं? क्या दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी? हितग्राहियों के परिवार की गिरदावरी पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने हेतु कितनी राशि व्यय की गई? व्यय की जानकारी से अवगत करावें। (घ) क्या भारत सरकार द्वारा योजना के पर्यवेक्षण हेतु गठित जिला स्तरीय/विकासखण्ड स्तरीय समिति की बैठक कब-कब आयोजित की गई? बैठक की कार्यवाही से अवगत करावें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। विधानसभा क्षेत्र सांरगपुर अंतर्गत कुल 192 ग्रामों के कुल 38106 किसानों के डाटा अपलोड हुए हैं। उपरोक्त 192 ग्रामों के किसानों में से प्रथम किश्‍त 21720 एवं द्वितीय किश्‍त 14191 को भुगतान किया जा चुका है। पात्रतानुसार योजना का लाभ देने हेतु सतत् कार्यवाही की जाती है। शेष किसानों को भुगतान नहीं होने के कारण (1) तकनीकी कारणों से (2) किसानों के बैंक खाते बन्‍द होने से (3) आधार नम्‍बर सही नहीं होने से। (ख) जी हाँ। जिला राजगढ़ द्वारा कार्यालयीन पत्र क्रमांक 1237,1238 दिनांक 08.11.2019 को अनुविभागीय अधिकारी सांरगपुर की ओर प्रेषित की गई है, अनुभाग स्तर पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (ग) तकनीकी कारणों से या किसानों के आधार नम्‍बर सही नहीं होने से या बैंक खाते बन्द होने से विलम्ब हुआ है। अधिकारी/कर्मचारी दोषी नहीं हैं। हितग्राहियों के परिवार की गिरदावरी पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने हेतु प्रश्‍न दिनांक तक 715934 राशि व्यय की गई है। (घ) जिला स्तरीय/विकासखण्ड स्तरीय समिति द्वारा समय-समय पर पर्यवेक्षण किया जाकर बैठक आयोजित की जा रही है तथा कार्यवाही सतत् की जाती है।

नियम विरूद्ध भूमि का डायवर्सन

[राजस्व]

28. ( क्र. 320 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र सारंगपुर अंतर्गत वर्ष 2017-18 से प्रश्न दिनांक तक किन कालोनियों एवं व्यवसायी प्रयोजन हेतु भूमि को डायवर्सन की स्वीकृति प्रदान की गई? सर्वे नं. रकवा तथा किस प्रयोजन हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है? अवगत करावें? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार शासन निर्देशानुसार क्‍या सभी संबंधित विभागों से अनापत्ती प्राप्त की गई? यदि हाँ, तो विवरण देवें। यदि नहीं, तो कारण स्पष्ट करें। (ग) प्रश्नांश (ख) अनुसार डायवर्सन की स्वीकृति प्रदान करने हेतु राजस्व अधिकारी नजूल, राजस्व एवं भू-राजस्व अधिकारी की आपत्ति को नजर अंदाज कर सक्षम अधिकारी द्वारा डायवर्सन की स्वीकृति प्रदान की गई? यदि हाँ, तो कारण स्पष्ट करें।

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) विधानसभा सांरगपुर अंतर्गत वर्ष 2017-18 में कालोनी प्रयोजन हेतु किसी भी भूमि की डायवर्सन की स्वीकृति प्रदान नहीं की गई है। राजस्व वर्ष 2017-18 में व्यवसायिक प्रयोजन हेतु 06 प्रकरणों में डायवर्सन की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिसका सर्वे नम्बर रकवावार जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' पर है। मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) दिनांक 27 जुलाई 2018 में म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 के नवीन संशोधन अनुसार धारा 59 तथा म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता (भू-राजस्‍व का निर्धारण तथा पुनर्निर्धारण) नियम 2018 तथा जो मध्यप्रदेश राजपत्र दिनांक 28 सितम्बर 2018 अनुसार स्वयं भूमिस्वामी द्वारा भूमि उपयोग व व्यपवर्तन तथा स्वनिर्धारण की सूचना दिए जाने का प्रावधान होने से वर्ष 2018-19 से प्राप्‍त दिनांक तक स्वयं भूमिस्वामी द्वारा भूमि उपयोग के व्यवसायिक व्यपवर्तन तथा स्वनिर्धारण की कुल 18 सूचनाए दी गई है निर्धारित प्रारूप में जिन्हें पावती प्रदान की गई है, जिनका सर्वे नं. रकवावार जानकारी  संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार(ख) जी हाँ, विधानसभा क्षेत्र सारंगपुर में वर्ष 2017-18 में भूमि की स्थिति अनुसार संबंधित स्थानीय नगर पालिका/नगर पंचायत/ग्राम पंचायत/लोक निर्माण विभाग/भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग तथा जहा लागू हो वहा नगर तथा ग्राम निवेश विभाग से अनापत्ति प्राप्त की गई। मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधरण) दिनांक 27 जुलाई 2018 में म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 के नवीन संशोधन अनुसार धारा 172 का लोप किया गया है। तथा मध्यप्रदेश राजपत्र दिनांक 28 सितम्बर 2018 अनुसार स्वयं भूमिस्वामी द्वारा भूमि उपयोग के व्यपवर्तन तथा स्वनिर्धारण की सूचना दिए जाने का प्रावधान होने से वर्ष 2018-19 से प्रश्‍न दिनांक तक स्वयं भूमिस्वामी द्वारा भूमि उपयोग के व्यपवर्तन तथा स्वनिर्धारण की दी गई सूचना की पावती दिए जाना प्रावधानित होने से संबंधित विभागों से अनापत्ति प्राप्त करने का प्रश्‍न उत्पन्न नहीं होता है। (ग) जी नहीं।

परिशिष्ट - "दस"

पेट्रोल पंप एवं गैस एजेंसी के विरूद्ध अनियमितता

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

29. ( क्र. 332 ) श्री बृजेन्द्र सिंह यादव : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुंगावली विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत कौन-कौन से पेट्रोलपंप एवं गैस एजेन्‍सी किस-किस स्‍थान के लिए स्‍वीकृत की गई है। (ख) वर्ष 2017-18 से प्रश्‍न दिनांक तक कौन-कौन से पेट्रोलपंप एवं गैस एजेन्‍सी की अनयमितता की शिकायत विभाग को प्राप्‍त हुई है? कौन-कौन से पेट्रोलपंप एवं गैस एजेन्‍सी पर कब-कब और क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई है? (ग) क्‍या मुंगावली विधानसभा क्षेत्र में स्‍थापित सभी पेट्रोलपंप एवं गैस एजेन्‍सी संचालकों द्वारा निर्धारित समय पर विभाग को मासिक एवं पाक्षिक पत्रक उपलब्‍ध कराकर वर्तमान भौतिक स्थिति से अवगत कराया जाता है? यदि नहीं, तो उन पर कब-कब, क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई है?

खाद्य मंत्री ( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) प्रश्‍नांकित अवधि में मोतीश्री सेल्‍स, अथाईखेड़ा एवं एस.जी.पी. गैस एजेंसी मुंगावली की शिकायतें प्राप्‍त हुई थी। पेट्रोल/डीजल के नमूने लिये जाकर विश्‍लेषण हेतु भोपाल प्रयोगशाला में भेजे गये। प्रयोगशाला की रिपोर्ट अनुसार नमूने मानक अनुरूप पाये गये हैं। एस.जी.पी. गैस एजेंसी मुंगावली की जांच अनुविभागीय अधिकारी, मुंगावली द्वारा की गई थी। इंडियन ऑयल कार्पोरेशन द्वारा उक्‍त गैस एजेंसी की आपूर्ति निलंबित कर जय बाबा गैस एजेंसी अशोकनगर के माध्‍यम से गैस वितरण की व्‍यवस्‍था कराई गई थी। दिनांक 07.11.2019 को एस.जी.पी. इंडेन की आपूर्ति पुन: बहाल की गई है। एस.जी.पी. इण्‍डेन गैस एजेंसी के विरुद्ध प्रकरण कलेक्‍टर न्‍यायालय में प्रचलित है। वर्ष 2017-18 में जवाहर फिलिंग सेल्‍स पिपरई के पेट्रोल पंप संचालक द्वारा बिना वैध अनुज्ञप्ति के पंप संचालन करने के कारण प्रकरण निर्मित किया गया था। उक्‍त प्रकरण की अपील में संभागायुक्‍त ग्‍वालियर संभाग द्वारा 50,000 रुपये की राशि दंडारोपित किया गया था। उक्‍त राशि जमा होने के पश्‍चात् उक्‍त फर्म को नवीन अनुज्ञप्ति जारी की गई। (ग) प्रश्‍नांकित विधानसभा क्षेत्र में स्‍थापित 21 पेट्रोल पंपों में से 07 पंपों के मासिक पत्रक नियमित प्राप्‍त हो रहे हैं। शेष 14 पेट्रोल पंपों के मासिक पत्रक प्राप्‍त न होने के कारण उन्‍हें कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया है।

परिशिष्ट - "ग्यारह"

यात्री बसों के रूट एवं फिटनेस

[परिवहन]

30. ( क्र. 333 ) श्री बृजेन्द्र सिंह यादव : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) परिवहन विभाग द्वारा अशोकनगर जिले में कौन-कौन सी यात्री बसों को कौन-कौन से रूट पर संचालन की स्‍वीकृति प्रदान की गई है? वाहन क्रमांक अनुसार रूट की जानकारी देवें। (ख) क्‍या विभाग द्वारा वाहन के फिटनेस का प्रमाण-पत्र देने के पूर्व मोटरयान अधिनियम अनुसार शर्तों को जांचा जाता है वर्ष 2017-18 से प्रश्‍न दिनांक तक कौन-कौन सी यात्री बस दुर्घटना ग्रस्‍त हुई हैं? कारण सहित जानकारी देवें। (ग) क्‍या बस संचालकों द्वारा मोटरयान अधिनियम की शर्तों के अधीन बसों में रूट की जानकारी, अग्निशमन यंत्र, इमरजेंसी दरवाजा, महिलाओं एवं विकलांगों के लिए सीट आरक्षण संबंधी निर्देश एवं यात्री किराया पर्ची प्रदान की जाती है? यदि नहीं, तो उन पर कब-कब क्‍या कार्यवाही की गई है?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) परिवहन विभाग द्वारा अशोक नगर जिले में प्रश्न दिनांक तक 270 अस्थायी अनुज्ञापत्र स्वीकृत किये गये हैं। वाहन क्रमांक अनुसार रूट की  जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र  '' अनुसार है। (ख) जी हाँ। पुलिस अधीक्षक कार्यालय जिला अशोक नगर के पत्र क्रमांक 22 दिनांक 04.12.2019 के अनुसार वर्ष 2017-18 से प्रश्न दिनांक तक 17 यात्री बस दुर्घटनाएं हुई हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) जी हाँ। जिन वाहनों में चैकिंग के दौरान मोटरयान अधिनियमों की शर्तों का उल्‍लंघन पाया गया उनके विरूद्ध वर्ष 2017-18 से प्रश्न दिनांक की अवधि में 84 वाहनों के विरूद्ध कार्यवाही की जाकर रू. 3,59,600/- का समझौता शुल्क वसूल किया गया है।

आदिवासियों की भूमि का क्रय-विक्रय

[राजस्व]

31. ( क्र. 386 ) श्री ठाकुर दास नागवंशी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला होशंगाबाद के विधानसभा क्षेत्र पिपरिया अन्तर्गत आदिवासियों की भूमि के क्रय-विक्रय की स्वीकृति हेतु कुल कितने प्रकरण विगत 01 वर्ष में प्राप्त हुये? (ख) प्रश्नांश () अन्तर्गत प्राप्त प्रकरणों में से कितने प्रकरण स्वीकृत किये गये एवं कितने प्रकरण अस्वीकृत किये गये? सूची प्रदान करें। (ग) क्या प्रश्नांश () अन्तर्गत अस्वीकृत प्रकरणों में पुन: विचार कर प्रकरण स्वीकृत किये गये हैं यदि हाँ, तो सूची प्रदान करें तथा पूर्व में इन प्रकरणों को किन कारणों से अस्वीकृत किया गया एवं पुन: विचार कर किस आधार पर स्वीकृत किये गये?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जिला होशंगाबाद के विधानसभा क्षेत्र पिपरिया अंतर्गत आदिवासियों की भूमि क्रय-विक्रय की स्‍वीकृति हेतु कुल 14 प्रकरण (आवेदन) प्राप्‍त हुए। (ख) विगत वर्ष 19-20 में पिपरिया विधानसभा क्षेत्र में 14 प्रकरण स्‍वीकृत किये गये है, कोई भी प्रकरण अस्‍वीकृत नहीं किया गया है। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

मेडिकल कॉलेज का नियम विरूद्ध संचालन

[चिकित्सा शिक्षा]

32. ( क्र. 394 ) डॉ. मोहन यादव : क्या चिकित्सा शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) साक्षी मेडिकल कालेज एण्ड रिसर्च सेंटर गुना द्वारा नियम विरूध मेडिकल कालेज संचालन करने पर की गई कार्यवाही का सम्‍पूर्ण ब्‍यौरा प्रस्तुत करें। (ख) उक्त कालेज सत्र के मध्य में बंद हो जाने से छात्र-छात्राओं के भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए प्रवेशरत छात्र-छात्राओं को होने वाले नुकसान एवं पुन: प्रवेश के संबंध में विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की गई? (ग) साक्षी चिकित्सा महाविद्यालय गुना के बंद होने से कितने छात्र-छात्राएं प्रभावित हुए? उनमें से कितने छात्र-छात्राओं द्वारा फीस जमा की गई थी? उस फीस को छात्र-छात्राओं को किस प्रक्रिया के तहत वापस किया जावेगा एवं कब तक? (घ) यदि सबंधित महाविद्यालय द्वारा उक्त जमा राशि वापस नहीं की जाती है तो संबंधित महाविघालय के संचालकों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की जा सकती है? नियमों की प्रति उपलब्ध करावे?

चिकित्सा शिक्षा मंत्री ( डॉ. विजयलक्ष्मी साधौ ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ख) साक्षी मेडिकल कालेज, गुना सत्र 2016-17 में प्रवेशित 125 छात्रों को भारत सरकार से अनुमति प्राप्‍त कर राज्‍य के 05 निजी चिकित्‍सा महाविद्यालयों, चिरायु मेडिकल कालेज, भोपाल,एल.एन.मेडिकल कालेज, भोपाल, पी.सी.एम.एस. मेडिकल कालेज, भोपाल, आर.डी.गार्डी मेडिकल कालेज, उज्‍जैन तथा इण्‍डेक्‍स मेडिकल कालेज, इंदौर में समायोजित किए जा चुके हैं। (ग) साक्षी मेडिकल कालेज, गुना सत्र 2016-17 में सभी प्रवेशित 125 छात्रों द्वारा संस्‍था में फीस जमा की गई थी। फीस वापिस किए जाने के संबंध में कार्यवाही प्रवेश एवं शुल्‍क विनियामक समिति द्वारा की जा रही है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) मध्‍यप्रदेश निजी व्‍यावसायिक शिक्षण संस्‍था (प्रवेश का विनियामक एवं शुल्‍क का निर्धारण) अधिनियम 2007 अध्‍याय दो के अध्‍याय की धारा 4 (9) के अनुसार राशि वापिस नहीं किए जाने की ‍स्थिति में नियत रकम भू-राजस्‍व के बकाए के तौर पर वसूल की जा सकती है। नियमों की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब अनुसार है।

ई-पंजीयन योजना

[वाणिज्यिक कर]

33. ( क्र. 396 ) डॉ. मोहन यादव : क्या वाणिज्यिक कर मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ई-पंजीयन योजना के सॉफ्टवेयर में क्रय-विक्रय एवं अन्य पंजीकृत दस्तावेजों की प्रविष्टि उपरांत ऑनलाईन सूची क्रमांक 02 जनरेट होने का प्रावधान रखा गया है अथवा नहीं? यदि हाँ, तो संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाईन होने के पश्चात भी सूची क्रमांक 02 मेन्यूअल क्यों रखे जा रहे है? (ख) यदि नहीं, तो क्या विभाग द्वारा भविष्य में सूची क्रमांक 02 ऑनलाईन करने के संबंध में सॉफ्टवेयर में अपडेशन करवाया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्यों? (ग) यदि प्रश्नांश (क) की जानकारी हाँ है तो ऑनलाईन सूची क्रमांक 02 की जांच किस प्रकार की जा सकती है प्रक्रिया बतावें?

वाणिज्यिक कर मंत्री ( श्री बृजेन्द्र सिंह राठौर ) : (क) जी नहीं। ई-पंजीयन के पूर्व पंजीबद्ध दस्‍तावेजों की सूची नियमानुसार कार्यालय में search हेतु उपलब्‍ध है। (ख) जी हाँ, समय-सीमा बताया जाना अभी संभव नहीं है। (ग) प्रश्‍नांश () उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

अनु.जनजाति वर्ग के लोगों को पट्टे का वितरण

[राजस्व]

34. ( क्र. 424 ) श्री करण सिंह वर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इछावर विधान सभा क्षेत्रान्‍तर्गत ग्राम आबिदाबाद (चार मण्‍डली) एवं ग्राम वीरपुर में राजस्‍व विभाग द्वारा वर्ष 2002 से प्रश्‍न दिनांक तक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचति जनजाति वर्ग के कितने हितग्राहियों को कब-कब, कहां-कहां पट्टे दिये गये? (ख) उक्‍त दिये गये पट्टों के हितग्राही इन क्षेत्रों में कब से निवास कर रहे हैं? (ग) क्‍या यह सही है कि पट्टे वितरण में भेदभावपूर्ण नीति अपनाकर, जो नये लोग बसे हैं, उन्‍हें पट्टे प्रदान कर दिये गये हैं एवं पूर्व से निवासरत कई परिवार इससे वंचित रहे गये हैं?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) इछावर विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत ग्राम आबिदाबाद (चार मण्डली) में कुल 85 पट्टे वर्ष 2002 में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के हितग्राहियों को दिये गये है। ग्राम वीरपुर (लावाखेडी) में पट्टे प्रदाय नहीं किये गये है।। (ख) वर्ष 2002 के पूर्व से। (ग) जी नहीं।

बंदोबस्‍त रिकार्ड का प्रदाय

[राजस्व]

35. ( क्र. 428 ) श्री पुरुषोत्तम लाल तंतुवाय : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला दमोह के पटेरा विकासखण्‍ड के ग्राम छेवला दुबे प.ह.नं. 13/21 में वर्ष 1985 से वर्ष 1999 तक का राजस्‍व रिकार्ड, बंदोबस्‍त की मिशल तथा रीनंबरिंग सूची एवं निस्‍तार पत्रक सहित छायाप्रति उपलब्‍ध करावें। (ख) हटा विधानसभा क्षेत्र में गौचर भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही कब तक की जावेगी? समय-सीमा बतायें? नहीं तो क्‍यों?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) हटा विधानसभा क्षेत्र में गोचर भूमि पर हटा एवं पटेरा तहसील अंतर्गत आने वाले ग्रामों में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही प्रचलित हैं। हटा विधानसभा के तहसील दमोह के अंतर्गत आने वाले ग्रामों में गोचर भूमि पर अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गयी हैं।

जीन मोहल्‍ला इटारसी के भूखण्‍डों का नवीनीकरण

[राजस्व]

36. ( क्र. 441 ) डॉ. सीतासरन शर्मा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) होशंगाबाद जिले के इटारसी नगर में स्थित शीट नं. 3 एवं 6 प्‍लाट नं. 3/1,7/1 क्षेत्रफल 307810 वर्गफुट भूमि के पट्टे का शासन द्वारा नवीनीकरण कब से किन कारणों से नहीं हो पाया है? (ख) प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित भूमि पर काबिज कितने नागरिकों द्वारा विगत चार वर्षों में पट्टा नवीनीकरण हेतु अनुविभागीय अधिकारी, इटारसी के यहां आवेदन दिये गये? (ग) इनमें से कितने लोगों के भूखण्‍डों का नवीनीकरण किया जा चुका है एवं कितने लोगों के आवेदनों का निराकरण किन कारणों से नहीं किया गया है? (घ) क्‍या शब्‍बीर अली राजा आ. हातिम अली निवासी खंडवा एवं आरिफ सैफी आ. अब्‍बास अली निवासी बाम्‍बे बाजार, खंडवा द्वारा प्रमुख सचिव, राजस्‍व विभाग को संबोधित आवेदन दिनांक 24.10.2019 को राजस्‍व विभाग (शाखा-1) वल्‍लभ भवन भोपाल को प्राप्‍त हुआ? यदि हाँ, तो इस संबंध में क्‍या कार्यवाही की गयी?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) पट्टाधारी एवं उनके वारिसानों द्वारा विवादित रकबे के भूमि का छोटे-छोटे भूखण्‍ड में विक्रय करने के कारण नामांतरण न हो पाने से पट्टा वर्ष 1988 के बाद से नवीनीकृत नहीं हो सका है। (ख) 7 व्‍यक्तियों द्वारा नवीनीकरण का आवेदन दिया गया है। (ग) 2 व्‍यक्तियों के आवेदन का निराकरण किया गया है। शेष में कार्यवाही प्रचलित है। (घ) जी हाँ। जिला कलेक्‍टर होशंगाबाद से जाँच प्रतिवेदन चाहा गया है।

बैतूल जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली द्वारा खाद्यान्न वितरण

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

37. ( क्र. 467 ) डॉ. योगेश पंडाग्रे : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्यप्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कितने जिलों में ऑनलाईन एवं कितने जिलों में ऑफलाईन व्यवस्था लागू की गई है? ऑफलाईन व्यवस्था लागू किये जाने का दिनांक भी बतावें। (ख) बैतूल जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की ऑनलाईन व्यवस्था लागू किये जाने के क्या कारण थे, जबकि लगभग समान सामाजिक एवं भौगोलिक स्थिति वाले समीपस्थ छिंदवाड़ा जिले में ऑफलाईन व्यवस्था ही लागू रखी गई? (ग) बैतूल जिले में ऑनलाईन आपूर्ति व्यवस्था के लागू होने के बाद जिले में कितने दिनों तक खाद्यान्न वितरण नहीं हो सका? उचित मूल्य दुकानवार जानकारी देवें। साथ ही पात्रता कूपन के अभाव कितने पात्र हितग्राहियों को खाद्यान्न का वितरण नहीं हो सका, यह भी बतावें। (घ) बैतूल जैसे आदिवासी बाहुल्य एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े हुए जिले में ऑनलाईन आपूर्ति सिस्टम में आ रही परेशानियों के दृष्टिगत यहाँ भी छिंदवाड़ा की भांति ऑफलाईन आपूर्ति प्रक्रिया द्वारा खाद्यान्न वितरण की कोई योजना है? यदि हाँ, तो उसे कब तक लागू कर दिया जाएगा, यदि नहीं, तो क्यों?

खाद्य मंत्री ( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ) : (क) वर्तमान में प्रदेश के सभी जिलो में ऑनलाईन व्‍यवस्‍था चालू है। 1881 उचित मूल्‍य दुकानों पर नेट कनेक्टिविटी उपलब्‍ध न होने पर आंशिक ऑफलाईन वितरण व्‍यवस्‍था लागू की गई है। (ख) उत्‍तरांश (क) के संदर्भ में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) बैतूल जिले में आधार आधारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (AePDS) व्‍यवस्‍था लागू होने के पश्‍चात पात्र परिवारों को खाद्यान्‍न वितरण किया जा रहा है। राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित पात्र श्रेणियों के भारत सरकार द्वारा निर्धारित सीमा में ही, वैध पात्रता पर्ची (ई-राशन कार्ड) परिवारों को ही राशन वितरण किये जाने का प्रावधान है। (घ) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

उज्जैन जिले के बड़नगर विधानसभा क्षेत्र में नलकूप खनन

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

38. ( क्र. 471 ) श्री मुरली मोरवाल : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्जैन जिले के बड़नगर विधानसभा क्षेत्र में जनवरी 2017 से प्रश्न दिनांक तक कितने नलकूप खनन विभागीय मशीन द्वारा एवं ठेका पद्धति से किय गये? किन-किन ग्रामों में खनन कार्य किया गया? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में खनन किये गये बोर में कितने प्लेट फार्म का निर्माण कार्य किया गया एवं कितने बोर में हैंडपम्प मय बॉडी के स्थापित किये गये है। जानकारी उपलब्ध करावें। (ग) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में किये गये बोर खनन की गहराई का सत्यापन किसके द्वारा किया जाता है किये गये सत्यापन की बोर खननवार, स्थानवार प्रमाणित प्रतिलिपि उपलब्ध करावें। क्‍या बोर खनन के मामले में पाया गया है कि मौके पर गहराई और किये गये भुगतान में भारी अंतर रहता हैं। क्या शासन बड़नगर विधानसभा क्षेत्र में इस मामले को संज्ञान में लेकर किये गये भुगतान एवं मौके पर नल-कूप की गहराई का राज्य स्तरीय जांच दल बनाकर जांच करावेगें। यदि हाँ, तो कब तक।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( श्री सुखदेव पांसे ) : (क) 231 नलकूप। ग्रामवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ग) खनित किये गये नलकूप की गहराई का सत्यापन संबंधित सहायक यंत्री द्वारा किया जाता है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 एवं 2 अनुसार है। जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

सार्वजनिक वितरण प्रणाली में धांधली

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

39. ( क्र. 489 ) श्री राहुल सिंह लोधी : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वर्ष 2018-19 में प्राथमिक कृषि शाख सहकारी समिति गुना प्रबंधक जमना यादव एवं शासकीय उचित मूल्य की दुकान देवपुर के विक्रेता छिमाधर यादव एवं मैसर्स मानिक चंद, उत्तम चंद, कैरोसिन (मिट्टी तेल) डीलर के विरूद्ध तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बल्देवगढ़, जिला-टीकमगढ़ द्वारा कोई दण्डात्मक कार्यवाही का आदेश पारित किया गया था? (ख) यदि हाँ, तो उक्त व्यक्तियों/फर्मों के विरूद्ध क्या कोई दण्डात्मक कार्यवाही की गई? (ग) यदि कार्यवाही नहीं की गई तो क्यों और कब तक की जायेगी?

खाद्य मंत्री ( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ) : (क) जी हाँ। (ख) जी नहीं। (ग) प्रकरण में अनुविभागीय अधिकारी के आदेश के विरूद्ध श्री छिमाधर यादव तनय पारीक्षत यादव निवासी ग्राम देवपुर के द्वारा अपील प्रस्‍तुत की गई थी जिसे कलेक्‍टर न्‍यायालय के आदेश दिनांक 23/09/2019 द्वारा खारिज किया गया। कलेक्‍टर न्‍यायालय में अपील लंबित होने के कारण दिनांक 23/09/2019 तक अनुविभागीय अधिकारी के आदेशानुसार कार्यवाही नहीं की जा सकी। वर्तमान में अनुविभागीय अधिकारी के आदेशानुसार कार्यवाही प्रचलन में है। कार्यवाही कार्यवाही पूर्ण किये जाने की समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है।

मंदिर की भूमि पर अवैध कब्जे

[राजस्व]

40. ( क्र. 491 ) श्री राहुल सिंह लोधी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) टीकमगढ़ जिले के खरगापुर नगर में शासन द्वारा बाबा हरिदास हनुमान जी मंदिर को कितनी जमीन का आवंटन किया गया था? (ख) खरगापुर नगर में उक्त मंदिर के लिए आवंटित की गई जमीन में से कितनी जमीन पर मंदिर का कब्जा है और कितनी जमीन पर अवैध लोगों ने कब्जा किया हुआ है। नाम बताये? (ग) यदि मंदिर की जमीन पर अन्य लोगों का अवैध कब्जा है तो शासन द्वारा अभी तक अवैध कब्जा हटाने के लिए क्या कोई कार्यवाही की गई? यदि नहीं, की गई तो क्यों? (घ) क्या भविष्य में शासन द्वारा मंदिर की जमीन से अवैध कब्जे को खाली करवाने की कार्यवाही की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) टीकमगढ़ जिले के खरगापुर नगर में शासन द्वारा हरिदास मंदिर को भूमि रकवा 0.590 हेक्‍टेयर भूमि आवंटित है। (ख) खरगापुर नगर में मंदिर के लिए आवंटित की गई भूमि में से 0.490 हेक्‍टेयर भूमि पर मंदिर का कब्‍जा है शेष रकवा 0.100 हेक्‍टेयर पर 92 व्‍यक्तियों द्वारा अस्‍थायी रुप से गुमटी रखकर अवैध कब्‍जा किया गया है। जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) मंदिर की जमीन पर अवैध कब्‍जाधारियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) प्रश्‍नांश () के परिप्रेक्ष्‍य में शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - "बारह"

जिम्‍मेदारों पर कार्यवाही

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

41. ( क्र. 568 ) श्री सुभाष राम चरित्र : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के प्रावधान अंतर्गत सार्वजनिक वितरण के प्राथमिकता परिवार के श्रेणी में प्रदेश के समस्‍त अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/कर्मकार मण्‍डल के तहत पंजीकृत श्रमिक बी.पी.एल. कार्डधारी एवं अन्‍य योजना से लाभ प्राप्‍त करने वाले कितने हितग्राहियों को खाद्यान्‍न पर्ची उपलब्‍ध कराकर खाद्यान्‍न उपलब्‍ध कराया जा रहा है यदि हाँ, तो वर्ष 2017से प्रश्‍नांश दिनांक तक का रीवा संभाग की जानकारी देवें? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में जिला सिंगरौली, सीधी, रीवा जिले में कितने अनुसूचित जाति/जनजाति परिवार की खाद्य पर्चियां जारी की गई कितनों की खाद्य पर्चियां जारी नहीं की गई तथा क्‍यों? (ग) प्रश्नांश (क) (ख) के संदर्भ में उपरोक्‍त अवधि एवं संभाग में कितनी दुकानों में खाद्यान्‍न की चोरी की शिकायतें थानों में दर्ज करायी गई? चोरी गये खाद्यान्‍न की पूर्ति कर क्‍या खाद्यान्‍न उपभोक्‍ताओं को उपलब्‍ध कराया गया? यदि हाँ, तो किस माध्‍यम से और कहां से? अगर नहीं तो क्‍यों? क्‍या रीवा जिले में खाद्यान्‍न की चोरी एवं वितरण की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत एडवोकेट श्री मयंकधर द्विवेदी द्वारा चाही गई थी? क्‍या उन्‍हें जानकारी नहीं दी गई यदि हाँ, तो क्‍यों एवं इस पर क्‍या कार्यवाही करेंगे? (घ) प्रश्नांश (क) (ख) (ग) में उल्‍लेखित तथ्‍यों अनुसार कार्यवाही न करने, खाद्यान्‍न की पर्ची न जारी करने से खाद्यान्‍न से वंचित करने के लिये कौन-कौन दोषी है? साथ ही खाद्यान्‍न की चोरी एवं काला बाजारी कर खाद्यान्‍न उपभोक्‍ताओं को न देने एवं चाही गई जानकारी न देने, उसमें उल्‍लेखित बिन्‍दुओं अनुसार कार्यवाही न करने के लिये कौन-कौन जिम्‍मेदार है इन जिम्‍मेदारों पर क्‍या कार्यवाही करेंगे? अगर नहीं तो क्‍यों?

खाद्य मंत्री ( श्री प्रद्युम्‍न सिंह तोमर ) : (क) राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत सम्मिलित पात्रता श्रेणी के परिवारों जिसमें अनुसूचित जाति/जनजाति, कर्मकार मंडल के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिक, बी.पी.एल. एवं अन्‍य श्रेणी के कुल वैध पात्रता पर्चीधारी परिवारों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट  अनुसार है, जिनके लिए खाद्यान्‍न का आवंटन जारी किया गया है। (ख) अनुसूचित जाति/जनजाति श्रेणी अंतर्गत कुल अनुसूचित जाति/जनजाति 69802 परिवार के पास पात्रता पर्ची है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत प्रदेश की वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 75% आबादी की सीमा तक ही लाभ दिया जा सकता है। इस सीमा से अधिक हितग्राहियों को लाभान्वित करने का प्रावधान अधिनियम की धारा-3 के अंतर्गत नहीं है। वर्तमान में सम्मिलित पात्र परिवारों में से हितग्राही की मृत्‍यु होने, विवाह होने से, अन्‍य स्‍थान पर निवास करने एवं पात्रता श्रेणी में न रहने के कारण हितग्रा‍ही की पात्रता में परिवर्तन होना एक निरंतर प्रक्रिया है, तदनुसार नवीन पात्रता पर्ची निर्धारित सीमा में जारी की जाती है। जुड़ने वाले नवीन परिवारों में बी.पी.एल. एवं अनुसूचित जाति/जनजाति श्रेणी को प्राथमिकता दी जाती है। इस वित्‍तीय वर्ष में कुल 1,40,988 नवीन हितग्राहियों को जोड़कर पात्रता पर्ची जारी की गई है, जिसमें जिला रीवा में 1911, सीधी में 1527 एवं सिंगरौली में 1418 हितग्राही सम्मिलित हैं तथा इन तीनों जिलों में 5744 अनुसूचित जाति/जनजाति सीमा से बाहर हैं। (ग) जिला सिंगरौली एवं सतना में उचित मूल्‍य दुकानों से खाद्यान्‍न चोरी संबंधी कोई प्रकरण थाना में दर्ज नहीं किया गया है। रीवा जिले की 19 एवं सीधी जिले की 07 उचित मूल्‍य दुकानों से राशन वितरण चोरी की शिकायतें दर्ज कराई गई। चोरी गये खाद्यान्‍न की मात्रा अनुसार दुकान के विक्रेताओं द्वारा बाजार से क्रय कराया जाकर उपभोक्‍ताओं को वितरण कराया गया है। श्री मयंकधर द्विवेदी द्वारा रीवा जिले में खाद्यान्‍न की चोरी एवं वितरण की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत चाही गई थी। आवदेक को जानकारी प्राप्‍त करने हेतु कार्यालय खाद्य शाखा रीवा द्वारा दिनांक 16.10.2019 को सूचित किया गया, किन्‍तु उनके द्वारा आज तक जानकारी प्राप्‍त नहीं की गई है। (घ) प्रश्नांश (क) एवं (ख) उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। रीवा जिले में दोषी विक्रेताओं के विरूद्ध एफ.आई.आर दर्ज कराई जा चुकी है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही

[राजस्व]

42. ( क्र. 569 ) श्री सुभाष राम चरित्र : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जिला सिंगरौली में कंम्‍पनियों/फैक्ट्रियों के निर्माण बाबत कितनी शासकीय एवं कितनी निजी कास्‍तकारों की जमीनें अधिग्रहित कर कंपनियों/फैक्ट्रियों को दी गई। इनमें से किन किसानों के वारिसानों को नौकरी दी गई? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में अधिग्रहित की गई शासकीय एवं निजी कास्तकारों की जमीनों के मुआवजे का भुगतान किस दर पर किया गया? शासकीय भूमियों के मुआवजे भी तैयार कर क्‍या संबंधित अधिकारियों द्वारा मुआवजे की राशि का बंदरवाट किया गया? निजी भूमियों को कई बार एक ही आराजी का भूमि स्‍वामी बदल-बदल कर मुआवजे दिये गये? इनमें मुआवजा आवंटन बाबत। अधिकृत किये गये अधिकारियों द्वारा अपने सगे संबंधितों के नाम फर्जी तरीके से मुआवजे तैयार कर उन्‍हें लाभान्वित किया गया क्‍या उसकी जांच कराकर उन पर क्‍या कार्यवाही करेगे? (ग) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में निजी भूमि स्‍वामियों के वारिसानों को कंपनियों द्वारा नौकरी नहीं देने तथा जबरन जमीन अधिग्रहित कर करने पर तथा पुनर्वास नीति 2002 के तहत विस्‍थापितों को मिलने वाली सुविधायें न देने के लिये जिम्‍मेदारों पर क्‍या कार्यवाही करेगे एवं इस बावत् निर्देश जारी करेंगे तो कब तक? अगर नहीं तो क्‍यों? (घ) प्रश्नांश (क) (ख) एवं (ग) के कंपनियों को दी गई भूमियों का गलत एवं मनमानी तरीके से मुआवजा वितरित किये जाने का जांच कराकर कार्यवाही बावत् निर्देश कब तक जारी करेंगे व निजी भूमि स्‍वामियों के वारिसानों को रोजगार दिलाये जाने बावत् क्‍या कंपनियों को निर्देश जारी करेंगे तो कब तक बतावें? अगर नहीं तो क्‍यों?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। जिला सिंगरौली में निजी एवं शासकीय भूमि का अधिग्रहण/आवंटन किया गया है। जिनका  विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट में दिया गया है। (ख) भू-अर्जन अधिनियम के प्रावधान अंतर्गत शासकीय गाईड लाईन के आधार पर मुआवजा निर्धारण किया जाकर संबंधित भूमिस्‍वामियों को भुगतान किया गया है। मुआवजा वितरण के अनियमितता के तथ्‍य प्रकाश में नहीं आये हैं। अत: जाँच कार्यवाही का प्रश्‍न ही नहीं उठता। (ग) भू-अर्जन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार भूमियों का अर्जन किया गया है। जिन प्रकरणों में पुनर्वास नीति 2002 लागू है, उन प्रकरणों में विस्‍थापितों को कंपनियों द्वारा पुनर्वास सुविधाएं प्रदाय कराई जा रही है। परियोजनाओं से विस्‍थापित परिवारों के 18 वर्ष या उससे अधिक के वारिसों को नियमानुसार रोजगार उपलब्‍ध कराया गया है। अत: कार्यवाही करने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) कंपनियों को दी गई भूमियों का गलत/मनमानी तरीके से मुआवजा वितरण नहीं किया गया है। अत: जाँच कार्यवाही का प्रश्‍न ही नहीं उठता।

परिशिष्ट - "तेरह"

बड़ा श्रीराम मंदिर झारडा की चल-अचल संपत्ति की जानकारी

[राजस्व]

43. ( क्र. 601 ) श्री बहादुर सिंह चौहान : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कार्यालय कलेक्‍टर जिला उज्‍जैन के पत्र क्रमांक 1254/6/संस्‍कृति/2019 दिनांक 14.10.2019 के अनुसार बड़ा श्रीराम मंदिर झारडा की चल-अचल संपत्ति शासन हित में कब्‍जा नहीं कराने वाले दोषी अधिकारियों को निलंबित कर विभागीय कार्यवाही करने संबंधी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) अनुविभाग महिदपुर को निर्देशित किया गया था एवं इस पत्र पर मान. कलेक्‍टर उज्‍जैन द्वारा सर्वोच्‍च प्राथमिकता देते हुए समय-सीमा में कार्यवाही करने के लिये उत्तरदायी दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही किये जाने के आदेश दिये गये थे? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार बड़ा श्रीराम मंदिर झारडा की चल-अचल संपत्ति पर शासन हित में कब्‍जा रिक्‍त नहीं कराने वाले दोषी अधिकारियों के विरूद्ध अभी तक क्‍या कार्यवाही की गई है? कार्यवाही नहीं करने के लिये कौन दोषी है? शासन द्वारा इन दोषी अधिकारियों पर कब तक कार्यवाही की जाएगी? (ग) क्‍या माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय में बड़ा श्रीराम मंदिर झारडा की चल-अचल संपत्ति शासन हित में कब्‍जा रिक्‍त कराने का राजस्‍व विभाग के तत्‍कालीन अधिकारियों द्वारा हलफनामा लिया गया है? (घ) माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय को असत्‍य जानकारी देने के लिये दोषी अधिकारियों पर शासन द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? कार्यवाही नहीं करने के लिये उत्तरदायी अधिकारियों पर शासन क्‍या कार्यवाही करेगा?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) जी हाँ। माननीय विधायक महोदय के पत्र दिनांक 10.10.2019 के आधार पर आवश्‍यक कार्यवाही हेतु लिखा गया था। (ख) माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर के आदेश दिनांक 06.08.18 के पालन में बड़ा श्री राम मंदिर झारडा की माननीय न्यायालय के आदेश में वर्णित समस्त चल-अचल सम्पत्ति का कब्जा दिनांक 11.08.2018 को प्राप्त किया गया था। प्रकरण में संपूर्ण कार्यवाही न्‍यायोचित की गई थी अतः कोई भी अधिकारी दोषी नहीं होने से कार्यवाही प्रस्तावित नहीं की गई (ग) माननीय उच्चतम न्यायालय में दिनांक 08.12.2018 को प्रति शपथ पत्र में दर्शाया है कि उच्च न्यायालय के आदेश उपरांत राज्य सरकार ने प्रश्‍नाधीन भूमि एवं मंदिर की व्यवस्था को अपने कब्जे में लिया गया। (घ) उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 06.08.18 में श्री राम मंदिर झारडा की सम्पत्ति सर्वे नंबर 594,595,596,603,878 कुल रकवा 5.39 हे. का वर्णन है। उपरोक्त संपूर्ण रकबे का कब्जा लेने उपरांत दिनांक 26.11.2019 को रबी फसल 2019 हेतु निलाम किया गया है। इसके साथ ही मंदिर की व्यवस्था शासन हित में शासकीय देवस्थान श्री विष्णु मंदिर, झारडा के पुजारी श्री मुकेशदास पिता सुंदरदास को अस्थाई रूप से सौंप दी गई। दिनांक 11.08.18 को कब्जे लिये जाने की कार्यवाही में मंदिर की माननीय उच्च न्यायालय के आदेश में वर्णित भूमि के अतिरिक्त ग्राम झारडा की आबादी खसरा नंबर 871 में स्थित ग्राम पंचायत अभिलेख अनुसार बड़ा श्री राम मंदिर की सम्पत्ति का भी अधिपत्य शासन हित में लेते हुए पंचायत को सपुर्दगी दी गई थी। उक्त कार्यवाही से व्यथित होकर तत्कालीन कब्जेदारों द्वारा माननीय व्यवहार न्‍यायाधीश वर्ग-1, महिदपुर में वाद दिनांक 06.09.18 को प्रस्तुत किया, जिसे माननीय न्यायालय द्वारा आदेश दिनांक 03.05.19 को खारिज किया गया। इसके उपरांत उक्त आदेश के विरूद्ध माननीय द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्‍यायाधीश महोदय, महिदपुर में अपील दिनांक 13.05.19 को प्रस्तुत की गई, जिसमें आदेश दिनांक 29.05.19 पारित किया गया। इस आदेश में प्रतिवादीगण (शासन पक्ष) के विरूद्ध अस्थाई आदेश जारी किया गया जिसमें वादीगण (तत्कालीन कब्जेदारियों) को विधि की सम्यक प्रक्रिया के बगैर बेदखल न करने के लिये आदेशित किया गया। इसके अनुक्रम में तहसील न्यायालय झारडा में प्रकरण क्रमांक 01/अ-68/2019-20 म.प्र. भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के अंतर्गत है। माननीय उच्चतम न्यायालय को तत्समय पदस्थ अधिकारियों द्वारा कोई भी असत्य जानकारी नहीं दी गई है, चूंकि कार्यवाही न्यायोचित की गई अतः संबंधित अधिकारियों पर कार्यवाही करने का कोई आधार नहीं है।

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ

[खाद्य, नागरिक