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मध्यप्रदेश विधान सभा


प्रश्नोत्तर-सूची
जुलाई, 2016 सत्र


मंगलवार, दिनांक 19 जुलाई, 2016


भाग-1
तारांकित प्रश्नोत्तर


 

( वर्ग 2 : सामान्य प्रशासन, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, संस्कृति, पर्यटन, प्रवासी भारतीय, नगरीय विकास एवं आवास, पर्यावरण, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम, जल संसाधन, वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, जनसंपर्क, खनिज साधन )


पृथ्‍वीपुर विधान सभा क्षेत्रांतर्गत विद्युतीकरण

1. ( *क्र. 1074 ) श्रीमती अनीता नायक : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या टीकमगढ़ जिले की पृथ्‍वीपुर विधानसभा क्षेत्र अन्‍तर्गत सभी विद्युतीकृत ग्रामों में प्राप्‍त घरेलू विद्युत कनेक्‍शनों के आवेदकों को कनेक्‍शन प्रदान किये जा चुके हैं? यदि नहीं, तो किन-किन में कितने घरेलू कनेक्‍शनों के आवेदकों के आवेदन लंबित हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) में आवेदकों के लंबित प्रकरण कब तक पूर्ण कर दिये जावेंगे? (ग) क्‍या विधानसभा क्षेत्र पृथ्‍वीपुर में ऐसे भी उपभोक्‍ता हैं, जिनका मीटर स्‍थापित होने के बाद भी विद्युत प्रवाह शुरू नहीं किया गया है? यदि हाँ, तो कब तक विद्युत प्रवाह शुरू किया जाएगा एवं इसके लिए कौन दोषी है एवं दोषियों के खिलाफ क्‍या कार्यवाही कब तक होगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में वर्तमान में विद्युतीकृत ग्रामों में घरेलू कनेक्‍शन हेतु कोई आवेदन लंबित नहीं है। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) जी नहीं। अत: प्रश्‍न नहीं उठता। 

विधायक विकास निधि से अनुशंसित/प्रस्‍तावित कार्यों की स्‍वीकृति‍

2. ( *क्र. 555 ) श्रीमती ऊषा चौधरी : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सतना जिले में विधायक विकास निधि से विधायकों द्वारा अनुशंसित एवं प्रस्‍तावित कार्यों को स्‍वीकृत करने की गाईड लाईन से हटकर कलेक्‍टर सतना को स्‍वीकृत करने का अधिकार किसके द्वारा दिया गया है? (ख) क्‍या गाईड लाईन में यह स्‍पष्‍ट प्रावधान है कि एक से अधिक ग्राम पंचायतों में कराये जाने वाले कार्यों की एजेंसी एक ग्राम पंचायत को नहीं बनाया जायेगा? यदि हाँ, तो गाईड लाईन की छायाप्रति उपलब्‍ध कराई जावे? यदि नहीं, है तो फिर कलेक्‍टर सतना को गाईड लाईन के विपरीत कार्य स्‍वीकृत करने एवं विधायकों की सहमति से हटकर कार्य करने पर इनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही अमल में लाई जावेगी? (ग) क्‍या प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य द्वारा वित्‍तीय वर्ष 2016-17 के प्राप्‍त वंटन में से पानी के टैंकर क्रय करने हेतु स्‍थानीय एजेंसी को निर्माण एजेंसी प्रस्‍तावित किया गया था, लेकिन कलेक्‍टर सतना द्वारा विधायक की सहमति एवं अनुशंसित एजेंसी के नाम कार्य स्‍वीकृत नहीं किया गया जिससे इस भीषण गर्मी में ग्राम पंचायतों को प्रदाय किये जाने वाले टैंकर समय पर उपलब्‍ध नहीं कराये जा सकने से आम जनता को पेयजल संकट का सामना करना पड़ा है? (घ) क्‍या वित्‍तीय वर्ष 2013-14 से 2015-16 तक सतना जिले के विभिन्‍न विधानसभा क्षेत्रों में एक से अधिक ग्राम पंचायतों में कराये जाने वाले कार्यों की एजेंसी एक ग्राम पंचायत को बनाकर कार्य कराये गये हैं? यदि हाँ, तो ऐसे स्‍वीकृत कार्यों की सूची, एजेंसी का नाम सहित जानकारी देवें? क्‍या ऐसे अस्‍पष्‍ट गाईड लाईन के प्रावधानों में संशोधन करेंगे, जिससे भविष्‍य में प्रदेश के माननीय विधायकों को कलेक्‍टरों द्वारा अनावश्‍यक परेशान न किया जा सके?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) सतना जिले में विधायक विकास निधि से मा. विधायकों द्वारा अनुशंसित प्रस्‍तावित कार्यों की स्‍वीकृतियाँ गाईड लाईन के अनुरूप जारी की गईं हैं। (ख) सामान्‍य प्रक्रिया के तहत सभी ग्राम पंचायतें अपने क्षेत्रान्‍तर्गत विकास कार्यों के निर्माण कराने में सक्षम हैं। विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना की मार्गदर्शिका में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि एक ग्राम पंचायत अन्‍य ग्राम पंचायत/पंचायतों के लिये विकास कार्य या सामग्री क्रय हेतु निर्माण क्रियान्‍वयन ऐजेन्‍सी हो सकेगी। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) प्रश्‍नकर्ता द्वारा वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में प्राप्‍त आवंटन एवं अनुशंसा के अनुरूप ऐजेन्‍सी का निर्धारण किया गया है। मान. विधायक के प्राप्‍त अनुशंसा पत्र दिनांक 21.06.2016 के अनुसार एवं दिनांक 27.06.2016 के अनुसार स्‍वीकृति जारी की गयी है। (घ) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। मार्गदर्शिका के बिन्‍दु क्रमांक 2.2 में स्‍थानीय निकायों के माध्‍यम से योजनाओं को क्रियान्वित करवाये जाने का प्रावधान है।

नवीन विद्युत ग्रिडों की स्‍वीकृति

3. ( *क्र. 1038 ) कुँवर हजारीलाल दांगी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या राजगढ़ जिले के विकासखण्‍ड जीरापुर के अंतर्गत ग्राम बालाहेड़ा में वर्तमान में 10-12 कि.मी. की दूरी पर स्थित विद्युत ग्रिड से विद्युत प्रदाय किया गया है? इसी प्रकार विकासखण्‍ड खिलचीपुर के अंतर्गत ग्राम दगल्‍या एवं बाजरोन ग्राम के मध्‍य स्थित लगभग 10-12 ग्रामों में लगभग 8-9 कि.मी. की दूरी पर स्थित जैतपुरा ग्रिड से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है? यदि हाँ, तो क्‍या अत्‍यधिक दूरी वाले विद्युत ग्रिडों से विद्युत प्रदाय होने के कारण निरंतर अल्‍प वोल्‍टेज एवं लाईन टूटने की समस्‍या के कारण किसानों का सिंचाई कार्य लगातार बाधित हो रहा है? यदि हाँ, तो क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा ग्राम बालाहेड़ा (जीरापुर) एवं खिलचीपुर के अंतर्गत ग्राम दगल्‍या एवं बाजरोन ग्राम के मध्‍य नवीन 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र स्‍थापना की मांग माननीय ऊर्जा मंत्री जी से अनेकों बार की गई है? (ख) इसी प्रकार क्‍या विधानसभा क्षेत्र खिलचीपुर के नगर माचलपुर में वर्तमान जनसंख्‍या के मान से विद्युत आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण प्रश्‍नकर्ता एवं क्षेत्र की जनता द्वारा निरंतर 132 के.व्‍ही. विद्युत सबस्‍टेशन स्‍थापित करने की मांग शासन से की जा रही है (ग) उपरोक्‍तानुसार क्‍या शासन ग्राम बालाहेड़ा एवं ग्राम दगल्‍या व ग्राम बाजरोन के मध्‍य नवीन 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र तथा नगर माचलपुर में 132 के.व्‍ही. विद्युत सबस्‍टेशन की स्‍वीकृति प्रदान करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, विकासखण्‍ड जीरापुर के ग्राम बालाहेड़ा तथा विकासखण्‍ड खिलचीपुर के ग्राम डगल्‍या एवं बाजरोन के मध्‍य स्थित क्षेत्र में प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित अनुसार विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। जी हाँ। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में उल्‍लेखित समस्‍या नहीं है तथापि ग्राम बालाहेड़ा को विद्युत प्रदाय कर रहा 11 के.व्‍ही. फीडर रबी सीजन में अतिभारित हो जाता है, जिसके दृष्टिगत ग्राम बालाहेड़ा में एस.एस.टी.डी. योजना के अंतर्गत 5 एम.व्‍ही.ए. क्षमता के नवीन 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र का कार्य किया जाना प्रस्‍तावित है, जिसे वित्‍तीय उपलब्‍धता अनुसार पूर्ण करने के प्रयास किये जावेंगे। ग्राम डगल्‍या एवं बाजरोन के मध्‍य स्थित ग्रामों में स्‍वीकृत भार के अनुसार अधोसंरचना उपलब्‍ध है, अत: वर्तमान में तकनीकी रूप से नवीन 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र की आवश्‍यकता नहीं है। जी हाँ, माननीय प्रश्‍नकर्ता विधायक महोदय द्वारा प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित मांग की गई है। (ख) विधानसभा क्षेत्र खिलचीपुर के नगर माचलपुर में वर्तमान में स्‍वीकृत भार के अनुसार विद्युत अधोसंरचना उपलब्‍ध है। भविष्‍य की मांग एवं भार प्रबंधन की दृष्टि से ए.डी.बी. योजनान्‍तर्गत 33 के.व्‍ही. माचलपुर फीडर का निर्माण कार्य प्रगति पर है। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में 132 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र स्‍थापित करने की तकनीकी रूप से वर्तमान में कोई आवश्‍यकता नहीं है। (ग) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार ग्राम बालाहेड़ा में एस.एस.टी.डी. योजना के अन्‍तर्गत 5 एम.व्‍ही.ए. क्षमता के नवीन 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र का कार्य किया जाना प्रस्‍तावित है, जिसे वित्‍तीय उपलब्‍धता अनुसार आगामी वर्षों में पूर्ण करने के प्रयास किये जायेंगे। उत्‍तरांश (क) एवं (ख) में दर्शाए अनुसार ग्राम डगल्‍या एवं बाजरोन के मध्‍य नवीन 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र तथा माचलपुर में 132 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र स्‍थापित करने की वर्तमान में कोई आवश्‍यकता नहीं है।

नहरों का पक्‍कीकरण/मरम्‍मतीकरण

4. ( *क्र. 1102 ) श्री जतन उईके : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छिंदवाड़ा जिले के विधान सभा क्षेत्र पांढुर्णा के अंतर्गत कितने वृहद/मध्‍यम/लघु सिंचाई परियोजना संचालित है? नाम सहित जानकारी देवें साथ ही क्‍या कोई नई सिंचाई परियोजना स्‍थापित करने के संबंध में प्रस्‍ताव है? यदि हाँ, तो प्रस्‍तावित परियोजनाएं कब तक पूर्ण कर ली जावेंगी? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में पूर्व से संचालित सिंचाई परियोजनाओं की नहरें क्‍या क्षतिग्रस्‍त हैं, कच्‍ची हैं? यदि हैं तो नाम सहित जानकारी देवें? (ग) मोही जलाशय, चांगोबा जलाशय की नहरों की मरम्‍मत हेतु कितनी-कितनी राशि स्‍वीकृत की गई है? (घ) प्रश्‍नांश (क) के संबंध में क्‍या क्षतिग्रस्‍त कच्‍ची नहरों को पक्‍की नहरों की लाइनिंग में परिवर्तन हेतु कोई योजना प्रस्‍तावित है? यदि हाँ, तो प्रस्‍तावित योजना का नाम बतायें?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) पांढुर्णा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत कोई वृहद अथवा मध्‍यम सिंचाई परियोजना नहीं है। लघु सिंचाई परियोजनाओं की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। पेंढ़ोनी, जामलापानी एवं सेंदुरजना लघु सिंचाई परियोजनाओं की डी.पी.आर. तैयार की गई है। परियोजनाओं की साध्‍यता स्‍वीकृति और वित्‍तीय संसाधनों की उपलब्‍धता पर निर्भर होने से स्‍वीकृति अथवा पूर्णता के लिए समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। कच्‍ची नहरें जल प्रवाह हेतु संधारित होकर क्षतिग्रस्‍त नहीं हैं। (ग) क्रमश: राशि रू. 52.29 लाख एवं रू. 94.64 लाख स्‍वीकृत की गई है। (घ) जी नहीं। स्‍वीकृति हेतु कोई प्रस्‍ताव शासन के विचाराधीन नहीं है।

परिशिष्ट - ''एक''

पीलिया खाल नाले पर प्रदूषण मुक्‍त कार्ययोजना की स्वीकृति

5. ( *क्र. 209 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्या जावरा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नगर पालिका परिषद् जावरा द्वारा शहर के मध्य बहने वाले प्रदूषित पीलिया खाल नाले पर पीलिया खाल प्रदूषण मुक्त कार्ययोजना बनाई गयी है? (ख) यदि हाँ, तो क्या शासन/विभाग के निर्देश पर एवं आमजन को हो रही प्रदूषण की कठिनाई को दृष्टिगत रखते हुए कार्ययोजना की डी.पी.आर. भी बन कर तैयार है? (ग) यदि हाँ, तो क्षेत्र की जनता एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार इसकी स्वीकृति हेतु मांग की जाकर नगर पालिका परिषद जावरा के माध्यम से शासन/विभाग को डी.पी.आर. प्रस्ताव अग्रेषित किये गए हैं? (घ) यदि हाँ, तो नगर की अत्यंत गंभीर इस प्रदूषण मुक्त पीलिया खाल नाले की कार्ययोजना प्रस्ताव डी.पी.आर. को कब स्वीकृति दी जाकर बजट में कब सम्मिलित किया जाएगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) से (ग) जी हाँ। (घ) कार्यवाही की जा रही है, समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

लघु सिंचाई योजनाओं की स्‍वीकृति

6. ( *क्र. 516 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के तारांकित प्रश्‍न संख्‍या-10 (क्रमांक 5021) दिनांक 11 मार्च 2016 के उत्‍तर में चर्चा के दौरान माननीय विभागीय मंत्री जी द्वारा विधानसभा क्षेत्र ब्‍यावरा के अंतर्गत भोजपुरिया बैराज का साध्‍यता का आदेश 07.01.2016 को जारी किया जाना तथा सर्वेक्षण डी.पी.आर. बनाने में लगभग तीन माह का समय लगने की बात कही गई थी? तो क्‍या भोजपुरिया बैराज की सर्वेक्षण डी.पी.आर. बनाई जाकर स्‍वीकृति प्रदान कर दी गई है अथवा नहीं? यदि नहीं, तो बैराज की स्‍वीकृति किन कारणों से किस स्‍तर पर लंबित है? (ख) इसी प्रकार क्‍या विधानसभा क्षेत्र ब्‍यावरा के अंतर्गत पार्वती नदी पर समलापर बैराज की भी तकनीकी स्‍वीकृ‍ति सहित विस्‍तृत कार्ययोजना अधीक्षण यंत्री जलसंसाधन मंडल गुना द्वारा शासन को सक्षम स्‍वीकृति हेतु प्रेषित की जा चुकी है? यदि हाँ, तो बतावें? (ग) उपरोक्‍तानुसार भोजपुरिया बैराज एवं समलापर बैराज की स्‍वीकृति के संबंध में अद्यतन स्थिति क्‍या है तथा कब तक उक्‍त लघु सिंचाई योजनाओं को स्‍वीकृति प्रदान की जावेगी?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) से (ग) जी हाँ। भोजपुरिया एवं समलापर बैराज की डी.पी.आर. बनाई जा चुकी है। उपलब्‍ध वित्‍तीय सीमित संसाधन पूर्व से स्‍वीकृत परियोजनाओं के लिए आबद्ध होने की पृष्‍ठभूमि में स्‍वीकृति के लिए समय-सीमा निर्धारित की जाना संभव नहीं है।

जबलपुर जिले को पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जाना

7. ( *क्र. 508 ) श्री अशोक रोहाणी : क्या राज्‍यमंत्री, संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जबलपुर जिले को पर्यटन हब के रूप में विकसित करने, पर्यटन को बढ़ावा देने व पर्यटकों को लुभाने हेतु प्रदेश शासन पर्यटन वन व पर्यावरण विभाग तथा जिला प्रशासन ने क्‍या-क्‍या कार्ययोजना बनाई है? इसके लिए कितनी-कितनी राशि के कौन-कौन से प्रस्‍ताव किस-किस स्‍तर पर स्‍वीकृति हेतु कब कहाँ-कहाँ भेजे गये हैं? मूल कार्ययोजना क्‍या है? वर्ष 2013-14 से 2016-17 तक की वर्षवार जानकारी दें (ख) प्रश्‍नांश (क) में पर्यटन विभाग जबलपुर/म.प्र. राज्‍य पर्यटन निगम ने कितनी-कितनी राशि की कौन-कौन सी योजनाएं बनाई हैं व कहाँ-कहाँ पर कौन-कौन से कार्य कराना प्रस्‍तावित/स्‍वीकृ‍त हैं? इसके लिए क्‍या कार्यवाही की गई है? इसके लिए शासन ने कब कितनी राशि आवंटित की है? (ग) प्रश्‍नांश (क) में बरगी डेम को पर्यटन स्‍थल के रूप में विकसित करने की योजना क्‍या है? इसके तहत पर्यटकों के लिए कौन-कौन सी सुविधाएं व मनोरंजन के कौन-कौन से साधन उपलब्‍ध कराने की क्‍या योजना है? इस हेतु शासन ने कितनी-कितनी राशि का आवंटन किया है तथा कितनी-कितनी राशि किन-किन कार्यों में व्‍यय हुई है?

राज्‍यमंत्री, संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

अटल ज्योति अभियान अंतर्गत ग्रामों का विद्युतीकरण

8. ( *क्र. 217 ) श्री मुरलीधर पाटीदार : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कितने ग्रामों में अटल ज्योति अभियान अंतर्गत फीडर सेपरेशन का कार्य पूर्ण किया जा चुका है एवं कितने ग्राम शेष हैं? वितरण केन्द्रवार सूची उपलब्ध करावें (ख) अटल ज्योति अभियान अंतर्गत किए जाने वाले फीडर सेपरेशन कार्य में कनेक्शन के मान से कितनी संख्या में ट्रान्सफार्मर लगाये जाना प्रावधानित हैंक्या केबल की गुणवत्ता के संबंध में मापदण्ड निर्धारित हैं? यदि हाँ, तो क्या व इसकी मॉनीटरिंग किस प्रकार की जा रही है? (ग) प्रश्नांश (ख) में उल्लेखित प्रावधान अंतर्गत प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र सुसनेर में कितने ट्रान्सफार्मर स्थापित किए गए हैं? ग्रामवार जानकारी देवें बाजना, रिछड़िया, दावतपुर ग्राम में लगाये गये ट्रान्सफार्मर एवं मापदण्ड अनुसार केबल गुणवत्तायुक्त लगाई गई है या नहीं? (घ) क्या उक्तानुसार स्थापित ट्रान्सफार्मर विद्युत उपलब्धता हेतु पर्याप्त है? यदि हाँ, तो इसकी मॉनीटरिंग किस प्रकार की जा रही हैविवरण देवें यदि नहीं, तो क्या ट्रान्सफार्मर की संख्या बढ़ाई जावेगी व कब तक?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) विधानसभा क्षेत्र सुसनेर के अंतर्गत अटल ज्‍योति अभियान के तहत् कोई भी कार्य किया जाना प्रावधानित नहीं था, यह केवल एक अभियान था, जिसके तहत् ग्रामीण क्षेत्रों में गैर कृषि कार्य हेतु 24 घंटे एवं कृषि कार्यों हेतु 10 घंटे विद्युत प्रदाय किया जाना था। फीडर सेपरेशन योजना के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र सुसनेर में कुल 185 ग्रामों में फीडर सेपरेशन का कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा फीडर सेपरेशन योजना के अंतर्गत 5 ग्रामों एवं अन्‍य योजना के अंतर्गत 14 ग्रामों का कार्य शेष है, जिसका केन्‍द्रवार वितरण का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) अटल ज्‍योति अभियान के अंतर्गत नहीं अपितु फीडर सेपरेशन योजना के अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र सुसनेर के तहत् विद्यमान उपभोक्‍ताओं के भार के अनुसार 573 वितरण ट्रांसफार्मर लगाये जाना प्रावधानित है। जी हाँ, केबल की गुणवत्‍ता के संबंध में मापदण्‍ड कार्यादेश में उल्‍लेखित है। ठेकेदार एजेंसी द्वारा कार्य में उपयोग की जा रही केबल का शासकीय अनुमोदन प्राप्‍त/एन.ए.बी.एल. प्रमाणित प्रयोगशालाओं में टेस्टिंग करवाकर गुणवत्‍ता सुनिश्चित कराए जाने का प्रावधान है, जिसकी मॉनीटरिंग कंपनी के नोडल अधिकारी द्वारा की जाती है। (ग) विधानसभा क्षेत्र सुसनेर के अंतर्गत फीडर सेपरेशन योजना के तहत् 412 वितरण ट्रांसफार्मर स्‍थापित किये गये हैं, जिनकी ग्रामवार सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। जी हाँ, प्रश्‍नांश '''' में उल्‍लेखित ग्रामों में लगाये गये वितरण ट्रांसफार्मर एवं केबल निविदा अनुबंध में उल्‍लेखित मापदण्‍डों के अनुसार ही लगायी गयी है। (घ) जी हाँ, वर्तमान में संबंधित ग्रामों में स्‍वीकृत विद्युत भार के अनुसार स्‍थापित वितरण ट्रांसफार्मर पर्याप्‍त हैं। वितरण केन्‍द्र प्रभारी एवं नोडल अधिकारी फीडर सेपरेशन के द्वारा इसकी मॉनीटरिंग की जा रही है। भार वृद्धि अथवा अतिरिक्‍त वितरण ट्रांसफार्मर लगाये जाने की तकनीकी रूप से आवश्‍यकता पाये जाने पर नियमानुसार प्रस्‍ताव बनाकर अनुमोदन उपरांत तदनुसार कार्यवाही की जाती है, जो कि एक सतत् प्रक्रिया है। वर्तमान में अतिरिक्‍त ट्रांसफार्मर लगाये जाने की आवश्‍यकता नहीं है।

ठोस अपशिष्‍ठ प्रबंधन हेतु बजट आवंटन

9. ( *क्र. 954 ) श्री विष्‍णु खत्री : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या विभाग द्वारा ठोस अपशिष्‍ठ प्रबंधन, नाले-नालियों के चैनलाईजेशन एवं श्‍मशानघाटों के विकास कार्य हेतु बजट प्रावधान किया गया है? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) में दर्शित कार्यों की आवश्‍यकता बैरसिया नगर पालिका में है? क्‍या विभाग इस हेतु बजट आवंटित करेगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) विभाग द्वारा ''स्‍वच्‍छ भारत मिशन'' अंतर्गत ठोस अपशिष्‍ट प्रबंधन, ''अमृत'' तथा ''मुख्‍यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना'' अंतर्गत नाले-नालियों के चैनलाइजेशन एवं श्‍मशानघाटों के विकास कार्य हेतु बजट प्रावधान किया गया है। (ख) जी हाँ, निकाय से योजना के प्रावधानों के अनुरूप उपयुक्‍त प्रस्‍ताव आने पर नगर पालिका बैरसिया को बजट आवंटन किया जा सकेगा।

घट्टिया विधानसभा क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री

10. ( *क्र. 457 ) श्री सतीश मालवीय : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्‍जैन जिले की घट्टिया विधानसभा क्षेत्र में कितने देशी एवं कितने अंग्रेजी शराब ठेके लायसेंस प्राप्‍त कर चल रहे हैं? दुकानवार, ग्रामवार, स्‍थानवार जानकारी उपलब्‍ध करावें (ख) घट्टिया विधानसभा क्षेत्र में विगत 01 वर्ष में अवैध शराब बिक्री के कितने प्रकरण बनाये गये? (ग) क्‍या घट्टिया विधानसभा क्षेत्र में भारी मात्रा में शराब माफिया द्वारा डायरी बनाकर अधिकारियों की मिलीभगत से कानून-कायदे की धज्जिया उड़ा कर हर गांव में अवैध रूप से शराब बिक्री की जा रही है, जिससे शासन को राजस्‍व की हानि होने के साथ ही आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ हो रहा है? ऐसे दोषी शराब माफिया एवं अधिकारियों के विरूद्ध विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही कब तक की जावेगी?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) उज्‍जैन जिले की घट्टिया विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2016-17 में 16 देशी मदिरा एवं 03 विदेशी मदिरा दुकानों के लायसेंस जारी किये गये हैं। दुकानवार, ग्रामवार, स्‍थानवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) घट्टिया विधानसभा क्षेत्र में विगत 01 वर्ष अर्थात जुलाई 2015 से जून 2016 अवधि में, आबकारी विभाग द्वारा आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34 (1)/(2) अवैध शराब आधिपत्‍य, परिवहन, विनिर्माण, विक्रय आदि के 108 आपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध किये गये हैं। (ग) घट्टिया विधानसभा क्षेत्र में किसी शराब माफिया द्वारा डायरी बनाकर एवं अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर, अवैध रूप से गांवों में शराब बिक्री का कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं आया है। वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में घट्टिया विधानसभा क्षेत्र में शासन को कोई राजस्‍व की हानि का प्रकरण प्रकाश में नहीं आया है। अवैध शराब के कारण किसी आमजन के स्‍वास्‍थ्‍य के साथ खिलवाड़ संबंधी कोई शिकायत/प्रकरण आलोच्‍य अवधि में प्रकाश में नहीं आया है। अतएव किसी तथाकथित शराब माफिया अथवा किसी अधिकारी के विरूद्ध कोई कार्यवाही करने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''दो''

भिण्‍ड विधानसभा क्षेत्रांतर्गत स्‍टाप डेम का निर्माण

11. ( *क्र. 1012 ) श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला भिण्‍ड में प्रस्‍तावित कचोंगरा स्‍टाप डेम का निर्माण क्‍वारी नदी पर सिंचाई क्षेत्र 405 हेक्‍टेयर प्रति हेक्‍टेयर लागत 1.69 लाख में प्रश्‍नांश दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अंतर्गत भिण्‍ड विधान सभा क्षेत्र में स्‍टाप डेम, लघु डेम/चेक डेम निर्माण की योजना कहाँ पर प्रचलित है? (ग) क्‍या भिण्‍ड में भू-जल स्‍तर गिर रहा है? यदि हाँ, तो सिंचाई विभाग क्‍या प्रयास कर रहा है? कृषक को रबी/खरीफ की फसल के समय सिंचाई के लिये पानी की व्‍यवस्‍था के लिये डेम निर्माण होगा? यदि हाँ, तो कहाँ पर? कब तक? (घ) सिंचाई विभाग भिण्‍ड की उदासीनता के कारण नदियां/तालाब/नहरें पानी के कारण सूखी हैं? बारहमासी पानी के लिए सिंचाई हेतु क्‍या प्रयास किए जा रहे हैं? कृषकों को 12 माह पानी देने के लिये शासन से क्‍या प्रयास होंगे?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) प्रश्‍नाधीन स्‍टॉपडेम का सर्वेक्षण कराया गया है। डी.पी.आर. अंतिम नहीं हुई है। (ख) भिण्‍ड विधानसभा क्षेत्र में बांध निर्माण के लिए तकनीकी रूप से उपयुक्‍त स्‍थल नहीं है। विभाग की चेकडेम बनाने की कोई योजना नहीं है। (ग) एवं (घ) भू-जल के आहरण एवं वर्षा ऋतु में भू-जल के पुनर्भरण पर भू-‍जल स्‍तर निर्भर होता है। विगत 3 वर्षों में अल्‍प वर्षा के कारण भू-जल के आहरण की तुलना में पुनर्भरण कम होने से भू-जल स्‍तर पर विपरीत प्रभाव होना संभावित है। जल संसाधन विभाग की परियोजनाओं से गत रबी में भिण्‍ड जिले में 1,53,150 हे. में सिंचाई की गई है। सिंचाई परियोजनाओं से बारहमासी जल दिया जाना तकनीकी रूप से संभव नहीं है।

वसूली के पंजीकृत प्रकरण

12. ( *क्र. 440 ) श्री मुकेश नायक : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) शाहनगर जिला पन्‍ना कार्यालय में विगत् 5 वर्षों में खनिज अधिकारी पन्‍ना द्वारा कुल कितने प्रकरण दर्ज कर वसूली हेतु भेजे गये हैं? दिनांकवार, प्रकरणवार भेजे गये वसूली आदेश की प्रति उपलब्‍ध करावें (ख) वसूली हेतु भेजे गये प्रकरणों में कितने प्रकरण में आज दिनांक तक वसूली की गई है, कितने प्रकरणों में अभी तक वसूली नहीं की गई है? प्रकरणवार जानकारी देवें (ग) अगर वसूली नहीं की गई तो इसके लिये कौन जिम्‍मेदार है एवं उसके खिलाफ क्‍या कार्यवाही कब तक की जावेगी?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) शाहनगर जिला पन्‍ना में विगत 5 वर्षों में खनिज अधिकारी पन्‍ना द्वारा एक भी प्रकरण वसूली हेतु नहीं भेजा गया है। अत: शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता। (ख) एवं (ग) प्रश्‍नांश (क) में दिये उत्‍तर अनुसार प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

करेली नहर की मरम्‍मत

13. ( *क्र. 1500 ) श्री जालम सिंह पटेल : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या नरसिंहपुर जिला अंतर्गत साराबहू रहली मायनर नहर करेली के क्षतिग्रस्‍त होने बाबत शिकायत कलेक्‍टर नरसिंहपुर को प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य ने पत्र दिनांक 30.5.16 द्वारा की है? यदि हाँ, तो उक्‍त संबंध में क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) क्‍या श्री विदुर परिहार, कृषक ने जे.सी.बी. से नहर क्षतिग्रस्‍त कर शासन को आर्थिक क्षति पहुंचायी है तथा आगे के कृषकों को मिलने वाले पानी में बाधा पहुंचाई है? (ग) यदि हाँ, तो दोषी कृषक श्री परिहार से आर्थिक नुकसान की भरपाई कर तथा दोषी के विरूद्ध विधि सम्‍मत कार्यवाही कर कब तक दंडित किया जायेगा एवं इस नहर की मरम्‍मत कब तक कराई जायेगी? यदि नहीं, तो क्‍यों?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। शिकायत में उल्लेखित समस्या का निराकरण पूर्व में ही किया जा चुका है। (ख) जी हाँ, परन्तु कृषक के व्यय पर नहर का सुधार कार्य कराने के उपरांत आगे के कृषकों को लगभग 25 हेक्टेयर में सिंचाई हेतु पानी उपलब्ध कराया गया। (ग) उत्तरांश "ख" के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

पी.आई.सी. का गठन

14. ( *क्र. 23 ) डॉ. मोहन यादव : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नगर पालिका अधिनियम के तहत प्रेसिडेन्‍ट इन काउंसिल (पी.आई.सी.) के गठन के संबंध में क्‍या प्रावधान हैपी.आई.सी. में कितने सदस्‍यों का होना एवं किस-किस वर्ग के सदस्‍यों का होना आवश्‍यक हैनियमों की प्रति उपलब्‍ध करावें। (ख) प्रश्‍नांश (क) की जानकारी के अनुसार सदस्‍य संख्‍या में से यदि किसी एक मात्र महिला सदस्‍य के द्वारा पी.आई.सी. की सदस्‍यता से त्‍याग पत्र दिया जाता है एवं अध्‍यक्ष द्वारा पी.आई.सी. का पुनर्गठन नहीं किया जाता है एवं 06 सदस्‍यीय पी.आई.सी. जिसमें कोई महिला सदस्‍य नहीं है, के द्वारा प्रस्‍ताव पारित कर प्रस्‍तावों पर अमल किया जाता है, तो क्‍या उक्‍त प्रस्‍तावों को वैध माना जावेगा? यदि हाँ, तो किस नियम के तहत? यदि नहीं, तो क्‍या उक्‍त पारित प्रस्‍तावों को शून्‍य माना जावेगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। (ख) नियम में प्रश्‍नांश के उत्‍तर का उल्‍लेख न होने से शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''तीन''

नगर पंचायत भीकनगांव के अध्‍यक्ष एवं अन्‍य अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही

15. ( *क्र. 863 ) श्रीमती झूमा सोलंकी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या भीकनगांव विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत नगर पंचायत भीकनगांव के अध्‍यक्ष, मुख्‍य नगर पंचायत अधिकारी एवं लेखापाल के विरूद्ध दिनांक 29/05/2014 से सितम्‍बर 2014 तक के भुगतानों की जाँच कार्यालय संयुक्‍त संचालक स्‍थानीय निधि संपरीक्षा इन्‍दौर म.प्र. के एल.एफ.ए.आय./1050, दिनांक 15/03/2016 तत्‍कालीन कलेक्‍टर के द्वारा जाँच कार्यवाही में गबन पाया गया था? (ख) यदि हाँ, तो वर्तमान तक संबंधित दोषी पदाधिकारियों पर क्‍या कार्यवाही प्रस्‍तावित की गई है तथा नहीं की गई तो क्‍या कारण है कि वर्तमान तक दोषी पदाधिकारी अपने पदों पर कार्यरत हैं? (ग) क्‍या माननीय उच्‍च न्‍यायालय की खण्‍डपीठ इन्‍दौर के आदेश क्र. 414/2015 दिनांक 15/12/2015 को प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्‍तव नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग म.प्र. शासन भोपाल को श्रीमती ममता जायसवाल पति सुभाष जायसवाल अध्‍यक्ष नगर पंचायत भीकनगांव को नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 41 (क) के अंतर्गत 02 माह में पद से हटाने का आदेश दिया गया था? हाँ, तो वर्तमान तक कोई कार्यवाही क्‍यों नहीं की गई? (घ) क्‍या प्रश्‍नांश (क) के जाँच प्रतिवेदन में हुई अनियमितताओं के दोषी पदाधिकारियों पर कोई कार्यवाही प्रस्‍तावित की जावेगी? हाँ, तो उसकी समयावधि क्‍या होगी?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) एवं (ख) प्रकरण में कलेक्‍टर, खरगोन की रिपोर्ट में गबन बाबत कोई अंतिम निष्‍कर्ष अभी नहीं पाया गया है। यह सच है कि माह मई, 2014 से माह सितम्‍बर, 2014 तक हुए भुगतानों की जाँच कलेक्‍टर, जिला खरगोन द्वारा संयुक्‍त संचालक, स्‍थानीय निधि संपरीक्षा, इंदौर से कराई गई है। संयुक्‍त संचालक, स्‍थानीय निधि संपरीक्षा, इंदौर के जाँच प्रतिवेदन क्रमांक एफ.ए.आय./प्रति दिनांक 15.03.2016 के संदर्भ में कलेक्‍टर, खरगोन द्वारा पत्र क्रमांक 1153/व.लि.2/2016 दिनांक 04.07.2016 द्वारा वस्‍तुस्थिति शासन को प्रेषित की है। जिस पर शासन स्‍तर पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (ग) माननीय उच्‍च न्‍यायालय, खण्‍डपीठ, इंदौर में दायर याचिका क्रमांक 414/2015 में माननीय उच्‍च न्‍यायालय द्वारा आदेश दिनांक 15.12.2015 को पारित निर्णय प्रकरण में 02 माह में उपयुक्‍त कार्यवाही करने के निर्देश जारी किये गये थे न कि पद से हटाने के। माननीय न्‍यायालय के निर्णय के अनुपालन में संबंधितों के विरूद्ध नियमानुसार प्रशासकीय कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (घ) प्रश्‍नांश '''' के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में गुण-दोष के आधार पर नियमानुसार कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

रानी अवंती बाई सागर परियोजना अंतर्गत नहर निर्माण

16. ( *क्र. 830 ) श्री नीलेश अवस्‍थी : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रानी अवंती बाई सागर परियोजना बायीं तट नहर की पाटन विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कितनी एवं कौन-कौन सी माइनर एवं डिस्‍ट्रीब्‍यूटर नहरें कितनी-कितनी लम्‍बाई की स्‍वीकृत हैं? उक्‍त स्‍वीकृत माईनर एवं डिस्‍टीब्‍‍यूटरी नहरों में से नहर बार कितनी नहरों का कितना-कितना निर्माण कार्य कब तक पूर्ण हुआ है एवं कितना-कितना निर्माण कार्य उक्‍त माईनरों का किन कारणों से शेष है? सूची देवें (ख) क्‍या पाटन सब-डिवीजन में जल उपभोक्‍ता संस्‍था रियाना के अंतर्गत मोहनतारा के माईनर एवं उसकी सब-माईनर का निर्माण क्‍या प्रस्‍तावित था एवं इस हेतु भूमि अधिकृत कर ली गई परन्‍तु आज दिनांक तक निर्माण न होने के क्‍या कारण हैं? इसी प्रकार खजूरी टेल माईनर किलो मीटर 22 से 26 में नहर निर्माण न होने के क्‍या कारण हैं एवं इन शेष कार्यों का निर्माण कब तक प्रारंभ कर दिया जावेगा? (ग) वित्‍त वर्ष 2016-17 में प्रश्‍न दिनांक तक पाटन विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कौन-कौन से सब-माईनरों की सफाई कितनी लागत से कराई गई एवं आधे सब माईनरों की सफाई न कराई जाने का क्‍या कारण है?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" एवं "ब" अनुसार है। (ख) जी हाँ, कृषकों के विवाद के कारण निर्माण नहीं हो सका है। खजूरी टेल माइनर की आर.डी. 22.70 कि.मी. से आर.डी. 26.00 कि.मी. तक आमंत्रित निविदाओं में ठेकेदार द्वारा भाग नहीं लेने एवं प्रतिस्पर्धा की कमी के कारण कार्य अपूर्ण है। वर्तमान में निविदा प्रक्रियाधीन है, निविदा की नियमानुसार स्वीकृति एवं एजेन्सी निर्धारण के पश्चात कार्य प्रारंभ हो सकेगा। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र "स" अनुसार है। सब-माइनरों की जल प्रवाह क्षमता के 50 प्रतिशत भाग में अवरोध होने पर ही सफाई किये जाने के प्रावधान हैं।

ड्यूटी पर पदस्‍थ कनिष्‍ठ अभियंता से अभद्रता करने वाले दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही

17. ( *क्र. 569 ) पं. रमेश दुबे : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या छिन्‍दवाड़ा जिले के विकासखण्‍ड बिछुआ के विद्युत उपकेन्‍द्र खमारपानी में पदस्‍थ कनिष्‍ठ अभियंता श्री रंजीत साहू से उनके विरूद्ध आयोजित होने वाले धरना आंदोलन को स्‍थगित किये जाने के बदले में आयोजकों द्वारा रूपयों की मांग कर उन्‍हें ब्‍लैकमेल किये जाने का मामला विगत एक वर्ष के भीतर प्रकाश में आया है? यदि हाँ, तो इस मामले पर‍ किस स्‍तर से क्‍या कार्यवाही की गयी है? (ख) क्‍या उक्‍त पूरे मामले की जानकारी प्रश्‍नकर्ता को प्राप्‍त होने पर प्रश्‍नकर्ता ने आन्‍दोलनकर्ताओं के विरूद्ध प्राप्‍त शिकायत, शपथ पत्र, कथन आदि के दस्‍तावेजों सहित ऊर्जा मंत्री, म.प्र. शासन, कलेक्‍टर व पुलिस अधीक्षक छिन्‍दवाड़ा एवं अधीक्षण यंत्री म.प्र.पू.क्षेत्र वि.वि.कं.लि. छिन्‍दवाड़ा को पत्र प्रस्‍तुत किया गया है? यदि हाँ, तो पत्र और शिकायती पत्रों में किन बिन्‍दुओं का उल्‍लेख है? पत्रवार जानकारी दें (ग) क्‍या आंदोलन स्‍थगित करने के बदले रूपयों की मांग करने वाले आन्‍दोलनकारियों के विरूद्ध सार्थक कार्यवाही करना तो दूर अधीक्षण यंत्री के द्वारा कनिष्‍ठ अभियंता श्री रंजीत साहू को ही विद्युत उपकेन्‍द्र खमारपानी से हटा दिया गया? क्‍यों कारण स्‍पष्‍ट करें? (घ) क्‍या विद्युत उपकेन्‍द्र खमारपानी के कनिष्‍ठ अभियंता श्री रंजीत साहू के द्वारा अधीक्षण यंत्री के विरूद्ध प्रस्‍तुत शपथ पत्र के आधार पर जाँच करने तथा प्रश्‍नांश (ख) में उल्‍लेखित पत्रों पर जाँच कर कार्यवाही करने की मांग की गयी है? यदि हाँ, तो क्‍या शासन उक्‍त मामले में अधीक्षण यंत्री की संलिप्‍तता को ध्‍यान में रखते हुए उन्‍हें अन्‍यत्र स्‍थानांतरित कर उक्‍त मामले की मजिस्‍ट्रीयल जाँच के आदेश देगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, शिकायत पत्रों के माध्‍यम से धरना आन्‍दोलन की जानकारी अधीक्षण अभियंता, संचालन एवं संधारण वृत्‍त, छिन्‍दवाड़ा को प्राप्‍त हुई है। माननीय प्रश्‍नकर्ता विधायक महोदय का उक्‍त संबंध में पत्र दिनांक 07.03.2016 प्राप्‍त होने पर अधीक्षण अभियंता, छिन्‍दवाड़ा द्वारा पत्र दिनांक 17.03.2016 से शिकायत की जाँच किये जाने एवं शासकीय कार्य में व्‍यवधान उत्‍पन्‍न करने वालों के विरूद्ध नियमानुसार समुचित कानूनी कार्यवाही करने हेतु पुलिस अधीक्षक छिन्‍दवाड़ा को लेख किया गया है। (ख) जी हाँ, प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित प्रकरण के संबंध में माननीय प्रश्‍नकर्ता विधायक महोदय द्वारा ऊर्जा मंत्रीजी को पत्र क्रमांक 358, दिनांक 07.03.2016 एवं अधीक्षण अभियंता, संचालन एवं संधारण वृत्‍त, छिन्दवाड़ा को पत्र क्रमांक 361 दिनांक 07.03.2016 एवं पुलिस अधीक्षक को पत्र क्रमांक 360 दिनांक 7.03.2016 प्रेषित किया गया है। उक्‍त पत्रों/शिकायती पत्रों में उल्‍लेखित बिन्‍दुओं की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। प्राप्‍त जानकारी अनुसार कलेक्‍टर छिन्‍दवाड़ा कार्यालय में कोई पत्र प्राप्‍त होना नहीं पाया गया। (ग) दिनांक 23.03.2016 को ग्राम खमारपानी के ग्रामवासियों द्वारा शिकायती पत्रों का ज्ञापन, जनसुनवाई में कलेक्‍टर, छिन्‍दवाड़ा कार्यालय में दिया गया। अधीक्षण अभियंता, संचालन एवं संधारण वृत्‍त, छिन्‍दवाड़ा द्वारा इसकी जाँच करने हेतु कार्यपालन अभियंता, प्रवर्तन, छिन्‍दवाड़ा को निर्देशित किया गया। कार्यपालन अभियंता, प्रवर्तन, छिन्‍दवाड़ा द्वारा जांचोपरांत पत्र क्रमांक 973 दिनांक 29.02.2016 से जाँच प्रतिवेदन प्रस्‍तुत किया गया। जाँच प्रतिवेदन में उल्‍लेखित तथ्‍यों के आधार पर कार्यपालन अभियंता, संचालन एवं संधारण संभाग, सौंसर द्वारा कार्यवाही करते हुए श्री रंजीत साहू, कनिष्‍ठ अभियंता का स्‍थानान्‍तरण खमारपानी से संभागीय कार्यालय, सौंसर किया गया। (घ) विद्युत उपकेन्‍द्र प्रभारी श्री रंजीत साहू द्वारा अधीक्षण अभियंता, संचालन एवं संधारण वृत्‍त, छिन्‍दवाड़ा के विरूद्ध किसी भी प्रकार का शपथपत्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी कार्यालय में प्रस्‍तुत नहीं किया गया है। तथापि माननीय प्रश्‍नकर्ता विधायक महोदय द्वारा ऊर्जा मंत्री को प्रेषित पत्र क्रमांक 358 दिनांक 07.03.2016 प्राप्‍त हुआ है। जिस पर उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार कार्यवाही की गई है। प्रश्‍नांश (ख) में उल्‍लेखित मामले की जाँच में अधीक्षण अभियंता, संचालन एवं संधारण वृत्‍त, छिन्‍दवाड़ा की संलिप्‍तता नहीं पाई गई है। अत: प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''चार''

मुरैना, श्‍योपुर जिलों की नहरों की स्थिति

18. ( *क्र. 1087 ) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या श्‍योपुर से मुरैना तक नहरों में हुए सी.सी. कांक्रीट कार्य की गुणवत्‍ता ठीक नहीं होने से संपूर्ण नहरों में दरारें आ गई हैं, वर्तमान में क्‍या स्थिति है? (ख) क्‍या शासन उक्‍त निर्माण कार्य की जाँच वरिष्‍ठ अधिकारियों की टीम बनाकर करायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? (ग) क्‍या उक्‍त गुणवत्‍ताहीन निर्माण की शिकायत पूर्व में भी की गई थी, लेकिन उसके बावजूद भी निर्माण में कोई सुधार नहीं किया गया था? दोषी लोगों के खिलाफ क्‍या कार्यवाही की जायेगी?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) से (ग) जी नहीं। नहरों में लाईनिंग की गुणवत्‍ता एवं स्थिति अच्‍छी है। निर्माण के पश्‍चात सामान्‍य स्‍वरूप की कुछ दरारें आईं थीं, जिन्‍हें निर्माण एजेंसी के व्‍यय से डिफेक्‍ट लायबिलीटी अवधि में ठीक करा लिया गया है। निर्माण कार्य की गुणवत्‍ता अच्‍छी होने से शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होते हैं।

अवैध खनन/ परिवहन पर कार्यवाही

19. ( *क्र. 932 ) श्री मानवेन्द्र सिंह : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला छतरपुर में सड़क निर्माण, भवन निर्माण, हाई-वे, टू-लेन, प्रधानमंत्री सड़क योजना आदि के निर्माण में उपयोग हेतु कौन-कौन सी फर्मों, कम्‍पनियों, संस्‍थाओं में गिट्टी, पत्‍थर, बोल्‍डर मुरम खनन/रेत खनन की अनुमति 01.04.2011 से प्रश्‍न दिनां‍क तक प्राप्‍त की थी और किसने-किसने कितनी राशि, रायल्‍टी के शुल्‍क के रूप में जमा की? (ख) क्‍या अवैध खनन, परिवहन स्‍वीकृत स्‍थान से अन्‍यत्र खनन की शिकायतें प्राप्‍त हुईं? उनका विवरण एवं जाँच का विवरण उपलब्‍ध करावें (ग) किस-किस की शिकायतें विचाराधीन हैं और कौन-कौन सी किस कारण से नस्‍तीबद्ध की गईं हैं?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जिला छतरपुर में सड़क निर्माण, भवन निर्माण, हाई-वे, टू-लेन, प्रधानमंत्री सड़क योजना आदि के निर्माण में उपयोग हेतु पत्‍थर, बोल्‍डर खनन हेतु 1. खजुराहो मिनरल्‍स-खजुराहो बिल्‍डर्स एण्‍ड कंस्ट्रक्‍शन प्रा.लि. छतरपुर, 2. एस.ई.डब्‍ल्‍यू. कंस्ट्रक्‍शन कंपनी हैदराबाद को अस्‍थाई अनुज्ञा पत्र जारी किये गये हैं तथा 3 सैद्धांतिक अनुमति जारी की गई है। अस्‍थाई अनुज्ञप्तिधारियों द्वारा क्रमश: रूपए 3544055/-, 113600/- रूपये रायल्‍टी जमा की गई है। कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग द्वारा ठेकेदारों के देयकों से काटी गई राशि का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है एवं महाप्रबंधक म.प्र. ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण परियोजना क्रियान्‍वयन इकाई छतरपुर द्वारा ठेकेदारों के बिलों से काटी गई रायल्‍टी का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) अवैध खनन, परिवहन स्‍वीकृत स्‍थान से अन्‍यत्र पाये जाने पर दिनांक 01.04.2011 से अब तक अवैध खनन के 118 प्रकरणों में राशि रूपए 413177356/- प्रस्‍तावित कर प्रकरण बनाये जाकर संबंधित अनुविभागीय अधिकारी न्‍यायालय में भेजे गये हैं एवं अवैध परिवहन के 1674 प्रकरण बनाये जाकर रूपये 40091499/- अर्थदण्‍ड आरोपित कर वसूल किया गया है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

 

विद्युत सब-स्‍टेशन का निर्माण

20. ( *क्र. 659 ) श्री प्रदीप अग्रवाल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दतिया जिले की इन्‍दरगढ़ तहसील में मध्‍य क्षेत्र वि.वि. कंपनी द्वारा 132 के.व्‍ही. का विद्युत स्‍टेशन स्‍वीकृत किया गया है या उसे अपग्रेड किया गया है? यदि हाँ, तो कब? कार्य दिनांक/कार्य समाप्ति दिनांक/लागत राशि सहित जानकारी उपलब्‍ध करायें (ख) क्‍या उक्‍त विद्युत स्‍टेशन पूर्ण किया जाकर विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है? यदि हाँ, तो किस दिनांक को? यदि नहीं, तो क्‍या कारण है कि इतना महत्‍वपूर्ण कार्य होने के बाद भी उसे समय-सीमा में पूर्ण नहीं किया गया है? इसके लिये कौन-कौन उत्‍तरदायी हैं एवं उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही की गयी? (ग) उक्‍त कार्य कब तक पूर्ण कर लिया जायेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, दतिया जिले की इंदरगढ़ तहसील में मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी नहीं अपितु मध्‍य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड द्वारा नवीन 132 के.वी. विद्युत उपकेन्‍द्र के निर्माण का कार्य स्‍वीकृत किया गया है। कार्य के प्राक्‍कलन की स्‍वीकृति दिनांक 11.03.2013 है। कार्य पूर्ण किये जाने की तिथि कांट्रेक्‍ट अवार्ड दिनांक 20.04.2013 से 24 माह अर्थात् 19.04.2015 थी। कार्य की लागत राशि 1051.37 लाख रूपये है। (ख) टर्न-की कांट्रेक्‍टर द्वारा उपकेन्‍द्र कार्य पूर्ण नहीं किया गया है तथा कार्य बीच में ही रोक दिया गया है। कार्य में हो रहे विलंब के लिए ठेकेदार उत्‍तरदायी है। समय-सीमा में कार्य पूर्ण नहीं करने के कारण कार्यादेश के अनुबंध की शर्तों के अनुसार ठेकेदार के विरूद्ध कार्यवाही की जा रही है, जिसके अंतर्गत सम्‍पूर्ण कार्यादेश की राशि के 10 प्रतिशत तक की पेनाल्‍टी टर्न-की कांट्रेक्‍टर के देयकों से काटी जा रही है। (ग) उक्‍त उपकेन्‍द्र का शेष कार्य विभागीय स्‍तर पर टर्न-की कांट्रेक्‍टर मेसर्स आइसोलक्‍स की रिस्‍क एवं कॉस्‍ट पर निविदा जारी कर शीघ्र पूर्ण करने के प्रयास किये जा रहे हैं। इस कार्य के लिए निविदा की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। अत: वर्तमान में समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। 

कॉलोनी विकास एवं अन्‍य राशि की वसूली

21. ( *क्र. 690 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नगर पालिक निगम सतना के वार्ड क्र. 33 (पूर्व वार्ड क्रमांक 31) में स्थित गंगा गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित के द्वारा नगर पालिक निगम सतना से कॉलोनी बनाने हेतु किस अराजी क्रमांकों की कितने-कितने रकबे की भूमि का वैध लायसेंस कब-कब लिया? निगम द्वारा जारी लायसेंस की प्रति उपलब्‍ध करायें (ख) प्रश्‍नांश (क) में वर्णित समिति के द्वारा नगर निगम से लायसेंस जारी होने की तिथि से प्रश्‍न तिथि तक क्‍या-क्‍या सुविधायें (नाली, सड़क, बिजली के खंभे, सेप्टिक टैंक, ओव्‍हर हेड वाटर टैंक, पानी की पाईप लाईनें, खंभों पर बिजली के तार एवं अन्‍य सभी सुविधायें) उक्‍त कॉलोनी में उपलब्‍ध कराई गई हैं? बिन्‍दुवार सुविधावार जानकारी दें (ग) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित सहकारी समिति के द्वारा कितना-कितना शुल्‍क नगर पालिक निगम सतना में किस-किस कार्य हेतु कब-कब जमा किया गया? मदवार, कार्यवार, राशिवार, दिनांकवार जानकारी दें कितना-कितना शुल्‍क किस-किस कार्य का किस मद का किस दिनांक से नगर पालिक निगम को लेना है? राशिवार, मदवार, कार्यवार दें (घ) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित समिति द्वारा नगर निगम सतना में राशि जमा नहीं कराये जाने के दोषी किस नाम/पदनाम के विरूद्ध राज्‍य शासन कब व क्‍या कार्यवाही कर कब तक उक्‍त राशि की वसूली करेगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) आराजी क्रं. 307/1/1, 308/1/1, 309/1, 311/1/1, 312/2/5, 312/2/5/1519 मौजा धवारी कुल रकबा 4.07 एकड़। दिनांक 02.07.2008 नगर पालिका निगम द्वारा जारी विकास अनुमति की प्रति की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) गंगा गृह सहकारी समिति द्वारा नगर पालिका निगम, सतना को अनुमति शुल्‍क रू. 6,600/- आश्रय शुल्‍क रू. 2,22,600/- पर्यवेक्षण शुल्‍क रू. 54,372/- क्रमश: दिनांक 17.01.2008 एवं 03.06.2008 को जमा किया गया है। कोई शुल्‍क जमा करना शेष नहीं है। (घ) उत्‍तरांश (ग) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

पट्टे की भूमियों में फ्री होल्‍ड अधिकार अधिनियम, 2010 का पालन

22. ( *क्र. 393 ) श्री राजकुमार मेव : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या मध्‍यप्रदेश नगरीय क्षेत्रों में स्थि‍त पट्टे की भूमियों के संबंध में फ्री होल्‍ड अधिकार अधिनियम, 2010 का पालन इंदौर विकास प्राधिकरण इंदौर, मध्‍यप्रदेश गृह निर्माण मण्‍डल इंदौर एवं रजिस्‍ट्रीकृत किसी गृह निर्माण सहकारी समिति सोसायटी द्वारा किया जा रहा है? यदि नहीं, तो क्‍या कारण है? (ख) इंदौर विकास प्राधिकरण इंदौर के पास वर्ष, 2010 से प्रश्‍न दिनांक तक पात्र पट्टाधारी (लीज़ होल्‍ड) अधिकार में उनके द्वारा धारित भूमि के संबंध में फ्री होल्‍ड अधिकार के तहत कितने आवेदन प्राप्‍त हुये? किसके-किसके द्वारा किस-किस दिनांक को आवेदन प्रस्‍तुत किये गये? उन आवेदन पत्रों का क्‍या निराकरण किया गया? यदि लंबित हो तो कारण बतायें? (ग) इंदौर विकास प्राधिकरण इंदौर द्वारा निविदा, निरंतर पंजीयन, संकल्‍प-09, एस.सी., एस.टी., पूर्व दर, नियमित दर, व्‍यवस्‍था के अंतर्गत आवंटित आवासीय, व्‍यवसायिक भूखण्‍डों को फ्री होल्‍ड किये जाने के संपरिवर्तन करने से संपरिवर्तन प्रभार की कितनी राशि शासन को किस-किस वर्ष में कितनी-कितनी प्राप्‍त हुई एवं जो संपरिवर्तन हेतु प्रकरण लंबित हैं, उनमें कितनी राशि का नुकसान शासन को हो रहा है? (घ) क्‍या शासन लंबित प्रकरणों में इंदौर विकास प्राधिकरण एवं गृह निर्माण मण्‍डल अथवा रजिस्‍ट्रीकृत गृह निर्माण समितियों को निर्देशित कर प्रक्रिया का पालन यथाशीघ्र करने हेतु निर्देशित करेगा? यदि हाँ, तो कब से?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) म.प्र. नगरीय क्षेत्र में स्थित पट्टे की भूमियों के संबंध में राजस्‍व विभाग द्वारा अधि‍सूचना क्रमांक 2-16-2009-7-6 भोपाल दिनांक 21.09.2010 को फ्री होल्‍ड अधिकार नियम 2010 प्रभावशील किये गये थे। प्राधिकरणों के द्वारा म.प्र. विकास प्राधिकरणों की सम्‍पत्तियों का प्रबंधन तथा व्‍ययन नियम 2013 के अंतर्गत भूखण्‍डों के व्‍ययन की समस्‍त कार्यवाही की जाती है। प्राधिकरणों के द्वारा उनकी योजनाओं के लिये भूमि तीन प्रकार से यथा शासन से आवंटन, आपसी समझौते से निजी भूमि स्‍वामी से प्राप्‍त करना तथा भू-अर्जन अधिनियम के अंतर्गत भू-अर्जन से प्राप्‍त की जाती है। राजस्‍व विभाग की उक्‍त अधिसूचना राज्‍य सरकार द्वारा प्रदत्‍त शासकीय भूमि पर दिये गये पट्टों के संबंध में प्रभावशील की गई है, जबकि प्राधिकरणों के द्वारा शासकीय भूमि के अतिरिक्‍त आपसी समझौते से निजी भूमि स्‍वामी से भूमि प्राप्‍त करना तथा भू-अर्जन अधिनियम के अंतर्गत सम्‍पत्ति धारित की जाती है। राजस्‍व विभाग की उक्‍त अधिसूचना को म.प्र. विकास प्राधिकरणों की सम्‍पत्तियों का प्रबंधन तथा व्‍ययन नियम 2013 के अंतर्गत प्रभावशील करने हेतु समस्‍त प्राधिकरणों से नीति निर्धारण चाही गई थी, जिस पर नगरीय विकास एवं आवास द्वारा विचार कर परीक्षणोंपरान्‍त कार्यवाही प्रचलित है। म.प्र. गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा नियम 2010 के परिप्रेक्ष्‍य में शासकीय भूमि पर तैयार की गई योजना के भूखण्‍डों के संबंध में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किये जा रहे हैं तथा संबंधित कलेक्‍टर द्वारा फ्री होल्‍ड की कार्यवाही की जाती है।
रजिस्‍ट्रीकृत किसी गृह निर्माण सहकारी समिति सोसायटी द्वारा नियम 2010 का पालन किये जाने की जानकारी एकत्रित की जा रही है। (ख) इन्‍दौर विकास प्राधिकरण के पास वर्ष 2010 से प्रश्‍न दिनांक तक कुल 1537 पट्टाधारी (लीज़ होल्‍ड) अधिकार में फ्री होल्‍ड अधिकार के संबंध में आवेदन प्राप्‍त हुये हैं। इन्‍दौर विकास प्राधिकरण द्वारा 468 आवेदनों का निराकरण किया गया है, शेष 1069 आवेदन विचाराधीन हैं। जिसकी सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। शेष जानकारी उत्‍तरांश (क) अनुसार। (ग) फ्री होल्‍ड अधिकार का प्रदान किया जाना नियम-2010 के अंतर्गत संपरिवर्तन के लिये केवल आवासीय एवं वाणिज्यिक प्रयोजन के लिये लीज़ पर आवंटित भूमि ही निर्धारित श्रेणी में आती है। नियम-5 के प्रथम परन्‍तुक अनुसार रियायती दर/न लाभ न हानि पर अर्थात् पूर्ण प्रीमियम प्रभारित किये बिना आवंटित की गई भूमि, व्‍यवस्‍थापन के अंतर्गत आवंटित भूखण्‍ड की पात्रता संपरिवर्तन की श्रेणी में आने का राजस्‍व विभाग के नियम 2010 में वर्णन नहीं है। अत: इस प्रकार के प्रकरण फ्री होल्‍ड अधिकार अधिनियम 2010 में संपरिवर्तन के लिये पात्र श्रेणी में नहीं आते हैं अत: शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता है। (घ) म.प्र. नगरीय क्षेत्रों में स्थित पट्टे की भूमियों के संबंध में फ्री होल्‍ड अधिकार नियम 2010 के परिप्रेक्ष्‍य में नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा म.प्र. विकास प्राधिकरणों की सम्‍पत्तियों का प्रबंधन तथा व्‍ययन नियम 2013 में संशोधन की कार्यवाही विचाराधीन है। अत: समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। 

अधिगृहीत भूमि हेतु मुआवजा राशि का निर्धारण

23. ( *क्र. 59 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या भू-अर्जन अधिकारी यूनिट क्रमांक 6 बाणसागर परियोजना रीवा म.प्र. द्वारा कोठार (राजस्‍थान) एवं घुघचिहाई तहसील रघुराजनगर की आराजी खसरा नं. 298, 299 के अधिग्रहण हेतु भू-स्‍वामियों को नोटिस दिये गये हैं और उनके लिए प्रति हेक्टेयर नौ लाख रूपये मुआवजा राशि निर्धारित की गई है? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) में वर्णित आराजी के समकक्ष आराजी खसरा नं. 1243 के भूस्‍वामी दीनावली पिता सरजू कोल सा.देह को भी भूमि अधिग्रहण हेतु नोटिस दिया गया है और इस हेतु प्रति हेक्टेयर 22 लाख रूपये मुआवजा राशि निर्धारित की गई है? (ग) यदि प्रश्‍नांश (क) और (ख) हाँ, तो एक ही तरह की आराजी के लिए मुआवजा राशि निर्धारण में इतना बड़ा अंतर क्‍यों है? इस त्रुटिपूर्ण मुआवजा निर्धारण के लिये कौन उत्‍तरदायी है? इसे कब तक ठीक कर प्रश्‍नांश (क) के समान मुआवजा राशि निर्धारित की जायेगी?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) जी हाँ, भू-अर्जन अधिकारी द्वारा रू. 9,16,666/- प्रति हेक्‍टर की दर से मुआवजा निर्धारित कर दिनांक 13.08.2012 को रू. 4,09,612/- का अवार्ड पारित कर भुगतान किया जाना प्रतिवेदित है। (ख) जी हाँ, भू-अर्जन अधिकारी द्वारा प्रति हेक्‍टर रू. 22/- लाख की दर से मुआवजा निर्धारित कर दिनांक 26.11.2012 को रू. 11,28,600/- का अवार्ड पारित कर भुगतान किया जाना प्रतिवेदित है। (ग) भू-अर्जन संबंधी अधिनियमों में अर्जित की जाने वाली भूमि के बाजार मूल्‍य का निर्धारण प्रारंभिक अधिसूचना जारी होने की तिथि‍ में किये जाने का प्रावधान है। प्रश्‍नाधीन दोनों प्रकरण में प्रारंभिक अधिसूचना की तिथि‍ एवं वर्ष भिन्‍न-भिन्‍न है। मुआवजा निर्धारण में त्रुटि की स्थिति नहीं है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होता है।

सिंहस्‍थ, 2016 में कराए गए निर्माण कार्य

24. ( *क्र. 803 ) श्री रामनिवास रावत : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सिंहस्‍थ, 2016 में कुल कितनी राशि खर्च की जाना किस-किस वर्ष के बजट में प्रस्‍तावित था तथा किस-किस वर्ष में कितनी राशि किस-किस मद में की गई? सिंहस्‍थ 2016 में कुल कितनी राशि खर्च की गई? (ख) सिंहस्‍थ, 2016 में कितनी-कितनी राशि से किस वर्ष में क्‍या-क्‍या निर्माण कार्य किया गया? निर्माण कार्य का नाम, स्‍थान, कुल प्रस्‍तावित लागत, कुल वास्‍तविक लागत कार्य प्रारंभ तथा समाप्ति की दिनांक, भुगतान की दिनांक, ठेकेदार/फर्म का नाम, पता सहित सूची प्रदान करें? (ग) सिंहस्‍थ, 2016 में वस्‍तुओं की खरीदी पर कुल कितनी राशि खर्च की गई। वस्‍तु का नाम, दर, कुल क्रय किए गए नग, कुल देय राशि, विक्रेता का नाम, पता, टिन नं., भुगतान की दिनांक सहित बतावें,  साथ ही यह भी बतावें कि उक्‍त वस्‍तुओं का उपयोग कहाँ किया गया? (घ) सिंहस्‍थ, 2016 में टॉयलेट किस दर से किस कम्‍पनी से खरीदे गए अथवा किराए से लिए गए तथा उसको स्‍थापित करने का कार्य किस ठेकेदार द्वारा किस दर से किया गया?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली का सतत् प्रदाय

25. ( *क्र. 361 ) श्री दीवानसिंह विट्ठल पटेल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लि. इन्‍दौर क्षेत्रान्‍तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे विद्युत प्रदाय की जा रही है? यदि हाँ, तो आदिवासी क्षेत्र के कई ग्रामों में आज तक भी 24 घंटे बिजली नहीं दी जा रही है? क्‍यों? (ख) क्‍या वनवासी क्षेत्र में आदिवासी लोग मजरे टोलों में ही निवासरत् रहते हैं? यदि हाँ, तो पानसेमल विधानसभा क्षेत्र के कई ग्रामों/टोलों/मजरों में 24 घंटे बिजली क्‍यों नहीं दी जा रही है? (ग) उक्‍त क्षेत्र में पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्‍पनी द्वारा निम्‍न स्‍तर का कार्य किया जा रहा है? क्‍या गुणवत्‍ता सुधारी जावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, तकनीकी कारणों यथा-लाईन फाल्‍ट के कारण तार टूटना, विद्युत उपकरणों की खराबी आदि के कारण हुए आकस्मिक अवरोधों, आवश्‍यक रखरखाव कार्य हेतु अथवा नवीन विद्युत अधोसंरचना का निर्माण करने हेतु अपरिहार्य होने जैसे कारणों को छोड़कर प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में गैर-कृषि कार्य हेतु 24 घंटे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। आदिवासी क्षेत्रों में समस्‍त राजस्‍व ग्रामों के मुख्‍य आबाद क्षेत्र में गैर-कृषि फीडरों पर 24 घंटे एवं कृषि फीडरों पर 10 घंटे नियमानुसार विद्युत प्रदाय की जा रही है। (ख) जी हाँ, वनवासी क्षेत्रों में निवासरत आदिवासी लोग अपनी परम्‍परा के अनुसार पृथक-पृथक मजरों/टोलों/फल्‍यों में निवास करते हैं। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र सहित आदिवासी क्षेत्रों में समस्‍त राजस्‍व ग्रामों के मुख्‍य आबाद क्षेत्र में गैर-कृषि फीडरों पर 24 घंटे एवं कृषि फीडरों पर 10 घंटे नियमानुसार विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। आदिवासी क्षेत्रों के कुछ ग्रामों के मुख्‍य आबादी से दूर पृथक-पृथक बसे हुए ऐसे मजरे/टोले/फल्‍ये जो गैर कृषि फीडरों से संबद्ध नहीं है, उन्‍हे 10 घंटे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। (ग) जी नहीं, म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इन्‍दौर क्षेत्रान्‍तर्गत निविदा अनुबंध की शर्तों के अनुसार निर्धारित मापदण्‍डों के अनुसार ही उचित गुणवत्‍ता पूर्ण कार्य सम्‍पादित किये जा रहे हैं। कार्य की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने के लिये नोडल अधिकारियों व तृतीय पक्ष निरीक्षण एजेंसी द्वारा सतत् रूप से निगरानी कर ठेकेदार एजेंसी से आवश्‍यक सुधार कार्य कराए जाते हैं, जो कि एक सतत् प्रक्रिया है।

 

 


 

 

 

 

 

 

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भाग-2

नियम 46 (2) के अंतर्गत अतारांकित प्रश्नोत्तर के रुप में परिवर्तित तारांकित प्रश्नोत्तर


मस्‍टर कर्मियों को नगद भुगतान

1. ( क्र. 24 ) डॉ. मोहन यादव : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या-101 ( क्रमांक 7497), दिनांक 01.04.2016 के जवाब में विभाग द्वारा उज्‍जैन जिले की किसी भी नगर पालिका द्वारा मस्‍टरकर्मियों को नगद भुगतान नहीं किया जाता तथा किसी भी जनप्रतिनिधि का नगद भुगतान के संबंध में कोई सुझाव प्राप्‍त होने के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या नगर पालिका परिषद् खाचरौद द्वारा वाउचर क्रमांक 968, दिनांक 14.12.2015, वाउचर क्रमांक 1126, दिनांक 05.01.2016, वाउचर क्रमांक 1185, दिनांक 13.01.2016 के माध्‍यम से मस्‍टरों का नगद भुगतान किया गया है, साथ ही आवक क्रमांक 63, दिनांक 12.01.2016 को पार्षद अर्जुन माली द्वारा मुख्‍य नगर पालिका अधिकारी खाचरौद एवं अध्‍यक्ष महोदय न.पा. खाचरौद को पत्र देकर मस्‍टरकर्मियों को एकाउंटपेयी चेक से भुगतान किये जाने का निवेदन किया था? (ग) यदि प्रश्‍नांश (ख) का जवाब हां है, तो क्या विभाग द्वारा सदन में गलत अपूर्ण जानकारी देने वाले तथा आर्थिक अनियमितता कर नगद भुगतान करने वाले संबंधित अधिकारी को निलंबित कर जाँच की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। (ग) अपूर्ण जानकारी देने वाले तथा आर्थिक अनियमितता कर नगद भुगतान करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध जाँच करने हेतु संभागीय संयुक्‍त संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास, उज्‍जैन संभाग, उज्‍जैन को संचालनालय पत्र क्रं. 740 दिनांक 09.07.2016 द्वारा निर्देशित किया गया है। जाँच उपरांत आवश्‍यक कार्यवाही की जाएगी। समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है।

बालोदाकोरन तालाब की नहर का निर्माण

2. ( क्र. 36 ) श्री मुकेश पण्‍ड्या : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बड़नगर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बालोदाकोरन में विभाग द्वारा तालाब का निर्माण किस वर्ष में कितनी लागत से किया गया है? उक्‍त तालाब की नहर किन-किन ग्रामों की सुविधा के लिये बनाई गई तथा किन-किन ग्राम के कृषकों को सुविधा का लाभ मिला हैं? (ख) क्‍या विभाग द्वारा तालाब की नहर का अंतिम छोर ग्राम रावदियापीर तक है किन्‍तु इसका निर्माण (पक्‍की नहर) 200 मीटर दूरी तक ही किया गया है शेष नहर को 200 मीटर कच्‍ची भूमि में छोड़ दिया गया है जिससे कि ग्राम रावदियापीर के कृषकों के खेतों में पानी भर जाने से फसलों का नुकसान हो रहा हैं? विभाग द्वारा इस समस्‍या के निराकण के संबंध में अब तक क्‍या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो इसके लिये कौन अधिकारी दोषी है व दोषी अधिकारी के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? विभाग द्वारा कृषकों कि समस्‍या का समाधान कब तक कर दिया जावेगा?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) बालोदाकोरन परियोजना का निर्माण वर्ष 2015 में लागत राशि रू.1760.10 लाख से कराया गया। परियोजना की नहर ग्राम बालोदाकोरन, अजडावदा एवं रावदियापीर में सिंचाई के लिए बनाई गई है, जिससे कृषकों को सिंचाई लाभ मिला है। (ख) जी हाँ। यद्यपि नहर का कार्य अपूर्ण है, जिसे कच्‍ची नहर गहराई में होने से कृषकों के खेतों में पानी भरने की स्थिति नहीं है। वर्षा के पानी की निकासी के लिए नहर किनारे नाली बनाई जा रही है। किसी अधिकारी के दोषी होने की स्थिति नहीं है। वर्षाऋतु उपरांत।

विकास कार्यों की कार्ययोजना

3. ( क्र. 58 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या नगर पालिका निगम सतना के द्वारा मुख्‍यमंत्री शहरी अधोसंरचना विकास योजना के तहत विकास कार्यों की कार्ययोजना बनाई गई थी? (ख) उक्‍त कार्ययोजना के तहत प्रश्‍नांश (क) नगर निगम क्षेत्र के कौन-कौन से विकास कार्य सम्मिलित किये गये थे? प्राक्‍कलन राशि, तकनीकी स्‍वीकृति एवं प्रशासकीय स्‍वीकृति की विस्‍तृत जानकारी दें? (ग) उक्‍त कार्य योजना के तहत शासन/संचालनालय द्वारा कब-कब, किस-किस वार्ड में कराये जाने वाले कार्यों के लिये कितनी-कितनी राशि जारी की गई थी? कार्यवार विवरण दें? इन कार्यों का मूल्‍यांकन किस अधिकारी द्वारा कितनी-कितनी राशि का किया गया है? (घ) यदि उक्‍त कार्य योजना के तहत कार्य नहीं कराये गये हैं तो राशि किस-किस मद में कब-कब व्‍यय की गई है? बतायें? नियम विरूद्ध व्‍यय के लिये कौन-कौन अधिकारी दोषी है? दोषी अधिकारी के विरूद्ध शासन क्‍या कार्यवाही करेगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) योजनांतर्गत स्‍वीकृत अनुसार कार्य कराया जाकर, राशि व्‍यय की गई है। योजनांतर्गत प्राप्‍त राशि अन्‍य मद में राशि व्‍यय नहीं की गई है। अत: शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

अवैध उत्‍खनन पर कार्यवाही

4. ( क्र. 63 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अशोकनगर व शिवपुरी जिले में पिछले 3 वर्षों में कितनी अवैध खनन की शिकायतें मिली व उस पर क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) जिला मुख्‍यालय अशोकनगर के पास ग्राम पलकटोरी में अवैध उत्‍खनन को रोकने गये व जब्‍त वाहनों को ले जाते समय पुलिस, पटवारी, तहसीलदार से दुर्व्‍यवहार डरा धमकाकर वाहन छुड़ा कर ले जाने वाले अजय यादव, यादवेन्‍द्र यादव समेत 20 लोगों के खिलाफ प्रकरण माह जून में दर्ज हुआ एवं उस पर 20 लोगों की पहचान कर सभी को अभी तक गिरफ्तार क्‍यों नहीं किया गया हैकब तक गिरफ्तारी हो जाएगी? (ग) जिस परिसर में इन वाहनों को रखा था उसको अतिक्रमण से मुक्‍त कर वहां रखे, सभी वाहनों को राजसात करने की कार्यवाही में विलंब क्‍यों हो रहा है व कब तक शासन कार्यवाही करेगाकिस-किस धारा में प्रकरण दर्ज हुआ है? (घ) पलकटोरी खदान में पिछले कई वर्षों से सैकड़ों टन अवैध खनन की शिकायत जिला पंचायत की बैठक में के.पी.सिंह यादव द्वारा की थी उसका आंकलन कर कितना जुर्माना होता है यह बताएं तथा इसकी वसूली हेतु कब तक कार्यवाही करेंगे?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट में दर्शित है। (ख) प्रश्‍नानुसार घटना में आरोपी 1- यादवेन्‍द्र सिंह पुत्र देशराज सिंह यादव, 2- अजय सिंह पुत्र देशराज सिंह यादव, 3- मनोज दांगी, 4- लखन यादव एवं अन्‍य 15-20 अज्ञात व्‍यक्तियों के विरूद्ध अपराध क्रमांक 266/16 धारा 353, 341, 186, 379, 147, 148, 149 का प्रकरण कायम कर विवेचना में लिया गया है। आरोपी घटना दिनांक से फरार है। प्रकरण विवेचना में है। आरोपीगणों की गिरफ्तारी के हर संभव प्रयास जारी हैं। (ग) अतिक्रमण की भूमि सर्वे क्रमांक 555/2मि1 पर वर्तमान में राजस्‍व मण्‍डल ग्‍वालियर द्वारा दिनांक 22.09.2016 तक अधीनस्‍थ न्‍यायालयों के आदेशों का क्रियान्‍वयन स्‍थगित किया गया है। अवैध उत्‍खनन में संलिप्‍त वाहनों को उक्‍त स्‍थल से जब्‍त किया गया था। उक्‍त वाहन थाना कोतवाली, अशोकनगर की अभिरक्षा में सौंपे गये हैं। प्रकरण में प्रश्‍नांश (ख) में दिये उत्‍तर में उल्‍लेखित धाराओं के अनुसार प्रकरण दर्ज किया गया है। (घ) ग्राम पलकटोरी सर्वे क्रमांक 459 रकबा 4.749 हेक्‍टेयर के अंश भाग एवं ग्राम मनकपुर सर्वे क्रमांक 40 रकबा 5.226 हेक्‍टेयर के अंश भाग पर 1,02,640 घन मीटर मुरम के अवैध उत्‍खनन का प्रकरण कलेक्‍टर, न्‍यायालय में दर्ज किया गया है। जिसमें राशि रूपये 10,26,40,000/- का अर्थदण्‍ड आरोपियों के विरूद्ध आरोपित किया गया है। प्रकरण न्‍यायालय कलेक्‍टर, अशोकनगर के समक्ष विचाराधीन है। प्रकरण न्‍यायालयीन प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है, अत: वसूली किये जाने की समयावधि बताया जाना वर्तमान में संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''पाँच''

मुख्‍यमंत्री व मुख्‍य सचिव को लिखे पत्रों पर कार्यवाही

5. ( क्र. 64 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 1 अप्रैल 2016 के प्रश्‍न संख्‍या 2 (क्रमांक 6602) के संदर्भ में बताएं कि प्रश्‍नकर्ता ने मुख्‍यमंत्री जी व मुख्‍य सचिव महोदय को पिछले 2 वर्ष में जो पत्र लिखे है, उन पर अभी तक क्‍या कार्यवाही हुई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भित प्रश्‍न के उत्‍तर में बताया गया था कि राजस्‍व, खाद्य नागरिक उपभोक्‍ता व आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण विभाग तथा नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग को कार्यवाही के लिय प्रश्‍नकर्ता के पत्र भेज दिये है तथा कार्यवाही प्रचलित है तो बताएं कि कार्यवाही में क्‍या प्रगति हुई है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जानकारी एकत्रित की जा रही है। 

नगर पालिका/नगर पंचायतों में सीधी भर्ती

6. ( क्र. 82 ) श्री गिरीश भंडारी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या संयुक्‍त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास म.प्र. भोपाल द्वारा दिनांक 8/3/2016 पत्र क्र. 3455 से प्रदेश की समस्‍त नगर पालिका/नगर परिषद् को पत्र भेजकर नगर पालिका/नगर परिषदों में आदर्श कार्मिक संरचना अनुसार प्रत्‍येक संवर्ग में सीधी भर्ती से भरे जाने वाले रिक्‍त पदों की पूर्ति हेतु प्रेसिडेन्‍ट इन कौंसिल से संकल्‍प पारित कराकर व्‍यावसायिक परीक्षा मण्‍डल से भरे जाने हेतु निर्देशित किया गया था? यदि हाँ, तो पत्र की प्रति उपलब्‍ध करावें? (ख) प्रश्‍न की कंडिका (क) की उपलब्‍ध जानकारी अनुसार पत्र क्र. 3455 दिनांक 8/3/2016 के बाद म.प्र. की कौन-कौन सी नगर पालिका/नगर पंचायत द्वारा सीधी भर्ती कर दी गई? (ग) प्रश्‍न की कंडिका (ख) की उपलब्‍ध जानकारी अनुसार नगर पालिका/नगर पंचायतों की भर्ती को निरस्‍त किया जावेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं व दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो क्‍या? नहीं, तो क्‍यों नहीं?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) संचालनालय पत्र क्रमांक 3455 दिनांक 08-03-2016 के निर्देश के बाद मध्‍यप्रदेश की नगर परिषद्, खुजनेर जिला राजगढ़ में सीधी भर्ती के रिक्‍त पदों की पूर्ति की गई। (ग) नगर परिषद्, खुजनेर में निर्देश के पूर्व विगत दो माह पूर्व से कार्यवाही प्रचलित होने से सीधी भर्ती की कार्यवाही पूर्ण की गई। शेष के लिये प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''छ:''

सिंचाई योजनाओं की स्‍वीकृति

7. ( क्र. 104 ) श्री कुंवर सिंह टेकाम : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सीधी एवं सिंगरौली जिले के अंतर्गत कितनी नवीन सिंचाई योजनायें प्रस्‍तावित हैं? योजना का नाम सहित पूर्ण विवरण देवें? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में प्रस्‍तावित सिंचाई योजनाओं की स्‍वीकृति कब तक प्रदान कर दी जावेगी? (ग) क्‍या सीधी एवं सिंगरौली जिले के आदिवासी बाहुल्‍य विकास खण्‍ड कुसमी, मझौली एवं देवसर के लिए सिंचाई क्षमता को बढ़ाये जाने हेतु शासन स्‍तर पर कोई योजना प्रस्‍तावित हैं? यदि हाँ, तो कौन-कौन सी योजना प्रस्‍तावित है?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) से (ग) सीधी एवं सिंगरौली जिले में जालापानी, निगरी, मवई डायवर्सन एवं मझौली मध्‍यम सिंचाई परियोजनाओं का सर्वेक्षण कराया गया है। इन परियोजनाओं की डी.पी.आर. अंतिम नहीं हुई है। परियोजनाओं की स्‍वीकृति विभाग के विशेषज्ञ संगठन ''बोधी'' द्वारा परीक्षण करने और तकनीकी साध्‍यता स्‍थापित होने पर निर्भर होने से स्‍वीकृति के लिए समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है।

पेयजल योजना

8. ( क्र. 105 ) श्री कुंवर सिंह टेकाम : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या नगर पंचायत मझौली जिला सीधी में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हेतु बनास नदी आधारित समूह पेयजल योजना के माध्‍यम से पेयजल आपूर्ति किये जाने हेतु निविदा जारी की गई हैं? यदि हाँ, तो पूर्ण विवरण देवें? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में निविदा जारी की गई हैं तो नगर पंचायत मझौली क्षेत्र के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति हेतु निर्माण कार्य कब तक प्रारंभ करके पूर्ण कर लिया जावेगा? (ग) नगर परिषद् मझौली के द्वारा समूह नल जल योजना के निर्माण में रोक लगाये जाने हेतु परिषद् में कोई प्रस्‍ताव पास किया गया हैं? यदि हाँ, तो किस नियम के तहत निर्माण कार्य में रोक लगायी गयी है? (घ) प्रश्‍नांश (ग) के संदर्भ में नगर परिषद् मझौली के परिषद् को निर्माण कार्य में रोक लगाये जाने हेतु क्‍या अधिकार प्राप्‍त हैं। यदि नहीं, तो शासन स्‍तर से पेयजल आपूर्ति हेतु समूह नल जल योजना के निर्माण को जारी रखने के लिये आदेश प्रसारित किये जावेगे? यदि हाँ, तो समय-सीमा बतायें।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी नहीं। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ख) उत्‍तरांश '''' के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी नहीं। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) जी नहीं। उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

खरगापुर विधान सभा के समस्‍त मजरों टोलों, ग्रामों में विद्युतीकरण

9. ( क्र. 126 ) श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खरगापुर विधान सभा क्षेत्र अन्‍तर्गत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अन्‍तर्गत ऐसे कितने ग्राम शेष पड़े हैं, जिसमें अभी तक विद्युतीकरण नहीं हुआ है तथा जो ग्राम छूट गये उनमें बिजली कब तक लगा दी जावेगी? (ख) क्‍या उक्‍त कार्य ठेकेदारों के विलम्‍ब करने से देर से हो रहा है या विभाग की लापरवाही से? (ग) क्‍या ग्राम पंचायत बुदौरा के ठीमरन मुहल्‍ला में खम्‍बे डाल दिये हैं परन्‍तु आज तक खम्‍बे खड़े नहीं किये? इसी तरह ग्राम पंचायत रमपुरा के खुड़न में भी खम्‍बे लगा दिये, तार नहीं लगाये गये तथा बिजली सप्‍लाई नहीं की जा रही है? ग्रामीण क्षेत्र में बरसात को देखते हुए पूरे खरगापुर विधान सभा क्षेत्र के ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना से बिजली कब तक लगा दी जायेगी? समयावधि बतायें? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) खरगापुर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत सभी अविद्युतीकृत ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) ग्राम पंचायत बुदौरा के ठीमरन मुहल्‍ला में 10 खंबे उपलब्‍ध है। उक्‍त खंबे किसी योजना के अंतर्गत पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विद्युतीकरण हेतु नहीं डाले गये है, अपितु ग्रामवासियों द्वारा स्‍वयं लाये गये है। ग्राम पंचायत रामपुरा का ग्राम खुडन दो भागों में विभाजित है, एक भाग जो अविद्युतीकृत था जिसे राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के 11 वें प्‍लान में प्रावधानानुसार दिनांक 20.09.2014 को विद्युतीकृत किया जा चुका है। दूसरा भाग पूर्व से विद्युतीकृत है, जिसके 11 केव्‍ही लाइन के तार चोरी हो गये है किन्‍तु उक्‍त भाग में कोई वैध कनेक्‍शन नहीं होने के कारण उक्‍त 11 के.व्‍ही. लाइन के तार पुन: नहीं लगाये गये है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उक्‍त क्षेत्र में किसी भी योजना में वर्तमान में खंबे खड़े नहीं किए गए है किन्‍तु जाँच करने पर पाया गया है कि अज्ञात व्‍यक्तियों द्वारा अवैधानिक रूप से 7 खंभे खड़े किये गये है, जिसकी संबंधित कनिष्‍ठ अभियंता खरगापुर द्वारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। खरगापुर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत सभी आबाद अविद्युतीकृत ग्रामों में विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। वर्तमान में खरगापुर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत 30 विद्युतीकृत ग्रामों के 100 एवं 100 से अधिक आबादी वाले अविद्युतीकृत 39 मजरो/टोलों के विद्युतीकरण सहित सघन विद्युतीकरण का कार्य टीकमगढ़ जिले हेतु 12 वीं पंचवर्षीय योजना में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत सम्मिलित है, जिनमें से 27 ग्रामों के सघन विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा शेष कार्य प्रगति पर है जिसे माह फरवरी 2017 तक पूर्ण किया जाना है। 

नहर निर्माण का मुआवजा

10. ( क्र. 139 ) श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या वान सुजारा की नहरों का निर्माण खरगापुर विधान सभा क्षेत्र 47 के कई ग्रामों के किसानों की पटैती भूमि-अधिग्रहण कर बनाई जा रही है? उक्‍त किसानों की भूमि का मुआवजा आज दिनांक तक क्‍यों नहीं दिया गया? कारण स्‍पष्‍ट करें? (ख) क्‍या उक्‍त नहर निर्माण में किसानों को मुआवजा राशि शासन के मापदण्‍ड अनुसार नहीं दी जा रही है तथा ठेकेदार द्वारा मनमाने तरीके से नहर की खुदाई का मटेरियल किसानों की भूमि में जबरन तरीके से जगह-जगह पर डाल दी गई है जिससे कई किसान परेशानी में है क्‍या किसानों को उक्‍त भूमि का मुआवजा दिया जायेगा जिस स्‍थानों पर नहरों की खुदाई का मटेरियल डाला गया है? यदि हाँ, तो कब तक यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें? (ग) क्‍या ठेकेदार द्वारा जिन किसानों की भूमि पर मटेरियल डाला गया है और किसानों द्वारा आपत्ति की जा रही है ऐसी स्थिति में क्‍या ठेकेदार के विरूद्ध कार्यवाही प्रस्‍तावित करेंगे यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) बानणसुजारा परियोजना की मुख्‍य नहर का निर्माण कृषकों की सहमति से उनकी भूमि का अधिपत्‍य लेकर किया जाना होना प्रतिवेदित है। भूमि का अर्जन आपसी सहमति एवं अनिवार्य अधिग्रहण से करते हुए मुआवजा वितरण प्रगति पर होना प्रतिवेदित है। (ख) एवं (ग) जी नहीं, निर्माण कार्य संबंधित कृषकों की सहमति से किया जाना प्रतिवेदित है। अत: शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते है।

मजदूरों को मजदूरी का भुगतान

11. ( क्र. 148 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या राज्‍यमंत्री,नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 18.03.16 में मुद्रित अता. प्रश्‍न संख्‍या 63 (क्रमांक 5349) के प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर के अनुसार प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य के पत्रों को जाँच अधिकारी अधीक्षण यंत्री नर्मदा विकास मण्‍डल क्रमांक 6, कटनी एवं सतना क्रमश: दिनांक 8.12.16 एवं 1.3.16 को प्रेषित किए गए थे तो अभी क्‍या जाँच की गई? यदि जाँच नहीं हुई तो कब तक कर ली जावेगी बताएं और जाँच में विलंब के क्‍या कारण है, इसके लिए कौन उत्‍तरदायी है? (ख) टनल निर्माण हेतु मेसर्स पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड हैदराबाद व मेसर्स एस ई डब्‍ल्‍यू इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर्स लिमिटेड हैदराबाद के साथ विभाग ने क्या एग्रीमेंट किया है? (ग) टनल निर्माण में लगे ठेकेदार के कर्मचारियों/मजदूरों व अन्‍य मजदूरों के बकाया भुगतान का विवरण पी.एफ., जी.पी.एफ. कटौती की जानकारी यदि एकत्र कर ली गई हो तो दें, यदि एकत्र नहीं की गई तो क्‍यों तथा यह जानकारी कब तक उपलब्‍ध करा दी जायेगी? (घ) प्रश्‍नांश (ग) के ठेकेदार को अभी तक कितना अग्रिम (मोबेलाइजेशन एवं मशीनरी एडवांस आदि) किस-किस कार्य के लिए दिया गया है? कितना समायोजन हो गया है कितना शेष है? शेष राशि का समायोजन क्‍यों नहीं हुआ कब तक किया जायेगा?

राज्‍यमंत्री,नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) मुख्य अभियन्ता अपर नर्मदा जोन, जबलपुर द्वारा जाँच की जा चुकी है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) पटेल-एस..डब्ल्यू. (संयुक्त उपक्रम) हैदराबाद के साथ बरगी व्यपवर्तन परियोजना की स्लीमनाबाद कैरियर नहर (दांयी तट नहर) की आर.डी. 104.00 कि.मी. से आर.डी. 129.00 कि.मी. तक का सर्वेक्षण, प्लानिंग, भू-तकनीकी, अन्वेषण, रूपांकन, प्राक्कलन, स्थाई भू-अर्जन प्रकरण तैयार करना, लाइन्ड सुरंग (लगभग 12 कि.मी. लम्बी व लगभग 10 मी. व्यास की) का मय कट एवं कवर, आर.सी.सी. ट्रांजीसन (लगभग 900 मी. लंबाई में) नहर का निर्माण कार्य (लगभग 13 कि.मी. लंबाई में ) जिसमें खुदाई, सीमेंट कांक्रीट लाइनिंग पक्के कार्यों का निर्माण एवं नहर प्रणाली की कमीशनिंग एवं परीक्षण आदि के कार्य का एग्रीमेंट टर्न-की आधार पर किया गया है। अनुबंध की राशि रूपये 799.00 करोड़ तथा कार्य पूर्ण करने की अनुबंधित समयावधि 40 माह वर्षाकाल सहित है। (ग) ठेकेदार द्वारा प्रस्तुत कर्मचारियों एवं मजदूरों के बकाया भुगतान एवं पी.एफ. कटौती का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (घ) ठेकेदार को रूपये 119.85 करोड़ (मोबेलाईजेशन एडवांस रूपये 79.90 करोड़ एवं इक्यूपमेंट एडवांस रूपये 39.95 करोड़) अग्रिम दिया गया है। प्रश्न दिनांक तक उपरोक्त अग्रिम की संपूर्ण वसूली कर राशि का समायोजन किया जा चुका है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्रमिकों का प्रोफेशनल टैक्‍स समाप्‍त करने बावत्

12. ( क्र. 171 ) श्री दिलीप सिंह शेखावत : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. में श्रमिकों से प्रतिवर्ष कितना प्रोफेशनल टैक्‍स शासन द्वारा वसूला जाता है? (ख) वर्तमान में श्रमिकों की आय कम एवं खर्चे अधिक हो चुके हैं, जिससे इन श्रमिकों को टैक्‍स देने में कठिनाई है? (ग) क्‍या प्रोफेशनल टैक्‍स समाप्ति की कोई योजना है? यदि नहीं, है तो कब तक बनायी जावेगी?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) श्रमिकों से कितना प्रोफेशनल टैक्‍स वसूल किया जाता है इसकी पृथक से कोई जानकारी संधारित नहीं की जाती है (ख) राज्‍य शासन द्वारा अल्‍प आय वर्ग के करदाताओं को लाभांवित करने के उद्देश्‍य से दिनांक 1 अप्रैल, 2013 से वृत्तिकर की छूट की सीमा रूपये 1,50,000/- से बढ़ाकर रूपये 1,80,000/- कर दी गई है। (ग) करारोपण के प्रावधान राज्‍य के वित्‍तीय संसाधनों की आवश्‍यकता के अनुरूप किए जाते हैं। वर्तमान में ऐसी कोई योजना विचाराधीन नहीं है।

जलसंसाधन विभाग द्वारा बनाये गये बांध

13. ( क्र. 220 ) श्री महेन्‍द्र सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) गुनौर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत वर्ष 2010 से प्रश्‍न दिनांक तक जल संसाधन विभाग से किन-किन स्‍थानों में कितने बांधों के निर्माण कार्य स्‍वीकृत हुये? स्‍वीकृत बांधों में से कितने बांधों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है एवं कितने निर्माणाधीन है? स्‍वीकृत जिन बांधों का निर्माण कार्य अभी भी प्रारंभ नहीं हुआ है, उनके प्रारंभ न होने का क्‍या कारण है? (ख) क्‍या समय-सीमा में निर्माण कार्य पूर्ण न होने पर सामग्री का मूल्‍य बढ़ जाता है और शासन से पुनर्वांटन की मांग की जाती है? घटिया गुणवत्‍ता एवं समय पर कार्य पूर्ण न करने वाली निर्माण एजेंसी के दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध कब तक और क्‍या कार्यवाही की जावेगी? (ग) क्‍या जल संसाधन विभाग द्वारा बांध एवं नहर निर्माण हेतु अधिग्रहि‍त की जाने वाली भूमि में सिंचित एवं असिंचित माने जाने के क्‍या प्रावधान है? क्‍या कुछ कास्‍तकारों की भूमि-अभिलेख (खसरा) में सिंचित होने के बावजूद भी उन्‍हें असिंचित भूमि का मुआवज़ा प्रदाय किया जाता है, जिससे कृषक को आर्थिक नुकसान होता है? (घ) क्‍या भू-अभिलेख (खसरा) में सिंचित होने पर पंजीयन विभाग द्वारा जिले की गाइड लाइन के अनुसार सिंचित भूमि की स्‍टाम्‍प ड्यूटी ली जाती है और उसी भूमि का अर्जन होने पर उसका असिंचित का मुआवज़ा दिया जाता है? क्‍या यह कास्‍तकारों के साथ अन्‍याय नहीं है? शासन इसके लिये दोषी अधिकारियों पर कब तक और क्या कार्यवाही करेगा?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। कोई कार्य अप्रारंभ नहीं है। (ख) जी नहीं, प्रश्‍नाधीन कार्यों के अनुबंधों में मूल्‍य वृद्धि देय नहीं होने से प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होता है। भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी होने और भूमि का अधिपत्‍य प्राप्‍त होने में विलंब के लिए निर्माण एजेंसी जिम्‍मेदार नहीं होती हैं। निर्माण कार्य की गुणवत्‍ता पर सतत् निगरानी रखे जाने के साथ-साथ कमी पाए जाने पर निर्माण एजेंसी के व्‍यय से कार्य ठीक कराया जाता है और निर्माण एजेंसी के विरूद्ध कार्रवाई की जाती है जो एक सतत् प्रक्रिया है। (ग) एवं (घ) जिला कलेक्‍टर द्वारा भूमि का मुआवजा आदेश मौके पर भूमि के सिंचित अथवा असिंचित होने के विनिश्‍चयन के अनुसार किया जाता है। अत: कृषकों की किसी प्रकार के आर्थिक नुकसान की स्थिति नहीं है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते है।

परिशिष्ट - ''सात''

खनिज विभाग पन्‍ना द्वारा जारी किए गए उत्‍खनन पट्टे

14. ( क्र. 221 ) श्री महेन्‍द्र सिंह : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पन्‍ना जिलांतर्गत वर्ष 2015-16 में कितने खनन पट्टे जारी कि एवं वर्तमान में कितनी खदानें किस खनिज के उत्‍खनन के लिये एवं किसके नाम किन-किन स्‍थानों में संचालित हैं? (ख) क्‍या संचालकों द्वारा खनिज विभाग पन्‍ना से सांठ-गांठ कर स्‍वीकृत क्षेत्र के बाहर अवैध उत्‍खनन किया जाता है और विभाग मूक दर्शक बनकर अवैध उत्‍खनन को अंजाम देता है? (ग) पन्‍ना जिला अंतर्गत संचालित कितनी खदानों का सीमांकन कर यह चिन्हित किया गया है कि खदान संचालकों का उत्‍खनन कार्य स्‍वीकृत क्षेत्र के अंदर है या बाहर और जो खदानें स्‍वीकृत क्षेत्र के अंदर संचालित नहीं पाई गई उन पर क्‍या कार्यवाही की गई?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में प्रश्‍नाधीन अवधि में जारी किये गये उत्‍खनिपट्टों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ में दर्शित है। शेष प्रश्‍नांश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब में दर्शित है। (ख) जी नहीं। अवैध उत्‍खनन पाए जाने पर अवैध खननकर्ताओं के विरूद्ध कार्यवाही की जाती है। (ग) संचालित खदानों में भू-प्रवेश की अनुमति के पूर्व सीमांकन के समय खदान की सीमा चिन्हित कर सीमा चिन्‍ह बनवाये जाते हैं। खनिज विभाग एवं राजस्‍व विभाग द्वारा समय-समय पर इनका निरीक्षण किया जाता है। खदान संचालकों द्वारा स्‍वीकृत क्षेत्र अंतर्गत खनन कार्य किया जा रहा है। स्‍वीकृत क्षेत्र के बाहर उत्‍खनन नहीं पाया गया है। अत: कार्यवाही किए जाने का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता।

अजा.वर्ग हेतु सिंचाई विद्युत कनेक्‍शन

15. ( क्र. 232 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. शासन द्वारा अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषकों को सिंचाई विद्युत पंप कनेक्‍शन प्रदान करने हेतु क्‍या प्रावधान है? (ख) मंदसौर जिले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषकों को वित्‍तीय वर्ष 2015-16 में उपरोक्‍त प्रावधानों के अन्‍तर्गत कितने हितग्राहियों को सिंचाई पंप कनेक्‍शन दिये गये,संख्‍या बतावें? (ग) मंदसौर जिले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषकों के कितने सिंचाई पंप कनेक्‍शन दिनांक 31.3.2016 तक की स्थिति में अवस्थित हैं? (घ) जिन अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषकों को इस योजना के तहत सिंचाई पंप कनेक्‍शन दिये गये है, शासन द्वारा म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी, इन्‍दौर को उसका भुगतान किया गया है अथवा नहीं की जानकारी देवें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के ऐसे कृषक जिनके कुंए निम्नदाब विद्युत लाइन से 150 फीट तक की दूरी पर हैं, उन्हें जमीन के बी-1 एवं पी-2, ट्रेस नक्शा व जाति प्रमाण पत्र तथा फोटो संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने पर वितरण कंपनी द्वारा पंजीयन शुल्क रू. 5/- प्राप्त कर तत्काल स्थायी सिंचाई विद्युत पंप कनेक्शन दिये जा रहे है। प्रश्‍नाधीन श्रेणी के जिन कृषकों के कुंओं पर विद्युत कनेक्शन हेतु लाइन विस्तार कार्य आवश्यक है, उनको पंप कनेक्शन प्रदाय करने हेतु राज्‍य शासन के आदिम जाति कल्याण विभाग के माध्यम से कार्यवाही की जाती है। आदिमजाति कल्याण विभाग में उक्‍त श्रेणी के कृषकों द्वारा आवेदन प्रस्तुत किये जाते है तथा आदिम जाति कल्‍याण विभाग की मांग पर उनके द्वारा चयनित कृषकों के पम्पों हेतु लाइन विस्तार के प्राक्कलन विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा सर्वे करके बनाये जाते है। लाइन निर्माण का कार्य उक्‍त विभाग द्वारा ही कराया जाता है। कृषि पंप कनेक्‍शनों हेतु विद्युत लाइन के विस्तार कार्य का सुपरविजन वितरण कंपनी द्वारा किया जाता है तथा कार्य पूर्ण होने पर स्थायी कनेक्शन प्रदान किया जाता है। इसके अतिरिक्त यदि कृषक चाहे तो कृषक अनुदान योजना के तहत् भी वह सिंचाई हेतु विद्युत कनेक्शन प्राप्त कर सकता है। कृषक अनुदान योजनान्तर्गत वित्तीय वर्ष 2016-17 में लघु एवं सीमांत कृषकों द्वारा रु. 7000/- प्रति हार्सपॉवर एवं अन्य कृषकों द्वारा रु. 11200/- प्रति हार्सपॉवर की दर से राशि विद्युत वितरण कम्पनी के संभागीय कार्यालय में जमा कराई जाती है। प्रति पम्प लागत यदि रु. 1.50 लाख से अधिक की प्राक्कलित होती है, तो शेष राशि आवेदक द्वारा देय होती है। पहुंच मार्ग उपलब्ध होने पर राशि जमा करने की दिनांक से 150 दिवस में कार्य पूर्ण किये जाने का प्रावधान है। (ख) मंदसौर जिले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषकों को वित्तीय वर्ष 2015-16 में उपरोक्त प्रावधानों के अंतर्गत कुल 1972 सिंचाई पंप कनेक्शन दिये गये है, जिनमें से 1946 कनेक्‍शन विद्यमान लाईनों से, 26 कनेक्‍शन आदिम जाति कल्‍याण विभाग द्वारा सम्‍पादित कार्यों के अंतर्गत तथा अनुदान योजना के अंतर्गत निरंक कनेक्‍शन प्रदान किये गये हैं। (ग) दिनांक 31.03.2016 की स्थिति में मंदसौर जिले में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषकों के सिंचाई विद्युत पंप कनेक्शनों की संख्या 23988 है। (घ) वर्ष 2015-16 में जिन अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति वर्ग के कृषकों को प्रश्‍नाधीन योजनाओं के तहत सिंचाई पंप कनेक्शन दिये गये है, वह कार्य राज्‍य शासन के आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा कराया गया है। म.प्र.पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड को आदिम जाति कल्याण विभाग से इस कार्य हेतु नियमानुसार प्राक्कलन की लागत का 5 प्रतिशत सुपरविजन चार्ज एवं लागू सर्विस टैक्‍स प्राप्त हुआ है।

सुवासरा नगर में पेयजल स्‍त्रोतों की जानकारी

16. ( क्र. 233 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सुवासरा नगर पंचायत में वर्ष 2016-17 में कितने हैण्‍डपंप कूप एवं ट्यूबवेल में पानी प्राप्‍त हो रहा है एवं कितने बंद हैं? विगत 4 माह में पेयजल हेतु समस्‍त शासकीय कुओं एवं ट्यूबवेल में कुल कितनी विद्युत मोटर चली उन सब के विद्युत बिलों की राशि बतावें? (ख) नगर पंचायत सुवासरा द्वारा पेयजल हेतु परिवहन का उपयोग किया गया? अगर हाँ, तो कितने दिनों के लिये किया गया है, प्रतिदिन की संख्‍या बतावें? (ग) एक टैंकर कितनी राशि में लगाया गया एवं परिवहन में कुल कितने टैंकर एवं कुल कितनी राशि खर्च की गई है एवं किस मद से राशि खर्च की गई है? (घ) नगर परिषद् द्वारा पेयजल परिवहन प्रारंभ करने के लिये लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी (पी.एच.ई.) अनुविभागीय अधिकारी (एस.डी.एम.) तथा उच्‍च अधिकारी से अनुमति ली गई है या नहीं? अगर ली गई है तो अनुमति की प्रतिलिपि बतावें?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) सुवासरा नगर परिषद् में वर्ष 2016-17 में 08 हैण्‍डपंप, 02 कूप एवं 10 ट्यूब वैल से पानी प्राप्‍त हो रहा है। 14 हैण्‍डपम्‍प बंद है तथा एक भी कूप एवं ट्यूब वैल बंद नहीं है। 16 मोटर चलाई गई जिसकी विद्युत बिल की राशि रू. 4,23,879/- है। (ख) जी हाँ। 152 दिन पेयजल परिवहन किया गया है। प्रतिदिन की संख्‍या जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) एक टैंकर (5000 लीटर क्षमता) राशि रू. 129/- में लगाया गया एवं कूल 13286 टैंकर पेयजल का परिवहन हुआ जिसमें कुल राशि रू. 21,12,474/- व्‍यय की गई। निकाय मद एवं अनुदान मद से व्‍यय किया गया। (घ) जी नहीं। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

ग्‍वालियर जिले के टेकनपुर हर्सी रोड का निर्माण

17. ( क्र. 247 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) टेकनपुर से हर्सी तक मुख्‍य नहर की की सर्विस रोड को जल संसाधन विभाग से लोक निर्माण विभाग को हस्‍तांतरण करने बाबत् विभाग द्वारा दिनांक 12/02/2016 को पत्र लिखा है जैसा प्रश्‍नकर्ता के 25 फरवरी 2016 के परि. अता. प्रश्‍न संख्‍या 58 (क्र. 1073) बताया है तो पत्र की प्रति उपलब्‍ध करावें? प्रश्‍न दिनांक तक उक्‍त पत्र पर क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के रोड का 1 जनवरी 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक कार्यपालन यंत्री, अधीक्षण यंत्री, मुख्‍य अभियन्‍ता या भोपाल से वरिष्‍ठ अधिकारियों द्वारा कब-कब भौतिक निरीक्षण किया है दिनांकवार स्‍पष्‍ट करें? क्या उन्‍होंने अपने निरीक्षण में इस रोड की हालत (निर्माण) के लिये वरिष्‍ठालय को पत्र लिखे है यदि हाँ, तो कब-कब पत्रों का विवरण उपलब्‍ध करावें? यदि नहीं, तो क्‍यों कारण सहित स्‍पष्‍ट करें? (ग) 1 अप्रैल 2013 से प्रश्‍न दिनांक तक जल संसाधन विभाग द्वारा भितरवार विधानसभा में किस-किस स्‍थान पर कितनी-कितनी वित्‍तीय स्‍वीकृति के क्‍या-क्‍या निर्माण कार्य किस-किस यंत्री, सहायक यंत्री/कार्यपालन यंत्री के सुपरवीजन में किस-किस ठेकेदार/एजेन्‍सी द्वारा निर्माण कार्य कराये गये है तथा कराये जा रहे है?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) एवं (ख) प्रश्‍नाधीन पत्र की छायाप्रति संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। कार्यपालन यंत्री, लोक-निर्माण विभाग, संभाग क्रमांक-2, ग्‍वालियर ने उनके वरिष्‍ठ से डी.पी.आर. बनाने की अनुमति दिनांक 20.04.2016 को मांगी है। पत्र की प्रति संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

परिशिष्ट - ''आठ''

अमौघा तालाब से अवैध मुरूम निकालना एवं बेचना

18. ( क्र. 253 ) श्री अजय सिंह : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या नगरपालिक निगम सतना के वार्ड क्रमांक-एक में स्थित अमौघा तालाब के गहरीकरण हेतु नगर निगम एवं जिला प्रशासन द्वारा राशि स्‍वीकृत की गई है? अगर हाँ, तो कब-कब एवं कितनी-कितनी प्रश्‍न तिथि तक की स्थिति में जानकारी दें? (ख) क्‍या उक्‍त तालाब के गहरीकरण के नाम पर जो मुरूम निकल रही है उसको नगरपालिक निगम के द्वारा‍ बिना खनिज विभाग की लिखित अनुमति के बिना टेंडर के बेचे जाने की शिकायत जिला कांग्रेस कमेटी शहर सतना के द्वारा कर जिला कलेक्‍टर को ज्ञापन भी दिया है? (ग) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित अमौघा तालाब की मुरूम बेचे जाने से आई राशि नगरपालिक निगम सतना में किस-किस आवक क्रमांक से किस मद/खाते में कब-कब जमा की है? (ग) क्‍या राज्‍य शासन नगरपालिक निगम के मुरूम बेचने को वैध मानता है कि अवैध? क्‍या कार्यवाही राज्‍य शासन उक्‍त अवैध मुरूम बेचने पर किस नाम, पदनाम के विरूद्ध करेगा? बिन्‍दुवार जानकारी दें? अगर नहीं, तो क्‍यों? कारण दें, नियम बतायें।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। कार्यालय कलेक्‍टर (जिला योजना एवं सांख्यिकी) सतना के पत्र क्रमांक 1048 दिनांक 23.05.2016 द्वारा वार्ड क्रमांक 1 अमौघा स्थित तालाब गहरीकरण निर्माण कार्य हेतु जनभागीदारी से प्रारंभ करने हेतु कुल लागत रूपयें 20.00 लाख प्रशासकीय स्‍वीकृति दी जाकर राज्‍य सरकार द्वारा उक्‍त योजनांतर्गत राज्‍य शासन के हिस्‍से के रूप में राशि रू. 10.00 लाख का अंशदान स्‍वीकृत किया गया, जिसकी प्रथम किस्‍त कार्यालय जिला योजना एवं सांख्यिकी सतना के आदेश क्रमांक 1053 दिनांक 24.05.2016 से रू. 5.00 लाख एवं द्वितीय किस्‍त आदेश क्रमांक 1278 दिनांक 15.06.2016 से रू. 5.00 लाख जारी की गई। (ख) जी हाँ। जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा दिनांक 06.06.2016 को जिलाध्‍यक्ष सतना को संबोधित शिकायती ज्ञापन प्रस्‍तुत किया गया था। इस ज्ञापन की प्रति जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। ज्ञापन में खनिज विभाग की लिखित अनुमति एवं टेण्‍डर के बिना अमौघा तालाब के गहरीकरण से निकली मुरूम को बेचे जाने संबंधी ‍शिकायत सम्मिलित नहीं है। (ग) अमौधा तालाब से निकली मुरूम/मिट्टी नगर निगम द्वारा बेची नहीं गयी है। अत: शेषांश का प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता है। (घ) उत्‍तरांश (ग) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''नौ''

अवैध खनिज परिवहन के दोषियों पर कार्यवाही

19. ( क्र. 259 ) श्री सुन्‍दरलाल तिवारी : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नोत्‍तरी दिनांक 03.03.2016 में मुद्रित परि.अता. प्रश्‍न संख्‍या-115 (क्रमांक 3957) के उत्‍तर (क) से (घ) के संदर्भ में अवैध परिवहन के 590 प्रकरणों में आरोपित अर्थदण्‍ड की मात्रा प्रतिवाहन नहीं बताई गई? ऐसी कितनी खदानें हैं जिनकी समयावधि समाप्‍त हो चुकी है, लेकिन उनके द्वारा खदान बंद नहीं की गई? उनके विरूद्ध कब-कब, कौन-कौन सी कार्यवाही किन-किन अधिकारियों द्वारा की गई विवरण देवें? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) के खनिज पट्टाभिलेखों के प्रकरणों में मुद्रांक शुल्‍क एवं पंजीयन फीस शासन के मापदण्‍ड अनुसार ली गई? खनिज पट्टों के अनुबंध कम कीमत के स्‍टाप पर कर शासन को कितना आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के अनुसार अगर कार्यवाही संबंधितों द्वारा शासन के मापदण्‍ड एवं अनुबंध के शर्तों अनुसार नहीं की गई, मुद्रांक शुल्‍क एवं पंजीयन शुल्‍क कम वसूला गया तो इसके लिए कौन-कौन दोषी हैं? शासन को हुई क्षति की वसूली क्‍या संबंधितों से करते हुए आपराधिक प्रकरण राशि के गबन का दर्ज करावेंगे? हाँ, तो कब तक? अगर नहीं तो क्‍यों?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) विधानसभा तारांकित प्रश्‍न क्रमांक 3957 में अवैध परिवहन के प्रकरणों पर आरोपित अर्थदण्‍ड की राशि वाहनवार नहीं मांगी गई थी। उत्‍तर प्रश्‍न अनुरूप प्रेषित किया गया था। जिले में ऐसी कोई भी खदान संज्ञान में नहीं है, जो समयावधि समाप्ति के बाद बंद नहीं की गई है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) जी हाँ। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

दोषियो के विरूद्ध वसूली के साथ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराना

20. ( क्र. 263 ) श्री सुन्‍दरलाल तिवारी : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या ध्‍यानाकर्षण सूचना क्रमांक 705 दिनांक 16.03.2016 के माध्‍यम से रीवा जिले में घटिया एवं गुणवत्‍ताविहीन नहरों का निर्माण किया जा रहा है, पर जल संसाधन विभाग से जानकारी चाही गई थी? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में मुख्‍य अभियंता गंगा बेसिन रीवा ने जिले की जवा तहसील में निर्मित वर्तमान 5 उद्वहन सिंचाई योजनाओं के रीस्‍ट्रक्चरिंग के कार्य की तकनीकी स्‍वीकृति जून 2013 में दी गई थी? सी.ई. गंगा बेसिन रीवा संभाग के कार्यपालन यंत्री (ई.ई.) संभाग को उद्वहन योजनाओं के कार्यों के निष्‍पादन को रोकने हेतु मई 2014 में निर्देशित किया? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के योजनाओं को त्‍योंथर फ्लो योजना में आक्षादित होने के कारण मई 2014 में रोका गया? अगर इसको तकनीकी स्‍वीकृत देने हुए देख लिया जाता तो 5 उद्वहन सिंचाई योजनाओं के कार्य का प्रदाय नहीं होता और 60.26 लाख के व्‍यय को टाला जा सकता था? (घ) प्रश्‍नांश (क), (ख), (ग) की योजनाओं हेतु अगर अधिकारियों द्वारा लापरवाही न बरती गई होती तो 60.26 लाख रूपये की बचत की जा सकती थी? क्‍या इस राशि की वसूली संबंधित अधिकारियों से करते हुए आपराधिक प्रकरण दर्ज करायेंगे? हाँ तो कब तक? नहीं तो क्‍यों?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) जी हाँ। (ख) से (घ) त्‍योंथर बहाव परियोजना का कार्य पूर्ण कराकर सिंचाई जल प्रदाय करने में 3-4 वर्ष का समय लगना संभावित होने से इस दौरान उद्वहन सिंचाई परियोजनाओं के सैच्‍य क्षेत्र में सिंचाई लाभ दिए जाने हेतु परियोजनाओं के संधारण एवं मरम्‍मत के लिए स्‍वीकृति दी गई है। सिंचाई लाभ दिए जाने के कारण व्‍यय निष्‍फल नहीं है।

पचीपुरा में निर्माणाधीन 132 के.व्‍ही. विद्युत सब स्‍टेशन का निर्माण

21. ( क्र. 271 ) श्री प्रहलाद भारती : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या पचीपुरा बैराढ़ में 132 के.व्‍ही. विद्युत सब स्‍टेशन वर्ष 2013 से निर्माणाधीन है? इसके निर्माण हेतु क्‍या समय-सीमा निर्धारित की गयी थी? (ख) क्‍या मेसर्स आईसोलेक्‍स गुड़गांव द्वारा समय अवधि में कार्य पूर्ण न करने के कारण उक्‍त कंपनी का टेण्‍डर निरस्‍त किया जा चुका है? यदि हाँ, तो कार्य को पूर्ण कराये जाने हेतु विभाग द्वारा वर्तमान में क्‍या कार्यवाही की गयी है? अद्यतन स्थिति से अवगत करावें। (ग) क्‍या उक्‍त 132 के.व्‍ही. विद्युत सबस्‍टेशन का निर्माण आज दिनांक तक भी पूर्ण नहीं हो पाया हैं जिससे क्षेत्र में विद्युत समस्‍या बनी हुयी है? (घ) उक्‍त विद्युत सब स्‍टेशन का निर्माण कब तक पूर्ण कर लिया जावेगा

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, पचीपुरा बैराढ़ में 132 के.वी. विद्युत उपकेन्‍द्र वर्ष 2013 से निर्माणाधीन है। कार्य पूर्णता की समय-सीमा, कांट्रेक्‍ट अवार्ड दिनांक 20.04.2013 से 24 माह अर्थात दिनांक 19.04.2015 निर्धारित की गयी थी। (ख) जी हाँ, टर्न की कान्‍ट्रेक्‍टर मेसर्स आइसोलक्‍स, गुडगांव द्वारा समयावधि में कार्य पूर्ण न करने के कारण उक्‍त कंपनी को जारी कार्यादेश निरस्‍त किया गया। कार्य पूर्ण किये जाने हेतु टर्न की कांट्रेक्‍टर मेसर्स आइसोलक्‍स गुडगांव की रिस्‍क एवं कॉस्‍ट पर विभागीय स्‍तर पर सामग्री क्रय एवं इरेक्‍शन हेतु निविदा दिनांक 05.07.2016 को जारी कर अन्‍य ठेकेदार को कार्यादेश प्रदाय करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उक्‍त उपकेन्‍द्र का लगभग 29 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। (ग) जी हाँ। (घ) उक्‍त उपकेन्‍द्र का शेष कार्य विभागीय स्‍तर पर टर्न की कांट्रेक्‍टर मेसर्स आइसोलक्‍स की रिस्‍क एवं कॉस्‍ट पर निविदा जारी कर शीघ्र पूर्ण करने के प्रयास किये जा रहे हैं। इस कार्य के लिए निविदा की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। अत: वर्तमान में समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

पचीपुरा तालाब के डूब क्षेत्र में पुल/रपटा निर्माण

22. ( क्र. 274 ) श्री प्रहलाद भारती : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जल संसाधन विभाग द्वारा निर्मित पचीपुरा लघु सिंचाई योजनान्‍तर्गत निर्मित तालाब के डूब क्षेत्र में सांपरारा से दुल्‍हारा सड़क पहुँच मार्ग व पुल/रपटा को शामिल नहीं किए जाने के कारण ग्राम सांपरारा से दुल्‍हारा मार्ग पर आवागमन बंद हो गया है जिससे कई गांवों के लोगों को आवागमन हेतु काफी समस्‍या का सामना करना पड़ रहा है? साथ ही लगभग 02 करोड़ की लागत से निर्मित सांपरारा से दुल्‍हारा सड़क की उपयोगिता समाप्‍त हो गयी है? (ख) क्‍या जल संसाधन विभाग सांपरारा से दुल्‍हारा मार्ग पर पचीपुरा तालाब के निर्माण के कारण डूब क्षेत्र में आये पुल/रपटा को ऊंचा बनाया जावेगा? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के संदर्भ में जल संसाधन विभाग द्वारा डूब क्षेत्र में आने कारण बंद उक्‍त सड़क पर नवीन पुल/रपटे को ऊंचा करके कब तक निर्मित करा दिया जावेगा? जिससे उक्‍त मार्ग पर आवागमन बहाल हो सके?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) से (ग) पचचीपुरा लघु सिंचाई परियोजना के डूब क्षेत्र में सांपरारा से दुल्‍हारा सड़क डूब में आने के कारण सांपरारा से मकलीझरा नवीन मार्ग एवं उच्‍च स्‍तरीय पुलिया का निर्माण किया जाकर वैकल्पिक मार्ग उपलब्‍ध कराया गया है। शेष प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होते है।

निज सहायक, विधायक कोलारस की सेवाएं यथावत रखे जाना

23. ( क्र. 286 ) श्री रामसिंह यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कलेक्‍टर जिला शिवपुरी के आदेश क्रं. 1185 बी/स्‍था./6-2/2014 शिवपुरी दिनांक 01/03/2014 से श्री ओ.पी. शर्मा कार्यालय सहायक वर्ग-2 म.प्र.मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमि. की सेवाएं प्रश्‍नकर्ता विधायक विधानसभा क्षेत्र कोलारस को उपलब्‍ध कराई गई है? यदि हाँ, तो उक्‍त सेवा किन नियमों/निर्देश के तहत उपलब्‍ध कराई गई है? लागू नियमों की प्रति संलग्‍न कर जानकारी दें? (ख) क्‍या कलेक्‍टर जिला शिवपुरी ने विधायक कोलारस के निज सहायक श्री ओ.पी. शर्मा की सेवाएं विभाग को वापस किए जाने हेतु आदेश पृष्‍ठांकन क्रं. 10465 दिनांक 19/10/2015 जारी किया है? यदि हाँ, तो उक्‍त आदेश किस पत्र के क्रम में जारी किया गया है? क्‍या उक्‍त पत्र में श्री ओ.पी. शर्मा का नाम लिखकर उनकी सेवाएं विभाग को वापस सौंपे जाने का उल्‍लेख किया है? यदि नहीं, तो सेवाएं वापिस करने का आदेश क्‍यों जारी किया गया? (ग) क्‍या विधायक कोलारस द्वारा अपने पत्र क्र. 06 दिनांक 14/01/2016 के द्वारा उनके निज सहायक श्री ओ.पी. शर्मा की सेवाएं यथावत रखने हेतु अनुरोध किया है? यदि हाँ, तो उक्‍त पत्र की प्रति संलग्‍न कर जानकारी दें कि निज सहायक की सेवाएं यथावत रखे जाने हेतु कलेक्‍टर शिवपुरी द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई और की गई कार्यवाही से इस पत्र के क्रम में विधायक कोलारस को कब एवं किस पत्र द्वारा अवगत कराया? (घ) क्‍या कलेक्‍टर जिला शिवपुरी का आदेश पृष्‍ठांकन क्र. 10465 दिनांक 19/10/2015 कब प्रदान किया गया? श्री ओ.पी. शर्मा के द्वारा उक्‍त आदेश की दी गई प्राप्ति की छायाप्रति संलग्‍न कर जानकारी दें? यदि उक्‍त आदेश कलेक्‍टर शिवपुरी द्वारा प्रश्‍न दिनांक तक उपलब्‍ध नहीं कराया तो क्‍यों?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। कलेक्‍टर शिवपुरी द्वारा सामान्‍य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक एफ ए 10-15/94/एक (1), दिनांक 19 मई 1995 के अंतर्गत सौंपी गई है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जी हाँ। प्रबंध संचालक, म.प्र.म.क्षे.वि.वि.कं.लि. भोपाल के पत्र क्रमांक 836, दिनांक 31.07.2015 के क्रम में। जी नहीं। प्रबंध संचालक, म.प्र.म.क्षे.वि.वि.कं.लि. भोपाल के पत्र क्रमांक 836 में लेख किया गया है कि सामान्‍य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक एफ ए 10-15/94/एक (1) दिनांक 19 मई, 1995 के बिंदु क्रमांक 3 के अनुसार राज्‍य शासन के किसी भी कर्मचारी की सेवाएं प्राप्‍त करने का अधिकार माननीय सांसदों एवं विधायकों को है। चूंकि म.प्र.म.क्षे.वि.वि.कं.लि. के कर्मचारी राज्‍य शासन के कर्मचारी (लिपिक) नहीं है, अत: प्रबंध संचालक, म.प्र.म.क्षे.वि.वि.कं.लि. के पत्र दिनांक 31.07.2015 द्वारा किये गये अनुरोध पर समान प्रकार के दो प्रकरण होने से आदेश क्रमांक 10465 दिनांक 19.10.15 द्वारा दोनों कर्मचारियों की सेवाएं माननीय विधायक महोदय कोलारस एवं पिछोर से वापस लेकर मूल विभाग को सौंपी गई। (ग) जी हाँ। माननीय विधायक के पत्र के संबंध में कलेक्‍टर शिवपुरी के पत्र क्रमांक 3015 दिनांक 10.06.2016 द्वारा ऊर्जा विभाग से अभिमत चाहा गया था, जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है एवं कलेक्‍टर शिवपुरी के पत्र क्रमांक 86 दिनांक 23.06.2016 द्वारा सामान्‍य प्रशासन विभाग से अभिमत चाहा गया था, जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है, साथ ही प्रबंध संचालक, म.प्र.म.क्षे.वि.वि.कं.लि. भोपाल को भी अवगत कराया गया है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। सामान्‍य प्रशासन विभाग के आदेश क्रमांक 1058/1729/2016/एक (1) दिनांक 08.07.2016 द्वारा परिपत्र दिनांक 19.05.1995 द्वारा जारी निर्देश को शिथिल करते हुए, श्री ओ पी शर्मा सहायक वर्ग-2 की सेवाएं श्री रामसिंह यादव, विधायक कोलारस को सौंपे जाने की अनुमति दी गई है, जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'ड.' अनुसार है, जिसकी क्रम के कलेक्‍टर शिवपुरी के आदेश क्रमांक 3539/स्‍था/6-2/2016 दिनांक 08.07.2016 द्वारा श्री ओ.पी.शर्मा सहायक वर्ग-2 म.प्र.म.क्षे.वि.वि.कं.लि. की सेवाएं श्री राम सिंह यादव, विधायक कोलारस को निज सहायक के रूप में सौंपी गई हैं, जिसकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) आदेश की प्रति माननीय विधायक एवं श्री ओ.पी. शर्मा को माननीय विधायक महोदय के माध्‍यम से उपलब्‍ध कराने हेतु भेजी गई थी, प्राप्ति की प्रति की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

माननीय विधायकों एवं सांसदों को लिपीकीय सुविधा

24. ( क्र. 287 ) श्री रामसिंह यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कलेक्‍टर जिला शिवपुरी के आदेश क्र. 821, दिनांक 11.02.2015 से श्री बृजेन्‍द्र श्रीवास्‍तव कार्यालय सहायक श्रेणी-3 म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लि.मि. संभागीय पिछोर की सेवाएं विधायक विधानसभा क्षेत्र पिछोर के निज सहायक के रूप में उपलब्‍ध कराई गई थी? यदि हाँ, तो उक्‍त सेवाएं शासन के किस आदेश/परिपत्र के तहत उपलब्‍ध कराई गई थी? शासन के आदेश/परिपत्र की एवं आदेश क्र. 821 की छायाप्रति संलग्‍न कर जानकारी दें? (ख) क्‍या श्री बृजेन्‍द्र श्रीवास्‍तव की सेवाएं नियमों के विपरीत उपलब्‍ध कराई गई है? यदि हाँ, तो नियमों के विपरीत आदेश जारी करने वाले अधिकारी के विरूद्ध शासन क्‍या कार्यवाही कब तक करेगा? यदि शासन कार्यवाही नहीं करेगा तो क्‍यों? (ग) क्‍या कलेक्‍टर जिला शिवपुरी का आदेश क्र. 821 दिनांक 11.02.2015 शासन के आदेश परिपत्र एवं नियमों का अध्‍ययन किए बगैर एवं देखे बगैर जारी किया गया है? यदि हाँ, तो नियमों का उल्‍लंघन क्‍यों एवं किसके द्वारा किया गया? (घ) क्‍या कलेक्‍टर जिला शिवपुरी को किसी भी निगम-मण्‍डल अथवा म.प्र. शासन का उपक्रम म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लि.मि. के कर्मचारी की सेवाएं माननीय विधायक के निज सहायक के रूप में उपलब्‍ध कराने का अधिकार है? यदि हाँ, तो शासन के कौन से नियम/आदेशों के तहत अधिकार हैं? इसकी छायाप्रति संलग्‍न कर जानकारी दें? यदि अधिकार नहीं है तो आदेश कैसे जारी किया गया?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। सामान्‍य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक एफ ए 10-15/1994/एक (1) दिनांक 19 मई, 1995 के अंतर्गत सौंपी गई हैं, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार एवं आदेश क्रमांक 821 दिनांक 11.2.2015 की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) एवं (ग) जी नहीं। कलेक्‍टर शिवपुरी के आदेश क्रमांक 1185 (बी) /स्‍था/6-2/2014 दिनांक 01.03.14 से श्री ओ.पी. शर्मा, सहायक वर्ग-2, म.प्र.म.क्षे.वि.वि.कं.लि. शिवपुरी की सेवाएं कोलारस विधायक श्री रामसिंह यादव की मांग पर विभाग एवं लिपिक की सहमति के आधार पर सौंपी गई थीं, उन्‍हीं के समान श्री बृजेन्‍द्र श्रीवास्‍तव, सहायक श्रेणी-3 म.प्र.म.क्षे.वि.वि.कं.लि. संभागीय पिछोर की सेवाएं माननीय विधायक विधान सभा क्षेत्र पिछोर के निज सहायक के रूप में उपलब्‍ध कराई गई थीं, अत: किसी अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही करने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) जी नहीं। प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। कलेक्‍टर शिवपुरी के आदेश क्रमांक 1185 (बी) /स्‍था/6-2/2014 दिनांक 01.03.14 से श्री ओ.पी. शर्मा, सहायक वर्ग-2, म.प्र.म.क्षे.वि.वि.कं.लि. शिवपुरी की सेवाएं कोलारस विधायक श्री रामसिंह यादव की मांग पर विभाग एवं लिपिक की सहमति के आधार पर सौंपी गई थीं, उन्‍हीं के समान श्री बृजेन्‍द्र श्रीवास्‍तव, सहायक श्रेणी-3 म.प्र.म.क्षे.वि.वि.कं.लि. संभागीय पिछोर को सचिवालयीन कार्य हेतु सामान्‍य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक एफ ए 10-15/1994/एक (1) दिनांक 19 मई 1995 के अंतर्गत आदेश जारी किये गये हैं।

सेमरिया स्थित शंकरजी तालाब का सौन्‍दर्यीकरण

25. ( क्र. 317 ) श्रीमती नीलम अभय मिश्रा : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या सेमरिया स्थित शंकर जी तालाब के सौन्‍दर्यीकरण हेतु वर्क आर्डर जारी होने के बाद भी आज दिनांक तक कार्य शुरू नहीं हुआ? (ख) कार्य शुरू न होने के कारण क्‍या है? इसमें दोषी कौन-कौन है? कार्य कब तक शुरू हो पायेगा एवं कब तक पूर्ण होगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) तालाब की जमीन का सीमांकन न होने के कारण कार्य प्रारंभ नहीं किया जा सका है। कोई दोषी नहीं है। सीमांकन उपरांत कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।

नगरीय क्षेत्रों की कॉलोनियों में मूलभूत सुविधाएं

26. ( क्र. 364 ) श्री दीवानसिंह विट्ठल पटेल : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) बड़वानी जिले के नगरीय क्षेत्रों में कितनी कॉलोनियां विस्‍तारित हुई है? नगरीय क्षेत्रवार संख्‍या एवं नाम सहित बतावें? (ख) कॉलोनाईजर द्वारा क्‍या-क्‍या मूलभूत सुविधायें दिये जाने के शासन के द्वारा नियम है? जिले में स्थित इन कॉलोनियों में क्‍या निर्धारित मापदंड अनुसार सुविधाएं दी जा रही है? (ग) खेतिया, पानसेमल एवं पलसूद में बेची गई कॉलोनियों का डायवर्सन कब हुआ तथा क्‍या शर्तें तय थी? क्‍या उन शर्तों का पालन हुआ है? यदि हाँ, तो सभी शर्तें एवं वहां की व्‍यवस्‍था की प्रमाणिक जानकारी उपलब्‍ध करावें? (घ) क्‍या इन कॉलोनियों के निवासियों को कई प्रकार की समस्‍याओं का सामना करना पड़ रहा है? क्‍या इन अवैध कालोनाईजरों के विरूद्ध शासन/विभाग कार्यवाही करेगा? यदि हाँ, तो कब तक और नहीं तो क्‍यों नहीं?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) बड़वानी जिले अंतर्गत कुल 07 नगरीय निकायों में जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार 107 कॉलोनियां विस्‍तारित हुई है। (ख) म.प्र. नगर पालिका (कॉलोनाईजर रजिस्‍ट्रीकरण, निर्बंधन तथा शर्तें) नियम 1998 के अनुसार कॉलोनी के आंतरिक एवं बाह्य विकास कार्य अनुसार कॉलोनाईजर को कॉलोनी वासियों को मूलभूत सुविधाएं दिये जाने का नियम है। नगरीय निकायों से प्राप्‍त जानकारी अनुसार कॉलोनियों में निर्धारित मापदण्‍ड अनुसार सुविधायें दिये जाने संबंधित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) नगर परिषद् खेतिया, पानसेमल एवं पलसूद में बेची गई कॉलोनियों का डायवर्सन एवं शर्तों से संबंधित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (घ) जी नहीं। नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। 

शाला उपकर की प्राप्‍त राशि

27. ( क्र. 372 ) श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नगर पालिका निगम इन्‍दौर में शाला उपकर के रूप में पिछले तीन वित्‍तीय वर्षों में कितनी-कितनी राशि प्राप्‍त की गई? (ख) उक्‍त शाला उपकर राशि का कितने विद्यालयों पर किन-किन कार्यों के लिए खर्च किया गया है या व्‍यय प्रस्‍तावित है? (ग) शाला उपकर मद से कितने विद्यालयों में कार्य किया जाना प्रस्‍तावित है तथा क्‍या-क्‍या कार्य किये जाना है? (घ) वर्तमान में उक्‍त मद से किन-किन विद्यालयों में क्‍या-क्‍या कार्य किये जा रहे हैं, उनकी जानकारी दें तथा लंबित कार्यों कौन-कौन से है तथा उन्‍हें कब तक पूरा कर लिया जावेगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) पिछले 03 वित्‍तीय वर्षों में शाला उपकर की राशि वर्षवार है :- वर्ष 2013-14 रूपये 12,71,09,000/-, वर्ष 2014-15 रूपये 15,93,17,000/-, वर्ष 2015-16 रूपये 18,33,87,346/- कुल राशि रूपये 46,98,13,346/- एकत्रित हुई है। (ख) विगत 03 वर्षों में शाला उपकर से विद्यालयों में किये गये कार्यों का विवरण वर्षवार है :- वर्ष 2013-14 में 78 विद्यालयों में कार्य किया गया, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है, वर्ष 2014-15 में 72 विद्यालयों में कार्य किया गया, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है, वर्ष 2015-16 में 43 विद्यालयों में कार्य किया गया, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) शाला उपकर मद से 24 विद्यालयों में कार्य किया जाना प्रस्‍तावित है एवं 12 विद्यालयों में एम.आई.सी. से निविदा पश्‍चात् वित्‍तीय स्‍वीकृति शेष है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) शाला उपकर मद से 39 विद्यालयों में कार्य किया जा रहा है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है, वर्तमान में कोई कार्य लंबित नहीं है।

पेंशन प्रकरणों का निराकरण

28. ( क्र. 373 ) श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. शासन के पेंशन नियम 57 एवं 59 के अनुसार सेवानिवृत्‍त होने वाले शासकीय सेवक का 24 माह पूर्व पेंशन प्रकरण तैयार करना एवं 6 माह पूर्व पेंशन स्‍वीकृति का प्रकरण तैयार कर जिला कोषालय अधिकारी को भेजने का प्रावधान है? इस नियम के अंतर्गत इन्‍दौर जिले में विभागवार सेवानिवृत्‍त होने वाले कर्मचारियों के संबंध में क्‍या स्थिति है? अवगत करावें। (ख) कितने सेवानिवृत्‍त होने वाले कर्मचारी हैं जिनके प्रकरण उक्‍त नियम के अंतर्गत तैयार कर कोषालय अधिकारी को समय-सीमा में प्रेषित किये गये हैं? विभागवार संख्‍या बतावें। (ग) ऐसे सेवानिवृत्‍त होने वाले कर्मचारी कितने हैं जिनके प्रकरण सेवानिवृत्‍त होने के पश्‍चात् भी लंबित हैं। ऐसे कर्मचारियों की संख्‍या बतायें जिनको सेवानिवृत्ति के पश्‍चात् भी पेंशन का भुगतान किया जाना लंबित है?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी, हाँ। इन्दौर जिले के विभागीय कार्यालय प्रमुखों से संभागीय पेंशन कार्यालय इंदौर में दिनांक 30-06-2016 की स्थिति में कुल 52 पेंशन प्रकरण अग्रिम प्राप्त हुए है। (ख) प्रश्नांश '''' अनुसार कुल 52 सेवानिवृत्त कर्मचारियों के प्रकरण उक्त नियमों के तहत अग्रिम रूप से समय-सीमा में प्रेषित किये गये है, विभागवार संख्या संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) दिनांक 30-6-2016 की स्थिति में लंबित न्यायालयीन प्रकरण, विभागीय जाँच, लोकायुक्त जाँच तथा शासकीय धन की वसूली से संबंधित कुल 137 पेंशन प्रकरण लंबित है।

परिशिष्ट - ''दस''

जन अभियान परिषद् के कार्य

29. ( क्र. 379 ) श्री विजय सिंह सोलंकी : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खरगोन जिले में जन अभियान परिषद् से जुड़ी कितनी समितियां गठित हैं, कितनी समितियां इस अभियान द्वारा लाभांवित हुई हैं? सूची नामवार, ग्राम, राशि सहित देवें? (ख) इस समितियों द्वारा वर्ष 2014 एवं 2015 में क्‍या-क्‍या कार्य कराये गये, इन कार्यों से लाभांवितों की संख्‍या बतायें? (ग) उक्‍त समितियों ने भगवानपुरा विधान सभा क्षेत्र में कराये गये कार्यों की सूची समितिवार देवें? (घ) नयी समितियों को जोड़ने की प्रक्रिया क्‍या है? पुरानी जुड़ी समितियों को किन शर्तों पर कार्य दिया गया, प्रति देवें?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) खरगोन जिले में जन अभियान परिषद् द्वारा 606 समितियों का गठन किया गया है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) इन 606 समितियों द्वारा वर्ष 2014 एवं 2015 में शासकीय योजनाओं का प्रचार-प्रसार चौपाल/बैठकों का आयोजन, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, नशामुक्ति, हरियाली,/ पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, समग्र स्‍वच्‍छता एवं साफ-सफाई, कृषि को लाभकारी बनाना, कुपोषण एवं परिवार नियोजन विषयों पर कार्य किये गये है। समितियों द्वारा किये जा रहे कार्यों से संबंधित ग्राम के ग्रामवासी लाभांवित हुये है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) नयी समितियों को जोड़ने की प्रक्रिया एवं पुरानी समितियों द्वारा कार्य कराये जाने की शर्तों संबंधी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

तालाबों हेतु स्‍वीकृति राशि

30. ( क्र. 394 ) श्री राजकुमार मेव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग द्वारा वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में महेश्‍वर विधानसभा क्षेत्र में कितने नवीन तालाबों के निर्माण एवं कितने पुराने तालाबों एवं उनकी नहरों के रख-रखाव एवं सुदृढ़ीकरण हेतु राशि स्‍वीकृत की गई? कितने कार्य प्रारंभ, कितने कार्य पूर्ण, कितने कार्य अपूर्ण एवं कितने कार्य अप्रारंभ है? उक्‍त कार्यों पर प्रश्‍न दिनांक तक कितनी राशि व्‍यय की गई? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संबंध में प्रश्‍नकर्ता द्वारा कब-कब, नवीन तालाबों के निर्माण, पूर्व के तालाबों एवं उनकी नहरों के रख-रखाव एवं सुदृढ़ीकरण हेतु प्रस्‍ताव विभाग को दिये गये? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संबंध में वर्ष 2016-17 में कितनी राशि के कौन-कौन से कार्य स्‍वीकृत किये गयेयदि नहीं, किये गये तो क्‍या कारण है? (घ) क्‍या शासन द्वारा प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र महेश्‍वर के किसानों की निरंतर की जा रही मांगों पर कार्यवाही नहीं की जा रही है? यदि हाँ, तो क्‍या कारण है? यदि नहीं, तो वर्ष 2016-17 में कितने कार्यों की स्‍वीकृति किसानों के हित में दी गई?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) से (घ) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। मा. प्रश्‍नकर्ता विधायक से शासन को प्राप्‍त पत्रों की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। उपलब्‍ध वित्‍तीय संसाधन पूर्व स्‍वीकृत परियोजनाओं के लिए आबद्ध होने की पृष्‍ठभूमि में स्‍वीकृति के लिए समय-सीमा नियत करना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''ग्यारह''

आंकलन खपत बिलों में अनियमितता

31. ( क्र. 404 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विदिशा जिले के गंजबासौदा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कितने घरेलू विद्युत उपभोक्‍ता ऐसे हैं जिनके विद्युत बिल आंकलन खपत के आधार पर दिये जा रहे हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) उल्‍लेखित उपभोक्‍ताओं के माह अप्रैल 2016 के बिलों में उल्‍लेखित आंकलन खपत क्रमश: 100, 150, 200, 250 एवं 300 के स्‍थान पर माह मई 2016 के बिलों में लगभग दो गुना आंकलन खपत की वृद्धि कर क्रमश: 150, 250, 300, 350 एवं 400 रीडिंग के बिल दिये गये है या नहीं? (ग) प्रश्‍नांश (ख) का उत्‍तर यदि हाँ, है तो क्‍या प्रति उपभोक्‍ता पर 100 प्रति यूनिट का अतिरिक्‍त भार किस आधार पर किस कारण से डाला गया है? इसके लिए कौन दोषी है? (घ) माह मई 2016 के कितने घरेलू विद्युत बिलों का सुधार माह जून 2016 में किस अधिकारी/कर्मचारी द्वारा किया गया है? बिलों का सुधार कब त‍क किया जावेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) विदिशा जिले के गंजबासौदा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत अप्रैल 2016 में कुल 7308 घरेलू विद्युत उपभोक्‍ताओं को आंकलित खपत के बिल दिये गये हैं। (ख) जी नहीं। उत्‍तरांश (क) में उल्‍लेखित घरेलू उपभोक्‍ताओं में से 1199 उपभोक्‍ताओं की खपत सम्‍बद्ध भार के अनुरूप नहीं पाये जाने पर वास्‍तविक भार के अनुसार खपत पुनरीक्षित की गई है। (ग) उत्‍तरांश (ख) में दर्शाए गए जिन उपभोक्‍ताओं की खपत भार के अनुरूप नहीं पाई गई, उन्‍हें ग्रीष्‍मकाल में कूलर, ए.सी. पंखे आदि का अधिक उपयोग पाये जाने के कारण उनके बिलों को वास्‍तविक भार के अनुरूप पुनरीक्षित किया गया है, जो कि नियमानुसार है। इसके लिए कोई अधिकारी/कर्मचारी दोषी नहीं है। (घ) माह मई-2016 के 299 घरेलू उपभोक्‍ताओं के विद्युत बिलों का सुधार माह जून-2016 में वितरण केन्‍द्रों में पदस्‍थ प्रबंधक/सहायक प्रबंधक के द्वारा परिसरों की जाँच कर किया गया है, जिसकी प्रश्‍नाधीन चाही गई जानकारी निम्‍नानुसार है :-

क्र.

वितरण केन्‍द्र का नाम

अधिकारी का नाम व पद

मई-16 के घरेलू उपभोक्‍ताओं के माह जून 2016 में सुधार किए गए विद्युत देयकों की संख्‍या

1.

बासौदा (श.)

श्री शैलेश जराठे, प्रबंधक

210

2.

गंज

श्री पंकज गोहिते, सहायक प्रबंधक

89

कुल

299

घरेलू उपभोक्‍ताओं की बिलिंग संबंधी समस्‍याओं की जाँच कर आवश्‍यक सुधार किये जा रहे हैं, जो कि एक सतत् प्रक्रिया है, अत: इस हेतु कोई निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। 

सिहोरा बरझा मार्ग का निर्माण

32. ( क्र. 421 ) श्रीमती नंदनी मरावी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) प्रश्‍नकर्ता के तारांकित प्रश्‍न संख्‍या-15 (क्रमांक 2423) दिनांक 25 फरवरी, 2016 में खितौला से सिहोरा बरझा लिंक रोड की स्‍वीकृति के परिपालन में क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) प्रश्‍नांश (क) किन-किन भू-स्‍वामियों की भूमि अधिग्रहण कर ली गई है? सूची उपलब्‍ध करायें। इन्‍हें किस-किस दर से मुआवजे का भुगतान किया गया है? यदि नहीं, तो कब तक कर दिया जावेगा? (ग) कंडिका (क) सड़क निर्माण के लिये डी.पी.आर. की प्रति उपलब्‍ध करायें? यह भी बतायें कि मार्ग निर्माण का कार्य कब तक पूर्ण कर लिया जावेगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) निकाय द्वारा खितौला से सिहेरा बरझा लिंक रोड निर्माण हेतु परिषद् द्वारा चाही गई जानकारी तहसीलदार से दिनांक 22.02.2016 से प्राप्‍त की गई तथा रोड निर्माण की डी.पी.आर. राशि रू. 218.11 लाख की परिषद् द्वारा स्‍वीकृत की जाकर, रोड निर्माण में आने वाली भूमि के अधिग्रहण तथा देय मुआवजा राशि हेतु प्रस्‍ताव कलेक्‍टर जबलपुर को भेजा गया। मुआवजा राशि का आंकलन, कलेक्‍टर जबलपुर द्वारा किया जा रहा है। (ख) जी नहीं। सड़क निर्माण हेतु अब तक भूमि स्‍वामियों की भूमि का अधिग्रहण नहीं किया गया है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्‍नांश '''' अनुसार सड़क निर्माण हेतु डी.पी.आर. की स्‍वीकृति नहीं दी गई है, डी.पी.आर. परीक्षणाधीन है। अत: उसकी प्रति उपलब्‍ध कराया जाना संभव नहीं है।

सिहोरा पेयजल योजना

33. ( क्र. 422 ) श्रीमती नंदनी मरावी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सिहोरा नगर पालिका में उदय परियोजना के तहत जल प्रदाय योजना का कार्य किया जाना प्रस्‍तावित है? इसके लिये एल.एन. मालवीय इंफा प्रोजेक्‍ट प्राईवेट लिमिटेड को कंसलटेंट नियुक्‍त किया गया था? (ख) प्रश्‍नांश (क) कंसलटेंट द्वारा बनाये गये डी.पी.आर. की प्रति उपलब्‍ध करायें तथा यह भी बतायें कि इस परियोजना का कार्य किस एजेंसी के द्वारा कब तक पूरा कर लिया जावेगा?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। (ख) डी.पी.आर. बनाने का कार्य प्रगति पर है। इस योजना का क्रियान्‍वयन म.प्र. अर्बन डेवलपमेंट कम्‍पनी के द्वारा किया जाना प्रस्‍तावित है। समय-सीमा बतलाया जाना संभव नहीं है।

 

पर्यटन विभाग द्वारा स्‍वीकृत निर्माण कार्य

34. ( क्र. 451 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या राज्‍यमंत्री,संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत अभी पर्यटन विभाग द्वारा वर्तमान में कितने कार्य निर्माणाधीन हैं, उनकी लागत सहित नाम बताएं वर्तमान में उनके निर्माण की क्‍या स्थिति है एवं यह कार्य कब तक पूरे कर लिये जायेंगे? (ख) क्‍या सागर नगर की विभिन्‍न बावडि़यों (जल स्‍त्रोत) एवं बाघराज मंदिर में निर्माण कार्य हेतु टेण्‍डर किये गये थे परन्‍तु अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किये जा सके हैं? इन कार्यों हेतु कितनी-कितनी राशि के टेण्‍डर किये गये थे? यह कार्य कब तक शुरू कर लिये जायेंगे? समय-सीमा बताएं?

राज्‍यमंत्री,संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) 2 कार्य निर्माणाधीन है। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार(ख) जी हाँ। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार

परिशिष्ट - ''बारह''

बाढ़ नियंत्रण योजनांतर्गत मोंगा बंधान कार्य

35. ( क्र. 452 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के परि. अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या-127 (क्रमांक 5222) दिनांक 11 मार्च 2016 के उत्‍तरांश में बताया गया था कि, नाले के दोनों किनारों पर अतिक्रमण होने से कार्य पूर्ण कराना संभव नहीं है तो क्‍या अतिक्रमण को दृष्टिगत रखते हुये रिंग वॉल को एलायमेंट में परिवर्तन कर लिया गया है, जिससे कि अतिक्रमण के कारण कार्य अवरोध उत्‍पन्‍न होने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता? (ख) यदि हाँ, तो यह कार्य अभी तक क्‍यों पूर्ण नहीं हो पाया है? इसके लिये कौन जिम्‍मेदार है एवं कार्य कब तक पूर्ण कर लिया जायेगा? (ग) क्‍या इस कार्य में एक स्‍टॉपडेम बनाने का प्रावधान था? यदि नहीं, तो आवश्‍यकतानुसार स्‍टॉपडेम बनाने की स्‍वीकृति शासन द्वारा प्रदान की जायेगी और कब तक?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) जी हाँ। विंग वॉल एलाईमेंट में परिवर्तन नहीं किया गया है। अतिक्रमण के कारण अवरोध की समस्‍या सतत् है। (ख) नाले के किनारे अतिक्रमण, नाले में गंदगी एवं जल सतत् प्रवाहित के कारण, निर्माण कार्य की गति धीमी है जिसके लिये कोई अधिकारी दोषी नहीं है। कार्य की पूर्णता वर्ष 2017-18 में संभव है। (ग) जी नहीं। जी नहीं, स्‍टॉपडेम से कोई सिंचाई लाभ नहीं होने के कारण।

नगर परिषद् को प्राप्‍त राशि

36. ( क्र. 485 ) श्री संजय उइके : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या नगर परिषद् बैहर को विभिन्‍न योजनाओं में शासन विभाग से नगर परिषद् को प्राप्‍त राशि द्वारा निर्माण कार्य/सामग्री खरीदी का कार्य किया गया है? (ख) यदि हाँ, तो वित्‍तीय वर्ष 2012-13 से प्रश्‍न दिनांक तक कौन-कौन से कार्य/सामग्री खरीदी हेतु कब-कब निविदा आमंत्रित की गई, सफल निविदाकार का नाम, दर, निविदा राशि सहित जानकारी देवें?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।

रायल्टी की राशि

37. ( क्र. 486 ) श्री संजय उइके : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या बालाघाट जिले में लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, नगरीय निकाय, वन विभाग में चल रहे निर्माण कार्यों में उपयोग किये जा रहे गौण खनिज रेत, मुरूम, गिट्टी, बोल्‍डर की रायलटी की राशि विभागों द्वारा विभागीय निविदा प्राप्‍त ठेकेदारों के बिलों से सीधे काट कर खनिज विभाग में जमा की जा रही है? हां या नहीं? (ख) यदि हाँ, तो किन नियमों/प्रावधानों से ठेकेदारों से बिलों की राशि काटकर जमा की जा रही है नियम की प्रति उपलब्‍ध करावें? (ग) वित्‍तीय वर्ष 2012-13 से प्रश्‍न दिनांक तक किन-किन विभागों ने, किन-किन निर्माण कार्यों के, किन-किन ठेकेदारों की कितनी-कितनी राशि प्रतिवर्ष जमा की गई?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। (ख) खनिज साधन विभाग के परिपत्र दिनांक 31-01-2006 एवं 04-03-2016 के अनुसार ठेकेदारों के बिलों से राशि काटकर जमा की जा रही है। निर्देश की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र -अ पर है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब पर दर्शित है।

लघु सिंचाई योजनाओं का पुन: सर्वेक्षण व स्‍वीकृति

38. ( क्र. 517 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या अधीक्षण यंत्री जल संसाधन मण्‍डल गुना जिला गुना के पत्र क्रमांक /1906/कार्य./2016 गुना दिनांक 16.05.2016 से कार्यपालन यंत्री जलसंसाधन संभाग नरसिंहगढ जिला राजगढ़ को विधानसभा क्षेत्र ब्‍यावरा के अंतर्गत जामी तालाब, पातलापानी तालाब, भगोरा तालाब, सुन्‍दरपुरा तालाब, खेजडा महाराज तालाब, अमानपुरा तालाब, बंजारी तालाब, नाहरगढ़ (बांसखों) तालाब लघु सिंचाई योजनाओं का स्‍थल निरीक्षण करते हुये तकनीकी आधार पर परखते हुये शासकीय मापदण्‍ड़ों के अनुसार पाये जाने पर साध्‍यता हेतु प्रस्‍तावित करने हेतु आवश्‍यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये थे? यदि हाँ, तो प्रश्‍न दिनांक तक किन-किन लघ़ु सिंचाई योजनाओं का स्‍थल निरीक्षण संबंधित अधिकारी द्वारा किया गया तथा कौन-कौन सी लघु सिंचाई योजना शासकीय मापदण्‍ड अनुसार पाये जाने पर साध्‍यता हेतु कब प्रस्‍तावित की गई? (ख) उपरोक्‍तानुसार क्‍या उक्‍त सभी लघु सिंचाई योजनाएं कम लागत में अधिक हेक्‍टेयर भूमि रकबा सिंचित करने वाली योजनाएं हैं? यदि हाँ, तो क्‍या शासन यथाशीघ्र इन योजनाओं की स्‍वीकृति प्रदान करेगा?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) जी हाँ। प्रश्‍नाधीन सभी परियोजनाओं का स्‍थल निरीक्षण कर विभागीय वेबसाईट पर साध्‍यता की जानकारी दर्ज की गई है। (ख) उपलब्‍ध सीमित वित्‍तीय संसाधन, पूर्व स्‍वीकृत परियोजनाओं के निर्माण हेतु आबद्ध होने से वित्‍तीय संसाधनों की उपलब्‍धता की सुनिश्चितता होने तक साध्‍यता परीक्षण कर आगामी कार्यवाही की जाना संभव नहीं है।

सिंहस्‍थ, 2016 में शौचालय का निर्माण कार्य

39. ( क्र. 534 ) श्री जितू पटवारी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सिंहस्‍थ, 2016 में पंचकोशी मार्ग व सिंहस्‍थ क्षेत्र में कितने अस्‍थायी शौचालय बनाये गये थे प्रति शौचालय किस दर पर निर्माण किया गया? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अंतर्गत क्‍या शौचालय निर्माण में भ्रष्‍टाचार की जाँच जिला पंचायत के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी द्वारा की गई? यदि हाँ, तो उनके हस्‍ताक्षरित जाँच पत्रक का विवरण उपलब्‍ध करायें? (ग) मेला क्षेत्र में बनाये गये शौचालयों का निर्माण किस-किस ठेकेदार ने किस-किस शर्तों के अधीन किया की जानकारी एवं निर्माण हेतु निकाली गई निविदा की छायाप्रति उपलब्‍ध कराये?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) सिंहस्‍थ 2016 की पंचक्रोशी यात्रा के दौरान मार्ग व सिंहस्‍थ क्षेत्र में निर्मित अस्‍थाई शौचालय एवं प्रति शौचालय की दर जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जी हाँ। प्रश्‍नांश (क) के अंतर्गत शौचालय निर्माण में भ्रष्‍टाचार की जाँच जिला पंचायत के मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी द्वारा की गई है, विवरण की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

वैचारिक महाकुम्‍भ में खर्च का विवरण

40. ( क्र. 535 ) श्री जितू पटवारी : क्या राज्‍यमंत्री,संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सिंहस्‍थ 2016 के अंतर्गत वैचारिक कुम्‍भ कार्यक्रम सरकार ने आयोजित किया था? (ख) यदि हाँ, तो कार्यक्रम कितने दिवसीय था एवं मदवार कार्यक्रम में कुल कितना खर्च हुआ? (ग) तीन दिवसीय कार्यक्रम में किन-किन अति‍थि को आमंत्रित किया गया प्रति अतिथियों की सूची उनके पदनाम सहित उपलब्‍ध करायें? (घ) वैचारिक कुम्‍भ में कुल कितनी जमीन अधिग्रहित की गई एवं कितना-कितना मुआवजा किन-किन किसानों को बांटा गया सूची उपलब्‍ध करायें?

राज्‍यमंत्री,संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) जी हाँ. (ख) तीन दिवसीय अंतर्राष्‍ट्रीय विचार महाकुंभ सिंहस्‍थ का सार्वभौम संदेश महासंगोष्‍ठी (12-14 मई, 2016) ग्राम निनौरा, जिला उज्‍जैन में आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मदवार व्‍यय की अद्यतन स्थिति की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार. (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार. (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार.

ग्रामों में पीने का पानी एवं सिंचाई व्‍यवस्‍था

41. ( क्र. 544 ) श्री सचिन यादव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कसरावद विधानसभा क्षेत्र के आदिवासी बाहुल्‍य ग्राम बलकवाड़ा, डोलानी सिनगुन, हीरापुर, बिलिदड, डाबरी, भैसावद, रसवा एवं बांमदी आदि 23 ग्रामों में पीने का पानी और सिंचाई के लिए पानी नहीं है तथा उक्‍त ग्राम पूर्ण रूप से सुखे की मार झेल रहे हैं? क्‍या इन ग्रामों को पेयजल के साथ सिंचाई का पानी देने हेतु बामंदी में बने साटक बांध से लिप्‍ट सिंचाई योजना बनाई गई है? हाँ, तो कब और उसकी अद्यतन स्थिति प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या है? (ख) उक्‍त आदिवासी बाहुल्‍य क्षेत्र के ग्रामों में पीने के पानी एवं सिंचाई की व्‍यवस्‍था हेतु प्रस्‍तावित योजना की स्‍वीकृति में विलंब के क्‍या कारण है? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) में दर्शित योजना की स्‍वीकृति प्रश्‍न दिनांक तक जारी कर दी जायेगी? हाँ, तो बतायें नहीं तो उक्‍त ग्रामों में पानी की समस्‍याओं को दूर करने के लिए शासन स्‍तर पर निर्देश जारी शीघ्र किए जायेंगे?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) से (ग) जी नहीं, प्रश्‍नाधीन ग्रामों में से ग्राम बलकवाड़ा एवं डोलानी को छोड़कर निम्‍न 7 ग्रामों में विभाग की परियोजनाओं से सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध है :-

क्रमांक

ग्राम

सिंचाई सुविधा

1.

सिनगुन

अम्‍बादड़ तालाब

2.

हिरापुर

डाबरी तालाब

3.

बिलीदड़

बिलीदड़ तालाब

4.

डाबरी

डाबरी तालाब

5.

भैसावद

बिलीदड़ तालाब

6.

रसवा

अम्‍बादड़ तालाब

7.

बमंदी

साटक तालाब


जी नहीं। साटक बांध से उपलब्‍ध जल से अतिरिक्‍त सिंचाई संभव नहीं है। शेष प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होते है।

ग्राम में पीने का पानी एवं सिंचाई व्‍यवस्‍था

42. ( क्र. 545 ) श्री सचिन यादव : क्या राज्‍यमंत्री,नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) माह मई-जून, 2016 में इंदिरा सागर परियोजना और औंकारेश्‍वर बांध परियोजना की मुख्‍य नहर में कसरावद विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत ग्रामों के लिये पानी नहीं छोड़ने के क्‍या कारण हैं? प्रश्‍न दिनांक तक की वस्‍तु स्थिति से अवगत कराते हुए बताये कि उक्‍त समयावधि में किन-किन ग्रामों में पानी लगातार छोड़ा गया है? (ख) प्रश्‍नांश (क) में दर्शित कसरावद विधान सभा क्षेत्र के ग्रामों में पानी नहीं छोड़े जाने से संबंधित ग्रामों के किसान समय रहते कपास की बोनी नहीं कर पाये उन्‍हें कितनी-कितनी राशि का मुआवजा दिया जायेगा एवं रहवासियों को जनहानि हुई है उसकी क्षतिपूर्ति किस प्रकार की जायेगी और इस प्रकार की पुनरावृत्ति न हो इस संबंध में क्‍या शासन स्‍तर पर निर्देश जारी किये जायेंगे? हाँ तो बतायें नहीं तो क्‍यों? (ग) प्रश्‍नांश (क) में दर्शित ग्रामों में पानी छोड़े जाने को लेकर विराधोभासी नीति क्‍यों अपनाई गई, उसके कारणों का उल्‍लेख करें?

राज्‍यमंत्री,नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) आर.डी. 105 कि.मी. से आगे लाईनिंग कार्य के कारण। दिनांक 06.06.2016 से कसरावद विधान सभा क्षेत्र के ग्राम जैतापुर, मछलगांव, बिटनेरा, बडिया, बिलखेड खुर्द, ककडगांव, खानपुरा, रतनपुर, पछाया एवं सिरलाय में जल प्रवाहित किया जा रहा है। (ख) प्रश्नाधीन क्षेत्र में कृषकों से कोई अनुबंध नहीं किया गया है एवं कोई जन-हानि नहीं हुई है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) उत्तरांश "क" के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

शासकीय विदेशी शराब की दुकान

43. ( क्र. 548 ) इन्जी. प्रदीप लारिया : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या परि.अता. प्रश्‍न संख्या-108 (क्र. 4876) दिनांक 11 मार्च 2016 के प्रश्‍नांश (ख) के उत्‍तर में बताया गया था कि आबकारी अधिनियम 1915 के अंतर्गत मधुकर शाह वार्ड सागर में स्थित शास.विदेशी शराब दुकान धार्मिक स्‍थल, नर्सिंग होम, शासकीय कॉलोनी, माखनलाल चतुर्वेदी विश्‍व‍विद्यालय परिसर से 50 मीटर से अधिक की दूरी पर स्थित है? (ख) क्‍या शासकीय मदिरा दुकान एवं अहाता के समीप गुप्‍ता नर्सिंग होम एवं बाईबल भवन स्थित है? यदि हाँ, तो संदर्भित प्रश्‍न क्र. 4876 दिनांक 11 मार्च 2016 के प्रश्‍नांश (ख) में विभाग द्वारा गलत जानकारी प्रदान की गई थी? जिसमें दोषियों के विरूद्ध विभाग क्‍या कार्यवाही करेगा? (ग) क्‍या संदर्भित प्रश्‍न क्र. 4876 दिनांक 11 मार्च 2016 के प्रश्‍नांश (घ) के उत्‍तर में बताया गया था कि उक्‍त विदेशी शराब दुकान वर्ष 2016-17 की अवधि में तहसील कार्यालय की ओर 500 मीटर की परिधि में किसी अन्‍य आपत्ति रहित स्‍थल पर स्‍थापित किया जावेगा? (घ) यदि हाँ, तो मधुकर शाह वार्ड स्थित शास.विदेशी मदिरा दुकान एवं अहाता प्रश्‍न दिनांक तक अन्‍य आपत्ति रहित स्‍थल पर स्‍थापित क्‍यों नहीं किया गया? कारण बतावें एवं विधानसभा में गलत जानकारी देने पर विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जावेगी?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। गुप्‍ता नर्सिग होम एवं बाईबल भवन शराब दुकान एवं अहाता के समीप स्थित है। लेकिन प्रश्‍न क्रमांक 4876 दिनांक 11 मार्च 2016 के प्रश्‍नांश (ख) में विभाग द्वारा गलत जानकारी प्रदान नहीं की गई थी। क्‍योंकि मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 में प्रावधानित सामान्य प्रयुक्ति के नियम (1) दुकानों का अवस्‍थापन अन्‍तर्गत उक्‍त गुप्ता नर्सिंग होम एवं बाईबिल भवन के संदर्भ में 50 मीटर की दूरी के प्रतिबंध प्रभावी नहीं है। अत: किसी अधिकारी/कर्मचारी के दोषी ना होने से विभाग द्वारा कोई कार्यवाही की जाना अपेक्षित नहीं है। (ग) जी हाँ। (घ) विदेशी मदिरा दुकान मुधकरशाह वार्ड सागर मदिरा की फुटकर बिक्री की दुकानों के अवस्‍थापन संबंधी नियमों/प्रावधानों के अंतर्गत स्‍थापित होने से लायसेंसी द्वारा वर्ष 2015-16 के संचालन स्‍थल पर ही वर्ष 2016-17 में विदेशी मदिरा दुकान मधुकरशाह वार्ड सागर का संचालन किया जा रहा है। कलेक्‍टर, जिला सागर के प्रतिवेदन क्रमांक आब/वि.स./2016/400 दिनांक 22 फरवरी, 2016 अनुसार वर्ष 2016-17 की अवधि के लिए विदेशी मदिरा दुकान मधुकरशाह वार्ड सागर को उसके वर्तमान स्‍थल पर या वर्तमान स्‍थल तहसील कार्यालय की ओर 500 मीटर की परिधि में किसी अन्‍य आपत्ति रहित स्‍थल पर स्‍थापित किया जाना निर्धारित किया गया था। तदनुसार वर्ष 2016-17 के लिए मदिरा दुकानों की निष्‍पादन सूचना (सेलमेमो) में भी इसी प्रकार उल्‍लेख किया गया था। लेकिन विधानसभा अतारांकित प्रश्‍न क्रमांक 4876 के भेजे गये उत्‍तर में टंकण त्रुटिवश वर्तमान स्‍थल पर या शब्‍द समूह टंकित होने से रह गया था। परिणामस्‍वरूप कलेक्‍टर द्वारा क्रमांक आब/वि.स./2016/400 दिनांक 22 फरवरी, 2016 से प्रेषित जानकारी की भाषा एवं आशय से भिन्‍न आशय के कारण, यह स्थिति निर्मित हुई है। इस संबंध में संबंधित के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है।

सफाई कामगारों की बैकलॉग भर्ती

44. ( क्र. 558 ) श्रीमती ऊषा चौधरी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या सतना नगरपालिक निगम सतना द्वारा म.प्र. शासन नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग (मंत्रालय) भोपाल के परिपत्र क्र./6716/5989/18-1 भोपाल, दिनांक 22.11.02 एवं समसंख्‍या परिपत्र क्र. 2112/05/18-1 भोपाल, दिनांक 30.05.2005 एवं म.प्र. शासन, सामान्‍य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्र. एफ-6-1/02/अ.प्र./एक.भोपाल, दिनांक 24.03.05 के परिपालन में अ.जाति, अ.ज.जाति वर्ग के बैकलॉग कैरी फारवर्ड पदों पर (सफाई कामगार) दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि पर 50 पदों पर नियुक्ति की गई है? यदि हाँ, तो आदेश क्रमांक एवं दिनांक सहित बताएं? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) के अनुसार उपरोक्‍त चयनित सफाई कामगारों द्वारा 29.08.05 को अपनी उपस्थिति नगरपालिक निगम कार्यालय में हलफनामा, मेडिकल प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र एवं जाति, निवास एवं योग्‍यता संबंधी दस्‍तावेज प्रस्‍तुत किये गये थे? (ग) यदि प्रश्‍नांश (ख) का उत्‍तर हां है, तो क्‍या वर्तमान में इन सफाई कामगारों से सेवाएं नहीं ली जा रही हैं? कारण सहित बताएं? (घ) क्‍या नगरपालिक निगम सतना के महापौर एवं आयुक्‍त द्वारा इन अ.जा./अ.ज.जा. वर्ग के लोगों के साथ विगत 11 वर्षों से शोषण करने के आरोप में कार्यवाही करते हुए नियुक्‍त किये गये 50 सफाई कामगारों की उपस्थिति कराकर नियुक्ति दिनांक से वेतन भुगतान कराया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक आदेश दिये जायेंगे? समय-सीमा बताई जावे।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। आदेश क्रमांक 176 दिनांक 30-07-2015 द्वारा 50 सफाई कामगारों के नियुक्ति आदेश जारी किए गए थे। (ख) जी हाँ। (ग) जी हाँ। चयन प्रक्रिया में अनियमितता होने से मेयर इन कॉउंसिल के संकल्‍प क्रमांक 02 दिनांक 22-09-2005 द्वारा निर्णय लिया गया कि इन कर्मचारियों को कार्य पर उपस्थित न कराया जाये। महापौर, नगरपालिक निगम, सतना द्वारा चयन प्रक्रिया में की गई अनियमितताओं की शिकायत राज्‍य शासन एवं आयुक्‍त, रीवा संभाग से की गई थी। आयुक्‍त, रीवा संभाग ने इन शिकायतों की जाँच कराई, जिसमें गंभीर अनियमितता पाई गई थी तथा तत्‍कालीन आयुक्‍त एवं नियुक्‍तकर्ता अधिकारी श्री एन.पी. नामदेव की दो वेतन वृद्धियां असंचयी प्रभाव से रोकी गई है। नगरपालिक निगम, सतना की मेयर इन कॉउंसिल की बैठ‍क दिनांक 02-02-2006 के संकल्‍प क्रमांक 4/5 द्वारा भर्ती प्रक्रिया म.प्र. लोक सेवा (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्‍य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण) अधिनियम, 1994 की धारा 14 के प्रावधान के अधीन शून्‍यकरणीय मान्‍य करते हुए निरस्‍त की जाती है, का निर्णय पारित किया गया। बैकलॉग के चयनित अभ्‍यार्थियों को चयन के पश्‍चात् तथा मेयर इन कॉउंसिल द्वारा संकल्‍प पारित कर नियुक्ति अवैध घोषित करने के कारण कार्य पर उपस्थित नहीं कराया गया है। (घ) उत्‍तरांश (ग) के परिप्रे‍क्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

प्रश्‍नकर्ता के पत्रों पर कार्यवाही

45. ( क्र. 570 ) पं. रमेश दुबे : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता ने चौरई-हिवरखेड़ी मुख्‍यमार्ग के वार्ड क्रमांक 2 में नाले का लंबित कार्य शीघ्र पूर्ण कराये जाने के संबंध में मुख्‍य नगरपालिका अधिकारी चौरई जिला-छिन्‍दवाड़ा को पत्र क्रमांक 169 दिनांक 28.01.2016 प्रेषित किया था? (ख) क्‍या इसी प्रकार प्रश्‍नकर्ता ने विधायक निधि से स्‍वीकृत कार्यों की अद्यतन जानकारी उपलब्‍ध कराये जाने के संबंध में पत्र क्रमांक 2045 दिनांक 31.12.2015 मुख्‍य नगरपालिका अधिकारी चौरई को प्रेषित किया था? (ग) प्रश्‍नांश '' एवं '' का उत्‍तर यदि हाँ, है तो अब तक उक्‍त पत्रों पर क्‍या कार्यवाही की गयी है? क्‍या प्रश्‍नकर्ता को उक्‍त पत्रों का जवाब दिया गया है यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) प्रश्‍नकर्ता के पत्रों पर समय पर कार्यवाही नहीं करने, प्रश्‍नकर्ता के पत्रों का समयावधि में जवाब नहीं देने के लिए शासन किसे दोषी मानता है? क्‍या शासन उक्‍त के लिए दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही करते हुए पत्रों में उल्‍लेखित विषयों पर संबंधित को कार्यवाही कर उसका जवाब दिये जाने का आदेश देगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ (ग) प्रश्‍नांश (क) में वर्णित पत्रों में वांछित जानकारी माननीय विधायक के कार्यालय को 11.07.2016 को प्राप्‍त हो गई है। प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित कार्य, गति‍शील होकर पूर्णता की ओर है। जी हाँ। (घ) प्रश्‍नकर्ता के पत्रों का जवाब समय पर नहीं देने पर मुख्‍य नगर पालिका अधिकारी को कारण बताओं सूचना पत्र दिया गया है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''तेरह''

जनभागीदारी योजनान्‍तर्गत निर्मित रेनबसेरा भवन एवं अन्‍य स्‍वीकृत कार्यों की जाँच

46. ( क्र. 577 ) श्रीमती ममता मीना : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कलेक्‍टर जिला गुना के प्रशासकीय स्‍वीकृति आदेश क्रमांक 1292-1293 दिनांक 18.05.2005 से ग्राम केदारपुरा में रेनबसेरा भवन का निर्माण कार्य ग्राम पंचायत नागरखेड़ी में राशि रू. 3.00 लाख स्‍वीकृत कर क्रियान्‍वयन एजेन्‍सी मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत राघौगढ़ को नियत किया जाकर तत्‍कालीन सरपंच के फार्म हाउस पर निर्माण कार्य कराया गया है? क्‍या उक्‍त रैनबसेरा भवन का उपयोग तत्‍कालीन सरपंच एवं उसके परिजनों द्वारा किया जा रहा है? (ख) ग्राम पंचायत नादनखेड़ी में वर्ष 2005 से वर्ष 2013 तक जनभागीदारी योजनान्‍तर्गत स्‍वीकृत 13 निर्माण कार्यों की जाँच हेतु कलेक्‍टर जिला गुना के आदेश क्रमांक 934-935, दिनांक 29.04.2015 द्वारा जाँच दल का गठन कर 06 बिन्‍दुओं के आधार पर, जाँच दल अधिकारियों द्वारा जाँच क्‍यों नहीं की गई है? क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा दिनांक 16.05.16 को कलेक्‍टर जिला गुना को दिये गये पत्र के अनुक्रम में कलेक्‍टर जिला गुना द्वारा आदेश क्रमांक 934-935, दिनांक 29.04.2015 में उल्‍लेखित 06 बिन्‍दुओं के आधार पर 13 निर्माण कार्यों की पुन: जाँच कराई जावेगी? (ग) जाँच कमेटी द्वारा प्रश्‍नांश (ख) में उल्‍लेखित आदेश के अनुक्रम में ग्राम पंचायत नागनखेड़ी में स्‍वीकृत 13 निर्माण कार्यों की जाँच क्‍यों नहीं की गई है, कारण सहित स्‍पष्‍ट करें? 13 निर्माण कार्य का उपयोग सार्वजनिक न होकर व्‍यक्ति विशेष द्वारा किये जाने के कारण संबंधित के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? (घ) वित्‍त विभाग म.प्र. शासन की अधिसूचना क्रमांक जी-16/1/2000सी/चार भोपाल दिनांक 13.09.2000 के नियम क्रमांक 9 अनुसार जनभागीदारी योजनान्‍तर्गत स्‍वीकृत सम्‍पत्ति पर राज्‍य शासन के स्‍वामित्‍व होने संबंधी निर्देश हैं? उक्‍त निर्देशों के अनुक्रम में क्‍या ग्राम पंचायत नागनखेड़ी में जनभागीदारी योजना से स्‍वीकृत 13 परिसम्‍पत्तियों को शासन द्वारा राजसात कब तक किया जावेगा?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) ग्राम केदारपुरा में भवन के निर्माण की जाँच हेतु मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत गुना की अध्‍यक्षता में समिति का गठन किया गया है। समिति के जाँच प्रतिवेदन के आधार पर उक्‍त रैनबसेरा भवन दान पत्र की भूमि पर बनाया गया है। जो शासकीय भूमि पर निर्मित है। प्रश्‍नकर्ता द्वारा दिनांक 16-05-2016 को रैनबसेरा की पुन: जाँच करने हेतु पत्र प्रेषित किया गया है। उक्‍त पत्र के आधार पर अपर कलेक्‍टर को जाँच सौंपी गई है। जाँच उपरान्‍त वस्‍तु स्थिति स्‍पष्‍ट हो सकेगी। (ख) जाँच दल द्वारा 6 बिन्‍दुओं के आधार पर जाँच की गई, जाँच प्रतिवेदन जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। प्रश्‍नकर्ता द्वारा दिये गये पत्र दिनांक 16-05-2016 के अनुक्रम में अपर कलेक्‍टर द्वारा जाँच कराई जा रही है। (ग) जाँच प्रतिवेदन जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) सभी निर्माण कार्यों का उपयोग सार्वजनिक रूप से हो रहा है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

जनभागीदारी योजनान्‍तर्गत स्‍वीकृत कार्यों की जाँच

47. ( क्र. 578 ) श्रीमती ममता मीना : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) गुना जिले में वित्‍तीय वर्ष 2011-12 से जनभागीदारी योजनान्‍तर्गत मांग संख्‍या 64 एवं 41 से किस-किस ग्राम में क्‍या-क्‍या निर्माण कार्य स्‍वीकृत किये गये? कार्यवार ग्राम का नाम, स्‍वीकृत राशि एवं जनगणना 2011 के अनुसार उक्‍त ग्राम की अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की पृथक-पृथक ग्रामवार जनसंख्‍या का भी प्रमाणीकरण सहित उल्‍लेख कर जानकारी उपलब्‍ध करावें? (ख) जनभागीदारी योजनान्‍तर्गत मांग संख्‍या 64 एवं 41 अंतर्गत स्‍वीकृत कार्यों के संबंध में दिशा निर्देश एवं मार्गदर्शिका की सत्‍यप्रति उपलब्‍ध करावें? क्‍या जनभागीदारी योजना में मांग संख्‍या 64 में 50 प्रतिशत या उससे अधिक अनुसूचित जाति एवं मांग संख्‍या 41 में 50 प्रतिशत या उससे अधिक अनुसूचित जनजाति मतदाताओं की जनसंख्‍या होने पर ही स्‍वीकृत किये जाने के निर्देशों की सत्‍यप्रति भी उपलब्‍ध करावें? (ग) क्‍या जनभागीदारी योजनान्‍तर्गत मार्गदर्शिका एवं दिशा निर्देशों के विपरीत गुना जिले में वर्ष 2011-12 से आज दिनांक तक मांग संख्‍या 64 एवं 41 अंतर्गत अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति बाहुल्‍य स्‍थानों की बजाय अन्‍य स्‍थानों हेतु जनभागीदारी से राशि व्‍यय की गई है, इस प्रकार के कार्यों की कार्यवार राशि सहित जानकारी उपलब्‍ध करावें? (घ) जनभागीदारी निधि की मार्गदर्शिका के विरूद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति बाहुल्‍य ग्रामों के स्‍थान पर अन्‍य स्‍थानों पर निर्माण कार्य स्‍वीकृत कराने वाले दोषी प्रभारी जिला योजना अधिकारी के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जावेगी और कब तक?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जनभागीदारी योजना के नियम-2000 की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' पर है। जी हाँ। आदेश की प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'''' पर है। (ग) जी नहीं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) सभी कार्य नियमानुसार स्‍वीकृत किये जाने से शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराई जाना

48. ( क्र. 601 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या श्‍योपुर जिला मुख्‍यालय पर संचालित जल संसाधन संभाग श्‍योपुर के अंतर्गत सी.आर.एम.सी. के बायी ओर बसे ग्राम कूण्‍ड, कनापुर काठोदी सहित 35 ग्रामों में सिंचाई की सुविधा की अनुपलब्‍धता के कारण इन ग्रामों की हजारों बीघा कृषि भूमि असिंचित रहती हैं जिससे इन ग्रामों में कृषि उत्‍पादन पूरी तरह प्रभावित रहता है और वे सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने की मांग कई दशकों से करते आ रहे हैं। (ख) क्‍या उक्‍त ग्रामों में सिंचाई सुविधा की उपलब्‍धता हेतु प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनान्‍तर्गत पार्वती उद्वहन सिंचाई योजना हेतु राशि 79.53 करोड़ का प्रस्‍ताव तैयार कर दिनांक 28.07.2016 को सम्‍पन्‍न जिला योजना समिति से अनुमोदित कराकर स्‍वीकृति हेतु शासन को ई.ई. जल संसाधन विभाग श्‍योपुर द्वारा भेजा गया है। (ग) यदि हाँ, तो उक्‍त प्रस्‍ताव में किन-किन कार्यों का समावेश किया गया है? प्रस्‍ताव वर्तमान में किस स्‍तर पर परीक्षणाधीन है इस कार्य में कितना समय और लगेगा। (घ) क्‍या शासन उक्‍त ग्रामों की स्थिति के मद्देनजर उक्‍त परीक्षणाधीन प्रस्‍ताव को शीघ्र स्‍वीकृत करेगा? तत्‍पश्‍चात् केन्‍द्र सरकार से उसे अविलम्‍ब स्‍वीकृत करायेगायदि नहीं, तो क्‍यों?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) प्रश्‍नाधीन 35 ग्रामों में से 19 ग्रामों में गत वर्ष चंबल नहर से कृषकों द्वारा स्‍वयं के साधनों से जल का उद्वहन कर 3,456 हेक्‍टर में तथा 14 ग्रामों में आबदा परियोजना की नहरों से 3,559 हेक्‍टर में सिंचाई की जाना प्रतिवेदित है। (ख) कृषि विभाग के अधीन प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत श्‍योपुर जिले की सिंचाई आयोजना में पार्वती उद्वहन सिंचाई परियोजना शामिल की जाना प्रतिवेदित है। (ग) कृषि विभाग की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत श्‍योपुर जिले की आयोजना में संभावित सभी कार्यों का समावेश किया जाना प्रतिवेदित है। पार्वती उद्वहन सिंचाई परियोजना जल संसाधन विभाग के मापदण्‍डों पर साध्‍य नहीं पाई गई है। भारत-सरकार द्वारा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत जिले की आयोजना स्‍वीकार करने के लिए विभाग समय-सीमा निर्धारित नहीं कर सकता है।

श्‍योपुर में 220 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र की स्‍थापना

49. ( क्र. 602 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कृषि बाहुल्‍य श्‍योपुर जिले में वर्तमान तक बिजली सप्‍लाई सबलगढ़ स्थित 220 के.व्‍ही.ए. उपकेन्‍द्र से होती है एवं प्रतिवर्ष वर्षाकाल में आंधी तूफान के कारण खम्‍भे टूटने, लाइनें गिरने व अन्‍य कई फाल्‍ट अक्‍सर आते रहते हैं जिससे जिले की बिजली सप्‍लाई बाधित होती है? (ख) क्‍या उक्‍त केन्‍द्र पर जिले के 132 के.व्‍ही.ए. के श्‍योपुर, बड़ौदा, विजयपुर तीन उपकेन्‍द्र निर्भर हैं लाइन लम्‍बी होने, कृषि सीजन में बिजली की मांग व लोड अधिक रहने के कारण जिले में बिजली/बोल्‍टेज की समस्‍या अक्‍सर विशेषकर कृषि सीजन में बनी रहती है नतीजतन किसान खासे परेशान रहते हैं? क्‍या चौथा 132 के.व्‍ही.ए. उपकेन्‍द्र कराहल में प्रस्‍तावित है? इसके निर्माण उपरांत उक्‍त समस्‍या और गंभीर हो जावेगी इसके निदान हेतु जिले में 220 के.व्‍ही.ए. उपकेन्‍द्र को स्‍थापित करने की आवश्‍यकता है। (ग) यदि हाँ, तो बतावें कि कम्‍पनी मुख्‍यालय में जिले में उक्‍त उपकेन्‍द्र की स्‍थापना का प्रस्‍ताव क्‍या प्रस्‍तावित होकर वर्तमान में प्रक्रियाधीन है? यदि हाँ, तो इस संबंध में क्‍या-क्‍या कार्यवाही पूर्ण/शेष रह गई है? यदि नहीं, तो क्‍या शासन उक्‍त केन्‍द्र की स्‍थापना का प्रस्‍ताव तैयार करवाकर भविष्‍य की आवश्‍यकता के मद्देनजर इसे स्‍वीकृति प्रदान करेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, वर्तमान में श्‍योपुर जिले की विद्युत सप्‍लाई 220 के.व्‍ही.उपकेन्‍द्र सबलगढ़ से होती है। वर्षाकाल में आँधी तूफान के कारण, कतिपय अवसरों पर खंबे टूटने अथवा तार टूटने के कारण विद्युत व्‍यवधान होता है, जिसे प्राथमिकता के आधार पर सुधार कर विद्युत व्‍यवस्‍था बहाल करने की कार्यवाही की जाती है। (ख) जी हाँ, 132 के.वी. श्‍योपुर, बड़ौदा एवं विजयपुर उपकेन्‍द्रों को विद्युत सप्‍लाई 220 के.व्ही. उपकेन्‍द्र सबलगढ़ से है। कृषि सीजन की अधिकतम माँग/लोड की आपूर्ति हेतु वित्‍तीय वर्ष 2015-16 में जिले के 132 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र श्‍योपुर, विजयपुर एवं बड़ौदा में पर्याप्‍त ट्रांसफार्मर क्षमता रही है। 132 के.वी. श्‍योपुर उपकेन्‍द्र पर दिनांक 12.09.2015 को 132 के.व्‍ही. 1X33 एम.व्‍ही.ए.आर. केपेसिटर बैंक चालू किये जाने पर वोल्‍टेज समस्‍या काफी हद तक समाप्‍त हो चुकी है। कृषि सीजन में भी श्‍योपुर जिले के अति उच्‍च दाब उपकेन्‍द्रों में सामान्‍य रूप से वोल्‍टेज की समस्‍या नहीं रहती है। किन्‍हीं विशेष आकस्मिक परिस्थितियों जैसे लाइन/ट्रांसफार्मर की ट्रिपिंग की स्थिति में अल्‍प अवधि के लिये कम वोल्‍टेज की समस्‍या उत्‍पन्‍न होने पर शीघ्रातिशीघ्र सुधार लिया जाता है। अत: वोल्‍टेज की समस्‍या गंभीर होने का प्रश्‍न ही नहीं उठता। वर्तमान में 132 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र कराहल स्‍थापित करने का कोई प्रस्‍ताव नहीं है। तथापि भविष्‍य की मांग को दृष्टिगत रखते हुये 220