मध्यप्रदेश विधान सभा


प्रश्नोत्तर-सूची
जुलाई, 2017 सत्र


मंगलवार, दिनांक 18 जुलाई 2017


भाग-1
तारांकित प्रश्नोत्तर


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बिजली के टूटे तारों/खंबों की मरम्‍मत

[ऊर्जा]

1. ( *क्र. 566 ) श्री रजनीश सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिवनी जिले के विधान सभा क्षेत्र केवलारी के अंतर्गत विकासखण्‍ड धनौरा, केवलारी, छपारा, सिवनी में कितने वर्षों से बिजली के टूटे तारों व खंबों की मरम्‍मत नहीं की जा रही है? कारण सहित पूर्ण विवरण देवें। (ख) क्‍या केवलारी विधानसभा क्षेत्रांतर्गत ग्राम नसीपुर, विकासखण्‍ड केवलारी में विगत 6 महीनों से विद्युत पोल टूटा हुआ है? यदि हाँ, तो अधीक्षण अभियंता/कार्यपालन अभियंता (संचा./संधा.) के पास इसकी कितनी शिकायत की गई? शिकायत किन-किन जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई है? शिकायतों पर विभाग द्वारा की गई कार्यवाही का भी विवरण देवें (ग) केवलारी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत उगली पांडिया छपारा वितरण केन्‍द्र क्षेत्रान्‍तर्गत में कितने लाइनमेन कार्यरत हैं एवं इन कार्यरत लाइनमेन को कितने-कितने ग्रामों का प्रभार सौंपा गया है? लाइनमेन के नाम सहित ग्रामों के नाम देवें

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र सहित प्रदेश में संपूर्ण विद्युत वितरण लाईनों/उपकरणों का प्रत्‍येक वर्ष दो बार यथा-वर्षाकाल के पूर्व एवं वर्षाकाल के पश्‍चात् मेन्‍टेनेंस का कार्य किया जाता है। उक्‍त के अतिरिक्‍त प्राकृतिक आपदा अथवा तकनीकी कारणों एवं आकस्मिक दुर्घटनाओं की स्थिति में विद्युत अधोसंरचना के क्षतिग्रस्‍त होने पर आवश्‍यकतानुसार मेन्‍टेनेंस/सुधार के कार्य किये जाते हैं। वर्तमान में सिवनी जिले के विधानसभा क्षेत्र केवलारी के अंतर्गत विकास खण्‍ड सिवनी में कोई भी क्षतिग्रस्‍त पोल/तार बदलने हेतु शेष नहीं है तथा विकासखण्‍ड धनौरा, केवलारी एवं छपारा में माह मई एवं जून, 2017 में आये आंधी-तूफान के कारण 22 ग्रामों के पोल क्षतिग्रस्‍त हुए हैं जो बदलने हेतु शेष हैं। उक्‍त 22 में से 18 ग्रामों का विद्युत प्रदाय वैकल्पिक व्‍यवस्‍था कर चालू कर दिया गया है। (ख) जी नहीं। तथापि दो माह पूर्व माननीय प्रश्‍नकर्ता विधायक महोदय एवं पूर्व सरपंच ग्राम पंचायत नसीपुर द्वारा दूरभाष पर पोल टूटने की जानकारी दी गई थी। उक्‍त तारतम्‍य में तत्‍काल निरीक्षण करने पर यह पाया गया कि ग्राम नसीपुर में ग्राम पंचायत भवन के पास पोल झुक गया है जिसे तुरन्‍त स्‍टेसैट लगाकर व्‍यवस्थित किया गया, किन्‍तु स्‍टेसैट को अज्ञात व्‍यक्तियों द्वारा बार-बार निकाले जाने के कारण स्‍टड पोल लगाकर उक्‍त पोल को सीधा कर दिया गया है। वर्तमान में उक्‍त पोल व्‍यवस्थित एवं सुरक्षित है। (ग) केवलारी विधान सभा क्षेत्रान्‍तर्गत उगली एवं पांडिया छपारा वितरण केन्‍द्रों में कुल 7 लाईन कर्मचारी कार्यरत् हैं, जिन्‍हें 64 ग्रामों का प्रभार सौंपा गया है। उक्‍त लाईन कर्मचारियों के नाम एवं उनके कार्य क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामों के नाम सहित केन्‍द्रवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''एक''

रीवा जिले में कराए गए नवीन कार्य/सुधार कार्य

[ऊर्जा]

2. ( *क्र. 432 ) श्री सुन्‍दरलाल तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रीवा जिले में गुढ़ विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विभागीय स्‍तर पर कितने नवीन कार्य एवं कितने सुधार के कार्य वर्ष 2014-15 से 2016-17 तक में कराये गए? (ख) प्रश्नांश (क) के कार्यों के कार्यादेश कब-कब किन-किन संविदाकारों/ठेकेदारों को कितनी अवधि में पूर्ण करने के लिए दिये गए, उनमें से कितने कार्य कब-कब पूर्ण कराये गए, का विवरण देवें? अगर कार्य समय पर पूर्ण नहीं किये गए तो संबंधितों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) प्रश्नांश (क) के कार्यों के कार्यादेशों का भुगतान किन-किन माध्‍यमों से दिनांक 15.6.2017 तक कुल कितना किया गया? भुगतान के पूर्व भवन एवं संनिर्माण कल्‍याण उपकर अधिनियम 1996 के तहत कितनी उपकर राशि की वसूली की गई? क्‍या अपूर्त मूल्‍य तथा पर निर्माण लागत दोनों में श्रमिक कल्‍याण उपकर लिए जाने के प्रावधान 2012 से लागू हैं? (घ) प्रश्नांश (क) के कार्यों पर प्रश्‍नांश (ग) अनुसार कितने कल्‍याण उपकर की राशि की वसूली की जाकर श्रम विभाग में जमा करायी गई? क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा भी पत्र क्र. 904, दिनांक 29.05.2017 के माध्‍यम से जानकारी चाही गई थी, जो आज भी अप्राप्‍त है? (ड.) प्रश्नांश (क) के ठेकेदार/संविदाकारों से कर्मकार कल्‍याण उपकर की राशि की वसूली न करके ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए कौन-कौन दोषी हैं? दोषियों के विरूद्ध क्‍या राशि की वसूली प्रस्‍तावित कर गबन का मामला पंजीबद्ध करायेंगे एवं प्रश्‍नांश (घ) अनुसार चाही गई जानकारी को समय पर न देने के लिए दोषियों पर क्‍या कार्यवाही करेंगे?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) रीवा जिले में गुढ़ विधानसभा क्षेत्रांतर्गत पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विभागीय स्‍तर पर वर्ष 2014-15 से 2016-17 तक कराये गये नवीन कार्यों एवं सुधार कार्यों से संबंधित जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ए-1, ए-2, ए-3, बी-1, बी-2, बी-3, सी-1, सी-2, सी-3, डी-1, डी-2, डी-3, ई-1, ई-2 एवं ई-3 अनुसार है। (ख) गुढ़ विधानसभा क्षेत्रांतर्गत प्रश्‍नावधि में जारी किये गये कार्यादेशों की दिनांक, संविदाकार/ठेकेदार के नाम, कार्य पूर्ण कराये जाने की अवधि तथा कार्य पूर्ण करने की दिनांक सहित जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ए-1, ए-2, ए-3, बी-1, बी-2, बी-3, सी-1, सी-2, सी-3, डी-1, डी-2, डी-3, ई-1, ई-2 एवं ई-3 अनुसार है। ग्रामीण क्षेत्र के कराये गये फीडर विभक्तिकरण के कार्यों हेतु स्‍वीकृत योजना के अंतर्गत दिये गये प्रावधानों एवं निर्देशों के अनुसार टर्न की आधार पर करवाये गये कार्यों में संबंधित ठेकेदार (फर्म) द्वारा निर्धारित समय-सीमा पर कार्य नहीं किये जाने के कारण संबंधित ठे‍केदार (फर्म) से प्राप्‍त होने वाले बिलों से संपूर्ण रीवा जिले के कार्यों हेतु एल.डी. रूपये 10.67 लाख की राशि की कटौती की गई है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में प्रोजेक्‍ट जिलेवार स्‍वीकृत होते हैं एवं निर्धारित समय-सीमा पर कार्य नहीं किये जाने पर रीवा जिले हेतु कुल रूपये 91 लाख एल.डी. की राशि की कटौती की गई है। (ग) प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित कार्यों का भुगतान संबंधित ठेकेदार/फर्म को चेक द्वारा एवं ठेकेदार/फर्म के खाते में ट्रांसफर करके किया गया है, जिसका विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ए-3, बी-2, बी-3, सी-3, डी-1, डी-2, डी-3, ई-1, ई-2 एवं ई-3 में दर्शाए अनुसार है। रूपये 978930 की राशि की कटौती भुगतान पूर्व बिलों से श्रम कल्‍याण उपकर के मद में काटी गई है। प्राप्‍त जानकारी अनुसार भवन एवं अन्‍य संनिर्माण कर्मकार कल्‍याण उपकर संनिर्माण कार्य की निर्माण लागत जिसमें अपूर्त मूल्‍य तथा विनिर्माण लागत दोनों सम्मिलित हैं, दिनांक 10.4.2003 से देय है। (घ) प्रश्‍नांश (ग) के उत्‍तर में उल्‍लेखित कटौती की गई राशि श्रम विभाग में जमा कराई गई है। जी हाँ। अधीक्षण अभियंता (संचा./संधा) के पत्र क्रमांक 2397 दिनांक 15.06.2017 के द्वारा माननीय विधायक महोदय को जानकारी प्रेषित की गई है। (ड.) प्रश्नांश (क) से संबंधित कार्यों के विरूद्ध ठेकेदारों/संविदाकारों द्वारा प्रस्‍तुत किये गये देयकों में से नियमानुसार श्रमिक कल्‍याण उपकर की राशि की कटौती की गई है। किसी भी ठेकेदार को लाभ नहीं पहुंचाया गया है। अत: इस संबंध में कोई अधिकारी/कर्मचारी दोषी नहीं है। चाही गई जानकारी माननीय विधायक को अधीक्षण अभियंता (संचा/संधा) रीवा के पत्र क्रमांक 2397, दिनांक 15.6.2017 के माध्‍यम से प्रेषित की गयी है। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में किसी के दोषी नहीं होने से कार्यवाही करने की आवश्‍यकता नहीं है।

विद्युत चोरी के प्रकरणो में फर्जी पंचनामों की जाँच

[ऊर्जा]

3. ( *क्र. 781 ) श्री मुरलीधर पाटीदार : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्नकर्ता द्वारा शून्यकाल सूचना क्रमांक 165, फरवरी-मार्च 2017 में विद्युत चोरी के प्रकरणों में नियम विरूद्ध कार्यवाही करने के संदर्भ में नगर सुसनेर में सिराज खाँ बोहरा के विरूद्ध पंचनामा नियमानुसार नहीं बनाने के प्रकरण में क्या जाँच की जावेगी? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में क्‍या क्षेत्रान्तर्गत विगत 02 वर्षों में बनाए गए पंचनामों की विस्तृत जाँच की जाकर उचित कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक व क्या कार्यवाही की जावेगी? (ग) वितरण केन्द्र सुसनेर अन्तर्गत विद्युत देयकों में अनियमितता संबंधी कितनी शिकायतें विगत 02 वर्षों में प्राप्त हुई हैं, जिनका निराकरण कर देयकों में सुधार किया गया? यदि हाँ, तो शिकायतवार पूर्ण विवरण देवें? (घ) क्या ग्राम मोड़ी के उपभोक्ताओं द्वारा देयक में उल्लेखित राशि जमा करने के उपरांत भी राशि बिलों में कम नहीं हो रही है? उदाहरणार्थ-गोवर्धन पिता पीरूलाल सर्विस क्र. 31-31-3201586 के देयक में जमा उपरांत भी राशि कम नहीं हुई है? क्या विस्तृत जाँच करवाई जाकर उपभोक्ताओं के हित में कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो क्या व कब तक? विवरण देवें

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सुसनेर वितरण केन्‍द्र के अंतर्गत विद्युत उपभोक्‍ता श्री सिराजखां बोहरा के विरुद्ध विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 के तहत नियमानुसार प्रकरण/पंचनामा बनाया गया है। अतः उक्‍त प्रकरण में किसी प्रकार की जाँच की आवश्यकता नहीं है। (ख) सुसनेर वितरण केन्द्र के क्षेत्रान्तर्गत विगत 2 वर्षों में बनाये गये प्रकरण/पंचनामें विद्युत अधिनियम 2003 के प्रावधानों के अनुरूप नियमानुसार बनाए गये हैं, अतः तत्संबंध में किसी प्रकार की जाँच/कार्यवाही किया जाना अपेक्षित नहीं है। (ग) सुसनेर वितरण केन्द्र के अंतर्गत विद्युत देयकों में त्रुटि संबंधी शिकायतें उपभोक्ताओं द्वारा लिखित में नहीं की गई, किन्तु प्राप्त बिलों से संतुष्ट नहीं होने पर उपभोक्ताओं द्वारा कार्यालय में उपस्थित होकर आवश्यक सुधार हेतु बिल प्रस्तुत किये। बिल सुधार के ऐसे 314 प्रकरण विगत 2 वर्षों में सुसनेर वितरण केन्द्र कार्यालय में प्राप्त हुए, जिन्हें नियमानुसार सुधारा गया। प्रकरणवार विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) ग्राम मोड़ी के उपभोक्ताओं द्वारा देयक में उल्लेखित राशि जमा करने के उपरांत नियमानुसार आगामी बिलों से जमा की गई राशि कम की जा रही है। प्रश्‍नांश में वर्णित उपभोक्ता श्री गोवर्धन पिता पीरूलाल (सर्विस क्रमांक 31-31-3201586) के प्रकरण की जाँच की गई। उक्‍त उपभोक्ता द्वारा सिंचाई श्रेणी का रू. 3000/- का बिल रसीद क्र. बी-10 दिनांक 13.04.2016 को जमा करवाया गया था, किन्तु उनके द्वारा जमा की गई राशि कम्प्यूटर में पंचिंग करते समय छूट गई थी। दिनांक 22.06.2017 को आवश्‍यक सुधार उपरांत उक्‍त उपभोक्‍ता को रू. 4008/- राशि का बिल जारी कर दिया गया है।

अपराध प्रकरण दर्ज किया जाना

[सामान्य प्रशासन]

4. ( *क्र. 478 ) श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ ग्‍वालियर में प्राथमिक जाँच प्रकरण 9/2011 पंजीबद्ध किया गया है? यदि हाँ, तो प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) सांसद निधि से 23 विद्यालयों में कम्‍प्‍यूटर प्रोजेक्‍टर लगाने में गंभीर अनियमितता होने के उपरांत भी प्रश्‍न दिनांक तक अपराध पंजीबद्ध क्‍यों नहीं किया गया, इसके लिए कौन दोषी है तथा उसके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जावेगी? (ग) प्रश्नांश (क) में प्राथमिक जाँच प्रकरण 9/2011 में पंजीबद्ध होने के बाद भी अपराध पंजीबद्ध न होने के क्‍या कारण हैं, क्‍या दोषी लोगों को बचाया जा रहा है? (घ) जिला कलेक्‍टर भिण्‍ड के प्रशासकीय स्‍वीकृति आदेश क्र. 794/4.11.1999835/16.11/199971/29.1.20001605/22.12.2000 में निहित शर्तों का पालन न करने के उपरांत अभी तक शिथिल कार्यवाही क्‍यों की जा रही है? कब तक कार्यवाही पूर्ण हो जायेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। जाँच प्रक्रियाधीन है। (ख) जाँच प्रक्रियाधीन है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) उत्‍तरांश (क) के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) जाँच प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

कृषि भूमि में विद्युतीकरण/पम्प उर्जीकरण

[अनुसूचित जाति कल्याण]

5. ( *क्र. 762 ) श्रीमती ऊषा चौधरी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अ.जा. कल्याण विभाग के अंतर्गत रीवा संभाग के कितने जिलों में वर्ष 2013-14 से 2015-16 तक अ.जा./अ.ज.जा. वर्ग के किसानों की कृषि भूमि में विद्युतीकरण/पम्प उर्जीकरण के कार्य कराये गए तथा किस वर्ष से अ.जा. वर्ग के किसानों के विद्युतीकरण के कार्य बंद कर दिए गए, बंद करने के क्या कारण थे? विवरण सहित जानकारी देवें (ख) वर्ष 2016-17 में सतना जिले के अंतर्गत विभाग द्वारा कितनी राशि अ.जा./अ.ज.जा. वर्ग के लिए स्वीकृत की गई थी, स्वीकृत राशि में से कितने किसानों के कार्यों पर राशि खर्च की गई? विधानसभा क्षेत्रवार कृषक संख्‍यावार जानकारी देवें (ग) क्या वित्तीय वर्ष 2016-17 में विभाग द्वारा अ.जा./अ.ज.जा. वर्ग के किसानों की कृषि भूमि में पम्प उर्जीकरण एवं विद्युतीकरण के कार्य नहीं कराये जाने से अधिकांश प्रकरण लंबित हैं? (घ) वित्तीय वर्ष 2017-18 में विभाग द्वारा अ.जा./अ.ज.जा. वर्ग के किसानों की कृषि भूमि में पम्प उर्जीकरण व बस्ती में विद्युतीकरण हेतु कितनी राशि जारी की गई है? प्रश्नकर्ता सदस्य द्वारा विगत दो वर्षों में कितने अ.जा./अ.ज.जा. वर्ग के किसानों/हितग्राहियों के प्रस्ताव अनुशंसा सहित भेजे गए हैं? यदि भेजे गए तो प्रस्तावित किये गए प्रकरणों में स्वीकृति क्यों नहीं दी गई?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) रीवा संभाग के समस्‍त जिलों में अनुसूचित जाति के कृषकों के पम्‍प उर्जीकरण के कार्य कराये गये हैं। यह कार्य बंद नहीं किया गया है। (ख) अनुसूचित जाति अंतर्गत कोई राशि स्‍वीकृत नहीं की गई है। (ग) जी हाँ। (घ) विभाग द्वारा रीवा जिले को बस्‍ती में विद्युतीकरण हेतु राशि रू. 11.24 लाख, पम्‍प उर्जीकरण हेतु राशि रू. 169.07 लाख, सतना जिले को बस्‍ती में विद्युतीकरण हेतु राशि रू. 11.68 लाख, पम्‍प उर्जीकरण हेतु राशि रू. 175.71 लाख, सीधी जिले को बस्‍ती में विद्युतीकरण हेतु निरंक, पम्‍प उर्जीकरण हेतु राशि रू. 57.40 लाख एवं सिंगरौली जिले को बस्‍ती में विद्युतीकरण हेतु निरंक और पम्‍प उर्जीकरण हेतु राशि रू. 468.60 लाख की राशि जारी की गई है। प्रश्‍नकर्ता विधायक द्वारा पाँच अनुसूचित जाति के प्रस्‍ताव जिला कार्यालय को प्राप्‍त हुए। 3 प्रकरणों के प्राक्‍कलन तैयार हो चुके हैं। समिति के अनुमोदन के उपरांत स्‍वीकृति की कार्यवाही की जायेगी। शेष 2 प्रकरणों में आवश्‍यक अभिलेख आवेदन पत्र के साथ न होने के कारण आवेदक को सूचित किया गया है।

सागर जिले में विभागीय योजनाओं का क्रियान्‍वयन

[आदिम जाति कल्याण]

6. ( *क्र. 392 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर जिले में अनुसूचित जनजाति वित्‍त एवं विकास निगम द्वारा वर्ष 2014-15 से प्रश्‍न दिनांक तक कौन-कौन से कार्य किये गये हैं? प्रत्‍येक कार्य पर व्‍यय राशि सहित बतायें। (ख) सागर जिले में विभाग का कितना अमला है? नाम, पद, कार्यालय स्‍थान सहित बतायें? क्‍या विभाग में प्रश्नांश (क) उल्लेखित समय में जिले में कार्यशाला/प्रशिक्षण किया है? यदि हाँ, तो स्‍थान, दिनांक, व्‍यय राशि सहित बतायें। (ग) सागर जिले में प्रश्नांश (क) समय में कितने लोगों को कौन-कौन सी गतिविधि से कितने रूपये की राशि एवं अनुदान राशि से लाभान्वित किया गया है? हितग्राही की संख्‍या, दिया गया लाभ, अनुदान राशि वर्ष सहित बतायें। (घ) हितग्राही चयन की क्‍या प्रक्रिया है? योजनाओं का लाभ लेने हेतु क्‍या दैनिक समाचार पत्रों में विज्ञापन जारी किये गये हैं? यदि हाँ, तो प्रति उपलब्‍ध करायें।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) निगम द्वारा वित्‍तीय वर्ष 2014-15 से मुख्‍यमंत्री स्‍वरोजगार योजना एवं वित्‍तीय वर्ष 2016-17 से मुख्‍यमंत्री आर्थिक कल्‍याण योजना एवं मुख्‍यमंत्री युवा उद्यमी योजना संचालित है। संचालित की जा रही सभी योजनायें बैंकों के माध्‍यम से संचालित हैं एवं अनुदान राशि नोडल बैंक के माध्‍यम से ऑनलाईन प्रदान की जाती है। (ख) सागर जिले में मध्‍यप्रदेश आदिवासी वित्‍त एवं विकास निगम जिला शाखा सागर में श्री शैलेन्‍द्र कुमार, लिपिक सह फील्‍ड इंस्‍पेक्‍टर एवं श्रीमती प्रीति ठाकुर, लिपिक सह फील्‍ड इंस्‍पेक्‍टर कुल 02 कर्मचारी कार्यरत हैं निगम कार्यालय सहायक आयुक्‍त आदिवासी विकास टी.सी.पी.सी. परिसर खुरई रोड सागर में संचालित है। प्रश्‍नांश (क) की समयावधि में निगम द्वारा किसी प्रकार की कार्यशाला/प्रशिक्षण का आयोजन नहीं किया गया है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) हितग्राहियों का चयन जिला टास्‍क फोर्स समिति द्वारा किया जाता है योजना का लाभ लेने हेतु सूचना एवं प्रकाशन विभाग के माध्‍यम से प्रेस नोट जारी किया जाता है। समाचार पत्र की छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

फीडर सेपरेशन योजना का क्रियान्‍वयन

[ऊर्जा]

7. ( *क्र. 853 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्‍वालियर जिले के भितरवार विधानसभा क्षेत्र में फीडर सेपरेशन योजना कब प्रारंभ हुई तब से वर्तमान तक कितने व कौन-कौन से ग्रामों को योजना में शामिल किया गया, इन ग्रामों में से कौन-कौन से ग्रामों में विद्युतीकरण कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण हुआ? गांवों के नाम स्‍पष्‍ट करें। किन-किन ग्रामों में नहीं हुआ तथा क्‍यों? अब कब तक पूर्ण कराये जावेंगे, स्‍पष्‍ट करें? (ख) प्रश्‍न (क) अनुसार क्‍या उक्‍त में से जिन ग्रामों में विद्युतीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है, उनमें घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया तथा अब भी कई ग्रामों में खम्‍भे नहीं गड़ें, कई तार नहीं खिचें जहां दोनों कार्य हो गये वहां ट्रांसफार्मर नहीं लगे, जहां लगे वहां खराब पड़े हैं, इन्‍हें नहीं बदला जा रहा है, इसका कारण बतावें? (ग) क्‍या शासन पूर्ण हो चुके ग्रामों में विद्युतीकरण कार्यों की गुणवत्‍ता व कार्यों के अपूर्ण रहने के कारणों की जाँच करायेगा तथा शेष अविद्युतीकरण ग्रामों में विद्युतीकरण के कार्य एक निश्चित समय-सीमा में पूर्ण करवायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों? कारण सहित स्‍पष्‍ट करें। (घ) विद्युत विभाग में कौन-कौन कर्मचारी/अधिकारी भितरवार विधानसभा क्षेत्र में पदस्‍थ हैं? उनका नाम, पद, मुख्‍यालय तथा पदस्‍थापना दिनांक स्‍पष्‍ट करें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) भितरवार विधानसभा क्षेत्र के 169 ग्रामों सहित ग्‍वालियर जिले में फीडर विभक्तिकरण योजना के अंतर्गत कार्यों के क्रियान्‍वयन हेतु टर्नकी ठेकेदार मेसर्स ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर्स लि. मुम्‍बई को दिनांक 09.8.2011 को अवार्ड जारी किया गया था एवं उक्‍त ठेकेदार एजेन्‍सी द्वारा दिनांक 20.8.2011 को कार्य प्रारंभ किये गये। उक्‍त ठेकेदार एजेंसी द्वारा कार्य में विलंब किये जाने के कारण उससे किया गया अनुबंध अप्रैल-2015 में निरस्‍त कर दिया गया एवं योजना में सम्मिलित शेष कार्यों के क्रियान्‍वयन हेतु निविदा के आधार पर ठेकेदार एजेन्‍सी मेसर्स बजाज इलेक्ट्रिकल्‍स लि. मुंबई को दिनांक 05.07.2016 को अवार्ड जारी किया गया। प्रश्‍न दिनांक तक उक्‍त 169 ग्रामों में से 77 ग्रामों में फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा 92 ग्रामों में कार्य शेष है, जिसे ठेकेदार एजेन्‍सी से किये गये अनुबंध अनुसार निर्धारित अवधि 28.02.2018 के पूर्व पूर्ण किया जाना संभावित है। उक्‍त योजना में सम्मिलित ग्रामों की वर्तमान में निर्धारित कार्य पूर्णता की अवधि, कार्य प्रगति एवं कार्य पूर्ण किये जाने की संभावित तिथि के विवरण सहित ग्रामवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। उक्‍तानुसार पूर्व अनुबंधित ठेकेदार एजेन्‍सी द्वारा निर्धारित समयावधि में कार्य नहीं किये जाने के कारण योजना के क्रियान्‍वयन में विलंब हुआ है। (ख) जी नहीं। प्रश्‍नाधीन योजना अंतर्गत पूर्ण किये गये कार्यों में निर्माण सामग्री की गुणवत्‍ता सुनिश्चित किये जाने हेतु सामग्री प्रदाय करने से पूर्व थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेन्‍सी के माध्‍यम से सामग्री का निरीक्षण कराने के उपरांत निर्धारित मानक स्‍तर के अनुरूप पाये जाने के बाद ही सामग्री प्रदाय करने हेतु आदेशित किया गया है। टर्नकी ठेकेदार एजेंसी के स्‍टोर में सामग्री प्राप्‍त होने के पश्‍चात् भी मुख्‍य सामग्रियों की रेंडम सेंपलिंग कराई जाकर एन.ए.बी.एल. द्वारा अधिकृत प्रयोगशालाओं में टेस्टिंग कराई जाकर सामग्री की गुणवत्‍ता सुनिश्चित कराई गई है। अत: यह कहना सही नहीं है कि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। फीडर विभक्तिकरण योजना के अंतर्गत कृषि एवं गैर-कृषि फीडरों को पृथक करने के साथ-साथ ग्रामों में विद्यमान निम्‍नदाब लाईन के कंडक्‍टर को ए.बी. केबिल द्वारा बदलने एवं मीटरीकरण के कार्य सम्‍पादित किये जा रहे हैं। प्रश्‍नाधीन क्षेत्रान्‍तर्गत उक्‍त योजना में स्‍थापित किये गये ट्रांसफार्मरों में से वर्तमान में एक भी ट्रांसफार्मर खराब नहीं है। जिन ग्रामों में उक्‍त योजनांतर्गत कार्य पूर्ण हो गया है, उनमें योजना में प्रावधानित सभी कार्य पूर्ण कर लिये गये हैं। (ग) उत्‍तरांश (ख) अनुसार निर्धारित प्रक्रिया के तहत थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेन्‍सी द्वारा निर्माण सामग्री की गुणवत्‍ता सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेन्‍सी द्वारा कार्य की गुणवत्‍ता में कमी/त्रुटि पाए जाने पर उसका निराकरण संबंधित ठेकेदार एजेन्‍सी से कराया जाता है। अत: गुणवत्‍ता संबंधी जाँच कराए जाने का प्रश्‍न नहीं उठता। उत्‍तरांश (ख) में दर्शाए अनुसार उक्‍त योजना अंतर्गत जिन ग्रामों में कार्य पूर्ण हो गया है, उनमें योजना में प्रावधानित सभी कार्य पूर्ण कर लिये गये हैं। योजना के अंतर्गत शेष 92 ग्रामों में कार्य पूर्ण किये जाने की संभावित तिथि की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (घ) भितरवार विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी एवं म.प्र. पावर ट्रांसमिशन कंपनी के कार्यालयों में पदस्‍थ अधिकारियों/कर्मचारियों की पदस्‍थापना दिनांक सहित प्रश्‍नाधीन चाही गई जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' एवं '' अनुसार है।

जनपद पंचायत महेश्‍वर एवं बड़वाह में नई परियोजनाओं की स्‍वीकृति

[नर्मदा घाटी विकास]

8. ( *क्र. 901 ) श्री राजकुमार मेव : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विभाग द्वारा किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु नर्मदा नदी से सामूहिक सिंचाई एवं माईक्रो सिंचाई परियोजनाएं तैयार कर स्‍वीकृत करने की कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, तो वर्ष 2017-18 में प्रदेश में कौन-कौन सी सिंचाई परियोजनाएं कितनी लागत की स्‍वीकृत की गई हैं? (ख) क्‍या खरगौन जिले में महेश्‍वर विधानसभा क्षेत्र की जनपद पंचायत महेश्‍वर एवं बड़वाह के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु कोई नई परियोजना स्‍वीकृति हेतु प्रस्‍तावित है? यदि हाँ, तो कौन-कौन सी? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के संबंध में महेश्‍वर विधानसभा क्षेत्र की जनपद पंचायत महेश्‍वर एवं बड़वाह के क्षेत्र बड़कीचौकी, कवाणा, घटयाबैडी, रामदढ, बलसगांव, आशाखो, पेमपुरा, करोंदियाखुर्द, हा‍थीदग्‍गड़, जिरात, रोस्‍याबारी, बाकानेर, कुसुम्‍भ्‍या, भवनतलाई, छोटाभेडल्‍या, बडाभेडल्‍या, हेलाबाबर आदि के किसानों की कृषि सिंचाई हेतु सुविधा उपलब्‍ध नहीं है? यदि हाँ, तो विभाग द्वारा क्‍या कार्ययोजना तैयार की गई? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) क्‍या प्रश्‍नांश (ग) के संदर्भ में नर्मदा नदी से किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु बजट सत्र फरवरी 2017 में मान. मंत्री महोदय द्वारा आश्‍वासन दिया गया था कि परियोजना हेतु पुन: सर्वे कराया जाकर सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु योजना तैयार की जाकर स्‍वीकृति प्रदान की जावेगी? क्‍या इस संबंध में विभाग द्वारा कोई योजना तैयार की गई है? यदि हाँ, तो किस प्रकार की योजना तैयार की गई है?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। वर्ष 2017-18 में नर्मदा नदी से कोई सिंचाई परियोजना स्‍वीकृत नहीं की गई है। (ख) जी नहीं। (ग) जी हाँ। इन ग्रामों में सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु ओंकारेश्‍वर परियोजना की नहर में अतिरिक्‍त जल उपलब्‍ध नहीं है, इसलिए कोई भी योजना प्रस्‍तावित नहीं की गई है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) माननीय मंत्री महोदय द्वारा आश्‍वासन दिया गया था कि इन ग्रामों में ओंकारेश्‍वर परियोजना की नहर से सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु परीक्षण किया जावेगा। परीक्षण उपरांत परिलक्षित हुआ है कि इन ग्रामों में सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु ओंकारेश्‍वर परियोजना की नहर में अतिरिक्‍त जल शेष नहीं है। अत: कोई योजना तैयार नहीं की गई है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

सोन नदी में 11 के.व्‍ही. लाइन क्रासिंग टॉवर की स्‍थापना

[ऊर्जा]

9. ( *क्र. 533 ) श्रीमती सरस्‍वती सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सिंगरौली जिले के चितरंगी विधान सभा क्षेत्र अन्‍तर्गत खटाई माची खुर्द/माचींकला के मध्‍य सोन नदी में 11 के.व्‍ही. लाइन के क्रासिंग टॉवर लगाने के लिए शासन स्‍तर से स्‍वीकृति प्राप्‍त हुई है? यदि हाँ, तो अभी तक विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही हुई? (ख) क्‍या उक्‍त निर्माण कार्य के लिये (अभ्‍यारण्य) सोन घड़‍ियाल क्षेत्र संचालक संजय टाईगर रिर्जव सीधी द्वारा अनापत्ति की गई है? यदि हाँ, तो विवरण दें। यदि नहीं, तो कारण बताएं। (ग) प्रश्नांश (क) और (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में उक्‍त सोन नदी पर क्रासिंग स्‍थल पर टॉवर का निर्माण कार्य कब तक प्रारम्‍भ करा दिया जावेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित 11 के.व्‍ही. लाईन की सोन नदी क्रासिंग हेतु टॉवर लगाए जाने के कार्य की स्‍वीकृति पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रदान की गयी है। उक्‍तानुसार टॉवर लगाये जाने का कार्य म.प्र. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा किया जाना है। म.प्र. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा उक्‍त कार्य हेतु प्राक्‍कलन स्‍वीकृत कर सर्वे का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। (ख) सोन नदी क्रासिंग में सोन घड़ि‍याल अभ्‍यारण्‍य होने के कारण प्रश्‍नाधीन प्रकरण में टॉवर लगाये जाने की अनुमति प्रदान करने हेतु मुख्‍य वन संरक्षक एवं क्षेत्र संचालक संजय टाईगर रिजर्व सीधी को पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा पत्र दिनांक 08.02.2017 द्वारा प्रस्‍ताव प्रेषित किया गया है जिस पर कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (ग) उत्‍तरांश (ख) में दर्शाए अनुसार स्‍वीकृति प्राप्‍त होने पर म.प्र. पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा टॉवर लगाये जाने का कार्य प्रारम्‍भ किया जा सकेगा। अत: वर्तमान में कार्य प्रारंभ किये जाने की निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

ग्रामीण बस्तियों/मजरे टोलों में विद्युतीकरण

[ऊर्जा]

10. ( *क्र. 870 ) श्री गिरीश भंडारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. शासन द्वारा घरेलू विद्युत (सिंगल फेस) 24 घण्‍टे विद्युत सप्‍लाई देने का नियम है? यदि हाँ, तो क्‍या नरसिंहगढ़ विधान सभा क्षेत्र के ग्रामों की बस्‍तियाँ/मजरे टोले व जो किसान खेतों पर रह रहे हैं, उनको 24 घण्‍टे बिजली दी जा रही है? (ख) प्रश्‍न की कण्डिका (क) की जानकारी अनुसार यदि 24 घण्‍टे बिजली दी जा रही है, तो उन ग्रामों की सूची उपलब्‍ध करावें? (ग) नरसिंहगढ़ विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत कितने ग्राम हैं, जहां किसानों को 24 घण्‍टे बिजली नहीं मिल रही है व उक्‍त ग्रामों को 24 घण्‍टे बिजली कब तक उपलब्‍ध करा दी जावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, विद्युतीकृत राजस्‍व ग्रामों के मुख्‍य आबाद क्षेत्र एवं ऐसे ग्रामों के विद्युतीकृत मजरों/टोलों/बस्तियों में गैर कृषि फीडरों के माध्‍यम से 24 घंटे विद्युत प्रदाय किये जाने का प्रावधान है तथा उक्‍तानुसार प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में भी विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। तथापि नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्र की 12 बस्तियों/मजरों/टोलों तथा खेतों में निवासरत किसानों को कृषि फीडर के माध्‍यम से 10 घन्‍टे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। उक्‍त 12 बस्तियों/मजरों/टोलों, जिनकी सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है, को 24 घंटे विद्युत प्रदाय करने हेतु गैर-कृषि फीडर से जोड़ने का कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में स्‍वीकृत है। (ख) प्रश्‍नाधीन चाही गई ग्रामवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सभी राजस्‍व ग्रामों में गैर-कृषि फीडरों से 24 घंटे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है तथा पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' में दर्शाए गए 12 बस्तियों/मजरों/टोलों को गैर-कृषि फीडरों से जोड़कर 24 घंटे विद्युत प्रदाय उपलब्‍ध कराने का कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु निविदा कार्यवाही प्रक्रियाधीन है, अत: कार्य पूर्णता की समय-सीमा वर्तमान में बताया जाना संभव नहीं है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिकाओं की नियुक्ति की जाँच

[महिला एवं बाल विकास]

11. ( *क्र. 96 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यान सिंह सोलंकी : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) बड़वाहा विधान सभा क्षेत्र में बड़वाहा एवं सनावद अंतर्गत कितनी आंगनवाड़ी स्वीकृत हैं? इन आंगनवाड़ी केन्‍द्रों में कितने पद स्वीकृत हैं, कितने पद खाली हैं? जो पद रिक्त हैं, उनकी पद पूर्ति कब तक की जावेगी? (ख) परियोजना बड़वाहा में माह फरवरी 2017 में कौन कौन सी आंगनवाड़ि‍यों में पद पूर्ति की कार्यवाही की गई, उसकी सूची दी जावे? इन रिक्त आंगनवाड़ी में ग्राम सिरलाय, सुराना नगर, मुराल्ला, जेठवाया में कार्यकर्ता एवं सहायिका में चयनित अभ्यर्थियों की सूची दी जावे तथा जो अपात्र किये गए हैं? उनकी सूची दी जावे। (ग) क्या प्रश्नकर्ता द्वारा पत्र क्रमांक 807, दिनांक 11 फरवरी 2017 के द्वारा परियोजना बड़वाहा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं की नियुक्ति में हुई धांधलियों की शिकायत की गई थी? यदि हाँ, तो इस सम्बन्ध में वर्तमान तक क्या कार्यवाही की गई है? यदि नहीं, की गई तो क्या कारण रहे हैं? कब तक जाँच हो जावेगी?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) बड़वाह विधानसभा क्षेत्र में बड़वाह एवं सनावद अन्तर्गत स्वीकृत आंगनवाड़ी एवं इन आंगनवाड़ी केन्द्रों में स्वीकृत एवं रिक्त पदों की जानकारी निम्नानुसार है :-

क्र

परियोजना

स्‍वीकृत आंगनवाड़ी/उप आंगनवाड़ी केन्‍द्रों की संख्‍या

स्‍वीकृत पद

रिक्‍त पद

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/उप कार्यकर्ता,

सहायिका

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उप कार्यकर्ता

सहायिका

1

बड़वाह

113

113

93

0

4

2

सनावद

153

153

153

1

14

 

पदों की रिक्ति एवं पूर्ति एक निरन्तर प्रक्रिया है अतः समय-सीमा दिया जाना संभव नहीं है। (ख) परियोजना बड़वाह में माह फरवरी 2017 में आंगनवाड़ी केन्द्रों में पदपूर्ति की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र 01 अनुसार है। ग्राम सिरलाय, सुराना नगर, मुराल्ला, जेठवाया में कार्यकर्ता एवं सहायिका में चयनित अभ्यर्थियों की सूची संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र 02 अनुसार तथा अपात्र किये गये अभ्यर्थियों की सूची संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र 03 अनुसार है। (ग) जी हाँ। जाँच की कार्यवाही प्रचलन में है।

परिशिष्ट - ''दो''

बिजली बिल की अवैध वसूली

[ऊर्जा]

12. ( *क्र. 946 ) श्री अनिल जैन : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विद्युत विभाग द्वारा विधानसभा क्षेत्र निवाड़ी के ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्‍ताओं से बिल के नाम पर भारी राशि की वसूली की जा रही है। साथ ही उन ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बिल की राशि जमा है, वहां भी विद्युत प्रदाय नहीं किया जा रहा है? यदि हाँ, तो कारण सहित जानकारी दी जावे। (ख) क्‍या बिजली विभाग के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बिजली ही उपलब्‍ध नहीं है वहां भी विभागीय अधिकारियों के द्वारा उपभोक्‍ताओं को बिजली कनेक्‍शन देकर बिलों की वसूली की जा रही है? यदि हाँ, तो दोषी के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जायेगी। (ग) विधानसभा क्षेत्र निवाड़ी में कितने घण्‍टे बिजली कृषि क्षेत्र एवं कितने घण्‍टे घरों के लिये बिजली दी जा रही है? ग्रामवार व नगरवार जानकारी दी जावे। साथ ही किसी ग्राम में ट्रान्‍सफार्मर खराब होने की स्थिति में पुन: लगाये जाने के लिये क्‍या नियम हैं? विवरण सहित बतावें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी नहीं, उपभोक्‍ताओं को म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी दर आदेश के अनुसार बिल दिये जाकर नियमानुसार विद्युत बिल की राशि की वसूली की कार्यवाही की जा रही है। वितरण ट्रांसफार्मर जला/खराब होने की स्थिति में नियमानुसार उससे संबद्ध उपभोक्‍ताओं में से न्‍यूनतम 75 प्रतिशत उपभोक्‍ताओं द्वारा भुगतान किये जाने पर अथवा कुल बकाया राशि की 40 प्रतिशत राशि जमा होने पर जला/खराब ट्रांसफार्मर बदले जाने का प्रावधान है। विधानसभा क्षेत्र निवाड़ी के ग्रामीण क्षेत्रों में वर्तमान में 87 जले/खराब ट्रांसफार्मरों को उनसे संबद्ध उपभोक्‍ताओं द्वारा उक्‍तानुसार निर्धारित नियम के अनुरूप विद्युत बिल की बकाया राशि जमा नहीं करने के कारण बदला नहीं जा सका है। उक्‍त ट्रांसफार्मरों से संबद्ध उपभोक्‍ताओं को छोड़कर प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में निर्धारित शेड्यूल अनुसार कतिपय अवसरों पर तकनीकी कारणों/प्राकृतिक आपदा के कारण आए विद्युत व्‍यवधान को छोडकर कृषि उपभोक्‍ताओं को 10 घण्‍टे प्रतिदिन तथा गैर कृषि उपभोक्‍ताओं को 24 घण्‍टे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। (ख) जी नहीं। अत: प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) विधानसभा क्षेत्र निवाड़ी में कतिपय अवसरों पर तकनीकी कारणों एवं प्राकृतिक आपदा के कारण आए विद्युत व्‍यवधानों को छोड़कर कृषि फीडरों पर 10 घण्‍टे एवं गैर कृषि फीडरों पर 24 घण्‍टे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। माह जनवरी 17 से जून 17 तक प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में विद्युत प्रदाय संबंधी माहवार, फीडरवार, ग्रामवार/नगरवार विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार ट्रांसफार्मर खराब होने की स्थिति में पुन: लगाये जाने के लिये खराब ट्रांसफार्मर से संबद्ध उपभोक्‍ताओं में से न्‍यूनतम 75 प्रतिशत उपभोक्‍ताओं द्वारा भुगतान किया जाना अथवा कुल बकाया राशि का न्‍यूनतम 40 प्रतिशत जमा होना आवश्‍यक है।

परिशिष्ट - ''तीन''

अनु. ज‍ाति/जन जाति क्षेत्र विकास योजनांतर्गत प्राप्‍त आवंटन

[अनुसूचित जाति कल्याण]

13. ( *क्र. 736 ) श्री महेन्‍द्र सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अनुसूचित जाति/जन जाति क्षेत्र विकास योजनांतर्गत पन्ना जिले को कितना आवंटन कब-कब प्राप्त हुआ? प्राप्त आवंटन का व्यय कब-कब किस आधार पर किया गया? वर्ष 2013-14 से प्रश्न दिनांक तक वर्षवार पृथक-पृथक बतायें (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार गुनौर विधानसभा क्षेत्र के किस-किस ग्राम में किस-किस कार्य के लिये कितनी राशि स्वीकृत की गई? स्वीकृत राशि के विरूद्ध कितना-कितना व्यय हुआ? इन कार्यों की निर्माण ऐजेंसी कौन है? विकासखण्डवार बतायें (ग) प्रश्नांश (ख) अनुसार अपूर्ण कार्यों के लिये कौन दोषी है? इन दोषियों पर क्या कार्यवाही की जावेगी? (घ) प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) के परिप्रेक्ष्य में की गई अनियमितताओं से संबंधित विगत 5 वर्षों में प्राप्त शिकायतों पर क्या कार्यवाही की गई? शिकायतवार कार्यवाहीवार विवरण दें।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत उत्‍तरदायी है। ग्राम पंचायतों को नोटिस दिये गये हैं। नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी। (घ) कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं/सहायिकाओं की नियुक्ति में अनियमितता

[महिला एवं बाल विकास]

14. ( *क्र. 992 ) श्रीमती अनीता नायक : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या वर्ष 2016-17, 2017-18 में टीकमगढ़ जिले की जनपदों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की नियुक्ति की गई? यदि हाँ, तो जनपदवार, ग्रामवार, नामवार, बतावें। जनपद द्वारा चयनित सूची जिला पंचायत में भेजने के पूर्व जनपद स्‍तर की कमेटी द्वारा नियुक्ति हेतु क्‍या मापदण्‍ड थे? अगर शासकीय मापदण्‍डों के आधार पर नियुक्तियां की गईं तो जिले में आपत्ति दर्ज होने के पश्‍चात् जनपद स्‍तर की कमेटी के द्वारा अनुमोदित सूची जिले की कमेटी द्वारा किन-किन अभ्‍यर्थियों को सूची से हटाकर दूसरी नियुक्तियां किस आधार पर की गई? कारण सहित जनपदवार ग्रामवार, नामवार बतावें। (ख) जनपद कमेटी द्वारा चयनित सूची से जिले में जो गड़बड़ी की गई है, क्‍या उनके विरूद्ध शासन कार्यवाही करेगा? अगर हाँ तो क्‍या और कब तक? (ग) आपत्ति दर्ज होने के पश्‍चात् कितने पदों पर नियुक्तियों का निराकरण किया गया? आपत्ति दर्ज का क्‍या कारण था? कारण सहित बतावें, टीकमगढ़ जिले में ऐसे कितने प्रकरण प्राप्‍त हुये, जिनकी अंकसूची उ.प्र. की थी, उनका नामवार, ग्रामवार, जनपदवार बतावें। (घ) क्‍या जिन आवेदकों की अंकसूची उ.प्र. की थी उन सभी आवेदकों की अंकसूची सत्‍यापित कराई गई हैं? तो नामवार, ग्रामवार, जनपदवार बतावें। जिन आवेदकों की सूची उ.प्र. की थी उन सभी की अंकसूचियां सत्‍यापित नहीं कराई गई हैं, तो ऐसा क्‍यों किया गया, इसके लिये कौन-कौन अधिकारी जिम्‍मेदार है? अगर जिम्‍मेदार अधिकारी दोषी हैं, तो विभाग क्‍या कार्यवाही करेगा और कब तक? अगर नहीं तो कारण सहित बतावें। जिले में कार्यकर्ताओं/सहायिकाओं के ऐसे कितने प्रकरण हैं, जिनमें मैरिट में आने के बाद भी नियुक्ति नहीं हुई, अगर नहीं तो क्‍यों? ग्रामवार, जनपदवार, नामवार बतावें।

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी हाँ। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''एक'' अनुसार है। नियुक्ति के मापदण्डों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''दो'' अनुसार है। विभाग द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका के चयन एवं नियुक्ति के संशोधित निर्देशों के अनुसार चयन समिति द्वारा प्राप्त आवेदनों का परीक्षण किये जाने के उपरान्त अनन्तिम सूची जारी की जाती है। अनन्तिम सूची के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया के संबंध में प्राप्त आपत्तियाँ परियोजना कार्यालय में प्राप्त की जाती है तथा जिला स्तरीय आपत्ति निराकरण समिति द्वारा आपत्तियों का निराकरण किया जाकर अन्तिम सूची का प्रकाशन किया जाता है। परियोजना स्तरीय समिति द्वारा अनुमोदित अनन्तिम चयन सूची के विरूद्ध प्राप्त आपत्तियों के निराकरण के पश्चात जिला स्तरीय समिति द्वारा जिन अभ्यर्थियों का चयन किया गया उक्त जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''तीन'' अनुसार है। (ख) जनपद स्तर खण्ड स्तरीय चयन समिति द्वारा अनन्तिम सूची जारी की जाती है जिसके विरूद्ध प्राप्त आपत्तियों का निराकरण जिला स्तरीय दावा आपत्ति निराकरण समिति द्वारा किया जाता है तत्पश्चात् ही अन्तिम चयन सूची जारी की जाती है। नियुक्ति प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी न होने से शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) आपत्ति दर्ज होने के पश्चात 111 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, 92 सहायिका एवं 20 मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के पद पर आपत्ति का निराकरण किया गया। अनन्तिम स्तर पर चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज फर्जी होने के प्रत्याशा में आपत्तियां दर्ज की गई हैं। ऐसे कुल 96 प्रकरण प्राप्त हुए हैं, जिनकी अंकसूची उत्तरप्रदेश की है। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''चार'' अनुसार है। (घ) जी नहीं। कुल 96 आवेदकों के द्वारा उत्तर प्रदेश की अंकसूची संलग्न की गई थी। जिनमें से 24 अंकसूचियों पर आपत्तियां प्राप्त हुईं थीं, जिन्हें सत्यापन हेतु भेजा गया तथा 72 प्रकरणों पर आपत्तियां प्राप्त नहीं होने से उन्हें सत्यापन के लिये नहीं भेजा गया। इसके लिये कोई अधिकारी जिम्मेदार/दोषी नहीं है। अतः शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। समस्त नियुक्तियां मेरिट के आधार पर ही की गईं हैं। आंगनवाड़ी केन्द्र सुनौनिया खास में अनन्तिम रूप से चयनित आवेदिका की कक्षा 5वीं की अंकसूची 99 प्रतिशत की तथा उ.प्र. की अंकसूची संदिग्ध प्रतीत होने से जिला स्तरीय समिति द्वारा पुनः सत्यापन के निर्देश दिये गये हैं, इस कारण उक्त केन्द्र में चयन नहीं किया गया है। प्रकरण क्र. 249/2016-17 अपर कलेक्टर न्यायालय में विचाराधीन है।

प्रदेश में पेट्रोल/डीजल पर कर वसूली

[वाणिज्यिक कर]

15. ( *क्र. 310 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रदेश सरकार द्वारा डीजल एवं पेट्रोल पर कर वसूला जा रहा है? यदि हाँ, तो कौन-कौन सा कर वसूला जा रहा है? प्रति लीटर वसूली जा रही राशि का ब्‍यौरा दें? (ख) शासन द्वारा वित्‍तीय वर्ष 2016-17 के दौरान पेट्रोल एवं डीजल से कर के रूप में कितनी राशि अर्जित की? (ग) क्‍या शासन द्वारा पेट्रोल एवं डीजल पर वसूले जा रहे कर की दरों में कटौती का प्रस्‍ताव किया जा रहा है? यदि हाँ, तो ब्‍यौरा दें? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) क्‍या शासन द्वारा किसानों को कर रहित डीजल उपलब्‍ध कराने की योजना है? यदि हाँ, तो ब्‍यौरा दें? यदि नहीं, तो क्‍यों?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) हाँ। डीजल एवं पेट्रोल के विक्रय पर वेट तथा उनकी मात्रा पर प्रति लीटर अतिरिक्त कर वसूल किया जाता है, जिसका विवरण संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) शासन द्वारा वित्तीय वर्ष 2016-17 के दौरान पेट्रोल एवं डीजल से कर के रूप में तीनों अधिनियमों (वेट, केन्द्रीय विक्रय कर, प्रवेशकर) के अंतर्गत रूपये 8886.15 करोड़ की राशि अर्जित की है। (ग) पेट्रोल एवं डीजल पर वसूले जा रहे कर की दरों में कटौती का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। राज्य में करारोपण राज्य की वित्तीय जरूरतों के हिसाब से किया जाता है। (घ) किसानों को कर रहित डीजल उपलब्ध कराने की कोई योजना नहीं है। राज्य में करारोपण राज्य की वित्तीय जरूरतों के हिसाब से किया जाता है।

परिशिष्ट - ''चार''

वेजीटेबल ऑयल से संबंधित T.P. 59 के प्रवेश एवं खारिजी

[वाणिज्यिक कर]

16. ( *क्र. 963 ) श्री सूबेदार सिंह रजौधा : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2016-17 में प्रदेश में प्रवेश के समय राईस ब्राण्‍ड ऑयल, पाम ऑयल व अन्‍य वेजिटेबल ऑयल से संबंधित कितनी T.P. 59 पास कराई गयी? जाँच चौकियों के नामवार जानकारी उपलब्‍ध कराई जाये (ख) T.P. 59 के क्रमांक एवं उस पर वर्णित वाहन क्रमांक व म.प्र. से बाहर निकलने वाली जाँच चौकियों के नाम सहित जानकारी दी जाये? (ग) प्रश्‍नांश (क), (ख) में उल्‍लेखित वहतियाँ (T.P. 59) किस-किस जाँच चौकियों पर कब-कब खारिज की गईं? उक्‍त वहितियों का माल भेजने वाले एवं माल पाने वाली फर्मों के टिन नंबरों से अवगत कराया जाये।

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क‍) वर्ष 2016-17 में प्रदेश में प्रवेश के समय राईस ब्रांड ऑयल, पॉम ऑयल व अन्‍य वेजिटेबल ऑयल से संबंधित 15438 T.P.59 पास कराई गईं। जाँच चौ‍कियों की नामवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) T.P.59 के क्रमांक पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के कॉलम नं. 2 एवं उसमें वर्णित वाहन क्रमांक कॉलम नं. 3 पर व मध्‍यप्रदेश में प्रवेश करने वाली जाँच चौकियों के नाम कॉलम नं. 6 पर अंकित हैं। (ग) प्रश्‍नांश (क), (ख) में उल्‍लेखित वहतियाँ (T.P.59) खारिज करने वाली जाँच चौकियों के नाम पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के कॉलम नं. 7 पर एवं खारिजी दिनांक कॉलम नं. 8 पर तथा उक्‍त वहतियों पर माल पाने वाली फर्मों के टिन नम्‍बरों की जानकारी कॉलम नं. 5 पर अंकित है। भेजने वालों का टिन कॉलम क्रमांक-4 अनुसार है।

उद्वहन सिंचाई योजना से लाभान्वित क्षेत्र

[नर्मदा घाटी विकास]

17. ( *क्र. 377 ) श्री मोती कश्यप : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या परिवर्तित आतारांकित प्रश्न क्र. 1593, दिनांक 03-3-2017 के प्रश्नांश (क) के उत्तर में मा. मुख्यमंत्री जी द्वारा की गई घोषणाओं के अनुसरण में विधान सभा क्षेत्र बड़वारा के विकासखण्‍ड ढीमरखेड़ा, कटनी (मुड़वारा) एवं बड़वारा के किन-किन ग्रामों को दायींतट नहर उद्वहन सिंचाई योजना में सम्मिलित किया गया? (ख) प्रश्नांश (क) के किस क्षेत्र की कितनी लागत की उद्वहन सिंचाई योजना को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी गयी है और निविदा स्वीकृत कर दी गई है? (ग) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्य में विधान सभा क्षेत्र बड़वारा के प्रश्नांश (ख) को छोड़कर शेष क्षेत्र की योजना को कब तक स्वीकृति प्रदान कर मा. मुख्यमंत्री जी की घोषणा की पूर्ति कर दी जावेगी?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। (ख) ढीमरखेड़ा माइक्रो उद्वहन सिंचाई प्रणाली की रूपये 256.16 करोड़ की प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी की गई है। इस कार्य की निविदा स्‍वीकृ‍त कर दी गई है। (ग) स्‍लीमनाबाद-बड़वारा माइक्रो उद्वहन सिंचाई प्रणाली की डी.पी.आर. तैयार करने की कार्यवाही प्रचलन में है। स्‍वीकृति की समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''पाँच''

आगंनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका को शासकीय कर्मचारी घोषित किया जाना

[महिला एवं बाल विकास]

18. ( *क्र. 548 ) श्री राजेन्द्र फूलचं‍द वर्मा : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या शासन द्वारा प्रदेश की आगंनवाड़ी में कार्यरत कार्यकर्ता व सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषि‍त करने तथा तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग का दर्जा दिये जाने की कोई योजना है या नहीं? यदि हाँ, तो क्‍या? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं? (ख) क्‍या आगंनवाड़ी कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा, जैसे महंगाई भत्‍ता, भविष्‍य निधी, पेंशन, शासकीय अवकाश, स्‍थानांतरण, मेडीकल, बीमा आदि की सुविधाएं प्रदान हैं या नहीं? यदि हाँ, तो क्‍या? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं? (ग) क्‍या महिला सशक्तिकरण एवं एकीकृत बाल विकास विभाग की भर्तियों में आगंनवाड़ी कार्यकताओं व सहायिकाओं को पदोन्‍नत किया जाता है या नहीं? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं? (घ) क्‍या भविष्‍य में शासन इन आगंनवाड़ी कार्यकताओं व सहायिकाओं के भविष्‍य को देखते हुए इनकी मांगों पर विचार करेगा या नहीं?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी नहीं। भारत सरकार द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका का पद मानसेवी श्रेणी में रखे जाने से शासकीय कर्मचारी घोषित नहीं किया जा सकता है, अतः शेष का प्रश्न ही नहीं। (ख) आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं का पद मानसेवी होने से इन्हे मंहगाई भत्ता, भविष्य निधि, पेंशन, स्थानान्तरण, मेडिकल आदि सुविधा का लाभ नहीं दिया जाता है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका के लिये शासकीय अवकाश निर्धारित है तथा इन्हें भारत सरकार द्वारा निर्धारित बीमा योजनाओं में लाभान्वित किये जाने का प्रावधान है। (ग) एकीकृत बाल विकास सेवा अन्तर्गत पर्यवेक्षकों के 50 प्रतिशत पदों पर सीमित सीधी भर्ती परीक्षा के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से पूर्ति की जाती है तथा आंगनवाड़ी सहायिकाओं के लिये आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के पद पर चयन हेतु अनुभव के अंक बोनस के रूप में दिये जाने का प्रावधान है। महिला सशक्तिकरण के अन्तर्गत किसी भी पद के लिये आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिका को पदोन्नत किये जाने का प्रावधान नहीं है। (घ) भारत सरकार द्वारा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका का पद मानसेवी निर्धारित किये जाने से राज्य स्तर से इस संबंध में निर्णय लिया जाना संभव नहीं है, अतः शेष जानकारी का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

निर्माण एजेंसियों को भुगतान

[ऊर्जा]

19. ( *क्र. 39 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के अतारांकित प्रश्‍न क्रमांक 1125, दिनांक 03 मार्च 2017 के संदर्भ में (सेवढ़ा) दतिया जिले के किन-किन निर्माण एजेंसियों के द्वारा म.प्र. क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी सिविल संभाग, ग्‍वालियर के 41 कार्य संपादित किये गये थे, जिनमें से सिर्फ 28 कार्यों का भुगतान किया जाना शेष है? (ख) क्‍या उक्‍त निर्माण हेतु कार्यपालन यंत्री द्वारा कार्य आदेश दिये गये थे, जिसके आधार पर कंपनी द्वारा कार्य संपादित किये गये थे? यदि हाँ, तो इसमें निर्माण एजेंसी का क्‍या दोष है? क्‍या निर्माण एजेंसी ने कार्य आदेश के आधार पर कार्य संपादित किये हैं, किंतु लगभग दो वर्ष बीत जाने के बावजूद किये गये कार्यों का भुगतान नहीं किया गया है, जबकि सात कार्यों का भुगतान कार्य आदेश के आधार पर संपादित किये गये कार्य का भुगतान पूर्व में किया गया है? यदि हाँ, तो क्‍या इस कंपनी का भुगतान मय ब्‍याज सहित किया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) उपरोक्‍त प्रश्‍नांश के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा मुख्‍य सचिव, म.प्र. शासन, भोपाल को दिनांक 05 मई, 2017 पत्र लिखकर कंपनी को भुगतान किये जाने एवं दिनांक 25 अप्रैल 2017 को रविन्‍द्र सिंह जादौन ठेकेदार द्वारा म.प्र. मध्‍यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लि. ग्‍वालियर द्वारा कार्य पूर्ण करने के बाद भी भुगतान नहीं किये जाने से परेशान होकर जहर खाकर मुख्‍य अभियंता कार्यालय ग्‍वालियर में आत्‍महत्‍या किये जाने की जाँच कराये जाने हेतु अनुरोध किया था? (घ) यदि हाँ, तो उक्‍त संबंध में क्‍या मुख्‍य सचिव कार्यालय के पत्र क्रमांक 3291/वि.क.अ./मु.स./2017/दिनांक 22 मई 2017 प्रश्‍नकर्ता के पत्र एवं सहपत्रों के साथ अग्रेत्‍तर कार्यवाही हेतु अपर मुख्‍य सचिव, ऊर्जा विभाग की ओर अंकित किया गया था? यदि हाँ, तो मुख्‍य सचिव, म.प्र. शासन के निर्देश के बाद मुख्‍य सचिव को प्रश्‍नकर्ता द्वारा लिखे गये पत्र में उल्‍लेखित बिन्‍दुओं में क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, प्रश्‍नाधीन उल्‍लेखित विधानसभा प्रश्‍न क्रमांक 1125 दिनांक 3 मार्च 2017 में यह जानकारी दी गई थी कि मेसर्स संजय कन्‍सट्रक्‍शन प्राइवेट लिमिटेड सेवढ़ा, जिला दतिया द्वारा संपादित किये गये 41 कार्यों में 28 कार्यों का भुगतान किया जाना शेष है। (ख) जी हाँ, किन्‍तु उक्‍त कार्यों के लिए म.प्र.म.क्षे. विद्युत वितरण कंपनी से प्रशासनिक अनुमोदन प्राप्‍त नहीं किया गया था तथा न ही वितरण कंपनी द्वारा इन कार्यों हेतु धनराशि उपलब्‍ध कराई गई थी। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा 41 में से 13 कार्यों का भुगतान कर दिया गया था तथा भुगतान हेतु 28 लंबित कार्यों के कार्यादेश तत्‍कालीन उप महाप्रबंधक (सिविल) ग्‍वालियर द्वारा बिना प्रशासनिक अनुमति एवं राशि उपलब्‍धता के जारी किये जाने के कारण उनके विरूद्ध जाँच की गई जिसका जाँच प्रतिवेदन दिनांक 30.05.2017 को प्राप्‍त हो चुका है। निर्माण एजेन्‍सी के लंबित देयकों के निराकरण हेतु कमेटी बनाकर अग्रिम कार्यवाही की जा रही है एवं भुगतान के संबंध में यथाशीघ्र निर्णय लिया जायेगा। (ग) श्री रवीन्‍द्र जादौन, ठेकेदार द्वारा की गई आत्‍महत्‍या के प्रकरण के संबंध में कलेक्‍टर एवं जिला मजिस्‍ट्रेट के आदेशानुसार मजिस्‍ट्रेट जाँच की जा रही है। (घ) जी हाँ। मुख्‍य सचिव कार्यालय से प्राप्‍त प्रश्‍नाधीन पत्र के तारतम्‍य में मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से जाँच प्रतिवेदन प्राप्‍त किया गया है। उत्‍तरांश (ग) में दर्शाए अनुसार श्री रवीन्‍द्र जादौन, ठेकेदार द्वारा की गई आत्‍महत्‍या के प्रकरण के संबंध में मजिस्‍ट्रेट जाँच की जा रही है। प्रश्‍नाधीन शेष भुगतान हेतु लंबित 28 प्रकरणों की जाँच मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से करायी गयी एवं प्रकरण पर मध्‍य क्षेत्र कंपनी द्वारा अंतिम निर्णय लिया जा रहा है।

घटक योजना का क्रियान्‍वयन

[आदिम जाति कल्याण]

20. ( *क्र. 816 ) डॉ. कैलाश जाटव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विभाग द्वारा विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव अंतर्गत घटक योजना में वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में कितने हितग्राहियों के आवेदन प्राप्त हुये एवं कितने हितग्राहियों द्वारा राशि का भुगतान किया गया? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार जिन हितग्राहियों द्वारा राशि का भुगतान किया गया, उनमें से कितने हितग्राहियों को विद्युत ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराये गये? सूची उपलब्ध करावें। (ग) जिन हितग्राहियों ने राशि जमा की एवं उन्हे ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं कराये गये, इसका क्या कारण है? इन्हें कब तक ट्रांसफार्मर उपलब्ध करा दिये जावेंगे।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) विभाग में आवेदन पत्र प्राप्त नहीं हुये, ना ही किसी हितग्राही द्वारा राशि का भुगतान किया गया। विद्युत विभाग द्वारा जमा कराई गई राशि का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) 17 ट्रांसफार्मर एवं लाईन विस्‍तार, 4 केबल लाईन विस्‍तार के कार्य कराये गये। सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) उपलब्‍ध आवंटन की सीमा में कार्य कराये गये हैं। शेष के लिए समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

विद्युत उपकेन्‍द्र की स्‍थापना

[ऊर्जा]

21. ( *क्र. 671 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के परि. अता. प्रश्‍न क्रमांक 1027, दिनांक 03.03.2017 के प्रश्‍नांश (क), (ख) एवं (ग) के उत्‍तर में स्‍वीकारा है कि श्‍योपुर विधान सभा क्षेत्रांतर्गत ग्राम पहाडली व राजपुरा के मध्‍य व इसके आसपास बसे दो दर्जन से अधिक ग्रामों में विद्युत की मांग व भार अत्‍यधिक रहने के कारण प्रतिवर्ष कृषि सीजन में पर्याप्‍त विद्युत सप्‍लाई व लो वोल्‍टेज की समस्‍या आती है, इस कारण से पहाडली व राजपुरा के मध्‍य उक्‍त सबस्‍टेशन के निर्माण की आवश्‍यकता है, ये कार्य एस.एस.टी.डी. योजना में प्रस्‍तावित भी हैं तो वित्‍त की अनुपलब्‍धता की आड़ लेकर उक्‍त सबस्‍टेशन को स्‍वीकृत करने में विलंब क्‍यों किया जा रहा है? वित्‍तीय उपलब्‍धता हेतु वर्तमान तक क्‍या प्रयास किये गये? (ख) क्‍या सुचारू विद्युत सप्‍लाई एवं वोल्‍टेज के अभाव में कृषकों को प्रतिवर्ष कृषि कार्य में आने वाली कठिनाईयों में वृद्धि होती ही जा रही है? (ग) यदि हाँ, तो क्‍या विद्युत कंपनी अविलंब वित्‍तीय संसाधनों की व्‍यवस्‍था करके पहाडली व राजपुरा के मध्‍य उपयुक्‍त स्‍थान पर नवीन सबस्‍टेशन स्‍वीकृत करेगी अथवा शासन इस हेतु विद्युत कंपनी को आद‍ेशित करेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, प्रश्‍न क्रमांक 1027 दिनांक 03.03.2017 के उत्‍तर में तकनीकी आवश्‍यकता के परिप्रेक्ष्‍य में ग्राम पहाडली एवं राजपुरा के मध्‍य 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र के निर्माण कार्य को करने हेतु वित्‍तीय उपलब्‍धता हेतु प्रयास किये जाने संबंधी जानकारी दी गई थी। वर्तमान में कार्य की महत्‍ता को दृष्टिगत रखते हुए ग्राम पहाडली में 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र के निर्माण कार्य को केन्‍द्र शासन द्वारा स्‍वीकृत दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजनांतर्गत शामिल कर लिया गया है। (ख) जी नहीं। विद्युत सप्‍लाई एवं वोल्‍टेज की समस्‍या 11 के.व्‍ही. फीडर के अंतिम छोर वाले ग्रामों में यदा-कदा रहती है। वर्तमान में सुचारू रूप से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। (ग) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार ग्राम पहाडली में 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र का कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में सम्मिलित कर योजनांतर्गत कार्य टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु मेसर्स एलटेक एप्‍लायन्‍सेस प्रायवेट लिमि. चेन्‍न्‍ई को दिनांक 18.01.2017 को अवार्ड जारी किया जा चुका है एवं उक्‍त टर्न-की ठेकेदार एजेंसी द्वारा अवार्ड दिनांक से 24 माह की अवधि में उक्‍त उपकेन्‍द्र का कार्य पूर्ण किया जाना है।


प्रदेश में बिजली की खरीदी/बिक्री

[ऊर्जा]

22. ( *क्र. 591 ) श्री मुकेश नायक : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश सरकार की बिजली कंपनियों ने वित्‍त वर्ष 2016-17 और वित्‍त वर्ष 2017-18 में मई, 2017 तक किन-किन निजी, सरकारी संस्‍थानों से कितनी बिजली कितने रूपये मूल्‍य की खरीदी और बेची? (ख) मध्‍यप्रदेश में स्‍थापित निजी क्षेत्र के विद्युत उत्‍पादन संयंत्रों से बिजली खरीदी की गारंटी देने के संबंध में राज्‍य सरकार की बिजली कंपनियों के क्‍या नियम हैं और जून, 2017 तक किन-किन बिजली संयंत्रों से बिजली क्रय करने के संबंध में अग्रिम दीर्घकालिक अनुबंध किये गये हैं? इन अनुबंधों की पूर्ण जानकारी देवें

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा प्रदेश की तीनों वितरण कंपनियों के लिए वित्‍तीय वर्ष 2016-17 तथा वित्‍तीय वर्ष 2017-18 में मई माह तक निजी एवं सरकारी संस्‍थानों से क्रय तथा बेची गई विद्युत की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) राज्‍य शासन की विद्युत कंपनियों द्वारा विद्युत उत्‍पादन संयंत्रों से बिजली खरीदी की गारंटी के संबंध में कोई नियम नहीं है तथापि टैरिफ रेग्‍युलेशन तथा विद्युत क्रय अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार विद्युत का क्रय किया जाता है। जून, 2017 तक निजी, शासकीय, संयुक्‍त उपक्रम में किये गये विद्युत अनुबंधों का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है एवं प्रश्‍नाधीन अवधि में बिजली संयंत्रों से किये गये दीर्घकालिक विद्युत क्रय अनुबंधों जो कि निर्माणाधीन/प्रस्‍तावित हैं, का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है।

पाटन विभान सभा क्षेत्र अंतर्गत घरेलू कनेक्‍शनों की संख्‍या

[ऊर्जा]

23. ( *क्र. 77 ) श्री नीलेश अवस्‍थी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पाटन विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत प्रश्‍न दिनांक तक कितने BPL घरेलू कनेक्‍शन तथा कितने घरेलू कनेक्‍शन, सामान्‍य कनेक्‍शनगैर घरेलू कनेक्‍शन तथा कितने कृषि पंप कनेक्‍शन हैं? विद्युत वितरण केन्‍द्रवार संख्‍या देवें एवं इन सभी उपभोक्‍ताओं से जनवरी 2017 से प्रश्‍न दिनांक तक किस दर से विद्युत शुल्‍क वसूला जा रहा है तथा इसमें राज्‍य शासन द्वारा प्रयोज्‍य होने वाली सब्सिडी किस दर से कितनी समायोजित रहती है तथा किस दर से कितना ऊर्जा प्रभारनियत प्रभार, ईंधन समायोजन प्रभार, मीटर किराया तथा कितना राज्‍य शासन द्वारा प्रायोज्‍य शुल्‍क वसूला जाता है? कनेक्‍शनों की श्रेणीवार संपूर्ण शुल्‍क सहित विवरण देवें। (ख) प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित उपभोक्‍ताओं में से कितनों ने 1 जनवरी, 2017 से प्रश्‍न दिनांक तक विद्युत के बढ़े हुये बिल प्राप्‍त होने तथा कितनों ने मीटर खपत से अधिक खपत के आधार पर एवं कितने पंप उपभोक्‍ताओं द्वारा बढ़े हुये भार/वास्‍तविक HP से अधिक HP के बिल प्राप्‍त होने की शिकायत दर्ज करवाई तथा इन दर्ज शिकायतों में से कितनों का निराकरण कर कितनी राशि का संशोधन बिलों में किया गया? विद्युत वितरण केन्‍द्रवार संख्‍या देवें। (ग) पाटन विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत कृषि पंपधारी उपभोक्‍ताओं को तीन से चार घ्‍ांटे विद्युत प्रदान करने तथा ग्रामीण घरेलू उपभोक्‍ताओं की लाईट में मेंटिनेन्‍स एवं अन्‍य कारण बताकर अंधाधुन्‍ध विद्युत कटौती करते हुये मात्र दस से बारह घंटे विद्युत प्रदाय करने के क्‍या कारण हैं? (घ) 1 जनवरी, 2017 से प्रश्‍न दिनांक तक पाटन विधान सभा क्षेत्र के कहाँ-कहाँ के कितनी क्षमता के ट्रान्‍सफार्मर कब जले तथा उन्‍हें कब बदला गया तथा कितने ट्रान्‍सफार्मर किन कारणों से प्रश्‍न दिनांक तक नहीं बदले गये? विद्युत वितरण केन्‍द्रवार सूची देवें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) पाटन विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत प्रश्‍न दिनांक तक प्रश्‍नाधीन वांछित श्रेणी के उपभोक्‍ताओं की वितरण केन्‍द्रवार संख्‍या निम्‍नानुसार है :-

वितरण केन्‍द्र

बी.पी.एल. घरेलू

सामान्‍य घरेलू

गैर घरेलू

पम्‍प

पाटन 1

4352

1691

556

3721

पाटन 2

2990

1143

144

2331

कटंगी

2936

2969

432

2299

बोरिया

1992

1095

109

2084

गोसलपुर

1137

1374

45

1526

सिहोरा ग्रामीण

3742

6861

222

4321

मझोली

5841

3995

687

5183

कुल योग

22990

19128

2195

21465

 

प्रश्नाधीन उल्लेखित श्रेणी के उपभोक्ताओं को म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी दर आदेश में निहित प्रावधानों के तहत् राज्य शासन द्वारा प्रयोज्य होने वाली सब्सिडी को समायोजित कर प्रतिमाह बिल (फ्लेट रेट कृषि पंप-छ: माही) प्रेषित किये जाते हैं। म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा त्रैमासिक आधार पर निर्धारित ईंधन प्रभार समायोजन की राशि को भी बिलों में शामिल किया जाता है। राज्य शासन को देय विद्युत शुल्क एवं उपभोक्ता की जमा सुरक्षानिधि पर देय ब्याज एवं मीटरिंग प्रभार भी उपभोक्ताओं के बिलों में समाहित रहता है। ऊर्जा प्रभार, नियत प्रभार, राज्य शासन द्वारा देय सब्सिडी, ईंधन समायोजन प्रभार, विद्युत शुल्‍क, मीटरिंग प्रभार तथा सुरक्षा निधि पर देय ब्याज के संबंध में जनवरी-17 से 9 अप्रैल-17 की अवधि हेतु एवं 10 अप्रैल-17 से प्रश्‍न दिनांक तक की अवधि हेतु प्रायोज्य दरों का विवरण क्रमश: घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ (1) तथा प्रपत्र-अ (2), गैर घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब (1) तथा प्रपत्र-ब (2) तथा कृषि पंप उपभोक्ताओं के लिए पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-स (1) तथा प्रपत्र-स (2) के अनुसार है। (ख) पाटन विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत 1 जनवरी, 2017 से प्रश्‍न दिनांक तक प्रश्नाधीन उल्लेखित कुल 1038 शिकायतें प्राप्त हुईं तथा इन सभी शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है, जिसमें रू.18,90,919 की राशि का संशोधन बिलों में किया गया। उक्त शिकायतों का वितरण केन्द्रवार विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-'' अनुसार है। (ग) पाटन विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत घोषित शेड्यूल अनुसार कृषि फीडरों पर प्रतिदिन 10 घंटे एवं गैर-कृषि फीडरों को 24 घंटे विद्युत आपूर्ति की जा रही है। तथापि कतिपय अवसरों पर तकनीकी कारणों/प्राकृतिक आपदा के कारण विद्युत व्यवधान होता है अथवा अत्यावश्यक मेन्टेनेंस/सुधार कार्यों हेतु विद्युत प्रदाय बंद किया जाना अपरिहार्य हो जाता है, जिसे यथाशीघ्र सुधार/मेन्टेनेंस कार्य पूर्ण कर सुचारू कर दिया जाता है। (घ) पाटन विधानसभा क्षेत्रांतर्गत 1 जनवरी, 2017 से प्रश्‍न दिनांक तक जले/खराब हुए वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षमता, स्थान, जलने/खराब होने तथा बदले जाने की दिनांक तथा बदलने हेतु शेष ट्रांसफार्मरों को बदले नहीं जाने के कारण सहित प्रश्नाधीन चाही गई वितरण केन्द्रवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-'' अनुसार है।

निर्वाचित विधायक को शिलान्‍यास व लोकार्पण कार्यक्रम में आमंत्रण

[सामान्य प्रशासन]

24. ( *क्र. 772 ) श्री दिनेश राय (मुनमुन) : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला स्‍तर पर होने वाले शासकीय कार्यक्रम जो माननीय केन्‍द्रीय मंत्री भारत सरकार व मान. मुख्‍यमंत्री म.प्र. शासन की अध्‍यक्षता एवं कर कमलों से आयोजित हों, उसमें क्‍या जिले के समस्‍त विधायकों के नाम एक समान रूप से ही शासन द्वारा प्रेषित आमंत्रण पत्र में तथा शासन द्वारा उस संबंध के समाचार पत्रों के विज्ञापन में आना चाहिए? (ख) प्रश्‍नांश (क) के आधार पर क्‍या 31 जनवरी 2014 के बाद सिवनी जिले में आयोजित किये गये शिलान्‍यास व लोकार्पण कार्यक्रम में प्रश्‍नकर्ता विधायक का नाम भी शासकीय आमंत्रण पत्र में तथा समाचार पत्र के विज्ञापन में था? यदि हाँ, तो मय साक्ष्‍य सहित जानकारी दें? (ग) प्रश्नांश (ख) यदि नहीं, तो क्‍या यह प्रश्‍नकर्ता विधायक के साथ भेदभाव/विशेषाधिकार हनन/अवमानना का प्रकरण है? यदि हाँ, तो शासन इस संबंध में क्‍या कार्यवाही करेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जिले में आयोजित किये जाने वाले विभिन्‍न शासकीय कार्यक्रमों में जिले के समस्‍त सम्‍माननीय विधायकों को समान रूप से आमंत्रित किया जाता है। सामान्‍य प्रशासन विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ 1-5-2011-एक (1) दिनांक 23 दिसम्‍बर 2011 में उल्‍लेखित व्‍यक्तियों की श्रेणी एवं पद के संबंध में क्रम दर्शाने वाली सारणी प्रकाशित की गई है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

प्राध्यापक पद पर की गई नियुक्तियों में अनियमितता

[सामान्य प्रशासन]

25. ( *क्र. 959 ) श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. लोक सेवा आयोग द्वारा दि. 19.01.2009 एवं शुद्धि पत्र दि. 22.01.2009 द्वारा शासकीय महाविद्यालयों में प्राध्‍यापक संवर्ग की नियुक्ति हेतु विज्ञापन जारी किया गया था, जिसमें शैक्षणिक अर्हता हेतु यू.जी.सी. द्वारा 2003 में जारी मार्गदर्शन को नियुक्ति हेतु आधार माना गया था? क्‍या चयन प्रक्रिया में यू.जी.सी. के नियमों का पालन किया गया? (ख) क्‍या विज्ञापन अनुसार भूगोल एवं भौतिकी विषय में अन्‍य पिछड़ा वर्ग श्रेणी में महिलाओं के लिए एक-एक पद आरक्षित था? अगर हाँ तो पदों पर चयनित महिला उम्‍मीदवारों का नाम बताएं? अगर महिला सीट पर पुरूष का चयन किया गया है, तो इस विषय में की गई कार्यवाही से अवगत कराएं। (ग) क्‍या उपरोक्‍त विज्ञापन के माध्‍यम से चयनित एवं नियुक्‍त किसी आवेदक की नियुक्ति शासन द्वारा निरस्‍त की गई है? अगर हाँ तो इसका कारण बताएं? किस कारण से यह नियुक्ति निरस्‍त की गई है? क्‍या इस कारण के होते हुए भी अनेक आवेदकों को नियुक्‍त किया गया है? क्‍या ऐसे आवेदक अभी कार्यरत हैं? अगर हाँ तो उन पर कार्यवाही कब तक की जावेगी? (घ) क्‍या इन नियुक्तियों के संबंध में राज्‍य शासन को प्राप्‍त शिकायत की जाँच की गई थी? अगर हाँ तो जाँच प्रतिवेदन की जानकारी दें और अनुशंसा पर क्‍या कार्यवाही की गई?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

 

 

 






भाग-2

नियम 46 (2) के अंतर्गत अतारांकित प्रश्नोत्तर के रुप में

परिवर्तित तारांकित प्रश्नोत्तर


विधान सभा क्षेत्र जतारा में ट्रांसफार्मर बदले जाना

[ऊर्जा]

1. ( क्र. 2 ) श्री दिनेश कुमार अहिरवार : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विधान सभा क्षेत्र जतारा में बिजली बिल जमा करने के बाद भी ग्रामों के ट्रांसफार्मर नहीं बदले गये? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) क्षेत्र के कई ग्रामों के मजरा-टोलों में ट्रांसफार्मर नहीं रखे गये, जबकि इन ग्रामों-रतबास, इरायली, कुड़याला, परा, मबई, करमौरा, मदरई, फतेह काखिरक, टीला नरैनी के लोगों द्वारा पैसा जमा किया गया? (ग) क्‍या इन ग्रामों के मजरों में ट्रांसफार्मर लगवायेंगे, जिससे यहाँ निवासरत लोगों को बिजली मिल सके?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में नियमानुसार बिजली के बिलों का भुगतान प्राप्‍त होने पर जले/खराब वितरण ट्रांसफार्मरों को म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अन्‍दर, पहुँच मार्ग उपलब्‍ध होने पर बदल दिया गया है। (ख) जिला टीकमगढ़ के विधान सभा क्षेत्र जतारा क्षेत्रान्‍तर्गत ग्राम कुडयाला एवं भदरई (मदरई नहीं) में विद्युत प्रदाय चालू है। प्रश्‍नाधीन उल्‍लेखित शेष ग्रामों यथा-रतबास, इरायली, परा, मबई, करमौरा, फतेह का खिरक, टीला नरैनी में जले/खराब वितरण ट्रांसफार्मरों से सम्‍बद्ध उपभोक्‍ताओं द्वारा नियमानुसार विद्युत बिल की बकाया राशि जमा नहीं करने के कारण उन्‍हें बदला नहीं जा सका है। (ग) उत्‍तरांश (ख) में दर्शाए गए बदलने हेतु शेष जले/खराब वितरण ट्रांसफार्मरों को नियमानुसार संबद्ध 75 प्रतिशत उपभोक्‍ताओं द्वारा बकाया राशि का भुगतान करने अथवा कुल बकाया राशि का 40 प्रतिशत जमा होने के उपरान्‍त प्राथमिकता के आधार पर बदल दिया जायेगा।

श्‍योपुर जिले में कुपोषण की रोकथाम

[महिला एवं बाल विकास]

2. ( क्र. 4 ) श्री बाबूलाल गौर : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के तारांकित प्रश्‍न क्रमांक 19 (क्रमांक 439, दिनांक 3 मार्च, 2017) के प्रश्‍न के उत्‍तर में सदन में चर्चा के समय विभागीय मंत्री द्वारा प्रश्‍नकर्ता के साथ स्‍थल का मौका मुआयना करने का कथन किया गया था? (ख) उक्‍त जानकारी/कथन की पूर्ति हेतु विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) श्‍योपुर जिले में कुपोषण से हो रही बीमारियों एवं मृत्‍युओं को रोकने के लिये शासन द्वारा अभी तक क्‍या-क्‍या प्रयास किये गये? पृथक-पृथक विवरण दिया जाये?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी हाँ। (ख) माननीय विभागीय मंत्री द्वारा श्योपुर जिले का भ्रमण किया गया है। (ग) महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत एकीकृत बाल विकास सेवा द्वारा किये जा रहे प्रयासों का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-01 अनुसार है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा किये जा रहे प्रयासों का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-02 अनुसार है।

अशोकनगर जिले में गाँव, बस्ती, मजरे व छोटी बस्तियाँ में बिजली की उपलब्धता

[ऊर्जा]

3. ( क्र. 27 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अशोकनगर जिले में विद्युत कंपनी के एस.डी.ओ., असिस्टेन्ट इंजीनियर, डी..एस.ई. को पिछले 3 वर्षों में प्रश्नकर्ता व नागरिकों द्वारा लिखित में कितनी शिकायतें वर्षवार मिली तथा इन पर क्या कार्यवाही की? (ख) अशोकनगर जिले में कितने गाँव, बस्ती, मजरे व छोटी बस्तियाँ ऐसी हैं जहाँ बिजली उपलब्ध नहीं है तथा खम्बे हैं लेकिन तार नहीं है तथा कब तक वहाँ विद्युत पहुँचा दी जाएगी? (ग) वितरण कंपनी को प्रश्‍नांश (क) जिले एवं अवधि में वर्षवार कितनी शिकायतें मिली है जिसमें डी.पी.नहीं है, फिर भी बिजली के बिल आ रहे हैं उनका विवरण शिकायतकर्ता के नाम के साथ देकर बताएं कि क्‍या कार्यावही की गई है? (घ) प्रश्‍नांश (क) जिले एवं अवधि में राजीव गाँधी विद्युतीकरण फेज 1 तथा फेज 3 में कितनी-कितनी धनराशि स्वीकृत एवं कितनी खर्च हुई व कितने गाँवों को लाभ मिला तथा इसके बाद कितनी बंजारा, मोगिया, आदिवासी बस्तियाँ, मजरे बिना बिजली के खम्बे के रह गये?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) अशोकनगर जिले में वर्ष 2014-15 से दिनांक 30.6.2017 तक माननीय प्रश्‍नकर्ता विधायक महोदय एवं नागरिकों से वर्षवार प्राप्‍त शिकायतों के संबंध में प्रश्‍ना‍धीन चाही गई जानकारी निम्‍नानुसार है:-

जिले का योग

क्रमांक

वित्‍तीय वर्ष

 

माननीय विधायक

नागरिकगण

प्राप्‍त

निराकृत

प्राप्‍त

निराकृत

1

2014-15

43

43

20

20

2

2015-16

28

28

51

51

3

2016-17

2

2

99

99

4

2017-18

3

3

141

141

योग

76

76

311

311

(ख) अशोकनगर जिले में 121 मजरे/टोले/बस्तियाँ अविद्युतीकृत हैं। उक्‍त सभी मजरों/टोलों एवं बस्तियों के विद्युतीकरण का कार्य 12वीं पंचवर्षीय योजना में अशोक नगर जिले हेतु स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण में सम्मिलित है। उक्‍त कार्य सितम्‍बर 2017 तक पूर्ण किया जाना संभावित है। इसके अतिरिक्‍त जिले के अंतर्गत एक ग्राम यथा- बन्‍धी का विद्युत प्रदाय तार एवं ट्रांसफार्मर चोरी होने के कारण मार्च-2013 से बंद है। इस ग्राम के 78 उपभोक्‍ताओं पर रूपये 1.80 लाख की बकाया राशि होने के कारण तार एवं ट्रांसफार्मर नहीं लगाये गये हैं। नियमानुसार बकाया राशि जमा होने के पश्‍चात आवश्‍यक कार्य करवाकर विद्युत प्रदाय चालू कर दिया जावेगा। (ग) अशोकनगर जिले में प्रश्‍नाधीन अवधि में वर्षवार प्राप्‍त ऐसी शिकायतें जिसमें ट्रांसफार्मर नहीं होने पर भी बिजली के बिल प्रदाय किये जा रहे हैं तथा शिकायतकर्ता के नाम सहित, की गई कार्यवाही का विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) अशोकनगर जिले में 10वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजनांतर्गत रू. 85.21 करोड़ की राशि स्‍वीकृत हुई एवं रू. 75.71 करोड़ की राशि व्‍यय की गई, जिससे 783 ग्राम लाभान्वित हुये। वर्तमान में अशोकनगर जिले में 12वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना क्रियाशील है, जिसमें मजरों/टोलों के विद्युतीकरण के कार्य कराये जा रहे हैं। उक्‍त योजनांतर्गत रू. 47.38 करोड़ की राशि स्‍वीकृत हुई है तथा रू. 19.80 करोड़ की राशि व्‍यय की जा चुकी है। योजना में प्रावधानित 363 मजरों/टोलों में से 221 मजरे/टोले विद्युतीकृत कर दिये गये हैं एवं 21 मजरे/टोले पूर्व से विद्युतीकृत हैं। शेष बचे 121 मजरे/टोले/बस्तियों के विद्युतीकरण के कार्य वर्तमान में प्रगति पर हैं जिन्‍हें योजना अवधि में पूर्ण कराने के प्रयास किये जा रहे हैं।

परिशिष्ट - ''एक''

प्रदेश में व्‍याप्‍त कुपोषण की वास्‍तविक स्थिति प्रदर्शित करने हेतु श्‍वेत पत्र जारी किया जाना

[महिला एवं बाल विकास]

4. ( क्र. 40 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या प्रदेश में व्‍याप्‍त कुपोषण की वास्‍तविक स्थिति प्रदर्शित करने हेतु श्‍वेत पत्र जारी करने की घोषणा माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा की गई थी? (ख) यदि हाँ, तो उक्‍त घोषणा किस दिनांक को की गई थी एवं किन-किन बिन्‍दुओं पर श्‍वेत पत्र तैयार कराना है एवं इस संबंध में क्‍या शासन द्वारा समिति गठित की गई थी? यदि हाँ, तो उक्‍त गठित समिति की बैठक कब-कब आयोजित की गई? यदि बैठक निरंतर नहीं की गई तो इसके क्‍या कारण हैं एवं कब तक श्‍वेत पत्र जारी किया जायेगा निश्चित समय-सीमा बतायें? (ग) क्‍या प्रदेश में व्‍याप्‍त कुपोषण को नियंत्रण करने हेतु छ: माह से तीन वर्ष के बच्‍चों, गर्भवती धात्री माताओं एवं किशोरी बालिकाओं को टेकहोम राशन के रूप में पूरक पोषण आहार की व्‍यवस्‍था एम.पी.एग्रो के साथ ज्‍वाईन्‍ट वेंचर कंपनियों द्वारा किये जाने की व्‍यवस्‍था में अनियमि‍ताएं/भ्रष्‍टाचार किये जाने के कारण कुपोषण की समस्‍या नियंत्रित होने की बजाय विकराल रूप धारण करती जा रही है? यदि नहीं, तो श्‍योपुर जिले सहित प्रदेश में विगत वर्ष एवं इस वर्ष कुपोषण के कारण मृत्‍यु होने एवं कुपोषित बच्‍चों की संख्‍या बढ़ने के क्‍या-क्‍या कारण है? (घ) उपरोक्‍त प्रश्‍नांश के परिप्रेक्ष्‍य में राज्‍य सरकार द्वारा माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा पोषण आहार प्रदाय करने की व्‍यवस्‍था के संबंध में दिये गये दिशा निर्देश अनुसार व्‍यवस्‍था की जायेगी। यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) प्रदेश में व्याप्त कुपोषण की वास्तविक स्थिति के संबंध में माननीय मुख्यमंत्री द्वारा श्वेत पत्र जारी करने के निर्देश दिये गए। (ख) माननीय मुख्यमंत्री द्वारा दिनांक 14.09.2016 को श्वेत पत्र जारी करने के निर्देश दिये गए। गठित समिति द्वारा बिन्दुओं के निर्धारण के संबंध में कार्यवाही की जाना अपेक्षित है। जी हाँ। समिति की बैठक आयोजित नहीं हुई है। श्वेत पत्र जारी किये जाने के संबंध में तैयार प्राथमिक जानकारी का परीक्षण पूर्ण न होने से बैठक आयोजित नहीं की गई है। समय-सीमा दिया जाना संभव नहीं है। (ग) जी नहीं। आई.सी.डी.एस. योजना अंतर्गत दिये जाने वाली विभिन्न सेवाओं में सबसे महत्वपूर्ण पूरक पोषण आहार कार्यक्रम है, जिसको शिशु एवं माताओं को मुख्य भोजन के अतिरिक्त आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्तता हेतु दिया जाता हैं। पूरक पोषण आहार केवल एक तिहाई पोषण की ही पूर्ति करता है, शेष पूर्ति हितग्राही को अपने दैनिक भोजन से प्राप्त की जानी है। केवल पूरक पोषण आहार शिशु एवं माताओं की दिनभर की अनुसंशित पोषण आवश्यकताओं को पूर्ति नहीं करता है। अतः केवल पूरक पोषण आहार प्रदाय को बच्चों में व्याप्त कुपोषण से नहीं जोड़ा जा सकता है। कुपोषण के लिए कोई एक कारण जिम्मेदार नहीं है इसके कई कारक जिम्मेदार होते है जैसे अपर्याप्त भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं का उपयोग न करना, आर्थिक संरचना, संसाधन की कमी, अनुचित आहार-व्यवहार, बीमारियाँ, परिवार में अधिक सदस्यों की संख्या/अधिक बच्चों की संख्या, बच्चों के जन्म में कम अंतर, सामाजिक कुरीतिया, अज्ञानता, स्वच्छता के प्रति उदासीनता, बार-बार संक्रमण होना, रोजगार की कमी/आमदनी के स्थायी स्त्रोत न होना, शौचालय का उपयोग न करना, पौष्टिक एवं विविध भोजन का उपयोग न करना, अंधविश्वास, झोला-छाप डॉक्टर से ईलाज कराना आदि कारण बच्चों में कुपोषण व्याप्त होने के लिए जिम्मेदार है। विभाग द्वारा दिनांक 01 नवम्बर 2016 से 28 फरवरी 2017 तक प्रदेश में विशेष वज़न अभियान का क्रियान्वयन किया गया, जिसमें छूटे हुए बच्चों का वजन भी लिया गया, जिससें तुलनात्मक रूप से वजन लिये गये बच्चों की संख्या, कम वजन एवं अतिकम वजन के बच्चों के संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। (घ) वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही प्रदेश के आंगनवाड़ी केन्द्रों में पूरक पोषण आहार की व्यवस्था लागू है। शेष का प्रश्न ही नहीं है।

अनुसूचित जनजाति बस्‍ती विकास नियम 2005 यथा संशोधित नियम 2014 के अनुसार निराकरण

[आदिम जाति कल्याण]

5. ( क्र. 54 ) कुँवर विक्रम सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कार्यालय आयुक्‍त आदिवासी विकास म.प्र. के पत्र क्र. 15-16/6387 दिनांक 15-3-2016 के अनुसार प्रस्‍ताव मांगे गये? (ख) क्‍या कार्यालय कलेक्‍टर (आदिम जाति कल्‍याण विभाग) छतरपुर के पत्र क्र. 1532 दिनांक 21/4/2016 को प्रस्‍ताव चाहे गये? (ग) क्‍या अनुसूचित जनजाति बस्‍ती विकास नियम 2005 यथा संशोधित नियम 2014 अनुसार जहां कम से कम 20 परिवार निवासरत हो तो स्‍वीकृति का प्रावधान है? यदि हाँ, तो कब तक स्‍वीकृति जारी की जावेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। (ग) जी नहीं। 50 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जनजाति की जनसंख्‍या होना भी आवश्‍यक है। शासन आदेश दिनांक 07-06-2017 द्वारा पूर्व के समस्‍त नियम निरस्‍त करते हुये अनुसूचित जाति/जनजाति बस्‍ती विकास एवं विद्युतीकरण योजना नियम 2017 जारी किये गये हैं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

जिला कार्यक्रम अधिकारी के विरूद्ध जाँच एवं कार्यवाही

[महिला एवं बाल विकास]

6. ( क्र. 60 ) कुँवर विक्रम सिंह : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या परियोजना अधिकारी एकीकृत बाल विकास परियोजना राजनगर-2 जिला छतरपुर द्वारा वरिष्‍ठ अधिकारियों को शिकायती आवेदन दिया हैं? (ख) क्‍या जिला कार्यक्रम अधिकारी छतरपुर के विरूद्ध जाँच कमेटी बनाई गई? यदि हाँ, तो क्‍या जिला कार्यक्रम अधिकारी छतरपुर दोषी पाये गये? जाँच प्रतिवेदनों की प्रति दें। (ग) क्‍या खजुराहों थाने में F.I.R. 294, 354 (A) 506 जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास छतरपुर को नियमों के तहत निलंबित किया गया? यदि नहीं, तो क्‍यों?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ, आयुक्त सागर संभाग सागर द्वारा जाँच कमेटी बनाई गई है, जाँच कमेटी की जाँच कार्यवाही प्रचलन में है। (ग) थाना प्रभारी खजुराहो जिला, छतरपुर म.प्र. के पत्र क्रं. 873, दि. 05/07/2017 के अनुसार अपराध क्रमांक 97/17, धारा 294, 354, 506 भादवि पंजीबद्ध कर विवेचना जारी है। संचालनालय, एकीकृत बाल विकास सेवा में प्राप्त एक अन्य शिकायत में श्री भरत सिंह राजपूत तत्का. प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला छतरपुर को आदेश दिनांक 07/07/2017 द्वारा निलंबित किया गया है।

33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र खोला जाना

[ऊर्जा]

7. ( क्र. 67 ) श्री मेहरबान सिंह रावत : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत बिजली के ओवर लोड को देखते हुए विभागीय स्‍तर पर 33/11 के.व्‍ही. के कितने विद्युत उपकेन्‍द्र नवीन स्‍थापित किऐ जाऐंगे? नामवार, ग्रामवार जानकारी बतावें? (ख) क्‍या प्रबंध संचालक के पत्र क्रमांक 51/22-04-2016 के द्वारा ग्राम छीतरिया का पुरा एवं घरसोला में नवीन 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र प्रस्‍तावित कर स्‍वीकृत कर दिऐ गऐ हैं? (ग) नवीन 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्रों के निर्माण कार्य विभाग द्वारा कब तक पूर्ण करा दिया जावेगा?
ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत विद्युत भार के दृष्टिगत ग्राम घरसौला में विभागीय स्‍तर पर 5 एम.व्‍ही.ए. क्षमता के एक नवीन 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र के निर्माण का कार्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण योजना वर्ष 2017-18 के अंतर्गत स्‍वीकृत किया गया है। (ख) जी नहीं। अपितु म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के पत्र क्रमांक 576 दिनांक 28.06.2017 के द्वारा ग्राम घरसौला में 5 एम.व्‍ही.ए. क्षमता के नवीन 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र के निर्माण का कार्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण योजना वर्ष 2017-18 के अंतर्गत स्‍वीकृत किया गया है। (ग) ग्राम घरसौला में स्‍वीकृत 5 एम.व्‍ही.ए. क्षमता के नवीन 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र का निर्माण कार्य माह मार्च, 2018 तक पूर्ण होना संभावित है।

विद्युतीकरण के अपूर्ण कार्यों को पूर्ण किए जाना

[ऊर्जा]

8. ( क्र. 68 ) श्री मेहरबान सिंह रावत : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कितने ग्रामों एवं मजरे/टोलों में विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है एवं कितने ग्रामों एवं मजरे/टोलों में विद्युतीकरण किया जाना शेष है? (ख) वर्ष 2015 से सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में कितने विद्युत सब स्‍टेशन स्‍थापित किऐ गऐ एवं कितने विद्युत सब स्‍टेशन बनाऐ जाना शेष हैं एवं प्रश्‍नांश (क) अनुसार शेष गांवों में विद्युतीकरण का कार्य कब तक पूर्ण कर लिया जाएगा? (ग) क्‍या कई ठेकेदार विद्युतीकरण का कार्य अधूरा छोड़कर चले गऐ (जैसे कि ग्राम पंचायत नैथरी अंतर्गत ग्राम केसापुरा का कार्य) तो विभाग उन ठेकेदारों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही करेगा एवं शेष रहे कार्यों को पूर्ण करने के लिये विभाग क्‍या कार्यवाही करेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत वर्ष 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक 2 ग्रामों एवं 165 मजरों/टोलों के विद्युतीकरण का कार्य किया गया है। वर्तमान में प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में 122 ग्रामों के सघन विद्युतीकरण एवं 243 मजरों/टोलों के विद्युतीकरण का कार्य कराया जाना शेष है। (ख) वर्ष 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में ए.डी.बी. योजना अन्‍तर्गत बावडीपुरा तथा गुरेमा एवं आर.ए.पी.डी.आर.पी. योजना अन्‍तर्गत बुद्धपुरा में नवीन 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्रों के निर्माण का कार्य पूर्ण किया गया है। वर्तमान में सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में ग्राम घरसोला में 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र का निर्माण कार्य जो कि एस.एस.टी.डी. योजना वर्ष 2017-18 में स्‍वीकृत है, पूर्ण किया जाना शेष है। उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार ग्रामों एवं मजरों/टोलों के सघन विद्युतीकरण/विद्युतीकरण कार्य को दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में सम्मिलित किया गया है। उक्‍त योजना का कार्य टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु वर्तमान में निविदा कार्यवाही प्रक्रियाधीन है, अत: कार्य पूर्णता की निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ग) जी हाँ। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत प्रश्‍नाधीन विद्युतीकरण के कार्य की प्रगति संतोषजनक नहीं होने के कारण मेसर्स के.ई.सी. इंटरनेशनल कंपनी, गुडगांव को जारी अवार्ड दिनांक 23.11.2013 को निरस्‍त कर उक्‍त कंपनी द्वारा जमा की गई परफारमेंस सिक्‍युरिटी राशि रूपये 11,07,86,286/- एवं 2,13,54,334/- तथा मोबलाईजेशन अग्रिम सुरक्षा निधि राशि रूपये 9,32,46510/- एवं मोबीलाईजेशन इरेक्‍शन सुरक्षा निधि राशि रूपये 1,16,43,690/- राजसात कर ली गई है। ग्राम पंचायत नैथरी नहीं अपितु नेपरी के अंतर्गत मजरा केसापुरा का कार्य राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत मेसर्स के.ई.सी. इन्‍टरनेशनल कंपनी गुडगाँव द्वारा किया जा रहा था जो कि अपूर्ण है। उक्‍त कंपनी को जारी अवार्ड निरस्‍त किया जा चुका है। शेष कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में टर्न-की आधार पर पूर्ण कराने हेतु निविदा कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

जन सुनवाई में प्राप्‍त शिकायतों पर कार्यवाही

[सामान्य प्रशासन]

9. ( क्र. 78 ) श्री नीलेश अवस्‍थी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में जन सुनवाई के संबंध में शासन के क्‍या दिशा-निर्देश हैं? क्‍या प्राप्‍त शिकायत आवेदनों के निराकरण हेतु कोई समय-सीमा निर्धारित है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के तहत वित्‍त वर्ष 2016-17 से प्रश्‍न दिनांक तक पाटन विधान सभा क्षेत्र के किन-किन ग्रामों के कितने नागरिकों से कहाँ-कहाँ पर किस-किस के विरूद्ध कब-कब कौन सी शिकायतें जन-सुनवाई में प्राप्‍त हुईं एवं उन पर कब क्‍या कार्यवाही की गई? सूची देवें। (ग) प्रश्‍नांश (ख) में उल्‍लेखित किन-किन शिकायतों का किन-किन कारणों से अभी तक निराकरण नहीं हुआ है? समय पर नियमानुसार निराकरण न करने का दोषी कौन है तथा उन पर क्‍या कार्यवाही की गई?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जनसुनवाई के संबंध में सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किये गये दिशा-निर्देश पुस्‍तकालय में रखे गये परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार। वर्तमान में लोक सेवा प्रबंधन विभाग द्वारा पत्र दिनांक 06/06/2017 में जनसुनवाई को सी.एम. हेल्‍पलाईन में दर्ज करने के निर्देश जारी किये गये है, जिसके निराकरण की समय-सीमा सी.एम. हेल्‍पलाईन के नियमानुसार तय है। निर्देश पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे गये परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार। (ग) प्राप्‍त शिकायतों पर नियमानुसार कार्यवाही की गई। तहसीलदार मझौली स्‍तर पर प्राप्‍त शिकायतों में से 01 शिकायत न्‍यायालय में प्रक्रियाधीन एवं 05 शिकायतों पर प्रकरण दर्ज कर कार्यवाही प्रगतिशील है, कोई दोषी नहीं है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

मुख्‍यमंत्री स्‍वेच्‍छानुदान राशि का राजनैतिक उपयोग

[सामान्य प्रशासन]

10. ( क्र. 85 ) श्री आरिफ अकील : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) माननीय मुख्‍यमंत्री स्‍वेच्‍छानुदान निधि से तथा अपदा प्रबंधन के तहत कलेक्‍टर को एक व्‍यक्ति को अधि‍कतम कितनी राशि प्रदान किए जाने का प्रावधान है? प्रावधान की प्रति उपलब्‍ध करावें। (ख) क्‍या प्रदेश के विभिन्‍न जिलों में माह जून 2017 में आयोजित किसान आंदोलन में मृतकों के परिजन को मुआवजा राशि अधिकार से अधिक राशि होने के कारण कलेक्‍टर द्वारा मुआवजा नहीं दिए जाने के अनुरोध के बाद माननीय मुख्‍यमंत्री ने मुख्‍यमंत्री स्‍वेच्‍छानुदान निधि से एक-एक करोड़ रूपये दिये जाने की घोषणा की थी? (ग) यदि हाँ, तो किस-किस जिले में किन-किन किसानों की मृत्‍यु हुई तथा किन-किन मृतकों के परिजन को कितनी-कितनी राशि किस-किस आदेश के तहत् कब-कब प्रदान की गई आदेश की प्रति उपलब्‍ध करावें।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) मुख्‍यमंत्री स्‍वेच्‍छानुदान मद की राशि मुख्‍यमंत्री जी द्वारा स्‍वीकृत की जाती है। मुख्‍यमंत्री स्‍वेच्‍छानुदान मद से अधिकतम राशि दो लाख एवं आपदा प्रबंध से (प्राकृतिक आपदा) के अंतर्गत विभिन्‍न मदों में आर्थिक सहायता स्‍वीकृत किये जाने का प्रावधान है। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) एवं (ग) मुख्‍यमंत्री जी द्वारा दिनांक 06.06.2017 को मंदसौर जिले में किसान आंदोलन के दौरान गोली लगने से मृतक कृषकों के परिवार को एक-एक करोड़ रूपये की राशि दिये जाने की घोषणा की गई, इसके परिपालन में सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा मुख्‍यमंत्री स्‍वेच्‍छानुदान मद से दिनांक 13 जून,2017 को स्‍वीकृति आदेश जारी किये गये। कलेक्‍टर मंदसौर के आदेश दिनांक 13.06.2017 द्वारा मृतकों के परिजनों को राशि उपलब्‍ध कराई गई। आदेश की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है।

आगंनवाड़ी केन्‍द्र

[महिला एवं बाल विकास]

11. ( क्र. 123 ) श्री नारायण सिंह कुशवाह : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) ग्वालियर जिले की ग्वालियर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में कुल कितने आंगनवाड़ी केंद्र हैं संख्या, स्थान, क्षेत्र वार्ड सहित जानकारी देवें। (ख) क्या सभी आंगनवाड़ी केंद्र महिला एवं बाल विकास के भवन में संचालित हैं, कितने आंगनवाड़ी केंद्र भवन विहीन हैं वर्ष २०१३ से आज दिनांक तक ग्वालियर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में कितने आंगनवाड़ी केंद्र के भवन बनाये गए हैं तथा कितने आंगनवाड़ी केंद्र किराये के भवनों में संचालित हैं? (ग) भवन विहीन आंगनवाड़ी केन्‍द्रों के भवन कब तक बन जावेंगे?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) ग्वालियर जिले की ग्वालियर दक्षिण विधान सभा क्षेत्र में कुल 162 आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित है। विस्तृत जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। संचालित 162 आंगनवाड़ी केन्द्रों में से 06 आंगनवाड़ी केन्द्र विभागीय भवनों में, 02 आंगनवाड़ी केन्द्र अन्य शासकीय भवन में तथा शेष 154 आंगनवाड़ी केन्द्र किराये के भवनों में संचालित है। वर्ष 2013 से आज दिनांक तक ग्वालियर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में 51 आंगनवाड़ी भवन स्वीकृत किये गये है। स्वीकृत 51 आंगनवाड़ी भवनों का कार्य निर्माणाधीन है। (ग) स्वीकृत 51 आंगनवाड़ी भवनों का कार्य निर्माणाधीन है। निर्माण एजेंसी को इसी वित्तीय वर्ष में भवन निर्माण का कार्य पूर्ण किये जाने हेतु निर्देश दिये गये है।

वर्ष 2017-18 में स्वीकृत आंगनवाड़ी भवनों की जानकारी

[महिला एवं बाल विकास]

12. ( क्र. 153 ) श्री हरवंश राठौर : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) बण्‍डा विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत वर्ष 2017-18 में किन-किन ग्रामों में कितने आंगनवाड़ी भवन स्वीकृत किए गए हैं। (ख) बण्‍डा विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत कितने ग्रामों में आंगनवाड़ी भवन किराए से या अन्य शासकीय भवनों में संचालित किए जा रहे हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) वर्ष 2017-18 में सागर जिले के बंडा विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत आंगनवाड़ी भवन स्वीकृत नहीं किए गए हैं। (ख) सागर जिले के बंड़ा विधान सभा क्षेत्रान्तर्गत एकीकृत बाल विकास परियोजना बंड़ा एवं शाहगढ़ अंतर्गत कुल 376 आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित है। इनमें से 129 आंगनवाड़ी केन्द्र विभागीय भवनों में, 119 अन्य शासकीय भवनों में तथा 128 आंगनवाड़ी केन्द्र किराये के भवनों में संचालित है। विस्तृत जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है।

विशेष केन्‍द्रीय सहायता योजना

[आदिम जाति कल्याण]

13. ( क्र. 195 ) श्रीमती संगीता चारेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सैलाना विधान सभा क्षेत्र में विशेष केन्‍द्रीय सहायता योजना अंतर्गत वित्‍तीय वर्ष 2012-13 से आज दिनांक तक किन-किन ग्राम पंचायतों का चयन किया गया तथा किन-किन गतिविधियों का चयन किया जा कर सहायता उपलब्‍ध कराई गई? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संबंध में क्‍या उपरोक्‍त चयनित ग्राम पंचायतों में वर्ष 2016-17 से आज दिनांक तक हितग्राही मूलक योजना का आवंटन उपलब्‍ध नहीं कराया गया है? यदि हाँ, तो कब तक आवंटन उपलब्‍ध करा दिया जावेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी हाँ। भारत सरकार से वर्ष 2016-17 में चयनित ग्राम पंचायतों के लिए योजना अनुमोदित न होने से आवंटन नहीं दिया गया। वर्ष 2017-18 में चयनित ग्राम पंचायतों के लिये भारत सरकार से विद्युत पंप हेतु राशि का प्रदाय गतिविधि अनुमोदित है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में आवंटन प्रदाय किया जा सकेगा।

परिशिष्ट - ''दो''

आंगनवाड़ि‍यों में वितरित पोषण आहार

[महिला एवं बाल विकास]

14. ( क्र. 196 ) श्रीमती संगीता चारेल : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सैलाना विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत सैलाना एवं बाजना विकासखण्‍ड में कितनी-कितनी आंगनवाड़ी एवं मिनी आंगनवाड़ी संचालित हैं तथा इनमें वर्तमान में कितने बच्‍चे दर्ज हैं? (ख) संचालित आंगनवाड़ि‍यों में किस मान से क्‍या पोषण आहार उपलब्‍ध कराया जा रहा है तथा इसकी मात्रा व गुणवत्‍ता के संबंध में विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की जाती है? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संबंध में आंगनवाड़ि‍यों तक पोषण आहार की आपूर्ति किस माध्‍यम से की जाती है तथा इसका मिलान किस-किस स्‍तर पर किन-किन अधिकारियों व कर्मचारियों द्वारा किया जाता है?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) सैलाना विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सैलाना तथा बाजना विकासखण्ड में संचालित आंगनवाड़ी एवं मिनी आंगनवाड़ी तथा इनमें वर्तमान में दर्ज बच्चों की जानकारी निम्नानुसार है :-

विकासखण्ड का नाम

आंगनवाड़ी केन्द्रों की संख्या

मिनी आंगनवाड़ी केन्द्रों की संख्या

06 माह से 06 वर्ष तक के दर्ज बच्चों की संख्या

सैलाना

198

100

18690

बाजना

348

68

19195

(ख) संचालित आंगनवाड़ी केन्द्रों में प्रदाय किए जा रहे पोषण आहार की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट पर है। 06 माह से 03 वर्ष तक के बच्चों गर्भवती,धात्री माताओं एवं किशोरी बालिकाओं हेतु एम.पी.एग्रो के माध्यम से प्रदाय किए जा रहे टेकहोम राशन के प्रत्येक बैच की गुणवत्ता की जाँच भारत सरकार खाद्य एवं पोषण आहार बोर्ड नई दिल्ली की प्रयोगशाला से कराई जाती है। 03 से 06 वर्ष तक के बच्चों को स्व-सहायता समूह के माध्यम से प्रतिदिन ताजा पका हुआ नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराया जाता है जिसकी मात्रा एवं गुणवत्ता का परीक्षण ग्राम स्तर पर प्रतिदिन पोषण आहार को चखकर एवं बच्चों की माता कार्यकर्ता ग्राम तदर्थ समिति के सदस्य द्वारा पुष्टि संबंधी हस्ताक्षर कर पंचनामा तैयार कर किया जाता है। (ग) एम.पी.एग्रो द्वारा टेकहोम राशन का प्रदाय बाल विकास परियोजना गोदाम तक किया जाता है। परियोजना गोदाम से आंगनवाड़ी केन्द्रों तक पूरक पोषण आहार (टी.एच.आर) की आपूर्ति परिवहनकर्ता के माध्यम से की जाती है तथा इसका मिलान परियोजना स्तर पर राजस्व विभाग के नामांकित प्रतिनिधि पर्यवेक्षक, स्थानीय व्यक्ति एवं परियोजना अधिकारी द्वारा किया जाता है तथा आंगनवाड़ी स्तर पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, स्थानीय व्यक्तियों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है तथा समय-समय पर आंगनवाड़ी केन्द्र निरीक्षण के समय पर्यवेक्षक एवं परियोजना अधिकारी द्वारा मिलान किया जाता है।

परिशिष्ट - ''तीन''

विद्युत लाईन संधा‍रण कार्य

[ऊर्जा]

15. ( क्र. 210 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विगत दो वर्षों में विधानसभा क्षेत्र पनागर के अंतर्गत वर्ष 2016-17 में विद्युत लाईन संधारण का कार्य नहीं किया गया हैं? (ख) यदि संधारण किया गया है तो क्‍या कार्य किया गया हैं? क्‍या ग्राम जटवां में 29 मई, 2017 को आये तूफान के कारण सभी खेतों की विद्युत लाईनें बंद हैं? (ग) प्रश्‍नांश (क) के अंतर्गत क्या गांव में जमीन से 06 फीट ऊंचे झूल रहे केबिल वायर को व्यवस्थित किया गया है? (घ) क्या‍ लकड़ी के खंभों की जगह निर्धारित सीमेंट/लोहे के पोल लगाये गये हैं?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) प्रदेश में विद्युत वितरण लाईनों/उपकरणों का प्रत्‍येक वर्ष दो बार यथा-वर्षा काल के पूर्व एवं वर्षाकाल के पश्‍चात मेन्‍टेनेंस का कार्य किया जाता है। उक्‍त के अतिरिक्‍त प्राकृतिक आपदा अथवा तकनीकी कारणों एवं आकस्मिक दुर्घटनाओं की स्थिति में विद्युत अधोसंरचना के क्षतिग्रस्‍त होने पर आवश्‍यकतानुसार मेन्‍टेनेंस/सुधार के कार्य किये जाते है। उक्‍तानुसार पनागर विधानसभा क्षेत्र में भी प्रश्‍नाधीन अवधि में मेन्‍टेनेंस के कार्य किये गये हैं। (ख) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार किये गये मेन्‍टेनेंस कार्य के अंतर्गत 33 के.व्‍ही. लाईनों, 11 के.व्‍ही. लाईनों, एल.टी.लाईनों, ट्रांसफार्मरों एवं अन्‍य विद्युत उपकरणों के संधारण का कार्य किया गया, जिसमें मुख्‍यत: पेड़ों की टहनियों की छटाई, खराब/टूटे इन्‍सुलेटर बदलना, तार सेग व्‍यवस्थित करना, पोल/क्रास आर्म सीधे करना, ट्रांसफार्मर व विद्युत उपकेन्‍द्रों के उपकरणों में सुधार कार्य, खराब स्‍टे/पोल बदलने आदि के कार्य किए गए हैं। दिनांक 29 मई 2017 को पनागर एवं आस-पास के क्षेत्रों में आंधी-तूफान के साथ अतिवृष्टि होने के कारण ग्राम जटवां सहित आस-पास के ग्रामों में विद्युत व्‍यवधान उत्‍पन्‍न हुआ था, किन्‍तु आवश्‍यक सुधार कार्य कर ग्राम जटवां को छोड़कर अन्‍य सभी ग्रामों का विद्युत प्रदाय सामान्‍य कर दिया गया था। किन्‍तु ग्राम जटवां को विद्युत प्रदाय कर रहे 11 के.व्‍ही. बघेली कृषि फीडर के 2 खम्‍भे टूटने एवं खेतों में फसल खड़ी होने के कारण कृषकों द्वारा विरोध करने के कारण उन्‍हें बदला नहीं जा सका, जिससे 18 कृषक प्रभावित हुये थे। उक्‍त खम्‍भों को दिनांक 26.06.2017 को बदलकर ग्राम जटवां का विद्युत प्रदाय चालू कर दिया गया है। (ग) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित क्षेत्रान्‍तर्गत विद्युत लाईनों के ढीले तारों को खींच कर टाईट/व्‍यवस्थित किया गया है। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में ऐसा कोई भी स्‍थान चिन्हित नहीं हुआ है जहां केबल वायर जमीन से 6 फीट की ऊँचाई पर हों। (घ) जी हाँ, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उपभोक्‍ताओं को नियमानुसार सीमेंट/लोहे के पोल लगाकर विद्युत कनेक्‍शन दिये गये हैं।

विद्युत संबंधी शिकायतों को ऑनलाईन दर्ज किया जाना

[ऊर्जा]

16. ( क्र. 211 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विद्युत संबंधी शिकायतों को ऑनलाईन दर्ज किया जा सकता है? (ख) क्या विद्युत कंपनी द्वारा विभिन्न शिकायतों के निराकरण हेतु अधिकतम समय-सीमा तय की जा सकती है? (ग) यदि हाँ, तो क्‍या प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के संदर्भ में कार्यवाही की जावेगी? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) क्या ट्रांसफार्मर खराब होने पर अधिकतम एक माह तक नहीं बदले जाते हैं?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ मोबाईल एप के माध्‍यम से विद्युत संबंधी शिकायतों को ऑनलाईन दर्ज करने की व्‍यवस्‍था वर्तमान में लागू है। (ख) म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा विद्युत संबंधी विभिन्‍न शिकायतों के निराकरण हेतु विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 57 के अंतर्गत वितरण अनुपालन मानदण्‍ड निर्धारित किये गये हैं, जिनमें विद्युत संबंधी शिकायतों के निराकरण हेतु अधिकतम समय-सीमा निर्धारित की गई है। (ग) उत्‍तरांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न नहीं उठता। (घ) जले/खराब वितरण ट्रांसफार्मर संबद्ध उपभोक्‍ताओं द्वारा नियमानुसार विद्युत बिल की बकाया राशि का भुगतान करने के उपरांत वितरण अनुपालन मानदण्‍डों के अनुसार संभागीय मुख्‍यालयों में 12 घंटों के अंदर, संभागीय मुख्‍यालयों को छोड़कर अन्‍य शहरी क्षेत्रों में 24 घंटों के अंदर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सूखे मौसम में 72 घंटों के अंदर तथा मानसून के मौसम (माह जुलाई से माह सितम्‍बर तक) में 7 दिवस के अंदर बदल दिये जाते है।

आदेश में संशोधन/स्पष्टीकरण जारी करना

[वित्त]

17. ( क्र. 245 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या लेखापाल पद पर पदोन्नति होने पर वेतनमान 5200-20200 +2400 ग्रेड वेतन के स्थान पर दिनांक 01-01-16 से वेतनमान 5200-20200 +2800 ग्रेड वेतन दिए जाने के आदेश वित्त सचिव म.प्र.शासन वित्त सचिव म.प्र.शासन, वित्त विभाग द्वारा दिनांक 16 जून 2017 को जारी किये है। (ख) उक्त आदेश विसंगति पूर्ण होने से लेखापाल संवर्ग की मांग पर प्रश्नकर्ता ने श्री अनिरूद्ध मुखर्जी, वित्त सचिव म.प्र.शासन, वित्त विभाग को प्रेषित किये गये पत्र क्रमांक 6897/20-05-2017, 6898/20-05-17 एवं 6908/22-05-17 में किस-किस विसंगति को दर्शाते हुए आदेश में आंशिक संशोधन/स्पष्टीकरण जारी करने एवं जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था? (ग) प्रश्‍नांश (ख) का उत्तर हाँ तो क्या प्रश्नकर्ता द्वारा प्रेषित किये उक्त पत्रों की अभिस्वीकृति किस दिनांक को एवं आदेश में आंशिक संशोधन/स्पष्टीकरण जारी की सूचना किस दिनांक को प्रश्नकर्ता को दी गई है एवं चाही गई जानकारी किस दिनांक को उपलब्ध करवाई गई? यदि नहीं, तो इसके लिए कौन दोषी है? (घ) प्रश्नकर्ता के पत्र के क्रम में प्रश्‍नांश (क) में उल्लेखित आदेश में आंशिक संशोधन/स्पष्टीकरण जारी करने एवं चाही गई जानकारी कब तक उपलब्ध कराने की कार्यवाही की जा रही है?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ I (ख) प्रश्‍नांश में संदर्भित पत्रों द्वारा लेखापाल पद का संशोधित वेतनमान 01-01-2006 या 01-04-2007 से दिये जाने, मंत्रि-परिषद् निर्णय की प्रति उपलब्‍ध कराई जाने तथा लेखापाल को पदोन्‍नति दिनांक से काल्‍पनिक गणना कर वेतन दिये जाने तथा प्रारं‍भिक नियुक्ति से 20 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर द्वितीय समयमान की पात्रता के संबंध में मार्गदर्शन की अपेक्षा रही है (ग) मंत्रि-परिषद् निर्णय की प्रति पत्र दिनांक 03-07-2017 से माननीय विधायक को भेजी गई है मंत्रि-परिषद् निर्णय के अनुसार लेखापाल संवर्ग के ग्रेड वेतन का उन्‍नयन दिनांक 1-1-2016 से किया गया है एवं तदनुसार ही आदेश दिनांक 16-5-2017 जारी किया गया हैI अत: मंत्रि-परिषद् निर्णय के प्रकाश में पूर्व तिथि से लाभ देने की स्थिति नहीं होने के कारण संशोधन/स्‍पष्‍टीकरण जारी करने की आवश्‍यकता नहीं रही है (घ) उपर्युक्‍त (ग) के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होताI

सेवानिवृत्‍त अधिकारियों से वसूली

[सामान्य प्रशासन]

18. ( क्र. 311 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विगत 3 वर्ष के दौरान भोपाल संभाग में सेवानिवृत्‍त हुए शासकीय सेवकों से शासन को अ‍ार्थिक अनियमितता की राशि वसूली की जाना शेष है? यदि हाँ, तो अधिकारियों का राशि सहित ब्‍यौरा दें। (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार अधिकारियों पर विगत कितने वर्षों से प्रकरण अथवा जाँच प्रचलन में थी ब्‍यौरा दें। कितने अधिकारियों से कुल कितनी राशि वसूली जाना है? (ग) क्‍या सेवानिवृत्‍ति‍ के समय राशि की वसूली किए जाने में विभाग स्‍तर पर चूक हुई है? यदि हाँ, तो इसके लिए दोषियों पर क्‍या कोई जाँच संस्थित की गई है? यदि हाँ, तो ब्‍यौरा दें, यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) क्या आगामी दिनों में सेवानिवृत्‍त होने वाले अधिकारी जो आर्थिक अनियमितता के मामलों में दोषी हैं और वसूली की जाना है, उनसे वसूली की क्‍या कार्यवाही की जा रही है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

प्रदेश में कुपोषित बच्चों की संख्या एवं मृत्यु

[महिला एवं बाल विकास]

19. ( क्र. 332 ) श्री रामनिवास रावत : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) 20 जून 2017 की स्थिति में प्रदेश में 0-6 एवं 6-12 वर्ष उम्र के कितने बच्चों का वजन लिया गया? इनमें से कितने सामान्य वजन, कितने कम वजन (कुपोषित) एवं कितने अति कमवजन (अतिकुपोषित) के है? जिलेवार बतावें? (ख) क्या प्रश्नकर्ता के विधानसभा प्रश्न क्र. 3694 दिनांक 10-03-17 के उत्तर में पुस्‍तकालय जानकारी में 01 जनवरी 16 से 31 जनवरी 17 तक 6 वर्ष से कम आयु के कुल 28948 एवं 06 वर्ष से अधिक आयु के कुल 462 बच्चों की मृत्यु की जानकारी दी गयी थी? यदि हाँ, तो दिनांक 01 फरवरी 17 से 20 जून 17 तक 0-6 वर्ष एवं 6-12 वर्ष के कितने बच्चों की मृत्यु किन कारणों (मीजल्स, डायरिया, मलेरिया, कुपोषण, कुपोषण जनित बीमारी एवं अन्य बीमारी नाम सहित) से हुई? अतिकुपोषित चिन्हित किये गए बच्चों में से कितने बच्चों की मृत्यु हुई है? जिलेवार बतावे? (ग) वर्ष 2014-15, 2015-16 एवं 2016-17 में कुपोषण को दूर करने के लिए कितनी राशि व्यय की गयी? जिलेवार वर्षवार बतावें?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) एकीकृत बाल विकास सेवा अंतर्गत 5 वर्ष तक के बच्चों का वजन लिया जाकर उनके पोषण स्तर का निर्धारण किया जाता है। विभागीय एम.आई.एस. अनुसार उपलब्ध माह मई 2017 की स्थिति में जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र -01 अनुसार है। (ख) जी नहीं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी अनुसार 6 वर्ष से कम आयु के कुल 28512 एवं 6 वर्ष से अधिक आयु के कुल 462 बच्चों की मृत्यु की जानकारी दी गई थी। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार माह फरवरी 2017 से मार्च 2017 तक की जानकारी पुस्‍तकालय में  रखे  परिशिष्ट के प्रपत्र-02  अनुसार है। माह अप्रैल 2017 से जून 2017 तक की जानकारी एच.एम.आई.एस. सॉफ्टवेयर में तकनीकी अवरोध के कारण उपलब्ध नहीं है। विभागीय एम.आई.एस. में अति कुपोषित चिन्हित बच्चों की मृत्यु की जानकारी संधारित नहीं की जाती है। शेष का प्रश्न नहीं। (ग) महिला एवं बाल विकास विभाग (एकीकृत बाल विकास सेवा) एवं स्वास्थ्य विभाग से संबंधित जानकारी पुस्‍तकालय में  रखे परिशिष्ट के प्रपत्र -03 अनुसार है।

आंगनवाड़ि‍यों के माध्यम से बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार का प्रदाय

[महिला एवं बाल विकास]

20. ( क्र. 333 ) श्री रामनिवास रावत : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्या प्रदेश में आंगनवाड़ि‍यों के माध्यम से बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को प्रदाय किये जाने वाला पोषण आहार एम.पी. एग्रो के माध्यम से ज्वाइंट वेंचर कंपनियों द्वारा सप्लाय किया जा रहा है? यदि हाँ, तो इन कंपनियों के नाम, मालिकों के नाम, पते सहित जानकारी दें? क्या विगत वर्ष आयकर विभाग द्वारा उक्त कंपनियों के ठिकानों पर छापा मारकर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के प्रकरण दर्ज किये गये? (ख) 1 अप्रैल 2012 से लेकर वर्ष 31 मार्च 2017 की स्थिति में कितना पोषण आहार उक्त कंपनियों द्वारा कितनी-कितनी मात्रा में व कितनी धनराशि का सप्लाई किया गया? किस-किस कंपनी को कितनी-कितनी राशि का भुगतान कब-कब किया गया वर्षवार बतावें? क्या उक्त कंपनियों का अनुबंध 31 मार्च 2017 तक था? यदि हाँ, तो वर्तमान में पूरक पोषण आहार किसके द्वारा प्रदाय किया जा रहा है? (ग) वर्ष 2012 से वित्तीय वर्ष 2016 की स्थिति में प्रदेश में कुपोषण में कितने प्रतिशत की कमी अथवा वृद्धि हुई वर्षवार तुलनात्मक विवरण सहित जानकारी दें? (घ) क्या मान. मुख्यमंत्री जी द्वारा कुपोषण की स्थिति पर श्वेत पत्र जारी करने की घोषणा की थी? यदि हाँ, तो श्वेत पत्र जारी करने में विलंब के क्या कारण है? कब तक श्वेत पत्र जारी कर दिया जावेगा?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी हाँ। ज्वाइंट वेंचर कंपनियों के अतिरिक्त एम.पी.एग्रो के स्वयं के बाड़ी संयंत्र के माध्यम से भी पोषण आहार प्रदाय किया जाता है। सभी ज्वाइंट वेंचर कंपनियां भारतीय कंपनी अधिनियम के अंतर्गत निर्गमित निकाय हैं तथा सभी शेयर होल्डर्स कंपनी के मालिक हैं। शेयर होल्डर्स की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-01 अनुसार है। विगत वर्ष आयकर विभाग द्वारा उक्त कंपनियों के ठिकानों पर छापा मारा गया था, परन्तु आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के प्रकरण दर्ज करने की कोई जानकारी आयकर विभाग द्वारा निगम/विभाग को नहीं दी गई है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2,3 एवं 4 अनुसार है। वर्ष 2011 में एम.पी.एग्रो से निष्पादित अनुबंध 31 मार्च 2017 तक की अवधि हेतु था, इसके पश्चात् दिनांक 05.05.17 को पुनः नवीन अनुबंध निष्पादित किया गया है जो दिनांक 30.06.17 तक की अवधि हेतु प्रभावशील है। उपरोक्त के परिपेक्ष्य में वर्तमान में एम.पी.एग्रो के स्वयं के संयंत्र एवं संयुक्त क्षेत्र में स्थापित संयंत्रों द्वारा पूरक पोषण आहर का प्रदाय किया जा रहा है। (ग) प्रश्नांकित अवधि वर्ष 2012 से वित्तीय वर्ष 2016 में कुपोषण के संबंध में राष्ट्रीय स्तर के तुलनात्मक सर्वे के परिणाम उपलब्ध नहीं है। वर्ष 2005-06 में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (एन.एफ.एच.एस.-3) अंतर्गत 5 वर्ष तक के बच्चों के पोषण स्तर के अध्ययन में प्राप्त परिणामों में प्रदेश में सामान्य से कम वज़न वाले कुल बच्चों का प्रतिशत 60 था, जिसमें गंभीर कुपोषण से ग्रसित बच्चों का प्रतिशत 12.6 था। वर्ष 2015-16 में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे (एन.एफ.एच.एस.-4) के जारी परिणामों में प्रदेश में में सामान्य से कम वज़न वाले कुल बच्चों का प्रतिशत 42.8, जिसमें गंभीर कुपोषण से ग्रसित बच्चों का प्रतिशत 9.2 पाया गया है। इस प्रकार 10 साल की अवधि में कम वजन के बच्चों के प्रतिशत में कुल 28.7 प्रतिशत गिरावट (औसतन सालाना गिरावट 2.87 प्रतिशत) एवं गंभीर कुपोषित बच्चों के प्रतिशत में कुल 27 प्रतिशत (औसतन सालाना गिरावट 2.7 प्रतिशत) दर्ज की गई है। (घ) प्रदेश में व्याप्त कुपोषण की वास्तविक स्थिति के संबंध में माननीय मुख्यमंत्री द्वारा श्वेत पत्र जारी करने के निर्देश दिये गए। माननीय मुख्यमंत्री द्वारा दिनांक 14.09.2016 को श्वेत पत्र जारी करने के निर्देश दिये गए। गठित समिति द्वारा बिन्दुओं के निर्धारण के संबंध में कार्यवाही की जाना अपेक्षित है। जी हाँ। समिति की बैठक आयोजित नहीं हुई है। श्वेत पत्र जारी किये जाने के संबंध में तैयार प्राथमिक जानकारी का परीक्षण पूर्ण न होने से बैठक आयोजित नहीं की गई है। समय-सीमा दिया जाना संभव नहीं है।

अजा बाहुल्य ग्राम में विकास कार्य हेतु राशि का आवंटन

[अनुसूचित जाति कल्याण]

21. ( क्र. 353 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में जिन अजा बाहुल्य ग्रामों में आज दिनांक तक विकास हेतु राशि नहीं दी गई है उनकी जानकारी देवें। (ख) उपरोक्त जिन अजा बाहुल्य ग्रामों में विभाग द्वारा विकास हेतु राशि नहीं दी गई है, क्या उन ग्राम पंचायतों के सरपंच-सचिव द्वारा प्रस्ताव नहीं दिए गए हैं या कोई और कारण है? (ग) अजा बाहुल्य ग्रामों में विकास हेतु विधायकगणों से कोई प्रस्ताव मांगे गए हैं या नहीं? (घ) सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में विभाग द्वारा अजा बस्ती में मंगल भवन कहाँ-कहाँ प्रस्तावित हैं? जानकारी देवें तथा यदि प्रस्तावित नहीं हैं तो इसका कारण बतावें।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है। (ख) जी हाँ। ग्राम अगारी एवं खेजडीया भूप के ही प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए। (ग) जी नहीं। (घ) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है।

परिशिष्ट - ''चार''

 

विद्युत पोलों पर केबल लगाना

[ऊर्जा]

22. ( क्र. 354 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मन्दसौर जिले में विभाग द्वारा विद्युत पोल पर लगे पुराने विद्युत तारों को हटाकर केबल लगाने का कार्य किया गया है या किया जा रहा है? यदि हाँ, तो एक विद्युत पोल से दूसरे विद्युत पोल की अनुमानित दूरी कितनी होती है? (ख) मंदसौर जिले में विगत 03 वर्षों (2014-15, 2015-16, 2016-17) में कितने किलोमीटर लम्‍बाई की निम्‍नदाब लाईनों में खुले तार हटाकर उनके स्‍थान पर केबल लगाई गई है? (ग) विद्युत पोलों से हटाए गए एल्युमीनियम के तारों को कहाँ रखा गया है या उस का क्या उपयोग किया गया है? (घ) विद्युत पोल पर डाली गई केबल कितने तार वाली डाली गई है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, मंदसौर जिले में म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विद्युत पोल पर लगे पुराने तारों को निकालकर उसके स्‍थान पर केबल लगाने का कार्य किया गया है। एक निम्‍नदाब विद्युत पोल से दूसरे विद्युत पोल की अनुमानित दूरी विद्युत लाईन के स्‍थल की आवश्‍यकता के अनुरूप लगभग 45 से 50 मीटर तक होती है। (ख) मंदसौर जिले में विगत 3 वर्षों (2014-15, 2015-16, 2016-17) में कुल 254 किलोमीटर निम्‍नदाब लाईनों में खुले तार हटाकर उसके स्‍थान पर केबल लगाये गये हैं। (ग) मंदसौर जिले में विद्युत पोलों से हटाए गए एल्‍युमीनियम के तारों (कन्‍डक्‍टर) को नियमानुसार क्षेत्रीय भण्‍डार मंदसौर में लौटा दिया गया है। (घ) मंदसौर जिले में सिंगल फेस निम्‍नदाब लाईन पर दो तार की केबल एवं थ्री फेस निम्‍नदाब लाईन पर आवश्‍यकतानुसार तीन तार एवं पाँच तार वाली केबल डाली गई है।

अत्‍याचार निवारण अधिनियम अंतर्गत दर्ज प्रकरण

[अनुसूचित जाति कल्याण]

23. ( क्र. 362 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्‍जैन संभाग में अनु.जाति/जनजाति अत्‍याचार निवारण अधिनियम अंतर्गत वर्ष २०१३ से जून २०१७ तक कितने-कितने, कौन-कौन से प्रकरण पंजीबद्ध किये गये? थानावार, जिलेवार ब्‍यौरा क्‍या है? (ख) उपरोक्‍त (क) संदर्भित कितने-कितने प्रकरण कितने समय से किस कारण से लंबित है? (ग) अत्‍याचार निवारण अधिनियम अंतर्गत जिलेवार दी गई राहत राशि का थानेवार ब्‍यौरा क्‍या है? राशि व नाम सहित विवरण दें .

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र- अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र- अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र- अनुसार है।

अनुसूचित जाति वर्ग के सदस्यों की साक्षरता

[अनुसूचित जाति कल्याण]

24. ( क्र. 364 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में अनुसूचित जातियों की जातिवार जनसंख्या एवं उनकी साक्षरता की स्थिति का जिलेवार ब्यौरा क्या है? (ख) वर्ष २०१३ से जून २०१७ तक अनुसूचित जाति वर्ग में शिक्षा (साक्षरता) के प्रतिशत का वर्षवार ब्यौरा क्या है एवं उक्त अवधि में शासन का साक्षरता लक्ष्य इस वर्ग के लिये क्या था? (ग) अनुसूचित जाति वर्ग में साक्षरता बढ़ाने की दिशा में शासन ने विगत पाँच वर्षों में क्या-क्या कदम उठाये व कितनी राशि इस पर व्‍यय हुई?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) प्रदेश में अनुसूचित जातियों की जातिवार जनसंख्‍या और उनकी साक्षरता की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) एवं (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

परिशिष्ट - ''पाँच''

आदिवासी उपयोजना हेतु प्राप्‍त राशि

[आदिम जाति कल्याण]

25. ( क्र. 365 ) श्री संजय उइके : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या केन्‍द्र से विभाग को विशेष केन्‍द्रीय सहायता एवं अनु-275 (1) में विकास कार्य हेतु आदिवासी उपयोजना क्षेत्र के लिए राशि प्राप्‍त होती है? (ख) यदि हाँ, तो केन्‍द्र से प्राप्‍त राशि के आधार पर वित्‍तीय वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनांक तक प्रत्‍येक आई.टी.डी.पी. माडा, लघु एवं क्‍लस्‍टर परियोजना की जनसंख्‍या एवं क्षेत्रफल के आधार पर कितनी राशि बालाघाट जिले अन्‍तर्गत राशि प्रदाय की गई? (ग) केन्‍द्र सरकार से वित्‍तीय वर्ष 2013-14 से 2015-16 तक अनु-275 (1) एवं विशेष केन्‍द्रीय सहायता से प्राप्‍त राशि से बालाघाट जिले के अन्‍तर्गत एकलव्‍य सोसायटी (आयुक्‍त आदिवासी विकास) एवं आयुक्‍त आदिवासी विकास विभागों को किन-किन विभिन्‍न गतिविधियों, विकास कार्यों हेतु कितनी-कितनी राशि आवंटित की गई तथा कितनी व्‍यय की गई?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ग) बालाघाट जिला के अन्‍तर्गत एकलव्‍य सोसायटी (आयुक्‍त आदिवासी विकास) की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब एवं आयुक्‍त आदिवासी विकास विभागों को विभिन्न गतिविधियों, विकास कार्यों हेतु आवंटित राशि तथा व्‍यय की गई राशि संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-स अनुसार है।

परिशिष्ट - ''छ:''

बस्ती विकास योजना का क्रियान्वन

[आदिम जाति कल्याण]

26. ( क्र. 371 ) श्री मुरलीधर पाटीदार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या अ.जा./अ.ज.जा. बाहुल्य बस्तियों में बस्ती विकास योजनान्तर्गत निर्माण विकास कार्य किये जाते हैं? यदि हाँ, तो विगत 03 वर्षों में आगर जिला अंतर्गत किए गए कार्यों का विवरण देवें? (ख) प्रश्नकर्ता द्वारा प्रश्नांश (क) में उल्लेखित कार्यों हेतु विगत 03 वर्षों में किन-किन कार्यों की अनुशंसा की हैं या पत्र जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग आगर एवं शाजापुर जिले को लिखे हैं एवं इनके संदर्भ में क्या कार्यवाही की गई हैं? (ग) प्रश्नकर्ता द्वारा पत्र क्रं. 643 दिनांक 10.04.15 से ग्राम लसुल्डियागोपाल में, पत्र क्रं. 978 दिनांक 11.09.15 से ग्राम लालाखेड़ी में, पत्र क्रं. 1054 दिनांक 03.11.15 से ग्राम डोंगरगांव में, पत्र क्रं. 1055 दिनांक 03.11.15 से ग्राम बराई में पत्र क्रं. 311 दिनांक 24.5.16 द्वारा ग्राम मोहना में, पत्र क्रं. 795 दिनांक 28.11.16 से ग्राम करजू में, निर्माण कार्यों की अनुशंसा की थी या मांग की थी? यदि हाँ, तो जिला संयोजकों द्वारा क्या कार्यवाही की गई कृपया पत्रवार की गई कार्यवाही का पूर्ण विवरण देवें? (घ) प्रश्नांश (ग) के संदर्भ में भेजे गए प्रति उत्तर संबंधी पत्रों की सत्यापित प्रति उपलब्ध करावें?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। प्रश्‍नांकित अवधि में किये गये कार्यों की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) प्रश्‍नांकित अवधि में प्रश्‍नकर्ता द्वारा बस्तियों में कार्यों की अनुशंसा नहीं की गई है। शाजापुर जिले के प्रश्‍नांकित ग्रामों में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्‍या 50 प्रतिशत या अधिक नहीं होने से योजना नियम अनुसार कार्य स्‍वीकृति की कार्यवाही नहीं की गई। (ग) जी हाँ। प्रस्‍ताव अनुसूचित जनजाति बस्‍ती विकास योजना के अनुरूप न होने से कार्य स्‍वीकृत नहीं किये गये। (घ) ग्राम मोहना एवं करजू में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्‍या 50 प्रतिशत से कम होने से पत्रों पर कार्यवाही नहीं की गई।

परिशिष्ट - ''सात''

प्रदेश में अशोक चिन्ह के अनाधिकृत उपयोग पर कार्यवाही

[सामान्य प्रशासन]

27. ( क्र. 374 ) श्री यशपालसिंह सिसौदिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शासन एव जनप्रतिनिधियों में से कौन-कौन व्यक्ति अपने लेटर हैड पर अशोक एव मध्यप्रदेश शासन के चिन्ह का उपयोग कर सकते हैं व किस नियम के तहत? नियमों की प्रति उपलब्ध करायें? (ख) क्या कोई पूर्व जनप्रतिनिधि, अधिकारी या अन्य कर्मचारी जिन्हें पद पर रहते अधिकार था, किन्तु सेवानिवृत्‍त होने पर या पूर्व होने के पश्चात लेटर हैड का उपयोग कर सकते हैं ऐसे गत 5 वर्षों में प्रदेश के कितने मामले विभाग के समक्ष आये, विभाग द्वारा उन पर क्या कार्यवाही की गई? (ग) क्या भारत का राज्य संप्रतीक (प्रयोग का विनियम ) नियम 2007 नियम के अनुसार जो जनप्रतिनिधि/अधिकारी एवं अन्य चिन्ह का प्रयोग नहीं कर सकते, उनके विरुद्ध भारत का राज्य संप्रतीक का प्रयोग, भारत का राज्य संप्रतीक (दुरूपयोग निषेध ) अधिनियम, 2005 के अध्याधीन शर्तों के तहत धारा 7 एव 8 के तहत 2007 से कितनों पर क्या-क्या कार्यवाही की गई? (घ) क्या कोई भी शासकीय कर्मचारी अपने परिचय पत्र पर मध्यप्रदेश शासन के मोनो एव चौपहिया वाहन पर म.प्र शासन का उपयोग कर सकता है? यदि नहीं, तो किस-किस कैंडर के कर्मचारी परिचय पत्र पर इसका उपयोग कर सकते है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) राज्‍य शासन के राज्‍य चिन्‍ह के उपयोग हेतु पृथक से नियम नहीं हैं। भारत के संप्रतीक के उपयोग हेतु जारी अधिसूचना दिनांक 04/10/2007 के पैरा 4 के बिन्‍दु क्रमांक 2 अनुसार भारत के संप्रतीक के प्रयोग के निर्देश का ही राज्‍य शासन के राज्‍य चिन्‍ह हेतु पालन किया जाता है। नियम की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) सेवानिवत्ति पश्‍चात् राज्‍य चिन्‍ह के उपयोग की कोई शिकायत गत 5 वर्षों में प्राप्‍त नहीं हुई। (ग) शिकायत प्राप्‍त न होने से कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) शासकीय कर्मचारी को शासन द्वारा जारी परिचय पत्र में शासन के मोनो का उपयोग किया जा सकता है। शासकीय कर्मचारी अपने निजी चार पहिया वाहन पर म.प्र.शासन का उपयोग नहीं कर सकता है।

रिस्क पांइट दुरस्तीकरण

[ऊर्जा]

28. ( क्र. 375 ) श्री यशपालसिंह सिसौदिया : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रतलाम एवं मंदसौर जिले में 01 जनवरी, 2015 के पश्‍चात 11 के.व्‍ही. एवं 33 के.व्‍ही लाईनों के रख-रखाव हेतु कोई ठेका विद्युत कंपनी द्वारा दिया गया है? यदि हाँ, तो ठेकेदार का नाम, कार्यादेश क्रमांक एवं दिनांक तथा 31 मार्च, 2017 तक उक्‍त ठेकदार को भुगतान की गई राशि की जानकारी देवें? (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित 11 के.व्‍ही. एवं 33 के.व्‍ही. लाईनों के रख-रखाव हेतु कितने फीडरों को चिन्हित किया गया था एवं कितने फीडरों का कार्य पूर्ण किया जा चुका है? कार्य पूर्ण न होने के कारण बतावें? (ग) मंदसौर जिले में विभाग द्वारा कौन-कौन से पांइट को हाई रिस्क पांइट माना है? स्थल सहित जानकारी देवें। मंदसौर जिले में एसे कितने पांइट हैं जहां एक ही स्थल पर एक से अधिक विद्युत दुर्घटनायें हुई हैं? (घ) मंदसौर जिले में 01 जनवरी, 2015 के पश्‍चात मई, 2017 अंत तक विद्युत दुर्घटनाओं से कुल कितने व्‍यक्तियों की मृत्‍यु हुई है, इनमें से कितने विद्युत कंपनी के विभागीय कर्मचारी थे?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, रतलाम एवं मंदसौर जिलों में 01 जनवरी 2015 के पश्चात् 11 के.व्ही. एवं 33 के.व्ही. फीडरों के नवीनीकरण एवं रख-रखाव कार्य हेतु म.प्र.पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इंदौर द्वारा ठेके दिये गये है। रतलाम जिले में मेसर्स आनंद इलेक्ट्रिकल्स दिल्ली को कार्यादेश क्रमांक एम.डी./पक्षे/06/एस.एस.टी.डी./पैकेज-801/आर्डर-2024/6791, इंदौर दिनांक 11.04.16 (सप्लाय) एवं कार्यादेश क्र. एम.डी./पक्षे/06/एस.एस.टी.डी./पैकेज-801/आर्डर-2025/6792 दिनांक 11.04.16 (इरेक्शन) दिया गया था जिसमें रतलाम जिले के अतिरिक्‍त देवास एवं शाजापुर जिले भी सम्मिलित थे। मंदसौर जिले में मेसर्स नीलशिखा इन्फ्रा लिमिटेड, इंदौर को कार्यादेश क्रमांक एम.डी./पक्षे/06/एस.एस.टी.डी./पैकेज-803/आर्डर-2053/10203 दिनांक 07.06.16 (सप्लाय) एवं कार्यादेश क्रमांक एम.डी./पक्षे/06/एस.एस.टी.डी./पैकेज-803/आर्डर-2054/10204 दिनांक 07.06.16 (इरेक्शन) जारी किये गये है जिसमें मंदसौर जिले के अतिरिक्‍त उज्‍जैन, आगर एवं नीमच जिले भी सम्मिलित थे। दिनांक 31 मार्च-2017 तक मेसर्स आंनद इलेक्ट्रिकल्‍स दिल्‍ली को सम्‍पूर्ण कार्यादेश के विरूद्ध रू. 12,78,77420/- का भुगतान किया गया था परंतु बाद में अपूर्ण कार्य यथा स्थिति में समाप्‍त कर देने के कारण इस निविदाकर्ता से रू. 83981889/- की राशि बैंक गारंटी भुनाकर एवं देयकों में से काटकर वापस वसूल ली गई इस प्रकार से इस निविदाकर्ता को वास्‍तविक रूप से शुद्ध भुगतान रू. 43895531/- सम्‍पूर्ण पैकेज के विरूद्ध किया गया, जिलेवार विवरण संधारित नहीं किया जाता हैं। मेसर्स नीलशिखा इन्‍फ्रा लिमि. इंदौर को राशि रू. 161717441/- का भुगतान सम्‍पूर्ण पैकेज के विरूद्ध किया गया हैं। (ख) प्रश्नांशक में उल्लेखित फीडरों में से रतलाम जिले में 11 के.व्ही. के 93 फीडर एवं 33 के.व्ही. के 42 फीडर चिन्हित किये गये थे, जिसमें से 11 के.व्ही. के 28 फीडरों का एवं 33 के.व्ही. के किसी भी फीडर का कार्य पूर्ण नहीं किया गया है। इसके पश्चात वितरण कंपनी कार्यालय के आदेश क्र. प्रनि/पक्षे/08-03/एस.एस.टी.डी./43 इंदौर दिनांक 14.10.16 के द्वारा ठेकेदार कंपनी मेसर्स आनंद इलेक्ट्रिकल्स का ठेका यथा स्थिति में समाप्त कर दिया गया था। मंदसौर जिले में 11 के.व्ही. के 58 फीडर एवं 33 के.व्ही. के 35 फीडर चिन्हित किये गये थे, जिसमें से 11 के.व्ही. के 57 फीडरों का एवं 33 के.व्ही. के 35 फीडरों का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। मंदसौर जिले में मात्र एक 11 के.व्ही. कयामपुर कृषि फीडर का कार्य जून के द्वितीय पखवाड़े (दिनांक 16.06.2017 से 30.06.2017 तक) में विद्युत प्रदाय का समय दोपहर 11 बजे से सांय 5 बजे तक होने से शट-डाउन नहीं दिये जा सकने के कारण पूर्ण किया जाना शेष है। (ग) वितरण कंपनी में हाई रिस्क पाईन्ट जैसी कोई शब्दावली प्रचलन में नहीं है, अतः प्रश्‍न नहीं उठता। मंदसौर जिले में ऐसा कोई पाईन्ट/लोकेशन नहीं है, जहां एक ही स्थल पर एक से अधिक विद्युत दुर्घटनाएं हुई हैं। (घ) मंदसौर जिले में 01 जनवरी-2015 के पश्चात् मई-2017 अंत तक हुई विद्युत दुर्घटनाओं में कुल 40 व्यक्तियों की मृत्यु हुई है, जिनमें विद्युत वितरण कंपनी का कोई भी कर्मचारी नहीं है।

सौर ऊर्जा उत्पादन की स्थिति

[नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा]

29. ( क्र. 378 ) श्री मोती कश्यप : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राज्य की ऊर्जा की आवश्यकता के विरूद्ध पर्याप्‍त मात्रा में ऊर्जा उत्पादित की जा रही है? (ख) प्रश्नांश- (क) में सौर, पवन एवं बायोमास ऊर्जा की भागीदारी कितनी-कितनी है? (ग) क्या राज्य के किन्हीं जिलों में जिले की क्षमता की प्रश्नांश-(ख) इकाईयां स्थापित की गई हैं? यदि हाँ, तो किन जिलों में कितनी संभावनायें पायी गई हैं? (घ) घरेलू एवं सामुदायिक सौर ऊर्जा उत्पादन की दिशा में किन जिलों में कितनी इकाईयां स्थापित की गई हैं और चालू वर्ष में कितना लक्ष्य निर्धारित किया गया है और उसकी पूर्ति हेतु किस प्रकार का अभियान चलाया गया?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ। (ख) प्रश्‍नांश-(क) के अन्‍तर्गत वर्तमान में प्रदेश में 734.38 मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा, 2415.90 मेगावाट क्षमता की पवन ऊर्जा एवं 11.2 मेगावाट क्षमता की बायोमास ऊर्जा परियोजनाएं कार्यशील है। (ग) जी हाँ। जिन जिलों में परियोजनाएं स्‍थापित है, उनकी जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। निजी विकासकों के द्वारा तकनीकी साध्‍यता एवं भूमि की उपलब्‍धता के आधार पर सौर, पवन एवं बायोमास परियोजनाओं की स्‍थापना की जाती है। (घ) घरेलू क्षेत्र में सौर ऊर्जा उत्‍पादन की दिशा में स्‍थापित/स्‍थापनाधीन संयंत्रों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। घरेलू क्षेत्र के लिए पृथक से कोई लक्ष्‍य निर्धारित नहीं किया गया है तथापि कुल 1500 किलोवाट की क्षमता के संयंत्रों की स्‍थापना हेतु तैयारी है। सोलर फोटोवोल्टाइक कार्यक्रम, ग्रामीण विद्युतीकरण एवं डीसेन्‍ट्रेलाईज्‍ड डिस्‍ट्रीब्‍यूशन जनरेशन कार्यक्रम अन्‍तर्गत विगत 5 वर्षों में स्‍थापित संयंत्रों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-स अनुसार है। वर्तमान वर्ष में डीसेन्‍ट्रेलाईज्‍ड डिस्‍ट्रीब्‍यूशन जनरेशन कार्यक्रम (डी.डी.जी.) योजनान्‍तर्गत स्‍वीकृत 20 ग्रामों में संयंत्र स्‍थापित किये जाने का लक्ष्‍य है। सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-द अनुसार है। इनकी पूर्ति हेतु निविदा जारी करने की कार्यवाही की जा रही है।

विद्युत सब स्‍टेशनों का निर्माण

[ऊर्जा]

30. ( क्र. 402 ) इन्जी. प्रदीप लारिया : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मकरोनिया नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत मकरोनिया नगर पालिका में कितने नये विद्युत सब स्‍टेशन के निर्माण किये जाने प्रस्‍तावित हैं? (ख) क्‍या मकरोनिया एवं रजाखेड़ी अंतर्गत विद्युत सब स्‍टेशनों का निर्माण किया जाना प्रस्‍तावित है? यदि हाँ, तो इन सब स्‍टेशनों का निर्माण कार्य कब से होगा? (ग) यदि विद्युत सब स्‍टेशनों को स्‍थापित करने में विभाग को भूमि संबंधी परेशानी है तो इसके लिये विभाग द्वारा क्‍या कोई कार्यवाही की जा रही है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) वर्तमान में मकरोनिया नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत विद्युत उपकेन्‍द्र निर्माण का कोई भी कार्य किया जाना प्रस्‍तावित नहीं है। (ख) जी नहीं, अत: प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) उत्‍तरांश (क) व (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न नहीं उठता।

दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही बावत्

[सामान्य प्रशासन]

31. ( क्र. 433 ) श्री सुन्‍दरलाल तिवारी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 23 फरवरी 2017 में मुद्रित आतारांकित प्रश्‍न क्रमांक 521 के उत्‍तर में (क) एवं (ख) जानकारी एकत्रित की जा रही है? उत्‍तर दिया गया है यदि जानकारी एकत्रित कर ली गई हो तो प्रति देते हुए बतावें कि प्रश्‍नकर्ता के पत्रों पर समय पर कार्यवाही न करने के लिए कौन दोषी हैं? दोषियों पर कब-कब, कौन-कौन सी कार्यवाही की गई? अगर कार्यवाही नहीं की गई तो क्‍यों? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में 23 फरवरी 2017 के बाद प्रश्‍नकर्ता द्वारा आयुक्‍त राजस्‍व रीवा संभाग रीवा, कलेक्‍टर रीवा एवं मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रीवा को लिखे गए पत्रों पर क्‍या कार्यवाही की गई? की गई कार्यवाही की प्रति दें, अगर कार्यवाही नहीं की गई तो इसके लिए कौन-कौन दोषी है? दोषियों पर क्‍या कार्यवाही करेंगे? अगर नहीं तो क्‍यों?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) उल्‍लेखित अतारांकित प्रश्‍न क्रमांक 521 के विधानसभा को भेजे गए उत्‍तर की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

अवैध शराब विक्रय पर कार्यवाही

[वाणिज्यिक कर]

32. ( क्र. 459 ) श्री मधु भगत : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बालाघाट जिले में वर्ष 2017-18 हेतु कहाँ-कहाँ शराब दुकानें प्रारंभ किये जाने हेतु अनुमति प्रदान कि गई है? स्‍थानवार, ग्रामवार, निकायवार, जगह का नक्‍शा, खसरा की प्रति सहि‍त वैधता एवं राज्‍य मार्ग से दुकान की दूरी बतायें? (ख) वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनांक तक बालाघाट जिले में कहाँ-कहाँ अवैध शराब विक्रय भण्‍डारण और आबकारी एक्‍ट अंतर्गत कितने प्रकरण दर्ज किये गये? प्रकरणवार जानकारी देवें। इन मामलों को माननीय न्‍यायालय में कब प्रस्‍तुत किया गया और किन-किन प्रकरणों का निराकरण कराया गया? (ग) संपूर्ण बालाघाट जिले में गांव-गांव में बिक रही अवैध शराब, अवैध भण्‍डारण आदि के संबंध में क्‍या विभाग विशेष निर्देश देकर अभियान चलाकर समुचित कार्यवाही करेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों? विगत दो वर्षों में जनता, जनप्रतिनिधियों द्वारा जिले की किन-किन शराब दुकानों को हटाने की मांग की है? उन पर अब तक विभाग ने क्‍या कार्यवाही की है? (घ) अवैध शराब रोकने हेतु शासन की क्‍या नीति नियम निर्देश हैं? क्‍या इन नीति नियम निर्देशों का पालन बालाघाट जिले में किया जा रहा है? नहीं तो क्‍यों? सम्‍पूर्ण जिले में गांव-गांव अवैध शराब बिक्री हेतु कौन उत्‍तरदायी है?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्रएक अनुसार है। संचालित देशी एवं विदेशी मदिरा दुकानों की स्‍थानवार, ग्रामवार, निकायवार, जगह का नक्‍शा संबंधी जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्रदो अनुसार है। खसरा की जानकारी विभाग द्वारा संकलित नहीं की जाती है। (ख) वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनांक तक बालाघाट जिले में अवैध शराब विक्रय भण्‍डारण और आबकारी एक्‍ट अंतर्गत दर्ज किये गये प्रकरणों की प्रकरणवार जानकारी एवं माननीय न्‍यायालय में प्रस्‍तुत/निराकृत प्रकरणों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्रतीन अनुसार है। (ग) जिले में अवैध शराब, अवैध निर्माण, धारण, भण्‍डारण आदि के विरूद्ध समुचित कार्यवाही के संबंध में आबकारी आयुक्‍त, मध्‍यप्रदेश ग्‍वालियर के पत्र दिनांक 23.05.2017 द्वारा स्‍थाई निर्देश जारी किये गये है, जिसमें संपूर्ण वर्ष में निरंतर सुनियोजित तरीके से प्रभावी प्रवर्तन कार्य करने हेतु निर्देशित किया गया है। जिसके पालन में जिले में आबकारी विभाग द्वारा व आवश्‍यकताअनुसार पुलिस के सहयोग से सुनियोजित तरीके से अवैध शराब के विक्रय, निर्माण, धारण आदि के विरूद्ध अभियान चलाकर प्रवर्तन कार्य संपादित किया गया। विगत दो वर्षों में जनता-जनप्रतिनिधियों द्वारा जिन-जिन शराब दुकानों को हटाने की मांग की है, उन प्रकरणों में विभाग द्वारा की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-चार अनुसार है। (घ) मध्‍यप्रदेश में विधि विरूद्ध/अवैध रूप से शराब के विनिर्माण, धारण, परिवहन, विक्रय आदि अपराधिक गतिविधियों को रोकने एवं नियंत्रित करने हेतु मध्‍यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 संपूर्ण मध्‍यप्रदेश में प्रवृत है। जिसमें उल्‍लेखित विभिन्‍न प्रावधानों/विविध उपबंधों का पालन बालाघाट जिले में किया जा रहा है। जिले में गांव-गांव शराब का अवैध विक्रय न होकर मध्‍यप्रदेश शासन द्वारा घोषित आबकारी नीति वर्ष 2017-18 एवं तदविषयक शासन एवं सक्षम प्रधिकारियों द्वारा जारी नियमों/निर्देशों व आबकारी अधिनियमों के प्रावधानों अनुसार ही जिले की लाइसेंस प्राप्‍त दुकानों से ही शराब का विक्रय किया जा रहा है। जिले में किसी भी स्‍थान से शराब के अवैध विक्रय धारण निर्माण परिवहन आदि से संबंधित सूचनाओं/शिकायतों पर आबकारी विभाग द्वारा संबंधित उत्‍तरदायी व्‍यक्तियों के विरूद्ध सक्षम कार्यवाही की जा रही है।

निर्धारित मापदण्‍डों का पालन न किया जाना

[सामान्य प्रशासन]

33. ( क्र. 479 ) श्री नरेन्‍द्र सिंह कुशवाह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) परि. अता. प्रश्‍न क्रमांक 1246 दिनांक 23.2.2017 के उत्‍तर में बताया गया था कि जिला कलेक्‍टर भिण्‍ड के प्रशासकीय स्‍वीकृति आदेश क्र. 794835712926151605 में निहित शर्तों के अनुसार मापदण्‍डों का निर्धारण किया गया किंतु क्रियान्वयन एजेंसियों द्वारा निर्धारित मापदण्‍डों का पूर्णत: पालन नहीं किया गया है यदि हाँ, तो प्रश्‍नांश दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की जावेगी? कौन दोषी पाया गया? क्‍या कार्यवाही की गई जानकारी दें? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ क्रियान्‍वयन एजेंसी का निर्धारण करने के लिए शासन द्वारा मापदण्‍ड निर्धारित किए गए थे? क्‍या स्‍वतंत्र एजेंसी से प्रत्‍येक तीन माह में मूल्‍यांकन प्रतिवेदन हेतु निर्देशित किया गया था यदि हाँ, तो समयावधि में कार्यवाही क्‍यों नहीं की गई? इसके लिए कौन दोषी पाया गया क्‍या कार्यवाही की जावेगी? (ग) प्रश्‍नांश (क) अनुसार 6 विद्यालयों में कम्‍प्‍यूटर प्रोजेक्‍ट स्‍थापना हेतु प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी एवं एजेंसी का निर्धारण किया गया, किंतु कम्‍प्‍यूटर विद्यालयों में नहीं लगाये? ऐसा क्‍यों? संबंधित अधिकारियों द्वारा निर्देशों का अपालन किया गया? यदि हाँ, तो कार्यवाही क्‍या की जावेगी जानकारी दें? (घ) क्‍या प्रश्‍नांश (क), (ख) और (ग) से स्‍पष्‍ट है कि प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी हुई सांसद निधि की राशि व्‍यय हुई और प्रोजेक्‍ट स्‍थापित नहीं किया गया तो अब क्‍या कार्यवाही की जावेगी जानकारी दें?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। प्रकरण में माननीय उच्‍च न्‍यायालय एवं माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा दिये गये निर्देश के परिपालन में कलेक्‍टर भिण्‍ड के पत्र दिनांक 08/08/2016 द्वारा प्रतिवेदन योजना आर्थिक एवं सांख्यिक विभाग को भेजा गया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ, इकाई ग्‍वालियर में प्रारंभिक जाँच प्रकरण क्रमांक 9/11 पंजी‍बद्ध होकर जाँच प्रक्रियाधीन है। (ख) से (घ) जी हाँ। माननीय उच्‍च न्‍यायालय एवं माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा पारित किये गये आदेश के परिपालन में कलेक्‍टर भिण्‍ड के पत्र दिनांक 04/06/2011 द्वारा क्रियान्‍वयन एजेंसी को निर्देश जारी किये गये थे। क्रिन्‍यान्‍वयन एजेंसी द्वारा निर्देशों का पालन न करने पर आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ इकाई ग्‍वालियर को प्रकरण जाँच हेतु सौंपा गया।

विद्युतीकरण कार्य

[ऊर्जा]

34. ( क्र. 534 ) श्रीमती सरस्‍वती सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिंगरौली जिले के चिंतरंगी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत पं दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजनांतर्गत कुल कितने ग्रामों व बसाहटों के विद्युतीकरण के लिए सर्वेक्षण कराया गया, उसमें से कितने ग्रामों व बसाहटों का विद्युतीकरण किया जा चुका है? (ख) ग्राम पिड़रिया, गेरूई (खम्‍हनिया) सिधार, खैरहनी, गुलरिहा, बसनिया, हरमा साची व अन्‍य आदिवासी बाहुल्‍य क्षेत्र हैं जो विदयुत विहीन हैं, अभी तक विद्युतीकरण नहीं हुए हैं क्‍या विद्युतीकरण कराये जाने की योजना है? यदि हाँ, तो शासन स्‍तर पर क्‍या कार्यवाही की गई है? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में उक्‍त विद्युत विहीन ग्रामों का कब तक विद्युतीकरण करा दिया जायेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) विधानसभा क्षेत्र चितरंगी सहित जिला सिंगरौली में दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के अंतर्गत टर्न की आधार पर कार्य कराए जाने हेतु अवार्ड मेसर्स मेक्‍स इंफ्रा, हैदराबाद को दिनांक 24.06.17 को जारी किया गया है। अवार्ड में निहित प्रावधानों के अनुसार टर्न-की ठेकेदार एजेंसी द्वारा सिंगरौली जिले के विद्युतीकृत ग्रामों के अविद्युतीकृत मजरों/टोलों/बसाहटों के विद्युतीकरण हेतु सर्वे की कार्यवाही कर विद्युतीकरण का कार्य कराया जाना प्रस्‍तावित है। वर्तमान में उक्‍त टर्न-की ठेकेदार एजेन्‍सी द्वारा सर्वे कार्य हेतु कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। अत: वर्तमान में प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में ग्रामों/बसाहटों में सर्वे/विद्युतीकरण की जानकारी दिये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता। (ख) वर्तमान में सिंगरौली जिले के चितरंगी विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत ग्राम पिड़रिया, गेरूई (खम्‍हनिया), सिधार, खैरहनी, बसनिया, हरमा साची पूर्व से विद्युतीकृत हैं। उक्‍त विद्युतीकृत ग्रामों के विद्युत विहीन क्षेत्रों, 100 से अधिक आबादी वाले मजरों/टोलों एवं प्रश्‍नाधीन उल्‍लेखित ग्राम पथरकटी के गुलरिहा टोला के विद्युतीकरण का कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के अंतर्गत प्रस्‍तावित है, जिस हेतु उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार कार्य टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु दिनांक 24.6.17 को अवार्ड जारी कर दिया गया है। (ग) उत्‍तरांश (ख) में दर्शाए अनुसार प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित ग्राम पूर्व से विद्युतीकृत हैं तथा इन ग्रामों के सघन विद्युतीकरण का कार्य एवं प्रश्‍नाधीन उल्‍लेखित ग्राम पथरकटी के गुलरिहा टोला के विद्युतीकरण के कार्य सहित योजनांतर्गत कार्य अवार्ड की शर्तों के अनुसार मई 2019 तक पूर्ण कराया जाना अनुमानित है।

जनसंपर्क राशि का वितरण

[सामान्य प्रशासन]

35. ( क्र. 567 ) श्री रजनीश सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में जिला सिवनी अंतर्गत विधायकों को कितनी-कितनी जनसंपर्क राशि आवंटित की गई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में विधायकों को प्राप्‍त उक्‍त राशि से कितनी-कितनी राशि में मान. सांसद एवं मान. प्रभारी मंत्री को अनुशंसा का अधिकार है? (ग) क्‍या प्रश्‍नकर्ता की जनसंपर्क राशि हितग्राहियों के खाते में जमा कर दी गई है? यदि नहीं, तो क्‍यों? जबकि प्रश्‍नकर्ता द्वारा जनसंपर्क राशि का प्रस्‍ताव विगत तीन माह पूर्व (मार्च) में संबंधित विभाग के पास पहुंचा दिया गया है? (घ) जनसंपर्क राशि के सही समय में संबंधित हितग्राहियों को नहीं मिलने का कौन जिम्‍मेवार है? क्‍या जिम्‍मेवार कर्मचारियों/अधिकारियों पर कोई कार्यवाही होगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जिला सिवनी अंतर्गत 04 विधान सभा के लिए कुल 8.00 लाख राशि आवंटित की गई थी। (ख) जनसंपर्क दौरे अनुदान की राशि प्रभारी मंत्री जी के द्वारा स्‍वीकृत की जाती है। प्रति विधान सभा क्षेत्र आवंटित होने वाली राशि में से 0.75 लाख रूपये ऐसे कार्यों के लिए सुरक्षित की जाती है, जिसकी अनुशंसा माननीय सांसद करते हैं। (ग) एवं (घ) विधान सभा क्षेत्र केवलारी के चार हितग्राहियों को राशि रूपये 20,000/- अनुशंसा की गई थी। यह राशि संबंधित हितग्राही के खाते में जमा करा दी गई है। शेष राशि का प्रस्‍ताव माननीय विधायक श्री रजनीश सिंह द्वारा प्रभारी मंत्री जी के अनुमोदन से दिनांक 22.03.2017 को प्राप्‍त हुआ था। जिसमें हितग्राहियों के आधार नंबर नहीं होने से आधार नंबर हेतु माननीय विधायक महोदय को कलेक्‍टर सिवनी के पत्र क्रमांक 1882 दिनांक 25.03.2017 को लिखा जाकर ई-मेल भी किया गया था। आधार नंबर प्राप्‍त नहीं होने से संबंधितों के खाते में राशि नहीं पहुंच पायी है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

मध्‍यप्रदेश सरकार पर कर्ज की स्थिति

[वित्त]

36. ( क्र. 593 ) श्री मुकेश नायक : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मार्च 2017 के अंत में मध्‍यप्रदेश सरकार पर कुल कितना और किन-किन वित्‍तीय संस्‍थाओं का कर्ज है और मार्च 2017 तक सरकार ने कर्ज पर ब्‍याज के रूप में कितनी धनराशि का भुगतान किया है? (ख) वित्‍त वर्ष 2017-18 में 01 अप्रैल, 2017 से 30 जून, 2017 तक राज्‍य सरकार ने कब-कब, किन-किन संस्‍थाओं से कितना-कितना कर्ज लिया है और इस अवधि में कर्ज पर ब्‍याज के रूप में कितनी धनराशि का भुगतान किया है? (ग) क्‍या राज्‍य सरकार की वित्‍तीय स्थिति कमजोर होने के कारण सर्वोच्‍च न्‍यायालय और मध्‍यप्रदेश उच्‍च न्‍यायालय के निर्णयों के बाद भी अब तक सरकार ने राज्‍य के होमगार्ड, अनेक प्रकार और संवर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों को देय धन राशि का भुगतान नहीं किया है और अनुदान प्राप्‍त अशासकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों को छठवें वेतनमान के अनुसार पेंशन, ग्रेच्‍युटी का भुगतान भी नहीं कि