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मध्य प्रदेश विधान सभा


प्रश्नोत्तर-सूची
फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र


शुक्रवार, दिनांक 11 मार्च, 2016


भाग-1
तारांकित प्रश्नोत्तर


 

( वर्ग 2 : सामान्य प्रशासन, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, संस्कृति, पर्यटन, प्रवासी भारतीय, नगरीय विकास एवं पर्यावरण, जल संसाधन, वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक और सांख्यिकी, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, जनसंपर्क, खनिज साधन)


नियम 25 के तहत लंबित प्रकरणों का निराकरण

1. ( *क्र. 5485 ) श्री आर.डी. प्रजापति : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर स्थित नगर एवं निवेश कार्यालय की स्‍थापना किस सन् में की गयी? (ख) पिछले 05 वर्षों में नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 36 के अंतर्गत कितने प्रकरण प्रारंभ किये गये, कितने प्रकरणों में न्‍यायालय में चालान प्रस्‍तुत किये गये एवं उनमें क्‍या निराकरण हुआ? (ग) म.प्र. भूमि विकास नियम 1984 के नियम 25 के अंतर्गत जारी की गयी अनुज्ञा को निरस्‍त करने के लिये क्‍या आधार है? (घ) संचालनालय एवं जिला कार्यालय छतरपुर में नियम 25 के कितने प्रकरण लंबित हैं? यदि लंबित हैं, तो कब से और इनका निराकरण कब तक एवं किसके द्वारा किया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) छतरपुर स्थित नगर एवं निवेश कार्यालय की स्थापना वर्ष 1999 में की गई। (ख) पिछले पाँच वर्षों में म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 36 के अंतर्गत अप्राधिकृत विकास करने के कारण अधिनियम की धारा 37 (1) के अंतर्गत 23 प्रकरण प्रारंभ किये गये। न्यायालय में एक भी प्रकरण का चालान प्रस्तुत नहीं किया गया है। (ग) म.प्र. भूमि विकास नियम 1984 निरसित होकर वर्तमान में म.प्र. भूमि विकास नियम 2012 प्रभावशील है। नियम 25 के अनुसार अनुज्ञा का प्रतिसंहरण ऐसी स्थिति में किया जाता है, जब प्राधिकारी के पास यह विश्वास करने का कारण हो कि ऐसी अनुज्ञा मिथ्या कथन अथवा किसी सारवान तथ्य के दुर्व्यपदेशन के आधार पर प्राप्त की गई हो अथवा अनुज्ञा में अधिरोपित शर्तों का उल्लंघन किया गया हो अथवा अधिनियम अथवा उसके अधीन निर्मित नियमों के उपबंधों का प्रेक्षण नहीं किया गया हो। (घ) संचालनालय एवं जिला कार्यालय छतरपुर में नियम 25 के तहत एक प्रकरण लंबित है। माह अगस्त 2015 से लंबित है। इसका निराकरण कलेक्टर, छतरपुर से भूमि स्वामित्व संबंधी जाँच प्रतिवेदन प्राप्त होने के पश्चात् संचालक, नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा किया जावेगा।

अनुबंधानुसार राशि का भुगतान

2. ( *क्र. 3670 ) श्रीमती पारूल साहू केशरी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सागर जिला अंतर्गत एस्‍सेल विद्युत वितरण कपंनी को शासन को करोड़ों रूपया देना बकाया है? प्रश्‍न दिनांक तक एस्‍सेल विद्युत वितरण कंपनी को कुल कितनी राशि सरकार को विभिन्‍न मदों में अनुबंध अनुसार देना बाकी है? (ख) क्‍या एस्‍सेल विद्युत वितरण कंपनी सागर द्वारा शासन को लगातार नियमित भुगतान नहीं किया जा रहा है और इससे अनुबंध की किन-किन शर्तों का लगातार उल्‍लंघन हो रहा है? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में अगर लगातार अनुबंध की शर्तों का उल्‍लंघन करने पर शासन द्वारा अनुबंध निरस्‍त किया जाता है अथवा कंपनी कार्य छोड़ देती है, तो उपभोक्‍ताओं की सुरक्षा निधि की जवाबदेही किसकी होगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) मेसर्स एस्‍सेल विद्युत वितरण (सागर) प्रा.लि. (वितरण फ्रेंचायजी) को म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा जारी की गई मंथली इनवाईस (एम.आई.) तथा पूरक इनवाइस (एस.आई.) के मद में दिनांक 22.02.2016 की स्थिति में राशि रू. 23,00,56,789/- का भुगतान करना बाकी है। भुगतान हेतु अनुबंध में निहित शर्तों की कंडिका 10.2 के तहत् लंबित बकाया राशि पर पेनाल्‍टी अधिरोपित की जा रही है। इसके अतिरिक्‍त मेसर्स एस्‍सेल विद्युत वितरण (सागर) प्रा.लि. द्वारा पुन‍रीक्षित पेमेंट सिक्‍योरिटी रू. 17.28 करोड़ जमा करना भी बाकी है। (ख) जी हाँ, मेसर्स एस्‍सेल विद्युत वितरण (सागर) प्रा.लि. द्वारा म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड को किश्‍तों में कुल देय राशि से कम का भुगतान किया जा रहा है। इससे अनुबंध की कंडिका 10.1, 23.2, 23.4 एवं 35.1 में निहित प्रावधानों का उल्‍लंघन हो रहा है। (ग) उपभोक्‍ताओं की सुरक्षा निधि की जवाबदेही म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड की रहेगी। 

जमुनिया में जलाशय की स्‍वीकृति

3. ( *क्र. 5483 ) श्री नथनशाह कवरेती : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या छिंदवाड़ा जिले के विधानसभा क्षेत्र जुन्‍नारदेव अंतर्गत घोघरीढाना ग्राम पंचायत जमुनिया में जलाशय की स्‍वीकृति प्रदान की गई है? यदि हाँ, तो स्‍वीकृति के लिए किस-किस विभाग की अनुमति प्राप्‍त की जाती है? क्‍या किसी विभाग की अनु‍मति शेष है? यदि हाँ, तो किस विभाग की और क्‍यों? (ख) क्‍या शासन प्रश्‍नांश (क) के प्रकाश में समस्‍त कार्यवाही पूर्ण कर जलाशय को दी गई स्‍वीकृति उपरांत कार्य पूर्ण करेगा? यदि हाँ, तो वर्ष एवं कार्य करने की समय-सीमा बतावें? (ग) उक्‍त जलाशय के निर्माण में बाधा डालने के लिए कौन-कौन अधिकारी/कर्मचारी दोषी हैं? उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही की जायेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। परियोजना से वनभूमि प्रभावित होने की दशा में भारत-सरकार से वन भूमि की अनुमति प्राप्‍त करना आवश्‍यक होता है। वन विभाग की अनुमति भारत-सरकार से प्राप्‍त नहीं हुई है। (ख) जी नहीं। परियोजना की लागत निर्धारित वित्‍तीय मापदण्‍ड से बहुत अधिक होने के कारण परियोजना असाध्‍य हो गई है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं। (ग) उक्‍त '''' एवं '''' उत्‍तर के प्रकाश में किसी अधिकारी के दोषी होने की स्थिति नहीं है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होता है।

सड़क के मध्‍य लगे विद्युत पोलों की शिफ्टिंग

4. ( *क्र. 5464 ) श्री संजय पाठक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या नगर निगम कटनी में सड़कों पर विद्युत पोलों के कारण यातायात बाधित हो रहा है तथा पीरपाबा से चाका रोड के निर्माण के समय सड़क के बीच में आये विद्युत पोलों को सड़क के कि‍नारे प्रतिस्‍थापित किया गया है? (ख) यदि प्रश्‍नांश (क) हाँ तो बस स्‍टैण्‍ड से चाका एवं शहर के अंदर सड़कों पर विद्युत पोल जो आज भी लगे हैं, उन्‍हें कब तक हटाकर सड़क किनारे किया जायेगा? (ग) क्‍या बस स्‍टैण्‍ड के आगे स्‍कूल बस दुर्घटनाग्रस्‍त होने के बावजूद भी विद्युत पोलों को नहीं हटाया गया, जिसमें घटना के समय कई बच्‍चे घायल हुये थे? (घ) जब सड़क का निर्माण कार्य पूर्णता की ओर है, इसके बाद भी विद्युत पोल न हटाये जाने का कारण स्‍पष्‍ट करें तथा कब तक हटाये जायेंगे?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ, जी हाँ। (ख) जी हाँ, बस स्‍टैण्‍ड से नाका तक के पोल हटाने की कार्यवाही प्रचलित है, मिशन चौक से बस स्‍टैण्‍ड तक विद्युत पोल हटा दिये गये हैं। शहर के अंदर अन्य मार्गों के पोल हटाने की कार्यवाही प्रचलित है। समय-सीमा बताना संभव नहीं है। (ग) बस दुर्घटना का कारण विद्युत पोल नहीं थे। उत्‍तरांश '''' अनुसार कार्यवाही प्रचलित है। (घ) कार्यवाही प्रचलित है। विद्युत खम्‍बों को सड़क योजना का कार्य किये जाने के पूर्व हटाया जाना सुनिश्चित किया जावेगा। समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

रीवा जिलांतर्गत फीडर सेपरेशन का कार्य

5. ( *क्र. 4498 ) पं. रमाकान्‍त तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या त्‍योंथर एवं जवा तहसील जिला रीवा में फीडर सेपरेशन का कार्य प्रारंभ हुआ और आज दिनांक तक अधूरा है? (ख) यदि हाँ, तो यह बतायें कि त्‍योंथर एवं जवा तहसील जिला रीवा के कितने फीडरों के लिये फीडर सेपरेशन कार्य प्रारंभ हुआ था, कितने फीडरों में सेपरेशन का कार्य पूर्ण हुआ है, शेष कार्य क्‍यों बंद हैं? (ग) उपरोक्‍त अधूरे कार्य कब तक पूरा करायेंगे? (घ) कार्य पूरा न होने में दोषी कौन हैं? दोषियों के खिलाफ क्‍या कार्यवाही की जायेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। (ख) रीवा जिले के अंतर्गत त्‍यौंथर एवं जवा तहसीलों में 11 के.व्‍ही. के 33 फीडरों के विभक्तिकरण का कार्य प्रारंभ हुआ था, जिसमें से 10 फीडरों का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। उक्‍त कार्य टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु अवार्ड पूर्व में मेसर्स. जी.ई.टी. पॉवर लिमिटेड, चेन्‍नई को दिया गया था, किन्‍तु कार्य की प्रगति संतोषप्रद नहीं पाये जाने पर उक्‍त अवार्ड निरस्‍त कर पुन: निविदा जारी कर शेष 23 फीडरों के कार्य हेतु कार्यादेश मेसर्स विंध्‍या टेलीलिन्‍कस लिमिटेडनई दिल्‍ली को दिनांक 05.05.2015 को जारी किया गया है। उक्‍त शेष 23 फीडरों का कार्य वर्तमान में प्रगति पर है। (ग) ठेकेदार एजेंसी से किये गये अनुबंध की शर्तों के अनुसार उक्‍त शेष कार्य दिसम्‍बर 2016 तक कार्य पूर्ण होना है। (घ) प्रश्‍नाधीन कार्य पूर्ण नहीं करने के लिये दोषी ठेकेदार एजेंसी मेसर्स जी.ई.टी. पॉवर लिमिटेड, चेन्‍नई का अवार्ड निरस्‍त कर दिया गया है तथा ठेके की शर्तों के अनुसार लायबिलिटी निर्धारित कर वसूली की कार्यवाही की जा रही है। 

घट्टिया तहसील में खदानों की नीलामी

6. ( *क्र. 3015 ) श्री सतीश मालवीय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्‍जैन जिले की घट्टिया विधानसभा क्षेत्र में कितनी चिन्हित खदानें हैं, इनमें से 01 अप्रैल 2013 से प्रश्‍न दिनांक तक कितनी खदानों (रेत, मुरम, गिट्टी, पत्‍थर आदि) की नीलामी की गई एवं कितना राजस्‍व प्राप्‍त किया गया? कितनी खदानों का सीमांकन किया गया? खदानों के नाम तथा किन व्‍यक्तियों द्वारा खदान ली गई? उनके नाम सहित सूची उपलब्‍ध करावें। (ख) क्‍या नीलाम की गई खदानों में से उत्‍खनन का कार्य नीलामी के निर्धारित रकबे व सर्वे नंबर से अधिक दूसरे सर्वे नंबर एवं रकबे में अवैध उत्‍खनन किया जा रहा है। इस संबंध में विभाग द्वारा कहाँ किस अधिकारी द्वारा निरीक्षण किया गया? निर्धारित रकबे से अधिक रकबे के उत्‍खनन के कितने प्रकरण बनाये गये और कितनी राशि वसूली की गई? शासन इस पर क्‍या कार्यवाही करेगा? (ग) क्‍या घट्टिया विधान सभा क्षेत्र में भारी मात्रा में रेती, मुरम, हार्ड मुरम एवं गिट्टी का भारी मात्रा में अवैध उत्‍खनन एवं अवैध भंडारण किया जा रहा है? विगत 01 जनवरी 2015 से 01 जनवरी 2016 तक अवैध उत्‍खनन एवं अवैध भंडारण के कितने प्रकरण बनाये गये? किस-किस व्‍यक्ति या संस्‍था पर कार्यवाही की गई? कितनी राशि की वसूली की गई? अवैध उत्‍खनन एवं अवैध भंडारण के संबंध में विभाग द्वारा अवैध उत्‍खनन रोकने की आगामी क्‍या कार्ययोजना है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नाधीन जिले की घट्टिया विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कुल 43 नीलाम खदानें चिन्हित हैं। प्रश्‍नांकित अवधि में कोई खदान नीलाम नहीं की गई है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) प्रश्‍नांश '' में दिये उत्‍तर अनुसार चूंकि खदानें नीलाम नहीं की गई हैं, अत: शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। खनिज के अवैध उत्‍खनन एवं अवैध भंडारण के प्रकरण प्रकाश में आने पर नियमानुसार कार्यवाही की जाती है। प्रश्‍नाधीन अवधि में दर्ज किये गये अवैध उत्‍खनन तथा अवैध भंडारण के प्रकरणों की प्रश्‍नानुसार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट में दर्शित है। दर्शित जानकारी अनुसार यह समस्‍त प्रकरण निराकरण हेतु प्रचलित हैं। अत: वर्तमान में राशि वसूल किये जाने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। जिले में पदस्‍थ अमले द्वारा जिले में सतत् निगरानी की जाती है। प्रश्‍नानुसार प्रकरण प्रकाश में आने पर कार्यवाही की जाती है।

परिशिष्ट - ''एक''

अधिकारियों के विरूद्ध आर्थिक अपराध के दर्ज प्रकरण

7. ( *क्र. 4425 ) श्री गिरीश गौतम : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या अनुसंधान एजेंसी आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ द्वारा बाणसागर परियोजना में हुए भ्रष्‍टाचार के लिये बाणसागर एवं गंगा कछार के अधिकारियों के विरूद्ध भा.द.वि. एवं भ्रष्‍टाचार निवारण अधिनियम के अंतर्गत अपराध कायम किया गया है? अपराध क्रमांक धारा एवं सभी आरोपित अधिकारियों का नाम, पद सहित विवरण देवें। (ख) क्‍या ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. द्वारा बाणसागर परियोजना के अधिकारियों, जिनके विरूद्ध (प्रकरण पंजीबद्ध हैं) अभियोजन चलाने के लिये अभियोजन स्‍वीकृति‍ हेतु कई प्रस्‍ताव भेजे गये? यदि हाँ, तो कब-कब अभियोजन स्‍वीकृति हेतु प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए तथा किनके विरूद्ध अभियोजन स्‍वीकृति‍ दी गयी? विवरण नाम, पद सहित बताएं और जिनके विरूद्ध प्रस्‍ताव दिये जाने के बाद अभियोजन की स्‍वीकृति‍ नहीं दी गयी है? अभियोजन स्‍वीकृति‍ नहीं दिये जाने का कारण बताएं। (ग) ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. द्वारा वांछित अभियोजन स्‍वीकृति‍ कब तक प्रदान कर दी जायेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ख) जी हाँ। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'' एवं '' अनुसार है। अभियोजन स्‍वीकृति के लंबित प्रकरण परीक्षण में हैं। (ग) समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

नीलामी रहित रेत खदानों की विधिवत नीलामी

8. ( *क्र. 4333 ) श्री जयवर्द्धन सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या गुना जिले में शासन द्वारा ग्राम पंचायतों को नि:शुल्‍क रेत उपलब्‍ध कराने के लिये कोई व्‍यवस्‍था की गई है? यदि हाँ, तो कृपया नियमों की प्रति उपलब्‍ध करावें? (ख) वित्‍तीय वर्ष 2015-16 में गुना जिले की कितनी ग्राम पंचायतों को नि:शुल्‍क रेत उपलब्‍ध कराई गई है? (ग) शासन द्वारा नीलामी रहित रेत खदानों की विधिवत नीलामी कब तक की जायेगी? क्‍या इसके लिये कोई प्रक्रिया प्रारंभ की गई है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) मध्‍यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 के नियम 3 (3) में एवं प्रारूप-अठारह की कंडिका का 02 के परन्‍तुक में प्रश्‍नानुसार प्रावधान सभी ग्राम पंचायतों हेतु किये गये हैं। उक्‍त नियमों की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट पर दर्शित है। (ख) वित्‍तीय वर्ष 2015-2016 में गुना जिले की किसी भी ग्राम पंचायत को नि:शुल्‍क रेत उपलब्‍ध नहीं करायी गई है। (ग) नीलामी हेतु चिन्हित खदानों की नीलामी सतत् रूप से की जा रही है। इसकी प्रक्रिया पूर्व से प्रारंभ एवं वर्तमान में निरंतर है।

नवीन सिंचाई पंप कनेक्‍शनों का प्रदाय

9. ( *क्र. 4813 ) श्री रामसिंह यादव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शिवपुरी जिले के बदरवास वितरण केंद्र के अंतर्गत सिंचाई पंपों के नवीन विद्युत कनेक्‍शनों हेतु अगस्‍त 2014 से दिसंबर 2015 तक राशि जमा करायी गयी है? यदि हाँ, तो किन-किन की कहाँ-कहाँ की कितनी-कितनी राशि कब-कब जमा करायी गई है? (ख) क्‍या जिन व्‍यक्तियों ने नवीन सिंचाई पंप कनेक्‍शनों हेतु राशि जमा करायी है? उनके द्वारा आवेदन प्रस्‍तुत किए गए हैं? यदि हाँ, तो कितने लोगों के द्वारा आवेदन प्रस्‍तुत किए गए? इनके प्राक्कलन कब किनके द्वारा स्‍वीकृत किए गए? यदि प्राक्कलन स्‍वीकृत नहीं हुए, तो राशि किस आधार पर जमा करायी गई? (ग) क्‍या जिन व्‍यक्तियों से नवीन सिंचाई पंप कनेक्‍शन हेतु राशि हजारों में वसूली गई और उन्‍हें रसीद केवल 506 रूपयें की दी गई, जिसकी शिकायतें प्राप्‍त हुईं थीं? यदि हाँ, तो कौन-कौन सी शिकायतें प्राप्‍त हुईं थीं? जिन आवेदकों से रसीद कम की देकर राशि अधिक ली गई है, तो उस पर क्‍या कार्यवाही हुई? क्‍या जिन व्‍यक्तियों ने नवीन सिंचाई पंप कनेक्‍शन हेतु राशि जमा कराई है, उनमें से कितनों को कनेक्‍शन प्रदान कर दिए गए हैं? कितने शेष हैं क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ, शिवपुरी जिले के बदरवास वितरण केन्‍द्र के अंतर्गत सिंचाई पंपों के नवीन स्‍थाई विद्युत पंप कनेक्‍शनों हेतु अगस्‍त 2014 से दिसम्‍बर 2015 तक 499 कृषकों द्वारा राशि जमा कराई गई है, जिसकी प्रश्‍नाधीन चाही गई आवेदकवार, ग्रामवार जमा कराई गई राशि एवं राशि जमा कराने की दिनांक सहित जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र एवं अनुसार है। (ख) जी हाँ, सभी 499 कृषकों द्वारा नवीन सिंचाई पम्‍प कनेक्‍शन के लिए आवेदन प्रस्‍तुत किये गये हैं। 171 नवीन सिंचाई पंप कनेक्‍शनों के प्राक्‍कलन उप महाप्रबंधक/कार्यपालन यंत्री द्वारा स्‍वीकृत किये गये हैं, जिनकी स्‍वीकृति की दिनांक की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है। 328 कृषकों के प्रकरणों में लाईन विस्‍तार कार्य आवश्‍यक नहीं होने के कारण प्राक्‍कलन स्‍वीकृत नहीं किये जाकर उनकी राशि प्रबंधक/सहायक यंत्री द्वारा भार अनुमोदन स्‍वीकृति के आधार पर जमा कराई गई है, जिसकी कार्योत्‍तर स्‍वीकृति उपमहाप्रबंधक (संचालन/संधारण) शिवपुरी द्वारा प्रदान की गई है। भार अनुमोदन वाले उक्‍त प्रकरणों का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है। (ग) जी नहीं, ऐसी कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में कोई कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता। जिन आवेदकों ने नवीन सिंचाई पंप कनेक्‍शन हेतु राशि जमा कराईं हैं, उन सभी आवेदकों को कनेक्‍शन प्रदान कर दिये गए हैं।

लघु सिंचाई परियोजनाओं की स्‍वीकृति

10. ( *क्र. 5021 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या राजगढ़ जिले के विधानसभा क्षेत्र ब्‍यावरा के अंतर्गत पातलापानी तालाब, भगोरा तालाब, खेजड़ामहाराजा तालाब, जामी तालाब, भोजपुरिया बैराज, सुन्‍दरपुरा तालाब, बांसखों तालाब, मोरीखों तालाब, लुहारी तालाब, सोनकच्‍छ तालाब एवं कुण्‍डीखेड़ा तालाब लघु सिंचाई योजनाएं विभाग की सर्वेक्षित योजनाएं हैं? यदि हाँ, तो क्‍या उक्‍त सभी सर्वेक्षित योजनाएं साध्‍य होकर कम लागत में अत्‍यधिक क्षेत्र सिंचित करने वाली योजनाएं हैं? (ख) क्‍या शासन विधानसभा क्षेत्र ब्‍यावरा की महत्‍वपूर्ण लघु सिंचाई परियोजनाओं की स्‍वीकृ‍ति प्रदान करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) मोरिखो परियोजना को छोड़कर प्रश्‍नाधीन सभी परियोजनाएं सर्वेक्षित हैं। जी नहीं। प्रश्‍नाधीन सर्वेक्षित सभी परियोजनाओं का डूब क्षेत्र सैंच्‍य क्षेत्र की तुलना में अत्‍याधिक होने से परियोजनाएं तकनीकी आधार पर साध्‍य नहीं हैं। (ख) प्रश्‍नाधीन विधान सभा क्षेत्र में भोजपुलिया बैराज का साध्‍यता आदेश दिनांक 07.01.2016 को जारी किया गया है। डी.पी.आर. अंतिम नहीं होने से परियोजना की स्‍वीकृति अथवा निर्माण के संबंध में निर्णय लेने की स्थिति नहीं आई है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

नरवर तहसील अंतर्गत अवैध रेत उत्‍खनन

11. ( *क्र. 5288 ) श्रीमती शकुन्‍तला खटीक : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या तहसील नरवर जिला शिवपुरी में अवैध रूप से संचालित रेत का उत्‍खनन ग्राम पंचायत खिरियासुनवई एवं ग्राम पंचायत जुझाई में 5 पनडुब्बियों एवं एल.एन.टी. मशीन (चैन) मशीन व 50-60 डम्‍फरों द्वारा बड़े पैमाने पर दिन-रात चल रहा है? इस समस्‍या को प्रश्‍नकर्ता विधायक द्वारा मौखिक रूप से तहसीलदार नरवर को अवगत कराया? परन्‍तु प्रश्‍न प्रस्‍तुत दिनांक तक कोई कारगर कदम नहीं उठाया गया है? (ख) क्‍या अवैध रेत उत्‍खननकर्ताओं द्वारा स्‍थानीय रहवासियों द्वारा विरोध करने पर बन्‍दूक की नोक पर रोके गये व एक-दो बार गोलियां चलाई गईं, जिससे ग्रामवासी भयभीत हो गये थे? (ग) यदि समय रहते अवैध खदानों को अतिशीघ्र नहीं रोका गया, तो खदानकर्ताओं के हौंसले बुलन्‍द होकर अवैध उत्‍खनन कार्य चलता रहेगा, जिससे शासन को करोड़ों रूपयों का नुकसान होगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नाधीन क्षेत्रों में समय-समय पर निरीक्षण किया जाता है, दिनांक 13.01.2016 को अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) करैरा द्वारा निरीक्षण के दौरान ग्राम खिरिया में लगभग 500 घन मीटर अवैध रूप से भंडारित रेत जब्‍त की गई है। इसके साथ दो ट्रेक्‍टर ट्राली, सात डम्‍पर और एक एल.एन.टी. मशीन जब्‍त की गई है। उक्‍त प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी करैरा के न्‍यायालय में विचाराधीन है। उक्‍त के अलावा प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में रेत का अवैध उत्‍खनन निरीक्षण के दौरान नहीं पाया गया है। प्रश्‍नानुसार प्रकरण में कार्यवाही की गई है। अत: कोई कदम न उठाये जाने संबंधी प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) प्रश्‍नानुसार कोई स्थिति अथवा घटना नहीं हुई है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जिले में समय-समय पर जाँच की जाती है। जाँच में खनिजों के अवैध उत्‍खनन परिवहन, भंडारण पाये जाने पर कार्यवाही की जाती है। जिले में खनिज राजस्‍व प्राप्‍त होता है। अत: राजस्‍व हानि जैसी कोई स्थिति नहीं है।

जनप्रतिनिधियों से प्राप्‍त पत्रों पर कार्यवाही

12. ( *क्र. 1769 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. शासन सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा जारी पत्र दिनांक 06 अगस्‍त 2012 एवं 27 नवम्‍बर 2015 के द्वारा माननीय सांसदों एवं विधायकों द्वारा लिखित पत्रों की पावती एवं पत्रों पर की गई कार्यवाही नियत समयावधि में देने, इन पत्रों के आवक-जावक की पंजी पृथक से संधारित करने एवं कार्यालय प्रमुखों द्वारा जनप्रतिनिधियों से प्राप्‍त पत्रों की मासिक समीक्षा के निर्देश दिये गये हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) के तहत प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य द्वारा कटनी जिले के शासकीय जिला स्‍तरीय, ब्‍लॉक स्‍तरीय, तहसील स्‍तरीय एवं अन्‍य शासकीय कार्यालयों एवं विभागों को जनवरी 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक कब-कब पत्र लिखे गये तथा पत्रों पर संचालित एवं की गई कार्यवाही से कब-कब अवगत कराया गया? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के तहत शासकीय अधिकारियों/कार्यालयों को लिखित पत्रों पर संबंधितों द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई, कितने पत्रों पर किन-किन कारणों से कार्यवाही लंबित है, निराकृत पत्रों का क्‍या-क्‍या निराकरण किया गया? (घ) प्रश्‍नांश (क) से (घ) के परिप्रेक्ष्‍य में शासनादेश का उल्‍लंघन कर, सदस्‍य म.प्र. विधान सभा के द्वारा जनहित में लिखित पत्रों पर नियमानुसार कार्यवाही ना करने की कार्यशैली की सक्षम प्राधिकारी से जाँच करवाये जाने के आदेश कर समुचित कार्यवाही की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक, यदि नहीं, तो क्‍यों?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) उत्‍तरांश '''' के प्रकाश में जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) उत्‍तरांश '''' से '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

सूखाग्रस्‍त तहसीलों में बिजली बिलों की वसूली पर रोक

13. ( *क्र. 5039 ) श्री गिरीश भंडारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा प्रदेश में घोषित सूखाग्रस्‍त तहसीलों के ग्रामों में जहां फसलों में 50% से ज्‍यादा नुकसान हुआ, वहां बकाया बिजली बिलों की राशि वसूल नहीं करने की घोषणा की थी? (ख) प्रश्‍न की कंडिका (क) की उपलब्‍ध जानकारी अनुसार न‍रसिंहगढ़ विधान सभा क्षेत्र में ऐसे कितने ग्राम हैं, जहां फसलों में 50% ज्‍यादा नुकसान हुआ है? ग्रामवार जानकारी देवें। (ग) प्रश्‍न की कंडिका (ख) की उपलब्‍ध जानकारी अनुसार क्‍या इन ग्रामों में मा. मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा अनुसार बकाया बिजली बिलों की वसूली नहीं की गई या ऊर्जा विभाग द्वारा मुख्‍यमंत्री जी की घोषणा को दर किनार करते हुए ग्रामों से ट्रांसफार्मर उतारे गये, किसानों के तार काट दिये गये? यदि हाँ, तो संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों पर क्‍या कार्यवाही की जावेगी? कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। (ख) कलेक्‍टर एवं तहसीलदार कार्यालय से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्रांतर्गत आने वाले नरसिंहगढ़ एवं पचौर तहसील के क्रमश: 200 एवं 64, इस प्रकार कुल 264 ग्रामों में 50 प्रतिशत से ज्‍यादा फसल का नुकसान हुआ है। उक्‍त ग्रामों की तहसीलवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) उत्‍तरांश '' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍नाधीन सूखाग्रस्‍त ग्रामों में माननीय मुख्‍यमंत्रीजी की घोषणा अनुसार जारी राज्‍य शासन के आदेश दिनांक 22.12.2015 के परिपालन में ऐसे किसान जिनकी 50 प्रतिशत से अधिक फसल के क्षतिग्रस्‍त होने की सूची कलेक्‍टर द्वारा दी गई है, उनके 31 मार्च 2016 तक कृषि पंप के विद्युत बिल की बकाया राशि की वसूली की कार्यवाही स्‍थगित रखी गई है। अत: किसी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता।

नर्मदा-सीप लिंक परियोजना का क्रियान्‍वयन

14. ( *क्र. 4567 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सीहोर जिले में नर्मदा नदी और सीप नदी की लिंक परियोजना का कार्य किया जा रहा है? यदि हाँ, तो कार्य करने वाली कंपनी परियोजना लागत और परियोजना की वर्तमान स्थिति का ब्‍यौरा देवें? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार क्‍या परियोजना के तहत भूमिगत नहर का निर्माण किया जा रहा है? यदि हाँ, तो कितनी लंबाई (दूरी) की नहर बनाई जा रही है और कार्य की स्थिति क्‍या है? (ग) परियोजना के तहत भूमिगत नहर निर्माण के लिए विस्‍फोटक का उपयोग किया जा रहा है? यदि हाँ, तो भूमिगत नहर निर्माण क्षेत्र व उसके आसपास निवासरत ग्रामीणों की सुरक्षा के क्‍या इंतजाम किए गए हैं?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) से (ग) जी नहीं। अत: शेष प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

संसद सदस्‍यों एवं विधायकों के पत्रों पर कार्यवाही

15. ( *क्र. 440 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. शासन सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा माननीय संसद सदस्‍यों एवं विधायकों के पत्रों के संबंध में पत्र प्राप्ति तथा की गई कार्यवाही से अवगत कराने के निर्देश कब-कब कलेक्‍टरों को जारी किए गए? (ख) उपरोक्‍त प्रश्‍नांश के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍नकर्ता द्वारा 01 सितम्‍बर, 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक जिला कलेक्‍टर भिण्‍ड, मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत भिण्‍ड, कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग भिण्‍ड, कार्यपालन यंत्री ग्रामीण विकास विभाग एवं प्रबंधक मध्‍यप्रदेश मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भिण्‍ड को लिखे कौन-कौन से पत्र कब-कब प्राप्‍त हुए एवं उन पत्रों के तारतम्‍य में क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? पत्र प्राप्ति एवं पत्रों पर की गई कार्यवाही के संबंध में किए गए पत्राचार की प्रतियां उपलब्‍ध कराएं? (ग) क्‍या सामान्‍य प्रशासन विभाग, म.प्र. शासन एवं जिला योजना समिति भिण्‍ड के निर्णय की अवहेलना करने वाले कलेक्‍टर भिण्‍ड एवं अन्‍य जिम्‍मेदार अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी? यदि नहीं, तो क्‍यों?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) उत्‍तरांश '''' के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

फीडर सेपरेशन कार्य को पूर्ण किया जाना

16. ( *क्र. 1778 ) श्री सुदेश राय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विकासखण्‍ड सीहोर में कुल कितने फीडर का सेपरेशन पूर्ण हो चुका है और कितने का बाकी है और जो शेष हैं, उनको पूर्ण होने में कितना समय लगेगा एवं उक्‍त कार्य के लिये निर्माण एजेंसी कौन रहेगी? (ख) वर्ष 2015-16 सीहोर में सिंगल लाईन कनेक्‍शन कहाँ-कहाँ प्रस्‍तावित हैं और उनको पूर्ण होने में कितना समय लगेगा एवं उक्‍त कार्य के लिये निर्माण एजेंसी कौन रहेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) विकासखण्‍ड सीहोर में कुल 33 फीडरों के सेपरेशन का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा 16 फीडरों का कार्य शेष है। उक्‍त शेष फीडरों के सेपरेशन का कार्य मई 2016 तक पूर्ण करने के प्रयास किये जा रहे हैं। उक्‍त कार्य के लिए ठेकेदार एजेंसी मेसर्स यू.बी.टेक. प्रा.लि. फरीदाबाद को कार्यादेश जारी किया गया है। (ख) वर्तमान में सिंगल पाइंट (सिंगल लाईन) कनेक्‍शन देने का कोई प्रावधान नहीं है। तथापि सीहोर जिले के अंतर्गत फीडर विभक्तिकरण योजना में ए.पी.एल. एवं बी.पी.एल. श्रेणी के 5222 घरेलू कनेक्‍शन दिये गये हैं एवं 16771 कनेक्‍शन वर्ष 2015-16 में प्रदाय किये जाने हेतु शेष हैं। उक्‍त कार्य के लिए मेसर्स यू.बी.टेक. प्रा.लि. फरीदाबाद को कार्यादेश जारी किया गया है। कार्य मई 2016 तक पूर्ण कराने के प्रयास किये जा रहे हैं। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजनांतर्गत सीहोर जिले में 14476 बी.पी.एल. श्रेणी के नि:शुल्‍क कनेक्‍शन प्रस्‍तावित हैं, जिनमें से राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में 502 कनेक्‍शन वर्ष 2015-16 में अद्यतन स्थिति में दिए गये हैं। योजनांतर्गत कार्य हेतु कार्यादेश मेसर्स ईरा-इन्‍फ्रा नोएडा को जारी किया गया था। कार्य समय-सीमा में पूर्ण नहीं करने के कारण मेसर्स ईरा-इन्‍फ्रा नोएडा का कान्‍ट्रेक्‍ट टर्मिनेट कर दिया गया है। शेष कार्य टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु निविदा कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। अवार्ड जारी होने के पश्‍चात् ही कार्य पूर्ण होने की समय-सीमा बताया जाना संभव होगा। 

अवैध उत्‍खननकर्ताओं के विरूद्ध दर्ज प्रकरणों पर कार्यवाही

17. ( *क्र. 4096 ) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मुरैना तहसील के ग्राम पड़ावली की भूमि सर्वे क्रमांक 1104, 1103, 1123, 1105 से माफिया लगातार अवैध उत्‍खनन कर रहे हैं? खनिज विभाग द्वारा लंबे समय से अनदेखी कर माफियाओं को प्रोत्‍साहित किया जा रहा है, शासन द्वारा अभी तक क्‍या कार्यवाही की गई? वर्ष 2014, 2015 की जानकारी दी जावे। (ख) क्‍या अरूण शर्मा द्वारा सर्वे नं. 1105 जो तालाब का किनारा है तथा सर्वे नं. 1123 जिसका किसी को ठेका नहीं होने की शिकायत की गई थी, लेकिन शिकायत के बावजूद भी संबंधितों के खिलाफ कार्यवाही नहीं करना विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत प्रदर्शित करता है? क्‍या शासन द्वारा ग्राम पड़ावली के किस-किस सर्वे के नंबर पर पत्‍थर निकालने की लीज़ दी गई है? सर्वे नंबर सहित पूर्ण जानकारी दी जावें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र पर वर्ष 2014 एवं वर्ष 2015 में अवैध उत्‍खनन के 04 प्रकरण दर्ज कर सक्षम न्‍यायालय में निराकरण हेतु प्रेषित किये गये हैं। प्रकरण का विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' में दर्शित है। (ख) जी हाँ। संबंधित शिकायत की जाँच खनिज विभाग एवं राजस्‍व विभाग द्वारा संयुक्‍त रूप से की गई है एवं अवैध उत्‍खननकर्ताओं के विरूद्ध प्रकरण दर्ज किये गये हैं, जिसका विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' में दर्शाया गया है। प्रश्‍नांश की शेष जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' में दर्शित है।

परिशिष्ट - ''दो''

ताप विद्युत गृहों का पर्यावरण क्‍लीयेरंस

18. ( *क्र. 4169 ) श्री अजय सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या पावर जनरेटिंग कंपनी के सभी ताप विद्युत गृहों की प्रत्‍येक इकाई का पर्यावरण क्‍लीयरेंस का रिन्‍यूवल दिया जाता है एवं पावर जनरेटिंग कंपनी को पावर हाउस परिसर में सघन पेड़ एक्‍सपर्ट एजेंसी या विभाग में पेड़ लगाने के विशेषज्ञ यदि उपलब्‍ध हैं, उनसे कराने हेतु निर्देशित किया जाता है? क्‍या सभी ताप विद्युत गृहों में ऑक्‍सीजन, कार्बन डाई ऑक्‍साईड एवं अन्‍य गैसों का क्‍या मापदण्‍ड है एवं हकीकत में क्‍या उपलब्‍धता है? (ख) म.प्र. पावर जनरेटिंग कंपनी में कितने स्‍थान पर ताप विद्युत गृह हैं। क्‍या सभी ताप विद्युत गृह के सीवर ट्रीटमेंट प्‍लांट के पानी का उपयोग कॉलोनी में किया जाता है या सीधे नदी नाले में बहाया जा रहा है? यदि ऐसा हो रहा है तो क्‍या नेशनल ग्रीन ट्रि‍ब्‍यूनल का उल्‍लंघन नहीं हो रहा है? क्‍या म.प्र. प्रदूषण मंडल रोक लगाकर म.प्र. पावर जनरेटिंग कंपनी के अधिकारियों पर कार्यवाही करेगा। (ग) सैलो द्वारा राखड़ बेचने पर ताप विद्युत गृहों की आमदनी से प्रदूषण बचाने पर ग्रीन बेल्‍ट विकसित करने हेतु ताप विद्युत गृहवार वर्षवार कितनी-कितनी राशि खर्च की गयी है? खर्च न होने पर प्रदूषण मण्‍डल क्‍या कार्यवाही करेगा।

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं। ताप विद्युत गृहों की विस्तारित एवं अन्य नवीन स्थापित इकाईयों हेतु भारत शासन, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा एक बार पर्यावरण क्लीयरेंस उनकी स्थापना के पूर्व दिया जाता है। तथापि सभी ताप विद्युत गृहों के संचालन हेतु म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सम्मति प्रदान की जाती है, जिसका प्रतिवर्ष रिन्यूवल (नवीनीकरण) करवाया जाता है। वर्तमान में म.प्र.पॉ.ज.कं.लि. के सभी ताप विद्युत गृहों हेतु सम्मतियाँ उपलब्ध हैं। जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृह परिसरों में एजेंसी या विभाग में उपलब्ध विशेषज्ञों के माध्यम से सघन वृक्षारोपण एक सतत प्रक्रिया है, जिसके परिपालन में सभी ताप विद्युत गृहों के परिसरों में एवं आस-पास सघन वृक्षारोपण किया गया है। ताप विद्युत गृहों से ऑक्सीजन एवं कार्बन डाई आक्साईड उत्सर्जन हेतु मापदण्ड निर्धारित नहीं किये गये हैं। तथापि सल्फर डाई आक्साईड एवं नाईट्रोजन आक्साईड गैसों के उत्सर्जन हेतु भारत शासन, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा गजट अधिसूचना दिनांक 7 दिसम्बर 2015 के माध्यम से वैधानिक मापदण्ड घोषित किये गये हैं, जिनकी जानकारी तथा लागू होने की तिथि निम्नानुसार है, ताप विद्युत गृह जो दिनांक 31-12-2003 के पूर्व स्थापित किये गये हैं :-

गैस का नाम

वैधानिक मानक
मि.ग्राम/एन.एम.3 में

लागू होने की तिथि

सल्फर डाई आक्साईड

600 (500 मे.वा. से कम क्षमता की इकाईयों हेतु)
200 (500
मे.वा. एवं अधिक क्षमता की इकाईयों हेतु)

गजट अधिसूचना जारी होने से दो वर्ष

नाइट्रोज़न आक्साईड

600

गजट अधिसूचना जारी होने से दो वर्ष

 

ताप विद्युत गृह जो दिनांक 01-01-2003 तथा 31-12-2016 के बीच स्थापित किये गये हैं :-

गैस का नाम

वैधानिक मानक
मि.ग्राम/एन.एम.3 में

लागू होने की तिथि

सल्फर डाई आक्साईड

600 (500 मे.वा. से कम क्षमता की इकाईयों हेतु)
200 (500
मे.वा. एवं अधिक क्षमता की इकाईयों हेतु)

गजट अधिसूचना जारी होने से दो वर्ष

नाइट्रोज़न आक्साईड

300

गजट अधिसूचना जारी होने से दो वर्ष

 

ताप विद्युत गृह जो दिनांक 01-01-2017 से स्थापित होना है :-

गैस का नाम

वैधानिक मानक
मि.ग्राम/एन.एम.3 में

लागू होने की तिथि

सल्फर डाई आक्साईड

100

स्थापना दिनांक से

नाइट्रोज़न आक्साईड

100

स्थापना दिनांक से

 

अधिसूचना की छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र क्रमांक-1 अनुसार है। उपरोक्त उल्लेखित अधिसूचना के जारी होने के पूर्व इन गैसों के उत्सर्जन हेतु कोई वैधानिक मापदण्ड उपलब्ध नहीं थे। उत्सर्जित गैसों में निहित आक्सीजन एवं कार्बन डाई आक्साईड गैस हेतु कोई मापदण्ड निर्धारित नहीं है, न ही इनका माप किया जाता है, तथापि सल्फर डाई आक्साईड एवं नाइट्रोज़न आक्साईड हेतु उपरोक्त घोषित वैधानिक मापदण्डों को म.प्र.पॉ.ज.कं.लि. के ताप विद्युत गृहों में यथा समय लागू किया जाना सुनिश्चित किया जावेगा। (ख) म.प्र. पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड में कुल चार स्‍थानों पर ताप विद्युत गृह स्‍थापित हैं। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह को छोड़कर सभी जगह सीवर ट्रीटमेंट प्‍लांट के पानी का उपयोग बगीचों में सिंचाई एवं वृक्षारोपण में किया जा रहा है। इनमें से से किसी भी जगह सीवर ट्रीटमेंट का पानी नदी नालों में नहीं बहाया जा रहा है। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में सीवर ट्रीटमेंट प्‍लांट निर्माणाधीन है तथा विद्युत गृह में वर्तमान में पर्याप्‍त संख्‍या में सोक-पिट वाले सेप्टिक टैंक क्रियाशील हैं। अत: किसी प्रकार की कार्यवाही का प्रश्‍न नहीं उठता है। (ग) म.प्र.पा.ज.कं.लि. के विभिन्न ताप विद्युत गृहों में से सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी, जिला-बैतूल के सैलों से राखड़ नि:शुल्क प्रदान की जा रही है, जबकि संजय गाँधी ताप विद्युत गृह, बिरसिंहपुर, जिला-उमरिया, अमरकंटक ताप विद्युत गृह, चचाई, जिला-अनूपपुर तथा श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह, डोंगलिया, जिला-खण्डवा के सैलों से राखड़ की बिक्री की जा रही है। राखड़ बिक्री से प्राप्‍त राशि के संबंध में भारत शासन पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, नई दिल्‍ली द्वारा फ्लाई ऐश के उपयोग हेतु दिनांक 03.11.2009 को जारी गजट अधिसूचना के पैरा क्रमांक-6 (पृष्‍ठ क्रमांक-8) के प्रावधानों के अनुसार ताप विद्युत गृहों द्वारा 100 प्रतिशत फ्लाई ऐश के उपयोग का लक्ष्‍य प्राप्‍त करने तक संबद्ध विद्युत गृह के सैलों से राखड बेचने पर प्राप्‍त राशि का उपयोग फ्लाई ऐश/उपयोगिता बढ़ाने से संबंधित अधोसंरचना विकास कार्यों एवं योजनाओं हेतु ही किया जाना है। अधिसूचना की छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र क्रमांक-2 के अनुसार है। अत: ताप विद्युत गृहों में सैलों से राखड़ बिक्री के मद में प्राप्‍त धन का उपयोग ग्रीन बेल्‍ट के लिए खर्च नहीं किया जा रहा है। उपरोक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण मण्‍डल द्वारा कोई कार्यवाही करने का प्रश्‍न ही उद्भूत नहीं होता। 

पेयजल संकट के निदान हेतु व्‍यय राशि

19. ( *क्र. 4746 ) श्री अनिल जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र निवाड़ी के अंतर्गत आने वाली नगर परिषद निवाड़ी, ओरछा एवं तरीचरकलां अंतर्गत पेयजल संकट दूर करने के लिए विभिन्‍न योजनाओं के तहत मदवार क्‍या-क्‍या कार्य किये जा रहे हैं तथा वित्‍तीय वर्ष में अब तक कितनी-कितनी राशि खर्च की जा चुकी है? योजनावार जानकारी दी जावे। (ख) क्‍या विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नगर परिषदों में पेयजल की गई लाईनें टूटी पड़ी हैं, जिसकी वजह से प्रदूषित पानी का वितरण किया जा रहा है? यदि हाँ, तो वार्डवार इन लाईनों को कब तक सुधार दिया जायेगा? (ग) पेयजल परिवहन के लिये नगर परिषदों के द्वारा क्‍या-क्‍या इंतजाम किये गये हैं?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जी नहीं। परन्‍तु समय-समय पर छोटी-मोटी टूट-फूट होती रहती है, जिसका नियमित संधारण कराया जाता रहता है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थि नहीं होता है। (ग) वर्तमान परिवेश में पेयजल परिवहन की आवश्‍यकता के दृष्टिगत की गई व्‍यवस्‍था का विवरण जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

परिशिष्ट - ''तीन''

अतिक्रमण हटाये बगैर सड़क का निर्माण

20. ( *क्र. 2758 ) श्री गोपाल परमार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या आगर नगर पालिका द्वारा विवेकानन्‍द कॉलोनी में जैन मंदिर के पास से पशुपतिनाथ मंदिर तक मुख्‍य मंत्री जी द्वारा की गई घोषणानुसार रोड बनाया गया? यदि हाँ, तो क्‍या न.पा. परिषद द्वारा रोड का चौड़ीकरण करने के लिए अवैध कब्‍जाधारियों को नोटिस दिया गया था? यदि हाँ, तो उसके बाद क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) क्‍या अतिक्रमण हटाये बगैर सड़क बना दी गई? यदि हाँ, तो अतिक्रमण क्‍यों नहीं हटाया गया। क्‍या शासन उन अधिकारी के खिलाफ कोई कार्यवाही करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? अतिक्रमण कब तक हटा लिया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। प्रस्‍तावित निर्माण स्‍थल पर कोई अतिक्रमण नहीं आने से स्‍वीकृत डी.पी.आर. के अनुसार सड़क का निर्माण कराया गया है। (ख) उत्‍तरांश '''' अनुसार। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

स्‍वच्‍छ भारत मिशन अंतर्गत शौचालय निर्माण

21. ( *क्र. 4336 ) श्री प्रहलाद भारती : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत नगरीय निकायों से घर-घर शौचालय निर्माण हेतु शासन ने कुल कितनी धनराशि इस वित्‍तीय वर्ष में स्‍वीकृत की है? ग्‍वालियर-चंबल संभाग की सभी निकायों की पृथक-पृथक जानकारी उपलब्‍ध करावें। (ख) ग्‍वालियर चंबल संभाग के कितने नगरीय निकायों में इस स्‍वीकृत राशि का उपयोग किया जा चुका है? निकायवार विवरण दें। (ग) क्‍या शौचालय निर्माण हेतु जारी निविदाओं में ठेकेदार रूचि नहीं ले रहे हैं? ग्‍वालियर-चंबल संभाग के कितने निकायों में इस कार्य की निविदायें एक से अधिक बार आमंत्रित की गयी हैं? ब्‍यौरा दें। (घ) क्‍या एक तरफ शौचालय निर्माण के लिये ठेकेदार रूचि नहीं ले रहे हैं, वहीं जिन निकायों में निविदाएं आ चुकी हैं, उन्‍हें नगरीय प्रशासन संचालनालय भोपाल, प्रशासकीय स्‍वीकृति नहीं दे रहा है? (ड.) ग्‍वालियर चंबल संभाग के ऐसे सभी निकायों की जानकारी उपलब्‍ध करावें, जिनकी निविदाएं नगरीय प्रशासन संचालनालय भोपाल में स्‍वीकृति के लिये लंबित हैं? निकायवार जानकारी उपलब्‍ध करावें। ये निविदायें कब भोपाल मुख्‍यालय में प्राप्‍त हुयी और जो लंबित हैं? उन्‍हें क्‍यों स्‍वीकृति से रोका गया है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) राशि रू. 162.75 करोड़। शेषांश की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) एवं (ग) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) जी नहीं। (ड.) निविदा आमंत्रित एवं निविदा स्‍वीकृत करने का अधिकार निकाय को होने से शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''चार''

न्‍यायालयीन निर्णय पर कार्यवाही

22. ( *क्र. 5414 ) श्री यादवेन्‍द्र सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विभाग द्वारा सतना जिले के सतना के जवाहर नगर मैदान में 1952 में जल संसाधन का कार्यालय खोलकर 5.50 एकड़ भूमि में बाउण्‍ड्री बनाकर कब्‍जा स्‍थापित किया था यदि हाँ, तो उक्‍त भूमि के अंश रकबा 2.82 एकड़ में विबिनी मुखर्जी को ए.डी.जे. कोर्ट द्वारा कब्‍जा दिलाये जाने के निर्देश दिये गये हैं? यदि हाँ, तो उक्‍त प्रकरण में समय पर शासन का पक्ष माननीय न्‍यायालय के समक्ष प्रस्‍तुत न करने हेतु विभाग ने किसे दोषी माना है तथा उनके विरूद्ध विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? क्‍या विभागीय अधिकारियों के कारण विभाग को करोड़ों रूपये का मुआवजा भुगतान करना पड़ेगा? यदि हाँ, तो शासन की हो रही राजस्‍व की क्षति का आंकलन कर बताएं? (ख) क्‍या गहिरानाला सतना में बाणसागर परियोजना के लिये 1979 में आ.न. 56 रकबा 17.50 एकड़ शासन द्वारा आवंटित कर बाणसागर कॉलोनी एवं कार्यालय का निर्माण कराया गया था? यदि हाँ, तो उक्‍त भूमि में लगभग 20 वर्ष बाद सुकरू मल्‍लाह अन्‍य के द्वारा दायर पत्र में विभाग द्वारा अपना पक्ष मान. न्‍यायालय में प्रस्‍तुत न कर पाने के कारण उक्‍त भूमि शासन के हाथ से जा रही है तो उसके लिये विभाग ने किसे जिम्‍मेदार माना है और उसके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही कर रहा है? (ग) क्‍या सतना जिले में पदस्‍थ अधि. ने सतना के भूमाफिया से पैसा लेकर जानबूझकर शासन का पक्ष सही नहीं रखा, जिसके कारण शासन को अरबों रूपये की क्षति होने जा रही है? क्‍या राज्‍य शासन उक्‍त दोनों प्रकरणों की जाँच राज्‍य स्‍तरीय समिति द्वारा करायेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। न्‍यायालयीन प्रकरणों में शासकीय अधिवक्‍ताओं की सलाह के मुताबिक पैरवी की गई है। वर्तमान में षष्‍ठम अपर जिला न्‍यायालय, सतना ने कब्‍जा वारंट के निष्‍पादन पर रोक लगा दी है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं। (ख) जी हाँ। प्रश्‍नाधीन भूमि के संबंध में वर्ष 1999 में शुकरू मल्‍लाह एवं अन्‍य द्वारा निजी स्‍वत्‍व होने का वाद जिला न्‍यायालय, सतना में दायर किया गया। शासकीय अधिवक्‍ता की सलाह के मुताबिक प्रकरण में शासन पक्ष की पुरजोर पैरवी की जाने के बावजूद भी न्‍यायालय में शासन के विरूद्ध निर्णय पारित हुआ। न्‍यायालयीन निर्णय के लिए किसी अधिकारी को जिम्‍मेदार ठहराया जाना उचित नहीं है। (ग) जी नहीं। प्रश्‍नाधीन विषय में कोई शिकायत अथवा प्रमाण शासन को प्राप्‍त नहीं है। अत: शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होता है।

सिंचाई नहरों के निर्माण की स्‍वीकृति

23. ( *क्र. 4458 ) श्री चन्‍दरसिंह सिसौदिया : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या गरोठ विधानसभा क्षेत्र में गांधीसागर डेम से सिंचाई योजना के अंतर्गत बनने वाली नहरों एवं सिंचाई जल सुरंगों के निर्माण की स्‍वीकृतियां दी गई हैं? (ख) क्‍या निर्धारित अनुबंध एवं मापदण्‍ड के अनुसार उक्‍त सुरंगों, नहरों का निर्माण कार्य किया जा रहा है एवं उपयोग में ली जाने वाली सामग्री का परीक्षण करवाया गया है? क्‍या उक्‍त कार्यों में हल्‍के स्‍तर की सीमेंट एवं अन्‍य उपयोगी सामग्री उपयोग में ली जा रही है? यदि हाँ, तो किस कारण? यदि नहीं, तो सीमेंट आदि की जाँच का ब्‍यौरा दें? (ग) निर्माणाधीन कार्यों का कब-कब एवं किन-किन अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया एवं निरीक्षण रिपोर्ट क्‍या है?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। भानपुरा नहर परियोजना की प्रशासकीय स्‍वीकृति दिनांक 30.08.2013 को रू.183.70 करोड़ की 9,490 हेक्‍टेयर रबी तथा गरोठ सूक्ष्‍म सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्‍वीकृति दिनांक 13.01.2016 को रू. 360.20 करोड़ की 21,400 हेक्‍टेयर रबी सिंचाई हेतु प्रदान की गई। परियोजनाओं के निर्माण कार्य की शर्तें अनुबंध अनुसार हैं एवं मापदण्‍ड तकनीकी आवश्‍यकता के अनुसार हैं। (ख) जी हाँ। जी हाँ। जी नहीं। सीमेंट टेस्‍ट रिपोर्ट की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) मुख्‍य अभियंता, नर्मदा ताप्‍ती कछार, इंदौर एवं अधीक्षण यंत्री, जल संसाधन मण्‍डल उज्‍जैन द्वारा क्रमश: दिनांक 04.03.2014 एवं 25.10.2015 को निरीक्षण किया गया। निरीक्षण प्रतिवेदन पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

टीकमगढ़ जिले में किये गये कार्य

24. ( *क्र. 4584 ) श्रीमती अनीता नायक : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) टीकमगढ़ जिले में वित्‍तीय वर्ष 01.04.2012 से प्रश्‍न दिनांक तक दो लाख रूपये से ज्‍यादा राशि के क्‍या-क्‍या कार्य किये गये? (ख) प्रश्‍नांश (क) में वर्णित जिले में उक्‍त समयानुसार मेन्‍टेनेंस पर क्‍या-क्‍या कार्यों पर कितनी राशि व्‍यय की गई? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में उल्‍लेखित कार्यों में से किस-किस को कितनी-कितनी राशि का भुगतान किस-किस रूप में किया गया?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) टीकमगढ़ जिले में वित्‍तीय दिनांक 01.04.2012 से प्रश्‍न वर्ष दिनांक तक 2 लाख रूपये से ज्‍यादा राशि के किये गये कार्यों का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) टीकमगढ़ जिले में मेन्‍टेनेंस के कार्य पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्‍वयं के स्‍त्रोतों से सतत् विद्युत प्रवाह व्‍यवस्‍था हेतु विभागीय स्‍तर पर किये जाते हैं। मेन्‍टेनेंस हेतु लगने वाली सामग्री एकजाई रूप से कंपनी स्‍तर पर संपूर्ण कंपनी क्षेत्र हेतु क्रय कर क्षेत्रीय भण्‍डारों को प्रदाय की जाती है। मैदानी अधिकारियों द्वारा आवश्‍यकतानुसार उक्‍त सामग्री भण्‍डार से समय-समय पर आहरित कर विभिन्‍न कार्यों हेतु उपयोग की जाती है। अत: विभागीय तौर पर किए गए मेन्‍टेनेंस के कार्यों पर व्‍यय की गई राशि की पृथक से जानकारी दिया जाना संभव नहीं है। इसके अतिरिक्‍त एच.व्‍ही.डी.एस. तथा आर.ए.पी.डी.आर.पी. योजनांतर्गत वार्षिक मेन्‍टेनेंस कान्‍ट्रेक्‍ट के प्रावधानान्‍तर्गत कार्य कराया गया है। टीकमगढ़ जिले के क्षेत्रांतर्गत दिनांक 01.04.2012 से प्रश्‍न दिनांक तक कराये गये मेन्‍टेनेंस के कार्यों की योजनावार व्‍यय की गई राशि का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) टीकमगढ़ जिले के अन्‍तर्गत दिनांक 01.04.2012 से प्रश्‍न दिनांक तक योजनावार किए गए कार्यों हेतु भुगतान की गई राशि का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। 

डूब प्रभावित मार्ग का डामरीकरण

25. ( *क्र. 1326 ) श्रीमती झूमा सोलंकी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भीकनगांव विधान सभा क्षेत्रांतर्गत अपरवेदा डेम अन्‍तर्गत डूब मार्ग भीकनगांव से झिरन्‍या का वैकल्पिक मार्ग खोई से लार्इखेड़ी मार्ग का चयन किया जाकर नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा मार्ग निर्माण की स्‍वीकृति प्रदाय की गई है? (ख) क्‍या इस मार्ग निर्माण कार्य में डामर डालने हेतु प्रावधान नहीं है? क्‍या कारण है? जब नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा डेम बनाकर किसी डामर मार्ग जो दो जनपदों को जोड़ने वाला मार्ग हो उसे डुबाया जाता है तो उसके बदले उनके द्वारा डामर मार्ग बनाने की स्‍वीकृति क्‍यों नहीं ली गई? (ग) क्‍या नर्मदा घाटी विकास विभाग क्षेत्रवासियों की आवश्‍यकता एवं मांग को देखते हुए खोई से लाईखेड़ी मार्ग पर डामर डालने हेतु पुन: शासन से स्‍वीकृति प्राप्‍त करने हेतु कार्यवाही प्रस्‍तावित करेंगे?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। अपरवेदा डेम से डूब प्रभावित भीकनगाँव-झिरन्‍या मार्ग के आंशिक भाग हेतु वैकल्पिक डामरीकृत मार्ग के रूप में शिवना से आभापुरी परिवर्तित मार्ग लंबाई 8.10 कि.मी. वर्ष 2009 में निर्मित किया गया है। खोई-लाईखेड़ी मार्ग पूर्व में कच्‍चा मार्ग था जिस पर क्षेत्रवासियों की मांग पर अतिरिक्‍त सुविधा के रूप में डब्‍ल्‍यू.बी.एम. मार्ग का निर्माण कार्य किया गया है। (ख) उत्‍तरांश के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा अतिरिक्‍त रूप से निर्मित खोई-लाईखेड़ी मार्ग को मूल विभाग, लोक निर्माण विभाग को सौंपे जाने की कार्यवाही प्रक्रिया में है। 

 

 

 







 

 

 

 

 

 

 

 

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भाग-2

नियम 46 (2) के अंतर्गत अतारांकित प्रश्नोत्तर के रुप में

परिवर्तित तारांकित प्रश्नोत्तर


शिक्षा उपकर की धनराशि

1. ( क्र. 9 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्‍वालियर संभाग में शिक्षा उपकर की कितनी-कितनी धनराशि स्‍थानीय निकायों व जिलाधीश के पास लंबित व पिछले 3 वर्षों में कितनी धनराशि खर्च हो चुकी है? (ख) जिलेवार व निकायवार विवरण देवें?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) ग्‍वालियर एवं चंबल संभाग की नगर पालिका/नगर परिषदों से प्राप्‍त जानकारी के आधार पर विगत तीन वर्षों की शिक्षा उपकरण से प्राप्‍त राशि, व्‍यय राशि एवं शेष राशि के संबंध में जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट ''पाँच''

नगर परिषद् शहपुरा एवं डिण्‍डोरी में कर्मचारियों की नियुक्ति

2. ( क्र. 27 ) श्री ओम प्रकाश धुर्वे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला डिण्‍डोरी के अंतर्गत नगर परिषद् शहपुरा एवं डिण्‍डोरी में वर्ष 2013, 14, 15 में किन-किन पदों पर कितने कर्मचारी भर्ती किये गये, एवं किन के अनुमोदन से भर्ती की गई? (ख) क्‍या उक्‍त भर्ती में नियमानुसार भर्ती प्रक्रिया का पालन कर भर्ती की गई है? यदि नहीं, तो सम्‍बंधितों के ऊपर क्‍या कार्यवाही की जा रही है? (ग) नगर परिषद् शहपुरा एवं डिण्‍डोरी में शिकायत के आधार पर कलेक्‍टर डिण्‍डोरी द्वारा वर्ष 2013, 14, 15 में क्‍या अध्‍यक्ष एवं C.M.O. के कार्यों की जाँच करायी गई? (घ) यदि हाँ, तो जाँच प्रतिवेदन के आधार पर दोषी कौन-कौन हैं, एवं क्‍या कार्यवाही किन-किन के ऊपर की गई?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) कलेक्‍टर जिला डिंडोरी द्वारा भर्ती प्रक्रिया की जाँच हेतु जाँच दल का गठन किया जाकर जाँच कराई गई, जिसमें मात्र नगर परिषद्, शहपुरा में ड्राईवर एवं कम्‍प्‍यूटर आपरेटर (क्‍लर्क) की नियुक्ति नियमानुसार नहीं पाई गई है। संबंधितों के विरूद्ध अनुशासनात्‍मक कार्यवाही हेतु प्रस्‍ताव संचालनालय में भेजा गया, जिस पर कार्यवाही प्रचलित है। (ग) एवं (घ) नगर परिषद्, डिंडोरी में उल्‍लेखित अवधि में कोई भी शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई। केवल नगर परिषद्, शहपुरा के सी.एम.ओ. एवं अध्‍यक्ष के विरूद्ध भ्रष्‍टाचार की जाँच हेतु कलेक्‍टर डिंडोरी द्वारा जाँच समिति का गठन किया जाकर समिति द्वारा प्रतिवेदन प्रस्‍तुत किया गया, जिस पर कार्यवाही प्रचलित है। जाँच प्रतिवेदन के आधार पर तत्‍का. सी.एम.ओ. श्री अंगदसिंह भैना एवं श्री देवकुमार गुप्‍ता, उपयंत्री, शहपुरा दोषी पाये गये हैं, शेषांश से संबंधित कार्यवाही प्रचलित है।

परिशिष्ट ''छ: ''

माही मुख्‍य बांध परियोजना का निर्माण

3. ( क्र. 36 ) श्री वेलसिंह भूरिया : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सरदारपुर विधान सभा क्षेत्रान्‍तर्गत पिछले ग्रीष्‍मकाल में माही मुख्‍य बांध के घटिया निर्माण के कारण रिसाव के कारण बांध के अंदर गैलरी में मरम्‍मत कार्य कराया गया था एवं इसके बाद भी गैलरी में रिसाव के कारण इस वर्षाकाल में बांध फूटने के डर से अधिक पानी निकाला गया था? (ख) क्‍या विभाग इसकी जाँच कराकर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही करेगा?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ख) मध्‍यम एवं वृहद बांध की गैलरी में बांध के निर्माण के कुछ वर्षों तक रिसाव होना एक सामान्‍य प्रक्रिया है। वर्षाकाल में जल की निकासी बांध के जल के स्‍तर और वर्षा की संभावना को दृष्टिगत रखते हुए की गई है। बांध सुदृढ़ है। अत: जाँच अथवा किसी अधिकारी के दोषी होने की स्थिति नहीं है।

फीडर सेप्रेशन के कार्य

4. ( क्र. 114 ) श्री वेलसिंह भूरिया : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र में 800 मजरें टोले तथा 213 रेवेन्‍यु ग्रामों में से कितने ग्रामों/मजरे/टोलों में फीडर सेपरेशन का कार्य पूर्ण हो गया है? ग्रामवार सूची उपलब्‍ध करवायें? (ख) कितने ग्रामों/मजरों/टोलों में फीडर सेपरेशन का कार्य अपूर्ण है? यदि अपूर्ण है तो इसके लिये विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई है? इसके लिये कौन अधिकारी/कर्मचारी जिम्‍मेदार है और उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) क्‍या इन कार्यों में प्रयुक्‍त सामग्री घटिया किस्‍म की लगी होने के कारण पिछले वर्ष पशुधन एवं जन-धन की हानि होने संबंधी समाचार पत्रों में समाचार प्र‍काशित हुए हैं तथा पशुधन एवं जन-धन की हानि हुई? यदि हाँ, तो इसके लिये कौन जिम्‍मेदार है एवं जिम्‍मेदारों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? (घ) उक्‍त अपूर्ण कार्य कब तक पूर्ण हो जावेंगे?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) धार जिले के अंतर्गत सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र में 193 राजस्‍व ग्राम अवस्थित हैं, न कि 213 राजस्‍व ग्राम। उक्‍त समस्‍त 193 राजस्‍व ग्रामों में प्रस्‍तावित फीडर सेपरेशन का कार्य पूर्ण हो चुका है जिनकी ग्रामवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है, उक्‍त 193 राजस्‍व ग्रामों के अतंर्गत अवस्थित कुल 192 मजरों/टोलों के फीडर सेपरेशन का कार्य भी पूर्ण हो चुका है, जिनकी ग्रामवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। सरदारपुर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत 800 मजरे/टोले होने की कोई जानकारी अभिलेखों में उपलब्‍ध नहीं है। (ख) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र के किसी भी ग्राम में फीडर विभक्तिकरण का कार्य किया जाना शेष नहीं है। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र के ग्रामों में कुल 693 मजरे/टोले चिन्हित हैं, जिनमें से 501 मजरों/टोलों में फीडर विभक्तिकरण का कार्य अपूर्ण है। उक्‍त सभी 501 मजरों/टोलों को घरेलू फीडरों से जोड़ने हेतु 12वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में शामिल कर कार्यादेश जारी किया जा चुका है। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में किसी अधिकारी/कर्मचारी के जिम्‍मेदार होने अथवा किसी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) उक्‍त कार्य में प्रयुक्‍त सामग्री का निविदा अनुबंध की शर्तों के अनुसार परीक्षण किया जाता है एवं निर्धारित मानकों के अनुरूप होने पर ही सामग्री का उपयोग विद्युत लाईनों में किया जाता है। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में पशुधन एवं जन-धन की हानि होने संबंधी कोई भी शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है, अत: किसी के जिम्‍मेदार होने का अथवा किसी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता। (घ) राजीव गाँधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत 12वीं पंचवर्षीय योजना में शामिल उपरोक्‍त कार्य निविदा अनुबंध की शर्त के अनुसार दिनांक 17.02.2017 तक पूर्ण किया जाना निर्धारित है। 

अनु.जाति/अनु.जनजाति के रिक्‍त पदों की संख्‍या

5. ( क्र. 117 ) श्री वेलसिंह भूरिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) धार जिले में शासन के विभिन्‍न विभागों के अंतर्गत अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/पिछड़ा वर्ग/नि:शक्‍तजनों के कितने-कितने पद कब से रिक्‍त पड़े हैं? (ख) क्‍या शासन द्वारा प्रति वर्ष बैकलॉग की पूर्ति हेतु समय-सीमा वृद्धि कर रहा है? किंतु विभागों द्वारा बैकलॉग की पूर्ति नहीं कर पदों को रिक्‍त रखे जा रहे हैं? (ग) यदि हाँ, तो उक्‍त रिक्‍त पदों की पूर्ति कब तक कर दी जायेगी। (घ) निर्धारित समय-सीमा में बैकलॉग पद पूर्ति न करने वाले जिम्‍मेदार अधिकारियों के विरूद्ध क्‍या व कब तक कार्यवाही की जायेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रहीं हैं। 

ग्रामीण विद्युतीकरण योजना

6. ( क्र. 118 ) श्री ओम प्रकाश धुर्वे : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला डिण्‍डोरी रा.गां. ग्रामीण, विद्युतीकरण योजना से प्रथम चरण में एवं द्वितीय चरण में जो कार्य हुये हैं, विभाग को क्‍या ऐसी शिकायतें मिली हैं कि ठेकेदार द्वारा खम्‍भे गड़ाने हेतु, गड्ढ़े खुदवाकर भुगतान नहीं किया गया है? (ख) अगर उक्‍त बात सही है तो ठेकेदार के प्रति क्‍या कार्यवाही की गई? क्‍या ठेकेदार एवं उनके सहयोगियों से कनेक्‍शन लेने हेतु भी कुछ गांवों में राशि ली गई? (ग) इस योजना के तहत जो विद्युत पोल लगाये जा रहे हैं उनकी गुणवत्‍ता की जाँच किस स्‍तर के कर्मचारियों से की जाती है? (घ) प्रथम चरण में कितने विद्युतीकृत ग्रामों में नि:शुल्‍क कनेक्‍शन ठेकेदार द्वारा नहीं किया गया एवं कितने ग्रामों में कनेक्‍शनधारियों को नि:शुल्‍क बल्‍ब दिया गया? विकासखण्‍डवार संख्‍या देवें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ, जिला डिण्‍डोरी में राजीव गाँधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के प्रथम चरण (11वीं पंचवर्षीय योजना) के अंतर्गत कराये गये विद्युतीकरण के कार्यों में ठेकेदार द्वारा खम्‍भे गड़ाने हेतु, गड्ढ़े खुदवाकर भुगतान नहीं करने बाबत् शिकायतें जनसुनवाई एवं विभागीय अधिकारियों के भ्रमण के दौरान प्राप्‍त हुई थीं। किन्‍तु राजीव गाँधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के द्वितीय चरण (12वीं पंचवर्षीय योजना) के अंतर्गत उक्‍त आशय की कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है। (ख) जिन ग्रामों में प्रश्‍नाधीन शिकायत प्राप्‍त हुई हैं, उनमें मजदूरी भुगतान करने हेतु संबंधित ठेकेदार एजेंसी मेसर्स रोहिणी इन्‍डसिट्रियल इलेक्‍ट्रिकल लिमिटेड, मुम्‍बई से आवश्‍यक भुगतान करवाने हेतु अनुरोध किया गया था तथा भुगतान कराकर शिकायत का निराकरण करा दिया गया है। जी नहीं, ठेकेदार एवं उनके सहयोगियों द्वारा कनेक्‍शन देने हेतु किसी भी ग्राम में राशि न‍हीं ली गई (ग) उक्‍त योजनांतर्गत लगाये जा रहे विद्युत पोलों की जाँच पोल निर्माता फैक्‍ट्री से पोल निर्गमन से पूर्व तृतीय पक्ष निरीक्षण एजेन्‍सी मेसर्स एरडा के पर्यवेक्षकों तथा विद्युत वितरण कंपनी के कम से कम सहायक अभियंता स्‍तर के अधिकारी द्वारा की जाती है। इस अतिरिक्‍त जिला स्‍तर पर योजना की मॉनिटरिंग हेतु वितरण कंपनी द्वारा गठित सेल में पदस्‍थ सहायक अभियंता एवं कार्यपालन अभियंता द्वारा भी विद्युत पोल सहित योजनांतर्गत लगने वाली विभिन्‍न सामग्री की गुणवत्‍ता सुनिश्चित की जाती है। (घ) राजीव गाँधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के प्रथम चरण (11वीं पंचवर्षीय योजना) के अंतर्गत ठेकेदार एजेन्‍सी द्वारा बल्‍व सहित प्रदाय किये गये बी.पी.एल. कनेक्‍शनों की ग्रामों की संख्‍या सहित विकासखण्‍डवार जानकारी संलग्‍न परिशि‍ष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। उक्‍त योजनांतर्गत ऐसे ग्रामों की संख्‍या की विकासखण्‍डवार जानकारी जिनमें बी.पी.एल. कनेक्‍शन प्रदान नहीं किये गये है संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। उक्‍त योजनांतर्गत उपलब्‍ध राशि अनुसार प्रावधान से अधिक बी.पी.एल. कनेक्‍शन दिये गये है तथा उक्‍त शेष बी.पी.एल. कनेक्‍शन के कार्यों को 12वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गाँधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में सम्मिलित कर लिया गया है। 

परिशिष्ट - ''सात''

औंकारेश्‍वर में सिंहस्‍थ 2016 में मूलभूत सुविधा एवं तीर्थ कर की वसूली

7. ( क्र. 178 ) श्री देवेन्द्र वर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खंडवा जिले के प्रसिद्ध ज्‍योर्तिलिंग औंकारेश्‍वर में शासन द्वारा सिंहस्‍थ 2016 के लिये कुल कितना बजट आवंटन स्‍वीकृत एवं प्रदान किया है? क्‍या इसमें जिले के जनप्रतिनिधियों के सुझावों को आमंत्रित किया गया है? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ख) इसमें स्‍थानीय निकाय एवं जिला प्रशासन द्वारा लाखों श्रद्धालुओं के आगमन को लेकर क्‍या कार्ययोजना तैयार की गई? विभिन्‍न निर्माण कार्यों एवं सुविधाओं पर किये जाने वाले कार्य एवं उस पर व्‍यय की कार्ययोजना क्‍या है? (ग) क्‍या देश/प्रदेश के किसी तीर्थ क्षेत्र में धार्मिक यात्रियों से तीर्थ कर नहीं वसूली जाता है? फिर औंकारेश्‍वर निकाय को यह छूट क्‍यों दी गई है, जबकि निकाय द्वारा यात्रियों की सुविधा के लिये कोई विशेष अपेक्षित संसाधन नहीं जुटाए जाते है? (घ) औंकारेश्‍वर निकाय को विगत 5 वर्षों में कितना तीर्थ कर प्राप्‍त हुआ तथा प्राप्‍त राशि से यात्रियों की सुविधा के लिये किन-किन कार्यों पर कितनी-कितनी राशि व्‍यय की है वर्षवार एवं मदवार जानकारी दी जाए? (ड.) मुख्‍यमंत्री तीर्थयात्रा के तहत लाखों लोगों को नि:शुल्‍क यात्रा कराई जा रही है किंतु देश के इस प्रसिद्ध ज्‍योर्तिलिंग में स्‍वयं के व्‍यय पर आने वाले श्रद्धालुओं से तीर्थ कर वसूला जाना क्‍या न्‍याय संगत है? क्‍या विभाग सिंहस्‍थ पूर्व इस तीर्थ कर को सदा के लिये प्रतिबंधित करने के आदेश प्रदान करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) खण्‍डवा जिले के औंकारेश्‍वर ज्‍यार्तिलिंग में शासन द्वारा सिंहस्‍थ 2016 को दृष्टिगत रखते हुये कुल 16 विभागों को विभिन्‍न कार्यों हेतु कुल राशि 76.022 करोड़ की स्‍वीकृति प्रदान की गई है। विभागवार कार्यों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। उक्‍त प्रस्‍ताव जनप्रतिनिधियों से सुझाव प्राप्‍त कर तैयार किया गया है। (ख) सिंहस्‍थ-2016 को दृष्टिगत रखते हुए तैयार की गई कार्ययोजना अनुसार विभिन्‍न निर्माण कार्यों एवं सुविधाओं पर किये जाने वाले कार्य एवं उस पर व्‍यय की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) नगर परिषद्, औंकारेश्‍वर से प्राप्‍त उत्‍तर अनुसार नगर परिषद्, औंकारेश्‍वर में आय के स्रोत नगण्‍य होने से यहां किये जाने वाले मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति होना संभव नहीं है इसको दृष्टिगत रखते हुये म.प्र. नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 127 (6) क के तहत ती‍र्थयात्रियों से तीर्थकर की वसूली की जाती है तथा यहां आने वाले तीर्थयात्रियों की मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति की जाती है। (घ) नगर परिषद् औंकारेश्‍वर से प्राप्‍त उत्‍तर अनुसार नगर परिषद्, औंकारेश्‍वर को विगत 05 वर्षों में तीर्थकर से प्राप्‍त वर्षवार आय एवं वर्षवार व्‍यय की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ड.) उक्‍त संदर्भ में वर्तमान में कोई प्रक्रिया प्रचलित नहीं है। 

ग्रि‍ड निर्माण में अनियमितता

8. ( क्र. 191 ) श्री देवेन्द्र वर्मा : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खं‍डवा जिले के ग्रामीण क्षेत्र में विगत‍तीन वर्षों में कहाँ-कहाँ कितने पॉवर के ग्रि‍ड कितनी-कितनी राशि से निर्मित कराए गए? (ख) क्‍या ग्राम सतवाड़ा पॉवर ग्रि‍ड निर्माण में गंभीर लापरवाही एवं खराब क्‍वालिटी के कारण बार-बार खराब होने से ग्रामीणों को परेशान होना पड़ रहा है? (ग) ग्रामीणों द्वारा सतवाड़ा ग्रि‍ड की लगातार शिकायत के बाद क्‍या इसकी जाँच कराई गई? यदि हाँ, तो जाँच में कौन-कौन अधिकारी दोषी पाए गए? (घ) सतवाड़ा पॉवर ग्रि‍ड के निर्माण के बाद से उसकी मरम्‍मत आदि पर कितनी राशि व्‍यय की गई है? क्‍या उक्‍त कार्य के दोषी ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारी से शासकीय धनराशि की वसूली की जाएगी? यदि हाँ, तो कब तक?

 

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) खण्‍डवा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विगत तीन वर्षों (वर्ष 2012-13 से 2014-15 तक) में 33/11 के.व्‍ही. के कुल 10 तथा 02 अति उच्‍चदाब उपकेन्‍द्र निर्मित किये गये है। उक्‍त उपकेन्‍द्रों की क्षमता, स्‍थान एवं निर्माण की लागत राशि का उपकेन्‍द्रवार विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जी नहीं है। (ग) ग्रामीणों द्वारा की गई सतवाड़ा ग्रिड की कोई भी शिकायत पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में किसी भी स्‍तर पर प्राप्‍त नहीं हुई है। (घ) 33/11 के.व्‍ही.उपकेन्‍द्र सतवाड़ा के सामान्‍य रख-रखाव पर विगत तीन वर्षों में एक लाख तिरासी हजार रूपये की राशि व्‍यय की गई है। उक्‍त राशि समय-समय पर आवश्‍यक रख-रखाव के कार्यों हेतु ही सामान्‍य प्रक्रिया के तहत् व्‍यय की गई है, अत: उक्‍त राशि को संबंधित अधिकारी/ठेकेदार से वसूल किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता।

परिशिष्ट - ''आठ''

फिडर सेपरेशन

9. ( क्र. 337 ) श्री कालुसिंह ठाकुर : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (ख) शासन की समस्‍त ग्रामों को फिडर सेपरेशन से जोड़ने की कार्यवाही के तहत धरमपुरी जनपद पंचायत क्षेत्र के किन-किन ग्रामों में कार्य पूर्ण हो चुका है, तथा किन-किन ग्रामों में शेष हैं? (ख) जनपद पंचायत धरमपुरी क्षेत्र के मानबयडा, चिकट्यावड, ढापला,एहमदपुरा, गवल्‍यावाडी, लालमाटिया, जामला, कातर आदि ग्रामों में कॉफी समय से बिजली प्रदाय नहीं होने के बावजूद वहां के ग्रामीण उपभोक्‍ताओं को किस आधार पर 3000-4000 के बकाया राशि के बिजली बिल दिये जा रहे हैं? (ग) फीडर सेपरेशन से वंचित जनपद पंचायत क्षेत्र के अधिकांश ग्रामों को कब तक फिडर सेपरेशन से जोड़कर नियमित विद्युत प्रदाय प्रारंभ कर दिया जावेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) धार जिले की धरमपुरी जनपद पंचायत क्षेत्र के कुल 99 राजस्‍व ग्रामों में से 29 ग्रामों के कार्य पूर्ण हो चुके हैं तथा 70 ग्रामों में कार्य अपूर्ण है। उक्‍त कार्य पूर्ण एवं अपूर्ण ग्रामों की ग्रामवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट में दर्शाए अनुसार है। (ख) प्रश्‍नाधीन उल्‍लेखित ग्रामों में वर्तमान में अटल ज्‍योति अभियान के तहत् आबादी क्षेत्र को तकनीकी कारणों से हुए लाईन फाल्‍ट, उपकरण खराब होने, प्राकृतिक आपदा के कारण हुए विद्युत व्‍यवधान, नवीन अधोसंरचना के निर्माण कार्यों एवं रख रखाव हेतु आवश्‍यक होने जैसी अपरिहार्य स्थितियों को छोड़कर 24:00 घण्‍टे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। क्षेत्र के ग्रामीण उपभोक्‍ताओं को उनकी खपत/सम्‍बद्ध भार के आधार पर नियमानुसार विद्युत देयक जारी किये जा रहे हैं। उपभोक्‍ताओं द्वारा विद्युत देयकों का नियमित रूप से भुगतान नहीं करने के कारण उनके विद्युत देयकों में बकाया राशि शामिल कर बिल दिये जा रहे हैं। (ग) धार जिले की धरमपुरी जनपद पंचायत के शेष बचे ग्रामों को माह मार्च-2016 तक फीडर सेपरेशन योजना के अंतर्गत घरेलू फीडरों से जोड़ना संभावित है। तथापि वर्तमान में प्रश्‍नाधीन क्षेत्र के समस्‍त 99 राजस्‍व ग्रामों के आबादी क्षेत्र को आकस्मिक अवरोधों को छोड़कर 24:00 घण्‍टे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। 

नामांतरण प्रकरण

10. ( क्र. 340 ) श्री कालुसिंह ठाकुर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2013 से आज दिनांक तक नगर परिषद् धामनोद, धरमपुरी, माण्‍डव द्वारा कितने नामांतरण प्रकरणों को स्‍वीकृति प्रदान की गयी? (ख) वर्ष 2013 से आज दिनांक स्‍वीकृत नामांतरण प्रकरणों की पुष्टि क्‍या परिषद् द्वारा की गयी है? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) क्‍या उपरोक्‍तानुसार नामांतरण प्रकरणों की पुष्टि पी.आई.सी. (President In Council) द्वारा ही करवाई गयी है? यदि हाँ, तो क्‍या दोषी पदाधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरूद्ध नगर पालिका अधिनियम की अवहेलना करने के आरोप में कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो निश्चित समयावधि बतावें?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) नगर परिषद्, धामनोद, धरमपुरी एवं माण्‍डव में क्रमश: 930, 123 एवं 18 नामांतरण प्रकरण स्‍वीकृत किये गये है। (ख) जी हाँ, म.प्र. नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 150 के अंतर्गत प्रश्‍नांश '''' अनुसार उक्‍त नगरीय निकायों के प्रकरणों में परिषद् द्वारा नामांतरण की स्‍वीकृति दी गई है। (ग) जी नहीं, नामांतरण प्रकरणों की पुष्टि प्रेस्डिेंट-इन-कौंसिल द्वारा नहीं करवाई जाती है। शेषांश का प्रश्‍न ही उत्‍पन्‍न नहीं होता।

प्रश्‍न संख्‍या 2 (क्र.27) के संबंध में

11. ( क्र. 502 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 8 दिसम्‍बर 2015 के परि.अ.ता. प्रश्‍न संख्‍या 2 (क्रमांक 27) के उत्‍तर में प्रपत्र (अ) व (ब) के उत्‍तर जिन प्रकरणों में कार्यवाही प्रचलित है? उन प्रकरणों में बताएं कि कार्यवाही कब शुरू हुई व अभी प्रचलित कार्यवाही में क्‍या प्र‍गति है? (ख) उक्‍त प्रश्‍न उत्‍तर के बाद प्रश्‍नकर्ता ने जो पत्र अशोकनगर व गुना के जिलाधीश व अधिकारियों तथा मुख्‍यमंत्री जी राजस्‍व व सहकारिता मंत्री जी, पंचायत मंत्री जी व प्रमुख सचिव राजस्‍व, प्रमुख सचिव खाद्य, प्रमुख सचिव पंचायत, प्रमुख सचिव सहकारिता को जो पत्र पिछले 03 माह में लिखे है उन पर शासन ने कार्यवाही की हैं?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

विधायक निधि की राशि के उपयोग के संबंध में

12. ( क्र. 603 ) श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या खरगापुर विधान सभा क्षेत्र सूखे की चपेट में है और पेयजल का भी भारी संकट है? ऐसी स्थिति नये हैण्‍डपम्‍प शासन द्वारा खनन नहीं कराये जा रहे है और कुओं में पानी था टूटे-फटे है और किसी नदी या बाउंड्री या शासन के बोर में अच्‍छा जल स्‍तर वहां पर मोटर पानी हेतु तथा पाईप लाईन यादि बिछाई जाय या उन फटे-टूटे कुओं का जीर्णोद्धार कराया जाय तो विधायक निधि की राशि का उपयोग करने पर प्रतिबंध है? (ख) क्‍या खरगापुर विधान सभा सहित म.प्र. में जहां भी पेयजल का संकट है? ऐसे जल स्‍त्रोतों के जीर्णोद्धार एवं नल जल योजना पर पानी की मोटरें, नये हैण्‍डपम्‍पों के खनन हेतु विधायक निधि की राशि खर्च किये जाने की स्‍वीकृत प्रदाय किये जाने की योजना बनाई जाएगी? यदि हाँ, तो विधायक निधि का उपयोग किये जाने के आदेश जारी करेंगे? (ग) यदि हाँ, तो कब तक समयावधि बतायें यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजनांन्‍तर्गत हैन्‍डपंम्‍प खनन, कुआं निर्माण, पॉवर पंम्‍प, पाईप लाईन का डाला जाना, टंकी का निर्माण, पेय जल व्‍यवस्‍था/ टेंकर क्रय आदि कार्यों पर विधायक निधि की राशि का उपयोग करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। परन्‍तु जल स्‍त्रोंतो/ टूटे-फूटे कुओं के जीर्णोद्धार कार्य अनुमत नहीं है। (ख) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजनांन्‍तर्गत जल स्‍त्रोतों/ टूटे-फूटे कुओं के जीर्णोद्धार कार्य अनुमत न होने से छोडकर शेष कार्य हेतु माननीय विधायक महोदया से कार्यों की अनुशंसा प्राप्‍त होने पर प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी की जा सकती है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास योजना की मार्गदर्शिका के अनुसार अनुमत नहीं होने से संभव नहीं है।

जिला कलेक्‍टरों के खाते में निधि

13. ( क्र. 604 ) श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जिला कलेक्‍टरों के खातों में सांसद निधि प्रदाय की जाती है और इसके लिये यूनियन बैंक निर्धारित है? परंतु विधायकों को मिलने वाली निधि जिला कोषालयों में भेजी जाती है और जिला कोषालयों में अधिक कार्य का भार होने के कारण विधायकों की निधि समय पर आहरण नहीं की गई या अधिकारियों द्वारा कार्य में ढील की गई या नेट की खराबी के कारण या बिजली की समस्‍यायें कई बार आ जाती है जिससे विधायकों की विधायक निधि लेप्‍स हो जाती है क्‍या विधायकों की राशि जिला कलेक्‍टरों के खातों में भेजी जाएगी यदि हाँ, तो आदेश जारी किये जायें यदि नहीं, तो कारण बतायें? (ख) क्‍या विधायकों की राशि हमेशा किसी ना किसी समस्‍या के चलते लेप्‍स हो जाती जनता विकास के कार्यों हेतु राशि की मांग करती है विधायक पत्र भी दे देते है और ऐसे कई विधायक है जिनकी राशि लेप्‍स हो जाती है? इसलिये सांसदों को जिस तरह से कलेक्‍टरों के खातों में राशि दी जाती है इसी तरह विधायकों को दिये जाने का भी प्रावधान बनाये?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। सांसद निधि की राशि केन्‍द्र शासन के निर्देशानुसार राष्‍ट्रीयकृत बैंकों में जमा की जाती है, किन्‍तु विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र विकास येाजना हेतु राज्‍य शासन के बजट से राशि आवंटित होती है तथा वित्‍त विभाग मध्‍यप्रदेश शासन की व्‍यवस्‍था अनुसार राशि का अहरण होता है। अत: जिला कलेक्‍टर के खातें में राशि जमा नहीं कराई जा सकती है। (ख) ऐसा कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन नहीं है।

कृषक अनुदान योजना संबंधी

14. ( क्र. 731 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रतलाम जिले में कृषक अनुदान योजनान्‍तर्गत तहसीलवार कितने कृषकों को वर्ष 2014 एवं दिसम्‍बर 2015 तक लाभान्वित किया? (ख) कितने कृषकों के उक्‍त अवधि के प्रकरण अब तक किस कारण से लंबित है? (ग) क्‍या 2014 एवं 2015 के स्‍वीकृत मामलों में सभी कृषकों को ट्रांसफार्मर उपलब्धि, से अन्‍य समस्‍त योजना कार्य पूर्ण होने का लाभ प्राप्‍त हो चुका है? यदि नहीं, तो कितने कृषकों को? योजना लाभ अंतर्गत समस्‍त योजना सामग्री समय पर न मिलने का कारण क्‍या है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) कृषकों को स्‍थायी विद्युत पम्‍प कनेक्‍शन प्रदाय करने हेतु लागू अनुदान योजना के अंतर्गत रतलाम जिले में कैलेण्‍डर वर्ष 2014 में 1103 कृषकों को एवं कैलेण्‍डर वर्ष 2015 में दिसम्‍बर-2015 तक 258 कृषकों की लाभान्वित किया गया है। उक्‍तानुसार लाभान्वित हुए कृषकों की संख्‍या की तहसीलवार, एवं कैलेण्‍डर वर्षवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) कृषकों को स्‍थायी पंप कनेक्‍शन प्रदाय करने हेतु लागू अनुदान योजना के अंतर्गत रतलाम जिले में कैलेण्‍डर वर्ष 2014 एवं कैलेण्‍डर वर्ष 2015 में क्रमश: 1103 एवं 721 इस प्रकार कुल 1824 कृषकों के आवेदन स्‍वीकृत किये गये थे जिनमें से कैलेण्‍डर वर्ष 2014 में 1103, कैलेण्‍डर वर्ष 2015 में 258 तथा कैलेण्‍डर वर्ष 2016 में दिनांक 26.02.16 तक 463, इस प्रकार कुल 1726 कृषकों के कार्य पूर्ण किये जा चुके हैं तथा शेष 98 कृषकों के कार्य लंबित हैं। उक्‍त सभी प्रकरणों में विलंब का कारण खेतों में फसल खडी़ होने आदि कारणों से राईट ऑफ वे की समस्‍या रही है। (ग) कैलेण्‍डर वर्ष 2014 के स्‍वीकृत सभी 1103 प्रकरणों का कार्य पूर्ण किया जा चुका है परंतु कैलेण्‍डर वर्ष 2015 के स्‍वीकृत कुल 721 कार्यों में से 623 कार्य पूर्ण कर कृषकों को उक्‍त योजना का लाभ दिया जा चुका है। उत्‍तरांश (ख) में दर्शाए अनुसार शेष 98 कृषकों को इस योजना में सिंचाई पम्‍प कनेक्‍शन जारी नहीं किये जा सके हैं। योजना अन्‍तर्गत उपरोक्‍त शेष कार्य को पूर्ण करने हेतु वांछित जानकारी योजना सामग्री पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के पास उपलब्‍ध है।

परिशिष्ट - ''नौ''

कार्यों की जानकारी

15. ( क्र. 811 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिण्‍ड जिले में वित्‍तीय वर्ष 01.04.2013 से प्रश्‍न तिथि तक दो लाख रूपये से ज्‍यादा राशि के क्‍या-क्‍या कार्य, किस-किस स्‍थान पर किये गये? (ख) प्रश्‍नांश (क) में वर्णित जिले में उक्‍त समयानुसार मेन्‍टेनेन्‍स पर किस-किस स्‍थान पर, किस-किस प्रकार के कार्यों पर कितनी राशि, कब-कब व्‍यय की गयी? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में उल्‍लेखित कार्यों में से किस-किस को कितनी-कितनी राशि का भुगतान किस-किस रूप में किया गया? (घ) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में उल्लेखित स्‍थानों एवं समयानुसार उक्‍त सभी कार्यों का गुणवत्‍ता एवं उपयोगिता प्रमाण पत्रों को किस-किस नाम/पदनाम द्वारा जारी किया गया?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) से (घ) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-''अ एवं ब'' अनुसार है।

निर्मित जलाशयों की नहरों के लिये आवंटन विषयक

16. ( क्र. 865 ) श्री जतन उईके : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जबलपुर संभाग के छिंदवाड़ा जिले के अंतर्गत पांढुर्णा विकासखण्‍ड के अंतर्गत जल संसाधन उपसंभाग पांढुर्णा के अधीनस्‍थ निर्मित योजनाएं में बिछुआसानी जलाशय, मांडवी जलाशय, हिवरासेनाडवार जलाशय एवं भंदारगोंदी जलाशय के नहरों के सुधार हेतु कितना आवंटन प्राप्‍त हुआ? कितना कार्य हुआ। (ख) कार्य पूर्ण हुआ या नहीं? उससे सिंचाई में क्‍या वृद्धि हुई? (ग) यदि नहीं, तो कारण बतायें?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) से (ग) माण्‍डवी, हिवरासेनेडवार एवं भण्‍डारगोदी लघु सिंचाई परियोजनाओं में नहरों के रख-रखाव का कार्य जल उपभोक्‍ता संथाओं एवं बिछुआसानी परियोजना के रख-रखाव का कार्य निविदा के माध्‍यम से अनुरक्षण मद में प्राप्‍त आवंटन से किया जाना प्रतिवेदित है। रख-रखाव में कराये गये कार्य पूर्ण हैं। प्रश्‍नाधीन परियोजनाओं में प्राप्‍त आवंटन एवं की गई सिंचाई की जानकारी निम्‍नानुसार है :-

परियोजना

आवंटन रू. में
(
अनुरक्षण मद)

सीसीए
(
हेक्टेयर में)

जल भराव क्षमता
(
मि.घ.मी.)

वास्‍तविक सिंचाई
वर्ष 2015-16

बिछुआसानी

30,000

375

1.95

462

माण्‍डवी

59,600

450

2.38

475

हिवरासेनेडवार

12,480

156

1.10

160

भण्‍डारगोदी

8,000

100

0.12

75

सिंचाई बांध की जानकारी

17. ( क्र. 1027 ) श्री रामपाल सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शहडोल जिले के ब्‍यौहारी एवं जयसिंहनगर तहसीलों में जल संसाधन विभाग द्वारा सिंचाई बांध निर्मित हैं? यदि हाँ, तो उक्‍त तहसीलों में बांधों की संख्‍या क्‍या है तथा सिंचाई रकबा बांधवार कितना है? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) के अनुसार सिंचाई बांध निर्मित है, तो वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में बांधों के रख-रखाव के लिये राशि आवंटित की गई है? यदि हाँ, तो उक्‍त तहसीलों के प्रत्‍येक बांध में कितनी राशि आवंटित की गई और उन राशियों से क्‍या-क्‍या कार्य कराये गये हैं?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''दस''

भरहुत नगर नाले का अतिक्रमण हटाया जाना

18. ( क्र. 1167 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या नगर पालिक निगम, सतना के अंतर्गत भरहुत नगर नाले पर 75 से अधिक लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिये जाने से बरसात के मौसम में जल भराव के कारण लोगों के घर में पानी घुस जाता है? अगर हां, तो अवैध कब्‍जा किये लोगों की सूची दें? (ख) प्र‍श्‍नतिथि तक प्रश्‍नांश (क) में वर्णित अवैध कब्‍जा किये लोगों द्वारा किस-किस वार्ड क्रमांक में कितने वर्गफुट भूमि पर कब से कच्‍चा-पक्‍का कब्‍जा कर रखा है, कब्‍जाधारीवार विवरण दें? (ग) क्‍या उक्‍त नाले की भूमि का नगर पालिक निगम एवं म.प्र. शासन के राजस्‍व अमले द्वारा सीमांकन 1.4.2015 से प्रश्‍न तिथि तक कराया? क्‍या रिपोर्ट आई? (घ) नगर पालिक निगम सतना द्वारा उक्‍त नाले का अतिक्रमण कब तक हटाया जायेगा? अगर नहीं, तो क्‍यों, कारण दें? प्रश्‍नतिथि तक अतिक्रमण नहीं हटाये जाने पर राज्‍य शासन किस नाम/पदनाम को दोषी मानता है? कब व क्‍या कार्यवाही उसके विरूद्ध की जायेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। नगर पालिक निगम, सतना द्वारा समय-समय पर नाले की सफाई कराई जाती है, जिससे पानी का भराव नहीं होता है। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) जी हाँ अतिक्रमणकारियों को चिन्हित किया गया है। चिन्हित अतिक्रमणकारियों की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) नगर पालिक निगम, सतना द्वारा अतिक्रमणकारियों को म.प्र. नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 318 के तहत सूचनायें जारी की गई थी, जिसके तहत कुछ अतिक्रमणकारियों द्वारा अपने अभिलेखों के साथ अभ्‍यावेदन प्रस्‍तुत किया गया है। अतिक्रमणकारियों द्वारा अभ्‍यावेदन के साथ प्रस्‍तुत अभिलेखों के पीरक्षण की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''ग्यारह''

ई-पंजीयन योजना

19. ( क्र. 1260 ) डॉ. मोहन यादव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में ई-पंजीयन योजना लागू होने के पश्‍चात् विभिन्‍न जिलों में कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं? ई-पंजीयन योजना लागू करने से शासन को राजस्‍व की कितनी हानि हुई है, जिलेवार, तहसीलवार, ग्रामवार जानकारी प्रदान करें? (ख) ई-पंजीयन येाजना हेतु बनाए गये साफ्टवेयर में साफ्टवेयर लागू होने के पश्‍चात् कितनी बार संशोधन किया गया? संशोधन, अपग्रेडेशन हेतु कितनी अतिरिक्‍त राशि ठेकेदार को भुगतान की गई? अतिरिक्‍त राशि भुगतान करने के लिये कौन दोषी हैं? दोषियों के विरूद्ध कब तक कार्यवाही की जायेगी? (ग) क्‍या प्रश्‍नकर्ता को पूर्व में पूछे गये प्रश्‍न के जवाब में साफ्टवेयर में किसी भी प्रकार की त्रुटि नहीं होना तथा राजस्‍व की कोई हानि नहीं होना बताया गया है? यदि हाँ, तो सदन में गलत जानकारी देकर गुमराह करने वाले दो‍षी अधिकारियों के विरूद्ध कब तक वैधानिक कार्यवाही की जावेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। ई-पंजीयन योजना लागू करने के कारण शासन को राजस्‍व हानि होने का कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं आया है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ख) ई-पंजीयन योजना के सुचारू संचालन हेतु साफ्टवेयर में समय-समय पर आवश्‍यक संधोधन किया जाना एक सतत् प्रक्रिया है। अत: तद् विषयक संशोधन की Frequency बताया जाना संभव नहीं है। अब तक संशोधन, अपग्रेडेशन हेतु 95,75,200/- रूपये की राशि का भुगतान किया गया है। निविदा के प्रावधान अनुसार Scope of Work के दायरे से बाहर होने वाले संशोधननों के लिये Change Request की प्रक्रिया के माध्‍यम से भुगतान कम्‍प्‍यूटराईजेशन परियोजना हेतु शासन द्वारा गठित क्रियान्‍वयन एवं पर्यवेक्षण समिति के अनुमोदन उपरांत स्‍वीकृत किया जाता है। भुगतान की कार्यवाही नियमानुसार है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी हाँ। सदन को गलत जानकारी नहीं दी गई है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। 

परिशिष्ट - ''बारह''

फीडर सेपरेशन के कार्य

20. ( क्र. 1508 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) श्‍योपुर जिले में वर्ष, 2011-12 से वर्तमान तक फीडर सेपरेशन योजनांतर्गत कितने कार्य स्‍वीकृत किये, के संबंध में कार्यरत एजेंसी का नाम, लागत कार्य पूर्ण करने की अवधि सहित योजना में शामिल फीडरों के नाम बतावें? इस हेतु कितनी राशि प्राप्‍त/व्‍यय हुई? (ख) उक्‍त में से कितने कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण हुए? कितने नहीं इसका कारण व इस हेतु कौन उत्‍तरदायी है, इनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? अपूर्ण कार्य कब तक पूर्ण होंगे? (ग) क्‍या योजना में शामिल 527 ग्रामों में से 134 ग्रामों में कार्य पूर्ण हो चुके हैं, में से कई ग्रामों में वर्तमान तक खंबे नहीं गढ़े? कई में तार नहीं खिंचे, जहां दोनों कार्य पूर्ण हो चुके हैं, वहां आगे के शेष कार्य पूर्ण नहीं कराये गये? कार्य भी घटिया किस्‍म का कराया गया? यदि नहीं, तो क्‍या शासन 134 ग्रामों में पूर्ण हो चुके कार्यों का भौतिक सत्‍यापन प्रश्‍नकर्ता की उपस्थिति में कराएगा व दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही करेगा तथा अपूर्ण पड़े कार्यों को शीघ्र पूर्ण करवाएगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) श्‍योपुर जिले में वर्ष 2011-12 से वर्तमान तक फीडर सेपरेशन योजनान्‍तर्गत 11 के.व्‍ही. के 58 फीडरों के विभक्तिकरण एवं 527 ग्रामों में सघन विद्युतीकरण के कार्य स्‍वीकृत किए गए जिनकी फीडर के नामवार एवं ग्रामवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ एवं ब अनुसार है। ठेकेदार एजेंसी मेसर्स ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर लिमिटेड मुम्‍बई को उक्‍त कार्य के लिए निविदा प्रक्रिया उपरांत चयनित कर कार्य एजेन्‍सी नियुक्‍त किया गया था, कार्य की लागत रूपये 41.98 करोड़ एवं कार्य पूर्ण करने की अवधि ठेकेदार एजेन्‍सी से किये गये अनुबंध के अनुसार प्रभावी दिनांक 20.08.2011 से 18 माह थी। उपरोक्‍त् कार्य हेतु रूपये 41.98 करोड़ की राशि स्‍वीकृति हुई एवं रूपये 11.05 करोड़ की राशि व्‍यय की गई है। (ख) उत्‍तरांश के परिप्रेक्ष्‍य में 11 के.व्‍ही. के 31 फीडरों के विभक्तिकरण एवं 205 ग्रामों में फीडर विभक्तिकरण का कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण हो चुका हैं जिसकी फीडरवार एवं ग्रामवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र एवं अनुसार है। 11 के.व्‍ही. के 27 फीडरों के विभक्तिकरण एवं 322 ग्रामों के सघन विद्युतीकरण का कार्य शेष है जिसकी फीडरवार एवं ग्रामवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र एवं अनुसार है। कार्य एजेंसी द्वारा सामग्री एवं श्रमिकों के अभाव के कारण निर्धारित समयावधि में कार्य पूर्ण नहीं कर पाने के दृष्टिगत कार्य एजेन्‍सी को जारी कार्यादेश दिनांक 08.06.15 को निरस्‍त किया जा चुका है। शेष कार्य पूर्ण करने के लिए मैसर्स बिकरान इंजीनियरिंग एण्‍ड एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड मुम्‍बई को दिनांक 20.02.2016 के द्वारा अवार्ड जारी किया गया है, जिसकी कार्य अवधि अनुबंध की प्रभावी दिनांक से 18 माह होगी। (ग) प्रश्‍नाधीन योजना में शामिल 527 ग्रामों में से 205 ग्रामों में फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण हो चुका है, जिसकी ग्रामवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है। उपरोक्‍त 205 ग्रामों में से 87 ग्रामों में शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण हुआ है, शेष 118 ग्रामों में फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण हुआ है, तथा ग्राम के सघन विद्युतीकरण का कार्य जैसे केबिलीकरण एवं मीटरीकरण के कार्य शेष है। कार्य की गुणवत्‍ता की जाचं के लिए कंपनी के अधिकारियों के अलावा तृतीय पक्ष निरीक्षण एजेन्‍सी मै. आई.सी.टी. लिमिटेड, नई दिल्‍ली को अनुबंधित किया गया है, जिसके इंजीनियर लगातार साईट पर रहकर कार्यों की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करते है। कार्यों का निरीक्षण नियमानुसार किया गया है एवं योजनान्‍तर्गत निर्धारित मापदण्‍डों के अनुसार गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने के बाद ही सामग्री का उपयोग किया गया है। अत: प्रश्‍नाधीन कार्य के पृथक से भौतिक सत्‍यापन की आवयकता नहीं है।

राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण के कार्य

21. ( क्र. 1511 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) श्‍योपुर जिले में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के प्रथम चरण में कौन-कौन से 475 ग्रामों को शामिल किया था, में से कौन-कौन से 143 ग्राम विद्युतीकृत हो चुके हैं, के नाम बतावें? इस हेतु कितनी राशि प्राप्‍त/व्‍यय की? (ख) उक्‍त शेष 332 ग्रामों एवं 4 ग्राम, जो पूर्व से अन्‍य योजना में स्‍वीकृत/विद्युतीकृत हैं, सहित कोन-कौन से 336 ग्रामों को फीडर सेपरेशन योजना में शामिल किया, में से निर्धारित अवधि के पश्‍चात् 66 ग्राम ही विद्युतीकृत हो पाए? शेष ग्रामों को कब तक विद्युतीकृत किया जायेगा? (ग) राजीव गांधी योजना के द्वितीय चरण में कौन-कोन से 252 मजरे-टोले शामिल किये गये, में से कौन-कौन से मजरे-टोले विद्युतीकृत हो चुके हैं? शेष कब तक होंगे? (घ) उक्‍त योजनांतर्गत प्रथम एवं द्वितीय चरण में वर्तमान तक विद्युतीकृत हो चुके गांव मजरे-टोलों में से कई में खंबे नहीं गढ़े? कई में वायरिंग नहीं हुई? 40 ग्रामों में कई माह से 65 ट्रांसफार्मर जले पड़े हैं, इन्‍हें न बदलने का कारण व कब तक बदला जावेगा? यदि नहीं, तो क्‍या शासन उक्‍त गांव, मजरे-टोलों में पूर्ण हो चुके विद्युतीकृत कार्यों का भौतिक सत्‍यापन करवाएगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) श्‍योपुर जिले में 11वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत सम्मिलित 475 ग्रामों में से 143 ग्रामों के विद्युतीकरण/सघन विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण हो चुका है। उक्‍त योजना में सम्मिलित 475 एवं कार्य पूर्णता वाले 143 ग्रामों की ग्रामवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। उक्‍त योजनान्‍तर्गत स्‍वीकृत राशि रू. 23.79 करोड़ में से राशि रू. 21.86 करोड़ व्‍यय हो चुकी है। (ख) प्रश्‍नांश '' में उल्‍लेखित 336 ग्रामों को फीडर सेपरेशन योजना में शामिल कर 82 ग्रामों के विद्युतीकरण/सघन विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। फीडर सेपरेशन योजना में सम्मिलित उक्‍त्‍ग्रामों एवं इनमें से कार्यपूर्णता वाले 82 ग्रामों की ग्रामवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण नहीं किये जाने के कारण ठेकेदार एजेंसी मेसर्स ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर लिमिटेड, मुंबई का अवार्ड निरस्‍त किया किया जा चुका है। शेष कार्य टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु निविदा कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। अत: वर्तमान में शेष कार्य पूर्ण होने की निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है। (ग) 12वीं पंचवर्षीय योजना में श्‍योपुर जिले हेतु स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में 252 मजरों/टोलों के विद्युतीकरण का कार्य सम्मिलित है तथा इनमें से 53 मजरों/टोलों के विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। उक्‍त योजना में सम्मिलित 252 मजरों/टोलों तथा कार्य पूर्णता वाले 53 मजरों/टोलों की ग्रामवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। ठेकेदार एजेंसी से किये गये अनुबंध के अनुसार उक्‍त कार्य मार्च 2017 तक पूर्ण कराने के प्रयास किये जा रहे हैं। (घ) राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के 11वें प्‍लान में शेष ग्रामों का कार्य, फीडर सेपरेशन योजनान्‍तर्गत पूर्ण किया जा रहा है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के 12वें प्‍लान में कार्य प्रगति पर है एवं योजना में सम्मिलित सभी मजरों/टोलों का कार्य किया जाना प्रस्‍तावित है। ग्रामों मे जले/खराब ट्रांसफार्मर बदलने के लिए बकाया राशि का 50 प्रतिशत जमा करने की शर्त को शिथिल कर इसे 10 प्रतिशत किया गया है। अत: ऐसे जले/खराब ट्रांसफार्मर जिनमें बकाया राशि का 10 प्रतिशत भी जमा नहीं किया गया है, बदलने हेतु शेष हैं। ग्रामों में जले/खराब ट्रांसफार्मर नियमानुसार 10 प्रतिशत बकाया राशि जमा होने के पश्‍चात् बदले जावेंगे अत: वर्तमान में समय-सीमा बताना संभव नहीं है। योजनान्‍तर्गत पूर्ण किये गये कार्यों का निरीक्षण नोडल अधिकारियों के साथ-साथ तृतीय पक्ष निरीक्षण इकाई मेसर्स वेपकॉस लिमिटेड, नई दिल्‍ली, आर.ई.सी.लिमिटेड, नई दिल्‍ली द्वारा नियुक्‍त निरीक्षण एजेन्‍सी एवं भारत सरकार द्वारा नियुक्‍त निरीक्षण एजेन्‍सी द्वारा किया गया है। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में कार्यों के भौंतिक सत्‍यापन की आवश्‍यकता नहीं है। तथापि किसी प्रकरण विशेष के प्रकाश में आने पर तत्‍काल नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। 

इंदौर विकास प्राधिकरण की कॉलानियों में स्‍कूल व धार्मिक स्‍थल का निर्माण

22. ( क्र. 1544 ) श्री सुदर्शन गुप्‍ता (आर्य) : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या इंदौर विकास प्राधिकरण की इंदौर में स्थित समस्‍त रहवासी स्‍कीमों (कॉलोनियों) में स्‍कूल व धर्मस्‍थल हेतु भूमि चिन्हित रहती है? यदि हाँ, तो वर्तमान में इंदौर में कितनी रहवासी स्‍कीम (कॉलोनी) का निर्माण इंदौर विकास प्राधिकरण द्वारा किया गया है व क्‍या उसमें स्‍कूल व धर्मस्‍थल हेतु भूमि छोड़ी जाकर वहां स्‍कूल व धर्मस्‍थल का निर्माण किया गया है? सूची उपलब्‍ध करावें। (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार जिन रहवासी स्‍कीमों (कॉलोनियों) में निर्धारित स्‍थल पर स्‍कूल व धार्मिक स्‍थल का निर्माण नहीं हुआ है? इस लिये संबंधित विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की जा रही है? स्‍पष्‍ट करें।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) इन्दौर विकास प्राधिकरण के इन्दौर में स्थित 28 रहवासी स्कीमों में स्कूल एवं धार्मिक संस्थान हेतु भूमि चिन्हित की गई है, धर्मस्थल हेतु चिन्हित नहीं की गई है। प्राधिकरण द्वारा 28 रहवासी योजनाओं का निर्माण किया गया है। निर्मित आवासीय योजनाओं मे से 71 स्थानों पर स्कूल एवं 02 स्थानों पर धार्मिक संस्थानों हेतु भूखण्ड चिन्हित किये गये है। कुल चिन्हित 73 स्थानों मे से 33 स्थानों पर निर्माण हुआ है, जिनमें 31 स्कूल एवं 02 धार्मिक संस्थान सम्मिलित है। योजनावार संख्यात्मक सूची संलग्न परिशिष्ट पर है। (ख) प्रश्नाशं अनुसार जिन रहवासी स्कीमों में (कालोनियों में) निर्धारित स्थल पर स्कूल का निर्माण नहीं हुआ है ऐसे प्रकरणों में यथासमय लीज़ शर्तों एवं प्रचलित व्ययन नियम के प्रावधान अनुसार कार्यवाही की जाती है।

परिशिष्ट ''तेरह''

शैक्षणिक ऑडिटोरियम व अन्‍य विकास कार्यों हेतु भूमि का चिह्नांकन

23. ( क्र. 1545 ) श्री सुदर्शन गुप्‍ता (आर्य) : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या इन्‍दौर विकास प्राधिकरण द्वारा इन्‍दौर में विगत 5 वर्षों में शैक्षणिक संस्‍थान (स्‍कूल-कॉलेज) ऑडिटोरियम, हॉस्पिटल, सामुदायिक भवनों के निर्माण हेतु भूमि चिन्हित की गई थी? यदि हाँ, तो उपरोक्‍त चिन्‍हीत भूमि पर प्रस्‍तावित निर्माण किया जा चुका है अथवा नहीं, स्‍पष्‍ट कर चिह्नित स्‍थानों की सूची उपलब्‍ध करावें? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) अनुसार प्रस्‍तावित निर्माण हेतु चिह्नित भूमि पर निर्माण हेतु विभाग द्वारा निविदा आमंत्रित कर उन्‍हें विक्रय किया जाता है? यदि हाँ, तो क्‍या विभाग द्वारा निविदायें आमंत्रत की गई? यदि नहीं, की गयी तो विभाग इस हेतु क्‍या कार्यवाही कर रहा है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। जी नहीं। चिन्हित भूमि की सूची संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी हाँ। जी नहीं। उक्त कार्यवाही प्रचलन में है। नवीन भू-अर्जन अधिनियम प्रभावशील होने के पश्चात् विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन प्रकरण एवं पारित विभिन्न आदेशों के परिपेक्ष्य में व्ययन संबंधी प्रक्रिया की कार्यवाही प्रचलन में है।

परिशिष्ट - ''चौदह''

संचालित योजनाओं पर व्‍यय

24. ( क्र. 1615 ) कुँवर विक्रम सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर जिले में विद्युत विभाग द्वारा वर्ष, 2012 से प्रश्‍न दिनांक तक संचालित कार्यों पर कितनी राशि व्‍यय की गई, योजनावार बतावें? (ख) जिले में संचालित योजनाओं के संबंध में किन-किन ठेकेदारों को कार्य किस मापदण्‍डों के अनुसार स्‍वीकृत किये गये और कार्यों की भौतिक स्थिति क्‍या है, विवरण दें तथा स्‍वीकृत कार्यों हेतु शासन की गाईड लाईन की प्रतियां उपलब्‍ध करावें? भू-अर्जन पर शासन का कितना व्‍यय हुआ?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) छतरपुर जिले में पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्‍पनी जबलपुर द्वारा वर्ष 2012 से प्रश्‍न दिनांक तक संचालित कार्यों पर योजनावार व्‍यय की गई राशि का विवरण निम्‍नानुसार है:-

क्र.

योजना का नाम

व्‍यय की गई राशि (रू. लाख में)

1

रा.गां.ग्रा.वि.यो. (11वीं पंचवर्षीय योजना)

1631.00

2

रा.गां.ग्रा.वि.यो. (11वीं पंचवर्षीय योजना पूरक)

1024.00

3

रा.गां.ग्रा.वि.यो. (12वीं पंचवर्षीय योजना)

702.00

4

आर.ए.पी.डी.आर.पी छतरपुर शहर

1491.77

5

आर.ए.पी.डी.आर.पी नौगांव शहर

967.01

6

फीडर सेपरेशन योजना

1151.23

 
पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा विभागीय तौर पर कराए जा रहे कार्यों हेतु कंपनी स्‍तर पर इकजाई रूप से सामग्री क्रय कर क्षेत्रीय भण्‍डार को प्रदाय की जाती है। मैदानी अधिकारियों द्वारा समय समय पर कार्यों की आश्‍यकतानुसार उक्‍त सामग्री का भण्‍डार से आहरण कर उपयोग किया जाता है। अत: जिले विशेष हेतु किये गये कार्यों में उपयोग की गई सामग्री पर व्‍यय की गई राशि की जानकारी दिया जाना संभव नहीं है। उक्‍त के अतिरिक्‍त छतरपुर जिले में पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा ट्रांसमिशन के कार्यों हेतु वर्ष 2012 से प्रश्‍न दिनांक तक कुल राशि रू. 2864.97 लाख व्‍यय की गई है जिसका योजनावार विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) छतरपुर जिले में योजनावार स्‍वीकृत कार्यों के देकेदारों का विवरण एवं कार्य की भौतिक स्थिति का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-''''-1 तथा ''''-2 अनुसार है। योजनावार स्‍वीकृत कार्यों के क्रियान्‍वयन हेतु वितरण कंपनी द्वारा निविदा आमंत्रित की जाती है तथा न्‍यूनतम निविदाकार की निविदा स्‍वीकृत कर निविदा की शर्तों के अनुसार कार्य करने हेतु कार्य आदेश जारी किया जाता है। रा.गां.ग्रा.वि.यो. एवं आर.ए.पी.डी.आर.पी योजना हेतु विद्युत मंत्रालय भारत सरकार द्वारा प्रदान की गई गाईड लाईन पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-''''-1 ''''-2 तथा फीडर सेपरेशन के कार्य हेतु राज्‍य शासन द्वारा पारित संकल्‍प 2013 पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ''''-3 में दिए गए निर्देशानुसार कार्य कराए जा रहे हैं। म.प्र. पॉवर ट्रांसमिशन कं. द्वारा केन्‍द्रीय विद्युत प्राधिकरण के ट्रांसमिशन प्‍लानिंग क्राइटेरिया गाईड लाईन के अनुसार कार्य कराए जाते हैं जिसकी प्रतिलिपि पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-''''-4 अनुसार है। शासन द्वारा विद्युत विभाग को वांछित शासकीय भूमि रू. एक के प्रतीकात्‍मक भू-भाटक दर पर उपलब्‍ध कराई जाती है अत: भू-अर्जन पर व्‍यय हुई राशि व्‍यवहारिक रूप से निरंक है।

अवैध उत्खनन

25. ( क्र. 1616 ) कुँवर विक्रम सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर जिले में दिनांक 1/1/2014 से प्रश्‍न दिनांक तक कितनी नदियों की बालू का उत्‍खनन किया जा रहा है? (ख) विभागीय अधिकारियों ने अवैध उत्‍खनन रोकने हेतु किन-किन तिथियों में निरीक्षण किन-किन क्षेत्रों में किया, तिथिवार बतावें? (ग) क्‍या विभागीय अधिकारी खनन माफियाओं से मिलकर अवैध उत्‍खनन कराकर मोटी रकम वसूलते हैं? (घ) क्‍या इन अधिकारियों के विरूद्ध कोई कार्यवाही की गई?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नाधीन जिले में प्रश्‍नांकित अवधि में दिनांक 02.02.2015 से 31.07.2015 के मध्‍य केन नदी पर ग्राम चुकहेटा में 01 नीलाम रेत खदान संचालित रही है। वर्तमान में एक अन्‍य रेत खदान केन नदी पर ग्राम कुरधना में दिनांक 11.02.2016 से 10.05.2016 तक की अवधि हेतु संचालित है। (ख) छतरपुर जिले में पदस्‍थ खनि निरीक्षक एवं खनि सर्वेयर द्वारा ग्राम गोमाकला, बारबंद, मवईघाट, बरूआ, पिपरी, बंजारी आदि ग्रामों का दिनांक 07.04.2014, 12.07.2014, 11.02.2015, 13.06.2015, 22.06.2015, 05,.07.2015, 21.05.2015 25.05.2015, 16.10.2015, को प्रश्‍नानुसार निरीक्षण किया गया है।  (ग) जी नहीं। (घ) प्रश्‍नांश '' में दिये उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

वोल्‍टेज में सुधार एवं 24 घण्‍टे विद्युत प्रदाय करने की योजनाएं

26. ( क्र. 1785 ) श्री सुदेश राय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला सीहोर के विकासखण्‍ड सीहोर में वोल्‍टेज में सुधार एवं 24 घण्‍टे विद्युत प्रदाय करने अंतर्गत वर्तमान में कौन-कौन सी योजनाओं में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कितनी-कितनी राशि के किस-किस कंपनी द्वारा क्‍या-क्‍या कार्य किये जा रहे हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों की योजनावार, राशि सहित कार्यों की पृथक-पृथक जानकारी बतावें? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में उक्‍त कार्यों को पूर्ण करने की समय-सीमा क्‍या है तथा कार्य कब तक पूर्ण कर लिये जायेंगे?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) सीहोर जिले के विकासखण्‍ड सीहोर में वोल्‍टेज सुधार एवं 24 घण्‍टे विद्युत प्रदाय के लिये शहरी क्षेत्र में आर.ए.पी.डी.आर.पी. एवं ए.डी.बी. योजना तथा ग्रामीण क्षेत्र में फीडर विभक्तिकरण योजना स्‍वीकृत हैं। उक्‍त योजनाओं हेतु स्‍वीकृत राशि सहित प्रस्‍तावित किये जा रहे कार्यों की ठेकेदार कंपनीवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) उत्‍तरांश (क) के सन्‍दर्भ में प्रश्‍नाधीन शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में क्रियान्वित की जा रही योजनाओं की योजनावार स्‍वीकृति राशि एवं योजनान्‍तर्गत प्रस्‍तावित कार्यों की जानकारी सहित विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) उत्‍तरांश (क) एवं (ख) में उल्‍लेखित कार्यों को पूर्ण करने की निर्धारित समय-सीमा संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' में दर्शाए अनुसार है। आर.ए.पी.डी.आर.पी. तथा फीडर विभक्तिकरण योजना अन्‍तर्गत प्रश्‍नाधीन कार्य क्रमश: जून, 2016 तथा मई 2016 तक तथा ए.डी.बी.योजना अंतर्गत कार्य अप्रैल 2016 तक पूर्ण कराये जाने के प्रयास हैं

परिशिष्ट - ''पंद्रह''

खनन अनुमति

27. ( क्र. 1836 ) श्री मुकेश नायक : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खनिज विभाग द्वारा कितने प्रकार के लायसेंस, अनुमति, खनन उसके परिवहन और उसके विक्रय से संबंधित हैं, जो शासन द्वारा कलेक्‍टर द्वारा और एस.डी.एम. द्वारा अनुमति दी जाती है, उनके नाम, उनसे संबंधित नियम/अधिनियम की जानकारी उपलब्‍ध करावें? (ख) पन्‍ना जिले में कितने प्रकार की खदानों की अनुमति दी गई है? उन ठेकेदारों के नाम, पता एवं खदाने किस-किस जगह हैं, रकबा सहित अवधि बताते हुए यह भी बतावें कि इन खदानों पर विभाग के कौन-कौन से प्राधिकारी ने 1 जनवरी, 2013 से जनवरी, 2016 तक निरीक्षण दौरे किये? (ग) इन खदानों पर मजदूरों की सुरक्षा पर्यावरण की सुरक्षा प्रदूषण इत्‍यादि से बचने के लिये क्‍या-क्‍या उपाय कराये गये?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' में दर्शित है। खनिज नियमों में एस.डी.एम. को खनन संबंधी अनुमति आदि प्रदान करने के अधिकार नहीं है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब में दर्शित है। प्रश्‍नांकित अवधि में खदानों का समय-समय पर जिले के खनि अधिकारी/खनिज निरीक्षक द्वारा निरीक्षण किया जाता है। खनिज नियमों में किए गए निरीक्षण की एकजाई पंजी संधारित किए जाने का प्रावधान नहीं है। (ग) खदानों में मजदूरों की सुरक्षा, पर्यावरण की सुरक्षा, प्रदूषण इत्‍यादि से बचने के लिए खदानों में पानी का छिड़काव, मजदूरों को मास्‍क लगाकर कार्य कराया जाता है।

राजीव गांधी विद्युतीकरण

28. ( क्र. 1837 ) श्री मुकेश नायक : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या पन्‍ना जिले में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना संचालित है? यदि हाँ, तो पन्‍ना जिले के पवई विधानसभा क्षेत्र के कितने ग्रामों में कितना कार्य किस संविदाकार से कराया गया है? क्‍या पूर्व के संविदाकार द्वारा कार्य अपूर्ण कर बंद कर दिया है? यदि हाँ, तो इसके लिये जिममेदार कौन है? कया उसके खिलाफ कोई कार्यवाही हुई? नहीं तो क्‍यों? (ख) क्‍या कुछ ग्रामों में मात्र खम्‍बे भर गाड़ दिये गये हैं? उनमें तार खींचा जावेगा, (केबिल) ट्रांसफार्मर लगाए जावेंगे, यदि हाँ, तो कब तक? ग्राम घुटेही (रैपुरा), सगौनी (बघवार), आदि तक बिजली नहीं है? क्‍या उन ग्रामों का विद्युतीकरण कराया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक? (ग) क्‍या शासन हर ग्राम में विद्युतीकरण करने की योजना बना रहा है? यदि हाँ, तो कब तक पूरी होगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ, पन्‍ना जिले में राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना संचालित है, जिसके अंतर्गत पन्‍ना जिले के पवई विधान सभा क्षेत्र में टर्न-की ठेकेदारों द्वारा किये गये कार्यों की ग्रामों की संख्‍या सहित जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट में दर्शाये अनुसार है। 11वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में विद्युतीकरण कार्य हेतु टर्न-की ठेकेदार एजेंसी मेसर्स आई.सी.एस.ए. (इण्डिया) लि. हैदराबाद को दिनांक 06.08.09 को कार्यादेश जारी किया गया परंतु अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्य समय-सीमा में पूर्ण नहीं किये जाने के कारण उक्‍त ठेकेदार एजेंसी के विरूद्ध कार्यवाही कर उक्‍त ठेका दिनांक 20.12.11 को निरस्‍त कर दिया गया था। एवं टर्न-की ठेकेदार एजेंसी की परफारमेन्‍स गांरटी राशि रू. 4.81 करोड़ जप्‍त कर ली गई थी। साथ ही उक्‍त ठेकेदार ऐजेंसी के देयकों से रू. 1.59 करोड़ की राशि लिक्विडेटेड डैमेज के रूप में पेनाल्‍टी स्‍वरूप काटी गई है। (ख) 12वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत रा.गा.ग्रा.वि.यो. अन्‍तर्गत जिला पन्‍ना में 24 ग्रामों में खम्‍बे खड़े कर दिये गये हैं एवं 38 ग्रामों में खम्‍बे खड़े  किये जाने का कार्य प्रगति पर है। उक्‍त ग्रामों में खंबे खड़े करने के पश्‍चात तार/केबिल खींचकर ट्रांसफार्मर स्‍थापित कर विद्युतीकरण किया जाना है। टर्न-की ठेकेदार एजेंसी से किये गये अनुबंध की शर्तों के अनुसार उक्‍त ग्रामों सहित पन्‍ना जिले के ग्रामीण विद्युतीकरण के कार्य मार्च 2017 तक पूर्ण किया जाना है। जी हाँ, ग्राम घुटेही (रैपुरा) एवं सगौनी (बघवार) के वन क्षेत्र में स्थित होने के कारण इनके विद्युतीकरण का कार्य नहीं हो सका है। उक्‍त दोनो ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य 12वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में शामिल है1 उक्‍त ग्रामों के विद्युतीकरण हेतु वन विभाग से अनुमति प्रतीक्षित हैअनुमति प्राप्‍त होने के पश्‍चात कार्य यथाशीघ्र पूर्ण किया जायेगा। (ग) जी हाँ] पारम्‍परिक रूप से लाईन विस्‍तार कर विद्युतीकरण योग्‍य सभी ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य 31 मार्च 2016 तक पूर्ण करने के प्रयास है। दूर-दराज के क्षेत्रों एवं सघन वन क्षेत्रों में स्थित ग्रामों को नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा गैर-परम्‍परागत ऊर्जा स्‍त्रोतों से दिसम्‍बर 2016 तक विद्युतीकृत करने का कार्यक्रम है। 

परिशिष्ट ''सोलह''

ग्‍वालियर विकास प्राधिकरण की आवासीय योजना

29. ( क्र. 1943 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या ग्‍वालियर विकास प्राधिकरण द्वारा आनंद गृह निर्माण सहकारी समिति से प्राधिकरण की सिटी सेंटर, ग्‍वालियर आवासीय योजना में कुल भूमि के बदले 50 प्रतिशत् विकसित भू-खण्‍ड समिति को प्रदान करने का अनुबंध किया गया था? आनंद गृह निर्माण सहकारी समिति द्वारा की गई भूमि पर कितने वर्गफिट भूमि प्राधिकरण द्वारा समिति को प्रदान की गई तथा कितने वर्गफिट भूमि प्राधिकरण द्वारा अन्‍य भूमियों के क्षेत्र पर समिति को प्रदान की गई? (ख) क्‍या समिति को दी गई भूमि के बदले अन्‍य भूमियों पर विकसित वाणिज्यिक भू-खण्‍ड भी समिति को दिये गये हैं? यदि हाँ, तो समिति को दिये गये कुल वाणिज्यिक एवं आवासीय सह-वाणिज्यिक भू-खण्‍डों का क्षेत्रफल भी बतावें? (ग) समिति द्वारा प्राधिकरण को अनुबंध पर दी गई भूमि पर कुल कितने क्षेत्रफल के भू-खण्‍ड विकसित हुये? आवासीय, वाणिज्यिक एवं आवासीय सह वाणिज्यिक भू-खण्‍डों की जानकारी नाम/पतों सहित प्रकरणवार दें? (घ) क्‍या प्राधिकरण द्वारा समिति को आवंटित भू-खण्‍डों का क्षेत्रफल समिति की भूमि से प्राधिकरण को प्राप्‍त भू-खण्‍डों से अधिक है? यदि हाँ, तो कितना तथा इस कारण प्राधिकरण को वर्तमान कलेक्‍टर गाइड लाईन के मूल्‍य के अनुसार कितनी क्षति हुई है तथा इस क्षति के लिये जिम्‍मेदार अधिकारियों/कर्मचारियों के नामवार/पतेवार/राशिवार/ समितिवार जानकारी दें?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। प्राधिकरण द्वारा सिटी सेंटर अंतर्गत आनन्द गृह निर्माण समिति के साथ किये गये 3 अनुबंधों यथा दिनांक 24.02.1990, 30.01.1990 तथा 22.08.1989 के अंतर्गत समिति द्वारा दी गई भूमि पर क्रमशः 36980 वर्गफुट, 116260 वर्गफुट तथा 333854 वर्गफुट भूमि (कुल 487094 वर्गफुट) तथा अन्य भूमियों के क्षेत्र पर क्रमशः 8716 वर्गफुट, 2905 वर्गफुट तथा 37272 वर्गफुट (कुल 48893 वर्गफुट) भूमि दी गई। (ख) जी हाँ। समिति को सिटी सेंटर योजना में ही लगी प्राधिकरण के स्वत्व की भूमि पर वाणिज्यिक भूखंड रकवा 6714 वर्गफुट तथा आवासीय सह वाणिज्यिक भूखंड रकवा 13127 वर्गफुट कुल रकवा 19841 वर्गफुट आवंटित किये गये। (ग) समिति द्वारा प्राधिकरण को उत्तरांश में उल्लेखित तीन अनुबंध पर दी गई भूमियों का कुल विकसित क्षेत्रफल 614472 वर्गफुट है, जिसमें 467001 वर्गफुट आवासीय तथा 147471 वर्गफुट भूमि आवासीय सह वाणिज्यिक है। समिति को अनुबंध अनुसार आवंटित किये गये भूखंड का विक्रय समिति द्वारा अपने सदस्यों को दिया गया है, जिसकी सूची प्राधिकरण में उपलब्ध नहीं है। (घ) जी नहीं। प्राधिकरण द्वारा समिति को आवंटन योग्य भूखण्ड क्षेत्रफल से कम क्षेत्रफल के भूखण्ड आवंटित किये गये है। अतः किसी क्षति का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। उक्त के परिपेक्ष्य में शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता है। 

इंदिरा सागर डेम की नहरों का निर्माण

30. ( क्र. 2138 ) श्री उमंग सिंघार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या बड़वानी जिले में इंदिरा सागर परियोजना डेम की नहर का कार्य दिनांक 1/1/2013 से 21/12/2015 के बीच में किया गया तथा उक्‍त कार्य का निर्माण किस एजेंसी द्वारा किया गया, तथा लागत राशि कितनी है? (ख) उक्‍त समय-सीमा में निर्माण कार्य में रेत व गिट्टी का उपयोग कितने क्‍यू. मीटर किया गया? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) अनुसार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार दिनांक 1/1/2013 से 21/12/2015 तक रेत खदानों की स्‍वीकृति पर प्रतिबंध के दौरान किए गए निर्माण कार्य का जवाबदार कौन है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) दिनांक 01/01/2013 से दिनांक 21/12/2015 के बीच मेसर्स आई.व्‍ही.आर.सी.एल.लिमि. हैदराबाद द्वारा रूपये 85.81 करोड़ एवं मेसर्स सोमदत्‍त बिल्‍डर्स एण्‍ड के.डी.एस. प्रा.लि. (जे.व्‍ही) नई दिल्‍ली द्वारा 77.13 करोड़ का निर्माण कार्य किया गया है। (ख) 78943 घन मीटर रेत एवं 216597 घन मीटर गिट्टी का उपयोग किया गया। (ग) जनवरी 2013 से जुलाई 2015 तक बडवानी जिले में खदानों से खनिज सप्‍लायर्स द्वारा एजेन्‍सी से रेत की कीमत एवं रायल्‍टी की राशि लेकर रेत सप्‍लाई की गई एवं अगस्‍त 2015 से दिसम्‍बर 2015 तक एजेन्‍सी द्वारा स्‍टॉक की गई रेत एवं अलीराजपुर जिले की रेत का उपयोग किया गया। शेष प्रश्‍नांश उपस्थित ही नहीं होता।

विभागीय कार्यक्रमों का आयोजन

31. ( क्र. 2178 ) श्री विजय सिंह सोलंकी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इंदौर संभाग में विभाग द्वारा विगत 3 वर्षों में कितने कार्यक्रम का आयोजन कहाँ-कहाँ, कब किया गया, आयोजनवार बतावें? आयोजन में खर्च राशि मदवार बतावें? (ख) उक्‍त आयोजनों के मुख्‍य कार्यक्रम अधिकारी कौन रहे, नाम, पद सहित सूची देवें? कार्यक्रमों में शामिल मुख्‍य अतिथियों की जानकारी देवें? (ग) वर्ष, 2015 में किस कार्यक्रम में व्‍यवधान की शिकायत वरिष्‍ठ विभाग को प्राप्‍त हुई है? किसी कार्यक्रम में हुई मारपीट पर दर्ज कराई गई एफ.आई.आर. संबंधी जानकारी देवें? किसी आयोजन की शिकायत पर की गई जाँच तथा जाँच प्रतिवेदन की जानकारी देवें?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है.

विस्‍थापित परिवारों को नगर निगम से प्राप्‍त सुविधाएं

32. ( क्र. 2207 ) श्री अंचल सोनकर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या महारानी लक्ष्‍मीबाई कन्‍या स्‍कूल एवं परसवारा के विस्‍थापित लोगों को गढ़ा पुरवा में जे.एन.एन.यू.आर.एम. में बने आवासों में रखा गया है? यदि हाँ, तो इन्‍हें विस्‍थापित करने का कारण क्‍या था? क्‍या विस्‍थापित उपरांत इन्‍हें जो स्‍थान निवास हेतु दिया गया था? क्‍या उसकी सम्‍पूर्ण सुख सुविधाओं की जवाबदारी नगर निगम, जबलपुर की थी? यदि हाँ, तो इन्‍हें क्‍या-क्‍या सुविधाएं प्रदाय की गई है? विस्‍तृत जानकारी देवें? (ख) प्रश्‍नांश (क) में दी गई सुविधाओं में क्‍या निगम द्वारा विस्‍थापितों के विद्युत बिल, पेयजल एवं भोजन की व्‍यवस्‍था की गई थी? यदि हाँ, तो कितने दिनों तक यह सुविधायें लोगों को प्रदाय की गई? इन सुविधाओं में निगम की कितनी राशि व्‍यय हुई, मदवार बतावें? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में विस्‍थापितों को दी गई सुविधाओं में क्‍या विद्युत बिलों की वसूली की जानी थी, इन्‍हें एक-एक विद्युत सब मीटर लगाकर उपयोग की गई विद्युत की राशि वसूल की जानी थी? यदि हाँ, तो क्‍या ऐसा किया गया? यदि हाँ, तो विस्‍थापितों से कितनी राशि वसूल की गई? विस्‍थापितों के भोजन पर कितनी राशि व्‍यय की गई?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) महारानी लक्ष्‍मी बाई स्‍कूल के पीछे स्थित बस्‍ती के हितग्राहियों को अस्‍थायी रूप से जे.एन.एन.यू.आर.एम. योजना में बने आवासों में रखा गया है। परसवाड़ा के विस्थिापितों को इन आवासों में नहीं रखा गया है। महारानी लक्ष्‍मी बाई स्‍कूल के पीछे स्थित बस्‍ती में राजीव आवास योजना के अंतर्गत उसी स्‍थान पर बस्‍ती का पुर्नविकास, पक्‍के आवास एवं अन्‍य अधोसंरचना कार्य किये जा रहे है। इस लिये निर्माण कार्य पूर्ण होकर आवासों के आवंटन तक हितग्राहियों केा इन आवासों में रखा गया है। इन हितग्राहियों को जो स्‍थान निवास हेतु दिया गया था, उसमें आधारभूत व्‍यवस्‍थायें नगर पालिक निगम, जबलपुर द्वारा पूर्व से ही की जा चुकी थी। जिनमें विद्युत व्‍यवस्‍था, पेयजल इत्‍यादि शामिल थे। (ख) उत्‍तर '''' में दी गई सुविधाओं में नगर निगम द्वारा विस्‍थापितों के पेयजल की व्‍यवस्‍था एवं सभी आवासीय इकाईयों में विद्युत की व्‍यवस्‍था (हितग्राहियों द्वारा स्‍वयं देय है।) की गई थी। उपरोक्‍त सुविधायें वर्तमान में भी जारी है। इन सुविधाओं में विद्युत व्‍यवस्‍था हेतु नगर निगम द्वारा राशि 1237319/- का भुगतान किया गया है। (ग) उत्‍तर '''' एवं '''' में विस्‍थापितों को दी गई सुविधाओं में विद्युत की वसूली हितग्राहियों से ही की जाना है। विद्युत सबमीटर नहीं लगाये गये है। औसर के आधार पर हित‍ग्राहियों द्वारा राशि रू. 94700/- का भुगतान भी किया जा चुका है एवं शेष राशि आवासों के आवंटन के पूर्व हितग्राहियों से जमा कराई जायेगी। विस्‍थापितों के भोजन में कोई व्‍यय नहीं किया गया है।

चीलर बांध में काली सिंध नदी का पानी लाने हेतु

33. ( क्र. 2301 ) श्री अरूण भीमावद : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या माननीय मुख्‍यमंत्री के शाजापुर प्रवास के दौरान किसान सम्‍मेलन में काली सिंध नदी/ लखुन्‍दर नदी का पानी चीलर बांध शाजापुर में लाने हेतु सर्वे करने हेतु निर्देश दिये गये थे? (ख) यदि चीलर बांध में उक्‍त नदियों का पानी लाया जाता है, तो सिंचित रकबा एवं शाजापुर नगर एवं बांध के आसपास गांवों में पेयजल की समस्‍या समाप्‍त होगी? (ग) प्रश्‍नांश (क) व (ख) के अनुसार विभाग द्वारा सर्वे कार्य पूर्ण कर प्रथम स्‍तरीय प्राक्‍कलन शासन को प्रस्‍तुत किया गया है? (घ) यदि हाँ, तो चीलर बांध में कालीसिंध नदी या लखुंदर नदी से पानी लाने हेतु प्रशासनिक स्‍वीकृति कब तक होगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) से (घ) जी नहीं, दिनांक 16.09.2010 को मा. मुख्‍यमंत्री जी ने जौनपुर नाले का जल चीलर बांध में मिलाने हेतु सर्वे कराए जाने की घोषणा की थी। परीक्षण पर योजना तकनीकी रूप से साध्‍य नहीं पाई गई। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

विदिशा जिले के सिरोंज स्थित केथन डेम पर अवैध अतिक्रमण

34. ( क्र. 2381 ) श्री गोवर्धन उपाध्‍याय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विदिशा जिले के सिरोंज स्थित केथन डेम कितने हेक्‍टेयर में स्थित है? उक्‍त डेम के डूब क्षेत्र के कितने हेक्‍टेयर में अवैध रूप से कितने व्‍यक्तियों द्वारा कब से अतिक्रमण कर खेती की जा रही है? (ख) क्‍या उक्‍त डेम के डूब क्षेत्र में सिंचाई विभाग द्वारा लोगों को सिंचाई के लिये पट्टे दिये गये हैं? यदि हाँ, तो किन-किन लोगों को कितनी अवधि के लिये दिये हैं?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ख) केथन जलाशय का डूब क्षेत्र 279.21 हेक्टेयर है। डूब क्षेत्र की भूमि खाली होने पर पिछले 10 वर्षों से 40 से 45 व्‍यक्तियों द्वारा बिना पट्टे के खेती की जाना प्रतिवेदित है। जिला कलेक्‍टर एवं मैदानी अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं कि डूब क्षेत्र की भूमि खाली होने पर विधिवत कार्रवाई करते हुए फसल हेतु भूमि पट्टे पर दी जाए और अनाधिकृत रूप से किसी व्‍यक्ति को डूब भूमि पर कृषि नहीं करने दी जाए।

पर्यटन विकास द्वारा निर्माण

35. ( क्र. 2386 ) श्री गोवर्धन उपाध्‍याय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विदिशा जिले के सिरोंज विधानसभा क्षेत्रांतर्गत विगत पाँच वर्षों में पर्यटन विकास विभाग द्वारा किन-किन स्‍थानों पर क्‍या-क्‍या निर्माण कार्य कराए गए हैं? (ख) उक्‍त निर्माण कार्यों की लागत कितनी हैं? (ग) पर्यटन विकास विभाग द्वारा जो कार्य अपूर्ण हैं, वह कब तक पूर्ण कराये जायेंगे? आगामी वर्षों में कौन से नये कार्य किये जाने हेतु प्रस्‍तावित हैं?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जानकारी परिशिष्‍ट अनुसार(ग) कार्यपूर्ण हो चुके है। वर्तमान में बताया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट -''सत्रह''

बाणसागर परियोजना के कार्य

36. ( क्र. 2391 ) श्रीमती शीला त्‍यागी : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जल संसाधन विभाग रीवा संभाग रीवा (बाणसागर परियोजना रीवा) में विधान सभा क्षेत्र मनगवां एवं सिरमौर में वर्ष 2013-14 से कौन-कौन से कार्य स्‍वीकृत कर कराये गये या कराये जा रहे हैं, कार्य का नाम, कार्य की लागत, कार्य की स्थिति अंकित कर देवें? (ख) प्रश्‍नांश (क) के कराये जा रहे कार्यों की कब-कब विभाग द्वारा निविदा जारी की गई है तथा कुल कितनी निविदायें प्राप्‍त हुई है और किस ठेकेदार अथवा कंपनी से काम कराया जा रहा है? (ग) प्रश्‍नांश (क) के कार्यों में कौन-कौन से काम अपने निश्चित समय-सीमा पर पूरा नहीं हो रहे है? उन ठेकेदारों एवं कंपनियों के विरूद्ध विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई या की जा रही हैं? (घ) क्‍या प्रश्‍नांश (क) के कार्यों के गुणवत्‍ता की जाँच वरिष्‍ठ अधिकारियों द्वारा की गई हैं? यदि गुणवत्‍ता विहीन कार्य कराये गये हैं तो संब‍ंधित दोषी ठेकेदार एवं संलग्‍न अधिकारी के विरूद्ध राशि वसूली एवं दण्‍ड आदेश जारी किया गया हैं? यदि हाँ, तो विवरण देवें?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) विधान सभा क्षेत्र मनगंवा एवं सिरगौर में प्रश्‍नाधीन वर्षों से कराये जा रहे कार्यों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। कार्य की प्रगति संतोषजनक नहीं होने के कारण निर्माण एजेंसी श्री अरूणेश्‍वर सिंह रीवा का अनुबंध विखण्डित किया गया और निर्माण एजेंसी की परफारमेंस गारंटी तथा सुरक्षा निधि राजसात कर पंजीयन निलंबित किया गया। (घ) गुणवत्‍ता की जाँच गुण नियंत्रण इकाई, रीवा द्वारा किया गया है। कार्य की गुणवत्‍ता संतोषजनक होने से शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते है।

चुटका परमाणु विद्युत गृह निर्माण की अधिसूचना

37. ( क्र. 2516 ) श्री रामप्यारे कुलस्ते : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) चुटका परमाणु विद्युत गृह निर्माण हेतु परियोजना स्‍थापना, कॉलोनी विकास तथा अन्‍य कार्यों के निर्माण हेतु परियोजना में कहाँ-कहाँ से और कितनी जमीन अधिग्रहण की जावेगी इस की सूचना कब-कब दी गई थी? (ख) क्‍या उक्‍त परियोजना में जमीन अधिग्रहण एवं अवार्ड पास करने के लिये सभी ग्रामों में ग्राम सभा की सहमति ली गई है यदि हाँ, तो कब-कब ग्राम सभा आयोजित की गई? (ग) धारा 09 अंतर्गत पुर्नवासन एवं पुर्नस्‍थापन का अवार्ड कब घोषित किया गया? अवार्ड घोषित होने के बाद लोग अपने दावे आपत्ति कहाँ दे सकेंगे जिससे लोगों की आपत्ति का निराकरण हो सकें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) परियोजना हेतु कलेक्‍टर मंडला से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार चुटका परमाणु विद्युत गृह निर्माण हेतु परियोजना स्‍थापना तथा कॉलोनी विकास हेतु ग्राम चुटका की 111.81 हेक्‍टेयर, टाटीघाट की 26.4 हेक्‍टेयर, कुण्‍डा की 85.76 हेक्‍टेयर तथा मानेगांव की 63.24 हेक्‍टेयर इस प्रकार कुल 287.21 हेक्‍टेयर भूमि, अवार्ड दिनांक 27.06.2015 एवं संशोधित अवार्ड दिनांक 11.12.2015 द्वारा अधिग्रहित की गई। भू-अर्जन अधिनियम की धारा 4 की अधिसूचना का प्रकाशन दिनांक 20.07.2012 को तथा धारा 6 की अधिसूचना का प्रकाशन दिनांक 05.07.2013 को किया गया। (ख) कलेक्‍टर मंडला से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार चुटका परमाणु विद्युत परियोजना में जमीन अधिग्रहण एवं अवार्ड पास करने के लिए सभी ग्रामों में ग्राम सभा की बैठक आयोजित कर सहमति ली गई थी। जिसके लिए ग्राम चुटका (ग्राम पंचायत पाठा) में दिनांक 16.03.2012 को, ग्राम टाटीघाट में दिनांक 16.03.2012 को, ग्राम कुण्‍डा में दिनांक 17.03.2012 को एवं ग्राम मानेगांव में दिनांक 17.03.2012 को ग्राम सभा की बैठक का आयोजन किया गया। (ग) कलेक्‍टर मंडला से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार भू-अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्‍यवस्‍थापन में ''उचित प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013'' की धारा 31 के अन्‍तर्गत पुनर्वास एवं पुनर्व्‍यवस्‍थापन का अवार्ड दिनांक 27.06.2015 को एवं संशोधित अवार्ड दिनांक 11.12.2015 को पारित किया गया है। ''प्रतिकर और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013'' की धारा 51 से 64 के प्रावधानों के तहत् भू-अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्‍यवस्‍थापन हेतु दावे, आपत्ति प्रस्‍तुत किए जा सकते है।

बिजली बिलों की अनाधिकृत रूप से वसूली

38. ( क्र. 2599 ) श्रीमती झूमा सोलंकी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भीकनगांव विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत घरेलू उपभोक्‍ताओं को बिना रिडिंग लिये आंकलित/अनुमानित खपत के विद्युत बिल जारी कर निरंतर अनाधिकृत रूप से वसूली की जा रही है? यदि हाँ, तो क्‍यों? (ख) क्‍या जिन उपभोक्‍ताओं के मीटर चालू हालत में घर के बाहर लगे हुए हैं उनसे भी अनुमानित खपत के नाम पर राशि वसूल की जा रही है? यदि हाँ, तो क्‍यों? (ग) क्‍या इस संबंध में भीकनगांव विधानसभा क्षेत्रांतर्गत ग्राम अंजनगांव से क्षेत्रीय विधायक को आवेदन पत्र प्राप्‍त होने पर बिलों के निराकरण हेतु विभाग को पत्र प्राप्‍त हुआ है? यदि हाँ, तो उस पत्र पर वर्तमान तक क्‍या कार्यवाही की गई? की गई कार्यवाही की हितग्राहीवार जानकारी उपलब्‍ध करावें? (घ) क्‍या भविष्‍य में जिनके घर पर मीटर चालू अवस्‍था में हैं, उन्‍हें रिडिंग के आधार पर बिल प्राप्‍त होगा? यदि हाँ, तो इसकी स्‍पष्‍ट समयावधि बताएं?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं, प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में घरेलू श्रेणी के उपभोक्‍ताओं को विद्युत मीटर में दर्ज वास्‍तविक खपत के अनुसार ही नियमानुसार विद्युत देयक जारी किये जा रहें है। तथापि ऐसे घरेलू श्रेणी के उपभोक्‍ता जिनके मीटर बंद/खराब है उन्‍हे विद्युत प्रदाय संहिता 2013 के प्रावधानों के अनुसार विगत तीन माह की वास्‍तविक खपत के औसत के आधार पर आंकलित खपत के विद्युत देयक जारी किये जा रहें है तथा जिन घरेलू कनेक्‍शनों पर मीटर नहीं लगे है, उनमें म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी टैरिफ आदेश के अनुसार संबद्ध भार के आधार पर आंकलित खपत के देयक दिये जा रहे है। (ख) जी नहीं। (ग) जी हाँ। माननीया प्रश्‍नकर्ता विधायक महोदया का पत्र क्रमांक 08/181-भीकनगांव/16 दिनांक 20.01.2016 संबंधित कनिष्‍ठ यंत्री अंजन गांव को प्राप्‍त हुआ था, जिसमें ग्राम अंजन गांव में अनुसूचित जाति/जनजाति के बी.पी.एल हितग्राहियों के घरेलू श्रेणी के विद्युत कनेक्‍शनों हेतु जारी किये गये विद्युत बिलों का निराकरण किये जाने का उल्‍लेख था उक्‍त पत्र में उल्‍लेखित 9 विद्युत कनेक्‍शनों का निरीक्षण कराया गया तथा इनमें मीटर बंद पाये गये। उक्‍त कनेक्‍शनों में संयोजित भार का भी सत्‍यापन कराया गया तथा यह पाया गया कि संयोजित भार के अनुसार ही आं‍कलित खपत के बिल जारी किये जा रहे हैं। उक्‍त सभी 9 कनेक्‍शनों के मीटर बदल दिये गये हैं। उक्‍त पत्र पर की गई कार्यवाही की हितग्राहीवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) जी हाँ, जिन घरेलू श्रेणी के उपभोक्‍ताओं के मीटर चालू अवस्‍था में है उन्‍हें वर्तमान में भी उनकी वास्‍तविक खपत के अनुसार नियमानुसार विद्युत देयक जारी किया ही जा रहा है। अत: समयावधि का उल्‍लेख किया जाना आवश्‍यक नहीं। 

परिशिष्ट - ''अठारह''

गलत तरिके से भुगतान के संबंध में दौषियों के खिलाफ कार्यवाही

39. ( क्र. 2600 ) श्रीमती झूमा सोलंकी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जुलाई 2015 विधानसभा सत्र में प्रश्‍न क्रमांक 1871 दिनांक 28 जुलाई, 2015 द्वारा प्राप्‍त उत्‍तर में यह बताया गया कि मूल ठेकेदार द्वारा छोटे प्रदायकर्ताओं से मटेरियल लेकर कार्य कराया जा रहा था? यदि हाँ, तो यह बतायें कि मुकेश ग्रॉफिक्‍स द्वारा कौन से मटेरियल सप्‍लाय कराया गया था तथा सप्‍लाय किये गये मटेरियल की सप्‍लाय करने हेतु संबंधित सप्‍लायर को शासन द्वारा अनुमति है? (ख) प्रश्‍न क्रमांक 1871 के जवाब में बताया गया है कि मूल ठेकेदार को छोटे प्रदायकर्ताओं को भुगतान में बैंक संबंधी समस्‍या के कारण मूल ठेकेदार को राशि का भुगतान न करते हुए छोटे प्रदायकर्ता मुकेश ग्राफिक्‍स को भुगतान किया गया, तो बैंक की ऐसी क्‍या समस्‍या थी जिससे मूल ठेकेदार को राशि भुगतान होने पर व छोटे प्रदायकर्ताओं को भुगतान करने में असमर्थ था? क्‍या इस प्रकार की सुविधा अन्‍य ठेकेदारों को भी दी जा सकती है? (ग) क्‍या हर मूल ठेकेदार को छोटे प्रदायकर्ताओं से सामग्री लेकर कार्य कराया जाता है? परंतु सभी छोटे प्रदायकर्ताओं को सीधे विभाग द्वारा भुगतान होने पर मूल ठेकेदारों के बैंक खाते में राशि का आय-व्‍यय न प्रदर्शित होने पर इनकम टैक्‍स एवं अन्‍य आरोपित टैक्‍स का सही आंकलन कैसे होगा? क्‍या इससे शासन की टैक्‍स प्राप्‍त करने में अनियमितताएं नहीं होंगी? (घ) क्‍या उपरोक्‍त प्रकार की राशि भुगतान की घटना में लेखा नियमों का उल्‍लंघन नहीं हुआ है? अगर हुआ है तो संबंधित दोषी अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध शासन कोई कार्यवाही प्रस्‍तावित करेगा।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। मेन कांट्रेक्‍टर द्वारा जो सामान क्रय किया जाता है उसके लिये शासन स्‍वीकृति का कोई प्रावधान नहीं है अत: प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) मूल ठेकेदार का बैंक खाता शाखा यूको बैंक भुसावल में होने के कारण 31 मार्च को राशि हस्‍तांतरण की समस्‍या हो रही थी। अत: ठेकेदार के आवेदन के अनुसार सीधे संबंधित फर्मों को भुगतान करने हेतु निवेदन किया गया था जिसके अनुसार भुगतान की कार्यवाही की गई। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) मूल ठेकेदार से आयकर एवं अन्‍य आरोपित टैक्‍स की कटौत्री स्‍त्रोत पर देयक भुगतान के समय की जाती है। इस प्रकरण में भी अनुबंध अनुसार टैक्‍स काटा गया। अत: अनियमितता का प्रश्‍न ही नहीं उठता। (घ) जी नहीं। शासन को वित्‍तीय हानि न होने के कारण अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही का प्रश्‍न ही नहीं उठता है। 

अमानक स्‍तर के ट्रांसफॉर्मरों का क्रय

40. ( क्र. 2619 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश मध्‍यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी मर्यादित भोपाल अथवा अन्‍य कंपनियों ने 01 जनवरी 2013 से 31 दिसम्‍बर 2015 तक स्‍मार्ट डेल्‍टा कंपनी से कितनी संख्‍या में कितनी राशि के कितने ट्रांसफॉर्मर खरीदे गए? (ख) उपरोक्‍त प्रश्‍नांश के परिप्रेक्ष्‍य में ट्रांसफॉर्मर खरीदी हेतु किस समाचार पत्र में कब निविदा प्रकाशित की गई तथा विज्ञापन में कितना व्‍यय किया गया? (ग) क्‍या भिण्‍ड जिले सहित लगभग संपूर्ण जिलों में डेल्‍टा स्‍मार्ट कंपनी के ट्रांसफॉर्मर प्रथम चार्ज के समय ही अधिक मात्रा में धुंआ निकलने के साथ ही जोर की आवाज कर जल रहें हैं? (घ) यदि हाँ, तो लहार एवं गोहद संभाग में 01 जून 2013 से प्रश्‍न दिनांक तक कितने और कहाँ-कहाँ उक्‍त कंपनी के ट्रांसफॉर्मर लगाए गए, उनमें से कहाँ कहाँ लगाए ट्रांसफार्मर जल गए? स्‍थान व ट्रांसफार्मर की क्षमता (एच.पी.) सहित बताएं?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नाधीन अवधि में मध्‍यप्रदेश मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, भोपाल एवं मध्‍यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर द्वारा मेसर्स स्‍टार डेल्‍टा ट्रांसफार्मर लिमिटेड, गोविंदपुरा, भोपाल (स्‍मार्ट डेल्‍टा कंपनी नहीं) से कुल 159 विभिन्‍न क्षमता के पॉवर ट्रांसफार्मर एवं 1444 विभिन्‍न क्षमता के वितरण ट्रांसफार्मर, इस प्रकार कुल 1603 ट्रांसफार्मर, क्रय किये गये हैं, जिनकी कुल लागत राशि रू. 43.59 करोड़ है। उक्‍त क्रय किये गये ट्रांसफार्मरों का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में ट्रांसफार्मर खरीदी हेतु मध्‍यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर द्वारा समाचार पत्रों में निविदा प्रकाशित की गई है। निविदा प्रकाशन की तिथि एवं विज्ञापन व्‍यय का विवरण निम्‍नानुसार है :-


क्र.

निविदा क्र.

समाचार पत्र का नाम

समाचार पत्रों में निविदा प्रकाशित करने की दिनांक

व्‍यय हुई राशि (रू. में)

1

449 एवं 450

दैनिक भास्‍कर, इन्‍दौर

03.01.2013

9800/-

दैनिक इंडियन एक्‍सप्रेस, मुम्‍बई

9800/-

दैनिक टाईम्‍स ऑफ इंडिया, नई दिल्‍ली

165816/-

2

583 एवं 584

दैनिक भास्‍कर, इन्‍दौर

06.03.2015

6844/-

दैनिक इंडियन एक्‍सप्रेस, मुम्‍बई

68600/-

दैनिक टाईम्‍स ऑफ इंडिया, नई दिल्‍ली

116071/-

कुल व्‍यय

376931/-

 मध्‍यप्रदेश मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, भोपाल द्वारा क्रय आदेश क्रमांक 1538 दिनांक 24.10.2013, मध्‍यप्रदेश पॉवर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड, जबलपुर के क्रय आदेश क्रमांक 04377-8 दिनांक 01.08.2013 की निरंतरता में जारी किया गया है, अत: निविदा प्रकाशित कराने की आवश्‍यकता नहीं थी। (ग) जी नहीं। तथापि मेसर्स स्‍टार डेल्‍टा ट्रांसफार्मर लिमिटेड, गोविंदपुरा भोपाल के कुछ ट्रांसफार्मर प्रथम चार्ज में असफल हुये हैं। (घ) मेसर्स स्‍टार डेल्‍टा ट्रांसफार्मर लिमिटेड, गोविंदपुरा, भोपाल के लहार एवं गोहद संभाग में 01 जून 2013 से प्रश्‍न दिनांक तक क्रमश: 107 एवं 56 इस प्रकार कुल 163 ट्रांसफार्मर स्‍थापित किए गये हैं। स्‍थापित किये गये उक्‍त ट्रांसफार्मरों में से 36 ट्रांसफार्मर असफल हुये हैं जिसमें से उत्‍तरांश (ग) अनुसार प्रथम चार्ज में असफल ट्रांसफार्मरों की संख्‍या 9 है। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र एवं अवधि में प्रश्‍न दिनांक तक स्‍टार डेल्‍टा कंपनी के लगाए गए एवं फेल हुए ट्रांसफार्मरों की स्‍थानवार एवं क्षमतावार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। 

गिट्टी खदानों की रायल्‍टी

41. ( क्र. 2631 ) श्री विजय सिंह सोलंकी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खरगोन जिले में वर्ष 2013 से 2015 तक किस-किस खदान से कितनी रायल्‍टी प्राप्‍त हुई है। खदान का नाम, ठेकेदार/एजेंसी का नाम, खदान का रकबा एवं सर्वे न. व स्‍थान का नाम, प्राप्‍त रायल्‍टी राशि, खदान की लीज़ या निलामी दिनांक से किस दिनांक तक अनुमति है जानकारी देवें। (ख) वर्तमान में कितनी खदाने संचालित हो रही हैं खदान के प्रकार, स्‍थान, एजेंसी का नाम व पता सहित सूची देवे। कितनी खदाने बंद है? कितनी खदानों पर कितनी सायल्‍टी बाकी है? (ग) जिले में कार्यरत गिट्टी खदानों किन शर्तों पर खुदाई अनुमति प्रदान की गई है? (घ) वर्तमान मे कितने व्‍यक्तियों/एजेंसियों के विरूद्ध प्रकरण जिला एस.डी.एम. कार्यालय में प्रचलन में है।

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट पर दर्शित है। (ख) वर्तमान में 61 खदाने संचालित है एवं 23 खदाने बंद है। प्रश्‍न की शेष जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट पर दर्शित है। वर्तमान में 10 खदानों पर रूपये 8,50,000/- बकाया है। (ग) प्रश्‍नांश '' में उल्‍लेखित खदाने मध्‍यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 के प्रावधानों के अंतर्गत स्‍वीकृत की गई है। इस नियम में प्रश्‍नानुसार शर्तें उल्‍लेखित है। यह नियम अधिसूचित है। (घ) वर्तमान में 01 प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) कसरावद, 03 प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) बडवाह एवं 11 प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) मंडलेश्‍वर के समक्ष विचाराधीन है।

विद्युत के खंभों एवं विद्युत लाईनों का सुधार

42. ( क्र. 2664 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विद्युत खंभों से काफी नीचे तक झूल रहें विद्युत तार से दुर्घटना का खतरा रहता है? यदि हाँ, तो विधान सभा क्षेत्र पनागर में ऐसे विद्युत खंभे जो झुक चुके हैं एवं विद्युत तार काफी नीचे तक झूल रहे हैं, उन्‍हें ठीक करने में लापरवाही क्‍यों बरती जा रही हैं? (ख) क्‍या विभाग ऐसे विद्युत खभों एवं लाईनों को सुधारेगा? यदि हाँ, तो कब तक? (ग) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार दुर्घटना की स्थिति में कौन जबावदार होगा।

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। म.प्र.पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रश्‍नाधीन क्षेत्र सहित संपूर्ण कंपनी क्षेत्र में वर्षा ऋतु के पूर्व एवं वर्षा ऋतु के पश्‍चात् नियमित रूप से विद्युत लाईनों/अधोसंरचना के रख-रखाव का कार्य कराया जाता है तथा इसके अतिरिक्‍त आवश्‍यकतानुसार विद्युत लाईनों/अधोसंरचना के संधारण के कार्य समय-समय पर किये जा रहे हैं, जो कि एक सतत् प्रक्रिया है। वर्तमान में पनागर विधानसभा क्षेत्र में विद्युत लाईन अव्‍यवस्थित होने संबंधी कोई प्रकरण संज्ञान में नहीं आया है। (ख) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार लाईनों एवं खंबों का रख-रखाव सतत् रूप से किया जाता है। कोई प्रकरण विशेष संज्ञान में आने पर तत्‍काल सुधार/रख-रखाव हेतु कार्यवाही की जाती है, अत: तत्संबंध में कोई समय-सीमा बताये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) उत्‍तरांश '' के अनुसार समस्‍त सुरक्षा रखे जाने के उपरांत भी आकस्मिक रूप से परिस्थिति विशेष में कोई घटना घटित होने पर विश्‍लेषण कर जवाबदारी निर्धारण संबंधी कार्यवाही की जाती है, अत: वर्तमान में किसी को जिम्‍मेदार ठहराने का प्रश्‍न नहीं उठता।

संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म के अधिकार

43. ( क्र. 2668 ) चौधरी चन्‍द्रभान सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. गौड़ खनिज नियम 1996 के नियम 57 (2) के प्रावधानों के तहत कलेक्‍टर/अपर कलेक्‍टर/प्रभारी अधिकारी खनिज शाखा द्वारा पारित आदेश के विरूद्ध अपील संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म म.प्र. के समक्ष सुनवाई हेतु किये जाने का प्रावधान है? (ख) यदि हाँ, तो संचालक से आशय संचालक भौमिकी तथा खनिकर्म है अथवा प्रभारी संचालक/कार्यकारी संचालक/ संयुक्‍त संचालक/अधीक्षण भौमिकीविद से है? (ग) क्‍या प्रभारी संचालक/कार्यकारी संचालक/ संयुक्‍त संचालक/अधीक्षण भौमिकीविद के द्वारा नियम 57 (2) के तहत अपील सुनकर निर्णय पारित करने का अधिकार रखते हैं? (घ) यदि हाँ, तो नियम की प्रति उपलब्‍ध करायें? यदि नहीं, तो ऐसी स्थिति में इन अधिकारियों द्वारा निर्णय लिये जाने की स्थिति में इनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जायेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। (ख) म.प्र. गौण खनिज नियम 1996 के नियम 2 (ग्‍यारह) के अनुसार संचालक से आशय संचालक, भौमिकी तथा खनिकर्म, मध्‍यप्रदेश है। अत: शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। (घ) प्रश्‍नांश '' में दिये उत्‍तर अनुसार प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

सिंचाई सुविधा प्रदान करना

44. ( क्र. 2674 ) चौधरी चन्‍द्रभान सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या रीवा जिले की तहसील हनुमना के दूरस्‍थ ग्राम लासा, तिलया, खूंटा, गोइडार, अल्‍वा, नाउन, बरौही, मलैगवां, मिशिरगवां, लोढी, हाटा, झरी, बरही, बन्‍ना, पाती आदि गांव के किसानों के सिंचाई के लिये कोई उचित माध्‍यम नहीं है (ख) यदि हाँ, तो क्‍या इन गांवों में सिंचाई हेतु कोई कार्ययोजना प्रस्‍तावित है (ग) यदि हाँ, तो क्‍या? यदि नहीं, तो सिंचाई सुविधा प्रदान करने हेतु क्‍या कार्ययोजना बनाई जायेगी और कब तक। समय-सीमा बतायें?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) प्रश्‍नाधीन ग्रामों में जल संसाधन विभाग की कोई सिंचाई परियोजना नहीं है। (ख) एवं (ग) प्रश्‍नाधीन ग्रामों सिंचाई हेतु जल संग्रहण की परियोजना के लिए उपयुक्‍त स्‍थान तथा पर्याप्‍त जलग्रहण क्षेत्र उपलब्‍ध नहीं है।

विभागीय पदोन्‍नति समिति को दी गई जानकारी

45. ( क्र. 2678 ) श्री उमंग सिंघार : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या वर्ष 2011-12-2013 में विभागीय पदोन्‍नति समिति की बैठक आयोजित करने हेतु जिन पदों का प्रस्‍ताव प्रमुख अभियंता ने अध्‍यक्ष विभागीय पदोन्‍नति समिति को, भेजा था, उनमें उल्‍लेखित जानकारी सही और अभिलेखों के आधार पर, सत्‍य एवं प्रमाणित थी? (ख) उक्‍त अवधि में डी.पी.सी. के पश्‍चात् जो भी आदेश प्रमुख अभियंता ने जारी किये थे क्‍या वह नियमानुसार उचित थे और अभिलेखों पर आ‍धारित थे? (ग) क्‍या उक्‍त अवधि में जो भी डी.पी.सी. की बैठक जिन पदक्रम सूची के आधार पर की गई थी उनमे दी गई जानकारी सत्‍य एवं अभिलेखों पर आधरित थी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) से (ग) पदोन्‍नति समिति की बैठकों के लिए प्रमुख अभियंता द्वारा प्रस्‍तुत प्रस्‍ताव उपलब्‍ध अभिलेखों के अनुसार होते हैं। प्रश्‍न में पदोन्‍नति समिति की बैठक विशेष अथवा पद विशेष का उल्‍लेख नहीं होने से शेष प्रश्‍नों के संबंध में जानकारी दी जाना संभव नहीं है।

काली रेत के खदानों की नीलामी

46. ( क्र. 2752 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यानसिंह सोलंकी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खरगोन जिले में बालू (रेती) की खदाने किन-किन ठेकेदारों को कब-कब, कितनी-कितनी राशि से कोन-कोन से ग्रामों के लिये गई, सम्‍पूर्ण सूची दी जावे? (ख) इसी प्रकार बड़वाहा/सनावद क्षेत्र में काली रेती की कितनी खदाने राज्‍य शासन द्वारा घोषित की गई है? इसकी सूची दी जावे? ये खदाने कब-कब, किस-किस दिनांक को कितनी-कितनी राशि से किन-किन ठेकेदारों को नीलामी की गई है, इसकी सूची दी जावे? (ग) काली रेती एवं बालू रेती के विगत एक वर्ष में अवैध उत्‍खनन के कितने प्रकरण बड़वाहा/सनावद क्षेत्र में बनाये गये हैं, इसमें कितने घनमीटर खनिज का परिवहन पकड़ा गया एवं किस दर से कितनी शास्ति आरोपित की गई है इसमें शास्ति आरोपित करने के नियम सहित जिन व्‍यक्तियों पर दण्‍ड आरोपित किया गया है, उनके वाहनों के नम्‍बर सहित जानकारी दी जावे? क्‍या ये वाहन कृषि कार्य हेतु उपयोग हेतु पंजीकृत थे अथवा वाणिज्यिक? (घ) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा बड़वाहा/सनावद क्षेत्र में काली रेती के लिये खदाने घोषित करने के लिये विगत 05 वर्ष में कब-कब पत्र जारी किये गये, प्रश्‍नकर्ता के पत्रों पर जिला प्रशासन द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? कार्यालयीन कार्यवाही की प्रति एवं यदि काली रेत खदान घोषित की गई है, तो उसकी सम्‍पूर्ण जानकारी दी जावे? (ड.) यदि कोई कार्यवाही नहीं की गई, तो संबंधित अधिकारी के विरूद्ध जनप्रतिनिधियों के पत्रों के उत्‍तर न दिये जाने के नियम होने पर क्‍या कार्यवाही की जायेगी, कब तक की जायेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-बी पर है। पूर्व में इन खदानों को जब-जब, जिस-जिस दिनांक को जितने वार्षिक ठेकाधन पर स्‍वीकृत किया गया था उसका विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-सी पर है। (ग) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में काली रेत एवं बालू रेत के अवैध उत्‍खनन का कोई प्रकरण नहीं बनने के कारण शेष जानकारी निरंक है। (घ) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-डी पर है। (ड.) माननीय प्रश्‍नकर्ता को कार्यालय कलेक्‍टर खनिज शाखा खरगौन के पत्र दिनांक 03.10.2015 से पत्र का उत्‍तर दिया गया है। शेष का प्रश्‍न उद्भुत नहीं होता। 

रूशल्‍ला में गिट्टी क्रेशर की स्‍वीकृत लीज़

47. ( क्र. 2869 ) श्री गोपीलाल जाटव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रूशल्‍ला में गिट्टी क्रेशर की लीज़ कब से कब तक अवधि की है और किस व्‍यक्ति के नाम से किस सर्वे नंबर पर स्‍वीकृत है रकबा सहित बताये? (ख) क्‍या स्‍वीकृत सर्वे नंबर की बजाय अन्‍य गोठान के सर्वे नंबर में अवैध तरीके से गिट्टी क्रेशर का संचालन कर रहा है? यदि हाँ, तो क्‍या कार्यवाही की गई बतायें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) ग्राम रूशल्‍ला में गिट्टी क्रेशर हेतु पत्‍थर खनिज का उत्‍खनिपट्टा अवधि 17.08.2009 से 16.08.2019 हेतु स्‍वीकृत है। यह उत्‍खनिपट्टा श्री महेन्‍द्र सिंह यादव के पक्ष में सर्वे नं 247/1 रकबा 1.000 हेक्‍टेयर क्षेत्र पर स्‍वीकृत है। (ख) जी नहीं। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

शादौरा तहसील में रजिस्‍ट्रार कार्यालय की स्‍थापना

48. ( क्र. 2870 ) श्री गोपीलाल जाटव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शादौरा को तहसील बनाये हुऐ काफी समय व्‍यतीत हो चुका है, लेकिन रजिस्‍ट्री के लिये किसान जिला मुख्‍यालय अशोकनगर जा रहे हैं? (ख) तहसील शादौरा में पंजीयक कार्यालय की स्‍थापना कब तक कर दी जायेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) अशोकनगर से तहसील शाढौरा की दूरी मात्र 15 किलोमीटर है। (ख) शासन की ऐसी कोई नीति नहीं है कि प्रत्‍येक तहसील में उप पंजीयक कार्यालय स्‍थापित हो। नये उप पंजीयक कार्यालय खोलने के लिए निर्धारित मापदण्‍ड की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट ''उन्नीस''

नगर पंचायत पथरिया में नल-जल योजना पर विद्युत व्‍यय

49. ( क्र. 3065 ) श्री लखन पटेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नगर पंचायत पथरिया (जिला-दमोह) द्वारा नगर में जल आपूर्ति हेतु नल-जल योजना पर जनवरी 2013-14, 2014-15 एवं 31 जनवरी 2016 तक प्रत्‍येक माह विद्युत बिलों का कितना-कितना भुगतान किया गया है। (ख) उक्‍त वर्षों में नगर पंचायत के बिजली बिलों का कब-कब भुगतान नहीं किया गया। (ग) बिजली विभाग द्वारा उपरोक्‍त योजना अंतर्गत बिल भुगतान न किए जाने के कारण बिजली कनेक्‍शन काटा गया। (घ) पुन: बिजली कनेक्‍शन के लिए कितनी-कितनी राशि नगर पंचायत को अतिरिक्‍त व्‍यय करना पड़ी उसके लिए दोषी कौन है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) जी नहीं। (घ) उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''बीस''

नगर पंचायत पथरिया जलपूर्ति पर व्‍यय (जिला दमोह)

50. ( क्र. 3066 ) श्री लखन पटेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या माह अप्रैल, मई एवं जून (वर्ष 2014-15 एवं 2015-16) में नगर पंचायत पथरिया द्वारा प्रत्‍येक वर्ष इन तीन माहों में जल आपूर्ति हेतु ट्रैक्‍टर- ट्राली या ट्रक किराये पर लिए गए? (ख) यदि हाँ, तो प्रत्‍येक वर्षों में कितनी कितनी राशि व्‍यय की गई, नगर के किन वार्डों को कितनी टेंकर प्रतिदिन जल आपूर्ति की गई। (ग) ट्रैक्‍टर - ट्राली या ट्रक टेंकरों द्वारा नदी से कुंओं से अथवा नलकूपों से पानी की आपूर्ति की गई? वे वार्डों से कितनी दूरी पर स्थित हैं। (घ) जल आपूर्ति हेतु परिवहन व्‍यय किस दर से किया गया।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) व्‍यय की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है एवं वार्डों मे प्रतिदिन जल आपूर्ति की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) दमोह रोड स्थित डगवेल में जल आपूर्ति हेतु किराये पर लगाये गये ट्रैक्‍टर की दर 24800/- रू. प्रति माह है। उक्‍त ट्रैक्‍टर से नगर के वार्डों में जल परिवहन नहीं किया गया। निकाय द्वारा स्‍वयं के ट्रैक्‍टरों से नगर के वार्डों में किये गये जल परिवहन पर हुये व्‍यय की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

13 वर्षों में भी बेलखेड़ी माइनर नहर का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं होने बाबत्

51. ( क्र. 3086 ) श्रीमती प्रतिभा सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के परि. अता. प्र. सं. 112 (क्र. 2249) दिनांक 28/07/2015 के उत्‍तर (क) एवं (ख) में बताया गया था कि रा.अ.बा. सागर परि. बांयी तट नहर की बेलखेड़ी माइनर निर्माण की निविदा 31/05/2003 को स्‍वीकृत की गयी थी? उक्‍त 15 कि.मी. लंबी माइनर नहर से 1941 हे. में सिंचाई का प्रावधान है वर्ष 2008 में अपूर्ण कार्य पर ठेका समाप्‍त कर दिया गया था? एवं शेष कार्य हेतु निविदाकारों द्वारा भाग नहीं लेने के कारण नहर का निर्माण पूर्ण नहीं हो सका? (ख) यदि हाँ तो शासन द्वारा उक्‍त शेष नहर निर्माण की छोटी-छोटी निविदाएं जारी कर या वि.यां. संरचना से कार्य पूर्ण कराने का प्रयास क्‍यों नहीं किया? क्‍या शासन 13 वर्षों से अपूर्ण उक्‍त बेलखेड़ी माइनर नहर का शेष निर्माण पूर्ण कराने का प्रयास शीघ्र करेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) बेलखेडी टेल माइनर के शेष कार्य हेतु 15 बार विकलनीय निविदा का आमंत्रण किया जा चुका है जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है किन्‍तु निर्माण एजेन्‍सी का निर्धारण न होने से निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। जी हाँ। शेष कार्य को छोटी-छोटी निविदाओं में विभक्‍त कर निविदा आमंत्रण की कार्यवाही की जा चुकी है जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है।

परिशिष्ट ''इक्कीस''

सिंचाई योजना के कार्य

52. ( क्र. 3165 ) श्री सचिन यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खरगोन उद्वहन नहर सिंचाई योजना का कार्य कब तक पूर्ण होगा एवं उक्‍त योजना से कितने क्षेत्रफल को सिंचित एवं कितने ग्रामों में पीने का पानी उपलब्‍ध कराने का लक्ष्‍य रखा गया है और वर्तमान में इस योजना का कार्य किस स्थिति में है? (ख) प्रश्‍नांश (क) में दर्शित योजनान्‍तर्गत कसरावद विधानसभा क्षेत्र में कुल कितने क्षेत्रफल को सिंचित एवं कितने ग्रामों में पीने का पानी उपलब्‍ध कराये जाने का लक्ष्‍य रखा गया है? (ग) दिनांक 8 दिसम्‍बर, 2015 के प्रश्‍न क्रमांक (965) के विभागीय उत्‍तर (ग) में दर्शित 13 ग्राम कौन-कौन से हैं और पानी का शुद्धिकरण एवं लिफ्टिंग का कार्य भी स्‍वयं सं‍बंधित विभाग क्‍यों नहीं कर पायेगा? कारण दें साथ ही क्‍या इस कार्य को करने के लिए संबंधित ग्राम पंचायत को अतिरिक्‍त राशि आवंटित की जायेगी यदि हाँ, तो बताये नहीं तो इसकी कार्य संचालन की व्‍यवस्‍था किस प्रकार से क्रियान्वित की जायेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) योजना का कार्य दिनांक 30/06/2016 तक पूर्ण किया जाना लक्षित है। योजना से 33140 हेक्‍टेयर क्षेत्रफल को सिंचित एवं 152 ग्रामों को अपरिष्‍कृत पेयजल उपलब्‍ध कराये जाने का लक्ष्‍य है। वर्तमान में कार्य 80 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। (ख) योजना अंतर्गत कसरावद विधानसभा क्षेत्र में कुल 9395 हेक्‍टेयर क्षेत्रफल को सिंचित एवं 47 ग्रामों को अपरिष्‍कृत पेयजल उपलब्‍ध कराये जाने का लक्ष्‍य रखा गया है। (ग) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। अनुबंध के अनुसार कार्य में पानी का शुद्धिकरण एवं लिफ्टिंग का कार्य शामिल नहीं है, केवल ग्राम के निकटतम बिन्‍दु तक सिंगल पाईंट कनेक्‍शन के माध्‍यम से अपरिष्‍कृत पेयजल उपलब्‍ध कराये जाने का प्रावधान है। जी नहीं। संचालन की व्‍यवस्‍था ग्राम पंचायतों को स्‍वयं के स्‍त्रोतों से करना है।

परिशिष्ट - ''बाईस''

पीने के पानी एवं सिंचाई की व्‍यवस्‍था

53. ( क्र. 3166 ) श्री सचिन यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 8 दिसम्‍बर, 2015 के परि.अता. प्रश्‍न संख्‍या-24 क्रमांक (965) के विभागीय उत्‍तर के परिशिष्‍ट छ: में स. क्र. 02, 04 एवं 05 तक के विषय अनुसार की गई कार्यवाही के विवरण में नर्मदाघाटी विकास विभाग द्वारा प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) प्रश्‍नांश (क) में दर्शित परिशिष्‍ट के स.क्र. 02 के विषय में उल्‍लेखित ग्रामों के संदर्भ में कार्यवाही का विवरण दिया गया है तो क्‍या उक्‍त ग्राम सिंचाई एवं पीने के पानी के लिए शासन/विभाग के पास कोई कार्य योजना बनाई गई है यदि हाँ, तो उसकी अद्यतन स्थिति क्‍या है? (ग) परिशिष्‍ट के स.क्र. 04 के विषय में उल्‍लेखित वार्ड 09 के संदर्भ में कार्यवाही के विवरण अनुसार प्रश्‍न दिनांक तक की जानकारी दे कि क्‍या खेतों में पाईप लाईन डालने का कार्य सी.ए.डी.ए. मद से किया जा रहा है यदि हाँ, तो बताये नहीं तो कारण दें? उक्‍त कार्य को नहीं किये जाने में कौन-कौन अधिकारी कर्मचारी द्वारा लापरवाही की जा रही है? उनके पदनाम सहित जानकारी दें? (घ) परिशिष्‍ट के स.क्र. 05 के विषय में उल्‍लेखित ग्राम खेलचा के संदर्भ में कार्यवाही के विवरण अनुसार अपरीष्‍कृत पानी कहाँ तक पहुंचा और कहाँ तक पहुंचाया जायेगा स्‍थानवार एवं ग्रामवार जानकारी दें एवं पंचायत द्वारा पानी लिफ्ट किया जायेगा तो संबंधित विभाग की क्‍या भूमिका होगी? नहीं तो इसके लिए राशि का आवंटन किस मद या विभाग के द्वारा किया जायेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी उत्‍तरांश , एवं अनुसार है। (ख) जी नहीं। (ग) सी.ए.डी.ए. प्‍लान में भारत सरकार की वर्तमान गाईड लाईन में भारत सरकार 100 प्रतिशत पाईप लाईन के लिये स्‍वीकृति नहीं देती है। केवल 10 प्रतिशत में माइक्रो इरिगेशन हेतु प्रावधान है लेकिन पम्‍पिंग प्रावधान के अभाव में स्प्रिंकलर/ड्रिप हेतु प्रेशर दिया जाना संभव नहीं होने से माइक्रो इरिगेशन लिया जाना संभव नहीं है। अत: शेषांश का प्रश्‍न नहीं उठता। (घ) अपरिष्‍कृत जल प्रदाय हेतु ग्राम के निकटतम बिन्‍दु तक उपलब्‍ध कराने का कार्य ही विभाग द्वारा किया जाना है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। शेष कार्य ग्राम पंचायत द्वारा किया जाना होगा एवं राशि प्रदाय भी ग्राम पंचायत से ही होगी।

इन्‍दौर विकास प्राधिकरण की लीज़ शर्तों का उल्‍लंघन

54. ( क्र. 3295 ) श्री महेन्द्र हार्डिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या इन्‍दौर विकास प्राधिकरण द्वारा अपनी विभिन्‍न योजनाओं में भूखण्‍डों का विक्रय लीज़ शर्तों के अधीन किया जाता है। (ख) क्‍या इन्‍दौर विकास प्राधिकरण द्वारा भूखण्‍डधारियों की लीज़ शर्तों के उल्‍लंघन की शिकायतें मिलने पर भूखण्‍डधारियों के भूखण्‍ड की लीज़/विक्रय निरस्‍त कर दिया जाता है जिसके विरोध में भूखण्‍ड धारियों द्वारा माननीय न्‍यायालय में अपील की जाती है, इसमें वर्षों लग जाते हैं? क्‍या विभाग इस समस्‍या को दूर करने हेतु लीज़ शर्तों के उल्‍लंघन पर लीज़ निरस्‍त करने के स्‍थान पर जुर्माने या अन्‍य दंड जैसे प्रावधान के नियम बनाएगा। यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) राजस्‍व विभाग द्वारा बनाए गए लीज़ शर्तों के उल्‍लंघन संबंधी प्रावधान/नियम नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग द्वारा भी बनाए जा सकते हैं? (घ) राजस्‍व विभाग द्वारा लीज़ शर्तों के उल्‍लंघन के शमन के लिए बनाए गये नियमों को विभाग द्वारा कब तक लागू किया जायेगा।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) लीज़ शर्तों के उल्लंघन की शिकायतों पर संबंधितों को सूचना जारी कर न्याय के प्राकृतिक सिद्धातों के अनुसार सुनवाई का अवसर देते हुये मामले में गुण-दोषों के आधार पर प्राधिकारी बोर्ड द्धारा निर्णय लिया जाता है। जिसके विरूद्ध कतिपय भूखंडधारियों द्वारा मान. उच्च न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की जाती है। जिनमें प्राधिकारी की ओर से पक्ष प्रतिरक्षण की कार्यवाही की जाती है। जी नहीं, क्योंकि विभाग द्वारा प्राधिकरण के सम्पत्तियों के अंतरण हेतु म.प्र. विकास प्राधिकरणों को सम्पत्तियों का प्रबंधन तथा व्ययन नियम 2013 दिनांक 29.06.2013 से प्रभावशील है। (ग) विभाग में म.प्र. विकास प्राधिकरणों को सम्पत्तियों का प्रबंधन तथा व्ययन नियम 2013 दिनांक 29.06.2013 प्रभावशील होने से कार्यवाही अपेक्षित नहीं है। (घ) उत्तराशं के परिपेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

सम्‍पत्तियों का राजसात

55. ( क्र. 3296 ) श्री महेन्द्र हार्डिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विभिन्‍न शासकीय कर्मचारियों के आय से अधिक प्रकरणों में जब्‍त सम्‍पत्ति को विभिन्‍न प्रयोजनों जैसे आंगनवाडी, स्‍कूल या चिकित्‍सालय हेतु राजसात किया जाता है। (ख) क्‍या इन्‍दौर स्थित एमआर-9 खजराना में प.ह. नं. 543/2 शासकीय सीलिंग की जमीन पर निर्माणाधीन मल्‍टी को राजसात किया गया है। यदि हाँ, तो क्‍या उसका उपयोग स्‍कूल, होस्‍टल, महाविद्यालय, चिकित्‍सालय अधिकारियों/ कर्मचारियों के आवास, पर्यटन विभाग की होटल हेतु किया जा सकता है? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) क्‍या इस प्रकार राजसात की गई सम्‍पत्ति के उपयोग हेतु शासन द्वारा स्‍पष्‍ट नियम बनाये गये है, यदि नहीं, तो क्‍यों तथा कब तक बनाये जायेंगे?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) जी नहीं। लोक सेवकों के विरूद्ध पंजीबद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के प्रकरणों में अनुपातहीन संपत्ति राजसात करने के संबंध में शासन द्वारा म.प्र. विशेष न्‍यायालय अधिनियम 2011 के अंतर्गत विशेष न्‍यायालय गठित किये गये है। इस अधिनियम के अंतर्गत शासन द्वारा म.प्र. विशेष न्‍यायालय नियम 2012 भी बनाये गये है। (ग) उत्‍तरांश '' के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

विभागीय आदेश के विपरीत कार्य

56. ( क्र. 3383 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य के विधान सभा प्रश्‍न सं. 138 (क्र. 2123) दिनांक 15 दिसम्‍बर 2015 के प्रश्‍नांश (ख), (घ) एवं (ड.) के उत्‍तर इस प्रकार की कोई लिखित शिकायत प्राप्‍त न होने दिया गया है? जबकि प्रश्‍नांशों के द्वारा लिखित शिकायत प्राप्‍त हुई है, ऐसा नहीं जानना चाहा गया था, हां, तो क्‍या कारण है कि प्रश्‍न का भिन्‍न उत्‍तर दिया गया, नहीं तो दिये गये उत्‍तर कैसे सही है, बतायें? (ख) प्रश्‍नांश (क) में प्रश्‍न सं. 138 (क्र. 2123) के प्रश्‍नांश (ग) का उत्‍तर अब नगर पालिक निगम कटनी कार्यालय में यह कार्य प्रारंभ कराया गया है? यदि हाँ, तो पात्रता पर्ची का कार्य दिसम्‍बर 2015 के पूर्व, कार्यालय नगर निगम के बजाय कहाँ से, किस आधार पर किया जा रहा था? आदेशों की प्रतियां उपलब्‍ध कराये एवं क्‍या यह कार्य शासनादेशों के अनुरूप था, हां तो कैसे? स्‍पष्‍ट करें? (ग) प्रश्‍नांश (क) में विधानसभा प्रश्‍न सं. 138 (क्र. 2123) से संबंधित प्रश्‍न की जानकारी प्रदान करने की बजाय भ्रामक उत्‍तर देने का क्‍या कारण है? जान बुझकर असत्‍य उत्‍तर देने का कौन-कौन जिम्‍&#