मध्यप्रदेश विधान सभा


प्रश्नोत्तर-सूची
दिसम्‍बर, 2016 सत्र


बुधवार, दिनांक 07 दिसम्‍बर, 2016


भाग-1
तारांकित प्रश्नोत्तर


 

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तकनीकी विश्‍वविद्यालय की स्‍वीकृति

[तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास]

1. ( *क्र. 1868 ) श्री जतन उईके : क्या राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या छिन्‍दवाड़ा जिले के विधान सभा क्षेत्र पांढुर्णा के आस-पास आने वाले तीन सौ चार गांव सहित मोहखेड, सौंसर सहित किसी भी स्‍थान पर इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं है? (ख) क्‍या छिन्‍दवाड़ा जिला बहुत बड़ा है तथा पिछले कई वर्षों से क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों, जनता एवं छात्र-छात्राओं द्वारा पांढुर्णा नगर में इंजीनियरिंग कॉलेज की मांग लगातार की जा रही है? (ग) क्‍या उच्‍च शिक्षा से वंचित क्षेत्र एवं आसपास के क्षेत्र के हजारों छात्र-छात्राओं की उच्‍च शिक्षा हेतु इंजीनियरिंग कॉलेज पांढुर्णा नगर में प्रारंभ किये जाने की कोई कार्य योजना पर शासन द्वारा स्‍वीकृति की कार्यवाही की गई? यदि हाँ, तो कब?

राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा ( श्री दीपक जोशी ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। (ग) जी नहीं। शासन स्तर पर कोई योजना विचाराधीन नहीं है।

खरीफ एवं रबी फसलों की समर्थन मूल्‍य पर खरीदी

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

2. ( *क्र. 1009 ) श्री सचिन यादव : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सरकार ने विगत वर्ष प्रदेश में खरीफ एवं रबी फसलों की पैदावार के उपरांत किसानों से विगत वर्ष प्रति अनाज की खरीदी किस समर्थन मूल्‍य पर कितनी-कितनी मात्रा में की और खरीदी का निर्धारित लक्ष्‍य क्‍या था? जिलेवार जानकारी दें (ख) प्रश्नांश (ख) अनुसार वर्ष 2016 में समर्थन मूल्‍य क्‍या निर्धारित किया गया और खरीदी का लक्ष्‍य क्या रखा गया है? जिलेवार जानकारी दें (ग) विगत वर्ष प्रदेश में मक्‍का खरीदी का समर्थन मूल्‍य क्‍या निर्धारित किया गया है और इसकी खरीदी का लक्ष्‍य क्‍या है? जिलेवार जानकारी दें (घ) क्‍या सरकार सहकारी संस्‍थाओं व अन्‍य संसाधनों के माध्‍यम से किसानों से समय रहते समर्थन मूल्‍य पर अनाज नहीं खरीद पाई है? यदि हाँ, तो क्षेत्रीय किसानों व अन्‍य माध्‍यमों से कितनी-कितनी शिकायतें जिलेवार प्राप्‍त हुई हैं और प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई है? (ड.) किसानों से समर्थन मूल्‍य पर खरीदी में हो रही विसंगतियों को दूर किये जाने एवं सुलभ व्‍यवस्‍था हेतु जिला स्‍तर पर जवाबदेही तय करने हेतु कोई दिशा-निर्देश जारी किये जायेंगे?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) विगत वर्ष 2015-16 में समर्थन मूल्‍य पर खरीफ एवं रबी फसलों के समर्थन मूल्‍य की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार तथा उपार्जित मात्रा एवं उपार्जन अनुमान की जिलेवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। (ख) वर्ष 2016-17 में समर्थन मूल्‍य, खरीदी अनुमान की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र- अनुसार है। (ग) वर्ष 2015-16 में प्रदेश में मक्‍का का समर्थन मूल्‍य रू. 1325 निर्धारित था एवं उपार्जन अनुमान 5 लाख मे.टन था। जिलेवार उपार्जन की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-द अनुसार है। (घ) जी नहीं। प्रदेश के किसानों से एफएक्‍यू गुणवत्‍ता का खाद्यान्‍न समर्थन मूल्‍य पर उपार्जित किया गया है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ड.) समर्थन मूल्‍य पर किसानों से खाद्यान्‍न उपार्जन के संबंध में कोई विसंगति परिलक्षित नहीं हुई है। समर्थन मूल्‍य पर किसानों से खाद्यान्‍न उपार्जन हेतु जिला स्‍तर पर जवाबदेही निर्धारित है इस संबंध में जारी निर्देश की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट-ई अनुसार है।

पेंच बांध हेतु भूमियों/परिसम्‍पत्तियों का अधिग्रहण

[राजस्व]

3. ( *क्र. 1799 ) पं. रमेश दुबे : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पेंच बांध माचागोरा जिला छिन्‍दवाड़ा हेतु ग्राम मडुआढ़ाना के किन-किन व्‍यक्तियों की कितनी भूमियों/परिसम्‍पत्तियों का अधिग्रहण किया गया है? अधिग्रहण से प्रभावित व्‍यक्तियों के पास मौके पर कितनी भूमि शेष बची है? प्रकरणवार पारित आदेश व प्रतिकर निर्धारण पत्रक व प्रभावित व्‍यक्तियों की शेष बची भूमि का ब्‍यौरा संलग्‍न करें? (ख) प्रश्नांश (क) के प्रकाश में क्‍या ग्राम मडुआढ़ाना के किसानों की अधिग्रहित भूमियों के पश्‍चात उनके पास बहुत ही कम भूमि बची है? बांध में जल भराव के पश्‍चात इन किसानों के मकान व शेष बची भूमि के चारों और पानी भर जाने से शेष बचे भूमि व भवन का किसानों द्वारा उपयोग नहीं कर पाने की शिकायतें प्रकाश में आयी हैं? (ग) क्‍या प्रश्‍नकर्ता ने भी डूब क्षेत्र के किसानों से समय-समय पर उक्‍त के संबंध में प्राप्‍त शिकायतों के संबंध में पत्र क्रमांक 1384, दिनांक 06.09.2016, क्रमांक 1330 दिनांक 27.08.2016, क्रमांक 1387, दिनांक 08.09.2016 मान. मुख्‍यमंत्री महोदय, पत्र क्रमांक 1385, दिनांक 06.09.2016 माननीय जल संसाधन मंत्री और पत्र क्रमांक 1383, दिनांक 06.09.2016 कलेक्‍टर छिन्‍दवाड़ा को प्रस्‍तुत किया है? (घ) यदि हाँ, तो उक्‍त पत्रों पर किस स्‍तर से क्‍या कार्यवाही की गई है? क्‍या शासन उक्‍त तथ्‍यों पर विचार कर डूब क्षेत्र में प्रभावित नागरिकों की शेष बची कम भूमियों एवं मकानों जो जल भराव के कारण उनके उपयोग में नहीं आ रही हैं, का सर्वे करवाकर ऐसी भूमियों/भवनों का अधिग्रहण कर मुआवजा भुगतान का आदेश देगा? नहीं तो क्‍यों?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) दिनांक 13.2.2014 को 64.598 हेक्टयर भूमि एवं परिसम्पत्तियों का दिनांक 13.2.2014 को 63.617 हेक्टयर भूमि का एवं परिसम्पत्तियों का अधिग्रहण दिनांक 17.12.2015 को पारित अधिनिर्णय अनुसार किया गया है। प्रकरणवार जानकारी पुस्कालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र एवं शेष बची भूमि की जानकारी पुस्कालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (ख) जी हाँ। परन्तु बांध में जल भराव पश्चात ऐसे सभी मकान एवं भूमि जो चारों ओर जल भराव से प्रभावित थी, को अधिग्रहण में शामिल किया गया। उपरोक्त संबंध में वर्तमान में कोई शिकायत विभाग स्तर पर लंबित नहीं है। (ग) जी हाँ। प्रश्नकर्ता विधायक महोदय ने पत्र क्रमांक-1383, दिनांक 6.9.2016 को कलेक्टर छिंदवाड़ा को प्रस्तुत किया था, जिस पर कार्यवाही पश्‍चात वस्तुस्थिति से प्रश्नकर्ता को अवगत कराने के निर्देश कार्यपालन यंत्री पेंच व्यपवर्तन परियोजना बांध जलसंसाधन संभाग क्रमांक 1, चौरई को प्रसारित किये गये हैं। मान. मुख्यमंत्रीजी एवं जल संसाधन मंत्रीजी को दिये गये आवेदन पत्रों पर संबंधित विभाग द्वारा कार्यवाही की जावेगी। (घ) उक्त पत्रों पर की गई कार्यवाही की जानकारी उत्तरांश अनुसार है। ग्राम मडुआढाना की अधिग्रहण के बाद शेष भूमि एवं उस पर स्थित परिसम्पत्तियों का अधिग्रहण मकान इत्यादि का अधिग्रहण निर्धारित स्तरों से ऊपर होने के कारण नहीं किया गया है। ऐसी सभी शेष भूमि एवं मकान जो चारों और से पानी से घिर रहे हैं, उन्हें भी अधिग्रहण में शामिल किया जा चुका है। शेष प्रश्न उद्भूत नहीं होता।

कृषकों की आत्‍महत्‍या के प्रकरण

[गृह]

4. ( क्र. 443 ) श्री मुकेश नायक : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर संभाग में किसानों द्वारा कर्ज बोझ से दुखी होकर आत्‍महत्‍या करने वालों और बेरोजगारी से तंग आकर आत्‍महत्‍या करने वालों की वर्ष 2013 से 2015 तक की जिलेवार संख्‍या बतावें। (ख) किसानों पर कर्ज बोझा कम करने और राज्‍य में बेरोजगारी दूर करने के लिए शासन के क्‍या कार्यक्रम हैं और उनका किस प्रकार क्रियान्‍वयन किया जा रहा है?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) सागर संभाग में वर्ष 2013 से 2015 तक कर्ज के बोझ से दुखी होकर कुल 04 किसानों द्वारा आत्महत्या की गई एवं बेरोजगारी से तंग आकर कुल 02 व्यक्तियों द्वारा आत्महत्या की गई है। जिलेवार जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

परिशिष्ट - ''एक''

भू-माफियाओं के विरूद्ध कार्यवाही

[गृह]

5. ( *क्र. 271 ) श्री यादवेन्‍द्र सिंह : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सतना जिले के मैहर नगरपालिका क्षेत्रांतर्गत मन्‍नूलाल अग्रवाल धर्मशाला को भू-माफियाओं द्वारा गिराकर कब्‍जा करने के प्रयास कर कुछ दुकानों को तोड़ने का कार्य किया गया, जिसकी शिकायत 1 नवम्‍बर 2016 को S.D.M. मैहर, थाना प्रभारी मैहर को संयुक्‍त हस्‍ताक्षर से की गई है? साथ ही प्रकरण न्‍यायालय प्रथम व्‍यवहार न्‍यायाधीश वर्ग 2 मैहर के न्‍यायालय से प्रकरण क्रमांक 08ए/16 स्‍थगन भी प्राप्‍त होकर विचाराधीन है? (ख) प्रश्नांश (क) यदि हाँ, तो न्‍यायालय के स्‍थगन के विरूद्ध भू-माफियाओं द्वारा किए गए आपराधिक कृत्‍य के विरूद्ध S.D.M. मैहर एवं थाना प्रभारी मैहर द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई है? (ग) यदि नहीं, तो कब तक दोषियों के विरूद्ध पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की जायेगी और अब तक न करने के लिए कौन दोषी हैं?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जी हाँ। दिनांक 01.11.2016 को फरियादी सरोज तिवारी पति स्व. श्री श्याम कुमार तिवारी 42 वर्ष निवासी विनायका टोला, मैहर जिला सतना ने एक संयुक्त हस्ताक्षरित शिकायत पत्र, अनावेदकगण महेश चौरसिया, नितिन ताम्रकार, अजय पाल द्वारा अवैध तरीके से पुरानी दुकान को जे.सी.बी. मशीन से गिराने बावत्, थाना प्रभारी मैहर को दिया। यह सही है कि खसरा (क्रमांक 1504 रकबा 1.160 हेक्टेयर) के संबंध में परिवाद क्र 08-ए/2016 दिनांक 18.01.2016 विचाराधीन है। (ख) थाना प्रभारी मैहर द्वारा जाँच उपरांत अग्रवाल धर्मशाला के तीन कमरों को अतिक्रमित करना व सम्पत्ति का नुकसान करना पाये जाने से अपराध क्रमांक 889/16 धारा 447, 427 भादवि का अनावेदक महेश चौरसिया, नितिन ताम्रकार, अजय पाल सिंह के विरुद्ध दर्ज किया गया। (ग) प्रकरण में प्राथमिकी दर्ज होकर विवेचनाधीन है। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

महिला/पुरूष/अवयस्‍क बच्‍चों के गुमशुदगी के दर्ज प्रकरण

[गृह]

6. ( *क्र. 1608 ) श्री प्रताप सिंह : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर संभाग के जिलों में 01 जनवरी 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक कितने महिला/पुरूष अवयस्‍क लड़के/लड़कियों के गुमशुदगी प्रकरण दर्ज हुए? उनके नाम, पता तथा प्रकरण दर्ज होने की तारीख बतलावें (ख) कितनी महिलाओं एवं अवयस्‍क लड़कियों के साथ गैंग रेप किया गया तथा कितनी पीड़‍ित महिला/लड़कियों ने आत्‍महत्‍या कर ली एवं कितनों की हत्‍या कर दी गई? (ग) गुमशुदा बच्‍चों एवं बच्चियों तथा महिलाओं को तलाशने के लिए पुलिस विभाग द्वारा अभी तक क्‍या प्रयास किये गये? प्रयास करने के पश्‍चात कितने गुमशुदा बच्‍चों एवं बच्चियों तथा महिलाओं/पुरूषों को तलाशने में पुलिस विभाग को सफलता मिली है? (घ) प्रश्नांश (क) एवं (ख) में दर्शाये पीड़ि‍त महिला/पुरूष एवं अवयस्‍क लड़के/लड़कियों को शासन स्‍तर से क्‍या कोई सहायता दी गई है? यदि हाँ, तो क्‍या सहायता दी गयी? इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए क्‍या पुलिस विभाग द्वारा कोई ठोस कार्ययोजना बनायी गई है? यदि हाँ, तो क्‍या? यदि नहीं, तो क्‍यों?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) सागर संभाग के जिलों में प्रश्नांकित अवधि में 2247 वयस्क महिला एवं 1200 वयस्क पुरूषों की गुमशुदगी के प्रकरण दर्ज हुए हैं, जिनके नाम, पता तथा प्रकरण दर्ज होने की तारीख की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। उपरोक्त अवधि में 423 अवयस्क लड़के एवं 884 अवयस्क लड़कियों के गुमशुदगी के प्रकरण दर्ज हुए हैं, जिनके नाम, पता संबंधी जानकारी धारा-74 किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 के तहत् उनकी पहचान प्रकट करने पर प्रतिषेध होने के कारण नहीं दी जा रही है। (ख) उक्त अवधि में 22 महिलाओं एवं 24 अवयस्क लड़कियों के साथ गैंगरेप की घटनाएँ घटित हुईं, इनमें से 01 पीड़ि‍ता द्वारा आत्महत्या तथा 01 पीड़ि‍ता की हत्या करने के प्रकरण दर्ज किये गये। (ग) अवयस्क बालक एवं बालिकाओं की गुमशुदगी के प्रकरणों में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार आपराधिक प्रकरण दर्ज किये जाते हैं, जिसमें एक माह तक दस्तयाबी न होने पर प्रकरण की विवेचना थाना प्रभारी द्वारा एवं तीन माह उपरांत संबंधित अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) द्वारा की जाती है एवं चार माह उपरांत प्रकरण मानव विरोधी अवैध व्यापार इकाई (AHTU) को हस्तांतरित कर दिया जाता है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार ट्रेक द मिसिंग चाइल्ड पोर्टल तैयार किया गया है, जिसमें पूरे देश के सभी राज्यों की पुलिस द्वारा गुमशुदा व दस्तयाब होने संबंधी जानकारी अंकित की जाती है। गुमशुदा के फोटो अपलोड कर उनकी तथा उनके अभिभावकों की तलाश की जाकर उन्हें मिलाने का कार्य किया जाता है। इसकी निरंतर समीक्षा की जाती है। साथ ही वयस्क महिला-पुरूषों के गुमने पर सोशल नेटवर्किंग साईट एवं अन्य तकनीकी माध्यम की मदद् से उनकी दस्तयाबी के प्रयास किये जाते हैं। उक्त अवधि में 389 बालक, 649 बालिकाएँ, 1232 महिलाएँ एवं 799 पुरूषों को दस्तयाब किया गया है। (घ) कुल 11 अनुसूचित जाति/जनजाति की गैंगरेप से पीड़ि‍त महिला/अवयस्क बालिकाओं को कुल 13,07,000/- रूपये की सहायता राशि शासन स्तर से प्रदाय की गई है। इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस विभाग द्वारा समय-समय पर ऑपरेशन स्माईल चलाया जाकर गुमशुदा बच्चों को तलाशने का प्रयास किया जाता है। साथ ही निर्भया मोबाईल एवं डायल 100 मोबाईल की मदद से भी ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने का प्रयास किया जाता है।

भूमि अधिग्रहण के ले-आउट में परिवर्तन

[राजस्व]

7. ( *क्र. 1666 ) श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या भारत का राजपत्र असाधारण भाग-2 खण्‍ड-3 उपखण्‍ड (ii) सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की अधिसूचना दिनांक 17 अगस्‍त, 2010 एवं 24 मई, 2011 द्वारा रायसेन जिले में राष्‍ट्रीय राजमार्ग संख्‍या 12 के 221.00 किलोमीटर से 295.62 किलोमीटर (बरेली भोपाल सेक्‍शन) तक सड़क निर्माण चौड़ा करने, 4 लेन का बनाने हेतु भूमि का अर्जन कर ग्रामीणों को मुआवजा दे दिया गया है? (ख) क्‍या प्रश्‍नांकित भूमि अर्जन के लिये औबेदुल्‍लागंज बायपास (उपमार्ग) इकलामा, उमरिया, खिल्‍लीखेड़ा, सनोटी, बिशनखेड़ी, आदि ग्राम के ग्रामीणों की भूमि का भी अधिग्रहण किया गया है, जिनमें से अधिकांश ग्रामीणों को मुआवजा दे दिया गया है? यदि हाँ, तो क्‍या यह ग्राम बायपास निर्माण की मूल योजना और प्रश्नांश (क) में प्रकाशित अधिसूचना में निहित खसरों में सम्मिलित थे? यदि नहीं, तो क्‍या इन ग्रामों की भूमि का अर्जन ले-आउट परिवर्तन के कारण किया गया है? (ग) यदि हाँ, तो प्रश्नांश (ख) वर्णित ग्रामांचल में ले-आउट परिवर्तन की आवश्‍यकता किन कारणों से पड़ी और यह किस सक्षम प्राधिकारी के आदेश से किया गया? (घ) क्‍या प्रश्नांश (ख) वर्णित ग्रामों के ग्रामीणों की भूमि पर बने भवन, गोडाऊन, ट्यूबवेल, कुंआ या अन्‍य नुकसान की शिकायतें और इनका मुआवजा दिये जाने के आवेदन प्राप्‍त हुए हैं? ग्रामवार आवेदकों के नाम एवं दी गई मुआवजा राशि की जानकारी उपलब्‍ध कराई जाये ऐसे कितने प्रकरण शेष हैं, जिनमें मुआवजा राशि दिये बगैर बायपास निर्माण की कार्यवाही प्रारंभ की गई है और क्‍यों? शेष प्रकरणों का निराकरण और मुआवजा राशि का वितरण कब तक कर दिया जायेगा? (ड.) क्‍या प्रश्नांश (ख) से (घ) तक बायपास मार्ग में बिना सक्षम स्‍तर से अनुमति एवं मुआवजा प्रकरणों का समुचित निर्धारण और निराकरण किये बगैर मार्ग निर्माण प्रारंभ किये जाने हेतु दोषी अधिकारियों की शासन जाँच कराकर उत्‍तरदायित्‍व का निर्धारण और संबद्ध ग्रामीणों को समुचित मुआवजा दिलाये जाने की कार्यवाही करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जी हाँ। कुल-537 में से 436 कृषकों को मुआवजा भुगतान किया जा चुका है। शेष कृषकों को भुगतान हेतु नियमानुसार कार्यवाही प्रचलित है। (ख) जी हाँ। यह ग्राम बायपास निर्माण की मूल योजना में शामिल है। अतः शेष प्रश्न उद्भूत नही होता। (ग) जी नहीं ले-आउट में परिवर्तन नही किया गया है। (घ) प्रश्नांश (ख) के संबंध में इस आशय के आवेदन भी प्राप्त हुए हैं कि उनकी भूमि बायपास में ली जा रही है, किन्तु प्रतिकर का भुगतान नही किया गया है। उक्त संबंध में सर्वे उपरान्त मौके पर भूमि का सीमांकन कर छूटे कृषकों को नियमानुसार मुआवजा राशि के भुगतान हेतु कार्यवाही की जा रही है। कृषकों की ग्रामवार सूची संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ड.) प्रश्नांश () एवं () में उल्लेखित ग्रामों में बायपास मार्ग का निर्माण सक्षम अनुमति व भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशित अधिसूचना उपरान्त सक्षम अधिकारी द्वारा अवार्ड पारित किये जाने के बाद प्रारंभ किया गया है। किसी अधिकारी के विरूद्ध जांच का प्रश्न उदभूत नही होता है। शेष रहे किसानों को उत्तरांश () एवं () अनुसार मुआवजा दिलाने की कार्यवाही की जा रही है।

परिशिष्‍ट - ''दो''

हटा नगर की नल-जल योजना को प्रारंभ किया जाना

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

8. ( *क्र. 259 ) श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) हटा नगर में जल आवर्धन योजना कब एवं कितनी राशि से स्‍वीकृ‍त हुई थी एवं कितनी-कितनी राशि से रिवाईज हुई? रिवीजन में क्‍या-क्‍या कार्य स्‍वीकृत किये एवं योजनान्‍तर्गत कब-कब कितनी सामग्री की खरीदी की गई? (ख) क्‍या आधी-अधूरी योजना को नगर पालिका हटा आधिपत्‍य प्राप्‍त करने को तैयार नहीं है एवं नगर में 15 वर्ष से प्रगतिरत 4 करोड़ रूपये से ज्‍यादा व्‍यय होने के उपरांत भी नगर की जनता को प्रतिदिन पेयजल प्रदाय नहीं किया जा रहा है? (ग) योजना में विलंब एवं लापरवाही बरत रहे अधिकारी/कर्मचारियों पर कब तक एवं क्‍या कार्यवाही की जावेगी एवं नगर की जनता को कब तक प्रतिदिन पानी मिलेगा?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) मूल योजना लागत रू. 169.30 लाख की वर्ष 2000 में। पुनरीक्षित योजना लागत रू. 352.61 लाख की वर्ष 2010 में। जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "अ" एवं "ब" अनुसार(ख) जी नहीं, योजना दिनांक 30.6.2016 को नगर पालिका को हस्तांतरित की जा चुकी है। नगरवासियों को अप्रैल 2015 से पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। (ग) जी नहीं। जानकारी उत्तरांश "ख" अनुसार।

परिशिष्ट - ''तीन''

राजस्‍व भूमि के पट्टों का वितरण

[राजस्व]

9. ( *क्र. 395 ) श्री शान्तिलाल बिलवाल : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) झाबुआ अलीराजपुर जिले में स्थित शासकीय भूमि काबिल काश्‍त, ना.का.का. भूमि जो कि 70-80 वर्ष पूर्व से खेती करते आ रहे गरीब आदिवासियों को रू. 10-20 हजार से भी अधिक अर्थदण्‍ड जमा करना पड़ता है, इन आदिवासियों को शासकीय भूमि के पट्टे कब तक दिये जावेंगे? (ख) शासन द्वारा सरदार सरोवर बांध के कारण विस्‍थापित लोगों को विस्‍थापित किये जाने हेतु झाबुआ अलीराजपुर जिले में शासकीय भूमि पर आदिवासियों को राजस्‍व भूमि के पट्टे नहीं दिये जा रहे हैं, परन्‍तु उक्‍त विस्‍थापित होने के बावजूद प्रतिबंध शासन कब तक हटा देवेगा? (ग) क्‍या शासकीय भूमि पर लगभग 70-80 वर्षों से खेती करते आ रहे आदिवासियों को यदि भूमि का पट्टा दिया जाता है तो हर वर्ष लगने वाले दण्‍ड से बच जावेंगे? क्‍या शासन द्वारा झाबुआ अलीराजपुर जिले में राजस्‍व भूमि पर पट्टे देने की कार्य योजना तैयार की जावेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

आई.टी.आई. ब्‍यावरा की बाउण्‍ड्रीवाल का निर्माण

[तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास]

10. ( *क्र. 322 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के अता. प्रश्‍न संख्‍या 20 (क्रमांक 527), दिनांक 21 जुलाई, 2016 में दी गई जानकारी अनुसार आई.टी.आई. ब्‍यावरा परिसर की बाउण्‍ड्रीवाल निर्माण कार्य हेतु राशि रूपये 24,41,756/- एवं पहुंच मार्ग निर्माण कार्य हेतु राशि रूपये 6.27 लाख पर पुनरीक्षित प्रशासकीय स्‍वीकृति प्रक्रियाधीन है? यदि हाँ, तो क्‍या उक्‍त कार्यों की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्‍वीकृति प्रश्‍न दिनांक तक प्रदान कर दी गई है? यदि हाँ, तो प्रति उपलब्‍ध करावें? यदि नहीं, तो उक्‍त संबंध में कार्यवाही किन कारणों से लंबित है? (ख) क्‍या यथाशीघ्र उक्‍त निर्माण कार्य नहीं कराये जाने से गत वर्षाकाल की भांति आगामी वर्षाकाल में भी छात्र-छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा तथा उक्‍त आई.टी.आई. भवन प्री-फेव्रीकेट पेटर्न से निर्मित है एवं खुला परिसर होने से पशुओं द्वारा क्षति पहुंचाई जा रही है? (ग) यदि हाँ, तो क्‍या शासन छात्र-छात्राओं को सुविधा प्रदान करने एवं भवन की सुरक्षा की दृष्टि से उक्‍त निर्माण कार्यों की प्रशासकीय स्‍वीकृति प्रदान करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा ( श्री दीपक जोशी ) : (क) जी हाँ। जी नहीं। परियोजना परीक्षण समिति की बैठक दिनांक 25 जून 2016 में बाउन्‍ड्रीवॉल निर्माण को स्‍थगित रखने का निर्णय लिया गया है। बाउन्‍ड्रीवॉल के निर्माण के लिए विभिन्‍न प्रकार की कॉस्‍ट इफेक्टिव डिजाईन का अध्‍ययन करने तथा गाईड लाईन तैयार करने बाबत् निर्णय लिया गया। पीआईयू, पी.डब्‍ल्‍यू.डी. द्वारा बाउन्‍ड्रीवॉल निर्माण के विकल्‍पों का प्रस्‍ताव तैयार कर लिया गया है। प्रस्‍तुत प्रस्‍ताव पर परीक्षण कर प्रस्‍ताव परियोजना परीक्षण समिति के समक्ष प्रस्‍तुत किया जाएगा। स्‍वीकृति होने पर निर्माण की कार्यवाही हो सकेगी। (ख) जी नहीं। (ग) जी हाँ। समयावधि बताना संभव नहीं है।

गौवंश के सदुपयोग हेतु नीति का निर्धारण

[पशुपालन]

11. ( *क्र. 1181 ) श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. शासन व प्रशासन एवं माननीय मुख्‍यमंत्री जी कृषि को लाभ का धंधा बनाने हेतु दृढ़ संकल्पित हैं, जिसमें पशुपालन विभाग का भी सहयोग आवश्‍यक है? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या शासन व प्रशासन प्रदेश के हर किसान को कम से कम दो गाय पालन हेतु एवं गौवंश (बछड़ों) का सदुपयोग हो सके (बैलों के रूप में उपयोग किया जावे) जिससे खेती की लागत भी कम होगी, हेतु नीति बनाई जावेगी? (ग) क्‍या उपरोक्‍त (ख) में उल्‍लेखित गौ-धन हेतु आर्थिक स्थिति से कमजोर कृषकों को अनुदान के रूप में गौ-धन उपलब्‍ध कराएंगे? (घ) यदि कोई कृषक परिवार गौ-धन एवं बैल जोड़ी न रखे तो क्‍या उन कृषकों को म.प्र. शासन द्वारा देय सभी लाभकारी एवं हितकारी योजनाओं से वंचित रखा जावेगा?

पशुपालन मंत्री ( श्री अंतरसिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। (ख) जी नहीं। वर्तमान में इस तरह की कोई नीति प्रस्तावित नहीं है। (ग) एवं (घ) जी नहीं।

नामान्‍तरण के दर्ज प्रकरण

[राजस्व]

12. ( *क्र. 489 ) श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खरगापुर विधान सभा क्षेत्र की तहसील बल्‍देवगढ़, पलेरा एवं खरगापुर में ऐसे कितने प्रकरण लंबित हैं जिन कृषकों के परिवारजनों माता-पिता, भाई-बहिनों की मृत्‍यु उपरांत नामान्‍तरणों का होना शेष है तथा ऐसे कितने प्रकरण शेष हैं, जिनके नामांतरण हो जाने के बाद कम्‍प्‍यूटर में नाम दर्ज नहीं हैं? (ख) इस प्रकार के प्रकरण किस कारण से लंबित पड़े हैं और उन्‍हें पूर्ण क्‍यों नहीं किया गया तथा किसान इस प्रकार की समस्‍या से ग्रसित है तथा सूखा राहत राशि, खाद, बीज आदि नहीं मिल पा रहा है, क्‍या ऐसे प्रकरणों का निपटारा करायेंगे? यदि हाँ, तो कब तक समयावधि बतायें? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें? (ग) क्‍या खरगापुर, पलेरा, बल्‍देवगढ़ तहसीलों में राजस्‍व मण्‍डल ग्‍वालियर, कमिश्‍नर, कलेक्‍टरों के द्वारा किये गये आदेशों अनुसार भी नामान्‍तरण शेष है? यदि हाँ, तो सक्षम अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों के नामान्‍तरण कब तक पूर्ण करा लिये जायेंगे? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें तथा वर्णित अधिकारियों के आदेशों का पालन न करने वाले अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही प्रस्‍तावित करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) एवं (ख) खरगापुर विधानसभा क्षेत्र की तहसील पलेरा, खरगापुर एवं बलदेवगढ़ में अविवादित नामांतरण किया जाना शेष नहीं है एवं विवादित नामांतरण के कुल 76 प्रकरण न्‍यायालयीन प्रक्रिया के तहत तहसील न्‍यायालयों में प्रचलित हैं, जिन्‍हें समय-सीमा में निराकरण किया जाकर तत्‍काल कम्‍प्‍यूटर में अमल किया जा रहा है। न्‍यायालयीन प्रक्रिया होने के कारण समय-सीमा बताना संभव नहीं है। (ग) खरगापुर विधान सभा क्षेत्र की तहसील पलेरा, खरगापुर एवं बलदेवगढ के अतंर्गत राजस्‍व मडंल ग्‍वालियर, कमिश्‍नर, कलेक्‍टर के द्वारा पारित किये गये आदेशों के अनुसार कोई भी नामांतरण प्रकरण शेष नहीं है। शेष प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता।

दो पहिया वाहन चालकों द्वारा ईयर फोन लगाने को प्रतिबंधित किया जाना

[परिवहन]

13. ( *क्र. 23 ) श्री सुदर्शन गुप्‍ता (आर्य) : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रदेश में दो पहिया (मोटर साईकल, स्कूटर आदि) वाहन चालकों द्वारा गाड़ी चलाते समय ईयर फोन लगाना प्रतिबंधित है? (ख) यदि नहीं, है तो क्‍या शासन इसे प्रतिबंधित करने के लिये कार्यवाही कर रहा है? यदि हाँ, तो कब तक इसे लागू किया जावेगा?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। शेषांश का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता। 

महिदपुर विधान सभा क्षेत्रांतर्गत जारी कार्यों की जाँच

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

14. ( *क्र. 1850 ) श्री बहादुर सिंह चौहान : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) महिदपुर विधान सभा में वर्तमान में जल निगम के अंतर्गत जारी कार्यों के तहत घटिया टंकी निर्माण पर अब तक क्‍या कार्यवाही की गई है? (ख) इसके अतिरिक्‍त पाईप लाईन भी उचित मापदंड की न होने की जाँच क्‍यों नहीं की गई है? (ग) क्‍या (क) व (ख) की जाँच पूर्ण होने तक संबंधित फर्म के भुगतान पर रोक लगाई जायेगी? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) इस घटिया निर्माण पर ध्‍यान न देने वाले अधिकारियों पर शासन कब तक कार्यवाही करेगा?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) महिदपुर विधानसभा क्षेत्र में जल निगम द्वारा टंकियों का निर्माण निर्धारित मापदण्ड के अनुसार करवाया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) पाईप लाईन की जाँच करवाये जाने पर वह उचित मापदण्ड की पाई गई है। (ग) उत्तरांश एवं के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) उत्तरांश एवं के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

सबमर्सिबल पंप का भौतिक सत्‍यापन

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

15. ( *क्र. 165 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) विभाग द्वारा सतना जिले में वर्ष 2012-13 से 2015-16 तक की अवधि में कितने सबमर्सिबल पम्‍प किस संस्‍था से किस दर पर खरीदे गये हैं? (ख) किस-किस विधानसभा के किस-किस गांव में सबमर्सिबल पम्‍प स्‍थापित किये गये हैं? भौतिक सत्‍यापन कर बतायें कि आज की स्थिति में वे चालू हैं या बंद पड़े हैं? यदि बंद पड़े हैं तो कारण बतायें? (ग) सतना जिले में किस-किस ग्राम पंचायत में नल-जल योजना चल रही है? कितनी नल-जल योजनाएं बंद पड़ी हैं? बंद होने का कारण क्‍या है? आम जनता को स्‍वच्‍छ पेयजल न मिल पाने के लिये कौन अधिकारी जिम्‍मेदार है? (घ) प्रश्नांश (ख) एवं (ग) के लिये कौन अधिकारी दोषी हैं? इन लापरवाह अधिकारियों के विरूद्ध कब तक अनुशासनात्‍मक कार्यवाही कर दी जायेगी, इन्‍हें कब तक सतना जिले से हटा दिया जावेगा?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) 909 नग। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-3 अनुसार है। जिन ग्रामों की नलजल योजना बंद है, वहाँ हैण्डपंप/कूपों के माध्यम से जलप्रदाय किया जाता है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) योजनाओं के संचालन संधारण का दायित्व संबंधित ग्राम पंचायतों का है। अतः कार्यवाही का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

तहसीलदार बिजावर को प्रेषित जाँच पर कार्यवाही

[राजस्व]

16. ( *क्र. 1738 ) श्री मानवेन्द्र सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कलेक्‍टर खनिज शाखा छतरपुर के द्वारा वर्ष 2005 में तहसीलदार बिजावर, जिला छतरपुर को 12 ग्रामों की 132.42 हे. राजस्‍व भूमि 327.83 हेक्‍टेयर वनभूमि एवं वनकक्षों में शामिल 3973.56 हेक्‍टेयर भूमि पर पूर्वेक्षण अनुज्ञप्ति पत्र में आवेदित भूमि के जाँच प्रतिवेदन हेतु लिखे पत्र पर जाँच प्रतिवेदन बनाया जाकर प्रेषित किया गया था? (ख) यदि हाँ, तो 132.42 हेक्‍टेयर राजस्‍व भूमि 327.83 हेक्‍टेयर वनभूमि एवं वनकक्षों में शामिल 3973.56 हेक्‍टेयर वनभूमि में से कितनी-कितनी भूमि किस राजस्‍व ग्राम के निस्‍तार पत्रक एवं अधिकार अभिलेख में किन-किन सार्वजनिक एवं निस्‍तारी प्रयोजनों के लिए दर्ज है, इसमें से कितनी भ‍ूमि की बिजावर एस.डी.ओ. के समक्ष भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 5 से 19 तक की जाँच लंबित है? (ग) तहसीलदार बिजावर एवं अतिरिक्‍त तहसीलदार बक्‍स्वाहा द्वारा अपने जाँच प्रतिवेदन में निस्‍तार पत्रक एवं अधिकार अभिलेख में दर्ज प्रयोजनों एवं एस.डी.ओ. के बिजावर के समक्ष लंबित धारा 5 से 19 तक की लंबित जाँच से संबंधित तथ्‍यों को किन कारणों से शामिल नहीं किया गया? (घ) क्‍या निस्‍तार पत्रक एवं अधिकार अभिलेख में दर्ज प्रयोजनों एवं एस.डी.ओ. के समक्ष लंबित जाँच से संबंधित तथ्‍यों को शामिल किया जाकर संशोधित प्रतिवेदन खनिज शाखा को प्रेषित कर दिया गया है? यदि हाँ, तो संबंधित प्रतिवेदन के आधार पर क्‍या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो क्‍यों? क्‍या दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे? समय-सीमा बतायें।

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

सुखेडा उपमण्‍डी हेतु भूमि की स्‍वीकृति

[राजस्व]

17. ( *क्र. 613 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जिला प्रशासन द्वारा चिन्हित एवं आवंटित तहसील पिपलौदा अंतर्गत सुखेडा उपमण्‍डी प्रारंभ किये जाने हेतु जावरा कृषि उपजमण्‍डी समिति जावरा द्वारा नियमानुसार आंकलित भू-भाटक राशि जमा करवा दी गई है? (ख) यदि हाँ, तो भूमि आवंटित किये जाने हेतु कार्यवाही को जिलाधीश महोदय रतलाम द्वारा संभागायुक्‍त महोदय उज्‍जैन को आगामी कार्यवाही हेतु अग्रेषित किया है? (ग) साथ ही क्‍या संभागायुक्‍त महोदय उज्‍जैन द्वारा तत्‍संबंधी कार्यवाही अंतिम अनुमोदन हेतु माननीय प्रमुख सचिव, राजस्‍व विभाग को अग्रेषित की है? (घ) यदि हाँ, तो शासन/विभाग द्वारा कृषक हित की अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण व्‍यवस्‍था हेतु भूमि आवंटन प्रक्रिया को कब तक पूर्ण कर लिया जाएगा?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) भूमि आवंटन पश्चात् प्रीमियम, भू-भाटक जमा कराये जाने का प्रावधान है। (ख) एवं (ग) जी हाँ। (घ) भूमि आवंटन कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

आराजी नम्‍बर 381 में हुए अतिक्रमण को हटाया जाना

[राजस्व]

18. ( *क्र. 26 ) डॉ. रामकिशोर दोगने : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 02 मार्च, 2016 के परि.अता. प्रश्‍न संख्‍या 113 (क्रमांक 2772) के उत्‍तर में बताया गया था कि जानकारी एकत्रित की जा रही है, तो क्‍या जानकारी प्राप्‍त हो गई है? यदि हाँ, तो बताएं? यदि नहीं, तो इसका क्‍या कारण है तथा जानकारी न देने वाले अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी? (ख) दिनांक 22.7.2016 के भी परि.अता. प्रश्‍न संख्‍या 120 (क्रमांक 2205) के उत्‍तर में भी बताया गया था कि अतिक्रमण हटाने की जानकारी कलेक्‍टर से अप्राप्‍त है, तो क्‍या विभाग इस प्रकरण में कोई कार्यवाही नहीं करना चाहता है? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) आराजी नम्‍बर 381 विकास खण्‍ड पाली, जिला-उमरिया के ग्राम सुन्‍दर दादर (घाटा टोला) में अतिक्रमण कर स्‍कूल का निर्माण करा लिया गया और इसकी जानकारी भूमि स्‍वामी को नहीं दी गई और न ही सहमति ली गई तो क्‍या उक्‍त जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाया जावेगा या उक्‍त भूमि का मुआवजा दिया जावेगा? (घ) विभाग द्वारा की गई कार्यवाही से उक्‍त आराजी नम्‍बर 381 के भूमि स्‍वामी को क्‍या इसकी जानकारी दी जावेगी? (ड.) अतिक्रमणकर्ता प्राचार्य, पटवारी, तहसीलदार के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जावेगी? इसकी जानकारी उपलब्‍ध कराई जावे?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) से (ड.) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

कटनी जिले में पेयजल की उपलब्‍धता

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

19. ( *क्र. 1292 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या कटनी जिला विगत तीन वर्ष से सूखे से प्रभावित है? यदि हाँ, तो उक्‍त जिले के रीठी एवं बहोरीबंद विकास खण्‍ड में उक्‍त अवधि में कितने हैण्‍डपंप सूख (ड्राई) गए थे? जून 2016 की स्थिति में पंचायतवार विवरण दें (ख) क्‍या 450 जनसंख्‍या के मान से एक हैण्‍डपंप स्‍वीकृत करने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो जिन गांवों की जनसंख्‍या 445 है या 400 है, उनको उक्‍त नियम को शिथिल कर उन गांवों में भी हैण्‍डपंप स्‍वीकृत किए जाने हेतु शासन कोई कार्य योजना बना रहा है? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो कारण बताएं? (ग) क्‍या कटनी जिले का विकासखण्‍ड रीठी पेयजल संकटग्रस्‍त है? उक्‍त विकास खण्‍ड में पेयजल संकट को दूर करने के लिए कोई कार्य योजना शासन द्वारा पृथक से तैयार कराकर पेयजल संकट को दूर करेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो कारण बताएं?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) से (ग) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

शासकीय अराजियातों के स्वामित्‍व परिवर्तन की जाँच

[राजस्व]

20. ( *क्र. 1501 ) श्रीमती ऊषा चौधरी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सतना जिले में कलेक्टर सतना राजस्व प्रकरण क्र. 33 अ 19 (111) 2015-16 आदेश दिनांक 05.04.2016, राजस्व प्रकरण क्र. 32 अ 19 (111) 2015-16 आदेश दिनांक 28.03.2016 के द्वारा निजी स्वामित्त्व की त्रुटि‍पूर्वक दर्ज भूमियों को मध्य प्रदेश शासन दर्ज किया गया है तथा प्रकरण में दोषी व्यक्तियों/अधिकारी एवं कर्मचारी को चिन्हित किया गया है, किन्तु कलेक्टर सतना द्वारा दोषियों के विरुद्ध एफ.आई.आर. अभी तक क्यों नहीं कराई गई? यदि कराई जावेगी तो समय-सीमा बताएं? (ख) माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के रिट पिटीशन क्र. 9659/15 में पारित आदेश दिनांक 04.08.2015 सतना जिले की बहुमूल्य भूमियों के खुर्द-बुर्द किये जाने के परिप्रेक्ष्‍य में कलेक्टर सतना के निर्देशानुसार एस.डी.एम. रघुराजनगर द्वारा जाँच समिति का गठन पत्र क्र. 52 दिनांक 06.02.2016 को किया गया था? समिति द्वारा जाँच प्रतिवेदन के आधार पर प्रश्नांकित भूमियों को शासकीय घोषित किया गया है, किन्तु त्रुटि‍कर्ता अधिकारी/कर्मचारियों के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई? अद्यतन विवरण देवें (ग) क्‍या ध्यानाकर्षण सूचना क्रमांक 506 दिनांक 11.03.2016, तहसीलदार रघुराजनगर के पत्र क्र. 30 दिनांक 12.03.2016 को कलेक्टर सतना को प्रेषित जवाब में दोषी व्यक्तियों, अधिकारी एवं कर्मचारियों को स्पष्ट चिन्हित किया गया है? उक्त जवाब के परिप्रेक्ष्य में कलेक्टर सतना द्वारा दोषियों के विरुद्ध क्या कार्यवाही की गई? अद्यतन जानकारी देवें

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) न्यायालय कलेक्टर सतना के राजस्व प्रकरण क्रमांक 3319 (3) 2015-16 आदेश दिनांक 05.04.2016 एवं न्यायालय कलेक्टर सतना के राजस्व प्रकरण क्रमांक 3219 (3) 2015-16 आदेश दिनांक 28.03.2016 के द्वारा न्यायालयीन आदेशों के आधार पर निजी स्वामित्व में दर्ज भूमियों को आदेशानुसार म.प्र.शासन दर्ज किया जा चुका है। उक्त आदेशों में तहसीलदार रघुराजनगर द्वारा प्रस्तुत जाँच प्रतिवेदन में यह पाया गया कि शासकीय से निजी स्वामित्व में दर्ज की गई भूमियां अनावेदकगणों द्वारा प्रस्तुत सत्यापित नकलों के आधार पर न्यायालयीन आदेश के तहत दर्ज की गईं थीं। उक्त आदेशों में किसी भी अधिकारी/कर्मचारी को दोषी चिन्हित नहीं किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ख) जी हाँ। जिसमें जाँच उपरांत यह पाया गया था, कि प्रश्नाधीन/रिट पिटीशन में अंकित भूमि का खसरे में पूर्व से ही म.प्र.शासन दर्ज अभिलेख है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

विभागांतर्गत संचालित योजनाएं

[पशुपालन]

21. ( *क्र. 851 ) श्री रामपाल सिंह : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शहडोल जिले में पशुपालन से संबंधित हितग्राहियों को लाभांवित एवं प्रोत्साहित किये जाने की कार्यवाही संचालित की जा रही है? (ख) यदि हाँ, तो उक्त कार्य के लिये कितनी राशि वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में जिले को आवंटित की गई और आवंटित राशि से किस-किस कार्य के लिये कितनी-कितनी राशि व्यय की गई? व्यय की गई राशि से लाभान्‍वित हितग्राहियों सहित अन्य कार्यों के लिये किये गये व्यय का ब्‍यौरा उपलब्‍ध्‍ा कराया जावे।

पशुपालन मंत्री ( श्री अंतरसिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार

परिशिष्ट - ''चार''

 

 

बी.पी.एल. राशन कार्डों को जारी करने में अनियमितता

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

22. ( *क्र. 1229 ) श्री देवेन्द्र वर्मा : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रदेश में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के राशन कार्ड 2011 की सर्वे सूची के आधार पर जारी किये जा रहे हैं? (ख) किसी भी ग्रामीण एवं नगरीय निकाय में आबादी में कितने प्रतिशत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन के राशन कार्ड जारी करने का नियम है? क्‍या एक ही परिवार में एकाधिक राशन कार्ड जारी किये जा रहे हैं? (ग) क्‍या खंडवा जिले में शासन के इन निर्देशों का पालन किया जा रहा है? यदि नहीं, तो क्‍यों? खंडवा नगर में वर्ष 2011 से 2016 तक वर्षवार जारी बी.पी.एल. राशन कार्डों की संख्‍यात्‍मक जानकारी दें (घ) क्‍या वर्ष 2011 से 2016 की अवधि में कई परिवारों का जीवन स्‍तर गरीबी रेखा के ऊपर होने के बाद भी उनके द्वारा इसका लाभ लिया जा रहा है? यदि हाँ, तो क्‍या ऐसे परिवारों का पुन: सर्वे कर अपात्र होने पर उनके राशन कार्ड निरस्‍त कर पात्र गरीबों के नाम जोड़ने के आदेश जारी किये जाएंगे? (ड.) क्‍या सरकार संपूर्ण प्रदेश में नए सिरे से गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन के वीडियो सर्वे के आदेश जारी कर नए राशन कार्ड जारी करने पर विचार करेगी, ताकि पात्र लोगों को इसका लाभ मिल सके?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) जी नहीं। (ख) किसी भी ग्रामीण अथवा नग‍रीय निकाय में उसकी आबादी के प्रतिशत के मान से गरीबी रेखा के कार्ड जारी करने का कोई नियम नहीं है। परिवारों के विभाजन के फलस्‍वरूप नये परिवार को गरीबी रेखा की सूची में शामिल किये जाने के पश्‍चात उसके द्वारा आवेदन करने पर पदाभिहित अधिकारी द्वारा राशनकार्ड जारी करने का प्रावधान है। (ग) खंडवा जिले में शासन के निर्देशों का पालन किया जा रहा है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। शेष भाग की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (घ) प्रश्‍नांकित क्षेत्र में ऐसा मामला प्रकाश में नहीं आया है बी.पी.एल. परिवारों की सूची में नाम जोड़ने एवं काटने की एक सतत् प्रक्रिया है। सक्षम अधिकारियों के समक्ष नाम जोड़ने एवं अपात्र परिवारों के संबंध में शिकायत की जाने पर जांचोपरांत आवश्‍यक कार्यवाही करने का प्रावधान है। (ड.) गरीबी रेखा का नवीन सर्वे भारत सरकार से निर्देश प्राप्‍त होने पर किया जाता है।

परिशिष्ट - ''पाँच''

भूमि हस्‍तान्‍तरण में अनियमितता

[राजस्व]

23. ( *क्र. 828 ) श्री अनिल जैन : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र निवाड़ी अंतर्गत ओरछा तहसील के ग्राम बबेड़ी जंगल स्थित भूमि खसरा नं. 27 का कितना रकबा वर्ष 1990 में किसके नाम दर्ज था? साथ ही प्रश्‍न दिनांक को प्रश्‍नागत खसरा नंबर 27 के कितने-कितने रकबे के कौन-कौन खातेदार हैं? उनके नाम व पते बताये जावें तथा वर्ष 1990 के खातेदारों से यह भूमि वर्तमान खातेदारों तक किस-किस प्रकार से हस्‍तांतरित हुई है? नामांतरण पंजी के आदेश क्रमांक व पेज क्रमांक के संदर्भ सहित जानकारी दी जावे? (ख) वर्ष 1990 से अब तक क्‍या उक्‍त नामांतरणों में राजस्‍व विभाग की भू-राजस्‍व संहिता के किन-किन नियमों का उल्‍लंघन हुआ है? उल्‍लंघनकर्ता के नाम, पद नाम बताये जावें तथा उनके विरूद्ध अब तक क्‍या कार्यवाही हुई है और कौन-कौन सी लंबित है? (ग) इसी प्रकार ओरछा तहसील के ग्राम प्रतापपुरा में स्थित भूमि खसरा नं. 248 के बारे में भी प्रश्नांश (क) एवं (ख) में चाही गयी शब्‍दश: जानकारी देते हुये बताया जावे कि भूमि के हस्‍तांतरण में किये गये भू-राजस्‍व संहिता उल्‍लंघन के कारण उल्‍लंघनकर्ताओं के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जा रही है? (घ) प्रश्‍नगत दोनों राजस्‍व ग्रामों के उक्‍त खसरा नंबरों में यदि कोई हेर-फेर हुई है तो अतिक्रमणकारियों के द्वारा अतिक्रमित भूमि को शासन द्वारा वापिस कब तक लिया जा सकेगा?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) ग्राम बबेड़ी जंगल तहसील ओरछा स्थित भूमि खसरा नम्‍बर 27 वर्ष 1990 के अभिलेख की जानकरी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) वर्ष 1990 से अब तक उक्‍त नामान्‍तरण में राजस्‍व विभाग द्वारा भू-राजस्‍व संहिता के नियमों का उल्‍लंघन होना नहीं पाया गया। (ग) ग्राम प्रतापपुरा तहसील ओरछा स्थित भूमि खसरा नम्‍बर 248 वर्ष 1990 के अभिलेख जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) प्रश्‍नगत दोनों राजस्‍व ग्रामों के उक्‍त खसरा नम्‍बरों पर कोई हेर-फेर नहीं हुआ है और न ही कोई अतिक्रमण है।

नल-जल योजना का क्रियान्‍वयन

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

24. ( *क्र. 1826 ) श्री कमलेश शाह : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) अमरवाड़ा विधान सभा क्षेत्र की नल-जल योजनाओं की संपूर्ण जानकारी देवें? (ख) जिन योजनाओं में जल स्रोत सूख गया है, उनका संचालन कैसे होगा? (ग) इसके लिये नवीन योजनाएं कब तक स्‍वीकृत की जावेंगी?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) ऐसी योजनाओं में विभाग द्वारा स्रोत विकसित किया जाकर उन्हें चालू करवाया जायेगा। (ग) निश्चित समयावधि नहीं बताई जा सकती।

नवीन हैण्‍डपंपों की स्‍वीकृति

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

25. ( *क्र. 428 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) प्रश्‍नकर्ता के विधान सभा क्षेत्र बासौदा अंतर्गत वर्ष 2013-14, 2014-15, 2015-16 एवं 2016-17 में कितने नवीन हैण्‍डपंप खनन किस-किस योजना में स्‍वीकृ‍त हुये थे? ग्रामवार सूची उपलब्‍ध करावें। (ख) प्रश्नांश (क) में स्‍वीकृत किये गये हैण्‍डपंपों के लिये बोर खनन किस-किस ग्राम में किस स्‍थान पर, किस दिनांक को किया गया? खनन किये गये बोर में कितने बोर सफल हुये व कितने असफल? सफल हुए बोर में से कितनों पर हैण्‍डपंप स्‍थापित कर दिये गये हैं, कितने शेष हैं? (ग) क्‍या असफल बोर पर हैण्‍डपंप स्‍थापित कर गांव में संचालित हैण्‍डपंप को गांव की जनगणना के मापदण्‍ड में सम्मिलित किया गया है या नहीं? सूची उपलब्‍ध करावें। इन असफल बोर के स्‍थान पर ग्राम में अन्‍य स्‍थान पर नवीन बोर खनन की क्‍या कार्य योजना है?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) 217 नलकूप खनन कर 206 सफल नलकूपों पर हैण्डपंप स्थापित किये गये। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी नहीं। लक्ष्य, आवंटन की उपलब्धता एवं भूजल सर्वेक्षण के आधार पर निर्धारित मापदण्ड अनुसार नलकूप खनन कर ग्रामों में हैण्डपंप स्थापित करने की योजना है।

 

 

 






 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

भाग-2

नियम 46 (2) के अंतर्गत अतारांकित प्रश्नोत्तर के रुप में

परिवर्तित तारांकित प्रश्नोत्तर


केन्‍द्रीय जेल भोपाल से फरार कैदी

[जेल]

1. ( क्र. 7 ) श्री बाबूलाल गौर : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) केन्‍द्रीय जेल भोपाल से दिनांक 30 एवं 31 अक्‍टूबर 2016 की दरमियानी रात सिमी के कितने-कितने आतंकवादी फरार हुए? नाम सहित बताया जाए? (ख) विभाग द्वारा इन आतंकवादियों की निगरानी के लिये किस-किस एजेन्‍सी द्वारा कितना बल लगाया गया था? (ग) विभाग द्वारा आंतकवादियों के फरार होने पर किन-किन अधिकारियों के विरूद्ध क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? नाम एवं पद नाम सहित बताया जाए? (घ) भविष्‍य में इस प्रकार की घटना को रोकने के लिये क्‍या कार्यवाही की जा रही है?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) केन्‍द्रीय जेल भोपाल से दिनांक 30 एवं 31 अक्‍टूबर की दरमियानी रात सिमी संगठन से संबंधित 08 विचाराधीन बंदी फरार हुए। उनके नाम पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'''' अनुसार है। (ख) जेल प्रहरियों/मुख्‍य प्रहरियों के अतिरिक्‍त विभाग द्वारा इन सिमी बंदियों की निगरानी के लिये मध्‍यप्रदेश पुलिस की 2-8 की सशस्‍त्र एस.ए.एफ. गार्ड केन्‍द्रीय जेल भोपाल में तैनात की गई थी। (ग) प्रथम दृष्‍ट्या लापरवाही के लिये दोषी पाये जाने पर अधिकारियों/कर्मचारियों के निलंबन की कार्यवाही की गई है, जिनके नाम एवं पदनाम की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'''' अनुसार है। (घ) मध्‍यप्रदेश शासन, जेल विभाग, मंत्रालय के आदेश क्रमांक-एफ-02 (बी) 24/2016/तीन/जेल, दिनांक 05/11/2016 द्वारा प्रदेश की समस्‍त 11 केन्‍द्रीय जेलों की सुरक्षा व्‍यवस्‍था के ऑडिट हेतु समिति का गठन किया गया है, जो पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'''' अनुसार है। केन्‍द्रीय जेल भोपाल की सुरक्षा ऑडिट केन्‍द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सी.आई.एस.एफ.) भारत सरकार, गृह मंत्रालय से भी कराई जा रही है। जेल मुख्‍यालय के पत्र क्रमांक-16173, दिनांक 04/11/2016 द्वारा अधीक्षक, केन्‍द्रीय जेल भोपाल को सिमी बंदियों की सुरक्षा के संबंध में विशेष निर्देश जारी किये गए हैं, जो पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'''' अनुसार है। घटना की जाँच करने तथा भविष्‍य में बंदियों के फरार होने की घटना की पुनरावृत्ति न हो इस संबंध में सुझाव प्रस्‍तुत करने हेतु मध्‍यप्रदेश शासन, सामान्‍य प्रशासन विभाग, मंत्रालय की अधिसूचना क्रमांक-एफ-24-7/2016/1-10, दिनांक 07/11/2016 द्वारा एकल सदस्‍यीय न्‍यायिक जाँच आयोग गठित किया गया है, जो तीन माह में जाँच पूर्ण कर अपनी रिपोर्ट राज्‍य सरकार को प्रस्‍तुत करेगा। उक्‍त अधिसूचना पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'''' अनुसार है।

गौ-शालाओं को उपलब्‍ध सुविधाएं

[पशुपालन]

2. ( क्र. 8 ) श्री बाबूलाल गौर : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भोपाल जिले में किन-किन स्‍थानों पर विगत तीन वर्षों में कितनी गौ-शालाएं स्‍थापित हैं? (ख) उक्‍त गौ-शालाओं में वर्तमान में कितनी-कितनी गायें रखी गई है? गौ-शालावार जानकारी दी जाए। (ग) क्‍या शासन द्वारा इन गौ-शालाओं के स्‍थापना हेतु भूमि अथवा अन्‍य सुविधा उपलब्‍ध कराई गई है? पृथक-पृथक जानकारी दी जाय? (घ) शासन द्वारा विगत तीन वर्षों में गौ-शालाओं को प्रति गाय प्रतिदिन के मान से कितनी-कितनी आर्थिक सहायता एवं अन्‍य सुविधाएं उपलब्‍ध कराई गई हैं?

पशुपालन मंत्री ( श्री अंतरसिंह आर्य ) : (क) भोपाल जिले में विगत तीन वर्षों में 28 क्रियाशील गौशालाएं संचालित है जिसमें विगत तीन वर्षों में एक श्री कृष्ण गौशाला सिंघोडा तह. बैरसिया नवीन पंजीकृत होकर स्थापित है। गौशालाओं के स्थानों की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। (ख) विगत तीन वर्षों में संचालित गौशालाओं में गौवंश संख्या की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। (ग) जी नहीं। गौशालाओं की स्थापना हेतु पूर्व में कोई सहायता उपलब्ध नहीं कराई जाती गौशाला पंजीकृत होकर संचालित होने पर अन्य सुविधाये उपलब्ध कराई जाती है। (घ) विगत तीन वर्षों में भोपाल जिले में गौशालाओं को प्रति गौवंश, प्रति दिन के मान से उपलब्ध कराई गई आर्थिक सहायता की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। तथा गौशालाओं को विगत तीन वर्षों में अन्य सुविधाओं की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार।

परिशिष्ट - ''एक

लीज भूमि संबंधी

[राजस्व]

3. ( क्र. 48 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या 99 (क्रमांक 2716) दिनांक 29 जुलाई 2016 के उत्‍तर में (क) से (ग) जानकारी एकत्रित करना बताया। क्‍या जानकारी प्राप्‍त कर ली गई थी? (ख) प्रश्नांश (क) में दर्शित  प्रश्‍न का पूर्ण उत्‍तर देवें।

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) एवं (ख) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

श्रमिकों की सेवानिवृत्ति आयु

[श्रम]

4. ( क्र. 49 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र.श्रम विभाग द्वारा 28 जून 2014 को निजी क्षेत्र के कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष से 60 वर्ष करने का आदेश किया गया? तत्‍संबंधी ब्‍यौरा क्‍या है? (ख) क्‍या शासनादेश का पालन ग्रेसिम केमिकल डिव्‍हीजन, लैक्‍सेस एवं आर्केमा उद्योग नागदा जं.जिला उज्‍जैन एवं विक्रम सीमेंट नयागांव, सतना सीमेंट मैहर सीमेंट, इप्‍का रतलाम तथा इंदौर आदि में पालन किया गया है? यदि हाँ, तो किस-किस दिनांक से एवं नहीं तो इनके विरूद्ध शासन ने क्‍या कार्यवाही की? (ग) जिन निजी क्षेत्र के उघोगों ने उक्‍त आदेश 2014 के बाद लागू किया, क्‍या उक्‍त कारखानों के श्रमिकों को आदेश लागू करने के दिनांक से आदेश जारी दिनांक के मध्‍यावधि का रिटायरमेंट लाभ दिया गया है? यदि नहीं, तो क्‍यों? शासन ने इस दिशा में क्‍या कार्यवाही की?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) जी हाँ। मध्यप्रदेश शासन, श्रम विभाग द्वारा मध्यप्रदेश औद्योगिक नियोजन (स्थाई आज्ञाएं) नियम 1963 के उपबंध अनुक्रमांक 14-ए में दिनांक 28.06.14 को अधिसूचना जारी कर निजी क्षेत्र के कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों की सेवानिवृत्ति आयु संशोधित कर 58 वर्ष के स्थान पर 60 वर्ष की गई है। (ख) उज्जैन जिले में लेंक्सेंस इंडिया प्रायवेट लिमिटेड, आरसील केटेलिस्ट प्रायवेट लिमिटेड नागदा (पूर्व नाम आर्केमा) इप्का रतलाम तथा इंदौर में शासन के आदेश का पालन अधिसूचना दि. 28.06.2014 से ही किया जा रहा है। विक्रम सीमेंट नया गांव यूनिट खोर के द्वारा उक्त आदेश का पालन नहीं करते हुए 58 वर्ष की आयु को पूर्ण करने वाले 17 श्रमिकों को सेवानिवृत्त किया गया है जिसमें से 16 प्रकरणों को औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के अंतर्गत औद्योगिक अधिकरण को सन्दर्भित किये गये है। एक प्रकरण पर समझौता कार्यवाही की जा रही है। प्रबंधन विक्रम सीमेंट द्वारा शासन की उक्त अधिसूचना के विरूद्ध याचिका क्र. 3552/16 माननीय उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की गई है जिसमें माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 11.03.2016 को अग्रिम सुनवाई तक कोई कोरसिव कार्यवाही नहीं किये जाने के निर्देश दिये हैं। सतना सीमेंट एवं मैहर सीमेंट में उक्त आदेश का पालन नहीं किया गया है। मैहर सीमेंट द्वारा उक्त आदेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में याचिका क्र. 786/15 दायर की गई थी जिसमें माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा दिनांक 20.04.2015 को याचिकाकर्ता के विरूद्ध दमनात्मक (No coercive steps be taken against the petitioner) कार्यवाही न की जावे, निर्देश दिये है। सतना सीमेंट द्वारा उक्त आदेश के विरूद्ध माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर में याचिका क्र. 12790/14 दायर की गई थी जिसमें माननीय उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा दिनांक 08.01.15 को याचिकाकर्ता के विरूद्ध दमनात्मक (No coercive steps be taken against the petitioner) कार्यवाही न की जावे, निर्देश दिये है। उक्त दोनों याचिकाओं में माननीय उच्च न्यायालय में शासन की ओर से प्रत्यावर्तन दायर कर दिया गया है जो कि न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। ग्रेसिम लिमिटेड (स्टेपल, ई.डी.डी., केमिकल डिवीजन) द्वारा उक्त आदेश का पालन नहीं किया गया है एवं माननीय उच्च न्यायालय में याचिका क्र. 1417/15 दायर की गई है तथा उक्त का संदर्भ देते हुए प्रबंधन द्वारा उक्त प्रावधानों का पालन नहीं करते हुए दिनांक 28.06.2014 से 22.12.2015 तक 58 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर ही श्रमिकों/स्टॉफ कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति प्रदान करते हुए ग्रेसिम (एस.एफ.डी., ई.डी.डी. एवं केमिकल) द्वारा कुल 173 कर्मचारियों को सेवानिवृत्त किया गया था। उक्त अवैधानिक सेवानिवृत्ति के कारण प्रबंधन के विरूद्ध म.प्र. औद्योगिक नियोजन (स्थाई आज्ञाएं) अधिनियम 1961 के अंतर्गत 9 प्रकरण सक्षम न्यायालय में दायर किये जा चुके हैं तथा औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के अंतर्गत कार्यालय में 132 प्रकरण समझौता कार्यवाही में प्राप्त हुए थे जिनमें 136 श्रमिक सम्मिलित थे। इनमें से 101 प्रकरण (105 श्रमिक) माननीय न्यायालय को संदर्भित किये गये है, 3 प्रकरण (3 श्रमिकों) द्वारा वापस ले लिये गये हैं। 20 प्रकरणों में (20 श्रमिक) सीधे श्रम न्यायालय में प्रकरण दायर कर दिये जाने के कारण इस कार्यालय में समझौता कार्यवाही बन्द कर प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिये गये है एवं 8 प्रकरणों (8 श्रमिक) में समझौता कार्यवाही कार्यालय में निरंतरित है। इसके अतिरिक्त कार्यालय द्वारा स्वंय संज्ञान लेकर 19 श्रमिकों के 2 प्रकरण न्यायालय को सीधे संदर्भित कर दिये गये है। उक्त उद्योगों द्वारा भी 22.12.15 के बाद 60 वर्ष की आयु पर सेवानिवृत्त किया जा रहा है। (ग) प्रदेश के समस्त निजी क्षेत्र के उद्योगों द्वारा शासन की अधिसूचना दिनांक 28.06.2014 को तत्काल प्रभाव से लागू किया गया और श्रमिकों को 60 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त किया जा रहा है। जिन निजी उद्योगों द्वारा शासन के उक्त आदेश को लागू नहीं किया अथवा 28.06.14 के बाद लागू किया गया। उनके विरूद्ध प्रश्न ख में उल्लेखित उद्योगों बाबद उत्तर (ख) अनुसार कार्यवाही की गई है। अन्य निजी उद्योग देवास जिले के किर्लोस्कर ब्रदर्स एवं टाटा इंटर नेशनल लि. द्वारा उक्त आदेश 28.06.2014 के बाद लागू किया गया, उक्त अवधि में सेवानिवृत्त किये गये टाटा इंटरनेशनल के 31 श्रमिकों एवं किर्लोस्कर के 2 श्रमिकों के प्रकरण औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के अंतर्गत श्रम न्यायालय में संदर्भ किये गये है। और उक्त श्रमिकों बाबत् म.प्र. औद्योगिक नियोजन (स्थाई आज्ञाएं) अधिनियम, 1961 के अंतर्गत किर्लोस्कर के विरूद्ध 1 अभियोजन एवं टाटा इंटरनेशनल के विरूद्ध 3 अभियोजन प्रकरण श्रम न्यायालय में दायर किये गये है। महिन्द्र टू-व्हीलर, पीथमपुर के 13 एवं लायड इन्शुलेशन, पीथमपुर के 1 कर्मचारी को प्रबंधन द्वारा स्टॉफ कर्मचारी मानते हुए उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया गया है। उक्त विवाद को न्याय निर्णय हेतु श्रम न्यायालय में संदर्भ कर दिया गया है।

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान के सम्बन्ध में

[तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास]

5. ( क्र. 72 ) श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक : क्या राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विभाग की नीति यह है कि‍ ऐसे विकासखंड जिनमें कोई भी शासकीय/अशासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) नहीं हैं वहां ITI स्थापित किए जाए? (ख) प्रदेश में ऐसे कितने विकासखंड हैं जहां एक से ज्यादा ITI स्थापित हैं? नाम सहित जानकारी प्रदाय करे? (ग) छतरपुर जिले के विकासखंड बिजावर में क्या कोई ITI है? प्रश्नांश (ख) के अनुक्रम में बताए की बिजावर विकासखंड में प्रश्न दिनांक तक ITI खोले जाने हेतु क्या-क्या विभागीय प्रयास हुए? (घ) प्रश्नांश (क) एवं (ग) के अनुक्रम में विकासखंड बिजावर में शासकीय ITI कॉलेज खोले जाने हेतु क्या विभाग प्रयासरत है?

राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा ( श्री दीपक जोशी ) : (क) जी हाँ। (ख) प्रदेश में ऐसे 24 विकासखण्‍ड हैं, जिसमें एक से ज्‍यादा शासकीय आई.टी.आई. संचालित है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार हैं। (ग) जी नहीं। वर्तमान में ऐसे 64 विकासखण्‍ड हैं, जिनमें शासकीय अथवा प्रायवेट आई.टी.आई. संचालित नहीं हैं। साथ ही ऐसे 125 विकासखण्‍ड है जिनमें शासकीय आई.टी.आई. संचालित नहीं है। विभाग द्वारा पिछले पाँच वर्षों में ऐसे 60 विकासखण्‍डों में जिनमें कोई शासकीय आई.टी.आई. नहीं थी, शासकीय आई.टी.आई. खोली गई हैं। विभाग द्वारा प्रत्‍येक ऐसे विकासखण्‍ड जिनमें शासकीय अथवा प्रायवेट आई.टी.आई. संचालित नहीं हैं, में शासकीय आई.टी.आई. प्रारंभ करने के हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। (घ) '''' अनुसार।

परिशिष्ट - ''दो''

मंदसौर जिलान्‍तर्गत सरकारी स्वामित्व की अनुपयोगी सम्पतियां

[राजस्व]

6. ( क्र. 80 ) श्री यशपालसिंह सिसौदिया : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मंदसौर जिले में सरकारी स्वामित्व की कितनी सम्पतियां विभिन्न ग्राम एवं शहरों में किस किस विभाग के पास कहाँ-कहाँ है? इन सम्पतियों में से ऐसी कितनी संपत्तियां हैं जो अनुपयोगी हैं विभागवार उपयोग में नहीं आने वाली सम्पत्तियों का विवरण देवें? (ख) प्रश्नांश (क) संदर्भित ऐसी कितनी सम्पत्तियां हैं जो मरम्मत के बाद उपयोग में लाई जा सकती हैं उनकी मरम्मत पर कितनी राशी का खर्च संभावित है? (ग) क्या सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा विभिन्न विभागों की अनुपयोगी सम्पत्तियों की खुली नीलामी या अन्य कार्यों में उपयोग की योजना प्रस्तावित है? यदि है तो कितनी नजूल की सम्पत्ति का निस्तारण कर दिया गया है तथा इससे सरकार को कितना राजस्व प्राप्त हुआ? (घ) क्या अनुपयोगी सम्पत्तियों का अन्य विभाग की आवश्कता पर उपयोग किया जा सकता है? यदि हाँ, तो 1 जनवरी 2010 के पश्चात् ऐसे कितने प्रकरणों में अन्य विभाग के भवन का उपयोग मंदसौर जिले में कहा कहाँ किया?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

नरेश यादव एवं अजय के विरूद्ध जिला बदर एवं अन्‍य कार्यवाही

[गृह]

7. ( क्र. 81 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 26 फरवरी 2016 के परि.अता. प्रश्‍न संख्‍या 2 (क्रमांक 17) के उत्‍तर में बताएं जब नरेश पुत्र रघुवीर सिंह यादव ने पुलिस को दिये बयान में अजय सिंह निवासी तायडें कालोनी अशोकनगर ने व उसने अतिक्रमण कर रखा है तथा नरेश स्‍वयं शासन द्वारा स्‍टे के बाद भी अतिक्रमण की गई भूमि पर बने भवन पर ऊपर की सीढ़ि‍यां बना रहा था तो दोनों पर सिविल जेल की कार्यवाही की सिफारिश क्‍यों नहीं की गई? (ख) प्रश्नांश (क) में जब नरेश यादव पर पूर्व में जिलाबदर की कार्यवाही हुई थी तथा अजय अवैध खनन के प्रकरण में लम्‍बे समय से फरार है व गंभीर धाराओं में प्रकरण दर्ज है तो इन दोनों के विरूद्ध जिलाबदर की कार्यवाही क्‍यों नहीं हो रही है? (ग) जिलाधीश, जिला पुलिस अधीक्षक, एस.डी.ओ. मुंगावली व तहसीलदार को पिछले 3 वर्ष में अथाईखेड़ा के उक्‍त भवन पर लगातार स्‍थगन के बाद भी नरेश यादव व अजय जिनका नाम एस.डी.ओ. पुलिस मुंगावली को व बहादुरपुर पुलिस को बताया, लगातार निर्माण कार्य जारी रखने की कितनी शिकायतें मिली तथा पुलिस रिपोर्ट जो जिला पुलिस अधीक्षक को दी उसके बाद भी नरेश यादव व अजय के विरूद्ध कार्यवाही क्‍यों नहीं की गई?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) नरेश यादव ने पुलिस को दिये कथन में ऐसा नहीं बताया कि अजय सिंह निवासी तायड़े कॉलोनी, अशोकनगर ने व उसके द्वारा अतिक्रमण कर रखा है। वस्तुस्थिति यह है कि ग्राम अथाईखेड़ा में भूमि सर्वे क्र. 696/2 में करीब 01 बीघा जमीन वर्ष 2012 में राजेन्द्र शर्मा निवासी अथाईखेड़ा ने अजय प्रताप सिंह यादव निवासी तायड़े कॉलोनी, अशोकनगर को बेची थी, जिसकी रजिस्ट्री वर्ष 2012 में अजय प्रताप द्वारा कराई गई थी। उस जमीन पर वर्ष 2012 से ही निर्माण कार्य कराया जा रहा है और उस निर्माण कार्य की देखरेख के लिए इसे कहा गया था, तब से यह उस निर्माण कार्य की देखरेख कर रहा था। यह जमीन शासकीय भूमि नहीं है जिस पर निर्माण कार्य हो रहा था व निर्माण कार्य भूमि सर्वे क्रमांक 696/1 में नहीं है और न ही अजय प्रताप द्वारा फर्जी रजिस्ट्री कराई गई है। भूमि सर्वे क्रमांक 696/1 ग्राम अथाईखेड़ा में नरेश सिंह द्वारा अतिक्रमण की शिकायत प्राप्त होने पर अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व, मुंगावली द्वारा सीमांकन होने पर निर्माण पर रोक लगाई थी जिसके आधार पर नायब तहसीलदार मुंगावली के आदेशानुसार थाना प्रभारी बहादुरपुर एवं पटवारी द्वारा मौके पर जाकर निर्माण कार्य रूकवाया था। पुनः निर्माण की शिकायत प्राप्त होने पर थाना प्रभारी बहादुरपुर एवं हल्का पटवारी द्वारा मौके पर निरीक्षण करने पर दिनांक 01.09.2015 को निर्माण कार्य जारी होना पाया गया था जिसकी रिपोर्ट थाना प्रभारी बहादुरपुर द्वारा दिनांक 02.09.2015 को एस.डी.एम., मुंगावली को भेजी गई थी। नरेश यादव के द्वारा की गई अवमानना के लिए उसके विरूद्ध कार्यवाही हेतु राजस्व न्यायालय, स्वयं सक्षम है। नरेश यादव के कथन की छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र एवं अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व, मुंगावली द्वारा दिये गये स्थगन का आदेश पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। (ख) नरेश यादव पुत्र रघुवीर सिंह यादव पर थाना बहादुरपुर द्वारा जिलाबदर की कार्यवाही दिनांक 27.06.2013 को पुलिस द्वारा प्रस्तुत की गई थी। जिला दण्डाधिकारी अशोकनगर द्वारा प्रकरण सारहीन पाये जाने से दिनांक 29.11.2014 को निरस्त कर दिया गया है। (ग) अनावेदक नरेश पिता रघुवीर सिंह यादव के विरूद्ध शिकायती पत्र क्रमांक/पुआ/ अनगर/शिका/476/15, दिनांक 15.09.2015, पत्र क्र./पुअ/अनगर/शिका/85/15, दिनांक 04.11.2015, पत्र क्र./पुअ/अनगर/शिका/66/15, दिनांक 04.11.2015, पत्र क्र./पुअ/अनगर/ शिका/71/15, दिनांक 23.11.2015, पत्र क्र./पुअ/अनगर/शिका/72/15, दिनांक 23.11.2015, पत्र क्र./पुअ/अनगर/शिका/76/15, दिनांक 05.12.2015 एवं पत्र क्र./पुअ/अनगर/ शिका/79/15, दिनांक 14.12.2015, प्राप्त हुए थे जिसकी जाँच एस.डी.ओ.पी., मुंगावली द्वारा की गई थी। जाँच के दौरान विवादित भूमि के रिकार्ड का अवलोकन करने पर पाया गया कि सर्वे नं. 696/2 अथाईखेड़ा में छोटे सिंह ठाकुर को 05 बीघा जमीन का पट्टा दिया गया था, जिसे नायब तहसीलदार, मुंगावली द्वारा भू- स्वामी घोषित किया गया था। इसी जमीन को दिनांक 24.01.2011 को राजेन्द्र शर्मा एवं राधाकिशन को छोटेसिंह ठाकुर द्वारा रजिस्टर्ड विक्रय किया गया है। दिनांक 30.06.2012 को राजेन्द्र शर्मा द्वारा 01 बीघा जमीन की रजिस्ट्री अजय प्रताप सिंह यादव को की गई थी जिसका नामान्तरण नहीं हुआ है। सर्वे नं.-696/1 में नरेश सिंह द्वारा किये जा रहे अतिक्रमण की शिकायत प्राप्त होने पर अनुविभागीय अधिकारी, राजस्व, मुंगावली द्वारा सीमांकन होने तक निर्माण पर रोक लगाई गई थी। जाँच में पाया गया कि सर्वे क्रमांक 696/2 में 01 बीघा नक्शा अनुसार मेन रोड किनारे की जमीन अजय प्रताप सिंह को बेची गई थी। इसी सर्वे से लगी सर्वे क्रमांक 696/1 को शासकीय भूमि पर नरेश यादव द्वारा अतिक्रमण किया गया है, जो तहसीलदार की रिपोर्ट दिनांक 16.10.2015 में स्पष्ट है। अतिक्रमणकारियों के विरूद्ध विधिवत कार्यवाही की गई है जिसकी निगरानी राजस्व मण्डल ग्वालियर में प्रचलित है। यह सही है कि छोटेसिंह द्वारा राजेन्द्र शर्मा को विक्रय की गई भूमि मुख्य सड़क से लगभग 01 किलोमीटर दूर स्थित होना रजिस्ट्री में लेख है जबकि राजेन्द्र शर्मा द्वारा अजय प्रताप यादव को उक्त सर्वे की 01 बीघा भूमि को विक्रय की रजिस्ट्री में चतुर-सीमा में पश्चिम दिशा में अशोकनगर विदिशा में आम सड़क पर होना लेख किया है। जिसका समाधान अनावेदकों द्वारा नक्शा प्रस्तुत कर किया गया है। जिसमें सर्वे क्र. 696/02 का पीले रंग से अंकित 01 भाग मुख्य सड़क किनारे दिखाया गया है। प्रकरण राजस्व मण्डल म.प्र. ग्वालियर के यहां निगरानी में चले जाने के कारण नरेश यादव व अजय प्रताप सिंह के विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की जा सकी। तहसीलदार परगना मुंगावली का प्रतिवेदन दिनांक 25.11.2015 पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र एवं अनुविभागीय अधिकारी, पुलिस मुंगावली का जाँच प्रतिवेदन पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार

अतिक्रमणकर्ताओं के विरूद्ध कार्यवाही

[राजस्व]

8. ( क्र. 82 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 31 मार्च 2016 के अता.प्रश्‍न संख्‍या 65 (क्र. 6598) के उत्‍तर में बताया कि प्रकरण क्र.868/2013-14 आदेश दिनांक 10.12.2014 द्वारा अतिक्रामक गजराज सिंह पुत्र आलोल सिंह निवासी खानपुर तहसील चंदेरी को म.प्र. राजस्‍व संहिता 1959 की धारा 248 के तहत दस हजार दण्‍ड आरोपित कर बेदखल करने का आदेश किया तो करोड़ों की अशोक नगर शहर के मध्‍य सिर्फ दस हजार का दण्‍ड क्‍यों किया तथा सिविल जेल की कार्यवाही क्‍यों नहीं की व केविएट क्‍यों नहीं लगाई व उसे न्‍यायालय जाने का मौका क्‍यों दिया? (ख) इस भूमि पर गुना के तत्‍कालीन जिलाधीश श्रीम‍ती नीलम राव ने पुलिस की मदद से अतिक्रमण हटा दिया तो अशोकनगर नया जिला बनने पर पुन: अतिक्रमण कराने वाले राजस्‍व कर्मचारियों एवं अधिकारियों को दण्डित क्‍यों नहीं किया गया? (ग) इस अतिक्रमण की गई भूमि  के प्रांगण में जून 2016 में पलकटोरी ग्राम में किये गये अवैध खनन करने वाले वाहन, डम्‍पर आदि पकड़े गये उनको तहसीलदार खनन अधिकारी व पुलिस पर हमला कर छुडा लिया व इसी प्रांगण में रखे जहां से पुलिस ने जप्‍त कर थाने पर रखे तो यह सिद्ध हो गया कि अमोल सिंह खानपुर तो बेनामी अतिक्रामक है व वास्‍तविक अतिक्रामक यादवेन्‍द्र सिंह अजय सिंह है तो उनको इस भूमि से बेदखल तत्‍काल क्‍यों नहीं किया जा रहा है जबकि उनके विरूद्ध किसी न्‍यायालय का स्‍थगन नहीं है?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) प्र.क्र. 8/अ-68/13-14 में तहसीलदार द्वारा नियमानुसार म.प्र. भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 248 के अंतर्गत कार्यवाही की है। (ख) आदेश दिनांक 10.12.2014 पर वरिष्ठ न्यायालयों से स्थगन आदेश प्राप्त होने के कारण तहसीलदार के आदेश का क्रियान्वयन रोकना पड़ा। इसके लिये कोई राजस्व अधिकारी/कर्मचारी दोषी नहीं है। (ग) बेदखल करने हेतु तहसीलदार अशोकनगर ने दिनांक 06.12.2016 नियत की है।

तकनीकी शिक्षा महाविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के प्रयास

[तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास]

9. ( क्र. 112 ) श्री यशपालसिंह सिसौदिया : क्या राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या तकनीकी शिक्षा विभाग प्रदेश के शासकीय तथा अशासकीय तकनीकी शिक्षा महाविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रयासरत है? यदि हाँ, तो 1 जनवरी 2016 के पश्चात् विभाग दवारा गुणवत्‍ता बढ़ाने हेतु क्या प्रयास किये गये? (ख) शैक्षणिक सत्र 2016-17 में प्रदेश के कितने निजी अभियांत्रिकी महाविद्यालयों में कितनी-कितनी सीट रिक्त हैं? क्या ज्यादातर महाविद्यालयों में सीट रिक्त रहने का मुख्य कारण महाविद्यालय गुणवत्ता का अभाव है? विभाग के अधिकारियों दवारा कब-कब महाविद्यालय प्रबन्धक के साथ गुणवत्ता हेतु बैठक की? क्या इस संबध में कोई कमेटी का भी गठन किया गया है? कमेटी द्वारा क्या निर्णय लिए गए? (ग) प्रदेश के गत वर्षों में इंजीनियरिंग कर चुके विद्यार्थियों को रोजगार उपलब्ध कराने हेतु विभाग दवारा कब-कब, क्या-क्या प्रयास किये गये? (घ) क्या इंजीनियरिंग छात्रों के बेरोजगार रहने का मुख्य कारण वैश्वीकरण के दौर में अभियांत्रिकी के सही विषय का चुनाव नहीं करना है? यदि हाँ, तो विषय चयन को लेकर प्रवेश के पूर्व कब-कब कार्यशाला कहाँ-कहाँ विभाग दवारा आयोजित की?

राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा ( श्री दीपक जोशी ) : (क) जी हाँ। संचालनालय द्वारा दिनांक 30 मई, 2016 को गुणवत्ता सुधार हेतु निर्देश पत्र जारी किया गया। अशासकीय संस्थाओं में गुणवत्ता सुधार हेतु राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल को इस आशय का पत्र क्र. 1728 दिनांक 27 जून, 2016 प्रेषित किया गया है। प्रदेश की शासकीय/स्वशासी शिक्षण संस्थाओं का तकनीकी शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा निरीक्षण किया गया है। भोपाल जिले के अशासकीय संस्थाओं का निरीक्षण राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल के अधिकारियों द्वारा किये जाने के निर्देश दिनांक 26 नवम्बर, 2016 को दिये गये हैं। शैक्षणिक गुणवत्ता को निर्धारित मापदंडों तक रखने के उद्देश्य से अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद्, नई दिल्ली द्वारा विगत वर्षों में पूर्व से संचालित संस्थाओं में सीटों में वृद्धि एवं नये संकाय खोले जाने की अनुमति उस स्थिति में ही प्रदान की जा रही है जब उस संस्था में संचालित सभी पाठ्यक्रम नेशनल बोर्ड आफ एक्रिडिटेशन द्वारा प्रमाणित किये गये हों। प्रदेश में सभी संस्थाओं को नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडिटेशन से मान्यता प्राप्त करने हेतु दिशा-निर्देश जारी किये जाकर निजी एवं शासकीय संस्थाओं की एक कार्यशाला नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडिटेशन के अधिकारियों के साथ अक्टूबर, 2015 में आयोजित की गई। गुणवत्ता सुधार हेतु राज्य शासन द्वारा ऑनलाईन परीक्षा आयोजन हेतु एक समिति का गठन किया गया है। विभाग द्वारा भी शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित किये जाने हेतु पत्र क्र. 636/963/2016/ 42 (1) दिनांक 16-05-2016 जारी किया गया। शैक्षणिक गुणवत्ता सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा भी संस्थाओं का निरीक्षण किया जाता है। (ख) शैक्षणिक सत्र 2016-17 में प्रदेश के निजी अभियांत्रिकी महाविद्यालयों में रिक्त सीटों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। जी नहीं। दिनांक 08 जून, 2016 को आयोजित समस्त शासकीय/स्वशासी तकनीकी शिक्षण संस्थाओं के प्राचार्यों की बैठक में गुणवत्ता सुधार के संबंध में सभी आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिये गये थे। जी नहीं। (ग) प्रदेश में इंजीनियरिंग डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को विभिन्न निजी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दृष्टि से विभिन्न संस्थाओं द्वारा ओपन एवं क्लोस्ड कैम्पस इंटरव्यू आयोजित किये जाते हैं। जिनमें काफी संख्या में विद्यार्थियों को रोजगार प्राप्त होता है। राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल द्वारा भी प्लेसमेंट के लिए कार्यवाही की जाती है। (घ) जी नहीं।

स्टेट रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर में सम्पादित कार्य

[विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी]

10. ( क्र. 113 ) श्री यशपालसिंह सिसौदिया : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश के "स्टेट रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर" दवारा क्या-क्या कार्य संपादित किये जाते हैं तथा उक्त सेंटर पर 1 जनवरी 2014 से प्रश्न दिनाँक तक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतन पर कितनी राशि खर्च हुई? क्या उक्त सेंटर पर अधिकांश कार्य वैज्ञानिकों के सहयोग से संपादित किये जाते हैं? (ख) क्या उक्त सेंटर पर काफी समय से एक भी वैज्ञानिक कार्यरत नहीं है? यदि हाँ, तो कब से और क्यों? (ग) क्या उक्त सेंटर पर निदेशक एवं वैज्ञानिक का पद रिक्त होने के कारण सेंटर का कार्य पूर्णत: बाधित हो रहा है? (घ) उक्त सेंटर द्वारा प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों के रख-रखाव उपयोग एवं समय अंतराल पर हुए परिवर्तन की व्‍याख्‍या उपग्रह से प्राप्त सूचना के आधार पर कब-कब की तथा कब-कब भूमि, जल नदी,वन,फसल,नहरें,शहर सड़क,रेल आदि के नक्शे तैयार किये? यदि कोई अन्य महत्वपूर्ण रिसर्च भी किये हो तो अवगत करायें?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) रिमोट सेन्सिंग एप्लीकेशन सेन्टर द्वारा भूमि उपयोग/आवरण, कृषि एवं मृदा वन, जल संसाधन आदि संसाधनों का डिजिटल मानचित्रण किया जाता है। इस केंद्र द्वारा तैयार किये गये मानचित्रों का मध्यप्रदेश शासन के कई विभागों/संस्थाओं जैसे कृषि वन, जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, आवास एवं पर्यावरण, राजस्व, नर्मदा घाटी विकास विभाग आदि द्वारा अपने विकास कार्यो में उपयोग किया जा रहा है। दिनांक 01 जनवरी 2014 से 31 अक्टूबर 2016 तक अधिकारियों एवं कर्मचारियों के वेतन पर कुल रूपये 13.90 करोड़ की राशि खर्च हुई है। रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर में अधिकांश कार्य वैज्ञानिकों द्वारा ही संपादित किये जाते हैं। (ख) उक्त सेंटर पर कुल 36 वैज्ञानिक कार्यरत हैं। (ग) निदेशक का पद रिक्त है, किन्‍तु सेन्टर का कार्य सुचारू रूप से संचालित है। (घ) केन्द्र द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के रख-रखाव एवं उपयोग हेतु भूमि उपयोग आवरण के उपग्रह चि़त्रों का उपयोग कर विभिन्न समयान्तर पर मानचित्रण किया जाता है। भारतीय अंतरिक्ष उपग्रह चंद्रयान-1 डाटा के आधार पर चंद्रमा की सतह पर विस्‍तृत अध्‍ययन एवं विश्‍लेषण किया गया है।

द्वितीय समयमान वेतनमान का लाभ

[पशुपालन]

11. ( क्र. 122 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या पशुपालन विभाग अन्‍तर्गत डेयरी संवर्ग के शासकीय सेवक जैसे प्रोक्‍योरमेन्‍ट आग्रेनाईजर, शीतकेन्‍द्र प्रबंधक, तकनीकी सहायक, दुग्‍ध विस्‍तार सहायक, सहायक ग्रामीण दुग्‍ध उत्‍पादक संगठक एवं सहायक दुग्‍ध रसायनज्ञ जिनकी समान नियुक्‍ती शर्त, एक ही वरिष्‍ठता सूची, परस्‍पर स्‍थानांतरित पद हैं, जिनकी सेवा अवधि 10, 20 एवं 30 वर्ष पूर्ण हो गई है? उनको प्रथम/द्वितीय एवं तृतीय समयमान वेतनमान की पात्रता है? यदि हाँ, तो शासकीय सेवकों का नाम, पदनाम, शैक्षणिक योग्‍यता का विस्‍तृत विवरण देवें? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में वित्‍त विभाग म.प्र. शासन भोपाल के परिपत्र क्र. एफ 11/1/नियम/चार दिनांक 07.11.2009 एवं दिनांक 13.11.2009 बिन्‍दु क्र. 01 में स्‍पष्‍टीकरण आदेश के परिप्रेक्ष्‍य में डेयरी संवर्ग के सहायक दुग्‍ध रसायनज्ञ पद वाले शासकीय सेवकों जिनकी 10 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण होने पर प्रथम समयमान वेतनमान का लाभ दिया गया है, 20 वर्ष सेवा अवधि पूर्ण करने के उपरान्‍त द्वितीय समयमान वेतनमान का लाभ कब तक दिया जावेगा? (ग) प्रश्नांश (ख) के संदर्भ में प्रश्‍नकर्ता के कार्यालयीन पत्र क्र. 271, दिनांक 10.07.2016 एवं पत्र क्र. 270, दिनांक 10.07.2016 के द्वारा डेयरी संवर्ग के सहायक दुग्‍ध रसायनज्ञ पद वाले शासकीय सेवकों को द्वितीय समयमान वेतनमान का लाभ दिये जाने हेतु विभागीय अधिकारी से अनुरोध किया गया था? प्रश्‍न दिनांक तक द्वितीय समयमान वेतनमान का लाभ नहीं दिया गया तो इसके लिये कौन दोषी है? इनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जावेगी?

पशुपालन मंत्री ( श्री अंतरसिंह आर्य ) : (क) पशुपालन विभाग में डेयरी संवर्ग के शासकीय सेवक जैसे प्रोक्योरमेंट आर्गनाइजर, शीतकेन्द्र प्रबंधक, तकनीकी सहायक, दुग्ध विस्तार सहायक, सहायक ग्रामीण दुग्ध उत्पादक संगठक एवं सहायक दुग्ध रसायनिज्ञ की एक ही वरिष्ठता सूची संधारित है। म.प्र. शासन वित्त विभाग के परिपत्र क्र. एफ 11/1/2008/नियम/चार, दिनांक 07.11.09 के साथ पुस्‍तकालय में रखे परिशि‍ष्ट में पारी प्रबंधक सहायक ग्रामीण दुग्ध उत्पादक संगठक (दुग्ध विकास में स्नातक एवं आई.डी.डी. को समयमान वेतनमान की पात्रता दर्शाई गई है। शेष पदों का उल्लेख नहीं है। (ख) जी हाँ। पुस्‍तकालय में रखे परिशि‍ष्ट में उपरोक्त पदनाम न होने के फलस्वरूप विभाग द्वारा वित्त विभाग से मार्ग दर्शन चाहा गया था। वित्त विभाग से अभि‍मत प्राप्त हो गया है तदनुसार कार्यवाही जारी है। (ग) जी हाँ। प्रश्नांश '' के उत्तर अनुसार कार्यवाही जारी है। शेष प्रश्न ही नहीं उठता।

ईंट भट्टे निर्माण करने वालों को भूमि आवंटन

[राजस्व]

12. ( क्र. 123 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजगढ़ जिला अंतर्गत विधान सभा क्षेत्र सारंगपुर में विगत कई वर्षों से ईंट भट्टा निर्माण करने वाले कितने व्‍यक्तियों को मार्च 2016 से प्रश्‍न दिनांक तक काली सिंध नदी के किनारे से विस्‍थापित किया गया? कितनी-कितनी भूमि उनके आधिपत्‍य में थी? विस्‍थापित किये जाने में उनका कितना-कितना नुकसान हुआ? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार क्‍या नदी किनारे ईंट भट्टा निर्माण करने वाले कुम्‍हारों को नगर में प्रदूषण के नाम से हटाया गया है? उक्‍त ईंट भट्टा निर्माण करने वाले कुम्‍हारों/मजदूरों को शासन स्‍तर से कहाँ-कहाँ ईंट भट्टा निर्माण हेतु अस्‍थाई पट्टे आवंटन किये गये एवं कुल-कितनी भूमि आवंटित की गई? (ग) प्रश्नांश (ख) अनुसार काली सिंध नदी में प्रदूषण को रोकने के कारण कुम्‍हारों को अन्‍यत्र विस्‍थापित किया गया तथा शासन स्‍तर से नदी की स्‍वच्‍छता हेतु नगरपालिका सारंगपुर द्वारा क्‍या कार्य योजना बनाई गई है एवं उक्‍त योजना के परिप्रेक्ष्‍य में विभाग द्वारा क्‍या कदम उठाये जा रहे हैं? (घ) प्रश्नांश (ग) अनुसार सारंगपुर में कुम्‍हारों को शासन स्‍तर से आवंटित भूमि का रकबा बहुत कम होने से क्‍या भविष्‍य में शासन स्‍तर से इनको ईंट भट्टा निर्माण हेतु अन्‍य स्‍थान पर अधिक रकबा की भूमि उपलब्‍ध कराई जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

दमोह जिले में वेयर हाऊस रसीद पर बैंक फाइनेस की सुविधा

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

13. ( क्र. 134 ) श्री लखन पटेल : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या दमोह जिले में वेयर हाऊस रसीद पर बैकों द्वारा ऋण नहीं दिया जाता हैं? जिस कारण कृषकों को बैंक फाईनेंस नहीं मिलता? (ख) बैंक फाईनेंस न मिलने के कारण कृषक अनाज ज्‍यादा समय तक स्‍टोर नहीं कर पाते हैं? जिसमें कृषकों को अनाज का सही बाजार भाव नहीं मिल पाता हैं? (ग) क्‍या दमोह जिले में वेयर हाऊस रसीद पर ऋण व्‍यवस्‍था प्रारंभ कराये जाने की व्‍यवस्‍था करेंगे यदि हाँ, तो कब तक?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) जी नहीं। मध्‍यप्रदेश वेयरहाउसिंग एण्‍ड लॉजिस्टिक्‍स कार्पोरेशन द्वारा कृषकों के भण्‍डारित स्‍कंध के विरूद्ध जारी की गई निगोशिएबल वेयर हाऊस रसीद पर बैंकों द्वारा ऋण दिया जाता है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) जी नहीं। कृषकों द्वारा जो स्‍कंध मध्‍यप्रदेश वेयरहाउसिंग एण्‍ड लॉजिस्टिक्‍स कार्पोरेशन के गोदामों में भण्‍डारित किया जाता है, उन वेयरहाउस रसीद पर बैंकों द्वारा ऋण प्रदान किया जाता है। (ग) मध्‍यप्रदेश वेयरहाउसिंग एण्‍ड लॉजिस्टिक्‍स कार्पोरेशन द्वारा जारी की गई निगोशिएबल वेयरहाउस रसीद के विरूद्ध सभी बैंकों से ऋण प्रदान करने की व्‍यवस्‍था पूर्व से ही लागू होने से शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

प्रदेश के थानों में रखे शस्‍त्रों व वाहनों के डिस्‍पोजल संबंध में

[गृह]

14. ( क्र. 136 ) श्री लखन पटेल : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. के थानों में वर्षों से वाहन व शस्‍त्र रखे हुए हैं जो थानों एवं शस्‍त्रागारों में जगह घेरे हैं? इनका कोई रिकार्ड थानों एवं शस्‍त्रागारों में है? (ख) इन वाहनों व शस्‍त्रों के निराकरण हेतु कोई प्रावधान किया गया है? यदि नहीं, तो जब्‍त शस्‍त्रों व वाहनों के डिस्‍पोजल (निराकरण) हेतु कोई प्रावधान किया जावेगा? यदि हाँ, तो क्‍या प्रक्रिया अपनायी जावेगी? (ग) इनके निराकरण की समय-सीमा बतावें?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जी हाँ। वाहनों एवं शस्त्रों का रिकार्ड संबंधित इकाइयों में रखा जाता है। (ख) जप्तशुदा वाहनों एवं शस्त्रों का निराकरण सक्षम न्यायालयों द्वारा किया जाता है। वाहनों एवं शस्त्रों के निराकरण हेतु दण्ड प्रक्रिया संहिता में प्रावधान निहित है। (ग) यह निरन्तर प्रक्रिया है समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

फर्जी शस्‍त्र लायसेंस का प्रदाय

[गृह]

15. ( क्र. 142 ) श्री पन्‍नालाल शाक्‍य : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या तत्‍कालीन अनुविभागीय अधिकारी श्री वी.डी. द्विवेदी द्वारा 200 फर्जी शस्‍त्र लायसेंस बनाकर अवांछित वर्ग को लाभांवित किया गया? बाद में श्री द्विवेदी द्वारा 200 फर्जी शस्‍त्र लायसेंस के संबंध में न्‍यायालय में अपना पक्ष न रखना और शासकीय अधिवक्‍ता का मौन रहना प्रश्‍न उपस्थित नहीं करता है? यदि हाँ, तो उक्‍त अधिकारी के खिलाफ क्या कार्यवाही कब तक की जावेगी? (ख) माननीय न्‍यायालय के समक्ष उक्‍त (क) में वर्णित अधिकारी द्वारा 30 दिवस की अवधि गुजरने के उपरांत भी 200 फर्जी रायफलों के लायसेंस के संबंध में अपील प्रस्‍तुत नहीं कर पाने का क्‍या कारण है? इस संबंध में शासकीय अधिवक्‍ता का मौन रहना भी प्रश्‍न उपस्थित करता है? उक्‍त अधिकारी के खिलाफ माननीय मंत्री द्वारा क्‍या कार्यवाही की जावेगी कब तक की जावेगी?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जी नहीं, अपितु तत्कालीन आर्म्‍स शाखा लिपिक श्री मुकेश खुल्वे एवं श्री रामबाबू सेन द्वारा वर्ष 2007-08 के मध्य पूर्व से स्वीकृत शस्त्र लायसेंसों पर अनाधिकृत रूप से किसी सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बिना अतिरिक्त शस्त्र वृद्धि, क्षेत्रवृद्धि, कारतूस वृद्धियां किये जाने के कारण कार्यालयीन आदेश क्र. 545/स्था./6-2/2013 दि.23.08.2013 से श्री मुकेश कुमार खुल्वे एवं श्री रामबाबू सेन आर्म्‍स शाखा लिपिक को निलंबित किया गया था। उक्त निलंबन आदेश के विरूद्ध स्थगन प्राप्त करने हेतु श्री खुल्वे द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, खण्डपीठ ग्वालियर में याचिका क्र. 6161/2015 प्रस्तुत की गई थी। याचिका में उत्तर प्रस्तुत करने हेतु श्री बी.डी.द्विवेदी को प्रभारी अधिकारी नियुक्त किया गया था। उक्त याचिका में समय-सीमा में उत्तर प्रस्तुत न किये जाने के कारण श्री खुल्वे को निलंबन आदेश के विरूद्ध दिनांक 07.12.2015 को स्थगन आदेश प्राप्त होने के कारण कार्यालय में कर्तव्य पर उपस्थित कराना पड़ा। श्री द्विवेदी द्वारा उच्च न्यायालय में दिनांक 22.01.2016 को उत्तर प्रस्तुत किया गया। माननीय न्यायालय में विलंब से उत्तर प्रस्तुत करने के लिए श्री द्विवेदी को कार्यालयीन कारण बताओ नोटिस क्र. 67/स्था/6-2/2016, दिनांक 25.01.2016 जारी किया जाकर कार्यवाही प्रचलित है। (ख) उत्तरांश के प्रकाश में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

शासकीय तालाबों को अतिक्रमण मुक्‍त करना

[राजस्व]

16. ( क्र. 166 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सतना विधानसभा क्षेत्रांतर्गत शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में वर्ष 1958 के बंदोबस्‍त के अभिलेखों के आधार पर कितने तालाब हैं? कितने तालाब शासकीय हैं, कितने तालाब निजी हैं, पृथक-पृथक जानकारी दें? इन तालाबों का खसरा नं. एवं रकबा भी दें? (ख) प्रश्नांश (क) में भू-अभिलेख में दर्ज शासकीय तालाबों में किस-किस अतिक्रमणकर्ता द्वारा कब-कब तथा कितने-कितने रकबें में अतिक्रमण किया गया है? (ग) रामस्‍थान ग्राम पंचायत के सेमरहा टोला एवं ग्राम पंचायत मटेहना के शासकीय तालाब में किस-किस अतिक्रमणकर्ता द्वारा कितनी-कितनी आराजी पर अवैध कब्‍जा कर लिया गया है? नामवार, खसरावार एवं रकबावार जानकारी दें। (घ) यदि प्रश्नांश (ख) एवं (ग) सही है तो शासन कब तक इन शासकीय तालाबों को अतिक्रमण मुक्‍त करा लेगा? यदि इनका आवंटन निजी व्‍यक्तियों को कर दिया गया है तो आवंटित करने वाले अधिकारी/कर्मचारी पर शासन क्‍या कार्यवाही करेगा और कब तक?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) शासकीय तालाब 67 एवं 13 निजी तालाब है। खसरा नंबर, रकबा सहित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट पर है। (ख) उपरोक्त में से केवल रामस्थान ग्राम पंचायत के सेमरहा टोला में स्थित तालाब को छोडकर शेष सभी तालाब अतिक्रमण मुक्त है। (ग) प्रश्नाधीन शासकीय तालाब की भूमि पर अतिक्रमण का विवरण निम्नवत है 1. आराजी क्रमांक 1201 रकबा 0.121 हेक्टेयर में सुमन्त लाल पिता कोदूलाल प्रजापति साकिन घुघचिहाई का अतिक्रमण है। 2. आराजी क्रमांक 1201 रकबा 0.121 हेक्टेयर में लल्लू पिता कोदूलाल प्रजापति साकिन घुघचिहाई का अतिक्रमण है। 3. आराजी क्रमांक 1202 रकबा 0.965 हेक्टेयर में जोत जमीन व 20x20 फीट पर मकान बनाकर रामदयाल पिता तिलकधारी प्रसाद ब्रा. का अतिक्रमण है। 4. आराजी क्रमांक 1202 रकबा 20 x 20 फीट (मकान बनाकर) पर ललूआ पिता लोटन प्रजापति साकिन घुघचिहाई का अतिक्रमण है। (घ) उत्तरांश (ग) में वर्णित अतिक्रमणकारियों के विरूद्ध म.प्र.भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत कार्यवाही की जा रही है। किसी निजी व्यक्ति को तालाब भूमि का आवंटन नहीं किया गया हैं। अतः शेष प्रश्न उद्भूत नहीं होता है।

जबलपुर जिले में अपराधों में बढोत्‍तरी

[गृह]

17. ( क्र. 176 ) श्री अंचल सोनकर : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जबलपुर जिले के अंतर्गत 1 जनवरी 2015 से 1 नवम्‍बर 2016 तक की कितनी हत्‍यायें, बलात्‍कार, लूट, चेन स्‍केनिंग, डकैती एवं धारा 307 की घटनायें दर्ज की गई? थानावार बतावें। य‍ह भी बताया जावें कि उक्‍त अवधि में गांजा, अफीम, स्‍मैक, शराब आदि के कितने प्रकरण दर्ज किये गये उन पर क्‍या कार्यवाही हुई? थानावार विवरण देवें। (ख) क्‍या  थाना ओमती जबलपुर के अंतर्गत विगत 2015-16 में बड़ी डकैती हुई थी जिसमें पीड़ित परिवार के सदस्‍यों पर जानलेवा हमला भी हुआ था? यदि हाँ, तो क्‍या डकैतों को पकड़ कर उनसे लूट का माल बरामद कर उन्‍हें सजा दिला दी गई है? यदि हाँ, तो कब यदि नहीं, तो क्‍यों? क्‍या पुलिस डकैतों को पकड़ने में नाकाम हुई है? अथवा पुलिस विभाग द्वारा प्रकरण को बंद कर दिया गया है? (ग) प्रश्नांश (क) में दर्ज प्रकरणों में पुलिस की लापरवाही से अपराधियों को उचित दंड नहीं मिल पाया वह खुले आम घूम रहे हैं? यदि हाँ, तो इसका दोषी कौन-कौन है? उन पर क्‍या कार्यवाही की गई? (घ) प्रश्नांश (क) एवं (ख) यदि हाँ, तो क्‍या शासन अपराधियों के विरूद्ध ठोस कानून बना कर उनके विरूद्ध कठोर कार्यवाही करते हुए दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों को उचित दण्‍ड देते हुए कार्यवाही करेगी? हाँ तो कब तक?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार(ख) जी हाँ। दिनांक 14.05.2016 को फरियादी उत्कर्ष गुप्ता के घर डकैती की रिपोर्ट पर थाना ओमती में अप.क्र. 207/16, धारा 395 भा.द.वि. का पंजीबद्ध किया जाकर जबलपुर क्राइम ब्रांच की टीम बनाकर विवेचना की जा रही है। (ग) जी नहीं। प्रश्नांश के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में घटनाओं की विवेचना कर साक्ष्य के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश किया गया है। सभी विवेचकों द्वारा आरोपियों के विरूद्ध कठौर दण्डात्मक कार्यवाही की गई है। अभी तक लापरवाही नहीं पाये जाने से किसी अधिकारी/कर्मचारी के विरूद्ध कोई दण्डात्मक कार्यवाही नहीं की गई है। (घ) अपराधियों के विरूद्ध वर्तमान में प्रचलित कानून के तहत विधिसम्मत् कार्यवाही की जाती है। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''तीन''

विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव अंतर्गत पुलिस थाने/चौकी के संदर्भ में पद पूर्ति

[गृह]

18. ( क्र. 181 ) डॉ. कैलाश जाटव : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव अंतर्गत पुलिस थाने/चौकी में वर्तमान में कितने कर्मचारी कार्यरत है? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार पुलिस थाने/चौकी में कितना पुलिस बल होना चाहिए उसकी सूची उपलब्ध करावें। (ग) प्रश्नांश (ख) अनुसार पुलिस थाने/चौकी में यदि पुलिस बल कम है तो उसकी पदपूर्ति कब तक कर दी जावेगी समय-सीमा बतावें।

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार(ग) उप निरीक्षक के रिक्‍त पद सीधी भर्ती/पदोन्‍नति से सहायक, उप निरीक्षक एवं प्रधान आरक्षक के रिक्‍त पद रेंज/जोन स्‍तर पर पदोन्‍नति से तथा आरक्षक के रिक्‍त पद सीधी भर्ती से भरे जाते है। उप निरीक्षक/आरक्षक के रिक्‍त पदों को सीधी भर्ती से भरे जाने संबंधी कार्यवाही की जा रही है। वर्तमान में पदोन्‍नति की प्रक्रिया माननीय उच्‍चतम न्‍यायालय में विचाराधीन याचिका के परिप्रेक्ष्‍य में स्‍थगित है। रिक्‍त पदों की पूर्ति की समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''चार''

विधान सभा क्षेत्र गोटेगांव अंतर्गत पीला मौजेक एवं ओलावृष्टि

[राजस्व]

19. ( क्र. 184 ) डॉ. कैलाश जाटव : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव अंतर्गत वर्ष 2015-16 में पीला मौजेक एवं ओलावृष्टि से प्रभावित कितने कृषकों को सूचीबद्ध किया गया? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार वर्तमान में कितने किसानों को उसका मुआवजा भुगतान नहीं किया गया? भुगतान का मापदण्ड क्या था? क्या समस्त किसानों को एक समान मुआवजा दिया गया? (ग) प्रश्नांश (ख) अनुसार यदि नहीं, तो प्रभावित किसानों के खाते में कब तक राशि का भुगतान किया जावेगा?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव के अंतर्गत वर्ष 2015-16 में पीला मौजेक में 72202 एवं ओलावृष्टि में 5833 प्रभावित कृषकों को सूचीबद्ध किया गया है। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार पीली मौजेक के 64 एवं ओलावृष्टि के 07 कृषकों को भुगतान नहीं किया गया। भुगतान का मापदण्ड राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 में वर्णित प्रावधानों के अनुसार किया गया है। 2 हे. से कम तथा 2 हे. से अधिक भूमि धारित करने वाले कृषकों को राजस्व पुस्तक परिपत्र 6-4 में दिये गये निर्देशानुसार राशि स्वीकृत की गई है। (ग) विवादित तथा पाहिया (ग्राम में निवास नहीं करने वाले) कृषकों के खाते बैंक नम्बर प्राप्त न होने के कारण भुगतान नहीं किया जा सका। कृषकों के बैंक खाते नम्बर प्राप्त होते ही खाते में भुगतान कर दिया जावेगा।

प्रदेश में गोपाल पुरस्कार योजना का क्रियान्‍वयन

[पशुपालन]

20. ( क्र. 196 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या गोपाल पुरस्कार प्रतियोगिता में पशुपालक 20 से 25 कि.मी. दूरी से पशुओं को वाहन में लाते हैं? (ख) क्या प्रश्नांश (क) के अधीन इतनी दूरी से पशुओं को लाने पर पशुपालक को स्वयं व्यय वहन करना पड़ता हैं? (ग) क्या ब्लॉक स्तर पर प्रतिभागी 10 पशुपालकों में केवल प्रथम, द्वितीय, तृतीय पुरस्कार ही दिया जाता हैं, बाकी 7 प्रतिभागियों को कुछ प्राप्त नहीं होता हैं? (घ) क्या शासन इन्हें भी सांत्वना स्वरूप पुरस्कार देने हेतु विचार करेगा, जो 20 से 25 कि.मी. दूरी से वाहन द्वारा पशु लाते हैं?

पशुपालन मंत्री ( श्री अंतरसिंह आर्य ) : (क) जी हाँ। (ख) योजनांतर्गत विकासखण्ड स्तर पर प्रतियोगिता कार्यक्रम आयोजन, पशुओं के चारा पानी, परिवहन एवं पशुपालकों की व्यवस्था हेतु राशि रू. 10,000 का प्रावधान है। जिला स्तर पर प्रचार-प्रसार, शिविर कार्यक्रम आयोजन, पशुओं के चारा पानी, परिवहन एवं पशुपालकों की व्यवस्था हेतु राशि रू. 50,000 का प्रावधान है। (ग) जी हाँ। (घ) जिला एवं राज्य स्तर पर सांत्वना पुरस्कार का प्रावधान है। विकासखण्ड स्तर पर सांत्वना पुरस्कार देने का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

जबलपुर जिले के पुलिस विभाग में आरक्षक, सहायक उपनिरीक्षक, उपनिरीक्षक की पूर्ति

[गृह]

21. ( क्र. 197 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या आरक्षक, सहायक उपनिरीक्षक, उपनिरीक्षक की कमी के कारण अपराधों में वृद्धि हुई हैं? (ख) यदि हाँ, तो कमी की पूर्ति कब तक की जावेगी? (ग) जबलपुर जिले के थानों में कितने पद स्वीकृत हैं? कितने रिक्त हैं? थानेवार सूची देवे।

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जी नहीं। (ख) प्रश्‍नांश '''' के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार

परिशिष्ट - ''पाँच

जबलपुर जिले में निर्घारित मापदंडों के अनुसार सी.जी.एच.एस. डिस्पेंसरी स्थापित करना

[श्रम]

22. ( क्र. 205 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या केन्द्र सरकार द्वारा प्रत्येक 10 हजार की आबादी में एक सी.जी.एच.एस. डिस्पेंसरी स्थापित करने का प्रावधान हैं? (ख) यदि हाँ, तो जबलपुर जिले में कितनी सी.जी.एच.एस. डिस्पेंसरी चालू हैं? सूची देवें। (ग) क्या प्रश्नांश (क) के अंतर्गत नई सी.जी.एच.एस. डिस्पेंसरी स्थापित करने हेतु प्रस्ताव हैं? (घ) यदि हाँ, तो कब तक स्था‍पित की जावेगी?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) केन्‍द्र सरकार से संबंधित है। (ख) प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर के प्रकाश में जानकारी निरंक है। (ग) एवं (घ) तदैव।

जनप्रतिनिधियों के पत्रों पर की गई कार्यवाही

[गृह]

23. ( क्र. 212 ) श्री घनश्‍याम पिरोनियाँ : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या वर्ष 2015 एवं 2016 में दतिया जिले के तीनों विधायकों ने पुलिस अधीक्षक दतिया को पत्र लिखे है, यदि हाँ, तो जनवरी 2015 से अक्‍टूबर 2016 तक कौन-कौन से पत्र लिखे उनकी जानकारी सूची सहित दी जाएं? (ख) प्रश्‍नांश (क) के पत्रों पर क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) प्रश्‍न (क) के पत्रों पर की गई कार्यवाही से संबंधित जनप्रतिनिधि को अवगत कराया गया अथवा नहीं? यदि अवगत कराया गया तो उक्‍त पत्रों की छायाप्रति उपलब्‍ध कराई जाए? यदि अवगत नहीं कराया गया तो क्‍यों नहीं कारण बतायें? (घ) पुलिस विभाग दतिया द्वारा जनप्रतिनिधियों के पत्रों पर कार्यवाही न करने और उनके जवाब नहीं देने के लिए विभाग क्‍या कार्यवाही कर रहा है?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जी नहीं। दतिया जिले के दो माननीय विधायकगणों द्वारा पत्र लिखे गये है। पत्रों की सूची पुस्तकालय में रखें परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। (ख) माननीय विधायकगण द्वारा दिये गये पत्रों में वांछित कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (ग) जी हाँ। छायाप्रतियां पुस्तकालय में रखें परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार(घ) उत्तरांश के परिपेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

आई.टी.आई. भाण्‍डेर में मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति

[तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास]

24. ( क्र. 213 ) श्री घनश्‍याम पिरोनियाँ : क्या राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या आई.टी.आई. भाण्‍डेर जो कि वर्ष 2006 से संचालित है और अभी तक मूलभूत सुविधायें  जैसे-छात्रों को ड्यूलडैस्‍क, कुर्सी, टेबिल, वाटरकूलर, कम्‍प्‍यूटर वर्कबैंच आदि उपलब्‍ध नहीं कराई गई है? (ख) क्‍या आई.टी.आई. भाण्‍डेर के भ्रमण के दौरान उपरोक्‍त कमियों के ध्‍यान में आने पर प्रश्‍नकर्ता द्वारा माननीय तकनीकी शिक्षामंत्री को पत्र दिनांक 06.09.2016 लिखकर फर्नीचर आदि उपलब्‍ध कराने हेतु निवेदन किया गया था यदि हाँ, तो उक्‍त पत्र के संबंध में क्‍या कार्यवाही हुई और इसकी सूचना जनप्रतिनिधि को दी गई अथवा नहीं? उपरोक्‍त सुविधायें जिनमें कम्‍प्‍यूटर भी सम्मिलित है, कब तक उपलब्‍ध करा दी जावेगी? (ग) ट्रैनिंग मैन्‍युअल के आधार पर दतिया/भाण्‍डेर आई.टी.आई. में लिपकीय/गैर‍ लिपकीय पद स्‍वीकृत है अथवा नहीं? क्‍या उपरोक्‍त पदों हेतु विधायक भाण्‍डेर ने पत्र लिखकर मांग की गई थी यदि हाँ, तो क्‍या कार्यवाही हुई क्‍या संचालनालय स्‍तर से कृत कार्यवाही की सूचना जनप्रतिनिधि को दी गई? कब तक उपरोक्‍त पद निर्मित हो जावेंगे?

राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा ( श्री दीपक जोशी ) : (क) एवं (ख) आई.टी.आई. भाण्‍डेर में छात्रों के लिये ड्यूल डेस्‍क, कम्‍प्‍यूटर तथा फर्नीचर की पर्याप्‍त उपलब्‍धता हैं। शेष हेतु क्रय आदेश जारी किये गये हैं। (ग) जी नहीं। समयावधि बताना संभव नहीं हैं।

ग्वालियर जिले की डबरा तहसील में राजस्व नामांतरण के प्रकरण

[राजस्व]

25. ( क्र. 230 ) श्रीमती इमरती देवी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि () ग्वालियर जिले की डबरा तहसील में वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में प्रश्न दिनांक तक कितने प्रकरण  नामांतरण एवं बंटवारा के प्राप्त हुए इनमें से कितने नामांतरण एवं बंटवारा स्वीकृत किये गये तथा कितने शेष हैं उन पर कब तक कार्यवाही की जावेगी। तथा शेष हैं तो क्यों। () प्रश्नांश (क) डबरा तहसील में नामान्तरण एवं बंटवारा की कार्यवाही हेतु क्या ग्राम पंचायतों को कोई अधिकार दिये गये हैं? यदि हाँ, तो ग्राम पंचायतों से उपरोक्त वर्ष में कितने प्रकरणों का निराकरण कराया गया है सूची सहित जानकारी देवें तथा निराकरण नहीं कराया गया तो क्यों? (ग) क्या शासन के आदेशों की अवेहलना की गई है इसमें कौन दोषी है उसके खिलाफ कोई कार्यवाही की गई है नहीं तो कब तक की जावेगी।

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

दोषी पर कार्यवाही

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

26. ( क्र. 239 ) श्रीमती शीला त्‍यागी : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या 69 (क्रमांक 2564) , दिनांक 27.07.2016 के (क) के उत्‍तर में उचित मूल्‍य दुकान सोनवर्षा विकासखण्‍ड नईगढ़ी जिला रीवा के विक्रेता द्वारा अवैध रूप से खाद्यान्‍न बिक्री करने में सचिव/विक्रेता को दोषी मानते हुए उनके विरूद्ध कार्यवाही की जा रही है, का उत्‍तर दिया गया है तथा (घ) का उत्‍तर जानकारी एकत्रित की जा रही है, का दिया गया है? (ख) यदि प्रश्नांश (क) हाँ, तो दोषी पर क्या कार्यवाही की गई तथा (घ) की जानकारी एकत्रित कर ली गई की नहीं की गई कार्यवाही की प्रति एवं (घ) की प्राप्‍त जानकारी उपलब्‍ध करावें? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में उक्‍त अवधि का खाद्यान्‍न क्‍या उपभोक्‍ताओं को वितरित कराएंगे? यदि हाँ, तो कब तक यदि नहीं, तो क्‍यों कारण बताएं क्‍या उक्‍त गड़बड़ी में समिति प्रबंधक एवं फूड कन्‍ट्रोलर रीवा दोषी है? यदि हाँ, तो दोषियों के विरूद्ध अपराधिक प्रकरण 3/7 का पंजीबद्ध कराएंगे की नहीं? यदि नहीं, तो क्‍यों? यदि हाँ, तो कब तक? (घ) यदि दोषियों पर अभी तक कार्यवाही नहीं हुई तो इसमें कौन-कौन दोषी हैं? दोषी पर कब क्‍या कार्यवाही करेंगे?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) जी हाँ, अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या 69 (क्रमांक 2564) , दिनांक 27.07.2016 के (क) न होकर (ग) के उत्‍तर में उचित मूल्‍य दुकान सोनवर्षा, विकासखण्‍ड नईगढ़ी, जिला रीवा के प्रकरण में सचिव विक्रेता को दोषी मानते हुए उनके विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी तथा उत्‍तर (घ) में जानकारी एकत्रित की जा रही है का दिया गया है। (ख) उचित मूल्य दुकान सोनवर्षा विकासखण्ड नईगढ़ी के अवैध रूप से खाद्यान्‍न बिक्री करने के प्रकरण में दोषी समिति प्रबंधक एवं विक्रेता के विरूद्ध चोर बाजारी निवारण अधिनियम, 1980 के अंतर्गत दंडित किये जाने तथा पंचायत सचिव के विरूद्ध अनुशासनात्‍मक कार्यवाही किये जाने के लिये कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है। जी हाँ, जानकारी एकत्रित कर ली गई, इस संबंध में श्रीमती गंगादेवी पति नन्हकू पासी, निवासी चौखण्डी को दो माह फरवरी एवं मार्च 2016 का खाद्यान्न 60 किलोग्राम, 2 किलोग्राम शक्कर, 2 किलोग्राम नमक एवं 8 लीटर केरोसीन उपलब्ध कराया जा चुका है। नहन्कू पासी के नाम पर सूखा राहत की पर्ची माह अक्टूबर तक के लिये वैद्य थी, इसके पश्चात् आवेदक को अनुसूचित जाति श्रेणी में समग्र पोर्टल पर सत्यापन पश्चात् दिनांक 25.10.2016 से नवीन पात्रता पर्ची जारी की जाकर 30 किलो ग्राम खाद्यान्‍न सामग्री माह नवम्‍बर से उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यवाही की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' एवं ' अनुसार है। (ग) संबंधित विक्रेता एवं समिति प्रबंधक से वसूली एवं सामग्री वितरण के संबंध में निर्णय वर्तमान में कलेक्‍टर न्‍यायालय, जिला रीवा में विचाराधीन है। जी नहीं, उक्त प्रकरण में खाद्य नियंत्रक, रीवा दोषी नहीं है, फलस्वरूप उनके विरूद्ध कार्यवाही का प्रश्न नहीं है। (घ) वर्तमान में प्रकरण कलेक्‍टर न्‍यायालय, जिला रीवा में विचाराधीन है। न्‍यायालयीन निर्णय अनुसार दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी।

शक्‍कर एवं खाद्यान्‍न के घोटाले की जाँच बाबत्

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

27. ( क्र. 244 ) श्रीमती शीला त्‍यागी : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रीवा जिले के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक शाखा जवा एवं डभौरा के अधीन आने वाले सेवा सहकारी समितियों की उचित मूल्‍य दुकानों में माह जुलाई, अगस्‍त, सितम्‍बर 2016 के शक्‍कर का उठाव नागरिक आपूर्ति से कब-कब कितने-कितने क्विंटल शक्‍कर/गेहूँ/चावल का किन-किन दिनांकों में किया गया है? समितियों को कब-कब प्रदाय किया गया है, की जानकारी उठाव का दिनांक, आवंटन (मात्रा) माहवार समितिवार देवें? (ख) क्‍या कई समितियों में खाद्यान्‍न/शक्‍कर के उठाव, परिवहन का कार्य रवि गुप्‍ता ट्रांसपोर्टर को दिया गया है? क्‍या रवि गुप्‍ता द्वारा सुरेश मिश्रा ट्रांसपोर्टर से परिवहन हेतु संबंध कर रखे गये हैं? उसमें फूड कंट्रोलर रीवा (श्री खान) के भी ट्रक परिवहन कार्य में लगे हुए हैं। क्‍या ट्रांसपोर्टर मिश्रा एवं फूड कंट्रोलर खान के भी नाम रवि गुप्‍ता के साथ पुलिस प्रकरण में सम्मिलित कराएंगे? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) यदि हाँ, तो क्‍या माह जुलाई, अगस्‍त, सितम्‍बर, 2016 के शक्‍कर नागरिक आपूर्ति से माहवार उठाव कर काला बाजारी कर दी गई, शिकायत होने पर तीन माह की उक्‍त शक्‍कर समितियों में दिनांक 20.10.2016 को उपलब्‍ध कराई गई? उसमें कौन-कौन दोषी है? दोषी पर क्‍या कार्यवाही करेंगे? (घ) क्‍या रवि गुप्‍ता ट्रांसपोर्टर का अनुबंध समाप्‍त कर सुरेश मिश्रा ट्रांसपोर्टर को परिवहन का कार्य दिया गया है? यदि हाँ, तो ऐसा क्‍यों? क्‍या दोनों ट्रांसपोर्टरों को ब्‍लैक लिस्‍टेड कर फिर से निविदा बुलाकर नए सिरे से किसी अन्‍य ट्रांसपोर्टर को परिवहन का कार्य देंगे?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं, रीवा जिले में द्वार प्रदाय योजना अन्तर्गत खाद्यान्न/शक्कर के उठाव हेतु परिवहनकर्ता रवि गुप्ता न होकर, परिवहनकर्ता राजेश गुप्ता नियुक्त थे। जी नहीं, राजेश गुप्ता द्वारा परिवहनकर्ता सुरेश मिश्रा से संबंध कर नहीं रखा गया है। जी नहीं, जिला आपूर्ति नियंत्रक, रीवा श्री नूरूलहुदा खान के ट्रक परिवहन कार्य में नहीं लगे हैं। राजेश गुप्ता द्वारा परिवहन व्‍यवस्‍था में अनियमितता किया जाना पाया गया था, अत: अन्‍य व्‍यक्तियों के नाम पुलिस प्रकरण में शामिल किये जाने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं, नागरिक आपूर्ति निगम से माहवार शक्कर का उठाव कर कालाबाजारी नहीं की गई है। जी नहीं, शिकायत होने पर तीन माह की शक्‍कर समितियों को दिनांक 20.10.2016 को उपलब्‍ध नहीं कराई गई, अपितु उचित मूल्य दुकानों में माह जुलाई 2016 में शक्‍कर आवंटन 06 जुलाई 2016 से 29 अक्‍टूबर 2016 तक प्राप्‍त किया गया, जिसका वितरण प्राप्ति दिनांक से एक माह के अंदर किया गया। उचित मूल्य दुकानों में माह अगस्त 2016 एवं माह सितम्बर 2016 की आवंटित शक्कर की उपलब्धता 15 सितम्‍बर 2016 से 29 अक्‍टूबर 2016 तक हुई, जिसका वितरण प्राप्ति दिनांक से एक माह के अंदर किया गया। उपलब्धता के आधार पर समस्त उचित मूल्य दुकानों को आवंटन अनुसार शक्‍कर प्रदाय किया जाकर विभिन्‍न दिनांकों में शक्‍कर का वितरण किया गया। अत: जिले में कोई दोषी न होने से कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) जी हाँ, परिवहनकर्ता राजेश गुप्ता का अनुबंध समाप्‍त किया जाकर परिवहनकर्ता सुरेश मिश्रा को परिवहन का कार्य दिया गया है। परिवहन व्‍यवस्‍था में अनियमितता किये जाने पर नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा परिवहनकर्ता राजेश गुप्ता को ब्‍लैक लिस्टेड किया जाकर परिवहन निविदा की शर्तों के अनुसार द्वितीय अनुबंधित परिवहनकर्ता सुरेश मिश्रा को ब्लॉक जवां के परिवहन का कार्य दिया गया है। अत: द्वितीय अनुबंधित परिवहनकर्ता को ब्‍लैक लिस्‍टेड कर नई निविदा की आवश्‍यकता नहीं है।

दमोह जिला में शासन द्वारा प्रदत्‍त आवंटन की जाँच

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

28. ( क्र. 260 ) श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दमोह जिले में माह जुलाई 2016 से अक्‍टूबर 2016 तक प्रत्‍येक राशन दुकान को मध्‍यप्रदेश सरकार द्वारा कितना-कितना आवंटन प्रदाय किया गया था? जिले की समस्‍त राशन दुकानों में प्रदत्‍त खाद्यान्‍न, तेल आदि की उक्‍त माहों की जानकारी निम्‍न प्रपत्र में उपलब्‍ध करावे (1) राशन दुकान का नाम (2) नेट अनुसार प्रदत्‍त खाद्यान्‍न की मात्रा (3) राशन दुकान को प्रदत्‍त खाद्यान्‍न/आवंटन (ख) दमोह जिले में उक्‍त माहों में शासन द्वारा प्रदत्‍त आवंटन एवं जिला द्वारा प्रदत्‍त आवंटन में काफी अंतर की शिकायतें प्राप्‍त हुई थी जिसकी जाँच आयुक्‍त संभाग सागर में लंबित है? जाँच कराकर दोषियों पर कार्यवाही की समय-सीमा व शेष आवंटन कब तक दुकानों को उपलब्‍ध होगा? (ग) क्‍या जिला दमोह में मशीनों द्वारा खाद्यान्‍न वितरण प्रश्‍न दिनांक तक नहीं कराया जा रहा है? कब तक इस योजना से जनता को लाभ प्रदाय किया जाएगा?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी हाँ। उक्‍त शिकायत के संबंध में वस्‍तुस्थिति यह है कि संचालनालय खाद्य से 17 जून, 2016 के आवंटन के आधार पर मध्‍यप्रदेश स्‍टेट सिविल सप्‍लाईज कार्पोरेशन द्वारा उचित मूल्‍य दुकानों पर राशन सामग्री का भण्‍डारण कराया गया था। दिनांक 22 जून, 2016 को संशोधित आवंटन ऑनलाईन जारी होने के पश्‍चात् दमोह के नगरीय क्षेत्र हटा एवं पटेरा की उचित मूल्‍य दुकानों में अधिक प्रदाय की गई मात्रा का सितम्‍बर, 2016 में समायोजन किया गया। शेष भाग का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। दमोह जिले में माह फरवरी, 2016 से पीओएस मशीन के माध्‍यम से राशन सामग्री का वितरण कराया जा रहा है। शेष भाग का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर किये गये चक्‍काजाम

[गृह]

29. ( क्र. 287 ) श्री कालुसिंह ठाकुर : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राष्‍ट्रीय राजमार्ग को अवरूद्ध करना कानूनन अपराध है या नहीं? यदि हाँ, तो दिनांक 19.9.16 को दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार अनुसार राष्‍ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 03 पर धामनोद नगर के समीप ग्राम दुधी रपट पर हुई सड़क दुर्घटना में स्‍थानीय बाईक सवार व्‍यक्ति की मृत्‍यु हो जाने से नाराज व्‍यक्तियों द्वारा धरमपुरी विधान सभा क्षेत्र के पूर्व विधायक श्री पांचीलाल मेढा के नेतृत्‍व में लगभग दो घण्‍टे तक स्‍थानीय पुलिस की मौजूदगी में राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर चक्‍काजाम किया गया, जिससे राजमार्ग से गुजर रहे हजारों यात्री व सेकड़ों वाहन दो घण्‍टे तक परेशान रहे? पुलिस विभाग द्वारा किन-किन व्‍यक्तियों पर किन-किन धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है व किन-किन के विरूद्ध क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई है? (ख) यदि प्रकरण दर्ज नहीं किया गया तो यह बतावें कि संबंधित थाना प्रभारी व धामनोद के एस.डी.ओ.पी. द्वारा राजमार्ग को दो घण्‍टे तक अवरूद्ध करने की घटना को विभाग के संज्ञान में लाया गया था अथवा नहीं? यदि संज्ञान में लाया गया तो फिर प्रकरण दर्ज नहीं करने का कारण बतावें अथवा अन्य माध्‍यम से विभाग के संज्ञान में आने पर विभाग द्वारा जिम्‍मेदार थाना प्रभारी व एस.डी.ओ.पी. के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई है? यदि कोई कार्यवाही नहीं की गई तो अब कब तक की जावेगी?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जी हाँ। राष्ट्रीय राजमार्ग को अवरूद्ध करना कानूनन अपराध है। दिनांक 18.09.2016 को सड़क दुर्घटना में मृतक कल्याण सिंह पिता नेनुराम जाति मीणा उम्र 50 निवासी धानी की मृत्यु हो जाने से थाना हाजा पर मर्ग क्र. 113/16, धारा 174 जा.फौ. कायम किया जाकर, बाद मर्ग जाँच के अपराध क्रमांक 621/16 धारा 304ए भा.द.वि. का अज्ञात वाहन के चालक के विरूद्ध पंजीबद्ध किया जाकर विवेचनाधीन है। दिनांक 18.09.2016 को कोई चक्काजाम किसी के द्वारा नहीं किया गया था। दुर्घटना होने के कारण राजमार्ग अवरूद्ध रहा था। दिनांक 19.09.2016 को सड़क दुर्घटनाओं को लेकर भूतपूर्व विधायक श्री पांचीलाल मेडा एवं स्थानीय 10-15 लोगों द्वारा सड़क पर खड़े होकर रोड जाम करने का असफल प्रयास किया गया था जिसकी पूर्व सूचना होने के कारण थाना प्रभारी एवं एस.डी.ओ.पी. जो कि मौके पर मौजूद थे उनकी समझाइश देने से चक्का जाम नहीं हो पाया था और इसलिए प्रकरण दर्ज नहीं किया गया था। (ख) अधिकारियों की समझाइश के कारण चक्काजाम नहीं हो पाया था। अतः वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में नहीं लाया गया था और न ही प्रकरण दर्ज किया गया था। एस.डी.ओ.पी. व थाना प्रभारी की त्रुटि न होने से उनके विरूद्ध कोई कार्यवाही प्रस्तावित नहीं है।

पटवारी, आर.आई के वेतन भुगतान के संबंध में

[राजस्व]

30. ( क्र. 302 ) श्रीमती सरस्‍वती सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सिंगरौली जिले के चितरंगी विधान सभा क्षेत्र में पदस्‍थ पटवारी एवं राजस्‍व निरीक्षकों का वेतन माह अप्रैल, 2016 से प्रश्‍न दिनांक तक भुगतान नहीं किया गया जिससे उक्‍त कर्मचारियों के बच्‍चों की पढ़ाई एवं आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गयी है तथा उनका परिवार का पालन पोषण भी प्रभावित हो गया है? (ख) यदि हाँ, तो उक्‍त कर्मचारियों का वेतन कब तक भुगतान कर दिया जायेगा और अब तक वेतन भुगतान न करने के क्‍या कारण थे?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) एवं (ख) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

 

खाद्य सुरक्षा पर्चियों का वितरण

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

31. ( क्र. 303 ) श्रीमती सरस्‍वती सिंह : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) चितरंगी विधान सभा क्षेत्र की किस पंचायत के कितने परिवारों को राशन दुकान से खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाभ प्राप्‍त हो रहा है? प्रश्‍न दिनांक तक की स्थिति से अवगत करावें। (ख) उक्‍त क्षेत्रान्‍तर्गत कितने परिवारों को खाद्य सुरक्षा पर्चियों का वितरण किया गया? कितने परिवारों को राशन कार्ड प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा जारी किये गये है और कितने शेष है? शेष परिवारों को कब-तक उक्‍त पर्चियों का वितरण कर दिया जायेगा? (ग) उक्‍त क्षेत्रान्‍तर्गत कितने परिवारों को समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन के तहत सर्वेक्षित किया गया है वर्तमान में कितने हितग्राही कार्ड/कूपन से वंचित है और इनके कूपन क‍ब-तक में बनेंगे? (घ) उक्‍त क्षेत्र में खाद्यान्‍न सुरक्षा मिशन पर्व के अंतर्गत अ.जा/अ.ज.जा. वर्ग के कितने परिवारों को लाभ दिया जा चुका है? कितने शेष हैं? शेष को कब तक लाभान्वित किया जावेगा?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) चितरंगी विधानसभा क्षेत्र में राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत मुख्‍यमंत्री अन्‍नपूर्णा योजना के तहत ग्राम पंचायतवार एवं शासकीय उचित मूल्‍य दुकानवार राशन सामग्री प्राप्‍त करने वाले परिवारों की संख्‍या की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) विधानसभा क्षेत्र चितरंगी अंतर्गत 74,438 परिवारों को पात्रता पर्ची (ई-राशनकार्ड) जारी की गई है। राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित पात्र परिवारों की श्रेणियों के परिवारों का स्‍थानीय निकाय द्वारा सत्‍यापन उपरांत साफ्टवेयर जनरेटेड़ ऑनलाईन पात्रता पर्ची (ई-राशनकार्ड) जारी की जाती है जिसके आधार पर पी.ओ.एस. मशीन के माध्‍यम से राशन सामग्री का वितरण किया जाता है। राशन सामग्री वितरण हेतु राशनकार्ड जारी करना आवश्‍यक नहीं है तथापि अन्‍त्‍योदय अन्‍न योजना के 11,841 परिवारों एवं बी.पी.एल. योजना के 41,826 परिवारों को कुल 53,667 राशनकार्ड प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा जारी किए गए है। बी.पी.एल. श्रेणी में चयनित/पात्र किसी भी परिवार को राशन कार्ड जारी किया जाना शेष नहीं है। माह सितम्‍बर, 2016 से सत्‍यापित पात्र परिवारों की जनसंख्‍या राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत निर्धारित जनसंख्‍या से अधिक होने तथा भारत सरकार द्वारा खाद्यान्‍न आवंटन की सीमा से अधिक खाद्यान्‍न की आवश्‍यकता होने के कारण माह सितम्‍बर, 2016 से सत्‍यापित नवीन परिवारों को पात्रता पर्ची जारी नहीं की गई है। पात्र परिवार के रूप में सम्मिलित परिवारों के डी-डुप्‍लीकेशन की कार्यवाही प्रचलित है उसके उपरांत अपात्र परिवारों को हटाने पर निर्धारित खाद्यान्‍न आवंटन की सीमा के अंतर्गत ही नवीन सत्‍यापित परिवारों को सम्मिलित किया जा सकेगा। (ग) विधानसभा क्षेत्र चितरंगी के 95,852 परिवार समग्र सामाजिक सुरक्षा मिशन के पोर्टल पर दर्ज है। राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत सम्मिलित 24 श्रेणी के पात्र परिवारों में से माह अगस्‍त, 2016 तक सत्‍यापित समस्‍त पात्र परिवारों की पात्रता पर्ची जारी की जा चुकी है इसके पश्‍चात् सत्‍यापित परिवारों की पात्रता पर्ची जारी न करने का कारण प्रश्‍नांश '' के उत्‍तर अनुसार है। (घ) विधानसभा क्षेत्र चितरंगी में राष्‍ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अंतर्गत अनुसूचित जाति/जनजाति श्रेणी अंतर्गत 8,654 परिवारों को लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली का लाभ किया जा रहा है। इन परिवारों के अतिरिक्‍त अनुसूचित जाति/जनजाति के परिवार अन्‍य पात्रता श्रेणी यथा अन्‍त्‍योदय अन्‍न योजना, बी.पी.एल., मजदूर सुरक्षा आदि के अंतर्गत भी सत्‍यापित किया जाकर योजना का लाभ प्राप्‍त कर रहे है। अनुसूचित जाति/जनजाति के आवेदन करने वाले कोई भी पात्र परिवार माह अगस्‍त, 2016 तक की स्थिति में पात्रता पर्ची से वंचित नहीं है। पात्र परिवार के रूप में सम्मिलित परिवारों के डी-डुप्‍लीकेशन की कार्यवाही प्रचलित है उसके उपरांत अपात्र परिवारों को हटाने पर निर्धारित खाद्यान्‍न आवंटन की सीमा के अंतर्गत ही नवीन सत्‍यापित परिवारों को सम्मिलित किया जा सकेगा।

परिशिष्ट - ''छ: ''

आवासीय पट्टे का बंटन

[राजस्व]

32. ( क्र. 308 ) श्रीमती सरस्‍वती सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) चितरंगी तहसील अन्‍तर्गत कुल कितने राजस्‍व ग्राम है और कुल कितने वन ग्राम है? क्‍या दखल रहित म.प्र.शासन की भूमि पर आबादी बनाकर भूमिहीन व्‍यक्ति जो पुस्‍तैनी से काबिज हैं, उन्‍हें आवासीय पट्टा देने का प्रावधान हैं? (ख) यदि हाँ,तो कर्थुआ, झोखो, भर्रा, कसर, नौढि़या, गोरवी, करैला, चुरकी, चतरी, खिरथ इत्‍यादि कई ग्रामों के आवासीय भूमिहीन व्‍यक्तियों का आवेदन प्राप्‍त होने के बावजूद भी वहां क्‍या आवासीय पट्टा वितरण नहीं कराये गये हैं? यदि नहीं, तो विवरण दें? (ग) प्रश्नांश (क) के तहत प्राप्‍त आवेदन पत्रों के पात्र व्‍यक्तियों का आवासीय पट्टा वितरण करायेंगे? यदि हाँ, तो कब तक  करायेंगे?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों का एक ही स्‍थान पर पदस्‍थी

[गृह]

33. ( क्र. 312 ) श्रीमती नीना विक्रम वर्मा : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रदेश में पुलिस अधिकारियों की पदस्‍थापना एवं स्‍थानांतरण के संबंध में शासन व गृह विभाग द्वारा नीति का निर्धारण किया गया है? (ख) यदि हाँ, तो पुलिस अधिकारियों की रैंकवार संबंधित पद पर एक ही स्‍थान पर अधिकतम पदस्‍थ रहने की किसी समयावधि का निर्धारण किया गया है? यदि हाँ, तो एक ही पद पर, एक ही स्‍थान पर अधिकारी अधिकतम कितनी समयावधि के लिये पदस्‍थ रह सकता है? (ग) इंदौर पुलिस रेंज में प्रश्नांश (ख) के संदर्भ में निर्धारित अधिकतम समयावधि से अधिक समय तक एक ही कार्यस्‍थल पर पदस्‍थ पुलिस अधिकारियों की रैंकवार संख्‍या बतायें तथा निर्धारित समयावधि से अधिक पदस्‍थ अधिकारियों को हटाने हेतु क्‍या कार्यवाही की जा रही है? (घ) नीति में या पदस्‍थापना नियमों में समान पद पर या पदोन्‍न्‍त पद पर उसी क्षेत्र/जिले में दोबारा कुछ अंतराल पश्‍चात् पुलिस अधिकारियों की पदस्‍थापना किए जाने के संबंध में क्‍या निर्देश हैं? क्‍या दोबारा पदस्‍थापित अधिकारियों को अन्‍यत्र स्‍थानांतरण करने की कोई कार्यवाही विभाग करेगा?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा गृह विभाग सहित समस्‍त विभागों के लिये स्‍थानान्‍तरण नीति वर्ष 2015-16 एवं वर्ष 2016-17 निर्धारित की गई हैं। (ख) स्‍थानान्‍तरण नीति वर्ष 2015-16 की कंडिका-8.7 अनुसार अधिकारियों की पदस्‍थापना हेतु सामान्‍यत: तीन वर्ष या उससे अधिक पदस्‍थापना की अवधि पूर्ण कर लेने के कारण स्‍थानान्‍तरण किया जाना प्रावधानित हैं। यह अनिवार्य नहीं है कि तीन वर्ष पूर्ण होने पर स्‍थानान्‍तरण किया ही जाये। पुलिस मुख्‍यालय के परिपत्र दिनांक 30 मार्च, 2015 द्वारा उप निरीक्षक से आरक्षक संवर्ग तक के अधिकारी/कर्मचारी की पदस्‍थापना के संबंध में जारी निर्देश संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार। (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार। उत्‍तरांश (ख) के प्रकाश में शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) स्‍थानान्‍तरण नीति वर्ष 2016-17 की कंडिका-8.25 के अनुसार जिस जिले में अधिकारी पूर्व में पदस्‍थ रह चुके हो वहां उनकी उसी पद पर पुन: पदस्‍थापना सामान्‍यत: नहीं किया जाना प्रावधानित हैं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता हैं।

परिशिष्ट - ''सात''

तिरला ज्ञानपुरा पेयजल योजना

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

34. ( क्र. 315 ) श्रीमती नीना विक्रम वर्मा : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या माननीय मुख्‍यमंत्री की घोषणा के क्रम में तिरला, ज्ञानपुरा पेयजल योजना के प्रस्‍ताव जिला स्‍तर से तैयार कर वरिष्‍ठ कार्यालय को प्रेषित किये गये है? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या वरिष्‍ठ कार्यालय द्वारा योजना की तकनीकी एवं प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी कर दी गई है? (ग) यदि नहीं, तो प्रकरण किस स्‍तर पर स्‍वीकृति हेतु प्रचलित हैं? (घ) क्‍या आगामी ग्रीष्‍मकाल के पूर्व कार्य प्रारंभ हो जावेगा?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जी हाँ। (ख) तकनीकी स्वीकृति प्रदान की गई है। प्रशासकीय स्वीकृति हेतु कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (ग) उत्तरांश () अनुसार। (घ) निश्चित समयावधि नहीं बताई जा सकती।

नल-जल योजना

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

35. ( क्र. 343 ) श्री राजेश सोनकर : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) इंदौर जिले में कितनी ग्राम पंचायतों द्वारा नल-जल योजना अंतर्गत शामिल किये जाने हेतु आवेदन दिये गये? विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी प्रदान करें? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में आवेदन स्‍वीकृति उपरांत कितनी पंचायतों द्वारा राशि जमा कराने के उपरांत कार्य प्रारंभ कराये एवं कितनी पंचायतों में कार्य प्रारंभ नहीं कराये गये? सूची देवें। (ग) प्रश्नांश (ख) के संदर्भ में पंचायत द्वारा राशि जमा किये जाने पर भी कार्य प्रारंभ नहीं कराये जाने का कारण स्‍पष्‍ट करें? क्‍या किन्‍हीं कारणों से उक्‍त योजना को बंद किया गया है?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) 46 ग्राम पंचायतों द्वारा। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) 30 में कार्य प्रारंभ एवं 16 में कार्य प्रारंभ नहीं कराये गये। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) सीमित वित्तीय संसाधनों को दृष्टिगत रखते हुये तथा भारत शासन द्वारा जून, 2015 से नवीन नलजल योजनाओं की स्वीकृति पर प्रतिबंध लगाये जाने के कारण।

हितग्राही योजनाएं

[पशुपालन]

36. ( क्र. 344 ) श्री राजेश सोनकर : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इंदौर जिला अंतर्गत पशुपालन विभाग द्वारा कितने हितग्राहियों को पिछले 03 वर्षों से प्रश्‍न दिनांक तक प्रशिक्षण दिया गया? (ख) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में इनमें से कितने हितग्राही सामान्‍य वर्ग से व कितने आरक्षित वर्ग के लाभांवित हुए है? सूची प्रदान करें। (ग) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में पशुपालन विभाग द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम कब-कब कहाँ-कहाँ पर आयोजित कराये गये? (घ) प्रश्नांश (ग) के संदर्भ में इनमें से कितने हितग्राहियों को प्रशिक्षण उपरांत ऋण आदि व रोजगारोन्‍मुखी कार्यक्रम के माध्‍यम से क्‍या सहयोग प्रदान किया गया?

पशुपालन मंत्री ( श्री अंतरसिंह आर्य ) : (क) गौ-सेवक योजना एवं कृत्रिम गर्भाधान प्रशि‍क्षण योजना (मैत्री) के अंतर्गत कुल 82 हितग्राही। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशि‍ष्ट '' अनुसार। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशि‍ष्ट '' अनुसार। (घ) प्रशि‍क्षण प्राप्त हितग्राहियों में से प्राथमिक प्रशि‍क्षण प्राप्त 38 गौ-सेवकों को स्वरोजगार हेतु पशु उपचार किट तथा रू. 6000.00 प्रति हितग्राही स्टायपंड। कृत्रिम गर्भाधान प्रशि‍क्षण के अंतर्गत रोजगारोन्मुखी कार्यक्रम हेतु विवरण निम्नानुसार है:- वर्ष 2013-14 में 24 निजी कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता हितग्राहियों को कृत्रिम गर्भाधान किट तथा योजनानुसार रू. 14000.00 प्रति हितग्राही। वर्ष 2015-16 में मैत्री योजना के अंतर्गत 10 हितग्राहियों को कृत्रिम गर्भाधान किट तथा योजनानुसार रू. 16000.00 प्रति हितग्राही। मैत्री योजना अंतर्गत प्रशि‍क्षण उपरांत हितग्राहियों को आगामी 03 वर्ष तक सहायता प्रदान की जाती है। जिसके अंतर्गत प्रथम वर्ष रू. 1500 प्रतिमाह, द्वितीय वर्ष रू. 1200 प्रतिमाह तथा तृतीय वर्ष रू. 800 प्रतिमाह दिए जाते है।

 

पेयजल पाईप लाईन की स्‍वीकृति

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

37. ( क्र. 360 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यानसिंह सोलंकी : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) बड़वाहा विधानसभा क्षेत्र में विभाग द्वारा विगत 05 वर्षों में ग्राम पंचायतवार कितनी-कितनी ओव्‍हर हेड टंकियों की स्‍वीकृति दी गई है? सूची उपलब्‍ध कराई जावे? (ख) तहसील, बड़वाहा की ग्राम पंचायतों में प्रश्‍नकर्ता द्वारा पेयजल की समस्‍या के निराकरण के‍ लिये किन-किन ग्रामों में ओव्‍हर हेड टंकियों की स्‍वीकृति के प्रस्‍ताव प्रेषित किये गये हैं एवं किन-किन ग्राम पंचायतों में पेयजल हेतु पाइप लाइन की स्‍वीकृति हेतु प्रस्‍ताव प्रेषित किये गये हैं उसकी सूची दी जावे एवं प्राप्‍त प्रस्‍तावों पर विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? अद्यतन कार्यवाही की जानकारी दी जावें? यदि कोई कार्यवाही नहीं की गई हो तो उसके क्या कारण रहें है? प्राप्‍त प्रस्‍तावों पर कब तक कार्यवाही की जावेगी, इसकी समय-सीमा बताई जावें? (ग) कस्‍बा पंचायत, बड़वाहा में पेयजल हेतु कितनी राशि की पाइप लाइन की स्‍वीकृति हुई है? क्‍या उक्‍त कार्य की निविदा जारी कर दी गई है? यदि हाँ, तो कब और यदि नहीं, तो निविदा कब तक जारी की जावेगी? निविदा जारी करने के पूर्व इस प्राप्‍त आवंटन में कितनी राशि व्‍यय की जा चुकी है और कहाँ-कहाँ की गई? पाइप लाइन की स्‍वीकृति के साथ और क्‍या-क्‍या कार्य कराये जावेंगे? क्‍या उक्‍त पेयजल की पाइप लाइन पूर्ण विकसित कॉलोनी में भी डाली जावेगी जहां कॉलोनी हस्‍तान्‍तरण में पेयजल की पूर्ति आदि पूर्णता का प्रमाण-पत्र कॉलोनाइजर द्वारा दिया गया है? यदि हाँ, तो किस नियम के तहत, स्‍पष्‍ट करें?
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) प्रश्नांकित अवधि में कोई भी ओव्हर हेड टंकी की स्वीकृति नहीं दी गई हैं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ख) जानकारी संलग्न परिशि‍ष्ट अनुसार है। (ग) प्रश्नांकित अवधि में कस्बा पंचायत बड़वाह की स्वीकृत आवर्धन योजना लागत रूपये 38.15 लाख के अंतर्गत राशि रूपये 11.14 लाख की पाइप लाइन भी स्वीकृत हुई थी, जिसकी निविदा दिनांक 15.2.16 को आमंत्रित की गई तथा स्वीकृत कर कार्यादेश जारी किया गया। योजना अंतर्गत स्वीकृत पाईप लाईन के अतिरिक्त नलकूप खनन, मोटर पंप स्थापना, पाईप क्रय एवं विद्युत कनेक्शन आदि पर रूपये 22.73 लाख का व्यय किया गया है। विभाग द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में ही कार्य किया जाता है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। 

परिशिष्ट - ''आठ ''

पट्टे की (अहस्‍तान्‍तरणीय) भूमि का विक्रय

[राजस्व]

38. ( क्र. 361 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यानसिंह सोलंकी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता 1959 में मध्‍यप्रदेश राजपत्र असाधारण दिनांक 21 अगस्‍त, 2015 में द्वितीय संशोधन अध्‍यादेश क्रमांक 5 सन् 2015 में संशोधन हुआ है? यदि हाँ, तो तदनुसार संशोधन की प्रति दी जावे? क्‍या मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता की धारा 165 में उपधारा (7 ख) के स्‍थान पर क्‍या उपधारा स्‍थापित की गई है? (ख) क्‍या मध्‍यप्रदेश राजपत्र असाधारण भोपाल, दिनांक 31.12.2015 से प्रश्नांश (क) के संशोधन को निरस्‍त किया गया है? यदि हाँ, तो तदनुसार निरस्‍त की प्रति उपलब्‍ध कराई जावे? (ग) क्‍या उप पंजीयन कार्यालय, बड़वाहा में दिनांक 15.02.2016 को शासकीय पट्टे की भूमि का विक्रय ई-पंजीकरण संख्‍या एम.पी. 2293320161082459 से किया गया है? यदि हाँ, तो विगत 5 वर्ष में ऐसी कितनी भूमियों का क्रय-विक्रय हुआ है जो अहस्‍तान्‍तरणीय हैं? क्‍या उक्‍त भूमि का नामान्‍तरण भी हो चुका है? यदि हाँ, तो इस प्रकार अहस्‍तान्‍तरणीय भूमि को विक्रय की अनुमति किस अधिकारी द्वारा दी गई है, उसकी जानकारी दी जावे? जबकि प्रश्नांश (ख) के अनुसार शासन द्वारा 31.12.2015 को संशोधन को निरस्‍त कर दिया गया था? क्‍या दोषी अधिकारियों, क्रेता-विक्रेताओं के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज होगा? यदि हाँ, तो कब तक यदि नहीं, तो क्‍यों? कारण सहित संपूर्ण जानकारी दी जावे? उक्‍त भूमि का नामान्‍तरण क्रय-विक्रय कब तक शून्‍य किया जावेगा, समय-सीमा बताई जावे?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) अध्यादेश का उक्त प्रावधान अधिनियमित नहीं होने के कारण दिनांक 31 दिसम्बर 2015 को व्यपगत हो गया है (ग) जी हाँ। बड़वाह क्षेत्र अंतर्गत विगत 5 वर्षों में अहस्तांतरणीय शासकीय पट्टे की भूमियों के कुल 02 प्रकरणों में क्रय-विक्रय होना पाया गया। प्रश्नांश में उल्लेखित विक्रय पंजीयन का नामांतरण नहीं हुआ है। अहस्तांतरणीय भूमि को विक्रय की अनुमति अनुविभागीय अधिकरी,राजस्व बड़वाह श्री मधुवंतराव धुर्वे द्वारा दी गई है। अनुविभागीय अधिकारी बड़वाह को अनुविभागीय अधिकारी के अधिकार म.प्र. शासन द्वारा निरस्त करने का संज्ञान होने पर अहस्तांतरणीय शब्द हटाने की अनुमति के दोनों प्रकरणों में अनुविभागीय अधिकारी बड़वाह द्वारा कलेक्टर खरगोन में अहस्तांतरणीय शब्द हटाने के आदेश के पुर्नविलोकन की अनुमति प्राप्त की जाकर पक्षकारों को नोटिस जारी किये गये, परन्तु मा. राजस्व मंडल म.प्र. ग्वालियर के समक्ष संबंधित पक्षकारों द्वारा पुर्नविलोकन अनुमति आदेश के विरूद्ध अपील प्रस्तुत कर दिनांक 23.09.2016 को तीन माह तक के लिये स्थगत प्राप्त किया गया है। अनुविभागीय अधिकारी बड़वाह द्वारा म.प्र. भू राजस्व संहिता 1959 के प्रावधानों के तहत आदेश पारित किया गया है जिसे न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत निरस्त किया जा सकता है, उक्त भूमि के क्रय विक्रय के संबंध में माननीय राजस्व मंडल ग्वालियर के द्वारा दिये जाने वाले आदेश अनुसार कार्यवाही की जा सकेगी।

आदिवासी बस्ती में खाद्यान्न वितरण

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

39. ( क्र. 378 ) श्री दिव्‍यराज सिंह : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खाद्यान्न वितरण के सम्बंध में विभाग द्वारा क्या मापदण्ड अपनाये जा रहे हैं। (ख) क्या कारण है कि ग्राम पंचायत कोटा के ग्राम धुरकुच आदिवासी बस्ती में लगभग 45 परिवारों को खाद्यान्न वितरण से वंचित रखा जा रहा है? इन परिवारों को खाद्यान्न वितरण कब प्रारंभ कराया जावेगा?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) ग्राम पंचायत कोटा के ग्राम धुरकुच में निवासरत एससी/एसटी के केवल अनुसूचित जनजाति के 10 नवीन परिवार शेष हैं जिन्‍हें जिला आपूर्ति नियंत्रक के लॉग-इन से सत्‍यापित कर दिया गया है। इन परिवारों को जनवरी माह से राशन सामग्री प्रदाय की जाएगी।
परिशिष्ट - ''नौ
''

किसानों की अधिग्रहित की गयी भूमि पर उद्योग धंधे स्‍थापित नहीं होना

[राजस्व]

40. ( क्र. 379 ) श्री दिव्‍यराज सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत डभौरा में विभिन्न कंपनियों के द्वारा किसानों की कृषि योग्य भूमि उद्योग लगाने एवं उन उद्योगों में रोजगार उपलब्ध कराने के नाम पर सस्ते दामों में खरीद ली गयी, किन्तु किसानों के साथ धोखा करते हुये पिछले पाँच वर्षों में किसी भी तरह के उद्योग धंधे स्थापित नहीं किये गये? क्या कारण है कि आज दिनांक तक उक्त संदर्भ में कोई संतोषजनक उत्तर प्राप्त नहीं हो सका? (ख) उक्त प्रकरण में विभाग के द्वारा कंपनियों के विरूद्ध क्या कार्यवाही की जावेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) एवं (ख) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

बदरवास विकासखण्‍ड अंतर्गत रिक्‍त पदों की पूर्ति

[पशुपालन]

41. ( क्र. 409 ) श्री रामसिंह यादव : क्या पशुपालन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या बदरवास विकासखण्‍ड के पशु चिकित्‍सालय बदरवास में ए.व्‍ही.एफ.ओ. व व्‍ही.ए.एस., पशु औषधालय खतौरा में ए.व्‍ही.एफ.ओ., पशु औषधालय इन्‍दार में ए.व्‍ही.एफ.ओ., पशु चिकित्‍सालय बिजरौनी में व्‍ही.ए.एस. एवं ए.व्‍ही.एफ.ओ. तथा पशु औषधालय अटलपुर में ए.व्‍ही.एफ.ओ. के पद रिक्‍त हैं? यदि हाँ, तो उक्‍त पद कब से रिक्‍त हैं? रिक्‍त पद कब तक भरे जाएंगे? (ख) क्‍या उक्‍त पद न भरे जाने के कारण उक्‍त पशु चिकित्‍सालय एवं औषधालयों के अंतर्गत आने वाले पशुपालकों को पशु चिकित्‍सा सेवाएं उपलब्‍ध न होने के कारण उपचार के अभाव में पालतू दुधारू आदि मवेशियों की मृत्‍यु हो जाती है? जिससे पशुपालकों को आर्थिक हानि और मानसिक कष्‍ट होता है? यदि हाँ, तो कहाँ-कहाँ पर कितने मवेशियों की विगत 03 वर्षों में मृत्‍यु हुई? (ग) यदि नहीं, तो प्रश्नांश (क) में वर्णित किन-किन पशु चिकित्‍सालयों एवं औषधालयों के अंतर्गत कौन-कौन से ग्राम आते है एवं इन ग्रामों में पशुओं का उपचार रिक्‍त पद होने के बावजूद कौन-कौन कहाँ-कहाँ पर कैसे करता है? संबंधित के पास पूर्व से कहाँ का कौन सा कार्य है? (घ) प्रदेश में मार्च-2016 की स्थिति में पशु चिकित्‍सा विस्‍तार अधिकारी, पशु चिकित्‍सा सहायक शल्‍यज्ञ, सहायक पशु चिकित्‍सा क्षेत्र अधिकारी के कितने पद रिक्‍त हैं? रिक्‍त पद भरने के लिए शासन ने विगत 02 वर्षों में क्‍या-क्‍या कार्यवाही की है? उक्‍त वर्णित पदों में से बदरवास विकासखण्‍ड के अंतर्गत कुल कितने पद स्‍वीकृत हैं और कितने रिक्‍त हैं? रिक्‍त पद कब तक भरे जाएंगे?

पशुपालन मंत्री ( श्री अंतरसिंह आर्य ) : (क) जी, हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशि‍ष्ट के प्रपत्र '' अनुसार। पदों की पूर्ति हेतु विज्ञापन जारी किया गया है। कार्यवाही प्रचलन में है। निशि‍चत समयावधि‍ बताना संभव नहीं है। (ख) जी नहीं, उक्त रिक्त पशु चिकित्सालय एवं औषधालय का प्रभार अन्य संस्था के अधि‍कारियों को सौंपा गया है उनके द्वारा अतिरिक्त प्रभार के रूप में कार्य किया जाता है, पशुओं की मृत्यु की जानकारी पशु चिकित्सा संस्थाओं में संधारित नहीं की जाती है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशि‍ष्ट के प्रपत्र '' अनुसार। व्ही.ए.एस., ए.व्ही;एफ.ओ. इन ग्रामों में उपचार करते है उनकी जानकारी निम्न है-

1. डॉ. गिर्राज शाक्य, व्ही.ए.एस., पशु चिकित्सालय, करैरा अतिरिक्त कार्य पशु चिकित्सालय, बदरवास/विकास खण्ड बदरवास।
2.
श्री कैलाश सिंह रघुवंशी, ए.व्ही.एफ.ओ., पशु औषधालय, सजाई अतिरिक्त कार्य पशु चिकित्सालय, विजरोनी एवं पशु औषधालय, खतोरा।
3.
श्री एन.के.शर्मा पशु औषधालय मथना अतिरिक्त कार्य पशु औषधालय, इन्दार।
4.
श्री मुकेश कुमार ए.व्ही.एफ.ओ., पशु चिकित्सालय, लुकवासा अतिरिक्त कार्य पशु औषधालय अटलपुर।

उपरोक्त अधि‍कारी/कर्मचारी संपूर्ण विकास खण्ड में पशु चिकित्सालय/पशु औषधालय/ ग्रामों में पशुओं का उपचार करते है। (घ) प्रदेश में पशु चिकित्सा विस्तार अधि‍कारी एवं पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ के 543 पद एवं सहायक पशु चिकित्सा क्षेत्र अधि‍कारी के 2029 पद रिक्त है। विगत दो वर्षों में पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ/पशु चिकित्सा विस्तार अधि‍कारी के कोई पद नहीं भरे गये। ए.व्ही.एफ.ओ. के 415 पद भरे गए है। बदरवास विकास खण्ड के अंतर्गत स्वीकृत एवं रिक्त पदों की जानकारी निम्नानुसार है-

क्र. पदनाम स्वीकृत पद रिक्त पद
1.
व्ही.ए.एस. 02 01
2.
व्ही.ई.ओ. 01 01
3.
ए.व्ही.एफ.ओ. 12 09

पशु चिकित्सा सहायक शल्यज्ञ/पशु चिकित्सा विस्तार अधि‍कारी के पदों की पूर्ति हेतु विज्ञापन जारी किया गया है। कार्यवाही प्रचलन में है। रिक्त पद भरे जाने हेतु निश्चित समयावधि‍ बताना संभव नहीं।

सोयाबीन एवं उड़द की नष्‍ट हुई फसल का बीमा का भुगतान

[राजस्व]

42. ( क्र. 410 ) श्री रामसिंह यादव : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शिवपुरी जिले की तहसील कोलारस एवं बदरवास के अंतर्गत वर्ष 2016 में बोई गई सोयाबीन और उड़द की फसल नष्‍ट हुई है? यदि हाँ, तो किस-किस ग्राम के कितने किसानों की सोयाबीन एवं उड़द की कितनी-कितनी फसल नष्‍ट हुई है? इसमें किसानों को कितनी आर्थिक क्षति हुई है? ग्रामवार बताएं। (ख) क्‍या जिन किसानों की उक्‍त फसलें नष्‍ट हुई है? उन किसानों ने अपनी फसल का बीमा कराया था? यदि हाँ, तो कितने किसानों ने फसल का बीमा कराया था? क्‍या उक्‍त फसल बीमा का भुगतान संबंधित किसानों को कर दिया गया है? यदि नहीं, तो बीमा का भुगतान कब तक किया जावेगा? (ग) जिन किसानों की फसलें नष्‍ट हुई है? उनमें से जिन किसानों का फसल बीमा नहीं है? उन किसानों को शासन अपनी ओर से फसल नुकसान का कितना-कितना अनुदान कब तक प्रदान करेगा? (घ) क्‍या कोलारस एवं बदरवास तहसील के अंतर्गत पटवारियों ने वर्ष 2016 में नष्‍ट हुई सोयाबीन एवं उड़द की फसल का सर्वे नहीं किया है? यदि हाँ, तो किन-किन पटवारियों ने नहीं किया है? दोनों तहसीलों के कौन-कौन से पटवारी, पटवारी हल्‍का मुख्‍यालय पर निवास नहीं करते हैं?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

बंद पड़ी नल-जल योजना

[लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी]

43. ( क्र. 429 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) प्रश्‍नकर्ता के विधान सभा क्षेत्र बागौदा अंतर्गत वर्ष 2013-14, 2014-15, 2015-16 एवं 2016-17 में कितने, किस-किस ग्राम में नल-जल योजना, कितनी लागत की स्‍वीकृति की गई है एवं कहाँ-कहाँ स्‍वीकृत किया जाना प्रस्‍तावित है? (ख) प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित ग्रामों में से कितनी नल-जल योजना सुचारू रूप से संचालित हो रही है, कितनी बंद पड़ी है, बंद का क्‍या कारण है? (ग) प्रश्‍नकर्ता के विधान सभा क्षेत्र बागौदा के ग्राम ग्‍यारसपुर में संचालित नल-जल योजना के विस्‍तार हेतु पंचायत द्वारा आवश्‍यक धन राशि विभाग में जमा करने के उपरांत भी योजना का विस्‍तार नहीं किये जाने का क्‍या कारण है? योजना के विस्‍तार की कार्यवाही कब तक पूर्ण कर ली जावेगी? (घ) प्रश्नांश (ख) में बंद पड़ी नल-जल योजना के सुचारू रूप से संचालन हेतु क्‍या योजना है?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) विधानसभा क्षेत्र बासौदा (बागौदा) में प्रश्नांकित अवधि में 8 योजनाएं स्वीकृत की गई। वर्तमान में कोई भी योजना स्वीकृति हेतु प्रस्तावित नहीं है। शेष जानकारी संलग्न परिशि‍ष्ट अनुसार है। (ख) जानकारी संलग्न परिशि‍ष्ट अनुसार है। (ग) ग्राम ग्यारसपुर की स्वीकृत आवर्धन नल-जल योजना लागत रूपये 49.90 लाख के अंतर्गत 2 नलकूपों का खनन करवाया गया परंतु पर्याप्त जल आवक क्षमता प्राप्त नहीं होने के कारण तथा सीमित वित्तीय संसाधनों को दृष्टिगत रखते हुये वर्तमान में योजना के अन्य कार्यों के क्रियान्वयन हेतु निविदा आमंत्रण की कार्यवाही नहीं की जा रही है। आवंटन उपलब्धता की स्थिति में कार्यों को पूर्ण करवाया जा सकेगा। निश्चित समय-सीमा नहीं बताई जा सकती। (घ) बंद योजनाओं के अंतर्गत लघु सुधार वाली योजनाएं पंचायतों एवं वृहद सुधार वाली योजनाओं को विभाग के माध्यम से चालू करने की योजना है। योजनाओं के लघु सुधार हेतु पंचायतों को राशि जारी करने की कार्यवाही कर दी गई है।

परिशिष्ट - ''दस''

प्रदेश की जेलों की सुरक्षा व्‍यवस्‍था

[जेल]

44. ( *क्र. 440 ) श्री मुकेश नायक : क्या लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) कैलेण्‍डर वर्ष 2015 और 2016 में अक्‍टूबर माह तक राज्‍य की जेलों में कुल कितने कैदियों की मृत्‍यु हुई और कितने कैदी जेल से फरार हुये हैं? जेलवार जानकारी दें। (ख) राज्‍य की जेलों में कुल कितने सजायाफ्ता कैदी और कितने विचाराधीन कैदी हैं तथा जेलों में सभी प्रकार कुल कितने कैदियों को रखने की क्षमता है? (ग) भोपाल के केंद्रीय जेल से दिनांक 30 अक्‍टूबर 2016 दीपावली की रात्रि में जेल के भीतर और बाहर सुरक्षा/निगरानी/पहरे पर कुल कितने सुरक्षा कर्मचारी तैनात थे और सुरक्षा के लिये कुल कित‍ने निगरानी कैमरे (सी.सी.टी.वी.) चालू हालत में थे और क्‍या कारण हैं कि सुरक्षा के बावजूद प्रतिबंधित संगठन सिमी के आठ कैदी जेल से फरार होने में सफल रहे? (घ) राज्‍य की जेलों में सुरक्षा व्‍यवस्‍था में सुधार के लिये क्‍या नये उपाय किये गये हैं और कौन से नये उपाय प्रस्‍तावित हैं?

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) प्रश्‍नांश अवधि में राज्‍य की जेलों के कुल 263 बंदियों की मृत्‍यु हुई और जेलों से कुल 18 बंदी फरार हुए। जेलवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। (ख) प्रदेश की 123 जेलों में 31 अक्‍टूबर, 2016 की स्थिति में कुल 15450 सजायाफ्ता एवं 21113 विचाराधीन बंदी निरूद्ध हैं। इन जेलों की कुल आवास क्षमता 27677 बंदियों को रखने की है। (ग) प्रतिबंधित सिमी संगठन के 08 विचाराधीन बंदियों के जेल से फरार होने की घटना की जाँच हेतु मध्‍यप्रदेश शासन, सामान्‍य प्रशासन विभाग, मंत्रालय की अधिसूचना क्रमांक-एफ 24-7/2016/1-10, दिनांक 07/11/2016 द्वारा एकल सदस्‍यीय न्‍यायिक जाँच आयोग गठित किया गया है, जो तीन माह में अपना प्रतिवेदन राज्‍य सरकार को प्रस्‍तुत करेगा। उक्‍त प्रतिवेदन के आधार पर ही फरारी की घटना का कारण स्‍पष्‍ट हो सकेगा। (घ) मध्‍यप्रदेश शासन, जेल विभाग, मंत्रालय के आदेश क्रमांक-एफ-02 (बी) 24/2016/तीन/जेल, दिनांक 05/11/2016 द्वारा प्रदेश की समस्‍त 11 केन्‍द्रीय जेलों की सुरक्षा व्‍यवस्‍था के ऑडिट हेतु समिति का गठन किया गया है, जो पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। केन्‍द्रीय जेल भोपाल की सुरक्षा ऑडिट केन्‍द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सी.आई.एस.एफ.) भारत सरकार, गृह मंत्रालय से भी कराई जा रही है। जेल मुख्‍यालय के पत्र क्रमांक-16173, दिनांक 04/11/2016 द्वारा अधीक्षक, केन्‍द्रीय जेल भोपाल को सिमी बंदियों की सुरक्षा के संबंध में विशेष निर्देश जारी किये गये हैं, जो पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। उक्‍त फरारी घटना की जाँच करने तथा भविष्‍य में बंदियों के फरार होने की घटना की पुनरावृत्ति न हो इस संबंध में सुझाव प्रस्‍तुत करने हेतु मध्‍यप्रदेश शासन, सामान्‍य प्रशासन विभाग, मंत्रालय की अधिसूचना क्रमांक-एफ-24-7/2016/1-10, दिनांक 07/11/2016 द्वारा एकल सदस्‍यीय न्‍यायिक जाँच आयोग गठित किया गया है, जो तीन माह में जाँच पूर्ण कर अपनी रिपोर्ट राज्‍य सरकार को प्रस्‍तुत करेगा। उक्‍त अधिसूचना पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

कुम्‍हार गड्ढों पर अतिक्रमण

[राजस्व]

45. ( क्र. 490 ) श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या खरगापुर विधान सभा क्षेत्र सहित पूरे टीकमगढ़ जिले के प्रत्‍येक ग्राम में कुम्‍हार गड्ढे थे जिससे कुम्‍हार मिट्टी खोदकर मिट्टी के बर्तन, खिलौने, मूर्तियां आदि बनाते थे और अपने परिवार की आजीविका चलाते थे परंतु उक्‍त कुम्‍हार गड्ढों पर लोगों ने जबरन अतिक्रमण कर लिया है। कुम्‍हार जाति के व्‍यक्तियों को आज मिट्टी नहीं मिल पा रही है और कई कुम्‍हारों के परिवारों की रोजी-रोटी बंद पड़ी है ऐसी स्थिति में क्‍या कुम्‍हार गड्ढों को अतिक्रमण से मुक्‍त करायेगें यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें। (ख) क्‍या जिन स्‍थानों पर अतिक्रमण कर मकानों का निर्माण कर दिया गया था? यहां शासन के भवन बने है। क्‍या उन ग्रामों में खाली पड़ी शासकीय भूमि में कुम्‍हार गड्ढों के नाम आवंटित करेगें? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) क्‍या शासन की खाली पड़ी भूमि कुम्‍हार जाति के लिये कुम्‍हार गड्ढों के नाम आंवटित किये जाने की शासन के पास कोई योजना है? यदि हाँ, तो जानकारी उपलब्‍ध करायें? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें।

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जिले की तहसीलों के समस्त ग्रामों में कुम्हार गड्ढों पर किसी का अतिक्रमण नहीं पाया गया है। (ख) उत्तरांश के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उद्भूत नहीं होता है। (ग) जी नहीं वर्तमान में ऐसी कोई योजना प्रस्तावित नहीं है।

गाडरवारा तहसील के थानों की संख्‍या

[गृह]

46. ( क्र. 508 ) श्री गोविन्‍द सिंह पटेल : क्या गृह मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या नरसिंहपुर जिले की गाडरवाड़ा विधान सभा क्षेत्र में विगत 03 वर्ष में कोई नया थाना स्‍वीकृत हुआ है? यदि हाँ, तो कहाँ, नाम एवं कब तक प्रारंभ किया जायेगा? (ख) विधान सभा क्षेत्र में कितने थाने एवं कितनी चौकियां है? नाम, स्‍थान सहित जानकारी देवें? (ग) क्‍या सभी थाना एवं चौकियों में स्‍वीकृत पदों के हिसाब से सब-इंस्‍पेक्‍टर, प्रधान आरक्षक, आरक्षक कितने पदस्‍थ है और कितने पद रिक्‍त है, रिक्‍त पदों की पूर्ति कब तक करा दी जायेगी?

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर ) : (क) जी नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यह सतत प्रक्रिया है। निश्चित अवधि बताना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''ग्‍यारह ''

अनुविभागीय कार्यालय को स्थायी सब डिवीजन का दर्जा

[राजस्व]

47. ( क्र. 530 ) श्री दिलीप सिंह शेखावत : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नागदा शहर को कब से अनुविभागिय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय का दर्जा मिला हुआ है? क्या इस कार्यालय को स्थाई सब-डिवीजन कार्यालय का दर्जा मिला हुआ है? (ख) यदि नहीं, तो कब तक मिल जावेगा? इसमें इस विभाग का एक भी कर्मचारी पदस्थ क्‍यों नहीं है? (ग) एक अनुभाग अधिकारी (राजस्व) कार्यालय में विभिन्न श्रेणी के कुल कितने पद स्वीकृत रहते है? नागदा शहर को कब तक अनुविभागीय अधिकारी के कार्यालय में विभाग के स्थायी कर्मचारियों की नियुक्ति कर दी जावेगी?

राजस्व मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

सेवा निवृत्ति उम्र में वृद्धि

[श्रम]

48. ( क्र. 531 ) श्री दिलीप सिंह शेखावत : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 28 जून 2014 को म.प्र. शासन द्वारा गजट नोटिफिकेशन हुआ था कि निजी उद्योगो में कार्यरत श्रमीकों कि सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दी गयी है, उसके बाद दिनांक 22 दिसम्बर 2015 को मा. श्रम मंत्री जी की अध्यक्षता में त्रि-पक्षीय बैठक में सहमति भी हो गयी थी कि शासन के नियमों का पालन किया जावेगा एवं रिटायरमेन्ट की आयु 60 वर्ष मानी जावेगी। (ख) क्‍या मा. मंत्री जी म.प्र. शासन के गजट नोटिफिकेशन एवं दिनांक 22 दिसम्बर 2015 के मध्य ग्रेसीम, केमिकल डिवीजन एवं लेक्सेंस उद्योग नागदा के द्वारा लगभग 175 श्रमीकों को 58 वर्ष की आयु में ही सेवा निवृत्‍त कर दिया गया था? क्‍या वर्तमान में उद्योगों द्वारा नियमों को मनमाने तरीकों से तोड़कर अपर स्टॉफ के कर्मचारियों को आज भी 58 वर्ष की उम्र में ही सेवानिवृत्त किया जा रहा है? (ग) प्रश्नांश (ख) उल्‍लेखित 175 श्रमिकों को उल्‍लेखित जिनको 58 वर्ष की आयु में ही सेवानिवृत्त कर दिया गया था, इन श्रमिकों को हित लाभ दिलाने हेतु शासन ने संबंधितों को क्या-क्या निर्देश जारी किये हैं? उन्हे कब तक अपना वाजिब हक मिल जावेगा?

खाद्य मंत्री ( श्री ओम प्रकाश धुर्वे ) : (क) जी हाँ। (दिनांक 28 जून, 2014 को म.प्र. शासन द्वारा गजट नोटिफिकेशन हुआ था कि निजी उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों की सेवानिवृत्ति आयु 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दी गयी है, उसके बाद दिनांक 22 दिसम्बर 2015 को माननीय श्रम मंत्रीजी की अध्यक्षता मंत्रि-पक्षीय बैठक में सहमति भी हो गयी थी कि शासन के नियमों का पालन किया जावेगा एवं रिटायरमेंट की आयु 60 वर्ष मानी जावेगी)। (ख) जी हाँ, म.प्र.शासन के गजट नोटिफिकेशन एवं दिनांक 22 दिसम्बर 2015 के मध्य ग्रेसिम उद्योग नागदा (स्टेपल, ई.डी.डी. एवं केमिकल डिवीजन) के द्वारा 171 श्रमिकों को 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति कर दिया गया था। इन उद्योगों में वर्तमान में श्रमिकों को 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त किया जा रहा है किन्तु अपर स्टॉफ के कर्मचारियों को 58 वर्ष की उम्र में ही सेवानिवृत्ति किया जा रहा है। इन संस्थानों द्वारा यह बताया गया है कि स्टॉफ कर्मचारियों का वेतन रूपये 10000/- प्रतिमाह से अधिक हैं तथा सुपर वाईजर श्रेणी का कार्य करते थे एवं अधीनस्थों की छुट्टी भी मंजूर करते थे। अतः उक्त स्टॉफ कर्मचारियों पर म.प्र. औद्योगिक नियोजन (स्थाई आदेश) अधिनियम, 1961 के प्रावधान प्रभावशील नहीं है। लेक्सेंस उद्योग नागदा द्वारा किसी भी श्रमिक को 58 वर्ष से पूर्व सेवानिवृत्त करने का कोई प्रकरण समक्ष नहीं आया है। (ग) प्रश्नांश (ख) में उल्लेखित श्रमिकों जिनको 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त कर दिया गया है, उन्हें 58 वर्ष की आयु तक की सेवावधि हेतु गेच्युटी एवं छुट्टी वेतन आदि के लाभ दिए गए है। अधिनियम के अनुसार सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष हो जाने पर इस प्रावधान का पालन नियोजकों द्वारा किया जाना चाहिये था। किन्तु ग्रेसिम इण्डस्ट्रीज नागदा द्वारा उक्त वैधानिक प्रावधानों की चुनौती देते हुए रिट पिटीशन क्र. 1417/2015 माननीय उच्च न्यायालय खण्डपीठ इंदौर के समक्ष दायर किया गया तथा उक्त का संदर्भ देते हुए प्रबंधन उक्त प्रावधान का पालन नहीं करते हुए 58 वर्ष की आयु पूर्ण करने पर ही श्रमिकों/स्टॉफ कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति करते हुए ग्रेसिम (एस.एफ.डी., ई.डी.डी. एवं केमिकल) द्वारा अधिसूचना दिनांक 28 जून, 2014 से दिनांक 22.12.2015 तक कुल 171 कर्मचारियों को सेवानिवृत्त किया गया। सेवानिवृत्ति के कारण प्रबंधक के विरूद्ध औद्योगिक नियोजन (स्थाई आज्ञाएं) अधिनियम 1961 के अंतर्गत स्टॉफ/अपर स्टॉफ के रूप में नियोजित कर्मचारियों को छोड़कर 139 श्रमिकों हेतु 9 प्रकरण सक्षम न्यायालय में दायर किये गये हैं, सूची संलग्न परिशिष्ट पर है। औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 के अंतर्गत 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति किये जाने के विरूद्ध कार्यालय में 132 प्रकरण समझौता कार्यवाही में प्राप्त हुये थे। जिनमें 136 श्रमिक सम्मिलित थे। इनमें से 101