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मध्यप्रदेश विधान सभा


प्रश्नोत्तर-सूची
फरवरी-मार्च 2017 सत्र


शुक्रवार, दिनांक 03 मार्च 2017


भाग-1
तारांकित प्रश्नोत्तर


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विद्युतीकरण के अपूर्ण कार्यों को पूर्ण किया जाना

[ऊर्जा]

1. ( *क्र. 3375 ) श्री वेलसिंह भूरिया : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2013 से धार जिले के सरदारपुर विधान सभा क्षेत्र के कितने ग्रामों एवं मजरे/टोलों में विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है एवं कितने ग्रामों एवं मजरे/टोलों में विद्युतीकरण किया जाना शेष है? (ख) वर्ष 2013 से धार जिले के सरदारपुर विधान सभा में कितने विद्युत सब स्‍टेशन स्‍थापित किए गए एवं कितने सब स्‍टेशन बनाये जाना शेष हैं? (ग) क्‍या कई ठेकेदार विद्युतीकण का कार्य अधूरा छोड़कर चले गए हैं? यदि हाँ, तो विभाग उन ठेकेदारों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही करेगा एवं शेष रहे कार्यों को पूर्ण करने के लिए विभाग क्‍या कार्यवाही करेगा? (घ) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के शेष कार्य कब तक पूर्ण कर लिये जायेंगे?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) वर्ष 2013 से पूर्व ही धार जिले के सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र के सभी 193 राजस्व ग्रामों एवं उनके चिन्हित 693 मजरों/टोलों में से 688 मजरों/टोलों के विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण कर लिया गया था। वर्ष 2013 के बाद से उक्तानुसार शेष 5 चिन्हित मजरों/टोलों में से 2 मजरों/टोलों के विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है एवं 3 मजरों/टोलों के विद्युतीकरण का कार्य किया जाना शेष है। (ख) वर्ष 2013 से धार जिले के सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र में एक 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र खुटपला माह अक्‍टूबर, 2015 में स्थापित किया गया है एवं 33/11 के.व्ही. के 4 उपकेन्द्रों की स्थापना हेतु स्वीकृति प्रदान की गई है। उक्त में से 33/11 के.व्ही. के 3 उपकेन्द्रों यथा फुलगावड़ी, गुमानपुरा एवं तिरला का कार्य प्रगति पर है तथा 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र भरावदा का कार्य दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में स्वीकृत है, जिसे टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु दिनांक 21.01.2017 को अवार्ड जारी किया गया है। (ग) जी नहीं, पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के धार वृत्त के अंतर्गत कोई भी ठेकेदार विद्युतीकरण का कार्य अधूरा छोड़कर नहीं गया है। अतः प्रश्‍न नहीं उठता। (घ) उत्तरांश (क) में दर्शाए गए धार जिले के सरदारपुर विधानसभा के शेष 3 मजरों/टोलों के विद्युतीकरण का कार्य एवं उत्तरांश (ख) में दर्शाए गए 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र भरावदा का कार्य दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना में स्वीकृत है तथा उक्त कार्य सहित धार जिले हेतु स्वीकृत योजना का कार्य टर्न-की आधार पर कराए जाने के लिए दिनांक 21.01.2017 को अवार्ड जारी किया गया है। ठेकेदार एजेंसी से किए गए अनुबंध अनुसार उक्त कार्यों सहित योजना का कार्य, अवार्ड दिनांक से 2 वर्ष की अवधि में पूर्ण किया जाना है। उत्तरांश (ख) में उल्‍लेखित शेष 33/11 के.व्ही. के 3 उपकेन्द्रों में से फुलगावड़ी एवं तिरला उपकेन्द्र का कार्य मई, 2017 तक तथा गुमानपुरा उपकेन्द्र का कार्य जून, 2017 तक पूर्ण किया जाना संभावित है। 

गोवारी जाति के व्‍यक्तियों को अनु. जनजाति के प्रमाण पत्र का प्रदाय

[सामान्य प्रशासन]

2. ( *क्र. 1719 ) श्री के.डी. देशमुख : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सामान्‍य प्रशासन विभाग के परिपत्र दिनांक 11 जुलाई 2005 द्वारा गोवारी जाति के व्‍यक्तियों को जनजाति का प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश प्रदेश के समस्‍त कलेक्‍टर्स को जारी किये गये हैं? (ख) यदि हाँ, तो बालाघाट जिले में तथा सिवनी जिले में प्रश्‍न दिनांक तक कि‍न-कि‍न गोवारी व्‍यक्तियों को अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र दिया गया है? उनके पता सहित विवरण दिया जावे। (ग) क्‍या म.प्र. शासन सामान्‍य प्रशासन विभाग, मंत्रालय के निर्देश क्र. एफ 7-7/2007/ आ.प्र./एक भोपाल, दिनांक 21/06/2016 अपर सचिव, सामान्‍य प्रशासन के आदेश का पालन नहीं हो रहा है? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) क्‍या सामान्‍य प्रशासन गोवारी जाति के लोगों को जनजाति का प्रमाण पत्र प्रदान करने के समस्‍त कलेक्‍टरों को स्‍पष्‍ट निर्देश देगा? यदि हाँ, तो कब तक?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। सामान्‍य प्रशासन विभाग के परिपत्र क्रमांक एफ 7-13/2004/आ.प्र./एक, दिनांक 11 जुलाई, 2005 द्वारा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्‍य पिछड़ा वर्ग के व्‍यक्तियों को जाति प्रमाण पत्र जारी किये जाने की प्रक्रिया संबंधी निर्देश जारी किये गए हैं। (ख) बालाघाट तथा सिवनी जिले में प्रश्‍न दिनांक तक गोवारी जाति के किसी भी व्‍यक्ति को अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। (ग) प्रश्‍न में सामान्‍य प्रशासन विभाग के जिस निर्देश का हवाला दिया गया है वह निर्देश दिनांक 21.06.2016 को नहीं बल्कि 17.06.2016 को जारी हुए हैं। इन निर्देशों का पालन न होने की कोई सूचना नहीं है। (घ) स्‍पष्‍ट निर्देश पूर्व से ही हैं। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। 

विद्युत् ग्रि‍ड की स्‍वीकृति

[ऊर्जा]

3. ( *क्र. 1690 ) श्री कैलाश चावला : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मनासा विधानसभा क्षेत्र में गत 5 वर्षों में कितने विद्युत ग्रिड की स्‍वीकृति प्रदान की गई है। ग्रिड का नाम, स्‍वीकृति की दिनांक, कार्य कब तक पूर्ण होना था, की दिनांक बतावें। (ख) जिन ठेकेदारों ने ग्रिड का कार्य समयावधि में पूर्ण नहीं किया उनके तथा फर्म होने पर भागीदारों के नाम बतावें? (ग) ऐसे ठेकेदारों के विरूद्ध जिन्‍होंने समयावधि में कार्य नहीं किया, उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) मनासा विधानसभा क्षेत्र में विगत 5 वर्षों में 4 नवीन 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्रों की स्‍थापना हेतु स्‍वीकृति प्रदान की गई है। उक्‍त स्‍वीकृत नवीन 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र के नामस्‍वीकृति दिनांक एवं कार्य पूर्णता की नियत दिनांक की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) मनासा विधानसभा क्षेत्र में स्‍वीकृत नवीन 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्रों के कार्य जिन ठेकेदार एजेंसियों द्वारा निविदा अनुबंध की शर्तों के अनुसार समय-सीमा में पूर्ण नहीं किये हैं, उनके नाम सहित जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) उत्‍तरांश (ख) में उल्‍लेखित ठेकेदार एजेंसियों द्वारा निविदा अनुबंध की शर्त अनुसार निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण नहीं करने के कारण उनके विरूद्ध निविदा अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्यवाही की गई है, जिसके तहत मेसर्स भारत इलेक्ट्रिकल कॉन्‍ट्रेक्‍टर्स, एंड मेनुफेक्‍चरर्स प्रा.लि., सांगली एवं मेसर्स श्रीराम स्विचगियर्स प्रा.लि. रतलाम के बिलों से लिक्विडेटेड डैमेज के रूप में पेनाल्‍टी स्‍वरूप क्रमश: रू.2.09 करोड़ एवं रू. 0.38 करोड़ की राशि काटी जा चुकी है।

परिशिष्ट - ''एक''

जनवरी 2005 के बाद नियुक्‍त कर्मचारियों को पेंशन की पात्रता

[वित्त]

4. ( *क्र. 1708 ) श्री राजेन्द्र फूलचं‍द वर्मा : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जनवरी 2005 के बाद नियुक्‍त कर्मचारियों को जी.पी.एफ. एवं पेंशन की पात्रता नहीं है? क्‍या जनवरी 2005 से नियुक्‍त कर्मचारियों का जी.पी.एफ. के बदले सी.पी.एफ. काटा जाता है? (ख) यदि सी.पी.एफ. काटा जा रहा है तो कर्मचारियों को सेवानिवृत्‍त होने पर क्‍या एक मुश्‍त राशि दी जाएगी या पेंशन के रूप में फि‍क्‍स पेंशन दी जाएगी? (ग) क्‍या कर्मचारी सी.पी.एफ. में जमा राशि सेवानिवृत्ति के पूर्व निकाल सकता है या नहीं? यदि हाँ, तो किस आधार पर तथा किस प्रक्रिया के माध्‍यम से?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। जनवरी, 2005 के पश्‍चात् नियुक्‍त कर्मचारियों का परिभाषित पेंशन अंशदान काटा जाता है। (ख) सेवानिवृत्ति पर अभिदाता की कुल जमा राशि की 40 प्रतिशत राशि को एन्‍यूटी मासिक पेंशन के भुगतान के रूप में (Annuity Purchase) एवं शेष 60 प्रतिशत राशि अभिदाता को एकमुश्‍त भुगतान की जाएगी। (ग) जी नहीं।

जबलपुर संभाग में अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरण

[ऊर्जा]

5. ( *क्र. 3630 ) श्री कमलेश शाह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दिनांक 01.01.2004 से प्रश्‍न दिनांक तक म.प्र. विद्युत मंडल में कितनी अनुकंपा नियुक्तियां दी गईं हैं, उनमें से कितने प्रकरण हार्ट अटैक व दुर्घटना से हुई मृत्‍यु के थे, की जानकारी वर्षवार जबलपुर संभाग के संदर्भ में देवें। (ख) जबलपुर संभाग में अनुकंपा नियुक्ति के कितने प्रकरण लंबित हैं? जिलेवार बतावें। (ग) जबलपुर संभाग में हार्ट अटैक से हुई मृत्‍यु के मामलों में संब‍ंधितों के परिजनों को कब तक अनुकंपा नियुक्ति दी जावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जबलपुर संभाग के अंतर्गत म.प्र. राज्‍य विद्युत मण्‍डल की उत्‍तरवर्ती कंपनियों द्वारा प्रश्‍नाधीन अवधि में दी गई अनुकंपा नियुक्तियों की संख्‍या एवं उनमें से प्रश्‍नाधीन उल्‍लेखित कारणों से हुई मृत्‍यु के प्रकरणों में दी गई अनुकंपा नियुक्तियों की वर्षवार एवं कंपनीवार संख्‍या संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) म.प्र. राज्‍य विद्युत मण्‍डल की उत्‍तरवर्ती कंपनियों के क्षेत्रांतर्गत जबलपुर संभाग में अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों की जिलेवार संख्‍या संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के अंतर्गत जबलपुर संभाग में हार्ट अटैक से हुई मृत्‍यु के लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों में अनुकंपा नियुक्ति के चिन्‍हित पदों पर वांछित अर्हता 3 वर्ष में पूर्ण करने का अभिवचन दिया गया है। अभिवचन अनुसार अर्हता पूर्ण करने पर नीति के प्रावधान अंतर्गत अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जायेगी। म.प्र. पावर जनरेटिंग कंपनी लि‍मिटेड में जबलपुर संभाग से संबंधित कर्मचारियों की हार्ट अटैक से हुई मृत्‍यु का एक मामला लंबित है। प्रकरण में म.प्र. पावर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड की संशोधित अनुकंपा नियुक्ति नीति 2013 के प्रावधानानुसार आवेदक द्वारा चयनित विकल्‍प के आधार पर उन्‍हें तृतीय श्रेणी के पद हेतु वांछित न्‍यूनतम शैक्षणिक अर्हता प्राप्‍त करने हेतु तीन वर्षों का समय प्रदान किया गया है। शैक्षणिक अर्हता अर्जित कर कंपनी को सूचित करने के उपरांत ही उन्‍हें अनुकंपा नियुक्ति दी जाना संभव हो सकेगी। म.प्र. पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के अंतर्गत जबलपुर संभाग में हार्ट अटैक से हुई मृत्‍यु के तीन मामलों में संबंधितों के परिजनों को चिन्हित पदों की अनुपलब्‍धता एवं चिन्हित पद के अनुरूप योग्‍यताधारी आवेदकों की अनुपलब्‍धता के चलते नियुक्ति दे पाना वर्तमान में संभव नहीं हो रहा है। अत: उक्‍त तीनों कंपनियों में वर्तमान में प्रश्‍नाधीन लंबित प्रकरणों में अनुकंपा नियुक्ति हेतु समय-सीमा बता पाना संभव नहीं है। म.प्र. पावर मैनेजमेन्‍ट कंपनी लिमिटेड में हार्ट अटैक से मृत्‍यु का कोई प्रकरण लंबित नहीं है। 

परिशिष्ट - ''दो''

मुख्‍यमंत्री सोलर पंप योजना का क्रियान्‍वयन

[नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा]

6. ( *क्र. 70 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुख्‍यमंत्री सोलर पंप योजनांतर्गत अब तक हुई कार्यवाही/प्रगति का ब्‍यौरा क्‍या है? (ख) उपरोक्‍त योजनांतर्गत किन क्षेत्रों में किसानों को सोलर पंप वितरित किये जायेंगे? क्‍या जिलेवार क्षेत्रों को चिन्हित किया गया है? यदि हाँ, तो ब्‍यौरा क्‍या है? (ग) मुख्‍यमंत्री सोलर पंप योजना के क्रियान्‍वयन पर कितनी राशि व्‍यय की जायेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) ''मुख्‍यमंत्री सोलर पम्‍प योजना'' के तहत कृषि हेतु सोलर पम्‍प वितरण की योजना तैयार की गई है। सोलर पम्‍पों की दरों के निर्धा‍रण के लिये निविदा कर ली गई है। (ख) इस योजना को प्रदेश के उन दूर-दराज के क्षेत्रों में क्रियान्वित किया जाना प्रस्‍तावित है, जहाँ ग्राम/टोले/वन क्षेत्र या स्‍थल वर्तमान में अविद्युतीकृत हैं और जहाँ अगले 2-3 वर्ष तक परंपरागत विद्युत पहुँचाने की संभावना नहीं है या ऐसे विद्युतीकृत ग्राम/टोले जिसमें प्रश्‍नाधीन स्‍थल विद्युत वितरण कम्‍पनियों की विद्युत लाइन से कम से कम 300 मीटर दूर स्थित हो, या नदी अथवा बांध के समीप ऐसे स्‍थान जहाँ पानी की पर्याप्‍त उपलब्‍धता हो एवं फसलों के चयन के कारण जहाँ वाटर पम्पिंग की आवश्‍यकता अधिक रहती हो। यह योजना राज्‍य के उन जिलों में भी क्रियान्वित की जाना प्रस्‍तावित है, जहाँ विद्युत वितरण कम्‍पनियों की वाणिज्यिक हानि काफी अधिक है। वर्तमान में जिलेवार क्षेत्रों को चिन्हित नहीं किया गया है। (ग) मुख्‍यमंत्री सोलर पम्‍प योजना के तहत् 3 एच.पी. तक के सोलर पम्‍प पर कुल (राज्‍यांश + केन्‍द्रांश) 90 प्रतिशत का अनुदान व्‍यय देय होगा तथा 3 एच.पी. से 5 एच.पी. तक के सौर पम्‍पों पर 85 प्रतिशत का अनुदान व्‍यय देय होगा।

पुरातत्‍व महत्‍व के स्‍थलों का पर्यटन स्‍थल के रूप में विकास

[संस्कृति]

7. ( *क्र. 1770 ) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार : क्या राज्‍यमंत्री, संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुरैना जिले में पुरातत्‍व एवं ऐतिहासिक महत्‍व के कौन-कौन से स्‍थल किन-किन स्‍थानों पर स्थित हैं, स्‍थानों के नाम, स्‍थल का प्रकार सहित पूर्ण जानकारी दी जावे। (ख) क्‍या उक्‍त ऐतिहासिक तथा पुरातत्‍व महत्‍व के स्‍थलों को पर्यटन स्‍थल के रूप में विकसित किया जा सकता है? यदि हाँ, तो शासन द्वारा इस दिशा में क्‍या पहल की है? आवागमन के रास्‍ते, सौंदर्यीकरण सहित पूर्ण जानकारी दी जावे। (ग) क्‍या उक्‍त स्‍थलों में से अधिकांश रख-रखाव के अभाव में जीर्ण-शीर्ण अवस्‍था में जा पहुंचे हैं? यदि हाँ, तो इसके स्‍वरूप को विकसित एवं व्‍यवस्थित रखने हेतु शासन द्वारा वर्ष 2015, 2016 में कितनी राशि आवंटित की? (घ) मुरैना जिले को पर्यटन के नक्‍शे पर उभारने हेतु क्‍या शासन द्वारा कोई कार्य योजना बनाई गई है? यदि हाँ, तो क्‍या-क्‍या कार्य प्रस्‍तावित हैं?

राज्‍यमंत्री, संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) मुरैना जिले के पुरातत्‍व एवं ऐतिहासिक महत्‍व के स्‍थलों की पूर्ण जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) वर्तमान में कोई योजना प्रस्‍तावित नहीं है। (ग) इन स्‍मारकों का समय-समय पर अधिकारियों द्वारा निरीक्षण होता रहता है, उसी तरह से उसका रख-रखाव किया जाता है, परिवर्तित समय में मौसम के प्रभाव से कुछ स्‍मारक क्षतिग्रस्‍त हैं। उनका विभाग द्वारा समय-समय पर अनुरक्षण कार्य कराया जाता है। वर्ष 2015-16 के लिये सबलगढ़ का किला, सबलगढ़ हेतु राशि रूपये 99.00 लाख एवं हुसैनपुरा की गढ़ी एवं किला, हुसैनपुरा हेतु राशि रूपये 8.00 लाख आवंटित है। (घ) वर्तमान में कोई योजना प्रस्‍तावित नहीं है।

परिशिष्ट - ''तीन''

पन्‍ना विधान सभा क्षेत्रांतर्गत बिजली आपूर्ति

[ऊर्जा]

8. ( *क्र. 3113 ) श्री मुकेश नायक : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला पन्‍ना के विधानसभा क्षेत्र पवई के विद्युत केन्‍द्र पवई अंतर्गत ग्राम बड़खेड़ा में कितनी अवधि से बिजली आपूर्ति बन्‍द है और क्‍या कारण हैं कि अब तक बिजली आपूर्ति शुरू नहीं की जा सकी है तथा कब तक बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी? (ख) लगभग 2000 की जनसंख्‍या वाले बड़खेड़ा ग्राम में बिजली के कितने उपभोक्‍ता हैं और उनमें से ऐसे कितने उपभोक्‍ता हैं जिन पर बिजली शुल्‍क बकाया है? (ग) विधानसभा क्षेत्र पवई जिला पन्‍ना अंतर्गत वर्ष 2011 से दिसम्‍बर 2016 तक कुल कितने अस्‍थाई दो एच.पी. एवं तीन एच.पी. टि.सी. एवं स्‍थाई विद्युत कनेक्‍शन किये गये हैं? वर्षवार जानकारी उपलब्‍ध करावें। (घ) उपरोक्‍त अवधि में कितने अस्‍थाई एवं स्‍थाई कनेक्‍शन प्रदाय किये गये हैं? संख्‍या वितरण केन्‍द्रवार बतायें। क्‍या इन विद्युत कनेक्‍शनों में से कुछ मामलों में विद्युत चोरी की शिकायतें भी मिली हैं? यदि हाँ, तो शिकायतों की संख्‍या और उन पर की गई कार्यवाही की जानकारी देवें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जिला पन्‍ना के विधानसभा क्षेत्र पवई के अन्‍तर्गत ग्राम बड़खेड़ा में दिनांक 17 अप्रैल 2016 से बाढ़ और अतिवृष्टि के कारण विद्युत लाइन क्षतिग्रस्‍त होने से बिजली आपूर्ति बंद है। उक्‍त कार्य हेतु प्राक्‍कलन तैयार कर सुधार कार्य प्रारम्‍भ किया गया था, किंतु कार्य के दौरान ट्रांसफार्मर की स्थिति के संबंध में विवाद के कारण गांव के लोगों द्वारा व्‍यवधान उत्‍पन्‍न किये जाने से कार्य पूर्ण नहीं हो सका है एवं बिजली आपूर्ति शुरू नहीं की जा सकी है। इस संबंध में वितरण कंपनी के संबंधित अधिकारी द्वारा थाना प्रभारी को सहयोग हेतु पत्र लिखा गया है। व्‍यवधान खत्‍म होने पर कार्य पूर्ण कर बिजली आपूर्ति सुचारू रूप से चालू की जा सकेगी। (ख) ग्राम बड़खेड़ा में 74 उपभोक्‍ता हैं जिनमें से 71 उपभोक्‍ताओं पर विद्युत बिलों की राशि बकाया है। (ग) पवई विधान सभा क्षेत्रांतर्गत प्रश्‍नाधीन अवधि में प्रदाय किये गये 2 एच.पी. एवं 3 एच.पी. के अस्‍थायी एवं स्‍थायी विद्युत कनेक्‍शनों का वित्‍तीय वर्षवार विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) पवई विधानसभा क्षेत्रांतर्गत आने वाले 4 वितरण केन्‍द्रों रैपुरा, शाहनगर,पवई एवं सिमरिया में प्रश्‍नाधीन अवधि में क्रमश: 3508, 2906, 3672 एवं 6806 इस प्रकार कुल 16892 अस्‍थाई एवं क्रमश: 2684, 5524, 5973 एवं 6925, इस प्रकार कुल 21106 स्‍थाई कनेक्‍शन प्रदाय किये गये हैं। उपरोक्‍त कनेक्‍शनों में विद्युत चोरी की शिकायतें नहीं मिली हैं, अत: प्रश्‍न नहीं उठता।

परिशिष्ट - ''चार''

जाँच प्रतिवेदन की अनुशंसाओं पर कार्यवाही

[सामान्य प्रशासन]

9. ( *क्र. 1240 ) सुश्री हिना लिखीराम कावरे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा जीरो टॉलरेंस की मंशा के अनुरूप भारतीय प्रशासनिक सेवा, राज्‍य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों तथा लोकायुक्‍त के द्वारा दिए गए जाँच प्रतिवेदन जो विभिन्‍न विभागों में लंबित पड़े हैं, ऐसे जाँच प्रतिवेदन की अनुशंसाओं पर कार्यवाही न करने के लिए क्‍या शासन तथा विभाग प्रमुखों पर कार्यवाही की जाएगी। (ख) प्रधानमंत्री भारत सरकार द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर चल रहे भ्रष्‍टाचार के मामलों की जाँच 90 दिन में पूरी करने संबंधी निर्देश का पालन क्‍या म.प्र. में भी किया जाएगा? (ग) जाँच प्रतिवेदन में की गयी अनुशंसा पर एक निश्चित समय-सीमा में कार्यवाही हो, इसके लिए सामान्‍य प्रशासन विभाग क्‍या कोई गाइड लाइन तैयार करेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

विधानसभा क्षेत्र नागदा-खाचरोद में स्वीकृत कार्य

[ऊर्जा]

10. ( *क्र. 1233 ) श्री दिलीप सिंह शेखावत : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र नागदा-खाचरोद के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में विभाग अंतर्गत विगत तीन वर्षों में विभिन्न योजनाओं में कितने कार्य स्वीकृत हुए हैं? स्वीकृत कार्यों में कितने कार्य पूर्ण हो चुके हैं एवं कितने कार्य अपूर्ण एवं अप्रारम्भ हैं? अपूर्ण एवं अप्रारम्भ रहने का कारण बतावें? (ख) यदि ठेकेदार द्वारा अनुबंध अवधि में कार्य पूर्ण नहीं किया तो उसके विरूद्ध क्या कार्यवाही की गयी? पूर्ण एवं अपूर्ण कार्यों की जानकारी, कार्य का नाम, स्वीकृत राशि सहित ग्रामवार एवं वार्डवार उपलब्ध करावें

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) विधानसभा क्षेत्र नागदा-खाचरोद के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इन्‍दौर अंतर्गत विगत 3 वर्षों में विभिन्‍न योजनाओं के तहत कुल 1460 कार्य स्‍वीकृत हुए हैं। उक्‍त स्‍वीकृत 1460 कार्यों में से 1354 कार्य पूर्ण हो चुके हैं, 106 कार्य अपूर्ण हैं एवं क्षेत्र में ऐसा कोई भी कार्य नहीं है जो स्‍वीकृत होकर प्रारंभ ही नहीं हुआ हो। विधानसभा क्षेत्र नागदा-खाचरोद के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में कार्य अपूर्ण रहने के मुख्‍य कारण राईट ऑफ वे की समस्‍या, ग्रामीणों द्वारा लाइन निर्माण के दौरान ट्रांसफार्मर स्‍थापना स्‍थल पर विवाद होने के कारण कार्य में व्‍यवधान उत्‍पन्‍न करना, निर्माण कार्य करने वाली एजेंसियों के पास कुशल श्रमिकों का पर्याप्‍त संख्‍या में उपलब्‍ध नहीं होना एवं समय से निर्माण सामग्री उपलब्‍ध नहीं होना आदि हैं। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में विगत 3 वर्षों में स्‍वीकृत/पूर्ण/अपूर्ण/अप्रारंभ कार्यों की योजनावार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र एवं अवधि में जिन ठेकेदार एजेंसियों द्वारा निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण नहीं किया गया है, उनके विरूद्ध अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्यवाही करते हुए, उनके द्वारा प्रस्‍तुत बिलों से लिक्विडेटेड डैमेज के रूप में पेनल्‍टी स्‍वरूप रू. 37.26 लाख की राशि काटी गई है, जिसका ठेकेदार एजेंसीवार विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। प्रश्‍नाधीन पूर्ण एवं अपूर्ण कार्यों के नाम एवं स्‍वीकृत राशि सहित, ग्रामवार/वार्डवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के क्रमश: प्रपत्र '' एवं '' अनुसार है। 

विकासखण्‍ड कुसमी में कार्यालय भवन का निर्माण

[महिला एवं बाल विकास]

11. ( *क्र. 2069 ) श्री कुंवर सिंह टेकाम : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या सीधी जिले के अंतर्गत विकासखण्‍ड कुसमी में महिला एवं बाल विकास विभाग का कार्यालय भवन क्षतिग्रस्‍त है? (ख) क्‍या प्रश्नांश (क) के संदर्भ में कार्यालय भवन हेतु नवीन भवन बनाने के लिये शासन स्‍तर पर कोई प्रस्‍ताव लंबित हैं? यदि हाँ, तो कब तक स्‍वीकृति प्रदान कर दी जाएगी? यदि नहीं, तो भवन निर्माण के लिये शासन स्‍तर पर क्‍या कार्यवाही की जाएगी? (ग) सीधी/सिंगरौली जिले के अंतर्गत विकासखण्‍ड कुसमी, मझौली एवं देवसर में कितने आंगनवाड़ी केन्‍द्र संचालित हैं? सूची उपलब्‍ध करायें। कितने आंगनवाड़ी केन्‍द्र भवन विहीन हैं? भवन विहीन आंगनवाड़ी केन्‍द्रों के लिये भवन कब तक बना लिये जावेंगे

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी नहीं। सीधी जिले के अंतर्गत विकासखण्‍ड कुसमी में परियोजना कार्यालय स्थानीय पंचायत भवन में संचालित है। (ख) जी नहीं। वर्तमान में विभाग के कार्यालय भवन निर्माण की स्वीकृति का कोई प्रावधान नहीं है। अतः शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) सीधी एवं सिंगरौली जिले के विकासखण्‍ड कुसमी, मझौली एवं देवसर में कुल 1000 आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित हैं। सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। विकासखण्‍ड कुसमी, मझौली एवं देवसर में कुल संचालित 1000 आंगनवाड़ी केन्द्रों में से 185 आंगनवाड़ी केन्द्र भवनविहीन (किराये पर संचालित) हैं। इनमें से विकासखण्‍ड देवसर में 49 भवन निर्माणाधीन हैं। आंगनवाड़ी भवनों का निर्माण कार्य वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करता है। अतः समय-सीमा दिया जाना संभव नहीं है।

दुधी सिंचाई परियोजना का कार्य प्रारंभ किया जाना

[नर्मदा घाटी विकास]

12. ( *क्र. 2392 ) श्री ठाकुरदास नागवंशी : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रश्न‍कर्ता द्वारा पत्र क्रमांक 751/आर पिपरिया दिनांक 29/08/2016 द्वारा कार्यपालन यंत्री रानी अवंती बाई, लोधी नगर, नहर संभाग नरसिंहपुर को दुधी सिंचाई परियोजना बनखेड़ी जिला होशंगाबाद के संबंध में पत्र प्रेषित किया गया, जिसकी प्रतिलिपि‍ सदस्य अभियांत्रिकी नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण भोपाल को प्रेषित की गई, उक्त पत्र में चाही गई जानकारी प्रेषित न करने का क्या कारण है? (ख) क्या सामान्य प्रशासन विभाग के आदेशानुसार माननीय विधायकों द्वारा चाही गई जानकारी अनिवार्य रूप से 30 दिवस की समय-सीमा में प्रदान करने के आदेश हैं? यदि हाँ, तो आदेश का पालन न करने के लिये कौन उत्‍तरदायी हैं? (ग) क्या‍ परियोजना के क्रियान्वयन हेतु सर्वे कार्य कराया गया ततपश्चात् दुधी सिंचाई परियोजना के विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन की डी.पी.आर. हेतु दिसम्‍बर 2014 में सर्वेक्षण कार्य हेतु 03 माह का समय प्रदान किया गया था तथा 01 वर्ष के अन्दर डी.पी.आर. तैयार कर प्रस्तुत किये जाने का लक्ष्य था? यदि हाँ, तो डी.पी.आर. तैयार कर कब तक उक्त कार्य की निविदायें जारी कर कार्य प्रांरभ हेतु टेंडर आहूत किये जावेगें? (घ) वर्तमान में यह प्रोजेक्ट किस स्थिति में है?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) कार्यपालन यंत्री, रानी अवंती बाई लोधी सागर नहर संभाग नरसिंहपुर के पत्र क्रमांक 1486 A /तकनीकी दिनांक 18/11/2016 द्वारा उत्‍तर प्रेषित किया जा चुका है। (ख) जी हाँ। माननीय सदस्‍य का पत्र सीधे कार्यपालन यंत्री को प्राप्‍त नहीं होने के कारण नियत समय-सीमा में उत्‍तर नहीं दिया जा सका। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) एवं (घ) शेष सर्वेक्षण कार्य जून 2016 में पूर्ण किया जाकर डी.पी.आर. विभागीय तौर पर तैयार की जा रही है। डी.पी.आर. स्‍वीकृत होने के उपरांत निविदाएँ जारी कर टेण्‍डर आहूत किये जायेंगे।

सहायक ग्रेड-3 के वेतनमान में विसंगति

[सामान्य प्रशासन]

13. ( *क्र. 3304 ) इन्जी. प्रदीप लारिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मध्‍यप्रदेश में शासन अंतर्गत विभिन्‍न शासकीय विभागों/मंत्रालय में सहायक ग्रेड-3 के पद पर नियुक्ति हेतु भर्ती नियम/वेतनमान अलग-अलग हैं? (ख) यदि नहीं, तो सामान्‍य प्रशासन विभाग और विधि एवं विधायी कार्य विभाग में कार्यरत सहायक ग्रेड-3 को म.प्र. शासन वित्‍त विभाग द्वारा वेतनमान 9300-34800+3600 (द्वितीय उच्‍चतर वेतनमान) एवं 9300-34800+4200 (तृतीय उच्‍चतर वेतनमान) संबंधी आदेश जारी किये गये हैं, जबकि अन्‍य विभागों को आदेश जारी नहीं किये गये? (ग) क्‍या प्रश्नांश (ख) में वर्णित दर्शाये गये आदेशों का पालन सभी विभागों में भी कराया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं (ख) दोनों विभागों में कार्यरत सहायक ग्रेड-3 को द्वितीय एवं तृतीय समयमान वेतनमान राज्‍य शासन के नी‍तिगत निर्णय के आधार पर दिये गये हैं। (ग) जी नहीं, शेषांश प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

लोकायुक्‍त मे दर्ज प्रकरणों में कार्यवाही

[सामान्य प्रशासन]

14. ( *क्र. 3601 ) श्री हर्ष यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) लोकायुक्‍त द्वारा वर्ष 2013-14 से 2015-16 तक सागर संभाग में आय से अधिक संपत्ति के मामलों में कितने छापे मारे गये? रिश्‍वत लेने के कितने ट्रेप किये गये? जिला, विभाग, पद, शासकीय सेवक नाम सहित बतायें। (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित कितने मामलों में कोर्ट में चालान प्रस्‍तुत किया गया? कितने मामलों में चालान किस कारण से प्रस्‍तुत नहीं किया गया? जिला, विभाग, पद, शासकीय सेवक के नाम सहित बतायें। कितने प्रकरणों में खात्‍मा लगाया गया है? (ग) वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में रिश्‍वत में ट्रेप एवं आय से अधिक संपत्ति के छापे वाले प्रकरणों में सागर संभाग में कौन-कौन शासकीय सेवक, अपने स्‍थान पर यथावत पदस्‍थ हैं तथा उनका स्‍थान परिवर्तन नहीं किया गया, किस नियम से वह उसी स्‍थान पर पदस्‍थ हैं?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

शहडोल जिलांतर्गत कुपोषि‍त बच्‍चे

[महिला एवं बाल विकास]

15. ( *क्र. 2082 ) श्रीमती प्रमिला सिंह : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) कुपोषण दूर करने के लिए राज्‍य शासन क्‍या प्रयास कर रहा है? इस संबंध में शासन की योजनाओं व निर्देशों से अवगत करावें (ख) क्‍या जिला शहडोल अंतर्गत कुपोषण की गंभीर समस्‍या है जिसके बारे में जिम्‍मेदार अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों व समाचार पत्रों के माध्‍यम से समय-समय पर अवगत कराया जाता है? फिर भी समस्‍या यथावत क्‍यों है? (ग) विगत 5 वर्ष में जिले में पाये गये कुपोषित बच्‍चों व शासन के प्रयास से कुपोषण मुक्‍त हुए बच्‍चों की जानकारी दें? (घ) क्‍या इस संवेदनशील मुद्दे पर लापरवाही बरती जा रही है? यदि हाँ, तो विभाग के लापरवाह अधिकारियों के विरूद्ध कोई कार्यवाही भी की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक, नहीं तो क्‍यों?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) आंगनवाड़ी केन्द्रों में 5 वर्ष तक के बच्चों का वजन लिया जाकर उनके पोषण स्तर का निर्धारण किया जाता है। कुपोषण की रोकथाम हेतु आई.सी.डी.एस. योजना का क्रियान्वयन, अटल बिहारी बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इनके अंतर्गत अतिकम वजन वाले बच्चों को थर्डमील का प्रदाय, चिन्हित ग्रामों में स्नेह शिविरों का आयोजन किया जाता है। अतिकम वजन वाले बच्चों में से चिन्हित बच्चों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित पोषण पुनर्वास केन्द्रों में संदर्भित किया जाता है। अतिकम वजन वाले बच्चों के पोषण की देखभाल जनसमुदाय, जनप्रतिनिधियों एवं प्रबुद्ध नागरिकों द्वारा जिम्मेदारी लिये जाने हेतु स्नेह सरोकार कार्यक्रम का क्रियान्वयन किया जा रहा है। (ख) कुपोषण के संबंध में प्राप्त प्रकरणों/शिकायतों के संबंध में समय-समय पर कार्यवाही की जाती है। विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन के माध्यम से कुपोषण को कम करने के निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं, जिसके परिणाम शनैः शनैः परिलक्षित होना अपेक्षित हैं। कुपोषण हेतु कई कारक जिम्मेदार होते हैं यथा अपर्याप्त भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं की अनुपलब्धता/पहुंच, आर्थिक संरचना, संसाधन की कमी, अनुचित आहार-व्यवहार, बीमारियां, परिवार में सदस्यों की संख्या, रोजगार की कमी, सामाजिक कुरीतियां, शिक्षा का अभाव आदि। गंभीर कुपोषित बच्चों की रोग निरोधक क्षमता कम होने से अन्य बीमारियों का उन पर तुलनात्मक रूप से ज्यादा प्रभाव पड़ता है। जनसामान्य द्वारा पोषण विविधता का उपयोग न करना, स्वच्छता एवं व्यवहार परिवर्तन में कम रूचि जैसे अन्य कारक भी कुपोषण की समस्या बने रहने के प्रमुख कारण हैं। (ग) शहडोल जिले में विगत 5 वर्षों में कम वजन एवं अतिकम वजन के कुल 7290 बच्चे पाये गए। अटल बाल मिशन अंतर्गत सुपोषण अभियान के माध्यम से 379 स्नेह शिविर आयोजित कर अतिकम वजन वाले 3977 बच्चों के पोषण स्तर में सुधार हुआ। पोषण पुनर्वास केन्द्रों में 1142 बच्चों को पोषण प्रबंधन हेतु भर्ती कराकर फॉलोअप द्वारा पोषण स्तर में सुधार किया गया। (घ) जी नहीं। शेष का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

प्रशासनिक अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही

[सामान्य प्रशासन]

16. ( *क्र. 3417 ) श्रीमती पारूल साहू केशरी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जैसीनगर विकासखण्‍ड के ओंरिया ग्राम की विधवा महिला किसान के ऊपर एस.डी.एम. के द्वारा किये गये अभद्र व्‍यवहार, आवेदन फेंकना एवं जेल में बंद कर देने की घटना के संबंध में प्रश्‍नकर्ता के द्वारा मुख्‍य सचिव म.प्र. शासन को दिनांक 24.12.2016 को शिकायत की गयी थी? (ख) क्‍या प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में न्‍याय की प्रतीक्षा में संघर्षशील विधवा महिला किसान की जघन्‍य हत्‍या का कारण बने प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के विरूद्ध शासन क्‍या कार्यवाही करेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) दिनांक 19/12/2016 को प्राप्‍त रामकिशन अहिरवार की रिपोर्ट पर जमीन के विवाद पर से एक राय होकर गाली गलौच कर रॉड से मारपीट कर महिला किसान शारदा दांगी की हत्‍या कर देने पर आरोपी दरयाब सिंह ठाकुर (जेठ) एवं निशा सिंह (जेठानी) के विरूद्ध थाना जैसीनगर जिला सागर में अप. क्र. 307/16 धारा 294, 302, 34 भादवि का पंजीबद्ध किया गया तथा आरोपियों की क्रमश: दिनांक 26/12/16 एवं 01/01/17 को गिरफ्तारी कर माननीय न्‍यायालय पेश किया गया एवं विवेचना पूर्ण होने पर चालान क्रमांक 19/17 तैयार कर दिनांक 06/02/2017 को माननीय न्‍यायालय के समक्ष पेश किया गया। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। 

फीडर विभक्तिकरण योजना के कार्य

[ऊर्जा]

17. ( *क्र. 2817 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या भिण्‍ड जिले में फीडर विभक्तिकरण योजनान्‍तर्गत कार्य किये जा रहे हैं? (ख) भिण्‍ड जिले में फीडर विभक्तिकरण योजनान्‍तर्गत कितने फीडरों पर कार्य करवाया गया है एवं कितने फीडरों का कार्य शेष है, शेष कार्य कब तक करवा दिया जायेगा? (ग) भिण्‍ड जिले की तहसील मेहगांव, गोरमी, रौन के अन्‍तर्गत कौन-कौन से फीडरों पर फीडर विभक्तिकरण योजनान्‍तर्गत कार्य किया गया है? जानकारी दें क्‍या उक्‍त कार्य के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित है? यदि हाँ, तो क्‍या?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ। (ख) भिण्‍ड जिले में फीडर विभक्तिकरण योजना के अंतर्गत 11 के.व्‍ही. के 151 फीडरों में से 57 फीडरों के विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा 94 फीडरों के विभक्तिकरण का कार्य शेष है, जिसे फरवरी 2018 तक पूर्ण किया जाना है। (ग) भिण्‍ड जिले की तहसील मेहगांव, गोरमी तथा रौन के अंतर्गत विभक्‍त किये गये 11 के.व्‍ही. फीडरों की सूची संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। उक्‍त कार्य सहित भिण्‍ड जिले के लिये तैयार की गई फीडर विभक्तिकरण योजना के कार्य हेतु ठेकेदार एजेंसी मेसर्स एम.डी.पी.प्रा.लि., ग्‍वालियर को दिनांक 17.08.2016 को अवार्ड जारी किया गया है। ठेकेदार एजेंसी से किये गये अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्य पूर्णता अवधि अवार्ड दिनांक से 18 माह निर्धारित है।

परिशिष्ट - ''पाँच''

बंद/खराब विद्युत मीटरों को बदला जाना

[ऊर्जा]

18. ( *क्र. 2810 ) श्री अशोक रोहाणी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पूर्व क्षेत्र विद्युत कंपनी जबलपुर के तहत शहरी क्षेत्र जबलपुर व ग्रामीण क्षेत्रों में कितने बिजली उपभोक्‍ता हैं? इनमें से कितने उपभोक्‍ताओं के घरों में मीटर नहीं लगे हैं? कितने मीटर बंद या खराब हैं? कितने उपभोक्‍ताओं की बिजली काटी गई है? कितने उपभोक्‍ताओं के बंद/खराब मीटर बदले गये हैं? वर्ष 2016-17 जनवरी 2016 से दिसम्‍बर 2016 तक की माहवार जानकारी दें। (ख) प्रश्नांश (क) में उपभोक्‍ताओं से बिजली उपयोग की औसत बिलिंग से राशि वसूल करने का क्‍या प्रावधान है तथा इसके लिए क्‍या प्रक्रिया निर्धारित है वर्तमान में लाइन लॉस की क्‍या स्थिति है? लाइन लॉस को घटाने हेतु क्‍या उपाय किये हैं? (ग) जबलपुर शहरी क्षेत्रांतर्गत कितने बिजली उपभोक्‍ताओं के घरों में मीटर नहीं लगे हैं? कितने उपभोक्‍ताओं के मीटर बदले गये हैं? मीटर बंद खराब होने व मीटर को बदलने से संबंधित कितनी शिकायतें मिलीं, कितनी शिकायतों का निराकरण किया गया? 1 जनवरी 2016 से दिसम्‍बर 2016 तक की माहवार जानकारी दें। (घ) प्रश्नांश (ग) में कितने उपभोक्ताओं से औसत बिलिंग के नाम पर कितनी राशि की माहवार वसूली की गई? अनाप-शनाप बिजली बिल भेजने से संबंधित कितनी शिकायतें मिलीं? इनमें से कितनी शिकायतों का निराकरण किया गया?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) माह दिसम्‍बर, 2016 की स्थिति में पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर के तहत् जबलपुर (शहर) वृत्‍त में कुल 300791 एवं जबलपुर (संचालन/संधारण) वृत्‍त में कुल 240095 विद्युत उपभोक्‍ता हैं। इनमें से 947 जबलपुर (शहर) वृत्‍त क्षेत्र के एवं 22517 जबलपुर (संचालन/संधारण) वृत्‍त क्षेत्र के उपभोक्‍ताओं के घरों में मीटर नहीं लगे हैं। दिसम्‍बर, 2016 की स्थिति में जबलपुर (शहर) वृत्‍त क्षेत्र के 14224 एवं जबलपुर (संचालन/संधारण) वृत्‍त क्षेत्र के 61007 उपभोक्‍ताओं के मीटर बंद/खराब स्थिति में हैं। जनवरी 2016 से दिसम्‍बर 2016 की अवधि में जबलपुर (शहर) वृत्‍त क्षेत्र के 95530 एवं जबलपुर (संचालन/संधारण) वृत्‍त क्षेत्र के 21339 उपभोक्ताओं की बिजली विद्युत बिल की बकाया राशि होने के कारण नियमानुसार काटी गई है। उक्‍त अवधि में जबलपुर (शहर) वृत्‍त क्षेत्र के 27194 एवं जबलपुर (संचालन/संधारण) वृत्‍त क्षेत्र के 9930 उपभोक्‍ताओं के बंद/खराब मीटर बदले गये हैं। जनवरी, 2016 से दिसम्‍बर, 2016 तक की प्रश्‍नाधीन माहवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) मीटर के बंद/खराब रहने के दौरान उपभोक्ता को म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता 2013 की कंडिका क्रमांक 8.35 में निहित प्रावधानानुसार खपत का आंकलन कर आंकलित खपत के अनुसार विद्युत बिल जारी किये जाते हैं। वर्तमान वित्‍तीय वर्ष 2016-17 के माह दिसम्बर 2016 तक की स्थिति में जबलपुर जिले का औसत लाइनलॉस 21.51 प्रतिशत है। लाइन लॉस को घटाने हेतु वितरण कम्पनी द्वारा दैनिक सुधार/रख-रखाव कार्य के अलावा निम्न कार्य वृहद योजनाओं के तहत टर्न-की आधार पर किये जा रहे हैं :- (1) अधिक भार वाले विद्युत ट्राँसफार्मरों की क्षमता वृद्धि करना, अतिरिक्त ट्राँसफार्मर लगाया जाना। (2) विद्युत लाईनों के तारों की क्षमता वृद्धि का कार्य। (3) ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि एवं गैर-कृषि उपभोक्‍ताओं के लिये 11 के.व्‍ही. फीडर विभक्तिकरण का कार्य। (4) अधिक हानि वाले क्षेत्र चयनित कर निम्न दाब लाईनों में नंगे तारों के स्थान पर केबिल डालने का कार्य। (5) बंद एवं खराब मीटरों को बदलना। (6) विद्युत चोरी रोकने हेतु सघन चेकिंग। (7) अधिक भार वाले फीडरों पर अतिरिक्त फीडर निर्माण कर भार वितरित किया जाना। (ग) जबलपुर (शहर) वृत्त क्षेत्रान्तर्गत 947 उपभोक्ताओं के घरों में मीटर नहीं लगे हैं। प्रश्‍नाधीन अवधि जनवरी 2016 से दिसम्बर 2016 तक 27194 मीटर बदले गये हैं। उक्‍त अवधि में मीटर बंद/खराब होने व मीटर को बदलने से संबंधित 6346 शिकायतें प्राप्त हुईं हैं। उक्‍त सभी शिकायतों का निराकरण किया गया है। प्राप्त शिकायतों एवं निराकरण का माहवार विवरण संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (घ) प्रश्‍नाधीन अवधि जनवरी 2016 से दिसम्बर 2016 तक की अवधि में जबलपुर (शहर) वृत्त क्षेत्रान्तर्गत औसत बिलिंग के विरूद्ध रू. 849.21 लाख की राशि वसूल की गई है, जिसका माहवार विवरण संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित बिजली बिल संबंधी 3954 शिकायतें प्राप्त हुईं तथा सभी शिकायतों का निराकरण किया गया।

परिशिष्ट - ''छ:''

श्‍योपुर जिलांतर्गत कुपोषित व्‍यक्तियों/बच्‍चों का सर्वेक्षण

[महिला एवं बाल विकास]

19. ( *क्र. 439 ) श्री बाबूलाल गौर : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) श्‍योपुर जिले में वर्ष 2015 एवं 2016 में कुपोषण से किस-किस माह में कितनी-कितनी मौतें हुई हैं? (ख) क्‍या शासन द्वारा श्‍योपुर जिले में कुपोषित व्‍यक्तियों/बच्‍चों एवं महिलाओं का सर्वेक्षण करवाया गया है? कुपोषितों की पृथक-पृथक संख्‍या बतायी जाये। (ग) शासन द्वारा कुपोषण से हो रही मौतों को रोकने के लिए क्‍या-क्‍या प्रयास किये जा रहे हैं?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) स्‍वास्‍थ्‍य विभाग से प्राप्‍त जानकारी अनुसार श्‍योपुर जिले में 20152016 में कुपोषण से मृत्‍यु की जानकारी निरंक है। (ख) आंगनवाड़ी केन्‍द्र में प्रतिमाह 5 वर्ष तक के आयु के बच्‍चों का वजन लिया जाकर उनके पोषण स्‍तर का निर्धारण किया जाता है। विभाग द्वारा 01.11.2016 से 20.01.2017 तक विशेष वजन अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान की अवधि 28.02.2017 तक बढ़ायी गई है। दिसम्‍बर 2016 की स्थिति में जिले में 5 वर्ष से कम आयु के 20,259 बच्‍चे मध्‍यम श्रेणी एवं 5004 बच्‍चे अतिकम वजन की श्रेणी में दर्ज किये गये हैं। विभाग द्वारा महिलाओं की पोषण स्थिति का निर्धारण नहीं किया जाता है। (ग) बच्‍चों के पोषण स्‍तर में सुधार हेतु बच्‍चों, गर्भवती/धात्री माताओं एवं किशोरी बालिकाओं को पोषण आहार प्रदाय, अटल बिहारी वाजपेयी बाल आरोग्‍य एवं पोषण मिशन अंतर्गत 59 डे-केयर सेंटर का संचालन, स्‍नेह सरोकार कार्यक्रम अंतर्गत अतिकम वजन वाले बच्‍चों की पोषण स्‍तर की देखभाल की जिम्‍मेदारी जनप्रतिनिधियों एवं जनसमुदाय द्वारा लेने, सुपोषण अभियान अंतर्गत जनसमुदाय की भागीदारी से स्‍नेह शिविरों का आयोजन, एकीकृत बाल विकास सेवा योजना अंतर्गत पोषण एवं स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की प्रदायगी, स्‍वच्‍छता के संबंध में समुदाय को जागरुक किया जा रहा है। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा बच्‍चों में कुपोषण की रोकथाम हेतु किये जा रहे प्रयासों की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''सात''

विद्युत लाइन में जम्‍फर जोड़ कर विद्युत की आपूर्ति

[ऊर्जा]

20. ( *क्र. 633 ) श्री गिरीश गौतम : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या रीवा जिले के विकासखण्‍ड रायपुर कर्चुलियान अंतर्गत विद्युत वितरण केन्‍द्र मनिकवार के ग्राम खुरहा में विद्युतीकरण किया जाकर दो ट्रान्‍सफार्मर स्‍थापित किये गये हैं तथा सभी घरों में विद्युत कनेक्‍शन लगाया जाकर मीटर भी स्‍थापित किये जा चुके हैं? यदि हाँ, तो किस योजना के तहत विद्युतीकरण किया गया है तथा कितने उपभोक्‍ताओं के यहां मीटर स्‍थापित किया गया? ठेकेदार का नाम भी बताएं (ख) क्‍या ट्रान्‍सफार्मर से उपभोक्‍ताओं को दी जाने वाली विद्युत लाइन में अभी तक जम्‍फर नहीं जोड़ा गया है, जिससे उपभोक्‍ता विद्युत सुविधा से वंचित हैं, जिसके लिये उपभोक्‍ताओं द्वारा विद्युत विभाग के अधिकारियों को विद्युत सुविधा दिये जाने बाबत् आवेदन पत्र भी दिया गया है? यदि हाँ, तो कब तक विद्युत जम्‍फर जोड़कर उपभोक्‍ताओं को विद्युत सुविधा उपलब्‍ध करायी जायेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँरीवा जिले के विकासखण्‍ड रायपुर कर्चुलियान अंतर्गत विद्युत वितरण केन्‍द्र मनिकवार के ग्राम खुरहा में विद्युतीकरण का कार्य कर दो नहीं अपितु पाँच वितरण ट्रांसफार्मर स्‍थापित किये गये हैं तथा सभी घरों में नहीं अपितु 100 एवं 100 से अधिक आ‍बादी वाले मजरों/टोलों में 44 बी.पी.एल. हितग्राहियों को मीटरयुक्‍त विद्युत कनेक्‍शन दिया गया है। उपरोक्‍त कार्य 12वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत किया गया है तथा योजनांतर्गत उक्‍तानुसार उल्‍लेखित सभी 44 उपभोक्‍ताओं के यहाँ मीटर स्‍थापित किया गया है। उपरोक्‍त कार्य ठेकेदार एजेंसी मेसर्स बजाज इलेक्ट्रिकल लिमिटेड, मुंबई द्वारा किया गया है। (ख) जी हाँ, पूर्व में स्‍थानीय अवरोध के कारण ग्राम-खुरहा में स्‍थ‍ापित 5 वितरण ट्रांसफार्मरों में से 2 वितरण ट्रांसफार्मरों का जम्‍फर नहीं जोड़ा गया था एवं इस हेतु उपभोक्‍ताओं द्वारा पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में संबंधित कार्यालय के अधिकारियों को विद्युत सुविधा दिये जाने हेतु आवेदन पत्र दिया गया है। दिनांक 15/02/2017 को ग्राम-खुरहा में स्‍थापित शेष 2 वितरण ट्रांसफार्मरों को विद्युत लाइन से जोड़कर विद्युत प्रवाह चालू कर दिया गया है। 

उपभोक्‍ताओं को 24 घंटे विद्युत का प्रदाय

[ऊर्जा]

21. ( *क्र. 3201 ) श्री इन्‍दर सिंह परमार : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मोहल्लों, कॉलोनियों के लिए 24 घंटे विद्युत प्रदाय करने हेतु शासन की कोई योजना है? (ख) प्रश्नांश (क) में उल्लेखित योजना में शाजापुर जिले की कालापीपल विधानसभा क्षेत्र के कौन- कौन से गाँवों के मोहल्लों, कॉलोनियों के सर्वे किये जा चुके हैं? गाँववार सूची देवें। (ग) प्रश्नांश (क) उल्लेखित योजना में कब तक गाँव के मोहल्लों, कॉलोनियों में विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण होगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) पूर्व से ही नगरों एवं राजस्‍व ग्रामों के मुख्‍य आबाद क्षेत्रों को गैर-कृषि कार्य हेतु 24 घंटे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। अत: नगर/ग्राम के मोहल्‍लों, कॉलोनियों के लिए 24 घंटे विद्युत प्रदाय करने हेतु पृथक से किसी योजना की आवश्‍यकता नहीं है। (ख) एवं (ग) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न नहीं उठता। 

विद्युत सब स्‍टेशनों का निर्माण

[ऊर्जा]

22. ( *क्र. 2106 ) श्री संजय शर्मा : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) तेन्‍दूखेड़ा विधानसभा क्षेत्र अन्‍तर्गत 2013 -2014 से वर्तमान तक कितने विदयुत सब स्‍टेशन स्‍वीकृत हैं? स्‍थानवार जानकारी प्रदान करें? (ख) कितने सब स्‍टेशन पूर्ण हो गये हैं? शेष स्‍वीकृत सब स्‍टेशनों का कार्य कब प्रारंभ किया जावेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) तेन्‍दुखेड़ा विधानसभा क्षेत्रांतर्गत वर्ष 2013-14 से वर्तमान तक 132 के.व्‍ही. के 2 एवं 33/11 के.वी. के 4 विद्युत उपकेन्‍द्र स्‍वीकृत हैं, जिनकी स्‍थानवार जानकारी निम्‍नानुसार है :-

क्र.

स्‍वीकृत विद्युत उपकेन्‍द्र का नाम

132 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र

1.

तेन्‍दुखेड़ा

2.

पलोहा बड़ा (भटेरा)

33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र

1.

सुनेहटी

2.

बिल्‍थरी

3.

नारगी

4.

लिलवानी

 

(ख) उत्‍तरांश (क) में उल्‍लेखित 6 विद्युत उपकेन्‍द्रों में से एक 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र का कार्य ग्राम सुनेहटी में पूर्ण कर दिया गया है। 132 के.व्‍ही. के 2 उपकेन्‍द्रों का कार्य क्रमश: जायका-II योजना एवं ए.डी.बी-III सेविंग योजना के तहत् स्‍वीकृत है। इन उपकेन्‍द्रों के निर्माण हेतु कार्यादेश जारी कर दिया गया है। इन उपकेन्‍द्रों के निर्माण हेतु भूमि का चयन कर लिया गया है तथा भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। शेष 33/11 के.व्‍ही. के उपकेन्‍द्रों का कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में शामिल है एवं इन कार्यों सहित योजनांतर्गत कार्य टर्न-की आधार पर करने हेतु निविदा प्रक्रिया प्रक्रियाधीन है। अत: वर्तमान में इन 3 उपकेन्‍द्रों का कार्य प्रारंभ किये जाने हेतु निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

परियोजना अधिकारी/पर्यवेक्षक के रिक्‍त पदों की पूर्ति

[महिला एवं बाल विकास]

23. ( *क्र. 2179 ) श्री गोवर्धन उपाध्‍याय : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) विदिशा जिले के सिरोंज विधान सभा क्षेत्रान्‍तर्गत कितने पद परियोजना अधिकारी एवं कितने पद पर्यवेक्षक के स्‍वीकृत हैं? जिसमें कितने पद भरे हैं तथा कितने पद रिक्‍त हैं? क्‍या रिक्‍त पदों के कारण योजनाओं के क्रियान्‍वयन में कठिनाई हो रही है? क्‍या कुछ पर्यवेक्षक मुख्‍यालय में निवास न कर भोपाल या विदिशा से अप-डाउन करते हैं, ऐसा क्‍यों? पदस्‍थ पर्यवेक्षकों का नाम एवं मुख्‍यालय की सूची उपलब्‍ध करावें (ख) सिरोंज विधान सभा क्षेत्र में तीन माह पूर्व आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के पद पूर्ति हेतु क्‍या विज्ञापन जारी किये गये थे? यदि हाँ, तो कौन-कौन केन्‍द्रों में पदों की पूर्ति की गई और कितने पद रिक्‍त हैं? रिक्‍त रहने का क्‍या कारण है? कब तक पूर्ति की जावेगी?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र ''एक'' अनुसार है। जी नहीं। रिक्त पदों का प्रभार अन्य परियोजना अधिकारी/परियोजना में पदस्थ वरिष्ठ पर्यवेक्षक को सौंपकर कार्य सुचारू रूप से कराया जाता है। जी नहीं। सभी पर्यवेक्षक मुख्यालय में निवास करती हैं। उक्त परियोजनाओं में पदस्थ पर्यवेक्षकों के नाम एवं मुख्यालय संबंधी जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र ''दो'' अनुसार है। (ख) जी नहीं। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''आठ''

माचलपुर नगर में 132 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र की स्‍थापना

[ऊर्जा]

24. ( *क्र. 1614 ) कुँवर हजारीलाल दांगी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के तारांकित प्रश्‍न संख्‍या 3 (क्रमांक 1038), दिनांक 19 जुलाई, 2016 के उत्‍तर की कंडिका (ख) में बताया गया था कि विधानसभा क्षेत्र खिलचीपुर के नगर माचलपुर में 132 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र स्‍थापित करने की तकनीकी रूप से वर्तमान में कोई आवश्‍यकता नहीं है? यदि हाँ, तो क्‍या नगर माचलपुर एवं आसपास ग्रामीण क्षेत्र की तीव्रता से बढ़ रही जनसंख्‍या, विद्युत आपूर्ति की मांग एवं निरंतर अल्‍प वोल्‍टेज की समस्‍या से स्‍थाई निजात दिलाने हेतु निकट भविष्‍य में 132 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र की स्‍थापना किया जाना परम आवश्‍यक है? यदि हाँ, तो विभाग द्वारा इस संबंध में क्‍या विचार किया गया? (ख) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा भी क्षेत्रीय जनता व किसानों की मांग अनुरूप माननीय मुख्‍यमंत्री जी, माननीय ऊर्जा मंत्री जी, सहित वरिष्‍ठ अधिकारियों से अनेकों बार 132 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र स्‍थापना की मांग की गई है? यदि हाँ, तो क्‍या शासन माचलपुर में 132 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र की स्‍वीकृति प्रदान करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ। विधानसभा क्षेत्र खिलचीपुर के नगर माचलपुर एवं आसपास के क्षेत्र में वर्तमान में स्‍वीकृत भार के अनुसार पर्याप्‍त विद्युत अधोसंरचना उपलब्‍ध है, अत: माचलपुर में 132 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र स्‍थापित करने की तकनीकी रूप से आवश्‍यकता नहीं है। भविष्‍य की मांग एवं भार प्रबंधन की दृष्टि से ए.डी.बी. योजनान्‍तर्गत, 132 के.वी. खिलचीपुर उपकेन्‍द्र से निर्गमित 33 के.व्‍ही. माचलपुर फीडर का कार्य प्रगति पर है। यह कार्य मार्च 2017 तक पूर्ण होने की संभावना है। इस कार्य के पूर्ण होने के उपरांत क्षेत्र में विद्युत प्रदाय की गुणवत्ता में और अधिक सुधार परिलक्षित होगा। (ख) जी हाँ। उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में माचलपुर में 132 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र स्‍थापित करने की वर्तमान में कोई आवश्‍यकता नहीं है। 

विभाग द्वारा जारी निर्देशों की अवहेलना पर कार्यवाही

[सामान्य प्रशासन]

25. ( *क्र. 3456 ) श्री सोहनलाल बाल्‍मीक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सामान्‍य प्रशासन विभाग मंत्रालय वल्‍लभ भवन भोपाल के पत्र क्र. एफ.19-76/2007/1/4, भोपाल, दिनांक 27.11.2015 के आदेशानुसार शासन के समस्‍त विभागों को माननीय विधायकगणों को शासकीय कार्यक्रमों में आमंत्रित करने के संबंध में निर्देश जारी किये गये हैं? हाँ या नहीं? यदि हाँ, तो जो अधिकारी/कर्मचारी इन निर्देशों की अवहेलना करते हैं, ऐसे अधिकारी/कर्मचारी के ऊपर विभाग द्वारा क्‍या-क्‍या कार्यवाही की जायेगी? (ख) शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, खिरसाडोह (परासिया) के प्राचार्य श्री रोहित कुमार शाह के द्वारा पॉलिटेक्निक कॉलेज, खिरसाडोह में दिनांक 22 नवम्‍बर 2016 को चार अतिरिक्‍त कक्षों के निर्माण (लागत राशि 10.00 लाख) कार्यों का भूमि पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया और न ही प्रश्‍नकर्ता को उपरोक्‍त कार्यक्रम के संबंध में कोई जानकारी दी गई और न ही कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया। क्‍या यह सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों की अवहेलना नहीं है? (ग) अगर हाँ तो सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा जारी किए गये दिशा-निर्देशों की अवहेलना करने वाले शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, खिरसाडोह (परासिया) के प्राचार्य श्री रोहित कुमार शाह के ऊपर विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही कब तक की जायेगी? (घ) उपरोक्‍त प्राचार्य की शिकायत के संबंध में प्रश्‍नकर्ता द्वारा प्रमुख सचिव, सामान्‍य प्रशासन विभाग, संचालक, तकनीकी शिक्षा, भोपाल एवं जिलाध्‍यक्ष, छिन्‍दवाड़ा को क्रमश: पत्र क्र.वि.स./परासिया/127/2016/845, 846 एवं 847 दिनांक 23/11/2016 के माध्‍यम से प्रेषित किये गये हैं, जिस पर विभाग द्वारा क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। शासकीय निर्देशों की अवहेलना का कृत्‍य आचरण या सेवा नियमों के तहत अवचार समझा जाकर अनुशासनात्‍मक कार्यवाही का प्रावधान है। (ख) जनभागीदारी समिति की बैठक दिनांक 21/11/2016 के दौरान लंबित अतिरिक्‍त कक्षों का निर्माण कार्य दिनांक 22/11/2016 को प्रारम्‍भ करने के निर्णय के मद्देनजर अल्‍पसमय में अनौपचारिक रूप से महाविद्यालयीन स्‍तर पर प्रात: 08.30 बजे भूमिपूजन का कार्यक्रम रखा गया था। जिसकी सूचना प्रश्‍नकर्ता माननीय विधायक को दूरभाष/एस.एम.एस. के माध्‍यम से दी गई थी। (ग) एवं (घ) प्रश्नांश (ख) के उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

 



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भाग-2

नियम 46 (2) के अंतर्गत अतारांकित प्रश्नोत्तर के रुप में

परिवर्तित तारांकित प्रश्नोत्तर

सहकारिता विभाग के कर्मचारियों द्वारा समितियों में की गई अनियमितता

[सामान्य प्रशासन]

1. ( क्र. 29 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के अतारांकित प्रश्न संख्‍या 1 (क्रमांक 99) दिनांक 3 मार्च 2016 एवं प्रश्न संख्‍या 2 (क्रमांक 20) दिनांक 19 जुलाई 2016 के संदर्भ में बताएं कि क्या उच्च न्यायालय खण्डपीठ ग्वालियर द्वारा खाद्य विभाग के सुकृति सिंह व श्री चंदेल की जाँच रिपोर्ट पर दोषियों के विरूद्ध जगदीश कुशवाह कर्मचारी के 20 अगस्त 2010 को पुलिस रिपोर्ट व कार्यवाही पर जो रोक लगाई थी उस स्थगन को 6 वर्ष हो गये अभी तक वेकेंट क्यों नहीं कराया जा सका है? (ख) क्या दोषी कर्मचारी जगदीश कुशवाह जिसे चंदेरी से गुना स्थानांतरण किया था क्या उसे पुनः चंदेरी भेज दिया गया है तथा उसके विरूद्ध पुलिस रिपोर्ट व सेवा समाप्ति के बारे में क्या कार्यवाही प्रचलन में है उसकी क्या प्रगति है? (ग) श्री अशोक वर्णवाल तत्कालीन प्रमुख सचिव खाद्य के अशोकनगर, गुना दौरे के बाद तथा खाद्य विभाग के अधिकारी सुकृति सिंह तथा श्री चंदेल की रिपोर्ट व प्रश्‍नकर्ता एवं अन्य राशन की दुकानों की शिकायत के बारे में शासन ने क्या कार्यवाही की है तथा राशन की दुकानों में अनियमितताओं के बारे में जो सहकारिता विभाग के कर्मचारी है उनको राशन वितरण से अलग करने व दण्डित करने हेतु क्‍या कार्यवाही की जा रही है तथा अन्य पत्रों पर अब तक क्‍या कार्यवाही हुई?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) माननीय उच्‍च न्‍यायालय खण्‍डपीठ ग्‍वालियर द्वारा दिए गए स्‍थगन पर माननीय उच्‍च न्‍यायालय में प्रकरण गतिशील है। प्रकरण में मध्‍यप्रदेश शासन की ओर से नियुक्‍त जिला आपूर्ति अधिकारी अशोक नगर ने प्रभारी अधिकारी के रूप में स्‍थगन समाप्‍त कराने हेतु दिनांक 20/10/2010, 05/05/2014, 23/08/2014, 03/12/2014, 23/06/2016, 18/01/2017 को माननीय उच्‍च न्‍यायालय में आवेदन प्रस्‍तुत किये है। प्रकरण माननीय उच्‍च न्‍यायालय ग्‍वालियर में विचाराधीन है। (ख) श्री जगदीश कुशवाह समिति प्रबंधक डोंगर शाखा चन्‍देरी का स्‍थानान्‍तरण दिनांक 14.06.2016 को सेवा सहकारी संस्‍था पनवाडीहाट शाखा आरोन जिला गुना पर किया गया था। श्री जगदीश कुशवाह का स्‍थानांतर पुन: दिनांक 14.10.2016 को सेवा सहकारी संस्‍था महोली शाखा चन्‍देरी जिला अशोकनगर किया गया है। जाँच रिपोर्ट दिनांक 07/06/2010 पर माननीय उच्‍च न्‍यायालय खण्‍डपीठ ग्‍वालियर से स्‍थगन दिये जाने से वर्तमान में कोई कार्यवाही प्रचलित नहीं है। (ग) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार

जाँच प्रकरण में कार्यवाही

[सामान्य प्रशासन]

2. ( क्र. 31 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के परि.अता.प्रश्‍न संख्‍या 5 (क्रमांक 76) दिनांक 09.07.13 एवं परि.अता.प्रश्न संख्‍या 23 (क्रमांक 788) दिनांक 27.02.15 के संदर्भ में कार्यालय लोकायुक्त संभागीय सर्तकता समिति उज्जैन संभाग द्वारा जाँच प्रकरण क्रमांक 83/2007 से संबंधित उत्तर में बताया गया कि पाँचों आरोप प्रमाणित नहीं पाये जाने से प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिया गया जबकि लोकायुक्त संगठन संभागीय सर्तकता समिति उज्जैन के पत्र क्रमांक/ससस/2008/149 उज्जैन दिनांक 10.01.08 के साथ संलग्न जाँच के 6 में से 5 आरोप (डॉ. मोहन गुप्त अध्यक्ष संभागीय सर्तकता समिति) प्रमाणित पाये गये? अतः वास्तविक स्थिति से अवगत करावें? (ख) अता. प्रश्न संख्‍या 23 (क्र. 788) दिनांक 27.01.15 के उत्तर में बताया गया कि समस्त रिकार्ड 30.01.14 को विनिष्ट किया जा चुका है, जबकि लोकायुक्त कार्यालय म.प्र. भोपाल के पत्र क्रमांक 3073/564/नस्त/15 में विनिष्ट किये जाने की दिनांक 30.01.15 है, जबकि उक्त प्रकरण में प्रश्‍नकर्ता वर्ष 2013 से पत्राचार कर रहे हैं, किन्तु कोई कार्यवाही नहीं करते हुए प्रकरण विनिष्ट कर दिया गया क्यों? (ग) क्या 6 में से 5 आरोप प्रमाणित पाये जाने पर उक्त प्रकरण की पुनः जाँच की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक, नहीं तो कारण स्पष्ट करें?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) शिकायत के संबंध में अध्‍यक्ष, संभागीय सतर्कता समिति, उज्‍जैन द्वारा प्रेषित प्रतिवेदन में 6 में से 5 आरोप प्रमाणित थे। प्रकरण के परीक्षण एवं तत्‍कालीन उपलोकायुक्‍त महोदय द्वारा विचारोपरांत अनावेदकों को दोषी नहीं पाये जाने से प्रकरण दिनांक 07/11/2008 को संगठन स्‍तर पर समाप्‍त किया गया है। (ख) अप्रमाणित प्रकरणों की संरक्षण अवधि समाप्‍त हो जाने के कारण जाँच प्रकरण क्रमांक 83/2007 से संबंधित अभिलेख/नस्‍ती दिनांक 30/01/2015 को विनिष्‍ट की गई है। विधानसभा तारांकित प्रश्‍न क्रमांक 788 के उत्‍तर में अभिलेखों/नस्‍ती के विनिष्‍टीकरण की तिथि 30/01/2015 के स्‍थान पर 30/01/2014 टंकण त्रुटि के कारण अंकित हो गई है। प्रश्‍नकर्ता द्वारा प्रस्‍तुत किये गये प्रत्‍येक पत्र पर लोकायुक्‍त संगठन द्वारा यथासमय यथोचित कार्यवाही की गई है। (ग) माननीय लोकायुक्‍त अथवा उप लोकायुक्‍त महोदय के आदेशानुसार संगठन स्‍तर पर समाप्‍त किये गये प्रकरण को पुन: प्रचलित किये जाने का कोई प्रावधान नहीं है। माननीय सदस्‍य द्वारा लोकायुक्‍त संगठन में दिये गये आवेदन एवं उसके साथ संलग्‍न जाँच प्रतिवेदन के आधार पर लोकायुक्‍त संगठन द्वारा जाँच प्रकरण क्रमांक 824/16 पंजीबद्ध किया जाकर जाँच विचाराधीन है।

आँगनवाड़ी भवनों की प्रशासकीय स्वीकृति

[महिला एवं बाल विकास]

3. ( क्र. 56 ) श्री हरवंश राठौर : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत वर्ष 20152016 एवं 201617 में कितने आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण हेतु कहाँकहाँ राशि स्वीकृत कर एजेंसी को प्रदाय की जा चुकी है। क्या राशि जारी करने के छह माह के पश्चात् भी कार्य एजेंसी को प्रशासकीय स्वीकृति जारी नहीं की गई है जिसके कारण एजेंसी द्वारा भवनों का निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया जा रहा है। स्वीकृत भवनों की जानकारी एवं प्रशासकीय स्वीकृति जारी नहीं करने का क्‍या कारण हैं एवं कब तक प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जावेगी?
महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 हेतु मनरेगा योजना के अभिसरण से कुल स्वीकृत 33 आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण की स्वीकृति एवं राशि उपलब्ध कराने की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट पर है। मनरेगा योजना के अभिसरण से आंगनवाड़ी भवन निर्माण हेतु निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत नियत है। मनरेगा योजना के अभिसरण से आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण के लिये राशि सीधे पंचायत राज संचालनालय के माध्यम से संबंधित ग्राम पंचातयों को उपलब्ध कराई जाती हैं तथा इन आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण के लिये जिला स्तर से तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति जारी की जाती हैं। पंचायत राज संचालनालय द्वारा संबंधित ग्राम पंचायत को राशि उपलब्ध कराने के उपरान्त इन 33 आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण की तकनीकी एवं प्रशासकीय स्वीकृति की कार्यवाही जिला पंचायत के माध्यम से प्रक्रियाधीन है। जिसे शीघ्र पूर्ण करवाकर निर्माण कार्य प्रारंभ किये जायेंगे। अतः शेष का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''एक''

नहरों का रख-रखाव

[नर्मदा घाटी विकास]

4. ( क्र. 87 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या पनागर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत नुनियाकला, बम्ह‍नौदा, उर्दुवाकला, लंहगी, धनपुरी, डूंडी, पहाड़ीखेड़ा आदि जगहों की नहरें जगह जगह से टूटी हैं? (ख) क्या नहरों के रख-रखाव की व्यवस्था नहीं होने से सिंचाई का पानी व्यर्थ जा रहा हैं? (ग) क्या किसानों के आखिरी खेतों तक पानी नहीं पहुँच पा रहा हैं? (घ) यदि हाँ, तो रख-रखाव का कार्य कब तक शुरू किया जायेगा?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) पनागर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत नुनियाकला, बम्‍हनौदा, उर्दुवाकला एवं डूंडी ग्राम की नहरें नर्मदा घाटी विकास विभाग की बरगी परियोजना से संचालित हैं। इनमें कोई टूटफूट नहीं है, नहर के अंतिम छोर तक प्रवाह चालू है। ग्राम लंहगी, धनपुरी, डूंडी व पहाडीखेड़ा की नहरें जल संसाधन विभाग के जलाशयों से संचालित हैं। इनके संबंध में जल संसाधन विभाग से प्राप्‍त जानकारी अनुसार नहरें टूटी नहीं हैं। (ख) जी नहीं। (ग) जी नहीं। काडा कार्य अपूर्ण होने से अंतिम खेतों तक पानी सुचारू रूप से पहुंचने में कठिनाई आ रही है। (घ) रख-रखाव प्रतिवर्ष जल उपभोक्‍ता संथा के माध्‍यम से किया जाता है। ग्राम लंहगी, धनपुरी, डूंडी व पहाडीखेड़ा की नहरों की लाइनिंग एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य आर.आर.आर (Repair Renuvation and Restroation ) मद के अंतर्गत कराया जा रहा है। काडा कार्य मद में आवंटन प्राप्‍त होने पर पूर्ण किया जा सकेगा।

नहरों की मेढ़ों का मुरमीकरण

[नर्मदा घाटी विकास]

5. ( क्र. 88 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या पनागर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत नहरों के निर्माण वर्ष के बाद आज तक नहरों की मेढ़ों पर मुरमीकरण का कार्य नहीं किया गया हैं? (ख) यदि किया गया है तो कब-कब? (ग) यदि नहीं, किया गया हैं तो क्‍यों? क्‍या निरीक्षण टीम के साथ साथ अन्य लोगों को आने जाने में कठिनाई हैं? (घ) क्या मुरमीकरण न होने से मदना एवं बिलगवां नहरें जो अत्‍यंत जीर्णशीर्ण स्थिति में हैं, इनके मुरमीकरण हेतु कार्यवाही की जायेगी?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) बरगी व्‍यपवर्तन परियोजना की मुख्‍य नहर कि.मी. 6.94 से 61.00 कि.मी. व नीमखेड़ा माइनर प्रणाली को छोड़कर अन्‍य किसी जगह यह कार्य नहीं किया गया है। (ख) से (घ) जानकारी संलग्‍न परिशिष्टि अनुसार है। अधिकांश स्‍थानों पर आवश्‍यकता नहीं होने एवं आवागमन में कठिनाई नहीं होने से कार्य आवश्‍यक नहीं है। केवल मदना एवं बिलगवां नहरें में जहाँ आवश्‍यक है वहाँ कार्य कराया जाना प्रस्‍तावित है।

परिशिष्ट - ''दो''

सहायक संवर्ग के समयमान वेतनमान की विसंगति का निराकरण

[वित्त]

6. ( क्र. 236 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. राज्‍य के सिविल सेवा के सदस्‍यों को सेवा में आगे बढ़ाने के निश्चित अवसर उपलब्‍ध कराये जाने की दृष्टि से (स) संवर्ग के म.प्र. के सभी विभागों में कार्यरत लिपिक संवर्ग (सहायक ग्रेड-3) को वित्‍त विभाग के परिपत्र क्रमांक एफ 11/1/2008/नियम/चार, दिनांक-24 जनवरी 2008 द्वारा प्रारम्भिक नियुक्‍त का वेतनमान (5200-20200+1900 ग्रेड पे) से द्वितीय उच्‍चतर वेतनमान (5200-20200+2800 ग्रेड-पे) एवं तृतीय उच्‍चतर वेतनमान (9300-34800+3200 ग्रेड-पे) दिये जाने का प्रावधान किया गया था? यह आदेश मंत्रालयीन एवं विधि विभाग में कार्यरत कर्मचारी पर लागू था या नहीं? (ख) क्‍या उक्‍त आदेश में अवैधानिक तरीके से पृथक-पृथक आदेश से मंत्रालयीन सहायक ग्रेड-3 एवं विधि विभाग (उच्‍च न्‍यायालय) में कार्यरत सहायक ग्रेड-3 को प्रारंभिक नियुक्‍त का वेतनमान (5200-20200+1900 ग्रेड-पे) से द्वितीय उच्‍चतर वेतनमान (9300-34800+3600 ग्रेड-पे) एवं तृतीय उच्‍चतर वेतनमान (9300-34800+4200 ग्रेड-पे) स्‍वीकृत किये जाने संबंधी आदेश प्रसारित किये है या नहीं? यदि हाँ, तो उक्‍त प्रस्‍ताव किस-किस अधिकारी द्वारा किस-किस आधार पर स्‍वीकृति हेतु प्रस्‍तुत किये गये हैं? प्रस्‍ताव की प्रति उपलब्‍ध करावें? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) यदि हाँ, तो मध्‍यप्रदेश शासन के सभी विभागों में कार्यरत सहायक ग्रेड-3 के द्वितीय एवं तृतीय उच्‍चतर वेतनमानों में विसंगति हुई है या नहीं? क्‍या यह दोहरी/भेदभाव की नीति हुई या नहीं? यदि हाँ, तो इसके लिये कौन-कौन उत्‍तरदायी है? (घ) क्‍या शासन के पास इस दोहरी नीति/विसंगति के निराकरण के लिये कोई नीति है? यदि हाँ, तो बतावें? क्‍या इस विसंगति का निराकरण 7वां वेतनमान स्‍वीकृति के पूर्व किया जावेगा? स्‍कूल शिक्षा विभाग में प्रश्‍नोत्‍तर दिनाँक तक ऐसे कितने लिपिक संवर्ग के (सहायक ग्रेड-3/ग्रेड-2/गणक/लेखापाल आदि) कर्मचारी है जिन्‍हें 10 वर्ष एवं 20 वर्ष की सेवा पर प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित उच्‍चतर वेतनमान स्‍वीकृत किया है? जिलेवार संख्‍यात्‍मक जानकारी उपलब्‍ध करावें?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। (ख) मंत्रि-परिषद् की स्‍वीकृति उपरांत आदेश प्रसारित किये गये है। मंत्रि-परिषद् संक्षेपिका एवं निर्णय की प्रति संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) मंत्रालय तथा उच्‍च न्‍यायालय के लिपिकीय संवर्ग के वेतनमान अन्‍य विभागों के वेतनमान से भिन्‍न है। अत: भेदभाव की स्थिति नहीं है। (घ) उपर्युक्‍त '''' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। शेषांश की जानकारी एकत्रित की जा रही है।

परिशिष्ट - ''तीन''

जाति प्रमाण पत्र

[सामान्य प्रशासन]

7. ( क्र. 238 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या समान्‍य प्रशासन विभाग, मंत्रालय भोपाल के पत्र क्रमांक एफ 7.80/2014/आ.प्र./एक, भोपाल, दिनांक 27.03.15 एवं 19.02.2016 के द्वारा समस्‍त कलेक्‍टर म.प्र. को मोगिया, मोध्‍या, मोंग्‍या, अनुसूचित जनजाति के संबंध में जारी प्रमाण पत्र जारी करने के निर्देश दिये गये हैं? (ख) प्रश्नांश (क) का उत्‍तर हां, है तो क्‍या उक्‍त पत्र में यह भी उल्‍लेखित है कि मोगिया, मोध्‍या, मोंग्‍या जाति संपूर्ण मध्‍यप्रदेश के लिए अनुसूचित जनजाति अधिसूचित है? (ग) प्रश्नांश (ख) का उत्‍तर हां, तो विदिशा जिले के किस-किस अनुविभागीय अधिकारी, राजस्‍व को 01 अप्रैल 2015 से प्रश्‍नांश दिनांक तक कितने आवेदकों के आवेदन प्राप्‍त हुये, कितनों के जाति प्रमाण पत्र बनाये गये हैं, कितने शेष हैं? (घ) प्रश्नांश (क) के प्रकाश में प्रश्‍नकर्ता द्वारा कलेक्‍टर विदिशा को प्रेषित पत्र दिनांक 12.01.2017 पर क्‍या कार्यवाही हुई है? यदि नहीं, तो कारण देवें?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। (ग) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार। (घ) प्रश्‍नाधीन पत्र समस्‍त अनुविभागीय अधिकारियों (राजस्‍व) को दिनांक 02.02.2017 द्वारा नियमानुसार कार्यवाही करने हेतु भेजा गया। 

परिशिष्ट - ''चार''

सांस्‍कृतिक विरासत सहजने संबंधी कार्य

[संस्कृति]

8. ( क्र. 263 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या राज्‍यमंत्री, संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष २०१३ से दिसम्‍बर २०१६ तक प्रदेश की सांस्‍कृतिक विरासत सहेजने की दृष्टि से कहाँ-कहाँ उत्‍खनन कार्य किया गया? उक्‍त कार्य में क्‍या अवशेष व अन्‍य पुरातत्‍वीय वस्‍तुएं मिली एवं उक्‍त कार्य पर हुए व्‍यय का वर्षवार मदवार ब्‍यौरा क्‍या है? (ख) उपरोक्‍त अवधी में अनुरक्षण, लघुनिर्माण, मॉडलिंग कार्यों व उन पर व्‍यय का वर्षवार, मदवार ब्‍यौरा दें. (ग) वर्तमान में विभाग द्वारा कराये जा रहे प्रमुख कार्यों की जानकारी दें.

राज्‍यमंत्री, संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) वर्ष 2013 से दिसम्‍बर, 2016 तक विभाग द्वारा ग्राम बिरजाखेड़ी जिला हरदा एवं कोषण सुरपुरा जिला भिण्‍ड में उत्‍खनन कार्य कराया गया. उक्‍त कार्य में मिले अवशेष व अन्‍य पुरातत्‍वीय वस्‍तुओं एवं व्‍यय की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार. (ख) वर्ष 2013 से दिसम्‍बर 2016 तक अनुरक्षण कार्यों के वर्षवार व्‍यय की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार. लघु निर्माण के कार्यों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार. मॉडलिंग कार्यों व उन पर वर्षवार व्‍यय की जानकारी मदवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार. (ग) प्रश्‍नांश के परिप्रेक्ष्‍य में वर्तमान में विभाग द्वारा कराये जा रहे प्रमुख अनुरक्षण कार्यों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार. उत्‍खनन शाखा द्वारा प्रदेश के जिलों का ग्रामवार सर्वेक्षण का कार्य कराया जा रहा है. मॉडलिंग शाखा द्वारा 1650 नग पुरातत्‍व महत्‍व की प्रतिकृतियों का निर्माण किया जा रहा है एवं नवीन मोल्‍ड यथा कुबेर, शिव एवं द्वारा शाखा का निर्माण किया गया है.

विद्युत बिलों में अनियमितता

[ऊर्जा]

9. ( क्र. 428 ) श्री यशपालसिंह सिसौदिया : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या उज्जैन संभाग में विद्युत बिल की रीडिंग, बिल प्रिंट,एव विद्युत बिल वितरण का कार्य ठेके से करवाया जा रहा है? यदि हाँ, तो उज्जैन संभाग में कौन-कौन सी कम्पनियां (ठेकेदार) कहाँ-कहाँ पर किस-किस कार्य को संपादित कर रही हैं कंपनी के नाम, शहर के नाम सहित जानकारी देवें? (ख) प्रश्‍नकर्ता के परिवर्तित अता. प्रश्‍न संख्‍या-1 (क्रमांक-1) दिनांक 6 दिसम्बर 2016 के खंड (क) के उत्‍तर में बताया गया की मंदसौर, रतलाम, नीमच जिले में 1 वर्ष में 15,884 शिकायतों का निराकरण कर 12,668 बिलों में 40.73 लाख का संशोधन विभाग द्वारा किया गया, क्या इतनी बड़ी त्रुटी के लिए विभाग द्वारा ठेकेदार से कोई राशि काटी गई है? यदि नहीं, तो क्यों? इन निजी कम्पनियों के कार्यों की मॉनीटिरिंग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्यवाही की गई या की जायेगी? (ग) उक्त जिलों में बिलों में लगातार ज्यादा यूनिट एवं राशि दिए जाने के क्या कारण हैं क्या दोषी अधिकारी को दण्डित तथा ठेका कम्पनियों के लायसेंस निरस्त किये जायेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? क्या विभाग उक्त जिलों में लगातार बिलों की शिकायतों के बाद, गत 1 वर्ष के सभी बिलों की जाँच करवाकर उपभोक्ताओं को न्याय दिलवाएगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) उज्‍जैन संभाग में केवल विद्युत बिल प्रिटिंग का कार्य निविदा प्रक्रिया उपरांत चयनित ठेकेदारों के माध्‍यम से कराया जा रहा है, जिसकी वृत्‍तवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। मीटर की रीडिंग (बिल की रीडिंग नहीं) एवं बिल वितरण का कार्य निविदा आधारित नहीं होकर ऑउटसोर्सिंग के माध्‍यम से सेवा प्रदाता फर्मों द्वारा उपलब्‍ध कराये गये श्रमिकों से अन्‍य अनुषांगी विभागीय कार्यों के साथ-साथ कराये जाते हैं। इसके अतिरिक्‍त संचालन/संधारण वृत्‍त उज्‍जैन, रतलाम एवं नीमच की रीडिंग एवं बिल वितरण का कार्य स्‍वतंत्र रूप से अनुबंधित व्‍यक्ति के द्वारा अनुबंध के आधार पर कराया जा रहा है जिसकी जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। (ख) जी हाँ। विद्युत देयक बनाने में विभिन्‍न मानवीय कारक लगते है जैसे मीटर रीडिंग, मीटर रीडिंग की कम्‍प्‍यूटर में एन्‍ट्री, पुराने भुगतान को सिस्‍टम में इन्‍द्राज करना इत्‍यादि। अत: बिल तैयार करने की प्रक्रिया में मानवीय त्रुटि होने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है। प्रश्‍नाधीन उल्‍लेखित बिलों की राशि का संशोधन 8 प्रकार की विभिन्‍न त्रुटियों के कारण हुआ था। प्रश्‍नाधीन तीनों जिलों में विगत विधानसभा सत्र के प्रश्‍न में उल्‍लेखित लगभग 22 माह की अवधि में उपभोक्‍ताओं को कुल 182.39 लाख विद्युत बिल जारी किये गये थे, जिसकी कुल राशि रू. 1626.97 करोड़ थी। उक्‍त बिलों में से केवल 12668 बिलों में ही संशोधन की स्थिति निर्मित हुई जो कि जारी किये गये बिलों की तुलना में नगण्‍य है। मीटर रीडिंग एवं बिल वितरण के कार्य निविदा आधारित नहीं होने के कारण कोई भी राशि नहीं काटी गई है, केवल मीटर रीडिंग के कार्य में अनियमितता पाये जाने पर रतलाम, मंदसौर एवं नीमच में सेवा प्रदाता फर्म द्वारा उपलब्‍ध कराये गये क्रमश: 12, 29 एवं 6 श्रमिकों को कार्य से मुक्‍त कर हटा दिया गया है। इसके अतिरिक्‍त नीमच वृत्‍त के अन्‍तर्गत नियमित कार्यरत कर्मचारी श्री पवन पिता ओमप्रकाश गंधर्व, लाईन हेल्‍पर को निलंबित किया गया है। साथ ही स्‍वतंत्र रूप से अनुबंधित 4 मीटर वाचकों का अनुबंध समाप्‍त कर दिया गया है। मानवीय/तकनीकी त्रुटियों के कारण विद्युत बिलों में हुई गलती संबंधित अधिकारी के संज्ञान में आने पर, बिलों में सुधार किया जाता है एवं सक्षम अधिकारी द्वारा अनियमितता करने वाले श्रमिकों/कर्मचारियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाती है। अत: संबंधित मॉनीटरिंग अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) मंदसौर, रतलाम एवं नीमच जिलों में नियमानुसार ही विद्युत देयक जारी किये जा रहे हैं एवं उत्‍तरांश-ख में वर्णित कार्यवाही के परिप्रेक्ष्‍य में किसी के विरूद्ध अन्‍य कोई कार्यवाही किया जाना शेष नहीं है। उपभोक्‍ता द्वारा शिकायत करने पर तुरंत ही संबंधित अधिकारी द्वारा जाँचकर उचित कार्यवाही की जाती है जो कि एक सतत प्रक्रिया है, अत: अन्‍य कोई जाँच कराया जाना आवश्‍यक नहीं है।

परिशिष्ट - ''पाँच''

विद्युत उप केन्‍द्र की स्‍वीकृति

[ऊर्जा]

10. ( क्र. 1027 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या श्‍योपुर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत ग्राम पहाड़ली व राजपुरा के मध्‍य व इसके आस-पास बसे दो दर्जन से अधिक ग्रामों में कृषि सीजन में प्रतिवर्ष सुचारू विद्युत व्‍यवस्‍था व लो वोल्‍टेज की समस्‍या गहरा जाती है इस कारण उक्‍त ग्रामों के कृषक खासे परेशान रहते है? (ख) कृषकों की उक्‍त समस्‍या का हल तभी संभव है जब पहाड़ली व राजपुरा के मध्‍य नवीन 33/11 विद्युत सब स्‍टेशन स्‍वीकृत कर स्‍थापित करवा दिया जावे? (ग) प्रश्‍नकर्ता के अता.प्र.सं. 87 (क्रमांक 1034) दिनांक 06.12.2016 के प्रश्नांश (क) के उत्‍तर में उक्‍त समस्‍या को अप्रत्‍यक्ष रूप से स्‍वीकारते हुए प्रश्नांश (ग) के उत्‍तर में जानकारी दी थी कि उक्‍त सब स्‍टेशन का निर्माण कार्य एस.एस.टी.डी. योजना में प्रस्‍तावित है फंड की उपलब्‍धतानुसार अग्रिम कार्यवाही की जावेगी यदि हाँ, तो फंड की उपलब्‍धता हेतु वर्तमान तक क्‍या प्रयास किये गये? (घ) क्‍या विद्युत कंपनी क्षेत्र हित के मद्देनजर यथाशीघ्र फंड की उपलब्‍धता सुनिश्चित करके अथवा शासन से आर्थिक सहायता प्राप्‍त करके अविलंब उक्‍त सब स्‍टेशन को स्‍वीकृति प्रदान कर इसकी स्‍थापना करवाएगी, यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) श्‍योपुर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत ग्राम पहाड़ली व राजपुरा के मध्‍य व इसके आस-पास के ग्रामों में कृषि सीजन में विद्युत भार/मांग अधिक होने के कारण कतिपय अवसरों पर सुचारू विद्युत प्रदाय/लो वोल्‍टेज की समस्‍या आती है। (ख) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार ग्राम पहाड़ली एवं राजपुरा के मध्‍य 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र के निर्माण कार्य की आवश्‍यकता है। (ग) जी हाँ, प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित जानकारी विगत विधानसभा सत्र के प्रश्‍न क्रमांक 1034 (सरल क्र.87) दिनांक 6.12.16 में दी गई थी। वित्‍तीय उपलब्‍धता हेतु प्रयास किये जा रहे हैं। (घ) जी हाँवित्‍तीय उपलब्‍धता हेतु प्रयास किये जा रहे हैं एवं वित्‍तीय उपलब्‍धता के अनुरूप प्रश्‍नाधीन विद्युत उपकेन्‍द्र के कार्य की स्‍वीकृति प्रदान की जा सकेगी। 

विद्युत उपकेन्‍द्र की स्‍वीकृति

[ऊर्जा]

11. ( क्र. 1028 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कृषि बाहुल्‍य श्‍योपुर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत ग्राम ढोढपुर व इसके आस-पास के दर्जनभर से अधिक ग्रामों में हमेशा कृषि सीजन में समुचित विद्युत प्रदाय व लो वोल्‍टेज की गंभीर समस्‍या व्‍याप्‍त रहती है इस कारण कृषकों को कृषि कार्य में कई समस्‍याएं आती है? (ख) उक्‍त समस्‍या के हल हेतु क्‍या ग्राम ढोढपुर में नवीन 33/11 विद्युत सब स्‍टेशन अविलंब स्‍वीकृत कर स्‍थापित कराये जाने की अत्‍यंत आवश्‍यकता है? (ग) प्रश्‍नकर्ता के अता.प्र.सं. 87 क्रमांक 34 दिनांक 06.12.2016 के प्रश्नांश (क) के उत्‍तर में स्‍वीकारा है कि ग्राम ढोढपुर सहित आस-पास के क्षेत्रों में कृषि सीजन में प्रतिवर्ष विद्युत भार व मांग अधिक रहने के कारण सुचारू विद्युत प्रदाय व लो वोल्‍टेज की समस्‍या आती है प्रश्नांश (ग) में ढोढपुर में उक्‍त सब स्‍टेशन की स्‍थापना का कार्य एस.एस.टी.डी. योजना में प्रस्‍तावित है फंड की उपलब्‍धतानुसार अग्रिम कार्यवाही की जा सकेगी ये भी स्‍वीकारा है यदि हाँ, तो फंड की उपलब्‍धता हेतु वर्तमान तक क्‍या कार्यवाही की गई? (घ) क्‍या विद्युत कंपनी फंड की उपलब्‍धता हेतु मजबूत प्रयास करके फंड की उपलब्‍धता सुनिश्चित करके ग्राम ढोढपुर में उक्‍त सब स्‍टेशन के कार्य को यथाशीघ्र स्‍वीकृति प्रदान करेगी, यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) श्‍योपुर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत ग्राम ढोढपुर व इसके आस-पास के ग्रामों में कृषि सीजन में विद्युत भार/मांग अधिक होने के कारण कतिपय अवसरों पर सुचारू विद्युत प्रदाय/लो वोल्‍टेज की समस्‍या आती है। (ख) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार ग्राम ढोढपुर में 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र के निर्माण कार्य की आवश्‍यकता है। (ग) जी हाँ, प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित जानकारी विगत विधानसभा सत्र के प्रश्‍न क्रमांक 1034 (सरल क्रमांक 87) दिनांक 06.12.2016 में दी गई थी। वित्‍तीय उपलब्‍धता हेतु प्रयास किये जा रहे हैं। (घ) जी हाँ, वित्‍तीय उपलब्‍धता हेतु प्रयास किये जा रहे हैं एवं वित्‍तीय उपलब्‍धता के अनुसार प्रश्‍नाधीन विद्युत उपकेन्‍द्र के कार्य को स्‍वीकृति प्रदान की जा सकेगी। 

तत्कालीन महिला बाल विकास अधिकारी नागदा के विरूद्ध जाँच

[महिला एवं बाल विकास]

12. ( क्र. 1234 ) श्री दिलीप सिंह शेखावत : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) प्रश्‍नकर्ता के तारांकित प्रश्‍न संख्‍या 20 (क्रमांक 1409) दिनांक 6 दिसम्बर 2016 में तत्‍कालीन महिला बाल विकास अधिकारी नागदा की जाँच संयुक्त आयुक्त उज्जैन द्वारा पत्र क्रमांक 5211 दिनांक 13.08.16 द्वारा विभाग को भेजने एवं उस पर कार्यवाही विचाराधीन, जवाब दिया गया था? (ख) क्‍या उक्त कार्यवाही जाँच विभाग द्वारा क्या पूर्ण कर ली गयी है? यदि हाँ, तो जाँच की प्रति उपलब्ध करावे। इसके लिये कौन दोषी है? विभाग द्वारा यदि जाँच पूर्ण नहीं हुई तो कब तक पूर्ण कर ली जावेगी?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी हाँ। (ख) श्री मृदुल मालवीय, तत्‍कालीन परियोजना अधिकारी नागदा जिला उज्‍जैन को विभाग के पत्र क्र. 2343/1718/2016/50-1 दिनांक 24.12.2016 द्वारा कारण बताओ सूचनापत्र जारी कर जवाब चाहा गया था। श्री मालवीय से उत्‍तर प्राप्‍त हो गया है, जिसका परीक्षण कर आगामी कार्यवाही की जा रही है। समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है।

राजीव गांधी विद्युतीकरण तथा फीडर सेपरेशन के कार्य

[ऊर्जा]

13. ( क्र. 1365 ) श्री हरवंश राठौर : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2016-17 में बण्‍डा विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत अविद्युतीकरण के कितने ग्राम शेष हैं? (ख) विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत फीडर सेपरेशन तथा राजीव गांधी विद्युतीकरण योजनान्तर्गत कौन-कौन से कार्य अप्रारंभ एवं अपूर्ण हैं तथा कब तक पूर्ण करा लिए जाएंगे। (ग) विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत किन-किन ग्रामों की विद्युत सप्लाई किन कारणों से बंद है एवं किन-किन ग्रामों में ट्रांसफार्मर जले एवं खराब हैं? उनको कब तक बदल दिया जाएगा? ग्रामवार जानकारी उपलब्ध कराई जाए।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) बण्‍डा विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत वर्तमान में कोई भी अविद्युतीकृत ग्राम विद्युतीकरण हेतु शेष नहीं है। (ख) बंडा विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत फीडर विभक्तिकरण योजना के अंतर्गत 6 फीडरों के कार्य अपूर्ण हैं, जिनकी फीडरवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'' अनुसार है। ठेकेदार एजेंसी को दिये गये कार्यादेश की शर्तों के अनुसार उक्‍त शेष कार्य वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में पूर्ण किया जाना संभावित है। बंडा विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत वर्तमान में प्रचलित 12वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में किसी भी अविद्युतीकृत ग्राम के विद्युतीकरण एवं विद्युतीकृत ग्राम के सघन विद्युतीकरण का कोई भी कार्य अप्रारंभ अथवा अपूर्ण नहीं है। (ग) बण्‍डा विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत मात्र 1 ग्राम-सिमरिया खुर्द में विद्यमान फेल/खराब वितरण ट्रांसफार्मर से सम्‍बद्ध शत्-प्रतिशत उपभोक्‍ताओं द्वारा बिजली के बिलों का भुगतान नहीं किये जाने के कारण ग्राम का विद्युत प्रदाय बन्‍द है। प्रश्‍नाधीन क्षेत्रान्‍तर्गत 12 ग्रामों के 13 जले/खराब वितरण ट्रांसफार्मरों से सम्‍बद्ध उपभोक्‍ताओं द्वारा नियमानुसार विद्युत बिल की बकाया राशि का भुगतान नहीं किये जाने के कारण इन जले/खराब वितरण ट्रांसफार्मरों को बदला नहीं जा सका है। उक्‍त सभी जले/खराब वितरण ट्रांसफार्मरों से सम्‍बद्ध उपभोक्‍ताओं द्वारा नियमानुसार विद्युत बिल की बकाया राशि का भुगतान किये जाने पर इन्‍हें बदला जाना संभव हो सकेगा, अत: वर्तमान में समय-सीमा बता पाना संभव नहीं है। उक्‍त 12 ग्रामों के 13 फेल/खराब वितरण ट्रांसफार्मरों की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'' अनुसार है। 

परिशिष्ट - ''छ: ''

पवन चक्की से विद्युत उत्‍पादन

[नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा]

14. ( क्र. 1485 ) श्री सुदर्शन गुप्‍ता (आर्य) : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या प्रदेश में पवन चक्की से विद्युत उत्पन्न होने के प्रोजेक्ट जगह-जगह पंचायत क्षेत्रों में स्थापित किये जा रहे हैं? यदि हाँ, तो किन-किन जिलों की पंचायत क्षेत्रों में पवन चक्की स्थापित की गई है, जिले की पंचायत व स्थापित पवन चक्की की संख्या की सूची उपलब्ध करावें? (ख) क्या प्रश्‍नांश (क) अनुसार पवन चक्की स्थापित करने पर पंचायत राजस्व अधिनियम के तहत कुछ राशि पंचायत अथवा शासन के खाते में जमा की जाना है? यदि हाँ, तो किस धारा के तहत कितनी राशि जमा की जाना निर्धारित है? स्पष्‍ट करें। (ग) क्या प्रश्नांश (ख) अनुसार पवन चक्की स्थापित करने पर संबंधित से निर्धारित राशि जमा कराई जा रही है? यदि नहीं, तो कारण सहित बतावें व कब तक जमा कराई जावेगी? स्पष्‍ट करें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ। स्‍थापित पवन चक्कियों की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। राशि जमा कराने का कोई प्रावधान नहीं है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) उत्‍तरांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''सात''

विद्युत ट्रंसफार्मरों का लोड कम करने हेतु कार्य योजना

[ऊर्जा]

15. ( क्र. 1489 ) श्री सुदर्शन गुप्‍ता (आर्य) : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या इन्दौर जिले में ऐसे कई विद्युत ट्रांसफार्मर हैं जहाँ उनकी क्षमता से अधिक लोड है? यदि हाँ, तो ऐसे कितने विद्युत ट्रांसफार्मर है, संख्या स्पष्‍ट करें? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार विभाग द्वारा ऐसे ट्रांसफार्मर का लोड कम करने हेतु क्या कार्य योजना बनाई गई है व इसे कब तक पूर्ण कर लिया जावेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, इंदौर जिले के ग्रामीण क्षेत्र में कुल 158 वितरण ट्रांसफार्मरों पर क्षमता से अधिक भार है। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में अति उच्‍चदाब उपकेन्‍द्रों एवं 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्रों पर स्‍थापित कोई भी पॉवर ट्रांसफार्मर अतिभारित नहीं है। (ख) उत्‍तरांश (क) में उल्‍लेखित कुल 158 अतिभारित वितरण ट्रांसफार्मरों में से 62 वितरण ट्रांसफार्मरों की क्षमता वृद्धि एवं 96 स्‍थानों पर अतिरिक्‍त वितरण ट्रांसफार्मर लगाये जाने का कार्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण योजना वर्ष 2016-17 के अंतर्गत किये जाने हेतु स्‍वीकृत है। उक्‍त कार्य माह जून-2017 तक पूर्ण किया जाना संभावित है। 

महिला बाल विकास विभाग गुना में चल रही अनियमितता

[महिला एवं बाल विकास]

16. ( क्र. 1521 ) श्रीमती ममता मीना : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) गुना जिले में वर्ष 2015-16 से 2016-17 तक विकासखण्डवार कितने-कितने कुपोषित बच्चे चिन्हांकित किये गये हैं तथा इन चिन्हांकित बच्चों के कुपोषण को दूर करने के लिये क्या कलेक्टर गुना से कार्य योजना अनुमोदित कराई है तथा इस कार्य योजना अनुसार माहवार तथा विकासखण्डवार एन.आर.सी. में कितने कितने बच्चे भर्ती कराये गये है तथा वर्तमान में इन चिन्हित बच्चों का कुपोषण दूर कर दिया है अथवा नहीं? अन्य जिलो में भी क्या यही स्थिति है? विकासखण्डवार स्थिति बताए? (ख) कितने जिलों में जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं महिला बाल विकास अधिकारियों के पदों पर जूनियर सहायक संचालक पदस्थ हैं तथा वरिष्ठता के आधार पर इन पदों पर सहायक संचालकों को क्यों पदस्थ नहीं किया गया? (ग) गुना जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका के कितने-कितने पद किस दिनांक से रिक्त हैं तथा इनकी पूर्ति कब तक कर ली जावेगी। आगामी तारीख सहित बताएं। (घ) उक्त विसंगति/मापदण्ड के लिये कौन अधिकारी जिम्मेदार है? उसे हटाकर उसके विरूद्ध विभागीय जाँच कब तक प्रारंभ कर दी जावेगी तथा उक्त विसंगति को कब तक दूर कर दिया जावेगा?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) गुना जिले में वर्ष 2015-16 से 2016-17 तक विकासखण्ड गुना में 1978, बमोरी में 967, आरोन में 353, राघौगढ़ में 867 तथा चांचौडा में 648 इस प्रकार कुल 4813 बच्चें चिन्हांकित किये गए। जी हाँ। गुना जिले में पोषण पुनर्वास केन्द्रों में भर्ती कराये गए बच्चों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-01 अनुसार है। इनमें से 1801 बच्‍चों के पोषण स्‍तर में परिवर्तन हुआ है। अन्य जिलों में पोषण पुनर्वास केन्द्रों में भर्ती कराये गए बच्चों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-02 अनुसार है। (ख) उपसंचालक/ जिला कार्यक्रम अधिकारी संवर्ग के पद रिक्त होने के कारण प्रदेश में कुल 15 जिलों में सहायक संचालक संवर्ग के अधिकारियों को प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी के रूप में पदस्थ किया गया है। प्रदेश के 02 जिलों जबलपुर एवं गुना में एक साथ वर्ष 2014 में सहायक संचालक पद पर पदोन्नत अधिकारियों में से एक को प्रभार दिया गया है। प्रदेश के किसी भी जिले में एक साथ पदस्थ 02 सहायक संचालक संवर्ग के अधिकारियों में से बाद में पदोन्नत/ नियुक्त अधिकारी को पूर्व में पदोन्नत/ नियुक्त अधिकारी के अधीन पदस्थ नहीं किया गया है। (ग) आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 69 पद आंगनवाड़ी सहायिका के 52 पद एवं मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 15 पद रिक्त है। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-03 अनुसार है। (घ) जिलें में रिक्त पदों की पूर्ति के संबंध में कोई विसंगति नहीं है। अतः शेष का प्रश्न नहीं।

उप संभागों एवं संभागों का पुनर्गठन

[ऊर्जा]

17. ( क्र. 1555 ) डॉ. कैलाश जाटव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नरसिंहपुर जिले में (संचा/संधा) उपसंभागों एवं (संचा/संधा) संभागों का पुनर्गठन हेतु कार्यालय अधीक्षण अभियंता (संचा/संधा) वृत म.प्र.पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंमनी लिमिटेड नरसिंहपुर ने मुख्य महाप्रबंधक (मा.सं.एवं.प्रषा), म.प्र.पू.क्षे.वि.वि.क.लि. जबलपुर को पत्र क्र/अअन/सं.सं./कार्य/2954/ नरसिंहपुर दिनांक 15-07-2016 को लेख किया था? उक्त पत्र पर क्या कार्यवाही की गई? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार अधीक्षण अभियंता के द्वारा (संचा/संधा) उपसंभागों एवं (संचा/संधा) संभागों का पुनर्गठन के संबंध में अपना अभिमत साध्य बताया था? गोटेगांव में उपसंभाग का निर्माण कब तक करा दिया जावेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) नरसिंहपुर जिले के संचालन एवं संधारण उप संभागों तथा संचालन एवं संधारण संभागों के पुनर्गठन हेतु अधीक्षण अभियन्‍ता (संचालन/संधारण) नरसिंहपुर के प्रश्‍नाधीन उल्‍लेखित पत्र क्रमांक 2954 दिनांक 15.07.2015 द्वारा प्रस्‍ताव मुख्‍य महाप्रबंधक (मा.सं. एवं प्रशा.) पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर को प्रेषित किया गया था। नरसिंहपुर जिले में अधीक्षण अभियंता, संचालन एवं संधारण सहित पर्याप्‍त संख्‍या में संचालन एवं संधारण संभाग, संचालन एवं संधारण उप संभाग व वितरण केन्‍द्र कार्यरत हैं, अत: उक्‍त प्रस्‍ताव पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। (ख) जी हाँ, साध्‍य प्रतीत होना बताया गया था। गोटेगांव में पूर्व से ही उप संभाग कार्यरत है, अत: कोई कार्यवाही किया जाना अपेक्षित नहीं है।

विभागीय परिपत्रों अनुसार माझी प्रमाणपत्र धारकों को संरक्षण

[सामान्य प्रशासन]

18. ( क्र. 1592 ) श्री मोती कश्यप : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या मा. मुख्यमंत्री को प्रश्नकर्त्ता द्वारा पत्र दिनांक 20-1-2016 के साथ माझी जनजाति के प्रमाणपत्र धारक धीमर, केवट आदि जातियों के शासकीय सेवकों के विरूद्ध किन्हीं प्रकार की कोई कार्यवाही न किये जाने विषयक किन्हीं विभागों के किन्हीं दिनांकों के परिपत्रों को संलग्न किया है। (ख) क्या विभाग द्वारा प्रश्नांश (क) से संबंधित विषय पर अभी तक किन-किन तिथियों में परिपत्र जारी किये हैं। (ग) क्या विभाग ने किन्हीं न्याय दृष्टान्तों और महाधिवक्ता के अभिमतों के आधार पर किन्हीं जनजातियों के प्रमाणपत्रधारकों, जो पिछड़ावर्ग की जातियों की सूची के किन्हीं सरल क्रमांकों में अंकित हैं और जिनके लोगों के शासकीय सेवाओं में नियोजन अंतिम हो चुके हैं, उन्हें कोई संरक्षण प्रदान किया गया है? (घ) प्रश्नांश (क) (ख) परिपत्रों व मा. मुख्यमंत्री द्वारा प्रदत्त सहमति व अनुमोदन और प्रश्नांश (ग) न्यात दृष्टान्तों व महाधिवक्ताओं के अभिमतों के आधार पर माझी जनजाति के प्रमाण-पत्र धारक धीमर, केवट आदि जिनके विभागीय परिपत्र दिनांक 11-11-2005 के पूर्व शासकीय सेवाओं में नियोजन अंतिम हो चुके हैं, उन्हें कब तक संरक्षण प्रदान कर दिया जावेगा।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) पत्र दिनांक 20.01.2016 इस विभाग में आना नहीं पाया गया है। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी हाँ। संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार। (घ) प्रश्नांश (क) के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''आठ''

लिफ्टइरीगेशन से लाभान्वित ग्राम

[नर्मदा घाटी विकास]

19. ( क्र. 1593 ) श्री मोती कश्यप : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या मा. मुख्यगमंत्री द्वारा माह अगस्त, सितम्बर, अक्टू्बर 2016 के किन दिनांकों में बड़वारा विधानसभा क्षेत्र के किन ग्रामों की जनदर्शन यात्रा के सार्वजनिक कार्यक्रमों में दायीं तट नहर के किसी स्थान से किन विकासखण्डों के किन ग्रामों के खेतों तक लिफ्ट इरीगेशन के द्वारा पानी पहुंचाने की घोषणा की है? (ख) क्या विभाग द्वारा वि.खं. ढीमरखेड़ा, कटनी और बड़वारा के किन-किन ग्रामों को माइक्रोइरीगेशन योजना से जोड़ा है और ऐसे कौन से ग्राम हैं, जो किन कारणों से लाभान्वित नहीं हो पायेंगे? (ग) प्रश्नांश (क), (ख) क्षेत्र के किन-किन जलाशयों से नहरों के माध्यम से सिंचाई होती है, उनके जलभण्डारण में वृद्धि कर अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने और सिंचाई रकबे के विस्तार के लिये क्या योजना बनायी गई है। (घ) प्रश्नांश (ख) के वंचित ग्रामों में पानी पहुंचाने की क्या योजना बनायी जावेगी। (ड.) प्रश्नांश (क), (ख), (ग) से कितने हेक्टेयर रकबे को सिंचित किया जावेगा।

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) प्रश्‍नांकित अवधि में माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा बरगी व्‍यपवर्तन परियोजना की मुख्‍य नहर से उद्वहन सिंचाई योजनाएं बनाकर सिंचाई सुविधाएं देने की घोषणाओं का विवरण निम्‍नानुसार है:- (1) दिनांक 10/08/2016 को मुख्‍य नहर के 85 से 102 किलोमीटर से ढीमरखेड़ा विकासखण्‍ड के 98 ग्रामों में लगभग 15,000 हेक्‍टेयर में सिंचाई देना। (2) . दिनांक 11/09/2016 को मुख्‍य नहर के 104 किलोमीटर से स्‍लीमनाबाद-बडवारा परियोजना बनाकर ढीमरखेड़ा, बहोरीबंद, मुडवारा एवं बडवारा विकासखण्‍डों के क्रमश: 6,15,55 एवं 59 ग्रामों में लगभग 35,000 हेक्‍टेयर में सिंचाई सुविधा देना। (3) दिनांक 15/10/2016 को ढीमरखेड़ा विकासखण्‍ड के ग्राम पौनिया में सिंचाई सुविधा देना। (ख) वर्तमान में प्रश्‍नाधीन ग्रामों में कोई माईक्रो इरीगेशन परियोजना नहीं है। प्रश्‍नांश के उत्‍तर में वर्णित परियोजनाओं में प्रश्‍नाधीन क्षेत्र के ग्रामों का सैच्‍य क्षेत्र शामिल है। (ग) प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में नर्मदा घाटी विकास विभाग की कोई सिंचाई परियोजना नहीं है। (घ) जानकारी उपरोक्‍त उत्‍तर एवं अनुसार है। (ड.) जानकारी उपरोक्‍त उत्‍तर अनुसार है।

आंगनवाड़ी भवनों की स्‍वीकृति

[महिला एवं बाल विकास]

20. ( क्र. 1628 ) श्री अंचल सोनकर : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) जबलपुर पूर्व विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत कुल कितने आंगनवाड़ी केन्‍द्रों को खोला गया है? इन केन्‍द्रों में कुल कितने बच्‍चे हैं? केन्‍द्रवार बच्‍चों की संख्‍या, बतावें? (ख) प्रश्नांश (क) में संचालित कितनी आंगनवाड़ी शासकीय भवन एवं कितनी आंगनवाड़ी किराये के भवनों में संचालित हो रही है? किराये पर संचालित आंगनवाड़ी केन्‍द्रों में कितना किराया मासिक दिया जा रहा है? शासकीय एवं अशासकीय भवनों की जानकारी अलग-अलग पता सहित बतावें। (ग) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा क्षेत्र में आंगनवाड़ी भवनों की स्‍वीकृति हेतु संबंधित विभाग को लेख किया गया था? यदि हाँ, तो कब? क्‍या पत्र पर कार्यवाही करते हुये आंगनवाड़ी केन्‍द्र भवनों के निर्माण की स्‍वीकृति प्राप्‍त हो चुकी है? यदि हाँ, तो कितने भवनों की? भवन कहाँ-कहाँ पर कितनी-कितनी राशि के निर्मित होंगे?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जबलपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र अन्तर्गत कुल 169 आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित है। केन्द्रवार बच्चों की संख्या पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (ग) जी हाँ। प्रश्नकर्ता माननीय विधायक द्वारा दिनांक 26.10.2016 के पत्र में पूर्व विधानसभा क्षेत्र अन्तर्गत सुभाष वार्ड में, पानी की टंकी के पास आंगनवाड़ी भवन निर्माण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। उक्त आंगनवाड़ी केन्द्र नगरीय क्षेत्रान्तर्गत आता है। आंगनवाड़ी भवन निर्माण की स्वीकृति उपलब्ध वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता पर दी जाती है, अतः समय सीमा दी जाना संभव नहीं है।

कुपोषित बच्‍चों को खोजने हेतु शिविर का आयोजन

[महिला एवं बाल विकास]

21. ( क्र. 1629 ) श्री अंचल सोनकर : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) जबलपुर जिले अंतर्गत कुल कितने कुपोषित बच्‍चे वर्ष 2014-15 से 2016-17 तक कहाँ-कहाँ किस स्थिति में पाये गये? कुपोषित बच्‍चों को खोजने के लिये विभाग द्वारा कितने शिविरों का आयोजन कहाँ-कहाँ पर किया गया? स्‍थान सहित बतावें। क्‍या ऐसे आयोजनों के दौरान विभाग द्वारा क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से सम्‍पर्क कर कुपोषित बच्‍चे बालिकाएं एवं गर्भवती महिलाओं को खोजने में मदद ली? यदि हाँ, तो कब-कब किस-किस से? (ख) क्‍या शासन की ऐसी महत्‍वपूर्ण योजनाओं की जानकारी संबंधित विभाग द्वारा जनप्रतिनिधियों को प्रदाय नहीं की जाती है? कारण बतावें? क्‍या ऐसे लोक हित के शिविरों में जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करने का शासन द्वारा कोई आदेश विभाग को प्रदाय नहीं किया गया है? कारण बतावें? (ग) प्रश्नांश (क) अंतर्गत प्रश्‍नकर्ता की विधान सभा क्षेत्र पूर्व जबलपुर में वर्ष 2014-15 से 2016-17 तक कुल कितने शिविरों का आयोजन किया गया, कितने शिविरों की जानकारी प्रश्‍नकर्ता को दी गई? कुपोषित बच्‍चे, बालिकाएं एवं महिलाओं को चिन्हित करने हेतु आयोजित शिविरों में किस-किस अधिकारी/कर्मचारी ने भाग लिया, शिविरों में कुल कितनी राशि का व्‍यय किया गय वर्षवार क्षेत्रवार बतावें? व्‍यय राशि का सत्‍यापन किस अधिकारी द्वारा कब-कब किया गया?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) एवं (ख) प्रश्नांकित अवधि में चिन्हांकित अतिकम वजन के बच्चों का विवरण संलग्न परिशिष्ट पर है। सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों में प्रत्येक माह की 1 से 4 तारीख तक 5 वर्ष की उम्र तक के बच्चों का वजन लिया जाकर उनके पोषण स्तर का निर्धारण किया जाता है। अतिकम वजन के बच्चों, किशोरी बालिकाएं एवं गर्भवती माताओं को खोजने हेतु पृथक से शिविरों का आयोजन नहीं किया जाता हैं। विभाग की समस्त महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी समय-समय पर विभिन्न माध्यमों से जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध करायी जाती है विभाग द्वारा आयोजित विशेष शिविरों में भी जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किये जाने के निर्देश हैं। (ग) प्रश्नांश (क) के सदंर्भ में अतिकम वजन के बच्चों को खोजने हेतु शिविर का आयोजन न होने से शेष का प्रश्न नहीं। 

परिशिष्ट - ''नौ''

विद्युत बिलों के संबंध में

[ऊर्जा]

22. ( क्र. 1644 ) श्री नीलेश अवस्‍थी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जबलपुर जिले के पाटन विधानसभा क्षेत्र अन्‍तर्गत 1 जनवरी, 2015 से 31 जनवरी, 2017 तक बिलों की राशि में अनियमितता को लेकर कितने लोगों ने शिकायत दर्ज की इनमें कितनी शिकायतों का निराकरण कर कितनी राशि का संशोधन कितने बिलों में किया गया? वितरण केन्‍द्रवार संख्‍या देवें? (ख) प्रश्‍नांकित अवधि में कितने उपभोक्‍ताओं ने मीटर खपत एवं आंकलित खपत के बिलों में अधिक राशि भेजे जाने की शिकायत दर्ज कराई? (ग) पाटन विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत कितने बी.पी.एल. परिवारों के घरेलू कनेक्‍शन एवं अन्‍य कितनों के घरेलू तथा कृषि कनेक्‍शन दिसम्‍बर-16 की स्थिति में विद्यमान है? वितरण केन्‍द्रवार संख्‍या देवें एवं यह भी बतलावें कि उल्‍लेखित कनेक्‍शन धारियों को प्रतिमाह किस दर पर कितना ऊर्जा प्रभार, नियत प्रभार, ईधन समायोजन प्रभार, मीटर प्रभार के साथ-साथ राज्‍य शासन के द्वारा जारी विभिन्‍न श्रेणियों हेतु प्रायोज्‍य विद्युत शुल्‍क वसूल किया जाता है? इन प्रभारों में राज्‍य शासन द्वारा विभिन्‍न श्रेणियों को दी जाने वाली कौन-कौन सी किस दर से सब्सिडी दी जाती है? इन प्रभारों में जमा सुरक्षा निधि पर देय ब्‍याज की राशि का किस दर पर समायोजन किया जाता है? उल्‍लेखित कनेक्‍शनों पर श्रेणीवार विस्‍तृत विवरण देवें? (घ) प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित कनेक्‍शन धारियों में से कितने कनेक्‍शन बिना मीटर के किन कारणों से संचालित हैं? वितरण केन्‍द्रवार संख्‍या देवें एवं यह भी बतलावें कि इन उपभोक्‍ताओं को किस आधार पर बिजली के बिल दिये जा रहे हैं? प्रश्‍न दिनांक की स्थिति में पाटन विधानसभा क्षेत्र के अन्‍तर्गत ग्रामों के विद्युतीकरण हेतु कोन-कौन सी योजनाएँ किन शर्तों के अधीन संचालित है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जबलपुर जिले के पाटन विधानसभा क्षेत्र अन्‍तर्गत 01 जनवरी, 2015 से 31 जनवरी, 2017 तक बिलों की राशि में त्रुटि के संबंध में 1380 शिकायतें प्राप्‍त हुई एवं इन सभी शिकायतों का निराकरण कर रू. 29,53,238/- की राशि का सभी 1380 बिलों में संशोधन किया गया है। उक्‍त प्राप्‍त शिकायतों, निराकृत शिकायतों तथा संशोधित की गई राशि की वितरण केन्‍द्रवार संख्‍या निम्‍नानुसार है :-

क्र.

वितरण केन्‍द्र का नाम

प्राप्‍त शिकायतों की संख्‍या

निराकृत शिकायतों की संख्‍या

संशोधित राशि (रूपये में)

1

कटंगी

19

19

85270

2

पाटन-1

215

215

679365

3

पाटन-2

124

124

301579

4

बोरिया

48

48

113170

5

मझोली

247

247

487318

6

मढ़ोताल ग्रामीण

1

1

23448

7

गोसलपुर

415

415

720240

8

सिहोरा ग्रामीण

311

311

542848

योग

1380

1380

2953238

(ख) प्रश्‍नांकित अवधि में 1292 उपभोक्‍ताओं ने मीटर खपत एवं आंकलित खपत के बिलों में अधिक राशि अंकित किये जाने की शिकायत दर्ज कराई। (ग) पाटन विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत दिसम्‍बर, 2016 की स्थिति में विद्यमान बी.पी.एल. परिवारों के घरेलू कनेक्‍शनों एवं अन्‍य घरेलू तथा कृषि कनेक्‍शनों की वितरण केन्‍द्रवार संख्‍या निम्‍नानुसार है :-

क्र.

वितरण केन्‍द्र का नाम

बी.पी.एल. घरेलू कनेक्‍शन

अन्‍य घरेलू कनेक्‍शन

कृषि पंप कनेक्‍शन

1

कटंगी

242

0

255

2

पाटन-1

491

0

492

3

पाटन-2

248

0

201

4

बोरिया

145

0

254

5

मझोली

1456

997

669

6

मढ़ोताल ग्रामीण

121

565

330

7

गोसलपुर

0

0

357

8

सिहोरा ग्रामीण

0

0

625

योग

2703

1562

3183

प्रश्‍नाधीन उल्‍लेखित श्रेणी के उपभोक्‍ताओं को म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी दर आदेश में निहित प्रावधानों के तहत् राज्‍य शासन द्वारा प्रयोज्‍य होने वाली सब्सिडी को समायोजित कर प्रतिमाह बिल प्रेषित किये जाते हैं। म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा निर्धारित त्रैमासिक आधार पर ईधन प्रभार समायोजन की राशि को भी बिलों में समाहित किया जाता है। राज्‍य शासन को देय विद्युत शुल्‍क एवं उपभोक्‍ता की जमा सुरक्षा निधि पर वर्तमान में 7.75 प्रतिशत की दर से ब्‍याज भी उपभोक्‍ताओं के बिलों में समाहित रहता है। घरेलू कनेक्‍शनों तथा कृषि उपभोक्‍ताओं को वर्तमान में प्रायोज्‍य होने वाले ऊर्जा प्रभारों का विवरण, ईधन प्रभार समायोजन तथा मीटर प्रभार पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'', राज्‍य शासन को देय विद्युत शुल्‍क पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'' एवं राज्‍य शासन द्वारा देय सब्सिडी संबंधी आदेश की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'' अनुसार है। (घ) उत्‍तरांश (क) में उल्‍लेखित उपभोक्‍ताओं में से मीटरों की कमी के कारण 271 कनेक्‍शन बिना मीटर के हैं, जिनका वितरण केन्‍द्रवार संख्‍या निम्‍नानुसार है :-

क्रमांक

वितरण केन्‍द्र का नाम

बिना मीटर वाले कनेक्‍शनों की संख्‍या

1

कटंगी

0

2

पाटन-1

0

3

पाटन-2

0

4

बोरिया

0

5

मझोली

12

6

मढ़ोताल ग्रामीण

0

7

गोसलपुर

177

8

सिहोरा ग्रामीण

82

योग

271

बिना मीटर वाले उपभोक्‍ताओं को म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी दर आदेश में निहित प्रावधानों के आधार पर खपत का आंकलन कर बिजली के बिल दिये जा रहे हैं। प्रश्‍न दिनांक की स्थिति में पाटन विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत ग्रामों के विद्युतीकरण हेतु 12वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में समाहित) संचालित है, जिसके अन्‍तर्गत 100 एवं 100 से अधिक आबादी वाले मजरो/टोलों/बसाहटों को विद्युतीकृत कर ग्रामों के सघन विद्युतीकरण एवं बी.पी.एल. हितग्राहियों को नि:शुल्‍क बी.पी.एल. कनेक्‍शन प्रदान करने का कार्य किया जा रहा है। 

ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली तार की चोरी

[ऊर्जा]

23. ( क्र. 1682 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सतना विधानसभा क्षेत्रांतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली तार चोरी की घटनायें बढ़ी हैं, क्‍या राजीव गांधी फिडर बाबूपुर से रामस्‍थान के बीच तार चोरी को एक साल हो गये है किन्‍तु इस मामले में विभाग द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गयी है? (ख) क्‍या ग्राम कुआं में 10 पोल की बिजली तार चोरों ने काट ली है जिससे विद्युत अवरोध उत्‍पन्‍न हुआ है? (ग) क्‍या बिजली तार चोरी की घटनायें, ठेकेदार एवं विद्युत विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से हो रही है? यदि नहीं, तो तार चोरी की घटनायें रोकने के लिए विभाग ने अब तक क्‍या कार्यवाही की है? (घ) यदि प्रश्नांश (क) एवं (ख) सही है तो दोषी ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों के विरूद्ध विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गयी है? बतायें? पिछले 05 वर्षों में बिजली तार चोरी से विभाग को कितना आर्थिक नुकसान हुआ है? इसकी वसूली दोषियों से कब तक कर ली जायेगी बतायें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी नहीं। सतना जिले के बाबूपुर से रामस्थान फीडर का कार्य फीडर विभक्तिकरण योजना (राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना नहीं) के अंतर्गत किया जा रहा था तथा कार्य के दौरान दिनांक 05.10.2015 को इस फीडर का तार चोरी हो गया था। उक्त कार्य टर्न-की आधार पर ठेकेदार एजेंसी मेसर्स एरा इंफ्रा कंपनी लिमिटेड नोएडा से करवाया जा रहा था। कार्य के दौरान तार चोरी होने पर थाने में रिपोर्ट करना, तार पुनः खींचना आदि समस्त कार्यवाही ठेकेदार एजेंसी द्वारा की जानी थी, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा नहीं। किन्तु उक्त ठेकेदार एजेंसी द्वारा उक्त चोरी हुआ तार पुनः नहीं लगाया गया। योजनांतर्गत कार्य समय से पूर्ण नहीं किये जाने के कारण उक्त ठेकेदार एजेंसी को जारी किया गया अवार्ड दिनांक 17.06.2016 को निरस्त कर ठेकेदार द्वारा जमा की गई परफार्मेंस बैंक गारंटी रू. 7.89 करोड़ का नगदीकरण पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अकाउण्ट में करते हुए पुनः निविदा प्रक्रिया उपरांत चयनित ठेकेदार एजेंसी मेसर्स विन्ध्या टेलीलिंक्स, न्यू दिल्ली को दिनांक 29.10.2016 को अवार्ड जारी कर दिया गया है। वर्तमान में प्रश्‍नाधीन कार्य सहित उक्त योजनांतर्गत शेष कार्य प्रगति पर है। (ख) जी हाँ, ग्राम कुआं क्षेत्रान्तर्गत विद्यमान 10 पोलों के तार दिनांक 24.01.2017 को अज्ञात चोरों द्वारा काट लिए गए थे। जानकारी प्राप्त होने पर संबंधित थाने में प्रथम सूचना क्रमांक 875, दिनांक 25.01.2017 दर्ज कराकर दिनांक 27.01.2017 को पुनः तार लगाने का कार्य पूर्ण कर विद्युत प्रदाय चालू कर दिया गया है। (ग) जी नहीं। सतना जिले में तार चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने एवं सामग्री की शीघ्र बरामदगी हेतु पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के पदस्थ अधिकारियों द्वारा संबंधित पुलिस थानों में लिखित सूचना दी जाती है तथा वितरण कंपनी के कर्मचारियों द्वारा समय-समय पर लाईनों की देख-रेख के लिये रात्रि में गश्त की जाती है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों द्वारा विद्युत सामग्री की चोरी के जिम्मेदार आपरा‍धिक तत्वों के खिलाफ कार्यवाही हेतु निरन्तर पुलिस अधीक्षक एवं जिला कलेक्टर, सतना को लिखित/व्यक्तिगत रूप से अनुरोध किया गया है। (घ) प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में किसी के दोषी होने अथवा किसी के विरूद्ध कार्यवाही किए जाने का प्रश्‍न नहीं उठता। पिछले 5 वर्षों में विद्युत तार की चोरी हो जाने के कारण, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को रू. 95.03 लाख का आर्थिक नुकसान हुआ है। उक्त चोरी गये तार की बरामदी हेतु पुलिस में एफ.आई.आर. दर्ज की गई है। उक्त के परिप्रेक्ष्य में किसी कर्मचारी/अधिकारी के दोषी होने अथवा उनसे आर्थिक नुकसान की राशि वसूल किए जाने का प्रश्‍न नहीं उठता।

गंजाल एवं मोरन नदी पर डेम बनवाया जाना

[नर्मदा घाटी विकास]

24. ( क्र. 1701 ) डॉ. रामकिशोर दोगने : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) हरदा जिले की गंजाल एवं मोरन नदी पर डेम बनवाये जाने की प्रस्तावित योजना की वर्तमान स्थिति क्या है? (ख) उक्त योजना अभी तक लंबित रहने का क्या कारण है व योजना पर कितनी राशि व्यय होना संभावित है? (ग) कब तक उक्त लंबित कार्यवाही पूर्ण कर ली जावेगी? (घ) उक्त योजनानुसार डेम बनवाये जाने से कितने किसानों की कितनी कृषि भूमि अधिगृहित की जावेगी व योजना पूर्ण होने पर कुल कितना हेक्टयर क्षेत्र सिंचित होगा। जिले व तहसीलवार बतायें।

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) हरदा जिले की गंजाल एवं मोरण्‍ड परियोजना की केन्‍द्रीय जल आयोग एवं कृषि मंत्रालय के सभी संचालनालयों से स्‍वीकृति प्राप्‍त कर ली गई है, अंतिम स्‍वीकृति अपेक्षित है। परियोजना की पर्यावरणीय स्‍वीकृ‍ति हेतु MoEF & CC, नई दिल्‍ली की बैठक दिनांक 30/01/2017 को संपन्‍न हुई, जिसका कार्यवाही विवरण प्र‍तीक्षित है। भूमि-अर्जन, पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन (R&R) हेतु प्रकरण आदिम जाति कल्‍याण मंत्रालय, नई दिल्‍ली (MoTA) को तैयार कर प्रस्‍तुत करने के पश्‍चात् उठाई गई आपत्तियों का निराकरण भी प्रस्‍तुत कर दिया गया है, स्‍वीकृति प्रतीक्षित है। (ख) वृहद परियोजना होने के कारण विभिन्‍न स्‍वीकृतियाँ प्राप्‍त किये जाने के कारण विलंब हो रहा है। केन्‍द्रीय जल आयोग, नई दिल्‍ली द्वारा परियोजना की लागत रूपये 2427.02 करोड़ आंकी गई है। (ग) पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (MoEF) नई दिल्‍ली एवं आदिम जाति कल्‍याण मंत्रालय (MoTA) नई दिल्‍ली से स्‍वीकृति उपरांत। (घ) मोरण्‍ड बांध के डूब क्षेत्र से 317 कृषकों की 532.33 हेक्‍टेयर भूमि एवं गंजाल बांध के डूब क्षेत्र से 111 कृषकों की 108.91 हेक्‍टेयर भूमि अधिग्रहित किया जाना अनुमानित है। प्रस्‍तावित परियोजना से होशंगाबाद जिले की सिवनी-मालवा तहसील का 4617 हेक्‍टेयर एवं हरदा जिले की रहटगांव तहसील का 8439 हेक्‍टेयर, हरदा तहसील का 4377 हेक्‍टेयर, खिड़किया तहसील का 7243 हेक्‍टेयर, सिराली तहसील का 9851 हेक्‍टेयर तथा खंडवा जिले की हरसूद तहसील का 17678 हेक्‍टेयर (कुल 52205 हेक्‍टेयर) क्षेत्र सिंचित किया जाना प्रस्‍तावित है।

अटल ज्‍योति योजना द्वारा ऊर्जाकृत गांव

[ऊर्जा]

25. ( क्र. 1759 ) श्री गोविन्‍द सिंह पटेल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र में अटल ज्‍योति योजना के द्वारा प्रश्‍न दिनांक तक कितने ग्राम फीडर विभक्तिकरण योजना अन्‍तर्गत विभक्‍त फीडर से जोड़े गये एवं कितने ग्राम उक्‍त योजना अन्‍तर्गत जोड़ना शेष है? सूची प्रदान करें? (ख) मुख्‍यमंत्री द्वारा गांवों को 24 घंटे बिजली देने की घोषणा के अनुसार अटल ज्‍योति योजना में ऐसे कितने गांव हैं जिनको 24 घंटे बिजली दी जा रही है तथा शेष गांवों में कब तक पूर्ण रूप से 24 घंटे बिजली प्रदान कर दी जावेगी? (ग) गाडरवारा वि.स. में दीनदयाल ग्राम ज्‍योति योजना अन्‍तर्गत कितने ग्राम स्‍वीकृत हैं उनकों कब तक विद्युत प्रदाय कर दी जावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) नरसिंहपुर जिले की गाडरवारा विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत अटल ज्‍योति योजना नहीं अपितु फीडर विभक्तिकरण योजना के अन्‍तर्गत प्रश्‍न दिनांक तक 166 ग्राम विभक्‍त किये गये फीडरों से जोड़े गये हैं तथा 11 ग्राम विभक्‍त किये गये फीडरों से जोड़ना शेष है। उक्‍त ग्रामों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-'' एवं '' अनुसार है। (ख) गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र के समस्‍त 177 ग्रामों के गैर-कृषि फीडरों पर 24 घंटे विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। अत: प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र में दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के तहत् 7 अविद्युतीकृत ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य स्‍वीकृत है, जिनमें से 3 ग्रामों में विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा एक ग्राम में विद्युतीकरण का कार्य प्रगति पर है, जिसे मार्च-17 तक पूर्ण किया जाना संभावित है। शेष 3 ग्रामों के विद्युतीकरण हेतु वन विभाग से स्‍वीकृति प्रतीक्षित है। वन विभाग से स्‍वीकृति प्राप्‍त होने पर इनके विद्युतीकरण का कार्य किया जाना संभव हो सकेगा। अत: वर्तमान में समय-सीमा बता पाना संभव नहीं है। 

आंगनवाड़ी केन्‍द्र

[महिला एवं बाल विकास]

26. ( क्र. 1775 ) श्री राम लल्लू वैश्य : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि जिला सिंगरौली में बहुत से नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनवाड़ी केन्‍द्र संचालित नहीं हैं, तो इन्‍हें कब तक संचालित किया जायेगा तथा कितने नये केन्‍द्र खोले जाने है?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) सिंगरौली जिले अन्तर्गत नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 1421 आंगनवाड़ी केन्द्र एवं 114 मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र स्वीकृत होकर कुल 1449 आंगनवाड़ी केन्द्र/मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र संचालित है। जिनमें नवीन स्वीकृत 86 आंगनवाड़ी केन्द्र वर्तमान में संचालित नहीं है इन नवीन स्वीकृत आंगनवाड़ी केन्द्रों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका के पद पर पदपूर्ति की कार्यवाही प्रचलन में है। पदपूर्ति की कार्यवाही पूर्ण होते ही संचालन प्रारंभ किया जाएगा। नियुक्ति की प्रक्रिया सतत है अतः समय सीमा दिया जाना संभव नहीं है। भारत सरकार द्वारा जनसंख्या के निर्धारित मापदण्डों की पूर्ति होने पर नवीन आंगनवाड़ी केन्द्र/मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र खोले जाने की स्वीकृति द्वारा दी जाती है। वर्तमान में नये आंगनवाड़ी केन्द्र खोले जाना प्रस्तावित नहीं है।

जिला सिंगरौली अंतर्गत एयरपोर्ट का संचालन

[विमानन]

27. ( क्र. 1777 ) श्री राम लल्लू वैश्य : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जिला सिंगरौली अंतर्गत हवाई पट्टी हेतु भूमि के अधिग्रहण की संपूर्ण कार्यवाही कब तक पूरी की जावेगी? सिंगरौली जिला औ‍द्योगिक क्षेत्र है जिसमें हवाई पट्टी का कार्य पूर्ण किया जाना आवश्‍यक है? (ख) य‍ह कार्य कब तक में पूरा किया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) समय सीमा बताई जाना संभव नहीं है।

बाल संरक्षण संस्‍था

[महिला एवं बाल विकास]

28. ( क्र. 1796 ) श्री अनिल फिरोजिया : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) कुष्‍ठ रोगियों के स्‍वस्‍थ बच्‍चों की देखभाल करने हेतु विभाग की क्‍या योजना है? (ख) उज्‍जैन संभाग मुख्‍यालय पर उक्‍त बच्‍चों की देखभाल करने हेतु कौन सी संस्‍था कार्यरत है? (ग) उक्‍त बच्‍चों की देखभाल करने हेतु पूर्व से संचालित बाल संरक्षण संस्‍था उज्‍जैन को किन कारणों से कब बन्‍द किया गया? बन्‍द करने के वर्ष में कितने बच्‍चे बाल संरक्षण संस्‍था में दर्ज थे? उन बच्‍चों की देखभाल का जिम्‍मा किसे सौंपा गया? (घ) क्‍या किसी एन.जी.ओ. को लाभ पहुंचाने के उद्देश्‍य से उक्‍त संस्‍था को बंद किया गया?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) किशोर न्याय अधिनियम, के तहत् देख-रेख एवं संरक्षण के जरूरतमंद बालकों को संरक्षण प्रदान किया जाता है। कुष्ठ रोगियों के देख-रेख एवं संरक्षण के जरूरतमंद बच्चों को भी संस्थागत और गैर-संस्थागत कार्यक्रम के तहत् लाभान्वित किया जाता है। (ख) वर्तमान में उज्जैन संभाग मुख्यालय पर एक शासकीय बाल गृह (बालकों हेतु) एवं एक बाल संरक्षण आश्रम (बालिकाओं हेतु) संचालित है। (ग) बाल संरक्षण आश्रम को बंद नहीं किया गया हैं। संस्था का पंजीयन किशोर न्याय अधिनियम की धारा 41 के तहत किया गया है और वित्तीय व्यवस्था समेकित बाल संरक्षण योजना के तहत् की गई है। किशोर न्याय अधिनियम की धारा 2 (9) अनुसार बच्चों के सर्वोत्तम हित को दृष्टिगत रखते हुये संस्था में निवासरत 45 बच्चों को परिवारों में सौंपा गया है। वर्तमान में संस्था संचालित हैं। शेष का प्रश्न ही नहीं होता है। (घ) प्रश्नांश "ग" के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता।

विद्युत फीडर सेपरेशन कार्य में अनियमितता

[ऊर्जा]

29. ( क्र. 1797 ) श्री अनिल फिरोजिया : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्‍जैन जिले में ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत फीडर सेप्रेशन का कार्य किस-किस संचा-संधा संभाग में किन-किन ठेकदार/फर्म/विभाग द्वारा कराया गया है। जिले के अंतर्गत कितने फीडरों का विभक्तिकरण कार्य किया गया है संख्‍या बतावें? (ख) क्‍या जिले में विद्युत फीडर सेपरेशन का कार्य पूर्ण हो चुका है? यदि नहीं, तो कब तक पूर्ण कर दिया जावेगा? (ग) क्‍या उक्‍त कार्यों का भौतिक सत्‍यापन कराया गया? यदि हाँ, तो किन अधिकारियों द्वारा? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) भौतिक सत्‍यापन के दौरान सेपरेशन कार्यों में क्‍या अनियमितता पाई गई एवं दोषियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? प्रकरणवार ब्‍यौरा देवें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) उज्‍जैन जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालन-संधारण संभाग, उज्‍जैन, तराना, नागदा, बड़नगर एवं महिदपुर में फीडर विभक्तिकरण का कार्य कराया गया है। फीडर विभक्तिकरण के कार्य हेतु संचालन-संधारण संभाग उज्‍जैन, तराना एवं बड़नगर को मिलाकर एक कार्यादेश ठेकेदार एजेंसी मेसर्स विश्‍वनाथ प्रोजेक्‍ट्स लिमिटेड को दिया गया था तथा संचालन-संधारण संभाग नागदा एवं महिदपुर को मिलाकर एक कार्यादेश ठेकेदार एजेंसी मेसर्स एन.सी.सी. लिमिटेड, हैदराबाद को दिया गया था। उज्‍जैन जिले के अंतर्गत कुल 407, 11 के.व्‍ही. फीडरों के विभक्तिकरण का कार्य किया गया है। (ख) जी हाँ, उज्‍जैन जिले में फीडर विभक्तिकरण योजना में स्‍वीकृत समस्‍त कार्य पूर्ण हो चुका है। तथापि संचालन एवं संधारण संभाग तराना के अंतर्गत 41 ग्रामों हेतु फीडर विभक्तिकरण का कार्य तकनीकी रूप से एवं उपलब्‍ध संसाधनों के अन्‍तर्गत आर्थिक रूप से साध्‍य नहीं होने के कारण पूर्व में फीडर विभक्तिकरण योजना में सम्मिलित नहीं किया गया था। वर्तमान में उक्‍त कार्य दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में स्‍वीकृत है। उक्‍त योजना का क्रियान्‍वयन टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु निविदा प्रक्रिया उपरांत ठेकेदार एजेंसी मेसर्स के.एम.सी. कन्‍सट्रक्‍शन लिमिटेड, हैदराबाद को दिनांक 24.11.2016 को अवार्ड जारी किया गया है तथा अनुबंध की शर्तों के अनुसार उक्‍त योजनान्‍तर्गत कार्य अवार्ड दिनांक से 2 वर्ष की अवधि में पूर्ण किया जाना है। (ग) जी हाँ, उक्‍त कार्यों का भौतिक सत्‍यापन पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों श्री मोहम्‍मद आमिर सहायक यंत्री, श्री रवि पाठक, सहायक यंत्री एवं श्री एन.सी.गुप्‍ता, अधीक्षण यंत्री द्वारा किया गया है। (घ) उज्‍जैन जिले में फीडर विभक्तिकरण के कार्य के भौतिक सत्‍यापन के दौरान कोई भी अनियमितता नहीं पाई गई अत: किसी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता। 

देशी एवं अंग्रजी मदिरा दुकान का स्‍थानांतरण

[वाणिज्यिक कर]

30. ( क्र. 1803 ) श्री रजनीश सिंह : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) केवलारी विधान सभा क्षेत्रान्‍तर्गत कौन-कौन सी देशी एवं अंग्रेजी मदिरा दुकानें कहाँ-कहाँ पर संचालित हैं? संचालित स्‍थल के पूर्ण पता सहित सूची उपलब्‍ध कराई जाये एवं संचालित दुकान राज्‍यमार्ग मुख्‍य सड़क से कितनी दूरी पर स्थित है? दूरी एवं दुकानदार सहित सूची दी जावें। (ख) विगत 02 वर्षों में प्रश्नांश (क) में उल्‍लेखित दुकानों के आस-पास शाला अध्‍ययन केन्‍द्र एवं अन्‍य शासकीय/सामाजिक कार्यालय होने के फलस्‍वरूप इन्‍हें अन्‍यत्र स्‍थानांतरित करने की शासन स्‍तर पर कौन-कौन सी शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं एवं उन पर क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई है? (ग) क्‍या केवलारी विधान सभा क्षेत्रान्‍तर्गत छपारा वि.ख. मुख्‍यालय पर स्थित मदिरा दुकानों को स्‍थानांतरित किये जाने की मांग स्‍थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा की जा रही है? यदि हाँ, तो इस पर क्‍या कार्यवाही की गई है? यदि नहीं, तो क्‍यों?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) केवलारी विधानसभा क्षेत्रांतर्गत संचालित देशी/विदेशी मदिरा दुकानें के स्‍थान, पता एवं राष्‍ट्रीय राजमार्ग/राज्‍य राजमार्ग से दूरी की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) शासन स्‍तर से देशी मदिरा दुकान केवलारी वर्तमान स्‍थल से हटाने के संबंध में विशेष कर्तव्‍यस्‍थ अधिकारी मंत्री मध्‍यप्रदेश शासन वित्‍त से शिकायत प्राप्‍त हुई थी जिसकी जाँच कराये जाने पर उक्‍त दुकान मध्‍यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के अंतर्गत बनाये गये सामान्‍य प्रयोग के नियम के नियम 1 दुकानों का अवस्‍थापन के नियम का पूर्णत: पालन करने के कारण शिकायत नस्‍तीबद्ध की गई। (ग) छपारा विकासखण्‍ड मुख्‍यालय पर स्थित देशी मदिरा दुकान छपारा को उसके स्‍थापित स्‍थल से अन्‍यत्र स्‍थानांतरित कराये जाने हेतु श्री नवनीत सिंह निवासी छपारा द्वारा दिनांक 26.02.2016 को छपारा की मूलभूत समस्‍याओं के संबंध में प्रस्‍तुत पत्र में वर्तमान स्‍थल से हटाये जाने हेतु उल्‍लेख किया था। शिकायत की जाँच सहायक जिला आबकारी अधिकारी लखनादौन वृत्‍त से कराई गई, संचालित मदिरा दुकान मध्‍यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के अंतर्गत बनाये गये सामान्‍य प्रयोग के नियम के नियम 1 दुकानों का अवस्‍थापन के नियम के अनुसार स्‍थापित एवं संचालित होना पाई गई। 

परिशिष्ट - ''दस''

भीमगढ़ बांध एवं ढूटी बांध को पर्यटन स्‍थल में शामिल करना

[पर्यटन]

31. ( क्र. 1804 ) श्री रजनीश सिंह : क्या राज्‍यमंत्री, संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश शासन की पर्यटन स्‍थलों को विकसित करने हेतु क्‍या कार्य योजना प्रस्‍तावित है? यदि है तो योजना को विस्‍तार से बतायें? (ख) क्‍या जिला सिवनी के अंतर्गत विधान सभा क्षेत्र केवलारी अंतर्गत एशिया के सबसे बड़े मिट्टी के बांध भीमगढ़ बांध एवं ढूटी बांध को विकसित करने हेतु कोई कार्ययोजना लंबित है? (ग) यदि प्रश्नांश (ख) के अनुसार लंबित है तो पर्यटन विभाग द्वारा उक्‍त दोनों बांध को पर्यटन स्‍थल के रूप में कब तक विकसित किया जावेगा?

राज्‍यमंत्री, संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) नवीन पर्यटन नीति 2016 के तहत प्रदेश में पर्यटन विकास की समग्र योजना है। किसी विशेष पर्यटन स्‍थलों को विकसित करने का प्रावधान नहीं है। (ख) वर्तमान में कोई योजना प्रस्‍तावित नहीं है। (ग) जी नहीं। शेष का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता। 

एन.वी.डी.ए. की प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठकों के कार्यवृत्त

[नर्मदा घाटी विकास]

32. ( क्र. 1828 ) श्री विजय सिंह सोलंकी : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2009 से 2011 तक इंदिरा सागर परियोजना की मुख्य नहर आर.डी. 96.030 कि.मी. से 107.330 कि.मी. तक डब्ल्यू.बी.एम. रोड, लाईनिंग कार्य एवं मिट्टी कार्य निर्माण कंपनी द्वारा कब-कब कितना कार्य किया गया, इस कार्य का किस अधिकारी द्वारा कब-कब निरीक्षण, मुल्यांकन किया गया। भुगतान व कार्य प्रगति की सप्ताहवार सूची देवें। यह कार्य कब पूर्ण हुआ दिनांक बतायें? इस निविदा कार्य की सीसी कब जारी की गई? दिनांक बतायें तथा सीसी की प्रति देवें। (ख) उक्त निर्माण कंपनी द्वारा नहर निर्माण के अधूरे कामों की शिकायत कब-कब किस-किस शिकायतकर्ता द्वारा विभिन्न माध्यमों से विभाग को प्राप्त हुई, शिकायती पत्र तथा पत्र पर की गई कार्यवाही की प्रति देवें। कार्य पूर्ण होने के बाद कब तक सुरक्षा निधि कंपनी को देना चाहिए था, कब प्रदान की गई। यदि नियमों का उल्‍लंघन हुआ है तो कारण एवं कार्यवाही की जानकारी देवें। (ग) एन.वी.डी.ए. की समीक्षा बैठकों में उक्त कार्य संबंधी प्राप्त जानकारी प्रपत्रों की प्रतियां देवें। इस कार्य पर बैठक में की गई टिप्पणियों की जानकारी बैठकवार देवें। वर्ष 2009 से 2011 तक एन.वी.डी.ए. की प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठकों के कार्यवृत्त (प्रोसीडींग) की प्रति देवें। (घ) किसी भी अधीक्षण यंत्री या कार्यपालन यंत्री द्वारा कब-कब मेसर्स करण डेवलपमेंट सर्विसेस प्रा. लि. ग्वालियर के कार्यों व भुगतान संबंधी जाँच की गई, जाँच आदेश, जाँच प्रतिवेदन, जांच उपरांत दल की टिप्पणी सहित जानकारी देवें।

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है। प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र में है। (ख) शासन को प्रश्‍नाधीन कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई। प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होता है। कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र के 12 माह के पश्‍चात् सुरक्षा निधि राशि, लौटाई जाने का प्रावधान अनुबंध में है। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। जी हाँ। प्रकरण में एक कार्यपालन यंत्री के विरूद्ध कार्यवाही संस्थित की गई है एवं दूसरे कार्यपालन यंत्री के विरूद्ध कार्यवाही संस्‍थापन प्रस्‍तावित है। (ग) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (घ) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

नगर पचोर में उप-पंजीयक कार्यालय खोलना

[वाणिज्यिक कर]

33. ( क्र. 1841 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या जिला राजगढ़ की तहसील पचोर में उप-पंजीयक कार्यालय खोलने हेतु गजट नोटिफिकेशन (प्रकाशन) जारी किया गया है? यदि हाँ, तो गजट नोटिफिकेशन की प्रति देवें। यदि नहीं, किया गया है तो कब तक जारी किया जावेगा? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार यदि गजट नोटिफिकेशन जारी हो गया है तो पचोर में उप-पंजीयक कार्यालय कब से अस्तित्व में आ जावेगा? यदि नहीं, तो क्यों नहीं? (ग) क्या भूस्वामियों के द्वारा समय पर रजिस्ट्री नहीं होने के कारण 50/100 रु के स्टॉम्प पर भूमि खरीदी की नोटरी करवाई जाती है जिस कारण शासन को लाखों के राजस्व का नुकसान हो रहा है? इसके लिए कौन जिम्मेदार है?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी नहीं। नवीन उप पंजीयक कार्यालय खोलने हेतु प्राप्‍त प्रस्‍तावों का इस हेतु निर्धारित मापदण्‍डों के परिप्रेक्ष्‍य में परीक्षण कर उपयुक्‍त पाए जाने पर तद्-विषयक निर्णय उपरांत गजट नोटिफिकेशन जारी किया जाता है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ख) पचोर में उप पंजीयक कार्यालय खोलने के संबंध में प्राप्‍त प्रस्‍ताव पर जिला कलेक्‍टर से जानकारी चाही गई है जो प्राप्‍त होने पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। (ग) भूस्‍वामियों के द्वारा समय पर रजिस्‍ट्री नहीं होने के कारण 50/100 रू. के स्‍टॉम्‍प पर भूमि खरीदी की नोटरी करवाए जाने का कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं आया है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

कॉक्‍स डिस्लरी नौगाँव के संबंध में

[वाणिज्यिक कर]

34. ( क्र. 1878 ) श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कॉक्‍स डिस्लरी नौगाँव में शासन द्वारा लीज देने के बाद क्या-क्या चल-अचल संपत्ति अस्तित्व में है? जब इस व्यावसायिक कंपनी ने व्यापार प्रारंभ किया तो कंपनी में कौन-कौन भागीदार थे? उनके नाम पते उपलब्ध करायें। (ख) कॉक्‍स डिस्लरी का वर्तमान में भागीदारों एवं संचालन करने वालों के नाम पते उपलब्ध करायें?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) शासन द्वारा लीज देने के बाद वर्तमान में कॉक्‍स डिस्‍टलरी (वर्तमान नाम मेसर्स जैगपिन ब्रेवरीज लिमिटेड नौगांव) परिसर के अन्‍दर (डी-1) आसवनी प्‍लांट (एफ.एल.9) विदेशी मदिरा बॉटलिंग प्‍लांट, (सी.एस.1-बी) देशी मदिरा बॉटलिंग प्‍लांट एवं (बी-3) बीयर प्‍लांट स्‍थापित है। कॉक्‍स डिस्‍टलरी के व्‍यापार प्रारंभ के समय में भागीदारों की जानकारी कार्यालयीन अभिलेखों में उपलब्‍ध नहीं है। (ख) प्रश्‍नांश के उत्‍तर में वर्णित अनुसार कॉक्‍स डिस्‍टलरी (वर्तमान नाम मेसर्स जैगपिन ब्रेवरीज लिमिटेड नौगांव) के वर्तमान भागीदारों की नाम एवं पते की जानकारी निम्‍नानुसार है :- (1) श्री जगदीश चन्‍द्र अग्रवाल, पुत्र श्री ओ.पी. अग्रवाल, नौगांव जिला छतरपुर (म.प्र.)। (2) श्री विपिन चन्‍द्र अग्रवाल, पुत्र श्री ओ.पी. अग्रवाल, नौगांव, जिला छतरपुर (म.प्र.) (3) श्रीमती क्षमा अग्रवाल, पत्‍नी श्री जगदीश चन्‍द्र अग्रवाल, नौगांव, जिला छतरपुर (म.प्र.) (4) श्रीमती राधा अग्रवाल, पत्‍नी श्री विपिन चन्‍द्र अग्रवाल, नौगांव जिला छतरपुर (म.प्र.)

किसानों से विद्युत के अस्‍थाई कनेक्‍शन के नाम पर अधिक वसूली

[ऊर्जा]

35. ( क्र. 1913 ) श्री के.पी. सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा किसानों से अस्‍थाई कनेक्‍शन के नाम पर किस-किस जिले में किस-किस दर पर राशि वसूल की जा रही है? जिलेवार सूची उपलब्‍ध करावें। (ख) क्‍या प्रदेश में किसानों के अस्‍थाई कनेक्‍शन के संबंध में अलग-अलग जिलों में अलग-अलग व्‍यवस्‍था संचालित हुई है? (ग) यदि हाँ, तो क्‍या यह भी सत्‍य है कि शिवपुरी जिले में अन्‍य जिलों की तुलना में म.प्र. मध्‍यक्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा किसानों से अस्‍थाई कनेक्‍शन के नाम पर अधिक राशि की वसूली कर लूटा जा रहा है? (घ) शिवपुरी जिले में अन्‍य जिलों की तुलना में किसानों से अस्‍थाई कनेक्‍शन के नाम पर अधिक वसूली के कारण क्‍या हैं? इसके लिए कौन उत्‍तरदायी है? क्‍या शासन किसानों से ली गई विद्युत अस्‍थाई कनेक्‍शन की अधिक राशि को वापिस करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा उनके क्षेत्रान्‍तर्गत आने वाले सभी जिलों में म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा वर्ष 2016-17 के लिये जारी टैरिफ आदेश दिनांक 05 अप्रैल, 2016 के अनुसार अस्‍थाई कनेक्‍शन के लिये निर्धारित दर के अनुसार राज्‍य शासन द्वारा देय सब्सिडी को समायोजित करते हुए राशि वसूल की जा रही है। प्रयोज्‍य दरों का विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। (ग) एवं (घ) उत्‍तरांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न नहीं उठता। 

परिशिष्ट - ''ग्यारह''

सहकारिता एवं विशेष पुलिस स्‍थापना लोकायुक्‍त प्रकरणों की जानकारी

[सामान्य प्रशासन]

36. ( क्र. 1990 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विशेष पुलिस स्‍थापना लोकायुक्‍त संगठन ग्‍वालियर संभाग अंतर्गत गत 1 जनवरी 2014 से बनाये गये ट्रैप के प्रकरणों की जानकारी आरोपी के नाम, पद तथा प्रकरण क्रमांक, दिनांक सहित देवें। इनमें से किन-किन आरोपियों के प्रकरण में चालान किस-किस न्‍यायालय में प्रस्‍तुत हो गये हैं। किन-किन के चालान प्रस्‍तुत नहीं हुए है? नामवार बतावें। (ख) महेन्‍द्र जैन सहकारी निरीक्षक कार्यालय उपायुक्‍त सहकारिता अशोकनगर के विरूद्ध लोकायुक्‍त ग्‍वालियर अंतर्गत न्‍यायालय में चालान पेश नहीं होने के कारण बतावें। चालान कब तक पेश किया जावेगा समयावधि बतावें। महेन्‍द्र जैन के खिलाफ प्रकरण चलाने की अनुमति हेतु सहकारिता विभाग को प्रेषित पत्र की प्रति उपलब्‍ध करावें।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार (ख) सहकारिता विभाग में अभियोजन स्‍वीकृति की कार्यवाही प्रक्रियाधीन होने से समयावधि बताया जाना संभव नहीं है। अभियोजन स्‍वीकृति हेतु विधि एवं विधायी कार्य विभाग द्वारा सहकारिता विभाग को लिखे गये पत्र की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार

विद्युत बिलों की राशि में अनियमितता

[ऊर्जा]

37. ( क्र. 1997 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्‍वालियर जिले में 1 जनवरी 2015 के पश्‍चात् कितने बिलों की राशि में अनियमितता को लेकर कितने व्‍यक्तियों ने कहाँ-कहाँ शिकायत की? इनमें कितनी शिकायतों का निराकरण किया गया? कितनी राशि का संशोधन कितने बिलों में किया गया? (ख) क्‍या उक्‍त जिले में विद्युत कम्‍पनी द्वारा उपभोक्‍ताओं को जानबूझकर मीटर खपत एवं आं‍कलित खपत की रीडिंग समान देकर दुगनी राशि वसूली जा रही है, जिनकी संख्‍या हजारों में है? इस तरह की कितनी शिकायतें उक्‍त अवधि में विभाग को प्राप्‍त हुई? कितने बिलों में मीटर खपत एवं आंकलित खपत के बिलों में संशोधन कर बिलों में संशोधन कर बिलों को कम किया गया? (ग) प्रश्नांश (क) संदर्भित जिन उपभोक्‍ताओं की मीटर खपत एवं आं‍कलित खपत दोनों समान बताकर बिलों को दुगना दिया गया है तथा इन उपभोक्‍ताओं ने दुगनी राशि भर भी दी है, क्‍या इनकी राशि अगले बिल में समायोजित कर ली जायेगीयदि हाँ, तो ऐसे उपभोक्‍ताओं के नाम, पते सहित सूची दें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) ग्‍वालियर जिले में प्रश्‍नाधीन अवधि में बिलों की राशि में संशोधन हेतु म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के विभिन्‍न जोन/वितरण केन्‍द्र कार्यालयों में कुल 118139 शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं। उपरोक्‍तानुसार सभी शिकायतों का निराकरण कर विद्युत देयकों में राशि रू. 1451.02 लाख का संशोधन किया गया है। जोन/वितरण केन्‍द्रवार प्राप्‍त शिकायतों का विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। अत: प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न नहीं उठता।

परिशिष्ट - ''बारह''

अनुदान प्राप्‍त बाल संरक्षण संस्‍थाओं के विरूद्ध कार्यवाही

[महिला एवं बाल विकास]

38. ( क्र. 1998 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) जिला ग्‍वालियर अंतर्गत कितने बाल संरक्षण गृह संचालित हैं, जिन्‍हें शासन से वित्‍तीय अनुदान प्राप्‍त है? बाल संरक्षण गृहों का नाम एवं पता तथा वर्तमान में दर्ज बच्‍चों की संख्‍या बताए? वित्‍तीय वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में प्रश्‍न दिनांक तक शासन/जिला स्‍तर से कितनी-कितनी वित्‍तीय सहायता राशि प्रदाय की गई? बाल संरक्षण गृहवार एवं वर्षवार राशि का ब्‍यौरा देवें। (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार जिला अंतर्गत ऐसी कितनी संस्‍थाएं हैं जहाँ उनके स्‍वयं के नाम से न तो भवन है और न ही बच्‍चों को रहने की व्‍यवस्‍था है? मात्र कागजी खानापूर्ति करके घरों में संस्‍था पंजीकृत होकर चल रही है? शासन से संस्‍था के मालिकों द्वारा अनुदान प्राप्‍त किया जाकर राशि का दुरूपयोग किया जा रहा? विभागीय अधिकारियों द्वारा कब-कब ऐसी संस्‍थाओं का निरीक्षण करने वाले अधिकारी का नाम, निरीक्षण दिनांक एवं कितने-कितने बच्‍चे उपस्थित पाये गये? (ग) क्‍या विभाग ऐसी संस्‍थाएं जो कागजी खानापूर्ति से चल रही हैं एवं शासन का लाखों रूपये अनुदान के रूप में प्राप्‍त कर रहे हैं, उनके विरूद्ध कोई कार्यवाही करेगा? यदि हाँ, तो समय-सीमा से अवगत करावें? यदि नहीं, तो कारण बतावें?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) ग्वालियर जिला अंतर्गत आश्रम शांति निकेतन शिक्षा समिति द्वारा बाल गृह संचालित है। जिसे वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र "1" पर है। (ख) संस्था का स्वयं का भवन है जिसमे बच्चों के रहने की पर्याप्त व्यवस्था है। संस्था द्वारा अनुदान राशि का नियमानुसार उपयोग किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों द्वारा किये गए निरीक्षण की जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र 2 पर है। (ग) प्रश्नांश (ख) के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''तेरह''

दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना

[ऊर्जा]

39. ( क्र. 2091 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के तहत मध्‍यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों एवं गरीब परिवारों को विद्युत प्रदाय के कामों में सी.बी.सी. (सेंट्रल बिजलेंस कमीशन) द्वारा निर्धारित मापदंड़ों का उल्‍लंघन हुआ हैं? (ख) क्‍या इन अनियमितताओं की जाँच रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कार्पोरेशन लिमिटेड द्वारा की गई है? यदि हाँ, तो जाँच का विवरण दें। (ग) क्‍या भारत सरकार द्वारा विद्युत प्रदाय के कामों में लगी इन कम्‍पनियों/ ठेकेदारों द्वारा समय पर काम पूरा नहीं करने एवं अन्‍य गड़बडि़यों के कारण काम पर मिलने वाली 15 प्रतिशत की सब्सिडी रोक दी गई? (घ) क्‍या विद्युत वितरण में हुए नुकसान की भरपाई आम आदमी को बिजली टैरिफ में वृद्धि कर की गयी है? यदि हाँ, तो पूर्ण विवरण दें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी नहीं। दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के अंतर्गत प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों एवं गरीब परिवारों को विद्युत प्रदाय के कार्य टर्न-की आधार पर कराये जाने हेतु अपनाई गई टेण्‍डर प्रक्रिया सी.व्‍ही.सी. द्वारा दर्शायें गये मार्गदर्शक बिन्‍दुओं के आधार पर संपादित की गई है। (ख) जी नहीं, रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा उक्‍त संदर्भ में कोई जाँच नहीं की गई है। अत: प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) जी नहीं। (घ) जी नहीं। विद्युत दरों का निर्धारण म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा किया जाता है। आयोग द्वारा दर निर्धारण हेतु वितरण हानियों के लिये निर्धारित मापदण्‍ड़ों के आधार पर आंकलित हानियों को दृष्टिगत रखा जाता है, न कि वास्‍तविक हानियों को। निर्धारित मापदण्‍ड़ों के अनुसार आंकलित हानियों से अधिक हानि होने पर बढ़ी हुई हानि के कारण पड़ने वाले वित्‍तीय भार का उपभोक्‍ता पर कोई असर नहीं पड़ता है, अपितु यह वित्‍तीय भार वितरण कंपनी को स्‍वयं वहन करना पडता है। 

सेस उपकर वसूली

[वित्त]

40. ( क्र. 2092 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शासन द्वारा सेस उपकर विभिन्‍न वस्‍तुओं पर लगाया गया है? यदि हाँ, तो किन-किन वस्‍तुओं और सेवाओं में कितने-कितने प्रतिशत सेस कर की वसूली की जा रही है? (ख) क्‍या शासन द्वारा विद्युत, डीजल, पेट्रोल, गैस सिलेण्‍डर आदि पर भी सेस कर वसूला जा रहा है? यदि हाँ, तो कितने-कितने प्रतिशत ब्‍यौरा दें। क्‍या केन्‍द्र शासन द्वारा भी सेस उपकर रोपित किया है? यदि हाँ, तो ब्‍यौरा दें? (ग) क्‍या शासन द्वारा नर्मदा सेवा के नाम पर भी सेस उपकर लगाने की कोई योजना बनाई जा रही है यदि हाँ, तो किन-किन वस्‍तुओं और सेवाओं पर कितने-कितने प्रतिशत सेस कर रोपित किया जाएगा? (घ) गत वित्‍तीय वर्ष में सभी स्‍त्रोतों से कुल कितनी राशि सेस उपकर के तौर पर वसूली गई और इस वर्ष कुल कितने राजस्‍व की वसूली किए जाने का प्रावधान रखा गया है?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ वन विभाग अन्‍तर्गत निम्‍नानुसार वस्‍तु पर उपकर अधिरोपित है-इमारती काष्‍ठ, बांस एवं जलाउ लकडी पर उपकर अधिरोपित है। इमारती काष्‍ठ पर 3 प्रतिशत, बांस पर 3 प्रतिशत एवं जलाऊ लकड़ी पर 3 प्रतिशत वन विकास उपकर अधिरोपित है। ऊर्जा विभाग अंतर्गत राज्‍य में विद्युत कंपनी द्वारा बेची गई या प्रदाय की गई अथवा स्‍वयं उपभुक्‍त की गई विद्युत पर 15 पैसे प्रति यूनिट की दर से ऊर्जा विकास उपकर देय है, परंतु ऐसी उत्‍पादन कंपनी, जिसमें मध्‍यप्रदेश शासन का 51 प्रतिशत या उससे अधिक का हिस्‍सा हो, द्वारा यह देय नहीं है। राज्‍य में कैप्टिव उत्‍पादन सयंत्र से बेची गई या प्रदाय की गई विद्युत पर 15 पैसे प्रति यूनिट की दर से ऊर्जा विकास उपकर देय है, परंतु इन संयंत्र द्वारा स्‍वयं उपभुक्‍त विद्युत पर इससे छूट है। राज्‍य के बाहर से विद्युत ले रहे ओपन एक्‍सेस उपभोक्‍ताओं द्वारा भी 15 पैसे प्रति यूनिट की दर से ऊर्जा विकास उपकर देय है। (ख) विद्युत पर "क" अनुसार ऊर्जा विकास उपकर अधिरोपित है। (ग) जी नहीं। (घ) इमारती काष्‍ठ, बांस एवं जलाऊ लकड़ी पर गत वर्ष 2015-16 में वन विकास उपकर रूपये 50.85 करोड़ प्राप्‍त किया गया एवं वर्ष 2016-17 में रूपये 50.00 करोड़ वन विकास उपकर प्राप्‍त करने का बजट अनुमान रखा गया है। गत वित्‍तीय वर्ष (2015-16) में ऊर्जा विकास उपकर की प्राप्‍त राशि रूपये 313.13 करोड़ थी तथा इस वित्‍तीय वर्ष में रूपये 516.72 करोड़ प्राप्ति का बजट अनुमान रखा गया है।

शराब की अवैध बिक्री पर रोक

[वाणिज्यिक कर]

41. ( क्र. 2117 ) डॉ. रामकिशोर दोगने : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) हरदा जिले में कुल कितनी देशी/विदेशी शराब की शासकीय दुकानें संचालित हैं। इनमें से कितनी व कौन-कौन सी दुकानें राष्ट्रीय राज मार्ग व मुख्य सड़कों के किनारे संचालित हो रही हैं। विधानसभा क्षेत्रवार बताएं। (ख) हरदा जिले में ऐसे बहुत से ग्रामों में जहां निर्धारित शासकीय दुकानें आवंटित व संचालित नहीं हैं वहां पर संबंधित ठेकेदार द्वारा अवैध रूप से देशी/विदेशी शराब की दुकानों का संचालन एवं विक्रय किया जा रहा है? तत्संबध में विभाग द्वारा कब-कब क्या-क्या कार्यवाही की गई? (ग) शासकीय देशी एवं विदेशी शराब दुकानों का संचालन किये जाने के क्या नियम हैं तथा क्या निर्धारित मात्रा से अधिक शराब का स्टॉक किये जाने अथवा निर्धारित समय से अधिक समय तक दुकानों का संचालन कर नियमों का उल्लघंन किये जाने के संबंध में विभाग द्वारा कब-कब, क्या-क्या किस प्रकार की कार्यवाही किस अधिकारी के द्वारा की गई। (घ) वर्ष 2013-14, 14-15, 15-16 एवं वर्ष 2016-17 में प्रश्न दिनाँक तक हरदा जिले में अवैध रूप से देशी/विदेशी शराब विक्रय किये जाने के कुल कितने प्रकरण बनाये गये वर्षवार व विधान सभावार बतायें?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) वर्तमान में हरदा जिले में 12 देशी एवं 8 विदेशी कुल 20 शराब की दुकानें संचालित है। इनमें से राष्ट्रीय राजमार्ग एवं मुख्य सड़कों के किनारे संचालित दुकानें विधानसभा पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-एक अनुसार है। (ख) हरदा जिले के अंतर्गत विभाग द्वारा निष्पादित मदिरा दुकानों के लायसेंसियों/ठेकेदारों द्वारा निर्धारित अवस्थिति में ही मदिरा दुकानें स्थापित कर, संचालन किया जा रहा है। संबंधित लायसेंसी/ठेकेदार द्वारा किसी भी गांव में अवैध रूप से देशी/विदेशी मदिरा दुकानों का संचालन नहीं किया जा रहा है। यह कहना सही नहीं है कि, जिले की मदिरा दुकानों के लायसेंसियों द्वारा गांव-गांव में मदिरा दुकानों के अतिरिक्त देशी एवं विदेशी शराब बेची जा रही है। जिले के अंतर्गत ग्रामों में अवैध रूप से मदिरा विक्रय किये जाने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध आबकारी अधिनियम के तहत कार्यवाही की जा कर, आबकारी विभाग द्वारा प्रश्‍नांश दिनांक तक 1446 प्रकरण दर्ज किये गये है जिनकी सूची विधानसभा पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-दो अनुसार है। (ग) मदिरा दुकानों का संचालन मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 एवं मध्यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) क्रमांक-73 दिनांक 05.02.2016 की शर्तों एवं निबंर्धनों के अंतर्गत तथा सामान्य प्रयुक्ति नियमों/शर्तों तथा विभागीय निर्देशों के अनुरूप किया जाता है। निर्धारित स्टाक से अधिक शराब स्टॉक किये जाने एवं निर्धारित समय से अधिक समय तक दुकानों का संचालन के संबंध में विभागीय अधिकारियों द्वारा निरंतर निरीक्षण किया जाता है। उक्‍त अवधि के दौरान ऐसा कोई प्रकरण प्रकाश में नहीं आया है। (घ) वर्ष 2013-14 वर्ष 2014-15 वर्ष 2015-16 एवं वर्ष 2016-17 में प्रश्‍नांश दिनांक तक हरदा जिले में अवैध रूप से देशी/विदेशी शराब विक्रय, धारण, परिवहन एवं संग्रहण के कुल 1446 प्रकरण दर्ज किये गए है। वर्षवार व विधानसभावार जानकारी विधानसभा पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्रदो एवं तीन अनुसार है। इसके अतिरिक्‍त पुलिस द्वारा बनाये गये प्रकरणों की जानकारी विधानसभा पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-चार अनुसार है।

नमामी देवी नर्मदे यात्रा में व्यय राशि

[संस्कृति]

42. ( क्र. 2123 ) डॉ. रामकिशोर दोगने : क्या राज्‍यमंत्री, संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्य प्रदेश शासन द्वारा चलाई जा रही नमामी देवी नर्मदा यात्रा में कुल कितनी राशि व्यय होना है व प्रश्न दिनाँक तक यात्रा पर कुल कितनी राशि किस-किस मद में व्यय की गई है? (ख) नमामी देवी नर्मदा यात्रा के दौरान किन-किन स्थानों पर मुख्य मंत्री शामिल हुये व उनके द्वारा कौन-कौन सी नई घोषणाएं की गई? (ग) इस यात्रा के दौरान हरदा जिले में किन-किन नवीन घाटों अथवा पुलों का निर्माण कराये जाने की मुख्य मंत्री द्वारा घोषणा की गई?

राज्‍यमंत्री, संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) से (ग) जानकारी ए‍कत्रित की जा रही है.

दतिया जिले के आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं की नियुक्ति

[महिला एवं बाल विकास]

43. ( क्र. 2189 ) श्री प्रदीप अग्रवाल : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) दतिया जिले के सेवढ़ा विकासखण्‍ड में 2015-16 एव 2016-17 में कुल कितनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की नियुक्तियां विभाग द्वारा की गई ग्रामवार, नामवार जानकारी उपलब्‍ध करायें? (ख) कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं की नियुक्ति के संबंध में शासन के क्‍या नियम हैं, नगर पंचायत इंदरगढ़ एवं नगर पंचायत सेंवढ़ा में चयन समिति में नगर पंचायत से सदस्‍य रहेगा या नहीं यदि नहीं, तो इस संबंध में शासन के दिशा निर्देशों की जानकारी उपलब्‍ध करायें? (ग) नियुक्ति के समय जो दस्‍तावेज अभ्‍यार्थियों द्वारा लगाये गये उनकी जाँच किन-किन अधिकारियों द्वारा की गई? जिनकी नियुक्ति की गई एवं जो दूसरे नंबर पर रहे उनके समस्‍त दस्‍तावेजों की छायाप्रति उपलब्‍ध कराई जावे? (घ) क्‍या यह सत्‍य है कि विभाग के अधिकारियों द्वारा फर्जी दस्‍तावेज बिना जाँच किये मान्‍यकर अपात्र व्‍यक्तियों को नियुक्ति दी गई व पात्र व्‍यक्ति को नीचे किया गया है यदि नहीं, तो संपूर्ण प्रकरण की किसी वरिष्‍ठ अधिकारी से प्रश्‍नकर्ता के समक्ष जाँच कराई जावेगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) दतिया जिले के सेवढ़ा विकासखंड अन्तर्गत वर्ष 2015-16 में 03 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं 17 आंगनवाड़ी सहायिकाओं की तथा वर्ष 2016-17 में 12 आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं 25 आंगनवाड़ी सहायिकाओं की नियुक्ति की गई। ग्रामवार, नामवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (ख) विभाग के पत्र क्र./एफ 3-2/06/50-2 भोपाल दिनांक 10/07/2007 द्वारा निर्धारित निर्देशों के अनुसार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/सहायिकाओं एवं उप आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की नियुक्ति की जाती है। बाल विकास परियोजना सेवढ़ा एवं इन्दरगढ़ ग्रामीण प्रकृति की होने से चयन समिति में नगर पंचायत के सदस्यों को नहीं रखा गया है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता/ सहायिका नियुक्ति निर्देश की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (ग) नियुक्ति के समय अभ्यर्थियों द्वारा लगाये गये दस्तावेजों की जाँच खण्ड स्तरीय चयन समिति तथा जिला स्तरीय दावा आपत्ति निवारण समिति द्वारा की गई है। नियुक्ति प्राप्त आवेदक एवं द्वितीय स्थान प्राप्त आवेदक के समस्त दस्तावेजों की छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (घ) जी नहीं। शासन के दिशा निर्देशों के तहत पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी गई है। अतः शेष का प्रश्न ही उपस्थित नहीं होता है।

नरसिंहगढ़ उपकोषालय को बन्‍द करना

[वित्त]

44. ( क्र. 2208 ) श्री गिरीश भंडारी : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शासन द्वारा म.प्र. स्थित तहसील स्‍तर के उपकोषालय को बन्‍द करने के आदेश दिये गये हैं? यदि हाँ, तो आदेश की प्रति उपलब्‍ध करावें। (ख) प्रश्‍न की कंडिका (क) की उपलब्‍ध जानकारी अनुसार नरसिंहगढ़ स्थित उपकोषालय को किस नियम के अन्‍तर्गत बन्‍द किया गया? आदेश की प्रति उपलब्‍ध करायें? नरसिंहगढ़ के उपकोषालय कार्यालय को कब से पुन: चालू किया जावेगा? समय सीमा बतावें? नहीं तो? कारण बतावें।

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी नहीं। अत: शेष प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है। (ख) उत्‍तरांश "क'' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

आंगनवाड़ी केन्‍द्र खोलना

[महिला एवं बाल विकास]

45. ( क्र. 2209 ) श्री गिरीश भंडारी : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत नवीन आंगनवाड़ी/मिनी आंगनवाड़ी केन्‍द्र खोलने के क्‍या नियम है? (ख) नरसिंहगढ़ विधान सभा क्षेत्र में कुल कितने आंगनवाड़ी/मिनी आंगनवाड़ी केन्‍द्र हैं? ग्राम/नगरवार सूची उपलब्‍ध करावें? (ग) प्रश्‍न की कंडिका (क) की उपलब्‍ध नियम अनुसार नरसिंहगढ़ विधान सभा क्षेत्र में ऐसे कितने ग्राम/नगर हैं, जहां आंगनवाड़ी/मिनी आंगनवाड़ी केन्‍द्र खोलने के नियम में आते हैं? सूची उपलब्‍ध करावें? (घ) प्रश्‍न की कंडिका (ग) उपलब्‍ध जानकारी अनुसार उपरोक्‍त स्‍थानों पर कब तक नवीन आंगनवाड़ी/मिनी आंगनवाड़ी केन्‍द्र खोले जायेंगे?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) भारत सरकार द्वारा आंगनवाड़ी केन्द्र/मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र स्वीकृत करने हेतु जनसंख्या के निम्नानुसार मापदण्ड निर्धारित किये गये है :-

(अ)

आंगनवाड़ी केन्‍द्र :-

 

1.1

ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र हेतु :-

400-800 (एक केन्द्र)

 

 

800-1600 (दो केन्द्र) -

 

 

1600- 2400 (तीन केन्द्र)

 

 

(इसके पश्चात् प्रति 800 की जनसंख्या पर एक केन्द्र)

1.2

आदिवासी क्षेत्र हेतु :-

300-800 (एक केन्द्र)

(ब)

मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र :-

 

1.1

ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र हेतु :-

150-400 (एक मिनी केन्द्र)

1.2

आदिवासी क्षेत्र हेतु :-

150-300 (एक मिनी केन्द्र)

(ख) नरसिंहगढ़ विधानसभा क्षेत्र अन्तर्गत परियोजना नरसिंहगढ़, कुरावर एवं पचोर में 425 आंगनवाड़ी केन्द्र एवं 42 मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र है। ग्रामवार, नगरवार सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (घ) भारत सर