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मध्य प्रदेश विधान सभा


प्रश्नोत्तर-सूची
फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र


गुरूवार, दिनांक 03 मार्च, 2016


भाग-1
तारांकित प्रश्नोत्तर


 

( वर्ग 2 : सामान्य प्रशासन, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, संस्कृति, पर्यटन, प्रवासी भारतीय, नगरीय विकास एवं पर्यावरण, जल संसाधन, वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, जनसंपर्क, खनिज साधन)

मुलताई विकास योजना प्रारूप का प्रकाशन

1. ( *क्र. 3987 ) श्री चन्‍द्रशेखर देशमुख : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या वर्ष 2008 से नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय द्वारा मुलताई विकास योजना के अंतर्गत वर्ष 2021 के लिये विकास प्‍लान तैयार किया गया था? यदि हाँ, तो विकास प्‍लान पर विभाग द्वारा आज दिनांक तक क्‍या-क्‍या कार्यवाही कब-कब की गयी है? उक्‍त में क्‍या नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय एवं मुलताई नगर पालिका परिषद द्वारा दावे आपत्ति आमंत्रित की गयी थी? हाँ तो विभाग द्वारा निराकरण किया गया? उक्‍त में मुलताई वासियों द्वारा कौन-कौन से सुझाव, आपत्तियां प्रस्‍तुत की गयी थीं? क्‍या शासन द्वारा इनका निराकरण करने के लिये विभागीय स्‍तर पर प्रयास किये गये हैं? यदि नहीं, तो निराकरण के लिये क्‍या कोई आदेश जारी किये जायेंगे? (ख) उक्‍त में दावे आपत्ति पर किसी प्रकार का निर्णय नहीं लिया गया है और राजपत्र में प्रकाशन नहीं किया गया है, तो फिर नगर एवं ग्राम निवेश कार्यालय किस आधार पर मुलताई शहर में अनुमति शुल्‍क ले रहे हैं एवं शासन द्वारा उक्‍त विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र क्‍यों मांगा जा रहा है? उक्‍त आदेश निरस्‍त करने के आदेश कब तक जारी किये जायेंगे?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। मुलताई विकास योजना प्रारूप का प्रकाशन दिनांक 12.10.2009 को किया गया है। म.प्र शासन आवास एवं पर्यावरण विभाग की अधिसूचना दिनांक 22.02.2011 द्वारा मुलताई विकास योजना का अनुमोदन किया गया है। जी हाँ। आपत्ति/सुझाव आमंत्रित कर निराकरण किया गया है। प्राप्त आपत्ति/सुझाव पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। संचालनालय, नगर तथा ग्राम निवेश से प्राप्त प्रतिवेदन पर विभाग द्वारा विचारोपरान्त मुलताई विकास योजना का अनुमोदन किया गया है। (ख) मुलताई प्रारूप विकास योजना पर प्राप्त आपत्ति/सुझाव की सुनवाई म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 17-क (1) की गठित समिति द्वारा सुनवाई पश्चात् संचालनालय, नगर तथा ग्राम निवेश भोपाल द्वारा प्रेषित अभिमत पर विभाग द्वारा विचारोपरांत विकास योजना का अनुमोदन अधिसूचना क्रमांक एफ-3-82-2009-32 दिनांक 22.02.2011 को किया गया, जो म.प्र. राजपत्र भाग-1 क्रमांक 467 में दिनांक 04.03.2011 को प्रकाशित हुआ है। आवास एवं पर्यावरण विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ 3-131-2012-32 भोपाल दिनांक 26.12.2012 (म.प्र. राजपत्र दिनांक 04.01.2013) द्वारा अधिनियम 1973 की धारा 24 (3) के प्रावधान अंतर्गत मुलताई निवेश क्षेत्र पर म.प्र. भूमि विकास नियम 2012 लागू है। नियम 2012 के नियम 21 में शुल्क लेने का प्रावधान है। अधिनियम की धारा 19 (1) के अंतर्गत विकास योजना अनुमोदित होने के पश्चात् अधिनियम की धारा 26 के अंतर्गत अनुज्ञा के बिना विकास प्रतिबंधित है। उपरोक्त समस्त कार्यवाहि‍यां विधि अनुसार समस्त प्रक्रिया का पालन कर की गई हैं, अतः किसी आदेश को निरस्त करने का प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

कटनी जिलांतर्गत फ्लेटों का निर्माण/विक्रय

2. ( *क्र. 3338 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य द्वारा आयुक्‍त, नगर पालिका निगम कटनी से पत्र क्रमांक 2489, दिनांक 26.11.2015 से बिन्‍दु क्रमांक 1 से 8 तक की जानकारी चाही गई है? उक्‍त पत्र लिखने के बाद भी कार्यालयीन पत्र क्रमांक 2645 दिनांक 22.12.2015 लिखा गया है, किन्‍तु जानकारी नहीं दी गई है और न ही किसी प्रकार का उत्‍तर दिया गया? (ख) प्रश्‍नांश (क) यदि हाँ, तो उक्‍त जानकारी उपलब्‍ध कराने के साथ ही जानकारी न देने के आदी नगर निगम कटनी के उत्‍तरदायी अमले के विरूद्ध शासन क्‍या कार्यवाही करेगा? (ग) द्वारका सिटी कॉलोनाइजर द्वारा कटनी जिलान्‍तर्गत कितने फ्लेटों का निर्माण कर लिया है तथा उसमें से कितने विक्रय किये हैं, कितने फ्लेट निर्माण हेतु शेष हैं? आर्थिक रूप से कमजोर व्‍यक्ति के कोटे के तहत किन-किन को भवन विक्रय किये गये हैं?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। चाही गई जानकारी वृहद स्‍वरूप की थी, जिसे कार्यालयीन पत्र क्रमांक 6969/लो.नि.वि./2016 कटनी, दिनांक 12.02.16 के द्वारा माननीय विधायक को प्रेषित कर दी गई है। (ख) उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) कॉलोनाईजर द्वारा 18 फ्लेट निर्माणाधीन हैं, विक्रय किये गये फ्लेटों की संख्‍या निरंक है, 82 फ्लेटों का निर्माण शेष है। आर्थिक रूप से कमजोर एवं निम्‍न वर्ग के व्‍यक्तियों के लिए आरक्षित भूखण्‍ड/भवनों का विक्रय नहीं किया गया है।

अवैध खनन/परिवहन पर कार्यवाही

3. ( *क्र. 2687 ) श्री मधु भगत : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बालाघाट जिले में सड़क निर्माण, भवन निर्माण, हाइवे, टू-लेन, फोर-लेन, प्रधानमंत्री सड़क योजना इत्‍यादि के निर्माण में उपयोग हेतु कौन-कौन सी फर्मों, कंपनियों, संस्‍थाओं ने गिट्टी, पत्‍थर, बोल्‍डर, मुरम, रेत खनन की अनुमति 01.4.2011 से प्रश्‍न दिनांक तक प्राप्‍त की थी और किसने-किसने, कितनी राशि, रॉयल्‍टी के शुल्‍क के रूप में जमा की? (ख) क्‍या अवैध खनन, परिवहन, स्‍वीकृत स्‍थान से अन्‍यत्र खनन की शिकायतें प्राप्‍त हुईं? उनका विवरण एवं जाँच का विवरण उपलब्‍ध करावें। (ग) किस-किस की शिकायतें विचाराधीन हैं और कौन-कौन सी किस कारण नस्‍तीबद्ध की गईं हैं?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नाधीन जिले में प्रश्‍नाधीन अवधि में सड़क निर्माण कार्य के लिए जिन कंपनियों/फर्मों/संस्‍थाओं को मुरूम, पत्‍थर, गिट्टी के उत्‍खनन की अनुमति प्रदान की गई है एवं जो रॉयल्‍टी राशि जमा की गई है। उसका विवरण संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) प्रश्‍नांश '' में उल्‍लेखित एक फर्म के विरूद्ध प्रश्‍नानुसार दो शिकायतें प्राप्‍त हुईं थीं, जिसके संबंध में प्रश्‍नानुसार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) प्रश्‍नांश '' में दी गई जानकारी अनुसार दोनों शिकायतों में अवैध उत्‍खनन का प्रकरण दर्ज कर शिकायतों का निराकरण किया गया है। अत: नस्‍तीबद्ध किये जाने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''एक''

झाबुआ जिलांतर्गत देशी/विदेशी मदिरा दुकानों की नीलामी

4. ( *क्र. 3929 ) कुमारी निर्मला भूरिया : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) झाबुआ जिले में वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2016-17 में देशी एवं विदेशी मदिरा की कितनी दुकानें कहाँ-कहाँ संचालित हैं तथा ये दुकानें किन-किन ठेकेदारों को नीलाम की गईं? नाम पते सहित अवगत करावें। (ख) प्रश्‍नांश (क) में नीलाम की गई दुकानें कितनी बोली में नीलाम हुईं? बोली लगाने वालों के नाम राशि सहित बतावें। नीलामी उपरांत कहाँ-कहाँ की दुकानें किस-किस ठेकेदार को किस दिनांक से संचालन हेतु अनुमति दी गई? (ग) क्‍या ठेकेदार को नीलाम स्‍थान के बाहर गांवों में रखकर मदिरा बिकवाने का अधिकार है? यदि नहीं, तो ऐसे कितने गांव हैं, जहां पर देशी एवं विदेशी मदिरा की दुकानें चलाई जा रही हैं? यदि अधिकार क्षेत्र से बाहर दुकानें संचालित हैं, तो विभाग उस पर क्‍या कार्यवाही कर रहा है? (घ) मदिरा दुकान संचालन हेतु स्‍थल चयन के क्‍या मापदण्‍ड हैं? क्‍या झाबुआ जिले में सभी मदिरा दुकान स्‍थल मापदण्‍ड अनुसार हैं? सार्वजनिक स्‍थल से दुकान हटाने हेतु विभाग को कितनी शिकायतें (क) अवधि में प्राप्‍त हुईं हैं तथा उस पर क्‍या कार्यवाही की गई?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) वर्ष 2013-14 एवं वर्ष 2014-15 से संबंधित जानकारी क्रमश: पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''एक'' एवं ''दो'' अनुसार है। वर्ष 2016-17 के लिये देशी एवं विदेशी मदिरा दुकानों का निष्‍पादन अभी प्रक्रिया में है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''एक'' एवं ''दो'' के कॉलम 1 से 9 में दुकानवार अंकित है। (ग) मध्‍यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के अंतर्गत निर्धारित स्‍थान के अतिरिक्‍त ऐसी कोई देशी/विदेशी मदिरा की दुकानें अन्‍य किसी गांव में संचालित नहीं की जा रही हैं। कोई भी दुकान अधिकार क्षेत्र के बाहर संचालित नहीं की जा रही है अर्थात लायसेंसी को आवंटित जिस स्‍थान, गांव के लिये स्‍वीकृत की गई है, वही संचालित की जाती है। यदि लायसेंस परिसर के अतिरिक्‍त अन्‍य स्‍थान, कब्‍जे की निर्धारित मात्रा से अधिक मदिरा अवैध रूप से धारण, विक्रय की जाती है तो संबंधित के विरूद्ध धारा 34 मध्‍यप्रदेश आबकारी अधिनियम के अंतर्गत प्रकरण पंजीबद्ध कर न्‍यायालय में प्रस्‍तुत किये जाते हैं। (घ) जिला झाबुआ की देशी/विदेशी मदिरा की दुकानें सामान्‍य प्रयुक्ति नियमों के नियम-1 में वर्णित मापदण्‍डों के अनुसार आपत्तिरहित स्‍थल पर संचालित की जा रहीं हैं। वर्ष 2013-14 में सार्वजनिक स्‍थल से विदेशी मदिरा दुकान थांदला को हटाने हेतु विभाग को 01 शिकायत प्राप्‍त हुई है। विदेशी मदिरा दुकान थांदला वर्ष 2002-03 से परंपरागत श्रेणी में एवं धार्मिक स्‍थल से 50 मीटर से अधिक की दूरी पर स्थित है, इस कारण दुकान को नहीं हटाया गया।

प्रमुख अभियंता/मुख्‍य अभियंता के स्‍वीकृत पद

5. ( *क्र. 4076 ) श्री प्रदीप अग्रवाल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. शासन जल संसाधन विभाग भोपाल के अंतर्गत संरचना अनुसार प्रमुख अभियंता/मुख्‍य अभियंता/कार्यपालन यंत्री के कुल कितने पद स्‍वीकृत हैं तथा उनके विरूद्ध कितने पद भरे जाकर कार्यरत हैं? (ख) म.प्र. शासन जल संसाधन विभाग में मुख्‍य अभियंता के स्‍वीकृत पदों के विरूद्ध संरचना अनुसार कितने पदों पर नियमित रूप से अधिकारी कार्यरत हैं तथा कितने अन्‍य प्रकार से संभावित किये गये हैं? उक्‍त अधिकारियों में कितने सेवा निवृत्‍त होने के पश्‍चात् भी अन्‍य प्रकार के संयोजन से कार्यरत हैं? (ग) प्रश्‍नांश (ख) उल्‍लेखित पदस्‍थापना के कारण अन्‍य कनिष्‍ठ अधिकारियों की वरीयता एवं पदोन्‍नति प्रभावित हो रही है? यदि हाँ, तो क्‍यों? (घ) क्‍या विभाग में पदस्‍थ अधिकारियों को एक ही नीति से वरीयता एवं पदोन्‍नति प्रदान की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक, यदि नहीं, तो क्‍यों?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) विभाग के अंतर्गत संरचना अनुसार प्रमुख अभियंता 01, मुख्‍य अभियंता 13 एवं कार्यपालन यंत्री के 204 पद स्‍वीकृत हैं। इन स्‍वीकृत पदों के विरूद्ध 01 प्रमुख अभियंता, 12 मुख्‍य अभियंता, 183 कार्यपालन यंत्री कार्यरत हैं। (ख) मुख्‍य अभियंता के स्‍वीकृ‍त पदों में से एक पद पर अधीक्षण यंत्री को मुख्‍य अभियंता का प्रभार दिया गया है। सेवानिवृत्ति पश्‍चात कोई मुख्‍य अभियंता संविदा पर नियुक्‍त नहीं किया गया है। सेवानिवृत्‍त मुख्‍य अभियंता, श्री एस.के. खरे की विशेषज्ञ सेवाएं आवश्‍यकतानुसार वृहद बांध निर्माण के लिए सलाहकार के रूप में लेने की व्‍यवस्‍था की गई है। पूर्णकालिक नियोजन नहीं है। (ग) एवं (घ) जी नहीं। पदों का रिक्‍त होना और रिक्‍त पदों के लिए पदोन्‍नति की जाना एक सतत् प्रक्रिया है। मध्‍यप्रदेश जल संसाधन अभियांत्रिकी तथा भौमिकी सेवा (राजपत्रित) भर्ती नियम, 1968 के तहत सीधी भर्ती एवं पदोन्‍नति करने की सुस्‍पष्‍ट व्‍यवस्‍था है।

परियोजनाओं का निर्माण

6. ( *क्र. 1847 ) श्री मुकेश नायक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या गुजरात, महाराष्‍ट्र और राजस्‍थान राज्‍यों के साथ मध्‍यप्रदेश नर्मदा घाटी की जिन संयुक्‍त बांध, सिंचाई और जल विद्युत परियोजनाओं में हिस्‍सेदारी है, उनमें मध्‍यप्रदेश अपने हिस्‍से की धनराशि समय पर नहीं चुका सका है? (ख) पिछले दस वर्षों में संयुक्‍त क्षेत्र की नर्मदा घाटी सिंचाई और जल विद्युत परियोजनाओं में मध्‍यप्रदेश ने अपने हिस्‍से की कितनी धनराशि का भुगतान कर दिया है और फरवरी 2016 की स्थिति के अनुसार कुल कितनी धनराशि बकाया है? (ग) संयुक्‍त क्षेत्र की गरूड़ेश्‍वर जल विद्युत परियोजना में मध्‍यप्रदेश को कितनी धनराशि चुकानी थी और कितनी धनराशि चुकायी गयी? (घ) क्‍या गरूड़ेश्‍वर परियोजना में मध्‍यप्रदेश 240 करोड़ रूपयों की राशि चुका नहीं पाया, इसलिये धन के बदले गुजरात ने पूरी परियोजना पर अपना अधिकार कर लिया है? हाँ या न, दोनों स्थिति में फरवरी 2016 के अनुसार इस परियोजना की स्थिति क्‍या है और इससे मध्‍यप्रदेश को क्‍या लाभ है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। (ख) पिछले 10 वर्षों अर्थात 2005-06 से 2015-16 में मध्‍यप्रदेश ने अपने हिस्‍से के कुल रूपये 383.76 करोड़ का भुगतान गुजरात राज्‍य को किया है। इसके साथ-साथ सरदार सरोवर परियोजना के परिचालन एवं संधारण व्‍यय हेतु रूपये 75.9839 करोड़ का भुगतान भी किया गया है। इस प्रकार कुल राशि रूपये 459.7439 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। माह फरवरी तथा माह मार्च में इंदिरा सागर परियोजना यूनिट 01 तथा सरदार सरोवर परियोजना के अंतर्गत पुनर्वास कार्यों में हुये व्‍यय के समायोजन एवं डूब प्रभावित शासकीय राजस्‍व एवं वन भूमि की लागत तय होने के पश्‍चात ही लेखा अं‍तिम होगा। (ग) एवं (घ) गरूड़ेश्‍वर वीयर से मध्‍यप्रदेश को लाभ-हानि का तुलनात्‍मक अध्‍ययन किया जा रहा है और तदनुसार ही इसमें सहभागिता पर निर्णय लिया जाएगा। अत: शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। 

मांझी जाति को दतिया जिले में अनुसूचित जन‍जाति का दर्जा

7. ( *क्र. 2079 ) श्रीमती शकुन्‍तला खटीक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ता.प्र.संख्‍या 06 (क्रमांक 418) दिनांक 07 दिसम्‍बर, 2015 के भाग (क) में करैरा जिला शिवपुरी की गैस एजेंसी अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में स्‍वीकृत होने तथा भाग (ग) के उत्‍तर में नायब तहसीलदार दतिया द्वारा श्रीमती नीति पत्नि श्री अनिल कुमार निवासी ग्राम एरई जिला दतिया को अनुसूचित जनजाति श्रेणी के प्रमाण पत्र जारी किए जाने की जानकारी दी थी? यदि हाँ, तो जाति प्रमाण पत्र की प्रति उपलब्‍ध करावें? (ख) क्‍या अनुसूचित जनजाति के जाति प्रमाण पत्र नायब तहसीलदार स्‍तर के अधिकारी को जारी करने के अधिकार हैं? (ग) यदि मांझी जाति को दतिया जिले में अनुसूचित जन‍जाति माना गया है, तो क्‍या मांझी जाति के अन्‍य परिवारों को भी अनुसूचित जनजाति का लाभ दिया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। जाति प्रमाण पत्र की प्रति संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों को जाति प्रमाण पत्र जारी किये जाने हेतु ज्ञापन दिनांक 08.1.1962 द्वारा राजपत्रित अधिकारी, तहसीलदार या फारेस्ट रेंजर द्वारा जारी प्रमाण पत्र स्‍वीकार करने के निर्देश थे। परिपत्र दिनांक 10 अप्रैल, 1975 द्वारा माननीय मंत्रीगणों द्वारा दिया गया प्रमाण पत्र स्वीकार किया जाने के निर्देश जारी किए गए। परिपत्र दिनांक 26.7.1984 द्वारा उपरोक्त के अतिरिक्त नायब तहसीलदारों को भी जिन्हें भू-राजस्व संहिता के अंतर्गत तहसीलदारों के अधिकारों से वेष्टित किया गया हो, को भी जाति प्रमाण पत्र जारी किये जाने हेतु अधिकृत किया गया व परिपत्र दिनांक 26 मई, 1987 द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी करने हेतु केवल 1. कलेक्टर/एडीशनल कलेक्टर/डिप्टी कलेक्टर/एस.डी.ओ./ सबडिवीज़नल मजिस्ट्रेट/सिटी मजिस्ट्रेट। 2. तहसीलदार 3. नायब तहसीलदार 4. परियोजना प्रशासक/अधिकारी (वृहद्ध/मध्यम/लघु) एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना अधिकृत किया गया। विभागीय परिपत्र दिनांक 01.8.1996 की कंडिका 1 अनुसार अनुसूचित जाति, जनजाति के सदस्यों को स्थायी प्रमाण पत्र जिलाध्यक्ष/अपर जिलाध्यक्ष/उप जिलाध्यक्ष/अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को अधिकृत किया गया है। वर्तमान में विभागीय परिपत्र दिनांक 13.1.2014 द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी करने हेतु अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) को पदाभिहित अधिकारी घोषित किया गया है। (ग) भारत सरकार द्वारा दिनांक 19.11.2000 को संविधान (अनुसूचित जनजातियां) आदेश 1950 में किए गए संशोधन के माध्‍यम से मध्‍यप्रदेश के लिये जारी अनुसूचित जनजातियों की सूची में अनुक्रमांक 29 पर मांझी जाति को अधिसूचित किया गया है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। 

परिशिष्ट - ''दो''

अस्‍थायी शौचालयों का निर्माण

8. ( *क्र. 1259 ) डॉ. मोहन यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिंहस्‍थ 2016 में पड़ाव स्‍थलों पर बनाये जा रहे अस्‍थायी शौचालयों के संबंध में निर्माण एवं क्रय की गई सामग्री के संबंध में किन-किन की शिकायतें प्राप्‍त हुईं? प्राप्‍त शिकायतों पर की गई कार्यवाही आदि की जानकारी देते हुये उक्‍त निर्माण कार्य कब तक पूर्ण होना है? (ख) क्‍या शौचायल के निर्माण में गुणवत्‍ताविहीन कार्य किया जा रहा है एवं शौचालय की सीट भी हल्‍के स्‍तर की क्रय की गई है, जिसके कारण से सिंहस्‍थ महापर्व के पूर्ण होने के पूर्व ही उक्‍त अस्‍थायी शौचालय गिरने की संभावना है? यदि हाँ, तो इसके लिये कौन दोषी हैं? दोषियों के विरूद्ध कब तक कार्यवाही की जावेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) सिंहस्‍थ-2016 के पड़ाव स्‍थलों पर बनाये जा रहे अस्‍थाई शौचालयों के संबंध में कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। उक्‍त निर्माण कार्य को 31 मार्च, 2016 तक पूर्ण होना संभावित है। (ख) जी नहीं। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

छतरपुर जिले में रेत खदानों से खनन/परिवहन

9. ( *क्र. 4121 ) श्रीमती रेखा यादव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) छतरपुर जिले में गत दो वर्षों में किस-किस रेत खदान से कितनी रेत का खनन एवं परिवहन किया गया है, कौन-कौन सी रेत खदान किन कारणों से किस दिनांक से बंद है? (ख) रेत की खदानों के बंद होने के कारण रेत उपलब्‍ध करवाए जाने की विभाग ने क्‍या वैकल्पिक व्‍यवस्‍था की है? यदि नहीं, की गई तो कारण बतावें? (ग) गत दो वर्षों में जिले में रेत के अवैध खनन एवं अवैध परिवहन के कितने प्रकरण बनाए जाकर कितनी रेत जप्‍त की गई, कितना अर्थदण्‍ड वसूल किया गया। (घ) रेत की खदान प्रारंभ किए जाने के संबंध में क्‍या कार्यवाही कब तक की जावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) छतरपुर जिले में विगत 02 वर्षों में रेत खनिज की 01 नीलाम खदान 03 अस्‍थायी अनुज्ञा पत्र स्‍वीकृत किए गए हैं, जिसका विवरण संलग्‍न परिशिष्ट पर है। संलग्‍न परिशिष्ट में दर्शित नीलाम रेत खदान से लगभग 44416 घनमीटर रेत का उत्‍खनन कर परिवहन किया गया है। संलग्‍न परिशिष्ट के क्रमांक-2 में उल्‍लेखित अस्‍थायी अनुज्ञा पत्र क्षेत्र से 4650 घनमीटर रेत एवं संलग्‍न परिशिष्ट के क्रमांक 3 में दर्शित अस्‍थाई अनुज्ञा क्षेत्र से लगभग 5043 घनमीटर रेत का उत्‍खनन कर परिवहन किया गया है। संलग्‍न परिशिष्ट में क्रमांक 12 में उल्‍लेखित नीलाम खदान/ अस्‍थायी अनुज्ञा पत्र की अवधि समाप्‍त होने से रेत खदान बंद है। संलग्‍न परिशिष्ट के क्रमांक 3 में उल्‍लेखित अस्‍थायी अनुज्ञा पत्र में अवधि शेष होने के कारण रेत खदान चालू है। संलग्‍न परिशिष्ट के क्रमांक 4 में दर्शित अस्‍थायी अनुज्ञा पत्र क्षेत्र में 'सिया' से पर्यावरणीय अनुमति प्राप्‍त न होने के कारण अभी कार्य प्रारंभ नहीं किया गया है। (ख) आसपास के जिलों से वैधानिक रूप से स्‍वीकृत होकर संचालित रेत खदानों से रेत क्रय करने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। अत: वैकल्पिक व्‍यवस्‍था किये जाने जैसी स्थिति नहीं है। (ग) गत दो वर्षों में रेत के अवैध खनन के 10 प्रकरण मात्रा 34706 घनमीटर के बनाये जाकर रूपए 143943560/- अर्थदण्‍ड प्रस्‍तावित कर प्रकरण संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों के न्‍यायालयों में निराकरण हेतु भेजे गए हैं एवं अवैध भण्‍डारण के 45 प्रकरण रेत मात्रा 19408 घनमीटर जप्‍त कर प्रकरणों में प्रस्‍तावित अर्थदण्‍ड रूपए 45420300/- किया जाकर प्रकरण संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों के न्‍यायालय में भेजे गये हैं एवं 1 प्रकरण में रूपए 2,55,000/- अर्थदण्‍ड राशि वसूल की गई है। अवैध परिवहन के 573 प्रकरण बनाए जाकर रूपए 13287910/- अर्थदण्‍ड वसूल किया गया है। (घ) रेत की खदानें जो ई-आक्‍शन से नीलाम हुईं हैं, उन बोलीदारों को सैद्धांतिक अनुमति जारी कर 'सिया' से पर्यावरणीय स्‍वीकृति प्राप्‍त करने हेतु निर्देशित किया गया है। 'सिया' से पर्यावरणीय स्‍वीकृति प्राप्‍त होने के उपरांत नियमानुसार रेत खदानें प्रारंभ की जावेंगी।

परिशिष्ट - ''तीन''

अशोकनगर जिलांतर्गत रेत खदानों की नीलामी

10. ( *क्र. 2871 ) श्री गोपीलाल जाटव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं वर्ष 2015-16 में अशोकनगर जिले में कितनी लीजें दी गईं और कितनी नीलामी बोली में गौण खनिज नीलाम की गई? (ख) क्‍या नीलाम की गई रेत खदानों का एग्रीमेंट हुआ है? यदि नहीं, तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्‍या कार्यवाही की जावेगी? (ग) उक्‍त नीलाम की गई रेत खदानों पर मशीन लगाकर सिंध नदी और बेतवा पर अवैध उत्‍खनन कब तक रोका जावेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नाधीन जिले में प्रश्‍नांकित अवधि में 3 लीजें दी गई हैं। वर्ष 2013-14 में 04 रेत खदानें, 02 पत्‍थर खदानें नीलाम की गईं हैं। वर्ष 2014-15 में कोई खदान नीलाम नहीं की गई। वर्ष 2015-16 में 05 रेत एवं 01 बोल्‍डर पत्‍थर की खदान नीलाम की गई है। वर्ष 2013-14 एवं वर्ष 2014-15 में खदानों की नीलामी नहीं की गई है। खदानों की नीलामी की बोली के संबंध में जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। प्रश्‍नांश '' में दिये उत्‍तर अनुसार वर्ष 2013-14 एवं वर्ष 2015-16 में नीलाम की गई रेत की खदानों का अनुबंध नहीं हुआ है। इसका कारण संलग्‍न परिशिष्‍ट में दर्शाया गया है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।
(ग) वर्ष 2013-14 में नीलाम की गई खदानें बेतवा नदी पर नहीं है, बल्कि सहायक नदियों पर हैं। उक्‍त नदियों में कोई अवैध उत्‍खनन का प्रकरण नहीं पाया गया। वर्ष 2015-16 में नीलाम की गई 05 रेत खदानों में से नीलाम खदान ग्राम सोबत के समीप सिंध नदी से लगे ग्राम सुनेरा में रेत निकालने पर अवैध उत्‍खनन का प्रकरण अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) अशोक नगर द्वारा बनाया गया है, जिसे कलेक्‍टर न्‍यायालय में निराकरण हेतु प्रस्‍तुत किया गया है। शेष नीलाम खदानों पर निगरानी रखी जा रही है। बेतवा नदी पर कोई रेत खदान वर्तमान में नीलाम नहीं की गई है।

परिशिष्ट - ''चार''

मांडवी एवं खोडाना तालाब कार्य योजना की स्‍वीकृति

11. ( *क्र. 3509 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विगत वर्षों में जावरा विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत मांडवी एवं खोडाना तालाब कार्य योजनाएं क्षेत्र सिंचित रकबा बढ़ाए जाने हेतु एवं जल संकट की गंभीरता को दृष्टिगत रख बनाई गई थी? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या मांडवी एवं खोडाना तालाब कार्य योजनाएं शासन/विभागीय संपूर्ण सर्वे एवं नियमानुसार कार्यवाहियों को पूर्ण कर दोनो योजनाओं को स्‍वीकृति दी जाकर प्रारंभ किया जाना था? क्‍या कारण रहे कि ये प्रारंभ नहीं हुई?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। माण्‍डवी तालाब, जिला रतलाम की प्रशासकीय स्‍वीकृति दिनांक 27.06.2007 को रू. 111.84 लाख की एवं खोडाना परियोजना जिला मंदसौर की प्रशासकीय स्‍वीकृति दिनांक 07.08.2007 को रू. 819.18 लाख की प्रदान की गई थी। खोडाना परियोजना एक नि‍म्‍मजित तालाब है, जिसका मूल उद्देश्‍य भू-जल स्‍तर को बढ़ाना होकर वर्षा ऋतु उपरांत तालाब खाली कर तालाब के तल में कृषि की जाना है। खोडाना परियोजना की प्रति हेक्‍टेयर लागत निर्धारित मापदण्‍ड से अधिक हो गई थी। अत: परियोजना की प्रशासकीय स्‍वीकृति दिनांक 16.06.2011 को निरस्‍त की गई। माण्‍डवी परियोजना के डूब क्षेत्र में नदी घाटी योजना के अंतर्गत ग्रामीण यांत्रिकी विभाग द्वारा निर्मित एक परकोलेशन तालाब आने से परियोजना तकनीकी मापदण्‍ड पर साध्‍य नहीं रही। अत: शेष प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता है।

नगर पालिका परिषद, गुना द्वारा स्‍वीकृत प्रस्‍ताव

12. ( *क्र. 2773 ) श्री अजय सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या किसी नगर पालिका परिषद को राजपत्र में प्रकाशित वार्ड सीमा से बाहर स्‍थायी निर्माण कार्य करने का अधिकार है? (ख) क्‍या नगर पालिक परिषद को निजी स्‍वामित्‍व की भूमि, बिना अधिग्रहण किए नजूल भूमि पर बिना किसी पूर्व अनुमति के अन्‍य प्रयोजन से स्‍थायी निर्माण कार्य करने का अधिकार प्राप्‍त है? क्‍या ऐसे सभी निर्माण के पूर्व टाउन एवं कंट्री प्‍लानिंग की अनुमति आवश्‍यक है? (ग) क्‍या नगर पालिका परिषद, गुना के साधारण सम्‍मेलन दिनांक 24.02.15 के एजेन्‍डा क्र. 1 के बिन्‍दु क्र. 16 (व्‍यय लगभग 20 लाख) व बिन्‍दू क्र. 27 (व्‍यय लगभग 10 लाख), बिन्‍दु क्रं.32 (व्‍यय 30 लाख) तथा साधारण सम्‍मेलन के एजेन्‍डा-3 दिनांक 19.10.15 के बिन्‍दु क्र.5 (व्‍यय 40 लाख) एवं बिन्‍दु क्र. 13 (व्‍यय 35 लाख), बिन्‍दु क्र. 21 (व्‍यय 35 लाख) के प्रस्‍ताव के अलावा प्रेसिडेन्‍स इन काउन्सिल का एजेन्‍डा क्रं. 1 बैठक दिनांक 27.01.15 के बिन्‍दु क्रं. 1, 2 (व्‍यय 9 + 9 लाख), बैठक दिनांक 05.02.15 एजेन्‍डा क्रं. 2 के बिन्‍दु क्र. 42, 43 (व्‍यय 9.5 + 10 लाख), बैठक दिनांक 16.03.15 के एजेन्‍डा क्रं. 4 का बिन्‍दु क्र. 72 (व्‍यय 10 लाख), बैठक दिनांक 17.04.15 का एजेन्‍डा क्र. 5 के बिन्‍दु क्रमांक 102, 103 (व्‍यय 9 + 9 लाख) आदि के द्वारा स्‍वीकृत प्रस्‍तावों का कार्य पूर्ण हो चुका है? यदि हाँ, तो कार्यस्‍थल का भौतिक सत्‍यापन एवं व्‍यय राशि का विवरण क्‍या है? (घ) प्रश्‍न बिन्‍दु (क), (ख), (ग) द्वारा यदि नगर पालिका अधिनियम 1961 के नियमों का उल्‍लंघन होना पाया जाता है तो क्‍या शासन जाँच करवाकर दोषियों पर कार्यवाही करेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। (ख) जी नहीं। उत्‍तरांश के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (घ) नगर पालिका अधिनियम 1961 के नियमों का उल्‍लंघन नहीं होने से शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''पाँच''

नगर परिषद लहार, मिहोना, दबोह में सड़क निर्माण

13. ( *क्र. 441 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिण्‍ड जिले की नगर परिषद लहार, मिहोना, दबोह में 01 जनवरी, 2010 से 31 दिसम्‍बर, 2014 तक सार्वजनिक, शासकीय एवं नगर परिषदों के स्‍वामित्‍व की भूमियों को छोड़कर निर्मित सड़कों के सर्वे क्रमांक भूमि स्‍वामित्‍व तथा व्‍यय का विवरण दें? (ख) उपरोक्‍त प्रश्‍नांश के परिप्रेक्ष्‍य में निजी स्‍वामित्‍व की भूमि पर उपरोक्‍त अवधि में निर्माण कराई गई सड़कों के डायवर्सन एवं जनहित में दान की गई भूमियों का ब्‍यौरा दें? (ग) क्‍या उपरोक्‍त अवधि में नगर परिषद लहार, मिहोना एवं दबोह द्वारा निजी भूमि स्‍वामियों से सांठ-गांठ कर सड़कें बनवाकर प्‍लाट विक्रय कराने की उच्‍च स्‍तरीय जाँच कराई जाएगी? यदि नहीं, तो क्‍यों? दोषी पाए जाने पर कब तक कार्यवाही की जाएगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (ग) निजी स्‍वामित्‍व की भूमि में सड़कों का निर्माण कार्य नहीं कराये जाने से जानकारी निरंक है।

तालाब के वेस्‍टवीयर पर पुलिया निर्माण

14. ( *क्र. 1301 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के प्रश्‍न क्रमांक 118 दिनांक 08 दिसंबर, 2015 के उत्‍तर में बताया गया था कि तहसील ब्‍यावरा के ग्राम झरखेड़ा तालाब के अंतर्गत ग्राम पाडली महाराज के निकट तालाब के वेस्‍टवीयर पर पुलिया निर्माण हेतु डूब क्षेत्र में जल भरा होने से सर्वेक्षण कराना संभव नहीं हो सका है? यदि हाँ, तो क्‍या वर्तमान में उक्‍त डूब क्षेत्र में जल भराव नहीं है? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या शासन ग्रामीणजनों को आवागमन की सुविधा सुलभ कराये जाने हेतु पुलिया निर्माण कार्य करवायेगा? यदि हाँ, तो कब तक? उक्‍त वेस्‍टवीयर पर पुलिया निर्माण नहीं कराये जाने से भविष्‍य में यदि कोई जनहानि होती है तो इसके लिये कौन उत्‍तरदायी रहेगा?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। (ख) जी नहीं। प्रश्‍नाधीन स्‍थल पर शासकीय रास्‍ता नहीं होने तथा ग्राम पाडली महाराज से झरखेड़ा होते हुए ब्‍यावरा तक तथा ग्राम जामी होते हुए मलावर तक पक्‍का मार्ग आवागमन हेतु उपलब्‍ध होने के कारण। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होता है।

नर्मदा नदी पर बांध निर्माण

15. ( *क्र. 732 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 1972 में प्रदेश सरकार ने नर्मदा नदी पर 29 बड़े बांध बनाने की योजना बनाई थी? (ख) क्‍या उक्‍त बांधों के निर्माण की मंजूरी नर्मदा जल न्‍यायिक प्राधिकरण द्वारा 1979 में प्रदान की गई थी? तत्‍संबंधी ब्‍यौरा क्‍या है। (ग) उक्‍त (क) एवं (ख) की स्‍वीकृतियों में से कितने एवं कौन-कौन से बांध निर्मित हो चुके? उनका निर्माण व्‍यय संबंधी ब्‍यौरा क्‍या है? (घ) कितने बांध अब त‍क निर्मित नहीं हुए एवं किस कारण? पूर्ण ब्‍यौरा क्‍या है।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) जी नहीं। नर्मदा न्‍यायिक प्राधिकरण द्वारा मध्‍यप्रदेश को 18.25 मिलियन एकड़ फीट नर्मदा कछार जल का बंटवारा किया। मध्‍यप्रदेश को अपने हिस्‍से के जल उपयोग अंतर्गत प्रश्‍नांश (क) अनुसार प्रदेश सरकार ने 29 बड़े बांध बनाने की योजना बनाई थी। (ग) 10 परियोजनाएं निर्मित हो चुकी हैं, जिनकी जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार है। 06 परियोजनाएं प्रगतिरत हैं, जिनकी जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार हैं। (घ) 13 परियोजनाएं अब तक निर्मित नहीं हुईं हैं, जिनकी जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र अनुसार हैं। 

परिशिष्ट - ''छ:''

विभागीय पदोन्‍नति समिति‍ की बैठकों का आयोजन

16. ( *क्र. 3384 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा विभागीय पदोन्‍नति समिति की बैठकों के निर्देश दिये गये हैं? यदि हाँ, तो क्‍या कटनी जिले के शासकीय विभागों में विभागीय पदोन्‍नति समितियों का गठन किया जा चुका है? वर्तमान में समितियों का गठन कब किया गया? वर्ष 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक कब-कब बैठकें आयोजित कर क्‍या अनुसंशायें की गईं? (ख) कटनी जिले में स्‍कूल शिक्षा विभाग एवं स्‍थानीय निकायों के शिक्षकों की पदोन्‍नति एवं संविदा शिक्षकों के संविलियन की कार्यवाही, कब से किन-किन कारणों से लंबित है? (ग) क्‍या कारण है कि विभागीय पदोन्‍नति समितियों की बैठकों का नियमानुसार आयोजन नहीं किया जाता, शिक्षकों की पदोन्‍नति की अनुशंसायें नहीं की जा रही हैं एवं संविदा शिक्षकों का संविलियन नहीं किया गया है, क्‍या इन अनियमितताओं का संज्ञान लेते हुये समुचित जाँच एवं कार्यवाही कर शासकीय सेवकों को शासनादेशों का लाभ दिलाया जायेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। विभागीय भर्ती नियम में विभागीय पदोन्‍नति समिति का प्रावधान होता है। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र एक एवं दो अनुसार है। (ख) वर्ष 2015 में पदोन्‍नति की कार्यवाही गोपनीय प्रतिवेदनों के अभाव में। वर्ष 2015 में संविदा शाला शिक्षक वर्ग-3 से 473 का सहायक प्राध्‍यापक के पद पर तथा संविदा शाला शिक्षक वर्ग-2 से 04 का अध्‍यापक पद पर संविलियन किया गया। (ग) प्रश्‍नांश '''' एवं '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। 

परिशिष्ट - ''सात''

हरदा जिले में ट्रांसफार्मर एवं बिजली व्‍यवस्‍था

17. ( *क्र. 4037 ) श्री संजय शाह मकड़ाई : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्रामीण और कृषि उपभोक्‍ता के जले ट्रांसफार्मर बदले जाने हेतु क्‍या नियम निर्देश लागू हैं? निर्देशों की प्रति उपलब्‍ध करावें। (ख) हरदा जिले में वर्तमान 2015-16 के रबी सीजन में खराब हुए ट्रांसफार्मरों को कितने-कितने दिनों में बदला गया? दिनांक एवं स्‍थान सहित जानकारी दें। (ग) टिमरनी तहसील के ग्राम बघवाड़ा में ट्रांसफार्मर समय में नहीं सुधारने में कौन-कौन उत्‍तरदायी हैं? ऐसे उत्‍तरदायी लोगों पर क्‍या कार्यवाही की गई है? (घ) टिमरनी विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत नौसर के खेरी टप्‍पर एवं ग्राम खारी में विद्युत व्‍यवस्‍था है? यदि नहीं, तो क्‍या इसके लिए शासन की तरफ से कोई योजना है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) ग्रामीण क्षेत्र के विद्युत उपभोक्‍ताओं के जले/फेल वितरण ट्रांसफार्मर वर्षा ऋतु (जुलाई से सितम्‍बर) में 7 दिन तथा शेष वर्ष के दौरान सूखे मौसम में 3 दिन में बदले जाने के नियम/निर्देश हैं, किन्‍तु जले/फेल वितरण ट्रांसफार्मर से संबद्ध उपभोक्‍ताओं के विरूद्ध बकाया राशि होने पर नियमानुसार बकाया राशि का 10 प्रतिशत जमा होने के उपरान्‍त उक्‍तानुसार उल्‍लेखित अवधि में ट्रांसफार्मर बदले जाने के निर्देश हैं। निर्देशों की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 'अ-1' एवं प्रपत्र 'अ-2' अनुसार है। (ख) हरदा जिले में वर्ष 2015-16 के रबी सीजन में खराब हुये ट्रांसफार्मरों को बदलने में लगे समय तथा बदलने की दिनांकवार एवं स्‍थानवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) टिमरनी तहसील के ग्राम बघवाड़ा में फेल ट्रांसफार्मर समय-सीमा में नहीं बदलने एवं क्षतिग्रस्‍त डी.पी. स्‍ट्रक्‍चर का सुधार कार्य समय-सीमा में नहीं करने के कारण संबंधित कनिष्‍ठ यंत्री, करताना वितरण केन्‍द्र को कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया गया है। (घ) टिमरनी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत नौसर के अंतर्गत खारी नाम का कोई ग्राम नहीं है। ग्राम पंचायत नौसर के अंतर्गत स्थित खड़ी टप्‍पर में कुल 09 मकान (टप्‍पर) बने हुए हैं। जिले में संचालित राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के प्रावधानों के अनुसार 100 एवं 100 से अधिक आबादी वाली बसाहटों/मजरों/टोलों को ही योजना में सम्मिलित किया जा सका था। उक्‍त प्रावधानों के अंतर्गत नहीं आने के कारण उक्‍त मजरे का कार्य जिले हेतु स्‍वीकृत उक्‍त योजना में शामिल नहीं किया जा सका। वित्‍तीय उपलब्‍धता के आधार पर उक्‍त मजरे के विद्युतीकरण का कार्य भविष्‍य में स्‍वीकृत होने वाली योजना में सम्मिलित किया जा सकेगा। तथापि सांसद/विधायक निधि द्वारा वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध करायी जाती है तो उक्‍त मजरे के विद्युतीकरण का कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराया जावेगा। 

प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थ पर लगने वाले टैक्‍स

18. ( *क्र. 3121 ) श्री रामनिवास रावत : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. में पेट्रोल, डीजल, कैरोसीन एवं रसोई गैस, सिलेण्‍डर प्रति यूनिट, उत्‍पादन कं‍पनियों से म.प्र. को मूल रूप से किस दर पर प्राप्‍त होते हैं? पेट्रोल, कैरोसीन एवं डीजल की दर प्रति लीटर एवं रसोई गैस सिलेण्‍डर की दर प्रति सिलेण्‍डर में मूल रूप से प्राप्‍त होने की दर एवं प्रदेश में लगने वाले विभिन्‍न टैक्‍स उपरांत विक्रय की दर बतावें? (ख) वर्तमान में म.प्र. में पेट्रोल, डीजल, कैरोसीन एवं रसोई गैस पर कौन-कौन से टैक्‍स किस-किस दर पर लगाए जा रहे हैं? विगत दो वर्षों में प्रदेश सरकार द्वारा इनमें से कौन-कौन से टैक्‍सों में कितनी-कितनी वृद्धि की गई है? वर्तमान में पड़ोसी राज्‍यों छत्‍तीसगढ़, राजस्‍थान, गुजरात एवं महाराष्‍ट्र, हरियाणा, उत्‍तरप्रदेश व दिल्‍ली में इन उत्‍पादों पर लगाए जाने वाले टैक्‍सों की जानकारी म.प्र. सहित तुलनात्‍मक विवरण दें? (ग) क्‍या प्रदेश में अन्‍य पड़ोसी राज्‍यों की तुलना में इन उत्‍पादों पर टैक्‍स अधिक होने से सीमांत इलाकों में पड़ोसी राज्‍यों से डीजल, पेट्रोल लाकर प्रदेश में बेचा जा रहा है, जिससे प्रदेश को राजस्‍व की हानि हो रही है? क्‍या प्रदेश सरकार अन्‍य पड़ोसी राज्‍यों के समान उक्‍त उत्‍पादों पर लगने वाले टैक्‍स अनुसार टैक्‍स की दर निर्धारित करेगी? (घ) वित्‍तीय वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 में प्रश्‍नांकित दिनांक तक प्रश्‍नांश (क) अनुसार उत्‍पादों पर लगने वाले विभिन्‍न प्रकार के टैक्‍सों से प्रदेश को कितने रूपये का राजस्‍व प्राप्‍त हुआ? कृपया वर्षवार बतावें।

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) यह जानकारी विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है। (ख) वर्तमान में मध्‍यप्रदेश में पेट्रोल, डीजल, कैरोसिन एवं रसोई गैस पर लगाए जा रहे कर की दर की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। अन्‍य राज्‍यों में लागू कर की दर विभाग द्वारा संधारित नहीं की जाती है। (ग) प्रदेश के सीमांत इलाकों में पड़ोसी राज्‍यों से डीजल, पेट्रोल लाकर प्रदेश में बेचे जाने की कोई जानकारी प्रकाश में नहीं आई है। प्रदेश सरकार प्रदेश में बजट अनुमान एवं राजस्‍व संग्रहण के आधार पर कर की दरें निर्धारित करती है। (घ) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र 'बी' अनुसार है। 

परिशिष्ट - ''आठ''

म.प्र. शासन द्वारा लिया गया ऋण

19. ( *क्र. 808 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) 31 मार्च 2002 एवं 31 मार्च 2003 तक की स्थिति में म.प्र. शासन के ऊपर किस-किस प्रकार का कितना ऋण था? (ख) 31 मार्च 2015 एवं 30 जनवरी 2016 तक की स्थिति में म.प्र. शासन के ऊपर किस-किस प्रकार का कितना-कितना ऋण था? (ग) म.प्र. शासन ने 30 जनवरी 2016 तक किस-किस से कितनी-कितनी राशि किन-किन शर्तों के आधार पर ऋण के रूप में ले रखी है?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) दिनांक 31.03.2002 की स्थिति में बाजार से ऋण रू. 4476.36 करोड़, केन्द्र सरकार का ऋण रू. 9043.18 करोड़, अन्य संस्थाओं से ऋण रू. 3172.07 करोड़ कुल रूपये 16691.61 करोड़ एवं 31.03.2003 की स्थिति में बाजार से ऋण रू. 5575.98 करोड़, केन्द्र सरकार का ऋण रू. 9483.09 करोड़, अन्य संस्थाओं से ऋण रू. 5088.27 करोड़ कुल रूपये 20147.34 करोड़ का ऋण था। (ख) दिनांक 31.03.2015 की स्थिति में बाजार से ऋण रू. 43149.92 करोड़, केन्द्र सरकार का ऋण रू. 13253.83 करोड़, अन्य संस्थाओं से ऋण रू. 25857.75 करोड़ कुल रूपये 82261.50 करोड़ का ऋण था। 30 जनवरी 2016 की स्थिति भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के द्वारा प्रदत्त वित्त लेखे जो वित्तीय वर्ष 2016-17 में प्राप्त होंगे, से जानकारी दी जाना संभव होगी। (ग) 30 जनवरी 2016 की स्थिति भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक के द्वारा प्रदत्त वित्त लेखे जो वित्तीय वर्ष 2016-17 में प्राप्त होंगे, से इस वित्तीय वर्ष में जानकारी दी जाना संभव नहीं है।

सिवनी जिले में खनिज खदानों की लीज़ स्‍वीकृति

20. ( *क्र. 3891 ) श्री दिनेश राय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में स्‍टोन क्रेशर, रेत, फर्शी, पत्‍थर आदि खदानों की लीज़ स्‍वीकृत किये जाने की क्‍या प्रकिया है? नियम व शर्तों की प्रतिलिपि उपलब्‍ध कराएं। (ख) सिवनी जिले में विगत 5 वर्षों में किस-किस गांव में किस-किस सर्वे नम्‍बर में कितने-कितने क्षेत्रफल की स्‍टोन क्रेशर, पत्‍थर, रेत आदि खनिजों की लीज़ पर किन-किन फर्मों या व्‍यक्तियों को कब-कब, कितनी-कितनी अवधि के लिये स्‍वीकृत की गई? (ग) प्रश्‍नांश (ख) से संबंधित 2010 से प्रश्‍न दिनांक तक अवैध उत्‍खनन करने या नियमों का पालन नहीं करने या पर्यावरण प्रदूषित करने हेतु कितने-कितने प्रकरण, किस-किस फर्म या व्‍यक्तियों पर कहाँ-कहाँ दर्ज किये गये व उन्‍हें क्‍या दण्‍ड दिया गया?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) म.प्र. गौण खनिज नियम 1996 में स्‍टोन क्रेशर हेतु पत्‍थर खनिज, निजी भूमि में स्थित फर्शी पत्‍थर, म.प्र. राज्‍य खनिज निगम के पक्ष में रेत खनिज का उत्‍खनिपट्टा स्‍वीकृत किये जाने का प्रावधान है। शासकीय भूमि में स्थित फर्शी पत्‍थर एवं पत्‍थर को नीलामी के माध्‍यम से व्‍यापारिक खदान के रूप में स्‍वीकृत किये जाने का प्रावधान है। यह नियम अधिसूचित नियम है, जिसमें प्रक्रिया, नियम तथा शर्तें उल्‍लेखित हैं। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' एवं '' अनुसार है।

नगर परिषद लांजी से प्राप्‍त शिकायतों की जाँच

21. ( *क्र. 3217 ) श्री कमल मर्सकोले : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राज्‍य शासन द्वारा लांजी नगर परिषद के दिनांक 25.08.2009 से गठन के उपरांत कितने विकास कार्यों के लिये नगर परिषद लांजी ने प्रेसिडेंट कौंसिल एवं नगर परिषद ने प्रस्‍ताव पारित कर राज्‍य शासन को दिनांक 29.01.2016 तक भेजे एवं राज्‍य शासन ने उस पर क्‍या कार्यवाही की? (ख) अध्‍यक्ष नगर परिषद लांजी ने विकास कार्य नहीं होने की कितनी शिकायतें प्रमुख सचिव नगरी विकास एवं संचालनालय नगरीय विकास को प्रेषित की एवं उन पत्रों पर संबंधित अधिकारियों द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) नगर परिषद लांजी को फायर बिग्रेड खरीदने एवं शौचालय तथा शहर में नालियों के निर्माण के लिये बजट नहीं दिये जाने का कारण बताया जावे तथा फायर बिग्रेड का अनुदान एवं गंदे पानी के निकासी के लिये नालियां बनाने डी.पी.आर. बनाने की अनुमति कब तक प्रदान की जायेगी? निश्चित अवधि बताई जावे। (घ) नगर परिषद लांजी को आवंटित बजट का ऑडिट एवं कर्मचारियों की भर्ती की जाँच कब तक करायी जावेगी?
मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) नगर परिषद लांजी में विकास कार्य नहीं होने की, अध्‍यक्ष द्वारा कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है। (ग) नगर परिषद लांजी जिला बालाघाट को फायर बिग्रेड क्रय के लिए राशि रू. 25.00 लाख उपलब्‍ध कराया गया है। व्‍यक्तिगत शौचालय 500 नग के लिए राशि रू. 98.60 लाख की कार्ययोजना स्‍वीकृत की गई है। नगर परिषद लांजी द्वारा गंदे पानी के निकासी के लिए नाली निर्माण का कोई प्रस्‍ताव तैयार नहीं किया गया है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) नगर परिषद लांजी द्वारा उप संचालक, स्‍थानीय निधि संपरीक्षा जबलपुर को पत्र क्रमांक 2375 दिनांक 08.01.2016 से ऑडिट कराने का अनुरोध किया गया है। कर्मचारियों के भर्ती की जाँच संबंधी कोई भी प्रकरण वर्तमान में लंबित नहीं होने से शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''नौ''

आरक्षित वर्ग के कृषकों को मुआवजा

22. ( *क्र. 3068 ) श्री लखन पटेल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या दमोह जिले में तहसील पथरिया के ग्राम हथना (नंदरई) में सिंचाई विभाग द्वारा तालाब निर्माण कराया गया? इसमें कितने किसानों की जमीन डूब क्षेत्र में हैं? (ख) ऐसे किसानों की संख्‍या नाम सहित बताएंगे, किस-किस किसान की भूमि व कितना-कितना रकबा डूब क्षेत्र में है? (ग) इन किसानों को वर्ष 1970-71 में राजस्‍व विभाग द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों को खेती के लिए पट्टे दिए गए थे? यदि हाँ, तो उनकी जमीन डूब क्षेत्र में आने से उन्‍हें मुआवजा दिया गया? यदि नहीं, तो क्‍यों? कब तक दिया जायेगा? कितनी-कितनी राशि दी जावेगी एवं कब तक?
जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ, ग्राम हथना (नंदरई) में बासांकला जलाशय का निर्माण कराया गया है। 43 कृषकों की भूमि डूब क्षेत्र में है। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र ''1'' एवं ''2'' अनुसार है। (ग) वनभूमि पर राजस्‍व विभाग द्वारा पट्टे दिए जाना नियम संगत नहीं होने के कारण मुआवजा भुगतान संभव नहीं हो सका। पट्टे की वैधानिकता का परीक्षण कर 3 माह के भीतर निराकरण करने के निर्देश कलेक्‍टर को दे दिए गए हैं।

परिशिष्ट - ''दस''

ट्रांसफार्मर का अन्‍यत्र व्‍यवस्थापन

23. ( *क्र. 3974 ) श्री मानवेन्द्र सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या 104 (क्रमांक 2364), दि. 28.07.2015 के प्रश्‍नांश (ख) भाग के उत्‍तर में नगरीय प्रशासन एवं पर्यावरण विभाग से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार उक्‍त अनुज्ञाओं में तत्‍कालीन प्रचलित नियमों के तहत खुला क्षेत्र, सर्विस क्षेत्र, पार्क आदि स्‍वीकृत किया जाना स्‍वीकार किया है, तो उक्‍त ट्रांसफार्मर चयनित स्‍थल पर स्‍थापित है या अचयनित स्‍थल पर? (ख) क्‍या अतारांकित प्रश्‍न क्रमांक 2197 उत्‍तर दिनांक 15.12.2015 के प्रश्‍नांश (घ) भाग के उत्‍तर में अध्‍यक्ष, विनीत कुंज, गृह निर्माण संस्‍था की लिखित सहमति प्राप्‍त नहीं होना लेख किया गया है? हाँ, तो इस प्रश्‍न दिनांक तक उक्‍त संस्‍था से तत्‍संबंधी सहमति प्राप्‍त कर ली गई है, तो सहमति पत्र प्रस्‍तुत करें? यदि नहीं, तो शिथिलीय कार्यवाही करने के लिए कौन-कौन अधि./कर्म. दोषी हैं? दोषियों के नाम व पदनाम उल्‍लेखित करें। (ग) शासन, संभावित जनहानि को जन्‍म देने वाली व सहमति देने में शिथिलता बरतने वाली उक्‍त संस्‍था के कॉलोनाईजर संबंधी अनुज्ञापत्र को निरस्‍त करने की कार्यवाही करेगा? हाँ तो अवधि नियत करें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। प्रश्‍नाधीन ट्रांसफार्मर को विनीत कुंज, गृह निर्माण संस्‍था की सहमति पर तात्‍कालिक प्रचलित नियमों एवं सुरक्षा की दृष्टि से अनुकूल चयनित स्‍थल पर तकनीकी साध्‍यता तथा स्‍वीकृत बाह्य विद्युतीकरण के प्राक्‍कलन अनुसार '' श्रेणी के विद्युत ठेकेदार के माध्‍यम से स्‍थापित कराया गया है। (ख) जी हाँ। अध्‍यक्ष विनीत कुंज गृह निर्माण संस्‍था के द्वारा दिनांक 18.02.16 को लिखित सहमति दी गई है। उक्‍त सहमति पत्र की छायाप्रति संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार प्रश्‍नाधीन ट्रांसफार्मर तकनीकी साध्‍यता के अनुरूप ही लगाया गया था एवं वर्तमान में अध्‍यक्ष विनीत कुंज गृह निर्माण संस्‍था से 5 प्रतिशत पर्यवेक्षण शुल्‍क के आधार पर कार्य कराने की लिखित सहमति दिनांक 18.2.16 को प्राप्‍त हो चुकी है, अत: उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में वर्तमान में कोई कार्यवाही किया जाना प्रस्‍तावित नहीं है।

परिशिष्ट - ''ग्यारह''

धार जिले में कर चोरी के प्रचलित प्रकरण

24. ( *क्र. 4029 ) श्री सुरेन्‍द्र सिंह बघेल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) धार जिले में दिनांक 01.01.2012 से 31.12.2015 तक कर चोरी के कितने प्रकरण विभाग द्वारा बनाये गये? (ख) प्रश्‍न (क) के अनुसार कितनी जुर्माना राशि वसूली गई? कितनी शेष है कितने प्रकरण न्‍यायालय/विभाग या अन्‍य जगह चल रहे हैं? (ग) वृत्‍त कार्यालयों में बिना टिन नं. कार्य करने वाले कितने प्रकरण चिन्हित कर भेजे हैं? इस पर क्‍या कार्यवाही की गई? (घ) प्रश्‍न (ख) अनुसार शेष बची वसूली कब तक कर ली जायेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) धार जिले में दिनांक 01/01/2012 से 31/12/2015 तक कुल 17 प्रकरण बनाये गये, जिसकी जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार 162.88 लाख रूपये राशि वसूल की गई है। उक्‍त प्रकरणों में से वसूली के कोई प्रकरण न्‍यायालय/विभाग में शेष नहीं हैं। (ग) इस प्रकार की जानकारी अभी तक संज्ञान में नहीं आई। अत: प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) प्रश्‍नांश (ख) अनुसार कोई वसूली शेष नहीं। अत: प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। 

परिशिष्ट - ''बारह''

महिदपुर वि.स. क्षेत्र में चल रहे प्रकरण

25. ( *क्र. 4282 ) श्री बहादुर सिंह चौहान : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) महिदपुर वि.स. क्षेत्र के दिनेश पिता मांगीलाल के विरूद्ध 27.06.14 को प्रकरण दर्ज करने के बाद भी विभाग द्वारा क्रेशर सील क्‍यों नहीं किया गया? (ख) इनके द्वारा कितनी सप्‍लाई पश्चिम रेल्‍वे कोटा को की गई जानकारी प्रश्‍न दिनांक तक देवें? (ग) इनके विरूद्ध वसूली के लिये चल रहे प्रकरण की अद्यतन स्थिति बतावें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र-अ पर दर्शित है। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र-ब पर दर्शित है। (ग) न्‍यायालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) महिदपुर जिला उज्‍जैन द्वारा दिनांक 19.02.2016 को आदेश पारित कर अनावेदक श्री दिनेश पिता श्री मांगीलाल जैन निवासी महिदपुर जिला उज्‍जैन पर रूपए 30,29,25,600/- (तीस करोड़ उनतीस लाख, पच्‍चीस हजार छ: सौ) का अर्थदण्‍ड म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता 1959 की धारा 247 (7) के तहत अधिरोपित किया गया है तथा तहसीलदार महिदपुर को अनावेदक के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही शीघ्र प्रारंभ कर वसूली के आदेश दिए गए हैं।

परिशिष्ट - ''तेरह''

 

 

 






 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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भाग-2

नियम 46 (2) के अंतर्गत अतारांकित प्रश्नोत्तर के रुप में परिवर्तित तारांकित प्रश्नोत्तर


सी.सी. रोड का निर्माण

1. ( क्र. 39 ) श्री वेलसिंह भूरिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) धार जिले के नगर पंचायत राजगढ़ बस स्‍टैण्‍ड में सी.सी.रोड का निर्माण कब किया गया? इसकी लागत एवं कार्य एजेंसी के नाम सहित जानकारी देवें? (ख) क्‍या उक्‍त कार्य की गुणवत्‍ता स्‍तरहीन होने के कारण जिलाधीश ने दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही के निर्देश दिए थे? यदि हाँ, तो कार्य एजेंसी के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) यदि नहीं, तो क्‍यों इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? दोषियों के विरूद्ध कब तक कार्यवाही की जायेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) वर्ष 2013 में प्रश्‍नाधीन कार्य किया गया। कार्य स्‍वीकार नहीं करने के कारण इसकी लागत बताया जाना संभव नहीं है। कार्य श्री कनकमल समीरमल जैन ठेकेदार द्वारा किया गया। (ख) जी नहीं। कलेक्‍टर धार ने जनशिकायत विभाग से प्राप्‍त शिकायत के कारण जाँच के निर्देश दिये थे। एजेन्‍सी के द्वारा कये गये निर्माण कार्य को अमान्‍य करते हुए मूल्‍यांकन एवं भुगतान नहीं करने के निर्देश आयुक्‍त, इन्‍दौर संभाग, इन्‍दौर ने दिए तद्नुसार कार्य का न तो मूल्‍यांकन किया गया न ही भुगतान किया गया। (ग) तत्‍कालनी मुख्‍य नगर पालिका अधिकारी श्री संतराम चौहान को कलेक्‍टर ने आदेश क्रमांक/1159/डूडा/2013 धार दिनांक 15.11.2013 द्वारा निलंबित किया। जाँच उपरांत तत्‍कालीन मुख्‍य नगर पालिका अधिकारी श्री संतराम चौहान के विरूद्ध संभागीय आयुक्‍त, इन्‍दौर के पत्र क्रं./414/2/स्‍थापना/इंदौर दिनांक 18.03.2014 द्वारा दो वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोके जाने की शास्ति अधिरोपित की गई।

चन्‍देरी की नगरपालिका के पार्षदों पर कार्यवाही

2. ( क्र. 88 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या चंदेरी में नगरपालिका अधिनियम की धारा 38 में 6 माह से ज्‍यादा अनुपस्थित रहने वाले के स्‍थान को रिक्‍त करने की अधिसूचना का अनुरोध जिलाधीश अशोकनगर को जनवरी 2016 में पत्र लिखकर किया था? (ख) ऐसे कितने पार्षद हैं जो अधिनियम की धारा 38 में दोषी हैं व इस संबंध में शासन क्‍या कार्यवाही कर रहा है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) शिकायतकर्ता श्री विवेकांत भार्गव पिता श्री लक्ष्‍मीकांत भार्गव द्वारा दिनांक 18.12.2015 एवं दिनांक 17.12.2015 के द्वारा कलेक्‍टर, अशोकनगर को आवेदन पत्र प्रस्‍तुत किये गये थे। जिसमें उल्‍लेख किया गया था कि नगर पालिका परिषद्, चंदेरी की पार्षद श्रीमती आशा मिश्रा, वार्ड क्रं. 03 जो कि, विगत 06 माह से नगर पालिका परिषद् की बैठकों/सम्‍मेलनों में उपस्थित नहीं हुये हैं और यह निरन्‍तर अनुपस्थित रहती हैं। इस कारण मध्‍यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम की धारा 38 के प्रावधानों अनुसार कार्यवाही की जाये। उक्‍त संबंध में विहित प्राधिकारी कलेक्‍टर, अशोकनगर के यहां जाँच प्रचलित है। (ख) नगर पालिका परिषद् में प्रश्‍नांश '''' के अतिरिक्‍त कोई भी पार्षद नहीं है, जो अधिनियम की धारा 38 में दोषी हो। अत: कोई कार्यवाही प्रचलित नहीं है।

अवैध शराब की दुकानों के ठेके

3. ( क्र. 112 ) श्री वेलसिंह भूरिया : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) धार जिले के अंतर्गत कितनी देशी एवं विदेशी शराब की दुकानें हैं? इन दुकानों में आबकारी विभाग द्वारा कितनी दुकानों के ठेके (नीलामी पद्धति से) प्रदान किये गये हैं? ग्रामवार, विकासखण्‍डवार बतायें? (ख) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में आबकारी विभाग द्वारा कितने लायसेंस धारी ठेकेदारों को शराब के ठेके प्रदान किये गये हैं? इनमें से कितने अवैध ठेकेदार हैं? इन ठेकेदारों के विरूद्ध विभाग द्वारा कितने प्रकरण दर्ज करवाये गये हैं एव इनके विरूद्ध विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कितने अवैध शराब के ठेके हैं? इनमें से कितने अवैध शराब के ठेकेदारों के विरूद्ध प्रकरण दर्ज कराये गये हैं? इनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही गई है? यदि नहीं, की गई तो क्‍यों? दोषी अधिकारियों के खिलाफ क्‍या कार्यवाही की जायेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जिला धार में वर्ष 2015-16 के लिए देशी एवं विदेशी मदिरा की दुकानों का निष्‍पादन नीलामी पद्धति से नहीं किया गया है। अपितु जिला धार में वर्ष 2015-16 के लिए 68 देशी मदिरा एवं 27 विदेशी मदिरा इस प्रकार कुल 95 मदिरा दुकानें, 26 एकल समूहों में संचालित है। इन मदिरा दुकानों/एकल समूहों का निष्‍पादन टेण्‍डर के माध्‍यम से किया गया है। वर्ष 2015-16 में धार जिले में संचालित मदिरा दुकानों की ग्रामवार, विकासखण्‍डवार सूची विधानसभा पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-एक अनुसार है। (ख) वर्ष 2015-16 में टेण्‍डर के माध्‍यम से 68 देशी मदिरा एवं 27 विदेशी मदिरा इस प्रकार कुल 95 मदिरा दुकानों के 26 एकल समूहों का आवंटन 24 ठेकेदारों (लायसेंसियों) को किया गया है। इस संबंध में लायसेंसीवार जानकारी विधानसभा पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-दो अनुसार है। इनमें से कोई भी अवैध ठेकेदार (लायसेंसी) नहीं है। वर्ष 2015-16 में इन 68 देशी मदिरा एवं 27 विदेशी मदिरा दुकानो के ठेकेदारों (लायसेंसियों) के विरूद्ध मध्‍यप्रदेश आबकारी अधिनियम के अन्‍तर्गत बने सामान्‍य अनुज्ञप्ति की शर्तों एवं लायसेंस की शर्तों नियम/निर्देशों के उल्‍लघंन पर दिनांक 01 अप्रैल 2015 से दिनांक 31 जनवरी 2016 तक 3100 विभागीय प्रकरण पंजीबद्ध किये जाकर उनका निराकरण किया गया है। मध्‍यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 48 अनुसार विभागीय प्रकरण शमनीय होने से, इन समस्‍त प्रकरणों में समक्ष प्राधिकारी द्वारा रूपये 25,42,140/- शास्ति अधिरोपित कर प्रकरण का शमन किया गया है। (ग) सरदारपुर विधानसभा क्षेत्र अन्‍तर्गत अवैध शराब का कोई ठेका नहीं है। अपितु वृत्‍त सरदारपुर में वर्ष 2015-16 में दिनांक 01 अप्रैल 2015 से दिनांक 31 जनवरी 2016 तक अवैध मदिरा व्‍यवसायियों के विरूद्ध आबकारी विभाग द्वारा कार्यवाही करते हुए कुल 387 प्रकरण मध्‍यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 के अन्‍तर्गत पंजीबद्ध किये है। अवैध मदिरा के इन प्रकरणों में कोई भी लायसेंसी संलिप्‍त होना नहीं पाया गया है। सभी प्रकरण सक्षम न्‍यायालय में प्रस्‍तुत किये जा चुके है। अत: उपरोक्‍त के प्रकाश में किसी अधिकारी के दोषी न होने से अधिकारियों के विरूद्ध अनुशासनात्‍मक कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

पवन चक्कियों हेतु शट-डाउन

4. ( क्र. 136 ) श्री यशपालसिंह सिसौदिया : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रतलाम एवं मंदसौर जिलों में पवन ऊर्जा हेतु लगने वाली विभिन्‍न पवन चक्कियों को विद्युत ग्रीड से जोड़ने वाली 33 के.व्‍ही. लाईनों के निर्माण के दौरान मार्ग में आने वाली विद्युत लाईनों पर शट-डाउन लेने की क्‍या प्रक्रिया है? क्‍या दोनों जिलों में उक्‍त प्रक्रिया का पालन हो रहा है? (ख) क्‍या रतलाम एवं मंदसौर जिले में पवन चक्कियों स्‍थापित करने वाली कंपनियों एवं म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड इन्‍दौर के अधिकारियों की मिलीभगत से संबंधित ग्रीड से शट-डाउन की प्रक्रिया का पालन किये बिना ही ग्रामीण क्षेत्रों का विद्युत प्रवाह बन्‍द कर दिया जाता है? यदि हाँ, तो इस संबंध में वित्‍तीय वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में (माह जनवरी-2016 तक कितनी शिकायतें इस बाबत् प्राप्‍त हुई और उन पर क्‍या कर्यवाही की गई? (ग) प्रश्‍नांकित जिलों में दिनांक 01 जनवरी, 2015 से 01 जनवरी, 2016 तक पवन ऊर्जा संयंत्रों के लिए निर्मित की जाने वाली 33 के.व्‍ही.लाईनों के निर्माण के दौरान किन-किन स्‍थानों/लाईनों पर शट-डाउन कब-कब लिया गया दिनांकवार जानकारी देवें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) रतलाम एवं मंदसौर जिलों में पवन ऊर्जा हेतु लगने वाली विभिन्‍न पवन चक्कियों को विद्युत ग्रीड से जोड़ने वाली 33 के.व्‍ही.लाईनों के निर्माण के दौरान मार्ग में आने वाली विद्युत लाईनों पर शट-डाउन लेने हेतु 3 दिन पूर्व संबंधित पवन ऊर्जा कंपनी द्वारा संबंधित कार्यपालन यंत्री के माध्‍यम से आवेदन दिया जाता है। कार्यपालन यंत्री द्वारा वृत्‍त स्‍तर पर स्‍थापित नोडल डिस्‍काम कन्‍ट्रोल सेन्‍टर (एन.डी.सी.सी.) को शट-डाउन का प्रस्‍ताव प्रेषित किया जाता है। नोडल अधिकारी (एन.डी.सी.सी.) द्वारा शट-डाउन का प्रस्‍ताव परीक्षण के उपरान्‍त अधीक्षण यंत्री (संचालन/संधारण) के माध्‍यम से कार्यपालक निदेशक, उज्‍जैन कार्यालय में स्‍थापित ऑपरेशन सेल प्रभारी (अधीक्षण यंत्री) को प्रेषित किया जाता है। ऑपरेशन सेल प्रभारी से अनुमोदन संबंधित वृत्‍त/संभाग में प्राप्‍त होने के पश्‍चात् शट-डाउन का परमिट संबंधित उपकेन्‍द्र से अधिकृत अधिकारी/कर्मचारी को दिया जाता है। जी हाँ, दोनों जिलों में उक्‍त प्रक्रिया का पालन हो रहा है। (ख) जी नहीं, रतलाम एवं मंदसौर जिले में इस संबंध में वित्‍तीय वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में माह जनवरी-2016 तक कोई भी शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है। (ग) प्रश्‍नांकित जिलों में दिनांक 01 जनवरी 2015 से दिनांक 01 जनवरी 2016 तक पवन ऊर्जा संयंत्रों के लिए निर्मित की जाने वाली 33 के.व्‍ही. लाईनों के निर्माण के दौरान जिन-जिन स्‍थानों/लाईनों पर शट-डाउन लिया गया उनकी रतलाम एवं मंदसौर जिलों हेतु दिनांकवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' एवं '' अनुसार है। 

दो संतानों वाले कर्मचारियों को दिये जाने वाले लाभ

5. ( क्र. 137 ) श्री यशपालसिंह सिसौदिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या 1 जून 2012 के पश्‍चात् राज्‍य कर्मचारियों के तीसरी संतान होने पर दण्‍डात्‍मक प्रावधानों (ए.सी.पी.नहीं देने) के संबंध में म.प्र. सरकार द्वारा विभिन्‍न राज्‍यों से नियमों/प्रावधानों की जानकारी मांगी गई हैं? यदि हाँ, तो कब-कब और किन-किन राज्‍यों से? किये गये पत्राचार की जानकारी देवें? (ख) उक्‍त राज्‍यों से सरकार को क्‍या-क्‍या जानकारी कब-कब प्राप्‍त हुई? पत्रों की प्रति सहित जानकारी देवें? (ग) क्‍या सरकार उक्‍त समस्‍त तथ्‍यों को मद्देनजर रखते हुए राज्‍य में इस संबंध में लागू प्रावधानों/नियमों की पुर्नसमीक्षा करने का विचार रखती है? यदि हाँ,तो क्‍या व कब तक एवं नहीं, तो क्‍यों? (घ) क्‍या राज्‍य सरकार बालिका प्रोत्‍साहन के अंतर्गत दो बालिकाओं पश्‍चात् नसबंदी कराने वाले कर्मचारियों को एक अतिरिक्‍त वेतनवृद्धि का लाभ तथा इन बलिकाओं को विभिन्‍न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में नि:शुल्‍क शिक्षा का विचार रखती है? यदि हाँ, तो इस संबंध में क्‍या कार्यवाही चल रही है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। (ख) एवं (ग) प्रश्‍नांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) जी नहीं। ऐसा कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन नहीं है।

फुलप्रूफ ई-रजिस्‍ट्री योजना का क्रियान्‍वयन

6. ( क्र. 154 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश सरकार का ई-सम्‍पदा (ई-रजिस्‍ट्री) की सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामियों जैसे की सर्वर ठप्‍प होना, लैंग्‍वेज सपोर्ट न करना तथा सर्विस प्रोवाइडर को समय पर भुगतान नहीं होने आदि खामियों की योजना के प्रारंभ होने के बाद किस-किस जिले में कितनी शिकायतें आई हैं तथा इससे कितने राजस्‍व की हानि प्रत्‍येक जिले में हुई है व इन खामियों व शिकायतों को दूर करने के क्‍या प्रयास किये जा रहे हैं? (ख) क्‍या पंजीयन व स्‍टाम्‍प विभाग में ई-रजिस्‍ट्री योजना लागू की, जिसका सॉफ्टवेयर विप्रो ने बनाया व ऑनलाईन रजिस्‍ट्री का काम भी शुरू हो गया था? यह सब फुलप्रूफ क्‍यों नहीं था व इसे फुलप्रूफ कब तक कर दिया जाएगा ताकि ई-रजिस्‍ट्री बिना बाधा के होने लगे?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। सम्‍पदा ई-पंजीयन परियोजना अन्‍तर्गत राजस्‍व हानि का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। खामिया व शिकायतों का निराकरण यथासंभव प्रतिदिन किया जाता है। (ख) जी हाँ। साफ्टवेयर फुलप्रूफ है। प्राप्‍त शिकायतों का निराकरण यथासंभव प्रतिदिन किया जाता है। 

परिशिष्ट ''चौदह''

मलिन बस्‍ती योजना के क्रियान्‍वयन में लापरवाही

7. ( क्र. 190 ) श्री देवेन्द्र वर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नगरपालिका निगम खंडवा, खण्‍डवा के चीराखदान क्षेत्र में मलिन बस्‍ती योजना के तहत किस वर्ष में कितने मकान बनाए गए हैं तथा उन पर अब तक कितना व्‍यय हुआ है? क्‍या उनका आवंटन हो चुका है? (ख) क्‍या शासन के करोड़ों रूपये खर्च होने के बाद भी वहां पर नागरिकों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्‍ध नहीं कराई गई? उक्‍त आवासों में मूलभूत सुविधा कब तक उपलब्‍ध कराई जाएगी? (ग) क्‍या विगत तीन वर्षों से निर्मित आवास में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में आवंटन/विस्‍थापन नहीं होने से उनके खिड़की दरवाजे चोरी हो रहे हैं जिससे शासकीय संपति का नुकसान हुआ है? इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? (घ) क्‍या नवनिर्मित आवासों में विस्‍थापित होने वाले क्षेत्रों/परिवारों का चयन कर लिया गया है? यदि हाँ, तो सूची उपलब्‍ध कराए? य‍ह विस्‍थापन प्रक्रिया कब तक पूर्ण कर ली जाएगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) वर्ष 2009 से 2014 तक 768 आवासीय इकाई निर्मित की गई है। राशि रू. 23.45 करोड़ का व्‍यय हुआ है। जी नहीं। (ख) जी हाँ। राशि के अभाव में अधोसंरचना के कार्य की निविदा नहीं कराई जा सकी थी। वर्तमान में तैयार भवनों के शीघ्र आवंटन हेतु मूलभूत सुविधाएं उपलब्‍ध कराये जाने हेतु अन्‍य मदों से राशि की व्‍यवस्‍था की जाकर कार्य कराये जा रहे है जो अंतिम चरण में है। अधोसंरचना कार्य प्रगति पर है। 30 मार्च 2016 तक मूलभूत सुविधाएं पूर्ण करा लिए जाने का लक्ष्‍य है। (ग) जी नहीं। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) जी हाँ। योजना अंतर्गत चयनित बस्तियों के पूर्व में चयनित हितग्राहियों के द्वारा आवास लेने से इंकार किये जाने से जिला क्रियान्‍वयन समिति खण्‍डवा के निर्णय अनुसार अन्‍य बस्तियों एवं आवासहीन परिवारों का सर्वे किया जाकर सूचीबद्ध किया जा रहा है। 30 मार्च 2016 तक चयन प्रक्रिया पूर्ण करते हुए चयनित हितग्राहियों को आवास आवंटन 15 अप्रैल 2016 तक किये जाने का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है।

फीडर सेपरेशन के कार्य

8. ( क्र. 206 ) श्री कैलाश चावला : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मनासा विधानसभा क्षेत्र में कितने गांव ऐसे हैं जिनमें प्रश्‍न दिनांक तक फीडर सेपरेशन के अन्‍तर्गत 11 के.व्‍ही. घरेलू फीडरों से जोड़ने का कार्य नहीं हो सका है? गांव के नाम का उल्‍लेख करें? (ख) उक्‍त गांवों में फीडर सेपरेशन का कार्य न होने के क्‍या कारण हैं एवं इन्‍हें कब तक पूर्ण कर लिया जावेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) मनासा विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत कुल 17 ग्राम ऐसे हैं जिन्‍हें फीडर सेपरेशन योजना के अन्‍तर्गत 11 के.व्‍ही. घरेलू फीडरों से जोड़ने का कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। ग्रामों की नामवार सूची संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) प्रश्‍नाधीन 17 ग्रामों के लिए विद्युत लाईनें डालने के मार्ग में रक्षित वन आने के कारण लाईनें डालने हेतु वन विभाग की अनुमति आवश्‍यक है। वन विभाग से अनुमति प्राप्‍त नहीं होने के कारण इन ग्रामों में फीडर सेपरेशन का कार्य नहीं हो पाया है। वन विभाग से अनुमति प्राप्‍त होने के उपरान्‍त उक्‍त कार्य किया जा सकेगा, अत: वर्तमान में निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

परिशिष्ट ''पंद्रह''

उद्वहन सिंचाई योजना

9. ( क्र. 208 ) श्री कैलाश चावला : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जल संसाधन संभाग उज्‍जैन के विभिन्‍न जिलों में कितनी उद्वहन सिंचाई योजनाएं विगत 20 वर्षा में निर्मित की गई है, जिलावार जानकारी दें? उक्‍त योजनाओं में से कौन-कौन सी योजनाएं प्रश्‍न दिनांक तक चालू हैं एवं कौन-कौन सी योजनाएं बंद है? जिलावार योजना का नाम, निर्माण का वर्ष, योजना कब से चालू है, यदि बंद है तो कब से जानकारी दें? (ख) उक्‍त उद्वहन योजनाओं के बंद होने के क्‍या कारण हैं, योजनावार बताएं? उक्‍त योजना निर्माण में शासन की कितनी राशि का व्‍यय हुआ है और इन्‍हे चालू किये जाने के लिये क्‍या शासन विचार कर रहा है? क्‍या कोई प्रस्‍ताव शासन के समक्ष विचाराधीन है?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ख) जल संसाधन संभाग उज्‍जैन के अधीन उज्‍जैन जिला आता है। उज्‍जैन जिले में प्रश्‍नाधीन अवधि में कोई उद्वहन सिंचाई परियोजना निर्मित नहीं की गई है। अत: शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

कन्‍वर्जेंस योजना में तकनीकी स्‍वीकृति में असाधारण विलम्‍ब

10. ( क्र. 236 ) श्री मोती कश्यप : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्त्‍ता विधायक के पत्र दिनांक 07.09.15 एवं 06.10.15 द्वारा अपनी विधायक क्षेत्र विकास निधि से कन्‍वर्जेंस योजनान्‍तर्गत प्रस्‍तावित किन कार्यों की प्रशासकीय स्‍वीकृति जिला योजना कार्यालय कटनी से हो गई है और उनमें से किन्‍हें मनरेगा मद से 40 प्रतिशत राशि प्रदान कर दी गई है और निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिये गये हैं? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) प्रस्‍तावों में से ग्रामीण यांत्रिकी सेवायें कटनी के किन संबंधित उपयंत्रियों, सहायक यंत्रियों और कार्यपालन यंत्री के द्वारा तकनीकी स्‍वीकृतियां प्रदान कर दी गई हैं और किनके द्वारा नहीं तथा किनकी दोषपूर्ण पायी गई हैं? (ग) क्‍या जिन यंत्रियों द्वारा तकनीकी स्‍वीकृतियां नहीं दी हैं और दोषपूर्ण प्राक्‍कलन बनाये गये हैं तथा जो किसी अधिकारियों द्वारा वापस कर दिये गये हैं? उनकी जाँच कर उनके विरूद्ध कोई कड़ी अनुशासनात्‍मक कार्यवाही की जावेगी और एक निर्धारित समय-सीमा में कार्य का निर्धारण सुनिश्चित किया जावेगा? (घ) प्रश्‍नांश (क), (ख), (ग) कार्यों की तकनीकी स्‍वीकृति कब तक प्रदान करा दी जावेगी और सभी निर्माण कार्य प्रारंभ करा दिये जावेंगे?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) 20 कार्यों की अनुशंसा की गई थी। सभी कार्यों की प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी की जा चुकी है। कार्यों की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के कालम 2 में दर्शित है। मनरेगा मद से जारी राशि एवं कार्य प्रारम्‍भ की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के कालम क्रमश: 8 एवं 7 में दर्शित है। (ख) तकनीकी स्‍वीकृति जारीकर्ता की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के कालम 5 में उल्‍लेखित है। सभी कार्यों की तकनीकी स्‍वीकृति जारी हो जाने से शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) सभी कार्यों की तकनीकी स्‍वीकृति जारी की जाकर कार्य प्रगति पर है।

परिशिष्ट ''सोलह''

पुनरीक्षित वेतनमान यथावत लागू करना

11. ( क्र. 275 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) म.प्र. पुनरीक्षित नियम 1990 लागू होने के पश्‍चात् के आदेश अर्थात म.प्र. वित्‍त विभाग के आदेश क्रमांक 383/109/97/सी/चार, दिनांक 6.3.97 से किन-किन वेतनमानों में क्‍या शर्त लगाई गई थी? (ख) म.प्र. पुनरीक्षित नियम 1998 के नियम - 12 में जिन विद्यमान वेतनमानों के विषय में म.प्र. पुनरीक्षित नियम 1990 एवं तत्‍पश्‍चात के आदेशों के अन्‍तर्गत एक निर्धारित सीमा के पश्‍चात् अथवा अन्‍य किन्‍हीं विशिष्‍ट शर्तों के अध्‍यधीन रहते हुये वेतनमान देने की शर्तें लगाई गई थी क्‍या वह पुनरीक्षित वेतनमान के संदर्भ में यथावत रहेगी? (ग) यदि प्रश्‍नांश (ख) का उत्‍तर सही है तो प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित वेतनमानों में लगाई गई शर्त यथावत लागू की जा रही है अथवा नहीं? यदि नहीं, तो कारण देवें।

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार. (ख) एवं (ग) जी हाँ

परिशिष्ट ''सत्रह''

समयमान वेतनमान दिया जाना

12. ( क्र. 276 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शासन के मंत्रालय एवं समस्‍त विभागाध्‍यक्ष कार्यालय तथा उनके अधीनस्‍थ कार्यालयों/संस्‍थाओं में कार्यरत सहायक ग्रेड-3 की सीधी भरती के नियम एक समान है या नहीं? यदि नहीं, तो नियम बतायें। (ख) यदि प्रश्‍नांश (क) का उत्‍तर हाँ, है तो म.प्र. राज्‍य के सिविल सेवा के सदस्‍यों को सेवा में आगे बढ़ने के निश्चित अवसर उपलब्‍ध कराये जाने की दृष्टि से (अ), (ब) एवं (स) संवर्ग के लिपिक संवर्ग (सहायक ग्रेड-3) के संवर्ग में वित्‍त विभाग के परिपत्र क्रमांक एफ 11/1/2008/नियम/चार, दिनांक 24 जनवरी 2008 के द्वारा आदेश प्रसारित किये गये हैं? यदि हाँ, तो यह आदेश मंत्रालयीन कर्मचारियों सहित सभी विभाग पर लागू था या नहीं? (ग) क्‍या राज्‍य शासन के आदेश क्रमांक एफ 11-2/2013/नियम/चार, भोपाल दिनांक 28 फरवरी 2013, 04 मार्च 2013 के द्वारा पृथक से आदेश जारी करते हुये संवर्ग (स) में अंकित प्रारंभिक वेतनमान रूपये 3050-4590 पाने वाले केवल म.प्र. मंत्रालय के तृतीय श्रेणी सहायक ग्रेड-3 के कर्मचारियों को द्वितीय समयमान वेतनमान रूपये 4500-7000 के स्‍थान पर रूपये 5500-9000 स्‍वीकृत किये जाने के आदेश पृथक से प्रसारित किये। (घ) प्रश्‍नांश (ग) का उत्‍तर हाँ, है तो राज्‍य शासन के विभागाध्‍यक्ष एवं विभागाध्‍यक्ष के अधीन कार्यरत सहायक ग्रेड-3 कर्मचारियों के साथ विसंगति हुई है या नहीं? यदि हाँ, तो इस विसंगति को विभाग कब समाप्‍त करेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (ग) जी हाँ। (घ) मंत्रालय के सहायक ग्रेड-3 को दिया गया समयमान वेतनमान राज्‍य के नीतिगत निर्णय के आधार पर है। प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। 

तालाबों की नहरों का निर्माण

13. ( क्र. 327 ) श्री कालुसिंह ठाकुर : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या धार जिले की धरमपुरी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम जामनघाटी, अहमदपुरा, अब्‍दुलपुरा में विभाग द्वारा निर्मित सिंचाई तालाबों के प्राक्‍कलन में यह प्रावधान था कि नजदीकी क्षेत्र के चिन्हित ग्रामों तक नहर तैयार कर क्षेत्र के कृषकों को सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराई जावेगी? (ख) यदि हाँ, तो वर्षों पूर्व तालाबों का निर्माण पूर्ण हो जाने के बावजूद लक्षित ग्रामों के कृषकों को सिंचाई सुविधा अब तक क्‍यों नहीं उपलब्‍ध कराई जा सकी है, कारण बतावें? तालाब के साथ नहर निर्माण हेतु प्राक्‍कलन में निर्धारित राशि का दुरूपयोग करने वाली निर्माण एजेंसी के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जावेगी तथा कब तक अपूर्ण नहरों का कार्य पूरा कर लक्षित ग्रामों के कृषकों को सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराई जावेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ख) धरमपुरी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम जामनघाटी एवं ग्राम अहमदपुरा में विभाग द्वारा कोई सिंचाई तालाब का निर्माण नहीं कराया गया है। ग्राम अब्‍दुलपुरा में अब्‍दुलपुरा तालाब का निर्माण कराया गया है। निर्मित अब्‍दुलपुरा परियोजना से रूपांकित क्षमता अनुसार सिंचाई सुविधा की गई है। प्राक्‍कलन में प्रावधान अनुसार ही नहर का निर्माण किया गया होने से कार्यवाही की स्थिति नहीं है। नहर कार्य पूर्ण है। अत: शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते है।

भिण्‍ड-भाण्‍डेर रोड पर से अतिक्रमण हटाया जाना

14. ( क्र. 442 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिण्‍ड जिले की नगर परिषद् लहार के अंतर्गत राजस्‍व एवं नगर परिषद् की भूमि पर भिण्‍ड-भाण्‍डेर रोड (स्‍टेट हाईवे 45) के दोनों ओर महाराणा प्रताप चौराहा से लेकर जेल तक आसना नाला सहित सड़क के दोनों ओर पक्‍के मकान व दुकानें बनाकर करोड़ों रूपए मूल्‍य की जमीन पर से अतिक्रमण को हटाने की जिला एवं नगर प्रशासन द्वारा कार्यवाही न करने का कारण बताएं? (ख) यदि अतिक्रमण हटाने हेतु कार्यवाही की गई तो कब-कब, क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) लहार नगर परिषद् की सीमा के अंतर्गत भिण्‍ड-भाण्‍डेर सड़क, बस स्‍टैण्‍ड से फार्मेसी कॉलेज तक लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित बायपास सड़क के दोनों ओर का अतिक्रमण कब तक हटा दिया जाएगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) महाराणा प्रताप चौराहे से बस स्‍टैण्‍ड तक राजस्‍व विभाग द्वारा सीमांकन उपरांत 38 अतिक्रमण चिन्हित किये गये है। नगर परिषद् लहार द्वारा अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण हटाने की सूचना दिनांक 17.02.2016 को जारी की गई है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ख) चिन्हित अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण हटाने के लिए दिनांक 17.02.2016 को सूचना जारी की गई है। दिसम्‍बर 2015 एवं जनवरी 2016 में अस्‍थाई अतिक्रमण हटाया गया है। (ग) राजस्‍व विभाग द्वारा सीमांकन उपरांत अतिक्रमण चिन्‍हित करने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण

15. ( क्र. 473 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला राजगढ़ की नगर पालिका परिषद् सारंगपुर अन्‍तर्गत कितने दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी कार्यरत हैं? (ख) क्‍या दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को 10 वर्ष से अधिक सेवा करने पर नियमित किया जाना है? यदि हाँ, तो प्रश्‍नांश (क) अनुसार 10 वर्ष से अधिक सेवा करने वाले दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को शासन की नियमितीकरण योजना के अंतर्गत आज दिनांक तक नियमित क्‍यों नहीं किया गया? (ग) प्रश्‍नांश (क) अनुसार 10 वर्षों से अधिक सेवा करने वाले दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को कब तक नियमित किया जावेंगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) कोई दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी कार्यरत नहीं है। निकाय में कार्य की आवश्‍यकता अनुसार मस्‍टर श्रमिक रखे जाकर कार्य कराया जाता है (ख) एवं (ग) निकाय में दैनिक वेतनभोगी न होने के कारण प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

वेतनमान अपग्रेड होने के संबंध में

16. ( क्र. 563 ) श्री ओम प्रकाश धुर्वे : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या श्री अरूण मिश्रा संपत्ति प्रबंधक, नगर निगम रीवा के कराजी सुधार न्‍यास से रीवा सुधार न्‍यास में बिना शासन के स्‍थानांतरण आदेश के स्‍थानांतरण उच्‍च वेतनमान, अपग्रेड होने आदि के संबंध में विधानसभा प्रश्‍न क्रमांक 2317 दिनांक 18.03.2008 लाया गया था? (ख) मध्‍यप्रदेश शासन नगरीय प्रशासन भोपाल पत्र क्र.एफ-4-76/2013/18/1, भोपाल, दिनांक 01.06.2013 द्वारा जाँच उपरांत पाये गये निम्‍न तथ्‍य (अ) शासन के बिना स्‍थानांतरण आदेश के कटनी से रीवा स्‍थानांतरित होकर कार्यरत रहना (ब) सुधार न्‍यास रीवा में किया गया संविलियन एवं (स) बगैर शासन स्‍वीकृति के उच्‍च वेतनमान प्राप्‍त करना, अनियमित पाये गये, यदि हाँ, तो कार्यवाही कब की जा रही है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) श्री अरूण कुमार मिश्रा का नगर पालिक निगम, रीवा में संविलियन की शिकायत के संबंध में कार्यवाही प्रचलित है। निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

दीनदयाल ग्रामीण विद्युतीकरण योजना

17. ( क्र. 566 ) श्री ओम प्रकाश धुर्वे : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला डिण्‍डोरी में दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना (पूर्ववर्ती 11 वीं पंचवर्षीय राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना) के तहत प्रथम चरण में जो विद्युतीकरण ग्रामों में हुआ है उनका सर्वे कब हुआ और विद्युतीकरण कब से प्रारंभ हुआ? (ख) चयनित ग्राम के पूरे घर या आबादी, विद्युतीकरण से कवर हो जाये क्‍या प्राक्‍कलन में ऐसा प्रयास किया गया? यदि नहीं, तो इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? (ग) जिला डिण्‍डोरी में ऐसे कितने अविद्युतीकृत ग्राम है एवं उनके शेष रहने के क्‍या कारण हैं? इसके लिए कौन जिम्‍मेदार हैं? (घ) इस योजना के तहत जिले में जो कार्य हो रहा है जिसमें खम्‍भों, ट्रांसफार्मर, मीटर कनेक्‍शन वायर नि:शुल्‍क बल्‍ब देने एवं गुणवत्‍ता देखने की जिम्‍मेदारी किस अधिकारी की है? जो खम्‍भे गाड़े जा रहे हैं, क्‍या उसमें बोल्‍डर, मुरम सीमेंट का उपयोग होता है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जिला डिण्‍डोरी में 11 पंचवर्षीय योजना के प्रथम चरण में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत् ग्रामों के विद्युतीकरण हेतु सर्वे कार्य माह दिसम्‍बर 2009 एवं विद्युतीकरण कार्य माह सितम्‍बर 2010 से प्रारम्‍भ हुआ था। (ख) उक्‍त योजना के प्रावधानों के अनुसार योजनान्‍तर्गत सघन विद्युतीकरण हेतु चयनित 844 ग्रामों के 100 एवं 100 से अधिक आबादी वाले मजरों/टोलों के विद्युतीकरण कार्य हेतु प्राक्‍कलन बनाकर विद्युतीकरण कार्य किया गया है। उक्‍त योजना में एच.टी.केबल का प्रावधान नहीं होने से एक ग्राम में कार्य नहीं हो पाया है, 843 ग्रामों में कार्य योजना के प्रावधानों के अनुसार किए गये हैं, अत: किसी के जिम्‍मेदार होने का प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) जिला डिण्‍डोरी में वर्तमान में 39 अविद्युतीकृत ग्राम है, ये ग्राम दूरस्‍थ क्षेत्र में स्थित एवं दुर्गम वनग्राम हैं जिनमें वन विभाग की शर्तों के अनुसार उच्‍च दाब लाईन खड़ी करने हेतु केबल लाईन का प्रावधान करना आवश्‍यक होता है। उक्‍त कार्य की लागत अत्‍यधिक होने के कारण यह कार्य प्रथम चरण की योजना में शामिल नहीं किया जा सका था, इस कार्य को 12वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में सम्मिलित कर लिया गया है, अत: इसके लिए कोई भी जिम्‍मेदार नहीं है। (घ) वर्तमान में संचालित योजना के तहत् प्रश्‍नाधीन उल्‍लेखित कार्य टर्न-की ठेकेदार एजेंसी मेसर्स वोल्‍टाज, मुंबई के माध्‍यम से कराया जा रहा है तथा कार्य की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने की जिम्‍मेदारी जिले में नियुक्‍त कार्यपालन अभियंता एवं सहायक अभियंता तथा थर्ड पार्टी एजेन्‍सी मेसर्स ई.आर.डी.ए. बड़ोदरा की है। इसके अतिरिक्‍त त्रिस्‍तरीय मॉनिटरिंग सिस्‍टम के अन्‍तर्गत मेसर्स आर.ई.सी. एवं विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नियुक्‍त दलों द्वारा भी कार्यों की गुणवत्‍ता के निरीक्षण का प्रावधान है। योजनान्‍तर्गत जो खम्‍भे गाड़े जा रहे हैं उसमें बोल्‍डर, मुरम एवं सीमेन्‍ट का उपयोग योजना के प्रावधानों के अनुसार ही किया जा रहा है। 

अवैध मोबाइल टावरों की जानकारी

18. ( क्र. 632 ) श्री राजेश सोनकर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या नगर पालिक निगम इंदौर द्वारा पिछले दिनों इंदौर शहर में अवैध रूप से लगे टॉवरों को हटाने की कार्यवाही की थी? यदि हाँ, तो कितने अवैध टॉवर कहाँ-कहाँ पर व किन-किन कंपनियों के थे? कितने टॉवर हटाये गये? क्‍या इंदौर शहर स्‍थापित टॉवरों पर एक ही टॉवर पर कई कंपनियों द्वारा फ्रिक्‍वेंसी शेयरिंग की जा रही है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में अवैध टॉवर कितने समय से लगे हुए थे? क्‍या नगर पालिक निगम इंदौर इन अवैध टावरों से पूर्व में स्‍थापित दिनांक से ही शुल्‍क वसूल करेगा? यदि हाँ, तो जिन भवनों पर उक्‍त टावर स्‍थापित हैं? क्‍या उनके एग्रीमेंट दिनांक का परीक्षण कर शुल्‍क वसूल किया जाएगा? (ग) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में क्‍या पूर्व में स्‍थापित किये गये अवैध टावरों पर नगर पालिक निगम इंदौर के अधिकारी/कर्मचारियों की दृष्टि इन अवैध टावरों पर नहीं पड़ी? क्‍या इस संबंध में दोषी कर्मचारियों पर कोई कार्यवाही की जायेगी? (घ) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में नगर पालिक निगम सीमा में शामिल वार्डों में व निगम सीमा में कहाँ-कहाँ पर किन-किन टेलिकॉम कम्‍पनियों द्वारा टावरों एवं केबल खुदाई हेतु अनुमति चाही गई?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। हटाये गये टावर की संख्‍या, स्‍थान, कम्‍पनी के नाम की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। जी हाँ। (ख) अवैध टॉवर हटाये जाने पर कम्‍पनी द्वारा प्रस्‍तुत नियमितिकरण आवेदनों के आधार पर उक्‍त टॉवर लगभग 05 वर्ष से स्‍थापित थे। जी हाँ, मध्‍यप्रदेश नगर पालिका (अवस्‍थी टावर के संस्‍थापन/सेल्‍यूलर मोबाईल फोन सेवा के लिये अधोसंरचना) नियम 2012 के अनुसार शुल्क लिया जावेगा। (ग) नगर पालिक निगम के संज्ञान में आने पर समय-समय पर अवैध टॉवर के वियद्ध कार्यवाही की जाती है। जो कि एक सतत् प्रक्रिया है। अत: शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) नगर निगम सीमा में शामिल वार्डों में लगे टॉवरों की जानकारी एवं केबल खुदाई की अनुमति की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' एवं ''ब-1'' अनुसार है।

नगर पालिक निगम इन्‍दौर में विद्युत व्‍यवस्‍था

19. ( क्र. 633 ) श्री राजेश सोनकर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नगर पालिक निगम इन्‍दौर द्वारा पूर्व में इन्‍दौर शहर में विद्युत व्‍यवस्‍था हेतु पुराने वेपर लेम्‍पों के स्‍थान पर नये कम्‍पलीट फीटिंग लगाने हेतु कब-कब व किस-किस कम्‍पनी को ठेका दिया? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में पुराने वेपर लेम्‍प कितनी संख्‍या में किन-किन वार्डों से निकाले गये व उनके स्‍थान पर कौन-कौन सी फिटिंग कहाँ-कहाँ लगाई गई व उस पर कितनी-कितनी राशि कहाँ-कहाँ व्‍यय की गई? विधानसभावार जानकारी उपलब्‍ध कराये? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के संदर्भ में क्‍या निगम द्वारा नई फिटिंगे कौन सी कम्‍पनी की लगाने का ठेका किन-किन कम्‍पनी को किस दर पर दिया गया? निगम ने सिटीलुम कम्‍पनी को निगम सीमा में शामिल वार्डों में स्‍ट्रीट लाईट संचालन, संधारण की जिम्‍मेदारी किस नियमों/शर्तों के आधार पर दी व कम्‍पनी द्वारा कहाँ-कहाँ पर क्‍या-क्‍या कार्य किया गया?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) सितम्‍बर-2008 में एशियन इलेक्‍ट्रानिक्‍स प्रा. लिमि. को ठेका दिया गया है। (ख) पुराने वेपर लेम्‍प (सोडियम/मेटल हेलाईड फिटिंग्‍स) 15867 नगर निकाले गये एवं इनके स्‍थान पर इतनी ही संख्‍या में 4x24 वॉट नई ऊर्जा बचत फिटिंग लगाई गई थी। वार्डवार (नवीन परिसीमन के पूर्व वार्ड) की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। कुल व्‍यय राशि रू.12,60,29,771.00 है। विधानसभावार विद्युत पोल की जानकारी नहीं होने से विधानसभावार जानकारी दी जाना संभव नहीं है। (ग) मेसर्स एशियन इलेक्ट्रानिक्‍स प्रा. लिमटेड को दर रू. 31,90,200/- प्रति माह पर मेयर-इन-काउंसिल की न्‍यूनतम नगर संधारण सहित प्रतिमाह सहित। सिटीलम कम्‍पनी को 69 वार्डों (नये परिसीमन के पूर्व) संचालन/संधारण हेतु निविदा आमंत्रित कर दिनांक 25-06-2013 से 5 वर्षों के लिये मेयर-इन-काउंसिल/निगम परिषद् की स्‍वीकृति से कार्य दिया गया। निविदा की शर्त पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। 

लैक्‍सेस केमिकल उद्यो‍ग की जाँच रिपोर्ट पर कार्यवाही

20. ( क्र. 733 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्‍जैन लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद द्वारा नागदा स्थित लैक्‍सेस केमिकल उद्योग के खतरनाक प्रदूषण संबंधी शिकायत शासन को वर्ष 2010 में की थी? जिसकी जाँच म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण मंडल व भारत सरकार ने की थी? उक्‍त जाँच रिपोर्ट का ब्‍यौरा क्‍या है व की गई कार्यवाही का ब्‍यौरा क्‍या है? (ख) उक्‍त खतरनाक केमिकल उद्योग के प्रदूषण के संबंध में फरवरी 2011 में की गई श्री अब्‍दुल हमीद पूर्व प्रदेश मंत्री, भाजपा अ.सं.मों.की शिकायत की जाँच रिपोर्ट व कार्यवाही का ब्‍यौरा क्‍या है? (ग) शासन ने प्रदूषण नियमों का पालन न करने वाले लैक्‍सेस उद्योग पर शिकायत दिनांक से अब तक क्‍या-क्‍या कार्यवाही की है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) माननीय पूर्व सांसद, लोकसभा क्षेत्र, उज्जैन द्वारा की गई शिकायत की जाँच केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से की गई है। रिपोर्ट की अनुशंसायें पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा उद्योग के विरूद्ध जल अधिनियम,1974 तथा वायु अधिनियम,1981 के प्रावधानों के अंतर्गत न्यायालयीन वाद दायर किया गया है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (ख) श्री अब्दुल हमीद द्वारा की गई शिकायत की जाँच रिपोर्ट पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। (ग) उद्योग पर मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा की गई कार्यवाही का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है।

किसान समृद्धि योजना का क्रियान्‍वयन

21. ( क्र. 856 ) श्री जतन उईके : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र पांढुर्णा के किसान समृद्धि योजना के तहत 1 जनवरी 2013 से जनवरी 2016 तक कितने आवेदन जमा हुए है? (ख) क्‍या उल्‍लेखित प्रस्‍तुत आवेदनों का निराकरण हो चुका है अथवा नहीं? कब तक उनका निराकरण कर दिया जायेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) विधानसभा क्षेत्र पांढुर्णा के अन्‍तर्गत पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के पांढुर्णा संभाग में किसान समृद्धि योजना अंतर्गत प्रश्‍नाधीन अवधि में कुल 6846 आवेदन प्राप्‍त हुए। (ख) जी हाँ, प्रश्‍नाधीन सभी आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है।

नवीन विद्युत ग्रिड स्‍थापना

22. ( क्र. 868 ) श्री जतन उईके : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या छिन्‍दवाड़ा जिले की विधान सभा क्षेत्र पांढुर्णा के ग्रामीण क्षेत्र पाठई, काराघाट, कामठी, कौडिया, लोनादेई, नरसला पठारा, दिधोरी, ढोलनखापा के ग्रामों में लम्‍बी-लम्‍बी दूरी से विद्युत प्रदाय की जा रही है? (ख) यदि हाँ, तो कितने दूरी से उन्‍हें विद्युत दी जा रही है? (ग) क्‍या इतनी लम्‍बी दूरी से विद्युत व्‍यवस्‍था किये जाने के कारण विद्युत प्रदाय से व्‍यवधान उत्‍पन्‍न होता है तो कई दिनों तक तार आदि टूटने के कारण उन्‍हें विद्युत नहीं मिल पाती है? (घ) यदि हाँ, तो क्‍या व्‍यवधान से बचने के लिए चिमनखापा में 132 के.वी. उपकेन्‍द्र ग्रामीण क्षेत्र के लिए बनाया जाना प्रस्‍तावित है? यदि हाँ, तो कब तक पूर्ण कर लिया जायेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं। (ख) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) जी नहीं, अपितु जंगल से लाईन गुजरने के कारण व्‍यवधान उत्‍पन्न होते है जिसके कारण विद्युत अवरोध होता है। उपलब्‍ध संसाधनों का उपयोग करते हुये शीघ्र सुधार कार्य कराकर, व्‍यवधान दूर कर विद्युत आपूर्ति प्रारम्‍भ कर दी जाती है। (घ) ग्राम चिमनखापा में 132 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र बनाया जाना प्रस्‍तावित नहीं है अपितु एक 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र ग्राम कौडि़या (चिमनखापा) में बनाये जाने का प्रस्‍ताव दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में शामिल है। वर्तमान में ग्राम कौडि़या (चिमनखापा) में प्रस्‍तावित उक्‍त उपकेन्‍द्र के निर्माण हेतु भूमि अधिग्रहण संबंधी कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। भूमि उपलब्‍ध होने एवं निविदा प्रक्रिया उपरांत टर्न की ठेकेदार एजेंसी के चयन तथा वित्‍तीय उपलब्‍धता अनुसार उक्‍त कार्य किया जा सकेगा, जिस हेतु वर्तमान में समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। 

ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाना

23. ( क्र. 878 ) श्री जतन उईके : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश में ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा दिये जाने के संबंध में क्‍या नियम हैं? नियम निर्देशों की जानकारी उपलब्‍ध करावें? (ख) छिन्‍दवाड़ा जिले में ऐसी कितनी ग्राम पचांयतें हैं, जो प्रश्‍नांश (क) अनुसार नगर पंचायत का दर्जा दिये जाने के मापदण्‍डों को पूरा करती हैं? संख्‍या बतायें? (ग) क्‍या शासन पांढुर्णा विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायतें सिवनी, तिगांव, बड़चिचोली संवारी बाजार को नगर पंचायत का दर्जा दिये जाने की कार्यवाही करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) मध्‍यप्रदेश में ग्राम पंचायतों को नगर पंचायत का दर्जा दिये जाने के संबंध में मध्‍यप्रदेश राजपत्र (असाधारण) दिनांक 27 दिसम्‍बर, 2011 में प्रकाशन अनुसार नगर परिषद् गठन हेतु जनसंख्‍या का अनुपात 20,000 से अधिक तथा 50,000 से कम निर्धारित किया गया है। जिन ग्राम पंचायतों की जनसंख्‍या उक्‍त मापदण्‍ड को पूर्ण करती हैं, उन्‍हें नगर परिषद् के गठन की कार्यवाही हेतु पंचायत द्वारा प्रस्‍तुत प्रस्‍ताव पर जिला कलेक्‍टर से प्राप्‍त प्रतिवेदन के आधार पर गठन की कार्यवाही नियमानुसार की जाती है। (राजपत्र की छायाप्रति जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है।) (ख) छिन्‍दवाड़ा जिले की कोई भी नगर पंचायत निर्धारित मापदंड को पूरा नहीं करती है। (ग) पांढुर्णा विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायतें वर्ष 2011 की जनगणना अनुसार सिवनी की जनसंख्‍या 6026 है, तिगांव की जनसंख्‍या 7460 एवं बड़चिचोली सांवली बाजार की जनसंख्‍या 5349 है। नियमानुसार नगर परिषद् गठन हेतु जनसंख्‍या का मापदंड पूर्ण नहीं होने के कारण नगर पंचायत का दर्जा दिया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट ''अठारह''

जनभागीदारी योजना के स्‍वीकृत कार्य

24. ( क्र. 902 ) श्री गोवर्धन उपाध्‍याय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विदिशा जिले के सिरोंज एवं लटेरी विकासखण्‍ड में विगत 3 वर्षों में योजना मण्‍डल विदिशा द्वारा जनभागीदारी योजना के तहत किन-किन ग्राम पंचायतों में कौन-कौन से कार्यों में कितनी-कितनी राशि स्‍वीकृत की गई? (ख) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार स्‍वीकृत कार्यों में से कौन-कौन से कार्य पूर्ण हुए एवं कौन-कौन से कार्य अपूर्ण है, अपूर्ण कार्यों को कब तक पूर्ण किया जावेगा? अब तक कितनी राशि का भुगतान किया गया है? (ग) प्रश्‍नांश (क) में वर्णित कार्यों में किस उपयंत्री द्वारा मूल्‍यांकन किया गया है? क्‍या एक ही कार्य को 3 से 4 बार स्‍वीकृत हो कर पूर्ण होना बतलाया गया है, यदि हाँ, तो ऐसा क्‍यों? उक्‍त कार्य में किस-किस उपयंत्री द्वारा प्राक्‍कलन तैयार किये गये है? (घ) प्रश्‍नांश (क) के स्‍वीकृत कार्यों में अनियमितता एवं भ्रष्‍टाचार की कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुई? शिकायतों की जाँच किस-किस अधिकारी के द्वारा कराई गई? दोषियों पर क्‍या कार्यवाही की जावेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ' ' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ' ' एवं ' ' के कालम 8,9, एवं 7 अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र ' ' एवं ' ' के कालम 10 अनुसार है। एक ही कार्य एक बार से अधिक स्‍वीकृत होना प्रतिवेदित नहीं है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) अनियमित्‍ता एवं भ्रष्‍टाचार की कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

स्‍वेच्‍छानुदान के तहत हितग्राहियों को स्‍वीकृत राशि

25. ( क्र. 906 ) श्री गोवर्धन उपाध्‍याय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिरोंज विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कार्यालय कलेक्‍टर जिला विदिशा के आदेश क्रमांक 1421 दिनांक 31.10.2014 द्वारा वर्ष 2014-15 में विधायक निधि स्‍वेच्‍छानुदान के तहत कुल कितने हितग्राहियों को कितनी राशि स्‍वीकृत की गई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार स्‍वीकृत कितने हितग्राहियों को कितनी राशि का भुगतान किया गया, कितनी राशि भुगतान हेतु लंबित है? लंबित रहने का क्‍या कारण? कब तक भुगतान किया जावेगा? (ग) प्रश्‍नांश (क) के अनुसार विधायक निधि स्‍वेच्‍छानुदान के तहत हितग्राहियों को स्‍वीकृत राशि में से कितने हितग्राहियों को कम राशि का भुगतान किया गया? कम राशि भुगतान का क्‍या कारण है? क्‍या दोषी पाये जाने पर कार्यवाही की जावेगी?
जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) 226 हितग्राहियों को राशि रूपये 4.84 लाख स्‍वीकृत की गई। (ख) 226 हितग्राहियों को राशि रूपये 4.84 लाख का भुगतान किया गया है। भुगतान हेतु कोई राशि लंबित नहीं है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) किसी भी हितग्राही को कम राशि का भुगतान नहीं किया गया। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

निर्माण कार्यों की जानकारी

26. ( क्र. 907 ) श्री गोवर्धन उपाध्‍याय : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिरोंज विधानसभा क्षेत्र में पुरातत्‍व विभाग द्वारा पिछले 5 वर्षों में किन-किन स्‍थानों पर कौन-कौन से निर्माण कार्य गये? उक्‍त निर्माण कार्यों में शासन द्वारा कितनी-कितनी राशि वर्षवार व्‍यय की गई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार उक्‍त कार्यों में से कितने कार्य पूर्ण हुए एवं कितने कार्य अपूर्ण हैं? अपूर्ण कार्यों को कब तक पूर्ण कराये जायेंगे? (ग) उक्‍त कार्यों में अनियमितता संबंधी कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुई? उस पर क्‍या कार्यवाही की गई है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) 13वें वित्‍त आयोग के अंतर्गत पुरातत्‍व विभाग द्वारा स्‍मारकों के अनुरक्षण एवं विकास कार्य कराये जाते है. पुरासंपदा की सुरक्षा की दृष्टि से 13वें वित्‍त आयोग के अंतर्गत भारत सरकार से प्राप्‍त राशि से वित्‍तीय वर्ष 2012-13 की कार्य योजना अनुसार छोटी मदागन लटेरी, (सिरोंज) जिला विदिशा में स्‍कल्‍पचर शेड का निर्माण कार्य कराया गया, जिसमें राशि रूपये 13,89,066/- का व्‍यय हुआ. इसके अतिरिक्‍त संग्रहालयों के उन्‍नयन एवं विकास कार्य के अंतर्गत सिरोंज संग्रहालय में बाउण्‍ड्रीवाल का निर्माण कार्य किया गया जिसमें राशि रूपये 24,94,240/- का व्‍यय हुआ. (ख) प्रश्‍नांश में वर्णित दोनों कार्य पूर्ण हो गये हैं. (ग) प्रश्‍नांश में वर्णित कार्यों में अनियमितता संबंधी कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई. अत: किसी कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता.

मुरैना नगर पालिका में अनियमितता की जाँच

27. ( क्र. 919 ) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या चंबल आयुक्‍त कार्यालय मुरैना द्वारा दिनांक 14.01.2015 को पत्र क्रमांक/विकास/23-4/51ए/2011/259 एवं पत्र क्र./विकास/23-4/51सी/2011/257 दिनांक 14.02.2015 तथा पत्र क्र./विकास/ 23-4/2011/263 दिनांक 14.01.2015 मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी नगर परिषद् मुरैना को अनुशासन कार्यवाही हेतु भेजा है? यदि हो तो उस पर क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) क्‍या कार्यालय कलेक्‍टर मुरैना द्वारा दिनांक 02.06.2011 को पत्र क्र./डूडा/शिकायत2011/407 पर टेण्‍डर प्रक्रियाओं में हुई अनियमितता, गबन, अधिकारिक क्षमताओं से अधिक कार्यों की स्‍वीकृति पर वर्ष 2011 में गठित समिति से जाँच कराई गई थी? यदि हाँ, तो जाँच कमेटी का प्रतिवेदन क्‍या था? बिन्‍दुवार जाँच प्रतिवेदन की जानकारी दी जावें? (ग) क्‍या उक्‍त जाँच प्रतिवेदन में अधिकारियों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज कराने के निर्देश देकर 3 दिवस में कार्यवाही की जानकारी मांगी गई थी? यदि हाँ, तो उस पर कार्यवाही क्‍यों नहीं कराई गई? (घ) क्‍या तत्‍कालीन जिलाधीश द्वारा कराई गई जाँच को उसी स्‍तर के अधिकारी (जिलाधीश) द्वारा जाँच कर अमान्‍य किया गया था क्‍या यह न्‍याय संगत था? क्‍या शासन हुई जाँच रिपोर्ट को अमान्‍य कर पूर्व की जाँच पर कार्यवाही कर वित्‍तीय अनियमितता करने वाले अधिकारियों पर अकुंश लगाएगा? यदि हाँ, तो कब तक?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ, परन्‍तु संबंधितों द्वारा आयुक्‍त, चंबल संभाग के आदेश के विरूद्ध माननीय उच्‍च न्‍यायालय खण्‍डपीठ, ग्‍वालियर से स्‍थगन प्राप्‍त करने से नगर पालिक निगम मुरैना द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है। (ख) जी हाँ। जाँच प्रतिवेदन पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी नहीं। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) कलेक्‍टर, मुरैना के आदेश दिनांक 02.06.2011 पर पी.आई.सी. द्वारा पारित संकल्‍प क्रमांक 91 दिनांक 10.06.2011 से संबंधित कर्मचारियों को निलंबित किया जाकर विभागीय जाँच संस्थित की गई और नियमानुसार पुर्नविलोकन आवेदन प्रस्‍तुत करने का निर्णय लिया गया। कलेक्‍टर के आदेश दिनांक 02.06.2011 के विरूद्ध श्री शिवचरन डंडोतिया एवं अन्‍य द्वारा माननीय उच्‍च न्‍यायालय में रिट पिटीशन क्रमांक 6710/2012, दायर किया गया, जिससे माननीय उच्‍च न्‍यायालय द्वारा दिनांक 18.09.2012 को कलेक्‍टर, जिला मुरैना को पुन: प्रकरण का परीक्षण कर विधि अनुकूल निर्णय लेने का आदेश पारित किया गया, जिसके अनुपालन में कलेक्‍टर, मुरैना द्वारा नगर पालिका परिषद्, मुरैना की पी.आई.सी. के संकल्‍प क्रमांक 200 दिनांक 16.08.2012 को पारित निर्णय में विभागीय जाँच उपरांत आरोप सिद्ध नहीं पाए गए, को आधार मानते हुए दिनांक 02.06.2011 को जारी आदेश, अमान्‍य कर दिया गया है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। 

सोलर पावर कंपनियां

28. ( क्र. 948 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मंदसौर जिले की तहसील सीतामऊ में फोकल फोटोवाल्‍टेक इंडिया प्रा.लि. एवं फोकल रेनेवेबल एनर्जी टू इंडिया प्रा.लि. फोकल एनर्जी सोलर वन इंडिया प्रा.लि. के या अन्‍य के खिलाफ उच्‍च न्‍यायालय के द्वारा पत्र क्रमांक 2684/2015 दिनांक 28.04.2015 का कोई आदेश विभाग एवं कलेक्‍टर महोदय का प्राप्‍त हुआ है या नहीं बतावें एवं उस का पालन किया गया है या नहीं? (ख) क्‍या विभाग द्वारा उपरोक्‍त कंपनियों को विद्युत कमिशनिंग करने एवं लाईट सप्‍लाई चालू करने की परमिशन दी गई है तो आदेश क्रमांक/दिनांक उपलब्‍ध करावें? (ग) प्रश्‍नांश (क) में दर्शाई गई कंपनी द्वारा सन एडीशन नामक दूसरी कंपनी से अनुबंध कर स्‍थानांतरण किया गया है या नहीं? अगर किया गया है तो विवरण उपलब्‍ध करावें? (घ) माननीय उच्‍च न्‍यायालय द्वारा उपरोक्‍त कंपनियों द्वारा किये गये कार्य पर कोई स्‍टे दिया गया था तो उस पर की गई कार्यवाही की जानकारी उपलब्‍ध करावें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ, माननीय उच्‍च न्‍यायालय का रिट याचिका क्रमांक 2684/2015 दिनांक 28.04.2015 में पारित अंतरिम आदेश कलेक्‍टर मंदसौर को प्राप्‍त हुआ है, जिसका पालन किया गया। उक्‍त आदेश फोकल एनर्जी सोलर वन इंडिया प्रा.लि. के विरूद्ध है, परन्‍तु फोकल फोटोवाल्‍टेक इंडिया प्रा.लि. एवं फोकल रेनेवेबल एनर्जी टू इंडिया प्रा.लि. के विरूद्ध नहीं है। (ख) जी हाँ, कार्यालय मुख्‍य अभियंता (विद्युत सुरक्षा) एवं मुख्‍य निरिक्षक भोपाल के पत्र क्रमांक 301 दिनांक 23.05.2015, क्रमांक 296 दिनांक 23.05.2015 एवं क्रमांक 382 दिनांक 30.05.2015 द्वारा फोकल फोटोवाल्‍टेक इंडिया प्रा.लि., फोकल रेनेवेबल एनर्जी टू इंडिया प्रा.लि. व फोकल एनर्जी सोलर वन इंडिया प्रा.लि. क्रमश: को अनुमति दी गई है। (ग) जी नहीं। (घ) माननीय उच्‍च न्‍यायालय द्वारा अपने अंतरिम आदेश द्वारा विकासक मेसर्स फोकल एनर्जी सोलर वन इंडिया प्रा.लि. को परियोजना कार्य रोकने हेतु स्‍थगन आदेश दिया गया था, जिसका पालन किया गया। माननीय उच्‍च न्‍यायालय द्वारा अंतरिम आदेश दिनांक 28.05.2015 द्वारा स्‍पष्‍ट किया गया कि उक्‍त पूर्व अंतरिम आदेश दिनांक 28.04.2015 मात्र उसी भूमि से संबंधित है, जिसका आवंटन कलेक्‍टर मंदसौर द्वारा अपने आदेश क्रमांक 37/A-20 (1) /2014-15 दिनांक 05.12.2014 द्वारा किया गया है।

पानपुर बडौद तालाब की डूब में आने वाली भूमि का मुआवजा

29. ( क्र. 949 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सुवासरा विधानसभा क्षेत्र में पानपुर, बडौद तालाब किस विभाग के अंतर्गत आता है एवं संचालित किया जाता है? (ख) उपरोक्‍त तालाब में कितने किसानों की भूमि डूब में गई है एवं इसमें से कितने किसानों को भूमि के बदले भूमि या मुआवजा राशि प्राप्‍त हो चुकी है? (ग) जिन किसानों की भूमि डूब में गई है उन्‍हें दूसरी जगह खेती के लिए भूमि या मुआवजा राशि कब तक दी जावेगी? (घ) क्‍या कुछ किसानों को भूमि के बदले भूमि या मुआवजा राशि नहीं देकर तालाब को खाली कर दिया जाता है जिससे 700 किसानों को नुकसान होता है?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) पानपुर बड़ौद तालाब एक निमज्जित तालाब होकर जल संसाधन विभाग के नियंत्रण में है। (ख) से (घ) प्रश्‍नाधीन तालाब के डूब क्षेत्र में 78 कृषकों की 60.91 हेक्‍टर भूमि है। निमज्जित तालाब का उददे्श्‍य भू-जल का पुनर्भरण करना और रबी सिंचाई के लिए भूमि में नमी बनाए रखना होने से निमज्जित तालाब वर्षा ऋतु उपरांत खाली कर भूमि स्‍वामी कृषक उनकी भूमि पर रबी फसल लेते हैं। निमज्जित तालाब की भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जाता है। शेष प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

राजीव आवास योजना की जानकारी

30. ( क्र. 970 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सागर विधानसभा क्षेत्र में शासन की राजीव आवास योजना पायलट प्रोजेक्‍ट के अंतर्गत कितने आवासों का निर्माण किया जाना है एवं इस हेतु कितनी राशि की स्‍वीकृति की गई है तथा कब तक पूर्ण किया जाना था? (ख) कितने आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है तथा कितने शेष हैं? वर्तमान में क्‍या स्थिति है? (ग) क्‍या उक्‍त आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है एवं वर्तमान में निर्माण कार्य बंद है? यदि हाँ, तो इसका क्‍या कारण है? (घ) उक्‍त आवासों का निर्माण कार्य पुन: कब तक शुरू किया जा सकेगा तथा इसे कब तक पूर्ण कर लिया जायेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) 780 भवन। राशि रू. 35.11 करोड़। मई 2014 तक। (ख) कोई भी आवास पूर्ण नहीं हुये हैं। 292 भवनों का कार्य प्रारंभ किया गया था, जो कि अपूर्ण है। (ग) जी हाँ। जी हाँ। ठेकेदार द्वारा कार्य नहीं किये जाने के कारण। (घ) ठेकेदार को निर्माण कार्य प्रारंभ करने अन्‍यथा ब्‍लेक लिस्‍टेड किये जाने हेतु सूचित किये जाने हेतु सूचित किया गया है। यदि वर्तमान ठेकेदार कार्य प्रारंभ नहीं करता है, तो पुन: निविदा जारी कर, नये ठेकेदार से कार्य करवाया जायेगा। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

सागर नगर के मुख्‍य बस स्‍टैण्‍ड का जीर्णोद्धार

31. ( क्र. 971 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या माननीय विभागीय मंत्री महोदय द्वारा सागर नगर के मुख्‍य बस स्‍टैण्‍ड का जीर्णोद्धार नवीनीकरण, सु‍विधाओं के विस्‍तार का शिलान्‍यास किया गया है, तो उक्‍त कार्य कब प्रारंभ किया जा रहा है तथा कब तक पूर्ण किया जायेगा? (ख) उक्‍त प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में स्‍वीकृत राशि से कौन सी सुविधायें उपलब्‍ध होंगी तथा उन पर कितनी राशि व्‍यय की जायेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। निर्माण कार्य दिनांक 16.02.2016 से प्रारंभ कर दिया गया है। ठेकेदार से अनुबंधानुसार कार्य पूर्णता की सम्‍भवित तिथि दिसम्‍बर-2016 है। (ख) उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में स्‍वीकृत राशि से कांक्रीट कार्य, बस पार्किंग, प्‍लेटफार्म, पार्किंग शेड, बायो टॉयलेट, प्‍लाजा गेट, ड्रेनेज कार्य करवाये जावेंगे। उक्‍त निर्माण कार्य की लागत राशि रू. 254.00 लाख है।

बांध निर्माण

32. ( क्र. 1025 ) श्री रामपाल सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शहडोल जिले के ब्‍यौहारी एवं जयसिंहनगर तहसीलों में जल संसाधन विभाग द्वारा नवीन सिंचाई बांध निर्माण की स्‍वीकृत प्रदान की गई है? यदि हाँ, तो उक्‍त तहसीलों में किन-किन स्‍थानों में बांध वर्ष 2014-15 एवं 15-16 में स्‍वीकृत की गई है और स्‍वीकृत राशि बांधवार कितनी है? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) के अनुसार हाँ तो सिंचाई बांध स्‍वीकृत की गई है तो बांध निर्माण की स्थिति क्‍या है? प्रश्‍न दिनांक तक प्रत्‍येक बांध निर्माण में कितनी राशि व्‍यय की गई है और प्रत्‍येक बांधों से कितना रकवा सिंचाई किया जाना प्रस्‍तावित है?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट ''उन्नीस''

योजनाओं के प्रचार-प्रसार हेतु आवंटित राशि

33. ( क्र. 1026 ) श्री रामपाल सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शहडोल जिले में विभिन्‍न योजनाओं के प्रचार-प्रसार हेतु शासन स्‍तर से राशि आवंटित की गई है? यदि हाँ, तो कितनी राशि विगत वर्ष 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक आवंटित की गई है? (ख) आवंटित राशि से किन-किन कार्यों के लिये कितनी-कितनी राशि व्‍यय की गई है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) विभाग द्वारा शहडोल जिले के लिए प्रश्नांकित अवधि मे विभिन्न योजनाओं के प्रचार-प्रसार हेतु वर्ष 2014-15 में रूपये 70.000/- एवं वर्ष 2015-16 में रूपये 85.000/- की राशि आवंटित की गई। (ख) आवंटित राशि से प्रश्न दिनांक तक 1.25.000/- की राशि सूचना शिविर एवं प्रदर्शनी पर व्यय किया गया है।

विद्युतविहीन गांवों, मजरों, टोलों का विद्युतीकरण

34. ( क्र. 1075 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पत्र क्र./विद्युत/2015-2016/59 दिनांक 10/06/2015 मुख्‍य अभियन्‍ता म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ग्‍वालियर को प्रश्‍नकर्ता विधायक द्वारा लिखा था पत्र पर अभी तक क्‍या-क्‍या कार्यवाही की है? (ख) भितरवार विधानसभा क्षेत्र में दिनांक 1 जनवरी 2016 की स्थिति में कितने गांव है जो विद्युतविहीन है उनकी सूची दें? ऐसे ग्राम भी बतावें जो देश की आजादी के बाद से प्रश्‍न दिनांक तक विद्युत विहीन है सूची दें, अब इन गाँवों में कब तक विद्युत प्रदाय करा दी जावेगी एक निश्‍चित समय-सीमा स्‍पष्‍ट करें? (ग) 1 जनवरी 2016 की स्थिति में विद्युत की इन गाँवों मजरों, टोलों में क्‍या स्थिति है - (1) लखनपुरा (2) गुर्जा (3) प्रयागपुरा (4) सीडना का पुरा (5) रघुवर का पुरा (6) रेंडाकी (7) गोठपुरा (8) मूँसाकी (9) हुँन्‍नपुरा (10) झाला (11) नयागाँव (12) चन्‍दूपुरा (13) काला खेत (14) कनेहर झील (पनिहार पंचायत) (15) कैंट (16) जरेरूआ का पुरा (17) बेरखेड़ा (18) जखौदी (19) सिकरावली (20) समेड़ी (21) बसई (22) खितैरा (23) पयैखा (24) वेदों का पुरा (25) सुरेहला (26) बसौटा (27) पूरनपुरा (28) अर्जुनपुरा (29) सिंघाईगढ़ा (30) कैमाई (31) सियाबाई इन गाँवों, मजरों में कब तक विद्युत पहुँचा दी जावेगी, अभी तक विद्युतविहीन रहने का क्‍या कारण रहा स्‍पष्‍ट करें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) माननीय प्रश्‍नकर्ता विधायक महोदय द्वारा मुख्‍य अभियंता म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, ग्‍वालियर को लिखे गये प्रश्‍नाधीन पत्र दिनांक 10.06.2015 में उल्‍लेखित बिन्‍दुओं पर की गयी कार्यवाही का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) भितरवार विधानसभा क्षेत्र में दिनांक 1 जनवरी 2016 की स्थिति में 21 ग्रामों में विद्युत अधोसंरचना उपलब्‍ध नहीं है। इनमें से 17 ग्राम डि-इलेक्ट्रिफाईड हैं एवं 4 ग्राम वीरान हैं। उक्‍त ग्रामों की सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। भितरवार विधानसभा क्षेत्र में ऐसा कोई भी आ‍बाद ग्राम नहीं है जो आजादी के बाद से प्रश्‍न दिनांक तक विद्युतविहीन रहा हो। 17 डि-इलेक्ट्रिफाईड ग्रामों में से 3 ग्राम 11वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में शामिल हैं। उक्‍त योजना का कार्य टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु ठेकेदार एजेंसी मेसर्स इरा इंफ्रा, नोयडा को कार्यादेश जारी किया गया था। टर्न की ठेकेदार एजेन्‍सी द्वारा कार्य समय-सीमा में नहीं किये जाने के कारण दिनांक 06.02.2016 को उक्‍त एजेंसी को जारी अवार्ड निरस्‍त कर दिया गया है। उक्‍त 3 ग्रामों सहित योजना के शेष कार्य के लिए पुन: निविदा कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उक्‍त 17 डि-इलेक्ट्रिफाईड ग्रामों में से 13 ग्राम दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के अन्‍तर्गत विद्युतीकरण हेतु सम्मिलित हैं। दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के अंतर्गत कार्य टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु निविदा दस्‍तावेजों की स्‍वीकृति ग्रामीण विद्युतीकरण निगम से प्रतीक्षित है। निविदा की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में वर्तमान में उक्‍त 17 डि-इलेक्ट्रिफाईड ग्रामों के विद्युतीकरण हेतु समय-सीमा बताना संभव नहीं है। 1 ग्राम (नागदा) पूर्व में सोलर पोल से इलेक्ट्रिफाईड था किन्‍तु वर्तमान में डि-इलेक्ट्रिफाईड है। यह ग्राम वर्तमान में किसी भी योजना में सम्मिलित नहीं है। (ग) प्रश्‍नांश (ग) में उल्‍लेखित 31 ग्रामों/मजरों/टोलों में से 14 ग्राम एवं 17 मजरें टोले हैं। इन 14 ग्रामों में से 3 ग्राम विद्युतीकृत हैं एवं 11 ग्रामों को विद्युतीकरण हेतु दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में सम्मिलित किया गया है। 17 मजरों/टोलों में से 12 मजरें/टोले दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना में सम्मिलित किए गए हैं। 4 मजरें टोलों को सीमित वित्‍तीय उपलब्‍धता के कारण किसी भी योजना में सम्मिलित नहीं किया जा सका है। वित्‍तीय उपलब्‍धता के आधार पर आगामी योजनाओं में इन मजरे-टोलों का विद्युतीकरण प्रस्‍तावित किया जावेगा। तथापि सांसद/विधायक निधि से वित्‍तीय सहायता उपलब्‍ध होने पर इन मजरों/टोलों का विद्युतीकरण प्राथमिकता के आधार पर कराया जावेगा। 1 मजरे में कोई बसाहट नहीं है, अत: इस मजरे को किसी भी योजना में शामिल नहीं किया गया है। 1 जनवरी 2016 की स्थिति में इन गाँवों मजरों, टोलों में विद्युतीकरण का विवरण पुस्तकालय में रखे प्रपत्र-स अनुसार है।

विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) ग्‍वालियर में कराये गये निर्माण कार्य

35. ( क्र. 1076 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्‍वालियर जिले में 1 अप्रैल 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) में कितना-कितना वित्‍तीय आवंटन किस-किस मद में प्राप्‍त हुआ है? प्राप्‍त आवंटन अनुसार 1 अप्रैल 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक कहाँ-कहाँ, किस-किस स्‍थान पर कितनी-कितनी लागत से किस-किस ठेकेदार/एजेन्‍सी द्वारा किस-किस अधिकारी/कर्मचारी के सुपरवीजन में क्‍या-क्‍या निर्माण कार्य कराये गये हैं तथा कराये जा रहे हें? वर्तमान में इन सभी निर्माण कार्यों की भौतिक तथा वित्‍तीय स्थिति क्‍या है? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार जो निर्मित तथा निर्माणाधीन कार्य हैं उनकी गुणवत्‍ता संबंधी कुछ व्‍यक्तियों द्वारा शिकायतें की गई हैं, उक्‍त अवधि में किस-किस व्‍यक्ति द्वारा किस-किस निर्माण कार्यों की शिकायतें की गई हैं? क्‍या उन शिकायतों की जाँच कराई गई है? यदि हाँ, तो किस-किस अधिकारी द्वारा जाँच की गई है? उनकी रिपोर्ट प्रस्‍तुत करें? क्‍या जाँच में गुणवत्‍ता खराब पाई गई? यदि हाँ, तो उनके प्रति क्‍या कार्यवाही की गई है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण ग्वालियर को म.प्र. शासन से 01.04.2014 से किसी भी मद में कोई वित्तीय आवंटन प्राप्त नहीं हुआ है। अतः शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता है। (ख) उत्तरांश के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

सतना जिले में दो लाख से कम वाले कार्य

36. ( क्र. 1176 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सतना जिले में वित्‍तीय वर्ष 01.04.2013 से प्रश्‍न तिथि तक 2 लाख रू. से कम राशि वाले क्‍या-क्‍या कार्य, किस-किस स्‍थान पर किये गये? (ख) प्रश्‍नांश (क) में वर्णित जिले में उक्‍‍त समयानुसार मेन्‍टेनेन्‍स पर किस-किस स्‍थान पर, किस-किस प्रकार के कार्यों पर, कितनी राशि व्‍यय की गयी? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में उल्‍लेखित कार्यों में से किस-किस को कितनी-कितनी राशि का भुगतान किस-किस रूप में किया गया? (घ) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में उल्‍लेखित स्‍थानों एवं समयानुसार उक्‍त सभी कार्यों का गुणवत्‍ता एवं उपयोगिता प्रमाण पत्रों को किस-किस नाम/पदनाम द्वारा जारी किया गया?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) से (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-'''' एवं प्रपत्र-''ब-1, ब-2, ब-3'' अनुसार है।

अवैध उत्‍खनन

37. ( क्र. 1239 ) श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दमोह जिला अन्‍तर्गत विगत वर्ष 2014-152015-16 में कौन-कौन सी रेत खदान, पत्‍थर खदान किसको आवंटित की गई? नाम, पतावार जानकारी उपलब्‍ध करायें। (ख) क्‍या हटा विकासखण्‍ड व पटेरा विकासखण्‍ड में अवैध रेत परिवहन, पत्‍थर उत्‍खनन की शिकायतें लगातार प्राप्‍त होती है जिनका प्रकाशन समाचार पत्रों द्वारा किया जाता है? इन पर खनिज अधिकारियों द्वारा की गई कार्यवाहियों की जानकारी उपलब्‍ध करायें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट में दर्शित है। (ख) प्रश्‍नानुसार शिकायतें समाचार पत्रों एवं अन्‍य माध्‍यम से प्राप्‍त होती है। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में शिकायतों की जाँच एवं नियमित निरीक्षण के दौरान वित्‍तीय वर्ष 14-15 में अवैध रेत परिवहन के 36 प्रकरण दर्ज कर रूपये 4.20 लाख का अर्थदण्‍ड वसूल किया गया। इसी प्रकार वित्‍तीय वर्ष 15-16 में दिनांक 15.02.2016 तक अवैध रेत परिवहन के 55 प्रकरण दर्ज कर रूपये 6.10 लाख का अर्थदण्‍ड वसूल किया गया। पत्‍थर खनिज का अवैध उत्‍खनन का कोई प्रकरण प्रकाश में न आने के कारण दर्ज नहीं किया गया है।

450 बेड के हॉस्पिटल का हस्‍तांतरण

38. ( क्र. 1264 ) डॉ. मोहन यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिंहस्‍थ 2016 के मद्देनज़र आगर रोड स्थित टी.बी. हॉस्पिटल के स्‍थान पर 450 बेड हॉस्पिटल के निर्माण के संबंध में जानकारी देते हुए उक्‍त हॉस्पिटल को स्‍वास्‍थ्‍य विभाग को कब तक हस्‍तांतरित किया जाना प्रस्‍तावित है? (ख) स्‍वास्‍थ्‍य आयुक्‍त द्वारा उपरोक्‍त निर्माणाधीन हॉस्पिटल के दौरे के समय कौन-कौन सी अनियमितताएं बताई गई थी? उक्‍त हॉस्पिटल का निर्माण कार्य कब तक पूर्ण कर लिया जावेगा? क्‍या सिंहस्‍थ महापर्व के प्रारंभ होने के पूर्व उक्‍त हॉस्पिटल स्‍वास्‍थ्‍य विभाग को हस्‍तांतरित कर दिया जावेगा? यदि नहीं, तो इसके लिये कौन दोषी है? दोषियों के विरूद्ध कब तक कार्यवाही कर दी जावेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) हॉस्पिटल भवन स्वास्थ्य विभाग को 31.3.2016 तक हस्तांतरण किया जाना प्रस्तावित है। निर्माण के संबंध में जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) स्वास्थ्य आयुक्त द्वारा दिनांक 6 जनवरी, 2016 को किए गए दौरे के समय कोई अनियमितता नहीं बताई गई थी। उक्त हॉस्पिटल का निर्माण कार्य 15 मार्च, 2016 तक पूर्ण कर लिया जावेगा। जी हाँ, सिंहस्थ महापर्व के प्रारंभ होने के पूर्व उक्त हॉस्पिटल स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित कर दिया जावेगा। उपरोक्त के आलोक में कोई दोषी प्रतीत नहीं होता है।

परिशिष्ट ''बीस''

जाँच कराकर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही

39. ( क्र. 1384 ) श्री सुन्‍दरलाल तिवारी : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रीवा जिला अन्‍तर्गत सिंचाई कार्य हेतु वर्ष 2010 से प्रश्‍नांश दिनांक तक में कितने तालाबों का निर्माण कब-कब कहाँ-कहाँ कितनी-कितनी लागत से कराये जा रहे है तथा कौन से तालाबों के कार्य पूर्ण कराकर किसानों को सिंचाई हेतु पानी दिया जा रहा है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में गुढ़ विधान सभा क्षेत्रान्‍तर्गत गोविंदगढ़ तालाब जो 808 एकड़ पर फैला है, उसके द्वारा कितने हेक्‍टेयर में सिंचाई हेतु पानी दिया जा रहा है अगर दिया जा रहा है तो प्राप्‍त राजस्‍व का विवरण देवे? साथ इसके रख-रखाव एवं सफाई हेतु वर्ष 2010 से प्रश्‍नांश दिनांक तक में कितनी राशि कब-कब खर्च की गई? (ग) प्रश्‍नांश (क) के तालाबों के निर्माण का कार्य पूर्ण समय-सीमा पर नहीं किया गया तो इसके लिए किनको दोषी मानते हुए कार्यवाही करेगें? साथ ही इनके कार्य कब तक पूर्ण कराकर किसानों को पानी दिया जाने लगेगा? प्रश्‍नांश (ख) के तालाब के रख-रखाव एवं साफ-सफाई हेतु प्राप्‍त राशि का सही ढंग से उपयोग न कर फर्जी रूप से राशि खर्च की गई कार्य मौके पर नहीं किये गए तो इसके लिए किन-किनको दोषी मानते हुए कौन-कौन सी एवं कब तक कार्यवाही करेंगे अगर नहीं तो क्‍यों?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) गोविंदगढ़ लघु सिंचाई परियोजना से लाभान्वित कृषकों द्वारा गत वर्ष रू.72,661/- एवं इस वर्ष रू.47,313/- जलकर जमा किया गया है। परियोजना के संधारण एवं मरम्‍मत हेतु वर्ष 2010 से अब तक प्रतिवर्ष रू.1,18,560/- का अंशदान जल उपभोक्‍ता संथा, गोविंदगढ़ को दिया गया है। (ग) भूमि एवं वित्‍तीय संसाधन उपलब्‍ध होने की दशा में लघु सिंचाई परियोजना का कार्य स्‍वीकृति के वर्ष को छोड़कर 2 वर्ष में पूरा कराए जाने की नीति है। निर्माण में विलंब की स्थिति नहीं है। परियोजनाएं 2016-17 में पूर्ण कराए जाने का भरसक प्रयास है। गोविंदगढ़ जलाशय के रख-रखाव एवं संधारण में फर्जी व्‍यय की स्थिति नहीं है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''इक्कीस''

राजीव गांधी विद्युतीकरण के कार्य

40. ( क्र. 1481 ) श्री अमर सिंह यादव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजनान्‍तर्गत राजगढ़ जिले में जो विद्युतीकरण किया जाता है उसमें उपयोग होने वाले पोल एवं एल.टी.केबल किस कंपनी द्वारा उपलब्‍ध कराये जा रहे हैं तथा मीटर किसके द्वारा उपलब्‍ध कराये जा रहे हैं?? (ख) क्‍या पोल एवं एल.टी. केबल स्‍वीकृत मापदण्‍ड अनुसार नहीं है? (ग) क्‍या विधानसभा क्षेत्र राजगढ़ की ग्राम पंचायत सांडाहेडी के ग्राम लसूड़ली में आज दिनांक तक कनेक्‍शन नहीं हो पाया है? कहीं पोल गाड़े है और कही केवल एल.टी.केबल लगाई गई तथा डी.पी.कालोनी में न लगाते हुये गाँव में लगाई गई है? (घ) निर्धारित स्‍थान पर डी.पी. नहीं लगाये जाने तथा लाईट चालू नहीं कराये जाने का क्‍या कारण है? इसके लिये कौन दोषी है? दोषियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजनान्‍तर्गत राजगढ़ जिले में विद्युतीकरण के कार्य में उपयोग होने वाले पोल/खंबे, ए.टी.ए.बी. केबल एवं मीटर, टर्न-की ठेकेदार एजेंसी द्वारा म.प्र. मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी से अधिकृत वैंडर्स से ही खरीदी जा रही है। पोल/खंबे मेसर्स गंधार उद्योग जयपुर, मेसर्स गंधार कांक्रिटिंग मंडीदीप, मेसर्स मैत्री मंडीदीप, मेसर्स बजरंग इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर पीलूखेड़ी, मेसर्स अरिहंत पीलूखेड़ी व मेसर्स पोल इंडिया देवास से, एल.टी.ए.बी.केबल- मेसर्स रेलीमेक नोएडा, मेसर्स त्रिवास नोएडा, मेसर्स पसोंदिया केबल, गाजियाबाद, मेसर्स समृद्धि केबल, भोपाल व मेसर्स पी.सी.आई. बंगाल कोलकत्‍ता से एवं मीटर मेसर्स इंडोटेक जयपुर से ठेकेदार एजेन्‍सी द्वारा क्रय कर उक्‍त कार्य में उपयोग में लाये जा रहे हैं। (ख) पोल एवं केबल स्‍वीकृत मापदण्‍ड अनुसार ही हैं। सामग्री की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने के पश्‍चात् ही सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। गुणवत्‍ता की जाँच करने हेतु तृतीय पक्ष जाँच एजेन्‍सी मेसर्स बीकोलॉरी लिमिटेड, कोलकाता को नियुक्‍त किया गया है। (ग) विधानसभा क्षेत्र राजगढ़ की ग्राम पंचायत सांडाहेड़ी के ग्राम लसूड़ली में प्रश्‍न दिनांक के पूर्व से ही 32 विद्युत कनेक्‍शन प्रदान किये जा चुके हैं। उक्‍त कार्य राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में किये गये हैं जिसमें केवल बी.पी.एल. हितग्राहियों के लिये ही पोल एवं केबल लगाई गयी है। ग्राम में कृषि एवं घरेलू फीडर को अलग-अलग करने के लिए ट्रांसफार्मर स्‍थापित किया गया है। ग्राम में ही कॉलोनी (मोहल्‍ला) में एक 25 के.व्‍ही.ए. क्षमता का ट्रांसफार्मर स्‍थापित करने के कार्य में ग्रामीण द्वारा विरोध करने के कारण प्रश्‍न दिनांक तक कार्य पूर्ण नहीं किया जा सका था। ग्रामीणों के आपसी समझौते एवं उनके सहयोग से दिनांक 15.02.2016 को उक्‍त कालोनी (मोहल्‍ला) में 25 के.व्‍ही.ए. क्षमता ट्रांसफार्मर स्‍थापित कर विद्युत प्रदाय प्रारंभ कर दिया गया है। (घ) उत्‍तरांश '' में दर्शाए अनुसार ट्रांसफार्मर स्‍थापित करने के कार्य में ग्रामीणों द्वारा विरोध करने कारण कार्य में विलम्‍ब हुआ। ट्रांसफार्मर निर्धारित स्‍थान पर ही लगाया गया है एवं विद्युत प्रदाय भी प्रारंभ कर दिया गया है, अत: प्रश्‍न नहीं उठता। 

हटाये गये कुशल एवं अकुशल कर्मचारियों की बहाली

41. ( क्र. 1509 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) श्‍योपुर जिले में विद्युत कम्‍पनी में दिनांक 01.01.2015 की स्थिति में संभागवार कुशल एवं अकुशल श्रेणी के कितने कितने मीटरवाचक, ऑपरेटर एवं श्रमिक किन किन सेवा प्रदाताओं के अधीन कब से कार्यरत थे वर्तमान में कितने कार्यरत हैं तथा कितने कर्मचारियों को जनवरी 2015 से वर्तमान तक हटाया गया व क्‍यों? (ख) क्‍या ये सच है कि उक्‍त में से जिन कर्मचारियों के पास मध्‍यप्रदेश के आई.टी.आई. डिप्‍लोमा एवं अन्‍य पर्याप्‍त शैक्षणिक अर्हताएं हैं उन्‍हें छोड़कर अन्‍य राज्‍यों के आई.टी.आई. प्रमाण पत्रधारी व पर्याप्‍त शैक्षणिक योग्‍यताधारियों सहित सभी अकुशल अनुभवी कर्मचारियों को विद्युत कम्‍पनी ने कार्य से हटा दिया हैं जिससे प्रश्‍नकर्ता की ध्‍यानाकर्षण सूचना दिनांक 15.12.2015 पर सदन में चर्चा के दौरान स्‍वस्‍थ्‍य मंत्रीजी ने अन्‍य राज्‍यों से आई.टी.आई. व पर्याप्‍त शैक्षणिक अर्हताधारी व अनुभवी कर्मचारियों के हित में नियमों में व्‍यवस्‍था करने का उत्‍तर दिया था? (ग) यदि हाँ, तो क्‍या शासन प्रश्‍नांश (ख) में वर्णित हटाए गए समस्‍त कर्मचारियों को अकुशल मानते हुए शीघ्र कार्य पर रखने के निर्देश विद्युत कम्‍पनी को जारी करने के आदेश जारी करेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) म.प्र. म.क्षे.वि.वि.कं.लि. श्‍योपुर वृत में दिनांक 01.01.2015 की स्थिति में कंपनी के संभागवार कार्यरत अपात्र पाए जाने पर हटाए गए तथा वर्तमान में दिनांक 01.01.2015 को कार्यरत में से शेष कुशल एवं अकुशल श्रेणी के मीटर वाचकों ऑपरेटरों एवं श्रमिकों की प्रश्‍नाधीन चाही गई जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''', एवं '''' अनुसार है। उक्‍त शेष कार्मिको सहित वर्तमान में सेवा प्रदाताओं के माध्‍यम से नियोजित कार्मिकों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। सेवा प्रदाता को कार्मिकों/श्रमिकों को नियोजित करने एवं सेवा से पृथक करने का पूर्ण अधिकार है। वर्तमान में केंद्रीयकृत निविदा प्रक्रिया के अंतर्गत चयनित सेवा प्रदाता द्वारा निविदा में वर्णित नियमों एवं शर्तों के अनुसार विभिन्‍न श्रेणियों के श्रमिक उपलब्‍ध कराए जा रहे है। (ख) सेवाप्रदाता द्वारा कुशल एवं अकुशल श्रमिकों के नियोजन हेतु मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा जारी निविदा क्रं. 379, भाग-IV कंडिका-3 में निहित प्रावधानों के अनुसार शैक्षणिक योग्‍यता एवं आयु सीमा संबंधी नियमों के अनुसार नियोजन किया गया है। प्राय: सभी कार्यरत कुशल एवं अकुशल श्रमिक श्‍योपुर जिले तथा आस-पास के निवासी है। कंपनी द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि भविष्‍य में ऐसे सभी आई.टी.आई जो म.प्र. शासन से अथवा नेशनल कॉउंसिल ऑफ वोकेशनल ट्रेनिगं (एन.सी.वी.टी.) द्वारा मान्‍यता प्राप्‍त हैं, उन्‍हें शैक्षणिक योग्‍यता संबंधी नियमों में शामिल किया जाए। (ग) उत्‍तरांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न नहीं उठता।

33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्रों की स्‍वीकृति

42. ( क्र. 1510 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रमुख सचिव ऊर्जा भोपाल द्वारा पत्र क्रमांक 4700/13/2015 दिनांक 02.07.2015 द्वारा ग्राम ननावद उतनवाड़ में नवीन 33 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र की स्‍थापना का प्रस्‍ताव वर्ष 2015-16 में प्रस्‍तावित होने, इस हेतु एस.एस.टी.डी. मद में शासन से वित्‍तीय सहायता की मांग करने तथा ग्राम अलापुरा, पहाड़ली, सायपुरा, धीरोली में 33 केव्‍ही उपकेन्‍द्रों की स्‍थापना तकनीकी एवं वित्‍तीय रूप से साध्‍य न होने की जानकारी प्रश्‍नकर्ता को दी है? (ख) यदि हाँ, तो बतावे कि उक्‍त प्रस्‍तावित दोनों उपकेन्‍द्रों हेतु वित्‍तीय सहायता कब तक उपलब्‍ध कराई जावेगी तथा चारों उपकेन्‍द्रों की स्‍थापना तकनीकी एवं वित्‍तीय रूप से असाध्‍य होने के क्‍या कारण है? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) में वर्णित ग्रामों के आस पास विद्यमान दर्जनों ग्रामों में प्रति वर्ष विद्युत/वोल्‍टेज की समस्‍या व्‍याप्‍त रहती है। नतीजन कृषकों को कृषि कार्य में कठिनाईयां आती है? यदि हाँ, तो कृ‍षकों के हित में उक्‍त दोनों प्रस्‍तावित उपकेन्‍द्रों हेतु वित्‍तीय सहायता शासन शीघ्र देगा तथा उक्‍त चारों उपकेन्‍द्रों की असाध्‍यता का निवारण करके विद्युत कम्‍पनी इन्‍हें शीघ्र स्‍वीकृति प्रदान करेगी यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। (ख) वित्‍तीय वर्ष 2015-16 के लिए मध्‍य क्षेत्र कंपनी हेतु बजट के एस.एस.टी.डी. मद में पूर्ण प्रावधानित राशि 143 करोड़ रूपये में से कंपनी को 23 फरवरी 2016 तक की स्थिति में रू. 88.88 करोड़ उपलब्‍ध करा दिए गए हैं। प्राथमिकता क्रम में उक्‍त दोनों उपकेन्‍द्रों का कार्य सम्मिलित किए जाने पर विचार किया जाएगा। उत्‍तरांश '''' में उल्‍लेखित 4 उपकेन्‍द्रों की स्‍थापना तकनीकी रूप से असाध्‍य होने संबंधी विवरण संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) प्रश्‍नांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में ग्राम ननावद एवं उतनवाड़ के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की विद्युत संबंधी समस्‍याओं के निवारण हेतु नवीन 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्रों की स्‍थापना के लिये उत्‍तरांश (ख) में दर्शाए अनुसार कार्यवाही की जायेगी। ग्राम अलापुरा, पहाडली, सायपुरा, धीरोली एवं आसपास के क्षेत्र का विद्युत भार संबद्ध विद्युत उपकेन्‍द्रों की क्षमता के अनुरूप है अत: इन ग्रामों सहित आसपास के क्षेत्र में भविष्‍य में भार वृद्धि होने पर ही विद्युत उपकेन्‍द्रों की स्‍थापना हेतु विचार किया जाना संभव होगा। 

परिशिष्ट ''बाईस''

स्‍ट्रीट लाईटों के लिए सर्विस लाईन

43. ( क्र. 1542 ) श्री सुदर्शन गुप्‍ता (आर्य) : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या इन्‍दौर नगर पालिक निगम क्षेत्रांतर्गत लगी स्‍ट्रीट लाईटों के विद्युत देयकों का भुगतान नगर पालिक निगम द्वारा किया जाता है? यदि हाँ, तो विगत दों वर्षों (प्रश्‍न पूछे जाने वाले माह तक) में स्‍ट्रीट लाईटों के विद्युत देयक की राशि माहवार स्‍पष्‍ट करें? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) अनुसार लगी स्‍ट्रीट लाईटें सर्विस लाईन नहीं होने के कारण 24 घंटे जलती रहती है? यदि हाँ, तो इससे विद्युत देयकों पर अधिक व्‍यय होना व स्‍ट्रीट लाईटों पर मेंटेनेन्‍स ज्‍यादा होने के लिये कौन जिम्‍मेदार है? क्‍या विभाग इस संबंध में संबंधित के विरूद्ध आवश्‍यक कार्यवाही करेगा? (ग) उक्‍तानुसार स्‍ट्रीट लाईटों के लिये सर्विस लाईन डालने हेतु विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की जा रही है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। यद्यपि कतिपय क्षेत्रों में ही जहाँ पर विधुत मण्‍डल द्वारा सर्विस लाईन नहीं डाली गई है, वहा स्‍ट्रीट लाईट जलते रहने की शिकायत मिलती हैं। इस विषय पर जाँच किए जाने के आदेश दिए गए है। यदि यदि अनियमित्‍ता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्यवाही की जा सकेगी। (ग) स्‍ट्रीट लाईट के लिए सर्विस लाईन डालने का कार्य म.प्र. प.क्षे.वि.कं.लिमि. द्वारा किया जाता है। नगर निगम द्वारा ऐसे समस्‍त क्षेत्रों को चिन्हित कर सर्विस लाईन डालने हेतु म.प्र. प.क्षे.वि.कं.लिमि. को क्रमश: संलग्‍न पत्र क्रं. 159 दिनांक 26.05.2015787 दिनांक 29.07.2015 के माध्‍यम से समस्‍या के निराकरण हेतु अनुरोध किया गया है।

परिशिष्ट ''तेईस''

इंदौर में मेट्रो ट्रेन की योजना

44. ( क्र. 1543 ) श्री सुदर्शन गुप्‍ता (आर्य) : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या इंदौर में मेट्रो ट्रेन चलाई जाने की योजना है? यदि हाँ, तो तैयार मार्ग प्रस्‍ताव की विवरण उपलब्‍ध करावें? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) अनुसार प्रस्‍तावित मेट्रो ट्रेन के लिये स्‍थानों का चिन्‍हांकन कर भूमि का अधिगृहण किया जा रहा है? यदि हाँ, तो किन-किन स्‍थानों पर भूमि अधिगृहण की जा रही है व कहाँ-कहाँ भूमि अधिगृहण में परेशानी है स्‍पष्‍ट कर सूची उपलब्‍ध करावें? (ग) भूमि अधिगृहण में आ रही परेशानी हेतु विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की जा रही है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ, मार्ग को अंतिम रूप दिया जा रहा है। अत: तैयार मार्ग प्रस्‍ताव का विवरण उपलब्‍ध कराया जाना संभव नहीं है। (ख) वर्तमान में भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही नहीं की जा रही है। (ग) उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

शासन की राशि का अनावश्‍यक व्‍यय

45. ( क्र. 1618 ) कुँवर विक्रम सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा प्रश्‍न क्रमांक 1792 दिनांक 27/2/2015 के प्रश्‍नांश (ख) एवं (ग) के उत्‍तर के परिशिष्‍ट (अ) में विकासखण्‍डवार व्‍यय 168.29 लाख दर्शाया गया? जिसके परिणाम धरातल पर, जनता को तथा बुद्धिजीवियों को कोई सार्थक हासिल नहीं हुए? (ख) क्‍या यह राशि केवल कागजों में ही सीमित हो गई? गलत तरीके से बिल-वाउचर बनाकर शासन की राशि का दुरूपयोग किया जा रहा है? (ग) क्‍या व्‍यय किये गये वाउचरों तथा राशि के संबंध का भौतिक सत्‍यापन किन-किन तिथियों में किया गया? (घ) जिला समन्‍वयक जन अभियान परिषद् छतरपुर द्वारा मनमानी कर शासन की लाखों रूपयों को कागजों में खानापूर्ति वाउचर गलत तरीके से प्रमाणित किये गये? क्‍या जाँच कर कठोर कार्यवाही की जावेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। जी नहीं। (ख) जी नहीं, शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) वित्‍तीय वर्ष 2012-13 एवं 2013-14 हेतु क्रमश: दिनांक 18/05/2013 एवं 12/09/2014 को अंकेक्षण करवाया गया। (घ) इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है, शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

पवन ऊर्जा संयत्र की स्‍थापना

46. ( क्र. 1749 ) श्री राजेन्द्र फूलचं‍द वर्मा : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सोनकच्‍छ विधान सभा क्षेत्र के टोकखुर्द तहसील में किस निजी कंपनी द्वारा बिजली उत्‍पादन के लिए पवन ऊर्जा संयत्र स्‍थापित किये जा रहे हैं और इनमें कौन-कौन व्‍यक्ति या संस्‍था या विभाग स‍म्‍मलित है? (ख) क्‍या कंपनी द्वारा जिन लोगों की जमीन संयत्र स्‍थापित करने हेतु रास्‍त व अन्‍य कार्य के लिये उपयोग में ली जा रही है उन सभी व्‍यक्तियों से सहमति लेकर उनको पर्याप्‍त मुआवजा प्रदान कर दिया गया है या नहीं? (ग) जिन व्‍यक्तियों की खड़ी फसल व पेड पौधे उखड़ कर नष्‍ट कर दी गई है उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्‍या शासन इस पर कोई ठोस कदम उठाएगा? यदि हाँ, तो क्‍या? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) विकासक कम्‍पनियों द्वारा संयन्‍त्र स्‍थापना हेतु भूमिस्‍वामी की सहमति से नियमानुसार विधिवत पंजीकृत विक्रय विलेख के माध्‍यम से भूमि क्रय की गई है। (ग) विकासक द्वारा परियोजना हेतु निजी भूमि क्रय से उपरोक्‍त स्थिति निर्मित नहीं होती है, अत: प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''चौबीस''

नगर पंचायत तेन्‍दूखेड़ा के स्‍वीकृत कार्य

47. ( क्र. 1801 ) श्री प्रताप सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दमोह जिले की नगर पंचायत तेन्‍दूखेड़ा में वर्ष 2013-14 से 2015-16 तक कुल कितने विकास कार्य कितनी-कितनी लागत के स्‍वीकृत किये गये? (ख) स्‍वीकृत किये गये कार्यों में कितने कार्य पूर्ण है तथा कितने कार्य अपूर्ण है अपूर्ण कार्य पूर्ण न होने का क्‍या कारण रहा है, इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? क्‍या अप्रारंभ एवं अपूर्ण कार्य के लिए दोषी/अधिकारी/ कर्मचारी के विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी? (ग) नगर पंचायत के अंतर्गत पूर्ण हुए कार्यों का मूल्‍यांकन किसके द्वारा किया गया? कराये गये कार्यों की गुणवत्‍ता का परीक्षण किस-किस अधिकार द्वारा किस-किस दिनांक को किया गया?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) प्रश्‍नांकित वर्षों में स्‍वीकृत किये गये 64 विकास कार्यों में 59 कार्य पूर्ण हो चुके हैं। 03 कार्य प्रगत पर, 01 कार्य के लिये कार्यादेश फरवरी-2016 में जारी किया गया है तथा 01 कार्य भूमि विवादित होने के कारण प्रारंभ नहीं हो पाया है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''' अनुसार है।

नवीन सिंचाई योजनाओं की स्‍वीकृति

48. ( क्र. 1902 ) श्री दीवानसिंह विट्ठल पटेल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बड़वानी जिले में विभाग की कौन-कौन सी सिंचाई योजनाएं वित्‍त वर्ष 2016-17 हेतु प्रस्‍तावित है? (ख) क्‍या विधानसभा क्षेत्र पानसेमल की सुसरी कालाअम्‍बा, मोगरी, काजलमाता, सलून जामन्‍या A, B गूलर पानी के DPR तैयार कर स्‍वीकृति की जावेगी? (ग) क्‍या उक्‍त सिंचाई योजनाओं को इस बजट में स्‍वीकृति प्रदान की जावेगी? यदि हाँ, तो कौन-कौन सी योजना स्‍वीकृति की जावेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) से (ग) बड़वानी जिले में बेड़दा लघु सिंचाई परियोजना की प्रशासकीय स्‍वीकृति दिनांक 23.02.2016 को राशि रू. 4845.87 लाख की जारी की गई है। सुसरी बांध तथा 5 बैराज क्रमंश: अंतरसंभा, सिलावद, कालापाट, चाचरियागोई एवं वरला की साध्‍यता आदेश जारी कर सर्वेक्षण, अनुसंधान एवं डी.पी.आर बनाने के आदेश दिए गए है। प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित शेष परियोजनाएं चिन्हित एवं प्रस्‍तावित नहीं है। अत: शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते है।

कूट रचित दस्‍तावेजों से भूमि विक्रय

49. ( क्र. 1945 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या ग्‍वालियर विकास प्राधिकरण की आनंद नगर योजना के अंतर्गत अशोक गृह निर्माण सहकारी संस्‍था द्वारा 47665 वर्ग मीटर भूमि आवंटन के पाँच कूट रचित दस्‍तावेज तैयार कर भूमि का विक्रय किया गया है? (ख) क्‍या प्राधिकारण के आदेश दिनांक 20.05.2014 द्वारा इन पाँच आवंटन पत्रों की जाँच के लिये समिति का गठन किया गया था तथा समिति द्वारा प्रस्‍तुत जाँच रिपोर्ट में भी इन आवंटन पत्रों को कूट रचित पाया गया है? (ग) यदि हाँ, तो प्राधिकरण द्वारा करोड़ो रूपये की भूमि आवंटन घोटाले में संलिप्‍त अधिकारियों/कर्मचारियों एवं सहकारी समिति के पदाधिकारियों के विरूद्ध क्‍या प्राधिकरण द्वारा प्रशासनिक स्‍तर पर अथवा पुलिस में प्राथमि‍की दर्ज कराकर कार्यवाही की गई है? अगर हां, तो कब? अगर नहीं तो क्‍यों? (घ) क्‍या इस प्रकार के घोटालों को रोकने हेतु राज्‍य शासन द्वारा दोषियों के विरूद्ध कठोरतम कार्यवाही हेतु प्राधिकरण को निर्देश जारी किये जायेंगे? शासन स्‍तर पर निगरानी की व्‍यवस्‍था की जाएगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। जी हाँ। (ग) जी नहीं। मूल दस्तावेजो के अभाव में तथा माननीय न्यायालय में मामला विचाराधीन होने से प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई गई। संस्था की मूल नस्ती गुम है, जिसका अपराध क्रमांक 677/11 थाना पड़ाव में दर्ज होकर विवेचना में है। अशोक गृह निर्माण सहकारी संस्था द्वारा अपने सदस्यों के पक्ष में प्राधिकरण द्वारा नामांतरण आदि किये जाने के निर्देश दिये जाने हेतु माननीय उच्च न्यायालय में डब्ल्यू.पी. क्रमांक 2627/15 विचाराधीन है तथा प्रश्नाधीन भूखण्डों का स्वामी एवं आधिपत्यधारी घोषित किये जाने तथा किसी प्रकार हस्तक्षेप किये जाने से प्राधिकरण को निषेधित किये जाने हेतु अपर जिला जज, ग्वालियर के न्यायालय में सिविल प्रकरण क्रमांक 59ए/2014 विचाराधीन है। (घ) माननीय न्यायालय में विचाराधीन प्रकरणों का निराकरण होने के पश्चात् ही तदानुसार शासन द्वारा कार्यवाही प्रस्तावित की जा सकती है।

भर्ती एवं पदोन्‍नति की जानकारी

50. ( क्र. 1988 ) श्री संजय उइके : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्राम पंचायत से नगर परिषद् बैहर जिला बालाघाट के गठन के समय कौन-कौन से पद स्‍वीकृत किया गया था? उस पद के विरूद्ध किन-किन की किस-किस पद पर पदस्‍थापना की गई थी? (ख) गठन से प्रश्‍न दिनांक तक शासन/विभाग द्वारा पद कब-कब स्‍वीकृत किया गया? पदोन्‍नति किस-किस को कब-कब किस पद पर की गई? किस-किस को, कब-कब दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी से स्‍थाई किया गया? किस-किस पद के विरूद्ध किन-किन की कब-कब भर्ती किया गया, 40 बिन्‍दु एवं 100 बिन्‍दु आरक्षण रोस्‍टर सहित जानकारी देवें?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र एवं अनुसार है।

प्र.क्र. 4379 तारा. किद. 22.7.15 से संबंधित

51. ( क्र. 2097 ) श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता के तारांकित प्रश्‍न संख्‍या 14 क्र. 4379 दिनांक 22.07.2014 के पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र में सरल क्र. 3, 6, 7, 19, 21, 24, 26, 33 एवं प्रपत्र में सरल क्र. 7 में की गई कार्यवाही के कॉलम में प्रकरण लंबित हैं उत्‍तर दिया है तो क्‍या (क) में उल्‍लेखित बिन्‍दुओं का निराकरण हो चुका है अथवा नहीं व कब तक निराकरण कर दिया जावेगा? (ख) यदि निराकरण हो चुका है तो संबंधित विधायक को समय रहते उत्‍तर न देने के क्‍या कारण हैं? जो सामान्‍य प्रशासन विभाग के निर्देशों का उल्‍लंघन है? संबंधित व्‍यक्ति के खिलाफ क्‍या कार्यवाही की जावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। माननीय प्रश्‍नकर्ता विधायक महोदय द्वारा पूछे गए तारांकित विधानसभा प्रश्‍न संख्‍या 14, क्रमांक 4379 दिनांक 22.07.2014 के पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' में सरल क्रमांक 3, 6, 7, 19, 21, 24, 26, 33 एवं प्रपत्र '' में सरल क्रमांक 7 में की गई कार्यवाही के कॉलम में दिये गये प्रकरणों की अद्यतन स्थिति का प्रश्‍नाधीन चाही गई जानकारी सहित विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) उत्‍तरांश '' के परिप्रेक्ष्‍य में उप महाप्रबंधक (संचा./संधा.) अम्‍बाह के पत्र क्रमांक उमप्रअ/1163 दिनांक 12.08.2015 एवं उप महाप्रबंधक (संचा./संधा.) मुरैना-II के पत्र क्रमांक 6906-07 दिनांक 03.12.2015 के माध्‍यम से माननीय विधायक महोदय को पूर्ण किये गये कार्यों की जानकारी दी गई है। सरल क्रमांक 6 के सन्‍दर्भ में उपभोक्‍ताओं द्वारा बकाया राशि का भुगतान करने के उपरान्‍त पुन: विद्युत प्रदाय चालू कर मौखिक रूप से तत्‍कालीन उप महाप्रबंधक द्वारा माननीय विधायक को अवगत करा दिया गया था। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में किसी के विरूद्ध कार्यवाही किया जाना अपेक्षित नहीं है। 

परिशिष्ट ''पच्चीस''

समितियों द्वारा किये गये व्‍यय

52. ( क्र. 2098 ) श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के अतारांकित प्रश्‍न क्र. 1912 दिनांक 15.12.2015 के उत्‍तर (ग) में पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट (द) में विकासखण्‍ड अम्‍बाह व मुरैना में गठित समितियों द्वारा 29.4 लाख रूपये व्‍यय होना उत्‍तर दिया है? (ख) यदि हाँ, तो उपरोक्‍त व्‍यय कहाँ-कहाँ समितियों के माध्‍यम से किन-किन ग्रामों में किन-किन कार्यों में व्‍यय किया गया एवं समितियों द्वारा जन समुदाय को कार्यक्रमों से क्‍या-क्‍या लाभ हुए?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है।

नवीन विद्युत विस्‍तार इकाई के संबंध में

53. ( क्र. 2140 ) श्री उमंग सिंघार : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जनरेटिंग कंपनी के सभी ताप विद्युत गृहों द्वारा प्रतिदिन हजारों टन कोयला जलाया जाता है एवं नई विद्युत विस्‍तार इकाई भी स्‍थापित की गई है प्रतिवर्ष विभाग से प्रत्‍येक इकाई का पर्यावरण क्‍लीयरेंस का रिन्‍यूवल दिया जाता है एवं पावर जनरेटिंग कंपनी को पावर हाउस परिसर में सघन पेड़ एक्‍सपर्ट एजेंसी या विभाग में पेड लगाने हेतु निर्देशित किया जाता है? क्‍या ऐसा नहीं हो रहा है? (ख) म.प्र. पावर जनरेटिंग कंपनी में कितने स्‍थान पर ताप विद्युत गृह है? क्‍या सभी ताप विद्युत गृह की कॉलोनी सीवर ट्रीटमेंट प्‍लांट का पानी का उपयोग कॉलोनी में उपयोग किया जाता है या सीधे नदी नाले में बहाया जा रहा है? यदि हाँ, तो क्‍या नेशनल ग्रीन ट्रिब्‍यूनल का उल्‍लंघन नहीं हो रहा है? क्‍या म.प्र. प्रदूषण मंडल रोक लगाकर म.प्र. पावर जनरेटिंग कंपनी के अधिकारियों पर कार्यवाही करेगा साथ ही ताप विद्युत गृह नाम, किस ताप विद्युत गृह में किस नदी नाले पर सीवर ट्रीटमेंट प्‍लांट का डिस्‍चार्ज है पानी का उपयोग कौन-कौन से पावर हाउस में होने लगा है एवं किस ताप विद्युत गृह में नहीं हो रहा आदि की जानकारी देवें? (ग) विगत एक वर्ष में सैलों द्वारा राखड़ बेचने पर ताप विद्युत गृहों की आमदनी से प्रदूषण बचाने पर ग्रीन बेल्‍ट विकसित करने हेतु ताप विद्युत गृहवार वर्षवार कितनी-कितनी राशि खर्च की गयी है न खर्च होने पर प्रदूषण मण्‍डल क्‍या कार्यवाही करेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के सभी ताप विद्युत गृहों द्वारा प्रतिदिन आवश्‍यकतानुसार ही कोयला जलाया जाता है। म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी के निम्‍नलिखित ताप विद्युत गृहों में विद्युत विस्‍तार/नवीन इकाईयां स्‍थापित की गई है:- 1. सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी-विस्‍तारित इकाई क्रमांक-10 एवं 11 (2x250 मे.वा.) 2. श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह, खण्‍डवा-नवीन इकाई क्रमांक- 1 एवं 2 (2x600 मे.वा.) विस्‍तारित एवं नवीन स्‍थापित इकाईयों हेतु भारत शासन, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, नई दिल्‍ली द्वारा एक बार ही उनकी स्‍थापना के पूर्व पर्यावरण क्‍लीयरेंस दिया जाता है। तथापि सभी ताप विद्युत गृहों के संचालन हेतु म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सम्‍मति प्रदान की जाती है, जिसका प्रतिवर्ष रिन्‍यूवल (नवीनीकरण) कराया जाता है। वर्तमान में म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के सभी ताप विद्युत गृहों हेतु सम्‍मतियां उपलब्‍ध है। म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत गृह परिसरों में स्‍वयं या एजेंसी के माध्‍यम से सघन वृक्षारोपण एक सतत् प्रक्रिया है, जिसके अंतर्गत सभी ताप विद्युत गृहों, जिनमें उपरोक्‍त उल्‍लेखित ताप विद्युत गृहों की विस्‍तारित इकाईयां भी सम्मिलित है, के परिसरों में एवं आस-पास सघन वृक्षारोपण किया गया है। (ख) म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड में कुल चार स्‍थानों पर ताप विद्युत गृह स्‍थापित है। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह को छोड़कर सभी जगह सीवर ट्रीटमेंट प्‍लांट के पानी का उपयोग बगीचों में सिंचाई एवं वृक्षारोपण में किया जा रहा है। इनमें से किसी भी जगह पानी नदी नालों में नहीं बहाया जा रहा है। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह में सीवर प्‍लांट निर्माणाधीन है तथा वर्तमान में पर्याप्‍त संख्‍या में सोक-पिट वाले सेप्टिक टैंक क्रियाशील है। अत: किसी प्रकार की कार्यवाही का प्रश्‍न नहीं उठता है। शेष प्रश्‍नांश लागू नहीं। (ग) म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के विभिन्‍न ताप विद्युत गृहों में से सतपुड़ा ताप विद्युत गृह, सारनी, जिला-बैतूल के सैलों से राखड़ नि:शुल्‍क प्रदान की जा रही है जबकि संजय गांधी ताप विद्युत गृह, बिरसिंहपुर, जिला-उमरिया, अमरकंटक ताप विद्युत गृह, चचाई, जिला-अनूपपुर तथा श्री सिंगाजी ताप विद्युत गृह, डोंगलिया, जिला-खण्‍डवा के सैलों से राखड़ की बिक्री की जा रही है। राखड़ बिक्री से प्राप्‍त राशि के संबंध में भारत शासन पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, नई दिल्‍ली द्वारा फ्लाई एश के उपयोग हेतु दिनांक 03.11.2009 को जारी गजट अधिसूचना के पैरा क्रमांक 6 (पृष्‍ठ क्रमांक 8) के प्रावधानों के अनुसार ताप विद्युत गृहों द्वारा 100 प्रतिशत फ्लाई ऐश के उपयोग का लक्ष्‍य प्राप्‍त करने तक संबद्ध विद्युत गृह के सैलों से राखड़ बेचने पर प्राप्‍त राशि का उपयोग फ्लाई एश उपयोगिता बढ़ाने से संबंधित अधोसंरचना विकास, कार्यों एवं योजनाओं हेतु ही किया जाना है (गजट अधिसूचना की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है) । अत: ताप विद्युत गृहों में सैलों से राखड़ बिक्री के मद में प्राप्‍त धन का उपयोग ग्रीन बेल्‍ट के लिये खर्च नहीं किया जा रहा है। उपरोक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा कोई कार्यवाही करने का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता। 

राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना अंतर्गत 24 घंटा बिजली देने आपूर्ति

54. ( क्र. 2141 ) श्री उमंग सिंघार : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय द्वारा राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना अंतर्गत 24 घण्‍टे बिजली देने की शुरूआत की गई थी? (ख) धार जिले के कितने गांवों में 24 घण्‍टे बिजली दी जा रही है तथा कितने गांव शेष हे तथा कब तक सभी ग्रामों में 24 घण्‍टे बिजली से जुड़ जायेगें? (ग) गंधवानी विधानसभा क्षेत्र में उक्‍त योजना अंतर्गत कितने कार्य अधूरे हैं तथा विभाग द्वारा शेष कार्य का टेंडर किस ठेकेदार (कंपनी) को दिया गया है, कितनी लागत का तथा कंपनी द्वारा कब तक कार्य पूर्ण कर लिये जायेंगे?
ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं, राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में अविद्युतीकृत ग्रामों के विद्युतीकरण, विद्युतीकृत ग्रामों के सघन विद्युतीकरण एवं इस प्रकार विद्युतीकृत क्षेत्र में सभी श्रेणी के बी.पी.एल. हितग्राहियों को बी.पी.एल. कनेक्‍शन दिये जाने का प्रावधान है। माननीय मुख्‍यमंत्रीजी द्वारा अटल ज्‍योति अभियान के तहत् ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युतीकृत ग्रामों के मुख्‍य आबादी वाले क्षेत्र में गैर-कृषि उपयोग हेतु 24 घण्‍टे विद्युत प्रदाय उपलब्‍ध कराने की शुरूआत की गई थी। (ख) धार जिले के अन्‍तर्गत कुल 1475 राजस्‍व ग्राम हैं तथा इन समस्‍त ग्रामों में गैर-कृषि उपयोग हेतु 24:00 घण्‍टे विद्युत प्रदाय की जा रही है। (ग) 12वीं पंचवर्षीय योजना में धार जिले हेतु स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अन्‍तर्गत शामिल गंधवानी विधानसभा क्षेत्र के सभी 103 मजरों/टोलों के विद्युतीकरण का कार्य अभी टर्न-की ठेकेदार एजेंसी मेसर्स यूबीटेक, फरीदाबाद द्वारा प्रारंभ नहीं किया गया है। राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में गंधवानी विधानसभा क्षेत्र सहित संपूर्ण धार जिले के विद्युतीकरण कार्य हेतु अवार्ड जारी किया गया है, जिसकी कुल राशि रू. 59.71 करोड़ है। निविदा अनुबंध की शर्तों के अनुसार उपरोक्‍त कार्य दिनांक 17.02.2017 तक पूर्ण किया जाना निर्धारित है।

विभागीय आवासीय परिसरों की स्थिति

55. ( क्र. 2151 ) श्री विजय सिंह सोलंकी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) खण्‍डवा, बड़वानी एवं खरगोन जिले में विभागीय आवासीय परिसर कहाँ-कहाँ है? इन आवासीय परिसरों में कितने टाईप के कितने-कितने आवासगृह है? वर्तमान में इन आवासगृहों में निवासरत अधिकारी/कर्मचारी के नाम, पद की सूची देवें? (ख) प्रश्‍नांश (क) के आवासीय परिसरों में कितने आवासगृह किस-किस टाईप के कब से खाली है? इन आवासीय परिसरों में कितने रहवासी अवैध रूप से कब से निवासरत है? इन आवासीय परिसरों में कोई अतिक्रमण है तो कितना और कब से है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र एवं अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र एवं अनुसार है। परिसरों में कोई अतिक्रमण नहीं है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। 

काम्‍प्‍लेक्‍स निर्माण में अनियमितता

56. ( क्र. 2161 ) श्री विजय सिंह सोलंकी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नगर एवं ग्राम निवेश कार्यालय खरगोन-‍बड़वानी द्वारा विगत 3 वर्षों में अपनी अनुमति वाले नवीन काम्‍प्‍लेक्‍सों/निर्माण कार्य स्‍थलों का निरीक्षण किस अधिकारी द्वारा किया गया? इन निरीक्षणों में कितनी अनियमितता पाई गई इन पर क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) खरगोन जिले से विभागीय कार्यालय को वर्ष 2014 एवं 2015 में कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुई तथा इन पर क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) भगवानपुरा विधायक द्वारा डायवर्सन रोड पर निर्माणाधीन काम्‍प्‍लेक्‍स की शिकायत पर क्‍या कार्यवाही की गई उक्‍त शिकायत पर किन-किन शर्तों पर अनियमितता पाई गई? (घ) सेंधवा विकासखण्‍ड में वर्ष 2013 से 2015 तक कितनी कालोनियों को अनुमति प्रदान की गई तथा किन-किन निर्माण कार्यों का निर्माण पूर्ण हो चुका है तथा कितनी निर्माणाधीन है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) नगर तथा ग्राम निवेश, जिला कार्यालय खरगोन की स्थापना शासन की अधिसूचना दिनांक 19.03.2013 को हुई है। स्थापना दिनांक से जिला कार्यालय खरगोन द्वारा नवीन कॉम्पलेक्सों की अनुमति प्रदाय नहीं की है। खरगोन कार्यालय द्वारा दी गई विकास अनुज्ञा के निर्माण स्थलों का निरीक्षण सहायक संचालक एवं सब-इंजीनियर नगर तथा ग्राम निवे जिला कार्यालय खरगोन द्वारा किया गया है। स्थल निरीक्षण कर जाँच प्रतिवेदन सक्षम प्राधिकारी को अग्रेत्तर कार्यवाही हेतु प्रेषित किया गया। (उत्तरांश अनुसार) (ख) नगर तथा ग्राम निवेश, जिला कार्यालय खरगोन को वर्ष 2014-15 में 04 शिकायतें प्राप्त हुई। प्राप्त शिकायतों पर यथा आवश्यकतानुसार स्थल निरीक्षण कर जाँच प्रतिवेदन सक्षम प्राधिकारी को अग्रेत्तर कार्यवाही किये जाने हेतु प्रेषित किये गये है। पुस्तकालय में रखे परिशष्‍ट के प्रपत्र एवं अनुसार(ग) डायवर्सन रोड पर आवासीय सह वाणिज्यिक विकास हेतु विकास अनुज्ञा प्रदान की गई। प्राप्त शिकायत के संबंध में प्रदत्त अनुज्ञा से भिन्न विकास की स्थिति होने के कारण विकासकर्ता को स्थल पर स्वीकृति के विपरीत हो रहे निर्माण को तत्काल प्रभाव से रोकने के लिये निर्देश दिये गये है एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, नगर पालिका परिषद् खरगोन को अवैध निर्माण नियमानुसार हटाने तथा कालोनाईजर का रजिस्ट्रेन निरस्त करने की अनुशंसा की है। (घ) जानकारी सेंधवा विकासखण्ड में वर्ष 2013 से 2015 तक 7 कालोनीयों की विकास अनुमति जारी की गई जिनमें से एक कालोनी का विकास पूर्णता संबंधी अभिमत प्रदान किया गया है। शे4 कालोनीयां निर्माणाधीन एवं 2 कालोनी पर कोई विकास कार्य नहीं हुआ। पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-स अनुसार

बंधुआ गोदाम के लिए प्‍लाटिंग

57. ( क्र. 2206 ) श्री अंचल सोनकर : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 1972 में नगर पालिका निगम जबलपुर के अंतर्गत खसरा नंबर 153 एवं 154 में बंधुआ गोदाम के लिये प्‍लाटिंग की गई थी? यदि हाँ, तो खं.नं. 153-154 में कुल कितने प्‍लाट किस साईज के तैयार किये गये एवं इन्‍हें कितने वर्षों के लिये हितग्राहियों को पट्टे/लीज पर आवंटित किये गये? (ख) प्रश्‍नांश (क) में आवंटित बंधुवा गोदाम के पट्टों/लीज की अवधि समाप्‍त होने के उपरांत क्‍या इनके पट्टे/लीज निरस्‍त की गई अथवा उनकी अवधि बढ़ाई गई तो कब तक क्‍या वर्तमान में बंधुआ गोदाम के नाम से आवंटित मूल पट्टेधारी काबिज है अथवा अन्‍य कोई सूची एवं मेप (सीकेट प्‍लान उपलब्‍ध करावें? (