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मध्य प्रदेश विधान सभा


प्रश्नोत्तर-सूची
फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र


शुक्रवार, दिनांक 01 अप्रैल, 2016


भाग-1
तारांकित प्रश्नोत्तर


 

(वर्ग 2 : सामान्य प्रशासन, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, संस्कृति, पर्यटन, प्रवासी भारतीय, नगरीय विकास एवं पर्यावरण, जल संसाधन, वित्त, वाणिज्यिक कर, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, ऊर्जा, नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा, जनसंपर्क, खनिज साधन)

गौण खनिज नियम में छूट का प्रावधान

1. ( *क्र. 7353 ) श्रीमती रेखा यादव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 के नियम 3 में छूट के संबंध में राज्‍य शासन ने दिनांक 10.04.2013 को क्‍या-क्‍या आदेश जारी किए? भारत सरकार ने 15 जनवरी, 2016 को क्‍या-क्‍या अधिसूचना जारी की है? आदेश एवं अधिसूचना की प्रति सहित बतावें। (ख) 10 अप्रैल, 2013 से प्रश्‍नांकित दिनांक तक छतरपुर एवं बैतूल जिले में छूट प्राप्‍त व्‍यक्तियों एवं निर्माण एजेन्‍सियों को कितने गौण खनिज के परिवहन हेतु कितने पिटपास जारी किए गए? कितने प्रकरणों में कितने गौण खनिज के खनन एवं परिवहन की अनुमतियाँ प्रदान की गईं। (ग) 10 अप्रैल, 2013 को शासन द्वारा जारी प्रक्रिया के अनुसार अनुमति प्राप्‍त न किए जाने पर नियम की किस-किस धारा के अनुसार प्रकरण पंजीबद्ध किए जाने, खनिज, औजार एवं वाहन जप्‍त किए जाने के वर्तमान में क्‍या प्रावधान प्रचलित हैं। इसके तहत 10 अप्रैल से प्रश्‍नांकित दिनांक तक छतरपुर एवं बैतूल जिले में कितने प्रकरण बनाए गए।

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) विभाग द्वारा दिनांक 10.04.2013 को प्रश्‍नांकित नियम के संदर्भ में जो 03 निर्देश जारी किए गए हैं, वे पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। प्रश्‍नांश में शेष वांछित जानकारी भारत सरकार की विषयवस्‍तु है। अत: जानकारी दिया जाना संभव नहीं है। (ख) छतरपुर जिले में विभिन्‍न तहसीलों से छूट प्राप्‍त व्‍यक्तियों एवं निर्माण एजेन्सियों को गौण खनिज रेत, पत्‍थर, मुरूम के परिवहन हेतु 2050 रॉयल्‍टी मुक्‍त अभिवहन पास जारी किए गए हैं। बैतूल जिले में प्रश्‍नाधीन अवधि में बैतूल तहसील अंतर्गत छूट प्राप्‍त व्‍यक्तियों एवं निर्माण एजेन्सियों को गौण खनिज साधारण मिट्टी (ईंट निर्माण) के परिवहन हेतु 04 रॉयल्‍टी मुक्‍त अभिवहन पास बुक जारी किए गए हैं। अनुमति नहीं अपितु म.प्र. गौण खनिज नियम 1996 के नियम 3 (क) के प्रावधान के तहत जिला छतरपुर में संबंधित तहसीलदारों द्वारा 34 प्रकरणों का प्रमाणीकरण तथा जिला बैतूल में 04 प्रकरणों का प्रमाणीकरण किया गया है। (ग) 10 अप्रैल, 2013 को राज्‍य शासन द्वारा जो निर्देश जारी किए गए हैं वह म.प्र. गौण खनिज नियम 1996 के नियम 3 (क) के संदर्भ में हैं। म.प्र. गौण खनिज नियम 1996 के नियम 53 में यह प्रावधान है कि इन नियमों के उल्‍लंघन पर नियमानुसार दण्‍डात्‍मक कार्यवाही किए जाने का उल्‍लेख है। प्रश्‍नानुसार उल्‍लेखित निर्देश के उल्‍लंघन पर पृथक से कोई दण्‍डात्‍मक प्रावधान उल्‍लेखित न होने से शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता।

प्रश्‍नकर्ता के पत्र पर कार्यवाही

2. ( *क्र. 6602 ) श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रश्‍नकर्ता ने मुख्‍य सचिव को गत वर्ष अशोकनगर के कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के श्री बाबूलाल यादव, एडवोकेट का पत्र अग्रेषित कर लिखित में जाँच का आग्रह किया था। इस पर मुख्‍य सचिव ने क्‍या कार्यवाही की? (ख) अशोकनगर जिले में विभिन्‍न समस्‍याओं के बारे में प्रश्‍नकर्ता ने मुख्‍य सचिव मध्‍यप्रदेश शासन को गत 02 वर्ष में जो पत्र लिखे हैं, आज तक उस संबंध में क्‍या कार्यवाही हुई है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

शासकीय भूमि पर डेयरी का अवैध संचालन

3. ( *क्र. 7188 ) श्री महेन्द्र हार्डिया : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या अर्जुन नगर झुग्‍गी बस्‍ती पुराना सुभाष नगर, भोपाल में अभिरूचि परिसर के समीप कतिपय व्‍यक्ति द्वारा शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर दूध डेयरी (भैंसों का तबेला) संचालित है? (ख) क्‍या दूध डेयरी हटाने के लिए स्‍थानीय रहवासियों द्वारा नगर निगम भोपाल में शिकायतें की गई हैं? यदि हाँ, तो प्राप्‍त शिकायतों पर क्‍या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, की गई तो क्‍यों तथा क्‍या शहर के बीच में वह भी शासकीय भूमि पर भैंस का तबेला संचालित किया जाना नियमानुकूल है? यदि नहीं, तो इसे क्‍यों नहीं हटाया गया तथा इस अवैध डेयरी संचालन को न हटाने के लिए कौन जिम्‍मेदार हैं? (ग) उक्‍त भैंस के तबेले को हटाने के लिए नगर निगम भोपाल कब तक कार्यवाही करेगा, इसे हटाने में हुए विलंब के लिए निगम दोषियों के विरूद्ध कब तक कार्यवाही करेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। नगर निगम भोपाल में प्राप्‍त शिकायतों के आधार पर जिसमें पीजी क्रमांक 93726629373467 के संबंध में श्री मुजाहिद खान/कदीर खान की डेयरी से समय-समय पर पशु अन्‍ना नगर कांजी हाउस में बंद किये गये तथा जुर्माना अधिरोपित किया गया। इसके अतिरिक्‍त गंदगी फैलाने वालों के विरूद्ध चालानी कार्यवाही की गई है। नगर निगम भोपाल द्वारा शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाये जाने हेतु निगम द्वारा पत्र क्रमांक 140-142 दिनांक 13.07.2015 को नजूल अधिकारी गोविन्‍दपुरा वृत्‍त भोपाल को पत्र भेजा गया है। निगम द्वारा अवैध डेयरी संचालन के संबंध में समय-समय पर पशु निरूद्ध किये जाकर चालानी कार्यवाही की गई है। इस कारण किसी के जिम्‍मेदार होने का प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता। (ग) नगर निगम भोपाल द्वारा भैंस के तबेले को हटाने के संबंध में समय-समय पर कार्यवाही की जाती रही है, जो निगम की एक नियमित प्रक्रिया है। समय-सीमा बताना संभव नहीं है। इस कारण किसी के दोषी होने एवं किसी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता।

ओंकारेश्‍वर परियोजना से डूब प्रभावित क्षेत्र

4. ( *क्र. 7895 ) श्री चम्पालाल देवड़ा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या ओंकारेश्‍वर परियोजना में डूब में आने के कारण देवास जिले के बागली विकासखण्‍ड अंतर्गत धाराजी धार्मिक क्षेत्र नर्मदा के बैक वाटर से जलमग्‍न हो गया है? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या प्रश्‍नांकित धाराजी क्षेत्र में पूर्व में वर्ष में दो बार धार्मिक मेला लगता था, जिससे उक्‍त स्‍थान पर उज्‍जैन एवं इंदौर संभाग के लाखों यात्री आते थे? उक्‍त क्षेत्र आदिवासी क्षेत्र होने के कारण रहवासियों को दुकान व व्‍यवसाय से रोजगार उपलब्‍ध होता था तथा वार्षिक आमदानी होती है? यदि हाँ, तो उपर्युक्‍त स्थिति में विभाग सीता म‍ंदिर (पीपरी) क्षेत्र तक नर्मदा का पावन जल पाईप लाईन से उद्वहन कर स्‍थायी घाट निर्माण कर पुन: मेला विकसित कर आयोजन करने हेतु विचार करेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। ओंकारेश्‍वर परियोजना के निर्माण से देवास जिले के बागली विकासखण्‍ड के अंतर्गत ग्राम धारड़ी डूब से प्रभावित है। नर्मदा घाटी विकास विभाग/एन.एच.डी.सी. में सीता मंदिर (पीपरी) क्षेत्र तक नर्मदा के जल को पाईप लाईन से उद्वहन करने एवं घाट निर्माण किये जाने की कोई योजना नहीं है।

विद्युत वितरण कंपनी द्वारा बिजली बिल की वसूली

5. ( *क्र. 6620 ) श्री नीलेश अवस्‍थी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में विद्युत वितरण कंपनी द्वारा घरेलू/व्‍यवसायिक विद्युत कनेक्‍शन हेतु किस प्रकार की कितनी श्रेणियां हैं तथा उनसे किस-किस प्रकार के शुल्‍क सहित कितना बिल वसूला जा सकता है? श्रेणीवार सूची देवें। (ख) टू-पार्ट टैरिफ क्‍या है? प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित उपभोक्‍ताओं से कितना फिक्‍स चार्ज और कितना ऊर्जा प्रभार लिया जा रहा है? श्रेणीवार सूची देवें एवं क्‍या बिजली अधिनियम 2003 के अनुसार बिल में उपभोक्‍ता से फिक्‍स प्रभार लेना अनिवार्य है, जबकि ऊर्जा प्रभार मीटर रीडिंग या वास्‍तविक खपत के अनुसार लगता है। (ग) प्रश्‍नांश (ख) यदि हाँ, तो प्रदेश में कनेक्‍शन धारी का निवास या प्रतिष्‍ठान बंद मिलने पर या मीटर रीडिंग शून्‍य खपत दर्शाने पर वर्तमान समय में कितना फिक्‍स चार्ज एवं कितना ऊर्जा प्रभार उपभोक्‍ताओं से वसूला जा रहा है? (घ) बिजली अधिनियम की धारा 45 (1), 3 क्‍या है? क्‍या इस अधिनियम के अनुसार उपभोक्‍ता का घर/कार्य स्‍थल बंद मिलने पर या बिजली खपत शून्‍य होने पर क्‍या उपभोक्‍ता से न्‍यूनतम ऊर्जा प्रभार वसूला जाना सही है? यदि हाँ, तो किस प्रकार से यदि नहीं, तो क्‍या शासन विद्युत कंपनियों द्वारा गलत तरीके से वसूले जा रहे ऊर्जा प्रभार को रोककर उपभोक्‍ताओं को राहत प्रदान करेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी विद्युत दर आदेश दिनांक 17.04.2015 के अनुसार घरेलू एवं गैर-घरेलू कनेक्‍शनों की विभिन्‍न उपश्रेणियों के प्रकार तथा इनके लिए प्रयोज्‍य विद्युत दरों एवं म.प्र. शासन द्वारा अधिसूचित विद्युत शुल्‍क का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी दर आदेश के अनुसार प्रयोज्‍य दरों एवं म.प्र. शासन द्वारा अधिसूचित प्रयोज्‍य विद्युत शुल्‍क के आधार पर ही विद्युत खपत के अनुसार वितरण कंपनियों द्वारा बिल वसूला जा सकता है। (ख) टू-पार्ट टैरिफ मांग आधारित टैरिफ है। इसमें उपभोक्‍ता अपने स्‍वीकृत/संबद्ध भार के साथ-साथ अपनी संविदा माँग हेतु आवेदन कर सकता है। प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित उपभोक्‍ताओं से लिये जा रहे फिक्‍स चार्ज (नियत प्रभार) और ऊर्जा प्रभारों का घरेलू एवं गैर घरेलू उपभोक्‍ता श्रेणीवार विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' एवं '''' में दर्शाया गया है। विद्युत की दरों के निर्धारण में म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 में उल्‍लेखित प्रावधानों को ध्‍यान में रखा जाता है। (ग) उपभोक्‍ता का निवास या प्रतिष्‍ठान बंद मिलने पर नियामक आयोग द्वारा जारी विद्युत दर आदेश के अनुसार नियत प्रभार एवं पूर्व वित्‍तीय वर्ष की औसत मासिक विद्युत खपत के आधार पर औसत बिल दिया जा रहा है तथा मीटर रीडिंग शून्‍य खपत दर्शाने पर म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी वर्तमान दर आदेश में निहित प्रावधानों के अनुसार नियत प्रभार एवं न्‍यूनतम प्रभार वसूला जा रहा है, जिसका प्रश्‍नाधीन श्रेणी-घरेलू एवं गैर-घरेलू उपभोक्‍ताओं हेतु विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। उल्‍लेखनीय है कि उपभोक्‍ता को विद्युत प्रदाय करने हेतु विद्युत अधोसंरचना निर्मित करने तथा विद्युत अधोसंरचना के रख-रखाव हेतु वितरण कंपनी को निरंतर राशि व्‍यय करनी होती है, जिसकी आंशिक प्रतिपूर्ति हेतु दर आदेश में फिक्‍स चार्ज के रूप में वितरण कंपनी के नियत खर्चों हेतु प्रावधान किया जाता है। (घ) विद्युत अधिनियम में प्रश्‍नाधीन उल्‍लेखित धारा 45 (1) 3 न होकर धारा 45 (3) है, जिसके प्रावधान निम्‍नानुसार है :- ''45 (3) किसी वितरण अनुज्ञप्तिधारी द्वारा प्रदाय की गई विद्युत के प्रभारों में निम्‍नलिखित सम्मिलित हो सकेंगे :- (क) वास्‍तविक रूप से प्रदाय की गई विद्युत के लिये प्रभार के अतिरिक्‍त कोई नियत प्रभार (ख) विद्युत अनुज्ञप्तिधारी द्वारा उपलब्‍ध कराये गये किसी विद्युत मीटर या विद्युत संयंत्र बावत कोई किराया या अन्‍य प्रभार।'' इस अधिनियम के अनुसार उपभोक्‍ता का घर/कार्य स्‍थल बंद मिलने पर या बिजली खपत शून्‍य होने पर भी उपभोक्‍ता से दर आदेश में निहित प्रावधानों के अनुसार प्रभारों की वसूली किया जाना सही है। अत: प्रश्‍न नहीं उठता।

सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्रांतर्गत स्‍वीकृत कार्य

6. ( *क्र. 6977 ) श्री मेहरबान सिंह रावत : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सबलगढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत जल संसाधन संभाग सबलगढ़ अंतर्गत वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में क्‍या-क्‍या कार्य स्‍वीकृत किए गए? कार्य ऐजेंसी का नाम, स्‍वीकृत राशि, कार्य पूर्ण करने की अवधि एवं व्‍यय की जानकारी वर्षवार बतावें। (ख) क्‍या उक्‍त कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण हुए एवं कौन-कौन से कार्य अवधि पूर्ण होने पर भी पूर्ण नहीं हुए हैं? अपूर्ण कार्य कब तक पूर्ण करा दिए जाएंगे। (ग) क्‍या उक्‍त अवधि में केनाल व डिस्‍ट्रीब्‍यूटरियों सहित पावती एक्‍बेडेक्‍ट पर कराए गए पक्‍कीकरण कार्य प्राक्‍कलन को अनदेखा कर घटिया निर्माण सामग्री से गुणवत्‍ताहीन कराये गये हैं? यदि हाँ, तो गुणवत्‍ता की जाँच कराकर दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ख) प्रश्‍नाधीन अवधि में कोई नवीन कार्य स्‍वीकृत नहीं किया गया है। शेष प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं। (ग) जी नहीं। प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होता है।

ग्‍वालियर संगीत महाविद्यालय में पदस्‍थ अमला

7. ( *क्र. 6763 ) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्‍वालियर राजा मानसिंह संगीत विश्‍वविद्यालय से संबद्धता वाले कितने शासकीय, अशासकीय महाविद्यालय कहाँ संचालित हैं? उनके स्‍थान सहित वर्तमान समय की जानकारी दी जावे? (ख) ग्‍वालियर संगीत महाविद्यालय में कितने नियमित, तदर्थ व अतिथि विद्वान वर्तमान में पदस्‍थ हैं? उनकी संख्‍या, विषय सहित पूर्ण जानकारी दी जावे। (ग) क्‍या 20 फरवरी, 2016 तक अतिथि विद्वानों को चार माह से भी अधिक समय से वेतन नहीं दिया गया है, क्‍यों? कारण सहित पूर्ण जानकारी दी जावे। (घ) क्‍या विश्‍वविद्यालय द्वारा जिन विषय में पद रिक्‍त हैं, वहां अतिथि शिक्षकों से अध्‍यापन कार्य कराया जा रहा है? उनके स्‍थाई पदों पर कब तक शिक्षकों की पदस्‍थापना कराई जावेगी। 20 फरवरी, 2016 तक क्‍या प्रक्रिया अपनाई गई है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) ग्‍वालियर राजा मानसिंह तोमर संगीत विश्‍वविद्यालय से संबद्धता वाले 13 शासकीय एवं 69 अशासकीय कुल 82 महाविद्यालयों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार. (ख) ग्‍वालियर संगीत महाविद्यालय में पदस्‍थ एवं वर्तमान में कार्यरत नियमित तदर्थ व अतिथि विद्वान की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार. (ग) दिनांक 20 फरवरी, 2016 तक अतिथि विद्वान को प्रतिमाह नियमित वेतन दिया जा रहा है। अत: प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता. (घ) जी हाँ. स्‍थायी पदों पर भर्ती करने हेतु प्रक्रियाधीन. कार्यवाही जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार.

 

गौण खनिज एवं रेत उत्‍खनन की स्‍वीकृति

8. ( *क्र. 1029 ) श्री रामपाल सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शहडोल जिले में खनिज विभाग द्वारा वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में गौण खनिज एवं रेत उत्‍खनन की स्‍वीकृति प्रदान की गई है? यदि हाँ, तो कहाँ-कहाँ और किस-किस को उत्‍खनन की स्‍वीकृति प्रदान की गई है और प्रत्‍येक खदान की स्‍वीकृति नियम व शर्तें क्‍या हैं? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) के अनुसार यदि उत्‍खनन की स्‍वीकृति प्रदान की गई है तो प्रश्‍न दिनांक तक प्रत्‍येक खदान से कितनी राशि प्राप्‍त हुई है? (ग) क्‍या शहडोल जिले में गौण खनिज एवं रेत उत्‍खनन के अन्‍य खदानों की स्‍वीकृति प्रस्‍तावित है? यदि हाँ, तो प्रस्‍तावित खदानों की स्‍वीकृति की प्रक्रिया किस स्‍तर तक की जा चुकी है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नाधीन जिले में वर्ष 2014-2015 में गौण खनिज एवं रेत के उत्‍खनन हेतु स्‍वीकृति प्रदान नहीं की गई है। वर्ष 2015-2016 में गौण खनिज पत्‍थर एवं रेत की नीलाम खदानें तथा क्रशर द्वारा गिट्टी निर्माण हेतु पत्‍थर खनिज का उत्‍खनिपट्टा स्‍वीकृत किया गया है। प्रश्‍नांश की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र एवं में क्रमश: दर्शित है। उपरोक्‍त खदानें मध्‍यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 में दर्शित शर्तों के आधार पर स्‍वीकृत की गईं हैं। यह नियम अधिसूचित है। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र एवं में दर्शित है। (ग) प्रश्‍नाधीन जिले में क्रशर द्वारा गिट्टी निर्माण हेतु पत्‍थर खनिज के उत्‍खनिपट्टा हेतु 16 आवेदन पत्र विचाराधीन हैं। यह आवेदन वर्तमान में जाँच की प्रक्रिया के अधीन हैं। रेत उत्‍खनन हेतु 5 खदानों में पर्यावरण अनापत्ति प्राप्‍त करने की प्रक्रिया प्रचलन में है।

परिशिष्ट - ''एक''

कम तेजी की मदिरा की जाँच

9. ( *क्र. 6404 ) श्री यशपालसिंह सिसौदिया : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आबकारी विभाग की कम तेजी मदिरा जाँच के लिये प्रयोगशाला को फूड एवं सेफ्टी मापदण्‍ड के अनुरूप नहीं लिये जाने के क्‍या कारण हैं? क्‍या प्रक्रिया प्रचलन में है? (ख) वर्तमान में विभाग द्वारा कम तेजी के नमूनों की जांच के लिये प्रायवेट प्रयोगशाला को 1 जनवरी, 2013 से कितनी जाँच के लिये कितना भुगतान किया गया? क्‍या यह प्रयोगशाला फूड एवं सेफ्टी (sefty) मापदण्‍ड के अनुरूप है?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) आबकारी विभाग में भारतीय मानक ब्‍यूरो के स्‍टैंडर्ड के अनुरूप प्रयोगशाला स्‍थापित है तथा इस विभागीय प्रयोगशाला में मोलासिस में उपस्थित शक्‍कर की मात्रा का निर्धारण, आसवनियों में विनिर्मित प्रासव का रसायनिक परीक्षण, विदेशी मदिरा विनिर्माणी इकाईयों में निर्मित विदेशी मदिरा, देशी मदिरा विनिर्माणी इकाईयों में निर्मित देशी मदिरा की गुणवत्‍ता हेतु प्राप्‍त नमूनों की जाँच भारतीय मानक ब्‍यूरो द्वारा निर्धारित प्रक्रियात्‍मक मानकों अनुसार की जाती है। (ख) प्रदेश के संभागीय उपायुक्‍त आबकारी कार्यालयों द्वारा प्रभाराधीन जिलों से संकलित एवं प्राप्‍त जानकारी अनुसार प्रदेश में 01 जनवरी, 2013 से प्रश्‍न दिनांक तक कम तेजी के एक भी नमूने की जाँच प्रायवेट प्रयोगशाला में नहीं कराई गई है, जाँच नहीं होने के कारण राशि भुगतान का प्रश्‍न उत्पन्‍न नहीं होता है। प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न का शेष अंश विभाग से संबंधित नहीं है।

विधायक स्‍वेच्‍छानुदान योजना को ई-भुगतान प्रणाली से मुक्‍त किया जाना

10. ( *क्र. 3533 ) श्री देवेन्द्र वर्मा : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मध्‍यप्रदेश के सभी शासकीय विभागों/निगम/मण्‍डलों में ई-भुगतान की प्रणाली प्रचलित है? यदि नहीं, तो किन-किन विभागों में नहीं है? (ख) किन-किन विभागों में ई-भुगतान प्रणाली का कार्य नहीं किया जाता है? क्‍या प्रदेश के निगम एवं मण्‍डलों में भी ई-भुगतान प्रणाली को लागू किया जायेगा? (ग) क्‍या विधायक स्‍वेच्‍छानुदान मद में भी ई-भुगतान प्रणाली को मान्‍य किया गया है? यदि हाँ, तो क्‍यों? (घ) क्‍या विधायक स्‍वेच्‍छानुदान राशि का उद्देश्‍य जरूरतमंदों को तत्‍काल आर्थिक सहायता देना है? यदि हाँ, तो ऐसे में क्‍या विधायक स्‍वेच्‍छानुदान योजना को ई-भुगतान प्रणाली से मुक्‍त किया जाएगा? यदि हाँ, तो कब तक?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) से (घ) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

कटनी जिलांतर्गत मदिरा दुकानों का निरीक्षण

11. ( *क्र. 7123 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मदिरा दुकानों के निरीक्षण में विवरण दर्ज किये जाने के शासनादेश हैं? यदि हाँ, तो कटनी जिले की मदिरा दुकानों का अप्रैल, 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक किन-किन शासकीय सेवकों द्वारा कब-कब निरीक्षण किया गया? (ख) क्‍या कटनी जिले में विभागीय उड़नदस्‍ता गठित है? यदि हाँ, तो इसके क्‍या कार्य हैं एवं कौन-कौन शासकीय सेवक इसमें शामिल हैं? उड़नदस्‍ते द्वारा अप्रैल, 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक किन-किन दुकानों, स्‍थानों का निरीक्षण, दौरा एवं जाँच, कब-कब की गई, क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) क्‍या स्‍वीकृत स्‍थल मानचित्र के अतिरिक्‍त अन्‍य स्‍थल पर दुकान संचालन के चलते देशी मदिरा दुकान नई बस्‍ती कटनी के लायसेंसी पर कार्यवाही की गई थी? यदि हाँ, तो यह दुकान कब से अनियमित तौर पर संचालित रही, प्रश्‍न दिनांक को किस स्‍थान से संचालित है? क्‍या कारण है कि जिला मुख्‍यालय में ही नियम विपरीत दुकान संचालन के जिम्‍मेदार शासकीय सेवकों को सूचना प्राप्‍त नहीं हुई? इस लापरवाही का कौन-कौन जिम्‍मेदार है? (घ) कटनी जिले में शासनादेशों के विपरीत संचालित मदिरा दुकानों के संबंध में जनवरी, 2015 से क्‍या शिकायतें प्राप्‍त हुई? क्‍या कार्यवाही की गई? क्‍या विभागीय संरक्षण से अनियमितताओं की जाँच एवं कार्यवाही के आदेश दिये जायेंगे?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। यह सही है कि दुकानों में निरीक्षण के विवरण दर्ज किये जाने का प्रावधान है। कटनी जिले में संचालित 43 देशी मदिरा दुकानें एवं 20 विदेशी मदिरा दुकानों के अप्रैल, 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक निम्‍नांकित शासकीय सेवकों द्वारा निरीक्षण किये गये हैं :- (1) राज्‍य स्‍तरीय उड़नदस्‍ता, भोपाल। (2) संभागीय उड़नदस्‍ता, जबलपुर। (3) जिला आबकारी अधिकारी कटनी। (4) समस्‍त सहायक जिला आबकारी अधिकारी, कटनी। (5) समस्‍त आबकारी उप निरीक्षक कटनी। उक्‍त शासकीय सेवकों द्वारा किये गये निरीक्षणों का दिनांकवार पत्रक पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र एक अनुसार है। (ख) जी हाँ। कटनी जिले में विभागीय उड़नदस्‍ता गठित है, जिसके द्वारा मादक द्रव्‍यों के अवैध धारण, संग्रहण एवं परिवहन की रोकथाम के लिए जिला कटनी में भ्रमण व कार्यवाही की जाती है, उड़नदस्‍ता में श्री लोकेश सिंह ठाकुर, सहायक जिला आबकारी अधिकारी एवं आबकारी आरक्षक श्री शिवमूरत नामदेव, श्री मनोज कुमार पाठक पदस्‍थ हैं। उड़नदस्‍ता द्वारा अप्रैल, 2015 से प्रश्‍न दिनांक तक की गई कार्यवाही में अवैध मदिरा के पंजीबद्ध किये गये प्रकरणों का पत्रक पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र दो अनुसार है। (ग) देशी मदिरा दुकान नई बस्‍ती, उसको स्‍वीकृत स्‍थान से लगभग 6 मीटर की दूरी स्थित पृथक भूमि स्‍वामी की खाली भूमि पर स्‍थापित कर संचालित करने का प्रकरण दिनांक 17.09.2015 को प्रकाश में आने पर आबकारी उप निरीक्षक वृत्‍त कटनी क्रमांक-2 द्वारा जाँच कर प्रकरण क्रमांक 308, दिनांक 17.09.2015 कायम किया गया, जिसमें कलेक्‍टर जिला कटनी द्वारा रूपये 10,000/- शास्ति आरोपित कर लायसेंसी को दण्डित किया गया। वृत्‍त के प्रभारी सहायक जिला आबकारी अधिकारी/आबकारी उप निरीक्षक द्वारा प्रस्‍तुत प्रतिवेदन अनुसार उक्‍त स्‍थल आपत्तिरहित एवं आबकारी अधिनियम के अंतर्गत बने सामान्‍य प्रयुक्‍त के नियमों के नियम 1 के अनुरूप होने से लायसेंसी द्वारा आवेदन करने पर कलेक्‍टर जिला कटनी द्वारा इसी स्‍थान (वर्तमान स्‍थल) पर संचालन की अनुमति दी गई। प्रश्‍न दिनांक को मदिरा दुकान उसी खाली भूमि में अस्‍थाई निर्माण कर संचालित है। उक्‍तानुसार जिम्‍मेदार शासकीय सेवकों के संज्ञान में मदिरा दुकान नई बस्‍ती नियमानुकूल संचालित है। किसी की लापरवाही नहीं पाई गई है। अत: कोई भी जिम्‍मेदार नहीं है। (घ) कटनी जिले में शासनादेशों के विपरीत कोई भी मदिरा दुकान संचालित नहीं है। जनवरी, 2015 से 09 शिकायतें प्राप्‍त हुईं, जिनकी जाँच विभागीय अधिकारियों द्वारा कराने पर शिकायतें प्रमाणित नहीं पाई गईं। शिकायतवार प्रतिवेदन की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र तीन अनुसार है। विभागीय संरक्षण से कोई अनियमितता नहीं हो रही है। अत: कोई जाँच एवं कार्यवाही आदेशित नहीं की गई है।

मास्‍टर प्‍लान के क्षेत्र के बाहर होटल/रिसोर्ट निर्माण की अनुमति

12. ( *क्र. 7790 ) श्री संजय शाह मकड़ाई : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रदेश के मास्‍टर प्‍लान (विकास योजना) की परिधि के क्षेत्र के बाहर ग्रामों में होटल/रिसोर्ट निर्माण करने हेतु नगर तथा ग्राम निवेश विभाग का विकास अनुज्ञा/अभिन्‍यास योजना ले-आउट प्‍लान लेना अनिवार्य है? यदि हाँ, तो नियमों की प्रति उपलब्‍ध करावें? (ख) क्‍या माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय द्वारा मई, 2013 में मढ़ई (वनवासी सम्‍मेलन और अंत्‍योदय मेले, कामती) भ्रमण के दौरान मढ़ई विकास योजना (प्रारूप) 2021 को स्‍थानीय लोगों के अनुरूप नयी विकास योजना बनाये जाने की घोषणा की गई थी। यदि हाँ, तो क्‍या वर्तमान में मढ़ई विकास योजना लागू नहीं है? यदि लागू है तो निवेश क्षेत्रों में अभिमत प्राप्‍त करने का क्‍या नीति निर्देश है? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के तहत यदि विकास योजना लागू है तो ग्राम रैनीपानी एवं श्रीरंगपुर में कितनी भूमि (एकड़) में होटल/रिसोर्ट निर्माण हेतु अनुमति देने का प्रावधान है? आदिवासी बाहुल्‍य क्षेत्र मढ़ई अंतर्गत ग्राम घोघरी/टेकापार/बीजाखारी/कामठी, श्रीरंगपुर, रैनीपानी, सांरगपुर में आदिवासियों को छोटे रकबे पर होमस्‍टे/होटल बनाये जाने की छूट की व्‍यवस्‍था है? यदि नहीं, तो क्‍या इसके लिए शासन की ओर से कोई योजना है? (घ) मढ़ई के देनवा नदी किनारे ग्राम सारंगपुर, बिजाखारी, टेकापार में होटल/रिसोर्ट, कॉलोनी बनाने की नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा विगत् 5 वर्षों से प्रश्‍न दिनांक तक किन-किन होटल/रिसोर्ट/कॉलोनाईजर को अनुमति दी गई?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) विकास योजना की परिधि के बाहर के क्षेत्रों में म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 प्रभावशील नहीं है। किसी भूमि के व्यपवर्तन के समय सक्षम प्राधिकारी द्वारा अभिमत चाहने पर नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा नियोजन मानकों के अनुरूप गुण-दोषों के आधार पर अभिमत दिया जाता है। (ख) जानकारी एकत्रित की जा रही है। (ग) मढ़ई विकास योजना अभी लागू नहीं है। अतः शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता है। (घ) मढ़ई के देनवा नदी के किनारे ग्राम सारंगपुर, बिजाखारी, टेकापार में विगत 5 वर्षों में कोई भी विकास अनुज्ञा/अनुमतियां नगर तथा ग्राम निवेश कार्यालय द्वारा जारी नहीं की गई है।

संविदा पर नियुक्त व्‍यक्ति को प्रत्‍यायोजित अधिकार

13. ( *क्र. 7042 ) श्री मधु भगत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अता. प्रश्‍न संख्‍या 49 (क्र. 1011) दि. 25.2.2016 के उत्‍तर में यह स्‍वीकार किया गया है कि सामान्‍य प्रशासन विभाग के परिपत्र दि. 03 सितम्‍बर, 2011 के प्रावधान अनुसार संविदा पर नियुक्त व्‍यक्ति को अनुशासनिक, प्रशासनिक शक्ति एवं अधिकार करने हेतु शासन ने अधिकार प्रत्‍यायोजित करने संबंधित निर्देश/नियम, परिपत्र प्रभावशील नहीं किए हैं? (ख) यदि हाँ, तो बतायें कि उक्‍त परिपत्र दि. 03 सितम्‍बर, 2011 के आधार पर नियु‍क्‍त व्‍यक्ति द्वारा जारी अनुशासनिक, प्रशासनिक आदेश अवैधानिक होंगे? क्‍या यह सही है? यदि नहीं, तो किस नियम के आधार पर वैध होंगे? (ग) संविधान के अनुच्‍छेद 309 के तहत बनाये गये एवं प्रभावशील सेवा, भर्ती, पदोन्‍नति, आरक्षण नियमों इत्‍यादि का उल्‍लंघन कर मात्र एक परिपत्र के आधार पर संविदा पर नियुक्‍त व्‍यक्ति द्वारा जारी आदेश विधिमान्‍य किस आधार पर होंगे?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) एवं (ग) उत्‍तरांश '''' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

इंदिरा सागर परियोजना की नहरों की स्‍वीकृति

14. ( *क्र. 2754 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यानसिंह सोलंकी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या खण्‍डवा, खरगोन, बड़वानी जिले में इंदिरा सागर परियोजना की नहरों की स्‍वीकृति हुई है? यदि हाँ, तो इसकी निविदा कब जारी हुई, निविदा में कार्य पूर्ण करने के लिये कितनी अवधि निर्धारित की गई थी। निविदा जारी होने की दिनांक, राशि एवं कार्यावधि सहित जानकारी दी जावे। (ख) कार्यादेश जारी होने के दिनांक तक क्‍या ठेकेदार द्वारा समय-सीमा में कार्य पूर्ण कर लिया गया है। यदि नहीं, तो कार्यावधि पूर्ण करने के लिये ठेकेदार को कितनी बार समयवृद्धि की गई। समय पर कार्य न होने के क्‍या कारण रहे हैं। क्‍या विभाग की गलती रही है? यदि हाँ, तो विभागीय अधिकारियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई। यदि ठेकेदार की त्रुटि रही है तो ठेकेदार के विरूद्ध समय-समय पर कितनी बार दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की गई। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के अनुसार जो कार्य शेष रहे हैं, वह कब तक पूर्ण कर लिये जावेंगे? समय-सीमा बतावें।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। वांछित जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के कॉलम 08 एवं 09 अनुसार है। नर्मदा बचाओ आंदोलन द्वारा कार्य में बाधा, भू-अर्जन प्रक्रिया में विलंब, न्‍यायालयीन प्रकरणों एवं नहरों में पानी चलाने के कारण कार्य समय-सीमा में पूर्ण नहीं हो सके। इस हेतु कोई विभागीय अधिकारी जिम्‍मेदार नहीं होने से उनके विरूद्ध कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। शेषांश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के सरल क्रमांक 12 एवं 14 के कॉलम 11 अनुसार है। (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के कॉलम 10 अनुसार है।

महेश्‍वर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत नहर निर्माण

15. ( *क्र. 6881 ) श्री राजकुमार मेव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) महेश्‍वर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत जनपद पंचायत महेश्‍वर एवं बड़वाह के ग्रामों में निर्मित तालाबों के रख-रखाव एवं नहर निर्माण हेतु आर.आर.आर. एवं एस.आर. योजना के अंतर्गत कितने प्रस्‍ताव विभाग द्वारा कब-कब एवं कितनी लागत के प्राक्‍कलन तैयार किये गये? (ख) क्‍या हाथीदग्‍गड़ तालाब, मण्‍डलेश्‍वर तालाब, गवला तालाब, जामन्‍या तालाब, रूपलाझिरी तालाब, अपर बलवाड़ा तालाब, अपर ससल्‍या, रठमान एवं दौलतपुरा तालाब के प्राक्‍कलन आर.आर.आर. योजना एवं एस.आर. योजना में तैयार किये जाकर स्‍वीकृति हेतु लंबित हैं? यदि हाँ, तो कब से एवं किन कारणों से? क्‍या वर्ष 2016-17 के बजट में स्‍वीकृति का प्रावधान किया गया है? यदि हाँ, तो कौन-कौन से तालाबों का एवं नहीं तो कारण बतावें? (ग) महेश्‍वर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बड़कीचौकी में अब्‍दुल खोदरा स्‍थल पर तालाब निर्माण, ग्राम देवगढ़ में तालाब निर्माण, ग्राम हिण्‍डोला गुवाडी में गाडा पानी/मेलखेडी गढ़ी में देवझिरी स्‍थल पर तालाब निर्माण किये जाने के प्रस्‍ताव विभाग द्वारा कब तैयार किये गये एवं उक्‍त प्रस्‍ताव में कब तक स्‍वीकृति प्रदान की जायेगी? (घ) क्‍या प्रश्‍नांश (ख) एवं (ग) के संबंध में प्रश्‍नकर्ता द्वारा वर्ष 2013-14 से प्रश्‍न दिनांक तक लगातार विभाग को स्‍वीकृति हेतु अवगत कराया जा रहा है? क्‍या क्षेत्र की एवं किसानों की उपेक्षा की जा रही है? यदि नहीं, तो कब तक किसानों के हित में उक्‍त प्रस्‍तावों में स्‍वीकृतियां दी जावेंगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) आर.आर.आर. योजना में स्‍वीकृत परियोजनाओं की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। एस.आर. नाम की कोई योजना नहीं है। (ख) एवं (ग) जी नहीं। प्रश्‍नाधीन कार्यों की डी.पी.आर. अन्तिम नहीं होने से स्‍वीकृति की स्थिति नहीं आने के कारण। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं। (घ) मा. प्रश्‍नकर्ता विधायक के विधान सभा क्षेत्र में स्‍वीकृत परियोजनाओं की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट में दर्शित है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

परिशिष्ट - ''दो''

मध्‍यप्रदेश भवन (दिल्‍ली) में विधायकों को ठहरने की सुविधा

16. ( *क्र. 7631 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश विधान सभा सदस्‍यों के लिए दिल्‍ली स्थित मध्‍यप्रदेश भवन में ठहरने की सुविधा उपलब्‍ध है या नहीं? यदि हाँ, तो उपलब्‍ध सुविधा के बदले कितना किराया लिया जा रहा है? (ख) प्रश्‍नांश (क) यदि हाँ, तो विधानसभा सदस्‍यों के लिये नि:शुल्‍क ठहरने की सुविधा उपलब्‍ध कराने हेतु शासन विचार करेगा या नहीं? यदि हाँ, तो कब तक? नहीं तो कारण देवें। (ग) मध्‍यप्रदेश विधानसभा सदस्‍यों के लिये अन्‍य राज्‍यों में कहाँ-कहाँ ठहरने की सुविधा उपलब्‍ध है? यदि नहीं, तो सुविधा उपलब्‍ध कराने पर शासन विचार करेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) मध्‍यप्रदेश भवन तथा मध्‍यांचल अधिवास नियम 2015 (यथा संशोधित दिनांक 02.01.2016) के परिशिष्‍ट-2 के स.क्र. 3 एवं 4 में प्रावधानानुसार माननीय विधायकगणों को प्रवास पर निम्‍नानुसार पात्रता है :- 1. कर्तव्‍य पर प्रवास नि:शुल्‍क। 2. निजी प्रवास एक कैलेंडर वर्ष में 30 दिवस (3 दिवस प्रतिमाह की शर्त पर) नि:शुल्‍क। अतिरिक्‍त अवधि के लिए अधिवास नियम के परिशिष्‍ट-3 के अनुसार शुल्‍क देय है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी नहीं।

फीडर विभक्तिकरण योजनांतर्गत विद्युतीकरण

17. ( *क्र. 725 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) रतलाम जिले में फीडर विभक्तिकरण योजना में कुल कितने ग्रामों में विद्युत लाईनों के खुले तारों को हटाकर उनके स्‍थान पर निम्‍नदाब केबल लाईन डाली गई है? डाली गई केबल लाईन की कुल लंबाई बतावें। (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित निकाले गये खुले तारों की कितनी मात्रा प्राप्‍त हुई तथा उनका क्‍या उपयोग किया गया? क्या निकाले गये तारों की चोरी हुई है? यदि हाँ, तो कितनी मात्रा की चोरी हुई? (ग) वर्ष 2015-16 में माह फरवरी, 2016 तक रतलाम जिले में कितनी मात्रा में विद्युत लाईनों के तार चोरी हुये हैं? ग्रामवार बतायें। इन चोरी प्रकरणों में विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) रतलाम जिले में फीडर विभक्तिकरण योजना में कुल 683 ग्रामों में विद्युत लाईनों के खुले तारों को हटाकर उनके स्‍थान पर 1,213 किलोमीटर निम्‍नदाब केबल लाईन डाली गई है। (ख) रतलाम जिले में फीडर विभक्तिकरण योजना में खुले तारों के स्‍थान पर निम्‍नदाब केबल लाईन डाली जाने के कार्य में संबंधित ठेकेदारों द्वारा कुल 1,28,147 किलोग्राम खुले तार निकाले गये। उक्‍त निकाले गये खुले तारों में से 1,02,725 किलोग्राम तार संबंधित ठेकेदारों द्वारा क्षेत्रीय भण्‍डार गृह रतलाम में जमा करवा दिया गया है। जी नहीं, उक्‍त निकाले गए तारों की चोरी नहीं हुई है। शेष बचे कुल 25,422 किलोग्राम खुले तार संबंधित ठेकेदारों द्वारा जमा नहीं कराये जाने के कारण उक्‍त तार के मूल्‍य की वसूली निविदा अनुबंध की शर्त के अनुसार संबंधित ठेकेदार के देयकों से की जा चुकी है। (ग) रतलाम जिले में वित्‍तीय वर्ष 2015-16 में माह फरवरी, 2016 तक विद्युत लाईनों के तार चोरी की कोई घटना नहीं हुई है, अत: प्रश्‍न नहीं उठता।

अन्‍य राज्‍यों की महिलाओं के प्रदेश में जाति प्रमाण पत्र बनाये जाना

18. ( *क्र. 6943 ) श्री नाना भाऊ मोहोड़ : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अन्‍य राज्‍यों से मध्‍यप्रदेश में ब्‍याह कर आने वाली अनुसूचित जन जाति, अनुसूचित जाति एवं अन्‍य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के जाति प्रमाण पत्र जारी किये जाने के संबंध में शासन के क्‍या नियम निर्देश हैं? (ख) क्‍या छिंदवाड़ा जिले के तहसील पांढुर्ना एवं सौसर में महाराष्‍ट्र राज्‍य से ब्‍याह कर आयी महिलाओं को उनकी जाति का जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया जा रहा है? हाँ, तो क्‍यों? (ग) क्या महाराष्‍ट्र राज्‍य से मध्‍यप्रदेश के नागरिकों से ब्‍याह कर आई महिलाओं को उनकी जाति का जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किये जाने से मध्‍यप्रदेश में उन्‍हें जातिगत आधार पर प्राप्‍त होने वाली योजनाओं का लाभ प्राप्‍त नहीं हो रहा है? (घ) प्रश्‍नांश (ग) के प्रकाश में क्‍या शासन उक्‍त तथ्‍य को संज्ञान में लेकर अन्‍य राज्‍यों से मध्‍यप्रदेश के नागरिकों के साथ ब्‍याह कर मध्‍यप्रदेश में आने वाली महिलाओं को उनके पति के समान आरक्षण अथवा योजनाओं का लाभ प्राप्‍त हो सके इस हेतु कोई नियम निर्देश अथवा कोई नीति बनायेगा? यदि हाँ, तो कब तक और यदि नहीं, तो क्‍यों?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा कुमारी माधुरी पाटिल बनाम एडिशनल कमिश्‍नर ट्रायबल डेवलपमेंट तथा एक अन्य याचिका डायरेक्टर ट्रायबल डेवलपमेंट बनाम लावेतीगिरी प्रकरणों में पारित निर्णयों तथा भारत सरकार द्वारा जाति प्रमाण पत्र जारी किये जाने के निर्देश दिनांक 2 मई, 1975, दिनांक 18 नवम्बर, 1982 भारत सरकार गृह मंत्रालय के आदेश दिनांक 6, अगस्त, 1984 के निर्देशानुसार अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्गों के व्यक्तियों को जाति प्रमाण पत्र जारी किये जाने संबंधी निर्देश, विभागीय परिपत्र दिनांक 11.7.2005 एवं 13.01.2014 द्वारा जारी किये गये हैं। जाति प्रमाण पत्र जारी किये जाने के संबंध में भारत सरकार द्वारा जारी निर्देर्शों के पालन में ही राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में निर्देश जारी किये जाते हैं। जारी निर्देशों के अनुसार जाति प्रमाण पत्र पर आरक्षण की सुविधा उसी राज्‍य से प्राप्‍त होगी, जिस राज्‍य से आवेदक का मूल रूप से संबंध है। (ख) एवं (ग) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) आरक्षण का विषय संवैधानिक है, इसलिये भारत सरकार द्वारा जारी नियम/निर्देशों तथा किए गए प्रावधानों के अनुसार ही राज्य सरकार अपनी नीति निर्धारित करती है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

बैतूल जिलांतर्गत रेत खदानों की नीलामी

19. ( *क्र. 7881 ) श्री चन्‍द्रशेखर देशमुख : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बैतूल जिले में कितनी रेत की खदानें कहाँ-कहाँ हैं? नाम बतावें। (ख) वर्ष 2013-14, 2014-15 में कितनी खदानों की नीलामी हुई और कितना राजस्‍व प्राप्‍त हुआ और नहीं तो क्‍यों? (ग) विगत वर्षों में यदि नीलामी नहीं हुई तो अवैध रेत के उत्‍खनन में कितने प्रकरण बनाये गये और इनसे कितना राजस्‍व प्राप्‍त हुआ है? (घ) क्‍या अवैध उत्‍खन‍न में नीलामी नहीं करना एक कारण नहीं है? यदि नहीं, तो जनता रेत का उपयोग कैसे करेगी और कार्य कैसे होंगे? क्‍या नीलामी नहीं होने की स्थिति में रेत के लिए रियायत का प्रावधान है? यदि नहीं, तो क्‍या कार्य बाधित नहीं रहेंगे? यदि नहीं, तो प्राक्‍कलन में रेत की क्‍या दर रखी जावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रश्‍नाधीन जिले में 12 रेत खदानें घोषित हैं, जिसकी जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट में दर्शित है। (ख) वर्ष 2013-14 में कोई रेत खदान नीलाम नहीं हुई है। वर्ष 2014-15 में 2 रेत खदानें नीलाम की गईं थीं, जिससे 1,97,40,000/- रूपये का राजस्‍व प्राप्‍त हुआ है। (ग) प्रश्‍नांश '' में दी गई जानकारी के अनुसार रेत खदानें नीलाम की गईं हैं। वर्ष 2014-15 में अवैध रेत खनन का 1 प्रकरण प्रकाश में आया था, जिस पर नियमानुसार रूपये 18,000/- का अर्थदण्‍ड आरोपित कर वसूल किया गया है। (घ) जी नहीं। प्रश्‍नाधीन जिले में प्रश्‍नांश '' अनुसार खदानें नीलाम की गईं हैं। आस-पास के जिलों में संचालित खदानों से रेत का क्रय कर उपयोग किया जा सकता है। वर्ष 2015-16 में 01 रेत खदान नीलाम की गई है, जिसमें अनुबंध की कार्यवाही प्रचलन में है। स्‍वीकृत खदानों के संचालित होने के पश्‍चात एवं आस-पास के जिलों में संचालित खदानों से रेत का उपयोग किया जा सकता है। अत: कार्य बाधित होने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। म.प्र. गौण खनिज नियम 1996 में रेत खनिज की रॉयल्‍टी दरें निर्धारित हैं। अत: शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''तीन''

जबलपुर मालगोदाम चौक की दुकानों का व्‍यवस्‍थापन

20. ( *क्र. 7044 ) श्री तरूण भनोत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जबलपुर स्थि‍त मालगोदाम चौक रेल्‍वे स्‍टेशन के समीप नगर निगम जबलपुर द्वारा व्‍यापारियों को दि. 27.5.1992 से वैध तरीके से दुकानें आवंटित की गईं थीं? यदि हाँ, तो उक्‍त दुकानों को अतिक्रमण के नाम पर क्‍यों तोड़ा गया? (ख) क्‍या इसी संदर्भ में तत्‍कालीन विधानसभा सदस्‍य स्‍व. औंकार प्रसाद तिवारी जी ने ध्‍यानाकर्षण सूचना क्रं. 60 दि. 12.2.1988 के द्वारा विधानसभा को अवगत कराया था, जिसके फलस्‍वरूप 11 सर्वदलीय विधायकों की कमेटी गठित की गई, जिसने अपनी रिपोर्ट में किसी तरह की कार्यवाही न करने का लेख करते हुए उक्‍त दुकानों को वैध कहा था? (ग) वर्णित (क) के संबंध में नगर निगम जबलपुर द्वारा पत्र क्र./बा./अधी./ 73/92 दि. 27.5.1992 को अध्‍यक्ष मालगोदाम व्‍यापारी संघ को निर्माण कार्य का वर्क आर्डर दिया गया था? फिर नगर निगम द्वारा दि. 17.11.15 को यातायात बाधक मानकर क्‍यों दुकानें तोड़ी गईं, जबकि स्‍टेशन पहुंच मार्ग हेतु वर्तमान में कुल तीन सड़क हैं? (घ) क्‍या उक्‍त व्‍यापारियों के साथ जो अन्‍याय हुआ है, उसकी प्रतिपूर्ति हेतु शासन मुआवजे के साथ उसी स्‍थान पर पुन: व्‍यापार करने की अनुमति प्रदान करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ, मालगोदाम चौक स्‍टेशन के समीप रेल्‍वे स्‍टेशन का मुहाना है, वर्तमान में वाहनों की संख्‍या में वृद्धि एवं यात्रियों का भारी दबाव रहता है, जिस कारण शहर विकास एवं जनहित आवागमन सुव्‍यवस्‍था की दृष्टि से उक्‍त दुकानों की किरायेदारी एवं आवंटन निरस्‍त करते हुये तोड़ा गया। दुकानदारों द्वारा दुकान तोड़े जाने के पश्‍चात व्‍यापारी संघ द्वारा मान. न्‍यायालय में याचिका दायर की गई, जिसे मान. न्‍यायालय द्वारा खारिज किया गया। (ख) जी हाँ, अपितु मान. उच्‍च न्‍यायालय में याचिका क्रमांक डब्‍ल्‍यू.पी./1829/15 एवं डब्‍ल्‍यू.पी./19823/15 गोरग पाल एवं अन्‍य के विरूद्ध म.प्र. शासन द्वारा याचिका दायर की गई, जिसे मान. उच्‍च न्‍यायालय द्वारा खारिज करते हुये कार्यवाही को वैध बताया है। (ग) जी हाँ, स्‍टेशन पहुँच मार्ग में कुल 03 सड़क हैं, किन्‍तु मालगोदाम से जिस सड़क में निर्मित दुकानें हटाई गई हैं, वह मार्ग अन्‍य 02 मार्गों से जनहित में अत्‍यंत व्‍यस्‍ततम है तथा 50 वर्ष पुराना है। (घ) जी नहीं, 30 वर्षों में बढ़े हुये यातायात को दृष्टिगत रखते हुये दुकानें हटाने का निर्णय व्‍यापक जनहित में लिया गया है, जिसे अन्‍याय नहीं कहा जा सकता।

क्रेशर संचालकों से विद्युत बिल की वसूली

21. ( *क्र. 7547 ) श्री सुखेन्‍द्र सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सीधी जिले के बहरी में श्री विनोद सिंह मेसर्स डढिया मयापुर क्रेशर एवं मे. घनश्‍याम सिंह क्रेशर के नाम से संचालित है? यदि हाँ, तो इन दोनों क्रेशरों में विगत् तीन वर्षों में कितनी-कितनी विद्युत खपत हुई एवं कब-कब, कितना-कितना विद्युत देयक जारी किया गया? कब-कब निरीक्षण किसके द्वारा किया गया? विवरण सहित पृथक-पृथक बतावें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में संबंधित सहायक यंत्री वि.वि.कं.लि. द्वारा श्री विनोद सिंह क्रेशर में जबरन एवं मनमानीपूर्वक विद्युत देयक क्‍यों जारी किया जाता है एवं बलपूर्वक ट्रांसफार्मर भी निकाल लिया गया है, जबकि वहीं पर मे. घनश्‍याम सिंह क्रेशर के ऊपर किसी भी प्रकार की कार्यवाही क्‍यों नहीं की जा रही है? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) के संदर्भ में क्‍या विभाग के उच्‍चाधिकारियों द्वारा विद्युत उपभोक्‍ता श्री विनोद सिंह क्रेशर संचालक के ऊपर एक पक्षीय कार्यवाही करने के दोषी/आरोपी एवं वहीं पर मे. घनश्‍याम सिंह क्रेशर पर पक्षपातपूर्ण कार्यवाही करने के आरोपी अधिकारी के विरूद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? समय-सीमा बतावें एवं यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट बतावें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ, प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में श्री विनोद सिं‍ह ग्राम डढिया तथा श्री घनश्‍याम सिंह, ग्राम मयापुर के नाम से क्रेशर संचालित है। विगत 3 वर्षों में उक्‍त दोनों क्रेशर कनेक्शनों द्वारा क्रमश: 6171 यूनिट तथा 19740 यूनिट की खपत की गई एवं उन्‍हें विगत 3 वर्षों में जारी किये गये माहवार बिलों का देयक राशि सहित दिनांकवार/माहवार विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। प्रत्‍येक माह एम.आर.आई. सिस्‍टम से मीटर की जाँच की गई है तथा मीटर रीडिंग के समय निरीक्षण किया गया है। (ख) जी नहीं, विद्युत देयक की राशि नियमानुसार जमा नहीं होने पर ही विद्युत प्रदाय बन्‍द करने/ट्रांसफार्मर निकालने की कार्यवाही की गई है। देयक की राशि पूर्ण अथवा आंशिक जमा करने पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है। (ग) श्री विनोद सिंह ग्राम डढिया द्वारा देयकों का भुगतान नहीं किए जाने के कारण नियमानुसार कार्यवाही की गई है। श्री घनश्‍याम सिंह ग्राम मयापुर द्वारा देयकों का पूर्ण/आंशिक भुगतान समय-समय पर किया गया है तथापि नियमानुसार प्रत्‍येक माह भुगतान नहीं किया गया है। नियमानुसार भुगतान नहीं करने पर उपभोक्‍ता के विरूद्ध कार्यवाही न करने के लिए संबंधित वितरण केन्‍द्र प्रभारी को दिनांक 22.03.2016 को चेतावनी पत्र जारी किया गया है।

परिशिष्ट - ''चार''

रिन्‍यू पावर लिमिटेड द्वारा C.S.R. के तहत संपादित कार्य

22. ( *क्र. 3125 ) श्री रामनिवास रावत : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) श्‍योपुर जिले की तहसील विजयपुर के ग्राम हुल्‍लपुर-लाड़पुरा में रिन्‍यु पॉवर लिमिटेड द्वारा स्‍थापित सौर ऊर्जा संयंत्र में कंपनी प्रबंधन द्वारा कॉरपोरेट सोशल रिस्‍पॉन्‍सबिलिटी (सी.एस.आर.) के तहत प्रतिवर्ष कितनी राशि व्‍यय की जाना है? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार कंपनी द्वारा प्‍लांट की स्‍थापना से अभी तक कितनी-कितनी राशि सी.एस.आर. के तहत व्‍यय कर क्‍या-क्‍या कार्य कराए गए हैं? कार्य का नाम, स्‍थान, राशि सहित जानकारी दें। (ग) रिन्‍यु पॉवर लिमिटेड द्वारा प्‍लांट स्‍थापित किए जाने के दिनांक से अनुबंधित कंपनी महिन्‍द्रा द्वारा कितने लोगों को कार्य पर सुरक्षा श्रमिक, आई.टी.आई. इलेक्‍ट्रीशियन, तकनीकी स्‍टाफ (बी.ई.) लिपिकीय स्‍टाफ आदि पदों पर रखा गया? कर्मचारियों के नाम, पता, योग्‍यता, पदस्‍थापना दिनांक सहित जानकारी दें व इन्‍हें कार्य पर रखने हेतु क्‍या प्रक्रिया अपनाई गई व तत्‍पश्‍चात कितने कर्मचारियों को बिना सूचना व बिना कारण के नौकरी या काम से निकाला गया?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) कंपनी अधिनियम-2013 की धारा-135 की उपधारा (1) के प्रावधानानुसार ऐसी कंपनी, जिसका नेट वर्थ रूपये 500 करोड़ या अधिक, अथवा टर्न-ओवर रूपये 1000 करोड़ या अधिक, अथवा शुद्ध लाभ रूपये 5 करोड़ या अधिक हो, उसे अपने औसत लाभ का 2 प्रतिशत "कार्पोरेट सामाजिक उत्‍तरदायित्‍व" में व्‍यय करना होता है। विकासक रिन्‍यू सोलर एनर्जी (टी.एन.) प्राईवेट लिमिटेड से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार वह उक्‍त परिधि में नहीं आती है और इस कारण "कार्पोरेट सामाजिक उत्‍तरदायित्‍व" पर व्‍यय करने हेतु बाध्‍य नहीं है। (ख) उक्‍त विकासक कंपनी, कंपनी अधिनियम-2013 के प्रावधानों के अन्‍तर्गत सी.एस.आर. के कार्य कराने हेतु बाध्‍य नहीं है, तदापि उनके द्वारा सी.एस.आर. कार्य कराये गए हैं, जिनकी कुल लागत रूपये 10 लाख है, किये गये कार्यों की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) परियोजना निजी निवेश के अन्‍तर्गत स्‍थापित है। कंपनी को श्रम नियमों के प्रावधान का पालन करना होता है। जानकारी विभाग स्‍तर पर संगठित करना प्रावधानित नहीं है।

परिशिष्ट - ''पाँच''

उज्‍जैन जिले में स्‍थापित विंड टरबाईन

23. ( *क्र. 5951 ) श्री सतीश मालवीय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या उज्‍जैन जिले के अंतर्गत 1 जनवरी, 2015 से 05 फरवरी, 2016 तक पवन ऊर्जा परियोजना में कंपनियों द्वारा बगैर सक्षम अधिकारी के समक्ष कार्यवाही कर भूमि परिवर्तन (डायवर्सन) नहीं कराते हुए विंड टरबाईन स्‍थापित की गई है? यदि हाँ, तो कौन-कौन सी कंपनियों द्वारा कहाँ-कहाँ? तहसीलवार संपूर्ण विवरण दें। (ख) भूमि परिवर्तन (डायवर्सन) करवाये बगैर कार्य प्रारंभ करने व विंड टरबाईन स्‍थापित करने वाली कितनी कंपनियों के विरूद्ध राजस्‍व अधिकारियों द्वारा प्रकरण पंजीबद्ध किए गए और नियमों का उल्‍लंघन करने वाली कंपनियों से कितनी राशि डायवर्सन शुल्‍क मय पेनाल्‍टी वसूल की गयी है? यदि नहीं, की गई तो क्‍यों? (ग) म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता के प्रावधानों के विपरीत गौचर, चरनोई, निस्‍तार भूमि में रास्‍ता निर्माण करने व अन्‍य उपयोग करने की अनुमति विंड टरबाईन स्‍थापित करने वाली कंपनियों को उज्‍जैन जिले में किन-किन गांवों में किस राजस्‍व अधिकारी द्वारा दी गई है? आदेश दिनांक व प्रकरण क्रमांक सहित संपूर्ण जानकारी तहसीलवार पृथक-पृथक उपलब्‍ध करायें। नियम विरूद्ध कार्य करने वाली कंपनियों व शासकीय अधिकारियों के विरूद्ध शासन क्‍या कार्यवाही करेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं। प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) कलेक्‍टर, उज्‍जैन से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार किसी भी राजस्‍व अधिकारी द्वारा म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता के प्रावधानों के विपरीत गौचर, चरनोई, निस्‍तार भूमि में रास्‍ता निर्माण करने व अन्‍य उपयोग करने की अनुमति विंड टरबाईन स्‍थापित करने वाली कम्‍पनियों को नहीं दी गई है। उज्‍जैन जिले की तहसील खाचरौद में न्‍यायालय अपर तहसीलदार खाचरौद के प्रकरण क्रमांक 10/बी-121/2015-2016 में आदेश दिनांक 28.12.2015 से नियत शर्तों पर ग्राम सुरेल, संदला, बडागांव व चंदवासला में आवागमन हेतु पूर्व से स्थित व प्रचलित वर्तमान मार्गों को दुरूस्‍त कर उपयोग की अनुमति दी गई है। इसी तरह तहसील बड़नगर में न्‍यायालय अपर कलेक्‍टर जिला उज्‍जैन के प्रकरण क्रमांक 01/अ-74/2015-16 में पारित आदेश दिनांक 30.11.2015 द्वारा नियत शर्तों पर ग्राम लिम्‍बास, काज्‍याखेड़ी, बांदरबेला नरेलाखुर्द, ओरडी व खरसौदकलां में आवागमन हेतु पूर्व में स्थित व प्रचलित मार्गों के उपयोग की अनुमति दी गई है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

रीवा संभाग अंतर्गत बांधों का निर्माण

24. ( *क्र. 7011 ) श्री सुन्‍दरलाल तिवारी : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या जल संसाधन विभाग द्वारा बांधों का निर्माण सिंचाई कार्य हेतु किया जा रहा है? यदि हाँ, तो विगत तीन वर्षों में जल संसाधन विभाग के रीवा संभाग अंतर्गत कितने-कितने हेक्‍टेयर पर कितने-कितने लागत से निर्माण कराये गये, वर्तमान में बांधों की स्थिति क्‍या है? कार्य प्रारंभ होने एवं पूर्ण होने की तिथि का विवरण देवें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के सिंचाई हेतु निर्माणाधीन बांधों में किन-किन बांधों से कितने-कितने हेक्‍टेयर भूमि की सिंचाई हो रही है? (ग) यदि प्रश्‍नांश (क) के बांधों का निर्माण अनुबंध के शर्तों के अनुसार समय पर नहीं कराये गये तो इसके लिये किन-किन को दोषी मानकर कौन-कौन सी कार्यवाही कब तक करेंगे? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) प्रश्‍नांश (ख) अनुसार अगर राशि संविदाकारों/ठेकेदारों को कार्य से ज्‍यादा भुगतान कर दी गई है, कार्य मौके पर नहीं कराये गये हैं तो इसके लिये किन-किन को दोषी मानते हुये कार्यवाही करेंगे? क्‍या संब‍ंधितों से राशि की वसूली के साथ आपराधिक प्रकरण भी पंजीबद्ध करायेंगे?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) भू-अर्जन की प्रक्रिया में समय लगने के परिप्रेक्ष्‍य में अनुबंधों की शर्तों के तहत आवश्‍यकता अनुसार समयवृद्धि दी जाना प्रतिवेदित है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं। (घ) जी नहीं, सम्‍पादित कार्य के माप के आधार पर भुगतान किया गया है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

परिशिष्ट - ''छ:''

ग्रामीण विद्युत सहकारी समिति पंधाना का संवि‍लियन

25. ( *क्र. 6676 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्रामीण विद्युत सहकारी समिति मर्या. पंधाना का संविलियन म.प्र.म.क्षे.वि.वि.कं. इंदौर में किया जा चुका है? यदि नहीं, तो कब तक किए जाने की योजना है और यहां विद्युत व्‍यवसाय किस कंपनी से संबद्ध होकर किया जा रहा है। कर्मचारियों को वेतन भत्‍तों का भुगतान कहाँ से किया जा रहा है? (ख) विगत 5 वर्षों में ग्रामीण विद्युत सहकारी समिति पंधाना के कार्य करते हुए सेवा निवृत्‍त, मृत कर्मचारियों को ग्रेज्‍युटी एवं अवकाश का नगदीकरण का भुगतान उनकी सेवा निवृत्ति/मृत्‍यु दिनांक पर किया गया है अथवा नहीं? यदि नहीं, तो कब तक किया जाएगा? (ग) क्‍या ग्रामीण विद्युत सहकारी समिति पंधाना के सेवा निवृत्‍त और मृत कर्मचारियों के परिजनों ने विभिन्‍न न्‍यायालयों, उपभोक्‍ता फोरम, सी.एम. हेल्‍प लाईन को शिकायत की है? यदि हाँ, तो उक्‍त शिकायतों पर क्‍या कार्यवाही की गई?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं, ग्रामीण विद्युत सहकारी समिति मर्या. पंधाना का संविलियन म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इन्‍दौर में नहीं हुआ है। संविलियन किये जाने की समय-सीमा बताना संभव नहीं है। वर्तमान में पंधाना क्षेत्र में म.प्र.प.क्षे.वि.वि.कं.लि. इन्दौर द्वारा विद्युत वितरण का कार्य किया जा रहा है तथा कार्यरत कर्मचारियों को वेतन भत्तों का भुगतान म.प्र.प.क्षे.वि.वि.कं.लि. इन्दौर के कोष से किया जा रहा है। (ख) जी नहीं, विगत 5 वर्षों में ग्रामीण विद्युत सहकारी समिति मर्यादित पंधाना के सेवानिवृत्त, मृत कर्मचारियों के ग्रेज्‍युटी एवं अवकाश नगदीकरण का भुगतान उनकी सेवानिवृत्ति/मृत्यु दिनांक पर समिति द्वारा नहीं किया गया है। कंपनी स्तर से भुगतान करने संबंधी कार्यवाही विचाराधीन है। सेवानिवृत्त एवं मृत कर्मचारियों के ग्रेज्युटी एवं अवकाश नगदीकरण के भुगतान/लंबित राशि का ब्यौरा क्रमशः पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' एवं '' अनुसार है। वर्तमान में उक्त राशि के भुगतान की समय-सीमा बताना संभव नहीं है। (ग) जी हाँ। ग्रामीण विद्युत सहकारी समिति मर्यादित पंधाना के सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा श्रम न्यायालय, माननीय उच्च न्यायालय एवं सी.एम. हेल्पलाईन में दर्ज किये गये प्रकरण/शिकायतों पर की गई कार्यवाही का विवरण क्रमशः पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '', '' एवं '' अनुसार है। उपभोक्ता फोरम में दर्ज किये गये प्रकरणों की जानकारी अभिलेखों में उपलब्ध नहीं है।

 

 

 




 

 

 

 

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भाग-2

नियम 46 (2) के अंतर्गत अतारांकित प्रश्नोत्तर के रुप में

परिवर्तित तारांकित प्रश्नोत्तर


शराब माफियाओं द्वारा आबकारी अधिनियम का उल्‍लंघन

1. ( क्र. 109 ) श्री वेलसिंह भूरिया : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या आबकारी अधिनियम 1997 के अंतर्गत आदिवासी गृहस्‍थों को देशी मदिरा विनिर्माण की छूट प्रति गृहस्‍थी 15 लीटर एवं विशेष परिस्थितियों में सामाजिक तथा धार्मिक समारोह के अवसर पर 45 लीटर देशी मदिरा बनाने एवं उपभोग की छूट दी गई है? (ख) यदि अधिनियम के अंतर्गत आदिवासी परिवारों को देशी मदिरा बनाने एवं उपभोग के लिये छूट दी गई है तो क्‍या प्रश्‍नकर्ता के विधान सभा क्षेत्र सरदारपुर एवं आदिवासी उपयोजना क्षेत्र में शराब माफिया द्वारा आदिवासियों को स्‍वयं के उपभोग के लिये मदिरा बनाने से रोका जा रहा है? (ग) यदि हाँ, तो विगत दो वर्षों में धार जिले में आदिवासियों को धमकाने एवं प्रताडि़त करने के कितने प्रकरण शराब माफिया/ठेकेदारों के विरूद्ध पुलिस में दर्ज किये गये हैं? उनके विरूद्ध विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई एवं कितनी सजा दिलाई गई? लंबित प्रकरणों में विभाग कब तक कार्यवाही करेगा? (घ) आदिवासी उपयोजना क्षेत्र के अंतर्गत किन-किन जिलों में देशी/विदेशी शराब की दुकानें खोलने के लायसेंस दिये गये हैं? जिलेवार सूची दें। अवैध रूप से शराब माफिया द्वारा चलाये जा रहे शराब की दुकानों को रोकने के लिये विभाग की क्‍या रणनीती है? अवैध दुकानों को कब तक प्रदेश में पूर्ण रूप से बंद कर दिया जायेगा?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जी हाँ। आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 61 (घ) में उपबंधित अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों में अनुसूचित जनजातियों के सदस्‍य निम्‍नलिखित शर्तों के अध्‍यधीन रहते हुए, आसवन द्वारा देशी मदिरा का विनिर्माण कर सकेंगे, अर्थात :- (1) अनुसूचित क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति के सदस्‍यों द्वारा देशी मदिरा का विनिर्माण केवल घरेलू उपभोग तथा सामाजिक और धार्मिक समारोहों पर उपभोग के प्रयोजनों के लिए ही किया जाएगा। (2) इस प्रकार विनिर्मित की गई देशी मदिरा का विक्रय नहीं किया जाएगा। (3) इस प्रकार विनिर्मित की गई देशी मदिरा के कब्‍जे की अधिकतम सीमा प्रति व्‍यक्ति 4.5 लीटर और प्रति गृहस्‍थी 15 तथा विशेष परिस्थितियों में सामाजिक तथा धार्मिक समारोह के अवसर पर प्रति गृहस्‍थी 45 लीटर होगी। परंतु ग्राम सभा देशी मदिरा के कब्‍जे की सीमा को कम कर सकेगी। (ख) धार जिले के सरदारपुर में, शराब माफियाओं द्वारा आदिवासियों को विहित सीमा में हाथ भट्टी शराब बनाने अथवा उपभोग करने से रोकने संबंधी कोई शिकायत जिला आबकारी कार्यालय धार को वर्ष 2015-16 में प्राप्‍त होना नहीं पाया गया है। (ग) पुलिस विभाग की जानकारी निरंक है। (घ) आदिवासी उपयोजना क्षेत्र के अंतर्गत जिला खरगोन, धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बडवानी, छिंदवाडा, बालाघाट, मण्‍डला, डिण्‍डोरी, सिवनी, बैतूल, खण्‍डवा, उमरिया, एवं रतलाम में वर्ष 2015-16 हेतु देशी मदिरा/विदेशी मदिरा की फुटकर बिक्री की दुकानों के लायसेंस जारी किये है। इन जिलों/क्षेत्रों में संचालित देशी मदिरा/विदेशी मदिरा फुटकर बिक्री की दुकानों हेतु जारी लायसेंस की सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। अवैध रूप से शराब माफिया द्वारा शराब दुकानें संचालन की सूचना प्राप्‍त होने पर संबंधितों के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी। प्रदेश में लायसेंसी शराब दुकानों के अतिरिक्‍त अवैध शराब दुकानें संचालित नहीं हो रही है।

अनियमितताओं की शिकायतें

2. ( क्र. 726 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) आलोट जिला रतलाम नगर परिषद् में व्‍याप्‍त अनियमितताओं के संबंध में उपसंचालक व शासन को वर्ष 2012 से प्रश्‍न दिनांक तक प्राप्‍त शिकायतों का ब्‍यौरा क्‍या है? (ख) उक्‍त गंभीर शिकायतों की जाँच कब हुई? जाँच रिपोर्ट का ब्‍यौरा क्‍या है? (ग) शासन ने अनियमितताओं पर अब तक क्‍या कार्यवाही की?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जाँच कार्यवाही प्रचलित है। (ग) जाँच निष्‍कर्ष प्राप्‍त होने पर गुण-दोष के आधार पर नियमानुसार कार्यवाही की जायेगी।

परिशिष्ट ''सात''

विभागीय कार्यों की जानकारी

3. ( क्र. 796 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिण्‍ड जिले में वित्‍तीय वर्ष 01.04.2013 से प्रश्‍नतिथि तक दो लाख रूपये से कम राशि के कितने कार्य किये गये? संख्‍या बतायें? (ख) उक्‍त समयानुसार मेंटेनेन्‍स पर कितनी राशि व्‍यय की गई? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में उल्‍लेखित कार्यों में से कितनी राशि का भुगतान किया गया?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) भिण्‍ड जिले में दिनांक 01.04.2013 से प्रश्‍न तिथि तक दो लाख रूपये से कम राशि के कुल 207 कार्य किये गये हैं। (ख) प्रश्‍नांश (क) में वर्णित समयावधि में मेंटेनेन्‍स के कार्यों पर रूपये 78.94 लाख की राशि व्‍यय हुई है। (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में उल्‍लेखित कार्यों हेतु ठेकेदार एजेंसियों को कुल राशि रू. 25.87 लाख का भुगतान किया गया है।

विभागीय कार्यों की जानकारी

4. ( क्र. 813 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भिण्‍ड जिले में वित्‍तीय वर्ष 01.04.2013 से प्रश्‍नतिथि तक दो लाख रूपये से ज्‍यादा राशि के कितने कार्य किये गये? संख्‍या बतायें? (ख) उक्‍त समयानुसार मेंटेनेन्‍स पर कितनी राशि व्‍यय की गई? (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं ख) में उल्‍लेखित कार्यों में से कितनी राशि का भुगतान किया गया?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) भिण्‍ड जिले में दिनांक 01.04.2013 से प्रश्‍नतिथि तक दो लाख रूपये से अधिक राशि के कुल 192 कार्य किये गये हैं। (ख) प्रश्‍नांश (क) में वर्णित समयावधि में मेंटेनेन्‍स के कार्यों पर रूपये 166.42 लाख की राशि व्‍यय हुई है। (ग) प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में उल्‍लेखित कार्यों हेतु ठेकेदार एजेंसियों को कुल राशि रू. 9712.83 लाख का भुगतान किया गया है।

नहरों का पक्‍कीकरण/मरम्‍मतीकरण

5. ( क्र. 864 ) श्री जतन उईके : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र पांढुर्णा के अंतर्गत कितनी वृहद/मध्‍यम/लघु सिंचाई परियोजनायें संचालित हैं? नाम सहित जानकारी देवें। क्‍या कोई नई सिंचाई परियोजना स्‍थापित करने के संबंध में प्रस्‍ताव है? यदि हाँ, तो प्रस्‍तावित परियोजनायें कब तक पूर्ण कर ली जायेंगी? (ख) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में पूर्व से संचालित सिंचाई परियोजनाओं की नहरें क्‍या क्षतिग्रस्‍त हैं एवं कच्‍ची हैं? यदि हाँ, तो कितने ग्रामवार जानकारी देवें? (ग) यदि हाँ, तो इनके मरम्‍मत हेतु कितनी राशि स्‍वीकृत की गई है? जलाशयवार जानकारी देवें। (घ) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य के संबंध में क्षतिग्रस्‍त कच्‍चे नहरों को पक्‍के नहरों (लाईनिंग) में परिवर्तन हेतु क्‍या कोई योजनाएं बनाई गई हैं? यदि हाँ, तो प्रस्‍तावित योजना कब तक पूर्ण कर ली जायेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) से (ग) जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। सैंदूरजना परियोजना की साध्‍यता दिनांक 16.12.2015 एवं पैंडोनी परियोजना की साध्‍यता दिनांक 07.01.2016 को प्रदान कर डी.पी.आर. बनाने के निर्देश दिए गए है। डी.पी.आर. अंतिम नहीं होने से समय-सीमा बताना संभव नहीं है। (घ) जी हाँ। आर.आर.आर. योजना के अंतर्गत नहरों का सुदृढ़ीकरण करने की व्‍यवस्‍था है। चांगोवा एवं मोही परियोजनाओं की नहरों का सुदृढ़ीकरण कार्य प्रारंभ है, जो वर्ष 2016-17 में पूर्ण होना संभावित है।

परिशिष्ट - ''आठ ''

जलाशयों एवं नहरों का संरक्षण

6. ( क्र. 874 ) श्री जतन उईके : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जबलपुर संभाग के अंतर्गत जिला छिन्‍दवाड़ा के विधान सभा क्षेत्र पांढुर्णा में स्थित जलाशयों एवं नहरों के रख-रखाव व मरम्‍मत क लिये शासन की क्‍या-क्‍या योजना है तथा प्रतिवर्ष इस प्रयोजना मद में कितनी राशि का भुगतान किया जा रहा है? जलाशयों व नहरों की वर्तमान भौतिक स्थिति क्‍या है? (ख) यदि इन पर सही रख-रखाव व मरम्‍मत कार्य ठीक से नहीं हो पा रहे हैं तो इसके लिए कौन अधिकारी दोषी है?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) लघु सिंचाई परियोजनाओं के जलाशयों के लिए वार्षिक रख-रखाव एवं मरम्‍मत के लिए व्‍यय सीमा रू.20/- प्रति हेक्‍टेयर सैच्‍य क्षेत्र निर्धारित है। नहरों का संधारण जल उपभोक्‍ता संथाओं की जिम्‍मेदारी है। जल उपभोक्‍ता संथाओं को रू.80/- प्रति हेक्‍टेयर के मान से अनुदान है। विधान सभा क्षेत्र पांढुर्णा में निर्मित सभी लघु सिंचाई परियोजनाएं रूपांकित क्षमता अनुसार सिंचाई करने के लिए संधारित है। (ख) परियोजनाओं का संधारण संतोषजनक होने से किसी अधिकारी के दोषी होने की स्थिति नहीं है।

मध्‍यप्रदेश में ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. एवं लोकायुक्‍त द्वारा की गई कार्यवाही

7. ( क्र. 1548 ) श्री सुदर्शन गुप्‍ता (आर्य) : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मध्‍यप्रदेश में ई.ओ.डब्‍ल्‍यू. एवं लोकायुक्‍त द्वारा विगत 5 वर्षों में किन-किन अधिकारियों व कर्मचारियों पर भ्रष्‍टाचार एवं कदाचार के आरोपों में कार्यवाही की गई है? संबंधित के विभाग सहित वर्षवार सूची उपलब्‍ध करावें? इन अधिकारियों और कर्मचारियों के पास से अब तक कितनी राशि की चल व अचल सम्‍पत्ति का होना पता चला है? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) अनुसार अधिकारियों/कर्मचारियों से जब्‍त संपत्ति का उपयोग शासन जनहित में करेगा, यदि हाँ, तो आज दिनांक तक जब्‍त कौन-कौन सी सम्‍पत्ति का उपयोग जनहित में किया जा रहा है? (ग) प्रश्‍नानुसार भ्रष्‍ट अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध शासन व जिला प्रशासन क्‍या कार्यवाही कर रहा है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

गौण खनिज खदान के संबंध में

8. ( क्र. 1796 ) श्री प्रताप सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मध्‍यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 के प्रावधानों के अंतर्गत गौण खनिज पर से पत्‍थर तथा क्रेशर गिट्टी बनाने हेतु उत्‍खनिपट्टे अथवा खदान नीलाम के रूप में स्‍वीकृत किये जाते हैं? दमोह जिले की तहसील जबेरा, तेन्‍दूखेड़ा एवं दमोह में किस-किस स्‍थान पर किस गौण खनिज की कितनी-कितनी खदानें हैं? (ख) दमोह जिले की तहसील जबेरा, तन्‍दूखेड़ा, दमोह, हटा एवं पटेरा में वर्ष 2009-10 से प्रश्‍न दिनांक तक किस-किस स्‍थान पर कितने-कितने क्षेत्रफल की किस फर्म/व्‍यक्ति को स्‍टोन क्रेशर, फर्सी पत्‍थर, गिट्टी आदि खनिजों की लीज कब-कब एवं कितनी-कितनी अवधि के लिए स्‍वीकृत की गई है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) म.प्र. गौण खनिज नियम 1996 में क्रेशर द्वारा गिट्टी निर्माण हेतु पत्‍थर खनिज का उत्‍खनिपट्टा स्‍वीकृत किये जाने का प्रावधान है। इस नियम में पत्‍थर की खदानों को नीलाम किये जाने का प्रावधान है। इसके आधार पर यदि क्रेशर स्‍थापित किया जाता है तब नीलाम खदान की अवधि 05 वर्ष के स्‍थान पर 10 वर्ष किये जाने का प्रावधान है। प्रश्‍नांश की शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' एवं '' में दर्शित है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' में दर्शित है।

तालाब निर्माण में भ्रष्‍टाचार की शिकायत पर कार्यवाही संबंध में

9. ( क्र. 2162 ) श्री विजय सिंह सोलंकी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि कलेक्‍टर कार्यालय खरगोन में जनसुनवाई दिनांक 23/06/2015, 14/07/2015, 04/08/2015, 15/09/2015, 06/10/2015 को क्रमश: आवेदनकर्ता खुबचंद पटेल निवासी इदारतपुर, काशीराम पिता हरि, खूबचन्‍द पिता कांशीराम पाटीदार एवं नारायण पिता सेवकराम पाटीदार, नारायण पिता सेवकराम - पंढरी मांगीलाल, नारायण पिता सेवकराम - पंढरी मांगीलाल द्वारा की गई शिकायत पर की गई कार्यवाही का समस्‍त विवरण देवे। इस संबंध में जाँच दल कब-कब घटना स्‍थल पर गये दिनांकवार जाँच दल नाम, पद सहित सूची देवे। वर्तमान में इन प्रकरणों की स्थिति क्‍या है।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित सभी आवेदनों पर की गई कार्यवाही का विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट पर है।

परिशिष्ट - ''नौ ''

मीटर चालू होने के बाद भी उपभोक्‍ताओं को औसतन बिल बाबत

10. ( क्र. 2235 ) श्री हरवंश राठौर : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विधानसभा क्षेत्र बण्‍डा जिला सागर के सभी ग्रामों के विद्युत आवेदकों को कनेक्‍शन प्रदाय कर दिए गए हैं। यदि नहीं, तो वर्तमान किन-किन ग्रामों में कितने आवेदकों के आवेदन विभाग में कनेक्‍शन देने के लिए लंबित हैं और कब तक उनकी पूर्ति कर दी जाएगी। (ख) क्‍या क्षेत्र में ऐसे उपभोक्‍ता भी हैं जिनको मीटर स्‍थापित कर देने के बाद भी विद्युत प्रवाह चालू नहीं किया गया है? यदि हाँ, तो ग्रामों के नाम तथा उपभोक्‍ताओं की संख्‍या क्‍या है और कब तक विद्युत प्रवाह शुरू कर दिया जाएगा? (ग) क्‍या क्षेत्र में ऐसे उपभोक्‍त भी हैं जिनके मीटर चालू होने के बाद भी औसतन राशि के बिल दिए जा रहे हैं। यदि हों तो इसके लिए कौन जवाबदार हैं?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जिला सागर के विधानसभा क्षेत्र बण्‍डा के अंतर्गत कृषकों को स्‍थायी पंप कनेक्‍शन प्रदाय करने हेतु लागू अनुदान योजना में 75 आवेदकों के पम्‍प कनेक्‍शनों हेतु लाइन विस्‍तार का कार्य कर उन्‍हें कनेक्‍शन प्रदान किया जाना लम्बित है। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में अन्‍य किसी श्रेणी के कनेक्‍शन हेतु आवेदन वर्तमान में लंबित नहीं है। स्‍थायी कृषि पंप कनेक्‍शन के उक्‍त लंबित आवेदनों की ग्रामवार संख्‍या संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। उक्‍त लंबित कार्य योजना के प्रावधानानुसार वरीयता क्रम में, निर्धारित समय-सीमा (कार्यादेश दिनांक से 150 दिन) में राइट आफ वे उपलब्‍ध होने पर पूर्ण किये जाने हेतु कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। (ख) जी नहीं, प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में ऐसा कोई उपभोक्‍ता नहीं है जिसे मीटर स्‍थापित कर देने के बाद भी विद्युत प्रदाय उपलब्‍ध नहीं कराया जा रहा है। अत: प्रश्‍न नहीं उठता। (ग) जी नहीं, प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में ऐसा कोई उपभोक्‍ता नहीं है जिसका मीटर चालू होने के बाद भी औसतन राशि के बिल दिए जा रहे हैं। तथापि ऐसे उपभोक्‍ता जिनका परिसर मीटर रीडिंग के समय बन्‍द पाया जाता है, उन्‍हें विद्युत प्रदाय संहिता 2013 के प्रावधानों के अनुसार पूर्व वित्‍तीय वर्ष की औसत मासिक विद्युत खपत के आधार पर औसत खपत का बिल दिया जाना है। जिसे आगामी माह के बिलों में समायोजित कर दिया जाता है। अत: किसी के जिम्‍मेदार होने का प्रश्‍न नहीं उठता।

परिशिष्ट - ''दस''

भगवानपुरा क्षेत्र में विद्युतीकरण के कार्य

11. ( क्र. 2630 ) श्री विजय सिंह सोलंकी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना, दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना अंतर्गत भगवानपुरा विधानसभा क्षेत्र में किन-किन ग्रामों में कार्य पूर्ण, प्रगतिरत, अप्रारंभ हैं? ग्रामवार कार्यों का प्रावधान बतायें? इन कार्यों को करने वाली एजेंसी का नाम व पता,कार्य के निरीक्षणकर्ता विभागीय अधिकारियों के नाम व पद बतायें? (ख) भगवानुपरा विधानसभा क्षेत्र में किन-किन ग्रामों में फीडर सेपरेशन कार्य पूर्ण, प्रगतिरत, अप्रारंभ हैं सूची देवें? इन कार्यों को करने वाली एजेंसी का नाम व पता कार्य के निरीक्षणकर्ता विभागीय अधिकारियों के नाम व पद बतायें? (ग) भगवानपुरा विधानसभा क्षेत्र में कितने स्‍थानों पर 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र का निर्माण कार्य चल रहा है? इन उपकेन्‍द्रों के पूर्ण हो जाने पर कौन-कौन से ग्राम लाभांवित होगें? (घ) दिनांक 29.02.2016 की स्थिति में खरगोन जिले में कितने विद्युत वितरण ट्रांसफार्मर जले/खराब है विकासखण्‍डवार संख्‍या बतायें? इन जले/खराब विद्युत वितरण ट्रांसफार्मरों को कब तक बदल दिया जायेगा?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) भगवानपुरा विधानसभा क्षेत्रांतर्गत कुल 183 ग्रामों में से राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में सम्मिलित सभी 163 ग्रामों का कार्य पूर्ण किया जा चुका है, प्रगतिरत एवं अप्रारंभ कार्य वाले ग्रामों की जानकारी निरंक है। ग्रामवार कार्यों के प्रावधान की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। उपरोक्त कार्य को ठेकेदार एजेंसी मेसर्स विध्या टेली लिंक लि. नई दिल्ली द्वारा संपादित किया जा रहा है। उक्त कार्य के निरीक्षण हेतु वितरण कंपनी के अधिकारी श्री निमेश कुमार सहायक यंत्री को नियु‍क्‍त किया गया था। दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के अंतर्गत कार्य टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु निविदा दस्‍तावेजों की स्‍वीकृति ग्रामीण विद्युतीकरण निगम से प्रतीक्षित है। (ख) भगवानपुरा विधानसभा क्षेत्र में फीडर सेपरेशन योजना के अंतर्गत कुल 183 ग्रामों में से सम्मिलित सभी 148 ग्रामों के फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण हो चुका है। प्रगतिरत एवं अप्रारंभ ग्रामों की संख्या निरंक है। उक्‍त ग्रामों की सूची पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। उक्त कार्यों को ठेकेदार एजेंसी मेसर्स सी.सी.पी.एल.-ए.एम.आर.सी.एल. (जेव्ही) हैदराबाद द्वारा संपादित किया जा रहा है। उक्त कार्य के निरीक्षण हेतु वितरण कंपनी के अधिकारी श्री निमेश कुमार सहायक यंत्री को नियुक्‍त किया गया था। (ग) भगवानपुरा विधानसभा क्षेत्रांतर्गत दो स्‍थानों यथा-ग्राम सरवरदेवला एवं ग्राम गोलवाड़ी में 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र का निर्माण कार्य चल रहा है। ग्राम सरवरदेवला में 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने पर ग्राम देवला, गारी, गलतार, मेहत्याखेड़ी, बोरखेड़ा, माडवखेड़ा, देवझिरी, मोहनपुरा, झगड़ी एवं ताराबावड़ी तथा ग्राम गोलवाडी में 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र का निर्माण कार्य पूर्ण हो जाने पर ग्राम खामखेड़ा, दोमवाड़ा, गोलवाडी, रेहगुन, कोलखेड़ा, सीतापुरी, तिरी एवं सतावड-2 लाभांवित होगें। (घ) खरगोन जिले में दिनांक 29.02.2016 की स्थिति में विकासखण्‍ड कसरावद का 1 विद्युतीकरण ट्रांसफार्मर खराब/जला था। उक्त ट्रांसफार्मर दिनांक 03.03.2016 को बदल दिया गया है।

जनभागीदारी मद अंतर्गत स्‍वीकृत कार्यों बाबत्

12. ( क्र. 2715 ) श्री कालुसिंह ठाकुर : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2013-14 से प्रश्‍नांकित दिनांक तक जनभागीदारी योजनान्‍तर्गत धार जिले में कितनी राशि प्राप्‍त हुई तथा इसके विरूद्ध कितनी राशि व्‍यय की गई वर्षवार जानकारी दें? (ख) धार जिले में उक्‍त योजनान्‍तर्गत कितने तथा कौन-कौन से कार्य स्‍वीकृत किये गये प्रत्‍येक कार्य में कितना जन सहयोग तथा कितनी योजनान्‍तर्गत राशि शामिल कर व्‍यय किया गया? कार्यवार, वर्षवार जानकारी देवें? (ग) इस योजनान्‍तर्गत किन-किन कार्यों को किसकी अनुशंसा से स्‍वीकृत किये गये प्रशासनिक स्‍तर पर की गई कार्यवाही का विवरण भी बताइये? (घ) वर्ष 2013-14 से वर्ष 2015-16 तक कितनी राशि योजनान्‍तर्गत लेप्‍स हुई है (अनाहरित) राशि लेप्‍स होने के लिए क्‍या प्रशासनिक स्‍तर पर योजना को सफल न करने के लिए शासकीय अमले को दोषी माना जावेगा? यदि हाँ, तो किसे यदि नहीं, तो क्‍यों? कृपया बताइये कि इनके द्वारा सफलता के लिए क्‍या प्रयास किये गये?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) वर्ष 2013-14 में 500.25 प्राप्‍त आवंटन के विरूद्ध 498.34 की राशि व्‍यय हुई, वर्ष 2014-15 में 650.00 लाख के विरूद्ध 519.95 लाख की राशि व्‍यय हुई एवं 2015-16 में 524.99 लाख के आवंटन के विरूद्ध प्रश्‍न दिनांक तक 524.99 लाख की राशि व्‍यय की जा चुकी है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) योजनान्‍तर्गत अनुशंसा करने का प्रावधान नहीं है। मध्‍यप्रदेश जन भागीदारी नियम-2000 के अन्‍तर्गत ग्रामीण एवं नगरीय निकायों द्वारा संकल्‍प पारित कर प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किये जाते है। अपेक्षित जानभागीदारी अंश राशि जमा होने एवं अर्हताओं की पूर्ती करने के उपरांन्‍त प्रशासकीय स्‍वीकृति जारी की जाती है। (घ) वर्ष 2013-14 में प्रस्‍ताव प्राप्‍त न होने से राशि रूपये 1.91 लाख अनाहरित रही। वर्ष 2014-15 में शासन द्वारा दिनांक 27.09.2014 को वित्‍तीय प्रतिबंध लगाये जाने से 130.05 लाख आहरित नहीं की जा सकी। वर्ष 2015-16 में प्रश्‍न दिनांक तक कोई राशि लेप्‍स नहीं हुई है। राशि लेप्‍स होने के संबंध में कोई भी अधिकारी/ कर्मचारी दोषी नहीं है। योजनान्‍तर्गत कार्यालय में प्रस्‍ताव प्राप्‍त होने के उपरान्‍त नियमानुसार कार्यवाही की जाती है।

 

डूब क्षेत्र में गयी भूमि के मुआवजा वितरण के संबंध में

13. ( क्र. 2866 ) श्री गोपीलाल जाटव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या ग्राम डोंगरा पछार जिला अशोकनगर में सिंचाई विभाग द्वारा अमाही तालाब का निर्माण कराया गया है इससे 500 बीघा जमीन 25 कृषकों की डूब क्षेत्र में जा चुकी है? लेकिन अभी तक उन कृषकों को मुआवजा वितरण नहीं किया गया है? (ख) यदि हाँ, तो उक्‍त कृषकों को कब तक मुआवजा वितरण कर दिया जावेगा? (ग) जिन कृषकों की भूमि डूब क्षेत्रों में जा चुकी है वह स्‍थायी बेरोजगार हो चुके है क्‍यों? क्‍या उक्‍त कृषकों को रोजगार की कोई व्‍यवस्‍था की जायेगी? (घ) संबंधितों को मुआवजा वितरण एवं रोजगार की व्‍यवस्‍था कब तक कर दी जावेगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) से (घ) जी नहीं। वर्ष 2016-17 में निर्मित अमाही जलाशय के बांध की मरम्‍मत एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य कराया गया है, नवीन निर्माण नहीं कराया गया है। बांध के रूपांकित डूब क्षेत्र में वृद्धि नहीं होने से भू-अर्जन एवं मुआवजा वितरण का प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होता है। अत: शेष प्रश्‍न उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

अपना विधायक अपनी चौपाल कार्यक्रम के दौरान प्राप्‍त शिकायतें

14. ( क्र. 2915 ) श्री राजेश सोनकर : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सांवेर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित अपना विधायक अपनी चौपाल कार्यक्रम के दौरान मध्‍यप्रदेश राज्‍य विद्युत मंडल इन्‍दौर से संबंधित समस्‍याओं के समाधान हेतु प्रश्‍नकर्ता द्वारा पत्र क्रमांक 1114 दिनांक 22/07/2015 के द्वारा कितने आवेदन कार्यपालन यंत्री (संचालन/संधारण) इन्‍दौर को प्रेषित किये थे? (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित पत्र क्रमांक 1114 के साथ संलग्‍न प्रेषित आवेदनों में से कितनों का निराकरण कर दिया गया है एवं प्रश्‍न दिनांक तक कुल कितने आवेदनों का निराकरण शेष है? शेष आवेदनों का निराकरण कब तक हो जायेंगा समय-सीमा बतावें? आवेदनवार की गई कार्यवाही की वर्तमान स्थित बतावें? (ग) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में प्राप्‍त आवेदनों के निराकरण हेतु किये गये कार्यों में विभाग द्वारा कुल कितनी राशि व्‍यय की गई है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) सांवेर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित अपना विधायक अपनी चौपाल कार्यक्रम के दौरान कार्यपालन यंत्री (संचा./संधा.) म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इन्‍दौर (म.प्र. राज्‍य विद्युत मण्‍डल नहीं) को माननीय प्रश्‍नकर्ता विधायक महोदय द्वारा अपने पत्र क्रमांक 1114 दिनांक 22.07.2015 से कुल 243 शिकायतों की सूची प्रेषित की गई थी। सूची के अनुसार 234 प्रकरण म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इन्‍दौर से संबंधित है तथा 9 प्रकरण अन्‍य विभागों से संबंधित हैं। (ख) प्रश्‍नांश '''' में उल्‍लेखित पत्र क्रमांक 1114 दिनांक 22.07.2015 के साथ संलग्‍न शिकायतों की सूची में से 157 प्रकरणों/शिकायतों का निराकरण कर दिया गया है एवं दिनांक 12.03.2016 तक 77 प्रकरणों/शिकायतों का निराकरण शेष है, जिनमें से 38 मामलों में प्रस्‍ताव विभागीय योजनाओं के अंतर्गत सक्षम स्‍वीकृति हेतु प्रक्रियाधीन है एवं शेष 39 प्रकरणों/शिकायतों में संबंधित कार्यों हेतु नियमानुसार आवेदन एवं निर्धारित राशि जमा कराने की सहमति अथवा तकनीकी साध्‍यता के अभाव में निराकरण नहीं किया जा सकता है। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में शेष प्रकरणों/शिकायतों के निराकरण हेतु वर्तमान में समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। प्रश्‍नाधीन प्राप्‍त सूची में से निराकृत प्रक्रियाधीन प्रकरणों/शिकायतों तथा लंबित प्रकरणों/शिकायतों की सूची सहित की गई कार्यवाही की आवेदनवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''', '''', '''' अनुसार है। (ग) प्रश्‍नांश (क) के सन्‍दर्भ में प्राप्‍त प्रकरणों/ शिकायतों के निराकरण हेतु किये गये कार्यों में म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इन्‍दौर द्वारा कुल राशि रूपये 22.90 लाख का व्‍यय किया गया है।

सामान्‍य प्रशासन विभाग की स्‍थानान्‍तरण नीति

15. ( क्र. 3245 ) श्रीमती अनीता नायक : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सामान्‍य प्रशासन विभाग की स्‍थानांतरण नीति क्‍या है? (ख) टीकमगढ़ जिले में वर्ष 2015 से प्रश्‍न‍दिनांक तक राजस्‍व विभाग एवं लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण विभाग के कौन-कौन से अधिकारियों एवं कर्मचारियों के स्‍थानान्‍तरण किये गये है एवं कौन-कौन से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को कार्यमुक्‍त किया गया है? (ग) जिन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को स्‍थानान्‍तरण होने बाद भी कार्ययुक्‍त नहीं किया गया है या जिन अधिकारियों ने स्‍थानांतरण आदेश की अवहेलना की है उनके विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जायेगी? ऐसे अधिकारियों को कब तक कार्यमुक्‍त किया जायेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा जारी स्‍थानांतरण नीति वर्ष 2015-16 पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) टीकमगढ़ जिले में राजस्‍व अधिकारियों (कनिष्‍ठ प्रशासनिक सेवा) की अत्‍यधिक कमी होने के कारण तथा जिले की 10 तहसीलें सूखाग्रस्‍त होने से किसानों को राहत राशि वितरण के सर्वे/ स्‍वीकृति/वितरण संबंधी वृहत कार्य में संलग्‍नता एवं उनके स्‍थान पर अन्‍य कनिष्‍ठ प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की पदस्‍थापना न होने तथा पूर्व से अत्‍यधिक पद रिक्‍त होने के मद्देनजर भारमुक्‍त नहीं किया गया है। लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण के अंतर्गत स्‍थानांतरित 78 शासकीय सेवकों में से 04 शासकीय सेवकों द्वारा माननीय उच्‍च न्‍यायालय जबलपुर से स्‍थगन प्राप्‍त होने के कारण यथास्थिति बनाई गई है। शेष को भारमुक्‍त किया जा चुका है। अत: शासकीय सेवकों के विरूद्ध कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

स्‍वीकृत की गई व्‍हाईट क्‍ले की खदान

16. ( क्र. 4379 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बैतूल जिले के ग्राम पलासखेड़ी में खसरा नं. 21/1 रकबा 39.837 हेक्‍टेयर मद पहाड़ चट्टान पर किस आदेश क्रमांक एवं दिनांक से किन-किन शर्तों के साथ व्‍हाईट क्‍ले की खदान स्‍वीकृत की गई, इसमें से किन-किन शर्तों का प्रश्‍न दिनांक तक पालन कर लिया गया है एवं किन-किन शर्तों का पालन नहीं किया गया? (ख) उपरोक्‍त प्रश्‍नांश के परिप्रेक्ष्‍य में कलेक्‍टर बैतूल ने किस दिनांक को अनुबंध किया, अनुबंध के पूर्व वन विभाग से पुन: जाँच करवाई जाकर प्रतिवेदन प्राप्‍त क्‍यों नहीं किया गया, खदान की कार्य अनुमति दिए जाने के पूर्व किसकी शिकायत पर किन प्रावधानों के अनुसार वन विभाग से भूमि की पुन: जाँच कर प्रतिवेदन प्रस्‍तुत किए जाने की कार्यवाही किन कारणों से की गई? (ग) खसरा क्रमांक 21/1 ग्राम के किस-किस वर्ष के राजस्‍व अभिलेख में पहाड़ चट्टान मद में राजस्‍व भूमि दर्ज है एवं किस-किस वर्ष के राजस्‍व अभिलेख में भूमि को नारंगी भूमि बताया गया है? (घ) शासन द्वारा अधिरोपित शर्तों की पूर्ति करवाई जाकर कब तक कार्य अनुमति प्रदान कर दी जाएगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट पर दर्शित है। आदेश में उल्‍लेखित शर्तों का पालन किया गया है। (ख) पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट पर दर्शित आदेश में उल्‍लेखित शर्तों को आवेदक द्वारा मान्‍य किये जाने के आधार पर अनुबंध का निष्‍पादन दिनांक 22.03.2011 को किया गया। इसके उपरांत आवेदिका द्वारा पर्यावरण अनापत्ति एवं म.प्र. प्रदूषण बोर्ड की सहमति प्रस्‍तुत कर कार्य अनुमति चाही गई। पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट पर दर्शित आदेश की कंडिका 8 के संदर्भ में वन विभाग से भूमि का वैधानिक स्‍वरूप की जानकारी चाही गई। यह किसी शिकायत के संदर्भ में नहीं थी। (ग) खसरा क्रमांक 21/1 ग्राम पलासखेडी के निस्‍तार पत्रक के अनुसार दिनांक 12.03.1975 के अनुसार प्रश्‍नांश दिनांक तक राजस्‍व अभिलेख में पहाड़ चट्टान मद में यह भूमि दर्ज है। राजस्‍व अभिलेख में नारंगी भूमि दर्ज होना नहीं पाया गया। (घ) प्रश्‍नांश '' में उल्‍लेख अनुसार वनमण्‍डलाधिकारी दक्षिण (सामान्‍य) बैतूल द्वारा पत्र दिनांक 13.04.2015, 23.04.2015 एवं 17.06.2015 से यह अवगत कराया गया है कि, प्रश्‍नाधीन भूमि असीमांकित संरक्षित वन क्षेत्र (नारंगी क्षेत्र) घोषित है। इस कारण से वर्तमान में कार्यानुमति प्रदान नहीं की गई है। इस कारण प्रकरण वर्तमान में विचाराधीन होने के कारण समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

रेत खदानों की रॉयल्‍टी

17. ( क्र. 4979 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2014 में रतलाम एवं मंदसौर जिले में नीलाम की गई रेत खदानों के रॉयल्‍टी कट्टे किन-किन खदान ठेकेदारों को आवंटित कर दिये हैं? किन-किन को नहीं किये गये एवं किस कारण? (ख) क्‍या अब तक रॉयल्‍टी कट्टे नहीं देने से शासन को आर्थिक क्षति नहीं हो रही है एवं अवैध रेत खनन नहीं हो रही है? (ग) क्‍या शासन की खनन नीति में पर्यावरण विभाग की एन.ओ.सी. के अड़ंगे से उक्‍त समस्‍या उत्‍पन्‍न हो रही है? क्‍या पर्यावरण विभाग की एन.ओ.सी. में कई प्रकार की बाधाओं से ठेकेदार परेशान है, व अवैध खनन हो रहा है? क्‍या शासन इसका सरलीकरण करेगी? यदि हाँ, तो कैसे एवं कब तक?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट में दर्शित है। (ख) पर्यावरण की अनुमति प्राप्‍त होने के पश्‍चात खदानें संचालित हो सकेंगी। अत: आर्थिक हानि जैसी स्थिति नहीं है। रेत के अवैध खनन के प्रकरण प्रकाश में आने पर उसके विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाती है। (ग) पर्यावरणीय अनापत्ति प्राप्‍त कर खदान संचालन किया जाना नियमों की बाध्‍यता है। पर्यावरणीय अनापत्ति प्राप्‍त करने की प्रक्रिया भारत सरकार द्वारा निर्धारित की गई है अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''ग्यारह''

अंशकालिक पदों पर कार्यरत स्‍वीपरों (सफाई कर्मी) की पूर्णकालिक नियुक्ति

18. ( क्र. 5058 ) श्रीमती ऊषा चौधरी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. शासन सामान्‍य प्रशासन विभाग द्वारा परिवहन विभाग सहित अन्‍य विभागों में अंशकालिक पदों पर कार्यरत स्‍वीपरों (सफाई कर्मी) को पूर्णकालिक करने हेतु कोई नीति बनाई गई है? (ख) क्‍या अंशकालिक पदों पर कार्य कर रहे स्‍वीपर (सफाई कर्मी) को पूर्णकालिक का दर्जा देने हेतु कोई नीति प्रावधान नहीं बनाया गया है, जिससे लम्‍बे समय से इन कर्मियों का शोषण शासन/प्रशासन स्‍तर पर हो रहा है? (ग) यदि हाँ, तो परिवहन विभाग सहित अन्‍य विभागों में विगत 25-30 वर्षों से स्‍वीपर (सफाई कर्मी) के पद पर कार्य करने वाले कर्मचारियों के शोषण को रोकने हेतु कोई प्रावधान बनाया जावेगा? (घ) यदि हाँ, तो कब तक प्रावधान बनाया जावेगा, यदि नहीं, तो क्‍यों? कारण सहित पूर्ण विवरण देवें।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जी नहीं। (ग) एवं (घ) अंशकालिक कार्य लिये जाने के कारण नीति बनाये जाने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

रेतघाट निलामी तथा अवैध उत्‍खनन

19. ( क्र. 5101 ) डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. में खनिज विभाग द्वारा गौण खनिज नियम 1996 के प्रावधानों के अधीन गौण खनिज नीलामी के प्रावधान हैं? उसके नियम क्‍या हैं? यदि हाँ, तो जो रेतघाट जितने हेक्‍टेयर या एकड़ में दी जाती है, उसको सीमांकन कर सीमा चिन्‍ह लगाने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो बालाघाट जिले की रेत की घाटों में यह प्रावधान नहीं हैं और यदि हैं, तो निर्धारित चिन्‍ह के बाहर जाकर भी रेत का खनन हो रहा है? (ख) इस प्रकार का अवैध खनन करने वालों पर क्‍या कार्यवाही करेंगे और अधिकारी जो भ्रष्‍टाचार कर रहे हैं उन पर क्‍या कार्यवाही करेंगे एवं चिन्‍ह लगने के बाद खनन प्रारंभ करायेंगे? (ग) क्‍या म.प्र. में खनिज विभाग द्वारा गौण खनिज नियम 1996 के नियम (5) में स्‍पष्‍ट हैं, कि नदी नालों के जल के भीतर खनन नहीं किया जायेगा जबकि रेतघाटों के आस-पास की खदानों में जल के भीतर तक खनन किया जा रहा है? (घ) क्‍या खनन एवं खनिज विधानसभा क्षेत्र 112 अंतर्गत नीलाम हुये घाट के अतिरिक्‍त भी आस-पास के घाटों के पास खनन किया जा रहा है? इसकी जाँच तुरंत कर संबंधितों को दण्डित करेंगे?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। यह नियम अधिसूचित है। जी हाँ। प्रश्‍नाधीन जिले में खदान क्षेत्र में स्‍थापित सीमा चिन्‍ह के अंदर ही खनन कार्य किया जा रहा है। (ख) प्रश्‍नांश '' के उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) म.प्र. गौण खनिज नियम 1996 के नियम 5 में रेत खनिज के मामले में इस प्रकार के प्रावधान नहीं है। प्रश्‍नाधीन जिले में नदी नालों के जल के भीतर खनन कार्य नहीं किया जा रहा है। (घ) जी नहीं। अंत शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

खनिजों के अवैध परिवहन से सड़कों को क्षति

20. ( क्र. 5102 ) डॉ. योगेन्‍द्र निर्मल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वारासिवनी-खैरलांजी विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत कौन-कौन सी सड़कें कितने-कितने भार को वहन कर सकती हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या खनिजों के अवैध परिवहन व भार क्षमता से अधिक भरे हुये डम्‍परों के कारण सड़कों को बहुत अधिक क्षति पहुँच रही हैं? यदि हाँ, तो शासन को हुई राजस्‍व हानि का विवरण देवें? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में शासन को हो रही राजस्‍व हानि की भरपाई के लिए विगत 3 वर्षों में खनिज विभाग द्वारा कौन-कौन से वाहनों पर कितनी-कितनी राशि की चालानी कार्यवाही की गई व कितने वाहन राजसात किए गये हैं? (घ) प्रश्‍नांश (ग) के परिप्रेक्ष्‍य में सड़कों को हुई हानि‍के विरूद्ध खनिज विभाग ने कितनी राशि वसूल कर शासकीय कोष में जमा कराई?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) लोक निर्माण विभाग, म.प्र. रोड डेव्‍ह.कार्पो. एवं म.प्र. ग्रा.स.वि.प्रा. से प्राप्‍त जानकारी के अनुसार वारासिवनी-खैरलांजी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत लोक निर्माण विभाग की सड़कों की भार क्षमता 8 टन, म.प्र. रोड डेव्‍ह.कार्पो. की सड़कों की भार क्षमता 8.160 टन एवं म.प्र. ग्रा.स.वि.प्रा. की सड़कों की भार क्षमता 8 टन की है। (ख) लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में 122.195 किलोमीटर सड़क का संधारण किया जाता है। इसमें से 21 किलोमीटर मार्ग क्षतिग्रस्‍त होना प्रतिवेदित है। इसका प्राक्‍कलन तैयार नहीं किया गया है। म.प्र. सड़क विकास निगम द्वारा प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में 37 किलोमीटर मार्ग संधारित है। इसमें कोई मार्ग क्षतिग्रस्‍त होना प्रतिवेदित नहीं है। म.प्र. ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण द्वारा 21.95 किलोमीटर मार्ग संधारित है। यह मार्ग क्षतिग्रस्‍त होना प्रतिवेदित किया गया है। इसका संधारण ठेकेदार द्वारा किया जा रहा है। अत: वर्तमान में शेष प्रश्‍नांश उपस्थित नहीं होता है। (ग) प्रश्‍नांश के संदर्भ में खनिज विभाग के द्वारा चालानी कार्यवाही नहीं की जाती है एवं वाहनों को राजसात किये जाने के नियमों में कोई प्रावधान नहीं है। (घ) प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता।

रोड का अनियमित डामरीकरण

21. ( क्र. 5144 ) चौधरी चन्‍द्रभान सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या भोपाल शहर के भदभदा रोड स्थित तत्‍कालीन वार्ड नम्‍बर 24 एवं वर्तमान वार्ड नम्‍बर 26 में प्रताप गार्डन से सूरज नगर की ओर जाने वाले मार्ग का विभाग द्वारा वर्ष 2013 एवं 2014 में डामरीकरण किया गया? यदि हाँ, तो मार्ग की लम्‍बाई, चौड़ाई, स्‍वीकृत टेंडर की राशि, भुगतान राशि तथा भौतिक सत्‍यापनकर्ता अधिकारी का नाम बतायें? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) में करवाया गया कार्य गुणवत्‍ताविहीन है? यदि हाँ, तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्‍मेदार अधिकारियों पर क्‍या और कब तक कार्यवाही की जायेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) साक्षी ढाबा (प्रताप गार्डन) से सूरज नगर तत्‍कालीन वार्ड नम्‍बर 24 एवं वर्तमान वार्ड नम्‍बर 26 स्थित सड़क निर्माण पर वर्ष 2013-2014 में डामरीकरण एवं सीमेंट कांक्रीट का कार्य किया गया था, जिसकी लम्‍बाई 858 मीटर, चौड़ाई 5.75 मीटर थी। कार्य की निविदा राशि रूपयें 150.30 लाख थी, जिसमें से ठेकेदार को रूपयें 49.17 लाख का भुगतान किया गया था। इस मार्ग पर कार्य श्री के.एस. ब्रहमवंशी अनुविभागीय अधिकारी, उपसंभाग क्रमांक-6 राजधानी परियोजना प्रशासन एवं श्री दीप कुमार जैन, कार्यपालन यंत्री निर्माण संभाग क्रमांक-1 राजधानी परियोजना प्रशासन भोपाल द्वारा किया गया। (ख) प्रश्‍नांश (क) कराया गया कार्य गुणवत्‍ता पूर्वक कराया गया है। शेष का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता है।

पॉलीथिन के प्रयोग पर प्रतिबंध

22. ( क्र. 5147 ) श्री राजेन्द्र फूलचं‍द वर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या म.प्र. शासन द्वारा प्रदेश में पोलिथिन के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है? यदि हाँ, तो क्‍या इसका कठोरता से पालन कराया जा रहा है? (ख) क्‍या सोनकच्‍छ विधानसभा में पॉलीथिन के उपयोग पर प्रतिबंध है तो कब से यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं? (ग) क्‍या भविष्‍य में पॉलीथिन के उपयोग पर पूर्णत: प्रतिबंध लगाया जाकर उसका कठोरता से पालन कराया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) भारत सरकार,पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा जारी अपशिष्ट प्लास्टिक (प्रबंध और प्रहस्तन) नियम,2011 प्रदेश में लागू है, जिसके अनुसार 40 माईक्रोन से कम मोटाई के पॉलीथिन कैरी बैग का निर्माण एवं उपयोग प्रतिबंधित है। शासन के आदेश दिनांक 17/10/2013 से 40 माईक्रोन से कम मोटाई के पॉलीथिन बैग पर प्रतिबंध है। (ख) उत्तरांश के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ग) प्रश्नांश एवं के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

सोनकच्‍छ नगर हेतु आवास योजना

23. ( क्र. 5148 ) श्री राजेन्द्र फूलचं‍द वर्मा : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सोनकच्‍छ नगर के निम्‍न आय वर्ग एवं मध्‍यम आय वर्ग के लोगों के आवास हेतु भवन या प्‍लाट दिये जाने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो किस योजना के तहत? (ख) उक्‍त योजना कब से लागू है तथा इसमें पात्र हितग्राहियों का चयन कौन करता है तथा किस प्रकार करता है? (ग) उक्‍त योजना का लाभ पाने के लिए हितग्राही को क्‍या कार्यवाही करनी होती है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। प्रधानमंत्री आवास योजना (सबके लिए आवास 2022 शहरी) (ख) 25 जून, 2015 से। नगरीय निकाय द्वारा म.प्र. शासन, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के ज्ञाप दिनांक 01.11.2014 अनुसार। (ग) नगरीय निकाय द्वारा सर्वेक्षण के समय आवश्‍यक अभिलेख एवं जानकारी उपलब्‍ध करानी होती है।

स्‍वच्‍छता अभियान के तहत शौचालय निर्माण

24. ( क्र. 5613 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मर्यादा और स्‍वच्‍छता अभियान के तहत सागर नगर में कितने शौचालय निर्माण किया जाना प्रस्‍तावित है? इस योजना में कितना बजट प्रावधानित किया गया है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में सागर नगर में विगत वर्ष 2014-15 से प्रश्‍नांश दिनांक तक कितने शौचालयों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा इन पर कितनी राशि व्‍यय की गर्इ है? कितने शौचालयों का निर्माण किया जाना शेष है? (ग) सागर नगर में कितने सुलभ शौचालय संचालित हैं तथा कितनों का और कहाँ-कहाँ निर्माण किया जाना प्रस्‍तावित है वर्तमान में इस हेतु कितना बजट प्रावधानित किया गया है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) स्‍वच्‍छ भारत मिशन अंतर्गत सागर शहर में 2000 व्‍यक्तिगत शौचालयों का निर्माण स्‍वीकृत किया गया है। इस हेतु राशि रू. 272.00 लाख की कार्ययोजना हेतु प्रावधान किये गये है। (ख) 1313 व्‍यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कार्य पूर्ण किया जाकर राशि रू. 1,23,66,490.00 का व्‍यय किया गया है। 687 व्‍यक्तिगत शौचालयों का निर्माण शेष है। (ग) सागर शहर में 37 सामुदायिक/सार्वजनिक शैचालय संचालित है। वर्तमान में 08 सामुदायिक/सार्वजनिक शौचालय का जवाहरगंज वार्ड, बिट्ठल नगर वार्ड, पुरब्‍याउ वार्ड, वल्‍लभ नगर वार्ड, गुरूगोविन्‍द सिंह, परकोटा वार्ड, बाघराज वार्ड, सुभाष नगर वार्ड में निर्माण प्रस्‍तावित। इस हेतु राशि रू. 124.00 लाख की कार्ययोजना प्रस्‍तावित।

नगर पालिका एवं नगर पालिक निगम के कर्मचारियों को समयमान वेतनमान

25. ( क्र. 5614 ) श्री शैलेन्द्र जैन : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शासन द्वारा समयमान वेतनमान का लाभ किन-किन विभाग के कर्मचारियों को कब से दिया जा रहा है? क्‍या नगर पालिका एवं नगर पालिक निगम के कर्मचारियों को भी समयमान वेतनमान का लाभ दिया जा रहा है? (ख) यदि हाँ, तो कब से, अगर नहीं दिया जा रहा है तो क्‍या कारण है? (ग) क्‍या शासन नगर निगमों एवं नगर पालिका के कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का लाभ देने पर विचार करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) नगरीय निकाय के कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का लाभ नहीं दिया जा रहा है। (ख) एवं (ग) नगरीय निकाय के कर्मचारियों को समयमान वेतनमान का लाभ दिये जाने के लिये शासन स्‍तर पर कार्यवाही प्रचलित है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

डिफॉल्‍टर घोषित फर्मों को रेत उत्‍खनन ठेका आवंटन

26. ( क्र. 5627 ) श्रीमती प्रतिभा सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दि म.प्र. स्‍टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन लिमि. द्वारा डिफॉल्‍टर फर्मों/व्‍यक्तियों को रेत खदानों के ठेके देने के क्‍या नियम हैं? क्‍या डिफॉल्‍टर फर्म के ठेके स्‍वीकृत नहीं किये जा सकते हैं? क्‍या श्री माँ रेवा इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर शॉप नं. J 1/14 कृषि उपज मंडी के पीछे जबलपुर से पूर्व ग्रुप तहसील सिहोरा (जबलपुर) ठेके की राशि रु. 4,03,38,841.00 बकाया है जिसमें से सुरक्षा राशि 1,27,87,500.00 निगम द्वारा समायोजन के बाद भी रु. 2,75,51,341.00 वसूल करना शेष है? (ख) यदि हाँ, तो डिफॉल्‍टर फर्म में श्री माँ रेवा इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर जबलपुर को निगम द्वारा समूह शहपुरा-1 कोड क्र. SMCO114 की 5 रेत खदानें नियम विरूद्ध कैसे स्‍वीकृत की गयी? क्‍या स्‍टेट माइनिंग कॉरपोरेशन उक्‍त डिफॉल्‍टर फर्म की स्‍वीकृत की गयी 5 रेत खदानों के ठेका निरस्‍त करेगा? यदि हाँ, तो कब तक, यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) बोलीदार की पात्रता के संबंध में नियम है कि म.प्र. शासन के द्वारा आवंटित खदान एवं खनिज के संबंध में देय शासकीय राशि बकाया नहीं होना चाहिए। तदाशय की अंडर टेकिंग संबंधित बोलीकर्ता को स्‍वयं देना होती है। साथ ही यदि अनुबंध करने से पूर्व अथवा बाद में किसी भी समय यह प्रकाश में आता है कि बोलीकर्ता बोली प्रस्‍तुत करने हेतु अपेक्षित अर्हता नहीं रखता है तो बोलीकर्ता को अयोग्‍य करार दिया जाएगा तथा नियमानुसार कार्यवाही की जावेगी। प्रश्‍नाधीन ठेकेदार द्वारा ठेका की अनुबंधित मात्रा पर बढ़ी हुई रायल्‍टी की राशि रूपए 275.51 लाख देय है। (ख) माँ रेवा इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, जबलपुर को म.प्र. राज्‍य खनिज निगम लिमिटेड द्वारा कार्य आदेश जारी नहीं किया गया है। यदि उनके द्वारा बकाया राशि जमा नहीं की जावेगी तो उनके विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही किये जाने की स्थिति निर्मित होगी।

राजीव गांधी विद्यतीकरण योजना

27. ( क्र. 5745 ) श्री महेन्‍द्र सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में विगत 05 वर्षों में गुनौर विधान सभा क्षेत्र अन्‍तर्गत कितने ग्रामों में विद्यतीकरण किया गया है? योजना अन्‍तर्गत स्‍वीकृत राशि व खर्च की गई राशि की जानकारी देवें? (ख) क्‍या उक्‍त योजना से जिन ग्रामों का विद्युतीकरण किया गया है उनमें पूर्ण कार्य न कर आधा अधूरा कार्य किया गया है? आधा विद्युतीकरण क्‍यों किया गया है? कारण सहित बतावें क्‍या शेष विद्युतीकरण के लिये ग्रामीणों से राशि की मांग की जाती है एवं राशि न देने पर कार्य अधूरा ही छोड़ दिया गया है? (ग) क्‍या राजीव गांधी योजना अतंर्गत अधिकारियों द्वारा बिना देखे मनमानी तरीके से प्राक्‍कलन तैयार किया जाता है? मोके में जाकर सर्वे नहीं किया जाता है जिससे आधा गांव विद्युतीकरण से छूट जाता है? क्‍या फिर से उन ग्रामों में विद्युतीकरण कार्य कराया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) 11वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अन्‍तर्गत विगत 5 वर्षों में गुनौर विधानसभा क्षेत्र के 1 अविद्युतीकृत ग्राम के विद्युतीकरण तथा 163 विद्युतीकृत ग्रामों के 100 एवं 100 से अधिक आबादी वाले मजरों/टोलों के विद्युतीकरण सहित सघन विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण किया गया है। पन्‍ना जिले हेतु स्‍वीकृत उक्‍त योजना के अंतर्गत कुल स्‍वीकृत राशि रू. 39.14 करोड़ के विरूद्ध राशि रू. 30.90 करोड़ व्‍यय की गई है। 12वीं पंचवर्षीय योजना में स्‍वीकृत राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अन्‍तर्गत प्रश्‍नाधीन अवधि में गुनौर विधानसभा क्षेत्र में 35 विद्युतीकृत ग्रामों के 100 एवं 100 से अधिक आबादी वाले मजरों/टोलों के विद्युतीकरण सहित सघन विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। पन्‍ना जिले हेतु स्‍वीकृत उक्‍त योजना के अन्‍तर्गत कुल स्‍वीकृत राशि रू. 59.26 करोड़ के विरूद्ध राशि रू. 3.43 करोड़ व्‍यय की गई है। (ख) जी नहीं। उक्‍त योजनाओं के अन्‍तर्गत किया गया कोई भी कार्य आधा-अधूरा नहीं किया गया है। प्रश्‍नाधीन योजनाओं के अन्‍तर्गत विद्युतीकरण हेतु ग्रामीणों से किसी भी प्रकार की राशि की मांग नहीं की जाती है। स्‍वीकृत प्रावधानों के अनुसार कार्य पूर्ण कराया जा रहा है। (ग) जी नहीं। मौके का सर्वेक्षण कर तदानुसार योजना के प्रावधानों के अनुरूप प्राक्‍कलन तैयार किये जाते हैं, ताकि अविद्युतीकृत ग्रामों का विद्युतीकरण एवं विद्युतीकृत ग्रामों के 100 एवं 100 से अधिक आबादी वाले मजरों/टोलों के विद्युतीकरण सहित ग्राम के सघन विद्युतीकरण का कार्य किया जा सके। चूंकि विद्युतीकरण के कार्य सर्वेक्षण अनुसार पूर्ण करवाये जा रहे है अत: फिर से ग्रामों का विद्युतीकरण करवाये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता।

लोकायुक्‍त कार्यालय को प्राप्‍त जनहित याचिका 2771/2015

28. ( क्र. 5755 ) श्री हर्ष यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सामान्‍य प्रशासन विभाग के पत्र क्रमांक एफ 22-15/2010/1-10 दिनांक 19 अप्रैल 2011 की प्रति उपलब्‍ध करावें? (ख) असंबद्ध लोगों को संदेही बनाने वाली संक्षेपिका तैयार करने में सबंधित विभाग के कौन कौन अधिकारी कर्मचारी सम्मिलित थे? सात करोड़ की अनियमितता से असंबद्ध होते हुए भी किन-किन कर्मचारियों को संदेही बनाया? (ग) उक्‍त दूषित जाँच को लोकायुक्‍त कार्यालय में पंजीबद्ध शिकायत पंजी क्रमांक 1907/सी/15 में शामिल क्‍यों नहीं किया जा रहा है? कब शामिल किया जावेगा? (घ) वर्ष 2015 और वर्ष 2016 में आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ में प्राप्‍त शिकायतों जिसमें एफ.आई.आर. क्रमांक 61/2012 के पहले हुई जाँच को दूषित बताया गया था पर अब तक कोई कार्यवाही क्‍यों नहीं की गई? आरोपित शिकायती बिन्‍दुओं पर पुन: जाँच कब की जावेगी?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) असंबद्ध लोगों को संदेही बनाये जाने का निष्‍कर्ष जाँच पश्‍चात् ही निकाला जा सकता है। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट '' अनुसार है। (ग) रिट पिटीशन क्रमांक 2771/2015 में माननीय न्यायालय खण्डपीठ ग्‍वालियर बैंच द्वारा पारित निर्णय की प्रति प्राप्‍त होने पर संगठन में शिकायत पंजी क्रमांक 1907/सी/15 पंजीबद्ध कर जाँच प्रकरण क्रमांक 149/2015 विरूद्ध अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्‍याण विभाग का प्रकरण जाँच में लिया गया है। (घ) एफ.आई.आर. क्रमांक 61/2012 के संबंध में वर्ष 2015 और वर्ष 2016 में आर्थिक अपराध प्रकोष्‍ठ में प्राप्‍त शिकायतों पर समुचित जाँच की कार्यवाही की जा रही है।

योजनावार प्राप्‍त राशि एवं व्‍यय राशि

29. ( क्र. 5760 ) श्री हर्ष यादव : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या ऊर्जा विभाग अतंर्गत एम.पी. पॉवर मैनेजमेन्‍ट कंपनी को आदिवासी उपयोजना और अनुसूचित जाति उपयोजना की राशि प्राप्‍त होती है वर्ष 2012-13 से 2014-15 तक योजनावार प्राप्‍त राशि और व्‍यय राशि की जानकारी दें? (ख) इन राशियों की भौतिक वित्‍तीय प्रगति, लक्ष्‍य उपलब्धि की समीक्षा कौन सा विभाग/कार्यालय करता है? संबंधित विभाग जिस प्रपत्र में वार्षिक जानकारी मंगाता है वर्ष 2012-13 से वर्ष 2014-15 तक की प्रगति सिर्फ उसी प्रपत्र में उपलब्‍ध करावें? (ग) उक्‍त वर्ष 2012-13 से वर्ष 2014-15 तक अव्‍ययित राशियां किन-किन खातों में जमा है? पूर्ण ब्‍यौरा दें? क्‍या जमा राशियों की जानकारी आयुक्‍त कोष एवं लेखा और प्रमुख सचिव वित्‍त विभाग को दी गई है, नहीं तो क्‍यों? (घ) जिला सागर अंतर्गत ब्‍लॉक देवरी एवं केसली विधानसभा क्षेत्र देवरी में ऊर्जा विभाग ने ग्रामीण विद्युतीकरण के लिये वर्ष 2012-13 से वर्ष 2014-15 तक क्‍या कार्य स्‍वीकृत किये? पूर्णता अपूर्णता की स्थिति बतावें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं। वर्ष 2012-13 से 2014-15 तक ऊर्जा विभाग को योजनावार प्राप्‍त राशि एवं ऊर्जा विभाग के अंतर्गत विद्युत कंपनियों द्वारा व्‍यय की गई राशि की जानकारी निम्‍नानुसार है :-

योजना का नाम- आदिवासी उपयोजना

(राशि रूपये लाख में)

वित्‍तीय वर्ष 2012-13

वित्‍तीय वर्ष 2013-14

वित्‍तीय वर्ष 2014-15

आहरित राशि

व्‍यय राशि

आ‍हरित राशि

व्‍यय राशि

आहरित राशि

व्‍यय राशि

33877

34274

31312

30428

36915

34517

 
योजना का नाम- अनुसूचित जाति उपयोजना
(
राशि रूपये लाख में)

वित्‍तीय वर्ष 2012-13

वित्‍तीय वर्ष 2013-14

वित्‍तीय वर्ष 2014-15

आहरित राशि

व्‍यय राशि

आ‍हरित राशि

व्‍यय राशि

आहरित राशि

व्‍यय राशि

38376

41830

22597

24362

30034

27690

(ख) इन राशियों की भौतिक/वित्‍तीय प्रगति, लक्ष्‍य एवं उपलब्धि की समीक्षा आदिम जाति क्षेत्रिय विकास संचालनालय, म.प्र. शासन द्वारा की जाती है। संबंधित विभाग जिस प्रपत्र में वार्षिक जानकारी मंगाता है, उसी प्रपत्र में वर्ष 2012-13 से 2014-15 तक की प्रगति की योजनावार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र (आदिवासी उपयोजना) एवं (अनुसूचित जाति उपयोजना) अनुसार है। (ग) आहरण एवं व्‍यय राशि साल दर साल अग्रेषित होती है एवं कार्य सतत् रूप से किये जाते हैं। अत: अव्‍ययित राशि निरंक है। अत: प्रश्‍न नहीं उठता। (घ) विधानसभा क्षेत्र देवरी के देवरी एवं केसली विकासखण्‍डों में वर्ष 2012-13 से 2014-15 तक राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत कुल 205 ग्रामों में विद्युतीकरण का कार्य स्‍वीकृत कर, कार्य पूर्ण कर लिया गया हैं, जिसकी अद्यतन स्थिति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र में दर्शायी गयी है।

बिल्‍डरों पर कार्यवाही

30. ( क्र. 5838 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बिल्‍डरों के द्वारा किये जाने वाले निर्माण कार्यों, आवासीय परिसरों एवं बेचिंग प्‍लाट के संबंध में किस-किस कानून, नियम के अनुसार मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आवश्‍यक अनुमति, सहमति या सम्‍मति लिया जाना आवश्‍यक है? ऐसा न करने वालों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाहियां किये जाने का प्रावधान है? (ख) उपरोक्‍त प्रश्‍नांश के परिप्रेक्ष्‍य में वर्ष 2014 एवं 2015 में मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के भोपाल एवं ग्‍वालियर क्षेत्रीय कार्यालय के अंतर्गत आने वाले किस-किस जिले में किस-किस बिल्‍डर को किन-किन प्रावधानों के तहत किस दिनांक को अनुमति, सहमति एवं सम्‍मति कितनी अवधि के लिए प्रदान की गई एवं किस-किस के आवेदन कब-कब से किन-किन कारणों सें लंबित/विचाराधीन हैं। (ग) उक्‍त प्रश्‍नांश के परिप्रेक्ष्‍य में किस-किस बिल्‍डर को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा कब-कब कारण बताओं सूचना पत्र जारी किया है एवं किस-किस के खिलाफ माननीय न्‍यायालय में प्रकरण प्रस्‍तुत किये तथा किस-किस के विरूद्ध किन-किन कारणों से न्‍यायालय में प्रकरण दायर नहीं किए जा सके हैं? स्‍पष्‍ट करें?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) बिल्डरों के द्वारा किये जाने वाले निर्माण कार्यों, आवासीय परिसरों एवं बेचिंग प्लांट के संबंध में बोर्ड से जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 एवं वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम,1981 के अंतर्गत सम्मति एवं लागू होने पर परिसंकटमय अपशिष्ट (प्रबंधन हथालन एवं सीमापार संचलन) नियम,2008 के प्रावधानों के अंतर्गत प्राधिकार प्राप्त किया जाना आवश्यक है। बोर्ड से सम्मति/प्राधिकार प्राप्त किये बिना भवन निर्माण/कॉलोनी विकास परियोजनाओं के विरूद्ध जल एवं वायु अधिनियमों में उल्लेखित प्रावधानों के अंतर्गत वैधानिक कार्यवाही किये जाने का प्रावधान है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। प्रश्नाधीन अवधि में स्थापना सम्मति हेतु प्राप्त समस्त आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है तथा कोई भी प्रकरण लंबित नहीं है। (ग) जारी नोटिस की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। परियोजनाओं के विरूद्ध बोर्ड द्वारा दायर किये गये न्यायालयीन प्रकरणों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार है। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा परियोजनाओं का सतत् निरीक्षण किया जाता है एवं जिन परियोजनाओं द्वारा बोर्ड से सम्मति प्राप्त नहीं की गई तथा प्रदूषण नियंत्रण हेतु आवश्यक व्यवस्थायें स्थापित/प्रस्तावित नहीं की गई उन्हें सम्मति के दायरें में लाने एवं प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्थायें स्थापित करने हेतु नोटिस जारी किये जाते है एवं उनके विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही की जाती है।

इलेक्ट्रॉनिक काम्‍प्‍लेक्‍स झोन उत्‍तर शहर

31. ( क्र. 5915 ) श्री रमेश मेन्दोला : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या इलेक्‍ट्रॉनिक झोन उत्‍तर शहर, इन्‍दौर पर तैनात कर्मचारी दीपक बंदिल द्वारा एक विद्युत उपभोक्‍ता महेश सिंह को जनवरी 2016 के द्वितीय पक्ष में मारपीट और गाली गलोच की गई? (ख) क्‍या उपभोक्‍ता मात्र उसके निवास 22 ए सुभाष नगर का विद्युत विच्‍छेद की शिकायत लेकर गया था जबकि उपभोक्‍ता नियमित रूप से विद्युत बिल भ‍रता आ रहा है? (ग) क्‍या उपभोक्‍ता के यहां बिना कारण दि. 11.7.2014 को पंचनामा बनाया गया इसके बाद करीब डेढ़ वर्ष बाद अकस्‍मात 12239/- का बिल दे दिया? क्‍या उसके बाद इसी बिल को अधिकारी द्वारा 1226/- का कर दिया तथा जिसे उसने चुका भी दिया? (घ) क्‍या दिनांक 20.01.16 को फिर से कनेक्‍शन काट दिया? शिकायत लेकर जाने पर मारपीट और जान से मारने की धौंस कर्मचारी बांदिल द्वारा दी गई तथा इसकी शिकायत भी उपभोक्‍ता द्वारा की गई? यदि हाँ, तो संबंधित कर्मचारी पर दिनांक 15.2.16 तक क्‍या कार्यवाही की गई नहीं तो क्‍यों नहीं की गई?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं, इलेक्‍ट्रॉनिक काम्‍प्‍लेक्‍स झोन, शहर संभाग उत्‍तर, इंदौर पर पदस्‍थ सहायक यंत्री श्री दीपक बांदिल द्वारा श्री महेश नारायण सिंह से मारपीट एवं गाली गलौच नहीं की गई। (ख) जी नहीं, उपभोक्‍ता अपने निवास की नहीं अपितु अपने स्‍कूल 22 ए सुभाषनगर के विद्युत कनेक्‍शन की शिकायत लेकर आया था। उपभोक्‍ता के उक्‍त विद्युत कनेक्‍शन का विच्‍छेदन परिसर की जाँच के दौरान स्‍वीकृत भार से अधिक भार पाए जाने तथा मीटर में एकत्रित यूनिट (एक्‍यूमलेटेड रीडिंग) पाये जाने पर जारी किये गये अंतिम निर्धारण आदेश की राशि जमा नहीं करने के कारण दि. 20.01.2016 को किया गया था। (ग) जी नहीं, उपभोक्‍ता का प्रश्‍नाधीन कनेक्‍शन गैर-घरेलू श्रेणी का है, जिसमें दिनांक 11.07.2014 को औचक निरीक्षण में वास्‍तविक रूप से संयोजित भार, स्‍वीकृतभार से अधिक पाये जाने के कारण पंचनामा बनाया गया था एवं दिनांक 24.07.2014 को ही अनन्तिम निर्धारण आदेश राशि रू. 16,821/- जारी किया गया था। इस प्रकरण में उपभोक्‍ता द्वारा मीटर में एकत्रित रीडिंग के बिल का भुगतान करने पर अंतिम निर्धारण आदेश राशि रू. 11,013/- दिनांक 22.07.2015 को जारी किया गया था। उक्‍त राशि जमा नहीं करने के कारण उपभोक्‍ता के माह दिसम्‍बर-2015 के देयक में यह राशि जोडी गई। उपभोक्‍ता द्वारा कार्यालय में उपस्थित होकर आर्थिक परेशानी का हवाला देते हुए मौखिक रूप से चालू माह का बिल जमा करने एवं शेष बकाया राशि आगामी दो-तीन दिवस में जमा करने का निवेदन किया गया। तदनुसार उपभोक्‍ता ने दिसम्‍बर-2015 के देयक की राशि रू. 1,226/- दिनांक 11.01.2016 को जमा कराई थी। (घ) जी नहीं, दिनांक 20.01.2016 को उपभोक्‍ता का विद्युत कनेक्‍शन पहली बार विच्‍छेदित किया गया था। जी नहीं, श्री दीपक बांदिल द्वारा उपभोक्‍ता श्री महेश नारायणसिंह के साथ कोई मारपीट/दुर्व्‍यवहार नहीं किया गया, तथा उन्‍हें शालीनता पूर्वक समझाईश दी गई। अपितु श्री महेश नारायणसिंह द्वारा ही श्री दीपक बांदिल सहायक यंत्री के साथ दुर्व्‍यवहार करते हुए रिकार्ड फैंका गया, जिसकी प्रथम सूचना रिपोर्ट श्री दीपक बांदिल द्वारा दिनांक 20.01.2016 को हीरानगर थाने में दर्ज कराई गई। उपभोक्‍ता द्वारा ऐसी कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई हैं। उक्‍त परिप्रेक्ष्‍य में श्री दीपक बांदिल, सहायक यंत्री के विरूद्ध कोई कार्यवाही किया जाना अपेक्षित नहीं है।

पवन ऊर्जा हेतु प्रदाय भूमि

32. ( क्र. 5952 ) श्री सतीश मालवीय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उज्‍जैन जिले में नवीन एवं नवीनकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा पवन ऊर्जा परियोजना में कितनी कंपनियों को विंड टरबाईन स्‍थापित करने की अनुमति किन-किन नियमों, मापदण्‍डों के तहत 01 जनवरी 2014 से 05 फरवरी 2016 के मध्‍य स्‍वीकृति प्रदान की गई है? कंपनियों के स्‍वीकृति आदेश नाम सहित विवरण पृथक-पृथक तहसीलवार दें। (ख) क्‍या उत्‍पादित बिजली की सप्‍लाई ग्रि‍ड तक पहुंचाने हेतु किसानों की निजी भूमि पर सप्‍लाई लाईन के पोल व डी.पी लगाने हेतु शासन द्वारा मुआवजा राशि देने के क्‍या मापदण्‍ड निर्धारित किए है? (ग) जिले में कितनी शिकायतें गौचर भूमि तथा अन्‍य शासकीय भूमियों का बगैर नोयत परिवर्तन किए नये रास्‍ते बनाने तथा अन्‍य शर्तों के उल्‍लघंन करने तथा अग्रिम आधिपत्‍य देने के संबंध में कितनी शिकायतें कलेक्‍टर उज्‍जैन जिले के एस.डी.एम. तहसीलदार को की गई? (घ) क्‍या उज्‍जैन जिले में पवन ऊर्जा अंतर्गत विंड टरबाईन स्‍थापित करने वाली कंपनियों ने बैगर भूमि परिवर्तन डायसर्वन कराये, बगैर शुल्‍क चुकाये निर्माण कार्य प्रांरभ कर दिया गया है? यदि हाँ, तो किन-किन तहसीलों से शिकायतें प्राप्‍त हुई? क्‍या कार्यवाही की गई?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) उज्‍जैन जिले में प्रश्‍नाधीन अवधि में "पवन ऊर्जा परियोजना नीति-2012" के प्रावधानों के अन्‍तर्गत 13 कम्‍पनियों को पवन ऊर्जा परियोजनाओं की स्‍थापना की स्‍वीकृति प्रदान की गई है। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) भारतीय टेलीग्राफ एक्‍ट, 1985 के प्रावधानों के अन्‍तर्गत उत्‍पादित बिजली की सप्‍लाई ग्रिड तक पहुंचाने हेतु निजी भूमि पर सप्‍लाई लाईन के पोल व डी.पी. लगाने हेतु मुआवजा राशि देने संबंधी मापदण्‍ड निर्धारित नहीं है। (ग) गौचर भूमि तथा अन्‍य शासकीय भूमियों का बगैर नोईयत परिवर्तन किए गये रास्‍ते बनाने तथा अन्‍य शर्तों के उल्‍लंघन करने तथा अग्रिम आधिपत्‍य देने के संबंध में तहसीलदार घटि्टया को 5 शिकायतें की गई हैं, जिन्‍हें जाँच उपरान्‍त निराकृत किया जा चुका है। जिले की अन्‍य तहसीलों में उक्‍त विषयक शिकायतें संबंधित तहसीलदार, एस.डी.एम. एवं जिला कलेक्‍टर के संज्ञान में नहीं आई है। (घ) जी नहीं। प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''बारह ''

परियोजनान्‍तर्गत तालाबों को पानी से भरा जाना

33. ( क्र. 6101 ) श्री सचिन यादव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कसरावद विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत नर्मदा घाटी विकास विभाग के कितने कितने तालाब कहाँ-कहाँ स्थित है स्‍थानवार जानकारी दें? उक्‍त तालाबों में से कितने तालाबों में कितना-कितना पानी मौजूद है इनमें से कौन-कौन से तालाबों में पानी सरप्‍लस है और जिन तालाबों में पानी कम है उन्‍हें पर्याप्‍त मात्रा में पानी भरने के लिए विभाग द्वारा क्‍या क्‍या कार्ययोजना किस-किस परियोजनान्‍तर्गत बनाई गई है तालाबवार जानकारी दें? (ख) उक्‍त तालाबों से कितने कितने हेक्‍टेयर/रकबा भूमि सिंचित की जाती है? (ग) क्‍या इंदिरा सागर परियोजना, कठोर उद्वहन पुनासा परियोजना व अन्‍य कौन-कौन सी परियोजनान्‍तर्गत उक्‍त तालाबों को पानी से भरा जा सकता है? हाँ,तो तालाबवार जानकारी दें और इस कार्य को पूर्ण किये जाने हेतु विभागीय स्‍तर पर क्‍या कोई कार्यवाही की गई है हाँ, तो बतायें नहीं तो क्‍यों कारण दें? जिन तालाबों को नहीं भरा जा सकता है तो उनके क्‍या कारण है? प्रश्‍न दिनांक तक सर्वे रिपोर्ट सहित जानकारी देते हुए बतायें कि उक्‍त सर्वे कब और किसके द्वारा किया गया? उनके पदनाम सहित जानकारी दें?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) नर्मदा घाटी विकास विभाग की इंदिरा सागर की मुख्‍य नहर की आर.डी. 79.84 कि.मी. पर निर्माणाधीन खरगोन उद्वहन योजना के अंतर्गत छिरवा तालाब (अवशेष जलाशय क्र.1) ग्राम छिरवा के पास निर्मित किया गया है। वर्तमान में इसमें लगभग 02 मिलियन क्‍यूबिक मीटर पानी उपलब्‍ध है। जिसके द्वारा खरगोन उद्वहन के कमाण्‍ड क्षेत्र में सिंचाई की जा रही है। (ख) खरगोन उद्वहन नहर के अंतर्गत निर्मित छिरवा तालाब (अवशेष जलाशय क्र.01) से 9387 हेक्‍टेयर में सिंचाई की जाती है। (ग) उक्‍त छिरवा तालाब (अवशेष जलाशय क्र. 1) को इंदिरा सागर परियोजना के अंतर्गत निर्मित खरगोन उद्वहन नहर से भरा जा रहा है तथा सिंचाई हो रही है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

डम्‍परों/ट्रकों द्वारा क्षमता से अधिक बिना रॉयल्‍टी रेत परिवहन

34. ( क्र. 6134 ) डॉ. रामकिशोर दोगने : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या डम्‍परों/ट्रकों द्वारा क्षमता से अधिक एवं बिना राजस्‍व शुल्‍क दिये अवैध रूप से रेत का परिवहन किया जाता है जिससे सड़क क्षतिग्रस्‍त होती है? (ख) हरदा जिले में क्षमता से अधिक एवं बिना रॉयल्‍टी चुकाए रेत का परिवहन करते पाये गये कितने डम्‍परों/ट्रकों पर चालानी कार्यवाही कर किस-किस से कितनी-कितनी राशि वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में वर्तमान तक वसूल की गई? (ग) बार-बार क्षमता से अधिक रेत का परिवहन करते पाये गये डम्‍परों ट्रकों पर चालानी की कार्यवाही के अलावा भी अन्‍य कोई कार्यवाही किये जाने का क्‍या प्रावधान है? (घ) यदि हाँ, तो हरदा जिले में ऐसे कितने प्रकरण दर्ज हैं व उन पर क्‍या कार्यवाही की गई है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जिला परिवहन कार्यालय हरदा द्वारा समय-समय पर वाहन क्षमता से अधिक रेत परिवहन के विरूद्ध कार्यवाही की जाती है। इसके अलावा खनिज विभाग द्वारा जिले में जाँच के दौरान रेत का अवैध परिवहन पाए जाने पर अवैध परिवहनकर्ताओं के विरूद्ध कार्यवाही की जाती है। सड़कों पर खनिज रेत के वाहनों के अलावा अन्‍य विविध प्रकार की सामग्रियों से लदे वाहनों का भी आवागमन होता है। अत: यह कहना सही नहीं है कि अवैध रेत के परिवहन से सड़कें क्षतिग्रस्‍त होती हैं। (ख) कार्यालय जिला परिवहन अधिकारी, हरदा द्वारा प्रश्‍नाधीन अवधि में 02 वाहन डम्‍परों पर चालानी कार्यवाही कर कुल रूपए 10000/- समझौता शुल्‍क वसूल किया गया है। जिले में खनिज विभाग द्वारा जाँच के दौरान पाए गए अवैध रेत परिवहन अथवा अभिवहन पास में उल्‍लेखित मात्रा से अधिक मात्रा में रेत ले जाते पाए जाने पर ऐसे अवैध परिवहनकर्ताओं के विरूद्ध प्रश्‍नाधीन अवधि में अर्थदण्‍ड आरोपित कर वसूल किया गया है जिसका विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' एवं '' पर है। (ग) परिवहन विभाग द्वारा चेकिंग के दौरान डम्‍परों/ट्रकों द्वारा क्षमता से अधिक रेत का परिवहन करते पाए जाने पर चालानी कार्यवाही की जाती है। यदि संबंधित वाहन द्वारा बार-बार क्षमता से अधिक परिवहन किए जाने पर परमिट निरस्‍ती संबंधी कार्यवाही की जाती है। (घ) प्रश्‍नांश '' में दिए उत्‍तर अनुसार 02 वाहन डम्‍परों में क्षमता से अधिक रेत का परिवहन पाए जाने पर चालानी कार्यवाही कर समझौता शुल्‍क वसूल किया गया है। प्रश्‍नांश '' में दिए गए उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में जिला परिवहन कार्यालय हरदा में बार-बार क्षमता से अधिक रेत के परिवहन का कोई प्रकरण दर्ज नहीं है।

परिशिष्ट - ''तेरह ''

विद्युत शुल्‍क वसूली

35. ( क्र. 6135 ) डॉ. रामकिशोर दोगने : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍य विद्युत लाईन काटे जाने के बाद भी उपभोक्‍ता को सरचार्ज करते हुये प्रगतिशील मासिक विद्युत शुल्‍क वसूला जाता है? (ख) यदि हाँ, तो विद्युत लाईन काटने के बाद विद्युत का उपयोग नहीं करने पर भी जो शुल्‍क वसूला जाता है वह किस मद में व किस नियम के तहत लिया जाता है? (ग) हरदा जिले में विगत तीन वर्षों में इस प्रकार से विद्युत लाईन काटे जाने के बाद भी कितने उपभोक्‍ताओं से कितनी-कितनी राशि वसूल की गई है? विधानसभा क्षेत्रवार बताएं?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ, अस्‍थायी रूप से विद्युत कनेक्‍शन विच्‍छेदित होने पर, म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी टैरिफ आदेश के प्रावधान अनुसार उपभोक्‍ता को बकाया राशि पर सरचार्ज लगाकर बिल जारी किया जाता है। (ख) उत्‍तरांश '''' में दर्शाए अनुसार अस्‍थायी रूप से कनेक्‍शन विच्‍छेदित होने पर म.प्र. विद्युत नियामक आयोग के द्वारा जारी टैरिफ आदेश के प्रावधान अनुसार बिल जारी किये जाते हैं, तथा इस प्रकार जारी बिलों में अस्‍थाई रूप से कनेक्‍शन विच्‍छेदन के समय बकाया राशि एवं नियमानुसार लगाई गई सरचार्ज की राशि सम्मिलित होती है। (ग) हरदा जिले में विगत तीन वर्षों में अस्‍थाई रूप से विद्युत कनेक्‍शन विच्‍छेदन के बाद उपभोक्‍ताओं से बकाया राशि सहित कुल वसूल की गई राशि का वर्षवार एवं विधानसभा क्षेत्रवार विवरण निम्‍नानुसार है :-

(राशि रू. लाख में)

विधानसभा क्षेत्र का नाम

वर्ष 2013-14

वर्ष 2014-15

वर्ष 2015-16
(
फरवरी 2016 तक)

उपभोक्‍ताओं की संख्‍या

राशि

उपभोक्‍ताओं की संख्‍या

राशि

उपभोक्‍ताओं की संख्‍या

राशि

हरदा

1493

137.49

3278

340.49

1183

88.97

टिमरनी

365

23.80

761

97.66

49

3.33

बिना अनुज्ञा निर्माण के विरूद्ध कार्यवाही

36. ( क्र. 6258 ) श्री मोती कश्यप : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या कटनी नगर की गोपाल नगर कालोनी में पार्क एवं सड़क हेतु आरक्षित किसी खसरे व रकबों की भूमि में भवन निर्माण की अनुज्ञा प्राप्‍त किये बिना किन्‍हीं के द्वारा बहुमंजिला भवनों का निर्माण कर दिया है? (ख) क्‍या मध्‍यप्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के अनुसार प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में किस प्रकार की अनियमिततायें पायी गई हैं? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क), (ख) के संदर्भ में लोकायुक्‍त संगठन द्वारा आयुक्‍त नगर निगम कटनी के द्वारा किसी तिथि में कोई निष्‍पादन प्रतिवेदन प्रस्‍तुत किया है? (घ) नगर निगम कटनी की जिन बस्तियों में बिना अनुज्ञा के आवासीय एवं व्‍यवसायिक भवनों के निर्माण किये हैं और उनके विरूद्ध आज तक क्‍या कार्यवाहियां की गई हैं?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं, अपितु श्रीमत कमलोदवी पत्नी स्‍व. श्री गोपाल चौदहा, निलेश कुमार पिता स्‍व. श्री गोपाल दास चौदहा द्वारा खसरा क्रमांक 1368/1 में डुप्‍लेक्‍स भवनों का निर्माण किया गया है। (ख) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में गोपाल नगर में प्रदान की गई अनुज्ञा क्रमांक 4466/लो.नि.वि./कालोनी/2003 कटनी, दिनांक 23.06.2003 के विपरीत कालोनी में पार्क के लिए आरक्षित 5500 वर्गफुट भूमि पर 4 डुप्लेक्स भवनों का निर्माण कार्य कर लिया गया है। नगर तथा ग्राम निवेश कटनी द्वारा अनुमोदित अभिन्‍यास के विपरीत कालोनाईजर द्वारा निम्‍नानुसार कार्य किये गये है :- (1) कालोनाईजर द्वारा स्‍वीकृत अभिन्‍यास में आरक्षित पेविंग (सड़क) क्षेत्र 10X110 फुट 1100 वर्गफुट तथा पार्क हेतु आरक्षित क्षेत्र 44X110 फुट 4400 वर्गफुट कुल क्षेत्रफल 5500 वर्गफुट में 4 नग भवनों का निर्माण कर लिया गया है। (2) कालोनी क्षेत्र में विकास कार्यों के विरूद्ध बंधक रखे गये भूखण्‍ड क्रमांक 01 से 04 को बिना नगर निगम से कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र प्राप्‍त किये अर्थात भूखण्‍डों को बंधन मुक्‍त कराये बिना विक्रय किया गया है। (ग) जी हाँ। कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''','''',''एवं '''' अनुसार है। (घ) नगर पालिक निगम, कटनी क्षेत्रांतर्गत आवासीय एवं व्‍यवसायिक भवनों के बिना अनुज्ञा निर्माण कार्य पाये जाने पर अनावेदकों के विरूद्ध म.प्र. नगर पालिक निगम, अधिनियम 1956 की धारा 307 (2) एवं 307 (3) के प्रावधानों के अनुसार सूचना दी जाकर अवैध निर्माण रोकथाम की कार्यवाही की जाती है, एवं समय-समय पर अवैध निर्माण हटाये जाने की कार्यवाही की गई है। विगत 05 वर्षों में की गई कार्यवाही का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

जल संरचना निर्माणों की अनियमितताओं की जाँच

37. ( क्र. 6259 ) श्री मोती कश्यप : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कटनी जल संसाधन विभाग के उपसंभागों में कौन-कौन यंत्री, सहायक यंत्री व उपयंत्री पदस्‍थ है और उन्‍होंने वर्ष 2012-13 से 2015-16 की अवधि में किन मदों के किन स्‍तर से तकनीकी प्रशासकीय स्‍वीकृतियों प्राप्‍त कर निर्माण कार्य सम्‍पादित किये है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के किन निर्माणों में सामग्री व मजदूरी में कितना व्‍यय किया गया है और उनका भौतिक सत्‍यापन व मूल्‍याकंन कब किनके द्वारा किया गया और पायी गई अनियमितताओं पर किन पर किनके द्वारा क्‍या कार्यवाहियों की गई है? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (ख) की दर्शित अवधि में योजना मद से कितनी राशि के कब कौन से कार्य स्‍वीकृत किये गये हैं और उन्‍हें किन निर्माण एजेन्सियों से किस विधि निष्‍पादित कराया गया है तथा किस स्‍तर तक पूर्ण निर्माण पर कितनी राशि व्‍यय हुई? (घ) क्‍या प्रश्‍नांश (ग) की जाँच किस स्‍तर के अधिकारी से करायी गई है और किस कार्य में क्‍या अनियमितताएं पाये जाने पर किसके विरूद्ध क्‍या कार्यवाहियाँ की गई है?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) एवं (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1,2 एवं 3,4 अनुसार है। निविदा कार्यों में निविदाकार को सामग्री एवं मजदूरी का पृथक-पृथक भुगतान नहीं किया जाता है। कार्यों का भौतिक सत्‍यापन एवं मूल्‍याकंन प्रभारी उपयंत्री, अनुविभागीय अधिकारी एवं कार्यपालन यंत्री द्वारा समय-समय पर किया जाता है। कोई अनियमितता नहीं पाई जाना प्रतिवेदित है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होता है। (ग) एवं (घ) योजना मद में स्‍वीकृत कार्यों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 5,6 अनुसार है। जी नहीं। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होता है।

अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरूद्ध अभियोजन की स्‍वीकृति

38. ( क्र. 6320 ) श्री आरिफ अकील : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश के सा.प्र. विभाग, राजस्‍व, गृह एवं लोक स्‍वास्‍थय एवं परिवार कल्‍याण विभागों के किन-किन अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध वर्ष 2013 से माह दिसम्‍बर 2015 तक किन-किन संस्‍थाओं द्वारा भ्रष्‍टाचार के प्रकरण पंजीबद्ध किए गये नाम व पद सहित बतावें? (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित अनुसार किन-किन विभागों के किन-किन अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध भ्रष्‍टाचार के प्रकरण के चालान न्‍यायालय में प्रस्‍तुत किये गये नाम व पद सहित बतावें? (ग) प्रश्‍नांश (ख) में उल्‍लेखित अनुसार किन-किन विभागों के किन-किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरूद्ध अभियोजन की स्‍वीकृति हेतु प्रकरण लंबित है विभागवार, नामवार, पदवार बतावें?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) से (ग) जानकारी एकत्रित की जा रही है।

प्रोटोकाल का पालन

39. ( क्र. 6481 ) श्री हेमन्‍त विजय खण्‍डेलवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विधायकों द्वारा किसी विषय पर दिए गए सुझाव मान.मुख्‍यमंत्री अथवा शासन को दिए गए पत्र आवेदन की श्रेणी में आते हैं? पत्र लिखने वाले विधायक क्‍या आवेदनकर्ता की श्रेणी में आते हैं? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या यह संबोधन विधानसभा सदस्‍यों के लिए उचित है? (ग) यदि नहीं, तो अवर सचिव म.प्र. शासन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण विभाग के पत्र क्रमांक 184/2505/2015/उन्‍तीस-1 भोपाल दिनांक 02.02.16 को विधायक द्वारा माननीय मुख्‍यमंत्री को लिखे गए सुझावी पत्र को आवेदन एवं विधायक को आवेदनकर्ता किन कारणों से उल्‍लेखित किया गया? (घ) क्‍या सामान्‍य प्रशासन विभाग इस संबंध में कोई निर्देश जारी करेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जी नहीं। (ग) अवर सचिव, खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण द्वारा माननीय विधायक के सुझावी पत्र को सामान्‍य पत्राचार की भाषा के रूप में ''आवेदन'' सम्‍बोधित किया गया। (घ) इस संबंध में संबंधित अधिकारी को उसकी त्रुटि के लिए सचेत किया गया है ताकि भविष्‍य में इस तरह की पुनरावृत्ति हो। संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार

परिशिष्ट - ''चौदह ''

नगर निगम क्षेत्र में शामिल वार्डों से प्राप्‍त राजस्‍व

40. ( क्र. 6519 ) श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नगर पालिक निगम इन्‍दौर सन् 2013 में शामिल वार्ड क्र.14, 15 एवं 16 के देपालपुर विधानसभा क्षेत्र के संबंध में नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने से आज तक कुल कितना कितना राजस्‍व प्राप्‍त हुआ? (ख) उपरोक्‍तानुसार प्राप्‍त राजस्‍व के अनुपात में उक्‍त कार्यों में कितनी कितनी राशि खर्च की गई है? (ग) नगर पालिक निगम क्षेत्र के अंतर्गत उक्‍त वार्डों में सड़क, बिजली, पानी एवं ड्रेनेज से संबंधित कितना कार्य किया गया है एवं कितना कार्य किया जाना शेष है? (घ) उपरोक्‍तानुसार में दिये कार्य कब तक पूर्ण कर लिये जावेंगे? विशेषकर पेयजल के संबंध में ग्रीष्‍म ऋतु के हिसाब से क्‍या योजना तैयार की गई है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) वार्ड क्रमांक 14, 15 एवं 16 से प्राप्‍त राजस्‍व कुल राशि रू. 5,31,31,562/- है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''''' के बिन्‍दु क्रमांक 01 अनुसार है। (ग) किये गये कार्यों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' के बिन्‍दु क्रमांक 02 अनुसार है। शेष कार्यों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' के बिन्‍दु क्रमांक 03 अनुसार है। देपालपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत शहरी सीमा में आने के पश्‍चात निगम द्वारा जनप्रतिनिधियों की मांग अनुसार कार्य प्रस्‍तावित किये गये है, प्रस्‍तावित कार्यों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' के (पेज क्रं. 01 से 04) अनुसार है। (घ) शेष कार्य निविदा स्‍वीकृति उपरांत सम्‍पन्‍न किये जायेंगे, ग्रीष्‍म ऋतु को दृष्टिगत रखते हुये जिन क्षेत्रों में नर्मदा परियोजना की जल वितरण लाइनें है, केवल नलकूप व हैण्‍डपंपों पर ही आधारित है उन क्षेत्रों में पेयजल वितरण प्राइवेट टैंकरों से कराये जाने हेतु निगम द्वारा जिला कलेक्‍टर, इन्‍दौर को राशि रूपयें 522.05 लाख की कार्ययोजना शासन से अनुदान उपलब्‍ध कराये जाने के लिये प्रेषित की गई है। कार्यवाही प्रचलित है।

वनवासी अंचल के ग्रामों में विद्युत सुविधा

41. ( क्र. 6537 ) श्री गोविन्‍द सिंह पटेल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा विधान सभा क्षेत्र के वनवासी अंचल के कितने ग्राम हैं जहाँ बिजली की सुविधा उपलब्‍ध नहीं है? इन वनवासी ग्रामों में विद्युत सुविधा कब तक उपलब्‍ध करा दी जायेगी? (ख) वनवासी अंचल के ग्रामों में अभी तक विद्युत सुविधा किस कारण से उपलब्‍ध नहीं हो सकी है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत वर्तमान में 6 वन ग्राम अविद्युतीकृत हैं। उक्‍त में से 3 ग्रामों यथा-ग्राम बड़ागांव, भैंसा एवं मुकुंदा में विद्युतीकरण का कार्य प्रगति पर है तथा 2 ग्रामों यथा- ग्राम टुइयापानी एवं भिलमाढाना में विद्युतीकरण के कार्य हेतु वन विभाग से अनुमति प्रतीक्षित है। उक्‍त पाँचों ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य वन विभाग की अनुमति उपरान्‍त माह जून 2016 तक पूर्ण किया जाना संभावित है। शेष ग्राम भिलमाढाना (राजस्‍व), सघन वन क्षेत्र में स्थित होने के कारण गैर परम्‍परागत ऊर्जा स्‍त्रोतों से विद्युतीकरण हेतु प्रस्‍तावित है, जिसका कार्य नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा किया जाना है। (ख) सघन वन क्षेत्र में होने के कारण दुर्गम पहुँच मार्ग व विद्युतीकरण कार्य की लागत बहुत अधिक होने के कारण इन ग्रामों में विद्युतीकरण में विलंब हुआ है तथापि शत प्रतिशत अविद्युतीकृत ग्रामों को विद्युतीकृत किये जाने के राष्‍ट्रीय लक्ष्‍य के अंतर्गत वन विभाग की स्‍वीकृति एवं वित्‍तीय उपलब्‍धता अनुसार शेष वन ग्रामों के विद्युतीकरण का कार्य क्रमश: किया जा रहा है।

टैक्‍स चोरी के प्रकरण

42. ( क्र. 6638 ) डॉ. गोविन्द सिंह : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2015 में सेल्‍स टैक्‍स विभाग (वाणिज्यिक कर विभाग) के कितने प्रथम श्रेणी स्‍तर के अधिकारियों को लोकायुक्‍त द्वारा रिश्‍वत लेते रंगे हाथों कब-कब पकड़ा गया? उनका नाम, पदनाम व पदस्‍थापना सहित बताएं। इन पकड़े गये अधिकारियों में किनकों निलंबित किया गया तथा किनका स्‍थानान्‍तरण किया गया? यदि नियमानुसार उनके विरूद्ध कड़ी कार्यवाही नहीं की गई तो क्‍यों? (ख) उपरोक्‍त प्रश्‍नांश के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या छतरपुर और सतना जिले में कारोबार करने वाली मेसर्स पेपटेक हाउसिंग प्रा. लि. के व्‍यापारी के यहां वर्ष 2013 में विभाग के एंटी एवेजन ब्‍यूरो सतना द्वारा छापा मारा गया था एवं प्रकरण क्र. 370/13 दर्ज किया गया था? यदि हाँ, तो प्रकरण में कितनी राशि का वेट टैक्‍स और पेनाल्‍टी लगाई गई थी? (ग) प्रश्‍नांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या उक्‍त वेट टैक्‍स एवं पेनाल्‍टी हटाकर पिछली कार्यवाही को शून्‍‍य घोषित कर शासन को करोड़ों रूपए के राजस्‍व की क्षति पहुंचाई गई? यदि हाँ, तो इसके लिए कौन-कौन दोषी है एवं उक्‍त टैक्‍स चोरी की राशि की वसूली किस प्रकार से की जाएगी?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। संबंधित अधिकारियों के विरूद्ध नियमानुसार कार्यवाही की गई है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) दिनांक 20/02/2013 को एन्‍टी इवेजन ब्‍यूरो सतना द्वारा मेसर्स पेपटेक हाउसिंग प्रा.लि. पर छापा मारा गया था। मेसर्स पेपटेक हाउसिंग प्रा.लि. छतरपुर वैट प्रकरण क्र. 370/13 में श्री ए.के. श्रीवास्‍तव तत्‍कालीन सहायक आयुक्‍त, वाणिज्यिक कर इन्‍दौर कैंप सागर द्वारा एकपक्षीय आदेश पारित दिनांक 27/02/2015 से अपवंचित वैट रूपये 3,17,51,787/- एवं शास्ति रूपये 6,35,03,574/- कुल रूपये 9,52,55,361/- का मांग पत्र जारी किया गया एवं प्रवेश कर प्रकरण 371/13 आदेश पारित दिनांक 27/02/2015 में प्रवेश कर एवं ब्‍याज राशि रूपये 81,59,314/- का मांग पत्र जारी किया गया। (ग) प्रश्‍नांश (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में मेसर्स पेपटेक हाउसिंग प्रा.लि. छतरपुर प्रकरण क्र. मध्‍यप्रदेश वेट अधिनियम की धारा 34 (1) के अधीन नवीन कर निर्धारण आदेश पारित दिनांक 15.5.15 से श्री टी.सी. वैश्‍य तत्‍कालीन सहायक आयुक्‍त (वर्तमान में सेवानिवृत्‍त) वाणिज्यिक कर सागर द्वारा वैट एवं प्रवेश कर प्रकरण में अतिरिक्‍त मांग निरंक निकाली गई है। इस आदेश को धारा 47 (2) के तहत पुन: कार्यवाही हेतु लिया गया है, प्रकरण का परीक्षण किया जा रहा है। अंतिम आदेश पारित होने पर प्रावधानों के अनुरूप वसूली कार्यवाही की जावेगी।

परिशिष्ट - ''पंद्रह ''

नगर परिषद् के वार्डों में कराए गए कार्य

43. ( क्र. 6732 ) श्री रामकिशन पटेल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र के नगर परिषद् बरेली एवं उदयपुरा अन्‍तर्गत वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में विकास कार्यों हेतु कितना बजट स्‍वीकृत किया गया? परिषद्वार जानकारी देवें? (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित बजट में किस-किस वार्डों में कौन-कौन से कार्य, कितनी लागत से कराये गये? कार्यों की वर्तमान स्थिति क्‍या है? परिषद् एवं वार्डवार जानकारी देवें? (ग) नगर परिषद् बरेली एवं उदयपुरा से पार्षदों द्वारा वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में कौन-कौन से प्रस्‍ताव विकास कार्यों के प्राप्‍त हुये, कितने प्रस्‍ताव पर तकनीकी प्रतिवेदन तैयार किये जाकर स्‍वीकृति हेतु परिषद् की बैठक एवं पी.आई.सी. की बैठक में स्‍वीकृत हेतु प्रस्‍तुत किये गये? कितने प्रस्‍ताव मान्‍य एवं अमान्‍य किये गये? प्रस्‍तुत प्रस्‍ताव की जानकारी वार्डवार देवें?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) उदयपुरा विधानसभा क्षेत्रांतर्गत नगर परिषद् बरेली में वर्ष 2014-15 में विकास कार्य हेतु राशि रूपयें 1,60,00,000/- एवं वर्ष 2015-16 में राशि रूपयें 2,00,00,000/- विकास कार्य हेतु स्‍वीकृत किये गये है तथा उदयपुरा नगर परिषद् में वर्ष 2014-15 में विकास कार्यों हेतु राशि रूपयें 7,38,98,000/- तथा 2015-16 में राशि रूपयें 8,28,48,000/- स्‍वीकृत किये गये है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) उदयपुरा एवं बरेली में पार्षदों से प्राप्‍त विकास कार्यों के समस्‍त प्रस्‍ताव परिषद्/पी.आई.सी. की बैठक में स्‍वीकृत किये गये है। विवरण जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। कोई भी प्रस्‍ताव अमान्‍य नहीं किये गये है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्‍थापना

44. ( क्र. 6751 ) श्रीमती अर्चना चिटनिस : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या बुरहानपुर शहर में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्‍थापना प्रस्‍तावित है? (ख) यदि हाँ, है, तो वर्तमान में प्रतिमा स्‍थापना किये जाने की प्रक्रिया की क्‍या स्थिति है? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) के संबंध में मान. मुख्‍यमंत्री जी द्वारा घोषणा की गयी थी? यदि हाँ, तो कब? (घ) प्रश्‍नांश (क) से संबंधित छत्रपति शिवाजी प्रतिमा स्‍थापना हेतु निश्‍चित समय-सीमा देवें।

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) जी हाँ। आयुक्‍त, नगर निगम, बुरहानपुर द्वारा प्रतिमा स्‍थापना हेतु यातायात विभाग को छोड़कर अन्‍य संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्‍त हो चुके है। यातायात विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्‍त होने पर नगर निगम, बुरहानपुर द्वारा अनुमति हेतु प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया जाने पर नियमानुसार प्रतिमा स्‍थापना हेतु अनुमति के संबंध में कार्यवाही की जावेगी। (ग) जी हाँ। दिनांक 02.01.2014 को। (घ) समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

मायसेम सीमेन्‍ट फैक्‍ट्री द्वारा उत्‍खनन

45. ( क्र. 6759 ) श्री प्रताप सिंह : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दमोह जिले में संचालित मायसेम सीमेन्‍ट फैक्‍ट्री नरसिंहगढ़ द्वारा किन-किन ग्रामों की कितनी-कितनी भूमि पर उत्‍खनन कार्य किया जा रहा है? कितने एकड़ क्षेत्र में कहाँ-कहाँ लीज स्‍वीकृत की गई है? स्‍वीकृत लीज अवधि एवं समाप्‍त अवधि बतलावें? (ख) प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित फैक्‍ट्री द्वारा उत्‍खनन कार्य के दौरान किये गये विस्‍फोटकों से फैले मलवे/धूल से कितने किलोमीटर दूर की फसलें नष्‍ट होती हैं एवं कितने ग्राम के ग्रामवासियों के स्‍वास्‍थ्‍य पर विपरित असर पड़ने से मृत्‍यु हुई है तथा कितने अस्‍वस्‍थ हैं? डस्‍ट एवं केमिकल से स्‍थानीय प्रवाहित नदी के प्र‍दूषित हुए जल के लिए कौन जिम्‍मेदार है? जिला प्रशासन अथवा अन्‍य संबंधित प्रदूषण बोर्ड द्वारा उपरोक्‍त तथ्‍यों की कब-कब जाँच करायी गई है? प्रदूषण बोर्ड से प्राप्‍त एन.ओ.सी. की स्थिति उपलब्‍ध करावें (ग) क्‍या दमोह लोकसभा क्षेत्र के सांसद द्वारा उल्‍लेखित क्षेत्र के भ्रमण के दौरान ग्रामवासियों ने फेफड़ा, ब्‍लड प्रेशर, रतौंधी, मानसिक बीमारी एवं शारीरिक विकलांगता होने संबंधी शिकायतें की गई थी? यदि हाँ, तो फैक्‍ट्री की प्रबंधन समिति द्वारा पीडि़त ग्रामवासियों की क्षतिपूर्ति की क्‍या भरपाई की गई है? (घ) प्रदूषित पर्यावरण से फसलें, मानव एवं जानवरों के स्‍वास्‍थ्‍य पर निरन्‍तर हो रहे विपरीत असर के लिए कौन जिम्‍मेदार है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट में दर्शित है। (ख) प्रश्‍नांश '' में उल्‍लेखित फैक्‍ट्री द्वारा उत्‍खनन कार्य के दौरान फसले नष्‍ट होने, ग्राम वासियों के स्‍वास्‍थ्‍य पर विपरीत असर पड़ने से मृत्‍यु होने एवं अस्‍वस्‍थ्‍य होने संबंधी कोई शिकायत अथवा सूचना प्राप्‍त नहीं है। स्‍थानीय प्रवाहित नदी के जल नमूने की जाँच दिनांक 20.03.2016 को की गई है। परिणाम निर्धारित मानकों के अनुरूप पाये गये है। डस्‍ट एवं केमिकल से नदी में प्रदूषण की स्थिति नहीं पायी गई। उद्योग की उत्‍खनन ईकाई को म.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा प्रदत्‍त जल/वायु सम्‍मति की वैधता दिनांक 31.01.2017 तक है। (ग) इस प्रकार की जानकारी प्राप्‍त नहीं है। प्रश्‍नांश में उल्‍लेखित तथ्‍यों के संबंध में उत्‍तर प्रश्‍नांश '' में दर्शित किया गया है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) प्रश्‍नांश '' में दिये उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''सोलह ''

राज्‍य की आर्थिक स्थिति

46. ( क्र. 6778 ) श्री सचिन यादव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राज्‍य सरकार की वर्तमान आर्थिक स्थिति क्‍या है वर्तमान में कुल कितना-कितना कर्ज कहाँ-कहाँ से लिया गया है? कर्जवार जानकारी दें? (ख) वर्तमान में राज्‍य सरकार ने किन-किन चीजों पर कितना वेट लगा रखा है और क्‍यों कारण दें साथ ही बतायें कि उक्‍त वेट क्‍या निर्धारित सीमा से अधिक है? हाँ तो क्‍यों कारण दें? (ग) भारत सरकार से प्रदेश सरकार को कुल कितनी-कितनी राशि कब-कब किस-किस मद में प्राप्‍त हुई? जुलाई 2016 से प्रश्‍नांकित दिनांक तक की जानकारी दें? (घ) वर्तमान में राज्‍य सरकार कर्ज मुक्‍त होने के लिए कौन-कौन से प्रयास किस-किस योजना अंतर्गत कर रही है? नहीं तो क्‍यों? क्‍या कर्ज की सीमा बढ़ाये जाने हेतु भारत सरकार को कोई पत्र प्रेषित किया गया है? हाँ तो विवरण देवें।

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) संतोषजनक 31 मार्च 2015 को कुल बाजार ऋण रुपये 43149.92 करोड़, केंद्र सरकार का ऋण रूपये 13253.83 करोड़, अन्य संस्थाओं से रूपये 25857.76 करोड़ एवं भविष्य निधि आदि रूपये 11049.79 करोड़, सब्याज जमा परिवार कल्याण निधि योजना आदि रूपये 58.69 करोड़, शासकीय कर्मचारी समूह बीमा योजना रूपये 1609.26 करोड़ है. वर्ष 2016-17 का लेखा महालेखाकार से प्राप्त होने पर वर्ष 2016-17 की जानकारी दर्शित होगी. (ख) राजस्व प्राप्ति के हित को दृष्टिगत रखते हुए मध्यप्रदेश वेट अधिनियम, 2002 की अनुसूची 2 के अनुसार विभिन्न वस्तुओं को लगाये गए वेट कर की सूची, अधिसूचना क्रमांक (44) दिनांक 17.12.2015 तथा अधिसूचना क्रमांक (11) दिनांक 22.1.2016 पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र , बी, सी एवं डी पर है. कर की दरें निर्धारित सीमा से अधिक नहीं हैं. (ग) प्रश्नांश अनुसार बाजार ऋण, केन्द्र से ऋण एवं अन्य संस्थाओं से ऋण की स्थिति है. 31 मार्च 2015 की स्थिति में केन्द्रीय करों में हिस्सा रूपये 24106.80 करोड़ एवं केंद्र से सहायता अनुदान रूपये 17591.44 करोड़ प्राप्त हुए थे. वर्ष 2016-17 का लेखा महालेखाकार से प्राप्त होने पर वर्ष 2016-17 की जानकारी दर्शित होगी. (घ) सरकार द्वारा ऋण राज्य की विकासात्मक गतिविधियों की निरंतरता बनाये रखने की वजह से लिया जाता है. राज्य यथा समय ऋण/ब्याज का भुगतान कर रहा है. 14 वें वित्त आयोग की अनुशंसा के अनुक्रम में केंद्र सरकार को पत्र लिखा गया है, जिसकी प्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र पर है.

बारना नहर का विस्‍तार

47. ( क्र. 6852 ) श्री वीरसिंह पंवार : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या बारना परियोजना के सुदृढ़ीकरण एवं सैन्‍य क्षेत्र में दस हजार हेक्‍टेयर वृद्धि करने के लिए राशि 582 करोड़ स्‍वीकृत की गई है यदि हाँ, तो उक्‍त राशि से क्‍या-क्‍या कार्य कराये जायेगें? (ख) उक्‍त विस्‍तार कार्य में विकासखण्‍ड उदयपुरा के किन-किन ग्रामों में नहर निर्माण का कार्य किया जायेगा ग्रामों के चयन का आधार क्‍या है उक्‍त कार्य कब तक पूर्ण होगा?

जल संसाधन मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) बारना परियोजना की प्रशासकीय स्‍वीकृति राशि रू. 581.00 करोड़ की दिनांक 15.02.2013 को दी गई है। परियोजना की नहर प्रणाली के जीर्णोद्धार, सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण के साथ-साथ रूपांकित सैच्‍य क्षेत्र 9917 हेक्‍टेयर बढ़ाने का कार्य शामिल है। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। सैच्‍य क्षेत्र का निर्धारण बहाव से सैच्‍य क्षेत्र में जल उपलब्‍ध कराने की तकनीकी संभावना के आधार पर किया गया है।

परिशिष्ट ''सत्रह''

दमोह जिले में लाइन स्‍टोन की लीज

48. ( क्र. 6868 ) श्री लखन पटेल : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या दमेाह जिले में मैसूर सीमेंट प्रायवेट लि. नरसिंहगढ़ एवं एक-एक ग्राम में लाईन स्‍टोन के लिए खनन हेतु लीज दी गई है यदि हाँ, तो वर्षवार, ग्रामवार एवं शर्तवार बतायें उपरोक्‍त खनन की लीज इसके पूर्व किसे आवंटित थी क्‍या पूर्व में आवंटित ठेकेदार या कंपनी से रायल्‍टी की राशि शेष है तो कितनी राशि शेष है वर्षवार, ग्रामवार बतायें? (ख) प्रश्‍नांश (क) कितनी राशि रायल्‍टी कंपनी द्वारा जमा की गई है कितनी राशि शासन के खाते में जमा किया जाना शेष है वर्षवार, लाईन स्‍टोन की जानकारी खदानवार वर्षवार बतायें? (ग) शेष राशि पर ब्‍याज कितना निर्धारित किया गया है?

ऊर्जा मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी हाँ। प्रश्‍नानुसार खनिपट्टा पूर्व में अन्‍य किसी को आवंटित नहीं था। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) प्रश्‍नाधीन कंपनी द्वारा विगत 3 वर्षों में वर्षवार जमा रायल्‍टी खदानवार संलग्‍न परिशिष्‍ट में दर्शित है। चूना पत्‍थर से सीमेंट निर्माण हेतु 1:1.6 परिवर्तन सूत्र के आधार पर राशि रूपये 67.54 करोड़ का मांग पत्र प्रश्‍नाधीन कंपनी को प्रेषित किया गया है। (ग) ब्‍याज की राशि का निर्धारण अभी नहीं किया गया है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''अठारह''

नगर निगम बुरहानपुर में लेखांकन कार्य

49. ( क्र. 6871 ) श्रीमती अर्चना चिटनिस : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या वर्तमान में भी नगर निगम बुरहानपुर में लेखांकन कार्य द्विप्रविष्टि प्रणाली के आधार पर ही किया जा रहा है? (ख) क्‍या जी.आई.एस. सर्वेक्षण की रिपोर्ट की अनुशंसाओं को नगर पालिका निगम द्वारा लागू कर दिया गया है? (ग) यदि हाँ, तो नगर निगम को इससे क्‍या लाभ हुआ है और यदि नहीं, तो शासन द्वारा इतनी बड़ी धन राशि व्‍यय करके नगर निगम में लागू की गई सुधार प्रणाली का क्रियान्‍वयन नहीं किए जाने के लिए कौन दोषी है?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जी हाँ (ग) जी.आई.एस. सर्वे के पूर्व नगर निगम अभिलेख अनुसार 25089 संपत्तियां दर्ज थी। सर्वे के पश्‍चात नगर निगम सीमा में 34300 संपत्तियों का आंकलन किया गया, तद्नुसार 9211 संपत्तियों की वृद्धि हुई जो 37 प्रतिशत होती है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

भोपाल नगर में लोहा व्‍यवसाय को व्‍यवस्थित

50. ( क्र. 6875 ) श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या लोहा व्‍यवसायी निर्माता संघ, भोपाल के आावेदन पर राजधानी भोपाल में लोहा मण्‍डी की स्‍थापना का प्रस्‍ताव कलेक्‍टर भोपाल द्वारा पत्र क्रमांक 1136 दिनांक 31.5.14 द्वारा प्रमुख सचिव आवास एवं पर्यावरण विभाग म.प्र. शासन को भेजा गया था? (ख) क्‍या कलेक्‍टर के उक्‍त पत्र के पश्‍चात नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग के पत्र क्रमांक एफ-3-22/2014 बत्‍तीस दिनांक 3 नवंबर, 2015 के द्वारा निर्धारित दिशा निर्देश के अंतर्गत प्रकरण प्रेषित किये जाने हेतु कलेक्‍टर को लिखा गया था? (ग) यदि हाँ, तो उक्‍त पत्र पर कलेक्‍टर भोपाल द्वारा प्रश्‍न दिनांक तक क्‍या कार्यवाही की गई? (घ) क्‍या शासन लोहा व्‍यवसायी एवं निर्माता संघ की वर्षों पुरानी मांग के दृष्टिगत तथा लोहे के सरियों से भरे ट्रकों जो अभी शहर के बीच से कई स्‍थानों पर जाते हैं उसके कारण हो रही दुर्घटनाओं को रोकने की दृष्टि से ग्राम कानासैया में ट्रांसपोर्ट नगर के करीब व्‍यवसायिक सुविधा की दृष्टि से प्रस्‍तावित एवं लोहा मण्‍डी हेतु चिन्हित भूमि खसरा नं. 373, 375/2, 412, 419, 449, 450 में बसाने हेतु शीघ्र आगामी कार्यवाही करेगा, यदि हाँ, तो कब तक नहीं तो क्‍यों?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। (ग) कलेक्टर, जिला भोपाल ने अवगत कराया है कि शासन के नियम अनुसार किसी भी व्यापारी संघ को भूमि आवंटन किये जाने का प्रावधान नहीं है। (घ) उत्तरांश के परिप्रेक्ष्य में समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

पौराणिक, धार्मिक, दार्शनिक एवं पवित्र नगरी महेश्‍वर, मण्‍डलेश्‍वर में पर्यटन को बढ़ावा

51. ( क्र. 6880 ) श्री राजकुमार मेव : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2014-15 से प्रश्‍न दिनांक तक पर्यटन हेतु महेश्‍वर, मण्‍डलेश्‍वर एवं आस-पास के दर्शनीय स्‍थलों को देखने हेतु कितने देशी एवं विदेशी पर्यटक आये हैं? महेश्‍वर में देशी एवं विदेशी पर्यटकों की सुविधा हेतु विभाग द्वारा क्‍या-क्‍या सुविधाएं उपलब्‍ध कराई गईं एवं सिंहस्‍थ 2016 को दृष्टिगत रखते हुये पर्यटकों की सुविधा हेतु आगामी क्‍या योजना बनाई गई है एवं उनका क्रियान्‍वयन कब तक किया जावेगा? (ख) सिंहस्‍थ 2016 को दृष्टिगत रखते हुये पौराणिक, धार्मिक दार्शनिक एवं पवित्र नगरी महेश्‍वर, मण्‍डलेश्‍वर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा क्‍या योजना बनाई गई है एवं वर्ष 2015-16 में कितना बजट प्रावधान किया गया है? कितना स्‍वीकृत किया गया है? कितना व्‍यय किया गया है? (ग) क्‍या महेश्‍वर, मण्‍डलेश्‍वर में पर्यटन को बढ़ावा दिये जाने हेतु नर्मदा नदी में स्‍टीमर चलाये जाने की कोई योजना तैयार की गई है? यदि हाँ, तो क्‍या एवं कब तक इसका क्रियान्‍वयन किया जावेगा? पर्यटन स्‍थल महेश्‍वर के सहस्‍त्रधारा में सलालम, कयाक वाटर स्‍पोटर्स नेशनल चैम्पियनशिप की प्रतियोगिता आयोजित किया जाने की तैयारी भी की जा रही है? यदि हाँ, तो इसके लिए पर्यटन विभाग क्‍या कार्ययोजना एवं कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्‍ध करायेगा? (घ) क्‍या सिंहस्‍थ 2016 को दृष्टिगत रखते हुये महेश्‍वर पर्यटन के लिए कोई विशेष कार्ययोजना बनाई गई है? यदि हाँ, तो क्‍या एवं उसका क्रियान्‍वयन कब तक किया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जनवरी, 2014 से फरवरी, 2016 तक महेश्‍वर में 24,57,841 देशी एवं 2294 विदेशी पर्यटक धार्मिक नगरी महेश्‍वर में पर्यटन हेतु आये हैं। महेश्‍वर में देशी एवं विदेशी पर्यटकों की सुविधा हेतु होटल इकाई का संचालन किया जा रहा है। जी नहीं। शेष का प्रश्‍न ही उपस्थित नहीं होता। (ख) जी नहीं। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। पर्यटन स्‍थल महेश्‍वर के सहत्रधारा में दिनांक 11 से 14 मार्च, 2016 को कैनो स्‍लालम एवं कैनो मैराथन की राष्‍ट्रीय प्रतियोगिता का आयोजन किया जा चुका है। खेल विभाग द्वारा सहस्‍त्रधारा में खिलाडि़यों के प्रशिक्षण हेतु कैनो स्‍लालम कोर्स का निर्माण किया गया है। (घ) जी नहीं। शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

नर्मदा मालवा गंभीर लिंक परियोजना

52. ( क्र. 6890 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यानसिंह सोलंकी : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या नर्मदा मालवा गंभीर लिंक परियोजना का कार्य मेसर्स नवयुगा इंजीनियरिंग कंपनी को दिया गया है? यदि हाँ, तो उक्‍त कार्य की प्राक्‍कलन राशि, कार्य के ठेके की राशि कार्य पूर्ण करने की अवधि, अनुबंधानुसार कार्य आरंभ करने की तिथि, वास्‍तविक कार्य प्रारंभ करने की तिथि, अनुबंधानुसार कार्य पूर्ण करने की तिथि की जानकारी दी जावे? (ख) कार्य आरंभ करने की तिथि से आज तक एजेन्‍सी में कितनी राशि का कार्य किया है? क्‍या निर्माण कार्यक्रम के अनुसार एजेन्‍सी ने लक्ष्‍य प्राप्ति की गई है? यदि नहीं,, तो क्‍यों एवं उसके लिये कौन दोषी है, तथा दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जावेगी? कार्य की धीमी प्रगति के लिये निर्माण एजेन्‍सी को अनुबंधानुसार दंडित किये जाने का क्‍या प्रावधान है? (ग) इसके तहत अब तक शासन के हित में कितनी राशि का दंड वसूला गया है एवं किस मद में जमा किया गया है? कार्य में प्रयुक्‍त होने वाली निर्माण सामग्री जैसे एम.एस. पाईप, तार स्‍टील, प्‍लेन स्‍टील, सीमेंट, रेत, गिट्टी एवं इलेक्ट्रिकल्‍स आईटम इत्‍यादि की अनुबंधानुसार गुणवत्‍ता विरूपित करने के लिये एजेन्‍सी के पास या विभाग के पास कोई गुणवत्‍ता नियंत्रण की प्रयोगशाला उपलब्‍ध है? यदि हाँ, तो कहाँ पर है एवं उसकी रिपोर्ट समय-समय पर शासन को सौंपी गई अथवा नहीं? (घ)