मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा दशम् सत्र

 

फरवरी-अप्रैल,2016 सत्र

 

गुरूवार, दिनांक 31 मार्च, 2016

 

(11 चैत्र, शक संवत्‌ 1938 )

 

 

[खण्ड- 10 ] [अंक- 21 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरूवार, दिनांक 31 मार्च, 2016

 

(11 चैत्र, शक संवत्‌ 1938 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

पृच्छा

 

नियम 139 के अधीन प्रदेश में गंभीर पेयजल संकट व्याप्त होने संबंधी चर्चा की मांग विषयक

 

उप नेता प्रतिपक्ष(श्री बाला बच्चन) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रदेश में भीषण पीने के पानी की समस्या है , हमने स्थगन और ध्यानाकर्षण दिया है लेकिन अभी तक सरकार से आपने जवाब नहीं मांगा है. हम चाहते हैं कि प्रश्नकाल के पहले इस गंभीर समस्या पर आपकी व्यवस्था आनी चाहिये.

अध्यक्ष महोदय-- पहले प्रश्नकाल हो जाने दें.

श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, हमें मालूम है कि प्रश्नकाल है.लेकिन प्रदेश के 43 जिलों की 286 तहसीलों में भयंकर सूखा पड़ा है, हैंडपंप सूख गये हैं, कुंए, तालाब, नदी सारे सूख गये हैं. लोगों का पलायन हो रहा है. ....व्यवधान...

संसदीय कार्य मंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र)-- अध्यक्ष जी, सरकार का जवाब चाहिये तो लंच के बाद दे देंगे. ....व्यवधान...

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, आसंदी से व्यवस्था आई थी कि आप इस गंभीर समस्या को 139 के तहत लेने वाले थे. आज हमने जब कार्यसूची देखी तो नियम 139 में दूसरी चर्चा ग्राह्य कर ली गई. सरकार जनहित के मुद्दों से भाग रही है. सरकार जनहित के मुद्दों पर चर्चा नहीं कराना चाहती है. सरकार को जनता के हितों से कोई वास्ता नहीं है. अध्यक्ष महोदय आपसे विनम्रतापूर्वक प्रार्थना है ...

श्री आरिफ अकील-- चर्चा मत - पानी दो - पानी दो. ....व्यवधान...

श्री बाला बच्चन-- अध्यक्ष महोदय, हमें उम्मीद थी कि आप नियम 139 के तहत इस गंभीर मुद्दे पर सदन में चर्चा करायेंगे. आज की कार्यसूची में भी वह चर्चा नहीं आई है.

श्री आरिफ अकील -- पानी दो- पानी दो.

अध्यक्ष महोदय-- कृपया एक मिनिट सुन लें.

श्री बाला बच्चन-- अध्यक्ष जी हमें उम्मीद थी कि आज की कार्यसूची में यह विषय होगा. लेकिन नहीं आया है.

अध्यक्ष महोदय-- कृपया सुनें.

डॉ.नरोत्तम मिश्र -- (विपक्ष के सदस्यों से) अध्यक्ष महोदय खड़े हुये हैं, कुछ तो मर्यादा रखें.

अध्यक्ष महोदय-- एक मिनिट सुन लीजिये आप.

श्री निशंक कुमार जैन -- अध्यक्ष महोदय, इतिहास में पहली बार गंभीर पानी के संकट के कारण जानवर-मवेशी भी पलायन कर रहे हैं. ....व्यवधान...

श्री मुकेश नायक-- माननीय अध्यक्ष जी, नियम 139 के तहत भी हम लोगों ने आपसे चर्चा कराने का आग्रह किया था अगर आप इस कल भी चर्चा कराने के संबंध में अपनी व्यवस्था दे दें क्योंकि ऐसा अभूतपूर्व जल संकट मध्यप्रदेश के इतिहास में कभी नहीं आया.

अध्यक्ष महोदय-- आप सुन लें एक मिनिट....व्यवधान...

श्री मुकेश नायक -- अध्यक्ष महोदय, लोगों ने हजारों मवेशी को खुले छोड़ दिया है, जहां जाना हो जाओ, 10-10 किलोमीटर लोग गांव में पानी लेने के लिये जा रहे हैं. आपसे विनम्र प्रार्थना है कि इस पर आप व्यवस्था दें कि कल 139 के तहत आप इस विषय पर सदन में चर्चा करायेंगे.

अध्यक्ष महोदय-- सुन तो लें आप. प्रश्नकाल हो जाने दें. संसदीय कार्य मंत्री जी ने कहा है कि इसके बाद में शासन जानकारी देगा . आप चाहें तो कक्ष में इस बारे में बात की जा सकती है. ....व्यवधान...

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, कक्ष में चर्चा हो चुकी है. कक्ष में आपने ही कहा था कि 139 में इसको लेंगे. आज की कार्यसूची में दूसरा विषय छपा है.

अध्यक्ष महोदय-- देखिये इस तरह की जिद करना उचित नहीं है.

 

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय,यह दुर्भाग्यपूर्ण है. प्रदेश में इस मंच से हम जनहित के मुद्दों को नहीं उठा सकते .

अध्यक्ष महोदय-- इस तरह से जिद करना उचित नहीं है.

श्री बाला बच्‍चन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कम से कम पानी पिलाने की व्‍यवस्‍था तो लोगों को करें, प्रदेश की जनता को पानी तो पिलवाये सरकार, आप इस पर व्‍यवस्‍था दें, नियम 139 के अंतर्गत आप चर्चा करायें, आपने स्‍थगन भी दिया है, पूरे प्रदेश में मवेशी को पानी नहीं मिल रहा है....... (व्‍यवधान).....

अध्‍यक्ष महोदय-- पेयजल समस्‍या पर अलग-अलग माननीय सदस्‍यों के 5 ध्‍यानाकर्षण लगभग ले चुके हैं. ....... (व्‍यवधान).....

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पर्याप्‍त नहीं है, मैंने भी ध्‍यानाकर्षण लगाया था, आपने मुझसे स्‍वयं स्‍वीकार किया था कि 139 की चर्चा लेंगे और आपको भी इस बात का अहसास है. प्रदेश में भीषण पेयजल संकट है. ....(व्‍यवधान).....

अध्‍यक्ष महोदय-- आपसे बात होने के बाद भी सदस्‍यों के ध्‍यानाकर्षण लिये गये, विशेष आग्रह पर, अब उसी विषय पर कितनी बार चर्चा करायेंगे. ....... (व्‍यवधान).....

श्री सुंदरलाल तिवारी-- इतने भीषण जल संकट के बाद भी सरकार चर्चा के लिये तैयार नहीं है. ....... (व्‍यवधान).....

डॉ. गोविंद सिंह-- पाइप नहीं पहुंचे जिलों में, हेण्‍डपम्‍प सूख चुके हैं. ....... (व्‍यवधान).....

श्री रामनिवास रावत-- नदी नाले सूख गये हैं, सरकार कोई व्‍यवस्‍था नहीं कर रही. ....... (व्‍यवधान).....

अध्‍यक्ष महोदय-- सरकार कहना चाहती है कुछ, आप सुनना नहीं चाहते.

श्री रामनिवास रावत-- आपने 139 पर दूसरी चर्चा ले ली, पेयजल जैसा मुद्दा जो जनहित का है, वह आपको दिखाई नहीं दिया, आपने स्‍वयं कहा था.

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यों द्वारा अपने स्‍थान पर खड़े होकर "हमको पानी दो सरकार" के नारे लगाये गये.)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये पानी का संकट है, इन्‍होंने कहा कि हम जवाब दें, हमनें कहा कि हम जवाब देने को तैयार हैं. जब सरकार जवाब देने को तैयार है तो यह जवाब सुनने को तैयार क्‍यों नहीं हैं. ....... (व्‍यवधान).....

श्री रामनिवास रावत-- स्‍थगन स्‍वीकार कर लो ....... (व्‍यवधान).....

श्री सुंदरलाल तिवारी-- स्‍थगन स्‍वीकार किया जाये माननीय अध्‍यक्ष महोदय.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम कह रहे हैं कि यह प्राकृतिक संकट है, पेयजल संकट पर सरकार पूरी मुस्‍तैदी से काम करने को तैयार है, लेकिन उस पर भी ये सिर्फ राजनैतिक रोटियां सेंकने के लिये प्रश्‍नकाल को बाधित कर रहे हैं जो एक निंदा की बात है, आपने कहा कि यह शून्‍यकाल में चर्चा हो, हम चर्चा को तैयार हैं, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शून्‍यकाल में चर्चा करें, (विपक्ष की तरफ इशारा करते हुये) बैठें सीट पर जाकर, क्‍या प्रश्‍नकाल में चर्चा हो सकती है इस बात की, किस बात पर चर्चा करना चाहते हैं यह. ....... (व्‍यवधान)..... राजनैतिक रोटियां सेंकने का काम करते हैं, कभी डंडा लेकर आते हैं, कभी कमंडल लेकर आते हैं. (XXX)....... (व्‍यवधान).....

अध्‍यक्ष महोदय-- आप कृपया बैठ जायें. आप गंभीर मान रहे हैं तो बात सुनें जब आप विषय को गंभीर मान रहे हैं तो जवाब सुनिये न सरकार का, 5 काल अटेंशन लिये गये.

डॉ. गोविंद सिंह-- नरोत्‍तम जी (XXX), जनता को पानी नहीं मिल रहा, जिले में पाइप नहीं है अभी, नट, बोल्‍ट के बोल्‍ट नहीं हैं, पानी की व्‍यवस्‍था है नहीं, जिलों में एक रूपया नहीं पहुंचा है. ....... (व्‍यवधान).....

 

गर्भगृह में प्रवेश

("अब तो पानी दो सरकार" का नारा लगाते हुये इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण गर्भगृह में आये.)

अध्‍यक्ष महोदय-- बैठ जाइये आप, कृपा करके बैठ जायें. सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिये स्‍थगित)

 

(सदन की कार्यवाही 11.08 बजे से 10 मिनट के लिये स्‍थगित की गई)

 

समय 11.22 बजे विधान सभा की कार्यवाही पुनः समवेत हुई.

अध्यक्ष महोदय (डॉ सीतासरन शर्मा ) पीठासीन हुए.

श्री बाला बच्चन-- अध्यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश में भीषण पेयजल संकट है. बहुत दिनों से इस विषय पर कई विधायकों ने ध्यानाकर्षण, स्थगन और नियम 139 की चर्चा की मांग करते रहे हैं. भीषण पेयजल के चलते हुए व्यक्तियों, मवेशियों के लिए पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है. हम सभी विधायकों ने आग्रह किया है. मैं समझता हूं कि नियम 139 पर चर्चा करानी चाहिए. जिससे पूरे प्रदेश में पानी की जो समस्या है, उसकी व्यवस्था सरकार करा सके और प्रदेश की जनता को समस्या से निजात मिल सके. यह हमारे पूरे दल की तरफ से आग्रह है कि इस भीषण समस्या से हम किस तरह से निपटे, जिससे पानी की समस्या हल हो सके. मवेशियों, व्यक्तियों सबको पीने का पानी मिल सके. इस पर चर्चा होना चाहिए.

अध्यक्ष महोदय-- इस संबंध में शासन का क्या कहना है?

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ नरोत्तम मिश्र)--अध्यक्ष महोदय, सम्मानित नेता प्रतिपक्ष ने जब यह बात कही थी कि शासन का जवाब नहीं आया है. उस समय भी मैंने कहा था कि हम जवाब आज भी देने को तैयार हैं. अध्यक्ष महोदय, विपक्ष की बात हो या सत्ता पक्ष की बात हो. यह सच है कि पेयजल संकट है. लेकिन यह संकट कोई सरकार का दिया हुआ नहीं है. यह प्राकृतिक है और ईश्वर का दिया संकट है. सरकार पूरी मुस्तैदी के साथ. पूरी ताकत, पूरी शिद्दत के साथ, पूरी मेहनत के साथ जनता की सेवा करना चाहती है. जहां तक सम्मानित नेता प्रतिपक्ष का सवाल है, वह चर्चा कराने की बात कर रहे हैं तो यह माननीय शिवराज सिंह चौहान जी की सरकार है और यह कभी चर्चा से भागती नहीं है. मैं इस बात का पक्षधर हूं और हमेशा कहते रहे हैं कि यह फ्लोर हमें चर्चा के लिए मिला है, हल्ला करने को नहीं मिला है. हल्ला सड़क पर हो,चर्चा यहां पर हो. नेता प्रतिपक्षजी जब चाहें...मेरी पूरी बात हो जाने दें.(व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत-- इसमें हल्ला वाली बात कहां से आ गई? (व्यवधान) यह आपत्ति जनक है.

डॉ नरोत्तम मिश्र-- मेरी पूरी बात होने दें.(व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत-- आप जो कहेंगे वह सुनेंगे. (व्यवधान)

डॉ नरोत्तम मिश्र-- मेरी बात के बाद बोले ना.(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--आप पहले सुन लें.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- हम अपनी बात बोलें तो हल्ला. (व्यवधान)

डॉ नरोत्तम मिश्र-- यह तरीका गलत है. (व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत-- हम जब समस्या उठायें तो हल्ला(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--आप चर्चा कराना चाहते हैं या नहीं?

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अगर पानी की बात करें तो हल्ला है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--तिवारीजी, सुन लीजिए.

डॉ नरोत्तम मिश्र--अध्यक्ष महोदय, पानी की बात हो या अन्य कोई बात हो, जब जब यहां पर सूखे की बात की गई, पानी की बात की गई या अन्य विषय की बात की गई, सरकार ने कभी चर्चा से पलायन नहीं किया. जैसा नेता प्रतिपक्ष ने कहा है, मेरी गुजारिश है कि नेता प्रतिपक्ष जी जब चाहें, जैसे चाहें, जिस नियम के तहत चाहें उस नियम के तहत चर्चा करें, सरकार जनता की सेवा के लिए पूरी ताकत के साथ तैयार है.

अध्यक्ष महोदय - माननीय प्रतिपक्ष के नेता जी और संसदीय कार्यमंत्री जी, दोनों की बातें मैंने सुनी और आज लंच के बाद अपराह्न में नियम 139 के तहत पेयजल की समस्या पर चर्चा कराई जाएगी. अब प्रश्नकाल चलने दें. (मेजों की थपथपाहट)..

श्री बाला बच्चन - धन्यवाद, माननीय अध्यक्ष महोदय.

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

दिव्‍यांगों को उपकरण का प्रदाय

1. ( *क्र. 6764 ) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुरैना जिले में विकलांगों की संख्‍या कितनी है, वर्ष 2014-2015 में क्‍या उक्‍त लोगों की गणना की गई थी? (ख) उक्‍त अवधि में कितने विकलांगों को उपकरण, यंत्र जीवन की सुगमता बनाने हेतु कार्यक्रमों में बांटे गये दिनांक, वर्षवार संख्‍या सहित जानकारी दी जावे? (ग) क्‍या शासन द्वारा विकलांगों, दिव्‍यांगों के जीवन को सुगम बनाने हेतु जो योजना चलाई गई है, जिला स्‍तर पर उनका क्रियान्‍वयन बहुत ही धीमी गति से किया जाता है? क्‍यों? (घ) उक्‍त अवधि में किये गये कार्यक्रमों की विकलांगों को सूचना देने का माध्‍यम क्‍या रहा था, क्‍या उक्‍त माध्‍यम से सभी विकलांगों को निश्चित दिनांक पर सूचना प्राप्‍त हुई थी?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) मुरैना जिले में वर्ष 2011-12 में स्पर्श अभियान के अन्तर्गत कराये गये सर्वेक्षण में 10,850 निःशक्तजन चिन्हित किये गये। जी नहीं। (ख) वर्ष 2014-15 में वित्तीय वर्ष के ज्यादातर समय में चुनाव आचार संहिता लागू रहने के कारण कार्यक्रम आयोजित नहीं होने से कृत्रिम अंग/सहायक उपकरण का वितरण नहीं किया गया। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी नहीं। शासन द्वारा निःशक्तजनों के जीवन को सुगम बनाने हेतु जिला स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन निरन्तर किया जा रहा है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) उत्तरांश के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

 

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार - अध्यक्ष महोदय, मैंने अपने प्रश्न के माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहा था, इसमें वर्ष 2011-12 में स्पर्श अभियान के तहत निःशक्तजनों की जो संख्या मुझे प्राप्त हुई है वह 10850 है. मैंने यह जानना चाहा था कि वर्ष 2014-15 में क्या उन लोगों की गणना फिर से की गई तो मुझे जो जवाब मिला है उसमें माननीय मंत्री महोदय ने कहा है कि चुनाव आचार संहिता लागू होने से कार्यक्रम आयोजित नहीं होने के कारण इनकी गणना नहीं हो पाई है. मैं यह चाहता हूं कि इनकी गणना फिर दोबारा से हो जाय क्योंकि बहुत सारे ऐसे निःशक्तजन जो गांवों में निवास करते हैं, वे इस सूची में छूट गये हैं, वे सब लोग इस सूची में आ जाएंगे. दूसरा प्रश्न मेरा माननीय मंत्री महोदय से यह है कि क्या इनके जीवन को सुगम बनाने के लिए सरकार कोई योजना बना रही है? मेरा ऐसा मानना है कि इसके लिए सरकार कोई नयी योजना बनाए क्योंकि वैसे ही जो निःशक्त लोग हैं, उनको 80 प्रतिशत विकलांग होने पर ही उनको पेंशन मिलेगी और उसमें यह भी बाध्यता कर दी गई है कि उनको बीपीएल में होना जरूरी है. अगर इस विषय पर भी माननीय मंत्री महोदय विचार करेंगे तो मुझे लगता है कि ठीक होगा.

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय, यह बात सही है कि पिछले वर्ष चुनाव का वातावरण था और आचार संहिता के कारण से यह केम्प नहीं लगाये जा सके थे. लेकिन जो जनसुनवाई कलेक्ट्रेट में होती है, उस दौरान काफी लोगों की मदद की गई. ट्राईसाइकिल दी गईं, केलिपर्स दिये गये, श्रवण यंत्र दिये गये और भी जो उपकरण निःशक्तजनों के लिए लगते हैं वे भी प्रदाय किये गये. अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्य ने इच्छा व्यक्त की है कि इस साल केम्प लगाकर फिर से एक बार निःशक्तजनों का परीक्षण किया जाएगा और उनके प्रमाण पत्र बनाएं जाएंगे और निःशक्तता को दूर करने के लिए उनके लिए जो भी आवश्यक व्यवस्थाएं होंगी, वह की जाएंगी. अध्यक्ष महोदय, इसी साल अप्रैल के महीने में पूरे प्रदेश में केम्प लगाकर फिर से निःशक्तजनों का परीक्षण किया जाएगा और उनके लिए आवश्यक जो सुविधाएं हैं, वह भी उपलब्ध कराई जाएंगी. (मेजों की थपथपाहट)..

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार - अध्यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री महोदय से एक और प्रश्न है कि इसका प्रचार-प्रसार ठीक तरह से हो जाय. देखने को मिलता है कि प्रचार-प्रसार ठीक न होने के कारण जो विकलांग दूर-दराज में निवास करते हैं उन्हें इन केम्पों का लाभ नहीं मिल पाता है. इनका प्रचार-प्रसार ठीक ढंग से हो जाय.

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय, पूरे मुक्कमल तरीके से प्रचार-प्रसार किया जाएगा और प्रत्येक घर पर हमारे कर्मचारी जाकर सूचित करेंगे कि ऐसा कोई व्यक्ति जो निःशक्तजन की परिभाषा में आता हो, यदि वह हो तो उस केम्प में वह आए, यह सुनिश्चित करने का काम विभाग ने कर लिया है.

श्री हरदीप सिंह डंग - मंत्री जी , यह 80 प्रतिशत की जगह 40 प्रतिशत किया जाय. यह जो 80 प्रतिशत किया गया है यदि उसको 40 प्रतिशत कर दिया जाता है तो उसे पेंशन की पात्रता आ जाएगी.

 

 

 

 

महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय रोजगार गारंटी योजना का क्रियान्‍वयन

2. ( *क्र. 7554 ) श्री मुकेश नायक : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में वित्‍तीय वर्ष 2014-15 तथा अप्रैल, 2015 से दिसम्‍बर, 2015 के बीच महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय रोजगार गांरटी योजना के अंतर्गत कितने जॉब कार्डधारियों के द्वारा जिलेवार कितने मानव दिवस श्रम कार्य किये गये और उनको कितनी राशि का भुगतान करना था? जिलेवार जानकारी प्रदान करें। (ख) उपरोक्‍त में से कितनी राशि का भुगतान किया गया है? यदि मजदूरी की राशि का भुगतान बकाया है, तो कितना है और शेष राशि का भुगतान कब तक करने की योजना है? जानकारी जिलेवार प्रदान करें। (ग) महात्‍मा गांधी राष्‍ट्रीय रोजगार गांरटी योजना के क्रियान्‍वयन के लिए वित्‍तीय वर्ष 2014-15 तथा अप्रैल, 2015 से दिसम्‍बर, 2016 तक केन्‍द्र सरकार से कितनी राशि कब-कब प्राप्‍त हुई है और यदि शेष है तो उसको प्राप्‍त करने की क्‍या योजना बनायी गयी है?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) प्रदेश में वित्तीय वर्ष 2014-15 तथा अप्रैल, 2015 से दिसम्बर, 2015 के बीच महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत जॉबकार्ड धारियों के द्वारा जिलेवार मानव दिवस श्रम कार्य किये गए और उनको राशि का भुगतान करना था, जिलेवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1 अनुसार है। (ख) उपरोक्त में से की गयी राशि का भुगतान एवं शेष मजदूरी की राशि के भुगतान की जिलेवार जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 2 अनुसार है। (ग) महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम के क्रियान्वयन हेतु वित्तीय वर्ष 2014-15 में राशि रु. 2451.63 करोड़ प्राप्त हुई माह अप्रैल, 2015 से वर्तमान दिनांक तक भारत सरकार से राशि रु. 2244.75 करोड़ प्राप्त हुई तथा शेष राशि हेतु भारत सरकार को पत्र प्रेषित किये गए हैं, पत्र की छायाप्रति पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 3 अनुसार है।

श्री मुकेश नायक - अध्यक्ष महोदय, पंचायत मंत्री ने मेरे प्रश्न के उत्तर में बताया है कि वर्ष 2014-15, और वर्ष 2015-16 में क्रमशः 2451.63 करोड़ रुपए और 2244.75 करोड़ रुपए की राशि मध्यप्रदेश की सरकार को प्राप्त हुई है. माननीय मंत्री महोदय से मैं जानना चाहता हूं कि वर्ष 2014-15 और वर्ष 2015-16 में कितनी धनराशि पिछले वर्षों की तुलना में केन्द्र सरकार से कम प्राप्त हुई है?

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय, जैसा कि सूची में उल्लेख हुआ है. वर्ष 2012-13 में कुल भुगतान 2934 करोड़ रुपए हुआ है, वर्ष 2013-14 में 2424 करोड़ रुपए हुआ है, वर्ष 2014-15 में 2710 करोड़ रुपए हुआ है और वर्ष 2015-16 में अभी तक 2265 करोड रुपए हुआ है, इससे आप तुलनात्मक अंदाज कर लेंगे.

श्री मुकेश नायक -- अध्यक्ष महोदय मेरा स्पेसिफिक प्रश्न है. मैंने इसमें कोड किया है कि राज्य सरकार को कितनी कितनी राशि प्राप्त हुई है. मैं स्पेसिफिक मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश सरकार ने दोनों वर्षो में कितनी राशि के लिए आग्रह किया था. डिमांड नोट क्या बनाकर भेजा था, और पिछले वर्ष की तुलना में कितनी धन राशि कम प्राप्त हुई है, तब ही इस पर चर्चा हो पायेगी कि मजदूरों का भुगतान कितना कम हुआ है, मजदूरों के कार्य दिवस कितने हैं, जाब कार्ड कितने लोगों के बनाये गये हैं और कितने लोगों को इसमें रोजगार दिया गया है और मध्यप्रदेश में इतने बड़े पैमाने पर पलायन की स्थिति क्यों है. इसलिए मैं मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि कितने रूपये इस वर्ष और पिछले वर्ष कितने रूपये मध्यप्रदेश की सरकार को केन्द्र सरकार से कम प्राप्त हुए हैं.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय मैं फिर इस बात को दोहरा रहा हूं. 2014-15 में 2491 करोड़, 2015-16 में 2244 करोड़ वित्तीय वर्ष 2014-15 में राज्य द्वारा अतिरिक्त राशि, राज्य ने जो राशि खर्च की थी अपने मद से 477 करोड़ रूपये की राशि का भुगतान राज्य मद से किया गया है. 2015-16 में इस राशि को समायोजित किया गया है और विभिन्न मदों के द्वारा 350 करोड़ रूपये की राशि इस वर्ष मजदूरी के हेड में प्रदाय की है. भारत सरकार की तरफ से हमें आश्वासन मिला है. लगभग 123 करोड़ रूपये की राशि अभी दो दिन पहले हमें भारत सरकार से प्राप्त हुई है, शेष हमारी डिमांड हैं लगभग 1100 करोड़ रूपये की यह डिमांड हमने भेजी हुई है. यह राशि जैसा कि भारत सरकार के वित्त मंत्री जी से, ग्रामीण विकास मंत्री जी से मुख्यमंत्री जी की भी चर्चा हुई है, मेरी भी चर्चा हुई है अगले सप्ताह तक यह राशि हमें देने का वायदा किया है.

श्री मुकेश नायक -- अध्यक्ष महोदय मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं आया है लेकिन मैं इस पर ज्यादा जोर नहीं डालूंगा. मैं यह कहना चाहता हूं कि मैंने बजट के भाषण में यह कहा था कि पिछले वर्ष राज्य सरकार को केन्द्र सरकार से 13 हजार करोड़ रूपये कम मिले हैं, और इस वर्ष 17 हजार करोड़ रूपये कम मिले हैं और वित्त मंत्री जी ने इस पर अपनी सहमति जताई थी. मेरा यह प्रश्न है कि तीन माह से प्रदेश में मनरेगा के मजदूरों की मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है. मंत्री जी क्या यह बात सही है.

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्यक्ष महोदय भारत सरकार का अभी बजट पारित हुआ है, राशि मिलने में कुछ विलंब हुआ है लेकिन हमने राज्य के मद से मजदूरी देने का काम किया है. 123 करोड़ रूपये की राशि हमें परसों प्राप्त हुई है और शेष राशि के लिए जैसा कि मैंने कहा है, हमने पत्र लिखे हैं, प्रत्येक सप्ताह हम पत्र लिख रहे हैं. माननीय मुख्य मंत्री जी पत्र लिख रहे हैं बजट पारित होते ही यह राशि हमें प्राप्त हो जायेगी. यह बात सही है कि कुछ विलंब हुआ है. हमारे काम रूके हुए हैं लेकिन हमें यह आश्वासन प्राप्त हुआ है कि शीघ्रातिशीघ्र भारत सरकार राशि जारी कर देगी.

श्री मुकेश नायक -- अध्यक्ष महोदय 3 माह का समय कम नहीं होता है . मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि क्या मंत्री जी यह बतायेंगे कि कितने समय में भुगतान हो जायेगा.

श्री गोपाल भार्गव -- अप्रैल माह में भुगतान हो जायेगा.

प्रश्न संख्या - 3 श्री सतीश मालवीय ( अनुपस्थित )

प्रश्न संख्या - 4 श्री प्रताप सिंह ( अनुपस्थित )

 

चुटका परमाणु विद्युत गृह निर्माण हेतु भूमि अधिग्रहण

5. ( *क्र. 2515 ) श्री रामप्यारे कुलस्ते : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मण्‍डला जिले में चुटका परमाणु विद्युत गृह निर्माण हेतु परियोजना स्‍थापना, कॉलोनी विकास तथा अन्‍य कार्यों के निर्माण हेतु परियोजना क्षेत्र से कहाँ-कहाँ से और कितनी जमीन अधिग्रहण की जावेगी, की सूचना कब-कब दी गई थी? (ख) उक्‍त परियोजना में जमीन अधिग्रहण एवं अवार्ड पास करने के लिये प्रभावित ग्रामों में ग्राम सह ग्राम सभाओं का आयोजन तथा लोगों की सहमति ली गई है? यदि ग्राम सभा आयोजित की गई है तो कब-कब ग्रामसभा आयोजित की गई? (ग) अवार्ड कब घोषित किया गया? अवार्ड घोषित होने के बाद लोग अपने दावे आपत्ति कहाँ दे सकेंगे, जिससे लोगों की आपत्ति का निराकरण हो सके? उक्‍त परियोजना में विस्‍थापित लोगों को मुआवज़े का क्‍या मापदंड होगा तथा जमीन पुनर्वास हेतु क्‍या मापदंड तय किये गये, विस्‍थापित लोगों की सहमति एवं उनकी मूलभूत आवश्‍यकता की जानकारी प्रदान करें।

राजस्व मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) ग्राम चुटका में 111.81 हे., ग्राम टाटीघाट में 26.40 हे., ग्राम कुण्डा में 85.76 हे., ग्राम मानेगांव में 63.24 हे., कुल 287.21 हे., भूमि अधिग्रहीत की गई। भू-अर्जन अधिनियम के प्रावधानानुसार धारा 4 एवं 6 की अधिसूचना का प्रकाशन क्रमशः दिनांक 20.07.2012, एवं दिनांक 05.07.2013 को किया गया है। (ख) जी हाँ। ग्राम चुटका ग्राम पंचायत पाठा दिनांक 16.03.2012 को, ग्राम टाटीघाट में दिनांक 16.03.2012 को, कुण्डा में 17.03.2012 एवं ग्राम मानेगांव में दिनांक 17.03.2012 को ग्राम सभा की बैठक का आयोजन किया गया। (ग) अवार्ड दिनांक 27.6.2015 को एवं संशोधित अवार्ड दिनांक 11.12.2015 को पारित किया गया है। भू-अर्जन अधिनियम 2013 की धारा 51 से 64 के तहत घोषित सक्षम प्राधिकारी को अपील एवं दावे प्रस्तुत किये जा सकेंगे। निर्धारित मापदण्ड अनुसार प्रत्येक विस्थापित परिवार को पाँच लाख रूपये अनुदान, पचास हजार रूपये परिवहन भत्ता, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जन जाति के विस्थापित परिवारों को पचास हजार रूपये एकमुश्त अनुदान, कारीगर एवं छोटे व्यापारी एवं अन्य को पच्चीस हजार रूपये प्रति परिवार तथा प्रत्येक परिवार को पचास हजार रूपये, पुनर्व्यवस्थापन भत्ता के मापदण्ड से प्रदान किया गया है। उपरोक्तानुसार निर्धारित मुआवजा भुगतान किया जा चुका है, अतः शेष प्रश्नांश उद्भूत नहीं होता है।

श्री रामप्यारे कुलस्ते -- अध्यक्ष महोदय मेरा प्रश्न है चुटका परमाणु विद्युत गृह जो कि मण्डला जिले के चुटका नामक ग्राम में प्रस्तावित है उसमें वहां के लोगों के विस्थापन, पुनर्वास, जमीन अधिग्रहण को लेकर जो प्रश्न था उसमें जो जवाब दिया गया है. मुझे जो जवाब मिला है उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं. इसलिए कि एक तो ग्राम सभाओे के बारे में प्रश्न लगाया था इस प्रश्न के संदर्भ में और ग्राम सभा कब कब आयोजित की गई, लोगों की सहमति असहमति का जो भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 के तहत प्रारूप के अनुसार है वह नहीं दी गई है. आवर्ड घोषित किया गया है उसके बाद में दावे आपत्ति की बात थी. अवार्ड घोषित होने के बाद मान लें कि कोई किसान अगर सहमत नहीं है तो अपने दावे आपत्ति कहां दे सकेगा. इसका इसमें उल्लेख नहीं है. आपका संरक्षण चाहिए बहुत गंभीर बात है.

अध्यक्ष महोदय -- आपके उत्तर में दावे आपत्ति के बारे में भी बताया गया है लेकिन माननीय मंत्री जी कुछ कह लें, दोनों के उत्तर उसमें हैं, उसमें ग्राम सभा की तिथि भी दी है, दावे आपत्ति के बारे में भी लिखा है कि सक्षम अधिकारी के समक्ष दिये जायेंगे, सक्षम अधिकारी का नाम जरूर नहीं लिखा है.

श्री रामप्‍यारे कुलस्‍ते -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सक्षम अधिकारी को दिए जा सकेंगे परंतु वह सक्षम अधिकारी कौन होगा ?

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा माननीय विधायक जी ने प्रश्‍न पूछा है, मेरा उनसे आग्रह है कि वहां ग्राम सभाएं हुई हैं और उसकी तारीखें भी आपको उपलब्‍ध करा दी गई हैं. इसके अलावा आपका दूसरा विषय दावे-आपत्‍ति के बारे में है तो यह बात सही है कि पुराना जो अधिनियम था उसमें जिला न्‍यायाधीश सुनवाई करते थे. लेकिन जब नया अधिग्रहण कानून लागू हुआ है तो हमने इसके लिए विधि विभाग को लिख दिया है कि वह तुरंत रिफरेंस के मामलों के लिए जिला जजों की नियुक्‍ति करे. विधि विभाग द्वारा जल्‍दी नियुक्‍ति हो जाएगी तो उनकी विधिवत सुनवाई भी होगी. फिर भी यदि कोई कमी है तो माननीय विधायक जी लिखकर दे दें तो हम वहां के कलेक्‍टर से कहेंगे कि उनकी सुनवाई करके निराकरण करे.

श्री रामप्‍यारे कुलस्‍ते -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें उत्‍तर में यह कहा गया है कि अवार्ड पास होने के बाद हमने मुआवजा भुगतान कर दिया है, मुझे इसमें असत्‍य जानकारी दी गई है क्‍योंकि मुआवजा भुगतान अभी तक नहीं हुआ है. माननीय मंत्री जी ने जैसा अभी कहा कि हम कलेक्‍टर को सुनवाई के लिए निर्देशित कर देंगे और प्राधिकरण की नियुक्‍ति के लिए भी उन्‍होंने आश्‍वस्‍त किया है परंतु इसमें एक विषय और आता है कि परियोजना क्षेत्र में जो कुछ मोहल्‍ले हैं उस सीमा के अंतर्गत उनकी जमीन अधिग्रहण कर ली गई, मकान-दुकान सब कुछ ले लिया गया, पर वहां थोड़ी-बहुत ही जमीन रह गई है और केवल कुछ घर रह गए हैं तो वहां पर आने-जाने की असुविधा होगी, ऐसी स्‍थिति में मेरा ऐसा मानना था कि चूँकि उनकी जमीन अधिग्रहित कर ली गई है तो उनको विस्‍थापन की श्रेणी में मानकर पुनर्वास पैकेज दिए जाएं. माननीय मंत्री जी क्‍या ऐसा करवाएंगे ?

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है कि जानकारी पहले गलत चली गई थी लेकिन संशोधित उत्‍तर कल माननीय विधायक जी को दे दिया गया है. अवार्ड पारित किया गया है परंतु राशि नहीं दी गई है. माननीय विधायक जी का दूसरा जो विषय है अगर कोई पीड़ित है तो पीड़ित के लिए हम लोग फिर से परीक्षण कराएंगे और वहां के निवासियों और किसानों को अलग से पैकेज हम लोग दे रहे हैं, विस्‍थापितों को सरकार द्वारा पूरी सुविधा दी जाएगी.

श्री रामप्‍यारे कुलस्‍ते -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद.

 

मनरेगा योजनांतर्गत नीमच जिले में कराये गये कार्य

6. ( *क्र. 4622 ) श्री कैलाश चावला : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मनरेगा योजनांतर्गत नीमच जिले में वर्ष 2013-14, 2014-15 में कितने कार्य पूर्ण करा लिये गये हैं व भुगतान नहीं हुआ पंचायतवार, कार्यवार, कार्य पूर्ण होने की दिनांक व बकाया राशि बतावें? (ख) भुगतान न किये जाने के क्‍या कारण हैं?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) मनरेगा योजना अंतर्गत नीमच जिले में वर्ष 2013-14, 2014-15 में 100 कार्य पूर्ण करा लिये गये हैं। पूर्ण कराये गये कार्यों में भुगतान लंबित न होने से शेष प्रश्‍न उपस्‍थित नहीं होता। (ख) उत्‍तरांश '' के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न ही उपस्‍थित नहीं होता।

श्री कैलाश चावला -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने माननीय मंत्री जी से वर्ष 2013-14 और 2014-15 में मनरेगा योजना के अंतर्गत कितने कार्य पूर्ण हुए और उनके भुगतान के बारे में सवाल किया था जिसके उत्‍तर में उन्‍होंने कहा है कि 100 कार्य पूर्ण करा लिए गए हैं. अब नीमच जिले में 300 पंचायतें हैं, 300 में से केवल 100 काम पूरे हुए हैं इसका कारण यह है कि वहां वेल्‍युएशन नहीं किया जा रहा है और वेल्‍युएशन न करने के कारण उन कार्यों को पूर्ण मानकर भुगतान नहीं हो रहा है. लगातार सरपंच हमसे संपर्क कर रहे हैं कि हमारा भुगतान नहीं हो रहा है जबकि हमारा काम पूरा हो चुका है तो क्‍या मंत्री महोदय 15 दिवस में उनके इस वर्ष के भी भुगतान शामिल करते हुए वेल्‍युएशन पूरा कराएंगे और क्‍या उनका भुगतान कर दिया जाएगा ?

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्‍य ने इच्‍छा व्‍यक्‍त की है, 15 दिवस के अंदर पूरा मूल्‍यांकन करके उसका भुगतान सुनिश्‍चित कर देंगे.

 

सहकारी संस्‍थाओं द्वारा लाभांश का वितरण

7. ( *क्र. 7197 ) श्री माधो सिंह डावर : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अलीराजपुर जिले में वित्‍तीय वर्ष 2014-15 के अंकेक्षण अनुसार कितनी सहकारी संस्‍थाएं लाभ में चल रही हैं? (ख) क्‍या संस्‍थाओं के सदस्‍यों को प्रतिवर्ष लाभांश वितरण करने का प्रावधान है? (ग) यदि हाँ, तो प्रश्‍नांश (क) अनुसार किस-किस संस्‍था द्वारा सदस्‍यों को कितना-कितना लाभांश वितरण किया गया? संस्‍थावार सूची प्रदान करें। (घ) यदि नहीं किया तो कारण बताएं? (ड.) क्‍या लाभांश का वितरण किया जावेगा?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) 59. (ख) जी हाँ, मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 43 के प्रावधानांतर्गत। (ग) किसी भी संस्था के द्वारा नहीं। (घ) मध्यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 49 (1) के अंतर्गत सहकारी संस्था की आम सभा को इस संबंध में अधिकारिता प्राप्त है। आमसभा द्वारा लाभांश वितरण का निर्णय नहीं लेने के कारण। (ड.) लाभांश वितरण के संबंध में निर्णय लेने की अधिकारिता सहकारी संस्था की आम सभा को ही प्राप्त है। अधिनियम की धारा 43 के प्रावधानों के अंतर्गत संबंधित सहकारी संस्थाओं की आमसभा की बैठक में इस बिन्दु पर विचार कर समुचित निर्णय लेने के लिये निर्देशित किया गया है।

श्री माधो सिंह डावर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे द्वारा सहकारी संस्‍थाओं को लाभांश के वितरण से संबंधित प्रश्‍न पूछा गया था, माननीय मंत्री महोदय ने मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में जवाब दिया है कि अलीराजपुर जिले की 59 सोसाइटीज़ लाभ में चल रही हैं परंतु अभी तक लाभांश का वितरण नहीं किया गया है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि सोसाइटी गठन हुए 40 वर्ष से भी अधिक समय हो चुका है लेकिन अभी तक सदस्‍यों को एक पैसे का भी लाभांश वितरण नहीं किया गया है. जब सोसाइटी लाभ में चल रही है तो उसका वितरण किया जाना चाहिए, यह मेरी मांग है.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, कुछ समितियां लाभ में चल रही हैं, कुछ समितियां लाभ में नहीं हैं. इसमें 26 समितियों में 24 समितियां लाभ में ही हैं. उनमें लाभांश वितरित नहीं करने की जो बात कही गयी है. यह जो राशि है जिला सहकारी बैंकों ने सोसायटियों को दे दी थी लेकिन अनेकों सोसायटियां घाटे में चल रही हैं और इस कारण से जो डिविडेंड की राशि सोसायटियों के लिए कृषकों को देना थीं, वह डिविडेंड की राशि नहीं दी है क्योंकि उन्होंने अपने घाटे में उस राशि को समायोजित कर लिया है इस कारण से यह संभव नहीं हो पाया है.

श्री माधो सिंह डावर-- माननीय अध्यक्ष महोदय, अलीराजपुर जिले की क्या सभी सोसायटियां घाटे में लगातार 40 साल से चल रही हैं? यदि घाटे में चल रही हैं तो उसका औचित्य क्या है?

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जब एनपीए बढ़ जाता है तो उस समय डिविडेंड देना संभव नहीं होता है. मैं एक बार परीक्षण करा लूंगा कि यदि मान लो कोई ऐसी व्यवस्था होगी तो हम उसको कर देंगे.

श्री माधो सिंह डावर-- धन्यवाद.

 

पंचायत सचिवों का नियम विरूद्ध निलंबन

8. ( *क्र. 7003 ) श्री मानवेन्द्र सिंह : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या छतरपुर जिले में वर्ष 2016 (01 जनवरी, 2016) से प्रश्‍न दिनांक तक में पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया है? हाँ, तो उक्‍त अवधि में निल‍ंबित सचिवों के नाम, ग्राम पंचायत का नाम, जनपद पंचायत क्षेत्र का नाम सहित प्रस्‍तुत करें? (ख) क्‍या उक्‍त सचिवों को निलंबित करने से पूर्व किसी प्रकार का नोटिस अथवा सक्षम अधिकारी के समक्ष में उपस्थित होकर अपना पक्ष स‍मर्थन करने हेतु पत्राचार किया गया है? हाँ, तो उक्‍त आशय का विवरण प्रस्‍तुत करें? (ग) प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर में प्रस्‍तुत सचिवों की सूची में से किन-किन सचिवों को शासनादेशों के अनुसार निलंबन से पूर्व सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया है? ऐसे सचिवों का नाम, ग्राम पंचायत का नाम, जनपद पंचायत का नाम उल्लेखित कर स्‍पष्‍ट करें कि उक्‍त निलंबन आदेश शासनादेशों के अनुकूल है या प्रतिकूल? (घ) यदि प्रतिकूल है तो शासन उक्‍त विसंगतिपूर्ण निलंबन आदेशों को तत्‍काल प्रभाव से निरस्‍त करने के निर्देश जारी करेगा? हाँ, तो कब तक?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। छतरपुर जिले में 15 पंचायत सचिवों को निलंबित किया गया। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार(ख) जी हाँ। उक्त 15 सचिवों में से 06 सचिवों को निलंबन के पूर्व कारण बताओ नोटिस एवं 02 सचिवों को जाँच उपरांत दोषी पाए जाने पर एवं शेष 07 सचिवों को गंभीर अनियमितता के आरोप में प्रथमदृष्टया दोषी पाए जाने पर कलेक्टर छतरपुर के अनुमोदन उपरांत निलंबित किया गया। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार(ग) उत्तरांश के परिपेक्ष्य में सभी सचिवों का निलंबन शासन आदेशों के अनुसार किया गया है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) उपरोक्त सचिवों को गंभीर वित्तीय अनियमितता, शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में की गई गंभीर लापरवाही एवं अनुशासनहीनता के आरोपों के तहत् मध्यप्रदेश पंचायत सेवा (ग्राम पंचायत सचिव भर्ती एवं सेवा की शर्तें) अधिनियम 2011 के नियम 7 के प्रावधानों के तहत् निलंबन किया गया है। आरोप पत्र का जवाब प्राप्त होने के पश्चात जाँच उपरांत गुण दोष के आधार पर निर्णय लिया जाता है। निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री मानवेन्द्र सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने माननीय मंत्री जी से आपके माध्यम से प्रश्न किया था कि छतरपुर जिले में 15 सचिवों को निलंबित किया गया था जिसमें 6 सचिवों को नोटिस दिया गया था और 2 दोषी पाये गये थे.बाकी जो 7 सचिव हैं उनको बिना कारण बताओ नोटिस दिये निलंबित किया गया है. मैं माननीय मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि क्या इन 7 सचिवों को बिना कारण बताओ नोटिस दिये निलंबित करना उचित था?

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, नियमों में प्रावधान है और यदि प्रथमदृष्टया बहुत गंभीर गलती पायी जाती है तो तत्काल निलंबन हो जाता है उसके बाद नोटिस इत्यादि की प्रक्रिया चलती रहती है. यदि प्रभक्षण हुआ है, राशि की गड़बड़ी हुई है, बहुत गंभीर बात सामने आयी है तो जिले के कलेक्टरों और जिला पंचायत सीईओ को यह अधिकार है कि उस कर्मचारी को निलंबित कर दें और बाद में जो भी वैधानिक खानापूर्ति होती है, वह की जाती है.

श्री मानवेन्द्र सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से आपके माध्यम से अनुरोध करुंगा कि जिले में सचिवों की काफी कमी है यदि इस बात का शीघ्र निराकरण करने की व्यवस्था कर दी जाए तो जिले में सारी व्यवस्था काफी सुधर जाएगी.

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, परीक्षण करा लेंगे यदि कोई बड़ी गलती नहीं होगी, राशि का गबन या प्रभक्षण नहीं हुआ होगा तो जल्दी से जल्दी उनकी बहाली की कार्यवाही कर देंगे, यदि गंभीर गलती होगी तो फिर उनके विरुद्ध विधि अनुसार कार्यवाही की जाएगी.

श्री मानवेन्द्र सिंह-- बहुत बहुत धन्यवाद.

 

 

 

 

 

शासकीय भूमि पर अवैध कब्‍जों को हटाया जाना

9. ( *क्र. 7620 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला कटनी अंतर्गत सभी जनपद पंचायत, नगर पंचायत एवं नगर निगम की कहाँ-कहाँ पर कितनी कितनी संपत्ति है? सम्‍पत्तिवार उसका विवरण दें तथा उस पर वर्तमान में काबिजवार कौन है? (ख) उक्‍त सम्‍पत्ति पर प्रारंभ से लेकर वर्तमान तक कौन-कौन कितने समय से काबिज हैं तथा कितना राजस्‍व इनसे प्राप्‍त हो रहा है? (ग) उक्‍त सम्‍पत्ति के संबंध में शासन के क्‍या निर्देश हैं? क्‍या शासन निर्देशों का उक्‍त सम्‍पत्ति के संबंध में पालन किया जा रहा है? यदि नहीं, तो पालन न करवाये जाने का क्‍या कारण है? (घ) क्‍या उक्‍त सम्‍पत्तियों पर किन्‍हीं के द्वारा अवैध कब्‍जा किया गया है? यदि हाँ, तो किसके द्वारा? अब तक उन पर क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? क्‍या अवैध कब्‍जे हटाये जावेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? (ड.) अवैध कब्‍जों को हटाये जाने के संबंध में कितने प्रकरण संबंधित पक्षकार द्वारा शासन की प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित संस्‍थाओं द्वारा न्‍यायालय में कब-कब दायर किये गये हैं? उन प्रकरणों के निपटारे हेतु शासन द्वारा क्‍या सक्षम प्रयास किये गये?

 

 

कुंवर सौरभ सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने आपके माध्यम से प्रश्न किया था कि कटनी जिले में राजस्व विभाग की कितनी शासकीय सम्पत्ति है और कौन कौन, कब कब से काबिज है, इस संबंध में शासन के क्या निर्देश हैं और कब्जा हटाने के लिए क्या कर रहे हैं. इसमें माननीय मंत्री जी की तरफ से जो उत्तर आया है, उसमें आपको अधिकारी गुमराह कर रहे हैं. मैं बताना चाहता हूँ कि बड़वारा जनपद में ग्राम भजिया में शुक्ला सागर तालाब को भरकर उसमें दुकानें बनाकर बेच दी गयी हैं. रुपौंद में मूर्तही तालाब, वर्ष 2007-08 में मनरेगा के माध्यम से एक बड़ा तालाब बना था, इसको अवैध रुप से बिड़ला प्लांट को दे दिया गया, आज वहां पर प्लांट खड़ा है. बहौरीबंद जनपद में खास बहौरीबंद में सामुदायिक भवन भगवानदास रजक के कब्जे में है,सामुदायिक भवन बहौरीबंद में राजेन्द्र यादव के कब्जे में हैं. सामुदायिक भवन, सिंगइया टोला रीठी में डॉ. निशांत के कब्जे में हैं. प्राथमिक शाला रीठी में सिद्धांत बर्मन के कब्जे में है.जो जानकारी दी है, परिशिष्ट तीन में, पेज नं 598 में होटल सम्राट के विषय में लिखा गया है कि लीज 8.8.15 को समाप्त हो गयी और इसको इसलिए रोक के रखा गया है कि अभी तक परिषद की बैठक नहीं हुई. पिछले 6-7 माह में परिषद की बैठक नहीं हुई है, माननीय मंत्री जी, अधिकारी आपको गुमराह कर रहे हैं. मेरा प्रश्न यह है कि जो शासकीय जमीन है, जिन पर लोग काबिज हैं, पूरी शासकीय सम्पत्ति में वहां के लोकल अधिकारी उस पर रुचि नहीं ले रहे हैं तो क्या एक दल बनाकर, उस दल से उन शासकीय सम्पत्तियों को खाली कराया जायेगा?

श्री रामपाल सिंह--- माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश पंचायत स्थावर संपत्ति का अंतरण अधिनियम 1994 के अंतर्गत प्रकरण होते हैं तो यह पंचायत विभाग उसका निराकरण करता है और इसी तरह से नगरपालिक अधिनियम 1956 के अंतर्गत संपत्ति अंतरण नियम 1994 प्रभावशील है, यह नगरपालिका और जिला पंचायत अधिनियम के तहत जो उनको अधिकार दिये हैं, संपत्ति का संचालन-संधारण करने के, अतिक्रमण हटाने के और माननीय सदस्य ने जो जानकारी चाही थी वह हमने उपलब्ध करा दी है. मेरा आपसे आग्रह है कि इस तरह शालाओं के अतिक्रमण का मामला है और जो आपने बातें बताई हैं,उसमें कुछ तो हमने आपको जानकारी दे दी कि हाँ है. लेकिन फिर भी माननीय अध्यक्ष महोदय, पंचायत विभाग या नगरीय प्रशासन विभाग को मूल रूप से यह कार्य करना चाहिए लेकिन माननीय विधायक जी ने जो बातें ध्यान में लाई है कि कहीं गड़बड़ी है तो निश्चित रूप से वह लिखकर दे दें हम उसकी निष्पक्ष जांच करा लेंगे.

कुँवर सौरभ सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि यह उनका कार्य है पर वह अपने कार्य का निष्पादन नहीं कर रहे हैं जो कार्यों का निष्पादन नहीं होता है वही तो हम सदन में आपके पास लेकर आते हैं. इसमें कटनी जिले में अलग से एक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए . बहुत सी सरकारी संपत्ति है, जिस पर लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा है इनमें कोई गरीब नहीं हैं , दबंग और पैसे वाले लोग हैं और यह नियम विरुद्ध उस जमीन पर काबिज है. मेरा निवेदन है कि शासकीय संपत्तियों पर सरकार और जनता का पैसा खर्चा हुआ है इसलिए कटनी जिले में व्यवस्था बन जाये कि वहाँ जो भी शासकीय जमीनों और शासकीय संपत्तियों पर लोग काबिज है, उसके लिए एक समिति बन जाये और वह समिति इन पर एक बार निगरानी करे चूंकि संबंधित विभाग कार्यवाही कर रहे होते तो हमारे पास इतना बड़ा पुलिंदा नहीं आता और इसमें भी लगभग सारी जानकारी भ्रामक है.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, अब मैं आपको निवेदन करूं कि कल रोहाणी जी मुझसे कर्ज माफ करा रहे थे. आज माननीय सदस्य नगरीय प्रशासन मंत्री जी से से पूछ सकते थे लेकिन मेरे ऊपर अति कृपा है, मेरे ऊपर उन्होंने भरोसा किया है तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि सरकारी जमीन का जो भी दुरुपयोग कर रहे होंगे उस पर सख्त कार्यवाही हम कराएंगे.

कुंवर सौरभ सिंह-- धन्यवाद मंत्री जी.

 

कृषि व्‍यवस्‍थापन भूमि का विक्रय

10. ( *क्र. 5053 ) श्रीमती ऊषा चौधरी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) ग्राम कृपालपुर तहसील रघुराजनगर की आराजी नं. 1285/1 रकबा 15.14 एकड़ के अंश भाग तीन एकड़ दिनबंधा तनय बोडई चमार एवं छोटवा तनय डेलिया चमार निवासी कृपालपुर को दो एकड़ कलेक्‍टर सतना के आदेश प्र.क्र. 219/74-75 दिनांक 12/07/1977 द्वारा कृषि हेतु व्‍यवस्‍थापन में दी गई थी? उक्‍त भूमि को तत्‍कालीन कलेक्‍टर सतना श्री जे.एल. बोस के प्र.क्र. 3119/80-81 के द्वारा एक वर्ष की अस्‍थाई लीज़ पर दिनबंधा एवं बोड्डा चमार को दी गई थी? उक्‍त लीज़ की अवधि किस आदेश के अंतर्गत बढ़ाई गई थी? (ख) तहसीलदार रघुराजनगर सतना के प्र.क्र. 17,6ए/2008/09 आदेश दिनांक 19/01/2009 के द्वारा प्रश्‍नांश (क) में वर्णित भूमि जो एक वर्षीय लीज़ पर कलेक्‍टर द्वारा कृषि कार्य हेतु दिनबंधा एवं बोड्डा चमार को दी गई थी, को तत्‍कालीन कलेक्‍टर जे.एल. बोस के द्वारा स्‍वीकृत एक वर्ष की अवधि किस अधिकारी द्वारा किस आदेश से बढ़ाई गई, इसकी विवेचना न करते हुए दिनबंधा एवं बोड्डा को लीज़ में स्‍वीकृत हुई आराजी पाँच एकड़ त्रुटि सुधार का आदेश देकर मुन्‍ना चमार तनय दीनबंधु चमार के नाम कर दिया? बोड्डा चमार के नाम की विवेचना ही नहीं की गई? क्‍या तहसीलदार द्वारा किसी व्‍यक्ति विशेष को लाभ पहुंचाने हेतु शासन की बेशकीमती भूमि अनाधिकृत खसरा के कालम नं. तीन में सुधार करा दिया? (ग) क्‍या प्रश्‍नांश (क) एवं (ख) में वर्णित आराजी का आदेश दिनांक 19/01/2009 के बाद राजस्‍व अमले द्वारा तत्‍काल इत्‍तलाबी करना, ऋण पुस्तिका जारी करना तथा रजिस्‍ट्रार सतना द्वारा दिनांक 23/01/2009 को मुन्‍ना चमार द्वारा 35 लाख रू. में आनंद सिंह तथा विनया सिंह को चार दिन के अंदर बेच दी गई? यदि हाँ, तो क्‍या कृषि हेतु व्‍यवस्‍थापन भूमि को शासन के नियमानुसार विक्रय किया जा सकता है? यदि नहीं, तो उक्‍त प्रकरण में कलेक्‍टर सतना द्वारा दोषियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? (घ) खसरा पंचशाला 2015-16 में आराजी नं. 1285/1क रकबा 5.318 हेक्‍टेयर म.प्र. शासन दर्ज का उल्‍लेख है तो प्रश्‍नांश (क), (ख), (ग) में वर्णित भूमि का स्‍टेटस क्‍या है?

 

श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी ने मेरे प्रश्नों के जो उत्तर दिये हैं पहली बात तो एक लाइन में जवाब दे दिया गया था. उसके बाद रात को 12 बजे प्रश्न का संशोधित उत्तर मुझे प्राप्त हुआ. 25 दिन पहले प्रश्न लगाये जाते हैं, 25 दिनों में जवाब नहीं आ पाता है.

अध्यक्ष महोदय-- आपका उत्तर तो आ गया है आप प्रश्न पूछें.

श्रीमती ऊषा चौधरी--- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यही है कि जब सतना जिले में कृपालपुर की आरजी नंबर थी उनमें जांच हो गई और 28 तारीख को माननीय कलेक्टर साहब ने सतना जिले में कार्ययोजना की मीटिंग में भी इस बात को कहा, माननीय सदस्य नारायण त्रिपाठी जी और माननीय सदस्य यादवेंद्र सिंह जी भी उस मीटिंग में थे,कि उक्त जमीन को शून्य घोषित करके सरकारी कर दी गई है फिर उन दोषियों को अभी तक अपराधी घोषित क्यों नहीं किया गया, उन्हें बचाने का काम क्यों किया जा रहा है.

श्री रामपाल सिंह--- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह 15 एकड़ जमीन थी, 5 एकड़ पट्टे रिकार्ड दुरुस्त करने की जो शिकायत थी उसमें गड़बड़ी की गई है, उसमें हम लोग कार्यवाही कर रहे हैं और जिन्होंने गड़बड़ी की है उनके खिलाफ कार्यवाही करेंगे.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सब स्पष्ट हो गया है जिन दोषी अधिकारियों ने इन जमीनों को खुर्द-बुर्द किया है, यह तो 16 एकड़ जमीन है. मेरा कहना है कि 16 एकड़ ही नहीं बल्कि सतना जिले की रघुराजनगर तहसील 150 एकड़ जमीन है और जिन अधिकारी कर्मचारी ने, उसमें बड़े बड़े एसडीएम और तहसीलदार हैं, इनको मगरमच्छों को बचाने का काम किया जा रहा है करोड़ों अरबों की जमीन बेच ली गई है.

अध्यक्ष महोदय-- आप सीधा प्रश्न करें.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जब सब कुछ स्पष्ट हो गया है जानकारी में आ गया है तो आज तक उनके ऊपर मुकदमा क्यों नहीं कायम किया जा रहा है, उनको बचाने का काम क्यों किया जा रहा है , मेरा यही अनुरोध है. आप सदन में घोषणा करें और जांच कमेटी राज्य सरकार द्वारा तय की जाये , सतना पर मुझे भरोसा नहीं है.

एडवोकेट सत्यप्रकाश सखवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, उस समय के जो तत्कालीन अधिकारी है, इनके समय में यह जमीन संबंधी भ्रष्टाचार हुआ है मैं मांग करता हूं कि इन्हें तुरंत निलंबित किया जाये, दंडित किया जाये.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, निश्चित रूप से शासकीय भूमि का अगर मध्यप्रदेश में कही दुरुपयोग हो रहा है और ऐसी बात माननीय विधायक ध्यान में लाएंगे तो उनको मैं धन्यवाद देता हूं और उनको आपके माध्यम से पूरा विश्वास दिलाता हूं कि इस पर हम लोग सख्त कार्यवाही करेंगे और जिन्होंने भी गड़बड़ी की है उनके खिलाफ कड़ी कार्यवाही हम करेंगे.

 

बी.आर.जी.एफ. योजनातर्गत कराये गये कार्य

11. ( *क्र. 7719 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या आयुक्‍त पंचायत राज संचालनालय मध्‍यप्रदेश भोपाल द्वारा अपने पत्र क्रमांक 1527/पं.राज/बी.आर.जी.एफ./2016 भोपाल दिनांक 09.02.2016 से मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत राजगढ़ को उनके पत्र क्रमांक 1484, दिनांक 06.02.2016 में प्रस्‍तावित तालिका के कार्य क्रमांक 1, 2, 6 एवं 9 को बी.आर.जी.एफ. योजना की शेष उपलब्‍ध राशि से कराये जाने हेतु अनुमति प्रदान कर संचालनालय को अंतरित शेष राशि रू. 159.00 लाख जिले के बी.आर.जी.एफ. योजनांतर्गत संचालित खाते में अंतरित की गई तथा शेष कार्य क्रमांक 3, 4, 5, 7, 8, 10, 11 एवं 12 कुल 8 कार्यों का विधिवत प्रस्‍ताव तैयार कर कार्य की लागत प्रस्‍तावित मद/योजना आदि की जानकारी सहित पूर्ण प्रस्‍ताव शासन के निर्णय हेतु पंचायत राज संचालनालय को प्रस्‍तुत करने हेतु दिनांक 11.02.2016 तक कार्यवाही सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया था? (ख) यदि हाँ, तो उपरोक्‍तानुसार जिले के बी.आर.जी.एफ. योजनांतर्गत संचालित खाते में संचालनालय द्वारा राशि अंतरित कर दी गई है? यदि हाँ, तो दिनांक सहित बतावें? यदि नहीं, तो कब तक राशि अंतरित की जावेगी तथा क्‍या शेष 8 कार्यों के विधिवत पूर्ण प्रस्‍ताव जिला पंचायत राजगढ़ द्वारा शासन के निर्णय हेतु पंचायत राज संचालनालय को निर्धारित तिथि को पहुंचा दिये गये हैं? यदि हाँ, तो शेष 8 कार्यों की स्‍वीकृति कब तक प्रदान कर दी जावेगी?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार(ख) जी हाँ। दिनांक 09.03.2016 को राशि हस्तांतरित की जा चुकी है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। जी नहीं। जिला पंचायत से प्रस्ताव प्राप्त नहीं हुए हैं, कार्यवाही जिला पंचायत स्तर पर प्रचलित है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र अनुसार। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री नारायण सिंह पँवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि मेरे विधान सभा क्षेत्र ब्यावरा में मैंने 12 महत्वपूर्ण पुलियाओं के लिए लिख करके निवेदन किया था जो ग्रामीण क्षेत्र में बहुत आवश्यक मार्गों पर स्थित हैं. माननीय मंत्री जी ने 4 पुलियाओं की स्वीकृति उसमें बी आर जी एफ योजना से कर दी है. शेष 8 पुलियाओं के लिए पंचायत राज संचालनालय को लिखा था. 7 फरवरी 2015 को मेरे प्रश्न के उत्तर में यह कहा गया था कि 15 दिवस के अन्दर इसका एस्टीमेट मंगा लेंगे. लेकिन आज दिनाँक तक भी उसका एस्टीमेट प्राप्त नहीं हुआ है और कार्यवाही जिला पंचायत में प्रचलित है ऐसा जवाब दिया है. मैं जानना चाहता हूँ कि यह कार्यवाही कब तक प्रचलित रहेगी? 2-3 महीने हो गए. माननीय मंत्री जी बताएँ कि कब तक इसको पूरा करा लेंगे और पुलियाओं की स्वीकृति प्रदान कर देंगे?

श्री गोपाल भार्गव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्य को जानकारी है कि भारत सरकार के द्वारा यह बेक्वर्ड रीजन ग्रांट फण्ड योजना (बी आर जी एफ) है. यह बंद कर दी गई है. बंद करने के बाद में जो राशि जिले में जमा थी उस राशि के द्वारा हमने जो भी काम जिला योजना समिति ने स्वीकृत किए थे. वह काम हमने करवाने का निर्देश दिया था. उनमें से 5 काम यह स्वीकृत हो गए हैं और जिन पुलियाओं के काम अभी नहीं हुए हैं और जो शेष राशि वहाँ बी आर जी एफ की जमा होगी उसके माध्यम से या फिर सी एम जी एस वाय या किसी अन्य योजना के माध्यम से वह काम करवा लेंगे.

श्री नारायण सिंह पँवार-- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूँ कि जो शेष राशि बी आर जी एफ की जिले में बच रही है क्या उसी राशि से इन पुलियाओं को स्वीकृत कर देंगे?

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, जैसा मैंने कहा या तो उस राशि से क्योंकि वह राशि पूरे जिले की होती है. एक विधान सभा क्षेत्र की नहीं होती है. यदि अन्य विधान सभा क्षेत्रों में भी कार्य लंबित होंगे तो हो सकता है कि उनमें भी आवश्यकता के अनुसार देना पड़े तो उस राशि से भी या फिर अन्य जो भी राशि हमें हमारे विभाग से उपलब्ध हो सकेगी. उससे हम पुलिया बनाने का काम करेंगे.

श्री नारायण सिंह पँवार-- धन्यवाद.

प्रश्न संख्या-- 12 (अनुपस्थित)

शौचालय निर्माण में अनियमितता

13. ( *क्र. 3560 ) श्री रामकिशन पटेल : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शासन द्वारा चलाई जा रही शौचालय निर्माण की योजना किस वर्ष से एवं किन-किन नामों से प्रारंभ की गई? योजनावार, वर्षवार जानकारी देवें। क्‍या एक ही परिवार को एक ही शौचालय पर अलग-अलग नामों की योजना से लाभ दिया जाने का प्रावधान है? यदि नहीं, तो योजना प्रारंभ से प्रश्‍न दिनांक तक रायसेन जिले में कितने परिवारों को इन योजनाओं का लाभ दिया गया है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में एक से अधिक बार एक ही शौचालय निर्माण पर अलग-अलग योजनाओं से लाभ नहीं दिया जाता है तो उक्‍त योजनाओं में लाभ देने वाले शासकीय सेवक पर क्‍या कोई कार्यवाही करने की शासन की योजना है? यदि हाँ, तो कब तक कार्यवाही की जावेगी?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) शासन द्वारा शौचालय निर्माण हेतु वर्ष 1999-2000 से समग्र स्‍वच्‍छता अभियान, 01-4-2012 से निर्मल भारत अभियान एवं 02-10-2014 से स्‍वच्‍छ भारत मिशन (ग्रामीण) संचालित किया जा रहा है। जी नहीं। रायसेन जिले में अलग-अलग योजना के नामों से एक ही परिवार को शौचालय का लाभ नहीं दिया गया है। रायसेन जिले में योजना प्रारंभ से प्रश्‍न दिनांक तक 142573 परिवारों को लाभ दिया गया है। (ख) प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री रामकिशन पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने माननीय मंत्री महोदय से क और ख के प्रश्न में जानकारी चाही थी जो पूर्णतः सत्य नहीं है. रायसेन जिले के मेरे विधान सभा क्षेत्र उदयपुरा में, उदयपुरा ब्लाक और बाड़ी ब्लाक में 2012 में निर्मल ग्राम के द्वारा जो शौचालय बनाए गए हैं. उनकी मैं जाँच चाहता हूँ क्योंकि वे बने ही नहीं हैं और व्यक्तियों के नाम से लिस्ट तैयार की गई है.

श्री गोपाल भार्गव-- अध्यक्ष महोदय, जैसा सदस्य ने अवगत कराया है कि बने ही नहीं हैं और राशि का भुगतान हो चुका है तो हम भोपाल से एक वरिष्ठ अधिकारी को भेजकर जाँच करा लेंगे, कार्यवाही करेंगे.

श्री रामकिशन पटेल-- बहुत बहुत धन्यवाद.

 

व्‍यवसायिक दुकानों की नीलामी

14. ( *क्र. 5900 ) श्री गोविन्‍द सिंह पटेल : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र के साईखेड़ा जो पूर्व में ग्राम पंचायत था, उसमें सन् 2003 से 2005 एवं 2011 से 2013 तक कितनी व्‍यवसायिक दुकानों का निर्माण कर नीलाम कराई गई? (ख) क्‍या इन दुकानों के लिए समय पर विभाग द्वारा विधिवत कार्यवाही करके भूमि का विधिवत आवंटन विभाग द्वारा पंचायत को किया गया है? (ग) क्‍या विभाग द्वारा निर्धारित राशि भू-भाटक एवं प्रीमियम पंचायत द्वारा जमा कराया गया। यदि नहीं, तो क्‍यों तथा इस हेतु शासन द्वारा क्‍या कार्यवाही की जा रही है? (घ) क्‍या दुकानों का निर्माण विधिवत कार्यवाही पूर्ण कर कराया गया है? यदि नहीं, तो क्यों? यह अवैध नहीं कहलायेगा? क्‍या इस हेतु तत्‍कालीन सरपंच पर उचित दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की जायेगी। यदि हाँ, तो कब तक यदि नहीं, तो क्‍यों? (ड.) इसमें विभिन्‍न भू-भाटक प्रीमियम की कितनी राशि पंचायत पर लंबित है, उसकी वसूली हेतु विभाग क्‍या कार्यवाही करेगा तथा जिन सरपंचों ने धोखाधड़ी की है, उनके खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज कराई जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक? क्‍या इस बेशकीमती भूमि से अतिक्रमण हटाया जायेगा?

 

 

 

राजस्व मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) :

श्री गोविन्द सिंह पटेल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो मैंने प्रश्न में जवाब मांगा था मतलब जो जमीन कोई पंचायत या आवासीय, व्यावसायिक उपयोग के लिए राजस्व विभाग से लेती है तो भूमि का आवंटन होता है. भू-भाटक, प्रीमियम वगैरह जमा करके विधिवत होता है. लेकिन 1995 से लेकर 2015 तक साईखेड़ा ग्राम पंचायत में कम से कम 200 दुकानें नियम विरुद्ध बनाई गई हैं, जिनमें न भूमि आवंटन हुआ, न भू-भाटक जमा हुआ, न प्रीमियम जमा हुई, तो पहले जो जवाब सिर्फ मेरा 2011-13 का दिया तो मैं मंत्री महोदय से चाहता हूँ कि 1995 से 2015 तक किसी सक्षम अधिकारी से, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, इनसे जाँच कराकर इतनी दुकानें ऐसी नियम विरुद्ध बनी हैं, जिनमें कोई भी भूमि का आवंटन नहीं है और पंचायतों ने मनमाना पैसा, सरपंचों ने अपने जेब में रख लिया है और वे किराया वसूली कर रहे हैं. उनकी किसी सक्षम अधिकारी से जाँच कराएँगे क्या?

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने जो प्रश्न यहाँ रखा है. वास्तव में हम देख रहे हैं कि पंचायत, स्थानीय निकाय, राजस्व विभाग की जमीन पर बगैर बताए कुछ भी बना लेते हैं, यह आपत्तिजनक है, उनको विधिवत अनुमति लेना चाहिए. जैसी माननीय विधायक जी जाँच की मांग कर रहे हैं 1995 से, अगर बगैर अनुमति के राजस्व विभाग की जमीन पर उन्होंने निर्माण किया है तो उसकी जाँच हम कलेक्टर से कराएँगे और जिन्होंने गड़बड़ी की है उनके खिलाफ कार्यवाही भी करेंगे.

 

 

श्री गोविन्द सिंह पटेल--अध्यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्न यह है कि चार कार्यकाल सरपंचों के निकल गये हैं उन सरपंचों ने भू-भाटक प्रीमियम का करोड़ों रुपये का चूना सरकार को लगाया है और अपनी जेब भी भरी है. क्या उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जायेगी और भू-भाटक या प्रीमियम की राशि जिस समय से पेंडिंग है क्या उन पंचायतों से वसूल की जायेगी ?

श्री रामपाल सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, राजस्व से संबंधित प्रश्न कल भी आये थे आज भी आये हैं सौरभ सिंह जी ने भी पूछा था आप भी पंचायत में चले गये ऐसे में मैं अतिक्रमण करुंगा तो भार्गव जी को कष्ट हो जायेगा. आप सरपंचों के खिलाफ कार्यवाही की बात कर रहे हैं तो इसमें भार्गव जी की भी सहमति रहेगी. जांच का आप कह रहे हैं तो हम जांच भी करायेंगे और जांच के बाद ही तय होगा कि गड़बड़ी किसने की है. नियमों का उल्लंघन करके अगर सरकारी जमीन पर अतिक्रमण किया है तो अतिक्रमण का केस भी बनायेंगे और जो राशि राजस्व विभाग की होगी उसे वसूलने का काम भी करेंगे.

श्री गोविन्द सिंह पटेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, अंतिम प्रश्न मेरा यह है कि जिन दुकानों का विधिवत् निर्माण नहीं हुआ है इसमें दुकानदारों की कोई गलती नहीं है. सरपंच ने अपनी जेब भरी है और विधिवत् काम नहीं कराया है. सरकार कह रही है, मुख्यमंत्रीजी कह रहे हैं और मंत्रीजी आप भी कह रहे हैं. जो बर्षों से काबिज हैं अभी तो उन्होंने टीन-टप्पर की झोपड़ी बना ली है और उनसे पैसे ले रहे हैं क्या उनको पट्टे देंगे और पंचायत जो वसूली कर रही है उससे उनको बेदखल करेंगे. उनको पट्टे मिल जायें और वे अपनी दुकान चलायें क्या मंत्रीजी ऐसा निर्णय करेंगे ?

श्री रामपाल सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, इनके गुस्से की पंचायतों पर ज्यादा झलक आ रही है. माननीय भार्गवजी से आप संपर्क कर सकते हैं उसमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन मेरा निवेदन यह है कि सरकार नीति बना रही है वर्षों से जो काबिज हैं उनके लिए हम नियम बना रहे हैं. आप लिखेंगे तो भविष्य में उनके लिए प्रावधान रखा है.

अध्यक्ष महोदय--पंचायत मंत्रीजी कुछ कह रहे हैं आपकी समस्या का शायद समाधान मिल जाये.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री गोपाल भार्गव)--अध्यक्ष महोदय, हमारे यहां एक कहावत है "सबई भूमि गोपाल की" (हंसी)

श्री बाबूलाल गौर--यह कह रहे हैं सबई भूमि गोपाल की है, लेकिन गोपाल भार्गव की नहीं है. (हंसी)

श्री गोविन्द सिंह पटेल--बिना भूमि आवंटन के ऐसे निर्माण न हों इसके लिए कोई कार्यवाही करेंगे क्या ? विधिवत प्रीमियम या भू-भाटक जमा करके निर्माण हो इसके लिये पंचायत विभाग या आपका विभाग कार्यवाही करेगा क्या ? ऐसी घटनायें बहुत हो रही हैं.

श्री रामनिवास रावत--सभी नियम गोपाल के.

श्री रामपाल सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, जो माननीय विधायकजी की चिन्ता है वह निश्चित रुप से शासन के हित में है हम ऐसे निर्देश जारी करेंगे कि विधिवत् कार्यवाही करके निर्माण कार्य करें. यह आपत्तिजनक बात है इस पर हम कार्यवाही करेंगे.

श्री गोविन्द सिंह पटेल--धन्यवाद मंत्रीजी.

प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजनांतर्गत मार्ग निर्माण

15. ( *क्र. 7842 ) श्री ओमकार सिंह मरकाम : क्या पंचायत मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या डिण्‍डोरी जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क का निर्माण अमानक स्‍तर का हुआ है? यदि हाँ, तो क्‍यों? यदि नहीं, तो समनापुर से नोंदर, बजाग सेजल्‍दा रुसा से गोपालपुर गोरखपुर से गोथलपुर, जाड़ा सुरुंग से गोपालपुर डिण्‍डोरी अझवार से उदरी, चौरा दादर से कबीर चबूतरा, घाटा से बोना, सरवर टोल से चौरा दादर, लातरम से घुरकुटा आदि मार्ग क्‍यों जर्जर स्थि‍ति में हैं। (ख) इसके लिए जिम्‍मेदार कौन है? मार्ग का निर्माण अच्‍छी तरह से हो इसके लिए कौन-कौन अधिकारी जिम्‍मेदार हैं?

पंचायत मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) : (क) जी नहीं। प्रश्नांश में उल्लेखित सड़कों का निर्माण कार्य गुणवत्ता पूर्ण कराया गया था, जिनका निर्माणाधीन अवधि में निर्माण के विभिन्न स्तरों पर राष्ट्रीय गुणवत्ता नियंत्रक/राज्य गुणवत्ता नियंत्रक द्वारा गुणवत्ता परीक्षण किया गया एवं कार्यों की गुणवत्ता को संतोषप्रद श्रेणी में वर्गीकृत किया गया था। गारंटी अवधि में संबंधित ठेकेदार द्वारा सामयिक रख-रखाव नहीं करने के कारण उक्त सड़कों में से 5 सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, जिस पर विभाग द्वारा संबंधित ठेकेदारों के विरूद्ध की गई कार्यवाही का विवरण संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। शेष सड़कों की स्थिति संतोषप्रद है एवं आवागमन सुचारू रूप से हो रहा है। (ख) उत्तरांश (क) के प्रकाश में 5 सड़कों के क्षतिग्रस्त होने का कारण संबंधित ठेकेदारों द्वारा सामयिक रख रखाव नहीं कराया जाना है, जिस पर विभागीय अधिकारियों द्वारा अनुबंधानुसार कार्यवाही की गयी है। अतः उक्त 5 सड़कों के क्षतिग्रस्त होने के लिये संबंधित ठेकेदार उत्तरदायी है। गुणवत्ता के अनुरूप कार्य कराये जाने का दायित्व प्रत्यक्ष रूप से निर्माण कार्य से संबंधित इकाई के महाप्रबंधक/सहायक प्रबंधक/उपयंत्री/कन्सलटेन्ट एवं ठेकेदार का है।

परिशिष्ट - ''दो''

श्री ओमकार सिंह मरकाम--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी ने उत्तर दिया है कि ठेकेदार के द्वारा रख-रखाव न करने से सड़क खराब हुई है. मैं मंत्रीजी से निवेदन करना चाहता हूँ आप जो सड़क बनाते हैं वह ओजीपीसी की डीपीआर के जो नार्म्स हैं उसके आधार पर 8 टन की क्षमता की सड़क बनाते हैं. वहां पर 15, 20, 30, 40 टन को जंगल के जो लट्ठे की निकासी होती है. मैं मात्र दो प्रश्न करुंगा. यह सड़क ठेकेदार के रख-रखाव के कारण खराब नहीं हुई है जो ओव्हरलोडिंग के वाहन चलते हैं उससे खराब हुई है आप ओजीपीसी के नार्म्स से सड़क बनाते हैं क्या उसको आप डीबीएम नार्म्स में बनायेंगे तभी हमारे यहां की सड़क ठीक रह पायेगी अन्यथा जंगल में पर्वत है विन्ध्यांचल है प्रतिवर्ष वहां लट्ठा निकासी होना है आपकी सड़क खराब होना ही है. मैं चाहता हूँ कि आपकी सड़क ओजीपीसी है उसे आप डीबीएम में क्रश बिल्डअप करके 200 एम एम डामर की थिकनेस है उसको 50 एमएम करके 20 एमएम सिल्क कोट वाली सड़क बनाने के लिए आप अनुमति देंगे क्या ?

श्री गोपाल भार्गव--माननीय अध्यक्ष महोदय, अभी यह सड़क गारंटी पीरियड में है इसकी जिम्मेदारी 2016 के अंत तक ठेकेदार की है कि वह इस सड़क के मेंटेनेंस का काम वह करे. इसके बाद वहां भारी परिवहन होता है उस दृष्टि से विचार करके इस सड़क की स्ट्रेंथिंग का काम करने के ऊपर विचार करेंगे, योजना बनायेंगे.

श्री ओमकार सिंह मरकाम--अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्रीजी से अनुरोध कर रहा हूँ कि वहां पर ठेकेदार इसका रख-रखाव नहीं कर पायेगा. जो ठेकेदार रख-रखाव कर रहा है उसका बिल भी आपके विभाग से नहीं दिया जा रहा है. वह रोड ठीक-ठाक रहे इसके लिये आपका निर्देश हो और मौके के निरीक्षण के लिए आप अपने स्तर से मेरी उपस्थिति में क्या उसके रख-रखाव के लिए जांच करायेंगे ?

श्री गोपाल भार्गव--माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा मैंने कहा कि पांच वर्ष की गारंटी की अवधि है जैसे ही पूरी होती है इसके बाद में उस सड़क के और ज्यादा सुदृढी़करण और ज्यादा स्ट्रेंथिंग का काम हम लोग करने पर विचार करेंगे, माननीय विधायक जी से भी सलाह ले लेंगे.

अध्यक्ष महोदय--प्रश्नकाल समाप्त.

 

( प्रश्नकाल समाप्त )

 

 

नियम 267-क के अधीन सूचनाएं

 

अध्‍यक्ष महोदय:- निम्‍नलिखित माननीय सदस्‍यों की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जायेंगी.

1. डॉ राजेन्‍द्र कुमार पाण्‍डेय

2. श्री दुर्गालाल विजय

3.श्री राजेन्‍द्र फूलचन्‍द वर्मा

4.श्री रामनिवास रावत

5. श्री शैलेन्‍द्र पटेल

6. श्री कमलेश्‍वर पटेल

7. श्री रणजीत सिंह गुणवान

8. श्री मानवेन्‍द्र सिंह

9. श्री शकंरलाल तिवारी

10. श्री हजारीलाल दांगी

अध्‍यक्ष महोदय :- अब कुछ नहीं कृपया सहयोग करें.

डॉ गोविन्‍द सिंह :- अध्‍यक्ष महोदय, कल आपने अपने कक्ष में शून्‍यकाल में विषय उठाने के लिये कहा था. आपने कहा थी कि परमीशन देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय:- मैंने कल कहां कहा था.

डॉ गोविन्‍द सिंह:- कल आपने अपने चेम्‍बर में कहा था कि हम ध्‍यानाकर्षण उठा लें तो आपने कहा था कि शून्‍यकाल में अपना विषय उठा लें.

अध्‍यक्ष महोदय :- ठीक है, कल कहा था तो डॉ गोविन्‍द सिंह जी को अनुमति है. आप लोग बैठ जाईये. क्‍या हो रहा है कि जो माननीय सदस्‍य मेहनत करके लिखकर देते हैं, उनको अवसर नहीं मिलता है, उनके नाम पढ़ देते हैं. जो माननीय सदस्‍य मेहनत नहीं करते हैं, वह यहां आकर के सीधे बोल देते हैं. वह अपनी बात कह देते हैं तो यह बात उचित नहीं है. कभी कभार कोई बहुत इमरजेंसी हो, कोई ऐसा विषय हो जिसको तत्‍काल उठाना पड़े तो बात अलग है नहीं तो इसमें वो डिस्‍हार्टन होंगे जो सचमुच मेहनत कर रहे हैं और समय के अनुसार अपनी बात लिखकर के दे रहे हैं. इसलिये इस तरह से इस परमंपरा को चलने नहीं दिया जायेगा. सिर्फ डॉ गोविन्‍द सिंह को अनुमति दी जायेगी, क्‍योंकि उन्‍होंने कहा कि मैंने कल कह दिया था सिर्फ इसलिये. इसमें और कोई नाम नहीं है, वह कल की बात है वह लेप्‍स हो गयी है.

डॉ गोविन्‍द सिंह :- अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश शासन का जो मंत्रालय है, वहां पर भ्रष्‍टाचार की तमाम फाईलें जला दी गयी हैं. कई लोगों का स्‍वेच्‍छानुदान स्‍वीकृत हो चुका था. उनका स्‍वेच्‍छानुदान जो पीडि़त लोग है उन तक नहीं पहुंच पाया है. यह लगातार प्रदेश में हो रही हैं, जैसे कृषि विभाग, पी एच ई और अन्‍य विभागों में हो रही है. हमारा शासन से अनुरोध है कि कम से कम जो जनहित के मामले हैं उनकी फाईलें सुरक्षित रखें, वह न जलें और जो पीडि़त लोग जो इस सहायता से वंचित रहे हैं,उनके दस्‍तावेज पुन: बुलाकर उन्‍हें पुन: सहायता दिलायी जाये. भविष्‍य में जो भ्रष्‍टाचार बचाने का काम किया जा रहा है, वह न किया जाये.

अध्‍यक्ष महोदय:-आप वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं. मैं आपको मना करना नहीं चाहता, किन्‍तु यह परमंपरा ठीक नहीं है. आप सभी लोग कृपया सहयोग करें.

श्री जितू पटवारी :- माननीय अध्‍यक्ष जी, बहुत महत्‍वपूर्ण मुद्दा है. अगर आप एक मिनिट बोलने देगें तो ठीक रहेगा.

अध्‍यक्ष महोदय:- आप की जो भी बात है वह लिखकर दे दीजिये.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

पत्रों का पटल पर रखा जाना

 

क. बरकतउल्‍ला विश्‍वविद्यालय भोपाल (म.प्र) 43 वां वार्षिक प्रतिवेदनप्रतिवेदन वर्ष 2014-2015

ख. जीवाजी विश्‍वविद्यालयविश्‍वविद्यालय,ग्‍वालियर (म.प्र.) का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-14

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.04 बजे ध्‍यानाकर्षण

 

श्री निशंक कुमार जैन :- (x x x)

अध्‍यक्ष महोदय :- यह कुछ भी रिकार्ड में नहीं आयेगा. पं.रमेश दुबे अपनी ध्‍यानाकर्षण की सूचना पढ़े. इसके अलावा कुछ भी रिकार्ड में नहीं आयेगा. आप सभी लोग सहयोग करें ध्‍यानाकर्षण महत्‍वपूर्ण होते हैं.

श्री जितू पटवारी:- (x x x)

श्री मुकेश नायक :- (x x x)

श्री निशंक कुमार जैन :- (x x x)

(व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय - आपका जो भी मुद्दा है, आप नियम से उठाईयें. आप सभी लोग बैठ जाईये. अब सिर्फ पं.रमेश दुबे का ही लिखा जायेगा.

(व्‍यवधान)

अध्यक्ष महोदय - वरिष्ठ सदस्यों को नहीं बोलना चाहिये. उनको सब नियम मालुम हैं. यह नियम राज्य विधान सभा का नहीं है. श्री रमेश दुबे को बोलने दें.

(1) पेंच व्यपवर्तन परियोजना के बांध निर्माण में मजदूर की मिट्टी में दबकर मौत होने

पं.रमेश दुबे(चौरई) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

जल संसाधन मंत्री(श्री जयंत मलैया) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा वक्तव्य निम्नानुसार है :-

पेंच परियोजना के मिट्टी के बांध का निर्माण कार्य मेसर्स एच.ई.एस.इंफ्रा प्रायवेट लिमिटेड,हैदराबाद द्वारा किया जा रहा है. दिनांक 9 एवं 10 मार्च,2016 की दरम्यानी रात को श्री जयराम पिता श्री बुद्धू मेश्राम,निवासी, बावनपाड़ा की मिट्टी में दबने से मृत्यु होने की दुर्घटना हुई है. मृतक का भाई श्री आसाराम लगभग दो वर्षों से बांध निर्माण कार्य में ठेकेदार के श्रमिक के रूप में कार्यरत् था.दुर्घटना के दिन आसाराम ने उसकी पत्नि के अस्पताल में भर्ती होने के कारण उसके छोटे भाई जयराम को उसके एवज में कार्य पर पहली बार भेजा. कार्य के दौरान श्रमिक श्री जयराम कार्यस्थल पर सो गया. जो डोजर से मिट्टी डालने और फैलाते समय डोजर चालक श्री मोहम्मद नसीफ उर्फ सितारे तथा अन्य कार्यरत् श्रमिकों तथा कर्मचारियों को नहीं देखा.परिणाम स्वरूप सोते हुए श्रमिक श्री जयराम की मिट्टी में दबने से मृत्यु हो गई. इस दुर्घटना पर दिनांक 10.3.2016 को थाना चौरई,जिला छिंदवाड़ा में डोजर चालक श्री मोहम्मद नसीफ उर्फ सितारे के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया है. निर्माण एजेंसी मेसर्स एच.ई.एस.इंफ्रा प्रायवेट लिमिटेड,हैदराबाद ने मृतक श्री जयराम को रुपये पांच लाख की तात्कालिक सहायता बैंक आफ बड़ौदा शाखा छिंदवाड़ा के चेक से दिनांक 11 मार्च,2016 को प्रदान की गई है. मध्यप्रदेश भवन एवं संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की योजना के अंतर्गत मृतक श्री जयराम को एक लाख रुपये की सहायता राशि के साथ-साथ तीन हजार रुपये की अंत्येष्टि सहायता राशि स्वीकृत की गई है. यद्यपि मृतक का परिवार पेंच परियोजना से विस्थापित नहीं हो रहा था. मानवीय सहानुभूति के आधार पर मृतक के परिवार को आदर्श पुनर्वास स्थल तूमड़ा में एक आवासीय भूखण्ड दिया गया है. कलेक्टर छिंदवाड़ा ने मृतक के परिवार के खेत में नलकूप खनन करने हेतु कृषि विभाग की योजना के तहत् स्वीकृति देने के निर्देश भी जारी किये हैं. दुर्घटना अत्यंत दुखद है और भविष्य में दुर्घटना न हो इसका पुख्ता इंतजाम किया जायेगा.

पं.रमेश दुबे - माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय मंत्री जी कह रहे हैं. मैं कहना चाहता हूं कि जब यह नाला क्लोजर का काम प्रारंभ हुआ था और जब चौबीस घंटे नाला क्लोजर का काम चल रहा है तो इस प्रकार की लापरवाही कंपनी के द्वारा या विभाग के द्वारा कैसे की जा रही है. वास्तविक रूप से यदि विभाग के द्वारा वहां पर काम चल रहा था तो वहां लाईटिंग की पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं थी और लाईटिंग की पर्याप्त व्यवस्था न होने के कारण कहीं न कहीं विभाग की भी लापरवाही थी. विभाग की भी नाला क्लोजर के समय महत्वपूर्ण भूमिका होती है वहां उनके जो कर्मचारी,अधिकारियों को भी उपस्थित रहना चाहिये. मुझे लगता है वे भी वहां उपस्थित नहीं थे और इस कारण इतनी बड़ी घटना घटी.

अध्यक्ष महोदय - आप प्रश्न करें. सारी बातें आ गई हैं.

पं.रमेश दुबे - जब सुबह वहां मजदूर कचरा बीनने गये तो मृतक की उंगली को कचरा समझा तब वह निकला. इसमें विभाग की लापरवाही है. विभाग के लोगों पर भी कार्यवाही होनी चाहिये ताकि ऐसी घटनाएं भविष्य में न हों.

श्री जयंत मलैया - अध्यक्ष महोदय, इस प्रकरण की विवेचना पुलिस द्वारा हो रही है. जहां तक पं.रमेश दुबे जी ने यह बात उठाई है. उस समय वहां पर  पर्याप्त मात्रा में लाईट थी और आज भी वहां लाईट की पूरी व्यवस्था है.

 

 

(2) शहडोल-बजाग-पडरिया सड़क निर्माण में मुरम की अवैध खुदाई किये जाने से

उत्पन्न स्थिति

श्री ओमकार सिंह मरकाम(डिण्डोरी) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

लोक निर्माण मंत्री(श्री सरताज सिंह) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

श्री ओमकार सिंह मरकाम - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने इस बात को स्वीकार किया है कि वहां मिट्टी नाला किनारे खोदी गई है. आपको जितनी मिट्टी की आवश्यक्ता है विभाग द्वारा उतनी मिट्टी खोदी गई है परन्तु मैं यह कहना चाहता हूं कि सड़क बनने के बाद जो गढ्ढे 20-30 फिट के हो गये हैं. ग्राम भुरसी,आमाडोंगरी,सिंगारसक्ती में, घोबदपुर में,आमाडोंगरी के टिकराटोली में तो मंत्री जी आप उच्चाधिकारियों से हमारी उपस्थिति में जहां-जहां गढ्ढे हैं उसकी जांच कराकर उन गढ्ढों को भरने के लिये कोई आज घोषणा करेंगे ?

श्री सरताज सिंह - माननीय विधायक जी मुझसे मिले थे. अधिकारी भी उपस्थित थे और इसमें निर्णय किया गया है कि जो गढ्ढे हैं उनको जेसीबी से बराबर कर दिया जायेगा.

श्री ओमकार सिंह मरकाम - आप जेसीबी से बराबर गढ्ढे कराएंगे लेकिन वहां मेरी उपस्थिति में आपके अधिकारी मौके पर जाकर गढ्ढे देख लें और उसमें अधिकारियों का निर्देश हो जाये. आवश्यकता के अनुसार गांव वालों की उपस्थिति में किस तरह गढ्ढे ठीक किये जायें. इसके लिये आप अधिकारियों को हमारी उपस्थिति में अधिकारियों को गढ्ढों को भरने के निर्देश देंगे ?

श्री सरताज सिंह - जैसा मैंने कहा कि इसको जेसीबी से लेबल कराया जायेगा और इस काम को देखने के लिये जब हमारे अधिकारी जायेंगे तो उनको कहा जायेगा कि माननीय विधायक जी से संपर्क कर लें और उनके सामने देख लें.

श्री जालमसिंह पटेल (नरसिंहपुर)--माननीय अध्यक्ष महोदय,

श्री लाल सिंह आर्य, नगरीय विकास एवं पर्यावरण(राज्यमंत्री )---माननीय अध्यक्ष महोदय,

श्री जालमसिंह पटेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, करेली नगर-पालिका में जैसा कि बताया गया है कि वर्तमान में निकाय में जल-संकट नहीं है, फिर यह योजना क्यों लायी जा रही है.

अध्यक्ष महोदय--आप तो सीधा प्रश्न योजना के संबंध में कर लीजिये.

श्री जालम सिंह पटेल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा की थी और लगभग 18 माह हो गए हैं, पहली बार निविदा हुई, फिर दूसरी बार निविदा हुई, जिसके कम रेट थे उसको न देकर ज्‍यादा रेट वाली कोई इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर संस्‍था को टेण्‍डर दे दिया । वर्तमान में जिस प्रकार से वहां पानी का संकट है और नगर पालिका के जो अध्‍यक्ष हैं, उनकी मिली भगत से भी वहां बहुत सारी समस्‍या पैदा की गई हैं । नगर पालिका द्वारा द्वितीय निविदा स्‍वीकृत की गई है, क्‍या उस निविदा की जानकारी मंत्री महोदय और प्रमुख सचिव को है ?

अध्‍यक्ष महोदय- आपका प्रश्‍न क्‍या है ?

श्री जालम सिंह पटेल- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न है कि नगर पालिका द्वारा जो द्वितीय निविदा स्‍वीकृत की गई है, क्‍या मंत्री महोदय और प्रमुख सचिव को उसकी जानकारी है ? क्‍या उसकी अनुमति इनसे ली गई थी ?

श्री लाल सिंह आर्य- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शासन ने मुख्‍य अभियंता के माध्‍यम से 3.3.2015 को पत्र जारी किया था, इसमें दो कार्य हैं, एक लाइन बिछाने का काम है और दूसरा इन्‍टेकवेल बनाने का काम है । दोनों काम यदि अलग अलग करते हैं तो अनुभव यह रहा है कि योजना ठीक ढंग से फलीभूत नहीं होती है, इसलिए शासन ने मुख्‍य अभियंता के माध्यम से आदेश जारी किए हैं कि दोनों को सम्मिलित करके निविदा आमंत्रित की जाए और उसी आधार पर नगर पालिका ने निविदा आमंत्रित की है । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 15 मार्च को उसका वर्क आर्डर भी जारी कर दिया गया है ।

श्री जालम सिंह पटेल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि ......

अध्‍यक्ष महोदय- अब तो वर्क आर्डर ही हो गया है ।

श्री जालम सिंह पटेल- अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी निविदा जिसको मिली है, जिसको ठेका मिला है, जो दस्‍तावेज हैं, वह टेण्‍डर लेने के लिए अधिकृत नहीं है और वह टेण्‍डर लेने की योग्‍यता नहीं रखता है, इसमें संचालनालय नगरीय प्रशासन का एक हवाला देता हूं कि कार्यादेश जारी करने के पूर्व मूल दस्‍तावेज की, संस्‍था की जांच निकाय स्‍तर पर सुनिश्चित की जाए, क्‍या यह सुनिश्‍चित किया गया है ? दूसरा निवेदन यह है कि दूसरी बार निविदा बुलाई गई है, पहली निविदा में यह लागू नहीं था, जिसको नाम दिया गया है......

अध्‍यक्ष महोदय- आप उत्‍तर ले ले, माननीय मंत्री जी ।

श्री लाल सिंह आर्य- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदस्‍य क्‍या चाहते हैं ।

अध्‍यक्ष महोदय- उनका कहना है कि जो निविदा स्‍वीकृत की गई है, वह नियमानुकूल है कि नहीं ?

श्री लाल सिंह आर्य - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो निविदाएं स्‍वीकृत होती हैं, वह नियमानुसार ही होती हैं ।

श्री जालम सिंह पटेल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निेवदन है कि जो दूसरी एजेंसी है, जो ठेकेदार है, वह उसकी योग्‍यता नहीं रखता है ।

 

अध्‍यक्ष महोदय- आपके पास कोई जानकारी है तो आप मंत्री जी को उपलब्‍ध करा दीजिए, मंत्री जी उसका परीक्षण करा लेंगे ।

 

श्री जालम सिंह पटेल- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि जो जलयोजना वहां स्‍वीकृत की गई है, उसमें व्‍यापक भ्रष्‍टाचार हुआ है, हमारी सरकार अच्‍छा काम करना चाह रही है पर नीचे स्‍तर पर उसको गलत तरीके से प्रस्‍तुत किया जा रहा है ।

 

अध्‍यक्ष महोदय- माननीय मंत्री जी को आप जानकारी उपलब्‍ध करा दें ।

 

श्री जालम सिंह पटेल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वहां के जो सीएमओ हैं, अध्‍यक्ष हैं और प्रदेश के इएनसी की मिली भगत से यह भ्रष्‍टाचार हुआ है, मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि इसकी जांच करा लें और सीएमओ को और बाकी लोगों को निलंबित करने की कार्यवाही करेंगे, इसके बाद जांच करा लें ।

 

श्री लालसिंह आर्य- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शासन स्‍तर पर वृहद समिति है जिसके द्वारा दस्‍तावेजों की जांच की जाती है, माननीय सदस्‍य ने शासन पर आरोप लगाया है और प्रश्‍नवाचक चिन्‍ह लगाया है, मैं आपको संतुष्‍ट करना चाहता हूं, एक महीने के अंदर हम यहां से जांच करा लेंगे और उसमें जो भी दोषी होगा उसके विरूद्व कार्यवाही करेंगे ।

 

श्री जालम सिंह पटेल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सीएमओ को हटाकार या सस्‍पेंड करके, वही अधिकारी रहेंगे तो फिर जांच कैसे होगी ?

 

अध्‍यक्ष महोदय- वह आपकी बात मान रहे हैं, अब आप बैठ जाइए ।

 

 

 

 

12.25 बजे ध्‍यानाकर्षण (क्रमश:)

(4) सिवनी जिले में शासकीय योजनाओं का लाभ हितग्राहियों को

न मिलने विषयक्.

 

 

श्री दिनेश राय (सिवनी) - अध्‍यक्ष महोदय,

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

श्री दिनेश राय - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें मेरे तीनों मामले थे. गरीबी रेखा के कार्ड में चाहे वह जन-सुनवाई हो, चाहे 181 हो, चाहे सी.एम. हेल्‍पलाईन पर शिकायत हो- इनका वास्‍तव में निराकरण नहीं होता है. मैं आपके माध्‍यम से, मंत्री जी से निवेदन करता हूँ कि हमारे यहां 3-3, 4-4 बार महिला-पुरुष लगातार जन-सुनवाई में भी शिकायत करते हैं और अपने आवेदन-पत्र देते हैं. लेकिन पटवारी एवं तहसीलदार अपने ऑफिस में बैठकर ही निराकरण कर देते हैं. स्‍थल नहीं जाते हैं, किसी भी हालत में स्‍थल नहीं जाते हैं.

मेरा आपसे आग्रह है कि आप स्‍थल निरीक्षण जरूर करायें. इसके लिए कोई कमेटी या कुछ ऐसा बना दें कि गांव के ऐसे 5 से 6 प्रबुद्ध लोग उसमें रहें, जो यह निर्णय (डिसाईड) करें कि वास्‍तव में यह गरीब है. वह पटवारी है और वहां आकर करे. मैं पूरे गांव की लिस्‍ट लेकर आया हूँ, जिनके लगातार आवेदन देने के बाद भी उनको गरीबी रेखा के कार्ड नहीं बन रहे हैं. मेरे पास जन-सुनवाई में भी लोग आ रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय -- आप सीधे प्रश्न कर दें.

श्री दिनेश राय -- अध्यक्ष महोदय, एक तो मैं चाहता हूं कि वे अपने कार्यालय में बैठकर  पट्टा एवं गरीबी रेखा के कार्ड की कार्यवाही करते हैं. मेरा निवेदन है कि वे यह स्थल पर जाकर करें. इसका निरीक्षण जरुर करवा लें. जांच करवा लें, कमेटी बना लें. दूसरा, आपने कहा कि पेंशन उनको प्रति माह मिल रही है. लेकिन 6-6,8-8 माह से उनको पेंशन नहीं मिली है. कुछ जगह तो एक एक साल से पेंशन नहीं मिली है. मैं उनकी लिस्ट लाया हूं. आपको बता देता हूं, क्योंकि आपको विभाग ने जानकारी अपूर्ण दी है. सचिव, सहायक सचिव इनका कहना है कि हमको अभी तक बजट नहीं आया है. आवंटन प्राप्त नहीं हुआ है. दूसरा, उनके द्वारा सही बैंक खाते ऑन लाइन पोर्टल में दर्ज नहीं होते. ..

अध्यक्ष महोदय -- आप कृपया प्रश्न कर दें.

श्री दिनेश राय -- अध्यक्ष महोदय, उसी से संबंधित है.

अध्यक्ष महोदय -- संबंधित है, लेकिन सीधा पाइंटेड प्रश्न करिये.

श्री दिनेश राय -- अध्यक्ष महोदय, उनके द्वारा सही बैंक खाते ऑन लाइन पोर्टल में दर्ज नहीं किया गया है. , कर्मचारियों ने एकाउंट का सही क्रियान्वयन नहीं किया है.

अध्यक्ष महोदय -- अगर आप इतना लम्बा बोलेंगे, तो उत्तर कैसे आयेगा.

श्री दिनेश राय -- अध्यक्ष महोदय, उन्होंने क्रियान्वयन नहीं किया है, जिसके कारण लोगों को पेंशन नहीं मिल रही है. असत्य जानकारी आ रही है.

अध्यक्ष महोदय -- आप सीधा प्रश्न पूछिये.

श्री दिनेश राय -- अध्यक्ष महोदय, मैं सीधा ही प्रश्न पूछ रहा हूं कि हितग्राहियों को अभी तक, आज तक पेंशन की राशि प्राप्त नहीं हुई है.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय, मुझे यह जानकारी दी गई है कि सिवनी जिले में फरवरी माह तक की पेंशन का भुगतान कर दिया गया है. यदि कहीं किसी ग्राम पंचायत या नगरीय निकाय में पेंशन नहीं मिली हो, तो उसके बारे में माननीय सदस्य लिख कर दे दें, हम वहां पर पेंशन देना सुनिश्चित कर देंगे. दूसरी बात मैं सदन को अवगत कराना चाहता हूं कि यह शिकायत कई जगह से आ रही है कि समय पर पेंशन नहीं मिली. हमने इसमें बहुत ज्यादा सुधार करने का काम किया है. मुख्यमंत्री जी का भी निर्देश है और सभी लोगों की चिंता है कि समय पर पेंशन मिलना चाहिये. तो एक प्रयोग यह भी चल रहा है कि जहां से गरीब लोग राशन प्राप्त करते हैं, वहां से ही पेंशन की व्यवस्था, हम वहां की मशीनों का उपयोग करके उससे करने लगें. यह व्यवस्था एकाध महीने के अंदर पूरी की पूरी सुचारु रुप से और बगैर किसी त्रुटि के पूर्ण कर ली जायेगी. शासन की पूरी चिंता है कि यह जल्दी से जल्दी समय पर हो और उसके बाद भी यदि यह संभव नहीं होगा, तो हम सीधा पंचायतों के माध्यम से या नगरीय निकायों के माध्यम से सीधा नगद राशि देकर के और हम पेंशन की व्यवस्था दिलवाने का काम करेंगे. जहां तक मेरा विचार है कि यदि एकाउंट में पैसा जमा होगा, तो उसमें पारदर्शिता रहेगी, गड़बड़ी नहीं होगी, कहीं कहीं गड़बड़ी की शिकायतें आती हैं और इसी कारण से विलम्ब हो रहा है. अब हमने यह भी तय किया है कि यदि समय पर पेंशन नहीं मिलती है, तो जिला पंचायत के जो अधिकारी हैं उनका, जनपद के जो अधिकारी हैं उनका या नगरीय निकायों के जो अधिकारी हैं उनका सीधा उत्तरदायित्व तय करके और उनके विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जायेगी. आवश्यकता होगी तो निलंबन की कार्यवाही हम करेंगे.

अध्यक्ष महोदय -- ठीक है.

श्री दिनेश राय -- अध्यक्ष महोदय, अभी तो पट्टा वाला और रह गया. उसमें तीनों चीजें थीं.

अध्यक्ष महोदय -- तीन नहीं, प्रश्न तो एक ही पूछ सकते हैं. ध्यान आकर्षण में एक ही प्रश्न पूछ सकते हैं. चलिये, एक प्रश्न और पूछ लीजिये.

श्री दिनेश राय -- अध्यक्ष महोदय, अभी गरीबी रेखा और पेंशन की बात आई है. पट्टे का भी ध्यान आकर्षण में है.

अध्यक्ष महोदय -- एक ही प्रश्न में इकट्ठा पूछ लीजिये.

श्री दिनेश राय -- अध्यक्ष महोदय, पट्टे में भी पटवारी वही प्रक्रिया कर रहे हैं. वे स्थल निरीक्षण नहीं करते हैं. तो मेरा आपसे आग्रह है कि आप गरीबी रेखा के कार्ड, पेंशन और पट्टा, इसके लिये किसी और विभाग को सुपुर्द कर दीजिये. क्योंकि पटवारी,तहसीलदार निरीक्षण बिलकुल नहीं कर रहे हैं. जन सुनवाई जब कलेक्टर के यहां करते हैं, तो 200 आते हैं और निराकरण कर देते हैं, विभाग को देख करके. सिर्फ कहकर निराकरण कर देते हैं, लेकिन स्थल पर उसका निराकरण नहीं होता.

अध्यक्ष महोदय -- अब आप बैठें, समस्या का हल तो सुन लीजिये. मंत्री जी.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को और सदन को अवगत कराना चाहता हूं कि जिस विषय के बारे में, पेंशन के बारे में, पट्टे के बारे में और भी अन्य विषयों के बारे में माननीय सदस्य चर्चा कर रहे हैं, उसकी अप्रैल के माह में समग्र रुप से पूरे प्रदेश में एक विस्तारित अभियान चलाकर 3 दिन की ग्राम सभा लगाकर के, ग्रामीण क्षेत्रों में हम पूरा का पूरा सर्वे करवा रहे हैं. मध्यप्रदेश में एक भी आदमी, एक भी व्यक्ति जो पात्र है, वह नहीं छूटना चाहिये, इस बात को अप्रैल के माह में मध्यप्रदेश सरकार सुनिश्चित करने जा रही है, अम्बेडकर जयंती के साथ में हम यह कार्यक्रम शुरु कर रहे हैं. इस कारण से मैं यह कह सकता हूं कि एक महीने के बाद शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति पात्र मिले, जो इससे वंचित रह जाये.

श्री दिनेश राय -- अध्यक्ष महोदय, अगर मंत्री जी कर लेंगे, तो उसके लिये मेरा धन्यवाद है. मंत्री जी अगर अप्रैल माह में यह कर देंगे, तो मैं उनको धन्यवाद देता हूं.

अध्यक्ष महोदय -- दिनेश जी, बैठ जायें.

 

12.33 बजे प्रतिवेदन की प्रस्तुति

याचिका समिति का तैंतीसवां प्रतिवेदन

श्री केदारनाथ शुक्ल (सभापति) -- अध्यक्ष महोदय, मैं, याचिका समिति का तैंतीसवां प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.

 

12.34 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति

अध्यक्ष महोदय -- आज की कार्य सूची में उल्लेखित याचिकाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जायेंगी.

 

12.35 बजे. शासकीय विधि विषयक कार्य

1.

मध्यप्रदेश नगरपालिक विधि(संशोधन)विधेयक, 2016

 

राज्य मंत्री,सामान्य प्रशासन (श्री लालसिंह आर्य) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मध्यप्रदेश नगर पालिक विधि (संशोधन) विधेयक, 2016 के पुर:स्थापन की अनुमति चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश नगर पालिक विधि (संशोधन) विधेयक, 2016 के पुर:स्थापन की अनुमति दी जाए.

अनुमति प्रदान की गई.

श्री लालसिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मध्यप्रदेश नगर पालिक विधि (संशोधन) विधेयक, 2016 का पुर:स्थापन करता हूं.

2.

मध्यप्रदेश उपकर(संशोधन) विधेयक, 2016

वित्त मंत्री(श्री जयंत मलैया) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाये.

अध्यक्ष महोदय-- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाये.

श्री रामनिवास रावत(विजयपुर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, (डॉ.गौरीशंकर शेजवार के बैठे बैठे हंसने पर ) क्यों डॉक्टर साहब क्यों हंसी आ रही है. अध्यक्ष महोदय, शेजवार साहब कुछ बोल नहीं रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- आप कृपया मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2016 पर अपने विचार रखें.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, वो हंस रहे हैं. बाघिन मर रही है, शावक मर रहे हैं, और शेजवार साहब यहां पर हंस रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- यह विषय इस समय कहां है. उप कर में यह विषय है क्या. (हंसी)

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय वित्त मंत्री जी द्वारा मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2016 जो विचार के लिये यहां पर प्रस्तुत किया गया है. इसका मैं पुरजौर विरोध करता हूं. अध्यक्ष महोदय, विरोध करने का कारण भी है. पहले भी ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और रोजगार उपलब्ध कराने के लिये, सरकार के द्वारा दान पर, रजिस्ट्री पर, लिखित पर आप रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था के तहत किसी भी रजिस्ट्री पर सरकार ढाई प्रतिशत का कर लेती थी और वह उप कर पंचायत विभाग को जाता था. पहले से ही सरकार ने रजिस्ट्री के रेट बढ़ा दिये, रजिस्ट्री की वेल्यू भी बढ़ा दी, इसके बाद सरकार ढाई प्रतिशत के स्थान पर सीधा 10 प्रतिशत मतलब चार गुना आप कर बढ़ाने जा रहे हैं, केवल यह बात कहकर कि" उपकर के आगम, ग्रामीण विकास विशेषत: ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयों की अधोसंरचना के अनुरक्षण के लिये उपयोजित किए जाएंगें. " माननीय अध्यक्ष महोदय, इसके पहले भी ढाई प्रतिशत कर मिलता था तो पहले आपने कितना उपायोजित किया . इसको भी आप स्पष्ट करें.(वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया द्वारा बैठे बैठे बोलने पर कि आप तो बोलें) मैं तो बोल ही रहा हूं. टेक्स आपको लगाना है, आप पूरी जनता को टेक्स के भार से इतना दबा रहे हैं कि जनता त्राहि-त्राहि कर रही है और जनता की समस्या आपको दिखाई नहीं दे रही है. सब चीजों के नाम पर टेक्स वसूल किया जा रहा है. विद्यालयों की व्यवस्था के नाम पर टेक्स, स्वच्छता कर के नाम पर केन्द्र सरकार का टेक्स, विकास के लिये एक्साइज ड्यूटी टेक्स, कितने टेक्स आपने बढ़ा दिया और इस टेक्स से जो ग्रामीण क्षेत्र का रहने वाला किसान है, आम जनता है वह आज भी सूखे से पीड़ित है. फसल हुई नहीं है, कोई क्रय-विक्रय करना चाहता है, तो इस तरह से आप टेक्स बढ़ाते गये तो क्रय विक्रय करने वालों की संख्या में भी कमी आयेगी. और आई भी है कल ही ई-स्टाम्प में भोपाल में सर्वर डाउन होने के कारण 31 करोड़ रूपये की इनकम सरकार की मारी गई है. राजस्व कर आपको नहीं मिल पाया है, तो प्रदेश में यह स्थिति है. टेक्स बढ़ाने से विकास नहीं होगा, टेक्स में मिलने वाले पैसे को किस तरह से खर्च किया जाये, किस काम में खर्च किया जाये, मैं समझता हूं कि आपने विद्यालय की अघोसंरचना विकास के अनुरक्षण की जो बात कही है , केवल अनुरक्षण की बात कही है, अनुरक्षण केवल मरम्मत कहा जाता है, क्या आप इसके लिये नये काम भी ले सकते हैं, क्या इसमें आप वाउन्ड्रीवाल भी ले सकते हैं, पूरे प्रदेश में न तो विद्यालयों के लिये भूमि आरक्षित है, कहीं भी विद्यालय बन रहे हैं, कभी भी एक अतिरिक्त कक्ष यदि स्वीकृत हो गया तो वह 1 किलोमीटर दूर बन रहा है, यदि दूसरा अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत हो गया तो वह तीसरी जगह बन रहा है. यह स्थिति प्रदेश में है. इसलिये वित्त मंत्री जी सबसे पहले तो आप इस प्रदेश में यह व्यवस्था करें कि प्रदेश के पूरे ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयों के लिये राजस्‍व विभाग से भूमि आरक्षित करायें, उनको फिर सुरक्षित करें, तब आपके स्‍कूलों के अधोसंरचना विकास की बात करेंगे. आपके टीचर नहीं हैं, और चार गुना टैक्‍स बढा दिया. पहले 2.5 प्र‍तिशत उपकर जो आप लेते थे उसको सीधा-सीधा 10 प्रतिशत कर रहे हैं, मैं समझता हूं कि यह कतई उचित नहीं है. किसी भी टैक्‍स को 20 प्रतिशत, 30 प्रतिशत, 40 प्रतिशत, 50 प्रतिशत बढ़ाया जाता है, आप सीधी-सीधा 4 गुना बढ़ाकर के क्‍या संदेश देना चाहते हो प्रदेश की जनता को, प्रदेश की जनता से क्‍या चाहते हो, पूरी सरकार को चलाने का भार प्रदेश की जनता पर ही आप डालना चाहते हो. माननीय अध्‍यक्ष महोदय यह दुर्भाग्‍यपूर्ण स्थिति है, मैं इस संशोधन विधेयक का विरोध करता हूं और माननीय मंत्री और सरकार के सभी मंत्रियों से निवेदन करूंगा, आग्रह करूंगा कि इसको बढ़ा दें, लेकिन 4 गुना नहीं, इसमें कहीं न कहीं कमी करके ढाई प्रतिशत से 10 प्रतिशत किया है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- केलकूलेशन तो कर लें.

श्री रामनिवास रावत-- ढाई प्रतिशत से 10 प्रतिशत किया जाये, यही तो है इसमें, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसका पुरजोर विरोध करता हूं और माननीय मंत्री जी से उम्‍मीद करूंगा कि इसको 10 प्रतिशत के स्‍थान पर कम रखें जिससे प्रदेश की जनता पर बोझ न पड़े.

श्री जयंत मलैया-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब तक विक्रय पत्र, दान पत्र, भोग बंधक तथा 30 वर्ष एवं उससे अधिक अवधि के पट्टे के दस्‍तावेजों पर स्‍टाम्‍प शुल्‍क का ढाई प्रतिशत उपकर लिया जाता है. इस राशि का उपयोग ग्रामीण विकास तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्‍ध कराने के लिये किया जाता है. जैसा माननीय रावत जी ने जानना चाहा था, वर्ष 2014-15 में इस विभाग को उपकर से लगभग 68 करोड़ रूपये के राजस्‍व की प्राप्ति हुई है. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा उपकर को प्रभार्य स्‍टाम्‍प शुल्‍क की राशि का 10 प्रतिशत करने का प्रस्‍ताव किया गया है, इससे उपकर के रूप में लगभग 200 करोड़ रूपये की अतिरिक्‍त राशि प्राप्‍त होना संभावित है, जिसका ग्रामीण विकास में अतिरिक्‍त रूप से उपयोग किया जा सकेगा. अत: इन दस्‍तावेजों पर स्‍टाम्‍प शुल्‍क की राशि का 2.5 प्रतिशत के स्‍थान पर 10 प्रतिशत उपकर किये जाने का प्रस्‍ताव किया जा रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय, मैं यहां निवेदन करना चाहता हूं जैसा कि अभी माननीय रावत साहब ने जिक्र किया है, ग्रामीण क्षेत्र के अंदर जो देय शुल्‍क होता है, मैं एक उदाहरण के तौर पर निवेदन करना चाहता हूं अगर कोई संपत्ति, भूमि, कुछ भी 10 लाख रूपये की है तो उस पर स्‍टाम्‍प शुल्‍क 5 प्रतिशत होता है, 1 प्रतिशत पंचायत शुल्‍क होता है और जो उपकर होता है, जो उपकर हमने लगाया है, यह उपकर स्‍टाम्‍प शुल्‍क के मूल्‍य के ऊपर होता है, जो बहुत कम होता है इससे आप समझें कि हमने 2.5 से बढ़ाकर इसको 10 प्रतिशत किया है तो पहले यह जो 1250 रूपये था अब वह 5 हजार रूपये हुआ और 10 लाख रूपये की सम्‍पत्ति के ऊपर मात्र 3750 रूपये की राशि बढ़ती है, ज्‍यादा राशि नहीं है इसमें. अध्‍यक्ष महोदय मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश उपकर (संशोधन) अधिनियम 1981 (क्रमांक 1 सन् 1982) की धारा 9 (6) के स्‍थान पर निम्‍नलिखित भाग स्‍थापित किया जाये, अर्थात 6 उपकर के आगम ग्रामीण विकास विशेषत: ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयों की अधोसंरचना के अनुरक्षण के लिये उपायोजित किया जाये.

श्री रामनिवास रावत-- यह तो प्रस्‍तुत ही कर दिया है, इसको पढ़ने की जरूरत नहीं है.

श्री जयंत मलैया-- जी, अत: यह विधेयक प्रस्‍तुत है.

 

 

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाये.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

अध्‍यक्ष महोदय-- अब विधेयक के खण्‍डों पर विचार होगा.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 2 तथा 3 इस विधेयक का अंग बने.

खण्‍ड 2 तथा 3 इस विधेयक का अंग बने.

 

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 1 इस विधेयक का अंग बने.

खंड 1 इस विधेयक का अंग बना.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न यह है कि पूर्ण नाम तथा अधिनियम सूत्र विधेयक का अंग बने.

पूर्ण नाम तथा अधिनियम सूत्र विधेयक का अंग बने.

 

श्री जयंत मलैया-- अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक,2016 पारित किया जाए.

अध्यक्ष महोदय-- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक,2016 पारित किया जाए.

प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक,2016 पारित किया जाए.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

विधेयक पारित हुआ.

 

नियम 52 के अधीन आधे घंटे की चर्चा

अध्यक्ष महोदय-- श्री रमेश मैन्दोला...(अनुपस्थित)

अध्यक्ष महोदय--विधानसभा की कार्यवाही अपराह्न 3.00 बजे तक के लिए स्थगित.

( अपराह्न 12.46 बजे से 3.00 बजे तक अन्तराल )

 

 

समय 3.08 बजे {उपाध्यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए.}

 

उपाध्यक्ष महोदय - अब अनुपूरक कार्यसूची में उल्लेखित कार्य लिये जाएंगे. आज की अनुपूरक कार्यसूची के पद - 6 के अंतर्गत 'शासकीय विधि विषयक कार्य' के उपपद (2), (3), तथा (4) में उल्लेखित विधेयकों की महत्ता एवं उपादेयता को दृष्टिगत रखते हुए, मैंने, स्थायी आदेश की कंडिका 24 में विनिर्दिष्ट, अपेक्षाओं को शिथिल कर आज पुरःस्थापन हेतु प्रस्ताव प्रस्तुत करने की अनुमति प्रदान की है. मैं समझता हूं कि सदन इससे सहमत है.

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.)

 

शासकीय विधि विषयक कार्य (क्रमशः)

 

मध्यप्रदेश विधान सभा सदस्य वेतन, भत्ता तथा पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2016 (क्रमांक 8 सन् 2016)

 

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) - उपाध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश विधान सभा सदस्य वेतन, भत्ता तथा पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2016 के पुरःस्थापन की अनुमति चाहता हूं.

उपाध्यक्ष महोदय - प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश विधान सभा सदस्य वेतन, भत्ता तथा पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2016 के पुरःस्थापन की अनुमति दी जाय.

अनुमति प्रदान की गई.

डॉ. नरोत्तम मिश्र - उपाध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश विधान सभा सदस्य वेतन, भत्ता तथा पेंशन (संशोधन) विधेयक, 2016 का पुरःस्थापन करता हूं.

 

 

मध्यप्रदेश विधान सभा अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष वेतन तथा भत्ता विधि(संशोधन) विधेयक,2016 (क्रमांक 9 सन् 2016 ) का पुर:स्थापन

 

संसदीय कार्य मंत्री ( डॉ नरोत्तम मिश्र ) -- उपाध्यक्ष महोदय मैं मध्यप्रदेश विधान सभा अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष वेतन तथा भत्ता विधि(संशोधन) विधेयक, 2016 (क्रमांक 9 सन् 2016 ) के पुर:स्थापन की अनुमति चाहता हूं.

उपाध्यक्ष महोदय -- प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश विधान सभा अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष वेतन तथा भत्ता विधि(संशोधन) विधेयक, 2016 (क्रमांक 9 सन् 2016 ) के पुर:स्थापन की अनुमति दी जाय.

अनुमति प्रदान की गई.

संसदीय कार्य मंत्री ( डॉ नरोत्तम मिश्र ) -- उपाध्यक्ष महोदय मैं मध्यप्रदेश विधान सभा अध्यक्ष तथा उपाध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष वेतन तथा भत्ता विधि(संशोधन) विधेयक, 2016 (क्रमांक 9 सन् 2016 ) का पुर:स्थापन करता हूं.

 

मध्यप्रदेश मंत्री ( वेतन तथा भत्ता ) संशोधन विधेयक, 2016 ( क्रमांक 10 सन् 2016 ) का पुर:स्थापन

 

राज्यमंत्री, सामान्य प्रशासन विभाग ( श्री लाल सिंह आर्य ) -- उपाध्यक्ष महोदय मैं मध्यप्रदेश मंत्री ( वेतन तथा भत्ता ) संशोधन विधेयक, 2016 ( क्रमांक 10 सन् 2016) के पुर:स्थापन की अनुमति चाहता हूं.

उपाध्यक्ष महोदय -- प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश मंत्री ( वेतन तथा भत्ता ) संशोधन विधेयक, 2016 ( क्रमांक 10 सन् 2016) के पुर:स्थापन की अनुमति दी जाय.

अनुमति प्रदान की गई.

श्री लाल सिंह आर्य ---- उपाध्यक्ष महोदय मैं मध्यप्रदेश मंत्री ( वेतन तथा भत्ता ) संशोधन विधेयक, 2016 ( क्रमांक 10 सन् 2016) का पुर:स्थापन करता हूं.

 

नियम 139 के अधीन अविलंबनीय लोक महत्व के विषय पर चर्चा.

मध्यप्रदेश में पेयजल संकट से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा

उपाध्यक्ष महोदय -- अब मध्यप्रदेश में पेयजल संकट से उत्पन्न स्थिति के संबंध में श्री कमलेश्वर पटेल तथा श्री रामनिवास रावत सदस्य चर्चा प्रारम्भ करेंगे. पूर्व में ध्यानाकर्षण तथा कतिपय मांगों के माध्यम से भी इस विषय पर चर्चा हो चुकी है. अत: समिति अनुसार 5 - 5 सदस्य ही इस चर्चा में भाग लेंगे. कृपया सहयोग करेंगे.

श्री बाला बच्चन -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय 10 - 10 माननीय सदस्यों के नाम तो पहले ही तय हो चुके हैं.

उपाध्यक्ष महोदय -- ठीक है विचार कर लेंगे.

डॉ नरोत्तम मिश्र -- एक गुजारिश है कि बहुत सारगर्भित चर्चा होगी निश्चित रूप से आपने कहा है कि सदस्यों की संख्या बोलने के लिए बढ़ा दें, आसंदी ने कहा भी है कि इस पर विचार करेंगे, लेकिन उसमें पुनरावृत्ति न हो चर्चा काफी हो अच्छी हो, एक ही विषय जो आ गया है वह रिपीट न हो तो अच्छा होगा.

उपाध्यक्ष महोदय -- माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी का कहना उचित है कि रिपीटिशन न हों क्योंकि इस विषय पर चर्चा कई बार हुई है. वहीं चीजें बार बार न आयें इसका माननीय सदस्य ध्यान रखेंगे, उनका यह कहना उचित है.

श्री बाला बच्चन -- इ स बात का ध्यान रखा जायेगा कि रिपीटिशन न हो. सदन में जो चीजें पहले आ चुकी हैं उनको छोड़कर ही नई बातें रखी जायेंगी. बाकी वैसा जवाब भी हो और समस्याओं का समाधान भी हो.

श्री सुन्दरलाल तिवारी -- उपाध्यक्ष महोदय जवाब भी वही घिसा पिटा न रहे, नया जवाब आये, जिससे जनता को राहत मिले.

डॉ नरोत्तम मिश्र -- हे व्यवधान पुरूष मैं आपको नमन करता हूं.

उपाध्यक्ष महोदय -- एक विधान पुरूष की उपाधि हुआ करती थी अभी आपने एक नई उपाधि निर्मित कर दी है व्यवधान पुरूष.

श्री रामनिवास रावत -- उपाध्यक्ष महोदय उपाधि विधान पुरूष की ही है वह अपभ्रंश है.

श्री कमलेश्वर पटेल ( सिहावल ) -- उपाध्यक्ष महोदय बहुत ही गंभीर विषय पर प्रदेश में जो आज हालात हैं पेयजल की समस्या को लेकर, उस पर चर्चा होने जा रही है . हमारे सत्तापक्ष के जो साथी हैं माननीय मंत्रीगण हैं जिस तरह की टीकाटिप्पणी करते हैं हम आपके सामने बहुत ही कम शब्दों में कुछ बात रखने के बाद फिर पेयजल संकट के बारे में बात करेंगे.

उपाध्यक्ष महोदय माननीय सरकार के माननीय मंत्रीगण से हमारा निवेदन है कि हमने यह विषय न तो पेपर में फोटो छपवाने के लिए लगाया था, और न ही सरकार को कोसने के लिए, बल्कि हम यह विषय स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से लेकर आये हैं, हमने स्थगन लगाया था , वास्तव में पेयजल संकट पूरे प्रदेश के साथ साथ सीधी सिंगरौली जिले में भी है. उसके निदान के लिये यह विषय उठाया है. वह नियम 139 के तहत उठाया था. खासकर माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी से विशेष निवेदन करेंगे कि कल हमारे एक साथी दोगने जी जो पेयजल संकट को लेकर सदन में आये थे.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ नरोत्‍तम मिश्र):- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दोगने जी पेयजल संकट के लिये आये थे या नहरों के संकट के लिये आये थे. सम्‍मानीय सदस्‍य आप बता दें.

इनका क्‍या है कि '' सर हो सजदे में मगर, दिल में हो दुनिया का ख्‍याल, ऐसी स्थिति पटेल साहब की है.

श्री कमलेश्‍वर पटेल :- माननीय मंत्री जी, उनका विषय पानी के संकट से संबंधित था, वह पेयजल से भी जुड़ा हुआ मामला है. अगर पानी पहुंचेगा तो वह पानी से जुड़ा हुआ ही मामला है. अगर वहां पर पानी पहुंचेगा तो वहां पर पीने के पानी का संकट भी दूर होगा.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- आपकी बात सही है कि वह मामला पानी के संकट से ही जुड़ा हुआ मामला था. परन्‍तु पानी का हर स्‍थान पर जाने से रूप बदल जाते हैं, नाम बदल जाते हैं. अगर पानी हाथ में देते हैं तो वह चरणामृत होता है, आंख से निकलता है तो वह आंसू होता है. जम कर गिरता है तो वह ओला होता है, नहर का पानी अलग होता है. पीने का पानी अलग होता है.

श्री जितू पटवारी :- माननीय मंत्री जी यह तो आपका ज्ञान है.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- ऐसा है कि जब से आपको डांट पड़ी है, उसके बाद पहली बार बोले है, आप बोल लो.

उपाध्‍यक्ष महोदय :-संसदीय कार्य मंत्री जी आज बहुत फार्म में हैं.

श्री रामनिवास रावत :- आपकी साजिश में फसेंगे तो ऐसा ही होगा.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- आप इनको समझाओ की मेरी साजिश में नहीं फसें. मैंने कहा था कि मेरी साजिश में फंसो ?

श्री बाला बच्‍चन :- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी आपको याद है राज्‍यपाल महोदय जी के अभिभाषण पर माननीय मंख्‍यमंत्री जी बोल रहे थे. तब उन्‍होंने यह कहा था कि टेल से रिटेल तक आप पानी कैसे पहुंचाओगे उसको स्‍पष्‍ट करेंगे. अब आप रिटेल कैसे करेंगे. मैंने उस समय मुख्‍यमंत्री जी को टोका था.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- वह मेन केनाल से ब्रांच में जाता है. उसको रिटेल ही बोलते हैं.

श्री बाला बच्‍चन :- क्‍या आप तोल के देंगे कि एक लीटर, दो लीटर, क्‍या आप तोल के देंगे ? डीजल, पेट्रोल या खाने का तेल जो होता है, दूध को ही नापकर दिया जाता है.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- तोल के देने को रिटेल ही बोलते हैं. खेरीज को रिटेल बोलते हैं

सुश्री कुसुम महदेले:- उपाध्‍यक्ष महोदय, यह क्‍या हो रहा है.

उपाध्‍यक्ष महोदय :- माननीय मंत्री जी ठीक बोल रही है. चर्चा दूसरे विषय पर होनी थी. कमलेश्‍वर जी आप चर्चा के प्रति गंभीर नहीं है, ऐसा लगता है. आप विषय से भ‍टकिये मत .

श्री कमलेश्‍वर पटेल :- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने गंभीरतापूर्वक ही बात कर रहा हूं. पहले ही बोला था कि सरकार के मंत्रिगणों द्वारा जो मजाक उड़ाया जाता है, जिस तरह की बात होती है. मैंने वह बात रखने की कोशिश की है. हम ना पेपर में छपने के लिये यह ईश्‍यू लेकर आये हैं. बल्कि यह ईश्‍यू हम सरकार के सामने इसलिये लाये हैं कि पूरे मध्‍यप्रदेश में सीधी, सिंगरौली जिले के साथ साथ पूरे रीवा,शहडोल और बुंदेलखंड संभाग में सूखा प्रभावित जिले हैं वहां पर पीने के पानी का संकट है, चाहे वह मनुष्‍य हो या जीव जन्‍तु हो सभी परेशान है. यहां तक कि जितने भी हमारे वाटर रिर्सोसेस हैं, जो नदी नाले थे वह भी सूख गये हैं. जानवरों को पीने के पानी की किल्‍लत हो रही है. इंसान को पीने के पानी की भारी किल्‍लत हो रही है. उनको दो दो, तीन तीन किलोमीटर दूर तक पानी लेने के लिये जाना पड़ रहा है.

उपाध्‍यक्ष महोदय, हमने कुछ दिन पहले विधान सभा में ध्‍यानाकर्षण लगाया था. उसमें विभाग की तरफ से जो जवाब आया था, उसका जवाब परसेंटेज के आधार पर ऐसा दिया कि प्रदेश में पानी की कोई दिक्‍कत नहीं है. अभी होली के दरमियान जो छुट्टियां थी उस समय हम अपने विधान सभा क्षेत्र में गये तो हमने देखा कि वहां पर पानी की स्थिति आज भी वही है पहले थी . उपाध्‍यक्ष महोदय, हैंडपंप का वाटर लेवल नीचे चला गया है. वहां पर संधारण का काम नहीं हो रहा है. वहां पर अगर राईजर पाईप की आवश्‍यकता है तो लोग उसके लिये चक्‍कर लगा रहे हैं. वहां पर स्थिति यह है पी एच ई विभाग के पास जितना अमला होना चाहिये, उतना अमला नहीं है. हैंडपंप का खनन कराया गया था, जिनका अभी तीन या चार महिने पहले ही खनन कराया गया था, उनमें से कई हैंडपंप ऐसे हैं, जहां पर शेड नहीं डाला गया है. कई नलजल योजना ऐसी है जहां पर पाईप लाईन तो डाल दी गयी है, उनको चालू नहीं किया गया है और जो चालू थी वह बंद पड़ी हुई है. और कई जगह तो पंचायत और पीएचई के विभाग बंद पड़े हैं और यहां से माननीय पंचायत मंत्री और आदरणीय पीएचई मंत्री जी ने घोषणा भी की थी, संधारण की राशि की भी घोषणा की थी पर सच्चाई तो यह है कि निचले स्तर पर जब हम कार्यपालन यंत्री और अन्य अधिकारियों से बात करते हैं, उनके पास अभी यहां का सर्क्यूलर, आदेश नहीं गया है, जो पंचायत और पीएचई के बीच में विवाद था, अभी उसका कहीं पर निराकरण नहीं हुआ है. मेरा आपके माध्यम से सरकार से निवेदन है कि जो भी नल जल योजनाएँ बंद हैं उन नल जल योजनाओं को तत्काल चालू कराया जाए. कई ऐसी नल जल योजनाएँ हैं जहां बिजली का बिल नहीं जमा होने की वजह से बंद पड़ी हैं और आपस में विवाद चल रहा है. इसका भी निराकरण कराया जाए. हमारी जो सीधी नगरपालिका है, सीधी नगरपालिका के ही वाटर हैड टैंक से वाटर सप्लाई बंद है, जो जिला मुख्यालय है,पीएचई और नगरपालिका के विवाद में वहां की यह स्थिति है. इसी तरह मंत्री जी को हमारा सुझाव भी है और निवेदन भी है कि जो भी अभी वर्तमान में नल जल योजनाएँ या जहां पर हैण्डपम्प सूख गये हैं उनके बगल में आप पुन: हैण्ड पम्प का खनन करायें. सूखे के तहत् प्रावधान भी है पर अभी वह काम शुरु नहीं किया गया है. कब शुरु करेंगे? जबकि सूखा राहत के क्या क्या प्रावधान हैं हमने इसके पहले देखा था और प्रदेश सरकार की तरफ से, राजस्व विभाग की तरफ से सर्रक्यूलर भी जारी हो गया, पर अगर हम जिलों में देखेंगे तो जिलों में पेयजन संकट को लेकर न समीक्षा बैठक की गयी और न ही किसी प्रकार की व्यवस्थाएं की गयीं, यह चिन्ता का विषय है, इसकी ओर हम माननीय मंत्री जी और सरकार का ध्यान आकृष्ट करायेंगे. मेरा यह भी निवेदन है कि सरकार को इस संकट से निपटने के लिए मेरे सुझाव भी हैं कि एक तो पानी के टेंकर्स की ज्यादा से ज्यादा व्यवस्था करायें. जहां जहां वाटर लेवल बहुत नीचे चला गया है या हैण्डपम्प में पानी सूख गया है या जहां जल स्रोत थे जो सूख गये हैं उसके लिए माननीय मंत्री जी को, विभाग को इस तरह की व्यवस्था करनी चाहिए, मोबाइल यूनिट्स की व्यवस्था करनी चाहिए जिससे पेयजल की व्यवस्था से आगामी 3-4 महीने जो भारी संकट आने वाला है उससे निपटा जा सके. जो हैण्डपम्प सूख गये हैं या उनका वाटर लेवल बहुत नीचे चला गया है, लोग हैण्डपम्प के माध्यम से पानी नहीं निकाल सकते, वहां पर विद्युतीकरण कराकर सबमर्सिबल पम्प के माध्यम से व्यवस्था करें. भविष्य के हिसाब से मेरा यह भी सरकार से निवेदन है कि जो भी हमारे जल के स्रोत हैं, जो तालाब हैं, या नदी नाले हैं, जो अभी सूख गये हैं तो वहां भी वर्तमान में जिस तरह की स्थिति है भविष्य में अगर वाटर लेवल बढ़ाना है, पानी का संरक्षण करना है तो उसके लिए अभी से गहरीकरण का कार्य प्रदेश सरकार को करना चाहिए जिसके माध्यम से जिस तरह से गरीब लोग, बेरोजगार, जो गांवों में मजदूरी के लिए भटक रहे हैं, पलायन कर रहे हैं, उसकी भी तत्काल व्यवस्था सरकार को करना चाहिए. इससे गहरीकरण भी होगा, जल का संरक्षण भी होगा और स्थानीय गरीब लोगों को रोजगार भी मिलेगा, वह पलायन नहीं करेंगे, ऐसी भी व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए. हमारे सीधी जिले में 30 जो हैण्डपम्प आपरेटर्स थे उनको 2 साल पहले निकाल दिया गया था. मेरा निवेदन है कि अभी पीएचई के पास अमला नहीं है.ऐसी परिस्थिति में भले ही आप थोड़े दिन के लिए, तीन-चार महीने के लिए उनको हायर कर लें क्योंकि आपके पास काम करने वाले लोग नहीं हैं तो उनका अभी ऐसे संकट के दौर में उपयोग करना चाहिए. हालांकि वह 20-25 साल काम करने के बाद सड़क पर आ गये हैं, अगर उनको आप फिर से मौका देते हैं, अस्थायी कर्मचारी के रुप में ही अगर मौका देते हैं तो हम समझते हैं कि उनके परिवार के पालन पोषण में काफी सुविधा होगी. हमारे विधानसभा क्षेत्र में ग्राम उकसा में एक साल पहले वाटर सप्लाई के लिए बोर किया गया था, अभी तक उसमें सेट नहीं डाला गया है. इसी तरह हमारे विधानसभा क्षेत्र में देवसर ब्लाक में चरकी गांव हैं जहां वाटर सप्लाई के लिए बोर किया गया था पर वाटर सप्लाई के हिसाब से पानी नहीं मिलने की वजह से, मेरा यह निवेदन है कि कम से कम उसमें हैण्डपम्प सेट ही डलवा देंगे तो कम से कम 10-20 परिवारों को भी अगर पानी पीने की व्यवस्था हो जाएगी तो ऐसे संकट के दौर में वह काम आयेगा.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि किस तरह से मेरे विधानसभा क्षेत्र में औऱ पूरे मध्यप्रदेश में नल जल परियोजनायें बंद हैं. हमारे विधानसभा क्षेत्र में ही कडियार, रजहाटीकर,तरका,हटवाखास,चितवारिया,बघोर,मेढ़ौली,पतुलखी,मयापुर,लिलवार,सेमरी,चोराही,कोदौरागांव,कोदौरा बाजार,पमरिया, बिठौली, पहाड़ी,बघौड़ी,तितली,हटवा बरहाटोला, डढ़िया, लौआ,खुटेली, जोकी एवं इसी तरह अन्य और भी नल जल परियोजनायें बंद हैं और मुख्यमंत्री नल जल योजना का कोई पता ही नहीं हैं. मेरा यह कहना है कि आलोचना करने के लिए नहीं बल्कि मैं इसलिए निवेदन कर रहा हूं जानकारी दे रहा हूं क्योंकि हमने कई बार सक्षम अधिकारियों से बात की लगातार संपर्क में है. तीन-तीन, चार-चार , छह-छह महीने बीतने के बाद भी संधारण का काम नहीं हुआ है. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, इसी तरह से हमारी विधानसभा क्षेत्र में सिंगरौली जिले के देवसर ब्लाक में डऊआडोल, हर्रा चन्देल, सरौधा, मजौना, सहुआर योजना चालू नहीं हुई हैं. इसी तरह से पोखरा देवसर, मझगवां द्वितीय, घिनहागांव,परिहासी में भी नल जल परियोजनायें बंद पड़ी हुई हैं.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, इसी तरह हमारे सिंगरौली विधानसभा क्षेत्र में भी मझौली, चाचर, खम्हरिया, छतिकरम, झाझीटोला, गोभा, चरगोड़ा, ओरगढ़ी, तियरा, काम, पिपरा, झखरावल,में भी कई नल जल परियोजनायें बंद हैं. इसी तरह से सतना जिले में अमरपाटन विधानसभा क्षेत्र में हिनोती, अरगट, बड़ाहरमा(रामनगर ब्लाक), इसी तरह से अमरपाटन ब्लाक की खरमसेड़ा, भीषमपुर, ताला, मुकुन्दपुर की नल जल परियोजनायें कई महीनों से बंद हैं. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, सीधी, सिंगरौली जिले में ही धौहनी विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत मड़वास, गिजवार, धुकखड़, कुसमी, गोतरा, निवास, निगरी, महुआगांव, टिकरी, तमसार,बरका,छूही, ताला, पाड़ योजनायें बंद हैं. मेरा कहने का मतलब यह है कि हम तो बहुत कम आंकड़े आपके सामने दे रहे हैं, पर इससे भी ज्यादा नल जल परियोजनायें बंद हैं और हैंडपंप्स की भी लंबी सूची है, वह मैं मंत्री जी को सौंप दूंगा और अवगत करा दूंगा. इसी तरह से पूरे मध्यप्रदेश में नल जल परियोजनायें बंद हैं , हैंडपंप खराब हैं . जिस स्थिति में संधारण का काम होना चाहिए उस गति से संधारण का कार्य नहीं हो रहा है. मेरा मंत्री जी से निवेदन है कि एक तरफ संधारण का काम भी हो और दूसरी तरफ जो नल जल परियोजनायें वाटर लेवल डाउन होने से या हैंडपंप सूखने से बंद हैं तो वहाँ पर दूसरे हैंडपंप के काम कराये जाये और टैंकर्स या अन्य स्त्रोतों के माध्यम से जल सरकार उपलब्ध कराये जिससे पेयजल संकट से जानवरों की और मनुष्यों की मृत्यु न हो और लोग जल संकट के कारण पलायन न करें साथ ही साथ मजदूरों के लिए मजदूरी की भी व्यवस्था करें. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आपने बोलने का अवसर दिया बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया(मंदसौर)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, एक बार पुनः मध्यप्रदेश में प्राकृतिक आपदा वर्षाकालीन सत्र में पर्याप्त पेयजल की वर्षा न होने के कारण से जो स्थिति उत्पन्न हुई है, यहाँ भी जिस प्रकार से कृषकों को प्राकृतिक आपदाओं को झेलना पड़ता है, कम वर्षा के कारण अधिक वर्षा के कारण, ओलावृष्टि के कारण, पाले के कारण उसी प्रकार से कहीं न कहीं जो विषय चर्चा में रखा गया है, मैं दोनो पक्ष सरकार पक्ष की तरफ से भी और प्रतिपक्ष को भी धन्यवाद देना चाहता हूं . इसलिए कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर हम सब इस सदन में प्रदेश की 7 करोड़ 50 लाख जनता के बारे में विचार कर रहे हैं, उस सन्निकट जलसंकट को लेकर के. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, किसी भी सरकार को इसकी चिंता करना चाहिए और चिंता है और पानी ऐसी वस्तु नहीं है कि जिसको महीने दो महीने, छह महीने के लिए सुरक्षित रखा जा सके. पेट्रोल और डीजल टैंकर भर, ट्रकों भर मिल सकते हैं लेकिन अगर कुंए में , टयूबवेल में पानी नहीं है, जलस्त्रोत यदि सूख गये हैं तो उसकी उपलब्धता पर कहीं न कहीं चुनौती है, परेशानी है. यह हम सब जानते हैं. पेयजल संकट पहली बार आया है ऐसा नहीं है. पानी का संकट पहले भी कई बार आया है. सरकार की सूझबूझ और सरकार की चिन्ता के कारण से, उसकी व्यवस्था के कारण से, कहीं हाहाकार न मचा. उपाध्यक्ष महोदय, मुझे 1984 का वह दिन, वह समय, वह वर्ष, याद है जब इस प्रदेश में भयावह जल संकट का सामना हमको करना पड़ा. उस समय मैं नगर पालिका का पार्षद हुआ करता था.10-10, 15-15 किलोमीटर दूर कहीं पानी नहीं मिलता था. बड़े शहरों की नलजल योजना पूरी तरह से ठप्प पड़ गई थी. पानी का जो स्रोत, जो प्रबंधन, नदियों के माध्यम से होता था, फिल्टर प्लांट के माध्यम से नलों तक पहुँचा था, शहरों में ज्यादा हाहाकार था. ग्रामीण क्षेत्र के लोग अपने खेत खलिहान पर काम पर जाने के समय उस कुँए पर ही जाकर के अपनी दिनचर्या पूरी कर लेते थे, नहाने का काम वहाँ हो जाता था. पानी भर करके घर ले आते थे. लेकिन तब हम भी देखते थे कोई मोटर साइकिल पर पानी ला रहा है, दो कंटेनर कोई साइकिल पर ला रहा है. कोई सिर पर उठाकर ला रहा है और उसके बाद भी कई बार संकट आया है. लेकिन संकट का सामना करने की कूवत, ताकत, ईश्वर ने हमको दी है. सरकार कटिबद्ध है और सरकार इस बारे में प्रतिबद्ध भी है. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, अब इतने महत्वपूर्ण मामले पर भी उधर पक्ष के सदस्य ठिठौली कर रहे हैं, हँसी उड़ा रहे हैं. एक तरफ तो गंभीर मुद्दे को सदन में लाया गया है. उस पर चिन्ता करना चाहिए, सुझाव देना चाहिए. अगर हँसी में ही करना था तो मेरे को लगता है कि इस प्रस्ताव को लाना न था...(व्यवधान)..

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- वही जल पिलावे हैं, उसको एक लाईन पहले ही बोल दो. आप बोल दीजिए. सब माननीय शिवराज सिंह जी की वजह से पूरा प्रदेश पानी पी रहा है.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- पानी पिएगा.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- यह बोलना ही आपको.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- तिवारी जी, पानी पिलाएँगे. जनता ने तो आपको पानी पानी कर दिया.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ.नरोत्तम मिश्र)-- यह बात बिल्कुल सच है कि माननीय शिवराज सिंह जी की वजह से इतने से बचे हों. (मेजों की थपथपाहट)

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- नहीं, जिसकी वजह से, उसको तो मिट्टी में मिला दिया. उमा जी को मिट्टी में मिला दिया. चालाकी से बनवाएँ हों मुख्यमंत्री.

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- तीन तीन बार लगातार सरकार बनाई है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- आए किस तरह हों.(व्यवधान)..

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- तिवारी जी, मध्यप्रदेश के इतिहास में तीसरी बार सरकार बनाई है...(व्यवधान)..

श्री जितू पटवारी-- यह आखिरी बार सरकार है. यह तीन तीन बार का अहंकार आखिरी बार ले जाएगा.

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- इस गलतफहमी में मत रहना जीतू वापस आ जाओ वही बहुत है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- सत्य बोलिए. उमा जी का नाम तो ले लीजिए. हिम्मत हो तो लीजिए.

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- केन्द्र में मंत्री हैं.

उपाध्यक्ष महोदय-- तिवारी जी, आप लोगों ने किस विषय पर चर्चा मांगी है?

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- उनको विषय ही पता नहीं. हँसी मजाक हो रही है.

पशुपालन मंत्री (सुश्री कुसुम सिंह महदेले)-- उपाध्यक्ष महोदय, उमा जी की चिन्ता तो हम लोग कर रहे हैं और कर ली है. आप अपनी चिन्ता तो करो. उमा जी की चिन्ता हमने कर ली. केन्द्र में मंत्री हैं. आप अपनी चिन्ता करिए...(व्यवधान)..

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- उमा जी का नाम आपने 11 बार लिया.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- अब नाम न आए दुबारा रिपीटिशन नहीं होना चाहिए.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- तिवारी जी, मैंने रिपीटिशन तो किया ही नहीं. अभी तो शुरुआत की है.

श्री रणजीत सिंह गुणवान-- आप बार बार खड़े होंगे तो फिर लगता है कि क्या बात है. प्रदेश की जनता को पानी पिलाएँगे और फिर सरकार बनाएँगे.

उपाध्यक्ष महोदय-- माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी, रहीम जी की बात कहना भूल गए,

रहिमन पानी राखिए, पानी बिन सब सून, पानी गए न ऊबरे मोती, मानुस, चून.

डॉ कैलाश जाटव-- जितू भैय्या, इतना सीरियस मुद्दा है पानी का और इतना बढ़िया विषय ले रहे थे भाई साहब आप बीच में बोल पड़े.

उपाध्यक्ष महोदय-- जीतू जी, यह उचित नहीं है. बहुत सीरियस मेटर है. सीरियस बात हो रही है.

डॉ कैलाश जाटव-- यह बहुत सीरियस मेटर है. कभी तो आप देखें गरीबों की बात, आप इन्दौर शहर में रहते हों. माननीय शिवराज जी की वजह से आज इन्दौर में पानी आया है...(व्यवधान)..

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- जीतू जी, यह सदन है, सड़क नहीं है, गरिमा.

श्री जितू पटवारी-- एक मिनट. अव्वल तो मैंने कोई गरिमा खोई नहीं है और कोई ऐसी बात नहीं की फिर भी मेरा अनुरोध यह है कि (XXX) तो मत करिए आप बुरा मत मानना.

उपाध्यक्ष महोदय-- जीतू जी, यह गलत बात है, इसको निकाल दीजिए.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- उपाध्यक्ष महोदय, यह शब्द तो संसदीय नहीं है.

उपाध्यक्ष महोदय-- मैंने उसको निकाल दिया है.

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- उसको निकलवा दें, विलोपित कर दें. दूसरी मेरी जीतू भैय्या से प्रार्थना है क्यों ऐसे पिंच मारने वाले शब्द आप बोलते हों. मैं सच बता रहा हूँ कि आपकी बाकी की उम्र वहीं जानी है.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- माननीय नरोत्तम जी, अभी संसदीय ज्ञान का थोड़ा अभी अभाव है. 2-4 बार विधायक कभी बन कर आएँ, पहली बार आए हैं.

डॉ.कैलाश जाटव--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, सदन में कोई विषय था नहीं इनके कहने पर माननीय नरोत्तम जी ने उस विषय को लिया उनको धन्यवाद देना चाहिये कितने गंभीर विषय को लिया है और आज पूरी पार्टी मजाक उड़ा रही है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- हमने मजबूर किया है तब लिया है.

श्री जितू पटवारी--जब हमने मजबूर किया है तब लिया है.

श्री सुखेन्द्र सिंह--लड़ाई लड़ी है इसके लिये यह विषय लेकर कोई एहसान नहीं किया है यह साढ़े सात करोड़ जनता का सवाल है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--इसके लिये हम सदन में लड़े हैं और आपको मजबूर किया गया इसके लिये आप चर्चा लेकर आये हैं आप.

उपाध्यक्ष महोदय--तिवारीजी समय जाया न करें.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया--इनको तो हर समय शून्यकाल ही नजर आता है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र--उपाध्यक्ष महोदय, अच्छा आप यह तो मानते हो कि व्यवधान पुरुष नाम सही है.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया--माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी आपको बहुत बहुत बधाई बहुत सही रखा है.

उपाध्यक्ष महोदय--आप जारी रखिये.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जैसा कि आदरणीय नरोत्तम मिश्र जी ने कहा कि मुख्यमंत्रीजी की दृढ़इच्छाशक्ति के कारण से यह इतने से रह गये हैं. यह बात ठीक है कि प्रदेश में जल संकट है इस बात को सब स्वीकार कर रहे हैं लेकिन कांग्रेस के पास प्रदेश में जनसमर्थन का संकट हो गया है और इसीलिये कांग्रेस गंभीर मुद्दों पर भी ठिठोलीपना कर रही है. जुलाई अगस्त के माह में वर्षाकालीन सत्र में पानी आया, बहुत तेज गति से आया एकाध हफ्ते में ही 25, 28 इंच तक आंकड़े पहुंच गये. हम सब प्रसन्न थे कि पहले डेढ़ महीने में ही पानी की आवक जिस प्रकार से हो रही है लगता है प्रकृति प्रसन्न है और अचानक पानी का गिरना बंद हो गया और लंबी खेंच हो गई. इस बीच जो नदी,नाले चल रहे थे वे चलते चलते थम गये, रुक गये अगला पानी नहीं आया और जब आने वाला पानी नहीं आया और पानी का जो प्रवाह था वह निरन्तर कम होता गया उसके कारण से जल संकट की जो आज संभावना बन रही है उसका एक कारण वह भी है. प्रबद्ध में जो पानी गिरा उसकी निरन्तरता दूसरी, तीसरी बार हो जाती तो शायद अक्टूबर, नवंबर माह तक नदी, नाले चलते रहते और पानी का एक दौर पेयजल का या अन्य व्यवस्थाओं का उस गिरते पानी से हम उठा सकते थे. यदि जल संकट की भयावहता नहीं दिखती, ठीक बात है कि प्रतिपक्ष ने भी इसकी मांग की है. चर्चा ग्राह्य की गई सरकार ने पलायन नहीं किया, भागने की कोशिश नहीं की, चर्चा को स्वीकार करके सदन के इस समय में इस विषय पर चर्चा करने के लिए अनुमति देते हुए हम सब इस विषय पर यहां पर बैठे हुए हैं. यह भी तय किया जा रहा है कि 10 सदस्य बोलेंगे कि 5 सदस्य बोलेंगे. चर्चा सारगर्भित होना चाहिये उससे कुछ परिणाम निकलना चाहिये. जल संकट की भयावहता है हम सब जिम्मेदार लोग बैठे हुए हैं तो सदन से सड़क तक यह ध्वनि अनुगूंज होना चाहिये कि सरकार ने पेयजल के आने वाले संकट में, बहुत ठीक समय पर अभी चर्चा हो रही है. अभी मई का समय है जून का समय है और जुलाई में न जाने कब बारिश आयेगी कुछ कहा नहीं जा सकता है अगर पिछले आंकड़े देखेंगे तो 15 जुलाई, 30 जुलाई तक है यदि तब पानी गिरने की संभावना बनती है तो अभी बहुत समय बाकी है इस संकट से लड़ने के लिए इसलिये बहुत उचित समय पर सदन में इस बात को लेकर चर्चा कर रहे हैं. संकट के इस दौर में चाहे वह पेयजल का संकट हो, प्राकृतिक आपदाओं का संकट हो, ओला-पाला का संकट हो, ओलावृष्टि का संकट हो, अतिवृष्टि का संकट हो इन सब संकटों के समय में मध्यप्रदेश सरकार के राजस्व विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने, अन्याय सभी विभागों के मंत्रिगणों ने, माननीय मुख्यमंत्रीजी ने अधिकारियों ने सबने मिलकर के कमर कसी उस संकट से जो संकट हमको प्राकृतिक संकट के रुप में मिला है यह बनाया हुआ संकट नहीं है. यह संकट हमको प्रकृति से प्राप्त हुआ है इस प्रकृति से लड़ाई लड़ना बहुत कठिन काम है इतना आसान काम नहीं है. केदारनाथ की घटना का हम उल्लेख करें तो प्रकृति का प्रकोप हमने देखा है सरकार ने अपने दम पर अपने स्तर पर जितनी व्यवस्था सुनिश्चित की होगी, वह की होगी करना भी चाहिये सरकार का दायित्व होता है लेकिन प्राकृतिक आपदा से जो क्षति होती है जो नुकसान होता है उसकी भरपाई की जाना बहुत मुश्किल होता है वह चीज नहीं आ सकती है वह चीज हमारे हाथों से गुजर गई है. पेयजल परिवहन इस प्रदेश को पेयजल संकट से उबारने के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा और ऐसे में मैं माननीय मंत्री महोदय से चाहूंगा कि वे ग्राम पंचायत स्तरों पर उन गांवों को चिह्नांकित कर लें जो गांव सब तरफ से, ट्यूबवेल उनके पूरी तरह से असफल हो गये, कुंएं, बावड़ी उनके सूख चुके हैं, नदी, नालों का प्रवाह नहीं है. 3, 4, 5, 7 किलोमीटर दूर तक पानी की कोई संभावना नहीं है. ऐसे ग्रामों में शासन की ओर से, लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी विभाग की ओर से पंचायतों के माध्‍यम से हम गांवों को चिह्नांकित करते हुए अधिक से अधिक पेयजल का परिवहन करें. ''आपका टैंकर आपके द्वार'' यह योजना यदि हम हाथ में रखेंगे, नगरपालिकाओं में यह चीजें होती हैं लेकिन ग्रामीण अंचलों में पंचायतों के पास धन का अभाव रहता है, संसाधनों का अभाव रहता है ऐसी स्‍थिति में हम परिवहनों के माध्‍यम से जल संकट दूर कर सकते हैं.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं माननीय मंत्री महोदया को यह भी सुझाव दूंगा कि उन गांवों में और उन क्षेत्रों में जहां पर कुएं और बावड़ियों में अभी थोड़ा-बहुत पानी बचा पड़ा हुआ है क्षेत्रीय जल प्रबंधन योजना के माध्‍यम से वहां पर हम पानी की 10-15 टोटियां लगा दें, खैर बना दें, टंकी रख दें, उन टंकियों में पानी भरकर रखें. इसकी समय सीमा भी सुनिश्‍चित की जानी चाहिए. इस जल संकट के समय हमें जनता से इस बात को लेकर भी आह्वान करना पड़ेगा, अपील करनी पड़ेगी और आग्रह करना पड़ेगा कि पानी का दुरुपयोग न करें, सदुपयोग करें. बूंद-बूंद हमारे लिए आवश्‍यक है. ऐसी क्षेत्रीय जल प्रबंधन व्‍यवस्‍था की तरफ हमको ध्‍यान देना पड़ेगा. शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे ट्यूब-वेल और ऐसे कुएं लोगों के पास हैं जिनके पास पर्याप्‍त आवक है, उन कुओं को और बावड़ियों को चिह्नांकित करते हुए, उन ट्यूब-वेल्‍स को चिह्नांकित करते हुए और उनका अधिग्रहण करते हुए हम क्षेत्रीय जल प्रबंधन व्‍यवस्‍था के माध्‍यम से उनको जोड़ने का काम करें ताकि लोगों के बीच में हम पानी का प्रबंधन कर सकें.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ट्यूब-वेल और हैंड-पंप जिनकी क्षमता समाप्‍त हो गई है, मालवा में, जिस क्षेत्र का मैं प्रतिनिधित्‍व करता हूँ, 1000-1200 फीट नीचे तक गहरा पानी चला गया है. एक समय था जब मालवा में कहावत थी ''मालव धरती गहन गंभीर, डग-डग रोटी पग-पग नीर'' लेकिन नीर समाप्‍त हो गया है. ऐसे क्षेत्रों को चिह्नांकित करते हुए जहां पर 1200-1300 डार्क और ग्रे जो जोन पहले से 10-10, 15-15 साल से चिह्नांकित हैं, उस सूची में रजिस्‍टर्ड है, मंदसौर जिला, मल्‍हारगढ़ तहसील, सीतामऊ तहसील ये हमारे क्षेत्र की ऐसी तहसीलें हैं जो पहले से ही डार्क और ग्रे जोन में कहीं न कहीं दर्ज हैं. उनको भी हमें आइडेंटिफाई करना पड़ेगा.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो नल-जल योजनाएं लंबे समय से बंद पड़ी हुई हैं उनको दिखवा लें कि क्‍या वे पुन: जीवित हो सकती हैं. जल संकट के इस समय में मैं माननीय मंत्री महोदया से आपके माध्‍यम से आग्रह करूंगा कि ग्राम पंचायतों की वे नल-जल योजनाएं जो धन के अभाव में बंद पड़ी हुई हैं क्‍योंकि वे पैसे जमा नहीं कर पा रहे हैं और पेयजल उनका बंद पड़ा हुआ है, पश्‍चिम क्षेत्र विद्युत कंपनियों ने जिन कुओं और बावड़ियों के कनेक्‍शन पैसा जमा नहीं करने के कारण काट दिए हैं उन कनेक्‍शंस को जल संकट के दौरान ग्राम पंचायतों को यथावत सुविधा देते हुए चालू करने का यदि आदेश प्रदान करेंगे तो उन गांवों में फिलहाल पानी की व्‍यवस्‍था सुनिश्‍चित हो जाएगी.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अंतिम बात मैं यह कहना चाहता हूँ कि कई बड़ी खदानें ऐसी हैं जो खनन की गई हैं काफी गहरी हो गई है, 200, 300 और 400 फीट तक चली गई हैं उन खदानों में पानी भरा पड़ा है. यह भी ठीक बात है कि उन खदानों का पानी पीने के योग्‍य नहीं होता है लेकिन उस पानी को हम ग्रामीण क्षेत्रों में नहाने के लिए, कपड़े धोने के लिए या अन्‍य कार्यों के लिए अगर हम परिवहन करेंगे तो जल संकट कुछ हद तक दूर हो सकता है. उसमें भी इस बात को हमें सुनिश्‍चित करना चाहिए कि उक्‍त पानी पेयजल हेतु नहीं है. ऐसे स्‍थानों को हमें चिह्नांकित करना चाहिए जहां पर हमें लगता है कि यह पानी पीने से नागरिक बीमार हो सकते हैं, उनके शरीर पर विपरीत असर पड़ सकता है, इस प्रकार हमें सावधानी भी बरतनी पड़ेगी क्‍योंकि बड़ा संकट है और इस बड़े संकट के अवसर पर 7 करोड़ 50 लाख जनता के बीच में हमको जाना है, व्‍यवस्‍था देना है और यह भरोसा दिलाना है कि मध्‍यप्रदेश के यशस्‍वी, लोकप्रिय, संवेदनशील मुख्‍यमंत्री जनता के साथ खड़े हैं. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

श्री जितू पटवारी -- मैंने जो टिप्‍पणी की थी वह सही की थी.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- इसलिए तो आपको उपाध्‍यक्ष महोदय ने समझाइश दी.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- गलती तो उस दिन भारत मां की जय बोल के कर गए.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- बाला बच्‍चन जी, जब मैंने अनुमति दी थी, चर्चा प्रारंभ हुई तो मैंने कहा था कि पांच-पांच सदस्‍य दोनों पक्ष से बोलेंगे. (श्री जितू पटवारी के कुछ कहने पर) जितू पटवारी जी, उन्‍होंने तो आशीर्वाद दिया, आप बार-बार चुनकर आएं, कहां बैठते हैं कहां नहीं, वह अलग बात है, यह तो संसदीय कार्य मंत्री जी ने दिया हुआ है लेकिन उसके लिए थोड़ा अनुशासित रहें, हम आसंदी से कुछ बोल रहे हैं और आप बोले जा रहे हैं. (श्री सुंदरलाल तिवारी के खड़े होने पर) तिवारी जी, आप बैठ जाएं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- उपाध्‍यक्ष महोदय, एक बार व्‍यवधान पुरुष आप कह दें.

श्री सुंदरलाल तिवारी -- उपाध्‍यक्ष महोदय, भारत माता की जय के साथ-साथ आज का अखबार पढ़ लीजिए, माननीय मोहन भागवत जी ने जय हिंद की भी बात की है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं रोज ही अखबार पढ़ता हूँ, इनको व्‍यवधान पुरुष की उपाधि आप दे दें. आप कह दें, हाऊस चलने लगेगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- बड़ा धर्मसंकट है. तिवारी जी, अब आप बैठ जाएं.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, सीख वा को दीजिए, जा को सीख सुहाए.

उपाध्यक्ष महोदय--जब चर्चा प्रारंभ हुई तो मैंने कहा था दोनों पक्षों से पांच-पांच सदस्य बोलेंगे. आप लोगों ने अनुरोध किया कि हम ज्यादा लोग बोलना चाहते हैं. आपने 10 लोगों की बोलने की बात कही है अभी जो सूची मेरे पास में आयी है इसमें हनुमान जी के पूंछ जैसी बढ़ती जा रही है इसमें बोलने वाले 15 लोग आ गये हैं. आज विधान सभा का समय 5.00 बजे तक है कैसे इतने लोग बोल पाएंगे. मेरी सभी सदस्यों से प्रार्थना है कि वह कम समय लेंगे, बातों को रिपीट नहीं करेंगे. माननीय सदस्य तीन से पांच मिनट तक अपने क्षेत्र की समस्या रखें जिससे अधिकांश सदस्यों को अवसर दे सकें. माननीय मंत्री जी भी जवाब देंगी, वह भी आप लोग सुनना चाहेंगे.

डॉ.गोविन्द सिंह--उपाध्यक्ष महोदय, आपने तो रिकार्ड ही तोड़ दिया है.

श्री बाला बच्चन--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, हम आपके आदेश का पालन करेंगे, लेकिन आप चर्चा जारी करवाएं.

उपाध्यक्ष महोदय--आप लोग सहयोग करिये चूंकि सदन का समय 5.00 बजे तक है.

श्री बाला बच्चन--उपाध्यक्ष महोदय, बिल्कुल सहयोग करेंगे.

उपाध्यक्ष महोदय--नाम बहुत ज्यादा आ गये हैं.

श्री बाला बच्चन--आप चर्चा को जारी रखवा दें सब एडजस्ट हो जाएंगे.

श्री बाला बच्चन--हम आपके माध्यम से सरकार से भी आग्रह करेंगे...

उपाध्यक्ष महोदय--मेरा माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि चर्चा में व्यवधान पैदा न करें.

श्री बाला बच्चन--उपाध्यक्ष महोदय, टाईम लिमिट में टाईम फ्रेम में सारे वक्ता बोल लेंगे, इससे यह पता लगता है कि पूरे प्रदेश में पेयजल संकट कितना बड़ा है.

उपाध्यक्ष महोदय-- इसी पेयजल संकट को दृष्टिगत रखते हुए सरकार चर्चा के लिये राजी हुई है. यह मैंने व्यवस्था दी है मेरा अनुरोध है कि आप लोग अपने क्षेत्र की बातें ज्यादा से ज्यादा करें.

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, इस वर्ष पूरे प्रदेश में भीषण सूखे के कारण भीषण पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है जिसको आप भी भली-भांति जानते हैं. बिन पानी सब सून प्रदेश के 41 जिलों की 268 तहसीलें राज्य सरकार सूखा प्रभावित घोषित कर चुकी हैं लगभग 50 तहसीलों के प्रस्ताव अभी पड़े हुए हैं. राज्य सरकार जान-बूझकर एक तहसील मिरी का भी है उस प्रस्ताव को कलेक्टर ने भेजा है, राज्य सरकार ने उसको सूखा प्रभावित घोषित नहीं किया है उसको जान-बूझकर घोषित नहीं कर रहे हैं सूखे की भयावहता को न बताएं उसको छुपाएं, उसको कहीं न कहीं छुपाने का प्रयास किया जा रहा है. 268 तहसीलें सूखा प्रभावित घोषित की गई हैं प्रदेश में भीषण पेयजल संकट है. प्रदेश के लगभग सभी क्षेत्रों में जहां पर कम वर्षा हुई है वहां पर सारे नदी-नाले, कुएं-बांवड़ियां तथा हैंडपम्प तक सूख गये हैं वहां की नल-जल योजनाएं बंद हो गई हैं, यह स्थिति है कि कहीं कहीं पानी बचा है. परिस्थितियां यहां तक पैदा हो गई हैं कि पशु-पक्षी भी मरने लगे हैं अगर इस बात को अतिश्योक्ति न माने तो मैं यह कह सकता हूं कि मेरे क्षेत्र में चार दिन पहले मेरे ही गांव होलपुर में पांच मोर मर गये जिनका मेरे द्वारा पीएम करवाया उनकी पीएम रिपोर्ट में यह आया है कि पीने के पानी के अभाव में इन मोरों की मृत्यु हुई है. रोज पशु मेरे क्षेत्र में मर रहे हैं जिन्हें आप गऊ माता कहते हैं गऊ हमारी धार्मिक आस्था का केन्द्र है जिसमें 33 करोड़ देवता निवास करते हैं. कहीं पर भी आप लोग राशि खर्च करें हमें कोई आपत्ति नहीं हैं, लेकिन इन पशुओं को जो बोल नहीं सकते हैं, कुछ सह नहीं सकते हैं जो पानी मांग नहीं सकते हैं, वह भटकते रहते हैं अगर उनको पानी नहीं मिला तो वह पानी के अभाव में दम तोड़ देते हैं उन गऊ माता को बचाने के लिये थोड़ी सी आप लोग संवेदनाओं को जागृत करें उनके लिये कहीं से भी पैसे की व्यवस्था करें. आप सिंहस्थ में काफी खर्च कर रहे हैं हमें कोई आपत्ति नहीं है इसमें हमारा भी सहयोग है, लेकिन मूक पशुओं के लिये भी राशि का कहीं न कहीं से जुटाएं, यही हमारा निवेदन है.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, भारत सरकार के मार्गदर्शी सिद्धांत हैं और राज्य सरकार भी यह बात स्वीकार करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में 55 लीटर प्रतिव्यक्ति जल उपलब्ध करवा रहे हैं और नल-जल योजनाओं से 70 लीटर जल उपलब्ध करवा रहे हैं. शहरी क्षेत्रों में 135 से 140 लीटर पानी उपलब्ध करवा रहे हैं, लेकिन स्थिति क्या है, स्थिति इतनी भयावह है कि पूरे प्रदेश के जिलों को देखें प्रदेश के कई जिलों में पानी की भयावह हालत है.

पानी की बूंद बूंद पर बंदूको का पहरा, बुंदेलखण्‍ड एवं बघेलखण्‍ड क्षेत्र के जिलों की स्थिति यह हो गई है कि वहां 5-5 किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ता है, पानी के लिए दो दो, तीन तीन, दिन- रात तक जागते रहना पड़ता है । जहां पर कुंए और तालाबों में जरा सा भी पानी है, वहां बंदूकों के पहरों में पानी की सुरक्षा की जा रही है । यह बात इसलिए भी आती है कि मेरे अपने क्षेत्र में वहां के कलेक्‍टर और एसडीएम को पिछले तीन महीने से बारिश जैसे ही समाप्‍त हुई, रवि की फसल जैसे ही प्रारंभ हुई, तीने महीने में 100 बार निवेदन किया कि आप नदी, नालों, तालाबों पर जल स्‍त्रोतों का संरक्षण कर लो, इनको लिफ्ट मत होने दो, इनका दोहन मत होने दो, इनको खेती में उपयोग मत होने दो, उन्‍होंने रोक तो लगा दी परन्‍तु सुनवाई नहीं की, किसी को रोका नहीं, मैंने अपने गांव से ही शुरूआत करने की बात की और आज स्थिति यह है कि वह नदियां जिनमें बड़ी - बड़ी देह हुआ करती थी और बारह मास चलती थीं, लोग कहते थे कि इनमें पानी की कभी कमी नहीं आएगी, गांव की कहावत है कि सात खटिया का वाहन चला जाता था, नीचे छतरी है, उन नदियों में आज बच्‍चे क्रिकेट खेल रहे हैं, यह इसकी भयावहता है ।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जब मैं पढ़ता था, तो एक बात ध्‍यान में आती थी, मैं इतिहास का विद्यार्थी था, प्रथम विश्‍व युद्व पड़ा, द्वितीय विश्‍व युद्व पड़ा, एक जगह मुझे पढ़ने को मिला, एक वैज्ञानिक ने, किसी ने घोषणा की थी कि तृतीय विश्‍व युद्व पानी के लिए होगा । हर व्‍यक्ति को, हर जनप्रतिनिधि को, इस भयावहता की गंभीरता से सबक लेना चाहिए, इसको गंभीरता से लेना चाहिए और समझना चाहिए, आज स्थिति यह है । मैं समझता हूं कि अगर आप आपराधिक आंकड़े निकाल लेंगे तो प्रदेश में प्रत्‍येक दिन एक मृत्‍यु, एक हत्‍या पानी के विवादों को लेकर के हो रही होगी, यह स्थिति बनी हुई है । माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जल संकट के चलते 51 जिले के कस्‍बे और गांवों में 14,956 नलजल योजनाओं में से 3,523 गांवों में यह योजनाएं बंद हैं । यह आंकड़े तो आपके हैं, मैं अपने जिले की कह सकता हूं कि 90 प्रतिशत नलजल योजनाएं मेरे क्षेत्र में, विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में बंद हैं । श्‍योपुर जिले में 187 नलजल योजनाएं हैं, जिसमें से 119 नलजल योजनाएं मेरे विधानसभा क्षेत्र में हैं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय 90 नलजल योजनाएं बंद हैं, माननीय मंत्री जी यह अतिश्‍योक्ति नहीं है, आप मेरे साथ किसी को भेज दीजिए, मैं साथ चलता हूं, उन गांवों में, आपकी योजनाओं को चिन्हित करके बताउंगा कि यह 90 नलजल योजनाएं कहां बंद हैं, लोग राजस्‍थान से पानी पी रहे हैं, 10-10 किलोमीटर से पानी ला रहे हैं, जबकि राज्‍य सरकार, भारत सरकार के निर्देश हैं कि किसी भी व्‍यक्ति को 100 मीटर के बाहर से पानी लेने के लिए नहीं जाना पड़े, लेकिन लोग 10-10 किलोमीटर दूर पानी के लिए तरस रहे हैं, यह स्थिति है । पीने के लिए दो घड़े पानी तो गांव में मिल जाता है, लेकिन पशुओं को 10 से 15 किलोमीटर दूर तक रोज पानी पिलाने के लिए ले जाना पड़ता है अगर नहीं ले गए तो उनमें से आधे पशु तो वैसे ही छोड़ दिए हैं । प्रदेश की स्थिति ब्‍यावरा, सागर, सीहोर, बीना, हरदा, गैरतगंज प्रदेश के लगभग सभी जिलों में सभी दूर भीषण संकट है ।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय यह सर्वे किया है, लोग सर्वे करते रहते हैं, सवा दो करोड़ लोगों को रोज पानी नहीं मिलता, प्रदेश के कई नगरों की नलजल योजनाएं सात दिन में एक दिन पानी देती हैं, कई जगह दो दिन में एक दिन पानी, कई जगह तीन दिन में एक दिन पानी, इसके लिए मैं बताउंगा, हमारे जल संसाधन मंत्री जयंत मलैया के गृह क्षेत्र दमोह में सप्‍ताह में एक दिन पानी वितरित किया जाता है, प्रदेश में 11 निकाय ऐसे हैं, जिनमें तीन दिन में एक दिन पानी दिया जाता है और 119 निकाय ऐसे हैं, जिनमें एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की जाती है, प्रदेश में गंभीर जलसंकट की स्थिति इससे भी स्‍पष्‍ट होती है कि भूजल बोर्ड के अनुसार लगातार बेताहासा दोहन के कारण प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में भूजल स्‍तर गिरता जा रहा है, दो से दस मीटर तक भूजल स्‍तर गिरा है, इस साल फरवरी के आरंभ में ही कुछ जिलों में जल स्‍तर 5 से 62 मीटर नीचे तक जा चुका है, इतनी भयावह स्थिति है । माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं इस तरफ भी ध्‍यान दिलाना चाहूंगा ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- रावत जी, आप मेरा भी सहयोग करिएगा, थोड़ा सा समय ।

श्री रामनिवास रावत- जी उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं सहयोग करूंगा, आप कहें तो अपनी बात खत्‍म कर देता हूं ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- नहीं, नहीं ऐसा नहीं है, मैंने तो कहा कि सहयोग करिए ।

श्री रामनिवास रावत- जी, उपाध्‍यक्ष महोदय, बिल्‍कुल सहयोग करेंगे ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- समय का ध्‍यान रखएिगा, आप अच्‍छा बोलते हैं, नि:संदेह सारगर्भित बातें आती हैं ।

श्री रामनिवास रावत- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अगर ऐसी बात है, तो मैं सब बंद कर देता हूं, अपनी बात पर आ जाता हूं, मेरी पीड़ा यह है कि मेरे क्षेत्र की स्थिति भी इतनी भयावह है ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- दिक्‍कत यह है कि आपकी पीड़ा है, मेरी सीमा है ।


 

श्री रामनिवास रावत -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश का जल स्‍तर 562 मीटर तक गिर गया है. मेरा यह निवेदन है कि अभी सिसोदिया जी ने कहा था कि जल स्‍तर 1,000 फीट नीचे गिरा है. मैं इसको ऐसे भी परिभाषित करना चाहूँगा कि एक स्थिति ऐसी होती है कि जल स्‍तर नीचे गिरता है लेकिन नीचे जल है, ग्राउण्‍ड वाटर है. एक क्षेत्र ऐसा भी है कि जिसमें जल स्‍तर केवल 200 फीट तक है और 200 फीट समाप्‍त होने के बाद, 1,500 फीट से 2000 फीट तक चले जाइये, उसमें जल नहीं है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं स्‍वयं अपने क्षेत्र में 1,200 फीट से नीचे तक के बोर करवा चुका हूँ लेकिन जल नहीं मिला है. कई हैण्‍डपम्‍प एवं बोर सूखे निकल गए. ऐसी स्थिति में क्‍या किया जाना चाहिए ? इस चीज को बड़ी गम्‍भीरता से लिया जाना चाहिए. मैंने कहा था कि मेरे क्षेत्र में 119 नल-जल योजनाएं हैं लगभग 90 नल-जल योजनाएं बन्‍द पड़ी हैं, माननीय मंत्री जी, मैंने एक प्रश्‍न किया था. मेरे यहां लगभग 20 मीटर अर्थात् 60 फीट जलस्‍तर इसी वर्ष नीचे गिरा है. मैंने लगातार नल-जल योजनाओं को संधारण करने के लिये मुख्‍य सचिव को नवम्‍बर 2015 एवं मार्च 2016 में लगातार पत्र भेजता रहा हूँ लेकिन उसे ठीक करने की स्थिति अभी तक नहीं आ रही है. मंत्री जी, प्रदेश में लगभग 90 प्रतिशत नल-जल योजनाएं बन्‍द पड़ी हैं, कई क्षेत्र ऐसे हैं- शिवपुरी के कई प्रतिनिधि होंगे, वहां सर्वाधिक नल-जल योजनाएं बन्‍द पड़ी हैं, शिवपुरी के फौरी, मेरे कराहल, टीकमगढ़, बघेलखण्‍ड और बुन्‍देलखण्‍ड की स्थिति लगभग समान है. नल-जल योजनाएं कई जगह बन्‍द हैं, मोटरें खराब होने के कारण, पानी सूख जाने के कारण, बिजली नहीं होने के कारण, बोर बन्‍द पड़ जाने के कारण एवं केबल फॉल्‍ट या चोरी हो जाने के कारण.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, बातें कितनी भी करते रहें. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने भी इस सदन में कई बार घोषणा की है, सूखे पर भी घोषणा की. विशेष सत्र बुलाया तब भी घोषणा की. किसी भी नल-जल योजना का कनेक्‍शन बिजली बिल के अभाव में काटा नहीं जायेगा. लेकिन हकीकत क्‍या है ? आप हकीकत, हमारे जन-प्रतिनिधियों से पूछ सकते हैं कि बिजली वाले कोई कुछ नहीं सुनना चाहता है. उन्‍हें पैसे चाहिए, चाहे नल-जल योजना का कनेक्‍शन हो, चाहे किसी का भी कनेक्‍शन हो. यदि उन्‍हें पैसे नहीं मिले तो उन्‍होंने गांव के गांव नल-जल योजनाओं के कनेक्‍शन भी काट दिये हैं. नल-जल योजनाएं कई जगह बन्‍द पड़ी हैं. इसी तरह से हैण्‍डपम्‍प भी 90 प्रतिशत बन्‍द पड़े हैं. अब, जैसे मैं अपनी स्थिति बताऊँ, मेरे गांव में 22 हैण्‍डपम्‍प हैं, 22 में से केवल एक हैण्‍डपम्‍प एवं एक बोर चल रहा है और कई जगह तो यह स्थिति है कि हैण्‍डपम्‍प हैं ही नहीं, बोर चलते हैं और अगर बिजली है तो पानी है, बिजली नहीं है तो पानी नहीं है. लोग बिजली के इन्‍तजार में बैठे रहते हैं, यह स्थिति है. इसी तरह से हैण्‍डपम्‍पों की स्थिति है- सूख जाने से खराब हैं, भर पट जाने से खराब हैं, राईजर पाईप नहीं होने से खराब हैं, भू-जल स्‍तर गिर जाने से खराब हैं, रोड के नहीं होने से खराब हैं. इसके लिए, मैं निवेदन करूँगा कि निश्चित रूप से इस सरकार में यह सूखे की स्थिति बनी. यह स्थिति धीरे-धीरे प्राकृतिक संतुलन एवं पर्यावरण संतुलन बिगड़ने के कारण बन रही है और बढ़ती जा रही है, हम इसे रोक नहीं पा रहे हैं. इसके लिए, हमें ध्‍यान देना होगा.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमें भू-जल सर्वेक्षण बोर्ड की विशेष स्थिति तैयार करनी पड़ेगी, हमें विशेष टीमें तैयार करनी पड़ेंगी. मेरा यह निवेदन है कि यह पूरी सरकार का सम्मिलित दायित्‍व है, अकेले पी.एच.ई. विभाग एवं पी.एच.ई. मंत्री इसे नहीं कर सकतीं कि भू-जल सर्वेक्षण बोर्ड द्वारा प्रदेश के समस्‍त जिलों में ऐसे क्षेत्रों को चिन्ह्ति करायें, जहां ग्राउण्‍ड वाटर नहीं है, जहां ग्राउण्‍ड वाटर की संभावना ही नहीं है, जहां हम कहीं से पानी नहीं ले जा सकते हैं, जहां हम कहीं से पानी पिलाने की व्‍यवस्‍था नहीं कर सकते, उन क्षेत्रों का सर्वेक्षण करें. नदियों एवं नालों की स्थिति का भी सर्वेक्षण करें कि हम सतही वाटर को रोककर, कैसे उन पर बांध बना सकते हैं, उन पर तालाब बना सकते हैं ? मेरे क्षेत्र में लगभग 40 तालाब टूटे-फूटे पड़े हुए हैं, वे छोटी सी राशि से ठीक हो जायेंगे, ज्‍यादा राशि की आवश्‍यकता नहीं है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - रावत जी, शॉर्ट कीजिये.

श्री रामनिवास रावत - शॅार्ट करूँ. मैं थोड़ा सुझाव और दे लूँ. कोई धर्मसंकट नहीं है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - ऐसा नहीं है, कोई धर्मसंकट नहीं है.

श्री रामनिवास रावत -- उपाध्यक्ष महोदय, सबसे पहले प्रदेश में चिह्नित करवाकर, सर्वेक्षण कराकर ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित करें और वहां सिंचाई विभाग, पीएचईडी की सतही जल रोकने की, बड़े बड़े बांध बनाने की योजना बनायें और जहां भी प्रदेश में टूटे फूटे तालाब जितने भी पड़े हैं, उनको जोड़ने की, तत्काल ठीक करने की व्यवस्था बनायें. फिलाहल आप ज्यादा से ज्यादा सर्वेक्षण कराकर बोर करवायें, वाटर सप्लाई करवायें. आप पानी का परिवहन कराकर पानी भिजवाने की व्यवस्था करें. स्थिति यह आने वाली है. मैं अपने क्षेत्र की बात करुं, तो परिवहन के लिये भी 15-20 किलोमीटर दूर जाना पड़ेगा. आप भूजल अधिनियम के बारे में भी विचार करें. जो बेहताशा भूजल का दोहन हो रहा है, इसको रोकने की व्यवस्था भी आप करें. अगर आप इसमें जायेंगे कि सिंचाई का रकबा बढ़ा है, सिंचाई का रकबा आपका शासकीय परियोजनाओं से भी बढ़ा है. लेकिन सर्वाधिक अगर सिंचाई का रकबा बढ़ा है, तो वह ग्राउंड वाटर के दोहन से, बोर के इस्तेमाल से सिंचाई का रकबा बढ़ा है. लेकिन दूसरी तरफ नुकसान भी हुआ है. मेरा तो निवेदन है कि भूजल अधिनियम तुरन्त लागू करें कि हम ग्राउंड वाटर के बेतहाशा दोहन पर कैसे रोक लगायें, किस तरह से स्थिति का सामना करें. ऐसी तहसीलों को चिह्नित करें. मेरे श्योपुर जिले की विजयपुर, कराहल और वीरपुर तहसील को चिह्नित करके उनको जल संकटग्रस्त तहसीलें घोषित करें, जिससे हमेशा यह चिह्नित रहे कि हमें वहां क्या क्या करना है. मैं मंत्री जी से निवेदन करुंगा कि जन भागीदारी से बूंद बूंद को सहेजने की व्यवस्था करें. जल प्रबंधन प्रणाली में आप बहुत पीछे हैं. एक समय था, मेरा क्षेत्र राजस्थान से लगा हुआ है. सिसोदिया जी कहीं चले गये. एक समय था कि राजस्थान में जल संकट भारी माना जाता था. लेकिन राजस्थान में जल प्रबंधन प्रणाली में सुधार करके, जल संरक्षण की व्यवस्था करके राजस्थान आज पीने के पानी के संकट से नहीं जूझ रहा है. हमारा मध्यप्रदेश जहां सतही जल की कमी नहीं थी, नदी नालों की कमी नहीं थी. आज हम जल संकट के पायदान पर खड़े हैं, जल संकट का सामना कर रहे हैं. आप जल प्रबंधन प्रणाली में देश के राज्यों की सूची में बहुत पीछे हैं. जल संवर्द्धन और संरक्षण की परम्परागत प्रणाली को सुधार करने की व्यवस्था करायें. नदी जोड़ो अभियान, नदी नालों पर चेक बांध की व्यवस्था करें. इसके साथ साथ नगरों में वाटर री-हारवेस्टिंग की व्यवस्था को कम्पलसरी लागू करें. मेरा यह निवेदन है कि वाटर री-हारवेस्टिंग जब तक लागू नहीं होगा, तब तक काम नहीं चलेगा. मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि मेरे क्षेत्र में कम से कम पानी का उपयोग करायें, पानी की रीसाइकलिंग करें और औद्योगिक इकाइयों में जो पानी का उपयोग होता है, उपयोग होने के बाद निकलने वाले पानी को उपचारित करने के बाद किस तरह से उपयोग में ला सकें, इसके लिये अनुरोध है और इस बार मेरे क्षेत्र के लोगों को पलायन न करना पड़े, दूसरी तरफ पानी के अभाव में लाखों लोग बाहर चले गये हैं. मेरा निवेदन है कि इस स्थिति को ठीक से संभाले, संभलवायें. उपाध्यक्ष महोदय, बोलना तो बहुत कुछ था, मेरी पीड़ा भी जबरदस्त है, पर मैं क्या बताऊं. आपने बोलने के लिये समय दिया, इसके लिये धन्यवाद.

डॉ. कैलाश जाटव (गोटेगांव) -- उपाध्यक्ष महोदय, आज सदन में जिस विषय को लेकर हम चर्चा कर रहे हैं, यह विषय वास्तव में प्राकृतिक आपदा होने की वजह से, कम बारिश होने की वजह से यहां आया है. लेकिन अगर हम पूरा इतिहास उठाकर देखें, तो इस देश पर राजा महाराजाओं का राज था. राजा महाराजा का राज हुआ, अंग्रेजों ने फिर उनके ऊपर शासन किया और उनको ठोक पीट कर फिर बराबर हमने आजादी ली. फिर यही राजा महाराजाओं ने चुनाव लड़कर सरकारें बनाईं. मध्यप्रदेश का जैसा इतिहास है कि कैसे कैसे लोगों ने यहां का नेतृत्व किया है. उन लोगों ने जंगल भी बेचा, जंगल की जमीनें भी बेचीं और जंगल के जानवरों को भी मारकर खा गये. ऐसे फोटो लगी रहती हैं, कही महलों में मैंने देखी हैं. यह प्राकृतिक आपदाएं कई बार पानी जब जमीन पर नहीं रुकता है, उसकी वजह से यह आती हैं. यह विषय..

श्री रामनिवास रावत -- उपाध्यक्ष महोदय, मुझे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन जो यहां हैं ही नहीं, जंगली जानवरों को मार कर खा गये, उनका रिप्लाई कौन देगा. इसको विलोपित करा दें.

डॉ. कैलाश जाटव -- रावत जी, जब आप बोल रहे थे, तो मैं चुप बैठा था. आपको प्राकृतिक आपदायें क्यों आती हैं, उस पर तो बात करना पड़ेगी. आज यह पानी किस वजह से कम हो रहा है. आपको इन सब बातों पर चर्चा करना पड़ेगी. ..(व्यवधान).. मैंने किसी का नाम नहीं लिया है, अगर आपको लग रहा है तो आप स्वीकार करें, कोई दिक्कत नहीं है.

..(व्यवधान)..

श्री जितू पटवारी-- इसमें राजा और रंक दोनों को ही चुनाव लड़कर के आना पड़ता है.सबको चुनाव जीतकर के आना पड़ता है कैलाश भैया....

डॉ.कैलाश जाटव -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहता हूं.

उपाध्यक्ष महोदय-- जाटव जी दोनों पक्ष में राजा और महाराजा हैं , इसलिये आप क्यों विवाद की बातें कर रहे हैं. आप विषय पर आयें.

डॉ.कैलाश जाटव -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह प्राकृतिक आपदायें और जल प्रबंधन को लेकर के आज पूरा देश और प्रदेश जूझ रहा है. मैं एक उदाहरण यहां पर रखना चाहता हूं. कल मैं टीवी देख रहा था लातूर में अभी भी रात को 2-2 बजे तक लोग जग रहे हैं, जबकि आपको मालूम है कि वहां पर सरकार किसकी रही है, वहां पर किसने राज किया है और उस राज्य की दुर्गति कैसे हुई. आपको सब मालूम है. लेकिन मेरा यह कहना है कि आज जिस तरीके से शिवराज जी की सरकार ने पानी का प्रबंधन किया है यह प्रबंधन 60 साल पहले क्यों नहीं हुआ, 50 साल पहले क्यों नहीं हुआ, 40 साल पहले क्यों नहीं हुआ. आज हम नदियों को जोड़ने का काम कर रहे हैं तो विपक्ष को आपत्ति है, क्षिप्रा में पानी डालने का काम कर रहे हैं उस पर विपक्ष को आपत्ति है. हम यह पूछना चाहते हैं कि अगर आप इस देश और प्रदेश के बारे में सही चिंतन कर रहे थे तो फिर आज यह विपत्ती क्यों आई, पानी के पीछे हम क्यों लड़ रहे हैं. हमने उस समय संसाधन नहीं जुटाये उसका परिणाम हमारी पीढ़ी को भोगना पड़ रहा है. आज हमारी सरकार ने कितने किसानों का भला किया है यह किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है, हमारे बजट में आया है, हमने सिंचाई के संसाधन बढ़ाये हैं, हमने किसानों की जमीनों में पानी देने का काम किया. लेकिन मेरा आज इस विषय को लेकर के इतना ही कहना है कि जो लोग हमें बता रहे हैं कि पानी की समस्या इस वजह से हुई है तो यह बड़ी दुखद बात है.

उपाध्यक्ष महोदय यह विषय इसलिये भी आवश्यक है कि प्रदेश का जो वनवासी बंधु क्षेत्र है , आदिवासी क्षेत्र है, उनका दोहन बहुत जबरदस्त तरीके से हुआ है, खनन के माध्यम से हुआ, जंगल कटाई के माध्यम से हुआ और वनवासी बंधु जहां पर भी निवास कर रहे हैं, आज इस सदन में जितने भी जनप्रतिनिधि बैठे हैं वे इस बात को भलीभांति जानते हैं कि उस क्षेत्र का जल स्तर जितनी तेज गति से से नीचे गया है उतना शहरों का जल स्तर नहीं गया है क्योंकि शहरों में तो नगर पालिकायें, शासन की मंशा के अनुसार जो योजनायें जाती हैं, उनका दोहन वहा पर हो रहा है वहां पर हमारी सरकार आम गरीब आदमियों तक उसका लाभ नहीं पहुंच पा रहा है. आम आदमी तक हम पानी नहीं पहुंचा पा रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय, इस चर्चा के माध्यम से मेरा इतना निवेदन है कि हम सिर्फ इतना भर कर लें कि बारिश के समय छोटे नदी- नाले का लेबलिंग कराकर और छोटे छोटे स्टाप डेम बना देंगे तो आप मानकर के चलिये कि वह पानी जहां जहां रूकेगा वहां का जल का स्तर साल भर बढेगा, उसमें बहुत ज्यादा पैसा सरकार को खर्चा नहीं करना है. बहुत सारी बड़ी बड़ी योजनायें बनाने की आवश्यकता भी सरकार को नहीं है सिर्फ जो हमारे नदी-नाले बह रहे हैं उसका लेबलिंग कराकर 10फुट, 15 फुट या 25 फुट ऐसे अगर हम उसमें पानी का ड्राप रोक लेंगे तो हमारे जल का जीवन सुधर जायेगा.

माननीय उपाध्यक्ष महोदय, देश के प्रधान मंत्री आदरणीय नरेन्द्र कुमार मोदी जी ने पर ड्राप मोर क्राप इसका नारा दिया, उस पर हमारे मुख्यमंत्री जी भी काम कर रहे हैं और शासन की मंशा भी है और आने वाले समय में यह भी लागू होगा. इसको जितनी गति से सरकार आगे बढ़ायेगी तो मैं समझता हूं कि पर ड्राप मोर क्राप जो है यह बहुत आगे निकलकर के हमारे पास में आयेगा. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आप सभी से अनुरोध है कि इस चर्चा में यदि आप पर्यावरण को भी ले लेते तो शायद यह चर्चा अति महत्वपूर्ण हो जाती. क्योंकि पानी का जो संकट है यह पर्यावरण के बिगड़ने के कारण है. जिस तरह से पृथ्वी का पर्यावरण बिगड़ा है उसके कारण भी हमें पानी नहीं मिल रहा है, अगर हम पर्यावरण में जायेंगे तो उचित रहेगा. मेरा सभी सदन के प्रतिनिधियों से निवेदन है कि यह राजनीति का विषय नहीं है , यह आम जनता की परेशानी का विषय है. आज जल संकट पूरे प्रदेश में, पूरे देश में है लेकिन जहां पर अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों की ज्यादा बस्तियां हैं वहां पर सरकार को ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है. उपाध्यक्ष जी आपने बोलने का समय प्रदान किया उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री मुकेश नायक(पवई) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश अभूतपूर्व प्राकृतिक संकट की स्थिति से गुजर रहा है. आज ही संसदीय कार्य मंत्री जी कह रहे थे कि ईश्वर का दिया हुआ यह संकट है, मैं विनम्रतापूर्वक उनसे कहना चाहता हूं कि यह प्राकृतिक संकट है और ईश्वर तो गुणातीत है, कालातीत है, भावातीत है. और प्रकृति में होने वाले संपूर्ण परिवर्तनों को ईश्वर केवल एक साक्षीभाव से देखता है. इसलिये ईश्वर के द्वारा दिया हुआ यह संकट नहीं है, यह प्रकृति के द्वारा दिया हुआ संकट है , और इस प्रकृति के संकट को मनुष्य ने निर्मित किया है पारिस्थितिक असंतुलन (Ecological Imbalance)) के कारण साउथ और नॉर्थ पोल पर जो निरंतर बर्फ पिघल रही है, ओजोन की लेअर में छेद पड़ रहे हैं और हाइड्रोजन का जो लेबल वातावरण में बढ़ रहा है, यह इकोलॉजीकल डिसआर्डर जो हैं उसके कारण प्रकृति में इस तरह के परिवर्तन आने लगे हैं. अभी यह विषय नहीं है, यह बहुत व्‍यापक विषय है पर्यावरण का, लेकिन जिस तरह से प्रकृति के साथ छेड़छाड़ और उसके दोहन को पूरे विश्‍व मानव समाज ने रखा है यह उन सब चीजों का परिणाम है. आज तो मैं मध्‍यप्रदेश में होने वाले जल संकट को सुधारने के लिये छोटे-मोटे सुझाव मैं माननीय मंत्री महोदया को और सरकार को आपके माध्‍यम से देना चाहता हूं.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूं कि इस बार 2242 करोड़ का बजट पीएचई विभाग ने रखा है और यह कहा गया है कि इस साल के बजट में 132 करोड़ रूपये ज्‍यादा का प्रावधान मध्‍यप्रदेश की सरकार ने किया है, अभी लगभग 20 दिन पहले 100 करोड़ रूपये ग्रामीण विकास विभाग ने एक लंबे संघर्ष के बाद कि पीएचई नल जल योजनाओं का हेण्‍डपम्‍पों का संधारण करे, रखरखाव करे, संचालन करे या ग्रामीण विकास विभाग करे. इस संघर्ष के बाद 100 करोड़ रूपये ग्रामीण विकास विभाग ने अभी पीएचई को ट्रांसफर किया है, लेकिन जिस तरह का प्रोसीजर है, सबसे पहले तो असिस्‍टेंट इंजीनियर प्रस्‍ताव बनायेगा, एग्‍जीक्‍यूटिव इंजीनियर को भेजेगा, 7 दिन लगेंगे असिस्‍टेंट इंजीनियर को, 7 दिन लगेंगे एग्‍जीक्‍यूटिव इंजीनियर को, 7 दिन लगेंगे सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर को, 7 दिन लगेंगे चीफ इंजीनियर को उसके बाद उसकी प्रशासकीय स्‍वीकृति होगी, तब वह मैदान में जायेगा क्रियान्‍वयन के लिये, इम्पिलीमेंटेशन के लिये. मुझे लगता है कि जो प्रदेश में पीएचई विभाग का पिछला इतिहास और काम करने का जो तौर तरीका रहा है, मुझे लगता है कि जो 100 करोड़ रूपये मंत्री महोदया को मिला है यह आप खर्च नहीं कर पाओगी, 3 महीने खत्‍म हो जायेंगे और इसलिये इस अभूतपूर्व प्राकृतिक संकट के इस दौर में आपको बहुत तत्‍परता से काम लेना होगा और अधिकारियों का जो ढीलापन है इसको आपको ठीक करना पड़ेगा और अब जो इतनी विपुल धनराशि आप मध्‍यप्रदेश में पेयजल संकट या पानी की समस्‍या के निवारण के लिये रखना चाहते हैं, वह कैसा चल रहा है, मैं आपको बताना चाहता हूं.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो जिस तरह के घटिया मटेरियल का उपयोग मध्‍यप्रदेश में हो रहा है और यह सभी दौर में होता रहा है, इसमें सुधार की आवश्‍यकता है, केवल एक राजनैतिक दल या विपक्षी दल का सदस्‍य होने के नाते मैं यह बात नहीं कह रहा हूं, मैं यह कहना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश में जो पानी है इसमें अगर हम केमीकल कंटेन्‍ट को अगर एनालाइज करें तो इसमें फ्लोराइड, कैल्शियम और आयरन तीन केमीकल कंटेन्‍ट पानी में पाये जाते हैं, लेकिन जो पाइप लगाये जाते हैं जिसको राइजिंग पाइप टेक्‍नीकल भाषा में हम बोलते हैं जिससे पानी ऊपर आता है, वह जो पाइप का उपयोग हम करते हैं, न तो इस बात का ध्‍यान रखते हैं कि जमीन का स्‍टेटा क्‍या है और न हम इस बात का कोई वैज्ञानिक परीक्षण करते हैं कि उसमें किस तरह के केमीकल कंटेंट हैं पानी के अंदर और फ्लोराइड मध्‍यप्रदेश में ज्‍यादा है यह तो सभी टेक्‍नीकल लोग जानते हैं, यह टेक्‍नीकल लोगों का विभाग है, इसके बावजूद भी फ्लोराइड की मात्रा ज्‍यादा होने के बाद भी जीआई पाइप डाल देते हैं, सालभर में पूरे पाइप में छेद हो जाता है और साल भर के बाद जब आदमी हेण्‍डपम्‍प चलाता है तो जो हेण्‍डपम्‍प का जो हेंडल है न जिसका सरेंडर बोलते हैं, इसमें बायसर होता है, इसमें चैन होती है, इतनी घटिया क्‍वालिटी का बायसर और चैन उपयोग में लाये जाते हैं कि 6 महीने से ज्‍यादा नहीं चलते. मेरे कहने का आशय यह है कि पूरे पीएचई विभाग में जिस तरह के मटेरियल को यूज किया जाता है इस‍की गुणवत्‍ता को अगर नहीं सुधारा गया तो संधारण का काम हो नहीं सकता, इसलिये नहीं हो सकता माननीय मंत्री महोदया क्‍योंकि पहले 50 हेण्‍डपम्‍प के बीच में एक आपका मैकेनिक होता था, अब 250 हेण्‍डपम्‍प के बीच में आपका एक मैकेनिक होता है और हर 6 महीने में अगर आपका हेण्‍डपम्‍प बिगड़ेगा तो आपका मैकेनिक क्‍या करेगा, आपके पीएचई विभाग के मटेरियल की सप्‍लाई टाइमली होती है क्‍या. एक-एक, दो-दो साल राइजिंग पाइप, वॉशर्स, चैन, कोई मटेरियल आपके यहां सप्लाई नहीं करते. बीच में आपने प्राइवेट ठेकेदारों को भी मैकेनिक कम होने के कारण हैंडपंप संधारण का काम दिया. यह कुछ क्षेत्रों में भी अभी भी चल रहा है. लेकिन वहां भी मैंने जो आंकलन किया है उसमें लगभग 900 रुपए प्रति हैंडपंप का खर्च आया है और न तो बहुत अधिक गुणवत्ता है, न कोई परिवर्तन आया है और जिस उद्देश्य से प्राइवेट ठेकेदारों को आपने यह संधारण का काम दिया था, वह काम उन्होंने कुशलतापूर्वक मध्यप्रदेश में नहीं किया है. मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि जीआई पाइप की जगह मध्यप्रदेश में जैसे झाबुआ और शहडोल में बहुत बड़े पैमाने पर एचडीपीई पाइप का उपयोग हुआ, पीवीसी पाइप लगाये गये, एल्युमिनियन के पाइप लगाये गये, उसके बहुत अच्छे परिणाम आए. वहां पर रख-रखाव और संधारण में ज्यादा सुविधा हुई. वे पाइप ज्यादा जल्दी खराब नहीं होते. लेकिन बाकी जगह इसको बिल्कुल प्रयोग में नहीं लाया गया.

उपाध्यक्ष महोदय, दूसरा मेरा सुझाव है कि आपकी जो नलजल योजनाएं हैं, जो आप चलाना चाहता हैं उनकी बात मैं कर रहा हूं क्योंकि आपकी ज्यादातर नलजल योजनाएं तो चल ही नहीं रही हैं. मैं विनम्रतापूर्वक आपसे यह कहना चाहता हूं कि बुन्देलखण्ड पैकेज में आपने 1200 नल जल योजनाएं बनाई, जिसमें से 997 नल जल योजनाएं बंद हैं. आप कल्पना करिए कि 1200 नल जल योजनाओं में से 997 नल जल योजनाएं काम नहीं कर रही हैं. आपका वॉटर सोर्स रेडी है, उसमें मोटर पड़ी हुई है, पूरे गांव में पाइप लाइन बिछी हुई है, बिजली का कनेक्शन हो गया, लेकिन कृपया करके आप अपने जवाब में यह जरूर बताएं कि क्या कारण है कि वह मोटर आज तक चालू नहीं हुई. इतनी विपुल धनराशि का नियोजन इन नल जल योजनाओं पर हुआ. इसके वैस्टेज का जिम्मेदार कौन है? आज तक आपने उन पर क्या कार्यवाही की? मध्यप्रदेश में जो नल जल योजनाएं हैं उसको बहुत कम समय में बताऊंगा. लेकिन मैं इतना जरूर कहना चाहता हूं कि जो मध्यप्रदेश की नल जल योजनाओं का वार्षिक प्रतिवेदन आपने रखा है, यह आपने देखा है? आप इसे जरूर देखिए. आपने ही रखा है. इसको देखकर आपकी आंखें खुल जाएंगी, यह रिपोर्ट बिल्कुल आई ओपनर है. यह रिपोर्ट कहती है कि भिण्ड जिले से जहां से हमारे डॉ. गोविन्द सिंह जी आते हैं, यहां पर नल जल योजनाओं की जो प्रगति है, वह जीरो परसेंट है, जीरो परसेंट! हम गांव में जब दौरा करने केलिए जाते हैं. अनेक बार मैंने आपको फोन पर भी बताया. आपसे व्यक्तिगत मिलकर बताया. गांव में जब हम दौरा करने के लिए जाते हैं तो हमसे लोग कहते हैं कि हमारी नल जल योजना चालू करा दो, हमारी नल जल योजना बंद पड़ी हुई है, मार्मिक अपील करते हैं. हम क्या करे, आप बताइए? पंचायत कहती है कि हमारे पास टेक्निकल मेनपॉवर नहीं है और पीएचई कहती है कि हमने तो ये सारी योजनाएं पंचायत को ट्रांसफर कर दीं. इस संघर्ष में, इस दुविधा में एक ही प्रबंध में, इस दुराज की अवस्था के कारण पूरी नल जल योजनाएं ठप्प पड़ी हुई हैं, कोई उसका धनीधौरी नहीं है, कोई उसकी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं है. गांव में पानी ही नहीं है.

उपाध्यक्ष महोदय, आपको यह जानकारी हैरानी होगी कि बुन्देलखण्ड में तो बहुत ज्यादा वॉटर लेवल नीचे है. थोड़े से क्षेत्रों को अगर आप छोड़ दें तो पानी बुन्देलखण्ड में जमीन में बहुत कम है. जहां से मैं प्रतिनिधित्व करता हूं वहां पर तो पानी की बहुत कमी है. पूरा जंगल और पहाड़ों का क्षेत्र है. न पानी के परिवहन की व्यवस्था है, न नल जल योजनाएं चालू हैं, न हैंडपंप सुधारे जा रहे हैं . हजारों की संख्या में मवेशी लोगों ने खुले छोड़ दिये हैं. जहां जाना हों जाएं क्योंकि न चारा है, न पानी है...(किसी माननीय सदस्य के बैठे-बैठे कुछ कहने पर) हां, पहले से ही खुले थे. हजारों की संख्या में हैं. लेकिन जो पहले से खुले हुए मवेशी हैं, कम से कम वह पानी तो पीएंगे, पशु-पक्षी पानी तो पीएंगे, वहां रहने वाले आदमी पानी तो पीएंगे तो उसकी व्यवस्था तो करना पड़ेगी. उस दृष्टि से मैं यह बातचीत कर रहा हूं. मेरा आपसे निवेदन है कि यह वार्षिक प्रतिवेदन को आप देखें. आपने मध्यप्रदेश को 4 जोन में बांटा है. आप देखें, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जी जहां का प्रतिनिधित्व करते हैं, अभी श्री सिसौदिया जी चले गये, मुझे लगता है कि सरकार ने उनको परमानेंट अपनी प्रशंसा के लिए रख छोड़ा है. इस तरह की विरुदावली का वाचन, इस तरह की भाटगिरी, एक पढ़े-लिखे प्रबुद्ध लोगों के द्वारा, इस तरह का स्तुतिगान, उनको यह नहीं पता है कि मुख्यमंत्री जी के जिले में, यह आपकी रिपोर्ट है, यह मेरी रिपोर्ट नहीं है, यह सरकार ने दी है, जिसका नेतृत्व माननीय मुख्यमंत्री जी करते हैं.उनके जिले सीहोर में 100 में से 8.89 प्रतिशत की प्रगति है, 9 प्रतिशत भी नहीं है डबल फिगर में भी नहीं पहुंचे हैं. यहां पर यह नगडिया बजाये जा रहे हैं प्रशंसा किये जा रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय मैं एक मिनट में बुंदेलखण्ड जहां से माननीय मंत्री जी आती हैं वहां की जरूर बात करना चाहूंगा. छतरपुर के बारे में आपके प्रगति प्रतिवेदन में लिखा है कि जो लक्ष्य रखा गया था उसका 11.11 प्रतिशत उपलब्धि है, आपकी रिपोर्ट में ही कहा गया है कि टीकमगढ़ में आपने 100 में से 7.05 प्रतिशत लक्ष्य अर्जित किया है, पन्ना जहां से हम और माननीय मंत्री जी भी प्रतिनिधित्व करती हैं वहां पर 32.5 प्रतिशत की उपलब्धी है. मेरे और माननीय मंत्री महोदया के विधान सभा क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा नल जल योजनाएं बंद पड़ी हुई हैं. इतनी बड़ी धन राशि वहां पर खर्च हुई है लेकिन जनहित में उ सका उपयोग नहीं हो पा रहा है. यहां पर ज्यादा समय नहीं है समय की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए. मैं माननीय मंत्री महोदया और राज्य शासन से यह कहना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश में बहुत ही अभूतपूर्व जल संकट पैदा होने वाला है इसको आप प्रापर एंटिसिपेट करें. इसका सही सही अनुमान निकालें, कहां पर कितनी धन राशि का नियोजन करना है. सही अधिकारी को सही स्थान पर रखें , अभी कल ही आपने प्रमुख सचिव को बदल दिया है, कहा गया कि वह बहुत ज्यादा ठीला आदमी है, कल का निर्णय है यह, आप वहां पर नये अधिकारी को लायी हैं अच्छा है आपने नई टीम को इंट्रोड्यूस किया है. लेकिन मैं उम्मीद रखता हूं कि जनहित में पेयजल समस्या का निराकरण होगा और अभूतपूर्व इस जल संकट के दौर में. पशु पक्षियों का आप विशेष रूप से ध्यान रखेंगी और जहां पर हैण्ड पंप और नल जल योजनाएं नहीं हैं वहां पर पानी के परिवहन पर भी आपका ध्यान होगा. उपाध्यक्ष महोदय आपने बोलने के लिए समय दिया धन्यवाद्.

श्री पन्ना लाल शाक्य ( गुना ) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय और इस सदन के सभी सदस्य. बस मैं इस सदन से यह ही निवेदन करना चाहता हूं कि मैं जितना निवेदन करूंगा उतना आप सुन लीजिए. मैं कहीं भीं किसी के बीच में नहीं बोलता. कुछ करने की इच्छा हो तो सुन लेना समझ में आ जायेगी, मैं बात ही ऐसी करता हूं. हम सबके सब पश्चिम की विचारधारा से ओतप्रोत हैं. बर्नार्ड शॉ ने यह कहा है कि मनुष्य इतिहास से कुछ नहीं सीखता है, हमने आज तक कुछ नहीं सीखा, क्योंकि हम पश्चिम से ओतप्रोत हैं, विचारों से. वेदव्यास जी ने कहा था कि धर्म के अनुसार आचरण करना तो आप सबकी समृद्धि होगी, किसी ने नहीं किया और महाभारत हो गया. यहां पर जल संकट की जो बात आयी है मैं एक एक करके गिना देता हूं. हमारे प्रदेश में सामाजिक वानिकी कार्यक्रम वन विभाग के द्वारा चलता था. उस समय के जवाबदार लोग अगल यहां पर बैठे हों तो वह पहले चिंता कर लें कि उन्होंने कितने पेड़ लगाये हैं, जल संकट वहां से पैदा हुआ है, वह पेड़ जिनकी उम्र एक एक हजार वर्ष की थी, वह किसने कटवाये जैसे पीपल है बड है. हमने कौन से पेड़ लगाये यूकेलिपिटिस जो कि सत्तर लीटर पानी एक दिन में पीता है. हमारी संस्कृति में एक त्यौहार आता है हरियाली अमावस्या, हममे से कोई भी एक भी पेड़ नहीं लगाता है उस दिन,( श्री सुन्दरलाल तिवारी जी द्वारा बैठे बैठे कहने पर कि लगाते हैं ) कौन लगाता है खड़े हो जाओ बताओ जरा, कौन सा पेड़ लगाया आपने यूकेलिपिटिस.

डॉ नरोत्तम मिश्र -- उपाध्यक्ष महोदय इनको बैंच पर खड़ा करो.

श्री पन्‍नालाल शाक्‍य -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, तो मेरा आपसे एक निवेदन है कि जिनके पूर्वजों ने एक-एक हजार वर्ष पुराने जो पेड़ कटवा दिए हैं वे आज यहां प्रतिज्ञा कर लें कि उन पेड़ों की उम्र वाले पेड़ हम लगाएं, यूकेलिप्‍टस नहीं. आज ही यह तय करें और यह जल संकट एक दिन का नहीं है. इसे हमने ही बुलाया है कि आ जाओ, आ जाओ. मैं एक-दो घटनाएं और बता देता हूँ. हमारे गुना में एक पुराना स्‍थान है जहां एक गणेश कुंड है, उस गणेश कुंड के जीर्णोद्धार के लिए सरकार ने बहुत मोटी राशि दी. मोटी राशि यानि नगद पैसा दिया लेकिन उसका जीर्णोद्धार नही