मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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     चतुर्दश विधान सभा                                                                                            दशम् सत्र

 

 

फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र

 

बुधवार, दिनांक 30 मार्च, 2016

 

(10 चैत्र, शक संवत्‌ 1938 )

 

 

       [खण्ड-  10 ]                                                                                                   [अंक- 20 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

बुधवार, दिनांक 30 मार्च, 2016

 

(10 चैत्र, शक संवत्‌ 1938 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

 

तारांकित प्रश्‍नोत्‍तर

 

छात्रावास/आश्रम अधीक्षकों को प्रदत्‍त सुविधाएं

1. ( *क्र. 7770 ) पं. रमेश दुबे : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या आदिम जाति कल्‍याण विभाग के अंतर्गत छात्रावासों/आश्रमों में पदस्‍थ अधीक्षकों को संविदा शाला शिक्षक वर्ग-2 के समान मानदेय एवं अध्‍यापक संवर्ग में आवश्‍यक शैक्षणिक अर्हताओं के आधार पर संविलि‍यन व पदोन्‍नति किये जाने के साथ ही संविदा अवधि में 7 हजार रूपये प्रतिमाह प्रदान किये जाने का आदेश प्रसारित किया गया था? (ख) यदि हाँ, तो छिन्‍दवाड़ा जिले में उक्‍त आदेश का लाभ आदिम जाति कल्‍याण विभाग के अंतर्गत छात्रावासों/आश्रमों में पदस्‍थ अधीक्षकों को क्‍यों नहीं दिया जा रहा है? (ग) क्‍या प्रश्‍नकर्ता ने उपरोक्‍त के संबंध में पत्र क्रमांक 1900 दिनांक 01/12/2015 प्रमुख सचिव, आदिम जाति कल्‍याण विभाग, मध्‍यप्रदेश शासन को प्रेषित किया है? (घ) यदि हाँ, तो प्रश्‍नकर्ता के पत्र में किन बिन्‍दुओं का उल्‍लेख है तथा इस पत्र पर अब तक किस स्‍तर से क्‍या सार्थक कार्यवाही की गई है? यदि नहीं, की गई है तो क्‍यों? कब तक कार्यवाही की जावेगी।

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) जिला छिन्‍दवाड़ा में मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत छिन्‍दवाड़ा के आदेश क्रमांक/6194/स्‍था./ आ.वि./स.अ.संवि./2015 छिन्‍दवाड़ा दिनांक 23.12.15 द्वारा पात्रता रखने वाले 08 संविदा अधीक्षकों को लाभ दिया गया। (ग) जी हाँ। (घ) विभागीय छात्रावास/आश्रमों में पदस्‍थ संविदा शाला शिक्षक वर्ग 2 के समान सुविधा दिये जाने के संबंध में मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत छिन्‍दवाड़ा के आदेश क्रमांक/6194/स्‍था./आ.वि./स.अ.संवि./ 2015 छिन्‍दवाड़ा दिनांक 23.12.15 द्वारा पात्रता रखने वाले 08 संविदा अधीक्षकों को लाभ दिया गया।

          पं. रमेश दुबे:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के पश्‍चात् संविदा अधी क्षकों का अध्‍यापक संवर्ग में संविलियन किया गया. जिसमें आठ लोग पात्र थे, उनका संविलियन किया गया. लेकिन उनके वेतन भत्‍ते की वृद्धि नहीं की गयी है. यह कब तक की जायेगी ?

          अध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्‍न यह है कि अध्‍यापक संवर्ग में संविलियन में जो लोग पात्र नहीं है, उन्‍हें संविदा शिक्षा वर्ग - 2 के समान संविदा अधीक्षकों को मानदेय का जो 15 प्रतिशत का नियम है, वह उन्‍हें कब तक दिया जायेगा.

          श्री ज्ञान सिंह -  माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य द्वारा जो जानकारी चाही गई थी प्रश्नोत्तर के परिशिष्ट में जानकारी दी जा चुकी है. मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को आश्वस्त करना चाहूंगा. जहां तक उन्होंने मानदेय की बात कही है नियमों में मानदेय की समय-समय पर व्यवस्था होती है और उनकी जैसी भावना है. ऐसे संविदा शिक्षकों को जो अभी तक मानदेय नहीं मिल पाया है उसकी व्यवस्था की जायेगी.

          पं.रमेश दुबे -  नियुक्ति के तीन वर्ष के पश्चात् मानदेय का प्रावधान है लेकिन उसके बाद भी उनको नहीं दी गई है लेकिन मंत्री जी ने कहा कि वह व्यवस्था की जायेगी और व्यवस्था कर रहे हैं इसके लिये बहुत-बहुत धन्यवाद.

          औषधि मिशन अन्‍तर्गत बीज अनुदान

2. ( *क्र. 7582 ) श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) औषधि मिशन के अन्‍तर्गत उज्‍जैन संभाग में वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में हितग्राही मूलक योजना के तहत कितने किसानों को किन-किन फसलों के लिये कितनी-कितनी राशि बीज अनुदान के रूप में भुगतान की गई है? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) में दर्शाई गई राशि की औषधि बीज विभाग द्वारा क्रय की गयी है? यदि हाँ, तो किस दिनांक को क्रय की गयी और चयनित कितने किसानों को य‍ह बीज वितरण किया गया? (ग) क्‍या प्रश्नांश (ख) में कृषकों को वितरित किया गया औषधि बीज समय-सीमा में वितरित किया गया है? यदि हाँ, तो प्रदाय बीज से कितना-कितना उत्‍पादन हुआ है? फसलवार बतायें।

        पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के   प्रपत्र-अ(कालम-4 एवं 6 में भुगतान की गई अनुदान राशि(रुपये लाख में) अनुसार है। (ख) जी हाँ। जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है।    (ग) जी हाँ। विभाग द्वारा उत्पादन की जानकारी संधारित नहीं की जाती है।

परिशिष्ट - ''एक''

          श्री दिलीप सिंह परिहार - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि बोनी का सीजन अक्टूबर-नवम्बर माह में होता है और दिसम्बर माह में बीज क्रय किया गया. किसानों को माह जनवरी तक वह बीज पहुंचा होगा तो उस बीज का कोई औचित्य नहीं रह जाता है तो जिन्होंने विलंब से बीज खरीदा और किसानों को वैसे ही खानापूर्ति के लिये दिया.

          सुश्री कुसुमसिंह महदेले - माननीय अध्यक्ष महोदय, कोई खानापूर्ति नहीं की गई है. समय पर बीज खरीदा गया है और समय पर फसल हुई है और समस्त बीज चालान के साथ समय पर प्राप्त किये जाकर बुवाई के समय ही कृषकों को उपलब्ध करा दिये गये थे.

          श्री दिलीप सिंह परिहार - माननीय अध्यक्ष महोदय, 28.12. को खरीदी हुई है.  संबंधित अधिकारी द्वारा बीज प्रदाय संस्था को  लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सिर्फ यह किया गया है और हमारे जिले में ऐसा कोई वितरण नहीं किया गया है.

          सुश्री कुसुमसिंह महदेले - माननीय अध्यक्ष महोदय, उज्जैन संभाग में हमने अश्वगंधा,तुलसी,सफेद मूसली के बीज का वितरण किया है और भरपूर फसल हुई है कोई शिकायत हमें आज तक प्राप्त नहीं हुई है.

          श्री दिलीप सिंह परिहार - अध्यक्ष महोदय,विभाग ऐसी नीति बनाए कि जब सीजन हो बोने का तब बीज दें. अक्टूबर-नवम्बर में बोनी होती है उसी समय बीज देना चाहिये.

          अध्यक्ष महोदय - सिर्फ नीमच जिले में दिसम्बर में दिया है बाकी जगह समय पर दिया है.

          श्री दिलीप सिंह परिहार - अध्यक्ष महोदय, माननीय मुख्यमंत्री जी, मंत्री जी, किसानों को सुविधा पहुंचाने के लिये अनुदान देते हैं क्या उसका दुरुपयोग नहीं हो रहा है.

          सुश्री कुसुमसिंह महदेले - माननीय अध्यक्ष महोदय, दुरुपयोग होने की कोई शिकायत  प्राप्त नहीं हुई है.

          श्री दिलीप सिंह परिहार - माननीय अध्यक्ष महोदय, विधायक मैं स्वयं बोल रहा हूं.

          अध्यक्ष महोदय - मंत्री जी, क्या आगे से जहां लेट हो गये हैं एक जिले में वहां समय से बीज उपलब्ध  करा दें.

          सुश्री कुसुमसिंह महदेले - माननीय अध्यक्ष महोदय, वहां से मांग नहीं आई इसलिये लेट हुआ. मांग आती तो हम जल्दी दे देते.

          अध्यक्ष महोदय - आप सीधे पूछ लीजिये कि भविष्य में समय पर मांग आने पर समय पर बीज उपलब्ध कराएंगे ?

          श्री ओमप्रकाश सखलेचा -  माननीय अध्यक्ष महोदय, पहला सवाल यह उठता है कि बीज देरी से खरीदा तो उन अधिकारियों पर क्या कार्यवाही हुई. कार्यवाही तो जरूरी है.नहीं तो यह शुद्ध रूप से अगर बुवाई का सीजन चला गया उसके बाद अगर बीज खरीदा गया.

          श्री दिलीप सिंह परिहार - माननीय अध्यक्ष महोदय, क्या उप संचालक,उद्यानिकी श्री रेगे, क्या इस अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही होगी ?

          सुश्री कुसुमसिंह महदेले - माननीय अध्यक्ष महोदय,अभी तक हमें कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुर्ई है शिकायत प्राप्त होगी तो अवश्य जांच कराएंगे.

          श्री दिलीप सिंह परिहार -  मैं आपको बताऊंगा ना.

          अध्यक्ष महोदय - आप लिखकर दे दीजिये.

          श्री दिलीप सिंह परिहार - माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें आपने यह भी जानकारी दी है कि फसल के उत्पादन की हम कोई जानकारी नहीं रखते हैं तो विभाग को जानकारी रखनी चाहिये. आप बीज समय पर नहीं देंगे तो वे फेंक देंगे. उसका कोई उपयोग नहीं हुआ. सरकार के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है. आईंदा ऐसा न हो. भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही हो.

          सुश्री कुसुमसिंह महदेले - माननीय अध्यक्ष महोदय, फसल नहीं होती तो निश्चित रूप से किसान शिकायत करते.

          श्री दिलीप सिंह परिहार - अध्यक्ष महोदय, बीज ही नहीं मिल रहा है तो किसान कब बोवेंगे.

          सुश्री कुसुमसिंह महदेले - माननीय अध्यक्ष महोदय, बीज दिया है. हमारे समय पर बिल मौजूद हैं.

          श्री दिलीप सिंह परिहार -  अध्यक्ष महोदय,आईंदा समय पर बीज उपलब्ध हों.

          सुश्री कुसुमसिंह महदेले - माननीय अध्यक्ष महोदय, समय पर ही उपलब्ध कराया है. आप कहते हैं तो और जल्दी उपलब्ध करवा देंगे.

          श्री दिलीप सिंह परिहार - माननीय अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद. शासन के पैसे का  दुरुपयोग नहीं हो.

        सुश्री कुसुमसिंह महदेले - माननीय अध्यक्ष महोदय, शिकायत प्राप्त होगी तो जांच करा लेंगे.

आरक्षित वर्ग के कृषकों के पंपों का उर्जीकरण

3. ( *क्र. 5677 ) श्रीमती ममता मीना : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या आदिम जाति कल्‍याण विभाग, गुना में वर्ष 2015-16 में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजा‍ति के कृषकों का पंप उर्जीकरण नहीं कराया गया है? कारण बतायें। (ख) विद्युतीकरण कार्यों हेतु निविदा प्रक्रिया उपरांत कार्य क्‍यों नहीं कराये जा रहे हैं? (ग) दोषी कौन है, हितग्राहियों को शासन योजना के लाभ से वंचित क्‍यों किया गया है? (घ) निविदायें स्‍वीकृति के अधिकार किसे हैं? निविदायें स्‍वीकृत क्‍यों नहीं की गई हैं? यदि निविदायें स्‍वीकृत नहीं की जा सकती हैं तो तत्‍काल निरस्‍त कर पुन: निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर हितग्राहियों को शासन योजना का लाभ शीघ्र दिलाये जाने की कार्यवाही की जावेगी?

        आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) से (ग) जी हाँ। दिनांक 12.09.2015 को आमंत्रित निविदा दर प्रचलित एस.ओ.आर. से 19.95 प्रतिशत अधिक प्राप्त होने के कारण जिला स्तर पर निविदा दरें स्वीकृत नहीं की जा सकी। अतः कार्य नहीं कराये जा सके। निविदा की सक्षम स्‍वीकृति की कार्यवाही की जाकर हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा सकेगा। (घ) निविदा दर 19.95 प्रतिशत अधिक होने के कारण स्वीकृति के अधिकार राज्य शासन को हैं। निविदायें स्वीकृति प्रकरण आयुक्त ग्वालियर संभाग के स्तर पर विचाराधीन है। यदि निविदायें स्वीकृत नहीं की जाती हैं, तो तत्काल निरस्त कर पुनः निविदा प्रक्रिया पूर्ण कर हितग्राहियों को शासन योजना का लाभ दिलाये जाने की कार्यवाही की जावेगी।

          श्रीमती ममता मीना--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहूंगी कि मेरे प्रश्न में माननीय मंत्री जी ने जो उत्तर दिया है (क) से लेकर (घ) तक उन्होंने इस उत्तर को सही माना है मेरा यह कहना है कि  अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के मजरे टोलों के लिये जो विद्युत व्यवस्था शासन की ओर से की गई है , माननीय मंत्री जी ने कहा है कि 19.95 प्रतिशत अधिक का टेन्डर आया है, तथा उन्होंने कहा है कि यह संभागायुक्त ग्वालियर को भेजा गया है, जबकि मैं आपके माध्यम से यह चाहती हूं कि क्या नियमानुसार परमीशन के लिये ,जो प्रभारी ट्रायबल डी.ओ.बना हुआ है, क्या उसको भेजना चाहिये था क्या?  माननीय मंत्री जी जवाब दें. अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसानों का प्रभारी डी ओ ने नुकसान किया है, उनके खरीफ एवं रबी का सीजन चला गया है ,शासन से अनुमति लेना चाहिये थी या कमिश्नर से अनुमति लेना चाहिये थी, इसमें कमिश्नर से अनुमति ली .अभी 1 अप्रैल, से लेकर 31 मार्च तक वित्तीय वर्ष होता है आज उसमें एक दिन बचा है तो क्या एक दिन में यह प्रक्रिया थोड़े ही पूरा करेंगे. हमारे किसानों का इतना बड़ा नुकसान हुआ है.

          अध्यक्ष महोदय--आप इसमें उत्तर तो आने दें.

          श्रीमती ममता मीना--माननीय अध्यक्ष महोदय,मैं यह चाहती हूं कि क्या जो संबंधित अधिकारी हैं उन्होंने इतनी बड़ी लापरवाही की वह एक साल में टेन्डर प्रक्रिया को पूर्ण नहीं कर पाये तो आप उनके खिलाफ क्या कार्यवाही करेंगे मैं आपके माध्यम से यह चाहती हूं.

          श्री ज्ञानसिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या ने बहुत सामयिक बिन्दु की ओर शासन का ध्यान आकर्षित किया है इसके लिये मैं उनको धन्यवाद देना चाहूंगा. वास्तव में ऐसे हमारे शोषित-पीड़ित समाज के उद्धार के लिये जो व्यवस्थाएं तथा योजनाएं बनायी गई हैं, चूंकि विद्युत के टेन्डर की हमारे विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, हमारे विभाग द्वारा पैसे उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी होती है उसमें अवश्य देरी हुई है. मैं माननीय सदस्या को आपके माध्यम से आश्वस्त कराना चाहूंगा कि उनके जैसी हटाने की भावना है, हटेगा भी तथा उसकी जांच भी करायी जाएगी.

          श्रीमती ममता मीना--माननीय अध्यक्ष महोदय,यह जांच का विषय ही नहीं है मैं यह कह रही हूं कि उन्होंने पांच माह का विलंब टेन्डर करने में किया इसमें शासन से परमीशन लेनी चाहिये थी न कि आयुक्त से उसके बाद हमारे जो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसानों का इतना बड़ा नुकसान हुआ और मैं तो यहां तक कहती हूं कि मेरे पास में जो टेन्डर प्रक्रिया की नियमावली है गवर्मेन्ट ऑफ मध्यप्रदेश की इसमें 120 दिन अगर हो जाते हैं तो स्वतः ही टेन्डर प्रक्रिया निरस्त हो जाती है. मैं तो इसमें यह चाहती हूं कि अगर ठीक है उन्होंने संभागायुक्त को लिखा तो क्या विभागाध्यक्ष को या कलेक्टर को किसी को कोई पत्र नहीं लिखा यह छः माह से आयुक्त के यहां पर प्रकरण पड़ा है.

          अध्यक्ष महोदय--आपका प्रश्न क्या है.

          श्रीमती ममता मीना--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यह है कि जो डी.ओ.ट्राईबल है श्री मिश्रा उसके द्वारा जान-बूझकर हमारे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के किसानों को क्षति पहुंचाई है तथा उन्होंने ऐसा उदासीनतापूर्ण कार्य किया यह प्रभारी अधिकारी अयोग्य है उसको तत्काल यहां से सस्पेन्ड करके हटाया जाये

          श्री ज्ञानसिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने पहले ही स्वीकार किया है कि इसमें देरी हुई है लेकिन देरी होने में विभाग का एक ही अधिकारी जिम्मेदार नहीं होता है. मैं तो यह भी व्यवस्था करने जा रहा हूं कि अगर टेन्डर समय पर नहीं हो पाएगा तो उसमें सीधी राशि विभाग के द्वारा विद्युत विभाग को चली जाएगी. टेन्डर का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी. जहां तक माननीय सदस्या जी का यह आग्रह है कि वह लिखकर के दें कि इसमें क्या क्या त्रुटियां हुई हैं इसमें अवश्य कार्यवाही होगी.

          श्रीमती ममता मीना-- अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहूंगी.मैं बैठूंगी नहीं,इसमें लिखकर देने का प्रश्न ही नहीं है...

          अध्यक्ष महोदय-- आपको बैठना तो पड़ेगा ही. आपकी बात आ गई हैं.

          श्रीमती ममता मीना-- अध्यक्ष महोदय,उन्होंने खुद स्वीकारा है कि हां हम किसानों तक यह लाभ नहीं पहुंचा पाए हैं. अध्यक्ष महोदय, वह अधिकारी जो कि प्रभारी अधिकारी है, उन्होंने एस सी एस टी के किसानों को क्षति पहुंचाई है आप चाहें तो उनको  ओ एस डी बना लें, या विभाग का प्रमुख बना दें.

          अध्यक्ष महोदय-- वे जांच करा रहे हैं.

          श्रीमती ममता मीना-- अध्यक्ष महोदय, यह जांच का विषय ही नहीं है.माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक दिन बचा है, एक दिन में  क्‍या कर लेंगे, पूरे प्रदेश में हुआ है, हमारे गुना जिले को,  अनुसूचित जाति/जनजाति के किसानों को जो क्षति हुई है, ऐसे अधिकारी को वहां रखने से क्‍या फायदा, निलंबित क्‍यों नही करते ? माननीय मंत्री जी सदन में घोषणा क्‍यों नहीं करते हैं ? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं नहीं  बैठूंगी, हमारे मुख्‍यमंत्री इतने संवदेनशील हैं, खेत-  खेत  जाकर किसानों के बीच में पहुंच रहे हैं ।  

          अध्‍यक्ष महोदय-  आप बैठ जाइए, बैठकर ही उत्‍तर लिया जाता है ।

          श्री ज्ञान सिंह-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, नियम पालन और शासन की व्‍यवस्‍था है, बिना दोष सिद्व किए कैसे निलंबित किया जा सकता है ।

          श्रीमती ममता मीना-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहती हूं, मेरी बात का पूरी तरह से जवाब  नहीं आया है,  अनुसूचित जाति/जनजाति से जुड़ा हुआ मामला है, छोटे किसानों से जुड़ा हुआ मुद्दा है ।

          अध्‍यक्ष महोदय-  जांच करा रहे हैं और जांच के बाद कार्यवाही होगी ।

          श्रीमती ममता मीना-  अध्‍यक्ष महोदय, जांच का विषय ही नहीं है, अगर वह अधिकारी इतना योग्‍य है तो उसको ओएसडी बना लें, उसको विभाग प्रमुख बना दें जब उन्‍होंने इतने बड़े बजट का नुकसान कर दिया है तो हमारे गुना जिले में रखने की क्‍या व्‍यवस्‍था है । माननीय मुख्‍यमंत्री जी इतने संवेदनशील हैं तो मंत्रीजी संवेदनशील क्‍यों नहीं हैं ।

 माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से चाहती हूं कि उस अधिकारी को निलंबित नहीं कर रहे हैं तो उसको वहां से हटा तो दें । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह किसानों से जुड़ा हुआ मुद्दा है ।

          अध्‍यक्ष महोदय-  आप बोलना चाहती हैं या फिर कुछ सुनना भी चाहती हैं, बैठ जाएं । माननीय मंत्री जी जांच कराने के पहले......

          श्रीमती ममता मीना-  माननीय अध्‍यक्ष जी, हटाने का बोले, अभी तत्‍काल हटाया जाए ।

          अध्‍यक्ष महोदय-  आप बैठ तो जाएं, आप किसी की सुन ही नहीं रही हैं ।

          श्री ज्ञान सिंह-  माननीय अध्‍यक्ष जी, सदन तो  नियमों से चलेगा, अकेला डी.ओ. जिम्‍मेदार नहीं है,  जहां पर देरी हुई है, एमपीईबी, वहां का कलेक्‍टर, कमिश्‍नर भी है,   मैं जांच करा लूंगा,  हटाने का क्‍या,  मैं निलंबित कर दूंगा ।

          श्रीमती ममता मीना-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं हटाने के लिए कह रही हूं आप ओएसडी बना दीजिए,  विभाग प्रमुख बना दीजिए,  जब इतनी बड़ी लापरवाही है और एक अप्रैल से लेकर 31 मार्च तक साल का वित्‍तीय वर्ष होता है और आप हटा नहीं रहे हैं, सस्‍पेंड करना चाहिए ।

          अध्‍यक्ष महोदय-  आप सुनना ही नहीं चाहती हैं तो क्‍या करें।

          श्रीमती ममता मीना-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सुन रही हूं माननीय मंत्री जी गोलमोल जवाब दे रहे हैं ।

          अध्‍यक्ष महोदय-  विश्‍वास जी, आप प्रश्‍न पूछिए, वह सुनना ही नहीं चाहती हैं, रिकार्ड में कुछ नहीं आएगा ।

          श्रीमती ममता मीना-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सुनना चाहती हूं ।

          अध्‍यक्ष महोदय-  उन्‍होंने क्‍या कहा है, वह तो आप सुन लीजिए ।

          श्रीमती ममता मीना-  XXXX

            अध्‍यक्ष महोदय-  प्रश्‍न संख्‍या 4 श्री विश्‍वास सारंग ।

          श्रीमती ममता मीना-  XXXX

            अध्‍यक्ष महोदय-  विश्‍वास जी, आप प्रश्‍न करें ।

          श्री विश्‍वास सारंग -  अध्‍यक्ष महोदय, मैं क्‍या करूं मेरी बहन है, वह नाराज हो जाएंगी ।

          श्रीमती ममता मीना-  विश्‍वास भैया, मेरी बात का उत्‍तर आ जाने दीजिए । अध्‍यक्ष महोदय, मैं नहीं बैठूंगी, आज मैंने पहली बार जिद की है, क्‍योंकि बहुत जायज मामला है, इसलिए जिद कर रही हूं । किसानों से जुड़ा हुआ मामला है, पूरे जिले का का मामला है । मंत्री जी से कहें कि उसको तत्‍काल हटाएं और सस्‍पेंड करें ।

          अध्‍यक्ष महोदय-  उन्‍होंने हटाकर जांच कराने के लिए बोला है ।

          श्रीमती ममता मीना-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जांच का विषय ही नहीं है ।

          श्री रामनिवास रावत-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश के पीटीजी ग्रुप विशेष पिछड़ी जनजाति सहरिया से जुड़ा हुआ मामला है, सहरिया के विकास के लिए जो पैसा भेजते हैं, उसका ठीक से उपयोग हो, यह सुनिश्‍चित करें और अधिकारी लापरवाही बरतते हैं तो उनके विरूद्व कार्यवाही करें,  सहरियाओं के प्रति सरकार की ऐसी असंवेदनशीलता नहीं होना चाहिए ।

          अध्‍यक्ष महोदय-  आप बैठ जाएं, आप सुन लें ।

          श्री रामनिवास रावत- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि उसको हटा कर जांच कर लें ।

          अध्‍यक्ष महोदय- वह, वही तो बोल रहे हैं परन्‍तु  सुन ही नहीं रही हैं । पता नहीं आप क्‍या चाहती हैं, उन्‍होंने कहा है कि हटाकर जांच करेंगे, आपने सुना ही नहीं है ।

          श्री बाला बच्‍चन-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी ने  यह नहीं कहा है ।

          श्री रामनिवास रावत-  अध्‍यक्ष महोदय, आसंदी निर्देश दे दे कि उनको हटाकर जांच कराई जाए या मंत्री जी स्‍वयं कहें ।

          श्री ज्ञान सिंह-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, आपके माध्‍यम से मैंने पहले ही सदस्‍य महोदय को आश्‍वस्‍त कराने का प्रयास किया, मैं फिर कहना चाहूंगा कि अकेला ट्रायवल का डीओ दोषी नहीं है,  उसमें एमपीईबी का डीई, वहां का कलेक्‍टर,कमिश्‍नर भी है । 

          श्री रामनिवास रावत - आप यह तो मानते हैं कि सहरियाओं के लिए काम नहीं हो रहे हैं, आप आदिवासियों के प्रति असंवेदनशील हैं. (व्‍यवधान)

          श्री बाला बच्‍चन - अध्‍यक्ष महोदय, हमने भी कितने आरोप सरकार के ऊपर इस संबंध में लगाये हैं या तो इस मद के पैसे कहीं और खर्च कर दिये जाते हैं.

          श्री बाबूलाल गौर - अध्‍यक्ष महोदय, ये दबाव नहीं डाल सकते हैं, दबाव नहीं डाला जा सकता है. (व्‍यवधान)

          श्री रामनिवास रावत - आप बने रहें असंवेदनशील. आपको सुनना ही नहीं है.

          श्री बाला बच्‍चन - अध्‍यक्ष महोदय, यह उत्‍तर बिल्‍कुल ठीक नहीं है. आपको शासन से उत्‍तर दिलवाना चाहिए.

          श्री बाबूलाल गौर - दबाव नहीं डाल सकते है. उत्‍तर आया है, आप सुनते नहीं हैं.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - अध्‍यक्ष महोदय, वे उत्‍तर दे रहे हैं, सुन तो लीजिये. (व्‍यवधान)  

          अध्‍यक्ष महोदय - इस बात का समाधान हो गया है.

          श्री बाबूलाल गौर - उसकी जांच होगी, बताया गया है और जांच में दोषी पाया जायेगा तो हटाया जायेगा.

          श्री आरिफ अकील - अध्‍यक्ष जी ने कहा है कि हटाकर जांच करेंगे तो वे भी नहीं मान रहे हैं. (व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय - मैंने ऐसा नहीं कहा. मैंने कहा कि मंत्री जी ने ऐसा बोला है. (व्‍यवधान)

          श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने भी ऐसा कहा था. उनको हटाकर जांच करा दें, हम उससे संतुष्‍ट हैं.

          श्री बाबूलाल गौर - दबाव से कार्य नहीं होता है. दबाव अथवा प्रेशर से कोई भी कार्यवाही विधानसभा में नहीं हो सकती है. (व्‍यवधान)

          श्री रामनिवास रावत - यह सहरिया आदिवासियों से जुड़ा हुआ मामला है.

          श्री बाबूलाल गौर - चाहे वह किसी भी पार्टी का हो, दबाव के आधार पर नहीं हो सकता है.

          श्रीमती ममता मीना - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से आश्‍वासन चाह रही हूँ.

          श्री बाबूलाल गौर - अध्‍यक्ष महोदय, अधिकारी की जांच होगी और वह गलत पाया जायेगा तो कार्यवाही होगी.

          अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी ने कहा है. श्रीमती ममता मीना बैठना ही नहीं चाहती हैं तो क्‍या करें ?

          श्रीमती ममता मीना - मैं चाह रही थी कि हटा दिया जाये और उसके बाद जांच की जाये. (विपक्ष के कई लोगों के एक साथ बोलने से व्‍यवधान)

          श्री रामनिवास रावत - अध्‍यक्ष महोदय, आपने भी निर्देश दिया था. उसका पालन नहीं किया गया.

          अध्‍यक्ष महोदय - मैंने कोई निर्देश नहीं दिया है.

           श्री रामनिवास रावत - अध्‍यक्ष महोदय, आपने जांच कराने की बात कही थी कि मंत्री जी ने कह दिया है तो कम से कम यह बात भी मंत्री जी ही कह दें. आसन्‍दी का ही सम्‍मान कर लें. प्रदेश के सहरियाओं का नहीं तो आसन्‍दी का ही सम्‍मान कर लें.

          अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाइये.

          श्री बाबूलाल गौर - आप मंत्री जी को सीधे आदेश नहीं दे सकते हैं.

          श्री रामनिवास रावत - हम विरोध कर रहे हैं कि प्रदेश के गरीबों के काम में जो बाधा डालता है, उनके खिलाफ कार्यवाही करें.

          अध्‍यक्ष महोदय - सारंग जी, कृपया प्रश्‍न करें. (व्‍यवधान)

          श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत गलत बात है. यह गरीब आदिवासी सहरियाओं पी.टी.जी. से जुड़ा हुआ मामला है. (व्‍यवधान)

          श्री बाला बच्‍चन - अध्‍यक्ष महोदय, जो तंत्र ने जवाब माननीय मंत्री जी को बनाकर दिया है तो वे, वह जवाब दे रहे हैं. वह गलत जवाब है. आप जवाब दिलवायें. ऐसे ही अगर विधानसभा चली और ऐसे ही जवाब आते रहेंगे तो हम लोगों का सदन से विश्‍वास उठ जायेगा. (व्‍यवधान)

          श्रीमती ममता मीना - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप तो बस इतना कहलवा दें कि हटवा दिया और उसके बाद उसकी जांच कराई जायेगी.

          श्री बाबूलाल गौर - माननीय मंत्री जी ने जो उत्‍तर दिया है. उन पर दबाव नहीं डाला जा सकता है. (व्‍यवधान)  

          श्री बाला बच्‍चन - अध्‍यक्ष महोदय, वह गलत एवं भ्रामक जवाब है. तंत्र मंत्रियों एवं विभाग को कितना मजबूर कर रहा है, इससे इस बात का पता चलता है.

          श्री बाबूलाल गौर - अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रकार कार्यवाही नहीं होती है. नियमानुसार कार्यवाही होगी. दोषी पाया जायेगा तो कार्यवाही होगी.

          श्री रामनिवास रावत - दबाव नहीं डाल रहे हैं. जो गलत करता था, राशि का दुरूपयोग करता था, उसके खिलाफ कार्यवाही करें.

          श्री बाबूलाल गौर - आप किसी भी मंत्री पर दबाव नहीं डाल सकते हैं. (व्‍यवधान)  

          श्रीमती ममता मीना - अध्‍यक्ष महोदय, हटाकर, जांच करवायेंगे. केवल इतना कहलवा दें. (व्‍यवधान)

          श्री आरिफ अकील - अध्‍यक्ष महोदय, आपने भी तो कहा कि हटवाकर जांच करवायेंगे.

          श्रीमती ममता मीना - अध्‍यक्ष महोदय, मेरी बात का जवाब माननीय मंत्री जी नहीं दे रहे हैं. मैं आपसे संरक्षण चाह रही हूँ.

          श्री बाबूलाल गौर - अध्‍यक्ष महोदय, मुझे बहुत आपत्ति है.

          श्री रामनिवास रावत - आपका क्‍या अधिकार है ?

          श्री बाबूलाल गौर - मैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय से बात कर रहा हूँ.

          श्री रामनिवास रावत - आपको यह कहने का क्‍या अधिकार है ?

          अध्‍यक्ष महोदय - आरिफ अकील साहब सुन लें. माननीय मंत्री जी ने जब प्रश्‍न का उत्‍तर दिया था तब यह कहा था चाहे जाने में या अनजाने में, कि उसको हटाकर के जांच करायेंगे. पहले सुन लेना, बोलना नहीं. मैंने निर्देश नहीं दिये हैं, वही बात रिपीट की है. रिकॉर्ड दिखवा रहे हैं. रिकॉर्ड में आया है तो उसको निकलवा रहे हैं. यदि रिकॉर्ड में ऐसा आया होगा तो जो उन्‍होंने कहा है, वैसी कार्यवाही होगी.

          श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रिकॉर्ड यहीं पर है.

          अध्‍यक्ष महोदय - रिकॉर्ड निकलवा रहे हैं. (व्‍यवधान) आप दो मिनिट बैठ जाइये.

          श्री बाला बच्‍चन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय

          अध्‍यक्ष महोदय - आप इस तरह नहीं कर सकते हैं. बैठ जाइये.

          श्री बाला बच्‍चन - अध्‍यक्ष महोदय, हम आपकी बात से सहमत हैं लेकिन जैसा आपने जो बोला, वह रिकॉर्ड में नहीं आया है तो रिकॉर्ड अभी निकलवा लें क्‍योंकि कल की बात नहीं है. माननीय मंत्री जी ने ऐसा नहीं बोला है.

                        अध्यक्ष महोदय -- रिकार्ड निकलवाने में समय तो लगेगा.

                   श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, अभी उसको  चेक करवा लें आप.

                   अध्यक्ष  महोदय -- करवा रहे हैं.

                   श्री सुन्दरलाल तिवारी--  मंत्री जी अब बदल रहे हैं.  अध्यक्ष महोदय, आपने ठीक सुना है.

                   अध्यक्ष महोदय -- हमने नहीं सुना है.  रिकार्ड  वालों ने  सुना है.

                   श्री रामनिवास रावत --  अध्यक्ष महोदय, मेरा विनम्रता पूर्वक निवेदन है कि  आसंदी और पूरे सदन ने यह बात सुनी और आसंदी ने  वही बात कही  जो मंत्री जी ने कही.  यह सब लोगों के सुनने में और  आसंदी के  कहने की बात पर प्रश्न  चिह्न  लगता है.  तो मेरा यह निवेदन है कि  इसका  निराकरण यह अभी रिकार्ड  निकलवाकर कर लें.

                   अध्यक्ष महोदय -- वही करवा रहे हैं.

                   संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) -- अध्यक्ष  महोदय, कोई  प्रश्न चिह्न नहीं है. ..

                   श्री रामनिवास रावत -- लगता है.

                   डॉ. नरोत्तम मिश्र -- आसंदी ने जैसा कहा है, उसका अक्षरशः पालन होगा, मेरा निवेदन है कि  बात समाप्त करें.

                   श्रीमती ममता मीना --   अध्यक्ष महोदय को मैं  धन्यवाद देती हूं.

 

 

 

बीमा अस्‍पतालों हेतु ऑपरेशन किट की खरीदी

                4. ( *क्र. 5166 ) श्री विश्वास सारंग : क्या श्रम मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भोपाल संभाग में स्थित बीमा अस्‍पतालों ने वित्‍तीय वर्ष 2015-16 में      किस-किस ऑपरेशन के लिए किट और इंस्‍ट्रूमेंट की खरीदी की? अस्‍पतालवार, ऑपरेशन किटवार, इंस्‍ट्रूमेंट, राशिवार जानकारी दें। (ख) प्रश्‍नांश (क) के तहत खरीदी गई किट व इंस्‍ट्रूमेंट का बाजार मूल्‍य बहुत कम है? यदि हाँ, तो उक्‍त किट व इंस्‍ट्रूमेंट का बाजार मूल्‍य कितना है? (ग) प्रश्‍नांश (क) व (ख) के तहत उक्‍त आर्थिक अनियमितताओं के लिए किस पदनाम/नाम के अधिकारी जिम्‍मेदार हैं? जिम्‍मेदार पर क्‍या कार्यवाही कब तक की जाएगी?

                श्रम मंत्री ( श्री अंतरसिंह आर्य ) :

 

                   श्री विश्वास सारंग -- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से  पूछना चाहता हूं कि  मुझे जो उत्तर मिला है,  उसमें यह कहा गया है कि जो उपकरणों की  खरीददारी हुई है, वह भंडार   क्रय  नियमानुसार  शासकीय उपक्रम  मध्यप्रदेश  लघु उद्योग निगम के  माध्यम से क्रय  हुई है.  मैं मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि  क्या यह खरीददारी  नियमानुसार हुई है.  क्या विभाग को इस बात की जानकारी है कि   मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियम  एवं  सेवा उपार्जन  28.7.2015  को  ही रिवाइज्ड कर दिये गये और उसके तहत  जिन उपकरणों की  खरीददारी हुई है, वह लघु  उद्योग  निगम की किसी भी  सूची  में शामिल नहीं हैं.  तो मंत्री जी यह बताने की कृपा करें, क्योंकि पहले ही उत्तर में  यह एस्टेब्लिश  हो गया है  कि इसमें बड़ा घोटाला हुआ है.  इसमें लघु उद्योग  निगम के मार्फत  यह खरीददारी नहीं होनी थी,  क्योंकि  वह उस लिस्ट में नहीं है.

                   श्री अंतर सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, जो सामग्री क्रय की गई है, वह  मध्यप्रदेश भंडार  क्रय  नियम, 1977  के नियम   14 (ब)  के अनुसार जो सामग्री  लघु उद्योग  निगम  के आरक्षित सूची में है,  उनका क्रय लघु  उद्योग निगम  के माध्यम  से ही किया जाना आवश्यक  है.  क्रय किये गये  चिकित्सा उपकरण लघु उद्योग  निगम की आरक्षित सूची  में  सम्मिलित होने से  उनका क्रय लघु उद्योग निगम  के माध्यम से  किया जाना अनिवार्य है.  इसलिये  लघु उद्योग निगम से  क्रय किया गया.

                   श्री विश्वास सारंग -- अध्यक्ष महोदय,अध्यक्ष महोदय, मेरा उत्तर नहीं  आया.  मैंने यही पूछा.  उन्होंने  1977  कहा, 1977  नहीं 1974   का जो मध्यप्रदेश  भंडार क्रय नियम है, वह 28.7.2015  को  ही  कैंसिल कर दिया गया है.  28.7.2015 को नये   भंडार क्रय नियम  आ गये हैं और यह जो खरीददारी हुई है,  यह 29.12.2015 को हुई है.  5 महीने बाद हुई है.  मेरे पास वह सूची भी है, लघु उद्योग निगम की जो प्रिसक्राइब्ड सूची है, उसमें  यह उपकरण  कहीं भी  नहीं हैं.

                   श्री अंतर सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, विधायक जी जो बात बता रहे हैं,  यदि आपके पास कोई जानकारी है, तो  आप उपलब्ध करवा दें,  उसका हम परीक्षण करा लेंगे.

                   श्री विश्वास सारंग -- अध्यक्ष महोदय, मेरा उत्तर नहीं आया.  मैं यह पूछ रहा हूं कि यह  जब 1974  के भंडार  क्रय नियम कैंसिल, खत्म कर दिये गये,  तो 2015 के नियमों  के तहत यह क्रय क्यों किया गया  और क्रय किया गया, तो यह तो  पेपर में भी   इसमें बहुत आया. मंत्री जी का भी वक्तव्य आया कि  इसमें गड़बड़ी हुई है.  तो अभी तक कार्यवाही क्यों नहीं हुई.  यह तो सीधा सीधा है.  इसमें जांच का तो विषय ही नहीं बनता है.

                   अध्यक्ष महोदय -- तो आप क्या चाहते हैं.

                   श्री विश्वास सारंग -- अध्यक्ष महोदय, मेरा यह मानना है कि  अभी कार्यवाही की जाये.

                   श्री अंतर सिंह आर्य -- अध्यक्ष महोदय, जो हमने क्रय  किया है, वह  नियम के अनुसार ही  लघु उद्योग निगम से क्रय किया है.  यदि कोई जानकारी  विधायक जी के पास है,  तो वह हमें दे दें, उसका  फिर से हम  परीक्षण करा लेंगे.

                   श्री विश्वास सारंग -- अध्यक्ष महोदय, मेरा उत्तर नहीं आ रहा है.  मैं आपका संरक्षण चाहता हूं कि सीधा सीधा मामला है.  मेरे पास यह है, या तो  मंत्री जी  जवाब दे दें कि  1974 का भंडार क्रय नियम  खत्म हुआ  है या  नहीं  हुआ है.  मैं तो सीधा प्रश्न पूछ रहा हूं.

                  


 

            अध्यक्ष महोदय -- मंत्री जी ने अभी बोला है न कि नियमानुसार ही हुआ है.

 

          श्री विश्वास सारंग -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं आया है.

(श्री सुन्दरलाल तिवारी, सदस्य के खड़े होने पर )

          अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जायें, सदस्य खुद सक्षम हैं प्रश्न पूछने में.

          श्री विश्वास सारंग-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कांग्रेस के मित्रों से निवेदन करना चाहता हूं कि इसमें राजनीति न करें. मैं सक्षम हूं मैं अपना प्रश्न खुद कर सकता हूं. अध्यक्ष महोदय, इस मामले को मंत्री जी ने गंभीरता से लिया है इसलिये मैं उनको धन्यवाद देना चाहता हूं. चूंकि अधिकारियों का यह मामला है. इसलिये प्लीज राजनीति न करें. मंत्री जी मेरे प्रश्न का जवाब दे दें कि 2015 में भण्डार नियम लागू हुये या नहीं हुये या फिर इनका विभाग उससे अलग हो गया है.

          श्री अंतरसिंह आर्य -- माननीय अध्यक्ष महोदय, 2015 का नया नियम भी कैबिनेट में संशोधित हुआ है.

          श्री विश्वास सारंग-- अध्यक्ष महोदय, बात सीधी सीधी हो गई कि घपला हुआ है . मंत्री जी से एक चीज और पूछना चाहता हूं कि जो आर्डर दिया गया है वह किस स्तर के अधिकारी के द्वारा दिया जाना चाहिये.

          श्री अंतरसिंह आर्य -- माननीय अध्यक्ष जी,  नियम-प्रक्रिया के अंतर्गत ही, नियमानुसार सामग्री क्रय की गई है. यदि नियमों की अव्हेलना हुई है, या आपके पास में कोई ऐसी जानकारी है, तो हम उसकी जांच करा लेंगे.

          श्री विश्वास सारंग-- अध्यक्ष महोदय, किस स्तर के अधिकारी से जांच करायेंगे.

          अध्यक्ष महोदय- मंत्री जी कह रहे हैं कि हम जांच करा लेंगे, आप उसमें लिखकर के दे दीजिये.

          श्री विश्वास सारंग- अध्यक्ष महोदय, लिखकर के तो मैंने प्रश्न पूछा है. मैं आलरेडी लिखकर के दे चुका हूं .अब इसके बाद और क्या लिखकर के दूंगा.

          अध्यक्ष महोदय- जो जांच आप चाहते हैं वह जांच मंत्री जी कराने को तैयार हैं.

          श्री विश्वास सारंग-- अध्यक्ष महोदय, संचालक के द्वारा यह सामग्री क्रय करनी थी जब कि उसके विपरीत प्रमुख सचिव कार्यालय के ई-मेल आईडी से यह आर्डर गया है. अब जांच किससे करायेंगे ? यदि प्रमुख सचिव ही उसमें इन्वाल्व हैं इसलिये मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि यदि यह मामला हुआ है. आपकी भी मंशा है कि इस तरह का घोटाला न हो. यदि घोटाला हुआ है तो उसकी जांच हो. यह बता दें कि जांच किस स्तर पर होगी और उस जांच में मुझे शामिल करेंगे या नहीं.

          अध्यक्ष महोदय--(मंत्री जी से) जांच करायेंगे उसकी और उस जांच में विधायक जी को शामिल करेंगे क्या. ?

          श्री अंतरसिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जांच करा लेंगे.

          अध्यक्ष महोदय-जांच में उनको शामिल करेंगे क्या ?

          श्री अंतरसिंह आर्य-- अध्यक्ष महोदय, ऐसा है कि माननीय विधायक को जांच में शामिल करना गरिमा के विपरीत है.  जांच करायेंगे.

          श्री विश्वास सारंग -- मंत्री जी हमारी गरिमा का तो हमें ही ध्यान रखने दें.

          अध्यक्ष महोदय-- जांच करा लेंगे. जांच के लिये तैयार हैं. प्रश्न क्रमांक 5 ..

          श्री विश्वास सारंग--अध्यक्ष महोदय, जांच कौन करेगा. प्रमुख सचिव खुद इन्वाल्व हैं.जांच कौन करेगा अध्यक्ष जी यह तो आपके माध्यम से पता लग जाये.

          श्री रामनिवास रावत-- राजनीति मत करो, भ्रष्टाचार होने दो.

          श्री विश्वास सारंग-- अध्यक्ष महोदय, जांच कौन करेगा.

          अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी जांच किससे करायेंगे.

          श्री अंतरसिंह आर्य-- हमारे विभाग से ही करायेंगे .

          श्री विश्वास सारंग-- अध्यक्ष महोदय, प्रमुख सचिव खुद इन्वाल्व हैं. मेरा निवेदन है कि मुख्य सचिव को मंत्री जी लिख दें जांच उस लेबिल पर हो, मुख्य सचिव को लिख दें क्योंकि प्रमुख सचिव सीधे सीधे इन्वाल्व हैं.

          अध्यक्ष महोदय-- आ गई आपकी बात..

          श्री विश्वास सारंग- अध्यक्ष महोदय जांच कौन करेगा. यहां पर प्रमुख सचिव जब इसमें इन्वाल्व हैं तो मंत्री जी मुख्य सचिव को लिख दें.

          अध्यक्ष महोदय-- अब यह निर्णय तो मंत्री जी को आप करने दीजिये. सारी बातों का निर्णय आप नहीं कर लेंगे न.

          श्री विश्वास सारंग-- अध्यक्ष महोदय, मैं तो आपसे निर्णय कराना चाह रहा हूं. माननीय अध्यक्ष महोदय, आप हमें संरक्षण नहीं देंगे तो कौन देगा.आप यह निर्देश तो दे दीजिये कि मुख्य सचिव को लिख दें.

          अध्यक्ष महोदय-- जांच कराने का उन्होंने कह दिया है.

          श्री विश्वास सारंग- नहीं, तो कौन जांच करेगा.

          अध्यक्ष महोदय-- यह सब बातों का यही निर्णय करेंगे क्या.

          श्री विश्वास सारंग-- अध्यक्ष महोदय, परम्परा रही है कि जांच कौन करेगा, यह तो बता दें.

          अध्यक्ष महोदय-- इन सारी बातों का निर्णय यही करेंगे ? दूसरे प्रश्नों को नहीं आने देंगे.प्रश्न क्रमांक 5 श्री आर.डी.प्रजापति...

          श्री बाला बच्चन--माननीय अध्यक्ष महोदय, (XXX)

          उच्च शिक्षा मंत्री(श्री उमाशंकर गुप्ता) -- नहीं, नहीं यह बहुत आपत्तिजनक है.अध्यक्ष जी पर आप आरोप लगा रहे हैं. आसंदी पर आरोप लगा रहे हैं.

          श्री बाला बच्चन-- आपत्तिजनक क्यों है.

          श्री उमाशंकर गुप्ता-- अध्यक्ष का काम है बैलेंस बनाकर के चलना,(तेज स्वर में बोलते हुये) क्या आपकी सब बातें मानेंगे. यह कोई तरीका है ?

            श्री बाला बच्‍चन--  यह विधानसभा में चर्चा हो रही है और आपकी पार्टी का विधायक प्रश्‍न पूछ रहा है ..... (व्‍यवधान)....  सरकार जवाब देने से बच रही है अध्‍यक्ष महोदय आपको इसका जवाब दिलवाना चाहिये, मेरा यह आपसे आग्रह है कि माननीय विश्‍वास जी के प्रश्‍न का जवाब आपको शासन से दिलवाना पड़ेगा ..... (व्‍यवधान).... 

          श्री आरिफ अकील--  ऐसी व्‍यवस्‍था बनवा दो कि सारी चोरियों की जांच चोर करेगा.

          श्री बाबूलाल गौर--  यह बहुत गलत बात है अध्‍यक्ष महोदय, आसंदी की ऊपर आरोप लगाया है. ..... (व्‍यवधान).... 

          अध्‍यक्ष महोदय--  आप बैठ जायें. ..... (व्‍यवधान).... 

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता--  हर कोई आसंदी पर आरोप लगा देता है.

          श्री बाला बच्‍चन--  सरकार पर हमारा आरोप है, आप पर हमारा आरोप है.

          अध्‍यक्ष महोदय--  आप दो मिनट बैठ तो जायें. ..... (व्‍यवधान)....  माननीय प्रतिपक्ष के नेता जी, तारांकित प्रश्‍न में 2 पूरक प्रश्‍न अधिकतम पूछे जाते हैं, 5 पूछ चुके अब आप इसके बाद और क्‍या चाहते हैं, दूसरे सदस्‍यों के प्रश्‍न महत्‍वपूर्ण नहीं हैं, एक ही सदस्‍य को 1 घंटा दे दें. आप लिखकर के दे दीजिये, यह कोई तरीका नहीं है. इस तरह से अगर सदस्‍य लोग, माननीय सदस्‍यों से भी मेरा अनुरोध है, आप जिद मत करिये, आपकी बात आई, आपकी बात के आधार पर मंत्री से चार पर जवाब दिलवाया, उन्‍होंने कहा कि जांच करा देंगे, अब आप हर बिंदू क्‍या यहीं तय करेंगे और इस तरह से दूसरे सदस्‍यों का जो अधिकारों का हनन हो रहा है, वह भी महत्‍वपूर्ण है, वह भी अन्‍य क्षेत्रों से संबंधित है, इस तरह से नियमों से ही चलाना पड़ेगा. मैंने 5 बार उनको अनुमति  दी, इसके बाद भी आप संतुष्‍ट नहीं हैं, तो क्‍या हर चीज में संतुष्‍ट करना जरूरी है क्‍या.

          श्री बाला बच्‍चन--  लेकिन असत्‍य और भ्रामक जवाब आ रहे हैं माननीय अध्‍यक्ष महोदय इसलिये हमारा आग्रह है.

          अध्‍यक्ष महोदय--  आप यहां पर कैसे निर्णय करेंगे सत्‍य और असत्‍य का, यह निर्णय आप कैसे करेंगे.

          श्री गोपाल भार्गव--  अध्‍यक्ष महोदय, यह तो विकलांग हैं अपने पैरों पर चल नहीं सकते, दूसरे की बैसाखियां लेकर चलने की कोशिश कर रहे हैं आप लोग.

          श्री बाला बच्‍चन--  हम हमारे पैरों पर खड़े हैं और कितने मजबूत हैं हम, यह हमने सरकार को सारा आइना दिखाया है, आपने किसी भी बात का जवाब नहीं दिया है.

          अध्‍यक्ष महोदय--  विकलांग शब्‍द कार्यवाही से निकाल दें.

          श्री रामनिवास रावत--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रश्‍न में ..... (व्‍यवधान).... 

          अध्‍यक्ष महोदय--  रावत जी को अलाऊ किया है केवल.

          श्री आरिफ अकील--  जिस पर चोरी का इल्‍जाम लगा है, वही चोरी की जांच करेगा. यह नियम बन रहा है कि जिस पर चोरी का इल्‍जाम, वही चोरी की जांच करे. 

          श्री रामनिवास रावत--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि आसंदी ने निर्देश दिया कि सदन नियम और कानूनों से चलेगा, अध्‍यक्ष महोदय, हम चाहते हैं कि सरकार भी नियम और कानूनों से चले.

          अध्‍यक्ष महोदय--  नियम से ही चलेगी.

          श्री रामनिवास रावत--  सरकार ने ही नियम बनाये हैं. सरकार के लोगों ने ही खरीदी की है. जब प्रमुख सचिव ही शामिल हैं और नियम विरूद्ध खरीदी की है तो माननीय सदस्‍य पूछ रहे हैं कि जांच आप किससे करायेंगे, मुख्‍य सचिव से करा लें, यह भर बात है, नियमों का पालन कौन करायेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय--  यहां मैं इस विषय पर बहस नहीं करना चाहता.

          श्री रामनिवास रावत--  एडिशनल चीफ सेकेट्री से जांच करा लें... (व्‍यवधान).... 

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता--  आप आरोप आसंदी पर लगायेंगे कि सरकार का बचाव कर रही है, अध्‍यक्ष अपनी व्‍यवस्‍था देता है, आप आरोप लगायेंगे क्‍या,(XXX)..... (व्‍यवधान).... 

          श्री रामनिवास रावत--  आपने क्‍या सुना, सुना क्‍या है आपने, मैंने क्‍या कहा है. ..... (व्‍यवधान)....  

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता--  आप अलग विषय ले जा रहे हो. नेता प्रतिपक्ष ने यह आरोप लगाया (XXX), यह कोई तरीका है, यह शब्‍द वापस होना चाहिये.

          श्री रामनिवास रावत--  बात मैं कर रहा हूं, नेता प्रतिपक्ष नहीं कर रहे.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता--  वापस लेना चाहिये यह शब्‍द...... (व्‍यवधान)....          

          अध्‍यक्ष महोदय--  बैठ जायें कृपया.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विनम्र प्रार्थना है सभी से कि सामान्‍य रूप से कोई भी सदस्‍य अपना प्रश्‍न उठाते हैं और वह इतने ज्ञानी हैं और उस प्रश्‍न के बारे में उन्‍हें अनुभव है कि वह उसमें सप्‍लीमेंट्री भी पूछ सकते हैं और सरकार की व्‍यवस्‍था में कहीं कोई कमी है तो उन्‍हें पूरा ज्ञान है, वह सब जानते हैं. हम यह देख रहे हैं कि हर प्रश्न पर खड़े होकर वकालत करना और व्यवधान पैदा करना यह कांग्रेस की  एक प्रेक्टिस हो गई है. स्थिति यहां तक आ गई है कि रावत जी तो माननीय अध्यक्षजी द्वारा जो निर्णय लिये जाते हैं उन पर ही व्यवस्था देने लगते हैं. मेहरबानी करके, जिसका प्रश्न है, वह प्रश्न पूछे, मंत्री उसका जवाब दें यह व्यवस्था सबसे अच्छी.

          श्री सुन्दरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, यह पूरे सदन की पीड़ा है कि माननीय मंत्रियों द्वारा जो जवाब  दिया जाता है, वह असत्य होता है.(व्यवधान)

          श्री विश्वास सारंग--अध्यक्ष महोदय, डॉ शेजवार साहब ने जो बोला है, मैं उसका समर्थन करता हूं.(व्यवधान)

          श्री शंकरलाल तिवारी--(XXX).(व्यवधान)

          श्री विश्वास सारंग-- अध्यक्षजी,  हम लोग, खासकर सत्ता पक्ष के विधायक कुछ पूछते हैं तो उसको राजनैतिक रंग नहीं देना चाहिए. मैं डॉ शेजवार साहब की बात का समर्थन करता हूं.(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय--अब किसी सदस्य कुछ नहीं लिखा जायेगा. सिर्फ आर डी प्रजापति जी जो बोलेंगे वह लिखा जायेगा.

          श्री सुन्दरलाल तिवारी-- XXX

          श्री रामनिवास राव-- XXX

          श्री शंकरलाल तिवारी--XXX

            श्री सुन्दरलाल तिवारी--XXX

            अध्यक्ष महोदय-- बैठिये. यह प्रश्न काल है, चर्चा काल  नहीं है. (व्यवधान)

 

विकासखण्‍ड हनुमना में प्रदाय ऋण की जाँच

5. ( *क्र. 4265 ) श्री आर.डी. प्रजापति : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) रीवा जिले के विकासखण्‍ड हनुमना में कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग रीवा द्वारा वर्ष 1995 से 2000 तक कुल कितने हितग्राहियों को रोजगार के लिये लोन (कर्ज) दिया गया? (ख) क्‍या हितग्राहियों द्वारा जो जाति/निवास प्रमाण पत्र/आय प्रमाण पत्र तथा अन्‍य दस्‍तावेज लगाये गये हैं, वह पूर्ण रूप से फर्जी हैं? (ग) यदि हाँ, तो फार्म में फर्जी दस्‍तावेज लगाने वालों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गयी है? यदि नहीं, तो कब तक की जावेगी?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) प्रश्नाधीन अवधि में कुल 50 हितग्राहियों को रोजगार के लिये बैंक द्वारा ऋण उपलब्ध कराया गया। (ख) जी नहीं। दस्तावेज फर्जी होने संबंधी कोई प्रमाण नहीं होने से प्रश्न उपस्थित नहीं होता।       (ग) प्रश्नांश (ख) के अनुक्रम में जानकारी निरंक है।

 

          श्री आर डी प्रजापति--अध्यक्ष महोदय, हमारी मंत्रीजी बहुत दयालु हैं. रीवा की मसीहा हैं. मेरा एक निवेदन है कि हनुमना विकासखंड के अंतर्गत 1995 से 2005 तक  दलालों के माध्यम से कुटीर और खादी ग्रामोद्योग से ऋण लेकर...

          अध्यक्ष महोदय--आप सीधा प्रश्न पूछिये.

            श्री आर डी प्रजापति-- अध्यक्ष महोदय, दलाल लोग निवास, जाति,आय के फर्जी प्रमाण पत्र अपने घर में बनाकर हितग्राहियों को पता भी नहीं चलता था और वो लोन निकाल लेते थे.  मेरा पहला प्रश्न है कि जिन हितग्राहियों को 10 साल में कर्ज दिया गया है उनके आवेदन पत्रों के साथ जितने संलग्न दस्तावेज हैं, उनकी प्रमाणित फोटो कॉपी मुझे दी जाये. दूसरा, जो दस्तावेज तैयार किये गये हैं, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, एसडीएम के जो प्रमाण पत्र अपने घर में बनाये गये, उनकी जांच करके, कार्रवाई की जाये. और जो गरीब तबके के हितग्राही हैं, जिनको पता नहीं है, उनको वह लोन वापस दिलवाया जाये.

          सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले--अध्यक्ष महोदय, अभी तो यह ही स्पष्ट नहीं हुआ है कि माननीय सदस्य किस संबंध में प्रश्न पूछ रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय--आप कोई स्पेसिफिक जानकारी दे दीजिए.

          श्री आर डी प्रजापति--अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि हनुमना विकास खंड में 1995 से 2000 और 2005 तक जो खादी ग्रामोद्योग से लोन दिया गया था, उस लोन में दलालों द्वारा हितग्राहियों के फर्जी नाम लिखकर जाति,निवास और आय प्रमाण पत्र लगाकर स्वयं ने राशि हड़प कर ली है. मेरा निवेदन है कि जो पूरे लोन हुए हैं, उसकी प्रमाणित प्रति मुझे भी दिलवायी जाये और जो फर्जी प्रमाण पत्र हैं, उसकी जांच कराकर जो दोषी हैं, उन पर कार्रवाई की जाये और हितग्राहियों को न्याय मिले.

          सुश्री कुसुम सिंह मेहदेले--अध्यक्ष महोदय, 1995 से जानकारी चाह रहे हैं, 20 साल हो गये हैं. इसके बावजूद इन 20 सालों में किसी भी हितग्राही की हमारे पास कोई शिकायत नहीं आयी है कि फर्जी जाति प्रमाण पत्र या कोई सा प्रमाण पत्र है और इसके बावजूद अगर शिकायत आयेगी तो हमारी संवेदनशील सरकार और हमारे माननीय मुख्यमंत्रीजी जांच करवा लेंगे. लेकिन एक बात और कहना चाहती हूं कि मध्यप्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की सीवीसी योजना के अंतर्गत मिट्टी के बरतन की ऋण की नियमित वसूली न होने पर आरसीसी राशि रुपये 1 लाख 54 हजार 615 बकाया है जिसमें ऋण राशि रुपये 63 हजार 497 एवं दंड ब्याज की राशि रुपये 91 हजार 118 बकाया है माननीय प्रश्नकर्ता के ऊपर.  

श्री आर.डी. प्रजापति - अध्यक्ष महोदय, लोन तो सरकार भी लेती है और सरकार पटाती भी है. मेरा मतलब है कि जिसने लोन लिया है, उनको अगर लोन मिल जाता है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन बीच के दलाल फर्जी लोन निकालकर हड़प रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय - उसकी जांच करवा रही हैं.

श्री आर.डी. प्रजापति - अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि माननीय मंत्री जी बहुत दयालु हैं, मेरा यह हाथ जोड़कर निवेदन है कि वह जो फर्जी प्रमाण पत्र बनाए गये थे और उन हितग्राही को पैसा नहीं दिया गया है.

अध्यक्ष महोदय - उन्होंने जांच कराने का बोल दिया है.

श्री आर.डी. प्रजापति - अध्यक्ष महोदय, वह जांच करा लें, मेरा यही निवेदन है. माननीय मंत्री जी मेरा हाथ जोड़कर निवेदन है कि उसकी जांच करवा लें.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले - अध्यक्ष महोदय, वर्ष 1995 की बात पूछ रहे हैं, मेरे पास कोई शिकायत नहीं आई है, और जब शिकायत नहीं आई है तो हम जांच किस बात की कराएं? और सबसे बड़ी बात यह है कि आपके ऊपर खुद हमारे विभाग का ऋण बकाया है.(व्यवधान)...

श्री आर.डी. प्रजापति - अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदया मैं तो आपसे निवेदन कर रहा हूं. मैं कह रहा हूं कि मैं पैसा जमा करूंगा वह अलग बात हुई.  आप जांच करा लीजिए. आप जब कहेंगी मैं जमा कर दूंगा. लेकिन उन गरीबों को तो पैसा मिल जाना चाहिए.

अध्यक्ष महोदय - आप बहस मत करिए, वह जांच कराने के लिए तैयार हैं.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले - अध्यक्ष महोदय, मैं कहती हूं कि आज जमा करो.

श्री आर.डी. प्रजापति - अध्यक्ष महोदय, आज तो नहीं होगा, माननीय मंत्री महोदया से निवेदन है कि  लेकिन जब आप इनकी जांच करा लेंगी, उसी दिन मैं पैसा जमा कर दूंगा.

अध्यक्ष महोदय - ठीक है, वह तैयार हैं.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, एक सदस्य से यह बात कहना, इसे कार्यवाही से निकाला जाय.

अध्यक्ष महोदय - वह जांच के लिए तैयार हैं. वह वही-वही बात बोल रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत - जो उन्होंने सदस्य से कहा है कि तुम्हारे ऊपर ऋण है उसे चुका दो.

वनमंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार)- यह वकालतनामा लगाने की परंपरा कौन-सी हो गई है? यह वकालतनामा क्यों लगा रहे हैं? (व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत - भले ही आपकी पार्टी के सदस्य हों, सदस्यों का भी अपमान करेंगे?

अध्यक्ष महोदय - श्री शंकरलाल तिवारी जी अपना प्रश्न करें.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले - अध्यक्ष महोदय, वर्ष 1995 की बात है, कोई शिकायत हमें प्राप्त नहीं हुई तो हम जांच किस बात की कराएं. आप 20 वर्ष पुरानी जांच की बात कर रहे हैं. आप अभी का तो निराकरण नहीं कर रहे हैं.

श्री आर.डी. प्रजापति - अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि आप उनकी जांच करवा लीजिए, पैसा जिस दिन कहेंगी, जिस दिन जांच हो जाएगी उसी दिन पैसा जमा कर दूंगा.

सुश्री कुसुम सिंह महदेले - अध्यक्ष महोदय, आप चंदला से विधायक हैं जिला छतरपुर से.

श्री आर.डी. प्रजापति - अध्यक्ष महोदय, मैं वहां पर रहा हूं. उस समय मैं वहां पर नौकरी करता था. मैं निवेदन कर रहा हूं कि वह बात फर्जी है.(व्यवधान)..

सुश्री कुसुम सिंह महदेले - अध्यक्ष महोदय,मैं जवाब देने के लिए तैयार हूं. (व्यवधान)...कोई शिकायत नहीं है, शिकायत मिलेगी तो मैं जवाब दे दूंगी.

अध्यक्ष महोदय - आपका उत्तर आ गया है, उनका प्रश्न भी आ गया है. वह प्रश्न समाप्त हो गया है.

प्रश्न संख्या 6 - (अनुपस्थित)

प्रश्न संख्या 7 - (अनुपस्थित)

 

 

 

 

 

आश्रम शालाओं/छात्रावासों के विद्यार्थियों को उपलब्‍ध सुविधाएं

8. ( *क्र. 1170 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सतना जिले में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति की किस-किस स्‍थान पर छात्र एवं छात्राओं की आश्रम शालायें एवं छात्रावास स्थित हैं? स्‍थानवार बतायें कि किन-किन में किस-किस नाम के बालक/बालिकायें किन कक्षाओं के कब से रह रहे हैं? किन-किन में कितने कमरे हैं? कितने बालक/बालिकायें रह रहे हैं? छात्रावास वार जानकारी दें। (ख) राज्‍य शासन के नियमों के तहत उक्‍त आश्रम शालाओं एवं छात्रावासों में क्‍या-क्‍या सामग्री एवं खान-पान की व्‍यवस्‍था बालकों/बालिकाओं को नि:शुल्‍क प्रदान की जाती है? छात्रावासवार जानकारी दें कि किस-किस में प्रश्‍नतिथि तक क्‍या-क्‍या सामग्री भौतिक रूप से उपलब्‍ध है? प्रश्‍नांश (क) में उल्‍लेखित छात्रावासों/ आश्रम शालाओं में छात्रावासवार क्‍या-क्‍या सामग्री 01.04.2013 से प्रश्‍नतिथि तक    किस-किस दर पर, कब कब किस-किस नाम पते वाली संस्‍थाओं/दुकानों से खरीदी गयी? उक्‍त सामग्री के किस-किस फर्म/दुकानों से किस-किस दर पर टेंडर (निविदा) आये? किस-किस को कितना भुगतान कब किया गया? () प्रश्‍नांश (क) में वर्णित छात्रावासों की पुरानी सामग्री का प्रश्नांश (ख) में उल्‍लेखित समयानुसार क्‍या किया गया?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' तथा 'एक' अनुसार है। (ख) जनजाति छात्रावास/आश्रम में नि:शुल्‍क निवास, नाश्‍ता, भोजन, पंलग, गद्दा, चादर, तकिया उपलब्‍ध कराया जाता है। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। शासन के प्राधिकृत एजेन्सियों/उपक्रमों के माध्‍यम से सामग्री क्रय की गई है। टेण्‍डर (निविदा) नहीं बुलाये गये। वर्ष 2014-15 एवं वर्ष 2015-16 में छात्रावास नवीन नियम के तहत राशि विद्यार्थियों के खाते में जमा कराने के पश्‍चात विद्यार्थियों द्वारा आवश्‍यक सामग्री स्‍वयं क्रय की गई है। 05 वर्ष की अधिक आयु वाली सामग्री पालक समिति के माध्‍यम से अधिकृत एजेन्‍सी/उपक्रम के माध्‍यम से क्रय की गई है। अनुसूचित जाति छात्रावासों में नि:शुल्‍क आवासीय सुविधा, प्रीमैट्रिक छात्रावास में मेस संचालन हेतु शिष्‍यवृत्ति तथा पोस्‍ट मैट्रिक छात्रावासों में मेस संचालन हेतु सहायता राशि एवं आगमन भत्‍ता एवं इसके अलावा बिस्‍तर सामग्री, खान-पान व्‍यवस्‍था हेतु सामग्री, खेलकूद सामग्री, कम्‍प्‍यूटर, लायब्रेरी, समाचार पत्र, उत्‍कृष्‍ट छात्रावासों में प्रवेशित विद्यार्थियों को स्‍टेशनरी एवं कोचिंग आदि की सुविधा प्रदान की जाती है। सभी छात्रावास/आश्रमों में बिस्‍तर सामग्री (गद्दा, चादर, तकिया, कव्‍हर, कम्‍बल, मच्‍छरदानी, पंखे, ट्यूबलाईट इत्‍यादि) मेस सामग्री हेतु बर्तन, सफाई हेतु हार्पिक एवं फिनायल आदि भौतिक रूप से उपलब्‍ध है। (ग) अपलेखन कर नियमानुसार निराकरण किया गया।

 

श्री शंकरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, मेरा द्वारा आदिम जाति और अनुसूचित जनजाति छात्रावास में जो बालक-बालिकाएं रह रही हैं, उनकी सुविधाओं के संबंध में प्रश्न लगाया गया था. प्रश्न का उत्तर तो बहुत अच्छा-अच्छा आया है. प्रश्नांश क, ख, ग, का उत्तर सब ठीक है. परन्तु मैं जो विनती करना चाहता हूं कि मेरे यहां पर छात्रावासों के 20-20, 30-30 साल बने भवन हैं, उनके शौचालय नष्ट हो चुके हैं. अन्य प्रकार के कमरों में भी रिनोवेशन की आवश्यकता है.

अध्यक्ष महोदय - आपका प्रश्न क्या है?

श्री शंकरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न सिर्फ इतना है कि जो इन छात्रावासों की 20-20, 30-30 साल की बिल्डिंग हैं, उनको रिनोवेशन के लिए क्या मंत्री जी यहां से कोई विशेष टीम भेजकर उनका निरीक्षण करवा कर और कुछ बजट देंगे ताकि वहां पर शौचालय, पेयजल और कमरों की मरम्मत हो सके, वे ठीक ठाक हो सकें. साथ ही मेरी विनती है कि इन्होंने जो भोजन और नाश्ता देने की बात कही है.

अध्यक्ष महोदय - आप उत्तर तो आने दीजिए. एक टीम भेजकर जो वहां पर कमियां हैं उसकी जांच करा लेंगे क्या?

श्री ज्ञान सिंह - अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्य चाह रहे हैं, अवश्य एक टीम भेजकर जांच करा ली जाएगी.

श्री शंकरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से जो उत्तर आया है उसके लिए धन्यवाद करता हूं. लेकिन अभी मेरा एक प्रश्न है, मेरी एक विनती है कि इन बच्चों को जो अभी भोजन देते हैं, अभी मेरे यहां सतना में एक घटना हुई. जो आटा सप्लाई हुआ, उसकी रोटियां बच्चों के द्वारा खाई गई, उससे बच्चे अचानक बीमार पड़े. उसमें जांच हुई. दूसरा, इन छात्रावासों में असुरक्षा की बहुत स्थिति रहती है. तीसरा, मंत्री जी अगर कृपा कर दें क्योंकि इस विभाग में बजट भी है, इन बच्चों को कम से कम छात्रावास में आरओ वाटर मशीन देने की क्या कृपा करेंगे कि इनको पेयजल शुद्ध मिल जाय ताकि वे बीमारी से बच जाएं, और खेलकूद का सामान मिल जाय?                             

            श्री ज्ञान सिंह --  माननीय अध्यक्ष महोदय कन्या छात्रावासों में जहां पर बाउण्ड्रीवाल नहीं है वहां पर बाउण्ड्रीवाल बनाने की शासन की मंशा है. जैसा कि माननीय सदस्य की इच्छा है आरओ लगाने की वह भी हो जायेगी.

          श्री शंकरलाल तिवारी -- माननीय मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद . प्रदेश के आदिवासी छात्रावासों के लिए मंत्री जी ने कहा है कि वे आरओ लगवाकर शुद्ध पेयजल देंगे. मैं उनका हृदय से धन्यवाद करता हूं. मेरे यहां के भवन भी ठीक ठाक करा दिये जायें.

 

साँची दुग्‍ध संघ में वितरक नियुक्ति के नियम

9. ( *क्र. 6954 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यानसिंह सोलंकी : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) साँची दुग्‍ध वितरक नियुक्त करने के संबंध में शासन के नियम क्‍या हैं? साँची दुग्‍ध वितरक नियुक्त करने के संबंध में खरगोन जिले के कसरावद, सनावद में वितरक नियुक्‍त किसे किया गया है? नगर कसरावद एवं नगर सनावद में दुग्‍ध वितरक नियुक्‍त करने के संबंध में कितने आवेदन पत्र प्राप्‍त हुए हैं एवं कितने वितरकों की नियुक्ति किन प्रावधानों के तहत की गई है? (ख) नगर सनावद एवं नगर बड़वाहा में दुग्‍ध वितरक नियुक्त करने के संबंध में विगत 2 वर्ष में कितने आवेदन पत्र प्राप्‍त हुए हैं? प्रश्‍नकर्ता द्वारा नगर सनावद एवं बड़वाहा में दुग्‍ध वितरक नियुक्‍त करने के संबंध में मुख्‍य सचिव, भोपाल, प्रमुख सचिव पशुपालन भोपाल एवं मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी, इंदौर को पत्र जारी कर वितरक नियुक्त करने के संबंध में जारी किये गये पत्रों पर विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) क्‍या राज्‍य शासन के आदेशानुसार जनप्रतिनिधियों को उनके प्राप्‍त पत्रों के उत्‍तर दिये जाने के प्रावधान है? यदि कोई विभाग उत्‍तर नहीं देता है तो उसके विरूद्ध अनुशासनात्‍मक कार्यवाही के निर्देश हैं? (घ) यदि हाँ, तो मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी, साँची दुग्‍ध संघ, इंदौर के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई एवं नहीं की गई तो कब तक की जावेगी? (ड.) नगर बड़वाहा/सनावद में यदि जनसंख्‍या के अनुपात में वितरक नियुक्‍त करने के नियम है, तो फिर इससे छोटे-छोट शहरों में नियुक्ति किस आधार पर की गई है?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) वितरक नियुक्ति के संबंध में दुग्ध संघ स्तर पर समय-समय पर स्थानीय परिस्थिति‍यों तथा दूध एवं दूध उत्पादों के विक्रय की संभावनाओं के आधार पर प्रक्रिया निर्धारित की जाती है। कसरावद शहर में तीन वितरक नियुक्त किये गये हैं। 1. श्री राजेश महाजन 2. श्री सुखराम राठौर               3. श्री गौरीशंकर पाटीदार सनावद शहर में श्री राधोराम मंडलोई को नियुक्त किया गया है। नगर कसरावद में तीन आवेदन एवं नगर सनावद में एक आवेदन प्राप्त हुए थे। इस प्रकार कुल 04 वितरकों की नियुक्ति संघ के वितरक नियुक्ति शर्तों एवं अनुबंध की शर्तों के परिपालन अंतर्गत की गई है। (ख) कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। जी हाँ। माननीय विधायक श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी जी को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया, जो संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है। (ग) जी हाँ। प्रश्नांश (ख) में उल्लेखि‍त बिन्दुओं के संबंध में मान. विधायक श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी को अवगत कराया गया है।  (घ) प्रश्नांश '' के परिप्रेक्ष्य में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ड.) जनसंख्या के अनुपात में वितरक नियुक्त करने के संबंध में कोई नियम निर्धारित नहीं है। विपणन की संभावनाओं के दृष्टिगत वितरकों की नियुक्ति की जाती है।

परिशिष्ट - ''चार''

 

          श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी -- माननीय अध्यक्ष महोदय मेरा प्रश्न दुग्ध संघ से संबंधित है. जो अधिकारी गलत जानकारी दे रहे हैं वास्तव में उनके खिलाफ में कार्यवाही होना चाहिए. जब मैंने यह प्रश्न लगाया है उसके पहले मैंने देखा है कि दो लोगों को इसका लाभ दिया गया है. 21-1-2013 को एक वितरक का नाम दिया है उसके ही परिवार के दूसरे भाई को उसका आदेश कर दिया गया है और एजेन्सी दे दी गई है. मैं यह चाहता हूं कि हमारे शहर बड़वाह और सनावद 40 और 50 हजार की आबादी के गांव हैं. कसरावद नगर पंचायत में तीन वितरक हैं और यहां पर एक और दो वितरक अलग अलग बांट दिये गये हैं. अधिकारियों की मिलीभगत से वहां पर काम चल रहा है. मैं माननीय मंत्री जी से चाहता हूं कि उसकी जांच  करा लें और दूसरे वितरकों की नियुक्ति करेंगे क्या.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- माननीय अध्यक्ष महोदय मैं निवेदन करना चाहती हूं कि जनसंख्या के आधार पर वितरक की नियुक्ति नहीं होती है और जितना दूध इकट्ठा होता है उसके आधार पर वितरक की नियुक्ति होती है.

          श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी -- मेरा माननीय मंत्री जी से इतना ही कहना है कि वहां पर दूध की खपत ज्यादा है. बड़ी बड़ी दो वहां पर नगरपालिकाएं हैं बड़ी जनसंख्या वाले वह नगर हैं. मैं चाहता हूं कि एक ही वितरक वहां पर मनमाने तरीके से अधिकारियों के साथ में मिली भगत करके दूध की सप्लाई कर रहा है. आप वहां पर दूसरे वितरक को रोजगार देंगे क्या, और ऐसे अधिकारियों को वहां से हटाकर जांच कर कार्यवाही करेंगे.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- अध्यक्ष महोदय निश्चित रूप से ऐसी कोई शिकायत आयेगी तो हम जांच करायेंगे, जरूरत पड़ेगी तो हम वहां पर नया वितरक भी नियुक्त करेंगे.

          श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी -- अध्यक्ष महोदय मेरा इतना ही निवेदन है जैसा  कि आपने उत्तर ख में आपने जानकारी दी है कि हमें कोई आवेदन नहीं दिया गया है . मेरा कहना है कि आवेदन भी दिये गये हैं, जानकारी भी दी गई है. मैं तो यह चाहता हूं कि आप वितरक बढ़ाने में क्यों कटौती कर रहे हैं . वितरक क्यों नहीं बढ़ाना चाहते हैं. एक ही वितरक को अधिकारियों के द्वारा क्यों लाभ दिया जा रहा है. आप वहां पर जांच करवा लें, अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही करें और वितरक बढ़ा लें.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- अध्यक्ष महोदय मैं पहले ही निवेदन कर चुकी हूं कि शिकायत प्राप्त होगी हम जांच करा लेंगे...(अनेक माननीय सदस्य एक साथ खड़े होकर बोलने लगे)

          अध्यक्ष महदोय -- वह सीधा प्रश्न कर रहे हैं कि आवश्यकतानुसार और वितरक नियुक्त करेंगे क्या.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- अध्यक्ष महोदय माननीय सदस्य ने जो शिकायत की थी हमारे विभाग में एक एक का जवाब दे दिया है. कृपा करके उत्तर पुस्तिका में जो परिशिष्ट लगे हैं उसको देखने का कष्ट करें.

          अध्यक्ष महोदय -- माननीय सदस्य ने सीधा प्रश्न किया है कि अभी एक ही वितरक है. यदि आवश्यकता है तो क्या और वितरक नियुक्त करेंगे क्या.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- माननीय अध्यक्ष महोदय निश्चित रूप से वितरक नियुक्त करेंगे. यह सच है कि आज के समय में दुग्ध संघ में बहुत शिकायतें आ रही हैं. समाचार पत्रों में भी छप रहा है. मैं इसे स्वीकार करती हूं और मैं इस पूरे सिस्टम को ठीक करूंगी, चाहे वह विधायक जी के क्षेत्र का मामला हो या पूरे प्रदेश की बात हो.

 

         

 

मिनीकिट प्रदर्शन योजना का क्रियान्‍वयन

10. ( *क्र. 7461 ) श्रीमती इमरती देवी : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) मिनीकिट प्रदर्शन योजना प्रदेश में कब से संचालित है तथा योजना के अतंर्गत किस प्रकार के किसानों को लाभान्वित किया जाता है एवं उक्‍त योजना के अतंर्गत प्रश्‍न दिनांक तक कितने हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है? संख्‍यात्‍मक जानकारी देवें। (ख) वर्ष 2016-17 में उक्‍त योजना के अतंर्गत कितने हितग्राहियों को लाभान्वित किये जाने का लक्ष्‍य रखा गया है तथा राशि का बजट प्रावधान कराया गया है? यदि नहीं, तो क्‍यों? क्‍या शासन की मंशा इस छोटी सी महत्‍वपूर्ण योजना को बंद कर छोटे एवं गरीब किसानों को उनके लाभ से वंचित कर बड़े किसानों, व्‍यापारियों एवं उद्योगपतियों को ही बड़ी-बड़ी योजनाएं चलाकर लाभ पहुंचाने की है? (ग) क्‍या पूर्व में भी उक्‍त योजना को निरंतर चालू रखने के संबंध में किसान संघ, किसान आयोग एवं जनप्रतिनिधियों से पत्र प्राप्‍त हुए थे? यदि हाँ, तो उन पर विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? (घ) क्‍या इस योजना के अतंर्गत देशी सब्‍जी बीजों का वितरण किया जाता है? यदि हाँ, तो फिर क्‍या शासन की मंशा देशी सब्‍जी फसलों के लिए चलायी जा रही इस महत्‍वपूर्ण योजना को बंद कर देशी प्रजातियों को पूर्णत: विलुप्‍त करने की है? (ड.) क्‍या देशी प्रजातियों को विलुप्‍त होने से बचाने हेतु उक्‍त योजना को पुन: निरंतर चालू रखने हेतु एवं विगत वर्षों से आगामी वर्ष हेतु अधिक हितग्राहियों को लाभान्वित करने हेतु आश्‍वस्‍त करेंगी?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) मिनीकिट प्रदर्शन की योजना वर्ष 2011-12 से संचालित है। इस योजना के अन्तर्गत सभी वर्ग के पात्र कृषकों को लाभान्वित किया जाता है। प्रश्न दिनांक तक 19,34,750 हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया है। (ख) वर्ष 2016-17 में उक्त योजनान्तर्गत कोई लक्ष्य नहीं रखा गया है। फलस्वरूप नवीन लक्ष्य हेतु बजट प्रावधान नहीं है। जी नहीं। विभाग द्वारा संचालित अन्य योजनाओं में भी छोटे एवं गरीब कृषकों को लाभान्वित किया जा रहा है। (ग) जी हाँ। स्वीकृति प्राप्त कर उक्त योजना का क्रियान्वयन वर्ष 2015-16 में किया गया है। (घ) जी हाँ। जी नहीं। घरेलू बागवानी की आदर्श योजना (बाड़ी) में भी देशी बीजों का वितरण किया जाता है। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है। (ड.) उत्तरांश ’’’’ के सन्दर्भ में प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

 

          श्रीमती इमरती देवी -- माननीय अध्यक्ष महोदय मेरे प्रश्न का उत्तर घुमाफिराकर असत्य दिया गया है. मैं पूछना चाहती हूं कि जो मिनी किट छोटे छोटे किसानों को बीज की दी जाती थीं. क्या यह 2016-17 में किसानों को उपलब्ध करायेंगे.

            सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आई.ए.पी. भारत सरकार ने बंद कर दी है.

          श्रीमती इमरती देवी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपकी सरकार ने बताया है कि 4 साल में 19 लाख किसानों को इससे फायदा हुआ है और 2 साल में 7 लाख किसानों को फायदा हुआ है तो इसे बंद करने की कोई वजह ही नहीं है. अगर किसानों को देशी बीज का लाभ हो रहा है और देशी सब्‍जियां, देशी टमाटर, भिंडी आदि सब देशी मिल रहा है तो इसे विदेशी में क्‍यों ले जाना चाहते हैं.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तो भारत सरकार की योजना थी, मैं माननीय सदस्‍या से निवेदन करूंगी कि हम पूछेंगे और फिर आपको बताएंगे.

          श्रीमती इमरती देवी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भारत सरकार की जो योजना है वह तो है, राज्‍य सरकार की क्‍या योजना है आप यह भी तो बताएं.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम किसानों को मिनीकिट उपलब्‍ध कराते हैं इसलिए देशी बीज विलुप्‍त होने का कोई सवाल ही नहीं उठता.

          श्रीमती इमरती देवी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, देशी बीज देश में नहीं रहेगा और विदेशी चालू कर रहे हैं. यह देशी बीज की योजना है जिससे छोटे-छोटे किसानों को लाभ होता है उसे बंद करने से क्‍या फायदा.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आ गया आपका उत्‍तर, यह कोई बहस का विषय नहीं है. आपकी बात रिकार्ड में आ गई है.

          श्रीमती इमरती देवी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या केन्‍द्र सरकार को प्रदेश के किसानों की चिंता नहीं है. यदि है तो योजना क्‍यों बंद कर दी गई.

          अध्‍यक्ष महोदय -- अब वह प्रश्‍न समाप्‍त हो गया है, सुश्री हिना कांवरे अपना प्रश्‍न करें.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि किसानों की चिंता नहीं होती तो चौथी बार कृषि कर्मण पुरस्‍कार नहीं मिलता. आपकी शिक्षा की जरूरत नहीं है.

          श्रीमती इमरती देवी -- आप कुछ भी करके लेते रहें, पहले क्षेत्र में जाकर देखो कि किसान कितना परेशान है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाएं. कृपया उनका प्रश्‍न हो जाने दें.

छपारा विकासखण्‍ड में फूड प्रोसेसिंग यूनिट की स्‍थापना

11. ( *क्र. 4322 ) श्री रजनीश सिंह : क्या पशुपालन मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सिवनी जिले में कितने फूड प्रोसेसिंग यूनिट हैं? ये कहाँ-कहाँ, कौन-कौन से ग्राम में स्थित हैं? इनमें कितने कर्मचारी/अधिकारी कार्यरत हैं? कृपया सूची प्रदान करें। यदि नहीं, तो क्‍यों? (ख) क्‍या छपारा विकासखण्‍ड में सीताफलों के अधिक उत्‍पादन को देखते हुये यहां फूड प्रोसेसिंग यूनिट खोले जाने हेतु कोई प्रस्‍ताव विभाग के पास लंबित है? यदि हाँ, तो इस पर कब तक कार्य शुरू होकर पूर्ण हो जायेगा और नहीं तो क्‍यों?

पशुपालन मंत्री ( सुश्री कुसुम सिंह महदेले ) : (क) कुल 161 फूड प्रोसेसिंग इकाईयां उद्योग विभाग में पंजीकृत हैं। महाप्रबंधक जिला व्यापार उद्योग केन्द्र सिवनी द्वारा इकाईवार दी गई सूची जिसमें इकाई का पता आदि का उल्लेख है, जिनमें कुल 496 व्याक्तियों का रोजगार सृजित है, की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। सहायक संचालक उद्यान जिला सिवनी द्वारा आई.ए.पी. योजनान्तर्गत कार्य योजना प्रस्ताव जिला प्रशासन (जिला पंचायत) सिवनी को प्रस्तुत किया गया है। शासन द्वारा खाद्य प्रसंस्करण इकाई स्वयं संचालित करने की कोई योजना नहीं होने से समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

          सुश्री हिना कांवरे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह पूछना चाहती हूँ कि सीताफल एक ऐसा फल है जिसमें शुगर, कार्बोहाइड्रेट्स, विटामीन-सी, कैल्‍शियम तथा फॉस्‍फोरस बहुतायत में पाया जाता है. क्‍या आपका विभाग सिवनी छपारा क्षेत्र में सीताफल की बहुतायत में उपलब्‍धता तथा इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्‍वों के उपयोग हेतु प्रोसेसिंग प्‍लांट लगाने के लिए प्रस्‍ताव बनाकर उद्योग विभाग को भेजेगा.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि हितग्राही, व्‍यवसायी अथवा किसान इस प्रकार की मांग करेंगे तो निश्‍चित रूप से हम इस पर विचार करेंगे और माननीय सदस्‍या को मैं सुझाव देना चाहती हूँ कि आईस्‍क्रीम की एक फैक्‍ट्री वहां पर खोल लें, सीताफल का गूदा उसमें काम आता है, निश्‍चित रूप से हमारी सरकार मदद करेगी, सब्‍सिडी देगी.

          श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वैसे मैं इंटरप्‍ट नहीं करना चाहता, आपने अभी कहा कि आई.ए.पी. योजना बंद कर दी और इस प्रश्‍न में आप कह रही हैं कि आई.ए.पी. योजना के अंतर्गत प्रस्‍ताव जिला प्रशासन को भेजा गया है. जब योजना ही बंद कर दी, योजना संचालित ही नहीं है तो फिर यह कौन सा जवाब है.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सीताफल की बात पूछी हमने सीताफल का जवाब दिया. आप अलग से पूछ लें, हम जवाब दे देंगे, ऐसी क्‍या बात है.

          कुंवर विक्रम शाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अब तो सीताफल की फैक्‍ट्री खुलने के बाद ही बात होगी.

          श्री गोपाल भार्गव -- आई.ए.पी. की राशि अभी कई जिलों में रुकी हुई है.

          श्री रामनिवास रावत -- धन्‍यवाद, बंद कर दी.

          सुश्री हिना कांवरे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो जवाब दिया है, मेरा प्रश्‍न ही यही है कि क्‍या प्रोसेसिंग प्‍लांट लगाने के लिए प्रस्‍ताव बनाकर आपका विभाग उद्योग विभाग को भेजेगा.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि किसान, हितग्राही अथवा व्‍यवसायी इस प्रकार की मांग करते हैं तो हम निश्‍चित रूप से इस पर विचार करेंगे. हमारे संवेदनशील माननीय मुख्‍यमंत्री जी का तो कहना है कि हर ब्‍लॉक में, हर विकासखण्‍ड में हम खाद्य प्रसंस्‍करण के केन्‍द्र खोलेंगे और आपके क्षेत्र में यदि कोई ऐसे प्रस्‍ताव हैं तो हम उनका स्‍वागत करते हैं.

          सुश्री हिना कांवरे -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इसमें एक प्रश्‍न और है कि सीताफल एक ऐसा फल है जिसकी मार्केटिंग की दिक्‍कत नहीं है किंतु यह फल 24 घंटे से ज्‍यादा प्राकृतिक रूप में सुरक्षित नहीं रखा जा सकता, क्‍या विभाग ऐसा कोई रिसर्च करवाएगा जिससे इस फल को मूल रूप में भण्‍डारण करके पूरे साल मार्केट में उपलब्‍ध कराया जा सके.

          सुश्री कुसुम सिंह महदेले -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे विभाग की योजना है कि कोल्‍ड चैन बनाई जाए लेकिन विभाग इसको खुद नहीं बनाता, यदि हितग्राही सामने आएंगे, व्‍यवसायी सामने आएंगे तो हम निश्‍चित रूप से सब्‍सिडी देंगे और मदद करेंगे.   

          सुश्री हिना कांवर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

            अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

 

 

( प्रश्‍नकाल समाप्‍त )

         

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.00 बजे                                कार्यमंत्रणा समिति का प्रतिवेदन 

 

12.01 बजे                                  स्वागत उल्लेख 

                       अध्यक्षीय दीर्घा में उपस्थित सांसद श्री गणेशसिंह का स्वागत उल्लेख

          संसदीय कार्यमंत्री(डॉ. नरोत्तम मिश्र)-- अध्यक्ष जी, हमारे सांसद श्री गणेशसिंह जी अध्यक्षीय-दीर्घा में उपस्थित हैं,सदन उनका स्वागत करता है.

          अध्यक्ष महोदय--  मैं सदन की ओर से सांसद श्री गणेशसिंह जी का स्वागत करता हूँ.

 

12.02 बजे                         नियम 267-क के अधीन विषय 

                             (1) टीकमगढ़ में सड़क यातायात व्यवस्थित किया जाना

                   श्री के.के.श्रीवास्तव(टीकमगढ़)--  अध्यक्ष महोदय,

         

 

          (2) श्री राजेन्द्र फूलचंद वर्मा--(अनुपस्थित)

         

 

 

 

 

 

 

 

 

(3) इछावर के ग्राम ब्रिजिशनगर के हायर सेकेण्ड्री स्कूल की हालत जर्जर होना

          श्री शैलेन्द्र पटेल (इछावर--अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

(4) श्री घनश्याम पिरौनिया--(अनुपस्थित)

         

           

            (5) रीवा जिले मऊगंज में सूखा राहत राशि बंटवारे में अनियमितता होना

           श्री सुखेन्द्र सिंह(मऊगंज)-- अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

         

 

 

 

             (6) चम्बल संभाग में संयुक्त संचालक का पद एवं कार्यालय स्वीकृत किया जाना 

          श्री रामनिवास रावत(विजयपुर)-- अध्यक्ष महोदय,

 

 

7. सिवनी जिले में जलसंकट और सूखाग्रस्त होने से उत्पन्न समस्या

 

          श्री दिनेश राय (सिवनी)--- माननीय अध्यक्ष महोदय, सिवनी जिला तथा मेरी विधानसभा का अधिकतर क्षेत्र पहाड़ी क्षेत्र में फैला हुआ है. आदिवासी बहुल क्षेत्र है. अधिकतर क्षेत्र  जलसंकट के कारण सूखाग्रस्त है. अधिकतर किसान बरसात के पानी पर निर्भर रहकर कृषि करते हैं, जिससे वे वर्ष में सिर्फ एक फसल ही पैदा कर पाते हैं. इस क्षेत्र में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना , अटलज्योति, योजनांतर्गत विद्युतीकरण कार्य प्राथमिकता के आधार पर कराए जाए तथा इन योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर लाभान्वित किया जाए तो क्षेत्रवासी पेयजल संकट व सूखा से उबरकर अपनी निर्धनता में सुधार ला सकते हैं.

 

 

 

8. श्योपुर जिला विधानसभा अंतर्गत मुख्य जिला मार्ग की हालत जर्जर होना

                   श्री दुर्गालाल विजय (श्योपुर)--  माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

9. इंदौर सहित पूरे मध्यप्रदेश में छोटे स्टाम्पों की किल्लत

श्री  सुदर्शन गुप्ता आर्य(इन्दौर 1)---  माननीय अध्यक्ष महोदय,इन्दौर सहित पूरे मध्यप्रदेश में छोटे स्टाम्पों की किल्लत बनी हुई है. छोटे स्टाम्प 50 रुपये, 100 रुपये, 500 रुपये  व 1000 रुपयों के स्टाम्प की आवश्यकता विक्रय अनुबंध, किरायेदारी अनुबंध, विद्युत मंडल से विद्युत कनेक्शन लेने पर तथा पॉवर ऑफ अटार्नी आदि में आवश्यकता पड़ती है किन्तु स्टाम्प उपलब्धता नहीं होने के कारण नागरिक व स्टाम्प वेंडर बेहद परेशान हो रहे हैं. छोटे स्टाम्पों की कमी से एक ओर नागरिक परेशान हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर इन स्टाम्पों से होने वाली आय भी प्रदेश सरकार को नहीं मिल पा रही है. प्रदेश सरकार इस ओर शीघ्र ध्यान देवें.

 

 

 

10. छतरपुर के सटई नगर स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के नवीन भवन का निर्माण किया जाना

                   श्री पुष्पेन्द्र नाथ पाठक (बिजावर)----  माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 12.10 बजे                          शून्यकाल में उल्लेख.

 (1)    उप नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्चन)(राजपुर)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश में भीषण पेयजल संकट है और मवेशी के लिए भी पानी पीने की समस्या है तो हमने इसमें नियम 139 के अंतर्गत चर्चा की मांग की है, ध्यानाकर्षण भी हमने और हमारे विधायक साथियों ने जो दिए हैं, मेरा आप से यह आग्रह है कि इस भीषण पेयजल संकट से किस तरह से निपटा जाए, हाउस में इस पर चर्चा होना चाहिए, शासन का इस पर जवाब आना चाहिए और इस संकट से हमें तथा प्रदेश की जनता को किस तरह से इससे निजात मिल सके. इस पर चर्चा होना चाहिए. यह मेरा आप से आग्रह है और पहले इस संदर्भ में चर्चा भी हुई है. मैं समझता हूँ कि आप सरकार से इस पर चर्चा कराने के लिए व्यवस्था दें.

          श्री रामनिवास रावत(विजयपुर)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, इनके निवेदन पर कुछ निर्देश तो दे दें.

          अध्यक्ष महोदय--  निर्देश कुछ नहीं देंगे. आप तो बोल लीजिए.

          श्री रामनिवास रावत--  आपने आश्वस्त किया था.

          अध्यक्ष महोदय--  यह परंपरा नहीं है.

          श्री रामनिवास रावत--  ध्यानाकर्षण भी लगा था, आश्वस्त भी किया था.

          अध्यक्ष महोदय--  यह परंपरा नहीं है.

          श्री रामनिवास रावत--  मानता हूँ.

          अध्यक्ष महोदय--  आप बहुत वरिष्ठ सदस्य हैं. मंत्री भी रह चुके हैं.

          श्री रामनिवास रावत--  मैंने इसीलिए आपको प्रेस नहीं किया कि ध्यानाकर्षण और 139 की चर्चा कराएँगे और यह सरकार भी सहमत थी. केवल आप ही नहीं, सरकार भी सहमत थी और ऐसा विषय भी नहीं है. मंत्री भी आ चुकी हैं और पूरी सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है. अगर चर्चा हो जाएगी तो आज प्रासंगिक है.

          अध्यक्ष महोदय--  आपका विषय आ गया.

          श्री रामनिवास रावत--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा विषय तो दूसरा था. यह तो महत्वपूर्ण विषय है ही इन्होंने उठा दिया.

          अध्यक्ष महोदय--  तो आप सपोर्टिंग डाक्यूमेंट्स लगाते हों उनके साथ में? आप अपना विषय बोलें.

(2)     श्री रामनिवास रावत--  पूरे प्रदेश का मामला है. माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी चले गए, बार-बार इंट्रप्ट करते हैं. मध्यप्रदेश के पेंच टायगर रिजर्व में पिछले एक वर्ष में नौ शेरों की जान चली गई है. प्रदेश को "टायगर स्टेट" के नाम से जाना जाता है और प्रदेश की सरकार किस तरह से उदासीन है. टायगर्स की रक्षा नहीं कर पा रही है. अभी 28 तारीख को एक बाघिन और दो शावक मरे मिले हैं. किस तरह से लोग शिकार कर रहे हैं और प्रदेश की पहचान समाप्त होती जा रही है और इस विषय का संबंध कूनो टायगर रिजर्व से भी है, कूनो सेंचुरी से भी है. जब वर्तमान प्रधानमंत्री उस समय गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो गिर के शेर लाने के लिए जब बात आई थी तो उन्होंने एफिडेविट दिया था कि मध्यप्रदेश की सरकार शेरों को सुरक्षित नहीं कर पा रही तो हमारे गिर के शेरों को कैसे सुरक्षित रखेगी. यह प्रदेश की बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है.  मैंने ध्यानाकर्षण लगाया.

          अध्यक्ष महोदय--  ठीक है. आपकी बात आ गई.

          श्री रामनिवास रावत--  बात तो आ गई लेकिन मैंने ध्यानाकर्षण लगाया है.

          अध्यक्ष महोदय--  ठीक है,  वह बात भी आ गई.

          श्री रामनिवास रावत--  अध्यक्ष महोदय, प्रदेश की पहचान का सवाल है.

(3)     श्री आरिफ अकील(भोपाल-उत्तर)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से अनुरोध है कि मध्यप्रदेश से और हिन्दुस्तान से हर साल हज यात्री हज पर जाते हैं. लेकिन दिन पर दिन उसका कोटा कम होता जा रहा है. पूर्व में जब केन्द्र में और प्रदेश में काँग्रेस की सरकार थी तो जितने मध्यप्रदेश में आवेदन आते थे उन सबको हज के लिए भेजते थे. आज प्रदेश में और देश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है. मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से और आप से अनुरोध करना चाहता हूँ कि ऐसी व्यवस्था करिए कि जितने लोगों ने हज के लिए आवेदन दिया है उन सबको भेजने के लिए कोटा मिले. ऐसी कोई व्यवस्था हो.

(4)     श्री मुकेश नायक(पवई)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, आपको याद होगा कि उच्च शिक्षा की अनुदान मांगों पर मैंने एक बहुत गंभीर विषय की तरफ ध्यानाकर्षित किया था. मध्यप्रदेश में 15 हजार विद्यार्थी, डी एड का जिन्होंने आईसेक्ट यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था, उनसे ढाई हजार रुपये के आसपास फीस ले ली और 4 साल हो गए उनकी परीक्षाएँ आयोजित नहीं की जा रही हैं.  डी बी भास्कर (अखबार दिखाते हुए) ने डिटेल में यह समाचार छापा है. यह कितना गंभीर है. इस विषय को लेकर मैंने माननीय मंत्री जी पर आरोप भी लगाया था. लेकिन उन्होंने उत्तर देने के बजाय या इस समस्या का निराकरण करने के बजाय इस समस्या से भागना उचित समझा और मध्यप्रदेश में 15 हजार बच्चे हैं. 4 साल से भटक रहे हैं और यह परीक्षा आयोजित नहीं की जा रही है. मध्यप्रदेश के 15 हजार बच्चे ढाई सौ करोड़ रुपये फीस वसूलने के बाद..(व्यवधान)..

          अध्यक्ष महोदय--  (अनेक माननीय सदस्यों के एक साथ खड़े होने पर) यदि आप इस तरह से करेंगे तो यह सब व्यवस्थाएँ खराब हो जाएँगी. अब सिर्फ तीन लोग बोलेंगे श्री नीलेश अवस्थी, श्री दिनेश राय मुनमुन एवं श्री सुन्दरलाल तिवारी.

(5)     श्री नीलेश अवस्थी(पाटन)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारी पाटन-मझौली विधान सभा में भीषण पेयजल संकट है. कई ऐसे गाँव हैं जहाँ पर नल पूरे खराब पड़े हुए हैं. नलजल योजना पूरी ठप्प पड़ी हुई है. पाईप नहीं मिल रहे हैं. किसानों को अपने मवेशियों को पानी पिलाने में भीषण दिक्कत आ रही है. नहरें बंद पड़ी हुई हैं. नदियों में पानी नहीं है. हमारे पूरे विधान सभा क्षेत्र में पेयजल का भयंकर संकट है. अध्यक्ष महोदय, आप से निवेदन है कि इसको सुलझाया जाए.

 

            श्री दिनेश राय (सिवनी)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, पेंच टाइगर रिजर्व पर मुझे बोलना था लेकिन रावत जी ने उस पर बोल दिया है उसमें एक लाईन कहना चाहता हूँ. मेरे प्रश्न संख्या 38 के उत्तर में बताया गया था कि एक भी शेर की मृत्यु नहीं हुई है जबकि 9 माह में 7 शेरों की मृत्यु हुई है अभी भी दो शावक गायब हैं एक कॉलर लगी हुई बाघिन गायब है. 10 जानवरों की 9 माह में मृत्यु हुई है.

          अध्यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र में घनसुर में बरेला प्लांट लगा हुआ है वहां पर कलेक्टर के नियम और राजपत्र में प्रकाशित होने के आधार पर यह तय हुआ है कि कोयला उनके मार्ग से ही ले जाया जायेगा. प्रतिदिन 400 ट्रक वहां से कोयला ले जाया जा रहा है जिससे आसपास के क्षेत्र की पूरी सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं उसमें यह शर्त थी कि पॉवर प्लांट कंपनी पहले सड़क का निर्माण करेगी उसके बाद ही कोयला वहां से ले जाया जायेगा. मेरा निवेदन है कि उस पर कार्यवाही करें.

 

 

(डॉ. रामकिशोर दोगने, सदस्य द्वारा अधोवस्त्र अवस्था में नारेबाजी करते हुए सदन में आगमन)

 

        अध्यक्ष महोदय--कृपया आप बैठ जाये.

          संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मीडिया में आने के लिए किस तरह के सहारे लिए जाते हैं मैं तो समझ ही नहीं पाया इस बात को कि क्या-क्या करना पड़ता है.

          डॉ. रामकिशोर दोगने--मंत्री महोदय, जाकर लोगों की स्थिति देखो यहां एसी में बैठकर समस्या का समाधान नहीं होता है. वहां जाकर देखो.

          डॉ. नरोत्तम मिश्र--यदि कोई स्थिति है तो यहां पर अपनी बात रखो यह फ्लोर बात करने के लिए है, यहां ध्यानाकर्षण लगाओ, यहां प्रश्न लगाओ, यहां चर्चा करो. क्या-क्या करते हो.

          डॉ. रामकिशोर दोगने--यहां बात रखेंगे तब तक सब काम ही खत्म हो जायेगा. (व्यवधान)

          श्री यशपाल सिंह सिसोदिया--अब यही देखना बाकी रह गया है क्या ? (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय--कृपया अपनी बात कह लें इसके बाद ध्यानाकर्षण की सूचना लूंगा. (व्यवधान)

          श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, बात रखने का मौका दिया जाये. (व्यवधान)

          श्री यशपाल सिंह सिसोदिया--माननीय अध्यक्ष जी सदन में अब यही देखना बाकी रह गया है क्या ? (व्यवधान) सदन शर्मशार हो रहा है..(व्यवधान)

          डॉ. नरोत्तम मिश्र--माननीय अध्यक्ष जी, डंडा लेकर अंदर आ गये, कभी कमण्डल लेकर अंदर आ जायें, कभी झींझा लेकर आ जायें, झांझर लेकर आ जायें कुछ तो मर्यादा होना चाहिये इस सदन की..(व्यवधान)

          श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह क्या तरीका है, आप बताओगे (व्यवधान)

          डॉ. नरोत्तम मिश्र--जनता बता रही है आपको हम क्यों बतायेंगे (व्यवधान) आपको हर बार जनता बता रही है (व्यवधान)

          श्री रामनिवास रावत--जनता आपको भी जवाब दे देगी (व्यवधान)

          श्री सुन्दरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, यह मर्यादाओं की बात कर रहे हैं (व्यवधान)

          खाद्य मंत्री (कुंवर विजय शाह)-- अध्यक्ष महोदय, 6 फिट से ज्यादा की लाठी लेकर इस सदन में आना सदन का अपमान है लाठी लेकर क्या चमकाना चाहते हो आप.(व्यवधान) ऐसे जनता की सेवा करोगे आप..(व्यवधान) 6 फिट से ऊपर की लाठी लेकर आये हैं यह (व्यवधान)

            अध्यक्ष महोदय--खाली हाथ हैं (व्यवधान)

          श्री रामनिवास रावत--लाठी कहां है ? (व्यवधान)

          कुंवर विजय शाह-- वहां पर रखी हुई है (व्यवधान)

          श्री रामनिवास रावत--लाठी कहां है आप जबरदस्ती आरोप लगा रहे हो (व्यवधान)

          श्री रणजीत सिंह गुणवान--अरे मुकेश बाबू क्या खिलवाड़ कर रहे हो विधान सभा में (व्यवधान)

          श्री के.के. श्रीवास्तव--(XXX)(व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय--अब मैं ध्यानाकर्षण लूंगा (व्यवधान)

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)-- अध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है. मध्यप्रदेश विधान सभा की शालीनता और इसका महत्व, इसका इतिहास देश में जाना जाता है. यह अर्धनग्न होकर आ गये महिला सदस्य बैठी हुई हैं, दर्शक दीर्घा में बैठी हैं इस प्रकार से यह असभ्य प्रदर्शन कर रहे हैं यह असभ्य प्रदर्शन कतई जायज नहीं कहा जा सकता है..(व्यवधान)

          डॉ. गोविन्द सिंह--पंडित रामलखन शर्मा ने ..(व्यवधान) हो गये थे तो क्या हो गया..(व्यवधान)

          श्री गोपाल भार्गव--यह महिलायें बैठी हैं महिलाओं के सामने, दर्शक दीर्घा में महिलायें बैठी हैं, यहां महिलायें बैठी हैं इस तरह से अध्यक्ष महोदय (व्यवधान)

          डॉ. गोविन्द सिंह--रामलखन शर्मा जी ने भी वस्त्र त्यागे थे (व्यवधान) जब आपको दिखाई नहीं दिया (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय--माननीय सदस्य बैठ जायें (व्यवधान) मंत्रीजी बैठ जायें, माननीय सदस्य बैठ जायें (व्यवधान)

          श्री गोपाल भार्गव--अधिकारी दीर्घा में महिलायें बैठी हैं (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय--आपकी बात आ गई..(व्यवधान)

          श्री रणजीत सिंह गुणवान--यह अर्धनग्न होकर आ गये विधान सभा की क्या व्यवस्था है (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय--मैं उस पर अपनी बात कहूंगा (व्यवधान) श्री रामनिवास रावत कुछ कह रहे हैं (व्यवधान)

          श्री विश्वास सारंग--अध्यक्ष महोदय, महिलाओं ने आंखें बंद कर ली हैं (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय--आपकी पूरी बात आ गई है (व्यवधान)

          श्री रणजीत सिंह गुणवान--(XXX)(व्यवधान) यह क्या अच्छा लग रहा है (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय--मंत्रीजी को एलाउ किया है इसके बाद आप (व्यवधान)

          श्री विश्वास सारंग--इन्हें सबसे पहले बाहर निकालिये (व्यवधान) बाहर निकालिये, बाहर निकालो (व्यवधान)

          एक माननीय सदस्य--अत्याचार बंद कर दो तो ऐसी परिस्थितियां नहीं बनेंगी (व्यवधान)

          श्री विश्वास सारंग--विधान सभा की परम्पराओं को तार-तार कर दिया (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय--आप आधे मिनट में अपनी बात समाप्त कर दें (व्यवधान) इसके बाद आप बोलेंगे. डॉ. दोगने जी बैठ जायें (व्यवधान)

          एक माननीय सदस्य--सिंहस्थ में नागा साधु आ गये तो सिंहस्थ बंद कर दो (व्यवधान)

          श्री रणजीत सिंह गुणवान--ऐसे सीन तो मत दिखाओ जिसको पूरा मध्यप्रदेश देखता है (व्यवधान) ऐसे ऐसे सीन दिखा रहे हो आप (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय--गुणवान जी बैठ जाइये आप. (व्यवधान) हर्ष यादव जी बैठिये (व्यवधान)

          श्री विश्वास सारंग--महिलाओं ने आंखें बंद कर ली हैं (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री गोपाल भार्गव जी बोल रहे हैं उनको बोलने दें मैंने उनको एलाउ किया है. (व्यवधान) उसके बाद रामनिवास रावत जी.

            श्री गोपाल भार्गव :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी महिला सदस्‍य यहां पर बैठी हैं.   

          अध्‍यक्ष महोदय :- आपकी बात आ गयी है.

          श्री गोपाल भार्गव :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी महिला सदस्‍य यहां पर बैठी हैं तो क्‍या यह शोभाजनक है. यहां पर सारे सदस्‍य इसी तरह आने लगेंगे तो क्‍या उचित होगा.      

(व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय :- इस पर मैं अपनी व्‍यवस्‍था दूंगा. रावत जी आप बोलिये.

          श्री रामनिवास रावत :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री श्री गोपाल भार्गव जी ने व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न उठाया है. इससे पहले भी जनता के हित में, जनता की मांग को मनवाने के लिये पूर्व में पूरे पांच वर्ष श्री रामलखन शर्मा जी ने, जो सम्‍माननीय विधायक हुआ करते थे. उन्‍होंने पूरे शरीर के वस्‍त्र त्‍यागकर विधान सभा में पूरे पांच वर्ष तक रहे थे. हम महिलाओं और बहनों का सम्‍मान करते हैं. उनकी इज्‍जत करना हम जानते हैं, हम महिलाओं का सम्‍मान पूरी तरह से करते हैं. इस तरह का आरोप लगाना ठीक नहीं है.       

          अध्‍यक्ष महोदय :- आप लोग मेरी बात सुन लीजिये, यह कोई बहस का विषय नहीं है.

(व्‍यवधान)

          डॉ. गोविन्‍द सिंह :- अध्‍यक्ष महोदय, महात्‍मा गांधी जी ने देश के लोगों के लिये कपड़े त्‍याग दिये थे. श्री रामलखन शर्मा जी ने पानी के ऊपर अपने कपड़े त्‍याग दिये थे. दोगने जी किसानों की समस्‍या के लिये कपड़े त्‍याग रहे हैं.

          (व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय :- विश्‍वास सारंग जी आप अपनी बात कहिये. (व्‍यवधान) गुणवान जी आप बैठ जाईये.

          श्री सुन्‍दर लाल तिवारी :- अध्‍यक्ष महोदय, आपके पीछे गांधी जी की फोटो है. आप देखिये.

गर्भगृह में प्रवेश एवं वापसी

 

(श्री सुन्‍दरलाल तिवारी, इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍य गर्भ गृह में आये और महात्‍मा गांधी जी की फोटो की तरफ हाथ से इशारा करते हुए अपनी बात कहने लगे और वापस अपनी सीट पर चले गये.)

(व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय :- तिवारी जी आप बैठ जाईये. आप लोग बैठ जाईये. विश्‍वास सारंग जी कुछ बोल रहे हैं. (व्‍यवधान)

          श्री रामनिवास रावत :- गांधी जी ने कभी वस्‍त्र नहीं पहने. (XXX). (व्‍यवधान)

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, (XXX).

          श्रीमती ऊषा चौधरी :- अध्‍यक्ष महोदय, सिंहस्‍थ मेले का जो आयोजन किया गया है, उसमें साधु संत आयेंगे तो वहां पर महिलाओं को जाना मना है.

          अध्‍यक्ष महोदय :- आप सब लोग बैठ जाईये. आप मेरी बात सुन लीजिये. तिवारी जी आप बैठ जायें. आप लोग बैठ जायें  (व्‍यवधान) अभी किसी की बात नहीं सुनी जायेगी. आप लोग कृपा करके बैठ जायें.

          माननीय डॉक्‍टर रामकिशोर दोगने जी किसी समस्‍या से पीडि़त होकर आयें हैं. किन्‍तु माननीय मंत्री जी ने जो विषय उठाया है, इससे मैं सहमत हूं. यह सदन बहस के लिये है. प्रदर्शन के लिये नहीं है. यहां मर्यादा में ही आना चाहिये, यह मेरा दृढ़ विश्‍वास है. श्री रामनिवास रावत जी ने जो कुछ कहा और पहले जो कुछ हुआ. पहले जो हुआ वह कोई पूर्व उदाहरण नहीं माना चाहिये और आदरणीय तिवारी जी से मेरा अनुरोध है कि इस विषय पर आप महात्‍मा गांधी जी को बीच में नहीं लाईये. आप कुछ तो मेहरबानी करिये. आप यहां पर तो कम से कम राजनीति मत करिये. अब आप बैठ जाईये. सदन की कुछ मर्यादाएं होना चाहिये. यहां पर बहस के लिये आते हैं. यहां पर चर्चा के लिये आते हैं, आप यहां पर जनता की आवाज उठाने के लिये, जबान से आते हैं, शरीर से नहीं. इसलिये यह बिल्‍कुल नहीं होना चाहिये, मेरा माननीय सदस्‍य से भी अनुरोध है कि आप कृपया मर्यादा में आयें.

………………………………………………………

XXX :  आदेशानुसार रिकार्ड  नहीं किया गया.

 

          श्री रामनिवास रावत :-माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जबान शरीर में होती है,किसी भी काम  के लिये संकल्‍प लेना यह कतई गलत नहीं है.

          अध्‍यक्ष महोदय :- उन्‍होंने संकल्‍प नहीं लिया है.

(व्‍यवधान)

          डॉ गोविन्‍द सिंह :- अध्‍यक्ष महोदय, हमने समाचार पत्रों में पढ़ा है कि आपने माननीय सदस्‍य को चर्चा के लिये बुलाया है. (व्‍यवधान)

          श्री रामनिवास रावत :- हम संकल्‍प लेते हैं, कभी हम जूते छोड़ते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय :- श्री यशपाल सिंह सिसोदिया आप अपना ध्‍यानाकर्षय पढि़ये.

(व्‍यवधान)

          श्री रामनिवास रावत:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप उनकी बात तो सुन लीजिये.

          अध्‍यक्ष महोदय :- सदन की कार्यवाही 10 मिनिट के लिये स्‍थगित.

 

(सदन की कार्यवाही 12.25 बजे से 12.45 तक का अंतराल)

         

         

(12.45बजे)              अध्यक्ष महोदय(डॉ.सीतासरन शर्मा)पीठासीन हुए.

                (..व्यवधान..)

          अध्यक्ष महोदय - सिर्फ ध्यानाकर्षण सूचना लिखी जायेगी और कुछ नहीं लिखा जायेगा.

 

 

 

 

 

 

 

 

                                                            ध्यान आकर्षण

(1)     प्रदेश के शासकीय चिकित्सालयों में शवों का पोस्टमार्टम रात में न किये जाने

                                         से उत्पन्न स्थिति

          श्री यशपालसिंह सिसोदिया(मंदसौर) - अध्यक्ष महोदय,

लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्र) – अध्यक्ष महोदय,

          श्री यशपालसिंह सिसोदिया - माननीय अध्यक्ष महोदय, संवेदनाओं से जुड़ा हुआ मेरा यह ध्यानाकर्षण है. एक समय था जब पोस्टमार्टम कक्षों में व्यवस्थाओं का अभाव हुआ करता था. आज सारी व्यवस्थाएं सुनिश्चित हो गई हैं. मेरा 28 मार्च,2016 को इसी विषय पर तीन दिन पहले तारांकित प्रश्न भी था. जो जवाब माननीय मंत्री जी ने यहां पढ़कर सुनाया है वह मेरे तारांकित प्रश्न के जवाब में भी आया और अभी जो सरकार की तरफ से जो यह जानकारी आई उसमें भी आया है. मेडिकोलीगल सलाहकार समिति ने ब्यूरो आफ पुलिस रिसर्च एण्ड डेव्लहपमेंट की फारेंसिक मेडिसिंस की स्टैंडिंग कमेटी में अभिमत दिया है. यह कोई आदेश नहीं है. यह कोई मील का पत्थर नहीं कि जो कह दिया तो कर दिया. यह मात्र अनुशंसा है कितना माना जाना चाहिये कितना नहीं माना जाना चाहिये. यह अलग विषय है. यह कब का है यह अभी अज्ञात है. यह वर्षों पुरानी अनुशंसा है जिसके बारे में सदन को जानकारी माननीय मंत्री जी के द्वारा दी गई है. वर्तमान समय में फोर लेन और टू लेन सड़क मार्गों पर नियमित रूप से दुर्घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. पोस्टमार्टम कक्ष पर, या यूं कहें मृतक जब अस्पताल में आता है परिजनों के साथ  पांच बजे और साढ़े पांच बजे भी जब मृतक का शव आ जाता है तब उसकी प्रक्रियाओं में पुलिस की रिपोर्ट,पुलिस का पंचनामा,चिकित्सक को बुलाना,चिकित्सा की टीम को खड़ी करना इस बीच में लगभग छह-साढ़े छह बज जाते हैं अस्पताल परिसर के अन्दर पोस्टमार्टम कक्ष तक जब बाडी जाती है तब तक साढ़े छह बज जाते हैं.तब जाकर के यह कह दिया जाता है कि अब पोस्ट-मार्टम नहीं होगा सूर्यास्त हो गया है. आज चिमनी का मेट्रोमेक्स का अथवा लालटेन का जमाना नहीं है. आज सोर ऊर्जा से लाईट चल रही है प्रदेश में 24 घंटे लाईट है तथा जनरेटर-इनवर्टर है इन सबके अंतर्गत जहां एक ओर जीवित व्यक्ति के 24 घंटे अस्पतालों में ऑपरेशन हो रहे हैं जब ऑपरेशन थिएटर 24 घंटे चल सकता है तो एक मृतक का शव परीक्षण करने में आखिर कहां दिक्कत आ रही है. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह भी जानता हूं कि ठीक है कि ऐसे अप्रसंग आते हैं जो पैनल के माध्यम से पोस्ट-मार्टम सुनिश्चित किया जाता है कोई 18 वर्ष की बालिका है उसने पायजन खाकर के सुसाइड कर लिया या दहेज की प्रताड़ना का कोई मामला है, लेकिन सामान्य रूप से जो दुर्घटना में मृत्यु हो जाए उसका पोस्ट-मार्टम अगर साढ़े छः बजे की जगह, मैंने आपके माध्यम से मांग की है तथा आपने संरक्षण भी दिया है इसके लिये आपका धन्यवाद भी ज्ञापित करता हूं. मैं निवेदन करता हूं कि रात 10.00 बजे तक शव का परीक्षण हो जाए. अगर सुबह को शव का परीक्षण होता है तो मंदसौर जिला मुख्यालय जहां का मैं प्रतिनिधित्व करता हूं उसमें भी अगर गरोठ तथा भानपुरा तरफ का कोई मृतक है तो उसकी डेड बॉडी घर तक पहुंचते-पहुंचते 3-4 बजे तक का समय हो जाता है. अगर 3-4 बज जाते हैं तो उनका दाह संस्कार नहीं होना है, फिर रात भर वहां रखना पड़ता है, यह बात आ जाती है. मैं मंत्री जी से चाहूंगा कि इसमें थोड़ी रियायत देने की कृपा करें, क्योंकि यह अभिमत है मंत्री जी, कोई निर्णय अथवा कानून-नियम-प्रक्रिया नहीं है.

          डॉ.नरोत्तम मिश्र--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं श्री यशपालसिंह सिसोदिया जी को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने एक मार्मिक विषय की ओर ध्यानाकर्षित किया है, लेकिन उन्होंने अपनी बातों में कई बातें कहीं हैं, हालांकि मैं इस पक्ष में कोई तर्क दूं पहले उन्होंने जो विषय उठाया है उससे अपने आपको आंशिक रूप से सहमत पाता हूं, लेकिन अभी आपने कहा कि शाम को जब पोस्ट-मार्टम के लिये बॉडी पहुंच जाती है तो शाम को दाग नहीं लगता है, फ्युनेरल नहीं होता है, यही शायद मान्य परम्पराओं को ध्यान में रखते हुए सूर्योदय से सूर्यास्त तक का समय इसके लिये रखा है. कुछ चीजों पर मैंने आंशिक सहमति इसलिये व्यक्त की है कि इसमें कुछ बातें हैं जैसे सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग को देखना जैसे अन्य व्यवस्थाएं हैं उन व्यवस्थाओं को भी देखना. जैसे हमारे पोस्ट-मार्टम रूम हैं अभी उसमें लाईट की वह सुविधा जो होनी चाहिये वह है अथवा नहीं, स्टॉफ की कमी जैसे स्वीपरों की हमें और भर्ती करनी पड़ेगी. डॉक्टर जो स्पेशिलिस्ट होते हैं उनका चयन करना पड़ेगा, लेकिन इन सब बातों के बावजूद सिसोदिया जी आपकी बात वजनदार है मैं इसको व्यक्तिगत रूप से प्रतीत करता हूं, हालांकि विभाग सहमत नहीं है, लेकिन मैं यह मानता हूं कि यह सुबह 8.00 बजे से कम से कम रात को 8.00 बजे तक पोस्ट-मार्टम हो जाना चाहिये जिससे कि यह सारी की सारी दिक्कतें दूर हों. हम इस तरह का कार्य करेंगे कि एक साल के अंदर स्टॉफ की भर्ती, पोस्ट-मार्टम रूम में लाईटिंग की व्यवस्था और उसमें सारी की सारी व्यवस्थाएं करके इसको हम 12 घंटे के लिये अलाऊ कर देंगे.

          श्री यशपालसिंह सिसोदिया--माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें आपका भी धन्यवाद, माननीय मंत्री महोदय आपका भी हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद व्यक्त करता हूं.

 

 

 

 

 

 

 

 

          श्री अशोक रोहाणी (जबलपुर केन्टोनमेंट)---माननीय अध्यक्ष महोदय,

                                                                      

 

          राजस्‍व मंत्री(श्री रामपाल सिंह)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

         

                       

          श्री अशोक रोहाणी-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मूल धन की राशि से 10-20 गुना ब्‍याज की राशि है ।  आपके माध्‍यम से मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि जो ब्‍याज की राशि है,  उसमें कटौती की जाए ताकि यह धन जमा हो सके ।

          श्री रामपाल सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आवास संघ, हाउसिंग बोर्ड, जबलपुर ने यह ऋण दिया था । तत्‍कालीन सरकार ने जो शर्ते बनाई थीं,  काफी समय हो गया है,  माननीय विधायक जी का जो कहना है,  आवास संघ,  हाउसिंग बोर्ड और जबलपुर विकास प्राधिकरण इन तीनों से  चर्चा करके अलग अलग उनका सिस्‍टम है,  ऋण देने की शर्तें हैं ।   मूल विषय यह  है कि हम लोगों का काम राजस्‍व बांटने का है,  जब आपदा आई,  तब सरकार ने बांटा,  उस समय भी सरकार ने बांटा होगा,  लेकिन आवास संघ,  हाउसिंग बोर्ड और जबलपुर विकास प्राधिकारण से अलग अलग शर्तों पर राशि ली है, 6478 लोगों ने  ऋण लिया था और शेष  1424 व्‍यक्ति अभी ऋण नहीं दे पाए हैं,  इस पर यह तीनों संस्‍थाएं निर्णय करेंगी,  उनको हम कहेंगे कि चर्चा करके इनका निराकरण करें ।  काफी समय हो गया है, विलम्‍ब भी हो गया है, ऐसी परिस्थिति में विभाग के माननीय मंत्री जी इस विषय की गंभीरता को लेकर  प्रकरण का निराकरण करें ।   आपके माध्‍यम से सदस्‍य से यही आग्रह है ।

          श्री अशोक रोहाणी-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सहकारिता मंत्री भी यही हैं,  यहीं पर घोषणा करा दें ।

          अध्‍यक्ष महोदय-  यहां घोषणा नहीं होगी ।

          श्री अशोक रोहाणी-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी बात मानिए,  मैं पहली बार बोल रहा हूं,  मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि ब्‍याज की कटौती के लिए आप घोषणा कराइए ।          

          अध्‍यक्ष महोदय - आपकी बात आ गई है, डिमाण्‍ड आ गई है्

          श्री तरूण भनोत (जबलपुर पश्चिम) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 1997 में जब भूकम्‍प आया तो पूरे मध्‍यप्रदेश की जनता से, मध्‍यप्रदेश सरकार ने भूकम्‍प सरचार्ज के नाम से हजारों करोड़ रूपये की राशि ली. मात्र 800 हितग्राही ऐसे हैं, जो बचे हैं, जो नहीं दे पा रहे हैं, उनकी आर्थिक स्थिति बहुत ही खराब है. आपने पूरे मध्‍यप्रदेश से भूकम्‍प सरचार्ज वसूला है. कई हजार करोड़ रूपये वसूले हैं तो 600 लोगों के ऋण माफ कर देंगे तो आपकी सदन पर बहुत कृपा होगी. आप इसमें व्‍यवस्‍था दिलवा दें.

          अध्‍यक्ष महोदय - आपकी बात आ गई है. आपको एलाउ कर दिया है. आपकी बात रिकॉर्ड में आ गई है. वही आ सकती थी. कुछ नहीं लिखा जायेगा. माननीय मंत्री जी.

          श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक जी जो मामला उठा रहे हैं, जरूरी है. उस समय सरकार आपकी थी, हम लोग विपक्ष में थे. माननीय रोहाणी जी, पूर्व विधानसभा अध्‍यक्ष जी, जब हम इस विषय को रख रहे थे तब हम यहां बैठे हुए थे तो उनकी आंखों में भी आंसू आ गये थे. लेकिन जो वसूली की थी, आपकी सरकार ने की थी एवं ऋण भी आपकी सरकार ने दिया था.

          श्री रामनिवास रावत - 12 - 13 वर्ष हो गए हैं.

          डॉ. गोविन्‍द सिंह - आप गलत बात करते हैं.

          श्री रामनिवास रावत - मतलब कुछ भी बोल दो. आप सरकार के मंत्री हो.

          डॉ. गोविन्‍द सिंह - आंसू आ गये थे, आंसू कब आये थे.

          श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप घोषणा कर दो.

          अध्‍यक्ष महोदय - बैठ जाइये, रोहाणी जी कुछ कह रहे हैं. डॉक्‍टर साहब बैठ जाइये.

          डॉ. गोविन्‍द सिंह - उन्‍होंने उसकी पैरवी की थी, उसके बाद सरकार ने उनकी बात मानी थी.

          श्री अशोक रोहाणी - यह बात सही है कि मैं तत्‍कालीन सरकार में दादा को इस सदन में आंसू आये थे और मैं अध्‍यक्षीय दीर्घा में बैठा था. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करता हूँ कि अगर दादा को आंसू आये थे तो मुझे उनके ब्‍याज की कटौती करके खुशी के आंसू दे दीजिये.

          श्री रामनिवास रावत - मंत्री जी का जवाब तो आ जाये.

 

1.02 बजे                              याचिकाओं की प्रस्‍तुति

          अध्‍यक्ष महोदय - आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं पढ़ी हुई मानी जायेंगी.

 

          अध्‍यक्ष महोदय - अब श्री लाल सिंह आर्य राज्‍यमंत्री, नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग शहरी क्षेत्रों में स्थित शासकीय भवन एवं परिसरों करी पुनर्घनत्‍वीकरण योजना के संबंध में वक्‍तव्‍य देंगे.

 

1.03 बजे                                                   वक्‍तव्‍य

 

शहरी क्षेत्रों में स्थित शासकीय भवन एवं परिसरों की

पुनर्घनत्‍वीकरण योजना विषयक्

                                 

           

          श्री लाल सिंह आर्य, राज्‍यमंत्री (नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शहरी क्षेत्रों में स्थित शासकीय भवन एवं परिसरों की पुनर्घनत्‍वीकरण योजना के संबंध में राज्‍य शासन द्वारा पूर्व में जारी मार्गदर्शी निर्देश दिनांक 28 नवम्‍बर, 2005 को निरसित करते हुए नवीन मार्गदर्शी निर्देश राज्‍य शासन द्वारा अनुमोदित किये गये हैं. पूर्व के मार्गदर्शी निर्देशों के अन्‍तर्गत पुनर्घनत्‍वीकरण परियोजनाओं के क्रियान्‍वयन में आ रही कठिनाईयों को दूर करने के लिए नवीन मार्गदर्शी निर्देश जारी किये जा रहे हैं. इन निर्देशों से मध्‍यप्रदेश के बड़े और छोटे शहरों में आधुनिकीकरण एवं नवीनीकरण की गतिविधियों को गति मिलेगी एवं नवीन शासकीय अधोसंरचना का निर्माण भी होगा.

          श्री बाला बच्‍चन (राजपुर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक मेरी जानकारी में है कि हाउस चल रहा है. आप किन कठिनाईयों एवं दिक्‍कतों के कारण यह वक्‍तव्‍य दे रहे हैं. मेरे हिसाब से, हाउस चल रहा है तो इसमें आपको चर्चा करानी चाहिए थी. आप जो नवीन मार्गदर्शी निर्देश लाये हैं. मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूँ कि  माननीय मंत्री जी वक्‍तव्‍य से काम नहीं चलेगा, आपको चर्चा करानी चाहिए तभी सारी चीजें बाहर पारदर्शी नजर आ सकती हैं. पुरानी भी आपकी ही है.

 

1.04 बजे                                             अध्‍यक्षीय घोषणा

 

(1) माननीय मंत्री, राज्‍यमंत्री एवं माननीय सदस्‍यों का

स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण विषयक

 

 

          अध्‍यक्ष महोदय- मध्‍यप्रदेश लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण विभाग द्वारा मध्‍यप्रदेश विधानसभा भवन स्थित एलोपैथिक डिस्‍पेन्‍सरी में माननीय मंत्री / राज्‍य मंत्री एवं माननीय सदस्‍यों का स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण किये जाने हेतु दि. 31 मार्च, 2016 को प्रात: 9.00 बजे से सायंकाल 6.00 बजे तक स्‍वास्‍थ्‍य शिविर लगाया जा रहा है. कुछ जांचे खाली पेट भी की जावेगी. माननीयों से अनुरोध है कि स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण शिविर में स्‍वास्‍थ्‍य परीक्षण का लाभ उठाने का कष्‍ट करें.

 

(2) विधान सभा भवन परिसर में वरिष्‍ठ रंगकर्मी श्री मनोज जोशी द्वारा

'चाणक्‍य' नाटक का मंचन किये जाने विषयक्

 

 

          अध्‍यक्ष महोदय - आज दिनांक 30 मार्च, 2016 को सायं 6.30 बजे विधान सभा भवन परिसर स्थित डोम क्षेत्र में प्रसिद्ध सिने कलाकार एवं वरिष्‍ठ रंगकर्मी श्री मनोज जोशी द्वारा 'चाणक्‍य' नाटक का मंचन किया जायेगा.

          कार्यक्रम के पश्‍चात् परिसर स्थित लॉन में श्री गोपाल भार्गव, माननीय मंत्री, सहकारिता, मध्‍यप्रदेश शासन की ओर से रात्रि भोज भी आयोजित है.

          माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि दोनों कार्यक्रमों में पधारने का कष्‍ट करें.

 

          अध्‍यक्ष महोदय - सदन की कार्यवाही 1.05 बजे से 3.00 बजे तक अन्‍तराल. 

 

 

3.07 बजे                 अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.

शासकीय विधि विषयक कार्य

            (1) मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक,2016( क्रमांक 6 सन् 2016) का पुरःस्थापन.

 

                   वित्त मंत्री (श्री जयंत मलैया) -- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक,2016 के पुरःस्थापन की अनुमति चाहता हूं.

                   अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक,2016 के पुरःस्थापन की अनुमति दी जाए.

अनुमति प्रदान की गई.

                   श्री जयंत मलैया -- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश उपकर (संशोधन) विधेयक,2016 का पुरःस्थापन करता हूं.

 

(2) भारतीय स्टाम्प (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक,2016 (क्रमांक 3 सन् 2016) पर विचार.

 

                   वित्त मंत्री (श्री  जयंत मलैया) -- अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि भारतीय स्टाम्प (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक,2016 पर विचार किया जाए.

                   अध्यक्ष महोदय -- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि भारतीय स्टाम्प (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक,2016 (क्रमांक 3 सन् 2016) पर विचार किया जाए.

                   उप नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्चन) -- अध्यक्ष महोदय,  मैं भारतीय स्टाम्प (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक,2016 का विरोध करता हूं और उसका कारण यह है कि   इस विधेयक के पेज नम्बर 3 की धारा  40   के स्थापन  के   (घ) बिन्दु अनुसार  कम स्टाम्प शुल्क  के विवादित  प्रकरणों में  मुख्य नियंत्रक, राजस्व प्राधिकारी को  अपील करने के लिये  25 प्रतिशत राशि जमा  करने  की बाध्याता  स्थापित की जा रही है, मैं समझता हूं कि वह आम आदमी के लिये  तकलीफदेह है.  मंत्री जी, इस पर आपको  विचार करना चाहिये,  क्योंकि आम व्यक्तियों के लिये  यह तकलीफ दायक है.  इस पर आप विचार करें तथा इसको   सरल बनायें, जिससे कि आम व्यक्तियों के लिये  यह व्यावहारिक हो और  जो अधिकारी इसमें शामिल हैं, कम स्टाम्प शुल्क के प्रकरणों में,  उन पर क्या कार्यवाही करेंगे या उन पर भी कार्यवाही होना चाहिये या  फिर वह  खुद इस तरह के प्रकरणों को  क्यों आगे बढ़ने देते हैं,  क्यों इसकी संख्या  बढ़ती है कि जिसके कारण   व्यक्तियों को  फिर अपील के लिये जाना पड़े और  25 प्रतिशत राशि  जमा करना पड़े.  मंत्री जी, मैंने इसको पढ़ा है.  इसमें जो स्टाम्प शुल्क धारक है,  वह 25 प्रतिशत राशि  जमा कराकर,  मान लें कि अगर  लम्बे समय तक केस चलता है,  तो उनकी बड़ी राशि उसमें अटकी रहेगी. दूसरी चीज यह है कि  जब निराकरण के  बाद  उसमें राशि  उनको जो वापस की जायेगी, वह एक प्रतिशत के हिसाब से की जायेगी.  तो मंत्री जी, इसको थोड़ा सा व्यावहारिक बनायें.   दूसरा, मेरा इसमें यह भी निवेदन है कि  रजिस्ट्री में लगने वाले  उपकर को  सम्पत्ति मूल्य के .125 से बढ़ाकर  .555  प्रतिशत कर दिया है. जो चार गुना है,इस पर भी आपको विचार करना चाहिये जिससे कि मैं समझता हूं कि आम आदमी का जो एक मकान खरीदने का  सपना है वह सपना टूट जायेगा, इसलिये मंत्री जी इस पर आप विचार करें.

          अध्यक्ष महोदय, नगरीय निकायों को दी जाने वाली स्टाम्प ड्यूटी 1% से बढ़ाकर के 2% वित्त मंत्री जी कर रहे हैं, इसका भार भी आम जनता और आम व्यक्तियों पर पड़ेगा. क्योंकि आम जनता से आप टेक्स लगाकर के वसूलने जा रहे हैं लेकिन मैं आपसे जानना चाहता हूं कि जो आपका सही स्टाम्प शुल्क है जहां से वसूलना चाहिये वह आप क्यों नहीं वसूल कर पा रहे हैं, मुझे लगता है कि इसमें आपका सरकारी तंत्र ज्यादा सक्रिय नहीं है जिसके कारण जो सही स्टाम्प शुल्क वसूल करना चाहिये वह नहीं हो पा रहा है  और गरीब जनता पर आप इस तरह के शुल्क लगातार लगाते चले जा रहे हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, इसका मैं खुलासा करना चाहता हूं, Comptroller and Auditor General (CAG) की रिपोर्ट वर्ष 2015 का मैं यहां पर उल्लेख करना चाहूंगा. उसकी कंडिका 6.3 में इस बात का उल्लेख किया गया है कि 6 करोड़ 33 लाख रूपये की प्राप्ति कर अथवा शुल्क के रूप में नहीं हो सकी है. आपका तंत्र इसमें सक्रियता क्यों नहीं दिखाता है, जहां से कर की वसूली होना चाहिये वह आप नहीं कर पा रहे हैं और आम जनता के ऊपर कर की बाध्यता लगाते जा रहे हैं इस पर वित्त मंत्री जी आपको विचार करना चाहिये.

          माननीय अध्यक्ष जी, जब मैं विनियोग विधेयक पर इस सदन में बोल रहा था तब CAG  की रिपोर्ट का मैंने रिफरेंस दिया था और माननीय वित्त मंत्री जी को यह बात ठीक नहीं लगी थी. लेकिन मैं सदन की जानकारी में लाना चाहता हूं कि वर्ष 2011 में भारत सरकार के संचार मंत्रालय के जो तत्कालीन मंत्री थे ए.राजा जी जब तक उनका इस्तीफा नहीं हुआ तब तक उस समय की लोकसभा की तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सुषमा स्वराज जी ने तब तक संसद को चलने नहीं दिया था आपकी पार्टी ने और इसी CAG की रिपोर्ट पर. आप लोग लोकसभा में CAG का रिफरेंस दें तो ठीक ठाक हम यहां पर CAG की रिपोर्ट का रिफरेंस देकर के बोलें और सरकार को यह बात ठीक नहीं लगे तो यह उचित नहीं है और मैं समझता हूं कि आपको इस बात पर विचार करना पडेगा, आखिर यह भी आडिट संस्था है और इस संस्था का हम उल्लेख नहीं करेंगे तो मैं समझता हूं कि उचित नहीं होगा और यह आडिट संस्था का अपमान होगा. तो मैं समझता हूं कि 6 करोड़ 33 लाख रूपये की प्राप्ति नहीं की जा सकी है यह सीएजी की रिपोर्ट में है. मंत्री जी आपके  सुस्त पड़े सरकारी तंत्र को चुस्त करें .माननीय अध्यक्ष महोदय, दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि कई प्रकरण ऐसे हैं जिसमें निजी संस्थाओं को सरकार के द्वारा प्रावधान के विपरीत जाकर के भूमि का आवंटन किया गया है, और भूमि आवंटन में कई रूपयों का स्टाम्प शुल्क का नुकसान किया गया है. मंत्री जी ऐसा नहीं करना चाहिये. मैं पहले भी इस बात को कह चुका हूं रिपीट नहीं करना चाहता हूं कि आम जनता, गरीब जनता के ऊपर आप टेक्स पर टेक्स लगाते जा रहे हैं, सख्ती से वसूलते हैं लेकिन कई सारी ऐसी निजी संस्थायें हैं जिनको आपने भूमि दी है उन पर स्टाम्प शुल्क का कितना नुकसान हुआ है और सरकारी खजाने पर कितना असर पड़ा है मंत्री जी इन पर भी आपको ध्यान देने की जरूरत है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार इस पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं करती कि ऐसे खनन पट्टाधारक जो हैं, खनन पट्टाधारकों के पेपर्स भी पंजीकृत नहीं होते हैं, पंजीकृत न होने के कारण सरकार को लाखों रूपये के शुल्क का नुकसान हो रहा है. मोबाईल टॉवर कंपनियों पर सरकार इतनी मेहरबान क्यों है. उनका पंजीकरण नहीं होने के कारण सरकार को शुल्क का भारी नुकसान हो रहा है.सरकारी खजाने का नुकसान हो रहा है, मंत्री जी इस पर भी आप गंभीरता से विचार करेंगे.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, ऐसे ही सरकार कालोनाइजर्स के दवाब में दिख रही है क्योंकि प्रदेश की बहुत सी कालोनियां ऐसी हैं जिनके पेपर्स पंजीकृत नहीं हुये हैं. इस कारण से स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क की हानि सरकार को हो रही है. पिछली बार जब मैं विनियोग विधेयक पर बोल रहा था तब सीएजी की रिपोर्ट के कई बिंदुओं  पर मैंने सरकार का ध्यान आकर्षित किया था, यह भी इसी से संबंधित है इसलिये मैं आपके ध्यान में यह बात ला रहा हूं कि कालोनाइजरों के दवाब में सरकार को नहीं रहना चाहिये, काफी कालोनियां विकसित हो चुकी हैं  लेकिन उनका पंजीयन न होने  के कारण स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क वसूल नहीं किया जा रहा है.उसके कारण स्‍टाम्‍प शुल्‍क और पंजीयन शुल्‍क नहीं वसूला जा रहा है तो माननीय मंत्री जी आप कृपा करके इन बातों का ध्‍यान रखें, इसलिये मेरा इन बातों को लेकर इस संशोधन विधेयक पर विरोध है, जब आप बोलें तो इन चीजों को आप क्‍लीयर करें. मैं यह चाहता हूं कि आम जनता को इन टेक्‍स से, इन करों से मुक्ति दिलायें और उनको रिलीफ दिलायें और जो सही कर है, जिसको आप और आपका तंत्र और सरकार नहीं वसूल पा रही है, उनको आप वसूलें, यही मेरा आग्रह है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं भारतीय स्‍टॉम्‍प संशोधन विधेयक 2016 के समर्थन में बोलने के लिये खड़ा हुआ हूं. स्‍टॉम्‍प को लेकर के जो नये उपाबंध आवश्‍यकताओं को देख करके इसकी निरंतरता है और इसकी आवश्‍यकता दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. स्‍टाम्‍प फिर चाहे वह पेपर से संबंधित हो या अन्‍य कारणों से लेकर या ई-स्‍टॉम्पिंग से लेकर के, आजकल इसकी बहुतायत आवश्‍यकता हो गई है, जिस प्रकार से राजस्‍व की प्राप्तियों के लेकर के भी स्‍टाम्‍प को लेकर के जगह-जगह, स्‍थान-स्‍थान पर इसकी आवश्‍यकता पड़ती है फिर चाहे वह भूखंड का मामला हो, भवन का मामला हो, नामांतरण के मामले हों, रजिस्ट्रियां जितनी प्रकार की होती हैं इन सबको लेकर के एक महत्‍वपूर्ण विभाग भी है और एक महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारी भी है. इसके आधार पर न केवल सरकार को राजस्‍व की आय प्राप्ति होती है बल्कि एक जो हितग्राही होता है या जिसके हक में ये स्‍टाम्‍प के माध्‍यम से या जो अपनी सम्‍पत्तियों का जिस प्रकार से उसका अधिकार बन रहा है उसको लेकर के भी उसके मन में इस बात को लेकर संतोष होता है कि आखिर सरकार की एक जिम्‍मेदार एजेंसी के माध्‍यम से हमारा यह कार्य संपादित होने की ओर अग्रसर है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍टाम्‍प और सम्‍यक रूप से स्‍टाम्‍प की प्रचलित परिभाषा स्‍पष्‍ट नहीं थी, इसको स्‍पष्‍ट करने को लेकर के व्‍यवस्‍थापन की परिभाषा से जोड़ते हुये शुल्‍क बचाने के लिये, क्‍योंकि कभी-कभी इसका दुरूपयोग भी किया जा सकता था, दुरूपयोग की भी संभावना हो सकती थी या होती आ रही थी, इसको लेकर के परिभाषाओं में कुछ संशोधन आये हैं इसको जोड़ा जाना मैं समझता हूं नितांत आवश्‍यक था. कम स्‍टाम्‍प शुल्‍क पर ब्‍याज के लिये धारा 35 का जो संशोधन आया है, मैं समझता हूं इसकी आवश्‍यकता महसूस की जा रही थी.

          डॉ. गोविंद सिंह-- इस पर टैक्‍स लगाने की कहां आवश्‍यकता थी, क्‍या प्रदेश की जनता चिल्‍ला रही थी कि टेक्‍स लगाओ, टेक्‍स लगाओ.

          श्री यशपाल सिंह सिसौदिया--  आपको अधिकार दिया है चिल्‍लाने का तो अब आप चिल्‍लाओ, कौन इंकार कर रहा है, आपकी आवाज में ही दम नहीं रहा, कोई चिल्‍ला ही नहीं पा रहा है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धारा 40 का स्‍थापन आवयश्‍क है क्‍योंकि धारा 47 (क) के आलोक में अपील का उपबंध अंतस्‍थापित किया जा रहा है. धारा 41 का भी स्‍थापन मैं समझता हूं कि आवश्‍यक है क्‍योंकि इन मामलों से स्‍टाम्‍प शुल्‍क के साथ-साथ ब्‍याज का प्रभारित किया जाना महसूस किया जा रहा है. अधिक लिये गये स्‍टाम्‍प शुल्‍क को वापस करने का उपबंध करने के लिये धारा 45 (क) मैं समझता हूं यह संशोधन है, यह नितांत आवश्‍यक है. कभी-कभी स्‍टाम्‍प वापिस किये जाने को लेकर के चूंकि कोई उपबंध नहीं थे इसको लेकर के इसको इसमें समाविष्‍ट किया गया है. धारा 47 (क) का लोप आवश्‍यक है, क्‍योंकि धारा 33 से 40 तक में पहले ही उपबंध सम्मिलित कर लिये गये हैं, इसलिये इसका लोप करना नितांत आवश्‍यक महसूस हो रहा था. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धारा 48 (ख) का स्‍थापन आवश्‍यक है क्‍योंकि वर्तमान में लिखित की प्रति पर अपनाई जाने वाली प्रक्रिया स्‍पष्‍ट नहीं थी, इसलिये इसका समाविष्‍ट किया जाना नितांत आवश्‍यक है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय धारा 53 का संशोधन इसलिये आवश्‍यक है क्‍योंकि ई-स्‍टाम्पिंग में अधिकतर त्रुटियां लिपिकीय प्रकृति की हैं, अ‍त 10 प्रतिशत की वर्तमान कटौती बहुत अधिक है इसलिये इसको जो आया है इसका स्‍वागत किया जाना चाहिये. मध्‍यप्रदेश उच्‍च न्‍यायालय के निर्णय के आलोक में धारा 73 का स्‍थापन इसलिये आवश्‍यक हो जाता है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हम सब न्‍याय की प्रक्रिया से जुड़े हुये हैं, न्‍याय पालिका का हम सम्‍मान करते हैं, न्‍यायपालिका के समय-समय पर जो दिशा निर्देश प्राप्‍त होते हैं उसको लेकर के धारा 73 का जो स्‍थापन है वह अति आवश्‍यक हो जाता है. परिवार की परिभाषा में पुत्रवधु को भी सम्मिलित करने को लेकर के अनुसूची 1 (क) को जो संशोधन है, मैं समझता हूं इसकी भी ब‍हुत महती आवश्‍यकता हो रही थी और पुत्रवधु को भी इसमें सम्मिलित कर लिया गया है.

          अध्यक्ष महोदय, जहां तक नगरीय निकायों के लिए 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत किये जाने का प्रस्ताव है, मैं समझता हूं कि आर्थिक रुप से नगर पालिका, नगर निगम, ग्राम पंचायतें, जनपद पंचायतें और जिला पंचायतों को स्टाम्प ड्यूटी के माध्यम से जो धनराशि सीधी जाती है, उससे अधोसंरचना विकास होता है. मैं भी नगर पालिका का पार्षद और अध्यक्ष हुआ करता था.  नगर पालिका, नगर निगमों, जनपद पंचायतों,जिला पंचायतों को सीधे स्टाम्प के माध्यम से राशि शासन द्वारा सीधे प्राप्त होती थी उसको 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 2 प्रतिशत किया गया है. इससे अधोसंरचना विकास होगा. आम जनता पर इसका असर इसलिए नहीं पड़ता कि 1 प्रतिशत हो या 2 प्रतिशत हो वह अगर पैसा देंगे तो उनके क्षेत्र में, उनके गांव में,शहर,कस्बे, अंचल में, विकासखंडों में विकास की अवधारणा सुनिश्चित होगी. कुल मिलाकर स्टाम्प संशोधन विधेयक, 2016 का मैं स्वागत करता हूं और माननीय मंत्रीजी को इसके लिए बधाई और धन्यवाद देता हूं. धन्यवाद.

          श्री रामनिवास रावत(विजयपुर)-- अध्यक्ष महोदय, मंत्रीजी द्वारा स्टाम्प संशोधन विधेयक, 2016 प्रस्तुत किया गया है.

          अध्यक्ष महोदय, इसमें कुछ नई बातें जोड़ी गई हैं. कुछ पुरानी परिभाषाएं,पुराने उपबंध,व्यवस्थाओं को हटाया गया है, समाप्त की गई हैं. जैसा कि बताया गया कि वर्तमान में ई-स्टाम्प और ई-रजिस्ट्री के आदेश के अनुसार कार्य प्रारंभ कर दिये गये हैं. इसमें बताया कि स्टाम्प की परिभाषा नई है. स्टाम्प की परिभाषा तो पहले भी थी. उसे आपने आज के वर्तमान आवश्यकता के अनुसार ई-स्टाम्प के अनुसार परिभाषित किया है. कोई भी रजिस्ट्री जो सम्यक रुप से स्टाम्पित है उसकी परिभाषा का उल्लेख किया है. ई-स्टाम्प अथवा इलेक्ट्रानिक स्टाम्प से अभिप्रेत है स्टाम्प शुल्क के भुगतान को निर्दिष्ट करने के लिए सृजित कोई इलेक्ट्रानिक रिकार्ड अथवा कागज पर उसकी छाप इसकी भी आपने व्यवस्था की है. परिबद्ध से अभिप्रेत है, लिखत को इस संदर्भ में उस पर किए गए  पृष्ठांकन के साथ लोक अधिकारी की अभिरक्षा में लेना , उसकी भी परिभाषा की है.

          अध्यक्ष महोदय, ई-स्टाम्प और ई-रजिस्ट्री प्रारंभ करने के बाद पूरे प्रदेश में एक समस्या पैदा हो गई कि पुरानी व्यवस्था के अनुसार पहले जो लोग शपथ पत्र आदि के लिए छोटे छोटे स्टाम्प खरीद लिया करते थे, या मिला लिया करते थे जैसे किसी शपथ पत्र के 10 रुपये के स्टाम्प की जरुरत है, आज ई-स्टाम्प लागू होने के बाद जो ई-स्टाम्प सर्वर हैं वह 10 रुपये का स्टाम्प न देकर, सीधे 100 रुपये के स्टाम्प की बात करते हैं और मजबूर होकर 10 रुपये के स्टाम्प पर शपथ पत्र करने वाले व्यक्ति को 100 रुपये का स्टाम्प देना पड़ता है. इस व्यवस्था में सुधार करें. शासन को राजस्व तो मिलता होगा. अब उस व्यक्ति की तो मजबूरी है, जिसको एफिडेविट देना है या कोई अनुबंध करना है उसके लिए एफिडेविट देना है तो उसको तो स्टाम्प लेना ही है लेकिन 10 के स्थान पर 100-100 रुपये का स्टाम्प खरीदना पड़ रहा है इसको जरुर देखें.

          अध्यक्ष महोदय, आपने बाजार मूल्य को भी परिभाषित किया है. पहले आपकी पूरी रजिस्ट्रियां कलेक्टर गाईड लाईन पर होती थी. कलेक्टर गाईड लाईन को ही अधिनियम के अनुसार बाजार मूल्य माना जाता था. अब बाजार मूल्य आप किस तरह से मानेंगे. आपको बाजार मूल्य की परिभाषा देने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई? क्या आपने कलेक्टर गाईड लाईन को समाप्त कर दिया है और बाजार के प्रचलित मूल्य पर आप रजिस्ट्रियां करेंगे?इसमें स्पष्ट नहीं किया गया है. इसमें मार्गदर्शी सिद्धांत तो दिये गये हैं लेकिन मार्गदर्शी सिद्धांतों में यह नहीं बताया कि हम कलेक्टर गाईड लाईन मानेंगे और उसके आधार पर रजिस्ट्रियां होंगी या फिर बाजारु मूल्य जो प्रचलित है, उसके आधार पर रजिस्ट्रियां करेंगे? रजिस्ट्रियों के लिए आप कौन सी व्यवस्था लागू रखना चाहेंगे. क्योंकि आपका यह स्टाम्प अधिनियम केवल उसी से संबंधित है. यह स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है.

          अध्यक्ष महोदय, आपने व्यवस्थापन में भी संशोधन किया है. स्टाम्प की भी परिभाषा दी है. जबकि वह पहले से ही परिभाषित था. आपने उसमें ई-स्टाम्प को शामिल किया है. दूसरा, कम प्रभार्य का भुगतान के संबंध में कहा है. यदि कोई रजिस्ट्री अभिलेख में कम मूल्य का स्टाम्प लगाता है और उस अनुसार फीस कम देता है तो उस पर पहले शास्ति की व्यवस्था थी, उसमें आपने संशोधन किया कि स्टाम्प शुल्क की कमी वाले भाग के लिए प्रति माह अथवा उसके भाग के लिए लिखत के निष्पादन की तारीख से दो प्रतिशत के बराबर शास्ति का भुगतान किया जाए तथा उस पर पृष्ठांकन द्वारा यह प्रमाणित करेगा कि वह सम्यक् रुप से स्टाम्पित है. मंत्रीजी, यह 2 प्रतिशत क्या है? ब्याज है, राशि है यह स्पष्ट ही नहीं है. 2 प्रतिशत के बराबर शास्ति, दंड? ये ब्याज के रूप में लेंगे. अब ब्याज के रूप में भी लेंगे तो क्या कुल रजिस्ट्री मूल्य पर ब्याज लेंगे या जितना रजिस्ट्री मूल्य है, उस मूल्य में जितना कम मूल्य के स्टाम्प लगाये गये हैं, उस पोर्शन पर ब्याज लेंगे, जिनकी आपको आवश्यकता है कि प्रभार्य अगर कम है क्योंकि यदि किसी भी रजिस्ट्री का रजिस्ट्री मूल्य 1000 रुपए है, अगर उसने 800 रुपए के स्टाम्प लगा दिये हैं और 200 रुपए के स्टाम्प नहीं लगाए तो क्या आप 200 रुपए पर ब्याज लेंगे या 1000 रुपए पर ब्याज लेंगे, यह आपने इसमें स्पष्ट नहीं किया है? इसका दुरुपयोग होगा. संबंधित प्राधिकृत अधिकारी जो है वह अपने हिसाब से निर्णय लेगा कि हम 1000 रुपए पर भी ब्याज ले सकते हैं या रजिस्ट्री मूल्य पर जो स्टाम्प प्रभार्य कम लगाया है उस पर ब्याज ले सकता है. यह आपको स्पष्ट करने की आवश्यकता है. यह जो आप स्टाम्प अधिनियम लाए हैं जो व्यवस्था में सुधार कर रहे हैं. इसमें यह भी स्पष्ट करें कि पिछले वर्षों की तुलना में मैं समझता हूं कि अपेक्षित वृद्धि इस विभाग के माध्यम से राजस्व की नहीं हुई है, जितनी वृद्धि होना चाहिए थी. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. कहीं न कहीं हमारी व्यवस्थाओं में कमी है और आपने यह भी कहा है कि किसी भी रजिस्ट्री में अगर उसका स्टाम्प कम है तो वह साक्ष्य में नहीं ली जाएगी, जब तक उसका शेष प्रभार्य ब्याज सहित चुका न दिया जाय. दूसरी तरफ आप कह रहे हैं कि दाण्डिक कार्यवाहियों में वह साक्ष्य के रूप में मान्य होगी. दाण्डिक कार्यवाही एक अलग व्यवस्था है, सिविल कार्यवाही एक अलग व्यवस्था है. लेकिन उसका तुरन्त निराकरण किया जाना चाहिए.

मूल अधिनियम की धारा 40 के स्थान पर निम्नलखित धारा स्थापित की जाए, अर्थात् - 40. (1) जबकि कलक्टर किसी लिखत को, जो रसीद या विनिमय-पत्र या वचन-पत्र नहीं है, धारा 33 के अधीन परिबद्ध करता है, कलेक्टर यह पहले भी कर सकते थे, उसके बाद अपील की व्याख्या की गई है धारा 40 में कि किस तरह से अपील हो सकेगी. आपने जो द्वितीय अपील की बात की है कि जैसे प्रथम अपील की, आपने कह दिया कि 25 प्रतिशत राशि जमा कराएं, तब प्रथम अपील होगी. अगर प्रथम अपील में वह हार गया तो वह 25 प्रतिशत राशि क्या आप राजसात करेंगे? आप क्या करेंगे आपने इस व्यवस्था के बारे में वर्णन नहीं किया. 25 प्रतिशत राशि इतनी राशि होती है, किसी व्यक्ति के पास इतना पैसा नहीं हो, अगर उसे अपील में जाना पड़ा, वह नहीं जा पाया और केवल इसी के कारण असफल रहता है तो बड़ी विषम स्थिति हो जाएगी. अपील करने से वह वंचित हो जाएगा. द्वितीय अपील में सामान्यतः जा सकता है. लेकिन प्रथम अपील के बाद 25 प्रतिशत राशि वापस करेंगे या नहीं करेंगे, इस स्थिति को स्पष्ट नहीं किया गया है. इसके साथ-साथ द्वितीय अपील में पारित आदेशों के अध्यधीन रहते हुए, कलेक्टर प्रथम और द्वितीय अपील के अधीन आदेश पारित करेगा और आप सिविल न्यायालय से भी वर्जित कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय, आप यह देखें, "धारा 40. (ज) यथास्थिति प्रथम अथवा द्वितीय अपील में पारित आदेशों के अध्यधीन रहते हुए, कलक्टर द्वारा उपधारा (1) के अधीन पारित किया गया आदेश अंतिम होगा और किसी भी सिविल न्यायालय में या किसी भी अन्य प्राधिकारी के समक्ष चाहे वह कोई भी हो, प्रश्नगत नहीं किया जाएगा." सिविल न्यायालय में जाने से भी आप बाधित कर रहे हैं. कम से कम सिविल न्यायालय में जाने की व्यवस्था तो बरकरार रहना चाहिेए. हो सकता है कि कभी कभी उसके साथ न्याय नहीं हो पाए जो अपील में जा रहा है तो कम से कम वह सिविल न्यायालय में वह जा सके, ऐसी व्यवस्था बनी रहे.

            अध्यक्ष महोदय, मैं यह भी कहना चाहता हूं कि अगर रजिस्ट्री करने वाले की स्वयं की जानकारी में आता है, वह कलेक्टर के यहां पर आवेदन करता है तो आवेदन करने के बाद भी आप उस पर 2 प्रतिशत की राशि ब्याज की लगा रहे हैं, कम से कम ऐसा व्यक्ति जो रजिस्ट्री कराता है, रजिस्ट्री के बाद उसे पता लगता है कि मैंने जो रजिस्ट्री कराई है, उसमें स्टाम्प का प्रभार्य कम है और वह स्वयं कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होकर यह कहता है कि मैं इतना प्रभार और देना चाहता हूं तो ऐसे व्यक्ति पर जो ब्याज की राशि है उसे माफ करें, जिससे लोगों में ईमानदार से आगे आने का एक प्रोत्साहन मिलेगा. आप दोनों पर ही जिसके खिलाफ संज्ञान में आता है, जिसके खिलाफ शिकायत पर कार्यवाही होती है उसके प्रति भी वही व्यवस्था है और जो स्वयं आकर कहता है कि मुझसे गलती हो गई मैंने रजिस्ट्री में कम प्रभार्य लगाया, अब मैं पूरा देना चाहता हूं, वह स्वयं आता है तो मैं समझता हूं कि उस पर जो ब्याज है वह ब्याज का दंड हटाना चाहिए, जिससे आदमी ईमानदारी के प्रति प्रोत्साहित हो. यह तो ठीक है कि आधिक्य लगे हैं, उसको अवधारित की गई प्रक्रिया का अनुसरण करते हुए वापस लौटा सकेगा. वापस लौटाने की व्यवस्था ठीक है, लेकिन वापस करने की तो बात ही मत सोचो क्योंकि आज तक कितनी बार ऐसी स्थिति बनी है, पहली बात तो यह है कि अधिक लगाते ही नहीं है, यह बात सही है कि अगर सामने प्रकरण आते हैं तो कम ही लगाने के आते हैं. मैं नहीं समझता कि अधिक लगाने के प्रकरण प्रदेश में एक या दो आये हों अगर आये हों तो मंत्री जी बताना कि रजिस्ट्री में कोई अधिक स्टाम्प भी लगाता है. स्वप्रेरणा की यह व्यवस्था है तो मैं समझता हूं आपने स्थापित की है, पहले से भी होंगी, स्वविवेकानुसार प्रत्येक रूपये का दो नये पैसे की कटौती करके उसी मूल्य के बराबर धन राशि जो कि 53 के खण्ड ग के स्थान पर निम्नलिखित खण्ड स्थापित किया जाय.

          माननीय अध्यक्ष महोदय मैं माननीय मंत्री जी से इसके बारे में जानना चाहूंगा यह मेरी भी समझ में नहीं आया है. पहले यह 10 पैसे था अब 2 नये पैसे स्थापित किया जाय, इसका पूरा अर्थ बतायें, इसकी पूरी व्याख्या बतायें कि यह है क्या कि 2 नये पैसे स्थापित किया है स्वविवेकानुसार प्रत्येक रूपये या रूपये के प्रभाग के लिए 2 नये पैसे कटौती करके उसी मूल्य के बराबर धनराशि, इसकी जरूर पूरी व्याख्या कर दें कि यह है क्या. जो मूल अधिनियम की अनुसूची एक के अनुच्छेद 36 दान, 48 विभाजन, 50 मुख्तारनामा, 54 निर्मुक्ति, 57 व्यवस्थापन इन सब में जो पुत्रवधु को जोड़ा है. हां इसके लिए मैं समझता हूं कि हमारी सभी की सहमति है, पूरे दल की भी सहमति है, इसमें कोई विरोध नहीं करेगा, बाकी कि जो चीजें उठाई हैं उनको  जरूर स्पष्ट करें और जो 25 प्रतिशत है वह अधिक है प्रथम अपील का उसको थोड़ा सा कम करें और स्पष्ट करें कि अगर वह अपील में असफल होता है तो उस 25 प्रतिशत राशि की क्या स्थिति बनेगी.

          डॉ नरोत्तम मिश्र -- आपने अपने दल की ग्यारण्टी कैसे ले ली है.

          श्री रामनिवास रावत --  आपको कोई संदेह है.

          डॉ नरोत्तम मिश्र -- मैं तो वैसे ही जानकारी ले रहा था.

          श्री रामनिवास रावत -- हम सब सामूहिक रूप से जिम्मेदार हैं.

          डॉ नरोत्तम मिश्र -- एक तो आपने जो कहा कि 2 नये पैसे वाली बात समझ में नहीं आयी है तो वह आप गोविन्द सिंह जी से पूछ लेना.

          श्री रामनिवास रावत -- वह आप ही समझा देना, आपकी भी समझ में नहीं आया होगा.

          डॉ नरोत्तम मिश्रा -- गोविन्द सिंह जी आपसे मेरा सवाल है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया जी आपके यहां पर गये ओलों का दौरा करने के लिए आप क्यों नहीं गये आप वहां के लहार के जनप्रतिनिधि हैं, आपके नेता नहीं है क्या वह. हैं या नहीं हां या ना ( गोविंद सिंह जी तरफ देखते हुए )

          अध्यक्ष महोदय -- इस बात का अधिनियम से क्या संबंध है.

          श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय किस तरह से विषयांतर कर रहे हैं देखिये अब वह एक्सपर्ट मंत्री जी आ गये हैं विषय का विषयांतर करने वाले ( डॉ गौरीशंकर शेजवार जी के सदन में आने पर ) माननीय अध्यक्ष महोदय आपने मुझे बोलने का समय दिया धन्यवाद्.

          डॉ गोविन्द सिंह -- हम खुद नेता हैं ना.

          डॉ नरोत्तम मिश्र -- आप नेता हैं लेकिन सिंधिया जी आपके नेता हैं या नहीं.(हंसी)

          डॉ गोविन्द सिंह -- पूरे प्रदेश और देश के नेता हैं.(हंसी)

          डॉ नरोत्तम मिश्र --  आपके हैं या नहीं.

          डॉ गोविन्द सिंह -- आप कौन होते हैं पूछने वाले.(हंसी)

          डॉ नरोत्तम मिश्र -- मैं छोटा भाई हूं.

          डॉ गोविन्द सिंह (लहार ) -- सब बता देंगे अकेले मैं. (हंसी)माननीय अध्यक्ष महोदय स्टाम्प का पिछले 10 वर्षों से शायद ही कोई एक या दो वर्ष शेष रहा हो जिसमें स्टाम्प की चर्चा, या स्टाम्प पर कर लगाने की बात न आयी हो, लगातार पिछले 10 वर्षों में यह स्टाम्प शुल्क रजिस्ट्री का था वह 300 गुना हो गया है इतना ज्यादा कहीं क्षेत्र में, कहीं गांव में, कहीं पर किसी शहरी क्षेत्र में और कई एक के बाद एक कानूनी उलझनों के चलते, अगर कोई किसान कृषि की भी जमीन बेचना चाहता है तो पहले वह शहर से लगी हुई जमीन है तो उसमें 10 बीसे, 10 बीसे का मतलब है 11500 वर्ग फीट, उसको सिटी के प्‍लॉट के हिसाब से लेंगे और उसी हिसाब से उसका मूल्‍य लगेगा. यह सब मिलाकर 300 गुने से भी ज्‍यादा हो रहा है. यह मुद्दा उठाने के बाद भी स्‍टांप की रजिस्‍ट्री के समय आपने कभी यह निर्धारित नहीं किया. हम भी लगातार यह मांग कर रहे हैं कि कई जगह भूमि है, बीहड़ है, हमारे यहां चंबल और सिंध के जो बीहड़ हैं वे 15-15 फीट ऊँचे उथरे बीहड़ हैं अगर कोई उन्‍नत किसान एक बीघा जमीन, एक बीघा जमीन यानि 22500 वर्गफीट, खरीदकर समतल कर खेती लायक बनाना चाहे तो उसका शुल्‍क भी सामान्‍य जमीन या अच्‍छी जमीन के बराबर वसूल कर रहे हैं. इसलिए वहां के गरीब किसान न तो जमीन खरीद पा रहे हैं और न बेच पा रहे हैं. इसके लिए माननीय मंत्री जी आपको कुछ व्‍यवस्‍था करनी चाहिए.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूँ कि अभी ई-रजिस्‍ट्री चालू की गई है. इसमें आम लोगों को और किसानों को बड़ी दिक्‍कतें आ रही हैं. दिक्‍कत यह आ रही है कि पहले तो कोई भी रजिस्‍ट्री करा देता था, वकील भी करा देता था या साधारण पढ़ा-लिखा आदमी भी करा देता था लेकिन अब केवल जिन्‍होंने पंजीयन कार्य लिया है वे ही करा सकते हैं इससे बेरोजगारी भी बढ़ रही है क्‍योंकि पहले कई लोगों को रोजगार मिलता था उनका रोजगार छिन गया है. आप सामान्‍य रजिस्‍ट्रीज़ को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर रहे हैं, इसमें मेरा यह निवेदन है कि अभी 2-4 वर्षों तक पुरानी पद्धति भी जारी रखें. यदि कोई पुरानी पद्धति से रजिस्‍ट्री कराना चाहे तो उसे अवसर मिलना चाहिए. इसके अलावा ई-रजिस्‍ट्री में यह भी दिक्‍कत आ रही है कि जगह-जगह सर्वर डाऊन रहता है. अभी हमारे लहार और मिहोना दोनों तहसीलों में सर्वर करीब 12 दिन डाऊन रहा. किसान लोग प्रतिदिन आते थे और लौट जाते थे तो आपको इसके लिए कुछ व्‍यवस्‍था करनी चाहिए. पहले स्‍टांप आप छपवाते थे, स्‍टांप की कीमत होती थी लेकिन अब एक कागज पर ही पूरी शुल्‍क लिख दी जाती है टाइप की जाती है और यह वही करता है जो पंजीयन वाला व्‍यक्‍ति होता है वह सारा शुल्‍क जमा कर देता है. आपका खर्चा ज्‍यादा नहीं हो रहा है पर आप वसूल ज्‍यादा रहे हैं. इसके आप प्रावधान पर प्रावधान हर वर्ष करते चले जा रहे हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधेयक की धारा 35, 40 और 41 में जो आपने 2 प्रतिशत ब्‍याज का प्रावधान किया है, इसमें आपने अगर टैक्‍स कम लगाया है तो ब्‍याज ज्‍यादा लगाया है. अभी सिसोदिया जी बोल रहे थे कि यह तो बहुत आवश्‍यक था, तमाम जनता कह रही थी कि जरूरी है, हो सकता है कि इनके मंदसौर जिले की अफीम वाली जनता कह रही हो कि हमारे पास अफीम का बहुत पैसा रखा है पूरा घर भरा हुआ है खर्चे के कोई साधन नहीं हैं तो आप रजिस्‍ट्री के रूप में लो, लेकिन हमारे क्षेत्र की साढ़े सात करोड़ जनता तो ऐसा नहीं कह रही है कि हमसे पैसे लो. सिसोदिया जी कह रहे हैं कि यह तो आवश्‍यक था, जनता की मांग थी, अरे भई कहां की जनता, कौन सी जनता, उनके मंदसौर की जनता की मांग होगी, हमारे इलाके की जनता की मांग नहीं है. अत: मैं कहना चाहता हूँ कि 2 प्रतिशत ब्‍याज लगाना अनुचित है. वित्‍त मंत्री जी आप ठीक हैं, होशियार हैं, लेकिन राघव जी इतने नहीं हैं, राघव जी के समय ऐसा नहीं था. आज एक लाख करोड़ की अर्थव्‍यवस्‍था आपकी बिगड़ी हुई है, कहां चला गया पैसा, पैसा गायब है. आपको अगले साल 18 हजार करोड़ रुपये मिलने थे वे भी नहीं मिल पाएंगे. प्रदेश में वेतन बांटना, योजनाएं, विकास कार्य आदि सब ठप्‍प हो जाएंगे. आप अपने अधिकारियों पर कंट्रोल करें. हो सकता है कि आपकी सौजन्‍यता का भी लाभ अधिकारी उठा रहे हों लेकिन आपको कई खर्चे कम करने पड़ेंगे. यह 2 प्रतिशत ब्‍याज का प्रावधान बहुत अनुचित है. आपने बजट के समय जब वित्‍त मंत्री का भाषण दिया था उस समय जो जो बातें आपने कही थीं उन पर ठप्‍पा लगाने के लिए यह संशोधन विधेयक लाए हैं, मैं तो इसका पूरी तरह से विरोध कर रहा हूँ. धारा 45 में आपने वापसी के लिए यह प्रावधान किया है कि लिखित में देगा. मैं इस बात में रामनिवास जी से सहमत नहीं हूँ कि कहीं कोई ज्‍यादा देता ही नहीं है. गांव के बिना पढ़े लिखे लोग आते हैं, रजिस्ट्रेशन करने वाले जो अधिकारी बैठे हैं, उनके जो दलाल है, तीन-चार दलाल हर कार्यालय में बैठे हैं, वे उनके माध्यम से सुबह वसूली करते हैं, उनका शाम को हिसाब होता है और यह प्रमाणित है. हमने कई लोगों से कहा कि लाओ में पकड़वाता हूँ, अब लेने वाले दूसरे लोग हैं तो वे पकड़ में ही नहीं आते, भ्रष्टाचार में वे लोग गिरफ्तार नहीं हो रहे हैं क्योंकि वे पैसा डायरेक्ट नहीं ले रहे हैं. अब रजिस्ट्री जब नहीं आयी तो उन्होंने कह दिया कि आज सर्वर डाउन हो गया, दो दिन और लटका दिया फिर इसके अलावा वे ज्यादा शुल्क ले लेते हैं. अगर किसी ने उनके हिसाब से देने में आनाकानी की तो जो शुल्क लगना चाहिए उससे 10-20 हजार रुपये ज्यादा लगा देते हैं. गांव का साधारण किसान नहीं समझ पाता और उनकी खून-पसीने की गाढ़ी कमाई को लूटा जा रहा है इसलिए इसमें जो आपने 6 महीने लगाये हैं इसको आप संशोधित  करें. 6 महीने का प्रावधान क्योंअगर 6 महीने के बाद भी उसको सूचना मिलती है कि हमारा ज्यादा पैसा वसूल कर लिया तो 6 महीने के बाद भी उसको छूट होना चाहिए, जब उसको पता चल जाए, तब वह आवेदन दे और आवेदन देने के बाद आप उसको वापस करें. इसके साथ ही साथ यह भी कहना चाहता हूँ कि पुत्रवधू को अनुसूची एक के अनुसार परिवार में  शामिल किया है. मैं पिछले कई सालों से देख रहा हूँ लगातार महिलाओं के ऊपर चर्चा होती है, हम महिला विरोधी नहीं हैं, लेकिन मैं यह कहना चाहता हूँ कि आखिर पुरुषों का भी ख्याल होगा कि नहीं होगा. अगर आप पुत्रवधू को दे रहे हैं, अपने ससुराल में वधू आ गयी, पत्नी आ गयी, सास-ससुर के बंटवारे में उसका हिस्सा हो गया और उधर जहां की वह रहने वाली है वहां मायके में भी हिस्सा ले रही है, डबल-डबल जगह फायदा ले रही है. अगर यहां कर रहे हैं तो वहां भी ऐसी कोई व्यवस्था कर दो ताकि पुरुषों को भी अपनी ससुराल में हिस्सा मिलने लगे(हंसी) न्याय होना चाहिए. अगर संविधान  में इस बात का प्रावधान है कि सब को समानता का अधिकार हो तो पुरुषों के अधिकारों का तो अवमूल्यन होता जा रहा है और तमाम कानून ऐसे बना दिये कि पुरुष ही पुरुष का अधिकार छीनने का काम कर रहे हैं. ठीक है, घर में हमारी भी मां-बहने हैं, हम सबकी इज्जत करते हैं, सबका सम्मान करते हैं लेकिन इसप्रकार से पुरुष का भी ख्याल करें और यह आपने लगाया है तो उसमें यह और जोड़ दें कि जिन महिलाओं को अपने मायके में हिस्सा नहीं मिला, वहां से  बंटवारा नहीं किया तो वहां उनके पतियों को हिस्सा मिलना चाहिए, यह प्रावधान करना चाहिए. इसी के साथ बाकी के जो आपने धारा 41 में टैक्स लगाये हैं, उनका में विरोध करता हूँ और अपनी बात समाप्त करता हूँ.

         

            वित्त मंत्री(श्री जयंत मलैया)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, भारतीय स्टाम्प अधिनियम,1899 का एक केन्द्रीय अधिनियम है, कर अपवंचन रोकने  तथा ease of doing business की दृष्टि से इस अधिनियम में कई संशोधन एवं नये प्रावधान शामिल किया जाना आवश्यक हो गया है. उक्त राज्य संशोधन राष्ट्रपति महोदय  की अनुमति के उपरांत  लागू हो सकेंगे. अधिनियम की धारा 2 में संशोधन इसलिए प्रस्तावित है क्योंकि स्टाम्प और सामयिक रुप से स्टाम्पित परिभाषाएँ वर्तमान में स्पष्ट नहीं थीं. इसी प्रकार इस धारा में कुछ नयी परिभाषाएँ जैसे ई-स्टाम्प, पहले ई-स्टाम्प  का कोई चलन ही नहीं था, यह अभी इसी वर्ष से हुआ है. इसके साथ ही बाजार मूल्य जोड़ा जाना  भी आवश्यक हो गया. धारा 35 में संशोधन पारदर्शिता लाने की दृष्टि से आवश्यक है क्योंकि स्वविवेक अनुसार दण्ड किये जाने के स्थान पर कम स्टाम्प शुल्क की दर पर प्रतिमाह दो प्रतिशत की दर  से ब्याज लिया जाना प्रस्तावित किया  गया है. अध्यक्ष महोदय, मैं यहां पर निवेदन करना चाहता हूँ कि अगर पहले कभी लिपिकीय त्रुटि होती थी तो दस प्रतिशत की कटौती होती थी. यह बहुत ज्यादा थी. अब इसको हमने घटाकर दो प्रतिशत कर दिया है. धारा 45 का संशोधन इसलिए आवश्यक है ताकि पक्षकार अधिक चुकाये गये स्टाम्प शुल्क की राशि वापस प्राप्त कर सके. इसीप्रकार धारा 53 में संशोधन इसलिए प्रस्तावित किया गया है क्योंकि स्टाम्पिंग के अंतर्गत पक्षकारों द्वारा की गयी गलतियां मुख्य रुप से लिपिकीय स्वरुप की होती है. जैसा मैंने अभी उल्लेख किया इसकी जगह, 10 प्रतिशत की जगह 2 प्रतिशत किया जाना हमने उचित समझा. अध्यक्ष महोदय, बार-बार बात आती है कि ई-रजिस्ट्रेशन और दोनों चीजें साथ साथ क्यों नहीं होती हैं, होना चाहिए. अब पुराना जमाना कभी नहीं लौटेगा, ई-रजिस्ट्री होने से हमने 5500 सर्विस प्रोवाइडर्स को रोजगार का अवसर दिया है और इसके साथ जो बात आप कर रहे थे दो-दो, चार-चार दलाल की, अब कम्प्यूटर में कोई दलाली नहीं चल सकेगी. जैसा डॉ. गोविंद सिंह जी ने कहा कि इसमें सर्वर डाउन हो रहा है. पहले और ज्यादा होता था, अब धीरे-धीरे इसकी बेहतरी हम करते जा रहे हैं, मुझे पूरी उम्मीद है कि निकट भविष्ट में यह पूरी तरह से ठीक हो जाएगा. जहाँ तक कलेक्टर गाइडलाइन बढ़ाने की भी बात हमारे मित्रों ने की है तो पिछले साल हमने कलेक्टर गाइडलाइन  ऑन एंड एवरेज पूरे प्रदेश में 1 प्रतिशत ही बढ़ाई है. अध्यक्ष महोदय, रावत जी ने एक चर्चा की थी और हमारे आदरणीय बाला बच्चन जी ने भी कहा था , उनका कहना था कि अपील पर 25 प्रतिशत पैसा लगता है. मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि हमारे कमर्शियल टैक्स में यदि अपील करनी होती है तो पैसा लगता है . कहीं 25 परसेंट लगता है, कहीं 50 परसेंट भी लगता है. इन्कम टैक्स में भी यदि अपील करनी पड़ती है तो उसमें भी पैसा लगता है.यह जो हमारे राजस्व को रोके रखने की बुरी प्रवृत्ति है, इसको रोकने के लिए, अपील के लिए राशि का प्रावधान किया जाता है. अध्यक्ष महोदय, उपकर की बात आई. जब टैक्स बढ़ाने के लिए अभी जो हमारा दूसरा  उपकर का विधेयक आएगा, तब उस समय उसके बारे में हम चर्चा करेंगे . अभी तो इसके साथ इसका कोई औचित्य ही नहीं है. बाला बच्चन साहब ने एक बहुत अच्छा सुझाव दिया, एक तो मोबाइल टावर्स के बारे में और एक खनन पट्टों के बारे में. इसके विषय में हम कार्यवाही कर रहे हैं और इसको और अधिक बढ़ाएंगे. अध्यक्ष महोदय, मैं यहाँ निवेदन करना चाहता हूं कि हमारे डॉ. गोविंद सिंह जी को बड़ी तकलीफ है कि पुत्रवधू को परिवार में क्यों शामिल कर लिया गया है.

          डॉ. गोविंद सिंह--  विरोध नहीं किया है हमने कहा है कि पुत्रवधुओं के साथ पुत्रों का भी ख्याल करो.

          श्री जंयत मलैया--  पुत्र तो पहले से ही परिवार का अंग है. अध्यक्ष महोदय, सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि हर पुत्री का अपने पिता की संपत्ति में पुत्र के बराबर का हक होगा क्या आप उससे सहमत नहीं हैं, सुप्रीम कोर्ट की बात से सहमत नहीं है. अगर उसको वहाँ मिलता है तो ये उसका अधिकार है और यहाँ पुत्रवधू है. जैसे स्त्रीधन होता है , जिसके ऊपर कोई जवाबदारी नहीं है. स्त्रीधन को कोई नहीं छू सकता है सरकार भी नहीं छू सकती है. इसी प्रकार से डॉ. साहब मेरा यह निवेदन है कि जो हमने पुत्रवधू को शामिल करके 5 प्रतिशत की जगह ढाई प्रतिशत किया है.

          डॉ. गोविंद सिंह---  मैंने इसका विरोध नहीं किया है.

          श्री जयंत मलैया--- अच्छा, आपने उसका विरोध नहीं किया है तो ठीक है, धन्यवाद. मैं सभी माननीय सदस्यों से निवेदन करुंगा कि विधेयक को  पारित कराने की कृपा करें.

          अध्यक्ष महोदय--  प्रश्न यह है कि भारतीय स्टाम्प (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाए.

                                                प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

          अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.

          अध्यक्ष महोदय---प्रश्न यह है कि खण्ड 2 से 13 इस विधेयक का अंग बने.

                                                खण्ड 2 से 13 इस विधेयक का अंग बने.

          प्रश्न यह है कि खण्ड 1 इस विधेयक का अंग बने.

                                                खण्ड 1 इस विधेयक का अंग बना.

          प्रश्न यह है कि पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

                                                पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

         

 

 

 

 

श्री जयंत मलैया--- अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि भारतीय स्टाम्प (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2016 पारित किया जाए.

          अध्यक्ष महोदय--  प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि भारतीय स्टाम्प (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2016 पारित किया जाए.

          प्रश्न यह है कि भारतीय स्टाम्प (मध्यप्रदेश संशोधन) विधेयक, 2016 पारित किया जाए.

                                                                   प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

                                                        विधेयक पारित हुआ.

 

 

 

मध्यप्रदेश वृत्ति कर (संशोधन) विधेयक, 2016 (क्रमांक 4 सन् 2016).

 

        वाणिज्यिक कर मंत्री (श्री जयन्त मलैया)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूँ कि मध्यप्रदेश वृत्ति कर (संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाए.

          अध्यक्ष महोदय--  प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश वृत्ति कर (संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाए.

          श्री रामनिवास रावत(विजयपुर)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, उसमें जो उन्होंने प्रस्ताव प्रस्तुत किया है कि वृत्ति कर चुकाने के बाद प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए जो 60 दिन के लिए भटकना पड़ता था, एक कार्य दिवस किया है, इसके लिए निश्चित रूप से हमारी सहमति है, कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन इसका पालन जरूर सुनिश्चित कराएँ. कानून बनाना और पालन कराना दोनों भिन्न भिन्न बातें हैं. अब यह सामने आएगा कि एक कार्य दिवस तो कर दिया. अब वृत्ति कर चुकाने के बाद उसी दिन उसे प्रमाण-पत्र मिल जाए तो निश्चित रूप से यह संशोधन उनके लिए लाया गया है. काफी ठीक है और इसमें हमारी सहमति है.

          अध्यक्ष महोदय--  प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश वृत्ति कर (संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाए.

                                                                                      प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

          अध्यक्ष महोदय--  अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.

          प्रश्न यह है कि खण्ड 2 इस विधेयक का अंग बने.

                                                                   खण्ड 2 इस विधेयक का अंग बना.

          अध्यक्ष महोदय--  प्रश्न यह है कि खण्ड 1 इस विधेयक का अंग बने.

                                                                   खण्ड 1 इस विधेयक का अंग बना.

          अध्यक्ष महोदय--  प्रश्न यह है कि पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

                                                पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

          श्री जयन्त मलैया--  अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूँ कि मध्यप्रदेश वृत्ति कर (संशोधन) विधेयक, 2016 पारित किया जाए.

          अध्यक्ष महोदय--  प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश वृत्ति कर (संशोधन) विधेयक, 2016 पारित किया जाए.

          प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश वृत्ति कर (संशोधन) विधेयक, 2016 पारित किया जाए.

                                                                                      प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

                                                                                        विधेयक पारित हुआ.

 

मध्यप्रदेश वेट (संशोधन) विधेयक (क्रमांक 5 सन् 2016).

        वाणिज्यिक कर मंत्री (श्री जयन्त मलैया)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूँ कि मध्यप्रदेश वेट (संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाए.

          अध्यक्ष महोदय--  प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश वेट (संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाए

          श्री रामनिवास रावत(विजयपुर)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी द्वारा वेट कर संशोधन विधेयक प्रस्तुत किया गया है. मैं समझता हूँ कि वेट कर में संशोधन प्रतिवर्ष ही होता है और कभी कभी वर्ष में 2-3 बार भी माननीय मंत्री जी प्रस्तुत कर देते हैं. माननीय मंत्री जी ने उद्देश्य और कारणों में जो बताया है कि क्यों प्रस्तुत करना पड़ा. आपने कहा है कि 2016-17 के लिए विधान सभा में बजट प्रस्तुत करते समय वित्त मंत्री द्वारा दिए गए भाषण के भाग 2 में अंतर्विष्ट कर प्रस्तावों को कार्यान्वित करने हेतु तथा कतिपय अन्य मामलों जैसे अनुसूची- 2 के भाग तीन-क में विनिर्दिष्ट मालों के संबंध में वजन, मात्रा, माप या इकाई के आधार पर कर की न्यूनतम राशि नियत करने के लिए उपबंध करने हेतु यह अधिनियम आपने प्रस्तुत किया है और इस अधिनियम में जो व्यवस्था की है जो जो संशोधन आपने प्रस्तुत किए हैं एक तो धारा 9 का संशोधन है. धारा 9 के संशोधन में आपने जो लिखा है उसमें एक तो मैं यह कहूँगा कि आप जो लिखते हैं कि "पूर्ण विराम के स्थान पर कोलन स्थापित किया जाए."       इन्हें चिन्हों से प्रदर्शित कर दिया जाए तो ज्यादा अच्छा है.

 

3.54 बजे                   {उपाध्यक्ष महोदय (डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए}

            माननीय उपाध्यक्ष महोदय, अगर कई सदस्यों से पूछोगे कि "कोलन" का मतलब क्या है तो "कोलन" को बता नहीं पाएँगे, तो "कोलन" स्थापित किया जाए के साथ साथ उसका चिन्ह भी अंकित कर दिया जाए तो समझ में आए कि "कोलन" का अर्थ यह चिन्ह है. यह चिन्ह स्थापित कर दिया जाए और इसके साथ आपने परन्तुक अन्तःस्थापित करने की जो बात कही है कि, "परन्तु राज्य सरकार,  अधिसूचना द्वारा,  अनुसूची- 2 के भाग तीन-क में विनिर्दिष्ट मालों के संबंध में,  वजन, मात्रा, माप या इकाई के आधार पर न्यूनतम कर की राशि नियत कर सकेगी." उपाध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह स्पष्ट जानना चाहूँगा कि आप किस तरह से कर का निर्धारण करना चाहते हैं. इसमें संशोधन तो आपने कर दिया. आप वजन, एक लीटर पर कितना, इसमें मैं समझता हूँ कि इस अनुसूची में जो भी माल आता है उसमें एक तो डीजल ही है. पेट्रोल है, प्राकृतिक गैस है, कंप्रेज्ड प्राकृतिक गैस को सम्मिलित करते हुए, तेन्दूपत्ता है, टिंबर है और आपकी मदिरा है, सिगार है, चुरहुट है, सिगरेट है यह सब दिये हुए हैं आपको इन सब पर संख्या स्पष्ट करना चाहिए. विधान सभा प्रारंभ होने के ठीक एक या दो दिन पहले मैं समझता हूँ आपका स्टेटमेंट था या पत्रकारों ने छापा था कि आप डीजल, पेट्रोल पर फ्लेट कर निर्धारित कर रहे हैं 13 रुपये या 15 रुपये जितना करना चाहते थे. अखबारों में भी छपा था मैं उस पर जाना नहीं चाहूंगा कि आपने कहा कि नहीं कहा. स्पष्ट होना चाहिये कि हम डीजल पर यह कर व्यवस्था रखेंगे. प्रति लीटर के हिसाब से या प्रति गैलन के हिसाब से रखेंगे. इसमें आपने मात्रा नहीं दी है. आपने यह तो कह दिया कि हम वजन, मात्रा, माप या इकाई के आधार पर न्यूनतम कर राशि नियत कर सकेगी. करेंगे तो आप स्पष्ट करो कि किस तरह से करेंगे यह पहले ही स्पष्ट होना चाहिये, डीजल और पेट्रोल की मार से लोग पीड़ित हैं. मदिरा पर आप बढ़ायें हमें कोई आपत्ति नहीं है, सिगरेट, सिगार पर बढ़ायें हमें कोई आपत्ति नहीं है. टिम्बर भी, लोग घरों में दरवाजे नहीं लगा पा रहे हैं कम से कम इसकी व्यवस्था आप देखें.

          माननीय उपाध्यक्ष महोदय, इसमें धारा 14 में भी आपने संशोधन किया है कि निम्नलिखित उपखंड के स्थान पर स्थापित किया जाय कि मध्यप्रदेश के राज्य के भीतर या राज्य क्षेत्र के बाहर निर्यात के अनुक्रम में विक्रय और अन्तरराज्यीय व्यापार एवं वाणिज्यिक अनुक्रम में विक्रय. उपाबंधों में जो व्यवस्था थी उसमें आगत कर चुकाने के संबंध में थी. इसी के साथ साथ उपखंड (6) में आपने संशोधन दिया हुआ है मद (तीन) के रुप में पुनर्क्रमांकित किया जाये इस प्रकार पुनर्क्रमांकित मद (तीन) के पहले निम्नलिखित मद अन्त:स्थापित की जाए.

          माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जो उपाबंध दिए रहते हैं जो आप संशोधन प्रस्तुत करते हैं. पीछे आपकी व्यवस्थाओं में क्या-क्या परिवर्तन किये गये यह भी दिया रहता है आप देखें पीछे जो उपाबंध हैं इनमें 14 की उपखंड (6) को  पुनर्क्रमांकित करने की बात की है यह उपाबंध इसमें पहले से ही उपस्थित नहीं है. उसके बाद आपने उसमें क्या किया है केन्द्रीय कर और केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम के अधीन देय केन्द्रीय कर के बराबर कि संबंध में दिया गया है. इसमें कोई चीज स्पष्ट नहीं हो रही है कि आप क्या लगाना चाहते हैं. व्यवस्था तो आपने की है कि किस चीज पर केन्द्रीय कर के बारे में कर वसूलना चाहते हैं. मूल अधिनियम की धारा 26 में आपने पहले उपधारा (1) के "केन्द्र सरकार या राज्य सरकार या किसी अधिसूचित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम" के स्थान पर, शब्द "व्यक्ति" स्थापित किया जाए; . इसका आपके द्वारा लोप कर दिया गया है. अगर कोई व्यक्ति सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम को केन्द्र सरकार को या राज्य सरकार को कोई माल सप्लाई करता है तो क्या पहले व्यक्ति और राज्य सरकार के बीच में जो व्यवस्था थी कोई भी व्यक्ति जो किसी व्यापारी को तथा केन्द्र सरकार या राज्य सरकार या सार्वजनिक जो होगा उसे क्रेता के रुप में नाम निर्दिष्ट किया जाय. अब इन सभी को हटाकर आपने व्यक्ति जोड़ दिया है तो क्या इनके बीच में कोई अनुसंबंध विक्रय संबंध क्रेता के संबंध नहीं रहेंगे क्या, आप इन पर कर की राशि नहीं लगायेंगे इसको स्पष्ट करें कि इसका क्या आशय है. व्यक्ति को क्रेता के रुप में आपने स्थापित किया है. दूसरा आपने (ख) को पूर्ण विराम के स्थान पर कोलन स्थापित किया जाये तत्पश्चात निम्नांकित परंतुक स्थापित किया है. आप देखें 26 (एक) (ख) तो है ही नहीं, इसमें (ख) पूर्व से ही नहीं है कौन सी जगह स्थापित कर रहे हो 26 की उपधारा (1) है उपधारा (2) है आप 26 की उपधारा (1) के (क) में और (ख) में यह स्पष्ट नहीं है आप देख लें. आपने कहा है कि परन्तु राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के वर्ग को इस उपधारा के प्रवर्तन से छूट दे सकेगी. अब इसमें यह निर्धारित कर दें कि आप किन-किन को छूट देना चाहते हैं या ऐसा तो नहीं है कि आप जिसे चाहें उसे छूट दे दें और इसी की उपधारा 2 में 2 प्रतिशत के स्‍थान पर 3 प्रतिशत बढ़ा रहे हैं. सभी पर आपको जो शास्ति की राशि है वह 2 प्रतिशत के स्‍थान पर 3 प्रतिशत कर दी है. ऐसी कई चीजें हैं. कतिपय मामलों में राजस्‍व को सुरक्षित करने की अनन्‍तिम कुर्की, इसमें आपने स्‍पष्‍ट नहीं किया, आपने कहा है कि जिसके नाम से संपत्ति है उसको तो कुर्क कर सकते हैं. जैसे मेरे नाम से संपत्ति है उसको तो कुर्क कर सकते हैं, लेकिन अगर किसी दूसरे पर भी देयता का भार है, जो संपत्ति दूसरे के नाम पर है तो आप उसको कैसे कुर्क करेंगे, इसमें आप किस तरह से व्‍यवस्‍था बनायेंगे, अगर वह डिनाय कर देगा कि मेरे पास कोई देयता नहीं है तो फिर आप किस तरह से कुर्क करने की व्‍यवस्‍था करेंगे.

          उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने बजट भाषण में जो उल्‍लेख किया था कि मूल अधिनियम की अनुसूची-1 में उन्‍हें जोड़ा जाना था, जिन्‍हें कर मुक्‍त किया है. आपने बायो इन्‍सेक्टिसाईड बायो पेस्टिसाईड, सूखे बेर, बेर पाऊडर, इलेक्‍ट्रानिक बेट्री, मिल्किंग मशीन, जैव-अनावश्‍यक सामग्री, यह तो आपने करमुक्‍त कर दिये. लेकिन आप अपने बजट भाषण को उठाकर देख लीजिये, आपने 38 कृषि यंत्रों को भी कर मुक्‍त किया है. इन 38 कृषि यंत्रों का इसमें हवाला क्‍यों नहीं किया, उनको क्‍यों नहीं इसमें जोड़ा, क्‍या ऐसी परिस्थितियां थी या फिर अलग से दोबारा प्रस्‍ताव लायेंगे या संशोधन लायेंगे. इसमें आपने लिखा है कि बजट भाषण के कारण जो आपने प्रस्‍तुत किया है उसके कारण यह संशोधन विधेयक प्रस्‍तुत किया है. बजट भाषण में आपने 38 कृषि यंत्रों को कर मुक्‍त किया जाना था लेकिन इन यंत्रों को आपने अनुक्रमांक 89 के पश्‍चात् 38 कृषि यंत्रों का भी नाम आना था, उनको आपने इसमें नहीं जोड़ा है.इन्‍हें कर मुक्‍त की सूची में नहीं जोड़ा है. इसके साथ साथ आपने जो गैस स्‍टोव और गैस गीजर के स्‍थान पर गैस स्‍टोव जिनमें आपने 14 प्रतिशत के स्‍थान पर 5 प्रतिशत किया था, उसमें गैस स्‍टोव को रखा गया है और गैस गीजर को आपने 5 प्रतिशत से 14 प्रतिशत तक कर बढ़ा दिया गया है.

          उपाध्‍यक्ष महोदय, इसी तरह से अनुक्रमांक 29 के सामने कालम- 2 में विद्यमान प्रविष्टि के स्‍थान पर कागज से बने कप, गिलास , प्‍लेंटे ,बाउल, थाली, कटोरी और दोना पत्‍ता, इसमें आपने प्‍लास्टिक पर कर बढ़ाया है. आपने प्‍लास्टिक की सारी चीजों पर तो कर बढ़ाया है. लेकिन माल की पैकिंग के लिये सभी प्रकार के बैग, थेले  ( एच डी पी ई/ एल डी पी ई/  पी पी से बुने हुए थेले बैग और पॉलिथिन बैग और थैलों को छोड़कर) तथा माल की पैकिंग के लिये प्‍लास्टिक से बनी वस्‍तुएं. तो आप इनको भी क्‍यों छोड़ रहे हैं. आपको इनको भी हतोत्‍साहित करना चाहिये. आपने पर्यावरण का नाम लिया तो पर्यावरण की दृष्टि से इसको हतोत्‍साहित करने की आवश्‍यकता है. आवश्‍यकता है, तो आप क्‍यों नहीं पूरे प्रदेश में बैन लगा दीजिये. इस पर कई राज्‍यों ने बैन लगाया है. इससे सभी लोग सहमत होंगे, निश्चित रूप से प्‍लास्टिक से पर्यावरण को हानि होती है. हम देखते हैं कि प्रदेश में हमारी गौमाता घुमते हुए मिल जाती हैं , वह प्‍लास्टिक खाती हैं और प्‍लास्टिक के ज्‍यादा उपयोग से और खाने से वह मर जाती हैं. यह भी बिल्‍कुल सत्‍य है.

          उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने सोया मिल्‍क, बायो फ्यूल आ‍धारित धुंआरहित स्‍टोव इन पर कर की वेट की राशि 5 प्रतिशत बढ़ायी है. बायसिकल जिसका विक्रय मूल्‍य (अधिकतम खुदरा मूल्‍य) दस हजार रूपये से अधिक हो उसके पुर्जे (जिसमें टायर ट्यूब तथा उपस्‍कर सम्मिलित हैं.) और आपने डायलिसिस मशीन, माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी लोग डायलिसिस के लिये वैसे ही परेशान हो रहे हैं. आप उसको तो कर मुक्‍त कर दें, आप जो अस्‍पतालों में स्‍थापित करेंगे, इसको तो कम से कम करमुक्‍त होना चाहिये. आपने भारी मालवाहक यान जिनका कुल वजन 12000 किलोग्राम से अधिक हो. उस पर 14 प्रतिशत टैक्‍स लगाया गया है. इसमें हमे कोई आपत्ति नहीं है.

          डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- उपाध्‍यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश में डायलिसिस मशीन पूरे प्रदेश में नि:शुल्‍क है, आपको करवानी है ?

          श्री रामनिवास रावत :- क्‍या आपकी इच्‍छा है, आपकी यही सदभावना हमारे लिये है.

          डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- मैंने किसी की करवाने के लिये कहा है.

          श्री रामनिवास रावत :- आपकी यही सदभावना है, कम से कम समझ में तो आया कि आप क्‍या सोच रहे हैं, आप क्‍या चाहते हैं. 

          उपाध्‍यक्ष महोदय :- स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री जी आज आप फंस गये.

          श्री बाला बच्‍चन :- उपाध्‍यक्ष महोदय, वह एकदम से अचानक खड़े हो गये. उनको ध्‍यान इस तरफ नहीं था इसलिये फंस गये.

     श्री रामनिवास रावत -  माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत वेट संशोधन विधेयक में मेरे द्वारा जो कुछ बातें उठाई गई है उन्हें जरूर स्पष्ट करने की कृपा करेंगे और जो 38 कृषि यंत्रों को कर मुक्त किया गया है उनकी भी सूची इसमें प्रस्तुत या सम्मिलित करने की कृपा करेंगे मेरा यही निवेदन है क्योंकि आपके बजट भाषण में 38 कृषि यंत्रों को करमुक्त करने की बात कही गई थी.

          श्री बाला बच्चन(राजपुर) - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं मध्यप्रदेश वेट संशोधन विधेयक का विरोध करता हूं उसका कारण यह है कि सरकार एक तरफ तो कर निर्धारण अधिकारी जो हैं वह नियमों के विपरीत आगत कर छूट दे रहे हैं. आप उन पर कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे हैं दूसरा आप कर वसूलने के लिये जो उपधारा लाये हैं उसका मैं उल्लेख करना चाहता हूं कि इस संशोधन की कंडिका 3 के उपखण्ड 6 की मद-2 में नवीन रूप से उपधारा स्थापित की जा रही है इसके लिये आप संशोधन विधेयक लाये हैं. मेरा मंत्री जी आपसे यह आग्रह है कि एक तरफ तो आगत कर छूट अधिकारियों के द्वारा दी जा रही है उन पर आप कार्यवाही नहीं कर रहे हैं दूसरी तरफ आप कर वसूलने के लिये उपधारा स्थापित कर रहे हैं तो मंत्री जी इस पर आप विचार करें. आगत कर रिबेट के प्रकरणों में सीएजी ने वर्ष 2013-14,2014-15 में जो आपत्तियां ली थीं उन आपत्तियों का आज तक निराकरण नहीं हुआ है. वह भी इसी से जु ड़ा हुआ है. आडिट सोचता है और वह रिपोर्ट में उल्लेख करता है हम उसको पढ़कर उसका उल्लेख न हीं करेंगे कम से कम सरकारी तंत्र को और वित्त मंत्री जी को यह काम करना चाहिये वह काम नहीं कर रहे हैं. उस पर एक्शन लेना चाहिये और उनका निराकरण होना चाहिये. इसी तरह वर्ष 2014-15 की सीएजी की रिपोर्ट की कंडिका 2.2.17.3 में जो केन्द्रीय विक्रय कर अधिनियम की धारा 6(2) के अंतर्गत 10 करोड़ रुपये कम का करारोपण किया है. दस करोड़ रुपये कम का करारोपण हुआ है तो आप इससे संबंधित कार्यवाही क्यों नहीं करते.कम से कम आप अपने विभाग में इसको भी देखें जिससे इसमें  सुधार हो सके और इस पर कसावट आ सके.

          श्री जयंत मलैया - उपाध्यक्ष महोदय, जो मैंने पिछली बार सीएजी के बारे में निवेदन किया था इस बार नहीं करूंगा. आपके पब्लिक अकाउंट्स कमेटी के चेयरमेन हैं उनके पास यह मामला आया होगा उनको बोलें कि जल्दी से उसको भेजकर विधान सभा में भिजवा दें.उसका हम निर्णय कर लेंगे.

          श्री बाला बच्चन - ठीक. मेरा यह आग्रह है चाहे वह हमारी पार्टी के सभापति हों लेकिन कम से कम आडिट के माध्यम से हमारी जानकारी में या विभाग की जानकारी में इस तरह के जो मामले आते हैं प्रकरण आते  हैं तो समय पर उनका निराकरण भी होना चाहिये और शुल्क जो कम वसूला जाता है तो कहीं न कहीं हमारी कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिन्ह लगता है. इससे पहले वाले संशोधन विधेयक पर जो मैंने बात कही थी उसको मैं दोहराना नहीं चाहता कि आपकी पार्टी ने देश की संसद में कितना हंगामा किया था और जब तक तत्कालीन मंत्री ए.राजा जी का इस्तीफा नहीं हुआ  था तब तक हंगामा चलता रहा था और उनके इस्तीफे के बाद ही संसद चली थी मेरी यह जानकारी में है.

          उपाध्यक्ष महोदय - सीएजी रिपोर्ट पब्लिक डाक्यूमेंट है. सभापति के परीक्षण के पहले उल्लेख किया जा सकता है.

          श्री बाला बच्चन - जी उपाध्यक्ष महोदय तो जो आडिट सोचता है और आडिट ने जिस तरफ ध्यान दिलाया हमने उसको पढ़ाया और  मैंने जिन कंडिकाओं का उल्लेख किया है और करोड़ों रुपये जो वसूले जाना चाहिये था और जो नहीं वसूले गये हैं तो माननीय मंत्री जी जब आप बोलें तो इन चीजों का भी जवाब दें दूसरा आप अपने विभाग में इस बात का भी ध्यान रखें क्योंकि बहुत सारी सीएजी की कंडिकाओं का उल्लेख करते हुए मैंने आपका ध्यान आकर्षित कराया है आप जो संशोधन विधेयक लाये हैं उसमें मुझे और आदरणीय साथी रामनिवास रावत जी को जो कहना था वह हमने कहा है. आप इसी के साथ हमारे सुझावों को उसमें शामिल करें और वैसा संशोधन विधेयक अगर पारित कराते हैं तो मैं समझता हूं प्रदेश के हित में ज्यादा अच्छा होगा.धन्यवाद.

          डॉ.गोविन्द सिंह (लहार)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय वित्तमंत्री जी ने अपने बजट भाषण में कहा था जैसे कि बेर के पाऊडर को कर मुक्त किया है मैंने उस दिन भी पूछा था और आज भी पूछ रहा हूं कि बेर का पाऊडर मंगाने के लिये भोपाल में कई जगहों पर पूछा है, लेकिन बेर का पाऊडर कहीं भी नहीं मिल रहा है, क्या आपके गांव में मिलेगा.

          उपाध्यक्ष महोदय--बेर के पाऊडर का प्रयोग करना स्वास्थ्य के लिये अच्छा है. (हंसी)

          डॉ.गोविन्द सिंह--पुराने समय में बुंदेलखण्ड में बेर का हिस्सा लगता था.(हंसी)

          उपाध्यक्ष महोदय--इसके बारे में स्वास्थ्य मंत्री जी बताएंगे. (हंसी)

          डॉ.नरोत्तम मिश्र--बेर का पाऊडर कई उपयोगों में आता है इनको किसमें जरूरत है बता दें. (हंसी)

          डॉ.गोविन्द सिंह--सुबह को जब नाश्ता करते थे बेर खाकर के भी नाश्ता हो जाता था.

          उपाध्यक्ष महोदय--डॉक्टर साहब प्रिस्क्रप्शन स्वास्थ्य मंत्री जी से बनवा लीजिये.

          डॉ.गोविन्द सिंह--उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि बेर का पाऊडर लाकर के एकाध बार भेंट कर दें कम से कम देख लें कि किस कम्पनी का है और कहां पर मिलता है. इसमें टैक्स माफ किया है या कम किया है. जैसा कि रावत जी ने भी बताया उसमें तो पहले ही टैक्स नहीं लगता था. एक और निवेदन करना चाहता हूं कि स्वर्णकार समाज है, सर्राफा व्यापारी वह एक महीने से अधिक समय से पूरे प्रदेश में हड़ताल कर रहे हैं आगे अप्रैल माह में आने वाली शादियां हैं उनके प्रति संकट खड़ा हो गया है. कोई भी सर्राफा व्यापारी छोटा सा भी जेवर बनाने के लिये तैयार नहीं है भारत सरकार ने उन पर एक्ससाईज ड्यूटी लगा दी है आपने इसमें कहा है कि माफ किया है, अब ऐसे माफ किया है जैसे कि घन्टा-मंजीरा इनमें तो माफ कर दिया है. जो घन्टी बजती है पीतल की उसमें तो माफ कर दिया है, लेकिन सोने एवं चांदी पर आपने माफ नहीं किया है इधर तो आप महिलाओं की पैरवी कर रहे हैं हमने बहुओं एवं बेटियों के लिये कुछ किया है, जेवर पुरूष तो पहिनते ही नहीं हैं पुरूष तो एकाध सोने की अंगूठी पहिन लेता है, लेकिन गहने करधनी, हार, मंगलसूत्र यह सब महिलाओं को जरूरत है. आगे अप्रैल महीने में पूरे प्रदेश में जबरदस्त शादियों का सीजन है तो हमारा आपसे अनुरोध है कि कम से कम अभी आप बजट का भाषण देते समय अगर महिलाओं के इतने आप हितैषी हैं तथा उनके प्रति सद्भावना है, उनकी समस्याओं को देखते हुए सोने एवं चांदी के मंगलसूत्र हैं तथा दूसरे कई जेवरात हैं उन पर आप जो टैक्स लगा रहे हैं उससे मुक्त करें. इसके साथ ही साथ कई चीजें हैं मैं थोड़ी बातें कहकर अपनी बात खत्म करना चाहता हूं जिन पर आपने टैक्स लगाया है उनको माफ करें.

          आपने मिलिट्री में कहा कि माफ नहीं करेंगे, लेकिन जो भारतीय सेना है सबकी रक्षा करती है उनको गाड़ी खरीदने पर टैक्स नहीं लगता है, उस पर भी आपने टैक्स लगा दिया है.

          श्री जयंत मलैया--उसमें घटाया है.

          डॉ.गोविन्द सिंह--इसमें उल्लेख नहीं है. लेकिन कई वस्तुओं पर टैक्स 5 प्रतिशत से 14 प्रतिशत कर दिया है. 5 प्रतिशत टैक्स ही बहुत है जैसे सेल्स टैक्स, सर्विस टैक्स तमाम टैक्स तो भारत सरकार ने लाद दिये हैं. आपने पेट्रोल एवं डीजल पर एक महीने पहले टैक्स लगा दिया है आखिर आप प्रदेश की जनता को क्यों बर्बाद करना चाहते हैं कम से कम जनता को बने रहने दें.

          उपाध्यक्ष महोदय--इसमें उपाध्यक्ष महोदय, लिखा है कि छुरी, चमच, कांटा, कप गिलास, प्लेट, पोलीथिन, आपने इन पर 5 से 14 प्रतिशत टैक्स बढ़ा दिया है. तो क्या आप छुरी भी नहीं जानते हैं, जिसकी रोजाना जरूरत पड़ती है. अब थाली पर टैक्स बढ़ा दिया है, अब खाना हाथ में तो नहीं खा सकते हैं, मलेया जी के ठीक है हाथ में खाना है इनके धर्म में भी लिखा है यह खा लेते होंगे. (हंसी)

          जिन पर आप टैक्स बढ़ा रहे हैं उनको आप वापस लें यही हमारी मांग है. मैं बढ़े हुए टैक्स का विरोध करता हूं जिन पर आपने टैक्स कम किया है उसके लिये आपका धन्यवाद.

          उपाध्यक्ष महोदय--डॉ.साहब आपके भाषण पर मनोरंजन कर और लगना चाहिये (हंसी)

          वित्‍त मंत्री(श्री जयंत मलैया)- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2016-17 का विधानसभा में बजट प्रस्‍तुत करते समय कराधान प्रस्‍तावों से संबंधित मेरे द्वारा जो घोषणाएं की गई थीं,  उनके क्रियान्‍वयन हेतु यह संशोधन विधेयक प्रस्‍तुत किया गया है ।  संशोधित विधेयक द्वारा धारा 9 में परन्‍तुक जोड़ा गया है,  जिसके द्वारा राज्‍य सरकार अनुसूची 2 के भाग 3 क में वर्णित किसी वस्‍तु पर वजन,  मात्रा अथवा इकाई के आधार पर लगा सकेगी ।

          उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं यहां यह निवेदन करना चाहता हूं,  आदरणीय रावत साहब ने यह बात कही थी कि किस प्रकार से ले रहे हैं,  मेरा निवेदन  है,  अभी तो हम विधानसभा से अधिकार ले रहे हैं कि हम किसी भी चीज के ऊपर,  वजन के ऊपर,  वॉल्‍यूम के ऊपर लगाने का अधिकार,  यह अधिकार हमें विधानसभा से मिल जाएगा,  तब इसके बाद आगे कभी भी हम इसका जब चाहे उपयोग कर सकते हैं,  इसके लिए किया है।   दूसरी चीज उन्‍होंने एक बात कही कि मेरे द्वारा बजट भाषण में कहा गया था कि 38 कृषि यंत्रों को कर मुक्‍त करेंगे ।

उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं पूरे बजट का उल्‍लेख करना चाहता हूं कि मैंने क्‍या कहा था और आपने कैसे इसको यहां पर ट्विष्‍ट किया है,  हमारी सरकार का उद्देश्‍य रहा है कि कृषि को लाभ का धंधा बनाया जाए,  इस हेतु पूर्व में 38 कृषि यंत्रों को कर मुक्‍त किया गया है ।

          श्री रामनिवास रावत-  इसको लिखने की क्‍या जरूरत थी ।

          श्री जयंत मलैया-  हमारी मर्जी, आप कैसे बोल सकते हो कि हम अपने बजट भाषण में क्‍या बोलेंगे ।  मुझे मालूम है कि अपने बजट भाषण में  क्‍या कहना है,  इसके साथ मैंने यह भी कहा था कि  जैविक कीट नाशक एवं दूध दोहने की मशीन को भी कर मुक्‍त किया जाना प्रस्‍तावित है ।

          उपाध्‍यक्ष महोदय-  रावत जी,  एक जुमला प्रचलित है,  मेरी मर्जी । (हंसी)

          डॉ नरोत्‍तम मिश्र-  मैं चाहे ये करूं,  मैं चाहे वो करूं,  मेरी मर्जी (हंसी) 

          श्री जयंत मलैया-  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,  विधेयक की धारा 14 में संशोधन के द्वारा अभ्‍यास पुस्तिका,  ग्राफ बुक,  ड्राइंग बुक के निर्माताओं को होने वाली कठिनाईयों को दूर करते हुए उनके द्वारा खरीदे गए,  कर चुके कागज पर अब आईटीआर प्राप्‍त हो सकेगी, यह आईटीआर 2 प्रतिशत की राशि को रोककर 3 प्रतिशत की दर से की जाएगी, इससे स्‍थानीय व्‍यापारियों के विक्रय में वृद्वि होगी,  इसी प्रकार से इसकी धारा 18 में संशोधन किया गया है,  भुगतान समय पर सुनिश्चित हो,  इस हेतु यह प्रावधान है कि यदि देयकर 3 माह से अधिक से विलम्‍ब किया जाता है तो ऐसी स्थिति में ब्‍याज की दर डेढ़ प्रतिशत के स्‍थान पर 2 प्रतिशत प्रतिमाह होगी, 3 माह के विलम्‍ब पर वर्तमान दर 1.5 प्रतिशत प्रतिमाह ही रहेगी ।

          माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अभी हमारे यहां जो टैक्‍स डिडेक्‍शन सोर्स है उसकी बड़ी दिक्‍कत होती थी,  इसके लिए हमने धारा 26 एक में राज्‍य सरकार एवं केन्‍द्रीय सरकार तथा अधिसूचित शासकीय उपक्रमों को बेचे जाने वाले माल पर,  इन विभागों,  उपक्रमों द्वारा स्‍त्रोत पर कटौती करना अनिवार्य है,  इसका दायरा बढ़ाते हुए अब मान्‍यता प्राप्‍त विश्‍वविद्यालय, चिकित्‍सा परिषद से मान्‍यता प्राप्‍त चिकित्‍सा विश्‍वविद्यालय, दंत चिकित्‍सा परिषद से मान्‍यता प्राप्‍त दन्‍त चिकित्‍सालय, विश्‍वविद्यालय, नगरीय निकाय,  ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत,  जिला पंचायत को भी कटौती करने के लिए संशोधन विधेयक द्वारा अधिकृत किया गया है,  इसके साथ ही ठेकेदार पंजीयन प्राप्‍त कर व्‍यापार करें,  इस हेतु अपंजीकृत ठेकेदारों के लिए टीडीएस की दर 2 प्रतिशत के स्‍थान पर 3 प्रतिशत की गई है,  जबकि पंजीकृत ठेकेदारों के लिए यह 2 प्रतिशत ही होगी,  विधेयक में नवीन धारा 28 क जोड़ी जा रही है,  जिसके तहत राजस्‍व की सुरक्षा करने के उद्देश्‍य से छापे अथवा अन्‍य विभागीय कार्यवाही के दौरान यदि कोई राशि प्रस्‍तावित हो और अन्‍य व्‍यवसायी को,  छापे वाले व्‍यवसायी को,  कोई राशि देय हो तो राशि को विभाग से रोका जा सकेगा,  किन्‍तु ऐसी कार्यवाही अधिकतम 2 वर्ष के लिए ही होगी,  यह अधिकार उपायुक्‍त स्‍तर के नीचे के अधिकारी को नहीं होगा,  वर्तमान में पंजीकृत व्‍यावसायियों को एक पक्षीय कर निर्धारण आदेश होने पर धारा 34 में प्रकरण खोले जाने की व्‍यवस्‍था है । संशोधन विधेयक द्वारा अब यह व्‍यवस्‍था समस्‍त व्‍यावसायियों के एक पक्षीय कर निर्धारण हेतु ही लागू की जा रही है,  ऐसे प्रकरणों के निराकरण हेतु समयावधि अभी नियत नहीं है,  इस हेतु 7 दिवस की समय सीमा भी अब निश्‍चित की जा रही है,  जैसा कि आदरणीय गोविन्‍द सिंह जी ने कहा कि जो देश की सीमा पर तैनात हमारे सैनिक हैं,जवान हैं या सीमा सुरक्षा बल के अधिकारी एवं जवान हैं. वे हमारे देश की एकता एवं अखण्‍डता को मजबूत बनाये रखने के लिए महत्‍वपूर्ण योगदान देते हैं. उनके लिये हमने टैक्‍स बढ़ाया नहीं है, घटाया है. इसके लिए केन्‍टीन स्‍टोर डिपार्टमेन्‍ट से कार खरीदी पर भी रियायती दर लागू होगी. यह व्‍यवस्‍था, सुविधा सी.एस.डी. के अनुरूप ही केन्‍द्रीय पुलिस बल व केन्‍टीन के माध्‍यम से बी.एस.एफ. के जवानों एवं अधिकारियों को दी जा रही है. इसके अतिरिक्‍त जैविक कीटनाशक, दूध दोहने की मशीन, सूखे बेर एवं बेर चूर्ण, बैटरी चलित वाहन, बायो ग्रेडेबल सामग्री से बने बैग्‍स तथा लिफाफों को भी कर मुक्‍त किया जा रहा है.

          उपाध्‍यक्ष महोदय, सोने-चांदी के बारे में बात की जा रही थी. मैं यह निवेदन करना चाहता हूँ, जो अभी चल रहा है. उसका न तो इस विधेयक से एवं राज्‍य सरकार से कोई लेना-देना है. हमारी सरकार ने सोने पर अर्थात् ज्‍वैलरी पर सिर्फ एक प्रतिशत टैक्‍स लगाया है, उस पर एन्‍ट्री टैक्‍स कुछ नहीं है और जहां तक आपने मंगल-सूत्र की बात की थी तो मंगल-सूत्र टैक्‍स फ्री है. मंगल-सूत्र के विक्रय के ऊपर, मैंने निवेदन किया है. धुंआ रहित गैस स्‍टोव तथा इन्‍डक्‍शन के टॉप के पुर्जे, डायलिसिस मशीन, कन्‍ज्‍यूमैबल सोया, मिल्‍क पर कर की दर घटाकर 5 प्रतिशत की जा रही है. माननीय रावत जी, जो आपने डायलिसिस की बात की थी, वह 14 प्रतिशत नहीं है, हम डायलिसिस की मशीन पर 5 प्रतिशत लगा रहे हैं. जो इन्‍डस्ट्रियल परपज़ में रॉ मटेरियल की पैकिंग के लिये छोड़ना जरूरी है, इसलिए उसको छोड़ा भी गया है.

          उपाध्‍यक्ष महोदय, पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से प्‍लास्टिक से बनी थैली, कप, गिलास, प्‍लेट, कटोरी आदि पर कर की दर बढ़ाकर 14 प्रतिशत की गई है. उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से एवं माननीय सदस्‍यों से अनुरोध करना चाहता हूँ कि हमारे संशोधन विधेयक को सर्वानुमति से पारित कराने में सहयोग करें.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश वेट (संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाये.

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

 

          अब विधेयक के खण्‍डों पर विचार होगा.

          श्री रामनिवास रावत (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र को देखते हुए) - आपने, क्‍या हां विभाग भी स्‍थापित कर दिया है ? अकेले हां बोलते हो. हां विभाग के मंत्री हो.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - असल में हमारी पार्टी में कोई गुट नहीं है. सब एकमत हैं. जो एक बोलता है तो सब माना जाता है. आपके यहां बड़ी दिक्‍कत है. गोविन्‍द सिंह जी, सिंधिया जी को नेता नहीं मानते हैं. आप दिग्विजय सिंह जी को नहीं मानते हैं.

          डॉ. गोविन्‍द सिंह - जब हम खुद नेता हैं तो हम क्‍यों मानेंगे.

          डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - क्‍या आप सिंधिया जी को नेता मानते हैं ? हां या न जवाब दीजिये.

          डॉ. गोविन्‍द सिंह - सिंधिया जी देश के नेता हैं एवं आपके भी हैं और आप भी उनके समर्थक हैं. 

          उपाध्‍यक्ष महोदय - खण्‍ड 3 में एक संशोधन है मंत्री जी.

 

                   डॉ. गोविन्द सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, यह आप कौन से विधेयक को पास करवा रहे हैं.  यह तो परंपरा के विपरीत है.

                   श्री रामनिवास रावत -- उपाध्यक्ष महोदय,   मंत्री जी ने  क्या यह संशोधन  बाद में प्रस्तुत किया है.

                   उपाध्यक्ष महोदय --  नहीं, संशोधन तो वे प्रस्तुत कर चुके हैं.

                   डॉ. गोविन्द सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, पहले तो खण्ड पारित होते हैं, उसके बाद विधेयक पारित होता है.   पहले विधेयक पारित  हो रहा है, फिर खण्ड पारित  हो रहे हैं.  क्यों मंत्री जी बतायें.

                   उपाध्यक्ष महोदय --  प्रश्न यह है कि यथासंशोधित खण्ड 3 इस विधेयक का अंग बने.

                             यथासंशोधित खण्ड 3 विधेयक का अंग बना.

                   डॉ. गोविन्द सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, यह  कौन सा विधेयक है. 

                   श्री रामनिवास रावत -- उपाध्यक्ष महोदय,  इसी विधेयक का चल रहा है, तो  उन्होंने क्या संशोधन दोबारा दिया है. विधेयक प्रस्तुत करने के बाद जो संशोधन दिया है, तो उसकी हमको कॉपी नहीं मिली.

                   डॉ. गोविन्द सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय,  पहले विधेयक  पारित होगा, तो फिर खण्ड काहे के.  किस नियम प्रक्रिया के  तहत यह पास हो रहे हैं.  जब पहले विधेयक पारित हो चुका है,  तो विधेयक पारित होने के बाद क्या खण्ड आयेंगे.

                   श्री रामनिवास रावत -- उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश वेट संशोधन अधिनियम  प्रस्तुत होने के बाद सरकार द्वारा दोबारा  संशोधन प्रस्तुत किया गया है,  उसकी हमको  कॉपी नहीं मिली.

                   उपाध्यक्ष महोदय --   वह नियमानुसार ही हो रहा है,   वह बांटा गया है.

                   श्री रामनिवास रावत -- उपाध्यक्ष महोदय,    हमको कॉपी नहीं मिली.  न तो हमारे  खाने में  मिली, न हमें प्राप्त  हुई.  न हमारे उप नेता प्रतिपक्ष  को प्राप्त हुई, न गोविन्द सिंह जी को प्राप्त हुई,  उसकी कॉपी किसी को नहीं मिली.

                   उपाध्यक्ष महोदय --   यह आप सब के पिजन होल में है.  यह बांटा गया है. आप लोगों ने न देखा होगा.

                   श्री रामनिवास रावत -- उपाध्यक्ष महोदय,    हमने सुबह ही देखा है.  सुबह तक तो थी नहीं.  यह आपत्तिजनक है,  एक दिन पहले  संशोधन की कॉपी हमको  मिलना  चाहिये और हमें अभी तक  कॉपी नहीं मिली  और संशोधन  अब प्रस्तुत हो रहा है.  हम चर्चा कर रहे  थे यथाप्रस्तावित  मध्यप्रदेश  वेट संशोधन  विधेयक,2016 पर.

                   डॉ. गोविन्द सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, पहले खण्ड पारित होने चाहिये थे,  उसके बाद में विधेयक पारित होता है.

                   उपाध्यक्ष महोदय --   यह संशोधन  28 मार्च,2016, परसों का बंटा हुआ है.  आपके पिजन होल  में है,  शायद आपने ठीक से देखा नहीं.

                   श्री रामनिवास रावत -- उपाध्यक्ष महोदय,    डेट कोई भी डली हो, लेकिन नहीं मिला.

                   डॉ. गोविन्द सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, प्रश्न इस बात का है कि  कोई भी विधेयक के खण्ड होते हैं, तो पहले खण्डों पर चर्चा होती है, खण्डों के बाद  फिर विधेयक आता है.

                   उपाध्यक्ष महोदय --   डॉ. साहब,  पहले  संशोधन पर चर्चा होती है.

                   डॉ. गोविन्द सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, लेकिन आज उलटा क्यों हो रहा है.

                   श्री रामनिवास रावत -- उपाध्यक्ष महोदय, पूरा अधिनियम उन्होंने प्रस्तुत किया है. तो क्या यह पहले नहीं देखते.  पहले ही देखना चाहिये कि आज प्रस्तुत कर रहे हैं,  फिर कल  संशोधन  प्रस्तुत कर रहे हैं.  यह सरकार की स्थिति है.

                   डॉ. गोविन्द सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, अधिनियम तो पारित हो चुका. यह पाइंट ऑफ आर्डर है.

                   उपाध्यक्ष महोदय -- डॉ. साहब,   नियम अनुसार ही हो रहा है. आपको गलत फहमी है, नियमानुसार ही हो रहा है.

                   डॉ. गोविन्द सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, आप नियम बता दें.  मैं आपसे प्रार्थना करता हूं  कि यह  किस नियम के तहत है.

                   उपाध्यक्ष महोदय --   प्रश्न यह है कि खण्ड 2,4,5,6,7,8 एवं 9 इस विधेयक का अंग बने.

                             खण्ड 2,4,5,6,7,8 एवं 9 इस विधेयक का अंग बने.

                   डॉ. गोविन्द सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, आप न्याय की कुर्सी पर  बैठे हैं, हम आपसे न्याय  मांग रहे हैं.  आप हमें यह बता दें  कि किस नियम के तहत  पहले विधेयक पारित हो गया, तो  उसके बाद  खण्डों  की चर्चा कैसे होगी.

                   उपाध्यक्ष महोदय --   प्रश्न यह है कि खण्ड 1 इस विधेयक का अंग बने.

                                                खण्ड 1 इस विधेयक का अंग बना.

                   प्रश्न यह है कि पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने. 

                   पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

 

 

 

बहिर्गमन

        इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्य गण  द्वारा  सरकार द्वारा मध्यप्रदेश वेट (संशोधन) विधेयक,2016 के खण्ड 3 में संशोधन  प्रस्तुत करने के विरोध में सदन से बहिर्गमन.

 

 

                   डॉ. गोविन्द सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, यह तो   पूरी तरह से मनमानी एवं तानाशाही है. पूरी तानाशाही  पूर्वक  विधान सभा चलाई जा रही है,  इसलिये   इन सब खण्डों का  मैं विरोध करता हूं और सरकार की तानाशाही के  विरोध में   हमारी   कांग्रेस पार्टी  सदन से बहिर्गमन कर रही है.  हम सब बहिर्गमन करते हैं.

                   श्री बाला बच्चन --  उपाध्यक्ष महोदय,  हम सब इसके विरोध में सदन से बहिर्गमन करते हैं.

                   (श्री बाला बच्चन, उप नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों  द्वारा  सरकार द्वारा मध्यप्रदेश वेट (संशोधन) विधेयक,2016 के खण्ड 3 में संशोधन  प्रस्तुत करने के विरोध में सदन से बहिर्गमन किया गया.)

 

 

 

 

 

शासकीय विधि विषयक कार्य (क्रमशः)

                   श्री जयंत मलैया -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश वेट (संशोधन) विधेयक,2016 पारित किया जाए.

                   उपाध्यक्ष महोदय -- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश वेट (संशोधन) विधेयक,2016 पारित किया जाए.

                   प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश  वेट (संशोधन) विधेयक,2016 पारित किया जाए.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

विधेयक पारित हुआ.

                   विधान सभा की कार्यवाही  गुरुवार, दिनांक 31 मार्च, 2016 के प्रातः 11.00 बजे  तक के लिये स्थगित.

                        अपराह्न 4.29 बजे विधान सभा की कार्यवाही  गुरुवार, दिनाँक  31 मार्च, 2016 (11 चैत्र, शक संवत् 1938) के प्रात: 11.00 बजे तक के लिए स्थगित की गई.

 

 

भोपाल,                                                                                           भगवानदेव ईसरानी

दिनांक : 30 मार्च, 2016                                                          प्रमुख सचिव,

                                                                                                      मध्यप्रदेश विधान सभा