मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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        चतुर्दश विधान सभा                                                                                                दशम् सत्र

 

 

फरवरी-अप्रैल, 2016 सत्र

 

सोमवार, दिनांक 29 फरवरी, 2016

 

(10, फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

 

           [खण्ड-  10 ]                                                                                                        [अंक- 5 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

सोमवार, दिनांक 29 फरवरी, 2016

 

( 10 फाल्‍गुन, शक संवत्‌ 1937 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 10.33 बजे समवेत हुई.

 

{उपाध्यक्ष महोदय ( डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह ) पीठासीन हुए.}

 

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

शासकीय बंगलों का आवंटन

1. ( *क्र. 1562 ) श्री सुदर्शन गुप्‍ता (आर्य) : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या इंदौर जिले में लोक निर्माण विभाग के कई शासकीय बंगले व मकान संबंधित अधिकारी/कर्मचारियों के स्‍थानांतरण होने के बाद भी अधिकारी/ कर्मचारी के कब्‍जे में हैं? यदि हाँ, तो संबंधित अधिकारी/कर्मचारी के नाम सहित सूची उपलब्‍ध करावें? (ख) प्रश्‍न (क) अनुसार शासकीय बंगले व मकानों को संबंधित शासन सेवक से खाली कराने हेतु विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की जा रही है? (ग) क्‍या इंदौर में विभाग द्वारा शासकीय सेवकों के अलावा अन्‍य लोगों को भी शासकीय आवास आवंटित किये हैं? यदि हाँ, तो क्‍यों, कारण सहित संबंधित के नाम, पते सहित सूची उपलब्‍ध करावें?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) जी हाँ। शेष जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार(ग) जी हाँ। जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब अनुसार

परिशिष्ट - ''एक''

 

          श्री सुदर्शन गुप्ता---  माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी ने जो जवाब दिया है उससे संतुष्ट नहीं हूं . मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि बंगले आवंटन के संबंध में जो शासन के नियम व मापदंड हैं उसका पालन नहीं हो पा रहा है तो क्या मंत्री जी उसका पालन कराएंगे  और अनेक पूर्व मंत्री, अधिकारी, स्थानांतरित अधिकारी , रिटायर्ड अधिकारी वर्षों से  उन बंगलों पर कब्जा करके बैठे हुए हैं, क्या उनसे बंगले खाली कराएंगे, यह मेरा प्रश्न है.

          श्री  सरताज सिंह---  माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह सही है कि तीन अधिकारी, जिनका यहाँ से स्थानांतरण हो चुका है अभी उन्होंने बंगला खाली नहीं किया है . एक तो पीनल रेंट उनसे लिया जाता है, वह भी लिया जा रहा है और उनको नोटिस दिया गया है, खाली करने के लिए कार्यवाही चल रही है तथा 3 बंगले ऐसे हैं जो संस्थाओं को आवंटित हैं. इसमें से 2, 2001 में आवंटित हैं और 1, 2008 में, एक महात्मा गाँधी बाल संस्थान के नाम पर है और एक अध्यक्ष, मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति, जनजाति, कर्मचारी संघ के नाम पर है. उपाध्यक्ष महोदय, जो जानकारी ली गई है. वास्तव में इन संस्थाओं द्वारा उन बंगलों का कोई उपयोग नहीं हो रहा है इसलिए इन बंगलों को भी खाली कराना आवश्यक है और इसके लिए नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी.

          श्री सुदर्शन गुप्ता(आर्य)--  माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं इन्दौर सहित पूरे प्रदेश की

बात बोल रहा हूँ. पूरे प्रदेश में भी कई जगहों पर ऐसे कब्जे किए हुए हैं, वे भी खाली होने चाहिए.

          उपाध्यक्ष महोदय--  इस प्रश्न में आप इन्दौर तक ही सीमित रहें.

          श्री सरताज सिंह--  आपने इन्दौर के संबंध में जानकारी मांगी है उसी का मैंने जवाब दिया है. अगर मध्यप्रदेश की बात करते तो उसकी जानकारी इकट्ठा करना पड़ेगी.

          श्री सुदर्शन गुप्ता(आर्य)--  उपाध्यक्ष महोदय, मेरा यह भी प्रश्न था कि क्या ये जो पूरे सरकार के नियम और मापदंड हैं, इनका इन्दौर सहित पूरे मध्यप्रदेश में पालन कराया जाएगा?

          श्री सरताज सिंह--  उपाध्यक्ष महोदय, अक्सर यह स्थिति निर्मित होती है कि किसी का ट्रांसफर हो जाता है तो वह बंगला नहीं छोड़ता है और उन पर कार्यवाही की जाती है. पूरे मध्यप्रदेश की क्या स्थिति है यह तो जानकारी लेने के बाद ही बता पाऊँगा. अभी इन्दौर के संबंध में प्रश्न पूछा गया उसका उत्तर मैंने दिया है.

          श्री सुदर्शन गुप्ता(आर्य)--  उपाध्यक्ष महोदय, जो वर्षों से बैठे हैं उन पर तो कार्यवाही करें.

          उपाध्यक्ष महोदय--  उन्होंने कहा है कार्यवाही करेंगे.

          श्री सुदर्शन गुप्ता(आर्य)--  ठीक है. धन्यवाद.

विकास खण्‍ड ढीमरखेड़ा के अंतर्गत मार्ग निर्माण

2. ( *क्र. 232 ) श्री मोती कश्यप : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता विधायक ने अपने पत्र दिनांक 28.09.2015 को मान. मंत्री जी को वि.स.क्षे. बड़वारा के वि.खं. ढीमरखेड़ा के किसी मार्ग को बजट में सम्मिलित किये जाने हेतु लेख किया है? (ख) क्‍या प्रश्‍नांश (क) मार्ग का प्राक्‍कलन वर्ष 2015 में मुख्‍य अभियन्‍ता, जबलपुर के द्वारा प्रमुख अभियन्‍ता को प्रस्‍तुत किया जा चुका है?   (ग) प्रश्‍नांश (क) मार्ग का निर्माण कितने कि.मी. का है और वह जिला कटनी से     किन-किन जिलों को जोड़ेगा? (घ) कटनी से शाहपुरा (जि. डिण्‍डोरी) व्‍हाया जबलपुर एवं प्रश्‍नांश (क) मार्ग द्वारा कटनी से शाहपुरा की दूरी कितनी बनती है और कितनी बचत होगी और उससे कटनी जिले को क्‍या लाभ होना संभावित है?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। (ग) मार्ग का निर्माण 13.02 कि.मी. का है तथा यह जिला कटनी से उमरिया एवं डिण्‍डौरी जिलों को जोड़ेगा। (घ) कटनी से शाहपुरा जिला-डिण्‍डौरी व्‍हाया जबलपुर की दूरी लगभग 181.00 कि.मी. एवं प्रश्‍नांश ''में वर्णित मार्ग द्वारा कटनी से शाहपुरा की दूरी लगभग 138.00 कि.मी. है। इस मार्ग के निर्माण से 43.00 कि.मी. की बचत होगी तथा कटनी जिले से उमरिया, डिण्‍डौरी, शाहपुरा जाने के लिए कम दूरी की सड़क से आवागमन का लाभ होना संभावित है।

          श्री मोती कश्यप--  माननीय उपाध्यक्ष जी, माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देता हूँ. मैं उत्तर से संतुष्ट हूँ. माननीय मंत्री जी से थोड़ा सा आग्रह करूँगा कि यह जो मार्ग है क्या उसकी प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है? क्योंकि आपके इधर से इसकी कार्यवाही बहुत ही तेजी से चल रही थी इसलिए मैंने पूछा.

          श्री सरताज सिंह--  उपाध्यक्ष महोदय, किसी भी मार्ग में जब प्रशासकीय स्वीकृति दी जाती है उसके बाद ही वह बजट में आता है. इनका यह जो मार्ग है 15 करोड़ 64 लाख का, यह बजट में आ चुका है इसलिए बन जाएगा.

          श्री मोती कश्यप--  धन्यवाद. माननीय मंत्री जी, एक और चीज है उधर उमरिया और कटनी जिले के बीच में महानदी बीच में पड़ती है तो उसका भी मैंने लेख किया था. उसका स्टेज वन 180 मीटर लंबाई का 746 लाख रुपये का 2012 में अधीक्षण यंत्री को चला गया था और 2015 में उसका डिटेल सर्वे भी हो गया है. यदि वह ब्रिज नहीं बनेगा तो उस मार्ग का कोई मतलब नहीं हो पाएगा. प्लीज़ कृपा करके इस ब्रिज के लिए भी देख लीजिएगा.

          श्री सरताज सिंह--  उपाध्यक्ष महोदय, इस मुद्दे को भी देख लिया जाएगा.

          श्री मोती कश्यप--  धन्यवाद.

 

हातोद औद्योगिक क्षेत्र में निर्माण कार्य

3. ( *क्र. 44 ) श्री वेलसिंह भूरिया : क्या उद्योग मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) सरदारपुर के हातोद में औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिये ए.के.व्‍ही.एन. ने कितना बजट स्‍वीकृत किया है? (ख) उक्‍त क्षेत्र के विस्‍तार के लिये सड़क, बिजली, पानी के लिये अलग-अलग कितनी राशि स्‍वीकृत की गई है? (ग) हातोद औद्योगिक क्षेत्र के लिये कुल कितनी भूमि शासन द्वारा आवंटित की गई है? (घ) उक्‍त औद्योगिक क्षेत्र को विकसित करने के लिये क्‍या समय-सीमा तय की गई है?

उद्योग मंत्री ( श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ) : (क) सरदारपुर के हातोद मे औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिये औद्योगिक केन्‍द्र विकास निगम, इन्दौर के संचालक मंडल द्वारा प्रथम चरण के अंतर्गत रू. 46.53 करोड़ परियोजना की स्‍वीकृति दी गई है। (ख) उक्‍त क्षेत्र के विकास हेतु परियोजना में सड़क हेतु रू. 22.58 करोड़ बिजली हेतु रू. 9.04 करोड़, आंतरिक जल प्रदाय हेतु रू. 5.92 करोड़ का प्रावधान किया गया है। (ग) 152.42 हेक्‍टेयर (घ) निम्‍नानुसार समयावधि निर्धारित की गई है :- विद्युत कार्य - 20.09.2016, सिविल कार्य - 30.11.2016.

          श्री वेल सिंह भूरिया--  माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदया ने जो हमको उत्तर दिया है उससे मैं पूर्ण रूप से संतुष्ट हूँ. लेकिन माननीय मंत्री जी से एक यह बात पूछना चाह रहा हूँ कि मेरे क्षेत्र में जो काम हो रहा है. वह गुणवत्ता विहीन है और मापदंड अनुसार नहीं हो रहा है तो क्या माननीय मंत्री जी मेरी उपस्थिति में उच्च स्तरीय अधिकारियों से जाँच करवाएँगी?

          श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया--  माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जहाँ तक गुणवत्ता का सवाल है, मैंने ये सारी चीजों का परीक्षण करवाया था और हमारे पास 2-3 ऐसी प्रक्रिया हैं जो गुणवत्ता के ऊपर हम लोग ध्यान देते हैं. एक तो हमारे एम डी, ए के व्ही एन, ने खुद जाकर लेब में पूरा परीक्षण किया है. वहाँ हमारी लेब रहती है, जो सेंपल्स लेकर, उस गुणवत्ता के ऊपर काम करते हैं. तीसरा, थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन भी होता है यह इंस्पेक्शन भी एक अच्छी पार्टी से कराया गया है उनको भी वहां पर जो भी विकास के काम हुए हैं उसमें कोई समस्या  नहीं मिली है. अभी भी अगर माननीय विधायक जी संतुष्ट नहीं हैं तो एम डी से फिर  से इसका परीक्षण कराया जायेगा. धन्यवाद.

          श्री वेलसिंह भूरिया--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूँ कि मेरी उपस्थिति में इसका परीक्षण कराया जाय.

          श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय विधायक जी को कहना चाहती हूँ कि शनिवार और रविवार को एम.डी. एकेवीएन को कहा गया था कि वे आपके साथ जायें परन्तु आप टेलीफोन नहीं उठा रहे थे और आप उपलब्ध नहीं थे.

          श्री वेलसिंह भूरिया--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, हमारे क्षेत्र में माननीय मुख्यमंत्रीजी का कार्यक्रम था जिसमें मैं व्यस्त था जिसके कारण बात नहीं हो पायी थी. अगली बार शनिवार, रविवार या जब भी आप आदेशित कर दें मैं वहां उपस्थित रहूंगा. मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं.

          छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितता की जाँच

4. ( *क्र. 1338 ) श्री गिरीश गौतम : क्या तकनीकी शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या रीवा जिले के महाविद्यालयों में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग छात्रों के छात्रवृत्ति में किये गये घोटाले की जाँच के लिए कलेक्‍टर रीवा द्वारा अतिरिक्‍त संचालक, अल्‍प संख्‍यक, पिछड़ा वर्ग विभाग को पत्र लिखा गया है?     (ख) क्‍या ए.डी. उच्‍च शिक्षा रीवा ने सीधी जिले के एक महाविद्यालय में छात्रवृत्ति राशि में फर्जी आहरण किये जाने की जाँच रिपोर्ट उच्‍च शिक्षा विभाग को कार्यवाही हेतु प्रेषित की है? (ग) क्‍या कलेक्‍टर रीवा द्वारा ए.डी. उच्‍च शिक्षा रीवा को महाविद्यालयों में उक्‍त विषयांकित छात्रवृत्ति में फर्जीवाड़े की जाँच किये जाने के लिए पत्र दिया गया है? यदि हाँ, तो ए.डी. उच्‍च शिक्षा रीवा द्वारा उस पत्र के आधार पर क्‍या जाँच की तथा    किन-किन महाविद्यालयों के संबंध में फर्जीवाड़े से सम्‍बंधित शिकायतों की जाँच कर रहा है? कॉलेजों का नाम बताएं? जाँच कब तक पूरी कर ली जायेगी? (घ) क्‍या रीवा जिले के कई महाविद्यालयों द्वारा छात्रवृत्ति में घोटाला किये जाने की उच्‍च स्‍तरीय जाँच करायी जायेगी?

तकनीकी शिक्षा मंत्री ( श्री उमाशंकर गुप्ता ) : (क) जाँच हेतु कलेक्टर रीवा द्वारा अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। (ख) जी हाँ, परन्तु ए.डी. उच्च शिक्षा, रीवा के द्वारा प्रेषित रिपोर्ट अस्पष्ट एवं निष्कर्षात्मक नहीं होने से कलेक्टर सीधी को जाँच कराकर उचित कार्यवाही हेतु पत्र क्रमांक 141, दिनांक 17.02.2016 को लिखा गया है। (ग) जी हाँ। ए.डी. उच्च शिक्षा रीवा को फर्जीवाड़े की जाँच हेतु पत्र लिखकर जाँच समिति गठित की गई है। समिति द्वारा उस पत्र के आधार पर 65 महाविद्यालयों की सूची तैयार कर 13 महाविद्यालयों की जाँच की जा चुकी है। शेष 52 महाविद्यालयों की जाँच प्रगति पर है। समिति गठन के पत्र एवं महाविद्यालयों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 एवं प्रपत्र-2          (i, ii, iii) पर है। (घ) अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग द्वारा संचालित छात्रवृत्तियों की जाँच कलेक्टर रीवा द्वारा करायी जा रही है।

          श्री गिरीश गौतम--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न करोड़ों रुपयों के भ्रष्टाचार से संबंधित है यह बहुत ही गंभीर मामला है. अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के छात्रों की छात्रवृत्ति का सवाल है यह छात्रवृत्ति 100, 200 या 400 रुपये की नहीं है. बीएससी नर्सिंग में 45000 रुपये दिया जाता है, 300 रुपये प्रतिमाह छात्रवृत्ति दी जाती है, बीएड करने वालों को 25000 रुपये व 330 रुपये छात्रवृत्ति, बीई करने वालों को 22300 रुपये, बीसीए करने वालों को 16000 रुपये, बीबीए करने वालों को 18000 रुपये और 300-330 रुपये छात्रवृत्ति प्रतिमाह दी जाती है इसीलिये यह करोड़ों में घपला चला गया है. यह कोई आर्थिक अनियमितता का सवाल नहीं है. सरकार विद्यार्थियों की मदद करना चाहती है उनको बढ़िया शिक्षा देना चाहती है (XXX). मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि मैंने प्रश्न में कहा है कि इसमें केवल एडी रीवा की रिपोर्ट है 65 कॉलेजों में घपला हुआ है 891 छात्रों की छात्रवृत्ति यदि 25000 रुपये के मान से देखेंगे तो करोड़ों रुपयों की छात्रवृत्ति हो जायेगी. इसमें उच्च स्तरीय जांच की मैंने मांग की है. इसमें केवल रीवा नहीं है, सीधी है, शहडोल है, उमरिया है और मैं समझता हूँ यह पूरे प्रदेश से संबधित मामला है. मैं रीवा एडी तक ही अपने को सीमित करना चाहता हूँ. कलेक्टर, रीवा जांच करेंगे तो वे सीधी की कैसे जांच करेंगे एक सीधी का भी प्रकरण था. जो उत्तर आया है उसमें 17.2.2016 को लिखा गया है. (ख) में लिखा है "जी हां. ए.डी. उच्च शिक्षा रीवा के द्वारा प्रेषित रिपोर्ट अस्पष्ट एवं निष्कर्षात्मक नहीं होने से कलेक्टर सीधा को जांच कराकर उचित कार्यवाही हेतु पत्र क्रमांक 141, दिनांक 17.2.2016 को लिखा गया है." अर्थात् विधान सभा सत्र लगने के बाद. मेरा आग्रह यह है कि जो हो गया सो हो गया उसकी वसूली करिये आगे छात्रों के साथ खिलवाड़ न हो उनको उनका पैसा व हक मिल जाये. मैं निवेदन करना चाहता हूँ कि यह सब अधिया में हुआ है. प्रायवेट कॉलेज हो या सरकारी कॉलेज हो सारे कॉलेज के संचालकों ने अधिया में सौदा किया है. 45000 हमें मिलेगा उसमें से आधा आप ले जाओ आधा हमें दे जाओ. यह भारी आर्थिक भ्रष्टाचार हुआ है मेरा प्रश्न यह है कि इसकी जांच ईओडब्ल्यू को दे दीजिये या एसआईटी का गठन कर दीजिये जो इसकी छानबीन कर ले, क्या यह जांच कराई जायेगी और जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध आपराधिक कृत्य के लिये मामला दर्ज किया जायेगा.

          श्री उमाशंकर गुप्ता--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मूलत: यह प्रश्न अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग से संबंधित है क्योंकि छात्रवृत्ति देने का काम यह विभाग करता है माध्यम कॉलेज होता है वहां से सूचियां जाती हैं. माननीय विधायक ठीक कह रहे हैं कि पिछले दिनों पूरे प्रदेश में यह शिकायत आई थी. मध्यप्रदेश की सरकार अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों की ठीक ढंग से पढ़ाई हो सके इसलिये काफी सुविधायें उनको दे रही है, प्रवेश शुल्क की प्रतिपूर्ति कर रही है छात्रवृत्ति दे रही है और उसका परिणाम यह है कि जीआरई 13 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत हुआ है. लेकिन इसका कुछ फायदा नाजायज लोगों ने उठाया है. लेकिन उसकी जांच इस स्‍तर पर और हर जिले में चल रही है. जिसकी जांच माननीय विधायक जी ने कही है. वास्‍तव में आपका प्रश्‍न आने के बाद वह रिपोर्ट हमें प्राप्‍त हुई है, जो कलेक्‍टर ने सीधी की जांच के जिले एडी को लिखा था, पिछले एडी ने वह जांच आदेशित की थी. वह जांच रिपोर्ट भी ठीक नहीं आयी है इसलिये हमने संबंधित जांच अधिकारी को भी सस्‍पेंड किया है और पुन: उसकी जांच करा रहे हैं और यह ठीक है कि हमने कलेक्‍टर रीवा को भी लिखा है कि जो एडिशनल डायरेक्‍टर हायर एजुकेशन की उसमें उन्‍होंने समिति गठित की है, जो कि सक्षम नहीं है.क्‍योंकि 65 कालेजों की सूची जो रीवा की आयी है, उसमें से 13 कालेजों की जांच करने एडिशनल डायरेक्‍टर और एससीएसटी विभाग के अधिकारी वहां पर गये तो कालेजों ने उनको रिकार्ड देने से ही मना कर दिया. इसलिये हमने कलेक्‍टर रीवा को भी लिखा है कि वह एसडीएम, एडी को जिसको मजिस्‍ट्रयल पावर हों, उसकी अध्‍यक्षता में कमेटी बनाकर उसकी जांच कराये. लेकिन मैं एससीएसटी और ओबीसी विभाग से बात करके, जो कि माननीय विधायक जी ने कहा है मैं इससे सहमत हूं कि कोई प्रदेश स्‍तरीय उच्‍च समिति बनाकर इन सारे प्रकरणों की जांच करायेंगे. वैसे मैं जानकारी के सदन को बताना चाहता हूं कि हमारे विभाग ने अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति और ओबीसी विभाग ने जो नेट पर जानकारी प्राप्‍त थी और उसमें जहां पर छात्रों के डुप्‍लीकेशन का नाम आया था, इसमें अनेक लोगों से करोड़ों रूपये की रिकवरी भी की है. लेकिन एक आदेश हमने और किया है, विशेषकर यह प्रश्‍न रीवा और सीधी जिले से संबंधित था वहां के कलेक्‍टर और एडी को कहा है कि केवल रिकवरी करना ही पर्याप्‍त नहीं है यह अपराधिक प्रकरण है इसलिये इन संस्‍थाओं या जो भी अपराधी हैं उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण भी दर्ज करायेंगे.

          श्री गिरीश गौतम:- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद् देता हूं कि उन्‍होंने इस बात को स्‍वीकार किया है. मैं केवल इसमें एक निवेदन करना चाहता हूं कि आप शिक्षा विभाग और एससीएसटी विभाग के अधिकारियों को भेजकर जांच करायेंगे तो उनको आपराधिक मामला कायम करने का अधिकार नहीं है. वह केवल अपना प्रतिवेदन देंगे तो उसकी स्थिति यह होगी कि जब अगले सत्र में कोई प्रश्‍न विधान सभा में लगायेगा तब आपके पास प्रतिवेदन आयेगा और फिर आप कोई नया आदेश देंगे. मेरा आपसे सिर्फ यह निवेदन है कि आप एसआईटी या अन्‍य कोई भी गठित करना चाहते हैं, जिससे उसको सीधे कोई गड़बड़ी या आर्थिक अनियमितता दिखाई देती है या भ्रष्‍टाचार दिखाई पड़ता है तो वह सीधे पुलिस में स्‍वयं मामला मामला कायम करने का पावर हो, वह सीधे मुकदमा कायम करे और मुकदमा कायम करके तब इन्‍वेस्‍टीगेशन करे, इन्‍क्‍वायरी नहीं इन्‍वेस्‍टीगेशन करे और चालान पेश करे. क्‍या आप ऐसा करेंगे.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता :- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम एडीस को पावर दे रहे हैं. जैसे ही रिकवरी की रिपोर्ट आती है, कहीं न कहीं तो अपराध है ही, हमारे पास आने की जरूरत नहीं है. हम कलेक्‍टर को भी कापी दे रहे हैं, उनसे भी आग्रह कर रहे हैं कि जैसे ही ऐसे लोगों रिपोर्ट आती है वह एफआईआर कायम करें, उसके लिये परमीशन लेने के लिये कहीं आने की जरूरत नहीं है.

          श्री गिरीश गौतम:- माननीय मंत्री जी मैं फिर आग्रह करूंगा कि आप एडी स्‍तर से नहीं कराईये. अभी मैं आरोप नहीं लगा रहा हूं, पर ऐसी संभावना है कि उस स्‍तर पर कोई मेन्‍युपलेशन हो जाये, इसलिये मेरा आग्रह है कि प्रदेश स्‍तर पर कराईये, भले ही आप एडी रीवा का करा रहे हैं पर उसमें भी जो अधिकारी जायें वह प्रदेश स्‍तर के हों और वह पावर वाले हों.

          उपाध्‍यक्ष महोदय:- माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि कलेक्‍टर को अधिकृत करेंगे. कलेक्‍टर सीधे एफआईआर दर्ज करा देगें. कलेक्‍टर को तो अधिकार हैं.

          श्री गिरीश गौतम :- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उसमें दिक्‍कत यह है कि एडी के अन्‍दर सीधी भी है. इसी में आप देख लें, एक जांच आपने कलेक्‍टर सीधी को दी, एक जांच आपने कलेक्‍टर रीवा को दी. एक ही एडी के अन्‍दर कई जगह के मामले हैं. इसलिये मैं चाहता हूं कि कलेक्‍टर रीवा या कलेक्‍टर सीधी, कलेक्‍टर उमरिया या कलेक्‍टर शहडोल यह ना होकर के कन्‍सालिडेड कोई एक समिति बनायें, जिसको उस पावर के साथ सीधे मामला कायम करने का अधिकार हो. उस पावर के साथ गठन करके उसकी जांच का आदेश करें, यह मेरा अनुरोध है. क्‍या आप करेंगे ?

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता :- उपाध्‍यक्ष महोदय, रिपोर्ट तो जिले में ही होगी, मुझे लगता है कि विकेन्‍द्रीकरण होने से ज्‍यादा जल्‍दी उसके रिजल्‍ट निकलेंगे. निगरानी के लिये मैंने पहले ही कहा है कि प्रदेश स्‍तर की कर देगें. अगर हम पावर हम कलेक्‍टर  या लोकल ही किसी को देंगे तो जल्‍दी होगा. पूरा प्रदेश का कम्‍पाईल करके, मैं सदस्‍य की भावना से सहमत हूं और सरकार ने उस पर कार्यवाही शुरू भी कर दी है. उस पर कार्यवाही नहीं हो रही है ऐसा नहीं है. एससीएसटी और ओबीसी विभाग ने भी सरक्‍यूलर जारी किये हैं और आज ही हम हमारे विभाग से कलेक्‍टर को सरक्‍यूलर जारी कर रहे हैं कि जहां से भी ऐसे मामले आते हैं, उनको पुलिस में जांच के लिये दिये जायें और आपराधिक प्रकरण कायम हो.

          श्री गिरीश गौतम :- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद क्‍योंकि इसमें बहुत बड़े-बड़े चेहरे बेनकाम होंगे, मैं यह निवेदन करना चाहता हूं. धन्‍यवाद्.

          श्री उमाशंकर गुप्‍ता :- किसी भी चेहरे को नहीं छोड़ेंगे. 

 

            श्री मुकेश नायक - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, इस पूरे विषय को लेकर सूचना के अधिकार के तहत रिपोर्ट मांगी गई थी. उन्होंने कहा इसमें 90 हजार पेज हैं और इसीलिये उन्होंने   एक सी.डी. बनाई दी.  हमने इस सी.डी. का  जब प्रारंभिक अनुसंधान किया तो यह इतना बड़ा घपला है कि पैर जमीन से खिसक जायेंगे. मेरा अनुरोध है कि कई अनुसूचित जाति,जनजाति,पिछड़े वर्ग के बच्चों की स्कालरशिप जांच के बाद रोक दी गई. जब स्कालरशिप रोक दी गई तो कालेज एडमिनिस्ट्रेशन ने उनके डाक्यूमेंट अपने पास रख लिये कि जब आप फीस जमा करोगे तब आपके डाक्यूमेंट आपको देंगे. मेरा प्रश्न यह है कि क्या मंत्री महोदय विधायक दल की कमेटी बनाकर इसकी जांच कराएंगे ? अनुरोध है आपसे कि जिन बच्चों के डाक्यूमेंट कालेज ने जमा कर लिये हैं क्या उनको आप निर्देशित करेंगे और दो-दो साल से पासआऊट बच्चे हो गये हैं. उनके डाक्यूमेंट कालेज एडमिमिस्ट्रेशन नहीं दे रहा है क्या उनको वह वापस दिलवाएंगे ?

            श्री उमाशंकर गुप्ता - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मुझे लगता है यह सही जानकारी नहीं है कि कहीं डाक्यूमेंट जप्त हुए हैं. क्योंकि डाक्यूमेंट किसी भी स्थिति में जप्त करने का किसी को अधिकार नहीं है और हमने एक कमेटी बनाकर रखी हुई है हमारे पास कोई शिकायत आती है तो संबंधित संस्था को सजा दी जाती है. इससे कोई लेनादेना नहीं है और भविष्य में इन सारी घटनाओं की जानकारी आने के बाद ही पिछले दिनों सरकार ने निर्णय लिया और जो हम छात्रवृत्ति बांट रहे हैं उसे समग्र से जोड़ दिया. आधार नंबर से जोड़ दिया है ताकि आगे यह गड़बड़ियां न हों  और जिन्होंने भी गड़बड़ी की हो जिस स्तर पर भी गड़बड़ी हुई हो हम स्वमोटो खुद जांच में ले रहे हैं और किसी को नहीं छोड़ेंगे जिन्होंने गड़बड़ी की है और उसके कारण किसी बच्चे की छात्रवृत्ति नहीं रोकी गई है.

          उपाध्यक्ष महोदय - विधायक जी, आपके पास स्पेसिफिक जानकारी हो तो माननीय मंत्री जी को दे दें.

          श्री मुकेश नायक - जी हां.

 

 

 

 

 

 

चचाई से अमलाई पहुंच मार्ग निर्माण की स्‍वीकृति

5. ( *क्र. 3078 ) श्री रामलाल रौतेल : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या अनूपपुर जिले के विद्युत नगरीय चचाई से अमलाई पहुंच मार्ग निर्माण हेतु विभाग ने किसी प्रकार की कोई पहल की है? यदि हाँ, तो जानकारी प्रदान करें? (ख) मुख्‍यमंत्री कार्यालय के पत्र क्रमांक 1826/सी.एम.एस./एम.एल.ए./ 087/2014 भोपाल दिनांक 05.08.14 के परिपालन में लोक निर्माण विभाग ने अब तक क्‍या कार्यवाही की है? यदि नहीं, तो क्‍या कारण है? क्‍या विभाग इसी वित्‍तीय वर्ष में कार्य की स्‍वीकृति प्रदान करेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) जी हाँ। भविष्‍य में प्राथमिकता से लिए जाने वाले कार्यों में सम्मिलित है। (ख) उत्‍तरांश '' अनुसार। प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। प्रस्‍ताव विचाराधीन होने से अभी बताना संभव नहीं। प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

          श्री रामलाल रौतेल - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि चचाई से अमलाई पहुंच मार्ग जो जिला स्तर से संभाग मुख्यालय को जोड़ने का प्रमुख महत्वपूर्ण मार्ग है. मात्र 4.40 कि.मी. इसकी लंबाई है. मैं माननीय मंत्री जी से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करना चाहूंगा कि इस वित्तीय वर्ष में इस सड़क निर्माण की स्वीकृति प्रदान करेंगे ?

          श्री सरताज सिंह - माननीय उपाध्यक्ष महोदय,चचाई से अमलाई इस सड़क की लंबाई है 42 कि.मी.

          श्री रामलाल रौतेल - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, साढ़े चार कि.मी. है 4.40 कि.मी. है. 42 कि.मी. नहीं है.

          श्री के.पी. सिंह - विधायक जी सही कह रहे हैं. आपने गलत पढ़ दिया माननीय मंत्री जी.

          उपाध्यक्ष महोदय -  के.पी. सिंह जी, इनके प्रश्न में लंबाई का प्रश्न नहीं है.

          श्री के.पी. सिंह - लेकिन वह बता रहे हैं कि उसकी लंबाई साढ़े चार कि.मी. है.

          श्री सरताज सिंह -  इसका डी.पी.आर.बन चुका है. डी.पी.आर. बना है 47.63 करोड़ का 4 कि.मी में नहीं बनता.

          श्री के.पी.सिंह - यह एक्स्ट्रा आर्डनरी सड़क बन रही हो.

          श्री सरताज सिंह -  इसको ब्रिक में लोन लेने का प्रस्ताव है उसमें लिया गया है जैसे ही हमें लोन की प्राप्ति होगी. इस सड़क को बनाया जायेगा.

          श्री रामलाल रौतेल - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मात्र 4.40 कि.मी. ही सड़क है और इतनी महत्वपूर्ण सड़क है जिला मुख्यालय से संभाग मुख्यालय को जोड़ने की मुख्य सड़क है

          श्री सरताज सिंह - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, इसको दिखवा लेंगे.

          श्री रामलाल रौतेल - विगत 10-15 वर्षों से उस सड़क में किसी प्रकार का कोई निर्माण कार्य नहीं हुए हैं. आज उस पर चलना दूभर हो गया है. मैं माननीय मंत्री महोदय  से विनम्रतापूर्वक अनुरोध करना चाहता हूं कि क्या इसी वित्तीय वर्ष में यह सड़क निर्माण करने की स्वीकृति प्रदान करेंगे क्या ?

            श्री सरताज सिंह - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी के आग्रह पर 4.40 कि.मी. सड़क हम  बना देंगे.

          श्री रामलाल रौतेल - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्यवाद.

         

 

राजस्‍व विभाग को भूमि का अंतरण

6. ( *क्र. 3355 ) श्री हेमन्‍त विजय खण्‍डेलवाल : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) अता. प्रश्‍न संख्‍या - 87 (क्र. 2722) दि. 03.03.2015 में बैतूल जिले की कितनी भूमि 1965 एवं 1971 में राजस्‍व विभाग को अंतरित करना बताया गया है? राज्‍य शासन के पत्र क्रमांक 7036/एक्‍स/66 दि. 14.07.1966 एवं पत्र क्रमांक 4325/2983/ 10/2/75 दिनांक 18 सितंबर 1975 में बैतूल जिले की कितनी भूमि राजस्‍व विभाग को अंतरित करने के आदेश दिए गए? (ख) बैतूल जिले में 1965 एवं 1971 में अंतरित बताई गई भूमि एवं वर्ष 1966 एवं 1975 में अंतरण के लिए आदेशित भूमि में से कितनी भूमि राजपत्र में किस दिनांक को डीनो‍टीफाईड की गई? कितनी भूमि का प्रश्‍नांकित दिनांक तक भी राजपत्र में डीनोटिफिकेशन नहीं किया गया? (ग) 1965 एवं 1971 में अंतरित बताई गई भूमि में से वास्‍तव में कितनी भूमि का प्रभार राजस्‍व विभाग को सौंप दिया है, 1965 एवं 1975 में अंतरण के लिये आदेशित भूमि में से कितनी भूमि का प्रभार राजस्‍व विभाग को सौंप दिया है? तिथिवार बतावें। (घ) अंतरित एवं अंतरण के आदेशित भूमियों का राजपत्र में कब तक निर्वनीकरण कर दिया जायेगा, समय-सीमा सहित बतावें?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) अतारांकित प्रश्न संख्या-87 (क्र. 2722) दिनांक 03.03.2015 में वर्ष 1965 में बैतूल जिले की 2340.866 हेक्टेयर वनभूमि एवं वर्ष 1971 में 25374.353 हेक्टेयर वनभूमि राजस्व विभाग को अंतरित करना बताया गया है। बैतूल जिले के लिये उपसचिव, म.प्र. शासन, वन विभाग के अर्ध शासकीय पत्र क्रमांक/7036/x/66 दिनांक 14.07.1966 से 7976.68 एकड़ एवं सचिव, म.प्र. शासन वन विभाग के अर्ध शासकीय पत्र क्रमांक/4325/2983/10/2/75 दिनांक 18 सितम्बर 1975 से (अंदाजन) 51475.96 एकड़ भूमि राजस्व विभाग को अंतरित करने के आदेश जिला कलेक्टर को दिये गये। (ख)  " बैतूल जिले में वर्ष 1972 में  829 ग्रामों की संरक्षित वनभूमि का निर्वनीकरण किया गया है. निर्वनीकरण ग्रामवार है, जिसमें रकबे का उल्लेख नहीं है. इन्हीं 829 ग्रामों में वर्ष 1965 में 13 ग्रामों एवं वर्ष 1971 में 217 ग्रामों की राजस्व विभाग को अंतरित भूमियां भी सम्मिलित हैं. विवरण संलग्ल परिशिष्ट-तीन पर है. वर्ष 1966  एवं वर्ष 1975 में अंतरित भूमियों के पृथक से निर्वनीकरण के अभिलेख उपलब्ध नहीं हो रहे हैं." (ग) वर्ष 1965 एवं 1971 में अंतरित की गई भूमि में से एवं वर्ष 1966 से 1975 में अंतरण के लिये आदेशित भूमि में से वास्तव में कितनी भूमि राजस्व विभाग को अंतरित की गई थी, यह अभिलेखों में पृथक-पृथक संधारित नहीं है, परन्तु अभिलेखों के अनुसार बैतूल जिले में राजस्व विभाग को अंतरित भूमि वर्ष 1965 एवं वर्ष 1971 की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र-एक एवं दो पर है। (घ) I.A.No. 2 in WP No 337/1995 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 13.11.2000 से निर्वनीकरण पर रोक लगाई गई है। अतः समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''दो''

 

          श्री हेमन्त विजय खण्डेलवाल--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय वनमंत्री जी ने जो उत्तर (घ) में जवाब दिया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश 13.11.2000 का उल्लेख किया है उसके संबंध में मेरा अनुरोध है कि उस आदेश का पुनः अवलोकन करवायें उसमें सुप्रीम-कोर्ट ने कहा है कि जो जमीन डी-नोटिफाईड करनी है उसमें सुप्रीम-कोर्ट से अनुमति ली जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहीं भी यह नहीं कहा कि आप उस प्रस्ताव को हमें नहीं भिजवा सकते अगर ऐसा नहीं कहा तो 1980 के पहले के जो प्रस्ताव वन विभाग के डी-नोटिफाईड थे, वह क्यों नहीं भेजे गये. दूसरा सवाल 1972 में हमारे जिले की 1 लाख 37 हजार हैक्टेयर जमीन जो डी-नोटिफाईड हो गई थी जिसे नारंगी जमीन मानकर वन विभाग ने राजस्व विभाग को हस्तांतरित नहीं किया उसके संबंध में भी सुप्रीम कोर्ट ने कोई उल्लेख तथा मार्गदर्शन नहीं किया है. मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि इस संबंध में बताएं ? दूसरा यह पूरी प्रक्रिया अगर करनी है तो इसके लिये एक से

टिलमेन्ट अधिकारी नियुक्त करें इसका विधान सभा में आश्वासन देंगे तो मैं समझता हूं कि 20-25 सालों से यह जो समस्या चल रही है न सिर्फ बैतूल जिले की है, बल्कि पूरे प्रदेश की है उसमें प्रगति मिलेगी.

          श्री गौरीशंकर शेजवार--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देशित एवं आदेशित किया है कि वन संरक्षण अधिनियम जब से आया है तब से इस प्रकार के अलग अलग निर्देश केन्द्र सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट के द्वारा आते रहे हैं, लेकिन इसमें दो अलग अलग विषय हैं. प्रश्न जो पूछा गया है वह एकड़ एवं खसरा उस भूमि के बारे में पूछा गया है इसका जवाब भी हमने दिया है, लेकिन निर्वनीकरण के लिये डी-नोटिफिकेशन किया गया है वह ग्रामों के हिसाब से किया गया है. मैं आपको बताना चाहता हूं कि बैतूल जिले में वर्ष 1972 में 829 ग्रामों की संरक्षित वन भूमि का निर्वनीकरण किया गया है. निर्वनीकरण ग्रामवार है जिसमें रकबे का उल्लेख नहीं है इन्हीं ग्राम 829 ग्रामों में वन 1965 में 13 ग्रामों तथा 1971 में 217 ग्रामों की राजस्व भूमि को अंतरित भूमि भी सम्मिलित है. मेरा यह कहना है कि थोड़ा इसमें जो रिकार्ड है वह ग्रामवार तो उपलब्ध है, लेकिन खसरे के हिसाब से उपलब्ध नहीं है, इसको ढूंढने में बड़ी कठिनाई हो रही है इसलिये जिस भूमि के बारे में माननीय विधायक डी-नोटिफिकेशन करवाने की बात कर रहे हैं उसका बहुत स्पष्ट उल्लेख कर दें कि किस भूमि को किस उपयोग के लिये वह डी-नोटिफिकेशन करवाना चाहते हैं हम केन्द्र सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट जहां भी आवश्यकता पड़ेगी उसको हम प्रक्रिया में लाकर उनको अनुमति में लेकर के भेजने के लिये तैयार हैं.

          श्री हेमन्त विजय खण्डेलवाल--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय वनमंत्री जी से मेरा अनुरोध है कि जो नारंगी जमीन है जिसका आपके आदेश में उल्लेख है सुप्रीम कोर्ट के आदेश में नारंगी शब्द का कहीं भी उपयोग नहीं है न उस पर रोक लगाई है आप इसका एक बार पुनः अवलोकन करें इसका अनुरोध करता हूं तथा इस प्रक्रिया को पुनः शुरू करें, क्योंकि 1 लाख 37 हजार हैक्टेयर जमीन में कहीं पर भी जंगल नहीं है. अगर यह जमीन राजस्व को मिल जायेगी तो बहुत सारे स्कूल, कॉलेज, डेम तथा जिले का जो विकास रूका हुआ है, वह पूरा विकास हो सकता है.

          श्री गौरीशंकर शेजवार--माननीय उपाध्यक्ष महोदय,नारंगी भूमि का वैसे इस प्रश्न में कहीं पर उल्लेख नहीं है, लेकिन फिर भी जो नारंगी भूमि है वह असीमांकित, संरक्षित वन-भूमि है. माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश दिनांक 2000 इस पर भी लागू होंगे.

 

                                                                                               

           वन्‍य जीव प्राणियों की गणना

7. ( *क्र. 729 ) श्री जितेन्‍द्र गेहलोत : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में वन्‍य जीवों (जंगली जानवरों) की गणना के नियम व गणना समय (वर्ष) का ब्‍यौरा क्‍या है? (ख) वर्ष 2015 से पूर्व वन्‍य जीवों की गणना कब की? गणना का ब्‍यौरा क्‍या है? (ग) वर्तमान गणना का ब्‍यौरा क्‍या है? वन्‍य जीवों की कुल संख्‍या, शिकार, मृत्‍यु अवैध परिवहन का वनवार ब्‍यौरा क्‍या है एवं वन्‍य जीवों के शिकार पर की गई कार्यवाही का पिछले दो वर्षों का ब्‍यौरा क्‍या है?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) प्रदेश में वन्यजीवों (जंगली जानवरों) की गणना के निर्देश जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। इनका आंकलन अखिल भारतीय वन्यप्राणी आंकलन के अंतर्गत प्रत्येक 04 वर्ष में एक बार कराया जाता है, जो वर्ष 2006, 2010 एवं 2014 में कराया गया है। (ख) वर्ष 2015 से पूर्व वन्यजीवों का आंकलन तृतीय अखिल भारतीय वन्यप्राणी आंकलन के अंतर्गत कराया गया है। इसके अंतर्गत क्षेत्रीय आंकलन कार्य 20 जनवरी, 2014 से 27 जनवरी, 2014 तक कराया गया था। भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून एवं राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण, नई दिल्ली द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार मध्यप्रदेश में 308 बाघ पाये गये हैं। विस्तृत रिपोर्ट अभी अप्राप्त है। (ग) वर्तमान आंकलन के अंतर्गत क्षेत्रीय आंकलन कार्य 31 जनवरी, 2016 से 06 फरवरी, 2016 तक केवल संरक्षित क्षेत्रों में कराया गया है। आंकड़ों का कम्प्यूटरीकरण एवं विश्लेषण का कार्य जारी है। वन्यजीवों के शिकार, मृत्यु, अवैध परिवहन एवं वन्यप्राणी के शिकार पर की गई कार्यवाही की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 '' एवं '' अनुसार है।

            श्री जितेन्‍द्र गेहलोत-  माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मंत्री जी की तरफ से जो उत्‍तर आया है, उससे मैं संतुष्‍ट हूँ । वन्‍यजीवों की बात कही गई थी, उसमें संख्‍या पूछी गई थी, उसमें बाघों की संख्‍या 306 दी गई है पर जो वन्‍यजीव हैं, जिस प्रकार रतलाम,मंदसौर तथा नीमच के अंदर नीलगाय जो घोड़ारोज है, उसकी संख्‍या बहुत ज्‍यादा अधिक होने के कारण वह  किसानों की फसल को चौपट कर देती हैं, खा जाती है और नुकसान करती है, उस पर अंकुश लगाने के लिए क्‍या माननीय मंत्री जी कोई योजना बनाएंगे ।

          डॉं गौरीशंकर शेजवार-  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जो नीलगाय शब्‍द है यह भी कहीं न कहीं तकलीफ देता है, लोग इसे रोजड़ कहते हैं, कहीं रोज कहते हैं,  यह बात भी सही है कि जो वनों से लगी हुई कृषि भूमि है, फसलों को,  वहां पर यह नुकशान कर भी रहे हैं लेकिन किसानों को नुकसान का मुआवजा देने के लिए सरकार गंभीरता से विचार कर रही है और जहां जहां प्रकरण होते हैं, उसमें हम मुआवजा भी देते हैं और मुआवजे का सरलीकरण करने के लिए हम नियमों में थोड़ा संशोधन भी कर रहे हैं ताकि आंकलन समय पर हो जाए, सही आंकलन हो जाए और जल्‍दी से जल्‍दी मुआवजा मिल जाए, इसके बारे में हम विचार कर रहे हैं । दूसरा केन्‍द्र सरकार के कृषि विभाग से किसानों को फसलों और खेतों के संरक्षण के लिए विशेष रूप से कुछ अनुदान प्राप्‍त हो रहा है । ऐसे प्रकरण भी हमने बनाए हैं और कई किसानों को फेंसिंग आदि के लिए हमने अनुदान प्रदाय किया है और भवष्यि में सरकार को इसकी चिन्‍ता है और हम भी चाहते हैं कि रोजड़ से फसलों को नुकसान न हो इनको पकड़ने के और इनको मारने के कुछ नियम  भी हैं, एस.डी.एम. को इनके अधिकार भी दिए गए हैं लेकिन इस संबंध में किसानों की तरफ से कोई ज्‍यादा उत्‍साह इसमें  दिखाई नहीं देता  है, लेकिन हमें पूरी चिन्‍ता है और हम सहमत है कि रोजड़ से खेतों का नुकसान हो रहा है ।

          उपाध्‍यक्ष महोदय -  माननीय मंत्री जी, मैं समझता हूँ कि जितने भी माननीय सदस्‍य हैं, जो ग्रामीण क्षेत्र से या जिनके क्षेत्र में वनक्षेत्र आते हैं, उनके लिए व्‍यापक रूप से यह समस्‍या है, इसका निराकरण होना चाहिए । नियम तो आपने बनाए हैं लेकिन सरलीकरण नहीं है, मुआवजा देने का नियम भी सरल नहीं है । मंत्री जी, मेरा व्‍यक्तिगत अनुभव है ।  दूसरा जो आपके जंगली जानवर हैं, नील हैं, सुअर हैं, फेंसिंग लगवाएं और अपने जानवरों को रोकें, ताकि वह खेत में न आ पाएं । मंत्री जी, एक आयोजन करके उनका नामकरण संस्‍कार कर दीजिए, नील से रोजड़े कर दीजिए ।

          डॉं गौरीशंकर शेजवार-  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हम आपसे सहमत हैं, उसकी प्रक्रिया में हमको करना पड़ेगा । दरअसल यह बोल-चाल की भाषा में है, किताबों में इसका ज्‍यादा उल्‍लेख नहीं है और जो मारने वाली बात है,उसके पीछे कहीं न कहीं नीलगाय लिखा है, इसलिए लोग इसको संकोच करते हैं।

          उपाध्‍यक्ष महोदय – तिवारी जी आप सिर्फ एक प्रश्‍न, सीधे पाइंटेड प्रश्‍न करेंगे.

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी  – उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी के सामने यह रोज़ का सवाल और इस सदन के सामने भी कई बार आया है. हमारे रीवा जिले में आधी किसानों की जमीनें रोज़ की वजह से बर्बाद हो गई है. किसानों को कुछ अनाज ले जाने को मिलता ही नहीं है.

          उपाध्‍यक्ष महोदय – आपका प्रश्‍न क्‍या है ? सुझाव क्‍या हैं ? यह बता दें.

          श्री सुन्‍दरलाल तिवारी  – मेरा यह कहना है कि जो भी नियम -कानून बनाये गये हैं. वे पूर्णत: अव्‍यावहारिक हैं और उन नियमों का पालन किसान नहीं कर सकता है, गांव में रहने वाले नहीं कर सकते इसलिए कानून व्‍यावहारिक बनाया जाये, उसका सरलीकरण किया जाये. जिससे किसानों को जल्‍दी मुआवजा या पैसा मिल सके.

          उपाध्‍यक्ष महोदय –  ठीक बात है.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार - उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं इनकी बात का जवाब दे दूँ.

          उपाध्‍यक्ष महोदय – आप जवाब दे दीजिये. इनका भी प्रश्‍न आ जायेगा. श्री विक्रम सिंह नातीराजा जी की बड़ी रूचि है, नील रोजड़ों में. आप भी प्रश्‍न पूछ लीजियेगा. श्री के.के.श्रीवास्‍तव जी आप बैठ जाएं.

          श्री विक्रम सिंह नातीराजा - मेरी सबसे पहली चीज तो यह है कि रोज़ एक एंटीलोप फैमिली से है, गाय है ही नहीं तो इसमें जो गाय शब्‍द है, उसको विलोपित करवाया जाये. (व्‍यवधान)

          उपाध्‍यक्ष महोदय – ठीक है, इसमें सहमति बन गई है.

          श्री विक्रम सिंह नातीराजा - मेरा एक निवेदन और है कि इनके जिस तरीके से अफ्रीका वगैरह में अतिरिक्‍त जानवरों की कलिंग की जाती है, थिनिंग की जाती है. इस प्रकार से आप विभागीय तौर पर कलिंग का इन्‍तजाम करवायें तो ज्‍यादा अच्‍छा रहेगा.         

          उपाध्‍यक्ष महोदय – ठीक है. ऐसा है लीक से हटकर हम कुछ कर रहे हैं, सामान्‍यत: ऐसा होता नहीं है.

          डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय- गौ अभ्‍यारण्‍य बनाया गया है. यदि मारे जाने में शासन को नियमानुसार कोई कठिनाई है लेकिन उनको पकड़े जाने की अत्‍यन्‍त आवश्‍यकता है. जैसे बाघों को दूर से कोई फायर करके, नशे की दवा से उसका पकड़ा जाता है. शासन द्वारा जिस तरह से गौ अभ्‍यारण्‍य बनाया गया है. क्‍या इस तरह का कोई अभ्‍यारण्‍य बनाकर के पूरे प्रदेश भर की समस्‍या है, उनको दूर से बेहोश कर, पकड़ कर उसे अभ्‍यारण्‍य में भेजे जाने की कार्यवाही करेंगे ? (व्‍यवधान)

          श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा एक सुझाव है कि इनकी संख्‍या को नियंत्रित करने के लिये आवश्‍यकता प्रतिपादित होगी और ये बढ़ते जा रहे हैं. अभ्‍यारण्‍य की बात तो श्री पाण्‍डे जी ने कही है. इनको पकड़कर के अगर इनको बड़े अभ्‍यारण्‍यों में छुड़वायेंगे और इनकी जनसंख्‍या पर नियंत्रण करने की बात सोचेंगे तो ये  बढ़ेंगे नहीं. नसबन्‍दी की बात सोचेंगे तो ये बढ़ेंगे नहीं. (व्‍यवधान)

          उपाध्‍यक्ष महोदय – क्‍या आप परिवार नियोजन चाहते हैं ? आप लोग बैठ जाइये. मंत्री जी जवाब दे देंगे. बहुत ज्‍यादा हो जायेगा. श्री वर्मा जी आप बैठ जाएं. ठीक है, जंगली सूअर की भी बात कर लेंगे.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार - माननीय उपाध्‍यक्ष जी, माननीय सदस्‍य ने यह कहा था कि हम सब एक साथ प्रश्‍न पूछ लेते हैं और मंत्री जी एक बार में जवाब दे देंगे तो इसलिए मैं चुपचाप बैठा था, बचे हों तो और प्रश्‍न हो जायें.

          उपाध्‍यक्ष महोदय - आप जवाब दे दें.    वही प्रश्‍न बार-बार दोहराये जा रहे हैं.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार - मैं आपसे अनुरोध करना चाह रहा हूँ कि मूल रूप से ये जो प्रश्‍न तथा इसका जो विषय है.

          पंचायत मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) - हमारी संस्‍कृति में गौ दान का बहुत महत्‍व है. आप तो सबके लिए 100 -100 गायें दान कर दीजिये. 

 

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार - मूल प्रश्‍न वन्‍य जीव प्राणियों की गणना से संबंधित है और कृषि को वन्‍य प्राणी नुकसान पहुँचा रहे हैं. यह तो विषय था ही नहीं लेकिन मूल विषय का अपने आप में संतुष्‍ट उत्‍तर आ गया है. इसलिए माननीय विधायक जी ने कहा लेकिन यह अतिरिक्‍त विषय रोजड़ वाला जुड़ा है. इसमें हम पूरी चिन्‍ता कर रहे हैं और इतना ही नहीं माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने यह घोषणा की है. वन्य प्राणियों  से जो नुकसान की क्षतिपूर्ति  है,  इसको देने के लिये  नियमों में  सरलीकरण कर रहे हैं, ताकि  आसानी से  फसल  की क्षतिपूर्ति का  भुगतान हो सके.  बाकी माननीय सदस्यों  द्वारा जो सुझाव आये हैं,  मैं उन  सुझावों को  कहीं  न कहीं, जब वन्य प्राणियों  के कारण कृषि के नुकसान के संबंध में  नियमों के  सरलीकरण में चर्चा हमारी समय समय पर   होती रहती है, आपके सुझाव को मैं उसमें रखूंगा, शामिल करुंगा.  चिंता यह वास्तव में है,  लेकिन  वन्य प्राणी अधिनियम अपने  आप में  एग्जिस्टिंग है और उसके हिसाब से हमें चलना है.  खेती भी जरुरी है, किसानों का नुकसान भी नहीं होना चाहिये. तो रास्ता जरुर निकालेंगे.  मुख्यमंत्री जी भी  इस पर  पूरी चिंता कर रहे हैं.

                   उपाध्यक्ष महोदय --  मंत्री जी, धन्यवाद.

जयन्‍ती माता पहुँच मार्ग की स्‍वीकृति

                8. ( *क्र. 2523 ) श्री हितेन्द्र सिंह ध्‍यानसिंह सोलंकी : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या बड़वाहा विधान-सभा क्षेत्र के नगर, बड़वाहा के पूर्वी दिशा में लगभग 500 वर्ष पुराना आस्‍था का केन्‍द्र जयन्‍ती माता के मन्दिर पहुँच मार्ग एवं चोरल नदी पर ब्रिज निर्माण हेतु प्रश्‍नकर्ता द्वारा समय-समय पर विभाग प्रमुख एवं विभागीय अधिकारियों को पत्र प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया गया था? यदि हाँ, तो पत्र प्राप्ति के दिनांक से वर्तमान तक विभाग द्वारा तद्संबंध में क्‍या कार्यवाही की गई है? (ख) प्रस्‍ताव अनुसार कितनी लागत का प्रस्‍ताव कनिष्‍ठ अधिकारी द्वारा वरिष्‍ठ अधिकारी को किस दिनांक को प्रेषित किया गया है? क्‍या उक्‍त प्रस्‍ताव वित्‍त वर्ष    2016-2017 में बजट में शामिल कर स्‍वीकृत किया जावेगा?

                लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) जी हाँ। कार्य का प्रस्‍ताव तैयार किया जा रहा है। (ख) कार्य की डी.पी.आर. तैयार की जा रही है। स्‍वीकृति के लिए समय बताया जाना संभव नहीं है।

                   श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी -- उपाध्यक्ष महोदय,  मेरा  प्रश्न धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है और यह जयन्ती माता, चौरल का जो  रपटा है,  उसको बनाने की काफी समय से मांग चल रही है, प्रश्न  उठा है,  उसके बाद में  मैं मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने डीपीआर तैयार करवाया. इसके पहले मैंने कई बार प्रश्न लगाया, लेकिन डीपीआर तैयार नहीं हो पाया था.  तो मैं मंत्री जी से यही निवेदन करना चाहता हूं कि  यह  काफी लम्बा चोड़ा नहीं, बहुत छोटा रोड है और  इसकी जो डीपीआर की रकम आई है, वह 3.94 करोड़ रुपये के लगभग है.  तो मैं  इसकी मंत्री जी से घोषणा करवाना चाहता हूं कि क्या आप  इस बजट में इसको शामिल करने की घोषणा करेंगे.

                   श्री सरताज सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय,  जैसा माननीय विधायक जी ने बताया कि इसका सर्वे का कार्य चल रहा है और डीपीआर बन रहा है. ..

                   श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी -- मंत्री जी, बन गया है.

                   श्री सरताज सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय,   यह मेरी जानकारी में नहीं है, यह आप बता रहे हैं.  डीपीआर बन रहा है और उसके बाद जो आगे प्रोसेस है,  हमारी  एसएफसी और ईएफसी में जाता है.  हर बात की समीक्षा होती है.  उसके आधार पर निर्णय किया जायेगा.

                   श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी --  उपाध्यक्ष महोदय, डीपीआर की कॉपी मेरे पास है, मैं उनको दे दूंगा.  पर इसको दिखवाकर इसी बजट में  शामिल कर दें, यह मेरी भावना है.  वह धार्मिक भावनाओं का क्षेत्र है.  लाखों लोग दर्शन करने जाते हैं, नंगे पांव जब नौ दर्गा में जाते हैं, तो उनके पांव में कंकरी चुभती है और छाले हो जाते हैं.  नौ दुर्गा में  9 दिन तक लगातार जाते हैं.  तो मैं यह चाहता हूं कि  यह डीपीआर की कॉपी मैं मंत्री जी को दे देता हूं  और उसे बजट में शामिल करवा लें.

                   श्री सरताज सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, विधायक जी की भावनाओं का सम्मान करते हुए  इस प्रक्रिया  को प्रारंभ किया गया है. प्रक्रिया प्रारंभ करने का अर्थ यह है कि  यह भविष्य में  बन जायेगा.

                   उपाध्यक्ष महोदय -- प्रक्रिया शुरु हो गई है.

श्री महाकालेश्‍वर मंदिर प्रबंध समिति के पास उपलब्‍ध भूमि

                9. ( *क्र. 3013 ) श्री सतीश मालवीय : क्या उद्योग मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि  (क) श्री महाकालेश्‍वर मंदिर प्रबंध समिति की भारतवर्ष के किस-किस स्‍थान पर कितनी-कितनी भूमि है? उक्‍त भूमि पर वर्तमान में किस-किस का कब्‍जा है? विगत 05 वर्षों में उक्‍त भूमि से कितनी आय हुई? कितने कब्‍जाधारी समय पर राशि मंदिर कोष में जमा नहीं करा रहे हैं? सूची उपलब्‍ध करावें। (ख) श्री महाकालेश्‍वर मंदिर प्रबंध समिति ने विगत 03 वर्षों में मंदिर की भूमि पर अवैध कब्‍जे को प्राप्‍त करने हेतु क्‍या कार्यवाही की? (ग) क्‍या शासन विभिन्‍न प्रान्‍तों एवं स्‍थानों की भूमि पर अपना कब्‍जा प्राप्‍त कर धार्मिक, सामाजिक एवं अन्‍य जन उपयोगी गति‍विधियों का संचालन करेगा?      (घ) मंदिर समिति के पास कितना स्‍वर्ण कोष है? क्‍या देश के अन्‍य मंदिरों की भांति श्री महाकालेश्‍वर मंदिर प्रबंध समिति मंदिर की धार्मिक गतिविधियों के अतिरिक्‍त स्‍वर्ण को प्रधानमंत्री स्‍वर्ण योजना में जमा कराने पर विचार किया है, जिससे डंप स्‍वर्ण से मंदिर को आय प्राप्‍त हो?

                        उद्योग मंत्री ( श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ) :  (ख) ग्राम चिन्‍तामण जवासिया की सम्‍पूर्ण भूमि मंदिर के कब्‍जे में ली गई है एवं शेष भूमि पर कब्‍जा प्राप्‍त करने हेतु कार्यवाही की जा रही है। (ग) जी हाँ। (घ) मंदिर के कोष में 7371.62 ग्राम स्‍वर्ण कोष है। जी नहीं।

परिशिष्ट - ''तीन''

                   श्री सतीश मालवीय --  उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से  मंत्री महोदया से कहना चाहूंगा कि  मैंने जो  बाबा  महाकाल  की जमीन से संबंधित एक प्रश्न  किया था,  चूंकि इसी साल सिंहस्थ है, तो वह अपने आप में अति महत्वपूर्ण हो जाता है.  मैंने जो (क) प्रश्न किया था,  उसका उत्तर जो मुझे मिला है, मैंने पूरे भारत वर्ष की  बाबा महाकाल की  चल, अचल  सम्पत्ति का ब्यौरा मांगा था.  मुझे उसका उत्तर मिला है कि जानकारी एकत्रित की जा रही है.  मैं  मंत्री महोदया से  अनुरोध करना चाहूंगा कि  इसकी एक समय सीमा बता  दें कि कितने दिनों में  यह जानकारी उपलब्ध हो जायेगी.

                   श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं  आपके माध्यम से  विधायक जी को बताना चाहती हूं कि  समय सीमा हम लोग नहीं दे पायेंगे. पहले तो मैं आपको धन्यवाद देती हूं  और इस सदन के माध्यम से आपको यह बताना चाहती हूं कि  हम लोगों के पास वह सूची थी भी नहीं.  आपके माध्यम से हमें पता चला कि  शायद  अभी यह तय नहीं है कि शायद बाबा महाकाल की   और भी  अनेक  स्थानों पर,  उनकी जमीन होगी.  तो आपको समय सीमा बताना संभव नहीं होगा. पर हम बिलकुल इसके ऊपर देखने के लिये  लग जायेंगे  कि पूरे भारत वर्ष में  जमीन कहां कहां है  और यह एकत्रित करके  आपको पहले दे देंगे.

                   श्री सतीश मालवीय --  उपाध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा. माननीय उपाध्यक्ष महोदय दूसरा मेरा मंत्री जी से प्रश्न था कि जिन अतिक्रामकों ने अतिक्रमण किया है उसकी सूची मुझे उपलब्ध हो गई है, मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि जिन अतिक्रामकों के द्वारा अतिक्रमण किया गया है , वह अतिक्रमण कब तक हटा दिया जायेगा.

          श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से माननीय विधायक जी को जानकारी देना चाहती हूं कि जो अतिक्रमणकर्ता है , उसमें 8 ऐसे हैं जिनके प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं. दूसरे अन्य जो 9 प्रकरण हैं उसमें बेदखली की कार्यवाही संबंधित तहसीलदार की कोर्ट में अब प्रकरण दर्ज कर दिये गये हैं. जल्दी से जल्दी इसका समाधान होगा.

          श्री सतीश मालवीय -- माननीय मंत्री जी अगर समय सीमा निर्धारित कर देतीं तो बेहतर होता.

          उपाध्यक्ष महोदय-- न्यायालयीन मामला है.

          श्री सतीश मालवीय-- उपाध्यक्ष महोदय, जो मामले न्यायालय में विचाराधीन नहीं है उसके अलावा जिन लोगों ने अतिक्रमण कर रखा है उसकी सूची है.

          श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया-- कोशिश है कि जल्दी से जल्दी हो जाये. आपने यह प्रकरण और तथ्य हमारे सामने लाये हैं, उसके लिये आपको धन्यवाद देती हूं. इस बारे में मेरी कलेक्टर से आज भी बात हुई थी कि जल्दी से जल्दी जिन्होंने भी अतिक्रमण कर रखा है उनको नोटिस के माध्यम से कार्यवाही की जाये.

          श्री सतीश मालवीय-- उपाध्यक्ष जी, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं.

 

 

 

तवा नदी पर पुल एवं एप्रोच रोड का निर्माण

10. ( *क्र. 2245 ) श्री विजयपाल सिंह : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या लोक निर्माण विभाग के सेतु निगम द्वारा बान्‍द्राभान एवं सांगाखेड़ाकला के मध्‍य तवा नदी पर पुल एवं एप्रोच रोड का निर्माण कराया गया है? यदि हाँ, तो क्‍या पुल एवं एप्रोच रोड का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है? यदि हाँ, तो कब? (ख) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा एप्रोच रोड का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं होने के संबंध में विभाग को पत्र प्रेषित किये गये थे? यदि हाँ, तो कब-कब तथा प्रश्‍नकर्ता के पत्र पर विभाग द्वारा प्रश्‍न दिनांक की स्थिति में कब-कब और क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई?    (ग) उक्‍त एप्रोच रोड का निर्माण कार्य पूर्ण नहीं होने के लिये कौन-कौन अधिकारी एवं ठेकेदार जिम्‍मेदार हैं? अधिकारी एवं ठेकेदार का नाम बताते हुये क्‍या विभाग द्वारा उनके विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो क्‍या तथा एप्रोच रोड का निर्माण कार्य कब तक पूर्ण कर लिया जावेगा?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : (क) जी हाँ। विस्‍तृत जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जी नहीं, अपितु माननीय मंत्रीजी की नोटशीट दिनांक 08.04.2010 प्राप्‍त हुई थी। विस्‍तृत जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) कोई अधिकारी जिम्‍मेदार नहीं है, शेष विस्‍तृत जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''चार''

          श्री विजयपाल सिंह --माननीय उपाध्यक्ष महोदय,बड़े दु:ख के साथ कहना पड रहा है कि 2005 में प्रारंभ हुआ निर्माण कार्य आज दिनांक तक अपूर्ण है. प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री सम्माननीय श्री बाबूलाल जी गौर के द्वारा यह पुल और सड़क का भूमि पूजन किया गया था. 11 वर्ष हो गये हैं अभी तक पुल और सड़क पूर्ण नहीं हो पाया है, अपूर्ण है. जो जगह पर मंत्री जी ने जवाब दिया है कि पुल भी पूर्ण है और 3 किलो मीटर की सड़क भी पूर्ण हो चुकी है. जब यह 3 किलोमीटर की सड़क पूर्ण हुई थी और बाढ़ आई थी तो उस सड़क की गुणवत्ता ऐसी थी कि बाढ़ में पूरी सड़क बह गई थी. उसके बाद भी मंत्री जी सड़क को पूर्ण बता रहे हैं . मैं मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि क्या इस सड़क के लिये भोपाल से किसी उच्च अधिकारी को भेजकर के जांच करा लेंगे ? जो अधिकारी या ठेकेदार इसके लिये दोषी पाये जाते हैं क्या उन पर कोई कार्यवाही करेंगे ?

            श्री सरताज सिंह -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह पुल बना था और इसके एप्रोच रोड दो तरफ के हैं. एक बान्द्राभान साइड का है . जो विलंब हुआ है उसके पीछे मूल कारण यह है कि कई ठेकेदारों ने इसका ठेका लिया फिर काम नहीं किया, ठेका निरस्त किया गया, दुबारा टेण्डर काल किये गये, इसकी सूची भी लंबी है. इस कारण यह विलंब हुआ है. जहां तक बान्द्राभान साइड के पुल का सवाल है, पहले इसके लिये 2009 में टेण्डर हुआ था उसको गुरूकृपा कंस्ट्रक्शन ने लिया था, उसको हमने 10.2.2012 को निरस्त कर दिया. उसका पंजीयन भी निलंबित कर दिया है, 24.9.2012 को दुबारा टेण्डर किया है, एससी जैन, ग्वालियर वालों ने टेण्डर लिया, और उन्होंने इस काम को पूरा कर दिया है.  अब माननीय विधायक जी का यह कहना है कि जो काम हुआ था बाढ़ के कारण वह क्षतिग्रस्त हुआ है, इस बात की जांच करा ली जायेगी, अगर क्षतिग्रस्त हुआ है तो उसको ठीक कर दिया जायेगा. दूसरा भाग इसका सांगाखेड़ाकला साइड का है . वहां भी स्थिति ऐसी है पहली बार हमने टेण्डर दिया हमने 22.3.2010 को, जिसको प्रांजल कंस्ट्रक्शन ने लिया था, उसका भी ठेका निरस्त हुआ, उसके बाद में 23.4.2012 को अंसारी कंस्ट्रक्शन ने ठेका लिया, उसने भी अधूरा काम किया तो काम निलंबित हो गया, और 30.11.2015 को कृष्ण कुमार तिवारी ने ठेका लिया उनका ठेका भी निरस्त हो गया, अभी 27.2.2016 को नया टेण्डर आया है जो खुल चुका है और उसका काम उसके आधार पर हो जायेगा.

            श्री विजयपाल सिंह--  माननीय उपाध्‍यक्ष जी, माननीय मंत्री जी मैं निवेदन करूंगा कि जो पुल का निर्माण हुआ है और पुल के निर्माण में जो एक पिलर का सेटलमेंट हो गया है, क्‍या उसकी भी जांच करायेंगे कि जो पिलर सेटलमेंट हुआ है और उसकी कुछ दिनों से जांच चल रही है और उसकी जांच शायद पूर्ण हुई नहीं हुई, मुझे तो जानकारी नहीं है, लेकिन मैंने अनेकों बार इस बात की पत्र लिखे हैं कि एक पुल का निर्माण हुआ और इतना घटिया किस्‍म का निर्माण हुआ कि उसका एक पिलर धस गया और उस पर आवागमन में भी कहीं न कहीं असुविधा हो रही है और कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है तो क्‍या उसकी भी जांच करायेंगे और निवेदन है कि अभी जो अधूरा कार्य है उसकी भी समय-सीमा बताने का कष्‍ट करेंगे.

          श्री सरताज सिंह--  जहां तक पुल का संबंध है, इस संबंध में कुछ काम हुआ है और जो पिलर बैठा था उसको रीइनफोर्स किया है और सड़कों के संबंध में मैंने अपना बता दिया है.

          श्री विजयपाल सिंह--  माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मेरा निवेदन है कि 11 वर्ष हो गये निर्माण होते-होते कम से कम उसकी समय सीमा तो बता दें.

          उपाध्‍यक्ष महोदय--  मंत्री जी ने बताया कि टेंडर हो चुका है, प्रक्रिया जारी है .

          श्री विजयपाल सिंह--  तो समय-सीमा में पूर्ण हो जाये, यह मेरा निवेदन था.

          उपाध्‍यक्ष महोदय--  आ गया जवाब आपका.

          श्री विजयपाल सिंह--  माननीय उपाध्‍यक्ष जी आया नहीं है, 11 साल हो गये हैं और कई बार मैंने प्रश्‍न भी लगाये हैं.

          उपाध्‍यक्ष महोदय--  अब आप बैठ जाये, आपका उत्‍तर आ गया है, पूरा मौका दिया मैंने आपको.

 

 

 

विदिशा जिले में पी.आई.यू. में लंबित कार्य

11. ( *क्र. 272 ) श्री निशंक कुमार जैन : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि () विदिशा जिले में पी.आई.यू. के अंतर्गत दिनांक 1 जनवरी 2013 से 31 दिसम्‍बर 2015 तक कितने कार्य स्‍वीकृत किए गए? कार्य का नाम, स्‍थान, स्‍वीकृत राशि, पूर्णता दिनांक सहित बतावें। () उपरोक्‍त कार्यों में से कितने पूर्ण होकर संबंधित विभाग को सुपुर्द कर दिये गये हैं? कितने अपूर्ण हैं। अपूर्ण कार्यों में कितनी राशि आहरित की जा चुकी है, इनकी अद्यतन स्थिति से अवगत करावें? () अपूर्ण कार्यों में ऐसे कितने कार्य हैं जो निर्धारित तिथि तक पूर्ण नहीं हुये हैं, ऐसे में ठेकेदार पर विभाग द्वारा कब-कब क्‍या कार्यवाही की गई? अपूर्ण कार्य कब तक पूर्ण कर लिए जायेंगे?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री सरताज सिंह ) : () 368 कार्य स्‍वीकृत। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के स्‍तम्‍भ 4, 6 एवं 11 अनुसार है। () 44 कार्य पूर्ण एवं विभागों को हस्‍तांतरित 27 कार्य अपूर्ण। आहरित राशि रू. 1304.26 लाख कार्यों की अद्यतन स्थिति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। () 13 कार्य। कार्यवाही पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के स्‍तम्‍भ 14 अनुसार है। संभावित पूर्णता तिथि पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के स्‍तम्‍भ 13 अनुसार है।

 

          श्री निशंक कुमार जैन--  माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, लोक निर्माण विभाग की पी.आई.यू ने विदिशा जिले के गंजबासौदा और ग्‍यारसपुर विकासखंड में बहुत सारी बिल्डिंगें बनाईं. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, विदिशा जिला माननी मुख्‍यमंत्री जी का गृह जिला है और हमारे प्रभारी मंत्री जी भी यहां पर विराजमान हैं और हमारी सांसद श्रीमती सुषमा स्‍वराज जी हैं, मध्‍यप्रदेश के बड़े म‍हत्‍वपूर्ण जिलों में शामिल है, मगर दुर्भाग्‍य की बात है कि प्रभारी मंत्री जी ने भी मीटिंग में निर्देश दिये कि जितने भी स्‍कूल बने हैं.

          श्री गौरीशंकर शेजबार--  (XXX).

          श्री निशंक कुमार जैन--  (XXX).

          उपाध्‍यक्ष महोदय--  विषय पर आ जायें.

          श्री बाबूलाल गौर--  शब्‍दों को निकाल दें, दुर्भाग्‍य शब्‍द.

          उपाध्‍यक्ष महोदय--  डॉक्‍टर साहब और निशंक जी दोनों ने जो कहा विलोपित कर दिया जाये....... (व्‍यवधान)....... विलोपित कर दिया ...... (व्‍यवधान)

          श्री निशंक कुमार जैन--  मंत्री जी भी तो खेद व्‍यक्‍त करें कि दुर्भाग्‍य हम है कि दुर्भाग्‍य आप है. .....  (व्‍यवधान)

          उपाध्‍यक्ष महोदय--  जितू पटवारी जी आपका प्रश्‍न भी आगे आने वाला है, समय चला जायेगा. आपका प्रश्‍न लगा है, बैठ जायें.

          श्री निशंक कुमार जैन--  बात इस बात की है कि मैं मूल प्रश्‍न पर आता हूं कि पी.आई.यू. ने जितने स्‍कूल बनाये हैं, बसौदा और ग्‍यारसपुर विकासखंड में 9 स्‍कूल पी.आई.यू. ने बनाये हैं और 9 स्‍कूलों में एप्रोच नहीं है, क्‍या वहां पर नाव चलायेंगे. स्‍कूलों में जब जाने के लिये रोड ही नहीं होगा तो बच्‍चे उस स्‍कूल में कैसे जायेंगे, और 9 स्‍कूलों में कुल लंबाई मात्र 1 किलोमीटर के आसपास होगी. मेरा एक निवेदन माननीय मंत्री जी से है कि 9 के 9 स्‍कूलों में एप्रोच के लिये सी.सी. की आप घोषणा कर दें कि वहां पर शीघ्र ही सी.सी. रोड बना दी जायेगी, नंबर 2 वहां पर 9 में से 8 स्‍कूलों में बिजली नहीं है, एक तरफ सरकार बड़े-बड़े होर्डिंग लगाकर डिंढोरा पीटती है कि कम्‍प्‍यूटर की सुविधा और तमाम सुविधाओं की बात करती है अरे जब बिजली ही नहीं होगी. न पीने का पानी है, न कम्‍प्‍यूटर है.

          उपाध्‍यक्ष महोदय--  निशंक जी आप भाषण दे रहे हैं, नहीं ऐसा नहीं. आपकी बात आ गई, अब मंत्री जी को जवाब देने दें.

          श्री निशंक कुमार जैन--  मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि वहां पर रोड बनवा दिये जायें, बिजली लगवा दी जाये, और साथ में जो मॉडल स्‍कूल है उसका सेकेंड फ्लोर और बाउंड्रीवाल की घोषणा कर दें यह छोटी सी घोषणा है माननीय मंत्री महोदय.

          उपाध्‍यक्ष महोदय--  आपके तीन प्रश्‍न आ गये, एक ही प्रश्‍न में, चलिये तीन हो गईं बातें. बिजली, एप्रोच रोड और बाउंड्रीवाल.

            श्री सरताज सिंह-- उपाध्यक्ष महोदय, पीआईयू किसी भी विभाग द्वारा दिये हुए काम को पूरा करता है. हमको स्कूल बिल्ड़िंग के लिए जो आवंटन मिला, उससे हमने बिल्डिंग का काम किया है. आप कहें कि एप्रोच रोड़ नहीं बनी तो उसमें ....

          श्री निशंक कुमार जैन-- माननीय मंत्रीजी रोड़ आपकी तरफ से बनवा दीजिए, बच्चों का सवाल है.

          उपाध्यक्ष महोदय-- पूरा उत्तर आने दीजिए.

          श्री सरताज सिंह-- जहां तक पीआईयू के कामों को सवाल है, मैं उसके बारे में बात कर रहा हूं कि हमको जितना आवंटन शिक्षा विभाग से मिलेगा, उसी हिसाब से उसका जो इस्टीमेट होगा,उसी हिसाब से काम किया जायेगा. यह डिपॉजिट वर्क है. उस हिसाब से वे काम किये गये हैं. बाकी जो समस्याएं हैं, उनको देखा जायेगा, वह अलग प्रक्रिया है, अलग विभाग है. जहां तक पीआईयू का संबंध हैं तो पीआईयू उतना ही काम करेगा जितना, उसको आवंटन मिला है.

          श्री निशंक कुमार जैन-- उपाध्यक्षजी, पीआईयू को जो काम दिया गया था, उसमें बिजली भी थी. बिजली नहीं लगी है. मैं मंत्रीजी से अनुरोध करना चाहूंगा कि पूरे नौ स्कूलों की सबकी लंबाई जोड़ दें तो मात्र एक किलोमीटर से भी  कम सड़क बनेगी. वह आप लोक निर्माण विभाग से करा दीजिए.

          उपाध्यक्ष महोदय-- वह डिपॉजिट वर्क है. उसमें सिर्फ बिल्डिंग शामिल थी. वह अलग कार्य है. उसकी प्रक्रिया अलग है.

          श्री निशंक कुमार जैन-- उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपकी बात से सहमत हूं. लोक निर्माण विभाग की ओर से घोषणा कर दीजिए. कोई बहुत बड़ा काम नहीं है.बारिश में बच्चे जूते,सेंडल  हाथ में लेकर स्कूल जाते हैं.

          उपाध्यक्ष महोदय-- मंत्रीजी, यह बता दें कि क्या बजट में बिजली कार्य शामिल था या नहीं?

            श्री सरताज सिंह-- वायर बिजली का प्रावधान उसमें नहीं था.

          श्री निशंक कुमार जैन-- उपाध्यक्ष महोदय, मंत्रीजी कुछ घोषणा करना चाहते हैं. एक मिनट का समय चाहूंगा.

          डॉ गौरीशंकर शेजवार-- उपाध्यक्ष महोदय, मेरे यहां पीआईयू द्वारा एक स्कूल बनाया गया. मैं उस कार्यक्रम में गया. लेकिन उसमें बाऊंड्री वॉल नहीं बनायी थी तो मैंने विधायक निधि से घोषणा कर दी.मेरा यह कहना है कि मान लीजिए एप्रोच रोड़ नहीं है तो वहां के स्थानीय विधायक की भी जिम्मेदारी है कि वह घोषणा कर दें कि विधायक निधि से मैं बनवा दूंगा.

          श्री निशंक कुमार जैन-- उपाध्यक्ष महोदय, मैं, वन मंत्रीजी से कहना चाहता हूं कि इनके विधानसभा क्षेत्र में तो स्कूलों में बाऊंड्री वॉल भी नहीं है. पानी, बिजली भी नहीं है. आपने कितना विधायक निधि से दे दिया मंत्री जी? आप सदन में बतायें.

          उपाध्यक्ष महोदय-- मंत्रीजी जवाब देना चाहेंगे? आप कुछ कह रहे थे.

            श्री सरताज सिंह--जो स्कूल भवन स्वीकृत होते हैं, उनका ड्राईंग,डिजाईन और इस्टीमेट केन्द्र सरकार से आता है. जो पैसा आता है, उसमें काम किया जाता है. जो काम रह जाते हैं, जैसा माननीय वन मंत्रीजी ने सुझाव दिया कि छोटे-मोटे कामों को विधायक निधि से भी कराया जा सकता है.

          श्री रामनिवास रावत-- उपाध्यक्ष महोदय, बच्चों का प्रश्न है. अगर मंत्रीजी घोषणा कर दे तो क्या बुराई है. मात्र एक किलोमीटर की सीसी रोड़ बनना है.

          उपाध्यक्ष महोदय-- प्रश्न क्रमांक 12 रामनिवास रावत जी अपना प्रश्न करें.

          श्री निशंक कुमार जैन-- उपाध्यक्ष महोदय, मात्र एक किलोमीटर की रोड़ है.

          उपाध्यक्ष महोदय-- निशंक जी आप बैठ जाईये. आपकी बात आ गयी है. आप अलग से प्रक्रिया करिये.

प्रदेश में विदेशी पूंजी निवेश

12. ( *क्र. 3113 ) श्री रामनिवास रावत : क्या उद्योग मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) 1 जनवरी 2013 से प्रश्‍नांकित दिनांक तक प्रदेश में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के‍ लिए मान. मुख्‍यमंत्री एवं मंत्रि‍मंडल के अन्‍य सदस्‍यों के साथ     किन-किन देशों की यात्राएं कब-कब की? इन यात्राओं पर कितनी-कितनी राशि व्‍यय की गई? (ख) प्रश्‍नांश (क) की यात्राओं में किन-किन विदेशी उद्योग समूहों/संस्‍थाओं द्वारा प्रदेश में कौन-कौन से उद्योग/निवेश के लिए एम.ओ.यू. हस्‍ताक्षर किए गए? इन एम.ओ.यू. में से प्रदेश में कितना विदेशी निवेश किस क्षेत्र में अभी तक कहाँ-कहाँ किया गया है? कितना भविष्‍य में प्रस्‍तावित है? कितने एम.ओ.यू. किस कारण से निरस्‍त हुए?

उद्योग मंत्री ( श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ख) हस्‍ताक्षरित एम.ओ.यू. की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। उक्‍त एम.ओ.यू. के संदर्भ में विदेशी निवेश होना अपेक्षित है, जिसका आंकलन किया जाना संभव नहीं है। उक्‍त में से कोई एम.ओ.यू. निरस्‍त नहीं हुआ है।

 

          श्री रामनिवास रावत--उपाध्यक्ष महोदय, जैसा आपने कहा कि मेरा प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है. मैं केवल यही जानना चाहूंगा. मैंने औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिये विदेश यात्राओं के संबंध में  पूछा था. मैंने पूछा कि 1 जनवरी,2013 से लेकर प्रश्न दिनांक (2016) तक कितनी यात्राएं की गई.  आपने उत्तर दिया है कि लगभग 7 यात्राएं की गई हैं और 683.70 व्यय भी हुआ है. फिर मैंने पूछा कि यात्राओं का जो उद्देश्य होता है कि कितने MOU हस्ताक्षरित हुए तो उनकी भी संख्या 9 बतायी है. उसके बाद मैंने पूछा था कि MoU हस्ताक्षरित होने के बाद कितना विदेशी निवेश हुआ? उसका उत्तर दिया कि--उक्त MoU के संदर्भ में विदेश निवेश होना अपेक्षित है. जिसका आकलन किया जाना संभव नहीं है. उक्त में से कोई MoU निरस्त नहीं हुआ है. उपाध्यक्ष महोदय, एक MoU 2013 मेंहुआ है, दो MoU 2014 में, चार MoU 2015 में हुए और तीन 2016 में हुए हैं. वर्ष 2016 से निवेश नहीं आया, लेकिन वर्ष 2014 में जो निवेश हुए और जितने भी एमओयू हस्ताक्षरित हुए हैं, क्या उन कंपनियों ने मध्यप्रदेश सरकार के पास आवेदन भूमि आवंटन के लिए किया है, किस-किस काम के लिए एमओयू हस्ताक्षरित हुए. अभी तक क्या कार्यवाही की गई, यह माननीय मंत्री महोदया बताएं?

श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया - उपाध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी के प्रश्न विदेश यात्राओं से संबंधित हैं. इसमें मैं आपको जानकारी देना चाहती हूं कि जो एमओयू साईन हुए थे, वे जी टू जी एमओयूज़ थे. जी टू जी मतलब, गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट, इनमें से एक तो दो उद्देश्य होते हैं कि सिर्फ एमओयूज़ की बात नहीं होती है. परन्तु जाकर दूसरे देश में अपने प्रदेश के बारे में बताया जाय, हमारे प्रदेश की ब्रांडिंग हो जाय. हमारे प्रदेश की मॉर्केटिंग हो जाय. कई तो ऐसे देश हैं जिनको महाराष्ट्र और आंध्रप्रदेश के अलावा कोई और प्रदेश तो दिखता ही नहीं है. ऐसे भी हमने कई विदेश यात्राएं लीं, जहां जब हमने जानकारी दी तो लोग बिल्कुल आश्चर्यचकित रह गये कि ऐसा भी एक और प्रदेश है जो महाराष्ट्र से भी अच्छा रह सकता है या आंध्रप्रदेश या तेलंगाना से भी अच्छा रह सकता है. बीमारू प्रदेश से आज हम यहां तक माननीय श्री शिवराज सिंह जी की वजह से आए हैं. दूसरा, जब हम जाते हैं तो सिर्फ हम इनेवस्टर्स से बात नहीं करते हैं, हम जी टू जी भी बात करते हैं. इसमें से जिसमें हमारी फाईन ट्यूनिंग होती जा रही है, उसमें मैं बड़े हर्ष और गर्व से आपको और इस सदन को बताना चाहती हूं कि जैसे जब जापान का जब दौरा हुआ तो उसमें हमारे जी टू जी में जेट्रो (जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गनाईजेशन ) के साथ एक इतना अच्छा एमओयू हुआ कि उसमें कम से कम हमें 12000 करोड़ रुपए का ऋण उपलब्ध हुआ है.

उपाध्यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी, संक्षेप में करें समय हो चुका है.

श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया - उपाध्यक्ष महोदय, यह बहुत महत्वपूर्ण है, इसीलिए हमसे प्रश्न पूछते हैं विदेश यात्राओं पर, हमें तो प्रोत्साहन मिलना चाहिए कि आप जाएं और हमारी ब्रांडिंग और मॉर्केटिंग करें और देखें कि निवेश और जी टू जी कैसे आ सकते हैं. (मेजों की थपथपाहट).. न कि पूछें ऐसे कि आपने क्या किया, एमओयूज़ कहां साईन किया? आज 12000 करोड़ रुपए का ऋण जापान जैसे एक देश से मिलता है, जो फूंक-फूंक कर चलता है. वह एक कदम नहीं उठाते जब तक कि उसने अपने एक-एक पेपर को पढ़ा नहीं और आज 12000 करोड़ रुपए का ऋण मेट्रो रेल के लिए मिल रहा है 0.3 परसेंट की ब्याज दर पर. (मेजों की थपथपाहट)..उसके साथ-साथ 40 साल के लिए और 10 साल और ग्रेस पीरियड, ऐसे करते हुए आज हमने ऐसे एमओयूज़ भी साईन किये हैं. मैं पूरी जानकारी माननीय विधायक जी को दे दूंगी.

श्री रामनिवास रावत - उपाध्यक्ष महोदय, केवल एक प्रश्न आपकी अनुमति से.

उपाध्यक्ष महोदय - माननीय रावत जी, 3 मिनट अतिरिक्त हो चुके हैं. बिल्कुल पाइंटेड, वक्त नहीं लेंगे.

श्री रामनिवास रावत - उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री महोदया ने कहा कि माननीय श्री शिवराज सिंह जी की वजह से हमारा प्रदेश बीमारू राज्य से बाहर निकला है. मैं केवल एक बात पूछना चाहता हूं कि उद्योग विभाग का वर्ष 2004-05 में जीएसडीपी में कितना योगदान था और यदि बीमारू राज्य से बाहर निकला है तो आज की  तारीख में कितना योगदान है?

श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया - मैं यह जानकारी आपको दे दूंगी.

उपाध्यक्ष महोदय - अब यह इस प्रश्न से उद्भुत नहीं होता है.

वन मंत्री (डॉ. गौरीशंकर शेजवार) - उपाध्यक्ष महोदय, आप विशेष अनुमति दे रहे हैं यह बात अलग है. लेकिन ऐसी परम्परा कभी रही नहीं.

उपाध्यक्ष महोदय - प्रश्नकाल समाप्त.

 

 

 

 

 

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

 

 

श्री रामनिवास रावत - उपाध्यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश में पंचायत सचिव, सहायक सचिव हड़ताल पर हैं. पूरे प्रदेश का काम बंद है. प्रदेश में गंभीर सूखा पड़ा हुआ है, पूरे प्रदेश में मनरेगा के काम बंद हैं. सूखा रोजगार के काम बंद हैं. लोग परेशान हो रहे हैं. प्रदेश से मजदूरों  पलायन कर रहे हैं. मैंने इस संबंध में ध्यानाकर्षण दिया है.

उपाध्यक्ष महोदय - ठीक है, उस पर विचार किया जाएगा.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नियम 267-क के अधीन विषय.

 

भिण्ड के आलमपुर नगर स्थित मृगा नदी में गंदा पानी छोड़ा जाना.

 

          1. डॉ. गोविन्द सिंह ( लहार ) -- उपाध्यक्ष महोदय मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है. भिण्ड जिले के आलमपुर नगर स्थित स्व. मल्हारराव होल्कर की ऐतिहासिक छत्री के समीप गुजरने वाली सोनभद्रिका नदी(मृगा नदी) में आलमपुर नगर के नालों एवं गंदी नालियों का सम्पूर्ण पानी छोड़ा जा रहा है जिससे नदी का पानी अत्यंत प्रदूषित हो चुका है. इस नदी में स्नान करने से जन सामान्य को विभिन्न प्रकार की गंभीर संक्रामक बीमारियां हो रही हैं एवं पशुओं द्वारा प्रदूषित पानी पीने से कई पशुों की मौत हो चुकी है. आलमपुर नगर का दूषित पानी सोनभद्रिका नदी में बहाए जाने से रोकने के संबंध में स्थानीय नागरिकों द्वारा जिला प्रशासन / शासन एवं नगर परिषद आलमपुर से अनुरोध किया जाता रहा है किंतु कोई कार्यवाही नहीं की गई. शासन प्रशासन एवं नगर परिषद् द्वारा सोनभद्रिका नदी प्रदूषण से बचाने में उदासीनता एवं लापरवाही बरते जाने को लोकर आम जनता में तीव्र रोष व आक्रोश व्याप्त है.

 

भोपाल स्थित हमीदिया अस्पताल में ट्रामा यूनिट का उन्नयन किया जावे

          2. श्री आरिफ अकील ( भोपाल उत्तर ) -- पढ़ी हुई मानी गई.

          ( उपाध्यक्ष महोदय द्वारा व्यवस्था दी गई की श्री आरिफ अकील जी की सूचना पढ़ी हुई मानी जायेगी)

 

           

            श्री सुदर्शन गुप्ता आर्य ( इंदौर - 1 ) -- उ पाध्यक्ष महोदय मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है. इंदौर जिला प्रशासन द्वारा स्मोक फ्री प्रोजेक्ट में लंबॆ समय से ढिलाई बरती जा रही है. इस संबंध में अब तक संबंधित अधिकारियों व संस्थाओं की बैठकें ही होती आई है. सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान प्रतिबंधित किए जाने के लिए राज्य व जिला स्तर पर कई आदेश भी निकाले गए ब्लाक स्तर पर जिला तंबाकू नियंत्रण समिति द्वारा भी प्रयास हुए. इतना ही नहीं सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों पर आर्थिक दण्ड करने के लिए इंफोर्समेंट स्कवाड भी बनाए गए मगर इसके बाद भी अधिकृत प्रशासनिक अधिकारी कानून के पालन को सुनिश्चित कर पाने में नाकाम रहे. जिससे जनता में भारी रोष व्याप्त है. स्मोक फ्री बनाने की कवायद में टोबेको कण्ट्रोल सेल जैसी  जो कमेटियां बनाई गई हैं इनकी जिम्मेदारी जिले में इस कैम्पेन के तहत की जा रही कार्यवाही पर विशेष ध्यान देना चाहिए. जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग को शामिल करके बनाई गई कमेटियों की बैठकें तक नियमित तरीके से नहीं हो पा रही हैं. तीन साल पहले स्वास्थ्य विभाग की टोबेको कण्ट्रोल सेल ने सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों पर 200 रूपये जुर्माना लगाने का निर्णय लिया था. तब शहर के पुलिस तानों प्रशासनिक कार्यालय व कुछ प्रायवेट संस्थानों को चालान बुक दी गई थी स्वास्थ्य विभाग ने एक साल में 100 से ज्यादा चालान बुक बांटी मगर चालानी कार्यवाही नहीं हुई. ये चालान बुक भी अधिकांश कार्यालयों में धूल खा रही हैं. कुछ समय पहले जिले के आईजी ने भी सभी थानों को स्मोक फ्री करने का आदेश जारी किया था लेकिन अब भी अधिकांश थानों में खुमेआम धूम्रपान किया जाता हुआ देखा जा सकता है. प्रदेश शासन और जिला प्रशासन को इस ओर ध्यान देते हुए स्मोक फ्री प्रोजेक्ट की नियमित समीक्षा की जाना अति आवश्यक है.

 

 

 

 

मुरैना स्थित स्नातकोत्तर महाविद्यालय के पास खुली भूमि पर दूषित जल इकट्ठा होने से विद्यार्थियों को परेशानी होना.

          3. श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार (नीटू) (सुमावली) --उपाध्यक्ष महोदय मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है. मुरैना फरवी 2016 जिले का एक मात्र शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नगर निगम सीमा के बीच स्थापित है. उक्त महाविद्यालय की जहां कक्षाएं लगती हैं. उससे लगी खुली भूमि में काफी मात्रा में पानी भरा रहने के कारण छात्र छत्राओं को दुर्गंध आती रहती है. वर्षांत व आसपास की बस्ती का दूषित पानी आ कर महाविद्यालय की खुली जमीन व मैदान में भर जाता है. प्रशासन द्वारा इसके निकालने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है. यदि इस दूषित पानी को यहां से निकाल दिया जावे तो महाविद्यालयीन छात्र छात्राओं की दुर्गंध से निजात मिलेगी बल्कि खुली मजीन का खेल मैदान के रूप में इस्तेमाल किया जा सकेगा. उक्त स्थिति से छात्रों में अभिभावकों में भारी रोष व्याप्त है शासन की छवि धूमिल हो रही है.

 

 

 

 

 

 

 

 

प्रदेश के स्कूल शिक्षा विबाग में संचालित पेंशन स्कीम कंपनी एनएसडीएल द्वारा अव्यवस्था से परेशानी होना.

          4.श्री यशपाल सिंह सिसौदिया ( मंदसौर ) -- उपाध्यक्ष महोदय मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है. मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अध्यापक संवर्ग के लिए संचालित पेंशन स्कीम कंपनी एनएसडीएल को उनकी जमा राशि की जानकारी उपलब्ध करा पा रही है और न ही उनकी शिकायतों का निराकरण कर पा रही हैं. प्रदेश के सैकड़ों अध्यापकों के पास पेंशन स्कीम प्रारम्भ 2013 से ही पेंशन किट नहीं है तथा कई अध्यापकों के खाते में राशि कटौती के बाद भी नहीं पहुंची है और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही के चलते न ही उनके खाते में शासन की अंशदान राशि पहुंच पाई है. इसको लेकर प्रदेश के अध्यापक संवर्ग में आक्रोश है उक्त पेंशन स्कीम के रिकार्ड हेतु समस्त अध्यापकों की व्यक्तिगत पासबुक बनवाई जाय.

 


 

6.       श्‍योपुर जिला चिकित्‍सालय का 200 बिस्‍तरीय अस्‍पताल में उन्‍नयन

किया जाना

                   श्री दुर्गालाल विजय (श्‍योपुर) -- उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है :-

         

          7.       श्री दिलीप सिंह शेखावत (अनुपस्‍थित)

 

          8.                 भोपाल के रेतघाट स्‍थित रोटरी बड़ी होने से दुर्घटनाएं होना

                   श्री विष्‍णु खत्री (बैरसिया) -- उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है :-

 

                  

          9.                       कटनी जिले के बहोरीबंद क्षेत्र में शिक्षकों की कमी

                   कुँवर सौरभ सिंह (बहोरीबंद) -- उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है :-

          10.     श्री आर.डी. प्रजापति (अनुपस्‍थित)

                  

          श्री गोविंद सिंह पटेल (गाडरवारा) -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आज सुबह 8 बजे के लगभग गाडरवारा विधान सभा क्षेत्र के सौ गांवों में भयंकर ओलावृष्‍टि हुई है, आंधी से पानी भी गिरा है इसलिए गेहूँ, चना, मसूर की फसल पूरी चौपट हो गई है. इसलिए मैं शासन से, राजस्‍व मंत्री जी से और कृषि मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूँ कि शीघ्र वहां का सर्वे कराके राहत राशि किसानों को बंटवाई जाए क्‍योंकि सूखे के कारण पहले से ही किसान परेशान था, ओलावृष्‍टि से और नुकसान हो गया है. मैं तो यहीं भोपाल में था लेकिन मुझे सूचना प्राप्‍त हुई है इसलिए मैं राजस्‍व मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ.

          उपाध्‍यक्ष महोदय -- धन्‍यवाद गोविंद सिंह जी.

 

                                                                                               


 

11.45 बजे                            पत्रों का पटल पर रखा जाना

            (1) मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग की निम्नलिखित अधिसूचनाएँ:-

        (i)  क्रमांक 2256-मप्रविनिआ-2015,दिनांक 17 दिसम्बर,2015

        (ii) क्रमांक 2267-मप्रविनिआ-2015,दिनांक 21 दिसम्बर 2015 तथा

        (iii) क्रमांक 58-मप्रविनिआ-2016,दिनांक 13 जनवरी,2016

 

 

 

 

 

 

 

 

 

         

 

          (2) मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल का वार्षिक    प्रतिवेदन  वर्ष 2014-2015

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

11.46 बजे                                  ध्यान आकर्षण

        (1) भिण्ड जिले में आवारा पशुओं द्वारा फसल को नष्ट किया जाना 

 

            डॉ.गोविन्दसिंह(लहार)-- अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

11.49 बजे                अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए

 

 

           

               वन मंत्री(डॉ. गौरीशंकर शेजवार)--  माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

                                                                                                                       

            डॉ. गोविंद सिंह--- माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न करने का मामला नहीं है. मैं चाहता भी नहीं हूं कि ज्यादा बहस हो लेकिन मैं चाहता हूं कि इस समस्या का कोई निदान होना चाहिए हो सकता है कि पूरे मध्यप्रदेश में यह समस्या न हो लेकिन दतिया और हमारे इलाके में 100-150 आवारा पशुओं के झुंड फसलों को बरबाद कर रहे हैं. अध्यक्ष महोदय, पहले पंडितों को गाय दक्षिणा में देते थे वह उनको ले जाते थे लेकिन हमारे क्षेत्र में यह सच्चाई है कि एक भी पंडित गाय लेने के लिए तैयार नहीं हैं, कहते हैं कि जो दक्षिणा देना है दे दो हम गाय नहीं लेंगे. अब हर खेत में ट्यूबवेल लगे हुए हैं , हरी भरी फसलें होती हैं , मैं कभी कभार रात को एक बजे दतिया से आया हूं तो मैंने देखा कि आठ-दस किसान दिसंबर की सर्दी घूम रहे थे उनमें एक परिचित था उनसे हमने पूछा क्यों भई , रामनाथ, तुम रात को लट्ठ लेकर क्यों घूम रहे हो तो वह बोला कि साहब , रात भर में हमारे चार बीघा मटर पशु साफ कर गये अब केवल दो बीघा ही बचा है. इसकी सुरक्षा पशुओं से  कर रहे हैं  ताकि हमारी साल भर तक  गुजर बसर   हो सके. यह बहुत गंभीर समस्या है. पंचायतों के पास इसके लिए फंड नहीं है. न ही पंचायतों के पास चरनोई भूमि बची है, भूमि पट्टे में चली गई और उन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर अपने नाम कर ली है. अध्यक्ष महोदय, आपसे हाथ जोड़कर प्रार्थना है कि इस समस्या का कोई निदान कर दें . मैंने गौर साहब से भी कहा, नरोत्तम मिश्रा जी से भी कहा है. हमारे क्षेत्र से भांडेर  लगा हुआ वहाँ के विधायक भी बैठे हुए हैं, उनसे आप पूछ लीजिये. पूरे खेत साफ हो रहे हैं, तीन साल से वहाँ सूखा पड़ रहा है वहाँ किसान रो रहा है. आप मंत्री हैं, हम आपसे कह रहे हैं आप वहाँ पर चलकर देख लें . वहाँ पर खेत के खेत साफ डले हैं, केवल उनकी फसल ही हरी- भरी खड़ी है , जिन्होंने अपनी सुरक्षा  और रक्षा कर ली है. जिस दिन चूक गए उसी दिन झुंड आ जाता है, दिन में पाँच-पाँच सौ गायें आ जाती हैं. अध्यक्ष जी, पहले बछड़ों का उपयोग होता था अब ट्रेक्टर चलने लगे तो लोगों ने बछड़े भी छोड़ दिए. हमने राजस्थान से बुलवाए. कुछ लोग लेकर आए बोले हम नगर परिषद् से हमने पाँच-पाँच सौ पर बछड़ा, गाय का, हमने कहा ले जाओ चराने के लिए, ले गए. कलेक्टर भिण्ड ने गौशाला के लिए भेजा, एक गौशाला है. बाकी की दोहाई-वोहाई तो सब फर्जी अनुदान ले रहे हैं, वे हैं ही नहीं. रावतपुरा मंदिर पर है, रावतपुरा महाराज चला रहे हैं, लेकिन वे 50 से ज्यादा रखते नहीं. कलेक्टर, एस पी, ने भेजा, तो आपके लोगों ने पीले साफे वालों ने उसको मार-मार कर भगा दिया. अब वे डर के कारण आ नहीं रहे हैं तो मैं केवल आप से ही विनय करना चाहता हूँ कि इसका कोई रास्ता निकलवा दें. हम बहस में नहीं पड़ना चाहते न हम चाहते हैं कुछ हो. लेकिन सच्चाई है, कैसे भी बचाओ किसानों को,  जो पूरी तरह से मरणासन्न स्थिति में भूखों मर रहे हैं. कोई रास्ता निकाल लें. यही हमारी विनय है. (XXX)

          अध्यक्ष महोदय--  यह कार्यवाही में से निकाल दें.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  माननीय अध्यक्ष महोदय, गोविन्द सिंह जी ने एक समस्या के बारे में ध्यानाकर्षण उठाया है. यह अवश्य है कि लोग पशुओं को छोड़ देते हैं तो वे आवारा हो जाते हैं. लेकिन इतना व्यापक, जितना उन्होंने बड़ा बढ़ा-चढ़ाकर इस विषय को रखा है, उतना है नहीं.

          श्री रामनिवास रावत--  उससे भी ज्यादा है.

          अध्यक्ष महोदय--  एक मिनट उत्तर तो आने दें. पूरी बात हो जाने दें फिर आप बोलिए.

          डॉ.गोविन्द सिंह--  हमारी बात अगर गलत निकल जाए तो जो भी दंड देंगे हम उस दंड को भुगतने को तैयार हैं.

          अध्यक्ष महोदय--  पूरी बात हो जाने दें.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--  अध्यक्ष महोदय, सरकार पूरी चिन्ता कर रही है. सबसे पहले तो लोगों में हमें यह जन-जागृति लाना चाहिए कि यदि पशु उनके हैं तो उनकी देखभाल स्वयं करें, स्वयं उनको बाँधें, उनके चारे की व्यवस्था वे स्वयं करें, तो जब तक यह जागरूकता किसानों में और जनता में नहीं आएगी तब तक सरकारी तौर पर हम इनकी व्यवस्था कर सकते हैं. हम गौशालाओं के माध्यम से इनकी व्यवस्था कर सकते हैं. इनके लिए पंचायत के जो अधिनियम हैं उनको लागू करके और लोगों को हम केन्द्रित कर सकते हैं पर अध्यक्ष महोदय, जब तक जनता में जागरूकता नहीं आएगी और जागरूकता लाने के लिए वहाँ हम सब जो जन प्रतिनिधि हैं इन्हें कहीं न कहीं कोई अभियान छेड़ना पड़ेगा. सरकार अपनी तरफ से पूरे काम कर रही है जैसा मैंने अपने उत्तर में बताया है. चारे की उपलब्धता हेतु जिले के बाहर चारे का निर्यात न किया जाए इस पर प्रतिबंध लगाया गया है. अध्यक्ष महोदय, ईंट भट्टों में लोग जो भूसे का उपयोग करते हैं वह नहीं करना चाहिए क्योंकि ज्यादा भूसे का उपयोग करेंगे तो कहीं न कहीं मवेशी को चारा कम हो जाएगा तो मवेशी बाहर फसलों का नुकसान करेगी. इसके लिए जितना प्रतिबंध लगा सकते हैं, जिला प्रशासन की तरफ से, वह हमने बराबर लगाया है. गौशालाओं की क्षमता बढ़ाने का हम बराबर प्रयास कर रहे हैं कि लोग गौशालाएँ खोलें ताकि जो बीमार और आवारा पशु हैं वे उनमें ज्यादा से ज्यादा रह सकें.

          सहकारिता मंत्री(श्री गोपाल भार्गव)--  माननीय अध्यक्ष महोदय, एक समस्या है, प्रश्न महत्वपूर्ण भी है लेकिन एक समस्या यह है कि गौशालाओं में गधे, सुअर, भी इसमें लिखे हैं. यह उसमें रखना भी संभव नहीं है और दूसरी बात यह है....

          डॉ.गोविन्द सिंह--  गधे, सुअर की व्यवस्था हम कर लेंगे. आप तो केवल गाय की व्यवस्था कर दें.

          श्री गोपाल भार्गव--  अब कोई गधाशाला, कोई सुअर शाला, यह तो हो नहीं सकता.

          डॉ.गोविन्द सिंह--  इनको आप छोड़ दो. आप तो केवल आवारा गायों और बछड़ों की कर दो, बाकी की छोड़ो.

          श्री गोपाल भार्गव--  आपकी तरफ से कोई सकारात्मक सुझाव मांग रहा हूँ. क्या उपाय होना चाहिए.

          संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)--  गधों और सुअरों की व्यवस्था आप कैसे करते हैं? जरा मार्गदर्शन करें. आपने लिखे हैं उसमें.

          श्री गोपाल भार्गव--  ध्यानाकर्षण सूचना में दिया हुआ है. सौ-सौ, डेढ़-डेढ़ सौ गधे. (हँसी) यह लिखा है.

          डॉ.गोविन्द सिंह--  आप तो मजाक कर रहे हैं.

          श्री गोपाल भार्गव--  मजाक नहीं कर रहा.

          डॉ.गोविन्द सिंह--  आपने सुझाव मांगा मैं सुझाव दे रहा हूँ.

          श्री गोपाल भार्गव--  बहुत अच्छी बात आपने कही. इसका कुछ सुझाव आपकी तरफ से ऐसा आए कि इसमें क्या होना चाहिए.

          डॉ.गोविन्द सिंह--  ठीक है इसके बाद मैं दे दूँगा.

          श्री गोपाल भार्गव--  यह जो डॉक्टर साहब माननीय मंत्री कह रहे हैं कि इसमें जन-जागृति लाने की आवश्यकता है. यह जनता के ही पालतू पशु हैं और यदि इस तरह से ये घूमेंगे तो इनके लिए अलग-अलग गौशालाएँ या इनके जानवरों की विशेष शालाएँ नहीं हो सकती हैं.

            अध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्रीजी हिरन की भी ऐसी ही समस्या है यह व्यावहारिक समस्या है जो माननीय सदस्य ने उठाई है.

          श्री गोपाल भार्गव--यह वन्य प्राणी भी नहीं है इसका कोई सार्थक उपाय माननीय सदस्य भी बतायें कि क्या हो सकता है.

          अध्यक्ष महोदय--पहले मंत्रीजी बोल लें.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, विभिन्न स्तरों पर सरकार ने पशु कल्याण समितियों का गठन किया है. समय-समय पर आवश्कतानुसार विशेष रुप से आवारा पशुओं के नियंत्रण व विस्थापन के लिए पशु कल्याण समितियां बराबर चिन्ता करती हैं. कांजी हाउस की व्यवस्था हर पंचायत में है परन्तु कई पंचायतों ने इस पर विचार करना छोड़ दिया है. जहां आवारा पशुओं की संख्या कम हुई है वहां लोगों ने कांजी हाउस में जानवरों को भेजना कम कर दिया है तो धीरे-धीरे करके यह व्यवस्था नष्ट हो गई है लेकिन आवारा पशुओं के लिए कांजी हाउस होना चाहिए और हम चिंता करेंगे की कांजी हाउस की व्यवस्था हो और उनमें पशुओं के आहार की व्यवस्था हो.

          श्री के.पी. सिंह--माननीय मंत्रीजी कांजी हाउस में जो पशु बंद हो जाता है उसे कोई छुड़ाने ही नहीं आता है, पंचायत परेशान है वह कैसे रखरखाव करे.

          डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- माननीय अध्यक्ष महोदय, ऐसे कांजी हाउस से हमारा आग्रह है कि वह उसे गौशाला में भेज दे. जो गौशालाएं संचालित हैं उनके मालिकों से हम जिला प्रशासन के माध्यम से आग्रह करवायेंगे कि ज्यादा से ज्यादा ऐसे पशुओं को अपने पास रखें. उनको अनुदान की या जो भी व्यवस्था होगी उसके बारे में हम पूरी चिंता करेंगे.(XXX)

          श्री मानवेन्द्र सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, कुछ वर्ष पूर्व एक नियम के अनुसार मध्यप्रदेश में ग्राम पंचायतों के कांजी हाउस बंद कर दिए गए थे वे आज तक चालू नहीं हुए हैं. जब कांजी हाउस बंद हुए तो कई ग्रामों में कांजी हाउस के स्थान पर अन्य भवन बना दिये गये. यह देखना होगा कि क्या दोबारा नियम बना है अन्यथा उसको फिर से लागू कराने का काम किया जाये और जिन ग्राम पंचायतों में  कांजी हाउस समाप्त कर दिए गए हैं वहां स्थान की व्यवस्था भी करानी होगी.

          श्री गोपाल भार्गव--माननीय अध्यक्ष महोदय, कांजी हाउस बंद करने के बारे में कभी कोई निर्देश शासन की तरफ से नहीं दिये गये हैं. ग्राम पंचायतों को पूरी स्वायत्तता है. मैं सभी ग्राम पंचायतों को पत्र लिखूंगा कि जहां पर कांजी हाउस नहीं है या वे खोलना चाहते हैं और भूमि उपलब्ध है उन्हें शासन की तरफ से निर्देश देंगे कि वे कांजी हाउस खोलें. कभी कभी यह बात आती है कि उनके पास स्टाफ नहीं होता है रखरखाव के लिए, चारे के लिये फंड नहीं होता है लेकिन हम इसके बारे में सोचेंगे, व्यवस्था करेंगे. वन्य प्राणियों से इतर आवारा पशुओं के लिए ग्रामीण क्षेत्र में एक व्यवस्था बनाने का प्रयास करेंगे और उसमें सभी माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि अपने-अपने क्षेत्रों में जहां भी वे कांजी हाउस की आवश्यकता समझें विचार करके बतायें उसमें शासन के बजट से जो कुछ भी हो सकेगा उसके लिये प्रावधान करेंगे.

          श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह प्रदेश की बहुत बड़ी समस्या है. मेरे विधान सभा क्षेत्र में एक पशु मेला लगता है अभी पिछले महीने ही वह मेला लगा था. वहां पहले एक-एक लाख के पशु बिकते थे इस बार पांच पांच रूपये में छोड़कर या बेच कर गये हैं, जब वहां पर कोई लेने वाला नहीं मिला तो वहां पर पांच हजार से अधिक बछड़ों को वहां छोड़ कर गये हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने सुझाव की बात कही है. कांजी हाऊस से समस्‍या हल नहीं होगी. क्‍योंकि कांजी हाऊस में पशु गया तो वहां पर कोई छुड़ाने नहीं आयेगा. मैं खुद जानता हूं कि पांच हजार बछड़े मेरे यहां छोड़ कर गये हैं. अगर कोई समस्‍या का निदान है तो जिस प्रकार से आप गौशालाओं को अनुदान देते हैं तो उसमें यह व्‍यवस्‍था कर दें कि प्रदेश के प्रत्‍येक किसान को जो पांच या पांच से अधिक गौधन रखता है उसको हम गौशालाओं की तरह संरक्षण देंगे तो निश्चित रूप से इनका पालन हो सकता है.

          श्री शंकर लाल तिवारी:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह अत्‍यंत गंभीर विषय है. मेरा निवेदन है कि पिछले समय सरकार के सामने एक बात आयी थी और सरकार ने शायद इस दिशा में कदम भी बढ़ाया था कि चार पांच पंचायत के बीच में जहां पर सरकारी चरू जमीन हो उसको जोड़कर के इस तरह के आवारा पशुओं के लिये एक खुली गौशाला सरकार की तरफ से पंचायतों के संरक्षण में चलायी जायेगी. इसका यही एक उपाय है यह कांजी हाउस से संभव नहीं है. चार पांच पंचायतों के बीच में एक खुली गौशाला बनायी जाये सरकार उसकी व्‍यवस्‍था करे.

          अध्‍यक्ष महोदय :- ठीक है, आपकी बात आ गयी है. डॉ गोविन्‍द सिंह जी आप अपनी आखिरी बात बोल दीजिये.

          डॉ गोविन्‍द सिंह :- अध्‍यक्ष महोदय, मेरे दो सुझाव हैं . आज से 20 वर्ष पहले डकैतों की एक हजार गायें थी तो उनको नागालैंड से एक टीम बुलाकर ले गये थे और उन्‍होंने जहां उनको जरूरत थी, गायों को पालते थे, वहां पर उनको भेजा था. हम सिर्फ इतना चाहते हैं कि सरकार से हमें कोई धन नहीं चाहिये, हमारी चार नगर परिषद हैं, अभी राजस्‍थान के लोग आते हैं, वह लोग एक-एक दो दो हजार गांय पालते हैं और पूरे देश में जहां भी जगह मिलती है और उनको घुमाते हैं, रखते हैं और उनका दूध भी बेचते हैं. जिस खेत में उनको बिठालते हैं और गायों से जो खाद होता है, उनको गरमी में खेत में बिठाते हैं और पांच पांच दस दस हजार वसूल करते हैं और गायों को चारा भी मिलता है. इस समस्‍या हेतु हमारा सिर्फ एक अनुरोध है कि पांच सौ रूपये प्रति गांय और बछड़ों को लेते हैं. हम चारों नगर परिषद से देने को तैयार हैं. आप सरकार की गारण्‍टी पर उनको सरकार से केवल जिले से बाहर ले जाने की गारण्‍टी और सुरक्षा प्रदान कर दे. हम सिर्फ सरकार से यही चाहते हैं. बाकी की व्‍यवस्‍था हम स्‍वयं कर लेंगे.

          डॉ गौरीशंकर शेजवार :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अपने उत्‍तर में और भाषण में इस समस्‍या के बारे में पूरा बताया है मूल रूप से यह समस्‍या कब से हुई और इसका कारण क्‍या है, यह भी बताना चाहता हूं. गोंविन्‍द सिंह जी जिस मंत्रिमण्‍डल में आप मंत्री थे यह बात 2003 के पहले की है. त‍ब यह हुआ कि जो चरनोई की जमीन थी वह लोगों को आवंटित कर दी गयी और यह जो चरनोई की जमीन थी यह पशुओं के चरने के लिये थी, उसमें चारा भी होता था और घूमने के लिये जगह भी थी और बैठने की व्‍यवस्‍था थी. समस्‍या जो है...

          डॉ गोविन्‍द सिंह :- आप उनको जिले से बाहर ले जाने के लिये गारण्‍टी ले लें, बाकी हम व्‍यवस्‍था कर लेंगे.          अध्‍यक्ष महोदय :- डाक्‍टर साहब आप पहले मंत्री जी का जवाब सुन लें.

          डॉ गौरीशंकर शेजवार :-क्‍या हुआ की मूल रूप से चरनोई की जमीन को कृषि के लिये आवंटित कर दी, जिन लोगों के अवैध पट्टे थे...

          श्री गोपाल भार्गव :- साढ़े सात प्रतिशत से घटाकर ढाई प्रतिशत कर दी. आपने पांच प्रतिशत बांट दी.

          डॉ गौरीशंकर शेजवार :- आपने पांच प्रतिशत बांट दी और जो बची हुई ढाई प्रतिशत जमीन थी उसमें उस पर भी अपने चहेतों के कब्‍जे करवा दिये तो ऐसी स्थिति में पशु कहां जायें. कभी इसके बारे में भी हमको सोचना चाहिये.

          डॉ गोविन्‍द सिंह :- आप बारह वर्षों से क्‍या कर रहे हो.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार - समस्या हमारे सामने खड़ी हुई है. समस्या पैदा करी किसी ने और गंभीर रूप से जानबूझकर यह सब बातें आईं लेकिन आज हमारे सामने समस्याएं हैं हम उसका निदान कर रहे हैं लेकिन जागरूकता भी जरूरी है आपका सहयोग भी जरूरी है आपको किसानों को कहना  पड़ेगा कि वे आवारा पशुओं को न छोड़ें आपको यह कहना पड़ेगा कि वे चारे का उत्पादन करें.

          श्री गोपाल भार्गव - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय रामनिवास रावत जी ने यह कहा था कि 5 पशु जिसके यहां हो मैं आपको अवगत कराना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश में पिछले दो वर्षों में हजारों की संख्या में हमने 50 हजार रुपये से ज्यादा की राशि मनरेगा के कन्वर्जेंस से पशु शेड के लिये दी है आप कृपा करके उनमें पशु रखें. गधे हों,सुअर हों,गाय हों, बैल हों जो  भी रखना हों रखें. सरकार ने व्यवस्था की है.

          श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय.

          अध्यक्ष महोदय - नहीं मैंने आपको अवसर दिया. विक्रम सिंह जी बोलेंगे. आपकी बात आ गई.सहयोग करिये आप.

          कुं.विक्रम सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सीधी एक बात मंत्री जी से पूछना चाहूंगा.मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा समस्या आज आवारा पशुओं की,रोजड़ों की और जंगली सुअरों की है. पूरे उत्तर प्रदेश से लगे हुए जितने भी मध्यप्रदेश के जितने भी जिले हैं उनमें सबसे ज्यादा समस्या आवारा पशुओं की,जंगली सुअरों की और रोजड़ों की है और साथ ही साथ ग्रामों में बंदरों के भी उत्पात से जनता परेशान हो चुकी है. मेरे विधान सभा क्षेत्र में यही समस्या है. सरकार कौन सी नीति बना रही है. यदि नीति बनाते समय हम लोगों को आमंत्रित किया जाये तो हम अच्छे सुझाव दे सकते हैं. मैं ज्यादा समय जाया न करते हुए मैं माननीय मंत्री जी से सिर्फ इतना पूछना चाहता हूं कि कौन सी नीति बनाई है आपने रोजड़ों,वनगायों के लिये,जंगली सुअरों के लिये,हिरन के लिये ?

          डॉ.नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, एक बात तो तय है  सुबह से चर्चा सुन रहे हैं एक बात तो विपक्ष को देखने के बाद लग रहा है कि वास्तव में शिवराज सिंह जी की सरकार ने  बड़ी समस्याएं समाप्त करने की दिशा में ठोस पहल की है इसीलिये आज सम्मानित विधायक कह रहे हैं कि रोजड़ों की सबसे बड़ी समस्या है आवारा पशुओं की सबसे बड़ी समस्या है. यह तय हो गया आज की इस चर्चा से. सुबह से देख रहा हूं कि शिवराज सिंह जी की सरकार  सही दिशा में काम कर रही है. रचनात्मक काम कर रही है. गरीब किसान के लिये काम कर रही है.

          कुं.विक्रम सिंह -  कृषि को लाभ का धंधा बनाने का सपना आपका है लेकिन कृषि को लाभ का धंधा किस तरीके से बनाया जायेगा ?

          श्री रामनिवास रावत - माननीय संसदीय मंत्री जी, आपने कहा है मेरी बात सुन लें. आप इस तरह की बात नहीं करेंगे.

          अध्यक्ष महोदय - यह कुछ नहीं लिखा जायेगा. श्री यशपाल सिंह सिसोदिया अपने ध्यानाकर्षण की सूचना पढ़ें.

          श्री रामनिवास रावत - xxx                 xxx

            अध्यक्ष महोदय -  आपको अलाऊ भी किया.

            श्री रामनिवास रावत-   xxx                 xxx

          अध्यक्ष महोदय - यह कार्यवाही से निकाल दीजिये.

          डॉ.नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष जी, (XXX) विधान सभा पर कितना बड़ा आरोप लगाया.

          अध्यक्ष महोदय - कार्यवाही से निकाल दिया.

          डॉ.नरोत्तम मिश्र - देखिये, माननीय अध्यक्ष जी, आज जब दुखती रग पर हाथ रख

दिया कि सबेरे से विपक्ष की भूमिका रोजड़े पर चल रही है कोई जनसमस्या पर बात नहीं

कर रहे.रोजड़े पर चार घंटे तक चर्चा कर रहे हैं. जबकि माननीय मंत्री कह रहे हैं कि हम

चिंतित है. हमारे मंत्री कह रहे हैं कि हमने उसके लिये पैसा दिया है. किस दिशा में ले जा रहे हैं. (..व्यवधान..)

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( xxx) आदेशानुसार रिकार्ड नहीं किया गया.

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          अध्यक्ष महोदय--कृपया शैलेन्द्र पटेल जी, श्री रामनिवास रावत जी बैठ जाएं.

          (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री श्री गौरीशंकर शेजवार जी जो बोलेंगे वही लिखा जाएगा बाकी माननीय सदस्यों का नहीं लिखा जाएगा.

          श्री रामनिवास रावत--(xxx)

            डॉ.नरोत्तम मिश्र--(xxx)

          अध्यक्ष महोदय--डॉ.शेजवार जी के बोलने के बाद श्री यशपाल सिंह जी अपना ध्यानाकर्षण पढ़ेंगे.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे मालूम नहीं था कि माननीय श्री रामनिवास रावत जी से यह उम्मीद नहीं थी कि विधान सभा में इतने असत्य कथन करेंगे. मैंने ऐसा बिल्कुल ही नहीं कहा था कि अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों को चरनोई की भूमि आवंटित की गई है.

          श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, चरनोई की भूमि कांग्रेस ने आवंटित कर दी. कांग्रेस ने चरनोई की भूमि अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के लोगों को भूमि आवंटित की है, उसका आप विरोध कर रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय--आप मंत्री जी का उत्तर सुन तो लें.

          डॉ.गौरीशंकर शेजवार--माननीय अध्यक्ष महोदय,मैं अभी भी अपने बयान पर कायम हूं कि कांग्रेस की सरकार ने चरनोई की जमीन को आवंटित किया है, लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि अपने चहेते कांग्रेस के लोगों को आवंटित की है यह जमीन.

          अध्यक्ष महोदय--इसको विलोपित करें. श्री यशपाल सिंह जी अपने ध्यानाकर्षण की सूचना को पढ़े.

 

 

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          (xxx) आदेशानुसार रिकार्ड नहीं किया गया.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(2)       रतलाम एवं मंदसौर जिले में पवन ऊर्जी संयंत्र स्थापित किये जाने हेतु कृषकों की जमीन का जबरन अधिग्रहण किये जाना

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

           

           

 

 

 

 

 

 

 

 

 

          ऊर्जा मंत्री (श्री राजेन्द्र शुक्ल)--माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

           

 

 

 

 

 

 


 

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया(मंदसौर)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी द्वारा दिए गए उन तमाम तर्कों से सहमत हो सकता हूँ कि निवेश बढ़ा है, उत्‍पादन बढ़ा है, इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा जो ध्‍यानकर्षण है, वह शासन की  संपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए भी है, खनिज विभाग से जुड़ी राजस्‍व की वसूली को लेकर के भी है, वन और पर्यावरण को लेकर के भी है तथा किसानों के दीर्घकालीन शोषण को लेकर के भी है इसलिए मेरा यह ध्‍यानाकर्षण अति महत्‍वपूर्ण  हो जाता है । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऊर्जा विभाग की इस व्‍यवस्‍था के कारण से इस प्रोजेक्‍ट में, इस कार्य योजना में, वन पर्यावरण, लोक निर्माण विभाग, प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना, मुख्‍यमंत्री ग्रामीण सड़क योजना, खेत सड़क योजना, पुलिस कानून व्‍यवस्‍था, शिक्षा विभाग आदि कई विभाग इससे जुड़े हुए हैं । मैं इसलिए कहना चाहता हूँ कि आपके विभाग के द्वारा, निवेशकों के द्वारा स्‍थापित किए गए उस टॉवर के समीप में शासकीय स्‍कूल है, आपकी नियमावली बोलती है कि शासकीय स्‍कूल के समीप में टॉवर नहीं होना चाहिए, कभी कोई दुर्घटना घट सकती है । दूसरा है  जो बस्तियॉं हैं, मजरे, टोले हैं, नई आबादी है, उनके पास में बना हुआ टॉवर बड़ा भीमकाय आकार का होता है, उस टॉवर के गिरने की भी कई दुर्घटनाएं हुई हैं । माननीय अध्‍यक्ष्‍ा महोदय, इसलिए मेरा ध्‍यानाकर्षण महत्‍वपूर्ण हो जाता है । सड़कों का निर्माण बहुत मुस्‍तैदी के साथ किया जा रहा है । ध्‍यानाकर्षण लगने के बाद मैं विभाग के तकनीकी अधिकारियों के द्वारा अवगत हुआ हूँ । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी का विशेष ध्‍यान चाहूँगा कि सिंगल एक्‍स.एल.  9.4 मेट्रिक टन की क्षमता लोक निर्माण विभाग, प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना की सड़कें सहन कर सकती है, लेकिन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विंड पॉवर के कारण 50 से 70 मेट्रिक टन के वाहन उन मार्गों से गुजर रहे हैं,यह समस्‍या सभी जगह है । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने निवेशकर्ताओं को अनुमति दी है, अधिकार नहीं दिए हैं । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री जी से व्‍यवस्‍था एवं आश्‍वासन भी चाहूंगा कि यह समस्‍या न केवल मंदसौर या मालवा की है वरन् मध्‍यप्रदेश के अनेक स्‍थानों पर जहां विंड पॉवर स्‍थापित हो रहे हैं । यहां कई विधायकगण बैठे हैं, राजेन्‍द्र पाण्‍डेय जी,महेन्‍द्र कालूखेड़ा जी,हरदीप सिंह ने 15 दिन तक अनशन किया, दिलीप सिंह शेखावत, सतीश मालवीय,बहादुर सिंह चौहान, राजेन्‍द्र वर्मा जी की पुलिस अधीक्षक से कुछ वाद-विवाद भी हुआ था ।

          अध्‍यक्ष महोदय-  आप सीधा प्रश्‍न करिए ।

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-   माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से प्रश्‍न करना चाहता हूँ कि वन विभाग के जो पेड़ कटे हैं क्‍या उसकी अनुमति कंपनी ने ली, जो सड़कें डेमेज हो गई हैं, उनको दुरस्‍त करने के लिए समय समय पर विभागों ने निवेशक को जो नोटिस दिए हैं, उस पर अमल हुआ है कि नहीं । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से, आपका संरक्षण प्राप्‍त करते हुए माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि पेड़ों की कितनी कटाई में वन विभाग से निवेशकों ने अनुमति ली है  और जो सड़कें निरन्‍तर डेमेज होती जा रही हैं, उनकी रिपेयरिंग के लिए रतलाम और मंदसौर जिले के लोक निर्माण विभाग एवं प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अधिकारियों ने जब जब नोटिस दिए हैं, उन नोटिसों का कितनी गंभीरता से निवेशकों ने पालन किया है । क्‍या पालन दुरस्‍ती  को लेकर के सुनिश्चित करेंगे ।

ऊर्जा मंत्री(श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैंने अपने जवाब में कहा है, मैं एक और कमेटी बना देता हूं, नवकरणीय ऊर्जा विभाग के आयुक्‍त और उस जिले के लोक निर्माण विभाग, आर.आर.डी.ए.के जो अधिकारी हैं और नवकरणीय विभाग के जो वरिष्‍ठ अधिकारी हैं, वह देख लेंगे कि कौनसी सड़कों में कितना  डेमेज हुआ है और वह डेमेज यदि निवेशकों के द्वारा हुआ है, जैसा कि मैंने अपने जबाव में सीधा सीधा  कहा है कि उन सड़कों को दुरस्‍त कराया जाएगा । जहां तक वन विभाग की बात है, वन विभाग ने कहा है कि हमारे कोई भी पेड़ काटे नहीं गए हैं, निजी जमीन में जो पेड़ काटे गए हैं,उसकी अनुमति की एक प्रक्रिया है ।

राजस्‍व विभाग से और यदि ऐसे कोई स्‍पेसिफिक पेड़ हैं, उसकी वन विभाग से अनुमति ली जाती है. यदि सागौन वगैरह निजी जमीन में हैं. उन्‍होंने कहा है कि इसमें हमारे कोई पेड़ नहीं काटे गए हैं. जहां तक निजी जमीन का सवाल है, उसमें बकायदा द्विपक्षीय अनुबन्‍ध करके और उनको राशि देकर उस जमीन का अनुबन्‍ध कर जमीनों को खरीदा गया है. जहां तक एप्रोच रोड़ का सवाल है तो निजी जमीनों में कहीं खम्‍भे आए हैं, फसल रही है तो उसका मुआवजा भी दिया गया है. जिसके प्रमाण उपलब्‍ध है.

          बहरहाल, माननीय सदस्‍य की जो चिन्‍ता है कि सड़कें खराब हुई हैं, उनके द्वारा खराब हुई हैं. हालांकि जो सिंगल एक्‍स.एल. की आपने बात कही है, 72 टन का यदि ट्रेलर निकलता है तो यदि हम उसका सिंगल एक्‍स.एल. लोड निकालें तो उसकी बीयरिंग कैपेसिटी से कम ही आता है. लेकिन फिर भी व्‍यावहारिक है कि सड़कें खराब होती हैं. सड़कें यदि खराब हुई हैं तो यह कमेटी देख लेगी और सड़कों को दुरस्‍त करवाने की कार्यवाही करेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय - आपकी सारी बात आ गई है एवं आश्‍वासन भी पूरा हो गया है.

          श्री यशपाल सिंह सिसोदिया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके लिये समिति बनाई. मैं माननीय मंत्री मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देता हूँ. मेरा एक निवेदन और है कि मंत्री महोदय, जो विभाग आपके पास ऊर्जा का है, साथ में खनिज का भी है. उन पवन ऊर्जा कम्‍पनियों ने जिस प्रकार से मार्ग बनवाये. उनमें मुरमीकरण को लेकर, खुदाई को लेकर किसी प्रकार के कोई राजस्‍व की, आपके खनिज विभाग को अदायगी नहीं की है. उस पर भी आप ध्‍यान दें. 

          श्री हरदीप सिंह डंग (सुवासरा) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री यशपाल सिंह सिसोदिया ने जो मुद्दा उठाया है. अगर सबसे ज्‍यादा विंड कम्‍पनियों और सौर ऊर्जा का काम हुआ है तो सुवासरा में . मेरा यह निवेदन है कि जो बातें उन्‍होंने बताई हैं, पूरा कोई एक आरोप नहीं है, प्रूफ है और इतने सारे कोर्ट के कागज और पूरी लिखा-पढ़ी है.

          अध्‍यक्ष महोदय – आप उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में, यदि कोई बात नई है तो वह बतायें. वह तो जांच करवा ही रहे हैं एवं कमेटी भेज रहे हैं.

          श्री हरदीप सिंह डंग - (XXX)

          अध्‍यक्ष महोदय - इसे कार्यवाही से निकाल दें.

          श्री हरदीप सिंह डंग - जमीनों के मात्र 75 - 80,000/- रू. दिये जा रहे हैं और दलाल कम्‍पनी वालों से 2.5 लाख रूपये एवं 3.5 लाख रूपये ले रहे हैं. गरीबों को 60,000/- रू. एवं 25,000/- रू. दिये जा रहे हैं. 

          अध्‍यक्ष महोदय – आप भाषण मत दीजिये. प्रश्‍न करें.

          श्री हरदीप सिंह डंग - पतलासी में एक गांव है. न वहां स्‍कूल, न खेल मैदान, न तालाब , न रास्‍ता बचा है, न कब्रिस्‍तान की एक इंच जमीन. अगर 2 प्रतिशत चरनोई की भूमि बचाने का प्रावधान आपके पास है, अगर वहां पर एक इंच भी चरनोई की जमीन निकल जाये तो मैं राजनीति छोड़ दूँगा. यह कम्‍पनियों द्वारा बड़ी सेटिंग करके पूरे ग्रामीण क्षेत्र की जमीन ले ली गई है. उसकी जांच कराई जाये और जो गरीबों की जमीन, खेल के मैदान, तालाब की जमीनें वह वापिस कराई जाये.  

          अध्‍यक्ष महोदय – आपका कोई प्रश्‍न नहीं है. आप बैठ जायें.

          श्री हरदीप सिंह डंग - श्री हिम्‍मत सिंह, भवानी सिंह छोटी पतलासी इसकी भैंस मर चुकी हैं, वहां पर जो तालाब था, उसमें करंट छोड़ा गया था. उनकी भैंस मर गई. मेरे पास पूरा प्रूफ है.

          अध्‍यक्ष महोदय – आपके पास कोई प्रश्‍न नहीं है, केवल भाषण है. उसका उत्‍तर लेंगे कि आगे बढ़ें.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल - ध्‍यानाकर्षण में सीधे-सीधे प्रश्‍न तो उद्भूत नहीं होते. जो आपने कहा है क्‍योंकि ध्‍यानाकर्षण तो रतलाम और मन्‍दसौर जिले को लेकर केन्द्रित है.

          अध्‍यक्ष महोदय – सुवासरा इनके मन्‍दसौर जिले में है.

          श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल - श्री यशपाल सिंह जी ने जो खनिज की बात कही है तो जो भी मटेरियल यूज़ होता है. जरूरी नहीं है कि उनको रॉयल्‍टी पेड करनी पड़े. रॉयल्‍टी पेड मटेरियल सीधे सप्‍लायर उनको दे सकता है. इसलिए इस डेव्‍हलपर को रॉयल्‍टी अलग से पेड करने की कोई जरूरत नहीं है. यदि रॉयल्‍टी पेड मटेरियल है, इसकी हम जांच करवा लेंगे कि जो भी खनिज उसमें लगा है, वह रॉयल्‍टी पेड है या नहीं.

                        श्री यशपाल सिंह सिसोदिया -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न  रायल्टी से संबंधित  नहीं है. मेरा प्रश्न यह है..

                   अध्यक्ष महोदय -- नो डिसकशन. यहां बहस नहीं हो रही है.  आपकी बात आ गई.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.31 बजे                                  अनुपस्थित की अनुज्ञा

निर्वार्चन क्षेत्र क्रमांक197- गंधवानी (अजजा) से  निर्वाचित सदस्य, श्री उमंग सिंघार, को विधान सभा के फरवरी-अप्रैल,2016 सत्र की बैठकों से अनुपस्थित रहने की अनुज्ञा.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.32 बजे

  राज्यपाल के अभिभाषण पर श्री शंकरलाल तिवारी, सदस्य द्वारा दिनांक 23 फरवरी,2016 को प्रस्तुत निम्नलिखित प्रस्ताव पर चर्चा (क्रमशः)

          "राज्यपाल ने जो अभिभाषण दिया, उसके लिये मध्यप्रदेश विधान सभा के इस सत्र में समवेत सदस्यगण अत्यन्त कृतज्ञ हैं. "

 

                   श्री राजेन्द्र मेश्राम (देवसर) -- अध्यक्ष महोदय, मैं सर्वप्रथम  आपको धन्यवाद  ज्ञापित करना चाहता हूं कि  आपने मुझे राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर बोलने के लिये अवसर दिया.  राज्यपाल महोदय   ने जो अभिभाषण  दिया है,  उसके लिये कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव के पक्ष में   मैं अपने विचार रखना चाहता हूं.  शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में  निवासरत् भूमिहीन  परिवारों को  आवासीय पट्टा देने का जो  सरकार के द्वारा कार्य किया जा रहा है,  इसलिये मैं सरकार को धन्यवाद एवं साधूवाद  देना चाहता हूं.  शासकीय  योजनाओं का लाभ  जमीनी स्तर पर  घर घर तक पहुंचाने का जो कार्य  भाजपा  एवं शिवराज सिंह जी की सरकार के द्वारा   किया जा रहा है,  इसलिये भी मैं  शिवराज सिंह जी को  एवं उनकी सरकार को धन्यवाद एवं साधूवाद  देना चाहता हूं.   इस वर्ष प्राकृतिक  आपदा ने प्रदेश  के किसानों  और खेती को  अकल्पनीय क्षति पहुंचाई है,  परन्तु मुख्यमंत्री जी  एवं  उनकी सरकार ने विधान सभा  का  विशेष सत्र बुलाकर  किसानों के संरक्षण  का जो ऐतिहासिक कार्य किया है,  यह शिवराज सिंह जी एवं  उनकी सरकार की संवैदनशीलता  का जीवंत  प्रमाण है.   मध्यप्रदेश के किसान की  कड़ी मेहनत  और शिवराज सिंह जी की सरकार के प्रयासों से  मध्यप्रदेश को इस वर्ष  भी लगातार चौथी बार कृषि कर्मण पुरस्कार  प्राप्त हुआ है.  इसलिये भी मैं प्रदेश के मुखिया एवं भाजपा की सरकार को  अपनी तरफ से धन्यवाद एवं साधूवाद  देना चाहता हूं.  मध्यप्रदेश गेहूं के उत्पादन में  आज देश में  दूसरे स्थान पर है.  इस व्यापक सूखे के बावजूद  मध्यप्रदेश की यह उपलब्धि  शिवराज सिंह जी की सरकार के लिये  गर्व की बात है.  सभी 35  विकास खण्डों में  किसान ज्ञान  सूचना केन्द्र की स्थापना  की गई है.  इसके माध्यम से किसानों को  उत्तम खेती के लिये  उनको तकनीकी की सूचना दी जाती है.  इसलिये भी मैं सरकार के  मुखिया,  शिवराज सिंह जी चौहान को  एवं कृषि मंत्री जी को  साधूवाद एवं धन्यवाद देना चाहता हूं.  मध्यप्रदेश में जब कांग्रेस की सरकार थी,  तब  पूरा मध्यप्रदेश अंधेरे में डूबा रहता था.  मैं आज मध्यप्रदेश के ऊर्जा मंत्री जी  एवं मुख्यमंत्री जी को साधूवाद एवं धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने ऊर्जा के क्षेत्र में  मध्यप्रदेश की सरकार द्वारा  जो नवीन एवं नवकरणीय  ऊर्जा स्रोतों से  विद्युत उत्पादन के लिये  किये गये प्रयासों से  मध्यप्रदेश पिछले वर्ष  सोलर एवं पवन ऊर्जा  परियोजनाओं की स्थापना  में  देश में द्वितीय स्थान पर रहा.  इसलिये  मैं ऊर्जा मंत्री जी  एवं मुख्यमंत्री जी को साधूवाद एवं धन्यवाद देना चाहता हूं. नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा  स्रोतों से विद्युत उत्पादन परियोजनाओं की  क्षमता  438 मेगावॉट  से बढ़कर 1987 मेगावॉट  हो गई है.  60 हजार करोड़  के निवेश से  10  हजार मेगावॉट  की परियोजनाएं  स्थापनाधीन हैं.माननीय अध्यक्ष महोदय रीवा में विश्व का सबसे बड़ा 750 मेगावॉट की क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया जा रहा है इसके लिये मैं प्रदेश के ऊर्जा मंत्री और मुख्यमंत्री को साधुवाद और धन्यवाद देना चाहता हूं. अध्यक्ष जी आपका और सदन का संरक्षण चाहते हुये, मैं कहना चाहता हूं कि भारत के संविधान के निर्माता डॉ.भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयंती और अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में प्रदेश में गरीब कल्याण वर्ष मनाया जा रहा है. अध्यक्ष जी आप विशाल और विराट हृदय के धनी है, आप सरल, सहृदय और सहिष्णु हैं. इसलिये मैं आपसे दो प्रार्थना करना चाहता हूं. मुझे विश्वास है कि मेरी प्रार्थना पर आप और सदन कृपा करेंगे.मुख्यमंत्री जी को मैं धन्यवाद देना चाहता हूं कि 14 अप्रेल को डॉ. भीमराव अम्बेडकर की जयंती भव्यता के साथ मनाने का निर्णय किया है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा यह निवेदन है कि संविधान के निर्माता डॉ.भीमराव अम्बेडकर का छायाचित्र इस सदन में अवश्य लगाया जाये. मेरा एक और निवेदन है. मैंने देखा है कि 15 अगस्त और 26 जनवरी राष्ट्रीय पर्व हैं, जब इस दिन हम कार्यक्रम में जाते हैं तो अनेक महापुरूषों के छायाचित्र वहां पर रहते हैं लेकिन उसमें डॉ. भीमराव अम्बेडकर का छाया चित्र नहीं होता है, इसलिये मेरा निवेदन है कि अधिकारिक रूप से शासन की तरफ से आदेश दिया जाये कि राष्ट्रीय पर्व में डॉ. भीमराव अम्बेडकर का छायाचित्र लगायें. माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया उसके लिये आपको साधुवाद और धन्यवाद.

          श्री के पी सिंह (पिछोर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे कितना समय मिलेगा.

          अध्यक्ष महोदय-- 5 मिनट.

          श्री के पी सिंह -- मेरी कोशिश रहेगी कि मेरी समय की जो सीमा है उसके अंदर मैं अपनी बात समाप्त करूं. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर अपनी बात कहने के लिये खड़ा हुआ हूं.  परिस्थिति बकौल नरोत्तम मिश्रा जी, सरकार उप चुनाव के जीतने पर अतिरिक्त उत्साह में है. जब कोई सरकार या व्यक्ति जीत के नशे में चूर होता है तब उसके सामने बात रखने में , मैं ऐसा सोचता हूं कि कम सुनाई देता है ऐसे व्यक्ति या सरकार को. नरोत्तम मिश्रा जी जब रामनिवास जी अपना भाषण दे रहे थे तो कह रहे थे कि मैहर की धूल आपकी अभी उतरी नहीं है. ऐसी हालत में अपनी बात कैसे रखूं लेकिन फिर भी परम्परा का निर्वाह करना विपक्ष की जिम्मेदारी है. इसलिये बात तो रखूंगा.

          डॉ.नरोत्तम मिश्रा -- क्या मैहर के बारे में मैंने असत्य कह दिया ?

          श्री के. पी. सिंह -- मैं जो कह रहा हूं उसको पहले आप पूरा सुन लें. फिर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करें.

          डॉ. नरोत्तम मिश्रा -- आप मेरे नाम का उल्लेख बार बार कर रहे हैं.

          श्री के पी सिंह -- आपने ही तो कहा था.

          श्री मुकेश नायक -- मध्यप्रदेश में 10 विधानसभा क्षेत्र में उप चुनाव हुये हैं जिसमें से 7 में आप हारे हो और 3 में जीते हो.

          डॉ. नरोत्तम मिश्रा-- आप अपने आंकड़े दुरस्त कर लें.

          श्री के.पी.सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं अपनी बात को प्रारंभ करना चाहता हूं कि पिछले वर्ष को सरकार ने शैक्षणिक वर्ष घोषित किया था और शैक्षणिक वर्ष में चूंकि अभी गरीब कल्याण हेतु राज्यपाल के अभिभाषण में जिक्र किया गया है उस शैक्षणिक वर्ष में सरकार ने क्या किया वह बताना चाहता हूं.

            माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब अतिथि शिक्षक, संविदा शिक्षक अपनी बात रखने को इस प्रदेश के मुख्‍यालय पर आये और लौटकर उन्‍होंने अपनी कहानी हमें सुनाई तो लगा कि पता नहीं यह कौन सा युग आ गया है. उनकी बात नहीं सुनी गई, और उन्‍हीं से सारे वह स्‍कूल, महाविद्यालय और संस्‍थान चलवाये जा रहे हैं. आज प्रदेश में ऐसा कोई गांव नहीं होगा, छोटे गांव की बात कर रहा हूं, कस्‍बों की बात नहीं कर रहा, जहां अतिथि शिक्षक स्‍कूल की व्‍यवस्‍था को नहीं चला रहे हों, 1 होंगे, 2 होंगे, 4 होंगे, 5 भी हो सकते हैं. उसी तरह से कस्‍बों में जो महाविद्यालय हैं वहां सारे के सारे महाविद्यालय अतिथि शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं और सरकार का शैक्षणिक वर्ष गुजर गया, हमने उम्‍मीद की थी कि शैक्षणिक वर्ष को विशेष उत्‍सव के रूप में पूरे साल मनाया जायेगा तो शायद अतिथि शिक्षकों की जगह नियमित नियुक्तियां हो जायेंगी, स्‍कूल की व्‍यवस्‍था में नियमित शिक्षक हो जायेंगे और स्‍कूलों का संचालन भी ठीक से हो जायेगा, लेकिन पूरा शैक्षणिक वर्ष गुजर गया, न तो महाविद्यालयों में विद्वानों की नियुक्तियां हुईं और न अतिथि शिक्षकों को, संविदा शिक्षकों को जो वह चाहते थे वैसी कोई सौगात इस सरकार के द्वारा दी गई. शैक्षणिक वर्ष गुजर गया और शिक्षा का स्‍तर नहीं सुधर पाया और इसका हमारे साथी मुकेश नायक जी कह रहे थे उसका प्रभाव यह हुआ कि 30 प्रतिशत महाविद्यालयों में संख्‍या कम हो गई पढ़ने वाले छात्रों की. मैं उदाहरण के रूप में अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी के ध्‍यान में लाना चाहूंगा कि आप 2013 के चुनाव के 6 महीने पहले मेरी विधानसभा में गये थे, वहां आपने एक इंटर स्‍कूल की बिल्डिंग में खनियाधाना तहसील मुख्‍यालय पर महाविद्यालय का उदघाटन किया था. लोगों में उम्‍मीद जगी थी कि मुख्‍यमंत्री ने जिस महाविद्यालय का उदघाटन किया है, शुरूआत की है, वह चुनाव के बाद शायद ठीक से व्‍यवस्थित हो जायेगा, बिल्डिंग हो जायेगी, शिक्षक हो जायेंगे. अध्‍यक्ष महोदय, वहां अभी इस साल तक सिर्फ एक प्राचार्य है वह भी शिवपुरी रहते हैं, कभी-कभी महीने में एक-दो दिन आते जाते हैं. उस महाविद्यालय को न तो भवन मिला, न वहां पढ़ाने के लिये कोई शिक्षक है और मुख्‍यमंत्री जी के द्वारा उदघाटित महाविद्यालय की हालत दो साल बाद भी ऐसी हो तो मध्‍यप्रदेश की हालत क्‍या होगी, यह तो मुख्‍यमंत्री जी जाने. लेकिन चूंकि मेरे साथ जो विधानसभा में देखने को मिला है, मुख्‍यमंत्री जी मैं आपके सामने रख रहा हूं, कम से कम मंत्रियों से तो हम उम्‍मीद करते नहीं हैं आपके प्रभारी मंत्री तो 4-4, 5-5 महीने तक जाते ही नहीं हैं आपने कई बार अखबारों में छपाया, आपने कहा भी है कि क्‍यों नहीं जा रहे हो, लेकिन इसके बाद भी उनमें कोई सुधार नहीं आया, लेकिन मैं  आपसे उम्‍मीद करता हूं कि इस महाविद्यालय का उदघाटन आपने किया, वहां कम से कम पढ़ाने के लिये शिक्षक तो हों, वहां विद्यार्थियों के लिये बैठने के लिये जगह तो हो, सिर्फ एक कमरे में ताला डला है आज तक, 2013 की बात है, तीन साल हो गये अध्‍यक्ष महोदय. ये आपके शैक्षणिक वर्ष का एक उदाहरण माननीय मुख्‍यमंत्री जी मैं आपके सामने रख रहा हूं, अगर आपको ठीक लगे तो इस व्‍यवस्‍था को ठीक करने का प्रयास करना.

          अध्‍यक्ष महोदय--  कितना समय लेंगे आप.

          श्री के.पी. सिंह--  5 मिनट हो गये क्‍या.

          अध्‍यक्ष महोदय--  6 मिनट हो गये.

          श्री के.पी.सिंह--  6 मिनट हो गये तो मैं समाप्‍त करता हूं अध्‍यक्ष महोदय, इसी संबंध में मुख्‍यमंत्री जी आपके ध्‍यान में लाना चाहता हूं, अनुसूचित जनजाति के भाषाई शिक्षकों की नियुक्ति विभाग के द्वारा की गई थी और इनकी संख्‍या मैं समझता हूं कि मध्‍यप्रदेश में हजारों में हो सकती है, सेकड़ों में हो सकती है. वह अनुसूचित जाति के भाषाई शिक्षक जो आपकी सरकार के द्वारा नियुक्‍त किये गये, मैंने जब माननीय मंत्री जी से पिछले सत्र के समय बात की कि भई अब इनका क्‍या होगा, उनको नौकरी में दोबारा नहीं रखा गया, 7-7 साल तक लोगों ने पढ़ा लिया और पढ़ाने के बाद उनको आज अलग कर दिया गया है, मंत्री जी का जवाब था, चूंकि यह केन्‍द्र पोषक योजना थी, केन्‍द्र से पैसा इसमें अनुसूचित जाति के भाषाई शिक्षकों को इसमें मिलता था, तब तक हमने चलाया, अब हमारे पास पैसा नहीं है, इनको हम वेतन कहां से दें.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं मुख्‍यमंत्री जी से पूछना चाहूंगा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति आपने की और उनसे 7-8-10 साल तक भाषाई शिक्षक के रूप में अनुसूचित जाति के बच्‍चों से पढ़ाया, लिखाया अब 8 साल बाद वह बच्‍चे कहां जायेंगे. आपने इसी बजट में उल्लेख किया है कि जितनी योजनाएं केन्द्र  पोषित बंद हुई हैं, उनमें हम खुद के वित्तीय साधनों से चलायेंगे. मैं मुख्यमंत्रीजी से गुजारिश करना चाहूंगा कि उन भाषायी शिक्षकों की जो अनुसूचित जाति वर्ग के हैं, गरीब परिवार से हैं, उनके पास रहने को घर तक नहीं है. जैसे तैसे उन्होंने पढ़ाई लिखाई की है. अगर हो सके तो उनकी नियुक्ति करा दीजिए. 8-8,10-10 साल पढ़ाने के बाद बेचारे कहां जायेंगे. न घर के रहे, न घाट के. दूसरी जगह नौकरी नहीं मिल सकती क्योंकि ओवरएज हो गये. आपके यहां 10-10 साल काम कर लिया अब वह कहां जायें. अगर इसमें आप कोई निर्णय कर सकें तो मैं समझता हूं कि मुख्यमंत्री जी की संवेदनशीलता उजागर होगी. धन्यवाद.

          श्री राजेन्द्र वर्मा(सोनकच्छ)-- अध्यक्ष महोदय, मैं राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर प्रस्तुत कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं.

          अध्यक्ष महोदय, राज्यपाल जी का जो अभिभाषण होता है वह किसी भी सरकार का काम करने का आईना होता है. मैं माननीय मुख्यमंत्रीजी का धन्यवाद करना चाहता हूं क्योंकि हमारी भारतीय जनता पार्टी की जो सरकार है. जब हम लोग 1990 के आसपास काम करते थे तो हमारी पार्टी का एक नारा हुआ करता था कि हर खेत को पानी, हर हाथ को काम. गरीब,अनुसूचित जाति की झोपड़ी में सुविधा तमाम और अयोध्या में श्रीराम.

          अध्यक्ष महोदय, हम दीनदयालजी की विचारधारा को मानने वाले लोग हैं. दीनदयालजी की विचारधारा उस व्यक्ति के लिए होती थी जो समाज में सबसे पीछे और सबसे नीचे हो,उसके लिए काम करना. उसी के अनुसार नीचे तक काम को पहुंचाने के लिए माननीय शिवराज सिंह चौहान जी की सरकार काम कर रही है. पहली बार मध्यप्रदेश के इतिहास में हुआ कि सारे वल्लभ भवन के अधिकारियों को गांव की खाक छानने के लिए भेजा. क्योंकि जैत के खेत से निकलने वाला किसान का बेटा शिवराज सिंह चौहान अच्छे से जानता था कि अगर गांव के किसानों का कोई जीवन यापन सुधार सकता है तो वल्लभ भवन के एसी के चेम्बर नहीं सुधार सकते. गांव की चौपाल सुधार सकती है. इसलिए चीफ सेक्रेटरी से लेकर कलेक्टर तक अधिकारियों को वहां पर भेजा और कहा कि जाकर देखो किसानों का जीवन यापन कैसे सुधर सकता है. खेती लाभ का धंधा कैसे बन सकती है. किसान कैसे समाज की मुख्य धारा में आगे आ सकता है. यह काम किसी ने किया है तो यह शिवराज सिंह चौहान ने किया है.

          अध्यक्ष महोदय, एक दिन के विशेष सत्र की हम लोग कल्पना कर सकते थे क्या. सरकार ने अपने खर्चे में कटौती करके 4600 करोड़ रुपये किसानों के खाते में सीधे जमा किये हैं. मेरा जितना राजनैतिक जीवन है, उसमें तो मैंने कभी ऐसा उदाहरण नहीं देखा है. मैं किसान परिवार से और ग्रामीण क्षेत्र से आता हूं. 

          अध्यक्ष महोदय, जब किसान पर प्राकृतिक आपदा आयी थी. मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि उस समय शिवराज जी का एक शब्द की साल हारे हैं, जिन्दगी नहीं हारे हैं और आंख में आंसू मत लाना, अभी शिवराज चौहान जिंदा है. इस शब्द ने किसानों को सम्बल दिया है. मैं इस सदन में बताना चाहता हूं कि यदि ऐसा नहीं होता तो प्रदेश में किसानों की आत्महत्या की लाईन लग जाती कि किसान परेशान हो जाता.  इस एक वाक्य ने किसानों को सम्बल दिया कि नहीं चिन्ता की कोई बात नहीं हमारे पीछे मध्यप्रदेश का शिवराज सिंह चौहान और उनकी सरकार पूरी ताकत से खड़ी है. हमने 4600 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खाते में दिये हैं. यह कोई छोटी बात नहीं है.

          अध्यक्ष महोदय, उस दिन राज्यपाल जी का अभिभाषण सुन रहा था तो कालूखेड़ा जी कह रहे थे आपने उस समय 10 लाख लोग इकट्टा किये और जबरजस्ती लेकर आये, बसें राजसात कर ली.  अध्यक्ष महोदय, सीजन चल रहा है, खेत में आलू खुद रहे हों, फसल कटने के लिए पड़ी है तो किसान के लिए चाहे आप बराक ओबामा खड़ा कर दो, उसके मन में श्रद्धा और आस्था नहीं होगी तो किसान अपने खेत की जगह छोड़कर गांव की चौपाल तक नहीं जाता है. जबरजस्ती कैसे ले जायेंगे. 10 लाख लोगों को कोई जबरजस्ती ले जा सकता है. उस कार्यक्रम में 10 लाख लोग गये तो वह शिवराज सिंह चौहान की नीति और नरेन्द्र मोदी जी की फसल बीमा योजना को धन्यवाद देने के लिए गये. जाकी फटे न पांव बिवाई, वह क्या जाने पीर पराई. कुछ पता नहीं है, कुछ भी बोल दिया जाता है.

          अध्यक्ष महोदय, जब मनमोहन सिंह जी की सरकार थी उनको यह भी नहीं पता होता था कि फसल बीमा योजना होती क्या है. (XXX) वह हमको बता रहे हैं. जीरो परसेंट पर ब्याज हम दें, हम किसान विरोधी हैं. 24 घंटे, 18 घंटे हम बिजली दें, हम किसान विरोधी हैं. खाद का अग्रिम भंडार हम करें, हम किसान विरोधी हैं. किसानों को 4600 करोड़ रुपये हम दें, हम किसान विरोधी हैं. सड़कों की दशा हम सुधारें, हम विकास विरोधी हैं. मैं कहना चाहता हूं कि जो विकास रोल मॉडल म.प्र में पेश किया है, 4-4 बार कृषि कर्मण पुरस्कार मिलें हैं. हमने तो दिया. एक बार मनमोहन सिंह थे, महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी थे, उनने दिया, हमने तो नहीं दिया. उस पर  भी प्रश्न चिह्न कि कृषि कर्मण अवॉर्ड किसे मिल रहा है? अध्यक्ष महोदय, यह जो मध्यप्रदेश की सरकार है. आज बिजली के क्षेत्र में हम बात करें. आज किसान की स्थिति बिजली के मामले में क्या होती? पूरा ब्लैक आउट हो जाता था और तब तत्कालीन मुख्यमंत्री यह कहते थे कि इंदौर में जब कार्यक्रम के लिए आते थे तो कहते थे (XXX) अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय श्री शिवराज सिंह जी चौहान को, उनकी पूरी सरकार को, पूरे मंत्रिमंडल के साथियों को इस बात के लिए बधाई देना चाहता हूं कि आपने मध्यप्रदेश का विकास का जो रोल मॉडल पूरे देश में प्रस्तुत किया है, वह अनुकरणीय है.

 

          अध्यक्ष महोदय, प्राकृतिक आपदा के बारे में जैसा मैंने कहा कि 4600 करोड़ रुपए हमने दिये हैं. यह अपने आपमें बहुत महत्वपूर्ण कदम है. पिछले 2 वर्षों में, इसके पहले 69 साल का इतिहास उठाकर देख लीजिएगा, 27000 करोड़ रुपए का अनुदान, अध्यक्ष महोदय, मैं फिर रिपीट कर रहा हूं, मेरे कांग्रेस के मित्र भी सुन लें, 27000 करोड़ रुपए का अनुदान हमने 2 वर्षों में किसानों को दिया है. यह कोई छोटी-मोटी रकम नहीं है. किसान की कड़ी मेहनत है. किसान की स्थिति हम क्या जानते हैं, किसान की स्थिति वह होती है कि जब हमें सर्दी में ठंड लगती है तो 4 बजे वह अपने खेत पर मोटर चालू करने जाता है, अपने खेत में पानत करता है. जब बारिश में हमें छतरी की आवश्यकता होती है तो वह उसी पानी को अपना अंबर मानकर खेत में खड़ा रहता है. जब गर्मी में हमें पंखे, कूलर की आवश्यकता होती है तो किसान भरी दोपहर में अपने खेत पर जाकर उस भारत माता की सेवा करता है. उस किसान के लिए चौथी बार मध्यप्रदेश की सरकार को कृषि कर्मण अवॉर्ड प्राप्त हुआ और वर्ष 2014 में 6 लाख से अधिक किसानों को 666 करोड़ रुपए की दावा राशि माननीय श्री शिवराज सिंह जी की सरकार ने दी है. वर्ष 2015 की बीमा राशि 4300 करोड़ रुपए जो अनुमानित है, वह भी राशि हम माननीय श्री शिवराज सिंह जी के नेतृत्व में देने वाले हैं. सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को 24 घंटे और किसानों को 10 घंटे बिजली देंगे, जब यह कहा गया था तो सब ने इस बात का उपहास उड़ाया था कि (XXX). नर्मदा क्षिप्रा लिंक योजना कभी पूरी नहीं हो सकती. वह सब काम किसी ने करके दिखाया है तो वह श्री शिवराज सिंह जी की सरकार ने कराया है. किसानों को फ्लेट रेट के आधार पर 1200 रुपए प्रति हार्स पावर के हिसाब से 6 माह में बिजली के बिल जमा करने की सुविधा दी गई है. नहीं तो पिछली बार तो अध्यक्ष महोदय, स्थिति यह होती थी कि जाओ, बिजली जिसकी जितनी मर्जी आए उतनी ले लो.

अध्यक्ष महोदय, श्री शिवराज सिंह जी की सरकार ने शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराया है. कृषक ऋण में खाद एवं बीज के लिए दिये गये ऋण की राशि पर भी राज्य सरकार ने 8 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया है, जिससे किसान की बीज की स्थिति और उसकी फसल की पैदावार अच्छी हो. अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से एक ही बात कहना चाहता हूं कि किसान जब तक सुखी रहेगा इस धरती पर, तभी सबके चेहरे पर लाली रहेगी. हमने वर्षों तक सुना था कि जब तक धरती पर दुखी किसान रहेगा, धरती पर तूफान रहेगा. लेकिन मैं बताते हुए यह प्रसन्नता है कि 27000 हैक्टेयर सिंचाई का रकबा आज हमने बढ़ा दिया है. किसान के लिए सरकार ने जो काम किये हैं, उसके लिए मैं माननीय श्री शिवराज सिंह जी चौहान का, पूरी सरकार का हृदय से धन्यवाद ज्ञापित करना चाहता हूं. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, उसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद. (मेजों की थपथपाहट)....

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर) -  अध्यक्ष महोदय, मुझे बोलने के लिए समय दिया उसके लिए मैं आपका आभारी हूं. अध्यक्ष महोदय, महामहिम राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर बोलने के लिए मैं यहां पर खड़ा हुआ हूं. महामहिम राज्यपाल महोदय का अभिभाषण किसी भी सरकार का नीति पत्र, दृष्टि पत्र या सरकार ने अभी तक क्या किया है और सरकार क्या करने जा रही है, यह सब उसमें समाविष्ट रहता है. मैं प्रारंभ करूंगा कि सरकार ने महामहिम के माध्यम से बिन्दु 4 पर कहलवाया है कि संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अम्बेडकर की 125वीं जयंती और अन्त्योदय के प्रणेता पं. दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में प्रदेश में गरीब कल्याण वर्ष रहेगा. यहीं इसके बिन्दु क्रमांक 88 पर अनुसूचित जाति, जनजाति के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की भी बात कही गई है. संविधान में जो व्यवस्था है, उसकी सुरक्षा करना, उनका संरक्षण करना आपका दायित्व है. अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहूंगा कि इसी बाबा साहेब अम्बेडकर की 125वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य पर बाबा साहेब अम्बेडकर के विचारों पर एक संगोष्ठी का आयोजन 21 फरवरी, 2016 को ग्वालियर में किया जाता है. इस आयोजन में केवल दलित छात्र थे दलित युवा थे और इसको संबोधित करने के लिए जेएनयू के एक प्रोफेसर विवेक कुमार आते हैं. वहां पर भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ता और आरएसएस के कार्यकर्ता किस तरह से लाठियों से अंदर घुसकर के, जो कि बाल भवन में कार्यक्रम आयोजित किया गया था, वहां पर लठ चलाये और अनुसूचित जाति और जनजाते के लोगों की पिटाई की और इस कार्यक्रम को नहीं होने दिया है. क्या इसी तरह से आप अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा करेंगे, बड़ा दुर्भाग्य है कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है. हम चाहते हैं कि इस प्रदेश के सबसे पिछड़े सबसे अंतिम व्यक्ति के भी संवैधानिक अधिकारों की भी सुरक्षा करें. लेकिन देखने में यह आ रहा है कि प्रदेश के सर्वोच्च पदों पर बैठे हुए व्यक्ति भी आईएएस अफसर हैं बीच में एक दो नाम रमेश थेटे और कर्णावत जी इनके नाम पेपर में छपे थे इन्होंने ऐसा क्या कर दिया है कि आपने उनका इतना उत्पीड़न किया है कि उनको मजबूर होना पड़ा है यह कहने के लिए कि सरकार ने अगर हमारी नहीं सुनी तो हमें आत्मदाह तक के लिए मजबूर होना पड़ेगा.

          माननीय अध्यक्ष महोदय संविधान के अनुच्छेद 19  में सभी को अभिव्यक्ति का अधिकार, सम्मेलन करने का अधिकार सभी व्यक्तियों को दिया गया है. 25 सितम्बर 2015 को अध्यापक संवर्ग के यहां पर रैली हुई उन्होंने अपनी मांगों को मनवाने के लिए आंदोलन किया और वह सब यहां पर एकत्रित हुए हैं, किस तरह से प्रदेश की सरकार ने उनको यहां पर लाठियों से मारा है और किस तरह से संवैधानिक अधिकारों का हनन किया है यह किसी से छिपा नहीं है. इसी प्रकार से पंचायत प्रतिनिधि जो कि चुने हुए प्रतिनिधि थे वह यहां पर अपनी मांगों के लिए एकत्रित हुए थे और अपनी मांगों के बारे में पंचायत मंत्रीजी से भी मिले थे, वह मुख्यमंत्री जी से भी मिलना चाहते थे लेकिन उनको किस तरहसे लाठी डंडों से पीटा गया और उनको भोपाल में अंदर नहीं आने दिया गया और उनको शहरके बाहर ही रेल्वे ट्रेक पर ही रोका गया है. यह सारी स्थिति दर्शित करती है कि सरकार की मंशा क्या है, सरकार किस तरह से पूरे प्रदेश की जनता की आवाज को दबाना चाहती है. अगर कोई सरकार के पक्ष मेंकहे तो  अच्छा अगर वह सरकार के पक्ष में नहीं कहे तो वह बेकार है, वह बातें सारी गलत हो जाती हैं.

          अध्यक्ष महोदय अभिभाषण में क्रमांक 5 पर दिया हुआ है कि प्राकृतिक आपदा वर्ष में किसानों को खेती से अकल्पनीय क्षति हुई है. अध्यक्ष महोदय आपको भी पता होगा और मेरी  भी जानकारी में यह बात और वह सही है कि प्रदेश में आज तक इतना भयावह सूखा मेरी स्मृति में कभी नहीं पड़ा है, प्रदेश के किसान बहुत दुखी हैं और बहुत परेशान हैं और यही कारण था कि आपने विधान सभा बुलायी, आपने उनके लिए पैसे की व्यवस्था की, इसके लिए आपको साधुवाद और इसके लिए हमने भी कहीं पर विरोध नहीं किया है, सर्वसम्मति से किसानों के लिए पैसा देने की बात की है.

          आपने इसमें 4600 करोड़ रूपये किसानों के खाते में जमा होने की बात की है. यह आपका अभिभाषण है आप इसको एक बार देख तो लेते. आप मेरे प्रश्न के उत्तर में मुझे जवाब दे रहे हैं कि 3822 करोड़ रूपये अभी किसानों के खाते में पहुंचाने की बात कही है. हमारे मंदसौर के एक विधायक जिसमें उन्होंने कहा है कि तहसीलदार ने मांग भेजी है, तहसीलदार ने एक शासकीय पत्र भेजा है कि इतने किसानों को आर्थिक क्षति हुई है लेकिन सरकार ने नहीं माना है कलेक्टर ने मांग नहीं भेजी है, वहां के किसानों को आज तक मुआवजा नहीं मिला है. यह बहुत ही दुर्भाग्य की बात है. आपको कृषि कर्मण अवार्ड मिला है. इसके लिए प्रदेश के किसानों को बधाई है. आप कहेंगे कि आपको बधाई दूं तो आपको बधाई नहीं दूंगा. अ भिभाषण के क्रमांक 12 पर प्रदेश के किसानों की कड़ी मेहनत और मेरी सरकार के प्रयासों से इस वर्ष भी मध्यप्रदेश को लगातार चौथी बार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त हुआ है, बहुत अच्छी बात है प्रदेश के किसानों को बधाई, लेकिन नीचे लिखा है कि प्रदेश गेहूं के उत्पादन में अब देश में दूसरे नंबर पर व्यापक सूखे के बावजूद भी प्रदेश की यह उपलब्धि गर्व की बात है. माननीय मुख्यमंत्री जी इसे पढ़ तो लेते, सूखे के बाद में तो अभी गेहूं का उत्पादन आया ही नहीं आपको गर्व कहां से हो गया, आपकी सरकार को गर्व कहां से हो गया है. गेहूं का तो कटना अभी प्रारम्भ हुआ है, गेहूं का उत्पादन तो दो माह के बाद में पता चलेगा. नरोत्तम जी क्या सही कह रहा हूं या मैं गलत कह रहा हूं.

          डॉ नरोत्तम मिश्र -- आप शतप्रतिशत गलत कह रहे हैं, 3 साल से लगातार सूखा पड़ रहा है, यह कृषि कर्मण अवार्ड पिछले साल का मिला है न कि इस वर्ष का मिला है, वह तो आप जो बोल रहे हैं ठीक है वह बोले जायें.

          श्री रामनिवास रावत -- मैं उसके लिए सहमत हूं. पिछले वर्ष का कृषि कर्मण अवार्ड है लेकिन आप इस वर्ष में दूसरे नंबर पर गेहूं का उत्पादन बता रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय -- माननीय सदस्य का वक्तव्य जारी रहेगा. सदन की कार्यवाही अपराह्न 02.30 बजे तक के लिए स्थगित.

         

 

                                       ( 01.00 बजे से 02.30 बजे तक अंतराल )

                                                                                   

 

 

 

 

 

2.38 बजे विधान सभा पुन: समवेत हुई

{उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए}

 

            उपाध्‍यक्ष महोदय -- रावत जी, चर्चा जारी रखेंगे.

          श्री मुकेश नायक -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सदन में बहुत कम सदस्‍य और मंत्रिमंडल के एक-दो सदस्‍य ही उपस्‍थित हैं. अगर सदन इतने गैरगंभीर तरीके से चलेगा तो लोकतांत्रिक परंपराओं को क्षति पहुँचेगी और प्रदेश की जनता जिस लोकतंत्र के मंदिर पर इतना भरोसा करती है तो उनका भरोसा भी कम होगा. कृपया निर्देश देने का कष्‍ट करें कि कम से कम सम्‍मानित सदस्‍य और मंत्रिमंडल के सदस्‍य तो विधान सभा में आएं.

          उपाध्‍यक्ष  महोदय  -- अब यह सब पर लागू होता है. दोनों पक्ष के लोगों को उपस्‍थित रहना चाहिए, हालांकि माननीय मंत्रिगण की जिम्‍मेदारी थोड़ी ज्‍यादा है.  

          श्री रामनिवास रावत -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, महामहिम राज्‍यपाल महोदय के अभिभाषण पर मैं किसानों के संबंध में चर्चा कर रहा था. इस वर्ष प्रदेश में भयंकरतम भीषण सूखा है. आज प्रदेश में रोज 6 किसान आत्‍महत्‍या कर रहे हैं जिनमें  तीन किसान और तीन खेतिहर मजदूर हैं. प्रदेश में 27 लोग प्रतिदिन आत्‍महत्‍या कर रहे हैं और प्रदेश की सरकार कभी हनुमंतिया टॉप, कभी मध्‍यप्रदेश दिवस आयोजन, कभी विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन, कभी पिकनिक, कभी विदेश यात्रा,  इन पर खर्च कर रही है.

          माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं एक बात की ओर आपका ध्‍यान आकर्षित कराना चाहूंगा, माननीय शिवराज सिंह चौहान जी यहां हैं नहीं, जब भी ओला-पाला पड़ा, केन्‍द्र में यूपीए की सरकार थी, आपने  यूपीए की सरकार के खिलाफ आंदोलन किया पैसा मांगने के लिए लेकिन मैं समझता हूँ कि इस 50 वर्ष के मेरे जीवन के कार्यकाल में सबसे भयावह त्रासदी होने के बाद यह पहला अवसर है कि इस भयंकर आपदा में केन्द्र की सरकार से एक नयी पाई मध्यप्रदेश शासन को नहीं मिली है. जब पिछली बार आपने विधानसभा आयोजित की थी. नरोत्तम जी, मिली है क्या?

            उपाध्यक्ष महोदय-- आसंदी के माध्यम से कहें.

          संसदीय कार्यमंत्री(डॉ.नरोत्तम मिश्रा)-- (हंसते हुए) माननीय उपाध्यक्ष जी, जबरदस्ती बुलवा रहे हैं.

          श्री रामनिवास रावत-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, हंस रहे हैं. (हंसी) दोनों जगह एक ही पार्टी की सरकार है. अभी 18 फरवरी को किसान मित्र के रुप में माननीय प्रधानमंत्री जी यहां आये और करोड़ों-अरबों रुपये खर्च कर दिया. विरोध करने की बात तो दूर, करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद स्वागत किया कि ये किसान मित्र हैं. मैं समझता हूँ कि ऐसा व्यक्ति कभी किसान मित्र नहीं हो सकता, जो इतनी भयावह आपदा के बाद दिसम्बर में उन्होंने केन्द्रीय दल भेजा. केन्द्रीय दल ने 4821 करोड़ की सिफारिश की और केन्द्र सरकार से आप लिख रहे हैं कि 2032 करोड़ रुपया प्राप्त होना अपेक्षित है. अपेक्षा है, मिलेंगे या नहीं मिलेंगे? नरोत्तम जी अब ध्यान नहीं दे रहे हैं. मिलेंगे या नहीं मिलेंगे इसकी कोई गारंटी नहीं है. रामपाल जी बता दें कि मिल गये क्या?

            राजस्व मंत्री(श्री रामपालसिंह)-- मिल जायेंगे, लेकिन आपके समय में  तो प्रधानमंत्री के यहां मुख्यमंत्री गये थे तब मिले तक नहीं थे और हमारे प्रधानमंत्री तो यहां आये और यहां  किसानों के लिए  घोषणा करके गये.

          श्री रामनिवास रावत-- ऐसा कोई वर्ष बता दो, जिस वर्ष प्राकृतिक आपदा हुई हो और यूपीए की सरकार से पैसा नहीं मिला हो रामपालसिंह जी. ऐसा एक वर्ष बता दो.

          श्री यशपालसिंह सिसोदिया-- उपाध्यक्ष महोदय, आज देश का बजट पेश हुआ है, शेरपुर, सीहोर में प्रधानमंत्री जी ने जो अपना विचार दिया था,उसी का एक दर्पण आज के बजट में है.

          श्री रामनिवास रावत--  क्या दिया है उसमें किसानों को? ऐसी कोई चीज नहीं बची,जिस पर टैक्स न बढ़ाया हो.

          श्री यशपालसिंह सिसोदिया--  आप पूरे बजट को देखिये. सीहोर के शेरपुर में जो बातें माननीय प्रधानमंत्री जी ने की थीं वह आज उन्होंने देश के बजट में सम्मिलित की हैं.

          उपाध्यक्ष महोदय-- यह प्रश्नोत्तरकाल नहीं है.

          श्री रामनिवास रावत-- सी.एम.साहब भी आ गये. माननीय मुख्यमंत्री जी को भी 13 वां साल है. इस 13वें साल के कार्यकाल में माननीय मुख्यमंत्री जी बता दें कि जब भी प्रदेश में प्राकृतिक आपदा आयी हो, आपने केन्द्र सरकार से मांगा हो और केन्द्र सरकार से पैसा नहीं मिला हो. यह पहला वर्ष है, इतनी भीषण आपदा के  बाद भी केन्द्र सरकार से एक नयी पाई राज्य सरकार को नहीं मिली है, यह प्रदेश के किसानों के साथ धोखा और दुर्भाग्य है.केन्द्र सरकार का यह बर्ताव दोहरापन है. या तो माननीय मुख्यमंत्री जी को माननीय प्रधानमंत्री जी पसंद नहीं करते हैं. इतना बड़ा आयोजन किया. आप घोषणा ही करा लेते. हमें अच्छा लगता, हम भी धन्यवाद देते और हम भी चाहते, आप चाहो तो मांग करो, आज प्रदेश में जबर्दस्त रुप से पलायन हो रहा है. पेयजल योजना के लिए कोई योजना नहीं बनायी है. माननीय मुख्यमंत्री जी, मेरे पूरे क्षेत्र में किसान ने केवल फसल बोयी, जहां ट्यूबवेल से इरीगेशन होता है और फसल बोने के बाद, एक पानी लग पाया, पूरी फसल नष्ट हो गयी, पशुओं को पूरी फसल चरा दी. यह प्रदेश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है.

          माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहूंगा, जो बात आती है, कृषि कर्मण अवार्ड मिला लेकिन उत्पादन में निरंतर कमी आती जा रही है और जो सिंचाई क्षेत्र की बात करते हैं, मैं मानता हूँ कि सिंचाई क्षेत्र बढ़ा. योजनाएँ जो निर्माणाधीन थीं, योजनाएँ बनीं लेकिन आज भी जो सिंचाई क्षेत्र की स्थिति है, कुल सिंचाई क्षेत्र 9854 हेक्टेयर है इसमें शासकीय योजनाओं से केवल 27.22 प्रतिशत है बाकी लोगों के ट्यूबवेल,  कुएँ और निजी स्रोतों से सिंचाई होती है और उन निजी स्रोतों से सिंचाई करने वाले किसानों के लिए भी आपने बिजली के रेट कितने बढ़ा दिये, इससे रोज किसानों के आत्महत्या की स्थिति बढ़ती जा रहा है.हम गेहूं के उत्पादन की स्थिति देखें तो गेहूं के उत्पादन में लगातार कमी आयी है. आप देख लें,आपकी ही आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में गेहूं के उत्पादन में 4.77 प्रतिशत की कमी आयी है.मक्का  के उत्पादन में 37.45 प्रतिशत की कमी आयी है. इसी तरह से दलहन, तिलहन इन सभी में  कमी आयी है फिर स्थिति यह कहां से आ रही है. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आज प्रदेश में अपराधों की स्थिति को हम देखें तो प्रदेश में लगभग 60 युवतियाँ रोज गायब हो रही हैं ,पता नहीं ये मानव तस्करी में जा रही हैं या कहाँ जा रही हैं . इनमें से 22 विवाहित हैं और इनमें से 25.19 प्रतिशत अव्यस्क लड़कियाँ हैं जो इस प्रदेश से गायब हो रही हैं . इसी तरह से यदि हम बलात्कार की स्थिति देखेंगे तो प्रतिदिन 13 महिलाओं के साथ इस प्रदेश में बलात्कार हो रहा है . माननीय उपाध्यक्ष महोदय, अनुसूचित जाति और जनजाति के मामले में उनकी महिलायें सर्वाधिक हैं, जिनका पता नहीं लग रहा है और प्रति तीन दिन में दो सामूहिक बलात्कार की स्थिति बनती जा रही है.

उपाध्यक्ष महोदय, यदि हम प्रदेश में स्वास्थ्य की स्थिति देखें तो  प्रदेश में मातृ मृत्यु और शिशु मृत्यु दर में कमी आई यह हम मानते हैं. लेकिन आप वहीं खड़े हैं. यह आपके किसी विशेष प्रयास की वजह से नहीं हुआ है. सामान्यतया पूरे देश की लाइफ स्टाइल बदली है. राष्ट्रीय स्तर पर भी कमी आई है, तो आपके यहाँ भी कमी आई है. उसके बावजूद भी आप मातृ मृत्यु दर में और शिशु मृत्यु दर में देश में प्रथम है. कुपोषण में भी आप देश में प्रथम नंबर पर है. आप पता नहीं किस स्थिति में इस प्रदेश को ले जाना चाहते हैं. इसी तरह से आपके यहाँ जो डॉक्टरों की स्थिति है, उनके 3195 पदों में से 1980 पद विशेषज्ञों के रिक्त हैं . इसी तरह से चिकित्साधिकारियों के 2996 पदों  में से 1837 पद रिक्त पड़े हैं . आपने 60 महाविद्यालयों को खोलने की घोषणा की लेकिन उनकी क्या स्थिति है उनमें से केवल तीन या चार महाविद्यालयों में प्राचार्य हैं बाकी महाविद्यालय अतिथि प्रोफेसर्स के भरोसे चल रहे हैं.

          उपाध्यक्ष महोदय---  रावत जी, अब आप  समाप्त करें.

            श्री रामनिवास रावत--- उपाध्यक्ष महोदय, एक बात और कहना चाहूंगा कि प्रदेश का सबसे बड़ा भ्रष्टाचार व्यापम का भ्रष्टाचार है. मुख्यमंत्री जी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश से व्यापम की  जांच सीबीआई को गई लेकिन सीबीआई में कितने प्रकरणों को भेजा गया , 212 प्रकरणों में से केवल 157 प्रकरण भेजे गये बाकी शेष प्रकरण कौनसे थे . वह क्यों नहीं भेजे गये. यह भी मुख्यमंत्री जी अपनी बात में स्पष्ट करेंगे. चूंकि उन शेष प्रकरणों में बड़े बड़े लोग सीधे-सीधे फंस रहे थे, उनके विरुद्ध एवीडेंस थे इसलिए वह शेष प्रकरण सीबीआई को नहीं सौंपे गये.

          उपाध्यक्ष महोदय, इसी तरह से रीवा जिले में केंद्रीय सहकारी बैंक का घोटाला, डभौरा का घोटाला, हरदा में सहकारी बैंक का घोटाला, जिला सहकारी बैंक, शिवपुरी में मरे हुए लोगों को ऋण दे दिये गये और इसी तरह से  लोकायुक्त की छापामार कार्यवाही में कई लोगों के यहाँ अकूत संपत्ति पकड़ी गई है, यह पैसा कहाँ से जा रहा और कहाँ आ रहा है. माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आज प्रदेश के किसान जबर्दस्त रूप से परेशान हैं माननीय मुख्यमंत्री जी, जैसा कि आप भी जानते हैं कि इस बार में प्रदेश भयावह सूखे की स्थिति होने के कारण ग्राऊंड वाटर पूरी तरह से समाप्त हो चुका है , कई क्षेत्र ऐसे हैं. मेरे विधानसभा क्षेत्र में आप आश्चर्य करेंगे कि 1000 हजार फुट गहरे टयूबवैल कराने के बाद भी पानी की स्थिति नहीं है पूरी तरह से पानी समाप्त हो गया है और लोग वहाँ पलायन कर रहे हैं. इसके लिए आप जरूर आप व्यवस्था करे नहीं तो स्थिति भयावह बनेगी. अभी से गांव के गांव खाली हो गये हैं. मेरे कराहल, विजयपुर, बीरपुर क्षेत्र में पानी की बहुत भयावह स्थिति है, इसके लिए शीघ्र उपाय करे. सरफेस वाटर और डैम इत्यादि की व्यवस्था आप कर दें. जिन डैम्स की डीपीआर आपके यहाँ पड़ी है उनको स्वीकृत करे दें और इसके लिए कोई विशेष योजना बनाये .

उपाध्यक्ष महोदय, मेरा विधानसभा क्षेत्र राजस्थान से लगा हुआ है , चंबल नदी के पानी को राजस्थान कई जगहों से ले जा रहा है, धौलपुर से दो जगह से ले जा रहा है ,सबलगढ़ में राजघाट से ले जा रहा है. आप पीने के पानी की व्यवस्था या फ्लड से तालाबों को भरने की व्यवस्था बना लेंगे तो बड़ी कृपा होगी. प्रदेश की जनता को आप बचायें .आदरणीय, राजस्व मंत्री जी, कई विधायकों के प्रस्ताव आपके पास सूखाग्रस्त घोषित कराने के लिए पड़े हुए हैं, कलेक्टर्स में भी आपको रिपोर्ट भेजी हैं, इसमें मेरी कराहल तहसील भी है लेकिन उसको आपने सूखा पीड़ित तहसील घोषित नहीं किया है, आप ऐसा पैमाना क्यों अपना रहे हैं. आप यह भाव तो न रखें . आप प्रदेश की जनता के मुख्यमंत्री और मंत्री हो, अकेले बीजीपी वाले क्षेत्रों के नहीं हो.आपने मुझे बोलने का समय दिया उसके लिए बहुत बहुत धन्यवाद.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत(नागदा-खाचरौद)--  माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं माननीय राज्यपाल जी के अभिभाषण के कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ. मध्यप्रदेश की सरकार ने हर क्षेत्र के अन्दर चाहे वह सिंचाई हो, बिजली हो, चाहे किसान हो, युवा हो, श्रमिक हो, हर क्षेत्र में सरकार ने अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है. यह हम सबका सौभाग्य है कि जब-जब भी मध्यप्रदेश की धरती पर उज्जैन में सिंहस्थ होता है, उस सिंहस्थ पर्व को मनाने का सौभाग्य भारतीय जनता पार्टी की सरकार को मिलता है. मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को आज बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहूँगा कि मैंने भी 2-3 सिंहस्थ देखे हैं. लेकिन पहली बार उज्जैन में जो सिंहस्थ की दृष्टि से, जिसमें 5 करोड़ श्रद्धालुओं के उज्जैन में आने का अनुमान है और लगभग 3 हजार करोड़ रुपये के जो विकास के कार्य श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए किए गए हैं ये एक अभूतपूर्व कार्य हैं और इसके लिए मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद दूँगा. उपाध्यक्ष महोदय, आज उज्जैन बदला हुआ दिखता है, उज्जैन अच्छा दिखता है, उज्जैन सुन्दर दिखता है और यह सब अगर कहीं पर हुआ है तो सरकार की जो दृढ़ इच्छा-शक्ति थी उस दृढ़ इच्छा-शक्ति का ही एक उहादरण हम सबके सामने है. मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को बधाई भी दूँगा और धन्यवाद भी दूँगा तथा कृषि मंत्री जी को भी धन्यवाद और बधाई दूँगा कि यह मध्यप्रदेश की धरती में पहली बार हो रहा है कि 4-4 बार केन्द्र की सरकार कृषि कर्मण अवार्ड अगर देती है तो मध्यप्रदेश की सरकार को देती है और यह केवल माननीय नरेन्द्र मोदी जी ने दिया मैं ऐसा नहीं मानता. केन्द्र में जब काँग्रेस के मित्रों की सरकार हुआ करती थी तब भी हमें अवार्ड मिला है और इसका मतलब सीधा-सीधा यह होता है कि सिंचाई का भी साधन हमने बढ़ाया है, बिजली की उपलब्धता भी बढ़ाई और किसानों के हितों में हमने कई प्रकार के निर्णय लिए, यह उसका एक जीता-जागता उदाहरण है. आज अगर 40 लाख हैक्टेयर भूमि में सिंचाई का रकबा हमने किया तो यह सरकार की एक दृढ़ इच्छा-शक्ति है कि उसके कारण आज 40 लाख हैक्टेयर भूमि के अन्दर सिंचाई देते हैं. मित्रों, कहना बहुत आसान होगा लेकिन आज अगर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री जी एक दिन का अगर विधान सभा का सत्र बुला कर और किसानों के हित में अगर साढ़े आठ-नौ हजार करोड़ रुपये बाँटने का अगर अभूतपूर्व निर्णय नहीं लेते तो शायद क्या स्थिति इस मध्यप्रदेश के किसानों की होती यह कहने की कोई आवश्यकता नहीं है आज....

          श्री यशपाल सिंह सिसोदिया--  उपाध्यक्ष महोदय, टी व्ही डिस्प्ले पर पुष्पेन्द्रनाथ जी पाठक का नाम चल रहा है जबकि दिलीप सिंह जी शेखावत बोल रहे हैं.

          श्री दिलीप सिंह शेखावत--  उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह भी कहना चाहूँगा कि 10 घंटे बिजली हमने किसानों को दी है. मैं भी वह सौभाग्यशाली विधायक हूँ कि राजा-महाराजा,  अँग्रेज और काँग्रेस की सरकार में जहाँ केवल एक हजार हैक्टेयर भूमि में सिंचाई होती थी आज मेरी विधान सभा में मैं 5 साल में 2 हजार हैक्टेयर भूमि तक सिंचाई का रकबा बढ़ाने में सफल होऊँगा यह मध्यप्रदेश की सरकार के कारण संभव हो पाएगा. आज कोई वाद विवाद प्रतियोगिता नहीं है लेकिन इसी सदन के अन्दर पूर्व मुख्यमंत्री जी कहते थे कि भूतो न भविष्यति नर्मदा का पानी क्षिप्रा में नहीं आ सकता है.  लेकिन अगर नर्मदा का पवित्र पानी क्षिप्रा में मिला है तो यह इस सरकार की दृढ़ इच्छा-शक्ति है. मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद दूँगा कि नर्मदा-गंभीर परियोजना के लिए भी इस सरकार ने पैसा आवंटित किया है और मैं बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहता हूँ. लेकिन माननीय मुख्यमंत्री जी सदन में विराजे हुए हैं मैं उनसे यह भी आग्रह करूँगा कि अगर नर्मदा जी के पानी को चंबल के उद्गम स्थल पर मिलाने की अगर कोई योजना लाएँगे तो निश्चित रूप से महू से लेकर मंदसौर, नीमच तक का पूरा क्षेत्र, क्योंकि नागदा एक औद्योगिक क्षेत्र है और उस औद्योगिक क्षेत्र में पानी की कमी के कारण डेढ़-दो महीने तक ग्रेसिम इंडस्ट्री जो विश्व की प्रसिद्ध फायबर के उत्पादन में एक इकाई है और वह इकाई डेढ़-दो महीने बंद होती है और उसके कारण मध्यप्रदेश की सरकार को भी बहुत बड़े रेवेन्यू का नुकसान होता है और इसलिए मैं आप से बहुत विनम्रता से निवेदन करूँगा कि अगर आपकी नर्मदा जी को चंबल के उद्गम स्थान पर मिलाने की योजना होगी तो निश्चित रूप से मैं आपका बहुत-बहुत आभारी रहूंगा. मैं माननीय मुख्यमंत्रीजी और श्रम मंत्रीजी को भी धन्यवाद देना चाहूंगा कि श्रमिकों की उम्र आपने 58 से बढ़ाकर 60 साल की है उससे कई श्रमिकों को बहुत लाभ हुआ है लेकिन उसमें थोड़ी बहुत कमियां हैं उनको आप देखेंगे तो निश्चित रुप से ठीक होगा. मैं माननीय मुख्यमंत्रीजी और गोपाल भार्गवजी को धन्यवाद देना चाहूंगा उन्होंने "मुख्यमंत्री सड़क" को डामर का करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है अब छोटे गांव भी डामर की सड़कों से युक्त होंगे. मैं गोपाल भार्गव जी से निवेदन करूंगा कि जो स्मार्ट विलेज की कल्पना आपने सिंहस्थ को दृष्टिगत रखते हुए की है यदि मध्यप्रदेश के संपूर्ण गांवों को स्मार्ट बनाने की कोई योजना बनाएंगे तो यह हम सबका सौभाग्य होगा. हम आज शहरों को स्मार्ट बनाना चाह रहे हैं.

          उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश की तुलना कभी बिहार जैसे प्रदेशों से हुआ करती थी पूर्व के मुख्यमंत्री यह कहते थे कि बिहार में अगर बिजली, पानी और सड़क के बिना सरकार बन सकती है तो मध्यप्रदेश में भी बन सकती है. उस तकदीर और तस्वीर को अगर किसी ने बदला है तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने बदला है.

          माननीय मुख्यमंत्रीजी मैं एक बात कहते हुए अपनी बात को समाप्त करुंगा आपने किसानों व कर्मचारियों को सब कुछ दिया है. प्रायवेट इंडस्ट्रीज में काम करने वालों लोगों पर जो प्रोफेशनल टैक्स लगाया है उसे कम या समाप्त करेंगे तो लाखों मजदूरों का बहुत भला होगा व उनकी सरकार के प्रति श्रद्धा भी बढ़ेगी. मैंने शून्यकाल में मामला उठाया था कि हमारे यहां जो वृद्धावस्था या विकलांग पेंशन मिलती हैं यह बहुत कम है इसको 1000 रुपये सरकार करेगी तो उचित होगा. उपाध्यक्ष महोदय, आपने बोलने का समय दिया उसके लिये धन्यवाद.

 

          कुंवर सौरभ सिंह (बहोरीबंद ) -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं महामहिम राज्यपाल महोदय के अभिभाषण पर संशोधन के संबंध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं.

          उपाध्यक्ष महोदय, एक किताब लिखी जाती है रिपलेस बिलीव इट ऑर नॉट इस किताब में कुछ ऐसे संस्करण होते हैं कुछ ऐसी बातें होती हैं जो लगभग असंभव होती हैं, नेक्स्ट टू इम्पासिबल होती हैं. इस अभिभाषण को पढ़कर कई लोगों ने अपनी पीठ खुद थपथपाने का प्रयास किया. कंडिका 5 में प्राकृतिक आपदा के विषय में 4600 करोड़ रुपये के बारे में इसमें वर्णन है हकीकत यह है कि आज दिनांक तक किसानों के खातों में राशि नहीं पहुंच रही है, आधी अधूरी पहुंच रही है लोग परेशान हैं. कंडिका 9 किसान बीमा योजना,  कटनी जिले के बड़गांव व रैपुरा सोसायटी में किसानों द्वारा प्रीमियम जमा किया गया परन्तु वहां किसी की गलती के कारण वह प्रीमियम आगे जमा नहीं हो पाया और किसानों को क्लेम नहीं मिला. मैं सिर्फ दो जगह का उदाहरण दे रहा हूं ऐसा बहुत जगह हुआ है. कंडिका 12 में कृषि कर्मण अवार्ड के बारे में कहा जा रहा है, रामनिवास जी ने कहा कि कृषि उत्पादन लगातार घट रहा है फिर भी हमें अवार्ड मिल रहा है. मैं बताना चाहूंगा कि यदि हमारा उत्पादन बढ़ा है तो हमारे वेयर हाउस खाली क्यों हैं. हर वेयर हाउस से आवेदन आता है कि हमारे यहां अनाज रखा जाये. जितना भी खाद्यान्न इकट्ठा हो रहा है वह बांट बांट के सभी को दे रहे हैं. एक समय वेयर हाउस की कमी थी और आज वेयर हाउस ज्यादा हो गये हैं. कंडिका में आगे बताया गया है कि वेयर हाउस और बनाये जा रहे हैं अगर उत्पादन हो रहा है तो वेयर हाउस खाली क्यों हैं. स्पष्ट है पीडीएस में जो गल्ला बंट रहा है वह गल्ला तुलकर वापिस किसानों के नाम पर वेयर हाउस में जा रहा है और वह उत्पादन में आ रहा है इसलिये गल्ला बढ़ता हुआ दिख रहा है. कंडिका 19 में ऊर्जा विभाग के द्वारा 24 घंटे और 10 घंटे बिजली देने की बात कही गई है जबकि हकीकत यह है कि जहां किसानों के 2 हार्स पॉवर के पंप चल रहे थे उनके 3 हार्स पॉवर के बिजली के बिल आए हैं और 1 हार्स पॉवर की बिजली, बिजली विभाग ने सरकार की खाई है और किसान से भी ज्यादा पैसा लिया है परन्तु गरीब किसान इस विषय में बोल नहीं सका इसीलिए लगातार बिल देता चला आ रहा है.कंडिका 26 में किसानों का पंजीयन, पंजीयन के माध्‍यम से किसान अपना गल्‍ला सोसायटियों को दे रहे हैं, इसमें ज्‍यादा लाभ व्‍यापारियों को हो रहा है. माननीय समस्‍या यह है कि जब किसान अपना गल्‍ला लेकर जाता है तो उसका गल्‍ला रख दिया जाता है और व्‍यापारी का गल्‍ला पहले तुलता है और जब किसान 15 20 दिन भटक जाता है तो वह मजबूर हो जाता है अपना गल्‍ला व्‍यापारियों को बेचने के लिये और वह उनकी ऋण पुस्तिका के माध्‍यम से वापस सोसायटी के पास वापस आ जाता है. कंडिका 45 में युवा उद्यमियों को कहा जा रहा है कि लोन दिया जा रहा है पर हकीकत यह है कि लोन उन्‍हीं को दिया जा रहा है जो आर्थिक रूप से सक्षम होते हैं. बैंक के ऊपर हमारा कोई  नियंत्रण नहीं है. बैंक पूरा का पूरा अपनी मनमर्जी से काम कर रहे हैं. जो युवा या व्‍यक्ति सक्षम है जिसके एकाउंट अच्‍छे हैं, जिनकी बुक अच्‍छी है उनको ही लोन दिया जा रहा है. कंडिका 55 में अन्‍नपूर्णा योजना के तहत यह कहा जा रहा है सारे एससीएसटी वालों को राशन की परची का वितरण हो गया है और खाद्यान्‍न मिल रहा है. माननीय मैं आपके माध्‍यम से बताना चाहता हूं कि खाद्यान्‍न पर्ची अभी भी मुश्‍किल से 70 प्रतिशत बंटी है और 30 प्रतिशत बंटना अभी भी बाकी है. गांव में बहुत बुरी स्थिति है. कंडिका क्रमांक 63 में इलेक्‍ट्रानिक फंड से ट्रासंफर किया जा रहा है लेकिन हकीकत यह है कि चाहे मनरेगा का पैसा हो या निराश्रित का पैसा हो कोई भी भुगतान हो वह जब ई पेमेंट मशीन में जाते हैं तो 50 साल के ऊपर के कोई भी महिला या लेबर का जब भी अंगूठा लेते हैं तो उनके मार्क्‍स अंगूठे के छापने ही पड़ते हैं, इसके चलते लोगों को बहुत भटकना पड़ता है. हमारे पास कोई योजना तैयार नहीं थी और हमने इलेक्‍ट्रानिक फंड स्‍टार्ट कर दिये, जिसके कारण नीचे लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा है. कंडिका 79-80 में कितनी शालाएं शिक्षक विहीन है और कितनी शालाएं भवन विहीन हैं, इस बात को किताब में लिखना तो उचित है  पर मौके पर बिल्‍कुल भी ऐसा नहीं है. कंडिका क्रमांक 82 में कुल 217  शासकीय आईटीआई बताये गये हैं,जबकि बहोरीबंद में हमारी विधान सभा में 3 से 4 करोड़ रूपये बैंक में रख हुए हैं और उसका ब्‍याज खाया जा रहा है और उस पर काम नहीं किया जा रहा है.कंडिका 92 में एससी एसटी की विशेष भर्ती अभियान के बारे में बताया गया है. परन्‍तु पता नहीं कि हकीकत क्‍या है. मैं सिर्फ इतना कहता हूं कि दवाई के पर्चे पर दवाई लिख देने से बीमारी दूर नहीं होती है जब तक नीचे तक नहीं पहुंचेगी त‍ब तक दवाई का पर्चा पढ़ने से कोई फायदा नहीं है. कंडिका 122 में ई पंजीयन ई स्‍टांपिंग संपना के बारे में कहा है. आपके पोर्टल दिन भर बंद रहते हैं. दिन भर रजिस्‍ट्री नहीं हो पाती है पता नहीं रजिस्‍टर कैसे बढ़ेगा. कंडिका 127 में खनिज में हम लोग अपना स्‍थान बता रहे हैं कि हम कितना रेवेन्‍यु कर रहे हैं लेकिन हकीकत तो यह है खनिज की या जो भी कमोडिटी का राजस्‍व बढ़ाते हैं वह जनता से ले रहे हैं. टैक्‍स का ज्‍यादा दोहन जनता से कर रहे हैं. कंडिका 143 में आधार कार्ड के बारे में लिखा गया है कि 82 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है लेकिन हकीकत यह है कि ग्रामीण स्‍तर पर हर आदमी को आधार कार्ड बनवाने के 50 से 100 रूपये देने पड़ रहे हैं. यदि हम पूरा भी कर रहे हैं तो इसका कोई फायदा नहीं हो रहा है. अपनी बात समाप्‍त करते हुए मैं सिर्फ यह कहना चाहूंगा कि जो दवाईयां पर्ची पर लिखी होती है उससे स्‍वास्‍थ्‍य में सुधान नहीं होगा हम लोगों को जो कह रहे हैं उसमें सुधार भी करना पड़ेगा. आपने बोलने का अवसर दिया धन्‍यवाद् .        

            श्रीमती ललिता यादव:- (अनुपस्थित)

               श्री गोविन्‍द सिंह पटेल (गाडरवारा):- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, राज्‍यपाल महोदय ने जो अभिभाषण प्रस्‍तुत किया है, उसके समर्थन में खड़ा हुआ हूं. राज्‍यपाल का जो अभिभाषण होता है वह सरकार का दृष्टिपत्र होता है कि सरकार ने पहले क्‍या किया और अब सरकार क्‍या करना चाह रही है. माननीय शिवराज सिंह की सरकार प्रदेश में 12 वर्षों से चल रही है और सरकार ने हर वर्ग के लिये काम किया है. वह चाहे किसान हो मजदूर हो, हर क्षेत्र में काम किया है. जब किसान की बात आती है तो हमारे प्रदेश को चौथी बार कृषि कर्मण अवार्ड पुरस्‍कार मिला है. वह सरकार की नीतियां और मध्‍यप्रदेश के किसान की मेहनत यह उसका फल है कि प्रदेश को कृषि कर्मण पुरस्‍कार मिला है. किसानों की हालत सुधारने के लिये सरकार ने जो काम किया है पहले वर्ष 2003 में 7 लाख हैक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती थी वह अब 36 लाख हैक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई हो रही है. किसान तीन चीजों से परेशान होता है एक तो उसको सिंचाई की सुविधा उपलब्‍ध हो जाये, उसको सस्‍ते ब्‍याज का ऋण उपलब्‍ध हो जाये और उसको कृषि यंत्रों पर सब्सिडी मिल जाये, यह दो तीन चीजें आवश्‍यक है. सरकार ने सिंचाई के लिये तो सिंचाई क्षमता 7 लाख हैक्‍टेयर से 36 लाख हैक्‍टेयर कर दी और बिजली के लिये भी सरकार ने बहुत काम किया है. बिजली के लिये जो एक जमाने में दो चार घंटे मिलती थी , उसकी भी निश्‍चितता नहीं रहती थी . अब दस घंटे थ्री फेस बिजली सिंचाई के लिये उपलब्‍ध है और गांव के लिये अटल जोत के लिये 24 घंटे बिजली, जो 24 घंटे बिजली की बात माननीय मुख्‍यमंत्री जी किया करते थे तो हम लोगों को भी लगता था कि कैसे करेगें. खेत की बिजली अलग और गांव की बिजली अलग, दोनों के अलग फीडर गांव की बिजली 24 घंटे चल रही है. किसान वोल्टेज की समस्या से जूझता था उनके यहां पर ट्रांसफार्मर नहीं रहते थे सरकार ने ट्रांसफार्मर के लिये भी काम किया है. एक योजना हाई वोल्टेज डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम जिसमें छोटे-छोटे ट्रांसफार्मर 2516 के ट्रांसफार्मर एक दो किसानों के बीच में चलाये जिससे उन्हें वोल्टेज की समस्या का निजात हुआ यदि कहीं पर हाई वोल्टेज डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम से काम नहीं हो पाया तो कृषक अनुदान योजना चला दी उसमें जितने भी ट्रांसफार्मर लगते हैं उसमें पांच एकड़ से कम के किसान 5 हजार हार्स पॉवर का पैसा जमा करते हैं और 5 एकड़ से ज्यादा वाले 8 हजार हार्स पॉवर का पैसा जमा करते हैं. किसान का लगता है 40-50 हजार रूपये अधिकतम उसमें डेढ़ लाख रूपये सरकार खर्च करके उनके खेतों तक बिजली के ट्रांसफार्मर लगाती है. हमारे जिले का ग्राऊंड वॉटर का मामला है, क्योंकि सिंचाई ग्राऊंड वॉटर से होती है इसलिये बिजली की आवश्यकता ज्यादा रहती है. एक जमाने में हमारे साथियों ने बिजली माफ हो गई थी, लेकिन उस समय बिजली की लाईनें खड़ी नहीं कीं और बिजली के लिये कुछ काम नहीं किया उस समय अस्थायी कनेक्शन टीसी के नाम से चलता था यह बात सरकार के पास आयी मैंने भी इस संबंध में ऊर्जा मंत्री से चर्चा की तो एक अटूट बंधन योजना चलायी उसमें 1 हजार फीट की दूरी तक जितने भी अस्थायी कनेक्शन हैं उनको अस्थायी कर दिया गया है इसलिये अस्थायी का 100 रूपये एक्ट्रा बिल लगने लगा तथा वोल्टेज भी किसानों को मिलने लगा. अभी सरकार ने एक और योजना बिजली के क्षेत्र में उसमें सब स्थायी कनेक्शन कर देंगे उसमें जो अटूट बंधन योजना से कनेक्शन लिये या जिनके टीसी हैं या जिनके ट्रांसफार्मर से अपने नलकूप-कुएं दूर पड़ते हैं उनका एक रजिस्ट्रेशन बिजली ऑफिस में कराया जा रहा है उसमें सबको ट्रांसफार्मर से बिजली की सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है, यह असंभव काम सरकार ने किया है इसलिये सरकार को कृषि कृमण पुरूस्कार मिला है. किसान ब्याज की मार से परेशान होता था 18-20 प्रतिशत ब्याज सहकारिता में लगता था उसमें किसान से ब्याज भी नहीं चुकता था किसान डिफाल्टर हो जाता था उसमें सरकार ने काम किया उसको 7-5-3 प्रतिशत किया था अब उसमें और परिवर्तन करते हुए 1 प्रतिशत करते हुए अब बिना ब्याज का कर दिया है. इतिहास में एक तो राजा विक्रमादित्य जी ने बिना ब्याज का कर्ज दिया था या माननीय शिवराज सिंह जी चौहान दे रहे हैं अब तो 10 प्रतिशत और कम करके एक लाख का कर्ज उसमें 90 हजार रूपये जमा कर दो इससे बड़ा सरकार की तरफ से कोई काम हो नहीं सकता है इसलिये आज किसान का माननीय मुख्यमंत्री पर भरोसा जगा है. मेरी विधान सभा में अभी ओलावृष्टि से 100 गांव प्रभावित हुए हैं ओले 100 गांवों में गिरे हैं इससे फसल चोपट हो गई है, लेकिन किसान को माननीय मुख्यमंत्री जी पर भरोसा है कि हमारे मुख्यमंत्री जी हमारी फसल के नुकसान की भरपाई करेंगे इसलिये कम से कम थोड़ी बहुत राहत मिल रही है. पूर्व में कांग्रेस सरकार में जब ओले गिर जाएं तो कोई चिन्ता ही नहीं रहती थी. आज मजदूरों एवं किसानों के आत्महत्याओं की बातें करते हैं आज न तो किसान

आत्महत्या कर रहे हैं और न ही मजदूर, मजदूर के लिये 1 रूपये किलो गेहूं, 1 रूपये किलो चावल. मजदूर की मजदूरी रोजगार गारंटी में दिन की ढाई सौ रूपये मिलती है मजदूर एक दिन काम करे और महीने भर का भोजन उसके बाद में मजदूर तथा गरीब व्यक्ति को अपनी बच्ची की शादी की चिन्ता नहीं है बच्ची की शादी में मध्यप्रदेश की सरकार 25 हजार रूपये खर्च करा रही है. लॉडली लक्ष्मी योजना के द्वारा भी बच्चियों की शादी के लिये 1 लाख 18 हजार रूपये मिलेंगे जो सरकार योजना चला रही है. गरीब लोगों को निशुल्क दवाईयां भी दे रही है किसी को चिन्ता नहीं है मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री सबकी चिन्ता कर रहे हैं. मैं तो यहां तक कहता हूं कि शासक की नीयत सही होना चाहिये. अगर राजा की नीयत सही है तो सुख-शांति क्षेत्र में आती है. एक किवदंती है उसको मैं बताना चाहता हूं एक राज अपना बेस बदलकर जनता का हालचाल पूछने निकले उनको जब प्यास लगी तो एक वृद्ध किसान महिला खेत पर थी राजा बोले माताजी प्यास लगी है पानी मिलेगा तो माताजी ने उनको एक गन्ना काटकर गन्ने का रस पिलाया और कहा कि आप गन्ने का रस पी लें. जब गन्ना काटा तो एक गन्ने में 500 ग्राम गन्ने का रस निकला तो राजा ने कहा कि एक गन्ने में 500 ग्राम रस भईया अच्छा गन्ना है राजा ने सोचा कि इन पर टेक्स बढ़ाना चाहिये किसानों के पास गन्ना बहुत ज्यादा निकलता है तो टेक्स लगना चाहिये राजा ने यह विचार मन में किया और कहा कि दूसरा गन्ना काटा तो उस गन्ने में 100 ग्राम रस निकला.एक गन्‍ने में 500 ग्राम और एक गन्‍ने में 100 ग्राम तो माता जी बोली कि राजा की नीयत बदल गई इसलिए यह हो रहा है, राजा की नीयत भर सही रहे ।   आज हमारे मुख्‍यमंत्री जी की जो नीयत है, वह बिल्‍कुल साफ है, पूरी ईमानदारी के साथ, किसानों की, जनता की सेवा करना चाहते हैं, इसलिए मध्‍यप्रदेश में संकट आने के बाद भी, सूखा पड़ जाता है, ओला पड़ जाता है,तुसार लग जाता है, उसके बाद भी कृषि कर्मण पुरस्‍कार मिलता है । माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने का मौका दिया बहुत-बहुत धन्‍यवाद ।

          श्रीमती ऊषा चौधरी(रैगांव)- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, महामहिम राज्‍यपाल महोदय जी के अभिभाषण के विरोध में बोलने के लिए खड़ी हुई हूँ । सरकार ने बड़ी वाह-वाही लूटी कि प्रदेश में यह काम हो रहे हैं, वह काम हो रहे हैं लाड़ली लक्ष्‍मी योजना आदि महामहिम राज्‍यपाल जी के अभिभाषण में दिया गया है,  लेकिन आम जनता और गरीब जनता अनुसूचित जाति,जनजाति के जीर्णोद्धार के लिए, उनका जीवन यापन ऊपर उठे, इसके लिए कोई भी प्रयास नहीं किया गया है और न ही अभिभाषण में उनका जिक्र किया गया है । न तो मजदूरों की मजदूरी बढ़ाने की चर्चा की गई है, न ही अनुसूचित जाति के आवासों की चर्चा की गई है कि उनका जीवन यापन आगे बढ़े और न ही गरीब दलितों के शिक्षा स्‍तर पर विदेशी शिक्षा या उच्‍च स्‍तरीय शिक्षा पर कोई चर्चा की गई है । आज मध्‍यप्रदेश सरकार तमाम घोषणाएं करती है, मध्‍यप्रदेश के  किसानों को चौथी बार कृषि कर्मण अवार्ड मिला है । किसानों की किस तरह से हालत है, सूखा ग्रस्‍त और ओला पीडि़त  में किसानों को एक दिन का सत्र बुलाकर इस सरकार ने मुआवजा देने की बात कही लेकिन मेरे विधानसभा क्षेत्र में अनुसूचित जाति,जनजाति की जो बस्तियां हैं पूरा का पूरा कोई सर्वे नहीं हुआ है, उन लोगों का नाम ही हटा दिया गया है । कुछ गिने-चुने लोगों का सर्वे हुआ है और एक हेक्‍टेयर का 2 हजार रूपया मुआवजे की राशि देने की बात कही गई, 5 हेक्‍टेयर भूमि है, उसको भी 2 हजार रूपए मुआवजे की राशि दी गई और आज तक किसानों के खाते में भी नहीं गई है । मेरे विधानसभा क्षेत्र में अर्जुनपुर कुसियारा,ड्योटा तमाम ऐसे गांव हैं जहां सर्वे ही नहीं हुआ है। आज तक किसानों को एक रूपया भी नहीं मिला और सरकार कृषि  कर्मण अवार्ड की बात करती है । माननीय मुख्‍यमंत्री जी पूरे प्रदेश में दलितों के साथ जिस तरह से अत्‍याचार हो रहा है, बलात्‍कार हो रहा है उस पर कोई कानून व्‍यवस्‍था बनाने का जिक्र नहीं किया गया है कि किस तरह कड़ी कानून व्‍यवस्‍था बनाई जाए ताकि इनकी सुरक्षा हो सके उनको न्‍याय मिल सके, इसका भी कोई जिक्र नहीं किया गया है । माननीय मुख्‍यमंत्री जी,पूरे प्रदेश में 24 घण्‍टे बिजली की बात करते हैं । मैं इस बात को मानती हूँ कि 24 घण्‍टे बिजली मिल रही है लेकिन जहां किसानों के लिए  पानी ही नहीं है, मेरे विधानसभा क्षेत्र में न तो कोई नहर है न ही कोई डेम बनाया गया है, बरगी के बांध के सपने दिखाए जा रहे हैं, नदियां सूखी पड़ी हुई हैं, हेण्‍डपंपों में पानी नहीं है । किसी हेंडपंप में यदि पानी निकल भी रहा है तो दबंग लोग उस पर मोटर लगाकर अपनी खेती सींच लेते हैं । किसानों की खेती सींचने की बात तो छोड़ दीजिए ।  पीने के पानी की व्‍यवस्‍था नहीं है, पीने के पानी के लिए लोग मर रहे हैं, तरस रहे हैं लेकिन पानी के लिए कोई डेम बनाया जाए, कोई बरगी की नहर लाई जाए, इसके लिए महामहिम राज्‍यपाल महोदय के भाषण में कोई जिक्र नहीं किया गया है । माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बात जहां थोड़ा बहुत पानी है तो किसान थोड़ी बहुत किसी तरह खेती की व्‍यवस्‍था कर रहा है तो हमारे यहां ऐरा प्रथा है जो जानवर हैं, जो गाय है और बैल हैं,  नीलगाय  तमाम खेतों को नष्‍ट कर रही हैं, उसके लिए भी पंचायत में पैसा नहीं है । कांजी हाउस नहीं है, कांजीहाउस है भी तो उसके रख-रखाव की व्‍यवस्‍था नहीं है,उसका भी कहीं कोई जिक्र नहीं किया गया है । मेरे विधानसभा क्षेत्र में कांजी हाउस बनवाया जाए क्‍योंकि ऐरा प्रथा के कारण किसान की पूरी खेती चर ली जाती है । माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह कहा गया है कि पूरे मध्‍यप्रदेश में सड़कों का जाल बिछा दिया गया है लेकिन सतना से रीवा जाने के लिए रीवा मार्ग आज तक वह सड़क नहीं बनी है, इस कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं, इसका भी कोई जिक्र नहीं है, 6-7 साल से तमाम गढ्ढे हैं, कहीं थोड़ी सड़कें बनी हैं, तो कहीं पुल बने हैं तो कहीं गिट्टी-मिट्टी पड़ी है, इस कारण से उस मार्ग पर नागौद के विधायक जी का एक्‍सीडेंट भी हुआ था ।

          उपाध्‍यक्ष महोदय - आप एक मिनिट में समाप्‍त करें.

          श्रीमती ऊषा चौधरी - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरे दल से,