मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

__________________________________________________________

 

चतुर्दश विधान सभा एकादश सत्र

 

 

जुलाई, 2016 सत्र

 

गुरूवार, दिनांक 28 जुलाई, 2016

 

( 6 श्रावण, शक संवत्‌ 1938 )

 

 

[खण्ड- 11 ] [अंक- 8 ]

 

__________________________________________________________

 

 

 

 

 

 

मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरूवार, दिनांक 28 जुलाई , 2016

 

( 6 श्रावण, शक संवत्‌ 1938 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11. 04 बजे समवेत हुई.

 

{ अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा ) पीठासीन हुए.}

 

अध्‍यक्ष महोदय :- प्रश्‍न क्रमांक -1

( श्री सुन्‍दरलाल तिवारी,सदस्‍य के खड़े होकर बोलने पर )

अध्‍यक्ष महोदय :- तिवारी जी आप बैठ जाईये. आप लोगों को जो कुछ बोलना है प्रश्‍नकाल के खत्‍म होने के बाद बोलिये. तिवारी जी यह बात ठीक नहीं है. आप बैठ जाईये.

(व्‍यवधान)

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया :- अध्‍यक्ष महोदय, यह बात ठीक नहीं है. तिवारी जी ने दो मिनट खराब कर दिये हैं. (व्‍यवधान)

डॉ गोविन्‍द सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्रीमती शशि कर्णावत जी ने इच्‍छा मृत्‍यु मांगी है. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय :- आप लोग बैठ जाईये. क्‍या आप लोग एक घण्‍टा चुप नहीं बैठ सकते हैं . आप लोग प्रश्‍नकाल का महत्‍व समझते हैं या नहीं ? इस तरह से विधानसभा का का समय बर्बाद कर रहे हैं,. आप लोग रोज प्रश्‍नकाल में खड़े हो जाते हैं. दूसरे सदस्‍यों के भी प्रश्‍न हैं उनका क्‍या होगा. आप लोग बैठ जाईये. नेता जी बोल रहे हैं. (व्‍यवधान) तिवारी जी और सुरेन्‍द्र सिंह जी आप लोग बैठ जाईये. श्री शैलेन्‍द्र पटेल आप अपना प्रश्‍न करिये.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ नरोत्‍तम मिश्र):- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं कि कल आपने आसंदी से व्‍यवस्‍था दी थी कि प्रश्‍नकाल को बाधित करने के लिये आप एक बैठक बुलाने वाले हैं. यह विषय जो सम्‍मानित सदस्‍य उठा रहे हैं, क्‍या यह शून्‍यकाल में नहीं उठ सकता है ?

अध्‍यक्ष महोदय :- व्‍यवस्‍थाएं समझदार लोग समझते हैं.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है कि समझदार लोग समझते हैं, लेकिन अध्‍यक्ष महोदय कुछ लोग ऐसे हैं, उनको समझाया जाना चाहिये. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय :- अब मैं क्‍या करूं, उनको समझ में नहीं आता है तो मैं उसका क्‍या करूं. मैं कह-कह कर परेशान हूं कि प्रश्‍नकाल होने दीजिये. आप लोग शून्‍यकाल में मामले को उठाईये. (व्‍यवधान) आप लोग बैठ जाईये.(व्‍यवधान) आप डिस्‍टर्ब मत करिये. श्री शैलेन्‍द्र पटेल आप अपना प्रश्‍न करिये. आप बैठ जाईये बिल्‍कुल नहीं सुनेंगे. आपको जो बोलना है, प्रश्‍नकाल के बाद बोलिये.

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

 

सीहोर जिले में संचालित विश्‍वविद्यालय

1. ( क्र. 3363 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सीहोर जिले में कोई सत्‍यसाईं विश्‍वविद्यालय संचालित किया जा रहा है? यदि हाँ, तो विश्‍वविद्यालय संचालन समिति व संचालक आदि का ब्‍यौरा दें। उक्‍त विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना कब व किन नियमों के तहत की गई है? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार सत्‍यसाईं विश्‍वविद्यालय द्वारा प्रदेश भर में कितने कॉलेज संचालित किए जा रहे हैं? क्‍या उक्‍त विश्‍वविद्यालय को मेडिकल कॉलेज या विद्यालय संचालन की पात्रता है, यदि हाँ, तो किन नियमों के तहत? (ग) प्रश्‍नांश (क) अनुसार उक्‍त विश्‍वविद्यालय में पढ़ाए जा रहे कोर्स की फीस किन मापदण्‍डों पर नियत की गई है? क्‍या विश्‍वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों से प्रतिवर्ष जनभागीदारी अशासकीय शुल्‍क एवं विश्‍वविद्यालय शुल्‍क वसूला जा रहा है? यदि हाँ, तो कक्षावार ब्‍यौरा दें (घ) क्‍या उक्‍त विश्‍वविद्यालय द्वारा सीहोर स्थित कैंपस में एक से अधिक कॉलेज यथा बी.एड., नर्सिंग, इंजीनियरिंग आदि‍ संचालित किए जा रहे हैं? यदि हाँ, तो क्‍या यह नियमानुसार सही है? यदि नहीं, तो शासन ने अब तक क्‍या कार्यवाही की है।

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री जयभान सिंह पवैया ) : (क) जी हाँ। विश्वविद्यालय संचालन समिति व संचालक की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र-एक अनुसार है। विश्वविद्यालय की स्थापना दिनांक 19.09.2013 को म.प्र. निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम, 2007 के प्रावधान के तहत की गई है। (ख) विश्वविद्यालय द्वारा विश्वविद्यालय के परिसर में स्थापित संगठक इकाइयों के अतिरिक्त परिसर के बाहर अन्यत्र कोई भी कॉलेज संचालित नहीं है। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र-दो अनुसार है। वर्तमान में विश्वविद्यालय को मेडिकल कॉलेज संचालन की पात्रता नहीं है। (ग) विश्वविद्यालय में पढ़ाये जा रहे कोर्स की फीस शिक्षा के मानक स्तरों के आधार पर शिक्षा की लागत के आंकलन की समीक्षा कर म.प्र. निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा शुल्क नियत किया जाता है। जी नहीं। विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों से जनभागीदारी अशासकीय शुल्क या विश्वविद्यालय शुल्क वसूल नहीं किया जा रहा है। (घ) जी हाँ। विश्वविद्यालय परिसर सीहोर में म.प्र. निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा घोषित संगठक इकाई जिसमें बी.एड., बी.पी.एड., इंजीनियरिंग, फार्मेसी, मैनेजमेंट, पैरामेडिकल कॉलेज संचालित है। सभी संगठक इकाइयों में चलाये जा रहे पाठ्यक्रमों का संबंधित नियामक निकायों से अनुमोदन प्राप्त है, जो नियमानुसार है। प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री शैलेन्द्र पटेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न एक गंभीर समस्या की ओर था. मेरे जिले में संचालित एक यूनिवर्सिटी के बारे में प्रश्न किया था उसका उत्तर माननीय उच्च शिक्षा मंत्री जी ने दिया है और जो प्रश्न उद्भूत होता है उसको सीधा मंत्री जी से पूछता हूं कि प्रश्न (ग) के परिप्रेक्ष्य में जो उत्तर दिया गया है वह यह है कि विश्वविद्यालय में पढ़ाये जा रहे कोर्स की फीस शिक्षा के मानक स्तरों के आधार पर, शिक्षा की लागत के आंकलन की समीक्षा कर मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा फीस निर्धारित की जाती है. मेरा प्रश्न यह है कि यह नियामक आयोग है क्या हम लोगों को इसकी जानकारी नहीं है, इसके लोग कौन हैं और यह करते क्या हैं ? मैं समझता हूं कि सदन में बैठे विधायकगण को इसकी जानकारी होगी. कृपा करके बताइये कि विनियामक आयोग करता क्या है, वह कैसे फीस निर्धारित करता है. क्योंकि देखा यह गया है कि प्रायवेट यूनिवर्सिटीज में सरकार की यूनिवर्सिटीज के मुकाबले बहुत ज्यादा फीस वसूली जाती है.

श्री जयभान सिंह पवैया--माननीय अध्यक्ष महोदय, विनियामक आयोग वैधानिक तरीके से गठित एक बॉडी है इसको आप भी जानते हैं तथा अन्य सदस्य भी जानते हैं. निजी विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण रखना और उसमें फीस की समीक्षा करने का विषय भी शामिल है. आप जिस विश्वविद्यालय का उल्लेख कर रहे हैं उस विश्वविद्यालय में जो फीस प्रस्तावित की थी मैं आपको उदाहरण के स्वरूप दो फीस के बारे में बता देता हूं. इन्होंने बी.ई.की 97 हजार रूपये फीस निर्धारित की. विनियामक आयोग ने समीक्षा के बाद उसको 60 हजार रूपये कर दिया. एमटेक में 1 लाख 30 हजार फीस प्रस्तावित की. विनियामक आयोग ने उसको 60 हजार कर दिया. समय समय पर विश्वविद्यालय के द्वारा जैसे ही शुल्क प्रस्तावित होता है वैसे विनियामक आयोग द्वारा युक्तिसंगत फीस के बारे में निर्देश दिये जाते हैं और इसी विश्वविद्यालय के बारे में आपको बता दूं मैं इतिहास में जाना नहीं चाह रहा हूं. लेकिन इसको जो छूट दी थी उसमें 25 लाख रूपये की पेनाल्टी लगाई, उस समय की सरकार ने उसको 5 लाख रूपये कर दिया. हमारी सरकार आने के बाद उसको नियंत्रण में लिया ई.ओ.डब्ल्यू में सारा मामला चल रहा है और 2015 में 1 प्रतिशत शुल्क जमा न करने की स्थिति में 51 हजार रूपये की पेनाल्टी इसी सरकार ने की है इसलिये आप कोई स्पेसिफिक मामला फीस के मामले में मुझे अगर बता दें तो सरकार तत्काल विनियामक आयोग को निर्देश देगी और निर्देश ही नहीं देगी मैं इसकी जांच कराने के लिये भी तैयार हूं.

श्री शैलेन्द्र पटेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, एक प्रश्न और है इसका जिस तरीके से शासकीय यूनिवर्सिटीज में हमारी विधान सभा के सदस्य नामांकित होते हैं, प्रायवेट यूनिवर्सिटीज में तो होते ही नहीं हैं. क्या यह सदन आपके माध्यम से इस ओर विचार करेगा कि 28 यूनिवर्सिटीज हो गई हैं इसमें कहीं न कहीं विधान परिषद के लोग भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. क्या ऐसे कोई इस दिशा में कानून अथवा कोई प्रयास होगा कि मध्यप्रदेश विधान सभा के सदस्य भी इन प्रायवेट यूनिवर्सिटीज में नामांकित होकर बाकी कार्यवाही को समझ सकेंगे और आम जनता को उसका फायदा दिला पायेंगे ?

श्री जयभान सिंह पवैया- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो प्रश्‍न किया है, मुझे ऐसा लगता है कि जो संदर्भित प्रश्‍न है उससे यह प्रश्‍न उद्भभूत नहीं होता है । इसके बारे में मैं यहां पर निर्णय नहीं ले सकता हूं ।

श्री शैलेन्‍द्र पटेल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कह रहा हूं कि क्‍या मंत्री जी विचार करेंगे क्‍योंकि मैंने पढ़ा है, किस तरह से नियम बने हैं उसमें कहीं भी उल्‍लेख नहीं है जब सरकारी विश्‍वविद्यालय में यह उल्‍लेख है, वहां पर सदस्‍य नामित होते हैं तो अशासकीय विश्‍वविद्यालय में क्‍यों नहीं होगे ?

श्री जयभान सिंह पवैया- अध्‍यक्ष महोदय, जब माननीय सदस्‍य कोई ऐसा सुझाव रखते हैं तो मुझे यह कहने में कोई आपत्ति नहीं है कि जो सुझाव है उसपर परीक्षण करेंगे, विचार करेंगे लेकिन निर्णय नहीं लिया जा सकता ।

श्री शैलेन्‍द्र पटेल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें आप व्‍यवस्‍था दे दें ।

अध्‍यक्ष महोदय- मंत्री जी ने विचार करने के लिए बोल दिया है, इसलिए व्‍यवस्‍था की कोई आवश्‍यकता नहीं है । ( श्री बाला बच्‍चन की ओर इशार करते हुए)

क्‍या आप कुछ पूछेंगे ?

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष(श्री बाला बच्‍चन) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं जो पूछना चाहता वह उन्‍होंने पूछ लिया इसलिए अब आवश्‍यकता नहीं है ।

उमरियापान में महाविद्यालय की स्‍थापना

2. ( *क्र. 2955 ) श्री मोती कश्यप : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला कटनी की तहसील ढीमरखेड़ा का क्षेत्रफल कितने कि.मी. का है और उसके किन-किन ग्रामों में बालक व कन्‍या उ.मा.वि. हैं और उनमें कक्षा 12 वीं की छात्र संख्‍या कितनी है और तहसील क्षेत्र में कितनी हैं? (ख) क्‍या प्रश्‍नकर्ता ने अपने पत्र दिनांक 09.02.2009, 07.02.2011, 27.03.2011, 07.05.2015, 24.12.2015 द्वारा मा. मुख्‍यमंत्री जी एवं मा. विभागीय मंत्री को उमरियापान में महाविद्यालय की स्‍थापना हेतु लेख किया है? (ग) प्रश्‍नांश (क) से (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में उमरियापान में कब तक महाविद्यालय खोल दिया जावेगा?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री जयभान सिंह पवैया ) : (क) जानकारी ​संलग्‍न परिशि​ष्ट अनुसार(ख) जी हाँ। (ग) प्रस्ताव तैयार कर स्थाई परियोजना परीक्षण समिति के विचारार्थ प्रस्तुति हेतु प्रक्रियाधीन है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''दो''

श्री मोती कश्‍यप- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्‍न किया था कि ढीमरखेड़ा तहसील में कितने विद्यालय हैं, बारहवीं के कितने छात्र हैं ? उत्‍तर में आया है कि 11 बालक विद्यालय हैं, 2 कन्‍या विद्यालय हैं, 13 विद्यालय हैं । बारहवीं के छात्रों की कुल संख्‍या 1364 है । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 765.75 वर्ग किलोमीटर का विकासण्‍ड क्षेत्र है और इसमें उमरियापान के साथ पचपेड़ी के 5 विद्यालय हैं, जिसमें 349 छात्र हैं । ढीमरखेड़ा मुरवाड़ी, पहरूआ पास पास के विद्यालय हैं, उसमें 626 छात्र हैं, सिलोड़ी दसरमन के 3 विद्यालय हैं उसमें 389 छात्र हैं. 13 हायर सकेण्‍ड्री होने के बावजूद भी वहां पर एक भी महाविद्यालय नहीं है, 1364 विद्यार्थी हैं । मैं प्रश्‍न पर आता हूं, लेकिन इसके साथ दो शब्‍द यह कहना चाहूंगा कि महाविद्यालय न होने के कारण जो संपन्‍न वर्ग के लोग हैं, वह तो जबलपुर, कटनी में शिक्षा अर्जित कर लेते हैं, लेकिन जो गरीब हैं, अनुसूचित जाति, जनजाति के बच्‍चे हैं, यह विधानसभा क्षेत्र आरक्षित विधानसभा है, उनके बच्‍चों की शिक्षा आगे नहीं बढ़ पाती है, उनकी शिक्षा बंद हो जाती है, उनका भविष्‍य उज्‍जवल हो इस दिशा में मैं प्रश्‍न करना चाहता हूं कि जैसा कि प्रश्‍नांश ग का उत्‍तर है कि उमरियापान का प्रस्‍ताव स्‍थाई परियोजना परीक्षण समिति के विचारार्थ प्रस्‍तुत करने की प्रक्रियाधीन है तो क्‍या अतिशीघ्र निर्णय कर चालू वर्ष में उमरियापान में महाविद्यालय चालू कर लिया जाएगा ?

श्री जयभान सिंह पवैया- मान्‍यवर अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍य की भावनाओं से सहमत हूं । वहां महाविद्यालय की आवश्‍यकता है । आपने शासन को पत्र भी दिए हैं और माननीय मुख्‍यमंत्री जी की भी मंशा रही है कि इतने बड़े केचमेंट एरिया में इतने विद्यार्थी हैं तो वहां पर महाविद्यालय खोलना चाहिए । इसके लिए जो परीक्षण समिति होती है, उसकी बैठक हमने 30 जुलाई को ही बुलाने का निर्णय लिया है और माननीय मुख्‍यमंत्री जी की इच्‍छा के मुताबिक और आपकी मांग के अनुसार हम यह प्रयास करेंगे कि इसी सत्र में महाविद्यालय का शुरू कर दिया जाए ।

श्री मोती कश्‍यप- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने चर्चा में बतलाया था कि ढीमरखेड़ा, मुरवारी, पहरूआ जो पास पास के गांव हैं और उसमें 626 छात्र हैं, ऐसे ही सिलोड़ी में दसरमन सहित 3 विद्यालय हैं और कछारगांव एक विद्यालय और खुला है इसमें 389 छात्र हैं । मेरी हार्दिक इच्‍छा है कि ढीमरखेड़ा सिलोड़ी जिनकी छात्र संख्‍या 626 और 389 हैं, उनको भी परीक्षण समिति में सम्मिलित कर वहां पर भी महाविद्यालय की स्‍थापना करवा देंगे ?

श्री जयभान सिंह पवैया- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी हमने आपकी मांग का सम्‍मान करते हुए बहुत प्रयास पूर्वक जल्‍दी महाविद्यालय खोलने की घोषणा की है । आपने अगला विचार रखा है वह प्रक्रिया में लिया जाएगा, विचारणीय होगा बस इतना ही अभी कहने की स्थिति में हूं ।

अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण

3. (*क्र. 3199 ) श्री अनिल फिरोजिया : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) उच्‍च शिक्षा विभाग के महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि विद्वानों को कितने वेतन/मानदेय पर नियुक्‍त किया गया है? (ख) म.प्र. शासन द्वारा कुशल/अकुशल श्रमिकों को किस दर पर वेतन भुगतान किया जाता है? (ग) क्‍या विभाग द्वारा नियुक्‍त अतिथि विद्वान योग्‍यता में कुशल श्रमिक से निम्‍न श्रेणी के हैं? यदि नहीं, तो इतने अल्‍प मानदेय पर नियुक्ति का क्‍या कारण है? (घ) क्‍या विभाग उच्‍च शिक्षा का स्‍तर सुधारने हेतु अतिथि विद्वानों को योग्‍यतानुसार मानदेय दे रहा है? (ड.) वर्षों से अतिथि विद्वान का कार्य संपादित कर रहे सहायक प्राध्‍यापकों को कब तक संविदा नियुक्ति/नियमित किया जावेगा?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री जयभान सिंह पवैया ) : (क) उच्च शिक्षा विभाग के आदेश क्रमांक एफ 1-13/2016/38-1 दिनांक 21.04.16 द्वारा नेट या 2009 यू.जी.सी. रेग्यूलेशन के अनुसार पी.एच.डी. योग्यता धारित अतिथि विद्वानों को मानदेय रूपये 275/- प्रति कालखण्ड, अधिकतम रूपये 825/- प्रति कार्यदिवस तथा उल्लेखित योग्यता नहीं रखने वाले शेष अतिथि विद्वानों को रू. 200/- प्रतिकालखण्ड व अधिकतम रू. 600/- प्रति कार्यदिवस की दर से भुगतान किया जा रहा है। (ख) श्रमायुक्त कार्यालय, म.प्र.शासन, इन्दौर के आदेश क्रमांक 6/11/अन्वेषण/पाँच/2015/12301-500 इन्दौर दिनांक 01.04.16 में स्पष्टीकरण के बिंदु-3 में लेख है कि राज्य शासन द्वारा दिनांक 15.05.15 को जारी एवं म.प्र. राजपत्र दिनांक 22.05.15 में प्रकाशित अकुशल श्रमिकों हेतु मजदूरी की पुनरीक्षित न्यनतम दरें 01.06.15 से प्रभावशील की गई हैं। उक्त परिपत्र की अनुसूची-क में श्रमायुक्त इन्दौर के अनुसार कुशल श्रमिकों को अधिकतम रूपये 9,085/- प्रतिमाह एवं अकुशल श्रमिकों को समान रूप से रूपये 6,850/- प्रतिमाह वेतन भुगतान किया जाता है। (ग) जी नहीं। उत्तरांश () के संदर्भ में प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (घ) जी हाँ। (ड.) अतिथि विद्वान सहायक प्राध्यापक नहीं है तथा उन्हें लोक सेवक नहीं माना गया है। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री अनिल फिरोजिया माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से प्रश्‍न किया था कि अतिथि विद्वान का मानदेय क्‍या है तो उसमें उत्‍तर आया है कि अतिथि विद्वान का मानदेय 275 रू. प्रति पीरियड (कालखण्‍ड) है और 825 रू. प्रति दिवस है, लेकिन जो उत्‍तर आया है उससे मैं संतुष्‍ट नहीं हूँ. अध्‍यक्ष महोदय, एक महीने में 4 संडे होते हैं, 4 दिन छुट्टी होती है और तीज-त्‍यौहार आने के कारण अतिथि विद्वान को मात्र 20 से 22 दिन काम करना पड़ता है और उनको 3 पीरियड (कालखण्‍ड) नहीं मिलते हैं, उनको 1 या 2 पीरियड मिलते हैं. मैंने यह पूछा था कि कुशल श्रमिक का वेतन कितना है और अतिथि विद्वान का वेतन कितना है ? तो मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह मांग करना चाहता हूँ कि आपने जो उत्‍तर दिया है कि अतिथि विद्वानों को 825 रू. प्रति दिवस मिलते हैं, लेकिन ये 20 या 22 दिन ही पढ़ा पाते हैं और इनका वेतन 6,000/- रू. या 7,000/- रू. के लगभग बनता है. माननीय मंत्री जी, क्‍या आप इनका मानदेय बढ़ायेंगे ? क्‍योंकि 5,000/- रू. या 7,000/- रू. में कोई भी अतिथि विद्वान नहीं पढ़ा सकता है और अपना परिवार नहीं पाल सकता है.

श्री जयभान सिंह पवैया माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक तो मैं यह निवेदन कर दूँ कि अतिथि विद्वानों के आमंत्रण की जो शुरूआत हुई थी. उसके पीछे का कन्‍सेप्‍ट यह था कि सरकार ऐसे योग्‍य शिक्षकों को महाविद्यालयों में आमंत्रित करे, जो बेरोजगार तो हैं, लेकिन उनके पढ़ाने का एवं शिक्षण का अनुभव भी विद्यार्थियों को प्राप्‍त हो और इसलिए उनके आवागमन इत्‍यादि के खर्चे को ध्‍यान में रखकर मानदेय की व्‍यवस्‍था की थी, यह वेतन नहीं है. जैसा कि हम उल्‍लेख कर रहे हैं और इसमें समय-समय पर मानदेय की दरों का पुनरीक्षण किया जाता रहा है. जैसे दिनांक 22 फरवरी, 2012 तक तो 155 रूपया प्रति पीरियड था और उसमें 4 कालखण्‍डों का उल्‍लेख होता था, दिनांक 5 अगस्‍त, 2014 में इसको बढ़ाकर 200 रू. प्रति कालखण्‍ड किया गया और दिनांक 10 मई, 2016 में यू.जी.सी. द्वारा परिवर्तित अर्हता के नियमों के अनुसार अब 275 रू. प्रति पीरियड कर दिया गया है और इसके मान से 875 रू. प्रति कार्यदिवस अधिकतम निर्धारण है. यह आपने ठीक कहा है कि जो औसत कार्य दिवस बनते हैं, वे 22 कार्य दिवस बनते हैं और 22 औसत कार्य दिवस के अनुसार 18,150 रू. महीने एक अतिथि विद्वान को मिलता है, 6,000 रू. या 7,000 रू. नहीं मिलता है. आपने श्रमिकों का उल्‍लेख किया है तो कुशल श्रमिक को 9,085 रू. एवं अकुशल श्रमिक को 6,850 रू. की राशि बनती है, लेकिन यह तुलना करना उचित नहीं होगा. हम अतिथि विद्वान एवं श्रमिक की तुलना नहीं कर रहे हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा बिन्‍दु यह है कि हमें इसके लिए यू.जी.सी. से कोई राशि उपलब्‍ध नहीं होती है. यह सरकार के संसाधनों से ही होता है, लेकिन जहां तक यू.जी.सी. ने अतिथि विद्वानों के लिए मार्गदर्शी सिद्धान्‍त तय किये हैं तो उसमें कहा गया है कि फुल टाईमर कान्‍ट्रेक्‍चुअल टीचर जो अतिथि विद्वान हैं- उनकी चयन प्रक्रिया नियमित प्राध्‍यापकों के अनुसार उसी अर्हता से हो, यानि नेट हो, पी.एच.डी. 2009 के बाद जो प्रावधान था और इनका चयन लोक सेवा आयोग की तरह ही पूरी प्रक्रिया से हो तब उन्‍होंने 25,000 रू. देने की एक गाइडलाईन दी है, लेकिन जो अतिथि विद्वान बुलाये जाते हैं. एप्‍लीकेशन के आधार पर मेरिट का मानदण्‍ड मानते हुए इनको काउंसलिंग के द्वारा आमंत्रित किया जाता है लेकिन मैं आपकी भावनाओं से सहमत हूं कि वह परिश्रम करते हैं, पढ़े लिखे हैं और इसलिए इनको पी.एस.सी. में वेटेज और क्‍या दिया जा सकता है इसके बारे में सरकार गम्‍भीर है अभी तक चार अंक का वेटेज देने का उल्‍लेख है. हम यह विचार कर रहे हैं कि उसको चार परसेंट में बदल दिया जाए मुझे लगता है बड़ी संख्‍या में पी.एस.सी. में ऐसे लोगों को मौका मिलेगा. इसी तरह आयु सीमा 45 साल निश्चित है उसके बारे में भी हम विचार कर रहे हैं कि उनके अनुभव को उन सालों के साथ जोड़ दिया जाए जो दस साल से पढ़ा रहा है उसको दस साल और पढ़ाने की अनुमति दें. इस पर विचार हो रहा है जब निर्णय होगा तो मैं सदन को जरूर सूचित करूंगा.

श्री अनिल फिरोजियामैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी का धन्‍यवाद करता हूं और निवेदन करता हूं कि यू.जी.सी. हमको कोई ग्रांट नहीं देता है मध्‍यप्रदेश शासन मानदेय देने की व्‍यवस्‍था करती है. मुख्‍यमंत्री जी के भाषणों में मैंने सुना है एक बार वह एक उदाहरण दे रहे थे कि वे एक स्‍कूल में गए थे वहां उन्‍होंने मास्‍टर से पूछा कि गंगा कहां से निकली है........

अध्‍यक्ष महोदय आप भाषण कर रहे हैं.

श्री अनिल फिरोजिया मानदेय बढ़ाने की तो कृपा करें.

अध्‍यक्ष महोदय मंत्री जी ने बोल दिया है कि वे उस पर विचार करेंगे.

हिरन नदी के पुल के एप्रोच मार्ग का निर्माण

4. ( *क्र. 2016 ) श्रीमती प्रतिभा सिंह : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि बरगी विधान सभा क्षेत्र के अंतर्गत हिरन नदी पर बने पुल के दोनों ओर एप्रोच मार्ग निर्माण हेतु प्रश्‍नकर्ता द्वारा विभाग को कब-कब लिखा गया? उपरोक्‍त भैरोघाट पुल के दोनों ओर एप्रोच मार्ग का निर्माण कब तक कराया जावेगा?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : प्रश्‍नकर्ता का पत्र दिनांक 19.07.2015 एवं 30.05.2016 को प्राप्‍त हुआ। रूपये 66.72 लाख कार्य का प्राक्‍कलन तैयार किया गया है जो परीक्षणाधीन है। उपलब्‍ध वित्‍तीय संसाधन अनुसार स्‍वीकृति हेतु विचार किया जा सकेगा वर्तमान में समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

 

श्रीमती प्रतिभा सिंह अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी के जवाब से संतुष्‍ट नहीं हूं. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से तीन प्रश्‍न करना चाहती हूं. मेरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत हिरण नदी पर भैरवगढ़ घाट लगभग चार साल से बन चुका है किन्‍तु एप्रोच रोड न होने के कारण से पुल कट जाता है जिससे शासन को क्षति हो रही है एवं पुल का लाभ क्षेत्र के लोगों को नहीं मिल पा रहा है. दूसरा प्रश्‍न एप्रोच रोड बनाने हेतु विभाग द्वारा 66.72 लाख का प्राक्‍कलन बनाया गया है जो कि स्‍वीकृति हेतु दीर्घ समय से लंबित है. तीसरा प्रश्‍न एप्रोच रोड बनाने की स्‍वीकृति से संबंधित है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से चाहती हूं कि इस सदन में ही स्‍वीकृति प्रदान करें एवं एप्रोच रोड कब तक बना दिया जाएगा इसकी समय सीमा भी बता दी जाए.

श्री रामपाल सिंहअध्‍यक्ष महोदय, अभी जो एप्रोच पुल है वहां सड़क तो अभी ठीक है. आवागमन चल रहा है लेकिन माननीय सदस्‍या की जो चिन्‍ता है कि वहां अच्‍छा काम हो वहां का प्राक्‍कलन आ गया है. माननीय सदस्‍या जी के आग्रह को देखते हुए जल्‍द ही इसको स्‍वीकृति देंगे.

श्रीमती प्रतिभा सिंह अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी जो कह रहे हैं कि आवागमन चल रहा है ऐसा नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदयमंत्री जी ने स्‍वीकृति देने का कह दिया है उन्‍होंने विचार करने का नहीं बोला है. विचार का बोलते तो यह बहस का विषय होता.

श्रीमती प्रतिभा सिंह अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी को इसके लिए आपके माध्‍यम से धन्‍यवाद देती हूं.

विधान सभा क्षेत्र गोटेगाँव अंतर्गत स्‍वीकृत राशि

5. ( *क्र. 1357 ) डॉ. कैलाश जाटव : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र गोटेगाँव अंतर्गत वित्‍तीय वर्ष 2013-14, 2014-15, 2015-16 एवं 2016-17 में वन विभाग द्वारा कितनी-कितनी राशि किस-किस योजना में स्‍वीकृत की गई? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार स्‍वीकृत राशि किस क्षेत्र में कितनी उपयोग में लाई गई? (ग) प्रश्‍नांश (ख) अनुसार स्‍वीकृत कार्यों में कितने कार्य पूर्ण हो चुके एवं कितने अपूर्ण हैं? (घ) प्रश्‍नांश (ग) अनुसार अपूर्ण कार्य होने का स्‍पष्‍ट कारण एवं कार्य पूर्ण न हो पाने के कारण संबंधित अधिकारियों पर क्‍या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो क्‍यों?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ख) एवं (ग) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (घ) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। इस वित्‍तीय वर्ष 2016-17 के कार्य प्रचलित। अत: किसी अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थि‍त नहीं होता।

श्री कैलाश जाटवअध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के जवाब में जो माननीय मंत्री महोदय ने लिखा है, मैं आपके माध्‍यम से पूछना चाहूंगा उन्‍होने प्रश्‍न में लिखा है कि अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता मैं इसलिए माननीय मंत्री महोदय से आपके माध्‍यम से यह पूछना चाहूंगा कि वर्ष 2013-14, 2014-15, 2015-16 और 2016-17 में मेरी विधानसभा में 7 करोड 98 लाख 79 हजार 668 रुपए के जो कार्य हुए हैं क्‍या माननीय मंत्री महोदय उसकी जांच करा लेंगे?

डॉ. गौरीशंकर शेजवारजो अनियमितताएं हुई हैं वह लिस्‍ट दे दें और आपने जहां दौरा किया है और आपकी जानकारी में आई है. और उतने नाम बता दें, उसकी जांच करवा लेंगे, क्योंकि पूरे कामों की और पुराने वर्षों की जांच लम्बी चलेगी और परिणाम देर से आयेगा. तो केवल जहां कमियां विधायक जी को लग रही हैं या उनके पास शिकायत आई है, वह लिस्ट मुझे दे दें और मैं उसकी जांच आप जिस स्तर से कहेंगे, उससे करवा लूंगा.

डॉ. कैलाश जाटव -- अध्यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा में वर्ष 2016-17 में योग केम्पा के नाम से 2.10 लाख रुपये खर्च किये गये. वहीं पर वृक्षारोपण में 3 करोड़ 72 लाख 9 हजार 426 रुपये खर्च किये गये. मेरी अभी विगत् वर्ष जो चौपाल यात्रा हुई थी, उसमें जो स्थान यहां पर मंत्री जी की तरफ से जवाब में आये हैं, उन स्थानों पर वृक्षारोपण नहीं पाया गया है. जहां पर यह मकान, मरम्मत निर्माण की बात कर रहे हैं, वहां पर भी कार्यों में गुणवत्ता नहीं रखी गई है. उन निर्माण कार्यों से स्टाफ पूरा परेशान है. मैं मंत्री जी से निवेदन करुंगा कि आप पूरे वर्ष की न कराकर सिर्फ 2015-16 और 2016-17 की जांच अगर करायेंगे, तो पूरा स्पष्ट परिदृष्य आपके सामने आ जायेगा कि आपके विभाग में आपके अधिकारियों ने किस तरीके से घपला किया है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार -- अध्यक्ष महोदय, जांच करवा लेंगे.

डॉ. कैलाश जाटव -- मंत्री जी, धन्यवाद.

पंधाना विधानसभा क्षेत्रांतर्गत स्‍टेडियमों का निर्माण

6. ( *क्र. 3434 ) श्रीमती योगिता नवलसिंग बोरकर : क्या खेल और युवा कल्याण मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत कितने इन्‍डोर व आउटडोर स्‍टेडियम स्‍वीकृत हुए हैं? यह कब बनेंगे? (ख) पंधाना नगर पंचायत में बनने वाले इंडोर स्‍टेडियम की क्‍या स्थिति है, वह क्‍यों नहीं बन रहा है?

खेल और युवा कल्याण मंत्री ( श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया ) : (क) पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की परफार्मेंस ग्रान्ट से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 01 आउटडोर ग्रामीण खेल परिसर के निर्माण की योजनान्तर्गत पंधाना विधानसभा क्षेत्र के छैःगाव माखन में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई है। निर्माण कार्य प्रगतिरत् है। (ख) इण्डोर स्टेडियम का निर्माण राजीव गांधी खेल अभियान योजनान्तर्गत किये जाने की पूर्व में योजना थी, परन्तु भारत सरकार ने उक्त योजना को भारत सरकार के पत्र क्र. 1-1/MYAS/SD/2016/1258 दिनांक 29/04/2016 द्वारा स्थगित कर दिया गया हैं। अतः शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता है।

 

श्रीमती योगिता नवलसिंग बोरकर -- अध्यक्ष महोदय, पहले तो मैं मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूंगी कि उन्होंने विधायक कप जैसी प्रतियोगिता प्रारंभ की (मेजों की थपथपाहट) जिससे स्थानीय विधायक का मान बढ़ा है. मैं मंत्री जी से यह चाहूंगी कि ऐसे ही प्रतियोगिता का स्वरुप और बड़ा किया जाये और राशि भी बढ़ाई जाये. मेरा मंत्री जी से एक और निवेदन है कि मेरे दो प्रश्न थे. मैंने प्रश्नांश (क) में यह पूछा था कि मेरी विधान सभा में कितने इन्डोर व आउटडोर स्टेडियम स्वीकृत हुए हैं. मेरे विधान सभा में दो विकास खण्ड हैं, जिसमें दो आउटडोर स्टेडियम स्वीकृत हुए थे. एक छैःगांव माखन में कार्य प्रगति पर है, लेकिन राजस्व विभाग द्वारा पंधाना विकास खण्ड में जमीन आवंटित न करने की वजह से वह स्टेडियम नहीं बन पाया. तो मेरा मंत्री जी से यह निवेदन है कि सिंगोट स्थान तय किया गया है और वह बहुत बड़ा क्षेत्र है. तो मंत्री जी यदि वह स्टेडियम भी बनवाते हैं, तो बहुत कृपा होगी और ग्रामीण क्षेत्र के खिलाड़ियों को प्रतिभा उभारने में ज्यादा सहयोग प्रदान होगा. ऐसा मेरा मंत्री जी से निवेदन है.

श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया -- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्या को बताना चाह रही हूं कि एक तो बड़े गर्व की बात है कि भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार ने मिलकर एक ऐतिहासिक डिसीजन लिया और आज हमारे ग्रामीण विकास मंत्री जी यहां हैं, मैं उनको धन्यवाद देना चाहती हूं कि इनके विभाग के माध्यम से जो पर्याप्त आउटडोर स्टेडियम विधायकों को मिल रहे हैं, वह एक बहुत ही अनूठी पहल है और इसी सदन में मैं उनको धन्यवाद देना चाहती हूं. अध्यक्ष महोदय, दूसरी बात यह है कि इनकी योजना है, इस योजना में न हमारी कोई पहल, न हमारा कोई हस्तक्षेप है और यह योजना सिर्फ पहले ब्लाकों के आधार पर होने वाली थी, पर अब विधानसभा वार होने वाली है और हर विधायक को अपने विधान सभा क्षेत्र में एक आउटडोर स्टेडियम मिलने वाला है या मिल गया है. अब आपके ऊपर है कि कितनी जल्दी आपने चिह्नित की जमीन, कितनी जल्दी आपने सीमांकन करवाया और कितनी जल्दी आपने ग्रामीण विकास के माध्यम से इस स्टेडियम को बनाया और उसकी गुणवत्ता देखी. क्योंकि मुझे लगता है कि जिस तरह से और जिस बड़े पैमाने पर आप लोगों ने मेरे विधायक कप पर रुचि ली, जिसके लिये मुझे आप लोगों का मान और सम्मान बढ़ाना था, उस बड़े पैमाने पर यही आउटडोर स्टेडियम मेरे लिये काम में आयेंगे, जब हम फिर से विधायक कप करेंगे. तो इन्हीं आउटडोर स्टेडियम के माध्यम से यह हम करना चाहते हैं. बहुत-बहुत धन्यवाद.

श्रीमती योगिता नवलसिंग बोरकर -- मंत्री जी, बहुत बहुत धन्यवाद और अध्यक्ष महोदय को भी धन्यवाद.

भोपाल-ब्‍यावरा रोड का निर्माण

7. ( *क्र. 2252 ) श्री जयवर्द्धन सिंह : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भोपाल-ब्‍यावरा रोड का ठेका किस कंपनी को कब दिया गया था, कितनी लागत थी एवं काम कब पूर्ण किया जावेगा? (ख) कंपनी द्वारा समय पर काम पूरा किया गया या नहीं? यदि नहीं, तो कंपनी के विरूद्ध विभाग द्वारा कब-कब, क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? (ग) कंपनी को किस बैंक द्वारा कितना फाइनेन्‍स किया गया एवं विभाग द्वारा ठेकेदार को कितना भुगतान किया गया? कुल कितना भुगतान (विभाग+बैंक) द्वारा ठेकेदार को दिया जा चुका है एवं कितना कार्य मौके पर किया जा चुका है?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) जी नहीं। दिनांक 10.05.2016 को अनुबंध निरस्‍त किया जाकर बैंक गारंटी राजसात कर ली गई। (ग) कन्‍सेशनायर को वित्‍तीय प्रबंधन हेतु संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार धनराशि देने हेतु वित्‍तीय संस्‍थानों द्वारा सहमति दी गई है। कन्‍सेशनायर को एम.पी.आर.डी.सी. द्वारा कोई भुगतान नहीं किया गया है, क्‍योंकि परियोजना में कन्‍सेशनायर द्वारा प्रीमियम देय है। ठेका निरस्‍त होने से पहले कन्‍सेशनायर द्वारा लगभग 20 प्रतिशत कार्य किया गया है।

परिशिष्ट - ''तीन''

श्री जयवर्द्धन सिंह माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भोपाल-व्‍यावरा रोड एनएच-12 का अनुबंध वर्ष 2013 में ट्रांसफर कंपनी को मिला था, लेकिन आश्‍चर्य की बात यह है कि तीन साल में जो काम पूरा होना था, वह पूरा नहीं हो पाया और इस टेण्‍डर को कैंसिल होने में एक साल लगे और 2016 तक ही कैंसिल हो पाया, जिसके कारण जो उस रोड की मरम्‍मत होनी थी वह नहीं हो पायी है. उसमें दो हिस्‍से हैं जो हिस्‍सा भोपाल जिले में आता है उसके मरम्‍मत हो चुकी है, लेकिन जो शेष 70 किलोमीटर का हिस्‍सा है कुरावर से नरसिंहगढ़ से व्‍यावरा तक उसमें गड्ढे हो गए हैं स्‍वीमिंग पुल बन चुके हैं, जहां पर बच्‍चे तैर सकते हैं, पूरा पानी भरा हुआ है और जहां भोपाल से व्‍यावरा एक दिन में सौ बसे जाती थीं, अब सिर्फ दो या तीन बसें जाती हैं. मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि एक तो जो ये ट्रांसफर कंपनी है पहले से वह काम बंद कर दिया था और पूरा पैसा उन्‍होंने कहीं और डायवर्ट कर दिए थे, तो क्‍या इन पर एक क्रिमिनल इन्‍वेस्टिगेशन होगा और दूसरा बिन्‍दु यह है कि जो शेष काम मरम्‍मत का रह गया है और पेंचवर्क को भरने का कुरावद, नरसिंगढ़ और व्‍यावरा तक वह काम कब तक पूर्ण होगा एमपीआरडीसी के माध्‍यम से.

श्री रामपाल सिंह माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वास्‍तव में जो विधायक जी ने प्रश्‍न उठाया है, वास्‍तव में विलंब हुआ है, इसमें कहने में संकोच नहीं है. लेकिन हमने अभी जो कार्यवाही की है, बैंक गारंटी राजसात कर ली गई है 35 करोड़, कंपनी मेसर्स ट्रांसटाइल, हैदराबाद ने काम समय पर नहीं किया.इस सड़क को अभी राष्‍ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के आदेशानुसार स्‍थानांतरित कर दिया. बीस प्रतिशत जैसा माननीय विधायक जी बता रहे हैं, काम किया है, उस तरफ काम नहीं किया है, इसके लिए हम लोग इसमें जल्‍दी काम शुरू हो, भारत सरकार से हम आग्रह करेंगे.

श्री जयवर्द्धन सिंह क्‍या माननीय मंत्री जी इतना हमें आश्‍वस्‍त करा देंगे कि जो कुरावद, नरसिंहगढ़ और व्‍यावरा का पेचवर्क बाकी है, वह कब तक पूरा हो जाएगा,

श्री रामपाल सिंह माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 16 करोड़ रूपए हमने स्‍वीकृत किए थे, पेचवर्क के लिए लेकिन यह राशि भी हमने वहां ट्रांसफर कर दी हैं, वहां आग्रह करके जल्‍दी ही हम प्रयास करेंगे और जल्‍दी इसका काम लगे ऐसी पूरी कोशिश करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय श्री गिरीश भण्‍डारी जी भी उसी क्षेत्र के हैं.

श्री गिरीश भण्‍डारी माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस पूरे रोड में व्‍यावरा से भोपाल का 50 किलोमीटर का हिस्‍सा मेरे विधानसभा क्षेत्र का आता है एक साल पहले उसका अनुबंध खत्‍म हो चुका था.

अध्‍यक्ष महोदय यह बात तो आ गई है, कोई नई बात हो तो बताएं.

श्री गिरीश भण्‍डारी मेरा यह कहना है कि उसमें आज की स्थिति में आवागमन खत्‍म हो चुका है, पूरी बसें बंद हो चुकी है, क्‍या मध्‍यप्रदेश शासन अपने स्‍तर पर तत्‍काल उसको 8-15 दिन के अंदर उसका पेचवर्क कराने का प्रयास करेगा.

अध्‍यक्ष महोदय आपने उत्‍तर दे दिया है पहले.

श्री गिरीश भण्‍डारी उन्‍होंने कहा है कि भारत सरकार को पैसा भेज दिया है वह करेंगे. मेरा यह कहना है कि क्‍या मध्‍यप्रदेश सरकार आवागमन की सुविधा को देखते हुए क्‍या वहां पर उस रोड पर.पेचवर्क की सुविधा करेगी.

श्री रामपाल सिंह माननीय अध्‍यक्ष जी जैसा कि बताया 16 करोड़ हमने स्‍वीकृत किए थे, वहां जो राशि है, उसको आग्रह करके उसका कार्य प्रारंभ करेंगे.

श्री गिरीश भण्‍डारी रास्‍ता पूरा बंद है, मरम्‍मत लगातार बंद है, किसी एक गड्ढे में भी काम नहीं हुआ है, अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण मार्ग है वह.

केवलारी विधानसभा क्षेत्र में पुल निर्माण

8. ( *क्र. 1782 ) श्री रजनीश सिंह : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिवनी जिले के अंतर्गत केवलारी विधानसभा क्षेत्र में निर्माण हेतु कितने बड़े व छोटे पुल स्‍वीकृत हैं एवं कितने निर्माणाधीन हैं? (ख) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत चकरघटा घाट गुवरिया एवं चमरया नाला छपारा में उच्‍चस्‍तरीय पुल निर्माण हेतु विधानसभा प्रश्‍न के माध्‍यम से निरंतर मांग की जा रही है? यदि हाँ, तो इस संबंध में शासन द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं, कारण स्‍पष्‍ट करें? (ग) इसी प्रकार ब्रिटिश शासन काल में निर्मित पलारी कहानी मार्ग के अंतर्गत ग्राम मझगंवा में बैनगंगा नदी पर स्थित पुल जीर्ण-शीर्ण हो गया है जिस पर विगत कुछ माह पहले आवागमन अवरूद्ध हो गया था? क्‍या विभाग के पास उक्‍त स्‍थान पर नवीन उच्‍चस्‍तरीय पुल निर्माण हेतु कोई प्रस्‍ताव विचाराधीन है? यदि हाँ, तो कब तक इसे कार्य रूप में परिणित कर लिया जावेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं? (घ) यदि उक्‍त पुल निर्माण नहीं होने से कोई दुर्घटना होती है तो इसका जवाबदार कौन होगा?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जी हाँ, चकरघटा गुवरिया मार्ग पंचायत मार्ग होने के कारण कोई कार्यवाही नहीं की गई है एवं चमरया नाला पुल निर्माण हेतु दिनांक 16.03.2016 को स्‍थायी वित्‍तीय समिति से अनुमोदित। अत: शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी हाँ। जी हाँ। शेष जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट अनुसार है। (घ) पुल निर्माण की कार्यवाही प्रगति पर है। अत: प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता.

परिशिष्ट - ''चार''

श्री रजनीश सिंह माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने आपके माध्‍यम से माननीय लोक निर्माण मंत्री महोदय से प्रश्‍न पूछा था, इसमें जो जवाब दिया मैं अधिकांश जवाब से तो संतुष्‍ट हूं पर एक जवाब से बहुत पीड़ा है और बहुत ज्‍यादा असंतुष्‍ट हूं. सात पुलों के बारे में माननीय मंत्री महोदय ने जानकारी दी, जिसमें उन्‍होंने कहा सात पुल की जो स्थिति है, उसमें सिर्फ एक ही पुल बनकर तैयार हुआ है, बाकी के जो छह पुल है उसमें न गति है, न प्रगति है, न चाल है, न कुछ है, न कुछ है.

अध्‍यक्ष महोदय आप तो प्रश्‍न पूछिए.

श्री रजनीश सिंह मैं उदाहरण देना चाहूंगा, पांच वर्ष हो गए माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मल्‍हारा के पुल में, प्रश्‍न से ही उदभूत है, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहूंगा कि पांच साल में दो बार प्रश्‍न लगाया. उसका उत्‍तर जो मिला कि पांच वर्ष में भी मल्‍हारा का पुल बनकर तैयार नहीं हुआ है. मेरे छपारा ब्‍लाक का तीन साल हो गए वह पुल तैयार नहीं हुआ है, उसके बाद एक मैंने पुल की बात की.

अध्यक्ष महोदय-- आप सीधा सीधा पूछें कि पुल कब तक बनायेंगे.

श्री रजनीश सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने जानकारी दी है कि निविदा की कार्य़वाही प्रगति पर है.

अध्यक्ष महोदय-- हां तो उस पर प्रश्न पूछ लीजिये.बजाए भाषण देने के.

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, भाई रजनीश सिंह जी ने जो प्रश्न पूछा है उसमें एक प्रश्न में तो कहा है कि अंग्रेजों के जमाने से है, प्रश्न में ही पूछ लिया. उसमें बीच में कांग्रेस शासनकाल भी रहा वह भी आप पूछ लेते, लेकिन अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को जानकारी देना चाहूंगा, उनके लिये खुशखबरी भी है कि आपके यहां पर जो 7 पुलों का काम है उसमें से एक पुल का काम तो पूर्ण हो गया है...

डॉ.गौरीशंकर शेजवार-- अध्यक्ष महोदय, अंग्रेजों के जमाने की तुलना कांग्रेस शासन से मतलब क्या, मंत्री जी और रजनीश सिंह जी ने ऐसे प्रश्न रखे हैं तो मैं जानना चाहता हूं कि अंग्रेजों के शासनकाल का क्या है...

अध्यक्ष महोदय-- कुछ नहीं पता नहीं वह तो कहने वाले जाने.(श्री रजनीश सिंह के खडे होने पर) आप उत्तर तो लीजिये, आपका काम हो रहा है.

श्री रजनीश सिंह --मैं एक मिनट में उन्हें धन्यवाद तो दे दूं .

अध्यक्ष महोदय-- आपका काम हो रहा है फिर उसके बाद उन्हें धन्यवाद दे देना.

डॉ. गोविंद सिंह -- अध्यक्ष महोदय, हमारा आपसे अनुरोध है कि प्रश्नोत्तरी में जो आप 25 प्रश्न रखते हैं उन्हें कम करके 5 कर दें, क्योंकि हम देख रहे हैं कि 5 प्रश्नों से ज्यादा बढ़ नहीं पाते हैं.

अध्यक्ष महोदय-- ऐसा नहीं है, अभी 8वां चल रहा है.

डॉ.गोविंद सिंह -- अध्यक्ष महोदय, प्रश्नकाल अगर इतनी धीमी गति से चलेगा तो 25 प्रश्न का कोई औचित्य नहीं है.

अध्यक्ष महोदय-- 5-7 मिनिट शुरू में खराब कर दिये.

डॉ.गोविंद सिंह -- अध्यक्ष महोदय, रोज ऐसा ही हो रहा है. इस सत्र में आज तक 10 से ज्यादा नहीं हो पाये हैं.

अध्यक्ष महोदय- ऐसा नहीं है, जिस दिन व्यवधान नहीं हुआ है उस दिन 21 प्रश्न भी हुये हैं. इसी सत्र में हुये हैं.

डॉ.गोविंद सिंह-- मंत्री जी भी आधे आधे घंटा जबाव देते हैं, प्रश्न का उत्तर नहीं देते हुये भाषण देते हैं.

अध्यक्ष महोदय-- कृपया बैठ जायें अभी तो उत्तर आने दें. आपका प्रश्न 20वे नंबर पर है, वह आयेगा (हंसी)

डॉ.गोविंद सिंह --आयेगा . (हंसी) तो धन्यवाद.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी कृपया संक्षिप्त में उत्तर दें.

श्री रामपाल सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा माननीय रजनीश जी से कहना है कि जो काम अभी तक नहीं हुये हैं वह काम हम लोग कर रहे हैं और आपको जानकारी देना चाहते हैं कि जहां तक पुलों का मामला है तो एक कार्य तो आपका पूर्ण हो गया है. चकरपाटस-सेमरिया मार्ग यह पंचायत मार्ग है इसमें हम पुल नहीं बना पायेंगे, आपने इसकी मांग की है. चमरया नाला पुल पर हम लोगों ने 121 लाख स्वीकृत कर दिये है यह आपके क्षेत्र की जनता के लिये और आपके लिये अच्छा समाचार है. दूसरा पलारी कहानी पुल की स्वीकृति 87 करोड़ 62 लाख की थी इसकी स्वीकृति हम लोग अभी कर रहे हैं इससे भी आपके क्षेत्र की जनता को काफी लाभ मिलेगा. इसमें पुल के लिये 5 करोड़ 68 लाख का वैनगंगा पुल भी शामिल है, यह भी आपके क्षेत्र और आपके लिये अच्छी खबर है. अध्यक्ष महोदय मैं कह सकता हूं कि 15 गांव के लगभग 21 हजार लोगों को इस सड़क से लाभ मिलेगा. दूसरी बात जो माननीय सदस्य ने कही है उसका हम लोग परीक्षण करा कर एक एक चीज से अवगत करायेंगे. माननीय विधायक जी यह काम करने वाली सरकार है और आपकी भावनाओं के हिसाब से पूरे प्रदेश की सड़कों का हम लोग विकास कर रहे हैं.

श्री रजनीश सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी की बड़ी सहृदया, बड़ा स्नेह और प्यार है . मैं कल इनके चेंबर में जाकर के अपने क्षेत्र की जनता के साथ में आभार भी व्यक्त कर आया हूं. मुख्यमंत्री जी का भी आभार व्यक्त कर लिया पर मैंने पहले ही कहा है कि मैं अधिकांश उत्तर से संतुष्ट हूं पर एक में मुझे पीड़ा है जिसका माननीय मंत्री जी ने उल्लेख किया है कि क्या ग्राम पंचायत के अंतर्गत अगर थावर नदी पर वह पुल आयेगा तो क्या जीवन भर वहां की जनता की सुविधा के लिये वह पुल नहीं बनेगा ? जबकि वह पुल मंडला जिला और केवलारी को जोड़ता है और आप जानते हैं कि 18 अगस्त को रक्षाबंधन का त्योहार है इतिहास गवाह है कि आला-उदल ने अपनी बहनों के साथ में रक्षाबंधन मनाने के लिये ..

अध्यक्ष महोदय-अब नहीं. भाषण नहीं. श्री गोवर्धन उपाध्याय.....

श्री रजनीश सिंह --अध्यक्ष महोदय वह पुल बहुत जरूरी है.

अध्यक्ष महोदय- आप बैठ जाईये, आप अच्छे विधायक हैं.

श्री रजनीश सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी का बहुत बहुत धन्यवाद.

प्रश्न संख्या 9 (अनुपस्थित)

 

फर्जी निर्वाचन की शिकायत की जाँच

10. ( *क्र. 2453 ) श्री सुरेन्‍द्रनाथ सिंह : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) असिस्टेंट रजिस्‍ट्रार, फर्म्‍स एवं संस्‍थाएं भोपाल नर्मदापुरम संभाग के जावक क्रमांक 3485, दिनांक 03 नवंबर, 2015 द्वारा किस संस्‍था की कार्यकारिणी मान्‍य की गई? (ख) असिस्टेंट रजिस्‍ट्रार को वर्ष 2016 में उक्‍त कार्यकारिणी के निर्वाचन दिनांक 05 जुलाई, 2015 फर्जी होने के संबंध में किस-किस की ओर से शिकायत प्राप्‍त हुई है? (ग) संज्ञान में आये तथ्‍यों अनुसार उक्‍त निर्वाचन प्रक्रिया में कितने व्‍यक्ति उपस्थित रहे? किस शासकीय स्‍थल और स्‍थान पर निर्वाचन हुए? निर्वाचन में उपस्थित व्‍यक्तियों के स्‍पष्‍ट नाम, शासकीय पद एवं उनके कार्यालय की स्‍पष्‍ट और पठनीय सूची उपलब्‍ध करावें? (घ) निर्वाचन में उपस्थित भोपाल के बाहर पदस्‍थ व्‍यक्तियों द्वारा शासकीय मुख्‍यालय छोड़ने की अनुमति संबंधी आवेदनों की प्रति उपलब्‍ध करावें प्रथम दृष्‍टया निर्वाचन फर्जी पाये जाने पर मान्‍यता अब तक निरस्‍त क्‍यों नहीं की गई? कब तक की जायेगी? प्रश्‍नाधीन मामले का जाँच प्रतिवेदन दें

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जावक क्रमांक 3485 दिनांक 03 नवम्‍बर, 2015 द्वारा कार्यकारिणी मान्‍य करने की कार्यवाही नहीं की गई है, अपितु म.प्र. तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ, भोपाल द्वारा प्रस्‍तुत धारा 27 की जानकारी की नकल जारी की गई है। (ख) श्री अरूण द्विवेदी एवं डॉ. सुरेश गर्ग दवारा शिकायत प्रस्‍तुत की गई है। (ग) मध्‍यप्रदेश सोसायटी रजिस्‍ट्रीकरण अधिनियम, 1973 के तहत प्रश्‍नांकित जानकारी का संधारण रजिस्‍ट्रार कार्यालय में अपेक्षित नहीं है। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (घ) उपरोक्‍तानुसार। मध्‍यप्रदेश सोसायटी रजिस्‍ट्रीकरण अधिनियम, 1973 में मान्‍यता दिये जाने संबंधी प्रावधान नहीं है, अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री सुरेन्द्रनाथ सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न में मंत्री जी द्वारा जो उत्तर दिया गया है उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं. उसमें यह बताया गया है कि मध्यप्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ, को मान्यता नहीं दी गई है लेकिन फर्म्स एवं सोसायटी द्वारा जो सूची जारी की गई है उसी के आधार पर सामान्य प्रशासन विभाग ने उसको मान्यता दे दी है. अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मेरी मंत्री जी से मांग है कि 3 लोगों ने वहां पर सूची दी थी लेकिन एक ही को उसकी सूची सोंपी गई है. मेरी मांग है कि रजिस्ट्रार के माध्यम से उसके निष्पक्ष चुनाव कराये जायें क्योंकि यह बहुत बड़ी संस्था है, करोड़ों की संपत्ति इस संस्था के अधीन है इसलिये मेरी मांग है कि रजिस्ट्रार के माध्यम से निष्पक्ष चुनाव कराये जायें.

महिला एवं बाल विकास मंत्री (श्रीमती अर्चना चिटनिस)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय विधायक जी ने जो प्रश्‍न किया था मान्‍यता देने का विषय इस विभाग के अंतर्गत नहीं आता है और जहां तक यह वाला मसला है, ये आलरेडी हाईकोर्ट में प्रक्रियाधीन है. माननीय सदस्‍य का कोई और प्रश्‍न हो तो मैं ....

श्री सुरेन्‍द्र नाथ सिंह-- फर्म्‍स सोसायटी से जो नियम 27 के तहत सूची जारी की गई है उसी को जीएडी ने मान्‍यता दे दी है. मेरा अनुरोध है कि यह तो कम से कम नहीं होना चाहिये.

श्रीमती अर्चना चिटनिस-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो मान्‍यता देने वाला विभाग है, वह दूसरा विभाग है और जो रजिस्‍ट्रेशन करने वाला विभाग है, वह उद्योग विभाग है, अगर कोई अनियमितता हुई है तो उस अनियमितता की जांच कराई जा सकती है और जांच के लिये सोसायटीज रजिस्‍ट्रेशन एक्‍ट 1973 के अंतर्गत धारा 32 (2) के अंतर्गत वह शिकायत दर्ज करें तो जांच नियमानुसार करा ली जायेगी.

अध्‍यक्ष महोदय-- शिकायत दर्ज कराईये तो जांच होगी.

 

हरि‍याली महोत्‍सव के अंतर्गत पौध रोपण

11. ( *क्र. 1925 ) श्री संजय शर्मा : क्या वन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) वर्ष 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक जिला नरसिंहपुर में हरियाली महोत्‍सव के अंतर्गत रोपण कार्यों में कितनी राशि शासन द्वारा आवंटित की गई? (ख) रोपण कार्यों में कितनी राशि व्‍यय की गई? विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी प्रदान करें। (ग) जिले में कितने पौधों का रोपण किन-किन स्‍थानों पर किया गया? विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी प्रदान करें (घ) इन रोपित पौधों की विधानसभा क्षेत्रवार वर्तमान स्थिति क्‍या है?

वन मंत्री ( डॉ. गौरीशंकर शेजवार ) : (क) वर्ष 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक जिला नरसिंहपुर में हरियाली महोत्‍सव के अंतर्गत रोपण कार्य हेतु 36560000/- रूपये राशि शासन द्वारा आवंटित की गई। (ख) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। (ग) एवं (घ) जानकारी संलग्न परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है।

परिशिष्ट - ''पाँच''

श्री संजय शर्मा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी ने मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में बताया कि वर्ष 2014 में 3 करोड़ 65 लाख रूपये का जो पौधारोपण किया गया था, राशि आवंटित जो की थी उसमें 51 लाख 73 हजार का अंतर खर्च में है, आपने जो व्‍यवस्‍था दी चलो ठीक है, बाकी प्रश्‍न (ग) के उत्‍तर में जो जानकारी दी गई है, वह पूरी असत्‍य जानकारी दी गई है. मैंने अपने क्षेत्र के बारे में जानकारी चाही थी कि कहां-कहां पर कितना पौधारोपण किया गया है, तो उसमें नरसिंहपुर विधानसभा के कई स्‍थान चिन्हित करके बता दिये कि तेंदूखेड़ा में इन-इन स्‍थानों में किया गया है, जबकि जानबूझकर गलत जानकारी सदन में दी गई है. वर्ष 2014 में जिन स्‍थानों पर पौधा रोपित किये गये थे, उन स्‍थानों पर पौधा रोपित किये भी नहीं गये हैं. महुआखेड़ा में इन्‍होंने बताया कि 35 हजार पौधा रोपित किये गये हैं, जबकि वर्तमान में वहां पर अगर दिखवाया जाये तो 3500 पौधे भी नहीं निकलेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न पूछ लें आप.

श्री संजय शर्मा-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जानकारी असत्‍य आई वह बता दें.

अध्‍यक्ष महोदय-- जो असत्‍य जानकारी है उसमें क्‍या चाहते हैं आप ?

श्री संजय शर्मा-- पौधारोपण नहीं किया गया है और असत्‍य जानकारी सदन में दी गई है, ऐसे अधिकारियों को अलग करके उनके खिलाफ कार्यवाही कराई जाये और समय सीमा निश्चित की जाये और क्‍या दोषी अधिकारियों को दंडित किया जायेगा और कब तक किया जायेगा ?

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- जांच करवा लेंगे साहब, और अधिकारी को हटाने के बाद जांच करवा लेंगे.

श्री संजय शर्मा-- समय-सीमा तय कर दी जाये और जांच किससे कराई जायेगी ?

अध्‍यक्ष महोदय-- जांच किससे करायेंगे और कितने समय में करायेंगे ?

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- माननीय विधायक जी बता दें किससे करवाना है, करवा लेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- जिससे आप बतायेंगे उससे जांच कराने के लिये तैयार हैं.

श्री संजय शर्मा-- भोपाल के किसी अधिकारी से और विधायकों को उसमें शामिल किया जाये. जहां जांच होगी, क्षेत्रीय विधायक साथ रहें.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- विधायक जी समय नहीं दे पायेंगे इतना और एक-दो जगह आप चले जायें बाकी की अधिकारी जांच कर लेंगे.

श्री संजय शर्मा-- माननीय मंत्री जी सही तो हम बता पायेंगे न, अधिकारी तो वही लिखकर ले आयेंगे जो यहां गलत जानकारी दी है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- नहीं अब किसी न किसी पर तो विश्‍वास करना पड़ेगा.

श्री संजय शर्मा-- नहीं तो हम लोगों पर तो विश्‍वास करो, हम जायेंगे साथ में. ..(हंसी)...

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- आप अपना विधायी काम छोड़कर 100 प्रतिशत नहीं जा सकते.

श्री संजय शर्मा-- प्रश्‍न लगाया है तो क्‍यों नहीं जायेंगे ? ...(व्‍यवधान)....

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- बीच में मत बोलों भाई, मैं धन्‍यवाद मानता हूं रावत जी का इन्‍होंने मुझे बोलने दिया ...(हंसी).... लेकिन इन्‍होंने अधिकृत कर दिया है व्‍यवधान करने के लिये लोगों को.

श्री संजय शर्मा-- माननीय अध्‍यक्ष जी, व्‍यवस्‍था ऐसी कर दी जाये, समय सीमा तय कर दी जाये.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- आप ऐसा करो, पहले तो यह बता दें कि अनियमितता कितनी जगह होगी, अनुमान से.

श्री संजय शर्मा-- मैं वही बता रहा हूं.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- मेरी सुन तो लो पहले ...(हंसी)....

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- मंत्री जी, दिल है कि मानता नहीं, छेड़े बिना काम चलता नहीं. ...(हंसी)....

श्री संजय शर्मा-- माननीय अध्‍यक्ष जी, सभी जगह गलत जानकारी दी गई है, पहली बात तो अधिकारियों को यह नहीं मालूम कि कौन सा विधानसभा क्षेत्र कहां है.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- आपके नरसिंहपुर विधानसभा क्षेत्र की पूरी जानकारी की जांच करवा लेंगे.

श्री संजय शर्मा-- तेंदूखेड़ा विधान सभा की.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- करवा लेंगे, नरसिंहपुर में जहां की आप कहोगे, वहां की करवा लेंगे और तेंदूखेड़ा में आप जहां की कहोगे, वहां की करवा लेंगे और आप कितनी जगह सम्मिलित रहना चाहेंगे वह बता दीजिये, आपको उस समय बुलवा लेंगे. और आप मना कर देंगे तो लिख देंगे कि विधायक जी नहीं आये.

श्री संजय शर्मा-- जहां पौधारोपण नहीं किया गया है और स्‍थान बताये गये हैं, वहां मैं जाऊंगा.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- आप जो जांच चाहते हैं सब करवा लेंगे.

श्री संजय शर्मा - समय-सीमा बता दें.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - अध्यक्ष महोदय, समय-सीमा के बारे में इसीलिये नहीं कह सकता कि अभी यह निश्चित नहीं है कि कितने प्वाइंट हैं और विधायक जी कितने उपलब्ध रहेंगे.

श्री संजय शर्मा - अगर आप अधिकारी को भिजवाएंगे तो हम 24 घंटे में करवा देंगे ज्यादा समय नहीं लगेगा.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - मैं एकदम हां नहीं कह सकता गलत साबित हो गया तो लोग कहेंगे कि गलत है इन्होंने आश्वासन दिया.

श्री संजय शर्मा - माननीय मंत्री जी गलत तो हो ही रहा है. सही कराना है गलत तो हो ही रहा है.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - अच्छा उसको जल्दी से जल्दी करवा लेंगे.

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष(श्री बाला बच्चन) - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी आज आपने सही जवाब दिये और आज आप मन बनाकर आये थे किसी की तरफ से कोई गदर नहीं हुआ. आज आपका रुख और रवैया सदन और विधायकों के पक्ष में था और ऐसा लगा कि जैसी विधायकगण उम्मीद करते हैं वैसा आपका प्रश्न का जवाब था.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - अध्यक्ष महोदय, विपक्ष का नेता जिस मंत्री को प्रमाणपत्र देता है उसका भविष्य अच्छा नहीं रहता.

ग्‍वारीघाट फोर लेन सड़क का निर्माण

12. ( *क्र. 1422 ) श्री अशोक रोहाणी : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कटंगा से ग्‍वा‍रीघाट जबलपुर 6.2 कि.मी. फोरलेन सड़क के निर्माण की मूल योजना क्‍या है? इसकी निर्माणाधीन अवधि व लागत क्‍या है तथा इसका जून 2016 तक कितना कार्य पूर्ण/अपूर्ण व कौन-कौन सा कार्य कब से निर्माणाधीन है? इस पर कुल कितनी राशि व्‍यय हुई है? (ख) क्‍या प्रश्‍नांकित सड़क का निर्माण मूल योजना के तहत निर्धारित चौड़ाई के तहत कराया गया है? यदि नहीं, तो क्‍यों? इसका निर्माण कहाँ से कहाँ तक कितने फीट तक निर्धारित चौड़ाई के तहत नहीं कराये जाने का कारण क्‍या है? सड़क निर्माण में बाधक चि‍न्हित कहाँ-कहाँ के अतिक्रमणों को समयावधि में नहीं हटाया गया है एवं क्‍यों? इसके लिए कौन दोषी है? (ग) प्रश्‍नांकित सड़क के निर्माण कार्य में सड़क के किनारे लगे हुये किस-किस प्रजाति के कितने-कितने वृक्षों को किसके आदेश से किसने कटवाया है तथा इसकी कितनी मात्रा में कटी लकड़ी का संग्रहण कहाँ-कहाँ पर किया गया है? पर्यावरण संरक्षण के लिए कि‍तने क्षेत्रफल में किस-किस प्रजा‍ति के कितने-कितने पौधों का रोपण कार्य कब किसने कराया है? यदि नहीं, तो क्‍यों? (घ) क्‍या प्रश्‍नांकित सड़क के निर्माण कार्य में बाधक पानी की पुरानी पाईप लाईन को शिफ्ट नहीं करने से इसके लीकेज से सड़क में गारंटी पीरियड में ही जगह-जगह छोटे-बड़े गड्ढे हो गये हैं? यदि हाँ, तो क्‍या शासन इस लापरवाही व गुणवत्‍ताविहीन कार्य कराने के लिए दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही करेगा?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) विस्‍तृत जानकारी संलग्न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) विवरण संलग्‍न परिशिष्‍ट के प्रपत्र '' अनुसार है। कोई दोषी नहीं। (ग) प्रस्‍तावित सड़क के निर्माण हेतु सड़क के किनारे लगे हुये आम, पीपल, नीम आदि प्रजाति के कुल 109 वृक्ष की कटाई हेतु नगर पालिका निगम उद्यान विभाग द्वारा पत्र क्रं. 224/दिनांक 24.08.2012 के द्वारा अनुमति प्रदान की गई तदुपरांत 23 वृक्षों की कटाई लोक निर्माण विभाग के अनुबंधित ठेकेदार से कराई जाकर 67.265 घन मीटर मात्रा में लकड़ी का संग्रहण उपसंभागीय स्‍टोर में किया गया। नगर पालिका निगम जबलपुर के ज्ञापन क्रमांक 281/दिनांक 18.09.2012 को माननीय उच्‍च न्‍यायालय में दायर रिट याचिका क्रमांक 436/2009 का उल्‍लेख कर अनुमति निरस्‍त की गई। माननीय उच्‍च न्‍यायालय द्वारा डब्‍लू.पी. 436/09 में पारित आदेश दिनांक 05.02.2013 के तहत कुल 50 वृक्ष काटने की अनुमति प्रदान की गई जिसके तहत समय समय पर कुल 09 वृक्ष नगर निगम जबलपुर द्वारा काटे गये एवं लकड़ी का उपयोग संग्रहण नगर निगम द्वारा किया गया। शेष पेड़ों को नहीं काटा गया है। पौधरोपण नहीं कराया गया। सघन बसाहट होने के कारण। (घ) जी नहीं। पाईप लाईन लीकेज के कारण मामूली पेंच निर्मित हुये थे, जिन्‍हें ठेकेदार द्वारा सुधार दिया गया है, प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

परिशिष्ट - ''छ:''

 

श्री अशोक रोहाणी - माननीय अध्यक्ष महोदय, कटंगी से ग्वारीघाट का जो मैंने प्रश्न पूछा था उसका जो उत्तर आया है यह मार्ग क्या पूर्ण हो गया है और नहीं हुआ तो कब तक होगा ? दूसरे मंत्री जी की सहृदयता के चलते उसी रोड पर मांग करूंगा कि बटौली से तिलहरी तक संकरा मार्ग है और जो कटंगा से ग्वारीघाट सड़क है उस पर यातायात का बहुत दबाव रहता है क्या उस सड़क को चौड़ा करने का काम करेंगे ?

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक की जो चिंता है, कटंगा से ग्वारीघाट सड़क का काम लगभग पूर्णता की ओर ,है अतिक्रमण की वजह से रुका हुआ है. उसमें माननीय विधायक जी का भी हमें सहयोग चाहिये कि वहां से अतिक्रमण हटवा देंगे तो इस रोड पर जो नाली और जो काम शेष रह गये हैं वह काम हम पूरा करेंगे दूसरा जो आपने प्रस्ताव दिया है इस प्रश्न में तो वह प्रस्ताव नहीं है.

श्री अशोक रोहाणी - यह मैंने इसलिये प्रस्ताव रखा क्योंकि आपकी सहृदयता का सदन में उल्लेख हुआ तो यहां आप सहृदयता दिखा दें.

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी जो बात रखेंगे उसको हम गंभीरता से चर्चा करके पूरा कराएंगे.

श्री अशोक रोहाणी - धन्यवाद.

कौशल विकास केन्‍द्र के बर्खास्‍त कर्मियों की सेवा में वापसी

13. ( *क्र. 2465 ) एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार : क्या राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कौशल विकास केन्‍द्रों की स्‍थापना ब्‍लॉक व तहसीलों पर कब से किस आदेश से एवं किन-किन अवधारणाओं को ध्‍यान में रखकर की गई थी? (ख) क्‍या उक्‍त कौशल विकास केन्‍द्रों में कार्यरत अमले को उन्‍हें सुनने का अवसर न देते हुए, एक पक्षीय कार्यवाही कर 16.05.2016 से तुगलकी फरमान जारी कर सेवा से पृथक कर दिया गया है, जिसके कारण उनका परिवार पलायन की स्थिति में आ गया है? यदि हाँ, तो ऐसा क्‍यों किया गया है? (ग) क्‍या मा. विधायक श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक द्वारा विधान सभा में पूछे गये प्रश्‍न के जवाब में मा. तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री उमाशंकर गुप्‍ता जी ने कहा था कि कौशल विकास केन्‍द्र के कर्मचारी/अधिकारी की वेतन वृद्धि एवं नई नीति बनाने की कार्यवाही जारी है? यदि हाँ, तो उन्‍हें वेतन वृद्धि का लाभ तो नहीं दिया गया, बल्कि सेवा से ही पृथक करने का औचित्‍य क्‍या रहा ? (घ) शासन प्रश्‍नांश (ख) में वर्णित कर्मचारी/अधिकारी को पुन: सेवा में रखने पर विचार करेगा? यदि हाँ, तो कब तक, नहीं तो क्‍यों नहीं?

राज्‍यमंत्री, तकनीकी शिक्षा ( श्री दीपक जोशी ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है(ख) जी हाँ। कौशल विकास केन्‍द्रों में कार्यरत अमले को उनकी संविदा अवधि पूर्ण होने पर सेवा से पृथक किया गया है। (ग) माननीय विधायक श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक के द्वारा पूछे गए प्रश्‍न क्रमाक 6312 माह मार्च 2016 के जवाब में माननीय उमाशंकर गुप्‍ता जी, मंत्री, तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग ने कहा था कि संविदा आधार पर नियुक्‍त कर्मचारियों/अधिकारियों के मानदेय बढ़ाने की कार्यवाही प्रचलन में है। सेवा से पृथक करने का औचित्‍य प्रश्‍नांश (ख) अनुसार। (घ) जी नहीं। प्रश्‍नांश (ख) के उत्‍तर अनुसार।

परिशिष्ट - ''सात''

 

एडव्होकेट सत्यप्रकाश सखवार - माननीय अध्यक्ष महोदय, तहसील और ब्लाक स्तरों पर कौशल विकास केन्द्रों पर संविदा कर्मियों की नियुक्ति की गई थी. एक तरफ तो सरकार रोजगार की बात करती है दूसरी तरफ इन संविदा कर्मियों को पृथक कर दिया गया है. मेरी आपके माध्यम से मांग है कि जो संविदा कर्मी सेवा से पृथक किये गये हैं उनको सेवा में वापस कब तक लेंगे ?

श्री दीपक जोशी - माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश शायद देश में पहला राज्य होगा जिसने माननीय प्रधानमंत्री जी की स्किल इंडिया योजना को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इस दिशा में मध्यप्रदेश ने पहला कदम 2011 में ही उठाया था. जहां पर हमारी आई.टी.आई. कार्यरत् नहीं थे वहां हमने कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना की थी और इन कौशल विकास केन्द्रों के माध्यम से गांव के समीप या अपने रहने वाले स्थान के समीप ही व्यक्तियों को तकनीकी रोजगार से जोड़ने के लिये इन कौशल विकास केन्द्रों की स्थापना की गई थी चूंकि यह अल्प अवधि प्रशिक्षण के कार्यक्रम होते हैं और मांग के अनुसार इन कार्यक्रमों को चलाया जाता है. यदि प्रशिक्षण पूरा हो जाता है या मांग पूरी हो जाती है तो यह स्वत: बंद कर दिये जाते हैं इसलिये इसमे संविदा नियुक्ति का हमने प्रावधान रखा है.

एडव्होकेट सत्यप्रकाश सखवार - माननीय अध्यक्ष महोदय,जब संविदा नियुक्ति का कोई मतलब ही नहीं है तो इनको क्यों रखा जाता है इसकी कोई समय-सीमा हो,इनको परमानेंट किये जाने का शासन की तरफ से माननीय मंत्री जी कोई प्रबंध करेंगे ? उनके वेतन और वेतन वृद्धि हेतु कोई नई नीति निर्धारित करें ?

श्री दीपक जोशी - माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा मैंने बताया कि  यह अल्प अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम हैं. मांग के अनुरूप हम इस कार्यक्रम को चलाते हैं. जब वह काम खत्म हो जाता है तो वह स्वत: बंद हो जाते हैं. माननीय सदस्य ने जिन बातों पर ध्यान दिलाया उसके लिये हम प्रयास कर रहे हैं

 

 

 

औद्योगिक क्षेत्रों के लिए कृषि भूमि का अर्जन

14. ( *क्र. 3582 ) श्री हर्ष यादव : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में कहाँ-कहाँ औद्योगिक विकास निगम द्वारा विगत 05 वर्षों में कृषि भूमि का अर्जन कर उद्योगों, लघु उद्योगों की स्‍थापना हेतु भूमि आरक्षित कर उन क्षेत्रों में मूलभू‍त सुविधाओं की उपलब्‍धता सुनिश्चित की है? कहाँ-कहाँ कितनी-कितनी भूमि पर ऐसे क्षेत्र बनाये गये हैं? (ख) क्‍या उक्‍त आरक्षित भूमि/क्षेत्र में उद्योग समूहों/कंपनी/फर्मों को आवंटित भूमि पर सही जगह उत्‍पादन किया जा रहा है? ऐसे कौन-कौन से क्षेत्र हैं, जहां भूमि आवंटन के बाद भी प्रश्‍न दिनांक तक कोई औद्योगिक गतिविधियां आंरभ नहीं हो सकी हैं? (ग) क्‍या विभाग/शासन ऐसी अर्जित भूमियों को जो कि औद्योगिक गतिविधियां आरंभ न होने से रिक्‍त हैं, को पुन: भू-स्‍वामियों को लौटाने पर विचार करेगा, ताकि वहां पूर्ववत् कृषि गतिविधियां जारी रह सके और भूमि का सार्थक उपयोग हो सकें? यदि हाँ, तो कब तक और यदि नहीं, तो क्‍यों?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रदेश में औद्योगिक केन्‍द्र विकास निगमों द्वारा विगत 05 वर्षों में उद्योगों, लघु उद्योगों की स्‍थापना हेतु कोई कृषि भूमि अर्जित नहीं की गई है। अपितु राज्‍य शासन के माध्‍यम से द्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिये संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार निगमों हेतु भूमि अर्जित की गई है। (ख) उक्‍त भूमि इकाइयों/उद्योगों को आवंटित नहीं की गई है अत: शेष का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) उक्‍त भूमि औद्योगिक विकास के लिये अर्जित की गई है। अत: रिक्‍त भूमि भू-स्‍वामियों को लौटाने का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

परिशिष्ट - ''आठ''

श्री हर्ष यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि पूरे मध्‍यप्रदेश में सरकार के द्वारा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये हर जिले में दो या तीन जगह चिन्हित की गई है. मेरा मंत्री जी से पूछना है कि जो जगह अधिकृत की गई है, वहां अधोसंरचना विकास के लिये बिजली, सड़क और पानी की व्‍यवस्‍था की गई है और जहां नहीं हुई है, वहां बहुत सारी इकाईयां चालू नहीं हो पाई है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऐसी भी स्थिति है कि किसानों को जो भूमि अधिकृत की है, वह वैसी ही पड़ी है. मेरा माननीय मंत्री जी से आपके माध्‍यम से जानना है कि ऐसी जगह जो किसानों की अधिकृत की है क्‍या वह सरकार वापस करेगी ?

महिला एवं बाल विकास मंत्री (श्रीमती अर्चना चिटनिस) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस प्रश्‍न के उत्‍तर में माननीय विधायक जी को यह बताया गया है कि औद्योगिक विकास केंद्र के द्वारा किसानों से कोई भूमि अर्जित नहीं की गई है और निगमों द्वारा भूमि अर्जित की जाती है. जानकारी के अनुसार तद्नुसार मात्र तीन ऐसे स्‍थान है जिसमें पहला जो स्‍थान है वह मध्‍यप्रदेश औद्योगिक केंद्र विकास निगम भोपाल में पीलूखेड़ी क्षेत्र के विस्‍तार के लिये किया गया है, उसमें अब तक कोर्ट से स्‍थगन आदेश था जो समाप्‍त हुआ है और उसमें भूमि आधिपत्‍य की कार्यवाही जारी है. दूसरा जो स्‍थान है, वह नवीन औद्योगिक केंद्र उज्‍जैनी जिला धार में वहां रोड के लिये भूमि अधिग्रहण किया गया है, और वहां रोड के निर्माण का काम चालू है. जहां रोड के लिये अधिग्रहण किया गया है, उस विशेष जगह पर कोई उद्योग की स्‍थापना का कोई प्रश्‍न ही नहीं उठता है. तीसरा जो स्‍थान है, वह देहली मुंबई इंडस्‍ट्रीयल कोरीडोर के अंतर्गत एक औद्योगिक क्षेत्र का उज्‍ज्‍ौन जिले में विकास किया जा रहा है. वहां लगभग एक हजार एकड़ में विकास कार्य चालू है. बिजली,पानी, सड़क का काम चालू है, जैसे ही काम पूर्ण हो जाता है तो उसकी एक न्‍यूनतम लागत मूल्‍य निर्धारित करके उद्योगों की स्‍थापना प्रारंभ की जा सकेगी.

श्री हर्ष यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मंत्री जी ने बताया मेरा ऐसा मानना है और पूरा प्रदेश जानता है कि मंडीदीप, पीथमपुर, हरनामपुर यह सतना है एवं हमारे यहां देवरी विधानसभा क्षेत्र में एक भी जगह अधिकृत की गई है यहां किसानों की जगह भी अधिकृत की गई है. मंत्री जी आप बतायें.

श्रीमती अर्चना चिटनिस - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक यह ठीक कह रहे हैं कि 28 जिलों में औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिये भूमि का अधिग्रहण किया गया है और इसका विकास किया जायेगा, पर यह भूमि शासकीय भूमि है यह भूमि किसानों की भूमि नहीं है. किसी विशेष जगह के औद्योगिक क्षेत्र के विकास के लिये आपका अगर आग्रह है, यदि आप प्रश्‍न करेंगे मैं उसका उत्‍तर दे सकूंगी.

शास. नवीन महाविद्यालय सेमरिया का भवन निर्माण

15. ( *क्र. 318 ) श्रीमती नीलम अभय मिश्रा : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शासकीय नवीन महाविद्यालय सेमरिया के भवन निर्माण हेतु शासकीय भूमि का आवंटन किया जा चुका है एवं क्‍या भवन निर्माण हेतु राशि स्‍वीकृत कर जारी की जा चुकी है? यदि हाँ, तो कब? यदि नहीं, तो क्‍यों एवं कब तक राशि जारी कर दी जावेगी? (ख) क्‍या उपरोक्‍त महाविद्यालय के 40 कि.मी. की परिधि में कोई दूसरा शा. महाविद्यालय नहीं है? यदि नहीं, तो क्‍या इस क्षेत्र के लोग कला (स्‍नातक) के अलावा अन्‍य संकाय हेतु बाहर जाते हैं या उच्‍च शिक्षा से वंचित हो जाते हैं? (ग) क्‍या उपरोक्‍त महाविद्यालय में नवीन कक्षायें प्रारंभ करने हेतु तैयारियां चल रही हैं? यदि नहीं, तो क्‍यों? यदि हाँ, तो कब तक?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री जयभान सिंह पवैया ) : (क) जी हाँ। भवन निर्माण हेतु राशि स्वीकृत नहीं हुई है। आवंटित भूमि पर श्री मार्तण्ड सिंह का कब्जा होने के कारण न्यायालयीन प्रकरण क्रमांक 13663/16 में दिनांक 29.06.2016 को स्थगन आदेश होने के कारण सीमांकन स्थगित है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (ख) जी हाँ। जी नहीं। अशासकीय यमुना प्रसाद शास्त्री महाविद्यालय, सेमरिया संचालित है, जहाँ विद्यार्थी अध्ययन कर सकते हैं। (ग) जी हाँ। महाविद्यालय में विज्ञान संकाय एवं स्नातकोत्तर (कला संकाय) की कक्षायें प्रारंभ करने हेतु निर्धारित मापदण्ड अनुसार प्रकरण का परीक्षण किये जाने की कार्यवाही प्रकियाधीन है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

श्रीमती नीलम अभय मिश्रा - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय उच्‍च शिक्षा मंत्री महोदय से यह प्रश्‍न करना चाहती हूं कि माननीय मंत्री जी यह बताने की कृपा करेंगे सिमरिया में लगभग दो वर्षो से जो पांच एकड़ जमीन शासकीय नवीन विद्यालय सिमरिया के नाम से आवंटित है तथा जिसमें किसी मार्तण्‍ड सिंह के नाम के व्‍यक्ति का कब्‍जा है तथा कुछ वर्षों से उक्‍त व्‍यक्ति जमीन में खेती भी करता है, जो कि सरकारी जमीन है. वह व्‍यक्ति पुलिस का सिपाही भी है तथा पास ही के बिरसिंहपुर चौकी में पदस्‍थ है तथा तहसीलदार और एस.डी.एम. की कमी से आज दिनांक तक न तो उक्‍त व्‍यक्ति को कोई नोटिस जारी किया गया है, न ही उस जमीन का आज तक सीमांकन हो पाया है. जबकि चार, पांच बार कॉलेज के प्राचार्य, टी. आई. सभी जा चुके है, लेकिन उस व्‍यक्ति से वह जमीन खाली नहीं करा सके हैं. लगभग दो वर्षो से यह प्रयास जारी है. माननीय मंत्री जी से मेरा यह प्रश्‍न है कि क्‍या माननीय मंत्री जी उस जमीन को खाली करने का प्रयास करेंगे. अधिकारी, कर्मचारी को निर्देशित करेंगे ?

श्री जयभान सिंह पवैया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह भूमि के संबंध में एक न्‍यायायलीन मामला है. आवंटित भूमि पर श्री मार्तण्‍ड सिंह नाम के व्‍यक्ति का कब्‍जा होने के कारण न्‍यायालयीन प्रकरण क्रमांक - 13663/2016 में दिनांक 29 जून, 2016 को कोर्ट द्वारा स्‍थगन आदेश होने के कारण सीमांकन स्‍थगित है. जैसे ही स्‍थगन आदेश हट जायेगा, तो सीमांकन की कार्यवाही शुरू कर देंगे.


 

श्रीमती नीलम अभय मिश्रा--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहते हुए माननीय मंत्रीजी से यह प्रश्न करना चाहती हूं कि जब वह मध्यप्रदेश शासन की जमीन है और दो वर्षों से कॉलेज के नाम से आवंटित है लेकिन आज दिनांक तक सिर्फ उस व्यक्ति की दादागिरी के चलते उसका सीमांकन नहीं हो पाया है. उसने उस 5 एकड़ जमीन पर कब्जा किया है जिसके कारण छात्र-छात्राएं एक कमरें में फूटी छत के नीचे बैठ कर पढ़ाई करते हैं. जिससे बहुत परेशानी होती है. मैं माननीय मंत्रीजी से यह आश्वासन चाहती हूं कि उस जमीन को खाली कराने की कृपा करें ताकि छात्र-छात्राओं के लिए नया कॉलेज बन सके और वह कॉलेज के लिए राशि कब तक स्वीकृत की जायेगी, मैं इसका भी आश्वासन चाहती हूं.

श्री जयभान सिंह पवैया-- अध्यक्ष महोदय, मैंने पहले ही निवेदन किया कि कोर्ट का स्थगन आदेश है. जैसे ही स्थगन आदेश वेकेट होगा, तत्काल सीमांकन की कार्रवाई करायेंगे. कौन व्यक्ति है, कौन दादा है इससे अन्तर नहीं आता है. सरकारी भूमि है तो उसका सीमांकन तत्काल होगा उसमें कोई बाधा पैदा नहीं होगी लेकिन यहां पर सवाल न्यायालय के स्थगन आदेश का है और उसके बाद में राशि जारी कर दी जायेगी.

अध्यक्ष महोदय-- न्यायालय की प्रक्रिया जल्दी करा लें. अगली हियरिंग की दरख्वास्त लगवा दें.

श्रीमती नीलम अभय मिश्रा-- मंत्रीजी, वह स्थगन कब तक हट जायेगा?

श्री जयभान सिंह पवैया--जी, अध्यक्ष महोदय, हम प्रयास करेंगे.

श्रीमती नीलम अभय मिश्रा-- मंत्रीजी, भवन की स्वीकृति मिल जाये.

शासकीय महाविद्यालय जीरापुर में कॉमर्स संकाय की स्‍वीकृति

16. ( *क्र. 1036 ) कुँवर हजारीलाल दांगी : क्या उच्च शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) राजगढ़ जिले के अंतर्गत शासकीय महाविद्यालय जीरापुर में कौन-कौन से संकाय संचालित हैं? क्‍या उक्‍त महाविद्यालय में कॉमर्स संकाय के संचालन की शासन स्‍तर से कॉलेज प्रारंभ दिनांक से प्रश्‍न दिनांक तक कोई व्‍यवस्‍था नहीं है? यदि हाँ, तो क्‍या कॉमर्स संकाय का संचालन कॉलेज की जनभागीदारी समिति के माध्‍यम से किया जा रहा है, जिससे कॉलेज की जनभागीदारी समिति पर अनावश्‍यक वित्‍तीय भार आ रहा है तथा अन्‍य विकास कार्य बाधित हो रहे हैं? (ख) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा उक्‍त कॉलेज में कॉमर्स संकाय के संचालन की शासन स्‍तर से स्‍वीकृति हेतु अनेकों बार माननीय मुख्‍यमंत्री जी, माननीय उच्‍च शिक्षा मंत्री जी, प्रमुख सचिव, उच्‍च शिक्षा एवं आयुक्‍त उच्‍च शिक्षा को निवेदन पत्र प्रेषित किये गये हैं? यदि हाँ, तो क्‍या शासन उक्‍त कॉलेज में कॉमर्स संकाय के संचालन की स्‍वीकृति प्रदान करेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री जयभान सिंह पवैया ) : (क) शासकीय महाविद्यालय जीरापुर में कला एवं विज्ञान संकाय संचालित है। जी हाँ। जी हाँ। पाठयक्रम स्ववित्तीय होने से अनावश्यक वित्तीय भार का प्रश्न नहीं उठता है। शेष प्रश्नांश उपस्थित नहीं होता। (ख) जी हाँ। जी नहीं। कैचमेंट एरिया में वाणिज्य के पर्याप्त विद्यार्थी-संख्या नहीं होने के कारण विभागीय मापदण्डों की पूर्ति नहीं हो रही है, जिससे शासकीय महाविद्यालय जीरापुर में वाणिज्य संकाय प्रारंभ किये जाने में कठिनाई है।

 

कुंवर हजारीलाल दांगी-- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्रीजी से पूछना चाहता हूं कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में शासकीय महाविद्यालय जीरापुर है उसमें नगर पंचायत,माचलपुर नगर पंचायत,जीरापुर और नगर पंचायत छापेड़ा इतने लंबे-चौड़े एरिया के बच्चें वहां पर पढ़ते हैं. जब से कॉलेज खुला है तब से वाणिज्य संकाय की क्लासेस स्व-वित्तीय आधार पर हमने चालू कर रखी है. राजगढ़ जिले में सबसे अधिक बच्चे उस कॉलेज में अध्ययन करते हैं. मैं जब से विधायक बना हूं तब से मांग करता आ रहा हूं कि वाणिज्य संकाय के एक प्रोफेसर की नियुक्ति करके संकाय की एक क्लास चालू करा दी जाये.अध्यक्ष महोदय,मैं माननीय मंत्रीजी से यही जानना चाहता हूं कि मेरे जीरापुर महाविद्यालय में वाणिज्य संकाय की क्लास कब तक चालू करा देंगे?

श्री जयभान सिंह पवैया--अध्यक्ष महोदय, हम जब पीजी क्लास शुरु कराते हैं. नया संकाय शुरु करते हैं तो उसके लिए केचमेंट एरिया में 200 विद्यार्थी होना अनिवार्य है. इस समय की स्थिति यह है कि कुल 47 विद्यार्थी पूरे केचमेंट एरिया में है इसलिए शासकीय स्तर पर संकाय खोला जाना मानदण्डों के अंतर्गत बिलकुल नहीं आ रहा है. जब विद्यार्थियों की संख्या अधिक हो जायेगी उस समय विचार हो जायेगा. दूसरी बात यह है कि जन भागीदारी समिति इसे संचालित कर रही है और उसके ऊपर वित्तीय भार आने का प्रश्न इसलिए नहीं उठता क्योंकि जन भागीदारी समिति के पास इस समय 1 लाख 82 हजार रुपये है और उसका कुल व्यय 62 हजार 436 रुपया होता है. फिलहाल हमें जन भागीदारी समिति से उसे संचालित रखना ही उचित होगा. मानदण्डों के अनुसार नया संकाय देने में अभी कठिनाई है.

कुंवर हजारीलाल दांगी--अध्यक्ष महोदय, एक और प्रश्न है. माननीय मंत्रीजी नये-नये विश्वविद्यालय खोल रहे हैं. सब कुछ कर रहे हैं. चूंकि यह ग्रामीण क्षेत्र का इलाका है और उसमें किसानों के बच्चे पढ़ते हैं और उन किसानों के बच्चों को सुविधा देने के लिए एक प्रोफेसर देकर वहां क्लास चालू नहीं करा सकते? राजगढ़ जिले में सबसे ज्यादा छात्र संख्या जीरापुर महाविद्यालय में है. मेरा निवेदन है कि एक प्रोफेसर देकर क्लास चालू करा दी जाये.

अध्यक्ष महोदय-- आपके प्रश्न का उत्तर आ गया है.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया--अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्रीजी से प्रश्न पूछना चाहता हूं कि पूरे प्रदेश के महाविद्यालयों के छात्र-छात्राएं संकाय और प्रोफेसर सहित अन्य विद्यालयों में शिफ्ट किये जा रहे हैं. माननीय मंत्रीजी मैं आपसे आश्वासन चाहूंगा मंदसौर में भी होम साईंस और आर्ट्स की कन्या महाविद्यालय की छात्राओं को प्रोफेसर सहित पीजी कॉलेज में भेजा जा रहा है. यह गंभीर मामला है. मैं आपसे निवेदन करुंगा.

अध्यक्ष महोदय - नहीं, मंदसौर का नहीं. उनको मैंने पूरक प्रश्न की अनुमति दी थी. अब समय हो गया है. श्री दांगी जी का उत्तर आ जाने दें.

कुंवर हजारीलाल दांगी - मेरी माननीय मंत्री जी से एक ही प्रार्थना है कि मेरे यहां पर वाणिज्य संकाय कैसे भी चालू करवा दिया जाय, मैं यही चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय - 16 प्रश्न हो पाए क्या करें?

डॉ. गोविन्द सिंह - आपका आश्वासन सदन में सबने सुना.

अध्यक्ष महोदय - समय की मर्यादा है. माननीय मंत्री जी उनका उत्तर दे दें, समय हो गया है.

श्री जयभान सिंह पवैया - मान्यवर अध्यक्ष महोदय, आदरणीय दांगी जी ने जो संकाय खोलने की मांग की है. मैंने प्रारंभ में कहा कि कुछ मानदंडों के अनुसार सरकारी तौर पर संकाय खुलते हैं. अगर बच्चे पर्याप्त उपलब्ध हो जायं, आप भी कोशिश करें कि बच्चे उपलब्ध हो जायं, यह प्रयास करेंगे तो हमें संकाय खोलने में कोई कठिनाई नहीं होगी.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्नकाल समाप्त.

 

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

 

 

समय 12.00 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

 

अध्यक्ष महोदय - नियम 267-क के अधीन लंबित सूचनाओं में से 16 सूचनाएं

 

 

 

श्री बाबूलाल गौर - बगैर पढ़े उसका महत्व कम हो जाता है.

अध्यक्ष महोदय - आपकी इस बात पर विचार कर लेंगे.

 

 

 

समय 12.01 बजे शून्यकाल में उल्लेख

 

डॉ. गोविन्द सिंह (लहार) - अध्यक्ष महोदय, व्यापम घोटाले में सुप्रीम कोर्ट ने आज मध्यप्रदेश की सरकार को आईना दिखाया है और कहा है कि यह व्यापम घोटाला समूचे देश का घोटाला है, इसमें पूरे देश के लोग जुड़े हुए हैं. इस सरकार को शर्म आनी चाहिए, मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए. लगातार घोटालों पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है, इससे ज्यादा मध्यप्रदेश की सरकार के लिए शर्म की बात नहीं हो सकती है.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) - इसमें सरकार का क्या है? सरकार ने ही उसको पकड़ा था. हमने घोटाले को उजागर किया. (व्यवधान)...हमने ही कार्यवाही की, हमें किस बात की शर्म? सुप्रीम कोर्ट में यह सरकार लेकर गई है.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, माननीय संसदीय मंत्री जी ने कुछ कहा है. मेरा व्यापम के संबध में स्थगन लगा है, कृपया इसे स्वीकार कर लें.

श्री बाबूलाल गौर - अध्यक्ष महोदय, यह ज्यूडिश्यल मामला है, इसके ऊपर कोई विचार नहीं किया जा सकता है. इस पर बोला भी नहीं जा सकता है.

अध्यक्ष महोदय - यह मामला कोर्ट में है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी (गुढ़) - अध्यक्ष महोदय, प्रदेश की एक सीनियर आईएएस ऑफिसर सुश्री शशि कर्णावत ने इच्छा मृत्यु की मांग माननीय मुख्यमंत्री जी से की है और यह आरोप लगाया है कि ..

अध्यक्ष महोदय - यह क्या शून्यकाल का विषय है?

श्री सुन्दरलाल तिवारी - मैं एक निवेदन कर लूं. 3 वर्ष से वह सस्पेंड हैं.

श्री रामनिवास रावत - वह दलित अधिकारी है. दलित अधिकारियों को प्रताड़ित किया जा रहा है, यह विषय नहीं है?

श्री सुन्दरलाल तिवारी - केवल आईएएस ही नहीं, अभी उन्हीं के क्षेत्र में अनुसूचित जाति, आदिवासियों (व्यवधान)..मृत्यु की अनुमति मांगी है, प्रदेश में प्रशासनिक हालात अच्छे नहीं हैं.

सुश्री हिना लिखीराम कावरे (लांजी) - अध्यक्ष महोदय, पुलिस की लापरवाही के चलते मेरी विधान सभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत टेमडी के अंतर्गत दो युवाओं को जिंदा जला दिया गया. अध्यक्ष महोदय, वे दोनों युवा एक उत्तरप्रदेश और दूसरा बिहार से थे. मैंने 21 तारीख को विधान सभा सचिवालय में ध्यान आकर्षण की सूचना दी है. मेरा आपसे निवेदन है कि आप इसे चर्चा के लिए ग्राह्य करें.

अध्यक्ष महोदय - इस पर विचार कर लेंगे.

श्री दुर्गालाल विजय (श्योपुर) - अध्यक्ष महोदय, श्योपुर जिले के अंतर्गत और श्योपुर नगर में कन्या महाविद्यालय नहीं हो पाने के कारण वहां की कन्याओं को आगे पढ़ने में बहुत बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है. कई परिवार के अभिभावक शिक्षा ग्रहण कराने के लिए अपनी बालिकाओं को संयुक्त रूप से चल रहे महाविद्यालय में नहीं भेज पाते हैं. मेरा आग्रह है, माननीय मुख्यमंत्री जी की भी घोषणा है कि श्योपुर में कन्या महाविद्यालय अलग से होना चाहिए. कन्या महाविद्यालय अलग से स्थापित किये जाने का मैं निवेदन करता हूं.

श्री गिरीश भण्‍डारी (नरसिंहगढ़) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज पूरे प्रदेश में गायों की बड़ी दुर्दशा हो रही है, गांव के लोग एक गांव से दूसरे गांव में गायों को छोड़ देते हैं इसकी वजह से गांवों में काफी विवाद की स्थिति हो रही है और आज स्थिति यह हो गई है कि चाहे नेशनल हाईवे, चाहे स्‍टेट हाईवे पर आज पूरी जगह गायें बैठी हुई हैं इसकी वजह से आवागमन भी बाधित हो रहा है और सबसे बड़ा कभी-कभी रात में एक्‍सीडेंट होने की वजह से वहां पर धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचती है और मेरा सुझाव है कि ग्राम पंचायतों को रोजगार गारन्‍टी के माध्‍यम से हर पंचायत में एक पशु शेड ऐसा बड़ा बना दिया जाए जिससे कि गांवों की जो गायें हैं उनको वहां पर रखा जा सके व गांव के जनसहयोग से वहां पर उनके भूसे की व्‍यवस्‍था हो सके.

डॉ.मोहन यादव (उज्‍जैन दक्षिण) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी अपनी विधानसभा में ग्राम मुंडला सुलेमान में नाले में अत्‍यधिक‍ वर्षा का पानी आने के कारण से दो भाई-बहन बह गए. एक को तो बचा लिया गया लेकिन एक बालिका को बचाया नहीं जा सका. मैं आपके माध्‍यम से शासन से निवेदन करना चाहता हूँ कि मृतक के लिए सहायता दी जाए. साथ ही साथ भविष्‍य में बार-बार ऐसी घटनाएं जहां-जहां भी हो रही हैं वहां पुलिया बना दी जाए, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.

श्री मधु भगत (परसवाड़ा ) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिला बालाघाट के अंतर्गत 126 युवा सहकारी समिति के 900 दैनिक कर्मचारियों को आयुक्‍त, सहकारिता एवं पंजीयक कर सहकारी संस्‍थाओं मध्‍यप्रदेश, भोपाल के पत्र दिनांक 13.07.2016 के अनुसार समस्‍त 900 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्‍त कर दी गई हैं. इन कर्मचारियों द्वारा शासन की जनकल्‍याणकारी योजनाओं का संचालन किया जाता था, जिससे राशन वितरण व रसायनिक खाद का वितरण, आहरण का कार्य जोकि दिनांक 20.07.2016 से बाधित हो रहा है उक्‍त कर्मचारियों की सेवाएं समाप्‍त होने से जिले की जनता में रोष है एवं आंदोलन की चेतावनी क्षेत्र की जनता द्वारा दी जा रही है. अत: सभी कर्मचारियों की बहाली के लिये सादर प्रेषित है.

श्री दिनेश राय ( सिवनी ) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे जिले में लगातार चोरी-डकैती की घटनाएं घट रही हैं. कल एक घटना मैंने बतायी थी. आज फिर हमारे यहां लगातार यातायात विभाग की लापरवाही से एक बच्‍चे की मृत्‍यु हो गई है. मेरा आग्रह है कि विभाग की घोर लापरवाही का मैंने जो प्रश्‍न लगाया है उसको कल ग्रहण कर ध्‍यानाकर्षण में लगाएं.

श्री आरिफ अकील (भोपाल उत्‍तर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नगर निगम भोपाल में 25 दिन और 90 दिन के कर्मचारी पिछले 10-15 सालों से डेलीवेजेस पर काम कर रहे हैं उनको सरकार ने अभी तक परमानेंट नहीं किया है. इन्‍होंने यह कहा था कि जिनको 10 साल से ज्‍यादा हो गए हैं उनको परमानेंट कर देंगे लेकिन आज 10-10 साल 15-15 साल से ज्‍यादा हो गए, जिनको 25 दिन और 90 दिन में रखे हैं उनको परमानेंट नहीं कर रहे हैं.

श्री प्रताप‍ सिंह (जबेरा) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वन विभाग के जितने भी वृक्षारोपण हुए हैं उनमें 4 से 6 माह के बीच जो चौकीदार लगे हैं उनकी तनख्‍वाह नहीं मिल रही है तो मैं आपसे अनुरोध करूंगा कि उनकी तनख्‍वाह क्‍यों नहीं मिल रही है, उसको दिलाई जाए.

श्री सोहनलाल बा‍ल्‍मीक (परासिया) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा क्षेत्र, परासिया में एक ही शासकीय महाविद्यालय है और वह चूंकि शासकीय महाविद्यालय शहर से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर है और नई बिल्डिंग बनने के कारण पुराना महाविद्यालय जहां संचालित होता था तो उसको वहां शिफ्ट कर दिया गया है जिसके चलते सभी छात्राओं को पेरशानी का सामना करना पड़ता है. मैंने माननीय मुख्‍यमंत्री जी से कई बार आग्रह किया है, शिक्षा मंत्री जी से भी कई बार आग्रह किया है कि मेरे क्षेत्र में एक कन्‍या महाविद्यालय खोला जाए, ताकि छात्राओं को जो आने-जाने में या असुरक्षित होती हैं तो कहीं न कहीं उनको इसका लाभ मिलेगा. मेरा आपसे यही निवेदन है कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में कन्‍या महाविद्यालय खोला जाए.

श्री बलबीर सिंह डण्‍डोतिया (दिमनी) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं दो बार विधान सभा में प्रश्‍न लगा चुका हूँ मेरे कुछ ऐसे गांव हैं उनमें जैसे बरसात हो गई, तो वहां पढ़ने के लिए व्‍यवस्‍था नहीं है. गोपी से मनपुरा के 8-10 गांव हैं उनमें रास्‍ता नहीं है तो मैं मंत्री महोदय जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि मेरी पूरी विधान सभा क्षेत्र में दो रोड करवा दें.

 

 

 

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष ( श्री बाला बच्चन ) -- माननीय अध्यक्ष महोदय 26 जुलाई को सिंहस्थ से संबंधित प्रश्नों के जवाब की तारीख थी. मेरा भी एक प्रश्न लगा हुआ था और मेरे प्रश्न के जवाब में शासन के द्वारा यह उत्तर आया है कि क से घ तक की जानकारी एकत्रित की जा रही है. अध्यक्ष महोदय इससे संबंधित और इसके अलावा मैंने और मेरे दल के 10 से 12 आदरणीय विधायकगणों ने स्थगन प्रस्ताव दिया है कि सिंहस्थ में जो अनियमितताएं हुई हैं, जो भ्रष्टाचार और घोटाले हुए हैं इससे संबंधित स्थगन दिया है उस पर चर्चा कराई जाय जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके. अभी तक सरकार जवाब एकत्रित कर रही है, यह बहुत दुख की बात है मैं समझता हूं कि हम सबका दुर्भाग्य होगा, इस स्थगन पर चर्चा होना चाहिए 10 - 12 विधायकों का स्थगन इस संबंध में दिया गया है.

अध्यक्ष महोदय -- आपसे चर्चा कर लेंगे.

श्री बाला बच्चन -- हम चाहेंगे कि सदन में इस पर चर्चा करा ली जाय.

अध्यक्ष महोदय -- नहीं, अभी सदन में इस पर चर्चा नहीं करायी जी सकती है.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, यहां पर संसदीय कार्य मंत्री जी हैं, काफी विधायकों ने इससे संबंधित स्थगन दिया है

अध्यक्ष महोदय -- आपका विषय आ गया है. इस पर बात कर लेंगे.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, विषय केवल आने के लिए नहीं लगाये जाते हैं, उस पर व्यवस्था आना चाहिए केवल एक दिन सदन का शेष बचा है, या तो अग्राह्य कर दें कि सरकार चर्चा नहीं कराना चाहती है या फिर चर्चा कराने के लिए ग्राह्य करें.

अध्यक्ष महोदय -- व्यवस्था दे तो दी है. आज आपने इस विषय को उठाया है, उस पर विचार करने दें.

श्री रामनिवास रावत -- नहीं, हमने यह विषय आज नहीं उठाया है. तीन दिन पहले से स्थगन दिया हुआ है.

अध्यक्ष महोदय -- हां तो उस पर विचार कर रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत -- वह आपके सचिवालय में प्रस्तुत कर दिया है सामान्यत: यह व्यवस्था रहती है , आप उस पर विचार कर रहे हैं तो कल तो विधान सभा ही समाप्त हो जायेगी.

अध्यक्ष महोदय -- अभी कल तक का समय है.

श्री रामनिवास रावत-- यह प्रदेश का बहुत बड़ा सिंहस्थ घोटाला हुआ है, यह तो बहुत बड़े भ्रष्टाचार को दबाने का एक तरीका है. आखिर इस पर चर्चा कब हो पायेगी.

अध्यक्ष महोदय -- आपको आज अवगत करा देंगे. स्थगन प्रस्ताव तो कभी भी लिया जा सकता है.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय जब से सत्र प्रारम्भ हुआ है तब से इस विषय पर स्थगन दिये गये हैं, इस पर चर्चा कराई जाना चाहिए.

श्री कैलाश चावला (मनासा) -- अध्यक्ष महोदय मंदसौर जिला चिकित्सालय में डायलिसिस यूनिट की स्थापना की गई है. डायलाइजर उपलब्ध न होने के कारण वहां पर किडनी रोग से ग्रसित जो मरीज हैं उनको परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इतना ही नहीं बीपीएल कार्ड धारी जो मरीज हैं उनसे प्रति डायलिसिस 500 रूपये वसूल किये जा रहे हैं. 1500 से 2000 रूपये उनसे लिये जा रहे हैं, जबकि डायलाइजर की कीमत ही 500 रूपये हैं. मेरा सरकार से आग्रह है कि यह डायलाइजर उपलब्ध कराये जायें. इधर उधर से मांग कर डायलिसिस कराना पड़ रहा है. यह गंभीर रोग से ग्रसित लोग हैं इनकी जान पर बन आयी है. इसलिए शासन को डायलाइजर उपलब्ध कराने के निर्देश देना चाहिए.

 

 

 

 

 

 

 

12.12 बजे. पत्रों का पटल पर रखा जाना.

(1) मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद भोपाल की वार्षिक रिपोर्ट

वर्ष 2014-15 एवं 2015-16

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री ( श्री गोपाल भार्गव ) -- अध्यक्ष महोदय मैं महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, 2005 (क्रमांक 42 सन् 2005) की धारा 12 की उपधारा (3) (च) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद भोपाल की वार्षिक रिपोर्ट वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 पटल पर रखता हूं.

 

 

 

 

(2) मध्यप्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन

वर्ष 2012-13

कुटीर एवं ग्रामोद्योग मंत्री ( श्री अंतर सिंह आर्य ) --

(3) आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की अपेक्षानुसार गृह विभाग की अधिसूचना

गृह मंत्री ( श्री भूपेन्द्र सिंह ) --

 

 

 

 

 

(4) (क) अटल बिहारी बाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय का तृतीय वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2014-15, (ख) मध्यप्रदेश भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय, भोपाल का वार्षिक

प्रतिवेदन वर्ष 2015-16

उच्च शिक्षा मंत्री ( श्री जयभान सिंह पवैया ) --

 

 

 

 

 

 

12.16 बजे ध्‍यानाकर्षण

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.)

श्री मुकेश नायक (पवई) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तीन साल में कई सदस्‍यों का एक भी ध्‍यानाकर्षण नहीं लगा है और कई सदस्‍य ऐसे हैं जिनके एक-एक सत्र में तीन-तीन, चार-चार ध्‍यानाकर्षण लग गए हैं. तीन साल बीतने को हैं विधान सभा में अनेक सदस्‍य ऐसे हैं जिनका एक भी ध्‍यानाकर्षण विधान सभा में नहीं आया है जबकि वे विषय अपेक्षाकृत ज्‍यादा लोकमहत्‍व के हैं, अविलंबनीय लोकमहत्‍व के हैं, जनता की समस्‍याओं को स्‍पर्श करते हैं. मध्‍यप्रदेश में सम्‍मानित सदस्‍य प्रभावी ढंग से जनसमस्‍याओं को उठा सकें इसके लिए हम आपसे न्‍याय की उम्‍मीद करते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है आपकी बात का ध्‍यान रखेंगे. श्री रामनिवास रावत कृपया अपने ध्‍यानाकर्षण की सूचना पढ़ें.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे आपत्‍ति है, ये विषय आपके कक्ष में लिया जाना चाहिए और वहां चर्चा होनी चाहिए, यह सचिवालय से संबंधित है.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपकी बात ठीक है पर वे भी वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं.

श्री सुदर्शन गुप्‍ता (इन्‍दौर-1) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदस्‍य अगर व्‍यवधान न करें तो सबके नंबर आ जाएं परंतु व्‍यवधान करके ये प्रश्‍न भी नहीं होने देते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- (श्री रामनिवास द्वारा श्री सुदर्शन गुप्‍ता की ओर देखने पर) आप उनकी तरफ मत देखिए, आप अपना ध्‍यानाकर्षण पढ़िए.

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज की प्रश्‍नकाल की कार्यवाही दिखवा लें, व्‍यवधान किसने प्रारंभ किया.

अध्‍यक्ष महोदय -- यह बहस करने का समय नहीं है, यह कॉल अटेंशन मोशन है. आप अपना ध्‍यानाकर्षण पढ़ें.

(1) मध्‍यप्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा के प्रश्‍नपत्र लीक होना

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यान आकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है :-

 

 

 

 

 

 

राज्‍य मंत्री, सामान्‍य प्रशासन (श्री लालसिंह आर्य) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने उत्‍तर दिया है. मंत्री जी के उत्‍तर की प्रथम लाईन में लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा 2013 का उल्‍लेख है. जिस पर माननीय मंत्री जी ने जवाब दिया कि वर्ष 2013 में कोई पेपर लीक नहीं हुआ है. मैंने अपने ध्‍यानाकर्षण में वर्ष 2012-13 का उल्‍लेख किया है. इसका आशय वर्ष 2012 भी हो सकता है और वर्ष 2013 भी हो सकता है. वर्ष 2012 एवं 2013 में लोक सेवा आयोग द्वारा भिन्‍न-भिन्‍न परीक्षा का आयोजन किया गया होगा. मंत्री जी ने बाद में स्‍वीकार किया है कि उक्‍त मामले में एसटीएफ द्वारा अपराध क्रमांक 13/14 कायम किया गया तत्‍पश्‍चात् अपराध क्रमांक 14/14 भी कायम किया गया, जो कि राज्‍य सेवा आयोग परीक्षा 2012 के संबंध में है. उक्‍त प्रकरण में फरियादी एसटीएफ के उप पुलिस अधीक्षक श्री शैलेन्‍द्र सिंह यादव है. उन्‍होंने होटल उदय पैलेस इंदौर में छानबीन के दौरान राज्‍य सेवा आयोग से संबंधित पेपर पकड़े. उन्‍होंने अपनी एफआईआर में स्‍पष्‍ट लिखा है कि ''अपराध क्रमांक 13/14 द्वारा 420, 120 भारतीय दण्‍ड विधान के तहत जब्‍तशुदा हस्‍तलिपि प्रपत्रों के प्रश्‍नों का पूर्णत: लोक सेवा आयोग से प्राप्‍त सामान्‍य हिन्‍दी, सामान्‍य अध्‍ययन प्रथम एवं द्वितीय के मूल प्रश्‍नों से मिलान होना पाया गया, जिसमें कि प्रथमदृष्‍टया आरोपियों राजीव प्रसाद, अखिलेश पांडे, बबलू पांडे, विजेन्‍द्र गुप्‍ता, इलियाज खान आदि ने मिलकर अयोग्‍य परीक्षार्थियों प्रियंका भदौरिया एवं सपना जैन तथा अन्‍य 10-12 परीक्षाथियों को अवैध लाभ पहुंचाने एवं स्‍वयं को अवैधानिक रूप से अवैध धन लाभ प्राप्‍त करने के आशय से आपराधिक षड्यंत्र कर उक्‍त परीक्षा को अवैधानिक रूप से प्रभावित किया जाना पाया जाता है''. आपने आयुर्वेदिक चिकित्‍सा परीक्षा एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर निरस्‍त कर दी. एसटीएफ ने लोक सेवा आयोग की परीक्षा के संबंध में भी रिपोर्ट प्रस्‍तुत की थी, आपको तत्‍काल लोक सेवा आयोग की परीक्षा को भी निरस्‍त करना चाहिए था. आपके द्वारा परीक्षा निरस्‍त नहीं की गई. आप जिन छात्रों को लाभ पहुंचाना चाहते थे, आपने उन्‍हें मौका दिया कि वे माननीय न्‍यायालय में जायें. आपके द्वारा केवल लोक सेवा आयोग की परीक्षा के साक्षात्‍कार पर रोक लगाई गई. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍य सरकार को इस प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए था. मैं माननीय मंत्री जी का सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय की ओर ध्‍यान आकृष्‍ट करना चाहता हूं, परीक्षाओं की गोपनीयता एवं पारदर्शिता के संबंध में माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय द्वारा पारित आदेश रिट पीटिशन क्रमांक 298 of 2015 with nos. 299, 305 एवं 325 of 2015 decided on 15 जून 2015 में उल्‍लेख किया गया है कि Education and Universities- Examination- Unfair means/ cheating/leakage of question paper/cancellation of All India examination and directions for conduct if fresh examination- When warranted- All India Pre-Medical and Pre-Dental Entrance Test, 2015 dated 3-5-15- Question paper leaked large scale cheating and malpractices during examination aided by organised gang of ..................

अध्यक्ष महोदय-- आप उसका उल्लेख कर दीजिए, पढ़ कर मत सुनाइये.

श्री रामनिवास रावत-- इसलिए पढ़ कर सुना रहा हूँ कि उन्होंने स्पष्ट दिया है कि किसी भी परीक्षा में इस तरह के पेपर लीक होने की स्थिति बनती है, लीक होना पाया जाता है, किसी भी परीक्षा की गोपनीयता, पारदर्शिता भंग होती है तो सारी परीक्षाएँ निरस्त की जानी चाहिए. राज्य सरकार को माननीय सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए था और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के पालन में अपील करके ऐसी परीक्षाओं को तुरन्त निरस्त कराना चाहिए था. वह राज्य सरकार ने न करते हुए जिस तरह से व्यापम को आपने व्यावसायिक उद्योग, सरकारी उद्योग, मंत्रियों के लिए उद्योग बना रखा है....

अध्यक्ष महोदय-- विषय से न भटकें.

श्री रामनिवास रावत-- इसी तरह से पीएससी को भी आप उद्योग मत बनाओ. इस परीक्षा को निरस्त कराओ और जो प्रतिभावान युवक हैं उनको हक दिलाने का काम करें मेरी ऐसी माननीय मंत्री जी से अपेक्षा है. क्या आप इसके विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे परीक्षा निरस्त कराने के लिए.

अध्यक्ष महोदय-- बस ठीक है. यही प्रश्न था जिसकी आपने इतनी भूमिका बाँधी.

राज्य मंत्री, सामान्य प्रशासन (श्री लाल सिंह आर्य)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य का यह आरोप कि मंत्रियों की सुविधाओं की दृष्टि से या उनके काम कराने की दृष्टि से उसको उद्योग न बनाएँ...

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, वह जाने दीजिए.

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार की मंशा न कभी ऐसी रही है न है और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत ही हम लोग वह परीक्षाएँ आयोजित कराते हैं. इनको भी मालूम है, इनकी सरकार के समय में भी हुआ है. अध्यक्ष महोदय, दिल्ली में कहीं भी किसी प्रकार से हमको जाने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि जैसा माननीय सदस्य ने कहा है परीक्षाएँ 2012 की प्रारंभिक और मुख्य हो चुकी थी. साक्षात्कार होना था. तब एसटीएफ ने जो आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी 2013 की जाँच कर रहे थे उसमें पाया. तब तक कोई प्रकाश में नहीं आया और जैसे ही एसटीएफ ने अपराध पंजीबद्ध किया. हमने साक्षात्कार की प्रक्रिया पूरी रोक दी और माननीय उच्च न्यायालय के आदेश क्रमांक 2.5.16 का तीन माह में साक्षात्कार करने के लिए जो अण्डरटेकिंग के आधार पर आदेश दिया हमने उसका पालन भी शुरू कर दिया और उसका परिणाम है कि कुल अभ्यर्थी जो 1191 थे उसमें से 1091 का साक्षात्कार हो भी चुका है. दो दिन शेष हैं शेष सौ बचते हैं उनका भी साक्षात्कार होगा.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, किसी भी परीक्षा की गोपनीयता भंग हुई, पेपर लीक हुए. आप कह रहे हैं परीक्षा आयोजित कर ली. परीक्षा आयोजित होने के बाद ही तो परीक्षा निरस्त होने की बात आती है. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी मैंने उल्लेख किया. मैं कॉपी भी उपलब्ध करा दूँगा. राज्य सरकार को जाना चाहिए. अध्यक्ष महोदय, प्रदेश के युवाओं के हित के लिए बहुत गंभीर बात है. कल ही सुप्रीम कोर्ट का एक निर्णय आया है. जिसमें लिखा है कि मध्यप्रदेश का व्यापम....

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, उसका संबंध नहीं है. श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा....

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, मैं आ रहा हूँ...

अध्यक्ष महोदय-- नहीं डिसएलाउड. आपका सीधा जो प्रश्न था...

श्री रामनिवास रावत-- कोर्ट ने कहा है बुधवार को राज्य सरकारों को....

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा कृपया अपना प्रश्न करें.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आप सुनने नहीं देंगे?

अध्यक्ष महोदय-- सुनने थोड़ी, बोलने नहीं देंगे, बोलिए आप..(व्यवधान). ..

डॉ मोहन यादव-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह रावत जी के बोलने पर घोर आपत्ति है. यह आसंदी का अपमान है. यह आपका अपमान नहीं. रावत जी, आप से उम्मीद नहीं थी कि आप ऐसे.... .(व्यवधान). ..

श्री रामनिवास रावत-- मुझे बोलने का भी अधिकार है. .(व्यवधान). ..

डॉ मोहन यादव-- आप जरूर बोलिए लेकिन बोल कैसे रहे हों.आपका बोलने का लहजा थोड़ा अच्छा नहीं है. .(व्यवधान). ..

श्री रामनिवास रावत-- मुझे बोलने का भी अधिकार है. .(व्यवधान). ..

अध्यक्ष महोदय-- रिलेवेंट कोई बात नहीं है. .(व्यवधान). ..

डॉ मोहन यादव-- आप इतने वरिष्ठ सदस्य हैं आप इतने समझदार सदस्य हैं.

श्री रामनिवास रावत-- मुझे बोलने का भी अधिकार है.

अध्यक्ष महोदय-- आप बोलिए पर रिलेवेंट बोलिए.

डॉ मोहन यादव-- आप से हमको सीखना है आप तो जैसे बच्चे को डाँट रहे हों.

श्रीमती ऊषा चौधरी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, छात्रों का भविष्य बर्बाद हो रहा है. .(व्यवधान). ..

श्री रामनिवास रावत-- आप चलाओगे सदन वैसा चलेगा? .(व्यवधान). ..

अध्यक्ष महोदय-- बैठ जाएँ. रावत जी, मेरा अनुरोध यह है...

श्री रामनिवास रावत-- ध्यानाकर्षण लगाया है मैंने. .(व्यवधान). ..

अध्यक्ष महोदय-- रावत जी, मेरा अनुरोध यह है आपको बोलने का अधिकार है. किन्तु उसमें एक रिजर्वेशन है और रिजर्वेशन यह है कि रिलेवेंट बोलने का अधिकार है तो आप रिलेवेंट इसमें जो आपने दिया है और जो उत्तर आया है.

श्री रामनिवास रावत-- रिलेवेंट ही बोल रहा हूँ.

अध्यक्ष महोदय-- यह रिलेवेंट नहीं है.

श्री रामनिवास रावत-- पीएससी की परीक्षा से संबंधित ही बोल रहा हूँ. कल सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्देश दिए हैं उसमें उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार.....

अध्यक्ष महोदय-- तो उसका आप मंत्री जी से पूछिए ना. .(व्यवधान). ..

श्री रामनिवास रावत-- (xxx)

अध्यक्ष महोदय-- यह नहीं लिखा जाएगा.

श्री रामनिवास रावत-- पटवारी से लेकर पीएससी की परीक्षा की भर्ती की जानकारी चाही है.

अध्यक्ष महोदय--सुप्रीम कोर्ट का आब्जर्वेशन तो पेपरों में आ गया है वह आब्जर्वेशन तो पेपर में सभी ने पढ़ा है. आप तो इससे उद्भूत विषय पूछिए.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, सुप्रीम कोर्ट ने पीएससी के संबंध में कहा है कि हमें पटवारी से लेकर पीएससी की भर्ती तक की जानकारी चाहिए, मध्यप्रदेश राज्य में हमें सभी जगह घोटालों की आशंका है. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ कि कल सुप्रीम कोर्ट के निर्णय में एक आदेश आया है कि राज्य सरकार हमें बताए कि व्यापम की तरह राज्य में कितने घोटाले हुए हैं. हमें पटवारी से लेकर पीएससी तक की भर्ती की जानकारी चाहिए. क्या राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के पालन में इस तरह की सभी परीक्षाओं की जांच करेगी ?

श्री लाल सिंह आर्य-- माननीय अध्यक्ष महोदय, समाचार-पत्रों में कोई चीज छपी है.

श्री रामनिवास रावत--छपी है तो आप इसी परीक्षा के मामले में देख लीजिए, इसी परीक्षा को निरस्त कराने के लिए क्या आप सुप्रीम कोर्ट जाएंगे ? मेरा एक प्रश्न है कि पीएससी की जो परीक्षा आयोजित हुई, पेपर लीक हुए क्या उसके लिए आप सुप्रीम कोर्ट जाएंगे या नहीं ?

डॉ. राजेन्द्र कुमार पाण्डे--अध्यक्ष महोदय, माननीय रावत जी हवाला दे रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है क्या वह फैसला उन्होंने पढ़ लिया है ? क्या वह फैसला आपको मिल गया है ? अखबार का उल्लेख कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- किसी ने नहीं पढ़ा है इसीलिए वह इररिलेवेंट है.

श्री रामनिवास रावत--आजकल ऑनलाइन डला रहता है.

श्री लाल सिंह आर्य--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने दो प्रश्न किए हैं. मैं आपके माध्यम से उन्हें संतुष्ट करना चाहता हूँ. एक तो यह कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने कोई आदेश दिया है उसकी अथेंटिक रुप से हमारे पास जब कॉपी आएगी तो स्वाभाविक है कि माननीय न्यायालय के आदेश का हम सम्मान करेंगे ही, महाधिवक्ता की उसमें राय लेंगे. इस विषय को लेकर हम सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएंगे क्योंकि उसकी आवश्यकता नहीं है.

श्री रामनिवास रावत--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने कहा था कि हम अधिवक्ता की राय लेंगे.

अध्यक्ष महोदय--अब नहीं, इस पर अंतहीन बहस नहीं हो सकती है दो प्रश्न आपके हो गए हैं. अब आपको एलाउ नहीं कर सकता हूँ. आप इस तरह से जिद न करें. इसमें नहीं कहा है.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, मैंने जो सुप्रीम कोर्ट का हवाला दिया है रिट पिटीशन का क्या आप उसे इसमें सम्मिलित करके अधिवक्ता से राय लेंगे. सुप्रीम कोर्ट के आदेश में लिखा हुआ है परीक्षाओं की गोपनीयता के संबंध में, माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जो आदेश पारित किया गया है इसको लेकर क्या आप अधिवक्ता से राय लेंगे?

अध्यक्ष महोदय-- कॉल अटेंशन में वाद-विवाद नहीं होता है. यह विषय महत्वपूर्ण था इसीलिए इसे कॉल अटेंशन में लिया गया.

श्री रामनिवास रावत--किस तरह से प्रदेश के युवाओं के साथ अन्याय हो रहा है. किस तरह से उनके हक मारे जा रहे हैं. किस तरह से अयोग्य लोगों को भर्ती कराया जा रहा है. इनका पूरा संरक्षण है.

श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा--अध्यक्ष महोदय, मैंने मंत्री जी का उत्तर ध्यान से सुना. व्यापम की तरह ही पब्लिक सर्विस कमीशन भी पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है. इसके लिए उसके अध्यक्ष, समस्त सदस्य और सब लोग जिम्मेदार हैं और अभी जो विधायक खड़े हुए थे वे सब भी जिम्मेदार हैं. पब्लिक सर्विस कमीशन जैसी पवित्र संस्था के साथ जो खिलवाड़ हो रहा है यह उचित नहीं है. आप यह बताने का कष्ट करें कि जब एसटीएफ को यह जानकारी मिल गई....

डॉ. कैलाश जाटव--माननीय कालूखेड़ा जी, जब पर्चियों पर भर्ती होती थी तब आपको आपत्ति नहीं होती थी अभी सब निष्पक्ष भर्तियां हुई हैं तो आपको आपत्ति हो रही है. आप विधायकों के ऊपर उंगली क्यों उठा रहे हैं विधायक कोई प्रशासन है क्या ? हम सब तो आपके सहयोगी हैं.

श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा(मुंगावली)--माननीय अध्यक्ष महोदय, यूपी की अदालत में ट्रांजिट रिमांड पर लेपटॉप और कुछ कागजात जप्त हुए हैं और एसटीएफ ने भी कुछ कागजात जप्त किए हैं. आपने यह स्वीकार किया है कि यह जानकारी आपको मिली थी कि एमपी पीएससी की 2012 की प्रारंभिक परीक्षा में भी पेपर लीक हुए थे. अगर पेपर लीक हुए थे तो उसके बाद जितने भी इंटरव्यू हुए हैं उसमें आपने हाई कोर्ट में अपना पक्ष अच्छी तरह से नहीं रखा. परीक्षा के पेपर लीक हो गए थे और उस परीक्षा में उसमें जो पास हुए हैं उनका क्या मतलब है. सैकड़ों छात्रों के साथ अन्याय हुआ है जिनको लीक हुए पेपर मिले थे उन्हीं को फायदा मिला है और सैकड़ों अन्य छात्रों को नहीं मिला तो आपकी इमेज क्या हुई. आपने हाई कोर्ट में इस केस को ढंग से कांटेस्ट नहीं किया और आप सुप्रीम कोर्ट में भी जाने से इंकार कर रहे हैं. इसका मतलब यह है कि आप पेपर लीक करने वालों को संरक्षण दे रहे हैं. यह भी बतायें कि पेपर लीक करने वालों में कितने लोग हैं शामिल हैं और उनके खिलाफ आपने क्या एक्शन लिया है उनके नाम बताइए.

श्री लाल सिंह आर्य :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एस.टी.एफ. इस प्रकरण की जांच कर रही है और माननीय उच्‍च न्‍यायालय ने अण्‍डर टेकिंग के आधार, पर इस शर्त के आधार पर कि आपका साक्षात्‍कार होता है और यदि आप इन्‍वाल्‍वड पाये गये तो ऐसे लोगों की परीक्षा निरस्‍त कर दी जायेगी, अमान्‍य कर दिया जायेगा. नंबर दो- आपने पूछा है कि कौन-कौन लोग इसमें इन्‍वाल्‍वड थे, जो प्रमुख अभियुक्‍त बेदीराम था,उसको गिरफ्तार कर लिया गया है और साथ ही 23 और अभियुक्‍तों को गिरफ्तार कर लिया गया है. जिसमें 22 अभ्‍यर्थी थे और 11 अन्‍य थे. यदि आप कहें तो उनके नाम पढ़ देता हूं. मुझे लगता है कि इसकी आवश्‍यकता नहीं है.

श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा :- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने यह पूछा था कि यदि पेपर लीक हुआ है तो उसके बाद आप साक्षात्‍कार करके नौकरियां देना चाहते हैं, इसका क्‍या तुक है ? क्‍योंकि आपके पास प्रमाण है, लेपटॉप जब्‍त हुआ है, एस.टी.एफ. की सारी जानकारी है और यह प्रमाण है कि पेपर लीक हुआ था. तो आपने इसको हाई कोर्ट में इसको कांटेस्‍ट क्‍यों नहीं किया, क्‍योंकि इतने लोगों के आप साक्षात्‍कार ले रहे हैं.जब यह सिद्ध हो जायेगा कि पेपर लीक हुआ था तो यह सब निरस्‍त होंगे तो इसका क्‍या मतलब है. इसको आपको कांटेस्‍ट करना चाहिये और आपको यह साक्षात्‍कार नहीं होने देना चाहिये था. यह जो पेपर लीक हुए हैं, इनको आपने दण्डित क्‍यों नहीं किया ? आपने हाई कोर्ट में प्रमाणित क्‍यों नहीं किया, जब एस.टी.एफ के पास जानकारी थी तो.

श्री लालसिंह आर्य :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एस.टी.एफ. ने प्रमाणित किया है कि यह लोग उस गड़बड़ी में हैं. इसलिये वह 23 लोग गिरफ्तार किया गया है, लेकिन जो साक्षात्‍कार लिया जा रहा है, वह साक्षात्‍कार माननीय उच्‍च न्‍यायालय के आदेश में ही किया जा रहा है और दूसरा उन्‍होंने उसमें अण्‍डर टेकिंग यह लिया है कि शर्त लगायें, उनसे लिखकर लें कि यदि इसमें दोषी पाया जाये तो उनको अलग किया जायेगा. इसलिये माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो भी शासन कर रहा है, वह माननीय उच्‍च न्‍यायालय के आदेश के परिपालन में कर रहा है.

श्री रामनिवास रावत :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, राज्‍य सरकार को तुरन्‍त सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिये था. राज्‍य सरकार संरक्षण दे रही है.

अध्‍यक्ष महोदय :- आपकी राय आ गयी है. आपके विषय आ गये हैं, शासन का उत्‍तर आ गया है.

श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा :- क्‍या शासन का यह कोई तरीका है. आपने हाई कोर्ट में इसको कांटेस्‍ट क्‍यों नहीं किया. (व्‍यवधान)

बहिगर्मन

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा शासन के उत्‍तर से असंतुष्‍ट होकर सदन से बहिर्गमन

श्री रामनिवास रावत:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं शासन के उत्‍तर से संतुष्‍ट नहीं हूं, प्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं के साथ अन्‍याय कर रही है. इ‍सलिये हम सदन से बहिर्गमन करते हैं.

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगणों द्वारा शासन के उत्‍तर से संतुष्‍ट नहीं होने और युवाओं के साथ अन्‍याय करने पर सदन से बहिर्गमन किया.)

 

 

 

 

12.38 बजे { उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए.}

 

(2) शाजापुर जिले के ग्राम खेड़ावद में कृषकों को भूमि का उचित मुआवजा न दिये जाना.

 

श्री जसवंत सिंह हाड़ा:- उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण का विषय इस प्रकार है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

राजस्व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्ता)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय,

 

 

श्री जसवंतसिंह हाड़ा--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मंत्री जी के जवाब में जो बात आयी है उसमें केवल मैं इतनी प्रार्थना करूंगा कि मंत्री जी ने जिस बात को जोर देकर कहा था प्रावधान की धारा निरस्त की जा चुकी है. मैं उनको इतना ही ध्यान दिलाना चाहता हूं कि क्योंकि मैं भी मास्टर रहा हूं वह भी रहे हैं, बहुत बच्चे पढ़ाये हैं वह इसको अच्छे तरीके से समझ लेते, पर उसको जोर देकर के इसलिये बताये कि यह निरस्त कर दिया गया. मैं उनको यह ध्यान दिला रहा हूं कि इसमें रामचन्द्र एवं गंगाबाई दोनों पृथक-पृथक थे. 1978 में जब गंगाबाई का देहांत हुआ तो रामचन्द्र ने गलत तरीके से वह जमीन अपने नाम पर नामांतरण करा ली. उनके दत्तक पुत्र ने जब आपत्ति का केस न्यायालय में लगाया तो यह 1979 में उनके पक्ष में मामला गया और यह निर्णय ऐसा हुआ कि यह गलत तरीके से रामचन्द्र जी ने स्वीकार किया और तहसीलदार ने 1982 में गलत तरीके से वह जमीन सीलिंग एक्ट 1974 के तहत 22 किसानों को बांटने का प्रस्ताव बनाया और 2008 में कलेक्टर शाजापुर ने विस्तार से प्रतिवेदन भेजा, 2011 में कलेक्टर साहब ने पुनः भेजा उसमें लिखा गया है कि उसकी जमीन वहां पर हो सकती है तो किसान को उपलब्ध करायें. उसके बाद 2013-14 में उसके चार-चार प्रतिवेदन आये. आज मंत्री जी कह रहे हैं तो मुझे इतना दुःख हो रहा है और मैं इस बात को कहना चाहता हूं कि उनको मुआजवा देंगे अथवा नहीं. अगर नहीं देंगे तो आप शासन स्तर पर निर्णय ले रहे हैं, क्या निर्णय ले रहे हैं, यह बता दें, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उसके बाद वह किसान दर दर, मारा मारा फिर रहा है । मैं आपके सामने सदन में घोषणा करता हूं कि अगर अधिकार हो तो मेरे स्‍वेच्‍छानुदान से उस गरीब किसान को राशि दे दें । गलत तरीके से उसकी जमीन बांट दी, जमीन भी नहीं दे रहे हैं और मुआवजा की परिभाषा बता रहे हैं । धारा 16 के अंदर यह मूल अधिकार है किसान की संपत्ति और उसके हक के लिए यह मुआवजा नहीं है । मुआवजा लेने का नियम क्‍या है, जब सरकार को रोड़ के लिए जमीन चाहिए, भवन निर्माण के लिए चाहिए, उसको तो सीलिंग एक्‍ट के कारण दी है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप बहुत अच्‍छे से जानते हैं, आपकी जमीन भी 74 में लपेट में आई होगी । इसके तहत वह जमीन ली थी । राजस्‍व मण्‍डल का 2001 में गलत तरीके का निर्णय हुआ है, उसमें भी स्‍पष्‍ट किया था । माननीय मंत्री जी शासन स्‍तर पर क्‍या निर्णय लेंगे, क्‍या किसान को मुआवजा देंगे ? कितने दिन में देंगे, यह भी बता दें ?

श्री उमाशंकर गुप्‍ता- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उत्‍तर में मैंने साफ किया है मैंने कहीं मना नहीं किया है । जमीन ली गई है बाद में जमीन सीलिंग से छूट गई । इसी बीच में जमीन 20-22 लोगों को बंट गई है । मैंने अपने उत्‍तर मे कहा है कि उनसे जमीन वापस लेना व्‍यावहारिक नहीं है, क्‍योंकि नियम के हिसाब से तो धारा 89 में माननीय न्‍यायालय द्वारा मुआवजा की राशि निरस्‍त कर दी गई है । जो भी 88 में एक्‍ट बना, क्‍यों बना, उसका मैं उल्‍लेख नहीं करूंगा लेकिन निरस्‍त कर दिया तो मुआवजा नहीं दे सकते हैं । तरीका यही है कि जमीन उनको वापस करें । लेकिन जो खेती कर रहे हैं, किसानों के हित में नहीं होगा, । यह प्रकरण अभी ध्‍यान में आया है । मैं विधायक जी को कहना चाहता हूं कि बहुत जल्‍द हम उस किसान को मुआवजा देने की कार्यवाही करेंगे और अतिशीघ्र करेंगे ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- आपने मुआवजा देने की ही मांग की थी ।

श्री जसवंत सिंह हाड़ा- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, कलेक्‍टर शाजापुर के प्रतिवेदन के आधार पर पूरी जमीन ढूढने की कोशिश की है, जिले में कहीं भी ऐसी जमीन उपलब्‍ध नहीं थी । हम उन किसानों से जमीन वापस लेने के पक्ष में नहीं है किसान भी नहीं है । उनको कोई शासकीय भूमि मिल जाए । बार बार वर्ष 2008,2013,2014 में स्‍पष्‍ट था कि जमीन उपलब्‍ध नहीं है, लेकिन उसके बाद मुआवजे का कोई उल्‍लेख नहीं किया है, उसमें उन्‍होंने क्षतिपूर्ति का उल्‍लेख किया है । हम उसको मुआवजा तो तब देंगे जब सरकार ने लिया हो । मैं मंत्री जी को साधुवाद देता हूं कि शीघ्र कर देंगे और उसको मुआवजा देंगे पर मैं यह चाह रहा था कि .......

उपाध्‍यक्ष महोदय- श्री जसवंत सिंह हाड़ा जी, उन्‍होंने आपको संतुष्‍ट कर लिया है ।

श्री जसवंत सिंह हाड़ा- मैं उनको ह्रदय से साधुवाद देता हूं पर मैं इतना और आपके माध्‍यम से पूछना चाहता हूं कि वह किसान 47 वर्ष से लड़ रहा है तो क्‍या उसको वर्तमान दर से उसको क्षतिपूर्ति देंगे, क्‍या उसको ब्‍याज सहित देंगे ? यह मैं

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया- माननीय हाड़ा जी माननीय मंत्री जी ने बड़ी सह्रदयता के साथ उसको स्‍वीकार किया .......

श्री जसवंत सिंह हाड़ा- यशपाल जी पहले तो यह साफ साफ हो जाए कि आप मेरे वकील हैं या मंत्री जी के वकील हैं । आप वकील किसके है, क्‍योंकि आप व्‍यवसाय से भी वकील हैं ।

श्री ओमप्रकाश सखलेचा- फीस किसने दी है पहले यह तय कर लें ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- आप साथी विधायक की वकालत करें ।

श्री जसवंत सिंह हाड़ा- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उसको वर्तमान दर से या उसको ब्‍याज के साथ देंगे और उसकी समय सीमा भी बता दें ।

श्री उमाशंकर गुप्‍ता- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 37 महीने हो गए हैं तो 37 दिन और इंतजार करना चाहिए, 37 साल के प्रकरण को हम सुलझाने जा रहे हैं माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आप भी मंत्री रहे हैं । केबिनेट में जाएगा विशेष प्रकरण मानकर हमको ले जाना पड़ेगा वहां क्‍या निर्णय होगा यह मैं अभी नहीं कह सकता लेकिन हम चाहेंगे कि कलेक्‍टर का जो भी प्रस्‍ताव आया है उसके हिसाब से किसान को राशि मिल जाए ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- मंत्री जी, उनका प्रश्‍न दूसरा है । जो कलेक्‍टर का प्रस्‍ताव आया है वह अपनी जगह है उनका यह कहना है कि जो प्रचलित बाजार दर है क्‍या उसके आधार पर मुआवजा देंगे ? अगर वे नहीं देंगे तो जो भी पुराना आया है, उसमें ब्‍याज वगैरह जोड़कर देंगे, इन्‍होंने ये 2 प्रश्‍न पूछे हैं.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता उपाध्‍यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि उस किसान को कुछ मिल जाये. जो हो सकता है, मैं वह अधिकतम देने की कोशिश करूँगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय ऐसा प्रस्‍ताव, वे संक्षेपिका के माध्‍यम से केबिनेट में लायेंगे.

श्री जसवंत सिंह हाड़ा उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह कह रहा हूँ कि अगर आपको लगता है कि उसका हक है. यह मैं इस सदन में कह रहा हूँ और अगर उसके साथ अन्‍याय नहीं हुआ हो तो आप पेपर का अध्‍ययन करके देखिये. इसलिए, मैं उसके हक के लिए इतनी बात कर रहा हूँ.

उपाध्‍यक्ष महोदय आपकी बात आ गई है.

श्री जसवंत सिंह हाड़ा उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं कह रहा हूँ कि यह निर्णय उन्‍हीं को, उनके विभाग को लेना है और विभाग के विलम्‍ब के कारण, वह 37 वर्षों से भटक रहा है, उसके बच्‍चे, उनकी पढ़ाई, उनके जीवन-यापन में परेशानियां हैं. यह मेरे विधानसभा क्षेत्र का मामला है.

उपाध्‍यक्ष महोदय मैं आपकी वेदना एवं चिन्‍ता को समझ रहा हूँ. आपकी सारी बातें आ गई हैं. मंत्री जी ने भी स्‍वीकार कर लिया है कि वे इसको लेकर केबिनेट में जायेंगे और यथाशीघ्र इसका निर्णय करायेंगे.

श्री जसवंत सिंह हाड़ा धन्‍यवाद.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(3) होशंगाबाद जिले के देहात थाने में पदस्‍थ पुलिस कर्मियों द्वारा नागरिकों

को प्रताडि़त किया जाना.

पंडित रमेश दुबे (चौरई) - अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यान आकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है:-

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

गृह मंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह) अध्‍यक्ष महोदय,

 

पं.रमेश दुबेमाननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा माननीय मंत्री जी से इतना आग्रह है कि यह आत्‍महत्‍या का विषय है पुलिस प्रताड़ना से आत्‍महत्‍या की गई है. मैं चाहता हूं कि वहां का जो थाना प्रभारी है उसको हटाया जाए साथ ही आई.जी. स्‍तर के अधिकारी से क्‍या जांच कराई जाएगी और अगर झूठी रिपोर्ट पाई जाती है तो उनके खिलाफ जो मामला बना है क्या वह वापस लिया जाएगा.

श्री भूपेन्‍द्र सिंहमाननीय उपाध्‍यक्ष जी इसमें जो एडिश्नल स्‍तर के अधिकारी एडिश्नल एस.पी. को इसके लिए जांच के लिए हमने निर्देशित किया है जवाब में भी इसको लिखा है जहां तक टी.आई. का सवाल है हम टी.आई. को आज ही तत्‍काल हटा देंगे और जांच में जो आपने कहा है वह बिंदु भी सम्मिलित कर लेंगे.

 

 

(4) सीधी जिले में पात्र व्‍यक्तियों के नाम गरीबी रेखा सूची से काटे जाना.

श्री कमलेश्‍वर पटेल (सिहावल)माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)उपाध्‍यक्ष महोदय,

श्री कमलेश्‍वर पटेल माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो माननीय मंत्री जी द्वारा जवाब आया है, वह पूरी तरह से भ्रामक है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सच्‍चाई तो यह है ग्राम उदय से भारत उदय अभियान के तहत गरीबी रेखा में नाम जोड़ने के बजाये यह सरकार गरीबों को उठाने की बजाए गरीबो को खत्‍म करने का काम किया है, ज्‍यादातर अनुसूचित जाति - जनजाति के लोग हैं. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहूंग. इसमें 90 प्रतिशत लोग अनुसूचित जाति जनजाति के लोग हैं, जिन लोगों के नाम काटे गए हैं और जो संख्‍या भी बताई गई है वह भी भ्रामक लोग है. पूरे जिले में बीस हजार से ज्‍यादा नाम काटे गए हैं और विधानसभा क्षेत्र सिंहावल में पांच हजार से ज्‍यादा लोग हैं. यह भी एक जानकारी दी गई है कि जिन्‍दा लोगों के नाम नहीं काटे गए हैं, उजागिर कोल पुत्र निजकउ कोल, दूसरा हिंछा कुशवाह पिता नर्मदा कुशवाह ग्राम गुढ़ाही यह हम उदाहरण स्‍वरूप बता रहे हैं ऐसे कई लेागों के नाम काटे गए हैं, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय जो जिन्‍दा है. इसके खिलाफ पचास किलोमीटर तहसील मुख्‍यालय से लेकर जिला मुख्‍यालय तक बरसते पानी में पदयात्रा भी की थी जिला प्रशासन के खिलाफ, प्रदेश सरकार के खिलाफ. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय मेरा कोई हंगामा खड़ा करने का मकसद नहीं है, मेरा मतलब इतना निवेदन है कि जो लोग पात्र है और जिनका नाम कट गया है या जो अभी विधवा, विकलांग, निराश्रित ऐसे लोग हैं जो वंचित है, जिनको सुविधा नहीं मिल पा रही है, खाद्यान की, या पेंशन की क्‍या पंचायतवार शिविर लगाकर इस तरह की व्‍यवस्‍था करेंगे.

पंचायत एवं ग्रामीम विकास (श्री गोपाल भार्गव) माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, 2002-03 में जब गरीबी रेखा का सर्वे हुआ था, उपाध्‍यक्ष महोदय, उस समय 54,68,000 परिवार बीपीएल सूची में थे, अभी अप्रैल 2016 में 61,82000 परिवार हुए और जब यह ग्रामोदय से भारत उदय अभियान पूरे प्रदेश में चला तो 65 लाख 8 हजार परिवार इसमें और जुड़ गए टोटल संख्‍या इसमें 54 लाख से बढ़कर 65 लाख 8 हजार हो गई है इसका अर्थ यह है लगभग 11 लाख से ज्‍यादा व्‍यक्ति इसमें सम्मिलित हुए. सीधी जिले में भी इसी तरह से 2002-03 में जो आंकड़ा था उससे लगभग दस प्रतिशत लोगों की वृद्धि हुई है. वर्तमान में लगभग 1 लाख 39 हजार लोग इससे लाभान्वित हो रहे हैं. उपाध्‍यक्ष महोदय, समय समय पर जैसे व्‍यक्तियों की मृत्‍यु हो जाती है या व्‍यक्ति कहीं अन्‍य स्‍थान पर रहने लगते हैं, सालों के लिए रोजगार के लिए चले जाते हैं तो स्‍वाभाविक रूप से वह संख्‍या कम हो जाती है, यह बड़ा विस्‍तारित सर्वे हुआ और ग्राम सभा में पूरे नाम पढ़कर सुनाये गये और सुनाने के बाद यह तय हुआ कि यह लोग नहीं है, सर्वसम्‍मति से विस्‍तारित सभाएं हुई है, तीन तीन ग्राम सभाएं हुई है. मैं मानकर चलता हूं कि इससे ज्‍यादा लोकतांत्रिक तरीका और ज्‍यादा बीपीएल सूची के निर्धारण हेतु नहीं हो सकता है.

उपाध्‍यक्ष महोदय, जहां तक मेरा मानना है, हालांकि बीपीएल सूची के जो मापदंड है, आपको भी जानकारी हो, इसमें जो 14 अंक दिए जाते हैं, जिनके आधार पर बीपीएल के अंतर्गत आदमी आता है या नहीं आता है वह है- परिवार द्वारा धारित भूमि शून्‍य होना चाहिए, निरंक होना चाहिए, मकान का प्रकार कोई मकान नहीं होना चाहिए, आवासहीन होना चाहिए, प्रतिव्‍यक्ति पहनने के कपड़ों की उपलब्‍धता सिर्फ दो जोड़ी कपड़ा होना चाहिए, खाद्य सुरक्षा में वर्ष के अधिकांश समय प्रतिदिन एक समय से भी कम भोजन उपलब्‍ध होना चाहिए, खुले में शौच होना चाहिए, उपभोक्‍ता वस्‍तुओं का स्‍वामित्‍व क्‍या निर्धारित, निम्‍नांकित धारित है यह निरंक होना चाहिए, उपभोक्‍ता वस्‍तु कोई होना नहीं चाहिए, सर्वाधिक पढ़े लिखे व्‍यक्ति का शैक्षणिक स्‍तर अशिक्षित होना चाहिए, पारिवारिक श्रम का स्‍तर बंधुआ मजदूर होना चाहिए, जीवीकोपार्जन के साधन आकस्मिक मजदूरी होना चाहिए, बच्‍चों का स्‍तर पांच से चौदह वर्ष का स्‍कूल न जाकर के काम पर जाना चाहिए, देनदारी का प्रकार अनौपचारिक .

देनदारी का प्रकार - अनौपचारिक स्त्रोतों से दैनिक उपयोग के लिये देनदारी होना चाहिये, परिवार के पलायन का कारण आकस्मिक कार्य होना चाहिये. सहायता की प्राथमिकता मजदूरी आधारित रोजगार लक्षित सार्वजनिक प्रणाली होना चाहिये. उपाध्यक्ष महोदय, आप भी भलीभांति जानते हैं और सभी माननीय सदस्य भी जानते हैं यह जो 64 लाख से अधिक परिवार वर्तमान में काम कर रहे हैं. हम यह जानते हैं कि सरकार ने पूरी उदारता के साथ में दुबारा सर्वे करके यह किया है और मैं बड़ी ईमानदारी के साथ में कहना चाहता हूं कि जो बीपीएल के मापदण्ड भारत सरकार ने निर्धारित किये हैं, जो अंक निर्धारित किये हैं इसके बाद भी हमने अपने अधिकारियों और कर्मचारियों से खुले मन से कहा है कि कोई भी पात्र व्यक्ति इसके अधिकार से वंचित नहीं रहना चाहिये. इसके बाद भी यदि कोई वंचित रहा है तो इसके लिये भी व्यवस्था है तहसीलदार, एसडीएम, एडिशनल कलेक्टर, कलेक्टर उसकी सुनवाई कर सकते हैं और 45 दिन में उनको निर्णय करना पड़ेगा और वो पात्रता में आ जायेंगे.

उपाध्यक्ष महोदय- माननीय मंत्री जी, आप अगर यह मापदण्ड कड़ाई से लागू करायेंगे तो 25% लोग ही बीपीएल सूची में बचेंगे, लेकिन माननीय सदस्य का जो प्रश्न है , दो व्यक्तियों के माननीय सदस्य ने नाम लिये हैं, जिनके बारे में सदस्य का कहना है कि वे जीवित हैं और मृत बताकर के उनका नाम बीपीएल सूची से काटा गया है तो एक तो आप उसकी जांच करा लें. (माननीय सदस्य श्री कमलेश्वर पटेल से) आप मंत्री जी को नाम दे दें.

श्री गोपाल भार्गव -- उपाध्यक्ष महोदय, हम उनकी जांच करा लेंगे और उसके अतिरिक्त और भी ऐसे कोई व्यक्ति होंगे और यह सिर्फ इसी विधानसभा क्षेत्र या सीधी जिले में नहीं बल्कि राज्य के किसी भी 230 विधानसभा क्षेत्रों में कहीं पर भी इस प्रकार की शिकायत होगी तो यह कहीं कोई ऐसी बात नहीं है कि यह लक्ष्मण रेखा हो जिसको हम पार नहीं कर सकते हों, हम इसके लिये निश्चित रूप से यदि कोई त्रुटि हुई होगी या फिर गलत हो गया होगा तो हम उसको संशोधित कर देंगे.

श्री कमलेश्वर पटेल -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने आश्वासन दिया जबाव में भी आश्वासन दिया है उसके संदर्भ में कहना चाहता हूं कि हम उन निरीह लोगों की बात कर रहे हैं जिनके पास में इतना किराया भी नहीं है कि वह वकील करके एसडीएम कार्यालय में जाये, फिर एडीएम के यहां पर अपील करें इसीलिये मैं कह रहा हूं अगर आप पंचायतवार व्यवस्था बना देंगे तो हम समझते हैं कि उनको न्याय मिल जायेगा. आप अपात्र लोगों के नाम काटिये, पर पात्र लोगों के नाम मत काटिये. आपसे यही निवेदन है कि आप पंचायतवार शिविर लगवा दीजिये. प्रदेश में 50 लाख से ज्यादा लोगों के नाम कटे हैं.

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य को यह अवगत कराना चाहता हूं कि जो देढ़ महीने तक हमारा ग्रामोदय से भारत उदय अभियान चला, एक नोडल अधिकारी बाहर से आया उसकी निगरानी में 3 ग्राम सभायें गांव की आयोजित की गईं, इसके बाद भी यदि कोई त्रुटि रही है, कहीं कोई कमी रही है तो हम देखेंगे क्योंकि हर गांव में फिर से जाना, मैं मानकर के चलता हूं कि किसी अधिकारी के लिये 52 हजार गांव में जाना संभव नहीं है और इस कारण से संबंधित अपील करें, हम इसके लिये और उदारतापूर्वक निश्चित रूप से व्यवस्था करेंगे कि कोई भी पात्र अपने अधिकार से वंचित न रहे.

उपाध्यक्ष महोदय --देखिये इसकी एक प्रक्रिया है.

श्री कमलेश्वर पटेल-- वह प्रक्रिया मुझे मालूम है. इसीलिये मैंने मंत्री जी से निवेदन किया है कि थोडी सी सहृदयता दिखायें और ऐसी व्यवस्था बना दें क्योंकि मंत्री जी के पास में सारे अधिकार हैं. उपाध्यक्ष महोदय, बहुत सारे ऐसे लोग है जिनके गरीबी रेखा में नाम नहीं है, विधवा, विकलांग,निराश्रित और आज भी उनको योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, खाद्यान नहीं मिल रहा है अगर मंत्री जी ऐसी व्यवस्था बना दें तो जो लोग रह गये हैं उनको भी लाभ मिल जायेगा.

उपाध्यक्ष महोदय-- कमलेश्वर जी, ऐसे लोगों की आप अपील करवायें, मंत्री जी ने आश्वासन दिया है कि संबंधित अधिकारी जो सुनवाई करते हैं, उदारता से वे उस पर विचार करेंगे और पात्र लोगों के नाम जोड़ें जायेंगे.

श्री कमलेश्वर पटेल- उपाध्यक्ष महोदय, ग्रामोदय से भारत उदय में मर्यादा अभियान के तहत लाखों आवेदन हर पंचायत से 300-400 आवेदन जमा हैं, उनका आज तक कोई निराकरण नहीं हुआ है. निराकरण किनका होता है जिनके पास में नगद नारायण होता है, 4-5 हजार रूपये हों तो उनका नाम जुड़ जाता है.

श्री गोपाल भार्गव -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं इतना कह सकता हूं कि 3 ग्राम सभायें हुई हैं इसमें कोई पैसे का सवाल नहीं है, एक बहुत पारदर्शी और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत रिमोट एरिया तक और सूक्ष्म स्तर तक हमने इसका प्रयोग किया है और मैं कहना चाहता हूं कि आप(श्री कमलेश्वर पटेल) जब पद यात्रा कर सकते हैं तो आप नायब तहसीलदार और तहसीलदार के यहां नहीं जा सकते हैं, आप कर सकते हैं.

श्री कमलेश्वर पटेल -- उपाध्यक्ष महोदय, कलेक्टर के यहां गये थे, एसडीएम के यहां गये थे.

श्री गोपाल भार्गव -- उपाध्यक्ष महोदय, एक संशोधित आदेश हम फिर से आज भेज देते हैं कि कोई भी व्यक्ति जो पात्र हो वंचित नहीं रह जाये, नीचले स्तर के अधिकारी को भी हम अधिकार दे देंगे इसकी सुनवाई का.

उपाध्यक्ष महोदय-- कमलेश्वर जी आपकी समस्या का निराकरण हो गया.

श्री कमलेश्वर पटेल --उपाध्यक्ष महोदय, इसके लिये मंत्री जी को धन्यवाद.

श्री जयवर्द्धन सिंह -- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, ऐसा ही मुद्दा बीपीएल सूची के संबंध में इसी महीने आरटीआई इन्क्वायरी के माध्यम से आया था जहां पर कि 8 लाख से अधिक नाम नगरीय क्षेत्र में काटे गये थे क्योंकि उन लोगों के पास में आधार कार्ड नहीं था.जबकि सर्वोच्‍च न्‍यायालय का आदेश है कि आधार कार्ड को आधार बनाकर यदि किसी हितग्राही के पास पहचान पत्र नहीं है तो भी अगर वह बीपीएल लिस्‍ट में है तो उसको पूरा अधिकार मिलना चाहिये, लेकिन वह नाम काटे गये हैं और यह मुद्दा पिछले हफ्ते विधान सभा में उठा भी था, लेकिन अभी भी उसका कोई निराकरण नहीं हुआ है. हर शहर में, हर नगर पंचायत में, हर नगर पालिका में हजारों नाम काटे गये हैं, सिर्फ इसलिये क्‍योंकि उनके पास आधार कार्ड नहीं है. इसके बारे में मैं मानता हूं क्‍योंकि यह मामला मंत्री जी का है तो मंत्री जी उत्‍तर दें और कब तक वह 8 लाख नाम वापस जुड़ जायेंगे.

श्री गोपाल भार्गव-- उपाध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि मैंने कहा कि इतनी बड़ी संख्‍या इन 10 वर्षों में बढ़ गई. 11 लाख परिवार और ज्‍यादा बढ़ गये.

श्री जयवर्द्धन सिंह-- उपाध्‍यक्ष महोदय, यह शहरी क्षेत्र का मुद्दा है.

श्री कमलेश्‍वर पटेल-- बढ़ता तो वहां हैं जहां चुनाव होता है.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- बैठ जाइये कमलेश्‍वर पटेल जी, मंत्री जी इनका कहना यह है कि आधार कार्ड न होने के कारण नाम जो कटे हैं तो क्‍या यह जायज है ?

श्री गोपाल भार्गव-- उपाध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है यह व्‍यवस्‍था दी थी कि आधार कार्ड के साथ में इनका परिचय पत्र लिंक किया जायेगा क्‍योंकि पारदर्शिता बहुत आवश्‍यक है और जिनके आधार कार्ड नहीं बने हैं वह आधार कार्ड बनवा लें, उसके बाद में नाम जुड़ जायेगा.

श्री जयवर्द्धन सिंह-- जिनके नाम काटे गये हैं उनको पूरी सुविधा बीपीएल की अभी नहीं मिल रही है, क्‍योंकि जो लिंक सिस्‍टम है त्रिपल एसएम का उसमें आधार कार्ड न होने के कारण उनको सुविधा नहीं मिल रही है तो उनका क्‍या होगा.

श्री गोपाल भार्गव-- मैं समझता हूं कि यदि आधार कार्ड बनवा लेंगे लोग तो उन्‍हें ही भविष्‍य में सुविधा होगी, मैं मानकर चलता हूं कि यह हमें बनवाना चाहिये, उससे आगे जाकर सभी को लाभ होगा और यदि हम आधार कार्ड के बगैर बनवाये ये सुविधा लेंगे, जैसे शासकीय राशन है और भी अन्‍य योजनायें हैं उनका बहुत बड़ा दुरूपयोग होता है. हमारे देश की पूरी स्‍टेटिक्‍स और सांख्यिकी उसी आधार पर चलती है और वह पूरी की पूरी धीरे-धीरे फेल हो जायेगी.

श्री जयवर्द्धन सिंह-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, उनका अधिकार है और वैसे भी बीपीएल हितग्राहियों को तो ..

उपाध्‍यक्ष महोदय-- नहीं तो बनवा लें.

श्री जयवर्द्धन सिंह-- अतिरिक्‍त पहचान पत्र जिसके बारे में सुप्रीम कोर्ट ने कहा भी है कि कोई भी बीपीएल हितग्राही को आधार कार्ड प्रस्‍तुत करने की आवश्‍यकता नहीं है तो फिर एम.पी. गवर्नमेंट ऐसा क्‍यों कर रही है, जबकि बीपीएल हितग्राही के पास कार्ड तो वैसे भी होता है तो वही काफी होना चाहिये.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, सर्वोच्‍च न्‍यायालय का ऐसा कोई फैसला है, क्‍या.

श्री गोपाल भार्गव-- सर्वोच्‍च न्‍यायालय का 2 वर्ष पहले आदेश हुआ था, लेकिन सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने यह भी नहीं कहा है कि आप बगैर आधार कार्ड के पूरा देश चला सकते हैं.

श्री जयवर्द्धन सिंह-- बीपीएल हितग्राही को पूरी सुविधा मिलना चाहिये, इतना तो कहा है.

श्री गोपाल भार्गव-- उपाध्‍यक्ष महोदय, विचार कर लेंगे.

श्री मुकेश नायक (पवई)-- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने प्रश्‍न के उत्‍तर में बताया कि वर्तमान में 65 लाख 8 हजार बीपीएल कार्डधारी मध्‍यप्रदेश में हैं और जो गरीबी के मापदण्‍ड बताये उसमें यह बताया, खुले में शौच करना चाहिये, दो जोड़ी कपड़े होना चाहिये, एक समय भोजन करना चाहिये, घर नहीं होना चाहिये और अंत में उन्‍होंने यह कहा कि हितग्राही को बंधुआ मजदूर होना चाहिये. मैं आपके माध्‍यम से मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि बंधुआ मजदूरी के खिलाफ राज्‍य शासन का भी कानून है और केन्‍द्र शासन का भी कानून है और मंत्री जी अपने उत्‍तर में जो यह कह रहे हैं कि बंधुआ मजदूर होना चाहिये, सबसे पहले तो यह पूरे कानून का एक्‍ट का वायलेशन है स्‍टेट के और सेंट्रल गवर्नमेंट के कानून का, उनका उत्‍तर है. दूसरी बात मैं उनसे यह पूछना चाहता हूं कि 65 लाख 8 हजार में से कितने हितग्राही हैं जो बंधुआ मजदूर हैं, कितने हितग्राही हैं जिनके पास केवल 2 जोड़ी कपड़े हैं, कितने हितग्राही हैं जो खुले में शौच करते हैं और कितने हितग्राही हैं जो केवल एक समय भोजन करते हैं और कितने हितग्राही हैं जिनके पास मकान नहीं है.

उपाध्‍यक्ष महोदय-- नायक जी, इतनी विस्‍तृत जानकारी इस समय नहीं दी जा सकती.

श्री मुकेश नायक-- तो केवल एक प्रश्‍न का उत्‍तर दे दें. माननीय मंत्री जी यह बताने की कृपा करें कि कितने बंधुआ मजदूर हैं और बंधुआ मजदूरी प्रथा को इन्‍होंने मध्‍यप्रदेश में चालू रखा है क्‍या और साढ़े सात करोड़ लोगों में से 65 लाख 8 हजार लोग अगर गरीबी रेखा में हैं तो शिवराज सिंह जी की सरकार का मध्‍यप्रदेश में क्‍या हाल है आप स्‍वयं जान सकते हैं.

श्री गोपाल भार्गव - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, नायक जी कुतर्क कर रहे हैं. कुतर्क इस तरह से कर रहे हैं कि भारत सरकार के कटआफ मार्क्स जो हैं उसके स्थापित नियम हैं. हमारे लिये सर्वे हुआ उसके आधार पर बी.पी.एल. के मानक तय किये गये. यदि जो निर्धारित अयोग्यताएं या फिर जो मार्क्स निर्धारित हैं. एक-एक नंबर,तेरह-चौदह विषयों के लिये, यदि लोगों के नहीं होते हुए भी हम उनको बी.पी.एल. में शामिल कर रहे हैं, तो यह हमारी सरकारी की उदारता है. उसको धन्यवाद देने के बजाय उसको मजाक का विषय बना रहे हैं. आप क्या चाहते हैं क्या 65 लाख के लोगों के नाम काट दिये जायें, क्या विलोपित कर दिये जायें ?

श्री मुकेश नायक - यह तो उनका अधिकार है. यह तो उद्भूत होता है इस प्रश्न से. आप यह बता दीजिये कि मध्यप्रदेश में कितने बंधुआ मजदूर हैं ?

श्री गोपाल भार्गव - मैं श्रम विभाग में काम नहीं करता न उस विभाग का मंत्री हूं.

श्री शंकरलाल तिवारी - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, यह गाईड लाईन कांग्रेस के जमाने में केन्द्र सरकार से बनी है दूसरी बात कांग्रेस यह स्पष्ट कर दे कि वह कटवाना चाहती है या जुड़वाना चाहती है. एक कह रहा है काटो एक कह रहा जोड़ो.

उपाध्यक्ष महोदय - मैंने आपको अनुमति नहीं दी है. आप कृपया बैठ जायें.

(..व्यवधान..)

श्री मुकेश नायक - हम अपात्र लोगों के नाम कटवाना चाहते हैं और पात्र लोगों के नाम जुड़वाना चाहते हैं.

श्री कमलेश्वर पटेल - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो शौचालय का क्रायटीरिया बताया है. यह डंडे मारकर जो गरीबों के यहां शौचालय बनवा रहे हैं, अगर उनके यहां शौचालय बन गये तो एक भी गरीब गरीबी रेखा में नहीं रह जायेगा.

उपाध्यक्ष महोदय - बैठ जाईये.

श्री गोपाल भार्गव - यदि राज्य के 65 लाख बहुसंख्यक लोग आज भी वंचित हैं,आज भी लाचार हैं, आज भी वे दो समय खाना खाने की स्थिति में नहीं हैं, कमाने की स्थिति में नहीं है तो हम उनके लिये सुविधा दे रहे हैं और सदस्य विरोध कर रहे हैं. इसका अर्थ यह है कि आप बाहर मैसेज देना चाहते हैं कि उनके नाम कटवा दो.

श्री कमलेश्वर पटेल - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में हजारों,लाखों की संख्या में नाम कट रहे हैं. हम लोग क्या चाह रहे हैं सरकार काट रही है.

उपाध्यक्ष महोदय - बैठ जायें.

श्री शंकरलाल तिवारी - माननीय उपाध्यक्ष महोदय, उदारता से जो दिया जा रहा है उसका मैं स्वागत करता हूं परंतु इस गाईड लाईन में संशोधन की बात जो वास्तविक धरातल की हो वह होनी चाहिये. गाईड लाईन और गरीबी रेखा में इतना फासला नहीं हो कि हम सिर्फ उदारता दिखाएं.

उपाध्यक्ष महोदय - यह गलत है. आप बैठें. नहीं तो हम कार्यवाही से निकाल देंगे. आप सुनते नहीं हैं. जिसको जो समझना हो सब समझ गये हैं.जिसको जिस रंग से देखना है सब इस चीज को देख चुके हैं. अब इस बात का पटाक्षेप करें.

श्री मुकेश नायक - पैंसठ लाख लोग यह कह रहे हैं कि वे खाना खाने की स्थिति में नहीं है तो इनकी सरकार 13 साल से मध्यप्रदेश में क्या कर रही है यह बताएं.

श्री गोपाल भार्गव - यह इस तरह से प्रश्न और प्रतिप्रश्न करके आप लोग क्या राज्य के लाखों लोगों का अहित करना चाहते हैं ? यदि करना चाहते हो तो आप बताएं. यह इस बात को उद्भूत करता है कि आप उनका नाम कटवाना चाहते हैं क्योंकि भारत सरकार इसकी अनुमति नहीं देती.

श्री मुकेश नायक - हम चाहते हैं कि अपात्र लोगों के नाम काटें और पात्र लोगों के नाम जोड़ें.ज्यादातर अपात्र लोगों के राशनकार्ड बने हुए हैं और पात्र लोगों के नाम नहीं जोड़े गये हैं.

(..व्यवधान..)

उपाध्यक्ष महोदय - अब किसी सदस्य का नहीं लिखा जायेगा. प्रतिवेदनों की प्रस्तुति. सुश्री मीना सिंह माण्डवे...

 

 

 

 

 

01.18 बजे प्रतिवेदनों की प्रस्तुति

 

 

(2) शासकीय आश्‍वासनों संबंधी समिति का सत्रहवां, अठारहवां एवं उन्‍नीसवां प्रतिवेदन

डॉ. राजेंद्र पाण्‍डेय, सभापति - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं शासकीय आश्‍वासनों संबंधी समिति का सत्रहवां, अठारहवां एवं उन्‍नीसवां प्रतिवेदन प्रस्‍तुत करता हूं. साथ ही सदन के मध्‍य अपनी और समिति की भावना भी व्‍यक्‍त करते हुए समिति के सदस्‍यों और सचिवालय का आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं. चूंकि लगातार आपकी सजगता और सदस्‍यों की सक्रियता के कारण आश्‍वासन काफी बढ़े और समिति ने काफी तेजी के साथ काम किया और उन आश्‍वासनों का निराकरण भी किया. प्रतिवेदन प्रस्‍तुत है. आप सबका बहुत बहुत धन्‍यवाद.

 

1.21बजे याचिकाओं की प्रस्‍तुति

उपाध्‍यक्ष महोदय - आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्‍तुत की हुई मानी जावें.

 

शासकीय विधि विषयक कार्य

उपाध्‍यक्ष महोदय - आज की कार्यसूची के पद 6 के अंतर्गत शासकीय विधि विषयक कार्य के पद (1) एवं (2) में उल्‍लेखित विधेयकों की महत्‍ता एवं उपादेयता को दृष्टिगगत रखते हुए, मैंने स्‍थायी आदेश की कंडिका 24 में विनिर्दिष्‍ट, अपेक्षाओं को शिथिल कर आज पुर:स्‍थापन हेतु प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत करने की अनुमति प्रदान की है.

मैं समझता हूं कि सदन इससे सहमत है.

सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.


 

(1) मध्‍यप्रदेश नगरपालिक विधि( द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2016 (क्रमांक 22 सन् 2016)

 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्रीमती माया सिंह) - उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश नगरपालिक विधि (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहती हूं.

उपाध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश नगरपालिक विधि (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाए.

अनुमति प्रदान की गई.

 

श्रीमती माया सिंह - उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश नगरपालिक विधि (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन करती हूं.

 

(2) मध्‍यप्रदेश भूमिस्‍वामी एवं बटाईदार के हितों का संरक्षण विधेयक, 2016(क्रमांक 23 सन् 2016)

 

राजस्‍व मंत्री (श्री उमांशकर गुप्‍ता) - उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश भूमिस्‍वामी एवं बटाईदार के हितों का संरक्षण विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन की अनुमति चाहता हूं.

उपाध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश भूमिस्‍वामी एवं बटाईदार के हितों का संरक्षण विधेयक, 2016 के पुर:स्‍थापन की अनुमति दी जाए.

अनुमति प्रदान की गई.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता - उपाध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश भूमिस्‍वामी एवं बटाईदार के हितों का संरक्षण विधेयक, 2016 का पुर:स्‍थापन करता हूं.


 

1.23 बजे वर्ष 2006-2007 के आधिक्‍य व्‍यय की अनुदान मांगों पर मतदान

 

वित्‍तमंत्री (श्री जयंत मलैया) - उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं राज्‍यपाल महोदय की सिफारिश के अनुसार प्रस्‍ताव करता हूं कि :-

"दिनांक 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त हुए वित्‍तीय वर्ष में अनुदान संख्‍या 24 एवं 67 के लिये स्‍वीकृत राशि के अतिरिक्‍त किये गये समस्‍त आधिक्‍य व्‍यय की पूर्ति के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को तीस करोड़ सत्‍ताईस लाख, नौ हजार, छ: सौ सतानवे रूपये की राशि दिया जाना प्राधिकृत किया जाय. "

उपाध्‍यक्ष महोदय - प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ.

उपाध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न यह है कि -

"दिनांक 31 मार्च, 2007 को समाप्‍त हुए वित्‍तीय वर्ष में अनुदान संख्‍या 24 एवं 67 के लिये स्‍वीकृत राशि के अतिरिक्‍त किये गये समस्‍त आधिक्‍य व्‍यय की पूर्ति के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को तीस करोड़ सत्‍ताईस लाख, नौ हजार, छ: सौ सतानवे रूपये की राशि दिया जाना प्राधिकृत किया जाय. "

 

आधिक्‍य मांगो का प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

 

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन) - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि एक तो यह जो विधेयक है, जहां तक मैंने समझा है यह विनियोग है इसका प्रस्‍तुतीकरण ही गलत है. वर्ष 2006-07 के अनुपूरक में आप इसको क्‍यों नहीं लाये.

श्री जयंत मलैया - आप भी जानते हैं जब यह लोक लेखा समिति जिसके अध्‍यक्ष आदरणीय महेंद्र सिंह कालूखेड़ा हैं, उनका 20 वां प्रतिवेदन अभी आयेगा उसके बाद ही तो इसके ऊपर बात आयेगी.

श्री बाला बच्‍चन - आप मेरी पूरी बात सुन लें.

उपाध्‍यक्ष महोदय - उनकी पूरी बात सुन लें.

श्री बाला बच्‍चन - दूसरा एक डिटेल आना चाहिए. डिटेल इसका कुछ भी नहीं है कि दस साल बाद जो राशि सदन में स्‍वीकृत की है. दस साल बाद में आप उसमें तीस करोड़ रूपये और खर्च करना जो बताते हैं. माननीय मंत्री जी मेरे पास मध्यप्रदेश विनियोग क्रमांक 2016 है. आपने कार्यसूची में 30 करोड़ रुपये का आंकड़ा दिया है. मेरे पास जो विधेयक है उसमें 31 मार्च 2007 को समाप्त हुए वर्ष के कतिपय आधिक्य व्यय की पूर्ति करने के लिए मध्यप्रदेश राज्य की संचित निधि में से रुपये 35 करोड़ 99 लाख 34 हजार 526 की राशि दी जाये, यह आंकडा है. मेरे हिसाब से सूची में भी गलत प्रिंट है. इन दोनों में से सच क्या है? सूची में जो प्रिंट हुआ है वह जो अभी आपने पढ़ा वह है तो इतना बड़ा अन्तर सूची में और विधेयक में है तो इन दोनों में से सच क्या है? 35 करोड़ रुपये या 30 करोड़ रुपये है?

श्री जयन्त मलैया-- 35 करोड़ 99 लाख रुपये.

श्री बाला बच्चन-- आपने अभी सूची में से 30 करोड़ रुपये पढ़ा. कितनी बड़ी चूक है.

उपाध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्रीजी आप इकट्ठा जवाब दे देंगे.

श्री बाला बच्चन-- लेकिन कितनी बड़ी चूक है. माननीय मंत्रीजी मद 5 में 35 करोड़ रुपये आना चाहिए उसकी जगह सूची में 30 करोड़ लिखा है यह बहुत बड़ी चूक है. आदरणीय रावत जी और मैंने इसको देखा. मैं भी इसको थोड़ा कन्फर्म करने में लगा था. वर्ष 2006-07 के अनुपूरक के बजाय अभी आपने आधिक्य व्यय लाना बताया है. सरकार के संज्ञान में 10 साल बाद क्यों आया है? मैं यह भी जानना चाहता हूं कि सदन में जो राशि स्वीकृत होती है और उससे ज्यादा खर्च हो गया. आज के दोनों जो विधेयक हैं उसमें 160 करोड़ रुपये का अंतर है. एक राशि वर्ष 2006-07 की है दूसरी 2010 की है यानि 10 साल और 7 साल पहले जो सदन ने स्वीकृति दी थी उससे लगभग 160 करोड़ रुपये जो अधिक खर्च हुआ उसकी स्वीकृति अभी मांग रहे हैं. उपाध्यक्ष महोदय, मैंने गलत इसलिए बोला कि इसका भी तरीका होता है. बजट बनता है उसकी बुक छपती है जिसको हम पढ़ते हैं उसमें मुख्य शीर्ष में जो मांगे होती हैं उन मांगों में जिन जिन मदों में राशियों का उल्लेख किया जाता है. आप जो राशि की स्वीकृति लेना चाह रहे हैं उसको आपने कहां कहां और कैसे कैसे खर्च किया है वह बतायें. दूसरे विधेयक की बात मैं बाद में करुंगा. आपने लोक निर्माण सड़क तथा पुल पर 2 करोड़ 48 लाख 32 हजार 322 रुपये खर्च करना बताया है. दूसरा, आप इसको तो भूल गये कि लोक निर्माण सड़क तथा पुल के पूंजीगत पर 5 करोड़ 72 लाख 24 हजार 829 रुपये को तो आपने सूची में से मिस कर दिया है आपने उसको माना भी है कि 30 करोड़ रुपये के बजाय 35 करोड़ रुपया होना चाहिए. अनुदान संख्या 24 और 67 राजस्व में 27 करोड़ 78 लाख 77 हजार 375 रुपये का है. मैं इसका डिटेल जानना चाहता हूं कि किस मांग संख्या के किस मद के अंतर्गत आपको खर्च करना था वह आपने सिर्फ ऐसा ही बना दिया है. मेरे हिसाब से गलत प्रस्तुतीकरण है. आप 10 साल और 7 साल बाद विधानसभा में ला रहे हैं और आपने 160 करोड़ रुपये खर्च कर डाले उसकी जानकारी आप ठीक ढंग से बनाकर नहीं ला रहे हैं. कार्यसूची में आप 30 करोड़ रुपये लिखते हैं उसके बाद विधेयक में 35 करोड़ रुपये का उल्लेख है. मंत्रीजी मैं आपसे आग्रह करना चाहता हूं कि इतने वरिष्ठ मंत्री से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई है. सदन में जो बजट पास होता है. मैं समझता हूं कि सदन का भी यह खुल्लमखुल्ला अपमान है. 10 साल बाद आप 35 करोड़ रुपये की राशि लेना और दूसरे विनियोग विधेयक में 123 करोड़ रुपये लेंगे. अगर इसको देखकर और व्यवस्थित करके लायेंगे तो मैं समझता हूं कि ज्यादा ठीक है. इसको थोड़ी गंभीरता से सरकार और माननीय मंत्रीजी लेंगे तो ज्यादा बेहतर होगा. मैं समझता हूं कि आपको भी इसमें व्यवस्था देना चाहिए. मंत्रीजी ऐसा होना नहीं चाहिए.

श्री रामनिवास रावत--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी द्वारा अभी अनुपूरक अनुमान और विनियोग विधेयक पारित कराया. राज्य के विकास के लिए अभी राशि दी गई. अब राशि राज्य के विकास के लिए दी या काहे के लिए दी यह तो माननीय मंत्रीजी बता सकते हैं. अभी आप अधिक व्यय की पूर्ति के लिए सदन से राशि मांग रहे हैं.

अध्यक्षीय घोषणा

सदन के समय में वृद्धि विषयक.

उपाध्यक्ष महोदय-- कार्यसूची के पद 10(1) तक की कार्यवाही पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाये, मैं समझता हूं सदन इससे सहमत है.

सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई.

 

 

श्री रामनिवास रावत - उपाध्यक्ष महोदय, लंच कर दें इसको बाद में ले लें.

उपाध्यक्ष महोदय - नहीं, थोड़ा-सा ही बचा है.

श्री रामनिवास रावत - विद्यासागर जी भी आने वाले हैं. इसमें अभी एक और है, दोनों विनियोग विधेयक साथ में प्रस्तुत नहीं किये हैं, देखा जाय तो अभी एक ही प्रस्तुत किया है.

उपाध्यक्ष महोदय - आप संक्षेप में बात कह लें, मुख्य बात श्री बाला बच्चन जी ने कह दी है, बात रिपीट न करें.

श्री रामनिवास रावत - आधिक्य व्यय जो हुआ है, आप बजट प्रस्तुत करते हैं, बजट अनुमान लगाते हैं, बजट पारित कराते हैं.

उपाध्यक्ष महोदय - मेरी राय है कि दूसरे पर भी कह लें क्योंकि वही बात आप दूसरे में भी कहेंगे.

श्री रामनिवास रावत - नहीं, दूसरा अलग है. जो आधिक्य व्यय की स्थिति है, यह स्थिति क्यों बनी? आपने विभागों के नाम दिये हैं, जबकि स्थिति यह होना चाहिए थी कि लोक लेखा समिति की रिपोर्ट के साथ या आप अपनी रिपोर्ट के साथ यह प्रस्तुत करते कि मध्यप्रदेश के किस जिले के किस पुल और किस सड़क में ज्यादा राशि व्यय की गई, किन कारणों से की गई, क्यों राशि अधिक व्यय हुई, इसका अनुमान क्यों नहीं लगाया जा सका? इसका पहले अनुमान लगाना चाहिए था. वर्ष 2007 की राशि अधिक व्यय होने के बाद आज आप वह राशि मांग रहे हैं, 35 करोड़ रुपए की राशि मांग रहे हैं. आपको वर्ष 2008 मिला, वर्ष 2009 मिला, अभी तो वर्ष 2016 है. उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी हंस रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी जवाब देंगे.

श्री रामनिवास रावत - हो सकता है कि कोई जरूरी नहीं है. चाहे जैसे खर्च करें, चाहे जैसे जब मांग लो, बहुमत है, हम विरोध करते रहें तो फर्क नहीं पड़ना. उपाध्यक्ष महोदय, हम चाहते हैं कि इस तरह का एक विवरण आधिक्य व्यय के संबंध में विधान सभा में प्रस्तुत होना चाहिए कि किस विभाग के किस मद में किस पर्टिक्युलर काम में अधिक व्यय हुआ, यह क्यों हुआ इसके लिए क्या कारण रहे, क्यों इसकी राशि बढ़ी, क्यों यह व्यय भार बढ़ा, किसके द्वारा अधिक व्यय किया गया, इसके लिए कौन उत्तरदायी है? इसके बाद राशि की मांग की जानी चाहिए, मेरा यह निवेदन है.

उपाध्यक्ष महोदय, उन्होंने इसी तरह से वर्ष 2009-10 का आधिक्य व्यय प्रस्तुत किया है, जबकि जो अधिक व्यय होता है, उसके वित्तीय वर्ष में तो अगले ही वित्तीय वर्ष में यह व्यवस्था होनी चाहिए कि अगले वित्तीय वर्ष में ही उस व्यय की प्रतिपूर्ति करें. 7-7-, 8-8 साल तक उस व्यय की प्रतिपूर्ति नहीं होना, कहीं न कहीं यह वित्तीय अनियमितता की ओर संकेत करता है. या तो किसी महालेखाकार ने पकड़ा हो, या लोक लेखा समिति ने पकड़ा हो, अगर नहीं पकड़ा होता तो आप इसकी भी पूर्ति नहीं कराते. यहां से अभी भी मांग नहीं करते. अभी तक जो राशि खर्च की है, वह किस मद की राशि थी? उसका आपने भुगतान तो कर दिया होगा, भुगतान तो अपेक्षित नहीं है? वह किस मद में किस अनुदान संख्या में से और किस राशि में से आपने व्यय किया? आप अब उसकी प्रतिपूर्ति कर रहे हैं. यह स्पष्ट बात आना चाहिए. इससे नहीं तो यह परिलक्षित होता है कि वित्तीय अनियमितता इसमें हुई है. वित्तीय अनियमितता नहीं हो, इसको रोकने के लिए ठोस नियम बनें ऐसी व्यवस्था हो, हम यह अपेक्षा करते हैं. माननीय वित्त मंत्री जी ने जो आधिक्य व्यय के लिए दो विनियोग विधेयक प्रस्तुत किये हैं, उनका मैं विरोध करता हूं. आप ना जाने किसके पापों की प्रतिपूर्ति कर रहे हैं?

वित्त मंत्री (श्री जयंत मलैया) - उपाध्यक्ष महोदय, महालेखाकार के अंकेक्षण दलों द्वारा विभिन्न शासकीय कार्यालयों का अंकेक्षण किया जाता है. अंकेक्षण की प्रक्रिया के अंतर्गत अंकेक्षण प्रतिवेदनों को समेकित कर पुस्तिका के स्वरूप में संविधान के अनुच्छेद 151 के अंतर्गत माननीय राज्यपाल को प्रस्तुत की जाकर विधान सभा के पटल पर प्रस्तुत की जाती है. उक्त प्रतिवेदनों पर लोक लेखा समिति में विचार किया जाता है. इस विचारण प्रक्रिया में विभागों से प्रश्नावली रूप में उत्तर प्राप्त किये जाने के बाद आवश्यकतानुसार विभागों के सचिवों से साक्ष्य प्राप्त किये जाते हैं. जब लोक लेखा समिति में विभागों के सचिवों से साक्ष्य प्राप्त किये जाते हैं, तब उसमें यह देखा जाता है कि यह नियमितीकरण करने योग्य है या नहीं है, किस कारण से यह हुआ है और इसके लिए क्या कोई दोषी है. अगर कोई व्यक्ति दोषी होता है तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाती है. मैं यहां निवेदन करना चाहता हूं कि संभवतः इन्होंने देखा नहीं है. यह लोक लेखा समिति का 20वां प्रतिवेदन है. इसमें लिखा है कि वर्ष 2006-07 में जिन्होंने अनियमितताएं की हैं, उनमें 41 लोगों के खिलाफ कार्यवाही की गई है और उसके अलावा कई लोगों का वेतन भी रोका गया है. यह पूरा का पूरा इसमें उल्लेख है. परन्तु अगर आप पढ़ेंगे नहीं तो आपको जानकारी नहीं मिलेगी. यह परम्परा केवल यहां ही नहीं है, यह सब जगह होता है.

श्री रामनिवास रावत - मैं यह कह रहा हूं कि इसमें उल्लेख होना चाहिए.

श्री जयंत मलैया - उपाध्यक्ष महोदय, मुझे नहीं पता, यह व्यवस्था तो सचिवालय की होगी कि किस चीज का उल्लेख होना चाहिए या किस चीज का उल्लेख नहीं होना चाहिए. मैं यहां यह और निवेदन करना चाहता हूं कि साथ-साथ इसके बारे में इसमें कारण भी रहता है कि यह आधिक्य क्यों हुआ. आधिक्‍य होने के कारण जो लोक लेखा समिति होती है उसके रिकमंडेशंस रहते हैं उन्‍हीं रिकमंडेशंस के आधार पर काम किया जाता है. अभी वर्ष 2009-10 का प्रतिवेदन आएगा तो उसमें चार विभाग आते हैं चारों विभागों में अब आप कहेंगे कि आधिक्‍य की स्थिति कैसे बनी. जब आप बजट बना रहे थे तब आपको उसी समय ख्‍याल रखना करना चाहिए था कि किस प्रकार का बजट होगा. अब 6वां वेतन आयोग आ गया जैसे अभी 7वां वेतन आयोग आ गया तो वह आधिक्‍य का व्‍यय तो होगा. उसको हमने उसमें लिया है. यह एक सामान्‍य सी प्रक्रिया है. अगर आप लोग पढ़ेगें, समझने की कोशिश करेंगे तो आप लोगों को समझ में आएगा.

मेरा निवेदन यह है कि यह हमेशा से रहा है. यह पुराने वर्षों के और यह तब होता है जब एजी साहब की टीप अलग-अलग विभागों में जाकर अंकेक्षण का कार्य करती है, रिपोर्ट सबमिट करती है और उसके बाद अपने ऑब्‍जर्वेशन के साथ सरकार को भेजती है. फिर यह लोक लेखा समिति में जाती है और लोक लेखा समिति के अध्‍यक्ष हमेशा प्रतिपक्ष के होते हैं. इस तरीके से कोई गड़बड़ी न हो सके इसीलिए लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था बनाई गई है. इसमें अगर आपको कुछ और भी पूछना हो मुझसे, तो आप पूछ सकते हैं. दूसरी बात मैं बाला बच्‍चन जी की करूंगा. यह जो दो बातें आई थी 30 करोड़ 27 लाख 9 हजार 697 रूपये जो कि मैंने अपने इसमें उल्‍लेख किया है. इसका यह मतदत्‍त है और जो 35 करोड़ रूपये का है यह भारत अनुदान है जिसके ऊपर विधान सभा में मतदान नहीं होता है.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न यह है कि दिनांक 31 मार्च 2007 को समाप्‍त हुए वि‍त्‍तीय वर्ष में अनुदान संख्‍या 24 एवं 67 के लिए स्‍वीकृत राशि के अतिरिक्‍त किए गए समस्‍त आधिक्‍य व्‍यय की पूर्ति के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को 30 करोड़ 27 लाख 9 हजार 697 रूपये की राशि दिया जाना प्राधिकृत किया जाए.

 

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

1:37 बजे शासकीय विधि विषयक कार्य

मध्‍यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-4) विधेयक, 2016

 

वित्‍त मंत्री (श्री जयंत मलैया) -- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं मध्‍यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-4) विधेयक, 2016 का पुर:स्‍थापन करता हूँ. अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूँ कि मध्‍यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-4) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाए.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्‍यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-4) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाय.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-4) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाए.

 

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

 

उपाध्‍यक्ष महोदय -- अब विधेयक के खण्‍डों पर विचार होगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 2, 3 तथा अनुसूची इस विधेयक का अंग बने.

 

खण्‍ड 2, 3 तथा अनुसूची इस विधेयक का अंग बने.

 

उपाध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न यह है कि खण्‍ड 1 इस विधेयक का अंग बने.

 

खण्‍ड 1 इस विधेयक का अंग बना.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न यह है कि पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

 

श्री जयंत मलैया -- उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूँ कि मध्‍यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-4) विधेयक, 2016 पारित किया जाय.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न यह है कि मध्‍यप्रदेश विनियोग (क्रमांक-4) विधेयक, 2016 पारित किया जाय.

 

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

विधेयक पारित हुआ.

 

वर्ष 2009-2010 के आधिक्‍य व्‍यय की अनुदान मांगों पर मतदान

श्री जयंत मलैया -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं राज्‍यपाल महोदय की सिफारिश के अनुसार प्रस्‍ताव करता हूँ कि :-

दिनांक 31 मार्च, 2010 को समाप्‍त हुये वित्‍तीय वर्ष में अनुदान संख्‍या 3, 27, 32 एवं 49 के लिये स्‍वीकृत राशि के अतिरिक्‍त किये गये समस्‍त आधिक्‍य व्‍यय की पूर्ति के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को एक सौ तेईस करोड़, पचानवे लाख, बत्‍तीस हजार, पांच सौ चालीस रूपये की राशि दिया जाना प्राधिकृत किया जाय.

 

प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ.

 

उपाध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न यह है कि दिनांक 31 मार्च, 2010 को समाप्‍त हुये वित्‍तीय वर्ष में अनुदान संख्‍या 3, 27, 32 एवं 49 के लिये स्‍वीकृत राशि के अतिरिक्‍त किये गये समस्‍त आधिक्‍य व्‍यय की पूर्ति के निमित्‍त राज्‍यपाल महोदय को एक सौ तेईस करोड़, पचानवे लाख, बत्‍तीस हजार, पांच सौ चालीस रूपये की राशि दिया जाना प्राधिकृत किया जाय.

आधिक्‍य मांगों का प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

 

श्री बाला बच्चन -- उपाध्यक्ष महोदय हमें इस पर बोलना है.

उपाध्यक्ष महोदय -- हम तो आगे बढ़ गये हैं.

श्री बाला बच्चन -- हमें तो बोलना है इस पर हमें लगा कि आप हमें इस पर बोलने के लिए चांस देंगे. यह 123 करोड़ रूपये का मामला है हम इस पर दो मिनट बोलना चाहते हैं.

उपाध्यक्ष महोदय -- आप विनियोग विधेयक पर बोल लीजियेगा.

श्री बाला बच्चन -- ठीक है.

1.41 बजे. शासकीय विधि विषयक कार्य (क्रमश:)

मध्यप्रदेश विनियोग (क्रमांक 5 ) विधेयक,2016(क्रमांक 20 सन् 2016)

वित्त मंत्री (श्री जयंत मलैया) -- उपाध्यक्ष महोदय मैं प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश विनियोग (क्रमांक 5) विधेयक, 2016 का पुर:स्थापन करता हूं.

उपाध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश विनियोग (क्रमांक 5)विधेयक,2016 पर विचार किया जाय.

उपाध्यक्ष महोदय -- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश विनियोग (क्रमांक 5 ) विधेयक 2016 पर विचार किया जाय.

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष ( श्री बाला बच्चन ) -- उपाध्यक्ष महोदय, जब मैं आग्रह कर रहा था कि इस पर बोलने के लिए दो मिनट का समय दिया जाय तो माननीय मंत्री जी कह रहे थे कि आगे बढ़ गये हैं. मैं उनको आपके माध्यम से बताना चाहता हूं, सरकार की जानकारी में लाना चाहता हूं. देखिये अरूणाचल प्रदेश में जो 7 माह आगे घड़ी का कांटा बढ़ चुका था सुप्रीम कोर्ट ने उसे पीछे कर दिया है.

उपाध्यक्ष महोदय -- बाला जी, सुप्रीम कोर्ट जो करता है वह करने दें. जो हमें करना है वह हम करेंगे. यह भी संवैधानिक संस्था है अलग से, कमतर नहीं है सुप्रीम कोर्ट से.

श्री बाला बच्चन -- आप बोल ही रहे थे उसी बीच में हमने अपनी बात रखी थी. घड़ी का कांटा भी पीछे किया जा सकता है. वह भाजपा ने शायद 7 माह तक सरकार चलायी थी उसके बाद में हमारी पार्टी सरकार में आयी है.

उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से यह जानना चाहता हूं कि पहले वाले विनियोग में यह निवेदन किया था कि आप पुलिस विभाग में पुलिस अनुदान की जो संख्या है उसमें लगभग आप 86 करोड़ रूपये ले रहे हैं. हम इसमें यह जानना चाहते हैं आधिक्य है 86 करोड़ रूपये का जो कि 6 साल पुरानी बात है, इसकी विस्तृत जानकारी तो देते कि कौन से मद में किस मांग संख्या के अनुसार इसे खर्च किया जाना था. क्या भवन बनाना है, कपड़े खरीदना है या पुलिस विभाग में किस काम के लिए लेना था ? ऐसे ही स्कूल शिक्षा के लिए 31 करो़ड़ 69 लाख के करीब है, इसमें भी मुझे यह जानना है कि किस काम में यह खर्च कर रहे हैं? जनसंपर्क विभाग के आपके लगभग 200 करोड़ रूपये है यह किसको भुगतान किया गया है? यह हम विस्तृत जानकारी में जानना चाहते थे और ऐसे ही अनुसूचित जाति कल्याण विभाग का 4 करोड़ 64 लाख 92 हजार 620 रूपये है.

उपाध्यक्ष महोदय, मेरी जानकारी में वर्ष 2013-14 में इसी अनुसूचित जाति विभाग के 600 करोड़ रूपये खर्च नहीं हो पाये थे और 2014-15 के 1300 करोड़ रूपये खर्च नहीं हो पाये थे. इस वर्ष का जो विनियोग आया है उसकी मैं बात कर रहा हूं कि इसकी विस्तृत रूप में जानकारी दे देंगे तो हम भी देख लें कि यह राशि का मिस यूज, भ्रष्टाचार या करप्शन कहां कहां हुआ है किस किस रूप में हुआ है और मध्यप्रदेश के खजाने की राशि जो मध्यप्रदेश की जनता की राशि है वह किस तरह से लुटायी गई है तो कम से कम इसकी विस्तृत जानकारी तो देना चाहिए. वित्त मंत्री जी यह जो 6 साल बाद 123 करोड़ रूपये की आधिक्य की राशि आप मांग रहे हैं, यह सदन का ह