मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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षोडश विधान सभा                                                                             दशम् सत्र

 

 

अप्रैल, 2026 सत्र

 

सोमवार , दिनांक 27 अप्रैल, 2026

 

(7 वैशाख, शक संवत्‌ 1948)

 

 

[खण्ड- 10]                                                                                           [अंक- 1]

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

सोमवार, दिनांक 27 अप्रैल, 2026

 

(7 वैशाख, शक संवत्‌ 1948)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत् हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

 

राष्ट्रगीत

राष्ट्रगीत वन्दे मातरम्का समूहगान

 

अध्यक्ष महोदयः-अब, राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् होगा, सदस्यों से अनुरोध है कि कृ़पया अपने स्थान पर खड़े हो जायें.

          (सदन में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम्का समूहगान किया गया.)

 

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नारी वंदन, नारी सशक्तिकरण और महिला आरक्षण को लेकर जो इस प्रकार से आज विशेष सत्र में चर्चा रखी गई है.

          अध्‍यक्ष महोदय नेता प्रतिपक्ष जी, एक मिनिट, पहले अभी कंडोलेंस हो जाने दीजिए.

11:05 बजे                                 स्‍वागत उल्‍लेख.

(नेता प्रतिपक्ष, श्री उमंग सिंघार द्वारा विशेष सत्र में उपस्थित महिलाओं एवं बहनों का स्‍वागत.)

श्री उमंग सिंघार अध्‍यक्ष जी, आज सदन में जितनी महिलाएं और बहनें आई हैं, उनका स्‍वागत करता हूं.

11:06 बजे                              निधन का उल्‍लेख.

(1)                                      श्री गणेश प्रसाद बारी, भूतपूर्व विधान सभा सदस्‍य.

(2)                                      श्री यादवेन्‍द्र सिंह, भूतपूर्व विधान सभा सदस्‍य.

(3)                                      श्री के.पी. उन्‍नीकृष्‍णन, भूतपूर्व केन्‍द्रीय मंत्री.

(4)                                      श्रीमती मोहसिना किदवई, भूत‍पूर्व केन्‍द्रीय मंत्री.

(5)                                      श्री अबू हासेम खान चौधरी, भूतपूर्व केन्‍द्रीय राज्‍य मंत्री.

(6)                                      श्री बिरेन सिंह इंगती, भूतपूर्व केन्‍द्रीय राज्‍य मंत्री, तथा

(7)                                      श्रीमती आशा भोसले, सुप्रसिद्ध पार्श्‍व गायिका.

 

 

 


 

 

 मुख्‍यमंत्री(डॉ.मोहन यादव) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज विशेष सत्र के दरमियान हमारे अपने प्रदेश के या देश के अन्‍य राज्‍यों के अलग-अलग स्‍वनाम धन्‍य महत्‍वपूर्ण हस्तियों का दिवगंत होना, यह लोकतांत्रिक पद्धति में हम सबके लिये, गणतंत्र के लिये हानि है. जैसा कि आपने बताया है कि मध्‍यप्रदेश विधानसभा के भूतपूर्व सदस्‍यगण श्री गणेश प्रसाद बारी जी का दिनांक-28 मार्च,2026, श्री यादवेन्‍द्र सिंह जी का 14  मार्च, 2026,  पूर्व केंद्रीय  मंत्री श्री के.पी. उन्‍नीकृष्‍णन का 03, 2026,  मार्च एवं श्री मोहसिना किदवई का दिनांक-08 अप्रैल, 2026,  भूतपूर्व केंद्रीय राज्‍य मंत्री श्री अबू हासेम खान चौधरी का 08 अप्रैल, 2026,  श्री बिरेन सिंह इंगती का 10 मार्च, 2026, और सुप्रसिद्ध पार्श्‍व गायिका आशा भौसले का 12 अप्रैल, 2026,  को निधन हुआ है.

श्री गणेश प्रसाद बारी जी सच में सभी दबे कुचले वर्ग के लिये लंबी लड़ाई लड़ते हुए, यद्यपि उनका जन्‍म 15 मई, 1949 का हुआ था, लेकिन उन्‍होंने वर्ष 1969  से जो सार्वजनिक क्षेत्र में, राजनीतिक क्षेत्र में संघर्ष करते हुए वर्ष 1985 में बहुजन समाज पार्टी के माध्‍यम से वह विधायक बने और चित्रकूट जैसे पवित्र स्‍थल का उन्‍होंने प्रतिनिधित्‍व किया है, उनका निधन हम सबके लिये अर्पूणीय क्षति है.

 श्री यादवेन्‍द्र सिंह का जन्‍म 05 जून, 1953 कचनार, नागौद जिला सतना में हुआ था और आपने चौदहवीं विधानसभा में इंडियन नेशनल कांग्रेस की ओर से नागौद का प्रति‍निधित्‍व किया है, आपके निधन से भी प्रदेश ने एक कर्मठ समाजसेवी खोया है.

श्री के.पी.उन्‍नीकृष्‍णन का जन्‍म 02 सितम्‍बर, 1936 को कोयम्‍बटूर में हुआ था और वह मूलत: तमिलनाडू के रहने वाले हैं और जैसा कि आपने भी उल्‍लेख किया है कि वह कांग्रेस के कई पदों पर रहे हैं और आप पांचवी, छठवीं, सातवीं, नौवीं लोकसभा के माध्‍यम से न केवल प्रतिनिधित्‍व किया है बल्कि मंत्री के नाते, भूतल परिवहन मंत्री एवं संचार मंत्री के नाते से भी आपने अपना योगदान दिया है. आपके निधन से देश ने एक वरिष्‍ठ नेता और कुशल प्रशासक खोया है.      

श्रीमती मोहसिना किदवई का जन्‍म 01 जनवरी, 1932 को जिला बांदा उत्‍तरप्रदेश में हुआ था. लेकिन उन्‍होंने एक अलग प्रकार के चुनौती पूर्ण वातावरण  से निकलकर अपने जन्‍म के बाद से एक यात्रा राजनीतिक क्षेत्र में प्रारंभ की, यद्यपि वह पहले वर्ष 1960 से 1974 तक विधान परिषद की सदस्‍य रहीं. वर्ष 1974 से 1977 तक विधायक के नाते से उन्‍होंने काम किया और अलग-अलग विभागों की मंत्री रहीं, वर्ष 1978 में छठवीं, वर्ष 1980 में सातवीं, वर्ष 1984 आठवीं और वर्ष 2004 और 2010 में भी वह क्रमश: लोकसभा और राज्‍यसभा की सदस्‍य निर्वाचित हुईं. केंद्र सरकार में समय पर अनेक विभागों की मंत्री के नाते से मोहसिना किदवई जी को हम सब अत्‍यंत आदर से जानते थे, उनका निधन सच में एक वरिष्‍ठ नैत्री और कुशल प्रशासक का जाना हुआ है.

            श्री अबू हासेम खान चौधरी का जन्‍म 12 जनवरी, 1941 को शाह जलापुर, मालदा पश्चिम बंगाल में हुआ था. आप मालदा में कांग्रेस पार्टी के अलग-अलग दायित्‍वों का निर्वहन आपने किया है. और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के डायरेक्‍टर भी आप रहे हैं. आप पश्चिम बंगाल से भी दो बार विधायक रहे हैं और पश्चिम बंगाल विधान सभा के साथ-साथ आप उप नेता प्रतिपक्ष भी रहे और साथ में वर्ष 2006 में 14वीं, वर्ष 2009 में 15वीं, वर्ष 2014 में 16वीं और वर्ष 2019 में 17वीं लोकसभा में आप माननीय सदस्‍य के रूप में निर्वाचित हुये और स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्री के नाते से आपने काफी कुशलता से देश सेवा की है. विभिन्‍न अलग-अलग समितियों के भी आप सदस्‍य रहे हैं. आपके निधन से देश ने एक वरिष्‍ठ नेता और कुशल प्रशासक खोया है.

          श्री बिरेन सिंह इंगती 2 मार्च, 1945 ग्राम बरहोई, असम में जिनका जन्‍म हुआ है. आप असम कार्बी यूथ एसोसिएशन के महासचिव रहे हैं. आप पांचवीं, छठवीं, सातवीं, आठवीं, चौदहवी, पन्‍द्रहवीं एवं सोलहवीं लोकसभा के माननीय सदस्‍य के रूप में निर्वाचित हुये हैं. केन्‍द्र सरकार में भी आप उपमंत्री कार्मिक प्रशिक्षण लोक शिकायत और पेंशन तथा राज्‍यमंत्री योजना एवं कार्यक्रम क्रियान्‍वयन रहे हैं. आपके निधन से देश ने एक वरिष्‍ठ नेता और कुशल प्रशासक खोया है.

          श्रीमती आशा भोसले, सच में इनका नाम बचपन से सुनते-सुनते, लता मंगेश्‍कर, आशा भोसले यह ऐसे नाम थे, ऐसा लगता था कि कोई भी फिल्‍म बने तो इनके वगैर कोई फिल्‍म नहीं बनती थी. वर्ष 1941 के बाद से लगातार लगभग 8 दशक, 80 साल तक जिन्‍होंने अपनी गायकी के माध्‍यम से अपनी विशेष पहचान बनाई और भारत की कौन सी ऐसी भाषा है जिसमें उन्‍होंने अपना स्‍वर नहीं दिया है और कई अर्थ में तो बहुत सारे सुनाम धन्‍य बड़ी-बड़ी कलाकार से भी अद्भुत सरस्‍वती माता की कृपा से परमात्‍मा ने उन्‍हें एक अलग स्‍वर दिया था. उनका एक अलग स्‍वर साधना का सफर था. हम सब उनको स्‍मरण भी कर रहे हैं और उनका जाना सच में हमारे लिये कष्‍टकारी है. जब उनके गीतों की तरफ देखते हैं, 12 हजार से ज्‍यादा गीतों में उन्‍होंने अपना योगदान दिया है और खासकर के आपको पुरस्‍कार भी सभी राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार, आखिरी तो ऐसा हुआ कि उन्‍होंने पुरस्‍कार लेने से भी मना किया कि नवोदित कलाकारों को पुरस्‍कार दिया जाना चाहिये. अब पुरस्‍कार में राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार, फिल्‍म फेयर, दादा साहब फाल्‍के सहित सारे पुरस्‍कार के साथ पद्मविभूषण से भी आपको विभूषित किया है. आपके निधन से देश ने एक सुप्रसिद्ध गायकी को भी खोया है. हिन्‍दी सिनेमा को आपकी वैविध्‍यपूर्ण गायकी से उल्‍लेखनीय उंचाई प्रदान करने, उदीयमान गायकों के मार्गदर्शन और प्रेरणास्रोत के रूप में आपको सदैव स्‍मरण किया जायेगा.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विभिन्‍न प्रदेश की हस्तियां जिन्‍होंने सामाजिक क्षेत्र में, राजनीतिक क्षेत्र में, संगीत के क्षेत्र में इसके अलावा अन्‍य क्षेत्र में अपना नाम किया है और निश्चित तौर से समाज के लिये एक प्रेरणादायक के रूप में रहे और उनके विचार, उनके कार्य देश और प्रदेश को हमेशा याद रहेंगे. मैं समझता हूं कि यह सार्वजनिक जीवन की अपूर्णणीय क्षति है.

          स्‍वर्गीय श्री गणेश प्रसाद बारी जी, बहुजन समाज पार्टी के सदस्‍य रहे हैं. समाज सेवा में हमेशा सक्रिय रहे हैं.

          स्‍वर्गीय श्री यादवेन्‍द्र सिंह जी, जिन्‍होंने 14वीं विधान सभा में नागौद से कांग्रेस पार्टी का प्रतिनिधित्‍व किया.

          स्‍वर्गीय श्री के.पी. उन्‍नीकृष्‍णन जी, जो तमिलनाडु से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव रहे. वरिष्‍ठ नेता और कुशल प्रशासक रहे हैं.

          स्‍वर्गीय श्रीमती मोहसिना किदवई जी, जो उत्‍तर प्रदेश की एक कद्दावर नेता थीं. निश्चित तौर से बड़ी मिलनसार, जमीनी नेता थीं. मुझे भी कई बार माननीय जमुना देवी जी के साथ उनसे मुलाकात करने का मौका मिला. इतने बड़े पदों पर रहने के बाद भी कभी उनमें घमंड नहीं देखा. ऐसे कुछ लोग होते हैं जो कुर्सी का घमंड नहीं करते. मैं इस बात को लेकर उनसे व्‍यक्तिगत प्रभावित था.

          स्‍वर्गीय श्री अबू हासेम खान चौधरी जी, जो मालदा से थे, जिला कांग्रेस कमेटी के अध्‍यक्ष भी रहे. ओरिएंटल बैंक ऑफ कामर्स के डायरेक्‍टर भी रहे. एक कुशल प्रशासक स्वर्गीय श्री बिरेन सिंह इंगती जी, जिनका जन्म गांव बरहोई जिला कार्बी आंगलान(असम) में हुआ था. स्वर्गीय श्रीमती आशा भोंसले जिनकी गायकी के बारे में पूरा देश और प्रदेश अच्छी तरह जानता है और आज के नये गायक कलाकार जिन्हें हमेशा एक गायिका के क्षेत्र में  संगीत के क्षेत्र में हम देवी के तुल्य के रूप में पूजते हैं उनके कई गाने जो आज की युवा पीढ़ी आज भी उस पर थिरकती है. मैं समझता हूं कि इतना जेनरेशन का लंबा गेप होने के बावजूद भी अगर संगीत के अंदर अपनी छाप छोड़ता है अपने गाने से अपनी आवाज से निश्चित तौर पर वह हमारी स्मृतियों में हमेशा से है. मैं मेरे दल की ओर से शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं. एवं दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. धन्यवाद.

          डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह(अमरपाटन) -  माननीय अध्यक्ष महोदय, 2 व्यक्ति जिनका उल्लेख हमारे सतना जिले के हैं मैं चाहता हूं दो मिनट अपनी बात कह दूं.

          अध्यक्ष महोदय - बोलिये.

          डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह - अध्यक्ष महोदय, आपने जिन दिवंगत आत्माओं की शांति, श्रद्धांजलि के लिये उल्लेख किया. माननीय मुख्यमंत्री जी ने हमारे नेता प्रतिपक्ष ने भी किया मैं उनकी भावनाओं से अपनी भावनाओं को भी जोड़ता हूं. श्री गणेश प्रसाद बारी सतना जिले के चित्रकूट के रहने वाले थे और वह बहुत ही निर्धन परिवार से आते थे लेकिन संघर्ष का जुझारूपन का उनमें गजब का जज्बा था यही कारण है कि 1993 में सभी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वहां से बहुजन समाज पार्टी से वे विधायक चुने गये. उन्होंने गरीबों,दलितों और जो वंचित वर्ग के लोग हैं उनके हितार्थ उनके सुख के लिये उनकी समृद्धि के लिये हमेशा अपनी आवाज उठाई. मैं उनको अपनी तरफ से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. माननीय अध्यक्ष महोदय, यादवेन्द्र सिंह जी भी हमारे बहुत निकट के परिचित थे. 2013 में वह इस सदन के सदस्य बने लेकिन मेरा उनका परिचय 1980 से था. उससे पहले वे भारतीय जनता पार्टी में हुआ करते थे लेकिन 1980 में कांग्रेस में आये और 43 वर्षों तक कांग्रेस में रहने के बाद में अंत में 2023 में कुछ परिस्थितियां ऐसी बनीं कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की लेकिन उनके बारे में मैं यह कहना चाहूंगा कि वह ऐसे नेता थे जो हमेशा गरीबों से जुड़े रहे उनसे मिलने वालों में हर तरह के लोग देखे जा सकते थे कुछ कम वस्त्र वाले,कुछ अच्छे वस्त्र वाले, कुछ सजे धजे और कुछ साधारण लोग गांव-गांव का दौरा करना और सतत् संपर्क रखना उनकी एक आदत थी. उनके न रहने से निश्चित ही नागौद और सतना जिले में जो रिक्तता आई है उसको भरपाना कठिन होगा. अंत समय में बड़े दुख में बड़ी पीड़ा में उनकी मृत्यु हुई ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें. इसी तरह माननीय अध्यक्ष महोदय,के.पी.उन्नीकृष्णनन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे. श्रीमती मोहसिना किदवई आजादी के आंदोलन की एक पुरौंधा रही हैं उनका परिवार रहा है उन्होंने वर्षों वर्षों तक मार्गदर्शन दिया. महिलाओं को उन्होंने प्रेरणा दी. आगे बढ़ने का साहस जो मोहसिना जी ने प्रदान किया. उनके भी न रहने से सामाजिक और राजनैतिक जीवन में जो रिक्‍तता आई है, उसको भर पाना कठिन है. श्री अबू हासेम खान चौधरी, श्री बिरेन सिंह इंगती जी, इनको भी मैं श्रद्धांजलि देता हूँ. अंत में आशा भोसले जी, अब मुझसे तो नहीं रहा जाता कि उनके बारे में भी मैं दो शब्‍द न कहूँ. वे निश्‍चित ही स्‍वर कोकिला थीं. जैसा कि मुख्‍यमंत्री जी कह रहे थे और नेता प्रतिपक्ष ने भी कहा कि हजारों गानों को उन्‍होंने इतनी ऊँचाइयां दीं कि उनकी पहचान देश में बनी. ऐसी उनकी आवाज थी. इतना परिवर्तन, इतनी लचीली, इतनी मधुरता कि वह उस जमाने में जो कई प्रकार की हिरोइनें थीं, उनके लिए गाती थीं. हमें लगता है कि 18-20 हिरोइनों को, जो उच्‍च श्रेणी की और चोटी के फिल्‍मों के कलाकार थे, उनको उन्‍होंने अपनी आवाज दी. ऐसा कभी नहीं लगा कि उस हिरोइन की आवाज नहीं है. इतनी प्रतिभाशाली थीं. भारत सरकार ने उन्‍हें पद्म विभूषण के टाइटल से अलंकृत किया. यह बहुत अच्‍छी बात है. ऐसी विभूतियों को हमें भूलना नहीं चाहिए. मैं इन सब दिवंगत आत्‍माओं को अपनी श्रद्धांजलि देता हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय -- मैं सदन की ओर से शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूँ. अब सदन दो मिनट मौन खड़े रहकर दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करेगा.

          (सदन द्वारा दो मिनट मौन खड़े रहकर दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की गई.)

          ऊँ शांति, शांति, शांति: ... दिवंगतों के सम्‍मान में सदन की कार्यवाही आधे घण्‍टे के लिए स्‍थगित की जाती है.

          (पूर्वाह्न 11.28 बजे दिवंगतों के सम्‍मान में सदन की कार्यवाही आधे घण्‍टे के लिए                                                         स्‍थगित की गई.)

 

 


 

12.12 बजे

{अध्‍यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

12.13 बजे

शासकीय संकल्‍प

नारी शक्ति वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं

सशक्तिकरण  संबंधी

          अध्‍यक्ष महोदय - एक मिनट. अब, माननीय मुख्‍यमंत्री जी नारी शक्ति वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं सशक्तिकरण के संबंध में संकल्‍प प्रस्‍तुत करेंगे. माननीय मुख्‍यमंत्री जी.

12.14 बजे

औचित्‍य का प्रश्‍न एवं अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

          श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर है.

          अध्‍यक्ष महोदय - एक मिनट. मुख्‍यमंत्री जी का संकल्‍प पूरा हो जाने दीजिये, फिर मैं आपको बोलने को देता हूँ.

          मुख्‍यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 

          श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, व्‍यवस्‍थाएं एवं नियम बदल दें.

          अध्‍यक्ष महोदय - जो आज कार्यसूची में मुख्‍यमंत्री जी का संकल्‍प लगा हुआ है, वह प्रस्‍तुत हो जाये.

          श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, फिर प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर का .....

          डॉ. मोहन यादव - अभी कुछ बोले ही नहीं, तो इसमें प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर कहां से आ गया ? कुछ बोलने के पहले ही प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर हो गया. (हंसी) 

          अध्‍यक्ष महोदय - अभी तो शुरू ही नहीं हुआ है.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, (मुख्‍यमंत्री की ओर देखकर) जो आप बोलने वाले हैं, उसी पर प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर है.

          डॉ. मोहन यादव - अभी बोलें तो सही.

          लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) - अध्‍यक्ष महोदय, प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर के लिये रूल चाहिये होता है. किस रूल के तहत प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर है, वह रूल बताना पड़ेगा.

(..व्‍यवधान..)

          श्री उमंग सिंघार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं भी बोलूँगा.

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री प्रहलाद सिंह पटेल) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कार्यसूची पर प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर है .....

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी हम लोग कार्यमंत्रणा समिति में बैठे. वहां पर तय हुआ कि मुख्‍यमंत्री जी प्रस्‍ताव रखेंगे बाकी सब लोग उस पर......

          श्री उमंग सिंघार - कोई तय नहीं हुआ. असत्‍य बात है. 

          श्री कैलाश विजयवर्गीय - अभी कार्यमंत्रणा समिति में जो बैठक हुई .... (..व्‍यवधान..)

          श्री उमंग सिंघार - असत्‍य बात है, कोई तय नहीं हुआ है. हमारा अशासकीय संकल्‍प आया, उस पर क्‍या सरकार चर्चा कराने के लिए तैयार है ?

          श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्‍यक्ष महोदय, ....

          श्री उमंग सिंघार - अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या 33 प्रतिशत आज 543 सीटों पर आरक्षण देने के लिये क्‍या यहां से प्रस्‍ताव जायेगा ?

          श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या इस पर बहस चालू हो गई ?

(..व्‍यवधान..)

          अध्‍यक्ष महोदय - मेरा माननीय नेता प्रतिपक्ष जी से अनुरोध है कि आप वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं, सदन की मर्यादा को भली प्रकार से जानते हैं. जिस संकल्‍प के लिये यह सत्र माननीय राज्‍यपाल जी ने आहूत किया है, वह विषय प्रारंभ हो जाये, उसके बाद फिर आपका कोई विषय होगा, आप रेज करेंगे, तो मैं उस पर व्‍यवस्‍था दूँगा. (मेजों की थपथपाहट) इसलिए मुख्‍यमंत्री जी को तो अपना संकल्‍प प्रस्‍तुत करने दीजिये. (मेजों की थपथपाहट) माननीय मुख्‍यमंत्री जी.

 

          डॉ.मोहन यादव-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज का यह खास दिन है, जब हम अपने देश की आधी आबादी की भावनाओं के साथ, आज हमारी मध्‍यप्रदेश विधान सभा, देश की पहली विधानसभा है जो बहनों के अधिकार के लिए, आज का अपना दिन स‍मर्पित कर रही है. (मेजों की थपथपाहट)

          यह हमारे लिए सौभाग्‍य की बात होगी कि जब हम अपने इस संकल्‍प के साथ अपनी दृढ़ इच्‍छाशक्ति को भी प्रकट करेंगे कि हां, हम देश की आधी आबादी को उनका 33 प्रतिशत का आरक्षण, उनकी आबादी के साथ जोड़कर देंगे, यह हम सभी के मन में संकल्‍प भी है और हमारा मनोभाव भी है. (मेजों की थपथपाहट)

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं, संकल्‍प प्रस्‍तुत करता हूं कि-

         "इस सदन का मत है कि नारी शक्ति के वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं सशक्तिकरण के लिए देश की संसद एवं सभी विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण, परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर, तत्‍काल प्रभाव से लागू किया जाये." (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदयसंकल्‍प प्रस्‍तुत हुआ.

          माननीय नेता प्रतिपक्ष कुछ कहना चाहते हैं.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चूंकि कांग्रेस विधायक दल की तरफ से भी अशासकीय संकल्‍प दिया गया था और चूंकि जैसा नियम 117 में व्‍यवस्‍था है कि माननीय अध्‍यक्ष जी यदि चाहें तो उसे ग्राह्य करवाकर, उस पर चर्चा करवा सकते हैं. हमारा विषय अशासकीय संकल्‍प में है कि 33 प्रतिशत तत्‍काल की, वर्तमान सीटों पर, परिसीमन कब होगा ? जनगणना कब होगी ? मैं आपसे कहना चाहता हूं कि क्‍या आज यहां, इस पर सरकार चर्चा करना चाहेगी ?                      (मेजों की थपथपाहट)

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-  अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर है. मेरा निवेदन यह था कि आज यह जो सदन है, यह आपके प्रयास से और माननीय राज्‍यपाल जी के निर्देश पर विशेष सत्र बुलाया गया है और इसमें जो संकल्‍प प्रस्‍तुत हुआ, साधारणतया हमारे यहां स्‍थाई आदेश में यह पंरपरा होती है कि जो संकल्‍प एक समान, यदि कोई भी प्रस्‍तुत करेगा तो जो पहले संकल्‍प देना, उसका माना जायेगा. अध्‍यक्ष महोदय जब मैं स्‍वयं विपक्ष का सदस्‍य था और मैंने एक संकल्‍प दिया था, वह मैंने 20 दिन पहले दिया था और इसी बीच सरकार उस पर शासकीय संकल्‍प ले आई, जिसमें आधा घंटा चर्चा हुई और उस समय माननीय श्रीनिवास तिवारी जी विधान सभा अध्‍यक्ष थे और उन्‍होंने स्‍थाई आदेश दिया था कि जो संकल्‍प साधारणतया पहले आता है, हम उसे स्‍वीकार करते हैं पर चूंकि यह शासकीय संकल्‍प है इसलिए हम इसे अनुमति प्रदान कर रहे हैं और मेरे आग्रह को उन्‍होंने निरस्‍त कर दिया था, यह सदन की परंपरा है. आसंदी से ही स्‍थाई आदेश निकला हुआ है, माननीय सदस्‍य ने जो कहा है, मैं, उनका विरोध नहीं करूंगा परंतु जो व्‍यवस्‍था और परंपरा हमारे यहां रही है, वह यही रही है कि जो संकल्‍प पहले आ जाता है, उसे आसंदी स्‍वीकार करती है.

          श्री उमंग सिंघार-  अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर है.

          डॉ. सीतासरन शर्मा (होशंगाबाद)-  अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाईंट ऑफ ऑर्डर है. ठीक है, पहले आप बोल लीजिये.

          श्री उमंग सिंघार-  संसदीय कार्य मंत्री जी ने दो बातें कहीं कि पहले सूचना दी गई. अगर सूचना पहले दी गई तो नियम 123 (3) के अंदर, विधान सभा प्रमुख सचिव को इन सूचनाओं की जानकारी देनी थी, किस सदस्‍य को जानकारी दी गई ? कब दी गई ? पहले अशासकीय संकल्‍प हमारा लगा है, ये कागज़ है, प्रमाण है (नेता प्रतिपक्ष द्वारा सदन में कागज दिखाते हुए.) आपने अगर पहले लगाया तो आपको सूचनायें देनी थीं, आपने सूचना क्‍यों नहीं दी ? और अगर लगा है तो नियम 117 के अंदर स्‍पष्‍ट है कि यदि अध्‍यक्ष महोदय चाहें तो 15‍ दिनों की आवश्‍यकता नहीं है, आप चाहें तो इस पर चर्चा करवा सकते हैं, महत्‍वपूर्ण विषय है नारी को आरक्षण देने का विषय है और हम आज से आरक्षण देने की बात कर रहे हैं, आज से प्रस्‍ताव की बात कर रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदयडॉ. सीतासरन शर्मा

          डॉ. सीतासरन शर्मा-  अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने संकल्‍प प्रस्‍तुत किया है, नेता प्रतिपक्ष जी जो कह रहे हैं, यह कौल एण्‍ड शकधर की किताब का पेज नंबर 903 है- "जब कोई संकल्‍प सभा में पेश कर दिया गया हो, तो उसके पश्‍चात् सारवार रूप से वही विषय उठाने वाला कोई अन्‍य संकल्‍प या उसमें संशोधन,ै ये एक वर्ष तक नहीं दिया जा सकता है." ये आज के आज में दे रहे हैं, ये एक साल तक नहीं दिया जा सकता है, ये तो आज के आज में ही दे रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट)

          श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)-  आपसे पहले का दिया हुआ है.

          श्री अजय अर्जुन सिंह-  आप पेज नंबर 940 देखें.

          श्री उमंग सिंघार-  अध्‍यक्ष महोदय, ये संशोधन की बात कर रहे हैं. हम अशासकीय संकल्‍प की बात कर रहे हैं. पहले माननीय सदस्‍य को स्‍पष्‍ट किया जाये कि किस विषय पर बोलना है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  कृपया सदस्‍य आपस में चर्चा न करें. बाला जी आप बतायें.

          श्री बाला बच्‍चन (राजपुर)-  अध्‍यक्ष महोदय, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 जो कानून बना, वह 20 सितंबर, 2023 को बना, उसमें यह निहित है जब चर्चा चल रही थी, उसके बाद 16 अप्रैल, 2026 को अधिसूचना जारी करते हैं. तो जब संशोधन पर चर्चा चल ही रही थी तो उस पर अधिसूचना जारी करना, माननीय पूर्व स्‍पीकर साहब ने जो बोला मैं उस बात को कोट कर रहा हूं कि जब चर्चा संशोधन पर ही चल रह थी और जो कानून बन चुका था आपने दो साल, पांच महीने तक उसकी अधिसूचना जारी नहीं की थी.  इससे आपकी नीयत का पता चलता है तो यह सब जो नियम हैं इनकी धज्जियां तो आप उड़ा रहे हो.

          अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बात यह कि लोकसभा में तीन संशोधन बिल आये थे तो नारी सम्‍मान पर जब बहस हुई मेजो़रिटी नहीं हो पाई तो वह खत्‍म हो गया.

          अध्‍यक्ष महोदय-- बाला बच्‍चन जी कृपया बैठ जाएं. मुख्‍यमंत्री जी बोल रहे हैं.

          मुख्‍यमंत्री (डॉ मोहन यादव)-- अध्‍यक्ष महोदय, जिस बात की बाला बच्‍चन जी बात कर रहे हैं और माननीय मित्रों ने बात की है इसी पर तो दिनभर बात करना है. इसमें डरना किस बात का. आप आपकी बात करो. हम हमारी बात करेंगे. हम इसी बात‍ के लिए तो कह रहे हैं कि हां हम वर्तमान में बढ़ी आबादी के साथ 33 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते हैं इसमें गलत क्‍या है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- जिसे बोलने की अनुमति दी जाए केवल वही बोलेंगे

          श्री अजय अर्जुन सिंह-- आज की तारीख में महिला आरक्षण 33 प्रतिशत वर्तमान स्थिति में आप कर दीजिए. क्‍या दिक्‍कत है. काहे के लिए रुके हैं. काहे के लिए परिसिमन कराइये. 

          अध्‍यक्ष महोदय-- अभी दूसरी चर्चा हो रही है जब प्रस्‍ताव पर चर्चा हो तो आप अपनी बात विस्‍तार से रखियेगा.

          श्री अजय अर्जुन सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं दूसरी बात यह पूछना चाहता हूं कि  जो चीज लोकसभा में खत्‍म हो चुकी है. क्‍या उसी विषय पर यहां पर हम ला सकते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय-- अजय जी आप थोड़ा रुक जाइये. बाला बच्‍चन जी आप अपनी बात‍ पूरी करें.

          श्री बाला बच्‍चन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जब तक परिसीमन की प्रक्रिया पूरी नही होगी तब 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में नहीं देने की जो चर्चा हुई है और उसमें भारी बहुमत से यह जो बहस गिर चुकी है वहां उसके बाद किरेन रिजिजू जी ने यह बात कही है कि यह जो हमारे दो दूसरे संशोधन विधेयक हैं मैं इनको वापस लेता हूं, तो जब देश की संसद में वह जो संशोधन बिल वापस हो चुका है तो फिर यह महिलाओं के आरक्षण के साथ में परिसीमन की प्रक्रिया को जोड़ रहे हैं, तो आपकी नीयत का पता चलता है कि आप स्‍वयं ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं देना चाहते हैं. वर्ष 2023 में श्रीमती सोनिया गांधी जी ने इसको लीड करते हुए कहा था......

          अध्‍यक्ष महोदय-- बाला बच्‍चन जी कैलाश जी बोल रहे हैं. आप जब भाषण दो तब बोलना.

          श्री बाला बच्‍चन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारा अशासकीय संकल्‍प इसमें जुड़ा हुआ है इसलिए मैं इस बात को कोट करते हुए कह रहा हूं कि सोनिया गांधी जी ने स्‍वयं इस बात को कहा था.

          अध्‍यक्ष महोदय-- बाला जी, प्‍लीज बैठ जाइये. संसदीय कार्य मंत्री जी बोल रहे हैं.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-- अध्‍यक्ष महोदय, यह 106 वां संविधान संशोधन था और इसमें बहुत ही स्‍पष्‍ट था कि इसमें परिसीमन होगा और परिसीमन के बाद वर्ष 2023 में जब यह प्रस्‍ताव पारित हुआ तब जातिगत जनगणना का आभास भी नहीं था. जब जातिगत जनगणना प्रारम्‍भ करने का निर्णय लिय गया तो यह 140 करोड़ जनता की जातिगत जनगणना के मेरे पास दोनों फार्म हैं जो जनगणना पहले होती थी वह फार्म भी है और जातिगत जनगणना वाला फार्म भी है. अब जातिगत जनगणना में बहुत समय लगेगा और इसलिए सरकार यह चाहती थी कि अभी इसका लाभ 33 प्रतिशत मिले (व्‍यवधान) और सरकार की नीयत है कि वर्ष 2029 में 33 प्रतिशत आरक्षण दे दिया जाए.  (व्‍यवधान)

          श्री ओमकार सिंह मरकाम-- अध्‍यक्ष महोदय. (व्‍यवधान)

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक--अध्‍यक्ष महोदय. (व्‍यवधान)

          श्री फूलसिंह बरैया-- अध्‍यक्ष महोदय. (व्‍यवधान)

          अध्‍यक्ष महोदय--प्‍लीज, प्‍लीज. सोहन जी, फूल सिंह जी प्‍लीज.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-- अध्‍यक्ष महोदय.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-- उमंग जी मेरी बात को पूरा हो जाने दीजिए.

          श्री उमंग सिंघार-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाइंट ऑफ आर्डर है. आप व्‍यवस्‍था दे दीजिए. मैं आपसे व्‍यवस्‍था मांग रहा हूं. यह भाषण देने लगते हैं.

           श्री कैलाश विजयवर्गीय-- उमंग जी, मैं भाषण नही दे रहा हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय-- मैं व्‍यवस्‍था दूंगा.

          श्री उमंग सिंघार-- अध्‍यक्ष महोदय, यदि सदन नियम और परम्‍पराओं से चल रहा है तो हम जो अशासकीय संकल्‍प जो लाए हैं उस पर चर्चा करना है कि नहीं करना है.

          अध्यक्ष महोदय -- आप चिंता न करें. मैं व्यवस्था दूंगा.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, जो नियम 334 (ए) है यह एसी और एसटी के आरक्षण का है. इस 334 (ए) में महिला आरक्षण को जोड़ा गया है. महिला आरक्षण कैसे देना है, इस बारे में उसमें प्रावधान भी है. मैं उसके विस्तार में नहीं जाऊंगा.

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यहां पर बात अशासकीय संकल्प को ग्राह्य करना है या नहीं करना है उस पर हो रही है. उस पर बात करें, यह भाषण दे रहे हैं. सदन का समय क्यों खराब कर रहे हैं. (व्यवधान)

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, बाला बच्चन जी ने जो बात कही है, मैं उसका जवाब दे रहा हूँ.

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, महिलाओं को आज से आरक्षण देना है उस पर हमारा अशासकीय संकल्प है.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- आप पूरी बात तो सुन लीजिए. आप तो समझदार हैं. विपक्ष के नेता हैं.

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आप व्यवस्था दे दें. हमारा पाइंट ऑफ ऑर्डर है.

          अध्यक्ष महोदय -- नेता प्रतिपक्ष महोदय, बाला बच्चन जी ने भी उससे आगे जाकर बात की थी. मैंने उनके बैठने के बाद भी दोबारा अवसर दिया. इसलिए कैलाश जी की बात पूरी हो जाने दीजिए. यह बात सही है कि अभी हाउस में सिर्फ इतनी बात हो रही है कि अशासकीय संकल्प लिया जाए अथवा नहीं लिया जाए. अपनी बात को हम उसी के इर्द-गिर्द ही रखें.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह था कि शासकीय प्रस्ताव आ चुका है. विषय वही है. अब अशासकीय प्रस्ताव को लेने का कोई प्रावधान नहीं है, आज तक की परम्परा के अनुसार, अब आप इस सदन के मालिक हैं. आप जो निर्णय करेंगे वह मान्य होगा.

          अध्यक्ष महोदय -- मैं समझता हूँ कि अब सभी सदस्यों के विचार आ गए हैं और सभी ने अपनी-अपनी बात कही है.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम --अध्यक्ष महोदय, सभी की बात नहीं आई है. अभी बहुत सदस्यों को बोलना है.

          अध्यक्ष महोदय -- सबसे मतलब, मरकाम जी आप सब में शामिल हो. (हंसी)

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- अध्यक्ष महोदय, यह तो अति हो गई (हंसी)

          अध्यक्ष महोदय -- सामान्यत: हम सभी इस बात को भलिभांति जानते हैं जब विशेष सत्र का आयोजन होता है तो उसका विषय पहले से निश्चित होता है. विशेष सत्र में संकल्प आए, प्रस्ताव आए या वह किसी अन्य विषय पर वह चर्चा केन्द्रित हो. जब वह विषय आ जाता है तो सामान्य तौर पर कोई भी दूसरा अशासकीय संकल्प नहीं आ सकता है. यह जो पुराने प्रावधान है उनके अनुसार है. मुझे अनेक सदस्यों ने अन्य-अन्य विषयों पर चर्चा करने के लिए लिखा है और अशासकीय संकल्प भी दिए हैं. लेकिन यह विधि अनुरुप नहीं होने के कारण, कार्यमंत्रणा समिति में भी यह बात हुई थी कि मुख्यमंत्री के प्रस्ताव पर संशोधन आ सकते हैं. वो संशोधन भी मुझे प्राप्त हुए हैं. मैं उन संशोधनों को लूंगा और उन पर चर्चा कराऊंगा, लेकिन मेरा आप सबसे आग्रह है कि हमारी जो व्यवस्थाएं बनी हुई हैं और पुरानी परम्पराएं हैं. संशोधन का भी नियम नहीं है लेकिन मैंने दिखवाया कि पिछले अनेक वर्षों में क्या हुआ है तो पता चला कि 3-4 बार ऐसे संकल्प आए हैं और उनमें संशोधन अलाऊ किए गए हैं. उस परम्परा के अनुसार मैं संशोधनों को एलाऊ करूंगा. इसलिए जो भी अशासकीय संकल्प या अन्य प्रकार की चर्चा की मांग की गई है. मैं उस अनुरोध को अस्वीकार करता हूँ. आप सबसे अनुरोध करता हूँ कि चर्चा को हम आगे बढ़ाएं.

12.29 बजे                                     बहिर्गमन

महिलाओं को लोक सभा और विधान सभा में तत्काल आरक्षण न दिए जाने के विरोध में बहिर्गमन

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, संसदीय कार्य मंत्री जी ने कहा है कि विषय एक है. आपका विषय परिसीमन के बाद आरक्षण देने का है. हमारा अशासकीय संकल्प है परिसीमन कब होगा, कब जनगणना होगी. महिलाओं को आज से लोकसभा और विधानसभा में  आरक्षण मिलना चाहिए. विषय अलग है. माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने व्यवस्था दे दी है हम उसका स्वागत करते हैं. लेकिन यह महिलाओं के हित में नहीं है. परिसीमन कब होगा यह पता नहीं है. लेकिन आज से आरक्षण लागू होना चाहिए, इस बात को लेकर हम लोग वॉक आउट करते हैं.

          (श्री उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा महिलाओं को लोक सभा और विधान सभा में तत्काल आरक्षण न दिए जाने के विरोध में सदन से बहिर्गमन किया गया.)

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि आपकी व्यवस्था के बाद व्यवस्था का प्रश्न उठाकर वॉक आउट करना, यह सदन की परम्परा नहीं है. मैं माननीय नेता प्रतिपक्ष के इस निर्णय का विरोध करता हूँ.

          अध्यक्ष महोदय -- मुझे कुछ अशासकीय संकल्पों को सूचना प्राप्त हुई हैं. अशासकीय संकल्पों की जो सूचनाएं मुझे प्राप्त हुई हैं, मैंने उन्हें अस्वीकार कर दिया है. लेकिन माननीय मुख्यमंत्री जी ने जो शासकीय संकल्प प्रस्तुत किया है उसमें संशोधन की सूचनाएं भी प्राप्त हुई हैं.

          1.       श्री सोहनलाल बाल्मीक

          2.       श्री मधु भगत

          3.       श्रीमती चन्दा सुरेन्द्र सिंह गौर

          4.       श्रीमती झूमा डॉ. ध्यान सिंह सोलंकी

          5.       श्रीमती सेना महेश पटेल

          6.       श्रीमती अनुभा मुंजारे

          7.       श्री सचिन सुभाषचन्द्र यादव

                                                                                     

            यह सूचनाएं प्राप्‍त हुई हैं और इन सबकी विषयवस्‍तु लगभग एक समान है इसलिए जो पहली सूचना है वह सोहनलाल बाल्‍मीक जी की है, मैं उनको कहूंगा कि वह अपनी सूचना पढ़ें.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, इन्‍होंने तो वॉक आउट कर दिया था.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आ गया हूं.

          डॉ. मोहन यादव -- अध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है कि बहिर्गमन शब्‍द नहीं था वॉक आउट की बात नेता प्रतिपक्ष जी ने कही है, तो मुझे लगता है कि सोहन जी को विचार करना चाहिए अपने नेता प्रतिपक्ष की बात मानते हुए.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी, आप अच्‍छे तरीके से सब जानते हैं. आपको पूरी चीजों की जानकारी है.

          अध्‍यक्ष महोदय -- सोहन जी, जैसे मुख्‍यमंत्री जी ने पढ़ा है उतना संशोधन पढ़ें.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय, आज प्रस्‍तुत संकल्‍प में निम्‍नानुसार संशोधन किया जाए:-

          ‘’इस सदन का मत है कि नारी शक्ति के वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं सशक्तिकरण के लिए देश की संसद् एवं सभी विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण, लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों पर तत्‍काल प्रभाव से लागू किया जावे’’

12.31 बजे                           अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

संकल्‍प पर चर्चा हेतु 4 घंटे का समय नियत किए जाने संबंधी

अध्‍यक्ष महोदय -- इस संकल्‍प पर चर्चा के लिए कुल 4 घंटे का समय उपलब्‍ध है. इसमें माननीय मुख्‍यमंत्री एवं माननीय नेता प्रतिपक्ष के भाषण हेतु 1 घंटे का समय नियत किया जाता है, शेष 3 घंटे सदन के माननीय सदस्‍यगण के लिए आवंटित हैं. आज भोजनावकाश नहीं होगा एवं सदन की कार्यवाही सायंकाल 4.00 बजे तक निरंतर चलेगी.

संशोधन और संकल्‍प दोनों पर एक साथ चर्चा होगी और चर्चा के पश्‍चात इस पर मत लिया जाएगा. मैं समझता हूं कि अब हम चर्चा प्रारंभ करते हैं. 

शासकीय संकल्‍प ..(क्रमश:)

पिछड़ा वर्ग एवं अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण राज्‍यमंत्री, स्‍वतंत्र प्रभार (श्रीमती कृष्‍णा गौर) -- अध्‍यक्ष महोदय, आज सदन में आहूत किए गए इस एक दिवसीय सत्र में हमारे प्रदेश के लोकप्रिय मुख्‍यमंत्री जी ने सदन में नारी शक्ति के वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं सशक्तिकरण के लिए देश की संसद एवं सभी विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण, परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर तत्‍काल प्रभाव से लागू करने का संकल्‍प प्रस्‍तुत किया है जो वंदनीय भी है और भूरि-भूरि प्रशंसा के योग्‍य भी है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी का यह संकल्‍प प्रस्‍ताव सही अर्थों में इस देश की आधी आबादी के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक एवं राजनैतिक सशक्तिकरण के प्रति प्रतिबद्धता है. मुझे यह कहते हुए गर्व है कि उनके कुशल नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश की धरा पर 1 करोड़, 25 लाख बहनें लाड़ली बहनें बनकर आत्‍मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं. मुझे यह भी कहते हुए गर्व है कि हमारी 53 लाख बेटियां लाड़ली लक्ष्‍मी बनकर आत्‍मसम्‍मान का जीवन जी रही हैं. सरकार की योजनाओं के मूल में हमारी मातृशक्ति है, जिसका सीधा-सीधा अर्थ यही है कि हमारी सरकार की कार्यकक्षा की धुरी, आधी आबादी हमारी महिलाएं हैं और इसलिए मैं मानती हूं कि यह संकल्‍प प्रस्‍ताव माननीय मुख्‍यमंत्री जी का इस प्रदेश की, इस देश की, आधी आबादी के प्रति मान सम्‍मान और स्‍वाभिमान का एक संकल्‍प है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी की मंशा और अभिलाषा निश्चित रूप से इस बात की है कि हमें इस देश में महिलाओं को लोक सभा और विधान सभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर उन्‍हें राजनीतिक रूप से सशक्‍त करना है. आज उनके द्वारा रखे गए इस संकल्‍प प्रस्‍ताव के समर्थन में मैं अपने विचार रखने के लिए खड़ी हुई हूं.

            अध्‍यक्ष महोदय, मैं सर्वप्रथम अपनी ओर से और संपूर्ण नारी जाति की ओर से आपके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करती हूं कि आपने इस श्रेष्‍ठ सदन में एक बहुत ही महत्‍वपूर्ण, गंभीर, संवेदनशील और नारी सशक्तिकरण के इस विषय को चर्चा के लिए रखा और निश्चित रूप से उसका विषय भी पूरे सदन के संज्ञान में है. नारी सशक्तिकरण के इसी उद्देश्‍य की पूर्ति के लिए देश की सबसे बड़ी पंचायत में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक लेकर के आई थी. जिससे इस देश की करोड़ो बहनों को इस बात की उम्मीद थी कि यह संशोधन विधेयक जब सदन में पारित होगा तो उनकी राजनैतिक आकांक्षाओं को पंख मिल जायेंगे, वह देश के निर्माण में नीति निर्धारक बन जायेंगी, वह निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदार बनेंगी. माननीय अध्यक्ष महोदय दो दिन तक चली उस चर्चा और बहस में देश की करोड़ों बहनें टकटकी लगाकर आस और उम्मीद लगाकर के बैठी थीं वह नहीं जानती थीं कि जिस प्रकार का आचरण कांग्रेस और पूरे विपक्ष का सदन में दिखाई दे रहा है, बहुत जल्द कांग्रेस और विपक्ष उनके सपनों को चूर चूर कर देंगे, उनकी आकांक्षाओं पर पानी फेर देंगे..

          श्री दिनेश गुर्जर- कांग्रेस ने नहीं किया, कांग्रेस ने तो पुराने  बिल पर आरक्षण देने का कहा है..

          श्रीमती कृष्णा गौर -- आपकी जब बारी आयेगी तब आप बोलें.

          अध्यक्ष महोदय- दिनेश जी, आपके विचार बहुत ऊंचे हैं, लेकिन अभी जिनको कहा है उनको अपनी बात रख लेने दें. कृपया शांत रहें.

          श्रीमती कृष्णा गौर -- अध्यक्ष जी, उनके सपनों को कुचलने का काम करेंगे और हुआ भी ऐसा ही, पूरे देश ने देखा कि किस प्रकार से कांग्रेस और पूरे विपक्षी दल ने इस देश की महिलाओं की उन राजनैतिक आकांक्षाओं पर कुठाराघात किया. सदन में जिस प्रकार का आचरण और व्यवहार कांग्रेस और विपक्षी दलों का दिखाई दिया वह बहुत शर्मनाक था. उन्होंने अपनी मंशा के अनुरूप संशोधन विधेयक को सदन में गिराने का काम किया , सिर्फ संशोधन विधेयक सदन में नहीं गिराया इस देश की आधी आबादी का मान-सम्मान गिराने का काम किया.

 

          माननीय अध्यक्ष महोदय, यह कांग्रेस और विपक्षी दलों का महिला विरोधी चेहरा था , महिला विरोधी मानसिकता थी जो देश की जनता और देश की करोड़ों बहनों के सामने उजागर हुई. आज मैं इस सदन में खड़े होकर सदन में कांग्रेस के , विपक्षी दलों के उस आचरण, उस व्यवहार और संशोधन विधेयक के उस नकारात्मक रवैये की कड़े शब्दों में निंदा करती हूं. उनके व्यवहार की भर्त्सना करती हूं. और माननीय अध्यक्ष महोदय यह मानती हूं कि यह विषय मात्र एक विधेयक का नहीं है यह देश की आधी आबादी के हमारी माता,बहनों और बेटियों के सम्मान, अधिकार और सशक्तीकरण का है, नारी शक्ति संशोधन विधेयक इस देश की नारी को राजनैतिक रूप से सशक्त करने की दिशा में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का संकल्प था और यह कानून मात्र एक कानूनभर नहीं था यह भारत के लोकतंत्र को और अधिक समावेशी बनाने और अधिक न्यायपूर्ण बनाने का एक संकल्प था इस देश की महिलाओं को सामाजिक न्याय और उन्हें समान भागीदारी दिये जाने का सुनहरा अवसर था . माननीय अध्यक्ष महोदय, विधि शास्त्र (Jurisprudence) में एक सिद्धांत है कि  "जहाँ अधिकार है, वहीं उपचार है" (वेयर देयर इस राईट, देयर इस रेमेडी) यह एक अत्यंत मूलभूत और सुस्थापित सिद्धांत है. अगर अधिकार आपके हाथ में हैं तो उपचार की ताकत आपके साथ है. और यही अधिकार देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी इस देश की करोड़ों बहनों के हाथों में सोंपकर उन्हें शक्ति संपन्न अधिकार संपन्न बनाना चाहते थे लेकिन कांग्रेस औऱ विपक्षी दलों ने उन्हें ऐसा करने से रोकने का काम किया. उन्होंने इस देश की नारी शक्ति का अपमान करने का काम किया क्योंकि यह कभी नहीं चाहते कि इस देश में महिलाओं को आरक्षण मिले, इस देश में महिलायें, देश के विकास और समाज की मुख्य धारा से जुड़ें , इनकी नियति इस बात की हमेशा रही है कि महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिलना चाहिये.

       माननीय अध्यक्ष महोदय, जो अपमान इन्होंने इस देश की करोड़ों बहनों का किया है वह अपमान बहनें कभी भूल नहीं सकतीं . हमारे देश की संस्कृति तो हमेशा से नारी सम्मान की रही है. यह वह देश है जहां नारी सम्मान की अपनी एक प्राचीन और गौरवशाली परम्परा है. यह वह देश है, जो यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः संदेश पर, की संस्कृति पर काम करता है और हमारी इसी संस्कृति  ने  इस देश में नारियों को शक्ति स्वरुप  कहा, अर्द्धनारीश्वर  की संज्ञा दी.  शक्ति का स्रोत  माना, लेकिन सिर्फ मां, बहन और  बेटी के रुप  में  ही नहीं,  बल्कि निर्णय, नेतृत्व  और परिवर्तन  की धुरी के रुप में भी और इसीलिये कहना चाहूंगी कि  किस प्रकार से  इस देश  में महिलाओं के सशक्तिकरण  की  एक तैयारी आगे आने  वाले  समय में  दिखाई देने वाली  थी. हमारे देश में  इतिहास  गवाह है कि  महिलाएं हमेशा से  समाज, परिवार, धर्म संस्कृति  और राष्ट्र की  आधारशिला रही है.  अगर वैदिक काल से   वर्तमान काल तक  हम  देखें, तो हमारे देश  में  नारियां हमेशा सम्मानीय  और आदरणीय रही हैं. अगर बीच  का  एक काल खण्ड छोड़  दिया जाये,  जिसे मुगलों का  काल कहा जाता है, तो  हम यह कह सकते हैं कि   इस देश में नारियां  हमेशा से सम्मानीय रही हैं.  यहां तक कि जिन वेदों   के  पार्ट की  अधिकारी महिलाएं हैं या  नहीं जैसे विषय  पर कतिपय लोग अतार्किक  विवाद करते हैं,  उन वेदों  को लिखने वाली 18  महिलाएं थीं,  अर्थात् महिलाओं का बौद्धिक  स्तर,  महिलाओं की बौद्धिक क्षमता  पुरुषों से इस देश में कभी कम  नहीं  रही और इसी लिये  हम समान भागीदारी  की बात करते  हैं.  अगर  मुगलों  के काल की हम बात करें, तो स्वाभाविक  रुप से  वह नारी के कलिषित अध्याय का  ऐसा अध्याय था,  जिसमें नारी की दुर्दशा हुई. नारी घर की चार दीवारी  में कैद हुई और उसके बाद वह अशिक्षित रही और अशिक्षित रहने के कारण  अपने अधिकार और सम्मान  से  वंचित हो गई. लेकिन  यह भी सच है कि समय समय पर इस देश  में  महान समाज सुधारकों ने, इस देश के महान  महापुरुषों ने  नारियों को देश की मुख्यधारा  से जोड़ने के लिये, उन्हें न्याय और अधिकार  दिलाने के लिये  अपना जीवन समर्पित करने  का  काम किया  और इस देश की नारियों को  विकास की  इस देश की मुख्यधारा  में  जोड़ने का काम किया. हम कैसे भूल सकते हैं   राजा राममोहन राय  जी को,  जिन्होंने इस देश में सतीप्रथा  जैसी  अमानवीय कुप्रथा को समाप्त करके समाज को नई दिशा  देने  का काम किया था. हम कैसे भूल सकते हैं ईश्वरचन्द्र विद्या सागर  जी को,  जिन्होंने इस देश में विधवा   पुनर्विवाह को  सामाजिक और कानूनी  मान्यता दिलाई. हम कैसे भूल सकते हैं  महात्मा  ज्योतिबा राव फुले को,  जिन्होंने इस देश में  नारी शिक्षा के  क्षेत्र में एक नई क्रांति  का  सूत्रपात किया था. हम कैसे भूल सकते हैं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी  जी  को, जिन्होंने आजादी  के संघर्ष में  महिला को अग्रिम पंक्ति  में  खड़ा करके संदेश दे दिया था  कि राष्ट्र का निर्माण  महिलाओं के  बिना अधूरा है. हम कैसे भूल सकते  हैं संविधान निर्माता  बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर जी  को, जिन्होंने इस देश में  संविधान में महिलाओं को   समान  अधिकार देकर  इस देश  में सामाजिक न्याय की  मजबूत नींव रखने का काम किया था. इस देश में   समय समय पर  समाज  सुधारकों ने   महापुरुषों ने  इस देश में नारियों  का  समान, नारियों  को अधिकार, नारियों को  देश  की मुख्यधारा में जोड़ना और नारियों को न्याय   दिलाने का लगातार काम  किया, क्योंकि यह हमारे देश की गौरवशाली  परम्परा है.  यह हमारी संस्कृति है और  इसी संस्कृति का पालन  करने का काम,  इसी गौरवशाली परम्परा को आगे बढ़ाने  का काम हमारे देश के प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी जी कर रहे थे.  आज इस कड़ी में  मैं  बहुत ही  गर्व, अभिमान और  विम्रतापूर्वक प्रधान मंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी  जी का  नाम लेना चाहूंगी.  किस प्रकार  से उन्होंने  इस देश में,  इस देश की    मातृ शक्ति  को  देश की मुख्यधारा से  डोड़ने का काम किया,  उन्हीं का यह पवित्र प्रयास था कि महिलाओं को इस देश  में राजनीतिक अधिकार  मिलना चाहिये.  महिलाएं इस देश में  33 प्रतिशत आरक्षण  प्राप्त करनी चाहिये  और इस दिशा में जो प्रयास  उन्होंने किये,  उसमें सरकार आगे  बढ़  रही थी. सिर्फ इतना ही नही,  12 करोड़ बहनों को  उन्होंने इज्जत घर की  सुविधा देने का काम किया.  10 करोड़ महिलाओं को  इस देश में उन्होंने उज्जवला के गैस पहुंचाकर  धुआं मुक्त रसोई देने का काम किया.  पीएम आवास योजना के माध्यम से करोड़ों बहनें इस देश में   अपनी सम्पत्ति  की अधिकारी बनीं.  आयुष्मान योजना ने हमारे देश  की करोड़ों बहनों को  स्वास्य की गारंटी  दी,  जन धन के खातों ने  इस देश की करोड़ों  बहनों के स्वाभिमान की  रक्षा की.  चाहे  ड्रोन दीदी योजना हो, चाहे  लखपति दीदी योजना हो,  चाहे स्व सहायता समूह    हो, चाहे मुद्रा योजना हो,  इस देश की करोड़ों  बहनें प्रधानमंत्री जी के  इस संकल्प से  आर्थिक  रुप से आत्मनिर्भर  बनी  हैं और यही कारण है कि  इस देश की महिलाओं का  बहुत बड़ा विश्वास  प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र  मोदी जी  ने जीता और इस देश में, इस देश की महिलाएं निश्चित रूप से इस देश के प्रधान मंत्री में अपना विश्‍वास बनाती रही, बढ़ाती रही. यही कारण है कि वर्ष 2014 के बाद वर्ष 2019 और 2024 में भी इस देश की आधी आबादी ने प्रधान मंत्री जी पर भरोसा किया और देश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का काम किया. यही कारण था कि कहीं न कहीं कांग्रेस और विपक्ष को इस बात का एहसास था कि महिलाएं उनका साथ नहीं दे रही हैं, इसलिये महिला आरक्षण बिल का विरोध करना चाहिये. आज निश्चित रूप से मैं, कहना चाहूंगी कि प्रधान मंत्री जी ने जो प्रयास किये उसी का परिणाम यह है कि आज देश की महिलाएं राजनीतिक रूप से सशक्‍त होने के लएि आगे बढ़ रही थीं. हमने देखा की उनके प्रयासों कि यह पारदर्शिता थी, उनकी दृढ़ इच्‍छाशक्ति का यह परिणाम था कि उन्‍होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम इस संविधान में 106 वां संशोधन करके ना केवल दोनों सदनों में पारित किया, बल्कि इस देश की करोड़ों बहनों को राजनीतिक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा को प्रस्‍तुत करने का एक मार्ग प्रशस्‍त किया.

          श्री अजय अर्जुन सिंह- पारित किया या पेश किया.

        श्रीमती कृष्‍णा गौर - मैं नारी शक्ति वंदन अधिनियम, वर्ष 2023 की बात कर रही हॅूं. नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया वर्ष 2023 में. (व्‍यवधान) आप ध्‍यान से सुनिये. आप कान में तेल डालकर आया करिये. क्‍योंकि यह महिलाओं की बात हो रही है. क्‍योंकि आप महिलाओं की बात कभी सुन नहीं सकते, क्‍योंकि कभी कांग्रेस पार्टी ने कभी महिलाओं को आगे नहीं बढ़ने दिया. मैं स्‍पष्‍ट रूप से कहना चाहती हूं..

          अध्‍यक्ष महोदय- ( श्री अजय सिंह जी के खड़े होने पर) अजय सिंह जी आप बहुत वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं. कृपया मर्यादा का पालन कीजिये.

          श्रीमती कृष्‍णा गौर - नारी शक्‍त‍ि वंदन अधि‍नियम वर्ष 2023 में ना केवल दोनों सदनों में पारित हुआ, बल्कि इस देश की मातृशक्ति को राजनीतिक क्षेत्र में आगे बढ़ने का मार्ग भी प्रशस्‍त हुआ.

          श्रीमती चंदा सुरेन्‍द्र सिंह गौर- इतने ही हितैषी हैं तो उमा भारती जी को मुख्‍यमंत्री पद से क्‍यों हटाया था.

          श्रीमती कृष्‍णा गौर -माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज गर्व के साथ कहना चाहूंगी कि मुझे मेरी भारतीय जनता पार्टी पर बहुत गर्व है. जिसने हमेशा से ही इस देश में महिलाओं के आरक्षण का समर्थन किया और हम चाहे सरकार में रहें या ना रहें, लेकिन जिसने भी महिला आरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाया, तो हमेशा भारतीय जनता पार्टी ने साथ दिया, सहयोग किया और समर्थन किया.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस को नहीं भूलना चाहिये कि वर्ष 2010 में जब डॉ. मनमोहन सिंह जी सरकार में यह विधेयक लेकर आये थे, तो राज्‍य सभा में इसने ही सहयोगी दलों ने विरोध किया था, लेकिन तब भी भारतीय जनता पार्टी ने सहयोग करके राज्‍य सभा में पारित कराया था, लेकिन जब वह बिल लोक सभा में आया तो इनके सहयोगी दलों ने विधेयक को फाड़ा, उसको फेंका और कांग्रेस मूकदर्शक बनकर देखती रही, क्‍योंकि पीछे से समर्थन था कि किसी भी कीमत में महिला आरक्षण पास नहीं होना चाहिये. यह इनकी नीयती, यह इनकी नीयत है, यह कभी नहीं चाहते कि इस देश में महिला आरक्षण लागू हो. हमारी पार्टी ने तो हमेशा संकल्‍प के साथ यह कहा कि हमें इस देश की महिलाओं को राजनीतिक भागीदारी देना है और यही कारण था कि स्‍थानीय निकायों में, ग्राम पंचायतों में हमने पचास प्रतिशत आरक्षण इस प्रदेश में महिलाओं को देने का काम किया, जिसके बाद अन्‍य प्रदेशों में भी पचास प्रतिशत आरक्षण इस देश की महिलाओं को मिला. आज बड़ी संख्‍या में ग्राम पंचायतों में, स्‍थानीय निकायों में महिलाएं चुनकर आ रही हैं. अपनी प्रशासनिक क्षमता का परिचय दे रही हैं. लेकिन हमको विचार करना चाहिये कि आज देशभर में अगर ग्राम पंचायतें और प्रतिनिधि बहनों की संख्‍या हम देखते हैं तो वह लगभग 15 लाख आती है, लेकिन वहीं संख्‍या विधान सभा आते-आते 400 हो जाती है और लोक सभा आते-आते मात्र 74 बचती है. हम सबको विचार करना चाहिये, इनको भी विचार करना चाहिये, देश के विपक्षी दलों को भी विचार करना चाहिये कि हमारी उन महिलाओं की प्रशासनिक क्षमताओं को कुंठित करने का हम काम कर रहे हैं. इस महिला आरक्षण विधेयक को जो लंबे समय तक, तीन दशक तक इस देश में पारित नहीं हो सका. अगर देश के प्रधान मंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी इस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं तो उनका साथ देना चाहिये. यह नहीं कि उसका विरोध करना चाहिये.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे यह कहते हुए आज बड़ा खेद है कि किस प्रकार से जब हमारी सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही थी और नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक लेकर वह लोक सभा में आयी थी और तीन दिन का विशेष सत्र आयोजित किया था और उस विशेष सत्र में सबको उम्‍मीद थी कि जिस प्रकार से वर्ष 2023 में नारी शक्‍ति वंदन अधिनियम बना, यह संशोधन विधेयक भी पारित होगा लेकिन कांग्रेस ने अपना असली चेहरा, असली चरित्र दिखा दिया. यह कभी नहीं चाहते कि इस देश में महिलाएं आगे बढे़ं, यह कभी नहीं चाहते कि महिलाओं को आरक्षण मिले. क्‍योंकि इनकी सोच, इनकी नीति, इनकी नियत कभी महिलाओं के सम्‍मान और आदर की नहीं रही है और इसलिए किस प्रकार की दलीलें दी गईं. यह सब जानते थे कि जो प्रस्‍ताव केन्‍द्र सरकार लेकर आयी है, वह ऐसा फार्मूला है जिसके माध्‍यम से किसी का नुकसान नहीं होगा. किसी राज्‍य का नुकसान नहीं होगा. इन्‍होंने समझते हुए भी, जानते हुए भी जानबूझकर के इसका विरोध किया. इन्‍होंने दलीलें दीं कि दक्षिण के राज्‍यों को नुकसान होगा, लेकिन किसी राज्‍य को नुकसान नहीं होता, जो फार्मूला केन्‍द्र सरकार लेकर आयी थी.

          अध्‍यक्ष महोदय, उसके बाद मैं एक और दलील का जरूर उल्‍लेख करना चाहूंगी. इन्‍होंने कहा कि इस संशोधन विधेयक में ओबीसी समाज की महिलाओं को आरक्षण का प्रावधान नहीं है. मैं स्‍वयं ओबीसी समाज की महिला का प्रतिनिधित्‍व करती हॅूं. (मेजों की थपथपाहट) मैं स्‍वयं ओबीसी समाज की महिला हॅूं और आज इस सदन में खडे़ होकर कहना चाहूंगी कि देश भर की ओबीसी समाज की महिलाओं को कांग्रेस की असत्‍य हमदर्दी की आवश्‍यकता नहीं है, कांग्रेस की असत्‍य संवेदनाओं की आवश्‍यकता नहीं है. इस देश की महिलाएं सक्षम हैं, ओबीसी समाज की महिलाएं सक्षम हैं. उनमें क्षमता है. एक बार महिला आरक्षण लागू हो जाए, ओबीसी समाज की महिलाएं अपने आप आगे आ जाएंगीं और अपना स्‍थान बना लेंगी. इस देश का ओबीसी समाज बहुत अच्‍छी तरह से जानता है कि इस देश में कांग्रेस ने हमेशा ओबीसी समाज को छला है, ओबीसी समाज के साथ धोखा किया है और इसीलिए इस देश का ओबीसी समाज कभी आपके साथ खड़ा नहीं होगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, एक और दलील दी गई कि मुस्‍लिम बहनों को आरक्षण नहीं है. मैं कहना चाहूंगी कि हमारे संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का प्रावधान नहीं है लेकिन फिर भी मैं कांग्रेस से पूछना चाहूंगी कि आज आप मुस्‍लिम बहनों के प्रति आप बड़ी संवेदनाएं दिखा रहे हैं. उस समय वह संवेदनाएं कहां चली गईं, जब सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो प्रकरण में उस बहन को न्‍याय देने का काम किया था. (मेजों की थपथपाहट) उस समय आपकी संवेदनाएं कहां चली गईं थीं, जब सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आपने पलट कर इस देश की करोड़ों मुस्‍लिम बहनों के अधिकार का हनन किया था. उस समय आपकी संवदेनाएं कहां चली गईं थीं. मैं आज कांग्रेस पार्टी से पूछना चाहती हॅूं कि मुस्‍लिम बहनों के आरक्षण के लिए इनके मन में इतनी संवदेना कहां से आ गई और सिर्फ इतना ही नहीं, जब ट्रिपल तलाक को समाप्‍त करने के लिए हमारी सरकार ने कानून बनाया, तो सबसे ज्‍यादा विरोध इन्‍होंने किया था. तब इनकी संवदेनाएं कहां गईं थीं (मेजों की थपथपाहट) और इसलिए मैं कहना चाहूंगी कि इनका विरोध सिर्फ विरोध करने के लिए है, फिरका परस्‍त ताकतों के दबाव में उसको रोका था. यह देखिए, यह इनका चरित्र है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं कहना चाहूंगी कि वास्‍तव में आज देश की जनता के सामने, देश की महिलाओं के सामने कांग्रेस की कथनी और करनी में स्‍पष्‍ट अंतर समझ में आ गया है. इनका महिला विरोधी चेहरा उजागर हो गया है और इस देश की महिलाओं का जो अपमान हुआ है, महिला सबकुछ भूल सकती है लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूल सकती (मेजों की थपथपाहट) और इसलिए आने वाले समय में निश्‍चित रूप से इस देश की मातृशक्‍ति निश्‍चित रूप से इनसे हिसाब लेगी, सूद समेत हिसाब लेगी और इनके अस्‍तित्‍व को समाप्‍त करने का काम करेगी.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपको धन्‍यवाद देते हुए अंत में मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगी, क्‍योंकि आपने मुझे अपनी बात रखने का मौका दिया, लेकिन मेरे सामने जो विपक्ष बैठा हुआ है, मैं विपक्ष के सभी सम्‍माननीय सदस्‍यों से कहना चाहूंगी कि आप दलगत राजनीति से ऊपर उठकर माननीय मुख्‍यमंत्री जी के इस प्रस्‍ताव का समर्थन कीजिए. आज नारी हित में आपके द्वारा दिया गया सहयोग निश्‍चित रूप से इतिहास के दस्‍तावेज के रूप में संरक्षित होगा. त्रुटि किसी से भी हो सकती है, त्रुटि आपके लोगों से हुई है लेकिन मैं कहना चाहूंगी कि इसका प्रायश्‍चित मध्‍यप्रदेश कांग्रेस द्वारा किया सकता है. इसीलिए आज मैं बहुत विनम्रता के साथ कहना चाहूंगी कि द्वापर युग में भगवान कृष्‍ण कौरवों के पास गए थे कि पांच गांव दे दो, लेकिन कौरवों ने उनकी बात नहीं मानी. कौरव एक इंच जमीन भी देने  के लिए तैयार नहीं थे. आज उनके ही वंश के यदुवंशी मोहन ने आपके सामने प्रस्‍ताव रखा है (मेजों की थपथपाहट) कौरवों ने उस समय नहीं माना, आपने उनका हश्र देखा. कम से कम आज तो मान जाइए, नहीं तो आने वाले समय में आपका भी यही हश्र होगा, इस देश की महिलाएं आपके अस्‍तित्‍व को समाप्‍त कर देंगी. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. मैं संपूर्ण सदन के सदस्‍यों से यही निवेदन करना चाहूंगी कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी के इस प्रस्‍ताव का समर्थन करें. धन्‍यवाद. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय -- बहुत-बहुत धन्‍यवाद, माननीय श्रीमती कृष्‍णा गौर जी.

 

 

          श्री अजय सिंहमाननीय अध्यक्ष महोदय, इतना अच्छा भाषण महिला आरक्षण की बात पर इनको इधर बैठा दीजिये मोहन की जगह आप ही आ जायें.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)अध्यक्ष महोदय, एक प्वाईंट ऑफ इन्फरमेशन है. आज मोहनी एकादशी है, ऐसा कहते हैं कि

श्रीमती झूमा डॉ. ध्‍यान सिंह सोलंकी (भीकनगांव) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शासकीय संकल्‍प मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री जी के द्वारा लाया गया, शायद यह भी ऐतिहासिक ही होगा, किसी मुख्‍यमंत्री के द्वारा शासकीय संकल्‍प लाना. इस सदन का मत है कि नारी शाक्ति के वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं सशक्तिकरण के लिए, देश की संसद और विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण, किन्‍तु साइलेंट जो शब्‍द है, परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के पश्‍चात इसको लागू किया जाना. अध्‍यक्ष जी, चूंकि सदन में हमारी काफी अनुभवी बहनें हैं, नारी शक्ति वंदन अधिनियम- 2026, देश की आधी आबादी, जिसमें हमारी माताएं, बहनें, बेटियां का प्रजातांत्रिक व्‍यवस्‍थाओं में भागीदारी देना और ये देना शब्‍द भी  बहुत बड़ा है. केन्‍द्र में सरकार महिलाओं के अधिकारों का समर्थन तो करती है, बिल लेकर आती है, किन्‍तु साथ में एक बड़ा शब्‍द जोड़कर बहनों के साथ में फिर बेडि़यां लागू करके उन्‍हें पीछे किया जाता है, इनकी नेक नीयत, साफ और स्‍पष्‍ट दिखाई देती है. नीयत भी साफ हो, बहनों और बेटियों को बढ़ाना हो, उनके अधिकारों को देना है तो ये पक्ष मैं बड़ी मजबूती के साथ में कहना चाहती हूं कि उन्‍हें भ्रमित न करें, सत्‍ता में बने रहने का एक षडयंत्र न चलाएं, जिससे कि बहने आगे बढ़ने की कोशिश करती है, किन्‍तु ये पार्टी हमेशा उनको पीछे धकेलने का काम करती है. यदि वास्‍तव में महिलाओं को आरक्षण देने की नीयत है तो उन्‍हें स्‍पष्‍ट, सीधे और निष्‍पक्षता को ध्‍यान में रखते हुए परिसीमन या जनगणना को सामने रखकर  बहनों को पीछे करने का काम नहीं करें. मैं यह भी स्‍पष्‍ट कहना चाहती हूं कि ये जटिल प्रक्रिया अभी संसदीय मंत्री जी ने सही कहा कि इतना लंबा फार्म है, जिसको फुलफिल करने में ही वक्‍त लगेगा, पूरे देश की आबादी डेढ़ अरब से अधिक है इतने लोगों को करना है और फिर उसके बाद परिसीमन करना है और उसके बाद लागू करेंगे.

          अध्‍यक्ष जी, हमारे देश की बहनें इतनी समझ तो रखती है वे चाहे पढ़ी लिखी हो या नहीं पढ़ी लिखी, वे भी समझ रखती हैं कि इतनी लंबी प्रक्रिया के बाद आपको अवसर दिया जाएगा, ये कहां का न्‍याय है, ये बिल्‍कुल महिलाओं के साथ न्‍याय नहीं है और साथ में अब अगर बीजेपी के रिकार्ड की बात करें तो एक दशक से अधिक केन्‍द्र में सरकार, दो दशक से अधिक मध्‍यप्रदेश में सरकार, उसके बाद भी महिला बिल ये आज तक लागू नहीं कर पाए हैं, कितने दुख की बात है, बड़े खेद के साथ इसको कहना पड़ रहा है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री स्‍व. राजीव गांधी जी वर्ष 1989 में पंचायती राज व्‍यवस्‍थाओं मे 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना, ये महिलाओं को सशक्तिकरण का काम, हमारे सालों साल पहले प्रधान मंत्री रहे राजीव जी ने लागू किया और महिलाओं को अधिकार दिए. वर्ष 1992 में तत्‍कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह जी ने राज्‍य सभा में महिला आरक्षण के लिए संविधान में 108 वां संशोधन विधेयक लेकर आए और उसको वहां तो पारित किया, किन्‍तु इन्‍हीं लोगों ने विरोध किया और उस बिल को पारित नहीं होने दिया, ये भी सच्‍चाई है और बाबा साहब ने महिलाओं को समानता का अधिकार दिया. बाबा साहब ने संविधान में यदि महिलाओं को समानता का अधिकार नहीं दिया होता तो आज यह चर्चा नहीं होती, आज यह बात नहीं होती, बाबा साहब सालों साल पहले ये अधिकार देकर गए हैं(...मेजों की थपथपाहट)

वर्ष 2023 में कांग्रेस ने ऐतिहासिक महिला आरक्षण बिल 128वां संशोधन का पूर्ण समर्थन किया, पूरी ताकत से किया, सर्व सम्‍मति से किया, सभी दलों ने किया और ये बिल कानून का रूप लिया और हमारे देश की प्रथम महिला, राष्‍ट्रपति महामहिम श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी ने इसको स्‍वीकार करते हुए, इसको कानून का रूप दिया, तो क्‍या हमारे देश की प्रथम महिला का यह अपमान नहीं है कि दोबारा इस कानून को लाया गया. ये किस बात को न्‍याय करना दिखा रहे हैं.

 

1.05 बजे                

 {सभापति महोदय (श्री अजय विश्‍नोई) पीठासीन हुए}                  

माननीय सभापति महोदय, कांग्रेस की यह बात करते हैं कि कांग्रेस ने महिलाओं के लिये क्‍या किया है? तो मैं बताना चाहती हूं कि देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री स्‍व.इंदिरा गांधी जी बनीं, देश की प्रथम महिला राष्‍ट्रपति प्रतिभा पाटिल जी बनीं, पहली गर्वनर स्‍व. सरोजनी नायडू जी बनीं, इसी तरह से लोकसभा की प्रथम अध्‍यक्ष श्रीमती मीरा कुमार जी बनीं और वित्‍तमंत्री की भी बात करें तो इंदिरा गांधी जी पहली वित्‍तमंत्री रहीं हैं और इसके साथ ही यह सभी महिलाएं अपनी योग्‍यता और पराक्रम के आधार पर आगे बढ़ी हैं और अपनी पूरी ताकत, अपने पूरे योगदान के साथ अपनी भूमिका को पूर्ण किया है.

सभापति महोदय, देश की वीरांगनाओं को भी मैं इस अवसर पर याद करती हूं, अपना जीवन न्‍यौछावर करने वाली, अपने खुद का, अपने परिवार का बलिदान देने वाली रानी दुर्गावती, रानी लक्ष्‍मीबाई, अहिल्‍या माता जो एक सशक्‍त शासक के रूप में मानी जाती है, इन वीरांगनाओं को भी अवसर मिला और इतिहास के स्‍वर्णिम अक्षरों में इनका नाम आज भी मौजूद है, इन्‍होंने काम करके दिखाया है(मेजों की थपथपाहट)

माननीय सभापति महोदय, वर्ष 2023 की मैं फिर से चर्चा करना चाहूंगी कि जब 128 वां संविधान संशोधन विधेयक पारित हुआ, कितनी बड़ी खुशी की लहर पूरे देश में थी कि इतनी बड़ी संख्‍या में लोकसभा में 554 मतों से पारित हुआ और राज्‍यसभा में 214 मतों से  यह पूरा का पूरा सर्वसम्मिति से पारित हुआ और पूरे देश की महिलाओं ने गर्व महसूस किया कि आज  हमारे लिये राजनीतिक दलों ने कुछ किया है, किंतु आज बड़े शर्म के साथ वह सोच रही हैं, क्‍यों यह दुर्भावना वश , षड्यंत्रपूर्वक सत्‍ता की लोलुपता के कारण महिलाओं को सिर्फ चांद तारे दिखाने का काम भारतीय जनता पार्टी कर रही है. (मेजों की थपथपाहट)

माननीय सभापति महोदय, मौजूदा सीटों पर, हम लोग कोई बहुत बड़ी मांग नहीं कर रहे हैं, जो वास्‍तविकता है, उसको लागू किया जाये और लागू यह होना चाहिए कि वर्तमान की जो सीटें हैं, उसमें परिसीमन करके उन्‍हीं सीटों के ऊपर महिलाओं को आरक्षण दिया जाये, ताकि वह राजनीतिक रूप से अपनी भूमिका निभा सके, अपनी भागीदारी को पूर्ण कर सके और इस देश में अपनी बौद्धिक रूप से जो काम वह कर सकती है, वह करेगी. किंतु आप इस तरह से बहला फुसलाकर कुछ  भी करना यह न्‍याय नहीं है. एस.टी,एस.सी. के साथ ओ.बी.सी. की हमारी गरीब बहनें, ओ.बी.सी. की हमारी काबिल बहनें, उन बहनों का भी इसमें प्रावधान होना चाहिए और कोटे के अंदर कोटा देने का भी प्रावधान होना चाहिए और हर वर्ग की महिलाओं के नेतृत्‍व का अवसर देने के लिये यह आवश्‍यक है.

सभापति महोदय, सशक्‍त नारी से ही सशक्‍त परिवार होगा और सशक्‍त परिवार के साथ देश भी सशक्‍त होगा, यह हमारे जितने प्राचीन काल के विद्वान चाहे हम महात्‍मा गांधी कहें, विवेकानंद जी कहें या फिर दयानंद सरस्‍वती जी कहें, इन्‍होंने कहा है कि जिस देश की नारी शिक्षित होगी और आगे बढ़ेगी उस देश का  उद्धार होगा. यहां तक की विवेकानंद जी ने बोला है कि मुझे तो पूरे देश की संस्‍कृति को बचाना है, पूरे देश में समाज सुधार करना है, जागरूकता लाना है, तो एक तरफ यदि 500 पुरूष खड़े हों और दूसरी तरफ सिर्फ बहनें 20 हो जायें तो उन 20 बहनों के सहयोग से मैं समाज का उद्धार कर सकता हूं, इतना विश्‍वास और भरोसा था.     माननीय सभापति महोदय, बहुत लंबा न कहते हुए बहनों को यदि सीधा अधिकार और आरक्षण की बात को लागू करने की बात यदि पुरजोर तरीके से दोनों पक्ष करते हैं, तो जनगणना का इंतजार, परिसीमन की प्रक्रिया का इंतजार और अनिश्चितकालीन समय का इंतजार हमारी बहनें नहीं करेंगी. आज की तारीख में लोकसभा की ओर विधानसभा की जो स्थिति है, उन आंकड़ों के आधार पर बहनों को आरक्षण दिया जाये और तुरंत इसको लागू किया जाये, यही मांग हम लोग कर रहे हैं और अंत में कहूंगी की अन्‍नपूर्णा बनकर देख लिया, सरस्‍वती बनकर भी देख लिया, अब बनना है दुर्गा, दुर्गा स्‍वरूपा बनकर इस देश के विकास में भागीदारी देकर, देश को ऊंचाईयों पर ले जाना है, इन्‍हीं शब्‍दों के साथ आपने मुझे बोलना का वक्‍त दिया, इसके लिये बहुत बहुत धन्‍यवाद. (मेजों की थपथपाहट)

                                          

            श्री हेमन्‍त विजय खण्‍डेलवाल (बैतूल)-- माननीय सभापति महोदय, आज सदन में मोहन यादव जी द्वारा जो नारी शक्ति के वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं सशक्तिकरण के लिये देश की संसद एवं सभी विधान सभाओं में एक तिहाई आरक्षण, परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करने के लिये जो संकल्‍प पेश किया है, उसके समर्थन में मैं अपनी बात कहने यहां आया हूं. मैं हमारी बहन कृष्‍णा गौर जी को इस बात के लिये धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि उन्‍होंने प्रभावी ढंग से सारे पक्ष की बात रखी. मैं अध्‍यक्ष महोदय को कहना चाहता हूं कि आज इस विषय के समर्थन में बोलते हुये मैं खड़ा हूं. यह कोई एक विधेयक नहीं है, बल्कि भारत के सामाजिक, राजनैतिक और नैतिक भविष्‍य की दिशा तय करने वाला विषय है, नारी शक्ति वंदन अधिनियम.

          माननीय सभापति महोदय, हमारे शास्‍त्रों, पुराणों, उपनिषदों, रामायण और महाभारत में भी जब-जब जिक्र आया उन्‍होंने हर बार इसका जिक्र किया कि नारी शक्ति पुरूषों के बराबर की हकदार है. नारी शक्ति भारत में एक आस्‍था है, भारत का विश्‍वास है.

          माननीय सभापति महोदय, नारी को जब-जब अवसर मिला, उसने न सिर्फ नेतृत्‍व किया, समाज और देश को एक नई दिशा दी. हम इसका उल्‍लेख अपने इतिहासों में भी देख सकते हैं. अगर हम आज सदन में इस बहस को जारी रखना चाहते हैं तो हमें रानी लक्ष्‍मीबाई, अवंतिबाई का बलिदान, रानी दुर्गावती की वीरता, झलकारी बाई की बात और लोकमाता अहिल्‍याबाई का सुशासन भी यह बताता है कि नारी को जब-जब सम्‍मान दिया उसने इस देश को आगे बढ़ाने का काम किया. मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश की बेटी यदि राष्‍ट्र निर्माण में उसे जगह मिले तो वह भी समाज का नेतृत्‍व कर सकती है.

          माननीय सभापति महोदय, आज जब बहनों के आरक्षण की बात आ रही है तो हमने दुनिया के कई देशों की क्‍या स्थिति है, इस पर भी बात करना चाहिये. हम मोदी जी के नेतृत्‍व में दुनिया के उन देशों में सुमार होने वाले थे जहां बहनों को 33 प्रतिशत के लगभग का आरक्षण दिया, बल्कि उससे ज्‍यादा दिया. रवांडा जैसा देश अफ्रिका का ऐसा देश है जहां 60 प्रतिशत महिलायें बिना आरक्षण के संसद का प्रतिनिधित्‍व करती हैं. स्‍वीडन 45 प्रतिशत, फिनलेंड 44 प्रतिशत, स्‍पेन 42 प्रतिशत, हम इन देशों की केटेगरी में खड़े होने वाले थे, लेकिन हमारे मोदी जी ने हमारे देश के प्रधान मंत्री ने यह विषय इसलिये उठाया कि हमें अपने देश की संसद की क्‍या स्थिति है, इस पर चर्चा करनी चाहिये. हमारे यहां वर्ष 2014 के पहले सिर्फ 59 बहने चुनकर आती थीं और आज भी स्थिति बहुत नहीं बदली, बल्कि हमारी बहनें 74 संसद में चुनकर आती है, लेकिन यदि हम प्रतिशत में बात करें तो वर्ष 1999 में यह प्रतिशत सिर्फ 9 प्रतिशत था जो आज बढ़कर 14 प्रतिशत हुआ है और अगर हम आंकड़ों की बात करें तो लोकसभा में 14 प्रतिशत की भागीदारी हैं, लेकिन विधान सभाओं में 10 से कम. वर्ष 2003 में जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी उससे पहले मात्र 10 महिलायें हमारी विधान सभा का प्रतिनिधित्‍व करती थीं, आज यह आंकड़ा 27 पर पहुंचा है, लेकिन यह भी 13 प्रतिशत है. क्‍या आप सोचते हैं कि जब तक आधी आबादी को पूरा न्‍याय संगत 100 प्रतिशत न्‍याय नहीं मिलेगा तब तक यह देश की प्रगति हो पायेगी, तब तक हम दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो पायेंगे.

          माननीय सभापति महोदय, हमारी बहनों को बिना आरक्षण भी जब-जब किसी पद पर सुशोभित किया उन्‍होंने उसके साथ न्‍याय किया. चाहे राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की बात करें या हमारे देश की सुमित्रा महाजन की बात करें जिन्‍होंने लोकसभा में नेतृत्‍व किया.

          श्री महेश परमार--  इंदिरा गांधी जी ने भी पाकिस्‍तान के दो टुकड़े किये, उनका भी जिक्र करना माननीय अध्‍यक्ष जी.

           श्री हेमन्‍त विजय खण्‍डेलवाल--  आपका नंबर आयेगा तब बोल देना. मैं आपसे कहना चाहता हूं कि हमारी पार्टी ने भी चाहे राजमाता सिंधिया की बात करें. सुषमा स्‍वराज की बात करें, उनके नेतृत्‍व को बढ़ाने का काम किया. हमारा दल एकमात्र ऐसा दल है जिसमें पहली मुख्‍यमंत्री उमा भारती इस प्रदेश को देने का काम किया.

          माननीय सभापति महोदय, हम सिर्फ आरक्षण की बात नहीं कर रहे, हम सिर्फ सदन की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि मोदी जी के नेतृत्‍व में हमारी सरकार ने जो काम किये उसकी भी बात कर रहे हैं अगर मातृ वंदन योजना नहीं आती जिसमें 61 लाख बहनों का पंजीयन हुआ या उसके अलावा जो लाल किले से  हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने घोषणा की थी तो लगता था कि वह सिर्फ योजना है लेकिन हमारी शौचालय निर्माण की योजना हमारी बहनों के सम्मान की योजना बन गई. आज हमारी जो उज्जवला गैस योजना है जिसमें हमारी बहनें धुंए से प्रभावित होती थीं उसकी चिंता का काम भी हमारी सरकार ने किया और जनधन खाते खोलने में सबसे  सफल कोई हुआ.

          श्री सोहनलाल बाल्मीक - (XXX)

            सभापति महोदय -  अभी उस पर चर्चा नहीं हो रही है.. अभी चर्चा यह हो रही है कि महिलाओं को कैसे सशक्त किया जाये. माननीय हेमन्त खण्डेलवाल जी के विषय को आने दें यह विषय नहीं आयेगा.

          श्री हेमन्त विजय खण्डेलवाल -  3 करोड़ 70 लाख खाते खुलकर मध्यप्रदेश में ही बहनों को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया. जब-जब बात आती है देश की जब जब बात आती हैप्रदेश की तो 52 लाख लाड़ली लक्ष्मी और सवा करोड़ लाड़ली बहनों का जिक्र किये बिना देश में मध्यप्रदेश की चर्चा अधूरी रह जाती है. हमारे मुख्यमंत्री मोहन यादव जी के नेतृत्व में हम लगातार काम कर रहे हैं और लाड़ली लक्ष्मी योजना का परिणाम तो यह है कि एक हजार बेटों पर 948 बेटियां होती थीं अब यह बढ़कर 970 हो गया है और यही एक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में हमारी सरकार का बड़ा काम है. माननीय सभापति महोदय, शिक्षा से लेकर विवाह तक हर जगह हमारी सरकार काम कर रही है. चाहे मेघावी विद्यार्थी योजना हो, प्रतिभा किरण योजना हो,गांव की बेटी योजना हो या गरीब बेटियों के विवाह की योजना हो.अभी तक 6 लाख 10 हजार बेटियां सरकार की जो कन्यादान योजना है उससे लाभान्वित हो सकीं और अब तो मुख्यमंत्री जी ने हमारी बहनों के लिये एक महिला डेस्क की स्थापना की जिसमें बहनें बिना संकोच के अपनी रिपोर्ट करा सकें, अपनी बात कह सकें अगर प्रदेश की 5 लाख स्वसहायता समूह में 62 लाख बहनों के जुड़ने की बात मैं नहीं करूंगा तो बात अधूरी रह जायेगी अगर मैं प्रदेश में 2 लाख एमएसएमई इकाई में 57 परसेंट महिलाओं के द्वारा संचालित हो रही हैं यानि हमने इसको लगभग 50 पर ला दिया बिना आरक्षण के हमारी सरकार ने मैं हमारे पूर्व मुख्यमंत्री जी को और वर्तमान मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि नगरीय निकाय और पंचायत में 33 से बढ़कर हमने 50 परसेंट आरक्षण देने का काम किया. मैं कांग्रेस के मित्रों की आलोचना नहीं करना चाहता लेकिन 1998 से 2003 में आपका महिला बाल विकास का बजट मात्र 262 करोड़ का था और आज हमारा बजट 32 हजार करोड़ का है. 50 परसेंट का इजाफा हमारी सरकार ने बहनों के बजट में किया. आज मध्यप्रदेश शासन ने बहनों को अधिकार भी मिल रहे हैं और बहनें आत्मनिर्भर भी हो रही हैं. यह नारी शक्ति अधिनियम कुछ छीनने के लिये नहीं बल्कि कुछ देने वाला संशोधन है यह देने की भावना से लाया गया. चालीस से निर्मित चालीस साल से लंबित नारियों  के अधिकार का यह कानून 2019 में लोक सभा में लाने का काम किया लेकिन हमारी कांग्रेस और विपक्ष की सोच के कारण जो सोच शाह बानो प्रकरण में जो 370 प्रकरण में देखने को मिली उसके कारण यह बिल पारित नहीं हो पाया. मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि भारत के संविधान के अनुसार यदि लोक सभा विधान सभा सीट का पुनगर्ठन करते हैं तभी हम सही में आबादी के साथ और बहनों के साथ न्याय कर पाएंगे. आप सब की जानकारी में है कि 2001 की जनगणना के बाद 2026 तक उस समय की तत्कालीन प्रधानमंत्री ने परिसीमन को स्थगित रखा था क्योंकि वह मानती थीं कि अगर परिसीमन हुआ तो दक्षिण के राज्यों से अन्याय होगा. और उसी बात को ध्‍यान में रखते हुए मोदी जी ने वर्तमान आबादी पर आरक्षण का तय किया ताकि दक्षिण के राज्‍यों का किसी भी तरह का नुकसान न हो. वर्ष 1971 में जब 543 की सीट थी, तब हमारे देश की आबादी 54 करोड़ थी. आज हमारे देश की आबादी 140 करोड़ है.

          माननीय सभापति महोदय, दुनिया में सबसे ज्‍यादा आबादी पर अगर किसी देश का सांसद है तो वह भारत है. लगभग 30 लाख की आबादी पर यहां एक सांसद है. जबकि अमेरिका में 7 लाख की आबादी पर एक सांसद है. हमारे विरोधी पाकिस्‍तान में 5 लाख की आबादी पर एक सांसद है. ब्रिटेन में 70 हजार की आबादी पर एक सांसद है और माल्‍टा जैसे देशों में तो 25 हजार की आबादी पर एक सांसद है. आप बताइये क्‍या एक सांसद 25 लाख लोगों की आवाज उठा सकता है ? यहां लोकतंत्र तो विशाल है, लेकिन प्रतिनिधित्‍व असंतुलित है. यह विसंगति इसलिए बनी कि वर्ष 1971 के बाद डिलिमिटेशन को फ्रीज कर दिया. आबादी 3 गुना बढ़ी, लेकिन संसद की सीटें स्‍थिर रहीं और नतीजा एक सांसद पर अत्‍यधिक बोझ और राज्‍यों में असमान प्रतिनिधित्‍व हो गया. लोकतंत्र का सिद्धांत एक व्‍यक्‍ति, एक वोट, समान मूल्‍य कमजोर पड़ गया और इसलिए जब आबादी बढ़ी तो प्रतिनिधित्‍व भी बढ़ना चाहिए. अगर 300 सीटें बढ़ेंगी तो सांसद पर भी बोझ घटेगा और हमारा प्रतिनिधित्‍व संतुलित होगा. सांसद और जनता के बीच में सीधा संपर्क होगा. जवाबदेही भी मजबूत होगी.

          सभापति महोदय, इसलिए मैं आपके माध्‍यम से यह कहना चाहता हूँ कि भाजपा महिला सशक्‍तीकरण कानून के प्रति सिर्फ प्रतिबद्ध नहीं है, बल्‍कि इसे धरातल पर लागू कर रही है. मेरा आपसे अनुरोध है कि महिलाओं को समान अवसर देना चाहिए, यह सवाल नहीं है, बल्‍कि हमें उन्‍हें क्‍या अधिकार देना चाहिए, इन अधिकारों के लिए हम तैयार हैं. यह भारत भूमि, जिस भारत भूमि में हम 'भारत माता की जय' कहते हैं, हम भूमि को माता मानते हैं, नदियों को देवी मानते हैं, नवरात्रि में नारी शक्‍ति की आराधना करते हैं तो वास्‍तविक जीवन में नारी को निर्णय लेने का अधिकार देने में हम क्‍यों पीछे रहते हैं. अब पूजा के साथ भागीदारी का सवाल है, सम्‍मान के साथ अधिकार का सवाल है और माननीय सभापति महोदय, इसलिए मैं आपके माध्‍यम से कांग्रेस के मित्रों को भी कहना चाहता हूँ कि इतिहास आपको हमेशा याद रखेगा क्‍योंकि इतिहास में 50 साल पहले जो हुआ, उसका परिणाम आज है और जिस-जिस ने नारी का सम्‍मान किया, वह आगे बढ़ गया. मैं आपको पूरी दुनिया के उदाहरण देना चाहूँगा. आज से 200-300 साल पहले अमेरिका से लेकर यूरोप में नारी को बराबरी का दर्जा दिया गया, वे देश दुनिया के नक्‍शे पर आगे बढ़ गए और अफगानिस्‍तान, ईरान, पाकिस्‍तान जैसे देशों में नारी का अपमान हुआ, वे देश दुनिया के नक्‍शे में सिमटते जा रहे हैं. अगर समाज चाहता है कि आने वाले समय में हम दुनिया का नेतृत्‍व करें, अगर हम चाहते हैं कि दुनिया में हम अमेरिका और चीन के बराबर रहें तो नारी को सम्‍मान देने का यह अवसर हमें नहीं खोना चाहिए. मैं सदन के सभी सदस्‍यों से अपील करता हूँ कि हम सब अपने मतभेदों को दूर करके और परिसीमन को लागू करके क्‍योंकि सही आबादी और सही जनता का प्रतिनिधत्‍व संतुलित आधार पर होगा तभी इस देश के साथ न्‍याय होगा, जनता के साथ न्‍याय होगा. इसलिए यह नारी शक्‍ति वंदन अधिनियम यदि लागू होगा, आरक्षण के साथ लागू होगा, परिसीमन के साथ लागू होगा, बढ़ी सीट के साथ लागू होगा तो इस देश के हर मतदाता के साथ न्‍याय होगा. इन्‍हीं शब्‍दों के साथ इसका समर्थन करते हुए मैं अपनी बात समाप्‍त करता हूँ. धन्‍यवाद.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक (परासिया) -- माननीय सभापति जी, संकल्‍प के संबंध में मैं अपने विचार यहां पर व्‍यक्‍त करना चाहता हूँ. वर्ष 2023 में, जिसमें आज यहां चर्चा करने के लिए बुलाया गया है, यह निश्‍चित रूप में एक राजनीतिक लाभ लेने के लिए यहां पर इस सदन को बुलाया गया है क्‍योंकि जो बिल लोकसभा में पारित नहीं हो पाया, गलत तरीके से पेश किया गया, परिसीमन और जनगणना के माध्‍यम से, तो निश्‍चित रूप से वह स्‍थिति पूरे देश के अंदर में दिल्‍ली में लोकसभा में बननी थी. परन्‍तु उसको जानबूझकर लाकर महिलाओं को यह संदेश देना चाहते थे कि कांग्रेस इस बिल का विरोध कर रही है जबकि कांग्रेस ने 2024 में पूर्ण बहुमत के साथ चाहे लोक सभा की बात करें, चाहे राज्‍य सभा की बात करें, उसको पूर्ण सहयोग करके बिल को पारित किया. वर्ष 2023 में जो बिल लोक सभा और राज्‍य सभा में पारित हुआ, उसको लागू करने में भारतीय जनता पार्टी की केन्‍द्र सरकार को क्‍या परेशानी थी, क्‍या दिक्‍कत थी ? 543 सीटों के अंतर्गत उस बिल को लागू करना था और सही मायने में यदि महिलाओं के सम्‍मान और अधिकारों की बात समझते थे तो निश्चित रूप से जो बिल 2023 में पारित हुआ, उसको लागू समय पर किया जाना था, जनगणना और परिसीमन का विषय तो बाद में था, मगर आरक्षण उस समय लागू हो जाता, तो शायद यह स्थिति आज निर्मित नहीं होती. मगर जबरदस्‍ती तरीके से लोक सभा में यह बिल लाकर राजनीतिक लाभ लेने के लिए महिलाओं को इस बात को गलत संदेश देने के लिए बिल को लाया गया और उस पर जबरदस्‍ती देश के अन्‍दर बहस करवाई जा रही है. यह बात भारतीय जनता पार्टी को समझना चाहिए कि आज की जो महिलाएं हैं, वे सशक्‍त महिला हैं, वे पढ़ी-लिखी हैं, जो  पढ़ी-लिखी नहीं हैं, वह भी इस बात को समझती हैं कि किस तरीके का छल उनके साथ, भारतीय जनता पार्टी के लिए किया जा रहा है. यदि आरक्षण लागू हो जाता तो शायद उनके जो अधिकार की बात थी, तो उन सबको आने वाले लोक सभा में फायदा मिलता.

          माननीय सभापति जी, आज जिस तरीके से नारी शक्ति वंदन के तहत जो रोना भारतीय जनता पार्टी रो रही है कि कांग्रेस ने बिल गिराया है, यह निश्चित रूप से आम जनता को, यह बात सबको मालूम है. हम डीलिमिटेशन की बात करें, जनगणना की बात करें, इसमें जिस तरीके से इसको डाला गया है और जानबूझकर उसको रोका गया है, यह निश्चित रूप से भारतीय जनता पार्टी की मंशा थी कि हम कहीं न कहीं महिलाओं को आरक्षण नहीं दे सकते, अभी हाल में जिस तरीके से, मैं देख रहा हूँ कि आप महिलाओं की बात करते हैं, महिलाओं के सम्‍मान की बात करते हैं, उनके सहयोग की बात करते हैं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी के निर्देश में आज पूरे प्रदेश के अन्‍दर जो गरीब महिला का मुख्‍यमंत्री कन्‍या में विवाह होता था, उसमें बन्‍धन कर दिया गया, यदि गरीबी रेखा का कार्ड होगा, तो ही शादी हो पायेगी, नहीं तो नहीं हो पायेगी. गरीबी रेखा के कार्ड मध्‍यप्रदेश में नहीं बन रहे हैं. ऐसी बहुत सारी गरीब बच्चियां हैं, जो सामूहिक कन्‍या विवाह में शामिल होती थीं, उनका विवाह होता था और उन्‍हें लाभ मिलता था. मगर मध्‍यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने उस पर रोक लगा दी. गरीबी रेखा में यह लगा दिया कि जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हैं, उन्‍हीं की शादी होगी और यह भी तय कर दिया कि 100 और 200 से ज्‍यादा विवाह सामूहिक विवाह में नहीं हो सकते हैं, तो क्‍या इस लोगों के पास इसका जवाब है ? कि क्‍यों नहीं मुख्‍यमंत्री कन्‍या विवाह में उन बच्चियों को फायदा मिले, जो बेचारी गरीब हैं, जिनके पास गरीबी रेखा के कार्ड नहीं हैं, तो इस तरीके की जो बातें बोलने में और काम करने में बहुत अन्‍तर होता है, माननीय सभापति जी, यह आरक्षण नहीं है, यह बिना फण्‍ड का पोस्‍ट डेटेड चैक होता है, जो चुनाव में वोट बटोरने के लिए दिया गया है. अगर आप सच में महिलाओं को अधिकार देना चाहते हैं, तो बिना परिसीमन की शर्त के इसे आज ही लागू करें और जो 543 सीटें हैं, उस पर लागू करके बताएं, हम  तब ही मानेंगे कि भारतीय जनता पार्टी महिलाओं के पक्ष में हैं, सिर्फ दिखावा करने की आवश्‍यकता नहीं है.

          माननीय सभापति महोदय, मैं अभी इस बिल के संबंध में यह भी कहना चाहता हूँ कि भारतीय जनता पार्टी के लोग महिलाओं के संबंध में बहुत पाठ पढ़ाते हैं. इस सदन के अन्‍दर ऐसे बहुत सारे हमारे मंत्री जी हैं, खास तौर पर संसदीय कार्य मंत्री जी यहां पर बैठे हैं, इनके शब्‍द थे कि लड़कियां इतने गंदे कपड़े पहनकर निकलती हैं, तो वह शूर्पणखा लगती हैं. यह नारी वंदन है, यह नारी सम्‍मान है, इस तरीके की भाषा है. हमारे सदन में जो हमारे मंत्री जी बैठे हैं, वह हमारे देश के सेना की अधिकारी, जो देश की सेवा कर रही हैं, उनको आतंकवादी बोलते हैं, यह नारी सम्‍मान है, यह स्थिति बनती है, लाड़ली बहनों के मामले में आप ही के मंत्री इस बात को बोलते हैं कि लाड़ली बहना योजना से जो महिलाएं लाभ ले रही हैं, यदि वे कार्यक्रम में नहीं आईं, तो उनके नाम काट दिये जायेंगे. यह धमकी देकर नारी का सम्‍मान किया जा रहा है. ऐसी बहुत सारी जो घटनाएं हो रही हैं, भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के द्वारा लगातार महिलाओं का अपमान किया जाता है. इस मौके पर, मैं यह भी कहना चाहता हूँ कि बहुत बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, हमारे देश की बच्चियों ने, बेटियों ने ओलंपिक में गोल्‍ड मैडल लेकर आईं और जब उनके अधिकारों को, उनके शारीरिक शोषण की बात को उन्‍होंने जन्‍तर-मन्‍तर में बात उठाई, तो उनको पैरों तले से कुचला गया. जो देश की बच्चियां मैडल लेकर आई थीं, मैडल से देश का नाम ऊँचा किया था. उन बच्चियों की बात तक नहीं सुनी गई, सिर्फ इसलिए नहीं सुनी गई, कि जो उन बच्‍चों का शोषण कर रहा था, वह सांसद, भारतीय जनता पार्टी का था. (शेम-शेम) इसलिए भारतीय जनता पार्टी ने कोई कार्रवाई नहीं की. आज उन बच्चियों का पूरा भविष्‍य खराब हो गया और ये लोग महिलाओं के मान-सम्‍मान की बात करते हैं. सभापति महोदय, NCRB के आंकड़ों के तहत ऐसी अनेक महिलायें, बच्चियां हैं, जिन पर अत्‍याचार हो रहा है और शोषण हो रहा है, उनके अधिकारों को मारा जा रहा है. मैं, इस मौके पर यह भी कहना चाहता हूं कि मैंने विगत सत्र में मेरी विधान सभा से लापता हुइ दो बच्चियों के संबंधित मामला उठाया था लेकिन आज तक उनका पता नहीं लगा है. NCRB रिपोर्ट के अनुसार विगत 6 वर्षों में 2 लाख 74 हजार महिलायें और बच्चियां लापता हुई हैं, क्‍या सरकार सो रही है, इस मामले में मेरे पास इसके सारे प्रमाणों के साथ NCRB की रिपोर्ट है. (माननीय सदस्‍य द्वारा सदन में कागज दिखाते हुए.)

          सभापति महोदय, क्‍यों नहीं इस विषय पर चर्चा की जाती है, आज आरक्षण पर चर्चा हो रही है, हमारे प्रदेश की 2 लाख 74 हजार महिलायें एवं बच्चियां लापता हैं, जिनका आज तक पता नहीं चला है और आज भी पूरे प्रदेश में एक रैकेट की तरह काम किया जा रहा है. क्‍या मुख्‍यमंत्री जी इस बात को ध्‍यान में नहीं रखेंगे कि हमारी बच्चियों-महिलाओं को गुमशुदा कर दिया जा रहा है और जब हमने विषय उठाया तो "मुस्‍कान मिशन" के तहत कार्रवाई हो रही है कहकर, उसे टाल दिया गया है. ऐसे बहुत से आंकड़ें NCRB के हैं, जहां आज भी प्रदेश में महिलाओं पर अत्‍याचार हो रहे हैं और सरकार चुपचाप बैठी है, शांत बैठी है. आरक्षण का विषय इसलिए लाया गया क्‍योंकि इनको अपना वोट बैंक त‍य करना है, वास्‍तविक रूप से जो काम करना है, वह ये नहीं करेंगे कि जिस तरह से महिलाओं पर अत्‍याचार हो रहा है, इस पर विधान सभा में एक दिन की चर्चा करें, तब हम मानेंगे कि आपको इस बात की चिंता है कि महिलाओं पर जो अत्‍याचार हो रहे हैं, उनके अधिकारों को मारा जा रहा है, आपको उसकी चिंता है और आप उस पर चर्चा करना चाहते हैं.

          सभापति महोदय, आपने अभी हाल में देखा होगा, जब सतना से आई एक मासूम 12 वर्ष की बच्‍ची, दलित बच्‍ची, जिसके साथ उज्‍जैन में बर्बरता हुई, उसे मारा गया, यह पूरे देश ने देखा, वह खून से लथपथ होकर, पूरे 8 किलोमीटर भटकी और मदद मांगती रही लेकिन भाजपा सरकार का तंत्र सोया रहा और पुलिस ने 24 घंटे के बाद FIR दर्ज की. यह सम्‍मान नारी को भारतीय जनता पार्टी के माध्‍यम से दिया जा रहा है.

          सभापति महोदय, छतरपुर में हमारी आदिवासी मातायें-बहनें जंगल की लड़ाई लड़ रही हैं, चिता पर लेटी हुई हैं, फांसी लगाकर नदियों में खड़ी हैं, उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है, वे भी देश-प्रदेश की ही महिलायें हैं. क्‍यों उनका अधिकार नहीं दिया जा रहा है. क्‍या सरकार को इस बात की चिंता नहीं कि उस आंदोलन में जो महिला लड़ रही है, वह अपने अधिकार के लिए उसमें भागीदार है, क्‍या उनको अपना अधिकार नहीं मिलना चाहिए ?

          सभापति महोदय, ये सभी चीजें जिस प्रकार से हो रही हैं, केवल आरक्षण को लेकर भारतीय जनता पार्टी चिंता व्‍यक्‍त करना चाह है, वह सिर्फ वोट बैंक बढ़ाने के लिए है, इसका और कोई कारण नहीं है, आज भी यह जो विशेष सत्र बुलाया गया है, इसे बुलाने का कोई औचित्‍य ही नहीं था, जब यह विधेयक लोकसभा में, राज्‍यसभा में पारित ही नहीं हुआ तो इसे यहां लाकर आप चर्चा करवाकर, क्‍या बताना चाह रहे हैं, क्‍या करना चाह रहे हैं, (xx)        

            संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-  सभापति महोदय, मेरा व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है. कभी भी दर्शक दीर्घा में बैठे हुए लोगों के ऊपर इस सदन से टिप्‍पणी करना उचित नहीं है.

          सभापति महोदय-  इसे विलोपित किया जाये.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-  सभापति महोदय, हमें सच्‍चाई स्‍वीकार नहीं पड़ेगी.

          सभापति महोदय-  लेकिन दर्शक दीर्घा में कौन बैठा है, इसका उल्‍लेख करना जरूरी नहीं है.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-  सभापति महोदय, मैं, यह कह रहा हूं कि महिलाओं को जिस तरीके से गुमराह किया जा रहा है, उसकी बात कर रहा हूं कि किस तरीके से प्रायोजित तरीके से, आरक्षण के बारे में अपने-आप को भारतीय जनता पार्टी साबित करना चाह रही है कि हम महिलाओं के पक्ष में हैं, वह बात मैं करना चाह रहा हूं. मेरा कहना है कि आज भी प्रदेश में बहुत से विषय हैं, जिन पर चर्चा होनी चाहिए. चाहे वह किसान, बेरोजगार की बात हो, मैं मुख्‍यमंत्री जी से कहना चाहता हूं कि इनके पास गृह, खनिज मंत्रालय है और जितने भी मंत्रालय वे देख रहे हैं, वे विफलता की ओर जा रहे हैं.

          सभापति महोदय-  यह विषयांतर हो रहा है, मेरा आग्रह है कि आपका समय समाप्‍त हो रहा, आपको 10 मिनट होने वाले हैं.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-  सभापति महोदय, मैं, अपनी बात समाप्‍त करूंगा. ये गुमराह करने की राजनीति भारतीय जनता पार्टी बंद करे, देश की महिला का सम्‍मान करना है तो जो 543 सीटें लोकसभा में हैं और वर्ष 2023 में जो कानून पास हुआ है, आरक्षण बिल पास हुआ है उसको लागू करें तब हम मानेंगे कि भारतीय जनता पार्टी वाकई महिलाओं के बारे में सोचती और समझती है. यह तो महिलओं के साथ में सिर्फ धोखा और छल है. यह मेरा आपसे आग्रह है. आपने बोलने का मौका दिया, आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          सभापति महोदय-- धन्‍यवाद सोहनलाल जी. 

          श्रीमती अर्चना चिटनीस-- माननीय सभापति महोदय, आज इस अवसर पर मैं सुभद्रा कुमारी चौहान जी की इन पंक्तियों का उल्‍लेख करना, उनको स्‍मरण करना इसलिए आवश्‍यक समझती हूं कि आजादी के पहले जो उन्‍होंने लिखा, प्रधानमंत्री जी उसे ही क्रियान्वित करना चाहते थे. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने जो प्रस्‍ताव रखा है उस प्रस्‍ताव के समर्थन में, मैं अपनी बात‍ कहूंगी. सुभद्रा कुमारी चौहान जी कहती हैं:-

तू होगी आधार, देश की
पार्लमेण्ट बन जाने में ।
तू होगी सुख-सार, देश के
उजड़े क्षेत्र बसाने में ।।

तू होगी व्यवहार, देश के
बिछड़े हृदय मिलाने में ।
तू होगी अधिकार, देशभर
को स्वातंत्रय दिलाने में ।।

          माननीय सभापति महोदय, सारे देश की महिलाएं एक प्रकार से आनंदित थीं, आश्‍वस्‍त थीं उन्‍हें भरोसा था कि अब वह समय आ गया है कि पार्लियामेंट और विधान सभाओं की हर तीसरी सीट पर भारत की एक बेटी बैठेगी वह समय आ गया है यह सोचकर हम भारत की बेटियां, भारत की बहनें आंनदित थे. हम यह सोच ही नहीं सकते थे, हम जितने स्‍तब्‍ध हुए, जितने हैरान हुए उससे अधिक हम दुखी हुए, आक्रोशित हुए और लगातार मेरे पूर्व के वक्‍ताओं ने हमारे माननीय विधायक बहन, भाइयों ने इस बात को कहा और मुझे आपके माध्‍यम से कहना आवश्‍यक लगता है कि कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दल यहां पार्लियामेंट में जो कहते रहे और यहां भी जो कह रहे हैं वह एक सेल्‍फ डिनायल के मोड में दिनांक 27 सितम्‍बर, 2023 में नये पार्लियामेंट भवन में जो सेशन हुआ जो सत्र हुआ उसको जो सारे दलों ने जो समर्थन किया है वह समर्थन नारी शक्ति वंदन का जो आपने भी किया है. 27 सितम्‍बर, 2023 को हमारी राष्‍ट्रपति आदरणीय द्रौपदी मुर्मू जी ने जिस पर हस्‍ताक्षर किये और कानून बना, उस कानून के अंतर्गत डीलिमिटेशन भी था, उस कानून के अंतर्गत सीटों की अभिवृद्धि भी और उस कानून के अंतर्गत ही 33 प्रतिशत सीटों का इजा़फा था. माननीय प्रधानमंत्री जी की जो मंशा थी.

          सभापति महोदय-- (कुछ माननीय सदस्‍यों के आसन से बैठे-बैठे बात करने पर) कृपया आसन पर बैठे-बैठे न बोलें.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस-- माननीय सभापति महोदय, वह तो मानसिकता है. महिलाओं को आने मत दो, महिलाओं को बोलने मत दो, जब बिल आए तो अपना अशासकीय संकल्‍प लाकर आधे घंटे का समय खराब करो. यह इनकी मानसिकता है.

          सभापति महोदय-- आप कृपया अपना विषय चालू रखें.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस-- माननीय सभापति महोदय, मेरी बात हो जाए और जब आपका समय हो तो आप अपनी बात कहना. माननीय प्रधानमंत्री जी यही तो चाहते थे कि जाति के अधार पर जनगणना होना चाहिए. उसको स्‍वीकार किया, उसका आभार नहीं है. उसको स्‍वीकार करके उसके अनुसार व्‍यवस्‍था भी प्रारंभ की, उसका आभार नहीं है और वह सब करने में जनगणना में विलंब हुआ, लेकिन प्रधानमंत्री जी को लगाता था कि अ‍ब महिलाओं को पार्लियामेंट में और असेम्‍बली में जगह देना आवश्‍यक है. अगर हमें विकसित भारत 2047 तक बनाना है तो देश की आधी आबादी की पार्टीसिपेशन के बिना वह संभव नहीं है. इसलिए हमने कहा कि आज जो एविलेवल सेंसस है उसके अनुसार डीलिमिटेशन करके हमें 33 प्रतिशत आरक्षण बहनों को देना चाहिए. अब इसमें आपत्ति क्‍यों होना चाहिए. अब राजनैतिक लाभ इसे होगा कि उसे होगा. बहनों के बारे में जब विचार करें तब राजनीति से ऊपर उठकर विचार करें. आज मुझे यह कहना आवश्यक लगता है कि प्रधानमंत्री बनते ही जो शब्द प्रधानमंत्री जी के मुंह से पहले ही निकले थे वो थे "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" प्राथमिकता उनकी शुरु से यही थी. (मेजों की थपथपाहट)

          सभापति महोदय, एक व्यक्तिगत विषय है, लेकिन प्रधानमंत्री जी जब मुख्यमंत्री बने उससे पहले हमारे मध्यप्रदेश के प्रभारी थे. जब वे प्रभारी थी उन्होंने मेरी जैसी बहनों को उम्मीदवार बनाया वो चुनाव में जीत तो नहीं पाई. मैं 195 वोट से पीछे रही थी. विधायक न बनने के बाद जब मैं उनसे मिलने गई तो उन्होंने कहा कोई बात नहीं विधायक नहीं बनीं तो क्या हुआ, नेता तो बन गईं. तब भी उनकी यह मानसिकता थी उस समय कोई रिजर्वेशन नहीं था, कोई विषय नहीं था. अभी अध्यक्ष महोदय ने जब यह विषय रखा कि हमारे इस सदन में महिलाओं की संख्या कितनी शीर्ण थी, कितनी कमजोर थी. शून्य, एक, दो, तीन, आठ. इस प्रकार की सदस्य संख्या हमारे इस सदन में थी. यह तब था जब कुल सदस्यों की संख्या 320 हुआ करती थी.

          सभापति महोदय, आज एक स्मरण सहसा आया कि झांसी की रानी लक्ष्मी बाई, अंग्रेजों से लड़ते हुए, देश की आजादी के लिए तलवार निकालकर लड़ती रही, उनकी सेना कमजोर हो गई. उनका घोड़ा बादल उन्हें एक लंबी छलांग लगाकर पार तो करा गया लेकिन मर गया. वे घायल थीं. सेना की संख्या शनै:शनै: कमजोर होती जा रही थी. अंग्रेज चारों तरफ से घेर रहे थे. वे अपने गुरु गंगादास जी के पास गईं. उनसे उन्होंने कहा कि मुझे आजादी मिलती हुई नहीं दिखती है. अंग्रेज हावी हैं, अंग्रेज षड्यंत्रकारी हैं. ग्वालियर में उनकी समाधि के पास ही गंगादास जी की बगीची है. तब उनके गुरुदेव ने कहा था कि तुम नींव की पत्थर हो. नींव के पत्थर और मंदिर का कलश देखा नहीं करते हैं. वह तो उन्हें स्वीकार हुआ. अब यह स्वीकार नहीं होता है कि जो महिला परिवार की धुरी है, जो महिला समाज की रीढ़ की हड्डी है, जो महिला इस संसार की निर्मात्री है. जो महिला आरबीआई की सीएफओ हो सकती है. जो महिला अर्द्धसैनिक बलों की नेतृत्वकर्ता हो सकती है. जो महिला हमारी बहन सोफिया कुरैशी और व्योमिका सिंह जो दुश्मन के छक्के छुड़ा सकती है. जो महिला फाईटर प्लेन उड़ा सकती है.  आज स्पेस के क्षेत्र में 25 प्रतिशत हमारी बहनें हैं. उन बहनों और बेटियों को पार्लियामेंट में 33 प्रतिशत जगह क्यों नहीं मिलनी चाहिए.

          माननीय सभापति महोदय, हम कैसी रीजनेबल सी बात करते हैं. हमने ही वर्ष 2023 में डिलिमीटेशन के साथ में, सीटों की वृद्धि के साथ में समर्थन किया है. सबने समर्थन किया है. आज हम कह रहे हैं कि आज की सीटों के आधार पर करो. आपने तब किया वह गलत था या आज आप जो बोल रहे हैं वो गलत है. दोनों में से कुछ एक तो गलत है. मल्काजगिरी लोक सभा सीट है. इसमें 37 लाख 79 हजार 596 वोटर हैं. लगभग 40 लाख वोटर संख्या है. अरे आप फ्रीजिंग खत्म नहीं करोगे. आप Number of Parliament seats बढ़ाना नहीं चाहते हैं. आप यथास्थिति में रहना चाहते हैं. अगर ज्यादा मेंबर ऑफ पार्लियामेंट होंगे तो बेहतर सर्विस दे पाएंगे. बहुत दुख के साथ कहना पड़ता है कि हमारी कांग्रेस की नेत्री, लोक सभा की सांसद वो कहती हैं कि अगर यह बिल पास हो गया तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा. अगर महिलाओं को रिजर्वेशन मिल गया तो लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा ? यह इनकी मानसिकता है. वही नेत्री एक और शब्द का इस्तेमाल करती हैं जिसका मैं आज उल्लेख करना आवश्यक समझती हूँ. वे कहती हैं कि महिलाओं का राजनीतिक इस्तेमाल हो रहा है. यह "इस्तेमाल" शब्द भारत की महिलाओं के लिए गरिमापूर्ण नहीं है. यह भर्त्सना योग्य है. यह कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाता है. यह जीजाबाई का देश है, यह अहिल्‍या बाई का प्रदेश है, यह झलकारी बाई का प्रदेश है, यह सावित्री बाई का देश है, यह रमाई का, भिमाई का देश है, मुकताई माई का देश है. यहां महिलाएं इस्‍तेमाल नहीं होतीं, यहां महिलाएं राष्‍ट्र निर्माण में अपना योगदान देती हैं. अब कांग्रेस की चुनरी में तो याद आता है वह गीत कि लागा चुनरी में दाग मिटाऊं कैसे. आपकी चुनरी में तो दाग लग गया है महिला आरक्षण का विरोध करने का. 131 वां संशोधन जो आया उस पूरे संशोधन को आप जाकर ऑनलाइन देखिए, वह संशोधन सीटों की अभिवृद्धि करते हुए 33 परसेंट महिलाओं को आरक्षण देने का था. वह संशोधन डीलिमिटेशन का नहीं था. वह संशोधन आपने जिसके अगेंस्‍ट वोट किया है और वोट अगेंस्‍ट ही नहीं किया, वोट अगेंस्‍ट करने के बाद जब वह बिल गिरा, उसके अगेंस्‍ट वोट करना इनकी (XX) थी और उसके बाद हंसना, मुस्‍कुराना, जश्‍न मनाना, वह एक प्रकार से इनकी क्रूरता थी. वह कांग्रेस की क्रूरता थी. बिल के गिरने पर यह आनंदित हो रहे थे, यह मजे ले रहे थे, यह उसको इंजॉय कर रहे थे. यह कांग्रेस की (XX) नहीं तो क्‍या कहा जाएगा. कांग्रेस की क्रूरता नहीं तो उसे क्‍या कहा जाएगा.

          श्री लखन घनघोरिया -- सभापति महोदय, (XX) शब्‍द कार्यवाही से विलोपित किया जाए.

          सभापति महोदय -- यह शब्‍द विलोपित किया जाए. बहन जी, समय सीमा का ध्‍यान रखें. कृपया आपके 10 मिनट हो गए हैं.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस -- सभापति महोदय, मैं अपनी बात अतिशीघ्र समाप्‍त करूंगी. मेरे  पूर्व  एक  हमारे  साथी ने  कहा कि   संख्‍या  सीमित  कर दी है.  मुख्‍यमंत्री कमलनाथ जी की सरकार थी यह प्रशंसा का विषय है कि उन्‍होंने 25 हजार की राशि बढ़ाकर 50 हजार की, परंतु वह जितने दिन सरकार में रहे एक भी बेटी को मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना का लाभ नहीं मिला. विवाह के उपरांत बेटियों के गोद में बच्‍चे आ गए लेकिन एक भी बेटी को मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना का लाभ नहीं मिला.

          श्री लखन घनघोरिया -- सभापति महोदय, मैं विभाग का मंत्री रहा हूं, आपके सामने आंकड़े रख दूंगा कि 76,785 महिलाओं को हमने लाभ दिया था.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस -- सभापति महोदय, सबको अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा. जब सोहनलाल बाल्‍मीक जी बात कर रहे थे मैंने बीच में बात नहीं की थी.

          सभापति महोदय -- लखन जी, जब आपका समय आएगा तब आप अपनी बात रखना.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- सभापति महोदय, किसी महिला प्रतिनिधि को इस प्रकार दबाना यह उचित है क्‍या. यही आपके संस्‍कार हैं, यही आपकी संस्‍कृति है.

          सभापति महोदय -- अर्चना जी वह नहीं हैं जिनको कोई दबा ले कैलाश जी, अर्चना जी स्‍वयं सक्षम हैं.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस -- सभापति महोदय, स्‍वयं सक्षम हैं और आपका मुझे थोड़ा सा सहयोग मिल जाएगा तो मैं अपनी बात पूरी कर लूंगी.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- सभापति जी, यह घर में तो दबा नहीं पाते यहां क्‍या दबाने की बात करते हैं हमारे कैलाश जी.

          सभापति महोदय --  घर की बात यहां मत करिए सबके हाल एक जैसे हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- आप कौन सा दबा लेते हैं. (हंसी)..

          श्रीमती अर्चना चिटनीस -- नहीं वह तो शंकर जी ने भी कभी यह प्रयास नहीं किया आप लोग मत करना. शिवजी भी नहीं कर पाए. आप लोग प्रयास न घर में करना न बाहर करना. यह मैं आपको एक अच्‍छी सलाह दे रही हूं. टंच माल शब्‍द का प्रयोग किसने किया. आइटम शब्‍द का प्रयोग किसने किया. तंदूर में महिलाओं को जलाने का इतिहास किसका है. अरे सब छोड़ो एक राष्‍ट्रीय दल उसकी महिला प्रमुख के घर में एक बेटा है और बेटी भी, बेटा सांसद बनता है 33 साल की उम्र में और उनकी बेटी सांसद बनती है 52 साल की उम्र में. अगर राहुल जी को अवसर मिल सकता था तो प्रियंका जी को समय पर अवसर क्‍यों नहीं मिला. जो अपनी बेटी को समय पर अवसर नहीं दे पाए वह भारत की बेटियों को अवसर देने का क्‍यूं विचार करेंगे और कैसे विचार करेंगे.      

            सभापति महोदय --  अर्चना जी, कृपया समाप्‍त करें.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस -- सभापति महोदय, मैं इन शब्‍दों के साथ, इस आग्रह के साथ अपनी बात को पूरा करूंगी.

          श्री पंकज उपाध्‍याय --  अरे दीदी, (XXX) का नाम ले लीजिए.

          सभापति महोदय --  आप अपनी बात जारी रखें. कृपया समाप्‍त करें.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस --  मैं अपनी बात को इन शब्‍दों के साथ पूरा करूंगी कि माननीय प्रधानमंत्री जी इनसे आग्रह करते रहे, इनसे समर्थन चाहते रहे.

            श्री पंकज उपाध्याय(जौरा) -- माननीय सभापति महोदय, दीदी आपने इतनी बातें यहां पर की हैं एक बार तो जशोदा बेन जी को अधिकार दिलाने की बात करे.एक महिला को अधिकार नहीं दे पाये.

          सभापति महोदय- अर्चना जी आप अपनी बात कहें.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस-- सभापति महोदय, इनका स्त्री के विषय में विचार रखने का तरीका यही है.

          सभापति महोदय- आप उनकी बात का जवाब मत दें आप अपनी बात कहें और समाप्त करें.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस-- माननीय सभापति महोदय, यह लाड़ली बहनों का प्रदेश है, यह लाड़ली लक्ष्मी का प्रदेश है, यह गांव की बेटी का प्रदेश है, यह सबसे पहले पंचायती राज में 50 प्रतिशत आरक्षण देने वाला प्रदेश है, यह वह प्रदेश है जहां की योजनायें को बाकी के स्टेट उनकी कॉपी करते हैं,  नकल (Replicate) करते  है। 'नीति अनुकरण' (Policy Emulation)  उनको रिप्लीकेट करते हैं. मैं केवल इतना कहते हुये अपनी बात को पूरा करूंगी कि आप इंतजार में थे कि लाडली बहना कब तक चलेगी, अरे लाडली बहना चली भी, और दौड़ी भी और 1250 से बढ़कर 1500 रूपये हमारे मुख्यमंत्री जी ने कर दिये हैं.

          सभापति महोदय, इसके लिये मैं माननीय मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देना चाहती हूं कि आप अहिल्या देवी जी के नाम से आप महिला सशक्तीकरण का मिशन चला रहे हैं, और हम कह रहे थे महिला आरक्षण यह कह रहे थे जात-बिरादरी, हम कह रहे थे महिला आरक्षण ये कह रहे थे मुस्लिम महिलाओ को आरक्षण दो, हम कह रहे थे महिला आरक्षण ये कह रहे थे उत्तर दक्षिण में कन्फ्यूजन पैदा करो, अंग्रेजों की फूट डालो और राज करो की नीति अपनाओ, देश के गृह मंत्री अमित शाह जी ने कहा कि हम अनुपातिक क्रम में हर प्रदेश को 50 प्रतिशत सीट बढ़ायेंगे उन्होंने कहा कि आपकी बात का भरोसा नहीं वह बोले कि मैं लिखकर के देता हूं.

          सभापति महोदय- अर्चना जी यह बातें आ चुकी हैं इसलिये रिपीट न करें आप समय सीमा देखें और अपनी बात को समाप्त करें.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस -- सभापति महोदय, देश की बहनों के भाव को प्रगट करते हुये केवल इतना कहना चाहूंगी कि कंस के वध का इल्जाम किस पर जाता है,

          श्री महेश परमार(तराना) -- दीदी आप कितना भी कह लो फिर भी आपको मंत्री नहीं बनायेंगे.

          श्रीमती अर्चना चिटनीस -- कंस के वध का इल्जाम किस पर जाता है ? बाण रावण के कलेजे में किसने मारे थे?, फिर क्यों हमने अपने ही सिद्धांत नकारे थे, शांति के पाप से रावण नहीं जला करते, भूख हड़तालों से लंका नहीं मिला करती, राम कहते हैं बिना युद्ध किसी को अपने सम्मान की सीता नहीं मिला करती.सभापति महोदय,   गीता में दिए गए कृष्ण के संदेश कालजयी हैं, जो हर युग में प्रासंगिक हैं । वर्तमान समय में, भारत की बेटियों को अपने स्वाभिमान और सम्मान की रक्षा के लिए किसी और का इंतज़ार करने के बजाय, स्वयं 'गांडीव' अर्जुन का धनुष, जो यहाँ शक्ति और दृढ़ निश्चय का प्रतीक है उसे उठाना होगा । 

          सभापति महोदय- अर्चना जी बहुत धन्यवाद.

          डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह(अमरपाटन) -- माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे इस महत्वपूर्ण अवसर पर बोलने का अवसर दिया मैं आपके प्रति धन्यवाद ज्ञापित करता हूं. कई लोगों ने यहां पर भाषण दिये, आदरणीय कृष्णा गौर जी, अर्चना जी, हेमंत खण्डेलवाल साहब इन सबके मैंने भाषण बहुत गंभीरता से सुने. बहुत खुशी हुई हमारी कृष्णा जी ने कम से कम गांधी जी का और डॉ.अम्बेडकर जी का नाम तो लिया, क्योंकि इनका जो नया भारत है उसमें यह सब लोग अप्रासंगिक हो गये हैं. पूरी व्यवस्था उसको कलंकित करने की कोशिश करते हैं.

 

(श्री राव उदय प्रताप सिंह, शिक्षा मंत्री जी द्वारा बैठे बैठे कुछ बोलने पर )

 

          सभापति महोदय मैं इस इन्टरप्शन का जवाब देना नहीं चाहता. मैं यह कह रहा था कृष्णा गौर जी के भाषण के बारे में.औजस्वी था लेकिन सारगर्भित नहीं था. आंकड़ों की बाजीगरी इधर का उधर कहीं कौरव कहीं पांडव कहीं मुगल. अरे मुगलों का तो इतना नाम यह लोग लेते हैं कि शायद मुगलों के वंशज इतना नाम नहीं लेते होंगे इतनी बार नाम यह लोग मुगलों का लेते है. अब अर्चना जी का भाषण सुन रहा था अर्चना जी कह रहीं थी कि राहुल और प्रियंका के बारे में कि वह लड़की हैं महिला हैं इसलिये उनको बाद में लोक सभा सदस्य बनने का मौका  मिला राहुल जी पुरूष हैं इसलिये वह पहले बन गये अब क्या किसी को जबर्दस्ती बनाया जा सकता है माननीय सभापति महोदय कि यह स्वयं की इच्छा होती है. लोकसभा सदस्य बनने का  अवसर मिला. राहुल जी, चूंकि वह पुरुष हैं,  वह पहले बन गये.  क्या किसी को जबरदस्ती  बनाया  जा सकता है. यह स्वयं की अपनी इच्छा होती है.  क्या नारी  को   अपनी इच्छा के पालन  का अधिकार  भी आप छीनना चाहती हैं.  यह है भाजपा  का  असली चेहरा. कहते हैं कि लोकतंत्र  कोई इनका कह रहे हैं कांग्रेस पार्टी का कि कोई महिला नेता नाम नहीं लिया.  अगर यह पास हो जायेगा, तो लोकतंत्र  खतरे में पड़  जायेगा.  इस बिल के बारे में, कानून के  बारे में, मुख्यमंत्री जी आ गये हैं.   बड़ी प्रसन्नता की बात है, कभी कभार तो हम लोगों  को  उनके सामने बोलने  का अवसर मिलता है,  आज  मैं सौभाग्यशाली हूं. मुख्यमंत्री जी ने संकल्प रखा है कि  इस सदन का मत है कि  नारी शक्ति के वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण  विकास  एवं सशक्तिकरण के लिये  देश की संसद  एवं   सभी विधान सभाओं में महिलाओं के लिये एक तिहाई आरक्षण,परिसीमन  की प्रक्रिया पूरी कर, तत्काल प्रभाव से लागू किया जाये.  जहां तक आरक्षण का सवाल  है महिलाओं को,  तो कांग्रेस तो सदैव उसके पक्ष में रही है. कांग्रेस ने कब विरोध किया है.  यह बता दें, कब विरोध किया है. कृत्रिम एक कहानी गढ़कर के  कुछ भी यहां सदन में बोल  देना, गैलरी के लिये बोलना, प्रेस के लिये बोलना कि  छप जायें. यह पर्याप्त नहीं होता है.  जब केंद्र  में देवगौड़ा की सरकार थी, 1996 की बात है. तो कांग्रेस पार्टी विपक्ष  में  थी, लेकिन विपक्ष में होते हुए  भी  कांग्रेस  पार्टी प्रस्ताव लाई थी कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण  दिया जाये, लेकिन  वह आगे नहीं बढ़ सका.  आप तो उसमें शामिल थे.  क्यों नहीं आप लोगों  ने उसको सपोर्ट किया. क्यों  नहीं  आपने  समर्थन किया.

          श्री कैलाश विजयवर्गीयसभापति  महोदय, अभी संसद  के अंदर  जिस बिल पर मतदान हुआ,  वह कौन सा बिल था.  कौन सा था.  नहीं नहीं, आप बतायें, उसका नाम क्या  है.

          डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह--  कैलाश जी,  आप क्यों इतनी जल्दबाजी में हैं,  मैं  वह भी बताऊंगा.

          श्री कैलाश विजयवर्गीयमैं  जल्दबाजी में नहीं हूं.  आप अपने खूबसूरत चेहरे  से जिस प्रकार  पूरे सदन को  गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं,  इसीलिये मुझे बताना पड़ेगा.

          डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह--   कोई असत्य कथन मैंने नहीं कहा है.  आप बैकफुट पर हो. मैं  जो कहना चाह रहा हूं, वह  आप समझ रहे हो. सभापित महोदय, ये बड़े चतुर राजनीतिक्ष हैं.  ये समझ रहे हैं कि  मैं  क्या कहना चाहता हूं.  क्या यह सही नहीं है,  तथ्य नहीं है कि 1996 में कांग्रेस सरकार  लाई  थी देवगौड़ा की सरकार थी.  हम लोग विपक्ष में थे. फिर भी कांग्रेस ने साहस किया.  वह बिल को लेकर आई.  उस समय क्यों नहीं  आपने उसका समर्थन किया.  कांग्रेस फिर से ..

          डॉ. सीतासरन शर्मा बाहर से सरकार को सपोर्ट कर रहे थे.

          डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह--  अच्छा चलिये, मैं मान लेता हूं, आप बाहर से सपोर्ट कर  रहे थे.  ठीक है,  मैं यह मानने को तैयार हूं.  लेकिन  फिर मैं एक बात और कहूंगा कृष्णा गौर जी चली गईं.  यह पिछड़ों के आरक्षण की बात कर रही थीं.  मैं  याद दिलाना चाहता हूं कि  1989-90 में  जब  विश्वनाथ प्रताप सिंह  जी प्रधानमंत्री थे देश के,  इनका बाहर से समर्थन था,  मंडल आयोग की सिफारिशें  उन्होंने लागू कीं.  27 प्रतिशत आरक्षण पिछड़े  वर्गों को दिया जाये,  यह उसमें प्रावधान था.  इन्होंने सरकार गिरा दी.  समर्थन  वापस ले लिया और आज आप   पिछड़े  वर्गों के हिमायती बन रहे हैं. कमल नाथ जी  ने 27 प्रतिशत आरक्षण देने का  निर्णय  लिया था वह अल्पकालीन सरकार ने. तो  ये पिछडे़ वर्गों को  आरक्षण देने  और  उनके हिमायती  होने  का तो  इनका ट्रैक रिकार्ड  तो  यह है. हां येन केन प्रकारेण  वोट ले लेत हैं,  क्योंकि भाजपा अब   वोट लेने की ही मशीन  बन गई है.  सामाजिक सरोकार, देश के विकास, महंगाई  कम करना, नौकरी देना तमाम  नौजवानों  को,  इससे इनका  कोई लेना देना नहीं है. अगर मैं वह कर रहा हूं तो क्‍या बेजा कर रहा हूं. सभापति महोदय, अब आप इस संकल्‍प के माध्‍यम से 33 फीसदी आरक्षण देने की बात कर रहे हैं, परिसीमन की बात कर रहे हैं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी परिसीमन कैसे जल्‍दी हो जायेगा. परिसीमन होगा जब आपकी जनगणना के आंकड़े आ जायेंगे तो वह वर्ष 2027 में आने वाले हैं और आप संकल्‍प ला रहे हो कि महिलाओं को आरक्षण परिसीमन के बाद देना है. अब यह कैसे संभव है. महिलाओं को आरक्षण 33 प्रतिशत मिले, यह हम और हमारी पूरी कांग्रेस पार्टी, पूरी शिद्दत के साथ, पूरी ताकत के साथ इसका समर्थन करती है. ( मेजों की थपथपाहट) मैं आपको याद दिलाता हूं कि ..

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह- माननीय सभापति जी यह मोदी जी की सरकार है. मैं आज इस सदन में बहुत जिम्‍मेदारी के साथ कह रहा हूं कि विपक्ष के लोग यह नोट कर लें कि वर्ष 2029 के पहले जनगणना भी होगी, परिसीमन भी होगा और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण भी मिलेगा.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह- माननीय सभापति, माननीय भूपेन्‍द्र सिंह जी बहुत विद्वान, वरिष्‍ठ और योग्‍य सदस्‍य हैं. वह क्‍या कह रहे हैं और संकल्‍प में क्‍या लिखा है, इसमें तो विरोधाभास है...

          सभापति महोदय- विरोधाभास तो नहीं है, जो उन्‍होंने कहा है वही बात कह कह रहे हैं ना. विरोधाभास तो नहीं है उन्‍होंने भी यही कहा है. यही कहा है ना.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह- उन्‍होंने वर्ष 2029 के बाद कहा है.

          सभापति महोदय- उन्‍होंने सिर्फ यह कहा है कि वर्ष 2029 के पहले यह सब चीजें जो जायेंगी. आप अपनी बात जारी रखिये.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह- यह बिल प्रस्‍तुत हुआ, वह दो तिहाई बहुमत नहीं पा सका उसमें तो इसका प्रावधान था, तो आप क्‍यों दोहरा रहे हो. फिर आप यह संकल्‍प क्‍यों ला रहे हो. इस संकल्‍प का क्‍या उद्देश है, मैं समझ नहीं पा रहा हूं.

          सभापति महोदय- ( भूपेन्‍द्र सिंह जी के खड़े होने पर) भूपेन्‍द्र जी आपकी बात स्‍पष्‍ट आ गयी है. आपको रिपीट करने की जरूरत नहीं है.

          सभापति महोदय- बोलना चाहते हैं तो लय टूट जाती है.

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह- माननीय सभापति जी, मैं स्‍पष्‍ट रूप से कह रहा हूं कि माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी की सरकार है और हमारे मुख्‍य मंत्री मोहन यादव जी इस प्रस्‍ताव को लाये हैं. इसीलिये इस सदन में मध्‍यप्रदेश देश का पहला सदन है, जिसमें माननीय मुख्‍य मंत्री आज यह प्रस्‍ताव लेकर आये हैं.

          माननीय सभापति जी, यह नारी के सम्‍मान और गरिमा का सवाल है...

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह - भूपेन्‍द्र जी, मैं इसके लिये इल्‍ड नहीं करूंगा.

          सभापति महोदय- भूपेन्‍द्र जी, ,आप दूसरे वक्‍ता के समय में से ज्‍यादा समय ना लें. आपने अपनी बात कह दी है वह उचित है. पर अब वक्‍ता को अपनी बात कहने दें.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह- सभापति जी, कोई बंधन होना चाहिये कि कोई सामने वाला वक्‍ता इल्‍ड करे, यह नियम है, यह परम्‍परा है.

          श्री भूपेन्‍द सिंह- सभापति महोदय, भगवान राम ने नारी के सम्‍मान के लिये रावण का वध किया और नरेन्‍द्र मोदी जी नारी के सम्‍मान के लिये कांग्रेस का समाप्‍त करेंगे.

          श्री महेश परमार- सभापति महोदय, (XXX) माननीय प्रधान मंत्री जी पहले (XXX) को न्‍याय दिला दो. हमेशा भगवान राम से तुलना करते हैं.

          सभापति महोदय- महेश जी, आप बैठ जायें.  डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह जी आप अपनी बात जारी रखें.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह- सभापति महोदय, मैं एक बात रख दूं तो हंगामा मच जायेगा.

          सभापति महोदय- आप अपनी बात जारी रखें, हंगामा क्‍यों मचवा रहे हैं.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह - सभापति महोदय, भगवान राम जी ने महिला के सम्‍मान के लिये रावण का वध किया और मोदी जी क्‍या कर रहे थे, महिला के सम्‍मान के लिये, उन्‍होंने क्‍या किया. (XXX) कहां हैं, यह है नारी का सम्‍मान.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय( संसदीय कार्य मंत्री)- मेरा व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है. इतने बड़े सीनियर नेता, अगर इतनी घटिया बात करेंगे तो यह बिल्‍कुल बर्दाश्‍त नहीं किया जायेगा.

          सभापति महोदय- वह विलोपित कर दिया है.

                                                                                   

....(व्‍यवधान)...

          श्री शैलेन्‍द्र कुमार जैन -- माननीय सभापति महोदय, नारी का सम्‍मान है इसलिए विधेयक लेकर आए हैं...(व्‍यवधान)...

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- सभापति महोदय, मेरे वक्‍तव्‍य में अगर एक भी बात असत्‍य है, गलत है, तो आप मुझे यहीं फांसी की सजा दे दीजिए. घोषित कर दीजिए...(व्‍यवधान)...नहीं तो माननीय कैलाश भाई से कहिए कि वे संयम और संयमित होकर बात सुनें. माननीय भूपेन्‍द्र सिंह जी से भी कहिए...(व्‍यवधान)..

          सभापति महोदय -- ठीक है, आप अपनी बात आगे जारी रखिए.

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- यह मुझे बात ही नहीं करने देते. आपको क्‍यों इतना बुरा लग रहा है, आप बैठ जाइए. (श्री रामनिवास शाह, सदस्‍य के अपने आसन से खडे़ होकर कुछ कहने पर) ..

          सभापति महोदय -- शाह जी, कृपया बैठिए.

          श्री रामनिवास शाह -- (XXX)

          सभापति महोदय -- आप कृपया बैठ जाइए. रामनिवास शाह जी जो बोल रहे हैं, वह नहीं लिखा जाएगा. माननीय राजेन्‍द्र जी, आप अपनी बात जारी रखिए.

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- माननीय सभापति महोदय जी, मैं मुश्‍किल से सिर्फ तीन मिनट ही बोल पाया हॅूं. मेरे पास इतने सारे नोट्स हैं लेकिन मैं एक पन्‍ना भी नहीं बोल पाया हॅूं. यह सब बीच-बीच में खडे़ होकर टोका-टाकी करते हैं. मैं इनकी तारीफ कर दूं, तो यह सब चुप्‍पी से देखेंगे, चुप्‍पी साधकर मुझे सुनेंगे, पर वह मेरा धर्म नहीं.

          सभापति महोदय -- आपके पास बहुत मसाला है, तो आप सकारात्‍मक रूप से बोलिए ना. किसी को टोका-टाकी का मौका ही मत दीजिए.

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- माननीय सभापति महोदय, जब यह गलत बयानी करते हैं, हम तो सिर्फ सही तथ्‍य उजागर कर रहे हैं. वैसे तो मैंने आपसे कहा कि आप मुझे फांसी दिलवा दीजिए, अगर यह घटना नहीं घटित हुई होगी तो.     

          सभापति महोदय -- चलिए, आप आगे बढ़िए.  

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- अब यह कोई नहीं बोलेगा.

          सभापति महोदय -- आप अपनी बात करें.

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- सभापति महोदय जी, माननीय मुख्‍यमंत्री जी संकल्‍प लाए हैं. बहुत देर कर दी हुजूर आते आते. कम से कम कुछ लाए तो हैं. बहरहाल लोकतंत्र में जीत और हार लगी रहती है. क्रम चलता रहता है लेकिन लोकसभा में एक बिल पास न होने के कारण जो कि मुकम्‍मल नहीं था, जो सामयिक नहीं था, उसकी आवश्‍यकता नहीं थी क्‍योंकि वर्ष 2023 में आप पास कर चुके थे. आप वह बिल लाए, आप वह बिल क्‍यों लाए ? आप इसकी मंशा के पीछे जाइए. बंगाल में चुनाव थे. उस शेरनी से जीत नहीं पा रहे हैं. (मेजों की थपथपाहट)  चाहे यह ओ दीदी कह लें, चाहे यह ऐ दीदी कह लें, उनके भय से कुछ काम होने वाला नहीं है.. सभापति महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहता हॅूं.

          सभापति महोदय -- आप अपनी बात जारी रखिए.

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- सभापति महोदय, वैसे मैं नहीं समझता कि इनका शीर्ष नेतृत्‍व इतना नादान होगा. 33 परसेंट आरक्षण देने का जो विधेयक सर्वसम्‍मति से पास हो गया, वर्ष 2026 में उसको लाने की क्‍या आवश्‍यकता पड़ी ? मैंने आपको बता दिया. बहरहाल राजनीति को इतने निम्‍न स्‍तर पर ले जाना, मैं समझता हॅूं कि यह उचित नहीं है. माननीय कैलाश जी, जब आप लोग लोकसभा में संविधान के अनुच्‍छेद 334 में संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाए, तो आपने यह प्रचार करना शुरू कर दिया कि कांग्रेस और जो विपक्षी दल हैं उन्‍होंने रोड़ा अटकाया. क्‍यों आपका उद्देश्‍य पवित्र नहीं था. आपका उद्देश्‍य संविधान की रक्षा करने का या उसका सम्‍मान करने का नहीं था. व्‍यक्‍तिगत, राजनैतिक पार्टी के लिए राजनैतिक लाभ लेने के लिए था, तो कुल मिलाकर उद्देश्‍य यह था. अब दिक्‍कत यह है जैसे मैंने कहा कि चुनाव जीतने की मशीन बन रही है और इनके बहुत सारे आनुषांगिक संगठन हैं.  (XX)

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह -- माननीय सभापति महोदय, इसे विलोपित कर दें.

          डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- सभापति महोदय, इसे क्‍यों विलोपित होना चाहिए?...(व्‍यवधान)..

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह -- सभापति महोदय, इस पर चर्चा कैसे करेंगे ? अभी चुनाव आयोग पर चर्चा हम कैसे करेंगे. यह संवैधानिक संस्‍था है ?...(व्‍यवधान)...

संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- माननीय सभापति महोदय, मेरा पाइंट ऑफ ऑर्डर है. इन्‍होंने पहले संघ की बात बोली. इन्‍होंने आनुषांगिक संगठन कहा. यह संवैधानिक संस्‍था है, इस प्रकार इनका मजाक उड़ाना, ( XX ) यह बोलना उचित नहीं है. इतने बड़े सीनियर लीडर हैं ये उन संवैधानिक संस्थाओं का इस प्रकार से मजाक उड़ायें यह बिल्कुल बर्दाश्त करने लायक नहीं है इसको आप विलोपित करें.

सभापति महोदयन तो संविधान का मजाक उड़ाना भी मंजूर नहीं होगा और संवैधानिक संस्थाओं का भी मजाक उड़ाना मंजूर नहीं यह दोनों चीजें को विलोपित कर दें.

डॉ राजेन्द्र कुमार सिंह- सभापति महोदय मैं कैलाश जी को स्मरण दिलाना चाहता हूं कि यह भी यहां पर बैठे हैं यह भी एक संवैधानिक संस्था है. आपको वो बख्शते हैं आकर आप तो सत्तादल में हो वाशिंग मशीन आपके पास में है आप निश्चिंत हो आप पूरी तरह से सुरक्षित हो. कोई आपको चिन्ता नहीं है, लेकिन यह वास्तविकता है. रात गई रात की बात न कर अब आई है सुबह रोशनी का हिसाब कर आप नये भारत का हिसाब दो ना आप विश्वगुरू बनना चाहते हैं पड़ोस में खाड़ी युद्ध चल रहा है. आज भारत की हैसियत है भारत की इतना हास्यास्पद हो गई है.

सभापति महोदयआप विषय पर आईये खाड़ी युद्ध की चर्चा में कहां पहुंच गये.

डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंहअर्चना जी ने कहां कहां की चर्चा कर दी रामायण महाभारत और क्या क्या.

सभापति महोदयरामायण और महाभारत हमारे सांस्कृतिक ज्ञान हैं उस पर आप बोल सकते हैं. आप अपना विषय जारी रखें.

डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह (XX)

डॉ.सीतासरन शर्मासभापति महोदय आप संकल्प पर एक शब्द नहीं बोले.

डॉ. राजेन्द्र कुमार सिंह-- सभापति महोदय, यह गलत बात है. आप लोग मुझे टोकते क्यों हैं फिर यह बताईये मुझे. आज बहुत से सदस्य टोक रहे हैं. मैं पार्टी का पक्ष रख रहा हूं आप लोगों का आईना दिखा रहा हूं.

डॉ.सीतासरन शर्मासभापति महोदय संकल्प से सर्वथा संगत तथा उसकी व्याप्ति  पर ही चर्चा होगी सर्वदा उसमें लिखा है.

डॉ राजेन्द्र कुमार सिंह-- सभापति महोदय, यह आप किताबें पढ़कर के सुनाते हैं.

डॉ.सीतासरन शर्मासभापति महोदय किताबें पढ़कर के सरकार आपको बताते हैं.

डॉ राजेन्द्र कुमार सिंह-- सभापति महोदय इस पूरी प्रक्रिया को सुनाना चाहता हूं, बताना चाहता हूं मैं इसे पूरे नजरिये से देखता हूं.

सभापति महोदयआपको बोलते हुए 20 मिनट हो चुके हैं.

डॉ राजेन्द्र कुमार सिंह-- सभापति महोदय कहां हो चुके हैं सभापति महोदय मैं सात मिनट से ज्यादा नहीं बोल पाया हूं.

सभापति महोदयआपने टोका-टाकी का माहौल बनाया है इसलिये नहीं बोल पाये हैं. आपके कांग्रेस पक्ष के लिये पूरा एक घंटे का समय है.

सभापति महोदयपूरा समय आप ही ले लेंगे तो कैसे होगा और को भी तो समय देना है.

डॉ राजेन्द्र कुमार सिंह-- सभापति महोदय कोई असत्य कथन बता दें आप बता दें असत्य कथन है.

            सभापति महोदयआप अपनी बात विषय पर जारी रखें.

          डॉ राजेन्द्र कुमार सिंह-- सभापति महोदय वर्ष 2003 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से संविधान की धाराओं अब माननीय कैलाश जी सदन से जा रहे हैं 330 एवं 334 पर आधारित तीन संशोधन 330 (ए), 332 (ए) और 334 (ए) जोड़े गये. क्योंकि यह लोकसभा एवं देश की विधान सभाओं में महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने के और उन्हें संस्थाओं में 33 प्रतिशत भागीदारी और आरक्षण देने का मामला था उसमें कांग्रेस पार्टी ने उनका पूरा समर्थन किया था. राष्ट्रपति जी ने इस पर 28 सितम्बर, 2023 को हस्ताक्षर उसी दिन कर दिये हैं. उसी दिन भारत के गजट में नोटिफिकेशन हो गया. 106 वां संविधान संशोधन के रूप में लेकिन मोदी जी की सरकार ने यह नये भारत का हाल देखिये कि उसमें ढाई साल लगा दिये उसको नोटिफाइड करने में वह कानून बन सके. यह इन्होंने किया है ढाई वर्ष बाद इसमें प्रश्न यह है कि इन्हें लागू करने में इतनी देरी क्यों है ? इसमें वास्तविकता यह है कि आपकी मंशा झलकती है बस हर निर्णय राजनैतिक लाभ के लिये आप लोग देखते हो. पंजाब का उदाहरण मैंने आपको बता ही दिया. सभापति महोदय 16 अप्रैल 2026 को भारतीय जनता पार्टी की सरकार तीन और बिल प्रस्तुत किये. 131 वां संविधान संशोधन विधेयक 2026 केन्द्र शासित प्रदेश क्षेत्र संशोधित विधेयक 2026 और परिसीमन अधिनियम 2026 बस यहीं से आपकी असली इच्छा प्रकट होती है. अगर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना ही था, अब ठीक है, अर्चना जी कह रही थीं, कोई चालीस लाख का हो गया, कोई तीस लाख का हो गया. ये भारत है आप इंग्‍लैंड, बोत्‍सवाना, फिनलैंड, नार्वे से जहां की आबादी 2 करोड़, ढाई करोड़ है. ये भारत है, क्‍यों आप परिसीमन को जोड़ना चाहते हैं, अगर आप वास्‍तव में आरक्षण देना चाहते हैं तो इसमें जरूर दें, लेकिन परिसीमन होगा, कौन होगा उसमें एक रिटायर्ड जस्टिस होगा, सुप्रीम कोर्ट का, एक नया ज्ञानेश कुमार आप वहां बैठा देंगे, वैसे ही आप उसको सदस्‍य बना देंगे और परिसीमन क्‍या होगा, आपके असम में क्‍या हुआ है, वहां पर एसआईआर के नाम से नाम काटे गए, परिसीमन के नाम से कांटछांट की गई ताकि ऐनकेन प्रकारेण, बड़े कलाकार है.

          सभापति महोदय राजेन्‍द्र जी, आप वरिष्‍ठ हैं, आप जानते हैं, परिसीमन आयोग बनेगा तो उसमें आपके भी सदस्‍य रहेंगे. मैं स्‍वयं परिसीमन आयोग में रहा हूं, मैं जानता हूं प्रक्रिया को.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह वे अपने आंकड़े देने के लिए रहेंगे, सब कोई जा नहीं सकता, उतना ही काम है निर्णय वह कमेटी करती है, तीन लोगों की कमेटी बनती है, उसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज, वर्ष 2003 में जस्टिस कुलदीप सिंह थे, फिर आप भूल जाएंगे किसी को उसी तरह. बहरहाल ये जो कांटछांट आप कर  रहे हैं, ये सिर्फ किसी तरह से आप बहुमत हासिल कर लें, ये आपकी पूरी कार्यवाही झलकती है. सभापति जी मैं बहुत सारी चीजें स्किप किए जा रहा हूं. अब उसमें लोकसभा का प्रावधान 850 बनाने का है और  संघीय व्‍यवस्‍था का ध्‍यान अवश्‍य रखा जाए, सिर्फ आबादी के आधार पर न हो, जो एक फॉर्मूला कि जितनी सीटें हैं, जिस राज्‍य की, उसका आप पचास फीसदी बढ़ा दें तो वह शायद न्‍याय संगत होगा और अगर ऐसा नहीं करेंगे, आबादी को आधार बनाएंगे तो जो दक्षिण के राज्‍य हैं, जहां बेहतर  शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य, आर्थिक ग्रोथ है और आबादी पर नियंत्रण फैमिली प्‍लानिंग के माध्‍यम से है वह पिछड़ जाएंगे, उनमें आक्रोश पैदा होगा और इस संघीय ढांचे को बनाए रखना बड़ा कठिन होगा, एक और चुनौती देश के सामने खड़ी हो जाएगी. कांग्रेस पार्टी ने हमेशा 33 प्रतिशत आरक्षण देने की भूमिका निभाई. राजीव गांधी जी ने पंचायती राज व्‍यवस्‍था लागू करने  की बात की थी. काल की गोद में वे असमय समा गए, लेकिन जब कांग्रेस की सरकार  नरसिम्‍हाराव जी के नेतृत्‍व में बनी तो पंचायती राज व्‍यवस्‍था, नगरीय शासन व्‍यवस्‍था इनको संवैधानिक दर्जा दिया 73 वां एवं 74 वां संविधान संशोधन लाकर और उसमें 33 फीसदी  आरक्षण महिलाओं को दिया गया.

          सभापति महोदय, देश में लगभग 24 लाख ऐसी संस्‍थाएं काम कर  रही है. और 24 लाख संस्‍थाओं में खुशी है हमें कि उसमें मध्‍यप्रदेश की सरकार का भी योगदान है. मुख्‍यमंत्री जी 33 फीसदी  से 50 फीसदी करने का आपका उसमें योगदान है, उसके लिए मैं आपको श्रेय देता हूं कि आपने 50 फीसदी किया, लेकिन आप नजर दौड़ाइए 12 लाख है, लेकिन उत्‍तर में 20 राज्‍य है जहां 50 फीसदी है लेकिन उत्‍तर प्रदेश राज्‍य  में जो सबसे बड़ा  है जो मोदी जी की कर्मभूमि है, वे वहां से चुनाव लड़ते हैं, वहां 50 फीसदी नहीं है, नियम ही नहीं आया 33 फीसदी है लेकिन 33 फीसदी भी नहीं 20 से 25 फीसदी आरक्षण उत्‍तरप्रदेश में महिलाओं को मिल रहा है. ये राजेन्‍द्र सिंह नहीं कह रहा है सभापति जी आप सीएजी की रिपोर्ट उठाकर देख लें.

          तू इधर उधर की बात न कर, बता कारवां क्‍यों लुटा

          मुझे रहजनों से गिला नहीं, तेरी रहबरी का सवाल है.

सभापति महोदय राजेन्‍द्र जी, इधर आपका समय न लुट जाए आप इसकी चिंता करो.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह सभाप‍ति जी, बस दो मिनट दे दीजिए मैं विषय को स्किप कर रहा हूं.

          सभापति महोदय सभी अभी 30 वक्‍ता और बाकी है हम यदि इतनना लंबा लंबा समय लेंगे तो काम मुश्किल से समाप्‍त हो पाएगा. सभी वक्‍ताओं से निवेदन है कि समय सीमा का ध्‍यान रखें.

डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह सभाप‍ति जी, आप हमारे संरक्षक है बस दो मिनिट दे दीजिए.

 

2.20 बजे                

{सभापति महोदया(श्रीमती झूमा डॉ.ध्‍यान सिंह सोलंकी)पीठासीन हुए}

              

माननीय सभापति महोदया, अगर वास्‍तव में इन लोगों में ईमानदारी होती है, तो इन्‍होंने इसको लागू कर दिया होता और मैं तो कहूंगा कि जो अगला चुनाव है माननीय मुख्‍यमंत्री जी यदि मैं आपके माध्‍यम से उनको कह पा रहा हूं तो विधानसभा का अगला चुनाव वर्ष 2028 का में आने वाला है, अब आप मत रूकिये वर्ष 2029 के चुनाव के लिये, वर्ष 2028 में ही महिलाओं को मध्‍यप्रदेश में 33 फीसदी आरक्षण दे दीजिये (मेजों की थपथपाहट) यह कांग्रेस पार्टी चाहती है, तब आपकी ईमानदारी और प्रतिबद्धता महिलाओं के प्रति, उनको न्‍याय देने के प्रति साबित होगी. लेकिन आपको तो बातें करनी है, अब वह कहावत है कि "सूप बोले तो बोले, छलनी भी बोले जिसमें बहत्तर छेद" जहां छेद ही छेद हैं, तो क्‍या करें. ''न थी हाल की जब हमें अपनी खबर, देखते रहे ओरो के ऐब हुनर, जब पड़ी नजर अपनी बुराईयों पर तो निगाहों में कोई बुरा न रहा'' यहां सब प्रबुद्ध लोग बैठे हैं, सब चुनकर आये हैं, सब जनता की सेवा करना चाहते हैं, राज्‍य के विकास में योगदान करने की इनकी सबकी भूमिका है.

माननीय सभापति महोदया, आपने ही अपने भाषण में उल्‍लेख किया था, मैं उसको क्‍यों दोहराऊं, पहली हमारी महिला अध्‍यक्ष ऐनी बेसेंट थीं, सरोजनी नायडू, इंदिरा गांधी, सोनिया गांधी फिर कितने क्रम से प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्‍यक्ष, अनेकों पद कांग्रेस ने दिये और यह कांग्रेस पर आरोप लगाते हैं कि कांग्रेस महिलाओं को आरक्षण नहीं दे रही है, महिलाओं का सम्‍मान नहीं कर रहे ही, लेकिन यह जो आज स्थिति बनी है...

सभापति महोदया-- राजेन्‍द्र जी आप अपनी बात पूरी करें, क्‍योंकि आपको आधा घण्‍टा हो गया है.

डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- वैसे यह इनके कार्यकताओं का काला चिट्ठा है, जो मेरे पास है, मैंने काफी स्‍टडी की है. अब महिलाओं का सम्‍मान करने वालों में इनकी लंबी सूची है, वह हमारे ब्रजभूषण शरण सिंह हैं, एक कुलदीप सिंह सेंगर है, एक वहां पर वह अंकिता भंडारी बेचारी है, वह है. बनारस में वह छात्रा के साथ गैंग रेप है, सब इनके कार्यकर्ता थे और बहुत सारी घटनाएं हैं, मैं नहीं दोहराना चाहता हूं, कठुआ वाला कांड है और फिर यह क्‍या कह देंगे कि न्‍याय अपना काम कर रहा है, अरे दृढ़इच्‍छाशक्ति के बिना न्‍याय भी काम नहीं कर पाता है, न्‍याय बंधुआ हो जाता है, इसलिए आप अपनी दृढ़इच्‍छाशक्ति रखें.

इंजी.प्रदीप लॉरिया -- आप तंदूर कांड पर भी बोलिये, इतना विख्‍यात हुआ था.

डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- लॉरिया जी जब आपका मौका आये तो आप बोल दीजियेगा, अब तो हमारे सभापति भी नहीं रहे हैं, वह हमको छोड़कर चले गये हैं. तब आप तंदूर कांड की भी बात कर लीजियेगा.

सभापति महोदया -- राजेन्‍द्र जी आप अपनी बात पूरी करें क्‍योंकि दोनों पक्षों की ओर से बहुत लंबी सूची है.

डॉ.राजेन्‍द्र कुमार सिंह -- सभापति महोदया, मैं अपनी बात खत्‍म कर रहा हूं, बहुत टोका टाकी आज इन लोगों ने मेरी की है. मैं स्‍पष्‍ट रूप से कहना चाहता हूं कि यह जो हमारे मान्‍यवर मुख्‍यमंत्री जी का आधा अधूरा लाया गया संकल्‍प है. अब बहुत सारी उपमाएं हमारी मेडम कृष्‍णा गौर जी ने यदुवंशियों के  लिये दी है, यह किया, वह किया, वह तो नहीं है, हमारे मुख्‍यमंत्री जी हैं. अब आप इतना अच्‍छा बोलने लगोगी, तो ऐसा न हो कि सारे लोग कहें कि कब आपका नंबर आ जाये वहां, तो थोड़ा सा संभलकर चलना, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मुझे बोलने का समय दिया है. मुझे दुख भी इस बात का है कि अगर तथ्‍य की बात रखो, तो बेवजह टोका टाकी होती है.

            लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं यांत्रिकी मंत्री(श्रीमती संपतिया उइके) -- माननीय सभापति महोदया, ''बेटियां अब न रूकेंगी, बेटियां अब न थकेंगी, बेटियां अपना इतिहास, नया युग रचेंगी, नया युग रचेंगी'' आज हम सब लोगों के लिये एक बहुत ही गौरव का पल है कि हमारी सरकार में डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्‍व में आज एक दिन का महिलाओं के लिये समर्पित इस संकल्‍प को पारित करने के लिये, इस संकल्‍प पर चर्चा करने के लिये आज हमारी बहनों को मौका मिला, उसके लिये मैं हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद देती हूं. जिस तरह से अभी हमारे सभी वक्‍तागणों ने हमारे सभी भाई बहनों ने लगातार 33 परसेंट आरक्षण को लेकर चर्चाएं हुईं. और जिसको लेकर के लगातार संसद के अंदर 16 और 17 तारीख को देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्‍व में चर्चा हुई और जिसमें सभी हमारे देश के 70 करोड़ बहनें लगातार टकटकी निगाह से देख रही थीं कि वह आज का दिन हमारे लिये भारत का एक नया युग रचेगा, इस भाव को लेकर के और वह दिन को देखने के लिये सभी हमारी बहनें दूरदर्शन के माध्‍यम से टेलीविजन के माध्‍यम से और संसद के अंदर हमारी करोड़ों बहनें अपनी नजर उठाकर देख रही थीं कि आज बहनों के लिये एक स्‍वर्णिम युग होगा और आज भी माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने हम सब लोगों को आज यहां पर चर्चा करने के लिये, अपनी-अपनी सहमति, अपनी-अपनी बातें यहां पर रखने के लिये किसके मन में क्‍या है, वह चरितार्थ करने के लिये यहां पर आज संकल्‍प पारित करने के लिये आज हम सभी लोगों को यहां पर बुलाया, इसके लिये मैं धन्‍यवाद देती हूं. आज भारतीय जनता पार्टी की सरकार चाहे वह केन्‍द्र की हो या प्रदेश की हो हर वर्ग की बहनों को कैसे सशक्‍त किया जाये उसके लिये लगातार सरकार ने अनेक ऐसी योजनायें बनाईं जिसके चलते आज त्रिस्‍तरीय पंचायती राज में 50 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को दिया गया. मैं मानती हूं कि हमारे पूर्व वक्‍तागण कह रहे थे कि त्रिस्‍तरीय पंचायती राज में 33 प्रतिशत आरक्षण हमारी बहनों को मिला और जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी तो वर्ष 2016-17 में तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री जी ने जिस तरीके से भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया और उस 50 प्रतिशत आरक्षण में महिलायें बहुत शानदार काम कीं और मध्‍यप्रदेश की बात करूं तो मध्‍यप्रदेश में भी हमारी सरकार ने लगातार महिलाओं को सशक्‍त करने का काम किया और आज जब केन्‍द्र की सरकार ने वर्ष 2016 और 2017 में चर्चा की बात आई, 33 प्रतिशत आरक्षण की बात आई तो उसमें पंचायत से पार्लियामेंट तक हमारी बहनें जातीं और आरक्षण के अलावा भी भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरीके से, मैं खुद उदाहरण हूं कि पंचायत से पार्लियामेंट तक पहुंचाने का काम यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया. भारतीय जनता पार्टी की स्‍पष्‍ट नीति रहती है और जो कहती है वह करके दिखाती है और उसके लिये हमारी अनेक बहनों ने आज जो यहां पर नेतृत्‍व कर रही हैं. 28 बहनों को भारतीय जनता पार्टी ने विधान सभा में टिकट दिया और उसके चलते हमारी 21 बहनें आज भारतीय जनता पार्टी की तरफ से नेतृत्‍व यहां पर कर रही हैं, मैं उन सभी बहनों को भी बहुत-बहुत धन्‍यवाद देती हूं और हमारे शीर्ष नेताओं को भी हृदय से बहुत-बहुत आभार व्‍यक्‍त करती हूं कि आरक्षण के अलावा भी आप लोगों ने बहनों को सम्‍मान देते हुये चाहे वह योजनाओं के माध्‍यम से हो, चाहे आर्थिक स्थिति में हमारी बहनें कैसे मजबूत हों उसको लेकर के वह चाहे राजनीतिक क्षेत्र हो, चाहे सामाजिक क्षेत्र हो हर क्षेत्र में महिलाओं का सम्‍मान बढ़ाने का काम हमारी सरकार लगातार कर रही है जिसके कारण से आज हमारी बहनें आगे आ रही हैं. हमारे पूर्व वक्‍तागण अभी कह रहे थे कि आर्थिक स्थिति में यदि हम बात करें तो जिस तरीके से मध्‍यप्रदेश के अंदर 5 लाख से ज्‍यादा स्‍वसहायता समूह बने और 62 लाख से ज्‍यादा हमारी बहनें आत्‍मनिर्भर भारत की ओर हमारी बहनें बढ़ीं जिसके चलते लखपति दीदी बनीं, जिसमें हमारी बहनें जो गांव देहात में रहने वाली स्‍वसहायता समूह के माध्‍यम से जुड़कर के और 12 लाख बहनें आज लखपति दीदी के रूप में जानी जाती हैं. मध्‍यप्रदेश की सरकार में स्‍टार्टअप इंडिया हमारी बहनों को तकनीकी योजना के माध्‍यम से जिस तरीके से ड्रोन दीदी के लिये लगातार काम करके और आज तकनीकी को बढ़ावा देने के लिये हमारी बहनों को आगे लाये और आज हमारी बहनें सिर्फ खेती, किसानी नहीं आज हमारी बहनें अंतरिक्ष में जाकर के उड़ान भर रही हैं, चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, खेलकूद का क्षेत्र हो हर क्षेत्र में हमारी बहनें आज पताका लहरा रही हैं, यह हमारी भारतीय जनता पार्टी की सरकार की देन है कि हर क्षेत्र में हमारी बहनें आगे आ रही हैं और जिस तरीके से आज लगातार भारतीय जनता पार्टी की सरकार जो कहती है वह करती है और उसको लेकर के चाहे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना हो, चाहे इंद्रधनुष योजना हो और अनेक ऐसी नई-नई योजना बनाकर के बेटियों को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने का काम यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है और आज मुझे बताते हुये बहुत हर्ष हो रहा है कि हमारी बहनों ने जिस तरीके से "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः" उसको पूरा संज्ञान में रखते हमारी बहन कृष्‍णा जी ने अभी बहुत ही विस्‍तार में यहां पर आप सब लोगों के बीच में बताईं तो निश्चित ही मैं उनको बहुत-बहुत धन्‍यवाद देती हूं. और हमारे सभी भाई बहनों को भी हृदय से बहुत धन्यवाद देती हूं कि उन्होंने 33 प्रतिशत आरक्षण के बारे में पूरे विस्तार से भारतीय जनता पार्टी की सरकार की सोच और सरकार की नियत को उन्होंने सिद्ध करके दिखाया और यहां पर उन्होंने विस्तार से बताया. एक बात और कहना चाहूंगी जब महिलाएं सशक्त होंगी. महिलाएं जब पूरी ऊर्जा के साथ खड़ी रहेंगे तो निश्चित ही देश के यशस्वी प्रधानमंत्री  जी ने हमारी 2047 का, हमारा कल का भारत कैसा होगा उसमें महिलाओं के लिये एक नींव साबित हो इस बात को लेकर उन्होंने कहा कि महिलाएं अब चौका चूल्हा नहीं महिलाएं त्रिस्तरीय पंचायती राज में अपना अमूल्य योगदान देते हुए अब संसद के अंदर महिलाएं अपनी अहम भूमिका निभाएंगी. विधान सभा के अंदर नीति बनाएंगी और वह नीति समावेशी होगी और लोकतंत्र और अच्छा मजबूत होगा. उसको लेकर महिलाओं के हित में लगातार हमारी सरकार काम कर रही है. उद्योग के क्षेत्र में यदि मैं कहूं जिस तरीके मुद्रा योजना के माध्यम से हमारी सरकार ने हमारी 68 लाख बहनों को आज मुद्रा योजना के माध्यम से सशक्त करने का काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया और उसके साथ-साथ स्टार्टअप इंडिया के माध्यम से जिस तरीके से हमारी बहनों को आज आगे लाने का काम आर्थिक स्थिति मजबूत करने का काम हमारी सरकार लगातार कर रही है तो निश्चित ही हमारी सरकार को मैं हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद देती हूं और इसके साथ-साथ जिस तरीके से आज हमारी सरकार ने एमएसएमई के माध्यम से 47 प्रतिशत हिस्सा हमारी बहनों के लिये लगातार काम कर रही हैं. हमारी जनजाति की बहनें, हमारी अनुसूचित जाति की बहनें जिस तरीके से हमारी बहनें लगातार उद्योग के क्षेत्र में काम कर रही हैं और उद्योग चलाने वाली महिलाऐं आज लगातार काम कर रही हैं और वह मालिक के रूप में अनेक बहनों को रोजगार देने का काम कर रही हैं. 17 सितंबर को देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी का जन्मदिन था और उस दिन जिस तरीके से देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ाया और जिस तरीके से धार जिले में माननीय प्रधानमंत्री जी ने वहां एक बहुत ही अच्छी योजना संचालित की जिससे हमारी बहनें स्वावलंबी बनकर काम कर रही है तो हमारी सरकार जो कहती है करती है हमारी महिलाओं के प्रति चाहे वह श्रम हो, चाहे नौकरी करने वाली हों या नौकरी देने वाली हों ऐसी योजनाएं संचालित करके हमारी बहनों को सशक्त करने का काम हमारी सरकार लगातार काम कर रही है मैं आज इस अवसर पर कहना चाहूंगी कि महिलाओं की जब आरक्षण की बात आती है तो आप सबको एकजुटता के साथ महिलाओं के आरक्षण की बात करके महिलाओं को सम्मान  देने का काम करना चाहिये ताकि समाज के अंदर समानता दिखना चाहिये और योजना जब बनती हैं तो समावेशीस योजनाओं में महिलाओं का योगदान महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित होनी चाहिये इस बात को लेकर भारतीय जनता पार्टी की सरकार लगातार काम कर ही है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि स्वतंत्रता के बाद 1947 के बाद कांग्रेस की सरकार रही और कांग्रेस की सरकार बहुत लंबे समय तक काम किया किन्तु जब जवाहरलाल नेहरू जी की सरकार थी उस समय 17 साल राज किया हमेशा चर्चा होती थी विचार विमर्श होते थे उस समय चुनावी भाषण में आरक्षण की बात करके  महिलाओं के वोट लिये जाते थे. आदिवासियों के वोट लिये जाते थे किन्तु हमारी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी 15 साल तक रहीं एक महिला नेतृत्व के रूप में देश में उन्होंने नेतृत्व किया लेकिन महिला आरक्षण पर उन्होंने चिंता नहीं की और इसके साथ-साथ आदरणीय मनमोहन जी ने 10 साल तक राज किया किन्तु महिला आरक्षण के बारे में सिर्फ चर्चा करके कभी उन्होंने विधेयक को पास नहीं होने दिया. राजीव गांधी ने लगातार चार साल राज किया किन्तु उन्होंने महिला आरक्षण पर चर्चा नहीं की और आज मुझे यह सब बातें कहने का मुझे इसलिये अवसर मिला है कि हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने चिंतन,मंथन किया कि देश के अंदर महिलाओं का स्थान होना चाहिये और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सरकार में उन्होंने महिलाओं को संगठन,सत्ता में लगातार आरक्षण देकर हम बहनों को आगे बढ़ाया और वह चाह रहे थे कि सिर्फ भारतीय जनता पार्टी में ही नहीं चाहे वह कोई भी दल की बहनें हों जो नेतृत्व कर रही हैं उन्हें आगे आऩे के लिये एक अच्छा अवसर प्रदान करने का काम देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी ने किया, हमारे डॉक्‍टर मोहन यादव जी ने किया. किंतु दुर्भाग्‍य का वह दिन था, 17 तारीख थी, जिस दिन हमारा विधेयक गिरा. विधेयक गिरने के बाद आज महिलाओं का जिस तरीके से अपमान हुआ, उसको पूरे देश की बहनें देख रही हैं कि कांग्रेस जो कहती है, वह कभी नहीं करती और उनकी कथनी और करनी में क्‍या अंतर है, इसको उन्‍होंने सिद्ध कर दिया. आज उनके जितने सहयोगी दल थे, उन्‍होंने इतना विरोध किया और बिल को गिराने में उनका बड़ा योगदान रहा. विधेयक गिराने के साथ-साथ उन्‍होंने जिस तरीके से जश्‍न मनाया, मेज थपथपाई, मिठाइयां बांटीं, यह बहुत ही दुर्भाग्‍यपूर्ण है. आज हमें यह कहना पड़ रहा है कि वे यह भूल गए कि देश के अंदर आज देश की 70 करोड़ बहनों ने उन सारी परिस्‍थितियो को देखा है. उनका जिस तरीके से अपमान किया गया, वह अपमान बहनें कभी बर्दाश्‍त नहीं करेंगी. आने वाले समय में कांग्रेस से निश्‍चित ही हमारी बहनें बदला लेंगी. भारतीय जनता पार्टी हमेशा महिलाओं के लिए खड़ी है. निश्‍चित ही भारतीय जनता पार्टी जो कहती है, वह करती है. महिलाओं को हर दृष्‍टि से आगे बढ़ाने का काम लगातार कर रही है. मैं हमारे देश की समस्‍त बहनों, मध्‍यप्रदेश की बहनों, जिले की बहनों की ओर से हमारी सरकार का हृदय से आभार व्‍यक्‍त करती हूँ. उन्‍होंने जिस तरह से देश के अंदर संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण का बिल लाकर के सिद्ध कर दिया कि हमारी बहनों के साथ हमेशा देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री खड़े हैं. मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री जी ने भी आज शासकीय संकल्‍प लाकर के यह सिद्ध कर दिया कि हमारी बहनों का आरक्षण बिल जो गिरा है, उसको लेकर आज पूरे दिन लगातार चर्चा का विषय बने, उसके लिए हमारे मुख्‍यमंत्री जी ने और हमारे विधान सभा के सम्‍माननीय अध्‍यक्ष जी ने हम सब लोगों को अवसर प्रदान किया है. निश्‍चित ही मध्‍यप्रदेश की हमारी समस्‍त बहनों की ओर से, हमारी समस्‍त मातृशक्‍ति की ओर से और सभी भाइयों की ओर से हमारे माननीय अध्‍यक्ष जी को भी हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद देना चाहती हूँ. आज 33 प्रतिशत आरक्षण बिल में जिस तरह से कांग्रेस का पर्दा फास करने के लिए हम लोगों को बोलने के लिए अवसर दिया तो निश्‍चित ही माननीय अध्‍यक्ष जी को, माननीय मुख्‍यमंत्री जी को हृदय से धन्‍यवाद देते हुए अपनी वाणी को विराम देती हूँ. धन्‍यवाद.

          सभापति महोदया -- धन्‍यवाद संपतिया जी. श्रीमती अनुभा मुंजारे जी. सभी अपनी समय-सीमा का ध्‍यान रखें ताकि सभी को अपनी बात रखने का अवसर मिले.

          श्रीमती अनुभा मुंजारे (बालाघाट) -- माननीय सभापति महोदया, नारी शक्‍ति वंदन का अर्थ है महिलाओं की शक्‍ति, उनके योगदान और उनके अधिकारों का सम्‍मान करना. हमारे समाज में नारी का स्‍थान मां दुर्गा, मां सरस्‍वती, मां लक्ष्‍मी के रूप में पूजनीय है. वह केवल परिवार की देखभाल करने वाली नहीं, बल्‍कि समाज और राष्‍ट्र की प्रगति की आधारशिला है.

          मैं महिलाओं के अधिकार, सशक्‍तीकरण, राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्‍व के संबंध में सदन में कहना चाहती हूँ कि कांग्रेस पार्टी के द्वारा भारत की स्‍वतंत्रता के पश्‍चात् से ही नारियों के उत्‍थान, सशक्‍तीकरण और सुरक्षा के लिए कई कानूनी और सामाजिक आर्थिक कदम उठाए गए हैं. स्‍वतंत्रता के बाद महिलाओं को लोकतंत्र के महापर्व चुनाव में भाग लेने, मतदान देने का अधिकार या पिता की संपति में बेटी को बराबर अधिकार देने का काम कांग्रेस पार्टी ने किया है. कांग्रेस पार्टी ने ही इस देश के संवैधानिक पदों पर महिलाओं को प्रतिनिधित्‍व करने का अवसर प्रदान किया, जिसमें देश की प्रथम महिला राष्‍ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवी सिंह पाटिल जी, प्रथम महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी जी, जिन्‍होंने लगातार 16 सालों तक भारत देश के प्रधानमंत्री पद की शोभा बढ़ाई और नारी के गौरव को बढ़ाने का काम किया और पड़ोसी देश के दो टुकड़े कर अपनी वीरता और साहस का उदाहरण प्रस्‍तुत किया. पहली महिला मुख्‍यमंत्री श्रीमती सुचिता कृपलानी जी, जिन्‍होंने उत्‍तर प्रदेश जैसे बड़े राज्‍य का शासन संचालन किया. पहली महिला लोकसभा अध्‍यक्ष श्रीमती मीरा कुमार जी जिन्‍होंने लोकतंत्र के इतने विशाल मंदिर में, लोकसभा में, अध्‍यक्ष के रूप में अपने सफल कार्यकाल का निर्वहन किया, इन सभी नारी शक्तियों को बड़े पदों पर सुशोभित करने का काम कांग्रेस पार्टी ने किया है, इस बात को नकारा नहीं जा सकता.

(मेजों की थपथपाहट)

          सभापति महोदया, पूर्व प्रधानमंत्री स्‍वर्गीय राजीव गांधी जी ने, राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी के स्‍वप्‍न पंचायती राज को साकार रूप प्रदान करने तथा महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं राजनैतिक प्रतिनिधित्‍व के लिए सर्वप्रथम पंचायतों में आरक्षण की व्‍यवस्‍था करने की पहल की थी, जिसे मूर्त रूप वर्ष 1993 में, 73वें और 74वें संविधान संशोधन, वर्ष 1992 के द्वारा पंचायतों में 33 प्रतिशत, कुछ राज्‍यों में 50 प्रतिशत भी भागीदारी महिलाओं की सुनिश्चित की गई. आज पूरे देश में जमीनी स्‍तर पर लगभग 14-15 लाख बहनें पंचायतों एवं नगरीय निकायों में राजनैतिक प्रतिनिधित्‍व एवं नीति निर्धारण कर, शासन का संचालन कर रही हैं, कांग्रेस पार्टी द्वारा महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कार्य किया गया है.

          सभापति महोदया, पूर्व में 1990 के दशक में संसद और विधान सभाओं में महिला प्रतिनिधित्‍व को सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई, कांग्रेस ने हर परिस्थिति में अपना पूर्ण समर्थन प्रदान किया है. पूर्व प्रधानमंत्री स्‍वर्गीय मनमोहन सिंह जी की यूपीए सरकार में महिला आरक्षण बिल को पुन: पेश किया गया, जिसे राज्‍यसभा से दो तिहाई बहुमत से पारित किया गया, जो एक ऐतिहासिक कदम था, जिसकी यहां चर्चा करना, मैं, अति आवश्‍यक समझती हूं. किंतु लोकसभा से पर्याप्‍त समर्थन न मिलने के कारण, यह बिल पारित नहीं हो पाया, जो अत्‍यंत खेदजनक है. उसके पश्‍चात् दिनांक 19 सितंबर, 2023 को महिलाओं को राजनैतिक प्रतिनिधित्‍व देने के लिए 128वां संविधान संशोधन विधेयक के रूप में लोकसभा में प्रस्‍तुत किया गया, लोकसभा में चर्चा उपरांत दिनांक 20 सितंबर, 2023 को सर्वसम्‍मति से पारित हुआ. दिनांक 21 सितंबर, 2023 को राज्‍यसभा में भी इसे सर्वसम्‍मति से पारित कर दिया गया और दिनांक 28 सितंबर, 2023 को माननीय राष्‍ट्रपति महोदया के हस्‍ताक्षर उपरांत यह 106वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 बन गया. कांग्रेस पार्टी द्वारा सर्वसम्‍मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अपना समर्थन दिया गया तथा उसे वर्ष 2024 में ही 543 संसद सदस्‍यों में से, 33 प्रतिशत महिला भागीदारी सुनिश्चित कर, उसी परिस्थिति में लागू करने के लिए हामी भर दी गई थी किंतु सरकार के द्वारा उसे नवीन रूप में लागू करने के लिए हमेशा दबाव बनाया गया. इसी के फलस्‍वरूप दिनांक 16 अप्रैल, 2026 को नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए सरकार पर्दे के पीछे से 3 और विधेयकों को पारित करवाना चाहती थी, जिसमें लोकसभा सीटों की वृद्धि के लिए बिल, परिसीमन विधेयक, संसदीय क्षेत्रों के सीमा परिवर्तन के संबंध में बिल लाये गए थे. जिसे विपक्ष द्वारा पास नहीं होने दिया गया. किंतु केंद्र सरकार द्वारा भ्रमित किया जा रहा है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को विपक्ष लागू नहीं होने दे रहा है, जबकि सत्‍य यह है कि यह विधेयक वर्ष 2023 में ही कानून के रूप 106वें संविधान संशोधन अधिनियम के रूप में मूर्त रूप ले चुका है. सरकार को ऐसी भ्रमित और असत्‍य जानकारी से परहेज करनी चाहिए.

          सभापति महोदया, सरकार नारी शक्ति की बात करती है, प्रदेश में महिला अपराध, अत्‍याचार में बढ़ोत्‍तरी हो रही है. मेरे विधान सभा क्षेत्र बालाघाट में, शहर में हनुमान चौक है, वहां दुर्गा जी का प्राचीन मंदिर है, वहां मंदिर से 10 मीटर दूर शराब की दुकान संचालित हो रही है. शहर के वार्ड 12, 25 और कई स्‍थानों पर माताओं-बहनों द्वारा शराब दुकानों के विरोध में लगातार 20 दिनों से अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है, किंतु जिला प्रशासन और सरकार द्वारा उनकी मांगों पर ध्‍यान नहीं दिया जा रहा है. ऐसे में माताएं, बहनें ही सुरक्षित नहीं रहेंगी तो हम नारी शक्ति का वंदन कैसे करेंगे, कैसे हम नारियों को राजनीतिक प्रति‍‍नि‍धित्‍व देने की बात करेंगे. मैं एक बहुत ही संवेदनशील विषय पर बात करना चाहती हूं. सामान्‍य तौर पर हम लोग खुलकर चर्चा नहीं करते हैं, लेकिन यह नारियों और बेटियों के सम्‍मान से जुड़ा मामला है. मैं भी एक नारी हूं, एक मां हूं, एक स्‍त्री हूं तो मैं जरूर करना चाहूंगी. हमारे मध्‍यप्रदेश या देश की भी हम बात करें  तो 23 प्रतिशत लड़कियां जब मासिक धर्म से होती हैं तो वह स्‍कूल छोड़ देती हैं, वह स्‍कूल नहीं आ पाती हैं. भारत में 23 प्रतिशत लड़कियां मासिक धर्म शुरू होने पर स्‍कूल छोड़ देती हैं जबकि सुप्रीम कोर्ट ने सभी स्‍कूलों में मुफ्त सेनेटरी पेड लड़कियों के लिए अलग से उपलब्‍ध कराये जाने का निर्देश दिया हुआ है. शौचालय, (Menstrual Health)  मेनेजमेंट अनिवार्य करने का आदेश दिया हुआ है. क्‍या मध्‍यप्रदेश के सभी स्‍कूलों में यह लागू है? अगर लड़कियों मासिक धर्म के दौरान स्‍कूल ही नहीं जाएंगी तो हम कैसे उम्‍मीद करें कि वह कॉलेज में पढ़ेंगी, उच्‍च शिक्षा अर्जित करेंगीं और अपने मुकाम को हांसिल करेंगी, यह बहुत बड़ा गंभीर मामला है. माननीय सभापति महोदय, अंत में मैं केवल एक मिनट का समय लूंगी. भारत देश में 28 राज्‍य हैं. यह भी ध्‍यान देने योग्‍य है. यहां जितनी भी महिला बहनें बैठी हुई हैं, चाहे वह इस पक्ष की हों, चाहे वह उस पक्ष की हों आप जरा ध्‍यान से सुने. हम पक्ष में हैं या विपक्ष में हैं हम अपनी-अपनी बात करते हैं लेकिन हम अगर महिला हैं तो महिला सशक्तिकरण के लिए हमारी विचारधारा एक होना चाहिए. यह मेरा आप सभी से निवेदन है. ध्‍यान से सुनिये मैं सदन का ध्‍यान विशेष रूप से दिलाना चाहूंगी कि भारत देश में 28 राज्‍य और 8 केन्‍द्र शासित प्रदेश हैं. इसमें से लगभग 22 से अधिक राज्‍यों में एनडीए घटक दल के साथ भारतीय जनता पार्टी सरकार चला रही है. वह बताएं, भारतीय जनता पार्टी बताए, हमारी सरकार बताए कि कितने राज्‍यों में महिला बहनों को मुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया गया है? भारत का केवल एक राज्‍य  में, दिल्‍ली में नारी शक्ति का वंदन किया गया है जहां की मुख्‍यमंत्री हमारी महिला बहन हैं. बाकी राज्‍यों में महिला बहनों को क्‍यों र्प्‍याप्‍त प्रतिनिधित्‍व नहीं मिला यह सरकार नारी वंदन की बात कर रही है यह भारत देश के विशाल लोकतंत्र में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सुनिश्चित नहीं करा पा रही है. कांग्रेस पार्टी महिला आरक्षण की हमेशा से पक्षधर थी है और हमेशा रहेगी. नारी के सम्‍मान में सड़क से लेकर सदन तक हमेशा ईमानदारी से काम करना हमारी जिम्‍मेदारी है और हम वह कर रहे हैं. मैं एक आखिरी उदाहरण देना चाहूंगी. आप नारी सशक्तिकरण की बात कर रहे हैं. आज मैं यहां विधायक हूं. जनता के आशीर्वाद से चुनकर आई हूं. आपको पता है मेरे साथ क्‍या हुआ है? मेरा पीए मुझसे छीन लिया गया. मेरे पास पिछले छ: महीने से पीए नहीं है. मुझे बिना बताए, मुझे जानकारी दिये बगैर मेरे अधिकारों का हनन किया गया. मेरा पीए ले लिया गया. जब मैं कलेक्‍टर बालाघाट के पास जाती हूं तो वह कहते हैं कि आप कोई दूसरा पीए ले लो. हम वह पीए आपको नहीं दे सकते हैं. अब बिना पीए के मैं छ: माह से काम कर रही हूं. अगर डॉ. मोहन यादव जी की सरकार के राज में एक महिला विधायक के साथ अन्‍याय हो रहा है तो हम क्‍या नारी शक्ति वंदन की बात करेंगे आप बताइये? मुझे जवाब दिया जाए? बड़ी-बड़ी लुभावनी बातें करना, उदाहरण देना और केन्‍द्र सरकार की तारीफें करना एक अलग बात है, सड़क पर आकर आम जनता के बीच में परिस्थितियों से मुकाबला करना अलग बात है. क्‍या मुझे वह पीए मिलेगा, किस कारण से मेरा पीए मुझसे छीना गया. मैं महिला हूं मेरे साथ ऐसा पीए चाहिए जिसको कोई व्‍यसन न हो, कोई गलत आदत न हो, जो दो बजे रात को भी मेरे साथ दौरे पर जा सके. मेरे साथ लिखा-पढ़ी कर सके. ऐसा पीए मेरे साथ काम कर रहा था उसको हटाया गया. मैंने सभी जगह गुहार लगाई मैं किसी एक का नाम नहीं लेना चाहती हूं. लेकिन मेरी बात आज तक नहीं सुनी गई. आज भी मैं बिना पीए के काम कर रहीं हूं. यह नारी शक्ति वंदन है. बताईये जवाब दीजिए. दूसरी बात, मैं यही कहना चाहती हूँ कि कथनी और करनी में अंतर होता है. हम जो कह रहे हैं उसको करें. महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों को रोकें. महिलाएं शराब बंदी के लिए सड़क पर लड़ रही हैं, रातों को भी सड़कों पर संभ्रांत घरों की महिलाएं, बहनें धरना दे रही हैं, सड़कों पर सो रही हैं. सरकार की यह नीयत होना चाहिए कि राजस्व को एक तरफ रखकर महिलाओं का नारीशक्ति वंदन करे और इन रिहायशी इलाकों से शराब दुकानों को हटाया जाए. यह होगा नारीशक्ति वंदन. मैं सभी से निवेदन करती हूँ कि नारी सम्मान के लिए हम दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सोचें. जब हम एक दूसरे का सम्मान करेंगे तब ही नारी का सम्मान होगा. हमारे शास्त्रों में भी लिखा है जिस समाज में नारी का सम्मान होता है वह समाज हमेशा तरक्की करता है. जिस घर में नारी का सम्मान होता है उस घर में लक्ष्मी, दुर्गा, पार्वती का वास होता है. जिस घर में नारी का अपमान होता है, जिस समाज में नारी का अपमान होता है वो समाज वो परिवार कभी आगे नहीं बढ़ता है. वहां शोक का माहौल होता है, वहां अशुभ संकेत होते हैं. आप धर्म की बात करते हैं. परोपकार की बात करते हैं. इस पर आपको सोचना पड़ेगा. मैं आपको आईना दिखा रही हूँ. मैंने अपना उदाहरण इसलिए रखा है. दो लाइनों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करूंगी. राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की लाइनें हैं, मुझे लगता है कि आप इन पंक्तियों के अर्थ को समझेंगे. मैं वैसे हिंदी साहित्य की स्टूडेंट रही हूँ और टीचर भी रही हूँ --

          समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याध,

        जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध.

 

        इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात को यहीं समाप्त करती हूँ. नारी सशक्तिकरण जिंदाबाद, जिंदाबाद. सभापति महोदया, आपने मुझे बोलने का समय दिया इसके लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद. आपका हार्दिक अभिनंदन करती हूँ, आभार व्यक्त करती हूँ.

          श्री गोपाल भार्गव (रहली) -- माननीय सभापति महोदया, हमारी सरकार के द्वारा आज इस सदन में नारी शक्ति के वंदन और महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए, उनके सशक्तिकरण के लिए जो संकल्प लाया गया है मैं उसके पक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ.

          सभापति महोदया, 1970 के दशक में मैंने एक पिक्चर देखी थी. आज नारियों के रहन-सहन और उनके प्रति किया जा रहा व्यवहार, उनके हकों से उन्हें वंचित किया जा रहा है. मैं मानकर चलता हूँ कि उस फिल्म की एक प्रकार से पुनरावृत्ति हो रही है. उस फिल्म का नाम था मदर इंडिया, अर्थात् भारतमाता.  इस फिल्म की मुख्य अभिनेत्री नर्गिस थीं. इस फिल्म में उनके बेटे राजेन्द्र कुमार और सुनील दत्त थे और राजकुमार ने उनके पति की भूमिका निभाई थी. वह अपने पति के साथ खेतों में हल चलाती है, छोटे छोटे बच्चों का पालन पोषण करती है. परेशान होते होते उसके पति की जीवनलीला भी समाप्त हो जाती है. उसका एक बेटा डाकू बन जाता है. इस फिल्म की कहानी मुझे आज भी याद है. 50-55 वर्ष पहले की पिक्चर आज भी साक्षात होती दिख रही है. इसी दुर्दशा से उबारने के लिए, इसी मुफलिसी से, इसी बेबसी से, इसी लाचारी से, इसी तिरस्कार से मुक्त करने लिए माननीय मोदी जी, हमारे प्रधानमंत्री जी और हमारी पार्टी, हमारी सरकार संसद में कानून लाई है. मुझे आज कहते हुए बहुत अफसोस है कि 55 साल पूर्व उस पिक्‍चर की और आज के वातावरण से बहुत ज्‍यादा नारियों की स्थिति में परिवर्तन नहीं आया है और उसके पीछे सबसे बड़ा कारण है हमारी पुरुष प्रधानता की सोच और पुरुष प्रधानता की सोच को खत्‍म करने का यदि किसी ने काम किया है तो वह भारतीय जनता पार्टी के हमारे नेतृत्‍व ने, हमारी पार्टी की जहां-जहां सरकारें हैं उन्‍होंने किया है. ग्रामीण संस्‍थाओं से हमने प्रतिनिधित्‍व देने का काम किया है. जब मैं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का मंत्री था उस समय हम लोगों ने 50 प्रतिशत आरक्षण ग्राम पंचायतों में सरपंच के पदों के लिए, जनपद के पदों, जिला पंचायत के पदों के लिए, नगरीय निकायों में वार्ड मेंबर्स के लिए, महापौर के लिए, पार्षदों के लिए, यह पद नहीं था बल्कि 55 साल पुरानी उस व्‍यथा को समाप्‍त करने का काम था कि महिलाएं आज खुद सरकार की बागडोर संभालेंगी, अपना खुद उन्‍नयन करेंगी, उस दासता से मुक्‍त होंगी, उस मुफलिसी से मुक्‍त होंगी, यही इसके पीछे एक सबसे बड़ा उद्देश्‍य था. समय-समय पर जो कुछ भी कारण रहे हों, लोग महिलाओं के वोट के कारण और कहने को सरकारें कांग्रेस पार्टी की सरकार जिसकी बात करते हैं वह भी लाई, लेकिन उसके पीछे छिपी हुई मंशा थी वह शुद्ध नहीं थी. भारत हमारा एक नारी प्रधान देश है. 

या देवी सर्वभूतेषु विद्या-रूपेण संस्थिता,

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः".

हम शक्ति के रूप में उपासना करते हैं. हम माता के रूप में उपासना करते हैं. हम क्‍वांर की नवरात्रि में भी करते हैं और चैत्र की नवरात्रि नववर्ष में भी करते हैं. पूजा तो हम करते हैं लेकिन जब हमें आचरण में देखने में मिलता है तो हम उस माता और शक्ति के लिए वह शक्ति नहीं देना चाहते, कानून की शक्ति, संविधान प्रदत्‍त शक्ति, जिससे कि वह खुद का उन्‍नयन कर सके और उस दासता से मुक्‍त हो सके.

सभापति महोदया, मैंने महिलाओं की दुर्दशा देखी है. मैं ग्रामीण क्षेत्र से आता हूं. सिर पर लकड़ी का गट्ठा लिए हुए उस समय हमारी उज्‍ज्‍वला योजना नहीं चल रही थी, गट्ठा लिए हुए जंगलों से लकड़ी बीनकर और शाम के समय घर का खाना पकाती थी. धुएं से आंखों से आंसू टपकते थे. बच्‍चे को गोद में लिए हुए, खिलाते हुए और आंसू टपकाते हुए खाना बनाती थी. मैंने वह दुर्दशा देखी है. कुएं से से पानी लाते हुए, नदी से, पोखर से, झरने से पानी लाते हुए, दो-दो, तीन-तीन किलोमीटर दूर तक, मैंने वह दुर्दशा देखी है. मजदूरी करती हुई, खेतिहर महिलाओं को, श्रमिक महिलाओं को मजदूरी करती हुई और अपने नौनिहालों को अपने पेट से चिपकाए हुए, पीठ पर बांधे हुए मैंने वह दुर्दशा देखी है. यह मजबूरी, यह दुर्दशा हमें खत्‍म करना होगा. हम 21 वीं सदी में जी रहे हैं लेकिन यदि 20 वीं सदी की विचारधारा और आपस में इस प्रकार की कटुता बनाए रहेंगे तो हम शायद बातें तो बहुत करते हैं लेकिन हम कल्‍याण नहीं कर पाए हैं.

          सभापति महोदया, अपोजिशन का कहना कि आप तत्‍काल लागू करो. हमारी सरकार का कहना कि बहुत बड़ी आबादी वंचित रह जाएगी आरक्षण से, महिलाओं का प्रतिनिधित्‍व होने से और इस कारण से हम इसके बाद करेंगे लेकिन करेंगे. हमारे गृह मंत्री जी ने भी संसद में कहा कि हम इस बात की गारंटी देते हैं, एक घंटे का समय दें हम संशोधन करके लाते हैं, लेकिन एक घंटे की भी प्रतीक्षा नहीं की गई. मुझे लगता है कि कहीं न कहीं जो संसद में प्रतिपक्ष है, ऐसे अनेकों दल हैं, चाहे टीएमसी हो, डीएमके हो, चाहे क्षेत्रीय दल हों, सपा हो, कोई भी दल हो, जिस प्रकार की इन लोगों ने संसद में स्थिति बनाई वह दु:खद है. यह युग जो है आधुनिक युग में हम भले जी रहे हों लेकिन नारी हमारी शक्ति की प्रतीक है, हमारे देश की जितनी नदिया हैं

          माननीय सभापति महोदय, हमारे देश की जितनी भी नदियां हैं,उनके हजारों साल पुराने नाम हैं, आज से नहीं रखे हैं हमने, चाहे गंगा हो, चाहे यमुना हो, चाहे गोदावरी हो, चाहे गोमती हो , चाहे वह ताप्ती हो या नर्मदा नदी हो, कोई भी हो हमारे यहां पर सभी नदियों के नाम स्त्रियों और महिलाओं के नाम पर नामकरण हुआ है और हम अपने घर के नाम भी महिलाओं के नाम, माता के नाम, बेटियों के नाम, पर रखते हैं. यह मातृत्व वंदना का सबसे बड़ा प्रतीक है.

          माननीय सभापति महोदय, भारत माता की कल्पना कोई कोरी कल्पना नहीं थी. भारत माता की कल्पना वास्तव में वह कल्पना है जिसमें मैं फिर दोहराऊंगा कि हम उस बदहाल नारी के लिये जो मदर इंडिया की नारी थी, हम उसके लिये माता के रूप में पूजने जा रहे हैं और इस कानून के माध्यम से और संसद के माध्यम से भले यह बिल अभी पास नहीं हो पाया हो आगे आने वाले निकट भविष्य में हम पूरे बहुमत के साथ में इसको पास करवाकर हम नारियों को उनके अधिकार नारी को सुपुर्द करेंगे इस बात की हम गारंटी लेते हैं.

          माननीय सभापति महोदय, हमारा भारत यह महिला प्रधान देश तो है ही क्योंकि हमारे यहां पर एक से एक महिलायें हुई हैं सीता, सावित्री, गीता, गायत्री, एक से एक सती मां अनूसुईया, मां सती मदालसा, हरिशचंद्र तारामति के किस्से हम सुनते हैं और नारियों ने जो त्याग किया जो तपस्या की है उसी के बल पर उन्हीं की आराधना पर, उन्ही की तपस्या, त्याग और समर्पण पर , उनके बलिदान पर यह पुरूष समाज और भारत वर्ष आज विश्व में अपना एक विशिष्ट सांस्कृतिक स्थान रखता है, उसके पीछे नारियों का ही सबसे बड़ा योगदान है. मैं ऐसी नारियों को प्रणाम करता हूं.

          माननीय सभापति महोदय, हमारी नारी शक्ति के उत्थान और सशक्तिकरण के प्रयासों के बावजूद, भारतीय समाज में आज भी पितृसत्तात्मक सोच और सामाजिक असमानता के कारण कई महिलाएं दास्ता (बन्धन) जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं।  नारी शक्ति अभी भी किस प्रकार दास्ता में जीवन यापन कर रही है, मैं देखता हूं क्योंकि हमारा कुछ पुरूष प्रधान समाज भी है जो मदिरा का सेवन करके आता है और उसका सबसे पहले गुस्सा नारियों पर ही उतरता है, और इसीलिये जब तक नारियों के लिये संसद में, पर्याप्त संख्या में बैठने का अधिकार नहीं मिलेगा , विधान मंडल में महिलाओं को बैठने का अधिकार नहीं मिलेगा, हमने नीचे की संस्थाओं में महिलाओं को जरूर आरक्षण दिया है लेकिन अभी वह उतनी शक्तिशाली नहीं हुई हैं. वह इतनी अधिकार संपन्न अभी भी नहीं हुई हैं जहां इस बुराई को वह रोक सकें , मुझे पूरा विश्वास है कि यदि हमने इस बात को कर लिया, हमने संसद में इस बात को पारित कर लिया और इस अवसर पर मैं अपने प्रतिपक्ष के लोगों से भी कहूंगा कि जल्दी हो या देर से हो यदि हम जितना भी देर करेंगे 4,5 साल जितनी भी देर होगी, यह हम महिलाओं के साथ में अन्याय करेंगे. हमें इसमें नहीं पड़ना चाहिये के इसमें लाभ किसको हो रहा है , और लाभ किसको नहीं हो रहा है. हम राजनैतिक दृष्टि से सोचते हैं और हमारा सोच भी उसी दृष्टि का बन गया है , मैं सामाजिक दृष्टि से सोचता हूं मैं उन महिलाओं की पीड़ा और दर्द को समझता हूं क्योंकि मैं जिस इलाके से चुनकर के आता हूं जब मैं गांव देहात में भ्रमण पर जाता हूं तब अधिकांश महिलायें मुझसे यह कहती हैं कि भैया किसी तरह से यहां पर शराबखोरी जो हो रही है वह बंद होना चाहिये, और यदि महिलायें सशक्त हो जायेंगी, महिलायें यदि अधिकार संपन्न हो जायेंगी, कोई विधायक बन जायेंगी वहां से, वैसे अभी भी महिलायें विधायक हैं लेकिन जब उनकी संख्या और बढ़ेगी और भी उनको संसद मे सांसद के रूप में अधिकार मिलेंगे तो मुझे विश्वास है कि यह इस प्रकार की घटनायें शायद ही वहां पर दोहराईं जायें.

          माननीय सभापति महोदय, बहुत से विषय हैं जिनके बारे में मैं, चर्चा करूंगा तो काफी समय लग जायेगा लेकिन बहुत सी योजनायें हमारी सरकार ने महिलाओं के लिये चलाई हैं . पहले जो महिलायें कुंए से, बावड़ी से पानी लाती थीं आज उनके अधिकांश के घरों में मैं यह नहीं कहता कि शत प्रतिशत लेकिन अधिकांश घरों में नल के द्वारा पानी पहुंचाया जा रहा है .यह भी एक प्रकार की दास्ता थी.

          माननीय सभापति महोदय, हमारी एक योजना उज्जवला के नाम से थी उसके जो गैस के चूल्हे थे, उज्जवला योजना के माध्यम से लाखों घरों में गैस उपलब्ध कराने का काम हमारी सरकार ने किया है.

          माननीय सभापति महोदय, वैसे तो मैंने बताया ही है कि सबसे अधिक आरक्षण सबसे पहले

सबसे अधिक आरक्षण, सबसे पहले  मेरे पंचायत मंत्री के कार्यकाल  में  महिलाओं के लिये 50 प्रतिशत  आरक्षण  की  व्यवस्था की थी हम लोगों ने उस समय.  लोगों ने  कहा, अन्य राज्य  के लोगों  ने  अरे आपने तो गजब कर दिया, यह कर दिया.  लेकिन तत्कालीन सरकार  ने  और केबिनेट की सहमति   से हम लोगों  ने यह काम किया.  उसके  बाद नगरीय निकायों में भी  आरक्षण हुआ और  मैं मानकर चलता हूं कि  यह नर्सरी है.  यह पाठसाला है,  एक प्रकार से राजनैतिक क्षेत्र  में  आने  से  अधिकारों के बारे में  जानने  की, संविधान  को, कानून, नियम और विधि सब के लिये जानने की  यह पाठसालाएं हैं.  इसी प्रकार से  जैस हमारे छात्र संघ होते हैं.  छात्र संघों के चुनाव जब भी होते हैं, हमने देखा है कि उसी में से  जो  लीडर शिप निकलती है,  आधे से ज्यादा विधान  मंडलों  में उसी प्रकार के नौजवान  दिखाई देते हैं.  मैं जब 1984  में  विधायक बना था, तो मैंने देखा कि  आधी हमारी मिंटो हाल  की विधान  सभा ऐसा लगता था कि जैसे कोई कालेज  छूटा हो,  क्योंकि उस समय लगभग पार्टियों में अंडर स्टेंडिंग   बन गई थी कि 35 प्रतिशत कोटा हम नये युवाओं को देंगे. तुलसी भाई  भी  उस समय के हैं और भी हमारे कई सदस्य बैठे हैं. तो मुझे लगता है कि उस समय  हमने देखा कि कालेज  जैसे छूटा हो उस समय.  तो  यह परिवर्तन की प्रतीक था. परिवर्तन से हमें पीछे नहीं हटना चाहिये.  मैं नहीं कह सकता हूं कि  इसका लाभ किसको होगा.  हो सकता है कि आपके लिये भी लाभ हो, हो सकता है कि  आपके लिये भी इसका   हिस्सा मिले  और इस कारण से ..

          सभापति महोदयाभार्गव जी, आप बहुत  विद्वान  मंत्री भी रहे हैं और  बहुत ज्ञान  का भंडार भी है आपके पास और यह विषय भी ऐसा है.  लेकिन आप और हम सब जानते हैं कि  एक  दिवसीय सत्र है यह.  तो  सबको अवसर मिले,  इसलिये थोड़ा  संक्षेप में अपनी बात रखें.

          श्री गोपाल भार्गवसभापति महोदया,  मैं 4-5 मिनट में समाप्त करुंगा.  अक्सर आलोचना की जाती है कि  आरक्षण केवल प्रतीकात्मकता को जन्म देगा.  अक्सर आलोचना की जाती है कि  जैसी पति प्रधान   की संस्कृति देखी गई, लेकिन  हमें यह नहीं भूलना चाहिये कि  बदलाव एक प्रक्रिया है.  पंचायतों से जो शुरुआत हुई,  उसी ने आज संसद तक  का रास्ता साफ किया है.  महिलाओं ने अपनी क्षमता को   शिक्षा, अर्थव्यवस्था  और  अंतरिक्ष तक  साबित किया है. रक्षा  के क्षेत्र में भी  साबित किया है. अब समय है कि  वह नीति निर्माता, पालिसी मेकर के रुप  में राष्ट्र की दिशा तय करे.  वैश्विक  परिदृश्य  में  नजर डालें, तो  आज हम जी20  देशों की कतार में खड़े हैं.  जहां मैक्सिको को  50 प्रतिशत  और आस्ट्रेलिया को  46 प्रतिशत  महिलाओं के प्रतिनिधित्व के कारण आज  शीर्ष पर हैं.  वहीं भारत 14.4  प्रतिशत के साथ  निचले पायदान  पर संघर्ष कर रहा है. लेकिन इस कानून के  लागू होते ही  भारत की संसद में  महिला सासंदों की संख्या 181 हो जायेगी और हम  न केवल  जी20 की रेंकिंग  में  छलांग लगायेंगे,  बल्कि  दक्षिण एशिया में  महिला सशक्तिकरण  के एक मजबूत स्तम्भ  के रुप में हम  उभरेंगे.  परिसीमन और  जनगणना  की प्रक्रिया के कारण  इसके पूर्ण क्रियान्वयन  में  समय लग सकता है.  औबीसी आरक्षण  जैसे  मुद्दों पर  विचार  विमर्श जारी है. लेकिन सबसे  बड़ी चुनौती हमारी सोच कर कानून बनाना है.    उसे सामाजिक स्वीकारता दिलाना है.  राजनैतिक दलों को अब स्वेच्छा से  आगे बढ़कर महिलाओं  को केवल वोट नहीं  बल्कि लीडर शिप देना होगी.  नारी शक्ति वंदन अधिनियम  भारत के भविष्य की नई  इबारत लिखेगा,  मुझे पूरा विश्वास है.  हमने अनेकों  उपाय किये हैं  और  उसके सरकार की तरफ से  राज्य सरकार और भारत सरकार  की तरफ से  अनेकों उपाय के परिणाम भी आये हैं.  नारी सुरक्षा, जननी सुरक्षा  योजना,  इस योजना ने संस्थागत  प्रसव  इंस्टीट्यूशनल डिलीवरी  को  बढ़ावा दिया. नगद वित्तीय सहायता  से न केवल  उचित पोषण   सुनिश्चित किया गया,  बल्कि मातृ  मृत्यु दर  एमएमआर को  कम करने  में बड़ी भूमिका  निभाई. यह  योजना गरीब गर्भवती महिलाओं  को  नगद  सहायता प्रदान करती है, ताकि वह   गर्भावस्था में पोषण  ले सकें  और  सुरक्षित अस्पताल  में   प्रसव  करा सकें. 2015-16 के  आंकड़ों के अनुसार लगभग 36  परसेंट महिलाओं को  इस योजना का लाभ मिला है.  राज्य में संस्थागत प्रसव दर 90 प्रतिशत  से अधिक  तक  पहुंच गई है. जिससे मातृ मृत्‍यु दर में भी उल्‍लेखनीय गिरावट आयी है. इसी प्रकार से हमारे जो बच्‍चे हैं, उनकी मृत्‍यु दर में भी गिरावट आयी है और इन योजनाओं के संयुक्‍त प्रभाव से भारत में मातृ मृत्‍यु दर में लगातार कमी आयी है और सुरक्षित प्रसव की दर में उल्‍लेखनीय वृद्धि हुई है. अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार भारत में मातृ मृत्‍यु दर एम.एम.आर जो वर्ष 2014 और 16 में 130 थी, वह अब घटकर 97 प्रति लाख जीवित जन्‍म पर आ गयी है. मैंने धुंए से मुक्ति का उल्‍लेख किया, उज्‍जवला का, फेंफड़ों की बीमारी से बचते हैं. स्‍वच्‍छ भारत मिशन, करोड़ों शौचालयों का निर्माण, महिलाओं को अंधेरे का इंतजार करने की व्‍यवस्‍था से मुक्ति दी और उन्‍हें सुरक्षा और गरिमा प्रदान की. यह हमारा सुरक्षा का बहुत बड़ा अभियान था स्‍वच्‍छता का.

          सभापति महोदया, लाड़ली लक्ष्‍मी और गांव की बेटी योजना, इन योजनाओं ने समाज की मानसिकता बदल दी और ड्राप आउट की दर में भारी कमी आयी है. सुकन्‍या समृद्धि योजना इसमें तीन करोड़ से अधिक खातों के माध्‍यम से बेटियों को सुरक्षित भविष्‍य का वित्‍तीय अधिकार मिला. लाड़ली बहना योजना, मध्‍यप्रदेश जैसी राज्य सरकारों कि इस क्रांतिकारी पहल ने महिलाओं के हाथ में सीधे नकदी पहुंचाकर उन्‍हें आर्थिक रूप से स्‍वतंत्र बनाया और मुझे कहते हुए खुशी है कि लाड़ली बहना योजना की शुरूआत करने वाला कोई राज्‍य था देश में तो सबसे पहले मध्‍यप्रदेश मध्‍य प्रदेश राज्‍य था, जिसने बहनों के उत्‍थान के लिये हम लोगों ने योजना बनायी और राज्‍य में लागू की. इसके बारे में शंका की जाती थी, लेकिन वह अनवरत रूप से विगत साढ़े तीन वर्षों से चल रही है.

          सभापति महोदया, मुद्रा योजना और बेटियों को स्‍कूल पहुंचने के लिये सायकलों की व्‍यवस्‍था, गांव में यदि कोई अव्‍वल आये तो उनके लिये स्‍कूटी की व्‍यवस्‍था, लेपटॉप की व्‍यवस्‍था. तमाम प्रकार की व्‍यवस्‍थाएं सरकार ने महिलाओं के उत्‍थान के लिये, बेटियों के लिये और सभी के लिये की है. सरकार का जो दायित्‍व है, उसे सरकार निभा रही है, लेकिन हम जनप्रतिनिधियों का जो दायित्‍व है, हमारा जो कर्तव्‍य है, जो भारत की महिलाओं के प्रति है तो महिलाएं अपनी दास्‍ता से मुक्‍त हों. महिलाएं स्‍वावलम्‍बी बनें और खुद के पैरों पर खड़ी हों और जैसा कि मैंने बताया कि चलचित्र जिस प्रकार से दिखाया जा रहा था, वह अवार्डेड फिल्‍म थी, हिन्‍दुस्‍तान की एक नंबर की फिल्‍म है. मैं चाहता हूं कि सब लोग उसे देखें कि किस प्रकार की स्थिति उस समय आजादी के तत्‍काल बाद थी, जब कांग्रेस पार्टी की सरकार थी. मैं किसी सरकार के बारे में नहीं कहना चाहता हूं, इतना कहना चाहता हूं कि वह बुरे दिन नहीं लौटें, हम बहुत अच्‍छे दिनों की तरफ आगे बढ़ें और सकारात्‍मक सोच के साथ चलें. बगैर किसी राजनीतिक प्रतिद्विंता के चलें, यही मेरा सबसे निवेदन है, आग्रह है कि इस संकल्‍प को सर्वसम्मति से पारित करवायें तो निश्चित रूप से बहुत बड़ी उपलब्धि मध्‍यप्रदेश की विधान सभा की और हम सब सदस्‍यों के लिये होगी. सभी के लिये धन्‍यवाद, नमस्‍कार.

          श्री लखन घनघोरिया- माननीय सभापति महोदया, आज जो माननीय मुख्‍य मंत्री जी के द्वारा जो संकल्‍प प्रस्‍तुत किया गया है. उसी संदर्भ में हमारा दल और अपने संशोधन देना चाहता था और हमने अशासकीय संकल्‍प भी दिया था और हमारा उद्देश्‍य भी इस सदन में बैठे तमाम लोगों का ध्‍येय एक ही है. किसी के उदेश्‍य में भ्रामक स्थितियां है कोई बहुत स्‍पष्‍ट है. हमारा देश और हमारी संस्‍कृति, जैसा कि अभी भार्गव जी बता रहे थे कि या देवी सर्वभूतेषू दया रूपेण संस्थिता नम: तस्‍यये, नम: तस्‍यये सारी देवी के नाम बता रहे थे. हम धर्म संस्कृति और परम्‍परा को मानने वाले लोग हैं. हम भगवान राम से सिया को अलग करने वाले नहीं हैं. हम राम और सिया दोनों को मानने वाले लोग हैं. हम सिया राम कहने वाले लोग हैं. हम शक्ति से शिव को अलग करने वाले लोग नहीं हैं. हम कृष्‍ण से राधा को अलग करने वाले लोग नहीं हैं. हम पहले राधे-राधे कहते हैं. हम पहले जय सिया राम कहते हैं. इसीलिये यह कहा भी गया है कि नारी निंदा मत करो, नारी रन की खान और नारी से नर होत है, प्रहलाद ध्रुव समान. यह कहा गया है, हमारी संस्‍कृति में कहा गया है. नारी जननी है और यह हमारा इतिहास है. हो सकता है कि हमारे राजनैतिक ध्‍येय अलग-अलग हों. यह बहुत स्‍पष्‍ट है कि हमारा संविधान दुनिया का सबसे खुबसूरत संविधान है और वह हमारे लोकतंत्र का आवरण है, कवच है. हमारे लोकतंत्र को यदि किसी ने जिंदा रखा है, तो वह हमारा प्‍यारा संविधान, जो हमारे बाबा साहेब आंबेडकर जी के अथक प्रयासों से बना है. संविधान निर्माण में तमाम लोगों का योगदान रहा है. वह हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है. सारी प्रक्रिया सांवैधानिक व्‍यवस्‍थाओं से चलती है. देश के उच्‍च सदन में जिसे लोकतंत्र का पवित्र मंदिर कहा जाता है, उसमें जब लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हनन हो रहा था, चीरहरण हो रहा था, तब समुचा विपक्ष एकजुट होकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोकतांत्रिक मूल्‍यों की रक्षा के लिए खड़ा था. यह हमारी सांवैधानिक व्‍यवस्‍थाएं हैं. मुझे तो आज भी यह समझ नहीं आया कि जब उस सदन के दिशा-निर्देश, संदेश सब कुछ हो गए हों, तब ऐसी बैठक का क्‍या औचित्‍य है. यदि हम पीछे जाएं, तो हमको ऐसा लगता है कि यह अकेला भ्रम नहीं है कि भ्रामक स्‍थितियां हो रही हैं. यह तो प्रपंच भी है. यदि हम इसके पीछे जाएं, तो वर्ष 2023 का नारी शक्‍ति वंदन अधिनियम का 106 वां संशोधन विधानसभा, लोकसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देता है. आप जिस दिन 131वां संशोधन बिल ला रहे थे, उस दिन उसी तारीख को वर्ष 2023 का 106वां संशोधन अधिसूचित हुआ था. यह उसी दिन अधिसूचित हुआ. कानून मंत्रालय ने 16 अप्रैल 2026 को नोटिफिकेशन जारी कर दिया. लेकिन वास्‍तविक आरक्षण वर्ष 2027 जनगणना के बाद परिसीमन पूरा होने पर लागू होगा. वर्ष 2029 को लेकर बहस चल रही है. अब बात आती है कि यह पूरे घटनाक्रम में कई चेहरे भी साफ हुए. पहाड़ जैसा ठूंठ, मुंह में अटक गया और राई जैसा सच गले में अटक गया. विपक्ष ने दिखाया था. कारण था कि आपकी मंशा सही नहीं थी. मंशा यदि सही होती, तो आप उसी को लागू करते. वर्ष 2023 के उस 106वां संशोधन को स्‍वीकार करते. आपने नहीं किया और उसके अंदर की क्‍या कहानी है ? उसके अंदर की कहानी यह है कि आड़ में झाड़ लगाना. महिला बिल की आड़ है और वह हो ही गया. बाबा साहेब आंबेडकर जी ने वर्ष 1947 से लेकर 1949, 1951 में हिन्‍दू महिला कोड बिल में सारी चीजें स्‍पष्‍ट कीं. विरोध करने वाले लोग कौन थे. बाबा साहेब आंबेडकर जी का और पंडित जवाहरलाल नेहरू जी का पुतला जलाने वाले लोग कौन थे ? मैं अभी विस्‍तार से बता दूंगा कि बाबा साहेब ने क्‍या-क्‍या व्‍यवस्‍थाएं रखी थीं. 131वां जो महिला आरक्षण का संशोधन बिल है, इसमें हमारा मानना है कि यह आड़ में झाड़ है.

     नजर उनकी, जुबां उनकी, मगर ताजुब है,

     नजर कुछ और कहती है, जुबां कुछ और कहती है.....

कहना भी है, लेकिन आड़ में क्या है ? 2021 में प्रस्ताव क्या था ? प्रस्ताव में यह था कि जनगणना के बाद परिसीमन अनिवार्य न रहे. बिल्क यह संसद के निर्णय पर निर्भर हो, ताकि सरकार जरूरत के अनुसार परिसीमन की तारीख और आधार तय कर सके. यह इनके प्रस्ताव में था. हमारा अनुच्छेद 81-82 संविधान का क्या कहता है. हमारे अनुच्छेद के आर्टिकिल के साथ खिलवाड़ हो रहा है. कहीं भी परिसीमन या आरक्षण का आधार होता है जनगणना, जनगणना आधार है. हमारा अनुच्छेद 82 कहता है कि यह प्रत्येक जनगणना के बाद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के पुनः समायोजन का प्रावधान करता है. संसद के कानून द्वारा परिसीमन आयोग गठित कर निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा जनसंख्या के अनुसार समायोजित करती है जिसमें अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लिये आरक्षण भी शामिल है. मतलब जनगणना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, आधार है. यदि हम जनगणना को ही खत्म कर देंगे. इसका मतलब यह है कि हम अपने अन्य स्रोतों को खत्म कर रहे हैं, हम उन आर्टिकिल्स को खत्म कर रहे हैं जो हमको मौलिक अधिकार हों. अनुच्छेद 81 कहता है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 81 यह लोकसभा की रचना निर्धारित करता है. इसमें 500 से अधिक पृथक राज्यों के प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्रों से प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा चुने जाते हैं. साथ ही 20 से अधिक न ही सदस्य संघ राज्य के क्षेत्र होंगे. केन्द्रशासित राज्यों के जनसंख्या के आधार पर राज्यों को सीटें आवंटन होती है. ताकि प्रतिनिधित्व समानुपातिक रहे. इसमें समझने वाली बात यह है कि जब विपक्ष चट्टान जैसे अड़ गया. 230 सदस्यों ने प्रतिकार किया. पहली बार 12 से 14 साल में हुआ नहीं तो मनमानी चल रही थी. तो वहां संसदीय कार्यमंत्री ने यह कहा कि हम दोनों बाकी बिल वापस लेते हैं. अब एक गिर गया तो दोनों वापस ले लिये उन्होंने खड़े होकर के कहा कि मैं वापस लेता हूं. यह सब प्रक्रियाएं यह संकेत देती हैं कि हमारी यहां के सदन की मंशा क्या है. हम राजनैतिक मायलेज रहना चाहते हैं. यह बहुत साफ है, यदि हम इतिहास में जायें. तो मैंने बताया था कि हिन्दू कोड बिल डॉ.भीमराव अंबेडकर जी ने तैयार किया 1947 में. वह क्या कहता था महिलाओं के समान अधिकार पर केन्द्रित था जिनने विरोध किया था उनका नाम लेंगे तो अभी बवाल होगा. जिस संगठन ने विरोध किया था उसकी आपत्ति पढ़ लें कि उसके प्रावधान क्या थे बाबा साहब जी के. हिन्दू कोड बिल के खिलाफ विवाह और तलाक पर पूर्ण रोक लगाई गई. महिलाओं को तलाक लेने और भरण-पोषण का अधिकार दिया बाबा साहब जी ने. सम्पत्ति अधिकार महिलाओं को पिता और पति की संपत्ति में सह उत्तराधिकार का हक बेटी और बेटों के बराबर हक था. संरक्षितकर्ता माताओं को बच्चों की कानूनी संरक्षण बनने का अधिकार जो पहले केवल पिताओं तक सीमित था. यह बताने का आशय यह था कि 1949 में रामलीला मैदान में एक बहुत बड़ी सभा आयोजित की गई बाबा साहब के इस प्रयास के खिलाफ जो महिला आरक्षण के लिये प्रयास कर रहे थे. रामलीला मैदान में 11 दिसम्‍बर 1949 को एक बहुत बड़ी सभा आयोजित की गई, बाबा साहब के इस प्रयास के खिलाफ, जो महिला आरक्षण के लिए प्रयास कर रहे थे, उसमें यह कहा गया वक्‍ताओं ने कहा कि हिन्‍दु धर्म को परमाणु बम कहा, महिलाओं को आपने परमाणु बम कह दिया उसके बाद 12 दिसम्‍बर 1949 को संसद मार्ग पर बकायदा एक पैदल मार्च हुआ, जिसमें बाबा साहब से लेकर पंडित जवाहरलाल नेहरू तक के पुतले जलाएं गए. इस आरक्षण बिल का लेकर यह है प्रमाण. उसके बाद आप आ जाएं वर्ष 1979 में राजीव गांधी जी ने जो पचांयती राज का लोक सभा में विधेयक पेश किया, लोक सभा में बिल पारित हो गया, लेकिन राज्‍य सभा में 46 वां बिल था, पांच वोटों से गिर गया, ये कौन लोग थे, किन्‍होंने विरोध किया, कहां के पितृ पुरूष थे, जिन्‍होंने विरोध किया. साथ दिया है विपक्षी दलों ने एकजुट होकर यह बिल रोक दिया, यदि नाम लूंगा तो बुरा लगेगा, फिर यही बिल माननीय पीव्‍ही नरसिम्‍हाराव जी ने वर्ष 1992 में पारित किया, यही बिल, वर्ष 2010 में माननीय मनमोहन सिंह जी ने राज्‍य सभा में इस बिल को पारित कर दिया, वहां 186 वोट थे और विपक्ष में 9 वोट पड़े थे, अब 186 वोट में इसमें अपना योगदान बता दें.

          सभापति महोदया घनघोरिया जी, समाप्‍त कीजिए.

श्री लखन सिंह घनघोरिया हमारी बात तो पूरी आ जाने दीजिए. आप अपना योगदान बता दें, जब राज्‍य सभा में बिल पारित हुआ तो आपने लोकसभा में इसको आने नहीं दिया, वर्ष 2010 की ये स्थिति भी बता दी. अब जातिगत जनगणना आपने अभी घोषित की थी वर्ष 2027 में, आप जब चाहे, तब कुछ भी कह देते हैं कुछ भी करते हैं, अभी जनगणना घोषित की और यह भी बता दिया कि दो चरणों में होगी, उन दो चरणों में पहला तो जातिगत जनगणना के 34 पाइंट दे दिये, उन 34 पाइंट में जातिगण कोई भी चीजें नहीं है, आप देख लें, उसमें कहीं भी न तो पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए 13 नंबर का कॉलम पढ़ लें. इसमें एक भ्रामक स्थिति है और सिर्फ राजनैतिक रूप से आपको परिसीमन अपने मुताबिक करना है, जनगणना आधार न हो और उत्‍तर-दक्षिण लड़ते रहे, वहां का अधिकार कम हो जाए, वहां की सीटें कम हो जाए, हमारे तरफ की सीटें बढ़ जाए, देश का संतुलन बिगड़ जाए उससे आपको कुछ  लेना देना नहीं है, देश की अखंडता, एकता, सार्वभौमिकता खतरे में आ जाए उससे आपको कुछ लेना देना नहीं है, आपकी सीटें कैसे बढ़ेगी, हम तैयार है. आप एक घंटे की बात  कह रहे थे, हम लोगों ने तो कहा था आज, अभी और अभी भी सदन में कह रहे हैं 543 सीटों पर आप तत्‍काल 33 प्रतिशत लगाओ, 33 प्रतिशत क्‍या हम तो 50 प्रतिशत आरक्षण पर तैयार है. (..मेजों की थपथपाहट) लगाइए न, वही एक रांई सा सच अटक गया है, रांई जैसा सच गले में अटक गया है, इसलिए मेरा सभी संभ्रांत साथियों से निवेदन है कि हम सब कुछ करें, ये ऐसे कुछ मुद्दे हैं, जिनकी भावनाओं के साथ खिलवाड़ न करें. इसी सदन में इन्‍हें डेक्‍सों में वे लोग बैठते हैं, किस किसने महिलाओं के लिए क्‍या शब्‍द कहे, एक चीख पुकार, एक आवाज सम्‍माननीय सदस्‍यों ने निकाली क्‍या, कोर्ट संज्ञान ले रहा है, तो सरकार नहीं कह रही, न तो संगठन कह रहा है.

और उस पर हम बड़ी बड़ी बात करें और कठघरे में लाकर दूसरों को खड़ा करें.

''वक्‍त ए शाम, सूरत से सल्‍तनत छीन लेता है,

 सुबह होते ही तारों की कयाकद छीन लेता है''

 सलीका सीख लो उसकी जमीन पर चलने का,

 तक्‍कबुर करने वालों से वह ताकत छीन लेता है.

अभी राई गले में अटकी है, समय आने दो, बहुत बहुत धन्‍यवाद.

 

            श्री गौरव सिंह पारधी (कटंगी) -- सभापति महोदया, आज मेरा सौभाग्‍य है कि हमारे माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने जो संकल्‍प प्रस्‍तुत किया है, उस पर मुझे बोलने का मौका मिल रहा है और यह देश की आधी आबादी जिसे हम नारी तू नारायणी, नारी तू नारायणी, तुझसे ही संसार बना, तेरे रूप अनेक यहां, हर रूप में तू ही पूजनीय, पूजनीय, ऐसी नारायणी हमारी नारी के पक्ष में भारतीय जनता पार्टी ने प्रस्‍ताव लाई है और मैं हर विषय पर चर्चा करूंगा, एक-एक बात जो मेरे पहले विपक्ष ने गलत बोली है, मैं उसका भी जवाब दूंगा. लेकिन मैं शुरूआत इस बात से करूंगा कि यह भाव कहां से आया है, यह भाव इस बात से आता है कि जब राजनीतिक सशक्‍तीकरण होता है, तो आर्थिक सशक्‍तीकरण अपने आप बढ़ जाता है और आर्थिक सशक्‍तीकरण से भी राजनीतिक सशक्‍तीकरण होता है, यह दोनों भाव को समझते हुए हम आगे बढ़ते हैं और इसलिए मध्‍यप्रदेश की सरकार आर्थिक सशक्‍तीकरण के लिये भी कार्य कर रही है, वह कार्य कर रही है कि यहां की जो महिलाएं हैं, वह आर्थिक रूप से सक्षम हों, उनके अंदर आंत्रप्रन्‍योरशिप की भावना आये, उसको सहयोग करने के लिये सरकार ने लगभग 18 जो नवीन नीतियां लाईं हैं, उसमें महिलाओं के लिये बहुत सी सुविधाएं दी हैं. मैं आपके ध्‍यान में लाना चाहूंगा कि पिछले कुछ सालों में सरकार की योजनाओं के माध्‍यम से एम.एस.एम.ई. का जो पोर्टल है, उद्यम पोर्टल उसमें लगभग 18 प्रतिशत जो नाम जुड़ रहे हैं, वह महिलाओं के हैं, तो मैं इसके लिये बधाई देना चाहूंगा, इसके साथ मैं कुछ बातें आपके ध्‍यान में लाना चाहूंगा सरकार सिर्फ बातें नहीं करती है, बल्कि सालों से कार्य कर रही है, वर्ष 2006-07 में मध्‍यप्रदेश उन अग्रणी राज्‍यों में रहा, जिसने पंचायतों में 50 प्रतिशत महिलाओं के लिये आरक्षण दिया है, उसके बाद मैं आपके ध्‍यान में लाना चाहूंगा, कांग्रेस के साथीगण 54 साल तक केंद्र में रहे, 54 साल तक आपकी सत्‍ता रही, आपके पास तो तीन चौथाई तक  बहुमत रहा, लेकिन आपने आपके रहते कभी भी महिला आरक्षण लाने का प्रयास नहीं किया, कभी भी नहीं किया. वर्ष 1996 की बात कर रहे थे, तो वर्ष 1996 में तो आप देवगौड़ा जी को बाहरी समर्थन दे रहे थे और विपक्ष में तब भाजपा थी, लेकिन भाजपा ने फिर भी वर्ष 1996 में महिला आरक्षण को सहयोग किया और भारतीय जनता पार्टी की सरकारें सहयोग ही नहीं करती है, वर्ष 1994 का जो हमारा राष्‍ट्रीय अधिवेशन बड़ोदरा में था, वहां पर हमने संकल्‍प पारित किया कि हम महिला आरक्षण जो है देश की हर संसद तक लायेंगे और  उसी के क्रियाकलाप में आज भारतीय जनता पार्टी के संगठन में  नीचे के स्‍तर तक तीस प्रतिशत तक पदाधिकारी जो हैं, वह महिलाओं में से बनाई जाती है, तो इसी के साथ मैं कुछ बातें ओर आपके ध्‍यान में लाना चाहता हूं, आज जो विधेयक संसद में गिरा, वह बहुत लंबी रणनीति है, मैं आपके ध्‍यान में पूरी बातें लाना चाहूंगा, वर्ष 1996 में आरक्षण का बिल आया, वर्ष 1998 में आया, वर्ष 1999 में आया, लगातार आता गया, जब जब केंद्र में भाजपा की सरकार रही आता गया, वर्ष2008 में भी आया लेकिन हमने राज्‍यसभा में पास कराने में सहयोग किया, आपके जो साथीगण थे, उनने आपका विरोध कर दिया, इसलिए आपकी हिम्‍मत टूट गई और आपने उसको पीछे रख दिया. वर्ष 2023 में जो आरक्षण का बिल पास हुआ, उसके पीछे की रणनीति समझिए, आपने इसलिए पास होने दिया, क्‍योंकि आपको मालूम था कि हमारे पास दो तिहाई की लगभग संख्‍या है, 352 एन.डी.ए. के सांसद थे और हमको 349 चाहिए थे और छ:, सात तो हमको सहयोग कर ही देते थे, तो इसलिए आपने कंसनसेस बना लिया क्‍योंकि आप समझ गये थे कि आप विरोध भी करोगे तो भी हम इसको संसद में पास करा लेंगे, हम इस संविधान संशोधन को ले आयेंगे, लेकिन आपकी परते वर्ष 2026 में खुल गईं, जब हमें आपकी सहयोग की जरूरत थी, जब इस देश की महिलाओं को सबके सहयोग की जरूरत थी तो आप लोग पीछे हट गये, आपने अपना असली चाल, चरित्र और चेहरा इस देश की नारी शक्ति के सामने लाकर दिखा दिया कि आप महिला आरक्षण के पक्ष में नहीं है. आप बिलकुल नहीं हैं और मैं आपको बताना चाहूंगा माननीय सभापति महोदया, आप सिर्फ महिला आरक्षण के ही विरोध में नहीं हैं, आप इस देश, इस प्रदेश के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्ग के भी विरोध में हैं. क्‍यों हैं क्‍योंकि हमारी सरकार ने जब इस बार संविधान संशोधन लाई तो हम उसमें वर्ष 2000 की जनगणना के हिसाब से तुरंत प्रस्‍तावित कर रहे थे, हम इंतजार नहीं करना चाह रहे थे कि अगली जनगणना और उसका लाभ क्‍या होता, माननीय सभापति महोदया, मैं आपको बताऊंगा. वर्ष 2001 में मध्‍यप्रदेश में अनुसूचित जनजाति 20.3 प्रतिशत था जो कि वर्ष 2011 में हो गया 21.1 प्रतिशत, यानी इस विधान सभा में अनुसूचित जनजाति के भाईयों की संख्‍या बढ़ जाती, आपने विरोध किया, आप नहीं चाहते थे कि इस विधान सभा में अनुसूचित जनजाति के भाईयों की संख्‍या बढ़ जाये. अनुसूचित जाति वर्ष 2001 में 15.2 प्रतिशत थी, इस प्रदेश में वर्ष 2011 में 15.6 हो गया, इस विधान सभा में, इस देश की संसद में अनुसूचित जाति के भाईयों की संख्‍या बढ़ जाती, लेकिन आप नहीं चाहते थे, इसलिये आपने विरोध किया. यह आपका दोहरा चरित्र है, आप नहीं चाहते थे कि हमारे आदिवासियों का, हमारे अनुसूचित भाईयों का यहां पर संगठन बढ़े,  हमारी महिलाओं का संगठन बढ़े इसलिये आप विरोध में खड़े हो जाते हैं और फिर बार-बार बात कर रहे हैं कि संख्‍या क्‍यों बढ़ा रहे हैं. अरे भाई आर्टिकल 82 constitution of India बाबा साहब ने बनाया, उनकी भी इच्‍छा थी कि परिसीमन होते रहना चाहिये, हर 10 साल में हो, हर जनगणना के बाद हो, तो हम तो परिसीमन ही कर रहे थे न हम कोई मना थोड़ी कर रहे थे, लेकिन आप उसके लिये तैयार नहीं हुये और मैं आपको जानकारी के लिये बताना चाहूंगा कि वर्ष 1971 में लगभग 55 करोड़ की आबादी इस देश की थी जब 545 सांसद हुये और 2025 की बात अगर मैं करूं तो लगभग 145 करोड़ हैं. आप चाहते हैं कि इस देश में एक सांसद 30 लाख लोगों की आबादी को रिप्रजेंट करता है. कहीं न कहीं हमारी जनता की, नागरिकों की आवाज कमजोर पड़ती है. सांसदों की संख्‍या बढ़ेगी, विधायकों की संख्‍या बढ़ेगी तो हमारे आम आदमी की आवाज बढ़ेगी. आप चाहते हो कि उसकी आवाज बुलंद न हो पाये इसलिये आप इस बात का विरोध करते हो.

          माननीय सभापति महोदया, मैं एक बात और बताना चाहूंगा. मध्‍यप्रदेश की सरकार अनेकों काम कर रही है. इसी क्रिया में आगे बढ़ाते हुये हमारा जो पीएम टेक्‍सटाइल पार्क है उसमें हमने डे केयर सेंटर स्‍वास्‍थ सुविधायें विशेष रूप से महिलाओं के लिये हॉस्‍टल जैसी सुविधायें भी की हैं और तो और अचारपुरा औद्योगिक क्षेत्र में 10 एकड़ की भूमि महिला उद्यमियों के लिये आरक्षित की है. हम महिलाओं को आर्थिक रूप से भी सशक्‍त बनायेंगे, उनको राजनीतिक तौर पर भी सशक्‍त बनायेंगे इसी दिशा में हम लोग प्रयास कर रहे हैं. माननीय सभापति महोदया, मैं एक बात और आपके ध्‍यान में लाना चाहूंगा कि एमपीआईडीसी उज्‍जैन, धार, भिंड और रायसेन जैसे औद्योगिक क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के लिये वर्किंग बूमेन हॉस्‍टल माननीय हमारे मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में सामने ला रहे हैं, मैं ब‍धाई देना चाहूंगा. साथ ही साथ एमएसएमई सेंटर में जो सपोर्ट मिलता है वह महिलाओं को लगभग 48 प्रतिशत है, स्‍पेशल तौर पर आम अगर कोई जायेगा तो उसको 40 प्र‍तिशत है. माननीय सभापति महोदया, साथ ही साथ अगर हम स्‍टार्टअप नीति की बात करें तो महिलाओं को 18 प्रतिशत सपोर्ट हैं जो कि नार्मली 15 प्रतिशत है इसी प्रकार मध्‍यप्रदेश की सरकार लगातार महिलाओं के हित में बात कर रही है.

          माननीय सभापति महोदया, आखिर में दो बातें और बताकर जाऊंगा. नोटिफिकेशन का डिले हमने नहीं किया. बार-बार बात हो रही थी कि महिला आरक्षण का नोटिफिकेशन हम लेट क्‍यों लायें हम लेट नहीं लाये नोटिफिकेशन तो संसद के बाद ही आना था, लेकिन हमें उम्‍मीद थी कि महिलाओं के हित में हमारे विपक्ष की पार्टियां शायद साथ दे देंगी तो इसलिये हमने उसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया. हमें उम्‍मीद नहीं थी कि विपक्ष की पार्टियां इतना दोहरा चाल चरित्र दिखायेंगी कि महिलाओं के हित में वह साथ नहीं देंगी, इस वजह से वह नोटिफिकेशन लेट आया, उसके पीछे टेक्‍नीकल रीजन हैं, हमारे साथीगण पता नहीं किस परिस्थिति में किन-किन बातों में करते रहते हैं. दो तीन बातें और बताना चाहूंगा, हमारे वरिष्‍ठ राजेन्‍द्र कुमार सिंह जी ने बोला कि हमारे बीपी सिंह जी की सरकार से समर्थन मंडल आरक्षण के लिये हटाया, नहीं, बीपी सिंह जी की सरकार से भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने हमारे लालकृष्‍ण आडवाणी जी की रथयात्रा चल रही थी, उनको जब अरेस्‍ट कर लिया गया था उस परिस्थिति में समर्थन हटाया था, गलत-गलत बातों से, गलत-गलत धारणा सबके बीच में ला रहे हैं, यह बहुत गलत बात है, इस बात का हम हर प्रकार से खंडन नहीं करते हैं, यह सारी बातें सच्‍चाई हैं. माननीय सभापति महोदया, पुन: मैं आपके ज्ञान में लाना चाहूंगा कि मध्‍यप्रदेश ने नीतिगत तरीके से आगे बढ़ते हुये, आगे बढ़ रहा है कि मध्‍यप्रदेश नीतिगत तरीके से आगे बढ़ रहा है. दो बातें और हैं. विकास की जो साझेदारी हम महिलाओं को देना चाहते हैं, उसके साथ-साथ हम यह भी चाहते हैं कि जो बातें हमारे कुछ माननीय सदस्‍यों ने बोली, निश्‍चित ही शराब दुकानों का स्‍थान परिवर्तन होना चाहिए, उसमें हमारे विधायक और सांसद सभी लोग साथ देते हैं. एक बात और मैं बताना चाहूँगा, हमारे लखन भैया एक बात बोल रहे थे कि हमने पंचायती राज अधिनियम का विरोध किया. नहीं, 64वां संवैधानिक संशोधन, जो राजीव गांधी जी लाए थे, उसमें पंचायतों को सीधे केन्‍द्र से जोड़ा जा रहा था, इसलिए हमने विरोध किया. जबकि 73वां और 74वां संवैधानिक संशोधन विधेयक जो कि पंचायती राज और स्‍थानीय निकायों से संबंधित है, जब यह नरसिम्‍हाराव जी की सरकार में आया तो भारतीय जनता पार्टी ने भी सहयोग किया. पूरे कन्‍सेशस से वह संवैधानिक संशोधन विधेयक पास हुआ. पुन: सभापति महोदया, मेरा आपसे अनुरोध है कि इस प्रकार की असत्‍य असत्‍य बातें सदन के सामने लाकर लोगों को बरगलाया जाता है. इस बात को हम सब सदस्‍य पसंद नहीं करेंगे. आखरी में मैं हमारी महिला शक्‍ति को प्रणाम करते हुए, उनको धन्‍यवाद देते हुए, इस आशा और विश्‍वास के साथ कि हमारे मुख्‍यमंत्री जी के द्वारा आज जो संकल्‍प लाया गया है कि महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण, परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जाए और तत्‍काल प्रभाव से लागू किया जाए. इस बात का समर्थन करते हुए शक्‍ति स्‍वरूपा, दीव्‍य चेतना, जो पाती जग से वंदन, बन भारत की संसद का स्‍वर, अब गूंजेगी अभिनन्‍दन, अब गूंजेगी अभिनन्‍दन. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्रीमती सेना महेश पटेल (जोबट) -- धन्‍यवाद सभापति महोदया. नारी शक्‍ति स्‍वरूपा वंदन अधिनियम पर बोलने का आज अवसर प्राप्‍त हुआ है. सबसे पहले ''यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः यत्रैताः न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः'' अर्थात् जहां पर नारियों की पूजा की जाती है, वहां पर देवताओं का निवास होता है, वास होता है. इसलिए नारियों का अपमान करना अब बंद कीजिए.

          माननीय सभापति महोदया, आज नारियों के बारे में और हम हमारे अपने अधिकारों के बारे में बोल रहे हैं और आज हमें समय-सीमा में मत बांधिये. हमें थोड़ा ज्‍यादा समय चाहिए.

          माननीय सभापति महोदया, भारतीय नारी शक्‍ति स्‍वरूपा को वंदन करती हूँ, अभिनन्‍दन करती हूँ. नारी शक्‍ति महिला आरक्षण के नाम पर यह राजनीति हो रही है. यह महिलाओं का अपमान करने का षड्यंत्र किया जा रहा है. यह हमारे भारत के संविधान पर एक प्रकार से हमला किया जा रहा है. इसको हम अस्‍वीकार करेंगे.

          सभापति महोदया, महिला आरक्षण बिल वर्ष 2023 में सर्व दलों की सहमति से पास किया गया है. इसमें कोई विरोध नहीं हुआ. लेकिन अब सब यह चाहते हैं कि जो सीटें आज हमारे पास हैं, 543 और 230, इन पर 33 प्रतिशत आरक्षण आज ही लागू होना चाहिए. यह हम बोलना चाह रहे हैं. आप महिला आरक्षण के नाम से परिसीमन को ज्‍वाइंट करके पूरे देश की नारियों का अपमान कर रहे हैं, गुमराह कर रहे हैं. अगर 33 प्रतिशत आरक्षण अभी लागू किया जाएगा तो आप सबका पूरा विपक्ष हमारे शीर्ष नेतृत्‍व से लेकर नीचे तक, हम सब मिलकर आपका जोरदार अभिनन्‍दन करेंगे. माननीय सभापति महोदया, लेकिन अभिनन्‍दत तभी कर पाएंगे जब 543 और 230 सीटों पर 33 प्रतिशत आरक्षण लागू किया जाएगा.

          माननीय सभापति महोदया, परिसीमन एक अलग प्रक्रिया है और इसे महिला आरक्षण से क्‍यों जोड़ा जा रहा है. परिसीमन तब लागू होगा जब जातिगत जनगणना पूर्ण होगी. परिसीमन तभी किया जा सकता है, जब जातिगत जनगणना पूर्ण होगी और जब जातिगत जनगणना पूर्ण होगी तो सरकार को स्‍पष्‍ट रूप से यह बताना होगा कि कौन से वर्ग को कितना-कितना आरक्षण दिया जा रहा है, यह स्‍पष्‍ट नीति होनी चाहिए, चाहे पिछड़ा वर्ग हो, अनुसूचित जाति हो, जनजाति हो, सभी वर्गों को कितना आरक्षण मिल रहा है, यह स्‍पष्‍ट होना चाहिए, सभी को समान अधिकार मिलना चाहिए.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार)-  सभापति महोदया, नारी शक्ति पर चर्चा हो रही है और सदन में न मुख्‍यमंत्री जी हैं, न उपमुख्‍यमंत्री जी हैं, न संसदीय कार्य मंत्री जी हैं, इससे मालूम पड़ता है कि प्रदेश के मुखिया इस चर्चा के विषय में कितने गंभीर हैं. (शेम-शेम)

          सहकारिता मंत्री (श्री विश्‍वास सारंग)-  उपमुख्‍यमंत्री राजेन्‍द्र जी सदन में ही बैठे हैं. (उपमुख्‍यमंत्री जी सदन में अपनी नियत सीट के बजाए किसी अन्‍य सीट पर बैठे थे.)

          श्री रामेश्‍वर शर्मा-  सभापति महोदया, सदन में जो भी चर्चा हो रही है, राजेन्‍द्र जी उसे गंभीरता से सुन रहे हैं और फिर बाद में जवाब देंगे.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-  सभापति महोदया, हम सदन में चर्चा कर रहे हैं लेकिन यहां कोई सुनने वाला ही नहीं है. मुख्‍यमंत्री, उपमुख्‍यमंत्री कोई नहीं है. मुख्‍यमंत्री जी जो संकल्‍प लेकर आये हैं, वे कहां हैं ?

          श्री भंवरसिंह शेखावत (बाबुजी)-  वि‍श्‍वास बेचारे की तो कोई सुन नहीं रहा है. विश्‍वास जो बोलता है, आप उस पर अविश्‍वास करते हो, आप उसकी सुनते कहां हो ?

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-  सभापति महोदया, यह मजाक चल रहा है, सिर्फ दिखावा है, मुख्‍यमंत्री जी ने यदि संकल्‍प लाया है तो वे सदन में पूरा बैठें, हमारे नेता प्रतिपक्ष शुरू से पूरी गंभीरता से सदन में बैठे हैं. यह सदन को गुमराह करने का काम किया जा रहा है. 

          श्रीमती सेना महेश पटेल-  सभापति महोदया, हमारा अपमान तो यहीं हो रहा है.

          श्री रामेश्‍वर शर्मा-  सभापति महोदया, कांग्रेस के नेताओं का व्‍यवहार अच्‍छा नहीं है. हम सभी सेना दीदी को सुनना चाहते हैं, पर आप लोग उनको बोलने नहीं दे रहे हैं. नारी के सम्‍मान में यहां चर्चा हो रही है.

          श्रीमती सेना महेश पटेल-  सभापति महोदया, भाजपा के लोग कांग्रेस के ऊपर आरोप लगाते हैं कि हमने बिल पास होने नहीं दिया, आप कैसा भ्रम देश के सामने फैला रहे हैं, देश की मातृशक्ति जागरूक हो चुकी है, वह एक-एक शब्‍द समझती है, आपके इस भ्रम में आने वाली नहीं है, यह आप ध्‍यान में रखें. (मेजों की थपथपाहट)

          सभापति महोदया, भाजपा वाले यह भ्रम फैलाना बंद करें, यदि आपको आरक्षण देना है तो आज ही लागू कीजिये, आप बतायें हाथ उठाकर कि कब लागू हो रहा है, महिला आरक्षण बिल पास हो चुका है, 33 प्रतिशत आरक्षण हमें अभी चाहिए. जिस प्रकार से बिल संसद में गिरा और आप हम पर आरोप लगा रहा है, वह 131वां संविधान संशोधन परिसीमन बिल था न कि महिला आरक्षण बिल था, आप गुमराह करना बंद कीजिये.

 

3.48 बजे

{अध्‍यक्ष महोदय (श्री नरेन्‍द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.}

 

          अध्‍यक्ष महोदय, हमारा शीर्ष नेतृत्‍व, हमारी पार्टी, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी जी का सपना था कि हर भारतीय नारी को सम्‍मान मिले, उसका हाथ मजबूत हो, नारी हर पद पर विराजमान है. जनपद, जिला पंचायत, नगर पालिका, विधायक सांसद सभी पदों पर नारी हो. आज यह जो मातृशक्ति यहां बैठी है, हम सभी आज यहां हैं, इसका श्रेय हमारे राजीव गांधी जी को जायेगा न कि किसी असत्‍य बोलने वाले को जायेगा.

          अध्‍यक्ष महोदय, जिस प्रकार से हमारी सोनिया गांधी जी का सपना है, उसके लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कीजिये, जिससे सभी उच्‍च पदों पर मातृशक्ति विराजमान हो और उसे गांव, फालिये, मजरे, टोले से निकलकर अपने क्षेत्र का नेतृत्‍व करने का अवसर मिले. यदि आपकी मंशा यही है तो आपको यह आरक्षण लागू करना होगा. जिस प्रकार भाजपा वाले गलत अफ़वाह फैलाते हैं, आज हर क्षेत्र में हमें यहां तक आने का अवसर यदि मिला, चाहे पंचायतों, नगर पालिकाओं, विधान सभा या संसद के माध्‍यम से मिला तो यह कांग्रेस की देन है. यह श्रेय कांग्रेस को जायेगा न कि आप जैसी असत्‍य पार्टी वालों को जाएगा. आप जो वादे देश की नारी शक्ति को दिखाते हो, आप महिलाओं के साथ जो छलावा कर रहे हो. सरकार ने देश की महिलाओं को क्‍या दिया है. वादा तो किया लेकिन भारतीय नारी उसका इंतजार कर रही है कि वह वादा पूरा कब होगा. घोषणाएं आपकी हैं लेकिन शर्त लगा रखी है कि वह कब पूर्ण होंगी. भारतीय नारी इंतजार कर रही है. भारतीय नारी सम्‍मान की भूखी है, लेकिन आप सम्‍मान टालने की बात‍ करते हो. आप ऐसे ही सम्‍मान करते हो. आज अगर यह 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होता. महिलाओं का अपमान तो इसी सदन में हो रहा है. यहां पर हम 27 मातृशक्ति हैं और बोलने वाली सिर्फ पांच से सात हैं. आपकी ही बहनों को आप बोलने का अवसर नहीं दे रहे हैं. कम से कम आप आज तो सभी को अपने अधिकार के लिए बोलने के लिए दो-दो मिनट तो देते. इसी से यह सिद्ध हो रहा है कि महिलाओं का कितना अपमान हो रहा है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस प्रकार से सिर्फ और सिर्फ भाषण देने से आरक्षण नहीं मिलेगा उसे जमीन पर लागू करना होगा. हमेशा आप सब का ब्‍लेम लगता है कि कांग्रेस हमेशा से महिला विरोधी है. मैं आज आपको इस सदन के माध्‍यम से बता देना चाहती हूं कि कांग्रेस ने ही कई उच्‍च पदों पर बड़ी-बड़ी हस्तियां, महाशक्तियां, वीरांगना, देश के लिए लड़ने वाली कई सेनाएं सभी को जगह दी है और हमारे देश की पहली प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी थीं. देश की राष्‍ट्रपति प्रतिभा पाटिल जी थीं. ऐसी कई महिलाएं उच्‍च पदों पर विराजमान रहीं हैं और यह कांग्रेस की देन है. आप किस मुंह से बोलते हैं कि राजनीति महिलाओं का सम्‍मान नहीं करती है. यह गलत बात, गलत अफवाह, गलत आरोप लगाना बंद कीजिए. नारी शक्ति हर ऐतिहासिक कदम में कांग्रेस की महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रही है और यह महिला आज इस सदन में विराजमान है यह कांग्रेस की ही देन है जो आज यहां तक पहुंची है. महिलाओं की वास्‍तविक चिंता हो तो आप जरा मणिपुर को भी याद कीजिए. क्‍या वह मणिपुर की महिलाएं इस देश की महिलाएं नहीं हैं. जिनको निर्वस्‍त्र करके किस प्रकार से कृत्‍य किया जाता है क्‍या वह इस देश की नारी शक्ति नहीं हैं, लेकिन उसके ऊपर किसी को चिंता नहीं है. अध्‍यक्ष महोदय, बोलने को तो और भी है लेकिन अगर महिला आरक्षण बिल की बात हो रही है तो महिला आरक्षण बिल 33 प्रतिशत लागू होना चाहिए. यह मांग मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी से करती हूं. जिस प्रकार से हमारी कार्यपालिका और न्‍यायपालिका के बीच में जो चल रहा है पता नहीं सत्‍ता का घमंड है या पता नहीं अपने आपको क्‍या समझते हैं. चाहे करैरा हो, चाहे अलीराजपुर हो, चाहे अन्‍य जिले हों अधिकारी को किस प्रकार से डराया जाता है, धमकाया जाता है, मारने की बात की जाती है, गाड़ने की बात की जाती है, दांत तोड़ने तक की बात की जाती है, क्‍या यह आपका अनुशासन है, क्‍या यह लोकतंत्र है, मुझे इसका जवाब चाहिए. इसी कृत्‍य से हर भारतीय नारी अपने आपमें असहज महसूस करती है. यह मैं आपको बताना चाहती हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय-- सेना जी कृपया समाप्‍त करें.

          श्रीमती सेना महेश पटेल-- जी पांच मिनट का समय ओर दें.

          अध्‍यक्ष महोदय-- पांच मिनट तो बहुत ज्‍यादा हो जाएगा.

          श्रीमती सेना महेश पटेल-- अध्‍यक्ष महोदय, आज हमारा ही तो दिन है.

          अध्‍यक्ष महोदय-- ज्‍यादा समय हो गया है. 

          श्रीमती सेना महेश पटेल-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं केवल पांच मिनट में अपनी बात को समाप्‍त करती हूं. वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2023 तक हमारी माताएं, बेटियां, बहनें कहां गायब हुई हैं इस‍की जिम्‍मेदारी यहां पर कौन ले राह है. इसी सदन में हमने प्रश्‍न लगाया था, इसी सदन में जवाब आया था, देश में हमारे मंत्री जी के माध्‍यम से जवाब आया कि 2 लाख 74 हजार बेटियों गायब हैं कहां गईं वह 2 लाख 74 हजार बेटियां इसका पता कौन लगाएगा आप बोल रहे हो मातृ शक्ति, वंदन शक्ति अरे, जब महिलाओं को सम्मान मिलेगा और महिलाएं लापता नहीं होंगी तब हम मानेंगे कि यह बिल सही है. कितनी सारी हमारी बेटियां गायब हो रही हैं. आज देश की सेवा करने वाली वो बेटी जिसका अपमान किया गया और मंत्री जी से इस्तीफा भी नहीं लिया गया. सोफिया कुरैशी हों या और भी ऐसी महिलाएं हैं. चाहे ओलम्पिक की खिलाड़ी हों, चाहे सीमा पर तैनात हों इन बेटियों का अपमान करने वालों का कोई इस्तीफा नहीं लिया गया है. मैं इतना कहना चाहूंगी कि हमेशा कांग्रेस को दोष देना बंद कीजिए. कांग्रेस की देन है कि आपके हाथ में मोबाइल है. कांग्रेस ने आपको पढ़ना लिखना सिखाया है. कांग्रेस की देन है जिसने इस देश को बनाया. इसलिए कांग्रेस की इस प्रकार से बुराइयां करना बंद कीजिए. आप क्या कर रहे हैं आप अपनी बात रखें. आप देश को क्या देना चाह रहे हैं, आपको आने वाली पीढ़ी किस काम से याद रखेगी. इसके ऊपर चिंतन-मनन करें. हमारी कांग्रेस की सरकार ने क्या-क्या दिया है, जिसे हम आज भी याद कर रहे हैं और आगे भी याद करेंगे. इस देश को बनाया है. मनरेगा दिया है, आधार दिया है, नेशनल फूड दिया, सिक्योरिटी एक्ट दिया है, राइट-टू-एजूकेशन दिया है, सूचना का अधिकार दिया है, इसरो की स्थापना की, बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया, शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थापना की, आईआईटी बनाया, एम्स बनाया और अनेकों ऐसे उद्योग लगाए. जिनको हम सब और आने वाली पीढ़ियां याद करेंगी. आपके भाजपा के राज ने देश को ऐसा क्या दिया है जिससे आपको याद किया जाए. कृपा करके देश को कुछ दो तो आपको भी आने वाले समय में याद किया जाएगा. आज 543 और 230 सीटों पर 33 प्रतिशत आरक्षण लागू होना चाहिए तो ही इन महिलाओं का सम्मान होगा. नहीं तो देश की नारी सब जानती है आपका यह असत्य चेहरा हम सब जानते हैं.

          अध्यक्ष महोदय, आपको बहुत बहुत धन्यवाद, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया.

          सुश्री निर्मला भूरिया (पेटलावद) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, आज सदन में माननीय मुख्यमंत्री जी ने नारी शक्ति वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण विकास और सशक्तिकरण के लिए देश की संसद एवं सभी विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने का जो संकल्प प्रस्तुत किया है उसका मैं पूर्ण समर्थन करते हुए अपनी बात को यहां रखना चाहूंगी.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में महिलाओं की भागीदारी को सशक्त बनाने की दिशा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक मील का पत्थर माना जा रहा है. यह केवल एक विधेयक नहीं बल्कि सामाजिक न्याय, समान अवसर और समावेशी विकास के उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है जिसमें देश की आधी आबादी को नीति-निर्माण में बराबरी का अधिकार देने की बात कही गई है. लोकसभा और राज्य विधान सभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का यह प्रस्ताव लंबे समय से लंबित एक ऐतिहासिक मांग को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी को मैं धन्यवाद देती हूँ. उनका अभिनंदन करती हूँ कि अत्यंत खुले हृदय से उन्होंने आज इस विशेष सत्र में नारी सशक्तिकरण के लिए किए गए प्रयासों और भविष्य की योजनाओं से सदन और प्रदेश को अवगत कराने के लिए इस विशेष सत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आज प्रदेश की प्रत्येक नारीशक्ति, बहनें और प्रदेश की बेटियां आपके इन सद्प्रयासों के लिए आपको साधुवाद दे रही हैं. इस पहल के केन्द्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का स्पष्ट संकल्प और मजबूत राजनैतिक इच्छाशक्ति दिखाई देती है. उनके अनुसार नारी शक्ति केवल एक नारा नहीं बल्कि भारत के विकास की आधारशिला है. इस संदर्भ में मध्‍यप्रदेश की भूमिका विशेष रूप से उल्‍लेखनीय है जहां आज 27 अप्रैल को विधान सभा का विशेष सत्र बुलाया गया है. यह सत्र राज्‍य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शा‍ता है कि महिला सशक्तिकरण केवल नीतिगत घोषणा नहीं बल्कि व्‍यावहारिक प्राथमिकता भी है. नारी शक्ति वंदन अंतर्गत महिलाओं के सर्वांगीण विकास और सशक्तिकरण के लिए विशेष सत्र का आयोजन किया है निश्चित रूप से महिलाओं के सम्‍मान के लिए और मध्‍यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को एक सार्थक प्‍लेटफार्म देने के लिए मैं प्रदेश की समस्‍त नारी शक्ति की ओर से आपको और माननीय मुख्‍यमंत्री जी को बहुत-बहुत धन्‍यवाद देती हूं. मुख्‍यमंत्री जी का यह मानना है कि यदि बेटियों और महिलाओं के समग्र विकास की दिशा में काम करेंगे तो प्रदेश में विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ जाएगी और यही कारण है कि महिलाओं के समग्र विकास के साथ-साथ महिलाओं को प्रदेश के विकास में सहभागी बनाने का जो तीव्र गति से अभियान चलाया है उसकी जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है. वूमेनलेड डेवलपमेंट की माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी की मंशा को जिस तेज गति से धरातल पर उतारने का काम हमारे मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने किया है वह उल्‍लेखनीय है.

          अध्‍यक्ष महोदय, देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी ने महिलाओं को नीति निर्माण में भागीदार बनाने के लिए एक पवित्र मंशा के साथ नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू किया और 16 से 18 अप्रैल के विशेष सत्र में इस अधिनियम को पूर्णता प्रदान करने के लिए आवश्‍यक संशोधन लोक सभा में रखा, लेकिन पूरे देश की महिलाओं ने यह देखा कि किस प्रकार से हमारे कांग्रेस के साथी और उनकी सहयोगी दूसरी पार्टियों ने इस पवित्र मंशा पर कुठाराघात किया और इस संशोधन अधिनियम को लोक सभा में पारित नहीं होने दिया. हमारे कांग्रेस के साथी और विपक्षी दलों ने कभी चाहा ही नहीं कि महिलाएं नीतियों के निर्माण में सहभागी हों या महिलाओं का राजनैतिक नेतृत्‍व कभी उभरकर सामने आए और इसी कारण कहीं न कहीं इस बिल में बाधा आई.

            अध्‍यक्ष महोदय, देश और प्रदेश में नारी सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्‍व की केन्‍द्र सरकार और मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी की राज्‍य सरकार के द्वारा महिलाओं और बेटियों के लिए किए गए कार्य और योजनाओं का मैं यहां पर संक्षिप्‍त में उल्‍लेखन करना चाहूंगी. मैं मुख्‍यमंत्री जी का सम्‍मान करते हुए यह कहना चाहूंगी कि यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री जी के द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए अभूतपूर्व कार्य किए गए कि बहनें किस तरह से सशक्‍त हों, वह अपने पैरों पर किस तरह से खड़ी हों, उनके लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं. मुख्‍यमंत्री जी ने देवी अहिल्‍या माता के सम्‍मान में उनकी कर्म स्‍थली महेश्‍वर में कैबिनेट का आयोजन किया और प्रदेश में पहली बार नारी सशक्तिकरण मिशन को लॉंच किया. यह मिशन महिलाओं को समग्र रूप से सशक्‍त बनाने के साथ-साथ प्रदेश के विकास में महिलाओं को मुख्‍य भूमिका देने का एक अवसर है. मध्‍यप्रदेश में आंगन वाड़ी सेवा में मातृ एवं शिशु स्‍वास्‍थ्‍य पोषण और महिला सशक्तिकरण में उल्‍लेखनीय प्रगति की है. आज हमारी आंगन वाड़ी केन्‍द्रों की संख्‍या 97 हजार से ज्‍यादा हो गई है. मुझे खुशी है कि हमारे मुख्‍यमंत्री जी के नेतृत्‍व में पहली बार 12 हजार से ज्‍यादा मिनी आंगन वाडि़यों को न केवल मुख्‍य आंगन वाडि़यों में बदला वरन् देश में पहली बार आंगन वाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के चयन के लिए पूर्णत: पारदर्शी ऑनलाइन चयन प्रक्रिया लागू की गई. यह सुशासन का एक बड़ा कदम है जिसकी देश भर में सराहना हुई है और इसी पारदर्शी प्रणाली के माध्‍यम से इतिहास में पहली बार 19 हजार से ज्‍यादा पदों पर महिलाओं को रोजगार दिया है.

          अध्यक्ष महोदय, महिला एवं बाल विकास विभाग की 'बैकबोन' (Backbone)  मानी जाने वाली आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को उनकी मेहनत को दृष्टिगत रखते हुये मध्यप्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने उनके मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि की है. 2003 में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को मात्र 500 रूपये प्रति माह और आंगनवाड़ी साहयिकाओं को 260 रूपये प्रतिमाह मिलता था उसको बढ़ाकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को आज 13000 रूपये प्रतिमाह और आंगनवाड़ी सहायिकाओं को साढे 6 हजार रूपये प्रतिमाह दिया जा रहा है . यह मध्यप्रदेश सरकार की महिला आर्थिक सशक्तिकरण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

          अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने सरकारी योजना और बजट में महिला और पुरूषों की अलग अलग जरूरत को ध्यान में रखते हुये संसाधनों पर न्यायसंगत और समान वितरण सुनिश्चित करने के लिये जेन्डर बजटिंग (Gender Budgeting) लागू की है और यह करने वालों में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है. मैं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री आदरणीय डॉ.मोहन यादव जी और उप मुख्यमंत्री वित्त श्री जगदीश देवड़ा जी को भी अपनी ओर से धन्यवाद देती हूं कि जेंडर रिस्पॉन्सिव बजटिंग (GRB) या जेंडर बजटिंग प्रक्रिया के तहत राज्य के वार्षिक बजट के साथ जेण्डर बजट स्टेटमेंट भी प्रकाशित किया है.

          अध्यक्ष महोदय- निर्मला जी समय सीमा का ध्यान रखें.

          कुमारी निर्मला दिलीप सिंह भूरिया-- जी अध्यक्ष जी, एक दो पाईंट ओर है. अध्यक्ष महोदय, योजनाओं को लागू हुये 10 साल हो गये हैं और यह योजना मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने और उन्हें एक छत के नीचे सहायता प्रदान करने के लिये प्रतिबद्ध है. महिला हेल्प लाइन में संकट में आने वाली महिलाओं के लिये हो, यह प्रदेश के 13 जिलों में गठित कठिन परिस्थितियों में रहने वाली महिलाओं के लिये 14 शक्ति सदन चल रहे हैं और अगले साल पांच नये ओर स्थापित किये जायेंगे , मुख्यमंत्री जी ने कामकाजी महिलाओं की समस्याओं को भी नजदीक से देखा है. अभी तक प्रदेश में 3 वर्किंग वूमेन्स हास्टल संचालित किये जा रहे हैं ताकि कामकाजी बहनें चाहे वह हमारी शहरी क्षेत्र में रहने वालीं हों, उनको रहने के लिये कोई परेशानी का सामना नहीं करना पड़े, हब फार इन्पारवेंट आफ वूमेन एक ऐसी योजना है जिसमें महिला सशक्तीकरण के लिये जिले में विभिन्न योजनाओं का आयोजन किया जा रहा है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय प्रधान मंत्री जी की विशेष योजना प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का उल्लेख भी करना चाहूंगी जिसमें गरीब महिलाओं को मजदूरी की हानि की आशंका में क्षतिपूर्ति  के रूप में नगद प्रोत्साहन राशि दी जा रही है, और ऐसी अनेकों योजनायें हैं जिसके बारे में हम यहां पर बता सकते हैं उसमें से एक है लाडली लक्ष्मी और लाड़ली बहना योजना यह ऐसी योजनायें हैं जिसके बारे में आप सभी लोग जानते हैं. प्रधानमंत्री जी के नारी शक्ति वंदन के संशोधन अधिनियम को लागू करने के प्रयासों पर कहीं न कहीं प्रतिपक्ष ने विधेयक का विरोध कर बहुत बड़ा पाप किया है, चाहे आज प्रधान मंत्री जी के महिला सशक्तिकरण के सकल्प को थोड़ा धक्का अवश्य लगा है लेकिन यह संकल्प को पूर्ण करने की एक भूमिका बनेगी यह प्रधानमंत्री जी का संकल्प है कि वे किसी भी हालत  में महिला सशक्तिकरण विधेयक को लागू करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगे , मुझे विश्वास है कि प्रधानमंत्री जी के इस संकल्प को हम लोग पूरा करेंगे.

          अध्यक्ष महोदय- निर्मला जी कृपया समाप्त करें.

          कुमारी निर्मला दिलीप सिंह भूरिया- जी अध्यक्ष जी. अंत में मैं सभी से आग्रह करना चाहती हूं कि हमारे मुख्यमंत्री जी जो संकल्प लेकर के आये हैं उसे सर्वसम्मति से पारित करें. अध्यक्ष जी आपने मुझे समय दिया उसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद.

          अध्यक्ष महोदय- हेमन्त कटारे जी, कृपया समय का ध्यान रखेगे.

 

          श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे(अटेर)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,आपका मुझे संरक्षण भी प्राप्त होगा ऐसी आशा है. अध्यक्ष जी, यह मेरे लिये गौरव की बात है कि मैं उस पार्टी से आता हूं जिसने सदैव महिलाओं को सशक्त करने के लिये सर्वोच्च पदों पर बैठालने का काम किया और वूमन्स रिजर्वेशन कि जो  नींव रखी गई है. भारत की राजनीति में वह कांग्रेस पार्टी है. वैसे तो सब लोगों ने नाम बता दिये हैं  मैं उन बातों को रिपीट नहीं करना चाह रहा हूं. चाहे प्रेसीडेंन्ट प्रतिभा पाटिल जी हों..

          अध्यक्ष महोदय- नहीं आप तो क्रांक्रीट मटेरियल रखो, रिपीट तो होना ही नहीं चाहिये,विद्वान सदस्य का यही उदाहरण है कि रिपीटेशन (Repetition)  आये ही नहीं, नई बात आनी चाहिये.

     श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे- जी अध्यक्ष महोदय.  धन्यवाद. तो यह  बात सब लोगों ने कही कि  इंदिरा गांधी जी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री थी, लेकिन मैं यह  बताना चाहता हूं इस सदन को कि  सिर्फ देश की नहीं पूरे एशिया की पहली  महिला प्रधानमंत्री  इंदिरा गांधी जी थी, And the only Prime Minister ever, a woman Prime Minister. उसके बाद  से  कोई दूसरी  महिला प्रधानमंत्री  नहीं  बनी और मुझे लगता है कि  जैसी भाजपा की नीति है और जिस प्रकार  व्यवहार  भाजपा  अपनी शीर्ष नेत्री  चाहे उमा भारती जी हों,  चाहे राजस्थान की  पूर्व मुख्यमंत्री  वसुंधरा राजे जी हों जो व्यवहार उनके साथ,  जो पीएम के पद के निकट  भी पहुंचता है, तो उनके राजनैतिक   भविष्य को बर्फ  से  लगा देते हैं. मुझे लगता है कि जब तक  भाजपा की सरकार है,   महिला नेत्री प्रधानमंत्री  के रुप  में देखने में   मुझे नहीं लगता कि कभी भी  प्राप्त होगा हम लोगों  को. 
            श्री सीतासरन शर्मा--  अध्यक्ष महोदय, सिरिमावो भंडारनायके  पहली प्रधानमंत्री थीं  एशिया की श्रीलंका की.  जरा अपना ज्ञान ठीक कर लें. 
            श्री हेमन्त सत्यदेव कटारेराष्ट्रपति थीं वह.  यह मेरे समय में से मत कटाना. अध्यक्ष महोदय. मैं  आपको ही फोकस कर रहा हूं अभी.
            अध्यक्ष महोदय--  नहीं इसमें समय लगा ही नहीं है. ..(हंसी)
            श्री हेमन्त सत्यदेव कटारेलग सकता था, लेकिन वापस ही घूम गया. तो महिला आरक्षण की मैं बात कर रहा था.  मैं आपको बताना चाहता हूं कि  जब इंदरिरा गांधी जी प्रधानमंत्री थी उन्होंने महिलाओं  को सशक्त करने के लिये काम किया  और उन्होंने कभी नमस्ते ट्रम्प नहीं किया.  ट्रम्प होते तो लौटकर उनको   राम राम ही करते.  अभी जो नमस्ते ट्रम्प चल रहा है, वह  सशक्त महिला थी. आज भी इंदिरा गांधी जी जैसी दमदार  महिला  ऐसा प्रधानमंत्री मिलेगा नहीं.  कोई अपना सीना कितने ही इंच का बताते रहे, लेकिन दमदारी  दिखाई देती है. उसके लिये बताना नहीं पड़ता है. 1989 में राजीव गांधी जी  महिला आरक्षण बिल लेकर आये  और मैं इस सदन को  बताना चाहता हूं कि  उसका विरोध करने वाले कौन थे.  उस समय विपक्ष में कौन थे.  1989 के बिल का विरोध किया  भाजपा के नेताओं ने, मैं  कहो तो नाम से बता दूं कि  किन किन ने उसके विरुद्ध वोट किया.  2010 में राज्यसभा से पास  हुआ  महिला  आरक्षण बिल, लेकिन लोकसभा में  फेल हुआ.  उसमें भी भाजपा के  नेताओं ने..
            श्री प्रहलाद सिंह पटेलअध्यक्ष महोदय,  मैं 1989 में सांसद था,  कृपा करके बोलने के पहले अपन  तथ्यात्मक बातें करें, तो अच्छा होगा. 
            श्री हेमन्त सत्यदेव कटारेहो सकता है कि  उस समय माननीय अनुपस्थित  हों, या केंटीन  में नाश्ता करने गये हों. 
            श्री प्रहलाद सिंह पटेलयह उधर की  आदत है,  इधर की नहीं है. 

          श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे--  मैं आपको बता दूंगा.जो पंचायती राज में  33 प्रतिशत  आरक्षण  का बिल था,  महिला आरक्षण की बात हो रही है, लोकसभा, राज्यसभा एवं विधान सभा  नहीं, अभी महिलाओं की बात  हो रही है और वह आया था. मेरी जानकारी  यही कहती है, लेकिन अगर  आपने  यह बात कही है तो मैं उसको पुनः चेक  करुंगा.  ऐसा नहीं है. जितना आपको संसदीय ज्ञान है,  मैं नहीं समझता  इतना बहुत कम सदस्यों को  होगा.  अगर आपने बात कही है, तो मैं उसको चेक करुंगा. लेकिन  मेरी  जानकारी अभी यही कहती है.  भाजपा के नेताओं को लज्जा  आनी  चाहिये यह कहते हुए कि जब जब   महिला आरक्षण बिल आया, चाहे 2010 में आया,  तब उसमें  विरोध  में वोट किया.   आपके जो संस्थापक थे  आडवानी जी,  उन्होंने तक इस आरक्षण बिल  के  विरोध  में वोट किया.  हमारे नेता राहुल गांधी जी,  सोनिया गांधी जी ने 2017 में  2018 में पत्र लिखकर  के  मांग की मोदी जी से कि  महिला आरक्षण विधेयक को  लाइये  मानसून सत्र में और यदि आप लाते हैं, तो   2019  के   चुनाव में यह बिल  चालू हो चुका होता और  महिलाओं  को यह  आरक्षण प्राप्त हो गया होता. लेकिन इसको अनसुना  किया गया.  कोई बात नहीं, लेकिन जब मोदी जी  लेकर के आये 2023 में इस  बिल को लाये, कांग्रेस ने  और  पूरे विपक्ष  ने सर्व सहमति से  सौ प्रतिशत इस बिल को  समर्थन दिया और  यह बिल पास हो चुका है.  महिला आरक्षण का बिल   लोकसभा में पास हो चुका है.   लेकिन अब चर्चा हो रही है,  चूंकि  एक और जो बिल उसके साथ   जोड़ा था परिसीमन का बिल,  चूंकि दो विषय हैं,  इन दोनों को जोड़ करके  देखा जायेगा,  तो  ठीक नहीं है. महिलाओं   के हितों की बात कर रहे हैं, तो आप उसमें परिसीमन  क्यों जोड़ रहे हैं.  यह आधार कार्ड  की तरह क्यों बता रहे हैं कि आधार को मोबाइल  से  लिंक करो तो ओटीपी  निकलेगा.  बैंक खाते से लिंक करो तो  केवाईसी    होगा.  यह आधार कार्ड थोड़ी है.  यह  महिला आरक्षण  है,  हम महिलाओं की बात करें, सीधी सी   बात हम यह कर रहे हैं कि  वन थर्ड आरक्षण   महिलाओं को मिले. परिसीमन के बाद  सीट  बढ़ती है, तो  उसमें वन थर्ड  का फार्मूला  है,  छोटा सा केलकुलेटर है,  उसको डिवाइड बाय थ्री कर लीजियें. सीटे घटती हैं,  तो  उसमें वन थर्ड का फार्मूला  महिलाओं के आरक्षण की बात कीजिये और परिसीमन में आप जो महिलाओं  को  मुखैटा बनाकर अपने 2029 का लक्ष्य ढूंढने  की कोशिश कर  रहे हैं,  उसको समाप्त कर दीजिये.  यह जो आपकी टाइमिंग है,  पश्चिम  बंगाल के चुनाव, तमिलनाडु के  चुनाव, यह सब चीजें ठीक नहीं हैं.  मुझे लगता है कि महिलाओं की आड़ में राजनीति  नहीं  चाहिये. एक अभी यह जब  इस पूरे विषय का राजनीतिकरण हो रहा था, तो भाजपा  के  सभी नेताओं ने   सभा आयोजित की.  इस विषय का राजनीतिकरण  किया.  उसी समय पर एक  महिला पीएस की मैं दाद देना  चाहूंगा, महिला एवं बाल  विकास की पीएस   ने  वाट्सएप पर लिख करके  यह  मेसेज कम्युनिकेट किया सारे कलेक्टर्स  को  और सारे अधिकारियों को कि  महिलाओं  को भाजपा  की भीड़ में  भेजने के लिये बाधित मत कीजिये.  इसका मतलब  यह है कि  महिलाएं इकट्ठी नहीं हो रही थीं. और आप कलेक्‍टर के माध्‍यम से और महिला बाल विकास के माध्‍यम से महिलाओं को इकट्ठा कर रहे हैं. मतलब यह कि महिलाएं विरोध नहीं कर रही हैं. आप जबरन उस भीड़ को बुला रहे थे वह रिकार्ड पर है उसको सारी न्‍यूज़ एजेंसीज ने कव्‍हर किया. मैं आपको एक दृश्‍य दिखाना चाहूंगा (फोटो दिखाते हुए) यह मध्‍य प्रदेश की महिलाएं हैं. इसको मुख्‍य मंत्री जी और सभी सदस्‍य देखें कि अनेकों महिलाओं ने केश त्‍याग किया, मुंडन कराया यह शिक्षिकाएं हैं, जो मध्‍यप्रदेश के भविष्‍य का निर्माण कर रही हैं और इनकी पीड़ा इतनी बड़ी थी कि इन्‍होंने अपने केश त्‍याग करके माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी को भेजे और सोचा की वह हमेशा मन की बात करते हैं और घंटों मन की बात करते हैं तो शायद एक बार तो शायद उनके मन में हमारी पीड़ा आयेगी. लेकिन मोदी जी ने कभी इनका जिक्र नहीं किया.

          पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री प्रहलाद सिंह पटेल)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है. मुझे लगता है कि माननीय सदस्य को चित्र दिखाना है तो उनको आसंदी से अनुमति लेना चाहिये. मैं चाहता था कि उनको टोकू ना. अब वह वर्ष 1989 में राजीव गांधी जी को प्रधान मंत्री बता रहे थे, तो उनकी समझ, समझ में आती है. वह कितने विद्वान आदमी हैं. मुझे लगता है आप भावनात्‍वक ना हों, तथ्‍यात्‍मक बाते करें तो अच्‍छा होगा. यदि आपको चित्र दिखाना था तो आप आसंदी से परमीशन ले लेते तो इसके बाद आप दिखा सकते हैं.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय- अध्‍यक्ष जी आपने बोला कि बड़े विद्वान हैं या तो आप अपने शब्‍द वापस लें या फिर उनके शब्‍द वापस करो. (हंसी)

          अध्‍यक्ष महोदय- हेमंत जी यह चित्र वगैरह या बाकी चीजों को कोट करने अपना तरीका है. आप सब समझदार सदस्‍य हैं, इस तरह से नहीं दिखा सकते हैं.

          श्री हेमंत सत्‍यदेव कटारे- अध्‍यक्ष महोदय, एक और प्रदर्शन हुआ. जहां पर महिलाओं ने, यह बिना चित्र दिखाये उसका चित्रण कर देता हूं. जहां पर महिलाओं ने थाली लेकर के भारतीय जनता पार्टी ने ..

          अध्‍यक्ष महोदय- आपका विषय तो पूरा हो ही गया है. आगे कुछ बाकी तो नहीं है.

          श्री हेमंत सत्‍यदेव कटारे- यह दूसरा प्रदर्शन है, इसमें राखी के अवसर पर महिलाओं ने सोचा कि उनको नियुक्ति मिल जायेगी, नियुक्ति पत्र मिल जायेगा जो तीन साल से लंबित था, उन्‍होंने राखी की थाली सजायी, पूजा की थाली सजायी और उसमें रखी और सोचा की बीजेपी के नेता आयेंगे तो उनसे राखी बंधवायेंगे और उनसे बदले में नियुक्ति पत्र भी मिल जायेंगे और कुछ उपहार के रूप में बहनों को अच्‍छा तोहफा मिलेगा, लेकिन बदले में उन बहनों को रात भर थानों में बिठाया गया और लाठी चार्ज करवाया गया और कोई भी भारतीय जनता पार्टी का नेता इनसे मिलने भी नहीं गया. मैं राज्‍य के विषय पर आ जाता हूं, चित्रण से समस्‍या है तो ठीक है. जो चित्र हैं, हैं तो वह सत्‍य. अब आपको सच दिखाने से समस्‍या है, आप नियम में कहते हैं कि सदन के बाहर के सदस्‍यों का नाम नहीं लिया जायेगा. ..

          अध्‍यक्ष महोदय- सत्‍य दिखाने से परहेज नहीं है, नियम और प्रक्रिया से परहेज है. आपको उसका पालन करना चाहिये.

          श्री हेमंत सत्‍यदेव कटारे - महिलाओं की पीड़ा सुनने के लिये संवैधानिक व्‍यवस्‍था है महिला आयोग का गठन करना और यह विषय राज्‍य का है. अभी हम केन्‍द्र की बात करें, यहां से भेजेंगे तो केन्‍द्र आपकी कहां सुन रहा है. आप राज्‍य की बात कीजिये, अगर महिला आयोग का गठन हो जाता, वह कार्यालय पिछले सात वर्ष से वह कार्यालय धूल खा रहा है. कम से कम तीस हजार से ज्‍यादा महिलाओं की शिकायतें और पीड़ा वहां लंबित हैं, इसका दोषी कौन है ? क्‍या यह सरकार इसके लिये माफी मागेंगी कि हमने इस आयोग का गठन नहीं किया, सात साल हो गये हैं, क्‍या भी गलत है, इस रिकार्ड को भी कोई चैलेंज करेगा, तीस हजार से ज्‍यादा शिकायतें हैं. क्‍यों आप एक महिला आयोग का गठन नहीं कर पाये, क्‍यों एक अध्‍यक्ष नहीं बैठा पाये जो उनकी पीड़ा सुनती. इसका रिजल्‍ट क्‍या आया कि महिलाओं की तस्‍करी में मध्‍यप्रदेश नंबर एक पर पहुंच गया है, तस्‍करी सोने की होती थी, ड्रग्‍स की होती थी. यहां पर महिलाओं की तस्‍करी प्रतिदिन हो रही है, बीबीसी की रिपोर्ट है,एन.सी.आर.बी के आंकड़ें हैं वर्ष 2023-24 के कि 40-45 महिलाएं प्रत्‍येक दिन गायब हुई हैं और आजतक वह लापता हैं. महिलाओं के ऊपर अत्‍याचार में हमेशा मध्‍यप्रदेश टॉप पर रहा है. मैं तो अपनी चुनी हुई प्रतिनिधियों की पीड़ा आपको बता देता हूं कि हमारी 6 महिला विधायक हैं, 6 में से बीना की एक सदस्‍या के साथ भाजपा ने क्‍या षड़यंत किया, वह पूरा प्रदेश जानता है. आपको ना ही उनको बीजेपी का रखा और ना इधर का. उनके साथ आपने कितना घिनौना कृत्‍य किया. आपने उनके भोलेपन का लाभ ही तो उठाया. दूसरी हमारी सदस्‍या अनुभा मुंजारे जी हैं. वह एक विधायक होते हुए, अपने हिसाब से अपना पी.ए नहीं रख सकती हैं ? मैं तो माननीय मुख्‍यमंत्री जी से आग्रह करूंगा कि कितना छोटा सा विषय है, वह एक साल से पीडि़त हैं उनका काम प्रभावित हो रहा है. आपको हमारी महिला विधायिका को एक पी.ए देने में क्‍या पीड़ा है. उनके ऊपर वन विभाग के अधिकारियों के द्वारा दबाव देकर के यह आरोप लगवाया गया कि वह दो-तीन लाख रूपये की मांग कर रही थीं. हमारी महिला विधायिका इतनी सशक्‍त हैं कि जब हमारे कार्यकर्ताओं की बात आती है तो वह पांच-दस लाख रूपये वह घर से खर्च कर सकती हैं, अपनी तनख्‍वाह दान कर सकती हैं. वह दो-तीन लाख रूपये के लिये यह काम नहीं करेंगी. बाद में उनको क्‍लीन चिट भी मिली, यह रिपोर्ट भी पब्लिश हुई. इस प्रकार के कृत्‍य अधिकारियों पर दबाव देकर के हो रहे है. हमारी दूसरी विधायक हैं सेना पटेल जी. माना उनके लड़के से गलती हुई, वह बहुत तेज ड्राइव कर रहे थे. लेकिन एक एक्‍सीडेंटल केस को अटेम्‍ट टू मर्डर का केस आप लोगों ने बना दिया. क्‍योंकि वह महिला विधायक हैं और आप उनके परिवार के ऊपर झूठे केस डालकर उनके ऊपर दबाव डालना चाह रहे हैं तो यह महिलाओं का मध्‍यप्रदेश में सशक्तिकरण हो रहा है. मेरे घर की पूरी महिलाओं के ऊपर आपने ईओडब्‍ल्‍यू के केस लगा दिये. 25 साल पुराने मामलों में केस लगा दिये. आप महिला सशक्‍तिकरण की बात कर रहे हैं. आप लोग एक बार अपने गिरेबां में झांककर देखिए. मैं एक घटना का जिक्र करना चाहूंगा. अभी अलीराजपुर में एक घटना हुई. वहां पर इंदर सिंह चौहान नाम के एक व्‍यक्‍ति ने महिला जनपद सीईओ को हाथ लगाकर थप्‍पड़ का इशारा करते हुए धमकाया. उसने कहा कि मैं तुम्‍हारे दांत तोड़ दूंगा, तुमको जमीन में जिंदा गाड़ दूंगा, तुमको जीने नहीं दूंगा, जब तक मेरे हिसाब से काम नहीं करोगी.  जबकि उनकी पत्‍नी अध्‍यक्षा हैं. वह न तो अध्‍यक्ष हैं और न कुछ है. उन्‍होंने वहां जाकर गुंडा-गर्दी की. महिला अधिकारी कह रही है कि मैं असुरक्षित महसूस कर रही हॅूं और मैं क्‍यों इस विषय को उठा रहा हॅूं क्‍योंकि उनके भाई वर्तमान में मंत्री हैं. मैं नाम नहीं लेना चाहता, लेकिन बात गुंडा-गर्दी की है, जिससे वह महिला खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है. जब कर्नल सोफिया कुरैशी का जिक्र हुआ था और विंग कमांडर व्‍योमिका सिंह ने पूरे देश को एड्रेस किया. मैं एक सेकेंड इस बात को कहना चाहूंगा कि जब वे उस यूनिफार्म को पहनकर के पूरे देश को एड्रेस कर रही थीं, जब सेना ने उनको आगे किया कि भारत की महिलाएं कितनी शक्‍तिशाली हैं और जब उन्‍होंने प्रेस कांफ्रेस को एड्रेस किया, तो उनकी यूनिफार्म को देखकर हर भारतवासी के रोंगटे खडे़ हो गए कि इन महिलाओं ने जाकर के आंतकवादियों का क्‍या हश्र किया और उसके बाद हमारे सदन के एक वरिष्‍ठ नेता कहते हैं कि उनकी बहनों से ही उनको मरवाया. उनको आतंकवादियों की बहन बता रहे हैं. वे छतरपुर की बेटी हैं. वह आंतकवादियों की बहनें नहीं हैं, वे हमारी, आपकी, सबकी बहनें हैं. वे हमारे देश का गौरव हैं (मेजों की थपथपाहट) और आज महिलाओं का दिन है. मैं कहता हॅूं कि इसमें कोई बुराई नहीं है, यदि वे माफी मांग लें. ठीक है, उस चीज के लिए वे माफी मांगें, यदि उनको मन से खेद लगता है. क्‍योंकि वे महिलाएं देश की आइकॉन हैं. हमारे भारत देश की ऑइकॉन हैं मैं समझता हॅूं कि ऐसे शब्‍द बोलने से महिलाओं का भी, सेना का भी मनोबल गिरता है. मैं केवल अंतिम बात रखकर अपनी बात समाप्‍त करूंगा. मेरी आखिर में केवल इतनी-सी मांग है कि आज सदन में जो चर्चा है, वह दो चीजों के बीच में है. एक तरफ मोदी हित है और दूसरी तरफ महिला हित है. इन दो चीजों के बीच में आज चुनाव होने वाला है. यह बहुत महत्‍वपूर्ण दिन है और यहां की आवाज महिलाओं तक जायेगी. प्रदेश की महिलाओं तक और देश की महिलाओं तक जायेगी. माननीय मुख्‍यमंत्री जी भी सुन रहे हैं, तो अब आप मोदी हित के साथ जायेंगे या महिला हित के साथ जायेंगे. आप महिलाओं का आशीर्वाद लेंगे, तो लंबी राजनीति चलेगी और मोदी का आशीर्वाद लेंगे, तो 2-4 साल ही चल पाऐंगे. मैं आग्रह करता हॅूं कि महिलाओं के हित के साथ खडे़ हैं, तो आप अभी इसी वर्ष 2026 में इस बिल को पारित कीजिए. आदरणीय कैलाश विजयवर्गीय जी विद्वान सदस्‍य हैं लेकिन उनके मुंह से एक बात कहते-कहते निकल गई. जब अशासकीय संकल्‍प की ग्राह्यता पर चर्चा चल रही थी, तब उन्‍होंने एक बात कही कि हम लोग वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव तक उसके आने पर महिला आरक्षण लागू कर देंगे, तो इसका मतलब स्‍पष्‍ट है कि जब 2028 में मध्‍यप्रदेश में विधानसभा का चुनाव होगा, तो उसमें महिलाओं को न्‍याय और आरक्षण नहीं मिलेगा. उन्‍होंने यह बात कही है और यह दुख की बात है. मैं कहना चाहता हॅूं कि वर्ष 2026 में आरक्षण लागू होना चाहिए और यह तत्‍काल एक तिहाई आरक्षण लागू हो और वह आज से प्रभावशील हो.  मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी से एक आग्रह और करूंगा कि यह तो केन्‍द्र का विषय है. हम इसमें कुछ नहीं कर सकते. वह राज्‍य सभा, लोकसभा से होगा. जो आप कर सकते हैं अगर वाकई आप महिला हितैषी हैं, माननीय मुख्‍यमंत्री जी आपकी सरकार महिला हितैषी है तो 50 प्रतिशत आरक्षण की घोषण आज तत्‍काल आप सारी शासकीय नौकरियों में, शासकीय पदों के अगेंस्‍ट कर दीजिए. मैं, मेरी पूरी कांग्रेस पार्टी आपका समर्थन करेगी. अगर आप महिला हितैषी हैं, तो आप आज ही करिए. (मेजों की थपथपाहट) और आपने एक और संकल्‍प लिया था. यह नया संकल्‍प है. इसका पुराना आपका संकल्‍प था कि लाड़ली बहना योजना में महिलाओं को 3 हजार रूपए देंगे. उस संकल्‍प को तो पूरा कर दीजिए. आज उसकी घोषणा कीजिए कि हां, 3 हजार रूपए कल से खातों में आना चालू हो जाएंगे. जो 6 लाख 28 हजार लाड़ली बहनों को उम्र के कारण अपात्र किया है, तो जो छोटी लाड़ली बहनें हैं, वे तो बड़ी होकर पात्र हुईं होंगी. उनकी उम्र रूक तो नहीं गई होगी.

          अध्‍यक्ष महोदय -- कृपया, समाप्‍त करें.

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं केवल इतनी-सी बात कहूंगा कि महिला आयोग का तत्‍काल रूप से गठन होना चाहिए और जो वन थर्ड आरक्षण है, उसे अभी लागू करना चाहिए. परिसीमन की आड़ में वर्ष 2029 के चुनाव की आड़ में आप महिलाओं को मुखौटा मत बनाइए. आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय -- धन्‍यवाद. डॉ.सीतासरन शर्मा जी.

          डॉ.सीतासरन शर्मा (होशंगाबाद) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ऐसे तो सारी बातें आ गईं. पर 2-3 बातें जो माननीय सदस्‍यों से चर्चा करने की रह गई हैं. ये बड़ी-बड़ी बात कर रहे थे. मैं माननीय श्रीमती अर्चना चिटनीस जी की बात से शुरूआत करूंगा कि कांग्रेस की महासचिव, लोकसभा की सदस्‍य श्रीमती प्रियंका गांधी जी ने इसका स्वागत किया. प्रेस में हेडिंग आयी जिस दिन नारी का आरक्षण विधेयक फेल हुआ उसको डेमोक्रेसी की जीत बता रहे हैं, यह इनकी मानसिकता है. इनकी मानसिकता समझ आती है. घनघोरिया जी बड़ी बड़ी बातें कर रहे थे, हमने यह किया, वह किया. एक बात और जो उनके भाषण से आयी है. उन्होंने कहा अपने भाषण में इसी बिल में सबसे पहले 1928 में कांग्रेस पार्टी के अधिवेशन में पंडित मोतीलाल नेहरू जी ने प्रस्ताव रखा था. 1931 में मुझे फेक्ट्स भी नहीं मालूम हैं. मैं प्रियंका गांधी का का प्रिन्ट लाया हूं जिसमें उन्होंने कोड किया है. मुझे शर्म आती है इनको नहीं आ रही है. 1931 से कितने साल हो गये 82 साल इनके तीन तीन प्रधानमंत्री जी निकल गये. यह मोतीलाल जी का प्रस्ताव लागू नहीं कर पाये. यह बातें बड़ी बड़ी करते हैं. आपके पंडित जवाहरलाल नेहरू, श्रीमती इंदिरा गांधी, श्रीमान राजीव गांधी जी, पी.वी.नरसिम्हा राव जी क्या कर रहे थे. आप अपने परदादा के काम को पूरा नहीं कर पाये ज्ञान हमें दे रहे हैं. अब थोड़ी बात इम्यूलेशन की कैसे बढ़ा आगे 1935 में एक लिमिटेड आरक्षण दिया गया लगभग 41 सीटें प्रोविजनल कमेटी में और सेन्ट्रल कमेटी में मिलाकर के पर वह लिमिटेड वोटर्स भी थे. कुल साढ़े तीन करोड़ महिलाएं थीं और 60 लाख वोटर्स थे लिमिटेड था. बाबा साहब अंबेडकर जी ने भारत के संविधान में प्रावधान किया कि सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार मिलेगा. मिल गया उन्होंने संविधान में एक बात और लिखी थी कि यह बात भाई भूल गये. उन्होंने संविधान में डायरेक्टेड ऑफ प्रिंसिपल भी बनाये थे. आर्टिकल 39 पढ़ लिया करो बाबा साहब का नाम तो खूब लेते हैं. आर्टिकल 39 में लिखा है कि महिलाओं और पुरूषों को समान अधिकार दिये जायेंगे इन्होंने 60 साल नहीं दिये. आर्टिकल 44 माननीय घनघोरिया जी बड़ी बड़ी बात कर रहे थे क्यों भाई तुमने हिन्दू कोड बिल की बात तो की है. कामन सिविल कोर्ट की क्यों नहीं कर रहे हैं, तीन तलाक की बात क्यों नहीं कर रहे हैं ? यही कारण है कि यह लोग महिला आरक्षण का विरोध कर रहे हैं और कोई कारण नहीं है. तुष्टिकरण की नीति इसका कारण है. कांग्रेस पार्टी ने महिला आरक्षण विधेयक कब लायी 1996 में देवगोड़ा सरकार लायी. आपने सरकार गिरा दी इसलिये लेप्स हो गया. 1998 में अटल बिहारी बाजपेयी जी लाये, वह कौन सी पार्टी के थे भाई. भाई कह रहे थे कि इन्होंने विरोध किया, उन्होंने विरोध किया. 2010 में मनमोहन सिंह जी लाये. जरा यह कह रहे थे कि भाजपा वालों ने विरोध किया. यह प्रवक्ता हैं एक कॉलेज में विधेयक 2010 का है. विधेयक है. विधेयक पर चर्चा तब हो पायी थी जब उपद्रवी सांसदों को सदन से बाहर कर दिया गया. समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के 7 सांसदों को उनकी उदंडता के लिये बजट सत्र के बचे कार्यकाल से उनको निलंबित कर दिया गया. विधेयक को सम्पर्क के बाकी घटक भारतीय जनता पार्टी अनाद्रमिक तेलगूदेशम पार्टी वाम दलों का समर्थन डला है. हमने समर्थन किया था राज्यसभा में फिर आपने लोकसभा में पेश क्यों नहीं किया आपने. चार साल तक रखे बैठे रहे. हमसे पूछते हैं कि 2023 का अभी क्यों लाये. चार साल रखे रहे इन्होंने कुछ नहीं किया. यह महिला विरोधी हैं उसका सीधा सीधा कारण तुष्टिकरण है और कोई कारण नहीं है.

          श्री सोहनलाल बाल्मीकअध्यक्ष महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि 2023 में यह बिल आया लोकसभा और राज्यसभा में उसको पास कर दिया उसको लागू करने में क्या दिक्कत है. आप 1958-55 एवं 1956 का जिक्र क्यों कर रहे हैं.                                                            श्री रामेश्‍वर शर्मा अब तो कांग्रेस की पूरी तारीखें सुन ली, दिन और तारीख से बात हो रही है.

डॉ. सीतासरन शर्मा अध्‍यक्ष महोदय, ये 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण नहीं देना चाहते हैं, ये केवल दो महिलाओं को आरक्षण देना चाहते हैं.

श्री विजय रेवनाथ चौरे तो क्‍या वर्ष 2023 में जो बिल पास हुआ क्‍या वह पुरुष आरक्षण बिल था, या महिला आरक्षण बिल था, यह बताओ.

डॉ. सीतासरन शर्मा अध्‍यक्ष महोदय,लोकसभा नहीं तो राज्‍य सभा, उत्‍तर नहीं तो दक्षिण, उत्‍तर वाले हरा दें दक्षिण से जीत जाए, वायनाड क्षेत्र से, भाई क्‍यों परेशान हो रहे हो, आपने तो दो को आरक्षण दे दिया, बाकी बहनों का भी ख्‍याल कीजिए. अध्‍यक्ष जी वर्ष 2023 की बात की और क्‍या संकल्‍प लाए, अशासकीय कि अभी से लागू कर दो, सभी ने भाषण में यही बोला संकल्‍प की भाषा ठीक से सुनी नहीं थी, पर सभी ने यही बोला कि अभी से लागू कर दो कैसे लागू कर दो, ये एक्‍ट तो पढ़ो इसमें लिखा है the provisions of the Constitution relating to the resevation  of seats for women, shall come into effect after an exercise of delimitation is undertaken for this perpose after the relevant figures for the first census taken a after commencement of the Constitutions (One Hundred and Twenty eight Amendment) Act, 2023 इसमें लिखा है तो आप अभी से कैसे पास कर दोगे, ये Constitution में लिखा है, पास हो गया भाई ये बिल नोटिफिकेशन हो गया, आज कैसे कर दोगे इसको सुनिए तो.

श्री बाला बच्‍चन अध्‍यक्ष महोदय, दो साल पांच महीने हो गए हैं, आप अधिसूचना जारी नहीं कर पाए.

डॉ. सीतासरन शर्मा अध्‍यक्ष महोदय, यह बिल सर्वसम्‍मति से पास हुआ इनके पार्टी के नेताओं ने भी किया, अब यहां दूसरी बात कह रहे, अभी शुरू करो, बिना डिलिमिटेशन के करो, वहां डिलिमिटेशन का पास किया. भैया बात कर लेते प्रतिपक्ष के नेता और लोकसभा से कि दादा तुमने क्‍या किया और आप क्‍या कह रहे हैं बात चीत तो कर लो दिल्‍ली वालों से, उन्‍होंने इसको पास कर दिया, अध्‍यक्ष महोदय ये पढ़ लिखकर नहीं आते, न कानून को समझते हैं, बहस करते हैं.

श्री बाला बच्‍चन अध्‍यक्ष जी, मेरा पाइंट आफ आर्डर यह है कि माननीय डा. साहब आपने इंगलिश में उसको पढ़ा, आप उसको हिन्‍दी में ट्रांसलेशन करके बताओ. बहस में यही हुआ है कि नई जनगणना के बाद परिसीमन लागू होगा, तो ढाई साल तक आप परिसीमन नहीं करा पाए. मुख्‍यमंत्री जी आज परिसीमन का लाए हो, आपके रिजिजू मना कर चुके हैं कि मैं बिल वापस लेता हूं, उन्‍होंने वापस लिया है.

          डॉ. सीतासरन शर्मा अध्‍यक्ष महोदय, आखिरी बात, ये बात इसलिए किया क्‍योंकि उसमें टाइम लग रहा था. इसलिए सोच गया कि जो लास्‍ट सेंसस है उसके आधार पर डिलिमिटेशन किया जाए. पर आज आपके नेता ने भाषण में क्‍या कहा, सरकार पुराने आंकड़ों पर आगे क्‍यों बढ़ना चाहती है, इतनी जल्‍दबाजी क्‍यों है, आप जल्‍दबाजी कह रहे, श्रीमती प्रियंका गांधी को जल्‍दबाजी क्‍यों है. आप वहां से पूछताछ करके क्‍यों नहीं आते कि तुमने क्‍या पास किया है. अध्‍यक्ष जी, इनको कुछ मालूम नहीं है ये महिलाओं के, आरक्षण के विरोधी है, महिलाओं के विरोधी है अध्‍यक्ष महोदय कभी पास नहीं होने देंगे, जब तक कांग्रेस लोकसभा में शून्‍य नहीं हो जाएगी, तब तक ये बिल पास नहीं हो पाएगा, इसलिए दृढ इच्‍छाशक्ति से प्रधानमंत्री से हमारा सभी का अनुरोध है कि वह इस बिल को पास करें, मुख्‍यमंत्री जी द्वारा प्रस्‍तुत संकल्‍प के समर्थन में मैं अपनी बात समाप्‍त करता हूं.

          अध्‍यक्ष महोदय - बहुत बहुत धन्‍यवाद.

          डॉ. मोहन यादव(मुख्‍यमंत्री) अध्‍यक्ष जी, माननीय सदस्‍य सीतासरन जी ने संक्षिप्‍त में, लेकिन To the पाइंट बात की हम सभी के लिए ये आदर्श है, हम सब एक तरह से ये मानकर चले कि सदन की सार्थक चर्चा में अपने पक्ष की तथ्‍यात्‍मक प्रस्‍तुतिकरण के लिए वाकई में ये प्रेरणास्‍पद है, ये बाकी को भी सीखना चाहिए.

          डॉ. सीतासरन शर्मा धन्‍यवाद मुख्‍यमंत्री जी.

अध्‍यक्ष महोदय -- श्री बाला बच्‍चन जी टू द प्‍वाइंट की तैयारी कर रहे हैं.

श्री बाला बच्‍चन -- मैं सारी चीजों का खुलासा करूंगा, बस आप पर्याप्‍त समय दे दें.

अध्‍यक्ष महोदय -- समय मेरे पास जितना है, उतना ही दे पाऊंगा(हंसी)...

श्री फूल सिंह बरैया(भाण्‍डेर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने जो संकल्‍प पेश किया है, वह निश्चित रूप से महिलाओं के हितों का है, लेकिन इसमें यह स्‍पष्‍ट नजर नहीं आ रहा है कि सरकार इस बिल को क्‍यों लाई है या इस संकल्‍प को क्‍यों लाई है? संकल्‍प को पास करना चाहते हैं कि नहीं चाहते हैं, या यह सिर्फ फार्मेलिटी है. आपका बहुमत है, आप पास कर लेंगे, लेकिन इसमें एक लाईन जोड़ दी है, परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर उसके बाद हम जो  है, इस बिल को लायेंगे या बाद में हम आरक्षण की व्‍यवस्‍था करेंगे, तो इसकी जरूरत क्‍या थी, अगर आपका मन ठीक है, हृदय साफ है, तो आप आज ही स्‍पष्‍ट कर देते कि हम तो आज हमारी मंशा है, हम यह काम आज करेंगे (मेजों की थपथपाहट) फिर इसकी आवश्‍यकता आपको क्‍यों पड़ गई? इसका अर्थ यह है कि आपकी मंशा महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय, अब इसमें एक बात ओर आती है कि आखिर महिलाएं इतनी पिछड़ क्‍यों गई है?महिला और पुरूष कहा जाता है कि एक गाड़ी के दो पहिए हैं, एक पहिया इतना कमजोर क्‍यों हो गया है? इसके ऊपर भी तो चर्चा होना चाहिए अगर इसके ऊपर हम इतनी चर्चा आज नहीं करेंगे तो मैं समझता हूं कि हम महिलाओं को फिर पुरूष के बराबर नहीं ला सकते हैं, महिला क्‍यों पिछड़ी है? इसका दोषी कौन है? क्‍या दोषी स्‍पष्‍ट रूप से निकलकर आ जाये तो क्‍या वह दोषी माफी मांगेगा और बिना माफी मांगे, यह घटना में कोई अपने देश की नहीं कह रहा हूं, कई देश के लोगों ने अपनों पर अत्‍याचार किये हैं और माफी मांगकर उनको बराबरी पर लायें हैं, यह रिकार्ड है, तो क्‍या हम यह नहीं कर सकते हैं. हम अब कह रहे हैं कि उन्‍होंने किया है, इन्‍होंने किया है, कांग्रेस ने किया है, फलाने ने किया है, कांग्रेस तो अभी 150 साल पुरानी है, [XX] (व्‍यवधान)....

जल संसाधन मंत्री(श्री तुलसीराम सिलावट)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह विलोपित किया जाये. (व्‍यवधान)....

राज्‍यमंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण( श्रीमती कृष्‍णा गौर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यही इनकी मानसिकता है. (व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय -- यह रिकार्ड में नहीं आयेगा. (व्‍यवधान)....

श्री फूल सिंह बरैया -- ये ऐसा व्‍यवहार करते हैं. (व्‍यवधान)....

श्रीमती कृष्‍णा गौर -- इनको माफी मांगनी चाहिए. (व्‍यवधान)....

लोकनिर्माण मंत्री(श्री राकेश सिंह)  -- यह भाषा ही गलत है, इस तरह की भाषा सदन में नहीं बोल सकते हैं. (व्‍यवधान)....

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- यह कांग्रेस की सोच है. (व्‍यवधान)....

श्री तुलसीराम सिलावट -- यह कांग्रेस का चरित्र है. (व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय -- बरैया जी आप संकल्‍प पर बोलें. (अनेक माननीय सदस्‍यों के आसन पर खड़े होकर कहने पर) कृपया सभी लोग बैठ जायें. (व्‍यवधान)....

श्री गौरीशंकर खटीक -- इन्‍हें माफी मांगनी चाहिए. (व्‍यवधान)....

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह शब्‍द विलोपित करवायें. (व्‍यवधान)....

अध्‍यक्ष महोदय -- मैंने वह विलोपित करवा दिया है. (व्‍यवधान)....

श्री राकेश सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, सदन में सार्थक चर्चा चल रही है, पक्ष विपक्ष दोनों ही नारी के सम्‍मान में बात कर रहे हैं और यह [XX] बनाने की बात कर  रहे हैं, यह अनुमति इनको सदन के भीतर कौन देगा. (व्‍यवधान)....

श्री रामेश्‍वर शर्मा -- हम यहां पर नारी का सम्‍मान करने के लिये बैठे हैं या उनका अपमान करने के लिये बैठे हैं. (व्‍यवधान)....

श्री राकेश सिंह -- यह सभ्‍य समाज में स्‍वीकार नहीं है, यही मानसिकता है जिसके कारण से स्‍त्रियों की यह हालत होती है कि वह बराबरी पर नहीं आ पाती है, वह यही मानसिकता है. (व्‍यवधान)....

            अध्‍यक्ष महोदय -- (अनेक माननीय सदस्‍यों के आसन पर खड़े होकर कहने पर) कृपया आप सभी लोग बैठ जायें, यह विलोपित करवा दिया गया है. बरैया जी आप विषय पर ही रहो, पुरातन काल पर मत जाओ. (व्‍यवधान)....                                                                  

            श्री फूलसिंह बरैया-- मैं विषय पर ही हूं. अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह कह रहा हूं कि इनकी यही मानसिकता के चलते, इनकी यह मानसिकता है कि महिला आगे नहीं बढ़नी चाहिये. इसमें लिखा है, आगे भी बता रहा हूं. कौन है वह लोग जिन्‍होंने देवदासी बनाया स्‍वीकार करिये और गुण्‍डागर्दी से अगर सदन को चलाना चाहते हो तो डेमोक्रेसी नहीं चलेगी. मैं आपकी मानसिकता बता रहा हूं और मेरे ऊपर थोप रहे हो. मैं इनकी बात कह रहा हूं कि यह आपने लिखा है और मुझसे कह रहे हैं कि मैं ऐसा बोल रहा हूं. मैं आपकी कह रहा हूं साहब....(व्‍यवधान)....

          श्री इंदर सिंह परमार-- यह कहां लिखा है ....(व्‍यवधान).... वेदों में भी महिलाओं को सम्‍मान की दृष्टि से देखा है. ....(व्‍यवधान)....

          मुख्‍यमंत्री (डॉ. मोहन यादव)--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत अच्‍छा विषय चल रहा है. पक्ष से, विपक्ष से और मैं मानकर चलता हूं कि आपके नेतृत्‍व में खासकर के सदन के दोनों पक्ष से सार्थक चर्चा की दिशा में आखिरी दौर में चलते-चलते पता नहीं बरैया जी की आत्‍मा में कौन सा, ये धरती की बात करते-करते चांद की बात कर रहे हैं, भगवान जाने, अभी देवदासी की बात लाये, कभी 2000 साल पुरानी बात लाये, मूल कांग्रेस की हो, बीजेपी की हो, अन्‍य किसी राजनीतिक दल की बात हो, यह जो अंदर का भाव है यह पहले स्‍पष्‍ट कर दें कि आप किधर की बात कर रहे हैं. यह मूलत: देश इसलिये जाना जाता है कि बहनों के लिये भी संघर्ष राजाराम मोहन राय जी ने सती प्रथा के खिलाफ किया है, ज्‍योतिबा फुले ने महिला समानता के लिये काम किया है. हमारे लिये परंपरा है विवेकानंद से लगाकर के हमारे वर्तमान के समय तक नरेन्‍द्र मोदी जी ने लाकर आरक्षण की बात करके यह विषय सार्थक करने का प्रयास किया है. हम बजाय इसको छोड़कर और कहीं जायेंगे तो दिशा भटकेगी. मैं इतना ही निवेदन करना चाहूंगा कि कृपया करके विषय पर रहें और समय का ध्‍यान रखें.

          अध्‍यक्ष महोदय--  फूल सिंह जी कृपया विषय पर रहें.

          श्री फूलसिंह बरैया--  अध्‍यक्ष महोदय, किसी भी महिला और पुरूष का विकास उसकी शिक्षा पर निर्भर है. शिक्षा का विरोधी कौन है. ''स्‍त्री शूद्रो विद्या न धीयताम, न स्‍त्री शूद्रो वेदम धीयताम''. स्‍त्री और शूद्र को विद्या नहीं देना चाहिये. मेरे पुरखों ने कहा है.  ....(व्‍यवधान)....

          अध्‍यक्ष महोदय--  फूल सिंह जी आप सार्थक बात करोगे. ....(व्‍यवधान).... आपका टाइम खत्‍म हो गया. ....(व्‍यवधान)....

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-- अध्‍यक्ष महोदय आप उनको बिठा दीजिये. ....(व्‍यवधान)....आखिर कोई मर्यादा होती है. ....(व्‍यवधान)....

          श्री फूलसिंह बरैया-- अध्‍यक्ष महोदय.. ....(व्‍यवधान)....

          अध्‍यक्ष महोदय--  फूलसिंह जी, प्‍लीज, प्‍लीज बैठ जाओ. ....(व्‍यवधान).... अब मैं कार्यवाही आगे बढ़ा रहा हूं, आपका टाइम पूरा हो गया. ....(व्‍यवधान)....

          श्री कैलाश विजयवर्गीय--  अध्‍यक्ष महोदय, सदन बहुत अच्‍छा चल रहा है आपके एक शब्‍द से ही हम सब कृतज्ञ हो गये. ....(व्‍यवधान)....

          अध्‍यक्ष महोदय--  ऊषा ठाकुर जी अपने विचार व्‍यक्‍त करें. फूल सिंह जी के 10 मिनट पूरे हो गये. ....(व्‍यवधान)....

          सुश्री ऊषा बाबूसिंह ठाकुर (डॉ. अम्‍बेडकर नगर, महू)--  माननीय अध्‍यक्ष जी, प्रदेश के कर्मठ कर्मियों के मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज जिस शासकीय संकल्‍प को लाये ....(व्‍यवधान)....

          श्री फूलसिंह बरैया--  अध्‍यक्ष महोदय...

          अध्‍यक्ष महोदय-- प्‍लीज, प्‍लीज आप बैठ जायें. आप बोले नहीं तो मैं इसके लिये क्‍या करूं. ....(व्‍यवधान).... ऊषा ठाकुर जी जो बोल रही है सिर्फ वही रिकार्ड में आयेगा. ....(व्‍यवधान)....

          श्री फूलसिंह बरैया-- (XXX)

            सुश्री ऊषा बाबूसिंह ठाकुर--  अध्‍यक्ष महोदय, प्रदेश की पूरी आबादी देश की आधी आबादी आजीवन आपकी ऋणी रहेगी. माननीय मुख्‍यमंत्री जी आपने आज यह संकल्‍प लाकर हम सब बहनों को अपने विचार व्‍यक्‍त करने का जो पावन मौका दिया, हम सदैव आपके ऋणी रहेंगे. माननीय अध्यक्ष जी, मैं इनको स्वर्णिम इतिहास याद दिला देना चाहती हूं. 

" मैं जीजा की अमर सहेली, पन्ना की प्रतिछाया हूँ
हाड़ी की हूँ अमिट निशानी मैं जसवंत की भार्या हूँ मैं हल्दी घाटी की रज का सिंदूर लगाया करती हूं. हरिषोणित की लाली से मैं पांव रचाया करती हूं. पद्मावती हूं रतन सिंह की.चूड़ावत की सेनानी, मैं जौहर की भीषण ज्वाला,रणचंडी हूं पाषाणी,कालिदास का मधुर काव्य हूं.तुलसी की मैं रामायण,अमृतवाणी हूं गीता की, घर-घर होता पारायण.मैं भूषण की शिवा बावनी,आला की हुंकार हूं. सूरदास का मधुर गीत मैं,मीरा का इकतारा हूं. बरदाई की अमर कथा रण गर्जन गंभीर हूं. मेरा परिचय इतना कि मैं भारत की तस्वीर हूं."
          माननीय अध्यक्ष जी, देश की आधी आबादी को 13 परसेंट से बढ़कर 33 परसेंट आरक्षण मिल जाये यह मंशा राष्ट्र नायक,युगदृष्टा,युगपुरुष नरेन्द्र भाई मोदी जी की थी और इसी को लेकर वह पावन काम में जुटे हुए थे.आज तक कोई ऐसा विधेयक,कोई ऐसा विषय माननीय प्रधानमंत्री जी सदन में नहीं लाये कि जो किसी कीमत पर अस्वीकार हो जाये. उनका निर्णय अंगद के पैर जैसा अडिग निर्णय है. वह इसको पारित कराकर ही रहेंगे और देश में एक तिहाई बहुमत बहनों को मिलने ही वाला है. इन्हें जितना विरोध करना हो यह कर लें. इनकी(XX),इनकी (XX) मानसिकता को पूरे देश ने देखा है कि यह अपने निजी स्वार्थों के लिये सैकड़ों संविधान संशोधन करते हैं. यह बुजुर्ग शाहबानो को गुजारा भत्ता नहीं मिलने देते.

          अध्यक्ष महोदय -यह शब्द निकाल दें.

          सुश्री ऊषा बाबूसिंह ठाकुर - यह सच्चर कमेटी लाते हैं.यह देश की एकता,अखण्डता को तार-तार करने के लिये न जाने कितने विधेयक लाते हैं.एक शब्द गलत नहीं है. आपको जितने तथ्य प्रमाण चाहिये मिल जायेंगे. माननीय अध्यक्ष जी,पूछिये इनसे 54 साल सत्ता थी. क्यों नहीं लाये आप महिला आरक्षण विधेयक,कितने आपने संविधान संशोधन किये निजी स्वार्थों के लिये किये. आप परिवारवाद के प्रवर्तक हो. आप निजी स्वार्थों के लिये राजनीति करने वालों के समर्थक हो. राष्ट्रहित से आपका कोई लेनादेना नहीं. 54 साल के इतिहास में एक तो राष्ट्रहित का निर्णय बताते. राष्ट्रनायक मोदी आये जब से धारा 370,भारत का स्वर्ग मुक्त हुआ आतंकवादियों के आतंक से,35-A समाप्त हुई.मंदिर बनाकर दिखाया. तीन तलाक समाप्त करके मुस्लिम बहनों को भी सम्मान से जीने का अधिकार हमने दिया. आप अपने गलेबान में झांककर देखिये और शांत होकर बैठिये. अभी भी प्रायश्चित्य करने का मौका है. देर आये दुरुस्त आये.आज भी प्रायश्चित हो तो करो इस संकल्प का समर्थन और खड़े हो जाओ मातृशक्ति के सम्मान में वरना भागते तुम्हें देश में जगह नहीं मिलने वाली. इस देश की मातृशक्ति तुमको माफ नहीं करने वाली. आप कोई एक तो काम बताईये.मोदी जी का जो सूक्ष्म चिंतन है उनकी जो प्रक्रिया है. उनके जो करने का तरीका है. वह अद्भुत है,अनूठा है. उन्‍होंने देखा कि जब सेना में साढ़े 10 हजार महिला अधिकारी हैं, जब बहनों को मौका मिला, उन्‍होंने पूरी क्षमता के साथ अपने को स्‍थापित किया. हम पायलेटों की बात करें तो पूरी दुनिया में 5 प्रतिशत महिला पायलेट हैं. आज हमारे पास 15 प्रतिशत महिला पायलेट हैं. मोनिका शर्मा 16 हजार किलोमीटर की यात्रा करके एक कीर्तिमान बनाती है. हमारी महाश्‍वेता 800 नागरिकों को आस्‍ट्रिया, हंगरी की सीमा से सुरक्षित हिंदुस्‍तान में ले आती है. हमारी बहन शोफिया कुरैशी, हमारी व्‍योमिका सिंह, जब ऑपरेशन सिंदूर का लक्ष्‍य माननीय प्रधानमंत्री जी उनको देते हैं तो कितने सलीके से उन्‍होंने लक्ष्‍य को साधा. पूरी दुनिया ने देखा और उन बहनों ने अपना कीर्तिमान स्‍थापित किया. जीवन का कोई भी क्षेत्र हो, बहनों ने अपनी अद्भुत क्षमता दिखाई है, इसीलिए तो जगतपिता ने अपनी व्‍यवस्‍था में रक्षा, वित्‍त और शिक्षा, सब मातृशक्‍ति को समर्पित किया. जब जगतपिता ने दुनिया बनाई, हर घर में अपने प्रतिनिधि के रूप में मां बनाई. हम सब साक्षी हैं, जितने सदन में बैठे हैं, हमारी माताओं ने सीमित संसाधनों में परिवार का प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति अपने सर्वोच्‍च लक्ष्‍य को प्राप्‍त करे, इस बात के लिए अपना सर्वस्‍व लुटाया. ऐसी मातृशक्‍ति को निर्णय में यदि भागीदारी मिले तो किसी को क्‍या कष्‍ट होना चाहिए. माननीय प्रधानमंत्री जी बहनों की संवेदनशीलता, उनके त्‍याग, तपस्‍या, सेवा को जानते हैं, इसीलिए वे बहनों को 33 प्रतिशत का आरक्षण देकर वर्ष 2047 के स्‍वर्णिम भारत निर्माण की नई इबारत लिखना चाहते हैं. पर कांग्रेस या इनके सहयोगी दल, इनकी तो वही तालीबानी मानसिकता, यह मातृशक्‍ति का सम्‍मान इस जन्‍म में नहीं कर सकते क्‍योंकि यह देश ही माता की संज्ञा के रूप में पूजा जाने वाला है, मातृशक्‍ति का सम्‍मान इनके भाग्‍य में नहीं है. ये अभागे हैं. यदि आज भी इन्‍हें पुण्‍य अर्जित करना हो तो आओ हमारे संकल्‍प के साथ और दिखाओ अपना परिचय कि आप मातृ शक्‍ति का इतना सम्‍मान करते हैं. ...(व्‍यवधान)...

          श्री हेमन्‍त सत्‍यदेव कटारे -- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं यह कहना चाह रहा था, मैं वैसे टोकना नहीं चाह रहा था, दीदी बहुत अच्‍छा बोल रही हैं, लेकिन जब विजय शाह वक्‍तव्‍य दे रहे थे तो दीदी हंस-हंस के ताली भी बजा रही थी, जब आतंकवादियों की बहन कहा जा रहा था. दीदी ही थी वहां पर, पीछे तालियां बजा रही थीं. ...(व्‍यवधान)...

          सुश्री उषा बाबूसिंह ठाकुर -- अध्‍यक्ष जी, बिल्‍कुल गलत है. निरर्थक और निराधार बात मत कीजिए. ...(व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- मैंने नोटिस किया, पहले भी एक शब्‍द आया, मैंने वह भी हटवा दिया. आपत्‍तिजनक कोई भी शब्‍द आता है, मैं सुनता हूँ तो हटवा देता हूँ.  ...(व्‍यवधान)...

          सुश्री उषा बाबूसिंह ठाकुर -- माननीय अध्‍यक्ष जी, महिलाओं की क्षमता, दक्षता की जितनी बात करें, उतनी कम है. हमारी शारदुला तिखाड़ीकर अफ्रीका के जंगल में जाकर एड्स की दवाई ढूंढ लाती है. हमारी तनुश्री पारीख सीमा सुरक्षा पर अपनी ड्यूटी देती है. हमारी सुधा मूर्ति टाटा की पहली महिला इंजीनियर बनकर आज इन्‍फोसिस की चेयरपर्सन है. शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य और पर्यावरण के लिए बेहतर काम कर रही है. इन सबका मूल्‍यांकन माननीय प्रधानमंत्री जी ने किया और वे जान गए कि यदि मैंने देश की आधी आबादी को अपने साथ राष्‍ट्र निर्माण की भूमिका में खड़ा कर लिया तो वर्ष 2047 का स्‍वर्णिम भारत बनते एक क्षण की भी देर नहीं लगने वाली है.

          माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं कहना चाहती हूँ कि नारी ही है वसुंधरा, जिससे है जीवन हरा-भरा, नारी के हैं रूप अनेक, शीतल-शीतल धूप अनेक, जिसके सत के आगे राम झुके और ममत्‍व के आगे श्‍याम झुके, उस नारी की क्‍या परिभाषा, जिसके आगे स्‍वयं भगवान झुके. यह दुनिया के सबसे बड़े लिखित संविधान वाला देश है जो नागरिकों के मौलिक अधिकारों और कर्तव्‍यों की चिंता करता है. सरकार की सरंचना इसी के आदेशों पर चलती है. मातृशक्‍ति को 33 प्रतिशत आरक्षण बिना शर्त, बिना किंतु परंतु आज संकल्‍प के साथ खड़े हो जाओ, तुम पुण्‍य के भागी बनोगे और देश की आधी आबादी का श्राप लेने से बच जाओगे. भारत मां की जय.

          अध्‍यक्ष महोदय -- बहुत धन्‍यवाद. श्री सचिन यादव. सचिन भाई, समय का ध्‍यान रखना, प्‍लीज.

          श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव (कसरावद) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बिल्‍कुल. आज नारी शक्‍ति वंदन अधिनियम और महिला आरक्षण जैसे गंभीर विषय पर यह विशेष सत्र आयोजित किया गया है. मैं इस पहल का स्‍वागत करता हूँ, लेकिन साथ ही साथ सरकार की जो नीयत है और मंशा है, उसमें काफी फर्क मुझे दिखाई देता है. काफी अंतर मुझे दिखाई देता है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नारी शक्‍ति वंदन अधिनियम वर्ष 2023 में हमारे देश की जो लोकसभा है. हमारे देश की लोक सभा में सर्वसम्‍मति से उसको पारित करने का काम आदरणीय अध्‍यक्ष जी किया गया था और उस बिल को पारित करने में कांग्रेस पार्टी ने अपनी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाने का काम किया था और उसी दिन कांग्रेस के सभी सांसदों ने देश की सरकार से आग्रह किया था कि इसको तत्‍काल प्रभाव से लागू करने का काम किया जाये. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे देश की सरकार और भारतीय जनता पार्टी की नीयत में और हकीकत में हमारी मातृशक्ति को यह 33 प्रतिशत का लाभ देना चाहती, तो जो वर्ष 2024 के लोक सभा चुनाव हुए, उस वर्ष 2024 की लोक सभा की जो वर्तमान परिस्थिति थी, उस परिस्थिति में इस आरक्षण को लागू करने का काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार कर सकती थी. लेकिन यहीं पर सवाल खड़ा होता है कि इनकी जो सोच है, इनकी जो मंशा है, इनकी जो भाषा है, इनकी जो नीयत है, इनकी जो कार्यप्रणाली है, उसमें जमीन-आसमान का फर्क है. इनके कहने और करने में अन्‍तर हमेशा हमें दिखाई दिया है. लेकिन आपने जो पूर्व में गलती की, उस गलती को सुधारने का एक और अवसर आपने जो पाप किया था, उसका प्रायश्चित करने का एक और अवसर आपके पास में यहां पर आया है. आप आज इस सदन के माध्‍यम से यह प्रस्‍ताव यहां से भेजिये कि इस महिला आरक्षण को तत्‍काल प्रभाव से जो वर्तमान परिस्थितियां हैं, इन वर्तमान परिस्थितियों में लोक सभा और विधान सभाओं में भी लागू करने का काम किया जाये.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं बहुत देर से, हमारे जो सत्‍ता पक्ष के साथी हैं, मैं इनकी बातें सुन रहा था, उनके वक्‍तव्‍य और भाषण सुन रहा था. मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था कि इससे पूर्व में नारी सशक्तिकरण के लिये, महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए, महिलाओं को प्रतिनिधित्‍व देने के लिये इस देश में जो पूर्व की सरकारें थीं, उन्‍होंने कोई काम नहीं किया. यह पहली बार जो अनूठी पहल है, सत्‍ता पक्ष के साथियों के साथ, चाहे प्रदेश की सरकार हो, चाहे केन्‍द्र की सरकार हो, उनके द्वारा किया जा रहा है, यह तथ्‍यों से परे है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप इस देश का इतिहास उठाकर देख लीजिये और इस देश के इतिहास में जब-जब कांग्रेस पार्टी को सरकार में आने का अवसर मिला है, कांग्रेस पार्टी ने सदैव हमारी माताओं-बहनों को बराबर का दर्जा देने का काम किया है, हमारी माताओं-बहनों को आगे बढ़ाने का काम किया है, उनको प्रतिनिधित्‍व देने का काम किया है. हम वर्ष 1928 की बात करें, जब मोतीलाल नेहरू जी ने एक रिपार्ट तैयार की थी और वर्ष 1931 के करांची के अधिवेशन में महिलाओं के समान अधिकार की नींव रखने का काम किया था. यही नहीं, जब हमें आजादी मिली तो हम देश में एवं पूरे विश्‍व के उन गिने-चुने देशों में थे, जहां पर महिलाओं को पहले दिन से ही अपने मत का अधिकार देने का अधिकार था और सरकार में उनकी हिस्‍सेदारी और भागीदारी देने का अधिकार था, यहां तक की जो बड़ी-बड़ी विश्‍वशक्ति हैं, जहां तक मैं अमेरिका की बात करूँ, तो अमेरिका में भी महिलाओं को यह अधिकार आजादी के बहुत समय बाद जाकर मिला. यही नहीं, हमने हमारी जो सोच थी, हमारा जो प्रयास था कि हम लोग नीचे से ऊपर तक जो हमारी महिलाएं हैं, जो माताएं हैं, बहनें हैं, उनको सशक्‍त बनाने का काम किया और इसी दिशा में हमारी कांग्रेस की सरकार में चाहे वह पंचायतें हों, चाहे नगरपालिकाएं हैं, उसमें हमने 33 प्रतिशत आरक्षण देने का काम हमने किया है. चाहे वह राजीव गांधी जी हों, चाहे नरसिम्‍हा राव जी हों और आज उसी का नतीजा है कि लगभग 14 लाख महिला प्रतिनिधि लोकतंत्र में अपनी भागीदारी निभाने का काम कर रही हैं. इसके बाद आदरणीय मनमोहन सिंह जी ने भी प्रयास किये, आदरणीय हमारे जो तमाम नेता रहे हैं, उन नेताओं ने भी इसमें अपनी महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाने का काम किया है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, चूंकि आज हमारा जो लोकतांत्रिक ढांचा है, उसमें एक बड़े बदलाव की तरफ हम सब साथी बढ़ रहे हैं. आज समय की मांग भी है, आवश्‍यकता भी है. लेकिन मेरा उसमें एक छोटा सा अनुरोध है कि आज हम सामाजिक न्‍याय की बात करते हैं, लेकिन वह सामाजिक न्‍याय हमको दिखता नहीं है. आज हम कहते हैं कि जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्‍सेदारी, यह कहने में तो बहुत अच्‍छा लगता है लेकिन जब हम इसको धरातल पर देखते हैं, तो यह हमारा नारा कहीं न कहीं खोखला साबित होता है. पूर्व में जो गलतियां हुई हैं, किसने की, किसने नहीं की, मैं इसमें नहीं जाना चाहता हूं लेकिन आज यह अवसर है कि हम सारी पुरानी बातें छोड़कर, हमारे देश के सबसे बड़े वर्ग, जिसकी देश में लगभग 56 प्रतिशत आबादी है, उसको राजनैतिक आरक्षण देने का निर्णय, आज इस सदन के माध्‍यम से प्रस्‍ताव पारित करके, केंद्र सरकार को भेजने का काम, हम जब करेंगे, तभी हमारी सामाजिक न्‍याय की भावना और सोच सही साबित होगी. मेरा सदन के माध्‍यम से मुख्‍यमंत्री जी से अनुरोध है क्‍योंकि वे भी पिछड़े वर्ग से आते हैं, उनकी भी जिम्‍मेदारी बनती है, हमारे जो पिछड़े वर्ग के साथी हैं जो सही मायने में अपने प्रतिनिधित्‍व के लिए, बड़ी आबादी होने के बाद भी भटक रहे हैं, उनको राजनैतिक हिस्‍सेदारी नहीं मिल रही है, उनके लिए सर्वसम्‍मति से आज यहां से प्रस्‍ताव, आप आज जो संकल्‍प लाये हैं, उसके साथ जोड़कर केंद्र सरकार को भेजा जाये, जिससे पिछड़े वर्ग को उसकी हिस्‍सेदारी मिले, इसकी शुरूआत आज इस सदन के माध्‍यम से हो, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, धन्‍यवाद, जय हिंद, जय भारत.

          श्री अजय विश्‍नोई-  अध्‍यक्ष महोदय, भाजपा को आरक्षण की जरूरत नहीं पड़ी और पिछले 20 वर्षों से यहां हमारा पिछड़े वर्ग का मुख्‍यमंत्री बैठा हुआ है. इसमें बार-बार आरक्षण की बात क्‍यों करते हैं, यहां तो बिना आरक्षण के रास्‍ता बना हुआ है.

          श्री सचिन सुभाषचन्‍द्र यादव-  आपने बात निकाली है तो कहूंगा कि कांग्रेस सरकार ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का काम किया था लेकिन आज तक उन लाखों विद्यार्थियों को उस आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया है. मेरा अनुरोध है कि हमारे साथियों को आरक्षण देने का काम किया जाये. 

          अध्‍यक्ष महोदयश्रीमती रीती पाठक

          राज्‍यमंत्री, लोक स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा (श्री नरेन्‍द्र शिवाजी पटेल)- अध्‍यक्ष महोदय

          अध्‍यक्ष महोदयनरेन्‍द्र जी, आशीष जी कृपया बैठ जायें रीती जी को बोलने दीजिये, आज महिलाओं का विषय चल रहा है, उनका सम्‍मान करें.

          श्रीमती रीती पाठक (सीधी)-  अध्‍यक्ष महोदय, यह सच है कि पुरूषों ने बहुत अति‍क्रमण कर लिया है. मैं यहां देख रही हूं, मेरा एक प्रस्‍ताव है यदि आप मान लें तो, यह हम सभी बहनों की तरफ से है कि (xx) महिलाओं के खिलाफ, देश की आधी आबादी के खिलाफ. (मेजों की थपथपाहट)

          श्री फूलसिंह बरैया-  अध्‍यक्ष महोदय,

          अध्‍यक्ष महोदयफूलसिंह बरैया जी कृपया एक मिनट रूकें. रीती जी मेरा आग्रह हैं कि कृपया कोई गैरजरूरी बात न करें. वह विषय वहां समाप्‍त हो चुका है और आप अपनी बात करें, विषय के अुनरूप ही बोलें.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक-  अध्‍यक्ष महोदय, इसे विलोपित किया जाये.

          अध्‍यक्ष महोदय-  हां, विलोपित ही है.

          श्रीमती रीती पाठक- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको धन्‍यवाद देती हूं कि आपने इस सदन को आहूत किया और यह बड़ा गंभीर विषय है.

          अध्‍यक्ष महोदय-  गंभीर विषय है इसलिए गंभीरता से बात करें और समय-सीमा में बात करें और हम सभी ने सोचा था कि 4 बजे सदन की कार्यवाही पूर्ण हो जायेगी लेकिन अभी 5 बज चुके हैं. अभी नेता प्रतिपक्ष, मुख्‍यमंत्री जी को भी बोलना है और कुछ सदस्‍य भी शेष है इसलिए मेरा सभी से अनुरोध है कि विषय पर रहें, संयम से रहें और सीमा में रहें. जिससे समय-सीमा में हम कार्यवाही को पूर्ण कर सकें.

          श्रीमती रीती पाठक-  अध्‍यक्ष महोदय, आपने सदैव हम बहनों को बहुत प्राथमिकता और सम्‍मान दिया है. इस सदन में आपने हमें अपनी आवाज को रखने का मौका दिया है. मैं हमारे यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री जी को धन्‍यवाद करना चाहती हूं कि उन्‍होंने इस संकल्‍प को इस सदन में प्रस्‍तुत किया और मैं उसी के पक्ष में आज बोलने के लिए उपस्थित हुई हूं. किसी बड़े कवि की 4 पंक्तियां मैं आज यहां नारी शक्ति को समर्पित करना चाहती हूं और बड़ी गंभीरता से इन शब्‍दों को लिखा गया है-

"नैराश्‍य नद में डूबते निज राष्‍ट्र की नव आस हो,

कोई अलौकिक शक्ति हो, अभिव्‍यक्ति हो, विश्‍वास हो,

नवकाल की नवज्‍योति हो, उत्‍सर्ग हो, आगाज़ हो,

मानो न मानो सत्‍य है, तुम स्‍वयं में इतिहास हो, तुम स्‍वयं में इतिहास हो."

 

(मेजों की थपथपाहट)

 

          अध्‍यक्ष महोदय, एक इतिहास कांग्रेस दल और उनके गठबंधन के साथियों ने भी बनाने का प्रयास किया. मुझे लगता है कि वे इस इतिहास को बनाने को, अपनी जीत मानते हैं, जब सदन की शुरूआत हुई थी तो नेता प्रतिपक्ष जी ने अपना विषय रखा था, और हमारी प्रसिद्ध गायिका..

 

5.05  बजे            { सभापति महोदय, (डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय ) पीठासीन हुए.}

 

.. आाशा जी के विषय पर वह बोल रहे थे और मैं उनको बड़े ध्‍यान से सुन रही थी और आपने कहा था कि उनके इस योगदान को हमारा देश कभी भी नहीं भूलेगा यह अविस्‍मरणीय है तो मुझे लग रहा था कि आपकी इस बात में, आपके इस भाव में, इस सोच में कितनी संवेदना है फिर मुझे लगा कि ऐसा क्‍यों हुआ यह कैसे हो गया कि इतनी संवेदनाओं वाली पार्टी, इतनी भावनाओं वाली पार्टी ऐसी सोच रखे, ऐसे विचार रखे. जब किसी महिला के लिए उनके जाने पर भी ऐसा सम्‍मान रहे तो क्‍यों ऐसा हुआ कि देश के सदन में उन्‍होंने महिला के सम्‍मान पर लाये हुए उस संशोधन विधेयक पर अपना ऐतराज जताया और वोट नहीं दिया जिससे वह वहीं पर रह गया. सभापति महोदय, मैं बैठे-बैठे सोच रही थी बहुत सारे वक्‍ताओं को सुना, बहुत ही बेहतरीन, शायद मैं उतना अच्‍छा बोल भी नहीं पाती हूं पर मुझे लगा कि एक चीज निष्‍कर्ष में आई और वह यह आई कि राहुल गांधी इनके दल के बड़े नेता हैं और राहुल गांधी जी की बहन हैं प्रियंका गांधी जिनका विषय आपने रखा था और उन्‍हें इस बात की चिंता है. शायद अपनी माता जी से उन्‍होंने डिस्‍कशन किया होगा कि मम्‍मा यह दीदी आ जाएगी और इसलिए सबसे पहले हम लोग मिलकर इस बिल को फेल करते हैं तो सबसे पहले तो उनके मन में घर की चिंता है बाकी देश की आधी आबादी की चिंता तो बाद की बात है. बहुत ही गंभीर विषय है. इस विषय पर विचार करने की आवश्‍यकता है कि पहले भी यह बात आई है. अभी भी यह बात आ रही है.

          अध्‍यक्ष महोदय, हमारा जो देश है वह शिव शक्ति का देश है. इतनी आराधना हम भगवान शिव की करते हैं उससे कहीं ज्‍यादा शक्ति की भी आराधना करते हैं. मुझे नहीं लगता है कि कहीं से भी कम इसका आंकलन हो रहा है. जब हमारे नॉर्थ पोल में हमारे देश के वैज्ञानिक वहां पर पहुंचे तो आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने नॉर्थ पोल का जो नाम रखा वह शिव शक्ति रखा, यह संवेदनाएं हैं और इन संवेदनाओं के साथ मैं अपने वक्‍तव्‍य को रख रही हूं कि हमारा यह देश जीजाबाई का देश है,  हमारा देश झलकारी बाई का देश है, हमारा देश अवन्ति बाई का देश है, हमारा देश अहिल्‍याबाई का देश है. हमारा देश वैदेही का देश है, हमारा देश लोपामुद्रा का देश है. हमारा देश बाबा भीमराव अंबेडकर का देश है, हमारा देश ईश्‍वरचंद्र विद्यासागर का देश है, हमारा देश राजा राममोहन राय का देश है जिन्‍होंने अपनी सोच से, अपने विचारों से, अपने कर्तव्‍य से, अपनी ईमानदारी से अपनी नारी जाति के लिए अगर कुछ सोचा भी तो उत्‍थान का विषय सोचा शब्‍दों की बात नहीं आई. अगर बात वैदिक काल से आए और अगर इस काल में हम पहुंचते हैं तो नारी जा‍ति के उत्‍थान की ही बात हमारे तक निकलकर आती है. जब मैं इस सदन में बैठी थी तो उस विषय को याद कर रही थी कि मैं सौभाग्‍यशाली हूं कि जब यह विधेयक नारी शक्ति वंदन अधिनियम सदन में लाया गया तो उस समय मैं अपने सीधी संसदीय क्षेत्र की ओर से एक जनप्रतिनिधि बनकर, सांसद बनकर उस सदन में उपस्थित थी और मैं प्रत्‍यक्षदर्शी हूं. मैंने देखा कि देश के नेतृत्‍वकर्ता जिनका नाम यशस्‍वी प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी है जो यह कहते हैं कि मैं रहूं या न रहूं यह देश रहना चाहिए. राजनैतिक व्‍यक्ति का जो विजन होता है वह पांच साल का होता है परंतु हमारे देश की यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी का विजन है कि वर्ष 2047 में भारत एक विकसित भारत बने और विकसित भारत में देश की आधी आबादी का हिस्‍सा सुनिश्चित हो. उस अधिनियम को वहां पारित किया जाए. अभी सचिन जी भी बोल रहे थे कि मुझे समझ में नहीं आता, मुझे दिखाई नहीं देता. मैंने कहा कि मैंने तो चशमा लगाया है मुझे लगता है कि उस चशमे को लेकर उसे पढ़ना चाहिए और उसको समझना भी चाहिए. उस बिल में कौन-कौन से नॉर्म्‍स थे. आज परिसीमन में बात होती है, लेकिन हम सबसे महत्‍वपूर्ण विषय इस बात को नहीं लेते हैं कि हमने किस विषय को लेकर नारी शक्ति को, देश की आधी आबादी को उनका हिस्‍सा, उनका अधिकार देने का प्रयास किया है जिसमें आपको सर्वसम्मति से साथ में आना चाहिए.

            सभापति महोदय, एक महिला जब राजनीतिक क्षेत्र में काम करने के लिए निकलती है तो वह सामान्य विषय नहीं  होता है. यह बिलकुल भी सामान्य नहीं होता है. यह एक असामान्य परिस्थितियों में और कई विपरीत परिस्थितियों में काम करने वाली बात होती है. उन बहनों के लिए एक समर्पित बिल  बनता जिस पर आप सब साथ देते. पहले भी हमारी वक्ताओं ने ऊषा दीदी ने भी कहा और मैंने भी इस बात को जरूर सोचा है कि ईश्वर किसी भी पाप या किसी भी गलत काम को ठीक करने के लिए एक मौका जरुर देता है और आज माननीय मुख्यमंत्री जी इस सदन में यह संकल्प लेकर आए हैं तो ईश्वर ने हमें यह मौका दिया है. नारी शक्ति का सम्मान कीजिए और नारी शक्ति का सम्मान करने के लिए आपको ज्यादा कुछ करना नहीं है कि बॉर्डर पर जाकर आपको गन लेकर, पिस्तौल लेकर खड़े होना है और अपने देश को बचाने का काम करना है. यह देश की आधी आबादी की बात है उसके सम्मान की बात है. इसलिए मैं आप सभी से आग्रह करती हूँ कि आदरणीय मुख्यमंत्री जी द्वारा लाए गए इस संकल्प पर आप सभी साथ आएं.

          सभापति महोदय, 26 जनवरी, 2024 का एक सीन मुझे बार-बार याद आता है. वह सीन था ऑल वूमन ट्राय सर्विस कंटीजेंट यह राजपथ पर दिखाया गया था. इसका उल्लेख मैं इसलिए करना चाह रही हूँ. यह महिला सशक्तिकरण का सबसे बड़ा उदाहरण था कि राजपथ पर पहली बार ऑल वूमन कंटीजेंट ने जिस तरह से ट्राय कलर को लागू किया था. जिस तरह से हमारे देश के तिरंगे को प्रदर्शित किया था. निश्चित रुप से वह अद्भुत था. इसका यहां पर उल्लेख करने का आशय यही है कि जब हमारे प्रधानमंत्री जी ने सेना में हमारी बहनों को जो सम्मान दिया. कारगिल के युद्ध में पायलट बनकर हों, चाहे अन्य रूप से नेवी में जो उसका सोत होता है उसके ऊपर से हमारी बहनों ने हेलीकाफ्टर को चलाते हुए उसको लीड किया था. यह निश्चित रुप से बहुत अद्भुत विषय था. यह सशक्तिकरण अन्य सरकारों ने भी हो सकता है किया हो मैं उस पर बात नहीं करना चाहती हूँ. मैं सिर्फ यह बात करना चाहती हूँ कि देश के प्रधानमंत्री जी ने जिस तरह से नारी शक्ति को सशक्त करने के लिए इस बिल को लाकर संसद में पास करने का जो प्रयास किया उसको आपने फेल करने का प्रयास किया. इसलिए मैं पुन: आपसे आग्रह करती हूँ.

          सभापति महोदय, बहनों के लिए यदि मैं अपनी सरकार के माध्यम से भावी योजनाओं की बात करूं तो वर्ष 2014 में जब हमारे प्रधानमंत्री जी ने प्रधान सेवक के रुप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने हेतु अपने कदम बढ़ाए थे तो उन्होंने सबसे पहले बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ योजना लागू की थी. जन-धन योजना जिसकी लाभार्थी सबसे बड़े तौर पर हमारी बहने हैं. 55 प्रतिशत का लाभ जनधन योजना में हमारी बहनों को मिल चुका है. मैं एक जनप्रतिनिधि हूं, गांव से आती हूँ. ग्रामीण क्षेत्र है. यह बिल जिस तरह से आना था और नहीं आ पाया हमें एक दूसरा मौका भी मिला है. मैं तो सिर्फ यह कहना चाहती हूँ कि एक महिला यदि किसी भी विषय को किसी भी कठिनाई को रखने में किसी दूसरी महिला के पास जितनी सहूलियत महसूस करती है शायद वह किसी पुरुष जनप्रतिनिधि के पास वैसी सहूलियत महसूस नहीं करती है. मैंने यह भी देखा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में किस तरह से हमारी बहनें लकड़ी और कंडे से खाना बनाती थीं. आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने इस विषय को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है. आज उज्ज्वला योजना में 12 करोड़ जो लाभार्थी हैं वो हमारी बहनें हैं.

          सभापति महोदय, स्वच्छ भारत अभियान की यदि मैं बात कहूं जिसमें हमारी बहनों का सम्मान, नारी शक्ति का सम्मान, उस परिवार का सम्मान जिसमें कई ऐसी घटनाएं जो किसी भी परिवार का व्यक्ति नहीं चाहेगा कि किसी भी परिवार की बहन, बेटी या मां के साथ इस तरह की घटनाएं हों. 10 करोड़ शौचालय आज हमारे देश में बनकर तैयार हो चुके हैं. नल से जल की यदि मैं बात करूं तो 15 करोड़ लोग नल से जल की योजना से लाभान्वित हो रहे हैं. इसमें सबसे ज्यादा लाभ यदि किसी का है तो वह हमारी बहनों का है. हमारी बहनें जो छोटे लेबर फर्म में काम करती हैं तो निश्चित रुप से यह एक बड़ा इनोवेशन था और हमारी सरकार के आने से पहले, आदरणीय प्रधानमंत्री जी के आने से पहले देश में 22 प्रतिशत का अनुपात था. अब 41 प्रतिशत का अनुपात है. मैं दो मिनट में अपनी बात समाप्त करुंगी.                                                        

 

 

 

5.15 बजे                                   अध्‍यक्षीय घोषणा

     चाय की व्‍यवस्‍था लॉबी में होने विषयक

        सभापति महोदय --  माननीय सदस्‍यों के लिए चाय की व्‍यवस्‍था सदन की लॉबी में की गई है, कृपया सुविधानुसार ग्रहण कर सकते हैं.

श्रीमती रीती पाठक -- सभापति महोदय, बहुत आवश्‍यक विषय है कि अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर आईएमएफ चीफ ने इस रेशियो के बारे में जो बात कही है कि यदि लेबर फोर्स में रेशियो 41 प्रतिशत से ऊपर उठकर 50 प्रतिशत हो जाए तो हमारी महिलाओं का योगदान निश्चित रूप से हमारे देश की जो आर्थिक वृद्धि दर है वह 27 प्रतिशत तक हो जाएगी. अगर हायर एजुकेशन का रेशियो कहूं जो बहुत ज्‍यादा जरूरी है शिक्षा, जिस पर अभी कुंठित मानसिकता के माध्‍यम से बात भी हो रही थी, तो हायर एजुकेशन का रेशियो वर्ष 2014 के पहले तक 90 प्रतिशत था और मैं बड़े गर्व के साथ कहना चाहती हूं कि हमारे देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी ने हायर एजुकेशन में 150 प्रतिशत का रेशियो आज हमारे देश में लाकर रखा है. डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ इंडिया की अगर बात मैं करूं तो सामान्‍य रूप से हम जल्‍दी इस पर बात नहीं करते, जन धन आधार मोबाइल का सबसे ज्‍यादा उपयोग यदि किसी ने किया है तो हमारी बहनों ने किया है. इसलिए पंचायतीराज का जो आरक्षण है, 50 प्रतिशत का आरक्षण जो हमारे प्रदेश में भी हमारी बहनों को दिया जाता है और आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने भी पंचायतीराज के क्षेत्र में इस आरक्षण को लागू किया है, तो मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहती हूं कि अभी सदन के वरिष्‍ठ सदस्‍य गोपाल भार्गव जी भी इस बात को कह रहे थे, वह जब पंचायतीराज मंत्री थे तब मैं उस समय जिला पंचायत अध्‍यक्ष थी. जिला पंचायत अध्‍यक्ष होने के बाद जिस तरह से महिलाओं को आरक्षण मिला था उसके कारण मैं जिला पंचायत अध्‍यक्ष होकर चाहे वह भले निर्दलीय जिला पंचायत अध्‍यक्ष हुई थी लेकिन हम लोगों के लिए सीटें सुनिश्चित हुई थीं इसलिए यह बहुत आवश्‍यक है कि राजनैतिक क्षेत्र में काम करने वाली बहनों को सपोर्ट किया जाए. उनकी मानसिक स्थिति को समझा जाए. भावनात्‍मक विचार को आत्‍मसात किया जाए और इसमें मुझे नहीं लगता कि किसी भी तरह से कोई राजनीतिक खेल खेलने की आवश्‍यकता है. चाहे इस पक्ष के हों, चाहे उस पक्ष के हों और आगे आने वाले समय में मैं इस सदन के माध्‍यम से इतना ही कहना चाहती हूं कि हम अपने शब्‍दों का इस तरह से प्रयोग करें जो किसी भी महिला के लिए उसको अपमानित कर देने वाला न हो. मेरा आपसे बस इतना ही कहना है और आपके माध्‍यम से इतना और कहना चाहती हूं कि आज हमारे पास बहुत अच्‍छा मौका है कि प्रदेश के यशस्‍वी मुख्‍यमंत्री जी ने जो हमारा संकल्‍प यहां पर रखा है उस संकल्‍प को नारी सशक्तिकरण के लिए हम सब मिलकर पारित करें यही मेरा आपसे कहना है. धन्‍यवाद.

            श्री आरिफ मसूद (भोपाल-मध्‍य) -- सभापति महोदय, बड़ी गंभीर चर्चा चल रही है. बड़ा गंभीर विषय है, लेकिन उसमें भी तुष्टिकरण बराबर जारी है. भेदभाव जारी है. आप खुले मन से लाते तो हम लोग खुले मन से सहयोग करते. नेता प्रतिपक्ष जी ने स्‍पष्‍ट कहा था कि लाओ आप 543 और 230 पर, हम लोग सर्वसम्‍मति से पारित करेंगे, लेकिन आप वह नहीं कर सकते. वह हिम्‍मत नहीं जुटा सकते. बड़ा अच्‍छा लगा सुबह के समय कृष्‍णा गौर जी ने भोपाल की एक प्रतिनिधि ने शुरुआत की, लेकिन जो भेदभाव था तब भी देखने को मिला. ज्‍योतिबा फुले का नाम लिया, सावित्री बाई फुले का नाम भूल गईं. फातिमा शेख का नाम भूल गईं. आजादी की लड़ाई लड़ने वाले योद्धा बहुत थे. आज आप जो चर्चा कर रहे हैं 33 परसेंट अधिकार दिलाने की बात कर रहे हैं, आज इस सदन में बैठे, तो यह लोकतंत्र का मंदिर आजादी के मतवालों ने ही बनाया है और उनके बीच में कोई भेदभाव नहीं था. बी अम्‍मा उनके दो पुत्र थे शौकत अली और जौहर अली. उन्‍होंने उस दौर में यह कहा था, उनको जब यह खबर दी गई कि अंग्रेजों से शायद डरकर आपके बच्‍चे वापस आएंगे तो उन्‍होंने कहा था कि अगर मेरे बच्‍चे वापस आए तो उनको यह कह देना कि आजादी का परवाना लेकर आओ या तुम्‍हारी लाश आना चाहिए नहीं तो मैं तुम्‍हारा दूध माफ नहीं करूंगी. कांग्रेस और हम उस पार्टी की संतान हैं. अच्‍छा होगा कि ऐसे मुद्दों पर हम सब मिलकर बात करें. बहुत दर्द देख रहा हूं महिलाओं को लेकर क्‍योंकि वह बार-बार रिपीट होंगे सभापति महोदय आप हंस रहे हैं .रिपीट में भी नहीं करना चाहता लेकिन खिलाड़ियों का क्या हुआ, अब खेल एवं युवक कल्याण मंत्री जी हंस रहे हैं, दिल्ली में जंतर मंतर पर खिलाड़ियों के साथ में क्या हुआ, हाथरस की घटना पर क्या हुआ, उस पर भी एक बार खुले मन से चर्चा हो जाए. मणिपुर के अंदर निवस्त्र करके हमारी मां बहनों को घुमाया गया, तब न सदन लगाया गया न चर्चा कराई गई. उसमें भी सर्वसम्मति से होना चाहिये क्योंकि यह लोकतंत्र है, यह प्रजातंत्र है, अच्छे मामले में हम सब लोगों को दल से ऊपर उठकर के बात करना चाहिये और एक साथ होना चाहिये, वहां पर भी कुछ नहीं किया और आज यहां पर बार बार कहा जा रहा है कि सर्वसम्मति से पारित कर दो. भाई क्यों कर दो. हमें मालूम है कि आपकी नियत में भेद है, हमें मालूम है कि आपकी नियत में खोट है तभी तो आप ऐसा बिल लेकर के आये हो. मध्यप्रदेश के अंदर आये दिन महिलाओं के साथ में घटनायें होती हैं . सागर के अंदर क्या हुआ. सागर के अंदर एक महिला के साथ में क्या हुआ वह जगह जगह न्याय मांगती फिरी, पूरे प्रदेश में दर दर की ठोकरें खाती फिरी उस पर और उसके परिवार पर कितना अत्याचार और दमन हुआ उसको इंसाफ दिलाने के लिये किसी ने बात नहीं की. और आज हम यहां पर कह रहे हैं कि संकल्प को सर्वसम्मति से पारित कर दें. तो मैं कहना चाहता हूं कि आपने तो कभी करा नहीं, आपने तो कभी इन चीजों पर चर्चा करी नहीं, आपने तो भेद भाव किया, और अक्सर कभी तालिबान का जिक्र आ जाता है, कभी जेहाद का आ जाता है. यह आज कल एक नया शब्द चल गया है जेहाद . अरे हम लोग उस बाप की संतान हैं कि हम लोगों ने गोलियां भी खाई हैं, इसी देश के लिये खाई हैं और हमारी बहुत अच्छी बहन कह रही थीं अभी बोल रही थीं कि मैं रिवाल्वर नहीं मांगती मैं नहीं चाहती बार्डर पर लड़ो, मैं तो कहती हूं कि संकल्प पारित करो, तो मैं आपके बीच में कहना चाहता हूं कि बहन आपका यह भाई तैयार है देश के लिये, भेजो बार्डर के ऊपर हम जायेंगे जब वक्त आयेगा तो देश के लिये जान भी दे देंगे. लेकिन इस देश और तिरंगे का अपमान नहीं सहेंगे लेकिन आप भी तो थोड़ा भेद भाव बंद करो, हर चीज में भेद भाव , आदरणीय विजय शाह जी बैठे हैं इन्हें भी आज माफी मांग लेना चाहिये  आपका बहुत जिक्र हुआ है आप अभी थे नहीं , मांग लो माफी आज अच्छा मौका है आज से अच्छा मौका नहीं मिलेगा. क्योंकि यह सच्चाई है कि आपने भी गलत किया था. क्योंकि जो भी देश के लिये काम करेगा वह हमारे माथे का तिलक है.

          सभापति महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि यह वो लोग बातें कर रहे हैं जिनकी संस्थाओं में कभी खुद की अध्यक्ष महिला नहीं रही, कांग्रेस का संस्थान में भी अध्यक्ष रहा और कांग्रेस ने प्रधान मंत्री भी दिया है तो यह असत्य की राजनीति करना बंद करो इसलिये आपके इस संकल्प का विरोध कर रहे हैं और अगर आपको वास्तव में संकल्प सर्व सम्मति से पारित कराना है तो आओ स्पष्ट बात करो क्योंकि आप लोकतंत्र के मंदिर में बैठे हो कि हम आज 230 सदस्यों के ऊपर आरक्षण लागू करेंगे हम आपके साथ हैं .

          सभापति महोदय, एक बात का दुख है अभी अध्यक्ष महोदय सदन में नहीं हैं चले गयेहैं, फूल सिंह बरैया जी की बात से बहुत सारे लोग सहमत नहीं होगे , मैं भी उस बात को मानता हूं लेकिन यह उचित नहीं है कि उनको बैठा दिया जाये यह मुझे ऐतराज है मुझे आपत्ति है. आपने मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया उसके लिये आपको बहुत बहुत धन्यवाद.

          सभापति महोदय- बहुत धन्यवाद आरिफ भाई.

          राज्य मंत्री, नगरीय विकास एवं आवास (श्रीमती प्रतिमा बागरी)-- माननीय सभापति महोदय, आज माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा महिलाओं के समर्थन में संकल्प प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ है . मैं उस संकल्प के समर्थन पर बोलने के लिये यहां पर खड़ी हुई हूं.

          माननीय सभापति महोदय, हमारे देश के यशस्वी प्रधान मंत्री जी ने महिलाओं को सशक्त करने के लिये धरातल से कार्य शुरू किया, और आज जब भारत देश को विकसित भारत बनाने की ओर हम अग्रसर हैं , ऐसे में हमारी 50 प्रतिशत की आबादी जो महिलाओ की है उनकी सहभागिता, इंडिया की लीडरशीप में हो, प्रदेश की लीडरशिप में हो यह सुनिश्चित करने के लिये बिल प्रस्तुत किया गया है.

          सभापति महोदय, वर्ष 2023 में इस बिल को मंजूरी मिली. प्रतिपक्ष के सदस्य कह रहे हैं कि जब 2023 में पास कर दिया था तो 2026 में इस बिल की आवश्यकता क्यों.  मैं आपके माध्यम से सदन में कहना चाहूंगी कि 2023 में इस अधिनियम के तहत लोक सभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत का आरक्षण का प्रावधान किया गया था. वर्ष 2026 तक आते आते यह साफ है कि यह सरकार अपने वादों को  पूरा करने के लिये प्रतिबद्धता के साथ  कार्य कर रही थी  और परिसीमन की प्रक्रिया  पूरी होते ही  यह आरक्षण लागू  होगा. यह देश की संसद और विधान  सभाओं  में महिलाओं की भागीदारी  ऐतिहासिक रुप से  बढ़ेंगी.  आरक्षण को जनगणना  और  परिसीमनन के बाद  लागू करना  कानूनी रुप से   अनिवार्य है, ताकि सीटों का निर्धारण  पारदर्शी और  निष्पक्ष हो.  विपक्ष ने इस संवैधानिक  प्रक्रिया को बेवजह तमाशा बना दिया.  पिछले 27 वर्षों से  लंबित  इस विधेयक को पारित  कर  सरकार  ने अपनी राजनैतिक  प्रतिबद्धता   और  नारी  शक्ति  के प्रति  सम्मान प्रकट किया.  यह सरकार की गंभीरता  को दर्शाता है,  इसे केवल  एक  चुनावी वादा  न  रखकर  संवैधानिक  संशोधन बनाया गया, जिससे  महिलाओं को 33 प्रतिशत   भागीदारी सुनिश्चित   हो गई.  नीति के निर्माण में  उनकी सीधी भूमिका तय  की गई.  यह ठीक उसी प्रकार  है कि  हमने नींव बनाने की अनुमति  दे  दी, जब बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन  की   बारी आई, तो हमने 2026  में  उसमें आपत्ति लगा दी.  नींव बनने के पश्चात्  यदि हम उसका परिणाम  चाहते हैं, तो  उस बिल्डिंग के कंस्ट्रक्शन में भी हमको सहमति देनी  थी.  2023 के पश्चात्  2026  में    जब इस बिल के परिसीमन   के लिये तय करना था, तब इन्होंने  वाक आउट कर दिया.  मैं कहना चाहती हूं कि  महिला सशक्तिकरण केवल  आरक्षण तक सीमित नहीं है.  यह एक अवसर है,  यह एक सम्मान है और यह एक भागीदारी का  व्यापक दृष्टिकोण है, जिसे  हमारी सरकार लगातार आगे बढ़ा रही है.  मैं विपक्ष को  कब तक नारी प्रिय   होती है,  उन चन्द  लाइनों के माध्यम से  आप  तक रखूंगी  कि नारी तब तक प्यारी लागे,   जब तक  वह बेचारी लागे,  खोले जुबां अपने  हक में तेज धार वाली भारी लागे,  तेज धार वाली आरी लागे.  ऐसी सोच वाली  विपक्ष  की मंशा है कि यदि  अपने हक की बात   हम करते हैं,  तो लगता है कि आरक्षण  के नाम पर  अधिकार जब मांगते हैं,  तो उनको बुरा लगता है.  एक डिवाइन  पर्सनालिटी  एक डायनामिक पर्सनालिटी एक डिसीजन  लीडरशिप जो प्रधानमंत्री जी की है,  उन्होंने ग्रास रुट से टाप क्लास  के  रुट तक  भारत को विकसित   भारत बनाने के लिये  और  नेशनल लीडरशिप   क्वालिटी  को विकसित करने के लिये  ट्रयू  इम्पावरमेंट  की डेफिनेशन दी है और वह ट्रयू इम्पावरमेंट  की डेफिनेशन यह है कि  True empowerment is not symbolic, its structural   और जब तक उसका स्ट्रक्चर हम  नहीं खड़ा करेंगे,  तब तक वह दिखेगा नहीं  और यह मंशा अगर  प्रधानमंत्री जी ने बनाई है,  तो  निश्चित तौर पर इसमें हम  सफल होंगे.  डेकेट से  हम महिलाएं   इस इम्पावरमेंट के लिये  वेट कर रही हैं और हमारे प्रधानमंत्री  जी  चाहते थे कि  यह  महिलाएं विकसित हों.  एक  शोध में  यह पाया गया है,  अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष  की यह  रिपोर्ट के मुताबिक  पुरुषों के समान  महिलाओं  की कार्य बल में  हिस्सेदारी से  भारत की जीडीपी  में  27 प्रतिशत  की बढ़ोतरी हो सकती है.  यदि 50 प्रतिशत  कुशल महिलाएं कार्य बल में शामिल  होती हैं, तो  विकसित विकास की दर 1.5 प्रतिशत  बढ़कर के  9   प्रतिशत  प्रतिवर्ष हो सकती है. यह शोध भी कहता है.  इसलिये देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी  महिलाओं की भागीदारी  हर जगह सुनिश्चित कर रहे हैं. अंतरिक्ष से लेकर के  हिमालय तक, सेवा से लेकर के  सुरक्षा तक,  कला संगीत से लेकर के  खेल तक, लाभार्थी से लेकर के देश के निर्माण तक.  वह सारथी बनाना चाहते हैं महिलाओं को. अब  महिलाएं केवल बहन बेटी  बहु मां के  रुप में नहीं  सफल हैं, बल्कि  हमारे  अन्दर निर्णय, नेतृत्व  और परिवर्तन करने की पूर्ण  क्षमता है.  भाजपा की योजनाओं ने  महिलाओं को मान सम्मान  दिलाया है.  उनको आत्मनिर्भक  बनाया है. उनको स्वाभिमान  भरा जीवन  जीने का अधिकार दिया है.

          सभापति महोदय- शासकीय संकल्‍प पर चर्चा पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाये. मैं समझता हूं तक सदन इससे सहमत है.

                                                                             सहमति प्रदान की गयी.

          श्रीमती प्रतिमा बागरी- माननीय सभापति महोदय, भारत का भविष्‍य तय करने का निर्णय हमारे देश के यशस्‍वी प्रधान मंत्री जी द्वारा महिलाओं को सौंपा जाना यह एक सफलतापूर्वक कार्य है. विपक्ष मोदी जी के 56 इंच सीने की बात कर रहा था तो मैं उस 56 इंच के सीने के दो-चार उदाहरण दूंगी कि 56 इंच का सीना मोदी जी का क्‍यों है. उनके अंदर चिंता थी उन्‍होंने धारा-370 को हटाकर के दिखाया. मोदी जी के 56 इंच के सीने का ही कमाल था कि अयोध्‍या में राम मंदिर का निर्माण हुआ और उसमें प्रभु श्रीराम जी भव्‍य प्रतिमा बनकर के तैयार है. आज हम सभी वहां दर्शन करने जाते हैं. जिन्‍होंने पाकिस्‍तान में घुसकर के आतंकवादियों को मारा, यह 56 इंच के सीने का कमाल है. जिन्‍होंने यूक्रेन के चल रहे युद्ध में विराम करवाकर तिरंगे के साथ निकलने वाले हर भारतीय के साथ पाकिस्‍तानियों को भी निकलने का अवसर दिया. यह उस 56 इंच के सीने का कमाल है. बहुत सारी बातें अन्‍य सदस्‍यों ने कही हैं. मैं सिर्फ इस पक्ष में हूं कि महिला आरक्षण के बिल का विरोध करके विपक्ष ने यह जताया है कि वह शब्दों मात्र में है कि वह नारी सशक्तिकरण की बात करते हैं. जब महिला नेतृत्‍व करने के लिये तैयार की जाती है या उसे अवसर दिया जाता है तो पीठ दिखाकर भागने का काम पीछे से यह करते हैं. प्रियंका वाड्रा जी जो यह कहती हैं कि मैं लड़की हूं, लड़ सकती हूं. काश आपने इन शब्‍दों की मर्यादा को रखा होता और विधेयक को जब आपकी पार्टी विरोध कर रही थी, उस समय यह कहा होता की मैं लड़की हूं इस विधेयक को पास हो जाने दो. इसमें बहुत सी लड़कियों, महिलाओं का भला होगा उनको अवसर मिलेगा तो निश्चित तौर पर उनकी इस बात में दम होता और हम मानते कि हां विपक्षी दल जो कहता है, कांग्रेस जो कहती है वह कर के दिखाती है. षृष्टि के सजन को गोद में पालती है, नारी वह है जो मुसीबत में भी लड़ना जानती है. इसलिये आप इस भ्रम में मत रहिये कि महिलाएं इस विरोध का कोई जवाब नहीं देंगी. निश्चित तौर पर कहते हैं कि हर कृत्‍य के लिये सजा होती है. आपने यह जो कृत्‍य किया है, आज आपको उसका परिणाम दिख नहीं रहा होगा. आप उसे सोच नहीं रहे होंगे, लेकिन 50 प्रतिशत की महिलाओं की आबादी, इसको जब परिणाम परिणित करेगी तो शून्‍य से शिखर तक आपके पहुंचने के जो रास्‍ते थे उसको वापस शून्‍य में ले जाने का कार्य आप करेंगे.

          सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया. मैं आपको बहुत धन्‍यवाद देती हूं और मैंने शासकीय संकल्‍प के पक्ष में अपनी बात को रखा और चाहती हूं कि विपक्ष भी इसका समर्थन करें. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम (डिंडौरी)- माननीय सभापति महोदय जी, इंदिरा भवन विधान सभा मध्‍यप्रदेश में सशक्‍त नारी के संकल्‍प के विषय में चर्चा चल रही है.  या देवी सर्वभूतेषू नारी रूपेण संस्थिता नम: तस्‍यये, नम: तस्‍यये, नमो नम:.

          हम चर्चा कर रहे हैं. मैं देख रहा हूं कि इधर से चर्चा हो रही है और उधर से चर्चा हो रही है. मैं बड़ी चिंता में हूं कि जिसको आप देने की बात कर हो उसको आप क्‍या दे पाओगे. जब आपने नारी की बात की है तो सबसे पहले मुझे मेरी मां याद आयी. मैं अपनी मां को क्‍या दे पाउंगा. मैं उस मां को क्‍या दे पाउंगा जिन्‍होंने मुझे जन्‍म दिया,जिन्‍होंने मुझे सुरक्षा दी, जिन्‍होंने मुझे संस्‍कार दिये और मैं तो गौरवांवित हूं और मैं उस क्षेत्र से हूं जहां रानी दुर्गावती एक विरासत है. वीरांगना अवंतीबाई की विरासत है. मैं उस पवित्र माटी से हूं और लोग कह रहे हैं कि हम देने वाले हैं. मैं सिर्फ हमारी माता-बहनों से इतना कहूंगा कि आप अपना अधिकार समझ जायें. और जिस तरह से नेताओं के विषय में आज बात की जा रही है, मैं आपको एक छोटा-सा उदाहरण दे रहा हॅूं. यह कोई दलगत नहीं है. हम लोग बैठते हैं, चौपाल लगाते हैं तो लोग कहते हैं कि हम अदालत नहीं जा सकते हैं. हमने आपको विधायक बनाया है. अधिकारी सुनते नहीं हैं. आपको विधायक बनाया है, आप सुनिए. पति-पत्‍नी में झगड़ा हो जाता है. मैं बोलता हॅूं कि आप गलत कर रहे हैं, आप अपनी पत्‍नी का सम्‍मान करिए, उसको रखिए. मुझे जो जवाब मिलता है, वह मैं आपको बता रहा हॅूं. वे कहते हैं कि विधायक जी, आप बहुत ज्ञान बांटते हो. कांग्रेस, भाजपा के विधायक नहीं, आप तो विधायक हो. हम नहीं जानते कि कहां क्‍या है. आप हमारे विधायक हो. जब देश का ( XX ) आप मुझे ज्ञान बांट रहे हैं. ...(व्‍यवधान)...

          श्री उमाकांत शर्मा -- सभापति महोदय, यह गलत बात है.....(व्‍यवधान)...

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- सभापति महोदय, मैं सत्‍य घटना बता रहा हॅूं.

          जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसीराम सिलावट) -- माननीय सभापति महोदय, इस शब्‍द को विलोपित किया जाए....(व्‍यवधान)...

          सभापति महोदय -- इस शब्‍द को विलोपित किया जाए. मरकाम जी, आप विषय पर रहें. आप अन्‍य व्‍यक्‍तियों पर निजी वक्‍तव्‍य न दें...(व्‍यवधान)...उमाकांत शर्मा जी, कृपया आप बैठिए...(व्‍यवधान)..

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- सभापति जी, हम प्रमाण दे रहे हैं. लोग ऐसे उदाहरण देते हैं.

          सभापति महोदय -- मरकाम जी, आप अनावश्‍यक न बोलें. आप अपनी बात रखें.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- सभापति महोदय, जो जनता की बात है, मैं वह प्रमाणित उदाहरण दे रहा हॅूं. मैं कोई असत्‍य नहीं कह रहा हॅूं. मेरी कोई मंशा नहीं है.

          सभापति महोदय -- मरकाम जी, आप अनुभवी हैं, ऐसे उदाहरण न दें. कृपया, सकारात्‍मक बोलें.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- माननीय सभापति महोदय, मेरी कोई मंशा नहीं है. यदि किसी को मेरी बात से ठेस लगी हो, तो मैं क्षमा चाहता हॅूं. मैं केवल उदाहरण बता रहा हॅूं. लोग जो कहते हैं. मैं यह कोई अनावश्‍यक बात नहीं कर रहा हॅूं.

          लोक स्‍वास्‍थ्‍य यांत्रिकी मंत्री (श्रीमती संपतिया उइके) -- माननीय सभापति महोदय, इसे विलोपित किया जाए.

          सभापति महोदय -- मरकाम जी, कृपया आप महिला आरक्षण की बात पर आएं.

          श्री ओमकार सिंह मरकाम -- सभापति महोदय जी, आज जो राजनीति की जा रही है, उसके विषय में मैं बताना चाहूंगा. अभी जो सत्‍ता दल का नाम है, इसमें मैंने थोड़ा संशोधन किया है. यह भारतीय जनता पार्टी तब थी, जब से माननीय मोदी जी आए हैं, यह भ्रमजाल पार्टी बन गया है. यह भ्रम का जाल फैलाता है और उस जाल में उन्‍हीं को उन्‍हीं से लड़ाता है. अगर वाकई दिलेरी थी, तो सुश्री ममता बैनर्जी आपके अपने देश की एक महिला मुख्‍यमंत्री है, उसका अपना दल हो सकता है, पर हैं तो वह एक महिला. आप उन्‍हें हथियार बनाकर लोहे को लोहे से ही कटवा रहे हैं. मैं यह कहना चाहता हॅूं कि 29 तारीख को मतदान है. अगर प्रधानमंत्री जी वाकई महिलाओं का सम्‍मान कर रहे हैं, तो मेरा दोनों हाथ जोड़कर अनुरोध है कि एक महिला मुख्‍यमंत्री लड़ रही है, संघर्ष कर रही है, उसको आप मुख्‍यमंत्री के रूप में आशीर्वाद दे दीजिए. उनके लिए तरह-तरह की आपत्‍ति मत करिए.

          श्री रामेश्‍वर शर्मा -- माननीय सभापति महोदय जी, ओमकार जी बहुत बडे़ नेता हैं. बहुत सीनियर नेता हैं. आपके (XX) ने क्‍या बोला, वह बोला या नहीं आपने ? राहुल गांधी जी ने सुश्री ममता बैनर्जी के बारे में क्‍या बोला. दो दिन पहले राहुल गांधी जी ने क्‍या बोला ? आप राहुल गांधी जी का वक्‍तव्‍य पढ़ते हैं कि नहीं पढ़ते हैं. राहुल गांधी जी की सुनते हैं या नहीं. आप अपनी ढपली, अपना राग पीटते रहते हैं. राहुल गांधी जी ने सुश्री ममता बैनर्जी के बारे में क्‍या बोला, जरा पढ़ लीजिए.

          सभापति महोदय -- लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍थाएं हैं. हम सब डेमोक्रेसी में हैं. कृपया, शांत रहें. विषयांतर्गत रहें. मरकाम जी, आप विषय पर रहें.

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- माननीय सभापति महोदय जी, हमने अपनी मांग की है. यह मेरा अनुरोध है. अब महिलाओं के सम्‍मान में बात आती है. आपने आशा कार्यकर्ता जो लाखों की तादाद में हैं. आप उनको कितना मानदेय दे रहे हैं. मेरे डिण्‍डोरी जिले में जब वे आंदोलन में बैठी थीं, तो रात में जाकर के मैं जब उनको भोजन करा रहा था, तो प्रशासन के लोग आकर बोले कि विधायक जी आप भोजन नहीं करा सकते. दिन भर से आंदोलन में बैठे हैं, शाम को वहां व्‍यवस्‍था नहीं है. आशा कार्यकर्ता देश की महिला है. देश की सेवा कर रहे हैं और मैं कह सकता हॅूं कि शत्- प्रतिशत् आशा कार्यकर्ता महिला है और वहीं पर रसोईया शत्-प्रतिशत् महिला है. आप उनको कितना मानदेय दे रहे हैं. केवल 4 हजार रूपए दे रहे हैं. मजदूरों का पैसा, महिलाओं का पैसा आप दे नहीं पा रहे हैं. आप महिला हित की बात करते हैं. अब बात आ रही है अभी हमारे शिक्षक और शिक्षिकाएं आयी थीं. हमारे स्‍कूल शिक्षा मंत्री जी जाकर उनसे दो मिनट मिल लेते, तो क्‍या आपको टैक्‍स लग जाता. आप क्‍यों नहीं मिल पाए. टीईटी परीक्षा लेकर के बुढ़ापे में ले रहे हैं. मैं तो कह रहा हॅूं चीफ सेक्रेटरी से लेकर के टीईटी तक की परीक्षा लीजिए. इनकी परीक्षा लो आप उन गरीबों को तथा महिलाओं को परेशान कर रहे हो. ये सिर्फ यहां पर बातें किये जा रहे हैं.

सभापति महोदयमाननीय गृहमंत्री जी आप बैठें. आप आसंदी की तरफ देखकर के बात करें इधर उधर न देखें.

श्री ओमकार सिंह मरकाम सभापति महोदय मैं यह कहना चाहता हूं कि आज महिलाओं के लिये दृड़ इच्छा शक्ति से सम्मान करना चाहिये और काम करना चाहिये. मैं तो यह कहना चाहता हूं कि राजनीति अपनी जगह है. आज माननीय मुख्यमंत्री जी आज संकल्प के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति देना है. माननीय मुख्यमंत्री जी के हम साथ में हैं. मैं चुनौती के साथ आपसे कहना चाहूंगा कि आज मैं घोषणा करता हूं एक छोटा कार्यकर्ता हूं मेरे दल का 2028 में 230 में 33 प्रतिशत टिकट देंगे यह हमारी तरफ से मैं बात करूंगा. आपमें हिम्मत है तो आप घोषणा करिये. मैं घोषणा करता हूं कि हम हमारे दल से बात करेंगे कि 230 में से 33 प्रतिशत देंगे बाद में नियम कानून बनते रहेंगे, वह चलेगा. पंडित जी दान दक्षिणा बाद में देंगे. हम देंगे.

श्री तुलसीराम सिलावटसभापति महोदय, आप दे दें पहले आप पूछ लो. हम देने के लिये तैयार हैं.

श्री ओमकार सिंह मरकाम सभापति महोदय हम यह भी कह रहे हैं कि 543 सीटों में से 33 प्रतिशत हम आज ही हमारे दल के लिये चिट्ठी लिखेंगे हमारे दल में हमारा दम है, हम बात करेंगे. आपमें दम है तो आपके दल में बात करें.

श्री गिरीश गौतमसभापति महोदय, मरकाम जी पहले आप अपनी बचा लेना इसके बाद ही किसी को टिकट दिलवाना. (हंसी)

श्री ओमकार सिंह मरकाम सभापति महोदय पंडित जी हम देने वाले हैं. देने वाले कभी सोचते नहीं हैं. मैं तो कहना चाहता हूं कि हम अपनी मां को दे रहे हैं. मां के विषय में हम नहीं सोचते हैं कि हम क्या दे पा रहे हैं. मैं यह कहना चाहूंगा कि यह वर्तमान में जो पिक्चर बना रहे हैं नेरेटिव सेट किया जा रहा है कि इनका विरोधी हम बनायेंगे. माननीय कैलाश जी बड़े प्रसन्न हैं लड्डू खा खा के आ रहे हैं तीन बार के कांग्रेसियों को हम फंसाएंगे ऐसे फंसाने वाले ज्यादा दिन चलते नहीं हैं. जनता सब समझने लगती है. आप अभी इस बात को स्वीकार करिये कि अभी तो आप है कुछ तो आप ही लोग बांटते हैं.

सभापति महोदयमुझे लगता है कि आपका विषय पूरा हो गया है.

श्री कैलाश विजयवर्गीयसभापति महोदय, यह इतने बुद्धिमान हैं, सदन में अगर कोई बुद्धिमान व्यक्ति हैं यह ओमकार हैं. मैं तुमसे पूछना चाहता हूं कि लोकसभा में आपने किस बात का विरोध किया बस यह बता दीजिये सिर्फ.

श्री ओमकार सिंह मरकाम सभापति महोदय लोकसभा में आपके भ्रमजाल का विरोध किया है उससे अधिक कुछ नहीं. परिसीमन, जनगणना, दुनिया भर का भ्रम दो करोड़ नौकरी पर बात नहीं, आपके 15 लाख कब आयेंगे उस पर बात नहीं, दो गुना आय होगी उसकी बात नहीं, भ्रम फैलाने में क्या मास्ट्री है साहब वाकई आप भी कुछ दिन वहां पर रहे हो.

सभापति महोदयआप अपनी बात एक मिनट में पूरी कर लें नहीं तो आप भी भ्रम में रह जाओगे. (हंसी)

            श्री ओमकार सिंह मरकाम सभापति महोदय यह बात पक्ष और विपक्ष की बात नहीं है. यह बात है वास्तविकता में माता बहनों के हक उनको मिलना चाहिये इसके लिये मेरा भाव है. आप राजनीति मत करिये महिलाओं पर उनको भी मुस्कान चाहिये. हस्ती मुस्कराती महिलाएं आगे बढ़े मेरे देश की महिला मुझे ऐसा हिन्दुस्तान चाहिये, यही मेरा भाव है. मैं चाहता हूं कि हम अपनी माता बहनों को मेरा बार बार निवेदन है, जिन्‍होंने हमें जन्‍म दिया, उन्‍हें देने की आप जो इस समय बात कर रहे हों, मैं मानता हूं, मां वह होती है, जो हमें जन्‍म देती है और इसलिए मां का दर्जा सबसे श्रेष्‍ठ है, बस एक लाइन बोलकर अपनी बात समाप्‍त करूंगा. हमारे जीवन के तीन विधान है जन्‍म, विवाह, मरण और इन सिस्‍टम के बीच में मां का जो एक स्‍वरूप मैंने देखा है अगर किसी के परिवार में डिलेवरी है और क्रिटिकल स्थिति में डॉ. ने कहा कि मां को बचाये, या बच्‍चे को, परिवार वाले से पूछते हैं, तो परिवार वाले कहते हैं, बच्‍चे को जाने दो, मां का बचा लो, क्‍योंकि उनका धर्म है, इसमें मैं टिप्‍पणी नहीं करूंगा पर अगर मां से पूछते हैं कि आप बताइए बच्‍चे को बचाए या आपको तो मां कहती है, मुझे जाने दो, मेरे बच्‍चे को बचा लो, ये होती है मां(...मेजों की थपथपाहट) इसलिए मैं मातृशक्ति को प्रणाम करता हूं और निवेदन करता हूं कि भ्रमजाल की राजनीति न करो, जितने भाजपाई है मैंने आज से आपकी पार्टी का नाम कर दिया है, भ्रमजाल पार्टी, भ्रम बंद करो भारतीय जनता पार्टी बन जाओ, जो अटल बिहारी वाजपेयी की थी.

          सभापति महोदय श्रीमती ललिता यादव जी.

          श्रीमती ललिता यादव(छतरपुर) माननीय सभापति महोदय, आज मैं सदन में हमारे प्रदेश के यशस्‍वी, ऊर्जावान मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी जो नारी शक्ति वंदन का संकल्‍प लेकर इस सदन में आए हैं, मैं पूरे मध्‍यप्रदेश की बहनों की ओर से माननीय मुख्‍यमंत्री जी का अभिनंदन करती हूं. हमारे प्रदेश के मुख्‍यमंत्री किसानों, गरीबी, युवाओं, महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए हमेशा दिन रात प्रयास करते हैं. जब से मुख्‍यमंत्री जी ने शपथ ली, तो उन्‍होंने न कड़ी धूप देखी, न ठंड देखी, न पानी देखा, उन्‍होंने दिन रात प्रदेश को आगे बढ़ाने का, महिलाओं को आगे बढ़ाने का, काम किया. मैं दो शब्‍द विपक्ष को भी कहना चाहती हूं फिर मुख्‍यमंत्री जी को भी कहूंगी पानी से नहाकर लिबास बदलते हैं(विपक्ष), और हमारे मुख्‍यमंत्री जी पसीने से नहाकर  इतिहास बदलते हैं. ऐसे हमारे मुख्‍यमंत्री जी जो महिलाओं के हितैषी है. मध्‍यप्रदेश हमारे देश का पहला राज्‍य है, जहां आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शिता के साथ की गई. 19500 पदों के विरूद्ध 9948 पदों पर नियुक्ति आदेश जारी किए गए.

सभापति जी, मुख्‍यमंत्री जी ने लाड़ली बहना योजना वर्ष 2023 में एक करोड़ 25 लाख लाभार्थी बहनों को प्रथम मासिक आर्थिक सहायता राशि का अंतरण हमारे मुख्‍यमंत्री जी ने किया. माह अगस्‍त 2023-24 एवं 2025 में तीन बार लाभार्थी महिलाओं को ढाई सौ रुपए की विशेष सहायता राशि का अंतरण किया गया. पिछले दो वर्ष में लाभार्थी महिलाओं को अक्‍टूबर 2025 तक राशि 34 हजार 921 करोड़ 11 लाख की राशि का अंतरण हमारे मुख्‍यमंत्री जी ने किया, ये है महिला हितैषी सरकार. प्रधानमंत्री आवास के माध्‍यम से 72 प्रतिशत से अधिक हमारी महिलाएं, प्रधानमंत्री आवास की स्‍वामिनी है. पीएम जनधन योजना के माध्‍यम से आज हर  बहन के बैंक में खाते हैं, मैंने वह समय देखा है जब किसी महिलाओं के खाते बैंक में नहीं हुआ करते थे.

माननीय सभापति महोदय, मैंने वह समय देखा है जब‍ किसी भी महिला का खाता बैंक में नहीं हुआ करता था. मैंने वह भी समय देखा है, जब हम लोग सांसद कोटे से सिलेण्‍डर की बात किया करते थे, लेकिन आज पी.एम. उज्‍जवला योजना के माध्‍यम से दस करोड़ से अधिक एल.पी.जी. कनेक्‍शन वितरण करने का काम हमारी महिलाओं को हमारे देश के यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी ने किया है. तीन तलाक कानून लागू करके हमारे देश के प्रधानमंत्री जी का उद्देश्‍य उन मुस्लिम महिलाओं को कानूनी संरक्षणता प्रदान करना था, जो कई दशकों से इस दमनकारी प्रथा का शिकार थी और माननीय सभापति महोदय, स्‍वच्‍छ भारत मिशन के तहत हमने वह भी समय देखा है कि जब गांव में बहनें सोचती थीं कि अंधेरा कब होगा और सबेरे उजाला न हो पाया और बहनें कैसे शौच के लिये जाये, हमारी माननीय प्रधानमंत्री जी ने मर्यादा योजना के तहत बहनों को संरक्षण देकर आज महिलाओं को मर्यादा के तहत शौचालय बनाने का काम किया है.

सभापति महोदय, मध्‍यप्रदेश में सरकारी योजनाओं में, सरकारी नौकरियों को महिलाओं को 33 प्रतिशत का आरक्षण तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री माननीय शिवराज सिंह चौहान द्वारा किया गया था, जिसको नवंबर 2024 में हमारे प्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी की अध्‍यक्षता में 35 प्रतिशत करने की मंजूरी प्रदान कर दी है, यह है महिला हितैषी सरकार, जल जीवन मिशन के तहत हमारी बहनें घड़ों से दूर दूर तक पानी ले जाती थीं, उस बात की चिंता हमारे देश के प्रधानमंत्री जी ने की है और आज घर-घर नल लगाकर बहनों को जिस तरह से पानी देने का काम किया है, यह है हमारे देश की महिला हितैषी सरकार.

माननीय सभापति महोदय, आजीविका मिशन के माध्‍यम से बहनों को मजबूत करने का काम हमारी सरकार ने किया है. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में 9.70 लाख गर्भवती महिलाओं को 512 करोड़ रूपये से अधिक सहायता हमारी सरकार के द्वारा उपलब्‍ध कराई गई है. बेटी पढ़ाओं, बेटी बचाओं अभियान के तहत, हमारे प्रधानमंत्री जी ने यह अभियान चलाया है और आज जिस तरह से बेटियां पढ़ लिखकर आगे बढ़ रही हैं, यह हमारी सरकार महिला हितैषी सरकार है. भारत के यशस्‍वी प्रधानमंत्री माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी हमारे भारत की नारी शक्ति की उम्‍मीदों और आकांक्षाओं के नायक है, जिन्‍होंने 2023 में भारत की आधी आबादी को नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्‍यम से लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐतिहासिक कार्य किया है, लेकिन जब संशोधन बिल 16,17,18 अप्रैल को संसद में लेकर हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी आये, तो कांग्रेस और विपक्ष के लोगों ने उस संशोधन बिल को गिरा दिया, इसलिए अभी सामने के हमारे विपक्ष के भाई कह रहे थे कि हम लोगों ने वर्ष 2023 में सर्वसम्‍मति से उसे पास करवाया था, हां आप लोगों ने उस समय सर्व सम्‍मति से पारित करवाया था लेकिन आपने इसलिए पास करवाया था क्‍योंकि वर्ष 2024 में लोकसभा के चुनाव थे और आपको भारत की महिलाओं के वोट चाहिए थे, इसलिए आप लोगों ने उस समय इस बिल को सर्व सम्‍मति से पारित करवाया था.

            सभापति महोदय, यह नारी का सम्‍मान करते हैं, मैं दोहराना नहीं चाहती हैं, मैं उन बातों को कहूंगी नहीं, जो अभी इस सदन में आईं हैं, लेकिन मैं यह कहना चाहती हूं कि नारी इस सृष्टि की संरक्षा का आधार और शक्ति का साक्षात् स्‍वरूप है. प्राचीन काल से ही भारतीय संस्‍कृति में "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः"  जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास होता है, नारी का सम्‍मान किसी भी सभ्‍य समाज की अनिवार्य पहचान है, दुनिया भर की महिलाओं ने अपने इच्‍छाशक्ति और साहस से यह सिद्ध करके दिखा दिया है कि हम कोमल है, हम कमजोर नहीं है, हमेशा से हम लोग यहीं कहते आये हैं कि  ''फूल नहीं चिंगारी हैं और यह भारत की नारी है'' प्रकृति के बाद ईश्‍वर ने इस दुनिया में सबसे शानदार हस्‍ताक्षर स्‍त्री के रूप में किया है, शायद इसी कारण प्रकृति, शक्ति, ममता, माया, क्षमा, तपस्‍या, आराधना यह सब शब्‍द स्‍त्रीलिंग हैं.               

          माननीय सभापति महोदय, ईश्‍वर ने सृजन का दिव्‍य अधिकार यदि अपने बाद दिया है तो नारियों के लिये दिया है, इसलिये नारियों का सम्‍मान होना चाहिये और जो नारियों का सम्‍मान नहीं करेगा उसको भोगना ही पड़ेगा. माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहती हूं कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी आगामी जनगणना परिसीमन तक महिला आरक्षण को टालना नहीं चाहते थे, उनका संकल्‍प था. वर्ष 2023 में उन्‍होंने कहा था कि अगला लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ होगा. माननीय सभापति महोदय, जब देश के प्रधानमंत्री जी ने दशकों के इंतजार के बाद देश के सामने ऐतिहासिक कार्य करने का एक कदम आगे बढ़ाया और माननीय प्रधानमंत्री जी सदन में कह रहे थे, विपक्षी लोगों से कह रहे थे, कांग्रेसी लोगों से अपील कर रहे थे कि आप अपने बड़े-बड़े विज्ञापन छपवा लो, आप क्रेडिट ले लो, लेकिन 50 प्रतिशत आबादी की महिलाओं का हक मत छीनो और उन्‍होंने यह भी कहा था कि आपके सहयोग के बिना हमारा यह बिल पास नहीं हो सकता. लेकिन माननीय सभापति महोदय, एक ओर माननीय प्रधानमंत्री जी अपील कर रहे थे तो दूसरी ओर विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे थे. इस दृश्‍य को भारत की सभी बहनों ने देखा. हम महिला आरक्षण की बात कर रहे थे वह जाति धर्म में बांटने की बात कर रहे थे. हम महिला आरक्षण की बात कर रहे थे, वह मुस्लिम बहनों की बात कर रहे थे और जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम बिल गिरा तो विपक्ष के लोग तालियां बजा रहे थे, टेबिल ठोक रहे थे, विपक्ष की महिलायें भी टेबिल ठोक रही थीं और वह जो कहती थीं कि मैं लड़की हूं लड़ सकती हूं, वह भी तालियां बजा रही थीं, जश्‍न मना नहीं थीं. माननीय सभापति महोदय, मैं आपके माध्‍यम से विपक्ष के लोगों को कहना चाहती हूं कि मातृ शक्ति कांग्रेस पार्टी और विपक्ष के दलों को कभी माफ नहीं करेगी और यह लड़ाई हमेशा जारी रहेगी. दो लाइनें कहकर अपनी बात को खत्‍म करूंगी.

          इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है,

                   नाव जर्जर ही सही तूफानों से टकराती तो है,

                             एक चिंगारी कहीं से ढूंढ कर लाओ मध्‍यप्रदेश की बहनों,

                                      इस दिये में तेल से भीगी हुई बाती तो है.

 

          माननीय सभापति महोदय, इन्‍हीं शब्‍दों के साथ आपने मुझे बोलने का मौका दिया आपका बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          श्री मधुभाऊ भगत (परसवाड़ा)--  माननीय सभापति महोदय, शासकीय संकल्‍प दिवस दिनांक 27 अप्रैल, 2026. माननीय सभापति महोदय, मेरा मध्‍यप्रदेश विधान सभा प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियम 123/1 के तहत आज मैंने संशोधन के लिये पत्र लगाया था. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने जो संकल्‍प पेश किया वह परिसीमन लागू होने के बाद महिलाओं को आरक्षण दिया जाये, जिस पर मेरा संशोधन था, जो आज आग्राह किया जाये, ऐसा मैं मानता हूं.

          माननीय सभापति महोदय, मैं महिलाओं के विषय में इतना कहना चाहूंगा कि महिला ये शब्‍द जरूर हो सकता है, लेकिन महिला एक मां है, महिला एक बहन है, महिला एक शक्ति है, महिला एक दुर्गा है और महिला जन्‍म देती है. आज यहां सामने भी महिलायें बैठी हैं, यहां हमारे पक्ष में भी महिला बैठी हैं. महिलाओं का सम्‍मान दोनों तरफ बराबर है. यह बात जरूर है कि आज हम महिला के आरक्षण के लिये और महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण के लिये हम लोग बातों को अपने वक्‍तव्‍य के माध्‍यम से रख रहे हैं. लेकिन यह जो भारत है, भारत जिसको हम माता कहते हैं यह धरती अपने आप में एक महिला है, माता है, जो जन्‍म देती है, जहां पर हम जनप्रतिनिधि होने के नाते बहुत बड़े और भी हमारे जो इस देश को चलाने वाले लोग हैं जो बड़ी-बड़ी संस्‍थाओं में होते हैं वह कहीं न कहीं नारी होती है और एक नर होता है. मैं समझता हूं कि जहां हम वीरांगनाओं के देश में आज हम लोग सब एकत्रित है, आज हम सब लोग अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं. मैं इतना कहना चाहूंगा कि जिस प्रकार वर्ष 2023 में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास किया गया, जिसमें कांग्रेस के सदस्‍यों ने अपनी सहमति से लेकिन इस बिल को 2026 तक रखा रहा. इस संबंध में कोई कार्यवाही 3 वर्ष तक भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने नहीं की अगर यह तीन वर्ष के भीतर इस कार्य को कर लेते तो इस परिस्थिति का निर्माण आज नहीं होता.उसी प्रकार केन्द्र सरकार ने तीन बिलों को जो सम्मिलित करके संविधान संशोधन बिल लाया जिसमें जनगणना तथा परिसीमन को सम्मिलित कर आरक्षण देने के पक्ष में नहीं होने के कारण 2011 का यह बिल लाये जो लोकसभा में पारित नहीं हुआ. यह भी एक प्रश्न खड़ा करता है. आज हम इस पक्ष में हैं कि देश की संसद देश की सभी विधान सभाओं की महिलाओं के लिये एक तिहाई आरक्षण लोक सभा के वर्तमान में  543 सीटों पर और मध्यप्रदेश की 230 सीटों पर तत्काल रूप से 33 प्रतिशत का आरक्षण किया जाये. निश्चित तौर पर हम देने के पक्ष में हैं लेकिन आपकी सरकार इसको टालना चाहती है. कहीं न कहीं दिखावा कर रही है तथा आज की मौजूदगी में स्थिति तत्काल आरक्षण देने की मंशा साफ दिखाई नहीं देती. आप जो संकल्प लाये हैं वह मात्र गुमराह करने के लिये न कि तत्काल आरक्षण देने के लिये है. भूमिका मैं भी बहुत महिलाओं के विषय में बना सकता हूं लेकिन महिलाओं के लिये भूमिका बनाकर रखना उतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि हम महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दे दें. 33 क्या,इस देश के अंदर आज जो हम नर बैठे हैं वह हम लोग कहीं न कहीं अपनी माता की वजह से हैं और अनेक शक्ति के रूप में जिन्होंने हमें वरदान दिया है जो हम पुरुष हैं ऐसे में तो भारत के मैं चूकि बालाघाट जिले से आता हूं निश्चित तौर से हमारे बालाघाट की जनसंख्या हम देखते हैं महिला,पुरुष की तो बालाघाट में पुरुष से ज्यादा महिलाएं 52 परसेंट करीब वहां होती हैं. हमें तो यह महसूस होता है कि अगर हम बालाघाट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं निश्चित तौर पर आरक्षण जब हो तो क्यों न पूरा 50 परसेंट का हो आधा महिला सम्हाले आधा पुरुष सम्हाले ताकि हमारे बालाघाट का मान सम्मान और इस प्रदेश का मान सम्मान और इस देश का मान सम्मान गौरव बना रहे. महिलाओं की शक्ति को आंकना नहीं चाहिये निश्चित तौर पर मरकाम जी की बात में बहुत दम था यहां सामने भी हमारी बहनों ने बहुत अच्छी अच्छी बातें रखीं लेकिन मैं इतना कह देना चाहता हूं कि कांग्रेस के अंदर के प्रतिस्पर्धा नहीं रही है. कांग्रेस के अंदर इंदिरा गांधी जी जो हमारे देश की प्रथम महिला प्रधानमंत्री रही हैं मैं समझता हूं कि आज आवश्यक्ता नारी की इस देश को है तो पूरी तरह से 33 परसेंट आरक्षण न कि परिसीमन का इंतजार किया जाये न जनगणना का,तत्काल रूप से लागू किया जाये ताकि हमारा प्रदेश सुरक्षित और संवर्धित बना रहे. बहुत-बहुत धन्यवाद.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय - मधु को फायदा यह है कि मधु नाम महिलाओं का भी होता है और मधु नाम पुरुषों का भी होता है.

          सभापति महोदय - अर्द्धनारीश्वर बनकर ही बोले हैं वह भी.

 

समय                      अध्यक्ष महोदय (श्री नरेन्द्र सिंह तोमर) पीठासीन हुए.

6.03 बजे

 

          श्रीमती नीना विक्रम वर्मा(धार) - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपका बहुत-बहुत आभार प्रकट करती हूं. माननीय मुख्यमंत्री जी का बहुत-बहुत आभार हूं कि वे आज सदन में यह संकल्प लेकर आये हैं. मैं इस संकल्प के पक्ष में अपनी बात रखने के लिये खड़ी हुई हूं. हमारे देश की महिलाओं का सनातन काल से एक गौरवशाली इतिहास रहा है. वे शस्त्र में शास्त्र में,ज्ञान में,विज्ञान में सभी क्षेत्रों में सदैव आगे रही हैं. समाज ने भी उनको समुचित सम्मान दिया और स्वयं भगवान ने अपने नाम के पहले उनका नाम रखकर अपनी श्रेष्ठता को दर्शाया है. यह एक संकल्प नहीं बल्कि भारत की आधी आबादी के सम्मान,अधिकार और भविष्य से जुड़ा हुआ प्रश्न है. नारी शक्ति,वंदन अधिनियम देश की महिलाओं को वह स्थान देने का प्रयास है जिसकी वह दशकों से हकदार रही हैं.यह अधिनियम केवल एक आरक्षण का मुद्दा नहीं है. यह लोकतंत्र में महिलाओं की वास्तविक भागीदारी का संकल्प है. हम जानते हैं कि इतिहास के एक महत्वपूर्ण क्षण पर देश की नारी शक्ति को उसका उचित हक मिल सकता था लेकिन राजनीतिक स्वार्थों से उस अवसर को टाल दिया.जो निर्णय भारत की 70 करोड़ महिलाओं को सशक्त कर सकता था उसे रोककर कुछ दलों ने अपनी मानसिकता देश के सामने उजागर कर दी.यह केवल एक संसदीय प्रक्रिया का रुकना नहीं था. यह महिलाओं के अधिकार के साथ किया गया अन्‍याय था. लेकिन क्‍या महिला के अधिकारों को टालना किसी की जीत भी हो सकती है. Let's be honest, this was not Victory, this was Denial. इतिहास गवाह है दशकों तक सत्‍ता में रहने के बावजूद महिलाओं को वोट बैंक की तरह देखा गया. उनके इम्‍पॉवरमेंट की बात भाषणों में रही, पॉलिसी में नहीं और जब उन्‍हें डिसिजन मेकर पॉवर देने का समय आया तो पूरा अपोजिशन एकजुट होकर रास्‍ते में खड़ा हो गया. यह कोई एक्‍सीडेंट नहीं, यह एक वेल प्‍लान्‍ड स्‍ट्रेटजी थी ताकि महिलाओं को आगे बढ़ने से रोका जा सके. भारत के इतिहास में एक गोल्‍डन चैप्‍टर लिखा जाना था. एक क्षण ऐसा जब देश की नारी शक्‍ति को उसका हक मिल सकता था, लेकिन कुछ राजनीतिक फैसलों ने उस मौके को मिस-ऑपूर्चुनिटी बना दिया. हम इतिहास बनाना चाहते थे, लेकिन कुछ लोगों ने भरोसा देना भी जरूरी नहीं समझा. जो हुआ, वह सिर्फ एक बिल का रुकना नहीं था. वह 70 करोड़ महिलाओं के सपनों पर सीधा प्रहार था और वही जो मोमेन्‍ट था, जब देश ने साफ देखा Who stand with women empowerment and who stand against it. जिस तरह इस पल को रोका गया और उसके बाद जिस तरह रिएक्‍शन आए, सवाल उठता है क्‍या यह नारी शक्‍ति का सम्‍मान था. कुछ लोगों ने इसमें अपनी जीत बताया.

          महोदय, चूँकि उस समय ऐसा लग रहा था कि जनगणना का काम पूरा होकर परिसीमन का पूरा काम कर लिया जाएगा. अत: 2029 से इसे लागू करने का प्रावधान रखा. किंतु कांग्रेस पार्टी ने जातिगत जनगणना का मुद्दा उठाकर इसे उकसाया. इसमें देशहित नहीं, केवल और केवल राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की गई. माननीय प्रधानमंत्री जी ने हमारी सरकार जातिगत टकराव न हो एवं जनगणना पूरी हो, अत: जनगणना के साथ-साथ जातिगत जनगणना की घोषणा कर जनगणना का कार्य प्रारंभ करा दिया. अब मुख्‍य प्रश्‍न यह है कि जनगणना जातिगत जनगणना के अंतिम प्रकाशन, उसके बाद परिसीमन आयोग का गठन, फिर प्रस्‍ताव, फिर आपत्‍तियां, सुनवाई और निराकरण, तब अंतिम प्रकाशन. यह एक प्रक्रिया थी, अत: जनगणना का कार्य चलता रहे और आरक्षण परिसीमन शीघ्र हो सके, इसलिए 2011 को जनगणना आधार मानकर आरक्षण 33 प्रतिशत किया जाए, यह विधेयक संसद में प्रस्‍तुत किया गया. जिसमें कांग्रेस और अन्‍य दलों ने विरोध किया. चूँकि यह संविधान संशोधन बिल था, जिस पर उपस्‍थित सदस्‍यों के दो-तिहाई मतों की जरूरत थी. यदि मुख्‍य विपक्षी दल कांग्रेस सहमत हो जाती तो महिलाओं को उनका अधिकार मिल जाता. हमारी पार्टी ने स्‍वर्गीय मनमोहन सिंह जी के समय राज्‍य सभा में जब आरक्षण बिल प्रस्‍तुत हुआ, बिना किंतु परंतु के समर्थन देकर उसे पारित किया. हालांकि कांग्रेस ने उसे लोक सभा में नौटंकी कर अधूरा छोड़ दिया. जब हमारे विपक्षी साथी कह रहे हैं कि 2023 वाले बिल को बिना परिसीमन किए लागू करो. महोदय, इसमें भी वे राजनीति कर रहे हैं. उनकी मंशा ठीक नहीं है. वे महिला आरक्षण बिल पारित नहीं करना चाहते. उन्‍होंने नई मांग उठाई है कि कोटे में कोटा तय हो. 33 प्रतिशत आरक्षण पिछड़ा और अल्‍पसंख्‍यक आरक्षण दिया जाए, नहीं तो हम इसका विरोध करेंगे. अब 33 प्रतिशत में पिछड़ा, अल्‍पसंख्‍यक और शेष 67 प्रतिशत में प्रावधान, क्‍या यह कानून संविधान की दृष्‍टि से न्‍यायपूर्ण है. कौन सा कानून इसकी अनुमति देता है कि एक ही सदन में 33 प्रतिशत में कोटे में कोटा और शेष 67 प्रतिशत कोटाविहीन, क्‍या यह संभव है. दूसरी मुख्‍य बात यह है कि जो विपक्ष के नेता संविधान की पॉकेट बुक एडिशन लेकर चलते हैं, संसद में दिखाकर शपथ लेते हैं, उनके दल के साथियों से मैं पूछना चाहती हूँ कि संविधान के किस प्रावधान में संसद या विधान सभा में पिछड़ा आरक्षण का प्रावधान है, बताने का कष्‍ट करेंगे. हमारे यहां एससी, एसटी को आरक्षण है, जो 10 वर्ष में बढ़ाया जाता है. यह पिछड़ा या अल्‍पसंख्‍यक आरक्षण कहां लिखा है. फिर महोदय अलग-अलग राज्‍यों में अलग-अलग जातियों को पिछड़ा वर्ग में शामिल किया जाता है. एक राज्‍य में वह पिछड़ा है और दूसरे राज्‍य में वह अगड़े वर्ग में आता है. बहुत सी जातियां जो अलग-अलग राज्‍यों में पिछड़ी हैं और वे केन्‍द्र की पिछड़ी सूची में शामिल नहीं हैं. ऐसे में क्‍या कोटे में कोटा संभव है. विसंगति को दूर करने में 10 से 15 साल लग सकते हैं. जातियों में झगड़े संभव हैं. इसका मतलब है कि केवल विपक्ष सीधे महिला आरक्षण का विरोध कर गलियारे तलाश रहा है ताकि हम महिलाओं को आरक्षण, अधिकार और अवसर न मिल सकें. एक और प्रमुख कारण है धार्मिक आधार पर आरक्षण. संभव है हमारे संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है. हाल ही में सर्वोच्‍च न्‍यायालय के फैसले में स्‍पष्‍ट है कि यदि कोई धर्म बदलता है, तो एससी, एसटी का लाभ नहीं मिलेगा, लाभ से वंचित हो जायेगा. क्‍या हमारे विपक्षी बन्‍धुओं को संविधान और कानूनी बातों की जानकारी नहीं है? मैं ऐसा नहीं मानती, यह बिल रोकने के बहाने हैं. अध्‍यक्ष जी, जो इनकी महिलाएं यह नारा देती हैं कि ''लड़की हूँ, लड़ सकती हूँ.'' वह सदन में महिलाओं के हक में लड़ने के लिए बिल के विरोध में खड़े होकर और बिल के गिरने के बाद खुशियां प्रकट करती हुई नजर आईं. हमारी मांग है महिलाओं को अधिकार मिले, सभी विपक्षी दलों से अपेक्षा है कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा प्रस्‍तुत किया गया संकल्‍प 33 प्रतिशत दिलाने में भागीदार बने.

          अध्‍यक्ष महोदय -  नीना जी, कृपया पूर्ण करें. आप एक मिनट में पूरा कीजिये.

          श्रीमती नीना विक्रम वर्मा - अध्‍यक्ष जी, मैं एक मिनट में अपनी बात समाप्‍त करती हूँ. जिस दिन यह बिल वहां पर आया था, उस दिन मैं वहां प्रत्‍यक्ष इसकी गवाह थी. आज भी कई महिलाएं इनमें अपनी उपस्थिति दर्ज कर इसकी गवाह हैं, लेकिन अब असली टेस्‍ट आया है तो उनका स्‍टैण्‍ड बिल्‍कुल अलग था. यह साफ दिखता है कि पॉलिटिकल कन्‍विंस, उनके लिये वुमन एंपावरमेंट से ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है, इसलिए यह सिर्फ एक पॉलिटिकल फैल्‍योर नहीं था, यह एक मॉरेल फैल्‍योर भी नहीं था, इतिहास यह हमेशा याद रखता है कि कौन प्रोग्रेस के साथ खड़ा था और कौन उसे रोकने की कोशिश कर रहा है ? देश की महिलाएं देख रही हैं, समझ रही हैं और याद रख रही हैं and trust me they will response हर मंच पर इसका जवाब मांगा जायेगा. अब समय बदल चुका है. देश की नारी शक्ति जो सिर्फ सुनती ही नहीं थी, समझती भी है और समय आने पर जवाब भी देती है. एक तरफ यह सोच जो महिलाओं को डिसिजन मेकर बनाना चाहती है और दूसरी तरफ वह राजनीति जो उन्‍हें वहीं रोकना चाहती है, लेकिन अब यह रुकने वाली नहीं हैं. Women of India are not asking for power. They are claiming their rightful place. वह दिन दूर नहीं, जब हर बेटी, हर महिला, सिर्फ सपने नहीं देखेगी, बल्कि उन सपनों से देश की दिशा बदलेगी. आज मैं इस बिल के लिये, आपके माध्‍यम से सभी पक्ष और विपक्ष, जिन्‍होंने सब तरह की अलग-अलग बातें कही हैं, उनसे एक अपील करना चाहूँगी कि जो भी कुछ हुआ, उस सबको छोड़कर आज नये सिरे से आप आइये, हम सब मिलकर माननीय मुख्‍यमंत्री जी के संकल्‍प को समर्थन दें और महिलाओं के लिये 33 प्रतिशत आरक्षण का रास्‍ता खुला करें. बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

          अध्‍यक्ष महोदय - माननीय श्री बाला बच्‍चन जी.

          श्री बाला बच्‍चन (राजपुर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लगभग 24-25 वक्‍ताओं को हाउस में मैंने सुना है. माननीय मुख्‍यमंत्री जी के द्वारा शासकीय संकल्‍प प्रस्‍तुत करना और उसमें लिखना कि ''इस सदन का मत है कि नारी शक्ति के वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं सशक्तिकरण के लिए देश की संसद एवं सभी विधान सभाओं में महिलाओं के लिये एक तिहाई आरक्षण, परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर, तत्‍काल प्रभाव से लागू किया जाये.'' क्‍या माननीय मुख्‍यमंत्री जी यह अपने अधिकार क्षेत्र की बात है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर, परिसीमन का काम देश की संसद का है, महिलाओं को आरक्षण देना देश की संसद का काम है और देश की संसद में ऑलरेडी यह बिल गिर चुका है और माननीय मुख्‍यमंत्री जी तत्‍काल प्रभाव से लागू करने की बात करते हैं. आपने ठीक किया. इसके बाद क्‍या है ? इसके लागू होने के बाद आप इस बिल को कहां पर भेजेंगे और इस बिल का, इस संकल्‍प का आप क्‍या करेंगे ? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दिनांक 30 सितम्‍बर, 2023 को जब देश की संसद में सर्वानुमति से लगभग 454 सांसदों ने वोटिंग करके महिला आरक्षण बिल को पास किया, पारित किया. उसको पारित करने के बाद उसकी अधिसूचना जारी होनी थी, वही मैं स्‍टार्टिंग में बोल रहा था. वह अधिसूचना कब आप जारी कर रहे हो ? दो वर्ष पांच महीने बाद, जब फिर से संसद में यह बिल महिलाओं से संबंधित, आरक्षण से संबंधित आया, तब आप दिनांक 17 अप्रैल, 2026 की रात्रि को इसकी अधिूसचना जारी करते हो. जब सरकार के इरादे स्‍पष्‍ट और साफ-सुथरे हैं, आप महिलाओं को आरक्षण देना चाहते हो, तो आपने अधिसूचना जारी करने में लगभग ढाई वर्ष क्‍यों लगाए ? हमारा यह प्रश्‍न है. हम यह आपसे जानना चाहते हैं कि आपने इतनी देरी और इतनी विलम्‍ब से अधिसूचना जारी क्‍यों की ? कहीं न कहीं महिलाओं के प्रति आपकी नीयत, आपकी सोच ठीक नहीं है, यह स्‍पष्‍ट होता है. यह हमारा सवाल है.

          मुख्‍यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जितनी अच्‍छी चर्चा चल रही है, मैं अपने नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार और माननीय श्री बाला बच्‍चन जी से यह निवेदन करूँगा कि आपकी बात का जवाब जरूर मिलेगा. आप दिल थामकर बैठे रहना.      

          श्री बाला बच्‍चनजरूर, मुख्‍यमंत्री जी हम तो इस बात का इंतजार कर रहे हैं. 24 वर्षों बाद कोई शासकीय बिल देश की संसद में गिरा है, मुख्‍यमंत्री जी आप इसका ध्‍यान रखें. वर्ष 2002 में एक बिल गिरा था और अब 24 वर्षों के बाद शासकीय बिल गिरा है और बिल गिरने के बाद, आप इसे यहां ला रहे हैं, आपको यह संकल्‍प करवाना था और आपको हमारी जरूरत थी तो इसे पहले लाते, सभी को समझ आ रहा है कि यह राजनैतिक मामला है. आप क्‍या संदेश देना चाहता हैं, यह सभी को समझ आ रहा है. किस कारण आप यह संकल्‍प लाये हैं, मुझे नहीं लगता है कि विशेष सत्र बुलवाकर, इसकी चर्चा करवाकर, मुख्‍यमंत्री द्वारा शासकीय संकल्‍प लाना, हमारे नेता प्रतिपक्ष और हमारी पार्टी के लोगों ने बिलकुल ठीक कहा था कि वह भी नियम 117 के अधीन रिलेवेंट था या तो आपको उस पर चर्चा करवानी चाहिए थी और उसे भी आपको लेना चाहिए था लेकिन अब इसका कोई औचित्‍य नहीं था, यह जो आप संकल्‍प लेकर आये हैं, मेरा आग्रह है कि आप जब बोलेंगे तो इस बात को जरूर बतायें.

          अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2023 में महिलाओं से संबंधित आरक्षण बिल पास हुआ था, जिसमें 454 वोट पड़े, केवल 2 सांसद विरोध में थे, उस समय केवल महिलाओं से संबंधित बिल आया था. मैं आप सभी को याद दिलाना चाहता हूं कि इस बिल पर ओपनिंग स्‍पीच श्रीमती सोनिया गांधी जी ने की थी और उन्‍होंने कहा था कि हम आपका समर्थन करते हैं, कांग्रेस पार्टी महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिले, इसके पक्ष में है. सोनिया जी ने कहा था कि महिलाओं के लिए स्‍थानीय निकायों में राजीव गांधी जी ने ही इससे संबंधित बात रखी थी कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिले. मुझे मालूम है जब पंचायती राज मध्‍यप्रदेश में लागू हुआ था, तब दिग्विजय सिंह जी मुख्‍यमंत्री थे और उन्‍होंने उस समय 33 प्रतिशत आरक्षण पंचायत, जनपद, जिला पंचायत, स्‍थानीय निकाय की नगर निगम, नगर पालिकाओं, मेयर के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण तब दिया गया था, आप तो बहुत विलंब से इस बात को लाये हैं. इस पर आप जो चर्चा कर रहे हैं, अभी बिल गिरने का खास कारण यह है कि आप 3 बिल एक साथ लाये, महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मिले, उसके साथ आपने परिसीमन जोड़ा और परिसीमन के बाद भी केंद्रशासित क्षेत्रों के कानूनों से संबंधित संशोधन बिल भी आपने रखे, इसलिए देश की संसद में हमारी I.N.D.I.A. गठबंधन के हमारे सांसदों ने, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, राहुल गांधी जी, खड़गे जी ने कांग्रेस पार्टी और I.N.D.I.A. गठबंधन के सांसदों ने इसका विरोध किया है और यहां भी यह जो परिसीमन वाला काम आपने किया है, हमारा कहना है आपकी मंशा साफ नहीं है. आपने इसमें जो जोड़ा है, इससे स्‍पष्‍ट होता है कि आप कभी-भी परिसीमन को वर्ष 2026, 27 या 28 तक, हमें नहीं लगता है कि आप इसे पूरा कर पायेंगे, इसलिए हमें आशंका है कि जिन वर्गों की महिलाओं को आरक्षण मिलना चाहिए, देश की संसद में विधान सभाओं में एक तिहाई आरक्षण मिलना चाहिए, अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्‍य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं को आरक्षण, पुरानी जनगणना के आधार पर, उसके परिसीमन पर मिलना चाहिए जो कि नहीं मिल पायेगा. इसी कारण से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी जी ने इस बिल का विरोध किया है.

          अध्‍यक्ष महोदय, नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 में स्‍पष्‍ट शर्त लिखी थी कि नई जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के आधार पर 33 प्रतिशत आरक्षण हो, जिससे कि मैंने अभी जिन वर्गों की महिलाओं का उल्‍लेख किया है, उन वर्गों की महिलाओं को आरक्षण मिल सके, यह स्‍पष्‍ट है. मुख्‍यमंत्री जी स्‍वयं शासकीय संकल्‍प ले आये, परिसीमन की प्रक्रिया आप जोड़ रहे हैं, आप परिसीमन की प्रक्रिया कर ही नहीं पायेंगे, यह स्‍पष्‍ट है और सभी को नजर आता है इसलिए मुख्‍यमंत्री जी जब आप बोलें तो इसे स्‍पष्‍ट करें.

          अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आग्रह है कि कांग्रेस पार्टी ने वर्ष 1925 में आज से 100 वर्ष पूर्व सरोजिनी नायडू जी को अपना राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बनाया था, कांग्रेस पार्टी में लगभग 5 महिलायें राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष रह चुकी हैं. अगर हम बात करें तो देश की प्रधानमंत्री भी श्रीमती इंदिरा गांधी जी रह चुकी हैं. प्रतिभा पाटिल जी देश की माननीय राष्‍ट्रपति भी रह चुकी हैं. मीरा कुमार जी लोकसभा की अध्‍यक्ष रह चुकी हैं. प्रदेश में जमुना देवी जी नेता प्रतिपक्ष रह चुकी हैं, पहली महिला उप मुख्‍यमंत्री रह चुकी हैं. आप मुझे बताएं कि जनसंघ 26 साल से जनसंघ थी जहां तक मेरी जो जानकारी है कि 26 साल तक की जनसंघ में जनसंघ की कोई राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बनी. लगभग 45 से 46 साल आपके भाजपा के गठन को हो गया है. आपने भाजपा का या जनसंघ का कोई राष्‍ट्रीय महिला अध्‍यक्ष बनाया है.

            माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कथनी और करनी में जमीन, आसमान का अंतर है  सभी अपनी-अपनी बात कह रहे थे, बिलकुल, आपकी बात का हम स्‍वागत करते हैं अपनी बात कहना भी चाहिए. हम नारी बिल का सम्‍मान करते हैं, लेकिन आप ढा़ई साल में उसका परिसीमन नहीं कर पाए हो तो इससे आपकी नीयम का पता चलता है. बाकी की बात मैं बताना चाहता हूं कि एक पिछड़ा वर्ग की मुख्‍यमंत्री उमा भारती जी आपने उनको एक साल पूरा नहीं करने दिया. तीन-तीन बार जो मायावती जी को भाजपा ने समर्थन देकर यूपी में सरकार बनाई थी आपने उनको भी तीनों टर्म में एक एक साल पूरा नहीं करने दिया. वह जब अपने बहुमत पर आईं तो उन्‍होंने पांच साल पूरा शासन किया है, लेकिन जब-जब भी आपने जहां समर्थन दिया है ऐसे ही हम वीपी सिंह जी की बात कर लें, पिछड़ों की आप बात करते हो. वीपी सिंह जी जब पिछड़ों के लिए काम करने लगे आपने क्‍यों अपना समर्थन विड्रॉ किया. कमलनाथ जी ने जो आरक्षण 14 प्रतिशत से 27 प्रतिशत किया तो आपने कमलनाथ जी की सरकार क्‍यों‍ गिराई. यह सब प्रदेश और देश की महिलाएं भी जानना चाहती हैं. यह सदन भी जानना चाहता है. मैंने आपसे यह आग्रह किया था कि तीस साल में सातवी बार महिलाओं को जो झटका लगा है उनको 33 प्रतिशत आरक्षण मिले इस बारे में तो किस-किस की सरकार रही मैं उसका उल्‍लेख करना चाहता हूं. सन् 1996 में देवेगौड़ा जी की सरकार थी, सन् 1998  में अटल बिहार वाजपेयी जी की सरकार थी. सन् 2002, 2003 में भी श्री वाजपेयी जी की सरकार थी और वर्ष 2008-2009 में मनमोहन जी की सरकार थी जिसमें हम राज्‍यसभा में इस बिल को पास करा चुके थे. लोकसभा में पास नहीं हुआ था. उसके बाद वर्ष 2023 की बात आती है तो नरेन्‍द्र मोदी जी प्रधानमंत्री थे और अभी वर्तमान में भी वह ही प्रधानमंत्री हैं तो जब भी गैर कांग्रेसी सरकारें देश में बैठती हैं, प्रदेश में बैठती हैं तभी एसी स्थिति क्‍यों बनती है इसलिए आपको इस पर विचार करना पड़ेगा. यह सब पूरा प्रदेश और देश जानना चाहता है और यह बिलकुल स्‍पष्‍ट है कि कांग्रेस पार्टी महिलाओं के साथ में, महिलाओं को आरक्षण मिले 33 प्रतिशत नहीं अगर 50 प्रतिशत भी आरक्षण देना है तो कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से महिलाओं के आरक्षण के साथ में हैं. इम इसके बिलकुल भी खिलाफ और विपरीत नहीं हैं. बाकी की बात तो हमारे विधान सभा के विधायक साथी जो मुद्दों को उठाते हैं उनके जवाब नहीं आते हैं. अगर उन चीजों को हम निकालेंगे तो महिलाओं पर  कितने अत्‍याचार हुए, नाबालिग लड़कियों के साथ कितने दुष्‍कर्म हुए, यहां तक कि कोर्ट में भी कई हजारों केस पेंडिग पड़े हैं तो बहुत बड़ी लिस्‍ट है, लेकिन मैं भी जानता हूं कि आगे नेता प्रतिपक्ष जी को भी बोलना है आपने लंबी चर्चा भी कराई है लेकिन नीयत साफ नहीं होगी तब तक इस तरह से महिलाओं के साथ धोखा होता जाएगा और चाहे यह इधर के या उधर के हमको बिलकुल भी ऐसा नहीं करना चाहिए. प्रियंका गांधी जी की बात‍ आई थी डॉ. साहब ने इंग्लिश में पढ़कर सुनाया था मैंने उनसे पूछा था कि इसका हिंदी में ट्रांसलेशन क्‍या है तो इसमें प्रियंका गांधी जी का साफ कहना है कि भैय्या पुरानी जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन पर यदि आप महिला आरक्षण अगर लागू करोगे तो हमारी ओबीसी वर्ग की महिलाएं छूट जाएंगी. वह नहीं होना चाहिए. आपका जो नारी शक्ति वंदन एक्‍ट 2023 में यही लिखा था कि नई जनगणना और उसके आधार पर परिसीमन होना चाहिए तो फिर यह पिछड़े वर्ग की महिलाएं भी आएंगी, एससी, एसटी वर्ग की महिलाएं भी आएंगी और उनको भी आरक्षण मिलेगा और इन सभी को आरक्षण मिलेगा तो मैं समझता हूं कि हमारी इस बहस की भी यह जो आप संकल्‍प लाए हो तब इसकी सार्थकता होगी. देश और मध्‍यप्रदेश समझ चुका है, महिलाएं भी समझ चुकी हैं आप ध्‍यान रखना आगे आने वाले समय में जहां कांग्रेस ने काम छोड़ा उसको कांग्रेस ही आगे बढ़ाएगी और देश में लागू करेगी. मैं तो माननीय मुख्‍यमंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि आपके अधिकार क्षेत्र की चीजें ही नहीं हैं और आप संकल्‍प ला रहे हो और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने तक तो कब कर पाओगे आप. यह असंभव काम है. मुख्‍यमंत्री जी के द्वारा और अध्‍यक्ष महोदय आप भी केन्‍द्र सरकार में मंत्री रहे हैं. यहां जो मंत्रीगण बैठे हैं वह केन्‍द्र में मंत्री रहे हैं, संसद में सांसद रहे हैं आप सभी इन चीजों को जानते हो सभी चीजें समझ में आती हैं. चर्चा को कहां लेंगे किस तरफ लेंगे इसकी सार्थकता क्‍या है. आप चर्चा करवाकर क्‍या कर लेंगे. आठ दिन पहले तो संसद में बिल गिर चुका है. इसको कहां ले जाओगे. यही मेरा सवाल है. धन्‍यवाद.

            श्री हेमन्त सत्यदेव कटारे (अटेर) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने 1989 का बिल जो कोट किया था. 64 वां कांस्टीट्यूश्नल अमेंडमेंट बिल राजीव गांधी जी प्रधानमंत्री रहते हुए लाए थे. मैंने इस फेक्ट को री-वेरीफाई किया. आदरणीय पंचायत मंत्री बहुत ही वरिष्ठ सदस्य हैं. मैंने सम्मानपूर्वक उनकी  बात को ग्राह्य करके पुन: अपनी इन्फार्मेशन चेक की. 15 मई, 1989 को यह अमेंडमेंट बिल आया इसमें पंचायती चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान भी किया गया था. राज्यसभा में यह बिल गिरा है. आपने जो बात कही थी कि वर्ष 1989 में वे लोकसभा के सदस्य थे. यह बात सही है परन्तु आप 2 दिसम्बर, 1989 को सदस्य बने. सिर्फ 29 दिन आप उस पूरे वर्ष में सदस्य रहे. 15 मई को यह बिल पेश किया गया था. यदि माननीय सदस्य कहेंगे तो मैं उनको इस  बिल की कॉपी या लोक सभा की प्रोसीडिंग भी निकालकर भेजना चाहूंगा. 

          श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, मैं एक महत्वपूर्ण बात कह नहीं पाया. देश के संसदीय मंत्री जी श्री किरेन रिजिजू ने दो बिल वापिस लिए हैं. महिलाओं से संबंधित आरक्षण वाला बिल जो 52-54 वोट से जो गिरा है इसलिए जो परिसीमन वाला और जो केन्द्र शासित क्षेत्र कानून से संबंधित था वो दो बिल उन्होंने वापिस लिए हैं. जब वो वापिस ले चुके हैं तो राज्य सरकार यह कैसे ले आई. वह तो उन्होंने वापिस ले लिए हैं.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- लोकसभा में आपने विरोध किया तो यहां पर किस बात का समर्थन कर रहे हैं आप. लोकसभा में आपने आरक्षण का विरोध किया.

          श्री बाला बच्चन -- परिसीमन. नो नो नो. आपने नई जनगणना के, मैं यह बात स्पष्ट कह चुका हूँ. (व्यवधान)

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- परिसीमन नहीं आपने आरक्षण का विरोध किया है. आपने लोकसभा में आरक्षण का विरोध किया है. इसलिए परिसीमन का बिल वापिस लिया. परिसीमन का बिल वापिस ही इसलिए लिया गया क्योंकि आपने आरक्षण का विरोध किया था. (व्यवधान)

          अध्यक्ष महोदय -- कृपया शांति बनाए रखिए.

          श्री बाला बच्चन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह इनके जहन में आ गया है. महिला आरक्षण का कांग्रेस ने कभी विरोध नहीं किया है. हमेशा पक्ष लिया है. यह आपने परिसीमन जोड़ा है.

          अध्यक्ष महोदय -- आप अपनी बात कह चुके  हैं.

          श्री बाला बच्चन -- लेकिन संसदीय कार्य मंत्री जी यहां पर भी भ्रमित करना चाह रहे हैं. बिलकुल असत्य बयान है इनका.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, साढ़े छह बज गए हैं. साढ़े छह घंटे से नारी शक्ति, नारी सशक्तिकरण बिल के संकल्प को लेकर चर्चा हो रही है. सरकार ने सदन बुलाया कि नारी शक्ति, नारी वंदन पर चर्चा करना है. जब कार्यसूची आई तो शासकीय संकल्प आ गया कि हमें आरक्षण की बात करना है. यह तो कांग्रेस ने पहले ही कह दिया था. हमने 33 प्रतिशत आरक्षण के संबंध में अशासकीय संकल्प दे दिया था. यह अलग बात है कि आपने व्यवस्था दी. सरकार उस पर चर्चा नहीं करना चाहती, 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं देना चाहती है यह अलग बात है. यह स्पष्ट है. माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय खण्डेलवाल जी ने कहा कि यह आधी आबादी की बात है. आधी आबादी महिलाओं की है, लेकिन हम 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देना चाहते हैं. शुरुआत तो यहां से होना चाहिए थी कि 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए. लेकिन 33 प्रतिशत पर भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार रुक गई है. रवांडा का आपने उदाहरण दिया कि अफ्रीका के एक छोटे से देश ने सबसे पहले महिला आरक्षण दिया. हिन्दुस्तान पीछे हो गया. आपने अच्छा उदाहरण दिया. लेकिन आपको उस उदाहरण से समझना था कि आपकी भारतीय जनता पार्टी की सरकार कब आरक्षण देगी. यह बात आप नहीं बता पाए.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, हमारे वरिष्ठ सदस्य भूपेन्द्र सिंह जी ने कहा कि परिसीमन भी होगा, जनगणना भी होगी और आरक्षण भी होगा. कब होगा. आपने कह दिया कि अगले साल होगा. लेकिन केन्द्र सरकार ने तो नहीं कहा है. ठीक है आप अन्तर्यामी हो, हम आपकी बात मान लेते हैं, अच्छी बात है.

          श्री भूपेन्द्र सिंह -- उमंग जी देश में माननीय नरेन्द्र मोदी जी का नेतृत्व है और नरेन्द्र मोदी जी जो संकल्प कर लेते हैं वो संकल्प पूरा होता है. आप इस हाउस में नोट कर लो, मैं रिकार्ड में कह रहा हूँ.  वर्ष 2029 में डि-लिमिटेशन होगा, परिसीमन होगा और महिला आरक्षण के साथ देश की संसद के चुनाव होंगे.        

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, मतलब आपने खुद ने 2029 की बात कह दिया. आप 2029 की बात कर रहे हैं.

          श्री भूपेन्‍द्र सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, 2029 के चुनाव के पूर्व हो जाएगा मतलब 2029 का चुनाव आरक्षण के साथ होगा. लोक सभा में करेंगे.

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं भी 2029 ही कह रहा हूं.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बीच में इंट्रप्‍शन मत करें. यह पुनरावृत्ति हो रही है. एक बार बात आ चुकी है. नेता प्रतिपक्ष को अपनी बात कहने दें.

श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, आपके सदस्‍य खुद कह रहे हैं कि 2029 में होगा. अब लोक सभा की आप बात करते हैं. मध्‍यप्रदेश के रहने वाले हैं मध्‍यप्रदेश की बात नहीं करना चाहते और रही बात आज 2026 है, 2029 का इंतजार क्‍यों करें. क्‍या लोक सभा में विशेष सत्र वापस नहीं आ सकता. क्‍या बिल पास नहीं हो सकता. क्‍यों 2029 की बात कर रहे हैं. क्‍यों सरकार 2047 की बात करती है. क्‍यों महिलाओं को सपने दिखाती है. आज क्‍यों नहीं. अभी क्‍यों नहीं. क्‍यों विशेष सत्र नहीं आ सकता. आ सकता है. हमारी बहन नीना जी कह रही थीं कि ओबीसी को आरक्षण नहीं दिया जा सकता. आरक्षण के अंदर आरक्षण नहीं दिया जा सकता है. आप भी ओबीसी से आती हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- नीना जी से तो आप धार में ही बात कर लिया करें..(हंसी)..

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, संविधान में संशोधन करना पड़ेगा. संविधान में इसका कोई प्रावधान नहीं है.

श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, कई बातें हैं. चुनाव के पहले सरकार की एक योजना आई थी उज्‍ज्‍वला योजना कि गैस की टंकी 450 रुपये में महिलाओं के लिए, हम महिलाओं के सम्‍मान के लिए 450 रुपये में टंकी दे देंगे. गैस की लाइन लग रही है. 45 दिन के अंदर ग्रामीण क्षेत्र के अंदर गैस की टंकियां भरा रही हैं और शहर के अंदर 35 दिन में, तो महिलाओं ने गैस की टंकी छज्‍जे पर रख दी हैं. शुरुआत घर के चूल्‍हे से होती है, तो महिलाओं के सम्‍मान में एक टंकी नहीं मिल पा रही है. कई बातें हैं अब मैं सभी की बात करूंगा तो बहुत लंबी हो जाएगी, लेकिन हिन्‍दुस्‍तान में भारतीय नारी को एक शक्ति के रूप में माना जाता है. कागजों में उनके सामाजिक, आर्थिक विकास की बात करते हैं. सोशल मीडिया का जमाना है. ऑनलाइन जमाना है. परीक्षाओं के फार्म हम ऑनलाइन भरते हैं. आज कल कोई राय भी हम ऑनलाइन लेते हैं. क्‍या केन्‍द्र सरकार ने कभी सोचा कि अगर हिन्‍दुस्‍तान की महिलाओं से अगर आज ऑनलाइन सर्वे कराया जाएगा कि आज आपको आरक्षण चाहिए कि 2029 में आरक्षण चाहिए. मैं जानता हूं कि हिन्‍दुस्‍तान की महिलाएं बोलेंगी कि आज हमको आरक्षण चाहिए. कराएं सर्वे. आम चर्चा करें. आम राय लें महिलाओं से, दर्शक दीर्घा में इतनी सारी महिलाएं बैठी हैं उनसे पूछिए, उनकी अंतर्रात्‍मा से पूछिए.

अध्‍यक्ष महोदय, निश्चित तौर से इस देश का इतिहास रहा है शिक्षा के क्षेत्र में सावित्री बाई फुले, अहिल्‍या बाई, इंदिरा जी, कई महिलाओं ने एक नारी शक्ति के रूप में देश की नींव रखी. निश्चित तौर से नवरात्रि होती है तब देवी को 9 दिन पूजते हैं. ऐसा माना जाता है कि जहां पर देवी होती है वहां पर भगवान होते हैं, देव होते हैं. केरल में तो साक्षात् महिलाओं की पूजा होती है. कई मंदिरों में ऐसी भी कई जगह हैं, मंदिर का नाम भी आपको बता दूं एक गांव है चकलाकोड. किसी ने कहा 56 इंच का सीना. अमेरिका के सामने 56 इंच के सीने ने घुटने टेक दिए.

          अध्यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि अगर आज देश की और प्रदेश की महिलाओं से अगर ईमानदारी से , दलगत भावना से ऊपर उठकर यदि महिलाओं से आन लाईन सर्वे करवाकर के यह बात महिलाओं से पूछी जाये कि आरक्षण आपको 2029 से चाहिये या अभी से  तो महिलायें कहेंगी कि आज से हमको आरक्षण चाहिये, 2029 से नहीं चाहिये, लेकिन यह सरकार ऐसा कार्य नहीं करेगी, आन लाइन सर्वे नहीं करवायेगी क्योंकि आपका जो 2023 का बिल था उसमें यह बात स्पष्ट थी कि परिसीमन और जनगणना के बाद में हम इस आरक्षण को लागू करेंगे तो यह बिल आपकी सरकार लाई थी, 2023 में और उस समय कांग्रेस की सरकार ने उस बिल का पूरा समर्थन किया था, वह बिल पास हुआ और आपके राष्ट्रपति और आपके प्रधानमंत्री सहमत थे, हम भी सहमत थे लेकिन आज आप राष्ट्रपति जी की बात नहीं करना चाहते हो, न आप प्रधानमंत्री जी की बात करना चाहते हो, उन्होंने ही बिल को पास करवाया था और उसमें कांग्रेस ने आपका पूरा साथ दिया था. आज क्या आवश्यकता पड़ी इस बिल को बदलने की, क्यों आपको परिसीमन को इसमें जोड़ना पड़ा, क्यों तीनों बिल को एक साथ जोड़ दिया गया. यह सोचनीय बात है.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, इस बिल से यदि परिसीमन-जनगणना को हटा दिया जाये तो क्या आज महिला आरक्षण का बिल देश में पास नहीं हो सकता है ? बिल्कुल हो सकता है लेकिन इसके लिये राजनैतिक कुटिल चाल से आपको ऊपर उठना होगा, अगर देश की महिलाओं को सम्मान देना है तो क्योंकि यहां पर कांग्रेस - बीजेपी नहीं चलेगा, जहां पर महिलाओं के सम्मान की बात होगी, लेकिन मैं समझता हूं कि भारतीय जनता पार्टी सिर्फ परिसीमन देखना चाहती है कि हम कैसे सरकार में वापस में आयें, क्योंकि इनकी सीटें घटकर के 240 हो गई हैं, इनको डर है कि कहीं सीटें और कम न हो जायें, हम सत्ता से बाहर न हो जायें.

          अध्यक्ष महोदय यह सिर्फ आरक्षण के नाम पर महिलाओं को सीढ़ी बनाकर के सत्ता में आना चाहते हैं, अगर महिलाओं के प्रति इनकी कथनी और करनी में अंतर नहीं है तो मै मुख्यमंत्री जी से कहना चाहूंगा कि आप प्रधान मंत्री जी से चर्चा करें, आपकी सरकार से चर्चा करें और चर्चा करके फिर से दिल्ली में विशेष सत्र लोकसभा का बुलायें और सिर्फ उसमें महिला आरक्षण की बात हो, कौन मना करेगा. सब सहमत हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, आजकल सोशल मीडिया में सिविक्स सेंस (Civic Sense) या नागरिक की भावना आज के समय में बहुत ही चर्चा का विषय है, और यह चर्चा भारत जैसे विकासशील देश में बेहद प्रासंगिक है। सिविक्स सेंस का अर्थ है- समाज और सार्वजनिक स्थानों के प्रति जिम्मेदारियों और कर्तव्यों को समझना यह केवल साक्षरता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में व्यवहार करने की समझ, सार्वजनिक रूप से वह कैसा व्यवहार करते हैं. निश्चित तौर से राजनैतिक दलों का भी एक सिविक्स सेंस होना चाहिये. संविधान का सम्मान करना, लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करना और जनता के मुद्दों पर संवेदनशील रूप से अपनी बात करना, लेकिन यह डबल इंजन की सरकार में सिविक्स सेंस खत्म हो गया है. नागरिक की भावना यह सरकार नहीं सुनना चाहती है. नागरिक के जज्बात और उनके अधिकार की बात यह सरकार नहीं करना चाहती है. सिर्फ अपनी मनमानी करना चाहती है, इससे कैसे देश चलेगा.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यह भी कह सकता हूं कि मेरी राजनीति की शुरूवात मेरी प्रेरणा किसी किताब या कालेज से नहीं हुई है. एक ऐसी महिला से मेरी राजनीति की शुरूवात हुई है जो आज इस दुनियां में नहीं है लेकिन महिला आरक्षण को लेकर के वह भी बहुत सोचती थीं. यह आंकड़ों की बात नहीं है, कानून की नजर की बात नहीं है, वाद विवाद की भी बात नहीं है, आरोप प्रत्यारोप की भी बात नहीं है, मेरी राजनीति की शुरूवात किसी  पाठशाला से नही हुई, किसी विश्वविद्यालय से नहीं हुई है. स्वर्गीय जमुना देवी जी, मेरी बुआजी थी उनसे मैंने सीखा है कि सामाजिक क्षेत्र के अंदर, सामाजिक जीवन के अदंर किस प्रकार से लोगों के लिये काम करना, दिल से काम करना, लोगों की भावना के हिसाब से काम करना.जैसा कि भाई बाला बच्चन जी ने कहा कि बुआ जी आदिवासी वर्ग से थीं और इस प्रदेश की उप मुख्यमंत्री बनी. संघर्ष उनके जीवन का जीवित मिसाल रहा है, जब वह कभी किस्सा मुझे सुनाती थी तो बताती थीं कि 1952 में उन्होंने पहला चुनाव लड़ा था, उस समय धार और झाबुआ लोकसभा संसदीय क्षेत्र था, वह बताती थीं कि मात्र 165 रूपये में उन्होंने लोकसभा चुनाव में प्रचार पर खर्चा किया था. वह उस समय अकेली चलती थीं, तत्समय कोई साधन नहीं थे, 20 से 25 किलोमीटर वह रोज पैदल चलकर के प्रचार करती थीं, उनके साथ में तीर कमान वाले कुछ आदिवासी साथ में चला करते थे. एक झोपड़ी में सोती थी.  रात को  बोले मैं पेटी कोट और ब्लाउज में सोती थी,  पूरे रात को मैं  साड़ी को धोती थी, वापस में सुबह पहनती थी.  मेरे आस पास  पूरी सुरक्षा में लोग  रहते थे.  झिराड़ों  का पानी   पीती थी, उस समय मिनरल वाटर  नहीं था.  यह महिलाओं का संघर्ष है.  इस प्रदेश  के अन्दर और  देश के अन्दर इंदिरा जी ने  किया.  मैं समझता हूं कि निश्चित तौर से  हर   महिला    की एक भावना है सम्मान की.   मैं समझता हूं कि जिस प्रकार की  कहानी भाजपा  की  सरकार केंद्र की  समझा रही है,  एक घर  में एक बेटी से कहा गया कि  तुम्हारे लिये एक कमरा  बनेगा.  यह तुम्हारा अधिकार है.  बेटी बड़ी खुश हुई.  उसे लगा कि मुझे मेरा कमरा  मिलेगा,  उसे हक मिलेगा.  घरवालों ने शर्त जोड़ दी  कि  जब नया घर बनेगा,   तुम्हारा कमरा भी वहीं मिलेगा. यह  अधिकारों का वादा  कि  घर के अंदर  उस बेटी के साथ किया गया.  लेकिन   घर की अनिश्चितता थी,  घर कब बनेगा. ऐसे ही वादा  भाजपा की सरकार ने कर  दिया महिलाओं के साथ कि   आपको महिला आरक्षण मिलेगा.  जैसे उस बेटी   को कमरा नहीं मिल पाया घर के अंदर,  ऐसे लगता है कि  महिला आरक्षण  इस देश की महिलाओं को नहीं मिल पायेगा.   निश्चित तौर से जनसंख्या  48-50 प्रतिशत है,  हमारे शर्मा जी बात कर  रहे  थे नेहरु जी की.  1927 में साइमन कमीशन के बहिष्कार  के बाद  ब्रिटिश सेक्रेटरी  ऑफ स्टेट लॉर्ड बर्कनहेड ने  भारतीयों को चुनौती दी थी  नेताओं को  कि अगर दम है, तो  खुद अपना संविधान बनाओ.  इस चुनौती से  1928  में सर्वदलीय सम्मेलन हुआ  और मोतीलाल  नेहरु जी  अध्यक्ष  एवं 10 सदस्यीय समिति बनी.  नेहरु जी ने रिपोर्ट तैयार की.  नेहरु जी ने उस समय रिपोर्ट में  कहा कि  देश के अंदर महिलाओं को  समानता  मिलना चाहिये,  उनको अधिकार मिलना चाहिये,  यह वहां से नींव रखी गई  महिलाओं के लिये.  यह इतिहास है, प्रमाण है.  इसको झुठलाया नहीं जा सकता.   निश्चित तौर से यह रिपोर्ट  1928  की क्रांतिकारी  एक महिलाओं  के समानता   के अधिकारों की लड़ाई  के लिये देश के अंदर एक नींव  के पत्थर के रुप में शुरुआत हुई.  कई अधिकार, 21 वर्ष  वोटिंग का अधिकार,  19 मौलिक अधिकारों को लेकर के  इस पर चर्चा हुई और वही  आज पूरे  देश   के अंदर लागू है.  लेकिन मैं सझता हूं कि इतिहास की शुरुआत  किसने की,  इतिहास   के  अगर पन्नों    में  आप   नाम लिखाना चाहते हैं, तो  आज आपको इतिहास बनाना पड़ेगा.  भाजपा ने  लोकसभा में इतिहास बनाने से  चूक कर दी.  यह चूक हमेशा  इतिहास के पन्नों में लिखी जायेगी कि सिर्फ अपनी नीयत के कारण  देश  की महिलाओं को आरक्षण नहीं दे  पायी यह भाजपा.  सदस्यों ने कई बातें कही,  मैं उन बातों पर  नहीं जाना चाहता हूं कि राजीव जी ने पंचायती राज  में किस प्रकार से आरक्षण दिया.  कुछ एक दो किस्से हैं,  जो मैं  महिलाओं के सम्मान की बात   बार बार हो रही है, वह बताना चाहता हूं. पहले सम्मान तो मिल जाये.  आरक्षण तो दूर की बात है.  इंदौर विकास प्राधिकरण  में  90 साल की एक बुजुर्ग  महिला  पिछले 20-25 साल से  अपने प्लाट के लिये संघर्ष  कर रही है. कोर्ट ने आदेश कर दिये.  90 साल की महिला  गीता बाई, इंदौर निवासी प्राधिकरण ने संकल्प  पारित किया 26.2.2010 को, प्लाट के मुआवजे का, लेकिन आज तक उसको नहीं मिला.  यह महिला सम्मान है. 

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, भोपाल के अंदर एक महिला हाकी खिलाड़ी खूशबू खान है, उसने वर्ष 2018 में यूथ ओलंपिक में भाग लिया था. उस समय सरकार ने वादा किया था कि आपको प्रधान मंत्री आवास देंगे, यह उसका प्रमाण पत्र है. यदि आप कहेंगे तो पटल पर रख दूंगा. वर्ष 2018 से 2026 हो गया लेकिन आज तक उसको आवास नहीं मिला. वह बच्‍ची झोपड़ पट्टी में रहती है, ओलंपिक खेली लड़की. क्‍या यह महिला सम्‍मान है ? उसके घर में कभी भी नोटिस चला जाता है कि जेसीबी से हम आपका घर तोड़ देंगे. वह हाथपैर जोड़ती है उसके पिताजी आटो चलाते हैं. क्‍या यह महिला सम्‍मान है उसको कब मिलेगा प्रधान मंत्री आवास ? वह प्रधान मंत्री आवास मांग रही है, कोई करोड़ों का घर नहीं मांग रही है, वह सिर्फ छोटा सा आवास मां रही है. आप उसको 9 साल में नहीं दे पाये.

          अध्‍यक्ष महोदय, बाला भाई ने कहा कि प्रदेश के अंदर कई बच्‍ची, महिलाएं लापता. साढ़े चार साल के अंदर 59 हजार 365 लापता हुई हैं. यह बाला भाई का प्रश्‍न था. उन्‍होंने बिल्कुल सही कहा कि हम प्रश्‍न लगाते हैं लेकिन जवाब नहीं आते हैं. यह हमारी बात नहीं है, यह 59 हजार उन परिवारों की बात है जो अपनी बहन और अपनी बेटी के लिये बार-बार उस थाने में चक्‍कर लगाते हैं कि हमारी बेटी मिल जाये. पुलिस वाले के सामने, थाने के सामने बैठे रहते हैं. आप उन परिवारों की भावनाएं समझ सकते हैं. क्‍या यह सरकार का फर्ज नहीं है कि जो 59 हजार बच्चियां लापता है उनको मिलना चाहिये. इस पर सरकार कार्यवाही नहीं करना चाहती है. सरकार जनप्रतिनिधियों की बात का जवाब नहीं देना चाहती है, सरकार इतनी निरंकुश. महिलाओं के सम्‍मान की बात, नारी शक्ति की बात, यह कोई छोटा आंकड़ा नहीं है 59 हजार का आंकड़ा है.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी ताबड़तोड़ फोटो आये सोशल मीडिया में महिला आयोग को लेकर के, पर मामला रूक गया. इससें स्‍पष्‍ट है कि सरकार महिला आयोग में इतने साल से पद खाली पड़ा है, इतनी सारी शिकायतें पड़ी हैं उस पर भी महिला नहीं बैठाना चाहती है. सरकार महिलाओं को भूल जाती है. आप उमा भारती जी को भूल गये, वसुंधरा राजे जी को भूल गये राजस्‍थान के अंदर, भजनलाल जी बन गये. आप कुसुम मेहदले जी को भूल गये, आप यहां पर कई महिलाएं बैठी हैं उनको भी भूल जायेंगे. यहां पर सत्‍ता पक्ष की जितनी भी महिलाएं बैठी हैं, मैं आपसे एक अनुरोध करना चाहता हूं, निवेदन करना चाहता हूं कि आप सभी नारी शक्ति की बात कर रही थीं. मैं आप सभी को झांसी की रानी मानता हूं. लेकिन आप अपने दल की ओर से आवाज उठायें कि हमको 33 प्रतिशत आज मिलना चाहिये. आज लोक सभा का सत्र होना चाहिये.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कई बार, कई घटनाएं होती हैं, वर्ष 2017-18 से सहकारी साख समितियों के चुनाव नहीं हुए हैं. समिति के 11 पदों में से 1 पद महिला को दिया जाता है. क्‍या सरकार उसके अंदर 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं दे सकती है. चुनाव क्‍यों नहीं करवा रहे हैं, क्‍या डर है. आप आम जनता को अधिकार नहीं देना चाहते हैं. आप आम जनप्रतिनिधियों की आवाज नहीं सुनना चाहते हैं. 1 प्रतिशत कोटा तो एक महिला. आप यहां 33 प्रतिशत आरक्षण की बात कर रहे हो. पहले आप खुद अपने गिरेबां में झांक कर के तो देखो. आप कल केबिनेट करें और कल ही पास करें.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2010 जब यह बिल आया तो राज्‍य सभा में पास हुआ, लोक सभा में गिरा. योगी आदित्‍यनाथ जी, उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍य मंत्री उन्‍होंने क्‍या- क्‍या बोला मैं अपनी जबान से बोलूंगा तो गलत हो जायेगा. चैनलों में आया और पेपरों में छपा. मैं उसके कुछ अंश बताना चाहता हॅूं कि उन्‍होंने कहा था कि हमारे दल के अंदर ही देने की सहमति नहीं है. यह मीडिया में छपा था. यह उनके वीडियो भी हैं. आप कहेंगे, तो मैं वीडियो भी दे दूंगा और जब आपके प्रदेश के एक मुख्‍यमंत्री यदि इस प्रकार के शब्‍द का उपयोग करते हैं, तो समझ में आता है कि भारतीय जनता पार्टी महिलाओं को सम्‍मान नहीं दे सकती है. यह स्‍पष्‍ट है. यहां तक कि उन्‍होंने एक बात कही थी कि संसद के अंदर अगर किसी महिला को आना है तो अपनी क्षमता पर आना पडे़गा. यहां किसी कोटे से कोई नहीं आ सकतीं, यह भी कहा था. इनके गिरेबां के अंदर ही ऐेसे लोग हैं, जो नहीं चाहते हैं. अगर चाहते, तो आरएसएस का प्रमुख सर संघसंचालक महिला होती. क्‍यों अभी तक एक महिला सर संघसंचालक नहीं बन पायी.(मेजों की थपथपाहट) महिलाओं का कहां सम्‍मान है ? आप अपने घर से शुरूआत करिए. निश्‍चित तौर से राहुल जी ने, प्रियंका जी ने प्रदेश......

          संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्‍यक्ष महोदय जी, क्षमा करें. मैं बोल नहीं रहा था. बोलना भी नहीं चाहता था. संघ में राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेविका समिति एक अलग होती है जो महिलाओं की समिति है और उसकी प्रमुख महिला ही रहती है. शायद इनको नॉलेज कम है. इसलिए संघ के मोहन जी हैं और महिला राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक समिति की अध्‍यक्ष महिला ही है. आपको अगर सामान्‍य ज्ञान नहीं है, तो मैं दे रहा हॅूं. आप ले लीजिए.

          सुश्री उषा बाबूसिंह ठाकुर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, जैसे राष्‍ट्रीय स्‍वयं सेवक संघ है, उसी तरह बहनों की राष्‍ट्रीय विकास समिति है और उसकी जो प्रमुख संचालिका हैं वह हमारी माननीय शांता अक्‍का जी हैं. उनका भी मुख्‍यालय नागपुर ही है.(मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय -- यह सदन ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए है. एक-दूसरे का ज्ञानावर्धन करते रहना चाहिए.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय जी, आपने सुबह बड़े अच्‍छे शब्‍द का उपयोग किया था. बुद्धि विलास.

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आरएसएस को लेकर इन्‍हें इतनी मिर्ची क्‍यों लगती है ? मैंने आरएसएस के लिए कोई अपशब्‍द तो नहीं बोला है.

          श्री रामेश्‍वर शर्मा -- इधर नहीं, उधर लगती है. जैसे ही आता है, तो उधर मिर्ची लग जाती है. इधर नहीं लगती है और इसलिए यदि संघ को समझना है, तो संघ के पास आइए....(व्‍यवधान)...

          श्री उमंग सिंघार -- अगर यह सदन जानना चाहता है, तो मैं यह भी जवाबदारी से कहना चाहता हॅूं कि हर सोसायटी हर कंपनी, हर फर्म का रजिस्‍ट्रेशन होता है. कानून के हिसाब से आरएसएस का आज तक रजिस्‍ट्रेशन क्‍यों नहीं है ? आप बताएं. संविधान की बात हो रही है....(व्‍यवधान)...

          श्री उमाकांत शर्मा -- आपके यहां सिर्फ चुनाव होता है..(व्‍यवधान). ..आप जानकारी तो लीजिए पहले....(व्‍यवधान)...

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, संविधान की बात हो रही है...(व्‍यवधान)...

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, इस पर आप चाहें, तो हम बहस करने के लिए तैयार हैं, पर विषय आज यह नहीं है. हम इस पर भी बहस करने के लिए तैयार हैं...(व्‍यवधान)...

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष जी, महिला आरक्षण पर बात कर लीजिए...(व्‍यवधान)..

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, हम इस पर भी बुद्धि विलास कर सकते हैं...(व्‍यवधान)...अगर समय हो, यह विषय हो, तो बहस कर लेंगे...(व्‍यवधान)..

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, आप जिस दिन कहेंगे, हम इस पर बहस कर लेंगे..(व्‍यवधान)...

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय, हम तैयार हैं. हम पीछे नहीं हटेंगे....(व्‍यवधान)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- उमंग जी, आप विषय पर रहें. रामेश्‍वर जी, विषय पर रहें. विषयांतर मत कीजिए. कृपया, आप सभी बैठिए. (श्री रामेश्‍वर शर्मा एवं श्री सोहनलाल बाल्‍मीक, सदस्‍य के अपने आसन से खडे़ होकर कुछ कहने पर) ...(व्‍यवधान)....पंडित जी, कृपया बैठिए. (श्री उमाकांत शर्मा, सदस्‍य के खडे़ होकर कुछ कहने पर)....(व्‍यवधान)...माननीय उमंग जी, आप अपनी बात पूरी करें.

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्रिमंडल के अंदर 31 मंत्री हैं. उसके अंदर 33 प्रतिशत आरक्षण क्‍यों नहीं है ? क्‍यों उसमें 9 महिलाएं नहीं है ? केवल 5 महिलाएं क्‍यों हैं. (मेजों की थपथपाहट) अब महिलाओं को पहले आरक्षण मिलेगा या रामेश्‍वर शर्मा जी को मिलेगा. अब यह बताएं और बार-बार एक आरोप लगाया जा रहा है कि कांग्रेस विरोध कर रही है. कांग्रेस ने वर्ष 2017 में भी माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी को पत्र लिखा.

          सोनिया जी ने भी लिखा, राहुल गांधी जी ने भी 2018 में मोदी जी को पत्र लिखा. आप चाहें तो इसको मैं पटल पर रखूं. लेकिन 2023 में यह संशोधित बिल आया. संशोधन में स्पष्ट था कि परिसीमन के बाद, जनगणना के बाद लागू होगा. सरकार ने उसमें कर दिया कि सिर्फ परिसीमन महिला आरक्षण. अध्यक्ष महोदय, मैं मानता हूं कि 2020 में कोविड था 2 साल तक देश के हालात खराब थे. लेकिन 2023 से लेकर 2026 तक आपकी सरकार ने क्यों नहीं इसमें जनगणना करायी, परिसीमन कराया क्यों नहीं ? अगर कराते तो आज से ही महिला आरक्षण चालू हो जाता, नहीं करा पायी. यह कथनी और करनी में फर्क है. मैं बार बार कहूंगा. अगर आपके इतने मंत्री हैं, आपके इतने मुख्यमंत्री जी हैं, आपकी इतने प्रदेशों में सरकार है. तो आप लोग मोदी जी को बोलें कि बुलाये विशेष सत्र उसमें सिर्फ महिला आरक्षण की बात करें. कौन सी पार्टी ना करेगी, यह बतायें सब आप तैयार रहेंगे तो मैं जवाबदारी के साथ इस मंच पर कहना चाहता हूं. निश्चित तौर से कभी कभी लगता है कि पार्टी को अपना एजेण्डा चलाने के लिये विशेष सत्र बुलाना पड़ता है. प्रदेश के अंदर कई मासूम बच्चे मर गये तो कभी विशेष सत्र नहीं हुआ, दूषित पानी से भागीरथपुरा में कई नागरिकों की मौत हो गई, तो विशेष सत्र नहीं हुआ, किसान प्रदेश में आत्महत्या कर रहे हैं, तो भी कभी विशेष सत्र नहीं हुआ ? बेरोजगार धरना, प्रदर्शन कर रहे हैं, कभी विशेष सत्र नहीं हुआ. अतिथि शिक्षक अपने अधिकारों के लिये प्रदर्शन कर रहे हैं, लखपति बहनें अपने अधिकारों के लिये सड़कों पर घूम रही हैं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संघर्ष कर रहे हैं, टीचर्स धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, उनके लिये विशेष सत्र नहीं हुआ, किसी के लिये भी विशेष सत्र नहीं हुआ. पार्टी के एजेण्डे के लिये सिर्फ निन्दा के लिये, विरोध करने के लिये आपको विशेष सत्र बुलाना है, यह कैसा न्याय है प्रदेश की जनता के साथ ? कैसा अधिकार है ? 27 प्रतिशत आरक्षण ओबीसी को लेकर विशेष सत्र क्यों नहीं ? उसमें भी बुलाना चाहिये. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं समझता हूं कि इन सब बातों की बजाय सरकार को सत्रों पर विश्वास है तो विशेष सत्र बुलाना है, उसका निष्कर्ष निकलना चाहिये. सिर्फ आलोचनाओं से काम नहीं चलेगा माननीय अध्यक्ष महोदय. मैं समझता हूं कि कई आंकड़े गिनाने से कोई मतलब नहीं है कि कई मेरे पूर्व सदस्यगण ने बोल दिया है. लेकिन मैं इतना जरूर कहना चाहता हूं कि अगर नियत साफ है, अगर मनोवादी सोच नहीं है तो ओबीसी के लिये सोचना चाहिये, उनके आरक्षण की बात के लिये सोचना चाहिये. चाहे प्रदेश में हो, चाहे देश के अंदर हो, यह भी इसमें बात होनी चाहिये. मैं समझता हूं कि माननीय मुख्यमंत्री जी अगला कोई मुख्यमंत्री कोई बनाएंगे तो एक महिला जरूर बनाएंगे. मेरी बात का जवाब होना चाहिये कि 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिये रहेगा कि नहीं ? आपकी दिल्ली की बात तो दूर है पहले मध्यप्रदेश के आपके केबिनेट की बात कर लेना, बता देना इस पूरे प्रदेश को, इस सदन को 33 प्रतिशत आप महिलाओं को आरक्षण देना चाहते हो कि नहीं ? यह महिलाएं जो यहां पर बैठीं हैं इनमें से ही कई मंत्री बनेंगी. आपका ही सम्मान करेंगी, हम भी इनका सम्मान करेंगे. अध्यक्ष महोदय मैं समझता हूं कि बातें बहुत हैं लेकिन अगर नियत साफ है, दिल साफ है, अगर करनी है ईमानदारी से हम सबको मिलकर के महिला आरक्षण को लेकर 33 प्रतिशत आज की बात होना चाहिये और आज ही प्रस्ताव पारित होना चाहिये. न कि परिसीमन और जनगणना को लेकर बात होनी चाहिये. माननीय अध्यक्ष महोदय आपने बोलने का मौका दिया आपको धन्यवाद.                                                       

अध्‍यक्ष महोदय माननीय मुख्‍यमंत्री जी.

मुख्‍यमंत्री (डॉ. मोहन यादव)   माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कांग्रेस की तरफ से आज इस महत्‍वपूर्ण संकल्‍प को लेकर के जिस प्रकार से अपनी बात रखी है. सच में मैं आज प्रदेश की ओर से, करोड़ों करोड़ आशाओं, आकाक्षाओं के केन्‍द्र इस गरिमामय सदन को कोटिश: प्रणाम करके अपनी बात प्रारंभ करना चाहता हूं. हमारे लिए माता बहनों के लिए जो सम्‍मान है, वह सदैव आदिकाल से उस भावना के अनुरूप है जिसके कारण से हमारे अपने सनातन संस्‍कृति की धारा के बलबूते पर, अगर हमारे मुंह से शब्‍द भी निकले तो मां सरस्‍वती को धन्‍यवाद करके निकलता है कि मां की कृपा हमारे ऊपर बनी हुई है. हमारे  लिए परमात्‍मा की कृपा से, घर के अंदर भी दिवाली का आनंद भी मनता है, तो हम महालक्ष्‍मी का आशीर्वाद मानते हैं. हमारे लिए सौभाग्‍य की बात है, अगर शस्‍त्र उठाना पड़े तो मां जगदंबा का आशीर्वाद लेकर विजयी यात्रा प्रारंभ करने के लिए संस्‍कृति हमें आशीर्वाद देती है हम उस गौरवशाली संस्‍कृति के लोग है. जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो नेता प्रतिपक्ष की तरफ मैं बड़े गौर से देख रहा था और मैं सोच रहा था कि नेता प्रतिपक्ष ने बुआ जी के बारे में बहुत अच्‍छे से बात कही. मैं बुआ जी का वह कष्‍ट भी समझ रहा था कि वह एक साड़ी को धोकर के और बाकी के वस्‍त्र से रात गुजारती है, अब मैं यह सोच रहा था बार बार की सरकार किसकी थी भैया ये तो बताओ नेता प्रतिपक्ष जी ये कांग्रेस को माफी मांगना  चाहिए आपके ऊपर ये जो जुल्‍म ढहाया है, ये जुल्‍म का जवाबदार कौन है, दरवाजे बंद करके पूछते हो हुनर उनका, कैसे दिखाए कि जब रास्‍ता ही नहीं मिला. ये कांग्रेस के जमाने के हाल थे, उस दौर के अंदर कांग्रेस ने बताया. कहां से चालू की मोतीलाल नेहरू, हमको तो याद ही नहीं था, धन्‍यवाद प्रियंका गांधी जी, आपके परनाना को आपने याद किया. वर्ष 1928, 1931 जब कांग्रेस ने महिला सशक्तिकरण की बात कही, महिला समानता की बात की, महिला आरक्षण की बात की तो भैया जब वर्ष 1947 में देश आजाद हो गया, 55 साल तक सरकार आपकी रही तो क्‍या  (xx) पीकर सो रहे थे, मैं जरा माफी मांगते हुए बात कहना चाहता हूं.

श्री उमंग सिंघार (नेता प्रतिपक्ष) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, (xx)  के सो रहे थे ये क्‍या संसदीय भाषा है, ये उज्‍जैन वाले भी ऐसी बात नहीं करते है. इसको विलोपित किया जाना चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय इसको विलोपित कर दें.

डॉ. मोहन यादव आप कहो तो संशोधित कर देता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय - मुख्‍यमंत्री जी, नेता प्रतिपक्ष हमेशा सोचते रहते हैं कि मुख्‍यमंत्री जी कम से कम गौर से देखें, आज आपने उनको गौर से देखा तो वह बहुत प्रसन्‍न है. (..हंसी)

श्री उमंग सिंघार मैं यह उम्‍मीद नहीं करता कि वे (xx) देखे.

डॉ. मोहन  यादव हम अभी इसको यही छोड़कर आगे की चर्चा के लिए बढ़ते हैं. अध्‍यक्ष महोदय, सच में आज का यह सत्र दोनों पक्ष की तरफ से धन्‍यवाद के साथ कि बहुत अच्‍छी बात है कि हमने इस सत्र में अपने अपनी ढंग से बात की. इस विषय को बढ़ाने के लिए मैं सच में मैं अपने प्रदेशा की साढ़े आठ करोड़ जनता में से आधी आबादी के लिए, मैं उनके स्‍नेही भाई के नाते, से आज अपने दल की तरफ से आप उपस्थित हुआ. मैं आप सभी का भी धन्‍यवाद करता हूं. सच में हमारी संस्‍कृति में परमात्‍मा की दया से, हम तो कदम कदम पर भगवान श्रीराम के उस उद्घोष के साथ कि जननी जन्‍म भूमिश्‍च, स्‍वर्गादपि गरियसी, हमने अपनी  वसुंधरा के साथ भी हमने अपने देश के साथ भी मातृसत्‍ता के साथ संबंध जोड़ने की सनातन संस्‍कृति के समय से जो भावना कायम रखी वाकई सच में हम अपने परिवार की तरफ देखते हैं तो हमारे लिए तो कदम कदम पर, आज हम अपनी बात करें, तो सच में जितने प्रकार से कांग्रेस यह बात कर रही है तो मुझे लगता है कि एक बहुत अच्‍छा शेर है :-

        तू इधर उधर की बात न कर, ये बता काफिला लुटा क्‍यों है. 

कांग्रेस के शासन काल में, कांग्रेस ने ही वर्ष 1928 में यह बात रखी, कांग्रेस ने ही 1972 में संशोधन लाकर के अब आप बताइए अध्‍यक्ष जी कितना विसंगतिपूर्ण व्‍यवहार है. एक तरफ तत्‍कालीन प्रधानमंत्री जो इस बात का निर्णय लेकर जाती है कि 525 लोकसभा की सीट में केवल 20 प्‍लस करके हम 545 करेंगे और 42 वां संविधान संशोधन करके, वह इस बात को ब्रेक कर देती है कि अब कोई सीट नहीं बढ़ाएगा. परिसीमन के माध्‍यम से ये कौन ला रहा है नियम, ये कौन संशोधन ला रहा है.

जरा हमारे कांग्रेस के मित्रगण बतायें कि आपातकाल के समय यह संविधान संशोधन लाने का पाप किसने किया है? मैं जवाबदारी के साथ कहना चाहूंगा कि यह कांग्रेस का पाप है कि हमने अपनी बहनों के साथ अन्‍याय करते हुए इस भावना के आधार पर उनको वहां रोकने का प्रयास किया है, अब आप बताईये अध्‍यक्ष जी अगर संविधान संशोधन में परिसीमन के बलबूते पर वर्ष 1972 में प्रति लोकसभा 10 लाख की आबादी थी, आज विधानसभाओं के साथ लोकसभाओं के दरमियान तत्‍कालीन आबादी से लेकर आधी आबादी तक का उनका गला घोंटकर उनका अधिकार रोकने का काम किसने किया है? आज 33 प्रतिशत आरक्षण की बात करते, ज्‍यादा अच्‍छा होता कि आप माफी मांगते कि 50 साल पहले हम बहनों का 33 आरक्षण दे देते, तो आज डबल की बात आप हम और सब मिलकर करते, यह पाप कांग्रेस के समय हुआ है, तब आपने वर्ष 1972 का लेकर के संविधान संशोधन कर दिया, अब संविधान संशोधन के बल बूते पर ही तो आज हम बात कर रहे हैं कि भाई यह संविधान संशोधन के लिये माननीय प्रधानमंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहूंगा, जिन्‍होंने बड़े विनम्रता के साथ कहा है कि भाई श्रेय की बात नहीं है, श्रेय आप ले लेना, विज्ञापन छपवा देंगे, हमारे को कोई श्रेय नहीं चाहिए, लेकिन यह देश की आधी आबादी का प्रश्‍न है. आप इस बात को  सहमत हो जाये क्‍योंकि हमारे पास वह मेजोरिटी नहीं है, वह मेजोरिटी आपके पास है और मेजोरिटी आपके पास कब तक थी? वह मेजोरिटी वर्ष 1984 में भी आपके पास थी, मैं अभी उस पर बाद में बात करूंगा, लेकिन सच में मैं जब इस तरफ से देखता हूं कि नकारात्‍मक प्रवृत्ति की कोई हद तो होगी? क्‍या कमाल करते हैं कांग्रेस के मित्र, जब पक्ष में हो तब भी परिसीमन का विरोध, विपक्ष में हो तो भी परिसीमन का विरोध, मुझे यह समझ में नहीं आता है कि यह चाहते क्‍या हैं? यह किधर ले जाना चाहते हैं, आप आखिरकार उनकी आबादी का उनको हक क्‍यों नहीं दिलवाना चाहते हो? यह आपकी ही गलती है, हमारी गलती थोड़ी है. अगर दो तिहाई बहुमत के साथ आज अगर सदन में होते तो, हम आपकी तरफ देखकर यह बात नहीं करते कि आओ मिलकर के बात कर लो, आप आओ जैसा चाहो, वैसा हम आपके साथ खड़े हैं, यह चूंकि शुरूआत से ही अगर मैं देखता हूं तो वाकई में कांग्रेसी जितनी जल्‍दी-जल्‍दी रंग बदलते हैं कि गिरगिट भी शरमा जाता है, आप कैसी बात करते हैं.

नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- अब गिरगिट की तरह तो इन्‍होंने रंग बदल दिया है. मैंने मेरे भाषण में यह कहा था कि सिर्फ अगर महिला आरक्षण का बिल आये तो पूरी कांग्रेस पार्टी साथ देने के लिये खड़ी है. आप वहां दिल्‍ली में विशेष सत्र बुलायें.

डॉ. मोहन यादव -- अध्‍यक्ष महोदय, जरा नेता प्रतिपक्ष थोड़ा पानी पी लें, थोड़ा शांति से सोच लें, समझ लें, हमने कहा कि भईया बगैर संविधान संशोधन के कोई भी  इस परिसीमन के साथ इस आरक्षण को पारित नहीं कर सकता है, यह संवैधानिक बाध्‍यता है, अब यह संवैधानिक बाध्‍यता में स्‍वाभाविक रूप से अगर मैं यह बात कर रहा हूं,  एक तरफ आप दिल्‍ली में कहते हैं कि परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, तो जब पक्ष में थे, तब भी विरोध करके आपने उसको सीज कर दिया, अब जब खोलने की बात कर रहे हैं, तो फिर आप विरोध कर रहो हो, आप आखिर चाहते क्‍या हो? अगर हम यह कह रहे हैं कि आरक्षण का हम समर्थन कर रहे हैं और आप भी समर्थन कर रहो हो, तो आप आओ संविधान संशोधन करा दो, आपकी हमारी  दोनों की बात रह जायेगी और आधी आबादी के साथ हम खड़े दिखाई देंगे.

श्री उमंग सिंघार -- तो आप मोदी जी की तरफ से गांरटी दे रहो हो कि अगला महिला आरक्षण बिल  लोकसभा में आयेगा, मैं अपनी पार्टी की तरफ से जवाबदारी ले रहा हूं.

डॉ. मोहन यादव -- अरे जरा आप पूछ लो भईया जल्‍दी मत करो, आप यहां बोल रहे हो, वहां बोलती बंद हो जायेगी, मैं दोबारा बोल रहा हूं, यह वहां बोलना पड़ेगा, जहां बोलना है, डॉ. सीतासरन शर्मा जी ने सही बोला था कि यह संविधान संशोधन का मामला है, अभी हम यह समझ ही नहीं पा रहे हैं कि हम किधर जा रहे हैं, हमने आपकी तरफ से गारंटी दे दी, मैं पचास प्रतिशत, तैतीस प्रतिशत आरक्षण दूंगा, अरे ओमकार सिंह मरकाम जी जरा अपनी दिल्‍ली से पूछो वह क्‍या कह रहे हैं? जो नेता जी बोलकर खड़ी हुई थीं, उनकी नानी ने भी उस समय न किया था, प्रियंका जी की वह नानी है, उनके पापा ने तीन तलाक के मामले में भी (श्री ओमकार सिंह मरकाम, सदस्‍य द्वारा आसन से कहने पर) अरे जरा ठहरो आप, हमने आपकी बात शांति से सुनी थी.

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- आप दे दो, हम दे दें.

अध्‍यक्ष महोदय -- (श्री ओमकार सिंह मरकाम, सदस्‍य द्वारा आसन से कहने पर) ओमकार सिंह आपने अपनी बात रख चुके हैं, अब मुख्‍यमंत्री जी जवाब दे रहे हैं, जरा शांति से सुनिये.

            डॉ.मोहन यादव -- श्री ओमकार सिंह मरकाम जी आप शांति से सुनो तो आपको ध्‍यान में आयेगा, अब आप बताओ अगर यह 17 अप्रैल, 2026 का संशोधन विधेयक नहीं गिरता, तो यह वास्‍तव में आज की स्थिति में बहनों की संख्‍या अगर इसी आंकड़े से देखें तो 543 से बढ़कर के 850 हो जाती, यह जो 33 प्रतिशत का हक उनका मारा गया है, तो इस हक मारे जाने में कांग्रेस, समाजवादी, टीएमसी, डीएमके सारे के सारे पाप में भागीदार हैं और इसीलिये अब आप अपनी तरफ से बात कुछ भी करो सच में यह जो ग्‍लास सीलिंग तोड़ने के लिये जो जरूरी मौका था वह मौका सच में कांग्रेस ने गंवा दिया. अभी आप देखो आज लोकसभा में 543 में से केवल 74 महिला सांसद हैं और जो लगभग 13.6 प्रतिशत है, यदि विधेयक पास हो जाता तो सच में आज हमारी सीटों की संख्‍या 850 होती और महिलाओं की संख्‍या 273 होती, यह पाप कांग्रेस के सर पर है जिन्‍होंने इस विधेयक को पास नहीं होने दिया और मैं आज आपके सामने बताना चाहूंगा सच में यानि हमारी जो बहनों का 13 प्रतिशत बढ़कर 33 प्रतिशत हो जाता, इसी प्रकार मध्‍यप्रदेश की बहनों के साथ में भी अपराध हुआ है. आज हम जो विषय लाये इसीलिये लाये हैं कि 29 लोकसभा जिसमें केवल 6 बहनें सांसद हैं, यह बढ़कर के 43 हो जातीं तो 6 की बजाय 14 बहनों को मौका मिलता, यह महत्‍वपूर्ण अवसर कांग्रेस के लोगों ने गंवाया है. यह बात मैं आपके सामने बताना चाह रहा हूं. अब बताईये अगर यह महिलाओं के प्रतिनिधित्‍व को दोगने से अधिक कर रहे हैं तो क्‍या गलत कर रहे हैं. विधान सभा में भी माननीय अध्‍यक्ष जी 230 से बढ़कर के आपकी जानकारी के लिये बताता हूं और यह प्रदेश की आधी आबादी सुन रही है, बहनें भी ऊपर सदन में सुन रही हैं, मैं आपको बताना चाहूंगा कि यह 230 से बढ़कर के 345 की संख्‍या हो जाती, यह बहनों का हक था यह बहनों का अधिकार था. ऐसे में उनके लिये 114 सीट यह बहनों के लिये आरक्षित होतीं और मैं मानकर चलता हूं इसमें सबसे बड़ी बात तो यह है कि अनुसूचित जाति, जनजाति की भी 33 प्रतिशत महिलाओं को स्‍थान मिलता, यानी वंचित वर्गों के साथ भी अन्‍याय करने का काम अगर किसी ने किया तो यह कांग्रेस के लोगों ने किया है.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह-- अध्‍यक्ष जी...

          डॉ. मोहन यादव-- राजेन्‍द्र भैया हमने भी बहुत शांति से सुना और आपकी गरिमा के साथ और आप भी बहुत आराम से सुनिये.

          डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह--  यह समाधान है कि कहीं न कहीं (XX) का प्रयोग हुआ है.

          अध्‍यक्ष महोदय--  राजेन्‍द्र जी, प्‍लीज बैठिये.

          डॉ. मोहन यादव-- अब आप बताओ जैसे मैं आंकड़ा अगर देख रहा हूं. तो सच में हमारे बीच...

          अध्‍यक्ष महोदय-- अभी भांग की बात चल रही है, बाकी फिर और पेय की बात चलना शुरू हो जायेगी. ..(हंसी).. नशा सर्वदा अच्‍छा नहीं होता है इसलिये भांग या बाकी सारी चीजों को विलोपित कर दो.

          श्री उमंग सिंघार-- अध्‍यक्ष महोदय, उसके बाद ही बुद्धि का विनाश होता है.

          डॉ. मोहन यादव --  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सुझाव यह दे रहा हूं कि अभी भी नींद से जागकर के, अगर हम अपना ये सम्मिलित रूप से यह जो शासकीय संकल्‍प का समर्थन आप करते हैं, यह किंतु, परंतु लगा, लगाकर तो महिलाओं के साथ अन्‍याय सदैव कांग्रेस ने किया है. एक बार नहीं, दो बार नहीं, 80 साल से बहनों के साथ अन्‍याय कर रहे हैं अब तो समझ में आ जाये कि बाकई यह गलती हो रही है और एक तो मुझे थोड़ा अटपटा भी लगेगा, एक तो महिलाओं के अधिकार की चोरी और ऊपर से सीना जोरी, यह तो नहीं चलेगी. कम से कम आज हम देखें विपक्ष के सदस्‍यगण विशेष सत्र पर प्रश्‍न उठा रहे हैं और मैं यह बताना चाहूंगा कि विशेष सत्र से यह कष्‍ट बाकई में आपको असहनीय होने वाला है. प्रदेशभर की बहनें बहुत गौर से आपका व्‍यवहार देख रही हैं आपकी सारी  बातों  को  समझ  रही हैं  आपकी  उन सारी बातों का उत्‍तर आपको भविष्‍य में मिलने वाला है. यह बात सही है कि जब देश की आधी आबादी के ऊपर आपने उनके अधिकार पर डाका डाला है और राजनीतिक स्‍वार्थ के आधार पर दीवार खड़ी कर दी है तो क्‍या माननीय अध्‍यक्ष

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(XX)- आदेशानुसार विलोपित

महोदय यह सदन मौन रहना चाहिये. इसलिये इस सदन को आवाज देने का काम हमारी सरकार ने किया है, हमारी पार्टी ने किया है. यह उनके अधिकार की बात नीचे तक जायेगी और इसको साझा करने का दायित्‍व भी होना चाहिये, लेकिन दुर्भाग्‍य से दलगत राजनीति, वोट की राजनीति, तुष्‍टीकरण की राजनीति यह जो आप प्राथमिकता दे रहे हो, सच में बाबा महाकाल भी आपको माफ नहीं करेंगे, इसी से अधिकारों की चोरी और सीना जोरी का अर्थ निकलता है. मैं आज आपसे बात कर रहा हूं परिसीमन, क्षेत्रीय असंतुलन की. सच में इसकी असलियत क्‍या है, मुख में राम, बगल में छुरी. विरोध की जड़ें कांग्रेस के इतिहास में मैं दोबारा बताना चाहूंगा वर्ष 1972 में लोकसभा सीटों की संख्‍या बढ़ाने के लिये 1976 में आपातकाल के दरमियान 42वें संविधान संशोधन के बलबूते पर परिसीमन पर रोक किसने लगाई थी, कांग्रेस ने लगाई थी, यह रिकार्ड अपने आप में है. आप दस्‍तावेजीकरण के बलबूते पर, आप संविधान संशोधन 42वां निकालोगे. तो तत्कालीन समय में प्रधानमंत्री कौन था हमारे लिये उससमय गौरव की बात थी महिला प्रधानमंत्री है लेकिन बड़े दु्र्भाग्य के साथ कहना पड़ेगा कि महिला ने महिलाओं का हक मारने का काम तत्कालीन समय में किया था यह अत्यंत दुख की बात है यह बात मैं कोड करना चाह रहा हूं और वह भी तब जब जनतंत्र की.

          श्री बाला बच्चन - माननीय अध्यक्ष महोदय, अटल बिहारी वाजपेयी जी ने देश की संसद में इँदिरा जी को ऐसे ही दु्र्गा नहीं कहा था माननीय मुख्यमंत्री जी कि इंदिरा दुर्गा का अवतार है.

          अध्यक्ष महोदय - बाला जी बैठिये.

          डॉ.मोहन यादव -  मैं पूर्व नेता प्रतिपक्ष को बताना चाहूंगा यह लोग मंच पर तो नारी वंदन का ढ़ोंग करते हैं और संसद में दीर्घा में बैठकर महिला अधिकार छीनकर ताली बजाने का काम करते हैं. कभी परिसीमन का बहाना,कभी उत्तर दक्षिण का बहाना अलग-अलग प्रकार से सब असत्य का पुलिंदा लेकर हमें लगता है  कि कांग्रेस को वास्तव में इस बात की माफी मांगना पड़ेगी लेकिन फिर जवाबदारी से कहना चाहूंगा कि यह बटवारा का पाप है आजादी के साथ जो चल रहा है. यह बटवारे की राजनीति अंग्रेज चले गये लेकिन बांटो राज करो की नीति कांग्रेस छोड़ती नहीं यह बड़े दुर्भाग्य के साथ बोलना पड़ेगा. सच में यह बांटो और राज करो की नीति के कारण से देश के अंदर वर्तमान की हालत हो रही है. अब बताईये देश देख रहा है बीते दस वर्षों में यशस्वी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तर के साथ दक्षिण में हमारी सरकारें नहीं हैं. बीजेपी की सरकारें नहीं हैं लेकिन वित्तीय मदद के लिये सारे रिकार्ड तोड़कर मदद कराने का काम अगर किसी ने किया तो 56 इंच के सीने वाली सरकार के माध्यम से हुआ है. जब पूरा देश उठकर खड़ा हुआ और दुनियां देख रही है कि सच में भारत कहां से कहां पहुंच गया लेकिन तुलसीदास जी ने सही लिखा है जाकी रही भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी. जिनकी दृष्टि में केवल वोट बैंक है केवल तुष्टिकरण है वह नारी शक्ति के इस विजन को कैसे समझ पाएंगे. मैं इस बात को वाकई में बड़े दुख के साथ कह रहा हूं कि सदन में बहनों का प्रतिनिधित्व बढ़ा तो माननीय अध्यक्ष महोदय, वंशवाद के महल की नींव हिल जायेगा यह उस बात का विरोध कर रहे हैं. इनको महिला मतलब एक घर, महिला शक्ति मतलब दो महिला इसके अलावा देश से कोई लेना देना नहीं इतने छोटे मन से बात नहीं बनेगी. छोटे मन से सच में अटल जी ने सही कहा कि छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता यह बात बिल्कुल सही है और टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता. कब आपका मन जुड़ेगा. कब आपका मन खड़ा होगा. हम भी इंतजार करेंगे. अब आप बताईये इनके नेता राहुल गांधी जी  ओबीसी सचिवों की गिनती कर रहे हैं. जिस पार्टी ने दशकों तक काका कालेलकर,मंडल कमीशन की रिपोर्ट को कूड़ेदान में रखा वह ओबीसी की बात कर रहे हैं. मुझे खुशी है इस बात की कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने उसकी गिनती करने का भी देश के सामने दूध का दूध पानी का पानी कर दिया. जब आपकी सरकारें थीं आपने तो बंद करने का काम किया. 1953 नें जनगणना का मौका आया था तो जनगणना बंद करने का पाप आपके साथ हुआ. इसलिये थोड़ी तो शर्म करिये. थोड़ा तो देख लीजिये.

          श्री उमंग सिंघार - 27 परसेंट प्रदेश में तो ओबीसी आरक्षण दे दो माननीय आप भी तो ओबीसी से आते हो.

          अध्यक्ष महोदय -  भाषण पूरा सुन लो.

          डॉ.मोहन यादव - आप जरा सुनो तो सही.अब यह हमसे कह रहे हैं कि ओबीसी कि चिंता कर लो. ओबीसी प्रधानमंत्री चरण सिंह की सरकार को गिराने का पाप किसके सिर पर है यह भी तो आपके ही जिम्मे है. जनता पार्टी के शासन काल में देश ने देखा एक ओबीसी वर्ग के नेता के साथ जो व्यवहार आपने किया था. और तो और आपके पार्टी के अध्यक्ष ही बात कर रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष सीताराम केसरी का भी तो कार्यकाल पूरा नहीं करने दिया. आप हमसे कह रहे हो. हमारी पार्टी से कह रहे हो. यह आपको अपने अंतर्मन में झांकने की जरूरत है.और तो और पिछड़े वर्ग आयोग को संवैधानिक मान्यता देने का काम भी अगर किसी ने किया है तो हमारे 56 इंच के सीने वाले यशस्वी प्रधानमंत्री की सरकार ने किया है. भारतीय जनता पार्टी को पिछड़े, दलित उत्‍थान का ज्ञान आपसे लेना पड़े. मध्‍यप्रदेश में एक नहीं, जितने उदाहरण देखेंगे, शुरुआत ही साध्‍वी उमा भारती, बाबूलाल गौर, शिवराज सिंह चौहान, ये शुरुआत अगर किसी ने की है, मुझे गर्व है, हमारी पार्टी ने की, जो आज तक जारी है. ये तो आपका अपना पता नहीं कौन सा छोटा मन है. आप न तो ओबीसी के, न महिला के, पता नहीं क्‍या अंदर-अंदर पकता रहता है. जमुना देवी बुआ जी का तो मैंने पहले ही जिक्र कर दिया, उनको केवल उप मुख्‍यमंत्री, आप तो कम से कम इस बात का हिसाब लगा लें कि वे अगर बनी हैं, सुभाष यादव जी को भी नहीं बनने दिया. वह तो हमारे लिए लंबी परंपरा है (श्री दिनेश गुर्जर, सदस्‍य के बिना माइक शुरू किए कुछ कहने पर) अरे जरा रुको भैया, गुर्जर जी, आप ही के वर्ग की बात कर रहा हूँ. जरा ठहरो तो सही, यह हमारी पार्टी है, प्रदेश के अंदर मौका पड़ता है, जहां जगह मिलती है, हरियाणा, सुषमा स्‍वराज जी, मध्‍यप्रदेश, साध्‍वी उमा भारती जी, गुजरात, आनंदी बेन पटेल जी, राजस्‍थान, वसुंधरा राजे जी, एक बार नहीं, दो-दो बार मुख्‍यमंत्री बनाई गईं. कभी एकाध बार तो आप कलेजा बड़ा करके देखते और अभी-अभी बहन रेखा गुप्‍ता जी को भी मौका हमारी पार्टी ने दिया है. (मेजों की थपथपाहट) यह इस बात का प्रमाण है कि नारी सशक्‍तीकरण को लेकर के जो हम कहते हैं, वह करके दिखाते हैं.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, केवल मुख्‍यमंत्री नहीं, देश में सर्वाधिक राज्‍यपाल और उप राज्‍यपाल की भी जवाबदारी किसी ने बहनों को दी है तो हमारी पार्टी ने दी है. अब आप बताइये, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कैसा दोगलापन है. संविधान की आड़ में आप आरक्षण धर्म के आधार पर देख रहे हैं. जो कि बाबा साहब ने संविधान बनाते समय भी नहीं लिखा. आपका दिमाग कहां जा रहा है. आप वोट के लिए किस स्‍तर तक नीचे जाओगे. यह प्रश्‍न आज सबके सामने लाने की आवश्‍यकता है. बड़ी मुश्‍किल से देश के अंदर एक सकारात्‍मक माहौल बना है, लेकिन उस माहौल को आप वापस वहां ले जाना चाह रहे हैं, मुझे इस बात का गर्व है कि यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्‍व में संविधान प्रदत्‍त अधिकारों के बलबूते पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी स्‍वतंत्रता के बलबूते पर प्रभू श्रीराम मंदिर का धाम भी अगर जगमगाया है तो हमारे लिए सौभाग्‍य की बात है. इसलिए प्रेम से सब बोलते हैं, जय-जय श्रीराम. हिंदू मुसलमान को लेकर चलने का जो अनुकूल माहौल बनाया, वह माहौल देश के अंदर एक अलग तरह की फिजा ले जा रहा है. लेकिन आप वापस उस जगह ले जाना चाहते हैं जिसमें उस दौर में जो दंगे होते थे, जहां कर्फ्यू की बात आप भूल चुके. आप धर्म के आधार पर आरक्षण लाकर के इस देश के साथ पाप करना चाहते हैं, देश की जनता आपको माफ नहीं करेगी, यह मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूँ.

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मैं देखना चाहता हूँ, सच में इनकी नेता प्रियंका गांधी कहती हैं भाजपा महिला आरक्षण की और पता नहीं क्‍या-क्‍या कहती हैं, चैम्‍पियन प्रस्‍तावक और बड़ी समर्थक है, प्रधानमंत्री जी ने तो कहा कि हम तो विज्ञापन छपवा देंगे आपका, आप साथ तो दें, लेकिन आप साथ देने के लिए तैयार नहीं हैं. आप केवल राजनीतिक छलावा करने के लिए तैयार हैं. महिलाओं के साथ जो छल कांग्रेस ने किया है, भगवान भी माफ नहीं करेंगे. आप बताएं, छल तो इनकी संस्‍कृति में है माननीय अध्‍यक्ष महोदय. मातृ शक्‍ति को केवल राजनीतिक शक्‍ति पाने के लिए और यह जो कह रहे हैं कि हम तो आरक्षण के पक्ष में हैं, आप बताएं, घोटाले के साथ लंबा धोखा देने का इतिहास है. 30 साल तक बहनों के हक पर डाका डालने का काम अगर किसी ने किया है तो कांग्रेस पार्टी ने किया. 12 सितम्‍बर, 1996 को जब पहली बार बिल सदन की दहलीज पर आया, तब से लगाकर वर्ष 2014 तक राजनीतिक शतरंज की गोटियों की तरह इस बिल को उलझाने का काम कांग्रेस ने किया. आपको जवाब देना पड़ेगा. वर्ष 2010 में राज्‍यसभा से पारित होने वाले बिल को वर्ष 2014 तक लोकसभा में क्‍यों लटकाए रखा. यह पाप किसका था. आपकी नीयत में खोट थी या इच्‍छाशक्‍ति जवाब दे गई थी. देश की आधी आबादी आपसे जवाब मांगती है. परिणाम यह हुआ कि 2014 में पंद्रहवीं लोक सभा भंग होते ही यह विधेयक लेप्‍स हो गया. जिस कांग्रेस ने दशकों तक महिला आरक्षण को केवल चुनावी लॉलीपाप बनाकर फाइलों में धूल फांकने के लिए डाल दिया. गठबंधन में मजबूरियों का बहाना बनाकर मातृशक्ति के साथ बार-बार विश्‍वासघात किया गया. उसी ऐतिहासिक अन्‍याय को यशस्‍वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी ने वर्ष 2023 में अपनी फौलादी इच्‍छाशक्ति से जड़ से मिटाने की नींव रखी. हमें इस बात की प्रसन्‍नता है और मैं इसके माध्‍यम से जो हमारी बहनें सुन रही हैं, मैं उनके बारे में बताना चाहूँगा कि हमने एक बार भी महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया है, यह रिकॉर्ड हर जगह उपलब्‍ध है. आज जब मैं आपके सामने संशोधन विधेयक की तरफ से विपक्ष से बात कर रहा हूँ, तो इन लोगों ने लोक सभा में और आज भी संकल्‍प पारित करने के लिये बहनों की आशा एवं अपेक्षा की पीठ में खंजर घोंपने का काम किया है, भगवान इनको कभी माफ नहीं करेगा. 

          माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर मैं कांग्रेस की तरफ देखता हूँ, तो ब‍हनों से हमेशा अधिकार छीनने का काम कांग्रेस ने किया है. आप बताइये कि बहन शाहबानो, इन्‍दौर की बहन है, उसके गुजारे-भत्‍ते की बात पर, एक बहन जिला कोर्ट, हाई कोर्ट, हाई कोर्ट में भी डबल बेंच फिर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ी, एक बहन कितनी लड़ाइयां लड़ेगी. लेकिन कांग्रेसियों को दया नहीं आई. सुप्रीम कोर्ट तक भी लड़कर  जीतकर आने के बाद, गुजारे-भत्‍ते की बात जब कर रहे थे, लेकिन उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटकर बहनों की तुष्टिकरण की मलाई चखना पसन्‍द की और बेबस शाहबानो के अधिकार को छीनकर केवल अपनी कुर्सी सलामती के लिये उसको कुर्बान कर दिया. मैं धन्‍यवाद देना चाहूँगा, माननीय श्री नरेन्‍द्र मोदी जी को, जिन्‍होंने सारी व्‍यवस्‍थाओं को, तीन तलाक को बदलकर, बहनों के हक‍ की बात और इस कुप्रथा से निजात दिलाने का काम किया है. (मेजों की थपथपाहट) बानो मतलब बहन होती है, यह तो मैं बोल सकता हूँ. इसी प्रकार से, आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूँ, नारी शक्ति वंदन अधिनियम को गिराकर देश हित की बजाय केवल दल हित देखने की जो बात कही है, सच में बड़ी निन्‍दनीय बात मन में आती है. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, प्रधानमंत्री जी ने दिनांक 18 अप्रैल, 2026 राष्‍ट्र के नाम संबोधन करते हुए, याद रखिये कि जो बात उन्‍होंने कही है. बहनों, आप सब सुन लीजिये, नारी सब भूल जाती है, लेकिन कभी अपना अपमान नहीं भूलती है. प्रदेश और देश की बहनें इस अपमान का बदला लेकर रहेंगी. संसद में भले ही मुस्‍कुरा-मुस्‍कुराकर कांग्रेस के लोगों ने बहनों के अपमान में अपनी राजनीतिक जीत का डंका बजाया, यह बहनों के घाव पर नमक छिड़कने के बराबर है, इसकी कीमत कांग्रेस को चुकानी पड़ेगी. मेजें थपथपाकर होली, दिवाली सारे त्‍यौहार मना रहे थे, बहनों के अधिकारों पर डाका डालकर मना रहे थे, यह हिसाब निश्चित रूप से बहुत महंगा पड़ेगा. याद रखिये, पाप की सजा अवश्‍य मिलती है. दुनिया में इन सारी व्‍यवस्‍थाओं के लिये, कांग्रेस कभी इस बात से अपने आपको पचा नहीं पायेगी. मोदी जी के नेतृत्‍व में महिला कल्‍याण की मिसाल की, अगर मैं बात करता हूँ. सच में मोदी जी के शब्‍दों में ईश्‍वर ने मुझे पवित्र कार्यों की सिद्धि के लिये चुना है. हमारे लिये नारी सशक्तिकरण कोई चुनावी गुणा-भाग नहीं है, लेकिन विपक्ष के लिये यह वोट और कोटा है. उनकी दृष्टि में केवल इतना ही है कि वह अपनी चुनावी राजनीति के लिये उसका दुरुपयोग करते हैं.

          अध्‍यक्ष महोदय, आप बताइये कि केवल 12 वर्षों में बहनों की सशक्तिकरण के लिये, उनके लम्‍बे समय का वनवास समाप्‍त करने का काम यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी ने किया है. देश बदल रहा है. आज की राजनीति तुष्टिकरण की नहीं है, महिला सशक्तिकरण की आवश्‍यकता है, इसलिए माननीय प्रधानमंत्री जी ने महिला कल्‍याण को महिला नेतृत्‍व विकास के दौर में बदला है, पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक नेतृत्‍व बढ़ रहा है. रक्षा, विज्ञान, खेल, चिकित्‍सा एवं राजनीति, हर क्षेत्र में बहनें अपने एक के एक कीर्तिमान बनाती जा रही हैं और आगे बढ़ती जा रही है. देश के आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन में, जो बहनों की भूमिका है, वह सचमुच अद्भुत है. आप बताइये, हमारे बीच अपने राज्‍य में, पूरे देश में सबसे बड़ी संख्‍या जनजातीय भाइयों-बहनों की आबादी है और यहां से भी इस बात का संदेश जाना चाहिए लेकिन देश के सर्वोच्‍च पद पर भी अगर राष्‍ट्रपति पद तक पहुंचाने का माननीय राष्‍ट्रपति जी श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को मौका मिला है, मुझे इसके लिए हमारी पार्टी पर गर्व है और 56 इंच के सीने वालों के आधार पर है और आगे बढ़कर देश के अंदर आर्थिक नीतियों का कुशलतापूर्वक संचालन कर, देश को 11वें नंबर की अर्थव्‍यवस्‍था से चौंथे नंबर तक पहुंचाया तो हमें गर्व है श्रीमती निर्मला सीतारमण जी ने, आज तमाम चुनौतियों के बीच बहनों की साख बढ़ाने का और देश को आगे बढ़ाने का निर्णय किया. मुझे इस बात का आनंद है कि यशस्‍वी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्‍व में जब हम देखते हैं तो रोमांच से, गर्व से एहसास होता है, हमारे देश का पाकिस्‍तान के साथ, आतंकवादियों के साथ लगातार किस प्रकार का माहौल था, किसी से यह छिपा नहीं है लेकिन जैसे ही 56 इंच के सीने वाले की सरकार बनी, हमारा देश उन 3 देशों में शामिल हो गया, जो अपने दुश्‍मनों को उनके घर में घुसकर मारने का काम करता है, यह हमारी सरकार के माध्‍यम से हुआ. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय, ऑपरेशन सिंदूर जिस घटनाक्रम को देश देख रहा था, उनको चुन-चुनकर मारने का काम किसी ने किया, तो प्रधानमंत्री जी के नेतृत्‍व में देश की सेना ने किया है, हम समेकित रूप से धन्‍यवाद देना चाहेंगे. हमारी बहन-बेटी की तरफ कोई इस निगाह से देखे तो सच में उसका हिसाब चुकता करने के लिए यह बहुत बड़ा उदाहरण है. वह समय गया, कितना खराब लगता था, देश के सीमाओं पर हमारे जवान अपने देश की रक्षा के लिए जान की बाज़ी लगाकर खड़े रहते थे लेकिन दुश्‍मन देश के सैनिक अपने सैनिकों का सर काट लेते थे, उसके साथ फुटबॉल की तरह खेलते, उनकी गर्दन पर लात मारते थे, सैनिक की गर्दन उठाकर ले जायें और देश की सत्‍ता जिनके पास थी, कांग्रेस के मौन प्रधानमंत्री 10 साल तक टुकूर-टुकूर देखते रहे, बड़े दुर्भाग्‍य के साथ कहना पड़ेगा वे दिन अब गए, अब घर में घुसकर मारने का समय आज भारत का है, हमें इस बात का गर्व है.

          अध्‍यक्ष महोदय, बेटियों ने भी हर क्षेत्र में काम किया है, जब देश के शासन में दम होता है और सब तरह से खिलने का मौका मिले तो बेटियों ने शान से तिरंगा फैराया है, भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने आईसीसी में वनडे वर्ल्‍ड कप जीतकर तिरंगे की शान बढ़ाई. तीरंदाजी में दीपिका कुमारी, ओलंपिक में पी.वी.सिंधु, मीरा बाई चानू, मनु भाकर, लवलिना बोरगोहेन ने पदकों का सिलसिला बनाया, यह पदकों की गंगा देश को आनंद में डूबा रही है. माननीय प्रधानमंत्री जी ने कभी पिता बनकर, कभी भाई बनकर, कभी पुत्र बनकर आधी आबादी के लिए जो काम किया, सच में पूरा देश नतमस्‍तक है. बहनों को तीन तलाक से मुक्ति प्रधानमंत्री जी ने दिलाई, हर घर में जल पहुंचाकर दशकों का कष्‍ट दूर किया, हर घर शौचालय बनाकर बहनों का सम्‍मान बढ़ाया, पीएम उज्‍जवला योजना, तत्‍कालीन समय में कांग्रेस के शासन काल में केवल सांसद के माध्‍यम से गैस कनेक्‍शन मिलते थे, आज घर-घर पीएम उज्‍जवला गैस कनेक्‍शन देने का काम, बहनों को धुंए की बीमारियों की बेडि़यों से मुक्‍त करवाने का काम किया. जब मैं आपसे बात कर रहा हूं सच में मातृवंदना योजना के माध्‍यम से हमारी बहनों के लिए मातृत्‍व को आसान बनाया. सुकन्‍या समृद्धि योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, जैसी योजना ने बेटियों की दिशा बदली. पाक्‍सो कानून में सजा और सख्‍त की गई. जनधन योजना में उन बहनों को जोड़ा, जिन्‍होंने कभी सोचा नहीं था कि बैंक के उनके खाते में पैसे आयेंगे.

          अध्‍यक्ष महोदय, जब यह बात निकली कि मध्‍यप्रदेश में इस विषय को क्‍यों लाया गया तो मैं बताना चाहूंगा हम यूं ही नहीं कहते हैं कि एम.पी. मतलब महिला सशक्तिकरण, मध्‍यप्रदेश में बहनों के प्रति हमारा विश्‍वास का लंबा सिलसिला है. हम राज्‍य के जनप्रतिनिधि हैं, जिसके यहां बेटियों ने अपने खून-पसीने और साहस से प्रदेश के लिए अपने जीवन का कीमती समय दिया है, मुझे इस बात की प्रसन्‍न्‍ता है कि अतीत के काल से हमारी माटी में लोकमाता अहिल्‍याबाई, राजसत्‍ता के लिए जिन्‍होंने लोकसेवा का पर्याय बनकर के अपना जीवन जिया. हमारी रगो में वीरांगना रानी दुर्गावती, रानी अवन्‍तीबाई लोधी, रानी कमलापति का रक्‍त दौड़ता है जिन्‍होंने झुकना नहीं लड़ना और जीतना सीखा है. हमें इस बात का गर्व है, हमारे प्रदेश पर गर्व है. जो धरती वीरांगनाओं के शौर्य से सिंचित हो वहां की बहनें भी कम कमाल नहीं करती हैं. यशस्‍वी प्रधानमंत्री के नेतृत्‍व में मध्‍यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में हमारी सरकार के द्वारा अनेक निर्णय लिये गये. निकायों के अंदर 50 प्रतिशत का आरक्षण अगर बहनों को मिला है तो प्रदेश की आधे से अधिक स्‍थानीय निकायों की कमान अगर बहनें संभाल रही हैं वह हमारे लिए आनंद का विषय है. लोकसभा में हमारी 6 बहनें प्रदेश में मजबूती से आवाज उठा रही हैं. विधान सभा में 27 बहनें और प्रदेश के मंत्री मंडल में पांच बहने मंत्री बनकर अपने उत्‍तरदायित्‍व का निर्वहन कर रही हैं. अगर कांग्रेस साथ देती तो निश्चित रूप से वह संख्‍या बढ़ती लेकिन कोई बात नहीं राज्‍य प्रशासन में बड़ा दायित्‍व नारी शक्ति के हाथ में है. मेरे मित्रों ने कुछ प्रश्‍न किया कि हम क्‍या कर रहे हैं हम आपको कांच बताने का काम करते हैं. हमारे राज्‍य के अंदर 55 जिलों में 17 महिला कलेक्‍टर बनकर शासन की व्‍यवस्‍था में सुशासन के लिए वह अपनी यात्रा में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं. केवल कलेक्‍टर ही नहीं आई जी, डी आई जी, जिला पंचायत, जनपद पंचायत संभागायुक्‍त कई प्रमुख पदों पर बहनों को बिठाकर हमारे लिए हम अपनी उस प्रतिबद्धता को बता रहे हैं. जो बहनों के लिए हमारे मन में हैं. जब हमारे मन में है. जब मैं स्‍वयं मुख्‍यमंत्री बना तो तत्‍कालीन समय में हमारी अपनी प्रमुख सचिव, श्रीमती वीरा राणा उनके साथ हमने अपनी सरकार के साथ बहनों के प्रति पहले दिन से सरकार के गठन के साथ यह विश्‍वास कायम करके विकास यात्रा को प्रारंभ किया था.

          अध्‍यक्ष महोदय, अक्‍सर हालात तो बदलते रहते हैं लेकिन कोई बात नहीं. नहीं बदलते हैं तो कांग्रेस और कांग्रेस की दृष्टि मुझे यह बड़ा अटपटा लगता है. कहां 55 साल का समय और कहां वर्ष 2002-2003 से यह अभी का समय. यह दो सरकारों का, दो तरह का माहोल है. आप देखिये वर्ष 2002-2003 से वर्ष 2026 तक दो दशकों में बहनों के प्रति हमारा जो समर्पण रहा है और हमारे हर संकल्‍प पत्र में बहनों को जो कल्‍याण की प्राथमिका दी नीयत, नीति और निर्णय से अपनी बहनों के जीवन में आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक सशक्तिकरण का उजाला भरने का काम किसी ने किया है तो हमारी सरकारों ने किया है. मैं, इस सदन के माध्‍यम से कहना चाहूंगा कि मध्‍यप्रदेश की बहनें अपने परिश्रम, सामर्थ्‍य, हिम्‍मत से पूरे देश के सामने उदाहरण बनीं. हमने सशक्‍त महिला, सशक्‍त परिवार सशक्‍त समाज से सशक्‍त राज्‍य का जो सपना देखा. समेकित रूप से वह धीरे-धीरे पूरा होता जा रहा है. इसलिए मध्‍यप्रदेश देश के चुनिंदा राज्‍यों में से है जहां बच्‍ची के जन्‍म से लेकर अंतिम पड़ाव तक विभिन्‍न योजना उनके जनकल्‍याण के साथ बहनों के कल्‍याण के लिए लगातार काम कर रही है. मुझे सम्‍मानित सदन को बताते हुए गर्व है कि हमारे प्रदेश की बहनें दुर्गा, लक्ष्‍मी, सरस्‍वती बनकर अपनी सफलता के झंडे गाड़ रही हैं. वर्ष 2003 में हमारी सरकार बनने के साथ ही हमारे केन्‍द्र में कल्‍याण का बिंदु हमेशा महिला कल्‍याण का रहा है. वर्ष 2006 में बेटियों के पहली बार मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना से प्रारंभ हुई यात्रा गरीब की बेटी का विवाह भी धूमधाम से होना चाहिए. लाखों बेटियों का कन्‍यादान इसी प्रकार से हमारी पूर्ववर्ती सरकारों के माध्‍यम से हुआ है. साथियों आपके शासनकाल के अव्‍यवस्‍था को देखूं और प्रत्‍येक वर्ष लाखों बेटियों का मिडिल हाई स्‍कूल में छोड़ने के इतिहास पर बात करूंगा तो शायद आपको बुरा लगेगा. उस बात को छोड़कर हम शिक्षित और प्रशिक्षित शक्ति के लिए जिस प्रकार से 20 साल में काम कर रहे हैं आप बताइये वर्ष 2007 में आई लाड़ली लक्ष्‍मी योजना ने उस दौर को जड़ से मिटाकर जहां बेटियां बोझ बनती थीं. लाड़ली लक्ष्‍मी योजना ने लिंगानुपात को बदलकर न केवल समाज की दृष्टि बदली बल्कि योजना ने 53 लाख से अधिक बेटियों के जीवन को बदलने का काम किया है. यह हमारी सरकार के काम करने का तरीका है. दो साल में ही प्राथमिक स्‍कूल में ड्रॉपआउट दर 6 से जीरो प्रतिशत करने का काम हमारी सरकार के माध्‍यम से हुआ है. प्रदेश में बालिकाओं का नामांकन और साक्षरता दर बढ़ती जा रही है. यह हमारी सरकार की समग्र दृष्टि और ईमानदारी से क्रियान्वयन का परिणाम है. कुछ दिन पहले ही 10 वीं और 12 वीं कक्षा के परिणाम आए हैं. मेरिट लिस्ट में बेटियों का नंबर वास्तव में हमें गौरवान्वित करने वाला है. 10 वीं में प्रतिभा सोलंकी, 12 वीं में चांदनी विश्वकर्मा और खुशी राय ने टॉप किया है. मेधावी विद्यार्थी प्रोत्साहन योजना, विदेश अध्ययन योजना के माध्यम से प्रदेश की प्रतिभावान बेटियों को उच्च शिक्षा में जो अवसर प्रदान किए हैं सच में वह अद्भुत हैं. जो बेटियां स्कूल जाने से डर रहीं थीं वे प्रतियोगी परीक्षा में टॉप आकर के लगातार आगे बढ़ रही हैं. सरकारी नौकरियों में भी 35 प्रतिशत आरक्षण ने बेटियों को नए पंख लगाकर उड़ने का मौका दिया है. हमारी सरकार ने सरकारी नौकरियों में भी 35 प्रतिशत आरक्षण देकर एक मजबूत और स्पष्ट संदेश दिया है. शासन, प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि निर्णायक होना चाहिए. यह उसके लक्षण हैं. हमारे लिए इसके परिणाम भी दिख रहे हैं. यही मैं आगे बढ़कर देखता हूँ. महिलाएं केवल 35 प्रतिशत तक सीमित नहीं हैं बल्कि अपनी प्रतिभा और परिश्रम के बल पर लगातार आगे बढ़ रही हैं. समग्र रुप से देखें तो सरकारी तंत्र में केवल चार वर्षों में 40 प्रतिशत महिलाओं ने सफलता के झण्डे गाड़े हैं. हम बहनों का अभिनन्दन करते हैं. कर्मचारी चयन मंडल, भोपाल द्वारा वर्ष 2022 से 2025 के बीच 62881 अभ्यर्थियों में 24906 महिलाएं अर्थात् 39. 61 प्रतिशत, यह सफलता का रिकार्ड बन रहा है. जब ताली बजाओ तो जोर से बजाना चाहिए, आनंद आना चाहिए. (मेजों की जोरदार थपथपाहट) लगना चाहिए कि हां यह रिकार्ड बन रहा है बहनों का. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं बताना चाहूंगा कि हमारे प्रदेश में...

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि ताली  बजनाने का बड़ा शौक है. वे कह रहे हैं नौकरियों में महिलाएं 35 प्रतिशत हैं. कलेक्टर में, डीआईजी में सब गिना दिया है. आपके मंत्रिमंडल में 33 या 35 प्रतिशत महिलाएं कब होंगी, ऐसे में हम भी ताली बजाएंगे. आप हमसे कब ताली बजवाओगे आप यह बता दो. आप यदि आज यह घोषणा कर दें तो महिलाएं खुश हो जाएंगी.

          अध्यक्ष महोदय -- अभी उन्होंने आपसे ताली बजवाने के लिए नहीं कहा है. जिनसे कहा है वे समझ रहे हैं.

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, हम स्वागत करना चाहते हैं. इनकी भावनाओं का, नारी शक्ति की बात हो रही है.

          अध्यक्ष महोदय -- आपका भाव बहुत अच्छा है.

          डॉ. मोहन यादव -- माननीय अध्यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष जी को बताना चाहूंगा कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग वर्ष 2021-22 से लगाकर 2025-26 तक विज्ञापित 15802 पदों में से 4671 पद महिलाओं के लिए निर्धारित किए गए. 4454 पदों पर महिलाओं का चयन हुआ है. यह लगभग 39.27 प्रतिशत है. यह दर्शाता है कि हमने बहनों को 35 प्रतिशत का आरक्षण देकर केवल अवसर नहीं दिया है. महिलाओं को आगे बढ़ाने की भावना का प्रकटीकरण किया है. जिसके आधार पर उन्होंने 35 प्रतिशत से बढ़कर 40 प्रतिशत तक उन्होंने अपना रिजल्ट दिया है. मध्यप्रदेश महिला सशक्तिकरण समग्र आर्थिक परिवर्तन का मॉडल बन चुका है. हमारी सरकार ने महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उद्योग, उद्यमिता, कौशल, वित्त, सामाजिक सुरक्षा जैसे सभी क्षेत्रों में काम किया है. जब मैं आपसे यह बात कर रहा हूँ तो सच में स्व-सहायता समूह से लगाकर, स्टार्ट-अप तक हमारे प्रदेश की बहन, बेटियां आत्मनिर्भर और विकसित प्रदेश की तरफ आगे बढ़ रही हैं और उसकी आधारशिला रख रही हैं. बहनें केवल पारम्परिक कौशल जैसे सिलाई, बुनाई, कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर तक सीमित नहीं हैं बल्कि कम्प्यूटर ग्राफिक्स, ऑर्टिफिसिअल इंटेलीजेंस ऐसे आधुनिक क्षेत्र में भी प्रशिक्षण प्राप्त करके, इनके साथ ही साथ प्लंबिंग, इलेक्ट्रिशिअन, ड्रायविंग, मोबाइल रिपेयरिंग ऐसे तमाम अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं. 5 लाख से अधिक स्व-सहायता समूह के माध्यम से 65 लाख से अधिक माताओं-बहनों ने संगठित होकर आत्मनिर्भरता का नया इतिहास रचा है. यह बहनें न केवल अपने परिवार की अर्थव्यवस्था को सम्हाल रही हैं बल्कि प्रदेश की इकॉनामी में भी अपना बड़ा रोल अदा कर रही हैं. ड्रोन दीदी के माध्‍यम से महिलाएं आधुनिक कृषि तकनीकी से जुड़कर खेतों के अंदर भी अद्भुत कमाल कर रही हैं. बैंक सखी के रूप में गांव-गांव में वित्‍तीय सेवा पहुंचाकर आर्थिक सशक्तिकरण के नए मापदण्‍ड खड़े कर रही हैं. महिलाएं आज केवल प्रशिक्षण नहीं ले रही हैं बल्कि स्‍वयं के उद्योग, ट्रेनिंग सेंटर, खुद भी सीख रही हैं और बाकी बहनों को भी प्रशिक्षित कर रही हैं जिससे एक सशक्‍त श्रंखला चालू हो रही है. बहनें किसान कल्‍याण वर्ष के आधार पर भी अब तो और नए तरह से आगे बढ़ रही हैं. कृषि, पशुपालन और डेयरी प्रबंधन में भी अपनी आय बढ़ाकर आत्‍मनिर्भरता के नए लक्ष्‍य की तरफ आगे बढ़ रही हैं. लाड़ली बहना योजना, मैं बताना चाहूंगा कि वर्ष 2023 के चुनाव के समय से कांग्रेस ने हल्‍ला मचाया कि पैसे नहीं हैं कहां से देंगे, कैसे करेंगे, मुझे इस बात का गर्व है कि प्रदेश की 1 करोड़, 25 लाख से अधिक बहनों को एक हजार से यात्रा प्रारंभ कर 1,500 रुपये हर महीने उनके खाते में दे रहे हैं. इस योजना के प्रारंभ होने से अभी तक 55 हजार करोड़ से अधिक की राशि बहनों के खाते में डाल दिए. यह हमारी अपनी वह प्रतिबद्धता है जिसके बलबूते पर प्रति लाड़ली बहना 40,400 रुपये से ज्‍यादा एक-एक बहनों के खाते में यह राशि पहुंच चुकी है. मुझे इस बात की भी प्रसन्‍नता है कि प्रदेश के 48 प्रतिशत स्‍टार्टअप का नेतृत्‍व बहनें कर रही हैं. यह कोई साधारण आंकड़ा नहीं है बल्कि हमारे सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्योगों की रीढ़ भी हमारी बहनें हैं. 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां पंजीकृत हैं. लगभग 2 लाख, 65 हजार इकाइयां महिलाओं के स्‍वामित्‍व में हैं. इन इकाइयों के लिए हार्डकोर से कह सकता हूं कि 10 लाख से अधिक बहनें रोजगार से जुड़ी हुई हैं.

          श्री भंवरसिंह शेखावत -- अध्‍यक्ष महोदय, आधा मिनट का टाइम देंगे. माननीय मुख्‍यमंत्री जी बहुत अच्‍छा भाषण दे रहे हैं. बहुत अच्‍छे आंकड़े प्रस्‍तुत किए हैं मैं आपको धन्‍यवाद देना चाहता हूं लेकिन महाराज, दो बातें कर दीजिए एक तो 70 परसेंट से ज्‍यादा सभी विभागों में पद रिक्‍त पड़े हुए हैं, पिछले 20 साल से भर्ती नहीं हुई है और आपके आधे विभाग आउटसोर्स के आधार पर चल रहे हैं, मेहरबानी करके इन सारे पदों को भरने की घोषणा कर दीजिए और आप नए लोगों की भर्ती करिए. आप तो बहुत अच्‍छा काम कर रहे हैं, पहलवान आदमी हैं कर भी सकते हैं.

          डॉ. मोहन यादव -- अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद आपका.

          अध्‍यक्ष महोदय -- भंवरसिंह जी, धन्‍यवाद तो दिया नहीं. आप कह रहे थे कि मैं आपको धन्‍यवाद देना चाहता हूं. आपने धन्‍यवाद तो दिया नहीं.

          श्री भंवरसिंह शेखावत -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरी बात का उत्‍तर आ जाए तो धन्‍यवाद भी दे दूंगा.

          डॉ. मोहन यादव -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय हमारे वरिष्‍ठ नेता, माननीय विधायक बदनावर, भंवरसिंह जी को मैं बताना चाहूंगा कि हमारी सरकार ने अकेले विद्युत विभाग में 50 हजार पदों की कैबिनेट से मंजूरी दी है. यह हमारी सरकार ने काम किया है. हमारे डिप्‍टी सीएम राजेन्‍द्र जी बैठे हैं, इनके विभाग में हमने 42 हजार पदों की भर्तियों के लिए स्‍वीकृति दी है. सरकारी स्‍तर पर आज की स्थिति में लगभग एक लाख पदों की हमने भर्ती की है. अकेले पुलिस के अंदर सब इंस्‍पेक्‍टर की 16 साल बाद हमने भर्तियां प्रारंभ की हैं. हर साल साढ़े सात हजार पुलिस के पद भर रहे हैं. तीन साल में साढ़े 22 हजार पदों की हम भर्ती करेंगे, लेकिन जब मैं अभी बात कर रहा हूं नारी सशक्तिकरण की, थोड़ा इस विषय पर आते हैं. इन इकाइयों के माध्‍यम से 10 लाख से अधिक महिलाओं के (नेता प्रतिपक्ष द्वारा बैठे-बैठे पूछने पर) अभी तो बहुत है. अभी तो आधा ही हुआ है. अभी जरा मैं धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि अच्‍छे विषय पर बात चल रही है, हमने भी सारा विषय विस्‍तार से सुना हमारे अपने मित्रों का, तो इस पर बात कर लें.

          अध्‍यक्ष महोदय --  सभी शांति से सुन रहे हैं.

          श्री सुरेश राजे -- अध्‍यक्ष महोदय, दो दिन का सत्र बुला लेते ना.

          डॉ. मोहन यादव -- अध्‍यक्ष महोदय, आप तो कल तक चलने दें. मैं, यूं ही बोलता रहूंगा तो आपको कल तक बैठना पड़ेगा. .(हंसी)..

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय, आप तो बस यह बता दें कि कथा का 5 वां अध्‍याय कब आएगा ? 

          डॉ. मोहन यादव -- अध्‍यक्ष महोदय, धीरे-धीरे रेमना धीरे सब कुछ होय, माली सींचे सौ घड़ा ऋतु आए तब फल होय. यह अपनी परम्‍परा है. जरा हमारे बीच में जब काम का अनुकूल माहौल बना है और माता-बहनों के अधिकार की बात हो रही है, तो शांति के साथ 5 वां अध्‍याय भी आएगा, प्रसाद भी मिलेगा, प्रदेश भी आगे बढ़ेगा, हम सब आनंद में डूबेंगे, क्‍योंकि हमारी और आपकी मानसिकता अगर इस अनुकूलता के साथ है कि हां हम नारी सशक्तीकरण की बात कर रहे हैं तो कृपा करके मेरी थोड़ी बात और पूरी होने दीजिये.

          अध्यक्ष महोदय, औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिये भारतीय टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को रणनीतिक रूप से विकसित करते हुये कई इकाईयों में  90 प्रतिशत से ज्यादा रोजगार महिलाओं को दिया जा रहा है. इसके साथ ही धार जिले में विकसित हो रहे पीएम मित्र (PM MITRA) पार्क, माननीय अध्यक्ष जी यहां पर मैं माननीय नेता प्रतिपक्ष जी को बताना चाहूंगा कि देखिये हमारा मन और हमारे काम करने का तरीका, हम दलगत राजनीति का भेदभाव नहीं करते , यह इसका उदाहरण हैं, अपनी सात विधानसभा धार में हैं और सात में से केवल दो विधानसभा हमारी हैं पांच विधानसभा आपके दल की हैं लेकिन उसके बाद भी देश का सबसे बड़ा पीएम मित्र पार्क बनाकर के प्रधान मंत्री जी से उनके जन्मदिन के दिन भूमि पूजन कराने का काम हमने धार में कराया है यह हमारी प्रतिबद्धता है कि हमारे आदिवासी अंचल में भी रोजगार मिलना चाहिये. हमारे भाई बहनों के लिये सब तरह के काम हैं और इतना ही नहीं हमने ओर आगे बढ़ते हुये निर्णय किया है कि जो मातायें बहनें, अभी तो यह तीन हजार की बात कह रहे थे, कि देढ़ हजार से यात्रा हुई तीन हजार कब होगी.

          अध्यक्ष जी मैं जवाबदारी से बताना चाहता हूं कि तीन हजार तो हम देंगे ही उससे आगे बढ़कर जो मातायें बहनें अगर रेडीमेड गारमेन्ट्स में काम करने आती हैं, रोजगार परख जो इन्ड्रस्टीज चलती है प्रति बहन पांच हजार रूपये महिना 10 साल तक देने की हमारी सरकार ने नीति बनाई ताकि रोजगार परख व्यवस्था हो सके.

          माननीय अध्यक्ष जी, सरकार अपनी तरफ से इसमें बड़ी भूमिका अदा कर रही है लेकिन हम सब संवेदनशीलता के साथ में उनके सशक्तीकरण पर अगर बात कर रहे हैं इसी दिशा में उज्जैन, धार , भिंड, रायसेन के औद्योगिक क्षेत्र में हमने बहनों के लिये केवल उद्योग में जाने का रस्ता नहीं निकाला, हमने तो वर्किंग वूमेन हास्टल भी बना रहे हैं, बहनें सुरक्षित तरीके से रहे भी सही. और अपने आय के साधन भी बढायें ऐसे कई प्रकार के हम इनकी सुविधाओं पर काम कर रहे हैं.

          माननीय अध्यक्ष महोदय, सुरक्षित परिवहन औद्योगिक क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा का ढांचा भी बन बना रहे हैं, रेडीमेड गारमेन्ट्स इन्ट्रस्टीज के माध्यम से मैंने बताया है और भी हम इस प्रकार के लगातार काम कर रहे हैं.

          अध्यक्ष महोदय, कांग्रेस राज में स्वास्थ्य व्यवस्था याद करके शरीर कांप जाता है, उस समय देश में, मुझसे अभी अपने में से किसी माननीय सदस्य ने कहा है मैं नाम नहीं बोलूंगा क्योंकि उनसे मेरी मित्रता है वह थोड़ा शरमा जायेंगे. मध्यप्रदेश में मातृत्व मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर की बात है. हमारे प्रतिपक्ष के मित्रों के माध्यम से. अब यह तो मैं बताना चाहूंगा कि खासकर के अगर आप इसका आंकड़ा देखेंगे , आपके समय की बात करें तो न तो उस समय आप दवा देते थे, न आप कोई दूसरा काम करते थे, भगवान की दुवा के भरोसे छोड़े देते थे.

          अध्यक्ष जी, हमने पिछले 20 वर्ष में यह जो वेन्टीलेटर पर पड़ी हुई जो स्वास्थ्य व्यवस्था थी इसको आक्सीजन देते हुये लगातार बदलाव करके 1956 से लेकर के 2003 तक केवल 5 मेडिकल कालेज थे. मुझे इस बात की खुशी है कि इस साल तक 32 मेडिकल कालेज हमारे अपने राज्य में संचालित हो रहे हैं और सारी प्रकार की सुविधाओं के बलबूते पर हरेक जगह, प्रधान मंत्री मातृवंदना योजना , जननी सुरक्षा योजना,  जैसी योजनाओं के माध्यम से बहनों के मातृत्व जैसे कठिन समय में भी हमने मदद करने का काम किया है.

 

          माननीय अध्यक्ष महोदय, सिकलसेल एनीमिया (SCA) के खिलाफ भी बहनों को स्वास्थ्य और सुरक्षा की गारंटी हमारी सरकार के माध्यम से दे रहे हैं. अस्पतालों में सोनोग्राफी जांचे और प्रसव से संबंधित सुविधायें बढाई गई हैं. ऐसे कई प्रकार के काम हमारे माध्यम से हो रहे हैं, मुझे तो इस बात का भी मानवीय दृष्टिकोण से थोड़ा सा आपके सामने बोलना चाहूंगा कि हमारी सरकार के माध्यम से देश भर के अंदर कितना खराब लगता है , अगर कोई व्यक्ति बीमार है और बीमार व्यक्ति हास्पीटल में पहुंच जाये और हास्पीटल में कोई कारण से उसका शरीर छूट जाये तो कितना खराब लगता था और हमारी बहन या परिवार का जो सज्जन वहां पर है और अगर वह व्यक्ति शरीर छोड़ देता है और ऐसे में उसकी बॉडी को घर लाना है तो घर हाथ में ले जाओ, ठेले पर ले जाओ, कोई गाड़ी की डिक्की में शव को रखकर के लाते थे, कितना खराब लगता था, अध्यक्ष महोदय, मुझे इस बात का संतोष है कि हमारी सरकार ने निर्णय किया कि ऐसी कठिन घड़ी में सरकार संवेदनशीलता के साथ में घर तक उस व्यक्ति का, सजन का शरीर पहुंचाने का काम हमारी सरकार के माध्यम से हो रहा है.

          अध्यक्ष महोदय, एयर एम्बूलेंस यह सुविधा भी हमारी सरकार के माध्यम से दे रहे हैं. जब आपसे मैं आज बात कर रहा हूं तो बताना चाहूंगा कि इन सबके कारण से मातृत्व मृत्यु दर भी 188 से घटकर के 142 हुई है. शिशु मृत्यु दर में भी कमी  आई है. 5 साल में एक हजार बच्चों में  से  62 जो काल के गाल  में  समा जाते थे,  आज उनकी संख्या  घटकर  44 हुई...

          श्री उमंग सिंघारअध्यक्ष महोदय,  यह एयर एम्बूलेंस से  मातृ मृत्यु दर कैसे कम हो गई.  थोड़ा यह तो बता दें मुझे.

          डॉ. मोहन यादवअब बताओ मैंने एयर एम्बूलेंस  बोला,  एरोप्लेन से और   हेलिकाप्टर से  घूमने की बात नहीं की.  एयर एम्बूलेंस के माध्यम से  अगर कोई हास्पिटल में बीमार है और उसकी हालत खराब  हुई, धार से   उसको इंदौर , भोपाल,  दिल्ली पहुंचाना है.  तो यह हमारी सरकार है,  उसके लिये डॉक्टर और कलेक्टर  डिसाइड करेगा, तो केवल आयुष्मान कार्ड  होगा, तो  भले ही 10 लाख का खर्चा  लगे,  उसकी जान बचाने का काम  हमारी  सरकार के माध्यम से हो रहा है.  एयर एम्बूलेंस की  वहां  भूमिका आती है.

          श्री उमंग सिंघारअध्यक्ष महोदय,   उससे मृत्यु दर कम हो गयी.  यानि हेलिकाप्टर पूरे प्रदेश में चलेंगे, उससे मृत्यु दर  कम हो जायेगी.

          डॉ. मोहन यादव अरे बाप रे,  अगर एयर एम्बूलेंस जान बचाने का काम  नहीं करेगी, तो  मुझे बात करना पड़ेगी नेता  प्रतिपक्ष जी से..

          श्री उमंग सिंघारअध्यक्ष महोदय,   अपवाद  हो सकता है,  इतनी जनसंख्या में  कितने  लोग  उसमें हेलिकाप्टर में जाते हैं.  क्या सभी माताएं हेलिकाप्टर  में जा  रही हैं.

          अध्यक्ष महोदयवह स्वास्थ्य  सुविधाएं बढ़ाने  की बात कर रहे हैं.

          डॉ. मोहन यादव अध्यक्ष महोदय, यह  स्वास्थ्य सुविधा बढ़ाने की बात है.  सकारात्मक बात है और  मैं यह कहना चाहता हूं कि  कोई  बात नहीं है, आप बार-बार मत छेड़ो,  आपकी सरकार ने नहीं किया,  तो   नहीं किया, हमने किया, कम से  कम वह तो श्रेय  दे दो हमको. यह हमारी सरकार की  भावना है.   हम तो आपको अभी कुछ कह नहीं रहे हैं.  हम तो आपको  माफ ही कर  रहे हैं. ..

          श्री उमंग सिंघारअध्यक्ष महोदय,   नहीं, आप बोलो ना.  आप बोलो.

          डॉ. मोहन यादव हम तो बोल ही रहे हैं.  मैं कहां मना कर रहा हूं,   मैं बोल तो रहा ही हूं और  ऐसे आप बोलते रहो,  तो मैं बहुत देर तक  बोलता  रहूंगा और आनंद आयेगा.  यही तो आनंद  है यहां का,  ऐसा अच्छा  पक्ष-विपक्ष का  माहौल  कहां मिलेगा.  जब   हम अपनी अपनी बात कर रहे हैं.  मैं आज आपके सामने बात कर रहा हूं. ..

          अध्यक्ष महोदयइसके बाद यह ध्यान  में आ जाना चाहिये  कि  अध्याय  जल्दी समाप्त  करवाना है कि देर तक  चलाना है.  ..(हंसी).. मुख्यमंत्री जी ने साफ इशारा कर दिया है.

          डॉ. मोहन यादव अध्यक्ष महोदय, कांग्रेस शासन काल में  महिला सुरक्षा  चर्चा का  विषय  ही नहीं था.  हमारी  सरकार की नीति स्पष्ट, अटल और अडिग है.  महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं कर रहे हैं. कोई  ढिलाई नहीं है, कोई दबाव  नहीं है.  इसीलिये इस संकल्प को  सार्थक करते हुए 57  वन स्टॉप सेंटर  स्थापित किये हैं, जो 24 घंटे, सातों दिन   संकट में फंसी बहनों  को  कानूनी, चिकित्सकीय  और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान करते हैं.  महिलाओं और बच्चों के लिये  हेल्प लाइन,  181   और 1098 निरंतर सक्रिय है. अब तक हजारों बहनों और   बेटियों को संकट की घड़ी  में तत्काल सहायता पहुंचाई जा चुकी है. 8 नये  वन स्टॉप सेंटर स्वीकृत कर रहे हैं, ताकि प्रदेश का कोई भी   दूरदराज का इलाका  इस सुरक्षा के छत्र  से  वंचित नहीं रहे.  महिला थानों को भी सुदृढ़ कर रहे हैं.  महिला पुलिस की भर्ती  भी बढ़ा रहे हैं. अपराधों के शीघ्र निपटाने  के लिये  फास्ट ट्रैक न्यायालय   भी सक्रिय किये हैं.  म.प्र. देश का वह पहला  राज्य है,  जहां मासूम बच्चियों  के साथ  दुराचार करने पर  फांसी देने का प्रावधान हमारे राज्य  में है. जहां हमारी बच्चियों पर  कोई कुदृष्टि डाले  उसको जड़ से  मिटाने  का  संकल्प  हमारी सरकारों ने लिया है.  गरीब, निःशक्त, कल्याणी बहनों के कल्याण के लिये  भी  प्रति माह  हम पेंशन  योजनाओं की राशि भेजते हैं. प्रदेश में लाखों बहनों  को  विभिन्न पेंशन योजनाओं  का लाभ मिल रहा है.  कांग्रेस के लोग पैसा नहीं, पैसा नहीं भ्रम फैलाते हैं.  एक बात बताना चाहूंगा कि  इसी साल का बजट देख लो, नारी सशक्तिकरण  के लिये  1 लाख करोड़  का प्रावधान  सरकार के माध्यम से किया गया है.  बहनों के लिये  हमारे  खजाने में कोई कमी नहीं है. म.प्र. सांस्कृतिक,   आध्यात्मिक  अभ्युदय का साक्षी बन रहा है. पर्यटन हमारी आय का  बड़ा माध्यम है.  जनजाति और ग्रामीण क्षेत्र में भी पर्यटन आधारित   अर्थ व्यवस्था का विस्तार  हुआ है.  मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि  इन  क्षेत्रों में संचालित   छोटे व्यवसाय, होम स्टे को  नवाचारों के माध्यम से  सफल कराने में हम  बहनों की भी बड़ी भूमिका देख रहे हैं.  बोलने के लिये तो और भी बहुत सारी   बात मैं बोल सकता हूं.  लेकिन सच  में कुछ  दृश्य  तो  17 तारीख को  देखने को मिला.  बड़ा अटपटा लग रहा था.  माता, बहनों के 33 प्रतिशत  के  आरक्षण की बात की थी.  जो  उनका अधिकार था,  लेकिन  विपक्ष ने जिस प्रकार  का अहंकार का रोल अदा किया,  इनके अहंकार से तो रावण भी  शरमा जाये, यह बड़े आश्चर्य की बात थी. यह अहंकारवादी व्‍यवस्‍थाओं से कभी बहनों का भला नहीं हो सकता है. वास्‍तव में यह जो अंदर का भाव है, एक परिवार और उसकी ताकत को बनाने का. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से मित्रों को बताना चाहता हूं कि परमात्‍मा भी आपको माफ नहीं करेगा. सच में यह स्‍वार्थ की राजनीति कांग्रेस को लगातार धीरे-धीरे डाउन करती जा रही है. यह आगे कहां जायेगी यह आपके लिये छोड़ देता हूं. मैं अब इस पर नहीं बोलता. सच में मुझे इस बात की प्रसन्‍नता है कि हम तो सब भारत माता की जय और वन्‍दे मातरम् बोलने वाले हैं. जहां पर माताएं-बहनें पूजी जाती हैं. यहां विपक्ष अपने दिमाग में ठीक से बैठाये कि सच में अगर बहनें लोक सभा में आयेंगी, विधान सभा में आयेंगी तो देश और प्रदेश को सशक्‍त करेगी. दुनिया के सामने भारत की ताकत को बढ़ते हुए दिखायेगी. लेकिन जाने-अनजाने जो आपसे पाप हो रहा है तो इस पाप की माफी भगवान भी नहीं देने वाला है.

          अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से बताना चाहूंगा कि मैं, जब आपसे बात कर रहा हूं तो यहां पर और भी बहुत सारी बातें कह सकता हूं.

          श्री भंवर सिंह शेखावत- मुख्‍य मंत्री जी यह ब्राह्मणों के भरोसे छोड़ दो, श्राप देंगे तो पंडित जी दे देंगे, गोपाल भार्गव जी दे देंगे. आप तो पहलवान आदमी हो, कहां यह श्राप के चक्‍कर में पड़ गये.

          डॉ. मोहन यादव-अध्‍यक्ष महोदय, नारी दुर्गा, नारा शक्ति, नारी से यह जहांन है, नारी की गरिमा से सारा हिन्‍दुस्‍तान है, पंख मिले जब नारी को, छू लेती वह आसमान है, उसकी उड़ान में बसता देश का स्‍वाभिमान है. मुझे आज के अवसर पर  विस्‍तार के साथ इस संकल्‍प का समर्थन करने के लिये, अध्‍यक्ष महोदय मैं आपके समक्ष अपने दल की तरफ से खड़ा हुआ था. मैं आपका आभार मानता हूं. आपके माध्‍यम से नेता प्रतिपक्ष और उनके सभी माननीय सदस्‍यों का आभार मानता हूं. पूरे देश के सामने इस लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था में मध्‍यप्रदेश की विधान सभा का, अध्‍यक्ष जी आपके सामने आपके नेतृत्‍व के माध्‍यम से पूरा देश मध्‍य प्रदेश की तरफ धन्‍यवाद से देखेगा कि नारी सशक्तिकरण को लेकर के दिनभर चर्चा चली और आनंद के साथ हमारा आज का विशेष सत्र सार्थक हुआ. कई राज्‍य इससे प्रेरणा लेंगे. आपके माध्‍यम से मैं संसदीय कार्य मंत्री और हमारे मित्रों के साथ जिन भी मित्रों ने इसमें भाग लिया, चाहे वह पक्ष के हों, चाहे विपक्ष के हों. आप सभी ने अपनी सार्थक भूमिका अदा की होगी. हम सब मिलकर के एक बार फिर इस नारी सशक्तिकरण के जन-आंदोलन के अंदर उस भूमिका के धनात्‍मक रूप से सोचते जायें. एक बार फिर मेरी और से आप सभी का वंदन. मैं आखिरी में आपके माध्‍यम से केवल यह अपील करता हूं कि जब मैंनें इतनी अच्‍छी बात कही और आपने समर्थन किया तो मैं आपके माध्‍यम से मैं उम्‍मीद करता हूं कि सर्वानुमति से आप इसका समर्थन करेंगे. बहुत-बहुत, धन्‍यवाद.

          श्री बाला बच्‍चन- परिसीमन की प्रक्रिया के अंतगर्त आप 33 प्रतिशत आरक्षण लायेंगे तो. आपने इसमें परिसीमन को जोड़ा हुआ है.

          अध्‍यक्ष महोदय- मैं, समझता हूं कि काफी सार्थक चर्चा रही है. अब मत लेने का समय आ गया है. आप सबके ध्‍यान में है कि मुख्‍य मंत्री जी ने संकल्‍प प्रस्‍तुत किया, उसमें सदस्‍यों ने संशोधन भी प्रस्‍तुत किये, जिसको श्री सोहनलाल बा‍ल्‍मीक जी ने प्रस्‍तुत किया.

          अब मैं, संकल्‍प पर सात माननीय सदस्‍यों द्वारा दिये गये संशोधनों पर सभा का मत लूंगा.

          प्रश्‍न यह है कि- '' इस सदन का मत है कि नारी शक्ति के वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं सशक्तिकरण के लिये देश की संसद एवं सभी विधान सभाओं में, महिलाओं के लिये एक तिहाई आरक्षण लोक सभा की वर्तमान 543 सीटों पर तत्‍काल प्रभाव से लागू किया जाये.''

         

          जो माननीय सदस्‍य इन संशोधनों के पक्ष में हों, वे कृपया हां कहें.

          जो माननीय सदस्‍य इन संशोधनों के विपक्ष में हों, वे कृपया ना कहें

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक- अध्‍यक्ष महोदय, हम इस पर डिवीजन चाहते हैं.

          श्री उमंग सिंघार- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, व्‍यवस्‍था के अनुसार डिवीजन मांगा जा रहा है.

            अध्‍यक्ष महोदय -- मैं दोबारा संकल्‍प प्रस्‍तुत करता हॅूं. एक बार और विचार कर लें.

            "इस सदन का मत है कि नारी शक्‍ति के वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं सशक्‍तिकरण के लिए देश की संसद एवं सभी विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों पर तत्‍काल प्रभाव से लागू किया जाये."

          जो माननीय सदस्‍य इन संशोधनों के पक्ष में हों,

                   वह कृपया हां कहें.

                             जो माननीय सदस्‍य इन संशोधनों के विपक्ष में हों,       

                                      वह कृपया ना कहें.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमने डिवीज़न की मांग की है. डिवीज़न देने का कष्‍ट करें. मैंने डिवीज़न की मांग की है, उसको स्‍वीकार करें. परम्‍परा के अनुरूप ही मौका दें.

          डॉ.सीतासरन शर्मा -- अध्‍यक्ष महोदय, हाथ उठाकर के ही डिवीज़न हो जाए, कोई दिक्‍कत नहीं है.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- अध्‍यक्ष महोदय जी, जो व्‍यवस्‍था अध्‍यक्ष महोदय जी देंगे, उसमें होगा. आप मत बोलिए.

          श्री महेश परमार -- शर्मा जी, अब आप वर्तमान अध्‍यक्ष नहीं रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष जी निर्णय लेने में सक्षम हैं.

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्‍यम से माननीय मुख्‍यमंत्री जी से अनुरोध है कि अगर हम कह रहे हैं कि 543 सीटों और 230 पर यहां से केन्‍द्र को प्रस्‍ताव चला जाए और अभी से उस पर आरक्षण की बात हो जाए, महिलाओं को आरक्षण मिले, तो इसमें मुझे नहीं लगता कि आपत्‍ति होना चाहिए. परिसीमन छोड़कर...(व्‍यवधान).. यह मैं आपके माध्‍यम से अनुरोध कर रहा हॅूं...(व्‍यवधान)...

          श्री विश्‍वास सारंग -- अध्‍यक्ष जी, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने प्रस्‍ताव रखा है, तो सर्वसम्‍मति से पास करें. यदि आप नारियों का सम्‍मान चाहते हैं उनको आरक्षण देना चाहते हैं, तो इस पर करें...(व्‍यवधान)..

          अध्‍यक्ष महोदय -- मैं समझता हॅूं कि चर्चा पूर्ण हो गई है. चूंकि अब माननीय सदस्‍य संशोधनों पर डिवीज़न चाहते हैं, तो डिवीज़न की एक प्रक्रिया है, जो आप में से बहुत सारे लोग उसका उपयोग कर चुके होंगे. रजिस्‍टर दोनों लॉबी में उपस्‍थित रहेगा और उसमें हां या ना के पक्ष में माननीय सदस्‍य अपना मतदान कर सकते हैं. एक प्रक्रिया यह है जोकि सरल है, जल्‍दी हो जाएगा, तो अपने हाथ उठाकर पक्ष करवा लिया जाये. जैसा आप लोग तय करेंगे, मतलब मैं अपनी कोई मर्जी नहीं कर रहा हॅूं.....(व्‍यवधान)....यह सब रिकार्ड में नहीं आएगा.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- (XXX)

          लोक निर्माण मंत्री (श्री राकेश सिंह) -- (XXX)

          संसदीय कार्यमंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अध्‍यक्ष महोदय, इसमें मेरा आपसे एक निवेदन है कि शासकीय प्रस्‍ताव का संकल्‍प था और माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने प्रस्‍तुत किया. शासकीय संकल्‍प था, जिस पर आज बहस हो रही थी. आपने संशोधन स्‍वीकार कर लिया. (XXX) हमने आपका आदेश शिरोधार्य किया.. .(व्‍यवधान)...

            अध्‍यक्ष महोदय -- एक मिनट. देखिए, आपने अपनी बात कही है. संसदीय कार्यमंत्री जी को अपनी बात कहने दीजिए. अरे भई, मैं सुन रहा हॅूं. (सभी सदस्‍यों के एक साथ अपने आसन से खडे़ होकर कुछ कहने पर)...(व्‍यवधान)..

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- अध्‍यक्ष महोदय जी, आपने संशोधन स्‍वीकार किया, हमने शिरोधार्य किया और वास्‍तव में संकल्‍प के ऊपर मत होना चाहिए. संशोधन में आप हां या ना की जीत करवा लीजिए और संकल्‍प के उपरांत आप मतदान करवाइए, मेरा यह आग्रह है आपसे. संशोधन में हां या ना की जीत हो जाए...(व्‍यवधान)...

          श्री विश्‍वास सारंग -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय..(व्‍यवधान)..

          श्री उमंग सिंघार -- अध्‍यक्ष महोदय ...(व्‍यवधान)..

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मूल प्रस्‍ताव तो सरकार का है, मुख्‍यमंत्री जी का है. संविधान में यह प्रस्‍ताव नहीं है. इसलिए मेरा आपसे आग्रह है कि परम्‍परा यही रही है...

          अध्‍यक्ष महोदय -- संसदीय कार्यमंत्री जी जो कह रहे हैं, एक तरीका यह भी हो सकता है.

...(व्‍यवधान)..

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक -- ( XXX )

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- ( XXX )

          श्री उमंग सिंघार -- ( XXX )

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- ( XXX )

          श्री उमंग सिंघार --  ( XXX )

          श्री कैलाश विजयवर्गीय -- ( XXX )

            अध्‍यक्ष महोदय   अब मैं पुन: मत के लिए प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत कर  रहा हूं.

          संशोधन पर प्रस्‍ताव पर आपकी बात मैं रख चुका हूं. अब, प्रश्‍न यह है कि इस सदन का मत है कि नारी शक्ति के वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं सशक्तिकरण के लिए देश की संसद एवं सभी विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर तत्‍काल प्रभाव से लागू किया जाए.

जो माननीय सदस्‍य इस संकल्‍प के पक्ष में हो कृपया हां कहे, जो माननीय सदस्‍य इस संकल्‍प के विपक्ष में हो कृपया न कहे.

श्री सोहन लाल बाल्‍मीक माननीय अध्‍यक्ष जी, विभाजन मांगा था, विभाजन दोनों का अलग अलग करवाया जाए.

श्री कैलाश विजयवर्गीय अध्‍यक्ष जी, हम डिवीजन नहीं मांग रहे आप हां की जीत कर दीजिए.

श्री उमंग सिंघार अध्‍यक्ष जी कार्यवाही आगे बढ़ चुकी है और आपने व्‍यवस्‍था दे दी है और अभी तक परम्‍परा नियम यह रहे है कि संशोधन में पहले होता है.

श्री विश्‍वास सारंग अध्‍यक्ष जी, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने जो प्रस्‍ताव रखा (...व्‍यवधान)

श्री उमंग सिंघार (xxx)

अध्‍यक्ष महोदय सभी लोग अपने स्‍थान पर बैठ जाएं. (...व्‍यवधान)

लोक निर्माण मंत्री(श्री राकेश सिंह) -- अध्‍यक्ष महोदय, जब तक आप आसंदी पर हैं, तब तक निर्णय आपके ही हाथ में है, कोई भी व्‍यवस्‍था जो आगे बढ़ी हो या न बढ़ी हो, अंतिम निर्णय केवल और केवल आपका ही होता है और आप आसंदी पर विराजमान हैं, इसीलिए अंतिम निर्णय जो होगा, वह आपका ही होगा. ..

          ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- देखिये कार्यवाही बढ़ाना है, तो मुझे बोलना पड़ेगा (एक से अधिक माननीय सदस्‍यों द्वारा अपने अपने आसन से कुछ कहने पर ) अगर आप ही लोग सलाह दे रहो हो, तो फिर कैसे काम चलेगा? ..(व्‍यवधान)..

श्री भंवर सिंह शेखावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा छोटा सा एक निवेदन है, बात तो आप ही की हो रही है, माननीय मुख्‍यमंत्री जी का संकल्‍प है, पास तो होगा क्‍योंकि बहुमत तो आपका ही है, आप क्‍यों घबरा रहे हो? पास आप ही करोगे, इधर मतदान हो जाने दीजिये क्‍या दिक्‍कत है, जो होने वाला है, वह क्‍लीयर दिख रहा है, माननीय मुख्‍यमंत्री जी के प्रस्‍ताव को कहीं कोई आंच नहीं आने वाली है, वह सर्वसम्‍मति से पास होगा ही होगा, सिर्फ मतदान होना, मतदान हो जाने दीजिये और आपका संकल्‍प पास होना ही है, इसमें क्‍या दिक्‍कत है? मतदान तो एक प्रक्रिया है.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री(श्री प्रहलाद सिंह पटेल) -- मैं इस सदन में पहली बार आया हूं, जैसे माननीय श्री गोपाल भार्गव जी ने कहा है, वह इतने वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं कि क्‍या ऐसी परंपरा है कि कोई संकल्‍प आये, तो उसके संशोधन को स्‍वीकार किया जाये? अगर विधेयक वित्‍तीय हो, अन्‍यान्‍य हो, जब ऐसी विषम परिस्थितियां आती हैं, तो स्‍वाभाविक है कि आपको ही अंतिम फैसला लेना है और इसलिए मैं आपसे यह प्रार्थना करता हूं कि कॉल एंड शकधर हो या हमारी परंपरायें हों, या पहली घटी हुई कोई घटना हो, तब तो बात समझ में आती है, अन्‍यथा सरकार का एक पक्ष है, एक संकल्‍प है, जिसके कारण दिन भर इतनी सकारात्‍मक बहस हुई है और आखिरी में जाकर यह परिस्थिति बने, तो मुझे लगता है कि उचित नहीं है और हमारी कोई अगर पिछली कोई परंपरा ऐसी हो, तो अध्‍यक्ष महोदय, हमें कोई दिक्‍कत नहीं है, लेकिन अंतिम फैसला अध्‍यक्ष्‍ा जी का होता है और इसलिए मुझे लगता है कि कोई ऐसा फैसला हो गया, यह बिल्‍कुल नई परिस्थिति है, इस नई परिस्थिति पर आप विचार करेंगे, ऐसी प्रार्थना है.  (व्‍यवधान)..                               

            अध्‍यक्ष महोदय-- गिरीश गौतम जी कुछ बोल रहे हैं.

          श्री गिरीश गौतम-- माननीय अध्‍यक्ष जी, विधान सभा में इस तरह से कोई विशेष विवरण नहीं है, परंतु परंपरा में आप सब जानते हैं. प्रस्‍ताव आते हैं, कई प्रस्‍ताव आते हैं. विधान सभा अध्‍यक्ष का जब निर्वाचन होता है तो 5-6 प्रस्‍ताव आते हैं और उसमें पहले प्रस्‍ताव वाले में मत होता है, यदि वह पास हो गया तो बाकी के प्रस्‍ताव Infructuous हो जाते हैं, विधान सभा का यह नियम है...(मेजों की थपथपाहट)... और इसी तरह से जब प्रस्‍ताव संकल्‍प के रूप में आया तो उसमें हां या नहीं में करना है, केवल वोटिंग उसी में होगी कि जो संकल्‍प आया है वह पास हो या नहीं हो. जितने संकल्‍प आते हैं, किसी तरह का भी संकल्‍प आता हो उसमें सबमें केवल एक वोटिंग होती है, बहस आपने कर लिया, सब कुछ कर लिया पर वोटिंग केवल एक होगी कि संकल्‍प पास हो या न पास हो, इसमें केवल यह नियम है.

          श्री सोहनलाल बाल्‍मीक--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, संकल्‍प में यही संशोधन हमारा था. आपने ग्राह्य किया है संशोधन को.

          श्री उमंग सिंघार--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पूर्व विधान सभा अध्‍यक्ष जी को मैं बताना चाहता हूं कि 123(3) के अंदर सूचनाओं की जानकारी देना अशासकीय संकल्‍प है, संकल्‍प नहीं है. कौन से आपके प्रमुख सचिव ने दी, कब दी, किसके रिकार्ड में, किस सदस्‍य को मिली, बतायें. संकल्‍प हमारा पहले था, उस पर हम लोग बात करना चाह रहे थे.

          डॉ. सीतासरन शर्मा--  अध्‍यक्ष महोदय, संकल्‍प तो पहला माननीय मुख्‍यमंत्री जी का ही प्रस्‍तुत हुआ. अब उसमें पीछे नहीं जा सकते. मेरा अनुरोध यह है कि इसमें ये संकल्‍पों के नियम हैं.

          श्री उमंग सिंघार-- मुख्‍यमंत्री जी के बाद माननीय विधान सभा अध्‍यक्ष जी ने व्‍यवस्‍था दे दी, अब उसके पीछे कैसे जायेंगे, आप बताओ. अब आप पीछे रिवर्स की बात कर रहे हो. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने व्‍यवस्‍था दे दी है, मत विभाजन की व्‍यवस्‍था दे दी है, डिवीजन की व्‍यवस्‍था ...(व्‍यवधान)... यह परंपरा है.

          डॉ. सीतासरन शर्मा-- कोई परंपरा नहीं है. अध्‍यक्ष महोदय 117 से 129 तक इन नियमों में कहीं भी संशोधनों पर मत की व्‍यवस्‍था नहीं है. संकल्‍प पर ही मत की व्‍यवस्‍था है. नियम 127 आप कृपया करके देख लें. उसमें सिर्फ संकल्‍प पर मत लेने की व्‍यवस्‍था है. संशोधन पर मत लेने की व्‍यवस्‍था नियमों में है ही नहीं, यह एक बात. दूसरी बात जो आदरणीय डॉक्‍टर साहब भी कह रहे थे और नेता प्रतिपक्ष जी ने भी कही तो पिछली बार जब एन.पी. प्रजापति जी अध्‍यक्ष थे तब एक विधेयक को प्रवर समिति में जाने का निर्णय हो गया था, सभा ने पास कर दिया था, इसके बाद उन्‍होंने उसको वापस लिया और विधेयक को वापस प्रस्‍तुत करवाया यहां पर, क्‍योंकि अध्‍यक्ष को सब अधिकार है और जैसा कि माननीय गिरीश गौतम साहब ने कहा जब तक आप आसंदी पर है, अध्‍यक्ष महोदय, सारे अधिकार आपको हैं और नियमों में कहीं भी नहीं है संशोधनों पर वोट लेने का, आप पढ़कर बता दीजिये. ...(मेजों की थपथपाहट)...

          डॉ. मोहन यादव--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसी बात हमारे डॉ. सीतासरन जी ने बताई, माननीय गिरीश गौतम जी ने कही और यह बात भी सही है कि प्रस्‍ताव तो हमारा पहला है और हमारे प्रस्‍ताव पर ही सारी बात है और ऐसे में वह संकल्‍प जब लाया तो कितनी झूठ बात है कि पहले हमारा हो गया तो यह कौन सी बात हुई. पहला हमारा प्रस्‍ताव है उस प्रस्‍ताव पर संशोधन की बात आई उसी आधार पर यह सारे लोग बैठे हैं, उसी की तो हम बात कर रहे हैं. इसमें क्‍या गलत है.

          श्री उमंग सिंघार--  माननीय अध्‍यक्ष महोदय ...(व्‍यवधान)... मैं वापस से प्‍वाइंट ऑफ ऑर्डर की बात कर रहा हूं. (XXX)

          डॉ. मोहन यादव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह किसी को बताने की जरूरत नहीं है.

          श्री उमंग सिंघार--  अगर आपका प्रस्‍ताव था तो सूचना क्‍यों नहीं मिली, सदन से, यहां से विधान सभा से.

          ...(व्‍यवधान)...

            श्री भूपेन्द्र सिंह- (XXX )

          श्री राकेश सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, बहुत अच्छे वातावरण में आज की चर्चा हुई है और अब जब हम प्रस्ताव को देखा जाये पक्ष और विपक्ष अपने-अपने मत का उपयोग करके परिणाम तक पहुंचाने की स्थिति में आ रहे हैं तब इस तरह का वातावरण उचित नहीं है. जहां तक बात होती  है कि माननीय अध्यक्ष महोदय ने कोई व्यवस्था दे दी. परंपरा है लोकसभा में भी परंपरा है कि अगर कहीं कोई कमी बाकी रह गई तो माननीय अध्यक्ष महोदय, लोक सभा उठने के बाद रात में लोक सभा फिर से काल की गई है और उसके बाद माननीय अध्यक्ष जी ने व्यवस्था दुबारा दी है और उस व्यवस्था को माना गया है इसलिये इस सदन के भीतर आपका जो निर्णय होगा वही अंतिम है. जहां तक बात दबाव की है माननीय अध्यक्ष जी पर न किसी का दबाव होता है न किसी का हो सकता है. जिस सौहार्दपूर्ण वातावरण में हमने चर्चा शुरू की है उसी सौहार्दपूर्ण वातावरण में हमको उसको समाप्त करना चाहिये और अंतिम  व्यवस्था जो आप देंगे माननीय अध्यक्ष महोदय, वही अंतिम और वह सर्वस्वीकार्य होगी.

          श्री बाला बच्चन - व्यवस्था में संशोधन क्यों किया जा रहा है.

          अध्यक्ष महोदय - एक तो मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि मुख्यमंत्री जी का संकल्प है वह पहले प्रस्तुत हुआ है विधान सभा में इसलिये यह गलतफहमी किसी को नहीं होनी चाहिये और कल कार्यसूची सबको वितरित की गई है दूसरा जो संशोधन है वह आज सुबह प्राप्त हुए हैं विधान सभा को लेकिन सामान्य तौर पर सब लोगों की इच्छा थी और सब लोग कार्यमंत्रणा में भी बैठे थे और पिछली एक-दो परंपराएं रही हैं जिसमें संशोधन स्वीकार किये गये हैं इसलिये उन संशोधनों को प्रस्तुत किया गया. वैसे सामान्य तौर पर संशोधन देने की प्रक्रिया भी काफी पूर्ववत् होती है लेकिन चूंकि  परंपरा थी और आज वह विषय आने वाला था और कम समय था इसलिये संशोधनों को स्वीकृति दी गई और संशोधन पर और मूल संकल्प पर चर्चा हुई और चर्चा लगभग-लगभग 8 घंटा चली सभी लोगों ने. अब स्वाभाविक रूप से जब डिवीजन की बात आती है तो संकल्प दो हैं एक संकल्प मुख्यमंत्री जी ने प्रस्तुत किया है.संशोधन सोहनलाल बाल्मीक जी ने प्रस्तुत किये हैं तो पहले मैंने संशोधन की बात की और उसके बाद दूसरा संकल्प मुख्यमंत्री जी का पढ़ा.तो मुख्यमंत्री जी के संकल्प पर कोई मतदान चाहता  नहीं है तो इसलिये मैं समझता हूं मैं दोबारा इसको पढ़ता हूं और उसके बाद फिर मैं मत लेता हूं.

          " इस सदन का मत है कि नारी शक्ति के वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं सशक्तीकरण के लिये देश की संसद और सभी विधान सभाओं में महिलाओं के लिये एक तिहाई आरक्षण परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर तत्काल प्रभाव से लागू किया जाये "

          जो माननीय सदस्य इसके पक्ष में हों कृपया "हां" कहें जो माननीय सदस्य इस संकल्प के विपक्ष में हों वे कृपया "ना" कहें.

          संसदीय कार्य मंत्री(श्री कैलाश विजयवर्गीय) -  अध्यक्ष महोदय,मेरा प्वाइंट आफ आर्डर है. यह संकल्प अब पारित हो गया है अध्यक्ष महोदय, इसलिये संशोधन की कोई आवश्यक्ता नहीं है. संकल्प पारित होने के बाद संशोधन पर चर्चा नहीं की जा सकती.मेरा प्वाइंट आफ आर्डर है.

          श्री उमंग सिंघार -  अध्यक्ष महोदय, पारित कहां हुआ.अभी डिवीजन मांगा है हमने उस पर व्यवस्था मांगी है. अभी पारित भी हो गया.

          श्री कैलाश विजयवर्गीय - अध्यक्ष महोदय, मेरा प्वाइंट आफ आर्डर है आप चाहें तो.हमेशा मूल सदस्य..

          अध्यक्ष महोदय - इसमें एक-दो बार प्रस्ताव पढ़ना पड़ता है. मैं एक बार फिर पढ़ता हूं शायद  आप भी डिवीजन मांग लें.         

          '' इस सदन का मत है कि नारी शक्‍ति के वंदन हेतु महिलाओं के सर्वांगीण विकास एवं सशक्‍तीकरण के लिए देश की संसद और सभी विधान सभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कर तत्‍काल प्रभाव से लागू किया जाये''

          जो माननीय सदस्‍य इसके पक्ष में हों कृपया ''हां'' कहें, जो माननीय सदस्‍य इस प्रस्‍ताव के विपक्ष में हों, वे कृपया ''ना'' कहें.

          हां की जीत हुई.

          हां की जीत हुई.

                                                                                      संकल्‍प स्‍वीकृत हुआ.  संशोधन अस्‍वीकृत हुए.

           

          नेता प्रतिपक्ष (श्री उमंग सिंघार) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने डिविजन की बात की है. ...(व्‍यवधान)...

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) -- अब प्रस्‍ताव तो पारित हो गया. अब संशोधन पर चर्चा करने की कोई आवश्‍यकता है नहीं अध्‍यक्ष महोदय. ...(व्‍यवधान)...

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डिविजन की बात है. ...(XXX)...

          अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय नेता प्रतिपक्ष से मैं आग्रह करना चाहता हूँ कि चूँकि जब मूल प्रस्‍ताव पर मतदान की बात नहीं आई और जो मुख्‍यमंत्री जी का प्रस्‍ताव था, उसको बड़ी संख्‍या में पारित कर दिया गया और जब वह पारित हो गया है तो मैं समझता हूँ संशोधन स्‍वत: ही उसी मत के आधार पर अस्‍वीकृत हो जाएंगे.

... व्‍यवधान...

 

 

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...(XXX)... आदेशानुसार रिकॉर्ड नहीं किया गया.

 

 

 

08.37 बजे                                   बहिर्गमन

प्रतिपक्ष की बात न सुने जाने के विरोध में सदन से बहिर्गमन

          श्री उमंग सिंघार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह व्‍यवस्‍था ...(व्‍यवधान)... हम विरोध करते हैं. हम वाक आऊट करते हैं.

          (प्रतिपक्ष की बात न सुने जाने के विरोध में श्री उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्‍व में इण्‍डियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण द्वारा सदन से बहिर्गमन किया गया.)

          अध्‍यक्ष महोदय -- आप लोग बैठिए, अभी सदन की कार्यवाही समाप्‍त नहीं हुई है.

         

         

          माननीय मुख्‍यमंत्री जी.

          मुख्‍यमंत्री (डॉ. मोहन यादव) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह सही है कि यह आज का हमारा विशेष सत्र नारी सशक्तिकरण प्रदेश और देश की आधी आबादी की भावनाओं का सम्‍मान करते हुए माननीय प्रधानमंत्री जी ने जिस प्रकार से लोक सभा में देश के सामने आह्वान किया था, उसी की परिणति के आधार पर हमने इस संकल्‍प का प्रतिपादन करते हुए, आपसे सदन के माध्‍यम से चर्चा कराते हुए, सार्थक चर्चा के माध्‍यम से दिन भर हमारे सभी पक्ष और विपक्ष के मित्रों के साथ इस पर चर्चा कराके संकल्‍प को पारित कराने का आग्रह किया था. मुझे बड़ा दुख भी है कि नारी सशक्तिकरण को लेकर कांग्रेस का जो अतीत का काला पृष्‍ठ था, आज भी दुर्भाग्‍य के साथ कांग्रेस उसी लाईन पर चलते हुए वह अपनी उस लाईन से बाहर नहीं आ रही है, जिसमें देश की आधी आबादी के साथ सही न्‍याय हो सके. मुझे दुर्भाग्‍य के साथ कहना पड़ रहा है कि कांग्रेस इसी की कीमत चुका रही है, उनकी पांच पीढि़यों ने लगातार नेहरू जी के बाद, इंदिरा जी उसके बाद राजीव गांधी जी, उनके बाद सोनिया गांधी जी और आज उनके अपने नेता प्रतिपक्ष के माध्‍यम से चाहे पक्ष में हो या विपक्ष में, सदैव उनकी नकारात्‍मक के आधार पर इस प्रदेश की जनता कभी उनको माफ नहीं करेगी. मैं इसके माध्‍यम से, आज यह प्रस्‍ताव पारित करने के लिए माननीय अध्‍यक्ष जी आपका भी धन्‍यवाद अदा करना चाहूँगा. मैं हमारे संसदीय कार्य मंत्री, हमारे सभी मित्रों के साथ इस सदन में सार्थक चर्चा के लिये और सभी मित्रों के साथ चर्चा में जो अलग-अलग प्रकार के सभी अवसरों के आधार पर जब हम यह संकल्‍प कर रहे हैं, तो हम उम्‍मीद कर रहे हैं कि आज नहीं तो कल हमारा दल और हमारी सरकार आधी आबादी को न्‍याय दिलाकर रहेगी, दुनिया की कोई ताकत उसको रोक नहीं पायेगी. अन्‍तत: कांग्रेस की इस दुरावस्‍था के बाहर, जनता को उनका हक माताओं और बहनों के अधिकार के साथ हम उनको दिलाकर रहेंगे. (मेजों की थपथपाहट) मैं एक बार फिर आपका वंदन करता हूँ, अभिनन्‍दन करता हूँ, धन्‍यवाद करता हूँ.

          अध्‍यक्ष महोदय - माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी.

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय) - अध्‍यक्ष महोदय, एक बार फिर से आपके दीर्घ अनुभव का दर्शन हम सबको आज देखने को मिला है. जिस शालीनता के साथ आपने इस गंभीर विषय पर चर्चा कराई है और कार्य मंत्रणा समिति ने सिर्फ 4 घंटे का ही समय दिया था. आपका धैर्य है कि आपने उसको 8 घंटे चलाया, उस पर 8 घंटे चर्चा हुई और उसके बाद भी बड़ी सार्थक चर्चा हुई, दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे और थोड़ी सी गर्मा-गर्मी तो चलती है, नहीं तो सदन का कुछ मतलब ही नहीं है. उसके बावजूद बहुत अच्‍छी चर्चा हुई, सार्थक चर्चा हुई और मैं इसीलिये सबसे पहले आपके धीर-गंभीर और बहुत ही चिंताशील स्‍वभाव के कारण, सबसे पहले मैं आपको धन्‍यवाद देना चाहता हूँ कि आपने बहुत ही गंभीरता के साथ आज इस प्रस्‍ताव पर चर्चा कराई (मेजों की थपथपाहट) और चर्चा ही नहीं कराई, परम्‍परा और नियम का पालन करते हुए चर्चा कराई. मैं माननीय मुख्‍यमंत्री जी को भी धन्‍यवाद देना चाहता हूँ कि आज काफी समय उन्‍होंने विधान सभा में समय देकर न सिर्फ सारी चर्चा सुनी हैं, आज बड़ा अद्भुत उनका जवाब भी था, एक बार फिर मुख्‍यमंत्री जी को मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूँ (मेजों की थपथपाहट) और धन्‍यवाद देता हूँ. मुझे यह कहते हुए गर्व है कि हमने आज 3 लाईन व्हिप जारी की थी, इसमें मात्र 6 सदस्‍य ऐसे थे, जो अपने किसी निजी कारण से जैसे किसी का स्‍वास्‍थ्‍य खराब था, किसी के घर में विवाह था, तो उन्‍होंने अनुमति ली थी बाकी सारे सदस्‍य पूरे समय विधान सभा में उपस्थित रहे और बहुत अच्‍छी चर्चा में भाग लिया (मेजों की थपथपाहट). मैं सारे सदस्‍यों को भी धन्‍यवाद देना चाहता हूँ,

            अध्‍यक्ष महोदय, मैं हमेशा  विधान सभा सचिवालय की तारीफ करता हूँ, यह बड़े उत्‍कृष्‍ट तरीके से कार्य करता है और इसलिए मैं  विधान सभा के माननीय प्रमुख सचिव महोदय, अधिकारी और नीचे तक के सब कर्मचारियों को धन्‍यवाद देता हूँ. अध्‍यक्ष महोदय, यह टैबलेट जो आपने हमें दिया है, मैं उसके लिये आपको धन्‍यवाद देना चाहता हूँ. (मेजों की थपथपाहट)

          कुंवर विजय शाह - अध्‍यक्ष महोदय, ...

          अध्‍यक्ष महोदय - विजय जी ने कुछ समझदारी की बात की है क्‍या ? (हंसी)      

          श्री कैलाश विजयवर्गीय-  विजय जी कभी-कभी करते हैं. मुझे गर्व है कि आज सभी सदस्‍यों ने न केवल गंभीरता के साथ सुना वरन् इस चर्चा में भाग भी लिया. विशेषकर हमारी महिला सदस्‍यों ने, जिस प्रकार हमारी ओपनिंग बैट्समैन श्रीमती कृष्‍णा गौर जी ने ओपनिंग की, इसके बाद बीच-बीच में अर्चना जी, उषा जी और सभी ने जिस प्रकार बल्‍लेबाजी की, आज की चर्चा बहुत ही सार्थक रही, मैं सभी महिला शक्ति को प्रणाम करता हूं. (मेजों की थपथपाहट)

 

 

8.46 बजे

          विधान सभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्‍थगित की जाना : प्रस्‍ताव

          संसदीय कार्य मंत्री (श्री कैलाश विजयवर्गीय)-  अध्‍यक्ष महोदय, आज की हमारी कार्यसूची पूर्ण हो गई है, यदि आप अनुमति दें तो मैं इस विधान सभा, जो एक दिवसीय सत्र था, उसके लिए आपको धन्‍यवाद देता हूं और प्रस्‍ताव भी करता हूं. हमारी सरकार के सभी अधिका‍री टॉप टू बॉटम, यहां उपस्थित थे, ये बड़ी अच्‍छी बात है. अधिकारी दीर्घा में वे पूरे समय बैठे रहे. इसके लिए अधिकारियों को धन्‍यवाद देता हूं. अध्‍यक्ष जी आपकी अनुमति हो तो मैं यह प्रस्‍ताव सदन में रख दूं.

          अध्‍यक्ष महोदय, विधान सभा का यह एक दिवसीय सत्र जिस कार्य के लिये आयोजित किया गया था, वह पूर्ण हो चुका है.

          अत: मध्‍यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियम 12-ख के द्वितीय परंतुक के अंतर्गत, मैं, प्रस्‍ताव करता हूं कि सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिये स्‍थगित की जाए.

          अध्‍यक्ष महोदय-  मैं, गिरीश जी को अनुमति देता हूं. वे कुछ कहना चाहते हैं.

          श्री गिरीश गौतम (देवतालाब)-  अध्‍यक्ष महोदय, मैं, सारे सदस्‍यों से आग्रह करना चाहता हूं कि हमारे सदन के नेता, प्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ.मोहन यादव जी ने नारियों के लिए, उनके अधिकारों की रक्षा के लिए जो प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया है, एक मत से ताली बजाकर, हम उनका धन्‍यवाद करें. (मेजों की थपथपाहट)

          अध्‍यक्ष महोदय-  माननीय संसदीय कार्य जी ने जो प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत किया है, वह प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ.

          प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

8.47 बजे

राष्‍ट्रगान जन-गण-मन का समूहगान

          अध्‍यक्ष महोदय-  अब राष्‍ट्रगान होगा.

            (सदन के माननीय सदस्‍यों द्वारा राष्‍ट्रगान जन-गण-मन का समूहगान किया गया.)

 

8.49 बजे

विधान सभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्‍थगित की जाना : घोषणा

 

अध्यक्ष महोदय-  विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित.

            रात्रि 8.49 बजे विधान सभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की गई.

 

भोपाल,                                                                                              अरविन्‍द शर्मा,

दिनांक : 27 अप्रैल, 2026                                                         प्रमुख सचिव,

                                                                                                      मध्यप्रदेश विधान सभा