मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा एकादश सत्र

 

 

जुलाई, 2016 सत्र

 

मंगलवार, दिनांक 26 जुलाई, 2016

 

(4 श्रावण, शक संवत्‌ 1938 )

 

 

[खण्ड- 11 ] [अंक- 6 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

मंगलवार, दिनांक 26 जुलाई, 2016

 

(4 श्रावण, शक संवत्‌ 1938 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

पुनासा डेम के अंतर्गत संचालित परियोजनाएं

1. ( *क्र. 2857 ) श्री सचिन यादव : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इंदिरा सागर परियोजना (पुनासा डेम) के अंतर्गत ऐसी कितनी परियोजनाएं हैं, जिनके माध्‍यम से कितने ग्रामों की कितनी-कितनी हेक्‍टेयर कृषि भूमि को सिंचित एवं अपरिष्‍कृत पेयजल सुविधा उपलब्‍ध कराई जा रही है? इनका विस्‍तार कर और कितने ग्रामों एवं क्षेत्र की कृषि भूमि को सिंचित किया जायेगा एवं कितनी-कितनी परियोजनाएं स्‍वीकृत एवं प्रस्‍तावित हैं, उन परियोजनाओं से कितने ग्रामों की कितनी हेक्‍टेयर कृषि भूमि को सिंचित एवं अपरिष्‍कृत पेयजल सुविधा उपलब्‍ध कराने का लक्ष्‍य रखा गया है एवं उनके विस्‍तारीकरण की भी क्‍या आगामी कार्ययोजना है? (ख) क्‍या इंदिरा सागर परियोजना (पुनासा डेम) जलाशय की भंडारण क्षमता के मान से प्रश्‍नांश (क) में दर्शित परियोजनाएं बनाई गई हैं? हाँ तो उक्‍त परियोजनाओं की पूर्ति के उपरांत कितना पानी उक्‍त डेम में शेष रहेगा? (ग) प्रश्‍नांश (क) अनुसार जिला खरगोन के कितने-कितने ग्रामों की कितनी-कितनी हेक्‍टेयर कृषि भूमि को सिंचित एवं अपरिष्‍कृत पेयजल सुविधा दी जा रही है एवं दी जायेगी तथा अस्‍वीकृत एवं प्रस्‍तावित आगामी परियोजनाओं से कितने हेक्‍टेयर कृषि भूमि को सिंचित एवं अपरिष्‍कृत पेयजल सुविधा दिये जाने का लक्ष्‍य रखा गया है? (घ) क्‍या उक्‍त परियोजनाओं के अंतर्गत क्षेत्रों में पड़ने वाले तालाबों, जलाशयों आदि को भी इन परियोजनाओं के माध्‍यम से पानी डाला जायेगा? हाँ तो बतायें? नहीं तो क्‍यों?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) इस संरचना के अंतर्गत दो परियोजनाएं आती हैं, जिसमें से एक इंदिरा सागर नहर परियोजना एवं दूसरी पुनासा उद्वहन सिंचाई परियोजना है। (1) इंदिरा सागर परियोजना के अंतर्गत खरगोन उद्वहन नहर का कार्य भी सम्मिलित है। वर्तमान में इंदिरा सागर परियोजना से लक्षित 596 ग्रामों की 123000 हेक्‍टेयर के विरूद्ध 358 ग्रामों की 105000 हेक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्‍ध कराई जा रही है एवं खरगोन उद्वहन नहर से 152 ग्रामों में अपरिष्‍कृत पेयजल उपलब्‍ध कराया जाना प्रस्‍तावित है। (2) पुनासा उद्वहन सिंचाई परियोजना में इंदिरा सागर जलाशय से सीधे पानी उद्वहन कर खण्‍डवा जिले के 99 ग्रामों की 35000 हेक्‍टेयर कृषि भूमि को सिंचित एवं अपरिष्‍कृत पेयजल सुविधा उपलब्‍ध कराई जा रही है। (3) इंदिरा सागर की मुख्‍य नहर के विस्‍तारीकरण के अंतर्गत दो परियोजनाएं स्‍वीकृत हैं, जिनका विवरण निम्‍नानुसार है :- (i) छैगाँवमाखन उद्वहन योजना-सिंचाई क्षमता 35000 हेक्‍टेयर, लाभान्वित ग्रामों की संख्‍या 58, अपरिष्‍कृत जल उपलब्‍ध कराये गये ग्रामों की संख्‍या 0. (ii) बिस्‍टान उद्वहन योजना-सिंचाई क्षमता 22000 हेक्‍टेयर लाभान्वित ग्रामों की संख्‍या 92, अपरिष्‍कृत जल उपलब्‍ध कराये गये ग्रामों की संख्‍या 0. (4) पुनासा सिंचाई योजना के विस्‍तारीकरण के अंतर्गत सिंहाडा उद्वहन योजना स्‍वीकृत है, जिसकी सिंचाई क्षमता 5750 हेक्‍टेयर, लाभान्वित ग्रामों की संख्‍या 17 तथा अपरिष्‍कृत जल उपलब्‍ध कराये गये ग्रामों की संख्‍या 17 है। (5) इसके अतिरिक्‍त इंदिरा सागर परियोजना के जलाशय से हरसूद उद्वहन योजना प्रस्‍तावित है, जिससे खण्‍डवा जिले की हरसूद तहसील के 13 ग्रामों में 5648 हेक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई प्रस्‍तावित है। (ख) इंदिरा सागर परियोजना के जलाशय से सिंचाई हेतु 1730 मिलियन क्‍यू.मी. पानी सुरक्षित रखा गया है जो कि प्रश्‍नांश (क) में दर्शाई गई योजनाओं हेतु सुरक्षित है। उक्‍त योजनाओं में पानी की आपूर्ति के पश्‍चात (पुनासा डेम) में 8020 मिलियन क्‍यू.मी. पानी उपलब्‍ध रहता है। (ग) प्रश्‍नांश (क) अनुसार जिला खरगोन के 225 ग्रामों की 54000 हेक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता निर्मित हो चुकी है तथा योजना का शेष कार्य पूर्ण होने पर 62 ग्रामों की 12551 हेक्‍टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा एवं 152 ग्रामों के लिये अपरिष्‍कृत पेयजल उपलब्‍ध कराई जावेगी एवं स्‍वीकृत बिस्‍टान उद्वहन नहर सिंचाई योजना से 92 ग्रामों की 22000 हेक्‍टेयर क्षेत्र को सिंचित कराया जाना प्रस्‍तावित है। (घ) जी नहीं। प्रस्‍तावित परियोजनाओं में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।

श्री सचिन यादव--अध्यक्ष महोदय,मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्रीजी से पूछना चाहता हूं. मैंने जो प्रश्न किया था उसका जो जवाब आया है कि सारी परियोजनाओं को पानी आवंटित करने के पश्चात इंदिरा सागर बांध में पर्याप्त पानी रहता है. मैं, आपके माध्यम से पूछना चाहता हूं कि क्या कारण है कि पर्याप्त पानी होने के बावजूद जब बोनी का समय आता तो हर साल किसानों को सड़कों पर उतर कर एनव्हीडीए के अधिकारियों के दफ्तरों का घेराव करना पड़ता है. हर साल ऐसी स्थिति निर्मित होती है जिसके कारण किसान परेशान होते हैं. मैं मंत्रीजी से इसका कारण जानना चाहता हूं.

श्री लाल सिंह आर्य--अध्यक्ष महोदय, बहुत सारी नहरों का कहीं न कहीं काम चल रहा है इसके कारण थोड़ा बहुत काम प्रभावित होता है. अध्यक्ष महोदय, जब भी किसान फसल के लिए पानी की मांग करते हैं तो हम निर्माण कार्य रोक कर किसानों के हित में पानी देने का काम करते हैं, और यह भविष्य में जारी रहेगा.

श्री सचिन यादव--अध्यक्ष महोदय, मैं, आपके माध्यम से यह भी जानना चाहता हूं कि नहरों के काम के जो टेण्डर 2006 में स्वीकृत हुए थे, उन नहरों का काम आज तक क्यों नहीं पूरा हो पा रहा है. मैं कई बार धरने दे चुका हूं. कई बार उच्चाधिकारियों से, प्रमुख सचिव से, चर्चा कर चुका हूं. कलेक्टर के माध्यम से जो जिले के बड़े अधिकारी हैं, उनसे चर्चा कर चुका हूं. लेकिन हर बार मुझे सिर्फ आश्वासन मिलता है. विगत 2-3 सालों से लगातार यही स्थिति निर्मित हो रही है कि हर बार जब भी पानी छोड़ने की बात आती है तो विभाग के लोग नहरों का काम पूरा करने की आड़ लेकर हर बार ऐसी स्थिति निर्मित करते हैं जिसके कारण किसानों को बहुत समस्या का सामना करना पड़ता है.

अध्यक्ष महोदय--कृपया प्रश्न पूछें.

श्री सचिन यादव--अध्यक्ष महोदय, मैं, आपके माध्यम से पूछना चाहता हूं कि एक समयावधि बतायी जाये जिसमें नहरों का काम, विशेष कर मेरे क्षेत्र में जो अधूरा पड़ा है, वह काम कब तक पूर्ण कर लिया जाएगा?

श्री लाल सिंह आर्य - अध्यक्ष महोदय,जब कभी प्राकृतिक घटनाएं होती हैं, तब काम प्रभावित होता है. निमाड़ क्षेत्र में कभी-कभी बरसात अधिक होती है, कभी-कभी किसानों के आन्दोलन भी होते हैं कि हमें पानी दिया जाय, काम रोक दिया जाय, इसलिए ऐसी परिस्थिति होती है, तब काम प्रभावित होता है. लेकिन फिर भी श्री सचिन जी मैं आपको संतुष्ट करना चाहता हूं कि जून, 2017 तक हम इस काम को पूर्ण कर देंगे.

श्री सचिन यादव - अध्यक्ष महोदय, मैं जब पिछली बार धरने पर बैठा था, तब मुझे कहा गया था कि अक्टूबर, 2016 तक जो नहरों का काम अधूरा पड़ा हुआ है, उसको पूर्ण कर लिया जाएगा. अब माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि जून, 2017 तक किया जाएगा. अब यह बताएं कि अगली बार जब बोवनी का सीजन आएगा, फिर यही स्थिति निर्मित होगी, फिर वही धरने, आन्दोलन, किसानों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा. इस स्थिति से बचने के लिए मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि इस काम अतिशीघ्र पूरा किया जाय और जो मुझे आश्वासन दिया गया था कि अक्टूबर, 2016 तक इस काम को पूर्ण कर लिया जाएगा, उसका आश्वासन मैं माननीय मंत्री जी से लेना चाहता हूं. अध्यक्ष महोदय, साथ ही साथ आपके माध्यम से माननीय मंत्री यह भी आश्वासन लेना चाहता हूं कि चूंकि जवाब में दिया है कि डेम में पर्याप्त पानी उपलब्ध है तो क्या जो मेरा क्षेत्र है, जो सूखा क्षेत्र है, विशेषकर हमारा बलकवाड़ा, सिंगून, दाबरी, नाइदड़ वाला जो बेल्ट है, साला, उमरिया वाला जो बेल्ट है, उस बेल्ट में उन किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए क्या कोई योजना मंजूर करने का काम हमारे माननीय मंत्री जी करेंगे?

अध्यक्ष महोदय - मंत्री जी एक मिनट, श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी जी का प्रश्न भी इसी से संबंधित है, आप दोनों का साथ में उत्तर दे दीजिए.

श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी - अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह चाहता हूं कि यह किसानों से जुड़ा हुआ नहरों का मामला है, नहरें बिछ चुकी हैं. तालाब के किनारे कई नहरें निकल गई हैं. तालाब सूख जाते हैं, तालाब से भी नहरें बनी हुई हैं. क्या उन नहरों में पानी छोड़ा जाएगा और यह बार-बार विपक्ष के लोग जो यह काम किया करते हैं कि कभी भी खड़े हो जाना, आन्दोलन करना तो इसमें कोई तारीख निश्चित कर दें कि जब गर्मी में पानी छोड़ा जाय, फसलें जब किसान लगाता है, उस समय यदि पानी छोड़ देंगे तो यह आन्दोलन वाली बात खत्म हो जाएगी.

श्री लाल सिंह आर्य - अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय श्री सचिन जी और श्री हितेन्द्र जी ने कहा है, अभी तक जो हमने बातचीत की है. मुश्किल में दो महीने हमारा नहरों का काम हो पाता है. उसका कारण है कि हमें कभी रबी की फसल में पानी देना पड़ता है, कभी खरीफ की फसल में पानी देना पड़ता है. कभी बरसात होती है, इस कारण से काम प्रभावित होता है. लेकिन किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए माननीय मुख्यमंत्री जी ने एक नहीं कई ऐतिहासिक निर्णय लिये हैं. एक नहीं कई योजनाओं को जन्म दिया है, जिसके कारण किसानों में खुशहाली आई है. लेकिन माननीय श्री सचिन जी जैसा कह रहे हैं, आपने जैसा इंगित किया है, बलकवाड़ा, सिंगून, दाबरी जोन, आप निश्चिंत रहिए, ऐसे बेल्ट जहां पर सूखा है, उन बेल्टों को भी सोलर प्लांट लगाकर हम किसान को पानी कैसे दे पाएं, यह भी हमारा विचार चल रहा है.

श्री सचिन यादव - माननीय मंत्री जी, इसमें साला, उमरिया भी जोड़ लें.

श्री लाल सिंह आर्य - आपका जो विषय आया है, आप वह भी लिखकर दे देना. सरकार का मंतव्य एक ही है कि एक भी इंच जमीन जो सूखी है, उस किसान के खेत तक पानी पहुंचाना. जहां तक तालाब वाली बात आई है, हम समीक्षा करेंगे. किसान के हित में जो आवश्यक हो सकता होगा, वह हम करेंगे.

अध्यक्ष महोदय - श्री मनोज कुमार अग्रवाल..

श्री हितेन्द्र सिंह सोलंकी - माननीय मंत्री जी, केवल तारीख निश्चित कर दें. (व्यवधान)..गर्मी के समय में पानी छोड़ने वाली बात है.

श्री सचिन यादव - अध्यक्ष महोदय, मेरा पाइंटेड प्रश्न है. आपसे निवेदन करना चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय - अब नहीं. 4-4, 5-5 प्रश्न हो गये. वाद-विवाद नहीं होता, आपकी सब बातें आ गईं.

 

दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण

2. ( *क्र. 1481 ) श्री मनोज कुमार अग्रवाल : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सामान्‍य प्रशासन विभाग के आदेश क्र. एफ 5-3/2006/1/3 भोपाल दिनांक 29 सितम्‍बर, 2014 के अनुसार म.प्र. शासन के विभिन्‍न विभागों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को 31 मार्च, 2016 तक नियमित किये जाने के आदेश दिये हैं? (ख) शासन के किन विभागों ने इस आदेश के तहत विभागों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित नहीं किया है? सूची प्रदाय की जावे (ग) उक्‍त आदेश का पालन संबंधित विभागों द्वारा कब तक किया जावेगा?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी नहीं। (ख) एवं (ग) उत्‍तरांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह कर्मचारियों और मानव के शोषण का मामला है । इसमें दैनिक वेतन भोगियों के साथ अन्‍याय हो रहा है, उसका मामला है, सुप्रीम कोर्ट का 2015 का भी आदेश है कि नियमितिकरण किया जाए । आज तक इसमें यह नहीं बताया कि कितने लोगों का नियमितिकरण किया गया और नियमितिकरण करने की इनकी आगे की क्‍या प्‍लानिंग है । कृपया मुख्‍यमंत्री महोदय बताने की कृपा करें कि कब तक नियमितिकरण होगा ।

राज्‍यमंत्री,सामान्‍य प्रशासन ( श्री लाल सिंह आर्य)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने यह नहीं पूछा कि कितने लोगों का नियमितिकरण हो चुका है । फिर भी मैं आपके संज्ञान में ला रहा हूं कि 58 हजार कर्मचारी हमारे मध्‍यप्रदेश में हैं जिनमें से 10 हजार का हम नियमितिकरण कर चुके हैं,48 हजार शेष हैं ।

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी, हमारी पूरी सरकार हर पहलू पर विचार कर रही है और नियमितिकरण की लाईन में खड़े हुए हमारे जो कर्मचारी हैं किस एंगल से हम काम कर पाए इस पहलू पर हम काम कर रहे हैं । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कर्मचारी हमारा है, उसने कभी सरकार के खिलाफ आंदोलन नहीं किया है, आंदोलन करने की बारी नहीं आ पाई । तब तक हमने कर्मचारी और अधिकारियों के हितों में हम जो कुछ कर सकते हैं वह हमने किया है ।

श्री मनोज कुमार अग्रवाल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसकी समय सीमा क्‍या है ।

श्री बाला बच्‍चन- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसी से संबंधित मेरा भी प्रश्‍न है कृपया मुझे समय दें ।

अध्‍यक्ष महोदय- पहले उनका प्रश्‍न पूरा हो जाए उसके बाद ।

श्री मनोज कुमार अग्रवाल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि इसकी समय सीमा क्‍या है । कितनी समय सीमा में यह कर पाएंगे कितने प्रतिशत यह कर पाएंगे ।

श्री बाला बच्‍चन- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने विधायक के जबाव को पूरी तरह से भ्रमित करने का प्रयास किया है । मैं यह जानना चाहता हूं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों कोर्ट से जीत चुके हैं उसके बाद भी सरकार उनको कितना परेशान करेगी । उनको नियमित क्‍यों नहीं किया जा रहा है, माननीय मंत्री जी इससे बड़ी और व्‍यवस्‍था क्‍या हो सकती है ।

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रतिपक्ष आज दैनिक वेतन भोगी की हिमायती बन रहा है कांग्रेस के समय में एक झटके में उनको निकाल कर बाहर कर दिया था । ( व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय- कृपया उत्‍तर तो आने दीजिए .

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया- आपने 28 हजार को निकाल दिया था । (व्‍यवधान)

श्री जितू पटवारी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय......( व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय- कृपया बैठ जाइए प्रश्‍नकाल को बाधित न करें । कृपया उत्‍तर आने दें । जितू पटवारी जी बैठ जाइए । (व्‍यवधान)

श्री लालसिंह आर्य- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने एक प्रश्‍न का जबाव उनको दिया था दूसरे प्रश्‍न से भी मैं उनको संतुष्‍ट करना चाहता हूं पर मुझे लग रहा है कि यह प्रश्‍न का जबाव लेने से ज्‍यादा राजनैतिक लाभ उठाने का ज्‍यादा प्रयास हो रहा है । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय शिवराज सिंह जी की सरकार कर्मचारी अधिकारी किसान मजदूरों की हितैषी सरकार है । इसलिए आप चिन्‍ता मत करिए यह खाने के दांत और दिखाने के दांत कृपया आप ऐसा मत करिए, 28 हजार कर्मचारियों को आपने निकाला था, लेकिन आप जिन कर्मचारियों को जिन शिक्षकों को 2300 रूपए देते थे हमने उनको 22000 तक पहुंचा दिया है । इसलिए माननीय अध्‍यक्ष महोदय मैं आपके माध्‍यम से कहना चाहता हूं और पूरे दावे के साथ पूरी गंभीरता के साथ कहना चाहता हूं कि कर्मचारी हमारे परिवार का अंग है, मध्‍यप्रदेश को आगे बढ़ाने में उसकी भी सहभागिता है । इसलिए माननीय मुख्‍यमंत्री हमारा शासन प्रशासन सारे विषयों पर हम गंभीरता से विचार कर रहे हैं और इनकी चिन्‍ता का कारण यह नहीं है इनकी चिन्‍ता का कारण सत्‍ता है । मुख्‍यमंत्री जी की चिन्‍ता का कारण है इसलिए हम पूरे पहलुओ पर विचार करके उनके हित में कोई अच्‍छा निर्णय हो सके । इसका हम प्रयास कर रहे हैं ।

प्रश्‍न संख्या -3 (अनुपस्थित)

अवैध खनन के प्रकरण में वसूली

4. ( *क्र. 1136 ) श्री बहादुर सिंह चौहान : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) कमिश्‍नर उज्‍जैन के समक्ष दिनेश पिता मांगीलाल जैन निवासी महिदपुर रोड के विरूद्ध चल रहे प्रकरण की अद्यत‍न स्थिति बतावें (ख) विगत 3 माह में इसमें कितनी तारीखें लगीं? इसकी जानकारी देवें (ग) इस प्रकरण का कब तक निराकरण होगा और क्‍या इनसे राशि वसूल की जावेगी? समय-सीमा बतावें।

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) प्रकरण न्‍यायालय, अपर आयुक्‍त, उज्‍जैन संभाग, उज्‍जैन के समक्ष प्रकरण क्रमांक 395/15-16 दर्ज है। इसमें दिनांक 25.07.2016 को पेशी नियत है। (ख) प्रश्‍नाधीन अवधि में प्रकरण में 5 तारीखें सुनवाई हेतु लगी हैं। (ग) प्रकरण अर्धन्‍यायिक प्रक्रिया के तहत विचाराधीन है। अत: प्रश्‍नानुसार समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

श्री बहादुर सिंह चौहान- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न अवैध खनन को लेकर है । पूर्व में भी माननीय अध्‍यक्ष जी इस प्रश्‍न पर चर्चा हो चुकी है । 30 करोड़ 29 लाख 25 हजार 625 का केस अवैध खनन का है । चूंकि मध्‍यप्रदेश का सबसे बड़ा अवैध खनन का केस मेरे द्वारा विधानसभा में उठाने के बाद बनाया गया है पर माननीय अध्‍यक्ष जी मुझे ऐसा लग रहा है कि अभी भी खनन माफिया जिसके विरूद्व इतना बड़ा केस बनाया है उसके विरूद्व कोई कार्यवाही नहीं हो रही है । इस पर उत्‍तर आया कि 5 तारीखें लग गई हैं । कल भी तारीख थी 25.7 को विभाग की ओर से कोई वकील वहां पर उपस्थित नहीं हो रहा है । अर्ध न्‍यायालय अपर आयुक्‍त उज्‍जैन में यह केस चल रहा है मेरा आपसे आग्रह है कि इतना बड़ा केस 30 करोड़ का है मैं बार बार इस प्रश्‍न को ला रहा हूं ।

अध्‍यक्ष महोदय- आप सीधे प्रश्‍न कर दें ।

श्री बहादुर सिंह चौहान- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि आपके विभाग का वरिष्‍ठ अधिकारी जो भोपाल स्‍तर का अधिकारी होगा जाकर इस केस को जो कि अर्द्व न्‍यायालय में चल रहा है उसका निराकरण करवाएंगे ।

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अर्द्व न्‍यायायिक मामला है । कमिश्‍नर कोर्ट में सुनवाई चल रही है और गुणदोष के आधार पर न्‍यायालय जो फैसला करेगा उसके हिसाब से कार्यवाही होगी जहां तक कुर्की के आदेश को जारी करने का सवाल है उस पर बोर्ड ऑफ रेवेन्‍यू ने भी स्‍टे लगाया हुआ है इसलिए कुर्की की कार्यवाही नहीं हो पा रही है ।

श्री बहादुर सिंह चौहान- माननीय अध्‍यक्ष जी, आर आर सी जारी हो चुकी है और जो तीन महीने का स्‍टे दिए हुआ है वह वेकेट हो गया है मेरी अपनी जानकारी के हिसाब से तीन माह के लिए स्‍टे दिया था उसका मकान आदि भी सीज हो रहा था गाडी । मेरा कहना है कि 6 तारीखें लग गई हैं क्‍या कारण है कि बार बार इसमें तारीखें बढ़ रही हैं । अपर आयुक्‍त उज्‍जैन इसकी तारीखें बढ़ा रहे हैं तो विभाग क्‍या देख रहा है । वहां के जो खनिज का अधिकारी है वह खनिज माफिया से मिला हुआ है । मैं कहना चाहता हूं क्‍या भोपाल के अधिकारी इस केस को डील करेंगे । मेरा आपसे सिर्फ इतना आग्रह है कि यह अर्द्व न्‍यायिक प्रकरण अपर आयुक्‍त उज्‍जैन न्‍यायालय में चल रहा है । क्‍या माननीय मंत्री जी इस अर्ध न्‍यायालय में इस केस को निराकरण कराने के लिए भोपाल स्‍तर के अधिकारी को नियुक्‍त करेंगे । ताकि समय पर तारीखों पर जाकर वकील इसका निराकरण करा सकें ।

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य की मंशा के अनुसार जो भी इसमें न्‍यायायिक तौर से किया जा सकता है वह किया जाएगा ।

श्री बहादुर सिंह चौहान- माननीय अध्‍यक्ष जी मेरी मांग है कि इसके लिए कोई दूसरा अधिकारी नियुक्‍त करें । उज्‍जैन का अधिकारी उस खनन माफिया से मिला हुआ है । मेरा आग्रह है कि भोपाल स्‍तर से अधिकारी नियुक्‍त करने में क्‍या दिक्‍कत है । माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं गलत क्‍या कह रहा हॅूं ? भोपाल स्‍तर के अधिकारी को इसके निराकरण के लिए नियुक्‍त कर दें.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जाएं कृपया. (व्‍यवधान) उनका उत्‍तर आ रहा है.

श्री मुकेश नायक -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी सदन में हैं हमारी तो वे नहीं सुनते लेकिन उनकी पार्टी के विधायक जो कह रहे हैं उसे तो सुन लें. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय -- आप लोग बैठ जाइए, उत्‍तर आ रहा है.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहादुर सिंह जी ने मेरी बात को ध्‍यान से नहीं सुना. मैंने कहा बहादुर सिंह जी की मंशा के अनुसार नियम के अनुरूप जो भी कार्यवाही होगी, वह की जावेगी.

 

डायवर्सन शुल्‍क एवं सम्‍पत्तिकर का निराकरण

5. ( *क्र. 1812 ) श्री सूबेदार सिंह रजौधा : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या नगर परिषद जौरा क्षेत्रान्‍तर्गत डायवर्सन कर समाप्‍त करने बावत परिषद द्वारा सर्वस‍म्‍मति से प्रस्‍ताव पारित कर कलेक्‍टर मुरैना व राज्‍य शासन की ओर से पत्र क्रं. 108570/860 दिनांक 17-09-2004 को भेजा गया था? यदि हाँ, तो उस पर क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) क्‍या अभी भी नगर के लगभग 3000 भवन स्‍वामी सम्‍पत्ति कर व डायवर्सन शुल्‍क दोनों भार वहन कर रहे हैं? यदि हाँ, तो क्‍या दोनों शुल्‍क अदा करना न्‍याय संगत है? (ग) प्रश्‍नांश (क) (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में क्‍या नगर के भवन स्‍वामियों को दोहरी शुल्‍क अदायगी से मुक्‍त किया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करे?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ, नगर परिषद, जौरा द्वारा जौरा क्षेत्रांतर्गत डायवर्सन कर समाप्‍त करने हेतु प्रस्‍ताव अनुविभागीय अधिकारी एवं कलेक्‍टर महोदय जिला-मुरैना की ओर भेजा गया है, सही है, किन्‍तु डायवर्सन शुल्‍क राज्‍य शासन के प्रावधानानुसार होने से कोई कार्यवाही प्रचलित नहीं है। (ख) जी हाँ (1) जौरा नगर में नगर परिषद द्वारा म.प्र. नगर पालिका अधिनियम, 1961 के अध्‍याय 7 भाग 1 की धारा 126 अनुसार दर निर्धारित कर संपत्ति कर एवं समेकित कर अधिरोपित किया जाता है, जो कि नियमानुसार है, (2) डायवर्सन शुल्‍क म.प्र. भू-राजस्‍व संहिता, 1961 के अध्‍याय 11 की धारा 57, 58 एवं 137 से 140 तक में भू-राजस्‍व के अधिरोपण एवं वसूली के संबंध में प्रावधान है, धारा 57 के अनुसार समस्‍त भूमि राज्‍य सरकार की संपत्ति है, धारा 58 के अंतर्गत समस्‍त भूमि चाहे वह किसी भी प्रयोजन के लिये उपयोजित की जाती हो और चाहे वह कहीं भी स्थित हो राज्‍य सरकार को राजस्‍व के भुगतान के लिये दायित्‍वाधीन है, 57 एवं 58 से स्‍पष्‍ट है कि प्रत्‍येक भूमि पर भू-राजस्‍व देय होता है, जो कि सांकेतिक रूप से दर्शाता है कि सभी भूमि का अंतिम स्‍वामित्‍व सरकार में ही निहित है और भूमि स्‍वामी/भू-धारक/उपयोगकर्ता उक्‍त भूमि के उपयोग के एवज में राज्‍य शासन को भू-राजस्‍व अदा कर रहा है। इस प्रकार सम्‍पत्ति कर व डायवर्सन शुल्‍क अदा करना नियमानुसार है। (ग) जी नहीं, शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जौरा नगर के तीन हजार नागरिकों पर दोहरा टैक्‍स लग रहा है एक तो नगर पंचायत वूसल कर रहा है दूसरा डायवर्सन के रूप में राजस्‍व विभाग वसूल कर रहा है तो यह विसंगति है. मैंने जो प्रश्‍न लगाया था उसमें माननीय मंत्री जी से पूछा था कि वर्ष 2004 में नगर पंचायत, जौरा ने यह प्रस्‍ताव करके भेजा है कि हम मकान वालों को पूरी मूलभूत सुविधाएं दे रहे हैं उनसे टैक्‍स वसूल कर रहे हैं तो राजस्‍व विभाग को इसमें टैक्‍स लेने का कोई औचित्‍य नहीं है यह प्रस्‍ताव गया है लेकिन माननीय मंत्रीजी ने जो जवाब दिया है उसमें इतनी धाराएं लिख दी हैं कि मैं पढ़ते-पढ़ते उनको समझ ही नहीं पाऊंगा, इसलिए माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहूंगा. सौभाग्‍य से माननीय मुख्‍यमंत्री जी भी बैठे हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अगर कोई कानूनी पेंच है कि उसमें नहीं कर सकते तो उसमें उस कानूनी पेंच को आज अध्‍यक्ष जी बैठे हैं पूरे विधानसभा के सब सदस्‍य बैठे हैं, क्‍या दोहरा टैक्‍स उन गरीब किसानों के साथ न्‍याय नहीं होगा ? मैं चाहूंगा कि इसमें आपका भी संरक्षण मिलेगा और माननीय मंत्री जी तो हमारी बहुत उदार मंत्री हैं और फिर हमारी प्रभारी मंत्री भी हैं. इनसे तो मैं पूरी उम्‍मीद करता हॅूं लेकिन इसमें पढ़कर थोड़ी हताशा हुई है. मैं माननीया मंत्री जी से आग्रह करता हॅूं कि कुछ न कुछ व्‍यवस्‍था ऐसी निकालें कि उन मकान मालिकों को दोहरा टैक्‍स न लगे या तो डायवर्सन लगे या संपत्ति कर के रूप में नगर पंचायत वसूल करे.

श्रीमती माया सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं सम्‍मानीय विधायक जी को बताना चाहती हॅूं कि उन्‍होंने जो सवाल पूछा है कि नगर परिषद जौरा में वहां के रहने वाले लोगों के ऊपर दोहरा करारारोपण किया जा रहा है. मैं आपको बताना चाहती हॅूं वास्‍तविकता यह है कि यह नियमों के अंतर्गत वैधानिक रूप से ही वसूल‍ किया जा रहा है. मैं आपके माध्‍यम से बताना चाहती हॅूं कि संपत्ति कर मध्‍यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 126 के अंतर्गत लिया जाता है. विधायक जी कहना है कि बहुत सारे ऐसे कागज दे दिए हैं और नियमों का हवाला दिया है जो उनके समझ में नहीं आ रहा है. मैं बहुत ही सरल भाषा में बताना चाहती हॅूं जो डायवर्सन शुल्‍क है वह मध्‍यप्रदेश भू-राजस्‍व संहिता 1959 की धारा 11 के अंतर्गत 57, 58, 137 और 140 के अंतर्गत उल्‍लेखित प्रावधानों के अंतर्गत यह डायवर्सन शुल्‍क लिया जा रहा है क्‍योंकि सारी जो जमीन है वह राज्‍य सरकार की संपत्ति है और उसके उपयोग के एवज में भू-राजस्‍व अदा करना अनिवार्य है तो इसलिए यह दोनों जो कर हैं, वह नियमानुसार लिये जा रहे हैं.

श्री सूबेदार सिंह रजौधा -- माननीय अध्यक्ष महोदय यह विधान सभा नियमों को दुरूस्त करने के लिए ही तो है. आप स्वयं सोचें कि उनको संपत्तिकर भी लगे और डायवर्सन शुल्क भी लगे और इस तरह के एक या दो प्रकरण नहीं है, 3 हजार लोग हैं. आपकी परिषद में चुने हुए लोग होते हैं और सरकार की तरफ से सीएमओ होता है. मैं माननीय मंत्री जी से उम्मीद करता हूं कि उनको एक ही कर लगे, ऐसी कोई व्यवस्था माननीय मंत्री जी करेंगी.

श्रीमती माया सिंह -- माननीय अध्यक्ष जी, मैं पुन: अपनी बात को दोहराना चाहती हूं और विधायक जी से मेरा भी आग्रह है कि इनसे यह दोनों शुल्क नियमानुसार लिये जा रहे हैं. संपत्ति कर और डायवर्सन शुल्क जमा करना नियमों के अंतर्गत है. नियमों में परिवर्तन करना और यहां पर उसका आश्वासन देना, यह मेरे लिए संभव नहीं है.

बादलडोह जलाशय की नहर की मरम्‍मत

6. ( *क्र. 1935 ) श्री चैतराम मानेकर : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बादलडोह जलाशय की नहर का निर्माण कब हुआ? (ख) क्‍या सिंचाई के समय नहर का पानी अत्‍याधिक मात्रा में सीवेज होता है? (ग) यदि नहीं, तो सिंचाई के समय नहर के नीचे खेतों में पानी का जमाव कैसे होता है? नहर को कब तक ठीक कर लिया जायेगा?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) ग्रीष्‍म काल 2016 में। (ख) एवं (ग) निर्माणाधीन नहर की लाईनिंग का कार्य पूर्ण कराए बगैर रबी सिंचाई में पानी देने से सीपेज हुआ जो स्‍वभाविक था। लाईनिंग का कार्य पूर्ण करा लिया गया है।

 

श्री चैतराम मानेकर -- माननीय अध्यक्ष महोदय मेरे प्रश्न के उत्तर में माननीय मंत्री जी ने जानकारी दी है कि लाइनिंग का कार्य पूर्ण कराये बगैर रबी सिंचाई में पानी देने से सीपेज हुआ है जो कि स्वाभाविक था, मैं स्वीकार करता हूं लेकिन अध्यक्ष महोदय मैंने तो उस जगह कीबात की है जहां पर लाइनिंग का काम हो गया था. इसके बाद में भी अब नहर का लाइनिंग का काम पूर्ण हो गया है और 2 - 3 माह के बाद में अक्टूबर नवम्बर में रबी सीजन आयेगा और नहर से पानी देने का काम शुरू होगा तो उस समय नहर से यदि पानी सीपेज होगा तो क्या मंत्री जी दोषी अधिकारियों पर कार्यवाही करेंगे?

डॉ नरोत्तम मिश्र -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सीपेज की समस्या बताई कि लाइनिंग का काम पूर्ण हो गया है. अब वहां पर समस्या का भी समाधान हो गया है उसके बाद में भी अगर सदस्य अगर किसी बात के बारे में आशंका व्यक्त करते हैं या हमें ऐसा बताते हैं कि यहां पर कोई अनियमितता की है तो दोषी व्यक्ति के विरूद्ध निश्चित रूप से कार्यवाही करेंगे.

श्री चैतराम मानेकर -- धन्यवाद.

 

सीहोर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत खराब/जले ट्रान्‍सफार्मर

7. ( *क्र. 111 ) श्री सुदेश राय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला सीहोर अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र 159 सीहोर में ऐसे कितने ट्रान्‍सफार्मर हैं जो जल जाने एवं अन्‍य कारणों से खराब पड़े हैं, इनमें से कितने को बदला गया तथा कितने बदले जाने शेष हैं? यदि शेष हैं तो इनको बदलने में देरी का कारण बतावें तथा कब तक बदल दिये जायेंगे? (ख) खरीफ फसल की बुआई के पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रान्‍सफार्मरों के रख-रखाव के लिये विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की जा रही है और यदि कृषकों को फसलों की बुआई के बाद तत्‍काल में ट्रान्‍सफार्मर की आवश्‍यकता होती है तो उसकी आपूर्ति किस प्रकार की जावेगी?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) सीहोर विधान सभा क्षेत्रान्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में प्रश्‍न दिनांक तक 68 ट्रांसफार्मर फेल हुए हैं, जिसमें से 67 ट्रांसफार्मर बदल दिये गये हैं, 1 ट्रांसफार्मर संबद्ध उपभोक्‍ताओं द्वारा रू. 10 लाख की बकाया राशि में से नियमानुसार राशि जमा नहीं करने के कारण बदला जाना शेष है। नियमानुसार बकाया राशि जमा होने पर उक्‍त ट्रांसफार्मर बदल दिया जावेगा। (ख) खरीफ फसल की बुआई के पूर्व ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मरों का रख-रखाव कार्य वितरण कंपनी द्वारा विभागीय स्‍तर पर सुनिश्चित किया जाता है। साथ ही वितरण कंपनी द्वारा विभागीय तौर पर एवं रेट कान्‍ट्रेक्‍ट के माध्‍यम से विभिन्‍न फर्मों से जले/खराब ट्रांसफार्मरों में आवश्‍यक सुधार कार्य करवाकर क्षेत्रीय भण्‍डारों में ट्रांसफार्मरों की उपलब्‍धता सुनिश्चित की जाती है। कृषि कार्यों हेतु ट्रांसफार्मरों की पर्याप्‍त उपलब्‍धता सुनिश्चित करने हेतु मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उक्‍तानुसार कार्यवाही की जा रही है।

 

श्री सुदेश राय -- माननीय अध्यक्ष महोदय मंत्री जी ने मेरे प्रश्न क के उत्तर में बताया है कि मेरी विधान सभा क्षेत्र में 68 में से 67 खराब व जले ट्रांसफार्मर बदले जा चुके हैं. मेरे पास में ऐसे 27 गांवों में 40 ट्रांसफार्मरों की सूची है जो अभी तक खराब पड़े हुए हैं. अध्यक्ष महोदय, मैं पूछना चाहता हूं कि अगर मंत्री जी को गलत जानकारी उपलब्ध कराई जाती है तो इसकी जवाबदारी किसकी है? अगर उनको गलत जानकारी दी जा रही है तो हमें क्या देंगे.

श्री पारस चन्द्र जैन -- माननीय अध्यक्ष महोदय आपके माध्यम से मैं माननीय सदस्य को बताना चाहता हूं कि जब उन्होंने विधान सभा में प्रश्न लगाया था, उस समय 68 में से 67 सुधर गये थे एक रह गया था, लेकिन 100 प्रतिशत बकाया होने के बाद में यह ट्रांसफार्मर उठाये गये हैं.

श्री सुदेश राय -- माननीय अध्यक्ष महोदय, क्या मेरे प्रश्न लगाने के बाद में इतने सारे ट्रांसफार्मर खराब हो गये हैं. अगर मंत्री जी को गलत जानकारी उपलब्ध कराई गई है तो यह कितनी गलत बात है. क्या आप गलत जानकारी देने वालों पर कार्यवाही करेंगे?

श्री पारस चन्द्र जैन -- अध्यक्ष महोदय, मैंने इनको बताया है, आंकड़े और तारीख इनके पास है, यदि उस तारीख पर देख लेंगे विधान सभा का प्रश्न जब लगाया है उस समय 68 में से सब सुधार दिये थे केवल एक ही बकाया था, लेकिन जब 100 प्रतिशत बकाया है तो उसके बाद में लाये हैं क्योंकि आगे फसल आयेगी तो उसके लिए मरम्मत कराना भी हमारे लिए आवश्यक है.

श्री सुदेश राय -- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी जो बता रहे हैं यह अभी अभी नहीं हुआ है. आपको जानकारी ही गलत उपलब्ध कराई गई है. आप अपने अधिकारियों से पता करें और उन पर क्या कार्यवाही की जायेगी, क्योंकि अगर उनका सुधार कार्य नहीं होगा तो कोई भी अधिकारी किसी की नहीं सुनेगा. जब माननीय मुख्यमंत्री जी किसानों के लिए इतना काम कर रहे हैं और अधिकारी गलत काम करेंगे तो किसानों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

अध्यक्ष महोदय -- आप सही जानकारी उपलब्ध करा दें उसके आधार पर कार्यवाही करेंगे या आपको रीजन बता देंगे.

श्री सुदेश राय -- क्या गलत जानकारी देने वालों पर कार्यवाही होगी.

अध्यक्ष महोदय -- आप पहले सही जानकारी तो उपलब्ध करा दें.

श्री सुदेश राय -- हां मेरे पास में पूरी जानकारी है.

अध्यक्ष महोदय -- हां आप उनको उपलब्ध करा दें.

नगरपालिका हटा/पटेरा द्वारा शौचालयों का निर्माण

8. ( *क्र. 1277 ) श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नगर पालिका परिषद हटा एवं नगर पंचायत पटेरा द्वारा विगत वर्ष 2014-152015-16 में कितने शौचालय बनाये गये? नाम, पतावार सूची उपलब्‍ध करायें। (ख) नगर परिषद पटेरा द्वारा गठन दिनांक से प्रश्‍न दिनांक तक नगर पंचायत अंतर्गत क्‍या-क्‍या खरीदी एवं कार्य किए गए? राशिवार कार्यों की जानकारी उपलब्‍ध करायें। साथ ही भ्रमण उपरांत प्राप्‍त शिकायतें व कार्यों की व खरीदी की जाँच हेतु दल गठित कर जाँच कराई जावेगी एवं दोषियों पर कार्यवाही के निर्देश कब तक प्रदाय किये जावेंगें।

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) वर्ष 2014-15 में नगरपालिका परिषद हटा एवं नगर परिषद पटेरा के द्वारा कोई शौचालय नहीं बनाये गये हैं। वर्ष 2015-16 में नगर पालिका परिषद हटा द्वारा 25 तथा नगर परिषद पटेरा द्वारा 60 शौचालयों का निर्माण कराया गया जिनकी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। कोई शिकायत प्राप्त नहीं होने से शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से घोषणा के अनुसार नगर पालिका परिषद् के गठन की माननीय मुख्‍यमंत्री जी को बहुत-बहुत बधाई देती हूँ. मैं माननीय मंत्री महोदया जी के जवाब से संतुष्‍ट हूँ. मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करती हूँ कि नवगठित नगर परिषद् पटेरा में पद सरंचना के हिसाब से पदों की पूर्ति की जावे जिससे छोटी-मोटी अनियमितताएं नहीं होंगी एवं शासन स्‍तर पर अधोसरंचना मद से राशि प्रदाय की जावे जिससे नगर का विकास हो सके. मैं निवेदन करती हूँ कि परिषद् में एक मंगल-भवन का निर्माण किया जावे एवं पटेरा बस स्‍टैंड को व्‍यवस्‍थित रखने की घोषणा की जावे, ये दोनों हमारी मांगे हैं, इनको पूर्ण किया जावे, ऐसा मैं निवेदन करती हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न उद्भूत नहीं होता है, परंतु माननीय मंत्री जी यदि आप उनको कुछ आश्‍वस्‍त करना चाहें तो कर दें.

श्रीमती माया सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष जी, सम्‍माननीय सदस्‍या जी ने जो सवाल उठाया है मैं उनसे कहना चाहती हूँ कि पद पूर्ति की जो बात की गई है वह हम अवश्‍य वहां सारी जानकारी उपलब्‍ध करेंगे और उसके आधार पर पदों की पूर्ति करने का मैं उनको आश्‍वासन देती हूँ. साथ ही साथ अधोसरंचना के विकास कार्यों के लिए उन्‍होंने कहा है तो वे प्रस्‍ताव बनाकर हमारे पास भेज दें और जो भी मदद संभव हो सकती है हम जरूर मदद करेंगे.

श्रीमती उमादेवी लालचंद खटीक -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

सड़क निर्माण हेतु मुरम खदानों के आवंटन में रियायत

9. ( *क्र. 1450 ) श्रीमती नीना विक्रम वर्मा : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या धार-गुजरी सीमेंटीकृत रोड के निर्माण हेतु संबंधित ठेकेदार को धार जिले में मुरम खदान आवंटित की गई है? (ख) यदि हाँ, तो कहाँ-कहाँ आवंटित की गई है? ग्राम का नाम, खसरा नम्‍बर व क्षेत्रफल सहित निर्मित किये जा रहे मार्ग से दूरी बताएं (ग) क्‍या सड़क निर्माण हेतु मुरम खदानों के आवंटन में ठेकेदारों को कुछ रियायत दी जाती है तथा इस प्रयोजन हेतु मुरम खदान कितने समयावधि के लिये आवंटित की जाती है? (घ) क्‍या मुरम का परिवहन अधिक क्षमता के भारी डम्‍पर के माध्‍यम से करने में ग्रामीण सड़कों को हो रहे नुकसान की भरपाई संबंधित ठेकेदार से करवाये जाने का प्रावधान है अथवा ठेकेदार से इन मार्गों की मरम्‍मत करवाये जाने का प्रावधान है?

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं। (ख) प्रश्‍नांश (क) के उत्‍तर के प्रकाश में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) मध्‍यप्रदेश गौण खनिज नियम 1996 के नियम 68 के तहत सड़क निर्माण हेतु मुरम खनिज के उत्‍खनन अनुज्ञा दिये जाने का प्रावधान है। यह उत्‍खनन अनुज्ञा निर्माण की कालावधि हेतु दिये जाने का प्रावधान है। राज्‍य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम, स्‍थानीय निकाय तथा सरकारी विभागों के अधीन किये जाने वाले समस्‍त निर्माण कार्यों के लिये मुरम पर रॉयल्‍टी देय नहीं है। (घ) जी नहीं। प्रश्‍नानुसार प्रावधान नियमों में नहीं है।

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहते हुए अपनी बात रखना चाहूंगी. मैंने प्रश्‍न इसलिए लगाया क्‍योंकि गांवों के अंदर जो छोटी-मोटी सड़कें होती हैं वे खराब हो जाती हैं तो गांव के लोग परेशान होते हैं. यह जरूर है कि विकास के लिए हम बड़े-बड़े प्रोजेक्‍ट बनाते हैं, ढाई सौ, तीन सौ करोड़ के प्रोजेक्‍ट हैं जिन्‍हें गिट्टी, मिट्टी की आवश्‍यकता होती है सरकार उन्‍हें खदानें आवंटित भी करती है लेकिन रॉयल्‍टी नहीं लेती, ये न ले कोई बात नहीं लेकिन जो ठेकेदार हैं जो मिट्टी, गिट्टी लेकर आते हैं ये छोटे-छोटे गांवों में से होकर आते हैं जिससे गांवों की सड़कें खराब हो जाती हैं जो कि प्रधानमंत्री सड़क योजना की सड़कें हैं, मुख्‍यमंत्री सड़क योजना की सड़कें हैं, विधायक और सांसद निधि की सड़कें हैं. ये सड़कें इनके कारण क्षतिग्रस्‍त हो जाती हैं क्‍योंकि इनके बड़े-बड़े वाहन आते-जाते हैं. इससे गांववालों को भी परेशानी होती है तो मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्‍यम से पूछना चाहूंगी कि क्‍या कोई ऐसा प्रावधान बनाएंगे जिससे ठेकेदार इन सड़कों की मरम्‍मत करें या विभाग के द्वारा इन सड़कों की मरम्‍मत करके गांव वालों को सुविधा प्रदान की जा सके, कृपया माननीय मंत्री बताने का कष्‍ट करें ?

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍या के प्रस्‍ताव पर विचार करेंगे. अभी कोई प्रावधान तो नहीं है लेकिन भविष्‍य में क्‍या किया जा सकता है संबंधित विभागों से बातचीत कर प्रावधान करने के बारे में विचार करेंगे.

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह विचार है कि जब तक विभाग द्वारा प्रावधान करने पर विचार हो तब तक क्‍या हम इन बड़े ठेकेदारों को यह बता सकते हैं या यह कह सकते हैं कि वे कुछ समय के लिए ही सही उन सड़कों को टेम्‍पोरेरी रूप से थोड़ा सा तो सुधार दें ताकि गांव वालों का आवागमन सुगम हो सके.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, यह बात सही है कि जो ट्रक्‍स चलते हैं उनसे प्रधानमंत्री सड़क योजना की सड़कें या अन्‍य जो सड़कें हैं वे खराब होती हैं, उनके रिपेयर की फिर कोई व्‍यवस्‍था नहीं होती तो इस संबंध में जरूर कुछ करें जैसा कि माननीय सदस्‍या ने भी प्रश्‍न उठाया है आप कुछ विचार करें और जो आप अभी कुछ कहने वाले थे वह भी कहें.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा आपका निर्देश है इस पर विचार करेंगे क्‍योंकि ज्‍यादातर प्रधानमंत्री सड़क योजना की सड़कें बनती हैं या लोक निर्माण विभाग की भी जो सड़कें बनती हैं उनके मेंटेनेंस पीरिएड के अंतर्गत संबंधित ठेकेदार को उनको सुधारना होता है लेकिन भारी वाहनों से यदि वे डेमेज हुई हैं तो उनके स्‍कोप के अंतर्गत वे सुधार रहे हैं या नहीं सुधार रहे हैं और जैसा माननीय सदस्‍या ने कहा है कि यदि थोड़ा-बहुत काम करने से, मुरम वगैरह डालने से वह मोटरेबल हो सकती हैं तो मुझे वह सूची आप उपलब्‍ध करा देंगे तो जो ठेकेदार उसमें परिवहन कर रहे हैं उनसे बातचीत करके रास्‍ता निकालेंगे.

श्रीमती नीना विक्रम वर्मा -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नहीं तो ये पंचायतों को थोड़ा-बहुत टैक्‍स दे दें तो पंचायतें खुद रिपेयर कर सकती हैं या ठेकेदार द्वारा दिलवा दिया जाए क्‍योंकि बहुत बड़े-बड़े प्रोजेक्‍ट होते हैं और गांव बहुत छोटे-छोटे होते हैं उनमें प्रधानमंत्री सड़कें कई बार नहीं होतीं, पर मुख्‍यमंत्री सड़क योजना की सड़कें या विधायक, सांसद निधि से बनी सड़कें बहुत ज्‍यादा डेमेज हो जाती हैं उनके लिए कोई प्रावधान ही नहीं है या तो विधायक फिर उन्‍हें दोबारा बनाएं जो कि इतनी जल्‍दी संभव नहीं होता और ये सड़कें बहुत जल्‍दी टूट जाती हैं क्‍योंकि इनकी क्षमता उतनी नहीं होती है जितने कि वहां डम्‍पर और ट्रक चलाए जा रहे हैं तो माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरा निवेदन है कि उन ठेकेदारों को निर्देशित कर दिया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है, आपकी बात आ गई, मंत्री जी भी सहमत हैं, अग्रवाल जी आप कुछ कह रहे थे.

श्री प्रदीप अग्रवाल -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, होता क्‍या है कि जो हमारी प्रधानमंत्री सड़क योजना की सड़कें हैं या मुख्‍यमंत्री सड़क योजना की सड़कें हैं ये केवल 10, 20 और 30 टन की क्षमता के लिए पास होती हैं जबकि इन सड़कों पर 80 से 100 टन के वाहन जो कि 15-15 सौ, 12-12 सौ फुट रेत लेकर जा रहे हैं इसके कारण सड़कें क्षतिग्रस्‍त हो जाती हैं. वे सड़कें एक महीने भी नहीं चलती हैं और एक महीने के अंदर ही उखड़ जाती हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है, वही विषय है.

शास. कार्यों के भूमिपूजन/लोकार्पण में क्षेत्रीय विधायकों को आमंत्रित किया जाना

10. ( *क्र. 2820 ) श्रीमती इमरती देवी : क्या नगरीय विकास एवं आवास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्‍या म.प्र. शासन सामान्‍य प्रशासन विभाग के आदेशानुसार शासकीय कार्यों के भूमिपूजन/लोकार्पण में क्षेत्रीय विधायक को भी आंमत्रित करना तथा पट्टिका में भी क्षेत्रीय विधायक का नाम अंकित करने के निर्देश हैं? (ख) यदि हाँ, तो वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में नगर पालिका परिषद् डबरा, नगर पंचायत पिछोर एवं नगर परिषद् बिलौआ जिला ग्‍वालियर में वर्षवार उक्‍त अवधि में कितने कार्य स्‍वीकृत हुए तथा कितने पूर्ण/अपूर्ण हैं? उक्‍त अवधि में इनमें से कितने कार्यों के भूमिपूजन/लोकार्पण में क्षेत्रीय विधायक को आमंत्रित किया गया? यदि नहीं, तो क्‍या शासन के आदेश की अवहेलना की गई है? इसके लिये कौन दोषी है, उस पर क्‍या कार्यवाही की गई है? नहीं तो कब तक की जावेगी?

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री ( श्रीमती माया सिंह ) : (क) जी हाँ। (ख) नगर पालिका परिषद् डबरा, नगर परिषद् पिछोर एवं विलौआ द्वारा वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में कराये गये कार्यों का भूमिपूजन/लोकार्पण कराने की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है, शेषांस का प्रश्‍न उपस्‍थित नहीं होता है.

परिशिष्ट - ''एक''

श्रीमती इमरती देवी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि डबरा नगरपालिका, पिछोर नगर पंचायत,बिलौआ नगर पंचायत में 2015-16 कितने कार्य हुए हैं और कितनों का भूमिपूजन हुआ है एवं लोकार्पण हुआ है ?

अध्यक्ष महोदय-- यह जानकारी पुस्तकालय में रखी हुई है.

श्रीमती इमरती देवीअध्यक्ष महोदय, जानकारी तो है लेकिन गलत है इसलिए मैंने पूछा है.

श्रीमती माया सिंह--- माननीय अध्यक्ष महोदय, वैसे तो इसकी विस्तृत जानकारी दी गई है और परिशष्ट में संलग्न भी है लेकिन आपने पूछा है तो मैं आपको बताना चाहती हूं कि नगरपालिका परिषद् डबरा में वर्ष 2015-16 में आपने जिन कार्यों की जानकारी चाही है उसमें 15 कार्य पूर्ण हुए हैं और 1 निर्माण कार्य अधूरा है. इसी तरीके से नगरपालिका परिषद् डबरा में वर्ष 2016-17 में 10 कार्य पूर्ण हुए हैं और 5 के निर्माण कार्य अभी अपूर्ण हैं. पिछोर के अंदर 6 निर्माण कार्य पूर्ण हुए हैं, 5 निर्माण कार्य अभी अपूर्ण हैं.पिछोर में वर्ष 2016-17 में 1 कार्य पूरा हुआ है और 7 निर्माण कार्य अपूर्ण हैं. बिलौआ में वर्ष 2015-16 में 2 निर्माण कार्य स्वीकृत हैं जिसमें से दोनों निर्माण कार्य पूरे हो गये हैं और बिलौआ में वर्ष 2016-17 में 4 कार्य पूर्ण हुए हैं और 7 निर्माण कार्य अपूर्ण हैं.

श्रीमती इमरती देवी-- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मैं कहना चाहती हूं कि डबरा नगरपालिका में 31 कार्य स्वीकृत हुए हैं, 31 के भूमि पूजन हुए हैं और 25 में लोकार्पण हुए हैं. इन कार्यों में क्या विधायक को बुलाया जाता है? यह बड़े भाईसाहब मुख्यमंत्री जी बैठे हैं, इन्होंने इसी विधानसभा में एक नियम बनाया था कि जहाँ भी लोकार्पण भूमिपूजन होगा, वहाँ क्षेत्र के विधायक को बुलाया जाएगा.19 भूमिपूजन पिछोर में हुए हैं उसमें 7 लोकार्पण हुए हैं उसमें बुलाया, बिलौआ में लोकार्पण हुए हैं, उसमें हमें बुलाया है वहाँ हम गये भी हैं, पट्टिका भी लगी है. मैं मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि जो मुख्यमंत्री जी ने नियम बनाया है उसका पालन क्यों नहीं हो रहा है और पूरे मध्यप्रदेश में जहाँ कांग्रेस के विधायक हैं, वहाँ उनको क्यों नहीं बुलाया जाता है. (शेम-शेम की आवाजें)

श्रीमती माया सिंहमाननीय अध्यक्ष महोदय, मैं विधायक जी को बताना चाहती हूं, वह बहुत परिश्रमी हैं और बहुत ही व्यवहार-कुशल भी हैं. शासकीय कार्यों के भूमिपूजन और लोकार्पण में क्षेत्रीय विधायक को आमंत्रित करना चाहिए यह निर्देश भी हैं और नगर परिषद् बिलौआ में 2015-16 में दो निर्माण कार्य हुए हैं जिनका लोकार्पण किया गया और उसमें सांसद जी मौजूद थे, मैं स्वयं मौजूद थी, आप भी मौजूद थीं और एक कार्यक्रम में आप मेरे ही साथ मौजूद थीं. बाकी के और जो भूमिपूजन के कार्यक्रम हुए हैं, पत्र जाता है और जिसमें अगर आपको लगता है कि निमंत्रण नहीं दिया है तो मुझे आप लिखित में बता दें कि किसमें नहीं दिया है. मैं इस बात की हिमायती हूं कि वहाँ के स्थानीय विधायक को जरूर बुलाना चाहिए.

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष(श्री बाला बच्चन)--- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह पूरे मध्यप्रदेश में हो रहा है, हम लोगों के साथ भी होता है. पूरे मध्यप्रदेश में जहाँ-जहाँ कांग्रेस पार्टी के विधायक या सांसदगण हैं, वहाँ पर ऐसा किया जा रहा है...(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--- बात आ गई है...(व्यवधान)... यह क्या इतना महत्वपूर्ण है कि इस पर बहस की जाए.

श्री बाला बच्चन--- अध्यक्ष महोदय, पूरे मध्यप्रदेश में हो रहा है,हमें कलेक्टर और कमिश्नर्स से बात करना पड़ती है, संबंधित प्रभारी मंत्रियों से बात करना पड़ती है.

अध्यक्ष महोदय--- इसके निर्देश भी हैं और मंत्री जी राजी हैं, यह क्या इतना महत्वपूर्ण है कि प्रश्नकाल को बाधित करके इस पर बात की जाए?

श्री बाला बच्चन--- अध्यक्ष महोदय, आसंदी से सरकार को आपका आदेश जाना चाहिए. ..(व्यवधान).. हमारे प्रोटोकॉल का हक मार रही है सरकार.

श्री रामनिवास रावत-- क्या विधायकों का सम्मान महत्वपूर्ण नहीं है?

अध्यक्ष महोदय-- विधायकों का सम्मान महत्वपूर्ण है परन्तु प्रश्नकाल भी महत्वपूर्ण है ..(व्यवधान)... आप बैठ जाइए कृपा करके. यह प्रश्न जनता के हैं.

श्री बाला बच्चन-- हम क्या बोले, हमारे साथ भी हो रहा है.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, हम आपसे ही अपेक्षा करेंगे कि आप हमारे सम्मान की रक्षा करें. संरक्षण प्रदान करें.

अध्यक्ष महोदय-- इस तरह से किसी भी विषय को लेकर के बाधित करना उचित नहीं है.

श्री बाला बच्चन-- अध्यक्ष महोदय, इस संबंध में सरकार पुनः आदेश जारी करें, हमें संरक्षण दें और इस सरकार को इस बारे में आप हिदायत दें यह हम लोगों के साथ में भी हो रहा है.

अध्यक्ष महोदय-- जब मंत्री जी खुद ही तैयार हैं तो उसमें क्या हिदायत दें.

श्री बाला बच्‍चन- वो ये कह रहे हैं कि वह लिस्‍ट दें कि किस-किस तारीख को लोकार्पण हुआ है, उनको नहीं बुलाया है. ये हो सकता है कि मध्‍यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की यह रणनीति हो कि जो भी कांग्रेस के जनप्रतिनिधि हैं, उन्‍हें न बुलाया जाए. हम विधायक हैं, फिर भी हमारे साथ ऐसा हो रहा है. (व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- सरकार की ओर से परिपत्र गया हुआ है. सरकार का यह मामला नहीं है. ये बीएसपी की अध्‍यक्ष हैं, यह बीएसपी और कांग्रेस दोनों का चुनाव लड़ी हैं, ये उनका मामला है, सरकार कहां से बीच में आ गई. सरकार ने तो परिपत्र जारी किया है. जहां तक नेता प्रतिपक्ष्‍ा ने और जगह का कहा है, वहां एक बार और रिमाण्‍डर करवा देंगे.

श्रीमती इमरती देवी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये बीएसपी और बीजेपी का कोई प्रश्‍न नहीं है, मुख्‍यमंत्री जी ने सदन में नियम बनाया है, उसका पालन नहीं हो रहा है. मुझे लोकार्पण और भूमिपूजन से मतलब है.

अध्‍यक्ष महोदय- वो मान तो रहे हैं कि एक बार और निर्देश दे देंगे. कुछ नहीं आएगा अब रिकॉर्ड में.

श्रीमती इमरती देवी- (xxx)

चंदला विधानसभा क्षेत्र में रेत/बालू माफियाओं द्वारा अवैध खनन

11. ( *क्र. 2051 ) श्री आर.डी. प्रजापति : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या छतरपुर जिले की चंदला वि.स. क्षेत्र की केन नदी में म.प्र. एवं उत्‍तर प्रदेश के खनन माफिया दिन-रात केन नदी के पास की खदानों में आये दिन अवैध खनन करते हैं। क्‍या इन बालू माफिया से गरीब जनता व किसानों में भय व्‍याप्‍त है? (ख) क्‍या मवईघाट, परेई, वरूआ, त्‍तेपुर, रामपुर, हर्रई, कुरधना, बधारी आदि से अवैध रूप से किसी किसान के खेत से बालू उठाने के नाम पर पट्टा लेकर सीधे नदी से रेत/बालू निकाल रहे हैं एवं इसकी कितनी शिकायतें प्राप्‍त हुयी हैं? सूची प्रदाय करें (ग) क्‍या प्रतिदिन लगभग 800 से 1000 ट्रक/ट्रालों से बालू निकाली जाती है? बालू उठाने की स्‍वीकृति कहीं की होती है, परन्‍तु उठाते सीधे नदी से पोपलेन एवं एल.एन.टी. आदि मशीनों से बालू उठाते हैं जिससे अवैध उत्‍खनन से सिर्फ पर्यावरण संतुलन ही नहीं बल्कि केन नदी के अस्तिव पर भी खतरा मंडरा रहा है, इससे प्रतिदिन कितने राजस्‍व की चोरी होती है? (घ) क्‍या खनिज माफिया आये दिन फायरिंग कर यहां के ग्रामीणों को धमकाते हैं, दिनांक 10.3.16 को फत्‍तेपुर में फायरिंग हुयी एवं मवईघाट में फायरिंग हुयी, जिसमें 02 लोग मारे गए एवं कई घायल हो गये हैं? यदि हाँ, तो इससे कितने किसानों ने पलायन किया है? सूचीवार जानकारी देवें

खनिज साधन मंत्री ( श्री राजेन्द्र शुक्ल ) : (क) जी नहीं। (ख) जी नहीं। प्रश्‍नानुसार प्राप्‍त शिकायतों का विवरण पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ग) एवं (घ) जी नहीं। अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री आर डी प्रजापति- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा विधानसभा क्षेत्र चंदला उत्‍तरप्रदेश की सीमा से लगा हुआ है और तीन तरफ से उत्‍तरप्रदेश से घिरा हुआ है. केन नदी पर उत्‍तरप्रदेश के माफिया प्रतिदिन हजारों की संख्‍या में आते हैं और मेरे क्षेत्र में बंदूकों से फायरिंग करते हैं. एक ही दिन में एक हजार ट्रक निकलते हैं. मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में मंत्री जी ने कहा है कि वहां कोई अवैध उत्‍खनन नहीं होता है. जब अवैध उत्‍खनन नहीं हो रहा है तो फिर मेरे पास वहां के 500 लोगों का रिकॉर्ड है, जिन्‍होंने मुख्‍यमंत्री हेल्‍पलाईन में फोन किया है.

श्री बाला बच्‍चन- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, (व्‍यवधान)

गर्भगृह में प्रवेश एवं वापसी

बसपा की सदस्‍य श्रीमती इमरती देवी का गर्भगृह में प्रवेश

(बसपा की सदस्‍य श्रीमती इमरती देवी अपनी बात कहते हुए गर्भगृह में आई और अध्‍यक्ष महोदय की समझाईश पर वापस अपने स्‍थान पर गई.)

अध्‍यक्ष महोदय- आप सीट पर जायें. मुख्‍य सचेतक जी ये क्‍या तरीका है. सारे प्रश्‍न का उत्‍तर आ गया है. सरकार निर्देश दे रही है. मंत्री जी भी राजी हैं. आप कुछ बोलते क्‍यों नहीं? प्रश्‍न काल बाधित हो रहा है.

श्री बाला बच्‍चन- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उनके पास वो पूरी तारीखें हैं, जब-जब लोकार्पण, शिलान्‍यास हुआ है और उन्‍हें नहीं बुलाया गया है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आप जवाब दिलवायें.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र- सारा जवाब दिया है. (व्‍यवधान)

श्री आर डी प्रजापति- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 10-03-2016 को हथ्‍थेपुरा और मवई घाट में खनिज माफिया द्वारा फायरिंग की गई. जिसमें कई लोग घायल हो गए. मवई घाट में बालू के लिए दो आदमियों की हत्‍या हो गई. लेकिन मंत्री जी कहते हैं वहां कुछ नहीं हो रहा है.

श्री बाला बच्‍चन- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुख्‍यमंत्री जी यहां बैठे हुए हैं, उन्‍हें इस बारे में जवाब देना चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय- मंत्री जी ने जवाब दे दिया.

श्री आर डी प्रजापति- मैं आपको बताना चाहता हूं कि कम से कम चार सौ पांच सौ लोगों ने पीजी सेल में, मुख्‍यमंत्री हेल्‍पलाईन में शिकायत की है और ये कह रहे हैं कि कुछ नहीं हुआ है. आप मेरे क्षेत्र में जांच करवा लीजिये. यदि मैं दोषी हूं तो मेरे ऊपर एफआईआर दर्ज की जाए.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये जो फायरिंग और दो लोगों के मारे जाने की बात माननीय सदस्‍य ने कही है. इस प्रकार की कोई घटना वहां नहीं हुई है. ये जानकारी खनिज विभाग द्वारा नहीं दी जा रही है बल्‍कि पुलिस अधीक्षक छतरपुर का 18 मार्च का पत्र है. जिसमें ये कहा गया है कि न तो कोई फायरिंग हुई है, न किसी की मौत हुई है और न ही कोई घायल हुआ है.

श्री आर डी प्रजापति- माननीय मंत्री जी कह रहे हैं कि कुछ नहीं हुआ. लेकिन कम से कम पांच सौ लोगों ने पीजी सेल में शिकायत की है. आप जांच करवा लीजिये कि वहां अवैध खनन हो रहा है या नहीं ? सुबह से लेकर रात तक फायरिंग होती है. (XXX). मां-बहनों के साथ अन्‍याय करते हैं. एक दिन में एक हजार ट्रक निकलते हैं. एक करोड़ की प्रतिदिन बालू निकालते हैं. इन्‍होंने मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में बिंदु (ख) में कहा है कि अभी तक मुझे चार आवेदन प्राप्‍त हुए हैं और चार आवेदनों में से पहला एसडीएम कार्यालय में, दूसरा एसडीएम कार्यालय में, तीसरा खनिज विभाग और तहसीलदार ने जाँच की, वह भी अप्राप्त है. चौथा, आप कह रहे हैं जाँच दल बना है, वह भी अप्राप्त है, 2014 से और ये पाँच सौ से ज्यादा....

अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न पूछिए.

श्री आर.डी.प्रजापति-- मेरा निवेदन है कि...

अध्यक्ष महोदय-- आप सीधा प्रश्न पूछिए.

श्री आर.डी.प्रजापति-- महत्वपूर्ण जानकारी दी है. ऐसे अधिकारी को निलंबित किया जाए और उनके ऊपर एफआईआर की जाए या तो मेरे ऊपर एफआईआर दर्ज की जाए या तो उस अधिकारी के ऊपर एफआईआर दर्ज की जाए जिसने असत्य जानकारी दी है. (शेम शेम की आवाज)

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठिए. प्रश्न का उत्तर तो आ जाए...(व्यवधान)..

श्री आर.डी.प्रजापति-- मैं दो साल से लगातार परेशान हूँ....(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- अजय सिंह जी आप बोलिए.

श्री आर.डी.प्रजापति-- दो साल से परेशान हूँ....(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, सिर्फ अजय सिंह जी बोलेंगे.

श्री अजय सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बहुत ही गंभीर बात है कि सत्तापक्ष के विधायक, ये दूसरे विधायक हैं आज सुबह से अवैध उत्खनन की बात कर रहे हैं. सरकार की तरफ से जो उत्तर आ रहा है....

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी भी उत्तर देंगे.

श्री अजय सिंह-- जो अभी उत्तर इन्होंने दिया कि कोई जानकारी नहीं, कोई फायरिंग नहीं, यदि एक सम्मानित विधायक भारतीय जनता पार्टी का बोल रहा है कि पाँच सौ, आठ सौ से हजार ट्रक रोजाना अवैध उत्खनन हो रहा है. क्या सरकार अवैध उत्खनन के लिए चिंतित है या नहीं?

अध्यक्ष महोदय-- (श्री आर.डी.प्रजापति जी के खड़े होने पर) प्रजापति जी, आप भी बैठिए.

श्री आर.डी.प्रजापति-- अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का उत्तर दिलवाइये.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी को तो बोलने दें.

श्री आर.डी.प्रजापति-- मैं निवेदन करना चाहता हूँ..

अध्यक्ष महोदय-- आप उत्तर तो लीजिए.

श्री राजेन्द्र शुक्ल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, पूर्व नेता प्रतिपक्ष जी ने जो बात कही है कि सरकार अवैध उत्खनन को लेकर के चिंतित है कि नहीं है. मैं उनको यह जानकारी देना चाहता हूँ कि जब उनकी सरकार रहती थी तो......(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- उत्तर तो लेना पड़ेगा. ..(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, अवैध उत्खनन के संबंध में सदन की समिति बनाकर जाँच कराने की घोषणा कर दें. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- बोलने तो दें भाई. आप बोलने ही नहीं दे रहे. ..(व्यवधान)..

श्री जितू पटवारी-- हमारी सरकार थी, 15 साल में कितना पानी बह गया नदी में... ..(व्यवधान)..

श्री राजेन्द्र शुक्ल-- पूरी बात सुनने का साहस नहीं है क्या? ..(व्यवधान)..

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ नरोत्तम मिश्र)-- अध्यक्ष महोदय, मेरे को विपक्ष पर तरस आने लगा है. खुद तो कोई प्रश्न लगाते नहीं और पूछते नहीं ..(व्यवधान)..

श्री आर.डी.प्रजापति-- अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न का उत्तर आ जाने दीजिए. मेरा आप लोगों से हाथ जोड़कर निवेदन है. यह गंभीर मामला है. ..(व्यवधान)..

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्चन)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपकी पार्टी के एमएलए ने यह कहा है कि अगर मैं असत्य हूँ तो मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए...(व्यवधान)..

डॉ नरोत्तम मिश्र-- पहले सवाल का जवाब आने दें. पहले से ही खड़े हो जाते हैं. माननीय सदस्य का जो मूल प्रश्न चल रहा है. उसका जवाब आया नहीं और खड़े हो

जाएँगे. ..(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत-- आप तो बैठ जाओ भैय्या.

अध्यक्ष महोदय-- रावत जी, बैठिए.

श्री बाला बच्चन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, भारतीय जनता पार्टी के एमएलए ने यह कहा है कि अगर मैं गलत हूँ तो मेरे खिलाफ एफआईआर कराई जाए और क्या बच जाता है माननीय मंत्री जी?

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठिए. उत्तर तो सुन लीजिए.

डॉ नरोत्तम मिश्र-- यह भारतीय जनता पार्टी का स्वस्थ लोकतंत्र है आप लोग अपनी सोचो.

श्री राजेन्द्र शुक्ल-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं इनके समय के कुशासन की याद नहीं दिलाता यदि पूर्व नेता प्रतिपक्ष खड़े नहीं होते. लेकिन यह बताना आवश्यक है कि छःसौ करोड़ रुपये इनके शासनकाल में जो रायल्टी से राजस्व आता था. वह साढ़े तीन हजार करोड़ हो गया है. (मेजों की थपथपाहट) यदि हमने अवैध उत्खनन में शिकंजा नहीं कसा होता, अंकुश नहीं लगाया होता तो क्या यह कभी संभव हो सकता था? ..(व्यवधान)..

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- तनख्वाह कितनी बढ़ गई मंत्री जी की... ..(व्यवधान)..

डॉ नरोत्तम मिश्र-- आपकी तुलना में कम बढ़ी है.. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- उत्तर तो आने दो ..(व्यवधान)..

श्री बाला बच्चन-- माननीय मंत्री जी, पहले ..(व्यवधान)..जवाब दीजिए

आप ..(व्यवधान)..

श्री आर.डी.प्रजापति-- मेरा निवेदन है कि मेरे प्रश्न का जवाब तो आ जाने

दीजिए. ..(व्यवधान)..

श्री बाला बच्चन-- यह पिछली सरकार से तुलना करके जवाब देना तो सदन को भ्रमित करने जैसा है.

डॉ नरोत्तम मिश्र-- ये जवाब लेना नहीं चाहते हैं क्या? ..(व्यवधान)..

श्री बाला बच्चन-- उन्होंने स्पेसिफिक प्रश्न पूछा है आपकी पार्टी के विधायक ने पूछा है और कहा है कि अगर मैं असत्य हूँ तो मेरे खिलाफ एफआईआर कराई जाए. इससे बड़ी बात क्या हो सकती है? आप प्रश्न से बचना चाहते हों और...

अध्यक्ष महोदय-- उत्तर दे रहे हैं भाई.

श्री बाला बच्चन-- गलत जवाब दे रहे हों. काँग्रेस की सरकार को जाने को 13 साल हो गए उसका जवाब देकर आप सदन को क्यों भ्रमित कर रहे हों?

अध्यक्ष महोदय-- कृपा करके उत्तर तो ले लें. प्रजापति जी की बात का उत्तर

दीजिए. ..(व्यवधान)..

डॉ नरोत्तम मिश्र-- पूरे झूठे, कोई प्लेट नहीं खरीदी गई ..(व्यवधान)..कोई प्लेट नहीं पूरे के पूरे झूठ के आधार पर काँग्रेस चल रही है. पूरा का पूरा झूठ. पूरी काँग्रेस झूठ के आधार पर चल रही है. ..(व्यवधान)..

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- सोलह सौ रुपये में.... ..(व्यवधान)..

डॉ नरोत्तम मिश्र-- कोई प्लेट नहीं खरीदी गई ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- झूठ शब्द निकाल दीजिए. ..(व्यवधान)..

(व्यवधान)

श्री आर.डी. प्रजापति--मेरा आप लोगों से हाथ जोड़कर व्यक्तिगत निवेदन है कि मंत्री जी को मेरे प्रश्न का उत्तर देने दीजिए..(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--मेरा आप लोगों से अनुरोध है कि माननीय सदस्य ने एक प्रश्न पूछा है उस पर माननीय वरिष्ठतम् सदस्य श्री अजय सिंह जी ने भी बात रखी है मंत्री जी को उनकी बात कहने दें और उनका समाधान होने दें. बैठ जाइये.

डॉ. नरोत्तम मिश्र--अध्यक्ष जी पूरे असत्य पर कांग्रेस चल रही है.100 प्रतिशत असत्य बोल रहे हैं. एक भी प्लेट नहीं खरीदी गई. एक भी मटका नहीं खरीदा गया.हम सही बात कह रहे हैं. दावे के साथ कह रहे हैं. हम मंत्री हैं आधार पर बोल रहे हैं और आपकी कृपा से नहीं हैं.

श्री रामनिवास रावत--असत्य शब्द क्या होता है जवाब आने दो. आप बीच में उठकर सदन नहीं चलाने देते हैं. आप संसदीय मंत्री हो सदन बाधित करते हो. चर्चा बाद में कर लेना पहले इस प्रश्न का जवाब आए.

अध्यक्ष महोदय--तो आप उत्तर तो लीजिए.

श्री आर.डी. प्रजापति--माननीय अध्यक्ष महोदय, 15 मई को मैंने स्वयं तीन ट्रक पकड़े थे.

श्री गोपाल भार्गव--(XXX)

अध्यक्ष महोदय--यह जो गोपाल भार्गव जी ने कहा यह रिकार्ड में नहीं आएगा. (व्यवधान)

श्री बाला बच्चन--यह कोई तरीका है आपका भ्रष्टाचार करते हो (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--उसे कार्यवाही से निकाल दिया गया है (व्यवधान)

श्री आर.डी. प्रजापति--माननीय अध्यक्ष महोदय, दूसरे लोग डिस्टर्ब करते हैं.(व्यवधान)

श्री बाला बच्चन--अध्यक्ष महोदय, गोपाल भार्गव जी का यह कोई तरीका है बात करने का..(व्यवधान)

11.52 बजे

गर्भगृह में प्रवेश एवं वापसी

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा गर्भगृह में प्रवेश

(पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) की टिप्पणी से नाराज होकर इंडियन नेशनल कांग्रेस के कई सदस्यगण अपनी अपनी बात कहते हुए गर्भगृह में आए)

 

अध्यक्ष महोदय--उसे कार्यवाही से निकाल दिया है (व्यवधान)

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)--अध्यक्ष जी कोई माफी नहीं मांगी जाएगी. कोई असभ्य बात नहीं कही है चले या न चले (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--कृपा करके अपने स्थान पर जाइये. (व्यवधान)

श्री बाला बच्चन--मुख्यमंत्री जी के संरक्षण में माननीय मंत्रीगण इस तरह की बातें कर रहे हैं. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--उसे कार्यवाही से निकाल दिया गया है.

श्री बाला बच्चन--अध्यक्ष महोदय, कार्यवाही से निकालने से नहीं चलेगा..(व्यवधान)

(गर्भगृह में आए इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण अपने-अपने आसन पर वापस गए)

 

श्री आर.डी. प्रजापति--माननीय अध्यक्ष महोदय, 15 तारीख को मैंने तीन ट्रक पकड़े. पुलिस को और टी आई को सूचित किया. 100 नंबर पर पुलिस को भी सूचित किया (व्यवधान) मैंने खनिज अधिकारी से कहा कि माननीय खनिज अधिकारी जी आ जाइये तो उन्होंने कहा कि मैं क्या हवाई जहाज से आ जाऊं, यह खनिज अधिकारी के बोल थे..(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय-- बैठ जाइए उत्तर ले लीजिए. मंत्री जी को उत्तर पूरा कर लेने दें उसके बात भनोत जी का प्रश्न है.

श्री अजय सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी इस सदन के वरिष्ठ सदस्य हैं जिस तरह से उन्होंने टिप्पणी की उसे आपने कार्यवाही से तो विलोपित कर दिया है लेकिन हम सब का अनुरोध है कि इस तरह से मंत्री को बात नहीं करना चाहिए. कृपा करके आप इस पर कुछ व्यवस्था दे दें.

श्री गोपाल भार्गव--माननीय अध्यक्ष महोदय, आप भी देख रहे हैं जब से सत्र शुरु हुआ है. पहले दिन से प्लेट, चम्मच घड़ा इसके अलावा अन्य किसी लोक महत्व के विषय पर चर्चा नहीं कर रहे हैं. (व्यवधान)

डॉ. नरोत्तम मिश्र--माननीय अध्यक्ष महोदय, यदि चवन्नी का भी भ्रष्टाचार है तो कोर्ट में जाएं, लोकायुक्त में जाएं वहां प्रमाण रखें. लोकायुक्त में क्यों नहीं जाते हैं. कौन रोक रहा है जाने के लिए, इनको चुनौती दे रहे हैं यदि चवन्नी का भ्रष्टाचार हुआ हो तो..(व्यवधान)

श्री बाला बच्चन--कोर्ट की प्रक्रिया अलग है. कोर्ट में भी जाएंगे लेकिन विधान सभा की प्रक्रिया अलग है. यह विधान सभा सदन किसलिए है (व्यवधान) यह मध्यप्रदेश की विधान सभा यह संस्था, यह सदन किसलिए है (व्यवधान) कोर्ट की प्रक्रिया के लिए भी हम जाएंगे.

श्री गोपाल भार्गव--यदि गलत हुआ है तो आपके पास दस फोरम हैं लोकायुक्त में जाएं, हाई कोर्ट में जाएं, ईओडब्ल्यू में जाएं, अन्य किसी एजेंसी में जाएं.

अध्यक्ष महोदय--यहां यह विषय नहीं है. सिंहस्थ पर बहस नहीं हो रही है. कृपा करके माननीय मंत्रीगणों से और सदस्यों से भी अनुरोध है कि यहां सिंहस्थ पर बहस नहीं हो रही है. बैठिए आप लोग..(व्यवधान)

श्री गोपाल भार्गव--लोक महत्व के अन्य विषय भी हैं चर्चा करने के लिए. प्रदेश की और भी कठिनाइयां हैं लोक महत्व के अनेकों विषय हैं (व्यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय :- सिंहस्‍थ पर बहस नहीं हो रही है. कृपा करके शांति रखें. सुखेन्‍द्र जी कृपया बैठिये. कृपा करके रावत जी,पटवारी जी बैठिये. आप लोग बैठिये उत्‍तर आने दीजिये.

(व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र :- इतने लोक महत्‍व के प्रश्‍न है, लेकिन कभी उत्‍तर प्रदेश के मामले पर, कभी दिल्‍ली के मामले पर और कभी अन्‍य विषय पर प्रश्‍नकाल को बाधित करते हैं.

श्री रामनिवास रावत :- आप क्‍या कर रहे हैं.आप बैठ जाईये.

(व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय :- मंत्री जी आप बोलिये. आप लोग उत्‍तर नहीं लेना चाहते हैं. आप लोग बैठ जाईये. मंत्री जी आप जल्‍दी से उत्‍तर दीजिये. फिर मैं दूसरा प्रश्‍न करूंगा.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल :- माननीय प्रजापति जी ने जो मुद्दा उठाया है, हालांकि रेत की जो नयी नीति बनी है और उससे जो आक्‍शन पद्धति से हमने रेत को अलाट करने का काम किया है, उससे अकेले छतरपुर में 56.68 करोड़ रूपये रेत की रायल्‍टी से प्राप्‍त होने वाली है.

(व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय:- आप लोग जबरदस्‍ती खड़े हो जाते हैं. आप लोग उत्‍तर ही नहीं आने देना चाहते हैं.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल :- जब आपका प्रश्‍न लगे, तब आप सवाल करना. अभी दूसरे सदस्‍य का प्रश्‍न है तो आप क्‍यों डिस्‍टर्ब कर रहे हैं. दूसरे के प्रश्‍न पर डिस्‍टर्ब कर रहे हैं.

(व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय :- आप लोग माननीय सदस्‍य के अधिकारों का हनन कर रहे हैं. कृपा करके उनका उत्‍तर आने दीजिये. यह बात उचित नहीं है.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल :- प्रजापति जी ने इतने मुश्किल से प्रश्‍न लगाया है, उनका जवाब आने दीजिये.

अध्‍यक्ष महोदय:- दण्‍डोतिया जी आप बैठ जाईये, उसका उत्‍तर आने दीजिये.

(व्‍यवधान)

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल:- अध्‍यक्ष महोदय, यह गैर जिम्‍मेदारी की पराकाष्‍ठा है, माननीय सदस्‍य की.

अध्‍यक्ष महोदय :- आप माननीय सदस्‍य के प्रश्‍न का उत्‍तर दें, उनका समाधान कर दें.

श्री राजेन्‍द्र शुक्‍ल :- अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्‍य से चर्चा करूंगा और उन्‍होंने जो -जो बातें कही हैं, शिकायत के रूप में उसकी जांच करायी जायेगी, जो दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही होगी.

अध्‍यक्ष महोदय :- प्रश्‍न क्रमांक 12 श्री तरूण भानोत.

(व्‍यवधान)

श्री आर.डी.प्रजापति :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, निलंबित कर दिया जाये. मेरा आपसे हाथ जोड़कर निवेदन है कि या तो मेरे ऊपर कार्यवाही की जाये. मैंने चार पत्र बतायें हैं, जबकि पांच सौ से ज्‍यादा ट्रक हैं. जिसका मैंने बताया है उनको निलंबित किया जाये. गलत जानकारी दी है.

(व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय :- भानोत जी आप अपना प्रश्‍न करिये. अपने अपने माईक बंद करिये, उनका माईक चालू नहीं हो रहा है. सिर्फ भानोत जी का लिखा जायेगा. प्रजापति जी आपका प्रश्‍न समाप्‍त हो गया है.

(व्‍यवधान)

श्री आर.डी.प्रजापति :- उनको निलंबित किया जाये.

अध्‍यक्ष महोदय :- माननीय मंत्री जी ने जांच कराने का बोल दिया है.

(व्‍यवधान)

श्री आर.डी.प्रजापति :- राजस्‍व विभाग की वसूली नहीं होती, मेरे कारण ही वसूली हुई है. उसको निलंबित किया जाये. जिसने गलत जानकारी दी है. मैं दो साल से परेशान हूं.

(व्‍यवधान) मैं जांच के लिये तैयार हूं. गलत हुआ तो मेरे ऊपर कार्यवाही की जाये. मेरा इस्‍तीफा लिया जाये, मैं तैयार हूं.

(व्‍यवधान)

(इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यों द्वारा शेम-शेम के नारे लगाये गये.)

श्री आर.डी.प्रजापति :- अध्‍यक्ष महोदय, मैं नहीं मान सकता, उसे निलंबित किया जाये.

(व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय :- आप लोग कृपा करके बैठ जायें. आपके प्रश्‍न का उत्‍तर आ गया है. मंत्री जी ने जांच कराने का बोल दिया है.

श्री आर.डी. प्रजापति :- जिस आदमी ने इतना बड़ा अन्‍याय किया है, क्‍या उसको निलंबित नहीं किया जा सकता है. इतना बड़ा खनन माफिया है.(व्‍यवधान) उसको हटाया जाये, उसको निलंबित किया जाये. जब तक निलंबित नहीं किया जायेगा मैं नहीं बैठने वाला हूं. (व्‍यवधान)

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन):- अध्‍यक्ष महोदय, सत्‍ता पक्ष के सदस्‍य बोल रहे हैं. (व्‍यवधान) आप विधायकों को संरक्षण देने के बजाए आप सरकार को संरक्षण दे रहे हैं...(व्‍यवधान )इस पर आपको विचार करना पड़ेगा. हम सबकी गरिमा का मामला है.

 

प्रश्नकाल समाप्त

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अध्यक्ष महोदय-- माननीय सदस्य ने प्रश्न किया है मंत्री जी इसकी जांच कराने के लिये तैयार हैं. श्री प्रजापति जी आप अपने स्थान पर बैठ जाएं, यह ठीक बात नहीं है.

(व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत(विजयपुर)--अध्यक्ष महोदय, इससे बड़ी बात क्या हो सकती है कि सदस्यों के अधिकारों का यहां पर हनन हो रहा है.

श्री आर.डी.प्रजापति--अध्यक्ष महोदय, मैं नहीं बैठने वाला चाहे आप मुझे निलंबित कर दें.

(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--आप बैठ जाएं प्रश्नकाल समाप्त हो गया है आप यहां पर परम्पराएं नहीं समझाएं.

श्री आर.डी.प्रजापति--मैं आसन्दी से निवेदन करना चाहता हूं कि यहां पर विधायक को कोई बात बोलने का अधिकार नहीं है जब मंत्री जी सदन को असत्य जानकारी दे रहे हैं उनको विधान सभा में ऐसी बातें नहीं बोलना चाहिये.

अध्यक्ष महोदय--आप बैठ जाएं. पंडित रमेश दुबे अपनी शून्यकाल की सूचना को पढ़ें.

श्री आर.डी.प्रजापति--संबंधित अधिकारी को हटाया जाए, तब ही बैठूंगा, उनके ऊपर कार्यवाही की जाए, तब ही सीट पर बैठूंगा. जांच की बात हो या कुछ भी मैं इसके लिये बैठने के लिये तैयार नहीं हूं.

(व्यवधान)

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष(श्री बाला बच्चन)--माननीय विधायक जी ने बोला है कि मेरा इस्तीफा ले लें मुझे पार्टी से निलंबित कर दें अथवा मुझे सदस्यता से निलंबित कर दें इससे बढ़कर और क्या बात हो सकती है. मंत्री जी आपकी पार्टी का विधायक बोल रहा है कि मुझे निलंबित कर दें अथवा मेरा इस्तीफा ले लें.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ.नरोत्तम मिश्र)--वह बैठ गये हैं उनकी समस्या का समाधान हो गया है. आप कृपया आराम करें.

(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--वह विषय अब समाप्त हो गया है, इस विषय पर यहां पर कोई भी चर्चा नहीं होगी.

श्री बाला बच्चन--प्रकरण समाप्त नहीं हुआ है.

अध्यक्ष महोदय--आपके कहने से इस तरह से नहीं होगा. वह विषय समाप्त हो गया आपका कंसर्न उसमें नहीं है. सभी सदस्य अपनी बात कहने के लिये सक्षम हैं. यहां पर किसी के गार्जियन बनने की जरूरत नहीं है.

(भाजपा के अनेक सदस्यगण अपनी बात कहते हुये श्री राजेन्द्र शुक्ल खनिज मंत्री के आसन्न के समीप आये)

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, यह क्या हो रहा है (सत्तापक्ष की ओर इशारा करते हुए.)

(व्यवधान)

(श्री बाला बच्चन के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के समस्त सदस्यगण गर्भ गृह में आ गये.)

अध्यक्ष महोदय--विधान सभा की कार्यवाही 10 मिनट के लिये स्थगित.

(12.03 बजे विधान सभा की कार्यवाही 10 मिनट के लिये स्थगित)

 

 

 

12.21 बजे [विधानसभा पुन: समवेत हुई ]

{उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए}

श्री बाला बच्‍चन माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश विधानसभा के इतिहास में यह पहली बार हुआ है.

उपाध्‍यक्ष महोदय शून्‍यकाल की सूचनाएं ली जायेंगी. (व्‍यवधान)

श्री बाला बच्‍चन यह माननीय विधायकों का अपमान है.

श्री रामनिवास रावत जिसकी वजह से हाऊस स्‍थगित हुआ था. उस पर कम से कम व्‍यवस्‍था तो आ जाये.

श्री बाला बच्‍चन कई विधायकों ने माननीय मंत्री जी को घेरा है. यह पूरे सदन के विधायकों का यह अपमान है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र नेताजी, बाला बच्‍चन जी....

श्री रामनिवास रावत अगर वे संतुष्‍ट हो गए हों तो कोई बात नहीं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र बाला बच्‍चन जी, (श्री आर.डी.प्रजापति की ओर देखते हुए) वे कुछ बोल रहे हैं.

श्री आर.डी.प्रजापति माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो मेरी मांग थी माननीय मंत्री जी ने मेरी मांग पूरी कर ली है. जो कह दिया है, उससे मैं सहमत हूँ.

श्री आरिफ अकील क्‍या सदन के सामने कहने में शर्म आ रही थी ?

श्री बाला बच्‍चन यह माननीय मंत्री जी बता दें. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत माननीय मंत्री ने सदन का अपमान किया है. सदन चल रहा है. सदन में प्रश्‍न पूछ रहा हैं और आप सदन के बाहर संतुष्‍ट कर रहे हो. आपको सदन में जवाब देना चाहिये. (व्‍यवधान)

डॉ. गोविन्‍द सिंह जनता के प्रतिनिधियों का अपमान है. (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय अब वे संतुष्‍ट हो गए हैं, मामला पटाक्षेप हो गया है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह अकेले में माफी मांगते हो और सदन का अपमान करते हो.

.............(व्‍यवधान)......

उपाध्‍यक्ष महोदय कोई एक सदस्‍य बोले. आप लोग एक साथ बोल रहे हैं.

श्री बाला बच्‍चन माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह विधायकों का अपमान है. मंत्री जी से बुलवाओ.

उपाध्‍यक्ष महोदय माननीय मंत्री जी ....

डॉ. गोविन्‍द सिंह माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह सदन का अपमान है....... (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय आप बोलें, एक व्‍यक्ति बोले कि क्‍या बोलना चाहता है ?

श्री आर.डी.प्रजापति उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं अपनी बात स्‍वयं कर लेता हूँ एवं मुझे जनता ने चुना है. मेरी बात माननीय मंत्री जी ने मान ली है और मैं पूर्ण रूप से संतुष्‍ट हूँ. मुझे किसी भी प्रकार की जरूरत नहीं है. मैं स्‍वयं नेता एवं विधायक हूँ. (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय आरिफ अकील साहब, मेरी बात भी सुन लीजिये. आप एक मिनट सुनिये. (व्‍यवधान) एक मिनट, आप बात ही नहीं सुनेंगे.

श्री आरिफ अकील हमें महाभारत की जरूरत नहीं है. (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय आरिफ साहब, मेरी बात सुन लीजिये. मैं खड़ा हूँ. आप बैठ जाइये. आसन्‍दी की मर्यादा रखिये. कोई एक व्‍यक्ति बोले कि क्‍या बोलना है तो उसके बाद, हम उसकी बात सुनें. फिर मामला पटाक्षेप होगा. आप सबकी तरफ से बोल रहे हैं.

श्री बाला बच्‍चन माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारा यह आग्रह है कि जिस समय प्रश्‍न का जवाब माननीय मंत्री महोदय को देना था, उस समय जवाब क्‍यों नहीं दिया ? यह पूरे सदन का अपमान है. यह विधायकों का अपमान है. यह उसी समय अगर माननीय मंत्री जी जवाब दे देते तो मैं समझता हूँ कि बात इतनी नहीं बढ़ती और सदन 10 मिनट के लिए जो स्‍थगित हुआ. उस दौरान 40 विधायकों ने माननीय मंत्री जी को घेरा था, जो उनकी पार्टी के थे तब जाकर जवाब दिया है. यह सदन का अपमान है. (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय चलिये, आपकी बात आ गई है. अब उनको बोलने दीजिये.

श्री बाला बच्‍चन यह भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल में ...... (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत उपाध्‍यक्ष महोदय, जो हम सदन में पूछ रहे हैं.....

उपाध्‍यक्ष महोदय यह प्रभारी नेता प्रतिपक्ष ने पूछ लिया है. उन्‍होंने अपनी बात रख दी है. बात यही हुई थी कि सबकी तरफ से बोलेंगे.

श्री रामनिवास रावत जब सदन चल रहा है तो सदन के बाहर मंत्री जी बतायेंगे. यह सदन का अपमान नहीं है. ...

श्री आरिफ अकील आप पहले व्‍यवस्‍था दें.

उपाध्‍यक्ष महोदय अब उनको बोल लेने दीजिये.

श्री आरिफ अकील उपाध्‍यक्ष महोदय, आपकी व्‍यवस्‍था उस पर आनी चाहिये.

उपाध्‍यक्ष महोदय किस चीज पर ?

श्री आरिफ अकील पहले उस पर व्‍यवस्‍था दीजिये.

उपाध्‍यक्ष महोदय देखिये, मामला आगे बढ़ चुका है.प्रश्‍नकाल समाप्‍त हो गया है. परम्‍परा यही रही है एक घंटे के बाद प्रश्‍नकाल नहीं चलता. यह मेरी व्‍यवस्‍था है. (व्‍यवधान)

श्री राम निवास रावत परम्‍परा रही है लेकिन सदस्‍यों का सम्‍मान क्‍या परम्‍परा से हटकर है? (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय यह ठीक है लेकिन बात वहां खत्‍म हो गई. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत सदन की गरिमा बनाए रखना क्‍या हम लोगों का दायित्‍व नहीं है. सदन चल रहा है, सदन में प्रश्‍न पूछा जा रहा है, सदन में जवाब देना चाहिए. (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय जिस माननीय सदस्‍य का मुद्दा है. वह बैठ गए रावत जी आप बैठ जाइए, यह गलत बात है. यह कुछ नहीं लिखा जाएगा. (व्‍यवधान)

श्री आरिफ अकील (XXX)

उपाध्‍यक्ष महोदय आरिफ जी मेरी बात सुन लीजिए. प्रश्‍नकाल समाप्‍त हो गया विधायक जी अपना कोई वक्‍तव्‍य देना चाहते हैं सुन लीजिए. जिनका मूल प्रश्‍न था. (व्‍यवधान)

श्री आरिफ अकील बाला बच्‍चन ने जो व्‍यवस्‍था की बात उठाई है उस पर क्‍या कर रहे हो आप. (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय आपत्ति किसको थी. कौन इससे परेशान था. माननीय विधायक थे. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावतबाला बच्‍चन को. (व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्रअध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्‍वाइंट ऑफ आर्डर.

उपाध्‍यक्ष महोदय आप तो उनको समर्थन दे रहे थे. आप इन्‍हीं की बात रख रहे थे. पाइंट ऑफ आर्डर सुन लीजिए. (व्‍यवधान)

 

12:27 बजे {अध्‍यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए}

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र अध्‍यक्ष महोदय मेरा व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न यह है. (व्‍यवधान)

श्री आरिफ अकील पहले बाला बच्‍चन जी की बात पर व्‍यवस्‍था दीजिए. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदयदोनों की बात पर व्‍यवस्‍था देंगे. (व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्रदूसरे के ललना का पलना झुलाने से कुछ नहीं मिलने वाला. (व्‍यवधान)

श्री आरिफ अकील तुम्‍हारा ललना न पलना कुछ नहीं है. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदय माननीय मंत्री जी आपका पाइंट ऑफ आर्डर क्‍या है? (व्‍यवधान)

श्री आरिफ अकीलअब आप यही कहने वाले हो.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र अध्‍यक्ष जी, मेरी गुजारिश सिर्फ इतनी है कि सम्‍मानित सदस्‍यों का यह कहना है कि सदन के बाहर जवाब दिया है. इसको मैं उचित इसलिए नहीं मानता कि अभी तक जब हाउस में व्‍यवधान आता है तब विधानसभा के सम्‍मानित अध्‍यक्ष जिस तरफ से व्‍यवधान आता है उस पक्ष को, मंत्री को या नेता प्रतिपक्ष को बुलाकर उस विषय पर बात करते हैं. आज भी माननीय अध्‍यक्ष महोदय ने सम्‍मानित सदस्‍य को सम्‍मानित मंत्री को बुलाया और समाधान किया हाउस को समवेत चलाने के लिए इसमें न तो कोई सदन के बाहर जवाब दिया. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत क्‍या समाधान किया, यहां बात आ जाए?

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र मुझे अपनी पूरी बात कह लेने दीजिए.

श्री रामनिवास रावत मेरा भी व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र क्‍या मैं अपनी पूरी बात न बोलूं? क्‍या मेरी बात नहीं सुनी जाएगी? मेरी बात सुन लीजिए उसके बाद अपनी बात बोलिए आपको कोई नहीं रोक रहा है. यहां पर हम लोग बोलने के लिए आए हैं.

श्री बाला बच्‍चन माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी आप ठंडे मिजाज से बोलिए.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र जब भी व्‍यवधान आएगा मैं संसदीय कार्य मंत्री हूं] इस व्‍यवस्‍था का अंग होऊंगा. (व्‍यवधान)

श्री बाला बच्‍चन उसी समय जवाब दे देते तो यह स्थिति बनती ही नहीं. माननीय मंत्री जी हमारा यह कहना है आप हाउस को चलाते, हाउस को देखते आपको बुला लिया. कौन सी बात हमारी जानकारी में आई.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र माननीय मंत्री जवाब दे रहे थे उसी वक्‍त प्रश्‍नकाल समाप्‍त की घोषणा सम्‍मानित अध्‍यक्ष ने आसंदी से की थी इसके बाद सम्‍मानित सदस्‍य ने उठकर कह दिया कि मैं अब संतुष्‍ट हूं. मैं कोई वकालत नहीं चाहता तो विषय समाप्‍त हो जाता है . आपके पास में आप समाधान करते हैं या नहीं यह मेरी व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है, आप बता दो. (व्‍यवधान)

अध्‍यक्ष महोदयपाइंट ऑफ आर्डर कैसे होगा?

श्री आरिफ अकील अध्‍यक्ष महोदय.

अध्‍यक्ष महोदय हां आपकी बात भी सुनेंगे.

श्री आरिफ अकील अध्‍यक्ष महोदय पहले बाला बच्‍चन जी ने व्‍यवस्‍था मांगी थी उपाध्‍यक्ष जी ने उनको सुना था उसके बाद आप आ गए. तो उनकी बात अधूरी रह गई.

श्री बाला बच्‍चन अध्‍यक्ष महोदय, जिस तर‍ह से माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी ने अभी बोला क्‍या यह आपकी पार्टी का मेटर था? आप जिस तरह से बोल रहे हैं, यह सदन का मेटर था. यह इश्‍यू सदन में रेस हुआ था.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र सदन में जो मेटर रेस होता है उसे अध्‍यक्ष जी बुलाते हैं.

श्री बाला बच्‍चनयह सदन का हक और अधिकार है. यह पार्टी का मेटर नहीं था. (व्‍यवधान)

अध्यक्ष महोदय -- उन्होंने उनसे कहा, मेरे से तो कुछ कहा ही नहीं.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, मैं यह बोल रहा हूं कि 10 मिनट की कार्यवाही छूटने के बाद मंत्री जी को भारतीय जनता पार्टी के ही 40 विधायकों ने घेरा था. तब जाकर मजबूरन विधायक जी को बुलाकर यह बात कही.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, मेरा पाइंट ऑफ आर्डर है.

अध्यक्ष महोदय -- अब इस पर पाइंट ऑफ आर्डर कब तक चलेगा. अभी माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी और बाला बच्चन जी ने जो विषय उठाया, चूंकि आपने कहा, इसलिये दोनों का उत्तर मैं दे देता हूं.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, तो हम पाइंट ऑफ आर्डर नहीं उठा सकते.

अध्यक्ष महोदय -- आप भी उठा सकते हैं, पर पाइंट ऑफ आर्डर पर पाइंट ऑफ आर्डर नहीं होता. कृपया बैठ जायें.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, यह सदन का मेटर है.

अध्यक्ष महोदय -- आप कृपया बैठ जायें. अभी माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी ने एक विषय उठाया..

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, पहले बाला बच्चन जी ने उठाया.

अध्यक्ष महोदय -- बाला बच्चन जी ने भी उठाया, दोनों के उत्तर इकट्ठा दूंगा. उन्होंने अपनी बात रखी कि माननीय सदस्य का समाधान हो गया है और ऐसी पहले भी परम्परा है. माननीय नेता प्रतिपक्ष, बाला बच्चन जी ने भी उस विषय को उठाया और कहा कि समस्या सदस्य की नहीं सदन की थी. यही विषय था न आपका. मेरा इसमें कहना यह है कि माननीय सदस्य ने सदन में ही कहा है कि उनका समाधान हो गया है. अब उसमें कोई विषय कैसे उठता है.

..(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, क्या सदन को यह जानने का अधिकार नहीं है.

अध्यक्ष महोदय -- जिस सदस्य ने समाधान की बात उठाई, वही सदस्य यदि सदन में कह रहा है, तो आप उस पर से क्या कह सकते हैं.

डॉ. गोविन्द सिंह -- कक्ष में क्या निर्णय हुआ, उस निर्णय की जानकारी सदन में आनी चाहिये और अभी मंत्री जी जवाब देने के लिये खड़े हुए थे, तो उनको जवाब देना चाहिये.

श्री बाला बच्चन -- अध्यक्ष महोदय, यह सदन का अपमान है. जो सदन में सदस्य गण आते हैं, उनका अपमान है.

अध्यक्ष महोदय -- नहीं. यह कोई अपमान नहीं है. अब इस विषय को यही समाप्त किया जाता है.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, मेरा पाइंट ऑफ आर्डर है.

श्री मुकेश नायक -- अध्यक्ष महोदय, जिस सदस्य ने प्रश्न पूछा है, तो उसका उत्तर मंत्री जी आपके कक्ष में विधान सभा के सदस्य को थोड़ी देंगे. वह तो विधान सभा के अन्दर ही देना पड़ेगा.

अध्यक्ष महोदय -- उत्तर नहीं दिया है. उत्तर तो यहीं दिया है.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, कहां दिया है.

अध्यक्ष महोदय --यह आपने कैसे अनुमान लगा लिया कि उत्तर वहां दे दिया.

श्री मुकेश नायक -- समाधान क्या हुआ है, इसका उत्तर मंत्री जी सदन को बता दें.

डॉ. गोविन्द सिंह -- अध्यक्ष महोदय, क्या उत्तर दिया है, हम लोगों को भी उसकी जानकारी हो. आपने वहां क्या गुड़ फोड़ दिया है, वह गुड़ फोड़ने की जानकारी यहां तो हो.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय, यह तो गलत परम्परा पड़ जायेगी. यह ऐसा नहीं होगा.

डॉ. गोविन्द सिंह -- यह गलत परंपरा नहीं है.

..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- कक्ष की कोई बातें यहां नहीं होतीं, यह पुरानी परम्पराएं हैं.

..(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी -- अध्यक्ष महोदय, मेरा भी पाइंट ऑफ आर्डर है.

डॉ. गोविन्द सिंह -- अध्यक्ष महोदय, आपके कक्ष में क्या चर्चा हुई है, उसकी जानकारी आप सदन में अवगत करा दें. ..(व्यवधान).. आपके समक्ष निर्णय हुआ है, उस निर्णय की जानकारी आप सदन को दें, ऐसा मेरा आपसे अनुरोध है.

श्री आरिफ अकील -- अध्यक्ष महोदय, पहले आप ही ने बारबार कहा है कि जो आपके कक्ष में बात होती है, उसकी चर्चा यहां नहीं कर सकते.

अध्यक्ष महोदय -- उसकी चर्चा यहां नहीं होती.

श्री आरिफ अकील -- नहीं होती ना. फिर यहां कैसे हो रही है.

अध्यक्ष महोदय -- गलत है . नहीं करना चाहिये.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है. मैं आपका संरक्षण चाहते हुए, आपसे निवेदन करते हुए यह व्यवस्था चाहता हूं कि सदन में एक घण्टे का समय प्रश्नकाल के लिये निर्धारित किया गया है. सदन में सदस्य प्रश्न पूछते हैं और प्रश्न इसलिये लगाये जाते हैं कि हमें सदन में जवाब मिल जाये. सदस्य का प्रश्न चर्चा में आया. सदस्य ने अपनी पीड़ा व्यक्त की. जब सदस्य प्रश्न कर रहा था, तब सदस्य ने यहां तक कहा कि या तो मेरा इस्तीफा ले लो, मेरे खिलाफ एफआईआर करा दो, अगर मेरी बात गलत सिद्ध हो, तो मुझे निलम्बित कर दो. उन्होंने यहां तक कहा कि मुझे निलम्बित भी कर दो विधान सभा से, अगर मेरी बात गलत सिद्ध हो तो. उसकी यह पीड़ा, सदस्य के अधिकारों की रक्षा करना, मैं आसंदी से निवेदन करता हूं. उसके बाद सदन स्थगित हो गया. सदन के बाहर मंत्री जी ने क्या उत्तर दिया, चूंकि उनकी पार्टी का सदस्य है, उनकी पार्टी के 40 विधायक इकट्ठे हुए. मंत्री जी ने क्या उत्तर दिया, यह क्या सदन की गरिमा को भंग करने का सवाल नहीं है. जो प्रश्न सदन में उठा, सदन में पूछा, तो सदन में उसका जवाब आना चाहिये. यह नियमों में भी व्यवस्था है कि जब सदन चल रहा हो और सदस्य कोई प्रश्न उठाता है, तो उसका जवाब सदन में आना चाहिये, न कि वह सदस्य आपकी पार्टी का है, तो दबाव बनाकर बाहर उसे सहमति के लिये तैयार कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय -- यह दबाव बनाने वाली बात कार्यवाही से निकाल दें.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, मैं यह बात आसंदी से जानना चाहता हूं कि ..

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- यह मैं बता रहा हूं, जवाब दे रहा हूं.

श्री रामनिवास रावत -- मैं आसंदी से जवाब चाह रहा हूं, आपसे नहीं.

अध्यक्ष महोदय -- मैंने उनको अनुमति दी है. पाइंट ऑफ आर्डर में ऐसी व्यवस्थाएं हैं कि यदि कोई सदस्य पाइंट ऑफ आर्डर उठाये, तो संसदीय कार्य मंत्री जी से या किसी अन्य सदस्य को बोलने की अनुमति दी जा सकती है.

श्री रामनिवास रावत -- अध्यक्ष महोदय, यह सदन की गरिमा का सवाल है. यह सदस्य के मौलिक अधिकारों का सवाल है.

अध्यक्ष महोदय -- कृपया बैठ जायें. आप लोगों के साथ यही मुश्किल है कि आप प्रश्न उठाते हैं, उत्तर नहीं लेते. आप बैठ जाइये.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) अध्‍यक्ष महोदय, आपने बोल लिया इसके बाद मुझे बोलने दो (श्री सुन्‍दरलाल तिवारी के खड़े होने पर) इसके बाद आप बोल लेना तिवारी जी, कोई दिक्‍कत नहीं है, सार्थक चर्चा होगी.

श्री आरिफ अकील यह बता दीजिए कि (XXX) क्‍या हुई.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र बता रहे हैं वह भी सुनो.

अध्‍यक्ष महोदय इसको कार्यवाही से निकाल दीजिए.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र अध्‍यक्ष जी, सिर्फ (XXX) पालिटिक्‍स ही करना है तो कहां तक जवाब देंगे. (...व्‍यवधान...)

श्री रामनिवास रावत पूरे प्रदेश में अवैध उत्‍खनन हो रहा है और यह आपके संरक्षण में हो रहा है. (...व्‍यवधान...)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र क्‍या अध्‍यक्ष जी (XXX) करते हैं. आप अध्‍यक्ष जी पर आरोप लगा रहे हैं ? (...व्‍यवधान...)

श्री रामनिवास रावत अध्‍यक्ष जी पर आरोप किसने लगाया, तुम्‍हारे ऊपर लगाया है. (...व्‍यवधान...) हम आसंदी का सम्‍मान करते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय यह शब्‍द कार्यवाही से निकाल दीजिए. (व्‍यवधान)

श्री आरिफ अकील मैंने यह शब्‍द अध्‍यक्ष जी के लिए कुछ नहीं कहा, यह वापस लो. (व्‍यवधान)

श्री रामनिवास रावत आप कार्यवाही में दिखवा लो.

श्री अध्‍यक्ष महोदय रावत जी, मैंने खुद कहा है कि आरिफ अकील जी की कोई दुर्भावना नहीं थी, उन्‍होंने सहज भाव से ऐसा कह दिया. (...व्‍यवधान...)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र अध्‍यक्ष जी, मेरी यह गुजारिश है कि सम्‍मानित सदन के सदस्‍यों की मर्यादा को रखना, स्‍वाभिमान को रखना, सम्‍मान को रखना हम सब की सामूहिक जिम्‍मेदारी हैं, जहां तक सम्‍मानित सदस्‍य ने जो प्रश्‍न उठाया था, सम्‍मानित मंत्री उसका जवाब दे रहे थे और सम्‍मानित मंत्री का जबाव चूंकि (व्‍यवधान)

श्री मुकेश नायक सम्‍मानित सदस्‍य बस यह जानना चाहते हैं कि मंत्री जी का आश्‍वासन क्‍या है, इतनी सी बात है, इतनी चतुराई की, इतने घुमाने-फिराने की आवश्‍यकता क्‍या है.

अध्‍यक्ष महोदय आप बैठ जाइए.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र ये आपकी समझ में नहीं आएगी मुकेश भाई, अध्‍यक्ष महोदय, आपने बोलने की अनुमति मुझे दी है कि इनको दी है.

अध्‍यक्ष महोदय आपको अनुमति दी है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र यदि मुझे अनुमति दी है तो इनको बैठालो आप.

श्री मुकेश नायक -- अध्‍यक्ष महोदय, सदन यह जानना चाहता है कि माननीय मंत्री जी सदन को क्‍या आश्‍वासन देना चाहते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय आप कृपया बैठ जाएं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- मेरी बात तो पूरी कर लेने दें, खड़े हो गए वकालत करने को जैसे किसी ने वकील नियुक्‍त कर दिया हो. मेरी यह गुजारिश है सिर्फ कि उस हो-हल्‍ले के बीच में माननीय मंत्री जी ने यह आश्‍वासन दिया,

श्री मुकेश नायक आपकी चालाकी के लिए विधान सभा नहीं है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र विधान सभा इसके लिए भी नहीं है कि आप वकालत करो.

अध्‍यक्ष महोदय मुकेश नायक जी आप बैठ जाइए, तिवारी जी आप बैठ जाएं, उनकी बात पूरी होने दो, उसके बार पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक जी कुछ कहेंगे.

श्री रामनिवास रावत माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी उत्‍तेजित न हों, सदन की गरिमा का ख्‍याल रखें.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र सारे सदस्‍य एक साथ खड़े हो गए, ये क्‍या तरीका है. अध्‍यक्ष जी, ये पूरी बात नहीं सुनना चाहते हैं.

श्री आरिफ अकील पानी पी लो पानी (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र की ओर इशारा करते हुए)

अध्‍यक्ष महोदय संबंधित मंत्री जी खड़े हुए हैं, अब तो बैठ जाइए.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र पानी पीने की जरूरत नहीं है, बिना पानी पीए कोसता रहूंगा. मेरा यह कहना है अध्‍यक्ष जी, जब सम्‍मानित सदस्‍य सवाल पूछ रहे थे, तब मंत्री जी ने उस वक्‍त भी जवाब दिया, उस वक्‍त हो-हल्‍ले में जवाब नहीं आया. सम्‍मानित सदस्‍य की एक ही मांग थी कि उसको हटाकर जांच की जाए मंत्री ने उस वक्‍त भी कहा. आप कार्यवाही देख लें, वही बात अंदर हुई.

श्री बाला बच्‍चन कार्यवाही दिखवा लो, माननीय मंत्री जी गलत बोल रहे हैं, कार्यवाही दिखवा लो, अगर यह बात मंत्री जी के द्वारा आ जाती, माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने नहीं बोला, संसदीय कार्य मंत्री जी कार्यवाही निकलवाकर चैक करा लें.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र मैं यह कह रहा हूँ कि हो-हल्‍ले में वह बात नहीं आई.

श्री रामनिवास रावत आप संसदीय कार्य मंत्री हो, सदन में असत्‍य मत बोलो.

श्री बाला बच्‍चन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री को बचाने के लिए, सरकार को बचाने के लिए सदन में संसदीय कार्यमंत्री असत्‍य बोल रहे हैं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र मैं कह रहा हूँ, पूरी बात तो सुन लो, हो-हल्‍ले में वह बात नहीं आई. मंत्री खुद खड़े होकर कह रहे हैं चलो उनसे ही पूछ लो.

अध्‍यक्ष महोदय नेता प्रतिपक्ष जी, मैं अलाउ नहीं किया है.

श्री रामनिवास रावत माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी जवाब दे रहे हैं.

श्री बाला बच्‍चन अध्‍यक्ष जी, मंत्री जी जवाब देना चाह रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय मैं अलाउ करूंगा तभी तो जवाब देंगे. मैं उन्‍हें अलाउ ही नहीं करूंगा तो कैसे जवाब देंगे.

श्री बाला बच्‍चन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी संसदीय कार्यमंत्री जी ने बोला है कि उस समय सुनाई नहीं दिया, जवाब नहीं आया था तो माननीय मंत्री जी का जवाब आने दीजिए.

श्री रामनिवास रावत अध्‍यक्ष महोदय, जवाब आने दीजिए, इस विषय पर आपसे संरक्षण की अपेक्षा है. सदन की कार्यवाही इतनी बाधित हुई.

श्री बाला बच्‍चन माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वे जवाब देना चाह रहे हैं जवाब आने दीजिए.

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- नेता प्रतिपक्ष और स्‍पीकर खड़े हैं, आपको इतना भी ख्‍याल नहीं है.... (व्‍यवधान).....

श्री बाला बच्‍चन-- आपके संसदीय कार्यमंत्री जी की व्‍यवस्‍था के ऊपर हम जवाब चाह रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप सदन चलने देना चाहते हैं या नहीं.

श्री बाला बच्‍चन-- जी चाहते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- तो बैठ जाइये. .... (व्‍यवधान).....

डॉ. गोविंद सिंह-- माननीय स्‍पीकर जी, खनिज मंत्री जी जवाब देना चाहते थे तो कृपया आप जवाब दिलवा दें.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप बैठ जायें, आपकी बात सुन ली मैंने. .... (व्‍यवधान).....

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- (XXX).... (व्‍यवधान).....

श्री बाला बच्‍चन-- (XXX). .... (व्‍यवधान).....

श्री आरिफ अकील-- (XXX). .... (व्‍यवधान).....

श्री रामनिवास रावत(XXX).... (व्‍यवधान).....

श्री मुकेश नायक-- अध्‍यक्ष महोदय,(XXX).

डॉ. गोविंद सिंह-- (XXX). .... (व्‍यवधान).....

श्री रामनिवास रावत(XXX). .... (व्‍यवधान).....

डॉ. गोविंद सिंह(XXX)

अध्‍यक्ष महोदय-- इसे कार्यवाही से निकाल दें. आप लोग कृपा करके बैठ जायें. .... (व्‍यवधान).....

एक माननीय सदस्‍य-- गोविंद सिंह जी, यह जंगल के शेर हैं, उलझो मत.

श्री रामनिवास रावत-- अध्‍यक्ष महोदय, विषय पर आये बात.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप सुन कहां रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत-- यह बात को डायवर्ट करते हैं (डॉ. गौरीशंकर शेजवार की तरफ इशारा करते हुये) आप इन्‍हें डांटते ही नहीं हो.

 

 

अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था

प्रश्‍नकाल में चर्चा होने के पश्‍चात् भोजन अवकाश के बाद या विधान सभा स्‍थगित होने के बाद उस चर्चा को पुन: नहीं उठाये जाने विषयक

 

अध्‍यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी कृपया शांत रहेंगे, बोल दिया मैंने. अब सभी बैठ जायें. .... (व्‍यवधान)..... आप लोगों को सदन चलने देना है कि नहीं चलने देना है, बार-बार खड़े हो जाते हो. दोनों पक्षों से अनुरोध है मेरा कोई भी खड़ा नहीं होगा. .... (व्‍यवधान)..... अरे बैठ जाओ महाराज. .... (व्‍यवधान).....

 

अभी प्रश्‍नकाल के बाद में माननीय सदस्‍यों ने कुछ विषय यहां उठाये थे, उस पर पाइंट्स ऑफ आर्डर्स भी उठाये गये माननीय प्रतिपक्ष के नेता जी ने और मुख्‍य सचेतक जी ने, आरिफ अकील साहब ने डॉ. गोविंद सिंह जी ने और संसदीय कार्यमंत्री जी ने उन पाइंट्स ऑफ आर्डर्स के बारे में अपनी बात कही. जैसा कि मैंने पहले भी कहा था कि समाधान हो गया है किंतु सदस्‍यगण यह जानना चाहते थे कि समाधान क्‍या हुआ. इस संबंध में मैं आपको जो अध्‍यक्षीय व्‍यवस्‍था है उसके बारे में अवगत कराना चाहता हूं. प्रश्‍नकाल में जो प्रश्‍न उठाया गया था उसकी जांच के संबंध में मंत्री जी ने आश्‍वासन दे दिया था, उसके बाद में व्‍यवधान हुआ और मेरे बार-बार अनुरोध करने के बाद भी वह शांत नहीं हुआ, जबकि सदस्‍य और मंत्री जी, सदस्‍य प्रश्‍न पूछना जारी रखना चाहते थे और मंत्री जी उत्‍तर देना भी चाहते थे. प्रश्‍नकाल समाप्‍त हो गया और उसके बाद में माननीय सदस्‍य ने यहां कहा कि उनका समाधान हो गया है वह संतुष्‍ट हैं.

 

इसके संबंध में जो आसन्दी की अध्यक्षीय व्यवस्था है वह मैं पढ़कर सुनाता हूं. प्रश्नकाल के समय किसी मुद्दे पर चर्चा हुई हो और अपराह्न में भोजन अवकाश के बाद या स्थगित होने के बाद विधान सभा जब समवेत् हुई हो तो वह मामला नहीं उठाया जा सकता इसीलिये यह व्यवस्था का प्रश्न अग्राह्य किया जाता है और सदन की कार्यवाही आगे जारी रहेगी.

श्री बाला बच्चन - समाधान क्या हुआ.

श्री रामनिवास रावत - एक मामला और था.

(..व्यवधान..)

अध्यक्ष महोदय - वह नहीं उठाया जा सकता.पं.रमेश दुबे.

श्री रामनिवास रावत - माननीय अध्यक्ष महोदय, एक मामला और उद्भूत हो गया है. अभी संसदीय कार्य मंत्री ने कहा था कि उसे हटाने के निर्देश दे दिये हैं. क्या संसदीय कार्य मंत्री जी ने असत्य कहा. अभी हाऊस में कहा था कि उस खनिज अधिकारी को  हटाने के निर्देश दे दिये हैं. क्या संसदीय कार्य मंत्री जी ने असत्य कहा.

श्री रामनिवास रावत - अध्यक्ष महोदय, क्या संसदीय कार्य मंत्री जी ने असत्य कहा.

अध्यक्ष महोदय - वह विषय अब व्यवस्था के बाद समाप्त हो गया है.

श्री बाला बच्चन - खनिज मंत्री जी जवाब दे रहे हैं तो आप वह दिलवाईये ना कि समाधान क्या हुआ.

श्री रामनिवास रावत - वह स्पष्ट करें.

श्री बाला बच्चन - यह सदन का मेटर था.

अध्यक्ष महोदय - अब यह व्यवस्था आने के बाद में वह चर्चा पूर्ण हो गई. अब उस पर कोई चर्चा नहीं होगी.

(..व्यवधान..)

श्री रामनिवास रावत - मंत्री जी कह रहे थे कि उस अधिकारी को हटा दिया गया है.

श्री बाला बच्चन - सदन यह जानना चाहता है कि समाधान क्या हुआ.

ए़व्होकेट सत्यप्रकाश सखवार - माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से शून्यकाल की विशेष सूचना बताना चाहता हूं.

श्री बाला बच्चन - सदन यह जानना चाहता है कि समाधान क्या हुआ है. माननीय संसदीय कार्य मंत्री जी ने अभी बोला था कि खनिज मंत्री जी जवाब देना चाहते हैं. तो खनिज मंत्री का जवाब आ जाने दीजिये. सदन का मेटर था समाधान क्या हुआ. यह सदन भी जानना चाहता है.

(..व्यवधान..)

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - माननीय अध्यक्ष महोदय,आपकी व्यवस्था के बाद इस तरीके से व्यवधान करना यह उचित नहीं है.

श्री बाला बच्चन - क्या व्यवधान है.

श्री रामनिवास रावत - क्या उचित है क्या अनुचित है क्या आपसे पूछकर बोलेंगे.

(..व्यवधान..)

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - आप आसन्दी का अपमान कर रहे हो.

श्री रामनिवास रावत - (..व्यवधान..)क्या आप चलाओगे सदन.

डॉ.गौरीशंकर शेजवार - आपको कोई अधिकार नहीं है.आप आसन्दी का अपमान कर रहे हो और आसन्दी का अपमान करना न्यायसंगत नहीं है. बैठ जाईये आप.

श्री बाला बच्चन - हम आसन्दी से मांग कर रहे हैं इस सरकार से जवाब दिलवाएं. वह सदन का मेटर था. सरकार सदन को भ्रमित कर रही है.

श्रीमती ऊषा चौधरी - बाला बच्चन जी इनकी नियत नहीं है जवाब देने की. दूसरा विषय आने दें.

श्री बाला बच्चन - समझौता क्या हुआ है वह सदन को बताना चाहता हूं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.46 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

अध्यक्ष महोदय - माननीय सदस्यों की शून्यकाल की सूचनाएं पढ़ी हुई मानी जायेंगी.

 

शून्यकाल में उल्लेख

 

एडव्होकेट सत्यप्रकाश सखवार - माननीय अध्यक्ष महोदय, ग्वालियर में सरकार की शह पर पुलिस द्वारा दलित बस्तियों में घुसकर बहन,बेटियों के साथ अभद्र व्यवहार कर शराब के नशे में घरों में घुसकर छेड़खानी की जा रही है एवं जबरन मुकदमे लगाकर जेल में बंद करने की धमकी दी जा रही है.

अध्यक्ष महोदय - शून्यकाल समाप्त हो गया. सखवार जी,

ए़व्होकेट सत्यप्रकाश सखवार - इससे पूरे ग्वालियर जिले में दलितों का उत्पीड़न हो रहा है, उनमें भयंकर रोष व्याप्त है.

अध्यक्ष महोदय - सखवार जी कुछ पढ़कर नहीं बोल सकते. सिर्फ शून्यकाल की  सूचनायें जो लिस्टेड होती हैं सिर्फ वही पढ़ सकते हैं.

ए़व्होकेट सत्यप्रकाश सखवार - अध्यक्ष महोदय,इस पर जरूर चर्चा करा ली जाये.

अध्यक्ष महोदय - ठीक है आपकी बात आ गई. आप बैठ जाईये.

(..व्यवधान..)

 

12.47 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) मध्यप्रदेश वेट नियम,2006 में संशोधन संबंधी वाणिज्यिक कर विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ ए 3-18-2016-1-पांच(25) दिनांक 2 अप्रैल 2016 तथा, वाणिज्यिक कर विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ ए-3-17-2016-1-पांच(22)दिनांक 31मार्च,2016

वाणिज्यिक कर मंत्री(श्री जयंत मलैया) - अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश वेट अधिनियम,2002(क्रमांक 20 सन् 2002) की धारा 71 की उपधारा(5) की अपेक्षानुसार

मध्यप्रदेश वेट नियम,2006 में संशोधन संबंधी वाणिज्यिक कर विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ ए 3-18-2016-1-पांच(25) दिनांक 2 अप्रैल 2016 तथा,

मध्यप्रदेश विलासिता,मनोरंजन,आमोद एवं विज्ञापन कर अधिनियम 2011(क्रमांक11 सन्2011) की धारा 13 की उपधारा(3) की अपेक्षानुसार

वाणिज्यिक कर विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ ए-3-17-2016-1-पांच(22)दिनांक 31मार्च,2016 पटल पर रखता हूं.

(..व्यवधान..)

12.48बजे उपाध्यक्ष महोदय(डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए.

 

 

12.49 बजे गर्भगृह में प्रवेश

 

बहुजन समाज पार्टी के समस्त सदस्य एवं इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगणों का प्रदेश में दलितों पर हो रहे अत्याचार के विरोध में गर्भगृह में प्रवेश

(एडव्होकेट सत्यप्रकाश सखवार के नेतृत्व में बहुजन समाज पार्टी के समस्त सदस्य एवं इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण प्रदेश में दलितों पर हो रहे अत्याचार के विरोध में गर्भगृह में आये तथा नारे लगाये.)

 

(2) मध्‍यप्रदेश राज्‍य बीज एवं फार्म विकास निगम का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे वित्‍तीय वर्ष 2015 -2016

(3) अपेक्षानुसार ऊर्जा विभाग की निम्‍न अधिसूचनाएं:-

(i) क्रमांक 2493-एफ-3-02-2011-तेरह, दिनांक 01 अप्रैल, 2016

(ii) क्रमांक 03-02-2011-तेरह, दिनांक 14 जून, 2016

ख) (i) शहपुरा थर्मल पॉवर कंपनी लिमिटेड, जबलपुर का नौवां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2014-2015, एवं

(ii) मध्‍यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इंदौर का त्रयोदश वार्षिक प्रतिवेदन दिनांक 31 मार्च, 2015 को समाप्‍त अवधि हेतु.

(ग) (i) क्रमांक 894- मप्रविनिआ - 2016, दिनांक 30 मई 2016, एवं

(ii) क्रमांक 900/2016, दिनांक 31 मई, 2106

 

(4) उद्योग और रोजगार विभाग की अधिसूचना क्रमांक एफ 16-18- 2015-बी-ग्‍यारह दिनांक 11 मार्च, 2016.

(5) एम.पी.स्‍टेट एग्रो इंडस्‍ट्रीज डेव्‍हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड का 45 वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखे वर्ष 2013 - 2014

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन) - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सखवार जी के द्वारा जो शून्‍यकाल में मामला उठाया गया है कि ग्‍वालियर में पुलिस दलित बस्तियों में जाती है और अभ्रदता करती है तथा वहां की महिलाओं के साथ में भी छेड़खानी करती है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सखवार जी ने शून्‍यकाल में मामला उठाया है, आपके संज्ञान में आ गया है, इस पर कार्यवाही होनी चाहिए. वहां की पुलिस जो निर्दोष लोगों के खिलाफ करती हैं, आप इस पर ध्‍यान दें. (व्‍यवधान..)

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय आपको इस पर व्‍यवस्‍था देना चाहिए. ग्‍वालियर जिले की पुलिस बस्तियों में जाती है और वहां पर बदतमीजी करती है, आपको इस पर व्‍यवस्‍था देना चाहिए और कार्यवाही करना चाहिए कि दलितों के साथ में ऐसा न हो. (व्‍यवधान)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - (व्‍यवधान)...कांग्रेस कभी भाजपा का, कभी बसपा का कांग्रेस विषय उठा रही है..... (व्‍यवधान)...

श्री बाला बच्‍चन - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, शराब के नशे में पुलिस जाती है, मारपीट करती है, छेड़छाड़ करती है... (व्‍यवधान)...दलितों का अपमान है. यह सरकार की तानाशाही है. इस पर चर्चा करानी चाहिए.

उपाध्‍यक्ष महोदय - कल शूल्‍यकाल में ले लेंगे ... (व्‍यवधान)...

(गर्भगृह में उपस्थित सदस्‍यगण नारे लगाते रहे.)

श्री बाला बच्‍चन - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ... (व्‍यवधान)..यह सरकार की तानाशाही है, हम इसकी निंदा करते हैं, दलितों का अपमान है दलितों बस्तियों में पुलिस जाती है छेड़छाड़ करती है, शराब के नशे में दलितों को पीटती है, अपमानित करती है और उनके खिलाफ पुलिस थानों में एफ.आई.आर. कराती है. यह बहुत निंदनीय है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - ध्‍यानाकर्षण की सूचनाऐं श्री जयवर्धन सिंह .

श्री बाला बच्‍चन - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, विधानसभा की कार्यवाही को रोककर इस पर चर्चा कराई जाये.

उपाध्‍यक्ष महोदय - कल शून्‍यकाल में ले लिया जायेगा.

श्री बाला बच्‍चन - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह विधायकों का अपमान भी है, हमारे द्वारा यह जो बात उठाई जा रही है इसके ऊपर आसंदी कोई संज्ञान ले. सरकार से कार्यवाही करवायें.

उपाध्‍यक्ष महोदय - श्री बाला बच्‍चन जी इस विषय का पटाक्षेप हो गया.

श्री बाला बच्‍चन - यह दलितों का अपमान है, शराब पीकर पुलिस जाती है, वहां की महिलाओं के साथ छेड़छाड़ करती है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - कल शून्‍यकाल में उनकी सूचना ले ली जायेगी. समाधान हो गया है फिर क्‍यों खड़े होकर बोल रहे हैं. (व्‍यवधान)

श्री बाला बच्‍चन - ठीक है. अगर आपने शून्‍यकाल की चर्चा ले ली और इसमें अगर आप कार्यवाही करवा रहे है, तो इस पर हमारा धन्‍यवाद.

उपाध्‍यक्ष महोदय - श्री जयवर्धन सिंह का ध्‍यानाकर्षण आने दीजिए.

श्री रामनिवास रावत - इस विषय को शून्‍यकाल में लेने की आपने कृपा की है.. ध्‍यानाकर्षण में ले लें तो कृपा होगी.

उपाध्‍यक्ष महोदय - नहीं कल शून्‍यकाल में ले लेंगे.

श्री रामनिवास रावत - यह ध्‍यानाकर्षण का विषय है. दलितों पर अत्‍याचार ध्‍यानाकर्षण का विषय है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - नहीं. अब वह संतुष्‍ट हो गये हैं. यह बेगानी शादी में अब्‍दुल्‍ला दीवाना समझ नहीं आ रहा है बार-बार. इधर से भी उठते हैं, उधर से भी उठते हैं, बैठ जाईये.

श्रीमती ऊषा चौधरी - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, सदन में दलितों के साथ बहुत अत्‍याचार हो रहा है. (व्‍यवधान) ....

श्रीमती शीला त्‍यागी - (व्‍यवधान) ....अन्‍याय हो रहा है, रात को दारू पी-पी कर 25-25 लोग जाकर बस्तियों में जाकर अत्‍याचार करते हैं, बहुत अश्‍लील हरकतें करते है...... (व्‍यवधान) ....

उपाध्‍यक्ष महोदय - बैठ जाईये. उनका ध्‍यानाकर्षण आने दीजिए.

श्रीमती शीला त्‍यागी - आप यह असत्‍य कह रहे हैं कि हम लोग संतुष्‍ट हो गये हैं. हम लोग संतुष्‍ट नहीं है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - श्री सत्‍यप्रकाश सखवार जी संतुष्‍ट हैं, कल ले लिया जायेगा उनका. जितू पटवारी जी बैठ जाये. आप सदन नहीं चलने देना चाह रहे हैं क्‍या ? (व्‍यवधान) ....

श्रीमती शीला त्‍यागी - (व्‍यवधान) ....20 से 25 लोग जा जाकर बच्चियों और महिलाओं के साथ अश्‍लील हरकतें करते हैं इससे गंभीर मामला क्‍या हो सकता है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - शीला जी बैठ जाये. जितू पटवारी जी बैठ जाये. उनका ध्‍यानाकर्षण आने दीजिए महत्‍वपूर्ण विषय है.

श्रीमती ऊषा चौधरी - (व्‍यवधान) ....उन पुलिस वालों पर कार्यवाही होना चाहिए.

उपाध्‍यक्ष महोदय - कल सूचनाओं में ले लिया जायेगा.

श्रीमती ऊषा चौधरी - (व्‍यवधान) ... संसदीय कार्य मंत्री जी दलितों का मुद्दा उठता है तो मजाक उड़ातें हैं, इनको शर्म आना चाहिए.

उपाध्‍यक्ष महोदय - नहीं-नहीं मजाक नहीं उड़ा रहे हैं. (व्‍यवधान) ...

एडव्होकेट सत्यप्रकाश सखवार--उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्रीजी मजाक उड़ाते हैं यह बड़ी शर्म की बात है. जब सदन में दलितों के, महिलाओं के अधिकारों की बात कही जाती है तब माननीय मंत्रीजी को गंभीरता से उस मसले को निपटाना चाहिए.

उपाध्यक्ष महोदय-- सखवार जी, ऐसी कोई बात नहीं है. बैठ जायें. आपकी शून्यकाल की सूचना कल ले ली जाएगी.(व्यवधान)

श्री जितू पटवारी-- उपाध्यक्षजी, तहसीलदार ने एक व्यक्ति को कह दिया कि तू जहर खा ले तो उसने जहर खा लिया. सरकारी तंत्र में यह बहुत महत्वपूर्ण है. (व्यवधान) विदिशा का कुशवाह नामक व्यक्ति को तहसीलदार ने कहा कि तू जहर खा ले, उसने जहर खा लिया. (व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय-- श्री जितू पटवारी जो बोल रहे हैं, उनका कुछ नहीं लिखा जाएगा.

श्री जितू पटवारी-- (XXX)

उपाध्यक्ष महोदय-- ऊषा जी, हम खड़े हैं अब आप बैठ जाईये. आसंदी की मर्यादा रखिये. बैठ जायें.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.56 बजे ध्यानाकर्षण

प्रदेश में कृषकों से प्याज खरीदी में अनियमितता किये जाने.

श्री जयवर्द्धन सिंह (राघोगढ़)-- उपाध्यक्ष महोदय,


 

राज्‍यमंत्री सहकारिता( श्री विश्‍वास सारंग)-

 

श्री जयवर्द्वन सिंह- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आदरणीय मंत्री जी युवा मंत्री हैं और पहली बार शायद ध्‍यानाकर्षण का उत्‍तर दे रहे हैं । मेरे चार प्रश्‍न हैं और मुझे उम्‍मीद है कि मेरे चारों प्रश्‍नों का उत्‍तर मिलेगा ।

उपाध्‍यक्ष महोदय- चार प्रश्‍न पूछने का नियम नहीं है । आप उसको जोड़ लीजिए । नियम एक का है हम अधिकतम दो प्रश्‍न की अनुमति दे सकते हैं ।

श्री जयवर्द्वन सिंह- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, अभी भी एक करोड़ 75 लाख की राशि का ब्‍यावरा में अभी भुगतान नहीं हुआ है । वर्तमान में अभी तक एक लाख मेट्रिक टन में 62 करोड़ की खरीदी की गई है यह पहले पृष्‍ठ पर लिखा है दूसरे पृष्‍ठ पर यह लिखा है कि जो भुगतान किसानों को हुआ है वह मात्र 23 करोड़ का है बाकी जो 40 करोड़ की राशि है वह कहां गई है और अगर इतना भुगतान बाकी है लेकिन जो अनुपूरक बजट है उसमें सिर्फ 15 करोड का उल्‍लेख है तो यह पूरी राशि जो अतिरिक्‍त अभी शेष है वह कहां से बांटी जाएगी, कैसे बांटी जाएगी ? अंतिम प्रश्‍न मेरा यह है कि जो प्‍याज खरीदी गई थी उसकी स्थिति क्‍या है ? मुझे जानकारी मिली है कि वह पूरी सड़ चुकी है । माननीय मंत्री जी उत्‍तर दें कि जो प्‍याज खरीदा गया था उसकी क्‍या स्थिति है ? कितना सड़ चुका है ? कितना अभी भी ठीक है ? यह व्‍यवस्‍था मौके पर की गई थी लेकिन भविष्‍य के लिए जब पूरे मालवा क्षेत्र में प्‍याज का इतना उत्‍पादन बढ़ रहा है और वाकई में अगर किसान के पास स्‍टोरेज सुविधा होगी तों यह स्‍वाभाविक है कि जब सप्‍लाई ज्‍यादा होती है तो दाम घटता है लेकिन जब सप्‍लाई कम होगी तो दाम बढ़ेगा तो अपने पास यदि स्‍टोरेज की सुविधा होगी तो उसके माध्‍यम से जब दाम ज्‍यादा होगा उसका सीधा लाभ किसान को मिल सकेगा । उसके लिए ब्‍लाक स्‍तर पर सुविधा मिलना चाहिए, ऐसी बुनियादी व्‍यवस्‍था होनी चाहिए उसके लिए मंत्री जी की क्‍या प्‍लानिंग है ?

श्री विश्‍वास सारंग- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, विधायक साथी ने जो प्रश्‍न पूछे हैं उसमें उन्‍होंने पहला प्रश्‍न किया है कि उनके विधानसभा क्षेत्र में लगभग 1 करोड़ 72 लाख रूपया का अभी भुगतान नहीं हुआ है । उन्‍होंने यह भी जिक्र किया कि पहले पृष्‍ठ पर कुछ उत्‍तर है और दूसरे पृष्‍ठ पर दूसरा उत्‍तर है । मुझे लगता है कि उन्‍होंने पूरा उत्‍तर नहीं पढ़ा उसमें लिखा हुआ है कि अभी 23 करोड़ का भुगतान हुआ है बाकी भुगतान की प्रक्रिया चल रही है ।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आरटीजीएस के माध्‍यम से भुगतान होना है कहीं कहीं जहां किसानों के बैंक खातों की जानकारी रह गई है तो वह एकत्रित करके यह प्रक्रिया चल रही है और मैं सदन में बताना चाहता हूं कि इस सप्‍ताह तक राशि का भुगतान पूरी तरह से सुनिश्चित कर दिया जाएगा, मैं यह सदन में बोलना चाहता हूं दूसरा विधायक जी ने पूछा है कि जो 40 लाख रूपए शेष रह गए हैं मैं बताना चाहता हूं कि 15 करोड़ की राशि राज्‍य शासन द्वारा दी गई और बाकी राशि की प्रतिपूर्ति लोन से की जाएगी इसलिए उसका किसी बजट में प्रावधान या दिखाने का कोई औचित्‍य नहीं था वह लोन भी हमको मिल चुका है और उसके माध्‍यम से हम इस राशि का भुगतान करेंगे । तीसरा जो माननीय विधायक जी ने प्रश्‍न किया है कि कितनी प्‍याज सड़ चुकी है. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं बताना चाहता हूं कि सही मायने में मुझे ऐसा लगता है कि सदन में इस बात की कहीं न कहीं तारीफ होना चाहिए क्‍योंकि माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने जिस प्रकार से मुख्‍यमंत्री बनने के बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने लगातार किसान हितैषी निर्णय लिए हैं उसी निर्णय में यह निर्णय भी शामिल हुआ है जब देश में पहली बार किसानों को प्‍याज में दिक्‍कत पैदा हुई तो किसानों के आसुओं को पोछने का काम भी शिवराज सिंह चौहान जी ने किया इसकी तारीफ होनी चाहिए । ( मेजों की थपथपाहट) मैं यहां पर निवेदन करना चाहता हूं .......

उपाध्‍यक्ष महोदय- भविष्‍य में भण्‍डारण की क्‍या व्‍यवस्‍था होगी ? यह और बता दें ।

श्री विश्‍वास सारंग- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, राष्‍ट्रीय उद्यानिकी अनुसंधान एवं विकास केन्‍द्र, नासिक, जो कि राष्‍ट्रीय स्‍तर की संस्‍था है जो प्‍याज के पूरे भण्‍डारण को लेकर अध्‍ययन किया है उन्‍होंने भी कहा है कि 25 से 30 प्रतिशत यदि अल्‍पावधि में हम इसका भण्‍डारण करते हैं तो उसमें क्षरण होने की आशंका रहती है. यह जानकारी प्रारंभिक जानकारी है इसमें 10 से 12 प्रतिशत ही क्षरण हुआ है, यह और बढ़ भी सकता है क्‍योंकि यह तो एक प्रक्रिया है प्‍याज की प्रवृति ऐसी है कि उसमें क्षरण होना है इसलिए मैं विश्‍वास दिलाना चाहता हूं ।

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, एक बात का और मैं जिक्र करना चाहता हूं । इस पूरी प्रक्रिया में मध्यप्रदेश शासन के 3-3, 4-4 विभागों ने मिलकर काम किया है और बहुत को-आर्डिनेशन से काम किया है. इसमें उद्यानिकी विभाग, सहकारिता विभाग, मंडी के माध्यम से कृषि विभाग ने भी काम किया है. सभी विभागों के अधिकारियों ने को-आर्डिनेशन से यह स्थिति बहुत अच्छी की है. मुझे ऐसा लगता है कि इसमें हम सबको मिलकर माननीय मुख्यमंत्री जी का अभिवादन करना चाहिए कि उन्होंने किसान हितैषी निर्णय लिया है. (मेजों की थपथपाहट)...

उपाध्यक्ष महोदय - भविष्य में आपकी भण्डारण की क्या व्यवस्था है, यह भी बता दें? क्योंकि आपके पास प्याज के गोदाम नहीं थे, आपने जनरल गोदामों में भण्डारण किया है.

श्री विश्वास सारंग - उपाध्यक्ष महोदय, जैसा उत्तर में भी आया है कि तकनीकी रूप से अभी मध्यप्रदेश में इस तरह के गोदाम नहीं हैं जो कि प्याज के भण्डारण के लिए उपयुक्त हों, उद्यानिकी विभाग ने एक योजना बनाई है और उस योजना के तहत वह सब्सिडी देकर ऐसे भण्डारों को आगे बनाने के लिए प्रोत्साहित करने का काम करने वाले हैं.

श्री जयवर्द्धन सिंह - उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी को धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने लगभग सभी उत्तर दे दिये हैं. लेकिन पहला जो बिन्दु था कि शेष राशि जिसके लिए माननीय मंत्री जी ने कहा है कि बजट में राशि आवंटित हो गई है.

उपाध्यक्ष महोदय - उन्होंने बजट में नहीं कहा है, बैंकों से ऋण लेने की बात कही है.

श्री जयवर्द्धन सिंह - उपाध्यक्ष महोदय, अनुपूरक बजट में 15 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है और बाकी जो शेष राशि है उसके लिए उन्होंने कहा है कि बैंक के ऋण के माध्यम से उसको आवंटित करेंगे. लेकिन मुझे इस बात का संदेह है कि वह पूरी 40 करोड़ रुपए की राशि किसानों को इस हफ्ते के अंत तक मिल जाएगी, इसीलिए अगर हो सके तो शुक्रवार तक एक आंकड़ा पूरा साफ हो जाय तो उसके बारे में कह दें.

उपाध्यक्ष महोदय - उन्होंने आश्वासन दिया है कि एक हफ्ते में भुगतान हो जाएगा.

श्री जयवर्द्धन सिंह - अगर वह विधान सभा में प्रस्तुत हो सके?

उपाध्यक्ष महोदय - आपकी समस्या का पूरा समाधान हो गया है और मार्केट इंटरवेंशन प्याज के मामले में पहली बार हुआ है, यह बात भी सही है.

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार - प्याज खरीदी के लिए सरकार को बधाई तो दे दें, पहली बार यह निर्णय हुआ है.

श्री जयवर्द्धन सिंह - उपाध्यक्ष महोदय, अगर अच्छे वेयर हाऊसेस होते तो और अच्छी कीमत मिलती. 10-15 रुपए बढ़े हुए मिलते. आपके क्षेत्र का मुद्दा था आपने नहीं उठाया. मैं इसे उठा रहा हूं.

श्री अमर सिंह यादव - बहुत अच्छे से प्याज की खरीदी हुई है, जहां तक किसानों की बात है तो कोई रोष नहीं है.

श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल - आपको सरकार को इतना धन्यवाद देना चाहिए कि किसान प्याज को सड़कों पर फेंक रहा था, पहली यह संवेदनशील सरकार है, किसानों के हितैषी मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने प्याज को खरीदा.

उपाध्यक्ष महोदय - आप बैठ जाइए. यह बात मैंने आसंदी से कह दी है.

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर) - उपाध्यक्ष महोदय, सभी सदस्यों ने कहा और माननीय मंत्री जी ने भी काफी लंबा चौड़ा भाषण दिया. किसानों के हितों के संरक्षण के लिए मुख्यमंत्री जी ने प्याज खरीदने का निर्णय लिया, बिल्कुल धन्यवाद के काबिल है. हम भी कह रहे हैं धन्यवाद के काबिल है. लेकिन मेरा यह निवेदन है, मंत्री जी ने जवाब दिया है कि पूरे प्रदेश में 1 लाख 4 हजार 26 मीट्रिक टन प्याज जून में खरीदी गई. 4 जून से लेकर 23 जून तक आपने प्याज खरीदी है. यह स्थिति कब बनी? जब प्रदेश में प्याज का बम्पर उत्पादन हुआ. कम से कम 12 लाख से अधिक मीट्रिक टन प्याज का प्रदेश में उत्पादन हुआ है. उस उत्पादन के बाद जब किसान मंडियों में फसल ले जाने लगे, वह मंडियों में बिकी नहीं. वह 50-60 पैसे किलो बिक रही थी, तब वे उसको फेंकने लगे. हमारा कहना था कि आपने बताया है कि किसानों में आक्रोश नहीं है. मेरा आरोप है कि आपने प्याज के बम्पर उत्पादन में 10 प्रतिशत की खरीदी का भी काम नहीं किया है.

उपाध्यक्ष महोदय, मेरा सीधा-सा प्रश्न है कि प्रदेश में प्याज का उत्पादन कितना किया है और आपका यह उत्तर सदन के पटल पर भी रहेगा, यह आपके आर्थिक सर्वेक्षण में भी आता है, इसका उत्तर आप मंत्री जी सोच-समझकर देना. इसे मंत्री जी नोट करते जायं कि कितना उत्पादन हुआ और उत्पादन के कितने प्रतिशत में खरीदी की गई? दूसरा, माननीय मंत्री जी आपके पास भण्डारण की क्या व्यवस्था थी, आसंदी ने भण्डारण की बात की. मेरा यह निवेदन है कि जिस समय किसान की प्याज का रेट कम था, उस समय सरकार ने प्याज खरीदने का निर्णय लिया. आपने भण्डारण किया, भण्डारण के बाद प्याज सड़ने लगी, गलने लगी और आज आपने बेचने का काम किया है. प्‍याज बेचने का काम किया है सरकार प्‍याज भी बेचने का काम कर रही है. आपने दो बार टेण्‍डर बुलाए. नंबर एक यह इ‍सलिए बुलाए और इसलिए प्‍याज खरीदी कि किसानों को उचित भाव मिल सके. मैं एक बात सीधी सी जानना चाहता हॅूं, सभी सदस्‍यों से भी पूछना चाहता हॅूं जो धन्‍यवाद दे रहे थे कि मार्केट में आज किसान की अच्‍छी प्‍याज का भाव क्‍या है. 9 रूपये किलो है, 10 रूपये किलो है अगर किसान की अच्‍छी क्‍वॉलिटी की प्‍याज है तो आप कितने रूपये में बेच रहो हो, 60 पैसे से लेकर 3 रूपये 62 पैसे में बेचने का काम कर रहे हो. अभी तक कितनी प्‍याज बेची ? आपके टेण्‍डर में इतनी रेट आई है, 4 रूपये किलो आप मार्केट में खुले रूप में बेच रहे हो, खुले बाजार में बेच रहे हो, अभी तक आपकी कितनी प्‍याज बिकी और क्‍या इस तरह आप मार्केट रेट से वर्तमान में कम दर पर प्‍याज बेचकर किसानों के साथ में अन्‍याय नहीं कर रहे ?

श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल -- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मेरा एक निवेदन है कि माननीय रावत जी...

उपाध्‍यक्ष महोदय आपके प्रश्‍न आ गए है. माननीय मंत्री जी जवाब दें. मनोज जी आप बैठ जाइए.

श्री रामनिवास रावत मनोज जी को जवाब देने दीजिए.

उपाध्‍यक्ष महोदय नहीं मनोज जी आप जवाब नहीं देंगे. आप बैठ जाइए. आपको भ्रम हो रहा है.

श्री मनोज निर्भय सिंह पटेल -- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मेरा निवेदन है कि आपने कहा कि आज प्‍याज के क्‍या भाव हैं ? खाली एक लाईन में बोलूंगा. अगर सरकार भंडारण नहीं करती तो यह भाव भी नहीं मिलते....(व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष्‍ा महोदय मनोज जी, मंत्री जी जवाब दे रहे है. आप बैठ जाइए.

श्री रामनिवास रावत -- तुम्‍हारे पिताजी सदन में किसानों के लिए बहुत लड़ते थे, उनका तो सम्‍मान करो. थोड़ी बहुत किसानों के लिए पीड़ा जगाओ.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- यह क्‍या है ? मनोज जी, आप बैठ जाइए. (व्‍यवधान)

श्री विश्‍वास सारंग -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आदरणीय रावत जी ने थोड़ा मुझे लगता है कि कुछ भ्रामक जानकारी उनको मिली है कहीं भी उत्‍तर में यह नहीं लिखा है कि टेण्‍डर में जो रेट आया है उसके हिसाब से 6 पैसे और 3 रूपये 62 पैसे तक..

श्री रामनिवास रावत -- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, क्रय विक्रय के लिये पारदर्शी व्‍यवस्‍था के अंतर्गत दो बार टेण्‍डर आमंत्रित किए गए.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- रावत जी, उनको जवाब दो देने दीजिए.

श्री रामनिवास रावत -- दूसरी बार टेण्‍डर आमंत्रित करने पर 60 पैसे प्रथम बार तो आया ही नहीं.

उपाध्‍यक्ष महोदय बड़ी मुश्किल है. उत्‍तर आने दीजिए.

श्री रामनिवास रावत माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मैं उन्‍हीं का उत्‍तर पढ़ रहा हॅूं.

श्री विश्‍वास सारंग माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मुझे बोलने ही नहीं दे रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत 60 पैसे से लेकर 3 रूपये 16 पैसे प्रति किलो के भाव से प्राप्‍त हुए.

उपाध्‍यक्ष महोदय यह टेण्‍डर रेट्स की बात कर रहे हैं. आप बैठ जाइए. ठीक तो है. वह बेच कितने में रहे हैं यह भी तो आप सुन लीजिए.

श्री शंकरलाल तिवारी -- माननीय उपाध्‍यक्ष जी, मेरे माइक की लाल बत्‍ती नहीं जला करती है. रावत जी जो विघ्‍न पैदा कर रहे हैं, माननीय शिवराज सिंह जी के इतने ऐतिहासिक निर्णय पर किसानों की तत्‍काल प्‍याज खरीदी जाए. उसमें जो विघ्‍न पैदा कर रहे हैं उसमें मैं इनको धन्‍यवाद देता हॅूं.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है आप बैठ जाइए. आपने धन्‍यवाद दे दिया, आप बैठ जाइए.

श्री रामनिवास रावत -- आप मंत्री तो बन जाओ, मैं और विघ्‍न पैदा कर दूंगा, तुम मंत्री तो बन जाओ. तुम्‍हारा नंबर नहीं लगने वाला. सात साल में बाहर चले जाओगे.

उपाध्‍यक्ष महोदय -- रावत जी, दूसरा ध्‍यानाकर्षण भी है वह भी महत्‍वपूर्ण है.

श्री विश्‍वास सारंग -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो उत्‍तर में लिखा है इसमें हम 4 रूपये किलों ही प्‍याज का विक्रय कर रहे हैं 3 रूपये 62 पैसे का रेट आया था उसको दृष्टिगत रखते हुए 4 रूपये और माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय मैं फिर निवेदन करना चाहता हॅूं कि...

श्री रामनिवास रावत -- प्‍याज अभी तक कितनी बिकी ?

उपाध्‍यक्ष महोदय -- आप जवाब तो ले लीजिए. आपने पूछा है कितनी प्‍याज बिकी.

श्री विश्‍वास सारंग माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, दो दिन में लगभग 7 हजार क्विंटल प्‍याज बिक चुकी है. इसमें तो धन्‍यवाद देना चाहिए. एक तरफ माननीय शिवराज सिंह जी के निर्णय से किसानों का फायदा हुआ.

श्री रामनिवास रावत -- मार्केट रेट क्‍या है ? अभी तक किसानों को नुकसान हो रहा है. प्‍याज सस्‍ता कर दिया आपने. आपको किस बात का धन्‍यवाद दें? (व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय -- रावत जी, आप बैठ जाइए. अरे, उपभोक्‍ताओं को तो फायदा दे रहे हैं. आप क्‍यों चिन्‍ता कर रहे हैं. प्‍याज उन्‍होंने पहले किसानों से ही खरीदी. (व्‍यवधान)..

श्री जयवर्द्धन सिंह -- अध्यक्ष महोदय यह वैकल्पिक व्यवस्था थी...(व्यवधान)..

उपाध्यक्ष महोदय -- बाजार में जब रेट ज्यादा थे तब उन्होंने खरीदा है और अब अगर बेच रहे हैं तो उपभोक्ताओं का फायदा हो रहा है..(व्यवधान).. मार्केट इंटरवेंशन क्या होता है बताइये...(व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत -- किसानों को उनकी लागत का उचित मूल्य मिलना चाहिए...(व्यवधान)..

उपाध्यक्ष महोदय -- नहीं गलत बात है...(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत --( X X X )

उपाध्यक्ष महोदय -- यह निकाल दीजिये...(व्यवधान)...

डॉ नरोत्तम मिश्रा -- नहीं, यह आसंदी से बात करने का तरीका गलत है.(व्यवधान)..

उपाध्यक्ष महोदय -- नहीं, रावत जी आप किसी बात को समझ ही नहीं रहे हैं. रावत जी आप इतने बुद्धिमान और होशियार सदस्य हैं समझें उस बात को..(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत -- मैं समझ रहा हूं..

उपाध्यक्ष महोदय -- जब डेढ रूपये किलो प्याज बिक रही थी तब उन्होंने 6 रूपये किलो खरीदी है तो उससे किसको फायदा हुआ है ?..(व्यवधान)...

श्री रामनिवास रावत -- लेकिन जिन किसानों की प्याज नहीं खरीदी गई है उनको लाभ मिलना चाहिए..(व्यवधान)..

उपाध्यक्ष महोदय -- अब तो यह चित हम जीते, पट तुम हारे यह बात करेंगे हमेशा, यह भी बात गलत है...(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत.. --( X X X )

उपाध्यक्ष महोदय -- रावत जी जो कह रहे हैं वह नहीं लिखा जायेगा.. ( व्यवधान).. नहीं किसी की बात नहीं..मंत्री जी का जवाब पूरा आ जाने दें. आप मंत्री जी का पूरा जवाब लेना चाहते हैं या नहीं ?..(व्यवधान)..

श्री विश्वास सारंग -- उपाध्यक्ष महोदय आपने बिल्कुल सही कहा है कि एक तरफ तो इस निर्णय से उन किसानों को जिनकी प्याज एक से डेढ़ रूपये किलो में बिक रही थी 6 रूपये किलो में खरीदकर सरकार ने किसानों का हित किया है, उसके बाद में4 रूपये किलो में बेचकर उपभोक्ताओं को लाभ देने का प्रयास किया गया है. यह तो सरकार का बहुत ही उपयोगी और अच्छा निर्णय है. इ सके लिए तो आपको सरकार की तारीफ करना चाहिए.

श्री रामनिवास रावत -- जिन किसानों के पास में प्याज का भण्डारण है उनके साथ में तो अन्याय हो रहा है....(व्यवधान)... आप उनके साथ में क्यों अन्याय कर रहे हैं..(व्यवधान). मार्केट में कितना रेट है यह बता दें..(व्यवधान)..

उपाध्यक्ष महोदय -- कितना उत्पादन हुआ है यह नहीं आया है...(व्यवधान)..यह कोई जबरदस्ती है, इस तरह से नहीं चलेगा ?

श्री रामनिवास रावत --- उपाध्यक्ष महोदय हम अपनी बात कहेंगे, किसानों के साथ में अन्याय कर रही है सरकार.

उपाध्यक्ष महोदय -- नहीं, ऐसा नहीं. जब हम अनुमति दें तब आप अपनी बात कहेंगे ऐसा नहीं है...(व्यवधान).. इनका एक प्रश्न अनुत्तरित है कि कितना उत्पादन हुआ है यह बता दें...(व्यवधान)..

श्री बाला बच्चन -- उपाध्यक्ष महोदय जो मई जून में किसानों का प्याज खरीदा गया है. वह मई जून का भुगतान अभी तक सरकार ने नहीं किया है,..(व्यवधान).

उपाध्यक्ष महोदय -- बाला बच्चन जी आपने मंत्री जी का स्टेटमेंट नहीं सुना, उन्होंने कहा है कि एक हफ्ते में भुगतान कर देंगे...(व्यवधान)..

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

बहिर्गमन

सरकार द्वारा किसानों को प्याज का भुगतान नहीं किये जाने इण्डियन नेश्नल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा सदन से बहिर्गमन

श्री बाला बच्चन -- सरकार पूरी बातों का जवाब नहीं दे पा रही है..(व्यवधान).. पुराना प्याज का भुगतान नहीं कर पा रही है, हमारे प्रश्नों का जवाब नहीं दे पा रही है, हम सदन से इसके लिए बहिर्गमन करते हैं.

( प्रभारी नेता प्रतिपक्ष श्री बाला बच्चन के नेतृत्व में इ.ने.कां. के सदस्यगण द्वारा सरकार द्वारा किसानों को प्याज का भुगतान नहीं किए जाने के विरोध में सदन से बहिर्गमन किया)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नीमच एवं जबलपुर के केन्टोनमेंट क्षेत्र में शासन की योजनाओं का लाभ न मिलना

श्री दिलीप सिंह परिहार ( नीमच ) --

 

 

 

 

 

 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्रीमती माया सिंह) -- माननीय उपाध्‍यक्ष जी,

 

 

श्री दिलीप सिंह परिहार-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय,लगभग 15 हजार मकान बंगला बगीचा क्षेत्र में हैं और लगभग 40 से 45 हजार लोग वहाँ निवास करते हैं.

उपाध्यक्ष महोदय-- कार्यसूची के पद 7(1) में उल्लेखित कार्य पूर्ण होने तक सदन के समय में वृद्धि की जाय. मैं समझता हूं सदन इससे सहमत हैं.

(सदन द्वारा सहमति प्रदान की गई)

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, दिलीप सिंह परिहार जी माननीय मंत्री महोदया से कुछ आश्वासन चाहेंगे. आज सदन में भाभीजी श्रीमती परिहार भी विराजित हैं, मैं मंत्री महोदया से आग्रह करूंगा कि दिलीप सिंह जी का भाषण बड़े गौर से आज मिसेस परिहार सुन रही हैं.

श्री दिलीप सिंह परिहार--- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, लगभग 40-45 हजार लोग वहाँ निवास करते हैं,वह लोग वहाँ पर मूलभूत सुविधायें जैसे बिजली, पानी, भी प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं.

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष(श्री बाला बच्चन)--- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आपने कार्यसूची के पद 7(1) तक कार्य पूरा करने के लिए बोला है, पद क्रमांक 7 में शासकीय विधि विषयक कार्य है?

उपाध्यक्ष महोदय--- हम चाहते हैं कि उसमें एक विधेयक आ जाये चूंकि माननीय मंत्री जी को दिल्ली जाना है, उनके पिताजी अस्पताल में भर्ती है, इस कारण वहाँ तक की कार्यसूची का कार्य लेंगे.

श्री दिलीप सिंह परिहार--- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से चाहूंगा कि जो गरीब लोग वहाँ निवास करते हैं यदि उनको अपनी बेटी का विवाह करना होता है तो वह प्लॉट बेचना चाहते हैं, गिरवी रखना चाहते हैं, लोन लेना चाहते हैं तो वह कुछ भी नहीं कर पाते हैं और बिल्कुल नारकीय जीवन जी रहे हैं.यह समस्या मैंने लगातार माननीय मुख्यमंत्री जी के सामने उठाई,विधायक दल में भी उठाई है. माननीय मुख्यमंत्री जी ने यह आश्वासन दिया कि जो जहाँ है, वहीं रहेगा. उनको बिजली की,सड़कों की व्यवस्था दी जाएगी, नाली की निकासी की जाएगी मगर आज तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है. मैं मंत्री जी से इस प्रश्न के माध्यम से यही पूछना चाहता हूं कि क्या आप वहाँ निर्माण अनुमति,रजिस्ट्री व नामांतरण इत्यादि दिये जाने का निर्देश देंगी? एक तो मेरा यह प्रश्न है और जो वहाँ विस्थापित सिंधी समाज के लोग निवास करते हैं उनको जो मकान दिये गये थे वह बिल्कुल क्षतिग्रस्त हैं, वहाँ पानी चूँ रहा है, जनहानि तक हो गई है. ना तो वह वहाँ निर्माण कर पाते हैं, ना अपना टेंट लगाकर वहाँ रह सकते हैं तो कम से कम मानवीय आधार पर मंत्री जी उनको अनुमति दें.

उपाध्यक्ष महोदय--- आपका एक प्रश्न है.

श्री दिलीप सिंह परिहार--- और भी प्रश्न हैं.

उपाध्यक्ष महोदय--- इसके बाद एक ही एलाऊ करेंगे.

श्री दिलीप सिंह परिहार--- मैं इसी में अपना प्रश्न कर लेता हूं. माननीय मंत्री महोदया जी, जो हमारी समिति बनी है, उसकी भी बैठकें हुई हैं उसमें भी कुछ निर्णय नहीं हुआ है. जबलपुर नगरपालिका में चोरी-छुपे नामांतरण किये जा रहे हैं. जो प्रभावशाली लोग हैं, उनके नामांतरण किये गये हैं तो विवादित स्थिति उत्पन्न हो रही है और जो प्रभावशाली लोग हैं वह लोग निर्माण भी कर रहे हैं, गरीब आदमी निर्माण नहीं कर पा रहा है तो कहीं-न-कहीं जो विवादित विक्रयपत्र, वसीयत के आधार पर जो पूर्व अधिकारी ने नामांतरण किये हैं, जो लगभग 95.36 वर्गमीटर भूमि पर परिषद संकल्प 180.61, 3.1.2014 पर नामांतरण स्वीकृत किया गया है तो उस अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी जिसने यह किया है. या तो सबको समान अधिकार दें कि उनके नामांतरण हो जाए उनको ऋण मिल जाये, सरकार की योजनाओं का लाभ मिल जाए जिससे कि वह लोन ले सके अपना मकान बना सके.

श्रीमती माया सिंह--- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, सम्माननीय विधायक जी ने जो बात पूछी है उस संबंध में मैं कहना चाहती हूं कि माननीय वित्तमंत्री जी की अध्यक्षता में केबिनेट सब-कमेटी बनाई गई और समिति ने 5 हजार वर्ग फीट तक के भूखंडों के व्यवस्थापन हेतु नियमों को 27 फरवरी 2016 की बैठक में सहमति दी. नियमों में सर्वेक्षण,पात्रता व व्यवस्थापन के बारे में विस्तृत नियम है. अतः विधि विभाग के अभिमत के बाद नियम लागू किये जाने हैं और विधि विभाग ने 22.7.2016 की टीप में कहा है कि न्यायालयीन प्रकरणों पर अभिमत नहीं दिया जा सकता इसलिए न्यायालयीन प्रकरणों को छोड़कर अन्य भूमियों पर योजना लागू करने के लिए पुनः परीक्षण करने के लिए विधि विभाग से अनुरोध किया जा रहा है.

श्री दिलीप सिंह परिहार--- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जिन अधिकारियों ने विवादित नामांतरण किये हैं उनके खिलाफ तो कार्यवाही होना चाहिए या तो वह सबके नामांतरण करें.माननीय उपाध्यक्ष महोदय, वसीयत के आधार पर 3.1.2014 को कुछ नामांतरण हुए, जो प्रभावशाली लोग हैं उनके नामांतरण हो गये हैं मेरा कहना है कि फिर सबके नामांतरण होना चाहिए.

श्रीमती माया सिंह- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं ये कहना चाहती हूं कि मंत्रिमंडल की उपसमिति का शीघ्र ही पुनर्गठन कर बैठक हम आयोजित करेंगे. आपने जो बात रखी है, उस पर बैठक में अवश्‍य ध्‍यान देंगे. प्रारूप और नियमों पर कार्यवाही प्रचलित है. बाकी की बातें हम उस बैठक में रखेंगे.

श्री दिलीप सिंह परिहार- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मूलभूत सुविधायें- बिजली, पानी, सड़क की व्‍यवस्‍था तो कम से कम हो जाए.

उपाध्‍यक्ष महोदय- कमेटी की बैठक में वे विचार करेंगे.

श्री ओमप्रकाश सखलेचा- एक सवाल यह है कि जिन्‍होंने गलत नामांतरण कर दिए हैं, उनके खिलाफ क्‍या कार्यवाही होगी ?

श्री दिलीप सिंह परिहार- कम से कम उन्‍हें मूलभूत सुविधायें तो मिल जायें.

उपाध्‍यक्ष महोदय- दिलीप सिंह जी आपकी बात आ गई है. माननीय मंत्री जी ने जवाब दिया है. एक बात और उन्‍होंने पूछी है कि जिनके गलत तरीके से नामांतरण हो गए हैं, उनके खिलाफ आप क्‍या कार्यवाही करेंगे ?

श्रीमती माया सिंह- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, क्‍योंकि मंत्रिमंडल का पुनर्गठन हुआ, इसी वजह से समिति का पुनर्गठन करके एक माह में उक्‍त प्रकार से सभी प्रकरणों को संज्ञान में लेकर जल्‍दी से जल्‍दी निर्णय किया जायेगा.

श्री दिलीप सिंह परिहार- बहुत- बहुत धन्‍यवाद मंत्री जी.

श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा- उपाध्‍यक्ष महोदय, नीमच के बंगला बगीचा की समस्‍या बहुत सालों से पेंडिंग थी. इस पर कई घोषणायें भी हुई. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने भी घोषणा की. सभी जनप्रतिनिधि बहुत समय से प्रयासशील थे. आपने खेत एरिया में आवासीय भवनों के नामांतरण की अनुमति दे दी है. लेकिन बंगला बगीचा के आवासीय भवनों के नामांतरण पर आपने रोक लगा रखी है. आप समय-सीमा बतायें कि कब तक ये रोक हटा ली जायेगी और मंत्रिमंडलीय उपसमिति इस पर कब तक निर्णय दे देगी और आप सभी समस्‍याओं का समाधान कर देंगे ?

श्रीमती माया सिंह- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने खेत और बगीचे के बारे में जो बताया है, उस पर भी हम उपरोक्‍त समिति की बैठक में निर्णय करेंगे. जितने भी विवादित नामांतरण के मामले हैं, जो शिकायतें हैं उसके निराकरण हेतु तो कलेक्‍टर भी सक्षम हैं. यदि इस संबंध में विधायक जी ने कोई लिखित शिकायत कलेक्‍टर को दी है तो कलेक्‍टर भी इसका निराकरण कर सकते हैं. महेन्‍द्र सिंह जी ने जो बात कही है, उसके परिपेक्ष्‍य में मैं पुन: अपनी बात दोहराना चाहती हूं कि एक माह के भीतर ही कमेटी की बैठक में आपके द्वारा उठाये गए बिंदुओं को रखेंगे. इस संबंध में विधि विभाग का अभिमत भी चार दिन पहले हमें प्राप्‍त हो चुका है. इन बिंदुओं पर विचार करके सकारात्‍मक कदम हम शीघ्र ही उठायेंगे. मंत्रिमंडलीय उपसमिति में भी यह मामला रखा जाएगा.

उपाध्‍यक्ष महोदय- मंत्री महोदय, कलेक्‍टरों को आप शासन स्‍तर से निर्देश दे दीजिए ताकि वे ऐसे प्रकरणों का निराकरण कर सकें.

श्रीमती माया सिंह- जी, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय.

श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा- पचास सालों से ये समस्‍या है, आप कुछ समय-सीमा बता दीजिये कि कब तक इसका समाधान होगा ?

श्रीमती माया सिंह- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, हमारे मंत्रिमंडल का पुनर्गठन हुआ है. पहले कमेटियां बनी थी, अभी विभागों में भी बदलाव हुआ है. उस दृष्‍टि से हम समिति का पुनर्गठन करके एक माह के अंदर बैठक में आपने जो बातें हमारे संज्ञान में लाई हैं, जो बिंदु सदन में रखे हैं, उस पर सकारात्‍मक चर्चा करके शीघ्र हल निकालेंगे.

श्री अशोक रोहाणी- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, जो समस्‍यायें माननीय परिहार जी ने सदन में रखी हैं. वे लगभग सभी कैन्‍टोंमेंट बोर्ड में व्‍याप्‍त हैं. मेरे क्षेत्र में भी बगीचों को हटाने के लिए कैंटोंमेंट बोर्ड प्रयास करता है. लगभग तीन सौ एकड़ की जमीन राज्‍य शासन ने कैंटोंमेंट बोर्ड को दी थी. उसके बदले एक सौ तिरेपन एकड़ की जमीन पर बगीचावासी निवासरत हैं. अदला-बदली का यह प्रस्‍ताव केंद्र सरकार के पास प्रस्‍तावित है. मेरा निवेदन है कि शीघ्र ही केन्द्र सरकार से जो अदला-बदली का प्रस्ताव है वह पास कराया जाए. दूसरा शासन की योजनाओं के लाभ के लिए जो मेरे पास उत्तर आया है उसमें कलेक्टोरेट में जो शासन की योजनाएँ संचालित होती हैं वह तो केंटोनमेंट बोर्ड को मिलती हैं लेकिन नगर पालिक निगम से संचालित योजनाओं का लाभ केंटोनेमेंट बोर्ड के निवासियों को नहीं मिलता है. हमारे जबलपुर में केंटोनेमेंट बोर्ड में लगभग पचास हजार लोग निवास करते हैं. मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि उनके लिए अलग से कोई एक व्यवस्था करें ताकि वे लोग न भटकें.

श्रीमती माया सिंह-- माननीय उपाध्यक्ष जी, विधायक जी ने जो बात उठाई है मैं उनको बताना चाहती हूँ कि नगर पालिका निगम, जबलपुर द्वारा सिटी मिशन मैनेजमेंट सेल गठित किया गया है, जो कि केंटोनेमेंट बोर्ड की शासकीय योजनाओं के प्रभारी अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करके केंट क्षेत्र के नागरिकों को योजनाओं का लाभ प्रदान करें.

उपाध्यक्ष महोदय-- पर माननीय सदस्य का कहना यह है कि जो नगर पालिक निगम की योजनाएँ हैं उनका लाभ नहीं मिलता है. केंट क्षेत्र के नागरिकों को शासन की योजनाओं का लाभ तो मिलता है, यह उनका कहना है.

श्री अशोक रोहाणी-- उपाध्यक्ष महोदय, जो नगर पालिक निगम संचालित करता है उन योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है. जिलाध्यक्ष कार्यालय से जो योजनाएँ संचालित होती हैं उनका लाभ मिलता है.

श्रीमती माया सिंह-- माननीय उपाध्यक्ष जी, मैंने वही बात रखी कि नगर पालिका निगम जबलपुर द्वारा सिटी मिशन मैनेजमेंट सेल गठित किया गया है और केंटोनेमेंट बोर्ड के शासकीय योजनाओं के प्रभारी अधिकारी के साथ समन्वय स्थापित करके केंट क्षेत्र की जितनी भी नागरिकों की योजनाएँ हैं उनका लाभ उन्हें मिले और केंटोनेमेंट बोर्ड के क्षेत्र में सभी योजनाओं का लाभ लोगों को मिल रहा है, यह भी है और पूरक जानकारी में मैंने पहले इस बात को रखा भी है.

इंजीनियर प्रदीप लारिया(नरयावली)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय मंत्री महोदया ने बताया है कि एक सब कमेटी बना रहे हैं और उसकी बैठक भी जल्दी कर रहे हैं. इसमें मेरा सिर्फ इतना ही आग्रह है कि जो अभी रोहाणी जी कह रहे थे, यह बात सही है कि कई शासकीय योजनाओं का लाभ मिलता है और कई योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है. एक बार सब कमेटी में इसका परीक्षण हो जाए. दूसरा, मध्यप्रदेश में तो पाँच छः केंटोनमेंट (छावनी) परिषद् हैं, पूरे देश में भी अस्सी के ऊपर छावनी परिषद् हैं. दिल्ली में और अन्य राज्यों में केंटोनमेंट क्षेत्र के विकास के लिए ग्राण्ट मिलती है और दिल्ली की राज्य सरकार अपने बजट में वहाँ के विकास और योजनाओं के लिए बजट का प्रावधान करती है. क्या यह सब कमेटी अन्य राज्यों का और दिल्ली का परीक्षण कराकर जो लाभ वहाँ के रहवासियों को मिल रहा है यह मध्यप्रदेश के केंटोनमेंट क्षेत्र के रहवासियों को भी मिलेगा? माननीय मंत्री जी से मैं उत्तर चाहूँगा.

श्रीमती माया सिंह-- माननीय उपाध्यक्ष जी, मैंने पूर्व में भी अपनी बात कही थी कि हम इस उप समिति का शीघ्र गठन करके बैठक आयोजित करेंगे और यहाँ जितने सम्माननीय विधायकों ने जो-जो सुझाव यहाँ दिए हैं और अभी लारिया जी ने जो बात कही है उस बैठक में उन सारी बातों को रख कर फिर निर्णय करेंगे, नियम के अनुसार निर्णय किया जाएगा.

श्री शैलेन्द्र जैन-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, सेम मेरा प्रश्न था जो नहीं आ पाया है. एक प्रश्न करने की अनुमति अध्यक्ष महोदय ने दी थी मेरे को...(व्यवधान)..

इंजीनियर प्रदीप लारिया-- उपाध्यक्ष महोदय, केंटोनमेंट क्षेत्र के विकास के लिए वहाँ कुछ प्रावधान हैं...

उपाध्यक्ष महोदय-- माननीय मंत्री जी, इनका स्पेसिफिक सुझाव है कि दूसरे राज्यों में केंटोनमेंट बोर्ड्स में जो सुविधाएँ मिल रही हैं क्या उनका परीक्षण करके अपने यहाँ लागू करेंगे?

श्रीमती माया सिंह-- बिल्कुल हम इस पर ध्यान देंगे और परीक्षण करके जो उनके हित में कदम उठाए जा सकते हैं. बिल्कुल ध्यान रखेंगे..(व्यवधान)..

इंजीनियर प्रदीप लारिया-- माननीय मंत्री महोदया, सरकार की जितनी भी योजनाएँ हैं उसका लाभ भी सुनिश्चित कराएँ.

श्रीमती माया सिंह-- सरकार की बहुत सारी योजनाओं का मैंने पूर्व में अपना वक्तव्य आपके सामने पढ़ा, उसमें बताया है बहुत सारी योजनाओं का लाभ लोगों को मिल रहा है.

श्री अशोक रोहाणी-- उपाध्यक्ष महोदय, मेरे एक प्रश्न का उत्तर अभी नहीं आया है कि केन्द्र सरकार में जो प्रस्ताव गया है अदला-बदली का उसके लिए प्रयास किए जाएँ. उसका उत्तर आ जाए.

उपाध्यक्ष महोदय-- अब उन्होंने स्पष्ट कह दिया है कि समिति की बैठक में उन सब चीजों को रखेंगे.

श्री अशोक रोहाणी-- मेरा बगीचों का प्रश्न है और जो प्रस्ताव केन्द्र सरकार को गया है उसमें प्रयास किए जाएँ बस इतना मेरा निवेदन है.

उपाध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी ने यही कहा है कि बैठक में इन सब बिन्दुओं को रखेंगे और उसमें प्रयास करेंगे, उन्होंने अपने जवाब में कहा है.

श्री तरूण भनोत(जबलपुर-पश्चिम)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, आपको धन्यवाद कि आपने बोलने के लिए समय दिया. मैं माननीय मंत्री महोदया से सिर्फ यह जानना चाहता हूँ कि जो केंटोनमेंट में आपने यह कहा कि हमने नोडल अधिकारी जो है उससे यह कहा है कि समन्वय बना कर काम करें. वह अलग बात हो गई. मैं प्वाईंटेड यह पूछना चाहता हूँ कि क्या राशि का प्रावधान किया जाएगा? जो राशि अभी नगर निगम को प्राप्त हुई है.जो नगर निगम के क्षेत्रों में खर्च करने के लिए है. क्या नगर निगम के पास अलग से राशि उपलब्ध कराई जाएगी ताकि वह राशि केन्टोनमेंट क्षेत्रों में व्यय की जा सके. या वह राशि कम करके केन्टोनमेंट क्षेत्र में खर्च की जाएगी.

श्रीमती माया सिंह--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं माननीय विधायक जी की इस बात का बाद में जवाब दूंगी क्योंकि इस बारे में मुझे विस्तृत जानकारी नहीं है विस्तृत जानकारी हासिल करके इस बात का जवाब दूंगी. लेकिन केन्टोनमेंट क्षेत्र में प्रमुख सचिव और आयुक्त के द्वारा हितग्राहियों के लाभ के संबंध में हम समीक्षा करेंगे और यदि उन्हें लाभ नहीं मिला है तो लाभ दिलवाया जाएगा.

श्री तरुण भनोत--उपाध्यक्ष महोदय, अगर राशि का प्रावधान नहीं किया जाएगा तो आप केन्टोनमेंट में लाभ कैसे देंगे.

श्रीमती माया सिंह--उस संबंध में देखेंगे.

उपाध्यक्ष महोदय--मंत्री जी ने कहा है आपको बाद में वे जानकारी दे देंगी अभी उनके पास जानकारी नहीं है.

श्री अशोक रोहाणी--उपाध्यक्ष महोदय, जो समन्वय समिति बनाई गई है उसने अपना कार्य करना शुरु कर दिया है इसके लिए मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद.

श्री शैलेन्द्र जैन--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, छावनी परिषद् की धारा-243 (सी) के तहत जितने भी केन्टोनमेंट बोर्ड हैं उनको नगर पालिका के समान दर्जा देने का प्रावधान है. क्या यह लागू करेंगे ?

श्रीमती माया सिंह--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, समिति की जो बैठक होगी उस समिति की बैठक में इन सब बिंदुओं पर हम विचार कर लेंगे और नियम के अनुसार हित में जो भी कदम उठाए जा सकते हैं वह उठाए जाएंगे. इस बात के लिए यहां पर सहमति देना संभव नहीं है.

1.47 बजे

प्रतिवेदनों की प्रस्तुति

(1) सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति का इक्यानवेवां से एक सौ एक वां प्रतिवेदन

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया (सभापति)--उपाध्यक्ष महोदय, मैं सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति का इक्यानवेवां से एक सौ एक वां प्रतिवेदन सदन में प्रस्तुत करता हूँ.

 

(2) प्रश्न एवं संदर्भ समिति का आठवां, नौवां, दसवां, ग्यारहवां, बारहवां, तेरहवां एवं चौदहवां प्रतिवेदन.

श्री अंचल सोनकर (सभापति)-- उपाध्यक्ष महोदय, मैं, प्रश्न एवं संदर्भ समिति का आठवां, नौवां, दसवां, ग्यारहवां, बारहवां, तेरहवां एवं चौदहवां प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूँ.

1.48 बजे

याचिकाओं की प्रस्तुति

 

उपाध्यक्ष महोदय--आज की याचिकाएं पढ़ी हुई मानी जाएंगी.

 

 

 

1.49 बजे

संविहित संकल्प

(क) मध्यप्रदेश विधान सभा सदस्य वेतन, भत्ता तथा पेंशन अधिनियम, 1972 (क्रमांक 7 सन् 1973) के अधीन बनाए गए मध्यप्रदेश विधान मंडल यात्रा भत्ता नियम, 1957 में किए गए संशोधन संबंधी.

 

 

 

 

1.50 बजे

(ख) मध्‍यप्रदेश विधान सभा सदस्‍य, वेतन भत्‍ता, तथा पेंशन अधिनियम, 1972

(क्रमांक 7 सन् 1973)

 

1.52 बजे

(ग) मध्‍यप्रदेश विधान सभा सदस्‍य वेतन, भत्‍ता तथा पेंशन अधिनियम, 1972

(क्रमांक 7 सन् 1973)

 

1.54 बजे शासकीय विधि विषयक कार्य

 

उपाध्‍यक्ष महोदय:- विधान सभा की कार्यवाही अपराह्न 3.30 बजे तक के लिये स्‍थगित.

 

(1.55 बजे से 3.30 बजे तक अंतराल)

 

3.37 बजे {अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

शासकीय विधि विषयक कार्य.

 

मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2016 (क्रमांक 13 सन् 2016)

 

उच्च शिक्षा मंत्री(श्री जयभान सिंह पवैया)--अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2016 पर विचार किया जाय.

अध्यक्ष महोदय--प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2016 पर विचार किया जाय.

श्री मुकेश नायक (पवई)--माननीय अध्यक्ष महोदय, संशोधन विधेयक सरकार ने सदन में प्रस्तुत किया है और संशोधन विधेयक के परिपत्र में ही लिख दिया है कि सदन चालू होने में समय था इसलिये दो महीने पहले इसका अध्यादेश जारी कर दिया गया. इस तरह से अध्यादेश को जारी करने का कोई औचित्य नहीं था इसको सदन में ही रखकर इस अधिनियम में संशोधन विधेयक लाने की आवश्यकता थी और नये विश्वविद्यालयों की अनुमति भी सदन में लाने की आवश्यकता थी. मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्यम से यह कहना चाहता हूं कि भविष्य में कभी भी इस तरह के संशोधनों की आवश्यकता हो तो विधान सभा का फोरम ही सबसे अच्छा होता है उसके बाहर अध्यादेश लाने की परम्परा हमें नहीं डालना चाहिये. दूसरी बात में कहना चाहता हूं कि पहले से ही मध्यप्रदेश में 20 निजी विश्वविद्यालय काम कर रहे थे आज 3 विश्वविद्यालयों को हमने अनुमति देने के लिये प्रस्ताव सदन में रखा है. इस तरह से मध्यप्रदेश में 23 निजी विश्वविद्यालय हो जाएंगे. सरकार ने यह कहा है कि निजी विश्वविद्यालय का उद्देश्य यह है कि ज्यादा से ज्यादा रोजगारोन्मुखी शिक्षा को प्रोत्साहित करना एक सम्यक और जनचेतना को शिक्षा के उद्देश्य में इसको जोड़ना. शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति के जीवन में समझ और रोजगार दोनों में समन्वय है. सिर्फ रोजगार ही शिक्षा दे, यह शिक्षा अधूरी है और शिक्षा रोजगार न दे, यह शिक्षा भी अधूरी है. इस उद्देश्‍य से शिक्षा को समझ और रोजगार दोनों के समन्‍वय के साथ उसका प्रारूप तैयार करना होता है एवं शिक्षाविदों ने बार-बार इस बात को कहा है. मैंने यह बात इसलिए कही क्‍योंकि मैं माननीय मंत्री महोदय का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूँगा कि जब भी हम सदन में परंपराओं की श्रृंखलाओं को आगे बढ़ाते हैं तो परंपरा क्‍या रही है इस पर विचार करना आवश्‍यक होता है. मेरा उद्देश्‍य जब आप तीन नये विश्‍वविद्यालयों की स्‍थापना करने के लिए आ रहे हैं तो आप इस पर विचार करें कि पहले 20 निजी विश्‍वविद्यालय जो मध्‍यप्रदेश में आपने खोले हैं. वे क्‍या काम करते रहे हैं ? उनकी क्‍या कार्य-प्रणाली रही है ? आपने विनियामक आयोग का गठन किया. इस आयोग का यह उद्देश्‍य था कि शासन के द्वारा शिक्षा के परिसर में जो निर्धारित मापदण्‍ड हैं, उनका आकलन करें और वे मापदण्‍ड कोई भी आवेदक करता है या नहीं करता है, इसका आकलन करने के बाद यदि वह मापदण्‍डों में खरा उतरता है तो विश्‍वविद्यालय की सिफारिश राज्‍य सरकार को भेजे.

अध्‍यक्ष महोदय, मुझे आश्‍चर्य होता है कि पहले किस तरह से शिक्षा विभाग में काम होता रहा है. निर्धारित मापदण्‍ड है कि निजी विश्‍वविद्यालय के लिए 20 हेक्‍टेयर जमीन जरूरी है फिर आपने उसको घटाकर 10 हेक्‍टेयर कर दिया. लेकिन जब मापदण्‍डों में 20 हेक्‍टेयर जमीन थी तब मैं सी.ए.जी. की एक रिपोर्ट की तरफ आपका ध्‍यान आकर्षित कराना चाहता हूँ कि यह कैसा विनियामक आयोग है जो इस बात को नहीं देखता है कि कोई भी आवेदक अपने निर्धारित मापदण्‍ड पूरा कर रहा है या नहीं कर रहा है. अगर विश्‍वविद्यालय में लायब्रेरी नहीं होगी, रिफरेंस लायब्रेरी नहीं होगी, लैब नहीं होगा, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर नहीं होगा, खेल-मैदान नहीं होंगे तो फिर ये विश्‍वविद्यालय विद्यार्थियों को क्‍या शिक्षा देंगे ? आप देखिये, जो सी.ए.जी. ने टिप्‍पणी की है, मैं उसकी ओर माननीय मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूँगा. यह भारत के नियंत्रक महालेखाकार परीक्षण का प्रतिवेदन दिनांक 21 मार्च, 2015 है, मध्‍यप्रदेश विनियामक आयोग संबंधित जिला कलेक्‍टरों से प्रायोजी निकायों द्वारा प्रस्‍तुत भूमि संबंधी विवरणों के साथ अनुपालन प्रतिवेदन के सत्‍यापन हेतु निवेदन करता है. जिला कलेक्‍टरों के प्रतिवेदन की संवीक्षा में प्रकट हुआ कि 6 प्रायोजी निकायों के पास शैक्षणिक उद्देश्‍य हेतु 20 हेक्‍टेयर भूमि नहीं थी, 4 प्रायोजी निकायों के प्रकरण में उनकी सम्‍पूर्ण 20 हेक्‍टेयर भूमि शैक्षणिक उद्देश्‍यों के अलावा अन्‍य उद्देश्‍यों के लिये थी, जबकि 2 प्रायोजी निकायों के पास क्रमश: 3.94 हेक्‍टेयर, 5.15 हेक्‍टेयर भूमि शैक्षणिक उद्देश्‍यों के लिए थी. शैक्षणिक उद्देश्‍यों के लिए अपेक्षित भूमि की अनुपलब्‍धता के बावजूद मध्‍यप्रदेश विनियामक आयोग ने अपने प्रतिवेदन में 6 निजी विश्‍वविद्यालयों की अनुशंसा राज्‍य सरकार से की. विभाग ने भी प्रायोजी निकायों द्वारा इन कमियों को दूर किया जाना सुनिश्चित किये बिना ही उनकी स्‍थापना कर दी. इतना ही नहीं किसी भी नये विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना के लिए जरूरी होता है कि विनियामक आयोग की सिफारिशों के बाद 90 दिन की कार्यावधि में उच्‍च शिक्षा अनुदान आयोग के द्वारा उस विश्‍वविद्यालय का निरीक्षण होता है, पूरी यू.जी.सी. की कमेटी आती है और वह कमेटी, विश्‍वविद्यालय निर्धारित मापदण्‍डों को पूरा करता है या नहीं करता है, इसका आकलन करती है.

अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका ध्‍यान सी.ए.जी. की रिपोर्ट की टिप्‍पणी की तरफ आकर्षित करता हूँ कि अधिनियम की धारा 8.5 के अनुसार राज्‍य सरकार आशय पत्र पर, अनुपालन प्रतिवेदन पर, मध्‍यप्रदेश विनियामक आयोग से प्रतिवेदन प्राप्‍त होने के पश्‍चात् यू.जी.सी. से प्रस्‍तावित निजी विश्‍वविद्यालय का निरीक्षण करने का अनुरोध करेगा अन्‍यथा राज्‍य सरकार ऐसा निर्णय कर सकेगी कि जैसा वह उचित समझे. उच्‍च शिक्षा विभाग ने प्रस्‍तावित निजी विश्‍वविद्यालय श्री सत्‍य सांई प्रौद्योगिक एवं चिकित्‍सा विज्ञान विश्‍वविद्यालय, सीहोर की अधोसंरचना भवन, भूमि, स्‍टॉफ, पुस्‍तकालय एवं पाठ्यक्रमों की स्थिति के निरीक्षण हेतु सचिव, यू.जी.सी. नई दिल्‍ली से अनुरोध किया था. निरीक्षण हेतु सचिव यू.जी.सी. नई दिल्‍ली को 06-07-2013 को अनुरोध किया था प्रस्‍तावित निजी विश्‍वविद्यालय के निरीक्षण हेतु यू.जी.सी. से किये गये अपने अनुरोध के तीन माह की समाप्ति के पूर्व ही विभाग ने 17-09-2013 को निजी विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना कर दी आप तीन महीने इंतजार नहीं कर सकते थे? अगर तीन महीने यू.जी.सी. की टीम आकर निरीक्षण नहीं करती तो उसके बाद मध्‍यप्रदेश सरकार को यह अधिकार था कि उस विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना की आप अनुमति दें लेकिन तीन महीने खत्‍म नहीं हुए और आर.के.डी.एफ. जिसने चार विश्‍वविद्यालय पहले ही मध्‍यप्रदेश में बना लिए उस यूनिवर्सिटी को आपने अनुमति दे दी यू.जी.सी. की टीम की सिफारिश के बगैर जो बिलकुल भी आपके अधिनि‍यम के विरूद्ध है मान्‍य परम्‍पराओं के विरुद्ध है और जो किसी भी शिक्षा संस्‍थान का जो एक्‍सीलेंस होता है, उसकी जो उत्‍कृष्‍टता होती है उसके भी विरुद्ध है इस तरह का काम निजी विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना के लिए किया. इतना ही नहीं माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने निजी विश्‍वविद्यालय को जो सीट निर्धारित की है, आर.के.डी.एफ. यूनिवर्सिटी को बी.एड. और डी.एड. और एम.एड. की पांच सौ सीट अलॉट की है. उन्‍होंने पांच हजार बच्‍चों को परीक्षा में बैठा दिया और डिग्रियां बांट दीं. आर.के.डी.एफ. में, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्‍वविद्यालय में पांच हजार बच्‍चे फर्स्‍ट इयर में फेल हो गए थे.

अध्‍यक्ष महोदययह विषय परिवर्तन है.

श्री मुकेश नायकमैं एक्‍ट पर बोल रहा हूं. विश्‍वविद्यालय की स्‍थापना को लेकर विनियामक आयोग और यू.जी.सी. के बारे में जो लिखा है मैं उसी पर बोल रहा हूं. वही विषय है.

अध्‍यक्ष महोदययह जो एक्‍ट है इसमें तीन विश्‍वविद्यालय जिनको कि अध्‍यादेश द्वारा लाया गया था उनको अब एक्‍ट बनाया जा रहा है.

श्री मुकेश नायकमैं इसी का विरोध कर रहा हूं कि आपने इससे पहले जो 20 निजी विश्‍वविद्यालय बनाए हैं क्‍या वह काम कर रहे हैं, इसका क्‍या औचित्‍य है. अगर उसका कोई औचित्‍य नहीं है तो यह तीन विश्‍वविद्यालय क्‍यों बनाए जा रहे हैं. मैं यह कहना चाहता हूं और इसीलिए यह प्रासंगि‍क हो जाता है, रिलेवेंट हो जाता है और यह एक्‍ट की चर्चा का हिस्‍सा बन जाता है. आप देखिए कि पांच हजार बच्‍चे जो राजीव गांधी यूनिवर्सिटी में फेल हो गए थे. पांच हजार बच्‍चों को माइग्रेशन सार्टिफिकेट नहीं मिला. उनको टी.सी. नहीं मिली, वह परीक्षा में फेल हो गए. और उनको आर.जी.पी.वी. और दूसरे निजी विश्‍वविद्यालयों ने अपने यहां एडमिशन दे दिया. पहली बात तो यह है कि कोई भी इंजीनियरिंग कॉलेज का बच्‍चा है जब फर्स्‍ट इयर में वह फेल हो जाता है तो उसको कोई यूनिवर्सिटी अपने यहां इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन कैसे दे सकती है. यह अपने आप एक्‍ट का वाएलेशन है. अपने आप यह नियमों का उल्‍लंघन है. मैं आपसे यह कहना चाहता हूं कि जिस तरह से निजी विश्‍वविद्यालय निरंकुश और स्‍वेच्‍छाचारी हो गए हैं. जिस तरह से निजी विश्‍वविद्यालय एक व्‍यावसायिक अड्डे बन गए हैं. इसके कारण जिस उद्देश्‍य से आप शिक्षा संस्‍थानों को बनाते हैं, जिस उद्देश्‍य से आप विश्‍वविद्यालयों को बनाते हैं वह शिक्षा का उद्देश्‍य आपका पूरा नहीं हो रहा है. आज आइसेक्‍ट यूनिवर्सिटी की चर्चा करें. आइसेक्‍ट यूनिवर्स&