मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा एकादश सत्र

 

 

जुलाई, 2016 सत्र

 

सोमवार, दिनांक 25 जुलाई, 2016

 

(3 श्रावण, शक संवत्‌ 1938)

 

 

[खण्ड- 11 ] [अंक- 5 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

सोमवार, दिनांक 25 जुलाई, 2016

 

(3 श्रावण, शक संवत्‌ 1938)

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.02 बजे समवेत हुई.

 

{अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

 

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न क्रमांक 1, डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय.

श्री जितू पटवारी-- अध्‍यक्ष जी, एक बहुत लोक महत्‍व का विषय है, अध्‍यक्ष जी एक मिनट, बहुत महत्‍वपूर्ण मुद्दा है.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍नकाल के बाद जो कुछ भी बोलना है.

श्री जितू पटवारी-- अध्‍यक्ष जी, मैं कभी कोई चीज बाधित नहीं करता हूं, मुझे पता है प्रश्‍नोत्‍तरी का. .... (व्‍यवधान).....

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- अध्‍यक्ष जी, यह प्रश्‍नकाल है, यह गलत परंपरा भी पड़ती जा रही है. .... (व्‍यवधान).....

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍नकाल के बाद तैयार हैं आपकी बात सुनने के लिये.

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- माननीय अध्‍यक्ष जी, इससे प्रश्‍नकाल बाधित होता है. .... (व्‍यवधान).....

अध्‍यक्ष महोदय-- नहीं यह उचित नहीं है, प्रश्‍नकाल के बाद बोलें कृपया. .... (व्‍यवधान)..... कोई बात नहीं लिखी जायेगी. .... (व्‍यवधान).....

श्री जितू पटवारी-- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍नकाल में कोई जबरदस्‍ती नहीं होगी, आपकी बात सुनने के लिये तैयार है. एक घंटे रूक सकते हैं आप, शांति से सुनेंगे आपकी बात. यदि ध्‍यान से सुनाना है तो 12 बजे के बाद बात करिये आप. कृपया करके बैठ जाइये.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने प्रश्‍नकाल से ही संबंधित एक पत्र आपके सचिवालय को सौंपा है. आज की तारीख में मेरा एक विधान सभा प्रश्‍न लगा था जो एनआरआई कोटे से मेडीकल एजुकेशन में भर्ती....

अध्‍यक्ष महोदय-- उसके बारे में कक्ष में चर्चा कर लेंगे.

श्री रामनिवास रावत-- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय-- इसके बारे में बात हो गई है. यह रिकार्ड में नहीं आयेगा.

श्री रामनिवास रावत-- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय-- यह नहीं आयेगा रिकार्ड में, आपने लिखकर दे दिया है उस पर जांच चल रही है. उसके पहले आप नहीं बोल सकते कुछ.

श्री रामनिवास रावत-- मुझे संतुष्‍ट तो कर दें. यह मेरा मौलिक अधिकार है.

अध्‍यक्ष महोदय-- उत्‍तर सुन लें. वैसे तो श्री रामनिवास रावत जी वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं, इन्‍होंने चूंकि मेरे सचिवालय में भी और मुझे स्‍वयं भी आकर के एक पत्र दिया था इस संबंध में, चूंकि अब वह सचिवालय के पास आ गया था इस संबंध में अब कोई प्रश्‍न यहां नहीं उठाना था, किंतु फिर भी चूंकि उन्‍होंने यह विषय उठा दिया है. मैं उनको यह जानकारी देना चाहता हूं कि वह दूसरे विभाग में चला गया था इसलिये डिले हुआ, 28 तारीख को आ रहा है. कृपया कर अब आप शांत रहें. डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय.

श्री रामनिवास रावत-- धन्‍यवाद्. लेकिन मेडीकल एजुकेशन का है, दूसरे विभाग में कैसे चला गया ?

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत स्‍वीकृत निर्माण कार्य

1. ( *क्र. 2585 ) डॉ. राजेन्‍द्र पाण्‍डेय : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या सर्व शिक्षा अभियान अंतर्गत रतलाम जिले में प्राथमिक विद्यालय एवं माध्यमिक विद्यालयों के स्कूल भवन, अतिरिक्त कक्ष, शौचालय एवं अन्यान्य अनेक निर्माण कार्य वर्ष 2008-09, 2009-10 एवं 2010-11 तक स्वीकृत हुए हैं? (ख) यदि हाँ, तो विकासखण्‍डवार एवं ग्राम पंचायतवार किन-किन स्थानों पर, किस-किस प्रकार के कितने कार्य स्वीकृत हुए एवं इस हेतु कार्यवार कितना बजट स्वीकृत किया गया? (ग) साथ ही क्या उपरोक्त वर्षों में स्वीकृत निर्माण कार्य अनेक स्थानों पर पूर्ण नहीं हुए हैं, जबकि निर्माण कार्यों हेतु संबंधित एजेंसियों ने पूर्ण राशि की किश्त आहरित कर प्राप्त कर ली है? (घ) यदि हाँ, तो उपरोक्त वर्षों के पूर्ण एवं अपूर्ण निर्माण कार्यों की भौतिक सत्यापन सहित जानकारी से अवगत कराते हुए स्पष्ट करें कि कितने कार्य पूर्ण हुए, कितने अपूर्ण रहे, कितनी राशि आहरित की गयी, कितनी राशि का उपयोग हुआ, कितनी शेष रही एवं अब तक तत्संबंधी क्या-क्‍या कार्यवाही की गयी?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जी हां. (ख) विकासखंडवार, ग्राम पंचायतवार, कार्य के प्रकार, कार्यवार स्‍वीकृत बजट राशि का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट- "" पर है. से (ग) अपूर्ण कार्य एवं एजेंसी द्वारा आहरित राशि का विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट "" अनुसार है. (घ) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट "" अनुसार है.

परिशिष्ट - ''एक''

 

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय - माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रश्न प्रारम्भ करने के पहले मैं शासन का और माननीय मत्री की का धन्यवाद ज्ञापित करना चाहता हूं कि माननीय मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में स्कूल शिक्षा विभाग ने और माननीय मंत्री जी ने अभी जो दिल्ली में बैठक हुई उसमें शिक्षकों को सम्मान देते हुए एक और नया नाम देने का प्रस्ताव किया है. अब शिक्षक जो कर्मी कहलाये जाते थे शासन ने उनका सम्मान किया और इसी भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने और आगे बढ़ते हुए उनको ड्रेस कोड देते हुए शिक्षकों के नाम के आगे जो अब नाम पट्टिका लगेगी तो उसे राष्ट्र निर्माता भी कहा जायेगा. निश्चित रूप से यह बहुत स्वागत योग्य है सदन की ओर से संपूर्ण शिक्षकगणों को बहुत-बहुत बधाई.

अध्यक्ष महोदय - कृपया प्रश्न करें.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय - मेरा प्रश्न भी शिक्षा से जुड़ा हुआ है. एक और हम शिक्षा की गुणवत्ता के लिये, अधोसंरचना के लिये निरंतर प्रयास कर रहे हैं किन्तु यह अत्यंत दुखद है कि शासन के द्वारा स्वीकृत कार्य और स्वीकृतियां भी, एक-दो वर्षों की नहीं, मैंने प्रश्न में जानना चाहा था 2005-06 से लेकर प्रश्न दिनांक तक की जानकारी दी जाये.मुझे जानकारी मिली कि जानकारी अधिक विस्तृत हो जायेगी..

अध्यक्ष महोदय - जानकारी आ गई है.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय - मुझे दी है. मैंने उसका अध्ययन किया. माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने भी अगर देखा हो और माननीय मंत्री जी ने भी उसको देखा होगा. विगत वर्षों में जो कार्य स्वीकृत हुए, वे स्वीकृत कार्य आज पर्यन्त पूरे नहीं किये जा सके और कम समय नहीं इन कार्यों को स्वीकृत हुए दस वर्ष हो चुके हैं. दस वर्ष बाद भी शासन के द्वारा यह कहा जाये..

अध्यक्ष महोदय - आप प्वाइंटेड पूछ लीजिये. आप वरिष्ठ सदस्य हैं.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय - अभी नींव स्तर पर कार्य है. मैं ध्यान आकर्षित करने के लिये निवेदन कर रहा हूं कि दस वर्ष होने के बावजूद नींव स्तर पर कार्य, प्लिंथ स्तर पर कार्य..

अध्यक्ष महोदय - आप सीधे पूछ लीजिये ना कि इस बारे में क्या करेंगे ?

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय - प्लास्टर किया जायेगा,रंग किया जायेगा,अपूर्ण कार्य. यह कम,ज्यादा नहीं यह लगभग जो कार्य स्वीकृत हुए थे उन कार्यों की संख्या थी 1545 और उनके लिये राशि भी कम नहीं लगभग 40 करोड़ के आसपास थी.

अध्यक्ष महोदय - आप कृपया सीधा प्रश्न कर लें.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय - उसमें से 1206 अपूर्ण कार्य हैं. तो अब कौन सी समयावधि होगी. किस समयावधि में वे कार्य पूर्ण किये जा सकेंगे ?

कुंवर विजय शाह - माननीय अध्यक्ष जी, माननीय विधायक जी को मैं आपके माध्यम से यह बताना चाहता हूं बहुत ही अच्छे विषय की ओर उन्होंने सदन का ध्यान आकर्षित किया है. यह बात सच है कि आपके ही जिले में इतने निर्माण कार्य अभी बाकी हैं. जो निर्माण ऐजेंसियां हैं वे समय पर काम नहीं करतीं और उसके कारण लोग कोर्ट में चले जाते हैं और इसके कारण कई काम हमारे लंबित हैं. ग्राम पंचायतों को यह सोचकर काम दिया गया था कि वे अतिरिक्त निर्माण कार्य जल्दी कर लेंगे किन्तु देखने में आ रहा है कि सरपंच के पांच साल पूरे हो जाते हैं वह घर चले जाते हैं. अब उन पर हम कोर्ट में काम कर रहे हैं. जो निर्माण ऐजेंसियां काम करती हैं, अभी तक विभाग यह करता था कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये इसकी समीक्षा होती थी. मेरे मंत्री बनने के बाद मैंने यह निर्णय लिया, माननीय अध्यक्ष जी,आपके माध्यम से मैं बताना चाहता हूं कि अब हर सप्ताह निर्माण कार्यों की समीक्षा वी.सी. के माध्यम से मैं स्वयं करूंगा और जो कोर्ट में प्रकरण चल रहे हैं उनको भी समय-सीमा में निपटाने के लिये हम कलेक्टरों को निर्देश दे रहे हैं.

डॉ.राजेन्द्र पाण्डेय - माननीय अध्यक्ष महोदय, समयावधि तो नहीं आई.मेरा प्रश्न यह है कि जो अपूर्ण कार्य हैं जिनको दस वर्ष से अधिक हो चुके हैं. अब कौन सी आगामी निश्चित समय-सीमा में वे कार्य पूर्ण किये जायेंगे ? जहां तक न्यायालय वाली बात है माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि थोड़ा देख लें कि ये न्यायालय मात्र राजस्व न्यायालय हैं,या तहसील न्यायालय हैं या एस.डी.एम. न्यायालय हैं. जो शासन के अधीन व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं. उनका अध्ययन करेंगे तो आप पाएंगे कि एस.डी.एम. के यहां पर दस वर्ष से पेंडिंग हैं,जिला पंचायत में पांच वर्ष से पेंडिंग हैं. जांच ऐजेंसियां भी जिला पंचायत के माध्यम से की जाती हैं. मेरे पहले प्रश्न का जवाब नहीं आया माननीय अध्यक्ष जी,समयावधि तो बताएं ?

अध्यक्ष महोदय - 1042 प्रकरणों का कैसे बताएंगे.

 

कुँवर विजय शाह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो मामले न्‍यायालय में विचाराधीन हैं, उन पर समय सीमा में बतलाना मेरे लिये संभव नहीं हैं.

डॉ. राजेंद्र पाण्‍डेय - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बाकी के बता दें. न्‍यायालय में तो बहुत से प्रकरण है.

अध्‍यक्ष महोदय - वह बता रहे हैं.

कुँवर विजय शाह - दूसरा जो आपने बताया है कि एस.डी.एम न्‍यायालय में और जो दूसरे न्‍यायालय में हैं वहां हमारे अधिकारियों को निर्देश दिये गये हैं कि जितना जल्‍दी हो सके इन कार्यों को कम्‍पलीट करायें. कुछ राशि की जरूरत होगी तो वह दे दी जाएगी. हमने वित्‍तमंत्री जी से भी निवेदन किया है कि निर्माण एजेंसी चुनने में हमें स्‍वतंत्रता दी जाये और अगर आवश्‍यकता पड़ेगी तो हम भविष्‍य में निर्माण एजेंसी भी चेंज करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍न क्रं- 2.

डॉ. राजेंद्र पाण्‍डेय - माननीय अध्‍यक्ष महोदय मेरा तो पहला ही प्रश्‍न हुआ.

अध्‍यक्ष महोदय - नहीं आपके दोनों हो गये हैं.

डॉ. राजेंद्र पाण्‍डेय - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि यह जो जांच हुई है या की जा रही है तो उन संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों या संबंधित एजेंसी के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी. न्‍यायालय में तो मात्र कुछ प्रकरण हैं, शौचालय से संबंधित हैं. अतिरिक्‍त कक्ष नहीं बने हैं,भवन नहीं बने हैं, उनके विरूद्ध जांच की जाये और जांच कर जिनकी लापरवाही है, उन दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाये.

अध्‍यक्ष महोदय - यह कोई व्‍यक्तिगत प्रश्‍न नहीं है. आपका प्रश्‍न आ गया है उसका निराकरण भी हो रहा है.

डॉ. राजेंद्र पाण्‍डेय - माननीय अध्‍यक्ष महोदय थोड़ा गंभीरता से लें. रतलाम जिले में यह हालत है तो पूरे मध्‍यप्रदेश में क्‍या स्थिति बन रही होगी ?

अध्‍यक्ष महोदय - आपका निराकरण भी हो रहा है, जांच करेंगे.

कुँवर विजय शाह - माननीय अध्‍यक्ष जी, मैंने बड़ी विनम्रता के साथ माननीय सदस्‍य को बताया है कि सारे प्रकरण न्‍यायालय में लंबित है.

श्री बाबूलाल गौर - समीक्षा हो रही है, समीक्षा कब तक होगी भईया...

अध्‍यक्ष महोदय - मंत्री जी उत्‍तर दे रहें हैं, बैठ जायें कृपया.

डॉ. राजेंद्र पाण्‍डेय - हमारे जिले की अलग से समीक्षा की जाये और दोषियों के विरूद्ध कार्यवाही की जाय.

अध्‍यक्ष महोदय - इनके जिले की अलग से समीक्षा करा लेना.

कुँवर विजय शाह - माननीय अध्‍यक्ष जी आपके निर्देश से मैं सबसे पहला दौरा आपके ही जिले में कराउंगा.

अध्‍यक्ष महोदय - कुँवर हजारीलाल दांगी .

सामु. स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खिलचीपुर का उन्‍नयन

2. ( *क्र. 1041 ) कुँवर हजारीलाल दांगी : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या दिनांक 26.04.2016 को ब्‍यावरा तहसील में आयोजित जिला योजना समिति जिला राजगढ़ की बैठक में माननीय प्रभारी मंत्री महोदया द्वारा मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी राजगढ़ को खिलचीपुर सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र को सिविल अस्‍पताल में उन्‍नयन हेतु प्रस्‍ताव शासन को प्रेषित करने हेतु निर्देशित किया गया था? यदि हाँ, तो क्‍या उक्‍त संबंध में प्रस्‍ताव शासन को प्रेषित किया जा चुका है? यदि हाँ, तो प्रति उपलब्‍ध करावें (ख) प्रश्‍नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी राजगढ़ द्वारा सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खिलचीपुर को सिविल अस्‍पताल में उन्‍नयन करने हेतु प्रेषित प्रस्‍ताव की स्‍वीकृति हेतु प्रश्‍न दिनांक तक शासन द्वारा क्‍या कोई कार्यवाही की गई? यदि हाँ, तो बतावें यदि नहीं, तो कब तक सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खिलचीपुर को सिविल अस्‍पताल में उन्‍नयन कर दिया जावेगा?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी हाँ। प्रस्‍ताव का परीक्षण किया गया. वर्तमान 30 बिस्‍तरीय सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र खिलचीपुर की दैनिक बाह्य रोगियों की संख्‍या लगभग 120 एवं आंतरिक रोगियों की संख्‍या लगभग 20- 25 है. चूंकि वर्तमान में 30 बिस्‍तरीय संस्‍था का पूरा उपयोग नहीं हो रहा है, इस कारण इस संस्‍था के उन्‍नयन की आवश्‍यकता वर्तमान में प्रतीत नहीं होती. शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता.

(ख) जी हां, प्रश्‍न (क) के उत्‍तर में उल्‍लेखित अनुसार. शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता.

 

कुँवर हजारीलाल दांगी - मेरे प्रश्‍न के उत्‍तर में मैं आपसे अनुरोध कर दूं माननीय अध्‍यक्ष महोदय कि मेरी खिलचीपुर विधानसभा क्षेत्र में दो सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र संचालित है और दो प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र संचालित हैं, जिसमें एक भी सिविल अस्‍पताल वर्तमान में संचालित नहीं हैं. मैंने अनुरोध किया कि मेरी विधानसभा क्षेत्र में माननीय मंत्री जी ने जो दूसरा उत्‍तर दिया है कि इसका परीक्षण करा लिया गया है. मैंने खुद जिला योजना समिति में भी उठाया था. जिला योजना समिति ने भी अनुशंसा की है कि वास्‍तव में खिलचीपुर विधानसभा क्षेत्र में सिविल अस्‍पताल की आवश्‍यकता है, लेकिन इसके बाद भी उत्‍तर में आ गया है कि वहां इसकी आवश्‍यकता नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय - कृपया आप प्रश्‍न करें.

कुँवर हजारीलाल दांगी - मेरा अनुरोध है माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कि जिला योजना समिति की सिफारिश को स्‍वीकार करते हुए क्‍या माननीय मंत्री महोदय जी मेरे खिलचीपुर विधानसभा क्षेत्र में सिविल अस्‍पताल वर्तमान सत्र के तत्‍काल बाद ही चालू करेंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी.

श्री रूस्‍तम सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बहुत ही प्रसन्‍नता की बात है कि माननीय विधायक जी को बड़ी चिंता है अपने क्षेत्र की, उसकी प्रशंसा तो की ही जानी चाहिए लेकिन मैं यह बता देना चाहता था आपके माध्‍यम से कि वहां पर जनसंख्‍या के मान से जो निर्धारित है उसके मान से भी सिविल अस्‍पताल के लायक जनसंख्‍या भी नहीं है और दूसरी चीज अभी वर्तमान में वहां तीस बिस्‍तर का सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र है और आने वाले मरीजों की संख्‍या 20-25 भी नहीं होती है. अब 30 बिस्‍तर को यह 50 या 100 बिस्‍तर का करवाने की कह रहे हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय हम तो यह कहना चाहते हैं कि अभी तो मध्‍यप्रदेश मैं वैसे ही डॉक्‍टर्स की बहुत कमी चल रही है, जो प्रदेश में पहले से सिविल अस्‍पताल है हम उनको तो डॉक्‍टर्स उपलब्‍ध करा दें. नया नया सिविल अस्‍पताल उपलब्‍ध करा तो दें और डॉक्‍टर्स एक ना हो तो पदस्‍थापना और ऐसे उन्‍नयन की मैं तो कोई औचित्‍य नहीं समझता हूं.

कुँवर हजारीलाल दांगी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा का क्षेत्र 100 किलोमीटर के अंतर्गत आता है, जनसंख्‍या कम नहीं है. दो सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र है और दो प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र है जिसमें सारे विधानसभा क्षेत्रों में सिविल अस्‍पताल है लेकिन सिर्फ मेरी विधानसभा क्षेत्र में नहीं है. मेरे साथ ही ऐसा क्‍यों हो रहा है. सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र खिलचीपुर में सिर्फ दो डॉक्‍टर्स है और दो जीरापुर में है और एक- एक डॉक्‍टर माचलपुर और थापेड़ा में है.

अध्‍यक्ष महोदय - आप सीधा प्रश्‍न करें उसका तो उन्‍होंने उत्‍तर दे दिया है.

कुँवर हजारीलाल दांगी - मेरा अनुरोध है कि 100 किलोमीटर के अंतराल में एक भी सिविल अस्‍पताल नहीं खोलेंगे क्‍या ? मेरी राजस्‍थान से लगी विधानसभा है सारे मरीज राजस्‍थान में इलाज कराने के लिये जाते है. इसलिए मरीजों की सुविधा को ध्‍यान में रखते हुए मेरी विधानसभा क्षेत्र में भी सिविल अस्‍पताल खोलना आवश्‍यक है, जिसे प्राथमिकता पर खोला जाये.

अध्‍यक्ष महोदय - ठीक है, बैठ जाइये, अनुरोध है उनका कि प्राथमिकता पर खोला जाये.

श्री रुस्तम सिंह-- अध्यक्ष महोदय, मैं पुनः माननीय सदस्य की सजगता की प्रशंसा करता हूं लेकिन इनके खिलचीपुर के जिला मुख्यालय से डिस्ट्रिक्ट हास्पिटल मात्र 17 किलोमीटर है.

कुंवर हजारीलाल दांगी--वह गलत जानकारी है.

श्री रुस्तम सिंह-- 100 किलोमीटर बता रहे हैं. कितना होगा 20 किलोमीटर होगा. लेकिन बहुत दूर नहीं है. इनका जिला चिकित्सालय 100 किलोमीटर दूर नहीं है. मेरा आग्रह है कि आपकी मांग बिलकुल जायज है लेकिन अभी उन्नयन लायक वहां की परिस्थितियां नहीं है. जब परिस्थितियां बनेंगी तो जरुर उस पर विचार किया जायेगा.

कुंवर हजारीलाल दांगी-- अध्यक्ष महोदय,एक प्रश्न और है. खिलचीपुर में 6 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं. दो डॉक्टर हैं. लेडी डॉक्टर तो पूरी विधानसभा क्षेत्र में नहीं है. कम से कम वहां डॉक्टरों की पदस्थापना तो कर दें.

आयुष अस्‍पतालों का संचालन

3. ( *क्र. 2669 ) श्री शैलेन्‍द्र पटेल : क्या राज्‍यमंत्री, आयुष महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शासन द्वारा सीहोर जिले में आयुष अस्‍पतालों का संचालन किया जा रहा है? यदि हाँ, तो जिले में कहाँ-कहाँ, कब अस्‍पताल प्रारंभ किए गए हैं? (1) अस्‍पतालों में पदस्‍थ स्‍टॉफ एवं स्‍वीकृत स्‍टॉफ का ब्‍यौरा दें। (ख) क्‍या जिले के अस्‍पतालों में नि:शुल्‍क दवाओं का‍ वितरण किया जा रहा है? यदि हाँ, तो कितने प्रकार की दवाएं प्रदाय की जा रही हैं? दवाओं के नाम सहित ब्‍यौरा दें (ग) प्रश्‍न दिनांक से 2 वर्ष के दौरान सीहोर जिले के किन-किन आयुष अस्‍पतालों में किस-किस रोग की कितनी-कितनी दवाओं का वितरण किया गया? अस्‍पतालवार ब्‍यौरा दें। (घ) क्‍या आयुष अस्‍पतालों की संख्‍या में वृद्धि अपेक्षित है? यदि हाँ, तो जिले में कहाँ-कहाँ नए अस्‍पताल खोले जाना प्रस्‍तावित है?

राज्‍यमंत्री, आयुष ( श्री हर्ष सिंह ) : (क) जी नहीं वरन् जिले में 22 आयुर्वेद, 10 यूनानी, 1 आयुष विंग एवं 1 होम्योपैथी औषधालय एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सिविल अस्पताल में 17 आयुष केन्द्र संचालित हैं। शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार(ख) जी हाँ। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार(ग) कुछ दवाइयां कई रोगों में दी जाती है, जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' '''' अनुसार(घ) जी नहीं।

 

श्री शैलेन्द्र पटेल--अध्यक्ष महोदय, सर्वप्रथम मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं कि मंत्री बनने के बाद आज पहली बार जवाब देने के लिए खड़े होंगे. मेरा प्रश्न आयुष विभाग में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के बारे में है. यह बहुत ही अच्छी पद्धति है. इसका विस्तार होना चाहिए. हमारे बहुत से माननीय सदस्य भी इसका इस्तेमाल करते हैं.

अध्यक्ष महोदय--आप सीधा प्रश्न करें.

श्री शैलेन्द्र पटेल--अध्यक्ष महोदय, मैं सीधा प्रश्न ही कर रहा हूं. बहुत सी असाध्य बीमारियों का इलाज आयुर्वेद में संभव है इसलिए इसका विस्तार होना चाहिए. मेरा सीधा-सीधा प्रश्न यह है कि सीहोर में केन्द्र तो है लेकिन अस्पताल नहीं है. अगर अस्पताल नहीं होगा तो इलाज कहां से होगा. जो पंचकर्म की,शिरोधार्य की, नास की सुविधा है यह सब वहां पर नहीं है. क्या आप सीहोर जिले में इसे शुरु करेंगे?

श्री हर्ष सिंह--अध्यक्ष महोदय, सीहोर जिले में जो आयुष विंग है उसमें पंचकर्म की व्यवस्था की गई है. मैं माननीय सदस्य को बताना चाहूंगा कि रोगी कल्याण समिति में इसके लिए 2 लाख 8 हजार रुपये पंचकर्म के लिए जमा किया जा चुका है. वहां विधिवत यह चल रहा है. जो भी कमी होगी जैसे अगर स्टाफ कम है या दूसरी कमी है तो मैं उसके लिए माननीय सदस्य से कहूंगा कि मैं उसकी व्यवस्था शीघ्र कर दूंगा.

श्री शैलेन्द्र पटेल--अध्यक्ष महोदय, दूसरा प्रश्न है कि सीहोर में यूनानी डॉक्टर नहीं है. मेरी विधानसभा के जामली में पूरा स्टाफ ही नहीं है. सेमली में डॉक्टर नहीं है. ऐसे बहुत से उदाहरण हैं. इन सबकी पूर्ति कब करेंगे? सीहोर जिले में आप अस्पताल की बात कर रहे हैं वह बेहतर तरीके से कब चलेगा ताकि भोपाल में जो शासकीय आयुर्वेदिक अस्पताल है, उसका भी भार कम होगा और यह इलाज जिला स्तर पर होने लगेगा. मंत्रीजी बतायेंगे कि डॉक्टरों की कमी की पूर्ति कब तक कर देंगे?

श्री हर्ष सिंह--अध्यक्ष महोदय, जहां तक यूनानी अस्पताल, जामली का प्रश्न है. हम वहां तत्काल ड़ॉक्टर की व्यवस्था करने का प्रयत्न कर रहे हैं. जो दूसरे अस्पताल खाली हैं उनके लिए भी युक्तियुक्तकरण से, हमारे 100 ड़ॉक्टर MD कर रहे हैं, उनके आने के बाद व्यवस्था की जायेगी.

श्री शैलेन्द्र पटेल--अध्यक्ष महोदय, एक सुझाव देना चाहता हूं. यह बहुत अच्छी पद्धति है. मैं अपने ही जिले में नहीं, माननीय वित्त मंत्री जी बैठे हैं, सारे जिले में इस विंग का विस्तार होना चाहिए ताकि लोगों को, मरीजों को इसका फायदा मिले और आयुर्वेद का लाभ उठा सकेंगे. धन्यवाद.

राज्‍य विमुक्त घुमक्‍कड़ जाति के विकास हेतु स्‍वीकृत राशि

4. ( *क्र. 2835 ) श्रीमती इमरती देवी ( श्री ठाकुरदास नागवंशी ) : क्या राज्‍यमंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) प्रदेश में राज्‍य विमुक्‍त, घुमक्‍कड़ एवं अर्धघुमक्‍कड़ जाति विकास अभिकरण के द्वारा 01 जनवरी 2014 से आज दिनांक तक कुल किन-किन कार्यों के लिए कितनी-कितनी राशि स्‍वीकृत की गई? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में स्‍वीकृत की गई राशि के जिलेवार कार्य किन-किन एजेंसियों के माध्‍यम से कराये गये एवं मौके पर हुए कार्यों का भौतिक सत्‍यापन किन-किन अधिकारियों द्वारा किया गया? (ग) राज्‍य में जिलेवार उपलब्‍ध कराई गई राशि के उपयोग का सत्‍यापन नहीं होने से राशि के दुरूपयोग के कितने प्रकरण बनाये गये एवं संबंधितों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की गई? क्‍या इन सबके लिए राशि स्‍वीकृत करने वाले राज्‍यस्‍तरीय अधिकारी उत्‍तरदायी नहीं हैं? यदि हाँ, तो संबंधित के विरूद्ध कब तक कार्यवाही की जावेगी?

राज्‍यमंत्री, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण ( श्रीमती ललिता यादव ) : (क) दिनांक 1 जनवरी 2014 से आज दिनांक तक किसी भी कार्य के लिये कोई भी राशि स्‍वीकृत नहीं की गई है। (ख) एवं (ग) प्रश्‍नांश (के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

 

श्रीमती इमरती देवी--अध्यक्ष महोदय, मैं, आपके माध्यम से पूछना चाहती हूं कि मैंने घुमक्कड जाति के संबंध में विधानसभा प्रश्न लगाया है, उसका मंत्रीजी ने मुझे सही जवाब नहीं दिया है. मंत्रीजी ने बताया है कि 2013 में जो योजना चालू की गई थी, वह बंद कर दी गई. मैं मंत्रीजी से जवाब चाहती हूं.

अध्यक्ष महोदय-- जो आप पूछ रही हैं वह कहां लिखा है?

श्रीमती इमरती देवी--लिखा है. मंत्रीजी ने जवाब दिया है.

अध्यक्ष महोदय-- आपने राशि का पूछा है.

श्रीमती इमरती देवी-- उन्होंने मना ही कर दिया कि हमने पूरे प्रदेश में 2014 से राशि देना बंद कर दी है.

अध्यक्ष महोदय-- इसमें 2013 का उल्लेख नहीं है. दिनांक 1 जनवरी, 2014 से कोई भी राशि स्वीकृत नहीं की गई. यह उत्तर है. आप क्या चाहती हैं?

श्रीमती इमरती देवी-- मैं यह चाहती हूं कि 2013 में माननीय मुख्यमंत्रीजी ने भोपाल में सारे घुमक्कड़ जातियों की महापंचायत बुलायी थी. घुमक्कड़ जाति में 51 जातियां आती हैं. मुख्यमंत्रीजी ने उस महापंचायत में बहुत बड़ी बड़ी घोषणाएं की थी.

अध्यक्ष महोदय--उसका प्रश्न तो है ही नहीं?

श्रीमती इमरती देवी-- इसी में प्रश्न आता है. 2013 में चुनाव के पहले मुख्यमंत्रीजी ने घोषणा की थी.

अध्यक्ष महोदय - आप सीधा प्रश्न कर लें.

श्रीमती इमरती देवी - हम कर तो रहे हैं आप सुन लें. वर्ष 2013 में जब चुनाव के पहले घुम्मकड़ जातियों के लिए घोषणा की थी वह योजना वर्ष 2014 जनवरी में बंद कर दीं. क्या यह वोटों के लिए की थीं?

अध्यक्ष महोदय - योजना बंद नहीं की है.

श्रीमती इमरती देवी - जब पैसा नहीं दिया तो योजना क्यों बनाई और इसकी घोषणा मुख्यमंत्री जी ने स्वयं की थी.

श्रीमती ललिता यादव - अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या ने जो प्रश्न किया है वह मध्यप्रदेश राज्य विमुक्त घुम्मकड़ एवं अर्ध घुम्मकड़ जाति विकास प्राधिकरण से संबंधित है. अभिकरण द्वारा केवल स्वरोजगार पर अनुदान उपलब्ध कराया जाता है. लेकिन माननीय सदस्या का प्रश्न पूछने का अधिकार है. यदि वह कुछ पूछना चाहती हैं तो वह पूछ सकती हैं.

श्रीमती इमरती देवी -अध्यक्ष महोदय, मैं पूछना चाहती हूं, हमारी बात सुन लें, वर्ष 2013 में मुख्यमंत्री जी ने योजना चालू की थी, अब वह दोबारा चालू करेंगे या फिर ऐसे ही घुम्मकड़ जाति के लिए वर्ष 2018 में चुनाव से पहले इसको लागू करेंगे?

श्रीमती ललिता यादव - अध्यक्ष महोदय, कोई योजनाएं बंद नहीं हुई हैं. मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आवास अनुदान योजना, बस्ती विकास योजना, विमुक्त जाति छात्रावास योजना, सारी योजनाएं चल रही हैं. लेकिन माननीय सदस्या का जो प्रश्न था वह अभिकरण से संबंधित था, इसीलिए अध्यक्ष महोदय, उसमें यह जवाब आया है.

अध्यक्ष महोदय - श्री ठाकुरदास नागवंशी..

श्रीमती इमरती देवी - अगर योजना चालू हैं तो इनकी राशि क्यों नहीं आ रही है?

अध्यक्ष महोदय - इसका उत्तर उन्होंने दे दिया है.

श्रीमती इमरती देवी - उत्तर कहां दिया है?

अध्यक्ष महोदय - उन्होंने उत्तर दे दिया है.

श्रीमती इमरती देवी - उत्तर नहीं दिया है. कब से इसे चालू करेंगे, इसकी तारीख बताएं कि घुम्मकड़ जाति के लिए कब से पैसा जारी होगा?

अध्यक्ष महोदय - आपका अभिकरण से संबंधित प्रश्न है.

श्रीमती ललिता यादव - अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्या ने वर्ष 2014 का जो प्रश्न किया है, उसकी पूरी जानकारी मेरे पास है, कितनी राशि आई है, कितनी व्यय हुई है. माननीय सदस्या मेरे पास आ जाएंगी और इसका जानकारी आप हमसे ले लेंगी क्योंकि प्रश्न में आपने यह पूछा नहीं है, इसलिए यह प्रश्न उपस्थित नहीं होता है.

श्रीमती इमरती देवी - ग्वालियर जिले में मेरी विधान सभा में कितना पैसा दिया गया है? इसमें मेरा एक सवाल और है कि जब मुख्यमंत्री जी ने सभा ने ली थी तब यह कहा था कि घुम्मकड़ जाति का अध्यक्ष बनेगा, लेकिन वर्ष 2013 से आज तक इनका अध्यक्ष घोषित नहीं किया है. वह लाल बत्ती कहां गई? उनको एक लाल बत्ती ही दे दो?

श्री ठाकुरदास नागवंशी - अध्यक्ष महोदय, मेरा इसमें नम्बर नहीं है.

अध्यक्ष महोदय - आपका भी इसी प्रकार का प्रश्न था, इसलिए उसे क्लब किया है.

श्री ठाकुरदास नागवंशी - अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.

अध्यक्ष महोदय - श्री गोवर्धन उपाध्याय..

श्रीमती इमरती देवी -अध्यक्ष महोदय, एक प्रश्न और हमारा है.

अध्यक्ष महोदय - अब नहीं.

श्रीमती इमरती देवी - (XXX)

अध्यक्ष महोदय - इनका रिकॉर्ड में कुछ नहीं लिखा जाएगा. आप अब कृपया बैठ जाइए. यह ठीक बात नहीं है. दूसरों का समय खराब हो रहा है. श्री गोवर्धन उपाध्याय..

खण्‍ड चिकित्‍सा कार्यालय में रिक्‍त पदों की पूर्ति

5. ( *क्र. 2893 ) श्री गोवर्धन उपाध्‍याय : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधान सभा क्षेत्र सिरोंज एवं लटेरी के खण्‍ड चिकित्‍सा कार्यालय में कौन-कौन से पद स्‍वीकृत हैं? स्‍वीकृत पद में से कौन-कौन से पद भरे गए हैं और कौन-कौन से पद अभी तक रिक्‍त हैं? रिक्‍त रहने का क्‍या कारण है? रिक्‍त पदों की पूर्ति कब तक की जावेगी? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार विधान सभा क्षेत्र में कहाँ-कहाँ उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र हैं? प्रत्‍येक उप स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में किस-किस श्रेणी के कितने पद स्‍वीकृत हैं? स्‍वीकृत पदों के विरूद्ध कितने पद भरे गये और कितने पद अभी तक रिक्‍त हैं? रिक्‍त पद रहने के क्‍या कारण हैं, पदों की पूर्ति कब तक की जावेगी?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) विधान सभा क्षेत्र सिरोंज एवं लटेरी के खण्ड चिकित्सा कार्यालय में स्वीकृत, भरे एवं रिक्त पदों की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। विभाग के अधीन नियमानुसार सीधी भर्ती एवं पदोन्नति के माध्यम से पद पूर्ति की कार्यवाही निरंतर जारी है। निश्चित समय-सीमा बताई जाना संभव नहीं है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''''अनुसार है। उप स्वास्थ्य केन्द्रों पर क्रमशः महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं पुरूष स्वास्थ्य कार्यकर्ता का एक-एक पद स्वीकृत है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। उत्तरांश (क) के अनुक्रम में शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

 

श्री गोवर्धन उपाध्याय - अध्यक्ष महोदय, मैंने प्रश्न किया था. माननीय मंत्री महोदय से जानकारी लेना थी कि सिरोंज विधान सभा क्षेत्र में ..

श्री रामनिवास रावत - मिश्रा जी, आपके क्षेत्र के लिए लड़ रही हैं, आप पैसा भिजवा दो.

श्री गोवर्धन उपाध्याय - अध्यक्ष महोदय, विधान सभा सिरोंज में कितने डॉक्टरों के पद रिक्त हैं. जवाब में माननीय मंत्री महोदय ने बताया है कि पांच में से एक पद पर पदस्थ है और बाकी के पद खाली हैं. मैं माननीय मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि जब एक डॉक्टर रहता है और एक डॉक्टर चला जाता है, ऐसी स्थिति में अस्पताल खाली रहता है एवं मरीजों को दिक्कत और कष्ट उठाना पड़ता है. मैं माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करना चाहूंगा कि इन पदों पर और भी डॉक्टरों को पदस्थ करें. दूसरा मेरा प्रश्न यह है कि सिरोंज और लटेरी के अंदर आपने एम्बूलेंस की व्यवस्था की है. परन्तु उनके लिए न वहां पर कोई ड्राइवर पदस्थ है. अब बिना ड्रायवर के एम्बूलेंस कैसे चलेगी, यह माननीय मंत्री महोदय बताने का कष्ट करें?

श्री निशंक कुमार जैन - मेरा विदिशा जिले से जुड़ा मामला है. एक ही जिले का मामला है.

अध्यक्ष महोदय - उनका उत्तर तो आने दें. यह जिले भर का प्रश्न नहीं है, सिर्फ विधान सभा क्षेत्र का प्रश्न है.

श्री रूस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने सिंरोज और लटेरी दोनों स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों के बारे में जानकारी चाही है तो जहां तक सिंरोज का सवाल है वहां प्रथम श्रेणी के पांच में से दो पद हैं और चिकित्‍सा अधिकारी पांच होने चाहिए थे उनके बदले में छ: हैं और मैं यह कह सकता हूँ कि मध्‍यप्रदेश के मान से डॉक्‍टर्स की स्थिति बहुत बेहतर है. 50 परसेंट डॉक्‍टर्स उपलब्‍ध नहीं हैं. इनके यहां 80 परसेंट की पदस्‍थापना है, लेकिन लटेरी में जरूर कमी है उसकी हम जरूर पूर्ति करेंगे. लटेरी में कमी है और उसकी हम पूर्ति करेंगे.

श्री गोवर्धन उपाध्‍याय -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से मैं बोलना चाहता था कि एम्‍बुलेंस के लिए कम से कम एक ड्राइवर की व्‍यवस्‍था तो करा दें.

श्री रूस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय , मैं माननीय सदस्‍य को और आपके मार्फत पूरे सदन को बताना चाहता हूँ कि अब एम्‍बुलेंस तो गौण हो गए हैं. 108 की इतनी गाडि़यां हैं, जननी एक्‍सप्रेस की गाडि़यां हैं जहां एम्‍बुलेंस की जरूरत होती है यही गाडि़यां जाती हैं उसकी पूर्ति होती है.

श्री निशंक कुमार जैन -- ( xxx )

अध्‍यक्ष महोदय -- कुछ लिखा नहीं जाएगा.

 

चिकित्‍सालय के बायोवेस्‍ट का विनिष्‍टीकरण

6. ( क्र. 2396 ) श्री कमल मर्सकोले : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सिवनी जिले में इंदिरा गांधी जिला चिकित्‍सालय से प्रतिदिन निकलने वाले बायोवेस्‍ट मटेरियल के विनिष्‍टीकरण का कार्य वर्ष 2015-16 में व वर्ष 2016-17 के लिये किस फर्म को दिया गया है? (ख) इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय सिवनी में बायोवेस्‍ट मटेरियल का उठाव समय पर नहीं हो रहा है, जिससे संक्रमण बीमारियों का खतरा बना हुआ है? विभाग द्वारा समय पर कार्य ना करने वाली इस फर्म के विरूद्ध क्‍या कोई कार्यवाही की गई है और विभागीय तौर पर इस लापरवाही के लिये जिम्‍मेदार अधिकारियों पर कोई कार्यवाही की है?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) सिवनी जिले में इंदिरा गांधी जिला चिकित्सालय से प्रतिदिन निकलने वाले बायोवेस्ट मटेरियल के विनिष्टीकरण का कार्य वर्ष 2015-16 में मेसर्स कृपा वेस्टेज सिवनी एवं वर्ष 2016-17 में मेसर्स एलाईट ऐजेन्सी जबलपुर को दिया गया है। (ख) जी हाँ। जी हाँ। बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण ऐजेन्सी मध्यप्रदेश प्रदूषण निवारण मण्डल के द्वारा प्राधिकृत की जाती है। मेसर्स कृपा वेस्टेज, सिवनी को दिनांक 07/11/2015 के माध्यम से निष्पादन प्रक्रिया बन्द करने के निर्देश जारी किये गये हैं। विभागीय स्तर पर जाँच उपरान्त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर लापरवाह अधिकारी के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी।

श्री कमल मर्सकोले -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डिस्ट्रिक्‍ट हॉस्पिटल, सिवनी में बायोवेस्‍ट के मटेरियल के विनिष्‍टीकरण का कार्य 2016-17 के लिए जिस फर्म को दिया गया था, उस फर्म ने समय पर उठाव नहीं किया है जिसकी वजह से संक्रमण बीमारी का खतरा बना हुआ है. मैं मंत्री जी यह कहना चाहता हूँ कि उस फर्म को क्‍या विधिक स्‍टेट करेंगे ? दूसरा मेरा प्रश्‍न है कि माननीय मंत्री जी ने विभागीय स्‍तर पर जॉंच के उपरांत जांच प्रतिवेदन के आधार पर संबंधित अधिकारियों को सस्‍पेंड करने, उनके विरूद्ध कार्यवाही करने की बात कही है . मैं मंत्री जी से यह आग्रह करना चाहता हूँ कि कितने समय-सीमा में यह जांच करवा देंगे?

श्री रूस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले तो मैं माननीय सदस्‍य को इस बात के लिये धन्‍यवाद देना चाहता हूँ कि जिस विषय बिन्‍दु पर सामान्‍यत: लोगों का ध्‍यान नहीं जाता, उस पर आपने ध्‍यान आकर्षित किया है इसके लिए बधाई के पात्र हैं और साफ-सफाई के लिए जो वेस्‍ट है वह प्रॉपर्ली उठे और उसका विनिष्‍टीकरण हो, इस पर भी माननीय सदस्‍य ने ध्‍यान आकर्षित किया है. मैं आपके माध्‍यम से यह बताना चाहता हूँ कि पहले मेसर्स कृपा वेस्‍टेज कम्‍पनी जो थी वह सिवनी का वेस्‍टेज उठाती थी, अब उसका ठेका बंद हो गया है, समाप्‍त हो गया है क्‍योंकि वह प्रॉपरली ठीक से काम नहीं कर रहे थे और दूसरा अब जो हुआ है वह मेसर्स एलाईट एजेंसी, जबलपुर को वर्ष 2016-17 के लिए कार्य दिया गया है. हमारे यहां इस कार्य में पर्यावरण विभाग और हेल्‍थ का ज्‍वाइंट काम होता है, एजेंसी तय करना पर्यावरण विभाग का काम है और काम लेना हमारे विभाग का काम है इसीलिए इस पर हम लोग नजर रखते हैं और जो बात कही है कि पहले काम ठीक से नहीं हुआ, उसमें कौन अधिकारी दोषी थे और क्‍या कार्यवाही की गई, उसमें हम जांच करा रहे हैं और उसमें निश्‍चित रूप से जो भी दोषी होगा, जिसकी गड़बड़ी होगी, उस पर कार्यवाही की जावेगी.

श्री कमल मर्सकोले -- अध्यक्ष महोदय मंत्री जी इसकी जांच की समय सीमा बता दें.

श्री रूस्तम सिंह -- इसकी जांच शीघ्र ही कर दी जायेगी समय नहीं लगेगा. आपको बता भी देंगे.

श्री कमल मर्सकोले -- धन्यवाद.

 

 

 

 

 

आयुष चिकित्‍सकों की रिक्‍त पदों पर पदस्‍थापना

7. ( *क्र. 470 ) श्री कुँवरजी कोठार : क्या राज्‍यमंत्री, आयुष महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जिला राजगढ़ अंतर्गत विधानसभा क्षेत्र सारंगपुर में किन-किन स्‍थानों पर आयुष अंतर्गत आयुष प्राथ.स्‍वा. केन्‍द्र संचालित हैं तथा उनमें कितने-कितने अधिकारी एवं कर्मचारियों के पद स्‍वीकृत हैं? स्‍वीकृत पदों के विरूद्ध कितने-कितने पद भरे हुये हैं? (ख) प्रश्‍नांश (क) अनुसार संचालित केन्‍द्रों पर कब से पद रिक्‍त हैं? रिक्‍त पदों की पूर्ति हेतु विभाग/शासन द्वारा क्‍या कार्यवाही की जा रही है? रिक्‍त पदों पर कब तक आयुष चिकित्‍सकों की पदस्‍थापना की जावेगी? (ग) प्रश्‍नांश (ख) अनुसार क्षेत्र में रिक्‍त पद होने के कारण ग्रामीण क्षेत्र में इलाज नहीं होने के कारण जनता को भारी असुविधा हो रही है, ऐसी स्थिति में आयुष चिकित्‍सकों के रिक्‍त पदों पर कब तक पदस्‍थापना की जावेगी? नहीं तो क्‍यों नहीं?

राज्‍यमंत्री, आयुष ( श्री हर्ष सिंह ) : (क) आयुष अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र संचालित नहीं है। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ख) उत्तरांश () अनुसार। (ग) समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं।

 

श्री कुंवरजी कोठार -- माननीय अध्यक्ष महोदय मैं आपका संरक्षण चाहता हूं. मेरा प्रश्न शासकीय आयुर्वेदीक औषधालय से संबंधित प्रश्न है. लेकिन त्रुटिवश प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र लिखा गया है. आपसे अनुमति चाहता हूं कि आयुर्वेदिक औषधालय की जानकारी माननीय मंत्री जी ने एकत्रित भी की है. यदि आपकी अनुमति हो तो मैं शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय के बारे में जानकारी पूछ लूं.

अध्यक्ष महोदय -- पूछ लीजिए.

श्री कुंवरजी कोठार -- अध्यक्ष महोदय मेरे विधान सभा क्षेत्र में 7 शासकीय आयुर्वेदिक औषधालय हैं और 2 पीएचसी हैं, जिनमें एक एक पद आयुर्वेदिक चिकित्सक के हैं. एक सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सारंगपुर है उसमें एक आयुर्वेदिक चिकित्सक का पद रिक्त है. ऐसे कुल 10 औषधालय हैं जहां पर आयुर्वेदिक चिकित्सक के पद रिक्त हैं. मैं माननीय मंत्री जी से यह चाहता हूं कि ये रिक्त चिकित्सक के पद कब तक भर दिये जायेंगे.

श्री हर्ष सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय यह सत्य है कि 7 आयुर्वेदिक औषधालय रिक्त हैं. मैं यथाशीघ्र उपलब्धता के आधार पर कुछ न कुछ डॉक्टर निश्चित रूप से भेजने का प्रयास करूंगा. एनआरएचएम में से भी डॉक्टर का स्थानांतरण हो गया है वहां पर भी डॉक्टर नहीं है उनकी संविदा नियुक्ति होती है. उ सके लिए भी मैं प्रयास करूंगा कि उनकी नियुक्ति यथाशीघ्र हो जाय.

श्री कुंवरजी कोठार -- धन्यवाद् मंत्री जी.

प्रश्न क्रमांक 8 ( अनुपस्थित )

प्राथमिक उपस्‍वास्‍थ्‍य केंद्र बेहट का उन्‍नयन

9. ( *क्र. 1502 ) श्री भारत सिंह कुशवाह : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मा. मुख्‍यमंत्री जी द्वारा दिनांक 27.06.13 को ग्‍वालियर प्रवास के दौरान उपस्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र बेहट को प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में उन्‍नयन करने हेतु घोषणा की गई थी इस संबंध में कलेक्‍टर द्वारा शासन को अवगत कराया गया है? (ख) यदि हाँ, तो उपस्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र बेहट को प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में उन्‍नयन करने हेतु मुख्‍य चिकित्‍सा एवं स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी जिला ग्‍वालियर द्वारा मूलभूत जानकारी प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र खोलने हेतु अनुशंसा सहित शासन को भेजी गई है? (ग) यदि हाँ, तो घोषणा एवं अनुशंसा के उपरांत भी विलम्‍ब का क्‍या कारण है? (घ) उपस्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र बेहट को प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र में उन्‍नयन कब तक किया जावेगा?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। (ख) जी हाँ। (ग) घोषणा के पालन में उप स्वास्थ्य केन्द्र बेहट का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन हेतु प्रस्ताव परियोजना परीक्षण समिति के समक्ष प्रस्तुत किये जाने हेतु कार्यवाही प्रचलन में है। (घ) निश्चित समयावधि‍ बताना संभव नहीं।

 

श्री भारत सिंह कुशवाह --माननीय अध्यक्ष महोदय मेरा प्रश्न इस प्रकार है कि उप स्वास्थ्य केन्द्र बेहट को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के रूप में उन्नयन करने के बारे में है. विभाग का जो उत्तर आया है उसमें मैं प्रश्न घ के उत्तर से असंतुष्ट हूं. मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि जब मुख्यमंत्री जी की घोषणा और विभाग की सहमति है तो क्या आप प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में बेहट का उन्नयन करेंगे.

श्री रूस्तम सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय बेहट में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र हो उसकी घोषणा तो माननीय मुख्यमंत्री जी ने की है जो माननीय मुख्यमंत्री जी की घोषणा है उ स पर शंका होने का प्रश्न नहीं है हम यह विश्वास दिलाते हैं कि यहां पर पीएचसी की स्थापना की जायेगी.

श्री भारत सिंह कुशवाह -- अध्यक्ष महोदय घ के बारे में प्रश्न यह है कि तीन वर्ष हो गये हैं घोषणा किये हुए तो कब तक यह घोषणा पूरी हो जायेगी.

श्री रूस्तम सिंह -- अध्यक्ष महोदय इनकी चिंता जायज है क्योंकि समय हो रहा है. लेकिन मैं इतना कह सकता हूं कि जब घोषणा हुई उस समय यह नहीं रहता है कि कौन कौन सा क्षेत्र आयेगा, उसके लिए जो न्यूनतम आवश्यकता हैं जनसंख्या और क्षेत्र वह वहां पर है या नहीं है, उसी के परीक्षण में कुछ समय लगा है. बेहट की वास्तव में देखें तो उतनी जनसंख्या नहीं है जितनी कि पीएचसी को खोलने के लिए चाहिए. हम इनको विश्वास दिलाते हैं कि यह हमने परीक्षण कर लिया है और दूसरे क्षेत्र के लोग इसका लाभ उठा सकते हैं उनको भी इसमें जोड़ लिया है अब यह प्रक्रिया में चालू है, समय सीमा इसमें इसलिए नहीं बता सकते हैं कि इसमें कई फार्मेल्टी होती हैं इसलिए समय सीमा की बात नहीं कर रहा हूं. मैं इतना ही कह सकता हूं कि जितनी चिंता विधायक को है कि बेहट में पीएचसी बने, तो यह मेरे पड़ोस का सवाल है, आपकी विधान सभा में मेरा गांव है तो मेरी भी चिंता है कि वहां पर जल्दी से जल्दी बने इसका मैं स्वयं प्रयास करूंगा.

श्री भारत सिंह कुशवाह -- धन्यवाद मंत्री जी.

प्रभारी प्राचार्य के विरूद्ध कार्यवाही

10. ( *क्र. 2070 ) श्रीमती शीला त्‍यागी : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) तारांकित प्रश्‍न संख्‍या-6 (क्रमांक 780), दिनांक 18.07.2014 के बिन्‍दु (घ) की जाँच संयुक्‍त संचालक लोक शिक्षण रीवा संभाग रीवा से कराने का उत्‍तर दिया गया था, जिसके परिपालन में संयुक्‍त संचालक लोक शिक्षण रीवा संभाग रीवा द्वारा अपने पत्र क्रमांक/वि.स./पवास/2014/1316 रीवा दिनांक 09.10.2014 से जाँच दल गठित कर जाँच कराई है तथा जाँच में उमाकान्‍त द्विवेदी प्रभारी प्राचार्य शा.उ.मा.वि. पुरौना को छात्रवृत्ति भुगतान में दोषी मानते हुए निलंबित कर विभागीय जाँच संस्‍थापित की गई है, की जानकारी जाँच प्रतिवेदन के साथ देवें। (ख) क्‍या उक्‍त विभागीय जाँच संयुक्‍त संचालक लोक शिक्षण रीवा को मिली है तथा प्रस्‍तुतकर्ता अधिकारी डी.ई.ओ. रीवा है तथा सेवा निवृत्‍त दोषी प्रभारी प्राचार्य द्विवेदी को गलत लाभ देने के उद्देश्‍य से जारी आरोप पत्र से गलत छात्रवृत्ति भुगतान का मुख्‍य आरोप अंकित नहीं किया गया है? क्‍या उक्‍त नियम विरूद्ध छात्रवृत्ति भुगतान का आरोप मुख्‍य आरोप पत्र में सम्मिलित कराया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) क्‍या उक्‍त सेवा निवृत्‍त प्रभारी प्राचार्य श्री उमाकान्‍त द्विवेदी तारांकित प्रश्‍न क्र. 3554, दिनांक 25.07.2014 के अपात्र गुरूजियों के एरियर्स भुगतान में कलेक्‍टर रीवा द्वारा की गई जाँच में 12 लाख रू. गलत भुगतान में दोषी है तथा उक्‍त राशि की वसूली के लिए आयुक्‍त लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल द्वारा दिनांक 03.06.2016 को आदेश जारी किया गया है? (घ) यदि प्रश्‍नांक (क) से (ग) हाँ तो क्‍या उक्‍त दोनों प्रकरणों में प्रभारी प्राचार्य द्वारा नियम विरूद्ध भुगतान की गई कुल राशि वसूली योग्‍य है? यदि हाँ, तो सेवा निवृत्‍त प्रभारी प्राचार्य श्री द्विवेदी को मिलने वाले स्‍वत्‍वों से पूरी वसूली योग्‍य राशि वसूल कर भुगतान करायेंगे? यदि नहीं, तो क्‍यों?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जी हाँ। संयुक्‍त संचालक लोक शिक्षण रीवा संभाग रीवा से प्राप्‍त जाँच प्रतिवेदन के आधार पर श्री उमाकांत द्विवेदी व्‍याख्‍याता एवं तत्‍कालीन प्रभारी प्राचार्य, शासकीय उ.मा.वि. पुरौना जिला रीवा को एक अन्‍य आरोप में संचालनालय के आदेश क्र-स्‍था-2/सर्त./सी/ रीवा/22/2015/257 दिनांक 27/03/2015 द्वारा निलंबित कर उनके विरूद्ध संचालनालय के पत्र क्र-स्‍था-2/सर्त./सी/रीवा/22/2015/414 दिनांक 07/05/2015 द्वारा जारी किए गए पत्र में वर्णित आरोप के आधार पर विभागीय जाँच संस्थित की गई है, जाँच जारी है। (ख) जी हाँ। जी नहीं, गलत छात्रवृत्ति भुगतान करने के आरोप को भी विभागीय जाँच में सम्मिलित किए जाने हेतु आरोप पत्र जारी किया गया है। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (ग) जी हाँ। संचालनालय के पत्र दिनांक 03.06.2016 द्वारा श्री द्विवेदी को अधिक भुगतान की गई राशि की वसूली के संबंध में कारण बताओ सूचना-पत्र जारी किया गया। (घ) विभागीय जाँच प्रक्रिया पूर्ण होने एवं कारण बताओ सूचना-पत्र का प्रतिवाद उत्‍तर प्राप्‍त होने पर परीक्षणोपरांत गुण दोष के आधार पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

श्रीमती शीला त्‍यागी -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी को यह बताना चाहती हूँ कि मैंने पिछले सत्र में अतारांकित प्रश्‍न लगाया था और वह छात्रवृत्‍ति घोटाले में संलिप्‍त प्राचार्य उमाकान्‍त द्विवेदी के संबंध में था और वे दोषी भी पाए गए. संयुक्‍त संचालक रश्‍मि शुक्‍ला जी को उसमें चेयरमेन बनाकर कमेटी गठित की गई और उनके माध्‍यम से आर्थिक अनियमितता का जो आरोप-पत्र था उसमें दाखिल नहीं किया गया और साथ ही साथ उनके साथ मिलकर लेनदेन की बात करके मुख्‍य आरोपी उमाकान्‍त द्विवेदी को इन्‍होंने इनके साथ सस्‍पेंड करके दो अन्‍य जो शिक्षक थे उनको भी निलंबित कर दिया गया है और बाद में उनके साथ आर्थिक लेनदेन करके मुख्‍य आरोपी लिपिक को तो आपने बहाल कर दिया, एक सेवानिवृत्‍त हो गए लेकिन दो जो शिक्षक हैं, शिवकुमार अहिरवार और रामेश्‍वर तिवारी, इन दोनों को अभी तक बहाल नहीं किया गया है और न ही उन्‍हें कोई आर्थिक दण्‍ड दिया गया, क्‍या माननीय मंत्री जी बताने की कृपा करेंगे कि आपने अभी तक उनको क्‍यों आर्थिक दण्‍ड नहीं दिया, सेवानिवृत्‍त होने के बाद भी.

कुंवर विजय शाह -- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं माननीय विधायक जी को आपके माध्‍यम से बतलाना चाहता हूँ कि जो जांच की व्‍यवस्‍था है उसके अनुसार किसी को तत्‍काल निलंबित नहीं किया जा सकता. जांच जारी है और उसके बाद जो भी जांच के परिणाम आएंगे, उसके आधार पर कार्यवाही की जाएगी. विभागीय जांच भी हमने शुरू कर दी है. दो महीने के अंदर विभागीय जांच पूरी हो जाएगी. यह बात मैं मानता हूँ कि शिक्षा विभाग में छात्रवृत्‍ति घोटाले की शिकायतों को शासन बहुत गंभीरता से ले रहा है और भविष्‍य में कोई भी ऐसा काम न करे, इसके लिए तत्‍काल प्रभाव से मैं जे.डी. हमारे संभागीय अधिकारी, रीवा को निलंबित करता हूँ और उसकी जांच एक महीने के अंदर यहां से किसी अधिकारी को भेजकर मैं कराऊंगा.

श्रीमती शीला त्‍यागी -- माननीय मंत्री जी, धन्‍यवाद.

सामु. स्‍वा. केन्‍द्र के नवनिर्मित भवन में विद्युत कनेक्‍शन

11. ( *क्र. 2935 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या राजगढ़ जिले की विधानसभा क्षेत्र ब्‍यावरा के अंतर्गत सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र सुठालिया का भवन निर्माण का कार्य पी.आई.यू. लोक निर्माण विभाग राजगढ़ द्वारा पूर्ण किया जाकर दिनांक 16.01.16 को विभाग के अधिपत्‍य में सौंप दिया गया है? यदि हाँ, तो क्‍या बाहरी विद्युत कनेक्‍शन के अभाव में उक्‍त स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र नवीन भवन में स्‍थानांतरित नहीं हो पा रहा है? यदि हाँ, तो प्रश्‍न दिनांक तक विभाग द्वारा इस संबंध में क्‍या कार्यवाही की गई? (ख) क्‍या उक्‍त नवीन भवन में बाहरी विद्युत कनेक्‍शन का प्राक्‍कलन स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा दिनांक 27.11.2015 से पी.आई.यू. लोक निर्माण विभाग राजगढ़ को प्रेषित डी.पी.आर. के संबंध में आवश्‍यक राशि स्‍वीकृति हेतु पुन: पी.आई.यू. लोक निर्माण राजगढ़ द्वारा स्‍वास्‍थ्‍य विभाग को प्रस्‍ताव प्रेषित कर दिया गया है? यदि हाँ, तो कब तक बाहरी विद्युत कनेक्‍शन कार्य करवा दिया जावेगा? (ग) क्‍या सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र सुठालिया के नवनिर्मित भवन से नगर सुठालिया पहुंच मार्ग के मध्‍य स्थित नाले पर पुलिया नहीं होने से वर्षाकाल में रोगियों व गंभीर पीड़ि‍त व्‍यक्तियों का आवागमन अवरूद्ध हो जाएगा? यदि हाँ, तो क्‍या शासन उक्‍त पहुंच मार्ग पर स्थित नाले पर पुलिया निर्माण करवाएगा? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। स्वीकृति हेतु कार्यवाही प्रचलन में है। (ख) मुख्य खण्ड चिकित्सा अधिकारी, सुठालिया द्वारा दिनांक 27.11.2015 को बाह्य विद्युत कनेक्शन हेतु प्राक्कलन संभागीय परियोजना यंत्री पी.आई.यू. लोक निर्माण विभाग, राजगढ़ को प्रेषित किया गया एवं संभागीय परियोजना यंत्री पी.आई.यू. लोक निर्माण विभाग, राजगढ़ द्वारा उनके पत्र दिनांक 30.11.2015 द्वारा अतिरिक्त परियोजना संचालक पी.आई.यू. लोक निर्माण विभाग को प्रेषित किया गया, किन्तु उनके द्वारा स्वास्थ्य विभाग को कोई प्राक्कलन प्रेषित नहीं किया गया, बल्कि मुख्य चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी राजगढ़ ने दिनांक 30.04.2016 को इसकी स्वीकृति हेतु प्राक्कलन संचालनालय स्वास्थ्य सेवायें को प्रेषित किया गया, जिसकी स्वीकृति की कार्यवाही प्रचलन में है। यथाशीघ्र। (ग) जी नहीं, बल्कि स्वास्थ्य केन्द्र की बाउण्‍ड्रीवाल के बाहर एक अतिरिक्त रास्ते के नाले पर पुलिया निर्माण किये जाने हेतु रोगी कल्याण समिति की बैठक दिनांक 15.06.2016 में मुख्य नगरपालिका अधिकारी सुठालिया को पुलिया निर्माण किये जाने हेतु निर्देशित किया गया है। कार्य नगरपालिका सुठालिया द्वारा किया जाना है। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं। शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री नारायण सिंह पंवार -- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं आपके माध्‍यम से माननीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि मेरी विधान सभा क्षेत्र ब्‍यावरा के टप्‍पा केन्‍द्र, सुठालिया में पिछले डेढ़ वर्ष से सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र का भवन बनकर तैयार है लेकिन बाहरी विद्युत कनेक्‍शन के अभाव में वह हॉस्‍पिटल चालू नहीं हो पा रहा है और यह शहर के बाहर स्‍थित होने के कारण इसमें असामाजिक तत्‍वों द्वारा लगातार तोड़फोड़ की जा रही है. इसमें ट्रांसफार्मर वगैरह लगे और कनेक्‍शन हो इसके लिए प्रयास जारी है और अतिरिक्‍त परियोजना संचालक पी.आई.यू. लोक निर्माण विभाग द्वारा प्रस्‍ताव भी विभाग को भेज दिया गया है. मेरा निवेदन यह है कि तत्‍काल ट्रांसफार्मर लगे और माननीय मंत्री जी यह बताने का कष्‍ट करें कि विभाग ने अभी तक क्‍या कार्यवाही की है ?

श्री रुस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बात सही है कि ब्‍यावरा के अंतर्गत सुठालिया का नया सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र बनकर तैयार हो गया है और लगभग 6 महीने पहले दिनांक 16.01.2016 को यह हैंडओवर भी हो गया है लेकिन उसमें बिजली फिटिंग नहीं थी, उसका एस्‍टीमेट बन गया है, स्‍वीकृति में है और बहुत जल्‍दी उसको बिजली प्रदाय करने की व्‍यवस्‍था कर दी जाएगी.

श्री नारायण सिंह पंवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं निवेदन करता हूँ कि उसकी कोई समय-सीमा तो होगी, लगातार 8 माह से हम भी संपर्क में हैं, पी.आई.यू. अधिकारियों से हम बात कर रहे हैं लेकिन माननीय मंत्री जी से मैं समय-सीमा पूछना चाहता हूँ कि कब तक यह काम हो जाएगा क्‍योंकि उस भवन के कांच वगैरह और खिड़कियां आदि भी लोग निकालने लग गए हैं.

श्री रुस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य की चिंता सही है और समय-सीमा के बारे में मैं बताना चाहूंगा कि हम पूरा प्रयास करेंगे कि एक महीने में यह हो जाए.

श्री नारायण सिंह पंवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसके लिए धन्‍यवाद. मेरा एक प्रश्‍न और है कि इसी अस्‍पताल के रास्‍ते पर एक पुलिया न होने के कारण रास्‍ता बाधित है, हालांकि मैंने नगर पालिका को संपर्क किया है लेकिन फिर भी विभाग बनाएगा तो वह ज्‍यादा उत्‍तम होगा क्‍योंकि और कोई रास्‍ता नहीं है और नगर पंचायत बहुत छोटी है उसके पास ज्‍यादा साधन नहीं हैं. वहां पर रास्‍ता बंद है.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी, पुलिया के लिए कुछ कर सकेंगे.

श्री रुस्‍तम सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रास्‍ता तो है लेकिन शॉर्टकट जो आता है पुलिया, यह बहुत अच्‍छे विधायक हैं मैं इनसे आग्रह करूंगा कि स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के पास पुलिया बनाने के लिए पैसा नहीं रहता है, यह विधायक निधि से पैसा दे दें, विधायक निधि दो करोड़ है, यह इतनी चिंता कर रहे हैं तो माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विधायक जी को पैसा दे ही देना चाहिए और आज घोषणा भी कर देनी चाहिए.

श्री नारायण सिंह पंवार -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद.

अम्‍बेडकर मंगल भवन का निर्माण

12. ( *क्र. 138 ) श्रीमती चन्‍दा सुरेन्‍द्र सिंह गौर : क्या आदिम जाति कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या खरगापुर विधान सभा क्षेत्र के नगर पलेरा सहित बल्‍देवगढ़ एवं निवाड़ी के लिये वर्ष 2013-14 में अम्‍बेडकर मंगल भवन स्‍वीकृत हो गये थे और बल्‍देवगढ़ तथा निवाड़ी में बनाये जा चुके हैं, परन्‍तु पलेरा में शासन स्‍तर पर अस्‍वीकृत कर दिया गया था? यदि हाँ, तो कारण स्‍पष्‍ट करें (ख) क्‍या भवन निर्माण भूमि के अभाव में निरस्‍त किया गया जबकि भवन हेतु भूमि पर्याप्‍त है? क्‍या अनु. जाति के व्‍यक्तियों की विशेष मांग और आम जनता की विशेष आवश्‍यकता को देखते हुए उसे पुन: स्‍वीकृत कर राशि जारी कर अम्‍बेडकर मंगल भवन निर्माण करायेंगे? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें (ग) क्‍या उक्‍त अम्‍बेडकर भवन को जनहित में निर्माण करने हेतु स्‍वीकृति‍ प्रदान करेंगे?

आदिम जाति कल्याण मंत्री ( श्री ज्ञान सिंह ) : (क) जी हाँ। डॉ. अम्‍बेडकर मंगल भवन, बल्‍देवगढ़ का कार्य प्रगति पर तथा निवाड़ी में ले-आउट दिया गया है। आयुक्‍त, अनुसूचित जाति विकास, मध्‍यप्रदेश के पत्र क्रमांक 4735 दिनांक 12 सितम्‍बर, 2013 द्वारा सभी जिला अधिकारियों को इस आशय के निर्देश दिये गये थे कि एक ही स्‍थान पर दो बार अम्‍बेडकर भवन का निर्माण नहीं हो। चूंकि पलेरा में पूर्व से डॉ. अम्‍बेडकर मंगल भवन का निर्माण किया जा चुका है, इसलिये पुन: अम्‍बेडकर मंगल भवन का निर्माण नहीं कराया गया। (ख) जी नहीं। पलेरा में विभाग द्वारा डॉ. अम्‍बेडकर मंगल भवन का निर्माण पूर्व से किया जा चुका है अत: प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) प्रश्‍नांश () के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्रीमती चन्दा सुरेन्द्र सिंह गौर-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न है कि खरगापुर विधानसभा के नगर पलेरा में अंबेडकर मंगल भवन वर्ष 2013-14 में स्वीकृत हुआ था परन्तु शासन स्तर से ही इसको निरस्त कर दिया गया था. आज आम जनता की मांग और आवश्यकतानुसार क्या उसे पुनः स्वीकृत कर निर्माण कराएंगे.

श्री ज्ञान सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, खरगापुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बल्देवगढ़ और निवाड़ी में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नाम से सामुदायिक भवन बनाये जाने की स्वीकृति दी गई थी चूंकि पलेरा में इसके पहले ही मंगल भवन बन चुका था इस कारण से वहाँ पर दुबारा बनाया जाना असंभव है.

श्रीमती चन्दा सुरेन्द्र सिंह गौरमाननीय अध्यक्ष महोदय, पलेरा में अंबेडकर मंगल भवन है ही नहीं इसीलिये मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहती हूं कि आप और आपके विभाग प्रमुख सदन में बता दें कि किस वर्ष में पलेरा में अंबेडकर भवन बनाया गया है, कितनी राशि से बनाया गया है और कहाँ पर भवन है, उस स्थान का नाम बता दे व किस रंग से पुताई की गई है वह बता दें. माननीय अध्यक्ष महोदय, सदन में असत्य जानकारी दी जा रही है, पलेरा में कोई अंबेडकर भवन नहीं है और असत्य जानकारी देना ठीक नहीं है.

श्री ज्ञान सिंहमाननीय अध्यक्ष महोदय, मैं पहले भी माननीय सदस्या को अवगत करा चुका हूं कि निवाड़ी और बल्देवगढ़ में दोनों सामुदायिक भवन प्रगति पर हैं चूंकि पलेरा में इसके पहले मंगल भवन बन चुके हैं पलेरा में 19 लाख 16 हजार की लागत से नगरपालिका के द्वारा भवन बनाया गया है.

श्रीमती चन्दा सुरेन्द्र सिंह गौरमाननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने मार्च में यह प्रश्न लगाया था तो उस समय माननीय मंत्री जी का जवाब आया था कि बजट के अभाव के कारण यह लंबित है. आज कागजों में भवन निर्माण हो गया है. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से पुनः अनुरोध करती हूं कि पलेरा में अंबेडकर मंगल भवन नहीं है फिर भी दुबारा बनाने की बात सही नहीं है. जब मंगल भवन नहीं है तो आप अपने अधिकारियों के साथ पलेरा चलें.

अध्यक्ष महोदयमंत्री जी, आप इस बात की जांच करा लें, माननीय सदस्या कह रही हैं कि वहाँ भवन नहीं है.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, सदस्या का आरोप है, उनके विधानसभा क्षेत्र का मामला है वह बड़े दावे के साथ कह रही है कि मंगल भवन बना ही नहीं है और मंत्री जी कह रहे हैं मंगल भवन बना है तो मेरा विनम्र अनुरोध है कि माननीय विधायक की उपस्थिति में किसी अधिकारी को भेजकर जांच करा लें.

अध्यक्ष महोदय-- आप बैठ जाएं. मंत्री जी, आप इसकी जांच करा लें.

श्री ज्ञान सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय,यह तो सर्वविदित है कि बाबा साहब के नाम पर उनकी जन्मस्थली से लेकर के जब कभी अगर अच्छे विकास के काम हुए हैं तो वह हमारे शासनकाल में हुए हैं . मैं इसको दिखवा लूंगा.

श्री रामनिवास रावत-- सरकार ने तो काम किये हैं लेकिन आप भी तो करिये.

अध्यक्ष महोदय-- मंत्री जी, आप इसको दिखवा लीजिये व माननीय सदस्या को अवगत भी करा दीजिये.

श्री ज्ञान सिंहअध्यक्ष महोदय, बहुत अच्छे काम हो रहे हैं मैं आपको आश्वस्त कराना चाहूंगा कि माननीय सदस्या की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यदि नये भवन बनाये जाने की आवश्यकता पड़ेगी तो हम बाबा साहब के नाम पर ऐसे वर्ग के लोगों को सुख सुविधा उपलब्ध हो सके इसमें कतई पीछे नहीं रहेंगे. ...(व्यवधान)...

श्री रामनिवास रावत-- नरोत्तम जी, जरा तो देखो, क्यों सदन को मजाक बना रहे हो.

श्री हरदीप सिंह डंग-- अध्यक्ष महोदय, इसकी जांच करवा लें.

अध्यक्ष महोदय-- वह जांच कराएंगे...(व्यवधान)..

श्री रामनिवास रावत-- आसंदी भी कह रही है, सदस्या भी कह रही हैं, संसदीय मंत्री जी हस्तक्षेप करें क्यों मजाक बनवा रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय--- माननीय मंत्री जी, आप इसकी जांच करा लें आपकी और सदस्या की बात में सीधा-सीधा डिफरेंस समझ में आ रहा है इसलिए उसकी जांच करा लें और माननीय सदस्या को अवगत करवा दें.

श्री ज्ञान सिंह--- माननीय अध्यक्ष महोदय, आसंदी के आदेश का अवश्य पालन किया जाएगा, जांच करवा ली जाएगी.

 

नीमच जिला चिकित्‍सालय द्वारा रेफर किये गये मरीज

13. ( *क्र. 2253 ) श्री दिलीप सिंह परिहार : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नीमच जिला चिकित्‍सालय द्वारा 1 अप्रैल 2014 से प्रश्‍न दिनांक तक कितने मरीजों को इलाज के अभाव में रेफर किया गया? (ख) प्रश्‍नांश (क) के प्रकाश में ऐसे कितने मरीज हैं, जिनको रेफर किया गया और उनकी रास्‍ते में इलाज के अभाव से या समय पर इलाज न मिलने के कारण मृत्‍यु हो गई? नाम सहित बतायें। (ग) उक्‍त अवधि के कितने ऐसे मामले हैं, जिसमें इलाज के अभाव में मरीज की मृत्‍यु होने के कारण चिकित्‍सकों की शिकायतें प्रशासन को की गई? (घ) क्‍या प्रश्‍नांश (ग) में प्राप्‍त शिकायत पर प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, तो तत्‍संबंधी ब्‍यौरा दें।

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) नीमच जिला चिकित्सालय द्वारा 01 अप्रैल 2014 से प्रश्न दिनांक तक रेफर किये गये मरीजों की वर्षवार जानकारी निम्नानुसार है :- 

वर्ष

रेफर किये गये मरीजों की संख्या

2013-14

420

2014-15

315

2015-16

565

 

कुल योग : 1300

 

(ख) रेफर किये गये मरीजों की रास्ते में ईलाज के अभाव में अथवा समय पर ईलाज न मिलने के कारण हुई मृत्यु की जानकारी 01.04.2014 से आज दिनांक तक की निम्नानुसार है :- (1) काली बाई (2) गजेन्द्र (3) शान्तिबाई जुना बधाना रामपुरा जिला नीमच (4) बाली बाई पति लक्ष्मीनारायण मनासा (5) चेनराम सुवाखेडी जिला नीमच (ग) इस संबंध में कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई। (घ) प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

 

श्री दिलीप सिंह परिहार--- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री जी से यह पूछना चाहता हूं कि नीमच जिले में जिला चिकित्सालय है, मनासा और जावद से रेफर होकर के केस नीमच में आए वह तो समझ में आता है. मगर नीमच जिला चिकित्सालय से बिना इलाज किये लोगों के रेफर करने की जो पद्धति चल रही है उसकी वजह से जनता में असंतोष है और जो मेरे प्रश्न के उत्तर में जानकारी आई है उसमें यह बात आई है कि कई लोगों को रेफर किया गया है और मैं बताना चाहता हूं कि 5 जून 2016 को जमुनाबाई पति राजू यादव उम्र 37 वर्ष की मृत्यु हुई , मैं स्वयं वहाँ था उनका इलाज नहीं किया गया, गैस की टंकी फटी थी और उसका खून बह रहा था, वहाँ पर उसका प्रॉपर इलाज नहीं किया उसको रेफर कर दिया और उसकी बीच रास्ते में ही उसकी मृत्यु हो गई तो यह भी असत्य जानकारी दी है. मैं मंत्री महोदय से पूछना चाहता हूं कि वर्ष 2015-16 में जो केस रेफर किये गये हैं उनकी संख्या 565 हैं. इन रेफर किये गये केस का क्या कारण रहा, इसकी समीक्षा कराएंगे क्या.

श्री रूस्‍तम सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य ने जो रेफर करने के संबंध में जो चिंता जाहिर की है, ये बात सही है कि 565 लोगों को वर्ष 2015-16 में रेफर किया गया है और बेहतर इलाज के लिए उन्‍हें रेफर किया गया है. लेकिन मैं माननीय सदस्‍य को आपके मार्फत बधाई देते हुए बताना चाहता हूं कि नीमच में ट्रामा सेंटर पूर्ण होने की ओर है. चार करोड़ इनक्‍याबे लाख की लागत से बन कर ट्रामा सेंटर पूरा हो रहा है और उसके उपकरणों के लिए भी छियत्‍तर लाख रूपये की मंजूर हो गए हैं. ये ट्रामा सेंटर नीमच को आपके प्रयास से प्राप्‍त हुआ है. इसके लिए मैं आपको बधाई देता हूं और आने वाले समय में संभवत: ये रेफर वाला काम अब नहीं होगा.

श्री दिलीप सिंह परिहार- धन्‍यवाद मंत्री महोदय, मैं ये चाहता हूं कि किसी से आप इसकी समीक्षा करा लें, पिछले दिनों लगभग 1300 केस रेफर किए गए हैं. लोगों का इलाज किए बिना ही उन्‍हें उदयपुर रेफर कर दिया जाता है. वहां मध्‍यप्रदेश सरकार द्वारा जारी योजनाओं का लाभ गरीबों को नहीं मिल पाता है. नीमच से लोगों को इतनी दूर भोपाल के हमीदिया अस्‍पताल रेफर कर दिया जाता है. नीमच राज्‍य के अंतिम छोर में है तो मध्‍यप्रदेश सरकार की योजनाओं का लाभ गरीबों को उदयपुर में प्राप्‍त हो. माननीय नरोत्‍तम मिश्रा जी, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने ये घोषणा की थी कि हम उदयपुर के अस्‍पताल में मध्‍यप्रदेश की योजनाओं को लागू करेंगे. क्‍या आप ऐसा कर पायेंगे ?

श्री रूस्‍तम सिंह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सदस्‍य महोदय ये जानना चाहते हैं कि जिन मरीजों को रेफर किया गया क्‍या वे वाकई रेफर करने के लायक थे. क्‍या उनका जिला चिकित्‍सालय में इलाज संभव था ? मैं सामान्‍यत: ये कह सकता हूं कि उनका इलाज संभव नहीं होने के कारण ही उन्‍हें रेफर किया गया. यदि वे चाहते हैं कि रेफर किए गए प्रकरणों को परीक्षण कर लिया जाए, तो मैं वरिष्‍ठ चिकित्‍सकों की टीम भेज कर उक्‍त प्रकरणों का परीक्षण करवा लूंगा.

अध्‍यक्ष महोदय- वो उदयपुर का कह रहे हैं. क्‍या आप उदयपुर में मध्‍यप्रदेश सरकार की योजनाओं को लागू करवा पायेंगे ?

श्री रूस्‍तम सिंह- ये निर्णय नीतिगत है. दूसरे प्रदेश का है. इस पर हम जरूर विचार करेंगे. ताकि हमारी योजनाओं का लाभ गरीबों को उदयपुर के अस्‍पतालों में भी प्राप्‍त हो सके.

अध्‍यक्ष महोदय- प्रश्‍न क्रमांक 14, श्री जतन उईके (व्‍यवधान)

श्री दिलीप सिंह परिहार- वहां जलने वालों का भी इलाज नहीं हो पा रहा है. वहां बर्निंग यूनिट होनी चाहिए. जले हुए लोगों को भी रेफर कर दिया जाता है. कम से कम जिला स्‍तर पर बर्निंग यूनिट हो. (xxx)

श्री राम निवास रावत- (xxx)

अध्‍यक्ष महोदय- कोई प्रश्‍न नहीं होगा अब; सिर्फ श्री जतन उईके का प्रश्‍न आयेगा. नहीं आपकी सारी बात आ गई है. कुछ रिकार्ड में नहीं आएगा.

संतान पालन अवकाश नीति

14. ( *क्र. 1099 ) श्री जतन उईके : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शिक्षा विभाग में महिलाओं को अपने सेवाकाल में संतान पालन हेतु (जिसके बच्‍चे 18 वर्ष से कम) 730 दिनों का अवकाश देने की नीति है? यदि हाँ, तो इसका पालन विभाग में न होने का क्‍या कारण है? (ख) प्रश्‍नांश (क) के संदर्भ में विगत एक वर्षों से प्रश्‍न दिनांक तक छिंदवाड़ा जिले के शासकीय स्‍कूलों में कार्यरत कितनी महिलाओं ने संतान पालन हेतु आवेदन दिए? कितने आवेदन को विभाग ने स्‍वीकृत किया? दिनांकवार, नामवार सूची उपलब्‍ध करायें

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जी हाँ। स्कूल शिक्षा विभाग के अन्तर्गत नियमित शासकीय शिक्षक संवर्ग में कार्यरत महिलाओं को संतान देखभाल अवकाश दिया जा रहा है। अतः शेषांश का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) छिन्दवाड़ा जिले के अन्तर्गत शासकीय विद्यालयों में कार्यरत 09 महिलाओं को संतान पालन अवकाश स्वीकृत किया गया है। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''दो''

श्री जतन उईके- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं अपनी बात बड़ी विनम्रतापूर्वक आपके माध्‍यम से रखना चाहता हूं. मेरा प्रश्‍न माननीय मंत्री जी है कि शिक्षा विभाग में 18 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों की कार्यरत माताओं को कितने दिन के संतान पालन अवकाश का प्रावधान है. उत्‍तर में कहा गया है 730 दिन. लेकिन मेरे जिले के अंतर्गत विगत वर्ष में मात्र 9 महिला शिक्षिकाओं को ये अवकाश प्रदान किया गया है. मेरे पास इसी प्रकार के 25 से 30 प्रकरण आये थे, मैंने डीईओ से संपर्क किया, उनका कहना है कि सहायक अध्‍यापिकाओं के लिए अवकाश का ये प्रावधान नहीं है. माननीय मंत्री जी से मेरा ये प्रश्‍न है कि क्‍या ये नियम सहायक अध्‍यापिकाओं के लिए लागू नहीं होता है ? कृपया बताने का कष्‍ट करें.

कुंवर विजय शाह- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश शासन ने शिक्षा विभाग में जो हमारी बहनें कार्यरत हैं, उन सभी के लिए 180 दिनों के प्रसूति अवकाश का प्रावधान है. जो नियमित शिक्षिकायें हैं उनके लिए 730 दिनों के संतान पालन अवकाश का प्रावधान है. माननीय सदस्‍य ने जो प्रश्‍न उठाया है, उसमें कुछ अनियमित शिक्षिकाओं एवं दूसरे संवर्ग की शिक्षिकाओं को नियमित शिक्षिकाओं की तरह अवकाश प्रदान कर दिया गया था, उसे निरस्‍त किया गया है. जो कुछ भी नियमों में उल्‍लेखित होगा, उसका पालन किया जायेगा.

श्री जतन उईके- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी आदरणीय डॉक्‍टर साहब का प्रश्‍न था, कि हिन्‍दुस्‍तान के वजीरेआजम को राष्‍ट्र के निर्माता खिताब से नवाजा गया. मेरा निवेदन है कि 40 हजार रूपये वेतन मिल रहा है एवं उतना ही काम करने वाले को 20 हजार रूपये वेतन मिल रहा है. तो इस तरह का भ्रम क्यों? और यह जो नियमित वालों को सात सौ तीस दिन का अवकाश प्रदान किया जा रहा है, मेरा अनुरोध है कि अध्यापकों को भी दिया जाए, उस छुट्टी का उन्हें लाभ मिले.

कुँवर विजय शाह-- माननीय अध्यक्ष जी, जो अभी नियमों में है नहीं, आपने ध्यान दिलाया देखेंगे.

जन स्‍वास्‍थ्‍य रक्षकों की पुरूष स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता के रूप में पदस्‍थापना

15. ( *क्र. 2687 ) श्री नथनशाह कवरेती : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मध्‍य प्रदेश के प्रशिक्षि‍त जन स्‍वास्‍थ्‍य रक्षकों को ग्राम आरोग्‍य केन्‍द्र या राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के तहत पुरूष स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता के रूप में पदस्‍थ करने हेतु शासन द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं? (ख) यदि हाँ, तो कब तक जन स्‍वास्‍थ्‍य रक्षकों को ग्राम आरोग्‍य केन्‍द्र या राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्‍वास्‍थ्‍य मिशन के तहत पुरूष स्‍वास्‍थ्‍य कार्यकर्ता के रूप में पदस्‍थ किया जावेगा?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी नहीं। (ख) प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री नथनशाह कवरेती-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश शासन द्वारा जन स्वास्थ्य रक्षकों को प्रशिक्षण देकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा के लिए लगाया गया. मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि ऐसे जन स्वास्थ्य रक्षकों को ग्राम आरोग्य केन्द्र या राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत पुरूष स्वास्थ्य कार्यकर्ता के रूप में कब तक पदस्थ किया जाएगा?

अध्यक्ष महोदय-- उन्होंने उत्तर तो दे दिया.

श्री रुस्तम सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, ये जो जन स्वास्थ्य रक्षक वाला जो सेवा का कार्य लिया गया था, 1995-96 से शुरू हुआ था, पाँच सौ रुपये देकर और वे स्वयंसेवी के रूप में कार्य करते थे. 2005-06 से वह कार्यक्रम ही, यह सब खत्म होकर, अब आशा कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं. अब कोई जन स्वास्थ्य सेवक मध्यप्रदेश में नहीं है इसलिए उनकी बाकी सब चीज के बारे में बोलने का कोई औचित्य नहीं है.

जननी वाहनों के संचालन के नियम/निर्देश

16. ( *क्र. 872 ) श्री रामपाल सिंह : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शहडोल जिले के समस्‍त विकासखण्‍डों में महिलाओं को प्रसूति हेतु लाने एवं छोड़े जाने हेतु लगाई जाने वाली जननी वाहनों के संबंध में क्‍या नियम-निर्देश हैं? विगत 3 वर्षों में कितने वाहन कब से किस अवधि तक, किस दर पर, किस फर्म के लगाये गये हैं? उक्‍त अवधि में उक्‍त फर्म को किये गये भुगतान एवं कार्य की पूर्ण जानकारी उपलब्‍ध करायें (ख) शहडोल जिला चिकित्‍सालय क्षेत्रांतर्गत समस्‍त विकासखण्‍ड में कुल कितने वाहन चालू हालत में हैं तथा कितने वाहन खराब स्थिति में हैं तथा कितने किस-किस कार्य में किसके द्वारा उपयोग में लिये जा रहे हैं? नाम, नंबर एवं वाहन चालक सहित व्‍यय की जानकारी उपलब्‍ध करावें (ग) विगत 03 वर्षों में सभी वाहनों की मरम्‍मत एवं ईंधन पर व्‍यय की जानकारी उपलब्‍ध करावें (घ) क्‍या वर्तमान में किसी विकासखण्‍ड में शासकीय कार्य हेतु प्रायवेट वाहन भी अनुबंधित किये गये हैं? यदि हाँ, तो उक्‍त वाहनों हेतु जारी निविदा एवं आदेश की प्रति उपलब्‍ध करावें

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) शहडोल जिले में महिलाओं को प्रसूति हेतु लाने एवं छोड़े जाने हेतु लगाई जाने वाली जननी वाहनों के संबंध में नियम-निर्देश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''एक'' अनुसार है। शेष प्रश्‍नांश की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''दो'' अनुसार है। (ख) शहडोल जिला चिकित्सालय क्षेत्रान्तर्गत समस्त विकासखण्ड में कुल 22 वाहन हैं, जिसमें से 17 वाहन चालू हालत में हैं तथा 05 वाहन खराब स्थिति में हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''तीन'' अनुसार है। (ग) विगत 03 वर्ष में सभी वाहनों की मरम्मत एवं ईंधन पर व्यय की जानकारी निम्नानुसार है :-

वर्ष

पी.ओ.एल. (राशि रू. में)

मरम्मत (राशि रू. में)

2013-14

1068094.00

2874607.00

2014-15

776081.00

1914512.00

2015-16

464701.00

1971175.00

 

(घ) जी हाँ। वर्तमान में खण्ड चिकित्सा अधिकारियों के लिये मोबिलिटी सपोर्ट हेतु 5 वाहन तथा आर.बी.एस.के. हेतु 02 वाहन प्रति विकासखण्‍ड के मान से कुल 10 वाहन अनुबंधित किये गये हैं। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''चार'' अनुसार है।

श्री रामपाल सिंह(ब्यौहारी)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से मैं पहला प्रश्न यह पूछना चाहूँगा कि क्या शहडोल जिले में संचालित जननी वाहनों के चालकों द्वारा हितग्राहियों के साथ रूखा व्यवहार किया जाता है एवं समय पर वाहन उपलब्ध नहीं कराई जाती है? साथ में कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो पिछड़े क्षेत्र हैं, आवागमन को दृष्टिगत रखते हुए, क्या जननी वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी?

श्री रुस्तम सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जननी वाहनों की जो संख्या है वह व्यवस्था के मान से ठीक है. लेकिन जहाँ जरुरत होती है वहाँ इसी तरह की प्रसूताओं के लिए, डिलेवरी के लिए जाने की जरुरत है, उसमें एक सौ आठ वाले जो वाहन हैं हम उसका भी उपयोग करते हैं इसलिए दोनों के उपयोग से वह पूर्ति हो जाती है और फिर भी माननीय विधायक महोदय यह हमको बताते हैं तो मैं आपके मार्फत उनको यह आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हमको बता दें कहाँ इस तरह की दिक्कत हो रही है. आवश्यकता होगी तो हम वह भी बढ़ा देंगे.

श्री रामपाल सिंह-- अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से दूसरा प्रश्न यह पूछना चाहता हूँ कि क्या शासन ऐसी व्यवस्था करेगा कि हितग्राहियों द्वारा लाभ प्राप्त करने के उपरांत सेवा अदायगी का प्रमाण-पत्र देने के उपरांत ही भुगतान की कार्यवाही की जाए. मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि जननी चालकों के पास कार्य प्रमाण-पत्र का प्रपत्र उपलब्ध कराया जाए एवं जननी को प्रसव केन्द्र पर पहुँचाने के बाद परिजनों से उक्त प्रमाण-पत्र हस्ताक्षर के उपरांत ही कार्य पूर्ण माना जाए. क्या ऐसी व्यवस्था आप करेंगे?

श्री रुस्तम सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, इन्होंने नीतिगत बात की है. सुझाव बहुत अच्छा है. यह केवल एक विधान सभा के लिए ही नहीं यह व्यवस्था पूरे प्रदेश के लिए करनी होगी. उस पर विचार कर लेंगे, परीक्षण कर लेंगे, औचित्य आएगा तो जरूर कर देंगे.

प्रश्न संख्या-- 17 (अनुपस्थित)

शासकीय हाई स्‍कूल का निर्माण

18. ( *क्र. 1032 ) श्री दिव्‍यराज सिंह : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विधानसभा क्षेत्र सिरमौर अंतर्गत ग्राम बेलवा सुरसरी सिंह में बारहवें वित्‍त से शासकीय हाई स्‍कूल का निर्माण कराने हेतु राशि सांसद निधि से प्रदाय की गई थी, किन्‍तु आज तक निर्माण कार्य अधूरा रहने का क्‍या कारण है? (ख) उक्‍त भवन का निर्माण कार्य कब तक पूर्ण होगा?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) जी हाँ। निर्माण कार्य हेतु पूर्ण राशि प्राप्त न होने के कारण कार्य अधूरा है। (ख) राशि प्राप्‍त होने के पश्‍चात। समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है।

श्री दिव्यराज सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूँ कि मेरे सिरमौर विधान सभा में ग्राम बेलवा सुरसरी सिंह के शासकीय हाई स्कूल का एक भवन है जो कई सालों से अभी भी अधूरा पड़ा हुआ है. उसके लिए अगर कुछ राशि वे प्रदान कर दें तो यह भवन पूरा कंपलीट हो सकेगा.

कुँवर विजय शाह-- माननीय अध्यक्ष जी, बहुत सारे निर्माण कार्य जो, कहीं निर्माण एजेन्सी की लापरवाही से या कहीं वित्त के अभाव में पूरे प्रदेश में शिक्षा विभाग में लंबित हैं, उसकी हम गंभीरता से मॉनिटरिंग कर रहे हैं और जैसा मैंने पहले भी कहा है, हर सप्ताह हम लोग व्हीसी में इसकी समीक्षा भी करेंगे और अभी जो माननीय विधायक जी ने मामला उठाया है. 2005 का है अभी तक नहीं बना है उसकी लागत ही दोगुनी हो गई है. इसमें 8000 रुपए की राशि और चाहिए यह तत्काल दे दी जाएगी और तीन-चार महीने में भवन पूरा कर दिया जाएगा.

श्री दिव्यराज सिंह--माननीय मंत्री जी धन्यवाद.

 

जीर्ण-शीर्ण स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्रों के भवनों का निर्माण

19. ( *क्र. 3126 ) श्री विष्‍णु खत्री : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या बैरसिया विधानसभा की स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिये ग्राम दिल्‍लौद के पूर्व निर्मित जीर्ण-शीर्ण भवनों के स्‍थान पर नवीन भवन एवं ईटखेड़ी सड़क स्थित स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र को प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र के रूप में उन्‍नयित करते हुए पूर्व निर्मित जीर्ण-शीर्ण भवन के स्‍थान पर नये भवन का निर्माण किये जाने की आवश्‍यकता प्रतीत होती है? (ख) प्रश्‍नांश (क) यदि हाँ, तो इस संबंध में विभाग द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई है? इन स्‍थानों पर नवीन भवनों के लिये कब तक बजट उपलब्‍ध कराया जावेगा?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी हाँ, ग्राम दिल्लौद में नवीन उपस्वास्थ्य केन्द्र भवन की स्वीकृति हेतु कार्यवाही प्रचलन में है। उप स्वास्थ्य केन्द्र ईटखेड़ी सड़क का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन हेतु मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी भोपाल से विस्तृत जानकारी मंगाकर परीक्षण उपरांत आवश्‍यक कार्यवाही की जावेगी। (ख) प्रश्‍नांश (क) के उत्तर के परिप्रेक्ष्य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। निश्चित समयावधि बताया जाना संभव नहीं है।

श्री विष्णु खत्री--माननीय अध्यक्ष महोदय,बैरसिया विधान सभा क्षेत्र के दिल्लौद उप स्वास्थ्य केन्द्र का भवन जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है. यह लगभग 42 वर्ष पूर्व बना था. इसी तरह से ईंटखेड़ी सड़क का उप-स्वास्थ्य केन्द्र भी जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है इसमें नवीन भवन की आवश्यकता है. इसके लिए मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूँ कि इन दोनों स्थानों पर नवीन उप-स्वास्थ्य केन्द्र, विशेष रुप से दिल्लौद में नवीन भवन और ईंटखेड़ी सड़क का जो उप स्वास्थ्य केन्द्र है, चूंकि ईंटखेड़ी बड़ा गांव है तो वहां पर उप-स्वास्थ्य केन्द्र का प्राथमिक उप-स्वास्थ्य केन्द्र में उन्नयन करते हुए नवीन भवन देने का मेरा मंत्री जी से आग्रह है.

श्री रुस्तम सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, उन्नयन के लिए परीक्षण करा लेंगे बाकी जो उप-स्वास्थ्य केन्द्र के भवन की जीर्ण-शीर्ण हालत है उसको ठीक कराने के लिए या आवश्यकता है तो नया बनाने के लिए और प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के भवन के बारे में भी वस्तुस्थिति दिखवाकर, जानकारी लेकर माननीय सदस्य की इच्छानुसार अगर स्थिति खराब है तो उस पर हम कार्यवाही करा देंगे.

श्री विष्णु खत्री--माननीय अध्यक्ष महोदय, दिल्लौद में नवीन भवन का माननीय मंत्रीजी आश्वासन दे दें. रखरखाव की बजाय नवीन भवन का आश्वासन दे दें तो अच्छा होगा.

श्री रुस्तम सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं यही कह रहा था कि अगर वह भवन मरम्मत लायक नहीं बचा है तो जरुर नया भवन बना देंगे. जहां तक 42 वर्ष का सवाल है, भवन तो 80 साल पुराने भी हैं और चल रहे हैं और उनमें अस्पताल भी चल रहे हैं यह कोई मापदण्ड नहीं है. भवन कैसा है, यदि वह खराब है तो नया बनवा देंगे.

श्री विष्णु खत्री--माननीय मंत्रीजी धन्यवाद.

शिवपुरी जिले में विद्यालयों का उन्‍नयन

20. ( *क्र. 1566 ) श्री रामसिंह यादव : क्या स्कूल शिक्षा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या विभाग द्वारा शिवपुरी जिले में वर्ष 2016 में कुछ विद्यालयों का उन्‍नयन किया गया है? यदि हाँ, तो कौन-कौन से प्राथमिक से माध्‍यमिक, माध्‍यमिक से हाईस्‍कूल एवं हाईस्‍कूल से हायर सेकेण्‍डरी (10+2) विद्यालयों का उन्‍नयन किया गया है? उन्‍नयन आदेश की प्रति संलग्‍न कर विधानसभा क्षेत्रवार जानकारी दें (ख) क्‍या उक्‍त उन्‍नयन किए गए सभी विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2016-17 में कक्षाएं प्रारंभ हो जाएंगी? यदि नहीं, तो उक्‍त विद्यालयों में नवीन कक्षाएं कब से प्रारंभ होंगी? (ग) क्‍या कोलारस विधानसभा क्षेत्र के कुछ प्राथमिक, माध्‍यमिक, हाईस्‍कूल एवं हायर सेकेण्‍डरी स्‍कूल उन्‍नयन हेतु पात्रता में आए हैं? यदि हाँ, तो कौन-कौन से स्‍कूल उन्‍नयन हेतु पात्रता की श्रेणी में आए हैं? इनके उन्‍नयन के आदेश कब तक जारी होंगे एवं नवीन कक्षाएं कब से प्रारंभ होंगी? (घ) क्‍या कोलारस विधानसभा क्षेत्र के विकासखण्‍ड बदरवास के ग्राम खतौरा के हाईस्‍कूल को हायर सेकेण्‍डरी (10+2) में उन्‍नयन करने के आदेश जारी कर दिए हैं? यदि हाँ, तो आदेश की प्रति संलग्‍न कर जानकारी दें यदि नहीं, तो उन्‍नयन आदेश कब तक जारी कर दिए जाएंगे एवं कक्षाएं कब से प्रारंभ होंगी?

स्कूल शिक्षा मंत्री ( कुँवर विजय शाह ) : (क) किसी प्राथमिक विद्यालय का माध्यमिक विद्यालय में उन्नयन नहीं किया गया है। माध्यमिक/हाईस्कूल/हायर सेकेण्डरी में उन्नयन संबंधी जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट अनुसार है। (ख) जी हाँ। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। (ग) वर्ष 2016-17 के लिए जिलों से प्रस्ताव प्राप्त किए जा रहे है। शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। उन्नयन बजट प्रावधान एवं स्वीकृति पर निर्भर करेगा। निश्चित समय-सीमा बताया जाना संभव नहीं है। (घ) जी नहीं। उत्तरांश (ग) के प्रकाश में प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री रामसिंह यादव--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से जानना चाहता हूँ कि शासन द्वारा याचिका एवं पूर्व विधान सभा सत्र में दी गई जानकारी के अनुसार हाई स्कूल खतौरा का हायर सेकेण्डरी स्कूल में उन्नयन किए जाने के नियम अन्तर्गत एवं पात्रता की श्रेणी में आता है. मंत्री महोदय खतौरा में हायर सेकेण्डरी स्कूल खोले जाने के आदेश कब तक जारी करेंगे ?

कुँवर विजय शाह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश के बच्चों की शिक्षा के लिए हम कृतसंकल्पित हैं और ज्यादा से ज्यादा हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी स्कूल शासन खोलना चाहता है. माननीय सदस्य ने प्रस्ताव दिया है परंतु अब शिक्षा सत्र चालू हो चुका है आप अगले साल की घोषणा कर दीजिए हम चालू करवा देंगे.

श्री रामसिंह यादव--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्रीजी से निवेदन करना चाहता हूँ कि वे आज ही घोषणा कर दें तो बहुत अच्छी बात है, आदेश कब तक जारी करेंगे.

कुँवर विजय शाह--माननीय अध्यक्ष महोदय, चूंकि शिक्षा सत्र चालू हो गया है पुराने स्कूल हमने चालू कर दिए हैं. माननीय सदस्य के निवेदन पर मैंने यह स्वीकार किया है. आने वाले शिक्षा सत्र से हम आपके साथ मिलकर चालू करेंगे.

श्री रामसिंह यादव--बहुत बहुत धन्यवाद.

सतना जिलांतर्गत संचालित नर्सिंग कॉलेज

21. ( *क्र. 57 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सतना जिले में कितने नर्सिंग कॉलेज चल रहे हैं? शासकीय एवं प्रायवेट नर्सिंग कॉलेज की जानकारी दें (ख) क्‍या नर्सिंग कॉलेजों में स्‍वास्‍थ्‍य विभाग द्वारा निर्धारित मापदण्‍डों का पालन किया जा रहा है? सी.एम.एच.ओ. का जाँच प्रतिवेदन प्रस्‍तुत करें (ग) यदि नर्सिंग कॉलेज निर्धारित मापदण्‍डों को पूरा नहीं करते हैं तो इनकी मान्‍यता कब तक समाप्‍त कर दी जायेगी (घ) नर्सिंग कॉलेज के फर्जी पाये जाने पर मान्‍यता देने वाले दोषी अधिकारियों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही की जावेगी?

लोक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री ( श्री रुस्तम सिंह ) : (क) जी नहीं, जिला सतना में शासकीय नर्सिंग कॉलेज संचालित नहीं है। प्रायवेट नर्सिंग कॉलेजों का संचालन एवं नियंत्रण संचालक चिकित्सा शिक्षा विभाग के द्वारा किया जाता है। (ख) से (घ) प्रश्न उपस्थित नहीं होता।

श्री शंकरलाल तिवारी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैंने प्रश्न लगाया था और उस प्रश्न के उत्तर में आया है कि सतना में शासकीय नर्सिंग स्कूल है ही नहीं. जबकि सतना में शासकीय ऩर्सिंग स्कूल पिछले तीन वर्षों से संचालित है और उसके भवन का पैसा यहां से जा चुका है भवन निर्माण नहीं हो पा रहा है. मेरा निवेदन यह है कि वहां पर नर्सिंग के जो प्रायवेट स्कूल चल रहे हैं उनमें गंभीर अनियमितता हो रही है. न उनके पास भवन है न ही अन्य व्यवस्था है, एक बिल्डिंग में बोर्ड लगाकर उन्होंने कॉलेज खोल लिया है. दूसरी बात होम साइंस के बच्चों को नर्सिंग की ट्रेनिंग दे रहे हैं. क्या होम साइंस की छात्राओं को नर्सिंग की ट्रेनिंग दी जा सकती है. मेरे क्षेत्र के नर्सिंग स्कूल का भवन कब तक बनेगा. उत्तर में आया है कि मेरे विभाग का नहीं है. सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा है. नर्सिंग कॉलेज नहीं बन रहा है वहां पर होम साइंस की छात्राओं को नर्सिंग पढ़ा रहे हैं अगर यह सही है तो उत्तर दिलवा दीजिए और कॉलेज की बिल्डिंग बनवा दीजिए.

श्री रूस्‍तम सिंह :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक छोटी सी बात थी इन्‍होंने लिखने में कालेज लिख दिया है. नर्सिंग स्‍कूल हमारा है और नर्सिंग कालेज चिकित्‍सा शिक्षा विभाग का है. हमारा स्‍कूल चल रहा है और कालेज हमारे विभाग का नहीं है. इसलिये आपकी जो कुछ मांग है उस पर विचार करेंगे और शरद जैन जी इसके मंत्री हैं, उनसे भी बात करेंगे. मैं आपको बता देना चाहता हूं कि शरद जैन जी तिवारी जी के व्‍यक्तिगत मित्र हैं.इसीलिये वह उनका सवाल भी हमसे पूछते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय :- प्रश्‍नकाल समाप्‍त.

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

अध्‍यक्ष महोदय :- अभी सिर्फ इनकी बात सुनेंगे. उन्‍होंने मेरी बात सुनकर प्रश्‍नकाल बाधित नहीं किया इसलिये 21 प्रश्‍न भी आ गये हैं. यदि वह शुरू में नहीं बोलते तो 25 प्रश्‍न भी हो जाते तो अब सिर्फ उनको सुनेंगे,इसके बाद शून्‍यकाल की लिखित सूचनाएं, फिर आपको आधे-आधे मिनट की अनुमति देंगे.

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ नरोत्‍तम मिश्र) :- अध्‍यक्ष महोदय, आपने इनको विषय रखने की अनुमति दी है या भाषण देने की.

अध्‍यक्ष महोदय:- विषय रखने की अनुमति दी है.

श्री जितू पटवारी :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद् आपकी कृपा बनी, आपकी कृपा से विषय ही रखूंगा और विषय से बाहर नहीं जाऊंगा. परन्‍तु मेरे पास इतना ज्ञान नहीं है. केवल लाईन पढ़ कर बता दूं, यह स्थिति भी नहीं बनेगी. मैं आपसे यह अनुरोध करना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश शासन ने दलितों के सम्‍मान के लिये, उनके उत्‍थान के लिये कई योजनाएं बनायी और पूरे प्रदेश में यहां तक कि मुख्‍यमंत्री जी ने दलितों को पुराहित बनाने कि बात कही. आज का एक अखबार है डी.बी.पोस्‍ट में एक खबर है.

अध्‍यक्ष महोदय :- यह कार्यवाही से निकाल दीजिये.

श्री जितू पटवारी :- (XXX)

डॉ नरोत्‍तम मिश्र :- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह भ्रम पैदा करने जैसी स्थिति है, मुख्‍यमंत्री जी ने कभी नहीं कहा है. यह डर्टी पोलेटिक्‍स है. इसके अलावा कुछ नहीं है. यह मुख्‍यमंत्री जी ने कब कहा कि पुरोहित बनायेंगे.

श्री मुकेश नायक :- (XXX)

(व्‍यवधान)

(श्री जितू पटवारी, सदस्‍य द्वारा सदन में अखबार दिखाने पर)

अध्‍यक्ष महोदय :- अखबार नहीं बता सकते.

श्री जितू पटवारी :- (XXX)

(व्‍यवधान)

श्री मुकेश नायक :- (XXX)

श्री रामनिवास रावत :- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय :- आप लोग बैठ जाईये. शून्‍यकाल की सूचनाएं, 267- क तहत ली जाती हैं. उसके तहत नियम यह है कि सुबह 9 बजे के पहले जो सूचनाएं दी जायेंगी उनको उसी दिन ले सकते हैं. अथवा उसके बाद अगले दिन के लिये समझी जायेंगी. उनमें से जो सूचनाएं ग्राह्य होती हैं. उसमें से 10 सूचनाएं यहां लेते हैं किन्‍तु कई विषय ऐसे होते हैं, जिनको माननीय सदस्‍य समय पर नहीं दे पाते हैं, किन्‍तु वह उसी दिन उठाने के होते हैं ऐसे माननीय सदस्‍यों को अनुमति दी जाती है. मेरा सदस्‍यों से अनुरोध है कि सिर्फ विषय पर ही बात‍ करें. कोई विषय ऐसा है तो उसके संबंध में कोई ऐसी बात न करें न कोई भाषण दें ताकि उसका कोई राजनैतिक अर्थ न निकाला जा सके, सीधा विषय आ कर के उसके संबंध में बात शासन के सामने आ जाये तो शासन जो भी उसके बारे में कार्यवाही कर सकता है वह करेगा, संज्ञान लेगा या नहीं लेगा. किन्‍तु उनके संज्ञान में लाने के लिये यह बात होती है, भाषण देने के लिये नहीं होती है और अन्‍य विषय प्रतिपादित होने के लिये नहीं होती है. कृपा करके सदस्‍य इसका ध्‍यान रखेंगे.

श्री रामनिवास रावत (विजयपुर)--माननीय अध्यक्ष महोदय, बिल्कुल आपकी बात से सहमत हैं, लेकिन सदस्यों ने स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण दिये हैं, उन विषयों को शून्यकाल में उठाकर आपसे निवेदन तो कर सकते हैं कि उन्हें ग्राह्य कर लिया जाये जितू भाई ने स्थगन दिया है, मैंने ध्यानाकर्षण लगाया है. यह मामला मुख्यमंत्री जी के क्षेत्र का मामला है तो आपसे अनुरोध है कि उसको आप ग्राह्य कर लें.

अध्यक्ष महोदय--उसको उतना लिमिटेड एवं पाईंटेड बोल देते. ॉ

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, 50 दलित परिवारों ने इच्छा मृत्यु का ज्ञापन देकर के मांग की है कि एक महिला ने आत्मघाती कदम उठाकर बच्चे के इलाज न होने के कारण आग लगाकर आत्महत्या कर ली.

अध्यक्ष महोदय--आपने इस पर लिखकर के दिया है.

श्री रामनिवास रावत--अध्यक्ष महोदय, मैंने इस बारे में ध्यानाकर्षण दिया है.

अध्यक्ष महोदय--ठीक है उस पर विचार कर लेंगे.

श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष महोदय, मेरी बात नहीं आयी.

अध्यक्ष महोदय--आपकी बात आ गई है. रामनिवास रावत जी ने यह बात कह दी है बस इतनी बात ही आना है.

श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष महोदय, मेरा अनुरोध है मैं नियम कायदों को पढ़कर के इस सदन में कार्यवाहियों के हिसाब से मैं कार्य करता हूं, पहले बात कह रहा था तो मंत्री जी खड़े हो गये तो अल्टीमेटिली क्या है.

अध्यक्ष महोदय--पहले मंत्री जी खड़े हो गये फिर कोई दूसरे खड़े हो गये.

श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष महोदय, तीन घटनाएं बुदनी की ऐसी हुई हैं. एक घटना सम्मानित सदस्य जी ने अभी बताई उसमें एक घटना और है मैंने पहले भी उसको कहा था आपको उसमें राजनैतिक द्वेषभाव से नहीं देखना चाहिये.

अध्यक्ष महोदय--आप भाषण मत दीजिये आप बोलिये हम सुनने के लिये तैयार हैं.

श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष महोदय, मेरा अनुरोध है कि पांच महीने के बेटे का इलाज न होने पर बुदनी से एक किलोमीटर दूर एक दलित महिला ने खुद की दाह को संस्कार कर दिया है, वह महिला जिन्दा जल गई, वहां जब गया वहां पर गांव के लोगों से बात की वहां पर कांग्रेस एवं बीजेपी लोगों ने यह कहा यह दलित महिला इसलिये जली कि उसके बच्चे का इलाज नहीं हो पाया है.

अध्यक्ष महोदय--आपने इस बारे में लिखकर के दिया है.

श्री जितू पटवारी--उसमें मैंने स्थगन प्रस्ताव दिया है.

अध्यक्ष महोदय--ठीक है.

श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष महोदय, इसमें मेरा अनुरोध यह कि--

अध्यक्ष महोदय--आपकी बात आ गई है.

श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष महोदय, मेरी बात पूरी नहीं आयी है इतना अन्याय उनके परिवार के साथ हुआ है कि उनके ऊपर दहेज उत्पीड़न का केस बात को दबाने के लिये लगा दिया गया है. मुख्यमंत्री जी के निर्वाचन क्षेत्र में इस तरीके का दलित उत्थान मैंने कहीं और नहीं देखा, जो कि मध्यप्रदेश में हो रहा है.

अध्यक्ष महोदय-- आपने जो लिखकर के दिया है उसको देख लेंगे.

श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष महोदय, आप मेरी बात को सुन नहीं रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय--जितू पटवारी द्वारा जो भी बोला जाएगा नहीं लिखा जाएगा.

श्री जितू पटवारी---(XXX)

 

 

 

नियम 267 क के अधीन विषय

(1) नरसिंहपुर क्षेत्र में अतिवृष्टि से फसलों एवं मकानों आदि का नष्ट होना.

श्री जालम सिंह पटेल (नरसिंहपुर)--अध्यक्ष महोदय,मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है.

 

 

 

 

 

 

(2) सीधी व सिंगरोली में नल-जल योजनाओं का बंद होना.

श्री कमलेश्वर पटेल--(सिंगरौली)अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है.

 

 

 

 

 

 

(3) प्रदेश के प्रथम श्रेणी उत्तीर्ण छात्र/छात्राओं की प्रोत्साहन राशि न मिलना.

 

श्री दिनेश राय मुनमुन (सिवनी)-- अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है.

 

 

4.जिला श्‍योपुर अंतर्गत टेंटरा-घोबनी मार्ग के पुर्ननवीनीकरण, डामरीकरण व दोहरीकरण किया जाना

श्री रामनिवास रावत- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्‍यकाल की सूचना पढ़ी हुई मानी जाए ।

अध्‍यक्ष महोदय- श्री रामनिवास रावत जी की शून्‍यकाल की सूचना पढ़ी हुई मानी गई।

5. डॉ. मोहन यादव- (अनुपस्थित)

6. श्री शैलेन्‍द्र जैन- (अनुपस्थित)

 

 

 

 

 

 

7.सरेखा हाईस्‍कूल विकासखण्‍ड परसवाड़ा में घटिया निर्माण कार्य

किया जाना

श्री मधु भगत (परसवाड़ा) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

मेरी विधानसभा क्षेत्र विकासखण्‍ड परसवाड़ा के सरेखा हाईस्‍कूल में वर्ष 2015-16 में भवन निर्माण हेतु उपयोग में लाई जाने वाली सामग्री से निम्‍न गुणवत्‍ता वि‍हीन सामग्री लगाई जाकर घटिया निर्माण कार्य कराया गया है । जिसकी प्रथम दृष्‍टया से प्रमाणित किया जा सकता है । इस मामले की स्‍थानीय स्‍तर पर अधिकारियों से और निर्माणकर्ता ठेकेदार की विभागीय अधिकारियों से सांठगांठ होने का कारण ठेकेदार से पुन: निर्माण नहीं कराया जा रहा है । घटिया निर्माण होने के कारण उपरोक्‍त भवन का कब्‍जा संबंधित संस्‍था ने लेने से मना कर दिया है । अत: मामले की जांच कराकर दोषियों को सजा दी जाए बल्कि हानि की राशि वसूल करने के साथ पुलिस में मामला दर्ज कराया जाए ।

8. दिनांक 8 जुलाई को भारी बारिश से दसवीं की पूरक परीक्षा में छात्र नहीं पहुंच सके. अत: पुन: परीक्षा आयोजित कराई जाना

श्री शैलेन्‍द्र पटेल (इछावर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

दिनांक 8 जुलाई की रात में सीहोर जिले में भारी बारिश हुई पूरा सीहोर 9 जुलाई को अस्‍त व्‍यस्‍त हो गया शहर के अधिकतर मार्ग बंद हो गए और क्षेत्र में नदी नालों में बाढ़ आने से आवागमन बंद हो गया । दिनांक 9 जुलाई को कक्षा दसवीं की परीक्षा थी । कई विद्यार्थी आवागमन न होने से पूरक परीक्षा नहीं दे पाए। विद्यार्थियों के भविष्‍य के मद्देनजर दिनांक 9 जुलाई की पूरक परीक्षा पुन: दिलाई जाए ।

9.प्रदेश में शस्‍त्र लाइसेंस परिवार के सदस्‍यों के नाम स्‍थानान्‍तरण न होना.

श्री लखन पटेल (पथरिया) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

प्रदेश के नागरिकों को सुरक्षा हेतु शस्‍त्र लायसेन्‍स प्रदान किये गये हैं. जिन व्‍यक्तियों को लायसेन्‍स प्रदान किये गये हैं. उनके फोती एवं नामांतरण भी नहीं हो रहे हैं, जिसके कारण जिला स्‍तर एवं थानों में नाजरात जमा बंदूकें हैं, जिनकी संख्‍या हजारों में हैं तथा 20-20 वर्षों से जमा हैं, जिसके कारण शस्‍त्र खराब हो रहे हैं तथा बंदूकें उपयोग लायक नहीं रह गई हैं. नागरिकों की मांग है कि उनके परिवार वालों को शीघ्र लायसेन्‍स समय सीमा में उपलब्‍ध कराये जावे. ऐसी बंदूकें रिवाल्‍वर समय सीमा तय कर नीलाम नहीं होने से शस्‍त्र खराब हो रहे हैं तथा इच्‍छुक लोग इन शस्‍त्रों के उपयोग से वंचित हो रहे हैं. इस उत्‍पन्‍न स्थिति से जनता में रोष व्‍याप्‍त है.

10.शासकीय महाविद्यालयों में अनुसूचित जाति एवं जनजाति के विद्यार्थियों को नि:शुल्‍क प्रवेश नहीं दिया जाना.

श्रीमती झूमा सोलंकी (भीकनगांव) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

मध्‍यप्रदेश में शासकीय महाविद्यालयों में अनुसूचित जाति, जनजाति के विद्यार्थियों को नि:शुल्‍क प्रवेश दिये जाने के शासनादेश हैं. किन्‍तु प्रदेश के महाविद्यालयों में आज भी जनभागीदारी मद से चलने वाले विषयों में भी रू 42,000 तक की राशि अनुसूचित जाति के छात्रों से शुल्‍क के रूप में ली जा रही है. यदि शुल्‍क लेने का प्रावधान नहीं है, जो महाविद्यालयों में लिया जा रहा है, की व्‍यवस्‍था बंद कर जनभागीदारी से संचालित विषयों में नि:शुल्‍क प्रवेश देने के आदेश जारी किया जाना छात्रहित में उचित होगा. जिससे समूचे प्रदेश के अनुसूचित जाति जनजाति वर्ग में असंतोष एवं आक्रोश व्‍याप्‍त है.

12.14 बजे

शून्‍यकाल में उल्‍लेख

गंजबसौदा में ईसीजी,सोनोग्राफी मशीन बंद होना

श्री निशंक कुमार जैन (बासौदा) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गंजबासौदा में ईसीजी मशीन 2 साल से बंद है सोनोग्राफी मशीन एक साल से बंद है । एक्‍स-रे मशीन एक साल से बंद है । अस्‍पताल में यदि एम.डी. डॉक्‍टर की पदस्‍थापना हो जाए । तीन लाख लोगों का केचमेंट एरिया है । दानदान दाता डायलिसिस मशीन देने को तैयार हैं । स्‍वयं सेवी संस्‍थाएं नो प्राफिट नो लास में विदिशा की तरह वहां पर काम करने के लिए तैयार है। पूर्व मंत्री जी भी बैठे हैं वर्तमान् मंत्री जी भी बैठे हैं। सबसे कई बार अनुरोध कर चुका हूं ।

अध्‍यक्ष महोदय- पूर्व नहीं हैं वह भी वर्तमान् हैं ।

श्री निशंक कुमार जैन- अध्‍यक्ष महोदय, वर्तमान तो हैं ही पूर्व स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री हैं ।

अध्‍यक्ष महोदय- ठीक है, ऐसा बोलिए ।

श्री निशंक कुमार जैन-वर्ष 2018 में पूर्व होंगे अभी तो वर्तमान् हैं ।

संसदीय कार्य मंत्री( डॉ. नरोत्‍तम मिश्र)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्तमान में भी हैं और भविष्‍य में भी हैं ।

श्री निशंक कुमार जैन- (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय- दो विषय नहीं । आपका विषय आ गया ।

श्री निशंक कुमार जैन- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक विषय और....

अध्‍यक्ष महोदय- नहीं, शून्‍य काल में तीन चार विषय नहीं होते हैं ।

अध्‍यक्ष महोदय- कुछ नहीं लिखा जाएगा सिर्फ पहला विषय लिखें ।

श्री निशंक कुमार जैन- (XXX)

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया (मंदसौर) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, शनिवार 23 जुलाई, 2016 को रात्रि में रतलाम के मेटरनिटी वार्ड (प्रसूता वार्ड) में 83 वर्ष पुराना अस्‍पताल का भवन, जो सन् 1932 में रियासत काल में बना था, उसके तल मंजिल के ऊपर सन् 2009 में एक नई बिल्डिंग बना दी, जिसकी नींव कमजोर थी. वहां पर एक हृदय विदारक घटना हुई है. रतलाम के मोती नगर के 25 वर्षीय श्री नरेन्‍द्र छोटेलाल लश्‍करी का असामयिक निधन हो गया है. वे काल के गाल में समा गए हैं. होशंगाबाद की बिटिया पप्‍पी वहां से विवाहित होकर, रतलाम उसके ससुराल में थी, उसकी बिटिया का जन्‍म हुआ था. मृतक नरेन्‍द्र ने अपनी बिटिया का पूरी तरह से चेहरा भी नहीं देखा था. शासन की ओर से 4 लाख रूपये की तत्‍काल सहायता दी गई है, मैं उसके लिए आभार व्‍यक्‍त करता हूँ. लेकिन एक बिटिया जो जन्‍म लेते ही अनाथ हो गई है, कम से कम 10 लाख रूपये की राशि, मृतक नरेन्‍द्र के परिवार को दी जानी चाहिए.

श्री जयवर्द्धन सिंह (राधौगढ़) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछले कुछ दिनों से अखबारों में यह खबर आ रही थी कि मेरे परिवार के नाम गुना जिले ........

अध्‍यक्ष महोदय वह बात तो आ गई है, सही खबर भी आ गई है.

श्री जयवर्द्धन सिंह अध्‍यक्ष महोदय, उसमें 2 प्‍वाईन्‍ट्स हैं. शिकायत करने के बाद श्री राजेश जैन, कलेक्‍टर, गुना ने यह घोषणा की कि सामाजिक, आर्थिक सर्वे में चूक हुई है और उन्‍होंने इस चूक को ठीक करने के लिए चिट्ठी प्रमुख सचिव, नागरिक आपूर्ति विभाग को भेजी है. लेकिन कल रात्रि में एक नई खबर मिली जिसे जनसम्‍पर्क विभाग ने पोस्‍ट किया है कि राज्‍य शासन द्वारा यह लिखा हुआ है कि यह सूची बीपीएलस की नहीं थी, यह सूची, असल में उज्‍ज्‍वला योजना है, उसके माध्‍यम से बनी थी. जिसमें एक सामान्‍य जनगणना सूची के माध्‍यम से ये नाम सामने आये थे लेकिन मूल विषय यह है कि जिला प्रशासन कुछ दूसरी बात कर रहा है और राज्‍य शासन कुछ और बात कर रहा है. इसमें सही बात क्‍या है ? और जो अधिकारी और कर्मचारी हैं, जिन्‍होंने गलती की है, क्‍या उन्‍हें सजा होगी ? यह एक विशेष मुद्दा है और जो खबर है, मैं इसे पटल पर रखना भी चाहूँगा.

अध्‍यक्ष महोदय पटल पर नहीं रखेंगे. आपकी बात आ गई है.

श्री जयवर्द्धन सिंह माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन इस पर कार्यवाही तो हो. चूँकि यह एक विशेष मुद्दा है और मैं मानता हूँ कि यह सरकार का षड्यंत्र है, जिसमें हमारे परिवार का नाम बदनाम हुआ है जबकि ऐसी कभी कोई लिस्‍ट नहीं थी. इसमें कार्यवाही होनी चाहिए.

 

श्री मुकेश नायक (पवई) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दमोह में पेयजल समस्‍या को हल करने के लिए सिंचाई विभाग और पी.एच.ई. विभाग के अन्‍तर्गत आने वाले लगभग 72 स्‍टॉप डेम, जिस पर कट लगाये गये थे ताकि स्‍टॉप डेम का पानी जुझारघाट परियोजना में आ सके. अभी वर्षा होने के बाद, वे 72 स्‍टॉप डेम जिन पर कट लगाये गये थे, बिल्‍कुल चकनाचूर हो गए हैं और जिससे राज्‍य शासन को करोड़ों रूपये का नुकसान हुआ है और जो जुझारघाट परियोजना में पानी जाना चाहिए, उसमें जल भराव नहीं हो पाया. जुझारघाट परियोजना को तकनीकी दृष्टि से अनुपयोगी माना गया है. इसलिए मैं शासन से मांग करता हूँ कि इसके लिए जो भी जिम्‍मेदार लोग हों, उन पर कार्यवाही होना चाहिए.

 

श्री बाबूलाल गौर (गोविन्‍दपुरा) अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि एक वर्ष पूर्व इसी सत्र में 1,50,000 करोड़ रूपये की धनराशि का बजट पेश किया गया था और सरकार पर 1,40,000 करोड़ रूपये का मार्केट का कर्ज भी है.

अध्‍यक्ष महोदय आप वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं. क्‍या यह शून्‍यकाल का विषय है ?

श्री बाबूलाल गौर (हंसते हुए) यह अति तारांकित प्रश्‍न है और फिर सरकार से प्रार्थना करूँगा कि .....

अध्‍यक्ष महोदय (श्री गौर की ओर देखते हुए) हम आपसे सीखते हैं. सब सदस्‍य आपसे सीखते हैं और यह सब नये सदस्‍य क्‍या विषय उठायेंगे ?

श्री बाबूलाल गौर यह तात्‍कालिक आवश्‍यकता है. सरकार की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है.

अध्‍यक्ष महोदय यह शून्‍यकाल का विषय नहीं है. मैं पूरे सम्‍मान के साथ कहना चाहता हूँ.

श्री बाबूलाल गौर कर्ज लो और घी पियो सिद्धान्‍त को छोडि़ये.

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन) अब सरकार बच नहीं पायेगी.

श्री मुकेश नायक मंत्री सब बड़े आदमी बन गए हैं.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) माननीय अध्‍यक्ष महोदय, गौर जी हमारे बहुत वरिष्‍ठ नेता एवं सदन के वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं. सबसे वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं. माननीय मुख्‍यमंत्री तथा मंत्री भी रहे हैं. आज अनुपूरक बजट पर चर्चा हो रही है, विनियोग विधेयक पर चर्चा होगी. यह अलग से बोल रहे हैं, समझ में नहीं आ रहा है.

 

(व्‍यवधान)

श्री बाबूलाल गौर-- अध्‍यक्ष महोदय, सही कह रहे हैं मैं रहूंगा नहीं उस समय मुझे दिल्‍ली में एक मीटिंग में जाना है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र सरकार पूरी तरह सावधान है यह वह भी समझ लें और यह भी समझ लें.

श्री बाला बच्‍चन आदरणीय गौर साहब का ध्‍यान सरकार और भारतीय जनता पार्टी पहले ही रख लेती.

श्री गोपाल भार्गव वह हमारे वरिष्‍ठ हैं मैं उन्‍हें क्‍या समझा सकता हूं. आप पूरी तरह से सक्षम हैं. एक गुरु के लिए शिष्‍य समझाए यह तो उल्‍टी गंगा हो जाएगी.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को (पुष्‍पराजगढ़) अध्‍यक्ष महोदय, मध्‍यप्रदेश के अध्‍यापक संवर्ग आज मध्‍यप्रदेश विधानसभा का घेराव करने जा रहे हैं यह बड़ा दुख का विषय है कि एक अध्‍यापक जो दूर दराज दूरांचल में पढ़ाता है और पढ़ाने के साथ अपने हक और अधिकार को मांगने के लिए उसको विधानसभा का घेराव करना पड़ता है. दूसरी बात 25/01/2015 को माननीय मुख्‍यमंत्री द्वारा यह घोषणा की गई कि जनवरी 2016 से सभी को समान कार्य समान वेतन का लाभ दिया जाएगा लेकिन आज तक अध्‍यापकों को यह लाभ नहीं दिया गया.

अध्‍यक्ष महोदयलम्‍बी बात मत करिए.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को शिक्षा विभाग में भी उनका संविलियन करना था शिक्षा विभाग में भी उनका संविलियन नहीं किया गया है मैं सरकार से यह चाहता हूं कि तत्‍काल अध्‍यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन किया जाए और उसका लाभ उन्‍हें दिया जाए.

अध्‍यक्ष महोदय आपकी पूरी बात आ गई है.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को पूरी बात नहीं आई है.

अध्‍यक्ष महोदय आ गई है शून्‍यकाल में लम्‍बी बात नहीं करते.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को यह सब नियमित भी नहीं हुए हैं. 1440 करोड़ रुपए उनकी मेहनत का पैसा सरकार दबा करके शासन चला रही है. मेरा आपसे निवेदन है कि उनके खातों में राशि जमा की जाए.

अध्‍यक्ष महोदय आप बैठ जाइए. अब यह रिकार्ड नहीं किया जाएगा.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय श्री हरदीप सिंह डंग को बुलाया गया है. उसके बाद कुछ रिकार्ड नहीं किया जाएगा. आप लोग अपनी अपनी बात कह देते हैं और दूसरे सदस्‍यों को बोलने नहीं देते हैं. यह बात ठीक नहीं है आप बैठ जाइए. (व्‍यवधान)

श्री हरदीप सिंह डंग (सुवासरा) अध्‍यक्ष महोदय, मैं उनकी इस बात का समर्थन करता हूं कि अध्‍यापकों का संविलियन किया जाए और उनको छठवां वेतनमान दिया जाए. मैं अपनी दूसरी बात रख रहा हूं.

अध्‍यक्ष महोदयआपने उनकी बात क्‍यों रखी. अब आपकी बात खत्‍म हो गई. अपनी- अपनी बात रखिए किसी के वकील बनने की जरूरत नहीं है. अब आप कल आइए इस तरह से समय नष्‍ट नहीं कर सकते हैं.

श्री हरदीप सिंह डंगअध्‍यक्ष महोदय, गायों के चरने की जमीन खत्‍म हो चुकी है. इस संबंध में मैंने ध्‍यानाकर्षण दिया है उसे आप स्‍वीकार करेंगे तो बड़ी कृपा होगी.

श्री शैलेन्‍द्र पटेल - (XXX)

अध्‍यक्ष महोदय यह बात आ गई है बार बार इसी बात को रिपीट न करें यह रिकार्ड में नहीं आएगा. इस तरह से आप समय का दुरुपयोग नहीं कर सकते हैं.

श्री दिनेश राय (सिवनी)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, द्वारा दिनांक 09/07/15 को हमारे यहां कलेक्‍टर को पत्र लिखा गया. जिन्‍दल ग्रुप को भी जमीन अलॉट की गई है. इसके लिए मैंने मंत्री जी से भी बात की तो उन्‍होंने भी स्‍वीकार किया लेकिन मुझे लगातार यह जवाब दिया जा रहा है आपके यहां पी.पी.पी मोड की जो मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा की थी कॉलेज की उसके बारे में कहा जाता है कि हमारे पास जानकारी नहीं है और न वहां मेडिकल कॉलेज खोला जाएगा.

अध्‍यक्ष महोदय यह विषय नहीं है. प्रश्‍न के ऊपर से शून्‍यकाल नहीं उठाया जाएगा. अब नहीं बोलें अब वह विषय गया. इस तरह से छह छह विषय नहीं उठाने देंगे. आपको विषय वही उठाना था जो यहां उठाना था प्रश्‍न पर से आप विषय उठाते हैं यह नहीं चलेगा. कुछ नहीं लिखा जाएगा. नहीं अब किसी का समय नहीं है.

श्री दिनेश राय (XXX)

 


 

..(व्यवधान)..

श्री राजेन्द्र पाण्डे (जावरा) -- अध्यक्ष महोदय, मेरी शून्यकाल की सूचना का विषय इस प्रकार है. जावरा विधान सभा क्षेत्र अन्तर्गत पिपलोदा तहसील और जावरा तहसील पहले से ही सूखाग्रस्त घोषित की जाकर के वहां पर पेयजल संकट बना रहता है. फसलें खराब होती हैं. जावरा तहसील के ग्राम रोला, नेतावली, रीसागूजर, धतरावदा,गोंदीशंकर,मांडवी इत्यादि ग्रामों में बोवनी के पश्चात् फसलें दवाई छिड़कने के कारण पूरी तरह से समाप्त हो गईं. लगभग एक से दो हजार बीघा जो कृषि भूमि है. (व्यवधान)..वहां पर न कृषि अधिकारी पहुंचे, न राजस्व अधिकारी पहुंचे. इससे वहां पर कृषकों में, क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है.

..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- श्री बाला बच्चन. पाण्डे जी, बैठ जाइये. दिनेश राय जी, बैठ जायें. (व्यवधान).. कृपया व्यवस्था बनाने दीजिये. मैंने बाला बच्चन जी को पुकारा है, उनके अलावा कोई नहीं बोलेगा. किसी का कुछ लिखा नहीं जायेगा. श्री बाला बच्चन.

श्री दिनेश राय -- (xxx)

श्रीमती ऊषा चौधरी-- (xxx)

अध्यक्ष महोदय -- बैठ जाइये आप दोनों. अब नहीं, कल बोलें, जिसको बोलना है.

..(व्यवधान)..

श्री राजेन्द्र पाण्डे -- अध्यक्ष महोदय, उनको बीमे की राशि प्राप्त हो जाये.

अध्यक्ष महोदय -- पाण्डे जी, कृपया बैठ जायें. श्री बाला बच्चन.

श्री दिनेश राय -- (xxx)

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्चन)-- अध्यक्ष महोदय, सदन के बहुत सारे साथियों ने जो शिक्षकों की मांग है, उन मांगों को यहां पर उठाया है और उनकी मांगों को यहां पर रखा है. मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब कभी भी चाहे अतिथि शिक्षकों की बात हो, चाहे संविदा शिक्षकों की बात हो, वह अपनी बात को लेकर, अपनी मांगों को लेकर जब वे प्रदर्शन करते हैं, तो सरकार उनके ऊपर लाठी चार्ज करती है, उनको सरकार पीटती है...

 

 

 

12.27 बजे गर्भगृह में प्रवेश

श्री दिनेश राय, सदस्य का गर्भगृह में प्रवेश

(श्री दिनेश राय, निर्दलीय सदस्य अपनी बात कहते हुए गर्भगृह में आये.)

अध्यक्ष महोदय -- आपकी बात आ गई. आप जबरदस्ती थोड़ी कर सकते हैं. आप जबरदस्ती नहीं कर सकते हैं. आप अपनी सीट पर जाइये. आप प्रश्नों पर से शून्यकाल उठाते हैं. आप अपनी सीट पर जाइये.

(अध्यक्ष महोदय की समझाइश पर श्री दिनेश राय अपने स्थान पर वापस चले गये.)

12.28 बजे

बहिर्गमन

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा अतिथि शिक्षक एवं संविदा शिक्षकों की सरकार द्वारा मांगें न माने जाने के विरोध में सदन से बहिर्गमन

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्चन) -- अध्यक्ष महोदय, मैं आपको बताना चाहता हूं कि बहुत सारी मांगें, बहुत दिनों से उनकी पेंडिंग हैं. उनकी मांगों को नहीं माने जाने के कारण, मेरी जानकारी में एक मामला यह भी है कि शिक्षकों की सेलरी से जो राशि कटती है, पेंशन खाते में जमा कराने के लिये 18 माह से 1440 करोड़ रुपये की राशि, जिसका 10 प्रतिशत राज्य सरकार को भरा जाना चाहिये, वह नहीं जमा करती है. इन मुद्दों को लेकर अतिथि शिक्षक और संविदा शिक्षक जब वे प्रदर्शन करते हैं, तो उनके ऊपर सरकार के द्वारा लाठीचार्ज किया जाता है, उनकी मांगों को नहीं माने जाने के कारण, हमारे साथियों ने इस बात को उठाया है. सरकार उनकी बात नहीं मान रही है, इस कारण से हम सदन से बहिर्गमन करते हैं.

(श्री बाला बच्चन, प्रभारी नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा अतिथि शिक्षक एवं संविदा शिक्षकों की सरकार द्वारा मांगें न माने जाने के विरोध में सदन से बहिर्गमन किया गया.)

 

 

 

 

 

 

 

 

12.29 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

 

(1) (क) मध्यप्रदेश विधान मण्डल यात्रा भत्ता नियम,1957 में संशोधन संबंधी अधिसूचना क्रमांक 1524-एफ(3) 20-10-दो-अड़तालीस, दिनांक 5 जुलाई,2016.

(ख) मध्यप्रदेश विधान सभा सदस्य (रेल द्वारा निशुःल्क अभिवहन) नियम,1978 में संशोधन संबंधी अधिसूचना क्रमांक 1528-फा (2)13- 2016-दो-अड़तालीस, दिनांक 5 जुलाई,2016

(ग) मध्यप्रदेश विधान सभा सदस्य (रेल द्वारा निःशुल्क अभिवहन) नियम,1996 में संशोधन संबंधी अधिसूचना क्रमांक 1526-फा (2) 14- 2016-दो- अड़तालीस, दिनांक 5 जुलाई,2016

 

 

(2) (क) मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड का नवम वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2014-2015.

(क) बाणसागर थर्मल पावर कंपनी लिमिटेड का चतुर्थ वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2014-2015.

 

 

 


 

(क)     मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वार्षिक लेखा परीक्ष्‍ाण प्रतिवेदन वर्ष 2014-2015

(ख)    मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वार्षिक लेखा परीक्ष्‍ाण प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016

पर्यावरण मंत्री(श्री अंतर सिंह आर्य) अध्‍यक्ष महोदय मैं -

 

 

 

 

(4)मध्‍यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल का लेखा परीक्षा प्रतिवेदन वर्ष 2014-2015(दिनांक 01.04.2014 से 31.03.2015 तक)

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्रीमती माया सिंह) अध्‍यक्ष महोदय मैं -

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(5)(क)अवधेश प्रताप सिंह, विश्‍वविद्यालय रीवा -

(ख)देवी अहिल्‍या विश्‍वविद्यालय, इंदौर -

 

 

(6) मध्‍यप्रदेश शासन अल्‍पसंख्‍यक आयोग का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2013-2014

 

 

 

 

 

 

12.32 बजे ध्‍यानाकर्षण

(1)प्रदेश में खसरा खतौनी विवरण व्‍यवस्‍था विसंगतिपूर्ण होने से उत्‍पन्‍न स्थिति.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार(सुमावली) अध्‍यक्ष महोदय, मेरे ध्‍यानाकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है-

 

 

 

 

 

 

राजस्व मंत्री(श्री उमाशंकर गुप्ता) -- मानीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार -- माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय मंत्री महोदय ने अपने उत्तर में बताया कि सभी खसरों की खतौनी के लिये 30 रूपये प्रति पेज के हिसाब से अभी जो वेण्डर(निजी ठेकेदार) है, वह ले रहा है. अध्यक्ष जी, वर्तमान व्यवस्था अनुसार किसान को अगर एक खसरे नंबर की नकल चाहिये तो 30 रूपये किसान को वहन करना पड़ते हैं. जबकि पहले जो प्रणाली थी उसमें यह प्रावधान था कि 20 रूपये किसान को देना पड़ता था उसमें 5-6 खसरे नंबर आ जाते थे, लेकिन अब एक खसरा नंबर के 30 रूपये देना पड़ रहे हैं जो कि अभी किसान से ठेकेदार के द्वारा लिये जा रहे हैं.

माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने जो मुझे जबाव दिया है उसमें उल्लेख है कि "सचिव, मध्यप्रदेश शासन, सूचना एवं प्रोद्योगिकी विभाग की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा ए-4 साईज के पृष्ठ पर खसरा, खतौनी एवं नक्शे की नकल 30 रूपये प्रति पृष्ठ के मान से किसानों से वेण्डर(निजी ठेकेदार) द्वारा एकत्रित कर राज्य शासन द्वारा गठित मध्यप्रदेश भू अभिलेख प्रबंधन समिति के खाते में जमा कराई जा रही है ". अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि जितने भी किसान जो नकल निकाल रहे हैं उनको रसीद ही नहीं दी जाती है तो फिर कैसे भू अभिलेख प्रबंधन समिति के खाते में राशि जमा कराई जा रही होगी.

अध्यक्ष महोदय- कृपया प्रश्न करें.

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार -- अध्यक्ष जी, दूसरा मेरा मंत्री जी से यह अनुरोध है कि जो पुरानी व्यवस्था थी वह ज्यादा सुदृढ़ व्यवस्था थी जब 20 रूपये में किसान नकल लेता था उसमें 5-6 खसरा नंबर आ जाते थे और उसके बाद जब दूसरे पेज की किसान को नकल चाहिये होती थी तो उसको 10 रूपये वहन करने होते थे. लेकिन आज किसान को अगर 10 खसरा नंबरों की नकल चाहिये तो उसको 300 रूपये वहन करने पड़ता हैं .इसलिये मेरा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि वे क्या इस नई व्यवस्था को बंद कर पुरानी व्यवस्था को ही हम लागू करेंगे ? क्योंकि जो एनआईएस पद्धति से लगभग 15 राज्यों में यह व्यवस्था चल रही है और जो नई व्यवस्था है उस व्यवस्था का चाहे तहसीलदार संघ हो, चाहे पटवारी संघ हो सभी ने विरोध किया है और मुझे ऐसा लगता है कि यह नई व्यवस्था ज्यादा सुदृढ़ नहीं है. दूसरा मैं माननीय मंत्री महोदय से यह पूछना चाहता हूं, आपने कहा है कि नई व्‍यवस्‍था अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी है. ग्‍वालियर जिले की तहसील का एक खुरेरी गांव है वहां इस सॉफ्टवेयर के कारण लोगों ने शासकीय भूमि प्राइवेट लोगों के नाम चढ़ा दी क्‍योंकि यह जो व्‍यवस्‍था लागू की गई है उसमें सरकारी जमीन का रिकार्ड आ ही नहीं रहा है कि यह किसके नाम चढ़ी है, सरकारी जमीन का कोई रिकार्ड नहीं है उसमें और उसके बाद जब कलेक्‍टर ने जांच की.

अध्‍यक्ष महोदय-- प्रश्‍न पूछे कृपया.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं क्षमा चा‍हता हूं. मैं यह जानना चाहता हूं कि खुरैरी गांव में एक शासकीय जमीन को भू-माफियाओं के नाम कर दिया गया उसके बाद कलेक्‍टर ने वहां जांच बिठाई और 2 महीने इस सॉफ्टवेयर को बंद रखा गया, किसी को नकल नहीं मिली और इसके बाद जब जांच हुई तो 68 ऐसे प्रकरण सामने आये जो गलत तरीके से लोगों के नाम चढ़ा दिये गये हैं, बंटवारे पुराने हैं और नाम चढ़ा दिये गये हैं. क्‍या माननीय मंत्री महोदय यह आश्‍वासन देंगे कि उच्‍च स्‍तरीय जांच करा ली जायेगी और ऐसे दोषी लोगों के खिलाफ क्‍या आप कार्यवाही करेंगे.

राजस्‍व मंत्री (श्री उमाशंकर गुप्‍ता)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नया जो सिस्‍टम लागू हुआ है इसमें प्रारंभिक कुछ कठिनाईयां और विसंगतियां हैं और इसके जो सुझाव आये थे इसलिये 8 जुलाई को अभी एक बैठक हुई थी उसमें काफी अच्‍छे जो सुझाव हैं उन पर विचार किया गया और उनका हम परीक्षण करके बहुत जल्‍दी लागू करेंगे. एक समस्‍या जो माननीय सदस्‍य ने उठाई है कि एक खसरे का ही 30 रूपये लिया जा रहा है, इसके लिये मैंने अपने जवाब में कहा है कि हम इसे सु‍निश्चित करेंगे कि एक पेज में जितने खसरे आ सकते हैं, कारण क्‍या है कंपनी को डाटा हमारे अधिकारी ही उपलब्‍ध कराते हैं, वे जिस प्रारूप में उपलब्‍ध कराते हैं वही कंपनी देती है, जहां तक गलत का सवाल है तो मैंने अपने जवाब में यह भी कहा है कि उसकी नकल पहले वेबसाइट पर देखी जा सकती है, जब किसान सुनिश्चित कर लेता है कि यह ठीक है तो फिर पैसा जमा करके अधिकृत उसकी नकल ले सकता है तो पहले उसको चेक करना है, उसका कोई पैसा नहीं लगता. यह 30 रूपये को भी हम यह कर रहे हैं कि हम 1 पेज में अधिकतम जितने सर्वे एक ही भू-स्‍वामि के आ सकते हैं उससे 30 रूपये सभी सर्वे के लिये जायें, यह कठिनाई है इसको हम दूर कर रहे हैं, और भी जो कठिनाई बताई है, मैंने जैसा कहा कि बहुत से सुझाव आये हैं, उनका समिति ने परीक्षण किया है और बहुत जल्‍दी उन निर्णय को हम लागू करेंगे और दूसरी जिस खुरैरी गांव की घटना बता रहे हैं, निश्चित ही हम उसकी उच्‍च स्‍तरीय जांच करायेंगे और कहीं भी कोई दोषी होगा तो उसके खिलाफ सख्‍त कार्यवाही करेंगे.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि किसानों पर इस व्‍यवस्‍था के कारण करोड़ों रूपये का आर्थिक बोझ पड़ रहा है. वैसे ही किसान 3-4 साल से चाहे सूखा हो, चाहे ओला हो, चाहे पाला हो, चाहे अतिवृष्टि के कारण किसान परेशान है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इस व्‍यवस्‍था में 30 रूपये प्रति पेज के हिसाब से मैं माननीय मंत्री महोदय को बधाई देना चाहता हूं कि उन्‍होंने कहा है कि आपको 4-5 नंबर चाहिये तो एक ही पेज पर आ जायेंगे, उसका 30 रूपये मूल्‍य लिया जायेगा, लेकिन माननीय मंत्री महोदय से मैं यह जानना चाहता हूं कि पहले शासन जब 20 रूपये लेता था उसके बाद ठेकेदार को 30 रूपये प्रति पेज के हिसाब से यह काम सौंप दिया है.

अध्‍यक्ष महोदय-- इसकी समीक्षा कर रहे हैं.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि 10 पैसे इस पेज की लागत आती है और हम 30 रूपये ठेकेदार को एक पेज का ठेका दे दिया है. मैं माननीय मंत्री महोदय से यह कहना चाहता हूं कि क्‍या इस व्‍यवस्‍था को और सुदृढ़ बनाने के लिये आप इस राशि को कम करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- बैठ जायें आप, उत्‍तर ले लें.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जवाब में कहा कि 30 रूपये शासन के खाते में जमा होते हैं, जो टेंडर हुये थे वह जो तय हुआ है अब, कंपनी को उसमें से 13 रूपया दिया जाता है,

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय.

अध्‍यक्ष महोदय-- बैठ जायें आप, हो गया आपका.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहता हूं.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसानों की बात उठा रह है, यह भी तो किसानों का शोषण है.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- यह उन्‍हीं के हित के लिये ही फंड है.

अध्‍यक्ष महोदय-- बैठ जाइये आप, श्री सुखेन्‍द्र सिंह.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बस एक मिनट और चाहता हूं, माननीय मंत्री महोदय से मैं जानना चाहता हूं आपके माध्‍यम से आपने कहा कि हमने यह व्‍यवस्‍था को लागू करके सुदृढ़ बनाया है आज कोई मुझे यह बता दे कि किसान को 30 रूपये लेने के बाद उसकी रसीद दी जाती है तो कैसे सुनिश्चित करेंगे कि यह पैसा सरकार के खाते में जमा हो रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय-- उसकी समीक्षा कर रहे हैं. बोल रहे हैं मंत्री जी कुछ.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार-- मैंने आज जौरा तहसील के एक आरआई, आज अगर सदन चाहेगा तो मैं उसका नाम भी ले दूंगा मैंने उससे पूछा कि क्‍या इसकी नकल मिलती है तो उसने कहा भाई साहब नहीं मिलती, मैं खुद नकल लेकर आया हूं कोई रसीद नहीं कटती इसकी. आप कहेंगे तो मैं उस व्‍यक्ति का नाम भी लेने के लिये तैयार हूं.

अध्‍यक्ष महोदय-- नहीं, नहीं मत लीजिये नाम, बैठ जाइये आप.

श्री उमाशंकर गुप्‍ता-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ज्ञापन जो मिले हैं वह किसानों की तरफ से नहीं मिले हैं इस व्‍यवस्‍था के लिये, एक बात, दूसरी बात यह है कि जब नकल मांगी जाती है तो तहसीलदार के डिजीटल साइन के लिये जाती है, तहसीलदार के जब डिजीटल साइन होते हैं तब ही वह नकल दी जाती है. इसका हिसाब कि कितनी कापी दी गईं, शासन के पास रिकार्ड रहता है.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार-- माननीय मंत्री महोदय, ढाई लाख किसानों के ज्ञापन लेकर आया हूं मैं, आप कह रहे हैं कि किसानों की तरफ से ज्ञापन नहीं है, मेरा ध्‍यानाकर्षण ढाई लाख किसानों का ज्ञापन है यह.

अध्‍यक्ष महोदय-- नहीं, हो गई बात, बैठ जाइये आप. श्री सुखेन्‍द्र सिंह .

 

 

 

 

 

 

 

 

(2) प्रदेश के महाविद्यालयों में आनलाईन प्रवेश से शासकीय कालेजों में प्रवेश न मिलना

श्री सुखेन्द्र सिंह (मऊगंज) - अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यानाकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है :-

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

उच्च शिक्षा मंत्री(श्री जयभान सिंह पवैया) - माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

 


स्‍वागत उल्‍लेख

श्री अजीत सिंह, कौन्‍सुल जनरल, सिंगापुर का स्‍वागत उल्‍लेख

अध्‍यक्ष महोदय - सदन की दीर्घा में श्री अजीत सिंह, कौन्‍सुल जनरल, सिंगापुर उपस्थित हैं, सदन की ओर से उनका स्‍वागत है.

श्री सुखेंद्र सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी के द्वारा जो जवाब आया है, मैं उससे सहमत नहीं हूँ यह प्रायवेट कॉलेज को लाभ पहुंचाने के लिये पूरी प्रक्रिया अपनाई जा रही है, पूरे रीवा संभाग की स्थिति मैं समझता हूं जिस तरीके से व्‍यापम का खेल हुआ है, उस तरीके से एडमीशन में भी अब खेल चालू हो गया है. विद्यार्थियों के भविष्‍य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. पूरे संभाग में टी.आर.एस. कॉलेज में 6302 सीटें खाली हैं. जी.डी.सी. रीवा में 932 सीटें खाली हैं, मॉडल साईंस कॉलेज में 135 सीटें खाली हैं, न्‍यू साईंस कॉलेज में 208 सीटें खाली हैं, पी.जी.एस. सतना में 275 सीटे खाली हैं, जी.डी.एस. सतना में 275 सीटें खाली हैं, संजय गांधी सीधी में दो सौ से अधिक सीटें खाली हैं, पंडित शंभू नाथ शुक्‍ला, शहडोल कॉलेज में 300 सीटें खाली हैं, जबकि वही प्रायवेट कॉलजों में पेन्टियम पाइंट रीवा में स्थिति फुल हो गई है, सतना कॉलेज में फुल हो गई है, आदिम कम्‍पयूटर कॉलेज में फुल स्थिति है, टाटा मेमोरियम, सीधी में फुल स्थिति है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय मेरे कहने का मतलब यह है कि प्रायवेट कॉलेजों की स्थिति फुल बताई जा रही है, पूरी सीटें भर गई है, क्‍या कारण हैं ? जबकि सारी शासकीय कॉलेजों की स्थिति अभी खाली है, अगर इसमें विद्यार्थियों के साथ कोई साजिश नहीं है तो फिर इसकी क्‍या स्थिति है. अभी रीवा में छात्र आंदोलित हैं. मेरा आपसे अनुरोध है कि इसकी न्‍यायिक जांच कराई जाये.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी.

श्री जयभान सिंह पवैया - माननीय सदस्‍य ने कुछ आंकड़े दिये हैं और उन्‍होंने यह कहा है कि कोई षड़यंत्र है, कोई पार‍दर्शिता नहीं है. मैं निवेदन करना चाहूंगा कि इस बार ऑनलाईन प्रवेश की प्रक्रिया को इस कारण ही स्‍वीकार किया गया है कि पिछली बार कॉलेज लेबिल कांउसलिंग जो हुई थी, उसमें बहुत शिकायतें मिली थी और महाविद्यालयों ने भी यह कहा था कि हम लोग दबाव के कारण विद्यार्थियों के साथ निष्‍पक्षता नहीं कर पाते, न्‍याय नहीं कर पाते इसलिए पहली बात अगर ऑनलाईन प्रवेश होगा तो सब विद्यार्थियों को न्‍याय मिलेगा. दूसरी बात यह कि विद्यार्थी को नौ कॉलेज चुनने का विकल्‍प दिया गया है इसमें जब नौ कॉलेज विद्यार्थी चुनता है तो विद्यार्थी के साथ अन्‍याय की बात ही नहीं है. ऑनलाईन प्रवेश जो होता है उसमें जो सुविधा और पारदर्शिता है उसमें पहली बात तो यह है कि उसमें मेरिट का और आरक्षण नियम दोनों का पालन होता है. छात्र को नौ विकल्‍प मिलते हैं और घर बैठे जानकारी मिलती है. कॉलेज लेवल कांउसलिंग में विद्यार्थियों को कॉलेज से कॉलेज भटकना पड़ता था. लेकिन अब वह ऑनलाईन के लिये आवेदन करके केवल दो बार उसको कॉलेज जाना पड़ता है एक बार सत्‍यापन के लिये और एक बार प्रवेश के लिये जाना पड़ता है. मुझे ऐसा लगता है कि आपने जब ध्यानाकर्षण लगाया और जो आपने आंकड़े दिये मैं आपकी जानकारी में ला दूं कि प्रवेश प्रक्रिया का थर्ड राऊंड बंद होने वाला था उसके बाद प्रवेश नहीं होने थे लेकिन विद्यार्थी हित में हमने चौथा राऊंड शुरु किया उसकी प्रक्रिया अभी जारी है. 29 जुलाई से 2 अगस्त तक प्रवेश के फार्म वहां पर अंतिम तौर पर जमा होंगे. मैं आपको यह भरोसा दिलाता हूं कि जब 28 तारीख को अलॉटमेंट की हमारी सूची जारी होगी तो हम उसके साथ पूरी प्रतीक्षा सूची भी जारी करेंगे. 2 अगस्त के बाद भी अगर विद्यार्थी बचते हैं प्रतीक्षा सूची में तो हम 3 और 4 अगस्त को उनको प्रवेश लेने के लिए अतिरिक्त समय देंगे.

श्री सुखेन्द्र सिंह--अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से मंत्रीजी से यह अनुरोध है कि जैसा आपने बात कही कि विद्यार्थियों ने यहां फार्म नहीं भरे, कई ऐसे विद्यार्थी हैं चाहा टीआरएस कॉलेज लेकिन उनको प्रायवेट कॉलेज दे दिया. मेरा अनुरोध है कि उनका क्या होगा?

श्री जयभान सिंह पवैया-- मैं तो आपसे यह अनुरोध करुंगा और आपने अपने ध्यानाकर्षण में लिखा भी है कि 80 प्रतिशत वाले को नहीं मिला 50 प्रतिशत वाले को मिल गया. मैंने स्पष्ट किया कि आरक्षित और अनारक्षित वर्क के कट ऑफ मार्क्स के कारण उनको ऐसे कॉलेजों में एडमिशन मिल सकता है. आप मुझे कोई उदाहरण दे दें तो मैं आपको आश्वस्ता करता हूं कि तत्काल उसकी जांच करवा लेंगे. गड़बड़ी की कोई आशंका बचने नहीं देंगे. पूरी पारदर्शिता होगी. किसी को लाभ पहुंचाने का सवाल ही नहीं उठता.

श्री सुखेन्द्र सिंह--अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से मंत्रीजी से अनुरोध है कि इस प्रक्रिया की जांच करा ली जाये. मैं उदाहरण भी आपको दे दूंगा. मेरा निवेदन है कि एडमिशन में थोड़ा सरलीकरण किया जाये जिससे प्रदेश के युवा भटके नहीं.

अध्यक्ष महोदय--स्पेसिफिक उदाहरण बाद में दे दीजिएगा.

श्री सुन्दर लाल तिवारी(गुढ़)--अध्यक्ष महोदय,मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्रीजी से अनुरोध करना चाहता हूं. माननीय सुखेन्द्र सिंह जी ने जो समस्या रखी है वह समस्या जिले में जमीन पर है. यह एक गंभीर विषय है. छात्र भटक रहे हैं. मेरा माननीय मंत्रीजी से निवेदन है कि आज तारीख है 25 जुलाई अभी प्रवेश प्रारंभ है, प्रवेश अभी समाप्त नहीं हुए. जिस प्रक्रिया का जिक्र माननीय मंत्रीजी ने सदन में किया है इससे मुझे लगता है कि 15 अगस्त के पहले पहले एडमिशन की प्रक्रिया पूरी नहीं होगी.

अध्यक्ष महोदय-- आप सीधा प्रश्न करें.

श्री सुन्दर लाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, छात्रों की यह समस्याएं एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं. मैं मंत्रीजी का ध्यान आकर्षित कर रहा हूं. जैसा मैंने कहा कि आज 25 जुलाई हो गई है. मंत्रीजी भी समझते हैं कि एक जुलाई से कॉलेज खुले हैं और 25 जुलाई तक एडमिशन नहीं हुए. ऑन लाईन की जो बात चल रही है मैं उसको विरोध में नहीं हूं. मैं उसके पक्ष में हूं. लेकिन मैं आपसे यह कहना चाह रहा हूं कि जो वास्तविक समस्या है. 15 अगस्त तक आपके एडमिशन नहीं होंगे. सारे प्रोफेसर्स, लेक्चरर्स एडमिशन में लगे हुए हैं. कॉलेज शुरु नहीं हो रहे हैं, पढ़ाई शुरु नहीं हो रही है. बड़ी संख्या में छात्र अस्थिर हैं.

अध्यक्ष महोदय-- आप क्या चाहते हैं वह बताईये.

श्री सुन्दर लाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि जो आपका साफ्टवेयर है, मंत्रीजी उसको थोड़ा देखें और उसमें सुधार करें. दो तरह की व्यवस्था है. हालांकि दोनों कॉलेज विश्वविद्यालय के द्वारा मान्यता (Recognised) प्राप्त है लेकिन एक निजी संस्था है और एक सरकारी संस्था(कॉलेज) है. मेरा कहना है कि जब विद्यार्थी कियोस्क सेन्टर में जाते हैं वहां ऑन लाईन आवेदन करते हैं तो वहां प्रायवेट कॉलेजेज़ के दलाल भी बैठते हैं और बैठकर बच्चों को गुमराह करते हैं और वहां पर प्रायवेट कॉलेज के नाम को क्लिक कर देते हैं. अगर शासकीय कॉलेज में नहीं हुआ तो उनका नाम प्रायवेट कॉलेज में आ जाता है और वह फीस जमा कर देते हैं. इसके बाद वे भविष्य की काऊंसलिंग के लिए इन्तजार नहीं करते. मेरा कहना है कि मंत्रीजी इसको दो भागों में विभाजित कर दें कि जो पहले शासकीय कालेज में प्रवेश लेना चाहते हैं, उनको अवसर मिले कि वे पहले शासकीय कालेज में प्रवेश ले सकें क्योंकि गरीब बच्चे भी हैं, उनके जेब में इतनी फीस भी नहीं है कि जो प्राइवेट कालेज ले सकें, उसके बाद प्राइवेट कालेज की बात आए.

श्री जयभान सिंह पवैया - अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि एक तो आज 25 जुलाई को शाम के बाद अद्यतन स्थिति का हमें ठीक से पता लगेगा, जिन कालेजों का उल्लेख ध्यानाकर्षण प्रस्तुत करने वाले माननीय सदस्य ने किया था, उनमें बड़ी संख्या में चौथे चरण में आवेदन प्राप्त हुए हैं और मेरिट लिस्ट की जानकारी पूरी तरह पोर्टल पर उपलब्ध है, यह भी आपसे निवेदन कर दूं. कुल मिलाकर 164033 आवेदन चतुर्थ चरण में प्राप्त हुए हैं. यह बहुत बड़ी संख्या है, इसलिए इसकी समीक्षा कल जो स्थिति पूरी पता लगेगी, उसके बाद की जा सकती है. अभी आदरणीय श्री तिवारी जी ने जो कहा है, मैंने उनके विषय को सुना है, लेकिन वह संदेह जरूर कर रहे हैं. परन्तु मैं आपको यह कह सकता हूं कि आपने जो सुझाव दिया है, उस पर विचार करेंगे. अभी कोई निर्णय मैं यहां खड़े होकर तो नहीं ले सकता हूं. आपके विषय पर विचार करेंगे.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, मैंने भी ध्यानाकर्षण दिया है. मेरा निवेदन यह है कि अभी 15 दिन का ही मामला है. 15 दिन में सारे निपटारे हो जाएंगे, ऐसा नहीं है कि यह साल भर चलने वाला है. अध्यक्ष महोदय, इसीलिए मेरा निवेदन है..

अध्यक्ष महोदय - उन्होंने विचार करने के लिए कह दिया है. जो विषय आपने उठाए थे, आपके दोनों विषय आ गये, दोनों के उत्तर आ गये हैं. अब उसको दीर्घकाल तक न ले जाएं.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से कहना यह है कि ऑन-लाईन प्रवेश जो हो रहा है, इसमें आपने आरक्षण की बात भी कही है.

 

 

 

समय 1.03 बजे याचिकाओं की प्रस्तुति

 

 

अध्यक्ष महोदय - आज की कार्यसूची में सम्मिलित सभी याचिकाएं प्रस्तुत की हुई मानी जाएंगी. *

श्री सुन्दरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, यही समस्या है, आप सुन तो लें.

अध्यक्ष महोदय - आपकी बात सुन ली है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, मैं आरक्षण के विरोध में नहीं हूं. (XXX)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

समय 1.04 बजे अध्यक्षीय घोषणा

माननीय सदस्यों की डिजिटल सिग्नेचर बनाई जाना

अध्यक्ष महोदय - मध्यप्रदेश विधान सभा के मानसून सत्र में 28 माननीय सदस्यों से 422 प्रश्न ऑन लाईन प्राप्त हुए हैं, जो अच्छी शुरुआत है. अब तक इस प्रक्रिया से प्रश्न प्रेषण हेतु 63 माननीय सदस्यों द्वारा प्रक्रिया की जानकारी लेकर डिजिटल सिग्नेचर बनवाये गये हैं. इस सत्र में शेष माननीय सदस्यों के लिए उक्त ऑन लाईन प्रक्रिया की जानकारी देने तथा डिजिटल सिग्नेचर बनाये जाने की व्यवस्था विधान सभा भवन स्थित एनआईसी प्रकोष्ठ, कक्ष क्रमांक-318 में की गई है, जिसकी सूचना पत्रक के माध्यम से भी माननीय सदस्यों को दी गई है. माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार उक्त प्रकोष्ठ में अपने डिजिटल सिग्नेचर बनवाने का कष्ट करें.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, हमें प्रश्न करने का शौक नहीं था. एक विषय ऐसा जो गंभीर है.

अध्यक्ष महोदय - आप दोनों की बात आ गई और समाधान भी आ गया है. उसको आप लंबा मत खींचिए.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, अगर आप उसको इरेलिवेंट कर देंगे, हम विद्ड्रा कर लेंगे.

अध्यक्ष महोदय - इरेलिवेंट ही है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, वह इरेलिवेंट नहीं है. माननीय मंत्री जी ने जवाब में यह बात कही है. आरक्षण के संबंध में माननीय मंत्री जी ने यह बात कही है.

अध्यक्ष महोदय - श्री गोपाल भार्गव, नहीं..अनंतकाल तक यह बात नहीं रख सकते, कृपया आप बैठ जाइए, नहीं अब कुछ नहीं, बात खत्म हो गई है. अब आगे बढ़ गये हैं. श्री सुखेन्द्र सिंह जी आपकी भी सब बात गई, उनके समर्थन में मत खड़े होइए.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

समय 1.05 बजे शासकीय विधि विषयक कार्य

 

मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम-स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2016 का पुरःस्थापन (क्रमांक 16 सन् 2016)

 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम-स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2016 के पुरःस्थापन की अनुमति चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम-स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2016 के पुरःस्थापन की अनुमति दी जाय.

अनुमति प्रदान की गई.

श्री गोपाल भार्गव - अध्यक्ष महोदय, मैं मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम-स्वराज (संशोधन) विधेयक, 2016 का पुरःस्थापन करता हूं.

 

श्री सुन्दरलाल तिवारी - अध्यक्ष महोदय, छात्रों के प्रवेश का सवाल है. अभी समस्या का समाधान नहीं हुआ है.

अध्यक्ष महोदय - आपकी बात आ गई, इसीलिए तो विषय लिया. आप सब विषयों की गंभीरता खत्म कर देते हैं.

(2) मध्यप्रदेश सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक, 2016 (क्रमांक 18 सन् 2016) का पुरःस्थापन (क्रमांक 18 सन् 2016)

 

अध्यक्ष महोदय - श्री विश्वास सांरग..

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र) - अध्यक्ष महोदय, मैं इसी विषय पर निवेदन कर रहा हूं कि अगर इसे कल ले लें या अगली किसी तारीख में ले लें, हमारे सम्मानीत मंत्री पारिवारिक कारणों से आज भोपाल में नहीं हैं.

अध्यक्ष महोदय - ठीक है. (श्री सुन्दरलाल तिवारी, सदस्य के खड़े होकर बोलते रहने पर) आप हर विषय को अनंतकाल तक खींचते हैं. वे कर रहे हैं, क्या है आप बार-बार वही-वही बात करते हैं, आप कृपया बैठ जाइए. इस तरह से अनंतकाल तक कोई विषय नहीं चल सकता.

 

 

(3) मध्यप्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2016 (क्रमांक 15 सन् 2016)

वाणिज्यिक कर मंत्री (श्री जयंत मलैया) - अध्यक्ष महोदय, मैं प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाय.

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ कि मध्‍यप्रदेश स्‍थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाय.

श्री शैलेन्‍द्र जैन (सागर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं वाणिज्यिक कर मंत्री महोदय द्वारा मध्‍यप्रदेश स्‍थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर संशोधन विधेयक, 2016 का समर्थन करता हूँ. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो संशोधन विधेयक है यह व्‍यापार के हित को ध्‍यान में रखते हुए किया गया है. हमारे मध्‍यप्रदेश का जो सुदूर अंचल का क्षेत्र है छोटे व्‍यापारी, खुदरा व्‍यापारी, मझौले व्‍यापारी हमारे गांवों में, हमारे कस्‍बों में, हमारे शहरों में एक बड़ी तादाद में फैले हुए हैं और जब से ऑनलाइन ट्रेडिंग की ई-कॉमर्स की व्‍यवस्‍था हुई है इसमें हमारी मल्‍टी-नेशनल कंपनियों के आ जाने से यह जो हमारे छोटे व्‍यापारी हैं उन व्‍यापारियों के व्‍यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह जो ई-कॉमर्स के द्वारा व्‍यापार अभी वर्तमान में संचालित है पूरे देश में इसके वर्ष 2016 की समाप्ति तक लगभग 1 लाख करोड़ रूपये का व्‍यापार होने की उम्‍मीद है. अकेले मध्‍यप्रदेश में लगभग 5 हजार करोड़ रूपये का व्‍यापार ई-कॉमर्स के द्वारा ऑनलाइन ट्रेडिंग के द्वारा किया जा रहा है. इसे निश्चित रूप से हमारे जो छोटे व्‍यापारी हैं उनके व्‍यापार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और उन व्‍यापारियों का जो व्‍यापार है उसमें बहुत गिरावट परिलक्षित हुई है.

 

01:07 बजे {उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए}

 

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, व्‍यापारियों के द्वारा अभी तक जो व्‍यापार किया जा रहा है ऐसे व्‍यापारियों को वेट टैक्‍स देना पड़ता है, ऐसे व्‍यापारियों को इंटर टैक्‍स भी देना पड़ता है लेकिन ऑनलाइन ट्रेडिंग में अभी तक किसी भी किस्‍म का कोई टैक्‍स नहीं लगता है. इससे हमारी दो व्‍यवस्‍थाएं हैं, जो इस इकानॉमी की दो पैरेलल व्‍यवस्‍थाएं हैं उन पैरेलल व्‍यवस्‍थाओं में एका नहीं है एक व्‍यवस्‍था ऐसी है जहां पर मल्‍टी-नेशनल कंपनियां उसे ऑपरेट कर रही हैं उसको हमने पूर्ण रूप से करमुक्‍त किया हुआ है. दूसरी तरफ जो व्‍यापारी अपना उद्योग वर्षों से यहां कर रहे हैं ऐसे व्‍यापारियों को वेट टैक्‍स और इंटर टैक्‍स देना पड़ रहा है. अब इसी तरह की क्षतिपूर्ति के उद्देश्‍य से यह देखा गया है कि अन्‍य राज्‍यों में भी चाहे वह दिल्‍ली हो, चाहे वह उत्‍तर प्रदेश हो, उत्‍तराखंड हो ऐसे तमाम राज्‍यों में इस तरह की ऑनलाइन ट्रेडिंग पर टैक्‍स लगाने का प्रावधान किया गया है. उत्‍तराखंड में लगभग 10 प्रतिशत की राशि का इस तरह की ऑनलाइन ट्रेडिंग पर टैक्‍स लगाने का प्रावधान किया गया है. गुजरात में लगभग 15 प्रतिशत, बिहार में 5 से 12 प्रतिशत तक, यूपी में 5 प्रतिशत, राजस्‍थान में 5.5 प्रतिशत तथा असम में 4 प्रतिशत का ऐसा प्रावधान किया गया है माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, यह जो संशोधन विधेयक लाया गया है जिसमें ऑनलाइन ट्रेडिंग पर 6 प्रतिशत का कर आरोपित करने का प्रावधान किया गया है मैं उसका समर्थन करता हूँ और पूरे सदन से भी मैं यह गुजारिश करता हूँ कि छोटे व्‍यापारियों को, जिनकी संख्‍या लाखों में है अकेले मध्‍यप्रदेश में और देश भर में देखा जाए तो करोड़ों की संख्‍या में ऐसे छोटे व्‍यापारी हैं उनके हितों की रक्षा के लिए हमें यह काम करना होगा. हमारी सरकार एक तरफ किसान हितैषी भी है लेकिन साथ में व्‍यापारियों का हित भी देखने की जिम्‍मेदारी इस सरकार की है इस नाते से व्‍यापारियों के हित में इस तरह का जो संशोधन विधेयक लाया गया है वह निश्चित रूप से सराहनीय है, माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं उसका समर्थन करता हूँ.

श्री रामनिवास रावत ( विजयपुर ) --माननीय उपाध्यक्ष महोदय मध्यप्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक 2016 जो प्रस्तुत किया गया है. मंत्री जी ने उद्देश्यों और कारणों के कथन में भी स्पष्ट किया है कि बजट के 2016-17 प्रस्तुत करते समय बजट भाषण के भाग दो में अंतर्विष्ट कर इस प्रस्ताव को क्रियान्वयन करने के लिए मध्यप्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर अधिनियम में समुचित संशोधन के लिए, चूंकि बजट भाषण में यह अंतर्विष्ट था कि आप इस तरह का संशोधन लायेंगे. आपका बजट अप्रैल में पारित हुआ है और आप यह संशोधन जुलाई में ला रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय माननीय मंत्री जी द्वारा मूल अधिनियम की धारा 3 के स्थान में संशोधन किया गया है. अभी हमारे भाई शैलेन्द्र जी भी कह रहे थे कि धारा 3 के खण्ड 1 में जो व्यवस्था की गई है उसमें स्पष्ट है कि इस धारा के अंतर्गत धारा 3 की उपधारा 2 के अधीन अधिसूचित माल के संबंध में प्रवेश पर कर का संग्रहण करने उसे राज्य सरकार को चुकाने हेतु नीति विनिर्दिष्ट कर सकेगी. आप यहां पर क्या चाह रहे हैं, क्या सरकार कर वसूलने में अक्षम साबित हो रही है, क्या आपको अपने अमले पर विश्वास नहीं रहा है. आप किस एजेन्सी को इसका ठेका देना चाहते हैं, आप किसी एजेन्सी को यह काम देना चाहते हैं. इससे स्पष्ट है कि आप और बिचौलिये ला रहे हैं. आप देख लें, इसमें है कि इस अधिनियम के अंतर्विष्ट किसी प्रतिकूल बात के होते हुए भी राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा भारत में विदेशी मदिरा बीयर और धारा 3 की उपधारा 2 के अधीन अधिसूचित माल के संबंध में प्रवेश कर का संग्रहण करने और उसे राज्य सरकार को चुकाने हेतु रीति विनिर्दिष्ट कर सकेगी और ऐसे निर्बंधनों तथा शर्तों पर जो कि उनमें विनिर्दिष्ट की जाय, सक्षम प्राधिकारी माल का परिवहन करने वाले व्यक्ति को नियुक्त करेगा. आप यहां पर किस व्यक्ति को नियुक्त करना चाहते हैं.

आपके पास में पहले से ही वाणिज्यिक कर विभाग है. आपका पूरा अमला है जो कि फील्ड में पदस्थ है. आप अपने अमले पर भरोसा करें, इसे सशक्त बनायें, उस पर विश्वास करें लेकिन आप फिर एक नया बिचौलिया स्थापित करना चाहते हैं, जिससे व्यापारियों को तो परेशानी होगी, इससे माल के परिवहन में तो परेशानी होगी इसके साथ साथ मैं यह दावे के साथ कह सकता हूं कि जब आपकी वित्तीय वर्ष की अंतिम स्थिति आये और अगले वित्त वर्ष का बजट प्रस्तुत करें तो आप बतायें कि इससे आपकी कितनी आय बढ़ी है. मेरा दावा है कि आपकी इससे आय नहीं बढ़ेगी. इससे आपको नुकसान होगा, जो प्रवेश कर मिलता है.

उपाध्यक्ष महोदय एक तरफ आप कह रहे हैं प्रवेश कर, आपका राजस्व बढ़ाने के लिए इसे ला रहे हैं, दूसरी तरफ अनुपूरक अनुमान प्रस्तुत किया है उसके पृष्ठ 4 पर वाणिज्यिक कर में 4 करोड़ 92 लाख का प्रावधान किया है. यह क्यों किया गया है कर उदग्रहण के लिए गाड़ियां खरीदने के लिए, जब आप यह व्यवस्था ही किसी दूसरे को सौंप रहे हैं तो यह 4 करोड़ 92 लाख रूपये क्यों प्रदेश की जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा गाड़ियों में खर्च कर रहे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय इससे बिचौलियों के बढ़ने की संभावना रहेगी, इससे व्यापारी भी परेशान होंगे. दूसरी तरफ केन्द्र में भारत सरकार के आर्थिक सलाहकार ने भी कहा है कि अंतर्राज्यीय व्यापार पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. यह बात सही है कि अन्य राज्यों ने भी लगाया है. वहीं दूसरी तरफ जीएसटी आने वाला है.केन्द्र सरकार लोक सभा में जीएसटी बिल प्रस्तुत करने जा रही है. उसमें प्रवेश कर, वाहन कर, स्टाम्प ड्यूटी, एंट्री कर इन सभी को समाहित करने की बात की गई है. इस कारण हमारा कहना है कि इस कर को आप ठेकेदारों को मत दीजिये. आपने कर की व्यवस्था को चालू रखें. आप अपने विभाग पर, अपने विभाग के फील्ड के अधिकारियों द्वारा वसूल करायें तो मैं समझता हूं कि इससे सिस्टम ठीक रहेगा, आप अपने प्रशासकीय अमले पर भरोसा करिये. धीरे धीरे सारी चीजों को हम ठेके पर देते जा रहे हैं इसका मतलब है कि कहीं न कहीं पूरी तरह से सरकारी अमला अक्षम साबित हो रहा है, सरकार अक्षम साबित हो रही है, हम कहीं न कहीं पर कमजोर हैं. आप वाणिज्यक कर विभाग की आबकारी विभाग की स्थिति देख लें कि इस तरह के करों को आपने कितनी बार एक्जेम्पट किया है. सोम डिस्टलरी को ही करोड़ो रूपये आपने एक्जेम्पट किये हैं, क्योंकि आप वसूल नहीं कर पाये हैं, आप छोटे साबित हो जाते हैं, क्योंकि हर राजनीतिक पार्टी ऐसे ठेकेदारों से चुनावों में खर्च करने के लिए चंदा लेती है, फिर वे ठेकेदार उसका अनुचित लाभ उठाते हैं.

उपाध्यक्ष महोदय हमारा कहना है कि आप अपने अधिकारियों पर विश्वास करें, इस काम को बिचौलियों को न दें. इसलिए यह जो संशोधन माननीय मंत्री जी ने प्रस्तुत किया है प्रवेश कर संशोधन विधेयक 2016 मैं इसका विरोध करता हूं.

प्रभारी नेता प्रतिपक्ष (श्री बाला बच्‍चन) -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय वित्‍त मंत्री जी ने पूरे सिस्‍टम में ऑनलाइन शॉपिंग के लिए जो किया है और इससे संबंधित स्‍थानीय क्षेत्रों में जो ऑनलाइन शॉपिंग होगी और उस पर जो टैक्‍स लगेगा इस हेतु आप जो संशोधन विधेयक लाए हैं, इसमें जो कमियां हैं और इसमें जो त्रुटियां हैं उनको मैं उजागर कर रहा हूँ और मैं आपके माध्‍यम से माननीय वित्‍त मंत्री जी और सरकार का ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूँ.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, ऑनलाइन शॉपिंग पर टैक्‍स लेना वैसा ही है जैसा कि ईमेल के जमाने में तार करना. माननीय वित्‍त मंत्री जी ने यह भी कहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्‍यों की सीमाओं पर जो चेकपोस्‍ट हैं वे सब बंद कर दिए जाएंगे. मैं चाहता हूँ कि माननीय मंत्री जी जब बोलें तो यह स्‍पष्‍ट करें कि जब ये चेकपोस्‍ट बंद हो जाएंगे तो शहरों में जो कुरियर कंपनियां हैं क्‍या उन पर आप चेकपोस्‍ट लागू करेंगे ? और अगर ऐसी स्‍थिति आ गई है तो मध्‍यप्रदेश की आर्थिक स्‍थिति कितनी बदहाल हो चुकी है इस बात का पता चल रहा है. मैं माननीय वित्‍त मंत्री जी से यह भी जानना चाहता हूँ कि ऑनलाइन शॉपिंग पर आप जो टैक्‍स ले रहे हैं उन वस्‍तुओं की श्रेणी भी आपने नहीं बनाई है कि किन-किन वस्‍तुओं के ऊपर आप टैक्‍स लेंगे और किन पर नहीं लेंगे ? मैं माननीय वित्‍त मंत्री जी के ध्‍यान में यह भी लाना चाहता हूँ कि पोस्‍ट ऑफिसेस के माध्‍यम से ऑनलाइन शॉपिंग पर गंगाजल उपलब्‍ध कराया जाता था, आपने गंगाजल को उपलब्‍ध कराने पर भी टैक्‍स लगा दिया, यह आपके ही केन्‍द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद जी का निर्णय था कि अब लोगों को पोस्‍ट ऑफिस के माध्‍यम से ऑनलाइन गंगाजल उपलब्‍ध करा दिया जाएगा, आपने उसको भी नहीं छोड़ा, उस पर भी आपने टैक्‍स लगाकर ये क्‍या कर दिया है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय वित्‍त मंत्री जी और सरकार की जानकारी में यह बात भी लाना चाहता हूँ कि कुछ राज्‍य जैसे उत्‍तराखंड, उत्‍तर प्रदेश के विद्यार्थी अगर पढ़ते हैं और पढ़ने से संबंधित सामग्री और खेल सामग्री अगर उन राज्‍यों में नहीं मिलती है तो वे सामग्री ऑनलाइन बुलवाते हैं, आपने मध्‍यप्रदेश के इन विद्यार्थियों को भी नहीं छोड़ा, पांच हजार तक की पढ़ने वाली सामग्री या खेल-कूद की सामग्री अगर उनके राज्‍य में नहीं मिलती है तो ऑनलाइन बुलाई जा सकती है लेकिन आपने मध्‍यप्रदेश के विद्यार्थियों को भी नहीं छोड़ा है.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से यह भी जानना चाहता हूँ कि बहुत सारी वस्‍तुएं ऐसी हैं जो कुरियर कंपनियों के अलावा अभी भी पोस्‍ट ऑफिसेस के माध्‍यम से ही भेजी जाती हैं या बुलवाई जाती हैं तो माननीय मंत्री जी आपने कहीं भी यह अनुबंध नहीं किया है, कहीं भी यह निर्देश जारी नहीं किया है कि जो वस्‍तुएं ऑनलाइन के अलावा भी पोस्‍ट ऑफिस के माध्‍यम से भेजी जाएंगी या बुलाई जाएंगी तो क्‍या आपकी ऐसी कोई व्‍यवस्‍था है कि जिससे वे लोग इस कर से बच सकें.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, इतने सारे मेरे सुझाव मैंने आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी के सामने, सरकार के सामने रखे हैं और अनुपूरक के समय बाकी की चीजें हम रखेंगे, माननीय मंत्री जी से मेरा यही आग्रह है कि जिन बिंदुओं की ओर मैंने आपका ध्‍यान आकर्षित किया है आप उन पर पुनर्विचार करें और उसके बाद संशोधन विधेयक प्रस्‍तुत करें और उसके पश्‍चात् यदि मध्‍यप्रदेश में इसको लागू करवाएंगे तो मैं समझता हूँ कि सर्वहारा वर्ग का भी फायदा होगा नहीं तो सरकार को लाभ पहुँचाने के चक्‍कर में सभी वर्गों का जो आप नुकसान कर रहे हैं वह बहुत दु:खद होगा और वह गलत होगा, यही मेरा आग्रह है, आप जब बोलें तो मेरे सुझावों पर अपनी बात रखें. माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपने समय दिया इसके लिए मैं आपको धन्‍यवाद देता हूँ.

वाणिज्‍यिक कर मंत्री (श्री जयंत मलैया) -- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, माननीय शैलेन्‍द्र जैन जी ने, रामनिवास रावत जी ने और नेता प्रतिपक्ष जी ने इस संशोधन विधेयक के बारे में अपनी बातें चर्चा के माध्‍यम से रखी हैं. मैं रामनिवास जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि हम किसी को एजेंसी नहीं बना रहे हैं, जो टैक्‍स कलेक्‍ट किया जाएगा वह टैक्‍स पूरा का पूरा हमारे विभाग के द्वारा ही होगा और इसमें इस तरीके से प्रावधान हमने करके रखे हैं कि इसमें कहीं कोई बिचौलिए की जरूरत नहीं है और न ही इसमें कोई बिचौलिए रहेंगे.

श्री रामनिवास रावत -- संशोधन विधेयक की धारा 3 (2) क्‍या कह रही है.

श्री जयंत मलैया -- यह तो आपने विधेयक देखा है इसका नोटिफिकेशन तो देख लीजिए, नोटिफिकेशन होता है, रूल्‍स फ्रेम होते हैं.

श्री रामनिवास रावत -- अभी विधेयक पर चर्चा हो रही है, नोटिफिकेशन पर चर्चा नहीं हो रही है. विधेयक अलग प्रस्‍तुत कर रहे हो, नोटिफिकेशन अलग निकालोगे मतलब आपके कंसेप्‍शन ही क्‍लियर नहीं हैं.

श्री जयंत मलैया-- क्रमांक 3 में इसकी व्यवस्था है मैं यहाँ निवेदन कर दूं ई-कॉमर्स के अंतर्गत माल का परिवहन करने वाले व्यक्ति से अभिप्राय माल का परिवहनकर्ता, कोरियर एजेंसी, एजेन्ट या माल का परिवहन करने वाला कोई अन्य व्यक्ति से है जिसमें माल का स्वामी भी सम्मिलित है. यह जो हमने कर लगाया है इससे हमें यह उम्मीद है कि हमें प्रतिवर्ष 300 करोड़ रुपये की प्राप्ति होगी, जिसको हम विकास के कार्यों में लगाएंगे. मेरा सभी सदस्यों से विनम्र निवेदन है कि इसको सर्व सम्मति से पारित करने की कृपा करें.

श्री रामनिवास रावत--- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मूल बजट जो प्रस्तुत किया था उस समय आपने 4 हजार दो सौ करोड़ कुछ कर(टैक्स) प्रावधानित किया था, कर से प्राप्त होने वाली राशि का अनुमान था, आप देख लें.

श्री जयंत मलैया-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, उस समय उतना व्यापार था, ऐसा उसमें जिक्र किया गया था और उसमें समय इसलिए लगा है कि हमने भी दूसरी जगह, जिन 6 प्रदेशों में यह टैक्स वसूला जा रहा है, ई-कॉमर्स के ऊपर उसको स्टडी करने के लिए अपने अलग-अलग दल भेजे थे उसको अब हमने बनाकर एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है जो लगभग-लगभग फुल प्रूफ है.

उपाध्यक्ष महोदय-- प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर(संशोधन) विधेयक, 2016 पर विचार किया जाय.

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

अब विधेयक के खण्डों पर विचार होगा.

प्रश्न यह है कि खण्ड 2 इस विधेयक का अंग बने.

खण्ड 2 इस विधेयक का अंग बना.

 

प्रश्न यह है कि खण्ड 1 इस विधेयक का अंग बने

खण्ड 1 इस विधेयक का अंग बना.

प्रश्न यह है कि पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

पूर्ण नाम तथा अधिनियमन सूत्र विधेयक का अंग बने.

श्री जयंत मलैयाउपाध्यक्ष महोदय, मैं, प्रस्ताव करता हूं कि मध्यप्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2016 पारित किया जाय.

उपाध्यक्ष महोदय--- प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ कि मध्यप्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2016 पारित किया जाय.

प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश स्थानीय क्षेत्र में माल के प्रवेश पर कर (संशोधन) विधेयक, 2016 पारित किया जाय.

 

प्रस्ताव स्वीकृत हुआ.

विधेयक पारित हुआ.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

1.24 बजे प्रतिवेदन की प्रस्तुति

 


 

राज्‍यमंत्री, संसदीय कार्य (श्री शरद जैन)- माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं प्रस्‍ताव करता हूं कि अभी जो उपाध्‍यक्ष महोदय ने शासकीय विधेयकों एवं अन्‍य कार्यों पर चर्चा के लिए समय निर्धारण करने के संबंध में कार्य मंत्रणा समिति की जो सिफारिशें पढ़कर सुनाई, उन्‍हें सदन स्‍वीकृति देता है.

उपाध्‍यक्ष महोदय- प्रस्‍ताव प्रस्‍तुत हुआ.

उपाध्‍यक्ष महोदय- प्रश्‍न यह है कि- शासकीय विधेयकों एवं अन्‍य कार्यों पर चर्चा के लिए समय निर्धारण करने के संबंध में कार्य मंत्रणा समिति की जो सिफारिशें पढ़ कर सुनाई, उन्‍हें सदन स्‍वीकृति देता है.

 

प्रस्‍ताव स्‍वीकृत हुआ.

 

उपाध्‍यक्ष महोदय- सदन की कार्यवाही अपरान्‍ह 3 बजे तक के लिए स्‍थगित की जाती है.

(अपरान्‍ह 1.29 बजे से 3 बजे तक अंतराल)

 

3.08 बजे उपाध्यक्ष महोदय (डॉ.राजेन्द्र कुमार सिंह)पीठासीन हुए}

औचित्य प्रश्न एवं व्यवस्था

अनुपूरक अनुमान एवं विनियोग विधेयक पर एक साथ चर्चा विषयक.

श्री रामनिवास रावत(विजयपुर)-- माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मेरा प्वाईंट आफ ऑर्डर है. उपाध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश विधान सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन संबंधी नियमों के अँतर्गत नियम 156 के अँतर्गत अनुपूरक अनुमान प्रस्तुत किया जाता है और 156 (1) के तहत अनुपूरक अनुमान प्रस्तुत करके नियम 156 (2) के तहत अनुपूरक अनुदान पर चर्चा की जाती है और मैं समझता हूँ कि मुझे यह भ्रम है कि इन दोनों में एक ही डंडा लगा हुआ है, जो कार्यसूची मिली है. आपके द्वारा ही अनुपूरक अनुमान पर ही चर्चा प्रारंभ करने की बात कही गई है, विनियोग विधेयक का कोई उल्लेख आसंदी से नहीं किया गया है. उपाध्यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहता हूँ कि यह दोनों की एक साथ चर्चा की जा रही है? उपाध्यक्ष महोदय, विनियोग विधेयक, नियम 158 (1) के तहत प्रस्तुत किया जाता है और 159 (1) के तहत विनियोग विधेयक पर चर्चा की जाती है. विशेष परिस्थितियों में, मैं मानता हूँ कि आसंदी विशेष परिस्थितियों में नियम को एग्जेम्पट करके दोनों की एक साथ चर्चा करा सकती है. लेकिन अभी कोई ऐसी विशेष परिस्थिति नहीं है. दो घंटे अनुपूरक अनुमान पर चर्चा करा लें. दो घंटे विनियोग विधेयक पर चर्चा करा लें. सदस्यों को भाग लेने का भी, ज्यादा बोलने का भी, मौका मिल जाएगा. पृथक्-पृथक् चर्चा कराएँ तो बड़ी कृपा होगी.

उपाध्यक्ष महोदय--दोनों पर चर्चा का अवसर मिलता है और समय भी बढ़ा हुआ मिलता है ऐसी कोई सीमा नहीं लगा रखी है.

श्री रामनिवास रावत--दोनों को एक साथ कर दिया है. दोनों को अलग-अलग कर दिया जाए. यह नियमों में भी व्यवस्था है.

उपाध्यक्ष महोदय--अतिरिक्त समय देंगे, ऐसा किया जा सकता है यह भी आप अच्छी तरह से जानते हैं.

श्री रामनिवास रावत--क्या हमेशा ही विशेष परिस्थिति रहेगी. एक तरफ कहते हैं बिजनिस नहीं है और हमेशा ही विशेष परिस्थिति रहती है.

उपाध्यक्ष महोदय--इस बार चूंकि शुरु किया जा चुका है, अगली बार से देख लेंगे. इस बार चलने दीजिए.

श्री रामनिवास रावत--इसका समय बढ़ा दें, चार घंटे कर दें जितने सदस्यों ने नाम दिए हैं उन्हें बोलने का समय दे दें.

उपाध्यक्ष महोदय--अतिरिक्त समय दे देंगे.

डॉ. गोविन्द सिंह (लहार)--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, माननीय वित्त मंत्रीजी ने अभी दो माह पूर्व मार्च के अंतिम सप्ताह में वर्ष 2016-17 का बजट पेश किया था परन्तु अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक खर्च के लिए विभागों में पैसा नहीं पहुंचा था. केवल मई, जून दो महीने में ऐसी कौन सी आवश्यकता पड़ गई कि आपको 14297 करोड़, 81 लाख, 40 हजार 800 रुपये की राशि पुन: मांगनी पड़ गई. वैसे ही मध्यप्रदेश सरकार कर्ज में डूबी हुई है. हमारे अनुमान से करीब 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपए का कर्ज मध्यप्रदेश पर है लेकिन आज गौर साहब ने स्वयं सदन में कहा कि 1 लाख 40 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है. हो सकता है वे ही सही हों लेकिन जितना भी कर्ज है.

श्री रामनिवास रावत--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, मैं आसंदी से एक निवेदन और करना चाहूंगा कि बजट सरकार के समस्त विभागों के लिए लिया जा रहा है. मात्र तीन या चार मंत्री बैठे हुए हैं. कम से कम माननीय वित्त मंत्री जी सभी मंत्रियों को कह दें कि जिन्हें पैसा चाहिए वह आ जाएं और जो न आएं उन्हें पैसा न दिया जाए.

उपाध्यक्ष महोदय--रामनिवास जी आप गिनती ठीक से नहीं कर रहे हैं.

श्री रामनिवास रावत--मैंने एग्जेक्ट नहीं कहा है, वित्त मंत्री जी को छोड़ दें तो पांच मंत्री ही बैठे हैं.

उपाध्यक्ष महोदय--वरिष्ठ मंत्रीगण बैठे हुए हैं.

डॉ. गोविन्द सिंह--माननीय उपाध्यक्ष महोदय, पिछले बजट में भी 1 लाख 50 हजार करोड़ से अधिक का बजट पास हुआ था. आज मध्यप्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति पर करीब 55 हजार का कर्ज लदा हुआ है. मध्यप्रदेश में शिक्षित और अशिक्षित दोनों प्रकार से बेरोजगारों की संख्या 1 करोड़ 10 लाख से अधिक हो गई है. उनके लिए इस अनुपूरक में कोई दिशा निर्देश नहीं हैं. सिंहस्थ के बारे में कहना चाहता हूँ कि सिंहस्थ का बहुत प्रचार हुआ. वर्ष 1992 में पटवा जी के समय भी सिंहस्थ हुआ था लेकिन पटवा जी के समय सिंहस्थ को सरकारी सिंहस्थ नहीं बनाया गया था. पटवा जी ने तत्कालीन चीफ सेक्रेट्री श्रीमती निर्मला बुच को यह निर्देश दिए थे कि कुंभ राजनीति का अखाड़ा न बने इसलिये मंत्री और अधिकारी कुंभ में ज्यादा दिखाई न दें, भाग न लें. परन्तु पटवा जी के चेले माननीय शिवराज सिंह जी ने इस कुंभ को पूरे प्रदेश और देश में आस्था के नाम पर राजनीति का अखाड़ा बना दिया और अपना प्रचार-प्रसार करने का काम किया. इससे दस गुना बड़ा कुंभ इलाहाबाद का होता है, यहां से ज्यादा लोग वहां आते हैं. कुछ माह पूर्व नासिक में कुंभ हुआ था. वहां पर भी कोई मंत्री वगैरह के फोटो नजर नहीं आए. इस आयोजन में करीब 5 हजार करोड़ रुपए का सरकारी खजाना लुटाने का काम किया गया है. आप 400 करोड़ रुपए का भुगतान करने के लिए राशि मांग रहे हैं जो कि सिंहस्थ का बकाया है पहले ही बहुत अधिक खर्च कर दिया उसके बाद भी 400 करोड़ बकाया है. नर्मदा लिंक क्षिप्रा परियोजना के भी करीब 34 करोड़ बकाया हैं उसको भी देने का इसमें आपने प्रावधान किया है. आप करोड़ों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं. फिर भी आपको और पैसा चाहिये. पंन्‍द्रह करोड़, पचास लाख फिर से जनसम्‍पर्क विभाग के लिये और चाहिये. जनसंपर्क विभाग का पूरे साल का जो बजट था वह आपने कुंभ में खर्च कर दिया. इसके बाद जगह-जगह, जहां या आप रेल में जाओ, हवाई जहाज का टिकट, बस के टिकट, बसों पर, रेलवे स्‍टेशन पर, दिल्‍ली में, मद्रास में जहां भी आप जाओ वहां पर कुंभ ही नजर आ र