मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

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पंचदश विधान सभा                                                                          अष्टम सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2021 सत्र

 

गुरूवारदिनांक 25 फरवरी, 2021

 

( 6 फाल्गुनशक संवत्‌ 1942 )

 

 

[खण्ड- 8 ]                                                                                                     [अंक-4]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

गुरूवारदिनांक 25 फरवरी, 2021

 

( 6 फाल्गुनशक संवत्‌ 1942 )

  

विधान सभा पूर्वाह्न 11.01 बजे समवेत हुई.

 

{ अध्यक्ष महोदय (श्री गिरीश गौतम) पीठासीन हुए.}

 

 

अध्यक्ष महोदय - प्रश्न क्रमांक 1..

श्री कमलेश्वर पटेल - अध्यक्ष महोदय.

अध्यक्ष महोदय - आपका प्रश्न है क्या?

श्री कमलेश्वर पटेल - नहीं, प्रश्न तो नहीं है. अध्यक्ष महोदय, एक बहुत महत्वपूर्ण विषय है जिसके बारे में कई दिन से आपसे निवेदन कर रहे हैं, उसका स्थगन प्रस्ताव लगा हुआ है.

अध्यक्ष महोदय - पहले प्रश्न तो आने दीजिए, प्रश्नकाल को बाधित मत करिए.

प्रश्न संख्या 1 - (अनुपस्थित)

भितरवार विधानसभा क्षेत्र में रेत का अवैध उत्‍खनन

[खनिज साधन]

2. ( *क्र. 991 ) श्री लाखन सिंह यादव : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भितरवार विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत लोहारी से रेत माफियाओं द्वारा किये जा रहे अवैध रेत उत्‍खनन के संबंध में कलेक्‍टर ग्‍वालियर को प्रश्‍नकर्ता विधायक द्वारा (1) पत्र क्र. 180, दिनांक 05.01.2021 (2) पत्र क्र. 193, दिनांक 11.01.2021 (3) पत्र क्र. 202, दिनांक 18.01.2021 द्वारा व्‍यक्तिगत उपस्थित होकर उक्‍त पत्रों के माध्‍यम से शिकायत की गई थी? यदि हाँ, तो उक्‍त पत्रों की छायाप्रति प्रस्‍तुत करें? उक्‍त पत्रों पर कोई कार्यवाही प्रश्‍न दिनांक तक न करने का क्‍या कारण है? क्‍या रेत माफियाओं को अवैध उत्‍खनन की खुली छूट दे दी गई है? यदि नहीं, तो फिर कैसे अवैध उत्‍खनन किया जा रहा है? (ख) ग्‍वालियर जिले में खनिज विभाग द्वारा 30 जनवरी, 2021 की स्थिति में किन-किन प्रकार के खनिज को किस-किस ग्राम पंचायतों से किस-किस खसरा नं. से कितने रकवा में कितनी राशि में किस दिनांक वर्ष से किस दिनांक वर्ष तक उत्‍खनन की स्‍वीकृति (ठेका) दिया है? (ग) दिनांक 1 अप्रैल, 2021 से प्रश्‍न दिनांक तक ग्‍वालियर जिले में अवैध उत्‍खनन की किस-किस व्‍यक्तियों द्वारा शिकायतें की गई है? उनका नाम, पता दें। उन शिकायतों पर क्‍या कार्यवाही की गई है?

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) जी हाँ। प्रश्‍न अनुसार पत्र की छायाप्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ पर दर्शित है। पत्रों पर कार्यवाही की गई, कार्यवाही की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब पर दर्शित है। जिले में अवैध उत्‍खनन एवं परिवहन के प्रकरण प्रकाश में आने पर कार्यवाही की जाती है। जी नहीं। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में परिशिष्ट के प्रपत्र-स पर दर्शित है। (ग) प्रश्‍नांकित तिथि से जानकारी दिया जाना संभव नहीं है।

श्री लाखन सिंह यादव - अध्यक्ष महोदय, ग्वालियर जिले भितरवार विधान सभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत लोहारी से रेत माफियाओं द्वारा लगातार अवैध उत्खनन किये जाने के संबंध में पिछले 3 माह से कलेक्टर ग्वालियर से मेरी दूरभाष पर, सेलफोन पर कई बार 12 से 14 बार चर्चा हुई. मैंने उनको हर बार अवगत कराया कि यह लोहारी से अवैध उत्खनन हो रहा है, जो कि स्वीकृत क्षेत्र नहीं है और उन्होंने मुझे हर बार यह आश्वासन दिया कि 2-4 दिन का आप समय दें, मैं इसको बंद करा दूंगा, लेकिन फिर भी 2 महीने से लगातार अवैध उत्खनन बड़े पैमाने पर होता रहा और 200 से 250 वाहन जिसमें डम्फर, हाइवा ट्रक और ट्रेक्टरों से अवैध उत्खनन होता रहा, उसके बाद जब टेलीफोन पर नहीं सुना तो मैंने दिनांक 5.1.21 को एक आवेदन कलेक्टर को दिया दिनांक 11.1.21 को आवेदन दिया और फिर दिनांक 18.1.21 को आवेदन दिया उनके समक्ष उपस्थित होकर, लेकिन आज दिनांक तक वह अवैध उत्खनन की कार्यवाही रुकी नहीं है. लगातार अवैध उत्खनन हो रहा है. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि क्या ऐसी खुली छूट दे रखी है, जो खदान स्वीकृत नहीं हैं, जिसका एरिया स्वीकृत नहीं है. जो खदान स्वीकृत हैं क्या वहां से आप खनन करवाएंगे कि जहां अवैध उत्खनन हो रहा है उसको आप लगातार जारी रखेंगे?

श्री सुरेश राजे - अध्यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा क्षेत्र डबरा में लगातार अवैध उत्खनन हो रहा है.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह - अध्यक्ष महोदय, जो माननीय सदस्य ने प्रश्न उठाया है, काफी वरिष्ठ सदस्य हैं, उन्होंने यह बात रखी है कि हमने 3 आवेदन दिये थे और तीनों पर कोई कार्यवाही नहीं हुई, लेकिन मैं बताना चाहता हूं कि जब आपकी शिकायत मिली थी उसके बाद दिनांक 1.2.21 को आपकी अनिता मोदी जो जनपद अध्यक्ष हैं, उनके साथ हमारा पूरा खनिज अमला गया था. उन्होंने एक विधिवत् जांच भी उसकी की थी. हमने अभी बाद में भी उसका परीक्षण कराया है. लगातार हम उन चीजों की जांच कर रहे हैं और इसमें हमने प्रकरण भी बनाये हैं. ऐसा नहीं है कि हमने उसके बाद प्रकरण नहीं बनाये हैं. दिनांक 27.10.20 को एक पोकलेन जप्त हुई है, दिनांक 6.1.21 को डम्फर जप्त किया है उसके बाद ट्रेक्टर की जप्ती की है, इस तरह से 8 प्रकरण हमने बनाये हैं, जिसमें 4 पोकलेन मशीन जप्त की, इसमें लगभग राशि 6 लाख 81 हजार 8 सौ रुपये वसूल की है तो यह कहना असत्य है कि हमारा विभाग कार्यवाही नहीं कर रहा है, उसमें लगातार हम कार्यवाही कर रहे हैं, जो आपने आवेदन दिये क्योंकि आप सम्माननीय हैं, मैंने उसमें एक्शन लिया है.

 

श्री लाखन सिंह यादव -- अध्यक्ष महोदय अभी आपने जिस अनिता मोदी सिंह रावत की बात की है वह भीतरवार की जनपद अध्यक्ष है और आपकी ही पार्टी की हैं. जब वह वहां पर गई तो आपने जो ठेकेदार हैं, उनकी दम पर उस महिला के खिलाफ एफआईआर करवाई है, उसके पति के खिलाफ एफआईआर करवाई है, आपने उसका लायसेंस निरस्त करवाया है और आप कार्यवाही की बात कर रहे हैं . मेरा यहां पर आपसे दूसरा निवेदन है कि आप यह बतायें कि यह जो लोहारी की खदान स्वीकृत है या नहीं है. मेरा यह कहना है कि लोहारी की खदान स्वीकृत नहीं है, वास्तव में बसई की खदान स्वीकृत है जिसकी दूरी वहां से 10-12 किलोमीटर है. उत्खनन लोहारी से हो रहा है. जो खदान आपकी स्वीकृत है वहां से तो एक डंपर भी रेत नहीं निकलेगी. मेरा आपसे यह निवेदन है कि आप कृपा करके जहां पर स्वीकृत खदान है वहीं से उत्खनन करायें, बाकी जो अवैध उत्खनन हो रहा हैं वहां से रोज 200 - 250 डंपर रेत आप निकलवा रहे हैं. उनको बंद करायेंगे और जिन अधिकारियों के संरक्षण में यह अवैध उत्खनन हो रहा है उनके खिलाफ में कार्यवाही करेंगे.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय 10 खदानें वहां पर मंजूर हुई हैं जिसमें से 6 संचालित हैं जिसमें से दो माननीय सदस्य के यहां पर संचालित हैं. उसमें जहां तक जांच कराने की बात है तो इसी तरह के जो आपके आवेदन आये थे उनका हमने परीक्षण भी कराया है, स्पाट पर हमने भेजा भी है, इसके पहले भी हमने जांच करवाई हैं. इसमें कोई विसंगति नहीं मिली है. यदि व्यक्तिगत रूप से कोई बात है तो माननीय सदस्य हमें बता देंगे तो मैं उसकी जांच करा लूंगा.

श्री लाखन सिंह यादव -- आप तो मुझे यह बता दें कि जो बसई खदान है उसमें रेत है क्या. जब वह सेंक्सन है तो फिर आप लोहारी से क्यों उत्खनन करा रहे हैं. उसकी वहां से दूरी 10 किलो मीटर है. अध्यक्ष महोदय हकीकत बात यह है कि जहां पर खदान सेंक्शन की गई है वहां पर रेत नहीं है. उसके नाम पर दूसरी जगह से पूरा अवैध उत्खनन हो रहा है. यह रोज बड़े पैमाने पर हो रहा है.( X X X ) कृपा करके आप इसमें जांच करवायेंगे और अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करेंगे क्या.

श्री विश्वास सारंग -- अध्यक्ष महोदय हमारा कहना है कि यह विलोपित कराया जाय.

अध्यक्ष महोदय -- यह रिकार्ड नहीं किया जाय.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- इसे तो रिकार्ड में रहने दें कोई विलोपित नहीं करवाना है.( X X X ) जहां तक उस जनपद अध्यक्ष की बात की है तो उसके दो वीडियो वायरल हुए हैं. मुझे तो पता भी नहीं है जब मैं वहां का विधायक था आज से 12 साल पहले तब वहां पर ऐसा कुछ नहीं होता था. यह इन्होंने ही वहां पर संचालित किया है, अकारण ही मेरा नाम छपने के लिए ले रहे होंगे. मैं पिछले 14 साल से उस इलाके में नहीं गया. इनको अपने ऊपर संकट लगे और यह मेरा नाम लें तो मुझे नहीं पता है.

श्री लाखन सिंह यादव -- ( X X X )

श्री विश्वास सारंग -- अध्यक्ष महोदय यह भी विलोपित करवायें.

अध्यक्ष महोदय -- यह रिकार्ड में नहीं आयेगा.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- अध्यक्ष महोदय मेरा जिससे कोई लेना देना नहीं है, मैं किसी माइनिंग वाले को आज तक नहीं जानता हूं,...(व्यवधान ). इनकी वसूली नहीं आ रही है इसलिए इन्होंने प्रश्न लगाया है....(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय -- मैं खड़ा हूं सभी माननीय सदस्य बैठ जायें. मेरा सभी माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि ऐसे शब्दों का प्रयोग न करें कि हमें ज्यादा से ज्यादा विलोपित करना पड़े. दोनों तरफ से मर्यादित होकर बात करें तो अच्छा है.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह -- जहां तक लोहारी की बात है लोहारी में कोई खदान सेंक्शन नहीं है और जो आपने बसई की बात कही है तो वहां पर खदान सेंक्शन है. इसलिए हमने 22 तारीख को वहां पर परीक्षण कराया था वहां हमें ऐसी कोई चीज नहीं मिली है यदि आपको ऐसा लगता है कि वहां पर भी कोई अवैध उत्खनन है तो आप मुझे बता दें उसका परीक्षण मैं फिर से करा लूंगा.

श्री लाखन सिंह यादव -- अध्यक्ष महोदय रात 10.30 बजे के वीडियो हैं मैं यह कह रहा हूं कि यदि वहां पर अवैध उत्खनन नहीं हो रहा है तो एक समिति गठित कर दें और उसमें क्षेत्रीय विधायक को रख दें तो पता चल जायेगा दूध का दूध पानी का पानी हो जायेगा. समिति गठित करने में क्या दिक्कत है.


 

अध्‍यक्ष महोदय -- उन्‍होंने कहा है आप बता दीजिये, स्‍पेशियली जांच करवा लेंगे.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, हमको विश्‍वास है आप बोलेंगे तो मैं परीक्षण करा लूंगा. समिति की बात क्‍या कर रहे हैं ?

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न क्रमांक 3, श्री राजेश कुमार प्रजापति.

श्री लाखन सिंह यादव -- अध्‍यक्ष महोदय, यहां से किसी अधिकारी के साथ समिति गठित कर दें, तो पता लग जाएगा कि अवैध उत्‍खनन हो रहा है कि नहीं हो रहा है.

श्री सुरेश राजे -- ( XXX )

अध्‍यक्ष महोदय -- इनका नहीं लिखा जाएगा. प्रश्‍न क्रमांक 3.

विधान सभा क्षेत्र चंदला में संचालित पत्थर खदानें/क्रेशर

[खनिज साधन]

3. ( *क्र. 1128 ) श्री राजेश कुमार प्रजापति : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या शासन के नियम-निर्देश के अनुसार पहाड़ों से गिट्टी पत्थर निकालने की अनुमति के पूर्व पर्यावरण एवं वन विभाग से अनुमति लेने का निर्देश है? क्या शासन के नियम-निर्देश के अनुसार 500 मीटर से कम दूरी पर गिट्टी पत्थर खदाने संचालित की जाने की अनुमति प्रदेश शासन या प्रशासन द्वारा नहीं दी जा सकती है? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार छतरपुर जिले में कितनी खदानें 500 मीटर या कम की दूरी पर संचालित हैं तथा अनुमति जारी किये जाने वाले अधिकारी का नाम, पदनाम सहित सत्यापित जानकारी उपलब्ध करायी जाये। (ग) जिला छतरपुर की विधानसभा क्षेत्र चंदला अंतर्गत वर्ष 2018 से किन-किन व्यक्तियों को पहाड़ों से गिट्टी बनाने हेतु पत्थर निकालने की स्वीकृति आदेश जारी किए गए थे? (घ) जिला छतरपुर की विधानसभा क्षेत्र चंदला अंतर्गत पत्थर से गिट्टी बनाने के लिए कितनी क्रेशरें संचालित हैं? सूची उपलब्ध करायें। क्या उक्त क्रेशरों का संचालन शासन के नियम-निर्देश अनुसार सक्षम अधिकारी के आदेश से संचालित है? यदि नहीं, तो क्यों कारण स्पष्ट करें।

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) जी नहीं। पहाड़ों के संबंध में पृथक से कोई प्रावधान नहीं है। म.प्र. गौण खनिज नियम 1996 में 500 मीटर से कम दूरी पर गिट्टी पत्‍थर खदानों की अनुमति दिये जाने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ पर दर्शित है। (ग) विभाग द्वारा इस प्रकार की जानकारी पृथक से संधारित करके नहीं रखी जाती है। (घ) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब पर दर्शित है तथा उक्‍त क्रेशरों का संचालन शासन के नियम निर्देश अनुसार सक्षम अधिकारी के आदेश से संचालित है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है।

 

श्री राजेश कुमार प्रजापति -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से खनिज मंत्री जी का ध्‍यान इस ओर आकर्षित कराना चाहूंगा कि मेरा विधान सभा क्षेत्र उत्‍तरप्रदेश से लगा हुआ है. और मेरे क्षेत्र में खजिन संसाधन ज्‍यादातर हैं. उसमें पत्‍थर, गिट्टी, गौण खनिज हैं. यहां पर ग्राम बदौराकला, प्रकाश बमौरी, घटहरी और मुड़हरा यह लगे हुये गांव हैं, जहां पर 500-500 मीटर में कई खदानें चलती हैं उन खदानों से जो परिवहन उत्‍तरप्रदेश के लिये जाता है उसके कारण धूल मिट्टी बहुत सारी उड़ती है जिससे किसानों की फसल भी नष्‍ट होती है और वहां पर कई लोग टीबी के मरीज भी होते जा रहे हैं जिससे मैं माननीय मंत्री जी से यह चाहूंगा कि वहां पर प्रॉपर प्रतिदिन पानी डलवाया जाए, जिससे धूल न उड़े और बीमारी कम हो सके. मेरा एक और प्रश्‍न है कि उस रोड में इतने बड़े गड्ढे हो गये हैं कि जनमानस को चलने में भी परेशानी होती है, तो गौण खनिज या किसी भी संसाधन से वहां की वेटेज़ रोड बनवाई जाए जिससे वहां का गौण खनिज निकल सके.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, ठीक है, माननीय सदस्‍य जो कह रहे हैं हम दिखवा लेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय सदस्‍य, आपका काम तो हो गया अब धन्‍यवाद तो कर दीजिये.

श्री राजेश कुमार प्रजापति -- अध्‍यक्ष महोदय, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. एक और प्रश्‍न था, आपका संरक्षण चाहिये. गौण खनिज जो मेरे यहां से निकलता है उसमें मध्‍यप्रदेश के लोगों को प्राथमिकता दी जाय क्‍योंकि वहां के लोग गरीब हैं और किसानी पर डिपेंड करते हैं और मध्‍यप्रदेश के लोगों को दिया जाय, उत्‍तरप्रदेश के लोग वहां पर आते हैं और कई तरह से अवैधानिक कार्य भी होते हैं.

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, यह नियम भी है कि माइनिंग इफेक्‍टेड एरिया और माइनिंग इफेक्‍टेड पर्सन के लिये वह राशि खर्च की जाती है जो भी हमें डीएमएफ के माध्‍यम से मिलती है, हम निश्चित रूप से जैसा सदस्‍य कह रहे हैं उसका हम पालन करेंगे.

श्री राजेश कुमार प्रजापति -- अध्‍यक्ष महोदय, वहां पर प्राथमिकता दी जाय. माननीय मंत्री जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

शास. तुलाई केन्द्रों के माध्यम से गेहूँ एवं चने का उपार्जन

[खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्‍ता संरक्षण]

4. ( *क्र. 271 ) श्री शशांक श्रीकृष्ण भार्गव : क्या खाद्य मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विदिशा जिला अंतर्गत विगत वर्ष रबी की फसल हेतु शासकीय तुलाई केन्द्रों के माध्यम से कितने टन गेहूँ एवं चने का उपार्जन किया गया? उपार्जन केन्द्रवार जानकारी उपलब्ध करायें। (ख) प्रश्नांश (क) क्रम में उपार्जन किय गये गेहूँ एवं चने की खरीदी उपरांत कितना गेहूँ और चना गोदामों में परिवहन किया गया एवं कितना गेहूँ एवं चना परिवहन नहीं होने से खुले में पड़े होने के कारण वर्षा के पानी से खराब हुआ? खराब हुए अनाज की मात्रा सहित जानकारी दें एवं अनाज खराब होने के लिए कौन दोषी है एवं दोषी व्यक्ति अथवा अधिकारी के खिलाफ क्या कार्यवाही की गई, के संबंध में जानकारी दें? (ग) क्या शासन ने किसानों से खरीदी गई फसल को तुलाई केन्द्रों पर सुरक्षित रखे जाने के संबंध में आवश्यक कार्यवाही हेतु दिशा-निर्देश जारी किए हैं? यदि हाँ, तो क्या? यदि नहीं, तो क्यों? कृषि उपज मण्डी विदिशा के नवनिर्मित परिसर में प्लाटों की दर तय कर कब तक नवीन मण्डी परिसर में कृषि उपज तुलाई कार्य प्रारंभ किया जायेगा?

खाद्य मंत्री ( श्री बिसाहूलाल सिंह ) : (क) विदिशा जिले में रबी उपार्जन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्‍य पर गेहूँ-723709.9 एवं चना-57865.4 मे.टन का उपार्जन किया गया है। उपार्जन केन्‍द्रवार जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में उपार्जित मात्रा में से गेहूँ-723596.1 एवं चना-57860.8 मे.टन का परिवहन किया गया है। उपार्जन केन्‍द्र पर परिवहन हेतु कोई मात्रा शेष नहीं है। गेहूँ-113.89 एवं चना-4.60 मे.टन उपार्जन केन्‍द्र स्‍तर की कमी है। जिले में खरीदी के दौरान असामयिक वर्षा होने के कारण 4987.80 मे.टन गेहूँ पानी से प्रभावित/अमानक हुआ है। उपार्जन के दौरान असामयिक वर्षा से गेहूँ प्रभावित/अमानक होने के कारण कोई अधिकारी/कर्मचारी दोषी नहीं है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) जी हाँ। समर्थन मूल्‍य पर गेहूँ उपार्जन हेतु जारी नीति, उपार्जन एजेंसी तथा उपार्जन समिति के मध्‍य हुए अनुबंध तथा समय-समय पर जारी निर्देशों में उपार्जन केन्‍द्र पर खरीदी गई फसल को सुरक्षित रखने हेतु उपार्जन केन्‍द्र पर तिरपाल, कवर, अग्निशमन यंत्र एवं रेत की बाल्टियां रखे जाने का प्रावधान किया गया है। कृषि उपज मण्‍डी, विदिशा के नवीन मण्‍डी प्रांगण मिर्जापुर में अनुज्ञप्तिधारी व्‍यापारियों हेतु भू-खण्ड आवंटन नियम, 2009 में विहित प्रावधानों के अंतर्गत 4 बार नीलामी का आयोजन किया गया, किन्‍तु व्‍यापारियों द्वारा नीलामी में भाग नहीं लेने से भू-खण्‍ड आवंटित नहीं हो सके हैं। वर्तमान में नवीन मण्‍डी प्रांगण में सम्‍पूर्ण कृषि उपज का नीलामी कार्य एवं उपज का आंशिक तौल कार्य किया जा रहा है।

श्री शशांक श्रीकृष्‍ण भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, विदिशा जिला अंतर्गत विगत वर्ष रबी की फसल हेतु शासकीय तुलाई केन्‍द्रों के माध्‍यम से कितने टन गेहूं एवं चने का उपार्जन किया गया ? उपार्जन केन्‍द्रवार जानकारी उपलब्‍ध करायें. क्रम में उपार्जन किये गये गेहूं एवं चने की खरीदी उपरांत कितना गेहूं और चना गोदामों में परिवहन किया गया ?

अध्‍यक्ष महोदय -- यह तो लिखा हुआ है. इसका उत्‍तर आ गया. अब आप प्रश्‍न पूछें.

श्री शशांक श्रीकृष्‍ण भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न का उत्‍तर आया है और उत्‍तर में माननीय मंत्री जी ने कहा है कि जो 4000 टन गेहूं खराब हुआ है उसके लिये कोई अधिकारी जिम्‍मेदार नहीं है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि जिस समय खरीदी हो रही थी उस समय माननीय मुख्‍यमंत्री जी, खाद्य मंत्री जी को, पीएस फूड सबको मैंने पत्र लिखे कि किसानों को मैसेज़ आना क्‍यों बंद हो गये हैं, तो पीएस फूड कहते हैं कि हमारे यहां से नहीं हुये, कलेक्‍टर साहब कहते हैं कि हमारे यहां से नहीं हुये ऊपर से बंद हुये हैं, यह भ्रम की स्थिति पैदा करके हमारे सैकड़ों किसानों की गेहूं और चने की खरीदी नहीं हुई. उसके लिये जिम्‍मेदार कौन है ? और बीच में बारदाने की कमी आई, तो भी उन्‍होंने कहा हमने कह दिया है कि जूट के बारदाने में खरीदी कर लो, लेकिन नीचे स्‍तर पर अमल नहीं हुआ जिसकी वजह से किसानों का गेहूं भी घर में रखा रहा और यह चार हजार-साढ़े चार हजार टन गेहूं भीगने के लिये मजबूर होना पड़ा. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि इसमें कौन-कौन से अधिकारी शामिल थे जिनकी लापरवाही की वजह से किसानों का गेहूं भी नहीं खरीदा गया और शासन को भी नुकसान हुआ इसकी भरपाई कौन करेगा ?

श्री बिसाहूलाल सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे सदन को यह बताते हुए हार्दिक प्रसन्‍नता है कि इस बार पूरे भारतवर्ष में मध्‍यप्रदेश...(व्‍यवधान)..

श्री शशांक श्रीकृष्‍ण भार्गव -- माननीय मंत्री जी, यह बात सब जानते हैं. सदन को जानकारी है कि आपने गेहूँ ज्‍यादा खरीदा है.. ..(व्‍यवधान)..

श्री बिसाहूलाल सिंह -- मैं वही बता रहा हूँ... ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय -- जवाब तो आने दीजिए.

श्री शशांक श्रीकृष्‍ण भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह पूछ रहा हूँ कि कौन अधिकारी उसमें दोषी है ?

अध्‍यक्ष महोदय -- जवाब आने दीजिए, फिर पूछ लीजिएगा. माननीय सदस्‍य, आप बैठ जाएं. मंत्री जी उत्‍तर दे रहे हैं.

श्री बिसाहूलाल सिंह -- देखिए, किसान लोग अपना गेहूँ, चना उपार्जन केन्‍द्रों पर ले जाते हैं. कभी-कभी वर्षा के कारण गेहूँ भी भीग जाता है, चना भी भीग जाता है. यह खरीदी समिति स्‍तर पर होती है, तो जब ये भीग गया, तो इसमें कौन अधिकारी दोषी है. वह तो किसानों का गेहूँ, चना भीगा, जिसके चलते खरीदी नहीं हो पाई और जितनी खरीदी विदिशा जिले में हुई है, उपार्जन, सबको हम लोगों ने ट्रांसपोर्ट कर लिया है. कोई वहां पर बकाया नहीं है.

श्री शशांक श्रीकृष्‍ण भार्गव -- ट्रांसपोर्ट गीला गेहूँ हुआ है और गीले गेहूँ को उठाने की व्‍यवस्‍था बारिश से पहले की जा सकती थी, डेट खत्‍म हो गई थी, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही की वजह से वहां पर माल पड़ा रहा और हमारे जिन किसानों की खरीदी नहीं हुई, माननीय मंत्री जी, उनके बारे में जवाब चाहिए.

श्री बिसाहूलाल सिंह -- देखिए, ये गेहूँ और चना, जब किसान उपार्जन केन्‍द्रों पर ले जाता रहा, तब वह भीगा. उपार्जन केन्‍द्रों पर किसानों ने बेचा तो जितना गेहूँ, चना भीगा, उसको हमने समिति के ऊपर छोड़ दिया है, उनसे हम वसूली भी कर रहे हैं, क्‍योंकि जितना अच्‍छा गेहूँ था, हमने खरीद लिया और उसका ट्रांसपोर्ट भी कर दिया. किसानों का वहां पर कोई बकाया नहीं है.

श्री शशांक श्रीकृष्‍ण भार्गव -- माननीय मंत्री जी, मेसेज की दिक्‍कत आने की वजह से सैकड़ों किसान जो रह गए, उनके बारे में आपने कोई जवाब नहीं दिया.

श्री बिसाहूलाल सिंह -- गेहूँ खरीदी या चना खरीदी के पहले जितने किसान हैं, सबको हम लोग मेसेज देते हैं, उनका पंजीयन होता है, इसके बाद खरीदी होती है.

श्री शशांक श्रीकृष्‍ण भार्गव -- माननीय मंत्री जी, मेसेज आने के बाद भी खरीदी नहीं की गई.

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रश्‍न क्रमांक 5, श्री यशपाल सिंह सिसौदिया.

श्री शशांक श्रीकृष्‍ण भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है आपसे, इसमें एक पूरक प्रश्‍न और है.

अध्‍यक्ष महोदय -- उसी प्रश्‍न को बार-बार आप पूछ रहे हैं, जवाब दे दिया, अब हो गया. प्रश्‍न क्रमांक 5.

श्री शशांक श्रीकृष्‍ण भार्गव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक प्रश्‍न मंडी का इसमें लगा हुआ है कि कृषि उपज मण्‍डी, विदिशा के नवनिर्मित परिसर में प्‍लाटों की दर तय कर कब तक नवीन मण्‍डी परिसर में कृषि उपज तुलाई कार्य प्रारंभ किया जाएगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- श्री यशपाल सिंह सिसौदिया, अपना प्रश्‍न पूछें.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ..(व्‍यवधान)..

श्री शशांक श्रीकृष्‍ण भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा पूरा प्रश्‍न तो हो जाए. पूरे प्रश्‍न का जवाब नहीं आएगा तो फिर प्रश्‍न पूछने का मतलब ही नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय -- जवाब तो वे दे रहे हैं. जवाब आप लेते नहीं हैं, दूसरी तरफ बात करते हैं. जवाब तो दिया उन्‍होंने.

श्री शशांक श्रीकृष्‍ण भार्गव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कृषि मण्‍डी का जो प्रश्‍न लगा है, उसका तो जवाब नहीं दिया गया है. मेरा प्रश्‍न इसमें यह है कि कृषि उपज मण्‍डी, विदिशा के नवनिर्मित परिसर में प्‍लाटों की दर कब तय की जाएगी और कब इन्‍हें नीलाम किया जाएगा. नवीन मण्‍डी को बने हुए तीन साल हो गए, लेकिन आज तक वहां पर तुलाई नहीं हो रही है, इसका कारण यह है कि वहां पर ऑफसेट प्राइज़ जो कलेक्‍टर रेट है, वह अत्‍यधिक होने की वजह से व्‍यापारी नहीं खरीद रहे हैं और उसके लिए हमने कई बार यह प्रयास किया कि वहां के रेट कम किए जाएं, ऑफसेट वेल्‍यु के हिसाब से और जो पुरानी लीज जो पुरानी मण्‍डी में है, उसका कम्‍पनसेशन दिया जाए, लेकिन सरकार की तरफ से आज तक कोई जवाब नहीं आया है.

श्री बिसाहूलाल सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, ये जो दूसरी मण्‍डी की बात कर रहे हैं, जहां पर खरीदी केन्‍द्र खोला जाए, ये प्रस्‍ताव शासन स्‍तर पर विचाराधीन है, हो जाएगा तो तत्‍काल खोल दिया जाएगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है. प्रश्‍न क्रमांक 5, श्री यशपाल सिंह सिसौदिया जी.

 

खाद घोटाले में ट्रांसपोर्टर पर FIR दर्ज की जाना

[सहकारिता]

5. ( *क्र. 24 ) श्री यशपाल सिंह सिसौदिया : क्या सहकारिता मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या दिनांक 02 दिसंबर, 2020 को मंदसौर नीमच जिलों में ट्रांसपोर्टर व्यवसाई द्वारा गेहूँ उपार्जन तथा खाद को सोसाइटी तक पहुंचाने में हेराफेरी का प्रकरण विभाग के प्रकाश में आया है? इसमें क्या अनियमितता हुई है? (ख) क्या सोसाइटियों को ठेकेदार द्वारा खाद परिवहन जो की RO के माध्यम से जिला विपणन विभाग से जारी हुआ बताकर स्टेट वेयर हाऊसिंग मंदसौर से खाद सोसाइटियों तक पहुँचाना था, वह पहुंचा ही नहीं, जिससे ट्रांसपोर्टर द्वारा 3 करोड़ 50 लाख का घोटाला प्रकाश में आया? क्या ठेकेदार के पिता वेयर हॉउस में चौकीदार पद पर कार्यरत हैं, जिससे दोनों की मिलीभगत से खाद की चोरी हुई? यदि हाँ, तो इतने बड़े घोटाले में पुलिस F.I.R. क्यों दर्ज नहीं कराई गयी और कार्यवाही के नाम पर मात्र कुछ सोसाइटियों के प्रबंधकों को निलंबित कर खानापूर्ति की गयी? (ग) क्या घोटाला मीडिया में उजागर होने के पश्चात परिवहन ठेकेदार ने शपथ पत्र दिनांक 07 दिसंबर, 2020 को देते हुए लिखा कि‍ घोटाले की 3 करोड़ 50 लाख की राशि मेरे परिवहन के बिलों के भुगतान में समायोजित कर ली जाये? क्या यह शपथ पत्र विधि सम्मत है? यदि नहीं, तो ठेकेदार के खिलाफ FIR कब तक दर्ज करा दी जायेगी?

सहकारिता मंत्री ( डॉ. अरविंद सिंह भदौरिया ) : (क) मंदसौर एवं नीमच जिले में परिवहनकर्ता द्वारा खाद को सोसायटी तक पहुंचाने में हेराफेरी का प्रकरण प्रकाश में आया है एवं गेहूँ उपार्जन की कोई हेरा-फेरी प्रकाश में नहीं आई है। विपणन संघ द्वारा म.प्र. स्‍टेट वेयर हाउसिंग एण्‍ड लाजिस्टिक्‍स कार्पोरेशन पिपल्‍या मण्‍डी में भंडारित किये गये उर्वरक की अफरा-तफरी वेयर हाउस के कर्मचारी श्री ठाकुर प्रसाद तिवारी एवं परिवहनकर्ता श्री कमल तिवारी द्वारा समितियों में उर्वरक के आर.ओ. का दुरूपयोग कर की गई है। (ख) जी हाँ, सोसायटियों के लिये बैंक द्वारा जारी आर.ओ. एवं चेक की प्रति विपणन संघ के द्वारा म.प्र. स्‍टेट वेयर हाउसिंग एण्‍ड लॉजिस्टिक्‍स कॉर्पोरेशन पिपल्‍या मण्‍डी के गोदाम में भण्‍डारित स्‍कंध सोसायटियों को प्रदाय नहीं करते हुए ट्रांसपोर्टर द्वारा गोदाम के चौकीदार से मिलकर अनुमानित राशि रू. 4,63,79,443/- (अनुदान सहित) की हेरा-फेरी किया जाना पाया गया है। जी हाँ, विपणन संघ द्वारा प्रकरण में विधिक अभिमत प्राप्‍त किया जा रहा है, प्राप्‍त विधिक अभिमत अनुसार विपणन संघ के स्‍तर से कार्रवाई की जावेगी। प्रकरण में उप आयुक्‍त सहकारिता द्वारा कराई गई जाँच प्रतिवेदन के अनुक्रम में दोषियों के विरूद्ध प्राथमिकी एवं अन्‍य कार्रवाई हेतु विपणन संघ को पत्र दिनांक 15.02.2021 प्रेषित किया गया है। (ग) जी हाँ, परिवहनकर्ता द्वारा खाद की गबन की राशि का समायोजन उपार्जन के परिवहन देयकों से करने हेतु शपथ पत्र प्रस्‍तुत किया गया है। शपथ पत्र नोटरी के समक्ष शपथ लेकर प्रस्‍तुत किया गया है, शपथ पत्र के परिप्रेक्ष्‍य में विपणन संघ द्वारा राशि रू. 3,32,52,285.17 का समायोजन आज दिनांक तक कर लिया गया है, विपणन संघ द्वारा शेष वसूली योग्‍य राशि प्राप्ति हेतु विधिक अभिमत उपरांत विधिक कार्रवाई की जावेगी। प्रकरण में उप आयुक्‍त सहकारिता द्वारा कराई गई जाँच प्रतिवेदन के अनुक्रम में दोषियों के विरूद्ध प्राथमिकी एवं अन्‍य कार्रवाई हेतु विपणन संघ को लिखा गया है।

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तारांकित प्रश्‍नोत्‍तरी में मेरा प्रश्‍न है और मेरे प्रश्‍न का जवाब माननीय मंत्री जी की तरफ से आ चुका है. मैं उसके विस्‍तार में नहीं जाऊंगा. आपका सरंक्षण चाहते हुए माननीय मंत्री से मैं सीधे-सीधे प्रश्‍न करूंगा. मैं यह भी जानता हूँ कि माननीय सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद भदौरिया जी बहुत निष्‍पक्ष और बहुत कर्मठ मंत्री हैं और मुझे उनसे पूरी उम्‍मीद है. अध्‍यक्ष महोदय, मंदसौर जिले में 2 दिसंबर, 2020 को यूरिया, डीएपी, एनपीके-12:32:16 तथा एमओपी, अध्‍यक्ष महोदय, वह खाद जो नीमच और रतलाम के रेकप्‍वॉइंट से निकला और उस खाद को सोसाइटियों तक जाना था और सोसाइटियों के माध्‍यम से किसानों तक जाना था. इसमें तीन विभागों की कहीं न कहीं साझेदारी और जिम्‍मेदारी बनती है. यह बात भी सही है कि विभाग ने अपनी तरफ से परिश्रम करके करीब 4 करोड़ के उस गबन में, उस घोटाले में, उस हेराफेरी में, आश्‍चर्य इस बात का भी है कि जो ठेकेदार है, उसका पिता चौकीदार भी है. ठेकेदार और पिता चौकीदार, दोनों ने मिलकर के आरओ बनवा लिया और सोसाइटियों के माध्‍यम से खाद किसानों तक पहुँचने के बजाय बीच में हेराफेरी हो गई.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 19 फरवरी 2021 को सुश्री जेनिफर ने एफआईआर दर्ज की, जोकि जिला विपणन अधिकारी महोदया हैं उन्‍होंने पिपलिया मंडी के थाना क्षेत्र में पिता-पुत्र दोनों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करवा दिया है. एक शपथ पत्र में भी ठेकेदार ने इस बात की स्‍वीकारोक्ति प्रदान की है कि मुझे शासन से बिलों का जो भुगतान होना है उसमें से जो हेरा-फेरी की है, जो मैंने गबन किया है, चोरी-चकारी की है, उस राशि को समायोजित कर लिया जाए. अभी भी करीब डेढ़ करोड़ रुपए की राशि ठेकेदार को उन बिलों के अगेंस्‍ट लेना बाकी है. मैं माननीय मंत्री जी से सीधा-सीधा यह जानना चाहूंगा, यह उम्‍मीद करुंगा कि क्‍या ठेकेदार की शेष डेढ़ करोड़ रुपए की राशि कैसे प्राप्‍त होगी, क्‍या उसकी सम्‍पत्ति को राजसात किया जाएगा और यह वैधानिक भी है, विधिसम्‍मत भी है.

मैं माननीय मंत्री जी से यह भी जानना चाहूंगा कि जो ठेकेदार है, उस ठेकेदार ने क्‍या पिछले 5-10 वर्षों से कोई अनुबंध करके इतना बड़ा काम हाथ में लिया है. मुझे जानकारी मिली है कि न तो ठेकेदार को कार्यादेश मिला है और न उनका कोई अनुबंध निष्‍पादित है. ऐसी स्थिति में यदि वह बिना अनुबंध के कोर्ट जाएगा, तो मुझे लगता है कि यह राशि भी वसूल नहीं हो पाएगी और जो राशि वसूल कर ली गई है वह भी शायद उसको शासन को लौटाना पड़ जाएगा. इसमें एक अनुबंध की कमी है. मैं मंत्री जी यह जानना चाहता हॅूं कि अनुबंध की क्‍या प्रक्रिया हुई, उसका वर्कऑर्डर हुआ या नहीं ? शेष राशि, सम्‍पत्ति उसकी किस प्रकार से राजसात होगी ? तीसरा जिला सहकारी केन्‍द्रीय बैंक के जो महाप्रबंधक हैं उनका और उन सोसायटियों के संबंध में हमें यह भी जानकारी मिली थी कि कुछ प्रबंधकों को निलंबित कर दिया गया, मैंने इस संबंध में प्रश्‍न भी पूछा था. कुछ सोसायटियों के प्रबंधकों को निलंबित कर दिया गया है. केवल खानापूर्ति की गई. मेरा यही कहना है कि क्‍या उन सोसायटियों के प्रबंधकों को निलंबित कर दिया गया था ?

डॉ. विजयलक्ष्‍मी साधौ -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिसौदिया जी जो बोल रहे हैं आशय यह है कि XXX है.

अध्‍यक्ष महोदय -- इसको रिकार्ड न करें. आप प्रश्‍न करिए.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया -- यह आपके ही कालखंड का है. मुझे कहलवाइए मत. दिसम्‍बर में आपकी सरकार थी. दिसम्‍बर 2020 की घटना है. 2 दिसम्‍बर को घोटाला हुआ है. आपके ही संरक्षण में हुआ होगा. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहूंगा कि जिला सहकारी केन्‍द्रीय बैंक के प्रबंधक विपणन संद्य और स्‍टेट वेयर हाऊसिंग कार्पोरेशन इन सबकी क्‍या..(व्‍यवधान)...

श्री कुणाल चौधरी -- यह आपने बताया कि 5 साल, 10 साल का मामला इकट्ठा हुआ तब आपकी सरकार थी.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इनकी क्‍या जिम्‍मेदारी है और क्‍या एक उच्‍चस्‍तरीय समिति भोपाल स्‍तर पर बनाने से पहले, क्‍योंकि इसमें ऑडिट का भी सवाल आएगा, मैं चाहता हॅूं कि इसकी बहुत निष्‍पक्ष जांच हो.

श्री बापूसिंह तंवर -- मंत्री जी बदल गए.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय मंत्री जी.

डॉ.अरविंद सिंह भदौरिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं एक सेकेंड में आपका भी धन्‍यवाद देता हॅूं. मंत्री बनने के बाद पहली बार प्रश्‍न कर रहे हैं माननीय सिसौदिया जी बडे़ विद्वान व्‍यक्ति हैं. बडे़ चिन्‍तक, विचारक हैं बडे़ नॉलेजिबल व्‍यक्ति हैं, उनका भी धन्‍यवाद देता हॅूं कि आप मुझसे प्रश्‍न कर रहे हैं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी और सदन का भी धन्‍यवाद देता हॅूं जो माननीय सिसौदिया जी ने जो विषय उठाए हैं वह महत्‍वपूर्ण हैं पिछली सरकार के समय, चाहे सरकार कोई भी हो, हमारी हो या आपकी हो किसी की भी हो उस समय जो आपने कहा और अनियमितता जो हुई है उससे 3 करोड़ 58 लाख रुपए की जो भी अनियमितता उस समय हुई थी इसके अतिरिक्‍त खाद्य सब्सिडी 1 करोड़ 37 लाख रुपए थी जो कुल मिलाकर 4 करोड़ 95 लाख रुपए की राशि होती है. इसमें से अभी तक 3 करोड़ 32 लाख रुपए उनसे वसूल कर लिया गया है लेकिन जो सब्सिडी की राशि है वह 1 करोड़ 63 लाख रुपए वसूली की कार्यवाही जारी है. अब आपने मुझे जो प्रश्‍न किया है ट्रांसपोर्टर के खिलाफ एफआईआर हो गई, उनके पिताजी के खिलाफ एफआईआर हो गई है तो जो इसमें सहकारी समितियों के प्रबंधक थे उनके खिलाफ भी एफआईआर कर दिया है जो बाकी बचा हुआ पैसा है वह भी उनसे वसूली कर रहे हैं. एक आपने प्रश्‍न किया है कि क्या उनकी संपत्ति को राजसात किया जाएगा? तो सहकारी अधिनियम में संपत्ति को राजसात करने, कुर्की तथा नीलामी का प्रावधान है. इसके अन्तर्गत कार्यवाही जरूर कराएंगे, आप निश्चिन्त होकर रहिए. आवश्यकता पड़ने पर सहकारी अधिनियम के अलावा भी अन्य एजेन्सियों के द्वारा भी इस पर कुर्की की, राजसात करने की, कार्यवाही कराएंगे, हंड्रेड परसेंट. दूसरा आपका एक प्रश्न है कि इसमें वहाँ के महाप्रबंधक और भी लोग, आपको डाउट है, ऐसे तीन विभागों का इसमें इन्वॉल्वमेंट था और तीनों विभागों के लिए, आपने मांग नहीं की है, मैं घोषणा करना चाहता हूँ कि उच्च स्तरीय एक कमेटी बनाकर तीनों विभागों के संबंधित जो भी अधिकारी, कर्मचारी, होंगे उनको छोड़ा नहीं जाएगा, उन पर एफ आई आर कराई जाएगी, जो भी दोषी होगा उस पर कार्यवाही की जाएगी, तो यह भी हम एक जाँच दल गठित कर देते हैं. इस पर और कुछ आपका प्रश्न हो?

श्री सज्जन सिंह वर्मा-- कमेटी में विधायक जी को रखोगे कि नहीं?

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- नहीं मेरी जरुरत नहीं है, मुझे विश्वास है.

श्री सज्जन सिंह वर्मा-- आपने तो कहा कि मुझे रखो.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- वह लाखन जी ने बोला था.

श्री सज्जन सिंह वर्मा-- (XXX)

अध्यक्ष महोदय-- यह रिकार्ड न करें.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- लाखन जी ने बोला था, मैंने नहीं बोला था.

अध्यक्ष महोदय-- उन्होंने खुद मना किया है.

डॉ.अरविन्द सिंह भदौरिया-- चौकीदारी उस समय आपके नेता माननीय जी कर रहे थे. जो अभी सदन में नहीं हैं.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- माननीय मंत्री जी......

श्री तरुण भनोत-- माननीय मंत्री जी वक्तव्य दे रहे हैं कि मुख्यमंत्री जी चौकीदारी कर रहे थे, तत्कालीन....

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, नहीं, ऐसा नही.

श्री तरुण भनोत-- उन्होंने कहा है...

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, यह नहीं कहा.

श्री तरुण भनोत-- उन्होंने कहा है...

अध्यक्ष महोदय-- नहीं, यह नहीं कहा, गलत.

श्री तरुण भनोत-- तो क्या मुख्यमंत्री चौकीदारी करते हैं?

अध्यक्ष महोदय-- नहीं.

श्री तरुण भनोत-- (XXX)

अध्यक्ष महोदय-- गलत अर्थ मत लगाइये.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- तरुण भाई, मेरा प्रश्न तो आ जाने दो.

एक माननीय सदस्य-- आपको क्यों लग रहा है तरुण भाई, उन्होंने तो एक बार भी नहीं बोला कि आपके (XXX) थे.

श्री तरुण भनोत-- हमने तो सुना था, मुख्यमंत्री नहीं, अभी तक तो चौकीदार प्रधानमंत्री सुने थे. ..(व्यवधान)...

राजस्व मंत्री(श्री गोविन्द सिंह राजपूत)-- चौकीदार होना गर्व की बात है.

श्री तरुण भनोत-- आप तो मत बोलो.

श्री गोविन्द सिंह राजपूत-- हम बार बार कह रहे हैं....(व्यवधान)...

श्री तरुण भनोत-- आप तो बैंगलूरू में चौकीदारी कर रहे थे.

श्री गोविन्द सिंह राजपूत-- सुनो, सारे लोगों...(व्यवधान)..

श्री तरुण भनोत-- आपकी बात तो सुनेंगे ही नहीं. ...(व्यवधान)..

श्री गोविन्द सिंह राजपूत-- जो यहाँ उपस्थित नहीं है.... ...(व्यवधान)..

श्री तरुण भनोत-- माननीय, आपके पुराने भाषण भी हैं. ...(व्यवधान).. आपके युवक काँग्रेस के अध्यक्ष के रूप से लेकर आपके सारे भाषण हैं. आप भूल जाते हैं आप कहाँ हैं.

अध्यक्ष महोदय-- अरे सुनिए तो. आप बैठ तो जाइये.

श्री गोविन्द सिंह राजपूत-- अध्यक्ष महोदय, मैं यह कहना चाहता हूँ कि तरुण जी और तरुण जी के नेता सच सुन रहे होते तो यह दुर्दशा नहीं होती, जो आज तुम्हारी हो रही है.

श्री तरुण भनोत-- आपको गलतफहमी है कि हमारी दुर्दशा हुई. यह तो आप अपने अन्दर झांक कर देखिए कि दुर्दशा किसकी हुई, कैसे थे और कैसे हो गए. ...(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- तरुण जी, बैठ जाइये.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- माननीय अध्यक्ष जी, मेरा सिर्फ यह निवेदन है....

अध्यक्ष महोदय-- आपके पक्ष में सब कह दिया, जो आप चाहते थे, सब कर दिया.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- अध्यक्ष जी, क्या इन अधिकारियों के रहते हुए जाँच संभव हो पाएगी?

डॉ.अरविन्द सिंह भदौरिया-- माननीय यशपाल जी, हमारे मित्र, आपकी मंशा से भी मैं सहमत हूँ, आप बड़े सजग विधायक भी हैं, आवश्यकता पड़ेगी तो जो वहाँ महाप्रबंधक हैं, अभी प्रथमदृष्टया वह जाँच में नहीं आए, जो हमने जाँच कराई उसमें, आवश्यकता पड़ेगी, जो कमेटी मैंने घोषित की है उसमें कहीं थोड़ा सा भी ध्यान आएगा तो उनको भी हटाकर भी जाँच करवा लेंगे. दूसरा, आगे भी कभी इस प्रकार की गड़बड़ियाँ न हों, क्योंकि हमारे नेता संजीदे हैं, तो इसके लिए भी बड़ा ट्रांसपरेंट सिस्टम अभी हमने खड़ा किया है. इसके समिति स्तर पर बैंक ब्रांच को डिमांड का आर ओ एवं चेक जारी करना तथा गोदाम द्वारा समिति को उर्वरक स्थानांतरण और आपूर्ति की प्रक्रिया ऑन लाइन कर दी गई है. इसी तरह समिति द्वारा उर्वरक प्राप्ति की पावती भी अब ऑन लाइन कर दी गई है. भविष्य में समिति स्तर पर एवं गोदाम स्तर पर उपलब्ध स्टॉक को नागरिकों द्वारा ऑन लाइन देखा जा सकेगा. इस प्रकार पूरी प्रक्रिया बहुत पारदर्शी बनाई गई, आपके प्रश्न के बाद, उसके पहले भी उसका प्लान किया है इसलिए आप निश्चिंत होकर रहिए. आपको और भी कुछ लगता है तो लिखित में दीजिए बिल्कुल हंड्रेड परसेंट पारदर्शिता रहेगी.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- माननीय मंत्री जी, आपको बहुत बहुत धन्यवाद. जांच दल कब तक गठित कर देंगे.

डॉ. अरविंद सिंह भदौरिया -- कल ही घोषित कर देंगे. आगे का प्रश्न भी करिए कि कितने समय में जांच करा लेंगे.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया -- कितने समय में जाँच करवा लेंगे.

डॉ. अरविंद सिंह भदौरिया -- 4 महीने में हम इसकी जाँच करवा लेंगे और कम में यदि कराना है तो 3 महीने में भी करा लेंगे.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया -- धन्यवाद मंत्री महोदय, तीन महीने में जाँच करवा लें.

हरपुरा सिंचाई परियोजना फेस-2 का कार्य प्रारंभ किया जाना

[जल संसाधन]

6. ( *क्र. 1230 ) श्री हरिशंकर खटीक : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता द्वारा हरपुरा सिंचाई परियोजना फेस-2 का बंद कार्य पुन: चालू कराने एवं पराई नदी पर परेवा बांध बनाये जाने बाबत् विधानसभा में तारांकित/अतारांकित प्रश्‍न किये जा रहे हैं? (ख) प्रश्नांश (क) के आधार पर बतायें कि जामिनी नदी पर हरपुरा सिंचाई परियोजना बनाने के पूर्व क्‍या उत्‍तर प्रदेश की सीमा पर भैराट बांध बनाया जा रहा था? अगर हाँ तो उस समय पानी की साध्‍यता फिर क्‍यों दी गई थी और बाद में फेस-2 के कार्य हेतु क्‍यों साध्‍यता निरस्‍त कर दी गई है? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के आधार पर बतायें कि जब फेस-1 का काम पूरा कराया गया तो विभाग को बम्‍हौरी बराना तालाब में भी फेस-2 का नहर द्वारा पानी भरने का कार्य भी पूरा किया जाना चाहिये था? ऐसा क्‍यों नहीं किया गया? (घ) प्रश्नांश (क), (ख) एवं (ग) के आधार पर बतायें कि फेस-2 हेतु जो साध्‍यता निरस्‍त कर दी गई है, उसकी पुन: गणना करवाकर साध्‍यता दी जावेगी तो कब तक? विभाग ऐसा आदेश जारी करेगा तो कब तक और नहीं तो क्‍यों? प्रश्‍न दिनांक तक पराई नदी पर परेवा बांध बनाये जाने एवं उसकी वित्‍तीय एवं प्रशासकीय स्‍वीकृति शासन से प्राप्‍त कराने हेतु विभाग ने क्‍या-क्‍या कार्यवाही पूर्ण कर ली है? निश्चित समय-सीमा सहित बतायें कि कब तक परेवा बांध के टेण्‍डर हो जावेंगे?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) जी हाँ। (ख) जी नहीं, तत्‍समय उत्‍तर प्रदेश द्वारा बांध बनाने संबंधी प्रक्रिया प्रचलन में नहीं थी। वर्तमान में जामनी नदी पर भैराट बांध निर्माणाधीन होना प्रतिवेदित है। (ग) फेस-1 में हरपुरा नहर की अधिकतम क्षमता 7 क्यूमेक पानी चलाने की रूपांकित होकर नहर का निर्माण कराया गया है। जामनी नदी पर उत्‍तरप्रदेश द्वारा भैराट बांध के निर्माण किए जाने सेहरपुरा नहर में पानी की उपलब्धता केवल 10 तालाबों को ही भरने की रह गई है। अत: अतिरिक्‍त तालाबों को भरने हेतु पानी की उपलब्धता न होने से हरपुरा विस्तार नहर फेस-2 तकनीकी रूप से असाध्‍य हो गई। शेष प्रश्नांश उत्पन्न नहीं होते हैं। (घ) हरपुरा सिंचाई परियोजना फेस-2 तकनीकी रूप से असाध्य होने से वर्तमान में पुनः गणना करके योजना बनाने संबंधी कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। पराई नदी पर परेवा बांध का डी.पी.आर. तैयार किया जाना प्रतिवेदित है। डी.पी.आर. मैदानी स्‍तर पर परीक्षणाधीन होने से शेषांश का प्रश्न उपस्थित नहीं होता हैं।

श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह टीकमगढ़ जिले से जुड़े हुए किसानों से संबंधित बहुत गंभीर मामला है. हमारे विनम्र अनुरोध के आधार पर मुख्यमंत्री महोदय ने वर्ष 2013 में नदी-तालाब जोड़ो योजना बनाई थी. इसके तहत टीमकगढ़ जिले की जामनी नदी से फेस-1 और फेस-2 के माध्यम से तालाबों में पानी भेजने का प्रस्ताव किया गया था. फेस-1 में दस तालाबों में पानी भरने की कार्यवाही प्रारंभ की गई. माननीय मलैया जी मंत्री थे उस समय मैं भी मंत्री था उसका भूमि पूजन भी किया गया था. जामनी नदी से फेस-1 और फेस-2 की हमने स्वीकृति दिलाई. फेस-2 से मेरे विधान सभा क्षेत्र में तालाब में पानी भेजने का मामला था उसके लिए पहले प्रशासनिक स्वीकृति जारी की गई. इसके बाद फेस-1 से भी 10 तालाबों में पानी भेजने की स्वीकृति दी गई. फेस-1 का काम तो पूरा हो गया है. मेरे विधान सभा जतारा में बम्हौरी बराना तालाब में पानी पहुंचाने के लिए नहर का काम भी शुरु हुआ था परन्तु यह काम असाध्य घोषित कर दिया गया.

माननीय अध्यक्ष महोदय, सिलावट जी बहुत अच्छे मंत्री हैं मुझे विश्वास है कि किसानों के हित में हमें न्याय मिलेगा. मंत्री जी से विनम्र प्रार्थना है कि जब बम्हौरी बराना तालाब के लिए पहले स्वीकृति जारी हुई थी तो उसका काम पहले प्रारंभ क्यों नहीं कराया गया.

श्री तुलसीराम सिलावट -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सम्मानित सदस्य ने बहुत गंभीर बात की है. फेस-1 से 10 जलाशयों को भरना था. अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय सदस्य से अनुरोध करना चाहूँगा. उस नदी से जो 10 जलाशय भरने की बात कही है उसमें से मात्र 5 भरते हैं. वर्ष 2017-18 में 5 तालाब भरे गये. वर्ष 2020-21 में भी 5 तालाब भरे गए उसके बाद भी 5 तालाब खाली हैं. फेस-2 जो माननीय सदस्य के विधान सभा क्षेत्र में आता है, मैं मानता हूँ कि इसकी प्रशासकीय स्वीकृति दिनांक 12.2.2013 में प्राप्त हुई थी. यह परियोजना 33 करोड़ 18 लाख रुपए लागत की थी. जिसके अन्तर्गत हरपुरा फेस-1 से नहर निर्माण बम्हौरी, बराना, देवगोंडा जलाशयों में पानी भरा जाना प्रस्तावित था. हरपुरा फेस-2 परियोजना के लिए दिनांक 10.2.2013 को निविदा आमंत्रित की गई थी किन्तु किसी भी एजेंसी द्वारा निविदा में भाग नहीं लिया गया. किसी भी एजेंसी के द्वारा निविदा में भाग न लेने के बावजूद भी माननीय सदस्य की किसान के प्रति रुचि को देखते हुए विभाग द्वारा नहर की खुदाई का काम प्रारंभ किया गया था, किन्तु ग्रामीणों के विरोध के कारण कार्य रोक दिया गया था. तीसरा कारण उल्लेखनीय है कि देवगोंडा जलाशय में नहर द्वारा पानी भरा जाना था परन्तु ऊंचाई नहर के लेवल से अधिक थी. यह तीन कारण थे जिसके कारण फेस-2 हम पूरा नहीं कर सके.

माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सम्मानीय सदस्य को यह आश्वस्त करता हूँ कि उनकी सुविधा के अनुसार हमारे विभाग के अधिकारियों की एक टीम बनाकर सिंचाई योजना की क्या वैकल्पिक व्यवस्था हो सकती है इसका पूरी परीक्षण किया जाएगा और तद्नुसार निर्णय लिया जाएगा.

श्री हरिशंकर खटीक -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने बताया कि दिनांक 10.2.2013 को फेस-2 के टेंडर बुलाए गए थे परन्तु टेंडर नहीं आए तो टेंडर दोबारा भी बुलाए जा सकते थे. दूसरी बात मंत्री जी ने बताई कि स्थानीय लोगों द्वारा आपत्तियाँ की गईं. मैं बताना चाहता हूँ कि एक परिवार के सात लोगों के द्वारा कलेक्टर के पास आपत्ति लगाई गई कि इससे हमारी जमीन डूब क्षेत्र में जा रही है, इस पर रोक लगाई जाए. इसके संबंध में मैं 8-10 बार विधान सभा प्रश्न लगा चुका हूँ जिसके उत्तर की प्रति मेरे पास उपलब्ध है. क्या एक परिवार के कारण 40 गांव के लोगों का नुकसान किया जा सकता है. दूसरी बात जो आपने कही कि देवगोंडा की ऊंचाई वहां से अधिक हो रही थी तो बम्‍हौरी बराना के तालाब के लिए रूट चेंज करके भी उसकी योजना बनाई जा सकती थी. अभी एक बात और आपके सामने आएगी कि उत्‍तर प्रदेश में बैराज बांध बन रहा है जामिनी नदी उत्‍तर प्रदेश की सीमा से निकलकर आई हुई है उस डेम का काम आज भी चल रहा है. उत्‍तर प्रदेश में बैराज डेम के कारण उसकी साध्‍यता निरस्‍त कर दी गई.

अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी यह बताएं कि‍ बैराज डेम पहले से बन रहा है या बाद में बन रहा था? और यह भी बताएं कि जब बैराज डेम बन रहा है तो क्‍या उस डेम का काम अधूरा है और यदि काम अधूरा है तो क्‍या अधूरे काम में बैराज डेम में जामिनी नदी का पानी नहर के द्वारा पहुंचाया जा सकता है? यदि कागजों के माध्‍यम से पहुंचाया जा सकता है तो यह बताएं कि जो पानी उसमें गया है उसके आधार पर क्‍या साध्‍यता निरस्‍त कर दी है और साध्‍यता निरस्‍त की है तो क्‍यों निरस्‍त की है?

श्री तुलसीराम सिलावट-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं यह स्‍पष्‍ट कर चुका हूं कि मुख्‍य तीन कारण थे. सम्‍माननीय विधायक जी ने कहा कि हम कलेक्‍टर से कई बार मिले एक ही परिवार थे, 29 लोगों के कारण यह योजना निरस्‍त की गई. हमारे सम्‍माननीय विधायक जी इतने सजग हैं, इतने जागरुक हैं मैं उनसे अनुरोध करता हूं कि आप उनसे सम्‍पर्क कर लीजिए मैं भी उनसे सम्‍पर्क कर लूंगा और यह जो उत्‍तर प्रदेश सीमा पर बांध की बात की है वह आपको पता है कि फेस-2 के बाद हुआ और आपने जामिनी नदी में जो पानी की कमी की बात कही है अध्‍यक्ष महोदय, मेरे सम्‍माननीय सदस्‍य को मेरे से ज्‍यादा बेहतर पता है कि पानी की कमी है. मैं आपको आश्‍वस्‍त कर रहा हूं कि आपके कहने पर तकनीकी रूप से मैं पुन: परीक्षण करवाकर प्रयास करूंगा कि आपकी जो इच्‍छा है, जो मंशा है कि आपके क्ष्‍ेात्र में सिंचाई का काम प्रारंभ हो मैं इसका पूरा भरोसा दिलाता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय--खटीक जी, मंत्री जी को धन्‍यवाद तो कह दीजिए.

श्री हरिशंकर खटीक-- अध्‍यक्ष महोदय, धन्‍यवाद दे देंगे और मंत्री जी बहुत अच्‍छा जवाब भी दे रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- खटीक जी आपका प्रश्‍न पूरा हो चुका है.

श्री हरिशंकर खटीक-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा इसमें एक और अनुरोध है कि बराना बमौरी के तालाब में जामिनी नदी का बारिश का पानी पहुंच जाएगा तो इससे चालीस गांवो के किसानों को इसका लाभ मिलेगा. मेरा अनुरोध है कि बामौरी बराना के तालाब के लिए आप यह कहें कि जो इसकी साध्‍यता निरस्‍त कर दी गई है आप उसे पुन: बहाल कराएंगे और बहाल कराने के बाद उसका काम करांएगे क्‍योंकि उसके लिए 33 करोड़ 19 लाख रुपए आज भी प्रशासन से स्‍वीकृत है. इसकी प्रशासकीय स्‍वीकृति आज भी है. हम कोई नए काम की स्‍वीकृति नहीं चाहते हैं. आप यह बोलिए कि आप इसको कराएंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपको कह दिया है कि आपसे पूछकर करेंगे.

श्री तुलसीराम सिलावट-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इसका परीक्षण करवा लू्ंगा.

श्री हरिशंकर खटीक-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं एक प्रश्‍न और पूछना चाहता हूं.

अध्‍यक्ष महोदय-- हरिशंकर जी आपका प्रश्‍न पूरा हो गया है. आप तीन प्रश्‍न से ज्‍यादा पूछ चुके हैं. आप पांच, छ: प्रश्‍न आप पूछ चुके हैं. इसमें बृजेन्‍द्र सिंह जी आपकी मदद करेंगे. मैं बृजेन्‍द्र सिंह जी को अनुमति दे रहा हूं. कृपया कर आप बैठ जाइए. आपका प्रश्‍न हो गया है.

श्री हरिशंकर खटीक-- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है. यह इसी से संबंधित है.

अध्‍यक्ष महोदय-- मंत्री जी ने उत्‍तर दे दिया है और मैंने बृजेन्‍द्र जी का नाम भी ले लिया है.

श्री हरिशंकर खटीक-- मंत्री महोदय इसमें शासकीय स्‍वीकृति कब तक जारी कर दी जाएगी?

श्री तुलसीराम सिलावट-- मैं सम्‍माननीय सदस्‍य को यह आश्‍वस्‍त करता हूं कि अतिशीघ्र कर दिया जाएगा.

श्री हरिशंकर खटीक-- धन्‍यवाद माननीय मंत्री जी.

श्री बृजेन्‍द्र सिंह राठौर-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी माननीय विधायक जो बात रख रहे थे निश्चित रूप से वह जिले की सिंचाई के लिए बहुत ही आवश्‍यक है क्‍योंकि टीकमगढ़ और निवाड़ी जिले ऐसे हैं कि वहां हर दूसरे साल सूखा पड़ जाता है और जब तक हम नदियों से तालाबों को नहीं जोड़ेंगे तब तक वहां की समस्‍या हल नहीं होगी. अभी माननीय मंत्री जी ने उत्‍तर दिया कि फेस-। में दस तालाबों को जोड़ना था केवल पांच भरे जा सके हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- आपको मैंने सलाह देने के लिए समय दिया है. इसमें क्‍या हो सकता है आप यह बताइए.

श्री बृजेन्‍द्र सिंह राठौर-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं प्‍वाइंटेड ही पूछ रहा हूं.यह जो पांच तालाब भरे गए आप यह क्‍यों स्‍वीकार नहीं कर रहे हैं कि कहीं न कहीं आपकी जो टेक्निकल विंग थी उनकी कमी रही है जिसकी वजह से यह पूरे कि पूरे तालाब नहीं भरे गए हैं. क्‍या अभी उसमें पैसा बचा है जिससे कि बकाया शेष 5 तालाब भरेंगे. आज भी वे 5 तालाब खाली हैं.

श्री तुलसीराम सिलावट- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे सम्‍माननीय सदस्‍य बहुत वरिष्‍ठ हैं. मैंने कहा कि जो 5 तालाब नहीं भरे हैं, वे पानी की कमी की वजह से नहीं भरे हैं. मैं इनके संज्ञान के लिए बता रहा हूं.

श्री बृजेन्‍द्र सिंह राठौर- मंत्री जी, आप तो वह बता रहे हैं, जो आपको लिखकर दिया गया है. मेरी मंशा केवल विरोध करना नहीं है.

श्री तुलसीराम सिलावट- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं इनकी भावना से अवगत हूं. यदि और कहीं का भी इनके संज्ञान में है क्‍योंकि यह सिंचाई का मामला है, किसानों का मामला है, यदि ये मुझे बता देंगे तो मैं कोशिश करूंगा.

श्री बृजेन्‍द्र सिंह राठौर- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत ही गंभीर मामला है. यदि आपने योजना बनाई और नदी के अंदर आज भी भरपूर पानी है. 10 नहीं 50 तालाब भरे जा सकते हैं और जब 10 तालाब भरने की योजना आपने बनाई तो कुछ सोच-समझकर ही बनाई होगी. पानी की पर्याप्‍त उपलब्‍धता के आधार पर बनाई गई होगी. जैसा कि हमारे साथी कह रहे थे कि उन्‍होंने योजना मंजूर करवाई थी और उसमें बहुत पैसा खर्च हुआ.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हकीकत यह है कि यदि आज भी इसकी उच्‍च स्‍तरीय जांच होगी तो पता चलेगा कि वह पैसा भ्रष्‍टाचार की बलि चढ़ गया. नहरों की जो वास्‍तविक गहराई होनी चाहिए थी, वह नहीं की गई. हमने जिला योजना समिति में भी इस बात को उठाया था. इसलिए हम चाहते हैं कि इसकी एक उच्‍च स्‍तरीय जांच हो, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए. आज भी पानी की कमी नदी में नहीं है. फेस-2 भी पूरा हो सकता है और फेस-1 तो पूरा हो ही जाना चाहिए था.

श्री तुलसीराम सिलावट- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह किसानों का मामला है. गंभीर मामला है. मुझे इसमें कोई शंका-कुशंका नहीं है. मैं इसकी पूरी जांच करवा लूंगा.

श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यदि आपकी अनुमति हो तो मेरा क्षेत्र भी इससे जुड़ा हुआ है.

अध्‍यक्ष महोदय- आपका क्षेत्र वहां से बहुत दूर है. आप इन लोगों के साथ अपना क्षेत्र मत जोडि़ये, हमारे साथ रहिये.

 

 

 

 

बाणसागर एवं गुलाबसागर की नहरों के कार्यों की जांच

[जल संसाधन]

7. ( *क्र. 1247 ) श्री शरदेन्दु तिवारी : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सीधी जिले में चुरहट विधान सभा के अंतर्गत गुलाब सागर बांध की मुख्‍य नहर एवं माइनर के काम में भारी अनियमितता हुई है, जिस कारण जगह-जगह सीपेज एवं नहरों के फूट जाने की समस्‍या बनी रहती है? अब तक इस हेतु क्‍या कार्यवाही की गयी है? यदि जाँच हुई है तो उसकी रिपोर्ट देवें? यदि नहीं, तो कब तक गुलाब सागर के घटिया कार्यों की जाँच हो जायेगी? (ख) अब तक गुलाब सागर परियोजना में नहरों हेतु कितनी धनराशि खर्च की गयी है? किन-किन संविदाकारों ने नहरों के काम किए हैं? इनकी ऑडिट रिपोर्ट क्‍या है? पृथक-पृथक संविदाकार, नहरों पर खर्च हुयी धनराशि‍ की वर्षवार जानकारी देवें। (ग) बाणसागर बांध से चुरहट क्षेत्र के वंचित गांवों में सिंचाई हेतु लिफ्ट एरीगेशन की क्‍या योजना है?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) सीधी जिले में चुरहट विधानसभा के अंतर्गत गुलाब सागर बांध की मुख्‍य एवं माइनर नहरों के काम में कोई अनियमितता नहीं हुई है। कार्य गुणवत्‍ता पूर्ण निर्धारित मापदण्‍डों के अनुसार संपादित कराया गया है। मुख्‍य नहर एवं माइनर नहरों में सीपेज एवं नहर फूटने की समस्‍या नहीं है। अत: किसी कार्यवाही एवं जाँच का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) गुलाब सागर परियोजना के नहरों के निर्माण में रू. 214.88 करोड़ व्‍यय किया जाना प्रतिवेदित है। संविदाकार एवं कार्यों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। निर्माण कार्यों का विभागीय अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया गया है। किसी भी अधिकारी द्वारा कोई प्रतिकूल टीप नहीं दिया जाना प्रतिवेदित है। (ग) लिफ्ट इरीगेशन की कोई योजना प्रस्‍तावित नहीं है।

परिशिष्ट - "एक"

 

श्री शरदेन्‍दु तिवारी- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न माननीय मंत्री जी से गुलाब सागर बांध को लेकर था. मेरी विधान सभा क्षेत्र के लगभग 35 गांव से होकर गुलाब सागर बांध से निकलने वाली नहरें जाती हैं और उनका काम निम्‍न गुणवत्‍तापूर्ण था. मुझे प्राप्‍त जवाब में आया है कि उनका काम बहुत उच्‍च कोटि का था. इस संबंध में, मैं आपके सामने कुछ उदाहरण देना चाहता हूं. अभी फरवरी और अक्‍टूबर में मुख्‍य नहर का जो ईको डक्‍ट (ECO DUCT) है, वहां से दो बार नहर टूट चुकी है. माइनर नहर नंबर 4 और 10 अक्‍सर टूटती रहती है. जिसके कारण वहां भारी क्षति हुई है. 50 प्रतिशत लाइनिंग का काम नहीं हुआ है. भारी सीपेज के कारण किसानों का बहुत नुकसान हो रहा है. यद्यपि उत्‍तर में बहुत सारी जगहों का काम पूर्ण बताया गया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन मैं आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं कि माइनर नहर नंबर 4, 5 और 6 का कार्य अभी-भी अपूर्ण है. मौके पर जा कर देखा जा सकता है. यहां त‍क कि नक्‍शे के हिसाब से जो 14 नंबर की माइनर नहर बननी थी, जो स्‍वीकृत नक्‍शा था, उसके आधार पर 14 नंबर की माइनर नहर नहीं बनी है. उसका एलाइ6नमेंट बदल दिया गया है. 15 नंबर की नहर में टेल तक पानी जाना चाहिए था. पानी वहां कभी पहुंचता ही नहीं है. जब फसल कटने को तैयार हो जाती है, तब जाकर वहां पानी पहुंचता है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने वर्ष 2003 के बाद से अभी त‍क जो वहां नहरों को कार्य हुआ है, बहुत सारे लगभग 17 ठेकेदारों ने वहां कार्य किया है, उसमें कुछ ऑडिट हुआ होगा, तकनीकी ऑडिट और फाइनेंशियल ऑडिट दोनों की ऑडिट रिपोर्ट मांगी थी, जो कि मुझे प्राप्‍त नहीं हुई है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्‍न बाण सागर बांध से संबंधित है. बाण सागर बांध का पानी चुरहट विधान सभा के शेष भाग से होकर जाता है और वहां काफी गांव ऐसे हैं जहां ऊंचाई होने के कारण वहां पानी नहीं पहुंच रहा है. उसके लिए मैं लिफ्ट एरीगेशन की योजना चाहता था. मैंने मंत्री महोदय से आग्रह किया था कि क्‍या ऐसी कोई योजना है तो जवाब प्राप्‍त हुआ है कि ऐसी कोई योजना नहीं है. इसलिए मैं यह जानना चाहता हूं कि ऐसी योजना कब तक बना ली जायेगी और गुलाब सागर बांध से संबंधित अनियमितता की जांच के बारे में मंत्री जी क्‍या कहना चाहेंगे ?

श्री तुलसीराम सिलावट- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे साथी की विधान सभा चुरहट में मुख्‍य एवं माइनर नहरों का निर्माण वर्ष 2003 में प्रारंभ होकर वर्ष 2010 में पूर्ण हो चुका है. वर्ष 2012-13 में ये नहरें प्रारंभ हो चुकी है और जिस प्रकार से माननीय सदस्‍य ने सीपेज की बात की, कि पिछले 5 वर्षों से मुख्‍य नहर को कांक्रीट से पक्‍का बना दिया गया है. जो हमारे सम्‍माननीय सदस्‍य तिवारी जी माइनर नहरों की बात की, मैं उसकी पूरी जांच करा लूंगा आपके संज्ञान में सम्‍माननीय अध्‍यक्ष महोदय के द्वारा लाना चाहता हूं कि उसकी तुरन्‍त मरम्‍मत करा दी जायेगी और इसमें यदि कोई अनियमितता होगी तो उसकी जांच भी करा लूंगा.

श्री शरदेन्‍दु तिवारी:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बार-बार पूर्णता की बात की जा रही है. मैं कह रहा हूं कि मौके पर कार्य अपूर्ण है और मंत्री महोदय से मैं यह भी चाहूंगा कि जो भी जांच यहां से हो, उस जांच में भी में शामिल रहूं साथ में, मैं जाकर उनको बता दूं कि कहां-कहां है. कांक्रीट का काम जो गुणवत्‍तापूर्ण कहा गया है वह बहुत ही निम्‍न गुणवत्‍तापूर्ण है, मंत्री महोदय, मैं आपके संज्ञान में यह बात लाना चाहता हूं.

श्री तुलसीराम सिलावट:- अध्‍यक्ष महोदय, जो हम अधिकारियों की जांच टीम भेजेंगे उसमें आपको भी सम्मिलित कर लेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय:- मंत्री जी को धन्‍यवाद ज्ञापित कर दीजिये.

श्री शरदेन्‍दु तिवारी:- धन्‍यवाद मंत्री महोदय. मेरा दूसरा प्रश्‍न था कि बाण सागर बांध से लिफ्ट इरीगेशन के बारे में क्‍या योजना है, मैं चाहूंगा कि उस विषय पर योजना बनायी जाये, क्‍योंकि हमारे यहां अभी तक बहुत सारे गांव सिंचित नहीं हो पाये हैं.

श्री तुलसीराम सिलावट:- अध्‍यक्ष महोदय, अभी ऐसी कोई भी योजना प्रस्‍तावित नहीं है. अभी सम्‍माननीय सदस्‍य जी ने कहा है तो उस संबंध में प्रयास करेंगे.

धरमपुरी विधानसभा क्षेत्रांतर्गत स्‍वीकृत रेत खदानें

[खनिज साधन]

8. ( *क्र. 1272 ) श्री पाँचीलाल मेड़ा : क्या खनिज साधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) धार जिले के धरमपुरी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत नर्मदा नदी की रेत खदानें किस-किस को कब-कब, कितने-कितने क्षेत्रफल की स्‍वीकृत की गई हैं? (ख) क्‍या नर्मदा नदी की स्‍वीकृत रेत खदान क्षेत्र से बाहर जाकर रेत माफिया द्वारा अवैध उत्‍खनन किया जाकर सैकड़ों डंपर रेत निकाली जा रही है, जिसमें पुलिस एवं खनिज विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत रहती है? इतना नहीं नर्मदा तट के खेतों में से भी अवैध रूप से रेत मशीनों के माध्‍यम से निकाली जा रही है तथा बड़े गड्ढे किये जाने से किसान खेती करने से वंचित हो गये हैं? यदि नहीं, तो क्‍या इन तथ्‍यों की प्रश्‍नकर्ता के समक्ष उच्‍च कमेटी बनाकर जाँच कराई जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) क्‍या उपरोक्‍त संबंध में प्रश्‍नकर्ता द्वारा एवं स्‍थानीय नागरिकों द्वारा जिला कलेक्‍टर धार तहसीलदार एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्‍व) एवं खनिज अधिकारी को माह नवम्‍बर-दिसम्‍बर 2020 में शिकायतें की थी? यदि हाँ, तो उक्‍त शिकायतों पर क्‍या-क्‍या कार्यवाही की गई? (घ) क्‍या स्‍वीकृत खदानों का सीमांकन कराकर उन्‍हें चिन्हित करने की कार्यवाही की जायेगी? यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

खनिज साधन मंत्री ( श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ) : (क) धार जिले के धरमपुरी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नर्मदा नदी में स्वीकृत रेत खदानों की जानकारी संलग्न परिशिष्ट पर दर्शित है। ये खदानें श्री वीरेन्द्र सिँह जादौन ई-7/एम 708, अरेरा कॉलोनी, भोपाल म.प्र. को दिनाँक 30.06.2023 तक आवंटित की गई हैं। (ख) यह कहना सही नहीं है कि नर्मदा नदी की स्वीकृत रेत खदान क्षेत्र से बाहर जाकर रेत माफिया द्वारा अवैध उत्खनन किया जा रहा है, जिले में रेत माफिया जैसी कोई स्थिति नहीं है। यह कहना भी निराधार है कि पुलिस एवं खनिज विभाग के अधिकारी की मिली भगत रहती है, जिले में ऐसी स्थिति भी नहीं है। यह कहना भी गलत तथा निराधार है कि नर्मदा तट के खेतों में से अवैध रूप से रेत मशीनों के माध्यम से निकाली जा रही तथा यह कहना निराधार है कि बड़े-बड़े गड्ढे किये जाने से किसान खेती करने से वंचित हो गये हैं, अतः ऊपर वर्णित स्थिति नहीं होने से प्रश्‍नकर्ता के समक्ष उच्च कमेटी बनाकर जाँच कराने का कोई औचित्य नहीं है। (ग) उपरोक्त संबंध में प्रश्‍नकर्ता एवं अन्य स्थानीय नागरिकों द्वारा जिला कलेक्टर धार, तहसीलदार, अनुविभागीय अधिकारी (रा.) एवं खनि अधिकारी को माह नवम्बर-दिसम्बर 2020 में शिकायत नहीं की गई थी। अतः कार्यवाही का प्रश्‍न नहीं उठता है। (घ) खदान की खनन योजना बनाने के पूर्व खदानों का सीमांकन तथा चिन्हांकन करके ही खदान नियमानुसार स्वीकृत की जाती है।

परिशिष्ट - "दो"

 

 

श्री पांचीलाल मेड़ा:- माननीय अध्‍यक्ष जी, मैं मां नर्मदा जी का बेटा, मां नर्मदा जी के पावन तट पर बसे ऋषि जिन्‍होंने अपने हड्डियों से से अस्‍त्र-शस्‍त्र बना करके दानवों का विनाश किया ऐसे महर्षि दधिचि ऋषि की समाधि स्‍थल के किनारे रहने वाले धरमपुरी का विधायक पांचीलाल मेड़ा आपसे संरक्षण चाहता है कि मां नर्मदा जी की कोख एवं शरीर को छलनी किया जा रहा है. मैं उससे अत्‍यंत दु:खी हूं, क्‍योंकि इसमें मेरी आस्‍था है. मेरी ही नहीं इस सदन के समस्‍त सदस्‍यों की भी मां नर्मदा में आस्‍था है, पूरे देश और प्रदेश की आस्‍था है. ऐसी मां नर्मदा जी के संरक्षण के लिये उसकी सुरक्षा के लिये, मैं आपका संरक्षण चाहते हुए मंत्री महोदय से पूछना चाहता हूं कि क्‍या मंत्री महोदय बताने का कष्‍ट करेंगे कि धरमपुरी विधान सभा में आपके द्वारा दिये गये उत्‍तर में कार्यवाही से अवगत कराया गया है, क्‍या आप आगे भी अगर अवैध उत्‍खनन होता है तो क्‍या कार्यवाही करेंगे?

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह:- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्‍य ने बोला है और हम सभी लोग मां नर्मदा के लिये समर्पित हैं, वह हमारी आराध्‍य हैं हमारी पूज्‍जनीय हैं इसलिये जहां तक इनके वहां पर छलनी वाली बात कही गयी है, तो इनकी जो धरमपुरी विधान सभा है वहां पर इनकी टोटल 21 खदानें सेंक्‍शन हैं और जहां तक खोदूभरू खदानें हैं, क्‍योंकि नर्मदा जी में तो खदान का उत्‍खनन करना भी अलाउ नहीं है. इसलिये जो खोदूभरू खदानें हैं वह अभी संचालित नहीं हैं, बाकि अभी हमारी 7 अन्‍य खदानें संचालित हैं और इसलिये अभी वहां पर अवैध उत्‍खनन के मामले में ऐसी कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं है. हमने कल वहां निरीक्षण भी कराया है और वहां तट पर जाकर फोटोग्राफी और विडियोग्राफी भी करायी है, जहां तक आगे संरक्षण की बात कही है तो निश्चित रूप से माननीय सदस्‍य जब भी आप आयेंगे और जो भी हमसे मदद मांगेंगे उनके बचाव के लिये, तो मैं निश्चित रूप से आपके साथ हूं और करने के लिये तैयार हूं.

श्री पांचीलाल मेड़ा:- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्‍न यह है कि मेरे क्षेत्र में निजी भूमि है मां नर्मदा जी के तट को छोड़कर के, वहां पर भी रेत पायी जाती है तो मंत्री जी यह बताने का कष्‍ट करेंगे की निजी भूमि धारकों को भी रेत उत्‍खनन की अनुमति दी जायेगी तथा क्‍या नियमों में ऐसा प्रावधान है ? अगर नहीं है तो नियमों में प्रावधान करें जिससे मेरे क्षेत्र में तथा अन्‍य स्‍थानों पर गरीब किसानों को रोजगार मिलेगा.

अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री जी आप तो खनन की बात कर रहे हैं.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह--‑माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य को यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि हमारे रेत नियम 2019 की धारा 17 के उप नियम 3 में यह प्रावधान है कि हम प्रायवेट जमीन को वहां पर किसी भी प्रायवेट ठेकेदार की जमीन है उस ठेकेदार से एग्रीमेंट करके उसको जमीन दे सकते हैं. इन्होंने अन्य खनिजों की बात की है उसमें भी हमने अधिनियमों में संशोधन किया है. ऐसे हमको जो भी प्रकरण बताएंगे उसकी कलेक्टर स्तर पर उसकी स्वीकृति होगी उसमें ऐसी जो भी बातें आयेंगी उसके लिये हम तैयार हैं.

श्री पांचीलाल मेड़ा--अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि डी..एम.एफ.पर गिट्टी, मुरम तथा रेत निकालने का प्रावधान है. अगर प्रावधान नहीं है तो क्या इसमें प्रावधान किये जायेंगे इससे राजस्व में भी वृद्धि कारगर रूप से होगी तथा गरीब लोगों को भी रोजगार मिलेगा तथा किसानों को भी इससे फायदा होगा.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह--‑माननीय अध्यक्ष महोदय, यह 22.1.2021 को एक नया संशोधन आया है उसमें इसका अमेन्टमेंट हो गया है उसमें जो भी खनिज की बात माननीय सदस्य जी कह रहे हैं उसको हमने सम्मिलित कर लिया गया है. उसमें रायल्टी का 10 प्रतिशत है वह डी.एम.एफ फंड में जायेगा और जहां पर भी वह सार्वजनिक विकास की चीजें हैं हमारी जो कमेटी है उससे सेंक्शन लेकर करेंगे. जो माननीय सदस्य जी कह रहे हैं उसमें सम्मिलित हैं.

डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ-- माननीय अध्यक्ष महोदय, धरमपुरी से लगा हुआ मेरा विधान सभा क्षेत्र महेश्वर भी है. आधा क्षेत्र नर्मदा नदी के किनारे है. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहती हूं कि आपने अभी अपने प्रश्न के उत्तर में कहा कि नर्मदा नदी में खनन नहीं हो रहा है खोदूभरू को परमीशन दी जा रही है. तो मैं आपके कथन को असत्य नहीं कहूंगी, लेकिन आप इसकी जानकारी ले लें कि मां नर्मदा में उत्खनन हो रहा है. पोकलेन लगाई जा रही है. वहां जे.सी.बी.मशीन से खोदा जा रहा है. डम्पर भी भरे जा रहे हैं और कहीं कहीं तो ट्रेक्टरों के माध्यम से काम हो रहा है. आपके जो ठेकेदारों को चिन्हित एरिया दिया है उसमें रेत नहीं है. जो अवैध उत्खनन अलग हटकर जो रकबा है उसमें अवैध उत्खनन हो रहा है, क्योंकि मेरा विधान सभा क्षेत्र आधा नर्मदा नदी के किनारे हैं और इसके साथ साथ ठेकेदारों द्वारा सरकार को भी चूना लगाया जा रहा है. वहां रायल्टी की रसीदें न देकर टोकन दिये जा रहे हैं. टोकन मेरे ख्याल से अथेंटिक नहीं है और उस टोकन के माध्यम से वहां पर अवैध उत्खनन किया जा रहा है जैसे मेरे महेश्वर से लेकर छिन्दवाड़ा सिवनी बहुत दूर है. वहां एक ही डम्पर को एक ही दिन में रायल्टी की रसीद दी जा रही है. क्या वह डम्पर छिन्दवाड़ा, सिवनी से बालाघाट होकर वापस आ सकता है और उसी गाड़ी नम्बर को और उसी ड्राईवर को जो वहां पर चलाने वाला है उसी के नाम से क्या सेम डे में रायल्टी काटी जा सकती है, यह संभव है, यह मैं आपसे जानना चाहती हूं.

श्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह--‑माननीय अध्यक्ष महोदय,जहां तक माननीय सदस्या ने यह बात कही है तो ऐसी कहीं पर्टीक्यूलर जगह है जहां पर हमें लगता है कि यहां पर अवैध उत्खनन हो रहा है तो हम निश्चित रूप से उसका परीक्षण करवा लेंगे दूसरी बात जो लगातार एक नम्बर से गाड़ियां जा रही हैं इसके लिये अभी माननीय मुख्यमंत्री जी के माध्यम से हम लोगों का एक जांच दल एक कमेटी और उसमें चौकियां बनाई गई हैं जिसमें हमारे राजस्व के अधिकारी भी हैं, माईनिंग के भी हैं, वहां के गृह विभाग के भी लोग हैं उसमें हम लोगों ने काफी प्रतिबंध किया है.

हमारी रायल्‍टी उस हिसाब से बढ़ी है. मंथली हमारी जो इनकम थी वह रायल्‍टी अब बढ़ गई है, इसलिए उन चीजों पर हम कंट्रोल कर रहे हैं और भविष्‍य में भी हम एप और जीपीएस सिस्‍टम के माध्‍यम से वह सब चीजें हम ला रहे हैं और बहुत जल्‍दी हम इस अवैध चीजों को कंट्रोल करेंगे और माननीय सदस्‍य ने जो बात कही है, हम उसका परीक्षण करवा लेंगे.

डॉ. विजयलक्ष्‍मी साधौ - मैंने स्‍वयं ने जाकर वह टोकन पकड़े हैं और कलेक्‍टर खरगौन के संज्ञान में लाई हूं और कलेक्‍टर खरगौन को वह टोकन दी हूं और कलेकटर खरगौन ने भी वह मान्‍य किया है कि यह अथेंटिक नहीं है. मैंने स्‍वयं ने जाकर दिया हूं, क्‍या आप इस पर कार्यवाही करेंगे?

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह - वह आप हमें उपलब्‍ध करवा दें. हम परीक्षण करवा देंगे.

श्री संजय यादव - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत गंभीर मुद्दा है. अध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाइए, मैंने शर्मा जी को समय दिया हूं.

श्री पी.सी. शर्मा - आदरणीय अध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मैं मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि कमल नाथ जी की सरकार के समय नर्मदा जी में मशीनों से उत्‍खनन नहीं होगा, यह निर्णय लिया गया था, तो क्‍या मशीनों से उत्‍खनन बरकरार है या बंद हो गया.

श्री प्रणय प्रभात पाण्‍डे - माननीय अध्‍यक्ष जी, मेरा भी प्रश्‍न लगा है.

श्री पी.सी. शर्मा - मशीनों से जेसीबी से पोकलन से उत्‍खनन हो रहा है. (...व्‍यवधान) अभी करोना बढ़ रहा है, इसका मामला नहीं है यह. (...व्‍यवधान)

श्री कुणाल चौधरी - कमल पटेल जी ने बता दिया है, कमल पटेल जी के लेटर में बता दिया है.

श्री सीतासरन शर्मा - आप कहे तो मैं बता देता हूं.

श्री कुणाल चौधरी - कमल पटेल जी ने बता दिया है, कमल पटेल जी के लेटर में सब बता दिया है कहां उत्‍खनन चल रहा है, उनके लेटर का जवाब दे दो, माफिया का जो मामला है कमल पटेल जी का है.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय सदस्‍य बैठ जाइए. (...व्‍यवधान)

श्री कुणाल चौधरी - माननीय मंत्री कह रहे हैं कि मंत्री राज हावी है, कमल पटेल जी को बुलाकर पूछ लो कौन माफियागिरी कर रहा है?

श्री बृजेन्‍द्र प्रताप सिंह - आपने जो नियमावली बनाई है, आपके द्वारा आपके समय की बनाई हुई है, उसी को फॉलो कर रहे हैं और नर्मदा में कोई भी अवैध उत्‍खनन नहीं होगा, न ही उसमें मशीन डाली जाएगी.

धरमपुरा जलाशय का निर्माण

[जल संसाधन]

9. ( *क्र. 480 ) श्री प्रणय प्रभात पाण्डेय : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या पूर्व रीठी तहसील अंतर्गत धरमपुरा जलाशय के निर्माण हेतु डूब क्षेत्र की भूमि अधिग्रहीत कर निविदा आमंत्रित की गई थी? (ख) यदि हाँ, तो इस जलाशय का निर्माण प्रारंभ न होने के क्या कारण हैं एवं इस जलाशय के निर्माण हेतु कितनी राशि स्वीकृत की गई थी? (ग) क्या उल्लेखित धरमपुरा जलाशय का आकार छोटा कर कम लागत से एक लघु जलाशय का निर्माण किया जा सकता है? यदि हाँ, तो इसके निर्माण में कुल कितनी लागत अधिग्रहीत डूब क्षेत्र की भूमि की लागत छोड़कर आयेगी? नवीन प्राक्कलन की छायाप्रति देवें। (घ) क्या शासन नवीन प्राक्कलन अनुसार धरमपुरा जलाशय का निर्माण करायेगा? यदि हाँ, तो किस प्रकार से कब तक? यदि नहीं, तो क्यों नहीं?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) जी हाँ। (ख) जलग्रहण क्षेत्र में कमी होने के कारण जलाशय का निर्माण प्रारंभ नहीं होना प्रतिवेदित है। परियोजना की प्रशासकीय स्‍वीकृति दिनांक 28.02.2013 को रू. 646.80 लाख की 301 हेक्‍टर हेतु प्रदान की गई। (ग) जलग्रहण क्षेत्र में कमी होने के कारण विस्‍तृत सर्वेक्षण उपरांत जलाशय के निर्माण के संबंध में गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाना संभव होगा। प्रस्‍ताव मैदानी कार्यालय में परीक्षणाधीन होने के कारण परियोजना की जानकारी वर्तमान में दिया जाना संभव नहीं है। (घ) उत्‍तरांश (ग) अनुसार। निश्चित समय-सीमा बताना संभव नहीं है।

श्री प्रणय प्रभात पाण्डेय - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पिछला क्‍या हुआ मैं उसमें नहीं जाना चाहता, चूंकि मेरे यहां सिंचाई का बहुत गंभीर मामला था, चूंकि मैं जिस क्षेत्र से आता हूं, वहां पानी का बहुत अभाव है, उसमें माननीय मंत्री जी ने जवाब दिया, मैं उन्‍हें बहुत धन्‍यवाद देना चाहता हूं. मैं पूछना चाहता हूं कि क्‍या उस बांध को छोटा करके बनाया जाएगा.

श्री तुलसीराम सिलावट - पहले यह योजना 301 हेक्‍टयेर की थी अब हमारे माननीय सदस्‍य की मंशा है कि इसको छोटा करके हम 136 हेक्‍टेयर की सिंचाई की सुविधा प्रदान करके लाभ पहुंचाएंगे, आप निश्चिंत रहो.

श्री प्रणय प्रभात पाण्डेय - माननीय मंत्री जी इसके लिए आपका धन्‍यवाद करता हूं. आपने हमे 4 बांधों की और स्‍वीकृति दी है, इसके लिए भी धन्‍यवाद करता हूं कि.

विधान सभा क्षेत्र पनागर अंतर्गत शासकीय तालाबों का निजीकरण

[राजस्व]

10. ( *क्र. 833 ) श्री सुशील कुमार तिवारी : क्या राजस्व मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विधानसभा क्षेत्र पनागर के शासकीय तालाबों का निजीकरण किया जा रहा है? (ख) क्या बिझुआ, जैतना, कालाडूमर, अमखेरा, झिरमिली, पुरैना तालाब पूर्व में शासकीय मद में थे? (ग) यदि हाँ, तो वर्तमान स्थिति में प्रश्नांश (ख) में उल्लेखित तालाब निजी व्यक्तियों के नाम पर कैसे दर्ज हो गये? (घ) क्या इन तालाबों का रिकॉर्ड दुरूस्त कर कब्जा मुक्त कराया जायेगा?

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) : (क) एवं (ख) जी नहीं। (ग) एवं (घ) प्रश्‍नांश (ख) के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्न उदभूत नहीं।

श्री सुशील कुमार तिवारी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी के लिए जानकारी देना चाहता हूं कि शासकीय और निजी दोनों तालाबों का संरक्षण समय समय पर होना चाहिए. आज माफिया उस पर कब्‍जा कर रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - उत्‍तर चाहिए तो जल्‍दी प्रश्‍न कीजिए, सामने घड़ी देखकर.

श्री सुशील कुमार तिवारी - अध्‍यक्ष महोदय, मैंने एक प्रश्‍न लगाया था जिसमें 6 तालाब बिझुआ, जैतना, कालाडूमर, अमखेरा, झिरमिली, पुरैना तालाब शासकीय मद में है. मेरा निवेदन है कि शासन के द्वारा जो हमें उत्‍तर दिया गया है, वह पर्याप्‍त नहीं है, उसकी जांच करवाई जाए और शासकीय तालाब हो या निजी तालाब हो, दोनों का संरक्षण जरूरी है. मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि क्‍या यह एसडीएम स्‍तर के अधिकारी से जांच करवाएंगे.

राजस्व मंत्री ( श्री गोविन्द सिंह राजपूत ) - माननीय अध्‍यक्ष जी, माननीय सदस्‍य जिन तालाबों की बात कर रहे हैं, वह तालाब निजी है लेकिन सदस्‍य चाहते हैं तो कि एसडीएम स्‍तर की जांच करवा देंगे और माननीय सदस्‍य भी उसमें शामिल रहेंगे.

प्रश्‍न क्रमांक 11 - श्री जुगुल किशोर बागरी - अनुपस्थित.

 

भीकनगांव विधानसभा क्षेत्रांतर्गत मत्स्य पालन

[मछुआ कल्याण तथा मत्स्य विकास]

12. ( *क्र. 1000 ) श्रीमती झूमा डॉ. ध्यानसिंह सोलंकी : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भीकनगांव विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत अपरवेदा डेम, नवलपुरा तालाब एवं उटखेड़ा तालाब अन्तर्गत मछली पालन कौन कर रहा है? क्या इनकी मत्स्य विभाग में समि‍‍ति‍ बनाकर पट्टे प्रदाय किये गये हैं? यदि हाँ, तो यह पट्टे कब जारी किये गये हैं तथा इसकी क्या समयावधि है? मत्स्य पालन हेतु पट्टे किसे प्रदाय किया जाना है? इसके क्या नियम हैं? (ख) शासन द्वारा निर्धारि‍त नियमावली की प्रतिलि‍पि‍ प्रदाय करें। क्या मत्स्य पालन हेतु निर्मित समीति‍यों में डूब प्रभावित परिवार के अधिकतम सदस्य होना अनिवार्य है? (ग) यदि हाँ, तो क्या नवलपुरा उटखेड़ा एवं अपरवेदा डेम की वर्तमान पट्टे प्राप्त समितियों में सभी सदस्य डूब प्रभावित हैं? यदि हाँ, तो कितने सदस्य हैं? तीनों तालाबों की समि‍तियों में डूब प्रभावित सदस्यों के नाम सहित सूची उपलब्ध करावें, नहीं तो उन्हें पट्टा किस आधार पर जारी किया गया है? (घ) क्या उपरोक्त वर्णित तीनों तालाबों में अवैध समि‍ति‍यां बनाकर मछली पालन करने की शिकायत प्राप्त हुई है? यदि हाँ, तो उस क्या कार्यवाही की गई है? (ड.) क्या डूब प्रभावित व्यक्तियों की अन्य समि‍ति‍यों ने मछली पालन पट्टे हेतु मांग की है? यदि हाँ, तो वह समि‍ति‍यां कौन-कौन सी हैं तथा कौन से तालाब के लिये हैं?

जल संसाधन मंत्री ( श्री तुलसीराम सिलावट ) : (क) प्रश्‍न में उल्‍लेखित तालाब को पट्टे पर दिये जाने, इनकी समयावधि तथा नियम संबंधी जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। (ख) मध्‍य प्रदेश मत्‍स्‍य पालन की नीति एवं त्रि-स्‍तरीय पंचायतों को मत्‍स्‍योद्योग के अधिकार/कार्यक्रम 2008 की प्रति पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र-अ अनुसार है। नीति में पंजीकृत समितियों में डूब प्रभावित सदस्‍यों को प्राथमिकता दी गई है। (ग) तीनों तालाबों के पट्टे धारक समितियों में सभी सदस्‍य डूब प्रभावित नहीं है। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-ब अनुसार है। (घ) एवं (ड.) जी नहीं। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्रीमती झूमा डॉ. ध्‍यानसिंह सोलंकी - अध्‍यक्ष जी, धन्‍यवाद. समय भी समाप्‍त हो रहा है और मेरा प्रश्‍न आ गया है. माननीय मंत्री जी, बहुत वरिष्‍ठ और अनुभवी हैं. अध्‍यक्ष जी, आप मुझे सुन लें. मैं सीधा प्रश्‍न पूछ रही हूँ.

अध्‍यक्ष महोदय - आप किसी दूसरी तरह से प्रश्‍न उठाइयेगा.

श्रीमती झूमा डॉ. ध्‍यानसिंह सोलंकी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी सुन लें.

अध्‍यक्ष महोदय - अब आपका कुछ नहीं लिखा जायेगा. प्रश्‍नकाल समाप्‍त

श्रीमती झूमा डॉ. ध्‍यानसिंह सोलंकी - (XXX)

 

 

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

 

 

 

 

 

12.01 बजे शून्‍यकाल में मौखिक उल्‍लेख

(1. सीधी जिले में नहर में बस डूबने से हुई मौतों के संबंध में स्‍थगन विषयक्)

डॉ. गोविन्‍द सिंह (लहार) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सीधी जिले में नहर में बस डूबने से कई मौतें हो गई हैं. उसके मामले में हमारे आदरणीय पटेल साहब ने, मैंने, प्रजापति जी और हमारे कई साथियों ने स्‍थगन प्रस्‍ताव लगाया है. हमारा आपसे विनम्र अनुरोध है कि सीधी जैसी गंभीर घटना में स्‍थगन .....

अध्‍यक्ष महोदय - बैठकर बातचीत कर लेंगे.

श्री कुणाल चौधरी (कालापीपल) - अध्‍यक्ष महोदय, हत्‍याएं हुई हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - बात कर लेंगे.

डॉ. गोविन्‍द सिंह - अध्‍यक्ष महोदय, यह सरकार का विषय है. सरकार भी करीब-करीब सहमत है तो कृपा करके माननीय संसदीय कार्यमंत्री जी बैठे हुए हैं. अगर आप हमारा निवेदन स्‍वीकार करें तो कृपया कर आप समय कभी भी तय कर लें.

श्री कुणाल चौधरी - अध्‍यक्ष महोदय, बड़ा गंभीर विषय है.

डॉ. सीतासरन शर्मा (होशंगाबाद) - अध्‍यक्ष महोदय, आप हमारी तरफ भी देख लीजिये.

श्री कुणाल चौधरी - शर्मा जी, अब आप मार्गदर्शक मंडल में हैं, अब कोई आपकी नहीं सुनेगा.

डॉ. सीतासरन शर्मा - अध्‍यक्ष महोदय, इधर देख लीजिये. आप बैठ जायें (श्री कुणाल चौधरी को देखकर). मेरी बात सुनी जायेगी.

अध्‍यक्ष महोदय - श्री सीतासरन शर्मा जी.

 

(2. तत्‍कालीन एसडीएम श्री हरेन्‍द्र नारायण के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्‍ताव)

डॉ. सीतासरन शर्मा - अध्‍यक्ष महोदय, मैंने तत्‍कालीन एसडीएम श्री हरेन्‍द्र नारायण के खिलाफ विशेषाधिकार प्रिविलेज मोशन दिया है, बहुत दिनों से पैंडिंग है, आपसे अनुरोध है कि कृपा करके उसको स्‍वीकार करें और विशेषाधिकार समिति को भेजें अथवा मुझे यहां पर वक्‍तव्‍य देने की अनुमति दें.

श्री जितू पटवारी - अध्‍यक्ष जी, सीधी में 54 लोगों की हत्‍याएं हो गईं, तो वह कौन सी बात है ?

डॉ. सीतासरन शर्मा - वह भी आ रहा है.

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा (सोनकच्‍छ) - (डॉ. सीतासरन शर्मा जी को देखकर) आप सरकार को जवाब नहीं देने दे रहे हैं. सरकार जवाब दे रही है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह - माननीय शर्मा जी, विधान सभा के पूर्व अध्‍यक्ष रहे हैं. सरकार के बदले जवाब दे रहे हैं, आप बीच में ही खड़े होकर नई बात कर रहे हैं.

डॉ. सीतासरन शर्मा - डॉ. साहब, मैंने अध्‍यक्ष जी से अनुमति ले ली थी कि मुझे बोलने दीजिये.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय संसदीय कार्यमंत्री जी, गोविन्‍द सिंह जी ने कुछ कहा है. आप उसका जवाब दीजिये.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) - अध्‍यक्ष जी, निश्चित रूप से घटना बहुत दु:खद एवं लोमहर्षक थी, वह बहुत पीड़ादायक प्रसंग था. जैसा माननीय सदस्‍य कह रहे हैं कि सरकार गंभीर नहीं थी, हमारे दोनों मंत्री तत्‍काल मौके पर गए थे, माननीय सिलावट जी और पटेल जी. उसके बाद मुख्‍यमंत्री जी मौके पर खुद गए थे. उनको राहत राशि तत्‍काल दी गई, जो सुविधाएं थीं, वह दी गईं. इसके बाद भी अगर विपक्ष के सम्‍मानित सदस्‍यों को लगता है तो आप जिस माध्‍यम से लेना चाहें. अगर अभिभाषण के बाद 5 बजे लेना चाहें तो 5 बजे ले लें, आप 4 बजे लेना चाहें तो 4 बजे ले लें. अध्‍यक्ष जी, यह आपके ऊपर है. सम्‍मानित सदस्‍यों के भी कई प्रकरण हैं. सरकार कहीं भी चर्चा से नहीं भाग रही है, चर्चा करने को तैयार हैं. जब चाहें तब तैयार हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - समय बता देंगे.

डॉ. गोविन्‍द सिंह - जी.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.03 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

अध्‍यक्ष महोदय - आज निम्‍नलिखित माननीय सदस्‍यों की शून्‍यकाल की सूचनाएं सदन में पढ़ी हुई मानी जाएंगी.

1. श्री बहादुर सिंह चौहान

2. श्री विजय रेवनाथ चौरे

3. इंजी. प्रदीप लारिया

4. श्री विजेन्‍द्र सिंह राठौर

5. श्री देवेन्‍द्र पटेल

6. श्री प्रियव्रत सिंह

7. श्री कमलेश्‍वर पटेल

8. श्री संजय शर्मा

9. श्रीमती झूमा डॉ. ध्‍यानसिंह सोलंकी

10. श्री फुन्‍देलाल सिंह मार्को

 

12.05 बजे शून्‍यकाल में मौखिक उल्‍लेख क्रमश:

3. माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा सदन के चलते सदन के बाहर लोकहित/जनहित के विषय पर उल्‍लेख करने विषयक.

 

श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति (एन.पी.),(गोटेगांव) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी माननीय पूर्व अध्‍यक्ष जी ने विशेषाधिकार के संबंध में बात कही है, ऐसी ही एक बात मैं मर्यादा और शिष्‍टता के बारे में इस सदन कहना चाहता हूं. कॉल शकधर में विशेषाधिकार के बारे में कहा गया है, दिनांक-10.06.1967 को कांग्रेस सदस्‍यों की बैठक में माननीय मुख्‍यमंत्री महोदय से आदरणीय श्री कैलाशचन्द्र जोशी जी ने तब कहा था कि आपने इस वर्ष के बजट में कुछ करों को राहत देने की घोषणा की है, इस समय विधानसभा का सत्र चल रहा है और ऐसे समय पर शासन द्वारा की गई कोई भी घोषणा सर्वप्रथम सभा भवन में होना चाहिये. मेरा आपसे अनुरोध है कि यह हमारी परंपरा रही है. अभी कल ही माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने एक लोकहित का विषय सभा चलते में कह दिया है जो आज समाचार पत्रों में छपा है, प्रदेश में मिले 344 मरीज लॉकडाउन और नाईट कर्फ्यू अभी नहीं, यह लोक महत्‍व का विषय है तो मेरा आपसे अनुरोध है कि जब सदन चलता रहे तो यह जो हमारी परंपरा है, यह फिर से सुचारू रूप से चालू रहे ताकि सदन की मर्यादा और शिष्‍टता बनी रहे.

संसदीय कार्यमंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत ही गंभीर विषय की ओर ध्‍यान आकर्षण किया गया है. मेरा यह कहना है कि इस विषय की गंभीरता अगर बनी रहे, अगर अच्‍छा हो कि सिर्फ उसे अखबार का आधार न बनाकर कोई प्रमाण का आधार हो. सिर्फ अखबार को आधार बनाकर सनसनी फैलाना मैं इसको अच्‍छा नहीं मानता हूं. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने और वित्‍तमंत्री जी ने विधायक दल की बैठक में ऐसे कोई भी प्रसंग का उल्‍लेख नहीं किया है.यह सर्वथा अनुचित और मिथ्‍या प्रसंग है, जो माननीय पूर्व विधानसभा अध्‍यक्ष ने उठाया है.(श्री एन.पी.प्रजापति सदस्‍य के अपने आसन से बैठे-बैठे कुछ कहने पर) आप भी बोलें अध्‍यक्ष अनुमति आपको भी देंगे.

श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति (एन.पी.) -- मैंने वर्ष 1967 का उद्धरण दिया है, आप गलत ले गये हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- अभी मैंने उनको अनुमति दी है, प्रजापति जी आप बैठ जायें.

श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति (एन.पी.) -- अध्‍यक्ष महोदय, आप मेहरबानी करके सुन तो लीजिये, मैंने वर्ष 1967 का कहा है.

अध्‍यक्ष महोदय -- प्रजापति जी आप थोड़ा सा बैठ जायें, आपके कहने के बाद ही मैंने उनको अनुमति दी है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- अभी मेरे कान ठीक है. (हंसी)(व्‍यवधान..) आप इलाज करा दो. (श्री सज्‍जन सिंह वर्मा,सदस्‍य द्वारा अपने आसन पर बैठे-बैठे कुछ कहने पर) श्री एन.पी.प्रजापति जी को छोड़कर (हंसी) हां डॉक्‍टर वर्मा कर सकते हैं, यह अगला आदमी कह रहा है कि मैं बुड्ढा होउंगा ही नहीं, मैं देव आनंद बनकर ही मरूंगा( हंसी...)

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जी दूसरा विषय मेरा यह है जो नाईट का लॉकडाउन और उसके संबंध में विषय है, सीधा सम्‍मानित मुख्‍यमंत्री जी का उल्‍लेख किया है, यह जनता के स्‍वास्‍थ्‍य से जुड़ा हुआ मामला है, जनहित का मामला है और इस संबंध में तात्‍कालिक ही निर्णय लिये जायेंगे न कि प्रतीक्षा में लिये जायेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- श्री नागेन्‍द्र सिंह जी आप बोलें.

श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति (एन.पी.) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय..

अध्‍यक्ष महोदय -- हो गया है, आपका जवाब आ गया है.

श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति (एन.पी.) -- नहीं, मैंने क्‍या कहा उसको घुमा फिराकर संसदीय मंत्री जी ने...

अध्‍यक्ष महोदय -- जो आपने कहा उसी का उन्‍होंने जवाब दिया है.

श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति (एन.पी.) -- मैंने वर्ष 1967 के वित्‍तमंत्री की बात की थी, अभी की नहीं की थी, आपने गलत सुन लिया है.

अध्‍यक्ष महोदय -- हो गया है, कृपया आप बैठ जायें.

श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति (एन.पी.) -- मैं कॉल शकधर के पेज 406 का यहां पर उल्‍लेख करूंगा, जो शर्मा जी ने विशेषाधिकार की बात की है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- वर्ष 1967 आज कहां से आ गया है.

श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति (एन.पी.) -- इसलिये आ गया, यह जो परंपरा परिपाटी इस सदन में है, उसका उद्धहरण मैं दे रहा हूं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -

- उसका पालन होगा.

अध्‍यक्ष महोदय -- बस हो गया, हां पालन हो गया.

श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति (एन.पी.) -- उसका पालन होगा न चलिये, धन्‍यवाद.

लोक निर्माण मंत्री(श्री गोपाल भार्गव) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय प्रजापति जी को मैं स्‍मरण कराना चाहूंगा कि पिछला बजट सत्र जिसमें आपकी सरकार थी, नोटिफाईड हो गया था, तारीखें आ गई थीं, बजट कब पेश होगा, यह भी तारीख आ गई थी, माननीय वित्‍तमंत्री जी आपको स्‍मरण होगा, डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़ाने की आपने उसके ऐन पहले घोषणा कर दी थी, जबकि बजट सत्र सामने था, यह कौन सी वर्ष 1967 की परंपरा की बात कर रहे हैं, आपने स्‍वयं परंपरायें ऐसी स्‍थापित की हैं कि आपको कहने का कोई अधिकार ही नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय -- नागेन्‍द्र सिंह जी आप बोलें.

श्री नर्मदा प्रसाद प्रजापति (एन.पी.) -- अध्‍यक्ष महोदय, मुझे पूरा अधिकार इसलिये हैं क्‍योंकि आपको उस समय आपत्ति उठानी थी, आपने आपत्ति नहीं उठाई, मैंने उठाई है.

श्री गोपाल भार्गव -- मैंने आपत्ति उठाई थी लेकिन उसके लिये ओवर रूल कर दिया गया था. मैं सिर्फ यह स्‍मरण कराना चाहूंगा कि जैसी परंपरायें आप बनायेंगे वैसी परंपरायें अब प्रचलन में आ जायेंगी.

अध्‍यक्ष महोदय -- इसको अब यहीं पर रोक दीजिये.

श्री तरूण भनोत (जबलपुर-पश्चिम) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे वरिष्‍ठ सदस्‍य, इस विधानसभा के वरिष्‍ठतम सदस्‍य हैं और हम सबके आदरणीय भी हैं और तत्‍कालीन नेता प्रतिपक्ष भी थे. माननीय मैं सिर्फ कहना चाहता हूं और आपकी किसी बात को काटना नहीं चाहता हूं कि मैं वित्‍तमंत्री था, कामर्शियल टैक्‍स विभाग मेरे पास नहीं था, मेरे पास उसको बढ़ाने का और घटाने का अधिकार ही नहीं था. आप कहीं न कहीं न उसको दुरूस्‍त कर लें और मेरे बाजू में बैठे हैं, इनकी व्‍यवस्‍था करें (हंसी..)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- ये बाजू वाले हमेशा ऐसे ही रहे हैं (हंसी.) ऐसा नहीं यह आज ऐसे हैं, यह हमेशा से ऐसे ही हैं. (हंसी..)

श्री बृजेन्‍द्र सिंह राठौर(प्रथ्‍वीपुर) -- यह वो ही बात हो रही है कि पूरी की पूरी फिल्‍म देखने के बाद पूछ रहे हैं कि हीरो हीरोइन कौन था, पहले कहां सो रहे थे सब लोग (हंसी..) (व्‍यवधान..)

अध्‍यक्ष महोदय -- आप बैठ जायें, श्री नागेन्‍द्र सिंह जी आप बोलें. (व्‍यवधान..)

श्री हरिशंकर खटीक-- अध्‍यक्ष महोदय, इनके पास तो अंग्रेजी और देशी विभाग था इसलिये इनको ....(व्‍यवधान)...

श्री नागेन्‍द्र सिंह 'नागौद'-- यह विषय पॉलिसी मेटर से संबंधित नहीं है, यह प्रशासनिक आर्डर है और कोई भी मंत्री प्रशासनिक आर्डर्स सदन चलते हुये दे सकता है और केवल पॉलिसी मेटर नहीं दिया जा सकता है यह गलत रिफ्रेंस देकर कहा जा रहा है.

श्री पी.सी. शर्मा-- मेरा निवेदन यह है कि जितेन्‍द्र डागा इस सदन के सदस्‍य रहे हैं, पहले वह भारतीय जनता पार्टी में थे और अब वह कांग्रेस पार्टी में आ गये हैं. अवैद्य तरीके से उनका निर्माण कल तोड़ दिया गया है, यह केवल पार्टी पॉलिटिक्‍स के आधार पर किया गया है. मैंने उनका एक सवाल पूछा था, मुख्‍यमंत्री जी ने जवाब दिया है कि जो जमीन अवैध बताई गई है इसमें मुख्‍यमंत्री जी का जवाब है कि उसके बदले में जो जगह वहां पर उनको दी गई और यह उनकी जमीन है उनके पास उसके पूरे कागजात हैं उसके बाद तोड़ा गया, यह कार्यवाही अगर पूर्व विधायकों के साथ की जायेगी केवल इस बात पर कि उस पार्टी में थे और आज इसमें नहीं हैं तो यह बिलकुल गलत है और यह बहुत गलत परंपरा है.

श्री दिलीप सिंह परिहार-- जब हमारे संजय पाठक जी का तोड़ा गया था तब आप कहां थे. ....(व्‍यवधान)...

श्री पी.सी. शर्मा-- यह गलत परंपरा है ....(व्‍यवधान)... इसमे मुख्‍यमंत्री जी का जवाब है, इसके बाद यह तोड़ा गया है. ....(व्‍यवधान)....

 

12.12 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

 

(1) (क)मध्‍यप्रदेश भवन एवं अन्‍य संनिर्माण कर्मकार कल्‍याण मण्‍डल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2018-2019 एवं 2019-2020, तथा

(ख) मध्‍यप्रदेश जिला खनिज प्रतिष्‍ठान नियम, 2016 के नियम 18 (3) की अपेक्षानुसार

(i) जिला उमरिया का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2017-2018, 2018-2019 एवं 2019-2020,

(ii) जिला कटनी का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2018-2019, तथा

(iii) जिला छतरपुर, अलीराजपुर, बैतूल एवं धार के वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020

पटल पर रखेंगे.

 

(2) (क) अधिसूचना क्रमांक1661/मप्रविनिआ/2019, दिनांक 25 नवम्‍बर, 2019, एवं

(ख) अधिसूचना क्रमांक मप्रविनिआ-अ.एवं.वि-2020-1040, दिनांक 7 सितम्‍बर, 2020 पटल पर रखेंगे.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(3) (क)मध्‍यप्रदेश राज्‍य पशुधन एवं कुक्‍कुट विकास निगम का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2018-2019, तथा

(ख) मध्‍यप्रदेश पशु चिकित्‍सा विज्ञान विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 2009 की धारा 38 की उपधारा (3) की अपेक्षानुसार नानाजी देशमुख पशु चिकित्‍सा विज्ञान विश्‍वविद्यालय, जबलपुर का वार्षिक लेखा वर्ष 2019-2020 पटल पर रखेंगे.

 

 

 

(4) मध्‍यप्रदेश लघु उद्योग निगम मर्यादित, भोपाल का 56 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2017-2018 पटल पर रखेंगे.

 

 

(5) (क) मध्‍यप्रदेश राज्‍य लघु वनोपज (व्‍यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित, भोपाल का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2017-2018,

(ख) म.प्र.राज्‍य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भोपाल का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2018-2019,

(ग) मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी बैंक मर्यादित का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2019-2020

 

सहकारिता मंत्री( डॉ.अरविन्द सिंह भदौरिया) - अध्यक्ष महोदय, मैं,मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1960 की धारा 58 की उपधारा (1) के खण्‍ड(घ) की अपेक्षानुसार-

(क) मध्‍यप्रदेश राज्‍य लघु वनोपज (व्‍यापार एवं विकास) सहकारी संघ मर्यादित, भोपाल का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2017-2018,

(ख) म.प्र.राज्‍य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भोपाल का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2018-2019, तथा

(ग) मध्‍यप्रदेश राज्‍य सहकारी बैंक मर्यादित का संपरीक्षित वित्‍तीय पत्रक वर्ष 2019-20 पटल पर रखता हूं.

 

(6) (क) मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वार्षिक लेखा परीक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2018- 2019,

(ख)मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020,

 

 

पर्यावरण मंत्री( श्री हरदीप सिंह डंग) - अध्यक्ष महोदय, मैं,

(क) जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 40 की उपधारा (7) एवं वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 36 की उपधारा (7) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वार्षिक लेखा परीक्षण प्रतिवेदन वर्ष 2018-2019,

(ख) जल (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 39 की उपधारा (2) एवं वायु (प्रदूषण निवारण तथा नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 35 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020,

पटल पर रखता हूं.

 

 

(7) कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार एन.एच.डी.सी. लिमिटेड का 19 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2018-2019 एवं 20 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020

 

नर्मदा घाटी विकास राज्यमंत्री ( श्री भारत सिंह कुशवाह ) - अध्यक्ष महोदय, मैं, कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार -एन.एच.डी.सी. लिमिटेड का 19 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2018-2019 एवं 20 वां वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2019-2020

पटल पर रखता हूं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.17 बजे ध्यान आकर्षण

 

 

(1) ग्वालियर में सहकारी सोसाइटी के माध्यम से चिटफंड का अवैध कारोबार होने

 

 

डॉ.गोविन्द सिंह (लहार) - अध्यक्ष महोदय,

 


 

सहकारिता मंत्री (डॉ. अरविंद सिंह भदौरिया) -- अध्यक्ष महोदय,

डॉ. गोविन्द सिंह -- अध्यक्ष महोदय, मैंने मंत्री जी का जवाब विस्तार से सुना. मैं कहना चाहता हूं कि यह स्थिति अकेले ग्वालियर ही नहीं समूचे प्रदेश में चिटफण्ड कम्पनियां अधिक ब्याज देकर 10 से 15 प्रतिशत ब्याज, कोई कोई संस्था तो 20 प्रतिशत जो क्रेडिट सोसाइटी सहकारिता क्षेत्र के अंतर्गत मल्टी परपज को-आपरेटिव्ह सोसाइटी के तहत रजिस्टर्ड हैं अन्य प्रांतों में, वह हमारे लहार में ही एक सोसाइटी है जीवन सुलभ. वह करीब 53 लाख लेकर उत्तर प्रदेश में बनी, उसका अध्यक्ष था, वह लूटकर चले गये और लोग आज तक भटक रहे हैं. एक सोसाइटी है, वह 3 करोड़ रुपये खा गई. हर साल संस्था अपना नाम बदलकर नई पास बुक से, नाम बदल बदल कर एक ही संस्था है, वह पैसा क्रेडिट, जमा करती है, साल में नाम बदल देती है और वह बोर्ड के डॉयरेक्टर बदल देती है. गृह मंत्री जी के डबरा क्षेत्र में ही एक एजेण्ट श्री भूपेन्द्र जैन कम्पनी का, रजिस्टर्ड सोसाइटी का एजेंट बना, वह पैसा लेकर उसमें जमा करता था. 21 फरवरी को डबरा में भूपेन्द्र जैन ने जो सुसाइड नोट दिया है उसमें लिखा है कि इतना कर्जा है, कंपनी भाग गई है इसलिए आत्महत्या कर रहा हूं. माननीय मंत्री जी से केवल इतना जानना चाहते हैं कि यह जनहित का मामला है. वास्तव में किसान गरीब लोग, जो दैनिक रोजी रोट कमाते हैं उनको 20 प्रतिशत ब्याज का लालच देकर 3 साल बाद यदि 1 लाख रुपये जमा किये तो 20 हजार रुपये देंगे, इतना ब्याज वे कहां से दे सकते हैं? यह राशि लेकर भागते हैं. यह स्थिति कई जिलों में आ रही है. हमारा आपसे हाल फिलहाल निवेदन है कि यह है तो पूरे प्रदेश का मामला, केवल ग्वालियर, चंबल संभाग में जो सोसाइटियां काम कर रही हैं, भिण्ड, ग्वालियर में कर रही हैं, इन पर आप एक उच्चस्तरीय कमेटी बना दें और गंभीरता से उसकी पूरी सच्चाई पता करें. एक बोर्ड डायरेक्टर है वह 3-3 सोसाइटियों में है जबकि नियम है कि एक सदस्य एक ही सोसाइटी में बन सकता है. ये क्रेडिट सोसाइटियां 3-3 चला रहे हैं इसलिए हमारा निवेदन है कि उसकी उच्चस्तरीय जांच करा लें और जांच कराने के बाद जो एक और गंभीर मामला है, कई सोसाइटियों की एफआईआर हो गई. सोसाइटियों के विरुद्ध काफी प्रयास के बाद एफआईआर होती है लेकिन उसके बाद पुलिस वाले कार्यवाही नहीं करते हैं. इसके लिए एक सेल बनाया है एडिशनल डी.जी. के नेतृत्व में, को-आपरेटिव फ्रॉड जांच करने के लिए सेल बनाया गया है तो उसको हम देख रहे हैं कि उसका कोई काम ही नहीं है.

हमारा निवेदन है कि पहले अपने विभाग से जांच कराएं, जांच के बाद जो दोषी पाए जाएं तो उसमें को-आपरेटिव सेल से फाइनल करवाकर और आर्थिक अपराध ब्यूरो को यह दिया जाय ताकि कुछ कार्यवाही हो सकती है क्योंकि 118 करोड़ का रुपये का घोटाला भोपाल में हमने पकड़ा था और ईओडब्ल्यू में एफआईआर करवाई थी, उसमें 2-3 लोग गिरफ्तार हुए फिर आगे कार्यवाही नहीं बढ़ी. हमें एक ही प्रश्न का जवाब चाहिए कि एक तो आप उच्चस्तरीय जांच कराएं, जांच के बाद जो दोषी हों उन पर आर्थिक अपराध ब्यूरो में कार्यवाही करें, जो सोसाइटियों पर एफआईआर प्रदेश में हुई हैं, जो एडिशनल डी.जी. को-आपरेटिव के बैठे हैं वह कोई कार्यवाही नहीं करते हैं, अभी तक 3-3, 4-4 साल हो गये हैं गिरफ्तारियां नहीं हुई हैं, उनकी गिरफ्तारी कराएं.

डॉ. अरविंद सिंह भदौरिया - अध्यक्ष महोदय, हमारे बड़े भाई विधायक डॉ. गोविन्द सिंह जी बड़े संवेदनशील व्यक्ति हैं. हमेशा जनहितैषी मुद्दों को उठाते रहे हैं. जो आपने कहा है इसमें एक उच्चस्तरीय जांच दल हम गठित कर देते हैं और जहां जहां का डॉक्टर साहब ने बताया है, मेरा कहना है कि भिण्ड, मुरैना, ग्वालियर, दतिया, ऐसे 4 जिलों का आप बोल रहे हैं, मैं कह रहा हूं कि गुना, शिवपुरी, अशोक नगर ऐसे पूरे ग्वालियर चंबल संभाग में जितनी भी इस प्रकार की सोसाइटियां हैं उन सभी की एक हाई अथॉरिटी से जांच करा लेते हैं और जो भी इसमें इनवाल्व होगा, उन सबको भी कोई बख्शा नहीं जाएगा. आपने जो हमको ध्यान दिलाया है. जैसे आपने कहा कि उस समय जब आप सहकारिता मंत्री थे, ऐसे भोपाल बैंक का एक मामला था, उसका चालान वगैरह ईओडब्ल्यू में हम लोगों ने भेज भी दिया है. जो जांच होने के बाद, एफआईआर होने के बाद आपका जो कहना है उसको ईओडब्ल्यू के सुपुर्द करके टाइम बाउंड, कई बार क्या होता है, एक विषय हमको भी संज्ञान में आया है. आज से मतलब जब श्री दिग्विजय सिंह जी की सरकार थी, उस समय का कोई एक विषय ईओडब्ल्यू में चल रहा है तो मैंने अभी उनको पूछा, ऐसे 22 साल से वह विषय पूरा ही नहीं हुआ. आपकी सरकार आई, हमारी सरकार आई, ऐसे करके चलते रहे तो उसको टाइम बाउंड करके भी इस पर हम लोग निर्णय करेंगे. कई बार एक दिक्त आती है आदरणीय डॉक्टर साहब, मल्टी स्टेट सोसाइटियों पर कार्यवाही कई बार हमारे अधिकार क्षेत्र में नहीं रहती है वह केन्द्र सरकार का अधिकार रहता है लेकिन गड़बड़ियां जो भी कहीं पर होंगी, पूरे ग्वालियर चंबल संभाग में इसकी टाइम बाउंड जांच कराकर उन पर कार्यवाही करेंगे.

डॉ. गोविन्द सिंह - ठीक है, धन्यवाद मंत्री जी को, कम से कम आपने बहादुरी दिखाई तो श्री पी. सी. शर्मा -- अध्यक्ष महोदय मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि भोपाल को भी इसमें शामिल कर लें.

सुश्री हिना लिखीराम कावरे ( लांजी) -- माननीय अध्यक्ष महोदय यह सोसायटी के माध्यम से अवैध चिटफण्ड वाला अवैध कारोबार है मेरी विधान सभा क्षेत्र में ग्राम बोलेगाव है जो कि हमारे पूर्व मंत्री स्व. श्री दिलीप भटेरे जी का गांव है . वहां पर एक व्यक्ति 10 प्रतिशत हर माह के ब्याज पर लोगों को राशि दे रहा है और आज के समय में उसके पास न केवल क्षेत्र के बल्कि दूसरे प्रदेशों के लोग भी पैसे जमा करने आ रहे हैं. इ स तरह का काम काफी दिनों से चल रहा है और काफी बड़ा एमाउण्ट हो गया है. वह हर तीन माह में लोगों को पैसे वापस करता है पैसे उनके पास में आते हैं चैक उनको वह देते हैं, चैक देने के बाद में जब उस चैक की डेट आती है तो वह उनको बुलाकर चैक वापस ले लेते हैं और पैसे दे देते हैं. मैं आपके माध्यम से कहना चाहती हूं कि मैंने कलेक्टर और एसपी की जानकारी में भी यह बात लायी है लेकिन अभी तक कोई ऐसा कानून नहीं है जो कि इस तरह का काम करने से रोक सके लेकिन कोई कार्यवाही उस पर नही हुई है. मेरा आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन है गृह मंत्री जी यहां पर बैठे हैं तो इसके लिए कोई कानून बनाया जाय कि अपराध घटित होने के बाद हम कार्यवाही करें इससे पहले अगर हम कोई ऐसा उपाय करें या कोई कानून बनायें जिससे इनको रोका जा सके.

श्री अरविंद सिंह भदौरिया -- अध्यक्ष महोदय हमारी बहन हिना कावरे जी ने एक विषय तो उठाया है. सबसे पहले मैं उनसे प्रार्थना करना चाहता हूं कि जो कलेक्टर को आपने पत्र लिखा है या जिसको भी पत्र लिखा है उसके एक कापी हमें भी दे दें. वहां पर हम हायर अथारिटी से उच्च स्तरीय जांच उस पर भी करा लेंगे. आप निश्चिंत रहें कितना बड़ा भी आदमी हो कोई भी हो उसके खिलाफ में कार्यवाही करेंगे. दूसरा आपने बहुत अच्छा विषय यहां उठाया है उसमें एक गाइड लाइन हम बनाने वाले हैं. ऐसी सभी संस्थाओं की जानकारी एवं उनका पंजीयन अनेक सदस्यों की जानकारी उनके द्वारा की जा रही व्यावसायिक जानकारी विभागीय पोर्टल पर दर्ज करायेंगे. इ ससे हमें पूरा दिखता रहेगा क्योंकि किसी भी विषय को दुरूस्त करने के लिए एक ट्रांसपरेंट प्रक्रिया को विकसित करना जरूरी है. आप निश्चिंत रहें आप हमें शिकायत दें हम आपको सूचना भी देंगे और कार्यवाही भी करेंगे.

श्री अरविंद सिंह भदौरिया -- अभी इस ध्यानाकर्षण में पट्टा जी का नाम नहीं है लेकिन आप आदेश करेंगे आप बतायें कि क्या पूछना चाहते हैं.

श्री पी सी शर्मा -- क्या भोपाल को भी इसमें शामिल करेंगे.आपने अभी जांच करने की बात की है. तो क्या भोपाल को भी जांच के दायरे में लेंगे.

श्री अरविंद सिंह भदौरिया -- आप हमें लिखित में हमें दे दें. अगर गड़बड़ होगी तो अवश्य उसकी जांच करा देंगे. सरकार की मंशा ठीक है सरकार का भाव ठीक है.

श्री आरिफ मसूद -- इस प्रकार का भोपाल का भी एक मामला है.

अध्यक्ष महोदय -- भोपाल के बारे में अभी शर्मा जी ने कहा है, वह मामला उठाया है. फिर बाद में यह कहेंगे आपने नहीं कहा इसलिए नहीं लेंगे तो मेरे पास में भी भोपाल की कुछ जानकारियां हैं वह मैं आपको दूंगा उस पर भी कार्यवाही करा देना.

श्री नारायण सिंह पट्टा (बिछिया) -- अध्यक्ष महोदय मण्डला आदिवासी जिला है अनेक चिटफण्ड कंपनियां अपना पैर पसार कर उनको लूटने का काम कर रही हैं. अ भी हाल ही में एक एचबीएन नाम की कंपनी जो लोगों से लाखों करोड़ो रूपया लेकर के लौटाने के नाम पर फरार हो चुकी है. मंत्री जी से निवेदन है कि इ स कंपनी के खिलाफ भी सख्त से सख्त कार्यवाही करें.

श्री विनय सक्सेना -- मेरा कहना है कि जब पूरे मध्यप्रदेश में ही चिटफण्ड का चल रहा है..

अध्यक्ष महोदय -- अभी मंत्री जी ने कहा है कि जिनकी सूचना होगी उनकी जांच करा लेंगे.

श्री विनय सक्सेना -- हम लोगों के तो ध्यानाकर्षण लगेंगे नहीं हमें तो आपका संरक्षण चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी ने खुद कहा है कि जो इस तरह की शिकायतें प्रचलन में आएंगी उन पर कार्यवाही करेंगे.

श्री विनय सक्‍सेना -- अध्‍यक्ष महोदय, जबलपुर में 15 दिन पहले 10 हजार बच्‍चे पूरी रात बैठे रहे और करोड़ों रुपये लेकर कंपनी भाग गई. माननीय मंत्री जी, एक निवेदन कर रहा हूं पूरे मध्‍यप्रदेश में एक आदेश कर दें, क्‍योंकि जो मालिक है वह पकड़ा ही नहीं जाता और कर्मचारी जेल में रहते हैं.

श्री आरिफ मसूद -- अध्‍यक्ष महोदय, एक बार मंत्री जी से कहलवा दीजिये.

श्री विनय सक्‍सेना -- अध्‍यक्ष महोदय, यह पूरे मध्‍यप्रदेश का मामला है. चिटफंड कंपनियों में पूरे प्रदेश में गड़बिड़यां हैं. आपका संरक्षण हम लोगों को नहीं मिलेगा तो किसे मिलेगा. कम से कम एक ऐसा आदेश करें कि बगैर मालिक के कोई कंपनी काम नहीं कर पाए.

डॉ. अशोक मर्सकोले -- अध्‍यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश के लिये एक आदेश करवा दीजिये.

श्री विनय सक्‍सेना -- अध्‍यक्ष महोदय, जबलपुर में तो कर्मचारी 15 दिन से जेल में है मालिक का पता ही नहीं है.

अध्‍यक्ष महोदय -- अब आपकी बात हो गई बैठ जाइये. माननीय मंत्री जी, सबकी शंका, कुशंका सबका निवारण करते हुये अपनी बात कहें.

श्री अरविंद सिंह भदौरिया -- अध्‍यक्ष महोदय, इसमें दो विषय हैं, एक जो हमारे डॉ. गोविंद सिंह जी ने विषय उठाया था कि सहकारी सोसायटियों का काम नहीं है, वह करके और कई प्रकार के भ्रम फैलाकर कई जगह किया गया है, उसके बारे में मैंने बोला है. फिर भी हमारे माननीय सदस्‍यगण ने जिन्‍होंने बोला, हमारे आरिफ मसूद साहब, श्री विनय सक्‍सेना जी और जो भी हैं एक पेपर दे देंगे, सरकार की मंशा बिलकुल स्‍पष्‍ट है, कोई भी हो, कितना भी बड़ा आदमी हो छोड़ा नहीं जाएगा. साहूकारी अधिनियम भी आरबीआई बैंक के द्वारा रजिस्‍टर्ड हो चुका है, आप निश्चिंत होकर मुझे लिखित में दे देंगे तो मैं योग्‍य एजेंसी से जहां से होगा, कार्यवाही करेंगे. मेरी एवं मेरी सरकार की नीति एवं नीयत में कोई अंतर नहीं, 100 परसेंट करेंगे.

 

12.38 बजे (2) प्रदेश के दिव्‍यांग बच्‍चों को कृत्रिम अंग निश्चित समय सीमा में प्रदाय न किये

जाने से उत्‍पन्‍न स्थिति

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया (मंदसौर) -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरी ध्‍यानाकर्षण की सूचना का विषय इस प्रकार है- सामाजिक न्‍याय विभाग द्वारा दिव्‍यांग बच्‍चों को नामांकित कर उन्‍हें विभिन्‍न प्रकार के कृत्रिम अंग प्रदान किये जाते हैं. इन कृत्रिम अंगों का नाप लेकर भारत सरकार द्वारा अधिकृत एलेम्‍पो कंपनी द्वारा उन्‍हें कृत्रिम अंग प्रदान किये जाते हैं, किंतु गत वर्षों में देखा गया कि परीक्षण के 2-3 वर्ष उपरांत भी कृत्रिम अंगों का आवंटन नहीं होता, नतीजतन जिन दिव्‍यांगों के हाथ और पैरों के लिये नाप लिये जाते हैं वह बढ़ती उम्र के साथ उनके नाप में परिवर्तन आ जाता है. अर्थात जब परीक्षण एवं नाप लिया जाता है तब से कृत्रिम अंगों को दिये जाने वाले वितरण में विलंब के कारण नाप में परिवर्तन हो जाता है जिससे वह कृत्रिम अंग अनुपयोगी सिद्ध हो जाते हैं. गत दिनों ऐसी समस्‍या प्रदेश के 80 प्रतिशत जिलों में देखने को मिली है जिससे दिव्‍यांग बच्‍चों के अभिभावक एवं दिव्‍यांगों में भारी आक्रोश है.

 

राज्‍य मंत्री, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्‍करण (स्‍वतंत्र प्रभार), श्री भारत सिंह कुशवाह---

 

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने अपने जवाब में जो बताया कि सूचीबद्ध होता है, अध्‍यक्ष महोदय, सूचीबद्ध होता है, मैं इससे इंकार नहीं करता. मंत्री जी का जवाब बिल्‍कुल ठीक है. हम यह भी कह रहे हैं कि शिविर लगते हैं, लेकिन समय पर उन उपकरणों का आवंटन नहीं होता. कंपनी ब्‍लॉक स्‍तर पर शिविर लगा देती है, जिसमें तीन हजार, चार हजार, पांच हजार दिव्‍यांग आते हैं. आपका संरक्षण चाहते हुए मैं यह कहना चाहता हूँ और पूरा सदन इस बात को जानता है कि दिव्‍यांगों के प्रति सबकी सहानुभूति होती है. माननीय प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी ने तो इसकी परिभाषा बदल दी. कभी उनको लूले, लंगड़े से संबोधित किया जाता था, फिर नि:शक्‍त शब्‍द आया. अभी उनका नाम परिवर्तित कर दिव्‍यांग किया गया है, उनको सम्‍मान दिया गया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक तो जो एलिमको कंपनी है, इस कंपनी का आधिपत्‍य हो गया है, उसके कारण से जो उसका आवंटन है, मैं फिर दोहरा रहा हूँ कि नाप लेने के समय और उपकरण बनने में विलंब और उसके बाद वितरण में भी देरी, इन सबके कारण से जो दिव्‍यांग बच्‍चा है, जिसका एक पांव तो डेडेड हो गया, लेकिन दूसरा पांव या दूसरा हाथ, जिस प्रकार से ब्‍लड सर्कुलेशन में है, और तब जब साल, डेढ़ साल का विलंब होता है, यह बहुत कष्‍टकारी होता है. माननीय मंत्री जी ने जो उल्‍लेख किया है, मैं लॉकडाऊन के समय की बात ही नहीं कर रहा हूँ. मैं तो उन पिछले 2-3-4 सालों की बात कर रहा हूँ, जब कंपनी ने ब्‍लॉक स्‍तर पर शिविर लगाए और अभिभावकों को इस बात की चिंता है कि अब जब उनके उपकरण बनकर आएंगे तो दिव्‍यांग बच्‍चे के शरीर पर कैसे फिट होंगे, क्‍योंकि बच्‍चों की ग्रोथ तो हुई है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कई अभिभावकों की शिकायत है और मुझे तो उन अभिभावकों ने आकर ज्ञापन भी सौंपे हैं. कई स्‍थानों पर तो माननीय मंत्री जी जांच करवा लें तो वे उपकरण ब्‍लॉक स्‍तर पर जाने के बाद कंपनी ने अगर दिए हैं, विलंब से दिए हैं, बंटने में भी, आवंटन होने में भी, इस तरह से वहां पर पड़े हुए हैं. एक तरह से अटालाखाना में हो गया. मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूँ कि एक तो पिछले 2-3 वर्षों में जहां-जहां भी शिविर हुए हैं, उन शिविरों की तारीख के साथ, उसका आवंटन, उसका परीक्षण और उपकरण देने में जो विलंब हुआ है, उसकी आप जांच करवा लें. माननीय मंत्री महोदय, प्रत्‍येक ब्‍लॉक स्‍तर पर इस प्रकार की शिकायतें आई हैं और इसको लेकर एक समय-सीमा भी आप सुनिश्‍चित कर दें कि निकट भविष्‍य में एलिमको कंपनी जब भी शिविर लगाए, शिविर की तारीख से एक महीने के अंदर, दो महीने के अंदर, तीन महीने के अंदर उपकरण बंट जाने चाहिए. आखिर बच्‍चे की जो ग्रोथ बढ़ रही है, उसके कारण अगर वह उपकरण आ भी जाएगा, तो उसके काम का इसलिए नहीं होगा, क्‍योंकि उसके शरीर पर वह फिट नहीं होगा, क्‍योंकि उसकी आयु बढ़ रही है तो उसका जो दूसरा पांव है, जो वर्किंग है, या दूसरा हाथ है, जो वर्किंग है, उसमें वह फिट नहीं होगा. मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूँ कि एक तो इसमें आप विलंब को दिखवा लीजिए, उसकी जांच करवा लीजिए. दूसरी बात यह है कि निकट भविष्‍य में कंपनी की एक समय-सीमा सुनिश्‍चित करवा दें तो मैं समझता हूँ कि पूरे मध्‍यप्रदेश के दिव्‍यांगों के ऊपर आपकी सहानुभूति होगी और आपकी कृपा भी होगी.

श्री भारत सिंह कुशवाह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य काफी वरिष्‍ठ सदस्‍य हैं और निश्‍चित रूप से दिव्‍यांगों के बारे में जो विभाग का रोडमैप है, जो विभाग का नियम है, यदि नियम का पालन एलिमको संस्‍था द्वारा नहीं किया जा रहा है या कृत्रिम अंग दिव्‍यांगों को समय पर नहीं पहुंचाए जा रहे हैं तो इसकी हम विस्‍तृत जांच कराएंगे. यदि शिविरों में भी कहीं देरी हुई है और उन बच्‍चों को दिव्‍यांग होने के कारण जो कृत्रिम अंग समय पर उपलब्‍ध होने चाहिए थे, वह उपलब्‍ध नहीं हुए तो हम दोनों कारणों की विस्‍तृत जांच करा लेंगे.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया -- माननीय मंत्री जी, बहुत-बहुत धन्‍यवाद. आपने दोनों कारणों की जांच का आश्‍वासन दिया, उसके लिए आपका आभार.

 

 

 

 

12.46 बजे याचिकाओं की प्रस्‍तुति

अध्‍यक्ष महोदय -- आज प्रस्‍तुत सभी याचिकाएं पढ़ी हुईं मानी जाएंगी.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.47 बजे शासकीय विधि विषयक कार्य

(1) मध्‍यप्रदेश भोज (मुक्‍त) विश्‍वविद्यालय संशोधन विधेयक, 2021

(क्रमांक 8 सन् 2021) का पुर:स्‍थापन

 

 

 

 

 

(2) डॉ.बी.आर.अम्‍बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्‍वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2021 (क्रमांक 9 सन् 2021) का पुर:स्‍थापन

 

 

 

 

(3) पंडित एस.एन.शुक्‍ला विश्‍वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2021

(क्रमांक 10 सन् 2021) का पुर:स्‍थापन

 

 

(4) मध्‍यप्रदेश निजी विश्‍वविद्यालय (स्‍थापना एवं संचालन) संशोधन विधेयक, 2021 (क्रमांक 11 सन् 2021) का पुर:स्‍थापन

 

 

(5) मध्‍यप्रदेश लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी (संशोधन) विधेयक, 2021 (क्रमांक 12 सन् 2021) का पुर:स्‍थापन

 

 

 

 

 

(6) मध्‍यप्रदेश सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी (संशोधन) विधेयक, 2021 (क्रमांक 13 सन् 2021) का पुर:स्‍थापन

 

 

 

12.51 बजे

मध्यप्रदेश सिविल न्यायालय (संशोधन) विधेयक, 2021 (क्रमांक 14 सन् 2020) का पुरःस्थापन.

विधि और विधायी कार्य मंत्री (डॉ.नरोत्तम मिश्र)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

मैं,मध्यप्रदेश सिविल न्यायालय (संशोधन) विधेयक, 2021 के पुरःस्थापन की अनुमति चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय-- प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश सिविल न्यायालय (संशोधन) विधेयक, 2021 के पुरःस्थापन की अनुमति दी जाय.

अनुमति प्रदान की गई.

डॉ. नरोत्तम मिश्र-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश सिविल न्यायालय (संशोधन) विधेयक, 2021 का पुरःस्थापन करता हूँ.

अध्यक्ष महोदय-- अब राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का पुनर्ग्रहण होगा. श्रीमती झूमा सोलंकी, सदस्य, अपना भाषण पूर्ण करेंगी.

12.53 बजे

राज्यपाल के अभिभाषण पर डॉ.सीतासरन शर्मा, सदस्य द्वारा दिनाँक 22 फरवरी, 2021 को प्रस्तुत प्रस्ताव पर चर्चा का पुनर्ग्रहण.

 

श्रीमती झूमा डॉ.ध्यान सिंह सोलंकी(भीकनगाँव)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी कल जो अधूरी बात रह गई थी, मैं आज अपनी बात रख रही हूँ. अध्यक्ष जी, सरकार के सुशासन का संकल्प, इसके ऊपर मैं कह रही हूँ कि भू-माफियाओं का अतिक्रमण हटाना, चूँकि हमारी सरकार ने भी शुरू किया था, शुद्ध के लिए युद्ध, किन्तु यह वास्तव में राजस्व के अमले द्वारा मनमानी करके उन दुकानों को तोड़ा जा रहा है, जिनकी रोजी-रोटी ही उन दुकानों से लगी है और ऐसे गरीब लोग जो नगर पालिकाओं में और पंचायतों में अपनी बाकायदा राशि भरते हैं और निरन्तर भर रहे हैं, उनकी तोड़ी गईं, तो किस तरह का यह सुशासन है, अध्यक्ष जी, यह मैं आप से कहना चाह रही हूँ.

अध्यक्ष जी, इसी तरह से महिलाओं पर अत्याचार, मैं पहले भी कह चुकी हूँ कि पूरे मध्यप्रदेश में जिस हिसाब से अत्याचार बढ़ें हैं वास्तव में बहुत सोचनीय और निन्दनीय है और इसी तारतम्य में हमारी सम्माननीय विधायक कलावती भूरिया जी का, जो मेरा शून्यकाल में भी लगा हुआ था, वे अपनी बात पूरी दबंगता से करती हैं और काम भी कर रही हैं, किन्तु खुले रूप से उनके ऊपर 10 फरवरी को पत्रकार वार्ता लेकर, पूर्व विधायक के द्वारा चेतावनी दी गई है, धमकियां दी गई हैं, आज तक उनकी कोई कार्यवाही नहीं की गई है. (शेम शेम की आवाज) अध्यक्ष जी, बहुत दुख की बात है यदि हमारी विधायक ही सुरक्षित नहीं है, जो महिला है, जिसको विशेषाधिकार है, वह सुरक्षित नहीं है तो आम जन की सुरक्षा की बात हम लोग कैसे कहेंगे. इसमें कार्यवाही होना चाहिए. (मेजों की थपथपाहट) और इसी तरह से बहुत बड़ी बात है कि उनको सुरक्षा देने के बजाय जो उनके खिलाफ धमकियाँ दे रहे हैं उनको प्रोटेक्शन दिया जा रहा है और आज पता चला कि पूर्व विधायक के लिए दो गार्ड की व्यवस्था की गई है, तो यह सरकार किनको सुरक्षा देना चाह रही है इस ओर सरकार को थोड़ा सा ध्यान देना चाहिए.

अध्यक्ष जी, हमारी महामहिम के द्वारा बिजली के बिलों की बात कही गई कि गरीबों को छूट दी जा रही है. माननीय कमलनाथ जी ने सौ यूनिट पर सौ रुपया, इस हिसाब से गरीबों के बिल आना शुरू हुए थे, किन्तु आज की तारीख में वह बिल उल्टे हो गए हैं, हजारों में बिल आ रहे हैं और गरीब लोग इससे त्रस्त हैं और नलजल योजना के, जिनसे हमारी पंचायतों में नल जल योजनाएँ चलती थीं, उनके सारे काटे जा रहे हैं और उनसे भरने के लिए कहा गया है और उनके जो बिल आ रहे हैं, और पहले जो व्यवस्था थी, वही रहे, जिससे पंचायतें आसानी से उनको संचालित कर सकती हैं.

माननीय अध्यक्ष जी, गरीबों को जो अनाज दिया जा रहा है, जो 28 सौ की सूची, जिसमें सभी अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य जो गरीब हैं, जिनको अनाज देते आए हैं, उनमें गरीबों को अनाज देने के बजाय इस बार बाजरे की व्यवस्था की गई है. यह कहाँ का न्याय है? जब हमारा पूरा मध्यप्रदेश गेहूँ उत्पादन में 6 बार से शायद अवार्ड ले रहा है, सबसे अधिक उत्पादन करने में और हमारे गरीबों को बाजरा खिलाएंगे हम? यह कहाँ का न्याय है गरीबों के साथ? तो अध्यक्ष जी, जो हमारे गरीब किसान हैं या मजदूर हैं वे अनाज खाते हैं, मक्का खाए, ज्वार खाए, किन्तु जो बाजरे की व्यवस्था की गई है यह बिल्कुल गलत है. हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी भी यहाँ बैठे हैं इसमें बिल्कुल बदलाव आना चाहिए. बाजरा, हमारे अनुसूचित जनजाति के लोग कभी खाते नहीं हैं.

माननीय अध्यक्ष जी, इसी तरह से ओलावृष्टि, अभी काफी कुछ हुआ, चूँकि जब बजट आएगा उसमें भी मैं अपनी बात रखूँगी. हमारे यहाँ आंधी-तूफान के साथ ओलावृष्टि भी हुई, इसमें बहुत नुकसान हुआ है. अतः अध्यक्ष जी, अतिशीघ्रता के साथ सर्वे के लिए यहाँ से आदेश मिलें ताकि उनका सर्वे हो और उन्हें मुआवजा दिया जाए. माननीय अध्यक्ष जी, आपने मुझे बोलने का वक्त दिया इसके लिए मैं आपका बहुत बहुत धन्यवाद करती हूँ.

 

 

 

 

12.55 बजे

सुश्री कलावती भूरिया, सदस्य द्वारा जान से मारने की धमकी दिए जाने के कारण सुरक्षा की मांग की जाना.

 

सुश्री कलावती भूरिया (जोबट)-- माननीय मुख्यमंत्री जी, आप प्रदेश की बहन और बेटियों को सुरक्षा प्रदान करते हैं. मैंने लगातार आपको पत्र भेजे हैं मुझे कोई सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है और सामने वाले को दो-दो गार्ड प्रदान कर दिए गए हैं. हारे हुए विधायक की सुरक्षा करना है या जीते हुए विधायक की सुरक्षा करना है. मुझे लगातार धमकियां दी जा रही हैं. कल भी प्रोग्राम किया गया, कल का वीडियो भी मैं दे सकती हूँ. आपको सीडी भी मैंने दी है. आईजी, डीजीपी सभी से मैंने गुहार लगाई है. मुझे सुरक्षा प्रदान नहीं की गई है. मेरी जान को खतरा है वहां पर लोग बंदूक लेकर घूम रहे हैं. क्या पूर्व विधायक को सरकार का संरक्षण है मिला हुआ है. खुले आम मेरे हाथ और मेरी नाक काटने की धमकी दी जा रही है. ऐसा कहा जा रहा है कि रोड पर उड़ा देंगे. मुझे वे कभी भी जान से मार सकते हैं.

अध्यक्ष महोदय -- आपकी बात आ गई है.

सुश्री कलावती भूरिया -- कोई कार्यवाही उन पर नहीं की गई है...(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय -- आपकी बात आ गई है, सदन के नेता बोल रहे हैं. अब आप बैठ जाइए. माननीय मुख्यमंत्री जी बोल रहे हैं,सुन तो लीजिए.

मुख्यमंत्री (श्री शिवराज सिंह चौहान) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, सम्मानित विधायक चाहे वे भाई हों, बहन हों, चाहे पूर्व विधायक हों सरकार हर एक की सुरक्षा की गारंटी देती है. सुरक्षा के लिए जो भी आवश्यक उपाय होंगे वे किए जाएंगे.

डॉ. विजयलक्ष्मी साधो -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री जी ने जो कहा है कि विधायक हो या भूतपूर्व विधायक हो, विधायक इस सदन का सदस्य है. आप सदन के पितामह हैं. सदस्य के साथ जिस तरह का बर्ताव हुआ है प्रेस कांफ्रेस लेकर हाथ पैर काटने की धमकी दी गई है. पूर्व विधायक पर तत्काल व्यवस्था देना चाहिए, गिरफ्तारी होना चाहिए. पूर्व विधायक को तो आपने गार्ड की व्यवस्था कर दी है लेकिन जो विधायक इस संस्था की सदस्य है, आप पितामह हैं. जो वर्तमान सदस्य है उसको अगर सुरक्षा प्रदान नहीं की जाएगी, वह महिला विधायक है तो फिर हम लोग कहां जाएंगे. मेरा आपसे अनुरोध है. (व्यवधान)

डॉ. विजय शाह -- माननीय मुख्यमंत्री जी ने आश्वस्त किया है कि कोई भी व्यवस्था कराना होगी कराएंगे, सुरक्षा गार्ड देना होगा तो कराएंगे. (व्यवधान)

डॉ. विजयलक्ष्मी साधो -- माननीय मेरी बात पूरी हो जाने दें. महिला विधायक, ऊपर से आदिवासी. तत्काल गिरफ्तारी होना चाहिए. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय -- आप बैठ जाइए थोड़ा सुन लीजिए. हम क्या कहने वाले हैं वह सुन तो लीजिए. आपकी बात सुन ली गई है. (व्यवधान)

डॉ. विजय शाह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मुख्यमंत्री जी के आश्वासन के बाद यह विषय खत्म हो जाता है. (व्यवधान)

श्री कांतिलाल भूरिया -- मैं माननीय मुख्यमंत्री जी से कहना चाहता हूँ कि विधायक के हाथ पैर काटने की बात हो रही है, कहा जा रहा है कि नाक काट देना चाहिए.... (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय -- मैं सभी माननीय सदस्यों से अनुरोध करता हूँ कि बैठ जाइए. भूरिया जी बैठ जाइए. (व्यवधान)

डॉ. विजय शाह -- अरे भूरिया जी आपने झाबुआ में आतंक मचाया है.. (व्यवधान)

श्री कांतिलाल भूरिया -- गुण्डों की वकालत मत करो, आप मंत्री हैं.. (व्यवधान).

अध्यक्ष महोदय -- आप बैठ जाइए, आपकी आवाज आ रही है, लिखा गया है. बैठ जाइए. मैं माननीय सदस्यों से निवेदन करता हूँ कि बैठ जाइए.. (व्यवधान)

श्री बाला बच्चन -- गिरफ्तार नहीं किया गया तो कभी भी घटना घट सकती है. मुख्यमंत्री जी आप इसको गंभीरता से लीजिए. विधान सभा की दूसरी बार की आदिवासी विधायक हैं. आपको इस पर गंभीरता से ध्यान देना पड़ेगा.. (व्यवधान)

डॉ. विजयलक्ष्मी साधो -- माननीय अध्यक्ष महोदय, उसकी गिरफ्तारी होनी चाहिए, महिला सदन की सदस्य होने के साथ साथ आदिवासी हैं.. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय -- आप लोग शांत हो जाइए, सुन लीजिए. मैं आसंदी से खड़ा हुआ हूँ. आप बैठ तो जाइए. बहन जी बैठ जाइए. माननीय विधायक जी बैठ जाइए. जीतू जी बैठ जाइए, मेरी बात सुन लीजिए. मैं सभी सदस्‍यों से अनुरोध करना चाहता हूं कि इसको किसी तरीके से जातीय नजरिए से आदिवासी और सामान्‍य के हिसाब से नहीं देखना है. इस विधान सभा के अंदर जो हमारा माननीय सदस्‍य है, वह सदस्‍य है और उसका इस तरह से वर्गीकरण मत कीजिए. माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने आश्‍वासन दिया है और मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि आप निश्चिंत रहिए. (व्‍यवधान) ...

डॉ. विजयलक्ष्‍मी साधौ-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमें आपका संरक्षण चाहिए, आश्‍वासन से काम नहीं चलेगा. उस व्‍यक्ति के ऊपर क्‍या कार्यवाही हुई है,
उस व्‍यक्ति की गिरफ्तारी होना चाहिए? यह एक महिला सदस्‍या का मामला है. (व्‍यवधान) ...

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा-- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने सुरक्षा की गारंटी दी है, परंतु उस अपराधी को पकड़ने की कोई बात नहीं की है, जिसने खुले आम धमकी दी है. उसको गिरफ्तार होना चाहिए. हम यह आश्‍वासन चाहते हैं. (व्‍यवधान) ...

डॉ. विजयलक्ष्‍मी साधौ-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आश्‍वासन नहीं चलेगा हम कार्यवाही चाहते हैं. (व्‍यवधान) ...

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक जनजाति की बात है और जिसकी बात कर रहे हैं हमारे नागर सिंह जी वह भी जनजाति से ही हैं. भूरिया जी आप मशीन लगाकर आते नहीं हैं, आप सुनते ही नहीं हैं आप सुना भी तो करिए. (व्‍यवधान) ...

श्री सज्‍जन सिंह वर्मा-- यह ट्वीस्‍ट हो रहा है, गृह मंत्री जी, आप सब्‍जेक्‍ट को ट्वीस्‍ट कर रहे हैं. हमारी मांग यह है कि एक विधायक को जो खुलेआम धमकी दे रहा है उसे गिरफ्तार करिए. मंत्री जी गिरफ्तारी का आश्‍वासन क्‍यों नहीं दे रहे हैं. (व्‍यवधान) ...

अध्‍यक्ष महोदय-- आप उन्‍हें बोलने तो दीजिए. वह बोलेंगे तभी तो समझ में आएगा.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या कोई कायमी है? नागर सिंह चौहान पूर्व विधायक हैं, आदिवासी समाज से आते हैं नागर सिंह जी की गिरफ्तारी कैसे कर लेंगे? पॉलिटिकल किसी ने प्रेस में कहा और प्रेस की बात का जवाब इन्‍होनें प्रेस से दे दिया. क्‍या इनकी बात का भी जवाब देंगे? इन्‍होंने भी वैसा ही जवाब दिया है. राजनैतिक रूप से आरोप प्रत्‍यारोप हैं वह लोकल की राजनीति है.

अध्‍यक्ष महोदय, जो बात मूल रूप से सदन की थी उसमें आपने आश्‍वासन दिया, माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने आश्‍वासन दिया कि माननीय सदस्‍या की सुरक्षा की पूरी गारंटी सरकार की है, मुख्‍यमंत्री जी की और आसंदी की है दोनों बातें आप कह चुके हैं उसके बाद भी अकारण इस विषय को तूल दे रहे हैं. (व्‍यवधान) ...

श्री कुणाल चौधरी-- माननीय मंत्री जी, गाड़ देने की, टांग देने की बात हुई थी और जो खुलेआम विधायक को धमकी दे रहे हैं उनको गाड़ेंगे, टांगेंगे नहीं और गरीब आदमी को गाड़ेंगे, टांगेंगे. (व्‍यवधान) ...

अध्‍यक्ष महोदय-- दोनों बातें आ गई हैं. माननीय सदस्‍य जी, अब तो संसदीय कार्य मंत्री जी ने भी कह दिया है जिनका आप नाम ले रहे हैं उनको भी बता दिया है तो बात तो वही हो गई है इसीलिए मैंने कहा है कि उस नजरिए से मत देखिए. आगे बात बढ़ने दीजिए. जालम सिंह पटेल जी आप बोलिए. (व्‍यवधान) ...

श्री ओमकार सिंह मरकाम-- अध्‍यक्ष महोदय, हम माननीय मुख्‍यमंत्री जी से पूछना चाहते हैं कि आप सुरक्षा के लिए क्‍या प्रोटेक्‍शन कर रहे हैं. (व्‍यवधान) ...

श्री जालम सिंह पटेल (नरसिंहपुर) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं राज्‍यपाल जी के अभिभाषण पर कृतज्ञता व्‍यक्‍त करता हूं. देश के प्रधानमंत्री सम्‍माननीय नरेन्‍द्र मोदी जी.

श्री जितु पटवारी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय..

अध्‍यक्ष महोदय-- जितु जी आप अपनी बात बाद में कह लीजिएगा. जालम सिंह जी ने बोलना शुरू कर दिया है.

श्री जितु पटवारी-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं खुद गया था कोई बड़ी घटना हो जाएगी उसमें मध्‍यप्रदेश का मुंह काला होगा. पक्ष, विपक्ष, राजनैतिक, दलगत विचार के ऊपर उठकर इस पर कोई संज्ञान लेना चाहिए अन्‍यथा एक दिन ऐसा आएगा कि सदन में चर्चा होती रहेगी और कोई बड़ी घटना होगी तब हम सारे शर्मसार होंगे. इसको उस नजरिए से लेना ही नहीं चाहिए कि यह कांगेस और बीजेपी है. एक सदस्‍य को उन्‍होंने कहा कि नाक काट दूंगा, हाथ काट दूंगा अलग-अलग धमकियां दी जा रही हैं.

श्री जालम सिंह पटेल-- अध्‍यक्ष महोदय, इनका वीडियो भी ऐसा ही चल रहा है. इनके वीडियों में भी इन्‍होंने ऊटपटांग बोला है. हमने आपका वीडियो भी देखा है.

श्री जितु पटवारी-- इसको तो संरक्षित करना पडे़गा. यह वीडियो की बात नहीं है. इस बात को आप नकारात्‍मक मत लो इसे आप सकारात्‍मक रूप से लीजिए. इसमें आप पक्ष और विपक्ष पर मत आइए. माननीय मुख्‍यमंत्री जी आप इस बात को संज्ञान में लेकर इस पर निर्णय लें अन्‍यथा बड़ी घटना घट सकती है. दोनों तरफ से घट सकती है.यह बात हम आपके संज्ञान में लाना चाहते हैं. ऐसा नहीं है आदिवासी बाहुल्‍य क्षेत्र है, बाद में यह बातें याद आएंगी कि हमने कहा था. (व्‍यवधान) ...

अध्‍यक्ष महोदय-- जालम सिंह जी, आप अपनी बात कहिए.

श्री जालम सिंह पटेल-- अध्‍यक्ष महोदय, देश और प्रदेश में अनेक विचार धाराओं के आधार पर सरकारें काम कर रही हैं और मैं ऐसा मानता हूं कि चाहे सामंतवाद हो, पूंजीवाद हो, समाजवाद हो, साम्‍यवाद हो, नक्‍सलवाद हो, माओवाद हो, आतंकवाद हो, परिवारवाद हो चलते आए हैं, जिनको जनता ने धूल चटाने का काम किया है और मानववाद को स्‍वीकार किया है, अंत्‍योदय को स्‍वीकार किया है और मैं ऐसा मानता हूं कि अंत्‍योदय के आधार पर आज चाहे हमारी प्रदेश की सरकार हो. चाहे केंद्र की सर‍कार हो लगातार काम कर रही है. एक तरफ मैं कह सकता हूं कि यह देश किसानों का देश है, गांवों का देश है और जब पूर्व प्रधानमंत्री, श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी देश के प्रधानमंत्री बने, तब गांव-गांव सड़क बनी. लंबे समय तक कांग्रेस की सरकार रही, मगर किसी गांव की तरफ सड़क का रूख नहीं रहा. इसी प्रकार से वर्तमान परिवेश में, मैं कह सकता हूं कि चाहे प्रधानमंत्री आवास हो, चाहे शौचालय हो, गैस के कनेक्‍शन हो या हमारी संबल योजना अथवा जितनी भी अन्‍य प्रकार की हमारी योजनायें चल रही हैं, आजादी के 70-72 वर्षों में धरातल पर यदि काम हुआ तो जहां-जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, हमारी सरकार है, मध्‍यप्रदेश में 15 वर्षों से हमारी सरकार है, सिर्फ उसी के आधार पर काम हुए है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक जनप्रतिनिधियों की मैं बात करता हूं तो अंत्‍योदय के विचार के कारण ही आज देश का प्रधानमंत्री, एक गरीब व्‍यक्ति, श्री नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री बने हैं. इस प्रदेश का मुख्‍यमंत्री है तो एक किसान का बेटा मुख्‍यमंत्री बना है. यदि अंत्‍योदय का विचार नहीं होता तो प्रदेश के मुख्‍यमंत्री आदरणीय शिवराज सिंह चौहान जी नहीं बनते अपितु कोई राजा-महाराजा होता या कोई उद्योगपति होता. हम कांग्रेस की सरकारों में देख सकते हैं कि किस प्रकार से उन्‍होंने अपने मुखिया बनाये हैं. इसी प्रकार से मैं कह सकता हूं कि जितने भी इस विचारधारा से जुड़े हम लोग हैं, हम लगातार ऐसा वर्ग जो शोषित है, पीडि़त है, कमजोर है, जिसकी कभी कोई चिंता नहीं हुई, उस क्षेत्र में लगातार हमारे प्रदेश के मुख्‍यमंत्री जी काम कर रहे हैं. प्रदेश के किसानों की बात यहां की जा रही है. किसानों को क्रेडिट देने का काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार और अटल बिहारी वाजपेयी जी जब प्रधानमंत्री बने तब किसान की क्रेडिट बनी. उसके पहले किसान को सिर्फ कर्जीला बनाने का काम किया जाता था. हम लोग मूलत: किसान हैं. हमारे यहां कोई टैक्‍ट्रर लिया जाता या कुंआ खोदा जाता था तो उसमें कम से कम 25 एकड़ की जमीन लगती थी और फिर उसमें कर्ज मिलता था और उस पर भी लगभग 18 प्रतिशत का ब्‍याज लगता था. आज 1 प्रतिशत और बिना ब्‍याज के किसानों को कर्ज मिल रहा है. मैं कह सकता हूं कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है इसलिए किसानों को यह लाभ मिल रहा है.

 

 

 

1.07 बजे

{सभापति महोदया (श्रीमती झूमा डॉ.ध्‍यानसिंह सोलंकी) पीठासीन हुई.}

 

माननीय सभापति महोदया, मैं आप सभी को जानकारी देना चाहता हूं कि कांग्रेस के बंधु लगातार केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए कृषि सुधार के कानूनों को बिना जाने-समझे उनका विरोध कर रहे हैं और आज उनके विश्‍वास का भी संकट है. इसलिए कांग्रेस के बंधु लगातार किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने का प्रयास कर रहे हैं.

माननीय सभापति महोदया, मैं आप सभी को, इस सदन को और विशेषकर कांग्रेस के बंधुओं को बताना चाहता हूं कि पंजाब में आपकी सरकार है, वहां कांग्रेस की सरकार ने 16 अप्रैल, 2013 को कॉन्‍ट्रैक्‍ट फार्मिंग एक्‍ट बनाया है, जिसकी कंडिका 25 के अनुसार यदि किसान अधिनियम का उल्‍लंघन करता है या उससे मुक्‍त हो जाता है तो कारावास के साथ 5 लाख रुपये तक का जुर्माना है. इसके अलावा प्रतिदिन जुर्माना भी किया जा सकता है. कंडिका 26 के अनुसार किसी न्‍यायालय में इसकी सुनवाई भी नहीं की जा सकती है. धिक्‍कार है कांग्रेस को.

माननीय सभापति महोदया, मैं आप सभी से कहना चाहता हूं कि यहां सब बड़ी-बड़ी बातें कर रहे हैं, मैं पंजाब राज्‍य में जो कानून पास हुआ है, उसकी बात कर रहा हूं लेकिन दिल्‍ली के नरेंद्र मोदी जी की सरकार ने उसमें सुधार किया और उसमें किसानों के ऊपर कोई बंधन नहीं है. कल लगातार हमारे प्रतिपक्ष के नेताजी इस बारे में बात कर रहे थे और ये घडि़याली आंसू बहाना उनको बंद करना चाहिए. इसी प्रकार से कल यह भी बात हो रही थी कि हमारी जो सड़कें प्रस्‍तावित हैं, हम उस पर वाह-वाही लूट रहे हैं. हमारे अभिभाषण में कुछ जानकारी है कि वर्ष 2020-21 में 3 हजार 243 करोड़ रुपये के खर्च से 1 हजार 796 किलोमीटर की लंबाई की सड़क का उन्‍नयन और निर्माण हुआ है. इसी प्रकार से सड़कों के नवीनीकरण का काम 1 हजार 856 किलोमीटर में किया गया है. 275 करोड़ रुपये की लागत से बड़े पुल और आरओबी बनाये गये हैं. इस वर्ष प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत 2 हजार किलोमीटर सड़कों का निर्माण किया गया है. 208 वृह्द पुलों का निर्माण किया गया है. वर्ष 2021-22 में जिसकी बात कल, माननीय कमल नाथ जी ने की थी, 5 हजार 200 किलोमीटर लंबाई की सड़कों का निर्माण किया जायेगा.

 

सभापति महोदया:- जालम सिंह जी, आपको पांच मिनट का समय है और वह हो चुका है, आप अपनी बात जल्‍दी खत्‍म करें.

श्री जालम सिंह पटेल:- इस प्रकार से लगभग हमारे मध्‍यप्रदेश में 14652 किलोमीटर सड़कों का निर्माण हो चुका है. हमको जानकारी होना चाहिये, मैंने पहले भी कहा है और अब भी कह रहा हूं कि अगर गांव तक सड़कें बनीं हैं तो तो प्रदेश के मुख्‍यमंत्री जी ने मुख्‍यमंत्री सड़क योजना के माध्‍यम से और उससे नीचे जाकर के किसानों के खेतों तक खेत- किसान सड़क मैं ऐसा मानता हूं कि अभी तक लगातार बन रही है. इसके अलावा भी चाहे नर्मदा वे हो उसके लिये प्रसाद योजना के माध्‍यम से अमरकण्‍डी जी का विकास किया जा रहा है. लगभग 1000 गौ-शाला का निर्माण हो गया है, उसी प्रकार से अभी 1000 गौ-शाला अभी और बनना है, लगातार शिफ्ट में काम किया जा रहा है. आपने बोलने के लिये समय दिया उसके लिये बहुत-बहुत धन्‍यवाद.

श्री जि‍तु पटवारी(राऊ):- सभापति महोदया, आसंदी से मेरा अनुरोध है कि राज्‍यपाल जी का अभिभाषण कोरोना की इस महामारी में जब लोगों ने एक दूसरे से बोलना बंद कर दिया, पिता की अंत्‍येष्टि में बेटे ने आग लगाने से डरना चालू कर दिया. हजारों किलोमीटर भूखे-प्‍यासे मजदूर, जगह-जगह हमने नये-नये दृश्‍य देखे. इंसानियत और मानवता के गिरते और चढ़ते कई उदाहरण इस पूरे एक साल में हम लोगों ने आत्‍मसात किये. इसमें प्रधान मंत्री जी ने जो कहा कि आपदा को अवसर समझो, हमने कोशिश की कि इस महामारी से निजाद में पूरी इंसानियत, मानवता एक साथ हो. मध्‍यप्रदेश के मुख्‍यमंत्री जी ने भी कई नारे दिये एक दिया समृद्ध मध्‍यप्रदेश का, दूसरा दिया स्‍वर्णिम मध्‍यप्रदेश का और अब दिया है आत्‍म निर्भर मध्‍यप्रदेश का. ईश्‍वर करे दो पहले के नारे तो समृद्ध और स्‍वर्णिम तो वह बना नहीं पाये पर आत्‍म निर्भर मध्‍यप्रदेश बने, इसके लिये उनको साधुवाद, धन्‍यवाद.

एक महामारी जिसकी चर्चा लगातार 17 अध्‍याय में हुई है. कोविड को लेकर इस सरकार ने जो व्‍यवस्‍थाएं की वह इसमें बताया गया है. दूसरी एक महामारी और मध्‍यप्रदेश ने नयी देखी, कुछ नया हुआ, नया यह हुआ कि लोकतांत्रिक महामारी. लोक तंत्र मध्‍यप्रदेश ने नया देखा, नया लोकतंत्र कैसे देखा यह जग-जाहिर है सर्वविदित है, इसमें लोगों के मत को खरीदने और बेचने का एक नया मध्‍यप्रदेश ने अनुभव किया. इसमें मध्‍यप्रदेश की जनता ने जो सदन आहूत हो रहा था उसमें 35 कर्मचारियों को कोरोना पॉजिटिव बताया और सदन आहूत नहीं होने दिया और उनके विशेषाधिकारों की रोकथाम की, यह देखा. एक राजेन्‍द्र जी, जावरा के विधायक जी का फोटो हम बार-बार देख रहे हैं उनका बयान आया, यह पहली बार देखा उन्‍होंने कहा कि मुझे अधिकारियों ने जानबूझकर कोविड का मरीज बना दिया, क्‍योंकि मैं सदन में उपस्थित नहीं हो सकूं, यह देखा. मैं मानता हूं कि यह भी पहली बार देखा कि एक सौम्‍य मुख्‍यमंत्री, सरल मुख्‍यमंत्री, किसान का बेटा मुख्‍यमंत्री और किसान को भगवान और उनका भक्‍त बताने वाला मुख्‍यमंत्री बताने वाला मुख्‍यमंत्री बयान देने लगा की टांग तोड़ दूंगा, गाड़ दूंगा मध्‍यप्रदेश से भाग जाओ रे, मामा अलग फार्म में है, मामा अलग मूड में है इनके बयान आने लगे. आदरणीय शिवराज जी राज्‍यपाल जी का अभिभाषण 15-16 साल के आपके शासन का जीता-जागता फेल्‍युअर का प्रमाण है, जीता-जागता यह अभिभाषण विफलता और अराजगता आपने 16 साल में कितनी की, इसी में आपने बताया है. मुख्‍यमंत्री जी, इसी में जो बातें हैं उन्‍हीं पर मैं आपसे आसंदी के माध्‍यम से चर्चा करूंगा. हम रोज एक फोटो अखबार में देखते हैं, मुख्‍यमंत्री जी एक पौधा रोज लगायेंगे, अच्‍छी बात है. पर्यावरण का संरक्षण का हम सबको करना है, परन्‍तु मुख्‍यमंत्री जी आपके वह 6 करोड़ 67 लाख के रिकार्ड का क्‍या हुआ. जो नर्मदा के आसपास लगाये थे उन पर आप चर्चा क्यों नहीं करते हैं ? एक पौधा रोज लगाओ यह जरूरी है उसमें वन विभाग क्या करेगा, वन मंत्री क्या करेंगे ? विद्या बालन की डिनर पर चर्चा अखबारों में आयी थी, तो वन मंत्री जी के कर्तव्यों का निर्वहन कौन करेगा ? यह आपको और हमको बताना है. कोविड को लेकर पिछले 16 सालों में मुख्यमंत्री जी ने कहा कि चिरायु हॉस्पीटल में भर्ती हुए अभिभाषण के पैरा 14 में मुख्यमंत्री जी केवल कोविड में थे. हमने यह प्रयास किया, इतने वेंटीलेटर लगाये इतना यह किया, इतना वह किया. 16 साल में आपने क्या किया ? आपने कहा कि 16 साल में जिले में कुछ नहीं कर सका. एक भी जिले के किसी भी हॉस्पीटल में एक वेंटीलेटर नहीं था, यह आपने बताया है. यह 16 साल की आपकी अकर्मण्यता आपकी है. इस पर आपको विचार करने की आवश्यकता है. आपने इस अभिभाषण में कहा कि साढ़े पांच करोड़ के प्रदेश में मैंने 5 करोड़ 25 लाख लोगों को, हमारे परिवार वालों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से राशन वितरित कराया यह 16 साल का आपकी विफलताओं का प्रमाण है. आपने कहा कि मैंने 1 करोड़ मजदूरों को 30 लाख करोड़ दिवस रोजगार उपलब्ध कराया. 1 करोड़ मजदूरों का प्रदेश बनाया यह 16 सालों में आपने किया है. यह प्रमाण दिया है कि 16 साल में मैं चुनकर जब तीन बार लोकप्रिय मुख्यमंत्री बना, लोगों की भावनाओं से मुख्यमंत्री बना.लोगों की जन भावनाओं पर खरा नहीं उतरा, यह आपने बताया है. हमारी बेटियों को लेकर मुख्यमंत्री जी बहुत चिन्तित हैं रोज पैर धोकर, पूजा पाठ करके कोई कार्यक्रम का आयोजन होगा तो उसमें जारी कर दिया फरमान पर वह नहीं बता पाये कि 9 हजार 600 बच्चियों को 11 महीने में अपहरण से हमने छुड़वाया, यह इसी अभिभाषण में आपने बताया है. 16 सालों में आपने साढ़े नौ हजार बच्चियों का अपहरण हुआ होगा इसका क्या प्रमाण है? यह अपने आप में बताता है कि वह विफल मुख्यमंत्री थे. आप भूल गये कि प्रदेश की राजधानी भोपाल में जघन्य बलात्कार हुए हैं. शहडोल में मंडल अध्यक्ष ने जिस तरीके से नशे के इंजेक्शन देकर के चार दिन तक बलात्कार किया है. आप भूल जाते हैं कि जावरा का युवा मोर्चा का मंडल अध्यक्ष उसने क्या किया ? आप भूल जाते हैं गुना की घटना को, आप भूल जाते हैं इन्दौर के काण्ड को, आप भूल जाते हैं कि 11 महीने में बच्चियों के साथ बलात्कार, 17 साल में बेटियों के साथ गेंग रेप, 17 साल में गर्भवती महिलाओं की मौतें, नवजात शिशु मृत्यु दर में देश में हम सबमें नम्बर 1 हैं. महिला सुरक्षा की पोल तो जब खुल गई जब एक साल में 4 हजार 600 बलात्कार के केसों के आंकड़े आये मध्यप्रदेश में एक साल में 49 हजार बेटियों पर किसी न किसी रूप में अपराध हुआ है मुख्यमंत्री जी. मध्यप्रदेश में यह आपका पाठ पूजन का असली चेहरा है आप कहते हैं कि सुशासन चलाना सुशासन चलाना 90 प्रतिशत विधायक उसमें सत्तापक्ष के हों अथवा विपक्ष के हों उनके प्रश्नों का एक उत्तर है कि जानकारी एकत्रित की जा रही है. हमने पूछा आप कहते हैं कि 17 साल में मध्यप्रदेश को स्वर्णिम बनाया. मेरे प्रश्न के उत्तर की बात हो रही है कि 11 महीने में शिवराज सिंह जी द्वारा कितने स्थानांतरण किये गये उसको तीन बार पूछा उसमें कहा कि जानकारी एकत्रित की जा रही है.यह कहना कि कमलनाथ जी ने वल्लभ-भवन को दलालों का अड्डा बना दिया. यही अधिकारी हमारे पास थे और यही अधिकारी आपके पास में हैं, यह लोग यहां पर बैठे हैं इनको रोज क्यों आप लोग चोर कहते हो. आप क्‍यों कहते हो कि ये गलत लोग हैं, इनसे ही लोकतंत्र चलता है. मैं आपको चुनौती देता हूं अगर कमल नाथ के 15 महीने में और आपके 11 महीने के कार्यकाल से तीन गुना ट्रांसफर नहीं हुए हो, सीधे डबल नहीं हुए हो तो मैं आपकी सारी बातें सर-माथे पर रखूंगा. जिस तरीके से आपके वक्‍तव्‍य आते थे, वह शिवराज सिंह चौहान नहीं था, जिसको हमारे जैसे नए लोग चुनकर आये, जब देखा कि एक गरीब का बेटा जो मुख्‍यमंत्री बन सकता है. आप तो नफरत, घृणा, जाओ रे काट दूंगा रे. माफिया दो तरह के हैं, एक (XXX) जो स्‍वच्‍छ है, बीजेपी की वॉशिंग मशीन में धुल-धाल कर आ रहे हैं और एक माफिया जिसमें कार्यवाही करके मैं रोज हेडलाइन बनाता हूं. सभापति महोदय, इस तरह का आचार विचार एक मुख्‍यमंत्री को शोभा नहीं देता.

मैंने प्रश्‍न पूछा कि किसान कर्ज माफी चालू रखोगे कि बंद करोगे कि वापस लोगे, वसूली करोगे, निरंतर जानकारी एकत्रित की जा रही है. मतलब दोगे भी नहीं लोगे भी, चुप बैठोगे. श्री कमल पटेल कहते हैं कि किसानों का कर्ज माफ करना पाप था (XXX) मैं मानता हूं कि ऐसी परिस्थिति में पिछले 10 वर्षों में.

श्री कमल पटेल (XXX) इसलिए विपक्ष में आए हो.

श्री जितु पटवारी - यह कमल पटेल की चिट्ठी माफियाओं के विरूद्ध है वह कमिश्‍नर को कहती है कि कलेक्‍टर खुद माफिया है. यही कमल पटेल की चिट्ठी आप इसी मंत्री मंडल में हो, कैसी सरकार है ये, (XXX) यह प्रश्‍न है आज प्रदेश के सामने.

सभापति महोदया - जितू जी समाप्‍त करें.

श्री जितु पटवारी - सभापति महोदय, मैं पूछना चाहता हूं कि पिछले 10-15 साल पहले मुख्‍यमंत्री जी ने एक नारा दिया, देश के प्रधानमंत्री ने भी उसको एक्‍सेप्‍ट किया. उन्‍होंने कहा कि मैं किसानों की आय दोगुनी करूंगा. मुख्‍यमंत्री जी ने कहा किसानों की आय दोगुनी करूंगा.

श्रीमती कृष्‍णा गौर (गोविन्‍दपुरा)- माननीय सभापति महोदया, मैं आपका बहुत धन्‍यवाद करती हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया. इस सदन में पहली बार मुझे बोलने का मौका मिला है मुझे आपका संरक्षण चाहिए, चूंकि आप एक महिला है. (...व्‍यवधान)

श्री जितु पटवारी - भाभी रोक-टोक से कुछ नहीं होगा. बात पूरी कहनी पड़ती है. (...व्‍यवधान)

सभापति महोदया - जितू जी खत्‍म करें, आपका समय हो गया है.

श्री जितु पटवारी - सभापति महोदया, पूरी बात कहेंगे, कांग्रेस पक्ष के दो लोग कम बोल लेंगे, मैं पूरा बोलूंगा, अनुरोध है. हमारे दो सदस्‍य कम हो जाएंगे, हमें जितने समय मिला है हम पूरा बोलेंगे.

सभापति महोदया - ठीक है आधा मिनट में पूर्ण कीजिए. (...व्‍यवधान)

श्रीमती कृष्‍णा गौर - इस सदन में पहली बार मुझे बोलने का मौका मिला है मुझे आपका संरक्षण चाहिए.

राज्‍यमंत्री उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्‍करण(श्री भारत सिंह कुशवाह) - सदन में अमर्यादित भाषा का उपयोग नहीं होना चाहिए. (...व्‍यवधान)

श्री जितु पटवारी - बात तो सुनो, क्‍यों घबरा रहे हो, सच्‍ची और अच्‍छी बातें है, सुनो भैया सुनो.

सभापति महोदया - जितू जी अपनी बात समाप्‍त करें.

श्रीमती कृष्‍णा गौर - आपका समय समाप्‍त हो गया है, मेरा समय प्रारंभ हो गया है.

श्री जितु पटवारी - आपका कैसे वक्‍त आ गया है, आप तय करेंगी या आसंदी तय करेंगी.

श्रीमती कृष्‍णा गौर - माननीय सभापति महोदया ने मेरा नाम पुकारा है.(...व्‍यवधान)

श्री भारत सिंह कुशवाह - जिस तरीके से बात होनी चाहिए, उस तरीके से करिए, उन्‍होंने नाम बोल दिया (...व्‍यवधान)

श्री जितु पटवारी - हमारे दो सदस्‍य कम बोलेंगे. हम हमारी बात पूरी करेंगे (...व्‍यवधान) ये कौन सी बात हुई.

सभापति महोदया - कृष्‍णा जी एक मिनट, उनको अपनी बात आधा मिनट में खत्‍म करने दीजिए ठीक है, उन्‍होंने कहा है कि दो सदस्‍य कम कर दिए जाएं.(...व्‍यवधान)

श्रीमती कृष्‍णा गौर - सभापति महोदया आपने नाम पुकारा, महिलाओं की बात नहीं सुनेंगे.

श्री जितु पटवारी - दो सदस्‍य हमारे कम हो जाएंगे.

सभापति महोदया - कृष्‍णा जी आप बैठ जाइए, दो मिनट में बात पूरी खत्‍म करेंगे और फिर आपकी समय सीमा शुरू हो जाएगी.

श्री जितु पटवारी - हमारा जो समय हमें मिला है, उस समय में हमारे सदस्‍य आपस में तालमेल कर लेंगे आपको बता देंगे और दो सदस्‍य कम कर लेंगे, आपसे अनुरोध है, आपकी भावनाओं के अनुरूप ही काम कर रहे हैं.

सभापति महोदया - ठीक है.

श्री जितु पटवारी - आदरणीय सभापति जी, आदरणीय शिवराज सिंह जी ने कहा कि राजनीति मेरा धर्म है और मैं ईमानदारी से सेवा करता हूं, सदस्‍यों के प्रश्‍नों के उत्‍तर नहीं देता हूं, (...व्‍यवधान)

श्री भारत सिंह कुशवाह - ईमानदारी से सेवा की है, इसलिए चौथी बार मुख्‍यमंत्री हैं, आप सवा साल नहीं टिक पाए. ईमानदारी से सेवा की है, (XXX) इसलिए जल्‍दी वहां पहुंचे हो. (...व्‍यवधान)

श्री जितु पटवारी - उन्‍होंने कहा किसानों की आय दोगुनी करेंगे, मैंने पूछा सर आपने 15 साल पहले कहा था कि किसानों की आय दोगुनी करूंगा, कहां तक पहुंचे, दोगुनी हुई डेढ़ी हुई, सवाई हुई, पर यह सरकार नहीं बता पाई कि क्‍या हुआ, कहा जानकारी एकत्रित की जा रही है. (...व्‍यवधान) फिर मैंने पूछा शिवराज सिंह जी प्रदेश में उपचुनाव में कितनी घोषणाएं किस किस विधान सभाओं में 28 में की वे नहीं बता पाएं, मैंने पूछा कितनी घोषणाएं की वे नहीं बता पाएं, घोषणाओं की जानकारी एकत्रित की जा रही है. मैं मानता हूँ कि शिवराज सिंह जी ने जिस तरीके का शासन चलाया.

श्री हरिशंकर खटीक - आप लोग तो कुछ नहीं कर पाये.

श्री जितु पटवारी - सुनो भाई, सुनो. आप शांति से सुनो. यह सरकार आएगी और चली जायेगी.

किसान कल्‍याण एवं कृषि विकास मंत्री (श्री कमल पटेल) - माननीय सभापति महोदया. आप मेरी बात सुनें.

श्री जितु पटवारी - सभापति महोदया, आप व्‍यवस्‍था बनाएं. मैं मानता हूँ कि कमल पटेल की चिट्ठी का .....(श्री तुलसीराम सिलावट के आसन पर खड़े होकर कुछ बोलने पर) आप तो बैठ जाओ. (XXX)

सभापति महोदया - आप सभी शांति से बैठे. इनकी बात सुन लें.

श्री जितु पटवारी - आप तो बिक कर गए हो, आप तो बैठो.

(..व्‍यवधान...)

जल संसाधन मंत्री (श्री तुलसीराम सिलावट) - तुम्‍हारे प्रमाण की जरूरत नहीं है.

श्री जितु पटवारी - (खीजकर बोलते हुए) (XXX)

श्री तुलसीराम सिलावट - सभापति महोदया......

(..व्‍यवधान...)

श्री कमल पटेल - आपको किसानों की बददुआ लगी है.

सभापति महोदया - आप सभी लोग बैठ जाएं.

(..व्‍यवधान...)

वन मंत्री (कुंवर विजय शाह) - सभापति महोदया, मेरा प्‍वाइंट ऑफ ऑर्डर है.

सभापति महोदया - आप लोग शांति से सुनें. दोनों ही पक्ष अपनी बात रख रहे हैं. शांति से सुनें.

श्री तुलसीराम सिलावट - सभापति महोदया, यह व्‍यवस्‍था का प्रश्‍न है.

श्री कुणाल चौधरी (कालापीपल) - माननीय मंत्री जी, विद्याबालन यहां पर डिनर के लिए नहीं हैं. आप आप रहने दीजिये, बात करने दीजिये, डिनर की चर्चा वहां करना.

कुंवर विजय शाह - सभापति महोदया, यह चौराहे का भाषण नहीं है. यह विधान सभा का भाषण है.

श्री कुणाल चौधरी - आपने चौराहे पर दिया होगा.

(..व्‍यवधान...)

1.26 बजे {अध्यक्ष महोदय (श्री गिरीश गौतम) पीठासीन हुए.}

श्री तुलसीराम सिलावट - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस प्रकार से सम्‍मानित सदस्‍य ने जिस भाषा का उपयोग किया है, उसको विलोपित किया जाये.

अध्‍यक्ष महोदय - श्रीमती कृष्‍णा गौर जी, आप अपना भाषण शुरू करें.

श्री तुलसीराम सिलावट - यह बिकाऊ और टिकाऊ मैंने इनको दे दिया है.

अध्‍यक्ष महोदय - श्रीमती कृष्‍णा गौर जी अपनी बात शुरू करें. श्रीमती कृष्‍णा गौर के अलावा कोई भी बोलेगा तो उसका नहीं लिखा जायेगा.

श्री जितु पटवारी - (XXX)

श्री तुलसीराम सिलावट - (XXX)

श्री जितु पटवारी - (XXX)

श्रीमती कृष्‍णा गौर - धन्‍यवाद, अध्‍यक्ष महोदय.

श्री जितु पटवारी - अध्‍यक्ष महोदय, हमारा कहना यह है कि हमारे 2 सदस्‍य कम हो जाएंगे. आप जो कहेंगे, पर आप हमारी बात पूरी हो जाने दीजिये. मुझे आप पर भरोसा है. मुझे सदन पर भरोसा है. (अपनी पार्टी के सदस्‍यों की तरफ देखते हुए) आप अध्‍यक्ष जी का स्‍वागत करो. (मेजों की थपथपाहट)

अध्‍यक्ष महोदय - जितु जी, आप यह निर्णय लीजिये. आप सुन लीजिये. आप सदस्‍यों की संख्‍या कम कर रहे हैं. समय सबको अलॉट है, आप उसके हिसाब से कम करके बताइये.

श्री जितु पटवारी - आप दो सदस्‍य कम कर दीजिये.

अध्‍यक्ष महोदय - यह आपको बताना है.

श्री जितु पटवारी - मैं बता दूँगा, पहले मेरा भाषण हो जाये. मैं पहले बताऊँ या बाद में बताऊँ.

अध्‍यक्ष महोदय - यह आपको पहले बताना पड़ेगा, तब ही तो भाषण कराएंगे. अभी तो श्रीमती कृष्‍णा गौर जी को बोलने दीजिये.

श्री जितु पटवारी - अध्‍यक्ष जी, पहले व्‍यवस्‍था दे दें.

अध्‍यक्ष महोदय - पहले गौर जी को बोलने दीजिये.

श्री जितु पटवारी - अध्‍यक्ष जी, यह तो आपकी हम पर कृपा नहीं है. आप मेरी पूरी बात हो जाने दीजिये.

अध्‍यक्ष महोदय - श्रीमती कृष्‍णा गौर जी आप बैठ जाएं.

श्रीमती कृष्‍णा गौर - जी, अध्‍यक्ष जी.

अध्‍यक्ष महोदय - (श्री पी.सी.शर्मा के खड़े होने पर) शर्मा जी, आप बैठ जाइये. श्री तुलसीराम सिलावट जी आप बैठ जाइये.

(..व्‍यवधान...)

श्री जितु पटवारी - अध्‍यक्ष जी, ऐसा कैसे चलेगा ? 5 मिनिट या 7 मिनिट.

अध्‍यक्ष महोदय - अच्‍छा, ठीक बात है.

श्री जितु पटवारी - अध्‍यक्ष जी, मैं पहला वक्‍ता हूँ. मुझे आपकी कृपा चाहिए, आपका संरक्षण चाहिए. आपकी ईमानदारी के चर्चे सब जगह हैं.

अध्‍यक्ष महोदय - आपको दो मिनिट दे रहा हूँ. आप विषय से मत हटियेगा.

श्री जितु पटवारी - आदरणीय अध्‍यक्ष जी, मुख्‍यमंत्री जी ने कहा कि अवैध माफिया, रेत माफियाओं के खिलाफ अभियान चालू रहेगा. श्री कमल पटेल जी मंत्री हैं, उन्‍होंने चिट्टी लिखी है. धौलपुर के एसपी ने यहां के एसपी को चिट्ठी लिखी है कि मध्‍यप्रदेश से अवैध खनन राजस्‍थान में जा रहा है. बीजेपी के नेता श्री एदल सिंह कंसाना के बेटे की कल ही खबर आई है अवैध खनन के संबंध में. यह मुख्‍यमंत्री जी का सुशासन है. सामाजिक कल्‍याण की रिपोर्ट यह कहती है कि सामाजिक न्‍याय विभाग की जितनी योजनाएं हैं, उसमें मध्‍यप्रदेश पीछे स्‍थान पर है, वह 9 वें स्‍थान से 16 वें स्‍थान पर चला गया है. एक एनसीआरपी की रिपोर्ट कहती है कि भ्रष्‍टाचार में मध्‍यप्रदेश दूसरे नम्‍बर पर है. आप लोगों को नरेन्‍द्र मोदी ने तमगा दिया है. यह रिपोर्ट है, आप कहो तो पटल पर रख दूँ. मैं अनुरोध करना चाहता हूँ कि शराब माफिया, जिनके खिलाफ मध्‍यप्रदेश में श्री शिवराज सिंह जी की रोज हेडलाइन आती है. उसमें 22 मरे, 14 मरे,