मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा                                                                          त्रयोदश सत्र

 

 

फरवरी-मई, 2017 सत्र

 

शुक्रवारदिनांक 24 मार्च, 2017

 

( 3 चैत्रशक संवत्‌ 1939 )

 

 

[खण्ड-  13  ]                                                                                            [अंक- 18 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

 

शुक्रवारदिनांक 24 मार्च2017

( 3 चैत्रशक संवत्‌ 1939 )

विधान सभा पूर्वाह्न 11.03 बजे समवेत हुई.

{ अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

तारांकित प्रश्‍नों के मौखिक उत्‍तर

 

टाउनशि‍पों/कॉलोनियों के लिये विद्युत अधोसंरचना का विकास

[ऊर्जा]

1. ( *क्र. 4302 ) श्री राजेश सोनकर : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) इन्दौर शहर वृत्‍त के अन्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में (फरवरी-2017 तक) कितनी नई टाउनशि‍पों/कॉलोनियों के कॉलोनाईजरों को उनकी विकसित की जा रही टाउनशि‍पों/कॉलोनियों में विद्युत अधोसंरचना विकसित किये जाने हेतु स्‍वीकृति प्रदान की गई है? माह जनवरी-2017 की स्थिति में इन्‍दौर जिला अन्‍तर्गत शहर वृत्‍त इन्‍दौर में कितने घरेलू विद्युत मीटर खराब/बन्‍द हैं? (ख) इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अन्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में (फरवरी-2017 तक) कितनी नई टाउनशि‍पों/कॉलोनियों के कॉलोनाईजरों द्वारा कितनी राशि किस-किस मद में जमा कराई गई? शहर वृत्‍त इन्‍दौर के अन्‍तर्गत माह फरवरी-2017 की स्थिति में माह जनवरी में बदले जाने हेतु शेष मीटरों में से घरेलू उपभोक्‍ताओं के कितने खराब/बन्‍द विद्युत मीटर बदल दिये गये हैं और कितने बदले जाने हेतु शेष हैं? (ग) इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अन्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में (फरवरी-17 तक) कॉलोनाईजर द्वारा विद्युत अधोसंरचना एवं कॉलोनी विद्युतीकरण हेतु कितने प्राक्‍कलन स्‍वीकृत कराये गये हैं एवं उसमें से कितनी कॉलोनियों में कार्य पूर्ण होकर उक्‍त कॉलोनियों को विद्युत कंपनी को सौंप दिया गया है एवं कितनी कॉलोनियों को विद्युत कंपनी को सौंपा जाना/कनेक्‍शन दिया जाना शेष है? (घ) इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अन्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 में (फरवरी-2017 तक) कॉलोनाईजर द्वारा विद्युत अधोसंरचना एवं कॉलोनी विद्युतीकरण हेतु कितने प्राक्‍कलन, कितने विद्युत भार के स्‍वीकृत कराये गये उसमें से कितनी कॉलोनियों में कार्य पूर्ण होकर कार्यपूर्णता की प्रमाणिकता विद्युत कंपनी के किस स्‍तर के अधिकारी ने निरीक्षण कर की क्‍या उक्‍त शेष कॉलोनियों के संबंध में नागरिकों द्वारा कोई विद्युत संबंधी शिकायत की गई? यदि हाँ, तो दोषी कॉलोनाईजर पर विद्युत कंपनी द्वारा क्‍या कार्यवाही की गई?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अंतर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 (फरवरी-2017 तक) में 17 नई टाउनशिपों/कॉलोनियों के लिये विद्युत अधोसंरचना विकसित किये जाने हेतु कॉलोनाइजरों को स्‍वीकृति प्रदान की गई है। माह जनवरी-2017 की स्थिति में शहर वृत्‍त इन्‍दौर के अंतर्गत बन्‍द एवं खराब घरेलू विद्युत मीटरों की संख्‍या 6217 थी। (ख) इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अंतर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 (फरवरी-2017 तक) में 17 नई टाउनशिपों/कॉलोनियों हेतु विद्युत अधोसंरचना विकसित किये जाने हेतु कॉलोनाईजरों द्वारा मदवार जमा की गई राशि की जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अंतर्गत माह फरवरी-2017 में, माह जनवरी-2017 की स्थिति में बदले जाने हेतु शेष कुल 6217 बन्‍द एवं खराब घरेलू विद्युत मीटरों में से 2992 मीटर बदले गये एवं 3225 मीटर बदले जाने हेतु शेष हैं। (ग) इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अंतर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 (फरवरी-2017 तक) में 17 नई टाउनशिपों/कॉलोनियों हेतु विद्युत अधोसंरचना विकसित किये जाने के लिये 17 प्राक्‍कलन स्‍वीकृत किये गये हैं। उक्‍त में से 2 कॉलोनियों के कार्य पूर्ण होने के उपरांत उन्‍हें म.प्र. पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इन्‍दौर को सौंप दिया गया है। कतिपय कारणों से 15 कॉलोनियों के कार्य पूर्ण नहीं होने के कारण उन्‍हें पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को सौंपा जाना शेष है। (घ) इन्‍दौर शहर वृत्‍त के अंतर्गत वित्‍तीय वर्ष 2016-17 (फरवरी-2017 तक) में 17 नई टाउनशिपों/कॉलोनियों हेतु विद्युत अधोसंरचना विकसित किये जाने के लिये कुल 29169 किलोवॉट विद्युत भार के 17 प्राक्‍कलन स्‍वीकृत किये गये। उक्‍त में से 2 कॉलोनियों के कार्य पूर्ण होने के उपरांत पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, इन्‍दौर के संबंधित सहायक यंत्री ने उनका निरीक्षण कर कार्य पूर्ण होना प्रमाणित किया है। जी नहीं। कोई शिकायत प्राप्‍त नहीं हुई है। अत: किसी के विरूद्ध कार्यवाही किये जाने का प्रश्‍न नहीं उठता।

श्री राजेश सोनकर -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हॅूं, मेरा जो प्रश्‍न था कि इंदौर शहर में बिजली के जो मीटर खराब और बंद पडे़ हैं उन्‍हें कब तक ठीक कर दिया जाएगा ? साथ में इंदौर शहर के कॉलो‍नाइजर जो रहवासियों से पैसा लेकर सीधे-सीधे उनके साथ धोखाधड़ी कर रहे हैं क्‍या इनके संबंध में कोई नियम बनेगा ? माननीय मंत्री जी ने खराब मीटरों की संख्‍या 6217 होना बताया है जिसमें से कुछ तो बदल दिए गए हैं और लगभग 3225 मीटर बदले जाना शेष हैं. माननीय मंत्री से मैं जानना चाहता हॅूं कि इन्‍हें कब तक बदल दिया जाएगा ? खराब एवं बंद पडे़ हुए मीटरों के कारण जो एवरेज बिल रहवासियों को दिए जा रहे हैं वह मनमाने तरीके से बिल आ रहे हैं तो क्‍या माननीय मंत्री जी रहवासियों को इसमें रियायत देने के लिए कुछ व्‍यवस्‍था करेंगे ? साथ ही कॉलोनाइजरों द्वारा अस्‍थाई रूप से दो वर्ष के लिए जो कनेक्‍शन लिए जाते हैं येन-केन-प्रकारेण उनको 8-8, 10-10 वर्षों तक स्‍थाई नहीं करवाया जाता है. कॉलोनाइजर रहवासियों से पैसा तो वसूल कर लेते हैं लेकिन उनको स्‍थाई कनेक्‍शन उपलब्‍ध नहीं करवाते हैं. इस बीच वे काम पूरा करके भाग जाते हैं. इस कारण से रहवासियों के ऊपर दोहरी मार पड़ती है. उनको अस्‍थाई कनेक्‍शन लेना पड़ता है, अधिक बिल देना पड़ता है. कॉलोनाइजर रहवासियों को कनेक्‍शन नहीं देते हैं. विभाग को भी पैसा जमा नहीं करते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- यह प्रश्‍न तो कर दिया आपने. कृपया आप अपना दूसरा प्रश्‍न और कर दीजिए.

श्री राजेश सोनकर -- जी. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो कॉलोनाइजर रहवासियों के साथ भी धोखाधड़ी कर रहे हैं और विभाग के साथ भी धोखाधड़ी कर रहे हैं, माननीय मंत्री जी क्‍या उनके ऊपर कार्यवाही करने के लिए कोई नियम बनाएंगे ?

श्री पारस चन्द्र जैन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जो खराब मीटर की बात सदस्य ने कही है वह वर्ष 2017 तक बदल दिये जाएंगे. दूसरी बात जो कॉलोनाइजर की इन्होंने कही है, जो कॉलोनी है वह कॉलोनाइजर को खुद को डेवलप करना पड़ती है.हम तो कनेक्शन करते हैं. इसका नियम है हम 10 दिन में कनेक्शन कर देते हैं. कॉलोनाइजर यदि उनको कम्पलीट कर दे तो हम कनेक्शन देने को तैयार है.

श्री राजेश सोनकर-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा कहना है कॉलोनाइजर रहवासियों से तो पैसा ले लेते हैं लेकिन विभाग को पैसा जमा नहीं करते हैं. इस तरह से वह रहवासियों और विभाग दोनों के साथ धोखा-धड़ी करते हैं तो ऐसे कॉलोनाइजर्स पर कार्यवाही करने के लिए कोई नियम मंत्री जी बनाएंगे? दूसरी बात खराब मीटरों के कारण जो अत्यधिक पैसा रहवासियों को देना पड़ रहा है उसके लिए रहवासियों को रियायत देने की व्यवस्था करेंगे ?

श्री पारस चन्द्र जैन-- माननीय अध्यक्ष महोदय,यदि सदस्य कोई विशेष कॉलोनी की बात करते हैं तो हम उस समस्या की जाँच करवा लेंगे उसको दिखवा लेंगे.

श्री राजेश सोनकर-- अध्यक्ष महोदय, मेरी विधानसभा में लगभग 10 से 15 ऐसी कॉलोनियाँ हैं जहाँ पर विद्युत कनेक्शन नहीं दिये गये हैं और रहवासियों से पैसा पूरा वसूल लिया गया है. इस कारण से रहवासियों को अस्थाई कनेक्शन लेना पड़ रहा है. कई जगह तो अवैध कनेक्शन लेना पड़ रहा है. उन पर दोहरी मार पड़ रही है पैसा देने के बाद कनेक्शन भी नहीं मिल रहा है और अस्थाई कनेक्शन के रूप में अधिक राशि उनको देना पड़ रहा है तो उन सभी कालोनी की जाँच करवा लें.

अध्यक्ष महोदय-- आप मंत्री जी को जानकारी दीजिये वह जांच करवा लेंगे.

श्री अनिल फिरोजिया-- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि जो मीटर लगे हुए हैं उसको रीडिंग ना करते हुए सभी जगह एवरेज बिल दिये जा रहे हैं तो क्या मंत्री जी इसकी रीडिंग बढ़वाकर बिल देने की कृपा कराएंगे?

श्री पारस चन्द्र जैन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, जहाँ मीटर लगे हैं वहाँ हम रीडिंग के माध्यम से ही अधिकतर बिल देते हैं और जहाँ नहीं है वहाँ नियामक आयोग के मापदंड के अनुसार ही बिल भेजे जाते हैं.

श्री अनिल फिरोजिया-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी मैं आपको हजारों बिल लाकर दे सकता हूं जो एवरेज बिल दिये जा रहे हैं. गरीब लोग वह एवरेज बिल कहाँ से देंगे जिनका बिल तीन सौ, चार सौ रुपये महीना का आना चाहिए उनके हजार-हजार, पन्द्रह-पन्द्रह सौ रुपये के बिल आ रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- जहाँ मीटर लगे हैं वहाँ देंगे ऐसा वह कह रहे हैं.

श्री अनिल फिरोजिया-- जहाँ मीटर लगे हैं वहाँ पर एवरेज बिल दे रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- आप मंत्री जी को जानकारी में लाइए ताकि वह कार्यवाही कर सकें.

श्री राजेश सोनकर-- फिर भी कोई आश्वासन दे दें कि कोई नियम बनेगा क्या?

श्री पारस चन्द्र जैन--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सभी सदस्यों को बताना चाहता हूं कि समाधान योजना जो बंद कर दी गई थी वह 1 अप्रैल से हम वापस चालू कर रहे हैं. समाधान योजना से जो पहले थी, वह लागू करेंगे तो सबको यदि कोई समस्या है तो उसका समाधान उसमें हो जाएगा इसके साथ ही हमने सलाहकार समिति भी बनाई है और इसमें वहीं के वहीं बैठक होगी. सदन के बाद हम कलेक्टर्स को बुलाएंगे और अधिकारी लोग उनकी समस्या का वही निराकरण करेंगे.

 

 

 

 

 

सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन

[नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा]

2. ( *क्र. 5545 ) श्री रामनिवास रावत : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में वर्तमान में सौर ऊर्जा से कितना विद्युत ऊर्जा का उत्पादन हो रहा है वर्ष 2010 से प्रश्नांकित दिनांक तक किन-किन निजी कम्पनियों से कितनी कितनी क्षमता के सौर ऊर्जा से विद्युत ऊर्जा उत्पादन परियोजनाओं के एम.ओ.यू. कब कब हस्ताक्षरित हुए? इनमें से कौन कौन सी परियोजना में कितना कितना विद्युत उत्पादन हो रहा है? किन-किन परियोजनाओं का निर्माण कार्य जारी है? किन परियोजनाओं का निर्माण किस कारण से अप्रारम्भ है? जिन परियोजनाओं का निर्माण कार्य जारी है, उनमें उत्पादन कब तक प्रारंभ हो जावेगा? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार जिन कंपनियों द्वारा एम.ओ.यू. हस्ताक्षरित किये हैं क्या उनको जमीन शासन द्वारा उपलब्ध कराई है? यदि हाँ, तो कितनी कितनी जमीन, कहाँ कहाँ, किस दर पर? (ग) प्रश्नांश (क) अनुसार जिन परियोजनाओं में विद्युत उत्पादन हो रहा है, उनमें विद्युत उत्पादन की दर प्रति यूनिट क्या है? उक्त विद्युत ऊर्जा उत्पादन इकाईयों द्वारा कितने मिलियन यूनिट विद्युत किस दर पर शासन को विक्रय की गई, निम्न विवरण सहित बतावें कम्पनी का नाम, स्थान, उत्पादन क्षमता (मेगावाट में), विक्रय की गई विद्युत (मिलियन यूनिट में), दर प्रति यूनिट, कुल राशि सहित वर्षवार जानकारी दें?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) प्रदेश में वर्तमान में सौर ऊर्जा से 800 मेगावाट क्षमता का विद्युत उत्‍पादन हो रहा है। वर्ष 2010 से आज दिनांक तक 02 निजी कम्‍पनियों से एम.ओ.यू. हस्‍ताक्षरित किये गये हैं, जिनकी जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। दोनों परियोजनाएं पूर्ण हो चुकी हैं। इन परियोजनाओं से विद्युत उत्‍पादन की जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' में प्रस्‍तुत है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) जी हाँ। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) वांछित जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है।

परिशिष्ट - ''दो''

 

 

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न सौर ऊर्जा से संबंधित है. सौर ऊर्जा का काफी ढोल सरकार पीट रही है. ऊर्जा में कितने एमओयू हस्ताक्षरित हुए और कितनों को जमीन किस रेट पर दी गई? निःशुल्क जमीन दी गई है. यह तो मंत्री जी ने अपने उत्तर में दिया है मैंने तीसरा प्रश्न पूछा है कि जिन परियोजनाओं में विद्युत उत्पादन हो रहा है उनमें विद्युत उत्पादन की दर प्रति यूनिट क्या है. इसमें परिशिष्ट (स) में बताया गया है. इसमें एक कंपनी है, एक्मे कंपनी, इससे 115 करोड़ की बिजली खरीदी है. 115 करोड़ का भुगतान किया गया है. मैं माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि इस एक्मे कंपनी से जो एमओयू सरकार ने हस्ताक्षर किये थे, वह क्या सोलर थर्मल सिस्टम के थे या सोलर प्लेट सिस्टम के थे, कृपया यह बता दें?

श्री पारस चन्द्र जैन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, एमओयू जो हुआ था वह सोलर थर्मल से ही एमओयू हुआ है और हमारे माननीय सदस्य बहुत ही अनुभव वाले सदस्य हैं, मैं उनसे बताना चाहता हूं कि 25 मेगावाट जो 15 रुपये प्रति यूनिट की दर से विद्युत खरीदना था लेकिन हमने बाद में उसको 8 रुपये 5 पैसे में खरीदा है और यह भी स्पष्ट है कि कम रेट में खरीदा और सरकार का कोई नुकसान नहीं होने दिया है. लेकिन उस टाइम हमारी समस्या यह थी कि लाइट खरीदना थी इसलिए उसके ऊँचे भाव आए लेकिन इसके बाद 15 रुपये की जगह उस कंपनी से 8 रुपये और 5 पैसे में हमे एग्रीमेंट किया है.

श्री रामनिवास रावत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यहीं पर तो भ्रष्टाचार हुआ है यहाँ सरकार ने एमओयू हस्ताक्षरित किये, सोलर थर्मल सिस्टम के और उसके बाद उसको परिवर्तित कर दिया सोलर प्लेट सिस्टम में इसमें कम से कम करोड़ों रुपयों का भ्रष्‍टाचार हुआ है. इसको बदलने के लिए जब एक बार फाइल गई तो कुछ अधिकारियों ने, जो नीरज मंडलोई और आशीष उपाध्‍याय थे, इन्‍होंने उस फाइल को निरस्‍त कर दिया कि एम.ओ.यू. को निरस्‍त किया जाता है, यदि लगाए तो सोलर थर्मल सिस्‍टम में लगाएँ और इसके बावजूद कुछ अधिकारियों ने षड्यंत्र करके ऐसा किया है क्‍योंकि सोलर थर्मल सिस्‍टम में लागत ज्‍यादा है और सोलर प्‍लेट सिस्‍टम में लागत कम है. इस एम.ओ.यू. को परिवर्तित करने के संबंध में लोकायुक्‍त में भी प्रकरण कायम हो गया है तो मेरा मंत्री जी से यह कहना है कि इसमें बहुत बड़ा भ्रष्‍टाचार हुआ है, इसकी जाँच आप करा, जाँच तो वैसे लोकायुक्‍त से होगी, जितने भी अधिकारी वहाँ पर बैठे हुए हैं क्‍या उनको आप हटाएंगे और जिस अधिकारी की इसमें प्रमुख भूमिका रही है, मृदुल खरे, उसने व्‍ही.आर.एस. ले लिया है, क्‍या इसके व्‍ही.आर.एस. की पूरी प्रक्रिया को रोकेंगे क्‍योंकि स्‍पष्‍ट भ्रष्‍टाचार सिद्ध होने के बाद भी वह सारे लाभ अभी प्राप्‍त कर रहा है ?

श्री पारस चन्‍द्र जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने माननीय सदस्‍य को पहले ही बताया है और इसमें नियम के हिसाब से ही कार्यवाही हुई है. यदि इनको कुछ गलत लगता है तो ये कहीं भी चले जाए, कोर्ट में चले जाए, उसकी जाँच हो जाएगी.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, हम कोर्ट में चले जाए, सरकार सोती रहती है. एम.ओ.यू. सोलर थर्मल सिस्‍टम हेतु किया और इसे आपने परिवर्तित कर सोलर प्‍लेट सिस्‍टम में कर दिया. कुछ भी करते रहें, क्‍या आप कुछ भी करोगे ? अध्‍यक्ष महोदय, इसमें बहुत बड़ा भ्रष्‍टाचार हुआ है और चिंता की जानी चाहिए. मंत्री जी कह रहे हैं कोर्ट में जाओ, तुम भ्रष्‍टाचार करो और हम कोर्ट में जाएँ.

अध्‍यक्ष महोदय -- आप कुछ प्रश्‍न तो करिए.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न मैंने पहले ही कर दिया है कि क्‍या वहाँ पर बैठे हुए समस्‍त अधिकारियों को हटाकर जाँच कराएंगे ? या सदन के सदस्‍यों की समिति बनाकर क्‍या इसकी जाँच कराएंगे ? इसमें 5 से 10 करोड़ रुपये का भ्रष्‍टाचार है. आपके ही अधिकारियों ने एम.ओ.यू. निरस्‍त किया है.

श्री बाबूलाल गौर -- अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या सरकार कोर्ट में जाएगी, अपने ही अधिकारियों के खिलाफ.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने ऐसा कब कहा ?

श्री बाबूलाल गौर -- अध्‍यक्ष महोदय, अभी इन्‍होंने कहा कोर्ट में जाइये.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, मंत्री जी कह रहे हैं कि आप कोर्ट में जाओ, हमें कुछ नहीं करना, हम तो भ्रष्‍टाचार करेंगे, करवाएंगे, संरक्षण देंगे.

श्री पारस चन्‍द्र जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं स्‍पष्‍ट करना चाहता हूँ कि कोई भ्रष्‍टाचार नहीं हुआ है. यदि यही कह रहे हैं कि लोकायुक्‍त में जाँच चल रही है तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा, इसमें क्‍या है.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, पानी का पानी तो तब हो जाएगा जब भ्रष्‍टाचार करने वाले, एम.ओ.यू. को बदलने वाले अधिकारियों को हटा दें, क्‍योंकि वे वहीं के वहीं बैठे हैं. उन अधिकारियों को हटाने की बात करो, आप हटाओगे तभी तो लोकायुक्‍त में पूरे पेपर स्‍पष्‍ट रूप से पहुँच पाएंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- आपका प्रश्‍न हो गया, आपकी बात आ गई, वे एग्री नहीं हैं.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, वे एग्री नहीं हैं तो इसका मतलब वे यह स्‍वीकार कर रहे हैं कि हम भ्रष्‍टाचार को संरक्षण देंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- ये उन्‍होंने कहाँ स्‍वीकार किया ?

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, और क्‍या है.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, रामनिवास जी अभी तक आपको समझ में नहीं आया कि सरकार किसको संरक्षण दे रही है ? ये भ्रष्‍टाचार को संरक्षण देगी और देती रहेगी. हम लोग सिर्फ अपनी बात उठा लें, बस.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा उत्‍तर नहीं आया.

अध्‍यक्ष महोदय -- मंत्री जी, एक बार और बोल दीजिए, जो रामनिवास रावत जी कह रहे हैं उसका उत्‍तर स्‍पष्‍ट और सपाट दे दीजिए. उनका प्रश्‍न सीधा यह है कि क्‍या अधिकारियों को हटाएंगे ? आप हाँ या ना में उत्‍तर दे दीजिए.

श्री पारस चन्‍द्र जैन -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा कहना है कि यदि प्रकरण लोकायुक्‍त में है तो उसकी जाँच हो जाएगी, उसमें क्‍या दिक्‍कत है.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, एम.ओ.यू. में सरकार ने हस्‍ताक्षर किए और अधिकारियों ने बदल दिया, ऐसा क्‍यों हुआ ? लोकायुक्‍त हैं नहीं, किससे जाँच होगी ?

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारी आपसे विनम्र प्रार्थना है, हालाँकि मैं आप पर कोई आक्षेप नहीं लगा रहा हूँ, लेकिन माननीय, आप हम लोगों के संरक्षणदाता हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, उत्‍तर आ गया है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपसे इसलिए कह रहा हूँ कि अगर मंत्री गलत उत्‍तर देते हैं, मनमानी करते हैं तो आपका भी डंडा रखा हुआ है उसको चलना चाहिए. जब रोहाणी जी थे, मंत्री अगर गलत जवाब देते थे तो वे उनको निर्देशित कर देते थे.

अध्‍यक्ष महोदय -- देखिए, यह बहस का विषय नहीं है. वैसे तो गलत जवाब की भी प्रक्रिया है, किंतु आप कह रहे हैं कि गलत है और वे कह रहे हैं कि सही है, फिर ?

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, आप स्‍वीकार कर रहे हैं कि अधिकारियों ने बदल दिए तो उनके ऊपर कार्यवाही होनी चाहिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- ये उन्‍होंने कहाँ कहा, उन्‍होंने यह बोला कि उसमें कंडीशन में चेंज हो गया है, किंतु जो इन्‍होंने आरोप लगाया उस पर वे सहमत कहाँ हो रहे हैं ?

श्री रामनिवास रावत -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एम.ओ.यू. में चेंज हुआ है, बिल्‍कुल उन्‍होंने शर्तें ही चेंज कर दी. एम.ओ.यू. की जो कंडीशन थी उसे चेंज कर दिया, एम.ओ.यू. सरकार ने किया और बदले अधिकारियों ने और मंत्री जी कह रहे हैं कि आप कोर्ट में जाओ, हमें जो करना है, करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय -- असल में आपका कोई सीधा प्रश्‍न नहीं है, प्‍वॉइन्‍टेड प्रश्‍न नहीं है.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, प्रश्‍न सीधा है कि क्‍या इसकी जाँच कराएंगे? इसमें भ्रष्‍टाचार हुआ है, या क्‍या सदन के सदस्‍यों की समिति बनाकर जाँच करवाएंगे और जिस अधिकारी ने एम.यू.ओ. में चेंज किया है क्‍या उसके खिलाफ कार्यवाही करेंगे ?

श्री पारस चन्‍द्र जैन -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍पष्‍ट है कि 15 रुपये की जगह 8 रुपये में खरीदी की गई है, कोई जाँच की आवश्‍यकता नहीं है.

 

प्रश्न संख्या - 3 - (अनुपस्थित)

लोअर गोई, इंदिरा सागर परियोजना में कार्यरत श्रमिक

[नर्मदा घाटी विकास]

4. ( *क्र. 7102 ) श्री बाला बच्‍चन : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्र.क्र. 1381 दिनांक 23.02.2017 के (ख) उत्‍तर में वर्णित लोअर गोई परियोजना में निर्माणकर्ता कंपनी द्वारा कर्मचारियों/श्रमिकों के पी.एफ. कटौत्री का अंशदान करना माना है? अत: इन कर्मचारियों/श्रमिकों के नाम, पी.एफ. नंबर, इनका अंशदान, नियोक्‍ता अंशदान की जानकारी माहवार देवें विगत 3 वर्षों का कंपनी का सेलरी स्‍टेटमेंट भी देवें (ख) बड़वानी जिले में इंदिरा सागर परियोजना में कार्यरत श्रमिकों/कर्मचारियों के नाम, उनके पी.एफ. नंबर, इनका अंशदान, नियोक्‍ता अंशदान की जानकारी माहवार विगत 3 वर्षों की देवें? विगत 3 वर्ष का कंपनी का सेलरी स्‍टेटमेंट भी देवें?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) एवं (ख) जी हाँ। जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है।

श्री बाला बच्‍चन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने यह प्रश्‍न दूसरी बार लगाया है. मेरा प्रश्‍न क्रं-1381, दिनांक-23 फरवरी, 2017 को भी था. उस प्रश्‍न का सरकार जवाब नहीं दे पाई थी, इस कारण से मुझे प्रश्‍न रिपीट करना पड़ा है. मेरे बड़वानी जिले में लोअर गोई परियोजना का काम चल रहा है और उसके बाद बड़वानी जिले में ही इंदिरा सागर परियोजना की नहरों का काम भी चल रहा है तो मैंने प्रश्‍न में यह पूछा था कि इन परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों और श्रमिकों का समय पर पी.एफ. जमा होता रहे, लेकिन सरकार ने जवाब नहीं दिया था, इस कारण फिर से मैंने यह प्रश्‍न पूछा है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बात यह है कि लोअर गोई परियोजना की नहरों का काम बहुत धीमा चल रहा है, उससे संबंधित मैंने बात पूछी थी और तीसरी बात यह है कि इंदिरा सागर परियोजना का पानी किसानों को पिछले साल 31 मार्च तक दिया गया था, उस उम्‍मीद में लोगों ने मक्‍का की बोवनी कर ली है और अब उस नहर का पानी छोड़ना बंद कर दिया है और कई लोगों की हजारों हेक्‍टेयर जमीन की फसल खत्‍म होने जा रही है. मेरे यह तीन प्रश्‍न का जवाब मैं माननीय मंत्री जी से चाहता हूं, लेकिन मंत्री जी यहां पर दिख नहीं रहे है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न के जवाब कौन देंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय - श्री विश्‍वास सारंग जी जवाब देंगे.

श्री बाला बच्‍चन- माननीय मंत्री जी मैंने तीन प्रश्‍न किये हैं. आप उन तीनों प्रश्‍नों का जवाब देंगे तो मैं समझता हूं कि किसानों, कर्मचारियों और जो श्रमिक हैं उनको भी इससे राहत मिलेगी.

राज्‍यमंत्री, सहकारिता (श्री विश्‍वास सारंग) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा माननीय श्री बाला बच्‍चन जी ने बताया है कि इन्‍होंने इसी सत्र में 23/02/2017 को प्रश्‍न लगाया था, उसमें उनको विभाग ने जानकारी उपलब्‍ध करा दी है. पूरे एक-एक कर्मचारी का क्‍या पी.एफ. कट रहा है और कितना पी.एफ. कटा है, इसकी जानकारी उपलब्‍ध करा दी है. मैं श्री बाला बच्‍चन जी को आपके माध्‍यम से यह भी बताना चाहता हूं कि इसमें कहीं कोई गड़बड़ नहीं है, जितनी उनको पात्रता थी उतना उनका पी.एफ. कटा है, समय से कटा है और उनको पी.एफ. मिल भी चुका है. हमें इसके निमित्‍त कोई शिकायत भी प्राप्‍त नहीं हुई है.

श्री बाला बच्‍चन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे यह लिस्‍ट अभी मिली है और यह लिस्‍ट बहुत बड़ी है. अगर इसमें कोई कमी है तो क्‍या आप उनके खिलाफ सख्‍ती से पी.एफ. के नियमों का पालन करवायेंगे. दूसरा लोअर गोई बांध के बारे में पांच साल पहले जो पानी मिल जाना चाहिए था लेकिन अभी तक किसानों को लोअर गोई परियोजना का पानी नहीं मिल पा रहा है. मैंने तीसरी बात पूछी कि‍ इंदिरा सागर परियोजना का पानी किसानों को मिलना अभी अत्‍यंत आवश्‍यक था क्‍योंकि उनके द्वारा पानी की उम्‍मीद में मक्‍का और दूसरी अन्‍य फसलें बो दी गई हैं, तो क्‍या आप उनको पानी दिलवायेंगे ? एक पानी के कारण सैकड़ों, हजारों किसानों को दिक्‍कत हो जायेगी. यह दो प्रश्‍न मेरे बचे हैं.

श्री विश्‍वास सारंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा श्री बाला बच्‍चन जी ने कहा है कि पी.एफ. से संबंधित यदि कोई भी शिकायत मिलेगी तो उसका निराकरण करेंगे. वैसे पी.एफ. की कमिश्‍नर के पास अपील होती है यह हमारे विभाग से संबंधित नहीं है, लेकिन फिर भी हमारी एजेंसी है और ठेकेदार हमारे अंडर में काम करते हैं, यदि ऐसी कोई भी बात होगी तो उसको हम पूरा करवा देंगे, मैं इसका आपको विश्‍वास दिलाता हूं. वैसे कहीं कोई गलती नहीं है. दूसरी बात जो लोअर गोई बांध के काम का बताया है तो इस वर्ष के दिसंबर तक यह काम पूर्ण हो जाएगा. तीसरी बात इंदिरा सागर परियोजना की है, तो उसमें लाईनिंग का काम अभी चल रहा है और लाईनिंग का काम जैसे ही पूरा होगा उसके माध्‍यम से समूचित सिंचाई की व्‍यवस्‍था शुरू हो जाएगी.

श्री बाला बच्‍चन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह मेरा आखिरी प्रश्‍न है. पिछले वर्ष 31 मार्च तक इंदिरा सागर परियोजना से पानी रिलीज किया गया था इस उम्‍मीद में किसानों ने बड़ी मात्रा में मक्‍का बो लिया है. एक पानी के कारण हजारों किसानों को दिक्‍कत हो रही है और उनकी फसलें मर जाएगी. सिर्फ एक पानी छुड़वा दें, इतना मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से मांग कर रहा हूं, नहीं तो किसानों के लिये बहुत गलत हो जाएगा. सिर्फ इंदिरा सागर परियोजना से एक पानी छुड़वा दें.

श्री विश्‍वास सारंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैंने बताया है कि लाईनिंग का काम चल रहा है, तकनीकी रूप से देख लेंगे. यदि ऐसा संभव होगा तो करायेंगे. लेकिन मुख्‍य मुद्दा यह है कि लाईनिंग का काम पूरा होते ही निश्चित रूप से हम वहां पर छुड़वाने की व्‍यवस्‍था करेंगे.

श्री बाला बच्‍चन- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जहां तक हो सकता है, वहां तक तो आप छुड़वा दें. माननीय मंत्री जी सब जगह तो काम नहीं चल रहा है.

अध्‍यक्ष महोदय - वह परीक्षण कर रहे हैं, आप पूछ लीजिए.

श्री विश्‍वास सारंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जैसा बताया है कि चूंकि तकनीकी मामला है इसलिए परीक्षण करा लेंगे और जो भी स्थिति बनेगी और जो भी किसानों के हित में होगा वह कराया जायेगा.

अध्‍यक्ष महोदय - श्री सचिन यादव जी, आप संक्षेप में और प्‍वाइंटेड बोलें.

श्री सचिन यादव - अध्यक्ष महोदय, इसी से जुड़ा हुआ मेरा प्रश्न है, इंदिरा सागर परियोजना और ओंकारेश्वर परियोजना, इसमें जब भी पानी छोड़ने की बात आती है तो कहीं न कहीं तालमेल की कमी है और जो अधिकारी हैं वे समय पर सूचना नहीं दे पाते हैं. जैसे अभी माननीय श्री बाला बच्चन जी ने बताया कि मक्के की बोनी हो गई, लेकिन जब पानी देने का समय आया तो नहरों को बंद कर दिया. ऐसी स्थिति हमारे ओंकारेश्वर में भी हुई थी. क्या माननीय मंत्री जी जो अधिकारी जमीनी स्तर पर हैं, उनको यह निर्देशित करेंगे और कोई एक ऐसा प्रोग्राम बनाने के लिए उनको निर्देश देंगे ताकि ऐसी समस्याएं बार-बार उत्पन्न न हों?

श्री विश्वास सारंग - अध्यक्ष महोदय, वैसे श्री सचिन जी ने जो प्रश्न किया है, वह इससे उद्भूत नहीं होता है. परन्तु मैं सदन को यह बताना चाहता हूं कि यह भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में एक-एक किसान तक हमने पानी पहुंचाने की व्यवस्था की है और हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं, एक-एक किसान को पानी मिलेगा, इसीलिए 4-4 बार कृषि कर्मण अवार्ड हमें मिले हैं.

श्री सचिन यादव - अध्यक्ष महोदय, मैं कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं.

अध्यक्ष महोदय - उन्होंने कोई पाइंटेड प्रश्न पूछा हो? वैसे उन्होंने पाइंटेड प्रश्न पूछा नहीं है.

श्री विश्वास सारंग - अध्यक्ष महोदय, अवश्य मई तक पानी छोड़ दिया जाता है और जब तक यदि कहीं काम होता है या लाइनिंग का काम है, वहां दिक्कत आती है. परन्तु मैं सुनिश्चित करता हूं, इसकी पूरी कार्य योजना बनी है और इसीलिए खेतों में लहलहाती फसल दिख रही है सचिन भाई.

श्री सचिन यादव - अध्यक्ष महोदय, समय पर पानी पहुंच जाय.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - अध्यक्ष महोदय, जो आदरणीय श्री बाला बच्चन जी ने बात रखी है. आप कह रहे हैं कि लाइनिंग की वजह से पानी नहीं छोड़ा जा सकता है. वहां पर जब किसानों ने अपनी फसल बोई थी, यह उम्मीद से बोयी थी कि पानी मिल जाएगा. हम लोग चाहते हैं कि आदरणीय श्री शिवराज सिंह चौहान जी फिर से कृषि कर्मण अवार्ड पाएं और वे खेत लहलहाते हुए दिखाई दें. इस वर्ष जब किसानों ने बोया है तो कोई न कोई विभाग के अधिकारियों के विश्वास के साथ बोया होगा कि पानी मिलेगा. एक पानी देने में क्या दिक्कत पड़ी हुई है? वहां पर लोगों ने धरने पर बैठना शुरू कर दिया है.

अध्यक्ष महोदय - उसका परीक्षण करवा रहे हैं.

श्री विश्वास सारंग - अध्यक्ष महोदय, जैसा नेता प्रतिपक्ष जी ने कहा तो मैंने पहले भी निवेदन किया है कि उसका परीक्षण करवा लेंगे. जैसी जो भी सबसे सकारात्मक स्थिति बनेगी, उसका पालन किया जाएगा.

श्री सचिन यादव - अध्यक्ष महोदय, मेरा छोटा-सा निवेदन है कि अगर पानी नहीं दे सकते हैं तो पूर्व में उसकी घोषणा कर दें, किसान फसल बो देते हैं और बीच में ये लोग पानी बंद कर देते हैं?

नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग के दायित्‍व

[नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा]

5. ( *क्र. 6564 ) श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा जनहित में क्‍या-क्‍या कार्य किये जाने के क्‍या प्रावधान हैं व कार्यों को मूर्त रूप देने हेतु विभाग द्वारा क्‍या मार्गदर्शिका अपनाई जाती है व उसके कार्यान्‍वयन हेतु क्‍या निर्देश/आदेश प्रचलन में हैं, की प्रति सहित जानकारी दी जाये। (ख) प्रश्नांश (क) के परिप्रेक्ष्‍य में विगत तीन वर्ष में कितनी राशि जिला मुरैना को प्राप्‍त हुई व उक्‍त राशि से क्‍या-क्‍या कार्य किये गये। (ग) क्‍या प्रदाय राशि में से माननीय विधायकों को अपने विधानसभा क्षेत्रों में अनुशंसा सहित प्रस्‍ताव भेजने की पात्रता है व इस हेतु क्‍या नियम हैं? (घ) विधानसभा क्षेत्र-07 दिमनी जिला मुरैना में विगत तीन वर्ष में कितने कार्य जनहित में किये गये, विवरण दिया जावे? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग द्वारा जनहित में किए जाने वाले कार्य एवं उन कार्यों के संबंध में आवश्‍यक प्रावधान की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट के प्रपत्र '''' एवं '''' अनुसार है। निर्देश-आदेश की प्रतियाँ पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ख) पृथक से कोई राशि जिलों को नहीं दी जाती है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। हितग्राही अंश एवं केन्‍द्र/राज्‍य शासन के अनुदान पर आधारित योजनाओं पर विगत तीन वर्षों में मुरैना जिले में किये गये कार्यों की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '''' अनुसार है। (ग) जी हाँ। तथापि प्रस्‍तावित कार्यों हेतु हितग्राही अंश की आवश्‍यकता होगी व उक्‍त की उपलब्‍धता पर कार्य कराए जा सकेंगे। (घ) विधानसभा क्षेत्र दिमनी, जिला मुरैना में विगत 3 वर्षों में पेयजल हेतु निम्‍नानुसार सोलर पम्‍प की स्‍थापना का कार्य किया गया है :- 1. ग्राम-दलजीत का पुरा, 2. ग्राम-मलवसई, 3. शासकीय अनुसूचित जाति कन्‍या आश्रम नवाली, 4. शासकीय अनुसूचित जाति कन्‍या आश्रम दिमनी। इसके अतिरिक्‍त 224 नग एल.ई.डी. बल्‍ब का विक्रय किया गया है।

श्री बलवीर सिंह डण्डौतिया - अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि प्रश्न में था कि क्रय बल्बों की जानकारी प्रस्तुत की जावे तो भविष्य में जो भी विभाग द्वारा कार्य कराए जाएं, मेरी विधानसभा की जानकारी मुझे दी जाय. मैंने जो प्रस्ताव भेजे हैं, उसकी जानकारी दी जाय. आपने बताया कि 224 बल्ब दिये हैं तो वह कौन-कौन से गांवों में दिये हैं उन गांवों के मुझे नाम बताए जाएं? उनका पता बताया जाए कि वास्तव में दिये हैं या भ्रष्टाचार कर बेच दिये हैं?

अध्यक्ष महोदय - एक तो उनकी बात यह है कि जो उनके क्षेत्र में नवकरणीय ऊर्जा के माध्यम से कार्य किये हैं, उसकी जानकारी उनको हो. दूसरा, उनके प्रस्तावों को तवज्जो दी जाय और तीसरा, आपका क्या कहना है?

श्री बलवीर सिंह डण्डौतिया - अध्यक्ष महोदय, मेरा एक प्रश्न और है कि मेरी विधान सभा में जिन गांवों में डीपी नहीं रखी गई है, लाइन नहीं खींची है, लेकिन वहां 3-3 साल के बिल आ रहे हैं?

अध्यक्ष महोदय - उसका उत्तर पहले ले लीजिए, डीपी का प्रश्न इसमें नहीं है.

श्री बलवीर सिंह डण्डौतिया - अध्यक्ष महोदय, इन कामों को कब तक करा लिया जाएगा और जो मजरे-टोले छूट गये हैं, और कई गांव भी छूट गये हैं, पंचायतें भी छूट गई हैं, इनको कब तक पूरा करा लिया जाएगा, यह मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं?

अध्यक्ष महोदय - यह प्रश्न से उद्भूत नहीं होता है.

श्री पारस चन्द्र जैन - अध्यक्ष महोदय, नवकरणीय ऊर्जा की तरफ से 8 योजनाएं चल रही हैं. दूसरा यह है कि यदि इसको वे कराना चाहते हैं तो अपना अंशदान देंगे. अभी प्रदेश में हमारे मुख्यमंत्री जी की एक और योजना चालू हुई है सोलर पंप, 3 एचपी पर 90 प्रतिशत सब्सिडी है और 5 एचपी पर 80 प्रतिशत की सब्सिडी हम दे रहे हैं, यह अभी हमारे टेण्डर हो गये हैं और इससे बहुत सारे मजरे टोलों में नवकरणीय ऊर्जा के माध्यम से काम हो जाएंगे.

श्री बलवीर सिंह डण्डौतिया - अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी, मैं पहले भी दो बार विधान सभा में प्रश्न लगा चुका है, आपको कह चुका हूं, लिखकर दे चुका हूं कि जो गांव रह गये हैं, लेकिन फिर भी उनके बिल आ रहे हैं और जिनमें लाइट नहीं लगी है, डीपी रखी नहीं गई है और उनके 3-3 साल से बिल आ रहे हैं, उनको देखा जाय?

अध्यक्ष महोदय - यह प्रश्न उद्भूत नहीं होता है.

श्री पारस चन्द्र जैन - अध्यक्ष महोदय, फिर भी यह लिखकर दे देंगे तो हम उसको दिखवा लेंगे.

अध्यक्ष महोदय - आप लिखकर दे दीजिए, वे निराकरण करेंगे.

श्री बलवीर सिंह डण्डौतिया - अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद.


 

श्री रामनिवास रावत--जो माननीय सदस्य ने कहा है कि पूरे प्रदेश के कई गांवों की यह स्थिति है. वहां लाईट है नहीं, लाईट लगी नहीं है. आवेदन भेज रहे हैं, उनको लाईट के बिल भेज रहे हैं लाईट पहुंच नहीं रही है.

अध्यक्ष महोदय--आप बैठ जाएं. प्रश्न क्रमांक 6 कुँवर सौरभ सिंह अपना प्रश्न पूछें.

प्राचीन मंदिरों का पर्यटन के रूप में विकास

[पर्यटन]

6. ( *क्र. 6149 ) कुँवर सौरभ सिंह : क्या राज्‍यमंत्री, संस्कृति महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रदेश में शासन द्वारा प्राचीन मंदिरों एवं दर्शनीय स्‍थलों को पर्यटन के रूप में विकसित किये जाने का प्रावधान है? (ख) प्रश्नांश (क) यदि हाँ, तो कटनी जिले की विधानसभा क्षेत्र बहोरीबंद के अंतर्गत ग्राम बांधा में राधाकृष्‍ण मंदिर, ग्राम मुहास में हनुमान मंदिर, ग्राम बिलहरी में गयाकुण्‍ड स्‍थान एवं पुष्‍पावती नगरी, ग्राम तिगवां एवं बड़गांव में प्राचीन शिलालेख है, क्‍या इन्‍हें पर्यटन के रूप में विकसित किया जावेगा? यदि हाँ, तो कब तक और यदि नहीं, तो क्‍यों? (ग) प्रश्‍नकर्ता सदस्‍य के पत्र क्रमांक 1960, दिनांक 19.01.2017 पर क्‍या कार्यवाही की गई? तिथिवार, कार्यवाहीवार विवरण दें।

राज्‍यमंत्री, संस्कृति ( श्री सुरेन्द्र पटवा ) : (क) जी नहीं। स्‍थल विशेष को पर्यटन के रूप में विकसित किये जाने का प्रावधान नहीं है। (ख) प्रश्‍नांश () के परिप्रेक्ष्‍य में प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

(ग)

कुँवर सौरभ सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, आपके माध्यम से मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि उनको मेरा पत्र मिल गया है. प्रश्न में संशोधन भी आ गया है. मंत्री जी से मेरा यही निवेदन है कि मेरी विधान सभा के कटनी जिले में अंगराज कर्ण की पुरानी राजधानी थी पुष्पावती के नाम से, झिंझरी में शेल चित्र के लेख हैं. मेरा निवेदन है कि माननीय मंत्री जी एक दल बनाकर के कटनी में वहां पर पर्यटन की दृष्टि से जांच कराएंगे, इसमें काफी प्रॉसप्रेक्टिव हैं ?

श्री सुरेन्द्र पटवा--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य का पत्र प्राप्त हुआ है. आज जो प्रश्न पूछा गया है उसमें तीन स्थान एएसआई के अंतर्गत आते हैं. बाकी जो तीन स्थान हैं पुरातत्व में नहीं आते हैं. स्थानीय धार्मिक स्थल है, वहां पर आवश्यकतानुसार पर्यटन की दृष्टि से कुछ सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता होगी तो परीक्षण करके सुविधाएं वहां पर उपलब्ध करा दी जाएंगी.

कुँवर सौरभ सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी बात से सहमत हूं. मैं कहना चाहता हूं कि वहां पर प्रॉसप्रेक्टिव बहुत हैं एएसआई ने स्थान लिया है अंगराज कर्ण की पुष्पावती नगरी है वहां पर बहुत सी पुरानी मूर्तियां लगातार खुदाई में निकल रही हैं. जैसा खजुराहो है वहां वैसा डेस्टीनेशन पुरातत्व के हिसाब से बन सकता है. पर्यटन की दृष्टि से आप कटनी जिले को देखेंगे तो आपको इसका लाभ मिलेगा ?

श्री सुरेन्द्र पटवा--अध्यक्ष महोदय ठीक है.

नरसिंहपुर विधानसभा क्षेत्रान्‍तर्गत संचालित आगंनवाड़ी केन्‍द्र

[महिला एवं बाल विकास]

7. ( *क्र. 6966 ) श्री जालम सिंह पटेल : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) नरसिंहपुर विधानसभा क्षेत्रांतर्गत कौन-कौन से ग्रामों में आंगनवाड़ी केंन्द्र नहीं हैं? (ख) क्या ऐसे ग्रामों में आंगनवाड़ी केन्द्र प्रारंभ करने हेतु कार्यवाही की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक? (ग) कितने आंगनवाड़ी केन्द्रों के भवन हैं एवं कितने किराये के भवनों में संचालित हैं? (घ) क्या भवन विहिन आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिए भवन की व्यवस्था की जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) नरसिंहपुर विधानसभा क्षेत्र अन्तर्गत बाल विकास परियोजना नरसिंहपुर के 01 ग्राम तथा बाल विकास परियोजना करेली के 27 ग्रामों में आंगनवाड़ी केन्द्र नहीं है। जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) भारत सरकार द्वारा जनसंख्या के निर्धारित मापदण्डों की पूर्ति होने पर नवीन आंगनवाड़ी केन्द्र/मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र खोले जाने की स्वीकृति दी जाती है। नरसिहंपुर विधानसभा क्षेत्र के उक्त 28 ग्रामों में निर्धारित मापदण्ड अनुसार जनसंख्या न होने के कारण आंगनवाड़ी केन्द्र खोला जाना प्रस्तावित नहीं है। (ग) नरसिंहपुर विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत 70 आंगनवाड़ी केन्द्र विभागीय भवन में, 120 आंगनवाड़ी केन्द्र अन्य शासकीय विभाग भवन में तथा 64 आंगनवाड़ी केन्द्र किराये के भवन में संचालित हैं। (घ) भवन विहीन 184 आंगनवाड़ी केन्द्रों में से 16 आंगनवाड़ी केन्द्रों हेतु भवन निर्माण की स्वीकृति शासन से प्राप्त हो गई। आंगनवाड़ी भवनों के निर्माण की स्वीकृति वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करती है, अतः समय-सीमा दिया जाना संभव नहीं है।

परिशिष्ट - ''तीन''

श्री जालम सिंह पटेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के उत्तर में मंत्री जी के द्वारा अधूरी जानकारी दी गई है. मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि जिन्होंने अधूरी जानकारी दी उन संबंधित अधिकारियों के ऊपर कार्यवाही करेंगे ? नरसिंहपुर ब्लॉक है उसमें लगभग 28 ऐसे गांव हैं, मजरे टोले हैं जिसमें आंगनवाड़ी केन्द्र नहीं है इसमें जानकारी सिर्फ एक ही दी गई है. करेली में 27 जगहों की जानकारी दी गई है. मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि माननीय मुख्यमंत्री जी की मंशा है कि बच्चों में कुपोषण संबंधी कई प्रकार की बीमारियां रहती हैं. यह दिक्कत आंगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से ही दूर हो सकती है. मंत्री जी का जवाब है कि जनसंख्या न होने के कारण आंगनवाड़ी केन्द्र नहीं खोले गये. जो लिस्ट में नाम आये हैं उसमें अधिकांश स्थान पर अनुसूचित जाति, जनजाति व कमजोर वर्ग के लोग हैं, मगर जनसंख्या में कम हैं. मैं मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि जिन्होंने अधूरी जानकारी दी है उन पर कार्यवाही होगी ? जैसे माननीय प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी ने नियम बनाया था कि प्रधानमंत्री सड़क अनुसूचित जनजाति के गांव के लिहाज से कम कर दी थी वहां ढाई सौ तक की आबादी तक सड़क बनायी गई. इसी प्रकार से आपके माध्यम से निवेदन करना चाहता हूं कि उन पर कार्यवाही करेंगे क्या ?

श्रीमती अर्चना चिटनिस--माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा कि माननीय सदस्य जी चाहते हैं जहां पर आंगनवाड़ी नहीं है उन गांवों में आंगनवाड़ी खुल जाए. मैंने जनसंख्या का मापदण्ड क्या है उसके बारे में कहा है. फिर भी इस पर बात करके कोई प्रोवीजन किया जा सकता है, उस पर विचार कर लेंगे.

श्री जालम सिंह पटेल--अध्यक्ष महोदय, नरसिंहपुर ब्लॉक के बारे में आपको गलत जानकारी दी गई है उसमें पंचायतों के नाम पढ़ सकता हूं.

अध्यक्ष महोदय--आप पंचायतों के नाम मत पढ़िये. आप तो बता दीजिये कि क्या गलत जानकारी दी है.

श्री जालम सिंह पटेल--अध्यक्ष महोदय, 28 जगहों के बारे में जानकारी नहीं दी. लिख दिया वहां आंगनवाड़ी केन्द्र नहीं है.

श्रीमती अर्चना चिटनिस--माननीय अध्यक्ष महोदय, जानकारी गलत दी गई है तो उसका परीक्षण कराकर संबंधितों पर कार्यवाही कर देंगे.

अध्यक्ष महोदय--ऐसे कितने केन्द्र हैं कि जहां पर लिख दिया है और वहां पर आंगनवाड़ी केन्द्र हैं ही नहीं.

श्री जालम सिंह पटेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, वहां पर केन्द्र ही नहीं है.

अध्यक्ष महोदय--आप मंत्री जी को लिखकर के दे दीजिये.

श्रीमती अर्चना चिटनिस--माननीय अध्यक्ष महोदय, जानकारी संख्या के हिसाब से दी है गांवों के हिसाब से दी भी नहीं है. संख्यात्मक दी है कि इतनी जगह पर है और इतनी जगह पर नहीं है.

श्री जालम सिंह पटेल--माननीय अध्यक्ष महोदय, करेली ब्लाक में गांव के नाम भी दिये हैं कि इसमें आंगनवाड़ी केन्द्र नहीं हैं, लेकिन नरसिंहपुर ब्लॉक में सिर्फ एक गांव का नाम दिया है. बाकी 28 जगहों के नाम ही नहीं दिये हैं.

अध्यक्ष महोदय--जो इसमें कमियां हैं उसके बारे में मंत्री जी को लिखकर के दीजिये उसका परीक्षण कराएंगी.

श्रीमती अर्चना चिटनीस-- अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से एक जानकारी देना चाहती हूं. बजट अनुदानों पर चर्चा के समय हम लोगों को बात करने का अवसर नहीं मिल पाया था, कि जहां मजरे-टोले हैं,दूरस्थ हैं, छोटे गांव हैं वहां रहवासी हैं, बच्चे रहते हैं वहां पर मोबाइल आंगनबाड़ी कॉन्सेप्ट पर भी विभाग विचार कर रहा है.

श्री संजय शर्मा-- अध्यक्ष महोदय, गलत जानकारियां बहुत दी जा रही है. स्वास्थ्य विभाग ने मेरे तेंदूखेड़ा विधान सभा की जगह दमोह जिले की जानकारी दे दी है.

अध्यक्ष महोदय-- यह प्रश्न उद्भूत नहीं होता. आप उसको प्रश्न संदर्भ समिति को दे दीजिए.

श्री संजय शर्मा-- अध्यक्ष महोदय, सही जानकारी दें.

विद्युत का उत्‍पादन

[ऊर्जा]

8. ( *क्र. 7145 ) चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा विगत 10 वर्षों में अशासकीय/निजी संस्‍थाओं (केप्टिव, गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्‍त्रोतों को छोड़कर) से कितने विद्युत क्रय अनुबंध (पी.पी.ए.) किये गये? वितरण सहित सूची उपलब्‍ध करायें (ख) ऐसे कितने प्‍लांट आज दिनांक तक संचालित हैं और उनसे वर्ष 2012-13 से दिसम्‍बर 2016 तक कितना विद्युत क्रय किया गया है एवं किस दर पर? विवरण सहित सूची उपलब्‍ध करायें (ग) म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड का प्रति वर्ष विद्युत उत्‍पादन तथा उन वर्षों में प्रति इकाई (यूनिट) औसत उत्‍पादन लागत कितनी है? विगत तीन वर्षों (2013-14, 2014-15 एवं 2015-16) की जानकारी दें

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा विगत 10 वर्षों में अशासकीय/निजी संस्‍थाओं (केप्टिव, गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्‍त्रोतों को छोड़कर) से विद्युत क्रय अनुबंध (पी.पी.ए.) की जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ख) संचालित पॉवर प्‍लांट्स एवं वर्ष 2012-13 से दिसंबर 2016 तक विद्युत क्रय एवं दर संबंधी विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र '' अनुसार है। (ग) म.प्र. पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड का वर्ष 2013-14, 2014-15 एवं 2015-16 का प्रति वर्ष विद्युत उत्‍पादन तथा इन वर्षों में प्रति इकाई (यूनिट) औसत उत्‍पादन लागत निम्‍नानुसार है :-

वर्ष

ताप विद्युत उत्‍पादन (मिलियन यूनिट में)

जल विद्युत उत्‍पादन (मिलियन यूनिट में)

प्रति इकाई औसत उत्‍पादन लागत (रू. प्रति यूनिट)

2013-14

16196.4

3673.4

3.32

2014-15

16909.3

2749.8

4.12

2015-16

18601.8

1962.3

4.25

 

चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी--अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से पूछना चाहता हूं कि सरकार ने,विभाग ने निजी उत्पादकों से जो अनुबंध किए हैं, उसमें यह भी किया गया कि अगर हम उनसे बिजली नहीं लेंगे उसके बाद भी उनको पेमेंट करना पड़ेगा?

श्री पारस चन्द्र जैन--अध्यक्ष महोदय, अनुबंध अनुसार जब बिजली खरीदी जाती है और जिससे सस्ती बिजली मिलती है उससे ही हम खरीदते हैं.

चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी--अध्यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्न किया कि बिजली खरीदना बहुत अच्छी बात है. बिजली में निर्भरता होना चाहिए लेकिन क्या ऐसा अनुबंध किया गया कि जिसमें अगर बिजली उनसे नहीं भी लेते हैं तो उसके उपरान्त भी उनको पेमेंट करना पड़ेगा?

श्री पारस चन्द्र जैन--अध्यक्ष महोदय, बिजली खरीदने का प्रश्न है तो समय समय पर हम खरीदते भी रहते हैं और सबसे कम रेट में जब हमको किसी से मिलती है तो उससे खरीदते हैं. इनका कहना है कि जब नहीं खरीदते हैं तब भी पैसा देते हैं क्या? उसमें मेरा कहना है कि शायद ऐसी कोई पाबंदी नहीं है.

चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी--अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से जो पूछना चाह रहा हूं कि क्या ऐसा अनुबंध किया गया है कि हम उनसे उत्पाद ले नहीं उसके उपरान्त भी उनको पेमेंट करना पड़ेगा?

श्री पारस चन्द्र जैन-- अध्यक्ष महोदय, रेग्युलर टैरिफ पर फिक्स चार्ज देना पड़ता है. जिससे हम एग्रीमेंट करते हैं उसको यह फिक्स चार्ज हमको देना पड़ता है.

चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी--अध्यक्ष महोदय, उस समय जो संबंधित अधिकारी थे उन्होंने इस तरह का त्रुटिपूर्ण अनुबंध क्यों किया? क्या उन पर कार्रवाई की जाएगी?

श्री पारस चन्द्र जैन--यह नियामक आयोग का नियम है उसका हमको पालन करना पड़ता है.

चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी--अध्यक्ष महोदय, 25 वर्ष के लिए अनुबंध करना और उसमें यह क्लॉज़ डालना कि हम आपसे उत्पादन नहीं भी लेंगे उसके उपरान्त भी आपको पेमेंट करेंगे तो जिस अधिकारी ने, जिस व्यक्ति ने किया है उसकी कहीं न कहीं मंशा मेनुपुलेटेड लग रही है. क्या इस पर कुछ कार्रवाई होगी?

अध्यक्ष महोदय-- आप नियामक आयोग का बताइये कि इसमें कुछ करेंगे क्या?

श्री पारस चन्द्र जैन-- अध्यक्ष जी, हमने जो अनुबंध किए हैं उस समय की परिस्थिति ऐसी थी कि जब बिजली खरीदना आवश्यक था. आज जरुर यह बात कि हम सरप्लस में हैं लेकिन उस समय यदि ऐसा नहीं करते तो जिन भी उद्योगपति या किसी से अनुबंध किये हैं, वह आते ही नहीं. यदि हमने अनुबंध किया तो नियमानुसार उसका पालन करना है.

चौधरी मुकेश सिंह चतुर्वेदी--अध्यक्ष महोदय, क्या यह अनुबंध 10 वर्ष के लिए नहीं किया जा सकता था? क्या जरुरी था कि 25 वर्ष के लिए अनुबंध किया जाये.

श्री पारस चन्द्र जैन--अध्यक्ष महोदय, उस समय परिस्थितियों के अनुसार किए गए अन्यथा वे आते नहीं.

श्री रामनिवास रावत-- अध्यक्ष महोदय, सरकार बिना बिजली खरीदे पैसे दे रही है. और वह भी 25 साल तक देंगे. किसानों की गाढ़ी कमाई का पैसा वैसे ही देते जाएंगे और किसानों से वसूल करेंगे और अगर पैसा नहीं देते हैं तो जेल भेजते जाएंगे. कितनी गंभीर बात है?


 

श्‍योपुर जिले में फीडर सेपरेशन योजना अंतर्गत किये गये कार्य

[ऊर्जा]

9. ( *क्र. 6450 ) श्री दुर्गालाल विजय : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) श्‍योपुर जिले में फीडर सेपरेशन योजना कब प्रारंभ हुई तब से वर्तमान तक कितने व कौन-कौन से ग्रामों को योजना में शामिल किया गया, में से कौन-कौन से ग्रामों में विद्युतीकरण कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण हुआ? किन-किन ग्रामों में नहीं हुआ तथा क्‍यों? कब तक पूर्ण कराये जावेंगे (ख) उक्‍त में से जिन ग्रामों में विद्युतीकरण कार्य पूर्ण हो चुका है, उनमें घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया गया तथा अब भी कई ग्रामों में खम्‍भे नहीं गड़े, कहीं तार नहीं खिंचे, जहां दोनों कार्य हो गये वहाँ ट्रांसफार्मर नहीं लगे, जहां लगे वहां खराब पड़े हैं, इन्‍हें नहीं बदला जा रहा है, इसका कारण बतावें? (ग) क्‍या उक्‍त योजना के तहत जिले में 527 ग्रामों में विद्युतीकरण कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण होना था, वह नहीं हुआ? वर्तमान तक 166 ग्रामों में ही यह कार्य पूर्ण हो पाया नतीजन जिले के घरेलू एवं कृषि उपभोक्‍ताओं को समस्‍याओं का सामना करना पड़ रहा है एवं वे योजना के लाभ से व‍ंचित बने हुये हैं? (घ) क्‍या शासन पूर्ण हो चुके ग्रामों में विद्युतीकरण कार्यों की गुणवत्‍ता व कार्यों के अपूर्ण रहने के कारणों की जाँच करायेगा तथा शेष अविद्युतीकरण ग्रामों में विद्युतीकरण के कार्य एक निश्चित समय-सीमा में पूर्ण करवायेगा? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) श्‍योपुर जिले में फीडर विभक्तिकरण योजना दिनांक 20.08.2011 से प्रारम्‍भ हुई थी, जिसमें फीडर विभक्तिकरण के कार्य हेतु 527 ग्राम सम्मिलित थे। उक्‍त कार्य टर्न-की आधार पर कराए जाने हेतु अवार्ड ठेकेदार एजेंसी मेसर्स ज्‍योति स्‍ट्रक्‍चर लिमिटेड को जारी किया गया था। उक्‍त ठेकेदार एजेन्‍सी द्वारा 134 ग्रामों के फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किया गया, किन्‍तु निर्धारित समयावधि में कार्य पूर्ण नहीं कर पाने के कारण उसका अवार्ड निरस्‍त कर दिया गया। शेष 393 ग्रामों के फीडर विभक्तिकरण के कार्यों के लिए पुन: निविदा प्रक्रिया उपरांत टर्न-की ठेकेदार एजेन्‍सी मेसर्स विकरान इंजीनियरिंग एण्‍ड एक्जिम प्रा.लि. को अवार्ड जारी किया गया है। वर्तमान तक उक्‍त ठेकेदार एजेन्‍सी द्वारा 102 ग्रामों के फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा 291 ग्रामों का कार्य शेष है। उक्‍तानुसार उक्‍त योजना में शामिल, पूर्ण एवं शेष ग्रामों की सूची पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। उक्‍त शेष ग्रामों के फीडर विभक्तिकरण का कार्य निर्धारित समयावधि नवम्‍बर 2017 तक पूर्ण किया जाना प्रस्‍तावित है। (ख) फीडर विभक्तिकरण योजना में उपयोग की जाने वाली सामग्री की गुणवत्‍ता की जाँच एन.ए.बी.एल. प्रमाणित प्रयोगशाला में कराई जाती है। जाँच में सामग्री निर्धारित मानक स्‍तर के अनुरूप पाए जाने पर ही उपयोग में ली जाती है। उक्‍त योजना में जिन ग्रामों में फीडर विभक्तिकरण के कार्य पूर्ण किये गये हैं, उनमें निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही कार्य किये गये हैं तथा शेष कार्यों हेतु पुन: निविदा प्रक्रिया उपरांत चयनित ठेकेदार एजेन्‍सी को अवार्ड जारी किया गया है। प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में 35 जले/खराब वितरण ट्रांसफार्मर शत-प्रतिशत राशि बकाया होने के कारण नहीं बदले जा सके हैं, जिन्‍हें नियमानुसार बकाया राशि जमा होने के उपरांत बदलने की कार्यवाही की जा सकेगी। (ग) प्रश्‍नाधीन फीडर विभक्तिकरण के कार्य (विद्युतीकरण के नहीं) 527 ग्रामों में किये जाने थे, जिनमें से वर्तमान तक 236 ग्रामों के फीडर विभक्तिकरण का कार्य पूर्ण किया जा चुका है तथा 291 ग्रामों के फीडर विभक्तिकरण का कार्य शेष है, जिसे पूर्ण किये जाने की निर्धारित समयावधि नवम्‍बर, 2017 है तथा प्रश्‍नाधीन सभी ग्रामों में विभक्‍त किये गये/मिश्रित फीडरों के माध्‍यम से कृषि एवं गैर-कृषि उपभोक्‍ताओं को निर्धारित समयावधि हेतु विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। (घ) फीडर विभक्तिकरण योजना में प्रश्‍नाधीन कार्यों की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करने के लिये निरीक्षण हेतु थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेंसी को अनुबंधित किया गया है, जिनके साईट इंजीनियरों द्वारा कार्यों की गुणवत्‍ता सुनिश्चित करते हुए निरीक्षण किया जाता है तथा निरीक्षण उपरांत कार्यों में कमी पाये जाने पर संबंधित ठेकेदार एजेंसी से आवश्‍यक सुधार कार्य कराए जाते हैं। थर्ड पार्टी निरीक्षण एजेन्‍सी द्वारा इंगित त्रुटियों के निराकरण उपरांत ही ठेकेदार एजेन्‍सी के बिलों का भुगतान किया जाता है। अत: कार्यों की गुणवत्‍ता की जाँच कराने की आवश्‍यकता नहीं है। प्रश्‍नाधीन शेष कार्य निर्धारित समयावधि नवम्‍बर 2017 तक पूर्ण कराने के प्रयास किये जायेंगे।

श्री दुर्गालाल विजय - माननीय अध्यक्ष महोदय,मेरा प्रश्न श्योपुर जिले में फीडर विभक्तीकरण के कार्य को लेकर है. दिनांक 20.8.2011 को फीडर विभक्तीकरण का कार्य श्योपुर में प्रारंभ किया गया था और ज्योति कंस्ट्रक्शन कंपनी को इसका अवार्ड दिया गया था. 527 गांवों में यह काम होना था लेकिन आज 6 साल बीत जाने के बाद भी अभी 300 गांवों में यह काम नहीं हो पाया है. अभी बताया गया कि ज्योति कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा काम बंद कर दिया गया, इस कारण दोबारा अवार्ड किया. मैं पूछना चाहता हूं कि यह काम कब बंद हुआ और आपने अवार्ड कब निरस्त किया और दूसरा अवार्ड कब हुआ और जो 134 गांवों का काम पूरा किया गया था वह किस तारीख को पूरा हुआ ? उसके बाद बहुत लंबे समय तक अवार्ड नहीं होना, बीच में गेप हुआ और उसके कारण श्योपुर जिले में विभक्तीकरण का कार्य पूरा नहीं हो पाया. एक और प्रश्न मेरा यह है कि यह जो दूसरी कंपनी है उसने काम कब प्रारंभ किया और उसने भी अभी 102 गांवों का काम किया है तो 291 गांवों का काम कब पूरा होगा और बीच की अवधि में विलंब से वर्कआर्डर निरस्त करने के लिये कौन जिम्मेदार है ?

श्री पारसचन्द्र जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय, जैसा माननीय सदस्य ने पूछा है तो ज्योति कंस्ट्रक्शन कंपनी का वर्क आर्डर दिनांक 8.6.2015 को निरस्त किया गया है और दूसरी कंपनी को यह कार्य दिया है.यह बात जरूर है कि इस कार्य में विलंब हुआ है.मैं माननीय सदस्य को आश्वस्त करता हूं कि 2017 तक बाकी जितने फीडर सेपरेशन के कार्य हैं वह पूरे कर दिये जायेंगे.

श्री दुर्गालाल विजय - माननीय अध्यक्ष महोदय, सवाल यह है कि 4 साल तक लगातार यह काम क्यों नहीं पाया, आपने 4 साल बाद उसका अवार्ड क्यों निरस्त किया,पहले क्यों नहीं किया ? केवल 134 गांवों में जिस कंपनी ने काम किया और साल भर में यह काम हो गया था. 3 साल तक उसका वर्कआर्डर निरस्त नहीं करने के लिये कौन जिम्मेदार है ? इस कारण से श्योपुर जिले के किसानों और घरेलू उपभोक्ताओं को यह भुगतना पड़ा है. जो फीडर विभक्तीकरण का कार्य किया गया है वह बहुत घटिया किस्म का है. कई स्थानों पर जो  ट्रांसफार्मर्स लगाए गए हैं, वह आज भी चालू नहीं हुए हैं. फुंके हुए ट्रांसफार्मर्स लगा दिये गये और बहुत घटिया स्तर का मटेरियल लगाया है. जहां काम पूरा भी हुआ है वहां लाईट नहीं जा पा रही है. उसकी जांच कराएंगे क्या.

श्री पारसचन्द्र जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय, दिनांक नया वर्कआर्डर दिनांक 20.2.2016 को दिया गया और जो बात आपने जांच की कही है, आप ऐसा कोई स्पेसिफिक स्थान बताएंगे या लिखकर हमको देंगे, तो हम उसकी जांच कराने के लिये तैयार हैं.

श्री दुर्गालाल विजय - माननीय अध्यक्ष महोदय, 4 साल तक कार्य तक यह कार्य क्यों रोका गया ?

श्री पारस चन्द्र जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय, हम उसकी जांच कराने के लिये तैयार हैं.

श्री दुर्गालाल विजय - माननीय अध्यक्ष महोदय,वर्ष 2011 में यह अवार्ड हुआ था 134 गांवों का काम 8 महीने में पूरा हो गया तो 4 वर्षों तक वह निरस्त क्यों नहीं हुआ ?

अध्यक्ष महोदय - माननीय सदस्य के 2 प्रश्न हैं मंत्री जी, एक तो जो 4 साल तक उसे अतिरिक्त समय दिया गया उसके लिये कौन जिम्मेदार हैं और दूसरा, जो काम गुणवत्ता स्तर का नहीं हुआ है क्या उसकी जांच कराएंगे ?

श्री दुर्गालाल विजय - माननीय अध्यक्ष महोदय,गुणवत्ता का मैंने बताया है कि मटेरियल की जांच नियमित रूप से होती है फिर भी हमारे सदस्य कह रहे हैं तो उसकी जांच कराने को तैयार हैं.

श्री प्रदीप अग्रवाल - माननीय अध्यक्ष महोदय, सभी जिलों में उस ठेकेदार द्वारा गुणवत्ता विहीन काम हुआ है.

श्री दुर्गालाल विजय - माननीय अध्यक्ष महोदय, इस प्रश्न का उत्तर नहीं आया कि 4 वर्ष तक उसका वर्कआर्डर क्यों निरस्त नहीं हुआ और उसके लिये कौन जिम्मेदार हैं ?

अध्यक्ष महोदय - मंत्री जी, 4 साल तक वर्कआर्डर निरस्त करने के लिये कौन जिम्मेदार है, आप उसकी जांच कराएं.

श्री पारसचन्द्र जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय, जो आपने आदेश दिया हम उसको दिखवा लेंगे.

श्री दुर्गालाल विजय - माननीय अध्यक्ष महोदय, 291 गांवों का काम कब तक पूरा हो जायेगा ?

अध्यक्ष महोदय - वर्ष 2017 में पूरा कर देंगे यह उन्होंने पहले कह दिया.

श्री रणजीत सिंह गुणवान - माननीय अध्यक्ष महोदय, फीडर सेपरेशन का काम पूरे प्रदेश में चल रहा है. हमारे क्षेत्र में जो बड़े गांव हैं, जिनका पहले से कनेक्शन भी है तो फीडर सेपरेशन का काम वहां क्यों नहीं चल रहा है ?

श्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा - माननीय अध्यक्ष महोदय, फीडर सेपरेशन का काम पूरे प्रदेश में बहुत घटिया हुआ है.

लाड़ली लक्ष्मी योजना का क्रियान्‍वयन

[महिला एवं बाल विकास]

10. ( *क्र. 6920 ) श्री रामपाल सिंह : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्या शासन द्वारा बालिकाओं के प्रोत्साहन हेतु लाड़ली लक्ष्मी योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है? (ख) यदि प्रश्नांश (क) हाँ तो उक्त योजना के प्रारंभ दिनांक से प्रश्न दिनांक तक शहडोल जिले के प्रत्येक महिला एवं बाल विकास परियोजना अंतर्गत विभिन्न परियोजनाओं में योजना अंतर्गत कितने प्रकरण पंजीकृत किये गये?

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''चार''

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लाड़ली लक्ष्‍मी योजना के क्रियान्‍वयन के संबंध में मैं जानना चाह रहा था. प्रश्‍न ''ख'' के संबंध में मेरा जो प्रश्‍न था उसके संबंध में छेड़छाड़ की गई है, जो मूल चीज मैं जानना चाह रहा था वह लाइन ही गायब कर दी गई है. इसमें सिर्फ इतना जवाब में आया है कि परियोजना में कितने प्रकरण पंजीकृत किये गये हैं, इसमें एक अनुमानित संख्‍या ही बताई गई है. जबकि मेरा प्रश्‍न ''ख'' था कि पंजीकृत बालिका का नाम, पता, पंजीयन दिनांक के साथ अंतिम लाभांवित बालिका के नाम की जानकारी आदि मैं विस्‍तृत रूप से जानना चाह रहा था, किंतु यह जानकारी नहीं दी गई. सिर्फ पंजीकृत कितने किये गये हैं उसकी एक अनुमानित संख्‍या दी गई है. जबकि शहडोल जिले की प्रत्‍येक परियोजना जहां है, आज भी मैं यह उदाहरण बतौर बता सकता हूं. मेरे पास कितनी संख्‍या है, आज भी लाड़ली लक्ष्‍मी योजना में किसी को प्रमाण-पत्र नहीं दिया गया है. बहुत से ऐसे प्रकरण हैं जो लंबित पड़े हुये हैं. हजार, पंद्रह सौ, दो हजार रूपये जब तक न दें, उनका पंजीयन नहीं किया जाता है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री महोदय से यह जानना चाहता हूं कि पंजीकृत बालिका का नाम पंजीयन दिनांक के साथ अंतिम लाभांवित बालिका का नाम, उत्‍तर तो आया नहीं है और इसमें जिसके द्वारा भी लापरवाही की गई है उनके प्रति आप क्‍या कार्यवाही करेंगी ?

श्रीमती अर्चना चिटनिस-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सदस्‍य जो जानकारी चाहते हैं उनको वैसी की वैसी संपूर्ण जानकारी देने की जवाबदारी मैं लेती हूं और लाड़ली लक्ष्‍मी योजना माननीय मुख्‍यमंत्री जी की बहुत ही महत्‍वाकांक्षी और बहुत सं‍वेदनशील योजना है. सदस्‍य जितनी संवेदना से कह रहे हैं उसका मैं सम्‍मान करती हूं और जांच कराकर अगर इसमें कोई कमी, कोताही होगी तो हम उस पर नियमानुसार कार्यवाही कराना भी सुनिश्चित करेंगे.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पूरे शहडोल जिले की बात है, केवल मेरी ब्‍यौहारी और जयसिंहनगर की बात नहीं है. पूरे जिले में यह घोर लापरवाही की गई है. किसी के पास कोई प्रमाण-पत्र नहीं है कि लाड़ली लक्ष्‍मी योजना में हमारा नाम पंजीकृत हुआ है या नहीं हुआ है. मैं यह चाहता हूं कि इसकी आप कितनी समय-सीमा में जांच करायेंगी और क्‍या दोषियों के विरूद्ध कठोर से कठोर कार्यवाही की जायेगी ? माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से यह जानना चाहूंगा कि इसकी एक समय-सीमा निर्धारित कर दी जाये.

श्रीमती अर्चना चिटनिस-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, प्रथम तो अगर किसी को प्रमाण-पत्र नहीं मिले हैं तो मैं यह सु‍निश्चित करूंगी की आने वाले महीने भर में सबको प्रमाण-पत्र मिल जायें और दूसरा जांच कराकर कार्यवाही तो नियमानुसार ही मैं कर पाऊंगी, इसका भी मैं प्रयास करूंगी कि जल्‍द से जल्‍द करा लें.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत ही महत्‍वपूर्ण योजना है और आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से प्रार्थना करना चाहूंगा कि इसमें आप कोई वरिष्‍ठ अधिकारी को भोपाल स्‍तर से भेज दें और इसकी जांच करायें क्‍योंकि वह आदिवासी जिला है और सं‍वेदनशील मामला है. मुख्‍यमंत्री जी भी चाहते हैं लाड़ली लक्ष्‍मी योजना का जिक्र हरदम अपने उद्बोधन में करते हैं, उस तरह से भी इसका क्रियान्‍वयन हो जाये.

श्रीमती अर्चना चिटनिस-- मैं भोपाल से वरिष्‍ठ अधिकारी को भेजकर जांच करा लूंगी.

 

 

नवीन विद्युत ग्रि‍ड की स्‍थापना

[ऊर्जा]

11. ( *क्र. 2799 ) श्री अरूण भीमावद : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या शाजापुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रूलकी एवं ग्राम मेवासा सहित आसपास के लगभग 20-25 ग्रामों में विद्युत निम्‍न दाब की गंभीर समस्‍या होने से सिंचाई कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं? (ख) यदि हाँ, तो क्‍या शासन किसानों की इस गंभीर समस्‍या पर विचार कर रहा है? (ग) प्रश्नांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में यदि हाँ, तो क्‍या शासन उक्‍त स्‍थानों पर नवीन विद्युत ग्रिड स्‍थापित करने की स्‍वीकृति प्रदान करेगा? (घ) यदि हाँ, तो कब तक? यदि नहीं, तो क्‍यों?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) शाजापुर विधानसभा क्षेत्र के अन्तर्गत वर्तमान में ग्राम रूलकी एवं उसके आस-पास के ग्रामों को 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र बेरछा से निर्गमित 11 के.व्ही. चैसला कुल्मी कृषि फीडर से सिंचाई हेतु सुचारु रुप से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। तथापि रबी सीजन 2016-17 में 11 के.व्ही. चैसला कुल्मी फीडर पर अधिकतम भार 165 एम्पीयर एवं अंतिम बिन्दु पर वोल्टेज रेग्यूलेशन (व्ही.आर.) 20.04 प्रतिशत दर्ज हुआ है। 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र बेरछा से निर्गमित 11 के.व्ही. चैसला कुल्मी फीडर की कुल लम्बाई 14.45 कि.मी. है तथा इससे संबद्ध क्षेत्र में कम वोल्टेज की समस्या के निदान हेतु इस फीडर के विभक्तिकरण के लिये 4 कि.मी 11 के.व्ही. लाईन के निर्माण का कार्य दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के अन्तर्गत स्‍वीकृत है। उक्त कार्य पूर्ण होने के पश्चात नवीन 11 के.व्ही. चैसला कुल्मी फीडर एवं पुराने 11 के.व्ही. चैसला कुल्मी फीडर पर भार क्रमशः 65 एम्पीयर एवं 100 एम्पीयर रहेगा एवं अंतिम सिरे पर वोल्टेज रेग्यूलेशन क्रमशः 6.0 एवं 7.0 प्रतिशत रहेगा। इस प्रकार प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में कम वोल्‍टेज की समस्‍या का निराकरण हो जायेगा। रबी सीजन 2016-17 में 11 के.व्ही. चैसला कुल्मी फीडर पर माह अक्टूबर-16 से फरवरी-17 तक औसतन 9 घंटे 39 मिनिट प्रतिदिन विद्युत प्रदाय किया गया है। ग्राम मेवासा एवं उसके आस-पास के ग्रामों को वर्तमान में 33/11 के.व्ही. उपकेन्द्र मझानिया से निर्गमित 11 के.व्ही. सुनेरा-मेवासा कृषि फीडर से सिंचाई हेतु सुचारू रूप से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। रबी सीजन 2016-17 में 11 के.व्ही.सुनेरा-मेवासा कृषि फीडर पर अधिकतम भार 165 एम्पीयर एवं अंतिम बिन्दु पर वोल्टेज रेग्यूलेशन (व्ही.आर.) 8.05 प्रतिशत दर्ज हुआ है, जो कि नियत सीमा में है। रबी सीजन 2016-17 में 11 के.व्ही. सुनेरा-मेवासा फीडर पर माह अक्टूबर-16 से फरवरी-17 तक औसतन 9 घंटे 27 मिनिट प्रतिदिन विद्युत प्रदाय किया गया है। (ख) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार ग्राम रूलकी एवं आस-पास के ग्रामों में रबी सीजन में कम वोल्‍टेज की समस्‍या के निराकरण हेतु 33/11 के.व्‍ही. उपकेन्‍द्र बेरछा से निर्गमित 11 के.व्‍ही. चैसला कुल्‍मी फीडर के विभक्तिकरण के लिये दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजना के अंतर्गत 4 कि.मी. 11 के.व्‍ही. लाईन के निर्माण का कार्य स्‍वीकृत किया गया है। (ग) एवं (घ) उत्तरांश (क) एवं (ख) के परिप्रेक्ष्‍य में उक्त स्थानों पर वर्तमान में नवीन 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्र स्थापित करने की तकनीकी रुप से आवश्यकता नहीं है।

श्री अरूण भीमावद-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं सबसे पहले आपका संरक्षण चाहूंगा क्‍योंकि पहलवान ऊर्जा मंत्री जी से हमारा पाला पड़ने वाला है. सबसे पहले तो मैं माननीय मंत्री जी को धन्‍यवाद देना चाहूंगा कि जब वह शाजापुर जिले के प्रभारी मंत्री थे उस समय उनका आखिरी दौरा शाम को 5 बजे जिस गांव में था उसमें एक मांग आई थी कि वहां पर नवीन विद्युत ग्रिड की स्‍थापना की जाये. मैंने अपने प्रश्‍न में ग्राम चैसला कुल्‍मी और रूलमी के बीच में और ग्राम मेवासा में नवीन ग्रिड की बात कही है. मेवासा का जहां तक मामला है वह क्‍लीयर हो चुका है. प्रश्‍न लगने के बाद ऊर्जा विभाग ने पूरी ताकत से वहां पर व्‍यवस्थित विद्युत सप्‍लाई कर दी है, एम्‍पीयर बढ़ा दिया गया है, लेकिन ग्राम चैसला कुल्‍मी में अभी तक किसी प्रकार की व्‍यवस्‍था नहीं की है जिसके कारण वहां आज भी 8 से 10 गांवों में सिंचाई के लिये विद्युत प्रवाह उस प्रकार से नहीं मिल पा रहा है जिस प्रकार से किसानों को मिलना चाहिये था. क्‍या वहां पर नवीन ग्रिड की स्‍‍थापना करेंगे ?

श्री पारस चन्‍द्र जैन-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, 11 के.व्‍ही. का जो सब स्‍टेशन है वह 30.06.2017 तक पूर्ण हो जायेगा. इनकी जो विद्युत प्रदाय की समस्‍या है उस समस्‍या का निराकरण हो जायेगा और इनको बराबर लाइट मिलने लगेगी. 11 के.व्‍हीं. का सब स्‍टेशन हम 30.06.2017 तक बना देंगे.

 

श्री अरूण भीमावद -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मुझे आपके संरक्षण की आवश्यकता है. क्योंकि विभाग द्वारा पिछले 15 वर्षों से यही उत्तर दिया जा रहा है. जबकि समस्या आज भी वहां जस के तस है. मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि नवीन ग्रिड की स्थापना के बाद ही वहां पर समस्या का हल होगा. इसलिये मंत्री जी से निवेदन है कि वह इस मामले में विशेष कृपा करें. मंत्री जी उस दिन का आपका आखिरी दौरा मेरे क्षेत्र में था और वहां के गांव वालों ने आपको लड्डू-बाफले खिलाये थे.

श्री अजय सिंह-- मंत्री जी कम से कम लड्डू बाफले की लाज तो रख लो. (हंसी)भीमावद जी मंत्री जी अगर आज घोषणा नहीं करते हैं तो एक बार फिर से दौरा करा दीजिये.

श्री पारस चन्द्र जैन-- अध्यक्ष महोदय, लड्डू-बाफले यदि मैंने खाये होंगे तो सदस्य ने भी खाये होंगे. मैंने तो बगैर घी के खाये हैं (हंसी) माननीय सदस्य ने तो घी के लड्डू बाफले खाये हैं.

श्री बाला बच्चन --मंत्री जी आपके उत्तर से तो ऐसा लगता है कि वह भी सरकार ने खाये हैं.

श्री पारस चन्द्र जैन-- माननीय अध्यक्ष महोदय, फिर भी विधायक जी यदि कह रहे हैं तो उसका हम परीक्षण करवा लेंगे, साध्यता होगी, वित्तीय व्यवस्था होगी तो हम उस काम को करवा देंगे.

श्री बाबूलाल गौर-- अध्यक्ष महोदय, ऊर्जा मंत्री जी कह रहे हैं कि मुझे बगैर घी के बाफले खिलाये हैं इसलिये शायद वो इनको बिजली नहीं देंगे.

अध्यक्ष महोदय-- बिजली मिलने के बाद घी वाले ही लड्डू बाफले खिलायेंगे वो.

श्री अरूण भीमावद -- मंत्री जी बहुत बहुत धन्यवाद.

 

 

 

 

 

 

घोषित वोल्‍टेज अनुसार विद्युत की सप्‍लाई

[ऊर्जा]

12. ( *क्र. 6960 ) श्री दिनेश राय (मुनमुन) : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सिवनी विधानसभा क्षेत्र के समस्‍त ग्रामों में म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता के अध्‍याय तीन के अंतर्गत घोषित वोल्‍टेज एवं विद्युत सप्‍लाई की जाती है? यदि हाँ, तो सिवनी विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले सभी वितरण केन्‍द्रों में तीन वर्षों की औसत खपत की वर्षवार जानकारी दें? (ख) प्रश्नांश (क) में घोषित वोल्‍टेज यदि कम है, तो क्‍या विभाग उस क्षेत्र में नये उपकेन्‍द्र स्‍थापित करेगा? (ग) क्‍या उपभोक्‍ताओं को घोषित वोल्‍टेज एवं विद्युत सप्‍लाई देने के लिये विभाग बाध्‍य है, तभी बिल वसूल करने का हकदार है? यदि हाँ, तो कौन जिम्‍मेदार है? (घ) सिवनी जिले के विद्युत सप्‍लाई करने वाली विद्युत कंपनी की गत तीन वर्षों की सी..जी. द्वारा अंकेक्षण रिपोर्ट एवं प्रश्नांश (क), (ख), (ग) की कार्यवाही रिपोर्ट पटल पर रखें।

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) जी हाँ, सिवनी विधानसभा क्षेत्र के सभी ग्रामों में म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता 2013 के अध्‍याय 3 के अन्‍तर्गत घोषित वोल्‍टेज पर विद्युत प्रदाय किया जाता है। सिवनी विधानसभा क्षेत्र के अन्‍तर्गत आने वाले सभी वितरण केन्‍द्रों में विगत 3 वित्‍तीय वर्षों में कुल विद्युत खपत की वर्षवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) उत्‍तरांश (क) में दर्शाए अनुसार सिवनी विधानसभा क्षेत्र के अन्‍तर्गत आने वाले सभी ग्रामों में म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता 2013 के अध्‍याय 3 के अन्‍तर्गत घोषित वोल्‍टेज पर विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। तथापि भविष्‍य में भार वृद्धि के दृष्टिगत दीनदयाल उपाध्‍याय ग्राम ज्‍योति योजनांतर्गत पीपरडाही में एवं आई.पी.डी.एस. योजनांतर्गत अशोक नगर (सिवनी) में 33/11 के.व्‍ही. विद्युत उपकेन्‍द्रों के निर्माण का कार्य स्‍वीकृत किया गया है। (ग) उपभोक्‍ताओं को घोषित वोल्‍टेज पर विद्युत प्रदाय करने के लिये वितरण कंपनियाँ म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी म.प्र. विद्युत प्रदाय संहिता 2013 में निहित प्रावधानों के अनुसार कटिबद्ध हैं एवं म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा जारी दर आदेश के अनुसार ही बिल जारी कर विद्युत प्रदाय संहिता 2013 में निहित प्रावधानों के अनुसार वसूली की कार्यवाही की जाती है। इस प्रकार वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप ही प्रश्‍नाधीन क्षेत्र में कार्यवाही की जा रही है, अत: किसी के जिम्‍मेदार होने का प्रश्‍न नहीं उठता। (घ) सिवनी जिले के अन्‍तर्गत मध्‍यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड द्वारा विद्युत वितरण का कार्य किया जा रहा है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की वर्ष 2013-14 एवं 2014-15 के वार्षिक लेखों की प्रति सी.ए.जी की अंकेक्षण रिपोर्ट सहित विधानसभा के पटल पर क्रमश: दिनांक 24.03.2015 एवं दिनांक 27.07.2016 को रखी जा चुकी है तथा वर्ष 2015-16 के वार्षिक लेखों की प्रति सी.ए.जी. की अंकेक्षण रिपोर्ट सहित विधानसभा के पटल पर रखने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है।

परिशिष्ट - ''पाँच''

 

श्री दिनेश राय-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि मैंने अपने प्रश्न के भाग (क) में उत्तर चाहा था उसका विभाग द्वारा जो तीन वित्तीय वर्षों में कुल विद्युत खपत की वर्षवार जानकारी परिशिष्ट में दी गई है उस परिशिष्ट "पांच " को अगर आप स्वयं देख लेंगे तो आपको जानकारी हो जायेगी कि सिवनी जो शहरी क्षेत्र है यहां वर्ष 2013-14 में बिजली की खपत 327.11 यूनिट और वर्ष 2015-16 में 417.34 यूनिट है. मेरे विधानसभा क्षेत्र का जो छपारा और गनेशगंज क्षेत्र है यहां पर हम माईनस हो गये हैं. वर्ष 2013-14 में गनेशगंज में 2.01 यूनिट और 2015-16 में 1.84 यूनिट बिजली की खपत हुई है. इसका मतलब यह है कि कहीं न कहीं हम इस क्षेत्र में या तो बिजली की कटौती कर रहे हैं, या वोल्टेज कम है क्योंकि छपारा और गनेशगंज से हमारे ग्रामीण क्षेत्र की 34 पंचायतें जुड़ी हुई हैं. वहां वोल्टेज की समस्या है. मंत्री जी आपने मेरे क्षेत्र को उप विद्युत केन्द्र दिये हैं. मेरा आपसे आग्रह है कि गोरखपुर क्षेत्र के लिये भी एक विद्युत उप केन्द्र स्वीकृत कर दें. क्योंकि उत्तर में ही स्पष्ट है कि कटौती अधिक है, बिजली की खपत कम है, वोल्टेज की समस्या है तो वहां उप विद्युत खोलेंगे क्या ?

श्री पारस चन्द्र जैन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य ने जो मांग की है उसका हम परीक्षण करवा लेंगे यदि तकनीकी साध्यता होगी और आवश्यकता होगी तो यह सरकार तो किसानों की है, करेंगे साहब.

श्री दिनेश राय-- -- कब तक कर देंगे यह और बता दें.

श्री पारस चन्द्र जैन -- अध्यक्ष महोदय, इसकी समय सीमा बताना संभव नहीं है.

श्री दिनेश राय-- -- एक साल, दो साल, पांच साल कब तक करेंगे.मंत्री जी आपको धन्यवाद देना चाहता हूं क्योंकि मेरा एक अशासकीय संकल्प जो आंगनवाड़ी केन्द्र और ग्राम पंचायतों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिये आपने सहमति दी है. श्री विश्वास सारंग जी भी बैठे हुये हैं, गोपाल भार्गव जी उसमें कुछ तकनीकी त्रुटियां थी लेकिन मंत्री जी आपने उसको दिलेरी से उस प्रस्ताव को पास किया है, तो वह कब से चालू करा देंगे.

अध्यक्ष महोदय-- वह प्रश्न उद्भुत नहीं होता है.

श्री दिनेश राय-- -- वह नहीं होता है तो इसको कब तक करा देंगे.

अध्यक्ष महोदय- किस चीज को ? प्रश्न क्रमांक 13

श्री दिनेश राय-- - अध्यक्ष महोदय, अच्छे मंत्री हैं, बढ़ाई भी कर रहा हूं, बधाई भी दे रहा हूं.

श्री पारस चन्द्र जैन--मैंने कहा है कि अतिशीघ्र, जल्दी से जल्दी कराने की कोशिश करूंगा.

अध्यक्ष महोदय--जल्दी से जल्दी कहा है.

श्री दिनेश राय-- मंत्री जी धन्यवाद.

दतिया जिले में पोषण आहार का वितरण

[महिला एवं बाल विकास]

13. ( *क्र. 5015 ) श्री घनश्‍याम पिरोनियाँ : क्या महिला एवं बाल विकास मंत्री महोदया यह बताने की कृपा करेंगी कि (क) क्या दतिया जिले में स्थित आंगनवाड़ि‍यों में बच्चों को स्‍व-सहायता समूहों द्वारा पोषण आहार दिया जा रहा है? (ख) क्या शासन के नियमों के तहत आंगनवाड़ी केन्द्रों से बच्चों की उपस्थिति संख्या सुपरवाईजर से प्रमाणित होने के उपरांत ही संबंधित आपूर्तिकर्ता को भुगतान किया जाना चाहिये? क्या स्‍व-सहायता समूहों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता का कोई सगा संबंधी नहीं होना चाहिये? (ग) क्या दतिया जिले के सेवढ़ा/भाण्डेर विधानसभा क्षेत्र के कई आंगनवाड़ि‍यों के स्‍व-सहायता समूहों को सुपरवाईज़र के उपस्थिति प्रमाणित कराये बिना दर्ज संख्या से अधिक बच्चों की राशि का भुगतान किया जा रहा है? (घ) भाण्डेर/सेवढ़ा विधानसभा क्षेत्र के प्रत्येक आंगनवाड़ी केन्द्रों के दिनांक 01 जनवरी 2014 से प्रश्न दिनांक तक भुगतान किये गये पोषण का विवरण आंगनवाड़ी कार्यकर्ता तथा सुपरवाईजरों द्वारा दिये गये उपस्थिति पत्रकों का विवरण उपलब्‍ध कराएं। साथ ही आंगनवाड़ी केन्द्रों को पोषण आहार आपूर्तिकर्ता समूहों के नाम की सूची उपलब्ध करायें तथा यह भी प्रमाणित करें कि इन समूहों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के कोई सगे संबंधी नहीं हैं।

महिला एवं बाल विकास मंत्री ( श्रीमती अर्चना चिटनिस ) : (क) जी हाँ। विभागीय निर्देशानुसार दतिया जिले में स्व-सहायता समूह के माध्यम से आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों को पोषण आहार दिया जा रहा है। (ख) राज्य शासन के निर्देशानुसार स्व-सहायता समूहों द्वारा प्रस्तुत जानकारी के आधार पर परियोजना अधिकारी द्वारा अभिप्रमाणित एवं संकलित कम्प्यूटरीकृत देयक के आधार पर भुगतान किया जाता है। जी नहीं। (ग) जी नहीं। दतिया जिले की सेवढ़ा एवं भाण्डेर परियोजना में आंगनवाड़ी केन्द्र में दर्ज एवं उपस्थिति के मान से ही भुगतान किया जाता है। दर्ज संख्या से अधिक उपस्थिति का भुगतान नहीं किया जा रहा है। (घ) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''1'' एवं ''2'' अनुसार है।

 

श्री घनश्‍याम पिरोनियाँ : माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि क्या दतिया जिले में स्थित आंगनवाड़ियों में बच्चों को स्व-सहायता समूहों द्वारा पोषण आहार दिया जा रहा है. (ख) में है कि क्या शासन के नियमों के तहत आंगनवाड़ी केन्द्रों से बच्चों की उपस्थिति संख्या सुपरवाईजर से प्रमाणित होने के उपरान्त ही संबंधित आपूर्तिकर्ता को भुगतान किया जाना चाहिये.

अध्यक्ष महोदय- पिरोनियां जी, यह चीज तो लिखित में आ गई है. उत्तर भी आ गया है. यदि आपको इस उत्तर के बाद कुछ पूछना है तो पूछिये.

श्री घनश्याम पिरोनियां -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूं कि आंगनवाड़ी केन्द्रों में बच्चों की संख्या में गड़बड़ी की जाती है. जबकि वास्तव में सरकार की मंशा है कि सभी बच्चों को पोषण आहार मिले और वह आगे बढ़े इसी कारण से यह योजना प्रारंभ हुई है लेकिन इस योजना में सुपरवाईजर और अन्य कार्यकर्तागण योजना का पलीता लगाने का काम कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी से जानना चाहता हूं कि जब सरकार की मंशा है कि उन बच्चों को उनका हक और अधिकार मिले उसमें कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हो तो जो लोग इस मामले में दोषी हैं उनके खिलाफ आप कब तक कार्यवाही कर देंगी.

श्रीमती अर्चना चिटनीस - माननीय अध्‍यक्ष जी, माननीय सदस्‍य की जैसी इच्‍छा है, उसी अनुसार हम व्‍यवस्‍था को सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे.

श्री घनश्‍याम पिरोनियॉं - माननीय मंत्री, किसी अधिकारी को भेजकर करवा दीजिए.

श्रीमती अर्चना चिटनीस - किसी अधिकारी को भेज दूंगी.

श्री घनश्‍याम पिरोनियॉं - धन्‍यवाद मंत्री जी.

पाँच वर्षों से अधिक अवधि से पदस्‍थ अधिकारियों का अन्‍यत्र स्‍थानांतरण

[नर्मदा घाटी विकास]

14. ( *क्र. 5805 ) श्री तरूण भनोत : क्या राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) प्रदेश में नर्मदा घाटी विकास विभाग में पदस्‍थ कितने कार्यपालन यंत्री, अधीक्षण यंत्री पिछले पाँच वर्षों से एक ही संभाग/मण्‍डल में पदस्‍थ हैं? जानकारी उनके नामवार, उनके संभाग में पदस्‍थी दिनांकवार बताई जावे (ख) क्‍या शासन की स्‍थानांतरण नीति के अन्‍तर्गत प्रथम श्रेणी के अधिकारियों को तीन वर्ष से अधिक एक ही स्‍थान पर नहीं रखने संबंधी शासन के निर्देश हैं? (ग) यदि वर्णित (ख) हाँ तो वर्णित (क) के अधिकारी जो विगत पाँच वर्षों से एक ही स्‍थान पर पदस्‍थ हैं, उन्‍हें कब तक हटाया जावेगा?

राज्‍यमंत्री, नर्मदा घाटी विकास ( श्री लालसिंह आर्य ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) एवं (ग) जी हाँ, स्‍थानांतरण नीति 2015 में उल्‍लेख है, परन्‍तु अनिवार्यता नहीं है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण में कार्यपालन यंत्रियों/अधीक्षण यंत्रियों की सेवायें अन्‍य विभागों से प्रतिनियुक्ति पर ली जाती हैं। वर्तमान में प्राधिकरण में अभियंताओं की कमी है। शेष प्रश्‍नांश उत्‍पन्‍न नहीं होते हैं।

परिशिष्ट - ''छ:''

श्री तरूण भनोत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से पाइंटेड प्रश्‍न पूछना चाहता हूं कि मध्‍यप्रदेश सरकार ने जो अपनी स्‍थानांतरण नीति बनाई है, क्‍या सरकार उसका पालन कर रही है?

राज्‍यमंत्री सहकारिता (श्री विश्‍वास सारंग) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, स्‍थानांतरण नीति का पालन भी हो रहा है, माननीय सदस्‍य इसके बाद जो पूछेंगे उसका भी जवाब मैं दे देता हूं.

श्री तरूण भनोत - मंत्री जी आप बड़े समझदार है, पहले से ही पता है आपको कि क्‍या पूछेंगे. चोर की दाढ़ी में तिनका.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रिसम्‍शन, प्रिसम्‍शन होता है.

श्री विश्‍वास सारंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मुझे यह भी मालूम है कि सदस्‍य क्‍या पूछना चाहेंगे, इसलिए पहले ही मैं उनको यह सुविधा दे देता हूं. 2015 में स्‍थानांतरण नीति है, उसमें यह सही है कि समय सीमा तक ही कोई अधिकारी एक स्‍थान पर रहता है, उसके साथ साथ यह भी प्रावधान है कि विभाग की आवश्‍यकतानुसार एवं कार्य की आवश्‍यकतानुसार भी शिथिलता लाई जा सकती है.

श्री तरूण भनोत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा पाइंटेड प्रश्‍न है कि ऐसी कौन सी आवश्‍यकता शासन की है, जब नीति आपने बनाई तीन साल से ज्‍यादा कोई अधिकारी नहीं रहेगा, साढ़े तीन साल रह ले, चार साल रह लें, लेकिन 6-6 और 8-8 साल से वह अधिकार है, जिनकी विभागीय जांच हो रही है, क्‍या जिनकी जांच हो रही है उनके अलावा ऐसे कोई अन्‍य अधिकारी नहीं है विभाग के पास में कि उनको वहां पर बैठा दें, इसका जबाव दे दें माननीय मंत्री?

श्री विश्‍वास सारंग - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नर्मदा घाटी विकास में खुद का कोई कैडर नहीं है. सभी अधिकारी डेपुटेशन पर आते हैं, इससे पहले भी प्रश्‍न में यहां पर चर्चा हुई कि काम किसानों के खेतों में पानी पहुंचाने से संबंधित है तो एकदम से शिफ्टिंग में बहुत दिक्‍कत होती है, अधिकारी वैसे तो बहुत कम ही है, यदि आप चाहेंगे तो मैं यहां पर आंकड़ा बता सकता हूं, जितने अधिकारियों की जरूरत है, उससे आधे भी अधिकारी इस विभाग में अभी नहीं है, लगातार उसकी मांग की जाती है लेकिन, डेपुटेशन पर सभी अधिकारी नहीं आ पा रहे हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसे ही प्रतिनियुक्ति से दूसरे अधिकारी आएंगे तो इन अधिकारियों को हटा दिया जाएगा.

श्री तरूण भनोत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा अंतिम प्रश्‍न, यह भी पाइंटेड है तीन वर्ष की जगह पांच वर्ष 6 वर्ष और 7 वर्ष से जो वह अधिकारी पदस्‍थ हैं और जिनके ऊपर विभागीय जांच चल रही है, ऐसी शासन की क्‍या मजबूरी उनको नहीं हटा रहे, यदि आपके पास अधिकारियों की कमी है आपके पास पर्याप्‍त अधिकारी नहीं है, ईमानदार लोग नहीं है तो यह भी आपकी नाकामी है.

अध्‍यक्ष महोदय - आप पाइंटेड प्रश्‍न पूछ रहे थे न?

श्री तरूण भनोत - अध्‍यक्ष जी, मेरा सिर्फ यह कहना है कि जिनको तीन वर्ष की जगह 6 वर्ष हो गए और जिन अधिकारियों की विभागीय जांच चल रही है, आप क्‍या उन अधिकारियों को हटा देंगे?

अध्‍यक्ष महोदय - ठीक है, आ गया आपका प्रश्‍न.

श्री तरूण भनोत - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, विश्‍वास भाई बड़ी किस्‍मत की बात है कि आप आज इस विभाग का जबाव दे रहे हैं. मैं बड़े विश्‍वास के साथ चाहता हूं कि आप इसका सही जबाव दें.

श्री विश्‍वास सारंग - आप अपनी सीआर ठीक कर रहे हो, या मेरी बिगाड़ रहे हो(हंसी...) अध्‍यक्ष महोदय, जैसा माननीय विधायक जी ने कहा है, जैसे ही रिप्‍लेसमेंट मिलेगा हम शिफ्ट कर देंगे.

श्री तरूण भनोत - मतलब 6 साल और लगेंगे आपको रिप्‍लेसमेंट ढूंढने में.

शासकीय महाविद्यालय धनेटा पोरसा में विद्युत व्‍यवस्‍था

[ऊर्जा]

15. ( *क्र. 3818 ) एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार : क्या ऊर्जा मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) शा. महाविद्यालय धनेटा पोरसा जिला मुरैना, ग्राम धनेटा से कितनी दूरी पर स्थित है? (ख) क्‍या ग्राम धनेटा से कॉलेज तक विद्युत विभाग द्वारा बिजली के पोल नहीं डाले गये हैं, जिसके कारण आज दिन तक धनेटा पोरसा शा. महाविद्यालय विद्युत विहीन है? विद्युत व्‍यवस्‍था न होने से शास. कम्‍प्‍यूटर तथा अन्‍य आवश्‍यक उपकरण अनुपयोगी पड़े हुए हैं। (ग) क्‍या शासन छात्र-छात्राओं के हित को ध्‍यान में रखते हुए ग्राम धनेटा से शासकीय महाविद्यालय (दूरी लगभग 500 मीटर) तक पोल गाड़कर डी.पी. रखवाकर विद्युत व्‍यवस्‍था करायेगा? यदि हाँ, तो कब तक, नहीं तो क्‍यों नहीं?

ऊर्जा मंत्री ( श्री पारस चन्‍द्र जैन ) : (क) शासकीय महाविद्यालय धनेटा पोरसा, जिला मुरैना ग्राम धनेटा से लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। (ख) शासकीय महाविद्यालय धनेटा के विद्युतीकरण हेतु अधोसंरचना विकसित करने का कार्य नियमानुसार '''' श्रेणी के विद्युत ठेकेदार से मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सुपरविज़न में महाविद्यालय प्रशासन द्वारा कराया जाना था, लेकिन महाविद्यालय प्रशासन द्वारा उक्‍त कार्य न करवाकर निम्‍न दाब लाईन से ही तात्‍कालिक समय में निम्‍न दाब कनेक्‍शन प्राप्‍त कर दिनांक 30.09.2005 से विद्युत का उपयोग किया जा रहा था। उक्‍त कनेक्‍शन की सर्विस लाईन जलने/खराब होने पर महाविद्यालय प्रशासन द्वारा सर्विस लाईन नहीं बदलवाने के कारण माह जून 2016 से विद्युत प्रदाय बंद है। उल्‍लेखनीय है कि महाविद्यालय के प्राचार्य के द्वारा दिनांक 14.08.2015 को लाईन विस्‍तार कार्य एवं 25 के.व्‍ही.ए. क्षमता का एक वितरण ट्रांसफार्मर स्‍थापित करने हेतु आवेदन दिया गया, जिस पर मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के संबंधित कार्यालय द्वारा दिनांक 06.01.2016 को राशि रू. 249719/- का प्राक्‍कलन स्‍वीकृत कर सुपरविज़न चार्ज एवं सर्विस टैक्‍स की राशि रू. 15,714/- का माँग पत्र जारी किया गया था, लेकिन आवेदक द्वारा उक्‍त राशि जमा नहीं करने के कारण प्रकरण में अग्रिम कार्यवाही नहीं की जा सकी। पुन: दिनांक 26.09.2016 को महाविद्यालय के प्राचार्य के द्वारा प्राक्‍कलन स्‍वीकृति हेतु आवेदन दिया गया, जिसके अनुसार उक्‍त कार्य नगरपालिका परिषद के द्वारा कराया जाना था, परन्‍तु प्राक्‍कलित राशि लगभग रू. 2.75 लाख होने के कारण नगरपालिका परिषद द्वारा उक्‍त कार्य करवाने में असमर्थता बतायी गई एवं उनके पास उक्‍त मद में मात्र रू. 2 लाख की राशि उपलब्‍ध होने के कारण पुन: पूर्व से स्‍थापित 100 के.व्‍ही.ए. क्षमता के ट्रांसफार्मर से निम्‍नदाब लाईन का लगभग 0.4 कि.मी. का विस्‍तार कार्य करने हेतु राशि रू. 1,94,496/- का प्राक्‍कलन स्‍वीकृत कर प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय धनेटा को कनिष्‍ठ यंत्री पोरसा के द्वारा सुपरविज़न चार्ज एवं अन्‍य प्रभार की राशि रू. 13,250/- का मांग पत्र दिनांक 04.03.2017 को जारी किया गया है। उक्‍त राशि आज दिनांक तक जमा नहीं कराई गई है। (ग) प्राचार्य, शासकीय महाविद्यालय धनेटा को कनिष्‍ठ यंत्री पोरसा के द्वारा सुपरविज़न चार्ज एवं अन्‍य प्रभार की राशि रू. 13,250/- का माँग पत्र दिनांक 04.03.2017 को जारी किया गया है। राशि जमा होने के उपरांत उक्‍त कार्य '''' श्रेणी के विद्युत ठेकेदार के माध्‍यम से महाविद्यालय/प्रशासन नगरपालिका परिषद के द्वारा मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के सुपरविजन में करवाया जावेगा। अत: कार्य पूर्णता की समय-सीमा बताना संभव नहीं।

एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न शासकीय महाविद्यालय पोरसा में बिजली व्‍यवस्‍था को लेकर है, पोरसा नगर पालिका क्षेत्र है और उसमें आज तक लाइट का प्रबंधन नहीं है, वहां पर छात्र कम्‍प्‍यूटर या अन्‍य उपकरण चलाने के लिए परेशान है. मैं चाहता हूं कि वहां पर लाइट का प्रबंध करा दिया जाए और माननीय मंत्री महोदय, यह कब तक करा देंगे, यह विनम्र प्रार्थना करता हूं.

श्री पारस चन्‍द्र जैन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमारे विभाग ने पहले भी एक लेटर 22.03.17 को लिखा था, नगर पालिका द्वारा सरचार्ज 13750 रूपए जमा करा दिया है, काम उनको ही कराना है, पैसा जमा हो गया है, हमने तो सरचार्ज लेकर काम की अनुमति दे दी है.

एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह विषय नगर पालिका का जरूर है, लेकिन आप उसमें थोड़ी सी सक्रिय भूमिका निभाएं, यह छात्रों से जुड़ा हुआ विषय है, इसमें गंभीरता से आप कार्यवाही करने की कृपा करेंगे.

श्री पारस चन्‍द्र जैन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने अभी बताया हूं. राशि जमा करा दी है, हमने वर्कआर्डर दे दिया है, काम उनको ही करना है, किसी से भी काम करवा लें.

अध्‍यक्ष महोदय - आप राशि जमा करवा दीजिए.

एडवोकेट सत्‍यप्रकाश सखवार - धन्‍यवाद, माननीय मंत्री महोदय इसको आप प्राथमिकता के आधार पर करवा देंगे.

मुख्‍यमंत्री द्वारा की गई घोषणाओं का क्रियान्‍वयन

[सामान्य प्रशासन]

16. ( *क्र. 6744 ) श्री नारायण सिंह पँवार : क्या मुख्यमंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या दिनांक 31 जनवरी 2017 को ब्‍यावरा नगर में आयोजित एन.एच.ए.आई. के फोरलेन भूमिपूजन कार्यक्रम एवं जिला स्‍तरीय अंत्‍योदय मेले में माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा की गई घोषणाओं के संबंध में कलेक्‍टर जिला राजगढ़ द्वारा अपने पत्र क्रमांक/11427/एस.सी. 2/2017 राजगढ़ दिनांक 04.02.2017 से प्रमुख सचिव मुख्‍यमंत्री कार्यालय मध्‍यप्रदेश शासन, सामान्‍य प्रशासन विभाग भोपाल को आवश्‍यक कार्यवाही हेतु जानकारी प्रेषित की गई है? (ख) यदि हाँ, तो प्रश्‍न दिनांक तक उक्‍त घोषणाओं पर आवश्‍यक व त्‍वरित कार्यवाही हेतु किन-किन विभाग प्रमुखों को क्‍या दिशा-निर्देश दिये गये हैं? निर्देशों की प्रति सहित जानकारी उपलब्‍ध करावें (ग) क्‍या उपरोक्‍तानुसार माननीय मुख्‍यमंत्री जी द्वारा की गई घोषणाओं के परिपालन की कोई समय-सीमा निर्धारित की गई? यदि हाँ, तो क्‍या?

मुख्यमंत्री ( श्री शिवराज सिंह चौहान ) : (क) जी हाँ। (ख) जानकारी पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है। (ग) घोषणाओं के क्रियान्‍वयन की कार्यवाही एक सतत् प्रक्रिया है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता।

श्री नारायण सिंह पँवार -- अध्यक्ष महोदय, मैं मंत्री जी का ध्यान आकर्षित कराना चाहता हूं कि मेरे विधान सभा क्षेत्र में मुख्यमंत्री जी का दिनांक 16.3.2017 को दौरा हुआ था और उन्होंने 7-8 घोषणाएं की थीं, उसके परिपालन में कलेक्टर, राजगढ़ द्वारा दिनांक 4.2.2017 को प्रमुख सचिव, माननीय मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भी प्रेषित कर दिया गया. मैं जानना चाहूंगा कि उसके परिपालन में क्या कार्यवाही हुई है, उत्तर में लिखा है कि जी हां पत्र प्रेषित कर दिया गया है. मेरी यह बहुत महत्वपूर्ण मांगें थीं, जिनकी मुख्यमंत्री जी ने घोषणाएं की हैं. जैसे सुठालिया नगर में महाविद्यालय स्थापित करना. टप्पा सुठालिया जिला राजगढ़ को तहसील का दर्जा प्रदान करना, ब्यावरा नगर में ऑडिटोरियम निर्माण की स्वीकृति, अस्थाई अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सब डिवीजन ब्यावरा को स्थाई करना, ब्यावरा में ड्रायविंग ट्रेनिंग स्कूल की स्थापना..

अध्यक्ष महोदय -- वह तो इसमें सूची है. आप सीधा प्रश्न पूछ लीजिये.

श्री नारायण सिंह पँवार -- अध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन यह है कि मेरे अधिकांश प्रश्नों के उत्तर में विभागों ने कहा कि हमें कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है, जबकि केवलराम धुर्वे, अवर सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय के द्वारा दिनांक 23.2.2017 को इसकी जानकारी सभी संबंधित विभागों को दे दी गई है. तो क्या सभी विभागों ने इस पर कोई संज्ञान लिया है. मैं मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि इन घोषणाओं पर कब तक अमल प्रारंभ हो जायेगा.

राज्यमंत्री, सहकारिता(श्री विश्वास सारंग) -- अध्यक्ष महोदय, जैसा विधायक जी ने कहा, मुख्यमंत्री जी की 8 घोषणाएं थीं और मुझे उनको यह बताते हुए प्रसन्नता है कि इसमें से 3 के ऊपर तो कार्यवाही शुरु हो गई है. 8वें नम्बर की घोषणा बजट में आ गयी है. 7वें नम्बर की घोषणा का भी पैसा उसमें आवंटित हो गया है और जो ऑडिटोरियम है, उस पर कार्यवाही चल रही है. बाकी जो भी घोषणाएं हैं, वह मुख्यमंत्री जी की घोषणा के पोर्टल में आ गई हैं और जल्दी से जल्दी उन पर कार्यवाही होकर के उसका निष्पादन हो जायेगा.

श्री नारायण सिंह पँवार -- अध्यक्ष महोदय, मैं सिर्फ इतना निवेदन करना चाहता हूं कि मेरे यहां सुठालिया नगर में महाविद्यालय इसी सत्र से प्रारंभ हो जाये और टप्पा सुठालिया जिला राजगढ़ को तहसील का दर्जा इसी सत्र में शुरु हो जाये, तो क्षेत्र के किसानों और विद्यार्थियों को लाभ मिल सकेगा और जो 7वें एवं 8वें नम्बर की घोषणा में जो बजट आवंटित हो गया है, इसके लिये मंत्री जी को धन्यवाद.

अध्यक्ष महोदय -- प्रश्न संख्या 17.

मुरैना स्थित रिफाइनरियों से बाहर भेजा गया खाद्य तेल

[वाणिज्यिक कर]

17. ( *क्र. 5366 ) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मुरैना वाणिज्‍यकर जाँच नाके से मुरैना की रिफाइनरियों में वर्ष 2015-16 में कितनी मात्रा में खाद्य तेलों को बाहर से मंगाया गया? (ख) क्‍या वाणिज्‍यकर जाँच चौकी मुरैना की क्रूड ऑयलों की प्रवि‍ष्ट‍ियों मार्गों पर स्थित अन्‍य प्रदेशों की जाँच चौकियों से भिन्‍न है? यदि हाँ, तो क्‍यों? यदि नहीं, तो क्‍या शासन इन प्रवि‍ष्ट‍ियों की सत्‍यता की जाँच हेतु कोई प्रावधान बनायेगा? (ग) उक्‍त समयावधि में मुरैना रिफाइनरियों से कितनी मात्रा में रिफाइण्‍ड खाद्य तेल की कितनी मात्रा बाहर भेजी गई।

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) मुरैना वाणिज्यिक कर, जाँच नाके से मुरैना की रिफाइनरियों में वर्ष 2015-16 में रू. 3905462145.00 का खाद्य तेल बाहर से बुलाया गया। जाँच चौकी पर किसी कमोडिटी का रिकॉर्ड मात्रात्‍मक आधार पर संधारित नहीं किया जाता है। (ग) उक्‍त समयावधि में मुरैना रिफाइनरियों से रू. 2024284034.00 का रिफाइंड खाद्य तेल बाहर भेजा गया है। किसी कमोडिटी का रिकार्ड मात्रात्‍मक आधार पर संधारित नहीं किया जाता है।

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार -- अध्यक्ष महोदय, मैंने वित्त मंत्री जी से यह जानना चाहा था कि मुरैना वाणिज्यिक कर जांच नाके से मुरैना की रिफाइनरियों में वर्ष 2015-16 में कितनी मात्रा में खाद्य तेलों को बाहर से मंगाया गया. मंत्री महोदय के द्वारा मुझे जो जवाब मिला है, मुरैना वाणिज्यिक कर, जांच नाके के मुरैना की रिफाइनरियों में वर्ष 2015-16 में रुपये 3905462145.00 का खाद्य तेल बाहर से बुलाया गया. जांच चौकी पर किसी कमोडिटी का रिकार्ड मात्रात्मक आधार पर संधारित नहीं किया जाता है. मुझे लगता है कि अगर मात्रात्मक आधार पर संधारित नहीं किया जायेगा, तो इसमें बहुत बड़ा मिलावटी काम जो हो रहा है, उसको बल मिलेगा. मेरा मंत्री जी से यह कहना है और वे मेरा प्रश्न लगाने का आशय भी समझ गये होंगे कि लगभग 50 से 60 टेंकर प्रति दिन सोयाबीन ऑयल, फूड फार्म ऑयल, सीड्स ऑयल यह सब सरसों के तेल में मिलाया जाता है. मिलावट को लेकर मैंने जो प्रश्न लगाया है, पूरे मुरैना जिले में एक बहुत बड़े लेविल का मिलावट का काम चल रहा है. जो व्यापारी अच्छा काम कर रहे हैं, उनके लिये मैं नहीं कहना चाहता, लेकिन मिलावट का एक बहुत बड़ा काम चल रहा है, क्योंकि मंत्री जी ने यह कहा है कि इसकी सत्यता के लिये जांच चौकियां अन्य राज्यों में अवस्थित नहीं हैं. अगर हम इसकी सत्यता की जांच नहीं करा पायेंगे, तो कैसे इस मिलावट के काम को बंद करा पायेंगे. मैं मंत्री जी से इसमें जानना चाहता हूं कि क्या इसके लिये सरकार कोई ठोस कदम उठायेगी.

श्री जयंत मलैया -- अध्यक्ष महोदय, जैसा कि मानननीय सदस्य ने पूछा, मध्यप्रदेश वेट अधिनियम,2002 की धारा 9 के अंतर्गत वस्तुओं के विक्रय मूल्य पर कर लगाया जाता है और इसकी मात्रात्मक जानकारी संधारित नहीं की जाती है. इसकी जो दूसरी धाराएं हैं, जैसे इस अधिनियम की धारा 9 (क) है, जिसमें जैसे रेत, गिट्टी, सोरिंग स्टोन आदि हैं, तो इसको हम मात्रा के आधार पर लेते हैं. इसी तरीके से धारा 9 (कक) है, इसमें सारे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को लेते हैं. तो जो रिफाइनरियों में ऑयल आता है, इसके लिये मात्रात्मक जानकारी संधारित नहीं की जाती है.

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार -- अध्यक्ष महोदय, मैंने जो दूसरा प्रश्न किया था, उसमें मैंने यह जानना चाहा था कि क्या यह जो राजस्थान और यूपी की जांच चौकियां हैं, उनमें से हम अपना सत्यापन करा लेंगे, अपनी जो जांच चौकियां हैं, वाणिज्यिक कर की..

अध्यक्ष महोदय -- उनका कहना यह है कि सत्यापन की कोई व्यवस्था करेंगे क्या.

श्री सत्यपाल सिंह सिकरवार -- अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने यह कहा है कि वहां जांच चौकियां अवस्थित नहीं हैं. तो इसकी सत्यता के लिये एक कमेटी बनाकर इसकी जांच करा ली जाये.

श्री जयंत मलैया -- अध्यक्ष महोदय, मैं यह निवेदन करना चाहता हूं कि मध्यप्रदेदश से दो राज्य लगे हुए हैं राजस्थान और उत्तर प्रदेश, जहां से माल आता है और जो कांडला के पोर्ट से भी माल आता है गुजरात से, वह भी इन दोनों प्रदेशों के माध्यम से होते हुए आता है. परन्तु वहां पर कोई जांच चौकियां हैं नहीं.

दतिया जिलांतर्गत अवैध शराब की बिक्री

[वाणिज्यिक कर]

18. ( *क्र. 5672 ) श्री प्रदीप अग्रवाल : क्या वित्त मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) दतिया जिले में आबकारी विभाग द्वारा वर्ष 2015-16 एवं वर्ष 2016-17 में कितने व्‍यक्तियों को कितनी-कितनी अवैध शराब देशी/विदेशी विक्रय करने का प्रकरण बनाकर उसके खिलाफ क्‍या कार्यवाही की? जानकारी उपलब्‍ध करावें (ख) देशी/विदेशी मदिरा ठेकेदारों को शासन द्वारा किसी शासकीय प्रतिष्‍ठान से उपलब्‍ध कराई जाती है या किसी निजी प्रतिष्‍ठान अथवा ठेकेदार से यानि खुले बाजार से? (ग) क्‍या आबकारी विभाग ठेकेदारों के माध्‍यम से एक लायसेंस से 4-5 दुकानें नगर में तथा पुलिस के साथ समझौता कर थाने के अंतर्गत आने वाले समस्‍त ग्रामों में मदिरा का अवैध बिक्री का कारोबार करवा रहा है? यदि नहीं, तो संपूर्ण प्रकरण की जाँच प्रश्‍नकर्ता के समक्ष कराई जावेगी?

वित्त मंत्री ( श्री जयंत मलैया ) : (क) आबकारी विभाग द्वारा जिला दतिया में वर्ष 2015-16 में कुल 640 प्रकरण एवं वर्ष 2016-17 में माह फरवरी 2017 अंत तक कुल 668 प्रकरण पंजीबद्ध किये गये। दर्ज प्रकरणों में जप्‍त की गई मदिरा की विकासखण्‍डवार जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है, दर्ज प्रकरणों में आबकारी अधिनियम 1915 की धारा 34 के अंतर्गत कार्यवाही की गई है। (ख) दतिया जिले में देशी मदिरा का प्रदाय शासकीय देशी मद्य भाण्‍डागार दतिया से एवं विदेशी मदिरा का प्रदाय शासकीय विदेशी मद्य भाण्‍डागार ग्‍वालियर से किया जाता है। (ग) आबकारी विभाग दतिया द्वारा जिले में विदेशी मदिरा के फुटकर विक्रय हेतु 15 एवं देशी मदिरा के फुटकर विक्रय हेतु 54 लायसेंस एवं 02 एफ.एल. 3 लायसेंस जारी किये गये हैं। लायसेंसशुदा दुकानों से ही मदिरा का विक्रय किया जाता है। इसके अतिरिक्‍त कहीं भी मदिरा विक्रय की अनुमति नहीं दी गई है, अवैध मदिरा विक्रय की सूचना प्राप्‍त होने पर आबकारी विभाग/पुलिस विभाग द्वारा प्रकरण पंजीबद्ध कर कार्यवाही की जाती है।

परिशिष्ट - ''सात''

श्री प्रदीप अग्रवाल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे प्रश्‍न '' के उत्‍तर में कहा गया है कि देशी मदिरा का प्रदाय शासकीय मद्य भण्‍डार दतिया एवं विदेशी मदिरा का प्रदाय ग्‍वालियर से किया जाता है. इसका मतलब यह है कि खुले बाजार में देशी और विदेशी मदिरा की बिक्री नहीं होती है. मेरा प्रश्‍न यह है कि 2015-16 एवं 2016-17 में जो प्रकरण बनाये गये हैं, उनमें जो मदिरा पकड़ी गई है, वह उनके पास कहां से आई ? क्‍योंकि खुले बाजार में नहीं बिकती है तो यह चोरी का माल है, यह तो निश्चित है, लेकिन चोरी किसकी हुई है तो क्‍या माननीय मंत्री महोदय यह बताने का कष्‍ट करेंगे कि वह मदिरा उनके पास कहां से आई ? मेरा एक प्रश्‍न इसी में और भी है कि जिनसे वह मदिरा पकड़ी गई है, उनके पास कहां से आई तो क्‍या उन ठेकेदारों पर कार्यवाही की जायेगी?

श्री जयंत मलैया - अध्‍यक्ष महोदय, जैसा मैंने अपने उत्‍तर में बताया है कि किस वर्ष में, कितनी मात्रा में शराब पकड़ी गई है और जो शराब पकड़ी गई है, उनमें जितने लोग पकड़े गए हैं, उनके खिलाफ हमने न्‍यायालय में प्रकरण दिए हैं, उनके खिलाफ जांच हो रही है परन्‍तु जहां तक यह सवाल आता है कि किसके पास से शराब पकड़ी गई है, कई बार शराब पकड़ी भी जाती है परन्‍तु वे लोग नदी-नालों के किनारे बनाते हैं तो वे लोग पकड़े नहीं जाते हैं, उस तरह की भी अवैध शराब रहती है और जो शराब अवैध परिवहन होती है, जो पकड़ी जाती है, वह भी इसी प्रकार से रहती है, जिसमें लोग नहीं पकड़े जाते हैं.

श्री प्रदीप अग्रवाल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बात देशी और विदेशी मदिरा की हो रही है. वह खुले बाजार में नहीं बिकती है. प्रश्‍न यही है कि इस प्रकार की कार्यवाही से ठेकेदारों को संरक्षण मिलता है क्‍योंकि ठेकेदार खुद देशी और विदेशी मदिरा दूसरे लोगों से खुले बाजार में बिकवाते हैं और जब शराब पकड़ी जाती है तो उसे बेचने वाला पकड़ा जाता है जबकि दोषी ठेकेदार होता है. यदि ठेकेदार पर कार्यवाही की जाती है तो इस प्रकार के कामों पर रोक लगाई जा सकती है.

श्री जयंत मलैया - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जिस व्‍यक्ति से शराब पकड़ी जाती है. अगर वह यह बताता है कि उसका सोर्स कोई ठेकेदार है तो उसके खिलाफ भी कार्यवाही की जाती है.

श्री प्रदीप अग्रवाल - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह पूछना पुलिस का काम है. हमें प्रयास करना चाहिए कि वह बताए.

अध्‍यक्ष महोदय - प्रश्‍नकाल समाप्‍त

(प्रश्‍नकाल समाप्‍त)

12.03 बजे नियम 267-क के अधीन विषय

 

 

12.04 बजे शून्‍यकाल में उल्‍लेख

 

अध्‍यक्ष महोदय - (इन्दिरा नेशनल कांग्रेस के सदस्‍यगण के एक साथ खड़े होने पर) कृपया सब बैठ जाएं. आप सुन लें. आज बहुत विधेयक हैं. कुँवर सौरभ सिंह जी आप भी बैठ जाएं. अब मेरा श्री तरूण भनोत से अनुरोध है, मैंने कल उन्‍हें आश्‍वस्‍त किया था. आप अपनी बात बहुत संक्षेप में रखेंगे. उसके बाद आधा-आधा मिनट देंगे, 6 सदस्‍यों से ज्‍यादा नहीं देंगे.

(1)श्री तरूण भनोत (जबलपुर-पश्चिम) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने कल यहां जो मुद्दा उठाया था कि संसद में माननीय केन्‍द्रीय खाद्य मंत्री जी ने यह रिपोर्ट दी है कि मध्‍यप्रदेश में बीते 2 वर्ष में 157 लाख टन अनाज गोदामों में सड़ गया, जिसमें 53 लाख टन गेहूँ एवं 104 लाख टन चावल सरकारी गोदामों में सड़ गया. यह लोक महत्‍व का मुद्दा है.

अध्‍यक्ष महोदय, माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय ने सन् 2010 में सभी राज्‍यों को यह ताकीद दी थी कि अनाज सड़ने से अच्‍छा है कि आप उसको गरीबों में बांट दें. अगर यह 157 लाख टन अनाज, जिसका मूल्‍य 4,000 करोड़ रुपये होता है. यदि मध्‍यप्रदेश के गरीबों को बांट दिया होता तो आज हम लोग अपने घरों में बैठकर आराम से खाना खा रहे होते. मैं माननीय सदन का ध्‍यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूँ कि इसमें बहुत गंभीर भ्रष्‍टाचार हुआ है. क्‍या यह अनाज खरीदा भी गया था ? जिसका भुगतान हुआ है. इसकी सरकार को सी.बी.आई. जांच करवानी चाहिए. इसके साथ-साथ जो शराब निर्माता हैं, उनको जानकर षड्यंत्र करके इस अनाज को सड़ाया गया जिससे कि वह इसको कम मूल्‍य पर खरीद सके. इसकी जांच शासन द्वारा सी.बी.आई. के माध्‍यम से कराई जानी चाहिए.

(2) डॉ. गोविन्‍द सिंह (लहार) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अभी ग्‍वालियर चंबल अंचल में गेहूं की फसल हरी है. 25 दिनों तक गेहूं के कटने की संभावना नहीं है. लेकिन विद्युत विभाग द्वारा गांव में जबर्दस्‍ती जिन लोगों ने पैसा जमा किया है उनके भी और जिन्‍होंने पैसा जमा नहीं किया है उनके भी ट्रांसफार्मर उतारे जा रहे हैं. मेरा उर्जा मंत्री जी से अनुरोध है कि जिन्‍होंने पैसा नहीं चुकाया है उनके ट्रांसफार्मर तो आप उतार सकते हैं लेकिन सामूहिक रूप से ट्रांसफार्मर उतारे जाएंगे तो किसान का खाद, बीज, मेहनत, मजदूरी सब चली जाएगी और किसान बर्बाद हो जाएगा. मेरा अनुरोध है कि आप ऐसे लोगों के ट्रांसफार्मर न उतारें जिन्‍होंने पैसा जमा कर दिया है.

(3) श्री बहादुर सिंह चौहान (महिदपुर)-- अध्‍यक्ष महोदय, मालवा में गेहूं की खरीदी बहुत अच्‍छी चल रही है. मैंने कल भी मुद्दा उठाया था कि हजारों क्विंटल गेहूं उपार्जन केन्‍द्रों पर आ रहा है. मैं आपके माध्‍यम से सहकारिता मंत्री जी का ध्‍यानाकर्षित करना चाहता हूं कि 10 रुपए क्विंटल में बोरी भरना, छपाई करना और वेयरहाउस तक पहुंचाना यह सब संभव नहीं है. मैं आपके माध्‍यम से सहकारिता मंत्री जी से आग्रह कर रहा हूं कि लगभग 20 से 25 रुपए हम्‍माली कर दी जाए ताकि उपार्जन केन्‍द्रों में हम्‍माली सही हो सके.

(4) कुंवर सौरभ सिंह (बहोरीबंद)-- अध्‍यक्ष महोदय, कटनी में 8 नवंबर के बाद 500 और हजार के नोट बंद किए गए तब रजनीश तिवारी के नाम से एक प्रकरण सामने आया. इसमें हजारों करोड़ रुपए का बेनामी फर्जी खाते से लेनदेन हुआ. इसमें देश से बाहर पैसा भेजा गया. इसमें कई बड़े लोग इसमें संलिप्‍त हैं. मैंने इस पर स्‍थगन प्रस्‍ताव भी दिया है. मैं आपके माध्‍यम से इस पर चर्चा चाह रहा हूं. एक भिखारी के नाम पर करोड़ो रुपए बैंक में रखे गए.

श्री रामनिवास रावत-- हजारों करोड़ो रुपए की हेरा-फेरी होती है. इसमें बड़े-बड़े लोग भ्रष्‍टाचार में लिप्‍त हैं. एस.पी. गौरव तिवारी जिसने वहां एफ.आई.आर. दर्ज की थी. जो फाइलें पकड़ी गई थीं उसमें कई ऐसी कंपनियां थीं जिन कंपनियों के बड़े बडे़ लोग उसमें संलिप्‍त हैं. स्‍थगन पर ऐसे विषय पर चर्चा नहीं कराओगे तो क्‍या मतलब रह जाएगा. केवल बात आने के लिए ही बात आई है.

अध्‍यक्ष महोदय-- शून्‍यकाल में तो बात आने के लिए ही बोला जाता है. हमने आपकी बात सुन ली है. आप यहां बहुत सालों से हैं.

श्री अजय सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, बहुत सालों तक रहेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय-- यह गारंटी तो कोई नहीं ले सकता.

श्री अजय सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, आप अच्‍छी बातें करें.

श्री बाबूलाल गौर-- अध्‍यक्ष महोदय, यह वहीं रहेंगे जहां आज हैं. आगे नहीं बढ़ पाएंगे.

श्री अजय सिंह-- गौर सा‍हब, इस बार तो आपकी अंतिम विदाई होगी.

श्री रामनिवास रावत -- अध्‍यक्ष महोदय, आपकी शुभकामनाएं हमें प्राप्‍त नहीं हैं.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप बार-बार इस सदन में आएं. हमारी पूरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सौरभ सिंह जी ने जो बात उठाई है. कटनी के रजनीश तिवारी का मामला जिसके ऊपर उन्‍होंने स्‍थगन दिया है. माननीय रावत जी ने भी अपनी चर्चा में यह बात कही और स्‍थगन प्रस्‍ताव भी दिया है. यह बड़ा गंभीर मामला है. रातों-रात वहां के एस.पी. गौरव तिवारी को हटाया जाता है. एक आदमी जिसके पास खाने के पैसे नहीं हों उसके खाते में से 25 करोड़ रुपए निकाले जाते हैं. वह बेचारा थाने में तीन दिन बंद रहा. टी.आई. द्वारा कहा जाता है कि आप लिखित में दे दो कि यह पैसे तुम्‍हारे हैं नहीं तो तुम्‍हें मरवा देंगे. अध्‍यक्ष महोदय, इस तरह की घटनाएं हो रही हैं. हमारा आपसे अनुरोध है कि आप इस पर चर्चा कराने का कष्‍ट करें.

अध्‍यक्ष महोदय-- इस पर विचार करते हैं.

श्री रामनिवास रावत-- अध्‍यक्ष महोदय, एक आदमी मर गया. यह कितनी गभीर बात है. अगर आप इस पर चर्चा कराएंगे तो बड़ी कृपा होगी.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया-- अध्‍यक्ष महोदय, आज की कार्यसूची में मेरा ध्‍यानाकर्षण 55 नंबर पर है. मैं आपसे संरक्षण चाहते हुए...

श्री अजय सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, एक तरफ नरेन्‍द्र मोदी जी डिमोनेटाइजे़शन की बात करते हैं. दूसरी तरफ एक ही जगह पर करोड़ों रुपए की हेरा-फेरी की बात होती है. जब इसकी जांच हो रही थी तो रातों-रात एस.पी. को हटा दिया जाता है. इस गंभीर विषय पर आप चर्चा कराएं. हमने स्‍थगन दिया है आप कृपया इसको ग्राह्य करके चर्चा कराएं.

अध्‍यक्ष महोदय-- देख लेंगे जैसी स्थिति होगी वैसा कर लेंगे.

श्री रामनिवास रावत-- अध्‍यक्ष महोदय, संदीप बर्मन, दो आदमी थे. जिन्‍होंने यह बयान दिए कि हमसे कौन आदमी यह काम करवाता था. उसी दिन से यह गायब हैं, इनका पता नहीं है. इनकी पत्‍नी और बच्‍चे कह रहे हैं कि यह गायब हैं. (व्‍यवधान)

डॉ. गोविन्द सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, सरकार के लोग इसमें शामिल हैं.

श्री अजय सिंह--यदि आप भ्रष्टाचार को समाप्त करना चाहते हैं स्वस्थ परम्परा लाना चाहते हैं तो कम से कम चर्चा तो हो जाए. (व्यवधान)

डॉ. गोविन्द सिंह--यह पूरा पैसा भारतीय जनता पार्टी के खाते में आ गया है. इसलिए दबा रहे हैं. (व्यवधान)

श्री अजय सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, हजारों की संख्या में लोगों ने कटनी शहर और जिले को बंद किया था. एक पुलिस अधिकारी को वापस वहां रखने के लिए (व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत--सात दिन तक लगातार वहाँ आन्दोलन चला. (व्यवधान)

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया--माननीय अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया है. (व्यवधान)

श्री सुन्दरलाल तिवारी--माननीय अध्यक्ष महोदय, इस सत्र के पहले दिन ही मैंने स्थगन प्रस्ताव दिया है. (व्यवधान)

डॉ. गोविन्द सिंह--मेरा ध्यानाकर्षण भी है और स्थगन भी है. भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए आप लोग चुनकर आए हैं. किसलिए चुनाव हुआ है आपका. आप पूरा पैसा गोल कर रहे हो. करोड़ों रुपयों का भ्रष्टाचार कर रहे हो. (व्यवधान)

 

12.11 बजे गर्भगृह में प्रवेश एवं वापसी

कुंवर सौरभ सिंह, श्री सुखेन्द्र सिंह एवं श्री हरदीप सिंह डंग द्वारा गर्भगृह में प्रवेश एवं वापसी

 

कुंवर सौरभ सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, इस फर्जी लेनदेन पर मैंने स्थगन प्रस्ताव दिया है उस पर चर्चा कराएं.

(कुंवर सौरभ सिंह, श्री सुखेन्द्र सिंह एवं श्री हरदीप सिंह डंग, सदस्यगण कटनी जिले में नोटबंदी के दौरान हुए फर्जी लेनदेन पर चर्चा की मांग करते हुए गर्भगृह में आए तथा अध्यक्ष महोदय की समझाइश पर वापस अपने आसन पर गए.)

अध्यक्ष महोदय--आप लोग बड़े अनुशासित सदस्य हैं अपने स्थान पर जाकर वहीं से बात करें. (व्यवधान)

श्री रामनिवास रावत--इस विषय में आसंदी से कोई निर्देश आना चाहिए. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--सुन तो लीजिए. इसीलिए तो उनको विषय उठाने की अनुमति दी है. क्या आप लोग एक मिनट बात सुनेंगे. अभी कॉल अटेंशन के बाद में विनियोग विधेयक पर चर्चा है आप उसमें सब बात कह सकते हैं. शून्यकाल में मैंने आपको अनुमति दी. अब आप कृपया बैठ जाएं दूसरे सदस्यों को आधे-आधे मिनट, एक-एक मिनट अपनी बात रखने का अवसर दें. जो कॉल अटेंशन आए हैं वे भी महत्वपूर्ण हैं. उसके बाद में विधेयक है और फिर विनियोग विधेयक है. आपको बहुत समय मिलेगा, उसमें जो कहना है वह कहिए. बजट सत्र में स्थगन प्रस्ताव नहीं लिया जाता है, आप परम्परा देखिए.

श्री अजय सिंह--इस विषय पर हम लोग विनियोग विधेयक के दौरान चर्चा कर लें ?

अध्यक्ष महोदय--विनियोग के दौरान करिए चर्चा.

श्री अजय सिंह--ठीक है.

(5)श्री यशपाल सिंह सिसौदिया(मंदसौर)--माननीय अध्यक्ष महोदय, प्रबंध संचालक, दुग्ध महासंघ ने 13 जनवरी को एक परिपत्र जारी किया है. दुग्ध संघ और दुग्ध सोसायटियां जो संभागीय स्तर की हैं उनके रुट पर दुग्ध कलेक्शन का काम प्रबंध संचालक, दुग्ध महासंघ करेगा. उसमें एनजीओ, एजेंसियों को आमंत्रित किया जा रहा है. मैं इस विषय पर माननीय मंत्री महोदय से वक्तव्य देने की मांग करुंगा.

(6)नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)--माननीय अध्यक्ष महोदय, पंजाब सरकार ने लालबत्ती कल्चर समाप्त किया है, उत्तर प्रदेश ने भी उसका अनुकरण किया है. मैं आपके माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री और पूरे सदन से प्रार्थना करना चाहता हूँ कि मध्यप्रदेश में भी लालबत्ती कल्चर समाप्त किया जाए. इससे एक नई परम्परा स्थापित होगी. क्या जरुरत है लालबत्ती की इसको समाप्त किया जाए.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी का माईक चालू है वे कुछ कहना चाह रहे हैं. (व्यवधान)

श्री अजय सिंह--मैं आज से ही मेरी लालबत्ती वापस करता हूँ. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--माननीय मंत्री जी आपको कुछ कहना है क्या ? (व्यवधान)

श्री अजय सिंह--मैं लालबत्ती अपनी गाड़ी में नहीं लगाता हूँ और न ही लगाउंगा. आप भी अनुकरण करें. (व्यवधान)

पंचायत एंव ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय नेता प्रतिपक्ष जी ने जो सुझाव दिया है कि लालबत्ती कल्चर मध्यप्रदेश में भी बंद होना चाहिए. माननीय अध्यक्ष महोदय, वे इतने साल तक सत्ता में रहे, हुकूमत में रहे. मैं इनसे पूछना चाहता हूँ कि यह विचार इसके पहले तक इनके दिमाग में क्यों नही आया ? आज कह रहे हैं कि सभी लोग लालबत्ती न लगाएं लेकिन इसके पहले आपके विवेक में, आपके विचार में, आपके आचरण में यह बात क्यों नहीं आयी ?

श्री अजय सिंह--मैं पांच साल तक मंत्री था, कभी भी लालबत्ती की गाड़ी में नहीं चला हूँ.

अध्यक्ष महोदय--यह विषय अब यहीं समाप्त करें. माननीय प्रतिपक्ष के नेता जी ने अपनी बात कह दी है. माननीय मंत्री जी आप कुछ कहना चाहते हैं क्या ?

राज्‍यमंत्री, सहकारिता (श्री विश्‍वास सारंग)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यशपाल सिंह जी ने दुग्‍ध संघ के विषय में जो मामला उठाया है, मैं उन्‍हें विश्‍वास दिलाता हूं कि मध्‍यप्रदेश सहकारी सोसायटी अधिनियम, 1916 एवं उसके अंतर्गत बने, नियम व उपविधियों के अंतर्गत इस पूरे मामले में परीक्षण करवा लिया जाएगा और इसके बाद जो भी उचित कार्यवाही होगी, वह की जायेगी.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया- धन्‍यवाद, मंत्री जी.

श्री तरूण भनोट- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह लोकहित का मुद्दा है. चार हजार करोड़ रूपये का अनाज बर्बाद हो गया. आप हमें इसका जवाब दिलवाइये. ..(व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय- हम जवाब देने के लिए किसी को बाध्‍य नहीं कर सकते हैं. बिना नोटिस के किसी को बाध्‍य नहीं किया जा सकता है. यशपाल सिंह जी की बात पर पहले से ही नोटिस दिया गया था.

श्री सचिन यादव- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खरीदी केंद्रों पर गेंहू का उपार्जन हो रहा है. ..( व्‍यवधान)..

अध्‍यक्ष महोदय- सचिन जी, आप बैठ जाईये. मधु भगत जी को बोलने दीजिए, आपके ही पक्ष के सदस्‍य हैं.

श्री तरूण भनोट- अध्‍यक्ष महोदय, हमारी शून्‍यकाल की सूचनाओं पर भी जवाब दिलवाइये या फिर यशपाल सिंह जी को प्राप्‍त जवाब कार्यवाही से विलोपित करवा दीजिए.

अध्‍यक्ष महोदय- उनको भी जवाब नहीं मिला है. किसी ने उनका जवाब नहीं सुना. ..( व्‍यवधान).. तरूण जी, आप बैठ जाईये.

(7) श्री मधु भगत (परसवाड़ा)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बालाघाट जिले के थाना रूज्‍जर अंतर्गत ग्राम उकवा के सरपंच संजय मसकोले, उप सरपंच संजीव अग्रवाल, सचिव भजन वलके के विरूद्ध थाना रूज्‍जर एवं पुलिस अधीक्षक बालाघाट के समक्ष की गई लिखित शिकायत जिसमें स्‍टाम्‍प ड्यूटी चोरी, पंचायत में गबन एवं अनियमितताओं की शिकायत पर तीन माह बीत जाने के उपरांत भी अपराध दर्ज नहीं किया गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. साक्ष्‍य एवं तथ्‍यों को दृष्टिगत रखते हुए यह मामला भारतीय दण्‍ड प्रक्रिया की संहिता धारा 420, 467 के अंतर्गत दण्‍डनीय अपराध है. अत: आप इस मामले की उच्‍च स्‍तरीय जांच करवाकर दोषियों के विरूद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही करें.

(8) श्री रजनीश सिंह (केवलारी)- अध्‍यक्ष महोदय, कल खैरीटोला में एक लाइनमैन हेल्‍पर की दुर्घटना में मौत हो जाती है. उसकी मौत का कारण यह है कि उसने सब स्‍टेशन से दो घंटे का परमिट लिया था, लेकिन स्‍टेशन से उसके पूर्व ही बिजली चालू कर दी गई. लाईनमैन की पर्याप्‍त व्‍यवस्‍था न होने कारण यह दुर्घटना घटी है. मेरा आपके माध्‍यम से मंत्री जी से निवेदन है कि उस हेल्‍पर के परिवार को उचित मुआवजा मिलना चाहिए और इस प्रकरण की जांच होनी चाहिए. धन्‍यवाद.

(9) श्री प्रताप सिंह (जबेरा)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दमोह जिले के नौरादेही अभ्‍यारणय का विस्‍तार तीन जिलों में आता है. वन विभाग के माध्‍यम से तीनों जिलों- नरसिंहपुर, सागर और दमोह के कलेक्‍टरों का पत्र भेजा गया है. पत्र में कहा गया है कि वहां से विस्‍थापित होने वाले करीब सौ गांवों में काम रोक दिया जाए. इससे उन गांवों के लोगों में काफी रोष है. मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहूंगा कि वहां तत्‍काल काम शुरू करवाये जायें, जिससे वहां के लोगों को रोजगार मिल पाये.

(कुछ माननीय सदस्‍यों द्वारा अधिकारी दीर्घा में जाकर चर्चा करने पर.)

अध्‍यक्ष महोदय- माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि वे सभी अपने-अपने स्‍थान पर जाकर बैठें.

(10) श्री गिरीश भंडारी (नरसिंहगढ़)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे क्षेत्र के बहुत सारे गांवों में बिजली काट दी गई है. जिसके कारण 10वीं और 12वीं की परीक्षा देने वाले बच्‍चों को बहुत ज्‍यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. मेरा निवेदन है कि कम से कम बच्‍चों की परीक्षा तक उन गांवों में बिजली चालू करवाई जाये.

(11) श्रीमती नीना विक्रम वर्मा (धार)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैंने इंदौर-अहमदाबाद लाईन के संबंध में ध्‍यानाकर्षण लगाया था. वहां पिछले 5 सालों से काम बंद पड़ा है. जिसके कारण वहां लगातार दुर्घटनायें हो रही हैं. वहां कोई मार्क भी नहीं है. मेरा आपके माध्‍यम से पी.डब्ल्‍यू.डी. मंत्री जी से निवेदन है कि वे उस जगह की मरम्‍मत करवा दें या कम से कम वहां मार्किंग करवा दें, जिससे वहां हो रही लगातार दुर्घटनाओं को रोका जा सके. धन्‍यवाद.

(12) श्री दिनेश राय (सिवनी)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, सिवनी नगर पालिका में 62.5 करोड़ रूपये से ज्‍यादा की नल-जल योजना चल रही है. इस योजना में भारी मात्रा में भ्रष्‍टाचार चल रहा है. मेरा नगरीय विभाग के मंत्री जी से आग्रह है कि जितने भी निर्माण कार्य वहां चल रहे हैं, उनकी जांच की जाए. जिससे आक्रोशित जनता को न्‍याय मिल सके और भ्रष्‍टाचारियों के ऊपर कार्यवाही हो सके.

(13) डॉ.रामकिशोर दोगने (हरदा)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे हरदा जिले में नल-जन योजना गांवों में संचालित है. वहां नल-जल योजना की बिजली काट दी गई है जबकि शासन का निर्देश है कि यदि गांव वाले बिल नहीं भरते हैं तो जिला पंचायत उस बिल को भरेगी. इसके बावजूद वहां की बिजली काट दी गई है. इसकी जांच की जानी चाहिए. यह एक जनहित का मामला है इसलिए तुरंत बिजली सप्‍लाई को चालू करवाया जाए.

(14) श्री सुखेन्‍द्र सिंह (मऊगंज)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरी विधान सभा क्षेत्र के हनुमना विकासखंड के अंतर्गत सरदमन एवं रघुनाथगढ़ में मनमाने क्रेशर संचालित होने की वजह से वहां के आस-पास के कई गांव प्रदूषित पर्यावरण में रहने को मजबूरी हैं और काफी परेशानी में हैं. घोघम रोड, प्रतापगंज रोड पूरी तरह से नष्‍ट हो गया है. आज लोगों का रास्‍तों से निकलना और जीना दूभर हो गया है. इस विषय पर हमने ध्‍यानाकर्षण एवं शून्‍यकाल की सूचना पूर्व में भी लगाई थी, लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है. कार्यवाही न होने के कारण कल रात क्रेशर मालिक एवं ग्रामीणों के बीच विवाद हो गया, जिसमें काफी मारपीट भी हुई है. इसलिए मैं इस विषय पर आपका ध्‍यान आकर्षित करना चाहता हूं ताकि इस पर कार्यवाही हो सके. (15) श्री सचिन यादव(कसरावद)-- माननीय अध्यक्ष जी, हमारे खरगौन जिले में जो गेहूँ का उपार्जन हो रहा है, वहाँ पर खरीदी केन्द्रों में किसानों का जो भुगतान है, वह उनकी बिना सहमति के, उनके ऋण खाते में, उनका समायोजन किया जा रहा है. इसके कारण किसानों में भारी आक्रोश है.

(16) श्री उमंग सिंघार(गंधवानी)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, आज के एक प्रश्न में सरकार ने जो जवाब दिया है, पूरे देश के अन्दर केशलेस व्यवस्था को माननीय नरेन्द्र मोदी जी चला रहे हैं, लेकिन मैंने आज एक सवाल किया था कि उसमें प्रश्न में जवाब दिया है कि देशी शराब और विदेशी शराब की दुकानों पर...

अध्यक्ष महोदय-- यह कोई विषय नहीं है. श्री हर्ष यादव कृपया अपनी बात कहें.

श्री उमंग सिंघार-- शराब को रोकने के लिए, कम करने के लिए केशलेस व्यवस्था की जाए. लेकिन सरकार केशलेस व्यवस्था नहीं चाहती. सरकार शराबबंदी भी नहीं चाहती है. आज सरकार ने जवाब दिया, रिकार्ड पर है.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, उस प्रश्न में मैंने भी पढ़ा है कि जयन्त मलैया जी ने उत्तर दिया है कि कोई शराब की दुकान बन्द नहीं होगी. यह तय कर दें कि एक तरफ मुख्यमंत्री जी कह रहे हैं कि नर्मदा तट पर, 5 किलोमीटर पर, आप ही के प्रश्न के उत्तर में 56 नंबर....

अध्यक्ष महोदय-- वैसे तो प्रश्न पर यहाँ चर्चा नहीं होती पर चूँकि माननीय नेता प्रतिपक्ष बोल रहे हैं इसलिए उनको अनुमति है.

श्री अजय सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, ये नीति तय कर दें कि विदेशी शराब की दुकानें बन्द हो रही हैं कि नहीं हो रही हैं. दूसरी बात, हमारे पूरे प्रदेश में, माननीय तरूण भनोत जी ने कही है....

अध्यक्ष महोदय-- इस पर चर्चा नहीं होती. पर अब चूँकि प्रतिपक्ष के नेता जी बोल रहे हैं. उमंग सिंघार जी ने गलत विषय उठाया. कृपा करके आगे इसका ध्यान भी रखें. आपका विषय आ गया. मलैया जी आप कह दीजिए.

श्री अजय सिंह-- अध्यक्ष महोदय, तरूण भनोत जी ने जो बात कही है कि केन्द्र सरकार की रिपोर्ट में आया है...

अध्यक्ष महोदय-- वह विषय भी आ चुका है.

श्री अजय सिंह-- आ चुका है, उस विषय पर भी सरकार कोई संज्ञान लेकर कोई उत्तर देगी? करोड़ों रुपये का खाद्यान्न खत्म हो गया.

अध्यक्ष महोदय-- अब नहीं, आपने जो पहले विषय उठाया था, उसका उत्तर देना चाहते थे. श्री मुकेश नायक जी....

श्री मुकेश नायक-- अध्यक्ष जी, आपने पहले हर्ष यादव जी का नाम बोला था.

अध्यक्ष महोदय-- हर्ष यादव जी आधा मिनट में बोल दीजिए.

(17) श्री हर्ष यादव(देवरी)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सागर महापौर का ऑडियो वायरल हुआ था, वित्तीय अनियमितताओं का, कदाचार का आरोप लगा था, सरकार ने उसके वित्तीय पावर भी ले लिए थे. मगर अभी भी उसको पद से नहीं हटाया गया है.

माननीय अध्यक्ष महोदय, एक बहुत बड़ा मामला आज संज्ञान में आया है, राजू आश्रय योजना में बहुत बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार हुआ है. 8 स्लम बस्तियों में काम होना था लेकिन एक ही जगह कार्य कराया गया है और बहुत घटिया निर्माण कार्य हुआ है, उसकी जाँच करवाई जाए.

अध्यक्ष महोदय-- मुकेश नायक जी, आप कृपया बोलिए, आप ही ने उनको टाइम दिलवाया था.

(18) श्री मुकेश नायक(पवई)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, सागर नगर निगम के द्वारा बिना नियम, बिना प्रक्रिया का पालन करते हुए, अराजक तरीके से, मनमाने एवं तानाशाहपूर्ण तरीके से, बिना नोटिस दिए, सैकड़ो दुकानें, सैकड़ों घरों को, गिराने की कार्यवाही की जा रही है और वर्तमान में सागर मेयर के द्वारा इस्तीफे की चर्चा है, जिसके कारण नगर निगम में कोई नेतृत्व नहीं होने के कारण अधिकारी मनमाने पूर्ण तरीके से व्यवहार कर रहे हैं. इस पर नियंत्रण होना चाहिए. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- हरदीप सिंह जी, आप बैठ जाएँ. पत्रों का पटल पर रखा जाना, श्री जयन्त मलैया...

 

 

 

12. 19 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना.

 

(ख) कंपनी अधिनियम, 2013 (क्रमांक 18 सन् 2013) की धारा 395 की उपधारा (1) (ख) की अपेक्षानुसार -

(i) मध्‍यप्रदेश वेंचर फाइनेंस लिमिटेड की प्रथम वार्षिक रिपोर्ट और लेखा वित्‍तीय वर्ष 2015-2016, तथा

(ii) मध्‍यप्रदेश वेंचर फाइनेंस ट्रस्‍टी लिमिटेड की प्रथम वार्षिक रिपोर्ट और लेखा वित्‍तीय वर्ष 2015-2016, एवं

(ग) मध्‍यप्रदेश वेट अधिनियम, 2002 (क्रमांक 20 सन् 2002) की धारा 71 की उपधारा (5) की अपेक्षानुसार -

(i) एफ-ए-3-11-2015-1-पांच (19), दिनांक 31 मार्च, 2015,

(ii) एफ-ए-3-60-2015-1-पांच (02), दिनांक 02 जनवरी, 2016,

(iii) एफ-ए-3-53-2015-1-पांच (38), दिनांक 01 दिसम्‍बर, 2015,

(iv) एफ-ए-3-58-2015-1-पांच (44), दिनांक 17 दिसम्‍बर, 2015, तथा

(v) एफ-ए-3-60/2015-1-पांच (11), दिनांक 22 जनवरी, 2016

 

पटल पर रखता हॅूं.

 

 

(2) मध्‍यप्रदेश स्‍टेट इंडस्ट्रियल डेव्‍हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड, भोपाल का 48वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा वर्ष 2013-2014

 

संसदीय कार्य मंत्री (डॉ. नरोत्‍तम मिश्र) -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं, कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 619-क की उपधारा (3) (ख) की अपेक्षानुसार मध्‍यप्रदेश स्‍टेट इंडस्ट्रियल डेव्‍हलपमेंट कार्पोरेशन लिमिटेड, भोपाल का 48 वां वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा वर्ष 2013-2014 पटल पर रखता हॅूं.

 

 

 

12.27 बजे ध्‍यान आकर्षण

 

श्री मुकेश नायक (पवई) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, तीन साल में मेरा एक ध्‍यानाकर्षण 92 वें नंबर पर आया. अगर हम सीनियर विधायकों का पूरे कार्यकाल में एक भी ध्‍यानाकर्षण विधानसभा में नहीं आएगा तो हमारे विधानसभा सदस्‍य बनने का औचित्‍य क्‍या रह जाएगा?

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आपने बहुत सदाश्‍यता दिखाते हुए और विधानसभा की जो गरिमा है उसको स्‍थापित करते हुए शायद विधानसभा के इतिहास में 58 ध्‍यानाकर्षण सूचनाऍं पहली बार ली हैं. इस कारण से मैं आपको बहुत धन्‍यवाद देता हॅूं क्‍योंकि इसके उत्‍तर माननीय सदस्‍यों के लिए मिलेंगे और सदस्‍य चाहें तो उसके बाद उस पर कार्यवाही कर सकते हैं. विधान सभा के नियम और प्रक्रिया है. संसदीय समितियॉं हैं उसके अनुसार कार्यवाही कर सकते हैं.

डॉ. गोविन्‍द सिंह (लहार) -- यह तो परंपरा है.

श्री गोपाल भार्गव -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपको बहुत धन्‍यवाद देता हॅूं. पहली बार 9 पेज की कार्यसूची आपने सारे विषयों के महत्‍व को दृष्टिगत रखते हुए निकाली है. यह उल्‍लेखनीय है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- माननीय मंत्री जी, ऐसा नहीं है. अनेक बार ऐसा हो चुका है. श्री रोहाणी जी के समय में 61 थे. रिकार्ड निकाल लीजिए, 61 सूचनाएं आई थीं. शुक्रवार के दिन यह चर्चा नहीं होती.

कॅुंवर विजय शाह -- 58 सूचनाएं कभी नहीं आईं.

श्रीमती ऊषा चौधरी (रैगांव) -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, महिला सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है. महिला दिवस के अवसर पर आपने मुझसे वादा किया था कि हम आपका ध्‍यानाकर्षण लेंगे. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कृपया सुन लीजिए.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(1) भिण्ड जिले में रेत का अवैध उत्खनन होना

डॉ. गोविंद सिंह(लहार),(सर्वश्री महेन्द्र सिंह कालूखेड़ा, आरिफ अकील)- माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरी ध्यान आकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है-

 

 

 

 

 

 

 

 

 

जल संसाधन मंत्री (डॉ. नरोत्तम मिश्र)-- माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने कहा कि न तो सड़कें टूटी हैं और न अवैध उत्‍खनन हो रहा है, 500 करोड़ रुपयों की चोरी करवाओ और 3 करोड़ रुपये पकड़ लो, यह क्‍या है ? और आप बोल रहे हैं कि यह सही नहीं है, अगर सही नहीं है तो आप मा पिताम्‍बरा की कसम खाकर कह दो कि अवैध उत्‍खनन नहीं हो रहा है, सड़कें नहीं टूटी हैं, हम अपना प्रश्‍न नहीं करेंगे. बस इसका ही जवाब दे दो, हमें प्रश्‍न नहीं करना है. (हंसी)

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- अध्‍यक्ष जी, माँ पिताम्‍बरा की कसम ?

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, यहाँ पर कसम नहीं खाई जाएगी, यहाँ तो एक ही चीज की शपथ ली जाती है जो सदस्‍यता के समय ली जाती है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, यह सदन भी सवा सात करोड़ जनता का पवित्र मंदिर है. आपको सब पता है आपके यहाँ भी हो रहा है, हम इसे रोकना चाहते हैं, हम चाहते हैं कि शासन को भी लाभ हो. सड़कें नहीं थीं, हमने बड़ी मुश्‍किल से श्रीमान जी से जैसे-तैसे लड़-झगड़ कर सड़कें बनवाईं और जो थोड़ी-बहुत सड़कें बनवा पाए, वे भी चकनाचूर हो गईं, हमें कष्‍ट इस बात का है.

अध्‍यक्ष महोदय, आप विश्‍वास नहीं करेंगे, दस-बारह वर्षों में हमारे करीब 72-73 प्रश्‍न विधान सभा में आ चुके हैं, हमारे 17 ध्‍यानाकर्षण लग चुके हैं, लेकिन हम पूरी तरह असफल हो चुके हैं, इसलिए हम आपकी शरण में आए हैं और हमने निवेदन किया है. मैं बताना चाहता हूँ कि वहाँ के खनिज अधिकारी, भदकारिया ने दीपक यादव से एग्रीमेंट कर लिया और अपने 15 ट्रक ड्राइवर के नाम से यूपी में चलवा रहा है, वह फ्री ले जाता है, एक ट्रक रेत कानपुर और उरई में 80 हजार रुपये की बिक रही है. वह प्रतिदिन चला रहा है, हमारे पास सी.डी. रखी है, सी.डी. में वह कह रहा है कि मेरे नहीं हैं, मेरा ड्राइवर चलवा रहा है. जब मैंने उससे कहा कि तुम रोज कहाँ तक चोरी करते हो तो बोला कि मेरे नहीं हैं वे ड्राइवर के हैं. लोग एफिडेविट दे रहे हैं, खनिज अधिकारी, भदकारिया, राजस्‍व के छोटे स्‍तर के अधिकारी और पुलिस वाले, एस.डी.ओ.पी. लहार मिलकर हमारे क्षेत्र को बिल्‍कुल लुटवा रहे हैं. मंत्री जी, हम आपसे चाहते हैं, अगर नहीं कर रहे हैं तो हमारी बात पर आप विश्‍वास मत करो, वैसे तो आपको सब सच्‍चाई पता है.

श्री रामनिवास रावत -- अवैध उत्‍खनन डबरा में भी तो होता है.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- अब वे भी क्‍या करें, मजबूरी है. मेरे पास स्‍वदेश अखबार है जो कि आपके ही संगठन आर.एस.एस. का प्रकाशन है, इनमें 25-30 खबरें हैं, प्रतिदिन की हैं इसमें लिखा है कि बेशर्मी की हद, आखिर कब तक रहेगी दलाली, प्रशासन बताए और क्‍या प्रमाण चाहिए अवैध खनन के.

अध्‍यक्ष महोदय -- अखबार पढ़ा नहीं जाता, आप वैसे ही रेफर कर दीजिए.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- इस पेपर में 30 दिन की 30 खबरें हैं लगातार, यह ग्‍वालियर से निकलता है, आपके घर दतिया भी पहुँचता है. मेरे पास इस स्‍वदेश अखबार का पूरा बण्‍डल है, अगर आप कहें तो आपको भेंट कर सकता हूँ. पटल पर तो नहीं रखूंगा आप कहें तो आपके घर पर पहुँचा दें. आप दतिया में लुटवाओ, हमें कोई दिक्‍कत नहीं है, मैं आपसे पूछना चाहता हूँ कि क्‍या आप लहार में अवैध उत्‍खनन बंद करा दोगे ? और क्‍या खनिज अधिकारी, भदकारिया और एस.डी.ओ.पी. लहार के विरुद्ध कठोर कार्यवाही करोगे ?

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अवैध उत्‍खनन बंद कराएंगे और अधिकारी दोषी होंगे तो उन पर कार्यवाही करेंगे.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- भदकारिया के खिलाफ, जो मुख्‍य रूप से करा रहा है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- आप हमें सी.डी. दे दो, हम पूरी सी.डी. की जाँच करा लेंगे.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- अखबारों में पूरी सच्‍चाई लिखी है, यह अखबारों का बण्‍डल भी आपको दे दूँ ?

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- बिल्‍कुल दे दो.

(डॉ. गोविंद सिंह, सदस्‍य द्वारा स्‍वदेशी अखबारों का बण्‍डल मंत्री जी को सौंपा गया)

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- सी.डी. और एफिडेविट दे देंगे आपको.

श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा -- अध्‍यक्ष महोदय, पलपटोरी गाँव में जून में खनन माफिया ने अवैध खनन किया, उन गाड़ियों को पकड़ा गया और पुलिस पर हमला करके उन गाड़ियों को छुड़ाया गया और उन्‍हें छुड़ाकर जो करोड़ों रुपयों की अवैध रूप से भूमि कब्‍जे में कर रखी है वहाँ रखा गया. 4 आदमियों पर प्रकरण दर्ज किया गया. दो फरार घोषित किये गये, उनको अभी तक आठ महीने से गिरफतार नहीं किया गया है. आपने उल्‍टे खनन माफिया के खिलाफ जिस पर कार्यवाही की गई और जिस पर दस करोड़ का जुर्माना किया गया है, उस खनन माफिया के ऊपर कार्यवाही करने वाले खनिज अधिकारी तक का स्‍थानांतरण कर दिया है. आपने जिस प्रकार से श्री गौरव त्रिपाठी का सतना से स्‍थानांतरण किया उसी प्रकार इस ईमानदार अधिकारी का भी जिसने खनन माफिया पर हाथ डाला, आपने उसका स्‍थानांतरण कर दिया है. क्‍या आप इस स्‍थानांतरण को रोकेंगे और क्‍या उन दो लोगों को गिरफतार करेंगे ? वह केवल खनन माफिया नहीं है, वह भू-माफिया भी हैं और राशन माफिया भी है. मैंने अशोक नगर जिले के बारे में दिया है.मैंने भिंड के बारे में नहीं दिया है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - आप बात कर सकते हैं, मैं उस पर आपत्ति नहीं उठा रहा हूं.

श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा - आपकी तैयारी होनी चाहिए.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - बिल्‍कुल होनी चाहिए, आप सच कह रहे हैं. मैं यह भी कहना चाहता हूं कि जिस पर भी केस रजिस्‍टर्ड हैं, उनको हम गिरफ्तार करवायेंगे यह हमारी जिम्‍मेदारी भी है.

श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा - वह लोग आठ महीने से गिरफ्तार क्‍यों नहीं हुए हैं और वह खुलेआम घूम रहे हैं. यह मेरी तकलीफ है कि वह खुलेआम घूम रहे हैं, झंडा वंदन कर रहे हैं, बी.जे.पी. के स्‍टेट अध्‍यक्ष के साथ उप चुनाव में चुनाव प्रचार कर रह हैं. आठ महीने हो गये हैं, उनके ड्राईवर को गिरफ्तार कर लिया और विभिन्‍न गंभीर धाराओं में उनके ऊपर प्रकरण दर्ज हैं. लूट के प्रकरण दर्ज हैं, डकैती के प्रकरण दर्ज हैं, उस भू-माफिया और खनन माफिया ने शासकीय कर्मचारियों पर हमला किया और हमला करके वाहन छुड़ा लिये. ऐसे मामले में आप गिरफ्तारी नहीं करेंगे और खनन अधिकारी का आपने स्‍थानांतरण कर दिया, उसकी जान को खतरा है.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी उत्‍तर दे दीजिए, फिर आगे बढ़ें.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, किसी की भी जान को खतरा नहीं होने देंगे, तत्‍काल कार्यवाही करेंगे.

श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तो गलत बात है.

अध्‍यक्ष महोदय - वह गिरफतारी करने का कह तो रहे हैं.

श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आठ महीने से वह फरार हैं और उनमें से एक ड्राईवर को गिरफतार कर लिया है. वह भू-माफिया ही नहीं है, राशन माफिया है और खनन माफिया है. जब माननीय मंत्री जी संसद का चुनाव लड़े थे, तब वह मंत्री जी के साथ चुनाव में काम कर चुका है, इसलिए आपका साफ्टकार्नर है. आप उसे गिरफतार नहीं कर रहे हैं. वहां के प्रभारी मंत्री और मुख्‍यमंत्री जी खनन माफिया को प्रदेश में संरक्षण दे रहे हैं. यह एक उदाहरण है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत गंभीर मामला है. इसमें आप उत्‍तर दिलवाईये कि आठ महीने से गिरफ्तार क्‍यों नहीं हुए ?

अध्‍यक्ष महोदय - वह उत्‍तर दे तो रहे हैं.

श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, खनन अधिकारी को जिसने गिरफ्तार किया था और जिसको जान से मारने की धमकी दी, उसका स्‍थानांतरण कर दिया.

अध्‍यक्ष महोदय - आपका प्रश्‍न आ गया है, अब रिपीटेशन हो रहा है. माननीय मंत्री जी आप बोलें.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं उसको जानता भी नहीं हूं और मेरा उसने कोई प्रचार भी नहीं किया है.

अध्‍यक्ष महोदय - माननीय मंत्री जी आप तो सीधा उत्‍तर दे दीजिए.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जैसा सम्‍माननीय सदस्‍य ने कहा है उस पर सात बार पुलिस ने दबिश भी दी है और हम तत्‍काल उस पर कार्यवाही भी करेंगे.

अध्‍यक्ष महोदय - श्री के.पी.सिंह जी आप सिर्फ एक प्रश्‍न पूछिए.

श्री के.पी.सिंह (पिछोर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, क्‍या माननीय मंत्री जी यह बता देंगे कि क्‍या बहती हुई नदी में कोई खनन करने वाला पुल बना सकता है यह किसी नियम में है या नहीं है ?

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, अवैध माईनिंग पर श्री के.पी.सिंह जी प्रश्‍न कर रहे हैं तो पहले मैं उनको प्रणाम कर लूं, क्‍यों‍कि मेरी इच्‍छा हो रही थी कि उनको प्रणाम कर लूं. दूसरा बात यह है कि खनन करने वाला पुल बना सकता है कि नहीं तो मैं टेक्‍नीकल आदमी नहीं हूं.

श्री के.पी.सिंह - आप टेक्‍नीकल आदमी नहीं है तो यह तो बता दें कि यह नियम में है कि नहीं है ?

अध्‍यक्ष महोदय - यह ध्‍यानाकर्षण में कहां उद्भूत हो रहा है ?

श्री के.पी.सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह अवैध उत्‍खनन से ही संबंधित है. मैं क्‍लीयर आपको बता देना चाहता हूं कि आपके यहां भी नर्मदा नदी है और तमाम लोग उस नदी की धारा पर पुल बना देते हैं और पानी को डायवर्ट करके दूसरे किनारे से कर देते हैं, जिससे दूसरी तरफ से कटाव चालू हो जाता है और वह चौड़ा हो जाता है. मेरा यह कहना है कि ऐसा कहीं भी नियम में नहीं है. मैं यह आपकी जानकारी के लिये बता देना चाहता हूं कि कहीं भी यह प्रावधान नहीं है कि किसी नदी की धार को रोककर कोई बांध बना सके और उसके नीचे से फिर सारी की सारी रेत निकाले. क्‍या पूरे मध्‍यप्रदेश में जहां-जहां ऐसे पुल बनाकर अवैध उत्‍खनन हो रहा है उसके रोकने की कार्यवाही आप करेंगे, उन बांधों को मिटाने का काम करेंगे ?

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जरूर करेंगे.

श्री अजय सिंह (नेता प्रतिपक्ष) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा भी ध्‍यानाकर्षण था आपने कहा था इसी विषय पर ले लेते हैं. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं 2011 में सरकार के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाया था. छ: साल से ऊपर हो गये हैं, रेत के अवैध उत्‍खनन की चर्चा बहुत हुई, ढाई घण्‍टे मैंने बोला था और माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने भी बोला था. ज्‍यादा समय तक रेत अवैध उत्‍खनन की चर्चा हुई. साढे़ छ: साल बाद वही अवैध उत्‍खनन की चर्चा माननीय डॉ.गोविन्‍द सिंह जी और श्री महेन्‍द्र सिंह कालूखेड़ा जी कर रहे हैं, और चर्चा में सत्‍ता पक्ष के लोग भी शामिल हैं कि अवैध उत्‍खनन हो रहा है. माननीय मंत्री महोदय अभी उत्तर दे रहे थे कि शासकीय जमीन में गिट्टी के लिए लीज पर देने का प्रावधान है. मैं आपको शासन की नियमावली नियम 7(1), 7(2) के अनुसार पत्थर गिट्टी रोड मेटल की खदानें शासकीय भूमि पर केवल नीलामी से दी जाती हैं. बड़े चतुराई से उस पर एक शब्द का हेरफेर कर दिया. एक जगह गिट्टी लिख दी, एक जगह मेटल लिख दिया. अध्यक्ष महोदय, आप भी जानते हैं कि गिट्टी और मेटल, एक ही चीज है. यदि शासकीय जमीन पर इसकी नीलामी होती तो सरकार को सिर्फ दो जगह इंदौर और खंडवा में करीब 600 करोड़ रुपए का फायदा होता. लेकिन यह बारीक खेल कर रहे हैं. रेत के अवैध उत्खनन की चर्चा तो छोड़ दें. अध्यक्ष महोदय, यह किस तरह से हो रहा है, आपके जिले में, आपके क्षेत्र में मां नर्मदा मैया की आप बात करें.

अध्यक्ष महोदय - आप भिण्ड जिले की बात करें.

श्री अजय सिंह - अध्यक्ष महोदय, मुझे यह पीड़ा है और आपको भी पीड़ा है, पूरा सदन जानता है कि आपको क्या पीड़ा है?

डॉ. नरोत्तम मिश्र - अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न उद्भूत नहीं होता है.

श्री यादवेन्द्र सिंह - अध्यक्ष महोदय, होशंगाबाद की बात कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय - यह भिण्ड जिले का मामला है.

श्री अजय सिंह - अध्यक्ष महोदय, मुझे उत्तर मिले, न मिले. यह सरकार की नीयत साफ है कि जब तक शिवराज सिंह की सरकार रहेगी, एक तरफ मां नर्मदा की बात करेंगे और दूसरी तरफ उसी नर्मदा नदी पर अवैध रेत उत्खनन करेंगे. क्या इस पर आप उत्तर देना चाहेंगे?

अध्यक्ष महोदय - श्री सुदर्शन गुप्ता, अपना ध्यानाकर्षण पढ़ें.

 

 

 

12.46 बजे

बहिर्गमन

इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगण द्वारा

शासन के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन

 

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) - अध्यक्ष महोदय, अवैध उत्खनन की बात को लेते हुए सरकार उस पर गंभीर नहीं है, इसलिए हम सदन से बहिर्गमन करते हैं.

(नेता प्रतिपक्ष श्री अजय सिंह के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यों द्वारा भिण्ड जिले में रेत का अवैध उत्खनन होने पर प्रस्तुत शासन के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया.)

 

 

 

(2) इंदौर शहर में अतिरिक्त फायर स्टेशन खोला जाना

 

श्री सुदर्शन गुप्ता (इन्दौर-1) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री (श्रीमती माया सिंह ) - अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

श्री सुदर्शन गुप्ता -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मंत्री जी ने अपने जवाब में ही यह स्वीकार किया है कि एक ही क्षेत्र में 2016 में 39 दुर्घटनाएं हुई हैं. दो फायरब्रिगेड पश्चिम क्षेत्र में एक मध्य क्षेत्र में है. मेरा ध्यानाकर्षित करने का उद्देश्य यह था कि पूर्वी क्षेत्र में कोई भी फायर स्टेशन नहीं है. पूर्वी क्षेत्र काफी फैला हुआ है, यहां पर मॉल है, हाई राईज इमारतें हैं, हजारों की संख्या में मल्टियां हैं, रिंग रोड़ हैं, बायपास है तथा 100 से अधिक मेरिज गार्डन हैं. अगर वहां पर दुर्घटना होती है तो पश्चिम क्षेत्र एवं मध्य क्षेत्र से यहां पर फायरब्रिगेड आने में काफी विलंब हो जाता है, क्योंकि पूरा व्यावसायिक क्षेत्र बीच में आता है. भीड़‑भड़ाके के क्षेत्र हैं, संकीर्ण मार्ग हैं वहां से गुजरते हुए पूर्वी क्षेत्र से जब फायरब्रिगेड आती हैं तो काफी देर हो जाती है इससे बहुत अधिक आर्थिक हानि होती है. इसी आवश्यकता को देखते हुए इन्दौर विकास प्राधिकरण ने पूर्वी क्षेत्र में एमआर 11 पर भूमि फायर स्टेशन के लिये आरक्षित कर रखी है. मंत्री जी से मैं पूछना चाहता हूं कि आरक्षित भूमि पर फायर स्टेशन बनवाने की घोषणा करेंगी ?

नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री (श्रीमती माया सिंह)--माननीय अध्यक्ष महोदय, इसमें कोई दो राय नहीं है कि इन्दौर हमारी कमर्शियल सिटी है जिस तरह के औद्योगिक क्षेत्र, हाईराईज बिल्डिंग्स, मॉल वगैरह हैं, जिसका जिक्र सम्मानीय सदस्य जी ने किया है मैं उनकी भावनाओं को ध्यान में रखते हुए इन्दौर शहर में जो भी आवश्यकता है उसका आंकलन एवं परीक्षण करवा लूंगी, उसके साथ ही साथ पूर्वी क्षेत्र में फायर स्टेशन की आवश्यकता होगी तो उसकी पूर्ति की जाएगी.

श्री सुदर्शन गुप्ता--अध्यक्ष महोदय, आपको भी धन्यवाद देता हूं. आपके माध्यम से मैं मंत्री जी को भी धन्यवाद देता हूं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

(3) विदिशा जिले के अनेक विद्यालयों में पहुंच मार्ग न होने संबंधी

श्री निशंक कुमार जैन (बासौदा)--माननीय अध्यक्ष महोदय,

लोक निर्माण एवं विधि विधायी मंत्री ( श्री रामपाल सिंह)--अध्यक्ष महोदय,

श्री निशंक कुमार जैन--अध्यक्ष महोदय, मैं आपका संरक्षण चाहते हुए कुछ कहना चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय-- सीधा प्रश्न करें. भाषण नहीं. भाषण में काम नहीं होते प्रश्न में ही काम होते हैं.

श्री निशंक कुमार जैन-- मैं अपनी बात कहना चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय-- बात मत कहिए. सीधे काम की बात करिए.

श्री निशंक कुमार जैन--अध्यक्ष महोदय, यदि विधान सभा में आने के लिए रोड ही नहीं होगा तो यह बिल्डिंग किस काम की है? ऐसे ही हालत उन स्कूलों की है.

अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न पूछ लीजिए. अन्यथा अगला ध्यानाकर्षण लूंगा.

श्री निशंक कुमार जैन--अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी ने उत्तर दिया. मैं पूछना चाहता हूं मंत्री जी कि आप जब खुद जिला योजना मंडल के प्रभारी मंत्री के रुप में आपने स्वीकार किया था कि वहां पर बच्चों को आने-जाने में तकलीफ है. एक तरफ शासन बच्चे-बच्चियों की स्कूलों के लिए तमाम तरह की घोषणाएं करता है और दूसरी तरफ बच्चियां गिर रही हैं. उनकी सायकल पंचर हो रही है. रास्ते में पानी भर जाता है. बच्चों के स्कूल जाने के लिए रास्ता नहीं है. मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्रीजी से अनुरोध करना चाहता हूं कि उन 6 स्कूलों में एप्रोच रोड की घोषणा कर दें क्योंकि आपने प्रभारी मंत्री के रुप में विदिशा में कहा था कि हम जल्दी करा देंगे.

श्री रामपाल सिंह--अध्यक्ष जी, जिन 8 स्कूलों का उल्लेख किया गया है. शासकीय हाई स्कूल, बरखेड़ा और सुमेर दांगी स्कूल के पुराने भवन हैं, वहां सड़क है. 6 स्कूलों की बात आयी थी. उन्होंने जिला योजना समिति का उल्लेख किया है. जिला योजना समिति में भी जिला पंचायत को निर्देश दिए कि इसका प्रस्ताव बना कर यहां काम करें. लेकिन उस समय विधायक जी को हमने विधायक निधि देने से रोका नहीं था. छोटी सड़कें थीं. आपको हमने रोका नहीं था. आप बीच में राशि दे सकते थे लेकिन उन्होंने उस राशि का सदुपयोग नहीं किया. आपकी गंभीरता हमको दिखती अगर छोटे से काम के लिए दे देते तो हम कोई आपत्ति करते तो आप बताते.

श्री निशंक कुमार जैन-- अध्यक्ष महोदय, उतने पैसे तो आप होर्डिंग और विज्ञापनों में खर्च कर देते हैं. विधायक निधि पुल पुलियों में देते.(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय-- एक प्रश्न पूछ लीजिए. 40-50 मीटर की सड़कें हैं.

श्री निशंक कुमार जैन-- अध्यक्ष महोदय, दुर्भाग्य देखिए. वह स्कूल भी मध्यप्रदेश सरकार ने नहीं बनवाये हैं. उस समय यूपीए की सरकार थी. 56 लाख रुपये प्रति स्कूल के हिसाब से पैसा यूपीए ने दिया. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय-- आप प्रश्न करें. बैठ जाये.

श्री निशंक कुमार जैन-- अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी, जैसा आपने मुझे आश्वासन दिया था मेहरबानी करके उन स्कूलों के पहुंच मार्ग की घोषणा कर दें. आपकी एक घोषणा से बच्चियों के स्कूल जाने में सुविधा हो जाएगी. उनकी सायकल पंचर नहीं होगी. बारिश में वह आ जा सकेंगी.

श्री रामपाल सिंह--अध्यक्ष जी, एक दो सड़कों के लिए तो आप विधायक निधि से दीजिए. बाकी हम शासन स्तर पर देखेंगे.(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय-- निशंक जी बैठ जायें. इसीलिए आपको अलाउ नहीं करते. आप लोग दूसरों का समय लेते हैं. यह बिलकुल ठीक नहीं है.

 

 

 

 

12.54 बजे बहिर्गमन

श्री निशंक कुमार जैन, सदस्य द्वारा शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन.

 

श्री निशंक कुमार जैन-- आपके असत्य वादे की नीति के विरोध में सदन से बहिर्गमन करते हैं. स्कूल शिक्षा के मामले में सरकार फैल है. बच्चियों को अनावश्यक आश्वासन दिए जा रहे हैं. (XXX)

अध्यक्ष महोदय-- निशंक जैन जी जो बोल रहे हैं वह नहीं लिखा जाएगा.

श्री निशंक कुमार जैन--( XXX)

( श्री निशंक कुमार जैन, सदस्य द्वारा शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया गया)