मध्यप्रदेश विधान सभा

 

की

 

कार्यवाही

 

(अधिकृत विवरण)

 

 

 

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चतुर्दश विधान सभा                                                                          त्रयोदश सत्र

 

 

फरवरी-मार्च, 2017 सत्र

 

गुरूवारदिनांक 23 मार्च, 2017

 

(  2 चैत्रशक संवत्‌ 1939 )

 

 

[खण्ड-  13  ]                                                                                            [अंक- 17 ]

 

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मध्यप्रदेश विधान सभा

गुरूवारदिनांक 23 मार्च2017

( 2 चैत्रशक संवत्‌ 1939 )

 

विधान सभा पूर्वाह्न 11.05 बजे समवेत हुई.

{ अध्यक्ष महोदय (डॉ. सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए.}

 

निधन का उल्‍लेख

 

अध्‍यक्ष महोदय - मुझे सदन को यह सूचित करते हुए अत्‍यंत दुख हो रहा है कि भूतपूर्व लोकसभा अध्‍यक्ष श्री रबि राय का 06 मार्च, भूतपूर्व केन्‍द्रीय मंत्री श्री पी.शिवशंकर का 27 फरवरी, मध्‍यप्रदेश विधानसभा के भूतपूर्व सदस्‍य श्री गुरूचरण सिंह का 12 मार्च तथा डॉ. धर्मवीर का 16, मार्च 2017 को निधन हो गया है.

श्री रबि राय का जन्‍म 26 नवम्‍बर, 1926 को ग्राम भउरागढ़ जिला-पुरी(उड़ीसा) में हुआ था, आप चौथी, नवीं दसवीं लोकसभा तथा 1974-1980 में राज्‍यसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए थे. श्री राय 1979-1980 में केन्‍द्र सरकार में स्‍वास्‍थ्‍य और परिवार कल्‍याण मंत्री रहे. आपने 1989 से 1991 तक लोकसभा के अध्‍यक्ष पद को सुशोभित किया था.

आपके निधन से देश ने एक वरिष्‍ठ राजनेता, संसदविद् एवं कर्मठ समाजसेवी खो दिया है.

श्री पी.शिवशंकर का जन्‍म 10 अगस्‍त, 1929 को ममीडीपल्‍ली जिला हैदराबाद (आंध्रप्रदेश) में हुआ था. श्री पी.शिवशंकर आंध्रप्रदेश उच्‍च न्‍यायालय में न्‍यायाधीश रहे. आप योजना आयोग के उपाध्‍यक्ष रहे. आप छटवीं और सातवीं लोकसभा तथा 1985-1987 एवं 1987-1993 में राज्‍यसभा के सदस्‍य निर्वाचित हुए. आप राज्‍य सभा में सदन के नेता तथा बाद में विपक्ष के नेता एवं केन्‍द्र सरकार में अनेक मंत्रालयों के मंत्री रहे. आपने सिक्किम एवं केरल राज्‍य के राज्‍यपाल के पद को भी सुशोभित किया था.

आपके निधन से देश ने एक वरिष्‍ठ राजनेता, कुशल प्रशासक तथा कर्मठ जनसेवी खो दिया है.

श्री गुरूचरण सिंह का जन्‍म 01 जनवरी, 1937 को ग्राम चौके(पंजाब) में हुआ था. श्री सिंह दो बार भा.ज.पा. के जिला अध्‍यक्ष तथा नगर सुधार न्‍यास विदिशा के अध्‍यक्ष रहे. श्री सिंह ने प्रदेश की बारहवीं विधानसभा(2003-2008) में भारतीय जनता पार्टी की ओर से विदिशा क्षेत्र का प्रतिनिधित्‍व किया था.

आपके निधन से प्रदेश के सार्वजनिक जीवन की अपूरणीय क्षति हुई है.

डॉ.धर्मवीर का जन्‍म 02 अगस्‍त, 1930 को ग्‍वालियर में हुआ था. आप 1984 में ग्‍वालियर के महापौर तथा आठ वर्ष तक कांग्रेस के जिलाध्‍यक्ष रहे. डॉ. धर्मवीर प्रदेश की आठवीं एवं नौंवी विधानसभा में भाजपा की ओर से सदस्‍य निर्वाचित हुए थे.

आपके निधन से प्रदेश ने एक लोकप्रिय नेता खो दिया है.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री (श्री गोपाल भार्गव) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय रबि राय जी, माननीय पी. शिवशंकर जी, माननीय गुरूचरण सिंह , एवं डॉ. धर्मवीर जी ये सभी ऐसे व्‍यक्तित्व थे, जिनके बारे में आज यदि हम सदन में चर्चा करते हैं तो श्री रबि राय जी का लोकसभा अध्‍यक्ष एवं केन्‍द्रीय मंत्री के रूप में जो कार्यकाल रहा, वह निश्चित रूप से देश का अविस्‍मरणीय संसदीय कार्यकाल था. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, उन्‍होंने अपने संसदीय ज्ञान से, अपने अनुभव से और अपनी विद्वता से और लोकसभा के कुशल संचालन से एक इतिहास लिखा है. हमारे सुभाष कश्‍यप जी की और कौल साहब की किताबों की नजीरों में श्री रबि राय जी की रूलिंग्‍स मिलती हैं. हमें श्री रबि राय जी के अध्‍यक्षीय कार्यकाल से बहुत कुछ सीखने को मिला है और इस मामले में विधानमण्‍डलों ने भी उनका काफी अनुसरण उनका किया है. वह उड़ीसा के ही नहीं बल्कि पूरे देश के बहुत प्रतिष्ठित और मान्‍य नेता थे.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, श्री पी. शिवशंकर जी ने भी केन्‍द्रीय मंत्रिपरिषद में रहते हुए एवं स्‍वास्‍थ्‍य विभाग को संभालते हुए अनेकों अनुकरणीय उदाहरण प्रस्‍तुत किये हैं और कुशल प्रशासन इस देश के लिये दिया है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय,  माननीय गुरूचरण सिंह जी मेरे साथ में विधायक भी रहे थे और विदिशा के हमारे बहुत ही वरिष्‍ठ और काफी लोकप्रिय नेता भी थे. उनके निधन से हम सभी लोगों को काफी दुख है और उनके निधन से प्रदेश को अपूरणीय क्षति हुई है.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, डॉ. धर्मवीर जी ग्‍वालियर में काफी लोकप्रिय थे और समस्‍त ग्‍वालियर चंबल संभाग उनकी लोकप्रियता का मुरीद था. आज वह भी हमारे बीच में नहीं है. चारो महानुभावों के लिये श्रद्धांजलि देते हुए मैं निश्चित रूप से स्‍वयं भी और पूरे सदन की ओर से उनके शोक संतप्‍त परिवारों के लिये सांत्‍वना देना चाहता हूं और ईश्‍वर से प्रार्थना करता हूं कि वह उनकी आत्‍माओं को शांति प्रदान करें, धन्‍यवाद.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)- अध्यक्ष महोदय, जो आज आदरणीय श्री गोपाल भार्गव जी ने और आपके माध्यम से 4 महान् आत्माओं के निधन का उल्लेख हुआ. जैसा श्री गोपाल भार्गव जी ने कहा कि श्री रबि राय जी बहुत बड़े विद्वान थे. लोकसभा और राज्यसभा के कार्य में उन्होंने बड़ी उपलब्धि हासिल की थी. एक फाइटर के रूप में भी उड़ीसा में वे जाने जाते थे. लेकिन एक विद्वान के रूप में बाद में उनकी ख्याति प्राप्ति हुई.

आदरणीय श्री पी. शिवशंकर जी, कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता थे, आंध्रप्रदेश के थे और बहुत ही अच्छा उनका कार्यकाल पेट्रोलियम और अन्य विभागों में रहा है. उल्लेखनीय काम उन्होंने किये.

आदरणीय श्री गुरुचरण सिंह जी, हम लोगों के साथ विधायक थे. विदिशा नगरपालिका के अध्यक्ष थे, भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष भी थे, उनके लिए भी हम संवेदना व्यक्त करते हैं.

आदरणीय डॉ. धर्मवीर जी, ग्वालियर के इतिहास पुरुष माने जाते थे. वे भी हम लोगों के बीच में आज नहीं हैं. मैं कांग्रेस विधायक दल की तरफ से इन चारों पुण्यात्माओं के लिए ईश्वर से कामना करता हूं और उनका परिवार भगवान से प्रार्थना करता हूं कि वे स्वस्थ रहें और इस क्षति में हम लोग उनके साथ हैं.

अध्यक्ष महोदय - मैं, सदन की ओर से शोकाकुल परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट करता हूं. अब सदन 2 मिनट मौन खड़े रहकर दिवंगतों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करेगा.

 (सदन द्वारा दो मिनट मौन खड़े रहकर श्रद्धांजलि अर्पित की गई.)   

अध्यक्ष महोदय - दिवंगतों के सम्मान में सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित.

 

(11.12 बजे सदन की कार्यवाही 5 मिनट के लिए स्थगित की गई.)

 


 

11.18 बजे विधान सभा पुनः समवेत हुई.

{अध्यक्ष महोदय (डॉ.सीतासरन शर्मा) पीठासीन हुए}

तारांकित प्रश्नों के मौखिक उत्तर

पुल-निर्माण की स्‍वीकृति

[लोक निर्माण]

1. ( *क्र. 1618 ) कुँवर हजारीलाल दांगी : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के प्रश्‍न संख्‍या 56, (क्रमांक 503) दिनांक 05 दिसम्‍बर, 2016 के उत्‍तर की कंडिका (ख) में माननीय विभागीय मंत्री महोदय द्वारा बताया गया था कि खिलचीपुर व्‍हाया सेमलीकलां से रामगढ़ मार्ग पर ग्राम बटेडिया में छापी नदी पर, ग्राम लिम्‍बोदा से कुंडालिया मार्ग पर तथा ग्राम काशीखेड़ा में छापी नदी पर पुल निर्माण कार्य वित्‍तीय संसाधनों की सीमित उपलब्‍धता के कारण स्‍वीकृत नहीं किया जा सका है? यदि हाँ, तो क्‍या वर्तमान में उक्‍त पुलों के निर्माण हेतु विभाग द्वारा कोई कार्यवाही की गई है? यदि हाँ, तो क्‍या? यदि नहीं, तो क्‍यों? (ख) उपरोक्‍तानुसार क्‍या शासन उक्‍त स्‍थानों पर पुल निर्माण कार्य का आगामी मुख्‍य बजट में प्रावधान करेगा?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जी हाँ। जी हाँ। तीनों पुल कार्यों के डी.पी.आर. तैयार कर बजट में सम्मिलित करने की कार्यवाही की गई है। शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ख) प्रश्‍न में वांछित अनुसार बजट में सम्मिलित करने की कार्यवाही की गई है।

कुँवर हजारीलाल दांगी--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे प्रश्न के उत्तर से मैं पूर्ण रूप से संतुष्ट हूं कि मेरी विधान सभा क्षेत्र की जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को माननीय मंत्री जी ने स्वीकार करते हुए बजट में सम्मिलित किया है. मैं आपके माध्यम से उनको बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं. एक अनुरोध मंत्री जी से करना चाहता हूं कि जो तीन पुलियाएं बजट में स्वीकृति की गई हैं, उनका कब तक टेन्डर बुलाकर कार्य प्रारंभ कर देंगे? यह मुझे आश्वासन दें ?

श्री रामपाल सिंह--माननीय अध्यक्ष महोदय, आप बड़े जागरूक सदस्य हैं. माननीय सदस्य जब दूसरे पक्ष में थे तब कोई काम नहीं हो पाये थे, लेकिन मुझे लिखकर के दिया. मैंने उनसे पूछा भी आप तो बहुत सक्रिय सदस्य हैं. आज धन्यवाद दे रहे हैं. काम भी शीघ्रता के साथ शुरू करेंगे. आपने मुझे धन्यवाद दिया. मैं भी आपको धन्यवाद देता हूं.

श्री अमर सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, इसी विषय पर मेरे भी अतारांकित में पुल-पुलिया से संबंधित 4 प्रश्न हैं.

अध्यक्ष महोदय-- इसी से संबंधित?

श्री अमर सिंह यादव-- जी.

अध्यक्ष महोदय-- चलिए पूछिए. मंत्री जी, जानकारी हो तो बता दीजिए.

श्री अमर सिंह यादव--राजगढ़ विधान सभा में राजस्थान सीमा से लगे किलामर्गर में और बोरधनपुरा में एक पुल की मांग की थी.

अध्यक्ष महोदय-- इससे उद्भूत नहीं होता. बैठ जाएं.

श्री रामपाल सिंह--अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी सब विवरण लिख कर दे दें, उस पर बड़ी गंभीरता से विचार किया जाएगा.

श्री अमर सिंह यादव-- अध्यक्ष महोदय, दो साल से लिखा-पढ़ी कर रहा हूं.

अध्यक्ष महोदय-- यह प्रश्न उद्भूत नहीं होता.

श्री अमर सिंह यादव-- वहां के जिला अधिकारी द्वारा असत्य जानकारी दी है. 20 करोड़ रुपये का इसने घपला कर रखा है. वह जिला अधिकारी सुनता ही नहीं है. मैं परेशान हूं.

अध्यक्ष महोदय-- बैठ जाइए. यह ठीक बात नहीं है. अब नहीं लिखा जाएगा.

श्री अमर सिंह यादव-- XXX

चंबल नदी पर वृहद डेम का निर्माण

[जल संसाधन]

2. ( *क्र. 5598 ) श्री दिलीप सिंह शेखावत : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या प्रश्‍नकर्ता के विधानसभा क्षेत्र के नागदा शहर में ग्रेसि‍म उद्योग द्वारा चम्बल नदी पर क्रमबद्ध 4 स्टॉप डेमों का निर्माण कराया गया था? क्‍या वर्तमान में ग्रेसि‍म, केमिकल डिवीजन, लेंसेक्स उद्योग, नागदा नगर, खाचरौद नगर एवं रेल्वे की आवश्यकताएं काफी बढ़ जाने के कारण इन डेमों से पूर्ति नहीं हो पा रही है, इस कारण ग्रीष्मकाल में उद्योग बन्द हो जाते हैं? साथ ही इन छोटे डेमों में पर्याप्त जल नहीं होने से किसानों को सिंचाई भी नहीं करने दी जाती है, जिससे किसानों की फसलें भी प्रभावित होती हैं? () क्‍या उपरोक्त समस्याओं के निवारण के लिये चम्बल नदी पर एक वृहद डेम के निर्माण की अत्यंत आवश्यकता है? (ग) वृहद डेम निर्माण करने के लिये शासन द्वारा क्या योजना बनाई जा रही है? यदि योजना नहीं बनाई गयी है तो कब तक बना ली जावेगी?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) जी हाँ। (ख) एवं (ग) चंबल नदी पर कोई वृहद परियोजना प्रस्तावित नहीं है। उज्जैन जिले के नागदा खाचरौद क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल एवं औद्योगिक उपयोग के लिये जल कमी की पूर्ति हेतु चंबल नदी की सहायक बागेड़ी नदी पर नागदा नगर से 18 कि.मी. अपस्ट्रीम में चंदवासला परियोजना की साध्यता स्वीकृति प्रदान कर डी.पी.आर. बनाने के निर्देश दिये गये हैं।

 

श्री दिलीप सिंह शेखावत--अध्यक्ष महोदय, मैं आपको भी धन्यवाद देना चाहूंगा कि 20 तारीख को मेरा ध्यानाकर्षण आपने ग्राह्य किया था. उस डेम को बनाने के लिए माननीय नरोत्तम सिंह जी और श्रीमती माया सिंह जी दोनों ने भूमिका निभाई. इसमें नरोत्तम जी ने घोषणा भी कर दी थी. मैं उनको एक बार फिर बहुत बहुत धन्यवाद देता हूं.मेरा छोटा सा एक प्रश्न है कि क्या इसी वर्ष आप उसकी डीपीआर बना कर स्वीकृत कर देंगे ? अध्यक्ष जी, नागदा-खाचरौद दोनों जगह पेयजल का संकट रहता है. किसानों को सिंचाई का संकट रहता है. इसके कारण हमारे यहां दो महीने उद्योग बंद रहते हैं जिससे लगभग 60 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष राजस्व की हानि शासन को होती है. कृपया इसी वर्ष डीपीआर बनाकर स्वीकृत कर देंगे तो उचित होगा.

डॉ नरोत्तम मिश्र--अध्यक्ष जी, आपका निर्देश था. निनावद खेड़ा के लिए आदरणीय माया सिंह जी ने भी आश्वस्त किया था. जैसा वह कहेंगी लेकिन मेरा माननीय सदस्य से निवेदन है कि चांद-बासला का जो डेम था उससे सिंचाई भी हो रही थी तो जल संसाधन विभाग को वहां डेम बनाने में ज्यादा फायदा था और वहां 17 एमसीएफसी पानी रुक भी रहा था. आपका जो निनावद खेड़ा है यहां पर 4.5 एमसीएम पानी रुकता है इससे सिंचाई भी नहीं हो पाती है लेकिन फिर भी आपका निर्देश था, जैसे ही आदरणीय माया सिंह जी करती हैं, हम कर देंगे.

सी.आर.एफ. मद से निर्मित सड़कें

[लोक निर्माण]

3. ( *क्र. 5184 ) श्री ओमकार सिंह मरकाम : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) भारत सरकार के सी.आर.एफ. मद से लोक निर्माण विभाग को विगत 3 वर्षों में कुल कितनी राशि प्राप्‍त हुई? (ख) प्रश्नांश (क) अनुसार प्राप्‍त राशि से डिंडौरी जिले में (क) अवधि में विभाग अन्‍तर्गत किन मार्गों का निर्माण कार्य कब प्रारम्‍भ हुआ? कार्य कब पूर्ण हुआ? कार्य पर कितना व्‍यय हुआ? (ग) सी.आर.एफ. के मद से लोक निर्माण विभाग द्वारा निर्मित कौन-कौन सी सड़कों की पुन: मरम्‍मत व निर्माण किया जा रहा है? कितनी राशि स्‍वीकृत की गयी तथा स्‍वीकृत राशि में कितनी राशि व्‍यय की गयी?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) वर्ष 2014-15 में रूपये 180.99 करोड़, वर्ष 2015-16 में रूपये 209.69 करोड़ तथा वर्ष 2016-17 में रूपये 128.80 करोड़। (ख) विगत तीन वर्षों में डिण्‍डोरी संभाग के अंतर्गत सी.आर.एफ. मद में कोई कार्य स्‍वीकृत नहीं है, अत: शेष प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता। (ग) विवरण पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्‍ट अनुसार है।

 

श्री ओमकार सिंह मरकाम--अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न था कि सीआरएफ मद में सड़क निर्माण के लिए कितनी-कितनी राशि,किस-किस वर्ष में मिली? मैंने पूछा था कि कब से शुरु हुआ? विभाग ने उसको घुमाकर तीन साल तक में सीमित कर दिया. यह कहां से गड़बड़ी हुई? अध्यक्ष महोदय, कब से शुरु हुआ यह जानकारी लेने का हमारा इतना अधिकार नहीं रहेगा तो मैं समझता हूं कि बड़ा मुश्किल हो जाएगा कि हम लोग जनता को कैसे जवाब दे पाएंगे. अध्यक्ष जी, सीआरएफ मद में कितनी राशि, किस वर्ष में स्वीकृत हुई इसका जवाब विभाग देने के लिए तैयार नहीं है तो यह खेद का विषय है. मैं आपके माध्यम से चाहता हूं कि मैंने जो उत्तर मांगा था कि कब से शुरु हुआ और उसमें किस वर्ष में कितनी राशि मिली यह जानकारी बताने में कोई दिक्कत नहीं होना चाहिए. यह जानकारी दिलाने का कष्ट करें.

अध्यक्ष महोदय, दूसरा प्रश्न कि लोक निर्माण विभाग की वर्तमान में जो डीपीआर बना रहे हैं. इनका सीएसआर का जो सिस्टम है, उसमें मुझे ऐसा लग रहा है कि सीआरएफ मद में जो रिन्यूअल रिपेरिंग हो रहा है इसमें हमको देखना चाहिए यह हमारी जिम्मेदारी है. अध्यक्ष जी, हमारे यहां जो रिन्युअल किये हैं, उसमें डिंडोरी में गाड़ासरई से बजाग सड़क का रिन्युअल किया है. मेरा क्षेत्र हैं, मुझे खुशी है कि रिन्युअल हो रहा है लेकिन उसमें मेरी शंकाएं हैं उनकी जांच के लिए EnC साहब से कहा.

अध्यक्ष महोदय-- आप सीधा प्रश्न करें.

श्री ओमकार सिंह मरकाम--अध्यक्ष जी, मेरा प्रश्न यह है कि गाड़ासरई से बजाग और बोंडा से गाड़ासरई सड़कों का जो रिन्युअल/निर्माण हुआ है वह सीआरएफ मद से और आपके विभाग के रेगुलर बजट से हुआ था. इन सड़कों के कार्य में गडबड़ी हुई है. माननीय मंत्री जी, क्या वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा हमारी उपस्थिति में इसकी जांच कराएंगे?

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय, पहले तो विधायक जी से निवेदन कर रहा हूं कि उन्होंने 3 वर्ष की ही जानकारी पूछी थी तो 3 वर्ष की जानकारी बता दी. ज्याद वर्षों का चाहिये तो और लिखकर दे दें तो पूरी जानकारी आपको उपलब्ध करा देंगे. दूसरा जांच का मामला है तो हम कहीं दूसरी जगह जहां का आप बताओगे वहां से हम जांच करा लेंगे.

श्री ओमकार सिंह मरकाम - श्री माननीय अध्यक्ष महोदय,माननीय मुख्यमंत्री जी इस

नर्मदा सेवा यात्रा में लगे हुए हैं और हजारों की संख्या में नर्मदा जी को मानने वाले भक्त मेरे क्षेत्र में आते हैं खासकर गुजरात के लोग मेरे क्षेत्र में आते हैं. मेरे क्षेत्र में चकरार नदी है,गोमती नदी है और ताकी नाला है. आप भी वहां गये थे तो हमने आपसे अनुरोध किया था अमरकंटक के अरण्डी आश्रम में,उसमें 2 पुलियों के लिये हम लोगों ने मांग की थी 2 पुलिया बन गईं. 3 पुलियों के लिये एक साथ टेंडर हुआ था और 2 पुलिया बनकर तैयार हो गई तीसरी चकरार की पुलिया का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है तो वह चकरार की पुलिया क्यों प्रारंभ नहीं हुई, किसके कारण विलंब हुआ और उसका काम कब प्रारंभ हो जायेगा और बारिश से पहले नर्मदा भक्तों को वह सुलभ रास्ता मिल जाये. यह मंत्री जी करेंगे क्या ?

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय का आप पर बड़ा स्नेह है. इसलिये विषय से हटकर आपको अवसर दिया है. अगर पुलिया नर्मदा तट पर है उसका आप पत्र लिखकर दे दीजिये उसे हम प्राथमिकता पर कराएंगे.

श्री ओमकार सिंह मरकाम - श्री माननीय अध्यक्ष महोदय, एक छोटा सा निवेदन हैमैं मंत्री जी से यह चाहता हूं कि 3 पुलियों का टेंडर हुआ 2 का काम चालू हो गया 1 का काम चालू क्यों नहीं हुआ, कौन अधिकारी इसके लिये जिम्मेदार हैं उसको आप जरूर देख लें.

अध्यक्ष महोदय - वह उसके लिये राजी हैं.

श्री रामपाल सिंह - जी अध्यक्ष महोदय.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सहकारी बैंकों से राशि आहरण की सीमा

[सहकारिता]

4. ( *क्र. 5374 ) श्री सुखेन्‍द्र सिंह : क्या राज्‍यमंत्री, सहकारिता महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या मध्‍यप्रदेश के सहकारिता विभाग द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में जिला सहकारी बैंक संचालित किये गये हैं? यदि हाँ, तो नोटबंदी में उपभोक्‍ताओं को राशि आहरण के प्रतिबंध की सीमा सभी बैंकों के समान ही लागू की गई है? (ख) प्रश्नांश (क) के संबंध में क्‍या जिला सहकारी बैंक की शाखाएं ब्‍लॉक मुख्‍यालयों पर संचालित हैं, जहां पर राशि का लेन-देन किया जाता है? यदि हाँ, तो क्‍या सरकारी बैंक की शाखाएं बचत बैंक के रूप में सहकारी समितियों के माध्‍यम से ग्रामों में सं‍चालित हैं? (ग) प्रश्नांश (क) (ख) के प्रकाश में ब्‍लॉक मुख्‍यालय पर स्थित सहकारी बैंक से बचत खाते हेतु प्रश्‍न दिनांक के समय 24 हजार रूपये हफ्ता के आहरण हेतु लिमिट निर्धारित है? यदि हाँ, तो क्‍या इन बचत बैंकों में बहुत सारे ग्रामीण उपभोक्‍ताओं के खाते खुले हुए हैं? यदि हाँ, तो प्रत्‍येक खातेधारी को अपने खाते से आहरण हेतु 24 हजार रूपये प्रति हफ्ता आहरण सीमा निर्धारित है? (घ) प्रश्नांश (क) (ख) (ग) के प्रकाश में सहकारी समिति बचत बैंक किस प्रकार से सभी खातेदारों को प्राप्‍त 24 हजार में वितरण किया जा रहा है? स्‍पष्‍ट करें। क्‍या ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्‍ताओं को 24 हजार आहरण की सीमा से वंचित रखा जा रहा है? इसके लिये कौन दोषी हैं? क्‍या सहकारी समिति बचत बैंक को भी प्रत्‍येक उपभोक्‍ता को आहरण सीमा 24 हजार रूपये हफ्ता की पूर्ति कराई जावेगी? यदि हाँ, तो कब तक समय-सीमा बतावें? यदि नहीं, तो कारण स्‍पष्‍ट करें? (ड.) प्रश्नांश (क) (ख) (ग) एवं (घ) के प्रकाश में ग्रामीण क्षेत्रों के दूर-दराज इलाकों में जहां सहकारी बचत बैंक संचालित हैं, वहां उन्‍हें प्रतिदिन एवं शादी ब्‍याह हेतु पैसा सीमा के अंदर भी प्राप्‍त नहीं हो रहा है? इसके लिये कौन दोषी है? दोषी के खिलाफ क्‍या कार्यवाही की जावेगी? नहीं की जावेगी तो क्‍यों? कारण स्‍पष्‍ट करें उपभोक्‍ताओं की परेशानी के लिये कौन जिम्‍मेदार है? स्‍पष्‍ट करें

राज्‍यमंत्री, सहकारिता ( श्री विश्वास सारंग ) : (क) प्रदेश के 51 जिलों में 38 जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक संचालित हैं। जी हाँ। (ख) जी हाँ, ब्‍लॉक मुख्यालय के अतिरिक्त अन्य स्थानों पर भी संचालित हो रही हैं। जी नहीं, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक की शाखाएं बचत बैंक के रूप में समितियों के माध्यम से ग्रामों से संचालित नहीं हैं। (ग) जी हां. जी हां. प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं द्वरा संचालित बचत बैंकों में ग्रामीण उपभोक्ताओं के खाते खुले हुए हैं. जी नहीं.(घ) वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा प्रति सप्ताह आहरण की सीमा समाप्त कर दिये जाने से बचत बैंकों के खातेदारों को मांग अनुसार राशि उपलब्ध कराई जा रही है. शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होते.(ड.) उत्तरांश "" अनुसार प्राथमिक कृषि साख सहकारी संस्थाओं द्वारा संचालित बचत बैंक द्वारा खातेदारों को मांग अनुसार राशि उपलब्ध कराई जा रही है. शेष प्रश्न उपस्थित नहीं होते.

श्री सुखेन्द्र सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय,मेरा प्रश्न सीधा किसानों से जुड़ा हुआ था. नोटबंदी से परेशान किसानों को लेकर हमने प्रश्न किया था.यह बात सही है कि जो जवाब मंत्री जी की तरफ से आया है उसमें सहकारी केन्द्रीय बैंकों में यह कर दिया गया है कि वहां से 24 हजार रुपये की लिमिट के ऊपर किसान चाहे जितना पैसा ले सकते हैं लेकिन इसके बावजूद आज किसान परेशान हैं, इन बैंकों में भटक रहे हैं. खासकर वे किसान जिन्होंने  धान की बोनी की थी, उनके पैसे भी इन बैंकों में हैं. मंत्री जी, मैं 3-4 बैंको का नाम बताता हूं, वहां मेरे क्षेत्र में किसान परेशान हैं ,उनको पैसे नहीं मिल पा रहे हैं. मैंने शून्यकाल में भी यह प्रश्न उठाया था कि एक किसान की वहां हार्टअटैक से मौत हो गई थी. मेरा अनुरोध है कि पटेहरा,पहाड़ी,खटकरी,हटवा यह प्राथमिक स्वास्थ्य समितियां हैं, इनमें पैसे उपलब्ध नहीं हैं और वहां के किसान परेशान हैं, तो क्या यह समस्या चलती रहेगी या सुलझ जायेगी ?

श्री विश्वास सारंग - माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी ने जिन समितियों के बारे में बताया है उसको दिखवाकर उसको वरीयता क्रम में लेकर जो समस्याएं हैं उसका निदान करवा देंगे.

विधायक निधि से कराए गए कार्य में अनियमितता

[लोक निर्माण]

5. ( *क्र. 6914 ) श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या विधायक निधि से शा.प्रा.शाला खैबरलाइन-कटनी में प्रश्नकर्ता के पत्र दिनांक 23.03.2015 द्वारा 10.00 लाख से नवीन भवन निर्माण्‍ा हेतु एवं 23.10.2015 द्वारा 45 हजार राशि डिसमेंटलिंग कार्य हेतु प्रदान की गई थी और विभाग द्वारा राशि 8.93 लाख से भवन एवं 1.07 का विद्युतीकरण कार्य का प्राक्कलन तैयार किया गया था? यदि हाँ, तो प्राक्कलन का विवरण और किये गये कार्य के कार्यादेश, माप पुस्तिका (एम.बी.) एवं किये गये भुगतान के देयक उपलब्ध करायें? (ख) क्या प्रश्नांश (क) के तहत प्रदत्त 10.45 लाख की राशि में से विभाग को 7.53 लाख की राशि ही सर्वर के माध्यम से प्राप्त हुई थी? यदि हाँ, तो कारण बतायें? (ग) क्या उपरोक्त 7.52 लाख की राशि से ही भवन निर्माण कार्य विभाग द्वारा करा लिया गया? यदि हाँ, तो प्राक्कलन में क्या परिवर्तन किये गये? किये गये परिवर्तन से प्रश्‍नकर्ता विधायक को क्यों नहीं अवगत कराया और विधायक विकास निधि से अनुशंसित किये गये कार्यों को कराये जाने एवं सदस्य विधानसभा को अवगत कराने संबंधी शासनादेश क्‍या हैं? (घ) प्रश्नांश (क) से (घ) के तहत अनुशंसित कार्य के निर्माण एवं राशि के उपयोग की कार्यवाही किस प्रकार सही है? राशि कम प्राप्त होने की जानकारी प्रदाय न करने, विकास निधि की पूर्ण राशि का उपयोग न करने, निर्माण अपूर्ण रहने, राशि लेप्स होने का कौन-कौन जिम्मेदार है? क्या इस अनियमितता पर कार्यवाही की जायेगी? यदि हाँ, तो क्या एवं कब तक? यदि नहीं, तो क्यों?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) प्राक्‍कलन अनुसार प्रदाय राशि की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिट के प्रपत्र '' अनुसार है। प्रश्‍न में चाही शेष जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र 1, 2, 3, 4 अनुसार है। (ख) किये गये कार्य के अनुसार राशि 7.53 लाख का आहरण किया गया है। (ग) जी नहीं। भवन निर्माण में सिविल कार्य पूर्ण, विद्युतीकरण का कार्य प्रगति पर, प्राक्‍कलन में कोई परिवर्तन नहीं। अत: शेष जानकारी का प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। (घ) प्रश्‍नांश (ग) के उत्‍तर के परिप्रेक्ष्‍य में कार्यवाही आवश्‍यक नहीं।

श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल - माननीय अध्यक्ष महोदय मेरे प्रश्न के जवाब में जो जानकारी दी गई है और मेरे पास जो जानकारी है दोनों में बहुत अंतर है. अतिरिक्त विधायक निधि मेरे द्वारा दी गई है. जो राशि का अंतर है वह गंभीर है. इसको देखते हुए मैं चाहूंगा कि इसकी पूरी जांच करा ली जाये कि राशि कहां खर्च की गई और कितनी राशि शेष बची है ? ताकि जो मेरी अतिरिक्त राशि वहां पर है उसका मैं अन्यत्र उपयोग कर सकूं.

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्यक्ष महोदय,माननीय विधायक महोदय ने 10 लाख 45 हजार रुपये की स्वीकृति दी थी और उसमें 45 हजार रुपये भवन तोड़ने की राशि थी, वह राशि बचा ली गई है. वह राशि भी उनकी बच गई और दूसरी राशि भी उनकी बच गई है. उसका तो उपयोग होगा, लेकिन जांच कराने की माननीय सदस्य की मांग है तो हम जांच करा लेंगे.

श्री संदीप श्री प्रसाद जायसवाल - धन्यवाद.

नेता प्रतिपक्ष(श्री अजय सिंह) - माननीय अध्यक्ष महोदय, सभी विधायकों की यह चिंता है कि उनकी राशि जल्दी उपयोग हो जाये. यह चिंता सिर्फ माननीय विधायक की ही चिंता नहीं है. आपके विभाग में जितने भी 3-4 सालों से इस तरह के राशि के मामले लंबित हों तो उस राशि का उपयोग सुनिश्चित कर दें ताकि इस वर्ष में काम पूरे हो जायें.

 

 

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, नेता प्रतिपक्ष जी ने जो बात कही है इसको गंभीरता से लेंगे और जो ऐसे मामले हैं उनका परीक्षण करके शीघ्र उनका निराकरण करायेंगे.

 

मंदसौर-नीमच जिले में संचालित ए.डी.जे. कोर्ट

[विधि और विधायी कार्य]

 

6. ( *क्र. 5923 ) श्री हरदीप सिंह डंग : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) मंदसौर-नीमच जिले में कितने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ए.डी.जे. कोर्ट संचालित हैं एवं स्थापना वर्ष की जानकारी देवें? (ख) उपरोक्त संचालित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ए.डी.जे. कोर्ट में आवश्यक मूलभूत सुविधाएं तथा न्यायालय भवन, न्यायाधीश आवास, गृह जेल/उपजेल स्टॉफ के पदों की पूर्ति सब सुविधा है या कौन-कौन सी कमी है? जानकारी देवें (ग) उपरोक्त मंदसौर-नीमच जिले में प्रत्येक ए.डी.जे. कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में कितने-कितने गांव हैं तथा ए.डी.जे. कोर्ट से सबसे अधिक दूरी पर कौन सा गांव स्थित है? गांव का नाम व दूरी सहित जानकारी देवें (घ) सीतामऊ न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कोर्ट में कितने गांव सम्मिलित हैं, सबसे अधिक दूरी वाला गांव कौन सा है? गांव का नाम व दूरी सहित जानकारी देवें

 

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) :

श्री हरदीप सिंह डंग-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे आज 3 प्रश्‍न हैं 1 तारांकित और 2 अतारांकित हैं. एक तो एडीजे कोर्ट के बारे में है. प्रश्‍न क्रमांक है 5923, 5924 और 5925.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप तो सीधे प्रश्‍न करिये.

श्री हरदीप सिंह डंग-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह तीनों एक ही हैं. मेरा एक ही निवेदन है, पहले प्रश्‍न में मैंने पूछा था कि मंदसौर नीमच जिले में कितने एडीजे कोर्ट संचालित हैं, दूसरी जबलपुर कोर्ट के आदेश की कापी, वर्ष 1995 से कोर्ट ने आदेश दिये हैं. मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि वित्‍तीय स्‍वीकृति अगर प्रदान हो जाये तो 22 साल पहले जो कोर्ट ने आदेश दिये थे वह कार्य आपके हाथों से हो जाये तो वहां पर अपर जिला सत्र न्‍यायालय प्रारंभ हो सकता है. जो आंकड़े दिये गये हैं, मंदसौर में 60 किलोमीटर दूर आखिरी गांव है और यहां नारायणगढ़ में 35 किलोमीटर दूर है. हमारी विधान सभा में 120 किलोमीटर दूर आखिरी गांव है और 2 तहसीलें हैं, उसके बाद भी एडीजे कोर्ट वहां नहीं है. मेरा निवेदन है कि सीतामऊ में आज ही आप वित्‍तीय स्‍वीकृति प्रदान करें जिससे 1 अप्रैल से वहां पर एडीजे कोर्ट प्रारंभ हो सके ?

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी का प्रश्‍न वास्‍तव में सही है, लेकिन यह भी आग्रह है कि यह नपाई की बात कहते हैं कि कितनी दूर गांव है, कितनी दूर आना जाना है. माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसकी पूरी जानकारी माननीय विधायक जी को उपलब्‍ध करा दी गई है. जहां तक सीतामऊ का प्रश्‍न किया है, उसका पत्र न्‍यायालय से आया है और जिला कलेक्‍टर से भवन और रहने की, ठहरने की और पूरी व्‍यवस्‍थाओं की जानकारी मांगकर इसका जल्‍दी ही निराकरण करायेंगे.

श्री हरदीप सिंह डंग-- मेरा निवेदन है, तहसीलदार द्वारा पत्र दिया गया है कि वहां पर सारी सुविधायें उपलब्‍ध हैं और अगर नहीं होंगी तो हम कैसे भी चाहे जनभागीदारी से चाहे किसी और मद से उपलब्‍ध करायेंगे, लेकिन आप वित्‍तीय स्‍वीकृति का पत्र आज ही जारी करा दें. नारायणगढ़ में मात्र 175 गांव हैं और यहां पर 229 गांव हैं, यहां की दूरी 120 किलोमीटर और वहां 35 किलोमीटर की दूरी है, जबकि यहां 2 तहसीलें हैं. मेरा निवेदन है कि आप यहां से आज ही पत्र जारी करें ताकि 1 अप्रैल से वहां पर एडीजे कोर्ट प्रारंभ हो सके. आपके एक पत्र से हजारों व्‍यक्तियों को फायदा हो जायेगा. आप पत्र पहुंचा दें, मेरा आपसे यह निवेदन है.

श्री रामपाल सिंह-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, इसमें महत्‍वपूर्ण भूमिका विधि विभाग की भी है, हाईकोर्ट की भी है. हम माननीय न्‍यायालय को भी आग्रह पत्र लिखेंगे और शीघ्र इसके निराकरण का प्रयास करेंगे.

श्री हरदीप सिंह डंग-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, आज ही लिख दें, आज ही इसका पालन करा दें.

अध्‍यक्ष महोदय-- आप जबर्दस्‍ती नहीं कर सकते. बैठ जाइये आप.

 

 

 

कृषि यंत्रों पर सब्सि‍डी

[किसान कल्याण तथा कृषि विकास]

7. ( *क्र. 5897 ) श्रीमती झूमा सोलंकी : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या किसानों को ड्रि‍प/स्प्रिंकलर/मोटर पंप क्रय करने पर शासन द्वारा सब्सि‍डी देने का प्रावधान है? यदि हाँ, तो वह कितनी राशि है? पृथक-पृथक बतायें। सब्सि‍डी किसके खाते में जमा होगी? किसान या सप्लाय करने वाली कंपनी? इस संबंध में जारी निर्देशों की प्रतिलिपी उपलब्ध करावें। (ख) किसानों द्वारा कृषक अंश जमा करने के उपरान्त किसान स्वयं अपनी इच्छा से ड्रि‍प/स्प्रिंकलर/मोटर पंप क्रय करना चाहे तो किसानों के सीधे बैंक खाते में सब्सि‍डी की राशि जमा हो सकती है? यदि हाँ, तो नियमावली की प्रतिलि‍पी उपलब्ध करावें? नहीं तो क्यों? किसानों को कंपनी द्वारा ड्रि‍प/स्प्रिंकलर/मोटर पंप क्रय करने पर कितनी मात्रा में सामग्री एवं कौन सी गुणवत्‍ता की उपलब्ध करायी जाती है?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) जी हाँ। योजनावार सब्सिडी देने के पृथक पृथक प्रावधान की जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-1 अनुसार है। यंत्रों पर किसानों द्वारा स्वयं अपनी इच्छा से शासन द्वारा पंजीकृत अधिकृत विक्रेताओं के माध्यम से क्रय करने की स्थिति में हितग्राही को देय अनुदान उसके बैंक खाते में सीधे (डी.बी.टी.) जमा किया जावेगा। मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम/मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित से सामग्री क्रय करने की स्थिति में यदि हितग्राही द्वारा केवल कृषक अंश की राशि जमा कर सामग्री क्रय की गई है तो अनुदान राशि का भुगतान संबंधित संस्था के बैंक खाते में सीधा किया जावेगा। इस संबंध में जारी निर्देशों की प्रतिलिपि पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार है। (ख) जी हाँ। निर्देशों/नियमावली की प्रतिलिपि पुस्‍तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-2 अनुसार किसानों द्वारा स्वयं अपनी इच्छा से शासन द्वारा पंजीकृत अधिकृत विक्रेताओं के माध्यम से क्रय करने की स्थिति में हितग्राही को देय अनुदान उसके बैंक खाते में सीधे (डी.बी.टी.) जमा किया जावेगा। मध्यप्रदेश राज्य कृषि उद्योग विकास निगम/मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित से सामग्री क्रय करने की स्थिति में यदि हितग्राही द्वारा केवल कृषक अंश की राशि जमा कर सामग्री क्रय की गई है तो अनुदान राशि का भुगतान संबंधित संस्था के बैंक खाते में सीधा किया जावेगा। किसानों को कंपनी द्वारा ड्रिप/स्प्रिंकलर/मोटर पंप क्रय करने पर संबंधित योजना के प्रचलित निर्देशों में उल्लेखित मात्रा में सामग्री आई.एस.आई. मार्क एवं निर्धारित गुणवत्ता की उपलब्ध कराई जाती है। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र-3 अनुसार है।

श्रीमती झूमा सोलंकी-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न किसानों के हितों को ध्‍यान में रखते हुये है जिसमें किसानों को ड्रिप और मोटर पम्‍प वगैरह विभाग के द्वारा दिये जाते हैं वह ऑनलाइन होता है जिसमें राशि या तो सीधे उनके खातों में जमा होती है और दूसरा किसानों द्वारा अंशदान राशि जमा करने पर विभाग द्वारा संबंधित संस्‍था को भुगतान की राशि दी जाती है, यह दोहरी व्‍यवस्‍था है. इसमें हमारे क्षेत्र में देखा गया है कि किसानों को इसका सीधा फायदा न मिलते हुये सीधे संस्‍थाओं को इसका ज्‍यादा फायदा हो रहा है. मैं माननीय मंत्री जी से आपके माध्‍यम से पूछना चाहती हूं कि क्‍या यह दोहरी व्‍यवस्‍था खत्‍म करके सीधे किसानों के बैंक खातों में सब्सिडी की राशि जमा होगी और जो शतप्रतिशत संस्‍थाओं को राशि दी जा रही है, क्‍या वह इस पर पाबंदी लगायेंगे ?

श्री गौरीशंकर बिसेन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह प्रश्न पूरे प्रदेश से संबंधित है. मुझे लगता है कि किसानों के हित में भी है. पहले मैं श्रीमती झूमा सोलंकी जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि इतना अच्छा प्रश्न उन्होंने किया है. अध्यक्ष महोदय, हमने इसमें परिवर्तन किया वह यह है कि एमपी एग्रो पिछले समय तक जो डीलर उपकरण सप्लाई करते थे उनको पैसा देता था. शासन ने अब नीति बदल दी है जिससे कि अनियमिततायें न हों, अब हम उत्पादक को जहां से प्रोडक्शन होता है उसको सब्सिडी देंगे. दूसरा अभी तक हम लाटरी के माध्यम से इसका चयन करते थे. उदाहरण के लिये एक विकास खण्ड में 25 हितग्राहियों ने आवेदन किया तो उसका लाटरी से चयन होता था लेकिन अब हमने परिवर्तन कर दिया है प्रथम आवे प्रथम पावें आन लाइन एप्लीकेशन होगी जिसकी एप्लीकेशन पहले आयेगी उसको प्राथमिकता दी जायेगी. अध्यक्ष महोदय, अब हमने डायरेक्ट बेनिफिट योजना चालू की (डीबीटी) इसमें बेनिफिशरी को उसके खाते में ही सीधे पैसा दिया जायेगा, अंश जमा करने के बाद में सब्सिडी का पैसा सीधे खाते में जायेगा. यह डी.बी.टी. योजना मध्यप्रदेश के सभी जिलों में हमने प्रारंभ भी कर दी है. अब पैसा किसी के हाथ में नहीं आयेगा. प्रधानमंत्री जी की मंशा के अनुसार हम सीधे अनुदान की राशि किसानों के खाते डालेंगे.

श्रीमती झूमा सोलंकी -- माननीय अध्यक्ष महोदय, एक प्रश्न और है कि जो आन लाइन की प्रक्रिया है इसमें परेशान यह है कि जो पढ़े लिखे किसान हैं वह तो प्रक्रिया का पालन कर लेते हैं लेकिन जो ग्रामीण किसान हैं उनको आन लाईन एप्लाई करने में बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है. मेरा मंत्री जी से अनुरोध है कि विभाग ऐसी व्यवस्था करे कि ग्राम सेवक या कृषि विस्तार अधिकारी, किसानों की आन लाइन की प्रक्रिया को पूर्ण करवायें.

श्री गौरीशंकर बिसेन -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं सदन के माध्यम से मध्यप्रदेश के सभी ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, एसडीओ, एसएडीओ, हमारे डिप्टी डायरेक्टर, पी़डी आत्मा और डायरेक्टर को निर्देशित करता हूं कि वह किसानों की एप्लीकेशन लेने के लिये उनके घर जायेंगे, उनके फार्म भरवायेंगे और सीधे उनकी मदद करेंगे.

श्रीमती झूमा सोलंकी -- मंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद.

श्री अनिल फिरोजिया -- माननीय अध्यक्ष महोदय, इसी से संबंधित प्रश्न है . मैं मंत्री जी से निवेदन चाहता हूं कि जो एक बीघा या दो बीघा जमीन के किसान हैं उनको डी.बी.टी योजना में सीधा लाभ नहीं मिल रहा है. वह पहले खरीदें और उनके खाते में पैसा जायेगा. हमारे जो निर्धन किसान हैं उनके लिये भी आप कुछ राहत दे दें. उनको तो डी.बी.टी. योजना से मुक्त करें.

श्री गौरीशंकर बिसेन- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय सदस्य की जानकारी में लाना चाहता हूं कि एग्रो से किसान लेता है उसको अंश जमा करना है. बाकि सब्सिडी का पैसा एग्रो के माध्यम से कंपनी को जायेगा.

श्री अनिल फिरोजिया -- उनके पास में पैसा ही नहीं है.

श्री गौरीशंकर बिसेन -- सुनिये तो. अध्यक्ष महोदय, एमपी एग्रो के माध्यम से पैसा अंश का नहीं देना है लेकिन हम अब प्रायवेट लीडर्स के माध्यम से भी नई व्यवस्था करने जा रहे हैं जिसमें कि उनसे भी लेने पर उनको अपना अंश नहीं देना पड़ेगा.

श्री अनिल फिरोजिया -- मंत्री जी, इसके लिये आपको बहुत बहुत धन्यवाद.

 

लघु एवं मध्‍यम सिंचाई परियोजना का संचालन

[जल संसाधन]

8. ( *क्र. 2076 ) श्री कुंवर सिंह टेकाम : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सीधी/सिंगरौली जिलांतर्गत विधानसभा क्षेत्र धौहनी में कितनी लघु एवं मध्‍यम सिंचाई योजनायें संचालित हैं? सूची उपलब्‍ध करायें (ख) क्‍या प्रश्नांश (क) के संदर्भ में बकिया बांध, कोड़ार बांध एवं जमधर बांध तथा वरचर बांध की मुख्‍य नहरों के पक्‍कीकरण आर.आर.आर. के माध्‍यम से कराये जाने का प्रस्‍ताव है? यदि हाँ, तो उसकी स्‍वीकृति कब तक प्रदान कर निर्माण कार्य कराया जायेगा? यदि नहीं, तो आर.आर.आर. के तहत क्‍या शामिल किया जाएगा? (ग) प्रश्नांश (क) के संदर्भ में लघु सिंचाई योजनाओं से संबंधित जीर्णोद्धार हेतु कितने प्रस्‍ताव प्राप्‍त हुए हैं? प्रस्‍तावित कार्यों की स्‍वीकृति कब तक प्रदान की जायेगी? (घ) प्रश्नांश (ख) के संदर्भ में जीर्ण-शीर्ण माइनर नहरों का मरम्‍मत कार्य कराये जाने की क्‍या योजना है? क्‍या मरम्‍मत कार्य कराया जायेगा? यदि हाँ, तो कब तक?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (ख) प्रश्नांश में उल्लेखित परियोजनाओं में नहरों के पक्कीकरण करने का कोई प्रस्ताव स्वीकृति हेतु विचाराधीन नहीं है। शेष प्रश्न उत्पन्न नहीं होते हैं। (ग) एवं (घ) पूर्व में स्‍वीकृत जीर्णोद्धार कार्यों की स्थिति संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। लघु सिंचाई परियोजनाओं के जीर्णोद्धार कराने का कोई नवीन प्रस्ताव स्वीकृति हेतु विचाराधीन नहीं होने से शेष प्रश्न उत्पन्न नहीं होते हैं।

परिशिष्ट - ''एक''

श्री कुंवर सिंह टेकाम-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को और माननीय मुख्यमंत्री जी को बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहूंगा क्योंकि मेरा विधानसभा क्षेत्र गौंड बाहुल्य क्षेत्र है और मेरे क्षेत्र में शासन ने 928 करोड़ रूपये की लागत से "गौंड सिचाई परियोजना" के नाम से स्वीकृति प्रदान की है. उसके लिये विधानसभा क्षेत्र की जनता की ओर से आपका आभार व्यक्त करता हूं. यह "गौंड सिंचाई परियोजना" जो नाम दिया है इससे गौंड जनजाति के उस क्षेत्र के लोग बहुत प्रफुल्लित हैं, हर्षित हैं, वह भी आपको बधाई देना चाहते हैं तो उनकी बधाई भी इस सदन के माध्यम से आपको देना चाहता हूं.

अध्यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्न किया था लघु एवं मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के बारे में आर.आर.आर. योजना से बनाये जाने के संबंधी उसमें विभाग ने उत्तर में कहा है कि हमारे पास में प्रस्ताव नहीं आया है. मेरा निवेदन है कि नहरों का पक्कीकरण का कार्य आर.आर.आर. योजना के माध्यम से कर दिया जाता तो सिंचाई की रूपांकित क्षमता तक हम पहुंच पाते और किसानों को सही समय पर और सही तरीके से पानी भी मिल जाता. मंत्री जी से अनुरोध है कि क्या बकिया बांध, कोडार बांध एवं वरचर बांध है तो इन तीनों में मुख्य नहरों के पक्कीकरण का कार्य क्या आर.आर.आर. के माध्यम करायेंगे.

डॉ.नरोत्तम मिश्र-- टेकाम जी, कोई भी बधाई हो तो वह मुख्यमंत्री जी को ही जाती है हमको नहीं जाती है.

श्री कुंवर सिंह टेकाम -- मैंने माननीय मुख्यमंत्री जी और आप दोनों को बधाई दी है.

डॉ. नरोत्तम मिश्र -- जैसे हम लोग आंदोलन करते थे तो ज्ञापन राज्यपाल जी के नाम से ही होता है. पूरी बधाई बजट में वित्त मंत्री जी ने ली 928 करोड़ की और वास्तव में आपकी विधानसभा की 14000 एकड़ जमीन उससे लाभान्वित हो रही है, बड़ी योजना है, बड़ा काम है . जहां तक आपने नहरों के पक्कीकरण की बात की है. इन तीनों तालाब के हम घटते क्रम में पक्कीकरण का प्रस्ताव भी भेज देंगे.

श्री कुंवर सिंह टेकाम - अध्‍यक्ष महोदय, दूसरा एक और है मोहराडोल बांध की आपने पिछले वित्‍तीय वर्ष में स्‍वीकृति प्रदान की थी, उसके लिए भी धन्‍यवाद, इसकी टेण्‍डर प्रक्रिया तो पूरी हो गई, लेकिन काम अभी तक प्रारंभ नहीं हुआ, क्‍या जल्‍दी से जल्‍दी इस बांध का निर्माण का कार्य शुरू कराएंगे.

डॉ नरोत्‍तम मिश्र - अध्‍यक्ष जी, वन विभाग का थोड़ा सा मामला है, उसको जल्‍दी शॉर्टआउट कर देंगे.

वेयर हाउसिंग में कराये गये कार्य

[किसान कल्याण तथा कृषि विकास]

9. ( *क्र. 6238 ) श्री शंकर लाल तिवारी : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या सागर जिले की मंडी/उपमंडी प्रांगणों में बुन्‍देलखण्‍ड परियोजना के तहत वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन में अधिकारियों के द्वारा निर्माण कार्य कराया गया है? (ख) क्‍या वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के इंजीनियरों द्वारा मण्‍डी/उपमंडी में घटिया निर्माण कार्य कराए गए हैं एवं इस संबंध में शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं? (ग) मंडी/उपमंडी प्रांगणों में घटिया निर्माण कार्य होने के कारण किन-किन मंडियों द्वारा आज दिनांक तक निर्मित कार्यों का आधिपत्‍य नहीं लिया गया है?(घ) घटिया निर्माण कराने वाले तकनीकी अधिकारियों के विरूद्ध आज दिनांक तक कार्यवाही क्‍यों नहीं की गई? यदि की जावेगी तो कब तक?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) जी हाँ। (ख) जी नहीं। जी हाँ, शिकायतें प्राप्‍त हुई हैं। (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है। (घ) उत्‍तरांश (ख) के अनुक्रम में निर्माण कार्यों में गुणवत्‍ता संबंधी जाँच मुख्‍य तकनीकी परीक्षक संगठन द्वारा की जा रही है। जाँच प्रतिवेदन प्राप्‍त होने के उपरान्‍त गुण-दोष के आधार पर संबंधित संस्‍था द्वारा कार्यवाही की जावेगी। परिशिष्ट - ''दो''

श्री शंकर लाल तिवारी - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न था कि बुन्‍देलखंड परियोजना के तहत सागर में मंडी, उपमंडी का निर्माण हुआ था, उस निर्माण में भारी भ्रष्‍टाचार तत्‍कालीन कार्यपालन यंत्री फूलचंद तोमर जी जो कृषि उपज मंडी विभाग के हैं उन्‍होंने किया था, जिसकी तमाम मंडियों ने जैसे सागर मंडी, शाहपुर मंडी, जैसीनगर मंडी, गढ़ाकोटा मंडी, इन मंडियों के तमाम लोगों ने शिकायत की थी, वहां हालत यह है कि गेहूं अगर प्‍लेटफार्म में डाला जाए, और गेहूं उठाया जाए तो एकाध तसला गिट्टी साथ में आ जाती है, इन चारों पांचों मंडियों को आज तक हैण्‍डओवर नहीं लिया, इसमें जिस व्‍यक्ति ने यह सारा भ्रष्‍टाचार किया, एक बार विधान सभा में भी और पहले यह विषय आ चुका है उसकी आज तक कोई जांच नहीं कराई गई, तीन साल पहले का मामला है. शिकायतों में कहा गया है कि हमने जांच भेज दी है मुख्‍य तकनीकी परीक्षक को, उसमें भी तमाशा यह किया गया कि यही फूलचंद तोमर ने कार्यपालन यंत्री रहते हुए, एक एक मंडी करोड़ों रूपए की बनी है, और जो मंडी बनी थी, उसमें भ्रष्‍टाचार किया और आज जांच के लिए जो उत्‍तर आया है कि तकनीकी परीक्षक को जांच दी है, तकनीकी परीक्षण में वह स्‍वयं कार्यपालन यंत्री के पद पर तैनात है, क्‍या उनको निलंबित करेंगे, क्‍या विभागीय जांच करवाएंगे, क्‍या उन्‍हें तकनीकी परीक्षक में जहां वह बैठे हैं, जिनको जांच करनी है, उत्‍तर में कहा गया है कि हम उनसे जांच करवा रहे हैं, तो क्‍या उनको वहां से हटाएंगे, उन्‍हें मुअत्तिल करेंगे?

श्री गौरीशंकर बिसेन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मंत्री गोपाल भार्गव जी, हमारी विधायक बहन पारूल साहू केशरी, हमारे मंडी सचिव, विधायक हर्ष यादव जी और तमाम हमारे जनप्रतिनिधियों ने यहां पर उपयंत्री मंडी जैसीनगर, सचिव जैसीनगर, सचिव गढ़ाकोटा, माननीय गोपाल भार्गव जी, इन सभी लोगों ने गढ़ाकोटा, जैसीनगर, उसके बाद सागर, शाहपुर को छोड़कर सभी जगह में निर्माण कार्य की शिकायत की है. हमारे वरिष्‍ठ मंत्री माननीय गोपाल भार्गव जी और जितने भी शिकायतकर्ता है, सभी की शिकायत गंभीर है. हमने इसको गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए भेजा है और इसकी जांच मुख्‍य तकनीकी परीक्षक कर रहे हैं, जांच का प्रतिवेदन अभी आया नहीं है, मुझे लगता है हमने जांच के लिए लिखा है, हमारे माननीय गोपाल भार्गव जी का जो पत्र है यह पत्र है दिनांक 10.03.16 को पत्र मिला है, इसकी जांच में समय लगेगा, हमारे एक सचिव का पत्र वर्ष 2015 का है, एक सचिव का 2016 का है, एक और सचिव का 2015 का है.

श्री शंकर लाल तिवारी - अध्‍यक्ष महोदय, आज तक इनको सस्‍पेंड क्‍यों नहीं किया गया, आज तक भ्रष्‍टाचार प्रमाणित होने के बाद उसे मुअत्तिल नहीं किया, आप मुख्‍य परीक्षक से जांच कराने की बात कर रहे हैं और वहीं पर उसे कार्यपालन यंत्री बना दिया, पहले उसको मुअत्तिल करने की बात करिए.

श्री गौरीशंकर बिसेन - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वर्ष 2015-16 में इसकी गंभीर शिकायत हुई है. इस सरकार के वरिष्‍ठ मंत्री, केबिनेट मंत्री श्री गोपाल भार्गव जी की शिकायत को मैं गंभीरता से ले रहा हूं.

श्री शंकर लाल तिवारी - मंत्री जी आपने, भार्गव जी के पत्र लिखने के बाद भी वहां के विधायक के कहने के बाद भी सस्‍पेंड नहीं किया.

श्री गौरीशंकर चतुर्भुज बिसेन - अध्‍यक्ष महोदय, फूलचंद तोमर, कार्यपालन यंत्री हमारे मंडी के हैं और यह प्रतिनियुक्ति पर सिटी में है. मैं अभी अपने विभाग से आज ही इसको प्रतिनियुक्ति से वापस लेने के निर्देश जारी करता हूं, इसके बावजूद इन्‍होंने भ्रष्‍टाचार किया है, इसको निलंबित किया जाता है.(मेजों की थपथपाहट....)

श्री शंकर लाल तिवारी - माननीय मंत्री जी को मैं हृदय से धन्‍यवाद देता हूं.

 

आई.सी.डी.पी. योजना अंतर्गत गोदाम निर्माण

[सहकारिता]

10. ( *क्र. 5860 ) श्री संजय उइके : क्या राज्‍यमंत्री, सहकारिता महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) बालाघाट जिले में आई.सी.डी.पी. योजनान्‍तर्गत वित्‍तीय वर्ष 2011-12 से प्रश्‍न दिनांक तक गोदाम निर्माण हेतु भूमि आवंटन के लिए किन-किन समितियों से प्रस्‍ताव, कलेक्‍टर बालाघाट के समक्ष आये हैं? (ख) कौन-कौन सी समितियों को भूमि आवंटित कर गोदाम निर्माण हेतु कितनी राशि कब प्रदान की गई है? (ग) भूमि आवंटन में घास एवं छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि में गोदाम निर्माण में अवरोध उत्‍पन्‍न होने से किन-किन समितियों को भूमि आवंटन नहीं किया गया है? समितिवार जानकारी देवें। (घ) क्‍या शासन स्‍तर पर उक्‍त मद परिवर्तन कर गोदाम निर्माण हेतु विभाग द्वारा प्रयास किया जा रहा है?

राज्‍यमंत्री, सहकारिता ( श्री विश्वास सारंग ) : (क) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''एक'' अनुसार है। (ख) जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''दो'' अनुसार है। (ग) 11 समितियों को। जानकारी पुस्तकालय में रखे परिशिष्ट के प्रपत्र ''तीन'' अनुसार है। (घ) वन संरक्षण अधिनियम 1980 के अंतर्गत आवश्‍यक कार्यवाही प्रावधानित है।

श्री संजय उइके -- अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न सहकारी समिति के गोदाम भवनों हेतु भूमि से संबंधित राजस्व विभाग से संबंधित था, उसको बदलकर सहकारिता विभाग को दे दिया गया. फिर भी मैं मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि जो उन्होंने उत्तर (घ) में जवाब दिया है कि वन संरक्षण अधिनियम,1980 के अंतर्गत आवश्यक कार्यवाही प्रावधानित है. क्या वह एनओसी के लिये है या मद परिवर्तन के लिये है, यह मैं जानना चाहता हूं.

श्री विश्वास सारंग -- अध्यक्ष महोदय, 67 गोदाम बनाने का प्रस्ताव था, जिसमें से 56 बनकर तैयार हुए हैं. 11 के लिये कलेक्टर ने पहले फेज में, क्योंकि यह वन भूमि थी, इसलिये रिजेक्ट किया था, पर हमने नये प्रारुप में उसको फिर से एप्लाई किया है और हमें ऐसा विश्वास है कि जल्दी से जल्दी उसकी परमीशन मिलेगी और ये 11 गोदाम भी हम बना देंगे.

श्री संजय उइके -- मंत्री जी, धन्यवाद.

 

 

 

मझगवां सघन बस्ती में राष्‍ट्रीय राजमार्ग का निर्माण

[लोक निर्माण]

11. ( *क्र. 3265 ) श्री मोती कश्यप : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्या वर्ष 2015-16 की अवधि में कटनी-अनूपपुर राष्ट्रीय राजमार्ग 78 के अंतर्गत तहसील बड़वारा के ग्राम मझगवां में बायपास निर्माण हेतु कृषकों के द्वारा मा. मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय जबलपुर में प्रस्तुत किये गये किसी वाद और पुनरीक्षण याचिका पर किसके पक्ष में किन्हीं दिनांकों को कोई निर्णय दिये गये हैं? (ख) क्या कलेक्टर कटनी के परामर्श पर निर्माण एजेन्सी द्वारा मझगवां के मध्‍य से जाने वाले सकरे मार्ग पर सैकड़ों वर्ष से निवास कर रहे ग्रामीणों के आवासों को ध्वस्त‍ कर वर्तमान प्रचलित मार्ग का निर्माण किया जाना वैधानिक है? () क्या विभाग द्वारा जनविरोध के विध्वंस को बचाते हुए दायीं दिशा की शासकीय व बंजर पड़ी कृषकों की भूमि से बायपास का निर्माण कराकर ग्रामीणों को राहत प्रदान की जावेगी?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जी हाँ। जानकारी संलग्‍न परिशिष्ट अनुसार(ख) जी हाँ। ग्राम मझगवां बायपास में भू-अर्जन प्रक्रिया पूर्ण न हो पाने के कारण व परियोजना को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, नई दिल्ली, भारत सरकार द्वारा निर्धारित अनुबंधानुसार समय-सीमा में पूर्ण करने हेतु अथॉरिटी इंजीनियर के अभिमत पर विद्यमान मार्ग का निर्माण मझगवां के मध्य से विद्यमान मार्ग पर कार्य किया जा रहा है। विद्यमान मार्ग में पर्याप्त चौड़ाई उपलब्ध है व विभाग द्वारा कुछ ही जगहों पर शासकीय भूमि पर अतिक्रमण तोड़कर निर्माण संभव होगा। () जी नहीं। मार्ग निर्माण विद्यमान सड़क सीमा में किया जा रहा है अतः विरोध की कोई स्थिति नहीं है।

परिशिष्ट - ''तीन''

श्री मोती कश्यप -- अध्यक्ष महोदय, मैंने जो राष्ट्रीय राजमार्ग 78 के संबंध में प्रश्न किया था, उसका जो कटनी से उमरिया का खण्ड है ,तो उसमें मझगवां जो गांव बीच में पड़ता है. उस गांव की बाईं दिशा से मार्ग की अधिसूचना भारत के राजपत्र में प्रकाशित हुई थी. अब उसको बदलकर ये जो मार्ग बना रहे हैं, उससे 50 कृषक सब्जी उगाने वाले प्रभावित हो रहे हैं. अब उसको बदलकर गांव के बीच के सकरे मार्ग से इस मार्ग को बनाया जा रहा है. जो परिशिष्ट दिया है, उसमें भी यह उल्लेख है कि किसानों ने माननीय हाई कोर्ट में एक याचिका लगाई थी. एक याचिका में माननीय हाई कोर्ट ने निर्णय दिया कि भूअर्जन अधिकारी, सक्षम अधिकारी उसकी सुनवाई करे, पक्षों को सुनें और उसके बाद कोई निर्णय ले. इसमें दूसरी याचिका भी लगी है, उस याचिका का अभी तक फैसला नहीं हुआ है, वह लम्बित, विचाराधीन है. लेकिन उस सबके बावजूद भी इन्होंने मार्ग परिवर्तन कर दिया. किसानों का अपना यह मानना है कि बाईं दिशा से मार्ग न बनाकर दाईं दिशा की जो बंजर भूमि है, जिसमें शासकीय भमि का रकबा बहुत ही अधिक है, उस भूमि पर मार्ग को बनायें, तो उसमें मुश्किल से 2,3,4 किसान कृषि के प्रभावित होंगे अन्यथा इसमें पचासों किसान प्रभावित हो रहे हैं. तो यह प्रश्न जो मैंने लगाया, जहां तक जन सुनवाई का प्रश्न है, तो जन सुनवाई तो हुई नहीं. कलेक्टर के पास किसानों का डेलीगेशन गया. कलेक्टर ने उनको डांटकर भगा दिया कि तुम लोग यदि बाधा उत्पन्न करोगे तो हम तुम लोगों को जेल भिजवा देंगे. मैं मंत्री जी से यह प्रश्न करना चाहता हूं कि माननीय उच्च न्यायालय ने जो निर्देश दिया है कि सक्षम अधिकारी, भू अर्जन अधिकारी पक्षों को सुनें और उसके बाद निर्णय दे. तो उनके द्वारा किस तारीख को इस पर सुनवाई की गई और क्या निर्णय दिया गया.

श्री रामपाल सिंह -- अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी का जो प्रश्न है, इसमें मुख्य अभियंता स्तर के, भारत सरकार के अधिकारी भी आये थे, बायपास बना रहे थे, वहां उसका विरोध शुरु हुआ. फिर किसान माननीय उच्च न्यायालय गये. न्यायालय ने भूअर्जन अधिकारी को निर्देश दिया कि सुनवाई करके निराकरण करें, जो वहां के जिला कलेक्टर हैं, सब ने मिलकर चर्चा की और शहर से बनाने का उसका निर्णय किया. शहर से मार्ग का निर्माण कार्य प्रारम्भ हो रहा है. बायपास में बाधा आ रही थी. इस तरह से प्रक्रिया पूरी की गई है, दोनों पक्ष को सुना गया, जो सक्षम भूअर्जन अधिकारी हैं और उनको सुनने के बाद तय हुआ कि बीच में से ही मार्ग बनाया जायेगा. तो मार्ग बीच में से बनाया जा रहा है. विधायक जी, अब आप जिस तरह जो बायपास मार्ग का चाहते हैं,तो आप वहां के जन प्रतिनिधि हैं, अच्छी तरह से समझ सकते हैं. लोगों की क्या भावना है और क्या आप चाहते हैं, तो उस हिसाब से आप बतायें और हम आपके हिसाब से क्या कर सकते हैं,थोड़ा मार्गदर्शन आप हमें करें.

श्री मोती कश्यप -- अध्यक्ष महोदय, मार्गदर्शन की जहां तक बात है, तो एक तो पहली चीज यह है कि जो दूसरी याचिका है, उसमें न्यायालय का अभी तक निर्णय नहीं हुआ. दूसरी जो मेरी मांग है, चूंकि बाईं तरफ बनेगा, तो उसमें पचासों किसान प्रभावित होंगे, दाईं तरफ शासकीय भूमि है और बंजर भूमि है. उसमें केवल 2,3, 4 किसानों की भूमि है, वह भी बंजर भूमि है. पेट्रोल पम्प के पीछे एक या दो किसान हैं, जिनकी भूमि आती है. तो पचासों किसानों की भूमि का बलिदान न देकर दाईं तरफ 1,2 किसानों की भूमि आ रही है और एक बात और हम आपको बता दें कि जब भी जवारे का मौसम आता है या दशहरे का मौसम आता है, वह पूरा मार्ग अवरुद्ध हो जाता है और प्रचलित मार्ग में से यदि हम बनायेंगे, तो वह बहुत ही सकरा मार्ग है और हमको इसमें तोड़-फोड़ करना पड़ेगी तथा पचासों मकान धवस्त हो जायेंगे. तो उसकी बजाये, लोगों को बर्बाद करने की बजाये जो बंजर भूमि है, शासकीय भूमि है, उधर से उस मार्ग को निकाला जाये, मेरा आग्रह केवल इतना है. मंत्री जी, मैं चाहूंगा कि इस दिशा में प्रयत्न करें, तो बहुत ही अच्छा होगा.

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, बायपास बनाने का पहले भी प्रयास किया गया था, उसमें वन भूमि भी आ रही थी. उसमें भी भारत सरकार को पत्र लिखा गया है, वहां से भी अनुमति नहीं मिली एवं कार्य में विलम्‍ब हुआ और वहां पर जनता ने विरोध किया. माननीय न्‍यायालय भी गए थे और इसमें काफी विवाद हुआ था इसलिए इस कार्य में काफी विलम्‍ब हो रहा है. लेकिन माननीय हमारे साथी मोती कश्‍यप जी का कहना है तो हम भारत सरकार को एक बार और आग्रह पत्र लिख देते हैं तथा इनकी भावनाओं से अवगत करा देते हैं, लेकिन वहां की जवाबदारी आपको संभालनी पड़ेगी, वहां पर जो पहले विरोध हुआ था और इसकी वजह से हमको शहर में से मार्ग बनाना पड़ रहा है. उसका सामना आप भी करें एवं आप जनमत तैयार करें. हम लोग उनकी भावनाओं से सहमत हैं.

जबलपुर-भोपाल सड़क मार्ग का रख-रखाव

[लोक निर्माण]

12. ( *क्र. 6282 ) श्रीमती प्रतिभा सिंह : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) जबलपुर जिले के अंतर्गत आने वाले जबलपुर-भोपाल (NH-12) मार्ग के जबलपुर से प्रश्‍नकर्ता के गाँव बेलखेड़ा तक विगत एक वर्ष में सुधार, रख-रखाव के क्‍या-क्‍या कार्य कितनी-कितनी राशि से किन-किन ठेकेदारों से कराये गये? (ख) क्‍या प्रश्नांश (क) रोड का एक वर्ष से सुधार कार्य नहीं होने के कारण सड़क गड्ढों में तब्‍दील हो गयी है? मात्र 50 कि.मी. यात्रा में उक्‍त रोड पर 3 घंटे का समय लग रहा है? क्‍या शासन उक्‍त जर्जर मार्ग का सुधार शीघ्र कराने के निर्देश MPRDC को देगा? यदि हाँ, तो कब तक?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) जानकारी संलग्‍न परिशिष्‍ट अनुसार है। (ख) जी नहीं। जी नहीं। मार्ग की मरम्‍मत म.प्र. रोड़ डेव्‍हलपमेंट कार्पो.लि. द्वारा जारी है। जबलपुर से हिरन नदी तक विद्यमान मार्ग पर चारलेन में उन्‍नयन हेतु केन्‍द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय नई दिल्‍ली द्वारा स्‍वीकृति प्रदान की गई है।

परिशिष्ट - ''चार''

श्रीमती प्रतिभा सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहती हूँ कि जबलपुर-भोपाल एन.एच.12 मार्ग की मरम्‍मत एवं संधारण का कार्यादेश परिशिष्‍ट के अनुसार दिनांक 3/12/2016 को ठेकेदार को दिया गया था और कार्यादेश के अनुसार कार्य पूर्ण करने की दिनांक 2/2/2017 थी, लेकिन अभी तक सिर्फ 48 किलोमीटर तक का पेंचवर्क किया गया है, इसमें कार्य ठीक से नहीं किया गया है और छोटे-छोटे गड्ढों को छोड़ दिया गया है, जो पुन: बड़े हो जाएंगे एवं जिससे पुन: परेशानी होने लगेगी तथा लगभग 20 किलोमीटर तक मनखेड़ी से मेरे गांव बेलखेड़ा मार्ग का कार्य अपूर्ण है. जिसमें बहुत बड़े-बड़े गड्ढे हैं, जिससे की सभी को बहुत परेशानी हो रही है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह करती हूँ कि यह कार्य जो करीब 20 किलोमीटर का मनखेड़ी से मेरे गांव बेलखेड़ा तक बचा हुआ है क्‍योंकि इसमें हमारी 10 अप्रैल को नर्मदा यात्रा भी है तो माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि एक सप्‍ताह के अन्‍दर यह कार्य पूर्ण कर दिया जाये.

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, वास्‍तव में यह कार्य 628 करोड़ रुपये का है एवं इसे एम.बी.एल.इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, नई दिल्‍ली ने लिया है और इसका आदेश हो गया था लेकिन इन्‍होंने कार्य प्रारंभ नहीं किया है. हमने इसको हटाने का पत्र भारत सरकार को लिखा है. लेकिन माननीय विधायक जी की जो चिन्‍ता है. जो मार्ग का कुछ कार्य अभी रह गया है, हम अपने स्‍तर पर उस मार्ग को एक सप्‍ताह के अन्‍दर दुरुस्‍त करवा देंगे, ठीक करा देंगे.

श्रीमती प्रतिभा सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, एक निवेदन और था, जैसा अभी मंत्री जी ने कहा है क्‍योंकि यह एन.एच.12 जबलपुर- भोपाल मार्ग है और मेरी विधानसभा का करीब 65 किलोमीटर मार्ग इसमें आता है, यह कार्य भी जल्‍दी हो जाये. जो दिल्‍ली की कम्‍पनी स्‍वीकृत की गई है. आपने कहा है कि गडकरी जी से भी बात की थी तो मैं आपको धन्‍यवाद देती हूँ. यह मार्ग जल्‍दी से बन जाये, इसके लिये निवेदन करती हूँ क्‍योंकि वह कम्‍पनी कार्य नहीं करना चाहती है, उसको टर्मिनेट कर दिया जाये एवं किसी दूसरी कम्‍पनी को कार्य दिया जाये.

श्री रामपाल सिंह - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, हमको यह सफलता बहुत प्रयासों के बाद मिली है. एन.एच.12 मार्ग आपका है, बहन मेरा गांव भी वहीं पड़ता है. आप चिन्‍ता न करें, हम उसके लिये पूरी मेहनत कर रहे हैं.

 

 

मुख्‍यमंत्री की घोषणा का क्रियान्‍वयन

[जल संसाधन]

13. ( *क्र. 5160 ) श्री रणजीतसिंह गुणवान : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) क्‍या आष्‍टा विधान सभा क्षेत्र में माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने घोषणा की थी कि झीकडी मनीपुरा तालाब की पाल बढ़वाई जायेगी? (ख) यदि हाँ, तो अभी तक घोषणा पर कार्य क्‍यों नहीं हुआ? (ग) कब तक कार्य प्रारम्‍भ कर दिया जायेगा? इसके लिये कौन जिम्‍मेदार है?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) से (ग) जी हाँ। मान. मुख्यमंत्री जी द्वारा दिनांक 25.01.2016 को की गई घोषणा क्र. बी-1558 है। घोषणा के परिप्रेक्ष्य में सर्वेक्षण कार्य किया गया। प्रस्ताव परीक्षणाधीन है।

श्री रणजीतसिंह गुणवान - माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न इस प्रकार से है कि माननीय मुख्‍यमंत्री जी ने मेरे आष्‍टा विधानसभा क्षेत्र में घोषणा की थी, मैं 12 तालाबों का नाम बता दूँ, कान्‍याखेड़ी, गुराड़याबर्मा, पाल्‍याखेड़ी, बिलपान और लाख्‍या धर्मपुरी, बड़खौला, देवली, छापर, छायन, भौरा, भटोली और देवली, इसमें से एक तालाब की पाल ऊँची करने का मुख्‍यमंत्री जी ने हमें आश्‍वासन दिया था. माननीय मंत्री जी से निवेदन है कि जो हमारे 12 तालाब हैं, उनमें से कम से कम 6 तालाब तो ले लें. मेरे क्षेत्र में तालाब नहीं हैं. किसान को सिंचाई करने के लिए पानी नहीं है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि आप घोषणा कर दें. मुझे पूरा विश्‍वास है कि आप मुझ पर कृपा करेंगे.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- आप मुख्‍यमंत्री जी के खास हैं. आप पर तो वह ही कृपा कर रहे हैं. मैं कहां हूं. अध्‍यक्ष महोदय, परसों जब घोषणा हुई थी आप ही आसंदी पर थे. मैंने परसों ही मनीपुरा तालाब को बजट में शामिल कर लिया है और बजट में घोषणा भी कर दी. इसके बाद इन्‍होंने जो दूसरी बात कही है..

डॉ. गौरीशंकर शेजवार-- अध्‍यक्ष महोदय, यह कह रहे हैं कि आप मुख्‍यमंत्री जी के खास हैं. यह चाहते हैं कि बदले में विधायक इनसे कहें कि नहीं साहब आप सबसे ज्‍यादा खास हैं तो इन्‍हें तो किसी ने कहा ही नहीं.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- मेरा काम तो डॉक्‍टर साहब से चल जाएगा. दूसरे का भी एक माह में हम तत्‍काल परीक्षण करा लेंगे.

श्री रणजीत सिंह गुणवान-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा दूसरा प्रश्‍न यह है कि पांच स्‍टॉप डेम हैं. उनकी डी.पी.आर. हो गई है. उनका टेंडर होना शेष है.

अध्‍यक्ष महोदय-- स्‍टॉप डेम का टेंडर होना है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- अध्‍यक्ष महोदय, उसका भी परीक्षण करा लेंगे.

घूघस सिघौरा नदी पर पुल निर्माण

[लोक निर्माण]

14. ( *क्र. 7073 ) श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार : क्या लोक निर्माण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) सुमावली विधानसभा क्षेत्र मुरैना में घूघस-सिघौरा नदी पर पुल निर्माण कार्य क्‍यों बंद किया गया है? फरवरी 2017 की स्थिति में जानकारी दी जावे। (ख) उक्‍त पुल निर्माण की स्‍वीकृत राशि कितनी थी? कितनी राशि अभी तक खर्च की जा चुकी है? कौन सी कम्‍पनी कार्य कर रही है? कितना प्रतिशत निर्माण कार्य किया जा चुका है? (ग) अभी तक कितना कार्य कराया जा चुका है? क्‍या उक्‍त पुल के निर्माण की शासन द्वारा वैकल्पिक योजना बनाई गई है? यदि हाँ, तो क्‍या? यदि नहीं, तो क्‍यों नहीं?

लोक निर्माण मंत्री ( श्री रामपाल सिंह ) : (क) निर्माणाधीन पुल के डाउनस्‍ट्रीम में जल संसाधन विभाग द्वारा बैराज का निर्माण स्‍वीकृत होने के कारण पुल डूब क्षेत्र में आने से। वर्तमान में पुल निर्माण कार्य बंद है। (ख) रू. 645.85 लाख। रू. 107.27 लाख। मेसर्स चम्‍बल डेवलपर्स ग्‍वालियर। लगभग 18 प्रतिशत। (ग) लगभग 18 प्रतिशत कार्य पूर्ण। जी नहीं। प्रश्‍न उपस्थित नहीं होता है। वर्तमान में पुल एवं पहुंच मार्ग के निर्माण हेतु वैकल्पिक कार्य योजना तैयार करने की कार्यवाही संबंधित विभागों के संयुक्‍त समन्‍वय से की जावेगी।

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार-- अध्‍यक्ष महोदय, मैंने जो प्रश्‍न किया था उसमें माननीय मंत्री महोदय ने जवाब दिया है कि निर्माणाधीन पुल के डाउनस्‍ट्रीम में जल संसाधन विभाग द्वारा बैराज का निर्माण स्‍वीकृ‍त होने के कारण पुल डूब क्षेत्र में आने से वर्तमान में पुल निर्माण का कार्य बंद है. मैं माननीय मंत्री महोदय से यह पूछना चाहता हूं कि क्‍या जल संसाधन विभाग ने लोक निर्माण विभाग को इस विषय को लेकर कोई पत्र लिखे हैं ?

अध्‍यक्ष महोदय-- आप किससे प्रश्‍न पूछ रहे हैं.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार-- माननीय मंत्री महोदय से पूछ रहा हूं.

अध्‍यक्ष महोदय-- इसका उत्‍तर पी.डब्‍ल्‍यू.डी. मंत्री देंगे.

श्री रामपाल सिंह-- अध्‍यक्ष महोदय, एक अप्रैल 2013 को घूघस-सिघौरा नदी पर पुल निर्माण स्‍वीकृत किया गया था. इसके बाद जल संसाधन विभाग ने वर्ष 2016 में एक डेम की स्‍वीकृति‍ प्रदान कर दी. इससे हमको कठिनाई आई और 6 करोड़ 40 लाख रुपए का हमने पुल स्‍वीकृत किया था उसको हम नहीं बना पा रहे हैं फिर हमने जल संसाधन विभाग से चर्चा की, राशि के संबंध में पत्राचार भी किया गया. लेकिन वर्ष 2016 में जल संसाधन विभाग ने स्‍वीकृत कर दिया. हमारा काम 18 प्रतिशत में हो गया था लेकिन अब सिंचाई विभाग से चर्चा करके वैकल्पिक मार्ग की व्‍यवस्‍था करेंगे.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवार-- अध्‍यक्ष महोदय, मैं मंत्री महोदय से जानना चाहता हूं कि करीब 4 पत्र जल संसाधन विभाग ने लिखे हैं. मेरे पास वह पत्र उपलब्‍ध हैं. उन्‍होंने अपने पत्र में यह कहा है कि लोक निर्माण विभाग ने जो पुल स्‍वीकृत किए हैं उसकी जो राशि लोक निर्माण विभाग खर्च करने वाला है. उसके अतिरिक्‍त ऊंचाई बढ़ाने में जो व्‍यय आएगा वह जल संसाधन विभाग करेगा. यहां से केवल उसका एस्‍टीमेट बनकर जाना है. जल संसाधन विभाग से वह स्‍वीकृत हो जाएगा.

श्री रामपाल सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, पहला पत्र तो जल संसाधन विभाग ने काम रोकने के लिए लिखा है. फिर हमने लिखा कि हमारा पैसा यदि स्‍वीकृत है फिर उन्‍होंने कहा कि ठीक है आप प्रस्‍ताव भेजिएगा कितनी राशि है. उसके बाद हम चर्चा करके इसका निराकरण करेंगे और जल्‍द ही आपकी समस्‍या का समाधान होगा.

श्री सत्‍यपाल सिंह सिकरवर-- धन्‍यवाद माननीय मंत्री जी.

बांध सुजारा परियोजना से विस्‍थापितों का पुनर्वास

[जल संसाधन]

15. ( *क्र. 5209 ) श्री के. के. श्रीवास्‍तव : क्या जल संसाधन मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) टीकमगढ़ जिले में बांध सुजारा बांध परियोजना में जिन गाँवों की जमीन डूब क्षेत्र में प्रभावित हुई उन प्रभावितों को जहां पुनर्वासित किया जा रहा है, वहाँ मूलभूत अधोसरंचना के अंतर्गत क्‍या-क्‍या निर्माण कार्य हुये हैं और अब तक क्‍या-क्‍या किये जा चुके हैं? अलग-अलग बसाहटों की स्‍पष्‍ट जानकारी दें (ख) नवीन बसाहटों में कब तक निर्धारित मापदण्‍डों के तहत निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जावेगा? (ग) शासन के निर्धारित मापदण्‍डों के अधीन निर्माण कार्य कब तक पूर्ण कर लिया जाना चाहिये? अवधि बताये तथा पुनर्वास की शर्तों के अधीन प्रश्‍न दिनांक तक निर्माण न कर पाने वालों के विरूद्ध क्‍या कार्यवाही निरूपित की गई है? यदि नहीं, तो क्‍यों?

जल संसाधन मंत्री ( डॉ. नरोत्तम मिश्र ) : (क) विस्थापित परिवारों के लिये टीकमगढ़ जिले में 02 पुनर्वास कॉलोनी, नवीन पुरैनिया एवं नवीन दरगुंआ बनाई जा रही है। नवीन पुरैनिया कॉलोनी में प्राथमिक शाला भवन, माध्यमिक शाला भवन, सामुदायिक भवन, आंगनवाड़ी भवन, मन्दिर, शान्तिधाम, पेयजल हेतु पानी की टंकियाँ, डब्ल्यू.बी.एम. सड़क, जल निकासी हेतु नालियाँ, विद्युत व्यवस्था आदि निर्माण कार्य 95 प्रतिशत तक पूर्ण कराये जा चुके हैं एवं नवीन कॉलोनी दरगुंआ में प्राथमिक शाला भवन, सामुदायिक भवन, आंगनवाड़ी भवन, मन्दिर, शान्तिधाम, पेयजल हेतु पानी की टंकियाँ, डब्ल्यू.बी.एम. सड़क, जल निकासी हेतु नालियाँ आदि के कार्य 50 प्रतिशत पूर्ण होकर प्रगतिरत हैं। (ख) नवीन पुरैनिया में मार्च 2017 तक तथा नवीन दरगुंआ में मई 2017 तक निर्माण कार्य पूर्ण होना संभावित है। (ग) इस वर्ष बाँध में जल भराव 311 मीटर तक होने की संभावना है। इस स्तर तक जल भराव के पूर्व प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की कार्यवाही पूर्ण कर ली जावेगी। पुनर्वास कॉलोनियों के अधोसंरचना निर्माण संबंधी अब तक की कार्यवाही संतोष-जनक होने से किसी के विरूद्ध कार्यवाही करने की स्थिति नहीं है।

श्री के.के. श्रीवास्‍तव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा प्रश्‍न सुजारा बांध में दो पुनर्वास कॉलोनी बनने का था. उसमें उत्‍तर मिला है कि 95 प्रतिशत कार्य मार्च में पूरा कर लिया जाएगा. काम तो चल रहा है और मैं संतुष्‍ट भी हूं, लेकिन अभी काम की स्‍पीड कम है. इसलिए उस काम को और तेज स्‍पीड से बढ़ाने की कृपा करें. इसी सुजारा बांध से संबंधित एक प्रश्‍न और है कि हमारे यहां से 526 गांव की मुख्‍यमंत्री समूह जल प्रदाय योजना 975 करोड़ की आपने स्‍वीकृत की है. उसके लिए बहुत-बहुत धन्‍यवाद. अभी इरीगेशन ने उसमें 29 एम.सी.एम. पानी देने के लिए हमें मना किया है. केवल 10 एम.सी.एम. पानी दे रहे हैं. इससे पीने के पानी का संकट पैदा हो जाएगा. बुंदेलखण्‍ड में सूखा है. 29 एम.सी.एम. पानी पूरा मिला जाए तो टीकमगढ़ जिले के 4 विधान सभा क्षेत्र के 526 गांव पीने के पानी के संकट से मुक्‍त हो जाएंगे. अध्‍यक्ष महोदय, मैं आपके माध्‍यम से माननीय मंत्री से चाहता हूं कि पीने का पानी मिल जाए.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- अध्‍यक्ष महोदय, पहला सम्‍माननीय सदस्‍य का प्रश्‍न है कि स्‍पीड बढ़ा दें तो के.के.भाई के बोलने की जो स्‍पीड है उस स्‍पीड पर उसे लाने की कोशिश करेंगे. दूसरा जो प्रश्‍न है उस पर पी.एच.ई. विभाग से बात करके आगे कार्यवाही करेंगे.

श्री के.के. श्रीवास्‍तव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पीने के पानी का संकट है. सिंचाई भले ही कम हो जाए लेकिन पीने का पानी जरूरी है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- पीने के पानी का विभाग अलग है.

श्री के.के. श्रीवास्‍तव-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, लेकिन पानी तो आप ही को देना है.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र-- अध्‍यक्ष महोदय, दोनों से बात कर लेंगे.

 

उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक दवाइयों की जाँच

[किसान कल्याण तथा कृषि विकास]

16. ( *क्र. 6924 ) श्री मुकेश पण्‍ड्या : क्या किसान कल्याण मंत्री महोदय यह बताने की कृपा करेंगे कि (क) विकासखण्‍ड बड़नगर में वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में विभागीय अधिकारियों के द्वारा कितनी दुकानों से उर्वरक, बीज एवं कीटनाशक दवाइयों के नमूने जाँच कराने हेतु लिये गये? (ख) कितनी दुकानों के लायसेंस निरस्त हुए, कितने व्यापारियों को चेतावनी दी गई, कितने व्यापारियों एवं दुकानों के विरूद्ध कार्यवाही की गई? (ग) वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 में विकासखण्‍ड बड़नगर में कितने व्‍यापारियों को नये लायसेंस जारी किये गये तथा किस अधिकारी द्वारा जारी किये गये?

किसान कल्याण मंत्री ( श्री गौरीशंकर बिसेन ) : (क) विकासखण्‍ड बड़नगर में वर्ष 2014-15 में 41 लायसेंसधारी से एवं 2015-16 में 48 लायसेंसधारी से विभागीय अधिकारियों के द्वारा उर्वरक बीज एवं कीटनाशक दवाइयों के नमूने जाँच कराने हेतु लिये गये। (ख) वर्ष 2014-15 में 10 लायसेंसधारी को कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर अमानक नमूने के शेष स्‍कंध का विक्रय प्रतिबंधित किया गया। जिनमें से 03 लायसेंसधारी के लायसेंस निरस्‍त किये गये तथा 02 लायसेंसधारी के लायसेंस निलंबित किये गये। वर्ष 2015-16 में 06 लायसेंसधारी को कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर अमानक नमूने के शेष स्‍कंध का विक्रय प्रतिबंधित किया गया। जिनमें से 01 लायसेंसधारी का लायसेंस निरस्‍त किया गया तथा 01 लायसेंसधारी का लायसेंस निलंबित किया गया। (ग) जानकारी संलग्न परिशिष्ट अनुसार है।

परिशिष्ट - ''पाँच''

 

श्री मुकेश पण्ड्या--माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे द्वारा ऊर्वरक और कीटनाशक दवाइयों के संबंध में वर्ष 2014-15 व 2015-16 के बारे में प्रश्न पूछा गया था. इसका उत्तर दिया गया है कि वर्ष 2014-15 में 42 लायसेंसधारी एवं वर्ष 2015-16 में 48 लायसेंसधारी लोगों की अमानक की जांच की गई थी. जबकि वर्ष 2014-15 में केवल 10 लायसेंसधारियों की जाँच की गई जिसमें से 3 लायसेंसधारियों के लायसेंस निरस्त किए गए तथा 2 लायसेंसधारियों के लायसेंस निलंबित किए गए. साथ ही वर्ष 2015-16 में 6 लायसेंसधारियों की जांच की गई. मेरा यह कहना है कि जो शेष बचे हुए लोग हैं जिनकी जाँच की गई उस जाँच में क्या कार्यवाही की गई. जो शेष बचे हैं क्या उनके लायसेंस निलंबित किये जायेंगे ?

किसान कल्याण मंत्री (श्री गौरीशंकर बिसेन)--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय विधायक जी जो कहेंगे वह हम कर देंगे. (मेजों की थपथपाहट)

श्री मुकेश पण्डया--माननीय अध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी को धन्यवाद.

 

(प्रश्नकाल समाप्त)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.01 बजे नियम 267 (क) के अधीन विषय

अध्यक्ष महोदय--निम्नलिखित माननीय सदस्यों की सूचनाएँ सदन में पढ़ी हुई मानी जाएंगी--

1. श्री फुन्देलाल सिंह मार्को

2. श्री मुकेश नायक

3. श्री सूबेदार सिंह रजौधा

4. श्री ठाकुरदास नागवंशी

5. श्री सुखेन्द्र सिंह

6. श्री हरदीप सिंह डंग

7. श्री जालम सिंह पटेल

8. श्री मधु भगत

9. श्री प्रदीप अग्रवाल

10. श्री चन्दर सिंह सिसोदिया.

 

 

 

12.02 बजे सम्पत्ति का विवरण पटल पर रखा जाना

श्री गौरीशंकर बिसेन, किसान कल्याण तथा कृषि मंत्री का सम्पत्ति विवरण.

 

किसान कल्याण तथा कृषि मंत्री (श्री गौरीशंकर बिसेन)--माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं स्वयं एवं पत्नी का चल-अचल संपत्ति का विवरण दिनांक 21 मार्च 2017 की स्थिति मे पटल पर रखता हूँ.

श्री तरुन भनोत (जबलपुर-पश्चिम)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बड़ा गंभीर मुद्दा है कि एक तरफ गरीबों को अनाज नहीं मिल रहा है. सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन है.

अध्यक्ष महोदय--मैं आपको बाद में समय देता हूँ.

 

 

 

 

12.02 बजे

औचित्य का प्रश्न

मंत्री द्वारा संपत्ति विवरण पटल पर रखने विषयक.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय आप कहते हैं कि विधान सभा कानून और कायदे से चलती है. माननीय मंत्री जी आपने अपनी संपत्ति का ब्यौरा विधान सभा के अंदर किस कानून नियम के तहत रखा है. माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से जानना चाहता हूँ.

अध्यक्ष महोदय--आप भी रख दें आपको भी अनुमति दे रहे हैं.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--अध्यक्ष महोदय, मर्जी का सवाल नहीं है. नियम, कानून और प्रक्रिया का सवाल है.

अध्यक्ष महोदय--आपने अपनी बात बोल ली न.

श्री गौरीशंकर बिसेन--आप मध्यप्रदेश विधान सभा के माननीय सदस्य हैं. माननीय मंत्रीगणों को अपनी संपत्ति का विवरण रखना चाहिए. प्रक्रिया पढ़ो. संपत्ति का विवरण रखने का मुझे अधिकार है. माननीय अध्यक्ष महोदय से अनुमति लेने के बाद रखा है.

श्री सुन्दरलाल तिवारी--माननीय अध्यक्ष महोदय, यह सफाई देने के लिए अदालत बनी है. जो भ्रष्टाचार हुआ हो उसकी अदालत में गवाही दें, या जो अपने आप को मुल्जिम मानता हो.

श्री गौरीशंकर बिसेन--मुझे संपत्ति विवरण रखने का अधिकार है.सारे माननीय सदस्यों को रखने का अधिकार है. पूरी संपत्ति को सार्वजनिक करुंगा. एक-एक संपत्ति को सार्वजनिक करुंगा.

अध्यक्ष महोदय--आप एक मिनट सुनेंगे.

श्री सुन्दरलाल तिवारी-- हां सुनेंगे.

श्री जितू पटवारी--अध्यक्ष महोदय, इन्हीं ने संपत्ति विवरण रखा, बाकी मंत्रियों ने क्यों नहीं रखा. सब क्यों नहीं रख रहे हैं. ऐसा क्या हुआ जो इनको अपना संपत्ति विवरण अचानक रखना पड़ा. ऐसा क्या हुआ कि इनको एकदम से रखना पड़ा(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--आप आपस में तय कर लो किसको रखना है और किसको नहीं रखना है. आप बगल वालों से तो तय कर लो (व्यवधान)

श्री तरुन भनोत--चोर की दाढ़ी में तिनका. (व्यवधान)

श्री सुन्दरलाल तिवारी--अगर अदालत में कोई मामला है तो संपत्ति विवरण अदालत में दें. सदन के अन्दर किसी ने इन पर आरोप ही नहीं लगाया है. हम लोगों ने तो कोई आरोप नहीं लगाया है. (व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय--आप बैठ जाएं, प्रतिपक्ष के नेता खड़े हैं.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)--माननीय अध्यक्ष महोदय, कल कांग्रेस विधायक दल के साथियों ने, कल हम लोगों ने एक किताब की आपत्तिजनक बातों का उल्लेख करते हुए सदन में बात रखी थी. उस विषय पर यह चर्चा हुई कि माननीय मुख्यमंत्री जी या मंत्री जी वक्तव्य देंगे. माननीय अध्यक्ष महोदय, आपसे अनुरोध है कि पहले उस पर वक्तव्य हो जाए. इसके बाद आगे कार्यवाही बढ़े.

अध्यक्ष महोदय- कल माननीय प्रतिपक्ष के नेता जी ने और प्रतिपक्ष के अन्य माननीय सदस्यों ने जो विषय उठाया था वह निश्चय ही अत्यंत गंभीर है. कल भी शासन की ओर से अनुरोध किया गया था कि वह वक्तव्य देने के लिए तैयार है. जैसा कि प्रतिपक्ष के नेता जी ने आज कहा है. मैं इससे सहमत हूँ और उच्च शिक्षा मंत्री जी को निर्देशित करता हूँ कि वे इस विषय में अपना वक्तव्य दें.

अध्‍यक्ष महोदय- सुंदरलाल तिवारी जी, आप बैठेंगे कि नहीं ? आपको वक्‍तव्‍य सुनना है कि नहीं ? यदि सुनना है तो कृपया बैठ जाईये. शायद इनको वक्‍तव्‍य नहीं सुनना है. इनका अब कुछ नहीं लिखा जाएगा. ये जानबूझकर नहीं सुनना चाह रहे हैं.

श्री सुंदरलाल तिवारी- XXX

अध्‍यक्ष महोदय- तिवारी जी, आप कृपया बैठ जाईये. आपकी बात आ गई है. यह प्रश्‍नोत्‍तरकाल नहीं है. आपको मालूम होना चाहिए कि प्रश्‍नोत्‍तरकाल 12 बजे समाप्‍त हो गया है.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

12.06 बजे

शासकीय वक्‍तव्‍य

श्री जयभान सिंह पवैया, उच्‍च शिक्षा मंत्री का ''भारत का भूगोल'' नामक पुस्‍तक पर वक्‍तव्‍य

 

उच्‍च शिक्षा मंत्री (श्री जयभान सिंह पवैया)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, कल प्रतिपक्ष के नेता और प्रतिपक्ष के मेरे मित्रों ने ''भारत का भूगोल'' नामक एक किताब को लेकर सदन में मुद्दा उठाया. मेरी कल ही इच्‍छा थी कि मैं इस विषय पर अपनी ओर से तथ्‍य सदन के समक्ष रख दूं, लेकिन मुद्दा किताब का था और सदन के गर्भगृह में नारे कुछ और ही लगाए जा रहे थे. उनका भी मैं जिक्र करूंगा. मैं आग्रह करना चाहता हूं कि यदि सदन में सभी धैर्य से मेरे तथ्‍यों को सुन लेंगे और तथ्‍यों को सुनने के अलावा मेरे भी कुछ सवाल सुन लेंगे तो मैं फिर उठकर आप सभी के सवालों का जवाब देना चाहूंगा. (मेजों की थपथपाहट)

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहली बात तो यह है कि जिस किताब के अंशों को सदन में रखा गया और उस किताब हेतु सरकार को जिम्‍मेदार बताया गया. इस विषय में मैं साफ कर देना चाहता हूं कि यह किताब शासन की सिलेबस कमेटी के द्वारा अनुमोदित नहीं है. इसके अतिरिक्‍त सरकार की ओर से किसी विषय के लिए पुस्‍तकों की एक सजेस्टिव लिस्‍ट निकलती है. मेरे पास अभी वह परिपत्र है जो शासन जारी करता है, इस परिपत्र में 12 पुस्‍तकों का सुझाव दिया गया है. इसमें भी उस किताब का कोई उल्‍लेख नहीं है कि इस किताब को खरीदना चाहिए. अध्‍यक्ष महोदय

की अनुमति होगी तो मैं पुस्‍तकों से संबंधित इस परिपत्र को सदन में पढ़कर सुना दूंगा या प्रस्‍तुत कर दूंगा. सदन में उल्‍लेखित पुस्‍तक एक निजी प्रकाशक द्वारा छापी गई पुस्‍तक है. श्री हरीश कुमार खत्री और एम.एस.सिसौदिया इसके लेखक हैं. निजी प्रकाशकों द्वारा जब कोई पुस्‍तक या ग्रंथ प्रकाशित किया जाता है तो वे पुस्‍तकालयों में उन पुस्‍तकों को विक्रय करने हेतु जाते हैं. प्रकाशक चाहते हैं कि पुस्‍तकालयों में उनकी किताब रखी जाए. 20 फरवरी को उच्‍च शिक्षा विभाग को सामान्‍य प्रशासन विभाग के माध्‍यम से अजाक्‍स द्वारा दी गई शिकायत प्राप्‍त हुई थी. तत्‍काल हमारे द्वारा इस शिकायत की जांच शुरू कर दी गई. कुलसचिव की कमेटी अलग से बनाई गई. प्राचार्य से भी इस संबंध में रिपोर्ट मंगवाई गई. इससे एक यह तथ्‍य सामने आया कि महाकौशल आर्ट एण्‍ड कॉमर्स कॉलेज के पुस्‍तकालय हेतु यह पुस्‍तक प्राचार्य द्वारा स्‍थानीय स्‍तर पर क्रय की गई थी. इसके अतिरिक्‍त दो-चार अन्‍य कॉलेजों के विषय में मुझे अभी जानकारी मिली है, जहां कुछ संख्‍या में पुस्‍तकें पुस्‍तकालयों में रखी हैं. पुस्‍तकालयों में एडिशनल बुक्‍स के रूप में या संदर्भ ग्रंथों के रूप में ऐसी सैकड़ों पुस्‍तकें रखी जाती हैं और स्‍थानीय स्‍तर पर क्रय भी की जाती हैं.

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, पहली बात यह है कि चूंकि पुस्‍तक प्राचार्य द्वारा खरीदी गई और स्‍थानीय स्‍तर पर खरीदी गई, जब यह विषय हमारे संज्ञान में आया और पूरी जांच रिपोर्ट आ गई तो हमने तत्‍काल कार्यवाही की है. हमारे द्वारा कार्यवाही के रूप में महाकौशल आर्ट एण्‍ड कॉमर्स कॉलेज के प्राचार्य को तत्‍काल निलंबित कर दिया गया है. (मेजों की थपथपाहट)

माननीय अध्‍यक्ष महोदय, दूसरी बात यह है कि इस पुस्‍तक को उच्‍च शिक्षा विभाग के किसी भी पुस्‍तकालय में न खरीदा जाए इसलिए पुस्‍तक और उसके लेखक को तत्‍काल प्रभाव से ''ब्‍लैक लिस्‍टेड'' कर दिया गया है. (मेजों की थपथपाहट)

 

(इंडियन नेशनल कांग्रेस एवं भारतीय जनता पार्टी के अनेक सदस्‍यगण अपने-अपने स्‍थान पर खडे़ होकर एक साथ बोलने लगे.) ..(व्‍यवधान)..

..(व्यवधान)..

(श्री ओमकार सिंह मरकाम सहित इंडियन नेशनल काँग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के अनेक सदस्यगण अपने-अपने स्थानों पर एकसाथ खड़े होकर अपनी-अपनी बातें कहने लगे)

..(व्यवधान)..

एक माननीय सदस्य-- रोज यही करोगे, दो दिन हो गए ..(व्यवधान)..

श्री ओमकार सिंह मरकाम-- यह क्या तरीका है? ..(व्यवधान)..

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- किसी बात का कोई मुद्दा नहीं है. ..(व्यवधान)..

श्री ओमकार सिंह मरकाम-- डाँटना शुरू कर दिया. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- वक्तव्य पूरा होने दें. ..(व्यवधान)..

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- शांति से वक्तव्य सुनिए. शांति से सुनना पड़ेगा. पहले

से तैयारी करके आए हो क्या? ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- मरकाम जी, कृपया वक्तव्य पूरा होने दें. ..(व्यवधान)..

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- बाद की बात का पता नहीं. वह स्पष्ट वक्तव्य दे रहे हैं, पहले वक्तव्य तो सुनो. आप सदन में गलत जानकारी लेकर आए. कल पूरा प्रकरण तथ्यों से विपरीत था. ..(व्यवधान)..

श्री रणजीत सिंह गुणवान-- भाई लोगों, जो तथ्य सामने आ रहे हैं, सब आराम से सुनिए. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- बात तो पूरी होने दें. ..(व्यवधान)..

श्री ओमकार सिंह मरकाम-- माननीय मंत्री जी असत्य जानकारी दे रहे हैं. मैं आपको बताना चाहता हूँ. ..(व्यवधान)..

श्री रणजीत सिंह गुणवान-- आप पहले सुनिए, उसके बाद यदि कोई बात है तो फिर प्रश्न करिए. आप जरा सुनने की क्षमता रखिए. ..(व्यवधान)..

श्री यशपाल सिंह सिसोदिया-- शासन का प्रकाशक नहीं है और उसके ऊपर भी सरकार कार्यवाही कर रही है. ..(व्यवधान)..

श्री ओमकार सिंह मरकाम-- हमको भी पता है. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- ओमकार सिंह जी मरकाम, यदि आप वक्तव्य पूरा नहीं होने देंगे तो मैं आगे बढ़ूँगा. ..(व्यवधान)..

श्री ओमकार सिंह मरकाम-- (XXX) मंत्री जी, यह जो कॉलेज आप महाकौशल.... ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- आप यदि वक्तव्य पूरा नहीं होने देंगे तो मैं आगे बढ़ जाऊँगा. आपकी बात फिर वहीं की वहीं रह जाएगी. वक्तव्य हो जाने दीजिए उसके बाद जो कहना है वह आप कहिए. मैं आपको रोक नहीं रहा पर पहले आप उनका वक्तव्य होने दीजिए. पहले मैंने उनको अनुमति दी है. ..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- बैठ जाइये, निशंक जी, बैठ जाइये, राजेश जी. ..(व्यवधान)..

श्री जयभान सिंह पवैया-- मान्यवर अध्यक्ष महोदय, मुझे ऐसा लगता है कि यह विषय बहुत गंभीर है. हम लोगों को जो और कुछ कहना हो, वह बाहर भी कह सकते हैं. मेरे बाद में कह सकते हैं, प्रचार के लिए जो करना हो. लेकिन बहुत ईमानदारी से और दलों की सीमाओं से हमें सामाजिक समरसता के मामले में ऊपर उठकर ही बोलना और सुनना चाहिए. (मेजों की थपथपाहट) आप बोलेंगे, मैं नहीं बोल पाऊँगा इसलिए मैं बहुत प्रार्थना करता हूँ कि आप बात तो सुन लीजिए. आप जो कहेंगे, आगे क्या कदम उठाना है, अगर हमें उचित लगेगा तो वह कदम सरकार उठा लेगी. तीसरा हमने पत्र लिख दिया है भोपाल कलेक्टर और आईजी भोपाल को, कि हमारी जाँच कमेटी ने, विश्वविद्यालय की ने, इसको पूरी तरह तथ्यों से विपरीत माना है जो पुस्तक में अंश लिखे गए हैं और इसलिए प्रकाशक की इस किताब से सामाजिक समरसता भंग होती है इसलिए कानूनी कार्यवाही, उस प्रकाशक के खिलाफ भी की जाएगी, यह पत्र भी शासन ने लिख दिया है. (मेजों की थपथपाहट)

मान्यवर अध्यक्ष महोदय, जो कुल सचिव की कमेटी हमने बनाई थी उसकी 5-7 पंक्तियों के मैं अंश सुनाना चाहता हूँ. उन्होंने लिखा है कि, अँग्रेजों के समय में गोंड को सर्वभक्षी शब्द लिखा जाता था, अँग्रेज लोगों ने जो लिखा और अँग्रेज लेखकों ने इस सर्वभक्षी विशेषण के आधार पर वह शब्द जोड़ दिया, जो उन्हें अपनी साम्राज्यवादी नीति के तहत उपयुक्त लगा. अँग्रेज विद्वान, जो या तो ब्रिटिश सरकार के अँग्रेज अधिकारी होते थे या फिर ब्रिटेन में धर्मांतरण के लिए प्रशिक्षित पादरी होते थे. ब्रिटिश सरकार की उस नीति को सफल बनाने में कृतसंकल्प थे, जिससे पूरा आदिवासी समाज गैर हिन्दू साबित हो सके ऐसा होने पर धर्मांतरण सरल होता और यह विद्वान, ऐसी हर चीज को अपने साहित्य में स्थान दे रहे थे, जिससे आदिवासियों का गैर हिन्दू होना साबित हो सके. गौ मांस का भोजन भी ऐसी ही एक असत्य बात उन्होंने लिखी है. यह कमेटी का उल्लेख है. दुर्गावती विश्वविद्यालय ने जनजातियों की ब्रिटिश साम्राज्यवादी दृष्टिकोण से स्थापित पहचान को दूर करने के लिए जनजातियों की भारतीय पहचान पर सतत् कार्य किया है और वर्ष 2014 में पंडित कुंजीलाल दुबे ग्रन्‍थमाला के अंतर्गत भारतीय जन‍जातियों की सांस्‍कृतिक पहचान पुस्‍तक का प्रकाशन किया, जिसमें इस वर्ग की भ्रांतियों का निराकरण किया गया है. मैंने इन कार्यवाहियों का जिक्र किया है और बहुत गहराई से हमने तहकीकात करा ली है कि किसी लाइब्रेरी ने बिना अध्‍ययन के ऐसी पुस्‍तकें अगर खरीदी है तो शो-कॉज नोटिस उन संबंधित प्रिंसिपल को भी हम जारी कर देंगे. कल पूरे दिन जानकारी मंगाने के बाद मुझे 4-5 लाइब्रेरी की जानकारी प्राप्‍त हुई है. शासन ने एक परिपत्र और जारी कर दिया है और वह परिपत्र यह है कि जो प्रकाशक पुस्‍तकों को लाइब्रेरी में विक्रय करते हैं उनको बिना पढे़, उनका बिना अध्‍ययन किए उसके लिए एक ऐसी समिति बना दी जाए जो हर कॉलेज में स्‍टडी करने के बाद ही उस पुस्‍तक को लाइब्रेरी के लिए खरीदेगी. (मेजों की थपथपाहट). मैं बहुत विनम्रता से और मुझे लगता है कि मैं भी बैठकर आपको सुनूंगा इसलिए अजय सिंह जी दुष्‍यन्‍त की पंक्तियॉं हैं कि हिम्‍मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग, डर-डर कर बात कहने की आदत नहीं रही. (मेजों की थपथपाहट). इसलिए पहले तो मैं प्रश्‍न यह करूंगा कि वर्ष 2007-08 में और मैं जो यह बात कह रहा हॅूं तो अपने इस पक्ष को रखते हुए कि हमारे किसी सिलेबस में हमारे द्वारा अथोरॉइज किसी पुस्‍तक में किसी प्रकार की भूल नहीं हुई है. लेकिन वर्ष 2007-08 में दिल्‍ली में किसकी सरकार थी ? एनसीईआरटी की पुस्‍तकें कौन छापता है ? समाज विज्ञान की पुस्‍तक में मेरे कांग्रेसी मित्रों आपकी केन्‍द्र सरकार और एचआरडी मिनिस्‍टर ने जिन पुस्‍तकों को प्रकाशित किया, सिलेबस में दिया उसमें लिखा गया था कि आदि गौमांस का भक्षण किया करते थे. (सत्‍ता पक्ष के सदस्‍यों द्वारा नारे लगाए गए). वर्ष 1981-82 में किसकी सरकार थी ? वर्ष 1991-92 में एचआरडी मिनिस्‍टर कौन थे, मैं उस इतिहास में बिल्‍कुल नहीं जाना चाहता. मैं व्‍यक्तिगत आक्षेप बिल्‍कुल नहीं करूंगा. ये तथ्‍य आप भी जरा पलटकर देख लीजिए और अपने पापों का प्रायश्चित् करो. (सत्‍ता पक्ष के सदस्‍यों द्वारा मेजों को थपथपाने पर). आप भी मेज न बजाएं, फालतू में उत्‍तेजना आती है, शांति से आप भी सुन लीजिए. जैन तीर्थंकरों को विक्षिप्‍त की तरह निर्वस्‍त्र घूमने का समाज विज्ञान की किताब में किसने पढ़ाया था ? जाट जैसी बहादुर कौम को उद्दंड नाम का शब्‍द किसने दिया था ? आपने उसको पाठ्यक्रम में दिया......(व्‍यवधान).........और मैं प्रमाण के रूप में यह बता रहा हॅूं.... ....(व्‍यवधान)....एनसीईआरटी टेक्‍स्‍ट बुक कंट्रोवर्सीज के नाम से यह प्रकाशित है.

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- आप यह क्‍या व्‍यवस्‍था चला रहे हो. आप वहां की बात कर रहे हो, अरे यहां तो संभाल लो, जो प्रदेश में है. पहले अपना प्रदेश तो संभालो, वहां के लिए आप बात कर रहे हो. माननीय अध्‍यक्ष जी, आप यहां का उत्‍तर दिलवाइए.

श्री जयभान सिंह पवैया -- आप हमारी बात सुन लीजिए.

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यहां का उत्‍तर दिलवाएं.....(व्‍यवधान)....

श्री जयभान सिंह पवैया -- आप मेरी बात सुन लीजिए, मैं बहुत संक्षेप में कह रहा हॅूं.

डॉ. गोविन्‍द सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, जो कल का विषय है उस पर अनुमति दी जाए, न की पूरा भाषण दे दें, पुरानी हिस्‍ट्री की......(व्‍यवधान)......आपके द्वारा माननीय अध्‍यक्ष महोदय कल जो घटना घटी है उस पर बोलने की अनुमति दी है, न कि आप 50 साल का इतिहास बोलने लगो.....(व्‍यवधान).....

अध्‍यक्ष महोदय -- विषय समाप्‍त हो गया है.

श्री यशपाल सिंह सिसौदिया -- यह भाषण नहीं, ज्ञान है ज्ञान.

डॉ. नरोत्‍तम मिश्र -- अध्‍यक्ष जी, वक्‍तव्‍य समाप्‍त हो गया है, आगे बढे़ आप. वक्‍तव्‍य समाप्‍त हो गया.

अध्यक्ष महोदय-- भनोत जी, अपनी बात रखें. अकेले भनोत जी को ही मैंने टाइम दिया है...(व्यवधान)..यदि भनोट जी के अलावा और कोई खड़ा होगा तो मैं आगे बढूंगा. मैंने उनको टाइम दिया है और किसी को नहीं दिया है. आप अपनी बात कह दीजिये, आपके लोग कोई डिस्टर्ब नहीं करेंगे.नहीं तो मैं आगे बढ़ूंगा.

श्री तरुण भनोत-- माननीय अध्यक्ष महोदय, मध्यप्रदेश के सरकारी गोदामों में सरकार की गलती से...(व्यवधान)....

श्री ओमकार सिंह मरकाम-- अध्यक्ष महोदय, मुझे इस विषय में बोलने दिया जाये. मैं आपसे अनुरोध करता हूँ.आप हमको बोलने नहीं दे रहे हैं..(व्यवधान)..

अध्यक्ष महोदय-- पत्रों का पटल पर रखा जाना.

श्री ओमकार सिंह मरकाम-- अध्यक्ष महोदय जी, आप हमको बोलने नहीं दे रहे हैं.हमको दबा रहे हैं...(व्यवधान)... यह आदिवासियों के शुभचिंतक हैं.हम लोगों की जाति पर बोलेंगे तो..(व्यवधान)...

अध्यक्ष महोदय-- भनोत जी आप बोलते क्यों नहीं हैं.....(व्यवधान)..आप लोग सुनते क्यों नहीं हैं. ...(व्यवधान).....उनकी पूरी बात हो जाने दीजिये..(व्यवधान)...आपको टाइम दिया था. पर आपके ही लोग व्यवधान कर रहे हैं.

एक माननीय सदस्य-- पूरा प्रकरण तथ्यों से विपरीत था.

 

12.21 बजे गर्भगृह में प्रवेश एवं वापसी

श्री ओमकार सिंह मरकाम,श्री तरुण भनोत एवं श्री निशंक कुमार जैन,सदस्यगण द्वारा गर्भगृह में प्रवेश एवं वापसी

(श्री ओमकार सिंह मरकाम, श्री तरुण भनोत एवं श्री निशंक कुमार जैन,सदस्य अपनी बात कहते हुए गर्भगृह में आ गये एवं अध्यक्ष महोदय की समझाईश पर अपने स्थान पर गये)

 

12.22 शासकीय वक्तव्य (क्रमशः)

नेता प्रतिपक्ष(श्री अजय सिंह)-- माननीय अध्यक्ष महोदय, विषय ओमकार सिंह जी ने डिंडौरी में एक सभा में उठाया था और राज्यपाल के नाम से कलेक्टर को इस विषय पर ज्ञापन दिया था और उस पर अनुरोध किया था. माननीय मंत्री महोदय ने कार्यवाही की. मंत्री महोदय अपनी कार्यवाही करने के साथ जो भाषण दे रहे थे कि 1980, 1914, 1990, 1991,यह एनसीईआरटी की चर्चा यहाँ नहीं हो रही है. हम लोग इस किताब की बात कर रहे हैं. वैसी चर्चा यदि करनी चाहें तो यह आपकी माखनलाल विश्वविद्यालय की एक किताब आज ही मिली है, उसमें नाथूराम गोंडसे और रावण को महापुरुष लिखा गया है.यह किस तरह का काम चल रहा है पवैया जी? यह आपकी माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय की किताब है, मोनिका वर्मा,सुरेन्द्रपाल की. यह आप लोग यदि सुनिश्चित कर लें कि इस तरह की किताब पर कार्यवाही हो. एक किताब का जिक्र हुआ तो आपने कार्यवाही कर दी. एफआईआर कर दिया लेकिन इस तरह की और जो किताबें छप रही हैं .इस किताब में 22 नंबर पर महापुरुष का नाम रावण बताया है. 15वें नंबर पर नाथूराम गोंडसे का नाम है. यह महापुरुष हैं हिंदुस्तान के? यह जिस तरह से बात हो रही है...(व्यवधान).. भई, रावण महापुरुष की बात नहीं हो रही.अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे अनुरोध करूँगा..

श्री शंकरलाल तिवारी-- (XXX).

श्री अजय सिंह-- नाथूराम गोंडसे महापुरुष रहा?...(व्यवधान) ...

अध्यक्ष महोदय--तिवारी जी बैठ जाइए. अब इसमें प्रतिपक्ष के नेता जी की बात के बाद में मैं आगे बढ़ूंगा....(व्यवधान)...

श्री अजय सिंह-- जिस आदमी ने गाँधी जी की हत्या की वह महापुरुष है?...

श्री शंकरलाल तिवारी-- (XXX)...(व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय-- तिवारी जी की बात कार्यवाही से निकाल दीजिये. तिवारी जी आप बैठ जाइए.

श्री अजय सिंह-- अध्यक्ष महोदय, यह किस तरह की बात कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय-- तिवारी जी की बात निकाल दी है. ...(व्यवधान)

श्री अजय सिंह-- माननीय अध्यक्ष महोदय, यह बात शुरु हुई ओमकार सिंह जी मरकाम से. माननीय मंत्री महोदय ने बहुत विस्तार से अपनी बात रख दी. मेरा आपसे अनुरोध है कि हमारे ओमकार सिंह मरकाम जी, जिनको पढ़कर क्षोभ हुआ उनको दो मिनट बात करने दी जाये.

अध्यक्ष महोदय-- वैसे अब कार्यवाही आगे बढ़ गई है परन्तु प्रतिपक्ष के नेता जी ने कहा है तो मरकाम जी सिर्फ दो मिनट बोलेंगे और इस पर कोई वाद-विवाद नहीं होगा.

श्री ओमकार सिंह मरकाम-- माननीय अध्यक्ष महोदय जी, जैसे ही डिंडौरी के उस कॉलेज में जहाँ मैंने ग्रेजुएशन किया है वहाँ गया तो हमारे संज्ञान में आया कि भारत का भूगोल पुस्तक में इस तरह से लिखा गया है. तो समाज के 20-25 हजार लोग इकट्ठे हुए और 25 जनवरी को हमने महामहिम राज्‍यपाल के नाम से ज्ञापन दिया, वहा पर कोई राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था, भारतीय जनता पार्टी के सदस्‍यगण भी उस कार्यक्रम में उपस्‍थित थे. इसके बाद 25 जनवरी को ही विधायक के लेटर-पैड में इस पर कार्यवाही हेतु मांग की, परंतु मुझे दु:ख है कि कार्यवाही नहीं हुई. माननीय मंत्री जी जब एक विधायक ज्ञापन देता है तो कार्यवाही होनी चाहिए और हमने राज्‍यपाल महोदय के नाम से ज्ञापन दिया था, आप अभी 20 फरवरी से एक्‍शन टेक-अप की बात कर रहे हैं, 25 जनवरी को जब आपको विधायक ने समाज के साथ ज्ञापन दिया तो सरकार ने उसे अनदेखा क्‍यों किया ? उसमें कार्यवाही क्‍यों नहीं की ? आपके नॉलेज में यह बात क्‍यों नहीं आई ? जबकि हमने ज्ञापन दिया है हम यह कह रहे हैं. अगर वहा पर कार्यवाही हो गई होती तो सदन में इस बात को उठाने की आवश्‍यकता ही नहीं पड़ती. हम आपसे किसी राजनीतिक द्वेषता से या चुनावी मुद्दे पर बात नहीं कर रहे हैं, हम मानवीय दृष्‍टिकोण से बात कर रहे हैं. इस लेख के कारण मुझे जो मेरे समाज के लोगों ने कहा, वह मैं आपको व्‍यक्‍त करूंगा तो ऐसा लगेगा कि ...

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है, आपकी बात आ गई है.

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है कि इस लेख के कारण जो हमारे समाज की प्रतिष्‍ठा को नुकसान हुआ है तो हमारी प्रतिष्‍ठा को कायम रखने के लिए सरकार क्‍या करेगी ? शासकीय चन्‍द्रविजय महाविद्यालय, डिण्‍डोरी के प्राचार्य पर आप क्‍या कार्यवाही करेंगे ?

अध्‍यक्ष महोदय -- ठीक है, आपकी पूरी बात आ गई है, आपका विषय आ गया है.

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरा यह कहना है माननीय मुख्‍यमंत्री जी, जो कि प्रदेश के मुखिया हैं... ...(व्‍यवधान) ...

अध्‍यक्ष महोदय -- मरकाम जी, अब आप कृपा करके बैठें, आपका पूरा विषय आ गया है.

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- अध्‍यक्ष महोदय, माननीय मुख्‍यमंत्री जी इस विषय पर स्‍पष्‍ट चर्चा करें, यह मेरा निवेदन है. ...(व्‍यवधान) ...

अध्‍यक्ष महोदय -- आगे बढ़ने के बाद आपको समय दिया.

श्री ओमकार सिंह मरकाम -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय जी, मैं आपसे एक निवेदन करना चाहता हूँ कि सरकार की जिम्‍मेदारी बनती है कि सरकार समाज से क्षमा मांगे.

अध्यक्ष महोदय-- पत्रों का पटल पर रखा जाना.

 

 

 

 

 

 

12.26 बजे पत्रों का पटल पर रखा जाना

(1) मध्यप्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम,भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 1013-2014 एवं 2014-2015

पशुपालन मंत्री (श्री अंतर सिंह आर्य)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम अधिनियम, 1982 (क्रमांक 37 सन् 1982) की धारा 27 की उपधारा (3) की अपेक्षानुसार मध्यप्रदेश राज्य पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम, भोपाल का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 1013-2014 एवं 2014-2015 पटल पर रखता हूँ.

(2) आयुक्त, निःशक्तजन, भोपाल, मध्यप्रदेश का वार्षिक प्रतिवेदन

सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण मंत्री (श्री गोपाल भार्गव)-- अध्यक्ष महोदय, मैं, निःशक्तजन व्यक्ति (समान अवसर, अधिकार संरक्षण और पूर्ण भागीदारी) अधिनियम, 1995 (क्रमांक 1 सन् 1996) की धारा 65 की उपधारा (2) की अपेक्षानुसार आयुक्त, निःशक्तजन, भोपाल, मध्यप्रदेश का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2015-2016 पटल पर रखता हूँ.

 

 

 

 

12.27 बजे अध्‍यक्षीय घोषणा

श्रीमद् राजचन्‍द्र मिशन, धरमपुर द्वारा नाटक ''युग पुरुष'' का आयोजन करने विषयक

 

अध्‍यक्ष महोदय -- आज, गुरुवार दिनाक 23 मार्च, 2017 को सायं 7.00 बजे विधान सभा परिसर में माननीय सदस्‍यों के लिए श्रीमद् राजचन्‍द्र मिशन, धरमपुर द्वारा संस्‍कृति विभाग के सौजन्‍य से नाटक ''युग पुरुष'' का आयोजन किया गया है. उक्‍त कार्यक्रम में माननीय सदस्‍यों की उपस्‍थिति प्रार्थित है. ...(व्‍यवधान) ...

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- अध्‍यक्ष महोदय, आपने भानोत जी के लिए कहा था कि मैं समय दूंगा, श्री भानोत जी केवल एक बात उठाना चाहते हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- माननीय प्रतिपक्ष के नेता जी, आपके आग्रह पर मैंने रिवर्स गाड़ी डालकर ओमकार सिंह मरकाम जी को समय दिया. मेरा आपसे अनुरोध है कि अब इतना आप शिथिल न कराए, वो जो बोलना चाहेंगे कल मैं उनको बोलने दूंगा.

श्री अजय सिंह -- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, मेरे अनुरोध के पहले ही आपने उनको अनुमति दे दी थी.

अध्‍यक्ष महोदय -- उनको अनुमति दी थी पर जब उन्‍होंने नहीं बोला तो मैं आगे बढ़ गया.

श्री अजय सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, यदि थोड़ा सा रिवर्स गेयर किए हैं तो थोड़ा और ज्‍यादा कर दीजिए.

अध्‍यक्ष महोदय -- अब मैं आगे बढ़ गया, उस वक्‍त आगे बढ़ा नहीं था और मंत्री जी को मैंने बैठा दिया था, किंतु अब कार्यवाही बहुत आगे बढ़ गई है, कल उनको मैं अनुमति दूंगा इसका मैं आपको आश्‍वासन देता हूँ. श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक अपनी ध्‍यानाकर्षण की सूचना पढ़ें.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं थोड़ा ज्ञानवर्धन करना चाहता हूँ कि क्‍या किसी कार्यवाही को रिवर्स में डाला जा सकता है ?

अध्‍यक्ष महोदय -- नहीं, विशेष अनुमति मैंने दी थी. श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक अपनी ध्‍यानाकर्षण की सूचना पढ़ें.

श्री अजय सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, इनकी गाड़ी तो हरदम रिवर्स में ही चलती है और जहाँ गढ़ाकोटा पहुँच जाते हैं फिर रिवर्स नहीं होते हैं.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आज भी कह रहा हूँ कि यह परम्‍परा ठीक नहीं है, असंवैधानिक है.

श्री अजय सिंह -- अध्‍यक्ष महोदय, ये आपके ऊपर आरोप लगा रहे हैं और आप इसको विलोपित नहीं कर रहे हैं.

अध्‍यक्ष महोदय -- सबको स्‍वतंत्रता है बोलने की, माननीय मंत्री जी का वह मत हो सकता है पर मेरा मत उससे डिफ्रेंट है. श्री पुष्‍पेन्‍द्र नाथ पाठक अपनी ध्‍यानाकर्षण की सूचना पढ़ें.

श्री गोपाल भार्गव -- अध्‍यक्ष महोदय, मैं आसंदी से क्षमा चाहते हुए माननीय नेता प्रतिपक्ष से कहना चाहता हूँ कि ऐसा काम मत करवाएँ कि जिससे हमारी संसदीय लोकतंत्र की परंपराएँ आहत होती हों.

अध्‍यक्ष महोदय -- मेरे से कोई काम नहीं करवाता, मैं अपने विवेक से करता हूँ.

श्री अजय सिंह -- (श्री गोपाल भार्गव की ओर देखकर) आपने सुन लिया अब, क्‍या कहा उन्‍होंने.

 

 

12.32 बजे ध्‍यानाकर्षण

 

(1) छतरपुर जिले के मातगुंआ थाना प्रभारी द्वारा पद का दुरूपयोग किया जाना

 

श्री पुष्‍पेन्‍द्रनाथ पाठक (बिजावर)- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

गृहमंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह ठाकुर) - माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

श्री पुष्पेन्द्रनाथ पाठक - अध्यक्ष महोदय, कर्तव्य में लापरवाही बरतने पर उप निरीक्षक अनुमेहा दुबे को पुलिस अधीक्षक द्वारा निलंबित कर अनुविभागीय अधिकारी पुलिस बिजावर से प्राथमिक जांच कराई जा रही है, इसके लिए मैं माननीय गृह मंत्री जी का बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूं और धन्यवाद ज्ञापित करता हूं. एक विषय की ओर मैं यह ध्यान आकर्षित कराना चाहता था कि पुलिस का ध्येय वाक्य है, 'देशभक्ति - जनसेवा.' और इससे कोई पुलिस का अधिकारी भटकता है, ध्येय से भटकता है तो उसका ध्यान आकर्षित करना और ध्यान में कोई बात आती है तो उसको बताना, सामाजिक दायित्व के नाते मेरे दायित्व निर्वहन की जिम्मेदारी थी. इस नाते पिछले 2-3 महीनों में कई बार फोन पर मैंने पुलिस अधीक्षक को, एसडीओपी को, एडिशनल एसपी को इसकी बार-बार जानकारी दी कि यह घटना हुई. जो भी घटनाओं का हमने उल्लेख किया है. इन सभी घटनाओं को हमने फोन पर सूचित किया है. लेकिन फोन पर सूचित करने के बाद भी कार्यवाही कुछ नहीं हुई. जब यह विषय आपके माध्यम से विभाग में पहुंचा और गृह मंत्री जी की तत्काल कार्यवाही की वजह से उनकी सुघड़ कार्यनीति की वजह से यह हो सका कि उसको निलंबित किया गया. लेकिन सवाल यह है कि इस तरह यदि कोई अधिकारी पथभ्रष्ट होते हैं, अपने ध्येय से भटकते हैं तो उनके खिलाफ समुचित कार्यवाही समय पर हो तो लोगों को न्याय मिलेगा. सोमवती अहिरवार का मैंने जो जिक्र किया है. इसमें विभाग की टीप में आया है कि सूचना थाना मातागुंवा में की. सूचना थाना मातागुंवा में की तो मातागुंवा थाने ने क्या किया, इसका कहीं कोई जिक्र नहीं है? इसकी जानकारी मिल जाए तो अच्छा रहेगा. दूसरा, यह कि थाना प्रभारी अपनी निजी गाड़ी में घूमती हैं, वसूली करती हैं, इस बात की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है तो माननीय अध्यक्ष महोदय, जब फरियादी अपनी फरियाद लेकर जाता है तो उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई तो सामान्यतः कोई गाड़ी लेकर घूम रहा है, वसूली कर रहा है, इस बात की थाने में कौन रिपोर्ट करेगा और क्यों करेगा? मेरा निवेदन यह है कि एक घटना का उल्लेख चूंकि इसका जो प्रारूप है, उसमें बहुत कम बातें लिखी जा सकती हैं. एक घटना देवेन्द्र सिंह बुंदेला के साथ दिनांक 1.2.17 को हुई. पुलिस की गाड़ी में थाना प्रभारी का निजी ड्रायवर जाकर किसी का ट्रेक्टर रोक ले और उससे कहे की थाने चलो तो यह जो घटना हुई, इसकी मैंने रात को ही सूचना दी, तब कोई कार्यवाही नहीं हुई. यह पुलिस की गाड़ी में उसकी निजी गाड़ी में पीली बत्ती लगी होने के बाद थाना प्रभारी के ड्रायवर ने ऐसी हरकत की, जिसकी सूचना मैंने समय पर दी तो मैं यह जो सूचना दे रहा हूं, इसको क्या शिकायत नहीं माना जाएगा?

अध्यक्ष महोदय - कृपया आप सीधा प्रश्न कर दें.

श्री पुष्पेन्द्रनाथ पाठक - माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरा प्रश्न यह है कि एक तो जो सोमवती की शिकायत लिखी है कि सूचना थाना मातागुंवा में की गई तो इस पर क्या कार्यवाही हुई, नहीं हुई तो क्या कार्यवाही की जाएगी? दूसरा, जो इसमें फरियादी प्रीति द्विवेदी का जिक्र आया है, इसमें मैंने शिकायत की है कि रिपोर्ट कर्ता कोई और था विनोद रायकवार, उसकी दो बार रिपोर्ट नहीं की गई. उसने जो रिपोर्ट की, वह रिपोर्ट नहीं ली गई, यह तीसरी घटना है, जिसकी थाना मातागुंवा में रिपोर्ट नहीं हुई है. सिविल लाइन, तीसरे थाने में रिपोर्ट हुई है तो उसने जो पहले कार्यवाही के लिए मांग की थी उस पर कोई कार्यवाही होगी क्या? और अभी इस संबंध में माननीय मंत्री जी आश्वासन देंगे क्या कि हमारे क्षेत्र में इस तरह की कोई ऐसी गतिविधि होती है, जिससे समाज को दिक्कत होती है और समाज को तत्काल न्याय नहीं मिले तो माननीय गृह मंत्री महोदय ऐसी व्यवस्था करेंगे कि फोन पर सूचना मिलने पर भी तत्काल उसका निराकरण हो सके? यह मैं माननीय गृह मंत्री जी से जानना चाहता हूं.

श्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर - अध्यक्ष महोदय, माननीय सदस्य के ध्यानाकर्षण के माध्यम से यह सारा विषय विभाग के ध्यान में आया. तत्काल इसमें कार्यवाही की गई और जो बिन्दु माननीय श्री पुष्पेन्द्रनाथ पाठक जी ने उठाए हैं, सभी बिन्दुओं की जांच करने के लिए वहां पर जो एसडीओपी पदस्थ हैं, वह एसडीओपी सभी बिन्दुओं की जांच कर रहे हैं और जांच रिपोर्ट के आधार पर और कोई आगे कार्यवाही करना होगी, वह कार्यवाही विभाग सुनिश्चित करेगा और एक बार फिर हम पुलिस मुख्यालय से हमारे सभी प्रदेश के पुलिस अधीक्षकों को इस बात के लिए कहेंगे कि हमारे माननीय विधायकगण अगर कोई विषय ध्यान में लाते हैं तो उसको गंभीरता से देखें और उसमें क्या कार्यवाही की गई है, उससे माननीय विधायक जी को अवगत कराएं.

श्री पुष्पेन्द्रनाथ पाठक - माननीय अध्यक्ष महोदय, गृह मंत्री जी की त्वरित कार्यवाही के लिए उनका बहुत-बहुत आभार और मुझे लगता है कि उनके नेतृत्व में गृह विभाग अच्छा काम करेगा और सुख शांति हमारे प्रदेश में बनी रहेगी, बहुत- बहुत धन्यवाद, बहुत-बहुत आभार.

श्री बाबूलाल गौर--माननीय अध्यक्ष महोदय, एक बहुत ही गलत बात हमारे नेता प्रतिपक्ष ने कह दी, इस पुस्तक में नाथूराम गोडसे का नाम नहीं है. यह नाथूराम गोंड हैं, यह नाथूराम गोंड है. इन शब्दों को निकाला जाये.

श्री वैलसिंह भूरिया--अध्यक्ष महोदय, यह हमेशा असत्य बोलते हैं. असत्य चीज लाकर के बताते हैं.

श्री बाबूलाल गौर--अध्यक्ष महोदय, यह नाथूराम गोंड हैं. नाथूराम गोडसे का नाम इस पुस्तक में नहीं है.

डॉ.गोविन्द सिंह--अध्यक्ष जी, एक पुस्तक आपको हम भेंट कर रहे हैं.

अध्यक्ष महोदय--मैं पुस्तक को अपने कक्ष में देख लूंगा.

(व्यवधान)

श्री बाबूलाल गौर -यह नाथूराम गोंड है महापुरुषों में.

अध्यक्ष महोदय- मैं उसको कक्ष में देख लूंगा.

(व्यवधान)

एक माननीय सदस्य - अध्यक्ष महोदय, क्लास लगानी पड़ेगी, ठीक से उच्चारण कराने के लिए.

डॉ. गोविन्द सिंह - शिवराज सिंह चौहान इसमें महापुरुष हैं.

अध्यक्ष महोदय - मैं उसको कक्ष में देख लूंगा.

श्री वैलसिंह भूरिया--माननीय शिवराज जी महापुरूष हैं.

डॉ.गोविन्द सिंह--बताइए शिवराज सिंह जी महापुरूष कब से हो गये हैं ?

अध्यक्ष महोदय--सारी बातें रिकार्ड में आ गई हैं. अब मैं उसको कक्ष में देख लूंगा. श्री कमलेश्वर पटेल अपनी ध्यानाकर्षण की सूचना पढ़ें.

 

(2) प्रदेश के अनेक जिलों में विद्युत कटौती से उत्पन्न स्थिति

श्री कमलेश्वर पटेल (सिहावल) माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

ऊर्जा मंत्री (श्री पारस चन्द्र जैन)--माननीय अध्यक्ष महोदय,

 

अध्यक्ष महोदय-- कृपया भाषण नहीं देंगे और एक प्रश्न पूछेंगे.

श्री कमलेश्वर पटेल-- अध्यक्ष महोदय, आपका संरक्षण चाहिए. माननीय मंत्री जी ने तीन पेज का जवाब दिया है.

अध्यक्ष महोदय--एक प्रश्न प्वाइंटेड पूछ लीजिए.

श्री कमलेश्वर पटेल-- सारी स्थिति बहुत अनुकूल है तो फिर हम कुछ पूछते ही नहीं हैं. मंत्री जी ने बहुत बढ़िया भाषण कर दिया.

अध्यक्ष महोदय--आप सीधा प्रश्न करें. आप नियम पढ़ लें.

श्री कमलेश्वर पटेल--अध्यक्ष महोदय, क्या विधायक असत्य जानकारी दे रहे हैं. हम लोग गांव-गांव घूमते हैं. सब जगह की परेशानी देखते हैं.

श्री यादवेन्द्र सिंह-- अध्यक्ष जी, एक दिन बिना प्रशासन को बताए आप गांव चलें.

अध्यक्ष महोदय-- हम भी ग्रामीण क्षेत्र से ही आते हैं.

श्री कमलेश्वर पटेल-- अध्यक्ष महोदय, जिस तरह का जवाब माननीय मंत्री जी ने दिया है, पढ़कर मुझे दुख भी हो रहा है. इस तरह से प्रशासनिक अधिकारी और बिजली विभाग के अधिकारी/कर्मचारी कार्य कर रहे हैं. आपका संरक्षण चाहेंगे. अध्यक्ष महोदय, कितने ऐसे औद्योगिक संस्थान हैं जहां पर इस तरह से बिजली डिस-कनेक्ट कर दी हो. एक तरफ सरकार गरीब कल्याण वर्ष मना रही है और दूसरी तरफ गरीबों को जेल में डाल रही है. कितने उद्योगों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की है? जिस तरह से अनुसूचित जाति, जनजाति, किसानों को, पिछड़े वर्ग के लोगों को....

अध्यक्ष महोदय--आप भाषण दे रहे हैं कि प्रश्न कर रहे हैं?

श्री कमलेश्वर पटेल-- प्रश्न पूछ रहे हैं कि कितने ऐसे औद्योगिक संस्थान हैं जिनके ऊपर इस तरह की कार्रवाई की है जिस तरह से गरीबों और किसानों के साथ कर रहे हैं.

आपका संरक्षण चाहिए.

अध्यक्ष महोदय-- इसमें यह बात कहां हैं? उसमें भी संरक्षण दें. आपने जिस समस्या के लिए ध्यानाकर्षण लगाया है, वह पूछिये ना.

श्री कमलेश्वर पटेल--अध्यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश में 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं संचालित हैं. अन्य परीक्षाएं भी चल रही हैं. गांव-गांव में बिजली काट दी है. इसमें जवाब दिया कहीं भी बिजली नहीं काटी है. क्या सरकार गरीबों,किसानों को 10-15 दिन का समय नहीं दे सकती? आपके माध्यम से मेरा इतना निवेदन है कि क्या यह वसूली अभियान विद्युत विभाग रोकेगा? और दूसरा प्रश्न पूछा था कि कितने उद्योगों पर इस तरह की कार्रवाई की है जिस तरह से किसानों पर की है.

अध्यक्ष महोदय--इसमें उद्योगों का कहां लिखा है?

श्री कमलेश्वर पटेल--अध्यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश में बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं. क्या मंत्री जी ऐसी व्यवस्था बनाएंगे कि जब तक किसानों की फसल नहीं आ जाती तब तक यह वसूली अभियान रोकेंगे?

श्री पारसचन्द्र जैन - माननीय अध्यक्ष महोदय, जो उद्योग बिल नहीं देते हैं उनके भी कनेक्शन काटे जाते हैं.

अध्यक्ष महोदय - उद्योगों का प्रश्न मैंने डिसअलाऊ कर दिया है.

श्री पारसचन्द्र जैन - अध्यक्ष महोदय, दूसरी बात जो इन्होंने कही है तो पूरे मध्यप्रदेश में साढ़े पांच लाख ट्रांसफार्मर्स हैं जिसमें से मात्र 7291 बंद हैं जिनमें से 3500 ट्रांसफार्मर्स ऐसे हैं जिनके अगर पैसे भर दिये जायेंगे तो वे ट्रांसफार्मर्स हम चालू कर देंगे. हम विपक्ष के साथियों से भी चाहते हैं कि वे लोगों से अपने क्षेत्रों में कहें कि जो लोग बिजली का उपयोग कर रहे हैं वे बिल के पैसे तो भरें.

अध्यक्ष महोदय - श्री रामपाल सिंह ब्यौहारी..(..व्यवधान..) आप उनको पूछने दीजिये. ध्यानाकर्षण का नियम नहीं है.

श्री कमलेश्वर पटेल- ट्रांसफार्मर जले हैं. गांव-गांव में बिजली नहीं है. मंत्री जी जो मैंने पूछा उसका जवाब नहीं आया.

अध्यक्ष महोदय - आप जवाब लेते कहां हैं चार आदमी खड़े हो जाते हैं.

श्री कमलेश्वर पटेल- अध्यक्ष महोदय, मैं कई गांवों के गांव बता सकता हूं हमारे क्षेत्र में ही 25 गांवों की बिजली काट दी गई.

अध्यक्ष महोदय - श्री रामपाल सिंह ब्यौहारी..आप प्रश्न पूछें. कोई अलाऊ नहीं है. किसी का नहीं लिखा जायेगा.

(..व्यवधान..)

श्री रामपाल सिंह ब्यौहारी - अध्यक्ष महोदय,मैं यह जानना चाहता हूं.

श्री कमलेश्वर पटेल - XXX

अध्यक्ष महोदय - आप उनको पूछने देंगे कि नहीं.

श्री कमलेश्वर पटेल- XXX

अध्यक्ष महोदय - कृपया बैठिये. रामपाल सिंह ब्यौहारी..अपना प्रश्न पूछें..नहीं तो मैं आगे बढ़ूंगा. प्रतिवेदनों की प्रस्तुति....

 

12.52 बजे गर्भगृह में प्रवेश

बिजली कटौती से प्रदेश के किसानों,गरीबों और छात्रों को हो रही परेशानी विषयक

( मध्यप्रदेश सरकार द्वारा बिजली के मामले में किसानों के साथ गरीबों के साथ,छात्रों के साथ अन्याय होने के विरोध में श्री कमलेश्वर पटेल,श्री सचिन यादव,श्री शैलेन्द्र पटेल, श्री यादवेन्द्र सिंह गर्भगृह में आए एवं नारेबाजी की गई.)

12.53 बजे बर्हिगमन

नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगणों का सदन से बर्हिगमन

नेता प्रतिपक्ष(श्री अजय सिंह) - माननीय अध्यक्ष महोदय, इस विषय पर सही जानकारी नहीं आने के कारण हम लोग सदन से बर्हिगमन करते हैं.

( श्री अजय सिंह,नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में शासन के उत्तर से असंतुष्ट होकर इंडियन नेशनल कांग्रेस के सदस्यगणों द्वारा सदन से बर्हिगमन किया गया.)

 

 

 

 

 

12.54 बजे प्रतिवेदनों की प्रस्तुति/स्वीकृति

(1) गैर-सरकारी सदस्यों के विधेयकों तथा संकल्पों संबंधी समिति का उन्नीसवां प्रतिवेदन

 

 

(2) याचिका समिति का अड़तालीसवां,उनचासवां,पचासवां,इक्यानवां प्रतिवेदन

श्री शंकरलाल तिवारी,सभापति - अध्यक्ष महोदय, मैं, याचिका समिति का याचिका समिति का अड़तालीसवां,उनचासवां,पचासवां,इक्यानवां प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.

 

(3) सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति का एक सौ तेईसवां से एक सौ चवालीसवां प्रतिवेदन

श्री यशपालसिेंह सिसौदिया,सभापति - अध्यक्ष महोदय, मैं, सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति का एक सौ तेईसवां से एक सौ चवालीसवां प्रतिवेदन प्रस्तुत करता हूं.

 

अध्यक्ष महोदय, मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं,आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि आपके दिशा-निर्देश में आपने जो जिम्मेदारी सभापति होने के नाते मेरे ऊपर और समिति के सदस्यों पर दी,मुझे कहते हुए अत्यंत प्रसन्नता है कि विगत सत्र में समिति ने 21 प्रतिवेदन सदन में प्रस्तुत किये थे और इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए 2004-05 से 2011-12 के आडिट रिपोर्ट से संबंधित यह प्रतिवेदन प्रस्तुत किये गये. मैं अध्यक्ष महोदय, आपका, समिति के सम्मानित सदस्यों का, विधान सभा के प्रमुख सचिव का एवं सचिवालय का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं.

अध्यक्ष महोदय - आपको भी धन्यवाद. सारी कार्यवाही अपडेट रखेंगे तो कार्य करने में सुविधा रहेगी.

 

 

 

 

याचिकाओं की प्रस्तुति

अध्यक्ष महोदय - आज की कार्यसूची में सम्मिलित याचिकाएं सदन में प्रस्तुत की हुई मानी जायेंगी.

 

 

 

 

 

 

 

12.55 बजे वक्‍तव्‍य

(1) अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या 120 (क्रमांक 1175) दिनांक 22 फरवरी 2017 एवं अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या 181 (क्रमांक 5612) दिनांक 09 मार्च 2017 के उत्‍तर में संशोधन करने के संबंध में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्‍करण राज्‍यमंत्री का वक्‍तव्‍य.

अध्‍यक्ष महोदय-- अब माननीय श्री सूर्यप्रकाश मीणा, राज्‍यमंत्री, उद्यानिकी तथा खाद्य प्रसंस्‍करण दिनांक 22 फरवरी, 2017 को पूछे गये अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या 120 (क्रमांक 1175) के उत्‍तर के भाग-(ख) के परिशिष्‍ट के प्रपत्र-ब तथा दिनांक 09 मार्च, 2017 को पूछे गये अतारांकित प्रश्‍न संख्‍या 181 (क्रमांक 5612) के उत्‍तर के भाग (क) के संलग्‍न परिशिष्‍ट में संशोधन करने के संबंध में वक्‍तव्‍य देंगे.

 

उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्‍करण राज्‍यमंत्री(श्री सूर्यप्रकाश मीणा)-माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

 

 

 

 

 

 

माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

अध्‍यक्ष महोदय-- अब श्री भूपेन्‍द्र सिंह, गृह मंत्री, राज्‍य सरकार द्वारा सेना में शहीद सैनिकों के माता-पिता को प्रतिमाह रूपये 5 हजार की पेंशन दिये जाने के संबंध में वक्‍तव्‍य देंगे.

(2) सेना में शहीद सैनिकों के माता-पिता को प्रतिमाह रूपये 5 हजार की पेंशन दिये जाने के संबंध में गृह मंत्री का वक्‍तव्‍य.

 

गृह मंत्री (श्री भूपेन्‍द्र सिंह)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय,

 

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह)-- माननीय अध्‍यक्ष महोदय, यह बहुत ही अच्‍छा निर्णय लिया गया है. यदि 5 हजार से कुछ राशि बढ़ा दी जाये तो और उचित रहेगा क्‍योंकि संख्‍या ज्‍यादा नहीं रहेगी. मेरे ही क्षेत्र में शहीद पदमाकर हुये थे और उनके माता-पिता के पास कुछ नहीं था और डिफेंस मिनिस्‍ट्री से जो राशि मिली उसे उनकी पत्‍नी अपने मायके लेकर चली गईं. वास्‍तव में माता पिता को कुछ नहीं मिला और वह भी बहुत कमजोर वर्ग के थे. इस तरह से अगर इसे 5 हजार रूपये से बढ़ाकर 7500 रूपये कर दें तो ज्‍यादा उचित होगा, यह हम लोगों की राय है.

 

1.00 बजे अध्‍यक्षीय घोषणा

भोजनावकाश न होने विषयक

अध्‍यक्ष महोदय-- आज भोजनावकाश नहीं होगा. भोजन की व्‍यवस्‍था सदन की लॉबी में की गई है, माननीय सदस्‍यों से अनुरोध है कि सुविधानुसार भोजन ग्रहण करने का कष्‍ट करें.

1.00 बजे शासकीय विधि विषयक कार्य

 

 

मध्यप्रदेश आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा निम्न आय वर्ग को आवास गारंटी

विधेयक, 2017 (क्रमांक 6 सन् 2017)

 

नगरीय विकास एवं आवास मंत्री, (श्रीमती माया सिंह) -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं मध्यप्रदेश आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा निम्न आय वर्ग को आवास गारंटी विधेयक, 2017 (क्रमांक 6 सन् 2017) के पुर:स्थापन की अनुमति चाहती हूं.

अध्यक्ष महोदय- प्रश्न यह है कि मध्यप्रदेश आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा निम्न आय वर्ग को आवास गारंटी विधेयक, 2017 (क्रमांक 6 सन् 2017) के पुर:स्थापन की अनुमति दी जाए.

अनुमति प्रदान की गई.

श्रीमती माया सिंह -- माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं, मध्यप्रदेश आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा निम्न आय वर्ग को आवास गारंटी विधेयक, 2017 (क्रमांक 6 सन् 2017) का पुर:स्थापन करती हूं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

1.05 बजे अध्यक्षीय व्यवस्था

 

माननीय मंत्री द्वारा संपत्ति विवरण पटल पर रखने विषयक

 

 

अध्यक्ष महोदय- आज श्री सुंदरलाल तिवारी जी ने एक विषय उठाया था कि माननीय मंत्री जी को कैसे क्यों अनुमति दी और उन्होंने कैसे पढ़ दिया. संसदीय प्रणाली में सुचिता के लिये स्थापित परम्परा है. पूर्व में भी 1995 में तब विद्वान अध्यक्ष श्री श्रीनिवास तिवारी जी इस आसंदी पर थे, ने मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों द्वारा संपत्ति विवरण पटल पर रखे गये हैं. इसी तरह वर्ष 2008 एवं 2012 में भी विवरण रखे गये हैं. (श्री सुंदरलाल तिवारी,सदस्य द्वारा बोलने हेतु माईक की लाईट जलाये जाने पर ) आपको बोलने की अनुमति नहीं है.उसको बंद कर दीजिये. साथ ही विधानसभा में प्रक्रिया में सदस्यों के पालनीय नियम क्रमांक 255 यह पढ़ने के बाद में यदि आपको कुछ बोलना हो तो कल अनुमति दूंगा. इस नियम के अंतर्गत भी कोई सदस्य अध्यक्ष की अनुज्ञा से वैयक्तिक विवरण दे सकते हैं.

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

1.06 बजे

वर्ष 2017-2018 की अनुदानों की मांगों पर मतदान (क्रमश:).

 

(1)

मांग संख्या 3

पुलिस

 

मांग संख्या 4

गृह विभाग से संबंधित अन् व्यय

 

मांग संख्या 36

परिवहन.

 

 

 

 

उपस्थित सदस्यों के कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत हुए.

अब मांगों और कटौती प्रस्तावों पर एक साथ चर्चा होगी.

आप लोगों से एक और निवेदन है कि आज बहुत से विभाग की मांगों पर चर्चा पूर्ण होना है. सदन के सभी माननीय सदस्यों से अनुरोध है कि बोलने वाले सदस्यों की संख्या भी ज्यादा है उसको कम करने का प्रयास करें और समय सीमा का भी ध्यान रखें ताकि मांग गुलेटिन नहीं करना पड़े. इसलिये सभी सदस्य कृपया संक्षेप में अपनी बात करने का प्रयास करेंगे.

श्री मुकेश नायक(पवई) -- माननीय अध्यक्ष, गृह विभाग की अनुदान मांगों पर सदन में चर्चा हो रही है. पिछली बार भी सम्मानित सदस्यों ने गृह विभाग की चर्चा पर अपने मूल्यवान सुझाव दिये थे. गृह विभाग की अनुदान मांगों पर समय सीमा का ध्यान रखूंगा. बहुत संक्षिप्त में गृह विभाग की मांगों पर अपनी बात रखूंगा.

माननीय अध्यक्ष महोदय, इस वर्ष का जो बजट मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत किया गया है और मध्यप्रदेश की सुरक्षा और गृह विभाग के प्रबंधन को लेकर के बजट में जो कटौती की गई है यह बहुत चिंता का विषय है यह नहीं होना चाहिये था. सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिये क्योंकि मध्यप्रदेश बहुत बड़ा राज्य है.इसका क्षेत्रफल बहुत बड़ा है. किसी भी प्रकार का समझौता राज्य के नागरिकों के हित में नहीं होना चाहिये. पिछले बजट सत्र में जब अनुदान मांगों पर चर्चा हुई थी तो यह सुझाव आये थे कि मध्यप्रदेश में अपराध करने वाले बच जाते हैं . उसका कारण यह है कि जो भौतिक साक्ष्य है उनकी जांच करने के लिये हमारे पास में न तो कोई वैज्ञानिक इक्यूपमेंट हैं, न हमारे पास में लैब है. आज भी मध्यप्रदेश में डीएनए टेस्ट की लेबोरेटरी नहीं है. आप बताईये आम तौर पर यह शिकायत आती है कि सामाजिक स्पर्धा को लेकर परस्पर राग और द्वेष को लेकर के बलात्कार की झूठीं शिकायतें थानों में होती हैं और हमारा कानून ऐसा है कि अगर किसी महिला ने रिपोर्ट दर्ज कर दी तो मुकदमा दर्ज होना है . कभी कभी अपवाद स्वरूप ऐसा भी हो जाता है कि कोई बहुत अच्छे व्यक्ति की जिंदगी भी इसमें तबाह हो जाती है और हो सकती है. अध्यक्ष महोदय, मेरा आपके माध्यम से गृह मंत्री जी से यह कहना है कि अगर डी.एन.ए. टेस्ट का इन्फ्रास्ट्रक्चर लेब आप यहां पर विकसित करते हैं तो हम बहुत निष्पक्षता से इसकी जांच कर सकते हैं, हम सही निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं और दोषी व्यक्ति जो बलात्कार के प्रकरण में लगभग 70 प्रतिशत ऐसे लोग बच जाते हैं जिन्हें सजा नहीं होती है, हम उनको सजा दिला सकते हैं और जो निरपराध व्यक्ति है उसको हम बचा भी सकते है. अध्यक्ष महोदय, दूसरी बात पिछली मांगों के समय यह हुई थी कि हमारा बेलस्टिक डिपार्टमेंट, हमारी अपराध विज्ञान की जो लेबोरेटरी है जिसमें फिंगर प्रिंट , बेलेस्टिक, जले कटे पदार्थों का परीक्षण, उल्टी का परीक्षण, विसरा का परीक्षण जहां पर वैज्ञानिक आधार पर हम किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकते हैं कि अपराध का वास्तविक उद्धेश्य और आब्जेक्ट क्या है वह इन्फ्रास्ट्रक्चर मध्यप्रदेश में नहीं है. मेरी विनती है कि कम से कम संभागीय मुख्‍यालयों में यह अन्‍वेषण की सुविधा और लैब होना चाहिए, ताकि जल्‍द से जल्‍द अपराध करने वालों को जेल भेजा जा सके, उसको सजा मिल सके और निरपराध व्‍यक्ति को बचाया जा सके. मुकदमों में विलंब का एक बहुत बड़ा कारण यह भी है कि ये लेबोरेट्रीज मध्‍यप्रदेश पुलिस विभाग के पास नहीं है. सायबर क्राइम को लेकर जिस तरह का इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर, जिस तरह का एक्‍सपर्टीज और जिस तरह का मैनपावर हमें चाहिए वह नहीं है. आज पूरे देश में, पूरी दुनिया में सबसे ज्‍यादा सायबर क्राइम हो रहे हैं और यह उसका जमाना है, जो पढ़े लिखे लोग है और ऑर्गनाइज्‍ड जो क्राइम होते हैं, उसमें सायबर क्राइम मुख्‍य आधार होता है. इसलिए इस पर बजट देने की आवश्‍यकता है, और भी इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर डेवलपमेंट करने की आवश्‍यकता है.

1:11 बजे { उपाध्‍यक्ष महोदय (डॉ. राजेन्‍द्र कुमार सिंह) पीठासीन हुए.}

उपाध्‍यक्ष महोदय - मध्‍यप्रदेश में थानों में पुलिस बल है ही नहीं, बड़े बड़े त्‍यौहार होते हैं, बड़े बड़े जलसे और जुलूसों का देश है, हर 15 दिन में भीड़ भरे त्‍यौहार होते हैं, सड़कों पर होली के त्‍यौहार मनाए जाते हैं, देवी शक्तिपूजा की प्रतिमाएं सड़कों पर रखी जाती हैं, गणेश पूजन की प्रतिमाएं सड़कों पर रखी जाती है. सम्‍माननीय सदस्‍यों को इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्‍या हमारी सड़कें यातायात के लिए हैं, या इस तरह के त्‍यौहार मनाने के लिए हैं. नेताओं की सभाओं सड़कों पर होती हैं, होलिका सड़कों पर जलाई जाती हैं, गणेश प्रतिमाएं सड़कों पर रखी जाती है, काली जी की प्रतिमा सड़कों पर रखी जाती है, बारातें सड़कों पर निकाली जाती है, कोई एक ऐसा कानून, ऐसा एक्‍ट सदन में बनना चाहिए ताकि सुचारू रूप से चलने वाला यातायात बाधित न हो और हमारे जनप्रतिनिधि, पब्लिक ओपीनियन क्रियेट करने वाले लोग, हमारे प्रशासन के लोग सजग रहे कि सड़कें केवल यातायात के लिए हैं, इस तरह के व्‍यवधान के लिए सड़कें नहीं हैं, यह ओपीनियन जब नेताओं के बीच में सदन में बनेगा, तब जाकर ग्रॉसरूट लेविल पर इसके पालन में अधिकारियों को सहायता मिलेगी. उपाध्‍यक्ष जी, पुलिस बल कम है. मेरे विधान सभा क्षेत्र में रहपुरा, पवई, सिमरिया थाने है, 25-30 आदमी मिलकर के अगर थाने पर हमला कर दें तो पुलिस थाने ऐसी स्थिति में नहीं है कि अपने थाने को बचा सके. वह तो भगवान की कृपा है कि ऐसी अपरिहार्य स्थिति आती नहीं है, लेकिन अगर ऐसी स्थिति आ जाए तो थानों में इतना पुलिस बल नहीं है कि वे थानों को बचा सके. इसलिए यहां उपस्थित समस्‍त सदस्‍यों से मेरी प्रार्थना है, वित्‍तमंत्री जी भी बैठे हैं कि इस तरह की वित्‍तीय कटौती जब होती है तो हमारे कानून व्‍यवस्‍था को लेकर, अपराध को रोकने पर बहुत विपरीत प्रभाव पड़ता है, इसलिए इस तरह की वित्‍तीय कटौती न होकर यह राशि दी जानी चाहिए ताकि जिला पुलिस बल में वृद्धि हो सके. उपाध्‍यक्ष जी, हमारे यहां मध्‍यप्रदेश में होमगार्ड है, होमगार्ड महिला पुलिस से भी कमजोर है, बेचारे दीन-हीन लोग, उनका कैडर सुनिश्चित नहीं है, जब चाहे उनसे किट जमा करा ली जाती है, अगर ठीक अधिकारी नहीं बैठा तो भोजन ही ठीक नहीं मिलता है, टूट डण्‍डा लिये सड़क पर घूम रहा है. मेरा यह कहना है कि होमगार्ड पुलिस बल को नए कैडर में तब्‍दील करना चाहिए और उनके भविष्‍य को लेकर एक सुरक्षित सर्विसेज होना चाहिए, सही वेतनमान होना चाहिए, उनको एक शक्ति मिलना चाहिए, होमगार्ड पुलिस जिला पुलिस बल को बहुत सहायता कर सकता है. मध्‍यप्रदेश में पुलिस की स्‍पेशल ब्रांच है, उसमें भी जिला बल के लोग भेजे जाते हैं, आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा में भी जिला बल पुलिस के लोग भेजे जाते हैं, लोकायुक्‍त में भी जिनके कोई सोर्स नहीं है, जो दीन हीन लोग है, जिनकी थाने में कोई सिफारिश नहीं करता ऐसे लोगों को भेज दिया जाता है, कोई कर्मचारी लोकायुक्‍त, आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा में नौकरी नहीं करना चाहता, यह पद थाने के लिए होते है लेकिन सजा के तौर पर लूपलाइन में इनको भेज दिया जाता है, यह दुर्भाग्‍यजनक है. अगर सभी के अलग अलग कैडर बना देंगे, होमगार्ड, स्‍पेशल ब्रांच, आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा, सायबर क्राइम के अलग कैडर बनाइए, जिला पुलिस बल के लोगों को चाहे जहां भेज देते हों वह उसका जानकार हो या न हो, आपने भेज दिया चले जाओ, उसका कोई माई-बाप नहीं होता है, बेचारा चला जाता है और वहां नौकरी करने की बजाए दिन रात इस बात की कोशिश में लगा रहता है कि वहां से कैसे निकले. तनख्‍वाह कम होने के कारण भी ऐसा होता है. उपाध्‍यक्ष महोदय, स्‍पेशल ब्रांच में कितना गंभीर काम होता है यह आप भी समझ सकते हैं, इसमें व्‍यक्ति को लूपलाइन के तौर पर भेजा जाएगा, एक शिथिल सेवाओं के रूप में देखा जाएगा तो यह कितना महत्‍वपूर्ण अमला है जरा आप सोचे, इतनी आतंकवादी गतिविधियां होती है, संगठित अपराध होते हैं, उसकी समय पर सूचना मिलना इसके लिए साधन चाहिए, एक्‍सपर्टीज चाहिए, लेकिन उसको वहां भेज दिया जाता है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आदरणीय नायक जी, आपको दस मिनट हो चुके हैं, जल्‍दी समाप्‍त करो. माननीय अध्‍यक्ष भी उल्‍लेख कर गए हैं, आज 9 विभागों की मांगों पर चर्चा होनी है, अगर समय ज्‍यादा लगा तो सभी विभाग को गुलेटिन कराने पड़ेंगे.

श्री कमलेश्‍वर पटेल - उपाध्‍यक्ष महोदय, पूरे प्रदेश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ मामला है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाइए.

श्री मुकेश नायक - आप इसी से समझ लीजिए कि मध्‍यप्रदेश में गृह विभाग कितना महत्‍वपूर्ण विभाग है, 5 मिनट, 10 मिनट की चर्चा गृह विभाग में (हंसी..) साढ़े सात करोड़ लोगों की सुरक्षा का प्रश्‍न है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आप चाहते हैं गुलेटिन हो जाए, अन्‍य विभाग महत्‍वपूर्ण नहीं है क्‍या ?

श्री मुकेश नायक - उपाध्‍यक्ष जी, यह नहीं चाहता कि बाकी विभागों पर चर्चा न हो लेकिन जैसे पहले परम्‍परा रही है, ज्‍यादा समय देने की तो ज्‍यादा समय देना चाहिए. उपाध्‍यक्ष जी, जो आपने कहा है मैं तो उसी समय सीमा में अपनी बात समाप्‍त कर सकता हूं. लेकिन कुछ सुझाव देना चाहता हूं, इसलिए यह बात कर रहा हूं. उपाध्‍यक्ष महोदय मैंने अभी कहा कि समस्‍त पुलिस सेवाओं के कैडर अलग अलग होना चाहिए, दूसरा, बीच में जब माननीय नंदन दुबे, डी.जी.पी. थे, उस समय पुलिस में प्रमोशन हुए, नहीं तो बेचारा हवलदार कभी एसआई नहीं बन पाया, एसआई, इन्‍सपेक्‍टर नहीं बन पाया, आईपीएस और आईएएस अधिकारी अपना प्रमोशन तो ले लेते हैं, उनका तो समय निश्चित है, लेकिन सिपाही से लेकर ऊपर तक जो पुलिस बल है, उनके प्रमोशन को लेकर भी कोई तरीका, नियम, समयबद्ध रूपरेखा होना चाहिए. आईएएस अधिकारी तो इस देश में भगवान है, यह समय चल रहा है भारतवर्ष में, जब भारतीय प्रशासनिक सेवाओं की औचित्‍य पर बहस होने लगी है इसके रिफार्म्‍स की बात होने लगी है, क्‍योंकि जिन अंग्रेजों ने हमारे देश में आईएएस बनाया, उन्‍होंने अपने देश में नहीं बनाया, यह भगवान है, भारतवर्ष का सबसे बड़ा संगठित गिरोह है, जिस तरह से राजनैतिक और प्रशासनिक अधिकारों को केन्द्रित करने वाला यह अमला है, इस पर देश में बहस चल पड़ी है. मुझे उम्‍मीद है कि हम लोगों के जिन्‍दा रहते यह जो प्रशासनिक सर्विसेज है यह रिफार्म्‍स होगी राजनैतिक और प्रशासनिक शक्तियों का विक्रेन्‍दीकरण होगा. आप एक व्‍यक्ति मुझे बताओं जो 10-25 किताबें पढ़ने वाला व्‍यक्ति कितनी गंभीर सेवाओं में चला जाता है, और विधान सभा में दो दिन पहले देखा आपने किस तरह से रेपरकेशन होते हैं, अगर कोई सनकी व्‍यक्ति इतनी गंभीर सेवा में आ जाए तो देश को तीस साल झेलना है उसको, उसकी सनक भी आदेश होती है, वह कीड़ा मकौड़ा समझता है दूसरे आदमियों को, कोई भी व्‍यक्ति उसके सामने जाता है तो वह समझता है कि कैसे दीन हीन आदमी उसके सामने आ गए. आज अगर देश का सबसे बड़ा कोई सामंतवादी है तो वह आईएएस अधिकारी है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - मुकेश जी यह तो जीएडी की चर्चा है, आप गृह विभाग पर आ जाइए.

श्री मुकेश नायक - सबसे पहले पुलिस प्रशासन को आईएएस अधिकारों को नीति, सिद्धांत और नियंत्रण से बाहर करना चाहिए, इसलिए मैंने इतनी चर्चा की (श्री कमलेश्‍वर पटेल जी के द्वारा बैठे बैठे कुछ कहने पर) नहीं मैं किसी को केन्‍द्र में रखकर बात नहीं कर रहा हूं, उनको तो इस प्रदेश सभी लोग जानते हैं कि वे किस तरह के आदमी है और क्‍या क्‍या करते हैं, बहुत लोग है जिनका ईमानदारी का अभियन इतना शक्तिशाली होता है कि उस पर से पर्दा जीवन भर उठता ही नहीं है. ऐसे बहुत लोग मैंने देखा हूं यह मेरा अनुभव है, कई दफे से जनप्रतिनिधि हूं, सरकार में मंत्री रहा हूं.

उपाध्यक्ष महोदय -- मुकेश जी, आप कमलेश्वर जी की सलाह पर चल रहे हैं क्या.

श्री वैलसिंह भूरिया -- उपाध्यक्ष महोदय, कांग्रेस के राज में एक भी आईएएस अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही नहीं हुई. हमारी पार्टी की सरकार में कई अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही हुई है.

श्री मुकेश नायक -- उपाध्यक्ष महोदय, बात कांग्रेस और बीजेपी की नहीं हो ही रही है.

उपाध्यक्ष महोदय -- वैलसिंह जी, हमेशा उठना जरुरी है क्या .मुकेश जी, अब समाप्त करें और बहुत सारे माननीय सदस्य हैं.

श्री मुकेश नायक -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं अंत में केवल यह कहना चाहता हूं कि मध्यप्रदेश में जो अपराध की स्थिति है, खासतौर से महिलाओं के अपराध को लेकर,कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर, उनसे छेड़छाड़ को लेकर, योन उत्पीड़न को लेकर, उस पर मध्यप्रदेश में नियंत्रण होना चाहिये. बाल अपराध को लेकर नियंत्रण होना चाहिये. मैं एक जिले का उदाहरण देना चाहूंगा कि आज दमोह जिले में जिस तरह का अपराध हो रहा है, देखिये कि पिछले 3-4 महीने में किस तरह से वहां हत्याएं हुई हैं, आप पूर रिकार्ड उठाकर देख लें. किस तरह से बच्चों की हत्याएं हुई हैं. किस तरह से अंधे कत्ल हुए हैं, कोई खोजने वाला नहीं है. पूरे जिले में जुआ,सट्टा हो रहा है और ऐसा भ्रष्टाचार इतने वर्ष के राजैतिक जीवन में मैंने पुलिस में विभाग में ऐसा भ्रष्टाचार नहीं देखा, जैसा दमोह जिले में आज है और उसका कारण है कि राजनैतिक संरक्षण है. सैंया भये कोतवाल, तो फिर डर काहे का. इसलिये वित्त मंत्री जी भी यहां बैठे हैं, उनके संज्ञान में भी लाना चाहता हूं, कृपा पूर्वक वे भी ध्यान देंगे. वैसे उम्मीद है कि वे अच्छे एवं संवेदनशील व्यक्ति हैं, लेकिन कभी कभी ऐसा होता है कि अच्छा व्यक्ति भी जब निरन्तर उसकी कोई बात मानता है, तो वह जो इमप्लीमेंट करने वाला व्यक्ति है, वह अच्छे व्यक्ति को अपने नियंत्रण में ले लेता है और वह फिर अपनी बुरी हरकतें भी करता रहता है और वह संज्ञान में नहीं आती हैं. धन्यवाद.

श्री बहादुर सिह चौहान(महिदपुर) -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं मांग संख्या 3,4 एवं 36 के समर्थन में बोलते हुए कटौती प्रस्तावों का विरोध करता हूं. पुलिस और परिवहन पर चर्चा हो रही है. मध्यप्रदेश सरकार के जितने भी विभाग हैं, उनके सब कार्यालयों पर..

उपाध्यक्ष महोदय -- बहादुर सिंह जी, एक मिनट. आदरणीय मुकेश जी, आज आपको मंत्री जी का उत्तर सुनना पड़ेगा.यह आसंदी से कई बार व्यवस्था दी गई है.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- उपाध्यक्ष महोदय,यह चले जायेंगे. ये हमेशा बोलकर चले जाते हैं.

उपाध्यक्ष महोदय -- मैं उनको ताकीद कर रहा हूं.

श्री मुकेश नायक -- उपाध्यक्ष महोदय, हम सुनेंगे, जरुर सुनेंगे. हम हमेशा बोलकर नहीं जाते हैं. कोई ऐसी बात नहीं है. आप बीच में व्यवधान न डालें, अपनी बात कहें.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- उपाध्यक्ष महोदय, जी, सुनेंगे, इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद. मध्यप्रदेश सरकार के जितने भी विभाग हैं, उनके कार्यालयों पर शाम के बाद ताले लग जाते हैं और पुलिस विभाग ही एक ऐसा विभाग है, थानों पर कभी ताले नहीं लगते हैं, वहां 24 घंटे काम करना पड़ता है.

नेता प्रतिपक्ष (श्री अजय सिंह) -- उपाध्यक्ष महोदय, पुलिस विभाग का 24 घंटे कार्यालय खुला रहता है, इसीलिये बजट का आवंटन कम कर दिया गया है.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं उसी पर आ रहा हूं. मैं बजट बढ़वाने के लिये बात कर रहा हूं. अपराध कायम करना पुलिस के लिये बहुत सरल होता है, प्रथम दृष्टया तत्काल अपराध कायम हो जाता है, लेकिन उसका जो चालान लगाना रहता है, पूरा इनवेस्टीगेशन होकर के जो चालान कोर्ट में पुटअप होता है, वह बड़ा कठिन होता है. केरल के बाद मध्यप्रदेश ही एक ऐसा राज्य है, जो चालान पेश करने में दूसरे नम्बर का राज्य है और चालान पेश करने की संख्या का जो प्रतिशत है, वह 93.33 प्रतिशत है. यह पुलिस का अद्भुत कार्य है. 45 योजनाएं हैं और इसके अतिरिक्त 3 योजनाओं की पीएससी और हो चुकी है, इस प्रकार 48 योजनाओं के लिये पुलिस विभाग की ओर से एक हजार करोड़ की डिमांड रखी गई थी,क्योंकि राज्य योजना आयोग द्वारा 45 योजनाओं में रुपये 1005.32 करोड़ की प्लान सीलिंग निर्धारित की गयी थी. वैसे पुलिस विभाग की डिमांड 1722.62 करोड़ की थी, उसमें से विभाग को मात्र 739 करोड़ रुपये मिले हैं. वित्त मंत्री जी भी बैठे हैं, गृह मंत्री जी भी है. यह विभाग बहुत ही महत्वपूर्ण विभाग है. जनता की सुरक्षा से जुड़ा हुआ विभाग है. छोटी मोटी कमी,पेशी और कहीं की जा सकती है. 25 योजनाओं के लिये तो 739 करोड़ रुपये मिल गये हैं, लेकिन 28 योजनाएं ऐसी हैं, जिनके लिये 261 करोड़ रुपये और देना चाहिये. मैं वित्त मंत्री जी का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं और मुझे उम्मीद है कि वित्त मंत्री जी इस पर ध्यान देते हुए पुलिस विभाग को 261 करोड़ रुपये और देंगे, यह मैं मांग करता हूं.

उपाध्यक्ष महोदय, गृह मंत्री जी की तो तारीफ जितनी की जाये, उतनी कम है. भूपेंद्र सिंह जी ने जो उज्जैन में सिंहस्थ 2016 आया था, उसमें पुलिस की जो भूमिका है, उसका चित्रण करने का समय नहीं है. (श्री सुन्दरलाल तिवारी द्वारा बैठे बैठे कुछ कहने पर) मैं असत्य नहीं बोल रहा हूं. अभी तो मैंने कुछ कहा ही नहीं है.

उपाध्यक्ष महोदय -- तिवारी जी, बैठकर टिप्पणी नहीं करें. यह परम्परा शुरु नहीं करें.

ऊर्जा मंत्री (श्री पारस चन्द्र जैन) -- उपाध्यक्ष महोदय, तिवारी जी तो सिंहस्थ में आये नहीं थे, उनको क्या मालूम.

श्री अजय सिंह-- उपाध्यक्ष महोदय, जिस सीट से बहादुर सिंह जी आये हैं, वहां पर इसी तरह से बातचीत होती है.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- उपाध्यक्ष महोदय,कल्पना परुलेकर जी आपकी पार्टी की विधायक थीं. आप सब खुश हो, कल्पना जी अभी हाउस में नहीं है, कांग्रेस खुश है, मैं इस बात को अच्छी तरह से जानता हूं और अगली बार भी आप मुझे सहयोग करेंगे, यह मुझे पूरी उम्मीद है. ..(हंसी).. पुलिस की प्रशंसा सिंहस्थ,2016 को लेकर की जानी चाहिये. अप्रैल-मई की जो गर्मी थी, उसमें सिंहस्थ में 8 करोड़ लोगों का आवागमन हुआ था. उस समय मैंने पुलिस को अपनी आंखों से देखा. हमको विधायक होने के नाते वीआईपी पास मिला था, लेकिन उसमें हम नहीं जा पाये. हम भी 2-3 किलोमीटर दूर रह गये. लेकिन यदि किसी यात्री की गाड़ी बंद हो गई तो पुलिस को उसको धक्का देते हुए देखा है. पुलिस कभी धक्का देकर गाड़ी स्टार्ट नहीं करवाती है. यह कार्य सिंहस्थ महा पर्व में पुलिस का रहा है और पुलिस की प्रशंसा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सिंहस्थ को लेकर की गई. मैं इसके लिये गृह मंत्री,श्री भूपेन्द्र सिंह जी की प्रशंसा करुंगा कि एक पूरा माह वे उज्जैन में रुके. साधु संतों के चरण स्पर्श करते रहे..

श्री अजय सिंह -- उपाध्यक्ष महोदय, पुलिस प्रशासन की बात सिंहस्थ में, जोकि आपने सही तारीफ की. लेकिन सिंहस्थ में जो घोटाला हुआ, उसका भी थोड़ा जिक्र कर दीजिये.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- उपाध्यक्ष महोदय, अब सिंहस्थ घोटाला वाला विषय तो यहां पर नहीं है. जब अच्छा काम है..

उपाध्यक्ष महोदय -- आप अपने विषय पर बोलें.

श्री गोपाल परमार -- उपाध्यक्ष महोदय, यह वास्तव में उज्जैन में एक अद्भुत काम हुआ है, ऐसी आप कल्पना नहीं कर सकते.

श्री बहादुर सिंह चौहान -- उपाध्यक्ष महोदय, मैं कह रहा हूं कि 12 वर्ष बाद सिंहस्थ महापर्व आता है. 12 वर्ष बीत जाने के बाद यह हम सौभाग्यशाली हैं,उस जिले के निवासी हैं और मां मोक्ष दायिनी क्षिप्रा उज्जैन से होते हुए महिदपुर में जाती है और आगे वह राजस्थान में चली जाती है. लेकिन मैं तुलना करना चाहता हूं, मेरे क्षेत्र के बार्डर पर झालावाड़ जिला लगता है. मेरा थाना, उज्जैन जिले का बार्डर झालावाड़ से लगता है. मैंने राजस्थान की पुलिस को भी देखा है और मध्यप्रदेश की पुलिस को भी देखा है, जमीन आसमान का अंतर है. जितनी मध्यप्रदेश पुलिस की प्रशंसा की जाये, उतनी कम है और गृह मंत्री जी की तो प्रशंसा इसलिये भी करना चाहिये कि ऐसे ईमानदार गृह मंत्री जी हैं. यह हम गारंटी देते हैं और हमारी, विधायक की अनुशंसा पर और आपके भी काम हुए होंगे. कांग्रेस के सदस्यों के काम भी निश्चित ही हुए होंगे. पहली बार ऐसे गृह मंत्री जी के बनने के बाद निचले स्तर के आरक्षक भी, हैड कांस्टेबल भी, वन,टू,थ्री स्टार के मन में भय व्याप्त है कि कार्य करते समय कोई भी गलती करेंगे, तो गृह मंत्री जी के यहां से कोई भी राहत मिलने वाली नहीं है. उसका परिणायम यह आया है कि धीरे धीरे अपराध कम होते जा रहे हैं. मैं कहना चाहता हूं कि वर्ष 2016-17 में अनुसूचित जाति पर विगत् 2015-16 की तुलना में 35.50 प्रतिशत अपराध कम हुए हैं. अनुसूचित जाति और जनजाति में जो अपराध हैं, उसमें 46.62 प्रतिशत की कमी आई है. यह एक रिकार्ड है. इस तरह से 35 और 46 प्रतिशत की कमी हुई है. अभी बच्चों के विरुद्ध अपराध का जो विषय आया था, वर्ष 2015-16 की तुलना में वर्ष 2016-17 में 14.76 प्रतिशत की कमी आई है और महिलाओं के अपराधों को लेकर 15.84 प्रतिशत की कमी आई है. निश्चित रुप से यह सिद्ध हो रहा है कि मध्यप्रदेश में अपराधों में धीरे धीरे कमी होती जा रही है. सबसे खराब कार्यालय किसी विभाग के बने हैं, आप थाना क्षेत्रों में जाकर देखेंगे, तो पुलिस विभाग के बने हुए हैं. उनमें दरारें पड़ी हुई हैं. उनमें फर्श नहीं है, उसके लिये यह पहली सरकार है, जिसने हुडको से ऋण लेकर चार चरणों में मध्यप्रदेश के पुलिस के रहवासी मकान बनाने के लिये 10500 मकान बनाकर पुलिस विभाग को दिये जा रहे हैं. यह पहली सरकार है. यातायात प्रबंधन के लिये इतने बड़े शहर हैं. इन्‍दौर और उज्‍जैन बहुत सारे शहर हैं. यातायात प्रबंधन के लिए 20 करोड़ रुपये का प्रावधान इस बजट में किया गया है, इसके लिये मैं माननीय वित्‍त मंत्री जी का धन्‍यवाद करना चाहता हूँ.

माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, प्रशिक्षण संस्‍थाओं का पुनर्गठन करने के लिए, यह गतिविधि पुलिस विभाग में हमेशा चलती रहती है, इसके लिए 30 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. पुलिस लाइनों का उन्‍नयन करने के लिए इसमें 10 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. दस्‍यु रक्षितवाहिनियों के लिये 32.32 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. मैं आपके माध्‍यम से माननीय भूपेन्‍द्र सिंह जी को धन्‍यवाद देना चाहता हूँ. हम सौभाग्‍यशाली हैं कि हमें ऐसे ईमानदार प्रभारी मंत्री मिले हैं. भूतभावन महाकाल बाबा की कृपा आपके ऊपर है और निश्चित रूप से भारतीय जनता पार्टी की सरकार और माननीय शिवराज सिंह जी के लिए सिंहस्‍थ, 2016 सम्‍पन्‍न करवाना एक चैलेन्‍ज के रूप में था. जिसमें मध्‍यप्रदेश के समस्‍त विभाग लगे थे और जिन अधिकारियों, कर्मचारियों और पुलिस कर्मचारियों ने अच्‍छे काम किये हैं, उनको प्रोत्‍साहित किया गया है, उनको इनाम भी दिये गये हैं, 5-5 हजार नकद पुरस्‍कार भी वितरित किये गये हैं. मैंने देखा है कि सिंहस्‍थ के मद से मकान पुलिस विभाग के बने हैं.

उपाध्‍यक्ष महोदय - बहादुर सिंह जी, आपके 10 मिनट हो गए हैं. मैं आपको समय बता रहा हूँ.

श्री बहादुर सिंह चौहान - उपाध्‍यक्ष महोदय, मैं परिवहन पर दो बातें कहकर अपनी बात समाप्‍त करूँगा. पुलिस विभाग के साथ हमारे गृह मंत्री, परिवहन विभाग के भी मंत्री हैं. परिवहन विभाग में कई परिवर्तन आपके नेतृत्‍व में हुआ है. जिस तरह खनिज माफियाओं, भू माफियाओं एवं बस माफियाओं का राज इस मध्‍यप्रदेश में चलता था. आपके आने के बाद एवं परिवहन मंत्री बनने के बाद बस माफियाओं के गुण्‍डे-बदमाशों के साथ सख्‍ती से व्‍यवहार किया गया. आज सभी बस संचालक अच्‍छे से अच्‍छा कर रहे हैं. इन्‍दौर से उज्‍जैन आने के लिए मात्र ढाई से तीन घण्‍टे में हम वाल्‍वो बस से आ जाते हैं. आप बहुत अच्‍छे परमिट दे रहे हैं. मध्‍यप्रदेश सरकार के ऐसे कस्‍बे हैं, जहां के बस स्‍टैण्‍ड जीर्ण-शीर्ण हैं, उनके उन्‍नयन के लिए मध्‍यप्रदेश इन्‍टरसिटी ट्रांसपोर्ट का गठन किया गया है, यह बड़ा सराहनीय कार्य है. इसके उन्‍नयन करने से आम जनता को सुविधा मिलेगी. ग्‍वालियर और इन्‍दौर, ये दोनों बड़े शहर हैं और मध्‍यप्रदेश में और भी बड़े शहर हैं, लेकिन पंजीयन करने के लिए जो डीलर हैं, उनको ही कार्य दिया गया है, यह निश्चित रूप से प्रशंसनीय है. प्रदूषण के केन्‍द्रों को खोलने के लिए बहुत ही अच्‍छा सरलीकरण किया गया है और सबसे अच्‍छा कार्य किया है. मैं माननीय गृह मंत्री जी का ध्‍यान आकर्षित करना चाहूँगा. आपने ट्रैक्‍टर -ट्रालियों में रिफ्लेक्‍टर लगाये जाने का कार्य किया है तथा 3.20 लाख रिफ्लेक्‍टर लगाये हैं. आप एक्‍जामिन करवा लें, जांच करवा लें. सामान्‍यत: सड़कों में रात के समय ट्राली के पीछे कोई भी रेडियम का रिफ्लेक्‍टर न होने के कारण मेरा मानना है कि उससे 50 प्रतिशत एक्‍सीडेंट हो जाते हैं. मैं गृह मंत्री जी से आपके माध्‍यम से आग्रह करूँगा कि इसको कम्‍पल्सरी कर दें कि ट्रैक्‍टर लेते ही यह पीछे लगाना ही पड़ेगा, इससे एक्‍सीडेंट से बचाव हुआ है, इसमें थोड़ा पैसा खर्च करने से हमारे प्रदेश की कई जानें बच जाती हैं. मेरे क्षेत्र में जनता के द्वारा, जो थाना झालड़ा, मैतूर तहसील का है, उसमें एक रणरापीर नाम से चौकी है, जो राजस्‍थान बॉर्डर से लगी हुई है. मैं सन् 2003 में जब विधायक बना था, उस समय जनसहयोग से करीब 6-7 लाख रुपये की बहुत अच्‍छी बिल्डिंग बनाकर दी गई है, वहां पर अभी ए.एस.आई. रहते हैं एवं हेड साहब रहते हैं लेकिन वह चौकी घोषित नहीं हुई है, अभी 82 नवीन थाने घोषित किए हैं, 133 पुलिस चौकियां घोषित की गई हैं और 13 पर्यटन चौकियां घोषित की गई है. मैं आपके माध्‍यम से गृह मंत्री से आग्रह करूँगा कि रणरापीर की बिल्डिंग जो ऑलरेडी बनी हुई है, उसमें कुछ खर्चा करने की जरूरत नहीं है और थाने की पुलिस वहां रहती है. राज्‍य शासन द्वारा एक आदेश निकाल दें ताकि वह स्‍थायी हो जाये. मैं एक महत्‍वपूर्ण बात और कहना चाहता हूँ. इस विधानसभा में हमने बीज माफियाओं के खिलाफ बड़ी कार्यवाही की है और पुलिस ने अपराध कायम किया है. मेरे ख्‍याल से यह मध्‍यप्रदेश का पहला केस है. जिसका चालान लग गया है, जिस पर चार्ज फ्रेम हो गया और माननीय हाई कोर्ट ने उस एफ.आई.आर. को निरस्‍त कर दिया है. माननीय हाई कोर्ट के आदेश का हम पालन करते हैं, लेकिन मैं आपके माध्‍यम से, मैं गृह मंत्री का ध्‍यानाकर्षण करना चाहता हूँ कि वह इन्‍वेस्‍टीगेशन ऑफिसर कौन था, वह थाना प्रभारी कौन था, चालान पेश एवं चार्ज फ्रेम होने के बाद हाईकोर्ट ने एफ.आई.आर. को निरस्‍त किया है. मैं कह सकता हूँ कि कहीं न कहीं वह अधिकारी दोषी है. मुझे पता है कि माननीय कृषि मंत्री महोदय ने आश्‍वासन दिया है कि बहुत जल्‍दी हाई कोर्ट के विरुद्ध पुलिस विभाग सुप्रीम कोर्ट में अपील करने वाला है, उसके साथ ही साथ एक कमेटी और भी बनी हुई है कि जो जांच हुई थी, उसके अलावा ए.डी.जी. लेवल की हमारे मध्‍यप्रदेश की पुलिस सी.आई.डी. के द्वारा उसकी जांच की जा रही है. मैं आपके माध्‍यम से आग्रह करना चाहता हूँ कि बीज वाला मामला 100 हत्‍याएं करने जैसा है. एक किसान मारा जाता है, इसमें किसान आत्‍महत्‍याएं करते हैं. मैं एक बार पुन: आपके माध्‍यम से गृह मंत्री से चाहूँगा कि इस पर जो जांच चल रही है, वह जांच और त्‍वरित की जाए और सुप्रीम कोर्ट में इसकी अपील की जाये. आपने बोलने का मौका दिया, मैं आपको बहुत धन्‍यवाद देते हुए मेरी बात को एक बार पुन: गृह एवं परिवहन मंत्री को बधाई देते हुए, अपनी बात समाप्‍त करता हूँ.

श्री मुकेश नायक - विधायक जी, दो महीने से जिस टी.आई. के लिये प्रयत्‍न कर रहे हैं. माननीय गृह मंत्री जी से निवेदन है कि उनका कर दें.

श्री बहादुर सिंह चौहान - वह हटा दिया है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आज की कार्यसूची में शामिल 9 विभागों की मांगों पर चर्चा पूर्ण की जानी है. अत: माननीय सदस्‍य दो-दो मिनट में अपने क्षेत्र की समस्‍याएं रखकर सहयोग प्रदान करें. प्रतिपक्ष की तरफ से माननीय नायक जी ने 15 मिनट लिये एवं श्री बहादुर सिंह चौहान जी ने भी 15 मिनट लिये हैं. अब सभी माननीय सदस्‍यों से मेरा अनुरोध है ताकि हम सभी विभाग की मांगों पर आज चर्चा कर सकें. संक्षेप में ही अपनी बातें रखें.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी (गुढ़) - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, आपके माध्‍यम से मांग संख्‍या 4 के विरोध में, मैं खड़ा हुआ हूँ. अभी उस पक्ष के हमारे विद्वान साथी माननीय बहादुर सिंह, गृह मंत्री जी को ईमानदार तथा उनकी काफी प्रशंसा कर रहे थे. मैं बड़ी देर से वह शब्‍द तलाश रहा था कि ईमानदार का अपोजिट क्‍या है ? क्‍या आप बताएंगे ?

श्री सतीश मालवीय - यह तो आप ही बता सकते हैं क्‍योंकि आपको ज्‍यादा अनुभव है. हम तो ईमानदार को ईमानदार ही कहेंगे.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आप बैठ जाइये, उनको अपनी बात कहने दें.

श्री सुदर्शन गुप्‍ता - तिवारी जी, आपने काला चश्‍मा लगा रखा है इसलिए सब काला ही काला दिख रहा है.

श्री सतीश मालवीय - ईमानदार की परिभाषा आप बता दो. ईमानदार आदमी पर आरोप लगा रहे हो.

उपाध्‍यक्ष महोदय - मालवीय जी, आप बैठ जाएं.

श्री सतीश मालवीय - आपको कुछ तो भी बोलने की बीमारी हो गई है.

श्री कालू सिंह ठाकुर - आपका 2 मिनट का समय खत्‍म हो गया है. दूसरे को चान्‍स दो.

उपाध्‍यक्ष महोदय - यह क्‍या तरीका है ? आप बैठ जाइये.

श्री सतीश मालवीय - आप कुछ तो भी आरोप लगा रहे हैं.

उपाध्‍यक्ष महोदय - आप अपने समय में बोल दीजिएगा.

श्री बहादुर सिंह चौहान - ऐसे गृह मंत्री जी के बनने से विधायकों का मान-सम्‍मान मध्‍यप्रदेश में बढ़ा है.

श्री सतीश मालवीय - मध्‍यप्रदेश के गृह मंत्री के ऊपर इस तरह का आरोप लगाना .......(व्‍यवधान)

उपाध्‍यक्ष महोदय - अभी उन्‍होंने कोई आरोप नहीं लगाया है.

श्री सतीश मालवीय - यह ईमानदार का विपरीत पूछ रहे हैं. यह इनका कौन सा तरीका है ?

उपाध्‍यक्ष महोदय - उनकी पूरी बात सुन लीजिये. बैठ जाइये.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - माननीय उपाध्‍यक्ष महोदय, मैंने तो कोई आरोप लगाया ही नहीं है.

उपाध्‍यक्ष महोदय - मैं सुन रहा था, कोई आरोप नहीं लगाया है.

श्री सतीश मालवीय - - इनका समय पूरा हो गया है.

श्री बलवीर सिंह डण्‍डौतिया - बोलने को नम्‍बर नहीं आया था.

उपाध्‍यक्ष महोदय - कोई माननीय सदस्‍य, इस तरह से टोका-टाकी नहीं करेगा. क्‍या डण्‍डौतिया जी आप तो बड़े अनुशासित हैं ? बैठ जाइये. तिवारी जी, जारी रखें. समय की कमी है.

श्री सुन्‍दरलाल तिवारी - अभी 2 दिन पहले एक ध्‍यानाकर्षण में हमारे माननीय गृह मंत्री जी यहां जवाब दे रहे थे और जवाब देते वक्‍त उन्‍होंने भोपाल की जेल से जो कैदी भागे थे